diff --git a/data/quran_devnagri_urdu_maududi.html b/data/quran_devnagri_urdu_maududi.html new file mode 100644 index 00000000..e9fde3e8 --- /dev/null +++ b/data/quran_devnagri_urdu_maududi.html @@ -0,0 +1,6583 @@ +
Quran - Devnagri Urdu Tarjuma
+Mutarjim: Abul Ala Maududi
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+सूरह 1: अल-फातिहा (उद्घाटन) 
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+[1:1] अल्लाह के नाम से जो रहमान ओ रहीम है 
+[1:2] तारीफ अल्लाह ही के लिए है जो तमाम क़ायनात का रब है 
+[1:3] रहमान और रहीम है 
+[1:4] रोज़ ए जजा का मालिक है 
+[1:5] हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझ ही से मदद माँगते हैं 
+[1:6] हमने सीधा रास्ता दिखा 
+[1:7] उन लोगों का रास्ता जिनपर तू नई इनाम फरमाया, जो मातूब नहीं हुए (ना उनका जिनपर तेरा गजब होता रहा), जो भटके हुए नहीं हैं 
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+सूरह 2: अल-बकराह (गाय) 
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+[2:1] अलिफ़ लाम मीम 
+[2:2] ये अल्लाह की किताब है, इसमें कोई शक्क नहीं, हिदायत है उन परहेज़गार लोगों के लिए 
+[2:3] जो गैब पर ईमान लाते हैं, नमाज़ क़याम करते हैं, जो रिज़क हमने उनको दिया है उसमें से ख़र्च करते हैं 
+[2:4] जो किताबें तुमसे पहले नाज़िल की गई हैं (यानी क़ुरान) और जो किताबें तुमसे पहले नाज़िल की गई थीं उन सब पर ईमान लाते हैं और आख़िरत पर यक़ीन रखते हैं 
+[2:5] ऐसे लोग अपने रब की तरफ से राह ए रास्ते पर हैं और वही फलाह पीते हैं wale हैं 
+[2:6] जिन लोगों ने (बातों को तस्लीम करने से) इनकार करदिया, उनके लिए यक्सन है, ख्वा तुम उन्हें खबरदार करो या ना करो, बाहर हाल वो मन्ने वाले नहीं है 
+[2:7] अल्लाह ने उनके दिलों और उनके कानों पर मोहर लगा दी है और उनकी आंखों पर परदा पढ़ गया है, वो सच साज़ा के मुस्तहिक हैं 
+[2:8] बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो कहते हैं कि हम अल्लाह पर और आख़िरत के दिन पर ईमान लाए हैं, हलांके दर-हक़ीक़त वो मोमिन नहीं हैं 
+[2:9] वो अल्लाह और ईमान लाने वालों के साथ धोखे-बाज़ी कर रहे हैं, मगर दरसल वो खुद अपने आप ही को धोखे में डाल रहे हैं और उन्हें इसका शूर नहीं है 
+[2:10] उनके दिलों में एक बीमारी है जिसे अल्लाह ने और ज्यादा बुरा दिया, और जो झूठ वो बोलते हैं, उसकी मानसिकता में उनके लिए दर्दनाक सजा है 
+[2:11] जब कभी उन्हें कहा गया के ज़मीन में फ़साद बरपा ना करो तो उन्हें ने यही कहा के हम तो इस्लाह करने वाले हैं 
+[2:12] ख़बरदार! हकीकत में यही लोग मुफसिद (फसाद करने वाले) हैं मगर उन्हें शूर नहीं है 
+[2:13] और जब उन्हें कहा गया जिस तरह दूसरे लोग ईमान लाए हैं उसकी तरह तुम भी ईमान लाओ तो उन्होन ने यही जवाब दिया "क्या हम बेवकूफों की तरह ईमान लाए हैं?" ख़बरदार! हकीकत में तो ये खुद बेवकूफ हैं, मगर ये जानते नहीं हैं 
+[2:14] जब ये एहले ईमान से मिलते हैं, तो कहते हैं के हम ईमान लाए हैं और जब अलैदागी (अकेले/प्राइवी) में अपने शैतानों से मिलते हैं, तो कहते हैं के असल में तो हम तुम्हारे साथ हैं और इन लोगों से महज़ मज़ाक कर रहे हैं
+[2:15] अल्लाह उन्हें मज़ाक कर रहा है, वो इनकी रस्सी दराज़ किए जात है, और ये अपनी सरकशी में अंधों (अंधों) की तरह भटकते चले जाते हैं 
+[2:16] ये वो लोग हैं जिन्हों ने हिदायत के बदले गुमराही ख़त्म ली है, मगर ये सौदा इनके लिए नफा-बख्श नहीं है और ये हरगिज सही रास्ते पर नहीं हैं 
+[2:17] इनकी मिसाल ऐसी है जैसे एक शक्स ने आग रोशन की और जब उसने सारे माहौल को रोशन कर दिया तो अल्लाह ने इनका नूर ए बसारत (दृष्टिकोण) साल्ब करलिया और इन्हें इस हाल में छोड़ दिया के तारिकियों (अंधेरों) में इन्हें कुछ नज़र नहीं आता 
+[2:18] ये बाहर हैं, गुंगे हैं, अंधे हैं, ये अब ना पलटेंगे 
+[2:19] हां फिर इनकी मिसाल यूं समझो के आसमान से ज़ोर की बारिश हो रही है और इसके साथ अंधेरी घटा और कड़क चमक भी है, ये बिजली की कड़क सुन कर अपनी जानो के खौफ से कानो में उंगली थूंसे लेते हैं और अल्लाह इन मुनकिरीन ए हक को हर तरफ से घेरे में लिए हुए हैं 
+[2:20] चमक से इनकी हालत ये हो रही है के गोया अनकारीब बिजली इनकी बसारत (दृष्टि) उचक ले जाएगी, जब ज़रा कुछ रोशनी यहीं महसूस होती है तो इसमें कुछ दूर चल लेते हैं और जब अंदर अंधेरा छा जाता है तो खड़े हो जाते हैं। अल्लाह चाहता है तो इनकी समाअत (सुनना) और बसारत बिल्कुल ही सलब करलेता, यकीनन वो हर चीज पर कादिर है 
+[2:21] लोगन! बंदगी इख्तियार करो अपने हमसे रूब की जो तुम्हारा और तुमसे पहले जो लोग हो गुजरे हैं उन सबका खालिक है, तुम्हारे बच्चों की तवक्कू इसी सूरत से हो सकती है 
+[2:22] वही तो है जिसने तुम्हारे लिए जमीन का फर्श बिछाया, आसमान की छठ बनाई, ऊपर से पानी बरसाया और उसके ज़रीये से हर तरह की पेडवार निकल कर तुम्हारे लिए रिज़क बाहम पहुंचाया, पास जब तुम ये जानते हो तो दूसरे को अल्लाह का मद्द ए मुक़ाबिल न ठहरो 
+[2:23] और अगर तुम्हारे पास अमृत है के ये किताब जो हमने अपने बंदे पर उतारी है, ये हमारी है या नहीं, तो इसके मानिंद (समान) एक ही सूरत बना लाओ, अपने सारे हमनवा को बुला लो (आपकी सहायता के लिए सहयोगी), एक अल्लाह को छोड़ कर बाकी जिसकी चाहो मदद लेलो अगर तुम सच्चे हो तो ये काम करके दिखाओ 
+[2:24] लेकिन अगर तुमने ऐसा ना किया और यक़ीनन कभी नहीं कर सकते, तो डरो हमें आग से जिसका इंधन (ईंधन) बनाएंगे इंसान और पत्थर, जो मुहैय्या की गई है मुनकिरीन ए हक़ के लिए 
+[2:25] और (ऐ पैगम्बर), जो लोग इस किताब पर ईमान ले आए और (इस्के मुताबिक) अपने अमल दुरुस्त कर लें, अनहेन ख़ुशख़बरी देदो के उनके लिए ऐसे बाघ हैं, जिनके बारे में खास बातें होंगी। उन बाघों के फाल सूरत में दुनिया के फालों से मिलते होंगे, जब कोई फल उन्हें खाने को दिया जाएगा, तो वो कहेंगे के ऐसे ही फाल इस्से पहले दुनिया में हमको दिए जाते हैं। उनके लिए वहां पाकीज़ा बीवियां होंगी, और वो वहां हमेशा रहेंगे
+[2:26] हां, अल्लाह इसे हरगिज़ नहीं शरमाता के मच्छर या इसे भी हकीर-तार (महत्वहीन) किसी चीज़ की तमसीलें (उदाहरण) दे। जो लोग हक़ बात को क़बूल करने वाले हैं, वो इन्हीं तमसीलों को देख कर जान लेते हैं के ये हक़ है जो उनके रब ही की तरफ से आया है, और जो मन्ने वाले नहीं हैं, वो इन्हें सुनकर कहने लगते हैं कि ऐसी तमसीलों से अल्लाह को क्या सरोकार? इस तरह अल्लाह एक ही बात से बहुतों को गुमराह करने में मदद करता है और बहुतों को राह और रास्ता दिखाता है। और गुमराही में वो उनको मुब्तिला करता है जो फ़ासीक़ है 
+[2:27] अल्लाह के अहद को मज़बूत बांध लेने के बाद तोड़ देते हैं, अल्लाह ने जिसे जोड़ने का हुकुम दिया है उसे काट-ते हैं, और ज़मीन में फ़साद बरपा करते हैं। हकीकत में यही लोग नुक्सान उठाने वाले हैं 
+[2:28] तुम अल्लाह के साथ कुफ्र का रवैय्या कैसे इख्तियार करते हो हालांके तुम बे-जान थे, उसने तुमको जिंदगी अता की, फिर वही तुम्हारी जान सब करेगा, फिर वही तुम्हें दोबारा जिंदगी अता करेगा, फिर उसी की तरफ तुम्हें पलट कर जाना है 
+[2:29] वही तो है, जिसने तुम्हारे लिए जमीन की सारी चीजें पैदा कीं, फिर ऊपर की तरफ तवाज्जु फरमाई और सात आसमान उस्तवार किए और वह हर चीज का इल्म रखने वाला है 
+[2:30] फिर जरा हमें वक़्त का तसव्वुर करो जब तुम्हारे रब ने फरिश्तों से कहा था के "मैं जमीन में एक खलीफा बनने वाला हूं" उनहोन ने अर्ज़ किया: "क्या आप जमीन में किसी ऐसे को मुकर्रर करने वाले हैं, जो इसके इंतेजाम को बिगाड़ देगा और खून-रेजियां करेगा? आप की हम्द ओ सना के साथ तस्बीह और आप के लिए तकदीस तो हम कर ही रहे हैं।” फरमाया: "मैं जानता हूं जो कुछ तुम नहीं जानते।" 
+[2:31] इसके बाद अल्लाह ने आदम को सारी चीज़ों के नाम सिखाए, फिर उन्हें फरिश्तों के सामने पेश किया और फरमाया "अगर तुम्हारा ख्याल सही है (के किसी खलीफा के तकरार से इंतेज़ाम बिगड़ जाएगा) तो ज़रा इन चीज़ों के नाम बताओ।" 
+[2:32] अनहोन ने अर्ज़ किया: "नुक़्स (दोष) से ​​पाक तो आप ही की ज़ात है, हम तो बस इतना ही इल्म रखते हैं, जितना आपने हमको दे दिया है, हकीकत में सब कुछ जाने और समझने वाला आप के सिवा कोई नहीं" 
+[2:33] फिर अल्लाह ने आदम से कहा: "तुम इन्हें इन चीज़ों के नाम बताओ" जब उसने उनको उन सबके नाम बता दिए, तो अल्लाह ने फरमाया: "मैंने तुम से कहा ना था के मैं आसमान और ज़मीन की वो सारी हकीकत जानता हूं जो तुमसे मख़फ़ी (चुपी) हैं, जो कुछ तुम ज़ाहिर करते हो, वो भी मुझे मालूम है और जो कुछ तुम छुपते हो, उसे भी मैं जानता हूं।” 
+[2:34] फिर जब हमने फरिश्तों को हुकुम दिया के आदम के आगे झुक जाओ, तो सब झुक गए, मगर इब्लीस ने इंकार किया, वो अपनी बदाई के घमंड में पढ़ गया और नफरमानों में शामिल हो गया [ 
+2:35] फिर हमने आदम से कहा के "तुम और तुम्हारी बीवी, दोनों जन्नत मैं रहो और यहां ब-फरागत जो चाहो खाओ, मगर इस डरख्त का रुख न करना, वरना ज़ालिमों में शामिल होंगे”
+[2:36] आख़िर ए कार शैतान ने दोनों को इस दरख्त की तरजीब देकर हमारे हुकुम की जोड़ी से हटा दिया और उनमें हमें हालत से निकालवा कर छोड़ा जिसमें वो थे। हमने हुकुम दिया के, अब तुम सब यहां से उतर जाओ, तुम एक दूसरे के दुश्मन हो और तुम्हें एक खास वक्त तक जमीन (में) ठहरना और वहीं गुजर बसर करना है” 
+[2:37] उस वक्त आदम ने अपने रब से चंद कलीमात सीख कर तौबा की, जिसको उसके रब ने कबूल करलिया, क्योंकि वो बड़ा माफ करने वाला और रहम फरमाने वाला है 
+[2:38] हमने कहा के, "तुम सब यहां से उतर जाओ फिर जो मेरी तरफ से कोई हिदायत तुम्हारे पास पहुंचें, तो जो लोग मेरी हिदायत की जोड़ी बनाएंगे, उनके लिए कोई खौफ और रांझ का मौका ना होगा 
+[2:39] और जो इसको कबूल करने से इंकार करेंगे और हमारी आयत को झुठलाएंगे, वो आग में जाने वाले लोग हैं, जहां वो हमेशा रहेंगे।” 
+[2:40] ऐ बानी-इज़राइल! जरा ख्याल करो मेरी उस नियामत का जो मैंने तुमको अता की थी, मेरे साथ तुम्हारा जो अहद (संविदा) था उसे तुम पूरा करो, तो मेरा जो अहद तुम्हारे साथ था उसे मैं पूरा करूंगा और मुझ ही से तुम डरो 
+[2:41] और मैंने जो किताब भेजी है उसपर ईमान लाओ, ये उस किताब की ताईद (पुष्टि) में है जो तुम्हारे पास पहले से मौजूद थी, लिहाजा सबसे पहले तुम ही इसके मुनीर ना बन जाओ थोड़ी कीमत पर मेरी आयत को ना बेच डालो और मेरे गजब से बचाओ 
+[2:42] बातिल का रंग चढ़ा कर हक को मुश्तबा (भ्रमित) ना बनाओ और ना जानते बूझते हक़ को छुपाने की कोशिश करो 
+[2:43] नमाज़ क़ायम करो, ज़कात दो और जो लोग मेरे आगे झुक रहे हैं उनके साथ तुम भी झुक जाओ 
+[2:44] तुम दूसरे को तो नेकी का रास्ता इख्तियार करने के लिए कहते हो हो, मगर अपने आप को भूल जाता हो? हलाँके तुम किताब की तिलावत करते हो, क्या तुम अक़ल से बिल्कुल ही काम नहीं लेते 
+[2:45] साबर और नमाज से मदद लो, बेशक नमाज एक मुश्किल मुश्किल काम है 
+[2:46] मगर उन फरमा-बरदार बंदों के लिए मुश्किल नहीं है जो समझते हैं कि आखिर ए कार उन्हें अपने रब से मिलना और उसकी तरफ पलट कर जाना है 
+[2:47] ऐ बानी इजराइल! याद करो मेरी उस नियामत को, जिसमें मैंने तुम्हें नवाजा था और इस बात को कहा था कि मैंने तुम्हें दुनिया की सारी कौमों पर फजीलत अता की थी 
+[2:48] और डरो उस दिन से जब कोई किसी के जरा काम न आएगा, न किसी की तरफ से सिफरिश कबूल होगी, न किसी को फिदिया लेकर चोदा जाएगा, और ना मुजर्रिमों को कहीं से मदद मिल सकेगी 
+[2:49] याद करो वो वक्त, जब हमने तुमको फिरौनियों की गुलामी से निजात बख्शी, उन्हें ने तुम्हें मजबूत अजाब में मुब्तिला कर रखा था, तुम्हारे लड़कों को जिबाह करते थे और तुम्हारी लड़कियों को जिंदा रहने देते थे और इस हालात में तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारी बड़ी आजमाइश थी
+[2:50] याद करो वो वक्त, जब हमने समंदर पार कर तुम्हारे लिए रास्ता बनाया, फिर इस्में से तुम्हें ब-खैरियत गुजारवा दिया, फिर वहीं तुम्हारी आंखों के सामने फिरौनियों को बर्बाद कर दिया 
+[2:51] याद करो, जब हमने मूसा को चालीस शबाना रोज़ की क़रारदाद पर बुलाया, तो उसके पीछे तुम बचदे (बछड़े) को अपना मबूद बना बैठे हमें वक़्त तुमने बड़ी ज़्यादा की थी 
+[2:52] मगर इसपर भी हमने तुम्हें माफ़ कर दिया के शायद अब तुम शुकर-गुज़ार बनो 
+[2:53] याद करो के (हमें ठीक करो) वक़्त जब तुम ये ज़ुल्म कर रहे थे) हमने मूसा को किताब और फुरकान अता की ता-के तुम उसके ज़रिये से सीधा रास्ता पा सको 
+[2:54] याद करो जब मूसा (ये नियामत लेते हुए पलटा, हमसे) ने अपनी क़ौम से कहा के ''लोगन, तुमने बचदे को'' माबूद बना कर अपना ऊपर सख्त ज़ुल्म किया है, लिहाज़ा तुम लोग अपने खालिक के हुजूर तौबा करो और अपनी जानो को हलाक करो, इसी में तुम्हारे खालिक के नजरिए तुम्हारी बेहतरी है” हमारा वक्त तुम्हारे खालिक ने तुम्हारी तौबा कबूल कर ली के वो बड़ा माफ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[2:55] याद करो जब तुमने मूसा से कहा था कि हम तुम्हारे कहने का हरगिज़ यकीन ना करेंगे, जब तक के अपनी आंखों से एलानिया खुदा को (तुमसे कलाम करते) ना देखो, हम वक्त तुम्हारे देखते हैं एक ज़बरदस्त सायेके ने (वज्रपात) तुमको आ लिया 
+[2:56] तुम बे-जान होकर गिर चुके थे, मगर फिर हमने तुमको जिला उठाया, शायद के इस एहसान के बाद तुम शुक्र-गुजार बन जाओ 
+[2:57] हमने तुमपर अबर का साया (बादल छा जाना) किया, मन ओ सलवा की गीज़ा तुम्हारे लिए फराह की और तुमसे कहा के जो पाक चीजें हमने तुम्हें बख्शी हैं, उन्हें खाओ, मगर तुम्हारे असलाफ (पूर्वजों) ने जो कुछ किया, वो हमपर जुल्म ना था, बलके उन्होन ने आपने अपना ही ऊपर जुल्म किया 
+[2:58] फिर याद करो जब हमने कहा था के, "ये बस्ती जो तुम्हारे सामने है, इसमें दखल हो जाओ, इसकी अदायगी जिस तरह चाहो मजे से खाओ, मगर बस्ती के दरवाज़े में सजदा-रेज़ होते हुए दाख़िल होना और कहते जाना हित्ता-तुन हित्ता-तुन (हमें हमारे बोझ/मगफिरत से छुटकारा दिलाओ), हम तुम्हारी खतों से दरगुज़र करेंगे और नीकुकरोन को मज़ीद फ़ज़ल ओ करम से नवाज़ेंगे” 
+[2:59] मगर जो बात कहीं गई थी, ज़ालिमों ने उसे बदल कर कुछ और करदिया, आख़िर ए कार हमने ज़ुल्म करने वालों पर आसमान से अज़ाब नाज़िल किया, ये सज़ा थी उन ना-फ़रमानियों की जो वो कर रहे थे 
+[2:60] याद करो, जब मूसा ने अपनी क़ौम के लिए पानी की दुआ की तो हमने कहा कि फलां चट्टान पर अपना आसा मारो चुनान्चे उसे बारह (बारह) चश्मे (स्प्रिंग्स) फूट निकले और हर काबिले ने जान लिया के कौन सी जगह उसके पानी लेने की है। हमें वक्त ये हिदायत कर दी गई थी कि अल्लाह का दिया हुआ रिज़क खाओ, पियो और जमीन में फसाद न फैलते फिरो
+[2:61] याद करो, जब तुमने कहा था के, "ऐ मूसा, हम एक ही तरह के खाने पर सब्र नहीं कर सकते, अपने रब से दुआ करो के हमारे लिए जमीन की पैदावार साग, तरकारी, खीरा, ककड़ी, गेहूं, लसन, प्याज, दाल वगैरा पैदा करे" तो मूसा ने कहा “ “क्या एक बेहतर चीज़ के बजाये तुम अदना डरजे की चीज़ लेना चाहते हो? अच्छा, किसी शहरी आबादी में जा रहो, जो कुछ तुम माँगते हो वहाँ मिल जायेगा। करने लगे और पैगम्बरों को ना-हक़ क़त्ल करने लगे, ये नतीज़ा था उनकी नफ़रमानियों का और इस बात का के वो हुदूद ए शरा से निकल जाता है 
+[2:62] यकीन जानो के नबी ए अरबी को मन्ने वाले होन या यहूदी, इसाई होन या सबी, जो भी अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान लाएगा और नीक अमल करेगा, उसका अजर उसके रुब के पास है और उसके लिए कोई खौफ और रांझ का मौका नहीं है 
+[2:63] याद करो वो वक्त, जब हमने तूर (तूर पहाड़) को तुम से उठाकर अहद लिया था और कहा था के "जो किताब हम तुम्हें दे रहे हैं उसे मज़बूती के साथ थम्ना और जो एहकाम ओ हिदायत इसमें दर्ज हैं उन्हें याद रखना, इसी जरूरी से तवक्कु की जा सकती है के तुम तकवा की रवीश पर चल सकोगे" 
+[2:64] मगर इसके बाद तुम अपने अहद से फिर गए इसपर भी अल्लाह के फजल और उसकी रहमत ने तुम्हारा साथ न छोड़ा, वरना तुम कभी के तबाह हो चुके होतय 
+[2:65] फिर तुम्हें अपनी कौम के उन लोगों का क़िस्सा तो मालूम ही है जिन्होन ने सब्त (सब्बाथ) का कानून तोड़ा था, हमने उन्हें केहदिया के बंदर बन जाओ और इस हाल में रहो के हर तरफ से तुमपर धुतकर फिटकर पड़े 
+[2:66] इस तरह हमने उनके अंजाम को हमें जमाने के लोगों और बाद में आने वाली नसलों के लिए इब्रत और डरने वालों के लिए हिदायत बना कर छोड़ा 
+[2:67] फिर वो वाकिया याद करो, जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा के, अल्लाह तुम्हें एक गाय (गाय) ज़िबा करने का हुक्म देता है। कहने लगे क्या तुम हमसे मज़ाक करते हो? मूसा ने कहा, मैं इस खुदा की पनाह मांगता हूं कि जाहिलों की सी बातें करूं 
+[2:68] बोले, अच्छा अपने रब से अंधेरा करो के वो हमें इस गाई की कुछ तफसील बताई, मूसा ने कहा, अल्लाह का इरशाद है के वो ऐसी गाई होनी चाहिए जो ना बूढ़ी हो ना बचिया, बलके औसत उमर की हो, लिहाजा जो हुक्म दिया जाता है उसकी तमील करो 
+[2:69] फिर कहने लगे अपने रब से ये और पूछ दो के उसका रंग कैसा हो, मूसा ने कहा वो फरमाता है जर्द (पीला) रंग की गाई होनी चाहिए, जिसका रंग ऐसा शुख (उज्ज्वल) हो के देखने वालों का जी खुश हो जाए 
+[2:70] फिर बोले अपने रब से साफ साफ पूछ कर बताओ कैसी गई मतलूब है, हमें इसकी तायुं में इश्तबा (भ्रम) हो गया है, अल्लाह ने चाहा तो हम इसका पता पा लेंगे
+[2:71] मूसा ने जवाब दिया: अल्लाह कहता है के वो ऐसी गई है जिसकी खिदमत नहीं ली जाती, ना ज़मीन जोत-ती है ना पानी खींचती है, सही सलीम और बे-दाग है, इसपर वो पुकार उठे के हां, अब तुमने ठीक पता बताया है, फिर उन्हें ज़िबा किया, वरना वो ऐसा करते मालूम न होते थे 
+[2:72] और तुम्हें याद है वो वाकिया जब तुमने एक शक्स की जान ली थी, फिर उसके बारे में झगड़े में और एक दूसरे पर क़त्ल का इल्ज़ाम थोपने लगे थे और अल्लाह ने फैसला करलिया था के जो कुछ तुम छुपाते हो इस्तेमाल खोल कर रख देगा 
+[2:73] हमें वक्त हमने हुक्म दिया के मकतूल ​​की लाश को उसके एक हिस्से से ज़र्ब लगाओ, देखो इस तरह अल्लाह मुर्दों को जिंदगी बक्शा है और तुम्हें अपनी निशानियां दिखती है ता-के तुम समझो 
+[2:74] मगर ऐसी निशानियां देखने के बाद भी आखिर ए कार तुम्हारा दिल मजबूत हो जाएगा, पत्थरों की तरह सच, बलके पत्थरों में कुछ इनसे भी बड़े हुए, क्योंकि पत्थरों में से तो कोई ऐसा भी होता है जिसमें से चश्मे फूटते हैं, कोई निकलता है और इसमें से पानी निकल आता है और कोई खुदा के खौफ से लरज़ कर गिर भी पढ़ता है। अल्लाह तुम्हारे कार्टूनों से बेख़बर नहीं है 
+[2:75] ऐ मुसलमानो! अब क्या लोगों से तुम ये तवाक्कू रखते हो के ये तुम्हारी दावत पर ईमान ले आओगे? हालांके इनमें से एक गिरोह का शेवा ये रहा है के अल्लाह का कलाम सुना और फिर खूब समझ बूझ कर दानिस्ता इस्में तहरीफ (बदलाव) की 
+[2:76] (मुहम्मद रसूल अल्लाह पार) ईमान लाने वालों से मिलते हैं तो कहते हैं के हम भी उन्हें मानते हैं, और जब आपस मैं एक दूसरे से तख़लीये (निजी) की बात चिन्त होती है तो कहते हैं के बेवकूफ़ हो गए हो? लोगों को वो बातें बताते हैं कि अल्लाह ने तुमपर खोली है ता-के तुम्हारे रब के पास तुम्हारे मुकाबले में उन्हें हुज्जत में पेश किया है 
+[2:77] और क्या ये जानते नहीं हैं के जो कुछ ये छुपाते हैं और जो कुछ जाहिर करते हैं, अल्लाह को सब बातों की ख़बर है 
+[2:78] इनमें एक दूसरा गिरो ​​उम्मियों का है, जो किताब का तो इल्म रखते नहीं, बस अपनी बे-बुनियाद उम्मीद और आरज़ूओं को लिए बैठे हैं और महज़ वेहम ओ गुमान पर चले जा रहे हैं 
+[2:79] पास हलाकत और तबाही है उन लोगों के लिए जो अपने हाथों से शरा का नविस्ता लिखते हैं (जो अपने हाथों से किताबें लिखते हैं), फिर लोगों से कहते हैं कि ये अल्लाह के पास से आया है ता-के इसके मुआवज़े में थोड़ा सा फ़ायदा हासिल करना। उनके हाथों का लिखा भी उनके लिए तबाही का सामान है और उनकी ये कमाई भी उनके लिए मुजीब ए हलाकत 
+[2:80] वो कहते हैं के दोज़ख़ की आग हमें हरगिज़ छूने वाली नहीं इल्ला ये के चंद रोज़ की सज़ा मिल जाए तो मिल जाए। इनसे पूछो, क्या तुमने अल्लाह से कोई अहद ले लिया है, जिसका खिलाफत-वारज़ी वो नहीं कर सकता? हां बात ये है कि तुम अल्लाह के जिम्मे डाल कर ऐसी बातें कहते हो जिनका मुतालिक तुम्हें इल्म नहीं है कि उन्होंने इनका ज़िम्मा लिया है? आख़िर तुम्हें दोज़ख की आग क्यों न लगेगी
+[2:81] जो भी बड़ी कमाई करेगा और अपनी खाता-कारी के चक्कर में पड़ा रहेगा, वो दोज़खी है और दोज़ख ही में वो हमेशा रहेगा 
+[2:82] और जो लोग इमाम लाएंगे और नेक अमल करेंगे वही जन्नती हैं और जन्नत में वो हमेशा रहेंगे 
+[2:83] याद करो, इजराइल की औलाद से हमने पुख्ता अहद लिया था कि अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करना, मां बाप के साथ, रिश्तेदारों के साथ, यतीमों और मिस्कीनो के साथ नेक सुलूक करना, लोगों से अच्छी बात कहना, नमाज कायम करना और जकात देना, मगर थोड़े आदमियों के सिवा तुम सब उस अहद से फिर गए और अब तक फिर हुए हो 
+[2:84] फिर ज़रा याद करो, हमने तुमसे मज़बूत अहद लिया था के आपस में एक दूसरे का खून ना बहाना और ना एक दूसरे को घर से बे-घर करना, तुमने इसका इक़रार किया था, तुम खुद इसपर गवाह हो 
+[2:85] मगर आज वही तुम हो के अपने भाई बंधों को कत्ल करते हो, अपनी बिरादरी के कुछ लोगों को बे-खानुमा (बे-घर) करते हो, ज़ुल्म ओ ज्यादा के साथ उनके खिलाफ जत्थे बंदियां (समूह बनाना/सहयोग करना) करते हो, और जब वो लड़यी में पकड़े हो ह्यूय तुम्हारे पास आते हैं तो उनकी रिहाई के लिए फ़िदिये का लेन डेन करते हो, हलांके उन्हें उनके घरों से निकालना ही सारा से तुमपर हराम था। तो क्या तुम किताब के एक हिस्सी पर ईमान लाते हो और दूसरे हिस्सी के साथ कुफ्र करते हो? फिर तुम में से जो लोग ऐसा करें उनकी सजा इसके सिवा और क्या है कि दुनिया की जिंदगी में ज़लील ओ ख़्वार होकर रहें और आख़िरत में छायादार अज़ाब की तरफ फेर दिए जाएं? अल्लाह उन हरकत से बे-ख़बर नहीं है जो तुम कर रहे हो 
+[2:86] ये वो लोग हैं जिन्हों ने आख़िरत बेच कर दुनिया की ज़िंदगी ख़त्म कर ली है, लिहाज़ा ना इनकी सज़ा में को तक़फ़ीफ़ (कामी) होगी और ना उनको कोई मदद पाहुंच सकेगी 
+[2:87] हमने मूसा को किताब दी, इसके बाद पै दर पै रसूल भेजे, आखिर ए कार ईसा इब्न मरियम को रोशन निशानियां देकर भेजा और रूह ए पाक से उसकी मदद की, फिर ये तुम्हारा क्या ढांग है के जब भी कोई रसूल तुम्हारी ख्वाहिशात ए नफ्स के खिलाफ कोई चीज लेकर तुम्हारे पास आया, तो तुमने उसे मुक़दमे में सरकशी ही की, किसी को झुटलाया और किसी को क़त्ल कर डाला 
+[2:88] वो कहते हैं, हमारे दिल महफ़ूज़ हैं, नहीं असल बात ये है के उनके कुफ्र की वजह से असमान अल्लाह की फितर पड़ी है, इसलिए वो कम ही ईमान लाते हैं 
+[2:89] और अब जो एक किताब अल्लाह की तरफ से उनके पास आई है, उसके साथ उनका क्या बरताओ है? दावा ये के वो हमें किताब की तस्दीक करती है जो उनके पास पहले से मौजूद थी, विवाद ये के इसकी आमद से पहले वो खुद कुफ्फार के मुकाबले में फतह ओ नुसरत की दुआएं मंगा करते थे, मगर जब वो चीज आ गई जिसे वो पहचान भी गए तो अनहोन ने उसे मन्ने से इंकार कर दिया, खुदा की लानत मुनकिरीन पर
+[2:90] क्या बुरा ज़रिया है जिसे ये अपने नफ़्स की तसल्ली हासिल करते हैं के जो हिदायत अल्लाह ने नाज़िल की है, उसको क़बूल करने से सिर्फ इस जिद्द की बिना पर इंकार कर रहे हैं के अल्लाह ने अपने फज़ल (वही ओ रिसालत) से अपने जिस बंदे को खुद चाहा, नवाज़ दीया! लिहाज़ा अब ये गजब बला ए गजब के मुस्तहिक हो गए हैं और ऐसे काफिरों के लिए सख्त ज़िल्लत आमेज़ सज़ा मुकर्रर है 
+[2:91] जब उनसे कहा जाता है के जो कुछ अल्लाह ने नाज़िल किया है उसपर ईमान लाओ तो वो कहते हैं "हम तो सिर्फ उस चीज़ पर ईमान लाते हैं जो हमारे हां (यानी नाक ए इसराइल) में उतरी है” इस दिन के बहार जो कुछ आया है उसके मन से वो इनकार करते हैं, हालांके वो हक़ है और उस तालीम की तस्दीक ओ ताईद कर रहा है जो उनके हां पहले से मौजूद थी। अच्छा, उन्हें कहो: अगर तुम हमें तालीम ही पर ईमान रखने वाले हो जो तुम्हारे हां आई थी, तो इसे पहले अल्लाह के उन पैगंबरों को (जो खुद बनी इसराइल में पैदा हुए थे) क्यूं क़तल करते रहे 
+[2:92] तुम्हारे पास मूसा कैसी रोशन निशानियों के साथ आया फिर भी तुम ऐसे जालिम था के, इसकी पीठ मोड़ते ही बच्चे को मबूद बना बैठे 
+[2:93] फिर जरा हमें मिसाक (संविदा) को याद करो जो तूर (तूर पर्वत) को तुम ऊपर उठा कर हमने तुमसे लिया था, हमने ताकीद की थी के जो हिदायत हम दे रहे हैं, उनको शक्ति के साथ पाबन्दी करो और कान लगा कर सुनो। तुम्हारे असलफ ने कहा के हमने सुन लिया, मगर मानेंगे नहीं और इनकी बात परस्ती का ये हाल था के दिलों में उनके बछड़ा (बछड़ा) ही बसा हुआ था। कहो: अगर तुम मोमिन हो तो ये अजीब ईमान है जो ऐसी बुरी हरकत का तुम्हें हुकुम देता है 
+[2:94] इनसे कहो के अगर वक्त अल्लाह के नाजदीक आखिरी का घर तमां इंसानों को चोद कर सिर्फ तुम्हारे लिए मखसूस है, तब तो तुम्हें चाहिए के मौत की तमन्ना करो अगर तुम अपने इस खयाल में सच्चे हो 
+[2:95] यकीन जानो के ये कभी इसकी तमन्ना ना करेंगे, क्योंकि अपने हाथों में जो कुछ काम कर उन्हें ने वहां भेजा है, उसका इक्ताजा यहीं है (के ये वहां जाने की तमन्ना ना करें) अल्लाह जालिमों के हाल में है ख़ूब वाकिफ़ है 
+[2:96] तुम इनमें सबसे ज्यादा कर जीने का हरिस पाओगी हट्टा के ये इस मामले में मुशरिकों से भी बड़े हुए हैं। इनमें से एक शक ये चाहता है कि कोई तरह हज़ार बरस जिए, हलांके लंबी उमर बहार हाल उसे अज़ाब तो दूर नहीं फेंक सकती। जैसा कुछ अमाल ये कर रहे हैं, अल्लाह तो इन्हें देख ही रहा है 
+[2:97] इनसे कहो के जो कोई जिबराईल से अदावत (दुश्मनी) रखता है, उसे मालूम होना चाहिए के जिबराईल ने अल्लाह ही के इज़ान से ये कुरान तुम्हारे क़ल्ब पर नाज़िल किया है, जो पहले आई हुई किताबों की तस्दीक ओ ताईद करता है और ईमान लाने वालों के लिए हिदायत और कामियाबी की बशारत बनकर आया है 
+[2:98] (अगर जिब्राइल से इनकी अदावत का सबाब यहीं है, तो केहदो के) जो अल्लाह और उसके फरिश्तों और उसके रसूलन और जिब्राईल और माइकल के दुश्मन हैं, अल्लाह उन काफिरों का दुश्मन है
+[2:99] हमने तुम्हारी तरफ ऐसी आयतें नाज़िल की हैं जो साफ साफ हक का इजहार करने वाली हैं और इनकी जोड़ी से सिर्फ वही लोग इंकार करते हैं जो फासिक हैं 
+[2:100] क्या हमेशा ऐसा ही नहीं हो रहा है के जब उन्होन ने कोई अहद किया, तो उनमें से एक ना एक गिरोह ने उसे जरूर बला ए तलाक रख दिया? बलके इनमें से अक्सर ऐसे ही हैं जो सच्चे दिल से ईमान नहीं लाते 
+[2:101] और जब इनके पास अल्लाह की तरफ से कोई रसूल उस किताब की तस्दीक ओ ताईद करता हुआ आया जो इनके हां पहले से मौजूद थी तो एहले किताब में से एक गिरोह ने किताब अल्लाह को इस तरह पास-ए-पुश्त (पीठ के पीछे) डाला गोया के वो कुछ जानते ही नहीं 
+[2:102] और लगे उन चीज़ों की जोड़ी बनाने जो शयातीन सुलेमान की सल्तनत का नाम लेकर पेश किया करते थे, हलांके सुलेमान ने कभी कुफ़्र नहीं किया, कुफ़्र के मुर्तक़िब तो वो शयातीन थे जो लोगन को जादूगरी की तालीम देते थे। वो पिछे पड़े हमें चीज के जो बाबिल (बेबीलोन) में दो फरिश्तों, हारुत ओ मारुत पर नाज़िल की गई थी, हलांके वो (फरिश्ते) जब भी किसी को उसकी तालीम देते थे तो पहले साफ तौर पर मुतनब्बे (चेतावनी) करदिया करते थे के "देख, हम" मेहज़ एक आज़माइश है, तू कुफ्र में मुब्तिला ना हो"। फिर भी ये लोग उनसे वो चीज़ सीखते थे, जिसमें शोहर और बीवी में जुदाई डाल दें, जाहिर था के इज़ान ए इलाही के बिना वो इस ज़री से किसी को भी जरूर (नुकसान) न पहुंचा सकता था, मगर इसके दावे वो ऐसी चीज सीखते थे जो खुद इनके लिए नफा बख्श नहीं, बल्के नुक्सान-दे थी और उन्हें खूब मालूम था के जो इस चीज का खरीददार बना उसके लिए आखिरी में कोई हिसा नहीं। कितनी बुरी माता थी जिसके बदले उन्हें ने अपनी जानों को बेच डाला, काश उन्हें मालूम होता 
+[2:103] अगर वो ईमान और तकवा इख्तियार करते, तो अल्लाह के हां इसका जो बदला मिला तो उनके लिए ज्यादा बेहतर था, काश उन्हें खबर होती 
+[2:104] ऐ लोग जो ईमान लाए हो! रैना (हमारी बात सुनो) ना कहो, बलके अनज़ुर्ना (हमें समझाओ) कहो और तवज्जु से बात को सुनो, ये काफ़िर तो अज़ाब ए अलीम के मुस्तहिक़ हैं 
+[2:105] ये लोग जिन्हों ने दावत ए हक़ को क़बूल करने से इंकार कर दिया है, ख़्वाह एहले किताब में से होन या मुशरिक माननीय, हरगिज़ ये पसंद नहीं करते के तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर कोई भलाई नाज़िल हो, मगर अल्लाह जिसको चाहता है अपनी रहमत के लिए चुन लेता है और वो बड़ा फ़ज़ल फ़रमाने वाला है 
+[2:106] हम अपनी जिस आयत को मनसूख (निरस्त) करते हैं हां भुला देते हैं, उसकी जगह उसे बेहतर ले आते हैं या काम अज़ काम वैसी ही। क्या तुम जानते नहीं हो कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है 
+[2:107] क्या तुम्हें ख़बर नहीं है कि ज़मीन और आसमान की फ़ार्मा रवाई अल्लाह ही के लिए है और उसके सिवा कोई तुम्हारी ख़बरगिरी करने और तुम्हारी मदद करने वाला नहीं है
+[2:108] फिर क्या तुम अपने रसूल से उस क़िस्म का सवाल और मुतालबे करना चाहते हो जैसे इसे पहले मूसा से किये जा चुके हैं? हलांके जिस शक्स ने ईमान की रवीश को कुफ्र की रवीश से बदल लिया वो राह ए रास्ते से भटक गया 
+[2:109] एहले किताब में से अक्सर लोग ये चाहते हैं के किसी तरह तुम्हें ईमान से फेर कर फिर कुफ्र की तरफ पलटा ले जाएं अगरचे हक उनपर जाहिर हो चूका है, मगर अपने नफ़्स के हसद की बिना पर तुम्हारे लिए उनकी ये ख्वाहिश है इसके जवाब में तुम अफ़ु ओ दरगुज़र (माफ़ कर दो और नज़रअंदाज) से काम लो, यहां तक ​​के अल्लाह खुद ही अपना फैसला नफीज़ करदे। मुतमइन रहो के अल्लाह ताला हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है 
+[2:110] नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो। तुम अपनी अकीबत के लिए जो भलाई कमा कर आगे भेजोगे, अल्लाह के हन उसे मौजुद पाओगे। जो कुछ तुम करते हो वो सब अल्लाह की नज़र में है 
+[2:111] उनका कहना है कि कोई शक्स जन्नत में ना जाएगा जब तक के वो यहूदी ना हो (या ईसाइयों के ख्याल के मुताबिक) इसाई ना हो। ये उनकी तमन्नाएं हैं, इनसे कहो अपनी दलील पेश करो अगर तुम अपने दावे में सच्चे हो 
+[2:112] दरसल ना तुम्हारी कुछ खुसियत है ना किसी और की, हक ये है के जो भी अपनी हस्ती को अल्लाह की इताअत में सोम्प दे और अमल नेक रवीश पर चले, उसके उसके रब के पास उसका अजर है और ऐसे लोगों के लिए किसी का खौफ या रांझ का कोई मौका नहीं 
+[2:113] यहुदी कहते हैं: इसाईयों के पास कुछ नहीं, इसाई कहते हैं: यहुदियों के पास कुछ नहीं, हलांके के दोनों ही किताब पढ़ते हैं और यही क़िस्म के दावे उन लोगों के भी हैं जिनके पास किताब का इल्म नहीं है, ये इख्तिलाफात जिन में ये लोग मुब्तिला हैं इनका फैसला अल्लाह कयामत के रोज कर देगा 
+[2:114] और हमारे शक्स से बढ़कर जालिम कौन होगा जो अल्लाह के मबादनों (पूजा स्थलों) में उसके नाम की याद से रोके और उनकी वीरानी के दर्पे हो? ऐसे लोग काबिल हैं के उनकी इबादत-गाहों में क़दम न रखें और अगर वहां जाएं भी तो डरते हुए जाएं, उनके लिए तो दुनिया में रुसवाई है और आख़िरत में अज़ाब ए अज़ीम 
+[2:115] मशरिक और मगरिब सब अल्लाह के हैं, जिसकी तरफ भी तुम रुख़ करोगे उसकी तरफ अल्लाह का रुख है, अल्लाह बड़ी मुसीबत वाला और सब कुछ जानने वाला है 
+[2:116] उनका क़ौल है कि अल्लाह ने किसी को बेटा बनाया है, बातों में अल्लाह पाक है। असल हकीकत ये है के ज़मीन और आसमान की तमाम मौजुदात उसकी दूध (मिल्कियत) हैं, सबके सब उसके मुती ओ फ़रमान हैं 
+[2:117] वो आसमान और ज़मीन का मुजिद (प्रवर्तक) है और जिस बात का वो फैसला करता है उसके लिए बस ये हुकुम देता है के "होजा" और वो हो जाती है 
+[2:118] नादान कहते हैं कि अल्लाह खुद हमसे बात क्यों नहीं करता या कोई निशानी हमारे पास क्यों नहीं आती? ऐसी ही बातें इनसे पहले लोग भी किया करते थे, इन सब (अगले पिछले गुमराहों) की मानसिकता (मानसिकता) एक जैसी हैं। यकीन लाने वालों के लिए तो हम निशानियां साफ-साफ नुमायां कर चुके हैं
+[2:119] (इससे बढ़ कर निशानी क्या होगी के) हमने तुमको इल्म ए हक के साथ खुश खबरी देने वाला और डराने वाला बना कर भेजा, अब जो लोग जहन्नुम से रिश्ता जोड़ चुके हैं उनकी तरफ से तुम जिम्मेदार ओ जवाबदे नहीं हो 
+[2:120] यहुदी और इसै तुमसे हरगिज़ राजी ना होंगे, जब तक तुम उनके तरीक़े पर ना चलने लगो। साफ कहदो के रास्ते बस वही है जो अल्लाह ने बताया है, वरना अगर उस इल्म के बाद जो तुम्हारे पास आ चूका है तुमने उनकी ख्वाहिश की जोड़ी तो अल्लाह की पकड़ से बचाने वाला कोई दोस्त और मददगार तुम्हारे लिए नहीं है 
+[2:121] जिन लोगों को हमने किताब दी है, वो उसका इस्तेमाल है तरह पढ़ते हैं जैसा के पढ़ने का हक है, वो इसपर सच्चे दिल से ईमान लाते हैं और जो इसके साथ कुफ्र का रावय्या इख्तियार करते हैं वही असल में नुक्सान उठाने वाले हैं 
+[2:122] ऐ बानी इजराइल! याद करो मेरी वो नियामत जिसकी मैंने तुम्हें नवाजा थी, और ये के मैंने तुम्हें दुनिया की तमाम कौमों पर फजीलत दी थी 
+[2:123] और डरो उस दिन से, जब कोई किसी के जरा काम न आएगा, न किसी से फिदिया (फिरौती) कबूल किया जाएगा, न कोई सिफरिश हाय आदमी को फ़ायदा देगी, और ना मुजरेमो को कहीं से कोई मदद मांग सकेगी 
+[2:124] याद करो के जब इब्राहिम को उसके रब ने चंद बातों में आज़माया और वो उन सब में पूरा उतर गया, तो उसने कहा: "मैं तुझसे सब लोगों का पेशवा बनने वाला हूं" इब्राहिम ने अर्ज़ किया: “और क्या मेरी औलाद से भी यही वादा है?” उसने जवाब दिया: "मेरा वादा ज़ालिमों से मुतालिक नहीं है।" 
+[2:125] और ये के हमने इस घर (काबा) को लोगों के लिए मरकज़ और अमन की जगह क़रार दिया था और लोगों को हुकुम दिया था कि इब्राहिम जहां इबादत के लिए खड़ा होता है उस मुकाम को मुस्तक़िल जाए नमाज़ बना लो और इब्राहिम और इस्माइल को तक़ीद की थी के मेरे इस घर को तवाफ और एतेकाफ और रुकू और सजदा करने वालों के लिए पाक रक्खो 
+[2:126] और ये के इब्राहीम ने दुआ की: "ऐ मेरे रब, इस शहर को अमन का शहर बना दे, और इसके बाशिंदों (लोग) में जो अल्लाह और आख़िरत को माने, उन्हें हर क़िस्म के फ़लों का रिज़क दे”। जवाब में उसके रुब ने फरमाया: "और जो ना मानेगा, दुनिया की चंद रोजा जिंदगी का सामान तो मैं उसे भी दूंगा मगर आखिर ए कार उसे अजाब ए जहन्नुम की तरफ घसीटूंगा, और वो बढतारीन ठिकाना है" 
+[2:127] और याद करो इब्राहिम और इस्माइल जब इस घर की दीवारें हैं उठ रहे थे, तो दुआ करते जाते थे: "ए हमारे रब, हमसे ये खिदमत क़बूल फरमा ले, तू सबकी सुनने और सब कुछ जानने वाला है 
+[2:128] ए रब, हम दोनों को अपना मुस्लिम (मुती ए फरमान) बना, हमारी नाक से एक ऐसी क़ौम उठो जो तेरी मुस्लिम हो, हमें अपनी इबादत के तौर-तरीके बता, और हमारी कहानियों से दरगुज़र फ़रमा, तू बड़ा माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
+[2:129] और ऐ रब, उन लोगों में खुद उनकी क़ौम से एक ऐसा रसूल उठियो जो उन्हें तेरी आयत सुनाए, उनको किताब और हिकमत की तालीम दे और उनकी जिंदगी संवारे, तू बड़ा मुक्तदर (सर्वशक्तिमान) और हकीम है। 
+[2:130] अब कौन है, जो इब्राहिम के तरीक़े से नफ़रत करे? जिसने खुद को हिम्मत ओ जिहालत में मुब्तिला करलिया हो, उसके सिवा कौन ये हरकत कर सकता है? इब्राहीम तो वो शक्स है जिसको हमने दुनिया में अपने काम के लिए चुन लिया था और आख़िरत में उसका शुमार सालिहें में होगा 
+[2:131] उसका हाल ये था के जब उसके रब ने उसे कहा: "मुस्लिम हो जा" तो उसने फ़वारान कहा: "मैं मालिक ए कायनात का 'मुस्लिम' हो गया।” 
+[2:132] इसी तारीख पर चलने की हिदायत हमें अपनी औलाद की थी और याकूब अपनी औलाद को कर गया, उसने कहा था के: "मेरे बच्चों! अल्लाह ने तुम्हारे लिए यही दीन पसंद किया है लिहाजा मरते दम तक मुस्लिम ही रहना" 
+[2:133] फिर क्या तुम उस वक्त मौजूद थे जब याकूब इस दुनिया से रुक्सत हो रहा था? उसने मरते वक्त अपने बच्चों से पूछा: "बच्चों! मेरे बाद तुम किसकी बंदगी करोगे?" उन सब ने जवाब दिया: "हम उसकी एक खुदा की बंदगी करेंगे जैसे आप ने और आपके बुजुर्ग इब्राहिम, इस्माइल और इशाक ने खुदा माना है और हम उसके मुस्लिम हैं" 
+[2:134] वो कुछ लोग थे जो गुजर गए, जो कुछ उन्होंने बनाया, जो उनके लिए है और जो कुछ तुम कमाओगे, वो तुम्हारे लिए है। तुमसे ये ना पूछा जाएगा के वो क्या करते थे 
+[2:135] यहुदी कहते हैं: यहुदी हो तो राह ए रास्ते पाओगे, इसे कहते हैं: इसे कहो: “नहीं, बलके सबको छोड़ कर इब्राहिम का तरीका, और इब्राहीम मुशरिकों में से ना था।” 
+[2:136] (मुसलमानो)! कहो के: "हम ईमान लाए अल्लाह पर और हमें हिदायत पर जो हमारी तरफ नाज़िल हुई है और जो इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब की तरफ नाज़िल हुई थी और जो मूसा और ईसा और दूसरे तमाम पैगम्बरों को उनके रब की तरफ से दी" गई थी. हम उनके दरमियान कोई तफ़रीक़ नहीं करते और हम अल्लाह के मुस्लिम हैं” 
+[2:137] फिर अगर वो इसी तरह ईमान लायें, जिस तरह तुम लाए हो, तो हिदायत पर हैं, और अगर इसके मुह फिरें तो खुली बात है के वो हथधर्मी (विवाद) में पढ़ गए हैं, लिहाज़ा इत्मिनान रख्खो के उनके मुक़ाबले में अल्लाह तुम्हारी हिमायत के लिए काफी है। वो सब कुछ सुनता और जानता है 
+[2:138] कहो: “अल्लाह का रंग इख्तियार करो उसके रंग से अच्छा और किसका रंग होगा? और हम उसी की बंदगी करने वाले लोग हैं।” 
+[2:139] ऐ नबी! इनसे कहो: "क्या तुम अल्लाह के बारे में हमसे झगड़ा करते हो? हलांके वही हमारा रब है और तुम्हारा रब भी। हमारे अमाल हमारे लिए हैं, तुम्हारे अमाल तुम्हारे लिए, और हम अल्लाह हाय के लिए अपनी बंदगी को खालिस कर चुके हैं
+[2:140] या फिर क्या तुम्हारा कहना ये है कि इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब सब के सब यहूदी थे या नसरानी थे? कहो: "तुम ज़्यादा जानते हो या अल्लाह? हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जिसका ज़िमे अल्लाह की तरफ़ से एक गवाही हो और वो उसे छुपाए? तुम्हारी हरकत से अल्लाह ग़ाफ़िल तो नहीं है 
+[2:141] वो कुछ लोग थे जो गुज़र चुके, उनकी कमाई उनके लिए थी और तुम्हारी कमाई तुम्हारे लिए। तुमसे उनके अमाल का सवाल नहीं होगा। 
+[2:142] नादान लोग जरूर कहेंगे: इन्हें क्या हुआ के पहले ये जिस क़िबले की तरफ रुख करके नमाज पढ़ते थे उसे यकीन फिर से हो गया? (ऐ नबी) इनसे कहो: "मशरिक और मगरिब सब अल्लाह के हैं, अल्लाह जिसे चाहता है सीधी राह दिखा देता है 
+[2:143] और इसी तरह तो हमने तुम्हें एक "उम्मत ए वसत (मध्य देश)" बनाया है ता-के तुम दुनिया के लोगों पर गवाह हो और रसूल तुमपर गवाह हो। पहले जिस तरफ तुम रुख करते थे, उसको तो हमने सिर्फ ये देखने के लिए किबला मुकर्रर किया था कि कौन रसूल की जोड़ी बनाता है और कौन उल्टा फिर जाता है, मगर उन लोगों के लिए कुछ भी नहीं साबित हुआ जो अल्लाह की। हिदायत से फ़ैज़ियाब था, अल्लाह तुम्हारे इस ईमान को हरगिज़ ज़या न करेगा। यकीन जानों के वो लोगों के हक़ में निहायत शफीक ओ रहीम है 
+[2:144] ये तुम्हारे मुँह का बार-बार आसमान की तरफ उठना हम देख रहे हैं, लो हम इसी क़िबले की तरफ तुम्हें फेर देते हैं जिसे तुम पसंद करते हो, मस्जिद ए हराम की तरफ रुख़ फेर दो अब जहां कहीं तुम हो उसकी तरफ मुंह करके नमाज पढ़ा करो। ये लोग जिन्हें किताब दी गई थी खूब जानते हैं के (तहवील ए क़िबला का/क़िबला का परिवर्तन) ये हुकुम उनके रब ही की तरफ से है और बार-हक़्क़ है मगर इसके बावज़ूद जो कुछ ये कर रहे हैं अल्लाह उसे ग़ाफ़िल नहीं है 
+[2:145] तुम एहले किताब के पास ख्वा कोई निशानी ले आओ, मुमकिन नहीं के ये तुम्हारे क़िबले की जोड़ी बनाने लगें, और न तुम्हारे लिए ये मुमकिन है के इनके क़िबले कि जोड़ी करो, और इनमें से कोई गिरो ​​भी दूसरे के क़िबले की जोड़ी के लिए तैयार नहीं है, और अगर तुमने इस इल्म के बाद जो तुम्हारे पास आ चुका है इनकी ख्वाहिशात की जोड़ी कि तो यकीनन तुम्हारा शुमार ज़ालिमों में होगा 
+[2:146] जिन लोगों को हमने किताब दी है वो इस मुकाम को (जिसे क़िबला बनाया गया है) ऐसा पहचानते हैं जैसा अपनी औलाद को पहचानते हैं, मगर उनमें से एक गिरोह जानते हैं बूझते हक़ को छुपा रहा है 
+[2:147] ये क़तई एक अमर ए हक़ है तुम्हारे रब की तरफ से, लिहाज़ा इसके मुतालिक तुम हरगिज़ किसी शक्क में ना पढ़ो 
+[2:148] हर एक के लिए एक रुख है जिसकी तरफ वो मुदता है, पस भलाईयों की तरफ सबक करो। जहां भी तुम होगे अल्लाह तुम्हें पा लेगा, उसकी क़ुदरत से कोई चीज़ बाहर नहीं
+[2:149] तुम्हारा गुजर जिस मुकाम से भी हो वहीं अपना रुख (नमाज के वक्त) मस्जिद ए हराम की तरफ फेर दो, क्योंकि ये तुम्हारे रब का बिल्कुल बार-हक्क फैसला है और अल्लाह तुम लोगों के अमाल से बे-खबर नहीं है 
+[2:150] और जहां से भी तुम्हारा गुजर हो अपना रुख मस्जिद ए हराम की तरफ फेरा करो, और जहां भी तुम हो उसकी तरफ मुंह करके नमाज पढ़ो ता-के लोगों को तुम्हारे खिलाफ कोई हुज्जत ना मिले। हां जो जालिम हैं उनकी जुबान किसी हाल में बंद न होगी तो उनसे तुम न डरो बलके मुझसे डरो और इसलिए के मैं तुमपर अपनी नियामत पूरी कर दूं और इस तवक्कु पर के मेरे इस हुकुम की जोड़ी से तुम इसी तरह फलाह का रास्ता पाओगे 
+[2:151] जिस तरह (तुम्हें वह चीज है) से फलाह नसीब हुई के) मैंने तुम्हारे दरमियान खुद तुम में से एक रसूल भेजा जो तुम्हें मेरी आयत सुनाता है, तुम्हारी जिंदगी को संवारता है, तुम्हें किताब और हिकमत की तालीम देता है और तुम्हें वो बातें सिखाता है जो तुम ना जानते थे 
+[2:152] लिहाज़ा तुम मुझे याद रक्खो मैं तुम्हें याद रखूंगा और मेरा शुक्र अदा करो, कुफरान ए नियामत न करो 
+[2:153] ऐ लोग जो ईमान लाए हो सब्र और नमाज से मदद लो, अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है 
+[2:154] और जो लोग अल्लाह की राह में हैं मारे जायें उन्हें मुर्दा ना कहो, ऐसे लोग तो हकीकत में जिंदा हैं, मगर तुम्हें उनकी जिंदगी का शूर नहीं होता 
+[2:155] और हम जरूर तुम्हें खौफ ओ खतरा, फाका काशी (भूख), जान ओ माल के नुक्सानात और आदमियों के घाटे(नुक्सान) में मुब्तिला करके तुम्हारी आजमाइश करेंगे 
+[2:156] हालात में जो लोग सब्र करें और जब कोई मुसीबत पड़े तो कहे के: "हम अल्लाह ही के हैं और अल्लाह ही की तरफ हमें पलट कर जाना है" 
+[2:157] उन्हें खुश-खबरी देदो उन्पर उनके रब की तरफ से बड़ी इनायत होगी, उसकी रहमत अनपर साया करेगी और ऐसे ही लोग रस्त-रो हैं 
+[2:158] यकीनन सफा और मरवा अल्लाह की निशानियों में से हैं, लिहाजा जो शक्स बैतुल्लाह का हज या उमर करे, उसके लिए कोई गुनाह की बात नहीं के वो इन दोनों पहाड़ों के दरमियां सई कार्ले और जो बरीज़ा ओ रगबत (खुले दिल से) कोई भलाई का काम करेगा अल्लाह को इसका इल्म है और वो इसकी कदर करने वाला है 
+[2:159] जो लोग हमारी नाज़िल की हुई रोशन तालीमत और हिदायत को छुपाते हैं, डरन हाल ये के हम इन्हें सब इंसानों की रहनुमाई के लिए अपनी किताब में बयान कर चुके हैं, यकीन जानो के अल्लाह भी अपर लानत करता है और तमाम लानत करने वाले भी अनपर लानत भेजते हैं 
+[2:160] अलबत्ता जो इस रवीश से बाज़ आ जाए और अपने तर्ज़ ए अमल की इस्लाह कार्लें और जो कुछ छुपाते थे उसे बयान करने लगें, उनको मैं माफ कर दूंगा और मैं बड़ा दरगुजार करने वाला और रहम करने वाला हूं 
+[2:161] जिन लोगों ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया और कुफ्र की हालत में ही जान दी, उन लोगों ने अल्लाह और फरिश्तों और तमाम इंसानों की लानत है
+[2:162] इसी लानत ज़दहगी की हालत में वो हमेशा रहेंगे, ना उनकी सज़ा में तक़फ़ीफ़ होगी और ना उन्हें फिर कोई दूसरी मोहलत दी जाएगी 
+[2:163] तुम्हारा ख़ुदा एक ही खुदा है, उस रहमान और रहीम के सिवा कोई और ख़ुदा नहीं है 
+[2:164] (क्या हकीकत को पहचानने के लिए अगर कोई निशानी और आलमत अंधेरा है तो) जो लोग अक़ल से काम लेते हैं उनके लिए आसमानो और ज़मीन की सच्चाई (सृजन) में, रात और दिन के पैहम एक दूसरे के बाद आने में, उन कश्तियों में जो इंसान के नफ़ा की चीज़ों के लिए हुए दरियाँ और समंदरों में चलती फिरती हैं, बारिश के हमारे पानी में जैसे अल्लाह ऊपर से बरसता है, फिर उसके ज़रीए से ज़मीन को जिंदगी बक्शता है और अपनी इसी इंतज़ाम की बदौलत ज़मीन में हर क़िस्म की जानदार मख़लूक को फैलाता है, हवाओं की गर्दिश में, और उन बादलों में जो आसमान और ज़मीन के दरमियान तबे फ़रमान बना कर रख दिए गए हैं, बेशुमार निशानियां हैं 
+[2:165] (मगर वेहदत ए ख़ुदावंदी पर दलालत करने वाले खुले खुले आसमां के होते हुए भी) कुछ लोग ऐसे हैं जो अल्लाह के सिवा दूसरो को उसका हमसर और मद्द ए मुक़ाबिल (बराबर और प्रतिद्वंदी) बनाते हैं और उनके ऐसे गिरविदा (प्यार) हैं जैसे अल्लाह के साथ गिरविदगी होनी चाहिए, हलांके ईमान रखने वाले लोग सबसे बढ़कर अल्लाह को मेहबूब रखते हैं, काश जो कुछ अज़ाब को सामने देखकर उन्हें सूझने वाला है वो आज ही जालिमीन को समझ जाए के सारी ताक़तें और सारे इख्तियारात अल्लाह ही के क़ब्ज़े में हैं और ये के अल्लाह सज़ा देने में भी बहुत सक्षम है 
+[2:166] जब वो सज़ा देगा हमें वक़्त कैफियत ये होगी के वही पेशवा और रहनुमा जिनकी दुनिया में जोड़ी की गई थी अपने जोड़े से बे-तालुकी जाहिर करेंगे, मगर सजा पा कर रहेंगे और उनके सारे असबाब ओ वसील का सिलसिला खत्म हो जाएगा 
+[2:167] और वो लोग जो दुनिया में उनकी जोड़ी बनाते थे, कहेंगे के काश हमको फिर एक मौका दिया जाता है तो जिस तरह आज ये हमसे बेज़ारी जाहिर कर रहे हैं हम इनसे बेज़ार होकर दिखा देते हैं, यूं अल्लाह इन लोगों के वो अमाल जो ये दुनिया में कर रहे हैं इनके सामने इस तरह लाएगा के ये हसरतन और पशेमानियों के साथ हाथ बदलते रहेंगे, मगर आग से निकलना कि कोई राह न पायेगा 
+[2:168] लोगन! ज़मीन में जो हलाल और पाक चीज़े हैं उन्हें खाओ और शैतान के बताए हुए रस्तों पर ना चलो, वो तुम्हारा खुला दुश्मन है 
+[2:169] तुम्हें बुराई और फ़हाश (अभद्रता) का हुकुम देता है और ये सिखाता है कि तुम अल्लाह के नाम पर वो बातें कहो जिनको मुतालिक तुम्हें इल्म नहीं है के वो अल्लाह ने फरमायी है 
+[2:170] इनसे जब कहा जाता है के अल्लाह ने जो एहकाम नाज़िल किये हैं उनकी जोड़ी करो तो जवाब देते हैं के हम तो उसी तारीख की जोड़ी करेंगे जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है, अच्छा अगर इनके बाप दादा ने अक्ल से कुछ भी काम न लिया हो और राह ए रास्ते न पाई हो तो क्या फिर भी ये उनहिन की जोड़ी चले जायेंगे
+[2:171] ये लोग जिन्हों ने खुदा के बताए हुए तारीख पर चलने से इंकार कर दिया है इनकी हालत बिल्कुल ऐसी है जैसे चारवाहा जानवरों को पुकारता है और वो हांक पुकार की सदा के सिवा कुछ नहीं सुनते। ये बाहर हैं, गुंगे हैं अंधे हैं, क्योंकि कोई बात इनकी समझ में नहीं आती 
+[2:172] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम हकीकत में अल्लाह ही की बंदगी करने वाले हो तो जो पाक चीजें हमने तुम्हें बख्शी हैं उन्हें बे-तकल्लुफ खाओ और अल्लाह का शुकर अदा करो 
+[2:173] अल्लाह की तरफ से अगर कोई बंदी तुम्पर है तो वो ये है के मुर्दार ना खाओ, खून से और सूअर (सूअर) के गोश्त से परहेज करो और कोई ऐसी चीज ना खाओ जिस्पर अल्लाह के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो, हां जो शक्स मजबूरी की हालात में हो और वो इनमें से कोई चीज खा ले बिना इसके के वो कानून शिकानी का इरादा रखता हो या जरूरत की हद से तजावुज़ करे, तो उसपर कुछ गुनाह नहीं। अल्लाह बख्शने वाला और रहम करने वाला है 
+[2:174] हक़ ये है के जो लोग उन एहकाम को छुपाते हैं जो अल्लाह ने अपनी किताब में नाज़िल किए हैं और थोड़े से दुनिया फ़ायदों पर उन्हें भेंट चढ़ते हैं वो दरसल अपने पैत आग से भर रहे हैं, कयामत के रोज़ अल्लाह हरगिज उनसे बात ना करेगा, ना उन्हें पाकीजा ठहरेगा, और उनके लिए दर्दनाक सजा है 
+[2:175] ये वो लोग हैं जिन्हों ने हिदायत के बदले ज़लालत खरीदी और मगफिरत के बदले अज़ाब मोल ले लिया, कैसा अजीब है इनका हौसला के जहन्नुम का अज़ाब बर्दाश्त करने के लिए तैयार हैं 
+[2:176] ये सब कुछ इस वजह से हुआ के अल्लाह ने तो ठीक ठीक हक़ के मुताबिक़ किताब नाज़िल की थी मगर जिन लोगों ने किताब में इख़्तिलाफ़ात निकला वो अपने झगड़े में हक़ से बहुत दूर निकल गए 
+[2:177] नेकी ये नहीं है के तुमने अपने चेहरे मशरिक (पूर्व) की तरफ करलिये या मगरिब (पश्चिम) की तरफ, बलके नेकी ये है कि आदमी अल्लाह को और यौम ए आखिर और मलिका को और अल्लाह की नाज़िल की हुई किताब और उसके पैगम्बरों को दिल से माने और अल्लाह की मुहब्बत में अपना दिल पसंद माल रिश्तेदारों और यतीमों पर, मिस्किनो और मुसाफ़िरों पर, मदद के लिए हाथ फैलाने वालों पर और ग़ुलामों की रिहाई पर ख़र्च करे, नमाज़ क़याम करे और ज़कात दे और नेक वो लोग हैं के जब अहद करें तो उसे वफ़ा करें, और तांगी ओ मुसीबत के वक़्त में और हक़ ओ बातिल की जंग में सब्र करें, ये हैं रस्त बाज़ लोग और यही लोग मुत्तक़ी (पवित्र) हैं
+[2:178] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारे लिए क़तल के मुक़द्दमो में क़िस्स (प्रतिशोध) का हुकुम लिख दिया गया है। आज़ाद आदमी ने क़त्ल किया हो तो हमें आज़ाद हाय से बदला लिया जाए, ग़ुलाम क़ातिल हो तो वो ग़ुलाम हाय क़ातिल किया जाए, और औरत इस जुर्म की मुर्तकीब हो तो हमें औरत हाय से क़िस्स लिया जाए, हाँ अगर किसी कातिल के साथ इसका भाई कुछ नरमी करने के लिए तैयार हो तो मारूफ तारीख के मुताबिक खून बहा (खून से पैसा) का तसफिया होना चाहिए और कातिल को लाज़िम है के रास्ते के साथ खून बहा अदा करे, ये तुम्हारे रब की तरफ से तकफीफ और रहमत है, इसपर भी जो ज्यादा करे उसके लिए दर्दनाक सजा है 
+[2:179] (अक़ल ओ खिरद रखने वालों)! तुम्हारे लिए क़िसास में ज़िन्दगी है, उम्मीद है कि तुम इस क़ानून की ख़िलाफ़त वारज़ी से परहेज़ करोगे 
+[2:180] तुम पर फ़र्ज़ किया गया है कि जब तुम में से किसी की मौत का वक़्त आए और वो अपने पीछे माल छोड़ रहा हो, तो वालिदाएं और रिश्तेदारों के लिए मारूफ़ तारीख़े से वसीयत करे, ये हक़ है मुत्तक़ी लोगों पर 
+[2:181] फिर जिन्हों ने वसीयत सुनी और बाद में उसे बदल डाला तो इसका गुनाह उन बदलने वालों पर होगा, अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है 
+[2:182] अलबत्ता जिसको ये अंदेशा हो के वसीयत करने वाले ने नदानिश्ता या क़स्दन हक़ तलाफ़ी की है और फिर मामले से तालुक़ रखने वालों के दरमियान वो इस्लाह करे, तो उसपर कुछ गुनाह नहीं है, अल्लाह बख्शने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[2:183] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम रोज़ फ़र्ज़ करदिये गए जिस तरह तुमसे पहले अंबिया के जोड़े पर फ़र्ज़ किए गए थे, इस्से तवाक्कु है के तुम में तक़वा की सिफ़त पैदा होगी 
+[2:184] चंद मुक़र्रर दीनो के रोज़ हैं, अगर तुम में से कोई बीमार हो, या सफ़र पर हो तो दूसरे दिनों में उतनी ही तड़प पूरी करले और जो लोग रोज़ा रखने की क़ुदरत रखते हों (फी ना रखें) तो वो फ़िद्या दीन, एक रोज़ का फ़िदिया एक मिसकीन को खाना खिलाना है और जो अपनी ख़ुशी से कुछ ज़्यादा भलाई करे तो ये उसके लिए बेहतर है, लेकिन अगर तुम समझो तो तुम्हारे हक़ में अच्छा यहीं है के रोज़ा रक्खो 
+[2:185] रमज़ान वो महीना है जिसमें कुरान नाज़िल किया गया जो इंसानों के लिए सरसर हिदायत है और ऐसी वाज़े तालीमात पर मुश्तमिल है जो राह ए रस्त दिखने वाली और हक़ ओ बातिल का फर्क खोल कर रख देने वाली है, लिहाज़ा अब से जो शक्स इस माहीने को पाए उसको लाज़िम है के इस पूरे माहीने के रोज़ रखे और जो कोई मरीज़ हो या सफ़र पर हो तो वो दूसरे दिनो में रोज़ की तदाद पूरी करे। अल्लाह तुम्हारे साथ नरमी करना चाहता है, शक्ति करना नहीं चाहता, इसलिए ये तारीख तुम्हें बता रहा है ता-के तुम रोज़ों की तदाद पूरी कर सको और जिस हिदायत से अल्लाह ने तुम्हें सरफराज किया है उसपर अल्लाह की किताब का इज़हार ओ एतराफ करो और शुकरगुज़र बानो
+[2:186] (और ऐ नबी)! मेरे बंदे अगर तुमसे मेरे मुतालिक पूछें, तो उन्हें बता दो के मैं उनसे करीब ही हूं, पुकारने वाला जब मुझे पुकारता है, मैं उसकी पुकार सुनता और जवाब देता हूं, लिहाजा उन्हें चाहिए के मेरी दावत पर लब्बैक कहें और मुझपर ईमान लायें, ये बात तुम उन्हें सुना दो, शायद के वो राह ए रास्ते पा लें 
+[2:187] तुम्हारे लिए रोज़ों के ज़माने में रातों को अपनी बीवीयों के पास जाना हलाल कर दिया गया है, वो तुम्हारे लिए लिबास हैं और तुम उनके लिए। अल्लाह को मालूम हो गया के तुमलोग चुपके-चुपके अपने आप से ख़यानत कर रहे थे, मगर उसने तुम्हारा कसूर माफ कर दिया और तुमसे दरगुज़र फरमाया, अब तुम अपनी बीवीयों के साथ शब-बाशी (संभोग) करो और जो लुत्फ़ अल्लाह ने तुम्हारे लिए जायज़ करदिया है, उसे हासिल किया करो, नई रातों को खाओ पियो यहां तक ​​के तुमको स्याही ए शब की धारी से सपेधा सुभ की धारी नुमाया नजर आ जाए तब ये सब काम छोड़ कर रात तक अपना रोजा पूरा करो और जब तुम मस्जिद में मौताकिफ (इत्तेकाफ में) होन तो बिवियों से मुबारकत ना करो, ये अल्लाह की बंदिश हुई हदें हैं, इनके करीब बा फटकना, इस तरह अल्लाह अपने एहकाम लोगों के लिए बा-सरहत (स्पष्ट रूप से) बयान करता है, तवक्कू है के वो गलत राविये से बचेंगे 
+[2:188] और तुम लोग ना तो आपस में एक दूसरे के माल नरवा तारीख से खाओ और ना हकीमो के आगे इनको इस गरज के लिए पेश करो के तुम्हें दूसरों के माल का कोई हिसा क़स्दन ज़ालिमाना तरीक़े से खाने का मौका मिल जाए 
+[2:189] लोग तुमसे चाँद की घटती बढ़ती सूरतों के मुतालिक पूछते हैं, कहो : ये लोगों के लिए तारेकॉन की तायिन की और हज की अलमतें हैं। नेज़ अनसे कहो: ये कोई नेकी का काम नहीं है के अपने घरों में पीछे की तरफ दाख़िल होते हो, नेकी तो असल में ये है के आदमी अल्लाह की नाराज़गी से बचे, लिहाज़ा तुम अपने घरों में दरवाज़े ही से आया करो, अलबत्ता अल्लाह से डरते रहो शायद के तुम्हें फलाह नसीब हो जाए 
+[2:190] और तुम अल्लाह की राह में उन लोगों से लड़ो, जो तुमसे लड़ते हैं, मगर ज्यादा न करो का अल्लाह ज्यादा करने वालों को पसंद नहीं करता 
+[2:191] उनसे लड़ो जहां भी तुम्हारा उनसे मुकाबला पेश आए और उन्हें निकालो जहां से उनहों ने तुमको निकला है, इस्ली के क़त्ल अगरचे बुरा है, मगर फ़ितना इसे भी ज़्यादा बुरा है और मस्जिद ए हराम के करीब जब तक वो तुमसे ना लड़ें तुम भी ना लड़ो, मगर जब वो वहां लड़ने से ना चूकें, तो तुम भी बे-तकल्लुफ़ उन्हें मारो के ऐसे काफ़्रियों की यही सज़ा है 
+[2:192] फिर अगर वो बाज़ आ जाएँ, तो जान लो के अल्लाह माफ़ करने वाला और रहम फ़रमान वाला है 
+[2:193] तुम उनसे लड़ते रहो यहाँ तक के फ़ितना बाकी ना रहे और दीन अल्लाह के लिए होजाए, फिर अगर वो बाज़ आ जाएँ, तो समझ लो के जालिमों के सिवा और किसी पर दस्त-दराज रवा नहीं
+[2:194] माह ए हराम का बदला हराम ही है और तमाम हुर्मतों का लिहाज़ बाराबरी के साथ होगा, लिहाज़ा जो तुमपर दस्त दराज़ी करे, तुम भी उसी तरह उसपर दस्त दराज़ी करो, अलबत्ता अल्लाह से डरते रहो और ये जान रक्खो के अल्लाह उन्ही लोगों के साथ है जो उसकी हुदूद todne se paheiz karte hain 
+[2:195] अल्लाह की राह में ख़र्च करो और अपने हाथों अपने आप को हलकत में ना डालो, एहसान का तरीक़ा इख्तियार करो के अल्लाह मोहसिनों को पसंद करता है 
+[2:196] अल्लाह की ख़ुशनुदी के लिए जब हज और उमरा की नियत करो तो उसे पूरा करो और अगर कहीं घिर जाओ (हिरासत में/रोका गया) तो जो कुर्बानी मुयस्सर आए अल्लाह की जनाब में पेश करो और अपने सर न मुंडो (मुंडो) जबतक के कुर्बानी अपनी जगह न पाहुंच जाए, मगर जो शक्स मेराज हो या जिसका सर में कोई तकलीफ हो और इस बिना पर अपना सर मुंडवा ले तो उसे चाहिए के फिदिये के तौर पर रोजे रखें या सदका दे या कुर्बानी करे, फिर अगर तुम्हें अमन नसीब हो जाए (और तुम हज से पहले मक्का पहुंच जाओ), तो जो शक्स तुम में से हज का जमाना आने तक उमर का फैसला उठाये वो हस्ब-ए-मकदूर (अफोर्ड कर सकते हैं) कुर्बानी दे, और अगर कुर्बानी मुयस्सर ना हो तो तीन रोजे हज के जमाने में और सात घर पहुंच कर, इस तरह पूरे दस रोजे रखले, ये रियात उन लोगों के लिए है जिनके घर बार मस्जिद ए हराम के करीब ना हो। अल्लाह के इन एहकाम की खिलाफ़-वारज़ी से बचो और ख़ूब जान लो के अल्लाह सख़्त सज़ा देने वाला है 
+[2:197] हज के महीने में सबको मालूम है, जो शक्स इन मुक्क्कर महिनो में हज की नियत करे, उसे खबरदार रहना चाहिए के हज के दौरन में उसे कोई शेहवानी फेल (यौन) भोग) , कोई बढ़ा अमली, कोई लड़े झगड़े की बात सरज़ाद ना हो और जो नया काम तुम करोगे वो अल्लाह के इल्म में होगा। सफ़र ए हज के लिए ज़ाद ए राह (प्रावधान) साथ ले जाओ, और सबसे बेहतर ज़ाद ए राह (प्रावधान) परहेज़गारी है, पास ऐ होश-मंदों! मेरी नफ़रमानी से परहेज़ करो 
+[2:198] और अगर हज के साथ-साथ तुम अपने रुब का फ़ज़ल (इनाम) भी तलाश करते जाओ तो इस्मे कोई मुज़हिक़ा नहीं, फिर जब अराफ़ात से चलो तो मशहरे हराम (मुज़दलिफ़ा) के पास ठहर कर अल्लाह को याद करो और हमें तरह याद करो करो, जिसकी हिदायत उसने तुम्हें दी है, वरना इसे पहले तुमलोग भटके हुए थे 
+[2:199] फिर जहां से और सब लोग पलट-ते हैं वहीं से तुम भी पलटो और अल्लाह से माफ़ी चाहो, यकीनन वो माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[2:200] फिर जब अपने हज के अरकान अदा कर चुको, तो जिस तरह पहले अपने आबा ओ अजदाद का जिक्र करते थे, उसी तरह अब अल्लाह का जिक्र करो, बलके उसे भी बुरा (मगर अल्लाह को याद करने वाले लोगों में भी बहुत फर्क है) उन में से कोई तो ऐसा है, जो कहता है के ऐ हमारे रब हमें दुनिया ही में सब कुछ दे दे, ऐसे शक्स के लिए आख़िरत में कोई हिसा नहीं 
+[2:201] और कोई कहता है के ऐ हमारे रब! हमने दुनिया में भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई, और आग के अज़ाब से हमें बचाया
+[2:202] ऐसे लोग अपनी कमाई के मुताबिक (दोनो जगह) हिसा पाएंगे और अल्लाह को हिसाब चुकाते कुछ देर नहीं लगती 
+[2:203] ये गिनती के चांद रोज हैं, जो तुम्हें अल्लाह की याद में बसर करना चाहिए, फिर जो कोई जल्दी करके दो उसी दिन में वापस होगा तो कोई हर्ज नहीं, और जो कुछ देर ज्यादा ठहर कर पलटा तो भी कोई हर्ज नहीं बशारत ये दिन उसने तकवा के साथ बसर किये हो। अल्लाह की नफ़रमानी से बचो और ख़ूब जान रक्खो के एक रोज़ उसके हुज़ूर में तुम्हारी पेशी होने वाली है 
+[2:204] इंसानों में कोई तो ऐसा है जिसकी बातें दुनिया की ज़िंदगी में तुम्हें बहुत अच्छी मालूम होती है, और अपनी नीक नियति पर वो बार-बार खुदा को गवाह ठहरता है, मगर हकीकत में वो बद्तरीन दुश्मन ए हक़ होता है 
+[2:205] जब उसे इक्तेदार हासिल हो जाता है, तो ज़मीन में उसकी सारी दौड़ धूप होती है के फ़साद फैलाये, खेतों को गैरत करे और नाक ए इंसान को तबाह करे, हलाँके अल्लाह (जिसे वो गवाह बना रहा था) फसाद को हरगिज पसंद नहीं करता 
+[2:206] और जब उसे कहा जाता है के अल्लाह से डर, तो अपने वकार का ख्याल उसको गुनाह पर जमा देता है, ऐसे शक्स के लिए तो बस जहन्नुम ही काफी है और वो बहुत बुरा ठिकाना है 
+[2:207] दूसरी तरफ़ इंसानों ही में कोई ऐसा भी है जो रज़ा ए इलाही की तालाब में अपनी जान ख़पा देता है और ऐसे बंदों पर अल्लाह बहुत मेहरबान है 
+[2:208] ऐ ईमान लाने वालों! तुम पूरे के पूरे इस्लाम में आ जाओ और शैतान की जोड़ी ना करो के वो तुम्हारा खुला दुश्मन है 
+[2:209] जो साफ साफ हिदायत तुम्हारे पास आ चुकी है अगर उनको पा लेने के बाद फिर तुमने लग्ज़िश खायी, तो खूब जान रक्खो के अल्लाह सब पर गालिब और हकीम ओ दाना है 
+[2:210] (सारी हिदायतों और हिदायतों के बाद भी लोग सीधे न हों तो) क्या अब वो इसके मुंतज़िर हैं के अल्लाह बादलों का चतर लगे फरिश्तों के परे साथ (स्वर्गदूतों की टोली के साथ बादलों की छतरियाँ) के लिए खुद सामने आ मौजूद हो और फैसला ही कर डाला जाए? आख़िर ए कार सारी मामलात पेश करने वाले अल्लाह ही के हुज़ूर होने वाले हैं 
+[2:211] बानी इसराइल से पूछो: कैसी खुली खुली निशानियां हमने उन्हें दिखाई हैं (और फिर ये भी उनहिन से पूछ लो के) अल्लाह की नियामत पाने के बाद जो क़ौम इसको शिकावत (मनहूसियत) से बदलती है उसे अल्लाह कैसी सज़ा देता है 
+[2:212] जिन लोगों ने कुफ्र की राह इख्तियार की है उनके लिए दुनिया की जिंदगी बड़ी मेहबूब ओ दिल पसंद बना दी गई है, ऐसे लोग ईमान की राह इख्तियार करने वालों का मजाक उड़ाते हैं, मगर कयामत के रोज़ परहेज़गार लोग ही उनके मुक़ाबले में आली मुक़ाम होंगे, राह दुनिया का रिज़क, तो अल्लाह को इख्तियार है जिसे चाहे बे-हिसाब दे
+[2:213] इब्तिदा में सब लोग एक ही तारीख पर थे (फिर ये हालात बाकी न रही और इख्तिलाफात रुनुमा हुए) तब अल्लाह ने नबी भेजे जो रस्त रावी पर बशारत देने वाले और कजरावी के नटाईज से डराने वाले थे, और उनके साथ किताब ए बार हक नाज़िल की ता-के हक़ के बारे में लोगों के दरमियान जो इख़्तिलाफ़ात रूनुमा हो गए थे उनका फ़ैसला करे। (और इख्तिलाफात के रूनुमा होने की वजह ये ना थी के इब्तिदा में लोगों को हक बताया नहीं गया था, नहीं) इख्तिलाफ उन लोगों ने किया जिन्होंने हक का इल्म दिया (जा) चूका था, उन्होन ने रोशन हिदायत पा लेने के बाद महज़ को हक़ को छोड़ दिया मुखतलिफ़ तारिके निकले के वो आपस में ज़्यादा करना चाहते थे, पास जो लोग अंबिया पर ईमान ले आए उनको अल्लाह ने अपने इज़ान से हमें हक़ का रास्ता दिखाया दिया जिसमें लोगों ने इख्तिलाफ़ किया था, अल्लाह जिसे चाहता है राह ए रास्ता दिखा देता है 
+[2:214] फिर क्या तुम लोगन ने ये समझ रखा है कि यूंही जन्नत का आखिरी तुम्हें मिल जाएगा, हालांके अभी तुमपर वो सब कुछ नहीं गुजरा है जो तुमसे पहले ईमान लाने वालों पर गुजर चूका है? उन्पर साख्तियां गुजरी, मुसिबतें आई, हिला मारे गए, हत्ता के वक्त का रसूल और उसके साथी एहले ईमान चीख उठे के अल्लाह की मदद कब आएगी, हमें वक्त उन्हें तसल्ली दी गई के हां अल्लाह की मदद करीब है 
+[2:215] लोग पूछते हैं कि हम क्या खर्च करते हैं? जवाब दो के जो माल भी तुम खर्च करो अपने वलियों पर, रिश्तों पर, यतीमो और मिस्कीनो और मुसाफिरों पर खर्च करो और जो भलाई भी तुम करोगे, अल्लाह उससे ब-खबर होगा 
+[2:216] तुम्हें जंग का हुक्म दिया गया है और वो तुम ना-गवार हो, हो हो सकता है कि एक चीज तुम्हें पसंद हो और वही तुम्हारे लिए बुरी हो। अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते 
+[2:217] लोग पूछते हैं माह ए हराम में लाना कैसा है? कहो: इसमें लड़ना बहुत बुरा है, मगर राह ए खुदा से लोगों को रोकना और अल्लाह से कुफ्र करना और मस्जिद ए हरम का रास्ता खुदा परस्तों पर बंद करना और हरम के रहने वालों को वहां से निकलना अल्लाह के नाजदीक इससे भी ज्यादा बुरा है और फितना खून-रेजी से छायादार-तार है. वो तो तुमसे लड़े ही जाएंगे हटा के अगर उनका बस चले तो तुम्हें इस दीन से फेर ले जाएं (और ये खूब समझलो के) तुम में से जो कोई इस दीन से फिरेगा और कुफ्र की हालत में जान देगा, उसके अमाल दुनिया और आखिरी दोनों में जया हो जाएगी, ऐसे सब लोग जहन्नुमी हैं और हमेशा जहन्नुम ही में रहेंगे 
+[2:218] बा-खिलाफ इसके जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्होन ने खुदा की राह में अपना घर बार छोड़ा और जिहाद किया है, वो रहमत ए इलाही के जायज़ उम्मेदवार हैं और अल्लाह उनकी लग्ज़िशों को माफ़ करने वाला और अपना रहमत से उन्हें नवाज़ने वाला है
+[2:219] पूछते हैं: शराब और जुवे (जुआ) का क्या हुकुम है? कहो: दोनों चीज़ों में बड़ी ख़राबी है अगर इनमें लोगों के लिए कुछ मुनाफ़े भी है, मगर उनका गुनाह उनके फ़ायदे से बहुत ज़्यादा है। पूछते हैं: हम राह ए खुदा में क्या खर्च करें? कहो: जो कुछ तुम्हारी ज़रूरत से ज्यादा हो, क्या वह अल्लाह तुम्हारे लिए साफ-साफ एहकाम बयान करता है, शायद के तुम दुनिया और आख़िरत दोनों की फ़िक्र करो 
+[2:220] पूछते हैं: यतीमों के साथ क्या मामला किया जाए? कहो: जिस तर्ज़ ए अमल में उनके लिए भलाई हो वही इख्तियार करना बेहतर है। अगर तुम अपना और उनका खर्च और रहना सहना मुश्तारिक (मिक्स) रख्खो तो इसमें कोई मुजाहिका नहीं, आखिर वो तुम्हारे भाई बंद ही तो हैं। बुराई करने वाले और भलाई करने वाले दोनों का हाल अल्लाह पर रोशन है, अल्लाह चाहता है तो इस मामले में तुमपर शक्ती करता, मगर वो साहब ए इख्तियार होने के साथ साहिब ए हिकमत भी है 
+[2:221] तुम मुशरिक औरतों से हरगिज़ निकाह ना करना जब तक के वो ईमान ना ले आइए, एक मोमिन लौंडी (गुलाम) मुशरिक शरीफ-जादी से बेहतर है अगरचे वो तुम्हें बहुत पसंद हो, और अपनी औरतों के निकाह मुशरिक मर्दों से कभी न करना जब तक के वो ईमान न ले आएं। एक मोमिन गुलाम मुशरिक शरीफ से बेहतर है अगर वो तुम्हें बहुत पसंद हो। ये लोग तुम्हें आग की तरफ बुलाते हैं और अल्लाह अपने इज़ान से तुमको जन्नत और मगफिरत की तरफ बुलाता है, और वो अपना एहकाम वाजे तौर पर लोगों के सामने बयान करता है, तवक्कू है के वो सबक लेंगे और हिदायत कबूल करेंगे 
+[2:222] पूछते हैं: हैज़ का क्या हुक्म है? कहो: वो एक गंदगी की हालत है, इसमें औरतों से अलग रहो और उनके करीब ना जाओ, जब तक के वो पाक साफ ना हो जाए, फिर जब वो पाक हो जाए तो उनके पास जाओ उस तरह जैसा के अल्लाह ने तुमको हुकुम दिया है, अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो गुनाहों से बाज आता है। राहें और पाकीज़गी इख्तियार करें 
+[2:223] तुम्हारी औरतें तुम्हारी खेतियाँ हैं, तुम्हें इख्तियार है जिस तरह चाहो अपनी खेती में जाओ, मगर अपने मुस्तकबिल की फ़िक्र करो और अल्लाह की नाराज़गी से बचो। ख़ूब जान लो के तुम्हें एक दिन उससे मिलना है। और (ऐ नबी)! जो तुम्हारी हिदायत को मान लें उन्हें फलाह ओ सआदत का मुस्दा (खुशखबरी) सुना दो 
+[2:224] अल्लाह के नाम को ऐसी कसमें खाने के लिए इस्तमाल न करो जिनसे मकसूद नेकी और तकवा और बंदगान ए खुदा की भलाई के कामोनों से बाज़ रहना हो। अल्लाह तुम्हारी सारी बातें सुन रहा है और सब कुछ जानता है 
+[2:225] जो बे-मानी कसमें तुम बिला इरादा खा लिया करते हो, लेकिन अल्लाह गिरफ़्तार नहीं करता, मगर जो कसमें तुम सच्चे दिल से खाते हो उनकी बाज़पुर्स वो ज़रूर करेगा। अल्लाह बहुत दरगुज़ार करने वाला और बर्दबार (सहिष्णु) है 
+[2:226] जो लोग अपनी औरतों से ताल्लुक न रखें की कसम खा बैठे हैं उनके लिए चार महीने की मोहलत है, अगर उन्होन ने रूजू करलिया तो अल्लाह माफ करने वाला और रहीम है
+[2:227] और अगर उन्हें तलाक ही दिया जाए तो जाने रहें के अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है 
+[2:228] जिन औरतों को तलाक दे गई हो वो तीन मरतबा अयाम ए माहवारी आने तक अपने आप को रोके रखें और उनके लिए ये जायज नहीं है के अल्लाह ने उनके रहम (गर्भ) में जो कुछ ख़ल्क (पैदा) फरमाया हो उसे छुपाएं। उन्हें हरगिज़ ऐसा ना करना चाहिए अगर वो अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखता है। उनके शोहर तालुकात दुरुस्त कार्लें पर अमादा हों तो वो इस इद्दत के दौरन में उन्हें फिर अपनी ज़वजियात में वापस ले लेने के हक़दार हैं। औरतों के लिए भी मारूफ़ तारीख़ पर वैसे ही हुकूक़ हैं जैसे मर्दों के हुकूक़ अपर हैं। अलबत्ता मर्दों को उनपार एक दरजा हासिल है और सब पर अल्लाह गालिब इक्तेदार रखने वाला और हकीम ओ दाना मौजूद है 
+[2:229] तलाक दो बार है, फिर या तो सीधी तरह औरत को रोक लिया जाए या भले तारिके से उसको रुखसत कर दिया जाए, और रुखसत करते हुए ऐसा करना तुम्हारे लिए जायज़ नहीं है के जो कुछ तुम उन्हें दे चुके हो, उसमें से कुछ वापस लेलो, अलबत्ता ये सूरत मुस्तसना है के ज़वजैन को अल्लाह के हुदूद पर क़याम न रह सके का अंदेशा हो, ऐसी सूरत में अगर तुम ये खौफ हो के वो डोनो हुदूद ए इलाही पर क़याम न रहेंगे, तो उन दोनों के दरमियान ये मामला हो जाने में मुज़हिक़ा नहीं के औरत अपने शहर को कुछ मुआवाज़ा देकर अलैदागी (अलगाव) हासिल करले, ये अल्लाह के मुकर्रर करदा हुद्दोद हैं, इनसे तजावुज़ ना करो, और जो लोग हुदूद ए इलाही से तजावुज करें वही जालिम हैं 
+[2:230] फिर अगर (दो बार तलाक देने के बाद शहर ने औरत को तीसरी बार) तलाक दे दी तो वो औरत फिर उसके लिए हलाल ना होगी, इल्ला ये के उसका निकाह किसी दूसरे शक्स से हो और वो उसे तलाक देदे, तब अगर पहला शोहर और ये औरत दोनों ये ख़याल करें के हुदूद ए इलाही पर क़याम रहेंगे, तो उनके लिए एक दूसरे की तरफ़ रूज़ू कार्लें में कोई मुज़हिक़ा नहीं। ये अल्लाह की मुकर्रर करदा हदें हैं जिन्होनें वो उन लोगों की हिदायत के लिए वाजे कर रहा है जो (उसकी हुदूद को तोड़ने का अंजाम) जानते हैं 
+[2:231] और जब तुम औरतों को तलाक दे दो और उनकी इद्दत पूरी होने को आ जाए, तो हां भले तरीक़े से उन्हें रोक लो या भले तरीक़े से रुखसत करदो, मेहज़ सताने की खातिर उन्हें ना रोके रखना, ये ज़्यादा होगी, और जो ऐसा करेगा वो डर हकीकत आप अपना ही ऊपर ज़ुल्म करेंगे। अल्लाह की आयत का खेल न बनाओ, भूल न जाओ के अल्लाह ने किस नियामत ए उज्मा से तुम्हें सरफराज किया है, वो तुम्हें हिदायत करता है के जो किताब और हिकमत उसने तुमपर नाज़िल की है, उसका एहतराम मल्हूज़ रख्खो। अल्लाह से डरो और खूब जान लो के अल्लाह को हर बात की खबर है
+[2:232] जब तुम अपनी औरतों को तलाक दे चुको और वो अपनी इद्दत पूरी कर लें, तो फिर इसमें माने ना हो के वो अपने दूसरे ताजवीज शोहरों से निकाह कर लें, जब के वो मारूफ तारीख से बहम मुनकीहत (शादी) पर राजी हों। तुम्हें हिदायत की जाती है कि ऐसी हरकत हरगिज़ न करना अगर तुम अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान लाने वाले हो, तुम्हारे लिए शाइस्ता और पाकीज़ा तरीक़ा यहीं है के इसी बाज़ रहो। अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते 
+[2:233] जो बाप चाहता हो कि उनकी औलाद पूरी मुद्दत ए रजात तक दूध पिए, तो मांएं (माताओं) अपने बच्चों को कामिल दो साल दूध पिलाएं। क्या सूरत में बच्चे के बाप को मारूफ तारीख़ से उनको खाना, कपड़ा देना होगा। मगर किसी पर उसकी परेशानी से बुरा हक बार ना डालना चाहिए, ना तो मां को इस वजह से तकलीफ में डाला जाए के बच्चा उसका है, और ना बाप ही को इस वजह से तंग किया जाए के बच्चा उसका है। दूध पिलाने वाली का ये हक़ जैसा बच्चे के बाप पर है वैसा ही उसके वारिस पर भी है, लेकिन अगर फ़रीक़ैन बहामी रज़ामंडी और मैशवेयर से दूध छुड़ाना चाहिए तो ऐसा करने में कोई मुज़हिक़ा नहीं, और अगर तुम्हारा ख्याल अपनी औलाद को कोई गैर औरत से दूध पिलाने का हो, तो इसमें भी कोई हर्जा नहीं बशारत ये के इसका जो कुछ मुआवजा (मुआवजा) ताई करो, वो मारूफ तारीख पर अदा करदो। अल्लाह से डरो और जान रक्खो के जो कुछ तुम करते हो, सब अल्लाह की नजर में है 
+[2:234] तुम में से जो लोग मर जाएंगे, उनके पीछे अगर उनकी बीवीयां जिंदा होंगी, तो वो अपने आप को चार महीने दस दिन रोके रखेंगे, फिर जब उनकी इद्दत पूरी हो जाए, तो उन्हें इख्तियार है अपनी जात के मामले में मारूफ तारीख़ से जो चाहें करें तुमपर इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं। अल्लाह तुम सब के आमाल से बख़बर है 
+[2:235] ज़माना ए इद्दत में ख्वा तुम उन बेवा औरतों के साथ मंगनी की इरादा इशारे कनयी में जाहिर करदो, ख्वा दिल में छुपाये रक्खो, दोनों सूरतों में कोई मुज़हिक़ा नहीं। अल्लाह जानता है कि उनका ख्याल तो तुम्हारे दिल में आएगा ही मगर देखो! खुफिया (छिपा हुआ) अहद ओ पैमान न करना अगर कोई बात करनी है तो मारूफ तारीख से करो और अकद ए निकाह बांधने का फैसला हमें वक्त तक न करो जब तक के इद्दत पूरी न हो जाए, खूब समझ लो के अल्लाह तुम्हारे दिलों का हाल तक जानता है, लिहाजा उसे डरो और ये भी जान लो के अल्लाह बर्दबार है, छोटी छोटी बातों से दरगुजर फरमाता है 
+[2:236] तुमपर कुछ गुनाह नहीं, अगर तुम अपनी औरत को तलाक दे दो कबूल इसके के हाथ लगाने की नौबत आए या मेहर मुकर्रर हो, इस सूरत में उन्हें कुछ ना कुछ देना जरूर चाहिए. ख़ुश हाल आदमी अपनी मक़दरत के मुताबिक़ और ग़रीब अपनी मक़दरत के मुताबिक़ मारूफ़ तारीख़ से दे, ये हक़ है नए आदमियों पर
+[2:237] और अगर तुमने हाथ लगाने से पहले तलाक दी हो, लेकिन मेहर मुकर्रर किया जा चुका हो, तो हमें सूरत में निस्फ (आधा) मेहर देना होगा, ये और बात है के औरत नरमी बरते (और मेहर ना ले) या वो मर्द जिसका इख्तियार में अकद ए निकाह है, नरमी से काम ले (और पूरा मेहर दे दे), और तुम (यानी मर्द) नरमी से काम लो तो ये तकवा से ज्यादा मुनासिबत रखा है, आपस में मामलात में फैयाज़ी को ना भूलो, तुम्हारे अमल को अल्लाह देख रहा है 
+[2:238] अपनी नमाज़ों की निगेहदाश्त रक्खो, ख़ुसूसन ऐसी नमाज़ की जो मोहासन सलावत की जामे (मध्य प्रार्थना) हो। अल्लाह के आगे इस तरह खड़े हो जैसे फरमाबरदार गुलाम खड़े हो गए हैं 
+[2:239] बाढ़-अमानी की हालत हो, तो ख्वा पेदल हो, ख्वा सवार, जिस तरह मुमकिन हो नमाज पढ़ो और जब अमन मयस्सर आ जाए तो अल्लाह को उस तारीख से याद करो जो उसने तुम्हें सिखाया है, जिसने तुम पहले ना-वाक़िफ़ थे 
+[2:240] तुम में से जो लोग वफ़ात पाएं और पीछे बीवीयां छोड़ रहे हों, उनको चाहिए के अपनी बीवीयों के हक़ में ये वसीयत कर जाएं के एक साल तक उनको नान-ओ-नफ़ाका (रखरखाव) दिया जाए और वो घर से ना निकली जायें. फिर अगर वो खुद निकल जाए तो अपनी जात के मामले में मारूफ तारीख से वो जो कुछ भी करें उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। अल्लाह सब पर गालिब इक्तेदार रखने वाला और हकीम ओ दाना है 
+[2:241] इसी तरह जिन औरतों को तलाक दी गई हो, उन्हें भी मुनासिब तौर पर कुछ न कुछ दे कर रुखसत किया जाए, ये हक है मुत्तकी लोगों पर 
+[2:242] इस तरह अल्लाह अपने एहकाम तुम्हें साफ साफ़ बताता है, उम्मीद है के तुम समझ बूझ कर काम करो 
+[2:243] तुमने उन लोगों के हाल पर भी कुछ गौर किया, जो मौत के डर से अपने घर बार छोड़ कर निकले थे और हज़ारों की ताड़ाद में थे? अल्लाह ने उनसे फरमाया: मर जाओ, फिर हमने उनको दोबारा जिंदगी बख्शी, हकीकत ये है के अल्लाह इंसान पर बड़ा फजल फरमान वाला है मगर अक्सर लोग शुक्र अदा नहीं करते 
+[2:244] (मुसलमानो)! अल्लाह की राह में जंग करो, और ख़ूब जान रक्खो के अल्लाह सुनने वाला और जाने वाला है 
+[2:245] तुम में कौन है जो अल्लाह को क़र्ज़ ए हसन (अच्छा ऋण) दे ता-के अल्लाह उसे कोई गुनाह बढ़ा कर वापस करे? घाटना भी अल्लाह के इख्तियार में है और बदन भी, और उसकी तरफ तुम्हें पलट कर जाना है 
+[2:246] फिर तुमने उस मामले पर भी गौर किया, जो मूसा के बाद सरदारन ए बानी इजराइल को पेश आया था? उनहों ने अपने नबी से कहा: हमारे लिए एक बादशाह मुकर्रर करदो ता-के हम अल्लाह की राह में जंग करें, नबी ने पूछा: कहीं ऐसा तो न होगा के तुमको लड़ाई का हुकुम दिया जाए और फिर तुम न लड़ो? वो कहने लगे: भला ये कैसे हो सकता है कि हम राह ए खुदा में ना लड़ें, जबके हमने अपने घरों से निकल दिया है और हमारे बाल बच्चे हमसे जुदा कर दिए गए हैं? मगर जब उनको जंग का हुकुम दिया गया तो एक कलील तड़ाद के सिवा वो सब पीठ मोड़ गए, और अल्लाह उनमें से एक एक जालिम को जानता है
+[2:247] उनके नबी ने उन्हें कहा के अल्लाह ने तालुत को तुम्हारे लिए बादशाह मुकर्रर किया है, ये सुनकर वो बोले: "हमपर बादशाह बनने का वो कैसे हक़दार होगा? उसके मुकाबले में बादशाही के हम ज़्यादा मुस्तहक़ हैं, वो तो कोई बड़ा मालदार आदमी नहीं है"। नबी ने जवाब दिया: "अल्लाह ने तुम्हारे मुक़ाबले में उसे मुंतख़ब किया है और उसको दिमाग़ी ओ जिस्मानी दोनों किस्मत की एहलियातें फ़रावानी के साथ अता फरमाई हैं और अल्लाह को इख्तियार है के अपना मुल्क जिसे चाहे दे, अल्लाह बदी वुसत रखता है और सब कुछ उसके इल्म में है" 
+[2:248] इसके साथ उनके नबी ने उनको ये भी बताया के "खुदा की तरफ से उसके बादशाह मुकर्रर होने की अलामत ये है के उसके अहद में वो संदूक तुम्हें वापस मिल जाएगा, जिसमें तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे लिए सुकून ए क़ल्ब का सामान" है, जिसमें आले मूसा और आले हारून के छोड़े हुए तबर्रुकात हैं, और जिसको इस वक्त फरिश्ते संभाले हुए हैं अगर तुम मोमिन हो, तो ये तुम्हारे लिए बहुत बड़ी निशानी है 
+[2:249] फिर जब तलुत लस्कर लेकर चला, तो उसने कहा: "एक दरिया पर अल्लाह की तरफ से तुम्हारी आजमाइश होने वाली है, जो उसका पानी पिएगा, वो मेरा साथी नहीं। मेरा साथी सिर्फ वो है जो उसे प्यास न बुझाए, हां एक आधा चिल्लू कोई पेशाब ले तो पेशाब ले। जालूथ (गोलियाथ) और उसके लश्करों का मुकाबला करने की ताक़त नहीं है, लेकिन जो लोग ये समझते थे के उनको एक दिन अल्लाह से मिलना है, उनको ने कहा: “बारहा ऐसा हुआ है के एक कलील गिरो, अल्लाह के इज़ान से एक बड़े गिरोह पर गालिब आ गया है, अल्लाह सब्र करने वालों का साथी है।” 
+[2:250] और जब वो जलूथ और उसके लश्करों के मुक़ाबले पर निकले तो उन्होन ने दुआ की: "ऐ हमारे रब हमपर सब्र का फ़ैज़ान कर, हमारे क़दम जमा दे और इस काफ़िर गिरो ​​पर हमें फ़तह नसीब कर।" 
+[2:251] आख़िर ए कार अल्लाह के इज़ान से उन्होन ने काफ़िरों को मार डाला और दाऊद ने जालुथ को क़त्ल कर दिया और अल्लाह ने उसे सल्तनत और हिकमत से नवाजा और जिन चीज़ों का चाहा उसको इल्म दिया, अगर इस तरह अल्लाह इंसानों के एक गिरोह को दूसरे गिरोह के ज़रिये से हटाता ना रहता, तो ज़मीन का निज़ाम बिगाड़ जाता, लेकिन दुनिया के लोगों पर अल्लाह का बड़ा फ़ज़ल है (के वो इस तरह दफ़े फ़साद का इंतेज़ाम करता रहता है) 
+[2:252] ये अल्लाह की आयत हैं जो हम ठीक ठीक तुमको सुना रहे हैं और तुम यकीनन उन लोगों में से हो जो रसूल बना कर भेजे गए हैं
+[2:253] ये रसूल (जो हमारी तरफ से इंसानों की हिदायत पर मामूर हुए) हमने उनको एक दूसरे से बढ़ चढ़ कर मरताबे अता किया, उनमें कोई ऐसा था जिसका खुदा खुद हम-कलाम हुआ, किसी को उसने दूसरी जिंदगी से बुलंद दर्जे दिए, और आखिर में ईसा इब्न-मरियम को रोशन निशानियां अता की और रूह ए पाक से उसकी मदद की, अगर अल्लाह चाहता तो मुमकिन ना था के रसूलों के बाद में जो लोग रोशन निशानियां देख चुके थे वो आपस में लड़ते, मगर (अल्लाह की मशियत ये ना थी के वो लोगों को जबरान इख्तिलाफ से) रोके, इस वजह से) उन्होन ने बहम इख्तिलाफ किया, फिर कोई ईमान लाया और किसी ने कुफ्र की राह इख्तियार की, हां, अल्लाह चाहता तो वो हरगिज ना लड़ते, मगर अल्लाह जो चाहता है करता है 
+[2:254] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जो कुछ माल माता हमने तुमको बक्शा है, उसमें से ख़र्च करो, क़ब्ल इसके के वो दिन आए जिसमें न ख़त्म ओ फ़रोख़्त होगी, न दोस्ती काम आएगी और न सिफ़ारिश चलेगी और ज़ालिम असल में वही हैं जो कुफ़्र की रवीश इख्तियार करते हैं 
+[2:255] अल्लाह वो ज़िंदा ए जावेद (हमेशा रहने वाली) हस्ती है, जो तमाम कायनात को संभाले हुए है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, वो ना सोता है और ना उसे लंबी लगती है, जमीन और आसमान में जो कुछ है उसका है, कौन है जो उसके जनाब में उसकी इज्जत के बिना सिफ़ारिश कर सके? जो कुछ बंदों के सामने है उसे भी वो जानता है और जो कुछ उन्हें ओझल है उसे भी वो वाक़िफ़ है, और उसकी मालूमात में से कोई चीज़ उनकी गिरफ़्तार ए इद्राक में नहीं आ सकती इल्ला ये के किसी चीज़ का इल्म वो खुद ही उनको देना चाहिए, उसकी हुकुमत अस्मानो और ज़मीन पर चाय हुई है और उनकी निगाहबानी उसके लिए कोई थका देने वाला काम नहीं है, बस वही एक बुज़ुर्ग ओ बरतर जात है 
+[2:256] दीन के मामले में कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं है, सही बात गलत ख़यालत से अलग चांट कर रख दी गई है, अब जो कोई तागूत का इंकार करके अल्लाह पर ईमान ले आया, उसने एक ऐसा मजबूत सहारा थाम लिया जो कभी टूटने वाला नहीं, और अल्लाह (जिसका सहारा उसने लिया है) सब कुछ सुनने और जाने वाला है 
+[2:257] जो लोग ईमान लाते हैं, उनका हमी ओ मददगार अल्लाह है और वो उनको तरीकियों (और यहां) से रोशनी में निकल लाता है और जो लोग कुफ्र की राह इख्तियार करते हैं उनके हामी ओ मददगार तागुत हैं और वो उन्हें रोशनी से तारीखों की तफफ खींच ले जाते हैं, ये आग में जाने वाले लोग हैं जहां ये हमेशा रहेंगे 
+[2:258] क्या तुम हमें बताओ शक्स के हाल पर गौर नहीं किया जिसने इब्राहिम से झगड़ा किया था? झगड़ा इस बात पर है कि इब्राहिम का रुब कौन है, और इस बिना पर हमारे शक्स को अल्लाह ने हुकूमत दे रखी थी। जब इब्राहिम ने कहा के "मेरा रब वो है, जिसका इख्तियार में जिंदगी और मौत है, तो उसने जवाब दिया: "जिंदगी और मौत मेरे इख्तियार में है" इब्राहिम ने कहा: " अच्छा, अल्लाह सूरज को मशिर्क से निकलता है, तू जरा उसे मगरिब से निकाल ला"। ये सुनकर वो मुनकिर ए हक्क शश्तर (आश्चर्यचकित) रह गया, मगर अल्लाह ज़ालिमों को राह ए रस्त नहीं दिखाया करता
+[2:259] हां फिर मिसाल के तौर पर उस लड़के को देखो जिसका गुजर एक ऐसी बस्ती पर हुआ जो अपनी छतों पर औंधी गिरी पड़ी थी। उसने कहा: "ये आबादी, जो हलाक हो चुकी है, इसी अल्लाह किस तरह दोबारा जिंदगी बख्शेगा?" इस्पर अल्लाह ने उसकी रूह क़ब्ज़ करली और वो सौ (सौ) बरस तक मुर्दा पड़ा रहा, फिर अल्लाह ने उसे दोबारा जिंदगी बख्शी और उससे पूछा: "बताओ, कितनी मुद्दत पैदा रहे हो?" उसने कहा: "एक दिन या चाँद घंटे रहेगा"। फरमाया: “तुम्हारे सौ बरस इसी हालत में गुजर चुके हैं, अब जरा अपने खाने और पानी को देखो के इसमे जरा तगय्यूर (परिवर्तन) नहीं आया है, दूसरी तरफ जरा अपने गधे (गधे) को भी देखो [के इसका पंजर (कंकाल) तक बोसीदा (सड़) हो रहा है] और ये हमने इसलिए किया है कि हम तुम्हें लोगों के लिए एक निशानी बना देना चाहते हैं, फिर देखो के हड्डियों के इस पंजर (कंकाल) को हम किस तरह उठा कर गोश्त पोश्ट इसपर चढ़ाते हैं। इस तरह जब हकीकत उसके सामने बिल्कुल नुमायन हो गई, तो उसने कहा: "मैं जानता हूं के अल्लाह हर चीज पर क़ुदरत रखता है" 
+[2:260] और वो वाकिया भी पेश ए नज़र रहे, जब इब्राहिम ने कहा था के: "मेरे मालिक, मुझे दिखा दे तू मुर्दों को कैसे ज़िंदा करता है" फ़रमाया: “क्या तू ईमान नहीं रखता?” उसने अर्ज़ किया "ईमान तो रखता हूं, मगर दिल का इत्मीनान अंधेरा है", फरमाया: "अच्छा तो चार परिंदे ले और उनको अपने से मानो (झुकाव/तम) कार्ले फिर उनका एक जज (भाग) एक एक पहाड़ पर रखदे फिर उनको पुकार, वो तेरे पास दौड़े चले आएंगे, खूब जान ले के अल्लाह निहायत बा इक्तेदार और हकीम है” 
+[2:261] जो लोग अपने माल अल्लाह की राह में सिर्फ (खर्च) करते हैं, उनके खर्च की मिसाल ऐसी है, जैसे एक दाना बोया (सो) जाए और उसके सात (सात) बालें निकलें और हर बाल में सौ (सौ) दानी होन, इसी तरह अल्लाह जिसका अमल चाहता है अफज़ोनी (मैनिफोल्ड/ज्यादा) अता फरमाता है, वो फराग दस्त (सर्व-गले लगाने वाला) भी है और अलीम भी 
+[2:262] जो लोग अपने माल अल्लाह की राह में खर्च करते हैं और खर्च करके फिर एहसान नहीं जाते ना दुख देते हैं, उनका अजर उनके रुब के पास है और उनके लिए कोई रांझ और खौफ का मौका नहीं 
+[2:263] एक मीठा बोल और कोई नगावार बात पर जरा सी खाई पोशी (सहनशीलता) हमें खैरात से बेहतर है, जिसके पीछे दुख हो। अल्लाह बे-नियाज़ है और बर्दबारी (सहिष्णु) उसकी सिफ़त है 
+[2:264] ऐ ईमान लाने वालों! अपने सदाकत को एहसान जता कर और दुख देकर उस शक्स की तरह खाख में ना मिला दो, जो अपना माल महज़ लोगों के दिखाने को खर्च करता है और ना अल्लाह पर ईमान रखता है ना आख़िरत पर, उसके खर्च की मिसाल ऐसी है जैसी एक चट्टान (रॉक) थी, जिसपर मिट्टी की तह जमी हुई थी, इसपर जब जोर का मेह (बारिश) बरसा, तो सारी मिट्टी भी गई और साफ चट्टानों की चट्टानें रह गईं, ऐसे लोग अपने नाजदीक खैरात करके जो नेकी कमाते हैं, उसमें कुछ भी उनके हाथ नहीं आता, और काफिरों को सीधी राह दिखाना अल्लाह का दस्तूर नहीं है
+[2:265] बख़िलाफ़ इसके जो लोग अपने माल महज़ अल्लाह की रजा-जोई के लिए दिल के पूरे सबात ओ करार (एकल दिमाग वाले) के साथ खर्च करते हैं, उनके खर्च की मिसाल ऐसी है, जैसे कोई सताए मरतफा (पठार) पर एक बाग हो, अगर ज़ोर की बारिश हो जाए तो डुगुना (दो गुना) फल लाए, और अगर जोर की बारिश ना भी हो तो एक हल्की बारिश (हल्की बौछार) हाय उसके लिए काफी हो जाए, तुम जो कुछ करते हो, सब अल्लाह की नजर में है 
+[2:266] क्या तुम में से कोई ये पसंद करता है के उसके पास एक हरा भरा बाग हो, नेहरोन से सैराब, खजूरों और अंगूरों और हर क़िस्म के फूलों से लड़ा हुआ, और वो ऐन हमें वक़्त एक तेज़ बवंडर (उग्र बवंडर) की ज़र्द में आकर झूलस जाए, जबके वो खुद बूढ़ा हो और उसके कमसिन (छोटा) बच्चे अभी कोई लायक ना हो? इस तरह अल्लाह अपनी बातें तुम्हारे सामने बयान करता है, शायद तुम गौर ओ फिक्र करो 
+[2:267] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जो माल तुमने कमाए हैं और जो कुछ हमने जमीन से तुम्हारे लिए निकाला है, उसमें से बेहतर हिसा राह ए खुदा में खर्च करो, ऐसा ना हो के उसकी राह में देने के लिए बुरी से बुरी चीज चांटने (पिक आउट) की कोशिश करने लगो, हलांके वही चीज अगर कोई तुम्हें दे तो तुम उसे लेना गवारा ना करोगे इल्ला ये के इसको कबूल करने में तुम इग्माज़ (तिरस्कार) बरात जाओ, तुम्हें जान लेना चाहे के अल्लाह बे-नियाज़ है और बेहतरीन सिफ़ात से मुत्तसिफ़ है 
+[2:268] शैतान तुम्हें मुफ़लिसी (गरीबी) से डराता है और शर्मनाक तर्ज़-ए-अमल इख्तियार करने की तरजीब देता है, मगर अल्लाह तुम्हें अपनी बख्शीश और फ़ज़ल की उम्मीद दिलाती है, अल्लाह बदा फराग-दस्त और दाना है 
+[2:269] जिसको चाहता है हिकमत अता करता है, और जिसको हिकमत (बुद्धि) मिली उसे हकीकत में बड़ी दौलत मिल गई, बातों से सिर्फ वही लोग सबक लेते हैं जो दानिशमंद हैं 
+[2:270] तुमने जो कुछ भी खर्च किया हो और जो नजर भी मानी हो, अल्लाह को उसका इल्म है, और जालिमों का कोई मददगार नहीं 
+[2:271] अगर अपने सदकात ऐलान (खुले तौर पर) करो तो ये भी अच्छा है, लेकिन अगर छुपा कर हाजत-मंदों को दो तो ये तुम्हारे हक में ज्यादा बेहतर है, तुम्हारी बहुत सी बुराइयां तर्ज ए है अमल से मेह्व (प्रायश्चित) हो जाती है। और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह को बाहर हाल उसकी खबर है 
+[2:272] लोगों को हिदायत बख्श देने की जिम्मेदारी नहीं है, अल्लाह को हिदायत हाय जिसे चाहता है बख्शता है और खैरात में जो माल तुम खर्च करते हो वो तुम्हारे अपने लिए भला है, आखिर तुम इसी लिए तो खर्च करते हो के अल्लाह की रजा हासिल हो, तो जो कुछ माल तुम खैरात में खर्च करोगे उसका पूरा पूरा अजर तुम्हें दिया जाएगा और तुम्हारी हक तलफी हरगिज ना होगी
+[2:273] खास तौर पर मदद के मुस्तहिक से तंगदस्त लोग हैं जो अल्लाह के काम में ऐसे घिर गए हैं कि अपनी जाति कस्बे-ए-माश (आजीविका) के लिए जमीन में कोई दौड़-धूप नहीं कर सकता। उनकी खुद्दारी देख कर नवाज़ीफ आदमी गुमान करता है के ये ख़ुश-हाल हैं, तुम उनके चेहरों से उनकी अंदरुनी हालत पहचान सकते हो मगर वो ऐसे लोग नहीं हैं के लोगों के पीछे पढ़ कर कुछ माँगें। उनकी इयानत में जो कुछ माल तुम खर्च करोगे वो अल्लाह से पोशीदा ना रहेगा 
+[2:274] जो लोग अपने माल शब-ओ-रोज़ खुले और छुपे खर्च करते हैं उनका अजर उनके रब के पास है और उनके लिए कोई खौफ और रांझ का मुकाम नहीं 
+[2:275] मगर जो लोग सूद (सूदखोरी) खाते हैं, उनका हाल उस शक्स का सा होता है, जिसे शैतान ने छू कर बावला (दीवाना) कर दिया है और इस हालात में उनको मुब्तिला होने की वजह ये है कि वो कहते हैं: "तिजारत भी तो आखिर सूद ही जैसी चीज है", हालंके अल्लाह ने तिजारत को हलाल किया है और सूद को हराम। लिहाजा जिस शक्स को उसके रब की तरफ से ये हिदायत पाहुंचे और आंदा के लिए वो सूद-खोरी से बाज़ आ जाए, तो जो कुछ वो पहले खा चुका, सो खा चुका, उसका मामला अल्लाह के हवाले है और जो इस हुक्म के बाद फिर इसी हरकत का इरादा (दोहराना) करे, तो जहन्नामी है, जहां वो हमेशा रहेगा 
+[2:276] अल्लाह सूद का मत्था मार देता है (सभी आशीर्वादों के ब्याज से वंचित करता है) और सदकात को नाशो नुमा देता है, और अल्लाह किसी नाशुक्रे बध-अमल इंसान को पसंद नहीं करता 
+[2:277] हां, जो लोग ईमान ले आयें और नेक अमल करें और नमाज कयाम करें और जकात दें, उनका अजर बहस उनके रुब के पास है और उनके लिए कोई खौफ और रांझ का मौका नहीं 
+[2:278] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, खुदा से डरो और जो कुछ तुम्हारा सूद लोगों पर बाकी रह गया है उसे छोड़ दो, अगर हकीकत तुम ईमान लाए हो 
+[2:279] लेकिन अगर तुमने ऐसा ना किया, तो आगाह हो जाओ के अल्लाह और उसके रसूल की तरफ से तुम्हारे खिलाफ एलान-ए-जंग है। अब भी तौबा करलो (और सूद चोद दो) तो अपना असल सरमाया लेने के तुम हक़दार हो, ना तुम ज़ुल्म करो, ना तुमपर ज़ुल्म किया जाए 
+[2:280] तुम्हारा क़र्ज़दार तंगदस्त हो, तो हाथ खुलने तक उसे मोहलत दो, और जो सदका करदो तो ये तुम्हारे लिए ज़्यादा बेहतर है, अगर तुम समझो 
+[2:281] उस दिन की रुसवेई ओ मुसीबत से बचो, जबके तुम अल्लाह की तरफ वापस होंगे, वहां हर शक्स को उसकी कमाई हुई नेकी या बड़ी का पूरा बदला मिल जाएगा और किसी पर ज़ुल्म हरगिज़ ना होगा
+[2:282] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब किसी मुकर्रर मुद्दत के लिए तुम आपस में क़र्ज़ का लें दीन करो तो उसे लिख लिया करो। फ़रीक़ैन के दरमियान इन्साफ़ के साथ एक शक्स दस्तावेज़ (दस्तावेज़) तहरीर करे। जिसे अल्लाह ने लिखा पढ़ने की काबिलियत बख्शी हो, उसे लिखने से इंकार न करना चाहिए। वो लिखे और इम्ला (हुक्म) वो शक्स कराए जिसपर हक़ आता है (यानी क़र्ज़ लेने वाला), और उसे अल्लाह, अपने रब से डरना चाहिए के जो मामला ताई हो उसमें कोई कमी बेशी ना करे। लेकिन अगर क़र्ज़ लेने वाला खुद नादाँ या ज़ईफ़ हो, या इमला ना करा सकता हो, तो उसका वली इन्साफ के साथ इमला कराये, फिर अपने मर्दों में से दो आदमियों की इसपर गवाही करालो और अगर दो मर्द ना हो तो एक मर्द और दो औरतें हो, ता-के एक भूल जाये तो दूसरी उसे याद दिला दे। ये गवाह ऐसे लोगों में से होनी चाहिए जिनकी गवाही तुम्हारे दरमियान मकबूल हो। गवाहों को जब गवाह बनने के लिए कहा जाए, तो उन्हें इंकार न करना चाहिए। मामला ख़्वा छोटा हो या बड़ा, मियाद की तैं (निर्दिष्ट अवधि) के साथ उसकी दस्तावेज़ (दस्तावेज़) लिखवा लेने में तसहुल (उपेक्षा) न करो। अल्लाह के नाज़दीक ये तरीक़ा तुम्हारे लिए ज़्यादा मब्नी बार इन्साफ़ है, इस शहादत क़याम होने में ज़्यादा सहुलत होती है, और तुम्हारे शुकुक ओ शुबाअत में मुब्तिला होने का इम्कान कम रह जाता है। हां जो तिजारती लें दीन दस्त बा दस्त तुमलोग आपस में करते हो, उसको ना लिखा जाए तो कोई हर्ज नहीं, मगर तिजाराती मामले तै करते वक्त गवाह कार्लिया करो। कातिब (मुंशी) और गवाह को सताया ना जाए, ऐसा करोगे तो गुनाह का इर्तेक़ाब करोगे। अल्लाह के गजब से बचो, वो तुमको सही तारीख ए अमल की तालीम देता है और उसे हर चीज का इल्म है 
+[2:283] अगर तुम सफ़र की हालत में हो और दस्तावेज़ लिखने के लिए कोई कातिब (मुंशी) ना मिले तो रेहान बिल क़ब्ज़ (हाथ में प्रतिज्ञा की सुरक्षा) पर मामला करो, अगर तुम में से कोई शक्स दूसरे पर भरोसा करके इसके साथ कोई मामला करे तो जिसका भरोसा किया गया है उसे चाहिए के अमानत अदा करे और अल्लाह अपने रब से डरे और शहादत हरगिज़ ना छुपाओ। जो शहादत छुपाता है उसका दिल गुनाह में आलूदा है और अल्लाह तुम्हारे अमाल से बेखबर नहीं है 
+[2:284] आसमानो और ज़मीन में जो कुछ है सब अल्लाह का है, तुम अपने दिल की बातें ख्वा जाहिर करो या छुपाओ, अल्लाह बाहर हाल उनका हिसाब तुमसे ले लेगा, फिर उसे इख्तियार है जिसे चाहे माफ करदे और जिसे चाहे सजा दे, वो हर चीज पर क़ुदरत रखता है 
+[2:285] रसूल हमें हिदायत पर ईमान लाया है जो उसके रब की तरफ से उसपर नाज़िल हुई है और जो लोग इस रसूल के मन्ने वाले हैं उन्होन ने भी हिदायत को दिलसे तस्लीम कार्लिया है, ये सब अल्लाह और उसके फरिश्तों और उसकी किताबों और उसके रसूलों को मानते हैं और उनका क़ौल ये है के: "हम अल्लाह के रसूलों को एक दूसरे से अलग नहीं करते, हमने हुकुम सुना और इताअत क़बूल की। ​​मालिक! हम तुझसे ख़ता-बख्शी (बख्शीश) के तालिब हैं और हमें तेरी ही तरफ पलटना है।”
+[2:286] अल्लाह किसी मुतनफ्फिस पर उसकी मक़दरत (ताक़त) से ख़राब ज़िम्मेदारी का बोझ नहीं डालता, हर शक्स ने जो नेकी कमाई है उसका फ़ल उसी के लिए है और जो बड़ी समेटी है उसका वबाल उसी पर है, (ईमान लाने वालों! तुम यूं दुआ किया करो) ऐ हमारे रब! हमसे भूल चुक में जो कसूर हो जाए अनपर गिरफ़्तार ना कर, मलिक! हमपर वो बोझ ना डाल जो तू-नहीं हमसे पहले लोगों पर डाले थे। परवरदिगार ! जिस बार को उठने की ताक़त हम में नहीं है वो हमपर ना रख, हमारे साथ नरमी कर, हमसे दरगुज़र फरमा, हमपर रहम कर, तू हमारा मौला है, काफिरों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर 
+
+सूरा 3: अल-इमरान (अमरान का परिवार) 
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+[3:1] अलिफ़ लाम मीम 
+[3:2] अल्लाह , वो जिंदा ए जावेद हस्ती (सेल्फ सब्सिस्टिंग), जो निज़ाम ए कायनात को संभाले हुए है, हकीकत में उसके सिवा कोई खुदा नहीं है 
+[3:3] उसने तुमपर ये किताब नाज़िल की है, जो हक लेकर आई है और उन किताबों की तस्दीक कर रही है जो पहले से आई हुई थी, इसे पहले वो इंसानों की हिदायत के लिए तौरात और इंजील नाज़िल कर चुक्का है 
+[3:4] और उसने वो कसौटी (मानदंड) उतारी है (जो हक़ और बातिल का फर्क दिखाने वाली है)। अब जो लोग अल्लाह के फ़रामीन को क़बूल करने से इनकार करते हैं, उनको यकीनन सज़ा मिलेगी। अल्लाह बे-पनाह ताक़त का मालिक है और बुराई का बदला देने वाला है 
+[3:5] ज़मीन और आसमान की कोई चीज़ अल्लाह से पोशीदा नहीं 
+[3:6] वही तो है जो तुम्हारी माँओं के पैत में तुम्हारी सूरतें, जैसी चाहता है, बनता है। हमें ज़बरदस्त हिकमत वाले के सिवा कोई और खुदा नहीं है 
+[3:7] वही खुदा है, जिसने ये किताब तुम्हारी नाज़िल की है। क्या किताब में दो तरह की आयतें हैं: एक मोहकमात, जो किताब की असल बुनियाद हैं और दूसरी मुताशाबीहात (अस्पष्ट)। जिन लोगों के दिलों में टेढ़ा है, वो फ़िटने की तलाश में हमेशा मुतास्बिहात ही के पीछे पड़े रहते हैं और उनको मानी पहचान की कोशिश करते हैं, हलांके उनका हक़ीक़ी मफ़हूम अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता। बख़िलाफ़ इसके जो लोग इल्म में पुख्ता-कार हैं, वो कहते हैं के "हमारा अनोखा ईमान है, ये सब हमारे रब ही की तरफ से हैं" और सच ये है के किसी चीज़ से सही सबक सिर्फ दानिशमंद लोग ही हासिल करते हैं 
+[3:8] वो अल्लाह से दुआ करते रहते हैं हैं के "परवरदिगार! जब तू हमें सीधे रास्ते पर लगा चुका है, तो फिर कहीं हमारे दिलों को काजी (टेढ़ापन) में मुब्तिला न करदीजियो। हमें अपने खज़ाने फ़ैज़ से रहमत अता कर के तू ही फ़ैयाज़ ए हक़ीक़ी (अता फ़रमाने वाला) है 
+[3:9] परवरदिगार! तू यकीनन" सब लोगों को एक रोज़ जमा करने वाला है, जिसके आने में कोई शुभ (शक्क) नहीं, तू हरगिज़ अपने वादे से तलने वाला नहीं है” 
+[3:10] जिन लोगों ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया है, उन्हें अल्लाह के मुक़ाबले में ना उनका माल कुछ काम देगा, ना औलाद, वो दोज़ख का इंधन (ईंधन) बनकर रहेंगे
+[3:11] उनका अंजाम वैसा ही होगा, जैसा फिरौन के साथियों और उन्हें पहले के नफरमानों का हो चुका है कि उनको ने आयत ए इलाही को झुटलाया, नतीजा ये हुआ के अल्लाह ने उनके गुनाहों पर उन्हें पकड़ लिया और हक़ ये है के अल्लाह सज़ा देने वाला है 
+[3:12] पस (ऐ मुहम्मद) ! जिन लोगों ने तुम्हारी दावत को कबूल करने से इंकार कर दिया है, उनसे कहदो के करीब है वो वक्त, जब तुम मगरूब हो जाओगे और जहन्नुम की तरफ हांके जाओगे और जहन्नुम बड़ा ही बुरा ठिकाना है 
+[3:13] तुम्हारे लिए उन दो गिरोहों में एक निशान ए इब्रत था, जो (बदर में) एक दूसरे से नाबार्ड आज़मा (मुठभेड़) हुए, एक गिरोह अल्लाह की राह में लड़ रहा था और दूसरा गिरोह काफ़िर था, देखने वाले ब-चश्म ए सर देख रहे थे के काफिर गिरोह मोमिन गिरोह से दो चाँद (दोगुने नंबर) है मगर (नतीजे ने) साबित करदिया के) अल्लाह अपनी फतह ओ नुसरत से जिसको चाहता है मदद देता है। दीधा ए बीना (देखने वाली आंखें) रखने वालों के लिए इसमें बड़ा सबक पोशीदा है 
+[3:14] लोगों के लिए मरगूबात ए नफ़्स (स्वाभाविक रूप से लालच से लुभाया गया) औरतें, औलाद, सोने चांदी के ढेर, चीदा घोड़े (ब्रांडेड घोड़े) मवेशी और ज़राय ज़मीनें बड़ी ख़ुश-आनंद बना दी गई है। मगर ये सब दुनिया की चांद रोजा जिंदगी के सामान हैं, हकीकत में जो बेहतर ठिकाना है वो तो अल्लाह के पास है 
+[3:15] कहो: मैं तुम्हें बताऊं के इनसे ज्यादा अच्छी चीज क्या है? जो लोग तक्वा की रवीश इख्तियार करते हैं, उनके लिए उनके रब के पास बाग हैं, जिनकी जगहें नफरतें बहती होंगी, वहां उन्हें हमेशा की जिंदगी हासिल होगी, पाकीजा बीवीयां उनके रफीक (साथी) होंगी और अल्लाह की रजा से वो सरफराज होंगे। अल्लाह अपने बंदों के रवये पर गहरी नज़र रखता है 
+[3:16] ये वो लोग हैं, जो कहते हैं " मालिक! हम ईमान लाए, हमारी ख़ातों से दरगुज़र फ़रमा और हमें आतिश ए दोज़ख से बचा ले" 
+[3:17] ये लोग सब्र करने वाले हैं, रस्तबाज़ हैं, फ़रमाबरदार और फैयाज हैं और रात की आखिरी घड़ियों में अल्लाह से मगफिरत की दुआएं मांगते हैं 
+[3:18] अल्लाह ने खुद शहादत दी है के उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, और (यही शहादत) फरिश्तों और सब एहले इल्म ने भी दी है, वो इन्साफ पर कायम है, हमें ज़बरदस्त हकीम के सिवा फिल वक़हे कोई खुदा नहीं है 
+[3:19] अल्लाह के नाज़दीक दीन सिर्फ इस्लाम है, इस दीन से हट कर जो मुख्तलिफ तारीख उन लोगों ने इख्तियार किये जिन्होनें किताब दी गई थी, उनके इस तर्ज़ ए अमल की कोई वजह इसके सिवा ना थी के उनहोन ने इल्म आ जाने के बाद आपस में एक दूसरे पर ज़्यादा करने के लिए ऐसा किया। और जो कोई अल्लाह के एहकाम ओ हिदायत की इबादत से इन्कार करदे, अल्लाह को उसका हिसाब लेते कुछ देर नहीं लगती
+[3:20] अब अगर ये लोग तुमसे झगड़ा करें, तो इनसे कहो: "मैंने और मेरे जोड़े (अनुयायियों) ने तो अल्लाह के आगे सर तस्लीम ख़त्म कर दिया है"। फिर एहले किताब और गैर एहले किताब दोनों से पूछो: “क्या तुमने भी उसकी इताअत ओ बंदगी कबूल की?” अगर की तो वो राह ए रस्त पा गए, और अगर इस से मुहं मोड़ा तो तुम सिर्फ पैगाम पाहुंचा देने की जिम्मेदारी थी, आगे अल्लाह खुद अपने बंदों के मामले देखने वाला है 
+[3:21] जो लोग अल्लाह के एहकाम ओ हिदायत को मानने से इंकार करते हैं और उसके पैगम्बरों को ना-हक़ क़त्ल करते हैं और ऐसे लोगों की जान के डरपे हो जाते हैं जो ख़ल्क़ ए ख़ुदा में अदल ओ रस्तियों का हुकुम देने के लिए उठें, उनको दर्दनाक सज़ा की ख़ुशख़बरी सुना दो 
+[3:22] ये वो लोग हैं जिनके अमाल दुनिया और आखिरी दोनों में ज़या हो गए, और इनका मददगार कोई नहीं है 
+[3:23] तुमने देखा नहीं के जिन लोगों को किताब के इल्म में से कुछ हिसा मिला है, उनका हाल क्या है? उन्हें जब किताब ए इलाही की तरफ बुलाया जाता है ता-के वो उनके दरमियान फैसला करे, तो उनसे एक फरीक इस्से पहलु-ताही (मुड़ जाता है) करता है और इस फैसले की तरफ आने से मुह फेर जाता है 
+[3:24] उनका ये तर्ज-ए-अमल इस वजह से है के वो कहते हैं हैं "आतिश ए दोज़ख तो हमें मास (छू) तक न करेगी और अगर दोज़ख की सज़ा हमको मिलेगी भी तो बस चंद रोज़"। उनको खुद कहा अकीदों ने उनको अपने दीन के मामले में बड़ी गलत फहमियों में दाल रक्खा है 
+[3:25] मगर क्या बनेगी जब हम उन्हें रोज जमा करेंगे जिसका आना यकीनी है? हमसे रोज़ हर शक्स को उसकी कमाई का बदला पूरा-पूरा दे दिया जाएगा और किसी पर ज़ुल्म न होगा 
+[3:26] कहो! ख़ुदाया! मुल्क के मालिक! तू जिसे चाहे, हुकूमत दे और जिसे चाहे छीन ले, जिसे चाहे इज्जत बख्शी और जिसे चाहे ज़िल्लत दे। भलाई तेरे इख्तियार में है. बेशक तू हर चीज़ पर क़ादिर है 
+[3:27] रात को दिन में पिरोता हुआ ले आता है और दिन को रात में, जानदार में से बे-जान निकलता है और बे-जान में से जानदार को, और जिसे चाहता है बे-हिसाब रिज़क़ देता है 
+[3:28] मोमिनीन एहले ईमान को छोड़ कर काफिरों को अपना रफीक और दोस्त हरगिज ना बनाएं, जो ऐसा करेगा उसका अल्लाह से कोई तलाक नहीं, हां ये माफ है के तुम उनके ज़ुल्म से बचने के लिए बजाहिर ऐसा तर्ज ए अमल इख्तियार कर जाओ, मगर अल्लाह तुम्हें अपने आप से डराता है और तुम्हें उसकी तरफ पलट कर जाना है 
+[3:29] (ऐ नबी)! लोगों को खबरदार करो के तुम्हारे दिलों में जो कुछ है, उसे ख्वा तुम छुपाओ या जाहिर करो, अल्लाह बाहर हाल उसे जानता है। ज़मीन ओ आसमान की कोई चीज़ उसके इल्म से बाहर नहीं है और उसका इक्तेदार हर चीज़ पर हावी है 
+[3:30] वो दिन आने वाला है, जब हर नफ़्स अपने किये का फल हाज़िर पायेगा ख्वा उसने हमें बुलाया कि हो या बुरा। हमें रोज़ आदमी ये तमन्ना करेगा के काश अभी ये दिन उसे बहुत दूर होता! अल्लाह तुम्हें अपने आप से डरता है और वो अपने बंदों का निहायत खैर ख्वाह है
+[3:31] (ऐ नबी)! लोगों से कहो के "अगर तुम हकीकत में अल्लाह से मुहब्बत रखते हो, तो मेरी जोड़ी इख्तियार करो, अल्लाह तुमसे मुहब्बत करेगा और तुम्हारी खतों से दरगुजर फरमाएगा, वो बड़ा माफ करने वाला और रहीम है" 
+[3:32] उनसे कहो के "अल्लाह और रसूल की इत्ता कबूल है" करलो” फिर अगर वो तुम्हारी दावत क़बूल ना करें, तो यकीनन ये मुमकिन नहीं है के अल्लाह ऐसे लोगों से मुहब्बत करे जो उसकी और उसके रसूल की इताअत से इंकार करे 
+[3:33] अल्लाह ने आदम और नूह और आले- इब्राहिम और आल-ए-इमरान को तमाम दुनिया वालों पर तर्जीह देकर ( अपनी रिसालत के लिए) मुंतखब किया था 
+[3:34] ये एक सिलसिले के लोग थे, जो एक दूसरे की नाक से पैदा हुए थे, अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है 
+[3:35] (वो हमारा वक्त सुन रहा था) जब इमरान की औरत कह रही थी के, “मेरे परवरदिगार! मुख्य है” बच्चों को जो मेरे पैत में है तेरी नज़र रखती हूँ, वो तेरे ही काम के लिए वक्फ होगा, मेरी इस पेशकश को क़बूल फरमा, तू सुनने और जाने वाला है।” 
+[3:36] फिर जब वो बच्ची उसे हां पैदा हुई तो उसने कहा "मालिक! मेरे हां तो लड़की पैदा हो गई है, हालांके जो कुछ उसने जाना था, अल्लाह को इसकी खबर थी और लड़के लड़की की तरह नहीं होता। खैर, मैंने उसका नाम मरियम रख दिया है और मैं उसका इस्तेमाल करती हूं।" उसकी आइंदा नाक को शैतान मरदूद के फिटने से तेरी पनाह में देती हूं” 
+[3:37] आखिर ए कार उसके रब ने उस लड़की को ब-खुशी कबूल फरमा लिया, उसे बड़ी अच्छी लड़की बनाकर उठाया और जकारिया को उसका सरपरस्त बना दिया। ज़कारिया जब कभी उसके पास महराब (अभयारण्य) में जाता तो उसके पास कुछ न कुछ खाने पीने का सामान मिलता। पुछता मरियम! ये तेरे पास कहाँ से आया? वो जवाब देती अल्लाह के पास से आया है, अल्लाह जिसे चाहता है बे-हिसाब देता है 
+[3:38] ये हाल देख कर जकारिया ने अपने रब को पुकारा "परवरदिगार! अपनी कुदरत से मुझे नई औलाद अता कर, तू ही दुआ सुनने वाला है" 
+[3:39] जवाब में फरिश्तों ने आवाज दी, जब के वो मेहराब में खड़ा नमाज पढ़ रहा था के "अल्लाह तुझे याह्या की ख़ुशख़बरी देता है, वो अल्लाह की तरफ से एक फरमान की तस्दीक करने वाला बनकर आएगा, उसमें सरदार ओ बुज़ुर्गी की शान होगी कमाल दर्जे का ज़ाबित (पूरी तरह से पवित्र) होगा, नबुवत से" सरफराज होगा और सालिहें में शामिल हो जाएगा” 
+[3:40] ज़कारिया ने कहा,“परवरदिगार! भला मेरे हां लड़का कहां से होगा, मैं तो बूढ़ा हूं चुका हूं और मेरी बीवी बांझ है, "जवाब मिला, ऐसा ही होगा, अल्लाह जो चाहता है करता है" 
+[3:41] अर्ज़ किया "मालिक! फिर कोई निशानी मेरे लिए मुकर्रर फरमा दे"। कहा, निशानी ये है कि तुम तीन दिन तक लोगों से इशारे के सिवा कोई बात-चित ना करोगे, इस दौरन में अपने रब को बहुत याद करना और सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते रहना।”
+[3:42] फ़िर वो वक़्त आया जब मरियाँ से फ़रिश्तों ने आकार कहा, " ऐ मरियम! अल्लाह ने तुझे बरगुज़ीदा किया और पाकीज़गी अता की और तमाम दुनिया की औरतों पर तुझको तर्जीह देकर अपनी खिदमत के लिए चुन लिया 
+[3:43] ऐ मरियम! अपने रब की तबह फरमान बनकर रेह, उसके आगे सर ब-सजूद हो, और जो बंदे उसके हुज़ूर झुकने वाले हैं उनके साथ तू भी झुक जा” 
+[3:44] (ऐ मुहम्मद)! ये गैब की खबरें हैं जो हम तुमको वही के ज़रिये से बता रहे हैं, वरना तुम हमें वक्त वहां मौजुद ना था जब हकल के खादिम ये फैसला करने के लिए के मयराम का सरदार कौन हो अपना अपना कलाम फेंक रहे थे, और ना तुम हमें वक्त हाज़िर था जब उनके दरमियान झगड़ा बरपा था 
+[3:45] और जब फ़रिश्तों ने कहा, "ऐ मरियम! अल्लाह तुझे अपने एक फ़रमान की ख़ुश-ख़बरी देता है, उसका नाम मसीह ईसा इब्न ए मरियम होगा, दुनिया और आख़िरत में मुअज़्ज़ाज़ (अत्यधिक सम्मानित) होगा, अल्लाह के मुकर्रब बंदों में" शुमार किया जाएगा 
+[3:46] लोगों से बर्तनों में भी कलाम (बात) करेगा और बड़ी उमर को पहुंच कर भी, और वो एक मर्द ए सालीह होगा” 
+[3:47] ये सुनकर मरियम बोली, “परवरदिगार! मेरे हां बच्चा कहां से होगा, मुझे तो किसी शक्स ने हाथ तक नहीं लगाया'' जवाब मिला, ''ऐसा ही होगा, अल्लाह जो चाहता है अदा करता है। वो जब किसी काम के करने का फैसला फरमाता है तो बस कहता है कि होजा और वो हो जाता है” 
+[3:48] (फरिश्तों ने फिर सिलसिला ए कलाम में कहा) “और अल्लाह उसे किताब और हिकमत की तालीम देगा, तौरात और इंजील का इल्म सिखाएगा 
+[3:49] और बानी इस्राइल की तरफ अपना रसूल मुकर्रर करेगा'' (और जब वो बहैसियत ए रसूल बानी इस्राइल के पास आया तो उसने कहा) '' मैं तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास निशानी लेकर आया हूं, मैं तुम्हारे सामने मिट्टी से परिंदे की सूरत में एक मुजस्समा बनाता हूं और उसमें फूंक मारता हूं, वो अल्लाह के हुकुम से परिंदा बन जाता है, मैं अल्लाह के हुकुम से मदार जाद (जन्म से) अंधे और कोढ़ी (कोढ़ी) को अच्छा कर्ता हूं और मुर्दे को जिंदा कर्ता हूं, मैं तुम्हें बताता हूं के तुम क्या खाते हो और क्या अपने घरों में ज़खीरा (स्टोर) रखकर हो। इसमें तुम्हारे लिए काफी निशानी है अगर तुम ईमान लाने वाले हो 
+[3:50] और मैं हमें तालीम ओ हिदायत की तस्दीक करने वाला बनकर आया हूं जो तौरात में से इस वक्त मेरे जमाने में मौजूद है, और इसलिए आया हूं के तुम्हारे लिए बाज़ उन चीज़ों को हलाल कर दूं जो तुमपर हराम कर दी गई है। देखो मैं तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास निशानी लेकर आया हूं, लिहाजा अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो 
+[3:51] अल्लाह मेरा रब है और तुम्हारा रब भी, लिहाजा तुम उसी कि बंदगी इख्तियार करो, यही सीधा रास्ता है
+[3:52] जब ईसा ने महसूस किया के बानी इसराइल कुफ्र ओ इंकार पर आमादा हैं तो उसने कहा "कौन अल्लाह की राह में मेरा मददगार होता है?" हवारियों (शिष्यों) ने जवाब दिया, "हम अल्लाह के मददगार हैं, हम अल्लाह पर ईमान लाए, गवाह रहो के हम मुसलमान (अल्लाह के आगे सर इताअत झुका देने वाले) हैं 
+[3:53] मालिक! जो फरमान तू ने नाज़िल किया है हमने उसे मान लिया और रसूल की जोड़ी क़बूल की, हमारा नाम गवाही देने वालों में लिख ले” 
+[3:54] फिर बनी इस्राइल (मसीह के खिलाफ) खुफिया तद्बीरें करने लगे, जवाब में अल्लाह ने भी अपनी खुफिया तदबीर की और ऐसी तदबीरों में अल्लाह सब से बुरा कर है 
+[3:55] (वो अल्लाह की खुफिया तदबीर हाय थी) जब उसने कहा, " ऐ ईसा! अब मैं तुझे वापस ले लूंगा और तुझको अपनी तरफ उठा लूंगा और जिन्हों ने तेरा इनकार किया उनसे (यानी इनकी मां से और उनके गांडेय माहोल में उनके साथ रहने से) तुझे पाक कर दूंगा और तेरी जोड़ी बनाने वालों को कयामत तक उन लोगों पर बालादस्त रखूंगा जिन्हों ने तेरा इंकार किया है। फिर तुम सबको आखिर मेरे पास आना है, हम वक्त में उन बातों का फैसला कर देंगे जिनमें तुम्हारे दरमियान इख्तिलाफ हुआ है 
+[3:56] जिन लोगों ने कुफ्र ओ इंकार की रवीश इख्तियार की है उनहें दुनिया। और आखिरी दोनो में साख सजा दूंगा और वो कोई मददगार न पायेगा 
+[3:57] और जिन्होन ने ईमान और नीक अमल का रवैय्या इख्तियार किया है उनको अजर पूरे पूरे दे दिये जायेंगे, और खूब जान ले के जालिमों से अल्लाह हरगिज मुहब्बत नहीं करता'' 
+[3:58] ये आयत और हिकमत से लबरेज़ तज़किरे हैं जो हम तुम्हें सुना रहे हैं 
+[3:59] अल्लाह के नाज़दीक ईसा की मिसाल आदम की सी है के अल्लाह ने उसे मिट्टी से पैदा किया और हुकुम दिया के होजा और वो होगा 
+[3:60] ये असल हकीकत है जो तुम्हारे रब की तरफ से बताई जा रही है और तुम उन लोगों में शामिल न हो जो इसमें शक करते हैं 
+[3:61] ये इल्म आ जाने के बाद अब कोई उस मामले में तुमसे झगड़ा करे तो (ऐ मुहम्मद)! उसे कहो, "आओ हम और तुम खुद भी आ जाएं और अपने-अपने बाल बच्चों को भी ले आएं और खुदा से दुआ करें के जो झूठा हो उसपर खुदा की लानत हो" 
+[3:62] ये बिल्कुल सही वाकियात हैं, और हकीकत ये है के अल्लाह के सिवा कोई खुदा-वंद नहीं है, और वो अल्लाह ही की हस्ती है जिसकी ताक़त सबसे अच्छी है और जिसकी हिकमत निज़ाम-ए-आलम में काम फरमा है 
+[3:63] पास अगर ये लोग (इस शर्त पर मुक़ाबले में आने से) मुह मोअदें तो (उनका मुफ़सीद होना साफ़ खुल जाएगा) और अल्लाह तो मुफ़सीदों के हाल से वाकिफ ही है 
+[3:64] कहो, "ऐ एहले किताब! आओ एक ऐसी बात की तरफ जो हमारे और तुम्हारे दरमियान यक्सान हैं, ये के हम अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी ना करें, उसके साथ किसी को शरीक ना ठहरें, और हम में से कोई अल्लाह के सिवा किसी को अपना रब ना बना ले” इस दावत को क़बूल करने से अगर वो मुहब्बत तो साफ कहदो के गवाह रहो, हम तो मुस्लिम (सिर्फ खुदा की बंदगी ओ इताअत करने वाले) हैं
+[3:65] ऐ एहले किताब! तुम इब्राहिम के बारे में हमसे क्यों झगड़ा करते हो? तौरात और इंजील तो इब्राहीम के बाद ही नाज़िल हुई है, फिर क्या तुम इतनी बात भी नहीं समझते 
+[3:66] तुम लोग जिन चीज़ों का इल्म रखते हो उनमें तो खूब बहसें (तर्क) कर चुके, अब उन मामले में बेहस क्यों करने चले हो जिनका तुम्हारे पास कुछ है भी इल्म नहीं .अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते 
+[3:67] इब्राहीम ना यहुदी था ना इसायी, बल्के वो एक मुस्लिम था, यक्सू था और वो हरगिज मुशीरकोन में से ना था 
+[3:68] इब्राहीम से निस्बत रखने का सबसे ज्यादा हक अगर किसी को पहुंचता है तो उन लोगों को pahunchta है जिन्हों ने उसकी जोड़ी की और अब ये नबी और उसके मन्ने वाले इस निस्बत के ज़्यादा हक़दार हैं। अल्लाह सिर्फ उनकी का हमी ओ मददगार है जो ईमान रखते हैं 
+[3:69] (ऐ ईमान लाने वालों) एहले किताब में से एक गिरह चाहता है कि कोई तरह तुम्हें राह ए रास्ते से हटा दे, हलांके दर हकीकत वो अपने सिवा किसी को गुमराह करने में नहीं डाल रहे हैं मगर उन्हें इसका शूर नहीं है 
+[3:70] ऐ एहले किताब! क्यों अल्लाह की आयत का इन्कार करते हो हलाँके तुम खुद इनका मुशाहिदा कर रहे हो 
+[3:71] ऐ एहले किताब! क्यों हक़ को बातिल का रंग चढ़ा कर मुश्तबा (भ्रमित) बनाते हो? क्यों जानते हैं बूझते हक़ को झुठलाते हो 
+[3:72] एहले किताब में से एक गिरोह कहता है कि इस नबी के मन्ने वालों पर जो कुछ नाज़िल हुआ है उसपर सुबह ईमान लाओ और शाम को इस तरह इनकार करदो, शायद इस तरकीब से ये लोग अपने ईमान से फिर जाएं 
+[3:73] नीज़ ये लोग आपस में कहते हैं कि अपने मजहब वाले के सिवा किसी की बात ना मानो। ऐ नबी! इनसे कहदो के, “असल में हिदायत तो अल्लाह की हिदायत है और ये उसी का दिन है के किसी को वही कुछ दे दिया जाए जो कभी तुमको दिया गया था, हां ये के दूसरे को तुम्हारे रब के हुजूर पेश करने के लिए तुम्हारे खिलाफ कोई हुज्जत मिल जाए।” नबी)! इनसे कहो के, "फज़ल ओ शर्फ अल्लाह के इख्तियार में है, जिसे चाहे अता फरमाये। वो वसीह उल नजर है और सब कुछ जानता है 
+[3:74] अपनी रहमत के लिए जिसको चाहता है मखसूस करता है और उसका फजल बहुत बुरा है।" 
+[3:75] एहले किताब में कोई तो ऐसा है के अगर तुम उसके एत्माद (भरोसे) पर माल ओ दौलत का एक धैर्य भी देदो तो वो तुम्हारा माल तुम्हें अदा कर देगा, और किसी का हाल ये है के अगर तुम एक दिन के मामले में भी उसपर भरोसा करो तो वो अदा ना करेगा, इल्ला ये के तुम उसके सर पर सवार हो जाओ, उनकी इस अखलाकी हालत का सबाब ये है के वो कहते हैं, "उम्मियों (गैर यहूदी लोगों) के मामले में हमपर कोई मवाज़ख़्ज़ा (दोष) नहीं है" और ये बात वो मेहज़ झूठ ग़द कर अल्लाह की तरफ मंसूब करते हैं, हालांके उन्हें मालूम है के अल्लाह ने ऐसी कोई बात नहीं फरमायी है 
+।
+[3:77] रहे वो लोग जो अल्लाह के अहद और अपने कसमों को थोड़ी कीमत पर बेच देते हैं, उनके लिए आख़िरत में कोई हिसा नहीं, अल्लाह कयामत के रोज़ ना उनसे बात करेगा ना उनकी तरफ देखेगा और ना उन्हें पाक करेगा, उनके लिए तो सच दर्दनाक सज़ा है 
+[3:78] उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो किताब पढ़ते हुए इस तरह ज़ुबान का उल्टा फेर करते हैं कि तुम समझो जो कुछ वो पढ़ रहे हैं वो किताब ही की इबारत है, हलांके वो किताब की इबारत नहीं होती। वो कहते हैं के ये जो कुछ हम पढ़ रहे हैं ये खुदा की तरफ से है, हलांके वो खुदा की तरफ से नहीं होता। वो जान बूझ कर झूठ बात अल्लाह की तरफ मंसूब करते हैं 
+[3:79] किसी इंसान का ये काम नहीं है के अल्लाह तो उसको किताब और हुकुम और नबुवत अता फरमाये और वो लोगों से कहे के अल्लाह के बजाए तुम मेरे बंदे बन जाओ। वो तो यही कहेगा के सच्चे रब्बानी बानो जैसा के इस किताब की तालीम का तकाजा है जिसे तुम पढ़ते और पढ़ते हो 
+[3:80] वो तुमसे हरगिज ये ना कहेगा के फरिश्तों को या पैगम्बरों को अपना रब बना लो, क्या ये मुमकिन है के एक नबी तुम्हें कुफ्र का हुकुम दे जब के तुम मुस्लिम हो 
+[3:81] याद करो, अल्लाह ने पैगंबर से अहद लिया था के, "आज हमने तुम्हें किताब और हिकमत ओ दानिश से नवाजा है, कल अगर कोई दूसरा रसूल तुम्हारे पास उसी तालीम की तस्दीक करता हुआ आए जो पहले से तुम्हारे पास मौजुद है, तो तुमको उसपर ईमान लाना होगा और उसकी मदद करनी होगी।" उन्होन ने कहा हन हम इक़रार करते हैं, अल्लाह ने फरमाया, "अच्छा तो गवाह रहो और मैं भी तुम्हारे साथ गवाह हूं 
+[3:82] इसके बाद जो अपने अहद से फिर जाए वही फासिक है" 
+[3:83] अब क्या ये लोग अल्लाह की इताअत का तरीक़ा (दीन अल्लाह) छोड़ कर कोई और तरीक़ा चाहते हैं? हलाँके आसमान ओ ज़मीन की सारी चीज़ें चार ओ नाचार (इच्छा से या अनिच्छा से) अल्लाह ही की तबेह फ़रमान (मुस्लिम) हैं और उसकी तरफ सबको पलटना है 
+[3:84] (ऐ नबी)! कहो के “हम अल्लाह को मानते हैं, उस तालीम को मानते हैं जो हमपर नाज़िल की गई है, उन तालीम को भी मानते हैं जो इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब पर नाज़िल हुई थी और उन हिदायत पर भी ईमान रखते हैं जो मूसा और ईसा और दूसरे पैगम्बरों को उनके रुब की तरफ से दी गई। हम इनके दरमियान फ़र्क़ नहीं करते और हम अल्लाह के ताबे फ़रमान (मुस्लिम) हैं” 
+[3:85] इस फ़रमाबरदारी (इस्लाम) के सिवा जो शक्स कोई और तरीक़ा इख्तियार करना चाहे उसका वो तरीक़ा हरगिज़ क़बूल न किया जाएगा और आख़िरत में वो नाकाम ओ। ना-मुराद रहेगा 
+[3:86] कैसा हो सकता है अल्लाह उन लोगों ओ हिदायत बख्शे जिन्हों ने नियामत ए ईमान पा लेने के बाद फिर कुफ्र इख्तियार किया हलांके वो खुद इस बात पर गवाही दे चुके हैं के ये रसूल हक़ पर है और इनके पास रोशन निशानियां भी आ चुकी हैं, अल्लाह ज़ालिमों को तो हिदायत नहीं दीया
+[3:87] उनके ज़ुल्म का सही बदला यहीं है के बेपरवाह अल्लाह और फ़रिश्तों और तमाम इंसानों की तरह फिटकर है 
+[3:88] इसी हालात में वो हमेशा रहेंगे, ना उनकी सज़ा में तख़्फ़िफ़ (कामी) होगी और ना उन्हें मोहलत दी जाएगी 
+[3:89] अलबत्ता वो लोग बच जायेंगे जो इसके बाद तौबा करके अपने तर्ज़ ए अमल की इस्लाह कार्लें, अल्लाह बख्शने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[3:90] मगर जिन लोगों ने ईमान लेन के बाद कुफ़्र इख्तियार किया फिर अपने कुफ़्र में बढ़ते चले गए उनकी तौबा भी क़बूल न होगी, ऐसे लोग तो पक्के गुमराह हैं 
+[3:91] यकीन रख्खो, जिन लोगों ने कुफ्र इख्तियार किया और कुफ्र ही की हालत में जान दी उनमें से कोई अगर अपने आप को सज़ा से बचाने के लिए रूह-ए-ज़मीन भर कर भी सोना (सोना) फ़िदे (प्रायश्चित) में दे तो उसे क़बूल न किया जाएगा, ऐसे लोगों के लिए दर्दनक सजा तय है और वो अपना कोई मददगार ना पाएगा 
+[3:92] तुम नेकी को नहीं पाहुंच सकते जब तक के अपनी वो चीज (खुदा की राह में) खर्च ना करो जिन्हे तुम अजीज रखते हो, और जो कुछ तुम खर्च करोगे अल्लाह उसे खबर हो ना होगा 
+[3:93] खाने की ये सारी चीज़ें (जो शरीयत ए मुहम्मदी में हलाल हैं) बानी इसराइल के लिए भी हलाल थी, अलबत्ता बाज़ चीज़े ऐसी थी जिनहें तौरात के नाज़िल किये जाने से पहले इज़राइल (याकूब) ने खुद अपने ऊपर हराम करलिया था। उनसे कहो, अगर तुम (अपने ऐतराज में) सच्चे हो तो लाओ तौरात और पेश करो उसकी कोई इबारत 
+[3:94] इसके बाद भी जो लोग अपनी झूठी घड़ी हुई बातें अल्लाह की तरफ मंसूब करते रहें वही दर-हकीकत जालिम हैं 
+[3:95] कहो, अल्लाह ने जो कुछ फरमाया है सच फरमाया है। तुमको यक्सू होकर इब्राहिम के तरीक़े की जोड़ी करनी चाहिए, और इब्राहिम शिर्क करने वालों में से ना था 
+[3:96] बेशक सबसे पहली इबादत-गाह जो इंसानों के लिए तामीर हुई वो वही है जो मक्का में वाक़े है, उसको ख़ैर ओ बरकत दी गई थी और तमाम जहां वालों के लिए मरकज़ ए हिदायत बनाया गया था 
+[3:97] इस्मेन खुली हुई निशानियां हैं, इब्राहिम का मुकाम ए इबादत है, और इसका हाल ये है के जो इस्मेन दखिल हुआ मामून (सुरक्षित) हो गया। लोगों पर अल्लाह का ये हक़ है कि जो इस घर तक पहुंचें कि इस्तितात रखे हो वो इसका हज करे, और जो कोई इस हुकुम की जोड़ी से इंकार करे तो उसे मालूम हो जाना चाहिए के अल्लाह तमाम दुनिया वालों से बे-नियाज़ है 
+[3:98] कहो, ऐ एहले किताब! तुम अल्लाह की बातें मन से क्यों कहते हो? जो हरकतें तुम कर रहे हो अल्लाह सब कुछ देख रहा है 
+[3:99] कहो, ऐ एहले किताब! ये तुम्हारी क्या रवानी है के जो अल्लाह की बात मानता है उसे भी तुम अल्लाह के रास्ते से रोकते हो और चाहते हो के वो टेढ़ी राह चले, हलांके तुम खुद (इसकी राह ए रास्ते होने पर) गवाह हो। तुम्हारी हरकतों से अल्लाह गाफिल नहीं है 
+[3:100] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुमने एहले किताब में से एक गिरोह की बात मानी तो ये तुम्हारे ईमान से फिर कुफ्र की तरफ फिर ले जाएंगे
+[3:101] तुम्हारे लिए कुफ्र की तरफ जाने का अब क्या मौका बाकी है जब तुमको अल्लाह की आयत सुनाई जा रही है और तुम्हारे दरमियान उसका रसूल मौजूद है? जो अल्लाह का दामन मज़बूती के साथ थमेगा वो ज़रूर राह ए रास्ते पाएगा 
+[3:102] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो जैसा के उसे डरने का हक़ है, तुमको मौत ना आए मगर इस हाल में तुम मुस्लिम हो 
+[3:103] सब मिलकर अल्लाह की रस्सी को मज़बूत पकड़ लो और तफ़रक़े (फूट डालो) में ना पड़ो। अल्लाह के हमें एहसान को याद रखो जो उसने तुम पर किया है, तुम एक दूसरे के दुश्मन थे, उसने तुम्हारा दिल जोड़ दिया और उसके फजल ओ करम से तुम भाई-भाई बन गए। तुम आग से भरे हुए एक गधे (गड्ढे) के किनारे खड़े थे, अल्लाह ने तुमको उसे बचा लिया, इस तरह अल्लाह अपनी निशानियां तुम्हारे सामने रोशन करता है शायद इन आलमतों से तुम अपने फलाह का सीधा रास्ता नजर आ जाओ 
+[3:104] तुम में कुछ लोग तो ऐसे जरूर हाय रहने चाहिए जो नेकी की तरफ बुलाएं, भलाई का हुकुम दें, और बुराइयों से रोते रहें, जो लोग ये काम करेंगे वही फलाह पाएंगे 
+[3:105] कहीं तुम उन लोगों की तरफ ना हो जाना जो फिरकों में बत्त गए और खुली खुली वजह हिदायत पाने के बाद फिर इख्तिलाफात में मुब्तिला हुए। जिन्हों ने ये रवीश इख्तियार की वो रोज सख्त सजा पाएंगे 
+[3:106] जबके कुछ लोग सुरखरू (उज्ज्वल) होंगे और कुछ का मुंह काला होगा, जिनका मुंह काला होगा (उन्हें कहा जाएगा के) नियामत ए ईमान पाने के बाद भी तुमने काफिराना रवैय्या इख्तियार किया? अच्छा तो अब इस कुफ़्रान ए नियामत के सिली में अज़ाब का मजा चक्खो 
+[3:107] रहे वो लोग जिनके चेहरे रोशन होंगे तो उनको अल्लाह के दामन ए रहमत में जगह मिलेगी और हमेशा वो इसी हालात में रहेंगे 
+[3:108] ये अल्लाह के इरशाद हैं जो हम तुम्हें ठीक ठीक सुना रहे हैं क्योंकि अल्लाह दुनिया वालों पर ज़ुल्म करने का कोई इरादा नहीं रखता 
+[3:109] ज़मीन ओ आसमान की सारी चीज़ों का मालिक अल्लाह है और सारे ममलात अल्लाह ही के हुज़ूर पेश होते हैं 
+[3:110] अब दुनिया में वो बेहतरीन गिरो ​​तुम हो जैसे इंसानों की हिदायत ओ इस्लाह के लिए मैदान में लाया गया है, तुम नेकी का हुकुम देते हो, बुरी (बुरायी) से रोते हो और अल्लाह पर ईमान रखते हो। ये एहले किताब ईमान लाते तो इन्हीं के हक में बेहतर था, अगर इनमें कुछ लोग इमानदार भी पाए जाते हैं मगर इनके बेहतर (अक्सर) अफ़राद नफ़रमान हैं 
+[3:111] ये तुम्हारा कुछ बिगाड़ नहीं सकता, ज़्यादा से ज़्यादा बस कुछ सता सकता है, अगर ये तुमसे लड़ेंगे तो मुकाबले में पीट दिखाएंगे, फिर ऐसी बेबस होंगे के कहीं से इनको मदद ना मिलेगी
+[3:112] ये जहां भी पये गए इनपर जिल्लत की मार ही पड़ी, कहीं अल्लाह के ज़िम्मे या इंसान के ज़िम्मे में पनाह मिल गई तो ये और बात है, ये अल्लाह के गजब में घिर चुके हैं, इनपर मोहताजी ओ मगलूबी मुसल्लत कर दी गई है (अल्लाह का प्रकोप और अपमान है) उन पर अटक गया), और ये सब कुछ सिर्फ वजह से हुआ है के ये अल्लाह की आयत से कुफ्र करते रहे और इन्होन ने पैगम्बरों को ना-हक़ क़तल किया। ये इनकी नफ़रमानियों और ज़्यादाातियों का अंजाम है 
+[3:113] मगर सारे एहले किताब यक़सान नहीं हैं, इनमें कुछ लोग ऐसे भी हैं जो राह ए रास्ते पर क़याम हैं, रातों को अल्लाह की आयत पढ़ते हैं और उसके आगे सजदारेज़ होते हैं 
+[3:114] अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखते हैं, नेकी का हुकुम देते हैं, बुराइयों से रोते हैं और भलाई के कामों में सरगर्म रहते हैं, ये साले लोग हैं 
+[3:115] और जो नेकी भी ये करेंगे उसकी ना-क़ादरी ना की जाएगी, अल्लाह परहेज़गार लोगों को खूब जानता है 
+[3:116] रहे वो लोग जिन्होन ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया तो अल्लाह के मुकाबले में उनको ना उनका माल कुछ काम देगा ना औलाद, वो तो आग में जाने वाले लोग हैं और आग ही में हमेशा रहेंगे 
+[3:117] जो कुछ वो अपनी इस दुनिया की जिंदगी में खर्च कर रहे हैं उसकी मिसाल हमें हवा की सी है जिसमें पाला हो (ठंढ के साथ) और वो उन लोगों की खेती पर चले जिन्होन ने अपने ऊपर आप जुल्म किया है और उसे बरबाद करके रखदे, अल्लाह ने इनपर जुल्म नहीं किया, दरहकीकत ये खुद अपने ऊपर जुल्म कर रहे हैं 
+[3:118] ऐ लोगन जो इमान लाए हो, अपनी जमात के लोगों के सिवा दूसरे को अपना राज़दार ना बनाओ, वो तुम्हारी बर्बादी के किसी मौके से फ़ायदा उठाने में नहीं छूटते, तुम्हें जिस चीज़ से नुक्सान मिले वही उनको मेहबूब है, उनके दिल का बुज़ुर्ग उनके मुँह से निकला पढ़ता है और जो कुछ वो अपने सीने में छुपाए हुए हैं वो इसी शेडेड-टार है। हमने तुम्हें साफ-साफ हिदायत दे दी है, अगर तुम अक्ल रखते हो (तो उनसे तालुक रखने में एहतियत बरतोगे) 
+[3:119] तुम उन्हें मुहब्बत रखते हो मगर वो तुमसे मुहब्बत नहीं रखते, हलांके तुम तमाम कुतुब ए आसमानी को मानते हो। जब वो तुमसे मिलते हैं तो कहते हैं कि हमने भी (तुम्हारे रसूल और तुम्हारी किताब को) मान लिया है, मगर जब जुदा होते हैं तो तुम्हारे खिलाफ उनके गाने या गजब का ये हाल होता है कि अपनी उंगलियां चबाने लगते हैं। उनसे कहदो के अपने गुस्से में आप जल मारो, अल्लाह दिलों के छुपे हुए राज़ तक जानता है 
+[3:120] तुम्हारा भला होता है तो उनको बुरा मालूम होता है, और तुमपर कोई मुसीबत आती है तो ये खुश होते हैं, मगर इनकी कोई तदबीर तुम्हारे खिलाफ कारगर नहीं हो सकती बशरथ ये के तुम सब्र से काम लो और अल्लाह से डर कर काम करते रहो। जो कुछ ये कर रहा है अल्लाह उसपर हावी है
+[3:121] (ऐ पैगम्बर! मुसलमानों के सामने हमें मौके का जिक्र करो) जब तुम सुबह सवेरे अपने घर से निकले थे और (उहुद के मैदान में) मुसलमानों को जंग के लिए जा-बाजा मामूर (ईमानवालों को युद्ध की कतार में खड़ा कर दिया) कर रहे थे, अल्लाह सारी बातें सुनते हैं और वो निहायत बाख़बर है 
+[3:122] याद करो जब तुम में से दो गिरो ​​बुज़दिली दिखाने पर आमादा हो गए थे, हलाँके अल्लाह उनकी मदद पर मौजूद था और मोमिनों को अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए 
+[3:123] आख़िर इसी पहले जंग ए बद्र में अल्लाह तुम्हारी मदद कर चूका था, हलाँके हमें वक्त तुम बहुत कमज़ार थे, लिहाज़ा तुमको चाहिए के अल्लाह की नाशुक्र से बचो, उम्मीद है के अब तुम शुक्रगुज़ार बनोगे 
+[3:124] याद करो जब तुम मोमिनो से कह रहे थे, “क्या तुम्हारे लिए ये बात काफ़ी नहीं के अल्लाह तीन हज़ार फ़रिश्ते उतार कर तुम्हारी मदद करेगी?” 
+[3:125] बेश्क, अगर तुम सब्र करो और खुदा से डरते हुए काम करो तो जिस आन दुश्मन तुम्हारे ऊपर चढ़ कर आएंगे उसकी आन तुम्हारा रब (तीन हजार नहीं) पांच हजार साहब ए निशान फरिश्तों से तुम्हारी मदद करेगा 
+[3:126] ये बात अल्लाह ने तुम्हें दी है इसलिए बता दी है कि तुम खुश हो जाओ और तुम्हारे दिल मुतमीन हो जाएं, फतह ओ नुसरत जो कुछ भी है अल्लाह की तरफ से है जो बड़ी कुव्वत वाला और दाना ओ बीना है (सर्व-शक्तिशाली, सर्व-बुद्धिमान) 
+[3:127] (और ये मदद वो तुम्हें इसलिए देगा) ता-के कुफ्र की राह चलने वालों का एक बाज़ू काट दे, या उनको ऐसी ज़लील शिकस्त दे के वो ना-मुरादी के साथ पसंद हो जाएँ 
+[3:128] (ऐ पैगम्बर) फैसले के इख्तियारात में तुम्हारा कोई हिसा नहीं, अल्लाह को इख्तियार है चाहे उन्हें माफ करे चाहे सज़ा दे, क्यूँके वो ज़ालिम हैं 
+[3:129] ज़मीन और आसमान में जो कुछ है उसका मालिक अल्लाह है, जिसको चाहे बख्श दे और जिसको चाहे अज़ाब दे, वो माफ़ करने वाला और रहीम है 
+[3:130] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ये बढ़ता और चढ़ता सूद (सूदखोरी) खाना छोड़ दो और अल्लाह से डरो, उम्मीद है के फलाह पाओगे 
+[3:131] हमसे आग से बचो जो काफिरों के लिए मुहय्या की गई है 
+[3:132] और अल्लाह और रसूल का हुकुम मान लो, तवक्कू है के तुमपर रहम किया जाएगा 
+[3:133] दाऊद कर चलो उस राह पर जो तुम्हारे रब की बख्शीश और उस पर जन्नत की तरफ जाती है जिसकी वुसअत (विशालता) ज़मीन और आसमानो जैसी है, और वो उन खुदा-तरस लोगों के लिए मुहैया की गई 
+[3:134] जो हर हाल में अपने माल खर्च करते हैं ख़्वाह बढ़ हाल होन या ख़ुश हाल, जो गुस्से को पी जाते हैं और दूसरों के कसूर माफ करते हैं, ऐसे लोग अल्लाह को बहुत पसंद हैं
+[3:135] और जिनका हाल ये है कि अगर कभी कोई फ़हाश काम उनसे सरज़द हो जाता है या किसी गुनाह का इर्तिक़ाब करके वो अपने ऊपर ज़ुल्म कर बैठते हैं तो मान अल्लाह उन्हें याद आ जाता है और उसे वो अपने कसूरों की माफ़ी चाहते हैं, क्योंकि अल्लाह के सिवा और कौन है जो गुनाह माफ़ कर सकता है और वो दीधा ओ दानिस्ता (जानबूझकर कायम रहेगा) अपने किये पर इसरार नहीं करते 
+[3:136] ऐसे लोगों की जजा उनके रब के पास ये है के वो उनको माफ़ कर देगा और ऐसे बाघों में उन्हें डॉक्टर करेगा जिनके बारे में आला नेहरेन बेथी होगी और वहां वो हमेशा रहेंगे। कैसा अच्छा बदला है नई अमल करने वालों के लिए 
+[3:137] तुमसे पहले बहुत से दौर गुजर चुके हैं, ज़मीन में चल फिर कर देखलो के उन लोगों का क्या अंजाम हुआ जिन्होन ने (अल्लाह के एहकाम ओ हिदायत को) झूठलाया 
+[3:138] ये लोगों के लिए एक साफ और सारी तम्बीह है और जो अल्लाह से डरता हूं उनके लिए हिदायत और हिदायत 
+[3:139] दिल शिकस्त ना हो, गम ना करो, तुम ही गालिब रहोगे अगर तुम मोमिन हो 
+[3:140] क्या वक्त अगर तुम्हें चोट लगी है तो इसे पहले ऐसी ही चोट तुम्हारे मुखालिफ फ़रीक़ को भी लग चुकी है। ये तो ज़माने के नशीब ओ फ़राज़ हैं जिनमें हम लोगों के दरमियान गर्दिश देते रहते हैं, तुम ये वक्त इस तरह लाया गया के अल्लाह देखना चाहता था के तुम में सच्चे मोमिन कौन हैं, और उन लोगों को जपना चाहता था जो वकायी (रास्ती के) गवाही हो, क्योंके ज़ालिम लोग अल्लाह को पसंद नहीं हैं 
+[3:141] और वो इस आजमाइश के ज़रीए से मोमिनो को अलग जप (शुद्ध) कर काफिरों की सरकोबी (ब्लॉट आउट) करना चाहता था 
+[3:142] क्या तुमने ये समझ रखा है के यूं ही जन्नत में चले जाओगे हलांके अभी अल्लाह ने ये तो देखा ही नहीं के तुम में कौन वो लोग हैं जो उसकी राह में जानेन लड़ने वाले और उसकी खातिर सब्र करने वाले हैं 
+[3:143] तुम तो मौत की तमन्नाएं कर रहे थे! मगर ये हमें वक्त की बात थी जब मौत सामने ना आई थी, लो अब वो तुम्हारे सामने आ गई और तुमने उसकी आंखें देख लिया 
+[3:144] मुहम्मद इसके सिवा कुछ नहीं के बस एक रसूल हैं, उनसे पहले और रसूल भी गुजर चुके हैं। फिर क्या अगर वो मर जाए या क़त्ल कर दी जाए तो तुम लोग उल्टे पांव फिर जाओगे? याद रक्खो! जो उल्टा फिर गया वो अल्लाह का कुछ नुक्सान ना करेगा, अलबत्ता जो अल्लाह के शुक्रगुज़ार बंदे बनकर रहेंगे उनको वो इसकी जजा देगा 
+[3:145] कोई ज़ि रूह अल्लाह के इज़ान के बिना नहीं मर सकता। मौत का वक्त तो लिखा हुआ है, जो शक्स सवाब ए दुनिया के इरादे से काम करेगा उसको हम दुनिया ही में से देंगे, और जो सवाब ए आखिरी के इरादे से काम करेगा वो आखिरी का सवाब पाएगा और शुक्र करने वालों को हम उनकी जजा जरूर अता करेंगे
+[3:146] इसके पहले कितने ही नबी ऐसे गुजर चुके हैं जिनके साथ मिलकर बहुत से खुदा परस्तों ने जंग की, अल्लाह की राह में जो मुसिबतें उन्पर पढ़ीं उनसे वो दिल सीखा नहीं हुए, उन्हें कामजोरी नहीं दिखाई, वो (बातिल के आगे) सरनागों (अपशब्द) नहीं हुए, ऐसे ही साबिरों को अल्लाह पसंद करता है 
+[3:147] उनकी दुआ बस ये थी के "ऐ हमारे रब! हमारी गलतियों और कहानियों से बेहतर फरमा, हमारे काम में तेरे हुदूद से जो कुछ तजावुज हो गया हो उसे माफ करदे, हमारे कदम जमा दे और काफिरों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर।” 
+[3:148] आख़िर ए कार अल्लाह ने उनको दुनिया का सवाब भी दिया और इसे बेहतर सवाब ए आख़िरत भी आता किया। अल्लाह को ऐसे ही नेक अमल लोग पसंद हैं 
+[3:149] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम उन लोगों के इशारों पर चलोगे जिन्होन ने कुफ्र की राह इख्तियार की है तो वो तुमको उल्टा फेर ले जाएंगे और तुम ना-मुराद हो जाओगे 
+[3:150] (उनकी बातें गलत हैं) हकीकत ये है के अल्लाह तुम्हारा हमी ओ मददगार है और वो बेहतरीन मदद करने वाला है 
+[3:151] अनकारीब वो वक्त आने वाला है जब हम मुनकिरीन ए हक के दिलों में रोब (आतंक/डर) बिठा देंगे, इसली के अनहोन ने अल्लाह के साथ उनको खुदाई में शरीक ठहराया है जिनके शरीक होने पर अल्लाह ने कोई सनद नाज़िल नहीं की, उनका आखिरी ठिकाना जहन्नुम है और बहुत ही बुरी है वो क़याम-गाह जो उन ज़ालिमों को नसीब होगी 
+[3:152] अल्लाह ने (ताईद ओ नुसरत का) जो वादा तुमसे किया था वो तो उसने पूरा करदिया, इब्तेदा में उसके हुकुम से तुम उनको कत्ल कर रहे थे मगर जब तुमने कमजोरी दिखाई और अपने काम में बहम इख्तिलाफ किया, और जून के वो चीज अल्लाह ने तुम्हें दिखाई जिसकी मुहब्बत में तुम गिरफ्तार थे (यानी माल ओ गनीमत) तुम अपने सरदार के हुकुम की खिलाफत वारज़ी कर बैठे हैं इसलिए कि तुम में से कुछ लोग दुनिया के तालिब थे और कुछ आख़िरत की ख्वाहिश रखते थे, तब अल्लाह ने तुम्हें काफिरों के मुक़ाबले में पसंद कर दिया ता-के तुम्हारी आज़माइशें और हक़ ये है के अल्लाह ने फिर भी तुम्हें माफ़ ही करदिया क्यूँके मोमिनो पर अल्लाह बड़ी नज़र ए इनायत रखता है 
+[3:153] याद करो जब तुम भागे चले जा रहे थे, किसी की तरफ पलट कर देखने तक का होश तुम्हें ना था, और रसूल तुम्हारे पीछे तुमको पुकार रहा था हमारा वक्त तुम्हारी इस रवीश का बदला है, अल्लाह ने तुम्हें ये दिया के तुमको रांझ पर रांझ दिए ता-के आंदा के लिए तुम्हें ये सबक मिले के जो कुछ तुम्हारे हाथ से जाए या जो मुसीबत तुम्पर नाज़िल हो उसपर मालुल (शोक) ना हो, अल्लाह तुम्हारे सब अमल से बख़बर है
+[3:154] इस ग़म के बाद फिर अल्लाह ने तुम में से कुछ लोगों पर ऐसी इत्मिनान की सी हालत तारी करदी के वो उगने लगे, मगर एक दूसरा गिरो ​​जिसके लिए सारी एहमियत बस अपने मफ़ाद ही की थी, अल्लाह के मुतालिक तरह तरह के जहिलाना गुमान करने लगा जो सरसर ख़िलाफ ए हक था, ये लोग अब कहते हैं के, "क्या काम के चलने में हमारा भी कोई हिस्सा है?" उनसे कहो, (किसी का कोई हिसा नहीं) इस काम के सारे इख्तियारात अल्लाह के हाथ में हैं। "दरअसल ये लोग अपने दिलों में जो बात छुपाए हुए हैं उसे तुमपर जाहिर नहीं करते, इनका असल मतलब ये है के," अगर (क़यादत के) इख्तियारत में हमारा कुछ हिसाब होता तो यहां हम ना मारे जाते।" इंसे कहदो के, "अगर तुम अपने घरों में भी होते तो जिन लोगों की मौत लिखी हुई थी वो खुद अपने खून-गाहों की तरफ निकल आते थे'', और ये मामला जो पेश आया, ये तो इसलिए था के जो कुछ तुम्हारे सीने में पोशीदा (छिपा हुआ) है अल्लाह उसे आजमा ले और जो खोट तुम्हारे दिलों में है उसे चांट दे। अल्लाह दिलों का हाल खूब जानता है 
+[3:155] तुम में से जो लोग मुकाबला के दिन पीठ फेर गए थे, उनकी इस लग्ज़िश का सबब ये था के उनकी बाज़ कमज़ोरियों की वजह से शैतान ने उन्हें कदम डगमगा दिया था। अल्लाह ने उन्हें माफ कर दिया, अल्लाह बहुत दरगुज़ार करने वाला और बर्दबार (सर्व सहनशील) है 
+[3:156] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, काफिरों की सी बातें ना करो जिनके अज़ीज़ ओ अक़रीब अगर कभी सफ़र पर जाते हैं या जंग में शरीक होते हैं (और वहां किसी हादसे से) दो-चार हो जाते हैं) तो वो कहते हैं के अगर वो हमारे पास होते तो ना मारे जाते और ना क़त्ल होते। अल्लाह क़िस्म की बातों को उनके दिलों में हसरत ओ एंडो का सबाब बना देता है, वरना दर-असल मरने और जेलाने वाला तो अल्लाह ही है और तुम्हारी तमाम हरकत पर वही निगरानी है 
+[3:157] अगर तुम अल्लाह की राह में मारे जाओ या मर जाओ तो अल्लाह की जो रहमत और बख्शीश है तुम्हारे हिस्से में आएगी वो उन सारी चीजों से ज्यादा बेहतर है जिन्हें ये लोग जमा करते हैं 
+[3:158] और ख्वाह तुम मारो या मारे जाओ बहार-हाल तुम सबको सिमत कर जाना अल्लाह ही की तरफ है 
+[3:159] (ऐ पैगम्बर) ये अल्लाह की बड़ी रहमत है के तुम इन लोगों के लिए बहुत नरम मिजाज पैदा हुए हो, वरना अगर कहीं तुम तुंध-खु (कठोर) और संघ दिल होते तो ये सब तुम्हारे गिर्द ओ पेश से छठ जाते। इनके कसूर माफ़ करदो, इनके हक़ में दुआ-ए-मगफिरत करो, और दीन के काम में इनको भी शरीक ए मशवरा रक्खो। फिर जब तुम्हारा आजम (संकल्प) किसी राय पर मुस्तहकम हो जाए तो अल्लाह पर भरोसा करो, अल्लाह को वह लोग पसंद हैं जो उसके भरोसे पर काम करते हैं 
+[3:160] अल्लाह तुम्हारी मदद पर हो तो कोई ताकत तुम पर गालिब आने वाली नहीं, और वो तुम्हें छोड़ दे तो इसके बाद कौन है जो तुम्हारी मदद कर सकता है? पास जो सच्चा मोमिन है उनको अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए
+[3:161] किसी नबी का ये काम नहीं हो सकता के वो खयानत कर जाए और जो कोई खयानत करे तो वो अपनी खयानत के साथ कयामत के रोज़ हाज़िर हो जाएगा, फिर हर मुतनफ़िस को उसकी कमाई का पूरा पूरा बदला मिल जाएगा और किसी पर कुछ ज़ुल्म न होगा 
+[3:162] भला ये कैसा हो सकता है के जो शक्स हमेशा अल्लाह की रज़ा पर चलने वाला हो वो हम शक्स के कहे काम करे जो अल्लाह के गजब में घिर गया हो, और जिसका आखिरी ठिकाना जहन्नुम हो जो बढ़ता है ठिकाना है 
+[3:163] अल्लाह के नाज़दीक डोनो क़िस्म के आदमियों में बदरजहा फर्क है और अल्लाह सबके आमाल पर नजर रखता है 
+[3:164] दार-हकीकत एहले ईमान पर अल्लाह ने ये बहुत बड़ा एहसान किया है के उनके दरमियान खुद उन्ही में से एक ऐसा पैगम्बर उठाया जो उसकी आयत उन्हें सुनाता है, उनकी जिंदगी को संवारता है और उनको किताब और ज्ञान (बुद्धि) की तालीम देता है, हलांके इसे पहले यहीं लोग सारे गुमराहियों में पड़े हुए थे 
+[3:165] और ये तुम्हारा क्या हाल है के जब तुमपर मुसीबत आ पड़ी तो तुम कहने लगे ये कहां से आई? हलाँके (जंग ए बद्र में) इस्से दुगनी (डबल) मुसीबत तुम्हारे हाथों [फ़ारिक ए मुख़ालिफ़ (दुश्मनों) पर] पढ़ चुकी है। (ऐ नबी)! इनसे कहो, ये मुसीबत तुम्हारी अपनी लाई हुई है, अल्लाह हर चीज पर कादिर है 
+[3:166] जो नुक्सान लड़ायी के दिन तुम्हें पहुंचा वो अल्लाह के इज़ान से था और इसलिए था के अल्लाह देखले तुम में से मोमिन कौन है 
+[3:167] और मुनाफिक कौन। वो मुनाफिक के जब उनसे कहा गया, आओ अल्लाह की राह में जंग करो या काम अज़ काम (अपने शहर की) मुदाफ़ियात (रक्षा) ही करो, तो कहने लगेंगे अगर हमें इल्म होता के आज जंग होगी तो हम ज़रूर तुम्हारे साथ चलते हैं। ये बात जब वो कह रहे थे हमें वक्त वो ईमान की ब-निस्बत कुफ्र से ज्यादा करीब था। वो अपनी जुबान से वो बातें कहते हैं जो उनके दिलों में नहीं होती, और जो कुछ वो दिलों में छुपते हैं अल्लाह उसे खूब जानता है 
+[3:168] ये वही लोग हैं जो खुद तो बैठे रहे और उनके जो भाई-बंद लादने गए और मारे गए उनके मुतालिक इन्हों ने केहदिया के अगर वो हमारी बात मान लेते तो ना मारे जाते। इनसे कहो अगर तुम अपने इस क़ौल में सच्चे हो तो खुद तुम्हारी मौत जब आए उसे ताल कर दिखा देना 
+[3:169] जो लोग अल्लाह की राह में क़त्ल हुए हैं उन्हें मुर्दा ना समझो, वो तो हकीकत में ज़िंदा हैं, अपने रब के पास रिज़्क पा रहे हैं 
+[3:170] जो कुछ अल्लाह ने अपने फजल से उन्हें दिया है उसपर खुश ओ खुर्रम हैं, और मुतमईन हैं के जो एहले ईमान उनके पीछे दुनिया में रह गए हैं और अभी वहां नहीं पहुंच पाए हैं उनके लिए भी कोई खौफ और रांझ का मौका नहीं है 
+[3:171] वाह अल्लाह के इनाम और उसके फ़ज़ल पर शादान ओ फ़रहान हैं और उनको मालूम हो चुका है के अल्लाह मोमिनो के अजर को ज़या नहीं करता
+[3:172] जिन लोगों ने ज़ख्म खाने के बाद भी अल्लाह और रसूल की पुकार पर लब्बैक कहा (उत्तर दिया) उन में जो अशखास नीकुकर और परहेज़गार हैं उनके लिए बड़ा अजर है 
+[3:173] और वो जिनसे लोगों ने कहा के, “तुम्हारे ख़िलाफ बड़ी फौजें जमा हुई” हैं, उनसे डरो", तो ये सुनकर उनका ईमान और बढ़ गया (बढ़ा) और उनको ने जवाब दिया के हमारे लिए अल्लाह काफी है और वही बेहतरीन कार्साज है 
+[3:174] आखिर ए कार वो अल्लाह ताला की नियामत और फज़ल के साथ पलट आए, उनको किसी क़िस्म का ज़रार भी ना चाहिए और अल्लाह कि रजा पर चलने का शरफ भी उन्हें हासिल हो गया, अल्लाह बड़ा फजल फरमाने वाला है 
+[3:175] अब तुम्हें मालूम होगा के वो दर-असल शैतान था जो अपने दोस्तों से ख्वा-मा-ख्वा (तुमको) डरा रहा था, लिहाजा आइंदा तुम इंसानों से ना डरना, मुझसे डरना अगर तुम हकीकत में साहिब ए ईमान हो 
+[3:176] (ऐ पैगम्बर) जो लोग आज कुफ्र की राह में बड़ी दौड़ धूप कर रहे हैं उनकी सरगर्मियां तुम्हें दुखी न करें। ये अल्लाह का कुछ भी ना बिगाड़ पाएंगे. अल्लाह का इरादा ये है कि उनके लिए आख़िरत में कोई हिसा ना रखे, और बिल आख़िर उनको सज़ा मिलने वाली है 
+[3:177] जो लोग ईमान को छोड़ कर कुफ़्र के ख़रिदार बने हैं वो यक़ीनन अल्लाह का कोई नुक्सान नहीं कर रहे हैं। उनके लिए दर्दनक अजब तय्यर है 
+[3:178] ये धीरे-धीरे जो हम उन्हें दिए जाते हैं इसको ये काफिर अपने हक में बेहतरी ना समझे। हम तो उन्हें इस तरह से ढील दे रहे हैं के ये खूब बार-ए-गुनाह समित लें, फिर उनके लिए सख्त ज़लील करने वाली सजा है 
+[3:179] अल्लाह मोमिनो को इस हालात में हरगिज़ न रहने देगा जिसमें तुम इस वक्त पे जाते हो। वो पाक लोगों को नापाक लोगों से अलग करके रहेगा। मगर अल्लाह का ये तरीक़ा नहीं है कि तुमको गैब पर मुत्तला करदे। गैब की बातें बताने के लिए तो वो अपने रसूलों में जिसको चाहता है मुंतखब करता है। लिहाजा (उमूर ए गैब के बारे में) अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रक्खो अगर तुम ईमान और खुदा तरसी की रवीश पर चलोगे तो तुमको बड़ा अजर मिलेगा 
+[3:180] जिन लोगों को अल्लाह ने अपने फजल से नवाजा है और फिर वो भुख्ल (कंजूसी/कठिनाई) से काम लेते हैं वो इस ख़याल में ना रहें के ये बख़ैली उनके लिए अच्छी है। नहीं, ये उनके हक में निहायत बुरी है, जो कुछ वो अपनी कंजूसी से जमा कर रहे हैं वही कयामत के रोज उनके गले का तौक बन जाएगा। ज़मीन और आसमानों की मीरास अल्लाह ही के लिए है और तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसे बाख़बर है 
+[3:181] अल्लाह ने उन लोगों का क़ौल सुना जो कहते हैं के अल्लाह फ़कीर है और हम गनी हैं। उनकी ये बातें भी हम लिख लेंगे, और इस पहले जो वो पैगम्बरों को ना-हक़ क़त्ल करते रहे हैं वो भी उनके नाम ए अमाल में सब्त है (जब फ़ैसले का वक़्त आएगा उस वक़्त) हम उनसे कहेंगे के लो अब अज़ाब ए जहन्नुम का मजा चक्खो 
+[3:182] ये तुम्हारे अपने हाथों की कमाई है, अल्लाह अपने बंदों के लिए जालिम नहीं है
+[3:183] जो लोग कहते हैं "अल्लाह ने हमको हिदायत करदी है कि हम किसी को रसूल तस्लीम न करें जब तक वो हमारे सामने ऐसी कुर्बानी न करे जिसमें (गाइब से आकार) आग खा ले", उनसे कहो, "तुम्हारे पास मुझसे पहले बहुत से रसूल आ चुके हैं जो बहुत सी" रोशन निशानियां लाए थे और वो निशानियां भी लाए थे जिसका तुम ज़िक्र करते हो (ईमान लाने के लिए ये शर्त पेश करने में) तुम सच्चे हो तो उन रसूलों को तुमने क्यों क़त्ल किया?” 
+[3:184] अब (ऐ मुहम्मद)!अगर ये लोग तुम्हें झुठलाते हैं तो बहुत से रसूल तुमसे पहले झुटले जा चुके हैं जो खुली खुली निशानियां और सहीफे (ग्रंथ) और रोशनी बख्शने वाली किताबें लाए थे 
+[3:185] आखिर ए कार हर शक्स को मरना है और तुम सब अपने-अपने पूरे अजर कयामत के रोज़ पाने वाले हो। कमियाब दर-असल वो है जो वहां आतिश ए दोज़ख से बच जाए और जन्नत में दखल कर दिया जाए। राही ये दुनिया, तो ये महज़ एक ज़ाहिर फरेब चीज़ है 
+[3:186] (मुसलमानो)! तुम्हें माल और जान दोनों की आजमाइशें पेश आकर रहेंगी, और तुम एहले किताब और मुशरिकेन से बहुत से तकलीफ-दे बातें सुनोगे। अगर सब हालात में तुम सब्र और खुदा तरसी की रवीश पर कायम रहो तो ये बदे हौसलों का काम है 
+[3:187] एहले किताब को वो अहद भी याद दिलाओ जो अल्लाह ने उनसे लिया था के तुमने किताब की तालीमात को लोगों में फैलाना होगा, उनमें पोशीदा रखना नहीं होगा. मगर उनहों ने किताब को पास-ए-पुश्त (पीठ के पीछे) डाल दिया और थोड़ी कीमत पर उसे बेच डाला। कितना बुरा करोबार है जो ये कर रहे हैं 
+[3:188] तुम उन लोगों को अजब से महफ़ूज़ ना समझो जो अपने कार्टून पर खुश हैं और चाहते हैं कि ऐसे कामों की तारीफ़ उन्हें हासिल हो जो फ़िलहाल उन्होन ने नहीं किया है। हकीकत में उनके लिए दर्दनाक सजा तय्यार है 
+[3:189] जमीन और आसमान का मालिक अल्लाह है और उसकी कुदरत सब पर हावी है 
+[3:190] जमीन और आसमान की अदायगी में और रात और दिन के बारी बारी से आने में उन होशमंद लोगों के लिए बहुत निशानियां हैं 
+[3:191] जो उठते, बैठते और लेटते, हर हाल में खुदा को याद करते हैं और आसमान ओ ज़मीन की सच्चाई (सृजन) में गौर ओ फ़िक्र करते हैं। (वो बे-इख्तियार बोल उठते हैं) "परवरदिगार! ये सब कुछ तू नई फ़िज़ुल और बे-मकसद नहीं बनाया है, तू पक गया है इसके अबस (बेकार / व्यर्थ) काम करे। पास ऐ रब! हमें दोज़ख के अज़ाब से बचा ले 
+[3:192] तू नहीं जिसे दोज़ख में डाला उसे डार हकीकत बड़ी ज़िल्लत ओ रुसवाई में दाल दिया, और फिर ऐसे ज़ालिमों का कोई मददगार न होगा 
+[3:193] मालिक! हमने एक पुकारने वाले को सुना जो ईमान की तरफ बुलाता था और कहता था के अपने रब को मानो, हमने उसकी दावत कबूल की, हमारे पास। आक़ा! जो कसूर हमसे हुए हैं उनसे दरगुज़र फ़रमा। जो बुराइयां हम में हैं उनसे दूर करदे और हमारा ख़तमा नीक लोगों के साथ कर
+[3:194] ख़ुदावंदा! जो वादे तू नहीं अपने रसूलों के ज़रिये से किये हैं उनको हमारे साथ पूरा कर और कयामत के दिन हमें रुसवाई में ना डाल, बेशक तू अपने वादे के ख़िलाफ़ करने वाला नहीं है” 
+[3:195] जवाब में उनके रुब ने फरमाया, “मैं तुम में से किसी का अमल ज़या करने वाला नहीं हूं, ख्वा मर्द हो या औरत, तुम सब एक दूसरे के हम जिन हो। लिहाजा जिन लोगों ने मेरी खातिर अपने वतन छोड़े और जो मेरी राह में अपने घरों से निकले गए और सताए गए और मेरे लिए लड़े और मारे गए उनके सब कसूर माई माफ कर दूंगा और उन्हें ऐसे बागों में दाखिल करूंगा जिनका आला जरूरी है होंगी. ये उनकी जजा है अल्लाह के हान और बेहतरीन जजा अल्लाह ही के पास है" 
+[3:196] (ऐ नबी)! दुनिया के मुल्कों में खुदा के नफरमान लोगों की चलती फिरत तुम्हें किसी धोखे में ना डाले 
+[3:197] ये महज़ चंद रोजा जिंदगी का थोड़ा सा लुत्फ है, फिर ये सब जहन्नुम में जायेंगे जो बद्दतरें जाये क़रार है 
+[3:198] बरक्स इसके जो लोग अपने रब से डरते हुए जिंदगी बसर करते हैं उनके लिए ऐसे बाग हैं जिनका आला नेहरेन बहती हैं, बागों में वो हमेशा रहेंगे, अल्लाह की तरफ से ये समां ए ज़ियाफ़त है उनके लिए, और जो कुछ अल्लाह के पास है नए लोगों के लिए वही सबसे बेहतर है 
+[3:199] एहले किताब में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो अल्लाह को मानते हैं, उस किताब पर ईमान लाते हैं जो तुम्हारी तरफ भेजी गई है और उस किताब पर भी ईमान रखते हैं जो इसे पहले खुद उनकी तरफ भेजी गई थी। अल्लाह के आगे झुके हैं, और अल्लाह की आयत को थोड़ी सी कीमत पर बेच नहीं देते। इनका अजर इनके रब के पास है और अल्लाह हिसाब चुकाने में डर नहीं लगता 
+[3:200] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, सब्र से काम लो, बातिल पारसन के मुक़ाबले में पा-मरदी दिखाओ, हक़ की खिदमत के लिए कमर-बस्ता हो जाओ, और अल्लाह से डरते रहो, उम्मीद है के फलाह पाओगे 
+
+सूरह 4: अन-निसा' (महिलाएं) 
+------------------------------------------------ 
+[4:1] लोगन! अपने रब से डरो जिसने तुमको एक जान से अदा किया और उसी जान से उसका जोड़ा बनाया और उन दोनो से बहुत मर्द ओ औरत दुनिया में फैल गए, हमसे खुदा से डरो जिसका वास्ता देकर तुम एक दूसरे से अपना हक मांगते हो, और रिश्ता ओ क़राबत के ताल्लुकात को बिगाड़ने से परहेज करो, यकीन जानो के अल्लाह तुमपर निगरानी कर रहा है 
+[4:2] यतीमों के माल उनको वापस दो, अच्छे माल को बुरे माल से ना बदल लो, और उनके माल अपने माल के साथ मिलकर कर ना खा जाओ, ये बहुत बड़ा गुनाह है 
+[4:3] और अगर तुम यतीमों के साथ बे-इंसाफी करने से डरते हो तो जो औरतें तुमको पसंद आये उन्हें दो दो, तीन तीन, चार चार से निकाह करलो, लेकिन अगर तुम्हें अंदेशा हो के उनके साथ अदल ना कर सकोगे तो फिर एक ही बीवी करो या उन औरतों को जजियत में लाओ जो तुम्हारे क़ब्ज़े में आई है, इन्साफ़ी से बचने के लिए ये ज़्यादा क़रीन ए सवाब है
+[4:4] और औरतों के मेहर खुश दिली के साथ (फर्ज जानते हुए) अदा करो, अलबत्ता अगर वो खुद अपनी खुशी से मेहर का कोई हिसा तुम्हें माफ कर दें तो उसे तुम मजे से खा सकते हो 
+[4:5] और अपने वो माल जिनहे अल्लाह ने तुम्हारे लिए कयाम ए ज़िन्दगी का ज़ैरया बनाया है, नादान लोगों के हवाले ना करो, अलबत्ता उन्हें खाने और पहनने के लिए दो और उन्हें नई हिदायत करो 
+[4:6] और यतीमों की आजमाइश करते रहो यहाँ तक के वो निकाह के काबिल उमर को पाहुंच जाएँ। फिर अगर तुम उनके अंदर एहलियात पाओ (मानसिक रूप से परिपक्व) तो उनके माल उनके हवाले करदो, ऐसा कभी न करना के हद ए इन्साफ से तजावुज करके इस खौफ से उनके माल जल्दी जल्दी खा जाओ के वो बदाए होकर अपने हक का मुतालिबा करेंगे। यतीम का जो सरपरस्त मालदार हो वो परहेज़गारी से काम ले और जो ग़रीब हो वो मारूफ़ तारीख़ से खाए। फिर जब उनके माल उनके हवाले करने लगो तो लोगों को इसपर गवाह बना लो, और हिसाब लेने के लिए अल्लाह काफी है 
+[4:7] मर्दों के लिए उस माल में हिसा है जो मां बाप और रिश्तेदार ने छोड़ा हो, और औरतों के लिए भी उस माल में हिसा है जो मां बाप और रिश्तेदार ने छोड़ा हो, ख्वाह थोड़ा हो या बहुत, और ये हिसा (अल्लाह की तरफ से) मुकर्रर है 
+[4:8] और जब तकसीम के मौके पर कुंबे (परिवार) के लोग और यतीम और मिस्कीन आएं तो इस माल में से उनको भी कुछ दो और उनके साथ भले मानस-ऑन (इंसान) की सी बात करो उन्हें कृपया) 
+[4:9] लोगों को इस बात का ख्याल करके डरना चाहिए के अगर वो खुद अपने पीछे बेबस औलाद छोड़ते तो मरते वक्त उन्हें अपने बच्चों के हक में कैसे कुछ अंदेशे लाहिक होते। पास चाहिए के वो खुदा का खौफ करें और रस्ती की बात करें 
+[4:10] जो लोग ज़ुल्म के साथ यतीमों के माल खाते हैं दर-हकीकत वो अपने पैत आग से भरते हैं और वो जरूर जहन्नुम की भड़कती हुई आग में झोंके जाएंगे 
+[4:11] तुम्हारी औलाद के बारे में अल्लाह तुम्हें हिदायत करता है के: मर्द का हिसा दो औरतों के बराबर है, अगर (मय्यत की वारिस) दो से ज़ायद लड़कियाँ हों तो उन्हें तर्क (विरासत) का दो तिहाई (2/3) दिया जाए, और अगर एक ही लड़की वारिस हो तो आधा (आधा) उसका। है, अगर मय्यत साहब ए औलाद हो तो उसके वलियों में से हर एक को तर्क का चाटा (छठा) हिसा मिलना चाहिए, और अगर वो साहब ए औलाद न हो और उसके वारिस हों तो मां को तिसरा (तीसरा) हिसा दिया जाए और अगर मय्यत के भाई बहन भी हो तो मां चाटे (छठा) इसकी हक़दार होगी। (ये सब इसी से वक्त निकले जाएंगे) जबके वसीयत जो मय्यत ने की हो पूरी करदी जाए और क़र्ज़ जो उसपर हो अदा करदिया जाए। तुम नहीं जानते कि तुम्हारे माँ बाप और तुम्हारी औलाद में से कौन बलिहाज़-ए-नफ़ा तुमसे करीब है। ये इसी तरह अल्लाह ने मुकर्रर कर दिया है, और अल्लाह यकीनन सब हकीकत से वाकिफ और सारी मसलहतों का जाने वाला है
+[4:12] और तुम्हारी बीवीयों ने जो कुछ छोड़ा हो उसका आधा हिसा तुम्हें मिलेगा अगर वो बे-औलाद हो, वरना औलाद होने की सूरत में तर्क का एक चौथाई (एक चौथाई) हिसा तुम्हारा है जबके वसीयत जो उन्होन ने की हो पूरी करदी जाए, और क़र्ज़ जो उन्होन ने छोड़ा हो अदा करदिया जाए, और वो तुम्हारे तर्क में से चौथी कि हक़दार होगी अगर तुम बे-औलाद हो, वरना साहब ए औलाद होने की सूरत में उनका हिसा आठवां होगा, बाद इसके के जो वसीयत तुमने की हो वो पूरी कर दी जाए और जो क़र्ज़ तुमने छोड़ा हो वो अदा कर दिया जाए और अगर वो मर्द या औरत (जिसकी मीरास तकसीम तलब है) बे-औलाद भी हो और उसकी मां बाप भी जिंदा न हो, मगर उसका एक भाई या एक बहन मौजूद हो तो भाई और बहन हर एक को चट्टा (छठा) हिसा मिलेगा, और भाई बहन एक से ज्यादा हो तो कुल तरके के एक तिहाई (एक तिहाई) में वो सब शरीक होंगे, जबके वसीयत जो की गई हो पूरी कर दी जाए, और क़र्ज़ जो मय्यत ने छोड़ा हो अदा करदिया जाए, बशरत ये के वो ज़रार रसन ना हो (कोई चोट नहीं पहुंचाता)। ये हुकुम अल्लाह की तरफ से और अल्लाह दाना ओ बीना और नरम-खु है 
+[4:13] ये अल्लाह की मुकर्रर की हुई हदें (सीमाएं) हैं। जो अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करेगा उसे अल्लाह ऐसे बाघों में दखल करेगा जिनकी जगहें नहरें बहती होंगी और उन बाघों में वो हमेशा रहेगा और यही बड़ी कामयाबी है 
+[4:14] और जो अल्लाह और उसके रसूल की नफरमानी करेगा और उसकी मुकर्रर की हुई हदन (हद) से तजावुज कर जाएगा उसे अल्लाह आग में डालेगा जिसमें वह हमेशा रहेगा और उसके लिए रुसवा-कुन सजा है 
+[4:15] तुम्हारी औरतों में से जो बदकारी की मुर्तकिब हूं, अपने में से चार आदमियों की गवाही लो, और अगर चार आदमी गवाही दे दें तो उनको घरों में बंद रखें यहां तक ​​के उन्हें मौत आ जाए या अल्लाह उनके लिए कोई रास्ता निकाल दे 
+[4:16] और तुम में से जो इस फेल का इर्तेकाब करें उन दोनों को तकलीफ दो, फिर अगर वो तौबा करें और अपनी इस्लाह कार्लें तो उन्हें छोड़ दो के अल्लाह बहुत तौबा क़बूल करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[4:17] हां ये जान लो के अल्लाह पर तौबा की क़बूलियत का हक़ उन्ही लोगों के लिए है जो नादानी की वजह से कोई बुरा फेल (अमल) कर गुज़रते हैं और उसके बाद जल्दी ही तौबा करते हैं। ऐसे लोगों पर अल्लाह अपनी नजर ए इनायत से फिर मुतवज्जैह हो जाता है और अल्लाह सारी बातों की खबर रखने वाला और हकीम ओ दाना है 
+[4:18] मगर तौबा उन लोगों के लिए नहीं है जो बुरे काम किए चले जाते हैं यहां तक ​​के जब उनमें से किसी की मौत का वक्त आ जाता है हमें वक्त वो कहता है कि अब मैंने तौबा की, और इसी तरह तौबा उनके लिए भी नहीं है जो मरते दम तक काफिर रहे। ऐसे लोगों के लिए तो हमने दर्दनाक सजा तय्यार कर रखी है
+[4:19] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारे लिए ये हलाल नहीं है के ज़बरदस्ती औरतों के वारिस बन बैठो और ना ये हलाल है के उन्हें तंग करके हमसे महर का कुछ हिसा उधार लेने की कोशिश करो जो तुम उन्हें दे चुके हो। हां अगर वो किसी सारी हद-चलनी की मुर्तकीब है (तो जरूर तुम्हें तंग करने का हक है)। उनके साथ भले तरीक़े से ज़िंदगी बसर करो, अगर वो तुम्हें ना पसंद हो तो हो सकता है कि एक चीज़ तुम्हें पसंद ना हो मगर अल्लाह ने उसमें बहुत कुछ भलाई रख दी हो 
+[4:20] और अगर तुम एक बीवी की जगह दूसरी बीवी ले आने का इरादा ही करलो तो ख्वाह तुमने उसे ढेर सा माल ही क्यों ना दिया हो, उसमें से कुछ वापस ना लेना, क्या तुम उसे बहुत ज्यादा लगा कर और सारे ज़ुल्म करके वापस लोगे 
+[4:21] और आख़िर तुम उसे किस तरह ले लोगे जबके तुम एक दूसरे से लुत्फ़-अंदोज़ हो चुके हो और वो तुमसे पुख़्ता अहद ले चुकी हैं 
+[4:22] और जिन औरतों से तुम्हारे बाप निकाह कर चुके हैं, उनसे हरगिज़ निकाह ना करो, मगर जो पहले हो चूका सो हो चुका। दार-हकीकत ये एक बेहाय का फेल (काम) है, नपसंददा है और बुरा चलन है 
+[4:23] तुम पर हराम की गई तुम्हारी मांएं, बेटियां, बहनें, फुपियां, खलाएं, भतीजियां, भंजियां और तुम्हारी वो मांएं जिन्हों ने तुमको दूध पिलाया हो, और तुम्हारी दूध शरीक बहनें, और तुम्हारी बीवियों की मायें, और तुम्हारी बीवियों की लड़कियाँ जिन्हों ने तुम्हारी गोदों में परवरिश पाई है, उन बीवियों की लड़कियाँ जिनसे तुम्हारा तालुक ज़ान ओ शॉ (अंतरंग संबंध) हो चुक्का हो वरना अगर (सिर्फ निकाह हुआ हो और) तालुक ए ज़ान ओ शॉ (अंतरंग संबंध) ना हुआ हो तो (उन्हें छोड़ कर उनकी लड़कियों से निकाह करने में) तुम्पर कोई मवाज़ख्ज़ा नहीं है, और तुम्हारे उन बेटों की बियाएं जो तुम्हारी हल्ब से पैदा हुईं (तुम्हारे दिलों से निकली) और ये भी तुम्पर हराम किया गया है के निकाह में दो बेहोन को जमा करो, मगर जो पहले हो गया सो हो गया, अल्लाह बक्शने वाला और रहम करने वाला है 
+[4:24] और वो औरतें भी तुमपर हराम हैं जो किसी दूसरे के निकाह में हो (मोहसिनात) अलबत्ता ऐसी औरतें इसे मुस्तसना हैं जो (जंग में) तुम्हारे हाथ आएं। ये अल्लाह का कानून है जिसकी पाबंदी तुमपर लाज़िम कर दी गई है। इनके माँ-सिवा जितनी औरतें हैं उन्हें अपने अमवाल के ज़रिये से हासिल करना तुम्हारे लिए हलाल कर दिया गया है, बशारत ये के हिसार निकाह में उनको महफ़ूज़ करो, ना ये के आज़ाद शेहवत रानी (वासना की संतुष्टि) करने लगो, फिर जो इज़्ज़वाजी जिंदगी का लुत्फ़ तुम उन्हें उठाओ उसके बदले उनके मेहर बटोअर फ़र्ज़ अदा करो। अलबत्ता महर की करारादाद हो जाने के बाद आपस की रजामंडी से तुम्हारे दरमियान अगर कोई समझा हो जाए तो इसमें कोई हराज नहीं। अल्लाह अलीम और दाना (बुद्धिमान) है
+[4:25] और जो शक्स तुम में से इतनी मक़दरत न रखता हो के खानदानी मुसलमान औरतों (मोहसिनात) से निकाह कर सके उसे चाहिए के तुम्हारी उन लड़कियों में से किसी के साथ निकाह करले जो तुम्हारे क़ब्ज़े में माननीय और मोमिना हों। अल्लाह तुम्हारे ईमानो का हाल खूब जानता है। तुम सब एक ही गिरोह के लोग हो, लिहाजा उनके सरपरस्तों (गुराडियंस) की इजाजत से उनके साथ निकाह करलो और मारूफ तारीख से उनके मेहर अदा करदो, ता-के वो हिसार ए निकाह में महफूज (मोहसेनात) होकर रह रहे हैं, आजाद शेखवत-रानी करती फिरें और ना चोरी छिपे आशनाइयां करें(गुप्त प्रेम प्रसंग)। फिर जब वह हिसार ए निकाह में महफूज हो जाए और उसके बाद किसी की बद-चलनी की मुर्तकीब हो तो उस पर उस सजा की बा-निस्बत आधी सजा है जो खानदानी औरतों (मोहसिनात) के लिए मुकर्रर है। ये सहुलत तुम में से उन लोगों के लिए भुगतान की गई है जिनको शादी ना करने से बंद-ए-तकवा के टूट जाने का अंदेशा हो। लेकिन अगर तुम सब्र करो तो ये तुम्हारे लिए बेहतर है। और अल्लाह बख्शने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[4:26] अल्लाह चाहता है कि तुम उन तरीक़ों को वाज़ेह करे और उन्ही तरीक़ों पर तुम्हें चलाये जिनकी जोड़ी तुमसे पहले गुज़रे हुए सुलह (धर्मी) करते थे। वो अपनी रहमत के साथ तुम्हारी तरफ मुतवज्जे होने का इरादा रखता है। और वो अलीम भी है और दाना भी 
+[4:27] हां, अल्लाह तो तुमपर रहमत के साथ तवज्जु करना चाहता है मगर जो लोग खुद अपनी ख्वाहिशत ए नफ्स की जोड़ी बना रहे हैं वो चाहते हैं के तुम राह ए रास्ते से हट कर दूर निकल जाओ 
+[4:28] अल्लाह तुमपर से पाबंदियां को हल्का करना चाहता है क्योंकि इंसान कर्ज चुकाया गया है 
+[4:29] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, आपस में एक दूसरे के माल बातिल तारीखों से ना खाओ, लें देइन होना चाहिए आपस की रजामंडी से और अपने आप को कत्ल ना करो यकीन मानो के अल्लाह तुम्हारे ऊपर मेहरबान है 
+[4:30] जो शक्स ज़ुल्म और ज़्यादा के साथ ऐसा करेगा उसको हम ज़रूर आग में झोंकेंगे और ये अल्लाह के लिए कोई मुश्किल काम नहीं है 
+[4:31] अगर तुम उन बदे गुनाहों से परहेज़ करते रहो जिनसे तुम मन किया जा रहा है तो तुम्हारी छोटी मोटी बुराइयों को हम तुम्हारे हिसाब से साबित कर देंगे और तुमको इज्जत की जगह दाख़िल करेंगे 
+[4:32] और जो कुछ अल्लाह ने तुम में से किसी को दूसरे के मुकाबले में ज्यादा दिया है उसकी तमन्ना ना करो। जो कुछ मर्दों ने कमाया है उसे मुताबिक़ उनका हिसा है और जो कुछ औरतों ने कमाया है उसे मुताबिक़ उनका हिसा। हां अल्लाह से उसके फजल की दुआ मांगते रहो। यकीनन अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है 
+[4:33] और हमने हर हमसे तर्के (विरासत) के हक़दार मुक़र्रर करदी हैं जो वाल्दैन और रिश्तेदार छोड़ें, अब रहे वो लोग जिनसे तुम्हारे अहद ओ पैमान हों तो उनका हिसा उन्हें दो। यकीनन अल्लाह हर चीज़ पर निगरान है
+[4:34] मर्द औरतों पर कव्वाम (रक्षक और रखवाले) हैं, इस बिना पर के अल्लाह ने उनमें से एक को दूसरे पर फजीलत दी है, और इस बिना पर के मर्द अपने माल खर्च करते हैं। पास जो साले औरतें हैं वो इताअत शिया (आज्ञाकारी) होती हैं और मर्दों के पीछे अल्लाह की हिफ़ाज़त ओ निगरानी में उनके हुकूक़ की हिफ़ाज़त करती हैं। और जिन औरतों से तुम सरकशी का अंदेशा हो उन्हें समझाओ, ख्वाबगाहों में (बिस्तरों में) उन्हें अलहेदा (अलग) रहो और मारो, फिर अगर वो तुम्हारी मुती (आज्ञाकारी) हो जाए तो ख्वा मा ख्वा अनपर दस्त दार्जी केलिए बहाने तलाश (नुकसान पहुंचाने के तरीके ढूंढो) ना करो। यकीन रक्खो के ऊपर अल्लाह मौजूद है जो बड़ा और महान है 
+[4:35] और अगर तुम लोगों को कहीं मिया और बीवी के तालुक्कत बिगाद जाने का अंदेशा हो तो एक हकम (मध्यस्थ) मर्द के रिश्तेदारों में से और एक औरत के रिश्तेदारों में से मुकर्रर करो। वो दोनों इस्लाह करना चाहेंगे अल्लाह के लिए उनके दरमियान मुवाफिकत की सूरत निकल देगा। अल्लाह सब कुछ जानता है और बाख़बर है 
+[4:36] और तुम सब अल्लाह की बंदगी करो, उसके साथ किसी को शरीक न बनाओ, माँ बाप के साथ नीक बरताओ करो, क़राबतदारों (रिश्तेदारों) और यतीमों और मिस्कीनो के साथ हुस्न ए सुलूक से पेश आओ, और पड़ोसि रिश्तेदार से, अजनबी हमसाए (पड़ोसी) से, पहलू के साथी (अपनी तरफ से साथी) और मुसाफिर से, और उन लौंडी गुलामों से जो तुम्हारे क़ब्ज़े में हो, एहसान का मामला रखो, यकीन जानो अल्लाह किसी ऐसे शक्स को पसंद नहीं करता जो अपने पिंडार में मगरूर हो और अपनी बदाई पर फक्र करे (अभिमानी और घमंडी) 
+[4:37] और ऐसे लोग भी अल्लाह को पसंद नहीं हैं जो कंजूसी करते हैं और दूसरों को भी हिदायत करते हैं, और जो कुछ अल्लाह ने अपने फज़ल से उन्हें दिया है उसे छुपाते हैं। ऐसे काफ़िर-ए-नियामत लोगों के लिए हमने रुसवा-कुन अज़ाब मुहैय्या कर रखा है 
+[4:38] और वो लोग भी अल्लाह को ना-पसंद हैं जो अपने माल महज़ लोगों को दिखाने के लिए खर्च करते हैं और दर हकीकत ना अल्लाह पर ईमान रखते हैं ना रोज़ ए आख़िर पर, सच ये है के शैतान जिसका रफीक (साथी) हुआ उसे बहुत ही बुरी रफाकत मुयस्सर आई 
+[4:39] आखिर लोगों पर क्या आफत आ जाती अगर ये अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान रखते और जो कुछ अल्लाह ने दिया है उसमें से खर्च करते? अगर ये ऐसा करता तो अल्लाह से इनकी नेकी का हाल छुपा न रह जाता 
+[4:40] अल्लाह किसी पर जरा बराबर भी जुल्म नहीं करता, अगर कोई एक नेकी करे तो अल्लाह उसे दो चांद करता है और फिर अपनी तरफ से बड़ा अजर अता फरमाता है 
+[4:41] फिर सोचो के हमें वक्त ये क्या करेंगे जब हम हर उम्मत में से एक गवाह लाएंगे और लोगों पर तुम्हारे साथ [यानी मुहम्मद (सस) को] गवाह की हैसियत से खड़ा करेंगे 
+[4:42] हमें वक्त वो सब लोग जिन्हों ने रसूल की बात न मानी और उसकी नफ़रमानी करते रहेंगे, तमन्ना करेंगे के काश ज़मीन फट जाए और वो इस में समा जाए, वहां ये अपनी कोई बात अल्लाह से ना छुपाएंगे
+[4:43] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम नशे की हालत में हो तो नमाज के करीब ना जाओ, नमाज हमें वक्त पढ़ना चाहिए जब तुम जानो के क्या कह रहे हो, और इसी तरह जनाब की हालत में भी नमाज के करीब ना जाओ, जब तक के ग़ुस्ल ना करो, इल्ला ये के रास्ते से गुज़रते हो. और अगर कभी ऐसा हो कि तुम बीमार हो, या सफर में हो, या तुम में से कोई शक्स रफे खतरे में डालकर आये, या तुमने औरतों से अंतरंग संबंध बनाया हो, और फिर पानी ना मिले तो पाक मिट्टी से काम लो और इसे अपने चेहरों और हाथों पर मसला करो। बेशक अल्लाह नरमी से काम लेने वाला और बख्शीश फरमाने वाला है 
+[4:44] तुमने उन लोगों को भी देखा जिन्होंने किताब के इल्म का कुछ हिसाब दिया है? वो खुद जलालत के खरीदार बने (खुद के लिए खरीदी गई त्रुटि) हैं और चाहते हैं के तुम भी राह गम करदो 
+[4:45] अल्लाह तुम्हारे दुश्मनों को खूब जानता है और तुम्हारी हिमायत ओ मददगार के लिए अल्लाह ही काफी है 
+[4:46] जो लोग यहुदी बन गए हैं उनमें कुछ लोग हैं जो अल्फ़ाज़ को उनके महल से फेर देते हैं और दीन ए हक़ के ख़िलाफ नेश-ज़ानी (शब्दों को उनके संदर्भ से बदलें) करने के लिए अपनी ज़ुबानो को तोड़ मोड़ कर कहते हैं 'समीना वा असयना' (हमने सुना है और हमने अवज्ञा की है) और 'इस्मा ग़ैर मुस्मा' (हमें ज़रूर सुनें, कहीं आप गूंगे न हो जाएं) और 'रैना' (सुनें हम)। हालंके अगर वो कहते 'समीना वा अताना' (हमने सुना है और हम मानते हैं), और इस्मा और अनज़ुर्ना [हमारी बात जरूर सुनें, और हमारी तरफ देखें (दया के साथ)] तो ये उनके लिए बेहतर था और ज्यादा रस्तबाजी का तरीका था। मगर उन पर उनकी बातिल परस्ती की बदौलत अल्लाह की फिटकर पड़ी हुई है उसके लिए वो कम ही ईमान लाते हैं 
+[4:47] ऐ वो लोगन जिनहेन किताब दी गई थी! मान लो उस किताब को जो हमने अब नाज़िल की है और जो उस किताब की तस्दीक या तय करती है जो तुम्हारे पास पहले से मौजुद थी। इसपर ईमान ले आओ क़ब्ल इसके के हम चेरे बिगाड कर पीछे फेर दें या उनको उसी तरह लानत जदा करदें जिस तरह सब्त (सब्बाथ) वालों के साथ हमने किया था, और याद रक्खो के अल्लाह का हुकुम नफीज होकर रहता है 
+[4:48] अल्लाह बस शिर्क ही को माफ नहीं कर्ता, इसके मा-सिवा दूसरे जिस कदर गुनाह हैं वो जिसके लिए चाहता है माफ करता है। अल्लाह के साथ जिसने और को शरीक ठहरया उसने तो बहुत ही बड़ा झूठ तसनीफ किया और बदले में गुनाह की बात की 
+[4:49] तुमने उन लोगों को भी देखा जो बहुत अपनी पाकीज़गी ए नफ़्स का दम भरते (जो अपनी धार्मिकता का घमंड करते हैं) हैं? हलांके पाकीजगी तो अल्लाह ही जिसे चाहता है अता करता है, और (उन्हें जो पाकीजगी नहीं मिलती तो डर हकीकत) उन्पर जरा बराबर भी ज़ुल्म नहीं किया जाता 
+[4:50] देखो तो सही, ये अल्लाह पर भी झूठे इफ्तारा गढ़ने से (झूठ गढ़ना) नहीं छोड़ते और इनके सरीहन गुनाहगार होने के लिए यही एक गुनाह काफी है
+[4:51] क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिन्होंने किताब के इल्म में से कुछ हिसा दिया है, और उनका हाल ये है के जिब्थ (निराधार अंधविश्वास) और तागुथ (झूठे आहार) को मानते हैं और काफिरों के मुतल्लिक कहते हैं के ईमान लाने वालों से तो यही ज्यादा सही रास्ते पर हैं 
+[4:52] ऐसे भी लोग हैं जिनपर अल्लाह ने लानत की है, और जिसपर अल्लाह लानत करदे फिर तुम उसका कोई मददगार नहीं पाओगे 
+[4:53] क्या हुकूमत में उनका कोई हिसा है? अगर ऐसा होता तो ये दुसरों को एक फूटी कौड़ी तक न दे देते 
+[4:54] फिर क्या ये दुसरों से इस लिए हसद करते हैं के अल्लाह ने उन्हें अपने फज़ल से नवाज दिया? अगर ये बात है तो उन्हें मालूम हो के हमने तो इब्राहिम की औलाद को किताब और हिकमत अता की और मुल्क ए अजीम बख्श दिया 
+[4:55] मगर उनमें से कोई उसपर ईमान लाया और कोई उसे मुंह मोड़ गया, और मुंह मोड़ने वालों के लिए तो बस जहन्नुम की भड़कती हुई आग ही काफी है 
+[4:56] जिन लोगों ने हमारी आयत को मन्ने से इंकार कर दिया है उन्हें बिल-यकीन हम आग में झोंकेंगे, और जब उनके बदन की खल (त्वचा) गल जाएगी (भुन जाएगी) तो उसकी जगह दूसरी खल पेदा करदेंगे ता-के वो खूब अज़ाब का मजा चखें। अल्लाह बड़ी क़ुदरत रखता है और अपने फ़ैसलों को अमल में लाने की हिकमत ख़ूब जानता है 
+[4:57] और जिन लोगों ने हमारी आयतों को मान लिया और नेक अमल किये उनको हम ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेंगे जिनका आला नेहरेन बहती होगी, जहां वो हमेशा हमेशा रहेंगे और उनको पाकीजा बिवियां मिलेंगी और उन्हें हम घनी छांव (छाया) में रखेंगे 
+[4:58] मुसलमानो! अल्लाह तुम्हें हुकुम देता है के अमानतें एहले अमानत के सुपुर्द करदो, और जब लोगों के दरमियान फैसला करो तो अदल के साथ करो। अल्लाह तुमको निहायत उमराह हिदायत करता है और यकीनन अल्लाह सब कुछ सुनता और देखता है 
+[4:59] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, इत्तला करो अल्लाह की और इताअत करो रसूल की और उन लोगों की जो तुम में से साहब ए अम्र हो, फिर अगर तुम्हारे दरमियान किसी मामले में निज़ा (विवाद/मतभेद) हो जाए तो उसे अल्लाह और रसूल की तरफ, फेर दो अगर तुम वक़ाई अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखते हो। यही एक सही तारीख़ है और अंजाम के ऐतबार से भी बेहतर है 
+[4:60] ऐ नबी! तुमने देखा नहीं उन लोगों को जो दावा तो करते हैं के हम ईमान लाए हैं उस किताब पर जो तुम्हारी तरफ नाज़िल की गई है और उन किताबों पर जो तुमसे पहले नाज़िल की गई थी, मगर चाहते हैं के अपने मामले का फैसला करने के लिए तघुत की तरफ रूजू करें, हलांके उन्हें टैगहुट से कुफ्र करने का हुकुम दिया गया था। शैतान उन्हें भटका कर राह ए रास्ते से बहुत दूर ले जाना चाहता है 
+[4:61] और जब उन्हें कहा जाता है कि आओ हमें चीज की तरफ से अल्लाह ने नाज़िल किया है और आओ रसूल की तरफ से मुनाफिकों को तुम देखते हो के ये तुम्हारी तरफ आने से कतराते हैं
+[4:62] फिर हमें वक्त क्या होता है जब इनके अपने हाथों की लाई हुई मुसीबत इनपर आ पढ़ती है? हमें वक्त ये तुम्हारे पास कसमें खाते हुए आते हैं और कहते हैं के खुदा की कसम हम तो सिर्फ भलाई चाहते थे और हमारी तो नियत ये थी के फरीक़ैन (दो पक्ष) 
+[4:63] अल्लाह जानता है जो कुछ उनके दिलों में है, उन्हें तारुज़ मत करो (उन्हें अकेला छोड़ दो), उन्हें समझाओ और ऐसी हिदायत करो जो उनके दिलों में उतर जाए 
+[4:64] (उन्हें बताओ के) हमने जो रसूल भी भेजा है इसी के लिए भेजा है के इज़्न ए खुदावंदी (अल्लाह की इजाजत से) कि बिना पर उसकी इताअत की जाए, अगर उन्हें ये तारीख इख्तियार किया होता के जब ये अपने नफ़्स पर ज़ुल्म कर बैठे थे तो तुम्हारे पास आ जाते थे और अल्लाह से माफ़ी मांगते थे, और रसूल भी उनके लिए माफ़ी की अंधेरगर्दी करता था, तो यकीनन अल्लाह को बख्शने वाला और रहम करने वाला पाते 
+[4:65] नहीं, (ऐ मुहम्मद) तुम्हारे रब की कसम ये कभी मोमिन नहीं हो सकता जब तक के अपनी बहामी इख्तिलाफात में ये तुमको फैसला करने वाला ना मान लें, फिर जो कुछ तुम फैसला करो उसपर अपने दिलों में भी कोई तंगी ना महसूस करें, बलके सर बा सर तसलीम कार्लें 
+[4:66] अगर हमने इन्हें हुकुम दिया होता है के अपने आप को हलाक करदो या अपने घर से निकल जाओ तो इनमें से कम ही आदमी इसपर अमल करते हैं, हलांके जो हिदायत इन्हें की जाती है, अगर ये इसपर अमल करते तो ये इनके लिए ज्यादा बेहतरी और ज्यादा साबित कादमी का मौजब होता 
+[4:67] और जब ये ऐसा करते हैं तो हम इनमें अपनी तरफ से बहुत बड़ा अजर देते हैं 
+[4:68] और इन्हें सीधा रास्ता दिखाते हैं 
+[4:69] जो अल्लाह और रसूल की इबादत करेगा वो उन लोगों के साथ होगा जिनपर अल्लाह ने इनाम फरमाया है, यानी अंबिया, और सिद्दीकीन और शुहदा और सालिहें, कैसे अच्छे हैं ये रफीक जो किसी को मुयस्सर आए 
+[4:70] ये हकीकत फजल है जो अल्लाह की तरफ से मिलता है और हकीकत जाने के लिए बस अल्लाह ही का इल्म काफी है 
+[4:71] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, मुकाबला के लिए हर वक़्त तय्यार रहो, फिर जैसा मौका हो अलग अलग दास्तान (समूहों) की शक्ल में निकलो या इकत्थे होकर 
+[4:72] हां, तुम में कोई आदमी ऐसा भी है जो लड़ाई से जीता है, अगर तुमपर कोई मुसीबत आए तो कहता है कि अल्लाह ने मुझपर बड़ा फ़ज़ल किया के मुख्य इन लोगों के साथ ना गया 
+[4:73] और अगर अल्लाह की तरफ से तुम्पर फ़ज़ल हो तो कहता है और इस तरह कहता है कि गोया तुम्हारे और उसके दरमियान मुहब्बत का तो कोई तालुक़ था ही नहीं के काश मैं भी इनके साथ होता तो बड़ा काम बन जाता 
+[4:74] (ऐसे लोगों को मालूम हो के) अल्लाह कि राह में लड़ना चाहिए उन लोगों को जो आख़िरत के बदले दुनिया की ज़िंदगी से फ़र्क दिलाएं, फिर जो अल्लाह की राह में लड़ेगा और मारा जाएगा या ग़ालिब रहेगा उसे ज़रूर हम अजर ए अज़ीम अता करेंगे
+[4:75] आख़िर क्या वजह है कि तुम अल्लाह की राह में उन बे-बस मर्दों, औरतों और बच्चों की खातिर ना लड़ो जो कमज़ार पाकर दबा लिए गए हैं और फरियाद कर रहे हैं के खुदाया हमको इस बस्ती से निकल जिसका बाशिंदा जालिम हैं और अपनी तरफ से हमारा कोई हमी ओ मददगार पैदा करदे 
+[4:76] जिन लोगों ने ईमान का रास्ता इख्तियार किया है, वो अल्लाह की राह में लड़ते हैं और जिन्होन ने कुफ्र का रास्ता इख्तियार किया है, वो तागुत की राह में लड़ते हैं, पास शैतान के साथियों से लड़ो और यकीन जानो के शैतान की चालें हकीकत में निहायत कमज़ार हैं 
+[4:77] तुमने उन लोगों को भी देखा जिनसे कहा गया था कि अपने हाथ रोके रखो और नमाज़ क़याम करो और ज़कात दो? अब जो उन्होंने लड़ाई का हुकुम दिया है तो उनमें से एक फरीक का हाल ये है के लोगों से ऐसा डर रहे हैं जैसा खुदा से डरना चाहिए या कुछ इस तरह भी बढ़कर। कहते हैं खुदाया! ये हमपर लड़ै का हुकुम क्यों लिख दिया? क्यों ना हमें अभी कुछ और मोहलत दी? उनसे कहो, दुनिया का सरमाया ए जिंदगी थोड़ी है, और आखिरी एक खुदा-तर्स इंसान के लिए ज्यादा बेहतर है, और तुमपर जुल्म एक शम्मा (खजूर की भूसी) बराबर भी बा किया जाएगा 
+[4:78] राही मौत, तो जहां भी तुम हो वो बाहर हाल तुम्हें आकार रहेगी ख्वा तुम कैसी ही मजबूत इमारत में हो, अगर उन्हें कोई फ़ायदा मिलता है तो कहते हैं ये अल्लाह की तरफ से है, और अगर कोई नुक्सान पहनता है तो कहते हैं ये तुम्हारी बदौलत है। कहो, सब कुछ अल्लाह ही की तरफ से है, आख़िर लोगों को क्या हो गया है कि कोई बात इनकी समझ में नहीं आती 
+[4:79] ऐ इंसान! तुझे जो भलाई भी हासिल होती है अल्लाह की इनायत से होती है, और जो मुसीबत तुझपर आती है वो तेरे अपने क़स्ब ओ अमल की बदौलत है। (ऐ मुहम्मद) हमने तुमको लोगों के लिए रसूल बना कर भेजा है और इसपर खुदा की गवाही काफी है 
+[4:80] जिसने रसूल की इत्ता की हमें दर-असल खुदा की इताअत की और जो मुंह मोड़ गया, तो बहार हाल हमने तुम्हें इन लोगों पर पासबान (रक्षक/अभिभावक) बना कर तो नहीं भेजा है 
+[4:81] वो मुहं पर कहते हैं के हम मुती ए फरमान हैं मगर जब तुम्हारे पास से निकलते हैं तो उनमें से एक गिरह रातों को जमा होकर तुम्हारी बातों के खिलाफ मशवरे करता है। अल्लाह उनकी ये सारी सरकशियां लिख रहा है, तुम उनकी परवा न करो और अल्लाह पर भरोसा रखो, वही भरोसे के लिए काफी है 
+[4:82] क्या ये लोग कुरान पर गौर नहीं करते? अगर ये अल्लाह के सिवा किसी और की तरफ से होता तो इसमे बहुत कुछ इख्तिलाफ बयानी पाई जाती
+[4:83] ये लोग जहां कोई इत्मिनान बख्श या खौफनाक खबर सुन पाते हैं उसे लेकर फैला देते हैं, हलांके अगर ये उसे रसूल और अपनी जमात के जिम्मेदार असहाब तक पहुंचाएं तो वो ऐसे लोगों के इल्म में आ जाए जो इनके दरमियान इस बात की सलाह है रखते हैं के इसे सही नतीजा आख़ज़ कर सकें। तुम लोगों पर अल्लाह की मेहरबानी और रहमत न होती तो (तुम्हारी कमजोरियां ऐसी थी के) मदूद ए चांद (आप में से कुछ) के सिवा तुम सब शैतान के पीछे लग गए होते 
+[4:84] (पस ऐ नबी) तुम अल्लाह की राह में लड्डू (लड़ाई), तुम अपनी जात के सिवा किसी और के ज़िम्मेदार नहीं हो, अलबत्ता एहले ईमान को लड़ने के लिए उक्साओ, बैद नहीं के अल्लाह काफ़िरों का ज़ोर तोड़ दे। अल्लाह का ज़ोर सबसे ज़्यादा ज़बरदस्त और उसकी सज़ा सबसे ज़्यादा सख्त है 
+[4:85] जो भलाई की सिफ़ारिश करेगा वो उसमें से हिसा पाएगा और जो बुराई की सिफ़ारिश करेगा वो उसमें से हिसा पाएगा, और अल्लाह हर चीज़ पर नज़र रखने वाला है 
+[4:86] और जब कोई एहतराम के साथ तुम्हें सलाम करे तो उसको हमसे बेहतर तारीख के साथ जवाब दो या कम-अज़-कम उसी तरह, अल्लाह हर चीज का हिसाब लेने वाला है 
+[4:87] अल्लाह वो है जिसके सिवा कोई खुदा नहीं है, वो तुम सबको कयामत के दिन जमा करेगा जिसको आने दो मुझमें कोई शुभा (संदेह) नहीं, और अल्लाह की बात से बढ़कर सच्ची बात और कौन हो सकती है 
+[4:88] फिर ये तुम्हें क्या हो गया है के मुनाफिकीन के बारे में तुम्हारे दरमियान दो रायें (राय) पाई जाती हैं, हालंके जो बुराइयां उनको ने कमायी हैं उनकी बदौलत अल्लाह उन्हें उल्टा फेर चुका है। क्या तुम चाहते हो कि जिसे अल्लाह ने हिदायत नहीं बख्शी उसे तुम हिदायत बख्श दो? हलांके जिसको अल्लाह ने रास्ते से हटा दिया उसके लिए तुम कोई रास्ता नहीं पा सकते 
+[4:89] वो तो ये चाहते हैं के जिस तरह वो खुद काफिर हैं इसी तरह तुम भी काफिर हो जाओ, ता-के वो सब यक्सन हो जाएं। लिहाजा उनमें से किसी को अपना दोस्त न बनाओ जब तक के वो अल्लाह की राह में हिजरत करके न आ जाए, और अगर वो हिजरत से बाज़ रहे तो जहां पाओ उन्हें पकड़ो और कत्ल करो और उनमें से किसी को अपना दोस्त और मददगार न बनाओ 
+[4:90] अलबत्ता वो मुनाफिक है हुकुम से मुस्तसना (अपवाद) हैं जो किसी ऐसी क़ौम से जा मिलें जिसके साथ तुम्हारा मुहैदा (संविदा) है, इसी तरह वो मुनाफिक भी मुस्तसना हैं जो तुम्हारे पास आते हैं और लड़यी से दिल बर्दाश्त हैं (उनके दिल लड़ने से कतराते हैं), ना तुमसे लड़ना चाहते हैं ना अपनी क़ौम से. अल्लाह चाहता है तो उनको तुम मुसल्लत करदे और वो भी तुमसे लड़े, अगर वो तुमसे किनारा कश हो जाए और लड़ने से बाज रहे और तुम्हारी तरफ सुलह ओ अष्टी का हाथ बदाएं अल्लाह ने तुम्हारे लिए उनपर दस्तूर दर्जी की कोई सबील नहीं रखी है
+[4:91] एक और क़िस्म के मुनाफ़िक तुम्हें ऐसे मिलेंगे जो चाहते हैं कि तुमसे भी अमन में रहें और अपनी क़ौम से भी, मगर जब कभी फ़ितने का मौक़ा पाएंगे उसमें कूद पड़ेंगे। ऐसे लोग अगर तुम्हारे मुकाबले से बाज ना रहें और सुलह ओ सलामती तुम्हारे आगे पेश ना करें और अपने हाथ ना रोकें तो जहां वो मिले उन्हें पकड़ो और मारो, उन्पर हाथ उठाने के लिए हमने तुम्हें खुली हुज्जत दे दी है 
+[4:92] किसी मोमिन का ये काम नहीं है के दूसरे मोमिन को क़त्ल करे, इल्ला ये के उसे छोड़ दे, और जो शक्स किसी मोमिन को गलती से क़त्ल करदे तो उसका कफ़्फ़ारा ये है के एक मोमिन को गुलामी से आज़ाद करे और मक़तूल के वारिसों को खून बहा (खून-पैसा) दे, इल्ला ये के वो खून-बहा माफ करदें। लेकिन अगर वो मुसलमान मकतूल ​​किसी ऐसी क़ौम से था जिसकी तुम्हारी दुश्मनी हो तो उसका कफ़्फ़ारा एक मोमिन गुलाम आज़ाद करना है और अगर वो किसी ऐसी गैर मुस्लिम क़ौम का फ़र्द था जिसकी तुम्हारी दुश्मनी हो तो उसके वारिसों को ख़ून-बहा (खून-पैसा) दिया जाएगा और एक मोमिन गुलाम को आज़ाद करना होगा। फिर जो गुलाम ना पाए वो पै डर पै दो माहीने के रोज़ रख्खे। ये गुनाह है पर अल्लाह से तौबा करने का तरीका है। और अल्लाह आलिम ओ दाना है 
+[4:93] रहा वो शक्स जो किसी मोमिन को जान बूझ कर कत्ल करे तो उसकी जजा जहन्नुम है जिसमें वो हमेशा रहेगा। उसपर अल्लाह का ग़ज़ब और उसकी लानत है और अल्लाह ने उसके लिए सख़्त अज़ाब मुहैय्या कर रखा है 
+[4:94] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, जब तुम अल्लाह की राह में जिहाद के लिए निकलो तो दोस्त दुश्मन में तमीज़ करो और जो तुम्हारी तरफ सलाम से तकदीम शांति) करे उसे फ़वारान न कहदो के तू मोमिन नहीं है, अगर तुम दुनियावी फ़ायदा चाहते हो तो अल्लाह के पास तुम्हारे लिए बहुत से अमल ए गनीमत है। आख़िर इसी हालात में तुम खुद भी तो इसे पहले मुबतला रह चुके हो, फिर अल्लाह ने तुमपर एहसान किया। लिहाजा तहकीक से काम लो. जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बख़बर है 
+[4:95] मुसलमानों में से वो लोग जो किसी मजूरी (अक्षम चोट) के बिना घर बैठे रहते हैं और वो जो अल्लाह की राह में जान ओ माल से जिहाद करते हैं दोनों की हैसियत यक्सान नहीं है। अल्लाह ने बैठने वालों की बा निस्बत जान ओ माल से जिहाद करने वालों का दरजा बड़ा रक्खा है, अगर हर एक के लिए अल्लाह ने भलाई का वादा फरमाया है, मगर उसके हां मुजाहिदों की खिदमत का मुआवजा बैठने वालों से बहुत ज्यादा है 
+[4:96] उनके लिए अल्लाह की तरफ से बड़े दर्जे हैं और मगफिरत और रहमत है, और अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[4:97] जो लोग अपने नफ़्स पर ज़ुल्म कर रहे थे उनकी रूहें जब फ़रिश्तों ने क़ब्ज़ की तो उनसे पूछा के ये तुम किस हाल में मुब्तिला थे? उनको ने जवाब दिया के हम ज़मीन में कमज़ूर ओ मजबूर थे, फ़रिश्तों ने कहा, क्या ख़ुदा की ज़मीन वसीह न थी के तुम हमसे हिजरत करते थे? ये वो लोग हैं जिनका ठिकाना जहन्नुम है और बड़ा ही बुरा ठिकाना है
+[4:98] हां जो मर्द, औरतें और बच्चे हकीकत हैं बेबस हैं और निकलने का कोई रास्ता और जरिया नहीं पाते 
+[4:99] बैद नहीं के अल्लाह उन्हें माफ करदे, अल्लाह बड़ा माफ करने वाला और दरगुजर फरमाने वाला है 
+[4:100] जो कोई अल्लाह की राह में हिजरत करेगा वो ज़मीन में पनाह लेने के लिए बहुत जगह और बसर अवकत के लिए बड़ी गुंजाईश पाएगा, और जो अपने घर से अल्लाह और रसूल की तरफ हिजरत के लिए निकले, फिर रास्ते ही में उसकी मौत आ जाए उसका अजर अल्लाह के ज़िम्मे वाजिब हो गया। अल्लाह बहुत बख्शीश फ़रमाने वाला और रहीम है 
+[4:101] और जब तुम लोग सफ़र के लिए निकलो तो कोई मुज़ैका (दोष) नहीं, अगर नमाज़ में इख्तेसर (छोटा) करदो (ख़ुसुसान) जबके तुम्हीं अंदेशा हो के काफ़िर तुम्हीं सताएंगे क्योंके वो खुल्लम खुल्ला तुम्हारी दुश्मनी पर तूले हुए हैं 
+[4:102] और (ऐ नबी)! जब तुम मुसलमानों के दरमियान हो और (हालत ए जंग में) उन्हें नमाज़ पढाने खड़े हो तो चाहिए के उनमें से एक गिरोह तुम्हारे साथ खड़ा हो और असलहा (हथियार) ले रहे, फिर जब वो सजदा करले तो पीछे चला जाए और दूसरा गिरोह जिसने अभी नमाज नहीं पढ़ी है आकार तुम्हारे साथ पढ़े और वो भी चौकन्ना रहे और अपने असलहा (हथियार) के लिए रहे, क्योंकि कुफ्फार इस ताक में है कि तुम अपने हथियारों और अपने सामान की तरफ से जरा गाफिल हो तो वो तुमपर एक बार ही टूट पड़े। अलबत्ता अगर तुम बारिश की वजह से तकलीफ़ करो या बीमार हो तो असलहा रख देने में कोई मुज़ैका नहीं, मगर फिर भी चौकन्ने रहो, यकीन रखो के अल्लाह ने काफिरों के लिए रुसवा कुन अज़ाब मुहैय्या कर रक्खा है 
+[4:103] फिर जब नमाज से फारिग हो जाओ तो खड़े और बैठे और लेते, हर हाल में अल्लाह को याद करते रहो और जब इत्मीनान नसीब हो जाए तो पूरी नमाज पढ़ो, नमाज दार हकीकत ऐसा फर्ज है जो पाबंदी ए वक्त के साथ एहले ईमान पर लाज़िम किया गया है 
+[4:104] क्या गिरोह के ताक़ुब में है कम्ज़ोरी ना दिखाओ, अगर तुम तकलीफ़ उठा रहे हो तो तुम्हारी तरह वो भी तकलीफ़ उठा रहे हैं और तुम अल्लाह से हमें चीज़ के उम्मीददार हो जिसकी वो उम्मीद नहीं है। अल्लाह सबको जानता है और वो हकीम ओ दाना है 
+[4:105] (ऐ नबी)! हमने ये किताब हक़ के साथ तुम्हारी तरफ नाज़िल की है ता-के जो राह ए रास्ते अल्लाह ने तुम्हें दिखाई है उसके मुताबिक़ लोगों के दरमियान फैसला करो। तुम बद-दयानत (बेईमान) लोगों की तरफ से झगड़ा करने वाले न बनो 
+[4:106] और अल्लाह से दरगुजर (माफी) की अंधेरगर्दी करो, वो बड़ा दरगुजर फरमान वाला और रहीम है 
+[4:107] जो लोग अपने नफ्स से खयानत करते हैं तुम उनकी हिमायत न करो, अल्लाह को ऐसा शक्स पसंद नहीं है जो खयानतकार (जो विश्वास को धोखा देता है) और मासीयत पेशा (पाप में लगा रहता है) हो 
+[4:108] ये लोग इंसानों से अपनी हरकत छुपा सकते हैं, मगर खुदा से नहीं छुपा सकते, वो तो हमें वक्त भी उनके साथ होता है जब ये रातों को चुपकर उसकी मर्जी के खिलाफ मैशवेयर करते हैं, इनके सारे अमल पर अल्लाह मुहीत है
+[4:109] हान! तुम लोगों ने मुजरिमों की तरफ से दुनिया की जिंदगी में तो झगड़ा किया, मगर कयामत के रोज इनकी तरफ से कौन झगड़ा करेगा? आखिर वहां कौन इनका वकील होगा 
+[4:110] अगर कोई शक्स बुरा फेल (अमल) कर गुजरे या अपने नफ्स पर जुल्म कर जाए और इसके बाद अल्लाह से दरगुजर (माफी) की अंधेरगर्दी करे तो अल्लाह को दरगुजर (माफ) करने वाला और रहीम पाएगा 
+[4:111] मगर जो बुराई कमा ले तो उसकी ये कमाई उसके लिए बढ़िया होगी। अल्लाह को सब बातों की खबर है और वह हकीम ओ दाना है 
+[4:112] फिर जिसने कोई खता या गुनाह करके उसका ज़म (दोष) किसी बे-गुनाह पर थोप दिया उसने तो बदाए बोहतान और सारे गुनाह का बार समान लिया 
+[4:113] (ऐ नबी)! अगर अल्लाह का फ़ज़ल तुंपार न होता और उसकी रहमत तुम्हारे शामिल ए हाल न होती तो उनमें से एक गिरो ​​ने तो तुम्हें ग़लत फ़हमी में मुब्तिला करने का फैसला कर ही लिया था, हलांके दर-हक़ीक़त वो खुद अपने सिवा किसी को ग़लत फ़हमी में मुब्तिला नहीं कर रहे थे, और तुम्हारा कोई नुक्सान ना कर सकता था। अल्लाह ने तुमपर किताब और हिकमत नाज़िल की है और तुमको वो कुछ बताया है जो तुम्हें मालूम न था और उसका फ़ज़ल तुमपर बहुत है 
+[4:114] लोगों की खुफिया सरगोशियों (गुप्त वार्ता) में अक्सर ओ बेश्तर कोई भलाई नहीं होती, हां अगर कोई पोशीदा तौर पर सदका ओ खैरात की तालक़ीन करे या किसी नए काम के लिए या लोगों के मामले में इस्लाह करने के लिए किसी से कुछ कहे तो ये अलबत्ता भली बात है। और जो कोई अल्लाह की रजा-जोई के लिए ऐसा करेगा उसे हम बड़ा अजर अता करेंगे 
+[4:115] मगर जो शक्स रसूल की मुखालिफत पर कमर बस्ता हो और एहले ईमान की रवीश के सिवा किसी और रवीश पर चले, डरन हाल ये के उसपर राह ए रस्त वाज़ेह हो चुकी हो, तो उसको हम उसकी तरफ चलाएंगे जिधर वो खुद फिर गया और उसे जहन्नुम में झोंकेंगे जो बदतरीन जाए करार (बुरी मंजिल) है 
+[4:116] अल्लाह के हां बस शिर्क ही कि बख्शीश नहीं है, इसके सिवा और सब कुछ माफ हो सकता है जिसे वो माफ करना चाहे। जिसने अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहरया वो तो गुमराही में बहुत दूर निकल गया 
+[4:117] वो अल्लाह को छोड़ कर देवियों (देवियों) को माबूद बनाते हैं, वो हमें बागी शैतान को माबूद बनाते हैं 
+[4:118] जिसको अल्लाह ने लानत ज्यादा किया है (वो हमें शैतान की इताअत) कर रहे हैं) जिसने अल्लाह से कहा था के “मैं तेरे बंदों से एक मुकर्रर हिसा लेकर रहूंगा 
+[4:119] मैं उन्हें बहकाऊंगा, मैं उन्हें अरज़ूओं (व्यर्थ इच्छाओं) में उलझाऊंगा, मैं उन्हें हुकुम दूंगा और वो मेरे हुकुम से जानवरों के कान फाड़ेंगे और मैं उन्हें हुकुम दूंगा और वो मेरे हुकुम से खुदाई साख्त में रद्द ओ बदल करेंगे।'' हमें शैतान को जिसने अल्लाह के बजाय अपना वाली ओ सरपरस्त बना लिया वो सारे नुक्सान में पढ़ गया 
+[4:120] वो इन लोगों से वादे करता है और यहीं उम्मीदें फैलाती हैं, मगर शैतान के सारे वादे बाज़ु फ़रेब के और कुछ नहीं हैं
+[4:121] इन लोगों का ठिकाना जहन्नुम है जिसमें खलासी (पलायन) की कोई सूरत ये ना पायेगा 
+[4:122] रहे वो लोग जो ईमान ले आयें और नेक अमल करें, तो उन्हें हम ऐसे बाघों में दखल देंगे जिनके बारे में पता चलता है और वो वहां हमेशा हमेशा रहेंगे. ये अल्लाह का सच्चा वादा है और अल्लाह से बढ़कर कौन अपनी बात में सच्चा होगा 
+[4:123] अंजाम-ए- कार ना तुम्हारी आरज़ूओं पर मौक़ुफ़ है न एहले किताब की आरज़ूओं पर। जो भी बुरा करेगा उसका फल पाएगा और अल्लाह के मुकाबले में अपने लिए कोई हमी ओ मददगार न पा सकेगा 
+[4:124] और जो नया अमल करेगा, ख्वा मर्द हो या औरत, बशारत ये के हो वो मोमिन, तो ऐसे ही लोग जन्नत में दाखिल होंगे और उनकी ज़र्रा बराबर हक़ तलाफ़ी ना होने देगी 
+[4:125] हमसे बेहतर और किसका तारीख़े ज़िंदगी हो सकती है जिसने अल्लाह के आगे सर-ए-तस्लीम ख़म करदिया और अपना रवैय्या नीक रक्खा और यक्सू होकर इब्राहिम के तारीख़े की जोड़ी की, उस इब्राहिम के तारीख़े की जिसने अल्लाह ने अपना दोस्त बना लिया था 
+[4:126] आसमान और ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह का है और अल्लाह हर चीज़ पर निर्भर है 
+[4:127] लोग तुमसे औरतों के मामले में फतवा पूछते हैं, कहो अल्लाह तुम्हें उनके मामले में फतवा देता है, और साथ ही वह एहकाम भी याद दिलाता है जो पहले से तुमको इस किताब मैं सुनाए जा रहे हैं, यानी वो एहकाम जो उन यतीम लड़कियों के मुतालिक हैं जिनका हक तुम अदा नहीं करते और जिनका निकाह करने से तुम बाज रहते हो (या लालेज की बिना पर तुम खुद उनसे निकाह करना चाहते हो), और वो एहकाम जो उन बच्चों के मुतालिक हैं जो बेचारे कोई ज़ोर नहीं रखते, अल्लाह तुम्हें हिदायत करता है कि यतीमों के साथ इन्साफ पर कायम रहो, और जो भलाई तुम करोगे वो अल्लाह के इल्म से छुपी न रह जाएगी 
+[4:128] जब किसी औरत को अपने शोहर से बढ़ सुलूकी या रुखी का ख़तरा हो तो कोई मुज़हिक़ा नहीं अगर मिया और बीवी (कुछ हुक़ूक़ की कमी पर) आपस में सुलह कर लें, सुलह बाहर हाल बेहतर है। नफ़्स तंग दिली के तरफ जल्दी मईल हो जाते हैं, लेकिन अगर तुमलोग एहसान से पेश आओ और खुदा तरसी से काम लो तो यकीन रखों के अल्लाह तुम्हारे इस तर्ज़-ए-अमल से बे-खबर न होगी 
+[4:129] बीवीयों के दरमियाँ पूरा-पूरा अदल करना तुम्हारे बस में नहीं है, तुम चाहो भी तो इसपर कादिर नहीं हो सकते, लिहाजा (कानून ए इलाही का इरादा पूरा करने के लिए ये काफी है के) एक बीवी की तरफ इस तरह ना झुक जाओ के दूसरी को अधर लटकता (सस्पेंस में) छोड़ दो। अगर तुम अपना तर्ज़ ए अमल दुरुस्त रखो और अल्लाह से डरते रहो अल्लाह के लिए चश्म पोशी (सर्व-क्षमाशील) करने वाला और रहम फ़रमान वाला है 
+[4:130] लेकिन अगर ज़वजैन एक दूसरे से अलग ही हो जाएं तो अल्लाह अपनी वसीह क़ुदरत से हर एक को दूसरे की मोहताजी से बे नियाज़ करडेगा. अल्लाह का दामन बहुत कुशादा है और वो दाना ओ बीना है
+[4:131] आसमानो और ज़मीन में जो कुछ भी है सब अल्लाह ही का है, तुमसे पहले जिनको हमने किताब दी थी उन्हें भी यहीं हिदायत की थी और अब तुमको भी यही हिदायत करते हैं के खुदा से डरते हुए काम करो, लेकिन अगर तुम नहीं मानते तो ना मानो, आसमान ओ ज़मीन की सारी चीज़ों का मालिक अल्लाह हाय है और वो बेनियाज़ है, हर तारीफ का मुस्तहिक 
+[4:132] हाँ अल्लाह हाय मालिक है उन सब चीज़ों का जो आसमान में है और जो ज़मीन में है, और कारसाज़ी के लिए बस वही काफ़ी है 
+[4:133] अगर वो चाहे तो तुम लोगों को हटा कर तुम्हारी जगह दूसरे को ले आये, और वो इसकी पूरी क़ुदरत रखता है 
+[4:134] जो शक्स महज़ सवाब ए दुनिया का तालिब हो उसे मालूम होना चाहिए के अल्लाह के पास सवाब ए दुनिया भी है और सवाब ए आख़िरत भी, और अल्लाह समी ओ बसीर (सुनने और देखने वाला) है 
+[4:135] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, इन्साफ के अलंबरदार और खुदा बर्बादी के गवाह बनो अगरचे तुम्हारे इन्साफ और तुम्हारी गवाही की जड़ (खिलाफ) खुद तुम्हारी अपनी जात पर या तुम्हारे वलीदीन और रिश्तेदारों पर ही क्यों ना पढ़ती हो, फरीक मामला ख्वा मालदार हो या गरीब, अल्लाह तुमसे ज्यादा उनका खैर ख्वाह है। लिहाजा अपनी ख्वाहिश ए नफ्स की परिवार में अदल (इंसाफ) से बाज़ न रहो और अगर तुमने लंबी लिपटी बात कही या सच्चाई से पहलू बचाया तो जान रख्खो के जो कुछ तुम करते हो अल्लाह कोई उसकी खबर है 
+[4:136] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ईमान लाओ अल्लाह पर और उसके रसूल पर और उस किताब पर जो अल्लाह ने अपने रसूल पर नाज़िल की है और हर उस किताब पर जो उसने पहले वो नाज़िल कर चुका है। जिसने अल्लाह और उसकी मलिका और उसकी किताबें और उसके रसूलन और रोज ए आखिरीरत से कुफ्र किया वो गुमराही में भटक कर बहुत दूर निकल गया 
+[4:137] रहे वो लोग जो ईमान लाए, फिर कुफ्र किया, फिर ईमान लाए, फिर कुफ्र किया, फिर अपने कुफ्र में बढ़ते चले गए, अल्लाह हरगिज उनको माफ न करेगा और न कभी उनको राह ए रास्ता दिखाएगा 
+[4:138] और जो मुनाफिक एहले ईमान को छोड़ कर काफिरों को अपना रफीक बनाते हैं उन्हें ये मुस्दा (खबर दें) सुना दो के उनके लिए दर्दनाक सजा तय्यार है 
+[4:139] क्या ये लोग इज्जत की तालाब में उनके पास जाते हैं? हालांके इज्जत तो सारी की सारी अल्लाह ही के लिए है 
+[4:140] अल्लाह किताब में तुमको पहले ही हुकुम दे चुका है के जहां तुम सुनो अल्लाह की आयत के खिलाफ कुफ्र बका जा रहा है और उनका मजाक उड़ाया जा रहा है वहां ना बैठो जब तक के लोग किसी दूसरी बात में ना लग जायें, अब अगर तुम ऐसा करते हो तो तुम भी उनकी तरह हो। यकीन जानो के अल्लाह मुनाफिकों और काफिरों को जहन्नुम में एक जगह जमा करने वाला है
+[4:141] ये मुनाफिक तुम्हारे मामले में इंतजार कर रहे हैं (किस करवट बैठा है) अगर अल्लाह की तरफ से फतह तुम्हारी हुई तो आ कर कहेंगे के क्या हम तुम्हारे साथ ना थे? अगर काफिरों का पल्ला भारी रहा तो वे कहेंगे कि क्या हम तुम्हारे खिलाफ लड़ने पर कादिर न थे और फिर भी हमने तुमको मुसलमानों से बचाया? बस अल्लाह ही तुम्हारे और उनके मामले का फैसला कयामत के रोज करेगा और (इस फैसले में) अल्लाह ने काफिरों के लिए मुसलमानों पर गालिब आने की हरगिज कोई सबील नहीं रखी है 
+[4:142] ये मुनाफिक अल्लाह के साथ धोखे-बाजी कर रहे हैं हलांके दर हकीकत अल्लाह हाय ने इन्हें धोखे में डाल रखा है। जब ये नमाज के लिए उठते हैं तो कसमसाते हुए मेहज़ लोगों को दिखाने की खातिर उठते हैं, और खुदा को काम ही याद करते हैं 
+[4:143] कुफ्र ओ ईमान के दरमियान दावा-डोल हैं, ना पूरे इस तरफ हैं ना पूरे हमारी तरफ। जैसे अल्लाह ने भटका दिया हो उसके लिए तुम कोई रास्ता नहीं पा सकते 
+[4:144] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, मोमिन को छोड़ कर काफिरों को अपना रफीक ना बनाओ। क्या तुम चाहते हो के अल्लाह को अपना खिलाफ़ सरीह हुज्जत देदो 
+[4:145] यकीन जानो के मुनाफिक जहन्नुम के सबसे आला तबके में जाएंगे और तुम किसी को उनका मददगार न पाओगे 
+[4:146] अलबत्ता जो उनमें से तैयब हो जाएं और अपने तर्ज ए अमल की इस्लाह कार्लें और अल्लाह का दामन थाम लें और अपने दीन को अल्लाह के लिए खाली कर दें, ऐसे लोग मोमिनो के साथ हैं और अल्लाह मोमिनो को जरूर अजर ए अजीम अता फरमायेगा 
+[4:147] आखिर अल्लाह को क्या पड़ी है के तुम्हें ख्वा मा ख्वा सजा दे अगर तुम शुकरगुजर बंदे बने रहो और ईमान क्या रवीश पर चलो? अल्लाह बड़ा कदरदान है और सबके हाल से वाकिफ है 
+[4:148] अल्लाह इसको पसंद नहीं करता के आदमी बिगड़ेगी पर जुबान खोले, इल्ला ये के किसी पर जुल्म किया गया हो। और अल्लाह सब कुछ सुनने और जाने वाला है 
+[4:149] (मज़लूम होने की सूरत में अगरचे तुमपर बढ़ोगी का हक़ है) लेकिन अगर तुम जाहिर ओ बातों में भलाई ही किए जाओ, या कम अज़ कम बुरायी से दरगुज़र करो, तो अल्लाह की सिफ़ात भी यही है के वो बड़ा माफ़ करने वाला है, हलाँके सज़ा देने पर पूरी क़ुदरत रखता है 
+[4:150] जो लोग अल्लाह और उसके रसूलों से कुफ्र करते हैं, और चाहते हैं के अल्लाह और उसके रसूलों के दरमियान तफ़रीक़ करें, और कहते हैं कि हम किसी को मानेंगे और किसी को ना मानेंगे, और कुफ्र ओ ईमान के बीच में एक राह निकालने का इरादा रखते हैं 
+[4:151] वो सब पक्के काफिर हैं और ऐसे काफिरों के लिए हमने वो सज़ा मुहैय्या कर रखी है जो उन्हें ज़लील ओ ख़्वार करने वाली होगी 
+[4:152] बा-ख़िलाफ़ इसके जो लोग अल्लाह और उसके तमाम रसूलों को मानें, और उनके दरमियान तफ़रीक़ न करें, उनको हम ज़रूर उनके अजर अता करेंगे, और अल्लाह बड़ा दरगुज़र फ़रमाने वाला और रहम करने वाला है
+[4:153] ये एहले किताब अगर आज तुमसे मुतालबा कर रहे हैं कि तुम आसमान से कोई तहरीर (लिखित) उन्पर नाज़िल कराओ तो इस तरह से बढ़ चढ़ कर मुजरेमाना मुतालिबे ये पहले मूसा से कर चुके हैं। उसे तो इन्हों ने कहा था के हमें खुदा को एलानिया (अपनी आंखों से) दिखा दो और इसी सरकशी की वजह से यकायक इनपर बिजली टूट पड़ी थी। फिर इन्होन ने बछड़े (बछड़े) को अपना मबूद बना लिया, हलाँके ये खुली खुली निशानियाँ देख चुके थे इस पर भी हमने इनसे दरगुज़र किया। हमने मूसा को सारे फ़रमान अता किया 
+[4:154] और लोगों पर तूर (माउंट तूर) को उठा कर इनसे (उस फ़रमान की इताअत का) अहद लिया, हमने इनको हुकुम दिया के दरवाज़े में सजदा-राइज़ होते हुए दाख़िल होन, हमने इनसे कहा के सबथ का कानून ना तोड़ो और इसपर इंसे पुख्ता अहद लिया 
+[4:155] आख़िर ए कार इनकी अहद शिकानी (संधि तोड़ना) कि वजह से, और इस वजह से के इन्होन ने अल्लाह की आयत को झुटलाया, और मुताअदीद पैगम्बरों को ना-हक़ क़तल किया, और यहाँ तक कहा के हमारे दिल गिलाफ़ों में महफ़ूज़ हैं। हलांके दर हकीकत इनकी बातिल परस्ती के सबाब से अल्लाह ने इनके दिलों पर थप्पड़ (सील) लगा दिया है और इसी वजह से ये बहुत कम ईमान लाते हैं 
+[4:156] फिर अपने कुफ्र में इतने बढ़े के मरियम पर सख्त बोहतन (बदनामी) लगाया 
+[4:157] और खुद कहा के हमने मसीहा, ईसा इब्न-मरियम रसूल अल्लाह को क़त्ल करदिया है हालानके फ़िलवाक़े इन्होन ने ना उसको क़त्ल किया ना सलीब (क्रॉस) पर चढ़ाया, बलके मामला इनके लिए मुश्तबा (उन्हें संदिग्ध बना दिया) करदिया गया, और जिन लोगों ने इसके बारे में इख्तिलाफ़ किया है वो भी दर-असल शक्क में मुब्तिला है, उनके पास इस मामले में कोई इल्म नहीं है, महज़ गुमान ही की जोड़ी है। उनहों ने मसीह को यकीन के साथ क़त्ल नहीं किया 
+[4:158] बल्के अल्लाह ने उसको अपनी तरफ उठाया, अल्लाह ज़बर्दस्त ताक़त रखने वाला और हकीम है 
+[4:159] और एहले किताब में से कोई ऐसा ना होगा जो उसकी मौत से पहले उसपर ईमान ना ले आएगा और कयामत के रोज़ वो उनपार गवाही देगा 
+[4:160] ग़रज़ इन यहूदी बन जाने वालों के इसी ज़ालिमाना रवैये की बिना पर, और इस बिना पार के ये बकसरत अल्लाह के रास्ते से रोते हैं 
+[4:161] और सूद (सूदखोरी) लेते हैं जिसने इन्हें मना किया था, और लोगों के माल नजायज़ तरीक़ों से खाते हैं, हमने बहुत सी वो पाक चीज़ें इनपर हराम करदी जो पहले इनके लिए हलाल थी। और जो लोग इनमें से काफिर हैं उनके लिए हमने दर्दनक अज़ाब तय्यार कर रखा है 
+[4:162] मगर उनमें जो लोग पूछते इल्म रखने वाले हैं और इमानदार हैं वो सब हमसे तालीम पर ईमान लाते हैं जो तुम्हारी तरफ नाज़िल की गई है और जो तुमसे पहले नाज़िल की गई है थी. इस तरह के ईमान लाने वाले और नमाज़ ओ ज़कात की पाबन्दी करने वाले और अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर पर सच्चा अकीदा रखने वाले लोगों को हम ज़रूर अजर ए अज़ीम अता करेंगे
+[4:163] (ऐ मुहम्मद)! हमने तुम्हारी तरफ उसी तरह वही भेजी थी जिस तरह नूह और उसके बाद के पैगम्बरों की तरफ भेजी थी, हमने इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब, ईसा, अयूब, यूनुस, हारून और सुलेमान की तरफ वही भेजी, हमने दाऊद को जुबुर दी 
+[4:164] हमने उन रसूलों पर भी वही नाज़िल की जिनका ज़िक्र हम इस पहले तुमसे कर चुके हैं और उन रसूलों पर भी जिनका ज़िक्र तुमसे नहीं किया, हमने मूसा से इस तरह गुफ्तगू की जाती है 
+[4:165] ये सारे रसूल ख़ुश ख़बरी देने वाले और डराने वाले बाना कर भेजे गए थे ता-के उनको मबूस करदीन के बाद लोगों के पास अल्लाह के मुकाबले में कोई हुज्जत ना रहे और अल्लाह बाहर हाल गालिब रहने वाला और हकीम ओ दाना है 
+[4:166] (लोग नहीं मानते तो ना माने) मगर अल्लाह गवाही देता है के जो कुछ उसने तुमपर नाज़िल किया है अपने इल्म से नाज़िल किया है, और इसपर मलिका (फरिश्ते) भी गवाह हैं, अगरचे अल्लाह का गवाह होना बिल्कुल किफायत करता है 
+[4:167] जो लोग इसको मन से खुद इनकार करते हैं और दूसरों को खुदा के रास्ते से रोकते हैं वो यकीनन गुमराही में हक से बहुत दूर निकल गए हैं 
+[4:168] इस तरह जिन लोगों ने कुफ्र ओ बगावत का तरीका इख्तियार किया और जुल्म ओ सितम पर उतर आए अल्लाह उनको हरगिज माफ न करेगा और उन्हें कोई रास्ता 
+[4:169] बजुज जहन्नुम के रास्ते के ना दिखाऊंगा जिसमें वो हमेशा रहेंगे। अल्लाह के लिए ये कोई मुश्किल काम नहीं है 
+[4:170] लोगन! ये रसूल तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से हक़ लेकर आया है, ईमान ले आओ, तुम्हारे लिए ही बेहतर है, और अगर इनकार करते हो तो जान लो के आसमान और ज़मीन में जो कुछ है सब अल्लाह का है और अल्लाह अलीम भी है और हकीम भी 
+[4:171] ऐ एहले किताब! अपने दीन में घुलु (अति) न करो और अल्लाह की तरफ हक़ के सिवा कोई बात मंसूब न करो, मसीह ईसा इब्ने मरियम इसके सिवा कुछ न था के अल्लाह का एक रसूल था और एक फरमान था जो अल्लाह ने मरियम की तरफ भेजा और एक रूह थी अल्लाह की तरफ से (जिसने मरियम के रहम में) बच्चों की शकल इख्तियार की) पास तुम अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाओ, और ना कहो के "तीन (त्रिमूर्ति)" हैं बाज़ आ जाओ, ये तुम्हारे ही लिए बेहतर है, अल्लाह तो बस एक ही खुदा है, वो बाला-तर है इस्के कोई उसका बेटा हो। ज़मीन और आसमान की सारी चीज़ें उसका दूध हैं, और इनकी कफ़लत ओ ख़बरगीरी के लिए बस वही काफ़ी है 
+[4:172] मसीह ने कभी इस बात को आर (तिरस्कार) नहीं समझा के वो अल्लाह का बंदा हो, और ना मुकर्रब-तरीन फ़रिश्ते इसको अपने लिए एआर (तिरस्कार) समझते हैं. अगर कोई अल्लाह की बंदगी को अपने लिए जानता है और तकब्बुर करता है तो एक वक्त आएगा जब अल्लाह सबको घेर कर अपने सामने हाज़िर करेगा
+[4:173] हमें वक्त वो लोग जिन्हों ने ईमान ला कर नीक तर्ज ए अमल इक्तियार किया है अपने अजर पूरे पूरे पायेंगे और अल्लाह अपने फजल से उनको मजीद अजर अता फरमायेगा। और जिन लोगों ने बंदगी को आर समझा और तकब्बुर किया है उनको अल्लाह दर्दनाक सजा देगा और अल्लाह के सिवा जिन की सरपरस्ती ओ मददगार पर वो भरोसा रखते हैं उनमें से किसी को भी वो वहां ना पाएंगे 
+[4:174] लोगन! तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास दलील ए रोशन आ गई है और हमने तुम्हारी तरफ ऐसी रोशनी भेज दी है जो तुम्हें साफ साफ रास्ता दिखाने वाली है 
+[4:175] अब जो लोग अल्लाह की बात मान लेंगे और उसकी पनाह ढूंढेंगे उनको अल्लाह अपनी रहमत और अपने फजल ओ करम के दामन में ले लेगा और अपनी तरफ आने का सीधा रास्ता उनको दिखा देगा 
+[4:176] लोग तुमसे 'कलालाह' (उन लोगों से विरासत जो अपने पीछे कोई वंशानुगत उत्तराधिकारी नहीं छोड़े हैं) के मामले में फतवा पूछते हैं। कहो अल्लाह तुम्हें फतवा देता है: अगर कोई शक्स बे-औलाद मर जाए और उसकी एक बहन हो तो वो उसके तर्क (जो उसने पीछे छोड़ दिया है) में से निस्फ़ (आधा) पाएगी, और अगर बहन बे-औलाद मारे तो भाई उसका वारिस होगा। अगर मय्यत की वारिस दो बहनें हों तो वो तर्के में से दो-तिहाई (दो-तिहाई) की हक़दार होंगी, और अगर कई भाई बहनें हों तो औरतों का इकहरा और मर्दों का दोहरा हिस्सा (तब पुरुष को दो महिलाओं का हिस्सा मिलेगा) होगा। अल्लाह तुम्हारे लिए एहकाम की तौज़ीह (स्पष्ट करता है) करता है ता-के तुम भक्त न फिरो और अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है 
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+सूरह 5: अल-मैदा (भोजन) 
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+[5:1] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, बंदिशों की पूरी पाबंदी करो, तुम्हारे लिए मवेशी की क़िसम के सब जानवर हलाल हो गए, सिवाय उनके जो आगे चलकर तुमको बताएँगे, लेकिन एहराम की हालत में शिकार को अपने लिए हलाल न करलो। बेशाक़ अल्लाह जो चाहता है हुकुम देता है 
+[5:2] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, खुदा परस्ती की निशानियों को बे-हुरमत न करो, न हराम महिनो (महीने) में से किसी को हलाल करो, न कुर्बानी के जाँवरों पर दस्तूर करो, न उन जानवरों पर हाथ डालो जिनकी गर्दन में नज़र ए खुदा-वंदी की हालत पर पत्ते पड़े (कॉलर पहने हुए) हुए हों, न उन लोगों को छेड़ो जो अपने रब के फजल और उसकी खुशनुदी की तलाश में मकान-ए-मोहतरम (काबा) की तरफ जा रहे हों। हां जब एहराम की हालत खत्म हो जाए तो शिकार तुम कर सकते हो और देखो एक गिरो ​​ने जो तुम्हारे लिए मस्जिद ए हराम का रास्ता बंद कर दिया है तो इसपर तुम्हारा गुस्सा तुम्हें इतना मुश्तैल ना करदे के तुम भी उनके मुकाबले में नरवा ज्यादतियां करने लगो। नहीं! जो काम नेकी और खुदा तरसी के हैं उन सब में तावुन (एक दूसरे की मदद) करो और जो गुनाह और ज्यादा के काम हैं उनमें किसी से तावुन (एक दूसरे की मदद) ना करो। अल्लाह से डरो, उसकी सज़ा बहुत ज़रूरी है
+[5:3] तुमपर हराम किया गया मुर्दर (मृत मांस), खून, सुवर का गोश्त, वो जानवर जो खुदा के सिवा किसी और के नाम पर जिबाह किया गया हो, वो जो गला घोंट (गला घोंट) कर, या चोट (घाव) खा कर, या बुलंदी से गिर कर, या टक्कर खा कर मारा हो, हां जिसके किसी दरिंदे ने फाड़ा हो, सिवाय उसके जिसने तुमने जिंदा पा कर जिबाह करलिया, और वो जो किसी आस्ताने (वेदियों) पर जिबाह किया गया हो, लेकिन ये भी तुम्हारे लिए जरूरी है कि पैंसों के ज़रिये से अपनी किस्मत मालूम करो। दिव्य बाण)। ये सब अफ़ज़ल फ़िस्क (पाप कर्म) हैं। आज काफ़रियों को तुम्हारे दीन की तरफ़ से पूरी मयूसी हो चुकी है लिहाज़ा तुम उनसे ना डरो बलके मुझसे डरो। आज मैंने तुम्हारे लिए मुकम्मल कर दिया है और अपनी नियामत तुमपर तमाम कर दी है और तुम्हारे लिए इस्लाम को तुम्हारे दीन की हैसियत से कबूल कर लिया है। (लिहाजा हराम ओ हलाल की जो क़ुयूद तुंपार आयद करदी गई है उनकी पबंदी करो) अलबत्ता जो शक्स भूख से मजबूर होकर उनमें से कोई चीज़ खा ले, बिना इसके के गुनाह की तरफ उसका मेलन (जानबूझकर झुका हुआ) हो तो अल्लाह माफ करने वाला और रहम फरमाने वाला है 
+[5:4] लॉग पूछते हैं कि उनके लिए क्या हलाल किया गया है, कहो तुम्हारे लिए सारी चीजें हलाल कर दी गई हैं और जिन शिकारी जानवरों को तुमने सिखाया हो (उन्हें शिकार करना सिखाओ, प्रशिक्षित करो) जिनको खुदा के दिए हुए इलम की बिना पर तुम शिकार की तालीम दिया करते हो, वो जिस जानवर को तुम्हारे लिए पकड़ रक्खें उसको भी तुम खा सकते हो, अलबत्ता उसपर अल्लाह का नाम लेलो और अल्लाह का कानून तोड़ने से डरो। अल्लाह को हिसाब लेते कुछ देर नहीं लगती 
+[5:5] आज तुम्हारे लिए सारी पाक चीजें हलाल हो गई हैं, एहले किताब का खाना तुम्हारे लिए हलाल है और तुम्हारा खाना उनके लिए और महफूज औरतें भी तुम्हारे लिए हलाल हैं ख्वा वो एहले ईमान के गिरो ​​से होन या उन क़ौमों में से जिनको तुमसे पहले किताब दी गई थी, बशारत-ये-के तुम उनके मेहर अदा करके निकाह में उनके मुहाफ़िज़ (रक्षक) बानो, ना हाँ के आजाद शेहवत (वासना) रानी करने लगो या चोरी छुपे आशनाईयां करो। और जो किसी ने ईमान की रवीश पर चलने से इनकार किया तो उसका सारा कारनामा ए जिंदगी जाय हो जाएगा और वो आखिरत में दीवालिया (पूरी तरह से हारे हुए लोगों के बीच) होगा 
+[5:6] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम नमाज के लिए उठो तो चाहिए के अपने मुंह और हाथ कोहनी तक धो लो, सिरों पर हाथ फेर लो और पांव तक धो लिया करो, अगर जनाब की हालत में हो तो नहा कर पक जाओ, अगर बीमार हो या सफर की हालत में हो या तुम में से कोई शक्स रफे हाजत (खुद को राहत देते हुए) करके आए या तुमने औरतों को हाथ लगाया हो, और पानी ना मिले, तो पाक मिट्टी से काम लो, बस उसपर हाथ मार कर अपने मुंह और हाथों पर फेर लिया करो। अल्लाह तुमपर जिंदगी को तंग नहीं करना चाहता, मगर वो चाहता है कि तुम्हें पाक करे और अपनी नियामत तुमपर तमाम करदे, शायद के तुम शुक्रगुज़ार बनो
+[5:7] अल्लाह ने तुमको जो नियामत अता की है उसका ख्याल रक्खो और हमें पुख्ता अहद को ना भूलो जो उसने तुमसे लिया है, यानी तुम्हारा ये क़ौल के, "हमने सुना और इताअत क़बूल की" अल्लाह से डरो, अल्लाह दिलों के राज़ जानता है 
+[5:8] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो! अल्लाह की खातिर रास्ता (सीधा) पर क़याम रहने वाले और इंसाफ की गवाही देने वाले बनो, किसी गिरोह की दुश्मनी तुमको इतना मुशतैल (चाल) ना करदे के इंसाफ से फिर जाओ। अदल (इंसाफ) करो, ये खुदा तरसी से ज्यादा मुनासिबत रखता है, अल्लाह से डर कर काम करते रहो, जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे पूरी तरह ब-खबर है 
+[5:9] जो लोग ईमान लाए और नेक अमल करें, अल्लाह ने उनसे वादा किया है कि उनकी खतों से दरगुजर किया जाएगा और उन्हें बड़ा अजर मिलेगा 
+[5:10] रहे वो लोग जो कुफ्र करें और अल्लाह की आयतें बताएं, तो वो दोज़ख़ में जाने वाले हैं 
+[5:11] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, अल्लाह के हमें एहसान को याद करो जो उसने (अभी हाल में) तुमपर किया है, जबके एक गिरो ​​ने tumpar दस्त दारज़ी (अपने खिलाफ हाथ फैलाएं) का इरादा कार्लिया था, मगर अल्लाह ने उनके हाथ तुम पर खड़े से रोक दिए, अल्लाह से डर कर काम करते रहो, ईमान रखने वालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए 
+[5:12] अल्लाह ने बानी इसराइल से पुख्ता अहद लिया था और में बारह (बारह) नकीब (नेताओं) ने मुकर्रर किया था और उनसे कहा था के "मैं तुम्हारे साथ हूं, अगर तुमने नमाज कायम रक्खी और जकात दी और मेरे रसूलों को माना अर उनकी मदद की और अपने खुदा को अच्छा कर्ज देते रहे तो यकीन रखिए के मैं तुम्हारी बुराइयां तुमसे ज़याल (मिटा दो) कर दूंगा और तुमको ऐसे बाघों (बगीचों) में दाख़िल करुंगा जिनका आला नहरें बहती होंगी, मगर इसके बाद जिसने तुम में से कुफ्र की रवीश इख्तियार की तो दर हक़ीक़त उसने स्व-सबील गम करदी (सही रास्ते से भटक गए)” 
+[5:13] फिर ये उनका अपने अहद को तोड़ देना था जिसकी वजह से हमने उनको अपनी रहमत से दूर फेंक दिया और उनका दिल मजबूत कर दिया। अब उनका हाल ये है कि अल्फ़ाज़ का उलट फेर करके बात को कहीं से कहीं ले जाते हैं, जो तालीम उन्हें दी गई थी उसका बड़ा हिसा भूल चुके हैं, और आए दिन तुम्हें उनकी कोई ना किसी खयानत का पता चलता रहता है। इनमें से बहुत कम लोग इस ऐब (बुराई) से बचे हुए हैं, [पास जब ये इस हाल को पाहुंच चुके हैं तो जो शरारतें भी ये करें वो इनसे ऐन मुतवक्क (अपेक्षित) हैं, लिहाजा इन्हें माफ करो और इनकी हरकत से चश्मा-पोशी (नजरअंदाज) करते रहो। अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो एहसान की रवीश रखते हैं 
+[5:14] इसी तरह हमने उन लोगों से भी पुख्ता अहद लिया था जिन्होन ने कहा था कि "हम नसारा (ईसाई) हैं" लेकिन उनको भी जो सबक याद करवाया गया था उसका एक बड़ा हिसा उनहोन ने फरामोश करदिया। आख़िर ए कार हमने उनके दरमियान कयामत तक के लिए दुश्मनी और आपस के बुग्ज़ ओ इनाद (बावजूद) का बीज बो (बीज बोना) दिया, और जरूर एक वक्त आएगा जब अल्लाह उन्हें बताएगा कि वो दुनिया में क्या बना रहे हैं
+[5:15] ऐ एहले किताब! हमारा रसूल तुम्हारे पास आ गया है जो किताब ए इलाही की बहुत सी उन बातों को तुम्हारे सामने खोल रहा है जब तक तुम पर्दा डाला करते थे, और बहुत सी बातों से दरगुज़र भी कर लिया जाता है। तुम्हारे पास अल्लाह की तरफ से रोशनी आ गई है और एक ऐसी हक़ नुमा किताब 
+[5:16] जिसकी ज़रिये से अल्लाह ताला उन लोगों को जो उसकी रज़ा के तालिब हैं सलामती के तारीख़े बताता है और अपने इज़ान से उनको अँधेरों से निकाल कर उजाले की तरफ लाता है और राह ए रास्ते की तरफ उनकी रहनुमाई करता है 
+[5:17] यकीनन कुफ्र किया उन लोगों ने जिन्हों ने कहा मसीह इब्न मरियम खुदा है। (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के अगर खुदा मसीह इब्न मरियम को और उसकी माँ और तमाम ज़मीन वालों को हलाक करना चाहे तो किसकी मजाल है कि उसको इस इरादे से बाज़ रख सके? अल्लाह तो ज़मीन और आसमान का और उन सब चीज़ों का मालिक है जो ज़मीन और आसमान के दरमियान पाई जाती है, जो कुछ चाहता है अदा करता है और उसकी क़ुदरत हर चीज़ पर हावी है 
+[5:18] यहूद और नसारा कहते हैं कि हम अल्लाह के बेटे और उसके चाहते हैं (प्यारे) हैं, इनसे पूछो, फिर वो तुम्हारे गुनाहों पर तुम्हें सजा क्यों देता है? दर हकीकत तुम भी वही इंसान हो जैसे और इंसान खुदा ने अदा किये हैं। वो जिसे चाहता है माफ़ करता है और जिसे चाहता है सज़ा देता है। ज़मीन और आसमान और इनकी सारी मौजुदात उसका दूध है। और उसकी तरफ सबको जाना है 
+[5:19] ऐ एहले किताब! हमारा ये रसूल ऐसे वक्त तुम्हारे पास आया है और दीन की वजह से तालीम तुम्हें दे रहा है जब रसूलों की आमद का सिलसिला एक मुद्दत से बंद था, ता-के तुम ये ना कह सको के हमारे पास कोई बशारत देने वाला और डराने वाला नहीं आया। तो देखो! अब वो बशारत देने वाला और डराने वाला आ गया और अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है 
+[5:20] याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा था के "ऐ मेरी क़ौम के लोगों! अल्लाह की हमें नियामत का ख्याल करो जो उसने तुम्हें अता की थी, उसने तुम में नबी पैदा किया, तुमको फरमा रवा बनाया, और तुमको वो कुछ दिया जो दुनिया में किसी को ना दिया था 
+[5:21] ऐ बिरादरान ए क़ौम! हमें मुक़द्दस सर-ज़मीन में दाख़िल हो जाओ जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिख दिया है, पीछे ना हटो वरना नाकाम ओ ना-मुराद पलटोगे” 
+[5:22] अनहोनी जवाब दीया "ऐ मूसा! वहां तो बड़े ज़बरदस्त लोग रहते हैं, हम वहां हरगिज़ ना जाएंगे जब तक वो वहां से निकल न जाएं, अगर वो निकल गए तो हम दखल देने के लिए तैयार हैं" 
+[5:23] उन डरने वालों में दो शक्स ऐसे भी थे जिनको अल्लाह ने अपनी नियामत से नवाजा था, उनहों ने कहा के "जबरों के मुकाबले में दरवाजे के अंदर घुस जाओ, जब तुम अंदर पहुंच जाओगे तो तुम ही गालिब रहोगे। अल्लाह पर भरोसा रखो अगर तुम मोमिन हो" 
+[5:24] लेकिन उनहों ने फिर यहीं कहा के " ऐ मूसा! हम तो वहां कभी ना जाएंगे जब तक वो वहां मौजूद हैं, बस तुम और तुम्हारा रब, दोनों जाओ और लाडो, हम यहां बैठे हैं
+[5:25] इस्पर मूसा ने कहा "ऐ मेरे रब, मेरे इख्तियार में कोई नहीं मगर या मेरी अपनी जात या मेरा भाई, पास तू हमें इन नफ़रमान लोगों से अलग करदे।" 
+[5:26] अल्लाह ने जवाब दिया ' अच्छा तो वो मुल्क चालीस (चालीस) साल तक इनपर हराम है, ये ज़मीन में मारे मारे फिरेंगे। इन नफ़रमानों की हालत पर हरगिज़ तरस न खाओ” 
+[5:27] और ज़रा इनमें आदम के दो बेटों का क़िस्सा भी बे कम-ओ-काश्त सुना दो जब उन दोनों ने क़ुर्बानी की, तो उन में से एक क़ुर्बानी क़बूल की गई और दूसरे की न की गई, उसने कहा “मैं तुझे मार डालूंगा” उसने जवाब दिया “अल्लाह तो मुत्तक़ियों ही की नज़रें (प्रसाद) क़बूल करता है 
+[5:28] अगर तू मुझे क़त्ल करने के लिए हाथ उठाएगा तो मैं तुझे क़त्ल करने के लिए हाथ न उठाऊंगा। मैं अल्लाह रब्बुल आलमीन से डरता हूं 
+[5:29] मैं चाहता हूं कि मेरा और अपना गुनाह तू ही समइत ले और दोज़खी बनकर रहे। ज़ालिमों के ज़ुल्म का यही ठीक बदला है।” 
+[5:30] आख़िर ए कार उसके नफ़्स ने अपने भाई का क़त्ल उसके लिए आसान कर दिया और वो उसे मार कर उन लोगों में शामिल हो गया जो नुक्सान उठाने वाले हैं 
+[5:31] फिर अल्लाह ने एक कौवा (कौआ) भेजा जो ज़मीन खोदने लगा ता-के उसे बताए के अपने भाई की लाश कैसे छुपाये। ये देख कर वो बोला अफ़सोस मुझपर! मैं इस कव्वे जैसा भी ना हो सका के अपने भाई की लाश छुपाने की तद्बीर निकाल लेता, इसके बाद वो अपने किये पर बहुत पछताया 
+[5:32] इसी वजह से बनी इजराइल पर हमने ये फरमान लिख दिया था के “जिसने किसी इंसान को खून के बदले या ज़मीन में फ़साद फ़ैलाने के सिवा किसी और वजह से क़त्ल किया उसने गोया तमाम इंसानों को क़त्ल कर दिया और जिसने किसी की जान बचाई उसने गोया तमाम इंसानों को ज़िंदगी बख्श दी”। मगर उनका हाल ये है कि हमारे रसूल पै डर पै उनके पास खुली खुली हिदायत लेकर आये फिर भी उनमें बकसरत लोग ज़मीन में ज़्यादतियां (ज्यादती करना) करने वाले हैं 
+[5:33] जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से लड़ते हैं और ज़मीन में हैं टैग-ओ-दो करते फिरते हैं के फ़साद (शरारत) बरपा करें उनकी सज़ा ये है के क़त्ल किये जायें, या सूली पर चढ़ाये जायें, या उनके हाथ और पैरों मुखालिफ़ सिमतों से काट डाले जायें, या वो जिला वतन (जमीन से निर्वासित) कर दिये जायें। ये ज़िल्लत ओ रुसवाई तो उनके लिए दुनिया में है और आख़िरत में उनके लिए इसे बड़ी सज़ा है 
+[5:34] मगर जो लोग तौबा कार्लें क़बल इसके के तुम उन्पर क़ाबू पाओ। तुम्हें मालूम होना चाहिए के अल्लाह माफ करने वाला और रहम फरमाने वाला है 
+[5:35] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो और उसकी जनाब में बैरयाबी (नज़दीकी) का ज़रिया तलाश करो, और उसकी राह में जिद ओ जहद करो, शायद के तुम्हें कामयाबी नसीब हो जाये
+[5:36] खूब जान लो के जिन लोगों ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया है, अगर उनके क़ब्ज़े में सारी ज़मीन की दौलत हो और इतनी ही और इसके साथ और वो चाहे के इसी फिदिये (बदले/प्रायश्चित) में दे कर रोज़ ए कयामत के अज़ाब से बच जाएं, तब भी वो उनसे क़बूल ना की जाएगी और उन्हें दर्दनाक सज़ा मिलकर रहेगी 
+[5:37] वो चाहे के दोज़ख की आग से निकल भागें मगर ना निकल सकेंगे और उन्हें क़याम (हमेशा) रहने वाला अज़ाब दिया जाएगा 
+[5:38] और चोर, ख्वा औरत हो या मर्द, दोनों के हाथ काट दो, ये उनकी कमाई का बदला है और अल्लाह की तरफ़ से इब्रातनाक सज़ा। अल्लाह की क़ुदरत सब पर ग़ालिब है और वो दाना ओ बीना है 
+[5:39] फिर जो ज़ुल्म करने के बाद तौबा करे और अपना इस्लाह करले तो अल्लाह की नज़र ए इनायत फिर उसपर मय्यल हो जाएगी, अल्लाह बहुत दरगुज़र करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[5:40] क्या तुम जानते नहीं हो के अल्लाह ज़मीन और आसमान की सल्तनत का मालिक है? जिसे चाहे सजा दे और जिसे चाहे माफ करदे, वो हर चीज का इख्तियार रखता है 
+[5:41] ऐ पैगम्बर! तुम्हारे लिए बाइस-ए-रंझ (शोक) ना हो वो लोग जो कुफ्र की राह में बड़ी तेजी से गमी दिखा रहे हैं ख्वा वो उनमें से हो जो मुंह से कहते हैं हम ईमान लाए मगर दिल उनके ईमान नहीं लाए, हां उनमें से हो जो यहुदी बन गए हैं, जिनका हाल ये है के झूठ के लिए कान लगाते हैं, और दूसरे लोगों की खातिर जो तुम्हारे पास कभी नहीं आए, सुन गुन लेते फिरते हैं, किताब-अल्लाह के अल्फाज़ को उनका सही महल मुतायिन होना के बकवास असल मानी से फेरते हैं। और लोग कहते हैं कि अगर तुम ये हुकुम दिया जाए तो मानो नहीं तो ना मानो, जैसे अल्लाह ही ने फिटने में डालने का इरादा करलिया हो तो उसको अल्लाह की नजरों से बचाने के लिए तुम कुछ नहीं कर सकते। ये वो लोग हैं जिनके दिलों को अल्लाह ने पाक करना ना चाहा। इनके लिए दुनिया में रूसवाई है और आख़िरत में साज़ा है 
+[5:42] ये झूठ सुनने वाले और हराम के माल खाने वाले हैं, लिहाज़ा अगर ये तुम्हारे पास (अपने मुक़द्दमात लेकर) आएं तो तुम्हें इख्तियार दिया जाता है के चाहो इनका फैसला करो वरना इंकार करदो. इंकार करदो तो ये तुम्हारा कुछ बिगाड़ नहीं सकता, और फैसला करो तो फिर ठीक ठीक इन्साफ के साथ करो के अल्लाह इन्साफ करने वालों को पसंद करता है 
+[5:43] और ये तुम्हें कैसे हकम (जज) बनाते हैं जबके इनके पास तौरात (तोराह) मौजूद है जिसमें अल्लाह का हुकुम लिखा हुआ है और फिर ये उसे मुंह मोड़ रहे हैं? असल बात ये है के ये लोग ईमान ही नहीं रखते
+[5:44] हमने तौरात नाज़िल की जिसमें हिदायत और रोशनी थी। सारे नबी जो मुस्लिम थे, यहूदी बन जाने वालों के मामले में उसी के मुतालिक थे, और इसी तरह रब्बानी और एहबर (विद्वान और न्यायविद) भी (इसी पर फैसले का मदार रखते थे)। क्योंके उन्हें किताब अल्लाह की हिफ़ाज़त का ज़िम्मेदार बनाया गया था और वो इसपर गवाह थे। पस (ऐ गिरो ​​ए यहूद!) तुम लोगों से ना डरो बलके मुझसे डरो, और मेरी आयत को जरा जरा से नुकसान पहुंचाओ (तुच्छ लाभ/कीमत) लेकर बेचना छोड़ दो। जो लोग अल्लाह के नाजिल करदा कानून के मुताबिक फैसला न करें वही काफिर हैं 
+[5:45] तौरात में हमने यहुदियों पर ये हुकुम लिख दिया था के जान के बदले जान, आंख के बदले आंख, नाक के बदले नाक, कान के बदले कान, दांत के बदले दांत, और तमाम जख्मों के लिए बराबर का बदला, फिर जो क़िस्स का सदका करदे तो वो उसके लिए कफारा है और जो लोग अल्लाह के नाज़िल करदा कानून के मुताबिक़ फैसला ना करें वही जालिम हैं 
+[5:46] फिर हमने पैगंबर के बाद मरियम के बेटे ईसा को भेजा, तौरात में से जो कुछ उसके सामने मौजूद था वो उसकी तस्दीक करने वाली थी और हमने उसको इंजील अता की जिसकी रहनुमाई और रोशनी थी और वो भी तौरात में से जो कुछ हमें वक्त मिला उसकी तस्दीक करने वाली थी और खुदा तरस लोगों को हिदायत और हिदायत थी 
+[5:47] हमारा हुकुम था के एहले इंजील उस कानून के मुताबिक फैसला करें जो अल्लाह ने इसमे नाजिल किया है और जो लोग अल्लाह के नाजिल करदा कानून के मुताबिक फैसला न करें वही फासिक हैं 
+[5:48] फिर (ऐ मुहम्मद!) हमने तुम्हारी तरफ ये किताब भेजी जो हक लेकर आई है और अल-किताब में से जो कुछ इसके आगे मौजूद है उसकी तस्दीक करने वाली और इसकी मुहाफिज ओ निगेहबान है। लिहाज़ा तुम खुदा के नाज़िल करदा कानून के मुताबिक़ लोगों के मामले का फैसला करो और जो हक तुम्हारे पास आया है उससे मुह मोड़ कर इनकी ख्वाहिश की जोड़ी ना करो। हमने तुम में से हर एक केलिये एक शरीयत और एक राह ए अमल मुकर्रर की, अगर तुम्हारा खुदा चाहता तो तुम सबको एक उम्मीद भी बना सकता था, लेकिन उसने ये इसलिए किया के जो कुछ उसने तुम लोगों को दिया है उसमें तुम्हारी आजमाइश करे, लिहाजा भलाईयों में एक दूसरे से सबक ले जाने की कोशिश करो। आख़िर ए कार तुम सब को खुदा की तरफ पलट कर जाना है, फिर वो तुम्हें असल हकीकत बता देगा जिसमें तुम इख्तिलाफ करते रहोगे 
+[5:49] पास (ऐ मुहम्मद)! तुम अल्लाह के नाज़िल करदा क़ानून के मुताबिक़ में लोगों के ममलात का फ़ैसला करो और इनकी ख्वाहिश की जोड़ी ना करो। होशियार रहो के ये लोग तुमको फ़िटने में डाल कर हमें हिदायत से ज़रा बराबर मुनहरिफ़ ना करने पाए जो खुदा ने तुम्हारी तरफ नाज़िल की है। फिर अगर ये इसी मुह मोड़ें तो जान लो के अल्लाह ने इनके बाज़ गुनाहों की याद में इनको मुबतला ए मुसीबत करने का इरादा ही कर लिया है, और ये हकीकत है के इन लोगों में से अक्सर फ़ासीक़ हैं
+[5:50] (अगर ये खुदा के कानून से मुह मोड़ते हैं) तो क्या फिर जेलियत का फैसला चाहते हैं? हालंके जो लोग अल्लाह पर यकीन रखते हैं उनके नजरिए से अल्लाह से बेहतर फैसला करने वाला कोई नहीं है 
+[5:51] ऐ लोग जो ईमान लाए हो! यहुदियों (यहूदियों) और ईसाइयों (ईसाइयों) को अपना रफीक (दोस्त) न बनाओ। ये आपस में ही एक दूसरे के रफीक हैं। और अगर तुम में से कोई इनको अपना रफीक बनाता है तो उसका शूमर भी फिर इसी में है। यकीनन अल्लाह ज़ालिमों को अपनी रहनुमाई से महरूम कर देता है 
+[5:52] तुम देखते हो के जिनके दिलों में निफ़ाक की बीमारी है वो उन्ही में दौड़-धूप करते फिरते हैं, कहते हैं हैं "हमें डर लगता है के कहीं हम किसी मुसीबत के चक्कर में न फंस जाएं" मगर बाद नहीं कि अल्लाह जब तुम्हें फैसला-कुन फतह (निर्णायक जीत) बक्शेगा या अपनी तरफ से कोई और बात जाहिर करेगा तो ये लोग अपने इस निफाक (पाखंड) पर जैसे येह दिलों में छुपे हुए हैं नदीम होंगे 
+[5:53] और हम वक्त एहले ईमान कहेंगे "क्या ये वही लोग हैं जो अल्लाह के नाम से कड़ी कसमें खा कर यकीन दिलाते थे के हम तुम्हारे साथ हैं?" उनके सब अमल ज़ाया होगे और आख़िर ए कार ये नाकाम ओ ना-मुराद होकर रहे 
+[5:54] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम में से कोई अपने दीन से फिरता है (तो फिर जाए) अल्लाह और भूत से लोग ऐसा अदा कर देंगे जो अल्लाह को मेहबूब होंगे और अल्लाह उनको मेहबूब होगा, जो मोमिनो पर नर्म और कुफ्फार पर सख्त होंगे, जो अल्लाह की राह में जिद ओ जहद करेंगे और किसी को मलामत करने वाले से न डरेंगे। ये अल्लाह का फ़ज़ल है, जिसे चाहता है अता करता है। अल्लाह वसीह ज़राए का मालिक है और सब कुछ जानता है 
+[5:55] तुम्हारे रफीक तो हकीकत में सिर्फ अल्लाह और अल्लाह का रसूल और वह एहले ईमान हैं जो नमाज़ क़याम करते हैं, ज़कात देते हैं और अल्लाह के आगे झुकने वाले हैं 
+[5:56] और जो अल्लाह और उसके रसूल और एहले ईमान को अपना रफीक बना लें उसे मालूम हो के अल्लाह की जमात ही गालिब रहने वाली है 
+[5:57] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारे पेश्रा एहले किताब में से जिन लोगों ने तुम्हारे दीन को मजाक और तफरीह का सामान बना लिया है, उन्हें और दूसरे काफिरों को अपना दोस्त और रफीक ना बनाओ। अल्लाह से डरो अगर तुम मोमिन हो 
+[5:58] जब तुम नमाज़ के लिए मुनादी (कॉल) करते हो तो वो इसका मज़ाक उड़ाते और इसे खेलते हैं। इसकी वजह ये है के वो अक्ल नहीं रखते 
+[5:59] इंसे कहो "ऐ एहले किताब! तुम जिस बात पर हमसे बड़े हो (हमसे नफरत करो) वो इसके सिवा और क्या है के हम अल्लाह पर और दीन की उस तालीम पर ईमान ले आए हैं जो हमारी तरफ नाज़िल हुई है और हमसे पहले भी नाज़िल हुई थी? और तुम में से अक्सर लोग फ़ासिक हैं।”
+[5:60] फिर कहो "क्या मैं उन लोगों की निशानदेही करूं जिनका अंजाम खुदा के हां फासीकों के अंजाम से भी बढ़ता है? वो जिनपर खुदा ने लानत की, जिनपर उसका गजब टूटा, जिनमें से बंदर और सुवर बन गए, जिन्होन ने टैगहुट की बंदगी की उनका दरजा और भी ज़्यादा बुरा है और वो सवा-ए-सबील (सही रास्ता) से बहुत ज़्यादा भटके हुए हैं” 
+[5:61] जब ये तुम लोगों के पास आते हैं तो कहते हैं कि हम ईमान लाए, हालंके कुफ़्र लिए हुए आए थे और कुफ़्र ही लिए हुए वापस गए, और अल्लाह ख़ूब जानता है है जो कुछ ये दिलों में छुपे हुए हैं 
+[5:62] तुम देखते हो कि इनमें से बकसरत लोग गुनाह और ज़ुल्म ओ ज़्यादा के कामोन में धूप-धूप करते हैं, और हराम के माल खाते हैं, बहुत बुरी हरकत हैं जो ये कर रहे हैं 
+[5:63] क्यों इनके उलेमा, और मशाहिक (जुर्सिट्स) इन्हें गुनाह पर ज़ुबान खोलने और हराम खाने से नहीं रोकते? यकीनन बहुत ही बुरा कारनामा ए जिंदगी है जो वो तय्यार कर रहे हैं 
+[5:64] यहूदी कहते हैं अल्लाह के हाथ बांधे हुए हैं। बांधे गए इनके हाथ, और लानत पड़ी इनपर हमें बकवस की बदौलत जो ये करते हैं। अल्लाह के हाथ तो कुशादा हैं, जिसकी तरह चाहता है खर्च करता है। हकीकत ये है कि जो कलाम तुम्हारे रब की तरफ से तुम पर नाज़िल हुआ है वो इनमें से अक्सर लोगों की सरकशी ओ बातिल परस्ती में उलटे इज़ाफ़े का मुजीब बन गया है, और (इसकी पैदाइश में) हमने इनके दरमियान कयामत तक के लिए अदावत और दुश्मनी डाल दी है। जब कभी ये जंग भड़कती है तो अल्लाह उसको ठंडा कर देता है। ये ज़मीन में फ़साद फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, मगर अल्लाह फ़साद बरपा करने वालों को हरगिज़ पसंद नहीं करता 
+[5:65] अगर (इस सरकशी के बजाये) ये एहले किताब ईमान ले आते और खुदा तरसी की रवीश इख्तियार करते तो हम इनकी बुराइयां इनसे दूर करदेते और इनको नियामत भरी जन्नतों में पहचानते हैं 
+[5:66] काश इन्हों ने तौरात और इंजील और उन दूसरी किताबों को क़याम किया होता जो इनके रब की तरफ से इनके पास भेज दी गई थी। ऐसा करते तो इनके लिए ऊपर से रिज़क बरसात और नीचे से उबाल, अगर इनमें कुछ लोग रास्ते-रो भी हैं लेकिन इनकी अक्सरियत बहुत ज्यादा है 
+[5:67] ऐ पैगम्बर! जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है वो लोगों तक पहुंच दो, अगर तुमने ऐसा ना किया तो उसकी पैगम्बरी का हक़ अदा ना किया। अल्लाह तुमको लोगों के शरर से बचाने वाला है। यकीन रख्खो के वो काफिरों को (तुम्हारे मुकाबले में) कामयाबी की राह हरगिज न दिखायेगा 
+[5:68] साफ कहदो के "ऐ एहले किताब! तुम हरगिज किसी असल पर नहीं हो जब तक के तौरात और इंजील और उन दूसरी किताबों को कायम न करो जो तुम्हारे रब की तरफ से नाज़िल की गई हैं”। जरूर है के ये फरमान जो तुमपर नाज़िल किया गया है उनमें से अक्सर की सरकशी और इंकार को और ज्यादा बढ़ा देगा, मगर इंकार करने वालों के हाल पर कुछ अफ़सोस ना करो
+[5:69] यकीन जानो के यहां इजारा (सच्चाई का विशेष दावा) किसी का भी नहीं है) मुसलमान हो या यहूदी, सबी (सबिया) हो या इसाई (ईसाई), जो भी अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान लाएगा और नेक अमल करेगा, उसके लिए ना किसी खौफ का मुकाम है ना रंज का 
+[5:70] हमने बनी इजराइल से पुख्ता अहद लिया और उनकी तरफ बहुत से रसूल भेजे, मगर जब कभी उनके पास कोई रसूल उनकी ख्वाहिशत ए नफ्स के खिलाफ कुछ लेकर आया तो किसी को अनहोन ने झुटलाया और किसी को कत्ल कर दिया 
+[5:71] और अपने नजरिये ये समझे के कोई फ़ितना रुनामा ना होगा, इसलिए अंधे और बाहर बन गए, फिर अल्लाह ने उन्हें माफ़ किया तो उनमें से अक्सर लोग और ज़्यादा अंधे और बाहर चले गए। अल्लाह उनकी ये सब हरकत देख रहा है 
+[5:72] यकीनन कुफ्र किया उन लोगों ने जिन्होन ने कहा के अल्लाह मसीह इब्ने मरियम ही है, हालंके मसीह ने कहा था के "ऐ बानी इस्राइल! अल्लाह की बंदगी करो जो मेरा रुब भी है और तुम्हारा रुब भी"। जिसने अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहरया उसपर अल्लाह ने जन्नत हराम करदी और उसका ठिकाना जहन्नुम है और ऐसे ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं 
+[5:73] यकीनन कुफ्र किया उन लोगों ने जिन्होन ने कहा के अल्लाह तीन (त्रिमूर्ति) में का एक है, हलांके एक खुदा के सिवा कोई खुदा नहीं है. अगर ये लोग अपनी बातों से बाज ना आएं तो इनमें से जिसने कुफ्र किया है उसको दर्दनाक सजा दी जाएगी 
+[5:74] फिर क्या ये अल्लाह से तौबा ना करेंगे और उसे माफ़ी ना मांगेंगे? अल्लाह बहुत दरगुज़र फ़रमाने वाला और रहम करने वाला है 
+[5:75] मसीह इब्ने मरियम इसके सिवा कुछ नहीं के बस एक रसूल था, उसके पहले और भी बहुत से रसूल गुज़र चुके थे, उसकी माँ एक रस्त-बाज़ (नेक) औरत थी, और वो दोनों खाना खाते थे, देखो हम किस तरह इनके सामने हक़ीक़त की निशानियाँ दिखाते हैं, फिर देखो ये किधर उलटे फिर जाते हैं 
+[5:76] इंसे कहो, क्या तुम अल्लाह को छोड़ कर उसकी तरफदारी करते हो जो ना तुम्हारे लिए नुक्सान का इख्तियार रखता है ना नफ़े का? हालंके सबकी सुनने वाला और सबको जानने वाला तो अल्लाह ही है 
+[5:77] कहो, ऐ एहले किताब! अपने दीन में ना-हक़ ग़ुलू (सीमा से परे जाना/ज्यादती करना) ना करो और उन लोगों के तक़लात (झुकाव/ख्वाहिशात) की जोड़ी ना करो जो तुमसे पहले खुद गुमराह हुए और बहुतों को गुमराह किया, और "सवा ए सबील (सही रास्ता)" से भटक गए 
+[5:78] बानी इसराइल में से जिन लोगों ने कुफ्र की राह इख्तियार की अनपर दाऊद और ईसा इब्न मरियम की जुबान से लानत की गई, क्योंकि वो सरकश हो गए थे और ज्यादतियां करने लगे थे 
+[5:79] उन्होन ने एक दूसरे को बुरे अफाल के इरतेकाब से रोकना छोड़ दिया था, बुरा तर्ज ए अमल था जो unhon ne ikhtiyar kiya
+[5:80] आज तुम उनमें ब-कसरत ऐसे लोग देखते हो जो (एहले ईमान के मुकाबले में) कुफ्फार की हिमायत ओ रफाकत करते हैं, यकीनन बहुत बुरा अंजाम है जिसकी तैयारी उनके नफ्सों ने उनके लिए की है। अल्लाह उन्पर गज़ब-नाक हो गया है और वो दैमी अज़ाब में मुब्तिला होने वाले हैं 
+[5:81] अगर फिल-वाकई ये लोग अल्लाह और पैगम्बर और उस चीज के मन्ने वाले हो गए जो पैगम्बर पर नाज़िल हुई थी तो कभी (एहले ईमान के मुकाबल में) काफिरों को अपना रफीक ना बनते, मगर इनमें से तो बेहतर लोग खुदा की इताअत से निकल चुके हैं 
+[5:82] तुम एहले ईमान की अदावत (दुश्मनी) में सबसे ज्यादा सख्त यहूद और मुशरिकेन को पाओगे, और ईमान लाने वालों के लिए दोस्ती में करीब-तार उन लोगों को पाओगे जिन्हों ने काहा था के हम नसारा (ईसाइयों) हैं, इस वजह से कि उनमें इबादत-गुज़ार आलिम और तारिक उद दुनिया फकीर (भिक्षु) पाए जाते हैं और उनमें गुरुर ए नफ़्स (अभिमानी) नहीं है 
+[5:83] जब वो हमें कलाम को सुनते हैं जो रसूल पर उतरते हैं तो तुम देखते हो के हक़ शनासी (सच्चाई को पहचानो) के असर से उनकी आंखें आंसुओं से छलनी हो जाती हैं, वो बोल उठते हैं के "परवरदिगार! हम ईमान लाए, हमारा नाम गवाही देने वालों में लिख ले" 
+[5:84] और वो कहते हैं के "आख़िर क्यों ना हम अल्लाह पर ईमान लायें और जो हक़ हमारे पास आया है उसे क्यों ना मान लें, जबके हम इस बात की ख्वाहिश रखते हैं के हमारा रब हमें साले लोगों में शामिल करें?” 
+[5:85] उनके इस क़ौल की वजह से अल्लाह ने उनको ऐसी जन्नतें अता की जिनके बारे में पता है कि वो हमेशा साथ रहेंगी। ये जजा है नीक रवैय्या इख्तियार करने वालों के लिए 
+[5:86] रहे वो लोग जिन्हों ने हमारी आयतों को मन्ने से इंकार किया और उन्हें झुटलाया, तो वो जहन्नुम के मुस्तहिक़ हैं 
+[5:87] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जो पाक चीज़ अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल की हैं उन्हें हराम न करलो और हद से तजावुज़ न करो, अल्लाह को ज़्यादा करने वाले सख़्त नापसंद हैं 
+[5:88] जो कुछ हलाल ओ तय्यब रिज़्क अल्लाह ने तुमको दिया है उसे खाओ पियो और उस खुदा की नफ़रमानी से बचते रहो जिसपर तुम ईमान लाए हो 
+[5:89] तुम लोग जो मोहमल (व्यर्थ रूप से) कसमें खा लेते हो उन्पर अल्लाह गिरफ़्तार नहीं करता, मगर जो कसमें तुम जान बूज़ कर खाते हो उन्पर वो तुमसे ज़रूर मवाक़ेज़ा करेगा। (ऐसी कसम तोड़ने का) कफारा ये है के दस मिस्किनो को वो औसत (औसत) दर्जे का खाना खिलाओ जो तुम अपने बाल बच्चों को खिलाते हो, या उन्हें कपडे पहनो, या एक गुलाम आज़ाद करो, और जो इसकी क्षमता (क्षमता) ना रखता हो वो तीन दिन के रोज़ रक्खे. ये तुम्हारी कसमों का कफ़्फ़ारा है जबके तुम कसम खा कर तोड़ दो। अपनी कसमों की हिफ़ाज़त किया करो, इस तरह अल्लाह अपने एहकाम तुम्हारे लिए वाज़ेह करता है शायद तुम शुक्र अदा करो
+[5:90] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, ये शराब (नशा) और जुवा (जुआ) और ये आस्ताने [(समर्पण) पत्थर] और पासें [(तीरों द्वारा भविष्यवाणी], ये सब गंदे शैतानी काम हैं, इनसे परहेज करो, उम्मीद हैं के तुम्हें फलाह नसीब होगी) 
+[5:91] शैतान तो ये चाहता है के शराब और जुवे के ज़रिये से तुम्हारे दरमियान अदावत और बुग़्ज़ (दुश्मनी और नफरत) डाल दे और तुम्हें खुदा की याद से और नमाज़ से रोक दे, फिर क्या तुम इन चीज़ों से बाज़ रहोगे 
+[5:92] अल्लाह और उसके रसूल की बात मानो और बाज़ आ जाओ, लेकिन अगर तुमने हुकुम अदाउली की (अगर तुम पीछे मुड़ते हो) तो जान लो के हमारे रसूल पर बस साफ साफ हुकुम पंहुंचा देने की जिम्मेदारी थी 
+[5:93] जो लोग ईमान ले आए और नेक अमल करने लगे उन्होन ने पहले जो कुछ खाया पिया था उसपर कोई गिरफ़्तार न होगी, बशारत-ए-के वो आइंदा उन चीज़ों से बचे रहे जो हराम की गई हैं और ईमान पर साबित क़दम रखें और अच्छे काम करें। फिर जिस चीज़ से रोका जाए उसे रुकें और जो फरमान ए इलाही हो उसे माने, फिर खुदा तरसी के साथ नेक रवैय्या रक्खें, अल्लाह नेक किरदार लोगों को पसंद करता है 
+[5:94] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह तुम्हें शिकार के ज़रिये से सख्त आजमाइश में डालेगा जो बिल्कुल तुम्हारे हाथ और नेज़ों (लांस) की ज़द में होगा, ये देखने के लिए कि तुम में से कौन उसे गायबाना डरता है, फिर जिसने तम्बीह (चेतावनी) के बाद अल्लाह की मुकर्रर की हुई हद से तजावुज़ किया उसके लिए दर्दनाक सज़ा है 
+[5:95] ऐ logon jo iman laye ho! एहराम की हालत में शिकार न मारो, और अगर तुम में से कोई जान बूझ कर ऐसा कर गुजरे तो जो जानवर उसने मारा हो उसी के हम पाला (इसी तरह) एक जानवर उसी मछली में से नजर देना होगा, जिसका फैसला तुम में से दो आदिल (सिर्फ) आदमी करेंगे, और ये नजराना काबा पाहुंचाया जाएगा, हां नहीं तो इस गुनाह के कफरे में चांद मिसकीनो को खाना खिलाना होगा, हां इसके ब-काद्र रोजे रखने होंगे, ता-के वो अपने किए का मजा चक्खे, पहले जो कुछ हो चुका उसे अल्लाह ने माफ कर दिया, लेकिन अब अगर किसी ने इस हरकत का इरादा किया तो उसे अल्लाह बदला लेगा, अल्लाह सब पर गालिब है और बदला लेने की ताक़त रखता है 
+[5:96] तुम्हारे लिए समंदर का शिकार और उसका खाना हलाल कर दिया गया, जहां तुम ठहरो वहां भी उसे खा सकते हो और काफ़िले (यात्रियों) के लिए ज़ाद-ए-राह भी बना सकते हो। अलबत्ता खुश्की (जमीन) का शिकार जब तक तुम एहराम की हालत में हो तुम पर हराम किया गया है। पास बचाओ हमें खुदा की नफरमानी से जिसकी पेशी में तुम सबको घेर कर हाज़िर किया जाएगा 
+[5:97] अल्लाह ने मकान ए मोहतरम, काबा को लोगों के लिए (इज्तिमय जिंदगी के) कयाम का जरिया बनाया और माह ए हराम और कुर्बानी के जंवरों और कलादोन[मालाएं (जिससे) वे पहचाने जाते हैं)] को भी (इस काम में मुआविन बना दिया) ता-के तुम्हें मालूम हो जाए के अल्लाह आसमान और ज़मीन के सब हालात से बेख़बर हैं और उसे हर चीज़ का इलम है
+[5:98] ख़बरदार हो जाओ!अल्लाह सज़ा देने में भी शामिल है और इसके साथ बहुत दरगुज़ार और रहम भी करने वाला है 
+[5:99] रसूल पर तो सिर्फ पैग़ाम पाहुंचा देने की ज़िम्मेदारी है, आगे तुम्हारे खुले और छुपे सब हालात का जाने वाला अल्लाह है 
+[5:100] (ऐ पैगम्बर!) इनसे कहदो के पाक और नापाक बहार हाल यकसन नहीं हैं, ख्वा नापाक की बोहतत (बहुतायत) तुम्हें कितनी ही खुशी (प्रसन्नता) करने वाली हो। पास ऐ लोगन जो अक़ल रखते हो! अल्लाह की नफरमानी से बचते रहो, उम्मीद है के तुम्हें फलाह नसीब होगी 
+[5:101] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ऐसी बातें ना पूछो करो जो तुमपर जाहिर कर दी जाए तो तुम्हें नगावार हो, लेकिन अगर तुम उन्हें ऐसे वक्त पूछोगे जब के कुरान नाजिल हो रहा हो तो वो तुमपर खोल दी जाएगी, अब तक जो तुमने किया उसे अल्लाह ने माफ कर दिया, वो दरगुज़ार करने वाला और बर्दबार (सर्व सहनशील) है 
+[5:102] तुमसे पहले एक गिरोह ने इसी क़िस्म के सवाल किए थे, फिर वो लोग इन्हीं बातों की वजह से कुफ़्र में मुबतला हो गए 
+[5:103] अल्लाह ने कोई बहिराह (मूर्तियों को समर्पित मवेशी) मुकर्रर किया है ना साइबा (एक ऊंटनी को अपने झूठे देवताओं, जैसे मूर्तियों, आदि के लिए मुक्त चरागाह के लिए खुला छोड़ दिया जाता है) और ना वसीला (एक ऊंटनी को मूर्तियों के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया जाता है क्योंकि उसने अपनी पहली डिलीवरी में एक मादा ऊंट को जन्म दिया है) और ना हाम (एक ऊंटनी-ऊंटनी को अपनी मूर्तियों के लिए काम से मुक्त कर दिया जाता है, जब वह काम पूरा कर लेती है। इसके लिए निर्धारित युग्मों की संख्या) मगर ये काफिर अल्लाह पर झूठी तोहमत लगाते हैं और इनमें से अक्सर बे-अकाल हैं (कहां ऐसे वहामियत को मान रहे हैं) 
+[5:104] और जब इनसे कहा जाता है के आओ उस कानून की तरफ जो अल्लाह ने नाज़िल किया है और आओ पैगम्बर की तरफ, तो वाह जवाब देते हैं हमारे लिए तो बस वही तरीक़ा काफ़ी है जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है। क्या ये बाप दादा ही हैं कि तक्लीद किए चले जाएंगे ख्वा वो कुछ ना जानते हों और सही रास्ते की उनको खबर ही ना हो 
+[5:105] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपनी फिक्र करो, किसी दूसरे की गुमराही से तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ता अगर तुम खुद राह ए रास्ते पर हो, अल्लाह की तरफ़ तुम सबको पलट कर जाना है, फिर वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या करते रहेंगे हो 
+[5:106] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम में किसी की मौत का वक़्त आ जाए और वो वसीयत कर रहा हो तो उसके लिए शहादत का निसाब ये है के तुम्हारी जमात में से दो (दो) साहिब-ए-अदल आदमी गवाह बन जाएं, अगर तुम सफर की हालत में हो और वहां मौत की मुसीबत पेश आ जाए तो गैर मुस्लिम ही में से दो गवाह ले लिए जाए। फिर अगर कोई शक्क पढ़ जाए तो नमाज के बाद दोनों गवाहों को (मस्जिद में) रोक लिया जाए और वो खुदा की कसम खा कर कहे के "हम किसी जाति फैसले के बदले शहादत बेचने वाले नहीं हैं, और ख्वा कोई हमारा रिश्तेदार ही क्यों ना हो (हम उसकी रियात" करने वाले नहीं) और ना खुदा बर्बादी की गवाही को हम छुपाने वाले हैं, अगर हमने ऐसा किया तो गुनाह-गैरों में शामिल होंगे”
+[5:107] लेकिन अगर पता चल जाए के इन दोनो ने अपने आप को गुनाह में मुब्तिला किया है तो फिर इनकी जगह दो और शक्स जो इनकी बा-निस्बत शहादत देने के लिए एहल-तर होन उन लोगों में से खड़े होन जिनका हक़ तलफ़ी हुई हो, और जो खुदा की क़सम खा कर काहें के "हमारी शहादत उनकी शहादत से ज़्यादा बार-हक़ है और हमने अपनी गवाही में कोई ज़्यादा नहीं की है, अगर हम ऐसा करें तो ज़ालिमों में से होंगे" 
+[5:108] क्या तारीख़ से ज़्यादा तवक्कु की जा सकती है के लोग ठीक ठीक शहादत देंगे, या काम आज भी बात है का खौफ करेंगे कि उनकी कसमों के बाद दूसरी कसमों से कहीं उनकी देरी न हो जाए। अल्लाह से डरो और सुनो, अल्लाह नफ़रमानी करने वालों को अपनी रहनुमाई से महरूम कर देता नहीं है 
+[5:109] जिस रोज़ अल्लाह सब रसूलों को जमा करके पूछेगा के तुमने क्या जवाब दिया है, तो वो अर्ज़ करेंगे के हमें कुछ इल्म नहीं, आप ही तमाम पोशीदा (छिपा हुआ) हकीकतों को जानते हैं 
+[5:110] फिर तसव्वुर करो उस मौके का जब अल्लाह फरमायेगा के "ए मरियम के बेटे ईसा! याद कर मेरी उस नियामत को जो मैंने तुझे और तेरी मां को अता की थी, मैंने रूह-ए-पाक से तेरी मदद की, तू गहवरे (पालना) में भी लोगों से बात करता था और बड़ी उमर को पहुंच कर भी। मैंने तुझको किताब और हिकमत और तौरात और इंजील की तालीम दी, तू मेरे हुकुम से मिट्टी का पुतला परिंदे की शक्ल का बनता था और वो मेरे हुकुम से परिंदा बन जाता था, तू मदार-ज़ाद (जन्म से अंधा) और कोढ़ी (कोढ़ी) को मेरे हुकुम से अच्छा करता था, तू मुर्दो को मेरे हुकुम से निकलता था. फिर जब तू बनी इजराइल के पास सारी निशानियां लेकर पहुंचूं और जो लोग उन में से मुनकिर ए हक था था उनहों ने कहा के ये निशानियां जादूगरी के सिवा और कुछ नहीं हैं, तो मैंने ही तुझसे बचाया 
+[5:111] और जब मैंने हवारियों (चेलों) को इशारा किया के मुझपर और मेरे रसूल पर ईमान लाओ, तब उनहों ने कहा के "हम ईमान लाए और गवाह रहो के हम मुसलमान हैं" 
+[5:112] (हवारियों के सिलसिले में) ये वाकिया भी याद रहे के जब हवारियों ने कहा, ऐ ईसा इब्ने मरियम! क्या आप का रुब हमपर आसमान से खाने का एक ख़्वान उतर सकता है? तो ईसा ने कहा अल्लाह से डरो अगर तुम मोमिन हो 
+[5:113] उन्होन ने कहा हम बस ये चाहते हैं के इस ख़्वान से खाना खायें और हमारे दिल मुतमीन (स्थिर) हों और हमें मालूम हो जाये के आप ने जो कुछ हमसे कहा है वो सच है और हम इसपर गवाह हैं 
+[5:114] इसपर ईसा इब्न-ए-मरियम ने दुआ की "खुदाया! हमारे रब!" हमपर आसमान से एक ख्वान नाज़िल कर जो हमारे लिए और हमारे एग्लोन पिचलों के लिए ख़ुशी का मौका क़रार पाए और तेरी तरफ से एक निशानी हो, हमको रिज़क दे और तू बेहतरीन राज़िक है” 
+[5:115] अल्लाह ने जवाब दिया “मैं उसको तुमसे नाज़िल करने वाला हूं” , मगर उसके बाद जो तुम में से कुफ्र करेगा उसे मैं ऐसा सजा दूंगा जो दुनिया में किसी को ना दी होगी”
+[5:116] गरज जब (ये एहसानात याद दिलाकर) अल्लाह फरमायेगा के "ऐ ईसा इब्न-ए-मरियम क्या तू नये लोगों से कहा था के खुदा के सिवा मुझे और मेरी मां को भी खुदा बना लो?" तो वो जवाब में अर्ज़ करेगा के " सुबान अल्लाह! मेरा ये काम ना था के वो बात कहता जिसके कहने का मुझे हक़ ना था, अगर मैंने ऐसी बात कहीं होती, तो आपको ज़रूर इल्म होता, आप जानते हैं जो कुछ मेरे दिल में है और मैं नहीं जानता जो कुछ आपके दिल में है, आप तो सारी पोशिदा हकीकतों के आलिम हैं 
+[5:117] मैंने उनके सिवा कुछ नहीं कहा जिसका आपने हुकुम दिया था, ये अल्लाह की बंदगी करो जो मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी, मैं उसका वक्त तक उनका निगरान था जब तक मैं उनके दरमियान था, जब आपने मुझे वापस बुला लिया तो आप उन पर नजर रख रहे थे और आप तो सारी ही चीजों पर नजर रख रहे हैं 
+[5:118] अब अगर आप उन्हें सजा दें तो वो आपके बंद हैं और अगर माफ कर दें तो आप गालिब और दाना हैं” 
+[5:119] तब अल्लाह फरमायेगा “ ये वो दिन है जिसकी सच्चाई को उनकी सच्चाई नफ़ा देती है, उनके लिए ऐसे बाग़ हैं जिनके बारे में वो नफ़रत कर रही हैं, यहाँ वो हमेशा रहेंगे, अल्लाह उनसे रज़ी हुआ और वो अल्लाह से, यही बड़ी कामयाबी है" 
+[5:120] ज़मीन और आसमान और तमाम मौजुदात की बादशाही अल्लाह ही के लिए है और वह हर चीज पर कुदरत रखता है 
+
+सूरह 6: अल-अनआम (मवेशी) 
+------------------------------------------------ 
+[6:1] तारीफ अल्लाह के लिए है जिसने जमीन और आसमान बनाया, रोशनी और तारिकियां (अंधेरा) पैदा की, फिर भी वो लोग जिन्होन ने दावत ए हक को मन्ने से इंकार कर दिया है डर्सन को अपने रब का हमसर ठहरे हुए हैं 
+[6:2] वही है जिसने तुमको मिट्टी से पैदा किया, फिर तुम्हारे लिए जिंदगी की एक मुद्दत मुकर्रर करदी, और एक दूसरी मुद्दत और भी है जो उसकी हां ताई शुदा है मगर तुम लोग हो के शक में पड़े हुए हो 
+[6:3] वही एक खुदा आसमान में भी है और ज़मीन में भी। तुम्हारे खुले और छुपे सब हाल जानता है और जो बुराई या भलाई तुम कमाते हो उसे खूब वाकिफ है 
+[6:4] लोगों का हाल ये है के उनके रब की निशानियों में से कोई निशानी ऐसी नहीं जो उनके सामने आई हो और उनको ने उसे मुंह ना मोड़ लिया हो 
+[6:5] चुनांचे अब जो हक उनके पास आया तो उसे भी अनहोन ने झुटला दिया। अच्छा, जिस चीज़ का वो अब तक मज़ाक उड़ाते रहे हैं अंकारिब उसके मुतालिक कुछ खबरें उन्हें पहनेंगे 
+[6:6] क्या अनहोन ने देखा नहीं के उनसे पहले कितनी ऐसी क़ौम को हम हलाक कर चुके हैं जिनका अपने अपने जमाने में प्यार हो रहा है? उनको हमने ज़मीन में वो इक्तेदार बख्शा था जो तुम्हें नहीं बख्शा है। उन्पर हमने आसमान से ख़ूब बारिशें बरसाईं और उन्हें नीची नहरें बहा दी, (मगर जब उनको ने कुफ़्रां ए नियामत किया तो) आख़िर ए कार हमने उनके गुनाहों की याद में उन्हें तबाह कर दिया और उनकी जगह दूसरे दौर की क़ौमों को उठाया
+[6:7] (ऐ पैगम्बर)! अगर हम तुम्हारे ऊपर कोई कागज में लिखी किताब भी उतार देते और लोग उसे अपने हाथों से छू कर भी देख लेते तब भी जिहों ने हक का इंकार किया है वो यहीं कहते के ये तो सारे जादू है 
+[6:8] कहते हैं के इस नबी पर कोई फरिश्ता क्यों नहीं उतरा गया? अगर कहीं हमने फ़रिश्ता उतार दिया होता, तो अब तक कभी का फैसला हो चुका होता, फिर इन्हें कोई मोहलत न दी जाती 
+[6:9] और अगर हम फ़रिश्ते को उतारते तब भी उसे इंसानी शक्ल ही में उतारते और इस तरह उन्हें उसी शुभे में मुबतला कर देते जिसमें अब ये मुबतला है 
+[6:10] (ऐ मुहम्मद)! तुमसे पहले भी बहुत से रसूलों का मज़ाक उड़ाया जा चूका है, मगर मज़ाक उड़ाने वालों पर आख़िर ए कार वही हकीकत मुसल्लत होकर रही जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे 
+[6:11] इनसे कहो, ज़रा ज़मीन में चल फिर कर देखो झूठलाने वालों का क्या अंजाम हुआ है 
+[6:12] इनसे पूछो, आसमानों और ज़मीन में जो कुछ है वो किसका है? कहो सब कुछ अल्लाह ही का है, उसने रहम ओ करम का शैवा अपने ऊपर लाज़िम करलिया है (इसके लिए वो नफरमानियों और सरकशियों पर तुम्हें जदली से नहीं पकड़ लेता), कयामत के रोज वो तुम सब को जरूर जमा करेगा, ये बिल्कुल एक गैर मुश्तबा हकीकत है, मगर जिन लोगों ने अपने आप को खुद तबाही के खतरे में मुब्तिला करलिया है वो उसे नहीं मानते 
+[6:13] रात के अंधेरे और दिन के उजाले में जो कुछ ठहरा हुआ है सब अल्लाह का है, और वो सब कुछ सुनता और जानता है 
+[6:14] कहो, अल्लाह को छोड़ कर क्या मैं किसी और को अपना सरपरस्त बना लूं? हमें खुदा को छोड़ कर जो ज़मीन ओ आसमान का खालिक है और जो रोज़ी देता है रोज़ी लेता नहीं है? कहो, मुझे तो यही हुकुम दिया है के सबसे पहले मैं उसके आगे सर तस्लीम ख़त्म करूं (और ले ली है के कोई शिर्क करता है तो करे) तू बहार-हाल मुशरिकों में शामिल ना हो 
+[6:15] कहो, अगर मैं अपने रब की नफ़रमानी करूं तो डरता हूं के एक बड़े (ख़ौफ़नाक) दिन मुझे सज़ा भुगतनी पड़ेगी 
+[6:16] उस दिन जो सज़ा से बच गया उसपर अल्लाह ने बड़ा ही रहम किया और यही नुमायन कमियाबी है 
+[6:17] अगर अल्लाह तुम्हें किसी क़िस्म का नुक्सान पहुंचाए तो उसके सिवा कोई नहीं जो तुम्हें इस नुक्सान से बच्चा सके, और अगर वो तुम्हें किसी से बेहरामद करे तो वो हर चीज़ पर कादिर है 
+[6:18] वो अपने बंदों पर कामिल इख्तियारत रखता है और दाना और बा-खबर है 
+[6:19] इनसे पूछो, किसकी गवाही सबसे ज्यादा खराब है? कहो, मेरे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह गवाह है, और ये कुरान मेरी तरफ बाजारिये वही भेजा गया है ता-के तुम्हें और जिस को ये पहुंचे, सबको मुतनब्बे(चेतावनी) कर्दून। क्या सच है तुम लोग ये शहादत दे सकते हो कि अल्लाह के साथ दूसरे खुदा भी हैं? कहो, मैं तो इसकी शहादत हरगिज़ नहीं दे सकता। कहो, ख़ुदा तो वही एक है और मैं हमसे शिर्क से क़तई बेज़ार हूं जिसमें तुम मुबतला हो
+[6:20] जिन लोगों को हमने किताब दी है वो इस बात को इस तरह गैर मुश्तबा तौर पर पहचानते हैं जैसे उनको अपने बेटों के पहचानने में कोई इश्तिबाह पेश नहीं आता, मगर जिन्होन ने अपने आप को खुद खासरे में डाल दिया है वो इसे नहीं मानते 
+[6:21] और हम शक्स से बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठा बोहतन लगाए, या अल्लाह की निशानियों को झुठलाए? यकीनन ऐसे जालिम कभी फलाह नहीं पा सकते 
+[6:22] जिस रोज हम सबको इकट्ठ करेंगे और मुशरिकों से पूछेंगे के अब वो तुम्हारे ठहरे हुए शरीक कहां हैं जिनको तुम अपना खुदा समझते थे 
+[6:23] तो वो इसके सिवा कोई फिट ना उठे सकेंगे के (ये झूठा बयां देन के) ऐ हमारे आका! तेरी कसम हम हरगिज मुशरिक न थे 
+[6:24] देखो, हमें वक्त ये किस तरह अपने ऊपर आप झूठ घड़ेंगे, और वहां उनके सारे बनवाती माबूद गम हो जाएंगे 
+[6:25] मेरे अंदर से बाज़ लोग ऐसे हैं जो कान लगा कर तुम्हारी बात सुनते हैं मगर हाल ये है के हमने उनके दिलों पर पूरे डाल रखे हैं जिनकी वजह से वो इसको कुछ नहीं समझते और इनके कानों में गिरानी डाल देते हैं। वो ख्वा कोई निशानी देख लें, उसपर ईमान ला कर ना देंगे, हद ये है के जब वो तुम्हारे पास आ कर तुमसे झगड़ा करते हैं तो इनमें से जिन लोगों ने इंकार का फैसला कर लिया है वो (सारी बातें सुनने के बाद) यहीं कहते हैं के ये एक दास्तां ए इतिहास (प्राचीन कथाएं) के सिवा कुछ नहीं 
+[6:26] वो इस अमर ए हक़ को क़बूल करने से लोगों को रोकते हैं और खुद भी इस तरह दूर भागते हैं (वो समझते हैं के इस हरकत से वो तुम्हारा कुछ बिगाड रहे हैं) हालंके दर असल वो खुद अपनी ही तबाही का सामान कर रहे हैं मगर उन्हें इसका शहर नहीं है 
+[6:27] काश तुम हमें वक्त की हालत देख सकते हो जब वो दोज़ख़ के किनारे खड़े किये जायेंगे, हमें वक़्त वो कहेंगे के काश कोई सूरत ऐसी हो के हम दुनिया में फिर वापस भेज देंगे और अपने रब की निशानियों को ना झुटलायें और ईमान लाने वालों में शामिल हों 
+[6:28] दार-हक़ीक़त ये बात वो महज़ है वजह से कहेंगे के जिस हकीकत पर उन्हें ने पर्दा डाल रखा था वो हमें वक्त बे-नकाब होकर उनके सामने आ चुकी होगी, वरना अगर उन्हें साबिक जिंदगी की तरफ वापस भेजा जाए तो फिर वही सब कुछ करें जिसमें उन्हें मन किया गया है। वो तो हैं ही झूठे (इसलिये अपनी इस ख्वाहिश के इजहार में भी झूठ ही से काम लेंगे) 
+[6:29] आज ये लोग कहते हैं कि जिंदगी में जो कुछ भी है बस यहीं दुनिया की जिंदगी है और हम मरने के बाद हरगिज दोबारा ना उठेंगे 
+[6:30] काश वो मंज़र तुम देख सको जब ये अपने रुब के सामने खड़े किये जायेंगे हमें वक्त इनका रुब इनसे पूछेगा “क्या ये हकीकत नहीं है?” ये कहेंगे "हां ऐ हमारे रब! ये हकीकत ही है", वो फरमायेगा "अच्छा! तो अब अपने इंकार ए हकीकत की याद में अज़ाब का मजा चाहो"
+[6:31] नुक्सान में पड़ गए वो लोग जिन्होन ने अल्लाह से अपनी मुलाकात की इत्तिला को झूठ करार दिया, जब अचानक वो घड़ी आ जाएगी तो यही लोग कहेंगे "अफसोस! हमसे इस मामले में कैसी तकसीर हुई" और इनका हाल ये होगा के अपनी पीठ पर अपने गुनाहों का बोझ लड़े होंगे। देखो! कैसा बुरा बोझ है जो ये उठा रहे हैं 
+[6:32] दुनिया की जिंदगी तो एक खेल और एक तमाशा है, हकीकत में आखिरी ही का मुकाम उन लोगों के लिए बेहतर है जो जियान कारी से बचना चाहते हैं, फिर क्या तुम लोग अक्ल से काम ना लोगे 
+[6:33] (ऐ मुहम्मद)! हमें मालूम है कि जो बातें ये लोग बनाते हैं इनसे तुम्हें रंज होता है, लेकिन ये लोग तुम्हें नहीं झुठलाते हैं बल्के ये जालिम दार असल अल्लाह की आयत का इंकार कर रहे हैं 
+[6:34] तुमसे पहले भी बहुत से रसूल झुटलाए जा चुके हैं, मगर हमें तकज़ीब पर और उन अज़ियातों (उत्पीड़न) पर जो उन्हें पहुंच गई उनहों ने सब्र किया, यहां तक ​​के उन्हें हमारी मदद पहुंच गई। अल्लाह की बातों को बदलने की ताक़त किसी में नहीं है, और पिछले रसूलों के साथ जो कुछ पेश आया उसकी खबरें तुम्हें पाहुंच ही चुकी हैं 
+[6:35] ताहम अगर लोगों की बे-रूखी तुमसे बर्दाश्त नहीं होती तो अगर तुम में कुछ ज़ोर है तो ज़मीन में कोई सुरंग ढूंढो या आसमान में सीढ़ी लगाओ और इनके पास कोई निशानी लाने की कोशिश करो। अगर अल्लाह चाहता तो इन सबको हिदायत पर जमा कर सकता था, लिहाजा नादान मत बनो 
+[6:36] दावत ए हक पर लब्बैक वही लोग कहते हैं जो सुनने वाले हैं। रहे मुर्दे, तो उन्हें अल्लाह के पास बस क़बरों से ही उठाया जाएगा और फिर वो (उसकी अदालत में पेश होने के लिए) वापस ले जाएंगे 
+[6:37] ये लोग कहते हैं के इस नबी पर उसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों नहीं उतरी? कहो, अल्लाह निशानी उतारने की पूरी क़ुदरत रखता है, मगर मेरे अंदर से अक्सर लोग नादानी में मुब्तिला हैं 
+[6:38] ज़मीन में चलने वाले किसी जानवर और हवा में परों (पंखों) से उड़ने वाले किसी परिंदे को देख लो, ये सब तुम्हारी ही तरह की अनवा (समुदाय) है. हमने इनकी तकदीर के नविस्ते (रिकॉर्ड) में कोई कसर नहीं छोड़ी है, फिर ये सब अपने रब की तरफ जाते हैं 
+[6:39] मगर जो लोग हमारे निशानियों को झुठलाते हैं वो बहरे (गूंगा) और गुंगे हैं, तारिकियों (अंधेरे) में पड़े हुए हैं, अल्लाह जिसे चाहता है है भटका देता है और जिसे चाहता है सीधे रास्ते पर लगा देता है 
+[6:40] इनसे कहो, जरा गौर करके बताओ, अगर कभी तुमपर अल्लाह की तरफ से कोई बड़ी मुसीबत आ जाती है या आखिरी घड़ी आ जाती है तो क्या हम वक्त तुम अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारते हो? बोलो अगर तुम सच्चे हो 
+[6:41] हमें वक्त तुम अल्लाह ही को पुकारते हो, फिर अगर वो चाहता है तो इस मुसीबत को तुमपर से ताल देता है, ऐसे मौके पर तुम अपने रुके हुए शरीकों को भूल जाते हो
+[6:42] तुमसे पहले बहुत सी क़ौमों की तरफ हमने रसूल भेजा और उन क़ौमों को मसाइब ओ आलम (दुर्भाग्य और कठिनाई के साथ) में मुब्तिला किया ता-के वो आजिजी (विनम्रता) के साथ हमारे सामने झुक जाएं 
+[6:43] पास जब हमारी तरफ से अनपर शक्ति आई तो क्यों न उन्होन ने आजिजी इख्तियार (विनम्रता) की? मगर उनके दिल तो और सख्त हो गए और शैतान ने उनको इत्मिनान दिला दिया के जो कुछ तुम कर रहे हो खूब कर रहे हो 
+[6:44] फिर जब उन्हें ने हमें हिदायत को, जो उन्हें मिल गई थी, भुला दिया तो हमने हर तरह की खुश-हालियों के दरवाजे उनके लिए खोल दिए, यहां तक ​​के जब वो उन बख्शीशों में जो उन्हें अता की गई थी खूब मगन हो गए तो अचानक हमने उन्हें पकड़ लिया और अब हाल ये था के वो हर खैर से मायुस थे 
+[6:45] इस तरह उन लोगों की जड़ (जड़) काट कर रख दी गई जिन्हों ने ज़ुल्म किया था और तारीफ है अल्लाह रब्बुल आलमीन के लिए (के उसने उनकी जद काट दी) 
+[6:46] (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अगर अल्लाह तुम्हारी बिनई (आँख-देखना) और समात (सुनना) तुमसे छीन ले और तुम्हारे दिलों पर मोहर करदे तो अल्लाह के सिवा और कौन सा खुदा है जो ये कुव्वतें तुम्हें वापस दिला सकता है? देखो, किस तरह हम बार-बार अपनी नैशनियां उनके सामने पेश करते हैं और फिर ये किस तरह उन्हें नजर चुरा लेते हैं 
+[6:47] कहो, कभी तुमने सोचा के अगर अल्लाह की तरफ से अचानक या एलानिया तुमपर अज़ाब आ जाए तो क्या जालिम लोगों के सिवा कोई और हलाक होगा 
+[6:48] हम जो रसूल भेजते हैं इसी के लिए तो भेजते हैं के वो नए किरदार लोगों के लिए खुश-खबरी देने वाले और बड़े किरदारों के लिए दाराने वाले माननीय। फिर जो लोग उनकी बात मान लें और अपनी तरज़ ए अमल की इस्लाह कार्लें उनके लिए कोई खौफ और रंज का मौका नहीं है 
+[6:49] और जो हमारी आयतों को झुटलाएं वो अपनी नफ़रमानियों की याद में सज़ा भुगत कर रहेंगे 
+[6:50] (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो, "मैं तुमसे ये नहीं कहता के मेरे पास अल्लाह के ख़ज़ाने हैं, ना मैं गैब का इल्म रखता हूँ, और ना ये कहता हूँ के मैं फ़रिश्ता हूँ। मैं तो सिर्फ हमें वही की जोड़ी कर्ता हूँ जो मुझपर नाज़िल की जाती है"। फिर इनसे पूछो क्या अंधा और आँखों वाला दोनों बराबर हो सकते हैं? क्या तुम गौर नहीं करते 
+[6:51] (ऐ मुहम्मद)! तुम इस (इल्म ए वही) के ज़रिये से उन लोगों को हिदायत करो जो इस बात का ख़ौफ़ रखते हैं कि अपने रब के सामने कभी इस हाल में पेश किये जायेंगे के उसके सिवा वहां कोई (ऐसा ज़ि इक्तेकर) ना होगा जो उनका हमी ओ मददगार हो, या उनकी सिफ़रिश करे, शायद के (है) हिदायत से मुतनब्बेह होकर) वो खुदा-तरसी की रवीश इख्तियार कार्लें 
+[6:52] और जो लोग अपने रब को रात दिन पुकारते रहते हैं और उसकी खुशनुदी की तालाब में लगे हुए हैं उन्हें अपने से दूर ना फेंको, उनके हिसाब में से किसी चीज का बार तुमपर नहीं है और तुम्हारे हिसाब में किसी चीज़ का बार ऊपर नहीं। इसपर भी अगर तुम उन्हें दूर फेंकोगे तो ज़ालिमों में शामिल होगे
+[6:53] दर-असल हमें इस तरह लोगों में से बाज़ को बाज़ के ज़रिये से आज़माइश में डाला गया है ता-के वो इन्हें देख कर कहें "क्या ये हैं वो लोग जिनपर हमारे दरमियान अल्लाह का फ़ज़ल ओ करम हुआ है?" हान ! क्या खुदा अपने शुक्र गुजर बंदों को इनसे ज्यादा नहीं जानता है 
+[6:54] जब तुम्हारे पास वो लोग आएं जो हमारी आयत पर ईमान लाते हैं तो उनसे कहो "तुम्हारे सलामती है तुम्हारे रब ने रहम ओ करम का शेवा अपने ऊपर लाज़िम करलिया है। ये उसका रहम ओ करम ही है के अगर तुम में से कोई नादानी के साथ किसी बुराई का इर्तिकाब कर बैठा हो फिर उसके बाद तौबा करे और इस्लाह करले तो वो उसे माफ करता है और नरमी से काम लेता है” 
+[6:55] और इस तरह हम अपनी निशानियां खोल कर पेश करते हैं ता-के मुजरिमों की राह बिल्कुल नुमायन हो जाये 
+[6:56] (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के तुम लोग अल्लाह के सिवा जिन दूसरों को पुकारते हो उनकी बंदगी करने से मुझे मना किया गया है। कहो, मैं तुम्हारी ख्वाहिश की जोड़ी नहीं बनाऊंगा, अगर मैंने ऐसा किया तो गुमराह हो गया, राह ए रास्ते पाने वालों में से ना रहा 
+[6:57] कहो, मैं अपने रब की तरफ से एक दलील ए रोशन पर कायम हूं और तुमने उसे झुठला दिया है, अब मेरे इख्तियार में वो चीज है नहीं जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे हो। फ़ैसले का सारा इख़्तियार अल्लाह को है, वही अमर ए हक़ बयान करता है और वही बेहतरीन फ़ैसला करने वाला है 
+[6:58] कहो, अगर कहीं वो चीज़ मेरे इख़्तियार में होती जिसकी तुम जल्दी मचा रहे हो तो मेरे और तुम्हारे दरमियान कभी का फैसला हो चूका होता, मगर अल्लाह ज़्यादा बेहतर जानता है के जालिमों के साथ क्या मामला जाना चाहिए 
+[6:59] उसके पास गैब की कुंजी हैं जिनके पास उसके सिवा कोई नहीं जानता, बाहर ओ बर्र (जमीन और समुद्र में) में जो कुछ है सबसे वो वाकिफ है, दरख्त से गिरने वाला कोई पत्ता ऐसा नहीं जिसका उसे इल्म ना हो, ज़मीन के तारिक (अंधेरा) माफ़ में कोई दाना (अनाज) ऐसा नहीं जिसे वो बाख़बर ना हो, ख़ुस्क ओ तर (हरा या सूखा) सब कुछ एक खुली किताब में लिखा हुआ है 
+[6:60] वही है जो रात को तुम्हारी रूहें (आत्माएं) क़ब्ज़ करता है और दिन को जो कुछ तुम करते हो उसे जानता है, फिर दूसरे रोज़ वो तुम्हें इसी करोबार के आलम में वापस भेज देता है ता-के जिंदगी की मुकर्रर मुद्दत पूरी हो। आख़िर ए कार उसकी तरफ तुम्हारी वापसी है, फिर वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या करते रहोगे 
+[6:61] अपने बंदों पर वो पूरी क़ुदरत रखता है और तुम्हारे निगरानी करने वाले मुकर्रर करके भेजता है, यहाँ तक के जब तुम में से किसी की मौत का वक़्त आ जाता है तो उसके भेजे हुए फरिश्ते इसकी जान निकल लेते हैं और अपना फर्ज ए अंजाम देने में जरा कोटाही (उपेक्षा) नहीं करते 
+[6:62] फिर सबके सब अल्लाह, अपने हकीकी आका की तरफ वापस ले लिए जाते हैं। ख़बरदार हो जाओ, फ़ैसले के सारे इख़तियारत उसी को हासिल हैं और वो हिसाब लेने में बहुत तेज़ है
+[6:63] (ऐ मुहम्मद)! इनसे पूछो, सेहरा और समंदर की तारीखों में कौन तुम्हें खतरे से बचाता है? कौन है जिसकी तुम (मुसीबत के वक्त) गिड़गिड़ा, गिड़गिड़ा कर और चुपके-चुपके दुआएं मांगते हो? किस्से कहते हो के अगर इस बला से तू नहीं हमको बचा लिया तो हम जरूर शुक्रगुजार होंगे 
+[6:64] कहो, अल्लाह तुम्हें उसमें और हर तकलीफ से निजात देता है फिर तुम दूसरों को उसका शरीक ठहरते हो 
+[6:65] कहो, वह इसपर कादिर है के तुमपर कोई अजाब ऊपर से नाज़िल करदे, या तुम्हारे क़दमों के नीचे से बरपा करदे, या तुम्हें गिरोहों में तकसीम करके एक गिरोह को दूसरे गिरोह की ताकत का मजा चखवा दे। देखो, हम किस तरह बार-बार मुखतलिफ़ तरीक़ों से अपनी निशानियाँ इनके सामने पेश कर रहे हैं शायद के ये हकीकत को समझ लें 
+[6:66] तुम्हारी क़ौम उसका इनकार कर रही है हलाँके वो हकीकत है। इनसे कहदो के मैं तुमपर हवालादार नहीं बना गया हूं 
+[6:67] हर खबर के जहूर में आने का एक वक्त मुकर्रर है, करीब तुमको खुद अंजाम मालूम हो जाएगा 
+[6:68] और (ऐ मुहम्मद)! जब तुम देखो के लोग हमारी आयत पर नुक्ता चिनियां कर रहे हैं तो उनके पास से हट जाओ यहां तक ​​के वो इस गुफ्तगू को छोड़ कर दूसरी बातों में लग जाएं और अगर कभी शैतान तुम्हें भुलावे में डाल दे तो जिसका वक्त तुम्हें इस गलती का एहसास हो जाए उसके बाद फिर ऐसे जालिम लोगों के पास न बैठो 
+[6:69] उनके हिसाब में से किसी चीज़ की ज़िम्मेदारी नहीं, लेकिन हिदायत करना उनका फ़र्ज़ है शायद के वो गलत रावी से बच जाएँ 
+[6:70] छोड़ो उन लोगों को जिन्हों ने अपने दीन को खेल और तमाशा बना रक्खा है और जिन्होनें दुनिया की जिंदगी फरेब में मुब्तिला किये हुए हैं। हां मगर ये कुरान सुना कर हिदायत और तम्बीह (चेतावनी) करते रहो कि कहीं कोई शक्स अपने किए कार्टूनों के जवाब में गिरफ़्तार ना हो जाए, और गिरफ़्तार भी इस हाल में हो के अल्लाह से बचाने वाला कोई हमी ओ मददगार और कोई सिफ़री इसके लिए ना हो, और अगर वो हर मुमकिन चीज़ फ़िदिये में देकर छूटना चाहे तो वो भी उसे क़बूल ना की जाए, क्योंकि ऐसे लोग तो खुद अपनी कमाई के नाते में पकड़े जाएंगे, इनको तो अपने इनकार ए हक के मुआवज़े में खौलता (उबलता हुआ) हुआ पानी पीने को और दर्दनक अज़ाब भुगतने को मीलेगा 
+[6:71] (ऐ मुहम्मद)! इनसे पूछो, क्या हम अल्लाह को छोड़ कर उनको पुकारें जो ना हमें नफा दे सकते हैं ना नुक्सान? और जबके अल्लाह हमें सीधा रास्ता दिखा चुका है तो क्या अब हम उल्टे पांव फिर जाएंगे? क्या हम अपना हाल उस शक्स का सा कहते हैं जिसमें शैतानों ने सेहरा में भटका दिया हो और वो हेयरन ओ सरगर्दन फिर रहा हो, डरन हाल ये के उसके साथी उसे पुकार रहे हों के इधर आ ये सीधी राह मौजूद है? कहो, हकीकत में सही रहनुमाई है तो सिर्फ अल्लाह ही की रहनुमाई है और उसकी तरफ से हमें ये हुकुम मिला है के मालिक ए कायनात के आगे सर ए इताअत खत्म करदो
+[6:72] नमाज़ क़याम करो और उसकी नफ़रमानी से बचो, उसकी तरफ़ तुम साथ जाओगे 
+[6:73] वही है जिसने आसमान ओ ज़मीन को बारहक़ अदा किया है और जिस दिन वो कहेगा के हश्र (पुनरुत्थान) हो जाए उसका दिन वो हो जाएगा। उसका इरशाद ऐन-ए-हक़्क़ है और जिस रोज़ सूरज फूँका जाएगा उस रोज़ बादशाही उसी की होगी, वो गैब और शहादत (दृश्यमान) हर चीज़ का आलिम है और दाना और ख़बर है 
+[6:74] इब्राहीम का वाकिया याद करो जबके उसने अपने बाप का आज़र से कहा था, “क्या तू बुथों” (मूर्तियों) को खुदा बनाता है? मैं तो तुझे और तेरी क़ौम को खुली गुमराही में पाता हूं” 
+[6:75] इब्राहीम को हम इसी तरह ज़मीन और आसमान का निज़ाम ए सल्तनत दिखाते थे और इस लिए दिखते थे के वो यकीन करने वालों में से हो जाए 
+[6:76] चुनांचे जब रात उसपर तारी हुई तो उसने एक तारा देखा, कहा ये मेरा रब है, मगर जब वो डूब गया तो बोला डूब जाने वालों का तो मैं गिरविदा नहीं हूं 
+[6:77] फिर जब चांद चमकता नजर आया तो कहा ये मेरा रब है, मगर जब वो भी डूब गया गया तो कहा अगर मेरे रब ने मेरी रहनुमाई ना की होती तो मैं भी गुमराह लोगों में शामिल हो जाता 
+[6:78] फिर जब सूरज को रोशन देखा तो कहा ये है मेरा रब, ये सबसे बड़ा है, मगर जब वो भी डूबा तो इब्राहीम पुकार उठा'' ऐ बिरादरान ए क़ौम! मैं उन सब से बेज़ार हूं जिन्हे तुम खुदा का शरीक ठहरते हो 
+[6:79] मैंने तो यक्सू होकर अपना रुख उस हस्ती की तरफ कार्लिया जिसने जमीन और आसमान को अदा किया है और मैं हरगिज शिर्क करने वालों में से नहीं हूं" 
+[6:80] उसकी क़ौम इस्से झगड़ाने लगी तो उसने क़ौम से कहा “क्या तुम लोग अल्लाह के मामले में मुझसे झगड़ा करते हो? हलाँके उसने मुझे राह ए रस्त दिखा दी है और मैं तुम्हारे रुके हुए शेयरों से नहीं डरता। हां अगर मेरा रब कुछ चाहे तो वो जरूर हो सकता है। मेरे रब का इल्म हर चीज़ पर छाया हुआ है, फिर क्या तुम होश में ना आओगे 
+[6:81] और आख़िर मैं तुम्हारे रुके हुए शरीकों से कैसे डरूँ जबके तुम अल्लाह के साथ उन चीज़ों को ख़ुदाई में शरीक बनाते हुए नहीं डरते जिनके लिए उसके पास कोई सनद नाज़िल नहीं है? हम दोनों फरीक़ों में से कौन ज़्यादा बे-खौफ़ी ओ इत्मिनान का मुस्तहिक है? बताओ अगर तुम कुछ इल्म रखते हो 
+[6:82] हकीकत में तो अमन उनके लिए है और राह ए रास्ते पर वही हैं जो ईमान लाए और जिन्हों ने अपने ईमान को ज़ुल्म के साथ अलुदा (कलंकित) नहीं क्या” 
+[6:83] ये थी हमारी वो हुज्जत जो हमने इब्राहिम को उसकी क़ौम के मुक़ाबले में आता है। हम जिसे चाहते हैं बुलंद मरतबे अता करते हैं। हक ये है के तुम्हारा रब निहायत दाना (बुद्धिमान) और अलीम है 
+[6:84] फिर हमने इब्राहीम को इशाक और याकूब जैसा औलाद दी और हर एक को राह ए रास्त दिखाई (वही राह ए रास्त जो) इसके पहले नूह को दिखाई थी और उसकी नाक से हमने दाऊद, सुलेमान, अयूब, यूसुफ, मूसा और हारून को (हिदायत बख्शी) इस तरह हम नीकुकारों (धर्मी) को उनकी नेकी का बदला देते हैं
+[6:85] (उसी की औलाद से) जकारिया, याह्या, ईसा और इलियास को (राह-याब किया) हर एक उनमें से साले था 
+[6:86] (उसी के खानदान से) इस्माइल, अल-यासा (एलीशा), और यूनुस और लूत को (रास्ता दिखाया)। इनमे से हर एक को हमने तमाम दुनिया वालों पर फजीलत अता की 
+[6:87] नीज़ इनके आबा ओ अजदाद और इनकी औलाद और उनके भाई बंदों में से बहुतों को हमने नवाजा, उन्होंने अपनी खिदमत के लिए चुन लिया और सीधे रास्ते की तरफ उनकी रहनुमाई की 
+[6:88] ये अल्लाह की हिदायत है जिसके साथ वो अपने बंदों में से जिसकी चाहत है रहनुमाई करता है लेकिन अगर कहीं लोगों ने शिर्क किया होता तो इनका सब किया किया घरात हो जाता 
+[6:89] वो लोग थे जिनको हमने किताब और हुकुम और नबुवत अता की थी। अब अगर ये लोग इसको मानने से इनकार करते हैं तो (परवा नहीं) हमने कुछ और लोगों को ये नियामत सोमप दी है जो इसे मुन्किर नहीं हैं 
+[6:90] (ऐ मुहम्मद)! वही लोग अल्लाह की तरफ से हिदायत-याफ्ता थे, उन्हीं के रास्ते पर तुम चलो, और कहदो के मैं (इस तबलीग ओ हिदायत के) काम पर तुमसे किसी का तालिब नहीं हूं। ये तो एक आम हिदायत है तमाम दुनिया वालों के लिए 
+[6:91] इन लोगों ने अल्लाह का बहुत ग़लत अंदाज़ लगाया जब कहा के अल्लाह ने किसी बशर पर कुछ नाज़िल नहीं किया है। इनसे पूछो, फिर वो किताब जिसे मूसा लाया था, जो तमाम इंसानों के लिए रोशनी और हिदायत थी, जिसे तुम पारा करके रखते हो, कुछ दिखाते हो और बहुत कुछ छुपा लेते हो, और जिसकी ज़रिये से तुमको वो इल्म दिया गया जो ना तुम्हें हासिल था और ना तुम्हारे बाप दादा को, आख़िर उसका नाज़िल करने वाला कौन था? बस इतना कहदो के अल्लाह, फिर उन्हें अपनी दलीलों से खेलने के लिए छोड़ दो 
+[6:92] (उसी किताब की तरह) ये एक किताब है जिसने हमने नाज़िल किया है बड़ी खैर ओ बरकत वाली है, उस चीज़ की तस्दीक करती है जो इसे पहले आई थी और इसके लिए नाज़िल की गई है के इसके जरूर से तुम बस्तियों के इस मरकज (यानी मक्का) और इसके अतराफ में रहने वालों को मुतनब्बे (चेतावनी) करो। जो लोग आख़िरत को मानते हैं वो इस किताब पर ईमान लाते हैं और उनका हाल ये है कि अपनी नमाज़ की पाबन्दी करते हैं 
+[6:93] और हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जो अल्लाह पर झूठा बोहतन घड़ी, या कहे के मुझपर वही आई है डरान हाल ये के उसपर कोई वही नाज़िल ना की गई हो, या जो अल्लाह की नाज़िल करदा चीज़ के मुक़ाबले में काहे के मैं भी ऐसी चीज़ नाज़िल करके दिखा दूंगा? काश तुम जालिमों को इस हालात में देख सको जबके वो साकारात-ए-मौत में डुबकियाँ खा रहे हैं और फरिश्ते हाथ बढ़ा कर कह रहे हैं के “लाओ, निकालो अपनी जान, आज तुम्हें उन बातों की याद में ज़िल्लत का अज़ाब दिया जाएगा जो तुम अल्लाह।” पर तोहमत रख कर ना-हक़ बका (बोला) करते थे और उसकी आयत के मुक़ाबले में सरकशी दिखाते थे”
+[6:94] (और अल्लाह फरमाएगा) “लो अब तुम वैसे ही तन-ए-तन्हा (अकेले) हमारे सामने हाजिर हो गए जैसा हमने तुम्हें पहली मर्तबा अकेला पेदा किया था, जो कुछ हमने तुम्हें दुनिया में दिया था वो सब तुम पीछे छोड़ आये हो, और अब हम तुम्हारे साथ हैं तुम्हारे उन सिफ़रिशियों को भी नहीं देखते जिनका मुतालिक तुम समझते थे कि तुम्हारे काम बनाने में उनका भी कुछ हिस्सा है, तुम्हारे आपस के सब राब्ते (संपर्क) टूट गए और वो सब तुमसे गुम हो गए जिनका तुम ज़म (कल्पना) रखते थे” 
+[6:95] दाने (अनाज) और गुठली को फड़ने (अंकुरित) वाला अल्लाह है, वही जिंदा को मुर्दा से निकलता है और वही मुर्दे को जिंदा से खारिज करता है, ये सारे काम करने वाला तो अल्लाह है, फिर तुम किधर बहके चले जा रहे हो 
+[6:96] परदा ए शब (रात) को चाक करके वही सुबह निकलता है, उसने रात को सुकून का वक्त बनाया है, उसने चांद और सूरज के तुलू-ओ-गुरूब का हिसाब मुकर्रर किया है। ये सब उसकी ज़बरदस्त क़ुदरत और इल्म रखने वाले के ठहरे हुए अंदाज़े हैं 
+[6:97] और वही है जिसने तुम्हारे लिए तारों को सेहरा और समंदर की तरीकियों में रास्ता मालूम करने का ज़रिया बनाया। देखो हमने निशानियां खोल कर बयान कर दी हैं उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं 
+[6:98] और वही है जिसने एक मुतनफ़्फ़िस से तुमको भुगतान किया फिर हर एक के लिए एक जाए क़रार (समय-सीमा) है और एक उसके सोमपे जाने की जगह (विश्राम स्थल)। ये निशानियाँ हमने वाज़ेह करदी हैं उन लोगों के लिए जो समझ बूझ रखते हैं 
+[6:99] और वही है जिसने आसमान से पानी बरसाया, फिर उसके ज़री से हर क़िस्म की नबात उगी, फिर उसने हरे हरे खेत और दरख्त पैदा किये, फिर उनसे ताई बा ताई चढ़े हुए दाने (अनाज) निकले और खजूर के शगूफों से फल (फल) के गुच्छे के गुच्छे पैदा किए जो बोझ के मारे झुके पड़ते हैं, और अंगूर, जैतून और अनार के बाग लगाए जिनका फल एक दूसरे से मिलते-जुलते भी हैं और फिर हर एक की ख़ुसूसियत जुदा जुदा भी है। ये दरख्त जब फालते हैं तो इनमें फल आने और फिर उन्हें पकड़ने की कैफियत जरा गौर की नजर से देखो, चीजों में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं 
+[6:100] इसपर भी लोगों ने जिन्नो को अल्लाह का शरीक ठहर दिया, हलांके वो उनका खालिक है,और बे-जाने बूझे उसके लिए बेटे और बेटियां तसनीफ करदी, हलांके वो पाक और बाला-तार है उन बातों से जो ये लोग कहते हैं 
+[6:101] वो तो आसमानो और जमीन का मुजिद (प्रवर्तक) है। उसका कोई बेटा कैसे हो सकता है जबके कोई उसकी शरीक और जिंदगी ही नहीं है। उसने हर चीज़ को पेदा किया है और वो हर चीज़ का इल्म रखता है 
+[6:102] ये है अल्लाह तुम्हारा रब, कोई खुदा उसके सिवा नहीं है, हर चीज़ का ख़ालिक, लिहाज़ा तुम उसकी बंदगी करो और वो हर चीज़ का कफ़ील है 
+[6:103] निगाहें उसको नहीं पा जैसे और वो निगाहों को पा लेता है, वो निहायत बारीकियां और बा-खबर है
+[6:104] देखो, तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से बसीरत की रोशनियां आ गई हैं, अब जो शादी से काम लेगा अपना ही भला करेगा और जो अंधा बनेगा खुद नुक्सान उठाएगा, मैं तुमपर कोई पासबान (कीपर) नहीं हूं 
+[6:105] इस तरह हम अपनी हैं आयतों को बार-बार मुख्तलिफ़ तरीक़ों से बयान करते हैं और इस लिए करते हैं कि ये लोग कहें तुम किसी से पढ़ आए हो, और जो लोग इल्म रखते हैं उन पर हम हकीकत को रोशन कर दें 
+[6:106] (ऐ मुहम्मद)! हमें वही की जोड़ी बनाते जाओ जो तुम्हारे रब की तरफ से नाज़िल हुई है, क्योंकि हमारे पास एक रुब के सिवा कोई और खुदा नहीं है। और इन मुशरिकेन के पीछे ना पड़ो 
+[6:107] अगर अल्लाह की मशियत होती तो (वो खुद ऐसा बंदोबस्त कर सकता था के) ये लोग शिर्क ना करते, तुमको हमने अंदर पासबान (अभिभावक) मुकर्रर नहीं किया है और ना तुम अंदर हवालादार हो 
+[6:108] और (ऐ ईमान) लाने वालों!) ये लोग अल्लाह के सिवा जिनको पुकारते हैं उन्हें गालियाँ न दो, कहीं ऐसा न हो के ये शिर्क से आगे बढ़कर जहालत की बिना पर अल्लाह को गालियाँ देने लगें। हमने तो इसी तरह हर गिरह के लिए उसके अमल को खुशनुमा बना दिया है, फिर उन्हें अपने रब ही की तरफ पलट कर आना है, हमें वक्त वो उन्हें बता देगा के वो क्या कर रहे हैं 
+[6:109] ये लोग कड़ी कसमें खा खा कर कहते हैं अगर कोई निशानी हमारे सामने आ जाए तो हम उसपर ईमान ले आएंगे। ऐ मुहम्मद! इनसे कहो, के "निशानियां तो अल्लाह के पास हैं" और तुम्हें कैसे समझा जाए कि अगर निशानियां आ भी जाएं तो ये ईमान लाने वाले नहीं 
+[6:110] हम उसी तरह इनके दिलों और निगाहों को फेर रहे हैं जिस तरह ये पहली मरतबा उसपर ईमान नहीं लाए थे, हम इनकी सरकशी ही में भटकने के लिए छोड़ देते हैं 
+[6:111] अगर हम फरिश्ते भी इनपर नाजिल करते और मुर्दे इनसे बातें करते और दुनिया भर की चीजों को हम उनकी आंखों के सामने जमा कर देते तब भी ये ईमान लाने वाले ना थे, इल्ला ये के मसीहत ए इलाही यहीं हो के वो ईमान लायें, मगर अक्सर लोग नादानी की बातें करते हैं 
+[6:112] और हमने तो इसी तरह हमेशा शैतान इंसानो और शैतान जिन्नो को हर नबी का दुश्मन बनाया है जो एक दूसरे पर ख़ुशैंद बातें धोखे और फ़रेब के तौर पर इल्का करते रहे हैं. अगर तुम्हारे रब की मशहुत ये होती के वो ऐसा ना करें तो वो कभी ना करते। पास तुम उन्हें उनके हाल पर छोड़ दो के अपनी इफ्तारा परदाज़ियां करते रहो 
+[6:113] (ये सब कुछ हम इन्हें इसके लिए करने दे रहे हैं के) जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल इस (खुशनुमा धोखे) की तरफ़ मायिल होन और वो इस रज़ी हो जाएं और उन बुराइयों का इकतिसाब करें जिनका इकतिसाब वो करना चाहते हैं
+[6:114] फिर जब हाल ये है तो क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और फैसला करने वाला तलाश करूं, हालांके उसने पूरी तफ़सील के साथ तुम्हारी तरफ किताब नाज़िल कर दी है? और जिन लोगों को हमने (तुमसे पहले) किताब दी थी वो जानती है कि ये किताब तुम्हारी रब ही है कि तरफ से हक़ के साथ नाज़िल हुई है, लिहाज़ा तुम शक्क करने वालों में शामिल ना हो 
+[6:115] तुम्हारे रुब की बात सच्ची और इंसाफ के ऐतबार से कामिल है, कोई उसके फ़रामीन को तबदील करने वाला नहीं है और वो सब कुछ सुनता और जानता है 
+[6:116] और (ऐ मुहम्मद)! अगर तुम उन लोगों की अक्सरियत के कहने पर चलो जो ज़मीन में बसे हैं तो वो तुम्हें अल्लाह के रास्ते से भटका देंगे, वो तो मेहज़ गुमान पर चलते और क़यास-आराइयां करते हैं 
+[6:117] दर हकीकत तुम्हारा रब्ब ज़्यादा बेहतर जानता है के कौन उसके रास्ते से हटा हुआ है और कौन सीधी राह पर है 
+[6:118] फिर अगर तुम लोग अल्लाह की आयत पर ईमान रखते हो तो जिस जानवर पर अल्लाह का नाम लिया गया हो उसका गोश्त खाओ 
+[6:119] आखिर क्या वजह है के तुम वो चीज ना खाओ जिस्पार अल्लाह का नाम लिया गया हो, हालांके जिन चीजों का इस्तमाल हालात ए इज़्तरार (जब तक आप विवश न हों तब तक आपको मना किया जाता है) के सिवा दूसरी तमाम हालात में अल्लाह ने हराम करदिया है उनकी तफ़सील वो तुम्हें बता चुका है, बकसरत लोगों का हाल ये है के इल्म के बिना महज़ अपनी ख्वाहिशत की बिना पर गुमराह-कुन बातें करते हैं, हद से में गुज़रने वालों को तुम्हारा रब खूब जानता है 
+[6:120] तुम खुले गुनाहों से भी बचो और छुपे गुनाहों से भी, जो लोग गुनाहों का इक्तिसाब करते हैं वो अपनी इस कमाई का बदला पा कर रहेंगे 
+[6:121] और जिस जानवर को अल्लाह का नाम लेकर जुबां न दिया गया हो उसका गोश्त ना खाओ, ऐसा करना फिस्क है, शयातीन अपने साथियों के दिलों में शुकूक (संदेह) और एतराजात इल्का करते हैं ता-के वो तुमसे झगड़ा करें, लेकिन अगर तुमने उनकी इताअत कबूल की तो यकीनन तुम मुशरिक हो 
+[6:122] क्या वो शक्स जो पहले मुर्दा था फिर हमने उसे जिंदगी बख्शी और उसको वो रोशनी मिलती है जिसके उजाले में वो लोगों के दरमियान जिंदगी की राह तय करता है, उस शक्स की तरह हो सकता है जो तारिकियों (अंधेरे) में पड़ा हुआ हो और कोई तरह उनसे ना निकलता हो? काफ़िरों के लिए तो इसी तरह उन्हें अमल ख़ुशनुमा बना दिए गए हैं 
+[6:123] और इसी तरह हमने हर बस्ती में उसके बड़े-बड़े मुजरिमों को लगा दिया है के वहां अपने मकर ओ फरेब का जाल फैलाएं, दरसल वो अपने फरेब के जाल में आप फंसे हैं, मगर उन्हें इसका शूर नहीं है 
+[6:124] जब उनके सामने कोई आयत आती है तो वो कहते हैं "हम ना मानेंगे जब तक के वो चीज़ खुद हमको ना दी जाए जो अल्लाह के रसूलों को दी गई है"। अल्लाह ज़्यादा बेहतर जानता है के अपनी पैगम्बरी का काम किस्से ले और किस तरह ले। करीब है वो वक्त जब ये मुजरिम अपनी मक्कारियों की याद में अल्लाह के हन जिलत और सख्त अजाब से दो-चार होंगे
+[6:125] पास (ये हकीकत है के) जिसे अल्लाह हिदायत बख्शने का इरादा करता है उसका सीना इस्लाम के लिए खोल देता है और जिसे गुमराही में डालने का इरादा करता है उसके सीने को तंग करता है और ऐसा दिखाता है के (इस्लाम का तसव्वुर करता ही) उसे यूं मालूम होना लगता है के गोया उसकी रूह आसमान की तरफ़ परवाज़ कर रही है। इस तरह अल्लाह (हक़ से फ़रार और नफ़रत की) नापाकी उन लोगों पर मुसल्लत करदेता है जो ईमान नहीं लाते 
+[6:126] हलानके ये रास्ता तुम्हारे रब का सीधा रास्ता है और इसके निशाना उन लोगों के लिए वाज़ेह कर दिए गए हैं जो हिदायत क़बूल करते हैं 
+[6:127] उनके लिए उनके रब के पास सलामती का घर है और वो उनका सरपरस्त है हमें सही तर्ज़-ए-अमल की वजह से जो उनहों ने इख्तियार किया 
+[6:128] जिस रोज़ अल्लाह इन सब लोगों को घेर कर जमा करेगा, उस रोज़ वो जिन्नो से ख़िताब करके फ़ैमायेगा के “ऐ गिरो ए जिन्न! तुमने तो नव-ए-इंसानी पर खूब हाथ साफ किया” इंसानों में से जो उनके रफीक थे वो अर्ज़ करेंगे “परवरदिगार! हम में से हर एक ने दूसरे को खूब इस्तमाल किया है, और अब हम हमें वक्त पर आ रहे हैं जो तू नहीं हमारे लिए मुकर्रर करदिया था”। अल्लाह फरमाएगा "अच्छा अब आग तुम्हारा सोचना है, इसमें तुम हमेशा रहोगे"।उससे बचेंगे सिर्फ वही जिन्हें अल्लाह बचाना चाहेगा, बेशक तुम्हारा रब दाना और अलीम है 
+[6:129] देखो, इस तरह हम (आखिरत में) जालिमों को एक दूसरे का साथी बनायेंगे हमें कमाई की वजह से जो वो (दुनिया में एक दूसरे के साथ मिलकर) करते थे 
+[6:130] (इस मौके पर अल्लाह उनसे पूछेगा के) "ऐ गिरो ​​ए जिन ओ इंस, क्या तुम्हारे पास खुद तुम्ही में से वो पैगंबर नहीं आए थे जो तुमको मेरी आयत सुनाते और इस दिन के अंजाम से डरते हाँ?” वो कहेंगे "हां, हम अपने खिलाफ़ खुद गवाही देते हैं"। आज दुनिया की जिंदगी ने लोगों को धोखे में डाल रखा है, मगर हमें वक्त वो खुद अपने खिलाफ गवाही देंगे के वो काफिर थे 
+[6:131] (ये शहादत उनसे पूरी हो जाएगी के ये साबित हो जाए के) तुम्हारा रब बस्तियों को जुल्म के साथ तबाह करने वाला नहीं था जबके उनके बाशिंदे हकीकत से ना-वाक़िफ़ होन 
+[6:132] हर शक्स का दरजा उसके अमल के लिहाज़ से है और तुम्हारे रब लोगों के अमल से बे खबर नहीं है 
+[6:133] तुम्हारा रब बे-नियाज़ है और मेहरबानी उसका शेवा है। अगर वो चाहे तो तुम लोगों को ले जाए और तुम्हारी जगह दूसरे जिन लोगों को चाहे ले आए जिस तरह उसने तुम्हें कुछ और लोगों की नाक से उठाया है 
+[6:134] तुमसे जिस चीज का वादा किया जा रहा है वो यकीनन आने वाली है और तुम खुदा को आजिज (निराश) करदेने की ताक़त नहीं रखते 
+[6:135] (ऐ मुहम्मद)! कहदो के लोगन! तुम अपनी जगह अमल करते रहो और मैं भी अपनी जगह अमल कर रहा हूँ। अंकारीब तुम्हें मालूम हो जाएगा के अंजाम ए कार किसके हक में बेहतर होता है। बहार-हाल ये हकीकत है के जालिम कभी फलाह नहीं पा सकते
+[6:136] लोगों ने अल्लाह के लिए खुद की अदा की, जो हुई खेतों और मवेशियों में से एक हिसा मुकर्रर किया है और कहते हैं ये अल्लाह के लिए है, बज़म ए खुद, और ये हमारे ठहरे हुए शरीकों के लिए। फिर जो हिसा इनके ठहरे हुए शरीकों के लिए है वो तो अल्लाह को नहीं पहचानता मगर जो अल्लाह के लिए है वो इनके शरीकों को पहुंच जाता है। कैसे बुरे फैसले करते हैं ये लोग 
+[6:137] और इसी तरह बहुत से मुशरिकों के लिए उनके शरीकों ने अपनी औलाद के कत्ल को खुशनुमा बना दिया है ता-के उनको हलकत में मुब्तिला करें और उनके दीन को मुश्तबा (भ्रम) बना दें। अगर अल्लाह चाहता तो ये ऐसा ना करते, लिहाजा इन्हें छोड़ दो के अपनी इफ्तारा पर्दाजियों में लगे रहेंगे 
+[6:138] कहते हैं ये जानवर और ये खेत महफूज हैं, इनमें सिर्फ वही लोग खा सकते हैं जिन्हें हम खिलाना चाहते हैं, हलांके ये पाबंदी इनकी खुद साकता है (उनके दावे से)। फिर कुछ जानवर हैं जिनपर सवारी और बार बारदारी (पीठ पर बोझ) हराम कर दी गई है और कुछ जानवर हैं जिनपर अल्लाह का नाम नहीं लेते। और ये सब कुछ इन्हों ने अल्लाह पर इफ्तारा (झूठी मनगढ़ंत बातें) किया है, इफ्तारा परदाज़ियों का बदला देगा में अनकरीब अल्लाह इन्हें 
+[6:139] और कहते हैं कि जानवरों के पेट में जो कुछ है ये हमारे मर्दों के लिए मखसूस है और हमारी औरतें पर हराम, लेकिन अगर वो मुर्दा हो (जन्म से मृत) तो दोनों इसके खाने में शरीक हो सकते हैं। ये बातें जो इन्हों ने गड़बड़ ली हैं इनका बदला अल्लाह इन्हें देकर रहेगा। यकीनन वो हकीम है और सब बातों की उपयोगी खबर है 
+[6:140] यकीनन खसरे (नुक्सान) में पढ़ गए वो लोग जिन्होन ने अपनी औलाद को जिहालत (अज्ञानता) ओ नादानी की बिना पर क़त्ल किया और अल्लाह के दिए हुए रिज़क को अल्लाह पर इफ्तारा परदाज़ी करके हराम ठहरा लिया, यकीनन वो भटक ​​गए और हरगिज वो राह ए रास्ते पाने वालों में से ना थे 
+[6:141] वो अल्लाह ही है जिसने तरह तरह के बाघ और ताकिस्तान और नखलास्तान (जालीदार और बिना जाली वाला) पैदा किए, खेतियां उगाई जिनसे क़िस्म क़िस्म के मकुलात हासिल होते हैं (ताड़ के पेड़, और फसलें, सभी स्वाद में भिन्न होते हैं), ज़ैतून और अनार के दरख़्त पैदा किये हैं जिनके फल सूरत में मुशाबेह (समान) और मज़ा (स्वाद) में मुख़्तलिफ़ होते हैं। खाओ उनकी पैदावर जबके ये फैलाएं, और अल्लाह का हक अदा करो जब इसकी फसल काटो, और हद से ना गुजरो के अल्लाह हद से गुजारने वालों को पसंद नहीं करता 
+[6:142] फिर वही है जिसने मवेशियों में से वो जानवर भी पैदा किए जिनसे सवारी ओ बार-बारदारी (बोझ) का काम लिया जाता है और वो भी जो खाने और बेचने के काम आते हैं। खाओ उन चीज़ों में से जो अल्लाह ने तुम्हें बख्शी है और शैतान की जोड़ी ना करो के वो तुम्हारा खुला दुश्मन है
+[6:143] ये आठ (आठ) नर्र ओ माडा (जोड़े) हैं, दो भेड़ (भेड़) की क़िस्म से और दो बकरी की क़िस्म से। (ऐ मुहम्मद)! इनसे पूछो के अल्लाह ने उनके नार हराम किये हैं या माडा, या वो बच्चे जो भेड़ों (भेड़) और बकरियों के पेट में हैं? ठीक ठीक इल्म के साथ मुझे बताओ अगर तुम सच्चे हो 
+[6:144] और इसी तरह दो औंस की क़िस्म से हैं और दो गाय (गाय) की क़िस्म से। पूछो, इनके नर अल्लाह ने हराम किये हैं या माडा, या वो बच्चे जो ऊंटनी (वह-ऊंटनी) और गाई के पेट में हैं? क्या तुमने हमें वक्त हाजिर किया था जब अल्लाह ने इनको हराम होने का हुक्म तुम्हें दिया था? फिर उस शक्स से बढ़ कर जालिम और कौन होगा जो अल्लाह की तरफ मंसूब करके झूठी बात कहे ता-के इल्म के बगैर लोगों की गलत रहनुमाई करे। यकीनन अल्लाह ऐसे ज़ालिमों को राह ए रस्त नहीं दिखता 
+[6:145] (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के जो वही मेरे पास आई है उसमें तो मैं कोई चीज ऐसी नहीं पाता जो किसी खाने वाले पर हराम हो, इल्ला ये के वो मुर्दार (मृत) हो, या बहया (बाहर डाला गया) हुआ खून, या सुव्वर का गोश्त हो के वो नापाक है, या फिस्क (अस्वच्छ) हो के अल्लाह के सिवा किसी और के नाम पर जुबां किया गया हो, फिर जो शक्स मजबूरी की हालत में (कोई चीज इनमें से खा ले) बिना इसके के वो नफरमानी का इरादा रखता हूं और बिना इसके के वो हद ए जरुरत से तजावुज करे, तो यकीनन तुम्हारा रब दरगुजर से काम लेने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[6:146] और जिन लोगों ने यहुदियात इख्तियार की अनपर हमने सब नाख़ून (नाखून) वाले जानवर हराम कर दिए थे, और गाय और बकरी की चारबी (मोटी) भी, बज़ुज़ उसके जो उनकी पीठ (पीठ) या उनकी एंथोन (अंतरिक्ष) से ​​लगी हुई हो या हड्डी से लगी रह जाये. ये हमने उनकी सरकशी की सजा उन्हें दी थी और ये जो कुछ हम कह रहे हैं बिल्कुल सच कह रहे हैं 
+[6:147] अब अगर वो तुम्हें झुटलाएएं तो उनसे कहदो के तुम्हारे रब का दामन ए रहमत वही है और मुजरिमों से उसके अज़ाब को फेरा नहीं जा सकता 
+[6:148] ये मुशरिक लोग (तुम्हारी इन बातों के जवाब में) जरूर कहेंगे के "अगर अल्लाह चाहता तो ना हम शिर्क करते और ना हमारे बाप दादा, और ना हम किसी चीज को हराम ठहराते"। ऐसी ही बातें बना बना कर इनसे पहले के लोगों ने भी हक को झुटलाया था, यहां तक ​​के आखिर ए कार हमारे अजब का मजा उन्होन ने चक लिया। इनसे कहो "क्या तुम्हारे पास कोई इल्म है जिसे हमारे सामने पेश कर सकते हो? तुम तो महज गुमान पर चल रहे हो और नेरी क़यास अराइयां करते हो" 
+[6:149] फिर कहो (तुम्हारी इस हुज्जत के मुकाबले में) "हकीकत रस हुज्जत तो अल्लाह के पास है, अगर अल्लाह चाहता तो तुम सबको हिदायत दे देता” 
+[6:150] इनसे कहो के “लाओ अपने वो गवाह जो इस बात की शहादत दीन के अल्लाह ही ने इन चीज़ों को हराम किया है”। फिर अगर वो शहादत दे दें तो तुम उनके साथ शहादत न देना, और हरगिज उन लोगों की ख्वाहिश के पीछे ना चलना जिन्हों ने हमारी आयत को झुटलाया है, और जो आख़िरत के मुनकिर हैं, और जो दूसरों को अपने रुब का हमसर बनाते हैं
+[6:151] (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के आओ मैं तुम्हें सुनाऊं तुम्हारे रब ने तुमपर क्या पाबंदियां आयद की हैं: ये उसके साथ किसी को शरीक ना करो, और वालिदें (मां बाप) के साथ नई सुलूक करो, और अपनी औलाद को मुफलिसी के डर से कत्ल ना करो, हम तुम्हें भी रिज्क देते हैं और उनको भी देंगे, और बेशर्मी की बातों के करीब भी ना जाओ, ख्वाह वो खुली हो या छुपी। और किसी जान को जैसे अल्लाह ने मोहतरम ठहरया है हलाक न करो मगर हक के साथ। ये बातें हैं जिनकी हिदायत हमें तुम्हें पसंद है, शायद के तुम समझ बूझ से काम लो 
+[6:152] और ये के यतीम के माल के करीब ना जाओ मगर ऐसी तारीख से जो बेहतर हो, यहां तक ​​के वो अपने सीने-रुश्द (परिपक्वता) को पाहुंच जाए, और नाप टोल में पूरा इन्साफ करो. हम हर शक्स पर ज़िम्मेदारी का उतना ही बोझ रखते हैं जितना उसके इम्कान में (यह सहन कर सकता है) है, और जब बात कहो इन्साफ की कहो मामला अपने रिश्ते में ही का क्यों ना हो, और अल्लाह के अहद (वाचा) को पूरा करो। बातों की हिदायत में अल्लाह ने तुम्हें कहा है शायद तुम हिदायत कबूल करो 
+[6:153] नीज़ उसकी हिदायत ये है के यही मेरा सीधा रास्ता है, लिहाज़ा तुम इसी पर चलो और दूसरे रास्ते पर ना चलो के वो उसके रास्ते से हटा कर तुम्हें परागा(बिखरा) करदेंगे. ये है वो हिदायत जो तुम्हारे रब ने तुम्हें कहा है, शायद के तुम कजरवी से बचाओ 
+[6:154] फिर हमने मूसा को किताब अता की थी जो भलाई की रवीश इख्तियार करने वाले इंसान पर नियामत की तकमील और हर जरूरी चीज की तफसील और सरसर हिदायत और रहमत थी (और इस्लिये बानी इसराइल को दी गई थी के) शायद लोग अपने रब की मुलाकात पर ईमान लायें 
+[6:155] और इसी तरह ये किताब हमने नाज़िल की है, एक बरकत वाली किताब, पास तुम इसकी जोड़ी करो और तक़वा की रवीश इख्तियार करो, बाद नहीं के तुमपर रहम किया जाए 
+[6:156] अब तुम ये नहीं कह सकते कि किताब तो हमसे पहले के दो गिरोहों को दी गई थी, और हमको कुछ खबर ना थी के वो क्या पढ़ते पढ़ते थे 
+[6:157] और अब तुम ये बहाना भी नहीं कर सकते अगर हमपर किताब नाज़िल की गई होती तो हम उनसे ज़्यादा रस्ते-कच्चे साबित होते। तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से एक दलील ए रोशन और हिदायत और रहमत आ गई है, अब इस से बढ़कर जालिम कौन होगा जो अल्लाह की आयत को झुठलाए और उससे मुह मोड़ ले। जो लोग हमारी आयत से मुह मोड़ते हैं उन्हें इस रुहगर्दानी की पैदाइश में हम बढ़ाते हैं सज़ा दे कर रहेंगे 
+[6:158] क्या अब लोग इसके मुंतज़िर हैं के उनके सामने फ़रिश्ते आ खड़े हैं, या तुम्हारा रुब खुद आ जाए, या तुम्हारे रुब की बाज़ सारे निशानियाँ नामदार हो जायेंगे? जिस रोज़ तुम्हारे रब की बाज़ मख़सूस निशानियां नामदार हो जाएंगी फिर किसी ऐसे शक्स को उसका ईमान कुछ फ़ायदा न देगा जो पहले ईमान न लाया हो या जिसने अपने ईमान में कोई भलाई न कमाई हो। (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहदो के अच्छा, तुम इंतज़ार करो, हम भी इंतज़ार करते हैं
+[6:159] जिन लोगों ने अपने दीन को टुकड़े-टुकड़े कर दिया और गिरो-गिरोह बन गए यकीनन उनसे तुम्हारा कुछ वास्ता नहीं। उनका मामला तो अल्लाह के लिए सही है, वही उनको बताएगा के उन्होन ने क्या कुछ किया है 
+[6:160] जो अल्लाह के हुज़ूर नेकी लेकर आएगा उसके लिए दस गुना (दस बार) अजर है, और जो बड़ी (बुरा काम) लेकर आएगा उसको उनता ही बलदा दिया जाएगा जितना उसने कसूर किया है, और किसी पर ज़ुल्म न किया जाएगा 
+[6:161] (ऐ मुहम्मद)! कहो मेरे रब ने बिल-यक़ीन मुझे सीधा रास्ता दिखाया है, बिल्कुल ठीक दीन जिस में कोई टेढ़ (टेढ़ापन) नहीं, इब्राहिम का तरीक़ा जिसने यक्सू होकर उसने इख्तियार किया था और वो मुशरिकों में से ना था 
+[6:162] कहो, मेरी नमाज़, मेरे तमाम मरासिम उबुदियात (मेरे सभी इबादत), मेरा जीना और मेरा मरना, सब कुछ अल्लाह रब्बुल आलमीन के लिए है 
+[6:163] जिसका कोई शरीक नहीं, इसका मुझे हुकुम दिया गया है और सबसे पहले सर ए इताअत झुकने वाला मैं हूं 
+[6:164] कहो, क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और रब तलाश करूं, हालांके वही हर चीज का रब है? हर शक्स जो कुछ कमाता है उसका ज़िम्मेदार वो खुद है, कोई बोझ उठाने वाला दूसरे का बोझ नहीं उठता। फिर तुम सबको अपने रुब की तरफ पलटना है, हमारा वक्त वो तुम्हारे इख्तिलाफत (मतभेद/विवाद) की हक़ीक़त तुमपर खोल देगा 
+[6:165] वही है जिसने तुमको ज़मीन का ख़लीफ़ा बनाया, और तुम में से बाज़ को बाज़ के मुकाबले में ज़्यादा बुलंद दर्जे दिया, ता-के जो कुछ तुमको दिया है उसमें तुम्हारी आजमाइश करे। बेहसाक तुम्हारा रुब सज़ा देने में भी बहुत तेज़ है और बहुत दरगुज़ार करने और रहम फ़रमाने वाला भी है 
+
+सूरह 7: अल-अराफ़ (ऊंचे स्थान) 
+------------------------------------------------ 
+[7:1] अलिफ़ लाम मीम साद 
+[7:2] ये एक किताब है जो तुम्हारी तरफ नाज़िल की गई है, पास (ऐ मुहम्मद), तुम्हारे दिल में इसे कोई परेशानी ना हो, इसके उतरने की ग़रज़ ये है के तुम इसके ज़रूरी से (मुनकिरीन को) डराओ और ईमान लाने वाले लोगों को याद दिहानी हो 
+[7:3] लोगन, जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है उसकी जोड़ी करो और अपने रब को छोड़ कर दूसरे सरपरतों की जोड़ी ना करो, मगर तुम हिदायत कम ही मानते हो 
+[7:4] कितनी ही बस्तियाँ हैं जिन्हें हमने हलक करदिया, उन पर हमारा अजब अचानक रात के वक्त टूट पड़ा, या दिन दहाड़े ऐसे वक्त आया जब वो आराम कर रहे थे 
+[7:5] और जब हमारा अजब उन्पर आ गया तो उनकी ज़ुबान पर इसके सिवा कोई सदा ना थी के वाकाई हम जालिम थे 
+[7:6] पास ये जरूर होकर रहना है के हम उन लोगों से बाज़-पुर्स करें जिनकी तरफ हमने पैगम्बर भेजे हैं और पैगम्बरों से भी पूछें (के उन्होन ने पैगाम रसानी का फर्ज कहां तक ​​अंजाम दिया और उन्हें इसका क्या जवाब मिला) 
+[7:7] फिर हम खुद पूरे इल्म के साथ सारी सरगुशिस्ट (पूरा हिसाब) उनके आगे पेश कर देंगे। आख़िर हम कहीं गायब तो नहीं थे
+[7:8] और जिनके पैडले भारी होंगे वही फलाह पाएंगे 
+[7:8] और जिनके पैडले हल्के रहेंगे वही अपने आप को खासे (नुक्सान) में मुब्तिला करने वाले होंगे, क्योंकि वो हमारी आयत के साथ ज़ालिमाना बरताओ करते रहे थे 
+[7:10] हमने तुम्हें ज़मीन में इख्तियारत के साथ बसाया और तुम्हारे लिए यहां समां ए ज़िस्त फराहम किया मगर तुमलोग काम ही शुकर-गुज़ार होते हो 
+[7:11] हमने तुम्हारी तख़लीक (सृजन) की इब्तेदा की, फिर तुम्हारी सूरत बनाई, फिर फ़रिश्टन से कहा आदम को सजदा करो. क्या हुक्म पर सबने सजदा किया मगर इब्लीस सजदा करने वालों में शामिल ना हुआ 
+[7:12] पूछा, “तुझे किस चीज ने सजदा करने से रोका जबके मैंने तुझको हुकुम दिया था?” बोला, मैं उससे बेहतर हूं। तू नहीं मुझे आग से पैदा किया है और उसे मिट्टी से'' 
+[7:13] फरमाया, ''अच्छा तू यहां से नीचे उतर, तुझे हक नहीं है के यहां बदाई का घमंड करे, निकल जा के डर-हकीकत तू उन लोगों में से है जो खुद अपनी ज़िल्लत चाहता है'' 
+[7:14] बोला, "मुझे उस दिन तक मोहलत दे जबके ये सब दोबारा उठेंगे" 
+[7:15] फरमाया "तुझे मोहलत है।" 
+[7:16] बोला, “अच्छा तो जिस तरह तू नई मुझे गुमराही में मुबतला किया मैं भी अब तेरी सीधी राह पर 
+[7:17] इंसानों की घाट में लगा रहूंगा, आगे और पीछे, दिनें और बायें, हर तरफ से इनको घेरूंगा और तू इनमें से अक्सर को शुक्रगुजार न पायेगा" 
+[7:18] फरमाया, "निकल जा यहां से ज़लील और ठुकराया हुआ, यकीन रख के इनमें से जो तेरी जोड़ी करेगी, तुझ समेत उन सब से जहन्नुम को भर दूंगा 
+[7:19] और ऐ आदम, तू और तेरी बीवी, दोनों इस जन्नत में रहो, जहां जिस चीज़ को तुम्हारा जी चाहे खाओ, मगर उस दरख्त के पास न फटकना वरना ज़ालिमों में से हो जाओगे” 
+[7:20] फिर शैतान ने उनको बहकाया ता-के उनकी शर्मगाहें जो एक दूसरे से छुपी गई पतली उनके सामने खोल दे। उसने उनसे कहा, “तुम्हारे रब ने तुम्हें जो इस दरख से रोका है इसकी वजह इसके सिवा कुछ नहीं है के कहीं तुम फरिश्ते ना बन जाओ, या तुम्हें हमेशा की जिंदगी हासिल ना हो जाए 
+[7:21] और उसने कसम खा कर उनसे कहा के मैं तुम्हारा सच्चा खैर-ख्वा हूं 
+[7:22] इस तरह धोखा देकर वो उन दोनों को रफ्ता रफ्ता अपना धप पार ले आया. आख़िर ए कार जब उनहों ने उस दरख्त का मजा चखा तो उनके सत्र एक दूसरे के सामने खुल गए और वो अपने जिस्म को जन्नत के पत्तों से ढँकने लगे। तब उनके रब ने उन्हें पुकारा, "क्या मैंने तुम्हें इस दरख्त से ना रोका था और ना कहा था के शैतान तुम्हारा खुला दुश्मन है?" 
+[7:23] दोनों बोल उठे, "ऐ रब, हमने अपना ऊपर सितम (ज़ुल्म) किया, अब अगर तू नहीं हमसे दरगुज़ार ना फरमाया और रहम ना किया तो यकीनन हम तबाह हो जाएंगे।"
+[7:24] फरमाया, "उतर जाओ, तुम एक दूसरे के दुश्मन हो। और तुम्हारे लिए एक खास मुद्दत तक ज़मीन ही में जाए-क़रार (निवास) और सामान-ए-ज़िस्ट (निवास और प्रावधान) है" 
+[7:25] और फरमाया, "वहीं तुमको जीना और वहीं मरना है और उसी मुझसे तुमको आख़िरकार निकल जाएगा।” 
+[7:26] ऐ औलाद ए आदम, हमने तुम्हारा लिबास नाज़िल किया है कि तुम्हारे जिस्म के काबिल ए शर्म हिस्सो को धन्यवाद और तुम्हारे लिए जिस्म की हिफ़ाज़त और ज़ीनत का ज़रिया भी हो। और बेहतरीन लिबास तकवे (पवित्रता) का लिबास है। ये अल्लाह की निशानियों में से एक निहसानी है, शायद के लोग इसे सबक लें 
+[7:27] ऐ बानी आदम, ऐसा ना हो के शैतान तुम्हें फिर उसी तरह फिटने में मुब्तला करदे जिस तरह उसने तुम्हारे वलियों को जन्नत से निकाला था और उनके लिबास उन्पर से उतरवा दिए थाय ता-के उनके शर्मगाहें एक दूसरे के सामने खोले। वो और उसके साथी तुम्हें ऐसी जगह से दिखते हैं जहां से तुम उन्हें नहीं देख सकते। शयातीन को हमने उन लोगों का सरपरस्त बना दिया है जो ईमान नहीं लाते 
+[7:28] ये लोग जब कोई शर्मिंदा काम करते हैं तो कहते हैं हमने अपने बाप दादा को इसी तारीक पर पाया है और अल्लाह ही ने हमें ऐसा करने का हुकुम दिया है। इनसे कहो अल्लाह बे-हयायी का हुक्म कभी नहीं दिया करता। क्या तुम अल्लाह का नाम लेकर वो बातें कहते हो जिनका मुतालिक तुम्हें इल्म नहीं है (वो अल्लाह की तरफ से हैं) 
+[7:29] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो, मेरे रब ने तो रस्ती ओ इन्साफ का हुकुम दिया है, और उसका हुकुम तो ये है कि हर इबादत में अपना रुख ठीक रखो और उसी को पुकारो अपने दीन को उसके लिए खालिस रख कर, जिस तरह उसने तुम्हें अब भुगतान किया है उसी तरह तुम फिर भुगतान किये जाओगे 
+[7:30] एक गिरो ​​को तो उसने सीधा रास्ता दिखा दिया है, मगर दूसरे गिरो ​​पर गुमराही चस्पां होकर रह गई है, क्योंकि उन्हें नहीं खुदा के बजाये शयातीन को अपना सरपरस्त बना लिया है और वो समझ रहे हैं कि हम सीधी राह पर हैं 
+[7:31] ऐ बानी आदम, हर इबादत के मुआक़े पर अपनी ज़ीनत से अरस्ता रहो और खाओ पियो और हद से तजौज़ न करो। अल्लाह हद से बढ़ने वालों को पसंद नहीं करता 
+[7:32] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो किसने अल्लाह की उस ज़ीनत को हराम कर दिया जैसे अल्लाह ने अपने बंदों के लिए निकला था और किसने खुदा की बख्शी हुई पाक चीज़ ममनू (मना) करदी? कहो, ये सारी चीजें दुनिया की जिंदगी में भी ईमान लाने वालों के लिए हैं, और कयामत के रोज तो खालीसतन उनके लिए होंगी। इस तरह हम अपनी बातें साफ-साफ बयान करते हैं उन लोगों के लिए जो इल्म रखने वाले हैं 
+[7:33] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो के मेरे रब ने जो चीजें हराम की हैं वो तो ये हैं: बेशर्मी के काम ख्वा खुले हों या छुपे, और गुनाह और हक के खिलाफ ज़ियादती, और ये के अल्लाह के साथ तुम किसी को शरीक करो जिसके लिए उसने कोई सनद नाज़िल नहीं की, और ये के अल्लाह के नाम पर कोई ऐसी बात कहो जिसका मुतालिक तुम्हें इल्म ना हो के वो हकीकत में उसकी ने फरमायी है
+[7:34] हर क़ौम के लिए मोहल्लत की एक मुद्दत मुकर्रर है, फिर जब किसी क़ौम की मुद्दत आन पूरी होती है तो एक घड़ी भर की तकदीम भी नहीं होती 
+[7:35] (और ये बात अल्लाह ने आगाज़ ए तख़लीक ही में साफ फरमा दी थी के) ऐ बानी आदम, याद रखो, अगर तुम्हारे पास खुद तुम्हीं से ऐसे रसूल आएं जो तुम्हें मेरी आयत सुना रहे हों, तो जो कोई नफ़रमानी से बचेगा और अपने रवये की इस्लाह करेगा उसके लिए कोई खौफ और रंज का मौका नहीं है 
+[7:36] और जो लोग हमारी आयतों को झूठलाएंगे और उनके मुक़ाबले में सरकशी बरतेंगे वही एहले दोज़ख होंगे जहां वो हमेशा रहेंगे 
+[7:37] ज़ाहिर है के उसे बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जो बिकल झूठी बातें ग़द कर अल्लाह की तरफ मंसूर करे या अल्लाह की सच्ची आयत को झूठलाये? ऐसे लोग अपने नविस्ता ए तकदीर के मुताबिक अपना हिसा पाते रहेंगे, यहां तक ​​के वो घड़ी आ जाएगी जब हमारे भेजे हुए फरिश्ते उनकी रूहें (आत्माएं) क़ब्ज़ करने के लिए पहनेंगे। हमें वक्त है वो उनसे पूछेंगे के बताओ अब कहां हैं तुम्हारे वो माबूद जिनको तुम खुदा के बजाये पुकारते थे? वो कहेंगे के, "सब हमसे ग़म हो गए" और वो खुद अपने ख़िलाफ गवाही देंगे के हम वक़ाई मुनकिर ए हक़ थे 
+[7:38] अल्लाह फरमाएगा जाओ, तुम भी उसके जहन्नुम में चले जाओ जिस्म में तुमसे पहले गुजरे हुए गिरो ​​जिन्न ओ इंसान (इंसान) जा चुके हैं। हर गिरो ​​जब जहन्नुम में दाख़िल होगा तो अपने पेशरो गिरोह (जो इससे पहले चला गया था) पर लानत करता हुआ दाख़िल होगा, हत्ता के जब सब वहाँ जमा हो जायेंगे तो हर बाद वाला गिरोह पहले गिरोह के हक़ में कहेगा के ऐ रब, ये लोग थे जिन्हों ने हमको गुमराह किया, लिहाज़ा इन्हें आग का दोहरा अज़ाब दे। जवाब में इरशाद होगा, हर एक के लिए दोहरा ही अज़ाब है मगर तुम जानते नहीं हो 
+[7:39] और पहला गिरो ​​दूसरे गिरो ​​​​से कहेगा के (अगर हम काबिल ए इल्जाम थे) तो तुम्हीं को हमपर कौन सी फजीलत हासिल थी, अब अपनी कमाई के नतीजे में अज़ाब का मजा चक्खो 
+[7:40] यकीन जानो, जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुटलाया है और इनके मुकाबले में सरकशी की है उनके लिए आसमान के दरवाजे हरगिज ना खोले जाएंगे। उनका जन्नत में जाना उतना ही नामुमकिन है जितना सूई (सुई) के नाक से ऊंट (ऊंट) का गुजारना। मुजरेमोन को हमारे हाँ ऐसा ही बदला मिला करता है 
+[7:41] उनके लिए तो जहन्नुम का बिछोना होगा और जहन्नुम ही का ओदना। ये है वो जजा जो हम जालिमों को दिया करते हैं 
+[7:42] बा-खिलाफ इसके जिन लोगों ने हमारी आयत को मान लिया है और अच्छे काम किए हैं और इस मामले में हम हर एक को उसकी क्षमता (क्षमता) ही देते हैं। वो एहले जन्नत हैं जहां वो हमेशा रहेंगे
+[7:43] उनके दिलों में एक दूसरे के खिलाफ जो कुछ कदुरत (द्वेष) होगी उसे हम निकल देंगे, उनके आला नेहरेन बहती होंगी, और वो कहेंगे के "तारीफ खुदा ही के लिए है जिसने हमने ये रास्ता दिखाया, हम खुद रह ना पा सकते थे अगर" ख़ुदा हमारी रहनुमाई न करता। हमारे रब के भेजे हुए रसूल वक़ै हक़ ही लेकर आये थे।” हमें वक्त निदा (आवाज) आएगी के "ये जन्नत जिसके तुम वारिस बन गए हो तुम्हें उन अमल के बदले में मिली है जो तुम करते रहे थे" 
+[7:44] फिर ये जन्नत के लोग दोज़ख वालों से पुकार कर कहेंगे, "हमने उन सारे वादों को ठीक पा लिया जो हमारे रब ने हमसे किये थे, क्या तुमने भी उन वादों को ठीक पाया जो तुम्हारे रब ने किये थे?” वो जवाब देंगे "हां" तब एक पुकारने वाला उनको दरमियान पुकारेगा के "खुदा की लानत उन जालिमों पर 
+[7:45] जो अल्लाह के रास्ते से लोगों को रोकते और उसे टेढ़ा करना चाहते थे और आख़िरत के मुनकिर थे" 
+[7:46] दोनों गिरोहों के दरमियान एक ओट में (बैरियर) हायल होगी जिसकी बुलंदियां (अराफ) पर कुछ और लोग होंगे ये हर एक को उसका कियाफा (मार्क्स) से पहचानेंगे और जन्नत वालों से पुकार कर कहेंगे "सलामती हो तुमपर"। ये लोग जन्नत में शामिल तो नहीं हुए मगर उसके उम्मीदवर होंगे” 
+[7:47] और जब उनकी निगाहें दोज़ख वालों की तरफ फिरेंगी तो कहेंगे, “ऐ रब! हमने ज़ालिम लोगों में शामिल ना कीजियो” 
+[7:48] फिर ये अराफ के लोग दोज़ख़ की चंद बड़ी बड़ी शख़्सियतों (व्यक्तित्वों) को उनकी अलमातों से पहचान कर पुकारेंगे के “देख लिया तुमने, आज ना तुम्हारे जत्थे (सभा/संख्याएँ) तुम्हारे किसी काम आये और ना वो साज़ ओ समां जिनको तुम बड़ी चीज़ समझते थे 
+[7:49] और क्या ये एहले जन्नत वही लोग नहीं हैं जिनका मुतालिक तुम कसमें खा खा कर कहते थे उनको तो खुदा अपनी रहमत में से कुछ भी ना देगा? आज इनसे कहा गया के दखिल हो जाओ जन्नत में, तुम्हारे लिए ना खौफ है ना रंज" 
+[7:50] और दोज़ख के लोग जन्नत वालों को पुकारेंगे के कुछ थोड़ा सा पानी हमपर डाल दो या जो रिज्क अल्लाह ने तुम्हें दिया है उसमें से कुछ फेंक दो। वो जवाब देंगे के "अल्लाह ने" ये दोनों चीजें उन मुनकिरीन ए हक पर हराम करदी हैं 
+[7:51] जिन्होन ने अपने दीन को खेल और तफरी बना लिया था। और जिन्होंने दुनिया की जिंदगी ने फरेब में मुब्तिला कर रखा था। अल्लाह फरमाता है के आज हम भी उन्हें उसी तरह भूला देंगे जिस तरह वो इस दिन की मुलाकात को भूल रहे हैं और हमारी आयतों का इनकार करते रहेंगे” 
+[7:52] हम लोगों के पास एक ऐसी किताब ले आए हैं जिसको हमने इल्म की बिना पर मुफस्सल (व्याख्यायित) बनाया है और जो ईमान लेन वालों के लिए हिदायत और रहमत है
+[7:53] अब क्या ये लोग इसके सिवा किसी और बात के मुंतजिर हैं के वो अंजाम सामने आ जाए जिसकी ये किताब खबर दे रही है? जिस रोज़ वो अंजाम सामने आ गया तो वही लोग जिन्हों ने उसे नज़र-अंदाज़ कर दिया था कहेंगे के "वक़ाई हमारे रब के रसूल हक़ लेकर आए थे, फिर क्या अब हमें कुछ सिफ़ारिश मिलेगी जो हमारे हक़ में सिफ़ारिश करें? हां हमें दोबारा वापस ही भेज" दिया जाये ता-के जो कुछ हम पहले करते थे उसके बजाये अब दूसरे तारिके पर काम करके दिखायें”। उनहों ने अपने आप को खासे (नुक्सान) में डाल दिया और वो सारे झूठ जो उनहों ने तसनीफ कर रक्खे थे आज उनसे गम हो गए 
+[7:54] दर हकीकत तुम्हारा रब अल्लाह हाय है जिसने आसमान और जमीन को छः (छह) दिनों में पैदा किया, फिर अपनी तख्त ए सल्तनत पर जलवा फरमा हुआ, जो रात को दिन पर धन देता है और फिर दिन रात के पीछे दौड़ा आता है, जिसने सूरज और चांद और तारे पैदा किये सब उसके फरमान के तबेह हैं। ख़बरदार रहो! उसी का ख़ल्क (सृजन) है और उसी का अमृत (आदेश) है। बड़ा बा-बरकत है अल्लाह, सारे जहांों का मालिक ओ परवरदिगार 
+[7:55] अपने रब को पुकारो गिड़गिदाते (विनम्रता के साथ) हुए और चुपके चुपके। यकीनन वो हद से गुज़रने वालों को पसंद नहीं करता 
+[7:56] ज़मीन में फ़साद बरपा ना करो जबके उसकी इस्लाह हो चुकी है और खुदा ही को पुकारो ख़ौफ़ के साथ और तम (उम्मीद) के साथ। यकीनन अल्लाह की रहमत नीक किरदार (जो अच्छा करते हैं) लोगों से करीब है 
+[7:57] और वो अल्लाह ही है जो हवाएं अपनी रहमत के आगे खुश-खबरी के लिए भेजे जाते हैं, फिर जब वो पानी से लड़े हुए बादल उठा लेती हैं तो उन्हें कोई मुर्दा सर-जमीन की तरफ हरकत देता है, और वहां मेह (बारिश) बरसा कर (उसी मेरी हुई जमीन से) तरह तरह के फल निकल ला आता है। देखो, इस तरह हम मुर्दों को हालात ए मौत से निकलते हैं, शायद के तुम इस मुशाहिदे से सबक लो 
+[7:58] जो जमीन अच्छी होती है वो अपने रब के हुकुम से खूब फल फूल लगती है और जो जमीन खराब होती है उसे नकीस (गरीब) पैदावर के सिवा कुछ नहीं निकलता। इस तरह हम निशानियों को बार-बार पेश करते हैं उन लोगों के लिए जो शुक्रगुज़ार होने वाले हैं 
+[7:59] हमने नूह को उसकी क़ौम की तरफ भेजा, उसने कहा “ऐ बिरादरान ए क़ौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है, मैं तुम्हारा हक़ मैं एक शानदार दिन (कमाल का दिन) के अज़ाब से डरता हूं” 
+[7:60] उसकी क़ौम के सरदारों ने जवाब दिया “हमको तो ये नज़र आता है के तुम सारे गुमराही में मुब्तिला हो” 
+[7:61] नूह ने कहा “ऐ बिरादरान ए क़ौम, मैं किसी गुमराही में नहीं पड़ा” हूं बलके, मैं रब उल आलमीन का रसूल हूं 
+[7:62] तुम्हें अपने रुब के पैगाम पहुंचाता हूं, तुम्हारा खैर-ख्वाह हूं, और मुझे अल्लाह की तरफ से वो कुछ मालूम है जो तुम्हें मालूम नहीं है
+[7:63] क्या तुम्हें इस बात पर ताज्जुब हुआ के तुम्हारे पास खुद तुम्हारी अपनी क़ौम के एक आदमी के ज़रिये से तुम्हारे रब की याद देहनी आई ता-के तुम्हें ख़बरदार करे, और तुम गलत रावी से बच जाओ और तुमपर रहम किया जाए?” 
+[7:64] मगर उनहों ने उसको झूठला दिया। आख़िर ई कार हमने उसे और उसके साथियों को एक कश्ती में सजा दी और उन लोगों को डुबो दिया जिन्हों ने हमारी आयत को झुटलाया था। यकीनन वो अंधे लोग थे 
+[7:65] और आद की तरफ हमने उनके भाई हद को भेजा। उसने कहा, "ऐ बिरादरान ए क़ौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है फिर क्या तुम ग़लत रावी से परहेज़ न करोगी?" 
+[7:66] उसकी क़ौम के सरदारों ने, जो उसकी बात मन्ने से इंकार कर रहे थे, जवाब में कहा “हम तो तुम्हें बे-अकाली (मूर्खता में) में मुब्तिला समझते हैं और हमें गुमान है के तुम झूठे हो” 
+[7:67] उसने कहा “ ऐ बिरादरान ए क़ौम, मैं बे-अकाली में मुब्तिला नहीं हूं बलके मैं रब उल आलमीन का रसूल हूं 
+[7:68] तुमको अपने रुब के पैगाम पहुंचाता हूं, और तुम्हारा ऐसा खैर-ख्वाह हूं जिसपर भरोसा किया जा सकता है 
+[7:69] क्या तुम इस बात पर ताज्जुब हुआ के तुम्हारे पास खुद तुम्हारी अपनी क़ौम के एक आदमी के ज़रिये से तुम्हारे रब की याद देहनी आई ता-के वो तुम्हें ख़बरदार करे? भूल न जाओ के तुम्हारे रब ने नूह की क़ौम के बाद तुमको उसका जानशीं (उत्तराधिकारियों) बनाया और तुम्हें खूब तनो-मंद किया (तुम्हारे कद में काफी वृद्धि हुई), पास अल्लाह की क़ुदरत के करिश्माओं को याद रखो, उम्मीद है के फलाह पाओगे" 
+[7:70] उनहोन ने जवाब दिया "क्या तू हमारे पास इस लिए आया है कि हम अकेले अल्लाह ही की इबादत करें और उन्हें छोड़ दें जिनकी इबादत हमारे बाप दादा करते आये हैं? अच्छा तो ले आ वो अजब जिसका तू हमें धमकी देता है अगर तू सच्चा है” 
+[7:71] उसने कहा “तुम्हारे रब की फिटकर तुम पर पड़ गई और उसका गजब टूट पड़ा, क्या तुम मुझसे उन नमो (नामों) पर झगड़ा करते हो जो तुमने और तुम्हारे बाप दादा ने रख लिए हैं, जिनके लिए अल्लाह ने कोई सनद नाज़िल नहीं की है। अच्छा तो तुम भी इंतज़ार करो और मैं भी तुम्हारे साथ इंतज़ार करता हूँ” 
+[7:72] आख़िर ए कार हमने अपनी महरबानी से हद और उसके साथियों को बचा लिया और उन लोगों की जड (जड़ें) काट दी जो हमारी आयत को झुटला चुके थे और ईमान लेन वाले ना थे 
+[7:73] और समूद की तरफ हमने उनके भाई सालेह को भेजा। उसने कहा “ऐ बिरादरान ए कौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है।” तुम्हारे पास तुम्हारे रब की खुली जगह आ गई है। ये अल्लाह की औंती (वह-ऊंटनी) तुम्हारे लिए एक निशानी के तौर पर है, लिहाजा इसे छोड़ दो के खुदा की जमीन में चढ़ती फिर, इसको किसी बुरे इरादे से हाथ न लगाना वरना एक दर्दनाक अजब तुम्हें आ लेगा
+[7:74] याद करो वो वक्त जब अल्लाह ने क़ौम ए अद के बाद तुम्हें उसका जानशीं (उत्तराधिकारियों) बनाया और तुमको ज़मीन में ये मंजिल बख्शी के आज तुम उसके हमवार मैदानों में आली शान महल बनाते और उसके पहाड़ों को मकान की शक्ल में तराशते हो। पस उसकी क़ुदरत के करिश्माओं से ग़ाफ़िल ना हो जाओ और ज़मीन में फ़साद बरपा ना करो। 
+[7:75] उसकी क़ौम के सरदारों ने जो बदे बने हुए थे, कामज़ूर तबक़ी के उन लोगों से जो ईमान ले आए थे कहा "क्या तुम यह जानते हो के सालेह अपने रब का पैगम्बर है?" उनको ने जवाब दिया “बेशक जिस पैगाम के साथ वो भेजा गया है उसे हम मानते हैं।” 
+[7:76] उन बुराइयों के मुद्दैयों (घमण्डियों) ने कहा जिस चीज़ को तुमने माना है हम उसे मुनीर हैं।” 
+[7:77] फिर उनहोन ने हमें ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को मार डाला और पूरे तम्मारुद (तिरस्कारपूर्ण अवज्ञा) के साथ अपने रब के हुकुम की खिलाफ वारज़ी कर गुजरे। और सालेह से कह दिया के ले आ वो अजाब जिसकी तू हमें धमकी देता है अगर तू वाकयी पैगम्बरों में से है 
+[7:78] आखिर ए कार एक देहला देने वाली आफत ने उन्हें आ लिया और वो अपने घरों में औंधे पड़े के पड़े रह गए 
+[7:79] और सालेह ये कहता हुआ उनकी बस्तियों से निकल गया के "ऐ मेरी क़ौम, मैंने अपने रब का पैगाम तुझे पहना दिया और मैंने तेरी बहुत खैर ख्वाही की, मगर मैं क्या करूं के तुझे अपने खैर ख्वाह पसंद ही नहीं हैं" 
+[7:80] और लुट को हमने पैगम्बर बनाकर भेजा, फिर याद करो जब उसने अपनी क़ौम से कहा, "क्या तुम ऐसे बे-हया हो गए हो, के वो फहाश काम करते हो जो तुमसे पहले दुनिया में किसी ने नहीं किया 
+[7:81] तुम औरतों को चोद कर मर्दों से अपनी ख्वाहिश पूरी करते हो। हकीकत ये है के तुम बिलकुल ही हद से गुज़र जाने वाले लोग हो” 
+[7:82] मगर उसकी क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ ना था के “लोगों को अपनी बस्तियों से निकालो, बड़े पाकबाज़ बनते हैं ये” 
+[7:83] आख़िर ए कार हमने लूट और उसके घरवालों को बजाया उसकी बीवी के जो पीछे रह गए जाने वालों में थी 
+[7:84] बच्चा कर निकल दिया और उस क़ौम पर बरसी एक बारिश, फिर देखो के उन मुजरिमों का क्या अंजाम हुआ 
+[7:85] और मदियां वालों की तरफ हमने उनके भाई शोएब को भेजा। उसने कहा " ऐ बिरादरान ए कौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है। तुम्हारे पास तुम्हारे रब की साफ रहनुमाई आ गई है, वजन (वजन) और पैमाने पूरे करो। लोगों को उनकी चीज में घाटा (नुकसान) ना दो, और जमीन में फ़साद बरपा ना करो जबके उसकी इस्लाह हो चुकी है
+[7:86] और (जिंदगी के) हर रास्ते पर घात लगाकर बैठ जाओ के लोगों को खौफ पैदा करने और ईमान लाने वालों को खुदा के रास्ते से रोकने लगो, और सीधी राह को टेढ़ा करने के डरपे हो जाओ। याद करो वो ज़माना जबके तुम थोड़े थे फिर अल्लाह ने तुम्हें बहुत कर दिया, और आखें खोल कर देखो दुनिया में मुफ़्सिदों का क्या अंजाम हुआ है 
+[7:87] अगर तुम में से एक गिरोह इस तालीम पर जिसके साथ मैं भेजा गया हूं, ईमान लाता है और दूसरा ईमान नहीं लता, तो सब्र के साथ देखते रहो यहाँ तक के अल्लाह हमारे दरमियान फैसला करदे, और वही सबसे बेहतर फैसला करने वाला है” 
+[7:88] उसकी क़ौम के सरदारों ने, जो अपनी बदाई के घमंड में मुब्तिला था, उसने कहा के “ऐ शोएब, हम तुझसे” और उन लोगों को जो तेरे साथ ईमान लाए हैं अपनी बस्ती से निकल देंगे वरना तुम लोगों को हमारी मिल्लत में वापस आना होगा।' 
+' आइए जबके अल्लाह हमें इसकी इजाजत दे चुका है। हमारे लिए तो इसकी तरफ पलटना अब किसी तरह मुमकिन नहीं इल्ला ये के खुदा हमारा रब ही ऐसा चाहे। हमारे रब का इल्म हर चीज़ पर हावी है, उसी पर हमने ऐतमाद (भरोसा) करलिया। ऐ रब, हमारे और हमारी क़ौम के दरमियान ठीक ठीक फ़ैसला करदे और तू बेहतरीन फ़ैसला करने वाला है” 
+[7:90] उसकी क़ौम के सरदारों ने, जो उसकी बात मन्ने से इंकार कर चुके थे, आपस में कहा “अगर तुमने शोएब की जोड़ी क़बूल कर ली तो बरबाद हो जाओगे।” 
+[7:91] मगर हुआ ये के एक देहला देने वाली आफत ने उनको आ लिया और वो अपने घरों में औंधे पड़े के पड़े रह गए 
+[7:92] जिन लोगों ने शोएब को झुटलाया वो ऐसे मिटे के गोया कभी उन घरों में बसे ही ना थे। शोएब के झूठलाने वाले आखिर ए कार बरबाद हो कर रहे 
+[7:93] और शोएब ये कह कर उनकी बस्तियों से निकल गया के "ऐ बिरादरान ए क़ौम, मैंने अपने रब के पैगामत तुम्हें पाहुंचा दिए और तुम्हारी ख़ैर ख़ैर का हक़ अदा करदिया, अब मैं हमसे क़ौम पर हूँ" कैसे अफसोस करूं जो क़ुबूल ए हक़ से इंकार करती है” 
+[7:94] कभी ऐसा नहीं हुआ के हमने किसी बस्ती में नबी भेजा हो और उस बस्ती के लोगों को पहले तंग किया हो और शक्ति में मुब्तिला ना किया हो इस ख्याल से के शायद वो आजिजी 
+[7:95] फिर हमने उनकी बढ़-हाली को ख़ुश हाली से बदल दिया दिया यहां तक ​​के वो खूब फले फूले और कहने लगे के "हमारे असलफ पर भी अच्छे और बुरे दिन आते ही रहे हैं" 
+। तक़वा की रवीश इख्तियार करते तो हम उन्पर आसमान और ज़मीन से बरकतों के दरवाज़े खोल देते, मगर उनहों ने तो झुटलाया, लिहाज़ा हमने हमें बुरी कमाई के हिसाब में उन्हें पकड़ लिया जो वो समित रहे थे
+[7:97] फिर क्या बस्तियों के लोग अब इससे खौफ हो गए हैं के हमारी गिरफ़्तार (पकड़) कभी अचानक उन रात के वक्त ना आ जाएगी जबके वो सोते पड़े माननीय 
+[7:98] हां उनको इत्मिनान हो गया है के हमारा मजबूत हाथ कभी यकायक अनपर दिन के वक्त ना पड़ेगा जबके वो खेल रहे होन 
+[7:99] क्या ये लोग अल्लाह की चाल से खौफ खा रहे हैं? हालंके अल्लाह की चाल से वही क़ौम बे-ख़ौफ़ होती है जो तबाह होने वाली हो 
+[7:100] और क्या उन लोगों को जो साबिक एहले ज़मीन के बाद ज़मीन के वारिस होते हैं, इस अम्र ए वक़ाई ने कुछ सबक नहीं दिया के अगर हम चाहें तो उनके कसूरों पर उन्हें पकड़ें क्या आप जानते हैं? (मगर वो सबक-आमोज़ हक़ीक़ से तगाफुल बारातते हैं) और हम उनके दिलों पर मोहर लगा देते हैं, फिर वो कुछ नहीं सुनते 
+[7:101] ये क़ौमें जिनके क़िस्से हम तुम्हें सुना रहे हैं (तुम्हारे सामने मिसाल में मौजूद हैं)। उनके रसूल उनके पास खुली खुली निहस्नाइयां लेकर आए, मगर जिस चीज को वो एक दफा झूठला चुके थे फिर उसे वो मन्ने वाले ना थे। देखो इस तरह हम मुनकिरीन ए हक़ के दिलों पर मोहर लगा देते हैं 
+[7:102] हमने उन में से अक्सर में कोई पास ए अहद न पाया, बलके अक्सर को फ़ासीक़ ही पाया 
+[7:103] फिर उन क़ौमों के बाद (जिनका ज़िक्र ऊपर किया गया) हमने मूसा को अपनी निशानियों के साथ फ़िरौन और उसकी क़ौम के सरदारों के पास भेजा, मगर उनहों ने भी हमारी निशानियों के साथ ज़ुल्म किया। पास देखो के इन मुफ़्सिदों का क्या अंजाम हुआ 
+[7:104] मूसा ने कहा "ऐ फिरौन, मैं क़ायनात के मालिक की तरफ से भेजा हुआ हूँ 
+[7:105] मेरा मनसब यहीं है के अल्लाह का नाम लेकर कोई बात हक़ के सिवा ना कहूँ। मैं तुम लोगों के पास तुम्हारे रब की।" तरफ से सारी दलील ए ममुरियत लेकर आया हूं। लिहाजा तू बनी इजराइल को मेरे साथ भेज दे।” 
+[7:106] फ़िरौन ने कहा "अगर तू कोई निशानी लाया है और अपने दावे (दावा) में सच्चा है तो उसे पेश कर" 
+[7:107] मूसा ने अपना आसा (कर्मचारी/रॉड) फेंक और यकायक वो एक जीता जागता अजदहा (सर्पेंट) था 
+[7:108] उसने अपनी जेब से हाथ निकला और सब देखने वालों के सामने वो चमक रहा था 
+[7:109] इसपर फिरौन की क़ौम के सरदारों ने आपस में कहा के "यकीनन ये शक्स बड़ा माहिर जादूगर है 
+[7:110] तुम्हें तुम्हारी ज़मीन से बे-दखल करना चाहता है। अब कहो क्या कहते हो?” 
+[7:111] फिर उन सब ने फिरौन को मशवरा दिया के इसके और इसके भाई को इंतजार में रखिए और तमाम शहरों में हरकारे (हेराल्ड) भेज दीजिए 
+[7:112] के हर माहिर-ए-फन जादूगर को आपके पास ले आइए 
+[7:113] चुनांचे जादूगर फिरौन के पास आ गए। उन्होन ने कहा “अगर हम गालिब रहे तो हमें इसका सिला तो जरूर मिलेगा?” 
+[7:114] फिरौन ने जवाब दिया "हां, और तुम मुकर्रब ए बारगाह होंगे" 
+[7:115] फिर उनहों ने मूसा से कहा "तुम फेंकते हो या हम फेंकें?"
+[7:116] मूसा ने जवाब दिया "तुम ही फेंको" उन्होन ने जो अपने आंचर [उनकी छड़ें] फेंके तो निगाहों को महसूर (आंखों को मंत्रमुग्ध कर दिया) और दिलों को खौफ-जदा कर दिया और बड़ा ही जबरदस्त जादू बना लिया 
+[7:117] हमने मूसा को इशारा किया के फेंक अपना आसा, उसका फेंकना था के आन की आन में वो उनके इस झूठे तिलिस्म को निंगालता चला गया 
+[7:118] इस तरह जो हक था वो हक साबित हुआ और जो कुछ अनहोन ने बना रक्खा था वो बातिल होकर रह गया 
+[7:119] फिरौन और उसके साथी मैदान ए मुकाबले में मगलूब हुए और (फतह-मंद होने के बजाये) उलटे जलील हो गए 
+[7:120] और जादूगरों का हाल ये हुआ के गोया किसी चीज ने अंदर से उनको सजदे में गिरा दिया 
+[7:121] कहने लगे "हमने मान लिया रब्बुल आलमीन को 
+[7:122] हमें रुब को जिसने मूसा और हारून मानते हैं" 
+[7:123] फ़िरौन ने कहा "तुम इसपर ईमान ले आए क़ब्ल इसके मैं तुम्हें इजाज़त दूं? यकीनन ये कोई ख़ुफ़िया साज़िश थी जो तुम लोगों ने इस दार-उस-सल्तनत में की ता-के इसके मालिकों को इक्तेदार से बे-दख़ल करदो नतीजा अब तुम्हें मालूम हुआ जाता है 
+[7:124] मैं तुम्हारे हाथ पांव मुखालिफ सिमटन से काटवा दूंगा और उसके बाद तुम सबको सूली पर चढ़ाऊंगा। 
+[7:125] उनहों ने जवाब दिया "बहार-हाल हमें पलटना अपनी रब ही की तरफ है 
+[7:126] तू जिस बात पर हमसे इंतिक़ाम लेना चाहता है वो इसके सिवा नहीं के हमारे रब की निशानियां जब हमारे सामने आ गई तो हमने उन्हें मान लिया। ऐ रब, हमपर सब्र का फैजान कर और हमें दुनिया से उठा तो इस हाल में के हम तेरे फरमा-बरदार हों” 
+[7:127] फिरौन से उसकी क़ौम के सरदारों ने कहा “क्या तू मूसा और उसकी क़ौम को यूं ही छोड़ देगा के मुल्क में फ़साद फैलाएं और वो तेरी और तेरे माबूदों की बंदगी छोड़ बैठे?” फ़िरौन ने जवाब दिया “मैं उनके बेटों को क़त्ल करुंगा और उनकी औरतों को जीता रहने दूंगा। हमारे इक्तेदार की गिरफ़्तार उन पर मज़बूत है" 
+[7:128] मूसा ने अपनी क़ौम से कहा "अल्लाह से मदद मांगो और सब्र करो, ज़मीन अल्लाह की है, अपने बंदों में से जिसका चाहता है उसका वारिस बना देता है। और आखिरी कामयाबियां उनके लिए जो उससे डरते हुए काम करें” 
+[7:129] उसकी क़ौम के लोगों ने कहा “तेरे आने से पहले भी हम सताए जाते थे और अब तेरे आने पर भी सताए जा रहे हैं”। उसने जवाब दिया "क़रीब है वो वक़्त के तुम्हारा रब तुम्हारे दुश्मन को हलाक करदे और तुमको ज़मीन में ख़लीफ़ा बने। फिर देखे के तुम कैसे अमल करते हो" 
+[7:130] हमने फिरौन के लोगों को कई साल तक कहा (सूखा) और बर्बादी की कमी में मुब्तिला रक्खा के शायद उनको होश आए 
+[7:131] मगर उनका हाल ये था के जब अच्छा जमाना आता तो कहते के हम इसी के मुस्तहिक हैं, और जब बुरा जमाना आता तो मूसा और उसके साथियों को अपने लिए फल-ए-बध (दुर्भाग्य) ठहरते, हालंके दर हकीकत उनकी फ़ल ए बद तो अल्लाह के पास थी, मगर उन में से अक्सर इल्म था
+[7:132] उनहों ने मूसा से कहा के "तू हमें महसूर करने के (हमें मंत्रमुग्ध करने के लिए) लिए ख्वा कोई निशानी ले आए, हम तो तेरी बात मन्ने वाले नहीं हैं" 
+[7:133] आकर ए कार हमने उनपर तूफान भेजा, टिड्डी-दाल छोड़े, सरसरियां फैलाए (और टिड्डियां, और) जूँ), मेंढक (मेंढक) निकले, और खून बरसाया। सब निशानियां अलग-अलग करके दिखाये, मगर वो सरकशी किये चले गये और वो बदले ही मुजरिम लोग थे 
+[7:134] जब कभी अनपर बला नाज़िल हो जाती तो कहते " ऐ मूसा, तुझे अपने रब की तरफ से जो मनसब हासिल है उसकी बिना पर हमारे हक़ में दुआ कर।" अगर अब के तू हमपर से ये बला तलवा दे तो हम तेरी बात मान लेंगे और बानी इजराइल को तेरे साथ भेज देंगे” 
+[7:135] मगर जब हम उनपार से अपना अजाब एक वक्त ए मुकर्रर तक केलिये, जिसको वो बाहर हाल पहन लेने वाले थे, हटा लेते तो वो यकलख्त अपने अहद से फिर जाते हैं 
+[7:136] तब हमने उनसे इंतकाम लिया और उन्हें समंदर में ग़र्क करदिया क्योंके उन्होन ने हमारी निशानियों को झुटलाया था और उन्हें बे-परवा होगा थाय 
+[7:137] और उनकी जगह हमने उन लोगों को जो कमज़ोर बना कर रक्खे गए थे, उस सर-ज़मीन के मशरिक़ ओ मगरिब का वारिस बना दिया जिसे हमने बराकतों से माला माल किया था। इस तरह बानी-इज़राइल के हक़ में तेरे रुब का वादा ए ख़ैर पूरा हुआ क्योंकि उन्होंने सब्र से काम लिया था और फिरौन और उसकी क़ौम का वो सब कुछ बर्बाद कर दिया गया जो वो बनाते और चढ़ते थे 
+[7:138] बानी इज़राइल को हमने समंदर से गुज़र दिया, फिर वो चले और रास्ते में एक ऐसी क़ौम पर उनका गुज़र हुआ जो अपने चंद बुथों (मूर्तियों) की गिरविदा (समर्पित) हुई थी। कहने लगे, "ऐ मूसा, हमारे लिए भी कोई ऐसा माबूद बना दे जैसे लोगों के माबूद हैं"। मूसा ने कहा "तुम लोग बड़ी नादानी की बातें करते हो 
+[7:139] ये लोग जिस तारीक की जोड़ी बना रहे हैं वो तो बरबाद होने वाला है और जो अमल वो कर रहे हैं वो सरसर बातिल है।” 
+[7:140] फिर मूसा ने कहा "क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और माबूद तुम्हारे लिए तलाश करूं? हलांके वो अल्लाह ही है जिसने तुम्हें दुनिया भर की क़ौम पर फ़ज़िलत बख्शी है 
+[7:141] और (अल्लाह फरमाता है) वो वक़्त याद करो जब हमने फिरौन वालों से तुम्हें निजात दी जिनका हाल ये था के तुम्हें अज़ाब में मुब्तिला रखते थे, तुम्हारे बेटे (बेटों) को कत्ल करते थे और तुम्हारी औरतों को जिंदा रहने देते थे और इस में तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारी बड़ी आजमाइश थी 
+[7:142] हमने मूसा को तीस (तीस) शब ओ रोज़ के लिए [कोह ए सीना (माउंट सिनाई) पर] तालाब किया और बाद में दस (दस) दिन का और इज़ाफा करदिया, इस तरह उसके रब की मुकर्रर करदा मुद्दत पूरे चालीस (चालीस) दिन हो गई। मूसा ने चलते हुए अपने भाई हारून से कहा के "मेरे पीछे तुम मेरी क़ौम में मेरी जानशीनी (मेरी जगह ले लो) करना और ठीक काम करते रहना और बिगाड़ पैदा करने वालों के तारीख पर ना चलना"
+[7:143] जब वो हमारे मुकर्रर किए हुए वक्त पर पहुंच गए और उसके रब ने उसे कलाम किया तो उसने इल्तेजा की के "ए रब, मुझे याराए नजर दे के मैं तुझे देखूं"। फरमाया “तू मुझे नहीं देख सकता, हां जरा सामने के पहाड़ की तरफ देख, अगर वो अपनी जगह कायम रह जाए तो अलबत्ता तू मुझे देख सकेगा।” चुनान्चे उसके रब ने जब पहाड़ पर तजल्ली की तो उसे रेजा कर दिया और मूसा गश खा कर गिर पड़ा, जब होश आया तो बोला “पाक है तेरी जात, मैं तेरे हुजूर तौबा करता हूं और सबसे पहला ईमान लाने वाला मैं हूं।” 
+[7:144] फरमाया "ऐ मूसा, मैंने तमाम लोगों पर तरजीह देकर तुझे मुंतखब किया के मेरी पैगम्बरी करे और मुझे हम-कलाम हो, पास जो कुछ मैं तुझे दूं उसे ले और शुकर बजा ला" 
+[7:145] इसके बाद हमने मूसा को हर शोबा ए जिंदगी के मुतालिक हिदायत और हर पहलू के मुतालिक वाज़े हिदायत तख्तियों पर लिख कर दे दी, और उसे कहा: "हिदायत को मजबूत हाथों से संभाल और अपनी क़ौम को हुकुम दे के इनके बेहतर मफ़हूम की जोड़ी बनाएं। अनकारीब मैं तुम्हें फासीकों के घर दिखाऊंगा 
+[7:146] मैं अपने निशानियों से उन लोगों की निगाहें फेर दूंगा जो बिना किसी हक के जमीन में बदाये बांटते हैं, वो ख्वा कोई निशानी देखलें कभी उसपर ईमान ना लाएंगे। अगर सीधा रास्ता उनके सामने आए तो उसे इख्तियार ना करेंगे और अगर टेढ़ा रास्ता नजर आए तो उसपर चल पड़ेंगे, इसलिए हमने हमारी निशानियों को झुटलाया और उनसे परवाही करते रहे 
+[7:147] हमारी निशानियों को जिस किसी ने झुटलाया और आखिरी की पेशी का इंकार किया उसके सारे अमल हो गया। क्या लोग इसके सिवा कुछ और जजा पा सकते हैं जैसा करें वैसा भरें?” 
+[7:148] मूसा के पीछे उसकी क़ौम के लोगों ने अपने ज़ेवरों (आभूषणों) से एक बछड़े (बछड़े) का पुतला बना लिया जिसमें से जमानत (गाय) की सी आवाज़ निकलती थी। मगर फिर भी उनहों ने उसे माबूद बना लिया और वो सख्त जालिम थे 
+[7:149] फिर जब उनकी फरेब खुदगी का तिलिस्म टूट गया और उनहों ने देख लिया के दर हकीकत वो गुमराह हो गए हैं तो कहने लगे के "अगर हमारे रब ने हमपर रहम न फरमाया और हमसे दरगुजर ना किया तो हम बरबाद हो जायेंगे” 
+[7:150] उधर से मूसा गुस्से और रंज में भरा हुआ अपनी क़ौम की तरफ पलटा। आते ही उसने कहा "बहुत बुरी जानशिनी कि तुम लोगों ने मेरे बाद! क्या तुमसे इतना सब्र ना हुआ के अपने रब के हुकुम का इंतज़ार कर लेते?" और तख्तियां फेंक दी और अपने भाई (हारून) के सर के बाल पकड़ कर उसे खींचा। हारून ने कहा "ऐ मेरी मां के बेटे, इन लोगों ने मुझे दबाया लिया और करीब था के मुझे मार डाला। पास तू दुश्मनों को मुझपर हंसने का मौका ना दे और इस जालिम गिरो ​​के साथ मुझे ना शामिल कर"
+[7:151] तब मूसा ने कहा "ऐ रब, मुझे और मेरे भाई को माफ कर और हमें अपनी रहमत में दखल फरमा, तू सबसे बढ़कर रहीम है।" 
+[7:152] (जवाब में इरशाद हुआ के) "जिन लोगों ने बचदे (बछड़े) को माबूद बनाया वो जरूर अपने रब के गजब में गिरफ़्तार होकर रहेंगे और दुनिया की ज़िंदगी में ज़लील होंगे। झूठ घड़ने वालों को हम ऐसे ही सजा देते हैं 
+[7:153] और जो लोग बुरे अमल करें फिर तौबा कार्लें और ईमान ले आएं तो यकीनान इस तौबा ओ ईमान के बाद तेरा रब दरगुजर और रहम फरमाने वाला है” 
+[7:154] फिर जब मूसा का गुस्सा ठंडा हुआ तो उसने वो तख्तियां उठा ली जिनकी तहरीर (लेखन) में हिदायत और रहमत थी उन लोगों के लिए जो अपने रब से डरते हैं 
+[7:155] और उसने अपनी क़ौम के सत्तर (सत्तर) आदमियों को मुंतखब किया ता-के वो (उसके साथ) हमारे मुकर्रर किये हुए वक्त पर हाजिर हों। जब इन लोगों को एक सख्त ज़लज़ले ने आ पकड़ा तो मूसा ने अर्ज़ किया " ऐ मेरे सरकार, आप चाहते तो पहले ही इनको और मुझे हलाक कर सकते थे, क्या आप हमारे कसूर में जो हम में से चंद नादानों ने किया था हम सबको हलाक कर देंगे? हाँ तो आप की डाली हुई एक आजमाइश थी जिसकी वजह से आप जिसे चाहते हैं गुमराह करते हैं और जिसे चाहते हैं हिदायत बख्श देते हैं हमारे सरपरस्त तो आप ही हैं, पस हमें माफ कर दीजिए और हमपर रहम फरमाइए है 
+[7:156] और हमारे लिए इस दुनिया की भलाई भी लिखिए और आख़िरत की भी, हमने आपकी तरफ रूजू कर लिया"। जवाब में इरशाद हुआ "सजा तो मैं जिसे चाहता हूं देता हूं, मगर मेरी रहमत हर चीज पर छाई हुई है। और उसे मैं उन लोगों के हक में लिखूंगा जो नफरमानी से परहेज करेंगे, जकात देंगे और मेरी आयत पर ईमान लाएंगे।” 
+[7:157] (पास आज ये रहमत उन लोगों का हिसा है) जो पैगम्बर है, नबी ए उम्मी की जोड़ी इख्तियार करें जिसका जिक्र उन्हें अपने हां तौरात और इंजील में लिखा हुआ मिलता है। वो उनको नेकी का हुकुम देता है, बुरी (सभी भ्रष्ट चीजें) से रुका है, उनके लिए पाक चीजें हलाल और नापाक चीजें हराम करता है, और उन पर से वो बोझ उतरता है जो उन पर लड़य हुए थे और वो बंदिशें खोलता है जिनमें वो बंद हुए थे। लिहाज़ा जो लोग इसपर ईमान लाए और इसकी हिमायत और नुसरत करें और वो हमें रोशनी की जोड़ी इख्तियार करें जो इसके साथ नाज़िल की गई है, वही फलाह पाने वाले हैं 
+[7:158] (ऐ मुहम्मद), कहो के “ऐ इंसानो, मैं तुम सब की तरफ हमें खुदा का पैगम्बर हूं जो जमीन और आसमान की बादशाही का मालिक है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, वही जिंदगी बक्शता है और वही मौत देता है। है के तुम राह ए रस्त पा लोगे 
+[7:159] मूसा की क़ौम में एक गिरोह ऐसा भी था जो हक़ के मुताबिक़ हिदायत करता था और हक़ ही के मुताबिक़ इन्साफ़ करता था
+[7:160] और हमने हमें क़ौम को बारह (बारह) घरानों में तकसीम करके उन्हें मुस्तक़िल गिरोहों की शक्ल दे दी थी। और जब मूसा से उसकी क़ौम ने पानी मांगा तो हमने उसको इशारा किया के फलां चट्टान पर अपनी लाठी मारो। चुनान्चे इस चट्टान से यकायक बारह चश्मे (बारह झरने) फूट निकले और हर गिरो ​​ने अपने पानी लेने की जगह मुतैयां करली। हमने उनपर बादल (बादल) का साया किया और उनपार मन ओ सलवा (बटेर) उतारा, खाओ वो पाक चीजें जो हमने तुमको बख्शी हैं मगर इसके बाद उन्होन ने जो कुछ किया तो हमपर जुल्म नहीं किया बलके आप अपने ही ऊपर जुल्म करते रहें 
+[7:161] याद करो वो वक्त जब उनसे कहा गया था कि इस बस्ती में जा कर बास (बस जाओ) जाओ और इसकी अदायगी से अपने हस्ब-ए-मंशा (जो भी चाहो) रोज़ी हासिल करो और हित्ततुन हित्ततुन (पश्चाताप) कहते जाओ और शहर के दरवाज़े में सजदा-रेज़ होते हुए दाख़िल हो। हम तुम्हारी खातें माफ़ करेंगे और नेक राविया रखने वालों को मज़ीद फ़ज़ल से नवाज़ेंगे” 
+[7:162] मगर जो लोग उनमें से ज़ालिम थे उनहों ने हमें बात को जो उनसे कहीं गई थी बदल डाला, और नतीज़ा ये हुआ के हमने उनके ज़ुल्म की पैदाइश में असमान आसमान से अज़ाब भेज दिया 
+[7:163] और ज़रा उनसे बस्ती का हाल भी पूछो जो समंदर के किनारे थे, उन्हें याद दिलाओ वो वाकिया के वहां के लोग सब्त (सब्बाथ/हफ्ते) के दिन एहकाम ए इलाही की ख़िलाफ़ वारज़ी करते थे और ये के मछलियां (मछलियां) सब्त के दिन उबर कर सात (पानी की सतह) पर उनके सामने आती थी और सब्त के सिवा बाकी दिनों में नहीं आती थी। ये इसलिए होता था कि हम उनकी नफरमानियों की वजह से उनको आजमाइश में डाल रहे थे 
+[7:164] और यहीं ये भी याद दिलाओ के जब उनमें से एक गिरोह ने दूसरे गिरो ​​से कहा था के "तुम ऐसे लोगों को क्यों हिदायत करते हो जिन्होनें अल्लाह हलाक करने वाला या सच साज़ा देने वाला है'' तो उनको ने जवाब दिया था के ''हम ये सब कुछ तुम्हारे रब के हुज़ूर अपनी मज़ीरत (बहाना) पेश करने के लिए करते हैं और इस उम्मीद पर करते हैं के शायद ये लोग उसकी नफ़रमानी से परहेज़ करने लगें।” 
+[7:165] आख़िर ए कार जब वो उन हिदायतों को बिल्कुल ही फ़रामोश कर गए जो उन्हें याद करई गई पतली तो हमने उन लोगों को बचा लिया जो बुराई से रोते थे और बाकी सब लोगों को जो ज़ालिम थे उनकी नफ़रमानियों पर सिर्फ अज़ाब में पकड़ लिया 
+[7:166] फिर जब वो पूरी सरकशी के साथ वही काम किये चले गये जिसमें उन्हें रोका गया था, तो हमने कहा के बंदर हो जाओ ज़लील और ख्वार 
+[7:167] और याद करो जबके तुम्हारे रब ने एलान करदिया के “वो कयामत तक बराबर ऐसे लोग बानी इजराइल पर मुसल्लत करता” रहेगा जो उनको बेहतरीन अज़ाब देंगे।” यकीनन तुम्हारा रुब सज़ा देने में तेज़-दस्त है और यकीनन वो दरगुज़ार और रहम से भी काम लेने वाला है
+[7:168] हमने उनको ज़मीन में टुकड़े-टुकड़े करके बहुत से क़ौमों में तकसीम कर दिया, कुछ लोग इनमें शामिल थे और कुछ इसे मुख़्तलिफ़ और हम उनको अच्छे और बुरे हालात से आज़माइश में मुब्तिला करते रहे के शायद ये पलट आएं 
+[7:169] फिर अगली नसलों के बाद ऐसे ना-खलाफ लोग उनके जानशीन (उत्तराधिकारी) हुए जो किताब ए इलाही के वारिस होकर इसी दुनिया ए दानी के फायदे (इस दुनिया का सामान) समित-ते हैं और कहते हैं के तवक्कू है हमें माफ कर दिया जाएगा। और अगर वही माता ए दुनिया फिर सामने आती है तो फिर लपक कर उसे ले लेते हैं। क्या उनसे किताब का अहद नहीं लिया जा चुका है कि अल्लाह के नाम पर वही बात कहे जो हक हो? और ये खुद पढ़ चुके हैं जो किताब में लिखा है, आख़िरत की क़यामगाह तो खुदा-टार्स लोगों के लिए ही बेहतर है, क्या तुम इतनी सी बात नहीं समझते 
+[7:170] जो लोग किताब की किताब पढ़ते हैं और जिन्होन ने नमाज़ क़याम रक्खी है, यकीनन ऐसे नए किरदार लोगों का अजर हम जया नहीं करेंगे 
+[7:171] उन्हें वो वक्त भी कुछ याद है जबके हमने पहाड़ को हिला कर उस तरफ इस तरह छा दिया था के गोया वो छतरी (छाता/छतरी) है, और ये गुमान कर रहे थे के वो अंदर आ पड़ेगा, और हम वक्त हमने उनसे कहा था कि जो किताब हम तुम्हें दे रहे हैं इसे मज़बूती के साथ थामो (पकड़ो) और जो कुछ इसमें लिखा है उसे याद रखो, तवक्कू है के तुम गलत-रवी से बचे रहोगे 
+[7:172] और (ऐ नबी), लोगों को याद दिलाओ वो वक्त जबके तुम्हारे रब ने बनी आदम की पुश्तों से उनकी नाक को निकला था और उन्हें खुद उनके ऊपर गवाह बनाते हुए पूछा था, “क्या मैं तुम्हारा रुब नहीं हूं?” कयामत के रोज़ ये ना कहदो के "हम तो इस बात से खबर थे" 
+[7:173] या ये ना कहने लगो के "शिर्क की इब्तिदा तो हमारे बाप दादा ने हमसे पहले की थी और हम बाद को उनकी नाक से पैदा हुए, फिर क्या आप हमें कसूर में पकड़ते हैं जो गलत काम लोगों ने किया था” 
+[7:174] देखो, इस तरह हम निशानियां वाज़ेह तौर पर पेश करते हैं और इसलिए करते हैं के ये लोग पलट आते हैं 
+[7:175] और (ऐ मुहम्मद), इनके सामने उस शक्स का हाल बयान करो जिसको हमने अपनी आयत का इल्म अता किया था मगर वो उनकी पाबंदी से निकल भागा. आख़िर ए कार शैतान उसके पीछे पड़ गया यहाँ तक के वो भटकने वालों में शामिल होकर रहा 
+[7:176] अगर हम चाहते तो उसे उन आयतों के ज़रिये से बुलंदी अता करते, मगर वो तो ज़मीन ही की तरफ़ झुक कर रह गया और अपनी ख्वाहिश ए नफ़्स ही के पीछे पड़ा रहा, उसकी हालात कुत्ते की सी हो गई के तुम उसपर हमला करो तब भी ज़ुबान लटके रहे और उसे छोड़ दो तब भी ज़ुबान लटके रहे। यही मिसाल है उन लोगों की जो हमारी आयत को झुठलाते हैं। तुम ये हिकायत (दृष्टांत) इनको सुनाते रहो, शायद के ये कुछ गौर ओ फ़िक्र करें
+[7:177] बड़ी ही बुरी मिसाल है ऐसे लोगों की जिन्होनें हमारी आयतों को झुटलाया, और वो आप अपने ही ऊपर ज़ुल्म करते रहे हैं 
+[7:178] जिसे अल्लाह हिदायत बख्शी बस वही राह-ए-रास्त पाता है और जिसको अल्लाह अपनी रहनुमाई से मेहरून करदे वही नाकाम ओ ना-मुराद होकर रहता है 
+[7:179] और ये हकीकत है के बहुत से जिन्न और इंसान ऐसे हैं जिनको हमने जहन्नुम के लिए पैदा किया है। उनके पास दिल हैं मगर वो उन्हें सोचते नहीं, उनके पास आंखें हैं मगर वो उन्हें देखते नहीं, उनके पास कान हैं मगर वो उन्हें सुनते नहीं। वो जानवरों की तरह हैं बलके उनसे भी ज्यादा गुजरे। ये वो लोग हैं जो गफ़लत में खो गए हैं 
+[7:180] अल्लाह अच्छे नमो का मुस्तहिक़ है। उसको अच्छे ही नामो से पुकारो, और उन लोगों को छोड़ दो जो उसका नाम रखने में रास्ते से मुन्हारिफ हो जाते हैं। जो कुछ वो करते रहेंगे उसका बदला वो पा कर रहेंगे 
+[7:181] हमारी मख़लूक़ में एक गिरोह ऐसा भी है जो ठीक ठीक हक़ के मुताबिक हिदायत और हक़ ही के मुताबिक इन्साफ़ करता है 
+[7:182] रहे वो लोग जिन्होन ने हमारी आयत को झुटला दिया है, तो उन्हें हम ब-तदरीज (कदम दर कदम) ऐसे तरीक़े से तबाही की तरफ ले जायेंगे के उनको ख़बर तक न होगी 
+[7:183] मैं उनको ढील दे रहा हूँ, मेरी चाल का कोई तोड़ नहीं है 
+[7:184] और क्या इन लोगों ने कभी सोचा नहीं? इनके रफीक पर जुनून का कोई असर नहीं है, वो तो एक खबरदार है जो (बुरा अंजाम सामने आने से पहले) साफ साफ मुतनब्बे (चेतावनी) कर रहा है 
+[7:185] क्या इन लोगों ने आसमान ओ जमीन ए इंतजाम पर कभी गौर नहीं किया और किसी चीज को भी जो खुदा ने भुगतान की है आंखें खोल कर नहीं देखा? और क्या ये भी अनहोन ने नहीं सोचा के शायद इनकी मोहलत ए जिंदगी पूरी होने का वक्त करीब आ लगा हो? फिर आख़िर पैगंबर की इस तम्बीह (चेतावनी) के बाद और कौन सी बात ऐसी हो सकती है जिसपर ये ईमान लायें 
+[7:186] जिसको अल्लाह रहनुमाई से महरूम करदे उसके लिए फिर कोई रहनुमा नहीं है, और अल्लाह इन्हें इनकी सरकशी ही में भटकता हुआ छोड़ देता है 
+[7:187] ये लोग तुमसे पूछते हैं कि आख़िर वो क़यामत की घड़ी कब नाज़िल होगी? कहो"इसका इल्म मेरे रब ही के पास है, उसे अपना वक्त पर वही जाहिर करेगा। आसमान और जमीन में वो बड़ा वक्त होगा। वो तुम्हारा अचानक आ जाएगा"। ये लोग उसके मुतालिक तुमसे इस तरह पूछते हैं गोया के तुम उसकी खोज में लगे हुए हो। कहो, "उसका इल्म तो सिर्फ अल्लाह को है मगर अक्सर लोग इस हकीकत से ना-वाक़िफ़ हैं" 
+[7:188] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो "मैं अपनी जात के लिए किसी नाफ़े (फ़ैयदे) और नुक्सान का इख्तियार नहीं रखता, अल्लाह ही जो कुछ चाहता है वो होता है और अगर मुझे गैब का इल्म होता तो मैं बहुत से फ़ायदे अपने लिए हासिल करता हूं और मुझे कभी कोई नुक्सान न मिलता। मैं तो महज़ एक खबरदार करने वाला और खुश-खबरी सुनने वाला हूं उन लोगों के लिए जो मेरी बात माने।''
+[7:189] वो अल्लाह ही है जिसने तुम्हें एक जान से बचाया और उसकी जिंदगी से उसका जोड़ा बनाया ता-के उसके पास सुकून हासिल करे। फिर जब मर्द ने औरत को धन्यवाद लिया तो उसे एक खफीफ सा हमाल रह गया जिसके लिए वो चलती फिरती रही, फिर जब वो बोझल हो गई तो दोनों ने मिलकर अल्लाह, अपने रब से दुआ की के अगर तू नहीं हमको अच्छा सा बच्चा दिया तो हम तेरे शुक्र गुजार होंगे 
+[7:190] मगर जब अल्लाह ने उनको एक सही ओ सलीम बच्चा दे दिया तो वो उसकी इस बख्शीश ओ इनायत में दुसरों को उसका शरीक ठहरना लगे। अल्लाह बहुत बुलंद ओ बदले में है मुशरिकाना बातों से जो ये लोग करते हैं 
+[7:191] कैसी नादान हैं ये लोग के उनको खुदा का शरीक ठहरते हैं जो किसी चीज को भी पेदा नहीं करते बलके खुद पेदा किए जाते हैं 
+[7:192] जो ना उनकी मदद कर सकते हैं और ना आप अपनी मदद ही पर कादिर हैं 
+[7:193] अगर तुम उन्हें सीधी राह पर आने की दावत दो तो वो तुम्हारे पीछे ना आएं, तुम ख्वा उन्हें पुकारो या खामोश रहो, दोनों सूरतों में तुम्हारे लिए यक्सन ही रहे 
+[7:194] तुम लोग खुदा को छोड़ कर जिन्हे पुकारते हो वो तो महज़ बंदे (गुलाम) हैं जैसे तुम बंदे हो। उनसे दुआएं मांग देखो. ये तुम्हारी दुआओं का जवाब दें अगर उनके बारे में तुम्हारा ख़यालत सही है 
+[7:195] क्या ये पांव (पैर) रखते हैं कि उन्हें चलें? क्या ये हाथ रखते हैं के उन्हें पकाएँ? क्या ये आंखें रखते हैं कि उन्हें देखें? क्या ये कान रखते हैं के उनसे सुने? (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो के “ बुला लो अपने ठहरे हुए शरीकों को फिर तुम सब मिल कर मेरे खिलाफ तदबीरें (योजना/कथानक) करो और मुझे हरगिज़ मोहलत न दो 
+[7:196] मेरा हामी-ओ-नासिर (अभिभावक) वो खुदा है जिसने ये किताब नाज़िल की है, और वो नए आदमियों की हिमायत करता है 
+[7:197] बा-खिलाफ इसके तुम जिन्हें खुदा को छोड़ कर पुकारते हो वो ना तुम्हारी मदद कर सकते हैं और ना खुद अपनी मदद ही करने के काबिल हैं 
+[7:198] बाल्के अगर तुम उन्हें सीधी राह पर आने के लिए कहो तो वो तुम्हारी बात सुन भी नहीं सकती, बा-ज़ाहिर तुमको ऐसा नज़र आता है के वो तुम्हारी तरफ़ देख रहे हैं मगर फ़िल-वाक़े वो कुछ भी नहीं देखते” 
+[7:199] (ऐ नबी), नरमी ओ दरगुज़र का तरीक़ा इख़्तियार करो, मारूफ़ की तालक़ीन किये जाओ (आदेश दो) अच्छा), और जाहिलों से ना उलझो 
+[7:200] अगर कभी शैतान तुम्हें अल्लाह की पनाह मांगो, वो सब कुछ सुनने और जाने वाला है 
+[7:201] हकीकत में जो लोग मुत्तकी (अल्लाह से डरने वाले/पवित्र) हैं उनका हाल तो ये होता है के कभी शैतान के असर से कोई बुरा ख्याल अगर उन्हें छू भी जाता है तो वो जानवर चौकन्ने (अलर्ट) हो जाते हैं और फिर उन्हें साफ नजर आने लगता है के उनके लिए सही तारीख-कर क्या है 
+[7:202] रहे उनके (यानी शैतान के) भाई बंद, तो वो उनको उनकी कजरावी में खिंचे (त्रुटि में गहराई से) लिए चले जाते हैं और उन्हें भटकने में कोई कसर नहीं उठता
+[7:203] (ऐ नबी), जब तुम लोगों के सामने कोई निशानी (यानी मोअजिज़ा) पेश नहीं करते तो ये कहते हैं कि तुमने अपने लिए कोई निशाना क्यों नहीं इंतखाब किया? इनसे कहो "मैं तो सिर्फ हमें वही की जोड़ी करता हूं जो मेरे रब ने मेरी तरफ भेजी है, ये बसीरत (दृष्टि) की रोशनी हैं तुम्हारे रब की तरफ से और हिदायत और रहमत है उन लोगों के लिए जो इसे कबूल करें 
+[7:204] जब कुरान तुम्हारे सामने पढ़ा जाए तो इसे।" तवज्जु से सुनो और खामोश रहो, शायद के तुमपर भी रहमत हो जाए” 
+[7:205] (ऐ नबी), अपने रुब को सुबह ओ शाम याद किया करो दिल ही दिल में ज़ारी (विनम्रता) और खौफ के साथ, और जुबान से भी हल्की आवाज के साथ। तुम उन लोगों में से ना हो जाओ जो गफ़लत में पड़े हुए हैं 
+[7:206] जो फ़रिश्ते तुम्हारे रब के हुज़ूर तकर्रब का मुकाम रखते हैं वो कभी अपनी बदाई के घमंड में आकर उसकी इबादत से मुँह नहीं मोड़ते और उसकी तस्बीह करते हैं, और उसके आगे झुके रहते हैं 
+
+सूरह 8: अल-अनफाल (स्वैच्छिक उपहार) 
+------------------------------------------------ 
+[8:1] तुमसे अनफाल (युद्ध की लूट/गनीमत के माल) के मुतालिक पूछते हैं? कहो "ये अनफ़ल तो अल्लाह और उसके रसूल के हैं, लेकिन तुम लोग अल्लाह से डरो और अपने आपस के तालुकात दुरुस्त करो और अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करो अगर तुम मोमिन हो" 
+[8:2] सच्चे एहले ईमान तो वो लोग हैं जिनके दिल अल्लाह का ज़िक्र सुनकर डर लगता है (भयभीत) जाते हैं और जब अल्लाह की आयत उनके सामने पड़ती है तो उनका ईमान बढ़ जाता है और वो अपने रब पर ऐतमाद (भरोसा) रखते हैं 
+[8:3] जो नमाज कायम करते हैं और जो कुछ हमने उनको दिया है उसमें से (हमारी राह में) खर्च करते हैं 
+[8:4] ऐसे ही लोग हक़ीक़ी मोमिन हैं। उनके लिए उनके रुब के पास बड़े दर्जे हैं, कसूरों से दरगुज़ार है और बेहतरीन रिज़क है 
+[8:5] (इस माल ए गनीमत के मामले में भी वैसी ही सूरत पेश आ रही है जैसी उस वक्त पेश आई थी जबके) तेरा रुब तुझी हक़ के साथ तेरे घर से निकल लाया था और मोमिनो में से एक गिरोह को ये सख्त नागावर था 
+[8:6] वो उस हक़ के मामले में तुझसे झगड़ा रहे थे दारान हाल (जबकि) ये के वो साफ़ साफ़ नुमायन हो चूका था, उनका हाल ये था के गोया वो आँखें देखे मौत की तरफ हांके (चालित) जा रहे हैं 
+[8:7] याद करो वो मौका जबके अल्लाह तुमसे वादा कर रहा था कि दोनों गिरोहोन में से एक तुम्हें मिल जाएगा। तुम चाहते थे के कमज़ोर गिरो ​​तुम्हें मिले मगर अल्लाह का इरादा ये था के अपने इरशादत से हक़ को हक़ कर दिखाये और काफ़िरों की जद्द काट दे 
+[8:8] ता-के हक़ हक़ होकर रहे और बातिल बातिल होकर रह जाये ख्वा मुजरिमों को ये कितना ही नागावर हो 
+[8:9] और वो मौका याद करो जबके तुम अपने रब से फरियाद कर रहे थे जवाब में उसने फरमाया के मैं तुम्हारी मदद के लिए पै डर पै एक हजार फरिश्ते भेज रहा हूं
+[8:10] ये बात अल्लाह ने तुम्हें सिर्फ इसलिए बताया है कि तुम्हें खुश-खबरी हो और तुम्हारा दिल इसे मुतमइन हो जाए। वरना मदद तो जब भी होती है अल्लाह ही की तरफ से होती है। यकीनन अल्लाह ज़बरदस्त और दाना (बुद्धिमान) है 
+[8:11] और वह वक्त जबके अल्लाह अपनी तरफ से गुनाह (उनींदापन) की शकल में तुम्हारे इत्मिनान ओ बे-खौफी की कैफियत तारी कर रहा था, और आसमान से तुम्हारे ऊपर पानी बरसा रहा था ता-के तुम्हें पाक करे और तुमसे शैतान की डाली हुई नजासत दूर करे और तुम्हारी हिम्मत बंधाए और इसके जरीए से तुम्हारे कदम जमादे 
+[8:12] और वह वक्त जबके तुम्हारा रब फरिश्तों को इरशारा कर रहा था के " मैं तुम्हारे साथ हूं, तुम एहले ईमान को साबित कदम रखो, मैं अभी काफिरों के दिलों में रोब (आतंक) डालता हूं। पस तुम उनकी गर्दन पर ज़र्ब (हड़ताल) और जोड़ जोड़ पर चोट लगाओ” 
+[8:13] ये इस तरह लोगों ने अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला किया। और जो अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला करे अल्लाह उसके लिए कड़ी सजा दे 
+[8:14] ये है तुम लोगों की सजा, अब इसका मजा चक्खो, और तुम्हें मालूम हो के हक का इनकार करने वालों के लिए दोज़ख का अज़ाब है 
+[8:15] ऐ ईमान लानी वालों, जब तुम एक लश्कर की सूरत में कुफ्फार से दो-चार (मुठभेड़) हो तो उनके मुकाबले में पीछे हटो (अपनी पीठ मोड़ो) 
+[8:16] जिसने ऐसे मौके पर पीठ पहरी, इल्ला ये के जंगी चाल के दौरे पर ऐसा करे या किसी दूसरी फौज से जा मिल्ने के लिए, तो वो अल्लाह के गजब में घिर जाएगा, उसका ठिकाना जहन्नुम होगा। और वो बहुत बुरी जाए बाज़ गस्त (बुरी मंजिल) है 
+[8:17] पास हक़ीक़त ये है के तुमने उन्हें क़तल नहीं किया बलके अल्लाह ने उनको क़त्ल किया, और तू नहीं नहीं फेंका बलके अल्लाह ने फेंका (और मोमिनों के हाथ जो इस काम में इस्तमाल किए गए हैं) तो ये इसलिए था के अल्लाह मोमिनो को एक बेहतरीन आज़माइश से कामियाबी के साथ गुज़ार दे। यकीनन अल्लाह सुनने वाला और जाने वाला है 
+[8:18] ये मामला तो तुम्हारे साथ है और काफिरों के साथ मामला ये है के अल्लाह उनकी चालों को कामजूर करने वाला है 
+[8:19] (काफिरों से कहदो में) “अगर तुम फैसला चाहते थे तो लो, फैसला तुम्हारे सामने आ गया। अब बाज़ आ जाओ तो तुम्हारे लिए बेहतर है। वरना फिर पलट कर उसी का इरादा करोगी तो हम भी इसी सजा का इआदा करेंगे और तुम्हारी जमीअत, तुम्हारे कुछ काम न आ सकेगे।' 
+' वालो, अल्लाह और उसके रसूल की इत्ता करो और हुकुम सुने के बाद उससे सरताबी (मुकर जाओ) ना करो 
+[8:21] उन लोगों की तरह न हो जाओ जिन्हों ने कहा के हमने सुना, हालंके वो नहीं सुनते 
+[8:22] यकीनन खुदा के नाज़दीक बदतरीन क़िसम के जानवर वो बाहर गूँगे लोग हैं जो अक्ल से काम नहीं लेते
+[8:23] अगर अल्लाह को मालूम होता के उन्हें कुछ भी बुलाया जाता है तो वो जरूर उन्हें सुनने की तौफीक देता, (लेकिन भलाई के बगैर) अगर वो उनको सुनता तो वो बेरूखी के साथ मुंह फेर जाते 
+[8:24] ऐ ईमान लाने वालों, अल्लाह और उसके रसूल की पुकार पर लब्बैक कहो जबके रसूल तुम्हें उस चीज की तरफ बुलाए जो तुम्हें जिंदगी बक्शने वाली है, और जान रक्खो के अल्लाह आदमी और उसके दिल के दरमियान हयाल है, और उसकी तरफ तुम समते जाओगे 
+[8:25] और बच्चों हमें फिटने से जिसकी शामत मखसूस तौर पर सिर्फ उन्हीं लोगों तक महदूद ना रहेगी जिन्हों ने तुम में से गुनाह किया हो, और जान रक्खो के अल्लाह सख्त सजा देने वाला है 
+[8:26] याद करो वो वक्त जबके तुम थोड़े थे, जमीन में तुमको बे-ज़ोर समझ जाता था, तुम डरते रहते थे के कहीं लोग तुम्हे मिटा ना दीन. फिर अल्लाह ने तुमको जाये पनाह मुहैय्या करदी, अपनी मदद से तुम्हारे हाथ मज़बूत किये और तुम्हें अच्छा रिज़्क मिल गया, शायद के तुम शुक्र-गुज़ार बनो 
+[8:27] ऐ ईमान लाने वालों, जानते बुझते अल्लाह और उसके रसूल के साथ खयानत(बेवफा) ना करो, अपनी अमानतों में गद्दारी के मुर्तकीब न हो 
+[8:28] और जां रख्खो के तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद हकीकत में समां ए आजमाइश हैं और अल्लाह के पास अजर देने के लिए बहुत कुछ है 
+[8:29] ऐ ईमान लाने वालों, अगर तुम अल्लाह से खुदा-तरसी इख्तियार करोगे तुम्हारे लिए कसौटी (मानदंड) बहम पाहुंचा देगा और तुम्हारी बुराइयों को तुमसे दूर कर देगा, और तुम्हारे कसूर माफ कर देगा। अल्लाह बड़ा फ़ज़ल फ़रमाने वाला है 
+[8:30] वो वक़्त भी याद करने के काबिल है जबके मुनकिरीन ए हक़ तेरे ख़िलाफ़ तदबीरें सोच रहे थे के तुझसे क़ैद करदें या क़तल कर डालें या जिला-वतन (दूर भगाओ) करदें। वो अपनी चालें चल रहे थे और अल्लाह अपनी चाल चल रहा था। और अल्लाह सब से बेहतर चाल चलने वाला है 
+[8:31] जब उनको हमारी आयतें सुनाई जाती थीं तो कहते थे के "हां सुन लिया हमने। हम चाहें तो ऐसी ही बातें हम भी बना सकते हैं। ये तो वही पुरानी कहानियां हैं जो पहले से लोग कहते चले आ रहे हैं" 
+[8:32] और वो बात भी याद है जो उन्होन ने कही थी के "खुदया अगर ये हकीकत है और तेरी तरफ से है तो हमपर आसमान से पत्थर बरसा दे, या कोई दर्दनाक अजब हमपर ले आ" 
+[8:33] हमें अल्लाह का वक्त उन्पर अजाब नाजिल करने वाला ना था जबके तू उनके दरमियान मौजुद था, और ना अल्लाह का ये क़ायदा है के लोग इस्तेग़फ़र कर रहे हैं और वो उनको अज़ाब दे दे 
+[8:34] लेकिन अब क्यों ना वो उन्पर अज़ाब नाज़िल करे जबके वो मस्जिद ए हराम का रास्ता रोक रहे हैं, हलांके वो मस्जिद के जायज है मुतवल्ली (अभिभावक) नहीं हैं। इसके जायज मुतवल्ली तो सिर्फ एहले तकवा ही हो स्केट हैं मगर अक्सर लोग इस बात को नहीं जानते
+[8:35] बैतुल्लाह के पास उन लोगों की नमाज क्या होती है, बस सीतियां बजाते और तालियां बजाते हैं। अब लो, इस अज़ाब का मजा चक्को अपने हमें इंकार ए हक़ की याद में जो तुम करते रहे हो 
+[8:36] जिन लोगों ने हक़ को मन्ने से इंकार किया है वो अपने माल खुदा के रास्ते से रुकने के लिए सिर्फ कर रहे हैं और अभी और खर्च करते रहेंगे, मगर आख़िर ए कार यही कोशिशें उनके लिए पछतावे का सबाब बनेंगे, फिर वो मगलूब होंगे, फिर ये काफ़िर जहन्नुम की तरफ घेर ले जायेंगे 
+[8:37] ता-के अल्लाह गंदगी को पाकीज़गी से मंत्र कर अलग करे और हर क़िस्म की गंदगी को मिला कर इकट्ठ करे फिर है पलांदे (बंडलों) को जहन्नुम में झोंक दे, यहीं लोग असली दीवालिये (हारे हुए) हैं 
+[8:38] (ऐ नबी), उन काफिरों से कहो के अगर अब भी बाज़ आ जाएं तो जो कुछ पहले हो चुका है उसे शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन अगर ये उसकी पिछली राविश का इरादा करेंगे तो गुज़िश्ता क़ौम के साथ जो कुछ हो चुका है वो सबको मालूम है 
+[8:39] ऐ ईमान लाने वालों, काफिरों से जंग करो यहां तक ​​के फ़ितना बाकी न रहे और दीन पूरा का पूरा अल्लाह के लिए हो जाए, फिर अगर वो फ़िटने से रुक जाएं तो उनके अमल का देखने वाला अल्लाह है 
+[8:40] और अगर वो ना माने तो जान रक्खो के अल्लाह तुम्हारा सरपरस्त है और वो बेहतरीन हामी ओ मददगार है 
+[8:41] और तुम्हीं मालूम हो के जो कुछ माल ए गनीमत तुमने हासिल किया है उसका पांचवां (पांचवां) हिसा अल्लाह और उसके रसूल और रिश्तेदारों और यतीमों और मिस्कीनो और मुसाफिरों के लिए है. अगर तुम ईमान लाए हो अल्लाह पर और उस चीज पर जो फैसले के रोज, यानी दोनों फौजों की लड़ाई (युद्ध में सेनाएं मिलीं) के दिन, हमने अपने बंदे पर नाज़िल की थी, (तो ये हिसा बा-ख़ुशी अदा करो)। अल्लाह हर चीज पर कादिर है 
+[8:42] याद करो वो वक्त जब तुम वादी के इस जानिब था और वो दूसरा जानिब पड़ाव (डेरा डाले हुए) डाले हुए थे और काफिला (कारवां) तुमसे नीचे (साहिल) की तरफ था। अगर कहीं पहले से तुम्हारे और उनके दरमियान मुक़ाबले की क़रारदाद (आपसी नियुक्ति) हो चुकी होती तो तुम ज़रूर इस मौक़े पर पहलू ताहि (अस्वीकार) कर लेते। लेकिन जो कुछ पेश आया वो इस लिए था कि जिस बात का फैसला अल्लाह कर चूका था उसे जहूर में ले आए ता-के जिसे हलाक होना है तो दलील ए रोशन के साथ हलक हो और जिसे जिंदा रहना है वो दलील ए रोशन के साथ जिंदा रहे। यकीनन खुदा सुनने वाला और जाने वाला है 
+[8:43] और याद करो वो वक्त जबके (ऐ नबी), खुदा उनको तुम्हारे ख्वाब में थोड़ा दिखा रहा था। अगर कहीं वो तुम्हें उनकी तदाद ज्यादा दिखा देता तो जरूर तुमलोग हिम्मत हार जाते और लड़ाई के मामले में झगड़ा शुरू कर देते। लेकिन अल्लाह ही ने इसे तुम्हें बचाया। यकीनन वो सीने का हाल तक जानता है
+[8:44] और याद करो जबके मुकाबले के लिए खुदा ने तुम लोगों की निगाहों में दुश्मनों को थोड़ा दिखाया और उनकी निगाहों में तुम्हें काम करके पेश किया, ता-के जो बात होनी थी उसे अल्लाह ज़हूर में ले आए। और आख़िर ए कार सारी ममलात अल्लाह ही की तरफ रूजू करते हैं 
+[8:45] ऐ ईमान लाने वालों, जब किसी गिरो ​​से तुम्हारा मुकाबला हो तो साबित क़दम रहो और अल्लाह को कसरत से याद करो, तवक्कू है के तुम्हें कामयाबी नसीब होगी 
+[8:46] और अल्लाह और उसके रसूल की इत्ता करो और आपस में झगड़ा नहीं वरना तुम्हारे अंदर कमज़ोरी पैदा हो जाएगी और तुम्हारी हवा उखड़ जाएगी। सब्र से काम लो, यकीनन अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है 
+[8:47] और उन लोगों के साथ रंग-ढंग ना इख्तियार करो जो अपने घरों से इतराते (खुश) और लोगों को अपनी शान दिखाते हुए निकले और जिनका रवीश ये है के अल्लाह के रास्ते से रोते हैं। जो कुछ वो कर रहे हैं वो अल्लाह की गिरफ़्तार से बाहर नहीं है 
+[8:48] ज़रा ख़याल करो हमें वक़्त का जबके शैतान ने लोगों के दिलों में इनकी निगाहों में ख़ुशनुमा बना कर दिखाया था और इनसे कहा था के आज कोई तुम्हारे गालिब नहीं आ सकता, और ये के मैं तुम्हारे साथ हूँ. मगर जब दोनों गिरोहों का आमना सामना हुआ तो वो उल्टे पांव फिर गया और कहने लगा के मेरा तुम्हारा साथ नहीं है, मैं वो कुछ देख रहा हूं जो तुमलोग नहीं देखते। मुझे खुदा से डर लगता है और खुदा बड़ी ताकत सजा देने वाला है 
+[8:49] जबके मुनाफिकेन और वो सब लोग जिनके दिलों को रोग लगा हुआ है, कह रहे थे के इन लोगों को तो इनके दीन ने खबत (भ्रम) में मुब्तिला कर रखा है, हलांके अगर कोई अल्लाह पर भरोसा करे तो यकीनन अल्लाह बड़ा ज़बरदस्त और दाना है 
+[8:50] काश तुम हमें हालात को देख सकते हो जबके फरिश्ते मकतूल ​​काफिरों की रूहें क़ब्ज़ कर रहे थे, वो उनके चेहरे और उनके कुल्होन पर ज़र्ब लगते जाते थे और कहते जाते थे “लो अब जलने की सजा भुगतो 
+[8:51] ये वो जजा है जिसका सामान तुम्हारे अपने हाथों ने पेशगी मुहैय्या कर रखा था। वरना अल्लाह तो अपने बंदों पर ज़ुल्म करने वाला नहीं है।” 
+[8:52] ये मामला उनके साथ उसी तरह पेश आया जिस तरह आले फिरौन और उन्हें पहले के दूसरे लोगों के साथ पेश आता रहा है, के उनहों ने अल्लाह की आयतों को मानने से इनकार किया और अल्लाह ने उनके गुनाहों पर उन्हें पकड़ लिया। अल्लाह क़ुव्वत रखता है और सख़्त सज़ा देने वाला है 
+[8:53] ये अल्लाह की इस सुन्नत के मुताबिक हुआ के वो किसी नियामत को जो हमें किसी क़ौम को आता है कि हो हमें वक़्त तक नहीं बदलता जब तक के वो क़ौम खुद अपनी तर्ज़ ए अमल को नहीं बदल देती। अल्लाह सब कुछ सुनने और जाने वाला है 
+[8:54] आले फिरौन और उनसे पहले कि क़ौमों के साथ जो कुछ पेश आया वो इसी ज़ब्ते के मुताबिक़ था। उनहों ने अपने रुब की आयतों को झुटलाया, तब हमने उनके गुनाहों की याद में उन्हें हलाक किया और आले-फिरौं को परेशान कर दिया, ये सब जालिम लोग थे
+[8:55] यकीनन अल्लाह के नाज़दीक ज़मीन पर चलने वाली मख़लूक़ में सबसे बेहतर वो लोग हैं जिन्हों ने हक़ को मन्ने से इनकार करदिया फिर किसी तरह वो उसे क़बूल करने पर तैयार नहीं हैं 
+[8:56] (खुसूसन) उनमें से वो लोग जिनके साथ तू नहीं मुआहिदा (संविदा) किया फिर वो हर मौके पर उसको तोड़ते हैं और जरा खुदा का खौफ नहीं करते 
+[8:57] अगर ये लोग तुम्हें लड़ाई में मिल जाएं तो इनकी ऐसी खबर लो के इनके बाद जो दूसरे लोग ऐसे रवीश इख्तियार करने वाले हों उनके हवास बख्ता (चेतावनी दी) हो जाएं। तवक्कू है के बाद-अहदों के इस अंजाम से वो सबक लेंगे 
+[8:58] और अगर कभी किसी क़ौम से ख़यानत (विश्वासघात) का अंदाज़ा हो तो उसके मुहाएद को एलानिया (सार्वजनिक रूप से) उसके आगे फेंक दो, यक़ीनन अल्लाह ख़यानो (विश्वासघाती) को पसंद नहीं करता 
+[8:59] मुनकिरीन ई हक़ इस ग़लत फ़हमी में ना रहे के वो बाजी ले गए, यक़ीनन वो हमको हारा नहीं सकते 
+[8:60] और तुमलोग, जहां तक ​​तुम्हारे बस चले, ज़्यादा से ज़्यादा ताक़त और तैयार बंधे रहने वाले घोड़े (अच्छी तरह से तैयार घोड़े) उनके मुकाबले के लिए मुहय्या राखो, ता-के इसके ज़रिये से अल्लाह के और अपने दुश्मनों को और उनके अलावा अन्य लोगों को खौफ़ ज़्यादा करो जिन्हे तुम नहीं जानते मगर अल्लाह जानता है। अल्लाह की राह में जो कुछ तुम खर्च करोगे उसका पूरा पूरा बदल तुम्हारी तरफ पलटया जाएगा और तुम्हारे साथ हरगिज ज़ुल्म न होगा 
+[8:61] और (ऐ नबी), अगर दुश्मन सुलह ओ सलामती की तरफ मायल हो तो तुम भी उसके लिए आमादा हो जाओ और अल्लाह पर भरोसा करो, यकीनन वही सब कुछ सुनने और जाने वाला है 
+[8:62] और अगर वो धोखे की नियत रखे तो तुम्हारे लिए अल्लाह काफी है। वही तो है जिसने अपनी मदद से और मोमिनो के जरीये से तुम्हारी तैद की (आपको मजबूत किया) 
+[8:63] और मोमिनो के दिल एक दूसरे के साथ जोड़ दिये। तुम रूह ए ज़मीन की सारी दौलत भी खर्च कर डालते हो इन लोगों के दिल ना जुड़ते लेकिन वो अल्लाह है जिसने इन लोगों के दिल जोड़े। यकीनन वो बड़ा ज़बरदस्त और दाना है 
+[8:64] ऐ नबी, तुम्हारे लिए और तुम्हारे जोड़े (अनुयायियों) एहले ईमान के लिए तो बस अल्लाह काफ़ी है 
+[8:65] ऐ नबी, मोमिनो को जंग पर उभारो। अगर तुम में से बीस (बीस) आदमी साबिर (जो कायम रहे) माननीय तो दो आरा (दो सौ) पर गालिब आएंगे, और अगर तुम में (सौ) आदमी ऐसे हो तो मुनकिरीन ए हक में से हजार (हजार) आदमियों पर भारी रहेंगे, क्योंकि वो ऐसे लोग हैं जो समझ नहीं सकते रखे 
+[8:66] अच्छा, अब अल्लाह ने तुम्हारा बोझ हल्का किया और उसे मालूम हुआ के अभी तुम में कमी है। अगर तुम में से एक (सौ) आदमी साबिर हो तो वो दो आरी (दो सौ) पर हो और एक हजार आदमी ऐसे हो तो दो हजार पर अल्लाह के हुकुम से गालिब आएंगे। और अल्लाह उन लोगों के साथ है जो सब्र करने वाले हैं
+[8:67] किसी नबी के लिए ये ज़ेबा नहीं है के उसके पास क़ैदी होन जब तक के वो ज़मीन में दुश्मनों को अच्छी तरह कुचल ना दे। तुम लोग दुनिया के फ़ायदे चाहते हो, हलांके अल्लाह के पेशे नज़र आख़िर है। और अल्लाह गालिब और हकीम है 
+[8:68] अगर अल्लाह का नविस्ता (फरमा) पहले न लिखा जा चुका हो तो जो कुछ तुम लोगों ने लिया है उसकी पैदाइश में तुमको बड़ी सजा दी जाती है 
+[8:69] पास जो कुछ तुमने माल हासिल किया है उसे खाओ के वो हलाल और पाक है और अल्लाह से डरते हैं रहो. यकीनान अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[8:70] ऐ नबी, तुम लोगों के क़ब्ज़े में जो क़ैदी हैं उन्हें कहो अगर अल्लाह को मालूम हुआ के तुम्हारे दिलों में कुछ ख़ैर है तो वो तुम्हें उससे बढ़ कर देगा जो तुमसे लिया गया है और तुम्हारी ख़तें माफ़ करेगा. अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[8:71] लेकिन अगर वो तेरे साथ ख़यानत (विश्वासघात) का इरादा रखते हैं तो इसे पहले वो अल्लाह के साथ ख़यानत कर चुके हैं। चुनांचे उसकी सज़ा अल्लाह ने उन्हें दी के वो तेरे क़ाबू में आ गए। अल्लाह सब कुछ जानता है और हकीम है 
+[8:72] जिन लोगों ने ईमान क़बूल किया और हिजरत की और अल्लाह की राह में अपनी जानेन लड़ें और अपने माल खापे, और जिन लोगों ने हिजरत करने वालों को जगह दी और उनकी मदद की, वही दर-असल एक दूसरे के वाली (सहयोगी) हैं। रहे वो लोग जो ईमान तो ले आए मगर हिजरत करके (दार उल इस्लाम में) आ नहीं गए तो उनसे तुम्हारा विलायत (गठबंधन) का कोई तल्लुक नहीं है जब तक के वो हिजरत करके ना आ जाए। हां अगर वो दीन के मामले में तुमसे मदद मांगे तो उनकी मदद करना तुम्हारा फर्ज है लेकिन कोई ऐसी कौम के खिलाफ नहीं जिसमें तुम्हारा मुहाएदा हो। जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे देखता है 
+[8:73] जो लोग मुनकिर ए हक़ है वो एक दूसरे की हिमायत करते हैं, अगर तुम ये ना करोगे तो ज़मीन में फ़ितना और बड़ा फ़साद बरपा होगा 
+[8:74] जो लोग ईमान लाए और जिन्होन ने अल्लाह की राह में घर बार छोड़े और जिद ओ जहद की और जिन्हों ने पनाह दी और मदद की वही सच्चे मोमिन हैं। उनके लिए ख़तों से दरगुज़र है और बेहतरीन रिज़क है 
+[8:75] और जो लोग बाद में ईमान लाए और हिजरत करके आ गए और तुम्हारे साथ मिलकर जिद्द ओ जहद करने लगे वो भी तुम्हीं में शामिल हैं। मगर अल्लाह की किताब में खून के रिश्तेदार एक दूसरे के ज्यादा हकदार हैं। यकीनन अल्लाह हर चीज को जानता है 
+
+सूरा 9: अल-बरात / अत-तौबा (प्रतिरक्षा) 
+------------------------------------------------ 
+[9:1] एलान ए बारात (प्रतिरक्षा) है अल्लाह और उसके रसूल की तरफ से उन मुशरिकेन को जिनसे तुमने मुहैदे (संधियाँ) किये थे 
+[9:2] पास तुम लोग मुल्क में चार (चार) माहीन और चल फिर लो और जान रक्खो के तुम अल्लाह को अजीज (निराश) करने वाले नहीं हो, और ये के अल्लाह मुनकिरीन ए हक़ को रुसवा करने वाला है
+[9:3] इत्तिला-ए-आम है अल्लाह और उसके रसूल की तरफ से हज ए अकबर के दिन तमाम लोगों के लिए के अल्लाह मुशरिकेन से बारी उज़-ज़िम्मा (संधि दायित्वों से मुक्त) है और उसका रसूल भी। अब अगर तुम लोग तौबा करो तो तुम्हारे लिए ही बेहतर है और जो मुंह फेरते हो तो खूब समझ लो के तुम अल्लाह को अजीज करने वाले नहीं हो। और (ऐ नबी), इंकार करने वालों को साख अज़ाब की ख़ुशख़बरी सुना दो 
+[9:4] बज़ुज़ उन मुशरिकेन के जिनसे तुमने मुहैदे (संधि) किया फिर उन्होन ने अपने अहद को पूरा करने में तुम्हारे साथ कोई कमी नहीं की और ना तुम्हारे ख़िलाफ़ किसी की मदद की, तो ऐसे लोगों के साथ में तुम भी मुद्दत ए मुहैदा तक वफ़ा करो क्योंकि अल्लाह मुत्तक़ियों (पवित्र) ही को पसंद करता है 
+[9:5] पास जब हराम माहीने गुजर जाएं तो मुशरिकेन को कत्ल करो जहां पाओ और उन्हें पकड़ो और घेरो और हर घात (घात) में उनकी खबर लें के लिए बैठो. फिर अगर वो तौबा करें और नमाज़ क़याम करें और ज़कात दें तो उन्हें छोड़ दो। अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[9:6] और अगर मुशरिकेन में से कोई शक्स पनाह मांग कर तुम्हारे पास आना चाहे (ता-के अल्लाह का कलाम सुने) तो उसे पनाह दे दो यहां तक ​​के वो अल्लाह का कलाम सुनले फिर उसे मामन (सुरक्षा का स्थान) तक पाहुंचा दो, ये है करना चाहिए के ये लोग इल्म नहीं रखते 
+[9:7] मुशरिकेन के लिए अल्लाह और उसके रसूल के नाज़दीक कोई अहद आख़िर कैसे हो सकता है? बाज़ुज़ उन लोगों के जिनसे तुमने मस्जिद ए हराम के पास मुहैदा किया था, जब तक वो तुम्हारे साथ सीधे रहे तुम भी उनके साथ सीधे रहो क्योंकि अल्लाह मुत्तक़ियों को पसंद करता है 
+[9:8] मगर इनके सिवा दूसरे मुशरिकेन के साथ कोई अहद कैसा हो सकता है जबके उनका हाल ये है कि तुम काबू पा जाओ तो ना तुम्हारे मामले में किसी क़राबत का ज़िक्र करें ना किसी की ज़िम्मेदारी का। वो अपनी जुबान से तुमको राजी करने की कोशिश करते हैं मगर दिल उनको इनकार करते हैं और उनमें से अक्सर फासीक हैं 
+[9:9] उन्होन ने अल्लाह की आयत के बदले थोड़ी सी कीमत कबूल कर ली फिर अल्लाह के रास्ते में सद्दे-राह बनकर खड़े हो गए (दूसरों को अपने रास्ते से रोक दिया), बहुत बुरे करतूत थे जो ये करते रहे 
+[9:10] किसी मोमिन के मामले में ना ये क़राबत का ज़िम्मा करते हैं और ना किसी अहद की ज़िम्मेदारी का और ज़्यादा हमेशा की तरफ से हुई है 
+[9:11] अगर ये तौबा कर लें और नमाज कयाम करें और जकात दें तो तुम्हारे दीनी भाई हैं और जाने वालों के लिए हम अपना एहकाम वाज़ेह किये देते हैं 
+[9:12] और अगर अहद करने के बाद ये फिर अपनी कसमों को तोड़ दें और तुम्हारे दीन पर हमले करने शुरू कर दें तो कुफ्र के आलम-बरदारों (सरगना) से जंग करो क्योंकि उनकी कसमों का कोई ऐतबार नहीं, शायद के (फिर तलवार ही के ज़ोर से) वो बाज़ आएंगे
+[9:13] क्या तुम ना लड़ोगे (लड़ाई) ऐसे लोगों से जो अपने अहद तोड़ते रहे हैं और जिन्होन ने रसूल को मुल्क से निकल देने का क़सद (साजिश) किया था और ज़्यादा की इब्तेदा करने वाले वही थे? क्या तुम उनसे डरते हो? अगर तुम मोमिन हो तो अल्लाह से इसका ज़ियादा मुस्तहिक़ है के उससे डरो 
+[9:14] उनसे लड़ो, अल्लाह तुम्हारे हाथों से उनको सज़ा दिलवायेगा और उन्हें ज़लील ओ ख़्वार करेगा और उनके मुकाबले में तुम्हारी मदद करेगा और बहुत से मोमिनो के दिल ठंडा करेगा 
+[9:15] और उनके कुलूब (दिलों) की जलन मिटा देगा, और जिसे चाहेगा तौबा की तौफीक भी देगा। अल्लाह सब कुछ जानने वाला और दाना (बुद्धिमान) है 
+[9:16] क्या तुम लोगों ने ये समझ रखा है कि यूं ही छोड़ दिए जाओगे हालंके अभी अल्लाह ने ये तो देखा ही नहीं के तुम में से कौन वो लोग हैं जिन्हों ने (उसकी राह में) जानफिशानी (अपना पूरा जोर लगाया) की और अल्लाह और उसके रसूल और मोमिनीन के सिवा किसी को जिगरी दोस्त ना बनाया, जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बा-खबर है 
+[9:17] मुशरिकेन का ये काम नहीं है के वो अल्लाह की मस्जिद के मुजावर ओ खादिम बने, डरन हाल ये के अपने ऊपर वो खुद कुफ्र की शहादत दे रहे हैन. उनके तो सारे अमल ज़ाय हो गए और जहन्नुम में उन्हें हमेशा रहना है 
+[9:18] अल्लाह की मस्जिद के आबाद-कार (मुजावर ओ खादिम) तो वही लोग हो सकते हैं जो अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर को माने और नमाज़ क़याम करें, ज़कात दीन और अल्लाह के सिवा किसी से ना डरें, उन्हीं से ये तवाक्कु है के सीधी राह चलेंगे 
+[9:19] क्या तुम लोगों ने हाजियों को पानी पिलाया और मस्जिद ए हराम (खाने काबा) की मुजावरी करने के लिए उस शक्स के काम के बराबर ठहर लिया है जो ईमान लाया अल्लाह पर और रोज ए आखिर पर और जिसने जांफिशानी (जोर दिया) उसकी अत्यंत) कि अल्लाह की राह में? अल्लाह के नाज़दीक तो ये दोनों बराबर नहीं हैं और अल्लाह जालिमों की रहनुमाई नहीं करता 
+[9:20] अल्लाह के हन तो उन्ही लोगों का दरजा बड़ा है जो ईमान लाए और जिन्होन ने उसकी राह में घर बार छोड़े और जान ओ माल से जिहाद किया, वही कामयाब हैं 
+[9:21] उनका रब उन्हें अपनी रहमत और खुशनुदी और ऐसी जन्नत की बशारत देता है जहां उनके लिए भुगतान ऐश के समान हैं 
+[9:22] उन्हें वो हमेशा रहेंगे, यकीनन अल्लाह के पास खिदमत का सिला देने को बहुत कुछ है 
+[9:23] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपने बापों और भाइयों को भी अपना रफीक (सहयोगी) ना बनाओ अगर वो ईमान पर कुफ्र को तर्जीह (प्रथम) दें, तुम में से जो उनको रफीक (सहयोगी) बनायेंगे वही जालिम होंगे
+[9:24] (ऐ नबी), कहदो के अगर तुम्हारे बाप और तुम्हारे बेटे, और तुम्हारे भाई, और तुम्हारी बीवीयां और तुम्हारे अजीज-ओ-अकारेब (करीबी और प्रियजन) और तुम्हारे वो माल जो तुमने कमाए हैं, और तुम्हारे वो कारोबार (बिजनेस) जिनका मनध (गिरावट) पढ़ जाने का तुमको खौफ है और तुम्हारे वो घर जो तुमको पसंद हैं, तुमको अल्लाह और उसके रसूल और उसकी राह में जिहाद से अज़ीज़-तर हैं तो इंतज़ार करो यहाँ तक के अल्लाह अपना फैसला तुम्हारे सामने ले आए, और अल्लाह फासिक लोगों की रहनुमाई नहीं करता 
+[9:25] अल्लाह इस्से पहले बहुत से मौक़े (मौके पर) पर तुम्हारी मदद कर चुका है, अभी गज़वा ए हुनैन के रोज़ (उसकी दस्तगीरी की शान तुम देख चुके हो), उस रोज़ तुम्हें अपनी कसरत ए तड़ाद का गरारा (गर्व) था मगर वो तुम्हारे कुछ काम ना आई और ज़मीन अपनी वुसत के बकवास तुमपर तंग हो गई और तुम पीठ फेर कर भाग निकले 
+[9:26] फिर अल्लाह ने अपनी सकीनत रसूल पर और मोमिनीन पर नाज़िल फरमाई और वो लश्कर उतरे जो तुमको नज़र ना आते थे और मुनकिरीन ए हक़ को सज़ा दी के यही बदला है उन लोगों के लिए जो हक़ का इंकार करें 
+[9:27] फिर (तुम ये भी देख चुके हो के) इस तरह सजा देने के बाद अल्लाह जिसको चाहता है तौबा की तौफीक भी बख्श देता है, अल्लाह दरगुजर करने वाला और रहम फरमाने वाला है 
+[9:28] ऐ ईमान लाने वालों, मुशरिकेन नापाक हैं, लिहाजा इस साल के बाद ये मस्जिद-ए-हराम के करीब न फटकने पाएं, और अगर तुम्हें तंगदस्ती का खौफ है तो बैद नहीं के अल्लाह चाहे तो तुम्हें अपने फजल से गनी करदे, अल्लाह आलिम ओ हकीम है 
+[9:29] जंग करो एहले किताब में से उन लोगों के खिलाफ जो अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान नहीं लाते और जो कुछ अल्लाह और उसके रसूल ने हराम करार दिया है उसे हराम नहीं करते और दीन ए हक को अपना दीन नहीं बनाते। (उनसे लड़ो) यहां तक ​​के वो अपने हाथ से जजिया दीन और छोटे बनकर रहें 
+[9:30] यहुदी कहते हैं के उज़ैर अल्लाह का बेटा है और इसाई कहते हैं के मसीह अल्लाह का बेटा है। ये बे-हकीकत बातें हैं जो वो अपनी जुबान से निकलते हैं उन लोगों की देखा देखी जो उनसे पहले कुफ्र में मुब्तिला हुए थे। खुदा की मार इनपर, ये कहां से धोखा खा रहे हैं 
+[9:31] इन्होन ने अपने उलेमा और दरवेशियों को अल्लाह के सिवा अपना रुब बना लिया है और इसी तरह मसीह इब्न मरियम को भी, हालंके इनको एक माबूद के सिवा किसी की बंदगी करने का हुकुम नहीं दिया गया था, वो जिसके सिवा कोई मुस्तहिक ए इबादत नहीं। पाक है वो इन मुशरिकाना बातों से जो ये लोग करते हैं 
+[9:32] ये लोग चाहते हैं अल्लाह की रोशनी को अपनी फुँकों से बुझा दें मगर अल्लाह अपनी रोशनी को मुकम्मल किए बगैर मन्ने वाला नहीं है ख्वाह काफिरों को ये कितना ही नागावार हो 
+[9:33] वो अल्लाह हाय है जिसने अपने रसूल को हिदायत और दीन ए हक के साथ भेजा ता-के उसे पूरे जिन ए दीन पर गालिब करदे ख्वा मुशरिकों को ये कितना ही नागावार हो
+[9:34] ऐ ईमान लाने वालों, एहले किताब के अक्सर उलेमा और दरवेशों (भिक्षुओं) का हाल ये है कि वो लोगों के माल बातिल तरीक़ों से खाते हैं और उन्हें अल्लाह की राह से रोकते हैं। दर्दनाक सज़ा की ख़ुश-ख़बरी दो उनको जो सोनी और चांदी जमा करके रखते हैं और वे खुदा की राह में खर्च नहीं करते 
+[9:35] एक दिन आएगा के इसी सोनी (गोल्ड) और चांदी पर जहन्नुम की आग ढेकाई जाएगी और फिर इसी से उन लोगों की पेशियां और पहलूओं और पीठों को दागा जाएगा, ये है वो खज़ाना जो तुमने अपने लिए जमा किया था, लो अब अपनी संपत्ति हुई दौलत का मजा चक्खो 
+[9:36] हकीकत ये है के महिनो की तड़ाद जब से अल्लाह ने आसमां ओ ज़मीन को पैदा किया है अल्लाह के नवासे (रिकॉर्ड) मैं बारा (बारह) हाय है, और इनमें से चार महीने हराम हैं। यही ठीक ज़ब्ता है चार (चार) में लिहाज़ा महिनो में अपने ऊपर ज़ुल्म न करो और मुशरिकों से सब मिलकर लड़ो (लड़ो) जिस तरह वो सब मिलकर तुमसे लड़ते हैं और जान रक्खो के अल्लाह मुत्तक़ियों ही के साथ हैं 
+[9:37] 'नसी' [स्थगन (पवित्र महीनों के भीतर प्रतिबंधों का)] कुफ्र में एक मजीद काफिराना हरकत है जिसे ये काफिर लोग गुमराही में मुब्तिला किये जाते हैं। किसी साल एक महीने को हलाल करते हैं और किसी साल उसको हराम करते हैं, ता-के अल्लाह के हराम किये हुए महिनो की ताड़द पूरी भी कर दें और अल्लाह का हराम किया हुआ हलाल भी कर लें। इनके बुरे आमाल इनके लिए ख़ुशनुमा बना दिए गए हैं और अल्लाह मुनकिरीन ए हक़ को हिदायत नहीं दिया करता 
+[9:38] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम्हें क्या हो गया के जब तुमसे अल्लाह की राह में निकलने के लिए कहा गया तो तुम ज़मीन से झिझक कर रह गए? क्या तुमने आख़िरत के मुक़ाबले में दुनिया की ज़िंदगी को पसंद किया? ऐसा है तो तुम्हें मालूम हो कि दुनियावी जिंदगी का ये सब सर-ओ-समान आखिरी में बहुत थोड़ा निकलेगा 
+[9:39] तुम ना उठोगे तो खुदा तुम्हें दर्दनाक सजा देगा, और तुम्हारी जगह किसी और गिरोह को उठेगा, और तुम खुदा का कुछ भी ना बिगाड़ोगे सकोगे, वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है 
+[9:40] तुमने अगर नबी की मदद न की तो कुछ परवा नहीं, अल्लाह उसकी मदद हमें वक्त कर चुका है जब काफिरों ने उसे निकल दिया था, जब वो सिर्फ दो में का दूसरा था, जब वो दोनों घर (गुफा) में थे, जब वो अपने साथी से कह रहा था के "गम ना कर, अल्लाह हमारे साथ है" हमें वक्त अल्लाह ने उसपर अपनी तरफ से सुकून ए क़ल्ब (दिल का सुकून) नाज़िल किया और उसकी मदद ऐसे लश्करों से कहा कि जो तुमको नज़र ना आते थे, और काफिरों का बोल नीचा करदिया और अल्लाह का बोल तो उनका हाय है. अल्लाह ज़बरदस्त और दाना ओ बीना है (सर्वशक्तिमान, सर्व-बुद्धिमान) 
+[9:41] निकलो, ख्वा हल्के हो या बोझल, और जिहाद करो अल्लाह की राह में अपने मालों और अपनी जानो के साथ, ये तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम जानो
+[9:42] (ऐ नबी), अगर फैयदा सहल-उल-हुसूल (तत्काल लाभ की संभावना) हो और सफर हल्का होता तो वो जरूर तुम्हारे पीछे चलने पर आमदा हो जाती। मगर उन पर तो ये रास्ता बहुत मुश्किल हो गया। अब वो खुदा की कसम खा खा कर कहेंगे के अगर हम चल सकते हैं तो यकीनन तुम्हारे साथ चलते हैं। वो अपने आप को खतरे में डाल रहे हैं, अल्लाह खूब जानता है के वो झूठे हैं 
+[9:43] (ऐ नबी), अल्लाह तुम्हें माफ करे, तुमने क्यों उन्हें रुक्सत दे दी? और झूठों (झूठों) को भी तुम जान लेते हैं 
+[9:44] जो लोग अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखते हैं वो तो कभी तुमसे ये अंधेरा (अनुरोध) ना करेंगे के उनको ना अपनी जान ओ माल के साथ जिहाद करने से माफ़ रक्खा जाए, अल्लाह मुत्तक़ियों को ख़ूब जानता है 
+[9:45] ऐसी डार्कह्वास्टीन (अनुरोध) सिर्फ वही लोग करते हैं जो अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान नहीं रखते, जिनके दिलों में शक्क है और वो अपने शक्क ही में मुतरद्दिद (डगमगाते हुए) हो रहे हैं 
+[9:46] अगर वक्त इनका इरादा निकलेगा तो वो इसके लिए कुछ तयारी करते हैं. लेकिन अल्लाह को उनका उठना पसंद ही ना था, इसके लिए उन्होंने उन्हें स्थिर करदिया और केहदिया के साथ रहो बैठने वालों के साथ 
+[9:47] अगर वो तुम्हारे साथ निकलते तो तुम्हारे अंदर ख़राबी के सिवा किसी चीज़ का इज़ाफ़ा ना करते, वो तुम्हारे दरमियान फ़िटना परदाज़ी के दौड़-धूप करते हुए, और तुम्हारे गिरो ​​का हाल ये है कि अभी हमसे बहुत से ऐसे लोग मौजूद हैं जो उनकी बातें कान लगा कर सुनते हैं, अल्लाह जालिमों को खूब जानता है 
+[9:48] लोगों ने फितना-अंगेज़ी की कोशिशों में इसे पहले भी शामिल किया है और तुम्हें नाकाम करने के लिए ये हर तरह की तदबीरों का उल्टा फेर कर चुके हैं यहां तक ​​के इनकी मर्जी के खिलाफ हक आ गया और अल्लाह का काम होकर रहा 
+[9:49] मेरे अंदर से कोई है जो कहता है के "मुझे रुक्सत दे दीजिए और मुझको फिटने में ना डालिए।" सुन रक्खो! फिटने ही में तो ये लोग पड़े हुए हैं और जहन्नुम ने काफिरों को घेर रखा है 
+[9:50] तुम्हारा भला होता है तो इन्हें रंज होता है और तुमपर कोई मुसीबत आती है तो ये मुंह फेर कर खुश खुश पलट-ते हैं और कहते जाते हैं के अच्छा हुआ हमने पहले ही अपना मामला ठीक कार्लिया था 
+[9:51] इंसे कहो "हमें हरगिज़ कोई (बुराई या भलाई) नहीं पहुंचती मगर वो जो अल्लाह ने हमारे लिए लिख दी है। अल्लाह ही हमारा मौला (गुराडियन) है, और एहले ईमान को उसी पर भरोसा करना चाहिए" 
+[9:52] इंसे कहो, "तुम हमारे मामले में जिस चीज के मुंतजिर हैं वो इसके सिवा और क्या है कि दो भलइयाँ में से एक भलाई है और हम तुम्हारे मामले में जिस चीज के मुंतजिर हैं वो ये है के अल्लाह खुद तुमको सज़ा देता है या हमारे हाथों को दिलवाता है? अच्छा तो अब तुम भी इंतज़ार करो और हम भी तुम्हारे साथ मुंतज़िर हैं”
+[9:53] इनसे कहो "तुम अपने माल ख़्वा रज़ी ख़ुशी ख़र्च करो या बा-कराहत (अनिच्छा से), बाहर-हाल वो क़बूल ना किये जायेंगे क्योंकि तुम फ़सीक लोग हो" 
+[9:54] इनके दिये हुए माल क़बूल ना होने की कोई वजह इसके सिवा नहीं है के इन्हों ने अल्लाह और उसके रसूल से कुफ्र किया है, नमाज के लिए आते हैं तो कसमसाते हुए आते हैं और राह ए खुदा में खर्च करते हैं तो बा-दिल ए ना ख्वास्ता (अनचाहे दिल) खर्च करते हैं 
+[9:55] इनके माल ओ दौलत और इनके कसम ए औलाद को देख कर धोखा ना खाओ, अल्लाह तो ये चाहता है कि इन्हीं चीजों के ज़रिये से इनको दुनिया की जिंदगी में भी मुब्तिला ए अजब करे और ये जान भी दें तो इंकार ए हक ही की हालत में दें 
+[9:56] वो खुदा की कसम खा खा कर कहते हैं के हम तुम्हीं में से हैं, हलांके वो हरगिज तुम में से नहीं हैं. असल में तो वो ऐसे लोग हैं जो तुमसे खौफ-जदा (डरते हुए) हैं 
+[9:57] अगर वो कोई जाए पनाह (शरण का स्थान) पा लें या कोई खो (गुफा) या घुस बैठने की जगह, तो भाग कर हमसे में जा छुपें 
+[9:58] (ऐ नबी), मुझमें से बाज़ लोग सदाकत की तकसीम में तुम्पर एतराजात करते हैं, अगर इस माल में से कुछ दे दिया जाए तो खुश हो जाएं, और ना दिया जाए तो बिगडने लगते हैं 
+[9:59] क्या अच्छा होता के अल्लाह और रसूल ने जो कुछ भी उन्हें दिया था उसपर वो राजी रहते और कहते के "अल्लाह हमारे" लिए काफ़ी है, वो अपने फ़ज़ल से हमें और बहुत कुछ देगा और उसका रसूल भी हमपर इनायत फरमाएगा, हम अल्लाह ही की तरफ नज़र जमाए हुए हैं” 
+[9:60] ये सदक़ात तो दर-असल फ़कीरों और मिस्कीनो के लिए हैं और उन लोगों के लिए जो सदाकत के काम पर मामूर हों, और उनके लिए जिनकी तालिफ़-ए-क़लब (जिनके दिलों को जीतना है) मतलूब हो नीज़ ये गार्डानो के छुड़ाने (गुलामों की फिरौती) और क़र्ज़दारों की मदद करने में और राह ए खुदा में और मुसाफिर-नवाज़ी में इस्तेमाल करने के लिए हैं। एक फ़रीज़ा है अल्लाह की तरफ से और अल्लाह सब कुछ जानने वाला और दाना ओ बीना है 
+[9:61] इनमें से कुछ लोग हैं जो अपनी बातों से नबी को दुख देते हैं और कहते हैं कि ये शक्स कानो (कानों) का कच्चा है। कहो, "वो तुम्हारी भलाई के लिए ऐसा है, अल्लाह पर ईमान रखता है और एहले ईमान पर एत्माद (भरोसा) करता है और सारा रहमत है उन लोगों के लिए जो तुम में से इमानदार हैं। और जो लोग अल्लाह के रसूल को दुख देते हैं उनके लिए दर्दनाक सजा है" 
+[9:62] ये लोग तुम्हारे सामने कसमें खाते हैं ता-के तुम्हें राजी करें, हलांके अगर ये मोमिन हैं तो अल्लाह और रसूल इसके ज्यादा हकदार हैं के ये उनको राजी करने की फिक्र करें 
+[9:63] क्या उन्हें मालूम नहीं है कि जो अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला करता है है उसके लिए दोज़ख की आग है जिसमें वो हमेशा रहेगा। ये बहुत बड़ी रुसवाई है
+[9:64] ये मुनाफिक डर रहे हैं के कहीं मुसलमानों पर कोई ऐसी सूरत नाज़िल न हो जाए जो इनके दिलों के भेद खोल कर रख दे। (ऐ नबी), इनसे कहो, "और मज़ाक उड़ाओ, अल्लाह हमें चीज़ को खोलने वाला है जिसके खुल जाने से तुम डरते हो" 
+[9:65] अगर इनसे पूछो के तुम क्या बातें कर रहे थे, तो झट कह देंगे के हम तो हंसी मज़ाक और दिल लगी कर रहे थे। इनसे कहो, "क्या तुम्हारी हंसी दिल लगी अल्लाह और उसकी आयत और उसके रसूल ही के साथ थे 
+[9:66] अब उज़रात (बहाने) ना तराशो, तुमने ईमान लाने के बाद कुफ़्र किया है, अगर हमने तुम में से एक गिरोह को माफ़ कर भी दिया तो दूसरे गिरो ​​को तो हम ज़रूर सजा" देंगे क्यूँके वो मुजरिम है।” 
+[9:67] मुनाफिक मर्द और मुनाफिक औरतें सब एक दूसरे के हम-रंग हैं, बुरे का हुकुम देते हैं और भलाई से मन करते हैं और अपने हाथ खैर से रोक रहे हैं। ये अल्लाह को भूल गए तो अल्लाह ने भी इन्हें भुला दिया, यकीनन ये मुनाफिक ही फासीक है 
+[9:68] इन मुनाफिक मर्दों और औरतों और काफिरों के लिए अल्लाह ने आतिश ए दोजख का वादा किया है जिसमें वो हमेशा रहेंगे, वही इनके लिए मौजुन (उचित जगह) है, इनपर अल्लाह की फ़िटकर है और इनके लिए क़याम रहने वाला अज़ाब है 
+[9:69] तुम लोगों के रंग ढांग वही हैं जो तुम्हारे पेश-रावों के थे, वो तुमसे ज़्यादा ज़ोरावर और तुमसे बढ़कर माल और औलाद वाले थे, फिर उनहोन ने दुनिया में अपनी हंसी के मजे लूटे लिए और तुमने भी अपनी तरह से मजे इसी तरह लूटे जैसे उनको ने लूटे थे, और वैसी ही बेहसों (तर्क) में तुम भी पड़े जैसी बेहसों में वो पड़े थे। तो उनका अंजाम ये हुआ के दुनिया और आख़िरत में उनका सब किया धरा ज़ाया हो गया और वही ख़ासियत में हैं 
+[9:70] क्या लोगों को अपने पेशावरों की तारीख (इतिहास/कहानी) नहीं पता? नूंह की क़ौम, आद, समूद, इब्राहीम की क़ौम, मदियां के लोग और वो बस्तियां जिन्हें उलट दिया गया। उनके रसूल उनके पास खुली-खुली निशानियां लेकर आए, फिर ये अल्लाह का काम न था के अनपर ज़ुल्म करता मगर वो आप ही अपने ऊपर ज़ुल्म करने वाले थे 
+[9:71] मोमिन मर्द और मोमिन औरतें, ये सब एक दूसरे के रफीक (साथी/सहयोगी) हैं, भलाई का हुकुम देते हैं और बुरे से रोकते हैं, नमाज कायम करते हैं, जकात देते हैं और अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करते हैं, ये वो लोग हैं जिनपर अल्लाह की रहमत नाज़िल होकर रहेगी। यकीनन अल्लाह सब पर ग़ालिब और हकीम ओ दाना है 
+[9:72] मोमिन मर्दन और औरतों से अल्लाह का वादा है के इन्हें ऐसे बाग़ देगा जिनके आला नेहरेन बहती होंगी और वो इनमें हमेशा रहेंगे, सदा-बहार बागों में उनके लिए पाकीज़ा क़याम-गाहें (रहते हैं) जगहें) होंगी, और सबसे बढ़कर ये के अल्लाह की खुशनुदी (खुशी) इन्हें हासिल होगी, यही बड़ी कामयाबी है 
+[9:73] ऐ नबी, कुफ्फार और मुनाफिकेन दोनों का पूरी कुव्वत से मुकाबला करो और इनके साथ मिलकर पेश आओ, आखिर ए कार इनका ठिकाना जहन्नुम है और वो बढ़-तरीन जाए करार (निवास) है
+[9:74] ये लोग खुदा की कसम खा खा कर कहते हैं कि हमने वो बात नहीं कही, हालंके इन्हों ने जरूर वो काफिराना बात कही है। वो इस्लाम लाने के बाद कुफ़्र के मुर्तकीब हुए और इन्होन ने वो कुछ करने का इरादा किया जिसे कर ना सके। ये इनका सारा गुस्सा इसी बात पर है ना के अल्लाह और उसके रसूल ने अपने फज़ल से इनको गनी (समृद्ध) कर दिया है! अब अगर ये अपनी इस रवीश से बाज़ आ जाए तो इनके लिए बेहतर है, और अगर ये बाज़ ना आए अल्लाह के पास इन्हें निहायत दर्दनाक सजा देगा, दुनिया में भी और आखिरी में भी, और ज़मीन में कोई नहीं जो इनका हिमायती और मददगार हो 
+[9:75] इन में से बाज़ ऐसे भी हैं जिन्होन ने अल्लाह से अहद किया था के अगर हमने अपने फजल से हमको नवाजा तो हम खैरात करेंगे और सालेह बन कर रहेंगे 
+[9:76] मगर जब अल्लाह ने अपने फजल से इनको दौलत-मंद करदिया तो वो भुखल (कंजूसी) पर उतर आए और अपने अहद से फिर के येहिन उसकी परवा तक नहीं है 
+[9:77] नतीजा ये निकला के इनकी इस बद-अहादी (विश्वासघात) की वजह से जो इन्होन ने अल्लाह के साथ की, और उस झूठ की वजह से जो वो बोलते रहे, अल्लाह ने इनके दिलों में निफाक (पाखंड) बिठा दिया जो उसके हुजूर उनकी पेशी के दिन तक इनका पीछा न छोड़ेगा 
+[9:78] क्या ये लोग जानते नहीं हैं कि अल्लाह को इनके मख़फ़ी (छिपे हुए) राज़ और इनकी पोशीदा सरगोशियां तक ​​मालूम हैं और वो तमाम गैब की बातों से पूरी तरह बख़बर है 
+[9:79] (वो ख़ूब जानता है उन कंजूस दौलत-मंदों को) जो बा-रज़ा (स्वेच्छा से) ओ रगबत देने वाले एहले ईमान की माली कुर्बानियों पर बातें जपते हैं और उन लोगों का मजाक उड़ाते हैं जिनके पास (राह ए खुदा में देने के लिए) उसके सिवा कुछ नहीं है जो वह अपने ऊपर मुशक्कत बर्दाश्त करके देते हैं। अल्लाह इन मज़ाक़ उड़ाने वालों का मज़ाक उड़ाता है और इनके लिए दर्दनाक सज़ा है 
+[9:80] (ऐ नबी), तुम ख्वा ऐसे लोगों के लिए माफ़ी की अंधेरगर्दी करो या ना करो, अगर तुम सत्तर (सत्तर) मरतबा भी इन्हें माफ़ करदेने की अंधेरगर्दी करोगे तो अल्लाह इन्हें हरगिज़ माफ़ ना करेगा, इस लिए के इन्हों ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया है, और अल्लाह फासीक लोगों को राह ए नजात नहीं दिखाता 
+[9:81] जिन लोगों को पीछे रह जाने की इजाज़त दे दी गई थी वो अल्लाह के रसूल का साथ न दें और घर बैठे रहने पर खुश हुए और उन्हें गवारा ना हुआ के अल्लाह की राह में जान ओ माल से जिहाद करें। उन्होन लोगों से कहा के “इस मजबूत गर्मी में ना निकलो”। इनसे कहो के जहन्नुम की आग इस तरह ज्यादा गरम है, काश इन्हें इसका शूर होता है 
+[9:82] अब चाहिए के ये लोग हसना कम करें और रोयें ज्यादा, इसके लिए जो बुरी (बुराई) ये कमाते रह रहे हैं इसकी जजा ऐसी ही है (के इन्हें इसपर रोना चाहिए)
+[9:83] अगर अल्लाह इनके दरमियान तुम्हें वापस ले जाए और अंदर से कोई गिरो ​​जिहाद के लिए निकले कि तुमसे इज्जत मांगे तो साफ कह देना, "अब तुम मेरे साथ हरगिज नहीं चल सकते और न मेरी मइया (कंपनी) में किसी दुश्मन से लड़ सकते हो, तुमने पहले बैठ रहने को पसंद किया था अब घर बैठने वालों ही के साथ बैठे रहो” 
+[9:84] और अंदर से जो कोई मरे (मर जाए) उसकी नमाज ए जनाज़ा भी तुम हरगिज़ न पढ़ना और न कभी उसकी क़ब्र पर खड़े होना क्योंकि उन्होन ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया है और वो मारे हैं इस हाल में के वो फासिक थे 
+[9:85] इनकी मालदारी और इनकी कसरत ए औलाद तुमको धोखे में ना डाले, अल्लाह ने तो इरादा करलिया है के इस माल ओ औलाद के ज़रिये से इनको इस दुनिया में सजा दे और इनकी जानें इस हाल में निकले के वो काफ़िर हूँ 
+[9:86] जब कभी कोई सूरत इस मज़मून (विषय) की नाज़िल हुई कि अल्लाह को मानो और उसके रसूल के साथ मिलकर जिहाद करो तो तुमने देखा के जो लोग मेरे साथ हैं साहब ए मक़दरत (सक्षम लोग) था वही तुमसे अंधकार करने लगे के उन्हें जिहाद की शिर्कत से माफ़ रक्खा जाए, और उन्हें कहा के हमें छोड़ दीजिए के हम बैठने वालों के साथ रहें 
+[9:87] इन लोगों ने घर बैठने वालों में शामिल होना पसंद किया और इनके दिलों पर थप्पड़ लगा दिया, इस लिए इनकी समझ में अब कुछ नहीं आता 
+[9:88] बा-खिलाफ इसके रसूल ने और उन लोगों ने जो रसूल के साथ ईमान लाए थे अपनी जान ओ माल से जिहाद किया और अब सारी भलाईयां उन्हीं के लिए हैं और वही फलाह पाने वाले हैं 
+[9:89] अल्लाह ने उनके लिए ऐसे बाग तय्यर रक्खे हैं जिनका आला नेहरेन बेह राही हैं, उनमें वो हमेशा रहेंगे. ये है अज़ीम ओ शान कामियाबी 
+[9:90] बदवी (बेडौइन्स) अरब में से भी बहुत से लोग आए जिन्हों ने उजार (बहाना) किए ता-के उन्हें भी पीछे छोड़ दिया रे जाने की इजाज़त दी जाए इस तरह बैठ रहे वो लोग जिन्होन ने अल्लाह और उसके रसूल से ईमान का झूठा अहद किया था। बदवियों (बेडौइन्स) में से जिन लोगों ने कुफ्र का तरीक़ा इख्तियार किया है अनक़रीब वो दर्दनाक सज़ा से दो-चार होंगे 
+[9:91] ज़ीफ़ (पुराना) और बीमार लोग और वो लोग जो शिर्कत ए जिहाद के लिए राह नहीं पाते, अगर पीछे रह जाएं तो कोई हर्ज नहीं जबके वो खुलूस ए दिल के साथ अल्लाह और उसके रसूल के वफ़ादार माननीय। ऐसे मोहसिनेन पर ऐतराज़ की कोई गुंजाईश नहीं है और अल्लाह दरगुज़र करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[9:92] इसी तरह उन लोगों पर भी कोई ऐतराज़ का मौका नहीं है जिहों ने खुद आ कर तुमसे अंधकार की थी के हमारे लिए सावरियां बहम पहन सकती हैं, और जब तुमने कहा के मैं तुम्हारे लिए सावरियों का इंतिज़ाम नहीं कर सकता तो वो मजबूरन वापस आ गए और हाल ये था के उनकी आंखों से आंसू जारी थे और उन्हें इस बात का बड़ा रंज था के वो अपने खर्च पर शरीक ए जिहाद होने की मक़दरत नहीं रखते
+[9:93] अलबत्ता एतराज उन लोगों पर है जो मालदार हैं और फिर भी तुमसे डार्कह्वास्टीन करते हैं के उन्हें शिर्कत ए जिहाद से माफ रखा जाएगा। उन्होन ने घर बैठने वालियों में शामिल होना पसंद किया और अल्लाह ने उनके दिलों पर थप्पड़ (सील) लगा दिया, इस लिए के अब ये कुछ नहीं जानते (के अल्लाह के हां इनकी रवीश का क्या नतीजा निकलने वाला है) 
+[9:94] तुम जब पलट कर इनके पास पहुंचोगे तो ये तरह तरह के उज़रात (बहाना) पेश करेंगे मगर तुम साफ कह देना के “बहाने ना करो, हम तुम्हारी किसी बात का ऐतबार ना करेंगे, अल्लाह ने हमको तुम्हारे हालात बता दिए हैं, अब अल्लाह और उसका रसूल तुम्हारे तर्जे अमल को देखेगा फिर तुम उसकी तरफ पलटोगे जो खुले और छुपे सब का जाने वाला है और वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या कुछ करते रहोगे” 
+[9:95] तुम्हारी वापसी पर ये तुम्हारे सामने कसमें खाएंगे ता-के तुम इनसे सिर्फ-ए-नजर करो (उन्हें अकेला छोड़ दो) तो बहकाओ तुम इनसे सिर्फ-ए-नजर ही करो। क्योंकि ये गंदी है और इनका असली मुकाम जहन्नुम है जो इनकी कमाई के बदले में इन्हें नसीब होगी 
+[9:96] ये तुम्हारे सामने कसमें खाएंगे के ता-के तुम इनसे राजी हो जाओ, हलांके अगर तुम इनसे राजी हो भी जाओगे तो अल्लाह हरगिज ऐसे फासिक लोगों से राज़ी ना होगा 
+[9:97] ये बदवी (बेदौइन) अरब कुफ्र ओ निफ़ाक (पाखंड) में ज़्यादा सच है और इनके मामले में इस अमृत के इम्कानात (संभावना) ज़्यादा हैं के हमें दीन के हुदूद से ना-वाक़िफ़ रहे जो अल्लाह ने अपने रसूल पर नाज़िल किया है। अल्लाह सब कुछ जानता है और हकीम ओ दाना है 
+[9:98] उन बदवियों में ऐसे ऐसे लोग मौजूद हैं जो राह ए खुदा में कुछ खर्च करते हैं तो इसे अपने ऊपर ज़बरदस्ती की छत्ती (जुर्माना) समझते हैं और तुम्हारे हक़ में ज़माने की गर्दिशों का इंतज़ार कर रहे हैं (के तुम किसी चक्कर में फँसो तो वो अपनी गर्दन से हमें निज़ाम की इताअत का क़लदा उतार फेंकें जिसमें तुमने उन्हें कस दिया है) हालंके बड़ी का चक्कर खुद इन्ही पर मुसल्लत है और अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है 
+[9:99] और इन्ही बदियों में कुछ लोग ऐसी भी है जो अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर पर ईमान रखते हैं और जो कुछ ख़र्च करते हैं उसे अल्लाह के हान तक़र्रब (मंहगाई) का और रसूल की तरफ से रहमत की दुआएं लेने का ज़रिया बनाते हैं। हाँ! वो जरूर इनके लिए तकरारब (निकटता) का जरूरी है और अल्लाह जरूर इनको अपनी रहमत में दखल देगा। यकीनन अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[9:100] वो मुहाजिर ओ अंसार जिन्होन ने सब से पहले दावत ए ईमान पर लब्बैक कहने में सबकत की, नीज़ वो जो बाद में रस्तबाज़ी के साथ पिचे आए, अल्लाह उनसे रज़ी हुआ और वो अल्लाह से रज़ी हुए, अल्लाह ने उनके लिए ऐसे बाग मुहैय्या कर रखे हैं जिनके बारे में खास बातें होंगी और वो उनमें हमेशा रहेंगे, यही अज़ीम ओ शान कामयाब है
+[9:101] तुम्हारे गिर्द ओ पेश जो बादवी रहते हैं उन में बहुत से मुनाफिक हैं और इसी तरह खुद मदीना के बाशिंदों में भी मुनाफिक मौजुद हैं जो निफाक में तक (विशेषज्ञ) हो गए हैं। तुम इन्हें नहीं जानते, हम उनको जानते हैं। करीब है वो वक्त जब हम उनको दोहरी सजा देंगे, फिर वो ज्यादा बड़ी सजा के लिए वापस ले जायेंगे 
+[9:102] कुछ और लोग हैं जिन्हों ने अपने कसूरों का ऐतराफ करलिया है उनका अमल मखलूट (कर्मों का मिश्रित रिकॉर्ड, अच्छे और बुरे) है। कुछ नया है और कुछ बढ़िया। बैद नहीं के अल्लाह उनपार फिर मेहरबान हो जाए क्योंकि वो दरगुज़र करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[9:103] (ऐ नबी), तुम इनके अमवाल में से सदक़ा लेकर इन्हें पाक करो और (नेकी की राह में) इन्हें बढ़ाओ, और इनके हक़ में दुआ ए रहमत करो क्यों तुम्हारी दुआ इनके लिए वजह तस्कीन होगी। अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है 
+[9:104] क्या इन लोगों को मालूम नहीं है कि वो अल्लाह ही है जो अपने बंदों की तौबा कबूल करता है और उनकी खैरात को कबूलियत अता फरमाता है, और ये के अल्लाह बहुत माफ करने वाला और रहीम है 
+[9:105] और (ऐ नबी), में लोगों से कहदो के तुम अमल करो, अल्लाह और उसका रसूल और मोमिनीन सब देखेंगे के तुम्हारा तर्ज़-ए-अमल अब क्या रहता है, फिर तुम उसकी तरफ पलटे जाओगे जो खुले और छुपे सबको जानता है और वो तुम्हे बता देगा के तुम क्या करते रहोगे 
+[9:106] कुछ दूसरे लोग हैं जिनका मामला भी खुदा के हुकुम पर ठहरा हुआ है, चाहे उन्हें सज़ा दे और चाहे उनपर अज़सर-ए-नव (फिर से) मेहरबान हो जाए, अल्लाह सब कुछ जानता है और हकीम ओ दाना है 
+[9:107] कुछ और लोग हैं जिन्होंने एक मस्जिद बनाई है ग़रज़ के लिए के (दावत ए हक़ को) नुक़्सान पूछैं, और (ख़ुदा की बंदगी करने के बजाये) कुफ़्र करें, और एहले ईमान में फ़ुट (तफ़्राका/डिवीज़न) डालें, और (इस बज़हिर इबादत गाह को) हमें शक्स के लिए कमेंगाह (स्टेशन) बनाएं जो इस्से पहले खुदा और रसूल के ख़िलाफ़ बरस ए पाइकर (संघर्ष में) हो चूका है। वो जरूर कसमें खा खा कर कहेंगे के हमारा इरादा तो भलाई के सिवा किसी दूसरी चीज का ना था मगर अल्लाह गवाह है के वो काटते झूठे हैं 
+[9:108] तुम हरगिज इस इमारत में खड़े ना होना। जो मस्जिद अव्वल रोज़ से तक़वा पर क़याम की गई थी, वही इसके लिए ज़्यादा मौज़ून (हक़दार/उचित जगह) है के तुम उसमें (इबादत के लिए) खड़े हो। उसमें ऐसे लोग हैं जो पाक रहना पसंद करते हैं और अल्लाह को पाकीज़गी इख्तियार करने वाले ही पसंद हैं 
+[9:109] फिर तुम्हारा क्या ख्याल है के बेहतर इंसान वो है जिसने अपनी इमारत की बुनियाद खुदा के खौफ और उसकी रज़ा की तालाब पर राखी हो या वो जिसने अपनी इमारत एक वादी की खोकली बेसबात कगार पर उठाई (बैंक का किनारा गिरने वाला था) और वो उसे लेकर सीधी जहन्नुम की आग में जा गिरी? ऐसे जालिम लोगों को अल्लाह कभी सीधी राह नहीं दिखाता
+[9:110] ये इमारत जो इन्हों ने बनाई है, हमेशा इनके दिलों में यकीनी की जड (जड़) बनी रहेगी (जिसके निकलने की अब कोई सूरत नहीं) बजुज इसके के इनके दिल ही पारा हो जाएंगे। अल्लाह निहायत बाख़बर और हकीम ओ दाना है 
+[9:111] हकीकत ये है कि अल्लाह ने मोमिनो से उनके नफ़्स (जान) और उनके माल जन्नत के बदले ख़त्म लिए हैं, वो अल्लाह की राह में लड़ते और मरते हैं। उनसे (जन्नत का वादा) अल्लाह के ज़िम्मे एक पुख्ता वादा है तौरात (तोराह) और इंजील और कुरान में। और कौन है जो अल्लाह से बढ़कर अपने अहद का पूरा करने वाला हो? पस ख़ुशियाँ मनाओ अपने हमसे सौदा (सौदा) पर जो तुमने खुदा से चुका लिया है, यही सबसे बड़ी कामयाबी है 
+[9:112] अल्लाह की तरफ बार-बार पलटने वाले, उसकी बंदगी बाजा लाने वाले, उसकी तारीफ के गुन गाने वाले, उसकी खातिर ज़मीन में गर्दिश करने वाले वाले, उसके आगे रुकू और सजदे करने वाले, नेकी का हुकुम देने वाले, बड़ी से रोकने वाले, और अल्लाह के हुदूद की हिफाजत करने वाले, (इस शान के होते हैं वो मोमिन जो अल्लाह से खत्म ओ फारोखत का ये मामला ताई करते हैं) और (ऐ नबी), में मोमिनो को खुश खबरी दे दो 
+[9:113] नबी को और उन लोगों को जो ईमान लाए हैं, ज़ेबा नहीं है के मुशरिकों के लिए मगफिरत की दुआ करें, चाहे वो उनके रिश्तेदार ही क्यों न हों, जबके अनपर ये बात खुल चुकी है के वो जहन्नुम के मुस्तहिक़ हैं 
+[9:114] इब्राहिम ने अपने बाप के लिए जो दुआ ए मगफिरत की थी वो तो हमसे वादे की वजह से थी जो उसने अपने बाप से किया था, मगर जब उसपर ये बात खुल गई के उसका बाप खुदा का दुश्मन है तो वो उससे बेज़ार हो गया। हक़ ये है के इब्राहीम बड़ा रक़ीक़-उल-क़ल्ब (कोमल हृदय) ओ खुदा तरस और बर्दबार (ईश्वर से डरने वाला और सहनशील) आदमी था 
+[9:115] अल्लाह का ये तरीक़ा नहीं है के लोगों को हिदायत देने के बाद फिर गुमराही में मुबतला करे जब तक के उन्हें साफ साफ बता ना दे के उन्हें किन चीज़ों से बचना चाहिए। दर हक़ीक़त अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है 
+[9:116] और ये भी वक़िया है के अल्लाह ही के क़ब्ज़े में आसमां ओ ज़मीन की सल्तनत है, उसके इख्तियार में जिंदगी ओ मौत है, और तुम्हारा कोई हमी ओ मददगार ऐसा नहीं है जो तुम्हें बचा सके 
+[9:117] अल्लाह ने माफ कर दिया नबी को और उन मुहाजिरीन ओ अंसार को जिन्हों ने बड़ी तंगी के वक्त में नबी का साथ दिया, अगरचे उनमें से कुछ लोगों के दिल काजी की तरफ मायिल हो चुके थे (मगर जब उन्होन ने उस काजी (कुटिलता) का इत्तेबा ना किया बलके नबी का साथ हाय दिया तो) अल्लाह ने उन्हें माफ कर दिया, उसका मामला लोगों के साथ शफाकत ओ मेहरबानी का है
+[9:118] और उन तीनो को भी उसने माफ़ किया जिनके मामले को मुल्तावी कर दिया गया था, जब ज़मीन अपनी साड़ी वुसैट (विशालता) के बावज़ूद अपर टैंग हो गई और उनकी अपनी जानेन भी उन्पर बार होने लगी और उन्होन ने जान लिया के अल्लाह से बचने के लिए कोई जाए पनाह खुद अल्लाह ही के दामन ए रहमत के सिवा नहीं है, अल्लाह के पास अपनी मेहरबानी से उनकी तरफ पलटा ता-के वो उसकी तरफ पलट आएं। यकीनन वो बड़ा माफ करने वाला और रहीम है 
+[9:119] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो और सच्चे लोगों का साथ दो 
+[9:120] मदीना के बशिंदों और गिर्द ओ नवाह (आसपास रहने वाले)के बदवियों को ये हरगिज़ ज़ेबा ना था के अल्लाह के रसूल को छोड़ कर घर बैठे रहते और उसकी तरफ से बे-परवा होकर अपने-अपने नफ़्स की फ़िक्र में लग जाते। इस लिए ऐसा कभी न होगा के अल्लाह की राह में भूख प्यास और जिस्मानी मुशक्कत की कोई तकलीफ वो झेलें, और मुनकिरीन हक को जो राह नागवार है उसपर कोई कदम वो उठाएं, और किसी दुश्मन से [अदावत (दुश्मनी) ए हक का) कोई इंतकाम वो लें और इसके बदले उनके हक में एक अमल-ए-सालेह न लिखा जाए। यकीनन अल्लाह के हां मोहसिनों का हक़ उल खिदमत मारा नहीं जाता है 
+[9:121] इसी तरह ये भी कभी न होगा के (राह ए खुदा में) थोड़ा या बहुत कोई खर्च वो उठायें और (साईं ए जिहाद में) कोई वादी (घाटी) वो पार करें और उनके हक़ में इसे लिख ना लिया जाए ता-के अल्लाह उनके इस अच्छे कारनामे का सिला उन्हें अता करे 
+[9:122] और ये कुछ जरूरी ना था के एहले ईमान सारे के सारे ही निकल खड़े होते, मगर ऐसा क्यों ना हुआ के उनकी आबादी के हर हिस्से में से कुछ लोग निकल कर आते और दीन की samajh भुगतान करते और वापस जा कर अपने इलाक़े के बाशिंदों (लोगों) को ख़बरदार करते ता-के वो (गैर मुस्लिमाना राविश से) परहेज़ करते 
+[9:123] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जंग करो उन मुनकिरीन ए हक से जो तुमसे करीब हैं और चाहिए के वो तुम्हारे अंदर ताकत पाएं, और जान लो के अल्लाह मुत्तक़ियों के साथ हैं 
+[9:124] जब कोई नई सूरत नाज़िल होती है तो इनमें से बाज़ लोग (मज़ाक के तौर पर मुसलमानो से) पूछते हैं के "कहो, तुम में से किसके ईमान में इसकी इज़ाफ़ा हुआ?" (इसका जवाब ये है के) जो लोग ईमान लाए हैं उनके ईमान में तो फिल-वकाई (हर नाज़िल होने वाली सूरत ने) इजाफा ही किया है और वो इसी दिलशाद (खुशी मना रहे हैं) हैं 
+[9:125] अलबत्ता जिन लोगों के दिलों को (निफाक का) रोग लगा हुआ था उनकी साबिक नजासत (गंदगी) पर (हर नई सूरत ने) एक और नजासत (गंदगी) का इजाफा करदिया और वो मरते दम तक कुफ्र ही में मुबतला रहे 
+[9:126] क्या ये लोग देखते नहीं के हर साल दो मरतबा ये आजमाइश में डाले जाते हैं? मगर इसपर भी ना तौबा करते हैं ना कोई सबक (पाठ) लेते हैं 
+[9:127] जब कोई सूरत नाज़िल होती है तो ये लोग आंखें ही आंखों में एक दूसरे से बातें करते हैं कि कहीं कोई तुमको देख तो नहीं रहा है, फिर चुपके से निकल भागते हैं। अल्लाह ने इनके दिल फेर दिये हैं क्योंकि ये ना-समझ लोग हैं
+[9:128] देखो! तुम लोगों के पास एक रसूल आया है जो खुद तुम्हारे अंदर से है, तुम्हारा नुक्सान में पढ़ना उसपर शाक़ (गिरान/गंभीर) है, तुम्हारी फलाह का वो हार (लालची से चिंतित) है, ईमान लाने वालों के लिए वो शफीक और रहीम है 
+[9:129] अब अगर ये लोग तुमसे मुह फेरते हैं हैं तो (ऐ नबी), इनसे कहदो के "मेरे लिए अल्लाह बस करता है (काफी है/मुझे काफी है), कोई माबूद नहीं मगर वो, उस पर मैंने भरोसा किया और वो मालिक है अर्श ए अज़ीम का" 
+
+सूरह 10: यूनुस (जोना) 
+------------------------------------------------ 
+[10:1] अलिफ़ लाम रा, ये उस किताब की आयतें हैं जो हिकमत ओ दानिश से लबरेज है 
+[10:2] क्या लोगों के लिए ये एक अजीब बात हो गई है कि हमने खुद उन्ही में से एक आदमी को इशारा किया के (गफलत में पड़े हुए) लोगों को चौका दे और जो मान लें उनको खुश खबरी दे दे उनके लिए उनके लिए रब के पास सच्ची इज़्ज़त ओ सरफ़राज़ी है? (क्या यही वो बात है जिसपर) मुनकिरीन ने कहा के ये शक्स तो खुला जादूगर है 
+[10:3] हकीकत ये है के तुम्हारा रब वही खुदा है जिसने आसमान और ज़मीन को छे (छह) दिनों में पेदा किया, फिर तख्त ए हुकुमत पर जलवा-गर हुआ और कायनात का इंतेज़ाम चल रहा है। कोई शफाअत (सिफारिश) करने वाला नहीं इल्ला ये के इसकी इजाजत के बाद शफाअत करे। याही अल्लाह तुम्हारा रब्ब है लिहाज़ा तुम उसकी इबादत करो। फिर क्या तुम होश में न आओगे 
+[10:4] उसकी तरफ तुम सबको पलट कर जाना है। ये अल्लाह का पक्का वादा है. बेशक पैदाइश की इब्तेदा वही करता है, फिर वही दोबारा पैदा करेगा, ता-के जो लोग ईमान लाये और जिन्होन ने नीक अमाल किये उनको पूरे इन्साफ के साथ जजा दे, और जिन्होन ने कुफ्र का तरीक़ा इख्तियार किया वो खौलता (उबलता हुआ) हुआ पानी पियें और दर्दनाक साज़ा भुगतानें हमें इंकार ए हक के पद में जो वो करते रहे 
+[10:5] वही है जिसने सूरज को उजियाला बनाया और चांद को चमक दी और चांद के घटने बढ़ने की मंजिलें ठीक ठीक मुकर्रर करदी ता-के तुम हमें बरसों (साल) और तारीखों के हिसाब मालूम करो। अल्लाह ने ये सब कुछ (खेल के तौर पर नहीं बलके) ब-मकसद ही बनाया है। वो अपनी निशानियों को खोल खोल कर पेश कर रहा है उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं 
+[10:6] यकीनन रात और दिन के उलट फेर में और हर उस चीज़ में जो अल्लाह ने ज़मीन और आसमान में पैदा की है, निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो (गलत बनी ओ) गलत रावी से) बचना चाहते हैं 
+[10:7] हकीकत ये है के जो लोग हमसे मिलने की तवाक्कु (उम्मीद) नहीं रखते और दुनिया की जिंदगी ही पर राजी और मुतमईन हो गए हैं, और जो लोग हमारी निशानियों से गाफिल हैं 
+[10:8] उनका आखिरी ठिकाना जहन्नुम होगा उन बुराइयों की याद में जिनका इकतिसाब वो (अपने इस गलत अकीदत और गलत तर्ज-ए-अमल की वजह से) करते रहें
+[10:9] और ये भी हकीकत है के जो लोग ईमान लाए (यानी जिन्हों ने उन सदकातों को कबूल किया जो इस किताब में पेश की गई हैं) और नेक अमल करते रहे उन्हें उनका रब उनके ईमान की वजह से सीधी राह चलाएगा। नियामत भारी जन्नतों में उनके आला नेहरें बहेंगी 
+[10:10] वहां उनकी सदा (पुकार/आवाज़) ये होगी के "पाक है तू ऐ खुदा", उनकी दुआ ये होगी के "सलामती हो: और उनकी हर बात का खात्मा इस पर होगा के "सारी तारीफ अल्लाह रब्बुल आलमीन ही के लिए है" 
+[10:11] अगर कहीं अल्लाह लोगों के साथ बुरा मामला करने में भी इतनी ही जल्दी करता जितनी वो दुनिया की भलाई मांगे में जल्दी करते हैं तो उनकी मोहलत और अमल कभी की खत्म हो जाती है, (मगर हमारा ये तरीका नहीं है)। मिलने की तवक्कु नहीं रखते उनकी सरकशी में भटकने के लिए चोट दे देते हैं 
+[10:12] इंसान का हाल ये है कि जब उसपर कोई सख्त वक्त आता है तो खड़े और बैठे और लेते हैं (झूठ बोलकर) हमको पुकारता है, मगर जब हम उसकी मुसीबत टाल देते हैं तो ऐसा चल नायकलता है कि गोया उसने कभी अपने किसी बुरे वक्त पर हमको पुकारा ही ना था। इस तरह हद से गुज़र जाने वालों के लिए उनके करतूत ख़ुशनुमा बना दिए गए हैं 
+[10:13] लोगन, तुमसे पहले की क़ौमों को (जो अपने अपने ज़माने में बार सर ई उरूज थी) हमने हलाक कर दिया जब उन्होन ने जुल्म की रवीश इख्तियार की और उनके रसूल उनके पास खुली खुली निशानियां लेकर आये और उन्होन ने ईमान ला कर ही ना दिया। इस तरह हम मुजरिमों को उनके जरायम (अपराध) का बदला दिया करते हैं 
+[10:14] अब उनके बाद हमने तुमको ज़मीन में उनकी जगह दी है ता-के देखें तुम कैसे अमल करते हो 
+[10:15] जब उन्हें हमारी साफ-साफ बातें सुनाई जाती हैं तो वो लोग जो हमसे मिलने की बात करते हैं तवक्कू नहीं रखते, कहते हैं "इस्के बजाये कोई और कुरान लाओ या इस में कुछ तरमीम (परिवर्तन)" करो। (ऐ मुहम्मद), इंसे कहो "मेरा ये काम नहीं है के अपनी तरफ से इस में कोई तगय्युर ओ तबद्दुल कार्लून। मैं तो बस हमें वही का पेयरो (फॉलोअर) हूं जो मेरे पास भेजती है। अगर मैं अपने रब की नफ़रमानी करूं तो मुझे एक बड़ा मुश्किल दिन के अज़ाब का डर है" 
+[10:16] और कहो "अगर अल्लाह की मशियत न होती तो मैं ये कुरान तुम्हें कभी न सुनाता और अल्लाह तुम्हें इसकी खबर तक न देता। आखिर इस पहले मैं एक उमर तुम्हारे दरमियान गुजार चुका हूं। क्या तुम अक्ल से काम नहीं लेते 
+[10:17] फिर उससे बढ़कर जालिम और कौन होगा जो एक झूठी बात गड़बड़ कर अल्लाह की तरफ़ इंसान करे या अल्लाह की वक़ाई आयत को झूठ करार दे? यक़ीनन मुजरिम कभी फलाह नहीं पा सकते”
+[10:18] ये लोग अल्लाह के सिवा उनकी परस्ती कर रहे हैं जो इनको न नुक्सान पहुंचा सकते हैं न नफा (फ़ैयदा), और कहते ये हैं के ये अल्लाह के सिवा हमारे सिफ़ारिश हैं। (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो "क्या तुम अल्लाह को हमारी बात बताते हो जैसे वो ना आसमानों में जानता है ना ज़मीन में?" पाक है वो और बाला ओ बारतार है उस शिर्क से जो ये लोग करते हैं 
+[10:19] इब्तेदान (शुरुआत में) सारे इंसान एक ही उम्मत थी, बाद में उन्होन ने मुख्तलिफ अकीदे और मसलक बना लिया। और अगर तेरे रब की तरफ से पहले ही एक बात ताई ना करली गई होती तो जिस चीज में वो बहम इख्तिलाफ कर रहे हैं उसका फैसला कर दिया जाता 
+[10:20] और ये जो वो कहते हैं के इस नबी पर उसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों न उतारी गई, तो उनसे कहो "गैब का मालिक ओ मुख्तार तो अल्लाह ही है। अच्छा, इंतजार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतजार करता हूं" 
+[10:21] लोगों का हाल ये है के मुसीबत के बाद जब हम उनको रहमत का मजा चखाते हैं तो प्यार ही वो हमारी निशानियों के मामले में चल बज़ियां शुरू कार्डते हैं. इनसे कहो "अल्लाह अपनी चाल में तुमसे ज्यादा तेज है, उसके फरिश्ते तुम्हारी सब मक्कारियों को कलाम-बंद (रिकॉर्डिंग) कर रहे हैं" 
+[10:22] वो अल्लाह ही है जो तुमको खुश्की (जमीन) और तारी (समुद्र) में चलाता है। चुनांचे जब तुम कश्तियों में सवार होकर बाद-ए-मवाफिक पर फरहान-ओ-शादान सफर कर रहे हो और फिर यकीन बाद-ए-मुखालिफ़ का ज़ोर होता है (भयंकर आंधी आती है) और हर तरफ से मौजों (लहरें) के थपेड़े लगते हैं और मुसाफिर समझ लेते हैं के तूफ़ान में घिर गए, हमें वक्त सब अपने दीन को अल्लाह ही के लिए खालिस करके उसकी दुआएं मांगते हैं के "अगर तू नहीं हमको इस बाला से नजात दे दी तो हम शुक्र गुजार बंद करेंगे" 
+[10:23] मगर जब वो उनको बचा लेता है तो फिर वही लोग हक से मुन्हारिफ होकर जमीन मैं बगावत करने लगता हूं। लोगन, तुम्हारी ये बगावत उल्टी तुम्हारे ही खिलाफ पढ़ रही है, दुनिया के चांद रोजा मजा आ रहा है (लूट लो), फिर हमारी तरफ तुम्हें पलट कर आना है, हमें वक्त हम तुम्हें बता देंगे के तुम क्या कुछ कर रहे हो 
+[10:24] दुनिया की ये जिंदगी (जिस के नशे में मस्त होकर तुम हमारी निशानियां से गफलत बारात रहे हो) इसकी मिसाल ऐसी है जैसे आसमान से हमने अपना पानी बरसाया तो जमीन की पैदावर, जैसे आदमी और जानवर सब खाते हैं, खूब घनी हो गई, फिर ऐन हमारा वक्त जबके जमीन अपनी बहार पर थी और खेतियाँ बानी सांवरी खादी थी और उनके मालिक ये समझ रहे थे के अब हम इनसे फ़ायदा उठाने पर कादिर हैं, यकीन रात को या दिन को हमारा हुकुम आ गया और हमने उसे ऐसा घरत करके रख दिया के गोया कल वहां कुछ था ही नहीं। इस तरह हम निशानियां खोल खोल कर पेश करते हैं उन लोगों के लिए जो सोचने वाले हैं
+[10:25] (तुम इस ना पयार जिंदगी के फरेब में मुब्तिला हो रहे हो) और अल्लाह तुम्हें दार-उस-सलाम की तरफ दावत दे रहा है, (हिदायत उसके इख्तियार में है) जिसको वो चाहता है सीधा रास्ता दिखा देता है 
+[10:26] जिन लोगों ने भलाई का तरीका बताया इख्तियार किया उनके लिए भलाई है और माज़ीद फ़ज़ल, उनके चेहरों पर रु-सियाही और ज़िल्लत न चाएगी (न उदासी और न ही अपमान)। वो जन्नत के मुस्तहिक हैं जहां वो हमेशा रहेंगे 
+[10:27] और जिन लोगों ने बुराइयां कमाई उनकी बुराई जैसी है वैसा ही वो बदला पी आएंगे, ज़िल्लत उन्पर मुसल्लत होगी, कोई अल्लाह से उनको बचाने वाला न होगा, उनके चेहरों पर ऐसी तारीख़ चाय हुई होगी जैसी रात के सियाह (अंधेरा) परदे उनपर पड़े हुए माननीय। वो दोज़ख के मुस्तहक़ हैं जहां वो हमेशा रहेंगे 
+[10:28] जिस रोज़ हम सब को एक साथ (अपनी अदालत में) इकठ्ठा करेंगे, फिर उन लोगों ने जिन्होनें शिर्क किया है कहेंगे के ठहर जाओ तुम भी और तुम्हारे बने शरीक भी। फिर हम उनके दरमियान से अजनबीयत का पर्दा हटा देंगे और उनके शरीक कहेंगे के “तुम हमारी इबादत तो नहीं करते थे 
+[10:29] हमारे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह की गवाही काफी है के (तुम अगर हमारी इबादत करते भी थे तो) हम तुम्हारी उस इबादत से बिल्कुल बे-खबर थाय।” 
+[10:30] हमें वक्त हर शक्स अपने किया का मजा चख लेगा, सब अपने हकीकी मालिक की तरफ फेर दिए जाएंगे और वो सारे झूठ जो उनको ने घड रक्खे थे गम हो जाएंगे 
+[10:31] इनसे पूछो, कौन तुमको आसमान और जमीन से रिज्क देता है? ये समात (सुनना) और बीनायी (दृष्टि) की कुव्वतें किसके इख्तियार में हैं? कौन बे-जान में से जानदार को और जानदार में से कौन निकलता है? कौन है नज़्म ए आलम की तदबीर कर रहा है (ब्रह्मांड के सभी मामलों को नियंत्रित करता है)? वो जरूर कहेंगे के अल्लाह, कहो फिर तुम (हकीकत के खिलाफ चलने से) परहेज़ नहीं करते 
+[10:32] तब तो यही अल्लाह तुम्हारा हक़ीक़ी रब है फिर हक के बाद गुमराही के सिवा और क्या बाकी रह गया? आख़िर ये तुम किधर फिराए जा रहे हो 
+[10:33] (ऐ नबी, देखो) इस तरह नफरमानी इख्तियार करने वालों पर तुम्हारे रब की बात सादिक आ गई के वो मान कर न देंगे 
+[10:34] इनसे पूछो, तुम्हारे रुके हुए हुए शेयरों में कोई है जो तख़लीक़ (सृजन) की इब्तेदा भी करता हो और फिर उसका इरादा भी करे? कहो वो सिर्फ अल्लाह है जो तकलीक की इब्तेदा भी करता है और उसका इरादा भी, फिर तुम ये किस उल्टी राह पर चलाये जा रहे हो 
+[10:35] इनसे पूछो, तुम्हारे रुके हुए शरीकोन में कोई ऐसा भी है जो हक की तरफ रहनुमाई करता हो? कहो वो सिर्फ अल्लाह है जो हक की तरफ रहनुमाई करता है। फिर भला बताओ जो हक की तरफ रहनुमाई करता है वो इसका ज्यादा मुस्तहिक है के उसकी जोड़ी की जाए या वो जो खुद रह नहीं पता इल्ला ये के उसकी रहनुमायी की जाए? आख़िर तुम हो क्या गया है, कैसे उलटे-उल्टे फ़ैसले करते हो
+[10:36] हकीकत ये है कि अक्सर लोग महज़ क़यास ओ गुमान (अनुमान) के पीछे चले जा रहे हैं, हालंके गुमान हक की ज़रूरत को कुछ भी पूरा नहीं करता। जो कुछ ये कर रहा है अल्लाह उसको खूब जानता है 
+[10:37] और ये कुरान वो चीज नहीं है जो अल्लाह की वही ओ तालीम के बगैर तसनीफ (रचित/लिखित) कार्लिया जाए। बल्के ये तो जो कुछ पहले आ चूका था उसकी तस्दीक और अल-किताब की तफ़सील है। इसमें कोई शक्क नहीं के ये फ़रमारवा-ए-क़ायनात की तरफ से है 
+[10:38] क्या ये लोग कहते हैं के पैगम्बर ने इसे खुद तसनीफ करलिया है? कहो "अगर तुम अपने इस इल्ज़ाम में सच्चे हो तो एक सूरत इस जैसी तसनीफ कर लाओ और एक खुदा को छोड़ दो जिसे बुला सकते हो मदद के लिए बुला लो" 
+[10:39] असल ये है के जो चीज़ इनके इल्म की गिरफ़्तार में नहीं आई और जिसका माल भी इनके सामने नहीं आया (जिसका अंतिम सीक्वल उन्हें स्पष्ट नहीं था), उसको इन्होन ने (ख्वा मा ख्वा अटकल पिचू) झूठला दिया। इसी तरह तो इनसे पहले के लोग भी झूठला चुके हैं। फिर देखलो उन जालिमों का क्या अंजाम हुआ 
+[10:40] इसमें से कुछ लोग ईमान लाएंगे और कुछ नहीं लाएंगे। और तेरा रब उन मुफसीदों (शरारत करने वालों) को खूब जानता है 
+[10:41] अगर ये तुझसे झूठ बोलते हैं तो कहदे के "मेरा अमल मेरे लिए है और तुम्हारा अमल तुम्हारे लिए। जो कुछ मैं करता हूं उसकी जिम्मेदारी से तुम बारी हो और जो कुछ तुम कर रहे हो उसकी ज़िम्मेदारी से मैं बारी हूँ” 
+[10:42] इन में बहुत से लोग हैं जो तेरी बातें सुनते हैं, मगर क्या तू बेहरों को सुनेगा ख्वा वो कुछ ना समझता हूँ 
+[10:43] इन में बहुत से लोग हैं जो तुझे देखते हैं, मगर क्या तू अंधों को राह बताएगा ख्वा उन्हें कुछ ना सूझता हो 
+[10:44] हकीकत ये है के अल्लाह लोगों पर जुल्म नहीं करता, लोग खुद ही अपने ऊपर जुल्म करते हैं 
+[10:45] (आज ये दुनिया की जिंदगी में मस्त हैं) और जिस रोज अल्लाह इनको इकट्ठ करेगा तो (यही दुनिया की जिंदगी यहीं ऐसी है) महसूस होगी) गोया ये महज़ एक घड़ी भर आपस में जान पहचान करने को थे। (हमें वक्त तहकीक हो जाएगा के) फिल-वाक़े सख़्त घाटे (नुक्सन) में रहे वो लोग जिन्होन ने अल्लाह की मुलाक़ात को झुटलाया और हरगिज़ वो राह ए रास्ते पर ना थाय 
+[10:46] जिन ब्यूरे नटैज से हम इन्हें डरा रहे हैं उनका कोई हिसा हम तेरे जीते जी दिखा दें या इसे पहले हाय तुझ उठा लें, बाहर हाल इन्हें आना हमारी ही तरफ है और जो कुछ ये कर रहे हैं उसपर अल्लाह गवाह है 
+[10:47] हर उम्मत के लिए एक रसूल है फिर जब किसी उम्मत के पास उसका रसूल आ जाता है तो उसका फैसला पूरे इन्साफ के साथ चुका दिया जाता है और उसपर जरा बराबर जुल्म नहीं किया जाता 
+[10:48] कहते हैं: अगर तुम्हारी ये धमकी सच्ची है तो आखिर ये कब पूरी होगी
+[10:49] कहो "मेरे इख्तियार में खुद अपना नफ़ा (फ़ैयदा) ओ ज़रार (नुकसान) भी नहीं। सब कुछ अल्लाह की मशियत पर मौक़ुफ़ है। हर उम्मत के लिए मोहलत की एक मुद्दत है, जब ये मुद्दत पूरी हो जाती है तो घड़ी भर की तकदीम ओ तक़हीर (देरी) भी नहीं होती” 
+[10:50] इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा था कि अगर अल्लाह का अजब अज़ाब अचानक रात को या दिन को आ जाए (तो तुम क्या कर सकते हो?) आख़िर ये ऐसी कौन सी चीज़ है जिसके लिए मुजरिम जल्दी मचाएँ 
+[10:51] क्या जब वो तुमपर आ पाडेय वह समय तुम उसे मानोगे? अब बचना चाहते हो? हालंके तुम खुद ही इसके जल्दी आने का तकाजा कर रहे थे 
+[10:52] फिर जालिमों से खा जाएगा के अब हमेशा के अजब का मजा चखो, जो कुछ तुम कमा रहे हो उसकी याद के सिवा और क्या बदला तुमको दिया जा सकता है 
+[10:53] फिर पूछते हैं क्या वाक़ई ये सच है जो तुम कह रहे हो? कहो "मेरे रब की कसम, ये बिल्कुल सच है और तुम इतना बाल-बूटा नहीं रखते के उसे ज़हूर में आने से रोक दो" 
+[10:54] अगर हर उस शक्स के पास जिसने ज़ुल्म किया है, रूह ए ज़मीन की दौलत भी हो तो हमें अज़ाब से बचने के लिए वो इस्तेमाल फ़िदिया (प्रायश्चित) मुझे देने पर आमादा हो जाएगा। जब ये लोग इस अज़ाब को देख लेंगे तो दिल ही दिल में पछताएंगे मगर उनके दरमियान पूरे इन्साफ से फैसला किया जाएगा, कोई ज़ुल्म उनपार ना होगा 
+[10:55] सुनो! आसमानो और ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह का है। सुन रक्खो! अल्लाह का वादा सच्चा है मगर अक्सर इंसान जानता नहीं है 
+[10:56] वही जिंदगी बक्शता है और वही मौत देता है और उसकी तरफ तुम सबको पलटना है 
+[10:57] लोगन! तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से हिदायत आ गई है। ये वो चीज़ है जो दिलों के अमराज़ (मर्ज) की शिफ़ा है और जो इसे क़बूल करें उनके लिए रहनुमाई और रहमत है 
+[10:58] (ऐ नबी), कहो के “ये अल्लाह का फ़ज़ल और उसकी मेहरबानी है के ये चीज़ हमें भेजी, इसपर तो लोगों को ख़ुशी मनानी चाहिए। येह। उन सब चीज़ों से बेहतर है जिन्हें लोग समेट रहे हैं” 
+[10:59] (ऐ नबी) इंसे कहो, “तुम लोगों ने कभी ये भी सोचा है के जो रिज़्क अल्लाह ने तुम्हारे लिए उतारा था उसमें से तुमने खुद को ही किसी को हराम और किसी को हलाल ठहरा लिया!”। इनसे पूछो, अल्लाह ने तुमको इसकी इजाज़त दी थी? या तुम अल्लाह पर इफ्तारा कर रहे हो 
+[10:60] जो लोग अल्लाह पर ये झूठ इफ्तार करते हैं (झूठ गढ़ते हैं) हैं उनका क्या गुमान है के कयामत के रोज़ उनसे क्या मामला होगा? अल्लाह तो लोगों पर मेहरबानी की नज़र रखता है मगर अक्सर इंसान ऐसे हैं जो शुक्र नहीं करते 
+[10:61] (ऐ नबी), तुम जिस हाल में भी होते हो और कुरान में से कुछ भी सुनाते हो, और लोग, तुम भी जो कुछ करते हो हम सब के दौरों में हम तुमको देखते रहते हैं। कोई ज़रा बराबर चीज़ आसमान और ज़मीन में ऐसी नहीं है, ना छोटी ना बड़ी, जो तेरे रब की नज़र से पोशीदा (छुपी) हो और एक साफ़ दफ़्तर में दर्ज़ ना हो
+[10:62] सुनो! जो अल्लाह के दोस्त हैं, जो ईमान लाए और जिन्होन ने तक़वा का रवैय्या इख्तियार किया 
+[10:63] उनके लिए कोई खौफ और रंज का मौका नहीं है 
+[10:64] दुनिया और आखिरी दोनों जिंदगी में उनके लिए बशारत (खुश-खबरी) ही बशारत है। अल्लाह की बातें बदल नहीं सकतीं. यही बड़ी कामयाबी है 
+[10:65] (ऐ नबी)! जो बातें ये लोग तुझपर बनाते हैं वो तुझसे रंजीदा ना करें। इज्जत सारी की सारी खुदा के इख्तियार में है, और वो सब कुछ सुनता और जानता है 
+[10:66] आगाह रहो! आसमान के बसने वाले हैं या ज़मीन के, सब के सब अल्लाह के ममलूक हैं और जो लोग अल्लाह के सिवा कुछ (अपने खुद का सच) शरीकों को पुकार रहे हैं वो निरे वेहम ओ गुमान (अनुमान और केवल अनुमान लगा रहे हैं) के पेयरो हैं और महज़ क़यास अराइयां (केवल अनुमान लगा रहे हैं) करते हैं 
+[10:67] वो अल्लाह हाय है जिसने तुम्हारे लिए रात बनाई के हमें सुकून हासिल करो और दिन को रोशन बनाया। इस में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो (खुले कानों से पैगम्बर की दावत को) सुनते हैं 
+[10:68] लोगों ने कहा कि अल्लाह ने किसी को बेटा बनाया है। सुभान अल्लाह! वो तो बे-नियाज़ है. आसमानो और ज़मीन में जो कुछ है सब उसका दूध है। तुम्हारे पास इस क़ौल के लिए आख़िर दलील क्या है? क्या तुम अल्लाह के मुतालिक वो बातें कहते हो जो तुम्हारे इल्म में नहीं हैं 
+[10:69] (ऐ मुहम्मद), कहदो के जो लोग अल्लाह पर झूठे इफ्तारा बांधते हैं (झूठ का अविष्कार करते हैं) वो हरगिज फलाह नहीं पा सकते 
+[10:70] दुनिया की चंद रोजा जिंदगी में मजे करलें, फिर हमारी तरफ उनको पलटना है फिर हम इस कुफ्र के बदले जिसका इर्तेक़ाब वो कर रहे हैं उनको साख अज़ाब का मजा चककाएंगे 
+[10:71] इनको नूह का क़िस्सा सुनाओ, हमें वक़्त का क़िस्सा जब उसने अपनी क़ौम से कहा था के "ऐ बिरादरान ए क़ौम, अगर मेरा तुम्हारे दमियां रहना और अल्लाह की आयतें सुना सुना कर तुम्हें गफलत से बेदार करना तुम्हारे लिए न-काबिल ए बर्दाश्त हो गया है तो मेरा भरोसा अल्लाह पर है। तुम अपने रुके हुए शरीकों को साथ लेकर एक मुत्तफ़िका फैसला करलो और जो मंसूबा (योजना) तुम्हारे पेश ए नज़र हो उसको खूब सोच समझ लो ता-के उसका कोई पहलू तुम्हारी निगाह से पोशीदा ना रहे, फिर मेरे खिलाफ उसको अमल में ले आओ और मुझे हरगिज मोहलत ना दो 
+[10:72] तुमने मेरी हिदायत से मुंह मोड़ा (तो मेरा क्या नुक्सान किया) मैं तुमसे किसी अजर का तालाब ना था, मेरा अजर तो अल्लाह के ज़िम्मे है, और मुझे हुकुम दिया है के (ख्वा कोई माने या ना माने) मैं खुद मुस्लिम बन कर रहूँ” 
+[10:73] उन्होन ने उसे झुटलाया और नतीजा ये हुआ के हमने उसे और उन लोगों को जो उसके साथ कश्ती में थे, बचा लिया और उन्हें ज़मीन में जानशीन (उत्तराधिकारियों) ने बनाया और उन सब लोगों को गर्क (डूब) करदिया जिन्हों ने हमारी आयत को झुटलाया था, पास देखलो के जिन्हे मुतनब्बे (चेतावनी) किया गया था (और फिर भी उन्होन ने मान कर ना दिया) उनका क्या अंजाम हुआ।
+[10:74] फिर नूह के बाद हमने मुखतलिफ़ पैगम्बरों को उनकी क़ौमों की तरफ भेजा और वो उनके पास खुली खुली निशानियां लेकर आये, मगर जिस चीज़ को उन्होन ने पहला झुटला दिया था उसे फिर मान कर ना दिया। इस तरह हम हद से गुजर जाने वालों के दिलों पर थप्पा लगा देते हैं 
+[10:75] फिर उनके बाद हमने मूसा और हारून को अपने निशानियों के साथ फिरौन और उसके सरदारों की तरफ भेजा, मगर उनहों ने अपनी बदाई का घमंड किया और वो मुजरिम लोग थे 
+[10:76] पास जब हमारे पास से हक उनके सामने आया तो उनको ने कहा के ये तो खुला जादू है 
+[10:77] मूसा ने कहा: "तुम हक को ये कहते हो जबके वो तुम्हारे सामने आ गया, क्या ये जादू है? हालंके जादूगर फलाह नहीं पाया करते" 
+[10:78] उनहों ने जवाब में कहा "क्या तू इसके लिए आया है के हमें तरीक़े से फेर दे जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है और ज़मीन में बदाई तुम दोनो की क़याम हो जाए? तुम्हारी बात तो हम मन्ने वाले नहीं हैं" 
+[10:79] और फिरौन ने (अपने आदमियों से) कहा के "हर" माहिर-ए-फन (विशेषज्ञ) जादूगर को मेरे पास हाजिर करो” 
+[10:80] जब जादूगर आ गए तो मूसा ने उन्हें कहा “जो कुछ तुम्हें फेंकना है फेंको।” 
+[10:81] फिर जब उन्होन ने अपने एंकर फेंके [कास्ट (उनके कर्मचारी)] दिए तो मूसा ने कहा, "ये जो तुमने फेंका है ये जादू है, अल्लाह अभी इसे बातिल किये देता है, मुफ़्सिदों (शरारत करने वालों) के काम को अल्लाह सुधरने नहीं देता 
+[10:82] और अल्लाह अपने फ़रमानों से हक को हक कर दिखाता है, ख्वा मुजरेमो को वो कितना ही नागावर हो” 
+[10:83] (फिर देखो के) मूसा को उसकी क़ौम में से चंद नवाज़वानों के सिवा किसी ने ना माना, फिरौन के डर से और खुद अपनी क़ौम के सरबर-अवार्डा (अपने प्रमुख) लोगन के डर से (जिन्हें खौफ था के) फिरौन उनको अज़ाब में मुबतला करेगा। और वाकिया ये है के फिरौन ज़मीन में गलबा रखा था और वो उन लोगों में से था जो किसी हद पर रुकते नहीं हैं 
+[10:84] मोसा ने अपनी क़ौम से कहा के "लोगन, अगर तुम अल्लाह पर ईमान रखते हो तो उसपर भरोसा करो अगर मुसलमान हो" 
+[10:85] उनहों ने जवाब दिया "हमने अल्लाह ही पर भरोसा किया, ऐ हमारे रब, हमें जालिम लोगों के लिए फितना न बना 
+[10:86] और अपनी रहमत से हमको काफिरों से निजात दे।" 
+[10:87] और हमने मूसा और उसके भाई को इशारा किया के "मिस्र (मिस्र) में चांद मकान अपनी क़ौम के लिए मुहय्या करो और अपने मकानों (घरों) को क़िबला ठहर लो और नमाज़ क़याम करो और एहले ईमान को बशारत (ख़ुश ख़बरी) दे दो" 
+[10:88] मूसा ने दुआ की "ऐ हमारे रब, तू नहीं फिरौन और उसके सरदारों को दुनिया की जिंदगी में ज़ीनत और अमवाल (माल) से नवाज़ रक्खा है। ए रब! क्या ये तुम्हारे लिए है कि वो लोगों को तेरी राह से भटकाएं? ए रब, उनका माल ख़राब" (मिटाना) करदे और उनके दिलों पर ऐसी मोहर करदे के ईमान ना लायें जब तक दर्दनक अजब ना देख लें”
+[10:89] अल्लाह ताला ने जवाब में फरमाया "तुम दोनों की दुआ कबूल की गई, साबित-कदम रहो और उन लोगों के तारीख की हरगिज जोड़ी न करो जो इल्म नहीं रखते" 
+[10:90] और हम बानी इसराइल को समंदर से गुजर ले गए फिर फिरौन और उसके लश्कर ज़ुल्म और ज़्यादा की ग़रज़ से उनके पीछे चले हट्टा के जब फ़िरौन डूबने लगा तो बोल उठा "मैंने मान लिया के खुदावंद ए हक़ीक़ी उसके सिवा कोई नहीं है जिसपर बानी इसराइल ईमान लाए, और मैं भी सर ए इताअत झुका देने वालों में से हूँ" 
+[10:91] (जवाब दिया गया) अब ईमान लता है! हालंके इस्से पहले तक तू नफरमानी करता रहा और फसाद बरपा करने वालों (शरारत करने वालों) में से था 
+[10:92] अब तो हम सिर्फ तेरी लाश (शव) ही को बचाएंगे ता-के तू बाद की नसलों के लिए निशान ए इब्रत बने अगरचे बहुत से इंसान ऐसे हैं जो हमारी निशानियों से गफ़लत बरात-ते हैं" 
+[10:93] हमने बनी इसराइल को बहुत अच्छा ठिकाना दिया और निहायत उम्मीद उमदा वासिल ए जिंदगी उन्हें अता किए, फिर उन्होन ने बहाम इख्तिलाफ नहीं किया मगर हमें वक्त जबके इल्म उनके पास आ चूका था। यकीनन तेरा रुब कयामत के रोज़ उनके दरमियान हमें चीज़ का फैसला कर देगा जिसमें वो इख्तिलाफ़ करते रहेंगे हैं 
+[10:94] अब अगर तुम्हें हिदायत की तरफ से कुछ भी शक हो जो हमें तुझपर नाज़िल की है तो उन लोगों से पूछ ले जो पहले से किताब पढ़ रहे हैं। फिल-वाक़े ये तेरे पास हक़ ही आया है तेरे रब की तरफ से, लिहाज़ा तू शक्क करने वालों में से ना हो 
+[10:95] और उन लोगों में ना शामिल हो जिन्होन ने अल्लाह की आयत को झुटलाया है, वरना तू नुक्सान उठाने वालों में से होगा 
+[10:96] हकीकत ये है के जिन लोगों पर तेरे रब का क़ौल रस्त आ गया है (तुम्हारे रब का वचन पूरा हो गया है) उनके सामने ख्वा कोई निशानी आ जाए 
+[10:97] वो कभी ईमान ला कर नहीं देते जब तक के दर्दनाक अज़ाब सामने न देख लें 
+[10:98] फिर क्या ऐसी कोई मिसाल है के एक बस्ती अज़ाब देख कर ईमान लाई हो और उसका ईमान उसके लिए नफा बख्श साबित हुआ हो? यूनुस की क़ौम के सिवा (इसकी कोई नज़ीर नहीं) वो क़ौम जब ईमान ले आई थी तो अलबत्ता हमने उसपर से दुनिया की जिंदगी में रुसवाई का अजब ताल दिया था और उसको एक मुद्दत तक जिंदगी से बेहरमंद होने का मौका दे दिया था 
+[10:99] अगर तेरे रब की मशियत (इच्छा) ये होती (के ज़मीन में सब मोमिन ओ फ़रमाबरदार ही होते) तो सारे एहले ज़मीन ईमान ले आये होते। फिर क्या तू लोगों को मजबूर करेगा के वो मोमिन हो जाए 
+[10:100] कोई मुतनफ़्फ़िस अल्लाह के इज़ान के बिना ईमान नहीं ला सकता, और अल्लाह का तरीक़ा ये है के जो लोग अक़ल से काम नहीं लेते उनपर गंदगी डाल देता है 
+[10:101] इंसे कहो "ज़मीन और आसमान में जो कुछ है उसे आंखें खोल कर देखो” और जो लोग ईमान लाना ही नहीं चाहते उनके लिए निशानियां और तम्बीहें (चेतावनी) आखिर क्या मुफीद हो सकती हैं
+[10:102] अब ये लोग इसके सिवा और किस चीज़ के मुंतज़िर हैं के वही बुरे दिन देखेंगे जो इनसे पहले गुज़रे हुए लोग देख चुके हैं? इनसे कहो "अच्छा, इंतजार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतजार करता हूं" 
+[10:103] फिर (जब ऐसा वक्त आता है तो) हम अपने रसूलों को और उन लोगों को बचा लिया करते हैं जो ईमान लाए हैं। हमारा यही तरीका है. हमपर ये हक़ है के मोमिनो को बचा लें 
+[10:104] (ऐ नबी!) कहदो के लोगों, अगर तुम अभी तक मेरे दीन के मुतालिक किसी शक्क में हो तो सुनलो के तुम अल्लाह के सिवा जिनकी बंदगी करते हो मैं उनकी बंदगी नहीं करता, बाल्के सिर्फ उसी खुदा की बंदगी करता हूं जिसे क़ब्ज़ में तुम्हारी मौत है। मुझे हुकुम दिया गया है के मैं ईमान लाने वालों में से हूं 
+[10:105] और मुझसे फरमाया गया है के तू यक्सू होकर अपने आप को ठीक ठीक इस दीन पर कायम करदे, और हरगिज हरगिज मुशरिकों में से न हो 
+[10:106] और अल्लाह को छोड़ कर कोई ऐसी हस्ती को न पुकार जो तुझे न फ़ायदा पाहुंचा सकती है न नुक्सान। अगर तू ऐसा करेगा तो जालिमों में से होगा 
+[10:107] अगर अल्लाह तुझे किसी मुसीबत में डाले तो खुद उसके सिवा कोई नहीं जो इस मुसीबत को टाल दे, और अगर वो तेरे हक में किसी भलाई का इरादा करे तो उसके फजल को फिरने वाला भी कोई नहीं है। वो अपने बंदों में से जिसका चाहता है अपने फज़ल से नवाजता है और वो दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[10:108] (ऐ मुहम्मद), कहदो के "लोगन, तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से हक़ आ चुका है, अब जो सीधी राह इख्तियार करे उसकी रास्ता-रवी उसके लिए मुफीद है, और जो गुमराह रहे उसकी गुमराही उसके लिए तबह-कुन है और मैं तुम्हारे ऊपर कोई हवालादार नहीं हूं” 
+[10:109] और (ऐ नबी), तुम हिदायत की जोड़ी बनाओ जो तुम्हारी तरफ बाजारिये वही (खुलासा) भेजो। राही है, और सब्र करो यहां तक ​​के अल्लाह फैसला करदे, और वही बेहतर फैसला करने वाला है 
+
+सूरह 11: हुद (हुद) 
+------------------------------------------------ 
+[11:1] अलिफ लाम रा. फरमान है, जिसकी आयतें पुख्ता और मुफस्सल इरशाद हुई हैं, एक दाना और बाख़बर हस्ती की तरफ से 
+[11:2] के तुम ना बंदगी करो मगर सिर्फ अल्लाह की। मैं उसकी तरफ से तुमको खबरदार करने वाला भी हूं और बशारत देने वाला भी 
+[11:3] और ये के तुम अपने रब से माफ़ी चाहो और उसकी तरफ पलट आओ तो वो एक खास मुद्दत तक तुमको अच्छा समान ए जिंदगी देगा और हर साहब-ए-फजल को उसका फजल अता करेगा. लेकिन अगर तुम मुह फेरते हो तो मैं तुम्हारे हक में एक बड़ा दिन के अज़ाब से डरता हूं 
+[11:4] तुम सबको अल्लाह की तरफ पलटना है और वह सब कुछ कर सकता है 
+[11:5] देखो! ये लोग अपने सीने को मोड़ते हैं ता-के उसे चुप जाएं। ख़बरदार! जब ये कप्तानों से अपने आप को धमकाते हैं अल्लाह उनके छुपे को भी जानता है और खुले को भी।वो तो उन भेदों से भी वाकिफ है जो सीने में हैं
+[11:6] ज़मीन में चलने वाला कोई जानदार ऐसा नहीं है जिसका रिज़क़ अल्लाह के ज़िम्मे ना हो और जिसका मुतालिक वो ना जानता हो के कहाँ वो रहता है और कहाँ सो जाता है, सब कुछ एक साफ़ दफ़्तर में दर्ज है 
+[11:7] और वही है जिसने आसमानो और ज़मीन को चे (छह) दिनों में भुगतान किया जबके इसे पहले उसका अर्श पानी पर था ता-के तुमको आज़मा कर देखो तुम में कौन बेहतर अमल करने वाला है। अब अगर (ऐ मुहम्मद) तुम कहते हो के लोग, मरने का बाद तुम दोबारा उठोगे, तो मुनकिरेन फवारान बोल उठते हैं के ये तो सारी जादूगरी है 
+[11:8] और अगर हम एक खास मुद्दत तक उनकी सजा को टालते हैं तो वो कहने लगते हैं के आखिर किस चीज ने इस्तेमाल किया रोक रक्खा है? सुनो! जिस रोज़ उस सज़ा का वक़्त आ गया तो वो किसी के फेर ना फिर बनायेगा और वही चीज़ उनको आ घेरेगी जिसका वो मज़ाक उड़ा रहे हैं 
+[11:9] अगर कभी हम इंसान को अपनी रहमत से नवाज़ने के बाद फिर उसे महरूम करते हैं तो वो मयुस होता है और नाशुक्र करने लगता है 
+[11:10] और अगर हमें मुसीबत के बाद जो उसपर आई थी तो हम उसे नियामत का मजा चखाते हैं तो कहते हैं मेरे तो सारे दिलादार (सख्तियां) पार हो गए, फिर वो फूला नहीं समता और अचानक लगता है 
+[11:11] क्या ऐब से पाक अगर कोई है तो बस वो लोग जो सब्र करने वाले हैं और वही हैं जिनके लिए दरगुज़ार भी हैं और बड़ा अजर भी हैं 
+[11:12] तो ऐ पैगम्बर! कहीं ऐसा ना हो कि तुम उन चीज़ों में से किसी चीज़ को (बयान करने से) छोड़ दो जो तुम्हारी तरफ वही की जा रही है। और इस बात पर दिल तंग हो के वो कहेंगे "इस शक्स पर कोई खजाना क्यों ना उतारा गया" हां ये के "इसके साथ कोई फरिश्ता क्यों ना आया"। तुम तो महज खबरदार करने वाले हो, आगे हर चीज का हवालादार अल्लाह है 
+[11:13] क्या ये कहते हैं के पैगम्बर ने ये किताब खुद गढ़ ली है? कहो, “अच्छा ये बात है तो इस जैसी घड़ी हुई दस सूरतें तुम बना लाओ और अल्लाह के सिवा और जो (तुम्हारे माबूद) हैं उनको मदद के लिए बुला सकते हो तो बुला लो अगर तुम (उन्हें माबूद समझने में) सच्चे हो 
+[11:14] अब अगर वो (तुम्हारे) माबूद) तुम्हारी मदद को नहीं पहचानते तो जान लो के ये अल्लाह के इल्म से नाज़िल हुई है और ये के अल्लाह के सिवा कोई हक़ीक़ी माबूद नहीं है फिर क्या तुम (क्या अम्र ए हक़ के आगे) सर-ए-तस्लीम ख़त्म करते हो?” 
+[11:15] जो लोग बस इसी दुनिया की जिंदगी और इसकी खुश नुमाइयों के तालिब होते हैं उनकी कारगुजारी के सारा फल हम यहीं उनको दे देते हैं और इसमे उनके साथ कोई काम नहीं की जाती 
+[11:16] मगर आखिरी में ऐसे लोगों के लिए आग के सिवा कुछ नहीं है। (वहां मालूम हो जाएगा के) जो कुछ उनको ने दुनिया में बनाया वो सब बेकार होगा और अब उनका सारा किआ धरा महज़ बातिल है
+[11:17] फिर भला वो शक्स जो अपने रब की तरफ से एक साफ शहादत (सबूत) रखता था, उसके बाद एक गवाह भी परवरदिगार की तरफ से (इस शहादत की ताईद में) आ गया, और पहले मूसा की किताब रहनुमा और रहमत के तौर पर आई भी मौजूद थी (क्या वो भी दुनिया की तरह, इसका इंकार कर सकता है?) ऐसे लोग तो इसपर ईमान ही लाएंगे। और इंसानी गिरोहों में से जो कोई इसका इंकार करे तो उसके लिए जिस जगह का वादा है वो दोज़ख है। पास (ऐ पैगम्बर), तुम इस चीज़ की तरफ से किसी शक्क में न पड़ना, ये हक़ है तुम्हारे रब की तरफ से मगर अक्सर लोग नहीं मानते 
+[11:18] और हमारे शक्स से बढ़ कर जालिम और कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ घड़े? ऐसे लोग अपने रब के हुज़ूर पेश होंगे और गवाह शहादत देंगे के ये हैं वो लोग जिन्हों ने अपने रब पर झूठ घड़ा था। सुनो! खुदा की लानत है जालिमों पर 
+[11:19] उन जालिमों पर जो खुदा के रास्ते से लोगों को रोकते हैं, उसके रास्ते को टेढ़ा करना चाहते हैं और आख़िरत का इंकार करते हैं 
+[11:20] वो ज़मीन में अल्लाह को बे-बस करने वाले ना थे और ना अल्लाह के मुक़ाबले में कोई उनका हमी (रक्षक) था. उन्हें अब दोहरा (डबल) अजब दिया जाएगा। वो ना किसी की सुन ही सकता था और ना खुद ही उनको कुछ सूझता था 
+[11:21] ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने आप को खुद घाटे (नुक्सान) में डाला और वो सब कुछ उनसे खोया गया जो उन्होन ने गढ़ रखा था 
+[11:22] नागुज़ीर है के वही आख़िरत में सबसे बढ़कर घाटे (नुकसान) में रहेंगे 
+[11:23] रहे वो लोग जो ईमान लाए और जिन्होन ने नीक अमल किए और अपने रब हाय के होकर रहे, तो यकीनन वो जन्नती लोग हैं और जन्नत में वो हमेशा रहेंगे 
+[11:24] डोनो फ़रीक़ों की में मिसल ऐसा है जैसा एक आदमी तो हो अंधा बेहरा और दूसरा हो देखने और सुनने वाला। क्या ये डोनो यक्सन हो सकते हैं? क्या तुम (इस मिसाल से) कोई सबक नहीं लेते 
+[11:25] (और ऐसी ही हालत थी जब) हमने नहीं को उसकी क़ौम की तरफ भेजा था। (उसने कहा) "मैं तुम लोगों को साफ-साफ कहबरदार करता हूं 
+[11:26] के अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी न करो, वरना मुझे अंदेशा है के तुमपर एक रोज़ दर्दनाक अज़ाब आएगा।" 
+[11:27] जवाब में उसकी क़ौम के सरदार, जिन्हों ने उसकी बात मन से इंकार किया था, बोले "हमारी नज़र में तो तुम इसके सिवा कुछ नहीं हो के बस एक इंसान हो हम जैसे, और हम देख रहे हैं के हमारी क़ौम में से बस उन लोगों ने जो हमारे हन अराज़िल थाय (अदना दर्जे / सबसे नीच) बे-सोचे समझे तुम्हारी जोड़ी इख्तियार करली है। और हम कोई चीज भी ऐसी नहीं जानते, जिसमें तुमलोग हमसे कुछ बढ़े हुए हो।
+[11:28] उसने कहा "ऐ बिरादरान ए क़ौम, जरा सोचो तो सही के अगर मैं अपने रब की तरफ से एक खुली शहादत पर कायम था और फिर उसने मुझको अपनी खास रहमत से भी नवाज दिया, मगर वो तुमको नजर ना आई, तो आखिर हमारे पास क्या जरूरी" है के तुम मनाना न चाहो और हम ज़बरदस्ती उसको तुम्हारे सर छपाईक दीन 
+[11:29] और ऐ बिरादरन ए क़ौम, मैं इस काम पर तुमसे कोई माल नहीं मांगता, मेरा अजर तो अल्लाह के ज़िम्मे है और मैं उन लोगों को धक्के देने से भी रहा जिन्हों ने मेरी बात मानी है अपने रब के हुजूर जाने वाले हैं मगर मैं देखता हूं कि तुमलोग जहलत बरात रहे हो 
+[11:30] और ऐ क़ौम, मैं लोगों को धुतकार दूं तो खुदा की पकड़ से कौन मुझे बचाने आएगा? तुम लोगों की समझ में क्या इतनी बात भी नहीं आती 
+[11:31] और मैं तुमसे नहीं कहता कि मेरे पास अल्लाह के खज़ाने हैं, ना ये कहता हूँ के मैं गैब का इल्म रखता हूँ, ना ये मेरा दावा है के मैं फ़रिश्ता हूँ और ये भी मैं नहीं कह सकता कि जिन लोगों को तुम्हारी आँखें हिकारत से देखती हैं उन्हें अल्लाह ने कोई भलायी नहीं डि उनके नफ़्स का हाल अल्लाह ही बेहतर जानता है। अगर मैं ऐसा कहूं तो ज़ालिम होगा” 
+[11:32] आख़िर ए कार उन लोगों ने कहा के “ ऐ नूह, तुमने हमसे झगड़ा किया और बहुत कार्लिया अब तो बस वो अज़ाब ले आओ जिसकी तुम हमें धमकी देते हो अगर सच्चे हो” 
+[11:33] नूह ने जवाब दिया,“ वाह तो अल्लाह हाय लाएगा, अगर चाहेगा, और तुम इतना बाल-बूटा नहीं रखते के इसे रोक दो 
+[11:34] अब अगर मैं तुम्हारी कुछ खैर ख्वाही करना भी चाहूं तो मेरी खैर ख्वाही तुम्हें कोई फैयदा नहीं दे सकती जबके अल्लाह ही ने तुम्हें भटका देने का इरादा करलिया हो. वही तुम्हारा रब है और उसकी तरफ तुम्हारी पलटना है” 
+[11:35] (ऐ मुहम्मद), क्या ये लोग कहते हैं कि इस शक्स ने ये सब कुछ खुद गढ़ लिया है? इनसे कहो “ अगर मैंने ये खुद घड़ा है तो मुझ पर अपने जुर्म की जिम्मेदारी है, और जो जुर्म है तुम कर रहे हो उसकी ज़िम्मेदारी से मैं बारी हूँ।” 
+[11:36] नहीं पर वही कि गई के तुम्हारी क़ौम में से जो लोग ईमान ला चुके बस वो ला चुके, अब कोई मन्ने वाला नहीं है। इनके कार्टूनों पर घूम खाना छोड़ो 
+[11:37] और हमारी निगरानी में हमारी वही के मुताबिक़ एक कश्ती बनानी शुरू करदो। और देखो, जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उनके हक़ में मुझसे कोई सिफ़रिश ना करना। ये सारे के सारे अब डूबने वाले हैं 
+[11:38] नहीं कश्ती बना रहा था और उसकी क़ौम के सरदारों में से जो कोई उसके पास से गुज़रता था वो उसका मज़ाक उड़ाता था। उसने कहा “अगर तुम हमपर हंसते हो तो हम भी तुमपर हंस रहे हैं 
+[11:39] अनकरीब तुम्हें खुद मालूम हो जाएगा कि किस पर वो अजब आता है जो उसे रुसवा कर देगा, और किसपर वो बला टूट पड़ती है जो तले नहीं तलेगी”
+[11:40] यहां तक ​​के जब हमारा हुकुम आ गया और वो तन्नूर (ओवन) उबल गया। तो हमने कहा “हर क़िस्म के जानवरों का एक जोड़ा कश्ती में रख लो, अपने घर वालों को भी सिवाय उन अश्कों के जिनके निशान-दही पहले की जा चुकी है इस में सवार करा दो, और उन लोगों को भी बिठा लो जो ईमान लाए हैं”। और थोड़े ही लोग थे जो नूह के साथ ईमान लाए थे 
+[11:41] नूह ने कहा "सवार हो जाओ इसमीं, अल्लाह ही के नाम से है इसका चलना भी और इसका ठहरना भी। मेरा रब बड़ा गफूर ओ रहीम है" 
+[11:42] कश्ती उन लोगों के लिए चली जा रही थी और एक एक मौज पहाड़ की तरह उठ रही थी। नूह का बेटा दूर फासले पर था, नूह ने पुकार कर कहा "बेटा, हमारे साथ सवार होजा, काफिरों के साथ ना रह।" 
+[11:43] उसने पलट कर जवाब दिया "मैं अभी एक पहाड़ पर चढ़ा जाता हूं जो मुझे पानी से बचा लेगा"। नूह ने कहा, आज कोई चीज अल्लाह के हुकुम से बचाने वाली नहीं है सिवाय इसके कि अल्लाह ही किसी पर रहम फरमाये।'' इतने में एक मौज दोनों के दरमियान हायल हो गई और वो भी डूबने वालों में शामिल हो गया 
+[11:44] हुकुम हुआ ''ऐ जमीन, अपना सारा पानी तैयार हो गया और ऐ आसमान, रुक जा” चुनांचे पानी ज़मीन में बैठ गया, फैसला चुका दिया गया, कश्ती जूड़ी पर टिक गई, और कह दिया गया के दरवाज़े जालिमों की क़ौम 
+[11:45] नूह ने अपने रुब को पुकारा, कहा “ऐ रब! मेरा बेटा मेरे घर वालों में से है और तेरा वादा सच्चा है और तू सब हकीमो से बड़ा और बेहतर हकीम है” 
+[11:46] जवाब में इरशाद हुआ “ऐ नूह, वो तेरे घर वालों में से नहीं है। वो तो एक बड़ा हुआ काम है. लिहाजा तू हमसे बात करता है कि मुझसे अंधेरा न कर जिसकी हकीकत तू नहीं जानता। मैं तुझे हिदायत करता हूं के अपने आप को जहिलों की तरह ना बना ले” 
+[11:47] नूह ने फवारान अर्ज़ किया “ऐ मेरे रब, मैं तेरी पनाह मांगता हूं इसके के वो चीज तुझसे मांगूं जिसका मुझे इलम नहीं। अगर तू नहीं मुझे माफ़ ना किया और रहम ना फरमाया तो मैं बरबाद हो जाऊंगा 
+[11:48] हुकुम हुआ " ऐ नूह उतर जा हमारी तरफ से सलामती और बरकतें हैं तुझपर और उन गिरोहोन पर जो तेरे साथ हैं। और कुछ गिरोह ऐसे भी हैं जिनको हम कुछ मुद्दत समान ए जिंदगी बख्शेंगी फिर उन्हें हमारी तरफ से दर्दनक अजब पहचानेगा” 
+[11:49] (ऐ मुहम्मद), ये गायब की खबरें हैं जो हम तुम्हारी तरफ वही कर रहे हैं, इसे पहले ना तुम इनको जानते थे और ना तुम्हारी क़ौम। पस सब्र करो, अंजाम-ए-कार मुत्तक़ियों के हक़ में है 
+[11:50] और आद की तरफ हमने उनके भाई हुद को भेजा। उसने कहा "ऐ बिरादरान ए क़ौम, अल्लाह की बंदगी करो, तुम्हारा कोई खुदा उसके सिवा नहीं है, तुमने महज़ झूठ घड़ रखा है 
+[11:51] ए बिरादरान ए क़ौम इस काम पर मैं तुमसे कोई अजर नहीं चाहता। मेरा अजर तो उसका ज़िम्मे है जिसने मुझे भुगतान किया है क्या तुम अक्ल से जरा काम नहीं लेते
+[11:52] और ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अपने रब से माफ़ी चाहो, फिर उसकी तरफ पलटो। वो तुम्हारे आसमान के दहाने खोल देगा और तुम्हारी मौजुदा कुव्वत (ताकत) पर मजीद कुव्वत का इजाफा करेगा। मुजरेमोन की तरह मुँह न फेरो” 
+[11:53] उन्होन ने जवाब दिया, “ऐ हुद, तू हमारे पास कोई सारी शहादत (सबूत) लेकर नहीं आया है, और तेरे कहने से हम अपने माबूदों को नहीं छोड़ सकते। और तुझपर हम ईमान लाने वाले नहीं हैं 
+[11:54] हम तो ये समझते हैं कि तेरे ऊपर हमारे मबूदों में से किसी की मौत हो गई है।'' हुड ने कहा, ''मैं अल्लाह की शहादत पेश करता हूं और तुम गवाह रहो के ये जो अल्लाह के सिवा दूसरों को तुमने खुदाई में शरीक किया ठहरे रक्खा है उसे मैं बेज़ार हूं 
+[11:55] तुम सब मिलकर मेरे खिलाफ अपनी करनी में कसार ना उठा रख और मुझे जरा मोहलत ना दो 
+[11:56] मेरा भरोसा अल्लाह पर है जो मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी। कोई जानदार ऐसा नहीं जिसकी छोटी उसके हाथ में ना हो। बेशक मेरा रब सीधी राह पर है 
+[11:57] अगर तुम मुंह फेरते हो तो फिर लो, जो पैगाम दे कर मैं तुम्हारे पास भेज गया था वह मैं तुमको पाहुंचा चूका हूं। अब मेरा रब तुम्हारी जगह दूसरी कौम को उठाएगा और तुम उसका कुछ न बिगाड़ पाओगे। यकीनन मेरा रब हर चीज़ पर नज़र है।” 
+[11:58] फिर जब हमारा हुकुम आ गया तो हमने अपनी रहमत से हुद को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे निजात दे दी और एक मजबूत अज़ाब से उन्हें बचा लिया 
+[11:59] ये हैं आद। अपने रुब की आयतों से उनको ने इंकार किया, उसके रसूलों की बात ना मानी, और हर जब्बार दुश्मन ए हक़ की जोड़ी बनाते रहे 
+[11:60] आख़िर ए कार इस दुनिया में भी अंदर फिटकर पड़ी और कयामत के रोज़ भी। सुनो! आद ने अपने रब से कुफ्र किया, सुनो! दूर फेंक दिये गये आद, हद की क़ौम के लोग 
+[11:61] और समूद की तरफ़ हमने उनके भाई सालेह को भेजा। उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है। वही है जिसने तुमको ज़मीन से पैदा किया है और यहां तुमको बसाया है। लिहाज़ा तुम उसे माफ़ी चाहो और उसकी तरफ पलट आओ। यकीनन मेरा रब करीब है और वो।" दुआओं का जवाब देने वाला है” 
+[11:62] उन्होन ने कहा “ऐ सालेह, इसके पहले तू हमारे दरमियान ऐसा शक्स था जिसकी बड़ी तवाक्कत (उम्मीदें) वबस्ता थी। क्या तुम हमें माबूदों की परस्तियों से रोकना चाहते हैं जिनकी परस्तियां हमारे बाप दादा करते थे? तू जिस तारीख़ की तरफ हमें बुला रहा है, इसके बारे में हमको शक है, जिसने हमें ख़लजान (परेशान करने वाला शक) में डाल रखा है।”
+[11:63] सालेह ने कहा " ऐ बिरादरान-ए-कौम, तुमने कुछ इस बात पर भी गौर किया के अगर मैं अपने रब की तरफ से एक साफ शहादत रखता था, और फिर उसने अपने रहमत से भी मुझको नवाज दिया तो इसके बाद अल्लाह की पकड़ से मुझे कौन बचाएगा अगर मैं उसकी नफरमानी करूं? तुम मेरे किस काम आ सकते हो सिवाय इसके मुझे और ज्यादा खसरे (नुक्सान) में डाल दो 
+[11:64] और ऐ मेरी कौम के लोगों, देखो ये अल्लाह की ऊंटनी (वह-ऊंटनी) तुम्हारे लिए एक निशानी है, इसे खुदा की जमीन में बदलना है के लिए आज़ाद छोड़ दो। इस्से ज़रा तरुज़ ना करना (उसे चोट मत पहुँचाओ) वर्ना कुछ ज्यादा देर न गुजरेगी के तुमपर खुदा का अज़ाब आ जाएगा” 
+[11:65] मगर उनहोन ने औंटनी को मार डाला इसपर सालेह ने उनको खबरदार कर दिया के “बस अब तीन दिन अपने घरों में और रह बस लो। ये ऐसी मियाद (वादा) है जो झूठी ना साबित होगी” 
+[11:66] आखिर-ए-कार जब हमारे फैसले का वक्त आ गया तो हमने अपनी रहमत से सालेह को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे बचा लिया, और उस दिन की रुसवाई से उनको महफूज रक्खा। बेशाक तेरा रब ही दर-असल ताक़तवार और बाला-दस्त (ऑल-माइटी) है 
+[11:67] रहे वो लोग जिन्होन ने ज़ुल्म किया था तो एक मजबूत धमाके ने उनको धर लिया और वो अपनी बस्तियों में इस तरह बे-हिस्स ओ हरकत (बेजान पड़ा हुआ) पड़े के पड़े रह गए 
+[11:68] के गोया वो वहां कभी बसाए ही ना थे। सुनो! समूद ने अपने रब से कुफ्र किया, सुनो! दूर फेंक दिए गए समूद 
+[11:69] और देखो, इब्राहिम के पास हमारे फरिश्ते खुश खबरी के लिए हुए पहुंचे। कहां तुम्पर सलाम हो, इब्राहिम ने जवाब दिया तुम्पर भी सलाम हो, फिर कुछ देर ना गुजरी के इब्राहिम एक भुना (भुना हुआ) हुआ बछड़ा (बछड़ा) (उनकी जियाफत के लिए) ले आया 
+[11:70] मगर जब देखा के उनके हाथ खाने पर नहीं बढ़ते तो वो उनसे मुश्तबा (उन पर अविश्वास) हो गया और दिल में उनसे खौफ महसूस करने लगा। उनहों ने कहा "दारो नहीं, हम तो लूट की क़ौम की तरफ भेज गए हैं" 
+[11:71] इब्राहिम की बीवी खड़ी हुई थी वो ये सुनकर हस दी (हँसे) फिर हमने उसको इशाक की और इशाक के बाद याकूब की ख़ुशख़बरी दी 
+[11:72] वो बोली "हाय मेरी कम्बख्त! क्या! अब मेरे हां औलाद होगी जबके मैं बुढ़िया फूल गई और ये मेरे मियां भी बूढ़े हो गए? ये तो बड़ी अजीब बात है'' 
+[11:73] फरिश्तों ने कहा ''अल्लाह के हुकुम पर ताज्जुब करती हो? यकीनन अल्लाह निहायत काबिल-ए-तारीफ और बड़ी शान वाला है” 
+[11:74] फिर जब इब्राहिम की घबराहट दूर हो गई और (औलाद की बशारत से) उसका दिल खुश हो गया तो उसने कौम ए लूट के मामले में हमसे झगड़ा शुरू किया 
+[11:75] हकीकत में इब्राहिम बड़ा हलीम और नरम दिल आदमी था और हर हाल में हमारी तरफ रूजू करता था
+[11:76] (आख़िर ए कार हमारे फ़रिश्तों ने उसे कहा) "ऐ इब्राहिम, इसके बाज़ आ जाओ, तुम्हारे रब का हुकुम हो चुका है और अब उन लोगों पर वो अज़ाब आ कर रहेगा जो किसी के फेर नहीं फिर सकता" 
+[11:77] और जब हमारे फ़रिश्ते लुट के पास पहुँचे तो उनकी आमद से वो बहुत घबराया और दिल तंग हुआ और कहने लगा के आज बड़ी मुसीबत का दिन है 
+[11:78] (महमानो का आना था के) उसकी क़ौम के लोग बे-इख्तियार उसके घर की तरफ दौड़ पड़े। पहले से वो ऐसी ही बदकारियों के शौकीन थे। लुट ने उनसे कहा "भाइयों, ये मेरी बेटियां मौजूद हैं, ये तुम्हारे लिए पाकीजा-तरर हैं। कुछ खुदा का खौफ करो और मेरे मेहमानों के मामले में मुझे ज़लील न करो। क्या तुम में कोई भला आदमी नहीं?" 
+[11:79] उनको ने जवाब दिया "तुझे तो मालूम ही है के तेरी बेटियों में हमारा कोई हिसा नहीं है और तू ये भी जानता है के हम चाहते क्या हैं" 
+[11:80] लूट ने कहा " काश मेरे पास इतनी ताक़त होती के तुम्हें सीधा करदेता, या कोई मज़बूत सहारा ही होता के" उसकी पनाह लेता” 
+[11:81] तब फ़रिश्तों ने उसे कहा के “ऐ लुट, हम तेरे रब के भेजे हुए फ़रिश्ते हैं। ये लोग तेरा कुछ न बिगाड़ सकेंगे। बस तू कुछ रात रहे अपने एहल ओ अयाल को लेकर निकल जा और देखो, तुम में से कोई शक्स पीछे पलट कर।” ना देखे मगर तेरी बीवी (साथ नहीं जाएगी) क्योंकि उसपर भी वही कुछ गुज़रने वाला है जो इन लोगों पर गुज़रना है। उनकी तबाही के लिए सुबह का वक्त मुकर्रर है। सुबह होते अब दिन ही कितनी है” 
+[11:82] फिर जब हमारे फैसले का वक्त आ गया तो हमने हमें बस्ती को तलपट (उल्टा) करदिया और उसपर पकी हुई मिट्टी (पकी हुई मिट्टी) के पत्थर तोड़-तोड़ बरसाये 
+[11:83] जिन में से हर पत्थर तेरे रुब के हां निशान ज़्यादा था और ज़ालिमों से ये सज़ा कुछ दूर नहीं है 
+[11:84] और मदियां वालों की तरफ हमने उनके भाई शोएब को भेजा. उसने कहा "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है। और नाप तौल में कमी ना किया करो। आज मैं तुम्हारे अच्छे हाल में देख रहा हूँ, मगर मुझे डर है के कल तुम्पर ऐसा दिन आएगा जिसका अज़ाब सबको घेर लेगा" 
+[11:85] और ऐ बिरादरान ए क़ौम, ठीक ठीक इन्साफ के साथ पूरा नापो और तोलो (माप) और लोगों को उनकी चीज़ में घाटा (नुकसान) ना दिया करो और ज़मीन में फ़साद ना फ़ायलते फिरो 
+[11:86] अल्लाह की दी हुई बचत (लाभ) तुम्हारे लिए बेतार है अगर तुम मोमिन हो और बहार-हाल मैं तुम्हारे ऊपर कोई निगरानी ए कार नहीं हूं" 
+[11:87] उन्होन ने जवाब दिया "ऐ शोएब, क्या तेरी नमाज़ तुझे ये सिखाती है के हम उन सारे माबूदों को छोड़ दें जिनकी परस्तिश हमारे बाप दादा करते थे? हां ये के हमको अपने माल में अपनी मंशा(जैसा हम चाहें) के मुताबिक तसर्रफ(खर्च/उपयोग) करने का इख्तियार ना हो? बस तू ही तो एक आली ज़र्फ और रस्तबाज़ आदमी (सहनशील और सही दिशा वाला) रह गया है”
+[11:88] शोएब ने कहा "भाइयों, तुम खुद ही सोचो के अगर मैं अपने रब की तरफ से एक खुली शहादत पर था और फिर उसने अपने हां से मुझको अच्छा रिज्क भी आता किया (तो इसके बाद मैं तुम्हारी गुमराहियां और हराम-खोरियों में तुम्हारा शरीक ए हाल कैसे हो सकता है) हूं?) और मैं हरगिज ये नहीं चाहता के जिन बातों से मैं तुमको रोकता हूं उनका खुद इर्तकाब करूं। मैं तो इस्लाह करना चाहता हूं जहां तक ​​भी मेरा बस चले और ये जो कुछ करना चाहता हूं उसका सारा इन्हिसार अल्लाह की तौफीक पर है किया और हर मामले में उसकी तरफ मैं रूजू करता हूं 
+[11:89] और ऐ बिरादरान ए क़ौम, मेरे खिलाफ़ तुम्हारी हद धर्मी कहीं ये नौबत न पाहुंचा दे के आख़िर ए कर तुमपर भी वही अज़ाब आ कर रहे जो नूह या हुड या सालेह की क़ौम पर आया था. और लुट की क़ौम तो तुमसे कुछ ज़्यादा दूर भी नहीं है 
+[11:90] देखो! अपने रब से माफ़ी मांगो और उसकी तरफ पलट आओ, बेशक मेरा रुब रहीम है और अपने मख़लूक से मुहब्बत रखता है” 
+[11:91] उनहों ने जवाब दिया “ऐ शोएब, तेरी बहुत सी बातें तो हमारी समझ ही में नहीं आती. और हम देखते हैं कि तू हमारे दरमियान एक बे-ज़ार आदमी है। तेरी बिरादरी ना होती तो हम कभी का तुझसे संगसार (पत्थर से मौत के घाट उतार देते) कर चुके होते, तेरा बलबूटा तो इतना नहीं है के हमपर भारी हो” 
+[11:92] शोएब ने कहा “भाइयों, क्या मेरी बिरादरी तुमपर अल्लाह से ज्यादा भारी है के तुमने (बिरादरी का तो खौफ किया और) अल्लाह को बिल्कुल पास ए पुश्त (तुम्हारे पीछे) वापस) दाल दिया? जान रक्खो के जो कुछ तुम कर रहे हो वो अल्लाह की गिरफ़्तार से बाहर नहीं है 
+[11:93] ऐ मेरी क़ौम के लोगों, तुम अपने तरीक़े पर काम किये जाओ और मैं अपनी तारीख़ पर करता रहूँगा। जल्दी ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि किस पर ज़िल्लत का अज़ाब आता है और कौन झूठा है। तुम भी इंतजार करो और मैं भी तुम्हारे साथ चश्मा-बरा हूं (मैं भी तुम्हारे साथ देखूंगा)" 
+[11:94] आखिर ए कार जब हमारे फैसले का वक्त आ गया तो हमने अपनी रहमत से शोएब और उसके साथी मोमिनो को बचा लिया और जिन लोगों ने जुल्म किया था उनको एक मौका धमाके ने ऐसा पकड़ा के वो अपनी बस्तियों में बे-हिस्स ओ हरकत (बेजान पड़ा हुआ) पड़े के पड़े रह गए 
+[11:95] गोया वो कभी वहां रहे बेसी ही ना थाय. सुनो! मदियां वाले भी दूर फेंक दिए गए जिस तरह समूद फेंके गए थे 
+[11:96] और मूसा को हमने अपने निशानियां और खुली खुली सनद ए ममोरियात (स्पष्ट अधिकार) के साथ फिरौन और उसके अयान ए सल्तनत की तरफ भेजा 
+[11:97] मगर उनहों ने फिरौन के हुकुम की जोड़ी की हलनके फिरौन का हुकुम रास्ता (दाहिनी दिशा) पर ना था 
+[11:98] कयामत के रोज़ वो अपनी क़ौम के आगे आगे होगा और अपनी पेशवाई में उन्हें दोज़ख की तरफ ले जाएगा। कैसी बिगड़ जाए वरूद (मनहूस मंजिल) है ये जिस पर कोई पहुंचे 
+[11:99] और उन लोगों पर दुनिया में भी लानत पड़ी और कयामत के रोज़ भी पड़ेंगे। कैसा बुरा सिला है ये जो किसी को मिले
+[11:100] ये चांद बस्तियां की सरगुज़िश्त (खाता) है जो हम तुम्हें सुना रहे हैं। इनमें से बाज़ अब भी खड़ी हैं और बाज़ की फ़सल कट चुकी है 
+[11:101] हमने उनपर ज़ुल्म नहीं किया, उन्होन ने आप ही अपने ऊपर सितम ढाया। और जब अल्लाह का हुकुम आ गया तो उनके वो माबूद जिन्हे वो अल्लाह को छोड़ कर पुकारते थे, उनके कुछ काम ना आ सके। और उनको ने हलाकत ओ बरबादी के सिवा उन्हें कुछ फ़ायदा ना दिया 
+[11:102] और तेरा रब्ब जब किसी जालिम बस्ती को पकड़ता है तो फिर उसकी पकड़ ऐसी ही हुआ करती है, फिल वक़हे उसकी पकड़ बड़ी सच और दर्दनाक होती है 
+[11:103] हकीकत ये है के इस में एक निशानी है हर उस शक्स के लिए जो अज़ाब ए आखिरी का खौफ करे। वो एक दिन होगा जिसमें सब लोग जमा होंगे और फिर जो कुछ भी हमें रोज़ होगा सब की आँखों के सामने होगा 
+[11:104] हम उसके लेन में कुछ बहुत ज़्यादा तक़रीर नहीं कर रहे हैं, बस एक गिनी चुनी मुद्दत उसके लिए मुकर्रर है 
+[11:105] जब वो आएगा तो किसी को बात करने का मजा ना होगा, इल्ला ये के खुदा की इज्जत से कुछ अर्ज़ करे, फिर कुछ लोग हमसे रोज़ बदबख्त होंगे और कुछ नई बख्त 
+[11:106] जो बद-बख्त होंगे वो दोज़ख में जाएंगे (जहां गर्मी और प्यास की शिद्दत से)। वो हांपेंगे और फुनकारे मारेंगे (आह और कराह) 
+[11:107] और उसकी हालत में वो हमेशा रहेंगे जब तक के जमीन ओ आसमान कायम हैं, इल्ला ये के तेरा रब कुछ और चाहे। बेशक तेरा रब पूरा इख्तियार रखता है के जो चाहे करे 
+[11:108] रहे वो लोग जो नइक बख्त निकलेंगे, तो वो जन्नत में जाएंगे और वहां हमेशा रहेंगे जब तक जमीन ओ आसमान कायम है, इल्ला ये के तेरा रुब कुछ और चचे। ऐसी बख्शीश उनको मिलेगी जिसका सिलसिला कभी मुनक्का (खतम) न होगा 
+[11:109] पास (ऐ नबी), तू उन माबूदों की तरफ से किसी शक्क में न रह जिनकी ये लोग इबादत कर रहे हैं। ये तो (बस लकीर के फकीर बने हुए) उसकी तरह पूजा पात किये जा रहे हैं जिस तरह पहले उनके बाप दादा करते थे। और हम इनका हिसा इन्हें भरपुर देंगे बिना इसके इस में कुछ कासर हो 
+[11:110] हम इसे पहले मूसा को भी किताब दे चुके हैं और उसके बारे में भी इख्तिलाफ किया गया था। अगर तेरे रब की तरफ से एक बात पहले ही ताई न करदी गई होती तो इख्तिलाफ करने वालों के दरमियान में कभी का फैसला चुका दिया जाता। ये वक़िया है के ये लोग इसकी तरफ़ से शक्क और ख़लजान (अशांत करने वाला संदेह) में पड़े हुए हैं 
+[11:111] और ये भी वक़िया है के तेरा रब इन्हें इनके अमल का पूरा पूरा बदला दे कर रहेगा। यक़ीनन वो इनकी सब हरकतों से ख़बर है
+[11:112] पास (ऐ मुहम्मद), तुम और तुम्हारे वो साथी जो (कुफ्र ओ बगावत से ईमान ओ इताअत की तरफ) पलट आए हैं, ठीक ठीक राह-ए-रास्त पर साबित क़दम रहो जैसा के तुम्हें हुकुम दिया गया है। और बंदगी की हद से तजावुज ना करो. जो कुछ तुम कर रहे हो उसपर तुम्हारा रब निगाह रखता है 
+[11:113] जालिमों की तरफ़ ज़रा ना झुकना वरना जहन्नुम की लपेट में आ जाओगे और तुम्हें कोई ऐसी वाली ओ सरपरस्त ना मिलेगा जो खुदा से तुम बच सके और कहीं से तुमको मदद ना पहनोगे 
+[11:114] और देखो, नमाज़ क़याम करो दिन के दोनों सिरों पर (दिन के दो छोर) और कुछ रात गुज़रने पर। दर हकीकत नेकियां बुराइयों को दूर कर देती हैं, ये एक याद दिहानी है उन लोगों के लिए जो खुदा को याद रखने वाले हैं 
+[11:115] और सब्र कर, अल्लाह नेकी करने वालों का अजर कभी ज़या नहीं करता 
+[11:116] फिर क्यों ना उन क़ौमों में जो तुमसे पहले गुज़र चुकी हैं ऐसे अहले ख़ैर मौज़ूद रहे जो लोगों को ज़मीन में फ़साद बरपा करने से रोकते हैं? ऐसे लोग निकले भी तो बहुत काम जिनको हमने उन क़ौमों में से बचा लिया, वरना जालिम लोग तो उन्ही मौजों (आसानी और आराम) के पीछे पड़े रहे, जिनके समान उन्हें फरवानी के साथ दिए गए थे (उन्हें सम्मानित किया गया) और वो मुजरिम बनकर रहे 
+[11:117] तेरा रब ऐसा नहीं है के बस्तियों को न-हक़्क़ तबह करदे हालंके उनके बशिंदे इस्लाह करने वाले माननीय 
+[11:118] बेशक तेरा रब अगर चाहता तो तमाम इंसानों को एक गिरह बना सकता था, मगर अब तो वो मुख़्तलिफ़ तरीक़ों ही पर चलते रहेंगे 
+[11:119] और रहो राह-रवियों से सिर्फ वो लोग बचेंगे जब तक तेरे रब की रहमत है। इसी (आजादी इंतेखाब ओ इख्तियार) के लिए ही तो उसने उन्हें अदा किया था और तेरे रब की वो बात पूरी हो गई जो उसने कही थी के मैं जहन्नुम को जिन्न और इंसान, सबसे बाहर दूँगा 
+[11:120] और (ऐ मुहम्मद), ये पैगंबरों के किस्से जो हम तुम्हें सुनाते हैं हैं, वो चीज़े हैं जिनके बारे में हम तुम्हारे दिल को मज़बूत करते हैं। इनके अंदर तुमको हकीकत का इलम मिला और ईमान लाने वालों को हिदायत और बेदारी नसीब हुई 
+[11:121] रहे वो लोग जो ईमान नहीं लाते, तो उनसे कहदो के तुम अपने तारीख पर काम करते रहो और हम अपने तारीख पर किया करते हैं 
+[11:122] अंजाम ए कर का तुम भी इंतज़ार करो और हम भी मुंतज़िर (इंतज़ार) कर रहे हैं 
+[11:123] आसमान और ज़मीन में जो कुछ छुपा हुआ है सब अल्लाह के क़ब्ज़े कुदरत में है। और सारा मामला उसी की तरफ रूजू किया जाता है। पास (ऐ नबी) तू उसकी बंदगी कर और उसी पर भरोसा रख। जो कुछ तुमलोग कर रहे हो तेरा रब उसे बेख़बर नहीं है 
+
+सूरह 12: युसूफ (जोसेफ) 
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+[12:1] अलिफ़, लाम, रा.. ये उस किताब की आयत है जो अपना मुद्दुआ (इसकी वस्तु) साफ़ साफ़ बयान करती है 
+[12:2] हमने इसे नाज़िल किया है कुरान बना कर अरबी ज़ुबान मैं ता-के तुम (एहले अरब) इसको अच्छी तरह समझ सको
+[12:3] (ऐ मुहम्मद), हम कुरान को तुम्हारी तरफ वही करके बेहतरीन जोड़ी में वाकियात और हक़ीक़त तुमसे बयां करते हैं, वरना इसे पहले तो (चीजों से) तुम बिल्कुल ही बे-खबर थे 
+[12:4] ये उस वक्त का जिक्र है जब यूसुफ ने अपने बाप से कहा "अब्बाजान, मैंने ख्वाब देखा है के ग्यारह (ग्यारह) सितारे हैं और सूरज और चाँद हैं और वो मुझे सजदा कर रहे हैं" 
+[12:5] जवाब में उके बाप ने कहा, "बेटा, अपना ये ख्वाब अपने भाइयों को ना सुनाना वरना वो तेरे डरपे आजर हो जायेंगे(किसी भी बुराई की साजिश रचेंगे) के विरुद्ध योजना आप), हकीकत ये है के शैतान आदमी का खुला दुश्मन है 
+[12:6] और ऐसा ही होगा (जैसा तू ने ख्वाब में देखा है के) तेरा रब तुझ (अपने काम के लिए) मुंतखब (चुनें) करेगा और तुम्हें बातों की तह तक पहचानना सिखाएगा और तेरे ऊपर और आले याक़ूब पर अपनी नियामत उसी तरह पूरी करेगी जिस तरह इस तरह पहले वो तेरे बुज़ुर्गों, इब्राहीम और इस्हाक़ पर कर चुका है, यकीनन तेरा रब आलिम (सर्व-ज्ञानी)-ओ-हकीम है (सर्व-ज्ञानी)" 
+[12:7] हकीकत ये है के यूसुफ और उसके भाइयों के क़िस्से में पूछने वालों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं 
+[12:8] ये क़िस्सा यूं शुरू होता है के उसके भाइयों ने आपस में कहा “ये यूसुफ़ और इसका भाई, दोनों हमारे वालिद (बाप) को हम सब से ज़्यादा मेहबूब हैं हलांके हम एक पूरा जत्था (बैंड) हैं। सच्ची बात ये है के हमारे अब्बाजान बिलकुल ही बहक गए हैं 
+[12:9] चलो यूसुफ को क़त्ल करदो या उसे कहीं फेंक दो ता-के तुम्हारे वालिद की तवज्जु (ध्यान दें) सिर्फ तुम्हारी तरफ हो जाए ये काम कर लेने के बाद फिर से तैयार रहना” 
+[12:10] इसपर उन में से एक बोला "यूसुफ को कत्ल न करो, अगर कुछ करना ही है तो उसे किसी अंधे कुवें (अच्छी तरह से) में डाल दो। कोई आता जाता काफिला (कारवां) उसे निकल ले जाएगा" 
+[12:11] इस कराराद पर उन्होन ने जा कर अपने बाप से कहा, “अब्बाजान, क्या बात है कि आप यूसुफ के मामले में हमपर भरोसा नहीं करते हलंके हम उसके सच्चे खैर-ख्वा (शुभचिंतक) हैं 
+[12:12] कल उसे हमारे साथ भेज दीजिए, कुछ चार-चुग (स्वतंत्र रूप से खाओ) लेगा और खेल-कूद से भी दिल बहलाएगा, हम उसकी हिफाज़त को मौजूद हैं" 
+[12:13] बाप ने कहा "तुम्हारा इसे ले जाना मुझे शक गुजारता है (मुझे परेशान करता है) और मुझको अंदेशा है के कहीं इसे भेड़िया (भेड़िया) ना फाड़ खाए जबके तुम इसे गाफिल हो" 
+[12:14] उनको ने जवाब दिया, "अगर हमारे होते इसे भेदिये" (भेड़िया) ने खा लिया, जबके हम एक जत्था (बैंड) हैं, तब तो हम बदे ही निकम्मे होंगे'' 
+[12:15] इस तरह इसरार करके जब वो उसे ले गए और उनहों ने ताई कर लिया के उसे एक अंधे कुवें (खैर) में छोड़ दें, तो हमने यूसुफ को वही (खुलासा) की ''एक'' वक्त आएगा जब तू इन लोगों को इनकी ये हरकत बताएगा, ये अपने फेल के नटाईज से बे खबर हैं” 
+[12:16] शाम को वो रोते पीठ-ते (विलाप करते हुए) अपने बाप के पास आए
+[12:17] और कहा "अब्बाजान, हम दौड़ने का मुकाबला करने में लग गए थे और यूसुफ को हमने अपने सामान के पास छोड़ दिया था कि इतने में भेड़िया (भेड़िया) आकर उसे खा गया। आप हमारी बात का यकीन ना करेंगे चाहे हम सच्चे ही हों" 
+[12:18] और वो यूसुफ के कमीज (शर्ट) पर झूठ मूठ का खून लगा कर आये थे। ये सुनकर उनके बाप ने कहा, "बल्के तुम्हारे नफ्स ने तुम्हारे लिए एक बड़ा काम को आसान बना दिया। अच्छा सब्र करूंगा और खूबी करूंगा। जो बात तुम बना रहे हो उसपर अल्लाह ही से मदद मांगी जा सकती है।" 
+[12:19] उधर एक काफिला आया और उसने अपने पानी लाने के लिए भेजा। सक़्के (जल वाहक) ने जो कुवें में डोल (बाल्टी) डाला तो (यूसुफ को देख कर) पुकार उठा "मुबारक हो! यहाँ तो एक लड़का है"। उन लोगों ने उसको माल ए तिजारत समझ कर छुपा लिया, हालंके जो कुछ वो कर रहे थे खुदा उसे बाख़बर था 
+[12:20] आखिर ए कार उन्होन ने उसको थोड़ी सी कीमत पर चंद दिरहमो के बदले बेच डाला और वो उसकी कीमत के मामले में कुछ ज्यादा के उम्मेदवार ना थाय 
+[12:21] मिसर (मिस्र) के जिस शक्स ने उसे खरीदा उसने अपनी बीवी से कहा, "इसको अच्छी तरह रखना, बाद नहीं के ये हमारे लिए मुफीद (उपयोगी) साबित हो या हम इसे बेटा बना लें"।इस तरह हमने यूसुफ के लिए हमें सर-जमीन में क़दम जमाने की सूरत निकली और उसे मामला फहमी की तालीम देने का इंतेज़ाम किया। अल्लाह अपना काम करके रहता है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं 
+[12:22] और जब वह अपनी पूरी जवानी को पाहुंचा तो हमने उसे कुव्वत ए फैसला और इलम अता किया, इस तरह हम दूसरे लोगों को जजा देते हैं 
+[12:23] जिस औरत के घर में वह था वो उसपर डोरे डालने लगी (उसे ललचाना शुरू कर दिया) और एक रोज़ दरवाज़े बंद करके बोली “आजा”। यूसुफ ने कहा, "खुदा की पनाह, मेरे रब ने तो मुझे अच्छी मंजिल बख्शी (और मैं ये काम करूं?) ऐसे जालिम कभी फलाह नहीं पाया करते" 
+[12:24] वो उसकी तरफ बड़ी और यूसुफ भी उसकी तरफ बढ़ता अगर अपने रब की बुरहान ना देख लेता (अपने भगवान का सबूत) ऐसा हुआ। ता-के हम उसे बड़ी और बेहयायी (अभद्रता और अभद्रता) को दूर कर दें, दर-हकीकत वो हमारे चुने हुए बंदोंमें से था 
+[12:25] आखिर ए कार यूसुफ और वो आगे पीछे दरवाजे की तरफ भागे और उसने पीछे से यूसुफ का कमीज (खींच कर) फाड़ दीया, दरवाज़े पर दोनो ने उसके शोहर को मौजुद पाया। उसे देखते ही औरत कहने लगी, "क्या सजा है उस लड़के की जो तेरी घरवाली पर नियत खराब करे? इसके सिवा और क्या सजा हो सकती है के वो क़ैद किया जाए या उसे सही अज़ाब दिया जाए" 
+[12:26] यूसुफ़ ने कहा "यही मुझे फांसने की कोशिश कर रही थी"। क्या औरत के अपने कुंबे (परिवार) वालों में से एक शक्स ने (कारने की) शहादत पेश की है, "अगर यूसुफ का कमीज़ आगे से फटा हो तो औरत सच्ची है और ये झूठा 
+[12:27] और अगर उसका कमीज़ पीछे से फटा हो तो औरत झूठी है और ये सच्चा"
+[12:28] जब शोहर ने देखा के युसूफ का कमीज पीछे से फटा है तो उसने कहा "ये तुम औरतों की चालाकियां हैं, हकीकत बड़े गजब की होती हैं तुम्हारी चालें 
+[12:29] युसुफ, इस मामले से दरगुजर कर और ऐ औरत, तू अपने कसूर की माफी मांग, तू ही असल मैं ख़तरा थी।” 
+[12:30] शहर की औरतें आपस में चर्चा करने लगी के "अज़ीज़ की बीवी अपने नौजवान गुलाम के पीछे पड़ी हुई है, मुहब्बत ने उसको बे-क़ाबू कर रखा है। हमारे नज़दीक तो वो सारी गलती कर रही है" 
+[12:31] उसने जो उनकी ये मकराना बातें सुनी तो उनको बुलावा भेज दिया और उनके लिए तकिया-दार मजलिस अरस्ता की और ज़ियाफत में हर एक के आगे एक चूड़ी (चाकू) रख दी। (फिर ऐन हमें वक्त जबके वो फाल काट कर खा रही थी) उसने यूसुफ को इशारा किया के उनके सामने निकल आ। जब उन औरतों की निगाह उसपर पड़ी तो वो दंग रह गई और अपने हाथ काट बैठी और सच (सहज) पुकार उठी " हाशा-लिल-लाह (भगवान हमारी रक्षा करें), ये शक्स इंसान नहीं है, ये तो कोई बुज़ुर्ग फ़रिश्ता है" 
+[12:32] अज़ीज़ की बीवी ने कहा "देख लिया! ये है वो शक्स जिसके मामले में तुम मुझपर बातें बनाती थी। बहस में मैंने इसे रुझाने (लुभाने) की कोशिश की थी मगर ये बच निकला। अगर ये मेरा कहना ना मानेगा तो क़ैद किया जाएगा और बहुत ज़लील ओ ख्वार होगा 
+[12:33] यूसुफ ने कहा “ऐ मेरे रब, कैद मुझे मंजूर है बा-निस्बत इसके मैं वो काम करूं जो ये लोग मुझसे चाहते हैं और अगर तू नहीं इनकी चालों को मुझसे दफा ना किया तो मैं इनके दाम में फंस जाऊंगा और जाहिलों में शामिल हो जाऊंगा 
+[12:34] उसके रब ने उसकी दुआ कबूल की और उन औरतों की चलें उससे दफा करदी। बेचैन वही है जो सब की सुनता है और सब कुछ जानता है 
+[12:35] फिर उन लोगों को ये समझ के एक मुद्दत के लिए उसे क़ैद करदें हलंके वो (उसकी पाक दमानी और खुद अपनी औरतों के बुरे अतवर की) सारी निशानियां देख चुके थे 
+[12:36] क़ैद-ख़ाने (जेल) में दो ग़ुलाम और भी उसके साथ दाख़िल हुए। एक रोज़ उन में से एक ने उसे कहा "मैंने ख़्वाब में देखा है के मैं शराब कशीद कर रहा हूँ" दूसरे ने कहा, "मैंने देखा के मेरे सर पर रोटियाँ रखी हैं और परिंदे उनको खा रहे हैं"। डोनो ने कहा "हमें इसकी ताबीर बताइए, हम देखते हैं के आप एक नए आदमी हैं" 
+[12:37] यूसुफ ने कहा: "यहां जो खाना तुम्हें मिला करता है उसके आने से पहले मैं तुम्हें ख्वाबों की ताबीर बता दूंगा। ये इलम उन उलूम से है जो मेरे रब ने मुझे अता किए हैं। वाकिया ये है के मैंने उन लोगों का तरीक़ा छोड़ कर जो अल्लाह पर ईमान नहीं लाते और आख़िरत का इंकार करते हैं 
+[12:38] अपने बुज़ुर्गों, इब्राहिम, इशाक और याक़ूब का तरीक़ा इख्तियार किया है, हमारा ये काम नहीं है के अल्लाह के साथ किसी को शरीक तेहरायें .दर-हकीकत ये अल्लाह का फजल है हमपर और इंसानों पर (के उसने अपने सिवा किसी का बंदा हमें नहीं बनाया) मगर अक्सर लोग शुक्र नहीं करते
+[12:39] ऐ जिंदान (जेल) के साथियों (साथी कैदियों), तुम खुद ही सोचो के बहुत से मुतफ़र्रिक (विभिन्न) रब बेहतर हैं या वो एक अल्लाह जो सब पर गालिब है 
+[12:40] उसको छोड़ कर तुम जिसकी बंदगी कर रहे हो वो इसके सिवा कुछ नहीं हैं के बस चंद नाम हैं जो तुमने और तुम्हारे आबा ओ अजदाद ने रख लिए हैं। अल्लाह ने उनके लिए कोई सनद नाज़िल नहीं की। फरमा रवायी (संप्रभुता) का इक्तेदार अल्लाह के सिवा किसी के लिए नहीं है। उसका हुकुम है के खुद उसके सिवा तुम किसी की बंदगी ना करो, यही थीथ सीधा तारीक ए जिंदगी है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं 
+[12:41] ऐ जिंदान के साथियों, तुम्हारे ख्वाब की ताबीर ये है के तुम में से एक तो अपने रब (शाह ए मिस्र) को शराब पिलाएगा, रहा दूसरा तो उसे सूली पर चढ़ाया जाएगा (सूली पर चढ़ाया जाएगा) और परिंदे उसका सर नोच नोच कर खाएंगे। फैसला हो गया उस बात का जो तुम पूछ रहे थे" 
+[12:42] फिर उनमें से जिसका मुतालिक ख्याल था के वो रिहा (रिलीज़) हो जाएगा उसे यूसुफ ने कहा के "अपने रब (शाह-ए-मिसर) से मेरा ज़िक्र करना"। मगर शैतान ने उसे ऐसा गफ़लत में डाला के वो अपने रब (शाह-ए-मिसर) से उसका ज़िक्र करना भूल गया और यूसुफ काई साल क़ैद-खाने में पड़ा रहा 
+[12:43] एक रोज़ बादशाह ने कहा “मैंने ख्वाब में देखा है के सात (सात) मोटी गायें (गायें) जिनको सात (सात) दुबली (दुबली) गायें खा राही हैं, और अनाज के सात बालें हरी (हरा) हैं और पुरानी सात सुखी हैं। ऐ एहले दरबार, मुझे इस ख्वाब की ताबीर बताओ अगर तुम ख्वाबों का मतलब समझते हो।” 
+[12:44] लोगों ने कहा "ये तो परेशान ख्वाबों की बातें हैं और हम इस तरह के ख्वाबों का मतलब नहीं जानते" 
+[12:45] उन दो क़ैदियों में से जो शक्स बच गया था और उसे एक मुद्दत दराज़ के बाद अब बात याद आई, उसने कहा "मैं आप हजरत को इसकी तावील बताता हूं, मुझे ज़रा (क़ैद-खाने में युसूफ के पास) भेज दीजिए” 
+[12:46] उसने जा कर कहा “यूसुफ, ऐ सरापा रस्ती (हे नेक इंसान), मुझे इस ख्वाब का मतलब बता के सात मोती गाएं जिनको सात दुबली गाएं खा रही हैं और सात बालें हरी (मक्के की हरी बालियाँ) हैं और सात सुखी, शायद के मैं उन लोगों के पास जाऊं और शायद के वो जान लें” 
+[12:47] युसूफ ने कहा “सात बरस तक लगतार तुमलोग खेती-बाड़ी करते रहोगे।” इस दौरन में जो फ़सलें (फसलें) तुम काटो उन में से बस थोड़ा सा हिसा, जो तुम्हारी खुराक के काम आए निकलो और बाकी को उसके बालों में ही रहने दो 
+[12:48] फिर सात बरस बहुत आएंगे। हमारे ज़माने में वो सब गल्ला (मकई) खा लिया जाएगा जो तुम हमारे लिए वक़्त के लिए जमा करोगे, अगर कुछ बचेगा तो बस वही जो तुमने महफ़ूज़ कर रखा हो 
+[12:49] इसके बाद फिर एक साल ऐसा आएगा जिसमें बारां-ए-रहमत (प्रचुर मात्रा में बारिश) से लोगों की फरियाद रस की जाएगी और वो रस निचोड़ेंगे”
+[12:50] बादशाह ने कहा उसे मेरे पास लाओ। मगर जब शाही फ़रिश्तादा (शाही दूत) यूसुफ़ के पास पहुंचा तो उसने कहा "अपने रब के पास वापस जा और उससे पूछ के उन औरतों का क्या मामला है जिन्हों ने अपने हाथ काट लिए थे? मेरा रब तो उनकी मक्कारी से वाकिफ़ ही है।" 
+[12:51] क्या पर बादशाह ने उन औरतों से दरियाफ्त किया है "तुम्हारा क्या ताजूरबा है उस वक्त का जब तुमने यूसुफ को रुझाने (लुभाने) की कोशिश की थी?" सब ने एक ज़ुबान होकर कहा "हाशा लिल्लाह! (भगवान हमारी रक्षा करें), हमने तो उसमें बुराई का शईबा तक ना पाया।" अज़ीज़ की बीवी बोल उठी, "अब हक़ खुल चुका है, वो मैं ही थी जिसने उसको फुसलाने की कोशिश की थी। बेशक वो बिल्कुल सच्चा है" 
+[12:52] (यूसुफ ने कहा) "इससे मेरी ग़रज़ ये थी के (अज़ीज़) ये जान ले के मैंने डर-पुर्दा उसकी ख़यानत नहीं की थी, और ये के जो ख़ियानत करते हैं उनकी चालों को अल्लाह कामियाबी की राह पर नहीं लगता 
+[12:53] मैं कुछ अपने नफ़्स की बारात नहीं कर रहा हूँ (अपनी आत्मा को पाप से मुक्त नहीं रखता), नफ़्स तो बड़ी (बुराई) पर उक्सता ही है, इल्ला ये के किसी पर मेरे रब की रहमत हो, बेशक मेरा रब बड़ा गफूर ओ रहीम है" 
+[12:54] बादशाह ने कहा "उन्हें मेरे पास लाओ ता-के मैं उनको अपने लिए मखसूस कर लूं"। जब यूसुफ ने उसे गुफ्तगू की तो उसने कहा "अब आप हमारे हां कादर ओ मंजिल रखते हैं और आप की अमानत पर पूरा भरोसा है” 
+[12:55] यूसुफ ने कहा, “मुल्क के खज़ाने मेरे सुपुर्द किजिए, मैं हिफाजत करने वाला भी हूं और इलम भी रखता हूं” 
+[12:56] क्या तारा हमने हमें सर-जमीन में यूसुफ के लिए इक्तेकार (शक्ति) की राह हमवार की। वो मुख्तार था के उसमें जहां चाहे अपनी जगह बने। हम अपनी रहमत से जिसको चाहते हैं नवाजते हैं। नेक लोगों का अजर हमारे हां मारा नहीं जाता 
+[12:57] और आखिरी का अजर उन लोगों के लिए ज्यादा बेहतर है जो ईमान ले आए और खुदा-तरसी के साथ काम करते रहेंगे 
+[12:58] यूसुफ के भाई मिस्र (मिस्र) आए और उसके हां हाजिर हुए, उसने उन्हें पहचान लिया मगर वो उसे ना-आशना था 
+[12:59] फिर जब उसने उनका सामान तय्यार करवा दिया तो चलते वक्त उनसे कहा, “अपने सौतेले भाई को मेरे पास लाना, देखते नहीं हो के मैं किस तरह पैमाना भर कर देता हूं और कैसा अच्छा मेहमान नवाज हूं 
+[12:60] अगर तुम उसे ना लाओगे तो मेरे पास तुम्हारे लिए कोई गल्ला (अनाज) नहीं है बलके तुम मेरे करीब भी ना फटकना” 
+[12:61] उनहों ने कहा, “हम कोशिश करेंगे के वालिद साहब उसे भेजने पर राजी हो जाएं, और हम ऐसा जरूर करेंगे” 
+[12:62] यूसुफ ने अपने ग़ुलामो को इशारा किया के "इन लोगों ने गले के बदले जो माल दिया है वो चुपके से उनके समान ही में रखदो"। ये युसुफ ने इस उम्मीद पर किया के घर पहुंच कर वो अपना वापस पाया हुआ माल पहचान जाएगा (या इस फैयाज़ी पर एहसान-मंद होंगे) और अजब नहीं के फिर पलटें
+[12:63] जब वो अपने बाप के पास गए तो कहा "अब्बाजान, आइंदा हमको गल्ला देने से इंकार कर दिया है, लिहाजा आप हमारे भाई को हमारे साथ भेज दीजिए ता-के हम गल्ला लेकर आएं और उसकी हिफाजत के हम जिम्मेदार हैं" 
+[12:64] बाप ने जवाब दिया "क्या मैं उसके मामले में तुम्हारे जैसा ही भरोसा करूं जैसा पहले उसके भाई के मामले में कर चूका हूं? अल्लाह ही बेहतर मुहाफिज (अभिभावक) है और वो सबसे बढ़कर रहम फरमाने वाला है" 
+[12:65] फिर जब उन्होन ने अपना सामान खोला तो देखा के उनका माल भी उन्हें वापस कर दिया गया है। ये देख कर वो पुकार उठे "अब्बाजान, और हमें क्या चाहिए, देखिए ये हमारा माल भी हमने वापस दे दिया है। बस अब हम जाएंगे और अपने एहल ओ अयाल के लिए रसद (भोजन का प्रावधान) ले आएंगे, अपने भाई की हिफाजत भी करेंगे और एक बरिश्तार (मक्के का एक अतिरिक्त ऊँट भार) और ज़्यादा भी ले आयेंगे। इन्ते गैले का इज़ाफ़ा आसनी के साथ हो जाएगा” 
+[12:66] उनके बाप ने कहा “मैं इसको हरगिज़ तुम्हारे साथ ना भेजूंगा जब तक तुम अल्लाह के नाम से मुझको पैमान (प्रतिज्ञा) ना दे दो इसके लिए मेरे पास जरूर वापस लेकर आओगे।” इल्ला ये के कहीं तुम घर ही ले जाओ”। जब उनहों ने उसको अपना पैमान दे दिया तो उसने कहा "देखो, हमारे इस क़ौल पर अल्लाह निगेहबान हैं" 
+[12:67] फिर उसने कहा "मेरे बच्चों, मिसर के दार-उल-सल्तनत में एक दरवाज़े से दाख़िल न होना बलके मुख़्तलिफ़ दरवाज़ों से जाना। मगर मैं अल्लाह की मशियत से तुमको नहीं बचा सकता, हुकुम उसके सिवा किसी का भी नहीं चलता 
+। दाख़िल हुए तो उसकी ये एहतियाती तदबीर अल्लाह की मशियत के मुक़ाबले में कुछ भी काम ना आ साकी। हां बस याकूब के दिल में जो एक ख़तरा थी उसे दूर करने के लिए उसने अपनी सी कोशिश की। बेशक वो हमारी दी हुई तालीम से साहिब-ए-इलम था मगर अक्सर लोग मामले की हकीकत को जानते नहीं हैं 
+[12:69] ये लोग युसूफ के हुजूर थे तो हमने अपने भाई को अपने पास अलग बुला लिया और उसे बता दिया के " मैं तेरा वही भाई हूं (जो खोया गया) था) अब तू उन बातों का गम ना कर जो ये लोग कर रहे हैं।” 
+[12:70] जब युसूफ ने भाइयों का सामान लधवाने (लोडिंग) लगाया तो उसने अपने भाई के सामान में अपना प्याला (कप) रख दिया। फिर एक पुकारने वाले ने पुकार कर कहा "ऐ काफिले वालों, तुम लोग चोर हो।" 
+[12:71] उनहों ने पलट कर पूछा "तुम्हारी क्या चीज़ खो गई?" 
+[12:72] सरकारी मुलाजिमों ने कहा "बादशाह का पैमाना हमको नहीं मिलता" [और उनके जमादार (मुखिया) ने कहा] "जो शक्स लाकर देगा उसके लिए एक बारीशूतार (मकई का ऊंट लादना) इनाम है, इसका मैं ज़िम्मा लेता हूं।" 
+[12:73] उन भाइयों ने कहा "खुदा की कसम तुम लोग खूब जानते हो के हम इस मुल्क में फ़साद करने नहीं आये हैं, और हम चोरियाँ करने वाले लोग नहीं हैं"
+[12:74] उनहोंने कहा "अच्छा, अगर तुम्हारी बात झूठी निकली तो चोर की क्या सजा है?" 
+[12:75] उनहों ने कहा "उसकी सजा? जिसके समां में से चीज निकले वो आप ही अपनी सजा में रख लिया जाए, हमारे हां तो ऐसे जालिमों को सजा देने का यही तरीका है।" 
+[12:76] तब यूसुफ ने अपने भाई से पहले उनकी खुर्जियां (पैक) की तलाश लेना शुरू की। फिर अपने भाई की खुर्जी (पैक) से गमशुदा चीज़ बारामद कार्ली। इस तरह हमने यूसुफ की ताईद (समर्थन) अपनी तदबीर से की, उसका ये काम ना था के बादशाह के दीन (यानी मिस्र का शाही कानून) में अपने भाई को पकड़ता इल्ला ये के अल्लाह ही ऐसा चाहे। हम जिसके दर्जे चाहते हैं बुलंद करते हैं, और एक इल्म रखने वाला ऐसा है जो हर साहिब-ए-इलम से बला-तार है 
+[12:77] उन भाइयों ने कहा "ये चोरी करे तो कुछ ताजुब की बात भी नहीं, इसके पहले इसका भाई (यूसुफ) भी चोरी कर चूका है"। युसूफ उनकी ये बात सुनकर पी गया (अपनी भावनाओं को दबाते हुए) हकीकत उन्पर ना खोली, बस (ज़ेरी-ए-लब) इतना कहकर रह गया के "बड़े ही बुरे हो तुमलोग, (मेरे मुंह डर मुंह मुझपर) जो इल्जाम तुम लगा रहे हो उसकी हकीकत खुदा खूब जानता है" 
+[12:78] उनहों ने कहा "ऐ सरदार ज़ि-इक़तेदार (अज़ीज़), इसका बाप बहुत बूड़ा आदमी है, इसकी जगह आप हम में से किसी को रख लीजिए। हम आपको बड़ा ही नहीं नफ़्स इंसान पाते हैं।" 
+[12:79] यूसुफ ने कहा "पनाह बा खुदा, दूसरे किसी शक्स को हम कैसे रख सकते हैं, जिसके पास हमने अपना माल पाया है उसको छोड़ कर दूसरे को रखेंगे तो हम जालिम होंगे।" 
+[12:80] जब वो युसूफ से मयूस हो गए तो एक गोशे में जा कर आपस में मशवरा करने लगे। उन में जो सबसे बड़ा था वो बोला "तुम जानते नहीं हो के तुम्हारे वालिद तुमसे खुदा के नाम पर क्या अहद ओ पैमान ले चुके हैं, और इस पहले यूसुफ के मामले में जो ज्यादा तुम कर चुके हो वो भी तुमको मालूम है। अब मैं तो यहां से हरगिज ना जाऊंगा जब तक मेरे वालिद मुझे इजाज़त न दें, या फिर अल्लाह ही मेरे हक में कोई फैसला फरमा दे, के वो सब से बेहतर फैसला करने वाला है 
+[12:81] तुम जा कर अपने वालिद से कहो के “अब्बाजान, आपके साहिबजादे ने चोरी की है। हमने उसे चोरी करते हुए नहीं देखा, जो कुछ हमें मालूम हुआ है बस वही हम बयां कर रहे हैं, और गैब की निगेबानी तो हम ना कर सकते थे 
+[12:82] आप हमें बस्ती के लोगों से पूछ लीजिए जहां हम थे हमें काफिले से डरायाफ्त कर लीजिए जिसके साथ हम आये हैं. हम अपने बयां में बिल्कुल सच्चे हैं।” 
+[12:83] बाप ने ये दास्तां सुन कर कहा “दर-असल तुम्हारे नफ्स ने तुम्हारे लिए एक और बड़ी बात को आसान बना दिया।” अच्छा इसपर भी सब्र करूंगा और खूबी करूंगा। क्या बुरा है के अल्लाह उन सबको मुझसे ला मिलाये, वो सब कुछ जानता है और उसके सब काम हिकमत पर मबनी हैं।” 
+[12:84] फिर वो उनकी तरफ से मुंह फेर कर बैठ गया और कहने लगा के "हाय यूसुफ!" वो दिल ही दिल में ग़म से घुटा जा रहा था और उसकी आँखें सफेद पढ़ गई थीं
+[12:85] बेटों ने कहा "ख़ुदा-रा! आप तो बस युसुफ़ ही को याद किये जाते हैं नौबत ये आ गई है के उसके गम में अपने आप को घुला दें या अपनी जान हलाक कर डालेंगे।" 
+[12:86] उसने कहा " मैं अपनी परेशानी और अपने गम की फरियाद अल्लाह के सिवा किसी से नहीं करता। और अल्लाह से जैसा मैं वाकिफ हूं तुम नहीं हो 
+[12:87] मेरे बच्चों, जा कर यूसुफ और उसके भाई की कुछ तो लगाओ। अल्लाह की रहमत से मायुस न हो, उसकी रहमत से तो बस काफिर ही मायुस हुआ करते हैं।” 
+[12:88] जब ये लोग मिसर जा कर यूसुफ की पेशी में दख़िल हुए तो उन्होन ने अर्ज़ किया के "ए सरदार बा इक्तेदार, हम और हमारे एहल ओ अयाल सख्त मुसीबत में मुबतला हैं और हम कुछ हकीर सी पूंजी लेकर आये हैं, आप हमें भरपुर गल्ला इनायत फरमायें और हमको खैरात दें, अल्लाह खैरात करने वालों को जजा देता है।” 
+[12:89] (ये सुनकर यूसुफ़ से ना रहा गया) उसने कहा, "तुम्हें कुछ ये भी मालूम है कि तुमने यूसुफ़ और उसके भाई के साथ क्या किया था जब तुम नादान थे।" 
+[12:90] वो चौंक कर बोले "क्या तुम यूसुफ हो?" उसने कहा, "हां, मैं यूसुफ हूं और ये मेरा भाई है। अल्लाह ने हमपर एहसान फरमाया। हकीकत ये है कि अगर कोई तकवा और सब्र से काम ले तो अल्लाह के हां ऐसे नए लोगों का अजर मारा नहीं जाता।" 
+[12:91] उन्होन ने कहा "बा-खुदा के तुमको अल्लाह ने हमपर फजीलत बख्शी और वक्ती हम ख़तरा थे।" 
+[12:92] उसने जवाब दिया, "आज तुमपर कोई गिरफ़्तार नहीं, अल्लाह तुम्हें माफ़ करे, वो सब से बढ़कर रहम फ़रमाने वाला है 
+[12:93] जाओ, मेरा ये कमीज़ ले जाओ और मेरे वालिद के मुँह पर डाल दो, उनकी बिनयि पलट आएगी। और अपने सब एहल-ओ-अयाल को मेरे पास ले आओ।” 
+[12:94] जब ये काफिला (मिस्र से) रावना हुआ तो उनके बाप ने (कानन में) कहा "मैं यूसुफ की खुशबू महसूस कर रहा हूं, तुम लोग कहीं ये ना कहने लगो के मैं बुढ़ापे में सात हो गया हूं।" 
+[12:95] घर के लोग बोले "खुदा की कसम आप अभी तक अपने उसी पुराने ख़ब्ते (पुराने भ्रम) में पड़े हैं" 
+[12:96] फिर जब ख़ुश-ख़बरी लेने वाला आया तो उसने युसुफ़ का कमीज़ याक़ूब के मुँह पर डाल दिया और यक़ीन उसकी बिनयि ओद कर आई। उसे) । तब उसने कहा, "मैं तुमसे कहता था ना कि मैं अल्लाह की तरफ से वह कुछ जानता हूं जो तुम नहीं जानते।" 
+[12:97] सब बोल उत्थे "अब्बाजान, आप हमारे गुनाहों की बख्शीश के लिए दुआ करें, वाकाई हम खतरनाक थे।" 
+[12:98] उसने कहा 'मैं अपने रब से तुम्हारे लिए माफ़ी की अंधेरगर्दी करुंगा, वो बड़ा माफ़ करने वाला और रहीम है।' 
+[12:99] फिर जब ये लोग युसूफ के पास पहुंचें तो हमने अपने वलियों को अपने साथ बिठा लिया और (अपने सब कुंबे वालों से) कहा " चलो अब शहर में चलो, अल्लाह ने चाहा तो अमन चैन से रहोगे।"
+[12:100] (शहर में दाख़िल होने के बाद) उसने अपने वलियों को उठा कर अपने पास तख्त पर बिठाया और सब उसके आगे बे इख्तियार सजदे में झुक गए। यूसुफ ने कहा "अब्बाजान, ये ताबीर है मेरे उस ख्वाब की जो मैंने पहले देखा था, मेरे रब ने उसे हकीकत बना दिया। उसका एहसान है के उसने मुझे कैद-खाने से निकाला और आप लोगों को सेहरा से लाकर मुझसे मिलाया, हलांके शैतान मेरे और मेरे भाइयों के दरमियान फसाद डाल चुका वाक़िया ये है के मेरा रब ग़ैर महसूस तदबीरों (रहस्यमय तरीके) से अपनी मशियत पूरी करता है, बेशक वो आलिम और हकीम है 
+[12:101] ऐ मेरे रब, तू नहीं मुझे हुकूमत बख्शी और मुझको बातों की तह तक। पाहुंचना सिखाया। ज़मीन ओ आसमान के बनाने वाले, तू ही दुनिया और आख़िरत में मेरा सरपरस्त है, मेरा ख़तमा इस्लाम पर कर और अंजाम ए कार मुझे सालिहें के साथ मिला'' 
+[12:102] (ऐ मुहम्मद) ये क़िस्सा गैब की ख़बरों में से है जो हम तुमपर वही कर रहे हैं, वरना तुम उस वक्त मौजुद न थे जब यूसुफ के भाइयों ने आपस में इत्तेफाक करके साजिश की थी 
+[12:103] मगर तुम ख्वा कितना ही चाहो इनमें से अक्सर लोग मान कर देने वाले नहीं हैं 
+[12:104] हालंके तुम इस खिदमत पर इनसे कोई उजरत भी नहीं माँगते हो, ये तो एक हिदायत है जो दुनिया वालों के लिए आम है 
+[12:105] ज़मीन और आसमान में कितनी ही निशानियाँ हैं जिनपर से ये लोग गुज़रते रहते हैं और ज़रा तवज्जु नहीं करते 
+[12:106] इनमें अक्सर अल्लाह को मानते हैं मगर है तरह के उसके साथ दूसरों को शरीक ठहरते हैं 
+[12:107] क्या ये मुतमइन हैं के खुदा के अज़ाब की कोई बला इन्हें दबोच ना लेगी या बेखबरी में कयामत की घड़ी अचानक अंदर ना आ जाएगी 
+[12:108] तुम इनसे साफ कहदो के” मेरा रास्ता तो ये है, मैं अल्लाह की तरफ बुलाता हूं, मैं खुद भी पूरी रोशनी में अपना रास्ता देख रहा हूं और मेरे साथी भी, और अल्लाह पाक है और शिर्क करने वालों से मेरा कोई वास्ता नहीं।' 
+[12:109] (ऐ मुहम्मद), तुमसे पहले हमने जो पैगम्बर भेजा था वो सब भी इंसान ही था, और इन्हीं बस्तियों के रहने वालों में से थे, और उनकी तरफ हम वही भेज रहे हैं क़ौमों का अंजाम इन्हें नज़र ना आया जो इनसे पहले गुज़र चुकी हैं? यक़ीनन आख़िरत का घर उन लोगों के लिए और ज़्यादा बेहतर है जिन्हों ने (पैगम्बरों की बात मान कर) तकवे के रवीश इख्तियार की। क्या अब भी तुम लोग ना समझोगे 
+[12:110] (पहले पैगम्बरों के साथ भी यही हो रहा है कि वो मुद्दतों की हिदायतें करते रहे और लोगों ने सुनकर ना दिया) यहां तक ​​के जब पैगम्बर लोगों से मयुस हो गए और लोगों ने भी समझ लिया के उनसे झूठ बोला गया था, तो यकीनन हमारी मदद पैगम्बरों को नहीं मिल पाई। फिर जब ऐसा मौका आ जाता है तो हमारा कायदा ये है कि जिसे हम चाहते हैं बच्चा लेते हैं और मुजरिमों पर से तो हमारा अजब ताला ही नहीं जा सकता
+[12:111] क़िस्सों में अगले लोगों के अक़ल-ओ-होश रखने वालों के लिए इबरत है। ये जो कुछ कुरान में बयान किया जा रहा है ये बनवाती बातें नहीं हैं बल्के जो किताबें इसे पहले आई हुई हैं उनकी तस्दीक है, और हर चीज की तफसील और ईमान लाने वालों के लिए हिदायत और रहमत 
+
+सूरह 13: अर-रा'द (थंडर) 
+------------------------------------------------ 
+[13:1] अलिफ़ लाम मीम रा ये किताब-ए-इलाही की आयत हैं, और जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है वो ऐन हक़ है, मगर (तुम्हारी क़ौम के) अक्सर लोग मान नहीं रहे हैं 
+[13:2] वो अल्लाह हाय है जिसने आसमानों को ऐसे सहरों (समर्थन) के बिना क़याम किया जो तुमको नज़र आते थे, फिर वो अपनी तख्त ए सल्तनत पर जलवा फरमा हुआ, और उसने आफताब (सूरज) ओ महताब (चांद) को एक कानून का बंधन बनाया। इस सारे निज़ाम की हर चीज़ एक वक़्त-ए-मुकर्रर तक के लिए चल रही है। और अल्लाह हाय सारे काम की तद्बीर फरमा रहा है। वो निशानियां खोल-खोल कर बयान करता है, शायद के तुम अपने रब की मुलाकात का यकीन करो 
+[13:3] और वही है जिसने जमीन फैला रखी है, इस में पहाड़ों के खूंटे गाड़ रखे हैं और दरिया बहा दिए हैं, उसी ने हर तरह के फल (फल) के जोडे पेदा किये हैं, और वही दिन पर रात तारी करता है। सारी चीज़ों में बड़ी निशानियाँ हैं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फ़िक्र से काम लेते हैं 
+[13:4] और देखो, ज़मीन में अलग-अलग खित्ते (क्षेत्र) पाये जाते हैं जो एक दूसरे से मुत्तसिल (एक दूसरे के करीब) वक़्त हैं अंगूर के बाग़ हैं, खेतियाँ हैं, खजूर के दरख्त हैं जिनमें से कुछ अकेले (सिंगल) हैं और कुछ दोहरे (डबल ट्रंक)। सबको एक ही पानी साराब करता है मगर मजे में हम किसी को बेहतर बना देते हैं और किसी को कमतर। सब चीज़ों में बहुत सी निशानियाँ हैं उन लोगों के लिए जो अक़ल से काम लेते हैं 
+[13:5] अब अगर तुम्हें तज्जुब करना है तो तज्जुब के काबिल लोगों का ये क़ौल है के "जब हम मर कर मिट्टी हो जायेंगे तो क्या हम नये सिरे से पैदा किये जायेंगे?" ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने रब से कुफ्र किया है, ये वो लोग हैं जिनके गर्दानो में तौक (तौक/बेड़ियाँ) पड़े हुए हैं, ये जहन्नुमी हैं और हमेशा रहेंगे 
+[13:6] ये लोग भलाई से पहले बुराई के लिए जल्दी मचा रहे हैं, हलांके इनसे पहले (जो लोग इस रवीश पर चले हैं उनपर खुदा के अज़ाब की) इब्रत-नाक मिसालें गुजर चुकी हैं। हकीकत ये है के तेरा रब लोगो की ज्यादतियों के साथ उनके साथ चश्मे-पोशी (सहनशीलता) से काम लेता है और ये भी हकीकत है के तेरा रब सख्त सजा देने वाला है 
+[13:7] ये लोग जिन्हों ने तुम्हारी बात मन से इंकार कर दिया है, कहते हैं के “इस शक्स पर इसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों ना उतारी? तुम तो महज़ ख़बरदार होने वाले हो, और हर क़ौम के लिए एक रहनुमा है
+[13:8] अल्लाह एक हामिला (गर्भवती) के पति से वाकिफ है, जो कुछ उसमें बनता है उसे भी वह जानता है और जो कुछ इसमें कामी या बेशी होती है उसमें भी वह खबर रहता है। हर चीज के लिए उसके हां एक मिकदर मुकर्रर है 
+[13:9] वो पोशीदा और जाहिर, हर चीज का आलिम है, वो बुजुर्ग है और हर हाल में बाला-तर रहने वाला है 
+[13:10] तुम में से कोई शक्स ख्वा जोर से बात करे या आहिस्ता, और कोई रात की तारीकी (अंधेरे) में छुपा हुआ हो या दिन की रोशनी में चल रहा हो, उसके लिए सब यक्सन है 
+[13:11] हर शक्स के आगे और पीछे उसके मुकर्रर किये हुए निगरान लगे हुए हैं जो अल्लाह के हुकुम से उसकी देख-भाल कर रहे हैं। हकीकत ये है कि अल्लाह किसी कौम के हाल को नहीं बदल सकता, जब तक वो खुद अपने अवसाफ को नहीं बदल देता, और जब अल्लाह किसी कौम की शामत (प्रतिशोध) लाने का फैसला करले तो फिर वो किसी के ताले नहीं बदल सकता, ना अल्लाह के मुकाबले में ऐसी कौम का कोई हामी ओ मददगार हो सकता है 
+[13:12] वही है जो तुम्हारे सामने बिजली चमकता है जिन्हें देख कर तुम्हें अंदेशे (डर) भी लहक होते हैं और उम्मीदें भी बांधती है, वही है जो पानी से लड़े हुए बादल उतारता है 
+[13:13] बादलों की गरज उसकी हम्द के साथ उसकी पाकी बयां करती है और फरिश्ते उसकी हैबत(आवे) से लरजते हुए उसकी तस्बीह करते हैं। वो ताकत हुई बिजली को भेजता है और (बासा औकात) उन्हें जिसका प्यार चाहता है ऐन इस हाल में गिरा देता है जबके लोग अल्लाह के बारे में झगड़ा करते रहते हैं। फिल वक़हे उसकी चाल बड़ी ज़बरदस्त है 
+[13:14] उसे पुकारना बार-हक़्क़ है, राही वो दूसरी हस्तियां जिन्हें छोड़ कर ये लोग पुकारते हैं, वो उनकी दुआओं का कोई जवाब नहीं दे सकती, उन्हें पुकारना तो ऐसा है जैसे कोई शक्स पानी की तरफ हाथ फैला कर उसे अंधेरा कर दे के तू मेरे मुंह तक पहुंच जा, हलंके पानी उस तक पहुंचने वाला नहीं, बस इसी तरह काफिरों की दुआएं भी कुछ नहीं है मगर एक तीर हदफ (लक्ष्यहीन प्रयास) 
+[13:15] वो अल्लाह ही है जिसकी जमीन ओ आसमान की हर चीज तूं (स्वेच्छा से) ओ करहां (अनिच्छा से) सजदा कर रही है और सब चीज़ों के साये सुबह-ओ-शाम उसके आगे झुकते हैं 
+[13:16] इनसे पूछो, आसमान ओ ज़मीन का रुब कौन है? कहो, अल्लाह, फिर इनसे कहो के जब हकीकत ये है तो क्या तुमने उसे छोड़ कर ऐसे माबूदों को अपना करसाज़ ठहर लिया जो खुद अपने लिए भी कोई नफा ओ नुक्सान का इख्तियार नहीं रखते? कहो, क्या अंधा और आँखों वाला बराबर हुआ करता है? क्या रोशनी और तारीख़ें यक्सन होती हैं? और अगर ऐसा नहीं तो क्या इनके ठहरे हुए शरीकों ने भी अल्लाह की तरह कुछ अदा किया है कि उसकी वजह से अंदर तकलीक (सृजन) का मामला मुश्तबा (एक जैसा लग रहा था) हो गया? कहो, हर चीज का खालिक (निर्माता) सिर्फ अल्लाह है और वह जानता है, सब पर गालिब
+[13:17] अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया और हर नदी नाला अपने ज़र्फ के मुताबिक इसे लेकर चल निकला, फिर जब सैलाब उठा तो साथ पर झाग (फोम) भी आ गया। और वैसे ही झग उन धातुओं (धातुओं) पर भी उठते हैं जिनमें ज़ेवर (आभूषण) और बर्तन (बर्तन) बनाने के लिए लोग पिघलाया करते हैं। इसी मिसाल से अल्लाह हक़ और बातिल के मामले को वाज़ेह करता है। जो झगड़ा है वो उड़ (गायब) हो जाता है और जो चीज़ इंसानों के लिए नाफ़े (फ़ैय्यादमंद) है वो ज़मीन में ठहर जाती है। इस तरह अल्लाह मिसालों से अपनी बात समझता है 
+[13:18] जिन लोगों ने अपने रब की दावत कबूल की है उनके लिए भलाई है। और जिन्होन ने इसे क़बूल ना किया वो अगर ज़मीन की सारी दौलत के भी मालिक हों और उतनी ही और फ़राहम कार्लें तो वो ख़ुदा की पकड़ से बचने के लिए इस सब को फ़िदिया (फिरौती) में दे डालने पर तैयार हो जायेंगे। ये वो लोग हैं जिनसे बुरी तरह हिसाब लिया जाएगा, और उनका ठिकाना जहन्नुम है, बहुत ही बुरा ठिकाना 
+[13:19] भला ये किस तरह मुमकिन है के वो शक्स जो तुम्हारे रब की इस किताब को जो उसने तुमपर नाज़िल की है हक़ जानता है, और वो शक्स जो इस हकीकत की है तरफ से अंधा है, दोनो यकसन हो जाये? हिदायत तो दानिशमंद (बुद्धिमान) लोग ही क़बूल किया करते हैं 
+[13:20] और उनका तर्ज़-ए-अमल ये होता है के अल्लाह के साथ अपने अहद को पूरा करते हैं, उसे मज़बूत बांधने के बाद तोड़ नहीं डालते 
+[13:21] उनकी रवीश ये होती है के अल्लाह ने जिन जिन रावबित को बरक़रार रखने का हुकुम दिया है, उन्हें बरक़रार रखते हैं, अपने रुब से डरते हैं और इस बात का ख़ौफ़ रखते हैं के कहीं उन्हें बुरी तरह हिसाब ना लिया जाए 
+[13:22] उनका हाल ये होता है के अपने रुब की रज़ा के लिए सब्र से काम लेते हैं, नमाज़ क़याम करते हैं, हमारे दिए हुए रिज़क में से एलानिया (खुले तौर पर) और पोशीदा खर्च करते हैं, और बुराइयों को भलाई से दफा करते हैं, आख़िरत का घर उन्हीं लोगों के लिए है 
+[13:23] यानी ऐसे बाग़ जो उनकी आबादी क़यामगाह होंगे। वो खुद भी उनमें दाखिल होंगे और उनके आबा ओ अजदाद और उनकी बीवीयां और उनकी औलाद में से जो सालेह (नेक) हैं वो भी उनके साथ वहां जाएंगे। मलायका हर तरफ से उनके इस्तेकबाल के लिए आएंगे 
+[13:24] और उनसे कहेंगे के "तुम्हारे सलामती है, तुमने दुनिया में जिस तरह सब्र से काम लिया उसकी बदौलत आज तुम इसके मुस्तहिक हुए हो"। पास क्या ही ख़ूब है ये आख़िरत का घर 
+[13:25] रहे वो लोग जो अल्लाह के अहद को मज़बूत बांध लेने के बाद तोड़ देते हैं, जो उन रबतों (रिश्ते) को काटते हैं जिन्हें अल्लाह ने जोड़ने का हुकुम दिया है, और जो ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं, वो लाते हैं के मुस्तहिक हैं और उनके लिए आख़िरत में बहुत बुरा ठिकाना है
+[13:26] अल्लाह जिसको चाहता है रिज़क की फराखी बक्शता है और जिसे चाहता है नपा-तुला रिज़क देता है 
+। लोग जिन्होन ने (रिसालत ए मुहम्मदी को मन्ने से) इनकार करदिया है कहते हैं “इस शक्स पर इसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों न उतरी?” कहो, अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह करता है और वो अपनी तरफ आने का रास्ता उसे दिखाता है जो उसकी तरफ रूजू करे 
+[13:28] ऐसे ही लोग हैं वो जिन्होन ने (इस नबी की दावत को) मान लिया है और उनके दिलों को अल्लाह की याद से इत्मिनान नसीब होता है, खबरदार रहो! अल्लाह की याद ही वो चीज़ है जिसके दिलों को इत्मिनान नसीब हुआ करता है 
+[13:29] फिर जिन लोगों ने दावत-ए-हक़ को माना और नेक अमल किये वो ख़ुश-नसीब हैं और उनके लिए अच्छा अंजाम है 
+[13:30] (ऐ मुहम्मद) इसी शान से हमने तुमको रसूल बना कर भेजा है, एक ऐसी क़ौम में जिसके पहले बहुत सी क़ौमें गुज़र चुकी हैं, ता-के तुम इन लोगों को वो पैगाम सुनाओ जो हमने तुंपर नाज़िल किया है, इस हाल में के ये अपने निहायत मेहरबान खुदा के काफिर बने हुए हैं। इनसे कहो के वही मेरा रब है, उसके सिवा कोई मबूद नहीं है, उसी पर मैंने भरोसा किया और वही मेरा मालजा-ओ-मावी है (वह मेरा एकमात्र सहारा है/उसी पर मेरा भरोसा है, और मैं उसकी ओर मुड़ता हूं) 
+[13:31] और क्या हो जाता अगर कोई ऐसा कुरान उतार दिया जाता जाता जिसका ज़ोर से पहाड़ चले लगे, या जमीन शक्क हो (फट्ट) जाती, या मुर्दे कब्रों से निकल कर बोलने लगते? (इस तरह की निशानियां दिखा देना कुछ मुश्किल नहीं है) बलके सारा इख्तियार हाय अल्लाह के हाथ में है। फिर क्या एहले ईमान (अभी तक कुफ्फार की तालाब के जवाब में किसी निशानी के जहूर की आस लगाए बैठे हैं और वो ये जान कर) अगर अल्लाह चाहता तो सारे इंसानों को हिदायत दे देता? जिन लोगों ने खुदा के साथ कुफ्र का रवैय्या इख्तियार कर रखा है उन पर उनके कार्टूनों की वजह से कोई ना कोई आफत आती ही रहती है या उनके घर के करीब कहीं नाज़िल होती है। ये सिलसिला चलता रहेगा यहां तक ​​के अल्लाह का वादा आन पूरा हो। यकीनन अल्लाह अपने वादे की खिलाफ वारज़ी नहीं करता 
+[13:32] तुमसे पहले भी बहुत से रसूलों का मज़ाक उड़ाया जा चूका है, मगर मैंने हमेशा मुनकिरेन को ढील दी और आख़िर ए कार उनको पकड़ लिया, फिर देखलो के मेरी सज़ा कैसी सच थी
+[13:33] फिर क्या वो जो एक-एक मुतनफ़्फ़िस (हर आत्मा) की कमाई पर नज़र रखता है (उसके मुक़ाबले में ये जसरतें की जा रही हैं के) लोगों ने उसे कुछ शरीक वहीं रखा है? (ऐ नबी), इनसे कहो (अगर वक्त वो खुदा के अपने बने हुए शरीक हैं तो) जरा उनके नाम लो के वो कौन हैं? क्या तुम अल्लाह को एक नई बात की खबर दे रहे हो जैसे वो अपनी ज़मीन में नहीं जानता? हां तुम लोग बस यूं ही जो मुंह में आता है केह डालते हो? हकीकत ये है के जिन लोगों ने दावत ए हक को मन्ने से इंकार किया है उनके लिए उनकी मक्कारियां खुशनुमा बना दी गई हैं और वो राह-ए-रास्त से रुक गए हैं, फिर जिसको अल्लाह गुमराही में फेंक दे उसे कोई राह दिखाने वाला नहीं है 
+[13:34] ऐसे लोगों के लिए दुनिया की जिंदगी ही में अजाब है, और आखिरी का अजाब उसे भी ज्यादा पसंद है, कोई ऐसा नहीं जो उन्हें खुदा से बचाने वाला हो 
+[13:35] खुदा तरस इंसानों के लिए जिस जन्नत का वादा किया गया है उसकी शान ये है के उसके खास नहेरे (नहरें) बह रही हैं, उसके फल (फल) दैमी (अनन्त) हैं और उसका साया ला-ज़वाल (सनातन)। ये अंजाम है मुत्तक़ी (पवित्र) लोगों का, और मुनकिरीन ए हक़ का अंजाम ये है के उनके लिए दोज़ख की आग है 
+[13:36] (ऐ नबी), जिन लोगों को हमने पहले किताब दी थी वो इस किताब से जो हमने तुमपर नाज़िल की है ख़ुश हैं और मुख़्तलिफ़ गिरोहों में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसकी बाज़ बातों को नहीं मानते। तुम साफ कहदो के "मुझे तो सिर्फ अल्लाह की बंदगी का हुकुम दिया है और इसे मना किया है कि किसी को उसके साथ शरीक ठहरूं, लिहाजा मैं उसकी तरफ दावत देता हूं और उसकी तरफ मेरा रूजू है" 
+[13:37] इसी हिदायत के साथ हमने ये फ़रमान-ए-अरबी तुमपर नाज़िल किया है। अब अगर तुमने इल्म के बारे में कहा है कि तुम्हारे पास आ चुका है लोगों की ख्वाहिश की जोड़ी अल्लाह के मुकाबले में ना कोई तुम्हारा हामी ओ मददगार है और ना कोई उसकी पकड़ से तुमको बचा सकता है 
+[13:38] तुमसे पहले भी हम बहुत से रसूल भेज चुके हैं और उनको हमने बीवी बच्चों वाला ही बनाया था, और किसी रसूल की भी ये ताक़त ना थी के अल्लाह के इज़ान के बगैर कोई निशानी खुद ला दिखता। हर दौर के लिए एक किताब है 
+[13:39] अल्लाह जो कुछ चाहता है मिटा देता है और जिस चीज को चाहता है क़याम रखता है, उम्मुल किताब (मूल किताब) उसके पास है 
+[13:40] और (ऐ नबी), जिस बुरे अंजाम की धमकी हम इन लोगों को दे रहे हैं उसका कोई हिसा ख्वा हम तुम्हारे जीते जी दिखा दें या उसके ज़हूर में आने से पहले हम तुम्हें उठा लें, बाहर हाल तुम्हारा काम सिर्फ पैग़ाम पहनना है और हिसाब लेना हमारा काम है 
+[13:41] क्या ये लोग देखते नहीं हैं के हम इस सर-ज़मीन पर चले आ रहे हैं और इसका दायरा (सीमाएं) हर तरफ से तंग करते चले आते हैं? अल्लाह हुकुमत कर रहा है, कोई उसके फैसले पर नज़र-ए-सानी (संशोधन) करने वाला नहीं है, और उसे हिसाब लेते हुए कुछ देर नहीं लगती
+[13:42] इनसे पहले जो लोग हो गुज़रे हैं वो भी बड़ी-बड़ी चलें चल चुके हैं, मगर असल फैसला-कुन चल तो पूरी की पूरी अल्लाह ही के हाथ में है। वो जानता है कि कौन क्या कमाई कर रहा है, और अनकरीब ये मुनकिरीन-ए-हक़ (काफिर) देख लेंगे के अंजाम किसका ब-खैर होता है 
+[13:43] ये मुनकीरीन कहते हैं कि तुम खुदा के भेजे हुए नहीं हो। कहो "मेरे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह की गवाही काफी है, और फिर हर उस शक्स की गवाही जो किताब ए आसमानी का इल्म रखता है" 
+
+सूरह 14: इब्राहीम (अब्राहम) 
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+[14:1] अलिफ लाम रा (ऐ मुहम्मद), ये एक किताब है जिसको हमने तुम्हारी तरफ नाज़िल किया है ता-के तुम लोगों को तारिकियों (अंधेरे) से निकाल कर रोशनी में लाओ उनके रब की तौफीक से, हमें खुदा के रास्ते पर जो ज़बरदस्त और अपनी ज़ात में आप महमूद हैं (काबिल ए तारीफ है) 
+[14:2] और ज़मीन और आसमान की सारी मौजुद्दत (हर चीज़) का मालिक है, और सख्त तबाह-कुन सजा है कबूल ए हक से इनकार करने वालों के लिए 
+[14:3] जो दुनिया की जिंदगी को आखिरी पर तरजीह देता है, जो अल्लाह के रास्ते से लोगों को रोक रहे हैं और चाहते हैं कि ये रास्ता (उनकी ख्वाहिश के) मुताबिक) तेदा (टेढ़ा) हो जाये। ये लोग गुमराही में बहुत दूर निकल गए हैं 
+[14:4] हमने अपना पैगाम देने के लिए जब कभी कोई रसूल भेजा है, उसने अपनी क़ौम ही कि जुबान में पैगाम दिया है ता-के वो उन्हें अच्छी तरह से खोल कर बात समझाए। फिर अल्लाह जिसे चाहता है भटका देता है और जिसे चाहता है हिदायत बख्शता है, वो बालादस्त (गालिब/सर्वशक्तिमान) और हकीम है 
+[14:5] हम इस पहले मूसा को भी अपनी निशानियों के साथ भेज चुके हैं, हमने भी हुकुम दिया था कि अपनी क़ौम को तरीकियों (अंधेरे) से निकल कर रोशनी में ला और उन्हें तारीख-ए-इलाही (ईश्वरीय इतिहास) के सबक-आमोज़ वाकियात सुना कर हिदायत कर। वाकियात में बड़ी निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो सब्र और शुक्र करने वाला हो 
+[14:6] याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा "अल्लाह के हमें एहसान को याद रखो जो उसने तुमपर किया है, उसने तुमको फिरौन वालों से छुड़ाया जो तुमको मजबूत तकलीफें देते थे, तुम्हारे लड़कों को कत्ल कर डालते थे और तुम्हारी औरतों को जिंदा बच्चा रखते थे, तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारी बड़ी आजमाइश थी 
+[14:7] और याद रखो, तुम्हारे रब ने खबरदार बना दिया था तो मैं। तुमको और ज़्यादा नवाज़ूंगा और अगर कुफ़्रान-ए-नियामत (कृतघ्न) करोगे तो मेरी सज़ा बहुत ज़रूरी है” 
+[14:8] और मूसा ने कहा के “अगर तुम कुफ़्र करो और ज़मीन के सारे रहने वाले भी काफ़िर हो जाएँ तो अल्लाह रहो नियाज़ और अपनी ज़ात में आप महमूद हैं”
+[14:9] क्या तुम उन क़ौमों के हालात नहीं पाहुंचे जो तुमसे पहले गुज़र चुकी हैं? कौम-ए-नूह, आद, समूद और उनके बाद आने वाली बहुत से कौमें जिनका शूमर अल्लाह ही को मालूम है? उनके रसूल जब उनके पास साफ-साफ बातें और खुली-खुली निशानियां लिए हुए आए तो उन्हें ने अपने मुंह में हाथ दबा लिया और कहा के “जिस पैगाम के साथ तुम भेज गए हो हम उसको नहीं मानते और जिस चीज की तुम हमें दावत देते हो उसकी तरफ से हम सख्त खलजन हैं।” आमीज़ शक्क (बेचैन करने वाला संदेह) में पैदा हुए हैं” 
+[14:10] उनके रसूलों ने कहा “क्या खुदा के बारे में शक्क है जो आसमान और ज़मीन का खालिक है? वो तुम्हें बुला रहा है ता-के तुम्हारे कसूर माफ़ करे और तुमको एक मुद्दत-ए-मुक़र्रर तक? मोहलात दे”। अनहोन ने जवाब दिया “तुम कुछ नहीं हो मगर वैसे ही इंसान जैसे हम हैं, तुम हमें उन हस्तियों की बंदगी से रोकना चाहते हो जिनकी बंदगी बाप दादा से होती चली आ रही है, अच्छा तो लाओ कोई सारी सनद (स्पष्ट प्रमाण)” 
+[14:11] उनके रसूलों ने उन्हें कहा “वाकई हम कुछ” नहीं हैं मगर तुम ही जैसे इंसान, लेकिन अल्लाह अपने बंदों में से जिसका चाहता है नवाजता है और ये हमारे इख्तियार में नहीं है कि तुम्हें कोई सनद ला दें अल्लाह ही के इज़ान (अनुमति/इच्छा) से आ सकता है चाहिए 
+[14:12] और हम क्यों न अल्लाह पर भरोसा करें जबके हमारी जिंदगी की राहों में उसने हमारी रहनुमाई की है? जो अज़ियातें (तक़लीफ़ीन) तुम लोग हमें दे रहे हो उन्पर हम सब्र करेंगे और भरोसा करने वालों का भरोसा अल्लाह ही पर होना चाहिए” 
+[14:13] आख़िर-ए-कार मुनकिरीन ने अपने रसूलों से कहा के “ हां तो तुम हमारी मिल्लत में वापस आना होगा वरना हम तुम्हें अपने मुल्क से निकल देंगे”। तब उनके रब ने उन्पर वही भेजी के "हम इन जालिमों को हलाक कर देंगे 
+[14:14] और उनके बाद तुम्हारी जमीन में आबाद करेंगे। ये इनाम है उसका जो मेरे हुजूर जवाब-देही (जवाबदेही) का खौफ रखता हो और मेरी वेद से डरता हो" 
+[14:15] अनहोन ने फैसला चाहा था (तो यूं उनका फैसला हुआ) और हर जब्बार (अत्याचारी) दुश्मन-ए-हक़्क़ ने मुहं की खाई (अपमानिता झेली) 
+[14:16] फिर इसके बाद आगे उसके लिए जहन्नुम है, वहां उसे कच-लहू (खून) का सा पानी पीने को दिया जाएगा 
+[14:17] जिसे वाह ज़बरदस्ती हलक़ से उतरें की कोशिश करेगा और मुश्किल ही से उतार सकेगा। मौत हर तरफ़ से उसपर छायी रहेगी मगर वो मरने ना पायेगा और आगे एक साख अज़ाब उसकी जान का लागू रहेगा 
+[14:18] जिन लोगों ने अपने रब से कुफ्र किया है उनके अमाल की मिसाल हमें रख (राख) की सी है जिसने एक तूफानी दिन की आंधी ने उड़ा दिया हो। वो अपने किये का कुछ भी फल (ना पा सकेंगे, यहीं पारले दर्जे की गम गश्तगी (चरम विचलन) है 
+[14:19] क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह ने आसमां ओ ज़मीन की तहलीक को हक़ पर क़याम किया है? वो चाहे तो तुम लोगों को ले जाई और एक नई ख़ल्क़त (रचना) तुम्हारी जगह ले आओ
+[14:20] ऐसा करना उसपर कुछ भी नहीं है 
+[14:21] और ये लोग जब इकात्थे अल्लाह के सामने बे-नकाब होंगे तो हमारे वक्त में से जो दुनिया में कामजोर था वो उन लोगों से जो बदे बने हुए थे, कहेंगे "दुनिया में हम तुम्हारे तबे थे, अब तुम अल्लाह के अज़ाब से हमको बचाने के लिए भी कुछ कर सकते हो?” वो जवाब देंगे "अगर अल्लाह ने हमें नजात की कोई राह दिखाई होती तो हम जरूर तुम्हें भी दिखाते, अब तो यक्सन है, ख्वा हम जजा-फजा करें या सब्र, बाहर हाल हमारे बचने की कोई सूरत नहीं" 
+[14:22] और जब फैसला चुका दिया जाएगा तो शैतान कहेगा" हकीकत ये है के अल्लाह ने जो वादे तुमसे किए थे वो सब सच्चे थे और मैंने जितने वादे किए उन में से कोई भी पूरा ना किया, मैंने इसके अलावा कुछ नहीं किया के अपने रास्ते की तरफ तुम्हें दावत दी और। तुमने मेरी दावत पर लब्बैक किया (कबूल की)। अब मुझे मालामत ना करो, अपने आप को मालामत करो। यहां ना मैं तुम्हारी फरियाद-रसी कर सकता हूं और ना तुम मेरी। इस्से पहले जो तुमने मुझे ख़ुदाई में शरीक बना रक्खा था मैं उससे बारी उज़-ज़िम्मा (खुद को अलग कर लेना) हूं। ऐसे जालिमों के लिए दर्दनाक सजा यकीनी है” 
+[14:23] बा खिलाफ इसके जो लोग दुनिया में ईमान लाए हैं और जिन्हों ने नीक अमल किए हैं वो ऐसे बागों में दाख़िल किए जाएंगे जिनके नीचे नेहरेन बहती होंगी। वहां वो अपने रब के इज्न (अनुमति) से हमेशा रहेंगे, और वहां उनका इस्तेकबाल सलामती की मुबारकबादी से होगा 
+[14:24] क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह ने कलिमा-ए-तैयब को किस चीज से मिसाल दी है? इसकी मिसाल ऐसी है जैसे एक अच्छी ज़ात का दरख्त, जिसकी जड़ (जड़) ज़मीन में गहरी जमी हुई है और शाखें (शाखाएँ) आसमान तक पहुँची हुई हैं 
+[14:25] हर आन वो अपने रब के हुकुम से अपना फल दे रहा है। ये मिसालें अल्लाह इसलिए देता है के लोग इनसे सबक लें 
+[14:26] और कलिमा ए खबीसा (बुरा शब्द) की मिसाल एक बद-ज़ात दरख्त की सी है जो ज़मीन की साथ से उखाड़ फेंका जाता है, उसके लिए कोई इस्तेहकम (स्थिरता) नहीं है 
+[14:27] ईमान लाने वालों को अल्लाह एक क़ौल-ए-साबित की बुनियाद पर दुनिया और आख़िरत, दोनों में सबात (दृढ़) अता करता है, और ज़ालिमों को अल्लाह भटका देता है। अल्लाह को इख्तियार है जो चाहे करे 
+[14:28] तुमने देखा उन लोगों को जिन्होनें अल्लाह की नियामत पाई और उसे कुफ्रान-ए-नियामत (कृतघ्नता) से बदल डाला और (अपने साथ) अपनी क़ौम को भी हलाकत के घर में झोंक दिया 
+[14:29] यानी जहन्नुम, जिसमें वो झुलस जाएंगे और वो बढतरीन जाए करार है 
+[14:30] और अल्लाह के कुछ हमसर (अल्लाह के बराबर) तजवीज कार्लिये ता-के वो उन्हें अल्लाह के रास्ते से भटका दें। इनसे कहो: अच्छा मजा करलो, आख़िर ए कार तुम्हें पलट कर जाना दोज़ख ही में है
+[14:31] (ऐ नबी), मेरे जो बंदे ईमान लाए हैं उनसे कहदो के नमाज़ क़याम करें और जो कुछ हमने उनको दिया है, उसमें से खुले और छुपे (राह ए ख़ैर में) ख़र्च करें क़बल इसके के वो दिन आए जिस्में ना ख़त्म ओ फ़रोख्त होगी और ना दोस्त नवाज़ी हो साकेगी (दोस्ती काम आएगी) 
+[14:32] अल्लाह वही तो है जिसने जमीन और आसमान को पेदा किया और आसमान से पानी बरसाया, फिर उसकी ज़रिये से तुम्हारी रिज्क रसानी के लिए तरह तरह के फल पेदा किये। जिसने कश्ती को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया के समंदर में उसके हुकुम से चले और दरियाओं को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया 
+[14:33] जिसने सूरज और चांद को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया के लगतार चले जा रहे हैं और रात और दिन को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया किया 
+[14:34] जिनसे वो सब कुछ तुम्हें दिया जो तुमने मांगा, अगर तुम अल्लाह किन नियमों का पालन करना चाहो तो कर नहीं सकते। हकीकत ये है कि इंसान बड़ा ही बे-इंसाफ और नाशुक्र है 
+[14:35] याद करो वो वक्त जब इब्राहीम ने दुआ की थी के “परवरदिगार, इस शहर को अमन का शहर बना और मुझे और मेरी औलाद को बुथ परस्ती (मूर्ति पूजा) से बचा 
+[14:36] परवरदिगार, बुथों (मूर्तियों) में ने बहुतों को गुमराही में डाला है (मुमकिन है के मेरी औलाद को भी ये गुमराह कर दें, लिहाज़ा उनमें से) जो मेरे तारीख पर चले वो मेरा है और जो मेरे खिलाफ़ तारीख इख्तियार करे तो यकीनन तू दरगुज़ार करने वाला मेहरबान है 
+[14:37] परवरदिगार, मैंने एक बे आब-ओ-गियाह वादी (बंजर घाटी) में अपनी औलाद के एक हिस्से को तेरे मोहतरम घर के पास ला बसाया है। परवरदिगार, ये मैंने इसके लिए क्या है के ये लोग यहां नमाज़ क़याम करें। लिहाज़ा तू लोगों के दिलों को इनका मुश्ताक बना (लोगों का दिल उनके प्रति) और उन्हें खाने को फल दे, शायद के ये शुक्रगुज़ार बनें 
+[14:38] परवरदिगार, तू जानता है जो कुछ हम छुपाते हैं और जो कुछ जाहिर करते हैं”। और वक़ई अल्लाह से कुछ भी छुपा हुआ नहीं है, न ज़मीन में न आसमानो में 
+[14:39] “शुक्र है हमें खुदा का जिसने मुझे इस बुढापे में इस्माइल और इशाक जैसे बेटे दिए, हकीकत ये है के मेरा रब ज़रूर दुआ सुनता है 
+[14:40] ऐ मेरे परवरदिगार, मुझे नमाज़ क़याम करने वाला बना और मेरी औलाद से भी (ऐसे लोग उठा जो ये काम करें) परवरदिगार, मेरी दुआ क़बूल कर 
+[14:41] परवरदिगार, मुझे और मेरे वलियों को और सब ईमान लाने वालों को उस दिन माफ़ करदीजियो जबके हिसाब क़याम होगा” 
+[14:42] अब ये जालिम लोग जो कुछ कर रहे हैं अल्लाह को तुम उसे गाफिल ना समझो। अल्लाह तो इन्हें टाल रहा है उस दिन के लिए जब हाल ये होगा के आंखें फटी की फटी रह गई हैं 
+[14:43] सर उठे भाग चले जा रहे हैं, नजरें ऊपर जमी हैं और दिल उड़े जाते हैं
+[14:44] (ऐ मुहम्मद), उस दिन से तुम इन्हें डराओ जबके अज़ाब इन्हें आ लेगा हमें वक्त ये जालिम कहेंगे के "ऐ हमारे रब, हमें थोड़ी सी मोहलत और दे दे, हम तेरी दावत को लब्बैक कहेंगे और रसूलों की पैवारी करेंगे"। (मगर उन्हें साफ जवाब दे दिया जाएगा के) क्या तुम वही लोग नहीं हो जो इसे पहले कसमें खा खा कर कहते थे थाय के हमपर तो कभी जवाब (गिरावट) आना ही नहीं है 
+[14:45] हालंके तुम उन क़ौमों की बस्तियों में रह बस चुके थे जिन्होन ने अपने ऊपर आप ज़ुल्म किया था और देख चुके थे के हमने उनसे क्या सुलूक किया और उनकी मिसालें (उदाहरण) दे कर हम तुम्हें समझा भी चुके थे 
+[14:46] उन्होन ने अपनी सारी ही चलें चल देखी, मगर उनकी हर चाल का तोड़ अल्लाह के पास था, अगर उनकी चालें ऐसी गजब की थी के पहाड़ उनसे ताल जाए 
+[14:47] पास (ऐ नबी), तुम हरगिज ये गुमान न करो के अल्लाह कभी अपने रसूलों से किए हुए वादों के खिलाफ करेगा। अल्लाह ज़बरदस्त है और इंतक़ाम लेने वाला है 
+[14:48] दारो इन्हें हम दिन से जबके ज़मीन और आसमां बदल कर कुछ कर देंगे और सब अल्लाह वाहिद ए कहार (एक जो चिड़चिड़ा है) के सामने बे-नक़ब हाज़िर हो जायेंगे 
+[14:49] हमें रोज़ तुम मुजर्रीमों को देखोगे के ज़ंजीरों में हाथ पाँव जकड़े होंगे 
+[14:50] तार-कोल (तरल पिच/टार/डंबर) के लिबास पहने हुए होंगे और आग के शोले उनके चेहरों पर छाये जा रहे होंगे 
+[14:51] ये इस लिए होगा के अल्लाह हर मुतनफ्फिस को उसके किये का बलदा देगा. अल्लाह को हिसाब लेते कुछ देर नहीं लगती 
+[14:52] ये एक पैगाम है सब इंसानों के लिए, और ये भेजा गया है इसके लिए कि उनको इसके जरीये से खबरदार कर दिया जाए और वो जान लें के हकीकत में खुदा बस एक ही है और जो अक्ल रखते हैं वो होश मैं आ जाइए 
+
+सूरह 15: अल-हिज्र (द रॉक) 
+------------------------------------------------ 
+[15:1] अलिफ लाम रा .. ये आयत हैं किताब ए इलाही और कुरान ए मुबीन की 
+[15:2] बैद नहीं के एक वक्त वो आ जाए जब वही लोग जिन्होन ने आज (दवा ए इस्लाम को कबूल करने से) इनकार कार्डिया है पछता-पछता कर कहेंगे के काश हमने सार ए तसलीम खाम करदिया होता 
+[15:3] चोदो इन्हें खायें (खाएं), पीएं (पीएं) मजे करें और बहलावे में डाले रहें इनको झूठी उम्मीद। अनकारीब इन्हें मालूम हो जाएगा 
+[15:4] हमने इसे पहले जिस बस्ती को भी हलाक किया है उसके लिए एक खास मोहलत ए अमल लिखी जा चुकी थी 
+[15:5] कोई क़ौम ना अपने वक्त ए मुकर्रर से पहले हलाक हो सकती है, ना उसके बाद झूठ बोल सकती है 
+[15:6] ये लोग कहते हैं "ऐ वो शक्स जिस पर ज़िक्र नाज़िल हुआ है, तू यकीनन दीवाना है 
+[15:7] अगर तू सच्चा है तो हमारे सामने फरिश्तों को ले क्यों नहीं आता?" 
+[15:8] हम फरिश्तों को यूं ही नहीं उतारते, वो जब उतारते हैं तो हक के साथ उतारते हैं, और फिर लोगों को मोहलत नहीं देते
+[15:9] रहा ये जिक्र, तो इसको हमने नाज़िल किया है और हम खुद इसके निगेहबान हैं 
+[15:10] (ऐ मुहम्मद), हम तुमसे पहले बहुत सी गुज़री हुई क़ौमों में रसूल भेज चुके हैं 
+[15:11] कभी ऐसा नहीं हुआ के उनके पास कोई रसूल आया हो और उनको मज़ाक न उड़ाया हो 
+[15:12] मुजरीमीन के दिलों में तो हम इस ज़िक्र को इसी तरह [सलाख़ के मानिंद (छड़ी की तरह)] गुज़रते हैं 
+[15:13] वो इसपर ईमान नहीं लाया करते। क़दीम (प्राचीन काल) से इस क़ौम के लोगों का यही तरीक़ा चला आ रहा है 
+[15:14] अगर हम ऊपर आसमान का कोई दरवाज़ा खोल देते हैं और वो दिन दहाड़े हमें छूने भी लगते हैं 
+[15:15] तब भी वो यहीं कहते के हमारी आँखों को धोखा हो रहा है, बलके हमपर जादू करदिया गया है 
+[15:16] ये हमारी कार-फरमाई है के आसमान में हमने बहुत से मजबूत गोले बनाए, उनको देखने वालों के लिए सजा लिया 
+[15:17] और हर शैतान ए मरदूद से उनको महफूज कर दिया 
+[15:18] कोई शैतान में राह नहीं पा सकता, इल्ला ये के कुछ सन-गन ले ले, और जब वो सन-गन लेने की कोशिश करता है तो एक शोला रोशन उसका पीछा करता है 
+[15:19] हमने जमीन को फैलाया, हमें पहाड़ जमाये, उसमें हर नाव की नबातात ठीक ठीक नापी तुली मिकदार (माप) के साथ उगी 
+[15:20] और इस में मैशत के असबाब फराहम किए, तुम्हारे लिए भी और उन बहुत सी मखलूकत के लिए भी जिनका राज़िक तुम नहीं हो 
+[15:21] कोई चीज़ ऐसी नहीं जिसका खज़ाने हमारे पास ना होन, और जिस चीज को भी हम नाज़िल करते हैं एक मुकर्रर मिकदार (माप) में नाज़िल करते हैं 
+[15:22] बार-बार हवाओं (उर्वरक हवाओं) को हम ही भेजते हैं, फिर आसमान से पानी बरसाते हैं, और हम पानी से तुम्हें सैराब करते हैं, इस दौलत के खज़ाना-दार तुम नहीं हो 
+[15:23] जिंदगी और मौत हम देते हैं, और हम ही सबके वारिस होने वाले हैं 
+[15:24] पहले जो लोग तुम में से हो गुज़रे हैं उनको भी हमने देख रखा है, और बाद के आने वाले भी हमारी निगाह में हैं 
+[15:25] यकीनन तुम्हारा रब सबको इकठ्ठा करेगा, वो हकीम भी है और आलिम भी 
+[15:26] हमने इंसान को साडी (सड़ी हुई) हुई मिट्टी के सूखे गारे से बनाया 
+[15:27] और उसके पहले जिन्नो को हमने आग की गोद से पैदा किया कर चुके थे 
+[15:28] फिर याद करो उस मौके को जब तुम्हारे रब ने फरिश्तों से कहा के “मैं सदी हुई मिट्टी के सूखे गले से एक बशर अदा कर रहा हूं 
+[15:29] जब मैं उसे पूरा बना चुका हूं और हम अपनी रूह से कुछ फूंक दूं तो तुम सब उसके आगे सजदे में गिर जाना” 
+[15:30] चुनांचे तमाम फरिश्तों ने सजदा किया 
+[15:31] सिवाए इबलीस के, के हमें सजदा करने वालों का साथ देने से इनकार करदिया 
+[15:32] रब ने पूछा “ ऐ इब्लीस, तुझसे क्या हुआ के तू नहीं सजदा करने वालों का साथ ना दिया?”
+[15:33] उसने कहा "मेरा ये काम नहीं है के मैं इस बशर को सजदा करूं जिसमें तू नई सदी हुई मिट्टी के सूखे गले से पेदा किया है" 
+[15:34] रब ने फरमाया "अच्छा तो निकल जा यहां से क्योंकि तू मरदूद (शापित) है 
+[15:35] और अब रोज़-ए-जज़ा तक तुझपर लानत है" 
+[15:36] उसने अर्ज़ किया "मेरे रब, ये बात है तो फिर मुझे रोज़ तक के लिए मोहलत दे जबके सब इंसान दोबारा उठेंगे" 
+[15:37] फरमाया " अच्छा, तुझ पर मोहलत है 
+[15:38] उस दिन तक जिसका वक़्त हमें मालूम है” 
+[15:39] वो बोला “मेरे रब, जैसा तू नहीं मुझे बहकाया उसकी तरह अब मैं ज़मीन में इनके लिए दिल फरेबियाँ अदा करके इन सबको बहका दूंगा 
+[15:40] सिवाय तेरे उन बंदों के जिन्हें तू नहीं इनमें से खाली करलिया हो” 
+[15:41] फरमाया “ये रास्ता है जो सीधा मुझ तक पहुँचता है 
+[15:42] बेशक, जो मेरे हक़ीक़ी बंदे हैं उनपर तेरा बस ना चलेगा। तेरा बस तो सिर्फ उन बहके हुए लोगों ही पर चलेगा जो तेरी जोड़ी बनाएं 
+[15:43] और उन सब के लिए जहन्नुम की वईद (नियत) है” 
+[15:44] ये जहन्नुम (जिसकी वईद जोड़ी ए इबलीस के लिए गई है) उसके सात (सात) दरवाजे हैं, हर दरवाजे केली उनमें से एक हिसा मखसूस करदिया गया है 
+[15:45] बा-खिलाफ इसके मुत्तकी लोग बाघों (बगीचे) और चश्में (फव्वारे) में होंगे 
+[15:46] और उन्हें कहा जाएगा के दखिल हो जाओ इनमें सलामती के साथ बेखौफ ओ खातिर 
+[15:47] उनके दिलों में जो थोड़ी बहुत खोट-कपट होगी उसे हम निकाल देंगे, वो आपस में भाई भाई बनकर आमने सामने तख्तों पर बैठेंगे 
+[15:48] उनको ना वहां किसी मुशक्कत से पाला पड़ेगा और ना वो वहां से निकल जाएंगे 
+[15:49] (ऐ नबी), मेरे बंदों को खबर दे दो के मैं बहुत दरगुजर करने वाला (माफ करने वाला) और रहीम हूं 
+[15:50] मगर इसके साथ मेरा अज़ाब भी निहायत दर्दनक अज़ाब है 
+[15:51] और इन्हें जरा इब्राहिम के मेहमानों का क़िस्सा सुनाओ 
+[15:52] जब वो आए उसके हां और कहा "सलाम हो तुमपर," तो उसने कहा "हमें तुमसे डर लगता है" 
+[15:53] उनको ने जवाब दिया " डरो नहीं, हम तुम्हें एक बदे सियाने लड़के की बशारत देते हैं” 
+[15:54] इब्राहीम ने कहा “क्या तुम इस बुढापे में मुझे औलाद की बशारत देते हो? ज़रा सोचो तो सही के ये कैसी बशारत तुम मुझे दे रहे हो?” 
+[15:55] उनहों ने जवाब दिया “हम तुम्हें बार हक बशारत दे रहे हैं, तुम मायौस ना हो” 
+[15:56] इब्राहिम ने कहा “अपने रब की रहमत से मायुस तो गुमराह लोग ही हुआ करते हैं” 
+[15:57] फिर इब्राहिम ने पूछा “ऐ फरीस्ताद-गान-ए-इलाही (अल्लाह के दूत), वो मोहिम (अभियान) क्या है जिसपार आप हजरत तशरीफ लाए हैं?” 
+[15:58] वो बोले, "हम एक मुजरिम क़ौम की तरफ भेज गए हैं 
+[15:59] सिर्फ लूट के घर वाले मुस्तस्ना (अपवाद) हैं, उन सबको हम बचा लेंगे
+[15:60] सिवाये उसकी बीवी के जिसके लिए (अल्लाह फरमाता है के) हमने मुकद्दर कर दिया है के वो पीछे रह जाने वालों में शामिल रहेगी” 
+[15:61] फिर जब ये फरीस्तादे लूट के हां पहुंचे 
+[15:62] तो उसने कहा “आप लोग अजनबी मालूम होते हैं” 
+[15:63] उनको ने जवाब दिया "नहीं, बलके हम वही चीज़ लेकर आए हैं जिसके आने में ये लोग शक्क कर रहे थे 
+[15:64] हम तुमसे सच कहते हैं के हम हक के साथ तुम्हारे पास आए हैं 
+[15:65] लिहाज़ा अब तुम कुछ रात रह रहे हैं अपने घर वालों को लेकर निकल जाओ और खुद उनके पीछे पीछे चलो, तुम में से कोई पलट कर ना देखे बस सीधे चले जाओ जिधर जाने का तुम्हें हुकुम दिया जा रहा है” 
+[15:66] और हमने अपना ये फैसला पहनकर लोगों की सुबह होते होते जद्द (जड़ें) कट दी जाएंगी 
+[15:67] इतने में शहर के लोग खुशी के मारे बेताब होकर लुट के घर चढ़ आए 
+[15:68] लुट ने कहा "भाइयों, ये मेरे मेहमान हैं, मेरी फजीहत (अपमान) ना करो 
+[15:69] अल्लाह से डरो, मुझे रुसवा ना करो" 
+[15:70] वो बोले “क्या हम बारह तुम्हें मना नहीं कर चुके हैं कि दुनिया भर के ठेकेदार ना बनो?” 
+[15:71] लूट ने अजीज होकर कहा "अगर तुम्हें कुछ करना ही है तो ये मेरी बेटियां मौजूद हैं" 
+[15:72] तेरी जान की कसम ऐ नबी, उस वक्त एक नशा सा चढ़ा हुआ था जिसमें वो आपे से बहार हुए जाते थे 
+[15:73] आखिर ई कार पोव फटते ही उनको एक जबरदस्त धमाके ने आ लिया (भोर में भीषण विस्फोट ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया) 
+[15:74] और हमने उस बस्ती को तलपत करके रख दिया और ऊपर पाकी (बेक्ड) हुई मिट्टी के पत्थरों की बारिश बरसा दी 
+[15:75] क्या वाकिये में बड़ी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो साहिब-ए-फिरसत हैं 
+[15:76] और वो इलाक़ा (जहाँ ये वाकिया पेश आया था) गुज़र गाह ए आम (हाई वे) पर वक़्त है 
+[15:77] उसमें समां ए इब्रत है उन लोगों के लिए जो साहिब ए ईमान हैं 
+[15:78] और ऐका वले ज़ालिम थाय 
+[15:79] तो देखलो के हमने उनसे भी इंतेक़ाम लिया, और इन दोनों क़ौमों के उजाड़े हुए इलाक़े खुले रास्ते पर वक़्त हैं 
+[15:80] हिज्र के लोग भी रसूलों की तकज़ीब कर चुके हैं 
+[15:81] हमने अपनी आयतें उनके पास भेजी, अपनी निशानियाँ उनको दिखाई, मगर वो सबको नज़र-अंदाज़ (अनदेखा) ही करते रहे 
+[15:82] वो पहाड़ तराश तराश कर मकान बनाते थे और अपनी जगह बिलकुल बे-ख़ौफ़ और मुतमइन थे 
+[15:83] आख़िर ई कार एक ज़बरदस्त धमाके ने उनको सुबह होते ही आ लिया 
+[15:84] और उनकी कमाई उनके कुछ काम न आई 
+[15:85] हमने जमीन और आसमान को और उनकी सब मौजूदत को हक़ के सिवा किसी और बुनियाद पर ख़ल्क (बनाना) नहीं बनाया है, और फैसले की घड़ी यकीनन आने वाली है। पस (ऐ मुहम्मद), तुम (लोगन की में)। बेहुदगियों पर) शरीफ़ाना दरगुज़ार से काम लो
+[15:86] यकीनन तुम्हारा रब सब का खालिक है और सब कुछ जानता है 
+[15:87] हमने तुमको सात (सात) ऐसी आयतें दे रखी हैं जो बार-बार दोहरायी जाने के लायक हैं, और तुम्हें कुरान ए अजीम अता किया है 
+[15:88] तुम हमें माता-ए-दुनिया की तरफ आंख उठा कर ना देखो जो हमने अपने अंदर से मुख्तलिफ क़िस्म के लोगों को दे रखा है, और ना इनके हाल पर अपना दिल कुढ़ाओ(शोक), इन्हें छोड़ कर ईमान लाने वालों की तरफ झुको 
+[15:89] और (ना मनने वालों से) कहदो के मैं तो साफ साफ तम्बीह (चेतावनी) करने वाला हूं 
+[15:90] ये उसकी तरह की तम्बीह है जैसी हमने उन तफ़रक़े परदाज़ों (जो बंटवारा करते हैं) की तरफ भेजी थी 
+[15:91] जिन्होन ने अपने कुरान को टुकड़े-टुकड़े कर डाला है 
+[15:92] तो कसम है तेरे रब की, हम जरूर इन सबसे पूछेंगे 
+[15:93] के तुम क्या करते रहे हो 
+[15:94] पास (ऐ नबी) जिस चीज का तुम्हें हुकुम दिया जा रहा है उसे हांके पुकारे कहदो (सार्वजनिक रूप से घोषित करो) और शिर्क करने वालों की जरा परवा ना करो 
+[15:95] तुम्हारी तरफ से हम उन मजाक उड़ाने वालों की खबरें लेने के लिए काफी हैं 
+[15:96] जो अल्लाह के साथ किसी और को भी खुदा करार देते हैं अनकरीब उन्हें मालूम हो जाएगा 
+[15:97] हमें मालूम है कि जो बातें ये लोग तुमपर बनाते हैं उनका दिल कोफ्त होता है व्यथित) 
+[15:98] इसका इलाज ये है के अपने रुब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो, उसके जनाब में सजदा बजा लाओ 
+[15:99] और हम आखिरी घड़ी तक अपने रुब की बंदगी करते रहो जिसका आना यकीनी है 
+
+सूरह 16: अन-नहल (मधुमक्खी) 
+------------------------------------------------ 
+[16:1] अगला अल्लाह का फैसला, अब इसके लिए जल्दी ना मचाओ, पाक है वो और बाला-तर है उस शिर्क से जो ये लोग कर रहे हैं 
+[16:2] वो इस रूह को अपने जिस बंदे पर चाहता है अपने हुकुम से मलिका के लिए नाज़िल फरमा देता है हिदायत के साथ के लोगों को) "आगा करदो, मेरे सिवा कोई तुम्हारा मबूद नहीं है, लिहाज़ा तुम मुझ से डरो" 
+[16:3] उसने आसमान ओ ज़मीन को बरहक़्क अदा किया है, वो बहुत बाला ओ बरतर है उस शिर्क से जो ये लोग करते हैं 
+[16:4] उसने इंसान को एक ज़रा सी बूंद से खरीदा और देखते-देखते सारें वो एक झगड़ालु हस्ती बन गया 
+[16:5] उसने जानवर पैदा किया जिनके पास तुम्हारे लिए पोशाक (कपड़े) भी हैं और खुराक भी, और तरह-तरह के दूसरे फायदे भी 
+[16:6] उन्मे तुम्हारे लिए जमाल (सुखद लुक) है जब के सुबह तुम उन्हें चरणों के लिए भेजते हो और जबके शाम उन्हें वापस लाते हो 
+[16:7] वो तुम्हारे लिए बोझ ढो (उठा) कर ऐसे ऐसे मुकाम तक ले जाते हैं जहां तुम मुश्किल जानफिशानी (दर्दनाक मेहनत) के बिना नहीं रह सकते कृपया. हकीकत ये है के तुम्हारा रब बड़ा ही शफीक और मेहरबान है
+[16:8] उसने घोड़े और खच्चर (खच्चर) और गधे पेदा किया ता-के तुम अपर सवार हो और वो तुम्हारी जिंदगी की रौनक बनी। वो और बहुत सी चीजें (तुम्हारे फायदे के लिए) भुगतान करता है जिनका तुम्हें इल्म तक नहीं है 
+[16:9] और अल्लाह ही के ज़िम्मे है सीधा रास्ता बताना जबके रास्ते टेढ़े भी मौजूद हैं। अगर वो चाहता तो तुम सबको हिदायत दे देता 
+[16:10] वही है जिसने आसमान से तुम्हारे लिए पानी बरसाया जिसमें तुम खुद भी सरायब होते हो और तुम्हारे जानवरों के लिए भी चारा पैदा होता है 
+[16:11] वो इस पानी के ज़रिये से खेतियां उगता है और ज़ैतून और खजूर और अंगूर और तरह तरह के दूसरे फल अदा करता है। इस में एक बड़ी निशानी है उन लोगों के लिए जो गौर-ओ-फिक्र करते हैं 
+[16:12] उसने तुम्हारी भलाई के लिए रात और दिन को और सूरज और चांद को मुस्कुरा कर रखा है, और सब तारे (सितारे) भी उसी के हुकुम से मुस्कुरा रहे हैं। इसमें बहुत सी निहसानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं 
+[16:13] और ये जो बहुत सी रंग बी रंग की चीजें हैं उसने तुम्हारे लिए जमीन में से भुगतान कर रखा है, उनमें भी जरूर निशानी है उन लोगों के लिए जो सबक हासिल है करने वाले हैं 
+[16:14] वही है जिसने तुम्हारे लिए समंदर को मुसक्कर कर रखा है ता-के तुम उसे तार-ओ-ताजा गोश्त लेकर खाओ और उसकी जीनत (सजावट) की वो चीज निकालो जिन्हें तुम पहचानते हो। तुम देखते हो के कश्ती समंदर का सीना चीरती हुई चलती है, ये सब कुछ इस तरह से है के तुम अपने रब का फज़ल तलाश करो और उसे शुकर-गुज़ार बनो 
+[16:15] उसने ज़मीन में पहाड़ों की महक दी ता-के ज़मीन तुमको लेकर धूलक ना जाए, उसने दरिया जारी किया और क़दरती रास्ते बनाए ता-के तुम हिदायत पाओ 
+[16:16] उसने ज़मीन में रास्ता बताने वाली अलमातें रख दी, और तारों (सितारों) से भी लोग हिदायत पाते हैं 
+[16:17] फिर क्या वो जो पेदा करता है और वो जो कुछ भी पेदा नहीं करता, dono yaksan hain? क्या तुम होश में नहीं आते 
+[16:18] अगर तुम अल्लाह की नियामतों को गिना चाहो तो गिना नहीं सकते, हकीकत ये है कि वो बड़ा ही दरगुजर करने वाला और रहीम है 
+[16:19] हालंके वो तुम्हारे खुले से भी वाकिफ है और छुपे से भी 
+[16:20] और वो दूसरे हस्तियां जिन्हें अल्लाह को छोड़ कर लोग पुकारते हैं, वो किसी चीज के भी खालिक नहीं हैं बलके खुद मखलूक हैं 
+[16:21] मुर्दा हैं ना के जिंदा और उनको कुछ मालूम नहीं है के उन्हें कब (दोबारा जिंदा करके) उठाया जाएगा 
+[16:22] तुम्हारा खुदा बस एक ही खुदा है मगर जो लोग आखिरी को नहीं मानते उनके दिलों में इंकार बसकर रह गया है और वो घमंड में पढ़ गए हैं 
+[16:23] अल्लाह यकीनन इनके सब करोत जानता है छुपे हुए भी और खुले हुए भी। वो उन लोगों को हरगिज़ पसंद नहीं करता जो गुरूर ए नफ़्स (गर्व से फूला हुआ) में मुबतला हो
+[16:24] और जब कोई उनसे पूछता है कि तुम्हारे रब ने ये क्या चीज नाजिल की है तो कहते हैं, "अजी वो तो अगले वक्त की फरसुदा कहानियां (प्राचीन कथाएं) हैं" 
+[16:25] ये बातें वो इसलिए करते हैं के कयामत के रोज अपने बोझ भी पूरे उठें, और साथ-साथ कुछ उन लोगों के बोझ भी समेटें, ये बार बिना जिहालत (उनकी अज्ञानता में) गुमराह कर रहे हैं। देखो! कैसी सख्त जिम्मेदारी है जो ये अपने सार ले रहे हैं 
+[16:26] इनसे पहले भी बहुत से लोग (हक को नीचा दिखाने के लिए) ऐसी ही मक्कारियां कर चुके हैं, तो देखलो के अल्लाह ने उनके मकर की इमारत जद्द (रूट) से उखाड़ फेंकी और उसकी छत ऊपर से उनके सर पर आ रही (ऊपर से उनके सिर पर छत गिर गई) और ऐसे रुख से अनपर अज़ाब आया जिधर से उसके आने का उनको गुमान तक ना था 
+[16:27] फिर कयामत के रोज़ अल्लाह उन्हें ज़लील ओ ख़्वार करेगा और उनसे कहेगा "बताओ, अब कहां हैं मेरे वो शरीक जिनके लिए तुम (एहले)। हक से) झगड़े किया करते थे?” जिन लोगों को दुनिया में इल्म हासिल था वो कहेंगे "आज रूसवाई और बदबख्ती है काफिरों के लिए" 
+[16:28] हां, उन्हीं काफिरों के लिए जो अपने नफ्स पर ज़ुल्म करते हुए जब मलिका के हाथ गिरफ़्तार होते हैं तो (सरकशी छोड़ कर) फ़ौरन दागें डाल देते (आत्मसमर्पण) हैं और कहते हैं "हम तो कोई कसूर नहीं कर रहे थे"। मलायका जवाब देते हैं "कर कैसे नहीं रहे थे! अल्लाह तुम्हारे कार्टूनों से खूब वाकिफ है 
+[16:29] अब जाओ, जहन्नुम के दरवाज़ों में घुस जाओ, वहीं तुमको हमेशा रहना है"। पस हकीकत ये है के बड़ा ही बुरा ठिकाना है मुतकब्बिरों (घमंडी वालों) के लिए 
+[16:30] दूसरी तरफ जब खुदा तरस लोगों से पूछता है के ये क्या चीज है जो तुम्हारे रब की तरफ से नाज़िल हुई है, तो वो जवाब देते हैं के "बेहतरीन चीज़" उतारी है”। इस तरह के कुछ लोगों के लिए इस दुनिया में भी भलाई है और आख़िरत का घर तो ज़रूर है उनके हक में बेहतर है। बड़ा अच्छा घर है मुत्तक़ियों (अल्लाह से डरने वालों) का 
+[16:31] दैमी क़याम (स्थायी निवास) की जन्नतें, जिन में वो दख़िल होंगे, आला नेह्रेन बेह राही होंगी, और सब कुछ वहां ऐन उनकी ख्वाहिश के मुताबिक होगा। ये जज़ा देता है अल्लाह मुत्तक़ियों (पवित्र) को 
+[16:32] उन मुत्तक़ियों को जिनकी रूहें पाकीज़गी की हालत में जब मलिका क़ब्ज़ करते हैं तो कहते हैं "सलाम हो तुमपर, जाओ जन्नत में अपने अमाल के बदले" 
+[16:33] (ऐ मुहम्मद), अब जो ये लोग इंतजार कर रहे हैं तो इसके सिवा अब और क्या बाकी रह गया है कि मलायका ही आ पूछूं, या तेरे रब का फैसला सादिर हो जाए? इस तरह की धिताई इनसे पहले बहुत से लोग कर चुके हैं, फिर जो कुछ उनके साथ हुआ वो असमान अल्लाह का ज़ुल्म ना था बल्के उनका अपना ज़ुल्म था जो उनहों ने खुद अपने ऊपर किया 
+[16:34] उनके कार्टूनों की ख़राबियां आख़िर उनकी दामनगीर हो गई और वही चीज़ असमान मुसल्लत होकर रही जिसका वो मज़ाक उड़ाया करता था
+[16:35] ये मुशरिकेन कहते हैं "अगर अल्लाह चाहता तो ना हम और ना हमारे बाप दादा उसके सिवा किसी और की इबादत करते और ना उसके हुकुम के बिना किसी चीज को हराम ठहराते"। ऐसे ही बहाने इनसे पहले के लोग भी बनाते रहे हैं तो क्या रसूलों पर साफ साफ बात पूछूंचा देने के सिवा और भी कोई जिम्मेदारी है 
+[16:36] हमने हर उम्मत में एक रसूल भेज दिया, और उसकी ज़रिये से सबको खबरदार कर दिया के "अल्लाह की बंदगी करो और" टैगहुट की बंदगी से बचो”। इसके बाद मेरे से किसी को अल्लाह ने हिदायत बख्शी और किसी पर ज़लालत मुसल्लत हो गई। फिर ज़रा ज़मीन में चल फिर कर देखलो के झूठलेन वालों का क्या अंजाम हो चुका है 
+[16:37] (ऐ मुहम्मद), तुम चाहे इनकी हिदायत के लिए कितने ही हारे हो, मगर अल्लाह जिसको भटका देता है फिर उसे हिदायत नहीं दिया करता और इस तरह के लोगों की मदद कोई नहीं कर सकता 
+[16:38] ये लोग अल्लाह के नाम से छोटी-छोटी कसमें खा कर कहते हैं "अल्लाह किसी को मरने वाले को फिर से जिंदा करके ना उठाएगा"। उठायेगा क्यों नहीं, ये तो एक वादा है जिसका पूरा करना उसने अपने ऊपर वाजिब कर लिया है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं 
+[16:39] और ऐसा होना जरूरी है के अल्लाह इनके सामने हकीकत को खोल दे जिसके बारे में ये इख्तिलाफ कर रहे हैं और मुनकिरीन ए हक़ को मालूम हो जाए के वो झूठे थे 
+[16:40] रहा उसका इमान (संभावना) तो] हमें किसी चीज़ को वजूद में लाने के लिए इसे ज़्यादा कुछ नहीं करना होता के उसे हुकुम दीन "हो जा" और बस वो हो जाती है 
+[16:41] जो लोग ज़ुल्म सहने के बाद अल्लाह की खातिर हिजरत कर गए हैं उनको हम दुनिया ही में अच्छा ठिकाना देंगे और आख़िरत का अजर तो बहुत बड़ा है, काश जान लें वो मज़लूम 
+[16:42] जिन्हों ने सब्र किया है और जो अपने रब के भरोसे पर काम कर रहे हैं (के कैसा अच्छा अंजाम उनका) मुंतज़िर है) 
+[16:43] (ऐ मुहम्मद), हमने तुमसे पहले भी जब कभी रसूल भेजे हैं आदमी ही भेजे हैं जिनकी तरफ हम अपने पैगाम वही किया करते थे। एहले ज़िक्र से पूछ लो अगर तुमलोग खुद नहीं जानते 
+[16:44] पिछले रसूलों को भी हमने रोशन निशानियां और किताबें दे कर भेजा था, और अब ये ज़िक्र तुमपर नाज़िल किया है ता-के तुम लोगों के सामने उस तालीम की तशरीह ओ तौज़ीह करते जाओ जो उनके लिए उतारी गई है, और ता-के लोग (खुद भी) गौर ओ फिक्र करें 
+[16:45] फिर क्या वो लोग जो (दावत ए पैगम्बर की मुखालिफत में) बढ़तर से बढतर चलें चल रहे हैं इस बात से बिल्कुल ही बे खौफ हो गए हैं के अल्लाह उनको जमीन में धोखा दे, हां ऐसे गोशे में अनपर अज़ाब ले आए जिधर से उसके आने का उनको हम ओ गुमान तक ना हो 
+[16:46] या अचानक चलते फिरते इनको पकड़ ले, या ऐसी हालत में उन्हें पकड़े जबके उन्हें खुद आने वाली मुसीबत का खटका लगा हुआ हो और वो उसे बचाने की फिक्र में चौकन्ने माननीय
+[16:47] वो जो कुछ भी करना चाहे ये लोग उसको अजीज (निराश) करने की ताकत नहीं रखते, हकीकत ये है के तुम्हारा रब बड़ा ही नरम-खु (बहुत उदार/शफाकत करने वाला) और रहीम है 
+[16:48] और क्या ये लोग अल्लाह की अदा की हुई किसी चीज़ को भी नहीं देखते के उसका साया किस तरह अल्लाह के हुज़ूर सजदा करते हुए दिन और बयेन गिरता है? सब के सब इस तरह इज़हार ए इज्ज़ (अपनी विनम्रता व्यक्त करें) कर रहे हैं 
+[16:49] ज़मीन और आसमान में जिस कदर जानदार मखलूक़त हैं और जितने मालिक हैं सब अल्लाह के आगे सर ब-सजूद हैं। वो हरगिज सरकशी नहीं करते 
+[16:50] अपने रब से जो उनके ऊपर है, डरते हैं और जो कुछ हुकुम दिया जाता है उसके मुताबिक काम करते हैं 
+[16:51] अल्लाह का फरमान है के "दो खुदा ना बना लो, खुदा तो बस एक ही है, लिहाजा तुम मुझ से डरो 
+[16:52] उसका है वो सब कुछ जो आसमान में है और जो ज़मीन में है, और खालिसन उसी का दीन (सारी कायनात में) चल रहा है। फिर क्या अल्लाह को छोड़ कर तुम किसी और से तकवा (डर) करोगे 
+[16:53] तुमको जो नियामत भी हासिल है अल्लाह ही की। तरफ से है फिर जब कोई सख्त वक्त तुमपर आता है तो तुम लोग खुद अपनी फरियाद लेकर उसी की तरफ दौड़ते हो 
+[16:54] मगर जब अल्लाह हमें वक्त को ताल देता है तो यकीनन तुम में से एक गिरोह अपने रुब के साथ दूसरे को (इस मेहरबानी के शुक्रिया में) शरीक करने लगता है 
+[16:55] ता-के अल्लाह के एहसान की नाशुकरी करे, अच्छा मजे करलो, अनकरीब तुम्हें मालूम हो जाएगा 
+[16:56] ये लोग जिनकी हकीकत से वाकिफ नहीं हैं, उनके लिए हमारे दिए हुए रिज्क में से मुकर्रर करते हैं। खुदा की कसम, जरूर तुमसे पूछा जाएगा के ये झूठ तुमने कैसे गड़बड़ ले लिया था 
+[16:57] ये खुदा के लिए बेटियां तजवीज करते हैं, सुभानअल्लाह! और इनके लिए वो जो ये खुद चाहते हैं 
+[16:58] जब मेरे बीच में किसी को बेटी के प्यार की खुशी-खबरी दी जाती है तो उसके चेहरे पर कलौंस (काला हो जाता है) चा जाती है और वो बस खून का सा घूंट पी कर रह जाता है 
+[16:59] लोगों से छुपता फिरता है के इस बुरी खबर के बाद क्या किसी को मुंह दिखाया गया। सोचता है कि जिल्लत के साथ बेटी को लिए रहो हां मिट्टी में दबा दे? देखो कैसे बुरे हुकुम हैं जो ये खुदा के बारे में लगते हैं 
+[16:60] बुरी शिफत से मुत्तसफ (लिखा जाए) किया जाने के लायक तो वो लोग हैं जो आखिरी का यकीन नहीं रखते। रहा अल्लाह, तो उसके लिए सब से बरतार सिफ़्फ़त हैं, वही तो सब पर ग़ालिब और हिकमत में कामिल है 
+[16:61] अगर कहीं अल्लाह लोगों को उनकी ज़्यादती पर फ़ौरन ही पकड़ लिया करता तो रूह ए ज़मीन पर किसी मुतनफ़्फ़िस को न छोड़ता। लेकिन वो सब को एक वक्त ए मुकर्रर तक मोहलत देता है। फिर जब वो वक्त आ जाता है तो उसे कोई एक घड़ी भर भी आगे पीछे नहीं हो सकता
+[16:62] आज ये लोग वो चीज़े अल्लाह के लिए तजवीज़ कर रहे हैं जो खुद अपने लिए इन्हें नापसंद हैं, और झूठ कहती हैं इनकी ज़ुबानें के इनके लिए भला ही भला है। इनके लिए तो एक ही चीज़ है, और वो है दोज़ख की आग, ज़रूर ये सब से पहले हमें में पकड़ लेंगे 
+[16:63] ख़ुदा की कसम, (ऐ मुहम्मद) तुमसे पहले भी बहुत सी क़ौमों में हम रसूल भेज चुके हैं (और पहले भी यहीं होता जा रहा है के) शैतान ने उनको खुशनुमा बना कर दिखाया (और रसूलों की बात उनको ने मान कर ना दी)। वही शैतान आज लोगों का भी सरपरस्त बना हुआ है और ये दर्दनक सजा के मुस्तहिक बन रहे हैं 
+[16:64] हमने ये किताब तुम्हारे लिए नाज़िल की है के तुम उन इख्तिलाफात (मतभेद) की हकीकत इनपर खोल दो जिनमें ये पड़े हुए हैं। ये किताब रहनुमाई और रहमत बनकर उतरी है उन लोगों के लिए जो इसे मान लें 
+[16:65] (तुम हर बरसात में देखते हो के) अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया और यकीन मुर्दा पड़ी हुई जमीन में उसकी बदौलत जान डाल दी। यकीनन इस में एक निशानी हैं सुनने वालों के लिए 
+[16:66] और तुम्हारे लिए मवेशियों में भी एक सबक मौजूद है उनके पेट (पेट) से गोबर और खून के दरमियान हम एक चीज तुम्हें पिलाते हैं, यानी खाली दूध, जो पीने वालों के लिए निहायत खुशगवार है 
+[16:67] (इसी तरह) खजूर के दरख्तों और अंगूर की बेलों से भी हम एक चीज तुम्हें पिलाते हैं जैसे तुम नशा-अवतार भी बना लेते हो और पाक रिज्क भी। यकीनन इस में एक निशानी है अक़ल से काम लेने वालों के लिए 
+[16:68] और देखो, तुम्हारे रब ने शहीद (शहद) की मक्खी पर ये बात वही करदी के पहाड़ों में, और दरख्तों में, और टट्टियों पर चढ़यी हुई बैलों में (पहाड़ों, पेड़ों और लताओं में) जाली) अपने छत्ता बना (अपना छत्ता बनाएं) 
+[16:69] और हर तरह के फूलों का रस चूस और अपने रब की हमवार की हुई राहों पर चलती रह। इस मक्खी के अंदर से रंग बी रंग का एक शरबत निकलता है जिसका शिफा है लोगों के लिए। यक़ीनन इस में भी एक निशानी है उन लोगों के लिए जो गौर ओ फ़िक्र करते हैं 
+[16:70] और देखो, अल्लाह ने तुमको पैदा किया, फिर वो तुमको मौत देता है और तुम में से कोई बेहतरीन उमर को पाहुचा दिया जाता है ता-के सब कुछ जाने के बाद फिर कुछ ना जाने। हक़ ये है के अल्लाह ही इल्म में भी कामिल है और कुदरत में भी 
+[16:71] और देखो, अल्लाह ने तुममें से बाज़ को बाज़ पर रिज़्क में फ़ज़िलत अता की है, फिर जिन लोगों को ये फ़ज़ीलत दी गई है वो ऐसे नहीं हैं के अपना रिज़्क अपने गुलामो की तरफ फेर दीया करते हुए ता-के डोनो इस रिज़क में बराबर के हिस्सेदार बन जाएं। तो क्या अल्लाह ही का एहसान मन्ने से इन लोगों को इंकार है
+[16:72] और वो अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए तुम्हारी हम जिन बीवियां बनाईं और उसी ने उन बीवियों से तुम्हारे बेटे पोते (बेटे और पोते) अता किए और अच्छी अच्छी चीजें तुम्हें खाने को दी। फिर क्या ये लोग (ये सब कुछ देखते हैं और जानते हैं भी) बातिल को मानते हैं, और अल्लाह के एहसान का इंकार करते हैं 
+[16:73] और अल्लाह को छोड़ कर उनको पूजते हैं जिनके हाथ में ना आसमान से इन्हें कुछ भी रिज्क देना है ना ज़मीन से और ना ये काम वो कर ही सकते हैं 
+[16:74] पास अल्लाह के लिए मिसालें ना घड़ो, अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते 
+[16:75] अल्लाह एक मिसाल देता है एक तो है गुलाम, जो दूसरे का ममलुक (गुलाम) है और खुद कोई इख्तियार नहीं रखता। दूसरा शक्स ऐसा है जिसे हमने अपनी तरफ से अच्छा रिज्क अता किया है और वो इस में से खुले और छुपे खूब खर्च करता है। बताओ क्या ये दोनों बराबर हैं? अल्हम्दुलिल्लाह, मगर अक्सर लोग (इस सीधी बात को) नहीं जानते 
+[16:76] अल्लाह एक और मिसाल देता है, दो आदमी हैं एक गंगा बहरा है, कोई काम नहीं कर सकता, अपने आका पर बोझ बना हुआ है, जिधर भी वो उसे भेजे कोई भला काम उसे बन ना आए, दूसरा शक्स ऐसा है के इन्साफ का हुकुम देता है और खुद राह ए रस्त पर क़याम है, बताओ क्या ये दोनों यकसन हैं 
+[16:77] और ज़मीन ओ आसमान के पोशीदा हक़ीक़ का इल्म तो अल्लाह ही को है और क़यामंत के बरपा होने का मामला कुछ दिन न लेगा मगर बस इतनी के जिसमें आदमी की पलक झपक जाए, बलके इसमें भी कुछ काम, हकीकत ये है के अल्लाह सब कुछ कर सकता है 
+[16:78] अल्लाह ने तुमको तुम्हारी मांओं के पैरों से निकला इस हालत में के तुम कुछ ना जानते थे, उसने तुम्हें कान दिए, आंखें दी, और सोचने वाले दिल दिया, इस लिए तुम शुक्र-गुज़ार बनो 
+[16:79] क्या इन लोगों ने कभी परिंदों को नहीं देखा के फ़िज़ा ए आसमानी में किस तरह मुसक्कर हैं? अल्लाह के सिवा किसने इनको थाम रक्खा है? इस में बहुत निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं 
+[16:80] अल्लाह ने तुम्हारे लिए तुम्हारे घरों को जाए सुकून बनाया, उसने जानवरों की खालों से तुम्हारे लिए ऐसा मकान बनाया जिन्होंने तुम सफर और कयाम, दोनों हालात में हल्का पेटे हो. उसने जंवारों के सौफ और ऊन और बालों से (मुलायम फर और ऊन और बाल) पहने और बारातें (उपयोग) की बहुत सी चीजे अदा करदी जो जिंदगी की मुद्दत ए मुकर्ररा तक तुम्हारे काम आती हैं 
+[16:81] उसने अपनी पेडा की हुई बहुत सी चीजो से तुम्हारे लिए साए का इंतेज़ाम किया, पहाड़ों में तुम्हारे लिए पनाह-गाहें (शरण स्थल) बनाईं, और तुम्हें ऐसी पोशाकें (वस्त्र) बख्शी जो तुम्हें गर्मी से बचाती हैं और कुछ दूसरी पोशाकें जो आपस की जंग में तुम्हारी हिफ़ाज़त करती हैं, इस तरह वह तुम्पर अपनी नियामतों की तकमील करता है शायद के तुम फरमाबरदार बानो 
+[16:82] अब अगर ये लोग मुह मोड़ते हैं तो (ऐ मुहम्मद), तुमपर साफ साफ पैग़ाम ए हक़ पाहुंचा देने के सिवा और कोई ज़िम्मेदारी नहीं है
+[16:83] ये अल्लाह के एहसान को पहचानते हैं, फिर इसका इंकार करते हैं और इसमें बेशतर ऐसे हैं जो हक़ मन के लिए तैयार नहीं हैं 
+[16:84] (इन्हें कुछ होश भी है कि हम रोज़ क्या बनाएंगे) जबके हम हर उम्मत में से एक गवाह खड़ा करेंगे, फिर काफ़िरों को ना हुज्जतें (बहाना) पेश करने का मौका दिया जाएगा ना उनसे तौबा ओ इस्तग़फ़र ही का मुतलबा किया जाएगा 
+[16:85] ज़ालिम लोग जब एक दफ़ा अज़ाब देख लेंगे तो इसके बाद ना उनके अज़ाब में कोई तख़्फ़िफ़ (हल्का /हल्का) की जाएगी और ना उन्हें एक लम्हा भर की मोहलत दी जाएगी 
+[16:86] और जब वो लोग जिन्हों ने दुनिया में शिर्क किया था तो अपने रुके हुए शरीकों को देखेंगे तो कहेंगे " ऐ परवरदिगार, यहीं हैं हमारे वो शरीक जिन्हे हम तुझे छोड़ कर पुकारा करते थे" इसपर उनके वो मबूद उन्हें साफ जवाब देंगे के "तुम झूठे हो" 
+[16:87] हम वक्त ये सब अल्लाह के आगे झुक जाएंगे और उनकी वो सारी इफ्तारा-पर्दाज़ियां (जालसाजी) रफू-चक्कर (गायब) हो जाएंगी जो ये दुनिया में करते रहेंगे 
+[16:88] जिन लोगों ने खुद कुफ्र की राह इख्तियार की और दूसरों को अल्लाह की राह से रोका उन्हें हम अज़ाब पर अज़ाब देंगे हमें फसाद के बदले जो वो दुनिया में बरपा करते रहे 
+[16:89] (ऐ मुहम्मद, इन्हें हमारे दिन से खबरदार करदो) जबके हम हर उम्मत में खुद उसी के अंदर से एक गवाह उठा खड़ा करेंगे जो उसका मुकाबला में शहादत (गवाह/गवाही) देगा। और लोगों के मुक़ाबले में शहादत देने के लिए हम तुम्हें लाएंगे और (ये उसी शहादत की तयारी है के) हमने ये किताब तुम्हारी नाज़िल कर दी है जो हर चीज़ की सफ़ वज़ाहत करने वाली है और हिदायत ओ रहमत और बशारत है उन लोगों के लिए जिन्हों ने सर-ए-तस्लीम ख़त्म कर दिया है 
+[16:90] अल्लाह अदल (न्याय) और एहसान (उदारता) और सिला रहमी का हुकुम देता है और बदी (दुष्टता) ओ बेहयाई और ज़ुल्म ओ ज़्यादती से मना करता है। वो तुम्हें हिदायत करता है ता-के तुम सबक लो 
+[16:91] अल्लाह के अहद (वाचा) को पूरा करो जब तुमने उसे कोई अहद बंदा हो, और अपनी कसमें पुख्ता करने के बाद तोड़ न डालो जबके तुम अल्लाह को अपना ऊपर गवाह बना चुके हो। अल्लाह तुम्हारे सब अफाल से खबर है 
+[16:92] तुम्हारी हालत उस औरत की सी न हो जाए जिसने आप ही मेहनत से सूत काता (काता हुआ सूत) और फिर आपने ही उसे इस्तेमाल किया टुकड़े-टुकड़े कर डाला। तुम अपनी कसमों को आपस के मामले में मकार ओ फरेब का हथियार बनाते हो ता-के एक क़ौम दूसरी क़ौम से बढ़कर फ़ायदे हासिल करे हलांके अल्लाह अहद ओ पैमान के ज़रिये से तुमको आजमाइश में डाला जाता है। और जरूर वो कयामत के रोज तुम्हारे तमाम इख्तिलाफात की हकीकत तुमपर खोल देगा 
+[16:93] अगर अल्लाह की मशियत ये होती (के तुम में कोई इख्तिलाफ ना हो) तो वो तुम सबको एक ही उम्मत बना देता, मगर वो जिसे चाहता है गुमराही में डालता है और जिसे चाहता है राह ए रास्ता दिखाता है। और ज़रूर तुमसे तुम्हारे अमाल की बाज़-पुर्ज़े होकर रहेगी
+[16:94] (और ऐ मुसलमानो) तुम अपनी कसमों को आपस में एक दूसरे को धोखा देने का ज़रिया ना बना लेना, कहीं ऐसा ना हो के कोई कदम जमाने के बाद उखड़ जाए और तुम इस जुर्म की पैदाइश में के तुमने लोगों को अल्लाह की राह से रोका, बुरा नतीजा देखो और सच सज़ा भुगतो 
+[16:95] अल्लाह के अहद को थोड़े से फ़ायदे के बदले ना बेच डालो, जो कुछ अल्लाह के पास है वो तुम्हारे लिए ज़्यादा बेहतर है अगर तुम जानो 
+[16:96] जो कुछ तुम्हारे पास है वो ख़र्च हो जाने वाला है और जो कुछ अल्लाह के पास है वही बाकी रहने वाला है, और हम जरूर सब्र से काम लेने वालों को उनके अजर उनके बेहतरी अमल के मुताबिक देंगे 
+[16:97] जो शक्स भी नया अमल करेगा, ख्वा वो मर्द हो या औरत, बशारत ये के हो वो मोमिन, उसे हम दुनिया में पाकीजा जिंदगी बसर कराएंगे और (आखिरत में) ऐसे लोगों को उनके अजर उनके बेहतरीन अमाल के मुताबिक बक्शेंगे 
+[16:98] फिर जब तुम कुरान पढ़ने लगो तो शैतान ए राजिम (शापित) से खुदा की पनाह मांग लिया करो 
+[16:99] उन लोगों पर तसल्लुत (शक्ति/अधिकार) हासिल नहीं होता जो ईमान लाते और अपने रब पर भरोसा करते हैं 
+[16:100] उसका ज़ोर तो उन्ही लोगों पर चलता है जो उसको अपना सरपरस्त बनाता है और उसके बहकाने से शिर्क करता है 
+[16:101] जब हम एक आयत की जगह दूसरी आयत नाज़िल करते हैं अल्लाह बेहतर जानता है के वो क्या नाज़िल करे तो ये लोग कहते हैं कि तुम ये कुरान खुद बिगाड़ते हो। असल बात ये है कि मेरे अंदर से अक्सर लोग हकीकत से ना-वाक़िफ़ हैं 
+[16:102] इनसे कहो के इसे तो रूह-उल-क़ुद्दूस ने ठीक ठीक मेरे रब की तरफ से बा-तदरीज़ नाज़िल किया है ता-के ईमान लाने वालों के ईमान को पुख्ता करे और फरमा-बरदारों को जिंदगी के मामलात में सीधी राह बताई और उन्हें फलाह ओ सआदत की खुश खबरी दे 
+[16:103] हमें मालूम है ये लोग तुम्हारे मुतालिक कहते हैं के इस शक्स को एक आदमी सिखाता है। हलानके उनका इशारा जिस आदमी की तरफ है उसकी जुबान अजमी है और ये साफ अरबी जुबान है 
+[16:104] हकीकत ये है के जो लोग अल्लाह की आयत को नहीं मानते अल्लाह कभी उनको सही बात तक पहुंचने की तौफीक नहीं देता और ऐसे लोगों के लिए दर्दनाक अजाब है 
+[16:105] (झूठी बातें नबी नहीं घड़ता बलके) झूठ वो लोग घड़ रहे हैं जो अल्लाह की आयत को नहीं मानते, वही हकीकत में झूठे हैं 
+[16:106] जो शक्स ईमान लाने के बाद कुफ्र करे (वो अगर) मजबूर किया गया हो और दिल उसका ईमान पर मुतमइन (आश्वस्त) हो (तब तो खैर) मगर जिसने दिल की रज़ा-मंदी से कुफ्र को क़बूल करलिया उसपर अल्लाह का ग़ज़ब है और ऐसे सब लोगों के लिए बड़ा अज़ाब है 
+[16:107] ये इस तरह के उन्होन ने आखिरी के मुकाबले में दुनिया की जिंदगी को पसंद किया कार्लिया, और अल्लाह का कायदा है कि वो उन लोगों को राह ए निजात नहीं दिखाता जो उसकी नियामत का कुफ़्रान करें
+[16:108] ये वो लोग हैं जिनके दिलों और कानों और आँखों पर अल्लाह ने मोहर (मुहर) लगा दी है ये गफ़लत में डूब चुके हैं 
+[16:109] ज़रूर है के आख़िरत में यही खसरे में रहें 
+[16:110] बा-ख़िलाफ़ इसके जिन लोगों का हाल ये है के जब (ईमान लाने की वजह से) वो सताए गए तो उनको ने घर-बार छोड़ दिए, हिजरत की, राह ए खुदा में ताकतियां झेली और सब्र से काम लिया, उनके लिए यकीनन तेरा रब गफूर ओ रहीम है 
+[16:111] (सब का फैसला उस दिन होगा) जबके हर मुतनफ़िस अपने ही बचाव की फ़िक्र में लगा हुआ होगा और हर एक को उसके लिए बदला पूरा दिया जाएगा और किसी पर ज़रा बराबर ज़ुल्म न होने पाएगा 
+[16:112] अल्लाह एक बस्ती की मिसाल देता है, वो अमन ओ इत्मिनान की जिंदगी बसर कर रही थी और हर तरफ से उसको ब-फरागत रिज़क पाहुंच रहा था के उसने अल्लाह की नियामतों का कुफ़्रान शुरू कर दिया, तब अल्लाह ने उसके बाशिंदों को उनके कार्टूनों का ये मजा चखाया के भूख और खौफ की मुसिबतें उनपर छा गई 
+[16:113] उनके पास उनकी अपनी क़ौम में से एक रसूल आया मगर उन्होन ने उसको झुठला दिया, आख़िर ए कार अज़ाब ने उनको आ लिया जबके वो जालिम हो चुके थे 
+[16:114] पस ऐ लोगों, अल्लाह ने जो कुछ हलाल और पाक रिज़क तुमको बख्शा है उसे खाओ और अल्लाह के एहसान का शुक्र अदा करो अगर तुम ठीक उसी की बंदगी करने वाले हो 
+[16:115] अल्लाह ने जो कुछ तुमपर हराम किया है वो है मुर्दार और खून और सुवर (सूअर) का गोश्त और वो जानवर जिसपर अल्लाह के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो। अलबत्ता भूख से मजबूर होकर अगर कोई इन चीजों को खा ले, बिना इसके वो कानून ए इलाही की खिलाफ वारजी का ख्वाहिश-मंद हो, या हद ए जरूरी से तजावुज का मुर्तकिब हो, तो यकीनन अल्लाह माफ करने और रहम फरमाने वाला है 
+[16:116] और ये जो तुम्हारी ज़ुबानें झूठे एहकाम लगाती हैं के ये चीज़ हलाल है और वो हराम है, तो इस तरह के हुकुम लगा कर अल्लाह पर झूठ ना बंद करो, जो लोग अल्लाह पर झूठे इफ्तारा बांधते हैं (झूठ लिखते हैं) हैं वो हरगिज फलाह नहीं पीते हैं 
+[16:117] दुनिया का ऐश चांद रोजा है आखिर ई कार उनके लिए दर्दनाक सज़ा है 
+[16:118] वो चीज़ हमने खास तौर पर यहुदियों (यहूदियों) के लिए हराम की थी जिनका ज़िक्र हम इस पहले तुमसे कर चुके हैं और ये अनपर हमारा ज़ुल्म ना था बल्के उनका अपना ही ज़ुल्म था जो वो अपने ऊपर कर रहे थे 
+[16:119] अलबत्ता जिन लोगों ने जहालत की बिना पर बुरा अमल किया और फिर तौबा करके अपने अमल की इस्लाह कार्ली तो यकीनन तौबा ओ इस्लाह के बाद तेरा रब उनके लिए गफूर और रहीम है 
+[16:120] वाकिया ये है के इब्राहीम अपनी ज़ात से एक पूरी उम्मत थी, अल्लाह का मुती ए फरमान और यक्सू। वो कभी मुशरिक न था 
+[16:121] अल्लाह की नियामतों का शुक्र अदा करने वाला था। अल्लाह ने उसको मुंतखब (चुना) करलिया और सीधा रास्ता दिखाया
+[16:122] दुनिया में उसको बुलाया दी और आख़िरत में वो यकीनन सालिहें में से होगा 
+[16:123] फिर हमने तुम्हारी तरफ ये वही भेजी के यक्सू होकर इब्राहिम के तारीख़े पर चलो और वो मुशरिकों में से ना था 
+[16:124] रहा सब्त (सब्बाथ/हफ्ते का दिन) तो वो हमने उन लोगों पर मुसल्लत किया था जिन्हों ने उसके एहकाम में इख्तिलाफ किया, और यकीनन तेरा रब कयामत के रोज उन सब बातों का फैसला कर देगा जिन में वो इख्तिलाफ करते रहेंगे 
+[16:125] (ऐ नबी), अपने रब के रास्ते की तरफ दावत दो हिकमत और उम्मीद हिदायत के साथ, और लोगों से मुबाहिसा (चर्चा) करो ऐसे तरीक़े पर जो बेहतरीन हो। तुम्हारा रब ही ज्यादा बेहतर जानता है कि कौन उसकी राह से भटका हुआ है और कौन राह-ए-रास्त पर है 
+[16:126] और अगर तुम लोग बदला लो तो बस उसी कदर ले लो जिस कदर तुमपर ज्यादा की गई हो, लेकिन अगर तुम सब्र करो तो यकीनन ये सब्र करो वालों ही के हक में बेहतर है 
+[16:127] (ऐ मुहम्मद) सब्र से काम किए जाओ और तुम्हारा ये सब्र अल्लाह ही की तौफीक से है, इन लोगों की हरकत पर रांझ ना करो और ना इनकी चालबाज़ियों पर दिल तंग (संकट) हो 
+[16:128] अल्लाह उन लोगों के साथ है जो तकवा से काम लेते हैं और एहसान पर अमल करते हैं 
+
+सूरह 17: बानी इसराइल (इस्राएली) 
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+[17:1] पाक है वो जो ले गया एक रात अपने बंदे को मस्जिद ए हराम से दूर कि उस मस्जिद तक जिसने महल को उसने बरकत दी है, ता-के उसे अपनी कुछ निशानियों का मुशाहिदा(दिखाएँ)कराए। हकीकत में वही है सब कुछ सुनने और देखने वाला 
+[17:2] हमने इसे पहले मूसा को किताब दी थी और उसे बानी इजराइल के लिए ज़रिया ए हिदायत बनाया था, इस टेक के साथ के मेरे सिवा किसी को अपना वकील (अभिभावक) न बनाना 
+[17:3] तुम उन लोगों की औलाद हो जिनहें हमने नूह के साथ कश्ती पर सवार किया था, और नूह एक शुक्रगुज़ार बंदा था 
+[17:4] फिर हमने अपनी किताब में बानी इसराइल को इस बात पर भी मुतनब्बेह (चेतावनी) करदिया था के तुम दो मरतबा ज़मीन में फ़साद ए अज़ीम बरपा करोगी और बड़ी सरकशी दिखाओगे 
+[17:5] आख़िर ए कार जब उन में से पहली सरकशी का मौका पेश आया, तो ऐ बानी इज़राइल, हमने तुम्हारे मुक़ाबले पर अपने ऐसे बंदे उठाए जो निहायत ज़ोरावर थे और वो तुम्हारे मुल्क में घुस कर हर तरफ फ़ैल गए। ये एक वादा था जिसका पूरा होकर ही रहना था 
+[17:6] इसके बाद हमने तुम्हें एक दूसरे गलेबे का मौका दे दिया और तुम्हें माल और औलाद से मदद दी और तुम्हारी तदाद पहले से बढ़ा दी
+[17:7] देखो! तुमने भलाई की तो वो तुम्हारी अपनी ही ली थी, और बुराई की तो वो तुम्हारी अपनी ज़ात के लिए बुरी साबित हुई। फिर जब दूसरे वादे का वक्त आया तो हमने दूसरे दुश्मनों को तुमपर मुसल्लत किया ता-के वो तुम्हारे चेहरे बिगाड़ दें और मस्जिद (बैत उल मकदिस) में उसकी तरह घुस जाएं, जिस तरह पहले दुश्मन घुसे थे और जिस चीज पर उनका हाथ पड़े उसे तबाह करके रख दें 
+[17:8] हो सकता है कि अब तुम्हारा रब तुमपर रहम करे, लेकिन अगर तुमने फिर अपनी साबिक राविश (पूर्व व्यवहार) का इरादा किया तो हम भी फिर अपनी सजा का इरादा करेंगे, और काफिर ए नियामत लोगों के लिए हमने जहन्नुम को क़ैद खाना बना रखा है 
+[17:9] हकीकत ये है कि ये कुरान वो राह दिखाता है जो बिल्कुल सीधी है। जो लोग इसे मान कर भले काम करने लगें उन्हें ये बशारत देता है के उनके लिए बड़ा अजर है 
+[17:10] और जो लोग आख़िरत को ना माने उन्हें ये खबर देता है के उनके लिए हमने दर्दनक अज़ाब मुहैय्या कर रखा है 
+[17:11] इंसान शरर (बुराई) हमें तरह माँगता है जिस तरह खैर माँगनी चाहिए। इंसान बड़ा ही जल्दी बाज़ वाकये हुआ है 
+[17:12] देखो, हमने रात और दिन को दो निशानियां बनाई हैं। रात की निशानी को हमने बे-नूर बनाया, और दिन की निशानी को रोशन कर दिया, ता-के तुम अपने रब का फज़ल तलाश कर सको और माह-ओ-साल का हिसाब मालूम कर सको। इसी तरह हमने हर चीज को अलग-अलग मुमैय्याज (स्पष्ट रूप से अलग) करके रखा है 
+[17:13] हर इंसान का शगुन (भाग्य/शगुन) हमने उसे अपनी गली में लटका रखा है, और कयामत के रोज हम एक नुइशता (पुस्तक/रिकॉर्ड/स्क्रॉल) उसके लिए निकालेंगे जिसे वो खुली किताब की तरह पायेगा 
+[17:14] पढ़ अपना नाम-ए-आमाल, आज अपना हिसाब लगाने के लिए तू खुद ही काफी है 
+[17:15] जो कोई राह-ए-रास्त इख्तियार करे उसकी रस्त-रवी उसके अपने ही लिए मुफीद है, और जो गुमराह हो उसकी गुमराही का जवाब usi par hai. कोई बोझ उठाने वाला दूसरे का बोझ ना उठाएगा और हम अजब देने वाले नहीं हैं जबतक के (लोगों को हक-ओ-बातिल का फर्क समझने के लिए) एक पैगम्बर ना भेज दें 
+[17:16] जब हम किसी बस्ती को हलाक करने का इरादा करते हैं तो उसके खुश हाल लोग को हुकुम देते हैं और वो हमें नफरमानियां करने लगते हैं, तब अज़ाब का फैसला हमें बस्ती पर चस्पां हो जाता है और हम उसे बर्बाद करके रख देते हैं 
+[17:17] देखलो, कितनी ही नसलें (पीढ़ियां) हैं जो नूंह के बाद हमारे हुकुम से हलाक हुई, तेरा रब अपने बंदों के गुनाहों से पूरी तरह से बाख़बर है और सब कुछ देख रहा है 
+[17:18] जो कोई जल्दी का ख्वाहिश-मंद हो, उसे यहीं हम दे देते हैं जो कुछ भी देना चाहते हैं, फिर उसके मकसूम में जहन्नुम लिख देते हैं जिसे वो तपेगा, मलामत ज़दा और रहमत से महरून होकर
+[17:19] और जो आखिरी का ख्वाहिश-मंद हो और उसके लिए सई (प्रयास) करे जैसी के उसके लिए सई (प्रयास) करनी चाहिए, और हो वो मोमिन, तो ऐसे हर शक्स की सई मशकूर होगी 
+[17:20] इनको भी और उनको भी, दोनों फरिकों को हम (दुनिया में) सामान-ए-ज़िस्ट दिए जा रहे हैं, ये तेरे रुब का अतिया है, और तेरे रुब की अता को रोकने वाला कोई नहीं है 
+[17:21] मगर देखलो, दुनिया ही में हमने एक गिरोह को दूसरे पर कैसी फजीलत दे रखी है, और आखिरी में उसके दर्जे और भी ज्यादा होंगे, और उसकी फजीलत और भी ज्यादा बढ़ चढ़ कर होगी 
+[17:22] तू अल्लाह के साथ कोई दूसरा मबूद न बना, वरना मलामत ज्यादा और बे यार ओ मददगार बैठा रह जाएगा 
+[17:23] तेरे रब ने फैसला कर दिया है के: तुम लोग किसी की इबादत न करो, मगर सिर्फ उसकी, वालिदेन (मां-बाप) के साथ नई सुलूक करो। अगर तुम्हारे पास उनके साथ कोई एक, या दोनों, बूढ़े (पुराने) होकर रहें तो उन्हें 'उफ्फ' तक ना कहो, ना उन्हें जिदक कर जवाब दो, बलके उनसे एहतराम के साथ बात करो 
+[17:24] और नरमी ओ रहम के साथ उनके सामने झुक कर रहो, और दुआ किया करो के "परवरदिगार, इनपर रहम फरमा जिस तरह इन्हों ने रहमत ओ शफाकत के साथ मुझे बचपन में पाला था" 
+[17:25] तुम्हारा रब खूब जानता है के तुम्हारे दिलों में क्या है, अगर तुम साले बनकर रहो तो वो ऐसे सब लोग के लिए दरगुज़ार करने वाला है जो अपने कसूर पर मुतनब्बेह हो कर बंदगी के रवैये की तरफ पलट आएं 
+[17:26] रिश्तेदार को उसका हक दो और मिस्कीन और मुसाफिर को उसका हक। फ़िज़ूल खर्ची न करो 
+[17:27] फ़िज़ूल खर्च लोग शैतान के भाई हैं, और शैतान अपने रब का ना-शुक्र है 
+[17:28] अगर उनसे (यानी हाजत-मंद रिश्तेदारों, मिस्किनो और मुसाफिरों से) तुम्हें कतराना हो (उनसे दूर हो जाओ), क्या बिना पार के अभी तुम अल्लाह की हमें रहमत को जिसकी तुम उम्मीद कर रहे हो, तो उन्हें नर्म जवाब दे दो 
+[17:29] ना तो अपना हाथ बगीचे से बंद रखो और ना उसे बिल्कुल ही खुला छोड़ दो के मलामत जादा और अजीज बन कर रह जाओ 
+[17:30] तेरा रब जिसके लिए चाहता है रिज्क कुशादा करता है और जिसके लिए चाहता है तंग करता है, वो अपने बंदों के हाल से ख़बर है और उन्हें देख रहा है 
+[17:31] अपनी औलाद को इफ़्लास (तंगदस्ती) के अंदेशे से क़त्ल ना करो, हम उन्हें भी रिज़क़ देंगे और तुम्हें भी। दर हक़ीक़त उनका क़तल एक बड़ी ख़ता है 
+[17:32] ज़िना के क़रीब ना फटको, वो बहुत बुरा फेल (काम) है और बड़ा ही बुरा रास्ता 
+[17:33] क़त्ल-ए-नफ़्स का इर्तिक़ाब न करो जैसे अल्लाह ने हराम किया है मगर हक़ के साथ, और जो शक्स मज़लूमाना क़तल किया गया हो उसके वाली को हमने क़िस्स (प्रतिशोध) के मुतालिबे का हक़ अता किया है। पास चाहिए के वो क़तल में हद से ना गुज़रे, उसकी मदद की जाएगी
+[17:34] माल-ए-यतीम के पास न फटको मगर अहसान तारीख़े से, यहां तक ​​के वो अपने शबाब (जवानी) को पाहुंच जाए। अहद की पकड़ करो, अहद के बारे में तुमको जवाब-देह करनी होगी 
+[17:35] पैमाने (माप/तराजू) से दो तो पूरा भर कर दो, और तोलो तो ठीक तराजू से तोलो। ये अच्छा तरीक़ा है और बा-लिहाज़ अंजाम भी यही बेहतर है 
+[17:36] किसी ऐसी चीज़ के पीछे ना लगो जिसका तुम्हें इल्म ना हो, यकीनन आंख, कान और दिल सब ही कि बाज़-पुर्स होनी है 
+[17:37] ज़मीन में अकड़ कर ना चलो, तुम ना ज़मीन को फाड़ सकते हो ना पहाड़ों की बुलंदी को पाहुंच सकते हो 
+[17:38] उमूर में से हर एक का बुरा पहलू तेरे रब के नज़दीक ना-पसंददा है 
+[17:39] ये वो हिकमत की बातें हैं जो तेरे रब ने तुझपर वही की है और देख! अल्लाह के साथ कोई दूसरा मबूद न बना बैठा वरना तू जहन्नुम में डाल दिया जाएगा मालामत जादा और हर भलाई से महरूम होकर 
+[17:40] कैसी अजीब बात है के तुम्हारे रब ने तुम्हें तो बेटों (बेटों) से नवाजा और खुद अपने लिए मलिका (फरिश्तों) को बेटियां बना लिया? बड़ी झूठी बात है जो तुमलोग ज़ुबानो से निकलते हो 
+[17:41] हमने कुरान में तरह तरह से लोगों को समझा के होश में आए, मगर वो हक़ से और ज़्यादा दूर ही भागे जा रहे हैं 
+[17:42] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो के अगर अल्लाह के साथ दूसरे खुदा भी होते, जैसा के ये लोग कहते हैं, तो वो मालिक ए अर्श के मुकाम पर पहुंचने की जरूर कोशिश करते हैं 
+[17:43] पाक है वो और बहुत बाला-ओ-बरतर है उन बातों से जो ये लोग कह रहे हैं 
+[17:44] उसकी पाकी तो सातो (सात) आसमान और ज़मीन और वो सारी चीज़ें बयां कर रही हैं जो आसमान ओ ज़मीन में हैं। कोई चीज़ ऐसी नहीं है जो उसकी हम्द के साथ उसकी तस्बीह ना कर रही हो, मगर तुम उनकी तस्बीह समझते नहीं हो। हकीकत ये है के वो बड़ा ही बोझाबर (बहुत सहनशील) और दरगुज़ार करने वाला है 
+[17:45] जब तुम कुरान पढ़ते हो तो हम तुम्हारे और आख़िरत पर ईमान न लाने वालों के दरमियान एक परदा रखते हैं 
+[17:46] और उनके दिलों पर ऐसा गिलाफ़ (अदृश्य पर्दा) चढ़ा देते हैं के वो कुछ नहीं समझते, और उनके कानों में गिरानी अदा करते हैं और जब तुम कुरान में अपने एक ही रब का जिक्र करते हो तो वो नफ़रत से मुह मोड़ लेते हैं 
+[17:47] हमें मालूम है कि जब वो कान लगा कर तुम्हारी बात सुनते हैं तो दर-असल क्या सुनते हैं, और जब बैठ कर बहस करते हैं तो क्या कहते हैं। ये जालिम आपस में कहते हैं के ये एक सहर-ज़ादा (मोहित) आदमी है जिसके पीछे तुमलोग जा रहे हो 
+[17:48] देखो, कैसी बातें हैं जो ये लोग तुमपर चानते हैं, ये भटक गए हैं, इन्हें रास्ता नहीं मिलता 
+[17:49] वो कहते हैं “जब हम सिर्फ हड्डियां और खाक होकर रह जाएंगे तो क्या हम नए सिरे से भुगतान करके उठेंगे?” 
+[17:50] इनसे कहो “तुम पत्थर या लोहा भी हो जाओ
+[17:51] या उसे भी ज़्यादा सख्त कोई चीज़ जो तुम्हारे ज़हन में क़बूल-ए-हयात से बाहर हो” (फिर भी तुम उठ कर रहोगे)। वो जरूर पूछेंगे “कौन है वो जो हमें फिर जिंदगी की तरफ पलटा कर लाएगा?” जवाब में कहो "वही जिसने पहली बार तुमको पेदा किया"। तुम कहो " क्या अजब, वो वक्त करीब ही आ लगा हो 
+[17:52] जिस रोज वो तुम्हे पुकारेगा तो तुम उसकी हम्द करते हुए उसकी पुकार के जवाब में निकल आओगे और तुम्हारा गुमान हमारा वक्त ये होगा के हम बस थोड़ी देर ही इस हालत में पड़े रहेंगे हैं” 
+[17:53] और (ऐ मुहम्मद), मेरे बंदों से कहदो के ज़ुबान से वो बात निकला करें जो बहती हो। दर-असल ये शैतान है जो इंसानों के दरमियान फ़साद डालने की कोशिश करता है। हकीकत ये है के शैतान इंसान का खुला दुश्मन है 
+[17:54] तुम्हारा रब तुम्हारे हाल से ज्यादा वाकिफ है। वो चाहे तो तुमपर रहम करे और चाहे तो तुम्हें अज़ाब दे दे। और (ऐ नबी) हमने तुमको लोगों पर हवालादार (अभिभावक) बनाकर नहीं भेजा है 
+[17:55] तेरा रब ज़मीन और आसमान की मखलूक़त को ज़्यादा जानता है। हमने पैगम्बरों को बाज़ से बर्बाद कर दिया, और हमने ही दाऊद को ज़बूर दी थी 
+[17:56] इनसे कहो पुकार देखो उन माबूदों को जिनको तुम खुदा के सिवा (अपना कारसाज़) समझते हो, वो किसी तकलीफ को तुमसे ना हटा सकते हैं ना बदल सकते हैं हैं 
+[17:57] जिनको ये लोग पुकारते हैं वो तो खुद अपने रब के हुजूर रसाई हासिल करने का वसीला तलाश कर रहे हैं (दृष्टिकोण के साधन तलाशते हैं) के कौन उसे करीब तार हो जाए और वो उसकी रहमत के उम्मीद और उसके अज़ाब से खैफ (डरते) हैं। हकीकत ये है कि तेरे रब का अज़ाब है हाय डरने के लाहिक 
+[17:58] और कोई बस्ती ऐसी नहीं जिसे हम कयामत से पहले हलाक न करें या सच अज़ाब न दें। ये नविश्ता-ए-इलाही (अनन्त रिकॉर्ड) में लिखा हुआ है 
+[17:59] और हमको निश्निया भेजने से नहीं रोका मगर इस बात ने के इनसे पहले के लोग उनको झुठला चुके हैं। (चुनांचे देखलो) समूद को हमने एलानिया ऊंटनी (वह-ऊंटनी) ला कर दी और उन्होन ने उसपर जुल्म किया। हम निशानियां इसी के लिए तो भेजते हैं के लोग उन्हें देख कर डरें 
+[17:60] याद करो (ऐ मुहम्मद), हमने तुमसे कह दिया था के तेरे रब ने इन लोगों को घेर रखा है और ये जो कुछ अभी हमने तुम्हें दिखाया है, इसको और हम दरख्त को जिसपर कुरान में लानत की गई है, हमने लोगों के लिए बस एक फ़ितना बनाकर रख दिया। हम उनमें तम्बीह (चेतावनी) बराबर तम्बीह (चेतावनी) किए जा रहे हैं, मगर हर तम्बीह इनकी सरकशी ही में इज़ाफ़ा किए जाती है 
+[17:61] और याद करो जबके हमने मलाइका (फरिश्तों) से कहा आदम को सजदा करो, तो सब ने सजदा किया, मगर इबलीस ने ना किया, उसने कहा “क्या मैं उसको सजदा करूं जैसे तू ने मिट्टी से बनाया है?”
+[17:62] फिर वो बोला "देख तो सही, क्या ये काबिल था कि तू ने इसे मुझपर फजीलत दी? अगर तू मुझे कयामत के दिन तक मोहलत दे तो मैं इसकी पूरी नाक की बेहकानी (उखाड़) कर डालूं। बस थोड़े ही लोग मुझे बचा सकेंगे।" 
+[17:63] अल्लाह ताला ने फरमाया, "अच्छा तो जा, इनमें से जो भी तेरी जोड़ी करें, तुझ समेत उन सब के लिए जहन्नुम ही भरपुर जजा है 
+[17:64] तू जिस को अपनी दावत से फिसल सकता है फिसल ले। उन पर अपने सवार (घुड़सवार) और प्यादे (पैदल) चढ़ा ला, माल और औलाद में उनके साथ साझी (साथी) लगा, और उनको वादों के जाल में फंस, और शैतान के वादे एक धोखे के सिवा और कुछ भी नहीं 
+[17:65] यकीनन मेरे बंदों पर तुझ पर कोई इक्तेदार हासिल न होगा, और तवक्कुल (भरोसे) के लिए तेरा रुब काफी है” 
+[17:66] तुम्हारा (हकीकी) रुब तो वो है जो समंदर में तुम्हारी कश्ती चलाता है ता-के तुम उसका फ़ज़ल तलाश करो। हकीकत ये है के वो तुम्हारे हाल पर निहायत मेहरबान है 
+[17:67] जब समंदर में तुम्हारी मुसीबत आती है तो हमें एक के सिवा दूसरे जिन को तुम पुकारते हो वो सब गम हो जाते हैं, मगर जब तुमको बच्चा कर ख़ुशी (जमीन) पर पहूंचा देता है तो तुम उसके मुंह मोड़ जाते हो। इंसान वक्त बड़ा नाशुक्रा है 
+[17:68] अच्छा, तो क्या तुम इस बात से बिल्कुल बे-खौफ हो के खुदा कभी खुश्की (जमीन) पर ही तुमको जमीन में धांसा दे, या तुम पथराओ करने वाली आंधी भेज दे और तुम उसे बचाने वाला कोई हिमायती ना पाओ 
+[17:69] और क्या तुम्हें इसका कोई अंदेशा नहीं के खुदा फिर कोई वक्त समंदर में तुमको ले जाए और तुम्हारी नाखुशी के बदले तुम्हारे साथ तूफानी हवा भेज कर तुम्हें गुस्सा करदे और तुमको ऐसा कोई ना मिले जो उसे तुम्हारे इस अंजाम की पुछ-गज्ज कर सके 
+[17:70] ये तो हमारी इनायत है के हमने बानी आदम को बुज़ुर्गी (सम्मान) दी और उन्हें ख़ुशकी (ज़मीन) ओ तारी (समुद्र) में सवारियां अता की और उनको पाकीज़ा चीज़ों से रिज़क दिया और अपनी बहुत से मखलूक़त पर नुमायां फौक़ियात (उत्कृष्ट) बख्शी 
+[17:71] फ़िर खयाल करो उस दिन का जबके हम हर इंसान गिरो ​​को उसके पेशवा (नेता) के साथ बुलाएंगे, हमें वक्त जिन लोगों ने उनका नाम-ए-आमाल सीधे हाथ में दिया वो अपना कारनामा पढ़ेंगे और उन्पर जरा बराबर जुल्म न होगा 
+[17:72] और जो इस दुनिया में अंधा बनकर रहा वो आख़िरत में भी अँधा ही रहेगा बलके रास्ते पाने में अँधे से भी ज़्यादा नाकाम 
+[17:73] (ऐ मुहम्मद), लोगों ने इस कोशिश में कोई कसार उठाया नहीं राखी के तुम्हें फिटने में डाल कर हमें वही से फेर दें जो हमने तुम्हारी तरफ भेजी है, ता-के तुम हमारे नाम पर अपनी तरफ से कोई बात गढ़ो। अगर तुम ऐसा करते तो वो जरूर तुम्हें अपना दोस्त बना लेते 
+[17:74] और बुरा ना था के अगर हम तुम्हें मजबूत ना रखते तो तुम उनकी तरफ कुछ ना कुछ झुक जाते
+[17:75] लेकिन अगर तुम ऐसा करते तो हम तुम्हें दुनिया में भी दोहरे (डबल) अजब का मजा चखाते और आख़िरत में भी दोहरे अज़ाब का, फिर हमारे मुकाबले में तुम कोई मददगार न पाते [ 
+17:76] और ये लोग इस बात पर भी तुले रहे हैं के तुम्हारे कदम इस सर-जमीन से उखाड़ दें (उखाड़ें) दीन और तुम्हें यहां से निकल बाहर करें, लेकिन अगर ये ऐसा करेंगे तो तुम्हारे बाद ये खुद यहां कुछ ज्यादा देर न ठहर सकेंगे 
+[17:77] ये हमारा मुस्तकिल तारीख-कर है जो उन सब रसूलों के मामले में हमने बारता है जिन्होंने तुमसे पहले हमें भेजा था, और हमारे तारीखे-कार में तुम कोई तगय्यूर (बदलाव) ना पाओगे 
+[17:78] नमाज़ क़याम करो ज़वाल-ए-आफ़ताब (सूरज का ढलना) से लेकर रात के अँधेरे तक, और फज्र के कुरान का भी इंतेज़ाम करो, क्योंकि कुरान ए फज्र मशूद (गवाह) होता है 
+[17:79] और रात को तहज्जुद पढ़ो, ये तुम्हारे लिए नफ्ल है, बैद (दूर/दूर) नहीं के तुम्हारा रब तुम्हें मक़ाम ए महमूद पर फैज़ करदे 
+[17:80] और दुआ करो के परवरदिगार, मुझको जहां भी तू लेजा सच्चाई के साथ लेजा और जहां से भी निकल सच्चाई के साथ निकल और अपनी तरफ से एक इक्तेदार (शक्ति) को मेरा मददगार बना दे 
+[17:81] और एलान करदो के "हक़ आ गया और बात मिट गया, बात तो मिटने ही वाला है" 
+[17:82] हम कुरान के सिलसिला-ए-तंज़िल (रहस्योद्घाटन) में वो कुछ नाज़िल कर रहे हैं जो माने वालों के लिए तो शिफ़ा और रहमत है, मगर ज़ालिमों के लिए ख़सारे (नुक्सान/नुकसान) के सिवा और किसी चीज़ में इज़ाफ़ा नहीं करता 
+[17:83] इंसान का हाल ये है के जब हम उसको नियामत अता करते हैं तो वो अहंकार (अहंकारी) और पीठ मोड़ लेता है, और जब जरा मुसीबत से दो-चार होता है तो मयुस होना लगता है 
+[17:84] (ऐ नबी), लोगों से कहदो के "हर एक अपने तरीके पर अमल कर रहा है, अब ये तुम्हारा रब" हाय बेहतर जानता है के सीधी राह पर कौन है” 
+[17:85] ये लोग तुमसे रूह (आत्मा) के मुतालिक पूछते हैं। कहो "ये रूह मेरे रुब के हुकुम से आती है, मगर तुम लोगों ने इल्म से कम ही बेहरा पाया है" (लेकिन आपको केवल थोड़ा सा ज्ञान दिया गया है) 
+[17:86] और (ऐ मुहम्मद), हम चाहें तो वो सब कुछ तुमसे छीन लें जो हमने वहीं के ज़रिये से तुमको अता किया है, फिर तुम हमारे मुक़बले में कोई हिमायती (सहायक) न पाओगे जो इसे वापस दिला सके 
+[17:87] ये तो जो कुछ तुम्हें मिला है तुम्हारे रब की रहमत से मिला है, हकीकत ये है के उसका फज़ल तुमपर बहुत बुरा है 
+[17:88] कहदो के अगर इंसान और जिन्न सब के सब मिलकर क्या कुरान जैसी कोई चीज लाने की कोशिश करें तो ना ला सकेंगे, चाहे वो सब एक दूसरे के मददगार ही क्यों ना हों 
+[17:89] हमने कुरान में लोगों को तरह-तरह से समझा मगर अक्सर लोग इंकार ही पर जमे रहेंगे 
+[17:90] और उन्होंने कहा " हम तेरी बात ना मानेंगे जब तक तू हमारे लिए ज़मीन को फाड़ कर एक चश्मा (वसंत) जारी ना करदे
+[17:91] हां तेरे लिए खजूरों और अंगूरों का एक बाग पैदा हो और तू हमसें नहरें रावन करदे 
+[17:92] हां तू आसमान को टुकड़े-टुकड़े करके हमारे ऊपर गिरा दे जैसा के तेरा दावा है या खुदा और फरिश्तों को रु दार रु (आमने सामने) हमारे सामने ले आए 
+[17:93] हां तेरे लिए सोने का एक घर बन जाए या तू आसमान पर चढ़ जाए, और तेरे पैरों का भी हम यकीन ना करेंगे जब तक कि तू हमारे ऊपर एक ऐसी तहरीर (लिखित) न उतार लाए जिसे हम पढ़ें"। (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो "पाक है मेरा" परवरदिगार! क्या मैं एक पैग़ाम लाने वाले इंसान के सिवा और भी कुछ हूँ?” 
+[17:94] लोगों के सामने जब कभी हिदायत आई तो उसपर ईमान लाने से उनको किसी चीज़ ने नहीं रोका मगर उनको इसी क़ौल ने के "क्या अल्लाह ने बशर (इंसान) को पैगम्बर बना कर भेज दिया?" 
+[17:95] इनसे कहो अगर ज़मीन में फ़रिश्ते इतमीनान से चल फिर रहे होते तो हम ज़रूर आसमान से किसी फ़रिश्ते ही को उनके लिए पैगम्बर बना कर भेजते 
+[17:96] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहदो के मेरे और तुम्हारे दरमियान बस एक अल्लाह की गवाही काफ़ी है, वो अपने बंदों के हाल से खबर है और सब कुछ देख रहा है 
+[17:97] जिसको अल्लाह हिदायत दे वही हिदायत पाने वाला है, और जिसे वो गुमराही में डाल दे तो उसके सिवा ऐसे लोगों के लिए तू कोई हमी ओ नासिर (रक्षक और मददगार) नहीं पा सकता। उन लोगों को हम क़यामत के रोज़ औंधे मुंह खींच लाएंगे, अंधे, गूँगे और बाहर। उनका ठिकाना जहन्नुम है. जब कभी उसकी आग धीमी होने लगेगी हम उसे और भड़का देंगे 
+[17:98] ये बदला है उनको इस हरकत का के अनहोन ने हमारी आयत का इंकार किया और कहा "क्या जब हम सिर्फ हदियां और खाक (धूल) हो कर रह जाएंगे तो नए सिरे से हमको पैदा करके उठा खड़ा किया" जाएगा?” 
+[17:99] क्या इनको ये ना सूझा के जिस खुदा ने ज़मीन और आसमान को पेदा किया है वो इस जैसन को पेदा करने की जरूर क़ुदरत रखता है? उसने इनके हश्र के लिए एक वक्त मुकर्रर कर रखा है जिसका आना यकीनी है, मगर ज़ालिमों को इसरार है के वो इसका इंकार ही करेंगे 
+[17:100] (ऐ मुहम्मद) इनसे कहो, अगर कहीं मेरे रब की रहमत के ख़ज़ाने तुम्हारे क़ब्ज़े में होते तो तुम ख़ार हो जाने के अंदेशे से जरूर उनको रोक रखो। वक़ई इंसान बड़ा तंग दिल (संकीर्ण मानसिकता) वक़ई हुआ है 
+[17:101] हमने मूसा को तो निशानियां अता की थी जो सारे तौर पर दिखाई दे रही थी (जो काफी स्पष्ट थीं)। अब ये तुम खुद बनी इजराइल से पूछ लो के जब वो सामने आई तो फिरौन ने यहीं कहा था ना के "ऐ मूसा, मैं समझता हूं के तू जरूर एक सहर-जादा (मोहित) आदमी है 
+[17:102] मूसा ने उसके जवाब में कहा "तू खूब जानता है के ये बसीरत अफरोज (आंखें खोलने वाला) निशानियाँ रब्बुस समावती वल अर्ध (स्वर्ग और पृथ्वी के स्वामी) के सिवा किसी ने नाज़िल नहीं की है, और मेरा ख्याल ये है के ऐ फिरौन, तू ज़रूर एक शामत-ज़ादा (बर्बाद) आदमी है”
+[17:103] आख़िर-ए-कार फिरौन ने इरादा किया के मूसा और बानी इसराइल को ज़मीन से उखाड़ फेंके, मगर हमने उसको और उसके साथियों को इकत्था गर्क (डूब) करदिया 
+[17:104] और उसके बाद बानी इसराइल से कहा के अब तुम ज़मीन में बसो, फिर जब आख़िरत के वादे का वक़्त आन पूरा होगा तो हम तुम सब को एक साथ ला हाज़िर करेंगे 
+[17:105] क्या कुरान को हमने हक़ के साथ नाज़िल किया है और हक़ ही के साथ ये नाज़िल हुआ है। और (ऐ मुहम्मद) तुम्हें हमने इसके सिवा और किसी काम के लिए नहीं भेजा के (जो मान ले उसे) बशारत दे दो और (जा ना माने उसे) मुतनब्बेह (चेतावनी) करदो 
+[17:106] और इस कुरान को हमने थोड़ा थोड़ा करके नाज़िल किया है ता-के तुम ठहर-ठहर कर इसे लोगों को सुनाओ, और इसे हमने (मौका मौका से) बा-तद्रेज उतारा है 
+[17:107] (ऐ मुहम्मद), इन लोगों से कहदो के तुम इसे मानो या ना मानो, जिन लोगों को इसे पहले इल्म दिया गया है उन्हें जब ये सुनाया जाता है तो वो मुंह के बाल सजदे में गिर जाते हैं 
+[17:108] और पुकार उठते हैं "पाक है हमारा रब, उसका वादा तो पूरा होना ही था" 
+[17:109] और वो मुँह के बाल रोते रोते हुए गिर जाते हैं और इसे सुनकर उनका ख़ुश (विनम्रता) और बढ़ जाता है 
+[17:110] (ऐ नबी), इंसे कहो, अल्लाह कह कर पुकारो या रहमान कहकर, जिस नाम से भी पुकारो उसके लिए सब अच्छे ही नाम हैं और अपनी नमाज न बहुत ज्यादा बुलंद आवाज से पढ़ो और न बहुत पुरानी आवाज से, दोनों के दरमियां अव्सत दर्जे का लहजा इख्तियार करो 
+[17:111] और कहो “तारीफ है उसने खुदा के लिए जिसने ना किसी को बेटा बनाया, ना कोई बादशाही में उसका शरीक है, और ना वो अजीज (असहाय) है कि कोई उसका पुश्तबान (समर्थक) हो” और उसकी बदाई बयां करो, कमाल दर्जे की बदाई 
+
+सूरह 18: अल-काहफ (गुफा) 
+------------------------------------------------ 
+[18:1] तारीफ अल्लाह के लिए है जिसने अपने बंदे पर ये किताब नाज़िल की और इसमें कोई टेढ़ ना रखी 
+[18:2] ठीक ठीक सीधी बात कहने वाली किताब, ता-के वो लोगों को खुदा के सख्त अज़ाब से खबर करदे, और ईमान ला कर नीक अमल करने वालों को खुश खबरी दे दे के उनके लिए अच्छा अजर है 
+[18:3] जिसमें वो हमेशा रहेंगे 
+[18:4] और उन लोगों को डर दे जो कहते हैं कि अल्लाह ने किसी को बेटा बनाया है 
+[18:5] क्या बात का ना उन्हें कोई इलम है और ना उनके बाप दादा को था। बड़ी बात है जो उनके मुँह से निकलती है, वो महज़ झूठ बोलते हैं 
+[18:6] अच्छा, तो (ऐ मुहम्मद), शायद तुम इनके पीछे ग़म के मारे अपनी जान खो देने वाले हो अगर ये तालीम पर ईमान ना लाए 
+[18:7] वाकिया ये है के ये जो कुछ सर-ओ-समान भी ज़मीन पर है इसको हमने ज़मीन की ज़ीनत बनाई है ता-के इन लोगों को आज़माएं इनमें कौन बेहतर अमल करने वाला है 
+[18:8] आख़िर ए कार इस सब को हम एक छतियाल मैदान बना देने वाले हैं
+[18:9] क्या तुम समझते हो के घर (गुफा) और कतबे (शिलालेख) वाले हमारी कोई बड़ी अजीब निसानियों में से थे 
+[18:10] जब वो चांद नवाजवां घर में पनाह गुज़ेन हुए और उन्होन ने कहा “ए परवरदिगार, हमको अपनी रहमत ए खास से नवाज और हमारा मामला दुरुस्त करदे” 
+[18:11] तो हमने उन्हें उसी घर में थापक कर साल हा साल के लिए गहरी नींद सुला दिया 
+[18:12] फिर हमने उन्हें उठाया ता-के देखें उनके दो गिरोहों में से कौन अपनी मुद्दत ए कयाम का ठीक शुरू करता है 
+[18:13] हम उनका असल क़िस्सा तुम्हें सुनाते हैं, वो चंद नवाज़वान थे जो अपने रब पर ईमान ले आए थे और हमने उनको हिदायत में तरक्की बख्शी थी 
+[18:14] हमने उनके दिल को वक़्त मज़बूत कर दिया जब वो उठे और उन्हें हमने एलान किया करदिया के "हमारा रब तो बस वही है जो आसमान और ज़मीन का रब है, हम उसे छोड़ कर किसी दूसरे माबूद को ना पुकारेंगे, अगर हम ऐसा करें तो बिल्कुल बेजा (अनुचित) बात करेंगे" 
+[18:15] (फिर उनहोन ने आपस में एक दूसरे से कहा) "ये हमारी क़ौम रब ई को कायनात को छोड़ कर दूसरे खुदा बना बैठी है, ये लोग उनके माबूद होने पर कोई वाज़े दलील क्यों नहीं लाते? आखिर उस शक्स से बड़ा जालिम और कौन हो सकता है जो अल्लाह पर झूठ बांधे 
+[18:16] अब जब तुम उनसे और उनके मबूदाने गैर-अल्लाह से बेताब हो चुके हो तो चलो अब फलां घर में चल कर पनाह लो। तुम्हारा रब तुम अपनी रहमत का दामन वही करेगा और तुम्हारे काम केलिए सर-ओ-सामान मुहैया कर देगा” 
+[18:17] तुम उन्हें घर में देखते हो तो तुम्हें यूं नजर आता है कि सूरज जब निकलता है तो उनके घर को छोड़ कर जाएं जानिब चढ़ जाता है और जब गुरुब होता है तो उनसे बच कर जाएं जानिब उतर जाता है और वो हैं के घर के अंदर एक वसीह जगह में पड़े हैं। ये अल्लाह की निशानियों में से एक है. जिसको अल्लाह हिदायत दे वही हिदायत पाने वाला है और जिसे अल्लाह भटका दे उसके लिए तुम कोई वली-ए-मुर्शिद नहीं पा सकते 
+[18:18] तुम उन्हें देख कर ये समझ के वो जाग रहे हैं, हलांके वो सो रहे थे। हम उन्हें दिनें करवट दिलवाते रहते थे और उनका कुत्ता घर के दहने [किनारे] (प्रवेश द्वार) पर हाथ फैलाये बैठे थे। अगर तुम कहीं झाँक कर उन्हें देखते तो उलटे पाँव भाग खड़े होते और तुम्पर उनके नज़ारे से अलग बैठ जाती 
+[18:19] और इसी अजीब करिश्मा से हमने उन्हें उठाया बिठाया ता-के जरा आपस में पूछ-गज करें, उन में से एक ने पूछा “कहो कितनी” देर इस हाल में रहे?” दुसरों ने कहा "शायद दिन भर या इस तरह कुछ काम होंगे"। फ़िर वो बोले "अल्लाह हाय बेहतर जानता है के हमारा कितना वक़्त इस हालात में गुज़रा। चलो अब अपने में से किसी को चाँदी का ये सिक्ख देकर शहर भेजें और वो देखे के सबसे अच्छा खाना कहाँ मिलता है वहाँ से वो कुछ खाने के लिए ले और चाहे के ज़रा होशियारी से काम करे, ऐसा ना हो के वो किसी को हमारे यहां होने से खबरदार कर बैठे
+[18:20] अगर कहीं उन लोगों का हाथ हमपर पढ़ गया तो बस संगसार (पत्थर से मौत ) कर डालेंगे, या फिर ज़बरदस्ती हमें अपनी मिल्लत में वापस ले जाएंगे, और ऐसा हुआ तो हम कभी फलाह न पा सकेंगे" 
+[18:21] इस तरह हमने एहले शहर को उनके हाल पर मुत्तला किया ता-के लोग जान लें के अल्लाह का वादा सच्चा है, और ये के कयामत की घड़ी बशक आकर रहेगी (मगर जरा ख्याल करो के जब सोचने की असल बात ये थी) हमारा वक्त वो आपस में इस बात पर झगड़ा रहे थे के (अशब-ए-कहफ) के साथ क्या। किया जाये. कुछ लोगों ने कहा "इनपार एक दीवार चुन दो, इनका रब ही इनके मामले को बेहतर जानता है" मगर जो लोग उनके मामले पर गालिब थे उन्हें ने कहा "हम तो अंदर एक इबादत गाह बनाएंगे" 
+[18:22] कुछ लोग कहेंगे के वो तीन थे और चौथा (चौथा) उनका कुत्ता था और कुछ दूसरे कह देंगे के पांच थे और छठा (छठा) उनका कुत्ता था। ये सब बेटुकी (अप्रासंगिक अनुमान) हांकते हैं। कुछ और लोग कहते हैं कि सात (सात) था और आठवां (आठवां) उनका कुत्ता था। कहो, मेरे रब ही बेहतर जानता है के वो कितने थाय, काम ही लोग उनकी सही ताड़द जानते हैं, लेकिन तुम सर-साड़ी बात से बढ़कर उनकी तड़प के मामले में लोगों से बेहस ना करो, और ना उनको मुतालिक किसी से कुछ पूछो 
+[18:23] और देखो, किसी चीज के बारे में कभी ये ना कहा करो मैं कल ये काम कर दूंगा 
+[18:24] (तुम कुछ नहीं कर सकते) इल्ला ये के अल्लाह चाहे, अगर भूल से ऐसी बात जुबान से निकल जाए तो तुरंत अपने रब को याद करो और कहो "उम्मीद है के मेरा रब इस मामले में रुशद से करीब-करीब बात की तरफ मेरी रहनुमाई फरमादेगा" 
+[18:25] और वो अपने घर (गुफा) में तीन सौ (तीन सौ) साल रहे, और (कुछ लोग मुद्दत के शूमर में) नौ (नौ) साल और बढ़ गए हैं 
+[18:26] तुम कहो, अल्लाह उनके क़याम की मुद्दत (उनके रहने की अवधि) ज़्यादा जानता है, आसमान और ज़मीन के सब पोशीदा अहवाल उसी को मालूम है। क्या ख़ूब है वो देखने वाला और सुनने वाला! ज़मीन ओ आसमान की मख़लूक़त का कोई ख़बर-गीर उसके सिवा नहीं, और वो अपनी हुकूमत में किसी को शरीक नहीं करता 
+[18:27] ऐ नबी! तुम्हारे रब की किताब में से कुछ तुम पर वही (रहस्योद्घाटन) किया गया है उसे (जून का भी/बिल्कुल) सुना दो। कोई उसके फार्मूदात को बदलने का मिजाज नहीं है, (और अगर तुम किसी की खातिर इस में रद्द या बदल करोगे तो) उसे छोड़कर भागने के लिए कोई जाएगा पनाह न पाओगे 
+[18:28] और अपने दिल को उन लोगों की माया पर मुतमइन करो जो अपने रब की रजा के तलबगार बनकर सुबह ओ शाम उसे पुकारते हैं, और उनसे हरगिज निगाह ना फेरो। क्या तुम दुनिया की जीनत पसंद करते हो? किसी ऐसे शक्स की इत्ता ना करो जिसके दिल को हमने अपनी याद से गाफिल करदिया है और जिसने अपनी ख्वाहिश ए नफ्स की जोड़ी इख्तियार कर ली है और जिसका तारीख-कर इफरात ओ तफ़रीत पर मबनी है (अपनी वासना का अनुसरण करता है और अपने मामलों के संचालन में चरम सीमा तक चला जाता है)
+[18:29] साफ कहदो के ये हक है तुम्हारे रब की तरफ से, अब जिसका जी चाहे मान ले और जिसका जी चाहे इंकार करदे। हमने (इनकार करने वाले) ज़ालिमों के लिए एक आग तैयार कर रखी है जिसकी लपेटें उन्हें घेरे में ले चुकी हैं। वहां अगर वो पानी मांगेगे तो ऐसे पानी से उनकी तवाज़ो की जाएगी जो तेल (तेल) के लिए तिलचट जैसा होगा और उनका मुंह भून डालेगा। बदतरें पीने की चीज़ और बहुत बुरी आरामगाह 
+[18:30] रहे वो लोग जो मान लें और नीक अमल करें, तो यकीनन हम नीकुकर लोगों का अजर ज़या नहीं किया करते 
+[18:31] उनके लिए सदा बहार (सदाबहार) जन्नतें हैं जिनके आला नह्रेन बेह राही होंगी, वहां वो सोने के कंगन (सुनहरे कंगन) से जुड़ेंगे। बारीक रेशम और अतलस ओ देबा के सब्ज़ कपडे पहनेंगे, और उनकी मसनदों पर तकिये लगा कर बैठेंगे, बेहतर अजर और आला दर्जे की जाये क़याम 
+[18:32] (ऐ मुहम्मद)! इनके सामने एक मिसाल पेश करो दो शक्स थे उन में से एक को हमने अंगूर के दो बाग दिए और उनके गिर्द खजूर के दरख्तों की बाध (बाड़) लगाई और उनके दरमियान काश्त (खेती) की जमीन राखी 
+[18:33] डोनो बाग खूब फले फूले और बारावर होने में उनको ने जरा सी कसार भी ना छोड़ी, उन बाघों के अंदर हमने एक नेहर जारी करदी 
+[18:34] और उसे खूब नफा ​​हासिल हुआ, ये कुछ पा कर एक दिन वो अपने हमसाए (पड़ोसी) से बात करते हुए बोला 'मैं तुझसे ज्यादा मालदार हूं और' तुझसे ज़्यादा ताक़तवर नफ़री रखता हूँ (मेरी सेवा में ताकतवर आदमी)" 
+[18:35] फिर वो अपनी जन्नत (बगीचे) में दखल हुआ और अपने नफ़्स के हक़ में ज़ालिम बनकर कहने लगा "मैं नहीं समझता के ये दौलत कभी फ़ना हो जाएगी" 
+[18:36] और मुझे तवक्कू नहीं के कयामत की घड़ी कभी आएगी, ताहम अगर कभी मुझे अपने रब के हुजूर पलटया भी गया तो जरूर इसे भी ज्यादा शानदार जगह पाऊंगा” 
+[18:37] उसके हमसये (पड़ोसी/साथी) ने गुफ्तगू करते हुए उसे कहा “क्या तू कुफ्र” करता है हमें जात से जिसने तुझे मिट्टी से और फिर से खिलाया किया और तुझे एक पूरा आदमी बना खड़ा किया 
+[18:38] रहा मैं, तो मेरा रब तो वही अल्लाह है और मैं उसके साथ किसी को शरीक नहीं करता 
+[18:39] और जब तू अपनी जन्नत में दखल हो रहा था हमें वक्त तेरी जुबान से ये क्यों न निकला के माशा अल्लाह, ला कुव्वता इल्ला बिल्ला (अल्लाह के अलावा कोई ताकत नहीं)? अगर तू मुझे माल और औलाद में अपने से कमतर पा रहा है 
+[18:40] तो बुरा नहीं के मेरा रब मुझे तेरी जन्नत (बगीचे) से बेहतर अता फरमाड़े और तेरी जन्नत (बाग/बगीचा) पर आसमान से कोई आफत भेज दे जिसमें वो साफ मैदान बनकर रह जाए 
+[18:41] या इसका पानी ज़मीन में उतर जाए और फिर तू इसकी तरह ना निकल सके”
+[18:42] आख़िर-ए-कार हुआ ये के उसका सारा सारा ख़त्म हो गया और वो अपने अंगूरों के बागों को टट्टियों पर उल्टा पड़ा देख कर अपनी लगाई हुई लगत पर हाथ माल्टा रह गया और कहने लगा के "काश! मैंने अपने रुब के साथ किसी को शरीक ना ठहरया होता" 
+[18:43] ना हुआ अल्लाह को छोड़ कर उसके पास कोई जत्था (जमात/कंपनी) के उसकी मदद करता, और ना कर सका वो आप ही हमसे आफत का मुकाबला 
+[18:44] हमें वक्त मालूम हुआ के कारसाज़ी का इख्तियार खुदा ए बरहक़्क़ ही के लिए है, इनाम वही बेहतर है जो वो बक्शे और अंजाम वही बा-खैर है जो वो दिखाए 
+[18:45] और (ऐ नबी)! इनमें हयात ए दुनिया की हकीकत इस मिसाल से समझो कि आज हमने आसमान से पानी बरसा दिया तो जमीन की पौद खूब घनी हो गई, और कल वही नबात भुस बनकर रह गई जैसे हवाएं उड़ाए फिरती हैं, अल्लाह हर चीज पर कुदरत रखता है 
+[18:46] ये माल और ये औलाद मेहज़ दुनियावी जिंदगी की एक हंगामा आराइश (सजावट) है, असल में तो बाकी रह जाने वाली नेकियां ही तेरे रब के नाज़दीक नातिजे के लिहाज़ से बेहतर हैं और उन्हीं से अच्छी उम्मीदे वबस्ता की जा सकती है 
+[18:47] फ़िक्र उस दिन की होनी चाहिए जबके हम पहाड़ों को चलाएंगे, और तुम ज़मीन को बिल्कुल बरहेना (नग्न) पाओगे, और हम तमाम इंसानों को इस तरह घेर कर जमा करेंगे के (अगलों पीछेलों में से) एक भी ना छूटेगा 
+[18:48] और सब के सब तुम्हारे रब के हुज़ूर सफ़ (पंक्तियाँ) डर सफ़ (पंक्तियाँ) पेश किये जायेंगे। लो देखलो, आगये ना तुम हमारे पास उसी तरह जैसा हमने तुमको पहली बार पेदा किया था। तुमने तो ये समझा था कि हमने तुम्हारे लिए कोई वादे का वक्त मुकर्रर ही नहीं किया 
+[18:49] और नाम ए अमल सामने रख दिया जाएगा हमें वक्त तुम देखोगे के मुजरिम लोग अपनी किताब ए जिंदगी के इंद्रजात (रिकॉर्ड) से डर रहे होंगे और कह रहे हैं होंगी के हाए हमारी चुदाई, ये कैसी किताब है के हमारी कोई छोटी बड़ी हरकत ऐसी नहीं रही जो इसमे दर्ज ना हो गई हो। जो जो कुछ अनहोन ने किया था वो सब अपने सामने हाज़िर पाएंगे और तेरा रब किसी पर ज़रा ज़ुल्म न करेगा 
+[18:50] याद करो, जब हमने फरिश्तों से कहा के आदम को सजदा करो तो उनहों ने सजदा किया मगर इब्लीस ने न किया, वो जिन्नो में से था इसके लिए अपने रब्ब के हुकुम की इबादत से निकल गया। अब क्या तुम मुझे छोड़ कर उसे और उसकी ज़िम्मेदारी को अपना सरपरस्त बनाते हो हलांके वो तुम्हारे दुश्मन हैं? बड़ा ही बुरा बादल है जिसमें ज़ालिम लोग इख्तियार कर रहे हैं 
+[18:51] मैंने आसमान ओ ज़मीन पैदा करते वक्त उनको नहीं बुलाया था और ना खुद उनकी अपनी तख़लीक में उन्हें शरीक किया था। मेरा ये काम नहीं के गुमराह करने वालों को अपना मददगार बनाया करूं 
+[18:52] फिर क्या करेंगे ये लोग हमें रोज जबके इनका रब इनसे कहेगा के पुकारो अब उन हस्तियों को जिन्हे तुम मेरा शरीक समझ बैठे थे, ये उनको पुकारेंगे, मगर वो इनकी मदद को ना आएंगे और हम इनके दरमियान एक ही हलाकत का घड़ा मुश्तारिक कर देंगे(हलाकत की जगह बना देंगे)
+[18:53] सारे मुजरिम हमें रोज आग देखेंगे और समझ लेंगे के अब उन्हें इस में गिराना है और वो इसे बचाने के लिए कोई जाए पनाह न पाएंगे 
+[18:54] हमने कुरान में लोगों को तरह तरह से समझा मगर इंसान बड़ा ही झगड़ालू वाकये हुआ है 
+[18:55] उनके सामने जब हिदायत आई तो उसे मन्ने और अपने रब के हुजूर माफ़ी चाहने से आख़िर उनको किस चीज़ ने रोक दिया? इसके सिवा और कुछ नहीं के वो मुंतज़िर हैं के उनके साथ भी वही कुछ हो जो पिछली क़ौमों के साथ हो चुका है, या ये के वो अज़ाब को सामने आते देख लें 
+[18:56] रसूलों को हम इस काम के सिवा और कोई ग़रज़ नहीं भेजते के वो बशारत और तम्बीह (चेतावनी) की खिदमत अंजाम दे दें, मगर काफिरों का हाल ये है कि वो बातिल के हथियार लेकर हक़ को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं और उनको ने मेरी आयत को और उन तम्बीहत (चेतावनी) को जो उनको मज़ाक बना लिया है 
+[18:57] और हमारे शक्स से बढ़ कर जालिम और कौन है जिसके बारे में रब की आयतें सुना कर हिदायत की जाए और वो उससे मुह फेरे और उस बुरे अंजाम को भूल जाए जिसका सर या सामान उसने अपने लिए खुद अपने हाथों से किया है? (जिन लोगों ने ये रवीश इख्तियार की है) उनके दिलों पर हमने गिलाफ (कवर) चढ़ा दिया है जो उन्हें कुरान की बात नहीं समझ देते, और उनके कानों में हमने गिरानी अदा कर दी है। तुम उन्हें हिदायत की तरफ कितना ही बुलाओ, वो इस हालात में कभी हिदायत न पाएंगे 
+[18:58] तेरा रब बड़ा दरगुज़र करने वाला और रहीम है। वो इनके कार्टूनों पर इन्हें पकड़ना चाहता था तो जल्दी ही अज़ाब भेज देता, मगर इनके लिए वादे का एक वक्त मुकर्रर है और इससे बच कर भाग निकलेगा कि ये कोई राह न पाएगा 
+[18:59] ये अज़ाब रसीदें तुम्हारे सामने मौजूद हैं, उनको ने जब ज़ुल्म किया तो हमने उन्हें हलाक कर दिया, और उनमें से हर एक की हलाकत के लिए हमने वक्त मुकर्रर कर रखा था 
+[18:60] (ज़रा इनको वो क़िस्सा सुनाओ जो मूसा को पेश आया था) जबके मूसा ने अपने खादिम से कहा था के “मैं अपना सफर ख़तम” ना करूंगा जबतक के दोनों दरियाओं के संगम पर ना पहुंच जाऊं, वरना मैं एक जमाना ए दराज़ तक चलता ही रहूंगा” 
+[18:61] पास जब वो उनके संगम पर पहुंचें तो अपनी मछली से गाफिल हो गईं और वो निकल कर इस तरह दरिया में चली गई जैसे के कोई सुरंग (सुरंग) लगी हो 
+[18:62] आगे जा कर मूसा ने अपने खादिम से कहा “ लाओ हमारा नाश्ता, आज के सफर में तो हम बुरी तरह थक गए हैं” 
+[18:63] खादिम ने कहा “आपने देखा! ये क्या हुआ? जब हम हमारे पास चट्टान (रॉक) के पास थे तब थे हमारा वक्त मुझे मछली का ख़याल ना रहा और शैतान ने मुझको ऐसा ग़ाफ़िल कर दिया के मैं उसका ज़िक्र (आपसे करना) भूल गया। मछली तो अजीब तरह से निकल कर दरिया में चली गई" 
+[18:64] मूसा ने कहा "उसकी तो हमें तलाश थी"। चुनाचे वो दोनों अपने नक्शे कदम पर फिर वापस हुए
+[18:65] और वहां उनको ने हमारे बंदों में से एक बंदे को पाया जिसे हमने अपनी रहमंत से नवाजा था और अपनी तरफ से एक खास इल्म अता किया था 
+[18:66] मूसा ने उसे कहा "क्या मैं आपके साथ रह सकता हूं ता-के आप मुझे भी हमें बताएं" दानिश (बुद्धि) की तालीम दीन जो आपको सिखाई गई है?” 
+[18:67] उसने जवाब दिया "आप मेरे साथ सब्र नहीं कर सकते" 
+[18:68] और जिस चीज की आपको खबर न हो आखिर आप उसपर सब्र कर भी कैसे सकते हैं" 
+[18:69] मूसा ने कहा "इंशा अल्लाह आप मुझे साबिर पाएंगे और मैं आपकी खबर में कोई कमी नहीं छोड़ूंगा" नफरमानी ना करूंगा” 
+[18:70] उसने कहा “अच्छा, अगर आप मेरे साथ चलते हैं तो मुझसे कोई बात ना पूछेगा जब तक के मैं खुद उसका आपसे जिक्र ना करूं” 
+[18:71] अब वो दोनों रावना हुए, यहां तक ​​के जब वो एक कश्ती में सवार हो गए तो हमें शक्स ने कहा कश्ती मैंने शिगाफ़ (छेद) डाल दिया। मूसा ने कहा "आपने इस में शिगाफ़ डाल दिया, ता-के सब कश्ती वालों को डुबो दें? ये तो आपने एक सख्त हरकत कर डाली" 
+[18:72] उसने कहा "मैंने तुमसे कहा ना था के तुम मेरे साथ सब्र नहीं कर सकते?" 
+[18:73] मूसा ने कहा "भूल चुक पर मुझे न पकड़िये, मेरे मामले में आप जरा खुद से काम न लें।" 
+[18:74] फिर वो दोनो चले, यहां तक ​​के उनको एक लड़का मिला और उस लड़के ने उसे बर्बाद कर दिया। मूसा ने कहा "आपने एक बे-गुनाह की जान ली हलांके उसने किसी का खून ना किया था? ये काम तो आपने बहुत ही बुरा किया" 
+[18:75] उसने कहा "मैंने तुमसे कहा ना था के तुम मेरे साथ सब्र नहीं कर सकते?" 
+[18:76] मूसा ने कहा “इसके बाद अगर मैं आप से कुछ पूछूं तो आप मुझे सात न रखें। लीजिए अब तो मेरी तरफ से आपको उज्र (एक्सक्यूज) मिल गया" 
+[18:77] फिर वो आगे चले यहां तक ​​के एक बस्ती में पहुंचें और वहां के लोगों से खाना मंगा मगर उन्होन ने उन दोनो के जियाफत से इनकार करदिया। वहां उन्होन ने एक दीवार देखी जो गिरा चाहती थी(गिरने वाली थी) नीचे) 
+। अब मैं तुम्हें उन बातों की हक़ीक़त बताता हूँ जिनमें तुम सब्र ना कर सके 
+[18:79] उस कश्ती का मामला ये है के वो चंद ग़रीब आदमियों की थी जो दरिया में मेहनत मज़दूरी करते थे।मैने चाहा के उसे अयबदार (क्षतिग्रस्त) कार्डून, क्यूँके आगे एक ऐसे बादशाह का इलाक़ा था जो हर कश्ती को ज़बरदस्ती छीन लेता था 
+[18:80] रहा वो लड़का, तो उसके वालिदैन मोमिन थे, हमें अंदेशा हुआ के ये लड़का अपनी सरकशी और कुफ़्र से उनको तंग करेगा 
+[18:81] इसलिए हमने चाहा के उनका रब उसके बदले उनको ऐसी और औलाद दे जो अखलाक में भी उससे बेहतर हो और जिसका सिला रहमी भी ज्यादा मुतावक्क हो
+[18:82] और इस दीवार का मामला ये है के ये दो यतीम लड़कों की है जो इस शहर में रहते हैं। क्या दीवार के नीचे बच्चों के लिए एक खजाना दफन है। और इनका बाप एक नया आदमी था, इसलिए तुम्हारे रब ने चाहा के ये डोनो बच्चे बालिग (परिपक्व) माननीय और अपना खजाना निकाल लें। ये तुम्हारे रब की रहमत की बिना पर किया गया है, मैंने कुछ अपने इख्तियार से नहीं किया है। ये है हकीकत उन बातों की जिनपर तुम सब्र न कर सके” 
+[18:83] और (ऐ मुहम्मद), ये लोग तुमसे ज़ुल-क़रनैन के बारे में पूछते हैं, इनसे कहो, मैं इसका कुछ हाल तुमको सुनाता हूँ 
+[18:84] हमने उसको ज़मीन में इक्तेदार अता कर रक्खा था और उसे हर क़िसम के असबाब ओ वसील बख्शे थे 
+[18:85] उसने (पहले मगरिब की तरफ एक मोहिम का) सर ओ समां किया 
+[18:86] हट्टा के जब वो गुरूब ए आफताब (सूर्यास्त) की हद तक पहुंच गया तो उसने सूरज को एक काले पानी में डूबते देखा और वहां उसे इस्तेमाल किया क़ौम मिली. हमने कहा, "ऐ ज़ुल-क़रनैन, तुझे ये मक़दरत (शक्ति) भी हासिल है के इनको तकलीफ़ पाहुंचे और ये भी के इनके साथ नेक रवैय्या इख्तियार करे" 
+[18:87] उसने कहा, "जो इनमें से ज़ुल्म करेगा हम उसको सजा देंगे, फिर वो अपने रुब की तरफ" पलटया जाएगा और वो उसे और ज्यादा सख्त अजाब देगा 
+[18:88] और जो इनमें से ईमान लाएगा और नीक अमल करेगा उसके लिए अच्छी जजा है और हम उसको नरम एहकाम देंगे” 
+[18:89] फिर उसने (एक दूसरी मोहिम की) तयारी की 
+[18:90] यहां तक के तुलु ए आफताब (सूर्योदय) की हद तक जा पाहुंचा। वहां उसने देखा के सूरज एक ऐसी क़ौम पर तुलू (उदय) हो रहा है जिसके लिए धूप से बचने का कोई सामान हमने नहीं किया है 
+[18:91] ये हाल था उनका, और ज़ुल-क़रनैन के पास जो कुछ था उसे हम जानते थे 
+[18:92] फिर उसने (एक और मोहिम का) समान किया 
+[18:93] यहां तक ​​के जब दो पहाड़ों के दरमियां पाहुंचा तो उसके पास एक क़ौम मिली जो मुश्किल ही से कोई बात समझती थी 
+[18:94] उन लोगों ने कहा “ऐ” ज़ुल-क़रनैन, याजुज और माजूज इस सर-जमीन में फसाद फैलाते हैं तो क्या हम तुझ पर कोई टैक्स (श्रद्धांजलि) इस काम के लिए दीन के तू हमारे और इनके दरमियान एक बंद (बाधा) तामीर करदे?” 
+[18:95] उसने कहा "जो कुछ मेरे रब्ब ने मुझे दे रक्खा है वो बहुत है।" तुम बस मेहनत से मेरी मदद करो, मैं तुम्हारे और इनके दरमियान बंद (बाधा) बना देता हूं 
+[18:96] मुझे लोहे की चादरें (चादरें) लाकर दो"। आखिर जब दोनों पहाड़ों के दरमियानी खाला (अंतरिक्ष) को उसने पाट दिया तो लोगों से कहा के अब आग देहकाओ। हट्टा के जब [ये अहानी दीवार (लोहे की दीवार)] बिल्कुल आग की तरह सुर्ख (लाल-गर्म) हो गई तो उसने कहा " लाओ, अब मैं इसपर पिगला हुआ तांबा (पिघला हुआ पीतल) उंडैलूंगा (डालूंगा)" 
+[18:97] (ये बंद ऐसा था के) याजुज ओ माजुज इसपर चढ़ कर भी ना आ सकता था और इसमें नकाब लगाना (इस पर पैमाना) उनके लिए और भी मुश्किल था
+[18:98] ज़ुल-क़रनैन ने कहा "ये मेरे रब की रहमत है, मगर जब मेरे रब के वादे का वक़्त आएगा तो वो इसको पैवंद ए खाक कर देगा, और मेरे रब का वादा बार-हक़्क़ है" 
+[18:99] और हम रोज़ हम लोगों को छोड़ देंगे के (समंदर की मौजों की तरह) एक दूसरे से गुत्थम गुत्था (एक साथ करीब आओ) माननीय और सुर (तुरही) फूंका जाएगा और हम सब इंसानों को एक साथ जमा करेंगे 
+[18:100] और वो दिन होगा जब हम जहन्नुम को काफिरों के सामने लाएंगे 
+[18:101] उन काफिरों के सामने जो मेरी हिदायत की तरफ से अंधे बने हुए थे और कुछ सुने केलिए तैयार ही ना थाय 
+[18:102] तो क्या ये लोग, जिन्हों ने कुफ्र इख्तियार किया है, ये ख्याल रखते हैं के मुझे छोड़ कर मेरे बंदों को अपना करसाज़ बना लें? हमने ऐसे काफिरों की ज़ियाफ़त के लिए जहन्नुम तय्यार कर रखी है 
+[18:103] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो, क्या हम तुम्हें बताएं के अपने अमाल में सबसे ज्यादा नाकाम ओ ना-मुराद लोग कौन हैं 
+[18:104] वो के दुनिया की जिंदगी में जिनकी सारी सई-ओ-जहाद (प्रयास/प्रयास) राह ए रास्ते से भटक रही है और वो समझे रहे के वो सब कुछ ठीक कर रहे हैं 
+[18:105] ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने रब की आयत को मन्ने से इंकार किया और उसके हुजूर पेहसी का यकीन ना किया। इसलिए उनके सारे अमल ज़ाया हो गए, क़यामत के रोज़ हम उन्हें कोई वज़न न देंगे 
+[18:106] उनकी जज़ा जहन्नुम है उस कुफ्र के बदले जो उनहों ने किया और उस मज़ाक की याद में जो वो मेरी आयत और मेरे रसूलों के साथ करते रहे 
+[18:107] अलबत्ता वो लोग जो ईमान लाए और जिन्होन ने नीक अमल किया, उनकी मेजबानी के लिए फिरदौस के बाग होंगे 
+[18:108] जिन में वो हमेशा रहेंगे और कभी उस जगह से निकल कर कहीं जाने को उनका जी न चाहेगा 
+[18:109] (ऐ मुहम्मद), कहो के अगर समंदर मेरे रब की बातें लिखने के लिए रोशनाई (स्याही) बन जाए तो वो ख़तम हो जाए मगर मेरे रब की बातें ख़त्म ना हो, बलके इतनी ही रोशनी और ले आएं तो वो भी किफ़ायत ना करे 
+[18:110] (ऐ मुहम्मद), कहो के मैं तो एक इंसान हूं तुम ही जैसा, मेरी तरफ वही की जाती है के तुम्हारा खुदा बस एक ही खुदा है, पास जो अपने रुब की मुलाकात का उम्मीदवर हो उसे चाहिए कि नेक अमल करे और बंदगी में अपने रुब के साथ किसी और को शरीक न करे 
+
+सूरह 19: मरियम (मरियम) 
+------------------------------------------------ 
+[19:1] काफ, हा, हां, ऐन, साद 
+[19:2] ज़िक्र है उस रहमत का जो तेरे रब ने अपने बंदे ज़कारिया पर की थी 
+[19:3] जबके उसने अपने रब को चुपके-चुपके पुकारा 
+[19:4] उसने अर्ज़ किया "ऐ परवरदिगार, मेरी हदियां तक ​​घुल गई हैं और सर बुढ़ापे से भड़क उठा है, ऐ परवरदिगार, मैं कभी तुझसे दुआ मांग कर ना-मुराद नहीं रहा
+[19:5] मुझे अपने पीछे अपने भाई बंदों की बुराइयों का खौफ है, और मेरी बीवी बांझ (बंजर) है, तू मुझे अपने फजल ए खास से एक वारिस अता करदे [19:6] 
+जो मेरा भी हो और आले याकूब की मीरा भी पाए, और ऐ परवरदिगार, उसको एक पसंदीदा इंसान बना” 
+[19:7] (जवाब दिया गया) “ऐ जकारिया, हम तुझे एक लड़के की बशारत देते हैं जिसका नाम यह होगा, हमने इस नाम का कोई आदमी इसे पहले पैदा नहीं किया” 
+[19:8] अर्ज़ किया, “परवरदिगार, भला मेरे हां कैसे बेटा होगा जबके मेरी बीवी बाँझ (बंजर) है और मैं बूढ़ा होकर सुखा चुका हूँ?” 
+[19:9] जवाब मिला “ऐसा ही होगा।” तेरा रब्ब फरमाता है के ये तो मेरे लिए एक ज़रा सी बात है, आख़िर इसे पहले मैं तुझ पेदा कर चूका हूँ जबके तू कोई चीज़ ना था” 
+[19:10] ज़कारिया ने कहा, “परवरदिगार, मेरे लिए कोई निशानी मुकर्रर करदे।” फरमाया “तेरे लिए निशानी ये है के तू” पैहम तीन दिन लोगों से बात न कर सके” 
+[19:11] चुनाचे वो मेहराब से निकल कर अपनी क़ौम के सामने आया और उसने इशारे से उनको हिदायत की के सुबह-ओ-शाम तस्बीह करो 
+[19:12] ऐ याह्या! किताब ए इलाही को मज़बूत थाम ले, हमने उसे इस्तेमाल किया बचपन ही में "हुकुम" से नवाज़ 
+[19:13] और अपनी तरफ से उसको नरम दिल और पाकीज़गी अता की और वो बड़ा परहेज़गार 
+[19:14] और अपने वालिदैन का हक़ शान (कर्तव्यनिष्ठ) था, वो जब्बार (अहंकारी) न था और न नफ़रमान 
+[19:15] सलाम उसपर जिस रोज़ के वो पैदा हुआ और जिस दिन मरे और जिस रोज़ वो ज़िंदा करके उठया जाए 
+[19:16] और (ऐ मुहम्मद), इस किताब में मरियम का हाल बयान करो, जबके वो अपने लोगों से अलग हो कर शर्की (पूर्वी तरफ) जानिब गोशा नशीन (एकांत में) हो गई थी 
+[19:17] और परदा दाल कर उनसे छुप (छिपी हुई) बैठी थी इस हालत में हमने उसके पास अपनी रूह को (यानी फरिश्ते को) भेजा और वो उसके सामने एक पूरा इंसान की शक्ल में नामदार हो गया 
+[19:18] मरियम यकायक बोल उठी के "अगर तू कोई खुदा तरस आदमी है तो मैं तुझसे" रहमान की पनाह मांगती हूं" 
+[19:19] उसने कहा "मैं तो तेरे रब का फ़रिश्ता हूं और इसे भेजा गया हूं के तुझसे एक पाकीजा लड़का दूं" 
+[19:20] मरियम ने कहा "मेरे हां कैसे लड़का होगा जबके मुझे कोई बशर (इंसान) ने छुआ तक नहीं है और मैं कोई बढ़िया औरत नहीं हूं'' 
+[19:21] फरिश्ते ने कहा '' ऐसा ही होगा, तेरा रब फरमाता है के ऐसा करना मेरे लिए बहुत आसान है और हम ये सिर्फ इसलिए करेंगे क्योंकि हम लड़के को लोगों के लिए एक निशानी बनाएंगे और अपनी तरफ से एक रहमत, और ये काम होकर रहना है" 
+[19:22] माया को हमारे बच्चे का हमाल रह गया और वो इस हमाल को लिए हुए एक दरवाजे के मकाम पर चली गई 
+[19:23] फिर जचगी (डिलीवरी) की तकलीफ ने उसे एक खजूर के दरख्त के नीचे पहुंचा दिया। वो कहने लगी "काश मैं इसे पहले ही मर जाती है और मेरा नाम ओ निशान ना रहता है”
+[19:24] फरिश्ते ने पेंटी (उसके बिस्तर के नीचे) से उसको पुकार कर कहा "गुम ना कर तेरे रब ने तेरे आला एक चश्मा रावन करदिया है 
+[19:25] और तू जरा इस दरख्त के तनय (ट्रंक) को हिला, तेरे ऊपर तार-ओ-ताजा खजूरें तपाक पडेंगी 
+[19:26] पास तू खा और पेशाब और अपनी आंखें ठंडी कर फिर अगर कोई आदमी तुझे नज़र आए तो उसे कहे के मैंने रहमान के लिए रोज़ की नज़र मानी है, इसलिए आज मैं किसी से ना बोलूंगी” 
+[19:27] फिर वो इस बच्चे को लिए हुए अपनी क़ौम में आई. लोग कहने लगे "ऐ मरियम, ये तू बड़ा पाप कर डाला 
+[19:28] ऐ हारून की बहन, ना तेरा बाप कोई बुरा आदमी था और ना तेरी माँ ही कोई बढ़कर औरत थी" 
+[19:29] मरियम ने बच्चे की तरफ इशारा कर दिया। लोगों ने कहा, "हम इसे क्या बात करें जो गेहवेरे (पालना) में पड़ा हुआ एक बच्चा है?" 
+[19:30] बच्चा बोल उठा “मैं अल्लाह का बंदा हूं उसने मुझे किताब दी, और नबी बनाया 
+[19:31] और बाबरकत किया जहां भी मैं रहूं, और नमाज और जकात की पाबंदियों का हुकुम दिया जब तक मैं जिंदा रहूं 
+[19:32] और अपनी वालिदा का हक अदा करने वाला बनाया, और मुझको जब्बार (दमनकारी) और शक्की (कठोर दिल वाला) नहीं बनाया 
+[19:33] सलाम है मुझपर जबके मैं पैदा हुआ और जबके मैं मरूं (मर जाऊं) और जबके जिंदा करके उठा जाऊं” 
+[19:34] ये है ईसा इब्न मरियम और ये है उसके बारे में वो सच्ची बात जिसमें लोग शक्क कर रहे हैं 
+[19:35] अल्लाह का ये काम नहीं है कि वो किसी को बेटा बने। वो पाक जात है, वो जब किसी बात का फैसला करता है तो कहता है कि होजा, और बस वो हो जाती है 
+[19:36] (और ईसा ने कहा था के)"अल्लाह मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी, लेकिन तुम उसी की बंदगी करो, यही सीधी राह है" 
+[19:37] मगर फिर मुख्तलिफ गिरो ​​बहम इख्तिलाफ करने लगे। तो जिन लोगों ने कुफ्र किया उनके लिए वो वक्त बड़ी तबाही का होगा 
+[19:38] जबके वो एक बड़ा दिन देखेंगे, जब वो हमारे सामने होंगे हम रोज तो उनके कान भी खूब सुन रहे होंगे और उनकी आंखें भी खूब देखती होंगी, मगर आज ये जालिम खुली गुमराही में मुब्तिला हैं 
+[19:39] (ऐ मुहम्मद), इस हालत में जबके ये लोग गाफिल हैं और ईमान नहीं ला रहे हैं, उनमें हमें दिन से डर दो जबके फैसला करदिया जाएगा और पछतावे के सिवा कोई चारा-ए-कार ना होगा 
+[19:40] आखिर-ए-कार हम हाय ज़मीन और उसकी सारी चीज़ों के वारिस होंगे और सब हमारी तरफ ही पलटेंगे 
+[19:41] और इस किताब में इब्राहीम का क़िस्सा बयान करो, बेशक वो एक रस्त-बाज़ इंसान और एक नबी था 
+[19:42] (इन्हें ज़रा उस मौके की याद दिलाओ) जबके उसने अपने बाप से कह के “अब्बाजान, आप क्यों उन चीज़ों की इबादत करते हैं जो ना सुनती हैं ना देखती हैं और ना आप का कोई काम बना सकती हैं
+[19:43] अब्बाजान, मेरे पास एक ऐसा इलम आया है जो आपके पास नहीं आया, आप मेरे पीछे चलें, मैं आपको सीधा रास्ता बताऊंगा 
+[19:44] अब्बाजान!आप शैतान की बंदगी ना करें, शैतान तो रहमान का नफरमान है 
+[19:45] अब्बाजान, मुझे डर है के कहीं आप रहमान के अज़ाब में मुब्तिला न हो जाएं और शैतान के साथी बन कर रहें” 
+[19:46] बाप ने कहा “इब्राहिम, क्या तू मेरे मबूदों से फिर गया है? अगर तू बाज़ न आया तो मैं तुझे संगसार (पत्थर मार कर मार डालूँगा) कर दूँगा। बस तू हमेशा के लिए मुझसे अलग हो जा” 
+[19:47] इब्राहिम ने कहा “सलाम है आपको, मैं अपने रब से दुआ करूंगा के आपको माफ़ करदे। मेरा रब्ब मुझपर बड़ा ही मेहरबान है 
+[19:48] मैं आप लोगों को भी चोदता हूं और उन हस्तियों को भी जिन्हे आप लोग खुदा को चोद कर पुकारते हैं। मैं तो अपने रुब ही को पुकारूंगा, उम्मीद है कि मैं अपने रुब को पुकार के ना-मुराद ना रहूंगा” 
+[19:49] पास जब वो उन लोगों से और उनके माबूदाने गैर अल्लाह से जुदा हो गया तो हमने उसको इशाक और याकूब जैसी औलाद दी और हर एक को नबी बनाया 
+[19:50] और उनको अपनी रहमत से नवाजा और उनको सच्ची नामवरी अता की 
+[19:51] और जिक्र करो इस किताब में मूसा का, वो एक चीदा (चुना हुआ) शक्स था और रसूल नबी था 
+[19:52] हमने उसको तूर के दहिनी(दाएं) जानिब से पुकारा और राज की गुफ्तगु से उसको तकरूब (सम्मान) अता किया 
+[19:53] और अपनी मेहरबानी से उसके भाई हारून को नबी बना कर उसे (मददगार के तौर पर) दिया 
+[19:54] और इस किताब में इस्माइल का जिक्र करो, वो वादे का सच्चा था और रसूल नबी था 
+[19:55] वो अपने घर वालों को नमाज और जकात का हुकुम डी एटा था और अपने रब के नजदीक एक पसंददीदा इंसान था 
+[19:56] और इस किताब में इदरीस का जिक्र करो, वो एक रस्त-बाज़ (नेक) इंसान और एक नबी था 
+[19:57] और उसे हमने बुलंद मुकाम पर उठाया था 
+[19:58] ये वो पैगम्बर हैं जिनपर अल्लाह ने इनाम फरमाया आदम की औलाद में से, और उन लोगों की नाक से जिन्होंने हमने नूह के साथ कश्ती पर सवार किया था, और इब्राहिम की नाक से और इस्राइल की नाक से और ये उन लोगों की नाक से थे जिन्हें हमने हिदायत बख्शी और बरगुजिदा किया। इनका हाल ये था के जब रहमान की आयत उनको सुनाई जाती है तो रोते हुए सजदे में गिर जाते थे 
+[19:59] फिर इनके बाद वो नख़लफ़ (पतित) लोग इनके जानशाहीन (उत्तराधिकारी) हुए जिन्होन ने नमाज़ को ज़या किया और ख्वाहिशात ए नफ़्स की जोड़ी की। पास करीब है के वो गुमराही के अंजाम से दो-चार होन 
+[19:60] अलबत्ता जो तौबा कार्लें और ईमान ले आएं और नेक अमली इख्तियार कार्लें वो जन्नत में दाखिल होंगे और उनकी ज़रा बराबर हक़ तलाफ़ी न होगी 
+[19:61] इनके लिए हमेशा रहने वाली जन्नतें हैं जिनका रहमान ने अपने बंदों से डर-पुर्दा वादा कर रखा है और यकीनन ये वादा पूरा होकर रहना है
+[19:62] वहां वो कोई बेहुदा बात ना सुनेंगे, जो कुछ भी सुनेंगे ठीक ही सुनेंगे और उनका रिज्क उन्हें पैहम सुबह-ओ-शाम मिलता रहेगा 
+[19:63] ये है वो जन्नत जिसका वारिस हम अपने बंदों में से उसको बनायेंगे जो परहेजगार रहा है 
+[19:64] (ऐ मुहम्मद), हम तुम्हारे रब के हुकुम के बिना नहीं उतरते, जो कुछ हमारे आगे है और जो कुछ पीछे है और जो कुछ इसके दरमियान में है हर चीज का मालिक वही है और तुम्हारा रुब भूलने वाला नहीं है 
+[19:65] वो रुब है आसमान का और ज़मीन का और उन सारी चीज़ों का जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान हैं, लेकिन तुम उसकी बंदगी करो और उसकी बंगदी पर साबित क़दम रहो। क्या है कोई हस्ती तुम्हारे इल्म में इसकी हम पाया (रैंक में उसके बराबर) 
+[19:66] इंसान कहता है क्या वाकाई जब मैं मर जाऊंगा तो फिर जिंदा करके निकल लाया जाऊंगा 
+[19:67] क्या इंसान को याद नहीं आता के हम पहले उसको पैदा कर चुके हैं जबके वो कुछ भी ना था 
+[19:68] तेरे रब की कसम, हम जरूर उन सब को और उनके साथ शयातीन को भी घेर लेंगे, फिर जहन्नुम के गिर्द ला कर इन्हें घुटनों (घुटनों) के बल गिरा देंगे 
+[19:69] फिर हर गिरोह में से हर उस शक्स को चांट लेंगे (बाहर निकालो) जो रहमान के मुकाबले में ज्यादा सरकश बना हुआ था 
+[19:70] फिर हम ये जानते हैं के में से कौन सबसे बढ़कर जहन्नुम में झोंके जाने का मुस्तहिक है 
+[19:71] तुम में से कोई नहीं है जो जहन्नुम पर वारिद ना हो, ये तो एक ताई शुदा बात है जिसे पूरा करना तेरे रब का ज़िम्मा है 
+[19:72] फिर हम उन लोगों को बचा लेंगे जो (दुनिया में) मुत्तक़ी था और जालिमों को उसी में गिरा हुआ छोड़ देंगे 
+[19:73] लोगों को जब हमारी खुली खुली आयत सुनाई जाती है तो इंकार करने वाले ईमान लाने वालों से कहते हैं “बताओ, हम दोनो गिरोहोन में से कौन बेहतर हालात में है और किसकी मजलिसें ज्यादा शानदार है?” 
+[19:74] हालंके इनसे पहले हम कितनी ही ऐसी कौमो को हलाक कर चुके हैं जो इनसे ज्यादा सर-ओ-समान रखती पतली और जाहिर शान ओ शौकत में इनसे बड़ी हुई थी 
+[19:75] इनसे कहो, जो शक्स गुमराही में मुब्तिला होता है उसे रहमान ढील दिया करता है, यहां तक ​​के जब ऐसे लोग वो चीज देख लेते हैं जिसका उनसे वादा किया गया है ख्वा वो अज़ाब ए इलाही हो या कयामत की घड़ी तब उन्हें मालूम हो जाता है के किसका हाल खराब है और किसका जत्था (पार्टी) कामज़ोर 
+[19:76] इस्के बराक जो लोगो राह ए रास्त इख्तियार करते हैं अल्लाह उनको रस्त-रवी में तरक्की अता फरमाता है और बाकी रह जाने वाली नेकियां ही तेरे रब के नाजदीक जजा और अंजाम के ऐतबार से बेहतर हैं 
+[19:77] फिर तू नया देखा उस शक्स को जो हमारी आयत को मन्ने से इंकार करता है और कहता है कि मैं तो माल और औलाद से नवाजा ही जाता रहूंगा 
+[19:78] क्या उसे गैब का पता चल गया है या उसने रहमान से कोई अहद ले रखा है
+[19:79] हरगिज नहीं, जो कुछ ये बख्ता (घमंड) है इसे हम लिख लेंगे और इसके लिए सजा में और ज्यादा इजाफा करेंगे 
+[19:80] जिस सर-ओ-समान और लाओ लश्कर का ये जिक्र कर रहा है वो सब हमारे पास रह जाएगा और ये अकेला हमारे सामने हाज़िर होगा 
+[19:81] इन लोगों ने अल्लाह को छोड़ कर अपना कुछ खुदा बना रखा है ता-के वो इनके पुश्तेबान (समर्थक) माननीय 
+[19:82] कोई पुश्तेबान ना होगा, वो सब इनकी इबादत का इंकार करेंगे और उल्टे इनके मुखालिफ़ बन जायेंगे 
+[19:83] क्या तुम देखते नहीं हो के हमने मुनकिरीन ए हक़ पर शयातीन छोड़ रक्खे हैं जो इन्हें ख़ूब ख़ूब (मुख़ालिफ़त ए हक़ पर) उसका रहे हैं 
+[19:84] अच्छा, तो अब इनपर नुज़ुल ए अज़ाब के लिए बेताब ना हो, हम इनके दिन गिन रहे हैं 
+[19:85] वो दिन आने वाला है जब मुत्तक़ी लोगों को हम मेहमानों की तरह रहमान के हुजूर पेश करेंगे 
+[19:86] और मुजरेमोन को प्यासे जानवरों की तरह जहन्नुम की तरफ हांक ले जाएंगे 
+[19:87] हमें वक्त लोग कोई सिफ़रिश लेन पर कादिर न होंगे बज़ुज़ उसके जिसने रहमान के हुजूर से परवाना हासिल करलिया हो 
+[19:88] वो कहते हैं के रहमान ने किसी को बेटा बना लिया है 
+[19:89] सच बहुत बात है जो तुम लोग गड़बड़ लाए हो 
+[19:90] करीब है के आसमां फट पड़े, जमीन शक्क हो जाए (स्प्लिट असंडर) और पहाड़ गिर जाए 
+[19:91] इस बात पर के लोगों ने रहमान के लिए औलाद होने का दावा किया 
+[19:92] रहमान की ये शान नहीं है के वो किसी को बेटा बना सके 
+[19:93] जमीन और आसमान के अंदर जो भी हैं सब उसके हुजूर बंदों की हैसियत से पेश होने वाले हैं 
+[19:94] सब पर वो मुहीत (घेरा हुआ) है और उसने उनको शामिल कर रखा है 
+[19:95] सब कयामत के रोज़ फरदान फरदान (अकेले अकेले) उसके सामने हाज़िर होंगे 
+[19:96] यकीनन जो लोग ईमान ले आए हैं और अमल ए सालेह कर रहे हैं अनकारी रहमान उनके लिए दिलों में मुहब्बत अदा कर देगा 
+[19:97] पास (ऐ मुहम्मद), इस कलाम को हमने आसां करके तुम्हारी जुबान में इसके लिए नाज़िल किया है के तुम परहेज़गरों को ख़ुश ख़बरी देदो और टोपी-धर्म (झगड़ालू/अड़ियल) लोगों को डरा दो 
+[19:98] इनसे पहले हम कितनी नमस्ते क़ौमों को हलाक कर चुके हैं, फिर आज कहीं तुम उनका निशान पाते हो, या उनकी भनक भी कहीं सुनायी देती है 
+
+सूरह 20: ता हा (ता हा) 
+------------------------------------------------ 
+[20:1] ता हा 
+[20:2] हमने ये कुरान तुम्हारे लिए नाज़िल नहीं किया है के तुम मुसीबत में पढ़ जाओ 
+[20:3] ये तो एक याद दिहानी है हर उस शक्स के लिए जो डरे 
+[20:4] नाज़िल किया गया है उस ज़ात की तरफ से जिसने पैदा किया है ज़मीन को और बुलंद आसमान को 
+[20:5] वो रहमान (क़ायनात के) तख्त ए सल्तनत पर जलवा फरमा है
+[20:6] मालिक हैं उन सब चीज़ों का जो आसमान और ज़मीन में हैं और जो ज़मीन ओ आसमान के दरमियान में हैं और जो मिट्टी के नीचे हैं 
+[20:7] तुम चाहे अपनी बात पुकार कर कहो, वो तो चुपके से कहीं हुई बात बल्के इसे मख़फ़ी-तर (सबसे गुप्त) बात भी जानता है 
+[20:8] वो अल्लाह है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं, उसके लिए बेहतरीन नाम हैं 
+[20:9] और तुम्हें कुछ मूसा की खबर भी पसंद है 
+[20:10] जबके उसने एक आग देखी और अपने घर वालों से कहा के “जरा ठहरो, मैंने एक आग देखी” है, शायद तुम्हारे लिए एक-आद अंगारा ले आऊं, हां इस आग पर मुझे (रास्ते के मुतालिक) कोई रहनुमाई (मार्गदर्शन) मिल जाए” 
+[20:11] वहां पहुंच तो पुकारा गया “ऐ मूसा 
+[20:12] मैं हाय तेरा रब हूं, जूतियां (जूते) उतार दे, तू वादी ए मुक़द्दस तुवा में है 
+[20:13] और मैंने तुझको चुन लिया है, सुन जो कुछ वही किया जाता है 
+[20:14] मैं ही अल्लाह हूं, मेरे सिवा कोई खुदा नहीं है, पास तू मेरी बंदगी कर और मेरी याद के लिए नमाज़ क़याम कर 
+[20:15] क़यामत की घड़ी जरूर आने वाली है, मैं उसका वक्त मख्फी रखना चाहता हूं, ता-के हर मुतनफ्फिस अपनी साई (मजदूर/कोशिश) के मुताबिक बदला पाए 
+[20:16] पास कोई ऐसा शक्स जो उसपर ईमान नहीं लाता और अपनी ख्वाहिश ए नफ्स का बंदा बन गया है तुझको उस घड़ी की फ़िक्र से ना रोक दे, वरना तू हलकत में पढ़ जाएगा 
+[20:17] और ऐ मूसा, ये तेरे हाथ में क्या है?” 
+[20:18] मूसा ने जवाब दिया "ये मेरी लाठी है, इसपर ठीक लगा कर चलता हूं, इसे अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूं, और भी बहुत से काम हैं जो इसे लेता हूं" 
+[20:19] फरमाया "फेंक दे इसको मूसा" 
+[20:20] उसने फेंक दिया और यकीन वो एक सांप (सांप) थी जो दौड़ रहा था 
+[20:21] फरमाया “पकड़ ले इसको और डर नहीं, हम इसे फिर वैसा ही कर देंगे जैसी ये थी 
+[20:22] और जरा अपना हाथ अपने बगल में दबा, चमकता हुआ निकलेगा बिना किसी तकलीफ के, ये दुसरी निशानी है 
+[20:23] इस लिए के हम तुझे अपनी बड़ी निशानियां दिखाने वाले हैं 
+[20:24] अब तू फिरौं के पास जा, वो व्यंग्य हो गया है” 
+[20:25] मूसा ने अर्ज़ किया “ परवरदिगार, मेरा सीना खोल दे 
+[20:26] और मेरे काम को मेरे लिए आसां करदे 
+[20:27] और मेरी जुबान की ग्यारह सुलझा दे 
+[20:28] ता-के लोग मेरी बात समझ सकें 
+[20:29] और मेरे लिए मेरे अपने कुंबे (मेरे अपने परिवार) से एक वजीर मुकर्रर करदे 
+[20:30] हारून, जो मेरा भाई है 
+[20:31] उसके जरूर से मेरा हाथ मजबूत कर 
+[20:32] और उसको मेरे काम में शामिल करदे 
+[20:33] हम खूब तेरी पाकी बयां करें 
+[20:34] और खूब तेरा चर्चा करें 
+[20:35] तू हमेशा हमारा हाल पर नजर रख रहा है" 
+[20:36] फरमाया " दिया गया जो तू नहीं माँगा ऐ मूसा
+[20:37] हमने फिर एक मरतबा तुझपर एहसान किया 
+[20:38] याद करो वो वक्त जबके हमने तेरी मां को इशारा किया, ऐसा इशारा जो वही के लिए किया जाता है 
+[20:39] के इस बच्चे को संदूक (बॉक्स) में रख दे और संदूक को दरिया में छोड़ दे, दरिया इसे सही पर फेंक देगा और इसे मेरा दुश्मन और इस बच्चे का दुश्मन उठा लेगा। मैंने अपनी तरफ से तुझपर मोहब्बत तारी करदी और ऐसा इंतिज़ाम किया के तू मेरी निगरानी में पाला जाए 
+[20:40] याद कर जबके तेरी बहन चल रही थी, फिर जा कर कहती है, "मैं तुम्हें उसका पता दूं जो क्या बच्चे की परवरिश अच्छी तरह करे?" इस तरह हमने तुझे फिर तेरी मां के पास पहुंचा दिया ता-के उसकी आंख ठंडी रहे और वो रंजीदा ना हो। और (ये भी याद कर के) तूने एक शक्स को क़त्ल कर दिया था, हमने तुझसे इस फाँदे से निकला और तुझे मुखतलिफ़ आज़माइशों से गुजारा और तू मदियाँ के लोगों में काई साल रुका रहा। फिर अब ठीक अपने वक्त पर तू आ गया है ऐ मूसा 
+[20:41] मैंने तुझे अपने काम का बना लिया है 
+[20:42] जा, तू और तेरा भाई मेरी निशानियों के साथ, और देखो तुम मेरी याद में तकसीर (लापरवाही) ना करना 
+[20:43] जाओ तुम दोनों फ़िरौन के पास के वो व्यंग्य हो गया है 
+[20:44] उसे नरमी के साथ बात करना, शायद के वो हिदायत क़बूल करे या डर जाए” 
+[20:45] डोनो ने अर्ज़ किया “परवरदिगार, हमें अंदेशा है के वो हमपर ज़्यादा करेगा या पिल पड़ेगा।” क्रूरतापूर्वक)” 
+[20:46] फरमाया” डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूं, सब कुछ सुन रहा हूं और देख रहा हूं 
+[20:47] जाओ उसके पास और कहो के हम तेरे रब के फरीस्तादे (संदेशवाहक) हैं, बानी इजराइल को हमारे साथ जाने के लिए छोड़ दे और उनको तकलीफ ना दे। हम तेरे पास तेरे रब की निशानी लेकर आए हैं और सलामती है उसके लिए जो राह-ए-रास्त की जोड़ी बनाए 
+[20:48] हमको वही (रहस्योद्घाटन) से बताया गया है कि अज़ाब है उसके लिए जो झूठलाए और मुंह मोड़े।' 
+[20:49] फ़िरौन ने कहा "अच्छा, तो फिर तुम दोनो का रुब कौन है ऐ मूसा?" 
+[20:50] मूसा ने जवाब दिया "हमारा रब वो है जिसने हर चीज को उसकी असली बख्शी (विशिष्ट रूप दिया), फिर उसको रास्ता बताया" 
+[20:51] फिरौन बोला "और पहले जो नसलें (पीढ़ियां) गुजर चुकी हैं उनकी फिर क्या हालत थी?" 
+[20:52] मूसा ने कहा "उसका इलम मेरे रब के पास एक नाविश्ते (रिकॉर्ड) में महफूज है, मेरा रब ना छूटता है ना भूलता है" 
+[20:53] वही जिसने तुम्हारे लिए जमीन का फर्श बिछाया, और उसमें तुम्हारे चलने को रास्ते बने, और ऊपर से पानी बरसाया, फिर उसके ज़रिये से मुखतलिफ़ अक्सम की पैदावर निकली 
+[20:54] खाओ और अपने जानवरों को भी छोड़ो, यकीनन इस में बहुत सी निशानियाँ हैं अक़ल रखने वालों के लिए 
+[20:55] इसी ज़मीन से हमने तुमको पैदा किया है, इसी में हम तुम्हें वापस ले जायेंगे और इसी से तुमको दोबारा निकलेंगे
+[20:56] हमने फिरौन को अपनी सभी निशानियां बताईं मगर वो झूठलाये चला गया और ना माना 
+[20:57] कहने लगा "ऐ मूसा, क्या तू हमारे पास इस के लिए आया है के अपने जादू के जोर से हमको हमारे मुल्क से निकल बाहर करे 
+[20:58] अच्छा, हम भी तेरे मुकाबले में वैसा ही जादू लाते हैं, ताई कार्ले कब और कहां मुकाबला करना है, ना हम इस झगड़े से फिरेंगे ना तू फिरियो, खुले मैदान में सामने आजा” 
+[20:59] मूसा ने कहा “जश्न का दिन ताई हुआ, और दिन चढ़े लोग जमा होन” 
+[20:60] फिरौं ने पलट कर अपने सारे हथकंडे जमा किये और मुकाबले में आ गया 
+[20:61] मूसा ने (ऐन मौके पर गिरो ​​मुकाबिल को मुखातिब करके) कहा "शामत के मारों, ना झूठी तोहमतें (झूठ का आविष्कार) बांधो अल्लाह पर, वरना वो एक सख्त अजाब से तुम्हारा सत्तियाना कर देगा, झूठ जिसने भी घड़ा वो ना-मुराद हुआ” 
+[20:62] ये सुनकर उनको दरमियान इख्तिलाफ ए राय हो गया और वो चुपके चुपके बहाम मशवरे करने लगे 
+[20:63] आखिर-ए-कार कुछ लोगों ने कहा के “ये डोनो तो महज़ जादूगर हैं.इंका मक़सद ये है के अपने जादू के ज़ोर से तुमको तुम्हारी ज़मीन से बे-दख़ल करदें और तुम्हारे मिसाल (आदर्श) तारीख़-ए-ज़िंदगी का ख़तम करदें 
+[20:64] अपनी सारी तदबीरें आज इकाथी करलो और एका करके मैदान में आओ। बस ये समझलो के आज जो गालिब रहा वही जीत गया।” 
+[20:65] जादूगर बोले "मूसा, तुम फेंकते हो या पहले हम फेंकते हो?" 
+[20:66] मूसा ने कहा "नहीं, तुम्हीं फेंको" क्योंकि उनकी रसियां ​​और उनकी लाठियां उनके जादू के ज़ोर से मूसा को दौड़ती हुई महसूस होने लगी 
+[20:67] और मूसा अपने दिल में डर गया 
+[20:68] हमने कहा "मत डर, तू ही गालिब रहेगा" 
+[20:69] फेंक जो कुछ तेरे हाथ में है, अभी इनकी सारी बनावती चीज़ों को निगल जाता है, ये जो कुछ बना कर लाए हैं ये तो जादूगर का फरेब है, और जादूगर कभी कामयाब नहीं हो सकता, ख़्वाह किसी शान से वो आये” 
+[20:70] आख़िर को यहीं हुआ के सारे जादूगर सजदे में गिरा दिए गए और पुकार उठे "मान लिया हमने हारून और मूसा के रब को" 
+[20:71] फिरौन ने कहा "तुम ईमान ले आए क़ब्ल इसके मैं तुम्हें इसकी इजाज़त देता? मालूम हो गया के ये तुम्हारा गुरु है जिसने तुम्हें" जादूगरी सिखाई थी। अच्छा अब मैं तुम्हारे हाथ पौन मुखालिफ सिमटन (वैकल्पिक पक्ष) से ​​कटवाता हूं और खजूर के तानो (चड्डी) पर तुमको सूली देता हूं, फिर तुम्हें पता चल जाएगा के हम दोनों में से किसका अजब फर्क और देर पर है” (यानी मैं तुम्हें) ज़्यादा सख्त सज़ा दे सकता हूं या मूसा) 
+[20:72] जादूगरों (जादूगरों) ने जवाब दिया "कसम है उस जात की जिसने हमने अदा किया है, ये हरगिज नहीं हो सकता के हम रोशन निशानियां सामने आ जाने के बाद भी (सदाकत पर) तुझे तर्जीह दें। तू जो कुछ करना चाहे करले, तू ज्यादा से ज्यादा बस इसी दुनिया की जिंदगी का फैसला कर सकता है
+[20:73] हम तो अपने रब पर ईमान ले आए ता-के वो हमारी खातें माफ करदे, और इस जादूगरी से जिसपर तू ने हमें मजबूर किया था दरगुजर फरमाये। अल्लाह ही अच्छा है और वही बाक़ी रहने वाला है” 
+[20:74] हकीकत ये है के जो मुजरीन बनकर अपने रब के हुज़ूर हाज़िर होगा उसके लिए जहन्नुम है जिसमें वो ना जिएगा ना मरेगा 
+[20:75] और जो उसके हुज़ूर मोमिन की हकीकत से हाज़िर होगा, जिसने कोई अमल किये होंगे, ऐसे सब लोगों के लिए बुलंद दर्जे हैं 
+[20:76] सदा बहार बाग़ (बगीचे) हैं जिनके आला नहरें बह रही होंगी उन में वो हमेशा रहेंगे। ये जजा है उस शक्स की जो पकीज़गी इख्तियार करे 
+[20:77] हमने मूसा पर वही की अब रात-ओ-रात मेरे बंदों को लेकर चल पढ़, और उनके लिए समंदर में सुखी सड़क (सूखी राह) बना ले, तुझे किसी के ताक़ुब का ज़रा ख़ौफ़ ना हो और ना (समंदर के बीच से गुज़रते हुए) डर लगे 
+[20:78] पीछे से फ्राईउन अपने लश्कर लेकर पहुँचे और फिर समंदर उन पर छा गया जैसा के चा जाने का हक़ था 
+[20:79] फ़िरौन ने अपनी क़ौम को गुमराह ही किया था, कोई सही रहनुमाई नहीं की थी 
+[20:80] ऐ बानी इसराइल, हमने तुमको तुम्हारे दुश्मन से नजात दी, और तूर के दिन जानिब तुम्हारी हाज़री के लिए वक़्त मुक़र्रर किया और तुमपर मन्ना ओ सलवा (बटेर) उतारा 
+[20:81] खाओ हमारा दिया हुआ पाक ​​रिज़क और इसे खा कर सरकशी ना करो वरना तुमपर मेरा गजब टूट पड़ेगा। और जिसपर मेरा गजब टूटा वो फिर गिर कर ही रहा 
+[20:82] अलबत्ता जो तौबा कार्ले और ईमान लाए और नेक अमल करे, फिर सीधा चलता रहे, उसके लिए मैं बहुत दरगुजर करने वाला हूं 
+[20:83] और क्या चीज तुम्हें अपनी कौम से पहले ले आई मूसा 
+[20:84] उसने अर्ज़ किया “वो बस मेरे पीछे आ ही रहे हैं। मैं जल्दी करके तेरे हुजूर आ गया हूं ऐ मेरे रब, ता-के तू मुझसे खुश हो जाए” 
+[20:85] फरमाया “अच्छा, तो सुनो, हमने तुम्हारे पीछे तुम्हारी क़ौम को आजमाइश में डाल दिया और सामरी ने उन्हें गुमराह कर डाला” 
+[20:86] मूसा सच गुस्से और रंज की हालत में अपनी क़ौम की तरफ पलटा। जाकर उसने कहा “ऐ मेरी क़ौम के लोग, क्या तुम्हारे रब ने तुमसे अच्छे वादे नहीं किये थे? क्या तुम्हारे दिन लग गए हैं? या तुम अपने रब का गजब ही अपना ऊपर लाना चाहते थे के तुमने मुझसे वादा खिलाफी की?” 
+[20:87] उनको ने जवाब दिया “हमने आप से वादा खिलाफी कुछ अपने इख्तियार से नहीं की। मामला ये हुआ के लोगों के ज़ेवरत के बोझ से हम लड़ गए थे और हमने बस उनको फेंक दिया था'' फिर इसी तरह सामरी ने भी कुछ डाला 
+[20:88] और उनके लिए एक बच्चे (बछड़े का आकार) की मूरत बनकर निकल लाया जिसकी जमानत (बैल) की सी आवाज निकलती थी। लोग पुकार उठे "यही है तुम्हारा खुदा और मूसा का खुदा, मूसा इसे भूल गया" 
+[20:89] क्या वो देखते ना थे के ना वो उनकी बात का जवाब देता है और ना उनके नफा ओ नुक्सान का कुछ इख्तियार रखता है।
+[20:90] हारून (मूसा के आने से) पहले ही उनसे कह चुका था के "लोगन, तुम इसकी वजह से फिटने (ट्रायल) में पढ़ गए हो, तुम्हारा रब तो रहमान है, पास तुम मेरी जोड़ी करो और मेरी बात मानो।" 
+[20:91] उनहों ने उसे कहा के "हम इसी तरह करते रहेंगे जब तक के मूसा वापस न आ जाएं" 
+[20:92] मूसा (कौम को डेटने के बाद हारून की तरफ पलटा और) बोला " हारून, तुमने जब देखा था के ये गुमराह हो रहे हैं 
+[20:93] तो किस चीज़ ने तुम्हारा हाथ पकड़ा था के मेरे तरीक़े पर अमल ना करो? क्या तुमने मेरे हुकुम की ख़िलाफ़-वारज़ी की 
+[20:94] हारून ने जवाब दिया “ऐ मेरी माँ के बेटे, मेरी दादी (दाढ़ी) ना पकड़, ना मेरे सर के बाल खींच, मुझे इस बात का डर था के” तू आ कर कहेगा तुमने बनी इजराइल में फूट डाल दी और मेरी बात का पास ना किया” 
+[20:95] मूसा ने कहा “और सामरी, तेरा क्या मामला है?” 
+[20:96] उसने जवाब दिया "मैंने वो चीज़ देखी जो इन लोगों को नज़र ना आई, लेकिन मैंने रसूल के नक्शे क़दम से एक मुट्ठी उठा ली और उसको डाल दिया, मेरे नफ्स ने मुझे कुछ ऐसा ही सुझाया" 
+[20:97] मूसा ने कहा, "अच्छा तो जा, अब जिंदगी भर तुझे यहीं पुकारते रहना है के मुझे ना छूना और तेरे लिए बाज़-पुर्स का एक वक्त मुकर्रर है जो तुझसे हरगिज़ ना तलेगा और देख अपना इस खुदा को जिस्पार तू ऋचा (इतना प्यार करता था) हुआ था, अब हम उसे जला डालेंगे और रेजा रेजा करके दरिया में बहाएंगे देंगे 
+[20:98] लोगन, तुम्हारा खुदा तो बस एक ही अल्लाह है जिसके सिवा कोई और खुदा नहीं है, हर चीज पर उसका इल्म है” 
+[20:99] (ऐ मुहम्मद), इस तरह हम पिछले गुजरे हालात की खबरें तुमको सुनाते हैं, और हमने खास अपने हां से तुमको एक "ज़िक्र" (दरस ए हिदायत) अता किया है 
+[20:100] जो कोई इसे मोह लेगा वो क़यामत के दिन साख बार ए गुनाह उठाएगा 
+[20:101] और ऐसे सब लोग हमेशा इसके वबल में गिरफ़्तार रहेंगे, और कयामत के दिन उनके लिए (जुर्म की है) जिम्मेदारी का बोझ) बड़ा तकलीफ-दे बोझ होगा 
+[20:102] उस दिन जबके सूर (तुरही) फूंका जाएगा और हम मुजरिमो को इस हाल में घेर लाएंगे के उनकी आंखें (देहशत के मारे) पथराई हुई होंगी 
+[20:103] आपस में चुपके चुपके कहेंगे के दुनिया में मुश्किल ही से तुमने कोई दस दिन गुजारे होंगे 
+[20:104] हमें खूब मालूम है के वो क्या बातें कर रहे होंगे, (हम ये भी जानते हैं के) हमें वक्त उनके साथ जो ज्यादा से ज्यादा मोहताज अंदाज लगाने वाला होगा वो कहेगा के नहीं, तुम्हारी दुनिया की जिंदगी बस एक दिन की जिंदगी थी 
+[20:105] ये लोग तुमसे पूछते हैं कि आखिर उस दिन ये पहाड़ कहां चले जायेंगे? कहो के मेरा रब उनको धूल बनाकर उड़ा देगा 
+[20:106] और ज़मीन को ऐसा हमवार चटियाल मैदान बना देगा (खाली स्तर का मैदान) 
+[20:107] के इसमे तुम कोई बल और सलवात (न कर्व और न ही क्रीज़) ना देखोगे
+[20:108] हमसे रोज़ सब लोग मुनादी (बुलाने वाले/पुकारने वाले) की पुकार पर सीधे चले आएंगे, कोई जरा अकड़ न दिखा सकेगा और आवाज़ें रहमान के आगे डब जाएंगी, एक सर-सरहत के सिवा तुम कुछ ना सुनोगे 
+[20:109] हमसे रोज़ शफ़ात (मध्यस्थता) करगर ना होगी, इल्ला ये के किसी को रहमान इसकी इजाजत दे और उसकी बात सुन्ना पसंद करे 
+[20:110] वो लोगों का अगला पिछला सब हाल जानता है और दूसरों को इसका पूरा इल्म नहीं है 
+[20:111] लोगों के सर उस हय्युल कय्यूम (जिंदा और कयाम) के आगे झुक जायेंगे. ना-मुराद होगा जो हमें वक्त किसी ज़ुल्म का बार (बोझ)-ए-गुनाह उठाए हुए हो 
+[20:112] और किसी ज़ुल्म या हक़ तलाफ़ी का ख़तरा ना होगा उस शक्स को जो नेक अमल करे और इसके साथ वो मोमिन भी हो 
+[20:113] और (ऐ मुहम्मद) इसी तरह हमने इसे कुरान ए अरबी बाना कर नाज़िल किया है और इस्में तरह-तरह से तम्बीहत (चेतावनी) की है शायद के ये लोग कजरावी (विकृति) से बचे हैं या इसमें कुछ होश के आसार इस की बदौलत पेदा हैं 
+[20:114] पास बाला ओ बरतर है अल्लाह, बादशाह ए हक़ीक़ी। और देखो, कुरान पढ़ने में जल्दी ना किया करो जबतक के तुम्हारी तरफ उसकी वही तकमील को ना पूछ जाए, और दुआ करो के ऐ परवरदिगार मुझे मज़ीद इल्म अता कर 
+[20:115] हमने इस्से पहले आदम को एक हुकुम दिया था, मगर वो भूल गया और हमने हममें एज़्म (दृढ़ संकल्प/दृढ़ संकल्प) ना पाया 
+[20:116] याद करो वो वक़्त जब हमने फरिश्तों से कहा था के आदम को सजदा करो, वो सब तो सजदा कर गए, मगर एक इब्लीस था के इंकार कर बैठा 
+[20:117] इस्पर हमने आदम से कहा के “देखो, ये तुम्हारा और तुम्हारी” बीवी का दुश्मन है, ऐसा ना हो के ये तुम्हें जन्नत से निकाल दे और तुम मुसीबत में पढ़ जाओ 
+[20:118] यहां तो तुम्हें ये सुविधाएं (सुविधाएं) हासिल हैं के ना भूखे नंगे रहते हो 
+[20:119] ना प्यास और धूप तुम्हें सताती है” 
+[20:120] लेकिन शैतान ने उसको फुसलाया, कहने लगा "आदम, बताऊं तुम्हें वो दरख्त जिसकी आबादी जिंदगी और ला-ज़वाल (सदाबहार) सल्तनत हासिल होती है?" 
+[20:121] आखिर ए कार वो दोनों (मियां बीवी) हमें दरख्त का फल खा गए, नतिजा ये हुआ के मौसम ही उनके सत्र (नग्नता) एक दूसरे के आगे खुल गए और लगे दोनों अपने आप को जन्नत के पत्तों से ढँकने। आदम ने अपने रुब की नफ़रमानी की और राह-ए-रास्त से भटक गया 
+[20:122] फिर उसके रुब ने उसे बरगुज़िदा किया और उसकी तौबा क़बूल कार्ली और उसे हिदायत बख्शी 
+[20:123] और फरमाया “तुम दोनो (फ़ारिक, यानि इंसान और शैतान) यहाँ से उतर जाओ, तुम एक दूसरे के दुश्मन रहोगे। अब अगर मेरी तरफ से तुम कोई हिदायत पाओगे तो जो मेरी हमें हिदायत की जोड़ी बनाएगा वो ना भटकेगा ना बदबख्त में मुब्तला होगा 
+[20:124] और जो मेरे "ज़िक्र" (दरस ए हिदायत) से मुह मोड़ेगा उसके लिए दुनिया मैं तंग हूँ जिंदगी होगी और कयामत के रोज हम उसे अंधा उठाएंगे”
+[20:125] वो कहेगा "परवरदिगार, दुनिया में तो मैं आँखों वाला था, यहाँ मुझे अंधा क्यों उठाया?" 
+[20:126] अल्लाह ताला फरमाएगा "हां, इसी तरह तू हमारी आयत को, जबके वो तेरे पास आई थी, तू ने भुला दिया था उसी तरह आज तू भुलाया जा रहा है" 
+[20:127] इस तरह हम हद से गुज़रने वाले और अपने रब की आयत ना माने वाले को (दुनिया में) बदला देते हैं और आख़िरत का अज़ाब ज़्यादा मज़बूत और ज़्यादा देर पर है (अधिक स्थायी) 
+[20:128] फिर क्या इन लोगों को (तारीख के इस सबक से) कोई हिदायत ना मिली के इनसे पहले कितनी ही क़ायमों को हम हलाक कर चुके हैं जिनकी (बरबाद शुदा) बस्तियों में आज ये चलते फिरते हैं? दर हकीकत इसमें बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक़ल ए सलीम रखने वाले हैं 
+[20:129] अगर तेरे रब की तरफ से पहले एक बात ताई ना करदी गई होती और मोहलत की एक मुद्दत मुकर्रर ना कि जा चुकी होती तो जरूर इनका भी फैसला चुका दिया जाता 
+[20:130] पास (ऐ मुहम्मद), जो बातें ये लोग बनाते हैं उन पर सब्र करो, और अपने रुब की हम्द ओ सना के साथ उसकी तस्बीह करो सूरज निकलने से पहले, और रात के औकात में भी तस्बीह करो और दिन के किनारों पर भी, शायद के तुम राजी हो जाओ 
+[20:131] और निगाह उठा कर भी ना देखो दुनियावी जिंदगी की उस शान ओ शौकत को जो हमने अपने अंदर से मुख्तलिफ किस्मत के लोगों को दे रखा है, वो तो हमने उन्हें आजमाइश में डालने के लिए दी है, और तेरे रब का दिया हुआ रिज़क ए हलाल हाय बेहतर और पैंदातर (अधिक स्थायी) है 
+[20:132] अपने एहल ओ अयाल (आपके परिवार के सदस्य) को नमाज की बात करो और खुद भी इसके पाबंद रहो, हम तुमसे कोई रिज्क नहीं चाहते, रिज्क तो हम ही तुम्हें दे रहे हैं और अंजाम की भलाई तक्वा हाय के लिए है 
+[20:133] वो कहते हैं कि ये शक्स अपने रब की तरफ से कोई निशानी (मोजाज़ा) क्यों नहीं लाता? और क्या इनके पास अगले सहीफों की तमाम तालीम का बयान ए वजह नहीं आ गया 
+[20:134] अगर हम उसके आने से पहले इनको किसी अज़ाब से हलाक कर देते तो फिर यही लोग कहते के ऐ हमारे परवरदिगार, तू नहीं हमारे पास कोई रसूल क्यों ना भेजा के ज़लील ओ रुसवा होने से पहले ही हम तेरी आयत की जोड़ी इख्तियार कर लेते हैं 
+[20:135] (ऐ मुहम्मद) इनसे कहो, हर एक अंजाम ए कार के इंतजार में है, पास अब मुंतजिर रहो, अनकरीब तुम्हें मालूम हो जाएगा के कौन सीधी राह चलने वाले हैं और कौन हिदायत-यफ्ता (सही मार्गदर्शन) हैं 
+
+सूरह 21: अल-अनबिया' (पैगंबर) 
+------------------------------------------------ 
+[21:1] करीब आ गया है लोगों के हिसाब का वक्त, और वो हैं के गफलत में मुंह मोड़े हुए हैं 
+[21:2] उनके पास जो ताज़ा हिदायत भी उनके रब की तरफ से आती है उसको बे-तकल्लुफ़ सुनते हैं और खेल में पड़े रहते हैं
+[21:3] दिल उनके (दूसरी ही फिक्रों में) मुहाफिज हैं और जालिम आपस में सरगोशियां (कानाफूसी) करते हैं के "ये शक्स आखिर तुम जैसा एक बशर (इंसान) ही तो है, फिर क्या तुम आंखें देखते जादू के फांदों में फंस जाओगे?" 
+[21:4] रसूल ने कहा, मेरा रब हर उस बात को जानता है जो आसमान और ज़मीन में की जाए, वो सामी (सुनने वाला) और अलीम (जानने वाला) है 
+[21:5] वो कहते हैं "बलके ये परागंदा (असंगत) ख्वाब है, बलके ये इसका मन-ग़दथ है, बलके ये शक्स शायर है वरना ये लाए कोई निशानी जिस तरह पुराने जमाने के रसूल निशानियों के साथ भेज गए थे” 
+[21:6] हलांके इनसे पहले कोई बस्ती भी, जिसने हमें हलाक किया, ईमान ना लाई, अब क्या ये ईमान लाएंगे 
+[21:7] और (ऐय) मुहम्मद), तुमसे पहले भी हमने इंसानो ही को रसूल बना कर भेजा था जिनपर हम वही (रहस्योद्घाटन) किया करते थे, तुम लोग अगर इल्म नहीं रखते तो एहले किताब से पूछ लो 
+[21:8] उन रसूलों को हमने कोई ऐसा जिस्म नहीं दिया था के वो खाते ना हो, और ना वो सदा (हमेशा) जीने वाले थे 
+[21:9] फिर देखलो के आखिर ए कार हमने उनके साथ अपने वादे पूरे किए, और उन्होंने और जिस को हमने चाहा बचा लिया, और हद से गुजर जाने वालों को हलाक कर दिया 
+[21:10] लोगन, हमने तुम्हारी तरफ एक ऐसी किताब भेजी है जिसमें तुम्हारा ही ज़िक्र है, क्या तुम समझते नहीं हो 
+[21:11] कितनी ही जालिम बस्तियाँ हैं जिनको हमने पीस कर रख दिया और उनके बाद दूसरी किसी क़ौम को उठाया 
+[21:12] जब उनको हमारा अज़ाब महसूस हुआ तो लागे वहाँ से भागें 
+[21:13] (कहा गया) "भागो नहीं, जाओ अपने उन्हीं घरों में और ऐश के समानों में जिनके अंदर तुम चैन कर रहे थे, शायद के तुमसे पूछेंगे" 
+[21:14] कहने लगे "हाय हमारी कमबख्त, बेशक हम ख़तावर थे" 
+[21:15] और वो यहीं पुकारते रहें यहां तक ​​के हमने उनको खलियान (काटा हुआ खेत) करदिया, जिंदगी का एक शरारा तक उनमें ना रहा (जीवन की कोई चिंगारी नहीं छोड़ना) 
+[21:16] हमने आसमान और जमीन को और जो कुछ भी इनमें है कुछ खेल के तौर पर नहीं बनाया है 
+[21:17] अगर हम कोई खिलोना बनाना चाहते हैं और बस यहीं कुछ हमें करना होता है तो अपने ही पास से कर लेते हैं 
+[21:18] मगर हम तो बातिल पर हक की चोट लगाते हैं जो उसका सारा तोड़ देती है और वो देखता-देखता मिट जाता है, और तुम्हारे लिए तभी। है उन बातों की वजह से जो तुम बनते हो 
+[21:19] ज़मीन और आसमान में जो मख़लूक़ भी है अल्लाह की है और जो (फ़रिश्ते) उसके पास हैं वो ना अपने आप को बड़ा समझ कर उसकी बंदगी से सरताबी करते हैं और ना मालूल (थके हुए/थके) होते हैं 
+[21:20] शब-ओ-रोज़ उसकी तस्बीह करते रहते हैं, दम नहीं लेते 
+[21:21] क्या इन लोगों के बने हुए अर्ज़ी खुदा ऐसे हैं के (बे-जान को जान बख्श कर) उठा खड़ा करते हैं
+[21:22] अगर आसमान ओ ज़मीन में एक अल्लाह के सिवा दूसरे खुदा भी होते तो (ज़मीन और आसमान) दोनों का निज़ाम बिगड़ जाता। पास पाक है अल्लाह रब्बुल अर्श उन बातों से जो ये लोग बना रहे हैं 
+[21:23] वो अपने कामों के लिए (किसी के आगे) जवाब-दे नहीं है और सब जवाब-दे हैं 
+[21:24] क्या उसे छोड़ कर इन्हों ने दूसरे खुदा बना लिए हैं? (ऐ मुहम्मद) इनसे कहो के "लाओ अपनी दलील, ये किताब भी मौजूद है जिसमें मेरे दौर के लोगों के लिए हिदायत है और वो किताबें भी मौजूद हैं जिनमें मुझसे पहले लोगों के लिए हिदायत थी" मगर उन में से अक्सर लोग हकीकत से बेखबर हैं, इस लिए मुहं मोड़े हुए हैं 
+[21:25] हमने तुमसे पहले जो रसूल भी भेजा है उसको यहीं कहा है कि मेरे सिवा कोई खुदा नहीं है, पास तुम लोग मेरी ही बंदगी करो 
+[21:26] ये कहते हैं "रहमान औलाद रखता है" सुभानअल्लाह, वो तो बंदे हैं जिन्हे इज्जत दी गई है 
+[21:27] उसके हुजूर बढ़ कर नहीं बोलते और बस उसके हुकुम पर अमल करते हैं 
+[21:28] जो कुछ उनके सामने है उसे भी वो जानता है और जो कुछ उनसे ओझल है उसे भी वो खबर है, वो किसी की सिफरिश नहीं करता बाजुज उसके जिसको हक़ में सिफ़रिश सुनने पर अल्लाह रज़ी हो, और वो उसके ख़ौफ़ से डरे रहते हैं 
+[21:29] और जो उनमें से कोई कह दे कि अल्लाह के सिवा मैं भी एक खुदा हूँ, तो उसे हम जहन्नुम की सज़ा दें, हमारे हाँ ज़ालिमों का यही बदला है 
+[21:30] क्या ये लोग जिन्हों ने (नबी की बात मन्ने से) इंकार करदिया है गौर नहीं करते के ये सब आसमान और जमीन बहम मिले हुए थे, फिर हमने इन्हें जुदा किया, और पानी से हर जिंदा चीज पैदा की, क्या वो (हमारी इस खल्लकी को) नहीं मानते 
+[21:31] और हमने जमीन में पहाड़ जमा दिए ता-के वो उन्हें लेकर ढुलक ना जाए, और इसमें खुशियां रखें बना दी, शायद के लोग अपना रास्ता मालूम करें 
+[21:32] और हमने आसमान को एक महफूज छत बना दिया, मगर ये हैं के इसकी निशानियों की तरफ तवाज्जु ही नहीं करते 
+[21:33] और वो अल्लाह ही है जिसने रात और दिन बनाए और सूरज और चांद को पैदा किया, सब एक एक फलक में तैर रहे हैं 
+[21:34] और (ऐ मुहम्मद), हमेशा (अनंत काल) तो हमने तुमसे पहले भी कोई इंसान के लिए नहीं रखा है अगर तुम मर गए तो क्या ये लोग हमेशा जीतते रहेंगे 
+[21:35] हर जानदार को मौत का मजा चखना है, और हम अच्छे और बुरे हालात में डाल कर तुम सबकी आजमाइश कर रहे हैं, आखिर-ए-कार तुम्हें हमारी ही तरफ पलटना है 
+[21:36] ये मुनकिरीन ए हक जाब तुम्हें देखते हैं तो तुम्हारा मजाक बना लेते हैं। कहते हैं “क्या ये है वो शक्स जो तुम्हारे खुदाओं का ज़िक्र किया करता है?” और इनका अपना हाल ये है के रहमान के ज़िक्र से मुनकिर हैं 
+[21:37] इंसान जल्दी बाज़ मख़लूक है, अभी मैं तुमको अपनी निशानियां दिखाये देता हूं, जल्दी ना मचाओ
+[21:38] ये लोग कहते हैं "आखिर ये धमाकेदार पूरी कब होगी अगर तुम सच्चे हो" 
+[21:39] काफिरों को उस वक्त का कुछ इलम होता जब ये ना अपने मुंह आग से बचा सकेंगे ना अपनी पीठ, और ना इनको कहीं से मदद मांगेगी 
+[21:40] वो बला (तबाही) अचानक आएगी और इन्हें इस तरह यक्लाख्त (अचानक) दबोच लेगी के ये ना उसको दफा कर पाएंगे और ना इनको लम्हा भर मोहलत ही मिल जाएगी 
+[21:41] मजाक तुमसे पहले भी रसूलों का उदय जा चूका है, मगर उनका मजाक उड़ाने वाली उसी चीज़ के फेर में आ कर रहे जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे 
+[21:42] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो, "कौन है जो रात को या दिन को तुम्हें रहमान से बचा सकता हो?" मगर ये अपने रब की हिदायत से मुह मोड़ रहे हैं 
+[21:43] क्या ये कुछ ऐसे खुदा रखते हैं जो हमारे मुकाबले में इनकी हिमायत करें? वो ना तो खुद अपनी मदद कर सकते हैं और ना हमारी ही ताइद उनको हासिल है 
+[21:44] असल बात ये है कि लोगों को और इनके आबा ओ अजदाद (पूर्वजों) को हम जिंदगी का सार ओ सामान दिए चले गए यहां तक ​​के इनको दिन लग गए (जब तक कि अवधि बहुत लंबी नहीं हो गई) उन्हें)। मगर क्या इन्हें नज़र नहीं आता के हम ज़मीन को मुख़्तलिफ़ सिम्तों से घटाये चले आ रहे हैं? फिर क्या ये गालिब आ जायेंगे 
+[21:45] इनसे कहदो के "मैं तो वही (रहस्योद्घाटन) कि बिना पर तुम्हें मुतनब्बे (चेतावनी) कर रहा हूँ"। मगर बाहर पुकार को नहीं सुना जाता जबके उन्हें खबरदार किया जाए 
+[21:46] और अगर तेरे रब का अजब ज़रा सा इन्हें छू जाए तो अभी गाल उठें के हाए हमारी कम्बख्त, बेशक हम ख़तावर थे 
+[21:47] क़यामत के रोज़ हम ठीक ठीक तोलें वे तराजू रख देंगे, फिर किसी शक्स पर ज़रा बराबर ज़ुल्म न होगा। जिसका राई (सरसों) के दाने के बराबर भी कुछ किया धरा होगा वो हम सामने ले आएंगे और हिसाब लगाने के लिए हम काफी हैं 
+[21:48] पहले हम मूसा और हारून को फुरकान (मानदंड) और रोशनी और "ज़िक्र" अता कर चुके हैं उन मुत्तक़ी लोगों की भलाई के लिए 
+[21:49] जो बे-देखे (बिगैर देखे) अपने रब से डरें और जिनका (हिसाब की) हमें घड़ी का खटका लगा हुआ है 
+[21:50] और अब ये ब-बरकत "ज़िक्र" हमने (तुम्हारे लिए) नाज़िल किया है फिर क्या तुम इसको क़बूल करने से इनकारी हो 
+[21:51] उसे भी पहले हमने इब्राहिम को उसकी होश-मंदी बख्शी थी और हम उसको खूब जानते थे 
+[21:52] याद करो वो मौका के उसने अपने बाप और अपनी क़ौम से कहा था के "ये मूरतें (चित्र) कैसी हैं जिनके तुमलोग गिरविदा (समर्पित) हो" रहे हो?” 
+[21:53] उनको ने जवाब दिया "हमने अपने बाप दादा को इनकी इबादत करते पाया है" 
+[21:54] उसने कहा "तुम भी गुमराह हो और तुम्हारे बाप दादा भी सारे गुमराह में पड़े हुए थे?" 
+[21:55] उनहों ने कहा "क्या तू हमारे सामने अपना असली ख्यालात पेश कर रहा है या मज़ाक करता है?"
+[21:56] उसने जवाब दिया "नहीं, बलके फिल वही तुम्हारा रब वही है जो ज़मीन और आसमान का रब और उनका भुगतान करने वाला है, इसपर मैं तुम्हारे सामने गवाही देता हूं 
+[21:57] और खुदा की कसम मैं तुम्हारी गैर मौजुदगी में जरूर तुम्हारे बटन (मूर्तियों/मूर्तियों) की खबर लूंगा'' 
+[21:58] चुनांचे उसने उनको टुकड़े-टुकड़े कर दिया और सिर्फ उनके बदले को छोड़ दिया ता-के शायद वो इसकी तरफ रूजू करें 
+[21:59] उन्हें आकार बुथों[मूर्तियों] का ये हाल देखा तो) कहने लगे ''हमारे खुदाओं का'' हाँ हाल किसने करदिया? बड़ा ही कोई जालिम था वो” 
+[21:60] (बाज़ लोग) बोले “हमने एक नवाज़वान को इनका जिक्र करते सुना था जिसका नाम इब्राहिम है” 
+[21:61] उनहों ने कहा “तो पकड़ लाओ उसे सबके सामने ता-के लोग देख लें (उसकी कैसी खबर ली जाती है)” 
+[21:62] (इब्राहिम के आने पर) उनहों ने पूछा "क्यूं इब्राहिम, तू नहीं हमारे खुदाओं के साथ ये हरकत की है 
+[21:63] उसने जवाब दिया "बल्के ये सब कुछ इनके इस सरदार ने किया है, इनसे पूछ लो अगर ये बोलते हो" 
+[21:64] ये सुनकर वो लोग अपने जमीर की तरफ पलटे और (अपने दिलों में) कहने लगे "वाकई तुम खुद ही जालिम हो" 
+[21:65] मगर फिर उनकी गणित पलट गई (दिमाग विकृत हो गया) और बोले "तू जानता है के ये बोलते नहीं हैं" 
+[21:66] इब्राहिम ने कहा "फिर क्या तुम अल्लाह को छोड़ कर उन चीज़ को पूज रहे हो जो ना तुम्हें नफा पहन कर कादिर हैं ना नुक्सान पर 
+[21:67] टफ (फाई) है तुमपर और तुम्हारे इन माबूदोन पर जिनके तुम अल्लाह को छोड़ कर पूजा कर रहे हो, क्या तुम कुछ भी अक्ल नहीं रखते?” 
+[21:68] उनहों ने कहा "जला डालो इसको और हिमायत करो अपने खुदाओं की अगर तुम्हें कुछ करना है" 
+[21:69] हमने कहा "ऐ आग, ठंडी हो जा और सलामती बन जा इब्राहिम पर" 
+[21:70] वो चाहते थे के इब्राहिम के साथ बुराइयां करें मगर हमने उनको बुरी तरह नाकाम करदिया 
+[21:71] और हमने उसे और लुट को बचा कर सर-जमीन की तरफ निकल ले गए जिसमें हमने दुनिया वालों के लिए बरकतें रखी हैं 
+[21:72] और हमने उसे इशाक अता किया और याकूब उसपर मजीद, और हर एक को सालेह (नेक) बनाया 
+[21:73] और हमने उनको इमाम बना दिया जो हमारे हुकुम से रहनुमाई करते थे और हमने उन्हें वही (रहस्योद्घाटन) के ज़रिये नीक कामोन की और नमाज़ क़याम करने की और ज़कात देने की हिदायत की, और वो हमारे इबादत गुज़ार थे 
+[21:74] और लूट को हमने हुकुम और इल्म बख्शा और हमें बस्ती से बचाकर निकाल दिया जो बदकारियां करती थी। दर हकीकत वो बड़ी ही बुरी, फासीक़ क़ौम थी 
+[21:75] और लुट को हमने अपनी रहमत में दाख़िल किया, वो साले लोगों में से था 
+[21:76] और यही नियामत हमने नूह को दी, याद करो जबके सब से पहले उसने हमें पुकारा था, हमने उसकी दुआ कबूल की और उसके घर वालों को करब-ए-अज़ीम (बड़ी विपत्ति) से नजात दी
+[21:77] और उस क़ौम के मुक़ाबले में उसकी मदद की जिसने हमारी आयत को झूठला दिया था। वो बदे बुरे लोग थे, हमने उन सबको डराया (डूब दिया) करदिया 
+[21:78] और इसी नियामत से हमने दाऊद और सुलेमान को सरफराज किया। याद करो वो मौका जबके वो दोनो एक खेत (खेत) के मुक़द्दमे में फैसला कर रहे थे जिसमें रात के वक्त दूसरे लोगों की बकरियां (बकरियां) पतली हो गईं (रात को भटक ​​गईं), और हम उनकी अदालत खुद देख रहे थे 
+[21:79] हमें वक्त हमें सही फ़ैसला सुलेमान को समझा दिया, हलांके हुकुम और इल्म हमें दोनों ने ही अता किया था। दाऊद के साथ हमने पहाड़ों और परिंदों को मुसक्कर कर दिया था जो तस्बीह करते थे, इस फेल (काम) के करने वाले हम ही थे 
+[21:80] और हमने उसको तुम्हारे फ़ैयदे के लिए ज़ीरा (कवच के कोट) बनाने की सनत (शिल्प) सिखा दी थी, ता-के तुमको एक दूसरा कि मार से बचे, फिर क्या तुम शुक्र गुज़ार हो 
+[21:81] और सुलेमान के लिए हमने तेज़ हवा को मुस्कुरा कर दिया था जो उसके हुकुम से उस सर-ज़मीन की तरफ चलती थी जिसमें हमने बरकतें रखी हैं। हम हर चीज़ का इल्म रखने वाले थे 
+[21:82] और शयातीन में से हमने ऐसे बहुतों (कई) को उसका तबे बना दिया था जो उसके लिए घोटे (गोताखोरी) लगाते थे और इसके सिवा दूसरे काम करते थे, सब के निगरान में हम ही थे 
+[21:83] और याही (होश-मंदी और हुकुम ओ इल्म की नियामत) हमने अय्यूब को दी थी। याद करो जबके उसने अपने रुब को पुकारा के "मुझे बीमारी लग गई है और तू अरहम उर रहीमीन (सब से बढ़कर रहम करने वाला) है।" 
+[21:84] हमने उसकी दुआ क़बूल की और जो तकलीफ इस्तेमाल की थी उसको दूर कर दिया, और सिर्फ उसके एहल-ओ-अयाल ही उसको नहीं दिए बल्कि उसके साथ उतने ही और भी दिए, अपनी खास रहमत के तौर पर, और इस तरह के ये एक सबक हो इबादत गुज़ारों केलिए 
+[21:85] और यही नियामत इस्माइल और इदरीस (हनोक) और धुल-किफ्ल (इसैया) को दी, के ये सब साबिर लोग (दृढ़ता का अभ्यास) थे 
+[21:86] और उनको हमने अपनी रहमत में दखल किया के वो सालिहों (धर्मी लोगों) से कहा 
+[21:87] और मछली वाले (यूनुस) को भी हमने नवाजा, याद करो जबके वो बिगड कर चला गया था और समझा था के हम उसपर गिरफ़्तार न करेंगे। आख़िर को उसने तारिकियों (अंधेरे) में पुकारा "नहीं है कोई खुदा मगर तू, पाक है तेरी जात, बेशक मैंने कसूर किया" 
+[21:88] तब हमने उसकी दुआ क़बूल की और ग़म से उसको नजात बख्शी, और इसी तरह हम मोमिनो को बचा लिया करते हैं 
+[21:89] और ज़कारिया को, जबके उसने अपने रब को पुकारा के "ऐ परवरदिगार, मुझे अकेला ना छोड़, और बेहतर वारिस तो तू ही है" 
+[21:90] पास हमने उसकी दुआ क़बूल की और उसे यहया अता किया और उसकी बीवी को उसके लिए दुरूस्त करदिया, ये लोग नेकी के कामोन में दौड़-धूप करते थे और हमें रगड़ते थे (प्यार से) और खौफ के साथ पुकारते थे, और हमारे आगे झुके हुए थे
+[21:91] और वह खातून जिसने अपनी इस्मत (शुद्धता) की हिफाजत की थी, हमने उसके अंदर अपनी रूह से फूंका और उसके बेटे को दुनिया भर के लिए निशानी बना दिया 
+[21:92] ये तुम्हारी उम्मत हकीकत में एक ही उम्मत है और मैं तुम्हारा रब हूं, पास तुम मेरी इबादत करो 
+[21:93] मगर (ये लोगों की करस्तानी है के) इन्हों ने आपस में दीन को टुकड़े-टुकड़े कर डाला, सबको हमारी तरफ पलटना है 
+[21:94] फिर जो नई अमल करेगा, इस हाल में के वो मोमिन हो, तो उसके काम की ना-कादरी ना होगी, और उसे हम लिख रहे हैं 
+[21:95] और मुमकिन नहीं है कि जिस बस्ती को हमने हलाक कर दिया हो वो फिर पलट सके 
+[21:96] यहां तक ​​के जब याजूज माजूज खोल दिए जाएंगे और हर बुलंदी से वो निकल पड़ेंगे 
+[21:97] और वादा बार हक के पूरे होने का वक्त करीब आ लगेगा तो यकायक उन लोगों के दीधे फटे के फटे रह जाएंगे (निश्चित रूप से डरावनी दृष्टि से घूरते रहेंगे), जिन्हों ने कुफ्र किया था। कहेंगे “हाय हमारी चुदाई, हम इस चीज़ की तरफ से गफ़लत में पड़े हुए थे, बलके हम ख़तरा थे।” 
+[21:98] बेशक तुम और तुम्हारे वो माबूद जिन्हें तुम पूजते हो, जहन्नुम का इंधन (ईंधन) हैं, वहीं तुमको जाना है 
+[21:99] अगर ये वक्त खुदा होते तो वहां ना जाते, अब सबको हमेशा उसी में रहना है।" 
+[21:100] वहां वो फुनकारे मारेंगे (कराहना/दहाड़ना) और हाल ये होगा के उसमें कान पड़ी आवाज ना सुनायी देगी 
+[21:101] रहे वो लोग जिनके लिए हमारी तरफ से भलाई का पहला ही फैसला हो चूका होगा, तो वो यकीनन उसे दूर रखके जाएंगे 
+[21:102] उसकी सरसराहट तक ना सुनेंगे और वो हमेशा हमेशा अपने मन की बाती चीज़ों के दरमियान रहेंगे 
+[21:103] वो इंतिहाई घबराहट का वक्त उनको जरा परेशान ना करेगा, और मलाइका बढ़ कर उनको हाथ हाथ लेंगे के "ये तुम्हारा वही दिन है" जिसका तुमसे वादा किया जाता था" 
+[21:104] वो दिन जबके आसमान को हम यूं लपेट कर रख देंगे जैसे तुममें आवारा लपेट दिए जाते हैं (कागज के पत्तों को एक लिखित स्क्रॉल में लपेटा जाता है) जिस तरह पहले हमने तकलीक की इब्तिदा की थी उसी तरह हम फिर उसका इरादा (उत्पन्न) करेंगे। येह एक वादा है हमारा ज़िम्मा, और ये काम हमें बाहर-हाल करना है 
+[21:105] और ज़बूर में हम हिदायत के बाद ये लिख चुके हैं के ज़मीन के वारिस हमारे नए बंदे होंगे 
+[21:106] इस में एक बड़ी खबर है इबादत गुजर लोगों के लिए 
+[21:107] (ऐ मुहम्मद), हमने जो तुमको भेजा है तो ये दर-असल दुनिया वालों के हक में हमारी रहमत है 
+[21:108] इनसे कहो, "मेरे पास जो वही आती है वो ये है के तुम्हारा खुदा सिर्फ एक खुदा है, फिर क्या तुम सर-ए-इतात झुकते हो?" 
+[21:109] अगर वो मुंह फिरें तो कहदो "मैंने अलल-ऐलान (खुले तौर पर) तुमको खबरदार कर दिया है। अब ये मैं नहीं जानता के वो चीज जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है करीब है या दूर
+[21:110] अल्लाह वो बातें भी जानता है जो बा-आवाज बुलंद कहती है और वो भी जो तुम छुपा कर करते हो 
+[21:111] मैं तो ये समझता हूं के शायद ये (देर/देरी) तुम्हारे लिए एक फिट है और तुम्हें एक वक्त और खास तक के लिए मजा करने का मौका दिया जा रहा है” 
+[21:112] (आखि-ए-कार) रसूल ने कहा “ऐ मेरे रब, हक के साथ फैसला करदे, और लोग, तुम जो बातें बनाते हो उनके मुकाबले में हमारा रुब-ए-रहमान ही हमारे लिए मदद का सहारा है।” 
+
+सूरह 22: अल-हज (तीर्थ यात्रा) 
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+[22:1] लोगन, अपने रब के गजब से बचो, हकीकत ये है के कयामत का ज़लज़ला बड़ी (हौलनाक) चीज़ है 
+[22:2] जिस रोज़ तुम उसे देखोगे, हाल ये होगा के हर दूध पिलाने वाली अपने दूध पीते बच्चों से गाफिल हो जाएगी, हर हामिला (गर्भवती) का हमाल गिर जाएगा, और लोग तुमको मदहोश नज़र आएंगे, हालंके वो नशे में ना होंगे, बलके अल्लाह का अज़ाब ही कुछ ऐसा सच होगा 
+[22:3] बाज़ लोग ऐसे हैं जो इल्म के बिना अल्लाह के बारे में बहस करते हुए हैं और हर शैतान ए सरकश की जोड़ी बनाने लगते हैं 
+[22:4] हालंके उसके तो नसीब ही में ये लिखा है के जो उसको दोस्त बनाएगा उसे वो गुमराह करके छोड़ेगा और अज़ाब ए जहन्नुम का रास्ता दिखाएगा 
+[22:5] लोगन, अगर तुम जिंदगी बाद ए मौत के बारे में कुछ शक है तो तुम्हें मालूम हो के हमने तुमको मिट्टी से पेदा किया है, फिर नुत्फ़े से, फिर खून के कपड़े से, फिर गोश्त की बोतल से जो शकल वाली भी होती है और शकल भी हो (ये हम इस बारे में बता रहे हैं) ता-के तुमपर हकीकत वाज़ेह करदें, हम जिस को चाहते हैं एक खास वक्त तक रेहमो (गर्भ) में रखते हैं, फिर तुमको एक बच्चे की सूरत में निकल लाते हैं, (फिर तुम्हें परवरिश करते हैं) ता-के तुम अपनी पूरी जवानी को पाहुंचो और तुम में से कोई पहले हाय वापस बुला लिया जाता है और कोई बेहतरीन उमर की तरफ फेर दिया जाता है, ता-के सब कुछ जाने के बाद फिर कुछ ना जाने। और तुम देखते हो के ज़मीन सुखी पड़ी है, फिर जहां हमने उसपर मेह बरसाया के यकायक वो फबक उठी और फूल गई और उसने हर क़िसम की ख़ुश मंज़र नबाअत (वनस्पति) उगलनी शुरी करदी 
+[22:6] ये सब कुछ इस वजह से है कि अल्लाह ही हक़ है, और वो मुर्दों को ज़िंदा करता है, और वो हर चीज़ पर कादिर है 
+[22:7] और ये (इस बात की दलील है) के क़यामत की घड़ी आकार रहेगी, इस में किसी शक्क की गुंजाईश नहीं, और अल्लाह जरूर उन लोगों को उठाएगा जो कब्रों में जा चुके हैं 
+[22:8] बाज़ लोग ऐसे हैं जो किसी इल्म और हिदायत और रोशनी बख्शने वाली किताब के बिना, गार्डन अकडे हुए 
+[22:9] खुदा के बारे में झगड़े हैं, ता-के लोगों को राह ए खुदा से भटका दें। ऐसे शक्स के लिए दुनिया में रुसवाई है और कयामत के रोज़ उसको हम आग के अज़ाब का मजा चखाएंगे
+[22:10] ये है तेरा वो मुस्तकबिल (भविष्य) जो तेरे अपने हाथों ने तेरे लिए तैयार किया है, वरना अल्लाह अपने बंदों पर ज़ुल्म करने वाला नहीं है 
+[22:11] और लोगों में कोई ऐसा है जो किनारे पर रह कर अल्लाह की बंदगी करता है, अगर फ़ैयदा हुआ तो मुतमइन होगया और जो कोई मुसीबत आ गई तो उल्टा फिर गया। उसकी दुनिया भी गई और आखिरी भी, ये है सारा खसरा (नुकसान/नुक्सान) 
+[22:12] फिर वो अल्लाह को छोड़ कर उनको पुकारता है जो ना उसको नुक्सान पहुंचा सकता है ना फ़ायदा, ये है गुमराही की इंतेहा 
+[22:13] वो उनको पुकारता है जिनका नुक्सान उनके नाफ़े (फ़ैयदा) से करीब तार है, बख्तरीन है हमारा मौला (अभिभावक) और बद्तरीन है उसका रफीक (साथी) 
+[22:14] (इस्के बराक) अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए और जिन्न ने नेक अमल किया, यकीनन ऐसी जन्नत में दखल करेगा जिनका कोई मतलब नहीं रही होंगी। अल्लाह करता है जो कुछ चाहता है 
+[22:15] जो शक्स ये गुमान रखता हो के अल्लाह दुनिया और आख़िरत में उसकी कोई मदद न करेगा उसे चाहिए के एक रस्सी (रस्सी) के ज़रीए आसमान तक पहुंच कर शिगाफ़ लगाए (इसमें एक छेद कर दो), फिर देख ले के आया उसकी तदबीर किसी ऐसी चीज़ को रद्द कर सकती है जो उसको नागावार है 
+[22:16] ऐसी ही खुली खुली बातों के साथ हमने कुरान को नाज़िल किया है, और हिदायत अल्लाह जिसे चाहता है देता है 
+[22:17] जो लोग ईमान लाए, और जो यहुदी हुए, और सबाई (सबाएंस), और नसारा, और माजूस, और जिन लोगों ने शिर्क किया, उन सब के दरमियान अल्लाह कयामत के रोज फैसला करेगा। हर चीज़ अल्लाह की नज़र में है 
+[22:18] क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह के आगे सर-ब-सुजूद है वो सब जो आसमान में हैं और जो ज़मीन में हैं, सूरज और चाँद और तारे और पहाड़ और दरख्त और जानवर और बहुत से इंसान और बहुत से वो लोग भी जो अज़ाब के मुस्तहिक हो चुके हैं? और जिसे अल्लाह ज़लील-ओ-ख़्वार करदे उसे फिर कोई इज़्ज़त देने वाला नहीं है। अल्लाह करता है जो कुछ चाहता है 
+[22:19] ये दो फरीक हैं जिनके दरमियान अपने रब के मामले का झगड़ा है। उनमें से वो लोग जिन्हों ने कुफ्र किया है उनके लिए आग के लिबास काटे जा चुके हैं, उनके सरों (सिरों) पर खौलता (उबलता) हुआ पानी डाला जाएगा 
+[22:20] जिसकी उनकी खालें (खालें) ही नहीं पित के अंदर तक गल (पिघल) जाएंगी 
+[22:21] और उनकी खबर लेने के लिए लोहे (लोहे) के गुर्ज़ (गदाएं) होंगे 
+[22:22] जब कभी वो घबरा कर जहन्नुम से निकलेंगे की कोशिश करेंगे फिर उसमें ढकेल दिए जाएंगे के चक्खो अब जलने की सजा का मजा 
+[22:23] (दूसरी तरफ) जो लोग ईमान लाए और जिन्हों नेइक अमल किए उनको अल्लाह ऐसी जन्नत में दखल करेगा जिनके बारे में खास बातें होंगी, वहां वो जल्द ही के साथ रहेंगे और उनके लिबास रेशम के होंगे 
+[22:24] उनको पाकीजा बात कबूल करने की हिदायत बख्शी गई और उन्हें खुदे सतुदा सिफ़्फ़त (सभी प्रशंसनीय) का रास्ता दिखाया गया
+[22:25] जिन लोगों ने कुफ़्र किया और जो (आज) अल्लाह के रास्ते से रोक रहे हैं और उस मस्जिद ए हरम की ज़ियारत में माने हैं जिसे हमने सब लोगों के लिए बनाया है, जिसमें मुकामी बशिंदों और बहार से आने वालों के हुकूक बराबर हैं, (उनकी रवीश) यकीनन सज़ा की मुस्तहक़ है), इस (मस्जिद ए हरम) में जो भी रस्ती से हटकर (धार्मिकता से भटकना) ज़ुल्म का तरीक़ा इख्तियार करेगा उसे हम दर्दनक अज़ाब का मजा दिखाएंगे 
+[22:26] याद करो वो वक्त जब हमने इब्राहीम के लिए इस घर (खाने काबा) की जगह तजवीज की थी (इस हिदायत के साथ) के “मेरे साथ किसी चीज़ को शरीक न करो, और मेरे घर को तवाफ़ करने वालों और क़याम वा रुकु व सुजूद करने वालों के लिए पाक रखो 
+[22:27] और लोगों को हज के लिए इज़ान ए आम (उद्घोषणा) दे दो के वो तुम्हारे पास हर दर दराज़ मुकाम से पैदल और ऊंटों (ऊंटों) पर सवार आएं 
+[22:28] ता-के वो फ़ैयदे देखें जो यहां उनके लिए रक्खे गए हैं, और चांद मुकर्रर दिनों में उन जानवरों पर अल्लाह का नाम लें जो उन्होंने उन्हें बख्शे हैं, खुद भी खाएं और तंग-दस्त मोहताज को भी दें 
+[22:29] फिर अपना मेल-कुचेल (गंदगी) दरवाज़े करें और अपनी नज़रें (मन्नतें) पूरी करें, और हमारे क़दीम (प्राचीन) घर का तवाफ़ करें 
+[22:30] ये था (तामीर ए काबा का मकसद) और जो कोई अल्लाह की क़याम करदा हुरमतों (पवित्रता) का एहतमाम करे तो ये उसके रब के नाज़दीक खुद उसी के लिए बेहतर है। और तुम्हारे लिए मवेशी (मवेशी) जानवर हलाल किए गए, मा सिवा उन चीज़ों के जो तुम्हें बतायी जा चुकी हैं। मूर्तियों की गंदगी से बचो, झूठी बातों से परहेज़ करो 
+[22:31] यकसु होकर अल्लाह के बंदे बनो, उसके साथ किसी को शरीक ना करो और जो कोई अल्लाह के साथ शिर्क करे तो गोया वो आसमां से गिर गया, अब या तो उसे परिंदे उचक ले जाएंगे या हवा उसको ऐसी जगह ले जा कर फेंक देगी जहां उसके चिल्लाए उध (टुकड़ों में बिखर जाएगा) जाएंगे 
+[22:32] ये है असल मामला (इसे समझ लो), और जो अल्लाह के मुकर्रर करदा शायर (पवित्रता) का एहतराम करे तो ये दिलों के तकवा से है 
+[22:33] तुम्हें एक वक्त ए मुकर्रर तक उन (हादी के जानवरों) से फैयदा उठाने का हक़ है फिर उन (के कुर्बान करने) की जगह उसी क़दीम घर के पास है 
+[22:34] हर उम्मत के लिए हमने कुर्बानी का एक कायदा मुकर्रर करदिया है ता-के (उस उम्मत के लोग) उन जानवरों पर अल्लाह का नाम लें जो हमें बख्शे हैं (मुखतलिफ़ तरीक़ों के अंदर) मकसद एक ही है)। पास तुम्हारा खुदा एक ही खुदा ही है और उसी के तुम मुती ए फरमान बनो। और ऐ नबी, बशारत दे दे अजीजाना (विनम्र) रवीश इख्तियार करने वालों को 
+[22:35] जिनका हाल ये है कि अल्लाह का जिक्र सुनते हैं तो उनके दिल कानप उठते हैं, जो मुसीबत भी अनपर आती है उसपर सब्र करते हैं, नमाज कायम करते हैं, और जो कुछ रिज्क हमने उनको दिया है उसमें से खर्च करते हैं
+[22:36] और (कुर्बानी के) ऊंटों (ऊंटों) को हमने तुम्हारे लिए शहर-अल्लाह (अल्लाह के प्रतीक) में शामिल किया है, तुम्हारे लिए उन्हें बुलाया है। पस उन्हें खड़ा करके अनपर अल्लाह का नाम लो, और जब (कुर्बानी के बाद) उनकी पीठ जमीन पर टिक जाए तो उनसे खुद भी खाओ और उनको भी खिलाओ जो कनात किए बैठे हैं (संतुष्ट लोग) और उनको भी जो अपनी हाजत पेश करें। जानवरों को हमने इस तरह तुम्हारे लिए मुस्कुरा दिया है ता-के तुम शुक्रिया अदा करो 
+[22:37] ना उनके गोश्त अल्लाह को पहचानते हैं ना खून, मगर उसे तुम्हारा तक़वा पहचानता है। उसने तुम्हारे लिए इस तरह मुसक्कर किया है ता-के उसकी बख्शी हुई हिदायत पर तुम उसकी तकबीर करो। और (ऐ नबी), बशारत देदो नीकुकर लोगों को 
+[22:38] यकीनन अल्लाह मुदाफ़ियात (बचाव) करता है उन लोगों की तरफ से जो ईमान लाए हैं। यकीनन अल्लाह कोई खैन (विश्वासघाती) काफिर ए नियामत को पसंद नहीं करता 
+[22:39] इजाज़त दे दी गई उन लोगों को जिनके खिलाफ जंग की जा रही है, क्योंकि वो मजलूम हैं, और अल्लाह यकीनन उनकी मदद पर कादिर है 
+[22:40] ये वो लोग हैं जो अपने घर से ना-हक़ निकल गए सिर्फ इस कसूर पर के वो कहते थे "हमारा रब अल्लाह है"। अगर अल्लाह लोगों को एक दूसरे के ज़रिये दफा न करता रहे तो खानकाहें (मठ), और गिरजा (चर्च) और मबाद (आराधनालय) और मस्जिदें, जिन में अल्लाह का कसरत से नाम लिया जाता है, सब मिसमार (ध्वस्त) कर डाली जायेंगी। अल्लाह जरूर उन लोगों की मदद करेगा जो उसकी मदद करेंगे। अल्लाह बड़ा ताक़तवार और ज़बरदस्त है 
+[22:41] ये वो लोग हैं जिनमें अगर हम ज़मीन में इक़्तेदार बख्शें तो वो नमाज़ क़याम करेंगे, ज़कात देंगे, मारूफ़ (भलाई) का हुकुम देंगे और मुनकर (बुराई) से मन करेंगे और तमाम मामले का अंजाम अल्लाह के हाथ में है 
+[22:42] (ऐ नबी), अगर वो तुम्हें झुठलाते हैं तो उनसे पहले क़ौम ए नूह और अद और समूद 
+[22:43] और क़ौम ए इब्राहीम और क़ौम ए लुट 
+[22:44] और एहले मद्यन भी झुटला चुके हैं और मूसा भी झुटलाये जा चुके है. उन सब मुनकिरेन को मैंने पहले मोहलत दी, फिर पकड़ लिया। अब देखलो के मेरी उकुबत (सजा) कैसी थी 
+[22:45] कितनी ही खतरनाक बस्तियां हैं जिनको हमने तबाह किया है और आज वो अपनी छतों (छतों) पर उल्टी पड़ी हैं, कितने ही कुवें (कुएं) बेकार और कितने ही क़सर (महल) खंडार बनी हुए हैं 
+[22:46] क्या ये लोग ज़मीन में चले फिर नहीं हैं के इनके दिल समझने वाले और इनके कान सनी वाले होते? हकीकत ये है के आँखें अँधी नहीं होती मगर वो दिल अँधे हो जाते हैं जो सीने में हैं 
+[22:47] ये लोग अज़ाब के लिए जल्दी मचा रहे हैं। अल्लाह हरगिज अपने वादे के खिलाफ न करेगा, मगर तेरे रब के हां का एक दिन तुम्हारे शुमार के हजार बरस के बराबर हुआ करता है 
+[22:48] कितनी ही बस्तियां हैं जो जालिम थी, मैंने उनो पहले मोहलत दी, फिर पकड़ लिया और सबको वापस तो मेरे पास ही आना है
+[22:49] (ऐ मुहम्मद), कहदो के "लोगन, मैं तो तुम्हारे लिए सिर्फ वो शक्स हूं जो (बुरा वक्त आने से पहले) साफ साफ खबरदार करने वाला हूं 
+[22:50] फिर जो ईमान लाएंगे और नेक अमल करेंगे उनके लिए मगफिरत है और इज्जत की रोजी 
+[22:51] और जो हमारी आयत को नीचा दिखाने की कोशिश करेंगे वो दोज़ख के यार हैं 
+[22:52] और (ऐ मुहम्मद) तुमसे पहले हमने ना कोई रसूल ऐसा भेजा है ना नबी (जिसके साथ ये मामला ना पेश आया हो के) जब उसने तमन्ना की, शैतान उसकी तमन्ना में ख़लाल अंदाज़ हो गया है तारा जो कुछ भी शैतान खलाल अंदाज़ियां करता है अल्लाह उनको मिटा देता है और अपनी आयत को पुख्ता करता है। अल्लाह अलीम है और हकीम 
+[22:53] (वो इस लिए ऐसा होने देता है) ता-के शैतान की डाली हुई ख़राबी को फ़ितना बना दे उन लोगों के लिए जिनके दिलों को [निफ़क़ का (पाखंड)] रोग लगा हुआ है और जिनका दिल खोता है। हकीकत ये है के ये जालिम लोग इनाद (दुश्मनी) में बहुत दूर निकल गए हैं 
+[22:54] और इलम से बेहरमंद लोग जान लें के ये हक है तेरे रब की तरफ से और वो इसपर ईमान ले आएं और उनके दिल इसके आगे झुक जाएं। यकीनन अल्लाह ईमान लाने वालों को हमेशा सीधा रास्ता दिखा देता है 
+[22:55] इनकार करने वाले तो इसकी तरफ से शक्क ही में पड़े रहेंगे यहां तक ​​के या तो उन्पर कयामत की घड़ी अचानक आ जाए, या एक मनहूस दिन का अज़ाब नाज़िल हो जाए 
+[22:56] हमें रोज़ बादशाही अल्लाह की होगी और वो उनका दरमियान फ़ैसला कर देगा। जो ईमान रखने वाले और अमल ए सालेह करने वाले होंगे वो नियामत भारी जन्नत में जाएंगे 
+[22:57] और जिन्होन ने कुफ्र किया होगा और हमारी आयत को झुटलाया होगा उनके लिए रुस्वाकुन अज़ाब होगा 
+[22:58] और जिन लोगों ने अल्लाह की राह में हिजरत की, फिर क़त्ल कर दिए गए या मर गए, अल्लाह उनको अच्छा रिज्क देगा और यकीनन अल्लाह हाय बेहतरीन राज़िक है 
+[22:59] वो उनहें ऐसी जगह पहचानेगा जिसे वो खुश हो जायेंगे। बेशक अल्लाह अलीम (सभी जानने वाले) और हलीम (सबसे सहनशील) है 
+[22:60] ये तो है उनका हाल, और जो कोई बदला ले, वैसा ही जैसा उसका साथ दिया गया, और फिर उसपर ज़्यादा हो गया, अल्लाह उसकी मदद जरूर करेगा। अल्लाह माफ करें वाला और दरगुज़ार करने वाला है 
+[22:61] ये इस लिए के दिन और दिन से रात निकलने वाला अल्लाह ही है और वो सामी (सनी वाला/सबकुछ सुनता है) ओ बेसिर (देखने वाला/सबकुछ देखता है) है 
+[22:62] ये इसलिए के अल्लाह ही हक़ है और वो सब बातिल हैं जिन्हे अल्लाह को छोड़ कर ये लोग पुकारते हैं। और अल्लाह ही बालादस्त (सर्वोच्च) और बुज़ुर्ग (सर्वोच्च) है 
+[22:63] क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह आसमान से पानी बरसाता है और उसकी बदौलत ज़मीन सर-सब्ज़ हो जाती है? हकीकत ये है के वो लतीफ़ ओ खबीर है (हर बात से पूरी तरह अवगत)
+[22:64] उसका है जो कुछ आसमान में है और जो कुछ ज़मीन में है। बेशाक वही गनी (सभी-पर्याप्त/सभी इच्छाओं से मुक्त) ओ हमीद (प्रशंसनीय) है 
+[22:65] क्या तुम देखते नहीं हो के उसने वो सब कुछ तुम्हारे लिए मुस्कुरा कर रखा है जो ज़मीन में है, और उसने कश्ती को क़ैद का पाबंद बनाया है के वो उसके हुकुम से समंदर में चलती है, और वही आसमान को इस तरह थामे हुए के उसके इज़ान के बिना वो ज़मीन पर नहीं गिर सकता? वाक़िया ये है के अल्लाह लोगों के हक में बड़ा शफीक (बहुत दयालु) और रहीम (दयालु) है 
+[22:66] वही है जिसने तुम्हें जिंदगी बख्शी है, वही तुमको मौत देता है और वहीं फिर तुमको जिंदा करेगा, सच ये है के इंसान बड़ा ही मुन्किर ए हक है 
+[22:67] हर उम्मत के लिए हमने एक तारीख-ए-इबादत मुकर्रर किया है जिसकी वो जोड़ी बनाती है, पास (ऐ मुहम्मद), वो इस मामले में तुमसे झगड़ा ना करें, तुम अपने रब की तरफ दावत दो, यकीनन तुम सीधे रास्ते पर हो 
+[22:68] और अगर वो तुमसे झगड़े तो कहदो के "जो कुछ तुम कर रहे हो अल्लाह को ख़ूब मालूम है 
+[22:69] अल्लाह क़यामत के रोज़ तुम्हारे दरमियान उन सब बातों का फैसला कर देगा जिन में तुम इख्तिलाफ करते रहोगे" 
+[22:70] क्या तुम नहीं जानते कि आसमां ओ ज़मीन की हर चीज़ अल्लाह के इलम में है? सब कुछ एक किताब में दर्ज है। अल्लाह केलिए ये कुछ भी मुश्किल नहीं है 
+[22:71] ये लोग अल्लाह को छोड़ कर उनकी इबादत कर रहे हैं जिनके लिए ना तो उसने कोई सनद (अधिकार) नाज़िल की है और ना ये खुद उनके बारे में कोई इलम रखते हैं। जालिमों के लिए कोई मददगार नहीं है 
+[22:72] और जब इनको हमारी साफ आयतें सुनायी जाती हैं तो तुम देखते हो के मुनकिरेन ए हक के चेहरे बिगाड़ने लगते हैं और ऐसा महसूस होता है के अभी वो उन लोगों पर टूट पड़ेंगे जो उन्हें हमारी आयतें सुनाते हैं। इनसे कहो "मैं बताऊँ तुम्हें के लिए ऐसी बढ़िया चीज़ क्या है? आग, अल्लाह ने उसका वादा उन लोगों के हक़ में कर रखा है जो क़बूल ए हक़ से इंकार करें, और वो बहुत ही बुरा ठिकाना है" 
+[22:73] लोगन, एक मिसाल दी जाती है, गौर से सुनो, जिन माबूदों को तुम खुदा को चोद कर पुकारते हो वो सब मिलकर एक मक्खी (उड़ना) भी चुकाना चाहते हैं तो नहीं कर सकते, अगर मक्खी उनसे कोई चीज छीन ले जाए तो वो उन्हें चूड़ा भी नहीं दे सकते। मदद चाहने वाले भी कमज़ार और जिनसे मदद चाही जाती है वो भी कमज़ार 
+[22:74] इन लोगों ने अल्लाह की कदर ही ना पहचानी जैसा के उसकी पहचान का हक़ है, वक़िया ये है के कुव्वत और इज़्ज़त वाला तो अल्लाह ही है 
+[22:75] हकीकत ये है के अल्लाह [अपने फरामिन की तरसिल के लिए (अपने फरमानों को बताने के लिए)] मलिका (फरिश्ते) में से भी पैगाम रसन मुंतखब (चुनें) करता है और इंसानों में भी। वो सामी (सनी वाला) और बेसिर (देखने वाला) है
+[22:76] जो कुछ उनके सामने है उसे भी वो जानता है और जो कुछ उनसे ओझल (छिपा/पीछे) है उसे भी वो वाकिफ है, और सारे मामले उसकी तरफ रूजू होते हैं 
+[22:77] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, रुकू और सजदा करो, अपने रब की बंदगी करो, और कोई काम करो, शायद के तुमको फलाह नसीब हो 
+[22:78] अल्लाह की राह में जिहाद करो जैसा के जिहाद करने का हक है, उसने तुम्हें अपने काम के लिए चुन लिया है और दीन में तुमको कोई तंगगी नहीं रक्खी। क़याम हो जाओ अपने बाप इब्राहीम की मिल्लत पर। अल्लाह ने पहले भी तुम्हारा नाम "मुस्लिम" रखा था और वह (कुरान) में भी (तुम्हारा यही नाम है) ता-के रसूल तुमपर गवाह हो और तुम लोग गवाह हो। पस नमाज़ क़याम करो, ज़कात दो और अल्लाह से वाबिस्ता हो जाओ (अल्लाह को मजबूती से पकड़ो), वह तुम्हारा मौला (अभिभावक), बहुत ही अच्छा है वह मौला और बहुत ही अच्छा है वह मददगार 
+
+सूरह 23: अल-मुमिनुन (आस्तिक) 
+------------------------------------------------ 
+[23:1] यकीनन फलाह पाई है ईमान लानी वालों ने जो 
+[23:2] अपनी नमाज़ में ख़ुश इख़्तियार करते हैं (विनम्रता के साथ सलात) 
+[23:3] लग्वियत (व्यर्थ चीज़ें) से दूर रहते हैं 
+[23:4] ज़कात के तारिके पर आमिल होते हैं 
+[23:5] अपनी शर्मगाहों की हिफ़ाज़त करते हैं 
+[23:6] सिवाए अपनी बिवियों के और उन औरतों के जो उनका दूध ए यमीन में होन (दाहिना हाथ रखता है) के अनपार (महफूज ना रखने में) वो काबिल ए मालामत नहीं हैं 
+[23:7] अलबत्ता जो उसके अलावा कुछ और चाहे वही ज्यादती करने वाले हैं 
+[23:8] अपनी अमानतन (भरोसे) और अपने अहद ओ पैमान (वादे) का पास रखते हैं 
+[23:9] और अपनी नमाज़ की मुहाफ़िज़त (हिफ़ाज़त) करते हैं 
+[23:10] यहीं लोग वो वारिस हैं 
+[23:11] जो मीरास में फिरदौस पाएंगे और उसमें हमेशा रहेंगे 
+[23:12] हमने इंसान को मिट्टी के सात कहा मिट्टी) से बनाया 
+[23:13] फिर उसे एक महफूज जगा टपकी हुई बूंद में तबदील किया 
+[23:14] फिर हमें बूंद को लोठडे की शक्ल दी, फिर लोठडे को बोटी बना दिया, फिर बोटी की हड्डियां (हड्डियां) बनाईं, फिर हददियों पर गोश्त चढ़ाया। फिर उसे एक दूसरा ही मख़लूक़ बना खड़ा किया। पास बड़ा ही बा-बरकत है अल्लाह, सब कारीगरों से अच्छा कारीगर 
+[23:15] फिर इसके बाद तुमको जरूर मरना है 
+[23:16] फिर कयामत के रोज यकीनन तुम उठोगे 
+[23:17] और तुम्हारे ऊपर हमने सात (सात) रास्ते बनाए, तख़लीक के काम से हम कुछ ना-बलाद ना थे (हम (अपनी) रचना से कभी भी बेपरवाह नहीं होते हैं 
+[23:18] और आसमान से हमने ठीक हिसाब के मुताबिक़ एक खास मुक़द्दर में पानी उतारा और उसको ज़मीन में ठहरा दिया। हम उसे जिस तरह चाहें गायब कर सकते हैं
+[23:19] फिर इस पानी के ज़रिये से हमने तुम्हारे लिए खजूर और अंगूर के बाग़ पैदा कर दिये, तुम्हारे लिए बाग़ों में बहुत से लज़ीज़ फल हैं और उनसे तुम रोज़ी हासिल करते हो 
+[23:20] और वो दरख्त भी हमने खरीदा जो तूर-ए-सीना (माउंट सिनाई) से निकलता है, तेल (तेल) भी लिए हुए उगता है और खाने वालों के लिए सालान भी 
+[23:21] और हकीकत ये है के तुम्हारे लिए मवेशियों में भी एक सबक है उनके पैठों (पेट) में जो कुछ है उसी में से एक चीज हम तुममें पिलाते हैं, और तुम्हारे लिए उनमें बहुत से दूसरे फायदे भी हैं 
+[23:22] उनको तुम खाते हो और उन्पार और कश्तियों पर सवार भी हो जाते हो 
+[23:23] हमने नूह को उसकी क़ौम की तरफ भेजा, उसने कहा “ ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारे लिए कोई और माबूद नहीं है, क्या तुम डरते नहीं हो?” 
+[23:24] उसकी क़ौम के जिन सरदारों ने मन्ने से इंकार किया वो कहने लगे के "ये शक्स कुछ नहीं है मगर एक बशर (इंसान) तुम ही जैसा। इसकी गरज़ ये है के तुमपर बरतारी (श्रेष्ठता) हासिल करे। अल्लाह को अगर भेजा होगा तो फरिश्ते भेजता.ये बात तो हमने कभी अपने बाप दादा के वक़्त में सुनी ही नहीं (के बशर रसूल बनकर आए) 
+[23:25] कुछ नहीं, बस इस आदमी को ज़रा जुनून लहक हो गया है, कुछ मुद्दत और देखलो [( शायद इफ़ाक़ा हो जाए)(हो सकता है वह ठीक हो गया हो)]" 
+[23:26] नहीं ने कहा "परवरदिगार, इन लोगों ने जो मेरी तकज़ीब की है इसपर अब तू ही मेरी नुसरत फरमा।" 
+[23:27] हमने उसपर वही की के "हमारी निगरानी में और हमारी वही के मुताबिक कश्ती (सन्दूक) तैयार कर। फिर जब हमारा हुकुम आ जाए और तन्नूर उबल पड़ा तो हर क़िस्म के जानवरों में से एक एक जोड़ा लेकर उसमें सवार हो जा, और अपने एहल ओ अयाल" को भी साथ ले, सिवाय उनके जिनके खिलाफ पहला फैसला हो चुका है, और जालिमों के मामले में मुझसे कुछ ना कहना, ये अब गरक (डूब/डूबना) होने वाले हैं 
+[23:28] फिर जब तू अपने साथियों के साथ कश्ती पर सवार हो जाए तो कह, शुक्र है हमें खुदा का जिसने हमें ज़ालिम लोगों से निजात दी 
+[23:29] और कह, परवरदिगार, मुझको बरकत वाली जगह उतार और तू बेहतरीन जगह देने वाला है।” 
+[23:30] इस क़िस्से में बड़ी निशानियां हैं और आजमाइश तो हम करके ही रहते हैं 
+[23:31] इनके बाद हमने एक दूसरे दौर की क़ौम उठाई 
+[23:32] फिर उनमें खुद उनकी क़ौम का एक रसूल भेजा (जिसने उन्हें दावत दी) के अल्लाह की बंदगी करो, तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई और माबूद नहीं है, क्या तुम डरते नहीं हो 
+[23:33] उसकी क़ौम के जिन सरदारों ने मन्ने से इनकार किया और आख़िरत की पेशी को झुटलाया, जिनको हमने दुनिया की ज़िंदगी में आसुदा कर रखा था, वो कहने लगे “ये शक्स कुछ नहीं है मगर एक बशर तुम ही जैसा, जो कुछ तुम खाते हो वही ये खाता है और जो कुछ तुम पीते हो वही ये पीटा है
+[23:34] अब अगर तुमने अपने ही जैसा एक बशर की इताअत क़बूल कर ली तो तुम घाटे ही में रहोगे 
+[23:35] ये तुम्हें इत्तिला देता है के जब तुम मर कर मिटटी हो जाओगे और हदियों का पंजर रह जाओगे हमें वक्त तुम (कबरों से) निकल जाओगे 
+[23:36] बैद (दूर/असंभव), बिल्कुल बैद (असंभव) है ये वादा जो तुमसे किया जा रहा है 
+[23:37] जिंदगी कुछ नहीं है मगर बस यहीं दुनिया की जिंदगी। यहीं हमको मरना और जीना है और हम हरगिज उठाए जाने वाले नहीं हैं 
+[23:38] ये शक्स खुदा के नाम पर महज़ झूठ गड़बड़ रहा है और हम कभी इसके मन्ने वाले नहीं हैं। 
+[23:39] रसूल ने कहा "परवरदिगार, इन लोगों ने जो मेरी तकज़ीब की है, इसपर अब तू ही मेरी नुसरत फरमा" 
+[23:40] जवाब में इरशाद हुआ "करीब है वो वक्त जब ये अपने किये पर पछताएंगे" 
+[23:41] आखिर ए कार ठीक ठीक हक के मुताबिक़ एक हंगामा ए अज़ीम ने उनको आ लिया और हमने इनको कचरा बना कर फेंक दिया। दूर हो जालिम क़ौम 
+[23:42] फिर हमने उनके बाद दूसरी क़ौम उठाई 
+[23:43] कोई क़ौम ना अपने वक़्त से पहले ख़त्म हुई और ना उसके बाद ठहर साकी 
+[23:44] फिर हमने पै डर पै अपने रसूल भेजे। जिस कौम के पास भी उसका रसूल आया, उसने उसे झुठलाया, और हम एक के बाद एक कौम को हलाक करते चले गए हटा के उनको बस अफसाना ही बना कर चोदा, फिटकर उन लोगों पर जो ईमान नहीं लाते 
+[23:45] फिर हमने मूसा और उसके भाई हारून को अपनी निशानियां और खुली सनद के साथ फिरौन और उसके अयान सल्तनत की तरफ भेजा 
+[23:46] मगर उनहों ने तकब्बुर (अहंकार) किया और बड़ी डंकी ली 
+[23:47] कहने लगे "क्या हम अपने ही जैसे दो आदमियों पर ईमान ले आयें? और आदमी भी वो जिनकी क़ौम हमारी बन्दी (ग़ुलाम) है” 
+[23:48] पास उन्होन ने दोनों को झुटला दिया और हलाक होने वालों में जा मिले 
+[23:49] और मूसा को हमने किताब अता फरमायी ता-के लोग उसे रहनुमायी हासिल करें 
+[23:50] और इब्ने मरियम और उसकी मां को हमने एक निशानी बनाया और उनको एक साथ मुर्तफा (पठार पर आश्रय) पर रक्खा जो इत्मिनान की जगह थी और चश्मे उसमें जारी थे 
+[23:51] ऐ पैगंबर, खाओ पाक चीज और अमल करो सालेह, तुम जो कुछ भी करते हो, मैं उसको ख़ूब जानता हूँ 
+[23:52] और ये तुम्हारी ये उम्मत एक ही उम्मत है और मैं तुम्हारा रब हूं, पास मुझ से तुम डरो 
+[23:53] मगर बाद में लोगों ने अपने दीन (धर्म) को आपस में टुकड़े-टुकड़े कर लिया, हर गिरह के पास जो कुछ है उसमें वो मगन है 
+[23:54] अच्छा, तो छोड़ो इन्हें, डूब रहे हैं अपनी गफलत में एक वक्त ए खास तक 
+[23:55] क्या ये समझते हैं के हम जो इन्हें माल ओ औलाद से मदद दिए जा रहे हैं 
+[23:56] तो गोया इन्हें भलइयां देने में सरगर्म हैं? नहीं, असल मामले का इन्हें शौर नहीं है 
+[23:57] जो अपने रब के खौफ से डरे रहते हैं
+[23:58] जो रुब की आयत पर ईमान लाते हैं 
+[23:59] जो अपने रुब के साथ किसी को शरीक नहीं करते 
+[23:60] और जिनका हाल ये है के देते हैं जो कुछ भी देते हैं और दिल उनके इस ख्याल से कांपते रहते हैं के हमें अपने रुब की तरफ पलटना है 
+[23:61] भलाईयों की तरफ दौड़ने वाले और सबाकत करके उनको पा लेने वाले तो डर-हकीकत वो लोग हैं 
+[23:62] हम किसी शक्स को उसकी मक़दर (ताकत) से ज़्यादा की तकलीफ़ नहीं देते और हमारे पास एक किताब है जो (हर एक का हाल) ठीक ठीक बता देने वाली है, और लोगों पर ज़ुल्म बाहर-हाल नहीं किया जाएगा 
+[23:63] मगर ये लोग इस मामले से बे-ख़बर हैं और इनके अमल भी इस तरीक़े से (जिसका ऊपर ज़िक्र किया गया है) मुख़्तलिफ़ हैं। वो अपने ये करूट किये चले जायेंगे 
+[23:64] यहां तक ​​के जब हम उनके अय्याशों (समृद्ध लोगों/आसुदा हाल) को अज़ाब में पकड़ लेंगे तो फिर वो डकराना शुरू कर देंगे (चिल्लाना/रोना शुरू कर देंगे) 
+[23:65] अब बंद करो अपनी फरियाद ओ फुगां, हमारी तरफ से अब कोई मदद तुम्हें नहीं मिलनी 
+[23:66] मेरी आयतें सुनाई जाती थीं तो तुम (रसूल की आवाज सुनते ही) उलटे पांव भाग निकलते थे 
+[23:67] अपने घमंड में उसको खातिर ही में ना लाते थे, अपने चौपालों (बैठक स्थलों) में अनपार बातें चांट-ते (उपहास किया गया उसे) और बकवास किया करते थे 
+[23:68] तो क्या इन लोगों ने कभी इस कलाम पर गौर नहीं किया? हां वो कोई ऐसी बात लाया है जो कभी इनके असलफ (पूर्वजों) के पास ना आई थी 
+[23:69] हां ये अपने रसूल से कभी के वाकिफ ना थे के (अंजाना आदमी होने के लिए) उससे कहते हैं 
+[23:70] हां ये बात के कयाल हैं के वो मजनूं [(जिन्न द्वारा)] है? नहीं, बल्के वो हक़ लाया है और हक़ ही इनकी अक्सरियत (सबसे) को नगावर है 
+[23:71] और हक़ अगर कहीं इनकी ख्वाहिश के पीछे चलता तो ज़मीन और आसमान और इनकी सारी आबादी का निज़ाम दरहम बरहम हो जाता। नहीं, बलके हम उनका अपना ही जिक्र उनके पास लाए हैं और वो अपने जिक्र से मुंह मोड़ रहे हैं 
+[23:72] क्या तू इनसे कुछ मांग रहा है? तेरे लिए तेरे रब का दीया ही बेहतर है और वो बेहतरीन राज़िक है 
+[23:73] तू तो उनको सीधे रास्ते की तरफ बुला रहा है 
+[23:74] मगर जो लोग आख़िरत को नहीं मानते वो राह ए रास्ते से हटना चाहते हैं 
+[23:75] अगर हम इनपर रहम करें और वो तकलीफ जिस में आज कल ये मुब्तिला हैं दूर करदें तो ये अपनी सरकशी में बिल्कुल ही बहक जाएंगे 
+[23:76] इनका हाल तो ये है के हमने उन्हें तकलीफ में मुब्तिला किया, फिर भी ये अपने रुब के आगे ना झुके और ना अजीजी (विनम्र) इख्तियार करते हैं 
+[23:77] अलबत्ता जब नौबत यहां तक ​​पहुंच जाएगी के हम इनपर सख्त अजाब का दरवाजा खोल देंगे तो यकीन तुम देखोगे के उस हालात में ये हर खैर से मयौस हैं
+[23:78] वाह अल्लाह हाय तो है जिसने तुम्हें सनी और देखने की कुव्वतें दी और सोचने को दिल दिए, मगर तुम लोग कम ही शुक्रगुज़ार होते हो 
+[23:79] वही है जिसने तुम्हें ज़मीन में फैलाया, और उसकी तरफ तुम समेट जाओगे 
+[23:80] वही जिंदगी बक्शता है और वही मौत देता है, गर्दिश ए लयल (रात) ओ नहर (दीन) उसी के क़ब्ज़े क़ुदरत में है। क्या तुम्हारी समझ में ये बात नहीं आती 
+[23:81] मगर ये लोग वही कुछ कहते हैं जो उनके पेशवा (पूर्वज) कह चुके हैं 
+[23:82] ये कहते हैं "क्या जब हम मर कर मिट्टी हो जाएंगे और हड्डियों का पंजर बन कर रह जाएंगे तो हमको फिर जिंदा" करके उठाया जाएगा 
+[23:83] हमने भी ये वादे बहुत सुनाए हैं और हमसे पहले हमारे बाप दादा भी सुनते रहे हैं।'' 
+[23:84] इनसे कहो, बताओ अगर तुम जानते हो, के ये ज़मीन और इसकी। सारी आबादी किसकी है 
+[23:85] ये जरूर कहेंगे अल्लाह की, कहो फिर तुम होश में क्यों नहीं आते 
+[23:86] इनसे पूछो, सातो (सात) आसमानो और अर्श-ए-अजीम का मालिक कौन है 
+[23:87] ये जरूर कहेंगे अल्लाह, कहो फिर तुम डरते क्यों नहीं 
+[23:88] इनसे कहो, बताओ अगर तुम जानते हो के हर चीज़ पर इक्तेदार किसका है? और कौन है वो जो पनाह देता है और उसके मुकाबले में कोई पनाह नहीं दे सकता 
+[23:89] ये जरूर कहेंगे के ये बात अल्लाह ही के लिए है। कहो, फिर कहां से तुमको धोखा लगता है 
+[23:90] जो अमर ए हक है वो हम इनके सामने ले आए हैं, और कोई शक्क नहीं के ये लोग झूठे हैं 
+[23:91] अल्लाह ने किसी को अपना औलाद नहीं बनाया है और कोई दूसरा खुदा उसके साथ नहीं है। अगर ऐसा होता तो हर खुदा अपने ख़ल्क़ को लेकर अलग हो जाता, और फिर वो एक दूसरे पर चढ़ते। पाक है अल्लाह उन बातों से जो ये लोग बनाते हैं 
+[23:92] खुले और छुपे का जाने वाला, वो बोलता है हमसे शिर्क से जो ये लोग तजवीज़ कर रहे हैं 
+[23:93] (ऐ मुहम्मद) दुआ करो के "परवरदिगार, जिस अज़ाब की इनको धमकी दी जा रही है वो अगर मेरी मौजुदगी में तू लाए 
+[23:94] तो ऐ मेरे रब, मुझे जालिम लोगों में शामिल न करो" 
+[23:95] और हकीकत ये है के हम तुम्हारी आंखें के सामने ही वो चीज ले आने की पूरी कुदरत रखते हैं जिसकी धमकी हम उन्हें दे रहे हैं 
+[23:96] (ऐ नबी), बुरे को इस तरह से दफा करो जो बेहतरीन हो जो कुछ बातें वो तुमपर बनाते हैं वो हमें खूब मालूम है 
+[23:97] और दुआ करो के "परवरदिगार, मैं शयातीन की उम्मीदों (वासवासों) से तेरी पनाह मांगता हूं 
+[23:98] बल्के ऐ मेरे रब, मैं तो इसे भी तेरी पनाह मांगता हूं के वो मेरे पास आएं"
+[23:99] (ये लोग अपनी करनी से बाज़ ना आएंगे) यहां तक ​​कि जब मेरे अंदर से किसी को मौत आ जाएगी तो कहना शुरू कर देगा के "ऐ मेरे रब, मुझे उसकी दुनिया में वापस भेज दीजिए जिसे मैं छोड़ आया हूं 
+[23:100] उम्मीद है के अब मैं जल्द अमल करूंगा"। हरगिज़ नहीं, ये तो बस एक बात है जो वो बक रहा है। अब इन सब (मरने वालों) के पीछे एक बरज़ख (बाधा) हैयाल है दूसरी जिंदगी के दिन तक 
+[23:101] फिर जून्ही के सुर (तुरही) फूंक दिया गया, उनके दरमियान फिर कोई रिश्ता ना रहेगा और ना वो एक दूसरे को पूछेंगे 
+[23:102] हमारा वक्त जिनके पैडल (तराजू) भारी होंगे वही फलाह पाएंगे 
+[23:103] और जिनके पैडले (स्केल) हल्के होंगे वही लोग होंगे जिन्हों ने अपने आप को घाटे में डाल लिया। वो जहन्नुम में हमेशा रहेंगे 
+[23:104] आग उनके चेहरों की खाल चट जाएगी और उनके जबड़े बाहर निकल आएंगे 
+[23:105] "क्या तुम वही लोग नहीं हो के मेरी आयत तुम्हें सुनायी जाती थी तो तुम उन्हें झुलाते थे?" 
+[23:106] वो कहेंगे "ऐ हमारे रब, हमारी बदबख्ती हम पर छा गई थी, हम वक्त गुमराह लोग थे 
+[23:107] ऐ परवरदिगार, अब हमें यहां से निकल दे फिर हम ऐसा कसूर करें तो जालिम होंगे" 
+[23:108] अल्लाह ताला जवाब देगा "दूर हो मेरे" सामने से, पड़े रहो इसी में और मुझसे बात ना करो 
+[23:109] तुम वही लोग तो हो के मेरे कुछ बंदे जब कहते थे के ऐ हमारे परवरदिगार, हम ईमान लाए, हमें माफ करदे, हमपर रहम कर, तू सब रहिमों से अच्छा रहीम है 
+[23:110] तो तुमने उनका मजाक बना लीजिए, यहां तक ​​के उनकी जिद ने तुम्हें ये भी भुला दिया के मैं भी कोई हूं, और तुम उन पर हंसते रहोगे 
+[23:111] आज उनके उस सब्र का मैंने ये फल दिया है के वही कामयाब है” 
+[23:112] फिर अल्लाह ताला उनसे पूछेगा “बताओ, ज़मीन में तुम कितने साल रहेंगे?” 
+[23:113] वो कहेंगे " एक दिन या दिन का भी कुछ हिस्सा हम वहां ठहरे हैं, शुरू करने वालों से पूछ लीजिये" 
+[23:114] इरशाद होगा "थोड़ी ही देर ठहरे हो ना, काश तुमने ये हमें वक्त जाना होता 
+[23:115] क्या तुमने ये समझ रक्खा था के हमने तुम्हें फिजूल (बेकर) ही पेदा किया है और तुम्हें हमारी तरफ कभी पलटना ही नहीं है?” 
+[23:116] पास बाला ओ बरतर है अल्लाह, बादशाह ए हकीकी, कोई खुदा उसके सिवा नहीं, मालिक है अर्श ए बुजुर्ग का 
+[23:117] और जो कोई अल्लाह के साथ किसी और माबूद को पुकारे, जिसके लिए उसके पास कोई दलील नहीं, तो उसका हिसाब उसके रब के पास है। ऐसे काफिर कभी फलाह नहीं पा सकते 
+[23:118] (ऐ मुहम्मद) कहो, "मेरे रब दरगुज़र फ़रमा, और रहम कर, और तू सब रहिमों से अच्छा रहीम है" 
+
+सूरह 24: अन-नूर (द लाइट) 
+------------------------------------------------
+[24:1] ये एक सूरत है जिसको हमने नाज़िल किया है, और इसने हमने फ़र्ज़ किया है, और इस में हमने साफ़ साफ़ हिदायत नाज़िल की है, शायद के तुम सबक लो 
+[24:2] जानिया (व्यभिचारी) औरत ज़ानी मर्द, दोनों में से हर एक को सौ (सौ) कोड़े (लैश) मारो और इनपर तरस खाने का जज़्बा अल्लाह के दीन के मामले में तुमको दामनगीर (दया) ना हो अगर तुम अल्लाह ताला और रोज-ए-आखिर पर ईमान रखते हो, और इनको सज़ा देते वक्त एहले ईमान का एक गिरोह मौजुद रहे 
+[24:3] ज़ानी (व्यभिचार का दोषी व्यक्ति) निकाह ना कैरी मगर जानिया के साथ या मुशरिक के साथ, और जानिया के साथ निकाह ना करे मगर जानी या मुशरिक। और ये हराम करदिया गया है एहले ईमान पर 
+[24:4] और जो लोग पाक दामन औरतों पर तोहमत (इल्ज़म/बोहतन/बदनामी) लगायें, फिर चार (चार) गवाह लेकर ना आयें, उनको अस्सी (अस्सी) कोड़े (कोड़े) मारो, और उनकी शहादत कभी कबूल ना करो। और वो खुद ही फासीक हैं 
+[24:5] सिवाय उन लोगों के जो इस हरकत के बाद ताइब (पश्चाताप) हो जाएं और इस्लाह कार्लें के अल्लाह जरूर (उनके हक में) गफूर ओ रहीम है 
+[24:6] और जो लोग अपनी बीवी पर इल्जाम लगाएं और उनके पास खुद उनके अपने सिवा दूसरे कोई गवाह न हो तो उनमें से एक शक्स की शहादत (ये है के वो) चार मरतबा अल्लाह की कसम खा कर गवाही दे के वो (अपने इल्ज़म में) सच्चा है 
+[24:7] और पंचवी (पांचवीं) बार कहे के उसपर अल्लाह की लानत हो अगर वो (अपने) इल्ज़ाम में) झूठा हो 
+[24:8] और औरत से सज़ा इस तरह तल सकती है के वो चार मरतबा अल्लाह की कसम खा कर शहादत दे के ये शक्स (अपने इल्ज़ाम में) झूठा है 
+[24:9] और पांचवी मरतबा कहे के हमें बंदी पर अल्लाह का गजब तोते अगर वो (अपने) इल्ज़म में) सच्चा हो 
+[24:10] तुम लोगों पर अल्लाह का फ़ज़ल और उसका रहम न होता और ये बात न होती के अल्लाह बड़ा इल्तिफ़ात (सबसे क्षमा करने वाला) फ़रमाने वाला और हकीम है, तो (बीवियों पर इल्ज़म का मामला तुम्हें बड़ी मुश्किल में डाल देता) 
+[24:11] जो लोग ये बोहतान (निंदा) गड़बड़ लाए हैं वो तुम्हारे ही अंदर का एक तोला है। क्या वक़िये को अपने हक में शरर ना समझो बल्के ये भी तुम्हारे लिए खैर ही है। जिसने इस में जितना हिसा लिया, उसने उतना ही गुनाह समथा और जिस शक्स ने इसकी जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा अपने सारा लिया उसके लिए तो अज़ाब ए अज़ीम है 
+[24:12] जिस वक्त तुम लोगों ने इसे सुना था उसका वक्त क्यों ना मोमिन मर्दन और मोमिन औरतों ने अपने आप से नीक गुमान किया और क्यों ना केहदिया के ये सारी बोहतन (बदनामी) है 
+[24:13] वो लोग (अपने इल्ज़म के सबूत में) चार गवाह क्यों ना लाए? अब के वो गवाह नहीं लाए हैं, अल्लाह के नज़रिए वही झूठे हैं 
+[24:14] अगर तुम लोगों पर दुनिया और आख़िरत में अल्लाह का फ़ज़ल और रहम ओ करम न होता तो जिन बातों में तुम पढ़ गए थे उनकी याद में बड़ा अज़ाब तुम्हें आ लेता
+[24:15] (जरा गौर तो करो, हमें वक्त तुम कैसी गलती कर रहे थे) जबके तुम्हारी एक जुबान से दूसरी जुबान इस झूठ को लेती चली जा रही थी और तुम अपने मुंह से वो कुछ कह जा रहे थे, जिसका मुतालिक तुम्हें कोई इल्म था ना था. तुम इसे एक मामुली बात समझ रहे थे, हालंके अल्लाह के नज़दीक ये बड़ी बात थी 
+[24:16] क्यों ना उसे सुनते ही तुमने कहादिया "हमें ऐसी बात ज़ुबान से निकलना ज़ीब नहीं देता, सुभान अल्लाह, ये तो एक बोहतन ए अज़ीम है" 
+[24:17] अल्लाह तुमको हिदायत करता है कि आंदा कभी ऐसी हरकत न करना अगर तुम मोमिन हो 
+[24:18] अल्लाह तुम्हें साफ साफ हिदायत देता है और वह आलिम ओ हकीम है 
+[24:19] जो लोग चाहते हैं के ईमान लाने वालों के गिरोह में फ़हाश (अभद्रता) फ़ैले वो दुनिया और आख़िरत मैं दर्दनाक सज़ा के मुस्तक हूँ। अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते 
+[24:20] अगर अल्लाह का फज़ल और उसका रहम ओ करम तुमपर न होता और ये बात न होती के अल्लाह बड़ा शफीक ओ रहीम है (तो ये चीज जो अभी तुम्हारे अंदर फैल गई थी बद्तरीन नताइज दिखा देती) 
+[24:21] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, शैतान के नक्शे कदम पर ना चलो, उसकी जोड़ी (जो) कोई करेगा तो वो उसे फहाश (अभद्रता) और बदी (दुष्टता) हाय का हुकुम देगा। अगर अल्लाह का फजल और उसका रहम ओ करम तुमपर ना होता तो तुम में से कोई शक पाक ना हो सकता, मगर अल्लाह हाय जिसे चाहता है पाक करता है है, और अल्लाह सुन्ने वाला और जाने वाला है 
+[24:22] तुम में से जो लोग साहब ए फज़ल (भरपूर) और साहिब ए मक़दरत (मतलब) हैं वो इस बात की कसम न खा बैठें के अपने रिश्तेदार, मिस्कीन और मुहाजिर-फि-सबीलिल्लाह (जिन्होंने अल्लाह की राह के लिए अपने घर छोड़ दिए हैं) लोगों की मदद ना करेंगे. उन्हें माफ करना चाहिए और अपराध करना चाहिए। क्या तुम नहीं चाहते कि अल्लाह तुम्हें माफ करे? और अल्लाह की सिफत ये है के वो गफूर और रहीम है 
+[24:23] जो लोग पाक दामन, बे-खबर, मोमिन औरतों पर तोहमतें (बदनामी) लगाते हैं अनपार दुनिया और आख़िरत में लानत की गई और उनके लिए बड़ा अज़ाब है 
+[24:24] वो उस दिन को भूल ना जाएं जबके उनकी अपनी जुबानें और उनके अपने हाथ पांव उनके कार्टूनों की गवाही देंगे 
+[24:25] उस दिन अल्लाह वो बदला उन्हें भरपुर दे देगा जिसका वो मुस्तहिक हैं और उन्हें मालूम हो जाएगा के अल्लाह ही हक है। सच को सच कर दिखाने वाला 
+[24:26] खबीस (अशुद्ध) औरतें खबीस मर्दों के लिए हैं और खबीस (अशुद्ध) मर्द खबीस (अशुद्ध) औरतों के लिए। पाकीज़ा औरतें पाकीज़ा मर्दों के लिए हैं और पाकीज़ा मर्द पाकीज़ा मर्दों के लिए। उनका दामन पाक है उन बातों से जो बनने वाले बनते हैं। उनके लिए मगफिरत है और रिज़क ए करीम
+[24:27] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपने घरों के सिवा दूसरे घरों में दाखिल ना हुआ करो जब तक के घर वालों की रजा (इजाजत) ना लेलो और घर वालों पर सलाम ना भेज लो। ये तरीक़ा तुम्हारे लिए बेहतर है, तवक्कू है के तुम इसका ख्याल रखोगे 
+[24:28] फिर अगर वहां किसी को ना पाओ तो दाख़िल ना हो जबतक के तुमको इजाज़त ना दे दी जाए, और अगर तुमसे कहा जाए के वापस चले जाओ तो वापस हो जाओ। ये तुम्हारे लिए ज़्यादा पाकीज़ा तरीक़ा है, और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे खूब जानता है 
+[24:29] अलबत्ता तुम्हारे लिए इसमें कोई मुज़ाहिक़ा (नुकसान) नहीं है के ऐसे घरों में दखल हो जाओ जो किसी के रहने की जगह न हो, और जिनमें तुम्हारे फ़ैयदे (या काम) की कोई चीज़ हो, तुम जो कुछ ज़ाहिर करते हो और जो कुछ छुपाते हो सब कि अल्लाह को खबर है 
+[24:30] ऐ नबी, मोमिन मर्दों से कहो के अपनी नज़रें बचा कर रखें और अपनी शर्म-गाहों की हिफ़ाज़त करें, ये उनके लिए ज़्यादा paakeeza tareeqa hai. जो कुछ वो करते हैं अल्लाह उसे बाख़बर रहता है 
+[24:31] और (ऐ नबी), मोमिन औरतों से कहदो के अपनी नजरें बचा कर रखें, और अपनी शर्मगाहों की हिफाजत करें, और अपना बनाओ सिंघार ना दिखायें बाजुज उसे जो खुद जाहिर हो जाए, और अपने सीनो पर अपनी ओढ़नियों के आंचल डाले रहें, वो अपना बनाओ सिंघार न जाहिर करें मगर लोगों के सामने: शोहर, बाप, शोहरों के बाप, अपने बेटे, शोहरों के बेटे, भाई, भाइयों के बेटे, बहनों के बेटे, अपने मेल-झोल की औरतें, अपने ममलुक (जो उनके कब्जे में हैं), वो ज़िर-दस्त मर्द जो किसी और क़िस्म की ग़रज़ ना रखते हों, और वो बचे जो औरतों की पोशीदा बातों से अभी वाकिफ़ ना हुए हों। वो अपने पांव ज़मीन पर मरती हुई ना चला करें के अपनी जो ज़ीनत उनहों ने छुपा रखी है उसका लोगों को इल्म हो जाए। ऐ मोमिनो, तुम सब मिलकर अल्लाह से तौबा करो, तवक्कु है के फलाह पाओगे 
+[24:32] तुम में से जो लोग मुजर्रद (सिंगल) हो और तुम्हारी लौंडी गुलामों में से जो साले होन, उनका निकाह करदो। अगर वो गरीब है तो अल्लाह अपने फजल से उनको गनी कर देगा। अल्लाह बदी वुसत (असीमित संसाधन) वाला और अलीम है 
+[24:33] और जो निकाह का मौका न पाए उन्हें चाहिए के इफ्फत-माबी (निरंतरता/पाक दामनी) इख्तियार करें, यहां तक ​​के अल्लाह अपने फजल से उनको गनी करदे और तुम्हारे ममलुकों में (तुम्हारे कब्जे में) से जो मकातिबात (मुक्ति) की अंधेरे में रहें उन्हें मकातिबात करलो, अगर तुम्हें मालूम हो कि उनको अंदर बुलाया है, और उनको हमारे माल में से दो जो अल्लाह ने तुम्हें दिया है। और अपनी लौंडियों (गुलाम-लड़कियों) को अपनी दुनिया फ़ायदों की खातिर क़हबा-गारी (वेश्यावृत्ति) पर मजबूर न करो जबके वो खुद पाक दामन रहना चाहती है। और जो कोई उनको मजबूर करे तो इस जब्र के बाद अल्लाह उनके लिए गफूर ओ रहीम है
+[24:34] हमने साफ साफ हिदायत देने वाली आयतें तुम्हारे पास भेज दी हैं, और उन क़ौमों की इब्रातनाक मिसालें भी हम तुम्हारे सामने पेश कर चुके हैं जो तुमसे पहले हो गुज़रे हैं। और वो हिदायतें हमने कर दी हैं जो डरने वालों के लिए होती हैं 
+[24:35] अल्लाह आसमान और ज़मीन का नूर है (कायनात में) उसके नूर की मिसाल ऐसी है जैसे एक ताक़ में चिराग रखा हुआ हो,चिराग एक फ़ानूस में हो(कांच के शेड में), फ़ानूस (कांच के शेड) का हाल ये हो के जैसे मोती की तरह चमकता हुआ तारा, और वो चिराग़ ज़ैतून के एक ऐसे मुबारक दरख्त के टेल (तेल) से रोशन किया जाता हो जो ना शर्की (पूर्वी) हो ना गराबी (पश्चिमी), जिसका टेल (तेल) आप ही आप भड़का पड़ता हो चाहे आग उसको ना लगे, (इस तरह) रोशनी बराबर रोशनी (बढ़ने के तमाम असबाब जमा हो गए)। अल्लाह अपने नूर की तरफ जिसका चाहता है रहनुमायी फरमाता है। वो लोगों को मिसालों से बात समझता है, वो हर चीज़ से ख़ूब वाकिफ़ है 
+[24:36] (उसके नूर की तरफ हिदायत पाने वाले) उन घरों में पाए जाते हैं जिनमें बुलंद करने का और जिन में अपने नाम की याद का अल्लाह ने इज़ान (इजाज़त) दिया है 
+[24:37] उन में ऐसे लोग सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते हैं जिन्हें तिजारत और खत्म ओ फारोखत अल्लाह की याद से और इकामत ए नमाज ओ अदाये जकात से गाफिल नहीं करते। वो उस दिन से डरते रहते हैं जिसमें दिल उलटने और दीधे पथरा जाने की (आंखें पथरा जाएंगी) नौबत आ जाएगी 
+[24:38] (और वो ये सब कुछ करते हैं) ता-के अल्लाह उनको बेहतरीन अमाल की जजा उनको दे और मजीद अपने फजल से नवाजे। अल्लाह जिसे चाहता है बे-हिसाब देता है 
+[24:39] (इस्के बराक्स) जिन्हों ने कुफ्र किया उनके अमल की मिसाल ऐसी है जैसे दश्त ए बे-आब में सराब का प्यासा (पानी रहित रेगिस्तान में मृगतृष्णा की तुलना) उसको पानी समझ हुए थे, मगर जब वहां पहुंचा तो कुछ न पाया, बलके वहां उसने अल्लाह को मौजुद पाया, जिसने उसका पूरा, पूरा हिसाब चुका दिया। और अल्लाह को हिसाब लेते देर नहीं लगती 
+[24:40] या फिर उसकी मिसाल ऐसी है जैसे एक गहरे समंदर में अँधेरा, के ऊपर एक मौज छायी हुई है, उसपर एक और मौज, और उसके ऊपर बादल, तारीकी(अंधेरा) पर तारीकी (अंधेरा) मुसल्लत है, आदमी अपना हाथ निकले तो उसे भी ना देखे. जिसे अल्लाह नूर न बख्शे उसके लिए फिर कोई नूर नहीं 
+[24:41] क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह की तस्बीह कर रहे हैं वो सब जो आसमान और ज़मीन में हैं और वो परिंदे जो पर्र फैलाये उड़ रहे हैं? हर एक अपनी नमाज और तस्बीह का तरीक़ा जानता है, और ये सब जो कुछ करते हैं अल्लाह उसे बा-ख़बर रखता है 
+[24:42] आसमान और ज़मीन की बादशाही अल्लाह ही के लिए है और उसकी तरफ सबको पलटना है
+[24:43] क्या तुम देखते नहीं हो कि अल्लाह बदल को आहिस्ता आहिस्ता चलाता है, फिर उसके टुकड़ों को बहाम जोड़ता है, फिर उसे समित कर एक कसीफ अब्र (घने बादलों का समूह) बना देता है। फिर तुम देखते हो के उसके ख़ौल में से बारिश के कतरे तपकते हैं और वो आसमान से, उन पहाड़ों की बदौलत जो उसमें बुलंद हैं, औले (ओले/बर्फ) बरसात है, फिर जिसे चाहता है उनका नुक्सान पहनता है और जिसे चाहता है उनसे बचा लेता है, उसकी बिजली की चमक निगाहों को ख़ैर (आँखें चकाचौंध कर देती है) कि देती है 
+[24:44] रात और दिन का उलट फेर वही कर रहा है। इसमें एक सबक है आंखों वालों के लिए 
+[24:45] और अल्लाह ने हर जानदार एक तरह के पानी से भुगतान किया, कोई पेट के बाल चल रहा है तो कोई दो टांगों पर और कोई चार टांगों पर। जो कुछ वह चाहता है पैदा करता है, वह हर चीज पर कादिर है 
+[24:46] हमने साफ साफ हकीकत बताने वाली आयत नाजिल कर दी है, आगे सिराते मुस्तकीम की तरफ हिदायत अल्लाह ही जिसे चाहता है देता है 
+[24:47] ये लोग कहते हैं कि हम ईमान लाए अल्लाह और रसूल पर और हमने इताअत कबूल की, मगर इसके बाद इनमें से एक गिरोह (इताअत से) मुंह मोड़ जाता है, ऐसे लोग हरगिज मोमिन नहीं हैं 
+[24:48] जब इनको बुलाया जाता है अल्लाह और रसूल की तरफ, ता-के रसूल इनके आपस के मुकद्दमे का फैसला करे तो इनमें से एक फरीक कतरा जाता है 
+[24:49] अलबत्ता अगर हक उनकी मुआफिकत (उनकी तरफ) में हो तो रसूल के पास बदाय इताअत-किश (आज्ञाकारिता) पर प्रतिबंध कर आ जाता है 
+[24:50] क्या उनके दिलों को (मुनाफिकत का) रोग लगा हुआ है? हां ये शक्क में पड़े हुए हैं? या इनको ये खौफ है कि अल्लाह और उसका रसूल इन्पर जुल्म करेगा? असल बात ये है के जालिम तो ये लोग खुद हैं 
+[24:51] ईमान लाने वालों का काम तो ये है के जब वो अल्लाह और रसूल की तरफ बुलाए जाएं ता-के रसूल उनके मुकद्दमे का फैसला करें तो वो कहें के हमने सुना और इताअत की, ऐसे ही लोग फलाह पाने वाले हैं 
+[24:52] और कामियाब वही हैं जो अल्लाह और रसूल की फरमा बरदारी करें और अल्लाह से डरें और उसकी नफ़रमानी से बचें 
+[24:53] ये (मुनाफिक) अल्लाह के नाम से कड़ी कसमें खा कर कहते हैं "आप हुकुम दें तो हम घरों से निकल खड़े हों"। इनसे कहो "कसमें न खाओ, तुम्हारी इबादत का हाल मालूम है, तुम्हारे कार्टूनों से अल्लाह बे-खबर नहीं है" 
+[24:54] कहो, "अल्लाह के मुती बनो (अल्लाह की आज्ञा मानो) और रसूल के तबे फरमान बनकर रहो, लेकिन अगर तुम मुंह फेरते हो तो खूब समझ लो के रसूल पर जिस फर्ज का बार रक्खा गया है उसका ज़िम्मेदार वो है और तुम जिस फ़र्ज़ का बार डाला है उसके ज़िम्मेदार तुम हो तो खुद ही हिदायत पाओगे वरना रसूल की ज़िम्मेदारी इससे ज़्यादा कुछ नहीं है के सफ़ सफ़ हुकुम पाहुंचा दे”
+[24:55] अल्लाह ने वादा फरमाया है तुम में से उन लोगों के साथ जो ईमान लाए और नेक अमल करें के वो उनको उसी तरह जमीन में खलीफा बनाएगा जिस तरह उनसे पहले गुजरे हुए लोगों को बना चुका है, उनके लिए उनके लिए दीन (धर्म) को मजबूत बुनियादों पर कायम कर देगा जिसे अल्लाह ताला ने उनके हक में पसंद किया है, और उनकी (मौजूदा) हालत ए खौफ को अमन से बदल देगा, बस वो मेरी बंदगी करें और मेरे साथ किसी को शरीक न करें, और जो इसके बाद कुफ्र करें तो ऐसे ही लोग फासीक हैं 
+[24:56] नमाज कायम करो, जकात दो, और रसूल की इताअत करो, उम्मीद है के तुमपर रहम किया जाएगा 
+[24:57] जो लोग कुफ्र कर रहे हैं उनके मुतालिक इस गलत फहमी में ना रहो के वो ज़मीन में अल्लाह को अजीज (निराश) कर देंगे, उनका ठिकाना दोज़ख है और वो बड़ा ही बुरा ठिकाना है 
+[24:58] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, लाज़िम है के तुम्हारे ममलुक (तुम्हारे गुलाम) और तुम्हारे वो बच्चे जो अभी अक्ल की हद को (सेक्स कॉन्शस/यौवन) नहीं पहचाने हैं, तीन औकात में इजाज़त लेकर तुम्हारे पास आया करें: सुबह की नमाज़ से पहले, और दोपहर को जबके तुम कपड़े उतार कर रख देते हो, और ईशा की नमाज के बाद। ये तीन वक्त तुम्हारे लिए पर्दे के वक्त हैं। इनके बाद वो बिला इजाज़त आएं तो ना तुमपर कोई गुनाह है ना अनपर, तुम्हें एक दूसरे के पास बार-बार आना ही होता है। इस तरह अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी इरशादत की तौज़ीह (वज़ेह) करता है, और वह अलीम ओ हकीम है 
+[24:59] और जब तुम्हारे बच्चे अक़ल की हद (सेक्स कॉन्शियस / यौवन) को पाहुंच जायें तो चाहिए के उसी तरह इजाज़त लेकर आया करें जिस तरह उनके बदे (बुजुर्ग) इजाज़त लेते रहे हैं. इस तरह अल्लाह अपनी आयत तुम्हारे सामने खुलता है, और वह अलीम ओ हकीम है 
+[24:60] और जो औरतें जवानी से गुज़री बैठी हो, निकाह की उम्मीद न हो, वो अगर अपनी चादरें (बाहरी ग्रामेंट्स) उतार कर रख दें तो उनपर कोई गुनाह नहीं, बशारत के ज़ीनत की नुमाइश करने वाली ना हो। तहम (फिर भी) वो भी हया-दारी ही बारातें (संयम से व्यवहार करें) तो उनके हक़ में अच्छा है, और अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है 
+[24:61] कोई हराज़ नहीं अगर कोई अंधा, या लंगड़ा, या मारीज़ (किसी के घर से खा ले) और ना तुम्हारे ऊपर इस में कोई मुज़हिक़ा (नुकसान/जर्ज) है के अपने घरों से खाओ या अपने बाप दादा के घरों से, या अपनी माँ, नानी के घरों से, या अपने भाइयों के घरों से, या अपनी बहनों के घरों से, या अपने चाचाओं के घरों से, या अपनी बहनों के घरों से, या अपने मामूओं के घरों से, या अपने दोस्तों के घरों से, या उन घरों से जिनकी कुंजियाँ (चाबियाँ) तुम्हारी सुपुर्दगी (कब्जा) में हो, या अपने दोस्तों के घरों से। इस में भी कोई हराज नहीं के तुमलोग मिलकर खाओ या अलग-अलग, अलबत्ता जब घरों में दखल हुआ करो तो अपने लोगों को सलाम किया करो, दुआ ए खैर, अल्लाह की तरफ से मुकर्रर फरमायी हुई, बड़ी बाबरकत और पाकीजा। इस तरह अल्लाह ताला तुम्हारे सामने आयत बयान करता है, तवक्कू है के तुम समझ बुझ से काम लोगे
+[24:62] मोमिन तो असल में वही हैं जो अल्लाह और उसके रसूल को दिल से माने और जब किसी इज्तिमाई काम के मौके पर रसूल के साथ हों तो उसे इज्जत के लिए बगैर न जाएं, जो लोग तुमसे इज्जत मांगते हैं वही अल्लाह और रसूल के मानने वाले हैं। जब वो अपने किसी काम से इजाज़त मांगे तो जैसे तुम चाहो इजाज़त दे दिया करो और ऐसे लोगों के हक़ में अल्लाह से दुआ ए मगफिरत किया करो। अल्लाह यकीनन गफूर ओ रहीम है 
+[24:63] मुसलमानो, अपने दरमियान रसूल के बुलाने को आपस में एक दूसरे का सा बुलाना न समझ बैठो। अल्लाह उन लोगों को खूब जानता है जो तुम में ऐसे हैं कि एक दूसरे की मदद लेते हुए चुपके से चौंक जाते हैं। रसूल के हुकुम की खिलाफत वारज़ी करने वालों को डरना चाहिए कि वो किसी फ़िटने में गिरफ़्तार न हो जाए, या उन पर दर्दनक अज़ाब न आ जाए 
+[24:64] ख़बरदार रहो, आसमान ओ ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह का है। तुम जिस रवीश पर भी हो अल्लाह उसको जानता है। जिस रोज़ लोग उसकी तरफ पलटेंगे वो उन्हें बता देगा के वो क्या करके आये हैं। वो हर चीज़ का इलम रखता है 
+
+सूरह 25: अल-फुरकान (भेदभाव) 
+------------------------------------------------ 
+[25:1] निहायत मुतबर्रक(बा-बरकत) है वो जिसने ये फुरकान अपने बंदे पर नाज़िल किया ता-के सारे जहां वालों के लिए नज़ीर(डर सुनाने वाली/वार्नर) हो 
+[25:2] वो जो ज़मीन और आसमानों की बादशाही का मालिक है, जिसने किसी को बेटा नहीं बनाया है, जिसके साथ बादशाही में कोई शरीक नहीं है, जिसने हर चीज़ को पैदा किया फिर उसकी एक तकदीर मुकर्रर की 
+[25:3] लोगों ने उसे छोड़ कर ऐसा माबूद बना लिया जो किसी चीज़ को पेदा नहीं करते बलके खुद पेदा किये जाते हैं, जो खुद अपने लिए भी किसी नफ़े (फ़ायदे) या नुक्सान का इख्तियार नहीं रखते, जो ना मार सकते हैं ना जिला सकते हैं, ना मारे (मृत) हुए को फिर उठा सकते हैं 
+[25:4] जिन लोगों ने नबी की बात मन से इंकार किया है वो कहते हैं के ये फुरकान एक मन गड़बड़ चीज है जैसे इस शक्स ने आप ही गड़बड़ ली है और कुछ दूसरे लोगों ने इस काम में इसकी मदद की है। बड़ा जुल्म और सख्त झूठ है जिसपर ये लोग उतर आए हैं 
+[25:5] कहते हैं ये पुराने लोगों की लिखी हुई चीज़ें हैं जिन्हें ये शक्स नक़ल (कॉपी) करता है और वो इसे सुबह ओ शाम सुनायी जाती हैं 
+[25:6] (ऐ मुहम्मद) इनसे कहो के “इसे नाज़िल किया है उसने जो ज़मीन और आसमान का भे डी (रहस्य) जानता है”। हकीकत ये है कि वो बड़ा गफूर उर रहीम (क्षमाशील और दयालु) है 
+[25:7] कहते हैं "ये कैसा रसूल है जो खाना खाता है और बाज़ारों में चलता फिरता है? क्यों ना इसके पास कोई फरिश्ता भेजा गया जो इसके साथ रहता है और (ना मनने वालों को) धमाका
+[25:8] हां और कुछ नहीं तो इसके लिए कोई खजाना ही उतार दिया जाता, या इसके पास कोई बाग (बगीचा) ही होता जैसा ये (इत्मिनान की) रोजी हासिल करता।'' और जालिम कहते हैं '' तुम लोग तो एक सहर जदा (मोहित) आदमी के पीछे लग गए हो'' 
+[25:9] देखो, कैसी कैसी अजीब हुज्जतें (तर्क) ये लोग तुम्हारे आगे पेश कर रहे हैं, ऐसे बहके हैं के कोई ठिकाने की बात इनको नहीं समझती 
+[25:10] बड़ा बराकात है वो जो अगर चाहे तो इनकी तजवीज-करदा चीज़ों से भी ज़्यादा बढ़ चढ़ कर तुमको दे सकता है, (एक नहीं) बहुत सारे बाग (बगीचे) जिनके नीचे नहरेन बहती हैं, और बड़े-बड़े महल 
+[25:11] असल बात ये है कि ये लोग "उस घड़ी" को झुटला चुके हैं और जो हमें घड़ी को झुटलाये उसके लिए हम भटकते हैं हुई आग मुहैय्या कर राखी है 
+[25:12] वो जब डर से इनको देखेगी तो ये उसके गजब और जोश की आवाजें सुन लेंगे 
+[25:13] और जब ये दस्त ओ पा-बस्ता (जंजीरों में जकड़े) उसमें एक तंग जगह थूंसे जाएंगे तो अपनी मौत को पुकारने लगेंगे 
+[25:14] (हमारा वक्त इनसे कहा जाएगा के) आज एक मौत को नहीं बहुत सी मौत को पुकारो 
+[25:15] इनसे पूछो, ये अंजाम अच्छा है या वो आबादी जन्नत जिसका वादा खुदा-तरस पहरेजगारों से किया गया है? जो उनके अमल की जजा और उनके सफर की आखिरी मंजिल होगी 
+[25:16] जिस में उनकी हर ख्वाहिश पूरी होगी, जिसमें वो हमेशा हमेशा रहेंगे, जिसका अता करना तुम्हारे रब के ज़िम्मे एक वाजिब उल अदा वादा है 
+[25:17] और वो वही दिन होगा जबके (तुम्हारा रब) लोगों को भी घेर लेगा और इनके उन माबूदों को भी बुला लेगा जिन्हे आज ये अल्लाह को चोद कर पूछ रहे हैं। फिर वो उनसे पूछेगा "क्या तुमने मेरे साथ बंदों को गुमराह किया था? या ये खुद राह-ए-रास्त से भटक गए थे?" 
+[25:18] वो अर्ज करेंगे के "पाक है आप की जात, हमारी तो ये भी मजाल न थी के आप के सिवा किसी को अपना मौला बनाएं, मगर आप ने इनको और इनके बाप को खूब सामान ए जिंदगी दिया हट्टा के ये सबक भूल गए और शामत ज्यादा होकर" रहे” 
+[25:19] यूं झूठला देंगे वो (तुम्हारे मजबूर) तुम्हारी उन बातों को जो आज तुम कह रहे हो, फिर तुम ना अपनी शामत (सजा) ताल सकोगे ना कहीं से मदद पा सकोगे। और जो भी तुम में से ज़ुल्म करे उसे हम असल अज़ाब का मजा दिखाएंगे 
+[25:20] (ऐ मुहम्मद), तुमसे पहले जो रसूल भी हमने भेजा था वो सब भी खाना खाने वाले और बाज़ारों में चलने फिरने वाले लोग ही थे। दरसल हमने तुम लोगों को एक दूसरे के लिए आज़माइश का ज़रिया बना दिया है, क्या तुम सब्र करते हो? तुम्हारा रब सब कुछ देखता है 
+[25:21] जो लोग हमारे हुज़ूर पेश होने का अंदेशा नहीं रखते वो कहते हैं "क्यों ना फ़रिश्ते हमारे पास भेजे जाएँ? या फिर हम अपने रुब को देखेंगे? बड़ा घमंड ले बैठे ये अपने नफ़्स में और हद से गुज़र गए ये अपनी सरकशी में
+[25:22] जिस रोज़ ये फरिश्तों को देखेंगे वो मुजरेमो के लिए किसी बशारत (खुश खबरी) का दिन न होगा, गाल उठेंगे के पनाह-ब-खुदा 
+[25:23] और जो कुछ भी इनका किया धरा है उसे लेकर हम गुबार (धूल) की तरह उड़ा देंगे 
+[25:24] बस वही लोग जो जन्नत के मुस्तहिक हैं उस दिन अच्छी जगह ठहरेंगे और दोपहर (मिड-डे) गुजारने को उम्मीद मुकाम पाएंगे 
+[25:25] आसमान को चीरता हुआ एक बादल हमें रोज नामदार होगा और फरिश्तों के परे के परे (रैंक के बाद रैंक) उतार दिए जाएंगे 
+[25:26] हमें रोज़ हक़ीक़ी बादशाही सिर्फ़ रहमान की होगी और वो मुनकिरीन के लिए बड़ा सख्त दिन होगा 
+[25:27] ज़ालिम इंसान अपना हाथ चबाएगा और कहेगा "काश मैंने रसूल का साथ दिया होगा 
+[25:28] हाय मेरी कम्बख्त, काश मैंने फलां शक्स को दोस्त ना बनाया होता 
+[25:29] उसके बहकाए में आकर मैंने वो हिदायत ना मानी जो मेरे पास आई थी। शैतान इंसान के हक में बड़ा ही बेवफा निकला” 
+[25:30] और रसूल कहेगा के “ऐ मेरे रब, मेरी क़ौम के लोगों ने इस कुरान को निशाना बनाकर बना लिया था।” उपहास)'' 
+[25:31] (ऐ मुहम्मद), हमने तो इसी तरह मुजरेमो को हर नबी का दुश्मन बनाया है, और तुम्हारे लिए तुम्हारा रब हाय रहनुमाई और मदद को काफी है 
+[25:32] मुनकिरीन कहते हैं ''इस शक्स पर सारा कुरान एक ही वक्त में क्यों न उतार दिया गया? हां, ऐसा इस लिए किया गया है के इसको अच्छी तरह हम तुम्हारे जेहन नशीं करते रहे और (इसी गरज के लिए) हमने इसको एक खास तरतीब के साथ अलग अलग अजजा की शक्ल दी है 
+[25:33] और (इसमें ये मसलाहत भी है) के जब कभी वो तुम्हारे सामने कोई निराली बात (या अजीब सवाल) लेकर आए, उसका ठीक जवाब बार वक्त हमें तुम्हें दे दिया और बेहतरी तरीक़े से बात खोल दी 
+[25:34] जो लोग औंधे मुँह जहन्नुम की तरफ ढकेले जाने वाले हैं उनका मौक़ुफ़ बहुत बुरा (सबसे ज्यादा) ग़लत) और उनकी राह हद दर्ज़ ग़लत है 
+[25:35] हमने मूसा को किताब दी और उसके साथ उसके भाई हारून को मददगार के तौर पर लगाया 
+[25:36] और उनसे कहा के जाओ उस क़ौम की तरफ जिसने हमारी आयत को झुटला दिया है। आख़िर ई कर उन लोगों को हमने तबाह करके रख दिया 
+[25:37] यही हाल क़ौम ए नूह का हुआ जब उन्होन ने रसूलों की तकज़ीब की, हमने उनको गर्क (डूब/डूबा) करदिया और दुनिया भर के लोगों के लिए एक निशान ए इबरत बना दिया, और इन ज़ालिमों के लिए एक दर्दनाक अज़ाब हमने मुहैय्या कर रक्खा है 
+[25:38] इसी तरह अद और समूद और असहाब ए रस और बीच की सदियों के बहुत से लोग तबाह हो गए 
+[25:39] और उन में से हर एक को हमने (पहले तबाह होने वालों की) मिसालें दे-दे कर समझा, और आखिर ए कार हर एक को नष्ट कर दिया
+[25:40] और उस बस्ती पर तो इनका गुजर हो चुका है, जिसपर बढ़तीं बारिश बरस गई थी। क्या इन्होन ने उसका हाल देखा ना होगा? मगर ये मौत के बाद दूसरी जिंदगी की तवक्कू ही नहीं रखते 
+[25:41] ये लोग जब तुम्हें देखते हैं तो तुम्हारा मज़ाक बना लेते हैं, (कहते हैं) “क्या ये शक्स है जिसे खुदा ने रसूल बना कर भेजा है 
+[25:42] इसने तो हमें गुमराह करके अपने मबूदों से बरगश्ता(आवारा/बेहका/गुमराह) हाय करदिया होता अगर हम उनकी अकीदत पर जाम ना गए होते”। अच्छा, वो वक्त दूर नहीं है जब अजब देख कर इन्हें खुद मालूम हो जाएगा कि कौन गुमराही में दूर निकल गया था 
+[25:43] कभी तुमने उस लड़के के हाल पर गौर किया है जिसने अपनी ख्वाहिश ए नफ्स को अपना खुदा बना लिया हो? क्या तुम ऐसे शक्स को राह ए रास्ते पर लाने का ज़िम्मा ले सकते हो 
+[25:44] क्या तुम समझते हो के अंदर से अक्सर लोग सुनते और समझते हो? ये तो जानवरों की तरह हैं, बलके उनसे भी गए गुज़रे 
+[25:45] तुमने देखा नहीं के तुम्हारा रब किस तरह साया फैला देता है? अगर वो चाहता तो उसे डेमी (स्थिर) बना देता। हमने सूरज को तैयार किया (सूरज इसका पायलट) बनाया 
+[25:46] फिर (जैसा जैसा सूरज उठा जाता है) हम इस साए को रफ्ता रफ्ता अपनी तरफ समित-ते चले जाते हैं 
+[25:47] और वो अल्लाह ही है जिसने रात को तुम्हारे लिए लिबास, और नींद को सुकून ए मौत, और दिन को जी उठने का वक्त बनाया 
+[25:48] और वही है जो अपनी रहमत के आगे, आगे हवाओं को बशारत बना कर भेजता है फिर आसमां से पाक पानी नाज़िल करता है 
+[25:49] ता-के एक मुर्दा इलके को इसकी ज़रिये जिंदगी बक्शे और अपनी मख़लूक में से बहुत से जानवर और इंसानों को प्यास बुझाएं 
+[25:50] क्या करिश्मा को हम बार-बार इनके सामने लाते हैं ता-के वो कुछ सबक लें। मगर अक्सर लोग कुफ्र और नाशुक्र के सिवा कोई दूसरा रवैय्या इख्तियार करने से इंकार करते हैं 
+[25:51] अगर हम चाहते तो एक एक बस्ती में एक एक नजीर (डर सुनाने वाला) उठा खड़ा करते 
+[25:52] पास (ऐ नबी), का फिरों की बात हरगिज़ ना मानो और इस कुरान को लेकर इनके साथ जिहाद-ए-कबीर करो 
+[25:53] और वही है जिसने दो समंदरों को मिला रक्खा है, एक लज़ीज़ ओ शीरीन (मीठा), दूसरा तल्ख ओ शूर (कड़वा और नमकीन), और दोनों के दरमियान एक पर्दा हयाल है, एक रुकावत है (दुर्गम) बैरियर) जो उन्हें गुड़-मुद होने से रोके हुए हैं 
+[25:54] और वही है जिसने पानी से एक बशर (इंसान) पैदा किया, फिर उसे नसब और सुसराल (खून से और शादी से) के दो अलग सिलसिले चलाये। तेरा रब बड़ा ही क़ुदरत वाला है 
+[25:55] क्या खुदा को छोड़ दिया गया है कर लोग उनको पूज रहे हैं जो ना इनको नाफा पाहुंचा सकते हैं ना नुक्सान, और ऊपर से मजीद ये के काफिर अपने रब के मुकाबले में हर बागी का मददगार बना हुआ है
+[25:56] (ऐ मुहम्मद), तुमको तो हमने बस एक मुबाशीर (खुश खबरी देने वाला) और नज़ीर (डर सुनाने वाला) बना कर भेजा है 
+[25:57] इनसे कहदो के “मैं इस काम पर तुमसे कोई उजरत (इज़ाजा) नहीं मांगता, मेरी उजरत बस यही है कि जिसका जी चाहे” वो अपने रब का रास्ता इख्तियार करले” 
+[25:58] और (ऐ मुहम्मद) हमें खुदा पर भरोसा रक्खो जो जिंदा है और कभी मरने वाला नहीं, उसकी हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो, अपने बंदों के गुनाहों से बस उसकी बा-खबर होना काफी है 
+[25:59] वो जिसने ची (छह) दीनों में ज़मीन और आसमान को और उन सारी चीज़ों को बना कर रख दिया जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान हैं, फिर आप ही (क़ायनात के तख्त ए सल्तनत) 'अर्श' पर जलवा फरमा हुआ। रहमान, उसकी शान बस किसी जाने वाले से पूछो 
+[25:60] लोगों से जब कहा जाता है कि इस रहमान को सजदा करो तो कहते हैं "रहमान क्या होता है? क्या बस जिसे तू कहता है उसे हम सजदा करते फिरें?" ये दावत इनकी नफ़रत में उल्टा और इज़ाफा करती है 
+[25:61] बड़ा मुतबर्रक (बा-बरकत) है वो जिसने आसमान में बुर्ज (किलेबंद गोले) बनाए और उसमें एक चिराग और एक चमकता चांद रोशन किया 
+[25:62] वही है जिसने रात और दिन को एक दूसरे का जानशीन बनाया, हर उस शक्स के लिए जो सबक लेना चाहे, या शुक्र गुज़ार होना चाहे 
+[25:63] रहमान के (असली) बंदे वो है जो ज़मीन पर नरम चल चलते हैं और जाहिल उनके मुंह को आएं तो कह देते हैं कि तुमको सलाम 
+[25:64] जो अपने रब के हुजूर सजदे और कयाम में रातें गुज़ारते हैं 
+[25:65] जो दुआएं करते हैं के "ऐ हमारे रब, जहन्नुम के अज़ाब से हमको बचा ले, उसका अज़ाब तो जान का लागू है 
+[25:66] वो तो बड़ा ही मुस्तकर (बुरा ठिकाना) और मुकाम है" 
+[25:67] जो खर्च करते हैं तो ना फ़िज़ूल खर्च करते हैं ना बुख़्ल, बलके उनका खर्च दोनों इन्तेहाओं (चरम) के दरमियान ऐतदाल पर क़याम रहता है 
+[25:68] जो अल्लाह के सिवा किसी और माबूद को नहीं पुकारते, अल्लाह की हराम की हुई किसी जान को ना-हक़्क़ हलाक नहीं करते, और ना ज़िना (व्यभिचार) के मुर्तकीब होते हैं। ये काम जो कोई करेगा वो अपने गुनाह का बदला पाएगा 
+[25:69] कयामत के रोज़ उसको मुकर्रर अज़ाब दिया जाएगा और इसमें वो हमेशा ज़िल्लत के साथ पड़ा रहेगा 
+[25:70] इल्ला ये के कोई (गुनाहों के बाद में) तौबा कर चुका हो और ईमान ला कर अमल ए सलीह करने लगा हो, ऐसे लोगों की बुराइयों को अल्लाह भलाइयों से बदल देगा और वो बड़ा गफूर ओ रहीम है 
+[25:71] जो शक्स तौबा करके नीक अमली इख्तियार करता है वो तो अल्लाह की तरफ पलट आता है जैसा के पलटने का हक़ है 
+[25:72] (और रहमान के बंदे वो हैं) जो झूठ के गवाह नहीं बनते और किसी चीज़ पर उनका गुज़र हो जाता है तो शरीफ़ आदमियों की तरह गुज़र जाते हैं
+[25:73] जिन्हें अगर उनके रब की आयतें सुना कर हिदायत की जाती है तो वो उसपर अंधे और बाहर बनकर नहीं रह जाते 
+[25:74] जो दुआएं मांगते हैं के, "ऐ हमारे रब, हमें अपनी बीवीयों और अपनी औलाद से आंखों की ठंडक दे, और हमको परहेज़गारों का इमाम बाना।” 
+[25:75] ये हैं वो लोग जो अपने सब्र का फल मंजिल-ए-बुलंद की शक्ल में पाएंगे, आदाब ओ तस्लीमात से उनका इस्तकबाल होगा 
+[25:76] वो हमेशा हमेशा वहां रहेंगे। क्या ही अच्छा है वो मुस्तकर (उत्कृष्ट निवास) और वो मुक़ाम 
+[25:77] (ऐ मुहम्मद), लोगों से कहो, "मेरे रब को तुम्हारी क्या हाजात पड़ी है अगर तुम उसको न पुकारो। अब के तुमने झूठला दिया है, अंकरीब वो सजा पाओगे के जान छुड़ानी मुहाल होगी" 
+
+सूरह 26: अश-शुअरा (कवि) 
+------------------------------------------------ 
+[26:1] ता सीन मीम 
+[26:2] ये किताब ए मुबीन की आयत हैं 
+[26:3] (ऐ मुहम्मद), शायद तुम इस ग़म (दुःख) में अपनी जान खो दोगे के ये लोग ईमान नहीं लाते 
+[26:4] हम चाहें तो आसमां से ऐसी निशानी नाज़िल कर सकते हैं के इनकी गर्दनें इसके आगे झुक जाएँ 
+[26:5] लोगों के पास रहमान की तरफ से जो नई हिदायत भी आती है ये उसे मुँह मोड़ लेते हैं 
+[26:6] अब के ये झूठला चुके हैं, आख़िर इन्हें इस चीज़ की हकीकत (मुखतलिफ़) कहा जाता है तरीक़ों से) मालूम हो जाएगी जिसका ये मज़ाक उड़ाते रहे हैं 
+[26:7] और क्या इन्होन ने कभी ज़मीन पर निगाह नहीं डाली के हमने कितनी कसीर मिकदार में हर तरह की उम्मीद नबातात (वनस्पति) इस्मेन पैदा की है 
+[26:8] यकीनन इसमें एक निशानी है, मगर मुझमें अक्सर माने वाले नहीं 
+[26:9] और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी 
+[26:10] इन्हें वक़्त का क़िस्सा सुनाओ जबके तुम्हारे रब ने मूसा को पुकारा “ज़ालिम क़ौम के पास जा 
+[26:11] फ़िरौन की क़ौम के पास, क्या वो नहीं डरते?” 
+[26:12] उसने अर्ज़ किया "ऐ रब, मुझे ख़ौफ़ है के वो मुझे झुतला देंगे 
+[26:13] मेरा सीना घुट-ता है और मेरी ज़ुबान नहीं चलती, आप हारून की तरफ़ रिसालत भेजें 
+[26:14] और मुझपर उनके हाँ एक जुर्म का इल्ज़ाम भी है, इसके लिए मैं डरता हूं के वो मुझे कत्ल कर देंगे” 
+[26:15] फरमाया “हरगिज नहीं, तुम दोनों जाओ हमारी निशानियां लेकर, हम तुम्हारे साथ सब कुछ सुनते रहेंगे 
+[26:16] फिरौन के पास जाओ और उसे कहो, हमको रब उल आलमीन ने इसलिए भेजा है 
+[26:17] के तू बनी इजराइल को हमारे साथ जाने दे” 
+[26:18] फिरौन ने कहा “क्या हमने तुझको अपना हां बच्चा सा नहीं पाला था? तू नहीं अपने उमर के काई साल हमारे हां गुजारे 
+[26:19] और इसके बाद कर गया जो कुछ कर गया, तू बड़ा एहसान फरामोश आदमी है” 
+[26:20] मूसा ने जवाब दिया “उस वक्त वो काम मैंने (अनजाने में) कर दिया था
+[26:21] फिर मैं तुम्हारा खौफ से भाग गया। इसके बाद मेरे रब ने मुझको हुकुम अता किया और मुझे रसूलन में शामिल फरमा लिया 
+[26:22] रहा तेरा एहसान जो तू नई मुझपर जानता है तो इसकी हकीकत ये है के तू नई बनी इसराइल को गुलाम बना लिया था” 
+[26:23] फिरौन ने कहा “और ये” रब-उल-आलमीन क्या होता है?” 
+[26:24] मूसा ने जवाब दिया "आसमानो और ज़मीन का रब, और उन सब चीज़ों का रब जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान हैं, अगर तुम यक़ीन लाने वाले हो।" 
+[26:25] फिरौं ने अपने गिर्द ओ पेश के लोगों से कहा 'सुनते हो?' 
+[26:26] मूसा ने कहा, "तुम्हारा रब भी और तुम्हारे उन आबा ओ अजदाद का रुब भी जो गुजर चुके हैं" 
+[26:27] फिरौन ने (हाज़िरिन से) कहा "तुम्हारे ये रसूल साहब जो तुम्हारी तरफ भेजे गए हैं, बिल्कुल ही पागल मालूम होते हैं" 
+[26:28] मूसा ने कहा "मशरिक़ ओ मगरिब और जो कुछ इनके दरमियान है सबका रब, अगर आप लोग कुछ अक़ल रखते हैं" 
+[26:29] फ़िरौन ने कहा "अगर तू नहीं मेरे सिवा किसी और को मबूद माना तो तुझे मैं उन लोगों में शामिल कर दूँगा जो क़ैद खानो में पड़े सध (सड़) रहे हैं” 
+[26:30] मूसा ने कहा “अगरचे मैं ले आऊं तेरे सामने एक सारी चीज़ भी?” 
+[26:31] फ़िरौन ने कहा "अच्छा तो ले आ अगर तू सच्चा है" 
+[26:32] (उसकी ज़ुबान से ये बात निकलते ही) मूसा ने अपना आसा (कर्मचारी) फेंक और यकायक वो एक सरेह अज़धा (सांप/साँप) था 
+[26:33] फिर उसने अपना हाथ (बगल) से) खिंचा और वो सब देखने वालों के सामने चमक रहा था 
+[26:34] फिरौन अपने गिर्द ओ पेश के सरदारों से बोला “ये शक्स यकीनन एक माहिर जादूगर है 
+[26:35] चाहता है के अपने जादू के ज़ोर से तुमको तुम्हारे मुल्क से निकल दे, अब तुम बताओ तुम क्या हुकुम देते हो?” 
+[26:36] उनहों ने कहा " इसे और इसके भाई को रोक लीजिए और शहर में हरकारे (हेराल्ड्स) भेज दीजिए 
+[26:37] के हर सियाने जादूगर को आपके पास ले आइए" 
+[26:38] चुनांचे एक रोज़ मुक़र्रर वक़्त पर जादूगर इकठ्ठे करलिये गए 
+[26:39] और लोगों से कहा गया “तुम इज्तिमा में चलोगे 
+[26:40] शायद के हम जादूगरों के दीन ही पर रह जाएंगे अगर वो गालिब रहे” 
+[26:41] जब जादूगर मैदान में आ गए तो उनको ने फिरौन से कहा “हमें इनाम तो मिलेगा अगर हम गालिब” रहे?” 
+[26:42] उसने कहा "हां, और तुम तो हमें वक्त मुकर्रबीन (मेरे सबसे करीब) में शामिल हो जाओगे" 
+[26:43] मूसा ने कहा "फेंको जो तुम्हें फेंकना है" 
+[26:44] उनहों ने फवारां अपनी रसियां ​​और लाठियां फेंक दी और बोले "फिरौं के इकबाल से हम ही गालिब रहेंगे।” 
+[26:45] फिर मूसा ने अपना आसा (कर्मचारी) फेंक दिया तो यकायक वो उनके झूठे करिश्माओं को हड़प कर्ता चला जा रहा था 
+[26:46] इसपर सारे जादूगर बे-इख्तियार सजदे में गिर पड़े 
+[26:47] और बोल उठे के " मान गए हम रब-उल-आलमीन को
+[26:48] मूसा और हारून के रब को” 
+[26:49] फिरौन ने कहा “तुम मूसा की बात मान गए क़ब्ल इसके के मैं तुम्हें इजाज़त देता! जरूर ये तुम्हारा बड़ा है जिसने तुम्हें जादू सिखाया है। अच्छा, अभी तुम्हें मालूम हुआ जाता है, मैं तुम्हारे हाथ पांव मुखालिफ़ सिम्तन (विपरीत पक्ष) में काटवाऊंगा और तुम सबको सूली पर चढ़ा दूंगा" 
+[26:50] उनहों ने जवाब दिया "कुछ परवा नहीं, हम अपने रुब के हुजूर पहन जायेंगे 
+[26:51] और हमें तवक्कू है के हमारा रब हमारे गुनाह माफ कर देगा क्योंकि सबसे पहले हम ईमान लाए हैं" 
+[26:52] हमने मूसा को वही (रहस्योद्घाटन) भेजी के "रात ओ रात मेरे बंदों को लेकर निकल जाओ, तुम्हारा पीछा किया जाएगा" 
+[26:53] इसपर फिरौन ने (फौजीन) जमा करने के लिए) शहर में नकीब (हेराल्ड्स) भेज दिए 
+[26:54] (और केहला भेजा) के “ये कुछ मुट्ठी भर लोग हैं 
+[26:55] और इन्होन ने हमको बहुत नाराज किया है 
+[26:56] और हम एक ऐसी जमात हैं जिसका शेवा हर वक्त चौकन्ना रहना है है" 
+[26:57] इस तरह हम उन्हें उनके बाघों और चश्में (पानी के झरने) 
+[26:58] और खजानो और उनकी बहतरीन कयाम-गाहों से निकल लाए 
+[26:59] ये तो हुआ उनके साथ और (दूसरी तरफ) बानी इजराइल को हमने इन सब चीज़ों का वारिस करदिया 
+[26:60] सुबह होते ही ये लोग उनके ताक़ुब (पीछा) में चल पड़े 
+[26:61] जब दोनों गिरोहों का आमना सामना हुआ तो मूसा के साथी गाल उठे के "हम तो पकड़े गए" 
+[26:62] मूसा ने कहा "हरगिज़ नहीं मेरे साथ मेरा रब है, वो ज़रूर मेरी रहनुमायी फरमायेगा” 
+[26:63] हमने मूसा को वही के ज़रिये से हुकुम दिया के “मार अपना आसा (कर्मचारी) समंदर पार” क्योंकि समंदर पहँट गया और उसका हर टुकड़ा एक अज़ीम ओ शान पहाड़ की तरह हो गया 
+[26:64] उसी जगह हम दूसरे गिरो ​​को भी करीब ले आओ 
+[26:65] मूसा और उन सब लोगों को जो उसके साथ थे हमने बचा लिया 
+[26:66] और दूसरों को गर्क (डूबा/डूब) करदिया 
+[26:67] क्या वक्त में एक निशानी है, मगर इन लोगों में से अक्सर मन्ने वाले नहीं हैं 
+[26:68] और हकीकत ये है के तेरा रब्ब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी 
+[26:69] और यहीं इब्राहीम का क़िस्सा सुनाओ 
+[26:70] जबके उसने अपने बाप और अपनी क़ौम से पूछा था के "ये क्या चीज़ हैं जिनको तुम पूजते हो?" 
+[26:71] उनको ने जवाब दिया “कुछ बुथ (मूर्तियां/मूर्तियां) हैं जिनकी हम पूजा करते हैं और इनकी सेवा में हम लगे रहते हैं” 
+[26:72] उसने पूछा “क्या ये तुम्हारी सुनते हैं जब तुम इन्हें पुकारते हो 
+[26:73] हां ये तुम्हें कुछ नफ़ा या नुक्सान पहुंचते हैं?” 
+[26:74] उनको ने जवाब दिया " नहीं, बल्कि हमने अपने बाप दादा को ऐसा ही किया पाया है" 
+[26:75] इसपर इब्राहिम ने कहा " कभी तुमने (आंखें खोल कर) उन चीज़ों को देखा भी जिनकी बंदगी तुम
+[26:76] और तुम्हारे पिछले बाप दादा बजा लाते रहे 
+[26:77] मेरे तो ये सब दुश्मन हैं, बाजुज़ एक रब उल आलमीन के 
+[26:78] जिसने मुझे भुगतान किया, फिर वही मेरी रहनुमाई फरमाता है 
+[26:79] जो मुझे खिलाता और पिलाता है 
+[26:80] और जब मैं बीमार हो जाता हूं तो वही मुझे शिफा देता है 
+[26:81] जो मुझे मौत देगा और फिर दोबारा मुझको जिंदगी बक्शेगा 
+[26:82] और जिसकी मैं उम्मीद रखता हूं के रोज ए जजा में वो मेरी खाता माफ फरमादेगा” 
+[26:83] (इस्के बाद इब्राहिम ने दुआ की) “ऐ मेरे रब, मुझे हुकुम अता कर और मुझको सालिहों (नए लोगों) के साथ मिला 
+[26:84] और बाद के आने वालों में मुझको सच्ची नामवारी आता कर 
+[26:85] और मुझे जन्नत ए नईम के वारिसों (उत्तराधिकारी) में शामिल फरमा 
+[26:86] और मेरे बाप को माफ़ करदे के बहकावे वो गुमराह लोगों में से हैं 
+[26:87] और मुझे उस दिन रुसवा ना कर जबके सब लोग ज़िंदा करके उठेंगे 
+[26:88] जबके ना माल कोई फ़ायदा देगा ना औलाद 
+[26:89] बज़ुज़ इसके के कोई शक्स क़ल्ब-ए-सलीम (स्वस्थ हृदय) लिए हुए अल्लाह के हुजूर हाज़िर हो” 
+[26:90] (उस रोज़) जन्नत परहेज़गारों के करीब ले आएगी 
+[26:91] और दोज़ख बहके हुए लोगों के सामने खुल जाएगी 
+[26:92] और उनसे पूछा जाएगा के “अब कहाँ है” वो जिनकी तुम खुदा को छोड़ कर इबादत करते थे 
+[26:93] क्या वो तुम्हारी कुछ मदद कर रहे हैं या खुद अपना बचाव कर सकते हैं?” 
+[26:94] फिर वो माबूद और ये बहके हुए लोग 
+[26:95] और इबलीस के लश्कर सबके सब इसमें ऊपर तले ढकेल दिए जाएंगे 
+[26:96] वहां ये सब आपस में झगड़ेंगे और ये बहके हुए लोग (अपने माबूदों से) कहेंगे 
+[26:97] के “खुदा की कसम, हम तो सारी गुमराही में मुबतला थे 
+[26:98] जबके तुमको रब उल आलमीन की बाराबरी का दरजा दे रहे थे 
+[26:99] और वो मुजरिम लोग ही थे जिन्होन ने हमको इस गुमराही में डाला 
+[26:100] अब ना हमारा कोई सिफ़रीशी है 
+[26:101] और ना कोई जिगरी दोस्त 
+[26:102] काश हमें एक दफा फिर पलटने का मौका मिल जाए तो हम मोमिन हों” 
+[26:103] यकीनन इस में एक बड़ी निशानी है, मगर मेरे अंदर से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं 
+[26:104] और हकीकत ये है के तेरा रुब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी 
+[26:105] क़ौम ए नूह ने रसूलों को झुटलाया 
+[26:106] याद करो जबके उनके भाई नूह ने उनसे कहा था "क्या तुम डरते नहीं हो 
+[26:107] मैं तुम्हारे लिए एक अमानत दार रसूल हूं 
+[26:108] लिहाज़ा तुम अल्लाह से डरो और 
+मेरी इताअत 
+करो।
+[26:111] उनहों ने जवाब दिया "क्या हम तुझे मान लें हलांके तेरी जोड़ी रज़िल-तरीन (सबसे नीच/नीच) लोगों ने इख्तियार की है?" 
+[26:112] नूह ने कहा “मैं क्या जानू के उनके अमल कैसे हैं 
+[26:113] उनका हिसाब तो मेरे रब के ज़िम्मे है, काश तुम कुछ शूर से काम लो 
+[26:114] मेरा ये काम नहीं है के जो ईमान लायें उनको मैं धुतकार दूं 
+[26:115] मैं तो बस एक साफ साफ मुतनब्बे (चेतावनी) करने वाला आदमी हूं" 
+[26:116] उनहों ने कहा "ऐ नूह, अगर तू बाज़ ना आया तो फिटकरे हुए लोगों में शामिल होकर रहेगा" 
+[26:117] नूह ने दुआ की "ऐ मेरे रब, मेरी क़ौम ने मुझे झुटला दिया 
+[26:118] अब मेरे और उनके दरमियान दो-टूक फैसला करदे और मुझे और जो मोमिन मेरे साथ हैं इनको निजात दे” 
+[26:119] आखिर ए कार हमने उसको और उसके साथियों को एक भारी हुई कश्ती में बचा लिया 
+[26:120] और उसके बाद बाकी लोगों को गर्क (डूब) कर दिया 
+[26:121] यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर लोग माने वाले नहीं 
+[26:122] और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी 
+[26:123] आद ने रसूलों को झुटलाया 
+[26:124] याद करो जबके उनके भाई हुड ने उनसे कहा था "क्या तुम डरते नहीं 
+[26:125] मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं 
+[26:126] लिहाजा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो 
+[26:127] मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है 
+[26:128] ये तुम्हारा क्या हाल है के हर ऊंचे मक़ाम पर ला हासिल एक यादगार इमारत बना डालते हो 
+[26:129] और बड़े-बड़े क़सर (विशाल महल) तामीर करते हो गोया तुम्हें हमेशा रहना है 
+[26:130] और जब किसी पर हाथ डालते हो जब्बार बन कर डालते हो 
+[26:131] पास तुम लोग अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो 
+[26:132] डरो उसे जिसने वो कुछ तुम्हें दिया है जो तुम जानते हो 
+[26:133] तुम्हें जानवर दिए, औलादें दी 
+[26:134] बाग दिए और चश्मे (पानी के झरने) दिए 
+[26:135] मुझे तुम्हारे हक में एक बड़े दिन के अज़ाब का डर है" 
+[26:136] उनको ने जवाब दिया " तू हिदायत कर या ना कर, हमारे लिए यकसन है 
+[26:137] ये बातें तो यूं ही होती चली आई हैं 
+[26:138] और हम अज़ाब में मुब्ताला होने वाले नहीं हैं" 
+[26:139] आख़िर ए कार उनहों ने उसे झुतला दिया और हमने उनको हलाक कर दिया। यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर लोग मन्ने वाले नहीं हैं 
+[26:140] और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बर्दस्त भी है और रहीम भी 
+[26:141] समूद ने रसूलों को झुटलाया 
+[26:142] याद करो जबके उनके भाई सालेह ने उनसे कहा "क्या तुम डरते नहीं 
+[26:143] मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं
+[26:144] लिहाज़ा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो 
+[26:145] मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है 
+[26:146] क्या तुम उन सब चीजों के दरमियान, जो यहां हैं, बस यूंही इत्मिनान से रहना दिए जाओगे 
+[26:147] बागों (बगीचों) और चैसमन में 
+[26:148] खेतों और नखलिस्तानो (खजूर-कुंजों) में जिनके खोसे रस भरे हैं 
+[26:149] तुम पहाड़ खोद खोद कर फखरिया (गर्व से) उन में इमरतें बनाते हो 
+[26:150] अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो 
+[26:151] उन बे-लगाम लोगों की इताअत ना करो 
+[26:152] जो ज़मीन में फसाद बरपा करते हैं और कोई इस्लाह नहीं करते” 
+[26:153] उन्हें ने जवाब दिया “तू महज़ एक सहर-ज़ादा (जादू से प्रभावित) आदमी है 
+[26:154] तू हम जैसा एक इंसान के सिवा और क्या है, ला कोई निशानी अगर तू सच्चा है” 
+[26:155] सालेह ने कहा “ये ऊंटनी (वह-ऊंटनी) है एक दिन इसके पीने का है और एक दिन तुम सब के पानी लेने का 
+[26:156] इसको हरगिज़ न छेड़ना (छेड़छाड़) वरना एक बुरे दिन का अज़ाब तुमको आ लेगा” 
+[26:157] मगर उन्हें ने इसकी कुंचे काट दी (उसे चोट लगी) और आख़िर-ए-कार पछताते रह गए 
+[26:158] अज़ाब ने उन्हें आ लिया, यकीनन इस्मे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर मन्ने वाले नहीं 
+[26:159] और हकीकत ये है के तेरा रब्ब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी 
+[26:160] लूट की क़ौम ने रसूलों को झुटलाया 
+[26:161] याद करो जबके उनके भाई लुट ने उनसे कहा था "क्या तुम डरते नहीं 
+[26:162] मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूँ 
+[26:163] लिहाज़ा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो 
+[26:164] मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है 
+[26:165] क्या तुम दुनिया की मखलूक में से मर्दों के पास जाते हो 
+[26:166] और तुम्हारी बीवीयों में तुम्हारे रब ने तुम्हारे लिए जो कुछ पेदा किया है उसे छोड़ देते हो? बल्के तुम लोग तो हद से ही गुजर गए हो।” 
+[26:167] उनहों ने कहा "ऐ लुट" अगर तू इन बातों से बाज़ ना आया तो जो लोग हमारी बस्तियों से निकल गए हैं उनमें तू भी शामिल हो कर रहेगा" 
+[26:168] उसने कहा "तुम्हारे कार्टून पर जो लोग कुद्द (घृणा/घृणा) कर रहे हैं मैं उन में शामिल हूं 
+[26:169] ऐ परवरदिगार, मुझे और मेरे एहल-ओ-अयाल (मैं और मेरे लोग/मेरा परिवार) को इनकी बदकिरदारियों से निजात दे” 
+[26:170] आखिर ए कार हमने उसे और उसके सब एहाल-ओ-अयाल को बचा लिया 
+[26:171] बज़ुज़ एक बुदिया के जो पीछे रह जाने वालों में से थी 
+[26:172] फिर बाकी मांदा(बाकी) लोगों को हमने तबाह कर दिया 
+[26:173] और उन पर बरसात एक बरसात, बड़ी ही बुरी बारिश थी जो उन डराए जाने वालों पर नाज़िल हुई
+[26:174] यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर माने वाले नहीं 
+[26:175] और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी 
+[26:176] असहाब-उल-अइक़ा ने रसूलों को झुटलाया 
+[26:177] याद करो जबके शोएब ने उनसे कहा था "क्या तुम डरते नहीं 
+[26:178] मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं 
+[26:179] लिहाजा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो 
+[26:180] मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है 
+[26:181] पैमाने ठीक भरो (पूरा माप दो) और किसी को घाटा (कम) ना दो 
+[26:182] सही तराजू से तोलो 
+[26:183] और लोगों को उनकी चीजे कम ना दो, जमीन में फसाद ना फैलाओ फिरो 
+[26:184] और हमें जात का खौफ करो जिसने तुम्हें और गुज़िश्ता नसलों को भुगतान किया है।” 
+[26:185] उनहों ने कहा "तू महज एक सहर जादा (जादू से प्रभावित) आदमी है 
+[26:186] और तू कुछ नहीं मगर एक इंसान हम ही जैसा, और हम तो तुझे बिल्कुल झूठा समझते हैं 
+[26:187] अगर तू सच्चा है तो हमपर आसमान का कोई टुकड़ा गिरा दे" 
+[26:188] शोएब ने कहा "मेरा रब जानता है जो कुछ तुम कर रहे हो" 
+[26:189] उन्होन ने उसे झुटला दिया, आखिर-ए-कार छतरी वाले दिन (कैनोपी का दिन) का अज़ाब अनपर आ गया, और वो बदे ही खौफ़-नाक दिन का अज़ाब था 
+[26:190] यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर मेरे अंदर से अक्सर लोग माने वाले नहीं 
+[26:191] और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी 
+[26:192] ये रब्बुल आलमीन की नाज़िल करदा चीज़ है 
+[26:193] इसे लेकर तेरे दिल पर अमानत-दार रूह उतरी है 
+[26:194] ता-के तू उन लोगों में शामिल हो जो (खुदा की तरफ से ख़ल्क़-ए-ख़ुदा को) मुतनब्बेह (चेतावनी) देने वाले हैं 
+[26:195] साफ़ साफ़ अरबी ज़ुबान में 
+[26:196] और अगले लोगों की किताबों में भी ये मौजूद है 
+[26:197] क्या इन (एहले मक्का) के लिए ये कोई निशानी नहीं है के इसे उलेमा-ए-बानी इस्राइल जानते हैं 
+[26:198] (लेकिन इनकी टोपीदारमी का हाल ये है के) अगर हम इसे किसी अजमी (गैर-अरब) पर भी नाज़िल कर देते हैं 
+[26:199] और ये (फसीह अरबी कलाम) वो इनको पढ़ कर सुनाता तब भी ये मान कर ना देते 
+[26:200] इसी तरह हमने इस (ज़िक्र) को मुजरिमों के दिलों में गुज़ारा है 
+[26:201] वो इसपर ईमान नहीं लाते जब तक अज़ाब ए अलीम ना देख लें 
+[26:202] फिर जब वो बे-ख़बरी में अनपर आ पड़ता है 
+[26:203] हम वक़्त कहते हैं "के क्या अब हमें कुछ मोहलत मिल सकती है?" 
+[26:204] तो क्या ये लोग हमारे अजब के लिए जल्दी मचा रहे हैं 
+[26:205] तुमने कुछ गौर किया, अगर हम उन्हें बरसों तक ऐश करने की मोहलत भी दे दें 
+[26:206] और फिर वही चीज उन्पर आ जाए जिसमें इन्हें डराया जा रहा है
+[26:207] तो वो सामान-ए-ज़िस्ट (जीवन के प्रावधान) जो उनको मिला हुआ है इनका किस काम आएगा 
+[26:208] (देखो) हमने कभी किसी बस्ती को इसके बिना हलाक नहीं किया के उसके लिए खबरदार करने वाले हक़ ए हिदायत अदा करने को मौजूद थाय 
+[26:209] और हम जालिम ना थे 
+[26:210] इस (किताब ए मुबीन) को शयातीन लेकर नहीं उतरे हैं 
+[26:211] ना ये काम उनको सजता है, और ना वो ऐसा कर ही सकते हैं 
+[26:212] वो तो इसकी समात (सुनवाई) तक से दूर रक्खे गए हैं 
+[26:213] पास (ऐ मुहम्मद), अल्लाह के साथ किसी दूसरे माबूद को न पुकारो, वरना तुम भी सजा पाने वालों में शामिल हो जाओगे 
+[26:214] अपने करीब-तरीन रिश्तेदारों को डराओ 
+[26:215] और ईमान लाने वालों में से जो लोग तुम्हारी जोड़ी इख्तियार करें उनके साथ तवाज़ो (विनम्रता/दया) से पेश आओ 
+[26:216] लेकिन अगर वो तुम्हारी नफ़रमानी करें तो उनसे कहदो के जो कुछ तुम करते हो उसे मैं बारी-उज़-ज़िम्मा (जिम्मेदार नहीं) हूं 
+[26:217] और हम ज़बरदस्त और रहीम पर तवक्कुल (भरोसा) करो 
+[26:218] जो तुम्हीं हमें वक्त देख रहा है जब तुम उठते हो 
+[26:219] और सजदा गुजर लोगों में तुम्हारी नक़ल ओ हरकत पर निगाह रखता है 
+[26:220] वो सब कुछ सुनने और जाने वाला है 
+[26:221] लोगन, क्या मैं तुम्हें बातों के शयातें किस पर उतर करते हैं 
+[26:222] वो हर चाल साज़, बढ़कर पर उतर करते हैं 
+[26:223] सुनी सुनाई बातें कानों में फूंकते हैं, और उनमें से अक्सर झूठे होते हैं 
+[26:224] रहे शूरा (कवि), तो उनके पीछे बहके हुए लोग चलते हैं है 
+[26:225] क्या तुम देखते नहीं हो के वो हर वादी (घाटी) में भटकते हैं 
+[26:226] और ऐसी बातें कहते हैं जो करते नहीं हैं 
+[26:227] बज़ुज उन लोगों के जो ईमान लाए और जिन्होन ने नेक अमल किए और अल्लाह को कसरत से याद किया और जब अनपर ज़ुल्म किया गया तो सिर्फ बदला ले लिया, और ज़ुल्म करने वालों को अंकाराब मालूम हो जाएगा के वो किस अंजाम से दो-चार होते हैं 
+
+सूरह 27: अन-नाम्ल (द नाम्ल) 
+------------------------------------------------ 
+[27:1] ता सीन। ये आयत हैं कुरान और किताब ए मुबीन की 
+[27:2] हिदायत और बशारत उन ईमान लाने वालों के लिए 
+[27:3] जो नमाज कायम करते हैं और जकात देते हैं, और फिर वो ऐसे लोग हैं जो आखिरी पर पूरा यकीन रखते हैं 
+[27:4] हकीकत ये है के जो लोग आख़िरत को नहीं मानते उनके लिए हमने उनके कार्टूनों को ख़ुशनुमा बना दिया है, इसलिए वो भटकते फिर रहे हैं 
+[27:5] ये वो लोग हैं जिनके लिए बुरी सज़ा है और आख़िरत में यही सबसे ज़्यादा ख़ासारे (नुक्सान) में रहने वाले हैं 
+[27:6] और (ऐ मुहम्मद) बिला शुभा तुम ये कुरान एक हकीम ओ आलिम (सर्वज्ञ और सर्वज्ञ) हस्ती की तरफ से पा रहे हो
+[27:7] (इन्हें वक्त का क़िस्सा सुनाओ) जब मूसा ने अपने घर वालों से कहा के "मुझे एक आग सी नज़र आई है, मैं अभी तो वहां से कोई खबर लेकर आता हूं या कोई अंगारा चुन लाता हूं ता-के तुम लोग गरम हो सको" 
+[27:8] वहां जो पहनूं तो निदा (आवाज़/पुकार) आई के "मुबारक है वो जो इस आग में है और जो इसके महोल में है, पाक है अल्लाह सब जहांओं का परवरदिगार 
+[27:9] ऐ मूसा, ये मैं हूं अल्लाह, ज़बरदस्त और दाना (सर्व-बुद्धिमान) 
+[27:10] और फेंक तू ज़रा अपनी लाठी।" जुनही के मूसा ने लाठी सांप (सांप) को देखा कि तरह बल खा रही है तो पीठ फिर कर भागा और पीछे मुड़ कर भी ना देखा। "ऐ मूसा, डरो नहीं, मेरे हुजूर रसूल दारा नहीं करते 
+[27:11] इल्ला ये के किसी ने कसूर किया हो। फिर अगर बुराई के बाद उसने अपनी गलती से अपने फेल (अमल) को बदल लिया तो मैं माफ करने वाला मेहरबान हूं 
+[27:12] और जरा अपना हाथ अपने गिरेबान मैं तो डालो चमकता हुआ निकलेगा बिना किसी परेशानी के, ये (दोनो निशानियां) नौ (नौ) निशानियों में से हैं फिरौन और उसके क़ौम की तरफ (ले जाने के लिए), वो बदे-किरदार (दुष्ट) लोग हैं” 
+[27:13] मगर जब हमारी खुली खुली निहसानियां उन लोगों के सामने आईं तो उनहों ने कहा ये तो खुला जादू है 
+[27:14] उनहों ने सारा-सर जुल्म और गुरु की राह से इन निशानियों का इंकार किया, हलांके दिल उनके कायल (आश्वस्त) हो चुके थे। अब देखलो के उन मुफसीदों का अंजाम कैसा हुआ 
+[27:15] (दूसरी तरफ) हमने दाऊद ओ सुलेमान को इल्म अता किया और उन्होंने कहा कि शुक्र है हमें खुदा का जिसने हमको अपने बहुत से मोमिन बंदों पर फजीलत अता की 
+[27:16] और दाऊद का वारिस सुलेमान हुआ और उसने कहा “लोगन, हमें परिन्दों (पक्षियों) की बोलियाँ सिखाई गई हैं और हमें हर तरह की चीज़ें दी गई हैं, बेशक ये (अल्लाह का) नुमाया फ़ज़ल है।” 
+[27:17] सुलेमान के लिए जिन और इंसानों और परिंदों के लश्कर जमा किए गए थे और वो पूरे ज़ब्त (सख्त अनुशासन) में रक्खे जाते थे 
+[27:18] एक मरतबा वो उनके साथ कूच (मार्च) कर रहा था) यहां तक ​​के जब ये सब चुनौतियां (चींटियों) की वादी (घाटी) में पहुंचे तो एक चुनती (चींटी) ने कहा "ऐ चुनिटों, अपने बिलों (छेद) में घुस जाओ, कहीं ऐसा ना हो के सुलेमान और उसके लश्कर तुम्हें कुचलें और उन्हें खबर भी ना हो" 
+[27:19] सुलेमान उसकी बात पर मुस्कुराए हुए हंस पड़ा और बोला "ऐ मेरे रब मुझे काबू में रख के मैं तेरे उस एहसान का शुक्र अदा करता रहूं जो तू-नए मुझपर और मेरे वालिदैन पर किया है और ऐसा अमल ए सालेह करूं जो तुझे पसंद आए, और अपनी रहमत से मुझको अपने साल बंदों में दाखिल कर।" 
+[27:20] (एक और मौक़े पर) सुलेमान ने परिन्दों का जायज़ा लिया और कहा "क्या बात है के मैं फलां हुड़-हुद (हूपो पक्षी) को नहीं देख रहा हूँ। क्या वो कहीं गायब हो गया है
+[27:21] मैं उसे सख्त सजा दूंगा, या जुबा कर दूंगा, वरना उसे मेरे सामने मकूल वजह पेश करनी होगी 
+[27:22] कुछ ज्यादा दिन न गुजरी थी के उसने आकर कहा "मैंने वो मालूमात हासिल की है जो आपके इलम में नहीं हैं। मैं सबा के मुतालिक यकीनी इत्तिला लेकर आया हूं 
+[27:23] मैंने वहां एक औरत देखी जो हमें क़ौम की हुक्मरान है 
+। के आगे सजदा करती है” शैतान ने उनके आमाल उनके लिए ख़ुशनुमा बना दिए और उन्हें शहर से रोक दिया, इस वजह से वो ये सीधा रास्ता नहीं पाते 
+[27:25] के हमें खुदा को सजदा करें जो आसमानो और ज़मीन की पोशीदा (छिपी हुई) चीज़ निकलता है और वो सब कुछ जानता है जिसे तुम लोग छुपाते हो और जाहिर करते हो 
+[27:26] अल्लाह, जिसके सिवा कोई मुस्तहिक ए इबादत (पूजा के योग्य) नहीं, जो अर्श ए अजीम का मालिक है 
+[27:27] सुलेमान ने कहा "अभी हम देखते लेते हैं के तू सच नहीं कहता" है ये तू झूठ बोलने वालों में से है 
+[27:28] मेरा ये खत (पत्र) ले जा और उसे उन लोगों की तरफ डाल दे, फिर अलग हट कर देख के वो क्या रद्द-ए-अमल जाहिर करते हैं” 
+[27:29] मलिका बोली “ऐ एहले दरबार, मेरी तरफ एक बड़ा एहम ख़त फेंक गया है 
+[27:30] वो सुलेमान की जानिब से है और अल्लाह रहमान ओ रहीम के नाम से शुरू किया गया है 
+[27:31] मज़मून ये है के "मेरे मुकाबले में सरकशी न करो और मुस्लिम हो कर मेरे पास हाज़िर हो जाओ" 
+[27:32] (खत सुनाकर) मलिका ने कहा “ऐ सरदारन ए क़ौम मेरे इस मामले में मुझे मशवरा दो। मैं किसी मामले का फैसला तुम्हारे बिना नहीं करती हूं" 
+[27:33] उन्हें ने जवाब दिया "हम ताकतवार और लड़ने वाले लोग हैं, अगला फैसला आपके हाथ में है, आप खुद देख लें के आपको क्या हुकुम देना है" 
+[27:34] मलिका ने कहा के "बादशाह जब किसी मुल्क में घुस आते हैं तो उसे ख़राब और उसके इज्जत वालों को ज़लालत कर देते हैं, यहीं कुछ वो किया करते हैं 
+[27:35] मैं लोगों की तरफ एक हदिया (उपहार) भेजती हूं, फिर देखती हूं के मेरे एलची (दूत) क्या जवाब लेकर पलट-ते हैं” 
+[27:36] जब वो [मलिका का सुरक्षित (दूत)] सुलेमान के हां पहुंचा तो उसने कहा, "क्या तुम लोग माल से मेरी मदद करना चाहते हो? जो कुछ खुदा ने मुझे दे रखा है वो इससे बहुत ज्यादा है जो तुमने दिया है। तुम्हारी हादिया (उपहार) तुम्हें मुबारक रहे 
+[27:37] ऐ सुरक्षित (दूत)]वापस जा अपने भेजने वालों की तरफ, हम उन पर ऐसे लश्कर लेकर आएंगे जिनका मुकाबला वो ना कर पाएंगे, और हम उन्हें ऐसी ज़िल्लत के साथ, वहां से निकालेंगे के वो ख़्वार होकर रह जायेंगे” 
+[27:38] सुलेमान ने कहा “ऐ एहले दरबार, तुम में से कौन उसका तख्त (सिंहासन) मेरे पास लाता है कबूल इसके के वो लोग मुती (फरमाबरदार) होकर मेरे पास हाजिर हूं?”
+[27:39] जिन्नो में से एक कवी (शक्तिशाली) हयाल ने अर्ज़ किया "मैं उसे हाजिर कर दूंगा क़बल इसके के आप अपनी जगह से उठें। मैं इसकी ताक़त रखता हूं और अमानतदार हूं" 
+[27:40] जिस शक्स के पास किताब का इलम था वो बोला "मैं आपकी" पलख झपकने से पहले उसे लाए देता हूं”। जुनही के सुलेमान ने वो तख्त अपने पास रक्खा हुआ देखा, वो पुकार उठा "ये मेरे रब का फज़ल है ता-के वो मुझे आजमाए के मैं शुक्र करता हूं या काफिर ए नियामत करता हूं। और जो कोई शुक्र करता है उसका शुक्र उसे अपने ही लिए मुफीद है, वरना कोई नाशुकारी करे तो मेरा रब बे-नियाज़ और अपनी ज़ात में आप बुज़ुर्ग है।” 
+[27:41] सुलेमान ने कहा, "अंजान तारीख़ से उसका तख्त उसके सामने रख दो, देखें वो सही बात तक पहुंच जाती है या उन लोगों में से है जो राह ए रास्ता नहीं पाते।" 
+[27:42] मलिका जब हाजिर हुई तो उसे कहा गया, क्या तेरा तख्त (सिंहासन) ऐसा ही है? वो कहने लगी "ये तो गया वही है, हम तो पहले ही जान गए थे और हमने सर-ए-इतात झुका दिया था (या हम मुस्लिम हो चुके थे)" 
+[27:43] उसको (इमान लेन से) जिस चीज ने रोक रखा था वो उन मबूदों की इबादत थी जिन्होन अल्लाह के सिवा पूजती थी, क्योंकि वो एक काफिर क़ौम से थी 
+[27:44] उसे कहा गया के महल में दाख़िल हो, उसने जो देखा तो समझ के पानी का हौज़ है और उतरने के लिए उसने अपने दर्द उठा लिए, सुलेमान ने कहा ये शीशे (कांच) का चिकना फ़र्श है इसपर वो पुकार उठी "ऐ मेरे रब, (आज तक) मैं अपने नफ़्स पर बड़ा ज़ुल्म करती रही, और अब मैंने सुलेमान के साथ अल्लाह रब्बुल आलमीन की इताअत क़बूल करली" 
+[27:45] और समूद की तरफ हमने उनके भाई सालेह को (ये पैगाम दे कर) भेजा के अल्लाह की बंदगी करो, तो यकायक वो दो मुतखसिम फरीक (दो तकरार) बन गए 
+[27:46] सालेह ने कहा "ऐ मेरी कौम के लोगों, भलाई से पहले बुराई के लिए क्यों जल्दी मचाते हो? क्यों नहीं अल्लाह से मगफिरत तालाब करते? शायद के तुमपर रहम फरमाया जय?” 
+[27:47] उनहों ने कहा "हमने तो तुमको और तुम्हारे साथियों को बद-शगुनी का निशान पाया है"। सालेह ने जवाब दिया "तुम्हारे नीक ओ बद शगुन का सारा रिश्ता (अच्छे और बुरे शगुन का मुद्दा) अल्लाह के पास है। असल बात ये है कि तुम लोगों की आजमाइश हो रही है" 
+[27:48] हमारे शहर में नौ (नौ) जत्थे-दार (रिंग-लीडर) थे जो मुल्क में फसाद फैलाते और कोई इस्लाह का काम ना करते थे 
+[27:49] उन्होन ने आपस में कहा “खुदा की कसम खा कर अहद करलो के हम सालेह और उसके घर वालों पर शब्खुन (गुप्त रात का हमला) मारेंगे और फिर उसके वाली (अभिभावक) से कह देंगे के हम उस खानदान की हलाकत के मौके पर मौजुद ना थाय, हम बिल्कुल सच कहते हैं 
+[27:50] ये चल तो वो चले और फिर एक चाल हमने चली जिसकी उन्हें खबर ना थी 
+[27:51] अब देखलो के उनकी चाल का अंजाम क्या हुआ। हमने तबाह करके रख दिया उनको और उनकी पूरी कौम को
+[27:52] वो उनके घर खाली पड़े हैं उस जुल्म की पैदाइश में जो वो करते थे, इस में एक निशान ए इब्रत है उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं 
+[27:53] और बच्चा लिया हमने उन लोगों को जो ईमान लाए थे और नफ़रमानी से परहेज़ करते थे 
+[27:54] और लुट को हमने भेजा। याद करो वो वक़्त जब उसने अपनी क़ौम से कहा "क्या तुम आँखें देखते हो ख़राबी करते हो 
+[27:55] क्या तुम्हारा यही चलन है के औरतों को छोड़ कर मर्दों के पास शेहवत-रानी (यौन इच्छा) के लिए जाते हो? हकीकत ये है के तुमलोग सच कहते हो (अज्ञान) का काम करते हो।” 
+[27:56] मगर उसकी क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ ना था के अनहोन ने कहा "निकल दो लुट के घर वालों को अपनी बस्ती से, ये बड़े पाकबाज़ बनते हैं" 
+[27:57] आख़िर ए कार हमने बचा लिया उसको और उसके घर वालों को, बाज़ उसकी बीवी के जिसका पीछे रह जाना हमने तै करदिया था 
+[27:58] और बरसै उन लोगों पर एक बरसात, बहुत ही बुरी बरसात थी वो उन लोगों के हक़ में जो मुतनब्बह किये जा चुके थे 
+[27:59] (ऐ नबी) कहो, हम्द है अल्लाह के लिए और सलाम उसे उन बंदों पर जिन्होंने हमें बरगुज़िदा किया. (इंसे पूछो) अल्लाह बेहतर है या वो मबूद जिनहें ये लोग इसका शरीक बना रहे हैं 
+[27:60] भला वो कौन है जिसने आसमान और ज़मीन को पेदा किया, और तुम्हारे लिए आसमान से पानी बरसाया, फिर उसके ज़रिये से वो खुसनुमा बाग उगे जिनके दरख्तों का उगना तुम्हारे बस में ना था? क्या अल्लाह के साथ कोई दूसरा खुदा भी है? (नहीं), बलके यहीं लोग राह ए रास्ते से हटकर चले जा रहे हैं 
+[27:61] और वो कौन है जिसने ज़मीन को जाए क़रार बनाया और उसके अंदर दरिया रावन किए, और उसमें (पहाड़ों की) मेखें गाध दी और पानी के दो ज़ख़िरों (दो शरीर) के दरमियान पर्दा हयाल कार्डिए? क्या अल्लाह के साथ कोई और खुदा भी शरीक में है? नहीं, बल्कि मेरे से अक्सर लोग नादान हैं 
+[27:62] कौन है जो बेकरार की दुआ सुनता है जबके वो उसे पुकारे और कौन उसकी तकलीफ रफा-दफा करता है? और (कौन है जो) तुम्हें ज़मीन का खलीफा बनाता है? क्या अल्लाह के साथ कोई और खुदा भी (ये काम करने वाला) है? तुम लोग कम ही सोचते हो 
+[27:63] और वो कौन है जो खुशियों और समंदर की तरीकियों में तुमको रास्ता दिखता है और कौन अपनी रहमत के आगे हवाओं को खुश खबरी लेकर भेजता है? क्या अल्लाह के साथ कोई दूसरा खुदा भी (ये काम करता) है? बहुत बाला ओ बरतर है अल्लाह हमसे शिर्क से जो ये लोग करते हैं 
+[27:64] और वो कौन है जो ख़ल्क़ (सृष्टि) की इब्तिदा (उत्पत्ति) करता है और फिर उसका इयादा (पुनः प्रस्तुत) करता है। और कौन तुमको आसमान और ज़मीन से रिज़क देता है? क्या अल्लाह के साथ कोई और खुदा भी है? कहो के लाओ अपनी दलील अगर तुम सच्चे हो 
+[27:65] इनसे कहो, अल्लाह के सिवा आसमान और ज़मीन में कोई गैब का इलम नहीं रखता, और वो नहीं जानता के कब वो उठेगा
+[27:66] बलके आख़िरत का तो इलम ही इन लोगों से ग़म हो गया है, बलके ये उसकी तरफ से शक्क में हैं, बलके ये उसे अंधे हैं 
+[27:67] ये मुन्किरें कहते हैं "क्या जब हम और हमारे बाप दादा मिट्टी हो चुके होंगे तो हमें वक़्ती क़बरों से निकला जायेगा?” 
+[27:68] ये खबरें हमको भी बहुत दी हैं और पहले हमारे आबा ओ अजदाद को भी दी जाती रही हैं, मगर ये बस अफसाने ही अफसाने हैं जो अगले वक्त से सुनते चले आ रहे हैं” 
+[27:69] कहो, जरा जमीन में चल फिर कर देखो के मुजरेमो का क्या अंजाम हो चुका है 
+[27:70] (ऐ नबी), इनके हाल पर रांझ ना करो और ना इनकी चालों पर दिल तंग हो 
+[27:71] वो कहते हैं के "ये धमकी कब पूरी होगी अगर तुम सच्चे हो?" 
+[27:72] कहो, क्या अजब के लिए तुम जल्दी मचा रहे हो उसका एक हिसा तुम्हारे करीब ही आ लगा हो 
+[27:73] हकीकत ये है के तेरा रब तो लोगों पर बड़ा फजल फरमाने वाला है, मगर अक्सर लोग शुक्र नहीं करते 
+[27:74] बिला शुभा तेरा रुब खूब जानता है जो कुछ उनके सीने अपने अंदर छिपाए हुए हैं और जो कुछ वो जाहिर करते हैं 
+[27:75] आसमान ओ ज़मीन की कोई पोशीदा चीज़ ऐसी नहीं है जो एक वाज़ेह किताब में लिखी हुई मौजुद ना हो 
+[27:76] ये वाक़िया है के ये कुरान बानी इजराइल को अक्सर उन बातों की हकीकत बताता है जिनमें वो इख्तिलाफ रखते हैं 
+[27:77] और ये हिदायत और रहमत है ईमान लाने वालों के लिए 
+[27:78] यकीनन (इसी तरह) तेरा रब इन लोगों के दरमियान भी अपने हुकुम से फैसला करडेगा. और वो ज़बरदस्त और सब कुछ जान-नय वाला है 
+[27:79] पास ऐ नबी, अल्लाह पर भरोसा रखो, यकीनन तुम सारे हक़ पर हो 
+[27:80] तुम मुर्दों को नहीं सुना सकते, ना उन दिलों तक अपनी पुकार रख सकते हो जो पीठ फेर कर भागे जा रहे होन 
+[27:81] और ना अंधों को रास्ता बता कर भटकने से बच सकते हैं। तुम तो अपनी बात उन्ही लोगों को सुना सकते हो जो हमारी आयत पर ईमान लाते हैं और फिर फरमाबरदार बन जाते हैं 
+[27:82] और जब हमारी बात पूरी होने का वक्त सामने आ जाएगा तो हम उनके लिए एक जानवर जमीन से निकालेंगे जो उनसे कलाम करेगा के लोग हमारी आयत पर यकीन नहीं करते थे 
+[27:83] और जरा तसव्वुर करो उस दिन का जब हम हर उम्मत में से एक फौज की फौज उन लोगों की घेर लाएंगे जो हमारी आयत को झुटलाया करते हैं था, फिर उनको (उनकी अक्साम (वर्गीकरण और योग्यता) के लिहाज़ से दर्जा बा दर्जा) मुरत्तब (व्यवस्थित) किया जाएगा 
+[27:84] यहां तक ​​के जब सब आ जाएंगे तो (उनका रब उनसे) पूछेगा के “तुमने मेरी आयत को झूठला दिया हलांके तुमने उनका इल्मी इहाता (समझे) ना किया था? अगर ये नहीं तो तुम क्या कर रहे थे?” 
+[27:85] और उनके ज़ुल्म की वजह से अज़ाब का वादा उन पर पूरा हो जाएगा, तब वो कुछ भी ना बोल पाएंगे
+[27:86] क्या उनको समझ में नहीं आता था कि हमने रात उनके लिए सुकून हासिल करने को बनाई थी और दिन को रोशन किया था? इसी में बहुत निशानियां थी उन लोगों के लिए जो ईमान लाते थे 
+[27:87] और क्या गुजरेगी हमें रोज जबके सुर/सूर (तुरही) फुनका जाएगा और आतंक खा जाएंगे वो सब जो आसमान और जमीन में हैं, सिवाय उन लोगों के जिनमें अल्लाह है हौल (आतंकवाद) से बचना चाहेगा। और सब कान दबाये उसके हुज़ूर हाज़िर हो जायेंगे 
+[27:88] आज तू पहाड़ों को देखता है और समझता है कि खूब जमे हुए हैं, मगर हमें वक़्त ये बादलों की तरह उड़ रहे होंगे, ये अल्लाह की क़ुदरत का करिश्मा होगा जिसने हर चीज़ को हिकमत के साथ उस्तवार (के साथ आदेश दिया) बुद्धि) किया है. वो खूब जानता है के तुमलोग क्या करते हो 
+[27:89] जो शक्स भलाई लेकर आएगा उसे ज्यादा बेहतर सिला मिलेगा और ऐसे लोग उस दिन के हॉल (आतंक/देहशत) से महफूज होंगे 
+[27:90] और जो बुराई के लिए हुए आएंगे, ऐसे सब लोग औंधे मुंह आग में फेंक जायेंगे. क्या तुमलोग इसके सिवा कोई और जजा पा सकते हो जैसा करो वैसा भरो 
+[27:91] (ऐ मुहम्मद, इनसे कहो) "मुझे तो यहीं हुकुम दिया है के इस शहर के रब की बंदगी करूं जिसने इसे हराम (पवित्र) बनाया है, और जो हर चीज का मालिक है। मुझे।" हुकुम दिया गया है के मैं मुस्लिम बन कर रहूं 
+[27:92] और ये कुरान पढ़ कर सुनाऊं” अब जो हिदायत इख्तियार करेगा वो अपने ही भले के लिए हिदायत इख्तियार करेगा, और जो गुमराह हो उसे कहदो मैं तो बस खबरदार करने वाला हूं 
+[27:93] इंसे कहो, तारीफ अल्लाह ही के लिए है, अनकरीब वो तुम्हें अपनी निशानियां दिखा देगा और तुम उन्हें पहचान लोगे, और तेरा रब बे-खबर नहीं है उन अमल से जो तुम लोग करते हो 
+
+सूरह 28: अल-कसास (द नैरेटिव) 
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+[28:1] ता सीन मीम 
+[28:2] ये किताब ए मुबीन (साफ़ किताब) की आयत हैं 
+[28:3] हम मूसा और फिरौन का कुछ हाल ठीक ठीक तुम्हें सुनाते हैं ऐसे लोगों के फ़ायदे के लिए जो ईमान लायें 
+[28:4] वक़िया ये है के फिरौन ने ज़मीन में सरकशी की और उसके बाशिन्दों को गिरोहों में तस्सीम करदिया, उन मेरे से एक गिरोह को वो ज़लील करता था, इसके लड़कों को क़त्ल करता था और उसकी लड़कियों को जीता (जिंदा) रहने देता था। फिल वकै वो मुफसिद (शरारत करने वाले) लोगों में से थे 
+[28:5] और हम ये इरादा रखते थे के मेहरबानी करें उन लोगों पर जो जमीन में जलील करके रख दिए गए थे, और उन्हें पेशवा (नेता) बना दें, और उन्हें वारिस बनाएं 
+[28:6] और ज़मीन में उनको इक्तेदार (शक्ति) बख्शें, और उनसे फिरौन ओ हमान और उनके लश्करों को वही कुछ दिखला दे जिसका उन्हें डर था
+[28:7] हमने मूसा की मां को इशारा किया के "इसको दूध पिला, फिर जब तुझे उसकी जान का खतरा हो तो इसे दरिया में डाल दे और कुछ खौफ और गम ना कर, हम इसे तेरे ही पास वापस ले आएंगे, और इसको पैगम्बरों में शामिल करेंगे" 
+[28:8] आखिर ए कार फ़िरौन के घर वालों ने उसे (दरिया से) निकाल लिया ता-के वो उनका दुश्मन और उनके लिए सबाब ए रंज बने। वक़ाई फिरौन और हमान और उसके लश्कर (अपनी तदबीर में) बदाए गलत-कार थे 
+[28:9] फिरौन की बीवी ने (उससे) कहा "ये मेरे और तेरे लिए आँखों की ठंडक है, इसे क़त्ल न करो, क्या अजब के ये हमारे लिए मुफीद साबित हो, या हम इसे बेटा ही बना लें।” और वो (अंजाम से) बेखबर थाय 
+[28:10] उधर मूसा की मां का दिल उड़ा जा रहा था, वो इस राज को फाश कर बैठती अगर हम उसकी धरस (दिल को मजबूत करते) ना बांध देते ता-के वो (हमारे वादे पर) ईमान लाने वालों में से हो 
+[28:11] उसने बच्चों की बहन से कहा इसके पीछे पीछे जा, चुनांचे वो अलग से उसको इस तरह देखती रही के (दुश्मनों को) उसका पता ना चला 
+[28:12] और हमने बच्चों पर पहले ही दूध पिलाने वालियों की चटियां (स्तन) हराम कर रखी थी। (ये हालात देख कर) उस लड़की ने उनसे कहा, "मैं तुम्हें ऐसे घर का पता बताऊं जिसके लोग इसकी परवरिश का ज़िम्मा लें और खैर ख्वाही के साथ इसे रखें?" 
+[28:13] इस तरह हम मूसा को उसकी मां के पास पलटा लाए ता-के उसकी आंखें ठंडी हों और वह घमघिन ना हो। और जान ले के अल्लाह का वादा सच्चा था, मगर अक्सर लोग इस बात को नहीं जानते 
+[28:14] फिर जब मूसा अपनी पूरी जवानी को पाहुंच गया और उसका नाशो-नुमा मुकम्मल हो गया तो हमने उसका हुकुम और इल्म अता किया। हम नए लोगों को ऐसी ही जजा देते हैं 
+[28:15] (एक रोज़) वो शहर में ऐसे वक़्त में दखल हुआ जबके एहले शहर गफ़लत में थे। वहां उसने देखा के दो आदमी लड़ रहे हैं, एक उसकी अपनी कौम का था और दूसरा उसकी दुश्मन कौम से तालुक रखता था। उसकी कौम के आदमी ने दुश्मन कौम वाले के खिलाफ उसे मदद के लिए पुकारा। मूसा ने उसको एक घुसा (मुट्ठी) मारा और उसका काम तमाम कर दिया। (ये हरकत सरज़ाद होते हाय) मूसा ने कहा "ये शैतान की करतूत है, वो सख्त दुश्मन और खुला गुमराह कुन है" 
+[28:16] फिर वो कहने लगा "ऐ मेरे रब, मैंने अपने नफ्स पर बड़ा जुल्म कर डाला, मेरी मगफिरत फरमा दे।" चुनांचे अल्लाह ने उसकी मगफिरत फरमा दी, वो गफूर ओ रहीम है 
+[28:17] मोसा ने अहद किया के "ऐ मेरे रब, ये एहसान जो तू ने मुझपर किया है इसके बाद अब मैं कभी मुजरिमों का मददगार ना बनूंगा" 
+[28:18] दूसरे रोज वो सुबह सवारे डरता और हर तरफ से खतरा पैदा हुआ शेहर मैं जा रहा था कि यकायक क्या देखता है कि वही शक्स जिसने कल उसे मदद के लिए पुकारा था आज फिर उसे पुकार रहा है। मोसा ने कहा "तू तो बड़ा ही बेकार हुआ आदमी है"
+[28:19] फिर जब मूसा ने इरादा किया के दुश्मन कौम के आदमी पर हमला किया तो वो पुकार उठा "ऐ मूसा, क्या आज तू मुझे उसकी तरह कत्ल करने लगा है, जिस तरह कल एक शक्स को कत्ल कर चुका है, तू इस मुल्क में जब्बार बन कर रहना चाहता है, इस्लाह नहीं करना चाहता” 
+[28:20] इसके बाद एक आदमी शहर के पारले सिरे (शहर का दूसरा छोर) से दौड़ता हुआ आया और बोला “मूसा, सरदारों में तेरे क़त्ल के मशवरे हो रहे हैं, यहां से निकल जा, मैं तेरा ख़ैर ख़्वा (शुभचिंतक) हूं” 
+[28:21] ये खबर सुनते ही मूसा डरता और सहमत निकल खड़ा हुआ और उसने दुआ की कि "ऐ मेरे रब, मुझे जालिमों से बचा" 
+[28:22] (मिस्र से निकल कर) जब मूसा ने मदियां का रुख किया तो उसने कहा "उम्मीद है के मेरा रब मुझे ठीक रास्ते पर डाल देगा" 
+[28:23] और जब वो मदियां के कुनवें (ठीक है) पर पाहुंचा तो उसने देखा के बहुत से लोग अपने जानवरों को पानी पिला रहे हैं, और उन्हें अलग एक तरफ दो औरतें अपने जानवरों को रोक रही हैं। मूसा ने औरतों से पूछा “तुम्हें क्या परेशानी है?” उनहोंने कहा "हम अपने जानवरों को पानी नहीं पिला सकते जब तक ये चारवाहे अपने जानवर निकल कर न ले जाएं, और हमारे वालिद एक बहुत बूढ़े आदमी हैं" 
+[28:24] ये सुनकर मूसा ने उनके जानवरों को पानी पिला दिया, फिर एक जगह की जगह जा बैठा और बोला "परवरदिगार, जो खैर भी तू मुझपर नाज़िल करदे मैं उसका मोहताज हूं।" 
+[28:25] (कुछ दिन ना गुजरी थी के) उन दोनो औरतों में से एक शरम ओ हया से चलती हुई उसके पास आई और कहने लगी "मेरे वालिद आप को बुला रहे हैं ता-के आपने हमारे जानवरों को पानी जो पिलाया है उसका अजर आपको दें।" मूसा जब उसके पास पहुंचा और अपना सारा क़िस्सा उसे सुनाया तो उसने कहा "कुछ खौफ ना करो, अब तुम ज़ालिमों से बच निकले हो।" 
+[28:26] दोनों औरतों में से एक ने अपने बाप से कहा "अब्बाजान इस शक्स को नौकर रख लीजिये, बेहतरीन आदमी जिसे आप मुलाजिम रखें वही हो सकता है जो मजबूत और अमानत-दार हो" 
+[28:27] उसके बाप ने (मूसा से) कहा "मैं चाहता हूं के" अपनी दो बेटियों में से एक का निकाह तुम्हारे साथ कर्दों बशारत ये के तुम आठ साल तक मेरे साथ मुलाकात करो, और अगर दस साल पूरे करदो तो ये तुम्हारी मर्जी है, तुम इंशा अल्लाह मुझे नहीं चाहते। 
+[28:28] मोसा ने जवाब दिया "ये बात मेरे और आपके दरमियान ताई हो गई। दोनों मुद्दतों में से जो भी मैं पूरी तरह से उसके बाद फिर कोई ज्यादा मुझपर ना हो, और जो कुछ क़ौल ओ क़रार हम कर रहे हैं अल्लाह उसपर निगहबान है।" 
+[28:29] जब मूसा ने मुद्दत पूरी कर दी और वो अपने एहल-ओ-अयाल (परिवार) को लेकर चला तो तूर की जानिब उसको एक आग नजर आई। उसने अपने घर वालों से कहा "ठहरो, मैंने एक आग देखी है, शायद मैं वहां से कोई खबर ले आऊं हां इस आग से कोई अंगारा ही उठा लाओ जैसे तुम ताप सको।”
+[28:30] वहां पाहुंचा तो वाड़ी के दहिने किनारे पर मुबारक खित्ते में एक दरख्त से पुकारा गया के "ऐ मूसा, मैं ही अल्लाह हूं, सारे जहां वालों का मालिक" 
+[28:31] और (हुकुम दिया गया के) "फेंक दे अपनी लाठी।" जूनी के मूसा ने देखा के वो लाठी सांप (साँप) की तरह बाल खा रही है तो वो पीठ फेर कर भागा और उसने मुड़ कर भी ना देखा। (इरशाद हुआ) "मूसा, पलट आ और खौफ ना कर, तू बिल्कुल महफूज है 
+[28:32] अपना हाथ गिरेबान में डाल, चमकता हुआ निकलेगा बिना किसी तकलीफ के और खौफ से बचने के लिए अपना बाजू बेंच ले। ये दो रोशन निशानियां हैं तेरे रुब की।" तरफ से फिरौन और उसके दरबारियों के सामने पेश करने के लिए, वो बड़े ही नफ़रमान लोग हैं” 
+[28:33] मूसा ने अर्ज़ किया “मेरे आका, मैं तो उनका एक आदमी क़त्ल कर चूका हूँ, डरता हूँ के वो मुझे मार डालेंगे 
+[28:34] और मेरा भाई हारून मुझसे ज़्यादा ज़ुबान अवार (जीभ की वाकपटुता) है, उसे मेरे साथ मददगार के तौर पर भेज ता-के वो मेरी तायद (समर्थन) करे, मुझे अंदेशा है के वो लोग मुझे झुठलाएँगे।” 
+[28:35] फरमाया "हम तेरे भाई के जरूर से तेरा हाथ मजबूत करेंगे और तुम दोनो को ऐसी सत्ता बक्शेंगे के वो तुम्हारा कुछ न बिगाड़ सकेगे। हमारी निशानियों के जोर से गलाबा (विजय) तुम्हारे और तुम्हारे जोड़े का ही होगा" 
+[28:36] फिर जब मूसा उन लोगों के पास हमारी खुली-खुली निशानियां लेकर पहुंच गया तो उनको ने कहा के ये कुछ नहीं है मगर बनवाती जादू और ये बातें तो हमने अपने बाप दादा के जमाने में कभी सुनी ही नहीं 
+[28:37] मूसा ने जवाब दिया "मेरा रब उस लड़के के हाल से खूब वाकिफ" है जो उसकी तरफ से हिदायत लेकर आया है और वही बेहतर जानता है के आखिरी अंजाम किसका अच्छा होना है, हक ये है के जालिम कभी फलाह नहीं पाते।” 
+[28:38] और फिरौन ने कहा "ऐ एहले दरबार मैं तो अपने सिवा तुम्हारे किसी खुदा को नहीं जानता। हमन, ज़रा ईंटें (ईंटें) पकावा कर मेरे लिए एक ऊंची इमारत तो बनवा, शायद के उसपर चढ़ कर मैं मूसा के खुदा को देख सकता हूं, मैं तो इसे झूठा हाय" समझता हूं" 
+[28:39] उसने और उसके लश्करों ने जमीन में बिना किसी हक के अपनी बदनामी का घमंड किया और समझ के उन्हें कभी हमारी तरफ पलटना नहीं है 
+[28:40] आखिर-ए-कार हमने उसे और उसके लश्करों को पकड़ा और समंदर में फेंक दिया, अब देखलो के उन जालिमों का कैसा अंजाम हुआ 
+[28:41] हमने उन्हें जहन्नुम की तरफ दावत देने वाले पेश-रो बना दिया और कयामत के रोज वो कहीं से कोई मदद न पा सकेंगे 
+[28:42] हमने इस दुनिया में उनके पीछे लानत लगा दी और कयामत के रोज वो बड़ी क़बाहत (अजीब दुविधा) में मुब्तिला होंगी 
+[28:43] पिछली नसलों को हलाक करने के बाद हमने मूसा को किताब अता की, लोगों के लिए बसेरातों का सामान (ज्ञान का साधन) बना कर, हिदायत और रहमत बना कर, ता-के शायद लोग सबक हासिल करें
+[28:44] (ऐ मुहम्मद) तुम हमें वक्त मगरबी गोशे (पश्चिमी तरफ) में मौजुद ना था जब हमने मूसा को ये फरमान ए शरीयत अता किया और ना तुम शहीदों (गवाहों) में शामिल थे 
+[28:45] बल्के इसके बाद (तुम्हारे जमाने तक) हम बहुत से नासलें (पीढ़ियां) उठा चुके हैं और बहुत सारा जमाना गुजर चूका है। तुम एहले मदियां के दरमियान भी मौजूद ना थे के उनको हमारी आयतें सुना रहे हो, मगर (उस वक्त की ये खबरें) भेजने वाले हम हैं 
+[28:46] और तुम तूर के दामन में भी उस वक्त मौजूद ना थे जब हमने (मूसा को पहली मरतबा) पुकारा था, मगर ये तुम्हारे रब की रहमत है (के तुमको ये मालूमात दी जा रही है) ता-के तुम उन लोगों को मुतनब्बेह (चेतावनी) करदो जिनके पास तुमसे पहले कोई मुतनब्बेह (चेतावनी) करने वाला नहीं आया, शायद के वो होश में आएं 
+[28:47] (और ये हमने इसलिए किया के) कहीं ऐसा ना हो के उनके अपने किए कार्टूनों की बदौलत कोई मुसीबत जब उन पर आए तो वो कहें "ऐ परवरदिगार, तू-ने क्यों ना हमारी तरफ कोई रसूल भेजा के हम तेरी आयत की जोड़ी बनाते और एहले ईमान में से होते।" 
+[28:48] मगर जब हमारे हां से हक उनके पास आ गया तो वो कहने लगे 'क्यूं ना दिया गया इसको वही कुछ जो मूसा को दिया गया था?' क्या ये लोग उसका इंकार नहीं कर चुके हैं जो इस पहले मूसा को दिया गया था? उनहों ने कहा "दोनों जादू हैं जो एक दूसरे की मदद करते हैं" और कहा "हम किसी को नहीं मानते।" 
+[28:49] (ऐ नबी) इनसे कहो "अच्छा तो लाओ अल्लाह की तरफ से कोई किताब जो इन दोनों से ज्यादा हिदायत बक्शने वाली हो अगर तुम सच्चे हो, मैं उसकी जोड़ी इख्तियार करूंगा।" 
+[28:50] अब अगर वो तुम्हारा ये मुतलबा पूरा नहीं करता तो समझ लो के दर असल ये अपनी ख्वाहिशत के जोड़े हैं, और हमारे शक्स से बढ़कर कौन गुमराह होगा जो खुदाई हिदायत के बिना बस अपनी ख्वाहिश की जोड़ी बनाए? अल्लाह ऐसे ज़ालिमों को हरगिज़ हिदायत नहीं बख्शता 
+[28:51] और (नसीहत की) बात पै डर पै हम उन्हें पाहुंचा चुके हैं ता-के वो गफ़लत से बेदार हैं 
+[28:52] जिन लोगों को इस पहले हमने किताब दी थी वो इस (कुरान) पर ईमान लाते हैं 
+[28:53] और जब ये उनको सुनाया जाता है है तो वो कहते हैं के "हम इसपर ईमान लाए, ये वाकाई हक़ है हमारे रब की तरफ से, हम तो पहले ही से मुस्लिम हैं" 
+[28:54] ये वो लोग हैं जिनका अजर दो बार दिया जाएगा हमें साबित क़दामी के बदले जो उन्होन ने दिखाया। वो बुराइयों को भलाइ से दफा करते हैं और जो कुछ रिज्क हमने उन्हें दिया है उसमें से खर्च करते हैं 
+[28:55] और जब उन्होन ने बेहुदा बात सुनी तो ये कह कर उसे किनारा कश हो गए के "हमारे अमल हमारे लिए और तुम्हारे अमल तुम्हारे लिए, तुमको सलाम है, हम जाहिलों का सा तरीक़ा इख़्तियार करना नहीं चाहिए।” 
+[28:56] "ऐ नबी, तुम जिसे चाहो उसे हिदायत नहीं दे सकते, मगर अल्लाह जिसे चाहता है हिदायत देता है और वो उन लोगों को खूब जानता है जो हिदायत कबूल करने वाले हैं।"
+[28:57] वो कहते हैं "अगर हम तुम्हारे साथ इस हिदायत की जोड़ी इख्तियार कर लें तो अपनी ज़मीन से उचक ले जायेंगे।" क्या ये वक़िया नहीं है कि हमने एक पुर-अमन हरम (मक्का) को इनके लिए जाये क़ियाम बना दिया जिसकी तरफ हर तरह के समारात (प्रावधान) खिंचे चले आते हैं, हमारी तरफ से रिज़क के तौर पर? मगर इनमें से अक्सर लोग जानते नहीं हैं 
+[28:58] और कितनी ही ऐसी बस्तियां हम तबाह कर चुके हैं जिनके लोग अपनी अर्थव्यवस्था (अर्थव्यवस्था) पर इत्र गए थे सो देखलो, वो उनके मास्कन पड़े हुए हैं जिन में उनके बाद काम ही कोई बसा है। आख़िर ए कार हम ही वारिस हो कर रहे 
+[28:59] और तेरा रब बस्तियों को हलाक करने वाला ना था जब तक उनके मरकज में एक रसूल ना भेज देता जो उनको हमारी आयतें सुनाता, और हम बस्तियों को हलाक करने वाले ना वे जब तक के उनके रहने वाले जालिम ना हो जाते हैं 
+[28:60] तुम लोगों को जो कुछ भी दिया है वो मेहज़ दुनिया की जिंदगी का सामान और उसकी ज़ीनत (श्रृंगार) है, और जो कुछ अल्लाह के पास है वो इसके लिए बेहतर और बाकी रास्ता है। क्या तुम लोग अक्ल से काम नहीं लेते 
+[28:61] भला वो शक्स जिसने अच्छा वादा किया हो, और वो उसे पाने वाला हो कभी उस शक्स की तरह हो सकता है जिसे हमने सिर्फ हयात-ए-दुनिया का सर-ओ-समान दे दिया हो, और फिर वो कयामत के रोज़ सज़ा के लिए पेश किया जाने वाला हो 
+[28:62] और (भूल ना जाएं ये लोग) उस दिन को जबके वो इनको पुकारेगा और पूछेगा "कहां है मेरे वो शरीक जिनका तुम गुमान रखते थे?" 
+[28:63] ये क़ौल जिनपर चस्पां होगा वो कहेंगे "ऐ हमारे रब, बहकावे यही लोग हैं जिनको हमने गुमराह किया था, उन्होंने हमें उसी तरह गुमराह किया जैसे हम खुद गुमराह हुए। हम आप के सामने बारात (अलगाव) का इज़हार करते हैं। ये हमारी तो बंदगी नहीं करते थे” 
+[28:64] फिर इनसे कहा जाएगा के पुकारो अब अपने ठहरे हुए शेयरों को। ये उन्हें पुकारेंगे मगर वो इनको कोई जवाब ना देंगे और ये लोग अजब देख लेंगे। काश ये हिदायत इख्तियार करने वाले होते 
+[28:65] और (फरामोश ना करें ये लोग) वो दिन जबके वो इनको पुकारेगा और पूछेगा के "जो रसूल भेजे गए थे उन्होंने तुमने क्या जवाब दिया था?" 
+[28:66] हमें वक्त कोई जवाब इनको न समझ आएगा और न ये आपस में एक दूसरे से पूछ ही पाएंगे 
+[28:67] अलबत्ता जिसने आज तौबाह कार्ली और ईमान ले आया और नेक अमल किया वही ये तवक्को (उम्मीद) कर सकता है के वहां फलाह पाने वालों मुझसे होगा 
+[28:68] तेरा रब अदा करता है जो कुछ चाहता है। और (वो खुद ही अपने काम के लिए जिसे चाहता है) मुंतखब (चुनें) कर लेता है। ये इंतेखाब इन लोगों के करने का काम नहीं है, अल्लाह पाक है और बहुत बाला-तरर है हमसे शिर्क से जो ये लोग करते हैं 
+[28:69] तेरा रब जानता है जो कुछ ये दिलों में छुपे हुए हैं और जो कुछ ये जाहिर करते हैं
+[28:70] वही एक अल्लाह है जिसके सिवा कोई इबादत का मुस्तहिक नहीं। उसके लिए हम्द है दुनिया में भी और आखिरी में भी, फरमा रवाई उसी की है और उसकी तरफ तुम सब पलटाये जाने वाले हो 
+[28:71] ऐ नबी, इनसे कहो कभी तुम लोगों ने गौर किया के अगर अल्लाह कयामत तक तुम हमेशा के लिए रात तारी करदे अल्लाह के सिवा वो कौन सा माबूद है जो तुम्हें रोशनी ला दे? क्या तुम सुनते नहीं हो 
+[28:72] इनसे पूछो, कभी तुमने सोचा के अगर अल्लाह कयामत तक तुम हमेशा के लिए दिन तारी करदे तो अल्लाह के सिवा वो कौन सा माबूद है जो तुम्हें रात ला दे ता-के तुम हमें सुकून हासिल कर सको? क्या तुमको सूझता नहीं 
+[28:73] ये उसी की रहमत है कि उसने तुम्हारे लिए रात और दिन बनाई ता-के तुम (रात में) सुकून हासिल करो और (दिन को) अपने रब का फज़ल तलाश करो। शायद के तुम शुक्र गुज़ार बनो 
+[28:74] (याद रखें ये लोग) वो दिन जबके वो इन्हें पुकारेगा फिर पूछेगा "कहाँ है मेरे वो शरीक जिनका तुम गुमान रखते थे?" 
+[28:75] और हम हर उम्मत में से एक गवाह निकाल लेंगे फिर कहेंगे के "लाओ अब अपनी दलील"। हमें वक़्त मालूम हो जाएगा के हक़ अल्लाह की तरफ है, और गम (गायब) हो जाएंगे इनके वो सारे झूठ जो इन्हों ने ग़ध रक्खे थे 
+[28:76] ये एक वक़िया है के क़ारून मूसा की क़ौम का एक शक्स था, फिर वो अपनी क़ौम के ख़िलाफ़ व्यंग्य हो गया और हमने उसको इतने खज़ाने (खजाने) दे रखे थे कि उनकी कुंजियाँ (चाबियाँ) ताकतवार आदमियों की एक जमात मुश्किल से उठ सकती थी। एक दफ़ा जब उसकी क़ौम के लोगों ने उसे कहा " फूलना (इतराना/खुशी) जा, अल्लाह फूलने (इतराने) वालों को पसंद नहीं करता 
+[28:77] जो माल अल्लाह ने तुझे दिया है उसे आख़िरत का घर बनाने की फ़िक्र कर, और दुनिया में से भी अपना हिसा फ़रामोश न कर। एहसान कर जिस तरह अल्लाह ने तेरे साथ एहसान किया है, और ज़मीन में फ़साद बरपा करने की कोशिश ना कर, अल्लाह मुफ़्सिदों (फ़साद करने वालों) को पसंद नहीं करता।'' 
+[28:78] तो उसने कहा "ये सब कुछ तो मुझे उस इल्म की बिना पर दिया गया है जो मुझको हासिल है"। क्या उसको ये इल्म ना था कि अल्लाह उसे पहले बहुत से ऐसे लोगों को हलाक कर चुका है जो उसे ज्यादा कुव्वत और जमीयत रखता था? मुजरिम से तो उनके गुनाह नहीं पूछे जाते 
+[28:79] एक रोज़ वो अपनी क़ौम के सामने अपने पूरे थेट में निकला। जो लोग हयात ए दुनिया के तालिब थे वो उसे देख कर कहने लगे "काश हमें भी वही कुछ मिलता जो क़ारून को दिया गया है, ये तो बड़ा नसीबे वाला है।" 
+[28:80] मगर जो लोग इल्म रखने वाले थे वो कहने लगे "अफसोस तुम्हारे हाल पर, अल्लाह का सवाब बेहतर है हमारे शक्स के लिए जो ईमान लाए और नेक अमल करे, और ये दौलत नहीं मिलती मगर सब्र करने वालों को।" 
+[28:81] आख़िर-ए-कार हमने उसे और उसके घर को ज़मीन पर धांसा दिया, फिर कोई उसके हामियों (समर्थकों) का गिरो ​​ना था जो अल्लाह के मुक़ाबले में उसकी मदद को आता, और ना वो खुद अपनी मदद आप कर सका
+[28:82] अब वही लोग जो कल उसकी मंजिल की तमन्ना कर रहे थे कहने लगे "अफ़सोस, हम भूल गए थे के अल्लाह अपने बंदों में से जिसका रिज़क चाहता है कुशादा करता है और जिसे चाहता है नपा-तुला देता है। अगर अल्लाह ने हमपर एहसान न किया होता तो हमें भी ज़मीन मैं धोखा देता हूं। अफ़सोस हमको याद ना रहा के काफिर फलाह नहीं पाया करते।” 
+[28:83] वो आख़िरत का घर तो हम उन लोगों के लिए मखसूस कर देंगे जो ज़मीन में अपनी बदाई नहीं चाहते और ना फ़साद करना चाहते हैं। और अंजाम की भलाई मुत्तक़िन ही के लिए है 
+[28:84] जो कोई भलाई लेकर आएगा उसके लिए उसे बेहतर भलाई है, और जो बुराई लेकर आए तो बुराइयां करने वालों को वैसा ही बदला मिलेगा जैसा अमल वो करता था 
+[28:85] ऐ नबी, यकीन जानो के जिसने ये कुरान तुमपर फ़र्ज़ किया है वो तुम्हें एक बेहतर अंजाम देने वाला है। लोगों से कहदो के "मेरा रब खूब जानता है के हिदायत लेकर कौन आया और खुली गुमराही में कौन मुबतला है।" 
+[28:86] तुम इस बात के हरगिज उम्मीद न थे के तुमपर किताब नाज़िल की जाएगी। ये तो महज़ तुम्हारे रब की मेहरबानी से (तुम्हारे नाज़िल हुई है), पास तुम काफिरों के मददगार ना बनो 
+[28:87] और ऐसा कभी ना होने पाए के ए लल्लाह की आयत जब तुम नाज़िल हूं तो कुफ्फार तुम्हें उनसे बाज़ रखेंगे। अपने रब की तरफ़ दावत दो और हरगिज़ मुशरिकों में शामिल ना हो 
+[28:88] और अल्लाह के साथ किसी दूसरे माबूद को ना पुकारो। उसके सिवा कोई माबूद नहीं है। हर चीज़ हलाक होने वाली है सिवाए उसकी जात के। फ़रमान रवाई उसी की है और उसकी तरफ तुम सब पलटे जाने वाले हो 
+
+सूरह 29: अल-अनकाबुत (मकड़ी) 
+------------------------------------------------ 
+[29:1] अलिफ़ लाम मीम 
+[29:2] क्या लोगों ने ये समझ रखा है के वो बस इतना कहने पर छोड़ दिए जाएंगे के "हम ईमान लाए" और उनको आज़माया ना जाएगा 
+[29:3] हलांके हम उन सब लोगों की आज़माइश कर चुके हैं जो इनसे पहले गुज़रे हैं। अल्लाह को तो जरूर ये देखना है कि सच्चे कौन हैं और झूठे कौन 
+[29:4] और क्या वो लोग जो बुरी हरकतें कर रहे हैं ये समझ बैठे हैं के वो हमसे बाजी ले जाएंगे? बड़ा गलत हुकुम है जो वो लगा रहे हैं 
+[29:5] जो कोई अल्लाह से मिलने की तवक्कू (उम्मीद) रखता है (उसे मालूम होना चाहिए के) अल्लाह का मुकर्रर किया हुआ वक्त आने ही वाला है। और अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है 
+[29:6] जो शक्स भी मुजाहिदा (संघर्ष) करेगा अपने ही भले के लिए करेगा। अल्लाह यकीनन दुनिया जहां वालों से बे-नियाज़ (इच्छाओं से मुक्त) है 
+[29:7] और जो लोग ईमान लाएंगे और नेक अमल करेंगे उनकी बुराइयां हम उनसे दूर कर देंगे और उन्हें उनके बेहतरी अमल की जजा देंगे
+[29:8] हमने इंसान को हिदायत दी है कि अपने वाल्दैन (माता-पिता) के साथ नेक सुलूक करें, लेकिन अगर वो तुझ पर जोर दें के तू मेरे साथ किसी ऐसे (माबूद) को शरीक ठहरे जैसे तू (मेरे शरीक की हकीकत से) नहीं जानता तो उनकी इताअत ना कर। मेरी ही तरफ तुम सबको पलट कर आना है। फिर मैं तुम्हें बता दूंगा के तुम क्या करते रहेंगे हो 
+[29:9] और जो लोग ईमान लाए होंगे और जिन्होन ने कोई अमल नहीं किया होगा उनको हम जरूर सालिहें में दखल करेंगे 
+[29:10] लोगों में से कोई ऐसा है जो कहता है के हम ईमान लाए होंगे अल्लाह पर, मगर जब वो अल्लाह के मामले मैं सताया गया तो उसने लोगों की डाली हुई आजमाइश को अल्लाह के अज़ाब की तरह समझ लिया। अब अगर तेरे रब की तरफ से फतह-ओ-नुसरत आ गई तो यही शक्स कहेगा "हम तो तुम्हारे साथ थे"। क्या दुनिया वालों के दिलों का हाल अल्लाह को बा-खूबी मालूम नहीं है 
+[29:11] और अल्लाह को तो जरूर ये देखना ही है कि ईमान लाने वाले कौन हैं और मुनाफिक कौन 
+[29:12] ये काफिर लोग ईमान लाने वालों से कहते हैं कि तुम हमारे तरीक़े की जोड़ी करो और तुम्हारी खतों (पापों) को हम अपने ऊपर ले लेंगे। हलांके उनकी खतों में से कुछ भी वो अपने ऊपर लेने वाले नहीं हैं, वो क़त-एन झूठ कहते हैं 
+[29:13] हां ज़रूर वो अपने बोझ भी उठाएंगे और अपने बोझ के साथ बहुत से दूसरे बोझ भी। और कयामत के रोज़ यक़ीनन उनसे इफ्तारा परदाज़ियों (बोहतान/फैब्रिकेशन) में कि बाज़-पुर्स होगी जो वो करते रहे हैं 
+[29:14] हमने नूह को उसकी क़ौम की तरफ़ भेजा और वो पचास (पचास) कम एक हज़ार बरस (950 साल) उनके दरमियान रहा। आख़िर ए कार उन लोगों को तूफ़ान ने आ घेरा इस हाल में के वो ज़ालिम थे 
+[29:15] फिर नूंह को और कश्ती वालों को हमने बचाया लिया और उसे दुनिया वालों के लिए एक निशान ए इब्रत (पाठ) बनाकर रख दिया 
+[29:16] और इब्राहिम को भेजा जबके उसने अपनी क़ौम से कहा "अल्लाह की बंदगी करो और उससे डरो, ये तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम जानो 
+[29:17] तुम अल्लाह को छोड़ कर जिनकी पूजा कर रहे हो वो तो महज़ बुथ (मूर्तियां/मूर्तियां) हैं और तुम एक झूठ गढ़ रहे हो। दर हकीकत अल्लाह के सिवाय जिनके तुम प्यार करते हो वो तुम्हें कोई रिज़क भी देने का इख्तियार नहीं रखते। अल्लाह से रिज़्क मांगो और उसकी बंदगी करो और उसका शुक्र अदा करो। उसकी तरफ तुम पलटाये जाने वाले हो 
+[29:18] और अगर तुम झुटलाते हो तो तुमसे पहले बहुत सी कौमें झुटला चुकी हैं। और रसूल पर सफ़ सफ़ पैग़ाम पाहुंचा देने के सिवा कोई ज़िम्मेदारी नहीं है।” 
+[29:19] क्या इन लोगों ने कभी देखा ही नहीं है कि अल्लाह किस तरह ख़ल्क़ की इब्तिदा करता है, फिर उसका इरादा (दोहराना) करता है? यकीनन ये [इआदा तो (किसी चीज़ की रचना को दोहराना)] अल्लाह के लिए आसां तरर है 
+[29:20] इनसे कहो के ज़मीन में चलो फिरो और देखो के हमें किस तरह ख़ल्क़ की इब्तिदा की है। फिर अल्लाह बार-ए-दिगार भी जिंदगी बक्शेगा। यकीनन अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है
+[29:21] जिसे चाहे सजा दे और जिसपर चाहे रहम फरमाये। उसकी तरफ तुम फेरे जाने वाले हो 
+[29:22] तुम ज़मीन में अजीज (सख्ती) करने वाले हो ना आसमान में। और अल्लाह से बचाने वाला कोई सरपरस्त और मददगार तुम्हारे लिए नहीं है 
+[29:23] जिन लोगों ने अल्लाह की आयत का और उससे मुलाकात का इंकार किया है वो मेरी रहमत से मयुस हो चुके हैं, और उनके लिए दर्दनक सजा है 
+[29:24] फिर उसकी क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ ना था के उन्हें कहा “कत्ल करदो इसे या जला डालो इसको”। आख़िर ए कर अल्लाह ने उसे आग से बचा लिया। यकीनन इस में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाने वाले हैं 
+[29:25] और उसने कहा "तुमने दुनिया की जिंदगी में अल्लाह को छोड़ कर बुथों (मूर्तियों) को अपने दरमियान मुहब्बत का जरिया बना लिया है मगर कयामत के रोज तुम एक दूसरे का इंकार और एक दूसरा पर लानत करोगे और आग तुम्हारा ठिकाना होगी, और कोई तुम्हारा मददगार ना होगा।” 
+[29:26] हमें वक्त लुट ने उसको माना और इब्राहिम ने कहा मैं अपने रब की तरफ हिजरत (पलायन) करता हूं। वो ज़बरदस्त है और हकीम है 
+[29:27] और हमने उसे इशाक (इसहाक) और याकूब (जैकब) (जैसी औलाद) इनायत फरमायी और उसकी नाक में नुबुवत और किताब रख दी, और उसे दुनिया में उसका अजर अता किया और आख़िरत में वो यकीनन सालिहें मुझसे होगा 
+[29:28] और हमने लुट को भेजा जबके उसने अपनी क़ौम से कहा "तुम तो वो फहाश काम करते हो जो तुमसे पहले दुनिया वालों में से किसी ने नहीं किया है 
+[29:29] क्या तुम्हारा हाल ये है के मर्दों के पास जाते हो (अपनी वासना को संतुष्ट करने के लिए), और Raahzani (हाईवे डकैती) करते हो, और अपनी मजलिसों में बुरे काम करते हो?” फिर कोई जवाब उसकी क़ौम के पास इसके सिवा ना था के अनहोन ने कहा "ले आ अल्लाह का अज़ाब अगर तू सच्चा है" 
+[29:30] लूट ने कहा "ऐ मेरे रब, इन मुफसिद (शरारती) लोगों के मुक़ाबले में मेरी मदद फरमा" 
+[29:31] और जब हमारे फरिश्ते (दूत/संदेशवाहक) इब्राहीम के पास बशारत (खुशखबरी) लेकर पहुंचे तो उन्हें ने उसे कहा, "हम इस बस्ती के लोगों को हलाक करने वाले हैं, इसके लोग सख्त जालिम हो चुके हैं।" 
+[29:32] इब्राहीम ने कहा "वहां तो लूट मौजूद है"। अनहोन ने कहा: "हम खूब जानते हैं कि वहां कौन कौन है। हम उसे और उसकी बीवी के सिवा उसके बाकी घर वालों को बचा लेंगे"। उसकी बीवी पीछे रह जाने वालों में से थी 
+[29:33] फिर जब हमारे फरिश्ते (दूत/संदेशवाहक) लूट के पास पहुंचें तो उनकी आमद पर वो सख्त परेशान और दिल तंग हुआ। उनहों ने कहा “ ना डरो और ना रांझ करो, हम तुम्हें और तुम्हारे घर वालों को बचा लेंगे, सिवाय तुम्हारी बीवी के जो पीछे रह जाने वालों में से है 
+[29:34] हम इस बस्ती के लोगों पर आसमान से अजब नाज़िल करने वाले हैं हमें फ़िस्क (बुराई) के बदौलत जो ये करते रहते हैं” 
+[29:35] और हमने हमें बस्ती की एक खुली निशानी छोड़ दी है उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं
+[29:36] और मदयां की तरफ हमने उनके भाई शोएब को भेजा।उसने कहा "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो और रोज़ ए आख़िर के उम्मीद-वार रहो और ज़मीन में मुफ़सीद बन कर ज़्यादतिया (शरारत) ना करते फिरो" 
+[29:37] मगर उन्होन ने उसे झुटला दिया. आख़िर ए कार एक सच ज़लज़ले ने उन्हें आ लिया और वो अपने घरों में पड़े के पड़े रह गए 
+[29:38] और आद ओ समूद को हमने हलाक किया, तुम वो मक़ामत देख चुके हो जहां वो रहते थे। उनके आमाल को शैतान ने उनके लिए ख़ुशनुमा बना दिया और उन्हें राह ए रास्ते से बरगश्ता करदिया, हलांके वो होश-गोश रखते थे 
+[29:39] और क़ारून ओ फिरौन ओ हमान को हमने हलाक किया। मूसा उनके पास बैयिनत (खुली निशानियां) लेकर आया मगर उनहोन ने जमीन में अपनी बदाई का ज़म किया हलंके वो सबकत ले जाने (क़ाबू से निकल जाने) वाले ना थे 
+[29:40] आख़िर ई कर हर एक को हमने उनके गुनाह में पकड़ा। फिर उनमें से किसी पर हमने पथराव (पत्थरों की बौछार) करने वाली हवा भेजी, और किसी को एक ज़बरदस्त धमाके ने आ लिया, और किसी को हमने ज़मीन में ढसा दिया, और किसी को डर (डूब) दिया। अल्लाह अनपर ज़ुल्म करने वाला ना था, मगर वो खुद ही अपना ऊपर ज़ुल्म कर रहे थे 
+[29:41] जिन लोगों ने अल्लाह को छोड़ कर दूसरे सरपरस्त (रक्षक) बना लिए हैं उनकी मिसाल मख़दी (मकड़ी) जैसी है जो अपना एक घर बनाती है, और सब घरों से ज़्यादा कमज़ूर घर मख़दी (मकड़ी) का घर ही होता है, काश ये लोग इलम रखते हैं 
+[29:42] ये लोग अल्लाह को छोड़ कर जिस चीज़ को भी पुकारते हैं अल्लाह उसे ख़ूब जानता है और वही ज़बरदस्त और हकीम है 
+[29:43] ये मिसालें (उदाहरण) हम लोगों की फहमिश (समझ) के लिए देते हैं, मगर उनको वही लोग समझते हैं जो इलम रखने वाले हैं 
+[29:44] अल्लाह ने आसमान और ज़मीन को बरहक़ अदा किया है, दर हकीकत इस में एक निशानी है एहले ईमान के लिए 
+[29:45] (ऐ नबी) तिलावत करो इस किताब की जो तुम्हारी तरफ वही के ज़ैरे से भेज दी गई है। और नमाज़ क़याम करो, यकीनन नमाज़ फ़हाश (बेहयायी) और बुरे कामों से रुकती है। और अल्लाह का ज़िक्र इस से भी ज़्यादा बड़ी चीज़ है। अल्लाह जानता है जो कुछ तुमलोग करते हो 
+[29:46] और एहले किताब से बेहस न करो मगर उम्र तरीक़े से, सिवाए उन लोगों के जो उन में से ज़ालिम हों। और उनसे कहो के "हम ईमान लाए हैं उस चीज पर भी जो हमारी तरफ भेज गई है और उस चीज पर भी जो तुम्हारी तरफ भेज गई थी। हमारा खुदा और तुम्हारा खुदा एक ही है और हम उसके मुसलमान (फरमा बरदार) हैं" 
+[29:47] (ऐ नबी) हमने इसी तरह तुम्हारी तरफ किताब नाज़िल की है। इस लिए वो लोग जिनको हमने पहली किताब दी थी वो इसपर ईमान लाते हैं, और इन लोगों में से भी बहुत से इसपर ईमान ला रहे हैं। और हमारी आयत का इंकार सिर्फ काफिर ही करते हैं
+[29:48] (ऐ नबी) तुम इसे पहले कोई किताब नहीं पढ़ते थे और ना अपने हाथ से लिखते थे, अगर ऐसा होता तो बातिल परस्त लोग (झूठ के समर्थक) शक में पढ़ सकते थे 
+[29:49] दर-असल ये रोशन निशानियां हैं उन लोगों के दिलों में जिन्हें इल्म बख्शा गया है। और हमारी आयत का इंकार नहीं करते मगर वो जो जालिम हैं 
+[29:50] ये लोग कहते हैं के "क्यों ना उतारी गई इस शक्स पर निशानियां इसके रब की तरफ से?" कहो "निशानियां तो अल्लाह के पास हैं और मैं सिर्फ खबरदार करने वाला हूं खोल खोल कर" 
+[29:51] और लोगों के लिए ये (निशानी) काफी नहीं है के हमने तुमपर किताब नाज़िल की जो इन्हें पढ़ कर सुनायी जाती है? दर हक़ीक़त इस में रहमत है और हिदायत है उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं 
+[29:52] (ऐ नबी) कहो के "मेरे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह गवाही के लिए काफ़ी है। वो आसमान और ज़मीन में सब कुछ जानता है। जो लोग बातिल को मानते हैं और अल्लाह से कुफ्र करते हैं वही खसरे (नुक्सान) में रहने वाले हैं।” 
+[29:53] ये लोग तुमसे अज़ाब जल्दी लेन का मुतालबा करते हैं। अगर एक वक्त ए मुकर्रर ना करदिया गया होता तो इनपर अज़ाब आ चूका होता, और यकीनन (अपने वक्त पर) वो आ कर रहेगा अचानक, इस हाल में के इन्हें खबर भी ना होगी 
+[29:54] ये तुमसे अज़ाब जल्दी लेन का मुतलबा करते हैं, हलाँके जहन्नुम इन काफिरों को घेरे में ले चुकी है 
+[29:55] (और इन्हें पता चलेगा) हमें रोज जबके अजब इन्हें ऊपर से भी ढांक लेगा और पांव के नीचे से भी और कहेगा के अब चक्खो मजा उन कार्टूनों का जो तुम करते थे 
+[29:56] ऐ मेरे बंदन जो ईमान लाए हो, मेरी ज़मीन वसीह है, पास तुम मेरी ही बंदगी बजा लाओ 
+[29:57] हर मुतनफ्फिस को मौत का मजा चखना है, फिर तुम सब हमारी ही तरफ पलटा कर ले जाओगे 
+[29:58] जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्हों ने नीक अमल किए हैं उनको हम जन्नत की बुलंद ओ बाला इमरतों (इमारतें/महल) में रखेंगे जिनके आला में नेह्रेन बहती होंगी, वहां वो हमेशा रहेंगे। क्या है उम्मीद अजर है अमल करने वालों के लिए 
+[29:59] उन लोगों के लिए जिन्हों ने सब्र किया है और जो अपने रब पर भरोसा करते हैं 
+[29:60] कितने ही जानवर हैं जो अपना रिज्क उठाये नहीं फिरते, अल्लाह उनको रिज्क देता है और तुम्हारा राजिक भी वही है. वो सब कुछ सुनता और जानता है 
+[29:61] अगर तुम लोगों से पूछो के ज़मीन और आसमान को किसने पेदा किया है और चांद और सूरज को किसने मुस्कुरा कर रखा है, तो जरूर कहेंगे के अल्लाह ने, फिर ये किदर से धोखा खा रहे हैं 
+[29:62] अल्लाह हाय है जो अपने बंदों में से जिसका चाहता है रिज़्क कुशादा (बड़ा करना) करता है और जिसका चाहता है तंग करता है। यकीनन अल्लाह हर चीज़ का जाने वाला है
+[29:63] और अगर तुम इनसे पूछो, किसने आसमान से पानी बरसाया और इसके जरूर से मुर्दा पड़ी हुई जमीन को जिला उठाया तो वो जरूर कहेंगे अल्लाह ने। कहो, अल्हम्दुलिल्लाह, मगर अक्सर लोग समझते नहीं हैं 
+[29:64] और ये दुनिया की जिंदगी में कुछ नहीं है मगर एक खेल और दिल का बहलावा। असल जिंदगी का घर तो डर ए आख़िरत (इसके बाद) है, काश ये लोग जानते हैं 
+[29:65] जब ये लोग कश्ती पर सवार होते हैं तो अपने दीन को अल्लाह के लिए खालिस करके उससे दुआ मांगते हैं। फिर जब वो उन्हें बचा कर ख़ुशी पर ले आता है तो यकीनन ये शिर्क करने लगते हैं 
+[29:66] ता-के अल्लाह की दी हुई निजात पर उसका कुफ़्रान ए नियामत करें और (हयात ए दुनिया के) मजे लूटें। अच्छा, अनक़रीब इन्हें मालूम हो जाएगा 
+[29:67] क्या ये देखते नहीं हैं कि हमने एक पुर-अमन हरम (सुरक्षा का अभयारण्य) बना दिया है, हलांके इनके गिर्द-ओ-पेश लोग उचक लिए जाते हैं? क्या फिर भी ये लोग बातिल को मानते हैं और अल्लाह की नियामत का कुफ़्रान करते हैं 
+[29:68] हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ बांधे या हक़ को झूठलाए जबके वो उसके सामने आ चुका हो? क्या ऐसे काफिरों का ठिकाना जहन्नुम ही नहीं है 
+[29:69] जो लोग हमारी खातिर मुजाहिदा (प्रयास) करेंगे उन्हें हम अपने रास्ते दिखाएंगे, और यकीनन अल्लाह नीकुकरों (जो अच्छा करते हैं) ही के साथ हैं 
+
+सूरह 30: अर-रम (रोमियों) 
+------------------------------------------------ 
+[30:1] अलिफ लाम मीम 
+[30:2] रूमी (रोमन) करीब की सर-जमीन में मगलूब (हार/पराजित) हो गए हैं 
+[30:3] और अपनी इस मगलूबियत (हार) के बाद चंद साल के अंदर वो गालिब (विजयी/प्रमुख) हो जाएंगे 
+[30:4] अल्लाह ही का इख्तियार है पहले भी और बाद में भी. और वो दिन वो होगा जबके अल्लाह की बख्शी हुई फतह पर मुसलमान खुशियां मनाएंगे 
+[30:5] अल्लाह नुसरत (जीत) अता फरमाता है जिसे चाहता है, और वो जबरदस्त और रहीम है 
+[30:6] ये वादा अल्लाह ने किया है, अल्लाह कभी अपने वादे की खिलाफत वारजी नहीं करता। मगर अक्सर लोग नहीं जानते हैं 
+[30:7] लोग दुनिया की जिंदगी का बस जाहिर पहलू (बाहरी पहलू) जानते हैं और आखिरी से वो खुद ही गाफिल हैं 
+[30:8] क्या उनहों ने कभी अपने आप में गौर-ओ-फिक्र नहीं किया? अल्लाह ने ज़मीन और आसमानों को और उन सारी चीज़ों को जो उनके दरमियान हैं बरहक़ और एक मुकर्रर मुद्दत ही के लिए अदा किया है। मगर बहुत से लोग अपने रब की मुलाक़ात के लिए तैयार हैं
+[30:9] और क्या ये लोग कभी ज़मीन में चले फिर नहीं हैं कि उन लोगों का अंजाम नज़र आता है जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं? वो इनसे ज़्यादा ताक़त रखते थे। उनको ने जमीन को खूब उधेड़ा (फसल के लिए जमीन जोतना/तैयार करना और खेती करना) था और उसे इतना आबाद किया था जितना इन्हों ने नहीं किया है। उनके पास उनके रसूल रोशन निशानियां लेकर आये। फिर अल्लाह अनपर ज़ुल्म करने वाला ना था, मगर वो खुद ही अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे थे 
+[30:10] आख़िर ए कार जिन लोगों ने बुराइयां की थी उनका अंजाम बहुत बुरा हुआ। इस्ली के अनहोन ने अल्लाह की आयत को झुटलाया था और वो उनका मज़ाक उड़ाते थे 
+[30:11] अल्लाह ही ख़ल्क की इब्तिदा (सृष्टि की उत्पत्ति) करता है, फिर वही इसका इयादा (फिर से भुगतान/दोहराना) करेगा। फिर उसकी तरफ तुम पलट जाओगे 
+[30:12] और जब वो सा-आट (घंटा/घड़ी) बरपा होगी उस दिन मुजरिम हक-दक (बेवकूफ) रह जाएंगे 
+[30:13] उनके तहरे हुए शरीकोन में कोई उनका सिफारिशी (मध्यस्थ) ना होगा, और वो अपने शरीकों के मुनकिर हो जाएंगे 
+[30:14] जिस रोज वो सा-आत (घंटा/घड़ी/कयामत) बरपा होगी, उस दिन (सब इंसान) अलग गिरोहों में बत्त (विभाजित) जाएंगे 
+[30:15] जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्होन ने नीक अमल किए हैं वो एक बाग में शादां-ओ-फरहान (खुश) हाल) रक्खे जायेंगे 
+[30:16] और जिन्होन ने कुफ्र किया है और हमारी आयत को और आख़िरत की मुलाकात को झुटलाया वो अज़ाब में हाज़िर रक्खे जायेंगे 
+[30:17] पस तस्बीह करो अल्लाह की जबके तुम शाम करते हो और जब सुबह करते हो 
+[30:18] आसमानो और ज़मीन मैं उसके लिए हम्द (प्रशंसा) है और (तस्बीह करो उसकी) तीसरे पहर और जबके तुम्हारे जोहर का वक्त आता है 
+[30:19] वो जिंदा में से मुर्दे को निकलता है और मुर्दे में से जिंदा को निकल लाता है और जमीन को उसकी मौत के बारे में बात करता है है।इसी तरह तुमलोग भी (हालत ए मौत से) निकल लिए जाओगे 
+[30:20] उसके निशानियों में से ये है के उसने तुमको मिट्टी से पैदा किया फिर यकीन तुम बशर (इंसान) हो के (जमीन में) फैलते चले जा रहे हो 
+[30:21] और उसकी निशानियों में से ये है कि तुम्हारे लिए तुम्हारी जिंदगी से बीवियां बनाईं ता-के तुम उनके पास सुकून हासिल करो और तुम्हारे दरमियान मोहब्बत और रहमत अदा करदी। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फिक्र करते हैं 
+[30:22] और उसकी निशानियों में से आसमान और जमीन की अदाएं, और तुम्हारी जुबान और तुम्हारे रंग (रंग) का इख्तिलाफ है। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं दानिशमंद (बुद्धिमान) लोगों के लिए 
+[30:23] और उसकी निशानियों में से तुम्हारी रात और दिन को सोना और तुम्हारे उसके फज़ल को तलाश करना है। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो (गौर से) सुनते हैं
+[30:24] और उसकी निशानियों में से ये है कि वो तुम्हें बिजली की चमक दिखाता है खौफ के साथ भी और तम (उम्मीद) के साथ भी। और आसमां से पानी बरसता है, फिर इसके ज़रीये से ज़मीन को उसकी मौत के बाद जिंदगी बक्शता है। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं 
+[30:25] और उसकी निशानियों में से ये है के आसमां और जमीन उसके हुकुम से कायम हैं, फिर जून्ही के उसने तुम्हें जमीन से पुकारा, बस एक ही पुकार में अचानक तुम निकल आओगे 
+[30:26] आसमान और ज़मीन में जो भी हैं उसके बंदे हैं। सब के सब उसके लिए ताबे-फ़रमान (आज्ञाकारी) हैं 
+[30:27] वही है जो तख़लीक की इब्तिदा करता है, फिर वही उसका इआदा (फिर से भुगतान/दोहराना) करेगा और ये उसके लिए आसमां तार्र है।आस्मानो और ज़मीन में उसकी सिफत (विशेषता) सबसे बारतार है और वो ज़बरदस्त और हकीम है 
+[30:28] वो तुम्हें खुद तुम्हारी अपनी ही ज़ात से एक मिसाल देता है। क्या तुम्हारे उन गुलामों में से जो तुम्हारी मिल्कियत में हैं, कुछ गुलाम ऐसे भी हैं जो हमारे दिए हुए माल ओ दौलत में तुम्हारे साथ बराबर के शरीके हैं और तुम उनसे जुड़े हुए हो, जिस तरह आपस में अपने हमसरों से डरते हो? इस तरह हम आयत खोल कर पेश करते हैं उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं 
+[30:29] मगर ये जालिम बे-समझे बूझे अपनी तखाइलात (इच्छाएं) के पीछे चल पड़े हैं। अब कौन हमारे शक्स को रास्ता दिखा सकता है जिसे अल्लाह ने भटका दिया हो। ऐसे लोगों का तो कोई मददगार नहीं हो सकता 
+[30:30] पास (ऐ नबी, और नबी के जोड़े) यक्सू होकर अपना रुख इस दीन की सिम्थ में जमा दो। क़याम हो जाओ उस फ़ितरत पर जिसपर अल्लाह ताला ने इंसानों को पेदा किया है। अल्लाह की बनाई हुई सच बदली नहीं जा सकती। यह बिल्कुल रस्त और दुरुस्त दीन है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं 
+[30:31] (क़याम हो जाओ इस बात पर)अल्लाह की तरफ़ रूजू करते हुए, और डरो उसे, और नमाज़ क़याम करो, और न हो जाओ उन मुशरिकेन में से 
+[30:32] जिन्होन ने अपना अपना दीन अलग बना लिया है और गिरोहों (फिरकों) में बात हो गई है। हर एक गिरोह के पास जो कुछ है उसमें वो मगन है 
+[30:33] लोगों का हाल ये है के जब उन्हें कोई तकलीफ पहुंची है तो अपने रब की तरफ रूजू करके उसे पुकारते हैं, फिर जब वो कुछ अपने रहमत का जायका (स्वाद) उन्हें चकमा देता है तो यकीनन उन मुझमें से कुछ लोग शिर्क करने लगते हैं 
+[30:34] ता-के हमारे किये हुए एहसान की नाशुक्री करें। अच्छा, मजा करो, अंकारीब तुम्हें मालूम हो जाएगा 
+[30:35] क्या हमने कोई सनद और दलील उन पार नाज़िल की है जो शहादत देती हो हमें शिर्क की सदाकत पर जो ये कर रहे हैं 
+[30:36] जब हम लोगों को रहमत का ज़ायका दिखाते हैं तो वो उसपर फूल जाते हैं हैं, और जब उनके अपने किया कार्टून से ऊपर कोई मुसीबत आती है तो यकीनन वो बहुत अच्छे लगते हैं
+[30:37] क्या ये लोग देखते नहीं हैं कि अल्लाह ही रिज़्क कुशादा करता है जिसका चाहता है और तंग करता है? यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं 
+[30:38] पास (ऐ मोमिन) रिश्तेदार को उसका हक़ दे और मिस्कीन ओ मुसाफिर को (उसका हक़)। ये तरीक़ा बेहतर है उन लोगों के लिए जो अल्लाह की ख़ुशनुदी चाहते हों, और वही फ़लाह पाने वाले हैं 
+[30:39] जो सूद (रिबा/सूद/ब्याज) तुम देते हो ता-के लोगों के अमल में शामिल होकर वो बढ़ (बढ़े) जाए, अल्लाह के नाज़दीक वो नहीं बढ़ता (बढ़े), और जो जकात तुम अल्लाह की खुशनुदी हासिल करने के इरादे से देते हो, उसी के देने वाले दर हकीकत अपने माल बढ़ाते हैं 
+[30:40] अल्लाह ही है जिसने तुमको अदा किया, फिर तुम्हें रिज़क दिया, फिर वो तुम्हें मौत देता है, फिर वो तुम्हें जिंदा करेगा. क्या तुम्हारे रुके हुए शेयरों में कोई ऐसा है जो मेरे साथ कोई काम भी करता हो? पाक है वो और बहुत बाला-ओ-बरतर है उस शिर्क से जो ये लोग करते हैं 
+[30:41] खुश्की (जमीन) और तारी (समुद्र) में फसाद बरपा हो गया है लोगों के अपने हाथों की कमाई से, ता-के मजा चखाये उनको उनके बाज़ अमल का, शायद के वो बाज़ आयें 
+[30:42] (ऐ नबी) इनसे कहो के ज़मीन में चल फिर कर देखो पहले गुज़रे हुए लोगों का क्या अंजाम हो चुका है। उन में से अक्सर मुशरिक ही थाय 
+[30:43] पास (ऐ नबी) अपना रुख मज़बूती के साथ जमा दो इस दीन-ए-रास्त की सिम्थ में कबूल इसके के वो दिन आए जिसकी ताल जाने की कोई सूरत अल्लाह की तरफ से नहीं है। उस दिन लोग फट कर एक दूसरे से अलग हो जाएंगे 
+[30:44] जिसने कुफ्र किया है उसके कुफ्र का जवाब उसी पर है, और जिन लोगों ने नेक अमल किया है वो अपने ही लिए फलाह का रास्ता साफ कर रहे हैं 
+[30:45] ता-के अल्लाह ईमान लाने वालों और अमल-ए-सालेह करने वालों को अपने फजल से जजा डे. यकीनन वो काफिरों को पसंद नहीं करता 
+[30:46] उसके निशानियों में से ये है के वो हवाएं भेजता है बशारत के लिए और तुम अपनी रहमत से बेहरामन्द करने के लिए। और इस ग़रज़ के लिए के कश्तियां उसके हुकुम से चलें और तुम उसका फ़ज़ल तलाश करो और उसकी शुकर गुजर बनो 
+[30:47] और हमने तुमसे पहले रसूलों को उनकी क़ौम की तरफ भेजा और वो उनके पास रोशन निशानियां लेकर आए। फिर जिन्हों ने जुर्म किया उनसे हमने इन्तेक़ाम लिया और हमपर ये हक़ था के हम मोमिनो की मदद करें 
+[30:48] अल्लाह हाय है जो हवाओं को भेजता है और वो बादल उठाती हैं। फिर वो बादलों को आसमान में फैला देता है जिस तरह चाहता है, और वो टुकड़ों में तकसीम करता है, फिर तू देखता है कि बारिश के मौसम में बादल से टपकते हैं। ये बारिश जब वो अपने बंदों में से पहले चाहता है बरसात है 
+[30:49] तो यकीनन वो खुश ओ खुर्रम हो जाते हैं, हलांके इसके नुज़ुल से पहले वो मयौस हो रहे थे
+[30:50] देखो अल्लाह की रहमत के असर, के मुर्दा पड़ी हुई जमीन को वो किस तरह जिला उठाता है, यकीनन वो मुर्दों को जिंदगी बक्शने वाला है और वो हर चीज पर कादिर है 
+[30:51] और अगर हम एक ऐसी हवा भेज दें जिसके असर से वो अपनी खेती को जर्द पाएं तो वो कुफ्र करते रह जाते हैं 
+[30:52] (ऐ नबी) तुम मुर्दों को नहीं सुना सकते, ना उन बेटों को अपनी पुकार सुना सकते हो जो पीठ फेरे भागे चले जा रहे हो 
+[30:53] और ना तुम अंधों को उनकी गुमराही से निकल कर राह ए रस्त दिखा सकते हो, तुम तो सिर्फ उन्हें सुना सकते हो जो हमारी आयत पर ईमान लाते और सर-ए-तस्लीम खत्म कर देते हैं 
+[30:54] अल्लाह ही तो है जिसने ज़ोफ़ (कामज़ोरी) की हालत में तुम्हारी अदायश की इब्तिदा की, फिर ज़ोफ़ है (कमज़ोरी) के बाद तुम्हें कुव्वत बख्शी, फिर इस कुव्वत के बाद तुम्हें ज़ीफ़ और बूड़ा (पुराना) करदिया। वो जो कुछ चाहता है चुकाता है, और वो सब कुछ जानने वाला, हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है 
+[30:55] और जब वो सा-आट (घंटा) बरपा होगी तो मुजरिम कसमें खा खा कर कहेंगे के हम एक घड़ी भर से ज़्यादा नहीं ठहरते हैं। इसी तरह वो दुनिया की जिंदगी में धोखा खाया करते थे 
+[30:56] मगर जो इल्म और ईमान से बेहरमंद (संपन्न) किए गए थे वो वो कहेंगे के खुदा के नविस्ते (रिकॉर्ड) में तो तुम रोज-ए-हशर तक पैदा कर रहे हो। तो ये वही रोज़-ए-हशर है, लेकिन तुम जानते न थे 
+[30:57] पास वो दिन होगा जिसमें ज़ालिमों को उनकी मज़रत कोई नफ़ा (फ़ैदा) न देगी और न उनसे माफ़ी माँगने के लिए कहा जाएगा 
+[30:58] हमने कुरान में लोगों को तरह तरह से समझा है, तुम ख्वाह कोई निशानी ले आओ, जिन लोगों ने मन्ने से इंकार कर दिया है वो यहीं कहेंगे के तुम बातिल (झूठ) पर हो 
+[30:59] इस तरह थप्पा (मुहर) लगा देता है अल्लाह उन लोगों के दिलों पर जो बे-इल्म है 
+[30:60] पास (ऐ नबी) सब्र करो, यकीनन अल्लाह का वादा सच्चा है. और हरगिज हल्का न पाएं तुमको वो लोग जो यकीन नहीं लाते 
+
+सूरा 31: लुकमान (लुकमान) 
+------------------------------------------------ 
+[31:1] अलिफ लाम मीम 
+[31:2] ये किताब-ए-हकीम (बुद्धि की किताब) की आयत हैं 
+[31:3] हिदायत और रहमत नीकुकर लोगों के लिए 
+[31:4] जो नमाज कायम करते हैं, जकात देते हैं और आखिरी पर यकीन रखते हैं 
+[31:5] यहीं लोग अपने रब की तरफ से राह-ए-रास्त पर हैं और यहीं फलाह पाने वाले हैं 
+[31:6] और इंसान ही में से कोई ऐसा भी है जो कलाम-ए-दिल फरेब [लगव बातों को/बेकार की बातें (आइम्यूजिक, गायन, आदि)] खत्म कर लाता है ता-के लोगों को अल्लाह के रास्ते से इल्म के बिना भटका दे और इस रास्ते की दावत को मज़ाक में उड़ा दें। ऐसे लोगों के लिए सख्त ज़लील करने वाला अज़ाब है
+[31:7] उसे जब हमारी आयतें सुनाई जाती हैं तो वो बड़े घमंड के साथ इस तरह रुख फेर लेता है गोया के उसने उन्हें सुना ही नहीं, गोया के उसके कान बाहर हैं। अच्छा मुशदा (खबर) सुना दो उसे एक दर्दनाक अज़ाब का 
+[31:8] अलबत्ता जो लोग ईमान ले आएं और नीक अमल करें, उनके लिए नियामत भारी जन्नतें हैं 
+[31:9] जिनमें वो हमेशा रहेंगे। ये अल्लाह का पुख्ता वादा है, और वो ज़बरदस्त और हकीम है 
+[31:10] उसने आसमान को पैदा किया बिना सुतुनो (खंभे) के जो तुमको नज़र आए। उसने ज़मीन में पहाड़ जमा दिए ता-के वो तुम्हें लेकर धुलक (टर्न/शेक) ना जाए। उसने हर तरह के जानवर ज़मीन में फैला दिए और आसमां से पानी बरसाया और ज़मीन में क़िसम क़िसम के उम्दा चीज़ उगा दी 
+[31:11] ये तो है अल्लाह की तख़लीक, अब ज़रा मुझे दिखाओ, दुसरों ने क्या पैदा किया है? असल बात ये है कि ये जालिम लोग सारे गुमराही में पड़े हैं 
+[31:12] हमने लुकमान को हिकमत अता की थी के अल्लाह का शुक्र गुज़ार हो। जो कोई शुकर करे उसका शुकर उसके अपने लिए ही मुफीद (फैयदमंद) है और जो कोई कुफ्र करे तो हकीकत में अल्लाह बे-नियाज और आप से आप महमूद (अत्यंत प्रशंसनीय) हैं 
+[31:13] याद करो जब लुकमान अपने बेटे को हिदायत कर रहा था तो उसने कहा "बेटा! खुदा के साथ किसी को शरीक न करना, हक़ ये है के शिर्क बहुत बड़ा ज़ुल्म है" 
+[31:14] और ये हकीकत ये है कि हमने इंसान को अपने वलीदीन (माता-पिता) का हक़ पहचान की खुद ताकीद की है। उसकी माँ ने ज़ोफ़ पर ज़ोफ़ (कमजोरी पर कमजोरी) उठा कर उसे अपने पेट में रखा और दो साल उसका दूध छूने में लगे। (इसी के लिए हमने उसको हिदायत की के) मेरा शुक्र कर और अपने वालिदैन का शुक्र बजा ला। मेरी ही तरफ तुझे पलटना है 
+[31:15] लेकिन अगर वो तुझपर दबाओ डालें के मेरे साथ तू किसी ऐसे को शरीक करे जिसे तू नहीं जानता तो उसकी बात हरगिज़ ना मान। दुनिया में उनके साथ नई बातें करता रह, मगर जोड़ी (फॉलो) हमें शक्स के रास्ते की कर जिसने मेरी तरफ रूजू किया है। फिर तुम सबको पलटना मेरी ही तरफ है, हमें वक्त मैं तुम्हें बता दूंगा के तुम कैसे अमल करते रहे हो 
+[31:16] (और लुकमान ने कहा था के) "बेटा, कोई चीज राय के दाना (सरसों) बराबर भी हो और किसी चट्टन (रॉक) में या आसमानो या जमीन मैं कहीं छुपी हुई हूं, अल्लाह उसे निकल 
+लाएगा 
+। लोगों से मुँह फेर कर बात ना कर, ना ज़मीन में अकड़ कर चल। अल्लाह कोई खुद-पसंद और फकर जताने वाले शक्स को पसंद नहीं करता 
+[31:19] अपनी चाल में ऐतदाल (मध्यम) इख्तियार कर, और अपनी आवाज जरा पिछली रख, सब आवाजों से ज्यादा बुरी आवाज गढ़ों की आवाज होती है
+[31:20] क्या तुम लोग नहीं देखते कि अल्लाह ने ज़मीन और आसमान की सारी चीज़ें तुम्हारे लिए मुस्कुराकर रखी हैं और अपनी खुली और छुपी नियामतें तुमपर तमाम करदी हैं? इसपर हाल ये है कि इंसानों में से कुछ लोग हैं जो अल्लाह के बारे में झगड़ा करते हैं बिना इसके कि उनके पास कोई इल्म हो, या हिदायत, या कोई रोशनी दिखाने वाली किताब 
+[31:21] और जब उनसे कहा जाता है कि जोड़ी बनाओ हमें चीज की जो अल्लाह ने नाज़िल की है तो कहते हैं हम तो उस चीज़ की पेयरवी करेंगे जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है। क्या ये उनकी जोड़ी करेगी ख्वाह शैतान उनको भड़काती हुई आग ही की तरफ क्यों ना बुलाता रहा हो 
+[31:22] जो शक्स अपने आप को अल्लाह के हवाले कर दे और अमलन वो नीक हो, उसने फिल-वाकई एक भरोसे के काबिल सहारा थाम लिया, और सारे मामले का आखिरी फैसला अल्लाह ही के हाथ है 
+[31:23] अब जो कुफ्र करता है उसका कुफ्र तुम्हें गम में मुबतला ना करे। उनको लाट कर आना तो हमारी ही तरफ है, फिर हम उन्हें बता देंगे के वो क्या कुछ करके आये हैं। यकीनन अल्लाह सीनो (छाती) के छुपे हुए राज़ तक जानता है 
+[31:24] हम थोड़ी मुद्दत उन्हें दुनिया में मजे करने का मौका दे रहे हैं, फिर उनको बेबस करके एक साख अज़ाब की तरफ खींच ले जायेंगे 
+[31:25] अगर तुम इनसे पूछो के ज़मीन और आसमानों को किसने पाया है, तो ये जरूर कहेंगे के अल्लाह ने। कहो अल्हम्दुलिल्लाह, मगर इनमें से अक्सर लोग जानते नहीं हैं 
+[31:26] आसमान और ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह ही का है। बेशक अल्लाह बे-नियाज़ (ज़रूरत से मुक्त) और आप से आप महमूद (प्रशंसनीय) हैं 
+[31:27] ज़मीन में जितने दरख़्त हैं अगर वो सब के सब क़लम बन जाएँ और समंदर (दवात (स्याही) बन जाएँ) जैसे सात (सात) मज़ीद समंदर रोशनाई (स्याही) मुहय्या करें तब भी अल्लाह की बातें (लिखने से) ख़तम न होंगी। बेशक अल्लाह ज़बरदस्त और हकीम है 
+[31:28] तुम सारे इंसानों को भुगतान करना और फिर दोबारा जिला उठाना (जिंदा करना) तो (उसके लिए) बस ऐसा है जैसे एक मुतनफ़िस (अकेले व्यक्ति) को (पैदा करना और जिला उठाना)। हकीकत ये है के अल्लाह सब कुछ सुनने और देखने वाला है 
+[31:29] क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह रात को दिन में पिरोता हुआ ले आता है और दिन को रात में? उसने सूरज और चाँद को मुसक्कर कर रखा है। सब एक वक्त ए मुकर्रर तक चले जा रहे हैं। और (क्या तुम नहीं जानते) के जो कुछ भी तुम करते हो अल्लाह उसे ब-ख़बर है 
+[31:30] ये सब कुछ इस वजह से है के अल्लाह ही हक़ है और उसे छोड़ कर दूसरी चीज़ को ये लोग पुकारते हैं वो सब बातिल हैं।और (इस वजह से के) अल्लाह ही बुज़ुर्ग हे बारतार है 
+[31:31] क्या तुम देखते नहीं हो कि कश्ती समंदर में अल्लाह के फजल से चलती है ता-के वो तुम्हें अपनी कुछ निशानियां दिखाएंगे? दर हकीकत इस में बहुत सी निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो सब्र और शुक्र करने वाला हो
+[31:32] और जब (समंदर में) लोगों पर एक मौज साएबानो (छतरियों की तरह) की तरह छा जाती है तो ये अल्लाह को पुकारते हैं अपने दीन को बिल्कुल उसी के लिए खाली करके। फिर जब वो बच्चा कर इन्हें खुश्की (जमीन) तक पहुंचा देता है तो इनमें से कोई इक्तेसाद बरता (गुनगुना) है। और हमारी निशानियों का इनकार नहीं करता मगर हर वो शक्स जो गद्दार और नाशुक्र है 
+[31:33] लोगन, बचो अपने रब के गजब से और डरो उस दिन से जबके कोई बाप अपने बेटे की तरफ से बदला ना देगा और ना कोई बेटा ही अपने बाप की तरफ से कुछ बदला देने वाला होगा। फिल्वाक़े अल्लाह का वादा सच्चा है। पास ये दुनिया की जिंदगी तुम्हें धोखे में ना डाले, और ना धोखे-बाज तुमको अल्लाह के मामले में धोखा दे दे 
+[31:34] उस घड़ी का इल्म अल्लाह ही के पास है, वही बारिश बरसात है, वही जानता है के मांओं के पैठों में क्या परवरिश पा रहा है, कोई मुतानफ़िस नहीं जानता के कल वो क्या कमाई करने वाला है और ना किसी शक्स को ये खबर है कि किस सर-ज़मीन में उसको मौत आनी है। अल्लाह ही सब कुछ जानने वाला और बाख़बर है 
+
+सूरह 32: अस-सजदा (आराधना) 
+------------------------------------------------ 
+[32:1] अलिफ़ लाम मीम 
+[32:2] इस किताब की तंज़ील (नुज़ुल/रहस्योद्घाटन) बिला शुभा रब उल आलमीन की तरफ से है 
+[32:3] क्या ये लोग कहते हैं के इस शक्स ने इसे खुद गड़बड़ लिया है? नहीं, बल्कि ये हक है तेरे रब की तरफ से ता-के तू मुतनब्बेह (चेतावनी) करे एक ऐसी क़ौम को जिसके पास तुझसे पहले कोई मुतनब्बेह (चेतावनी) करने नहीं आया। शायद के वो हिदायत पा जाएं 
+[32:4] वो अल्लाह हाय है जिसने आसमानों और ज़मीन को और उन सारी चीज़ों को जो इनके दरमियान हैं छे (छह) दिनों में पेदा किया और इसके बाद अर्श पर जलवा फरमा हुआ। उसके सिवा ना तुम्हारा कोई हमी ओ मददगार है और ना कोई उसके आगे सिफ़ारिश करने वाला। फिर क्या तुम होश में ना आओगे 
+[32:5] वो आसमान से ज़मीन तक दुनिया के मामले की तदबीर (योजना) करता है और इस तदबीर की रुदाद (रिकॉर्ड) ऊपर उसके हुजूर जाती है एक ऐसे दिन में जिसका मिक़दार तुम्हारे साथ एक हज़ार साल है 
+[32:6] वही है हर पोशीदा (चुपी हुई) और जाहिर का जाने वाला। ज़बरदस्त, और रहीम 
+[32:7] जो चीज़ भी उसने बनाई ख़ूब ही (अच्छी तरह) बनाई। उसने इंसान की तख़लीक की इब्तिदा गारे (मिट्टी/मिट्टी) से की 
+[32:8] फिर उसकी नाक एक ऐसी सात से चलाई जो हकीर पानी (तरल पदार्थ) की तरह का है 
+[32:9] फिर उसको निक-सुक से दुरुस्त किया और उसके अंदर अपनी रूह फूंक दी। और तुमको कान दिये, आँखें दी और दिल दिये। तुम लोग कम ही शुक्र गुज़ार होते हो 
+[32:10] और ये लोग कहते हैं: "जब हम मिट्टी में राल-मिल चुके होंगे तो क्या हम फिर नये सिरे से पैदा किये जायेंगे?" असल बात ये है के ये अपने रब की मुलाक़ात के मुनीर हैं
+[32:11] इनसे कहो "मौत का वो फ़रिश्ता जो तुम्पर मुकर्रर किया गया है तुमको पूरा का पूरा अपने क़ब्ज़ में ले लेगा और फिर तुम अपने रब की तरफ पलटा लाये जाओगे" 
+[32:12] काश तुम देखो वो वक़्त जब ये मुजरिम सर झुकाए अपने रुब के हुजूर खड़े होंगे. (हम वक्त ये कह रहे होंगे) "ऐ हमारे रब, हमने खूब देख लिया और सुन लिया, अब हमें वापस भेज दे ता-के हम नई अमल करें। हमें अब यकीन आ गया है।" 
+[32:13] (जवाब में इरशाद होगा) “अगर हम चाहते तो पहले ही हर नफ्स को इसकी हिदायत दे देते, मगर मेरी वो बात पूरी हो गई जो मैंने कहीं थी के मैं जहन्नुम को जिन्नो और इंसानों से भर दूंगा 
+[32:14] पास अब चक्खो मजा अपनी इस हरकत का के तुमने इस दिन की मुलाक़ात को फ़रामोश कर दिया। हमने भी अब तुम्हें फ़रामोश कर दिया 
+। सजदे में गिर पड़ते हैं और अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करते हैं और तकब्बुर नहीं करते 
+[32:16] उनकी पीठें बिस्तरों से अलग रहती हैं, अपने रब को खौफ और तमा (उम्मीद) के साथ पुकारते हैं। और जो कुछ रिज्क हमने उन्हें दिया है उसमें से खर्च करते हैं 
+[32:17] फिर जैसा कुछ आंखों की ठंडक का सामान उनके अमाल की जजा में उनके लिए छुपा कर रखा गया है उसकी किसी मुतनफ्फिस (व्यक्ति/आत्मा) को खबर नहीं है 
+[32:18] भला कहीं ये हो हो सकता है कि जो शक्स मोमिन हो वो हम शक्स की तरह हो जाए जो फासीक (नफ़रमान/बुराई करने वाला) हो? ये डोनो बराबर नहीं हो सकते 
+[32:19] जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्होन ने नीक अमल किए हैं उनके लिए तो जन्नतन की क़याम-गहेन (मेहमाननवाज घर) हैं। ज़ियाफ़त के तौर पर उनके अमल के बदले में 
+[32:20] और जिन्हों ने फिस्क (ना-फरमानी) इख्तियार किया है उनका ठिकाना दोज़ख है। जब कभी वो उसे निकालना चाहेंगे उसमें ढकैल दिए जाएंगे और उन्हें कहा जाएगा के चक्खो अब उसी आग के अज़ाब का मजा जिसको तुम झूठलाया करते थे 
+[32:21] हमसे बड़े अज़ाब से पहले हम इसी दुनिया में (किसी न किसी छोटे) अज़ाब का मजा इन्हें चकते रहेंगे। शायद के ये (अपने बगियाना [अपराध] रवीश से) बाज़ आ जाएं 
+[32:22] और उसे बड़ा ज़ालिम कौन होगा जिसमें उसके रब की आयत के ज़रिये से हिदायत की जाए और फिर वो इनसे मुह फेर ले। ऐसे मुजरेमो से तो हम इंतेक़ाम लेकर रहेंगे 
+[32:23] इस्से पहले हम मूसा को किताब दे चुके हैं। लिहाज़ा उसी चीज़ के मिलने पर तुम्हें कोई शक्क न होना चाहिए। हमें किताब को हमने बानी इसराइल के लिए हिदायत बनाई थी 
+[32:24] और जब उन्होन ने सब्र किया और हमारी आयत पर यकीन लाते रहे तो उनके अंदर हमने ऐसे पेशवा पेदा किये जो हमारे हुकुम से रहनुमायी (हिदायत/मार्गदर्शन) करते थे
+[32:25] यकीनन तेरा रब ही कयामत के रोज़ उन बातों का फैसला करेगा जिनमें (बानी इसराइल) बहाम (आपस में) इख्तिलाफ करते रहे हैं 
+[32:26] और क्या इन लोगों को (तारीख़ी (ऐतिहासिक) वाकियात में) कोई हिदायत नहीं मिली के उनसे पहले कितनी कौमों को हम हलाक कर चुके हैं जिनके रहने की जगह में आज ये चलते फिरते हैं? इसमें बड़ी निशानियां हैं. क्या ये सुनते नहीं हैं 
+[32:27] और क्या लोगों ने ये मंज़र कभी नहीं देखा के हम एक बे-आब ओ गया (बंजर) ज़मीन की तरफ पानी बहा लाते हैं, और फिर उसी ज़मीन से वो फसल उगती है जिसमें उनके जानवरों को भी चारा मिलता है और ये खुद भी खाते हैं? तो क्या इन्हें कुछ नहीं सूझता 
+[32:28] ये लोग कहते हैं "ये फैसला कब होगा अगर तुम सच्चे हो?" 
+[32:29] इनसे कहो "फैसले के दिन ईमान लाना उन लोगों के लिए कुछ भी नफेह (फैडेमांड) न होगा जिन्हों ने कुफ्र किया है और फिर उनको कोई मोहलत न मिलेगी।" 
+[32:30] अच्छा, इनके हाल पर छोड़ दो और इंतज़ार करो, ये भी मुंतज़िर (इंतज़ार कर रहे) हैं 
+
+सूरह 33: अल-अहज़ाब (सहयोगी) 
+------------------------------------------------ 
+[33:1] ऐ नबी! अल्लाह से डरो और कुफ्फार ओ मुनाफिकीन की इताअत (आज्ञा) न करो, हकीकत में अलीम (सभी जानने वाले) और हकीम अल्लाह ही है 
+[33:2] पैरवी करो हमसे बात की जिसका इशारा तुम्हारे रब की तरफ से तुम किया जा रहा है। अल्लाह हर हमसे बात करता है जो तुमलोग करते हो 
+[33:3] अल्लाह पर तवक्कुल (भरोसा) करो, अल्लाह ही वकील होने के लिए काफी है 
+[33:4] अल्लाह ने किसी शक्स (मर्द) के धड़ (जिस्म/शरीर) में दो दिल नहीं रखे हैं, ना उसने तुम लोगों की उन बीवीयों को जिनसे तुम जिहार [आप किसकी तुलना अपनी मां की पीठ से करते हैं (उन्हें तलाक देने के लिए)] करते हो तुम्हारी मां बना दिया है, और ना उसने तुम्हारे मुंह बोले बेटों को तुम्हारा हक़ीक़ी बेटा बनाया है। ये तो वो बातें हैं जो तुमलोग अपने मुँह से निकल देते हो, मगर अल्लाह वो बात कहता है जो मबनी बार हकीकत है। और वही सही तारीख़ की तरफ़ रहनुमाई करता है 
+[33:5] मुँह बोले बेटों (दत्तक पुत्रों) को उनके बापों (पिता) की निस्बत से पुकारो, ये अल्लाह के नज़दीक ज़्यादा मुंसिफाना (न्यायसंगत) बात है। और अगर तुम मालूम ना हो के उनके बाप कौन हैं तो वो तुम्हारे दीनी भाई और रफीक हैं। ना दानिशता जो बात तुम कहो इसके लिए तुमपर कोई पकड़ा नहीं है, लेकिन उस बात पर जरूर गिराफ्त है जिसका तुम दिल से इरादा करो। अल्लाह दरगुज़र करने वाला और रहीम है 
+[33:6] बिला शुबा नबी तो एहले ईमान के लिए उनकी अपनी ज़ात पर मुक़द्दम है, और नबी की बीवियाँ उनकी माँ (माँ) हैं। मगर किताबुल्लाह की रूह से आम मोमिनीन और मुहाजिरीन की बा-निस्बत रिश्तेदार एक दूसरे के ज़्यादा हक़दार हैं। अलबत्ता अपने रफ़ीक़ों के साथ तुम कोई भलाई (करना चाहो तो) कर सकते हो। ये हुकुम किताब ए इलाही में लिखा हुआ है
+[33:7] और (ऐ नबी) याद रखो हमें अहद-ओ-पैमान (संविदा) को जो हमने सब पैगम्बरों से लिया है, तुमसे भी और नूह और इब्राहीम और मूसा और ईसा इब्ने मरियम से भी। सबसे पुख्ता अहद ले चुके हैं 
+[33:8] ता-के सच्चे लोगों से (उनका रब) उनकी सच्चाई के बारे में सवाल करें, और काफिरों के लिए तो उसने दर्दनक अजब मुहैय्या कर ही रखा है 
+[33:9] ऐ लोगों, जो ईमान लाए हो, याद करो अल्लाह के एहसान को जो (अभी अभी) उसने तुमपर किया है जब लश्कर तुमपर चढ़ आए तो हमने उनपर एक ताकत आंधी (हवा) भेज दी और ऐसी फौजें रावण की जो तुमको नज़र ना आती थी। अल्लाह वो सब कुछ देख रहा था जो तुमलोग हमें वक्त कर रहे थे 
+[33:10] जब वो ऊपर से और नीचे से तुमपर चढ़ आए, जब खौफ के मारे आंखें पथरा गई, कालीजे मुह को आ गए, और तुमलोग अल्लाह के बारे में तरह तरह के गुमान करने लगे 
+[33:11] हमें वक्त ईमान लाने वाले खूब आजमाए (परीक्षित) गए और बुरी तरह हिला मारे गए 
+[33:12] याद करो वो वक्त जब मुनाफिकीन और वो सब लोग जिनके दिलों में रोग थे साफ़ साफ़ कह रहे वे के अल्लाह और उसके रसूल ने जो वादे हमसे किए थे वो फरेब के सिवा कुछ ना थाय 
+[33:13] जब उन में से एक गिरो ​​​​ने कहा के "ऐ यत्रिब के लोगों, तुम्हारे लिए अब रुकने का कोई मौका नहीं है, पलट चलो" जब उनका एक फर्क ये कह कर नबी से रुखसत तलब कर रहा था के "हमारे घर खतरों में हैं," हलांके वो खतरे में ना थे। दर-असल वो (मुहाज़ ए जंग से [युद्ध-मोर्चे से]) भागना चाहते थे 
+[33:14] अगर शहर के अतराफ से दुश्मन घुस आए होतय और हमें वक्त उन्हें फिटने की तरफ दावत दी जाती तो ये उसमें जा पढ़ते और मुश्किल ही से उन्हें शरीक ए फिटना होने में कोई तामुल (अनिच्छा) होता है 
+[33:15] लोगों ने इसे पहले अल्लाह से अहद किया था के ये पीठ ना फेरेंगे। और अल्लाह से किए हुए अहद की बाज़-पुर्स (सवाल करते हुए) तो होनी ही थी 
+[33:16] (ऐ नबी!) इनसे कहो, अगर तुम मौत या कत्ल से भागो तो ये भगना तुम्हारे लिए कुछ भी नफा-बख्श ना होगा, इसके बाद जिंदगी के मजे लूटने का थोड़ा ही मौका तुम्हें मिल सकेगा 
+[33:17] इनसे कहो, कौन है जो तुम्हें अल्लाह से बचा सकता है अगर वो तुम्हें नुक्सान पहुंचाना चाहे? और कौन उसकी रहमत को रोक सकता है अगर वो तुमपर मेहरबानी करना चाहे? अल्लाह के मुक़ाबले में तो ये लोग कोई हामी ओ मददगार (रक्षक या मददगार) नहीं पा सकते हैं 
+[33:18] अल्लाह तुम में से उन लोगों को खूब जानता है जो (जंग के काम में) रुकावतें डालने वाले हैं, जो अपने भाइयों से कहते हैं "आओ हमारी तरफ।" जो लड़ाई में हिसा लेते भी हैं तो बस नाम गिनाने को
+[33:19] जो तुम्हारा साथ देने में सक्षम है। ख़तरे का वक़्त आ जाए तो इस तरह दिधे फिरा-फिरा कर तुम्हारी तरफ देखते हैं जैसे किसी को मरने वाले पर गशी तारी हो रही हो। मगर जब ख़तरा गुज़र जाता है तो यही लोग फ़ायदों के हरिस बनकर कैंची की तरह (कैंची की तरह) चलती है ज़ुबान के लिए तुम्हारे इस्तेकबाल को आ जाते हैं। ये लोग हरगिज़ ईमान नहीं लाए, इसी के लिए अल्लाह ने इनके सारे अमल ज़या कर दिए। और ऐसा करना अल्लाह के लिए बहुत आसान है 
+[33:20] ये समझ रहे हैं कि हमला-आवर गिरोह अभी गए नहीं हैं और अगर वो फिर हमला हो जाए तो इनका जी चाहता है कि हमें मौका पर ये कहीं सेहरा (रेगिस्तान) में बद्दुओं (बेडौइन) के दरमियान जा बैठें और वहीं से तुम्हारे हालात पूछते रहते हैं। अगर ये तुम्हारे दरमियान रहेंगे भी तो लड़ाई में कम ही हिसा लेंगे 
+[33:21] दर हकीकत तुम लोगों के लिए अल्लाह के रसूल में एक बहतरीन नामुना था, हर उस शक्स के लिए जो अल्लाह और यौम ए आखिर का उम्मीदवर हो और कसरत से अल्लाह को याद करे 
+[33:22] और सच्चे मोमिनो (का हाल हमें वक्त ये था के) जब उन्होन ने हमला-आवर लश्करों को देखा तो पुकार उठे के "ये वही चीज है जिसका अल्लाह और उसके रसूल ने हमसे वादा किया था। अल्लाह और उसके रसूल की बात बिलकुल सच्ची थी।” इस वक़िये ने उनके ईमान और उनकी सुपुर्दगी (सबमिशन) को और ज़्यादा बढ़ा दिया 
+[33:23] ईमान लाने वालों में ऐसे लोग मौजूद हैं जिन्हों ने अल्लाह से किये हुए अहद को सच्चा कर दिखाया है। इनमें से कोई अपनी नज़र पूरी कर चुका है और कोई वक़्त आने का मुंतज़िर है। इन्हों ने अपने रवैय्ये में कोई तबदीली नहीं की 
+[33:24] (ये सब कुछ के लिए हुआ) ता-के अल्लाह सचाई की जजा दे और मुनाफिकों को चाहे तो सजा दे और चाहे तो उनकी तौबा कबूल करले। बेशाक़ अल्लाह गफूर ओ रहीम है 
+[33:25] अल्लाह ने कुफ्फार का मुँह फेर दिया, वो कोई फ़ायदा हासिल किए बिना अपने दिल की जलन के लिए यूं ही पलट गए, और मोमिनीन की तरफ़ से अल्लाह ही लड़ने के लिए काफी हो गया। अल्लाह बड़ी कुव्वत वाला और ज़बरदस्त है 
+[33:26] फिर एहले किताब में से जिन लोगों ने हमला-अवरों का साथ दिया था, अल्लाह उनकी गढ़ियों (किलों) से उन्हें उतार लाया और उनके दिलों में उसने ऐसा रोब (आतंक) डाल दिया के आज उनमे से एक गिरोह को तुम क़त्ल कर रहे हो और दूसरे गिरो ​​को क़ैद कर रहे हो 
+[33:27] उसने तुमको उनकी ज़मीन में और उनके घरों और उनके अमवाल (माल) का वारिस बना दिया और वो इलाक़ा तुम्हें दिया जिसे तुमने कभी पामाल न किया था। अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है 
+[33:28] ऐ नबी! अपनी बीवीयों से कहो, अगर तुम दुनिया और उसकी जीनत चाहती हो तो आओ, मैं तुम्हें कुछ दे दिला कर भले तरीक़े से रुखसत कर दूं 
+[33:29] और अगर तुम अल्लाह और उसके रसूल और दार-ए-आखिरत की तालिब हो तो जान लो के तुम में से जो नीको-कर हैं अल्लाह ने उनको लिए बड़ा अजर मुहैया कर रखा है
+[33:30] नबी की बीवियां, तुम में से जो किसी सरीह फहाश हरकत का इर्तिक़ाब करेगी उसे दोहरा (डबल) अज़ाब दिया जाएगा। अल्लाह के लिए ये बहुत आसान काम है 
+[33:31] और तुम में से जो अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करेगी और नेक अमल करेगी, उसको हम दोहरा अजर देंगे। और हमने उसके लिए रिज़क ए करीम मुहैय्या कर रक्खा है 
+[33:32] नबी की बीवी, तुम आम औरतों की तरह नहीं हो। अगर तुम अल्लाह से डरने वाली हो तो दबी ज़ुबान से बात ना किया करो के दिल की ख़राबी का मुबतला कोई शक्स लालच में पड़ जाए, बलके साफ सीधी बात करो 
+[33:33] अपने घरों में टिक कर रहो और साबिक दौर ए जाहिलियत की सी समझ-धज ना दिखती फिरो। नमाज़ क़याम करो, ज़कात करो और अल्लाह और उसके रसूल की इत्ता करो। अल्लाह तो ये चाहता है के एहले बैत ए नबी से गंदगी को डर करे और तुम्हें पूरी तरह से पाक करदे 
+[33:34] याद रखो अल्लाह की आयत और हिकमत की उन बातों को जो तुम्हारे घरों में सुनायी जाती है। बेशाक़ अल्लाह लतीफ़ (सूक्ष्म/कोमल) और बा-ख़बर है 
+[33:35] बिल यकीन जो मर्द और जो औरतें मुस्लिम हैं, मोमिन हैं, मुती-ए-फ़रमान हैं, रस्त बाज़ हैं, साबिर हैं, अल्लाह के आगे झुकने वाले हैं, सदक़ा देने वाले हैं, रोज़ा रखने वाले हैं हैं, अपनी शर्मगाहों की हिफाज़त करने वाले हैं, और अल्लाह को कसरत से याद करने वाले हैं, अल्लाह ने उनके लिए मगफिरत और बड़ा अजर मुहैय्या कर रखा है 
+[33:36] किसी मोमिन मर्द और किसी मोमिन औरत को ये हक़ नहीं है के जब अल्लाह और उसका रसूल किसी मामले का फैसला करदे तो फिर उसे अपने मामले में खुद फैसला करने का इख्तियार हासिल रहे। और जो कोई अल्लाह और उसके रसूल की ना-फरमानी करे तो वो सारे गुमराह में पढ़ गया 
+[33:37] (ऐ नबी), याद करो वो मौका जब तुम हमें शक्स से कह रहे थे, जिसपर अल्लाह ने और तुमने एहसान किया था के "अपनी बीवी को ना छोड़ और अल्लाह से डर" हमें वक्त तुम अपने दिल में वो बात छुपाये हुए थे जिसे अल्लाह खोलना चाहता था। तुम लोगों से डर रहे थे, हलांके अल्लाह इसका ज़्यादा हक़दार है के तुम उससे डरो। फिर जब ज़ैद उसे अपनी हाजत पूरी कर चुका तो हमने उससे (मुतल्लका खातून) का तुमसे निकाह करदिया, ता-के मोमिनो पर अपने मुंह बोले बेटों (बेटों) की बीवीयों के मामले में कोई तंगगी ना रहे जबके वो उनसे अपनी हाजत पूरी कर चुके हों। और अल्लाह का हुकुम तो अमल में आना ही चाहिए था 
+[33:38] नबी पर किसी ऐसे काम में कोई रुकावत नहीं है जो अल्लाह ने उसके लिए मुकर्रर कर दिया हो। याही अल्लाह की सुन्नत उन सब अंबिया (पैगंबरों) के मामले में रह रही है जो पहले गुजर चुके हैं और अल्लाह का हुकुम एक कताई ताई-शुदा फैसला होता है 
+[33:39] (ये अल्लाह की सुन्नत है उन सब अंबिया (पैगंबर) के मामले में) जो अल्लाह के पैगामात मांगते हैं और उसी से डरते हैं और एक खुदा के सिवा किसी से नहीं डरते, और मुहासिबे (जवाबदेही) के लिए बस अल्लाह ही काफी है
+[33:40] (लोगन) मुहम्मद तुम्हारे मर्दों में से किसी के बाप नहीं हैं, मगर वो अल्लाह के रसूल और ख़तीम-उन-नबियिन हैं, और अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखने वाला है 
+[33:41] ऐ लोगों! जो ईमान लाए हो, अल्लाह को कसरत से याद करो 
+[33:42] और सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते रहो 
+[33:43] वही है जो तुम्हारे लिए रहमत फरमाता है और उसके मलिका तुम्हारे लिए दुआ ए रहमत करते हैं ता-के वो तुम्हें तरीकियों (अंधेरे) से रोशनी में निकल लाये. वो मोमिनो पर बहुत मेहरबान है 
+[33:44] जिस रोज वो उसे मिलेंगे उनका इस्तेकबाल सलाम से होगा और उनके लिए अल्लाह ने बड़ा बा-इज्जत अजर फरहम कर रखा है 
+[33:45] ऐ नबी, हमने तुम्हें भेजा है गवाह बना कर, बशारत (खुश खबरी) देने वाला और डराने वाला बना कर 
+[33:46] अल्लाह की इजाज़त से उसकी तरफ दावत देने वाला बना कर और रोशन चिराग बना कर 
+[33:47] बशारत देदो उन लोगों को जो (तुम्हारा) ईमान लाए हैं के उनके लिए अल्लाह की तरफ से बड़ा फजल है 
+[33:48] और हरगिज़ ना दब्बू कुफ़्फ़ार-ओ-मुनाफ़ीक़ीन से, कोई परवा न करो उनकी अज़ियात रसानी (तकलीफ़/चोट) की और भरोसा करलो अल्लाह पर। अल्लाह ही इसके लिए काफी है के आदमी अपनी गलती उसके सुपुर्द करदे 
+[33:49] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम मोमिन औरतों से निकाह करो और फिर उन्हें हाथ लगाने से पहले तलाक दे दो तो तुम्हारी तरफ से अनपार कोई इद्दत (प्रतीक्षा अवधि) लाज़िम नहीं है जिसका पूरा होना का तुम मुतलबा कर सको. लिहाज़ा उन्हें कुछ माल दो और भले तरीक़े से रुखसत करदो 
+[33:50] ऐ नबी, हमने तुम्हारे लिए हलाल कर दी तुम्हारी वो बीवीयां जिनके मेहर तुमने अदा की हैं, और वो औरतें जो अल्लाह की अता करदा लौंडियां (गुलाम-लड़कियां) में से तुम्हारी मिल्कियत में आइए.और तुम्हारी वो चाचा-ज़ाद और फुपी-ज़ाद और मामू-ज़ाद और खाला-ज़ाद बहनें जिन्हों ने तुम्हारे साथ हिजरत की है। और वो मोमिन औरत जिसने अपने आप को नबी के लिए हेबा किया हो अगर नबी उसे निकाह में लेना चाहे। ये रियात (विशेषाधिकार) खालीसतन तुम्हारे लिए है, दूसरे मोमिनो के लिए नहीं है। हमको मालूम है कि आम मोमिनो पर उनकी बीवीयां और लौंडियां (गुलाम लड़कियां) के बारे में हमने क्या हुदूद (प्रतिबंध) आयद किये हैं। (तुम्हें हुडदंग से हमने इस लिए मुस्तस्ना (छूट) किया है) ता-के तुम्हारे ऊपर कोई तंगगी ना रहे। और अल्लाह गफूर ओ रहीम है 
+[33:51] तुमको इख्तियार दिया जाता है कि अपनी बीवीयों में से जिसको चाहो अपने से अलग रख लो, जिसे चाहो अपने साथ रख लो और जिसे चाहो अलग रखने के बाद अपने पास बुला लो। क्या मामले में तुमपर कोई मुज़ाइक़ा (दोष) नहीं है। क्या इस तरह मुतवक्कि (संभावना) है कि उनकी आंखें ठंडी रहेंगी और वो रंजीदा (शोक) न होंगी। और जो कुछ भी तुम उनको दोगे उसपर वो सब राजी रहेगी। अल्लाह जानता है जो कुछ तुम लोगों के दिलों में है, और अल्लाह आलिम ओ हलीम है
+[33:52] इसके बाद तुम्हारे लिए दूसरी औरतें हलाल नहीं हैं। और ना इसकी इजाज़त है के उनकी जगह और बीवीयां ले आओ ख़्वाह उनका हुस्न (खूबसूरती) तुम्हें कितना ही पसंद हो। अलबत्ता लौंडियों की तुम्हें इजाज़त है। अल्लाह हर चीज़ पर निगरानी है 
+[33:53] ऐ लोग जो इमा लाए हो, नबी के घरों में बिला इजाज़त न चले आया करो, न खाने का वक़्त निकलता रहो। हां अगर तुम्हें खाने पर बुलाया जाए तो जरूर आओ, मगर जब खाना खालो तो मुंतशिर (फैलाओ) हो जाओ, बातें करने में ना लगे रहो। तुम्हारी ये हरकतें नबी को तकलीफ़ देती हैं, मगर वो शरम की वजह से कुछ नहीं कहते और अल्लाह हक़ बात कहने में शरमाता नहीं। नबी की बीवीयों से अगर तुम्हें कुछ माँगना हो तो पूरे दिन के पीछे से माँगा करो। ये तुम्हारे और उनके दिलों की पाकीज़गी के लिए ज़्यादा मुनासिब तरीक़ा है। तुम्हारे लिए ये हरगिज जायज नहीं के अल्लाह के रसूल को तकलीफ दो, और ना ये जायज है कि उनके बाद उनकी बीवीयों से निकाह करो। ये अल्लाह के नजरिए बहुत बड़ा गुनाह है 
+[33:54] तुम ख्वाह कोई बात जाहिर करो या छुपाओ, हर बात का इल्म है 
+[33:55] अज़वाज़ (पत्नियाँ) नबी के लिए इसमें कोई मुज़हिक़ा (दोषपूर्ण) नहीं है कि उनके बाप, उनके बेटे, उनके भाई, उनके भतीजे, उनके भांजे, उनके मेल-जोल की औरतें और उनके ममलुक घरों में आएं। (ऐ औरतें) तुम्हें अल्लाह की नफ़रमानी से बचना चाहिए। अल्लाह हर चीज़ पर निगाह रखता है 
+[33:56] अल्लाह और उसके मलिका (फ़रिश्ते) नबी पर दरूद भेजते हैं, ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम भी उन्पर दरूद ओ सलाम भेजो 
+[33:57] जो लोग अल्लाह और उसके रसूल को अज़ियात (झुंझलाहट) देते हैं दुनिया और आख़िरत में अल्लाह ने लानत फरमायी है और उनके लिए रुसवा-कुन अज़ाब मुहैय्या करदिया है 
+[33:58] और जो लोग मोमिन मर्दन और औरतों को बे-कसूर अज़ियात (चोट) देते हैं उन्हें ने एक बदे बोहतन (बदनामी/निंदा) और सारी गुनाह का जवाब अपने सर ले लिया है 
+[33:59] ऐ नबी, अपनी बीवीयां और बेटियां और एहले ईमान की औरतों से कहदो के अपने ऊपर अपनी चादरों के पल्लू लटका लें। ये ज़्यादा मुनासिब तरीक़ा है ता-के वो पहचान ली जाये और न सतायी जाये। अल्लाह ताला गफ़ूर ओ रहीम है 
+[33:60] अगर मुनाफ़ीक़ीन, और वो लोग जिनके दिलों में ख़राबी है, और वो जो मदीना में हिजान अंगेज अफ़वाहें तुम्हें उठा खड़ा करेंगे। फिर वो इस शहर में मुश्किल ही से तुम्हारे साथ रह सकेंगे) 
+[33:61] उनपर हर तरफ से लानत की उम्मीद होगी, जहां कहीं पाए जाएंगे पकड़े जाएंगे और बुरी तरह मारे जाएंगे 
+[33:62] ये अल्लाह की सुन्नत है जो ऐसे लोगों के मामले में पहले से चली आ रही है, और तुम अल्लाह की सुन्नत में कोई तबदीली न पाओगे 
+[33:63] लोग तुमसे पूछते हैं के कयामत की घड़ी कब आएगी। कहो उसका इल्म तो अल्लाह ही को है, तुम्हें क्या खबर?शायद के वो करीब ही आ लगी हो
+[33:64] बहार-ए-हाल ये यकीनी अमर है के अल्लाह ने काफिरों पर लानत की है और उनके लिए भड़कती हुई आग मुहइया कर दी है 
+[33:65] जिसमें वो हमेशा रहेंगे। कोई हमी ओ मददगार न पा सकेंग 
+[33:66] जिस रोज़ उनके चेहरे आग पर उलट पलट किये जायेंगे हमें वक्त वो कहेंगे के “काश हमें अल्लाह और रसूल की इबादत की होती” 
+[33:67] और कहेंगे “ऐ रब हमारे, हमने अपने सरदारों और अपने बड़ों (महानों) की इताअत” कि और उनहों ने हमें राह-ए-रास्त से बे-राह करदिया 
+[33:68] ऐ रब, उनको दोहरा(डबल) अज़ाब दे और उन्पर सख्त लानत कर” 
+[33:69] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, उन लोगों की तरह न बन जाओ जिन्होन ने मूसा को अज़ियातें (रंज पाहुंचा) दी पतली, फिर अल्लाह ने उनकी बनाई हुई बातों से उसकी बारात फरमायी (उसे साफ कर दिया) और वो अल्लाह के नाजदीक ब-इज्जत था 
+[33:70] ऐ ईमान लाने वालों, अल्लाह से डरो और ठीक बात किया करो 
+[33:71] अल्लाह तुम्हारे अमल दुरुस्त कर देगा और तुम्हारे कसूरों से दरगुजर पैदा होगा। जो शक्स अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करे उसने बड़ी कामयाब की 
+[33:72] हमने इस अमानत को आसमान और ज़मीन और पहाड़ों के सामने पेश किया तो वो उसे उठाने के लिए तैयार न हुए, और इससे डर गए। मगर इंसान ने इसे उठाया लिया, बशक वो बड़ा जालिम और जाहिल (अज्ञानी) है 
+[33:73] इस बार-ए-अमानत को उठने का लाज़मी नतीजा ये है के अल्लाह मुनाफिक मर्दन और औरतों, और मुशरिक मर्दन और औरतों को सज़ा दे और मोमिन मर्दन और औरतों की तौबा क़बूल करे.अल्लाह दरगुज़र फ़रमाने वाला और रहीम है 
+
+सूरह 34: अल-सबा' (द सबा') 
+------------------------------------------------ 
+[34:1] हम्द (तारीफ़) हमारे लिए खुदा के लिए है जो आसमान और ज़मीन की हर चीज़ का मालिक है और आख़िरत में भी उसी के लिए हम्द है। वो दाना (हिकमत वाला) और बाख़बर है 
+[34:2] जो कुछ ज़मीन में जाता है और जो कुछ उससे निकलता है और जो कुछ आसमान से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है, हर चीज़ को वो जानता है।वो रहीम और गफूर है 
+[34:3] मुकीरीन कहते हैं के क्या बात है के कयामत हमपर नहीं आ रही है! कहो कसम है मेरे आलिम-उल-गैब परवरदिगार की, वो तुमपर आ कर रहेगी। उसे ज़र्रा बराबर (परमाणुओं का वजन/सबसे छोटा कण) कोई चीज़ न आसमानों में छुपी हुई है न ज़मीन में न जर्रे से बड़ी और न उससे छोटी, सब कुछ एक नुमाया दफ़्तर में दर्ज है 
+[34:4] और ये कयामत इस्लिये के जजा दे अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए हैं और नीक अमल करते रहे हैं। उनके लिए मगफिरत है और रिज़क-ए-करीम 
+[34:5] और जिन लोगों ने हमारी आयतों को नीचा दिखाने के लिए ज़ोर लगाया है, उनके लिए बदतरीन क़िस्म का दर्दनाक अज़ाब है 
+[34:6] (ऐ नबी), इल्म रखने वाले खूब जानते हैं के जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है वो सरसर हक़ है और खुदा-ए-अज़ीज़ ओ हमीद का रास्ता दिखता है
+[34:7] मुनकिरीन लोगों से कहते हैं "हम बताते हैं तुम्हें ऐसा शक्स जो खबर देता है कि जब तुम्हारे जिस्म का ज़र्रा ज़र्रा मुंतशिर (बिखरा) हो चूका होगा उस वक्त तुम नए सिरे से अदा कर दिए जाओगे 
+[34:8] ना मालूम ये शक्स अल्लाह के नाम से झूठ गड़बड़ है या इसे जुनून (दीवाना पान) लाहिक है।” नहीं, बलके जो लोग आख़िरत को नहीं मानते वो अज़ाब में मुबतला होने वाले हैं और वही बुरी तरह बहके हुए हैं 
+[34:9] क्या इन्होन ने कभी उस आसमान ओ ज़मीन को नहीं देखा जो इन्हें आगे और पीछे से घेरे हुए हैं? हम चाहें तो इन्हें ज़मीन में ढांसा दें, या आसमान के कुछ टुकड़े अंदर गिरा दें। दर हकीकत इस में एक निशानी है हर उस बंदे के लिए जो खुदा की तरफ रूजू करने वाला हो 
+[34:10] हमने दाऊद को अपने हां से बड़ा फजल अता किया था। यहीं हुकुम हमने) परिन्दों को दिया। हमने लोहे को उसके लिए नरम कर दिया 
+[34:11] क्या हिदायत के साथ के ज़रीन (मेल के पूरे कोट) बना और उनके हल्के ठीक अंदाज़ पर रख। (ऐ आले दाऊद) नीक अमल करो। जो कुछ तुम करते हो उसको मैं देख रहा हूं 
+[34:12] और सुलेमान के लिए हमने हवा को मुस्कुरा कर दिया, सुबह के वक्त उसका चलना एक महीने की राह तक और शाम के वक्त उसका चलना एक महीने की राह तक। हमने उसके लिए पिगले हुए तांबे (पिघला हुआ पीतल) का चश्मा (वसंत) बहा दिया और ऐसे जिन्न उसके ताबे करदिये जो अपने रब के हुकुम से उसके आगे काम करते थे। उनमें से जो हमारे हुकुम से सरताबी (विचलित/घुमावदार) करता है उसको हम भड़कती हुई आग का मजा चखते हैं 
+[34:13] वो उसके लिए बनाते थे जो कुछ वो चाहता, ऊंची इमारतें, तसवीरें, बदे बदे हौज जैसी लगन (जलाशय जैसे कटोरे) और अपनी जगह से ना हटें वली भारी देगें. ऐ आले दाऊद, अमल करो शुकर के तरीक़े पर। मेरे बंदों में कम ही शुक्र गुजर हैं 
+[34:14] फिर जब सुलेमान पर हमने मौत का फैसला नफीज किया तो जिन्नो को उसकी मौत का पता देने वाली कोई चीज उस घुन (कीड़ा) के सिवा न थी जो उसके आसा (कर्मचारी) को खा रहा था। इस तरह जब सुअलीमान गिर पड़ा तो जिन्नो पर ये बात खुल गई के अगर वो गैब के जाने वाले होते तो इस ज़िल्लत के अज़ाब में मुबतला ना रहते 
+[34:15] सबा (शीबा) के लिए उनके अपने मसकन (घर-जमीन) ही में एक निशानी मौजूद थी, दो बाग दयेन(दाएं) और बायें(बाएं)। खाओ अपने रुब का दिया हुआ रिज़क और शुकर बजा लाओ उसका, मुल्क है उम्मीद ओ पाकीज़ा और परवरदिगार है बख्शीश फ़रमाने वाला 
+[34:16] मगर वो मुँह मोड़ गये। आख़िर ए कार हमने उनपार बंद (बांध) तोड़ सैलाब (बाढ़) भेज दिया और उनके पिछले दो बाघों (बगीचों) के जगह दो और बाघ उन्हें दिए जिनमें कड़वे (कड़वे) कसैले (इमली) फल और झाओ के दरख्त थे और कुछ थोड़ी सी बेरियां (लोटे के पेड़) 
+[34:17] ये था उनके कुफ्र का बदला जो हमने उनको दिया। और नाशुक्रे इंसान के सिवा ऐसा बदला हम और किसी को नहीं देते
+[34:18] और हमने उनके और उन बस्तियों के दरमियान, जिनको हमने बरकत अता की थी, नुमायां बस्तियां बसा दी पतली, और उनके सफर की मुसाफ़्तें एक अंदाज़े पर रख दी पतली। चलो फिरो रातों में रात दिन पूरे अमन के साथ 
+[34:19] मगर उनहों ने कहा “ऐ हमारे रब, हमारे सफ़र की मुसाफ़तें लम्बी करदे।” उनहों ने अपने ऊपर आप जुल्म किया, आखिर ए कार हमने उन्हें अफसाना बना कर रख दिया और उन्हें बिल्कुल तित्तर बिटर कर डाला। यकीनन इसमे निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो बड़ा साबिर (दृढ़) ओ शाकिर (आभारी) हो 
+[34:20] उनके मामले में इब्लीस ने अपना गुमान सही पाया और उन्होन ने उसकी जोड़ी बनाई, बजुज़ एक थोड़े से गिरो ​​के जो मोमिन था 
+[34:21] इब्लीस को अनपर कोई इक्तेदार (अधिकारी) हासिल न था मगर जो कुछ हुआ वो इस तरह हुआ के हम ये देखना चाहते थे के कौन आख़िरत का मनने वाला है और कौन उसकी तरफ से शक्क में पड़ा हुआ है। तेरा रब्ब हर चीज़ पर निगरान (सतर्क) है 
+[34:22] (ऐ नबी, मुशरिकेन से) कहो के पुकार देखो अपने उन माबूदों को जिनमें तुम अल्लाह के सिवा अपना माबूद समझे बैठे हो। वो ना आसमानों में कोई ज़रा बराबर चीज़ के मालिक हैं ना ज़मीन में। वो आसमां ओ ज़मीन की मिलकियत में शरीक भी नहीं है। उनमें से कोई अल्लाह का मददगार भी नहीं है 
+[34:23] और अल्लाह के हुज़ूर कोई शफ़ात भी किसी के लिए नफ़ेह (फ़ैदा-मंद) नहीं हो सकता हमें शक्स के जिसके लिए अल्लाह ने सिफ़ारिश की इजाज़त दी हो। हट्टा के जब लोगों के दिलों से घबराहट दूर होगी तो वो (सिफ़रिश करने वालों से) पूछेंगे के तुम्हारे रब ने क्या जवाब दिया, वो कहेंगे के ठीक जवाब मिला है और वो बुज़ुर्ग ओ बारतार है 
+[34:24] (ऐ नबी) इनसे पूछो, "कौन तुमको आसमान और ज़मीन से रिज़्क देता है?” कहो "अल्लाह। अब ला मुहाल (अनिवार्य रूप से) हम में और तुम में से कोई एक ही हिदायत पर है या खुली गुमराही में पड़ा हुआ है।" 
+[34:25] इनसे कहो, "जो कसूर हमने किया हो उसकी कोई बाज-पर्स तुमसे ना होगी, और जो कुछ तुम कर रहे हो उसकी कोई जवाब तलबी हमसे नहीं की जाएगी।" 
+[34:26] कहो "हमारा रब्ब हमको जमा करेगा, फिर हमारे दरमियान ठीक ठीक फैसला कर देगा। वो ऐसा जबरदस्त हकीम (महान न्यायाधीश) है जो सब कुछ जानता है।" 
+[34:27] इनसे कहो, "जरा मुझे देखो तो सही वो कौन हस्तियां हैं जिन्होंने तुमने उसके साथ शरीक लगा रखा है।" हरगिज़ नहीं, ज़बरदस्त और दाना तो बस वो अल्लाह ही है 
+[34:28] और (ऐ नबी) हमने तुमको तमाम ही इंसानों के लिए बशीर (खुश कब्री देने वाला) ओ नज़ीर (डर सुनाने वाला) बना कर भेजा है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं 
+[34:29] ये लोग तुमसे कहते हैं के वो (कयामत का) वादा कब पूरा होगा अगर तुम सच्चे हो 
+[34:30] कहो तुम्हारे लिए एक ऐसे दिन की मियाद मुकर्रर है जिसके आने में ना एक घड़ी भर की आखिरी (देरी) तुम कर सकते हो और ना एक घड़ी भर पहले इसे ला सकते हो हो
+[34:31] ये काफ़िर कहते हैं के "हम हरगिज़ इस कुरान को ना मानेंगे और ना इसके पहले आई हुई किसी किताब को तसलीम करेंगे"। काश तुम देखो इनका हाल हम वक्त जब ये जालिम अपने रब के हुजूर खड़े होंगे हमें वक्त ये एक दूसरे पर इल्जाम धरेंगे। जो लोग दुनिया में दबा कर रखे गए थे वो बड़े बनने वालों से कहेंगे के "अगर तुम ना होते तो हम मोमिन होते।" 
+[34:32] वो बदे बनने वाले दबाए हुए लोगों को जवाब देंगे "क्या हमने तुम्हें हमें हिदायत से रोका था जो तुम्हारे पास आई थी? नहीं, बल्कि तुम खुद मुजरिम थे।" 
+[34:33] वो दबाए हुए लोग उन बदाए बनने वालों से कहेंगे, 'नहीं, बलके शब-ओ-रोज़ की मक्कारी थी जब तुम हमसे कहते थे के हम अल्लाह से कुफ्र करें और दूसरों को उसका हमसर ठहरें।' आख़िर ए कार जब ये लोग अज़ाब देखेंगे तो अपने दिलों में पछताएंगे और हम मुनकिरीन के गैलन में तौक (बेदी/बेड़ी) डाल देंगे। क्या लोगों को इसके सिवा और कोई बदला दिया जा सकता है के जैसा अमल उनके थे वैसी ही जजा वो पायें 
+[34:34] कभी ऐसा नहीं हुआ के हमने किसी बस्ती में एक खबरदार करने वाला भेजा हो और उस बस्ती के खाते पीते लोगों ने ये ना कहा हो के जो पैग़ाम तुम लेकर आए हो उसको हम नहीं मानते 
+[34:35] उनको ने हमेशा यहीं कहा के हम तुमसे ज्यादा माल औलाद रखते हैं और हम हरगिज सजा पाने वाले नहीं हैं 
+[34:36] (ऐ नबी), इनसे कहो मेरा रब जैसा चाहता है कुशादा (प्रचुर मात्रा में) रिज्क देता है और जिसे चाहता है नापा तुला अता करता है, मगर अक्सर लोग इसकी हकीकत नहीं जानते 
+[34:37] ये तुम्हारी दौलत और तुम्हारी औलाद नहीं है जो तुम्हें हमसे करीब करती हो। हां मगर जो ईमान लाए और नेक अमल करे, यहीं लोग हैं जिनके लिए उनके अमल की दोहरी (डबल) जजा है, और वो बालंद ओ बाला इमरतन में इत्मिनान से रहेंगे 
+[34:38] रहे वो लोग जो हमारी आयत को नीचा दिखाएंगे के लिए दौड़-धूप करते हैं, तो वो अज़ाब में मुबतला होंगे 
+[34:39] (ऐ नबी), इनसे कहो, "मेरा रब अपने बंदों में से जैसा चाहता है खुला रिज़क देता है और जिसे चाहता है नपा तुला देता है। जो कुछ तुम खर्च कर देते हो उसकी जगह वही तुमको और देता है। वो सब रज़िकॉन (प्रदाता) से बेहतर रज़िक़ (प्रदाता) है 
+[34:40] और जिस दिन वो तमाम इंसानों को जमा करेगा फिर फ़रिश्तों से पूछेगा "क्या ये लोग तुम्हारी ही इबादत करते थे?" 
+[34:41] तो वो जवाब देंगे के "पाक है आप की जात, हमारा तालुक़ तो आपस में है ना के इन लोगों से। दर-असल ये हमारी नहीं बलके जिन्नो की इबादत करते थे, मेरे अंदर से अक्सर उन्ही पर ईमान लाए हुए थे" 
+[34:42] (उस वक्त हम कहेंगे के) आज तुम मेरे से कोई ना किसी को फ़ायदा पाहुंचा सकता है ना नुक्सान। और ज़ालिमों से हम कह देंगे के अब चक्खो उस अज़ाब ए जहन्नुम का मजा जैसे तुम झूठलाया करते थे
+[34:43] लोगों को जब हमारी सफ़ आयत सुनाई जाती है तो ये कहते हैं के "ये शक्स तो बस ये चाहता है के तुमको उन माबूदों से बरगश्ता (मुड़ जाना) करदे जिनकी इबादत तुम्हारे बाप दादा करते आये हैं।" और कहते हैं "ये (कुरान) महज़ एक झूठ है घड़ा हुआ।" इन काफ़िरों के सामने जब हक़ आया तो उनको ने कहा के "ये तो सारे जादू है" 
+[34:44] हलांके ना हमने इन लोगों को पहले कोई किताब दी थी के ये उसे पढ़ते थे, और ना तुमसे पहले इनकी तरफ कोई मुतनब्बेह करने वाला भेजा था 
+[34:45] इंसे पहले गुज़रे हुए लोग झूठला चुके हैं। जो कुछ हमने उन्हें दिया था उसके उसरे-अशीर (यहां तक ​​कि दसवें/दसवे हिस्से) को भी ये नहीं पहुंचे हैं। मगर जब उन्हें ने मेरे रसूलों को झुटलाया तो देखलो के मेरी सजा कैसी थी 
+[34:46] (ऐ नबी), इनसे कहो "मैं तुम्हें बस एक बात की हिदायत करता हूं, खुदा के लिए तुम अकेले अकेले और दो दो मिल कर अपना दिमाग लड़ाओ और सोचो, तुम्हारे साहब [साथी (मुहम्मद)] में आख़िर ऐसी कौन सी बात है जो जुनून (पागलपन) की हो? वो तो एक सख्त अज़ाब की आमद (आने) से पहले तुमको मुतनब्बेह करने वाला है” 
+[34:47] इंसे कहो “अगर मैंने तुमसे कोई अजर मांगा है तो वो तुम ही को मुबारक” रहे. मेरा अजर तो अल्लाह के ज़िम्मे है और वो हर चीज़ पर गवाह है।” 
+[34:48] इनसे कहो "मेरा रब (मुझपर) हक़ का इल्का (प्रेरणा/हल्स डाउन) करता है और वो तमाम पोशीदा (छुपी हुई) हक़ीक़त को जाने वाला है" 
+[34:49] कहो, "हक़ आ गया और अब बातिल के लिए कुछ नहीं हो सकता" 
+[34:50] कहो, "अगर मैं गुमराह हो गया हूं तो मेरी गुमराही का जवाब मुझपर है, और अगर मैं हिदायत पर हूं तो वही (रहस्योद्घाटन) की बिना पर हूं जो मेरा रब मेरे ऊपर नाज़िल करता है। वो सब कुछ सुनता है और करीब ही है।" 
+[34:51] काश तुम देखो उन्हें वक्त जब ये लोग घबराएं फिर रहेंगे होंगे और कहीं बच कर ना जा सकेंगे, बलके करीब ही से पकड़ लिए जाएंगे 
+[34:52] हमें वक्त ये कहेंगे के हम उसपर ईमान ले आए, हालंके अब दूर निकली हुई चीज कहां हाथ आ सकती है 
+[34:53] इसे पहले ये कुफ्र कर चुके थे और बिला तहकीक दूर की कोड़ियां (अनुमान) लाया करते थे 
+[34:54] हमें वक्त जिस चीज की ये तमन्ना कर रहे होंगे हमें उसी तरह महरूम करदिये जाएंगे जिस तरह इनके पेश-रो हम मशरब (उनमें से पहले की तरह) महरूम हो चुके होंगे। ये बदाए गुमराह-कुन शक्क में पड़े हुए थे 
+
+सूरह 35: अल-फ़ातिर (उत्पत्तिकर्ता) 
+------------------------------------------------ 
+[35:1] तारीफ अल्लाह ही के लिए है जो आसमानो और ज़मीन का बनाने वाला और फ़रिश्तों को पैगाम रसान मुकर्रर करने वाला है। (ऐसी फ़रिश्ते) जिनके दो दो और तीन तीन और चार चार बाज़ू (पंख) हैं। वो अपने मख़ूक की सच्चाई में जैसा चाहता है इज़ाफ़ा करता है। यकीनन अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है
+[35:2] अल्लाह जिस रहमत का दरवाज़ा भी लोगों के लिए खोल दे उसे कोई रोकने वाला नहीं, और जिसे वह बंद करदे उसे अल्लाह के बाद फिर कोई दूसरा खोलने वाला नहीं। वो ज़बरदस्त और हकीम है 
+[35:3] लोगन, तुम्हारे अल्लाह के जो एहसानात हैं उन्हें याद रक्खो, क्या अल्लाह के सिवा कोई और खालिक भी है जो तुम्हें आसमान और ज़मीन से रिज़क देता हो? कोई माबूद उसके सिवा नहीं, आखिर तुम कहां से धोखा खा रहे हो 
+[35:4] अब अगर (ऐ नबी) ये लोग तुम्हें झुठलाते हैं (तो ये कोई नई बात नहीं), तुमसे पहले भी बहुत से रसूल झुटलाए जा चुके हैं, और सारे मामले आखिर ए कार अल्लाह हाय की तरफ रूजू होने वाले हैं 
+[35:5] लोगन, अल्लाह का वादा यकीनन बरहक्क (सच्चा) है, लिहाजा दुनिया की जिंदगी तुम्हें धोखे में ना डाले और ना वो बड़ा धोखेबाज़ तुम्हें अल्लाह के बारे में धोखा देने वाले हैं 
+[35:6] दर हकीकत शैतान तुम्हारा दुश्मन है आपके लिए भी उसे अपना दुश्मन ही समझो, वो तो अपने जोड़े को अपनी राह पर इस लिए बुला रहा है कि वो दोज़खियों में शामिल हो जाए 
+[35:7] जो लोग कुफ्र करेंगे उनके लिए साख अज़ाब है और जो ईमान लाएंगे और नेक अमल करेंगे उनके लिए मगफिरत और बड़ा अजर है 
+[35:8] (भला कुछ ठिकाना है उस लड़के की गुमराही का) जिसके लिए उसका बुरा अमल खुशनुमा बना दिया गया हो और वह उसे अच्छा समझ रहा हो? हकीकत ये है के अल्लाह जिसे चाहता है गुमराही में डाल देता है और जिसे चाहता है राह ए रस्त दिखा देता है। पास (ऐ नबी) खा-मा-खा तुम्हारी जान लोगों की खातिर ग़म-ओ-अफसोस में ना घुले। जो कुछ ये कर रहे हैं अल्लाह उसको खूब जानता है 
+[35:9] वो अल्लाह ही तो है जो हवाओं को भेजता है, फिर वो बादल उठाती हैं, फिर हम उसे एक उजाद (बंजर) इलाके की तरफ ले जाते हैं और उसी जमीन को जिला उठाते हैं जो मेरी पड़ी थी। मारे हुए इंसान का जी उठना भी इसी तरह होगा 
+[35:10] जो कोई इज्जत चाहता हो उसे मालूम होना चाहिए कि इज्जत सारी की सारी अल्लाह की है। उसके हाँ जो चीज़ ऊपर चढ़ती है वो सिर्फ पाकीज़ा क़ौल (बात/शब्द) है, और अमल ए साले उसको ऊपर चढ़ता है। रहे वो लोग जो बेहुदा चाल बाजियां करते हैं, उनके लिए कुछ अजीब है और उनका मकर (प्लॉटिंग) खुद ही गैरत होने वाला है 
+[35:11] अल्लाह ने तुमको मिट्टी से पेदा किया, फिर से शुक्राणु (शुक्राणु की बूंद) से, फिर तुम्हारे जोडे बना दिए (यानी मर्द और औरत)। कोई औरत हमीला नहीं होती और ना बच्चा जानती है मगर ये सब कुछ अल्लाह के इल्म में होता है। कोई उमर पाने वाला उमर नहीं पाता और ना किसी की उमर में कुछ कमी होती है मगर ये सब कुछ एक किताब में लिखा होता है। अल्लाह के लिए ये बहुत आसान काम है
+[35:12] और पानी के दोनो जख़ीरे यक्सन नहीं हैं। एक मीठा और प्यास बुझाने वाला है, पीने में खुशगवार, और दूसरा साख खरी (नमकीन) के हलक शील दे (जुबान पर कड़वा), मगर दोनों से तुम तर-ओ-ताजा गोश्त हासिल करते हो। पहनने के लिए ज़ीनत का सामान निकलते हो, और इसी पानी में तुम देखते हो के कश्तियां उसका सीना चीयरती चली जा रही हैं ता-के तुम अल्लाह का फ़ज़ल तलाश करो और उसकी शुकर गुजर बानो 
+[35:13] वो दिन के अंदर रात को और रात के अंदर दिन को पिरोता हुआ ले आता है.चांद और सूरज को उसने मुस्कुरा कर रखा है. ये सब कुछ एक वक्त-ए-मुकर्रर तक चले जा रहा है। वही अल्लाह (जिसके ये सारे काम हैं) तुम्हारा रब है, बादशाही उसी की है उसे छोड़ कर जिन दूसरे को तुम पुकारते हो वो एक परीका (खजूर की खाल) के मालिक भी नहीं है 
+[35:14] इन्हें पुकारो तो वो तुम्हारी दुआएं सुन नहीं सकते।और सुनो तो उनका तुम्हें कोई जवाब नहीं दे सकता। और कयामत के रोज़ वो तुम्हारे शिर्क का इंकार कर देंगे। हकीकत ए हाल की ऐसी सही खबर तुम्हें एक खबरदार के सिवा कोई नहीं दे सकता 
+[35:15] लोगन, तुम ही अल्लाह के मोहताज हो और अल्लाह तो गनी (आत्मनिर्भर) ओ हमीद (बेहद प्रशंसनीय) है 
+[35:16] वो चाहे तो तुम्हें हटा कर कोई नई ख़लक़त (सृजन) तुम्हारी जगह ले आये 
+[35:17] ऐसा करना अल्लाह के लिए कुछ भी दुश्वार नहीं 
+[35:18] कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ ना उठाएगा।और अगर कोई लड़ा हुआ (भारी लादा हुआ) नफ़्स अपना बोझ उठाने के लिए उसे पुकारेगा बार का एक अदना (छोटा) हिसा भी बताने के लिए कोई ना आएगा चाहे वो करीब-तरीन रिश्तेदार ही क्यों ना हो। (ऐ नबी) तुम सिर्फ उन लोगों को मुतनब्बे (चेतावनी) दे सकते हो जो बे-देखे अपने रब से डरते हैं और नमाज़ क़याम करते हैं। जो शक्स भी पाकीज़गी इख्तियार करता है अपने ही भलाई के लिए करता है और पलटना सबको अल्लाह ही की तरफ करता है 
+[35:19] अंधा और आँखों वाला बराबर नहीं है 
+[35:20] ना तारीकियाँ (अंधेरा) और रोशनी यकसन हैं 
+[35:21] ना ठंडी छाँव और धूप की तपिश एक जैसी है 
+[35:22] और ना ज़िंदे और मुर्दे मुसावी (बराबर) हैं। अल्लाह जिसे चाहता है सुनता (सुन) है, मगर (ऐ नबी) तुम उन लोगों को नहीं सुना सकते हो कब्रों में पागल हो 
+[35:23] तुम तो बस एक खबरदार करने वाले हो 
+[35:24] हमने तुमको हक़ के साथ भेजा है। बशारत (ख़ुश ख़बरी) देने वाला और डरने वाला बनकर। और कोई उम्मत ऐसी नहीं गुजरी है जिसमें कोई मुतनब्बेह (चेतावनी) करने वाला ना आया हो 
+[35:25] अब अगर ये लोग तुम्हें झुठलाते हैं तो इनसे पहले गुजरे हुए लोग भी झुटला चुके हैं। उनके पास उनके रसूल खुले दलैल (प्रमाण) और सहीफे (ग्रंथ) और रोशन हिदायत (मार्गदर्शन) देने वाली किताब लेकर आये थे 
+[35:26] फिर जिन लोगों ने ना माना उनको मैंने पकड़ लिया और देखलो के मेरी सजा कैसी सच थी
+[35:27] क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह आसमान से पानी बरसाता है और फिर इसके ज़रिये से हम तरह तरह के फल निकल लाते हैं जिनका रंग मुख़्तलिफ़ होते हैं। पहाड़ों में भी सफ़ेद (सफ़ेद), सुर्ख (लाल) और गहरी सियाह (गहरा काला) धारियां पाई जाती हैं जिनके रंग मुख़्तलिफ़ होते हैं 
+[35:28] और इसी तरह इंसानों और जानवरों और मुसलमानों के रंग भी मुख़्तलिफ़ हैं। हकीकत ये है कि अल्लाह के बंदों में से सिर्फ इल्म रखने वाले लोग ही उससे डरते हैं। बेशाक़ अल्लाह ज़बरदस्त और दरगुज़र फ़रमाने वाला है 
+[35:29] जो लोग किताबुल्लाह की तिलावत करते हैं और नमाज़ क़याम करते हैं, और जो कुछ हमने उन्हें रिज़क़ दिया है उसमें से खुले और छुपे ख़र्च करते हैं, यक़ीनन वो एक ऐसी तिजारत के मुतवक्किह (उम्मीदवार) हैं जिसका हरगिज खसरा (नुक्सन) न होगा 
+[35:30] (इस तिजारत में उन लोगों ने अपना सब कुछ खा लिया है) ता-के अल्लाह उनको अजर पूरय के पूर उनको दे और मजीद अपने फजल से उनको अता फरमाये। बेशाक़ अल्लाह बख्शने वाला और क़दरदान (प्रशंसनीय) है 
+[35:31] (ऐ नबी) जो किताब हमने तुम्हारी तरफ वही के ज़रिया से भेजी है वही हक है, तस्दीक (पुष्टि करें) करती हुई आई है उन किताबों की जो इसे पहले आई थी। बेशक अल्लाह अपने बंदों के हाल से खबर है, और हर चीज पर निगाह रखने वाला है 
+[35:32] फिर हमने इस किताब का वारिस बना दिया उन लोगों को जिन्होंने (इस विरासत के लिए) अपने बंदों में से चुन लिया। अब कोई तो इनमें से अपने नफ़्स पर ज़ुल्म करने वाला है, और कोई बीच की रास है (मध्यम कोर्स), और कोई अल्लाह के इज़ान से नेकियों में सबक करने वाला (आगे बढ़ने वाला) है, यहीं बहुत बड़ा फ़ज़ल है 
+[35:33] हमेशा रहने वाली जन्नतें हैं जिनमें ये लोग दाखिल होंगे, वहां इन्हें सोने (सोना) के कंगन (कंगन) और मोतियों (मोती) से सजाया जाएगा, वहां इनका लिबास रेशम होगा 
+[35:34] और वो कहेंगे के शुक्र है उस खुदा का जिसने हमसे गम दूर कर दिया, यकीनन हमारा रब माफ करने वाला और क़दर फ़रमाने वाला है 
+[35:35] जिसने हमें अपने फ़ज़ल से आबादी (हमेशा के) क़याम की जगह ठहर दिया, अब यहां ना हमें कोई मुशक्कत पेश आती है और ना थकान लाहिक होती है 
+[35:36] और जिन लोगों ने कुफ्र किया है उनके लिए जहन्नुम की आग है, ना उनका क़िस्सा पक कर दिया जायेगा के मर जायेंगे और ना उनके लिए जहन्नुम के अज़ाब में कोई कमी आ जायेगी। इस तरह हम बदला देते हैं हर उस शक्स को जो कुफ्र करने वाला है 
+[35:37] वो वहां चीख-चीख कर कहेंगे के "ऐ हमारे रब हमें यहां से निकल ले ता-के हम नई अमल करें, उन अमाल से मुख्तलिफ जो पहले करते रहे थे।" (उन्हें जवाब दिया जाएगा) "क्या हमने तुमको इतनी उमर न दी थी कि मैं कोई सबक लेना चाहता था तो सबक ले सकता था? और तुम्हारे पास मुतनब्बे (चेतावनी) करने वाला भी आ चूका था। अब मजा चक्खो। जालिमों का यहां कोई मददगार नहीं है
+[35:38] बहस अल्लाह आसमानो और ज़मीन की हर पोशीदा (चुपी) चीज़ से वाकिफ है। वो तो सीने के छुपे हुए राज़ तक जानता है 
+[35:39] वही तो है जिसने तुमको ज़मीन में खलीफा बनाया है। अब जो कोई कुफ्र करता है उसका कुफ्र (बोझ) उसी पर है, और काफिरों को उनका कुफ्र इसके सिवा कोई तरक्की नहीं देता के उनके रब का गजब उन पर ज्यादा से ज्यादा भड़का चला जाता है। काफ़िरों के लिए खसरे (नुक्सान) में इज़ाफ़े के सिवा कोई तरक़्की नहीं 
+[35:40] (ऐ नबी) इनसे कहो, "कभी तुमने देखा भी है अपने उन शरीकों को जिन्हें तुम खुदा को छोड़ कर पुकारा करते हो? मुझे बताओ, उन्हें ने ज़मीन में क्या पेदा किया है? हां आसमानों में उनकी क्या शिरकत है?” (अगर ये नहीं बता सकता तो इनसे पूछो) क्या हमने इन्हें कोई तहरीर (लिखित) लिख कर दी है जिसका बिना पर ये (अपने इस शरीक के लिए) कोई साफ सनद रखते हो? नहीं, बलके ये जालिम एक दूसरे को महज़ फरेब के झाँसे दिए जा रहे हैं 
+[35:41] हकीकत ये है के अल्लाह ही है जो आसमानों और ज़मीन को टाल (विस्थापित) जाने से रोके हुए हैं, और अगर वो ताल (विस्थापित) जाएँ तो अल्लाह के बाद कोई दूसरा इन्हें थमने (पकड़ने) वाला नहीं है। बेशक अल्लाह बड़ा हलीम (सहनशील) और दरगुज़र फ़रमाने वाला है 
+[35:42] ये लोग कड़ी क़िस्में खा कर कहते थे कि अगर कोई ख़बरदार करने वाला उनके हाँ आ गया होता तो ये दुनिया की हर दूसरी क़ौम से बढ़ कर रास्ता-रो (बेहतर निर्देशित) होटे. मगर जब ख़बरदार करने वाला इनके पास आ गया तो उसकी आमद (आ रही है) ने इनके अंदर हक़ से फ़रार के सिवा किसी चीज़ में इज़ाफ़ा ना किया 
+[35:43] ये ज़मीन में और ज़्यादा इस्तकबार (गुरूर) करने लगे और बुरी बुरी चालें चलने लगें, हालंके बुरी चालें चलने वालो ही को ले बैठती है। अब क्या ये लोग इसका इंतज़ार कर रहे हैं कि पिछली क़ौमों के साथ अल्लाह का जो तरीक़ा रहा है वही इनके साथ भी बढ़ता जाए? यही बात है तो तुम अल्लाह के तरीक़े में हरगिज़ कोई तबदीली न पाओगे और तुम कभी न देखोगे के अल्लाह की सुन्नत को उसके मुकर्रर रास्ते से कोई ताक़त फेर सकती है 
+[35:44] क्या ये लोग ज़मीन में कभी चले फिर नहीं हैं के इनहे उन लोगों का अंजाम नज़र आता है जो इनसे पहले गुजर चुके हैं, और इनसे बहुत ज्यादा ताकत थी? अल्लाह को कोई चीज़ अजीज (निराश) करने वाली नहीं है, न आसमानों में और न ज़मीन में। वो सब कुछ जानता है और हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है 
+[35:45] अगर कहीं वो लोगों को उनके किये कार्टून पर पकड़ा तो ज़मीन पर किसी मुतनफ़्फ़िस (जीवित प्राणी) को जीता (ज़िंदा) ना छोड़ता। मगर वो उनको एक मुकर्रर वक्त तक के लिए मोहलत दे रहा है, फिर जब उनका वक्त आन पूरा होगा अल्लाह के पास अपने बंदों को देख लेगा 
+
+सूरह 36: या सिन (या सिन) 
+------------------------------------------------ 
+[36:1] यासीन 
+[36:2] कसम है कुरान ए हकीम की 
+[36:3] के तुम यकीनन रसूलन मैं से हो 
+[36:4] सीधे रास्ते पर हो
+[36:5] (और ये कुरान) गालिब और रहीम हस्ती का नाज़िल करदा है 
+[36:6] ता-के तुम खबरदार करो एक ऐसी क़ौम को जिसके बाप दादा खबरदार ना किये गए थे और इस वजह से वो गफ़लत में पड़े हुए हैं 
+[36:7] इनमें से अक्सर लोग फ़ैसला-ए-अज़ाब के मुस्तहिक हो चुके हैं, इसके लिए वो ईमान नहीं लाते हैं 
+[36:8] हमने उनकी गर्दनों में तौक (बेदी/बेड़ी) डाल दिए हैं जिनसे वो थोड़ीयों (चिन) तक जकड़े गए हैं, इसलिए वो सर उठाए खड़े हैं 
+[36:9] हमने एक दीवार उनके आगे खादी करदी है और एक दीवार उनके पीछे, हमने उन्हें ढांक दिया है, उन्हें अब कुछ नहीं सूझता 
+[36:10] उनके लिए यकसन है, तुम उन्हें खबरदार करो या ना करो, ये ना मानेंगे 
+[36:11] तुम तो उसी खबर को खबरदार बना सकते हो जो हिदायत की जोड़ी। करे और बे-देखे खुदा ए रहमान से डरे, उसे मगफिरत और अज्र-ए-करीम की बशारत (खुश खबरी) दे दो 
+[36:12] हम यकीनन एक रोज़ मुर्दों को जिंदा करने वाले हैं जो कुछ अफाल (आमाल) उन्होन ने किये हैं वो सब हम लिखते रहे हैं, और जो कुछ आसर उनहों ने पीछे छोड़े हैं वो भी हम सब (लिख) रहे हैं। हर चीज को हमने एक खुली किताब में दर्ज कर रखा है 
+[36:13] इन्हें मिसाल के तौर पर उस बस्ती वालों का क़िस्सा सुनाओ जबके उसमें रसूल आए थे 
+[36:14] हमने उनकी तरफ दो रसूल भेजे और उन्होन ने दोनों को झुटला दिया फिर हमने तीसरा मदद के लिए भेजा और उनसब ने कहा "हम तुम्हारी तरफ रसूल की हकीकत से भेज गए हैं" 
+[36:15] बस्ती वालों ने कहा "तुम कुछ नहीं हो मगर हम जैसे चांद इंसान, और खुदा ए रहमान ने हरगिज कोई चीज नाज़िल नहीं की है, तुम महज़ झूठ बोलते हो।" 
+[36:16] रसूलों ने कहा "हमारा रब जानता है के हम जरूर तुम्हारी तरफ रसूल बना कर भेज गए हैं 
+[36:17] और हमपर साफ साफ पैगाम पाहुंचा देने के सिवा कोई जिम्मेदारी नहीं है" 
+[36:18] बस्ती वाले कहने लगे "हम तो तुम्हारे लिए फ़ल-ए-बद्द (मनहूस) समझते हैं, अगर तुम बाज़ ना आए तो हम तुमको संगसार (पत्थरबाजी) कर देंगे और हमसे तुम बड़ी दर्दनाक साज़ा पाओगे" 
+[36:19] रसूलों ने जवाब दिया "तुम्हारी फ़ल-ए-बद्द (नहुसत) तो तुम्हारे अपने साथ लगी हुई है, क्या ये बातें तुम इसलिए करते हो कि तुम्हें हिदायत की गई है? असल बात ये है के तुम हद से गुज़रे हुए लोग हो” 
+[36:20] इतने में शहर के दरवाज़े से एक शक्स दौड़ता हुआ आया और बोला “ऐ मेरी क़ौम के लोगों, रसूलों की जोड़ी इख्तियार करलो 
+[36:21] जोड़ी करो उन लोगों की जो तुमसे कोई अजर नहीं चाहते और ठीक रास्ते पर हैं 
+[36:22] आखिर क्यों ना मैं उस हस्ती की बंदगी करूं जिसने मुझे भुगतान किया है और जिसकी तरफ तुम सबको पलट कर जाना है
+[36:23] क्या मैं उसे चोद कर दूसरे को माबूद बना लूं? हलांके अगर खुदा ए रहमान मुझे कोई नुक्सान पहुंचाना चाहे तो ना उनकी शफाअत मेरे लिए कोई काम आ सकती है और ना वो मुझे छुड़ा ही सकते हैं 
+[36:24] अगर मैं ऐसा करूं तो मैं सारी गुमराही में मुबतला हो जाऊंगा 
+[36:25] मैं तो तुम्हारे रब पर ईमान ले जाऊंगा आया, तुम भी मेरी बात मान लो।” 
+[36:26] (आखिर ए कार उन लोगों ने उसे क़त्ल कर दिया और) उस शक्स से कहदिया गया के "दाखिल हो जा जन्नत में" उसने कहा "काश मेरी क़ौम को मालूम होता है 
+[36:27] के मेरे रब ने किस चीज़ की बदौलत मेरी मगफिरत फ़रमा दी और मुझे ब-इज्जत लोगों में दाख़िल फरमाया” 
+[36:28] इसके बाद उसकी कौम पर हमने आसमान से कोई लश्कर नहीं उतारा, हमने लश्कर भेजा कि कोई हाजात ना थी 
+[36:29] बस एक धमाका हुआ और यकीन वो सब बुझ कर रह गए 
+[36:30] अफसोस बंदों के हाल पर, जो रसूल भी उनके पास आया उसका वो मज़ाक ही उड़ाते रहे 
+[36:31] क्या उन्हें ने देखा नहीं के उनसे पहले कितनी ही हाय क़ौमों को हम हलाक कर चुके हैं और उसके बाद वो फिर कभी उनकी तरफ पलट कर ना आये 
+[36:32] उन सबको एक रोज़ हमारे सामने हाज़िर किया जाना है 
+[36:33] लोगों के लिए बे-जान ज़मीन एक निशानी है, हमने इसको जिंदगी बख्शी और इस गल्ला (अनाज/अनाज) निकाला जिसे ये खाते हैं 
+[36:34] हमने इसमे खजूरों और अंगूरों के बाग पैदा किये और उसके अंदर चश्मे (स्प्रिंग्स) फोढ़ निकले 
+[36:35] ता-के ये उसके फल खायें, ये सब कुछ इनके अपने हाथों का भुगतान किया हुआ नहीं है फिर क्या ये शुक्र अदा नहीं करते 
+[36:36] पाक है वो जात जिसने जुमला अक्साम के जोड़े पैदा किये ख्वाह वो ज़मीन की नबात में से होन या खुद इनके अपने जिन्स (यानी नाव-ए-इंसानी) में से या उन आशियानों में से जिनको ये जानते तक नहीं हैं 
+[36:37] इनके लिए एक और निशानी रात है, हम उसके ऊपर से दिन हटा देते हैं तो अंदर अंधेरा छा जाता है 
+[36:38] और सूरज, वो अपने ठिकाने की तरफ चल जा रहा है, ये ज़बरदत आलिम (सर्वज्ञ) हस्ती का बंदा हुआ हिसाब है 
+[36:39] और चाँद, उसके लिए हमने मंज़िलें मुक़र्रर कर दी हैं यहाँ तक के इनसे गुज़रता हुआ वो फिर खजूर की सूखी शाखा (सूखी पुरानी शाखा) के मनिंद रह जाता है 
+[36:40] ना सूरज के बस में ये है कि वो चांद को जा पकड़े और ना रात दिन पर सबक ले जा सकती है। सब एक एक फलक में तैर रहे हैं 
+[36:41] इनके लिए ये भी एक निशानी है के हमने इनकी नाक को भरी हुई कश्ती में सवार करदिया 
+[36:42] और फिर इनके लिए वैसी ही कश्तियां और पैदा कि जिनपर ये सवार होते हैं 
+[36:43] हम चाहें तो इनको गरक करदें, कोई इनकी फरियाद सुनने वाला ना हो और किसी तरह ये ना बचाए जा सकें 
+[36:44] बस हमारी रहमत ही है जो इन्हें पार लगाती और एक वक्त और खास तक जिंदगी से मिलता जुलता (आनंद) होने का मौका देती है
+[36:45] लोगों से जब कहा जाता है के बच्चों उस अंजाम से जो तुम्हारे आगे आ रहा है और तुम्हारे पीछे गुजर चुका है, शायद के तुमपर रहम किया जाए (तो ये सुनी अन सुनी कर जाते हैं) [ 
+36:46] इनके सामने इनके रब की आयत (निशानी) में से जो आयत (निशानी) भी आती है ये इसकी तरफ इल्तिफ़ात नहीं करते 
+[36:47] और जब इनसे कहा जाता है कि अल्लाह ने जो रिज़क तुम्हें अता किया है उसमें से कुछ अल्लाह की राह में भी खर्च करो तो ये लोग जिन्होन ने कुफ्र किया है ईमान लाने वालों को जवाब देते हैं " क्या हम उनको खिलाएं जिन्हें अगर अल्लाह चाहता तो खुद खिला देता? तुम तो बिलकुल ही बहक गए हो” 
+[36:48] ये लोग कहते हैं के “ये कयामत की धमकी आख़िर कब पूरी होगी? बताओ अगर तुम सच्चे हो” 
+[36:49] दर-असल ये जिस चीज की राह तक रहे हैं वो बस एक धमाका है जो यकीन है कि ऐन उस हालात में धर लेगा जब ये (अपनी दुनिया मामलात में) झगड़ा कर रहे होंगे 
+[36:50] और हम वक्त ये वसीयत तक ना कर पाएंगे, ना अपने घरों को पलट पाएंगे 
+[36:51] फिर एक सुर (तुरही) फूँका जाएगा और यकीन ये अपने रब के हुजूर पेश होने के लिए अपनी कब्रों से निकल पड़ेंगे 
+[36:52] घबरा कर कहेंगे: "अरे, ये किसने हमने हमारी ख्वाब-गाह से उठाया खड़ा किया?" ये वही चीज़ है जिसका खुदा ए रहमान ने वादा किया था और रसूलों की बात सच्ची थी” 
+[36:53] एक ही ज़ोर की आवाज़ होगी और सब के सब हमारे सामने हाज़िर हो जायेंगे 
+[36:54] आज किसी पर ज़रा बराबर ज़ुल्म ना किया जायेगा और तुम्हें वैसा ही बदला दिया जाएगा जैसे अमल तुम करते रहे थे 
+[36:55] आज जन्नती लोग मजे करने में मशगुल हैं 
+[36:56] वो और उनकी बिवियां घने साइयों (शेड्स) में हैं मसनदों पर ताकि लगे हुए 
+[36:57] हर क़िस्म की लज़ीज़ चीज़ें खने पीने को उनके लिए वहां मौजूद हैं, जो कुछ वो तालाब करें उनके लिए हाज़िर है 
+[36:58] रब ए रहीम की तरफ से उनको सलाम कहा गया है 
+[36:59] और ऐ मुजरिमोन, आज तुम चैट कर अलग हो जाओ 
+[36:60] आदम के बच्चों, क्या मैंने तुमको हिदायत ना की थाई के शैतान की बंदगी ना करो, वो तुम्हारा खुला दुश्मन है 
+[36:61] और मेरी ही बंदगी करो, ये सीधा रास्ता है 
+[36:62] मगर इसके बावज़ूद उसने तुम में से एक गिरोह-ए-कसीर (आपकी बड़ी भीड़) को गुमराह कर दिया, क्या तुम अक़ल नहीं रखते थे 
+[36:63] ये वही जहन्नुम है जिसे तुमको डराया जाता रहा था 
+[36:64] जो कुफ्र तुम दुनिया में करते रहे हो उसकी पैदाइश में अब इसका इंधन (ईंधन) बनो 
+[36:65] आज हम इनको मुंह बांध देते हैं, इनके हाथ हमसे बोलेंगे और इनके पांव गवाही देंगे के ये दुनिया में क्या कमाई करते रहेंगे 
+[36:66] हम चाहें तो इनकी आंखें मूंद लें (आंखें मिटा दीं), फिर ये रास्ते की तरफ लपक कर देखें, कहां से इन्हें रास्ता सुझाएगा
+[36:67] हम चाहें तो इनकी जगह ही पर इस तरफ मास्क (रूपांतरण) करके रख दें के ये ना आगे चल सकें ना पीछे पलट सकें 
+[36:68] जिस शक्स को हम लंबी उमर देते हैं इसकी सच्चाई को हम उलट ही देते हैं (हम सृजन में उलट हैं), क्या (ये हालात देख) कर) इन्हें अक्ल नहीं आती 
+[36:69] हमने इस (नबी) को शेर नहीं सिखाया है और ना शायरी इसको ज़ायब ही देती है, ये तो एक हिदायत है और साफ पढ़ी जाने वाली किताब 
+[36:70] ता-के वो हर उस शक्स को खबरदार बना दे जो जिंदा हो और इंकार करने वालों पर हुज्जत कयाम हो जाए 
+[36:71] क्या ये लोग देखते नहीं हैं कि हमने अपने हाथों की बनाई हुई चीजों में से इनके लिए मवेशी पैदा किए और अब ये इनके मालिक हैं 
+[36:72] हमने उन्हें इस तरह इनके बस में कर दिया है के उनमें से किसी पर ये सवार होते हैं, किसिका ये गोश्त खाते हैं 
+[36:73] और उनके अंदर इनके लिए तरह तरह के फवाद (फायदे) और मशरूबात (पेय) हैं फिर क्या ये शराब गुजर नहीं होते 
+[36:74] ये सब कुछ होते हुए इन्होन ने अल्लाह के सिवा दूसरे खुदा बना लिए हैं और ये उम्मीद रखते हैं के इनकी मदद की जाएगी 
+[36:75] वो इनकी कोई मदद नहीं कर सकते बल्के ये लोग उलटे उनके लिए हाज़िर-बाश लश्कर (प्रतीक्षा में सेना) बने हुए हैं 
+[36:76] अच्छा, जो बातें ये बना रहे हैं वो तुम्हें रंजीदा ना करें, इनकी छुपी और खुली सब बातों को हम जानते हैं 
+[36:77] क्या इंसान देखता नहीं है कि हमने उसका इस्तेमाल किया (शुक्राणु ड्रॉप) से भुगतान किया और फिर वह सारा झगड़ालू बनकर खड़ा हो गया 
+[36:78] अब वह हमपर मिसालें चस्पां करता है और अपनी कमाई को भूल जाता है, कहता है “कौन इन हदियों को जिंदा करेगा जबके ये गंदा (सड़ा हुआ) हो चुकी हूं?” 
+[36:79] उसे कहो, वहीं जिंदा करेगा जिसने पहले उसे पैदा किया था, और वह तखलीक (सृजन) का हर काम जानता है 
+[36:80] वही जिसने तुम्हारे लिए हरे भरे (हरा) दरख्त से आग पैदा कर दी और तुम उसे अपने चूल्हे (स्टोव) रोशन करते हो 
+[36:81] क्या वो जिसने आसमानो और ज़मीन को पेदा किया इसपर कादिर नहीं है के इन जैसों को पेदा कर सके? क्यों नहीं, जबके वो माहिर खल्लाक (शानदार रचनाकार) है 
+[36:82] वो तो जब किसी चीज का इरादा करता है तो उसका काम बस यही है कि उसे हुकुम दे के होजा और वो जो जाती है 
+[36:83] पाक है वो जिसके हाथ में हर चीज का मुकम्मल इक्तेदार (पूर्ण नियंत्रण) है, और उसकी तरफ तुम पलटाए जाने वाले हो 
+
+सूरह 37: अस-सफ़त (रैंकों में रहने वाले) 
+------------------------------------------------ 
+[37:1] कतर दर कतर सैफ बांधने वालों की कसम 
+[37:2] फिर उनकी कसम जो दतने फाटक ने वाले हैं 
+[37:3] फिर उनकी कसम जो कलाम ए हिदायत सुनाने वाले हैं 
+[37:4] तुम्हारा माबूद ए हकीकत बस एक ही है
+[37:5] वो जो ज़मीन और आसमान का मालिक है और तमाम उन चीज़ों का मालिक है जो ज़मीन ओ आसमान में हैं, और सारे मशरिकों का मालिक है 
+[37:6] हमने आसमान ए दुनिया को तारों की ज़ीनत से सजाया है 
+[37:7] और हर शैतान सरकश से इसको महफ़ूज़ कर दिया है 
+[37:8] ये शयातीन माला-ए-आला (हाई काउंसिल) की बातें नहीं सुन सकते, हर तरफ से मारे और हांके जाते हैं 
+[37:9] और इनके लिए पैहम अज़ाब है 
+[37:10] ताहम अगर कोई इनमें से कुछ ले उदय तो एक तेज़ शोला उसका पीछा करता है 
+[37:11] अब इनसे पूछो, इनकी अदायगी ज्यादा मुश्किल है या उन चीजों की जो हमने भुगतान कर रखी हैं? इनको तो हमने लीस डर गैरे (चिपचिपी मिट्टी/चिकनी मिट्टी) से पेदा किया है 
+[37:12] तुम (अल्लाह की क़ुदरत के करिश्माओं पर) हेयरन हो और ये इसका मज़ाक उड़ा रहे हैं 
+[37:13] समझा जाता है तो समझ कर नहीं देते 
+[37:14] कोई निशानी देखते हैं तो इस्तेमाल करते हैं थाटन (मजाक/मॉक) में उड़ाते हैं 
+[37:15] और कहते हैं “ये तो सारा जादू है 
+[37:16] भला कहीं ऐसा हो सकता है के जब हम मर चुके हों और मिट्टी बन जाएं और हड्डियों का पंजर रह जाएं हमें वक्त हम फिर जिंदा करके उठा खड़े किए जायें 
+[37:17] और क्या हमारे अगले वक्त के आबा ओ आजदाद भी उठाये जायेंगे?” 
+[37:18] (इनसे कहो हां, और तुम) खुदा के मुकाबले में बेबस हो 
+[37:19] बस एक ही झिडकी होगी और यकीन ये अपनी आंखों से (वो सब कुछ जिसकी खबर दी जा रही है) देख रहे होंगे 
+[37:20] हमें वक्त ये कहेंगे " हाये हमारी कम्बख्त, ये तो यम उल जजा है” 
+[37:21] “ये वही फैसले का दिन है जिसे तुम झुटलाया करते थे” 
+[37:22] (हुकुम होगा) घेर लाओ सब जालिमों और उनके साथियों और उन माबूदों को जिनकी वो खुदा को चोद कर बंदगी किया करते थाय 
+[37:23] फिर उन सबको जहन्नुम का रास्ता दिखाओ 
+[37:24] और जरा यहीं ठहरो, इनसे कुछ पूछना है 
+[37:25] “क्या हो गया तुम्हें, अब क्यों एक दूसरे की मदद नहीं करते 
+[37:26] (अरे, आज तो ये अपने आप को) और एक दूसरे को हवलिये (आत्मसमर्पण) किये दे रहे हैं” 
+[37:27] इसके बाद ये एक दूसरे की तरफ मुड़ेंगे और बहाम तकरार शुरू कर देंगे 
+[37:28] जोड़ी बनाने वाले अपने पेशवाओं से) कहेंगे, “तुम हमारे पास सीधे रुख से आते थे” 
+[37:29] वो जवाब देंगे “नहीं बलके तुम खुद ईमान लेन वाले ना थे 
+[37:30] हमारा तुमपर कोई जोर ना था, तुम खुद ही सरकश लोग थे 
+[37:31] आखिर ए कार हम अपने रब के इस फरमान के मुस्तहिक हो गए के हम अज़ाब का मजा चखने वाले हैं 
+[37:32] तो हमने तुमको बहकाया, हम खुद बहके हुए थे” 
+[37:33] इस तरह वो सब हम रोज़ अज़ाब में मुश्तारिक (शारीक) होंगे 
+[37:34] हम मुजरिमों के साथ यहीं कुछ करते हैं
+[37:35] ये वो लोग थे के जब उनसे कहा जाता "अल्लाह के सिवा कोई मबूद ए बरहक़ नहीं है" तो ये घमंड में आ जाते थे 
+[37:36] और कहते थे "क्या हम एक शायर मजनूं (दीवाने) की खातिर अपने मबूदों को छोड़ दें?" 
+[37:37] हलांके वो हक़ लेकर आया था और उसने रसूलों की तस्दीक की थी 
+[37:38] (अब उन्हें कहा जाएगा के) तुम लाज़िमन दर्दनाक सज़ा का मज़ा चखने वाले हो 
+[37:39] और तुम्हें जो बदला भी दिया जा रहा है उन्ही अमाल का दिया जा रहा है जो तुम करते रहो हो 
+[37:40] मगर अल्लाह के चीदा (चुने हुए/चुने हुए) बंदे (इस अंजाम ए बद से) महफूज़ होंगे 
+[37:41] उनके लिए जाना बुझा रिज़क (ज्ञात प्रावधान) है 
+[37:42] हर तरह की लज़ीज़ चीज़ 
+[37:43] और नियामत भारी जन्नतें 
+[37:44] जिनको वो इज्जत के साथ रखेंगे, तख्तों पर आमने-सामने बैठेंगे 
+[37:45] शराब के चमसों से सागर (कप) भर-भर कर उनके दरमियान फिराए जाएंगे 
+[37:46] चमकती हुई शराब, जो पीने वालों के लिए लज्जत होगी 
+[37:47] ना उनके जिस्म को कोई जरूर होगा और ना उनका अक्ल उसे खराब होगी 
+[37:48] और उनके पास निगाहें बचाने वाली, खूबसूरत आंखों वाली औरतें होंगी 
+[37:49] ऐसी नाज़ुक जैसे अंडे (अंडे) के छिलके के नीचे छुपी हुई झिल्ली 
+[37:50] फिर वो एक दूसरे की तरफ मुतवज्जे हो कर हालात पूछेंगे 
+[37:51] उनमें से एक कहेगा, “दुनिया में मेरा एक हम नहसीन (साथी) था 
+[37:52] जो मुझसे कहता था, क्या तुम भी तस्दीक करने वालों में से हो 
+[37:53] क्या वाकाई जब हम मर चुके होंगे और मिट्टी हो जाएंगे और हड्डियों का पंजर बनकर रह जाएंगे तो हमें जजा ओ सजा दी जाएगी 
+[37:54] अब क्या आप लोग देखना चाहते हैं कि वो साहब अब कहां हैं?” 
+[37:55] ये कह कर जुन्ही वो झुकेगा तो जहन्नुम की गहराई में उसको देख लेगा 
+[37:56] और उसे खिताब करके कहेगा “खुदा की कसम, तू तो मुझे तबाह ही कर देने वाला था 
+[37:57] मेरे रब का फज़ल शामिल ए हाल ना होता तो आज मैं भी उन पर लोगों में से होता जो पकड़े हुए आये हैं 
+[37:58] अच्छा तो क्या अब हम मरने वाले नहीं हैं 
+[37:59] मौत जो हमें आनी थी वो बस पहले आ चुकी है? 
+[37:60] यकीनन यही अज़ीम ओ शान कामियाबी है 
+[37:61] ऐसी ही कामियाबी के लिए अमल करने वालों को अमल करना चाहिए 
+[37:62] बोलो, ये ज़ियाफ़त अच्छी है या ज़ख़्म का दरख्त 
+[37:63] हमने हमें दरख्त को ज़ालिमों के लिए दिया फितना बना दिया है 
+[37:64] वो एक दरख्त है जो जहन्नुम की तह से निकलता है 
+[37:65] उसके शगुफे (उभरता हुआ फल) ऐसे हैं जैसे शैतानों के सर 
+[37:66] जहन्नुम के लोग उसे खाएंगे और उसी से पैठ भरेंगे
+[37:67] फिर इसपर पीने के लिए खुलता हुआ पानी मिलेगा 
+[37:68] और इसके बाद उनकी वापसी उसी आतिश ए दोज़ख की तरफ होगी 
+[37:69] ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने बाप दादा को गुमराह पाया 
+[37:70] और उनके नक्शे क़दम पर दौड़ चले 
+[37:71] हालांके उनसे पहले बहुत से लोग गुमराह हो चुके थे 
+[37:72] और उन्हें हमने तम्बीह (चेतावनी) करने वाले रसूल भेजे थे 
+[37:73] अब देखलो के उन तम्बीह किए जाने वालों का क्या अंजाम हुआ 
+[37:74] इस बद-अंजामी से बस अल्लाह के वही बंदे बचाए हैं जिन्होंने अपने लिए खालिस कार्लिया है 
+[37:75] हमको (इससे पहले) नहीं ने पुकारा था, तो देखो के हम कैसे अच्छे जवाब देने वाले थे 
+[37:76] हमने उसको और उसके घर वालों को करब-ए-अजीम (बड़ी मुसीबत) से बचा लिया 
+[37:77] और उसकी नाक को बाकी रक्खा 
+[37:78] और बाद की नाकों में इसकी तारीफ ओ तौसीफ छोड़ दी 
+[37:79] सलाम है नूंह पर तमाम दुनिया वालों में 
+[37:80] हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा दिया करते हैं 
+[37:81] डार हकीकत वो हमारे मोमिन बंदों में से था 
+[37:82] फिर दूसरे गिरो ​​को हमने डूब कर दिखाया 
+[37:83] और नूह ही के तारीख़ पर चलने वाला इब्राहिम था 
+[37:84] जब वो अपने रुब के हुजूर क़ल्ब ए सलीम लेकर आया 
+[37:85] जब उसने अपने बाप और अपनी क़ौम से कहा “ये क्या चीज़ हैं जिनकी तुम इबादत कर रहे हो 
+[37:86] क्या अल्लाह को छोड़ कर झूठ घड़े हुए माबूद चाहते हो 
+[37:87] आख़िर अल्लाह रब-उल-आलमीन के बारे में तुम्हारा क्या गुमान है?” 
+[37:88] फिर उसने तारों पर एक निगाह डाली 
+[37:89] और कहा मेरी तबीयत ख़राब है 
+[37:90] चुनांचे वो लोग उसे छोड़ कर चले गए 
+[37:91] उनके पीछे वो चुपके से उनके मबूदों के मंदिर में घुस गया और बोला “आप लोग खाते क्यों नहीं हैं” 
+[37:92] क्या हो गया, आप लोग बोलते भी नहीं?” 
+[37:93] इसके बाद वो उनपार पिल (टूट) पड़ा और सीधे हाथ से खूब ज़रबीन लगाई (तोधना शुरू किया) 
+[37:94] (वापस आकर) वो लोग भागे भागे उसके पास आए 
+[37:95] उसने कहा “क्या तुम अपनी ही तराशी हुई चीज़ को पूजते हो 
+[37:96] हलांके अल्लाह ही ने तुमको भी पेदा किया है और उन चीज़ों को भी जिनमें तुम बनाते हो” 
+[37:97] उनहों ने आपस में कहा “इसके लिया एक अलाव (चिता) तय्यार करो और इसे देखती हुई आग के ढेर में फेंक दो” 
+[37:98] उनहों ने उसे ख़िलाफ एक करवायी करना चाही थी, मगर हमने उन्हें नीचा दिखा दिया 
+[37:99] इब्राहीम ने कहा “मैं अपने रब की तरफ जाता हूं, वही मेरी रहनुमाई करेगा 
+[37:100] ऐ परवरदिगार, मुझे एक बेटा अता कर जो सालिहों (धर्मी) में से हो”
+[37:101] (इस दुआ के जवाब में)हमने उसको एक हलीम (बुर्दबार) लड़के की बशारत दी 
+[37:102] वो लड़का जब उसके साथ दौड़ धूप करने की उमर को पहुंच गया तो (एक रोज़) इब्राहिम ने उसे कहा, "बेटा, मैं ख्वाब में देखता हूं के मैं तुझसे ज़िबाह" कर रहा हूँ, अब तू बता, तेरा क्या ख्याल है?” उसने कहा, "अब्बाजान, जो कुछ आपको हुकुम दिया जा रहा है उसे कर डालिये, आप इंशा अल्लाह मुझे साबिरों (सब्र करने वालों) में से पियेंगे" 
+[37:103] आख़िर को जब इन दोनों ने सर-ए-तस्लीम ख़म करदिया और इब्राहिम ने बेटे को मथाय के बल गिरा दिया 
+[37:104] और हमने निदा दी के "ऐ इब्राहीम 
+[37:105] तू ने ख्वाब सच कर दिखाया हम नेकी करने वालों को ऐसा ही जजा देता है 
+[37:106] यकीनन ये एक खुली आजमाइश थी" 
+[37:107] और हमने एक बड़ी कुर्बानी फिदिये में दे कर हमसे बचे को छुड़ा लिया 
+[37:108] और उसकी तारीफ ओ तौसीफ हमेशा के लिए बाद की नाकों में छोड़ दी 
+[37:109] सलाम है इब्राहिम पर 
+[37:110] हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा देते हैं 
+[37:111] यकीनन वो हमारे मोमिन बंदों में से थे 
+[37:112] और हमने उसे इशाक (इसाक) की बशारत दी, एक नबी सालिहें में से 
+[37:113] और हमने उसे और इशाक को बरकत दी। अब दोनों की जुर्रियत में से कोई मोहसिन है और कोई अपने नफ़्स पर सारे ज़ुल्म करने वाला है 
+[37:114] और हमने मूसा ओ हारून पर एहसान किया 
+[37:115] उनको और उनकी क़ौम को करब-ए-अज़ीम (बड़ी मुसीबत) से निजात दी 
+[37:116] उनको नुसरत बख्शी जिसकी वजह से वही गालिब रहे 
+[37:117] उनको निहायत वाजे किताब अता की 
+[37:118] उन्हें राह-ए-रास्त दिखाई 
+[37:119] और बाद की नसलों में उनका जिक्र ए खैर बाकी रक्खा 
+[37:120] सलाम है मोसा और हारून पर 
+[37:121] हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा देते हैं 
+[37:122] दर हकीकत वो हमारे मोमिन बंदों में से थे 
+[37:123] और इलियास भी यकीनन मुरसलीन (संदेशवाहक) में से थे 
+[37:124] याद करो जब उसने अपनी क़ौम से कहा था के “तुम लोग डरते नहीं हो 
+[37:125] क्या तुम बाल को पुकारते हो और अहसानुल खलीक़ीन को छोड़ देते हो 
+[37:126] हमें अल्लाह को जो तुम्हारा और तुम्हारे अगले पिछले आबा ओ अजदाद का रब है?” 
+[37:127] मगर उनहों ने उसे झुटला दिया, तो अब यकीनन वो सजा के लिए पेश किए जाने वाले हैं 
+[37:128] बजुज उन बंदगां ए खुदा के जिनको खालिस करलिया गया था 
+[37:129] और इलियास का जिक्र ए खैर हमने बाद की नसलों में बाकी रक्खा 
+[37:130] सलाम है इलियास पर 
+[37:131] हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा देते हैं 
+[37:132] वाकाई वो हमारे मोमिन बंदों में से थे 
+[37:133] और लुट भी उन्ही लोगों में से थे जो रसूल बना कर भेज गए हैं
+[37:134] याद करो जब हमने उसको और उसके सब गर वालों को निजात दी 
+[37:135] सिवाय एक बुदिया के जो पीछे रह जाने वालों में से थी 
+[37:136] फिर बाकी सबको तहस नेहस करदिया 
+[37:137] आज तुम शब-ओ-रोज़ उनके उजड़े दयार (उजाड़ बस्तियों) पर से गुज़रते हो 
+[37:138] क्या तुमको अक्ल नहीं आती 
+[37:139] और यकीनन यूनुस भी रसूलों में से थे 
+[37:140] याद करो जब वो एक भारी कश्ती की तरफ भाग निकला 
+[37:141] फिर क़ोरा अंदाज़ी (कास्ट लॉट) में शरीक हुआ और उसमें मथ खाई (हारे हुए लोगों में) 
+[37:142] आख़िर ए कार मछली ने उसे निगल लिया और वो मलामत ज़दा था 
+[37:143] अब अगर वो तस्बीह करने वालों में से न होता तो 
+[37:144] रोज़-ए-क़यामत तक उसी मछली के पैत में रहता 
+[37:145] आखिर हमने उसे बड़ी सकीम (बीमार/बीमार) हालात में एक छतियाल जमीन पर फेंक दिया 
+[37:146] और उसपर एक बेल-दार दरख्त (लौकी की प्रजाति का एक फैला हुआ पौधा) उगा दिया 
+[37:147] इसके बाद हमने उसे एक लाख या उससे ज्यादा लोगों की तरफ भेजा 
+[37:148] वाह ईमान लाए और हमने एक वक्त ए खास तक उन्हें बाकी रक्खा 
+[37:149] फिर जरा इन लोगों से पूछो, क्या (इनके दिल को ये बात लगती है के) तुम्हारे रब के लिए तो होन बेटियां और इनके लिए होन बेटे 
+[37:150] क्या वक्त है हमने मलाइका (फ़रिश्तों) को औरतें बनाया है और ये आँखों देखी बात कह रहे हैं 
+[37:151] ख़ूब सुन रक्खो, असल ये लोग अपने मन ग़ादत से ये बात कहते हैं 
+[37:152] के अल्लाह औलाद रखता है, और फ़िल वजह ये झूठे हैं 
+[37:153] क्या अल्लाह ने बेटियों के बजाये बेटियां अपने लिए पसंद करली 
+[37:154] तुम्हें क्या हो गया है, कैसे हुकुम लगा रहे हो 
+[37:155] क्या तुम्हें होश नहीं आता 
+[37:156] हां फिर तुम्हारे पास अपनी बातों के लिए कोई साफ सनद (दलेल) है 
+[37:157] तो लाओ अपनी वो किताब अगर तुम सच्चे हो 
+[37:158] इन्होन ने अल्लाह और मलिका के दरमियान नसब (रिश्तेदारी) का रिश्ता बना रक्खा है, हालंके मलिका खूब जानते हैं के ये लोग मुजरिम की हसीयत से पेश होने वाले हैं 
+[37:159] (और वो कहते हैं के) “अल्लाह उन सिफ़ात से पाक है 
+[37:160] जो उसके खालिस बंदों के सिवा दूसरे लोग उसकी तरफ मंसूब करते हैं 
+[37:161] पास तुम और तुम्हारे ये माबूद 
+[37:162] अल्लाह से किसी को फेर नहीं सकते 
+[37:163] मगर सिफ़र उसको जो दोज़ख़ की भड़कती हुई आग में झुलसने वाला हो 
+[37:164] और हमारा हाल तो ये है कि हम में से हर एक का एक मुक़ाम मुकर्रर है 
+[37:165] और हम सफ़ बस्ता (पंक्तियों में) खिदमतगार हैं 
+[37:166] तस्बीह करने वाले हैं।” 
+[37:167] ये लोग पहले तो कहां करते थे 
+[37:168] के काश हमारे पास वो "ज़िक्र" होता जो पिछली क़ौमों को मिला था
+[37:169] तो गुनगुनाने के लिए अल्लाह के चीदा (चुने हुए/चुने हुए) बंदे होतय 
+[37:170] मगर (जब वो आ गया) तो इन्हों ने उसका इनकार करदिया, अब अनकरीब इन्हें (इस रवीश का नातीजा) मालूम हो जाएगा 
+[37:171] अपने भेजे हुए बंदों से हम पहले ही वादा कर चुके हैं 
+[37:172] के यकीनन उनकी मदद की जाएगी 
+[37:173] और हमारा लश्कर ही गालिब होकर रहेगा 
+[37:174] पास (ऐ नबी) ज़रा कुछ मुद्दत तक इन्हें इनके हाल पर छोड़ दो 
+[37:175] और देखते रहो, अंकारीब ये खुद भी देख लेंगे 
+[37:176] क्या ये हमारे अज़ाब के लिए जल्दी मचा रहे हैं 
+[37:177] जब वो इनके सेहन (मैदान/खुली जगह) में आ उतरेगा वो दिन उन लोगों के लिए बहुत बुरा होगा जिनमें मुतनब्बेह (चेतावनी) किया जा चुका है 
+[37:178] पास ज़रा इन्हें कुछ मुद्दत के लिए छोड़ दो 
+[37:179] और देखते रहो, अनकरीब ये खुद देख लेंगे 
+[37:180] पाक है तेरा रब, इज्जत का मालिक, उन तमाम बातों से जो ये लोग बना रहे हैं 
+[37:181] और सलाम है मुरसलीन (संदेशवाहक) पर 
+[37:182] और सारी तारीफ अल्लाह रब्बुल आलमीन ही के लिए है 
+
+सूरह 38: दुखद (दुखद) 
+------------------------------------------------ 
+[38:1] साद, कसम है हिदायत भरे कुरान की 
+[38:2] बलके यही लोग, जिन्होन ने मन्ने से इंकार किया है, सच तकब्बुर और जिद में मुब्तिला हैं 
+[38:3] इनसे पहले हम ऐसी कितनी ही क़ौमों को हलाक कर चुके हैं (और जब उनकी शामत आई है) तो वो गाल उठे हैं, मगर वो वक़्त बचने का नहीं होता 
+[38:4] लोगों को इस बात पर बड़ा ताज्जुब हुआ के एक डरने वाला खुद इनमें से आ गया, मुनकिरेन कहने लगे के "ये साहिर (जादूगर) है, सच झूठा है 
+[38:5] क्या इसने सारे ख़ुदाओं की जगह बस एक ही खुदा बना डाला? ये तो बड़ी अजीब बात है" 
+[38:6] और सरदारन ए क़ौम ये कहते हुए निकल गए के "चलो और दत-ते रहो अपने" माबूदोन की इबादत पर। ये बात तो किसी और हाय गरज से कहीं जा रही है [38:7 
+] 
+ये बात हमने ज़माना ए करीब की मिल्लत में किसी से नहीं सुनी। था जिसपर अल्लाह का ज़िक्र नाजिल कर दिया गया 
+? परवरदिगार की रहमत के ख़ज़ाने इनके कब्ज़े में हैं 
+[38:10] क्या ये आसमान ओ ज़मीन और इनके दरमियान की चीज़ों के मालिक हैं? अच्छा तो ये आलम ए असबाब की बुलंदियाँ पर चढ़ कर देखें 
+[38:11] ये तो जत्थों (सेनाओं) में से एक छोटा सा जत्था (सेना) है जो इसी जगह सीखा (हार झेलना) खाने वाला है 
+[38:12] इनसे पहले नूह की क़ौम, और आद, और मेखों (तम्बू-खूँटी/खूँटी) वाला फिरौन
+[38:13] और समूद, और क़ौम ए लूट, और ऐका वाले झूठला चुके हैं। जत्थय वो थाय 
+[38:14] उनमें से हर एक ने रसूलों को झुटलाया और मेरी उकुबत का फैसला (सजा का फैसला) उसपर चस्पां हो कर रहा 
+[38:15] ये लोग भी बस एक धमाका के मुंतज़िर हैं जिसका बाद कोई दूसरा धमाका ना होगा 
+[38:16] और ये कहते हैं के ऐ हमारे रब, यम उल हिसाब (हिसाब के दिन) से पहले ही हमारा हिसाब हमें जल्दी से दे दे 
+[38:17] (ऐ नबी), सब्र करो उन बातों पर जो ये लोग बनाते हैं, और इनके सामने हमारे बंदे दाऊद का किस्सा बयान करो जो बड़ी किस्मत का मालिक था. हर मामले में अल्लाह की तरफ रूजू करने वाला था 
+[38:18] हमने पहाड़ों को उसके साथ मुसक्कर कर रखा था के सुबह ओ शाम वो उसके साथ तस्बीह करते थे 
+[38:19] परिंदे सिमत आते और सबके सब उसकी तस्बीह की तरफ मुतवज्जे हो जाते थाय 
+[38:20] हमने उसकी सल्तनत मजबूत कर दी थी, उसको हिकमत अता की थी और फैसला-कुन बात कहने की सलाह बख्शी थी 
+[38:21] फिर तुम्हें कुछ खबर मिली है उन मुकद्दमे वालों की जो दीवार चढ़ कर उसके बाला खाने (निजी चैंबर) में घुस आये थे 
+[38:22] जब वो दाऊद के पास पहुँचे तो वो उन्हें देख कर घबरा गया, उनको ने कहा "डरिए नहीं, हम दो फरीक मुक़द्दमा हैं जिनके बीच में एक ने दूसरे पर ज़्यादा की है। आप हमारे दरमियान ठीक ठीक हक़ के साथ फैसला कर दीजिए, इन्साफ़ी ना किजीए और हमें राह ए रास्ता बताएं 
+[38:23] ये मेरी भाई है, इसके पास निनानवे (निन्यानवे) डुम्बियां (ईवे) है और मेरे पास सिर्फ एक ही डुम्बी (ईवे) है, इसने मुझसे कहा के ये एक डुम्बी भी मेरे हवाले करदे और इसने गुफ्तगु में मुझे दबाया लिया'' 
+[38:24] दाऊद ने जवाब दिया: ''इस शक्स ने अपनी दुंबियों (ईव्स) के साथ तेरी दुंबी मिला लेने का मुतालबा करके यकीनन तुझपर जुल्म किया, और वाकिया ये है के मिल-जुल कर साथ रहने वाले लोग अक्सर एक दूसरे पर ज्यादातियां करते रहते हैं, बस वही लोग इस से बचे हुए हैं जो ईमान रखते हैं और अमल ए सालेह करते हैं, और ऐसे लोग काम ही हैं।” (ये बात कहते हैं) दाऊद समझ गया के ये तो हमने दार-असल इसकी आजमाइश की है, चुनांचे उसने अपने रब से माफ़ी मांगी और सजदे में गिर गया और रूजू कार्लिया 
+[38:25] तब हमने इसका वो कसूर माफ किया और यकीनन हमारे हां उसके लिए तक़र्रब का मुकाम और बेहतर अंजाम है 
+[38:26] (हमने उसे कहा) "ऐ दाऊद, हमने तुझे ज़मीन में ख़लीफ़ा बनाया है, लिहाज़ा तू लोगों के दरमियान हक़ के साथ हुकूमत कर, और ख्वाहिश ए नफ़्स की जोड़ी ना कर के वो तुझ अल्लाह की राह से भटक जाएगी. जो लोग अल्लाह की राह से भटकते हैं यकीनन उनके लिए सख्त सजा है के वो यम उल हिसाब को भूल गए।”
+[38:27] हमने इस आसमां और ज़मीन को, और इस दुनिया को जो इनके दरमियान हैं, फ़िज़ूल पैदा नहीं करदिया है, ये तो उन लोगों का गुमान है जिन्हों ने कुफ्र किया है और ऐसी काफिरों के लिए बर्बादी है जहन्नुम की आग से [ 
+38:28] क्या हम उन लोगों को जो ईमान लाते हैं हैं और कोई अमल करते हैं और उनको जो ज़मीन में फ़साद करने वाले हैं यक्सन करदें? क्या मुत्तक़ियों को हम फाजिरों (दुष्ट) जैसा कर दें 
+[38:29] ये एक बड़ी बरकत वली किताब है जो (ऐ मुहम्मद) हमने तुम्हारी तरफ नाज़िल की है ता-के ये लोग इसकी आयतें पर गौर करें और अक़ल ओ फ़िक्र रखने वाले इसे सबक लें 
+[38:30] और दाऊद को हमने सुलेमान (जैसा बेटा) अता किया, बेहतर बंदा, कसरत से अपने रब की तरफ रूजू करने वाला 
+[38:31] काबिल ए जिक्र है वो मौका जब शाम के वक्त हमारे सामने खूब सीधे (अच्छी तरह से प्रशिक्षित) हुए तेज-रौ (दौड़ना) घोड़े (घोड़े) पेश किए गए 
+[38:32] तो उसने कहा "मैंने इस माल की मुहब्बत अपने रब की याद की वजह से इख्तियार की है" यहां तक ​​के जब वो घोड़े (घोड़े) निगाह से ओझल हो गए 
+[38:33] तो (उसने हुकुम दिया के) इन्हें मेरे पास वापस लाओ, फिर लगा उनकी पिंडलियां (पैर) और गर्दन (गर्दन) पर हाथ फेरने 
+[38:34] और (देखो के) सुलेमान को भी हमने आजमाइश में डाला और उसकी कुर्सी पर एक जड़ (मात्र शरीर/शरीर बिना जान के) ला कर डाल दिया फिर उसने रूजू किया 
+[38:35] और कहा के “ऐ मेरे रब, मुझे माफ” करदे और मुझे वो बादशाही दे जो मेरे बाद किसी के लिए सजावर ना हो, क्योंकि तू ही असल दाता है” 
+[38:36] तब हमने उसके लिए हवा को मुस्कुरा कर दिया जो उसके हुकुम से नरमी के साथ चलती थी जिधर वो चाहता था 
+[38:37] और शयातीन को मुस्कुरा कर दिया, हर तरह के मइमार (बिल्डर) और गोताखोर (गोताखोर) 
+[38:38] और दूसरे जो पाबंद ए सलासिल थे (जंजीरों से बंधे) 
+[38:39] (हमने उसे कहा) "ये हमारी बख्शीश है, तुझे इख्तियार है जिसे चाहे दे और जिसे चाहे रोक ले, कोई हिसाब नहीं" 
+[38:40] यकीनन उसके लिए हमारे हां तकरारब का मुकाम और बेहतर अंजाम है 
+[38:41] और हमारे बंदे अयूब का जिक्र करो, जब उसने अपने रुब को पुकारा के शैतान ने मुझे सख्त तकलीफ और अजाब में डाल दिया है 
+[38:42] (हमने उसे हुकुम दिया) अपना पांव (पैर) ज़मीन पर मार, ये है ठंडा पानी नहाने के लिया और पीने के लिए 
+[38:43] हमने उसे उसके अहल ओ अयाल वापस दिये और उनके साथ उतने ही और, अपनी तरफ से रहमत के तौर पर, और अक़ल ओ फिकर रखने वालों के लिए दर्स के तौर पर 
+[38:44] (और हमने इसे कहा) तिनकों का एक मुत्ता ले (बंडल ऑफ रशेस) और उसे मार दे, अपनी कसम न तोड़, हमने उसे साबिर पाया, बहतरीन बंदा, अपने रब की तरफ बहुत रूजू करने वाला 
+[38:45] और हमारे बंद, इब्राहिम और इशाक और याकूब का जिक्र करो बड़ी कुव्वत ए अमेल रखने वाले और दीधावर (ताकत और दूरदर्शिता)लोग थे
+[38:46] हमने उनको एक खाली सिफत की बिना पर बरगुजिदा किया था, और वो दार-ए-आखिरत की याद थी 
+[38:47] यकीनन हमारे हां उनका मशहूर चुने हुए नेक अशखास (उत्कृष्ट वाले) में हैं 
+[38:48] और इस्माइल और अल-यासा (एलीशा) और ज़ुल्किफ़ल का ज़िक्र करो, ये सब दूसरे लोगों में से थे 
+[38:49] ये एक ज़िक्र था। (अब सुनो के) मुत्तक़ी लोगों के लिए यक़ीनन बहतरीन ठिकाना है 
+[38:50] हमेशा रहने वाली जन्नतें जिनके दरवाजे उनके लिए खुले होंगे 
+[38:51] उनमें वो तकिये लगाये बैठे होंगे, ख़ूब ख़ूब फ़वाके और मशरूबत (प्रचुर मात्रा में फल और पेय) तालाब कर रहे होंगे 
+[38:52] और उनके पास शर्मीली हम्सिन बीवियां होंगी 
+[38:53] ये वो चीजें हैं जिनमें हिसाब के दिन अता करने का तुमसे वादा किया जा रहा है 
+[38:54] ये हमारा रिज्क है जो कभी खत्म होनेवाला नहीं 
+[38:55] ये है मुत्तक़ियों का अंजाम और व्यंग्यों के लिए बद्तरीन (बुराई) ठिकाना है 
+[38:56] जहन्नुम जिसमें वो झुलस जाएंगे। बहुत ही बुरी क़यामगाह 
+[38:57] ये है उनके लिए, पास वो मजा चखें खौटले (उबलते हुए) हुए पानी और पीप लहू (मवाद) 
+[38:58] और इसी क़िस्म की दूसरी तल्खियों का 
+[38:59] (वो जहन्नुम की तरफ अपने जोड़े को आते देख कर आपस में कहेंगे) "ये एक लश्कर तुम्हारे पास घुसा चला आ रहा है, कोई खुशामदीद (स्वागत) इनके लिए नहीं है, ये आग में झुलसने वाले हैं" 
+[38:60] वो उनको जवाब देंगे " नहीं बलके तुम ही झुलसे जा रहे हो, कोई खैर मकसद तुम्हारे लिए नहीं ये अंजाम हमारे आगे लाये हो। कैसी बुरी है ये जाए क़रार” 
+[38:61] फिर वो कहेंगे “ऐ हमारे रब, जिसने हमें इस अंजाम को पाने का बंदोबस्त किया उसे दोज़ख का दोहरा अज़ाब दे” 
+[38:62] और वो आपस में कहेंगे “क्या बात है, हम उन लोगों को कहीं नहीं देखते जिन्हें हम कहते हैं” दुनिया में बुरा समझे थे 
+[38:63] हमने यूं ही उनका मज़ाक बना लिया था, या वो कहीं नज़रों से ओझल हैं?” 
+[38:64] बेशक ये बात सच्ची है, एहले दोज़ख में यहीं कुछ झगड़े होने वाले हैं 
+[38:65] (ऐ नबी) इनसे कहो, "मैं तो बस ख़बरदार करने वाला हूं। कोई हक़ीक़ी माबूद नहीं मगर अल्लाह, जो जानता है, सब पर गालिब 
+[38:66] आसमानों और ज़मीन का मालिक और उन सारी चीज़ों का मालिक जो इनके दरमियान हैं, ज़बरदस्त और दरगुज़ार करने वाला” 
+[38:67] इनसे कहो “ ये एक बड़ी खबर है 
+[38:68] जिसको सुनकर तुम मुँह फेरते हो” 
+[38:69] (इनसे कहो) “मुझसे वक़्त की कोई ख़बर ना थी जब माला-ए-आला (उच्च परिषद) में झगड़ा हो रहा था 
+[38:70] मुझको तो वही (खुलासा/प्रेरणा) के ज़रिये से ये बातें सिर्फ इसलिए बताई जाती हैं कि मैं खुला-खुला ख़बरदार करने वाला हूं” 
+[38:71] जब तेरे रब ने फ़रिश्तों से कहा “मैं मिट्टी से एक बशर बनाने वाला हूं
+[38:72] फिर जब मैं उसे पूरी तरह बना दूं और उसमें अपनी रूह फूंक दूं तो तुम उसके आगे सजदे में गिर जाओ” [ 
+38:73] इस हुकुम के मुताबिक फरिश्ते सब के सब सजदे में गिर गए 
+[38:74] मगर इब्लीस ने अपनी बदाई का घमंड किया और वो काफिरों में से हो गया 
+[38:75] रब ने फरमाया “ऐ इब्लीस, तुझे क्या चीज उसको सजदा करने से मनाए हुई जिसने अपने दोनों हाथों से बनाया है? तू बड़ा बन रहा है या तू ही कुछ ऊंचे दर्जे की हस्तियों में से है?” 
+[38:76] उसने जवाब दिया "मैं उसे बेहतर हूं, आपने मुझको आग से पैदा किया है और इसको मिट्टी से" 
+[38:77] फरमाया " अच्छा तो यहां से निकल जा, तू मरदूद है 
+[38:78] और तेरे ऊपर यौम उल जजा तक मेरी लानत है" 
+[38:79] वो बोला " ऐ मेरे रब, ये बात है तो फिर मुझे वक़्त तक के लिए मोहलत दे दे जब ये लोग दोबारा उठेंगे" 
+[38:80] फरमाया, "अच्छा तुझे उस रोज़ तक की मोहलत है 
+[38:81] जिसका वक़्त मुझे मालूम है" 
+[38:82] उसने कहा "तेरी इज्जत की कसम, मैं सब लोगों को बहका कर रहूंगा 
+[38:83] बजूज तेरे उन बंदों के जिन्हें तू नई खालिस करलिया है" 
+[38:84] फरमाया "तो हक ये है, और मैं हक ही कहता हूं 
+[38:85] के मैं जहन्नुम को तुझसे और उन सब लोगों से भर दूंगा जो इंसानों में से तेरी जोड़ी बनाएगा'' 
+[38:86] (ऐ नबी) इनसे कहदो के मैं इस तबलीग पर तुमसे कोई अजर नहीं मांगता, और ना मैं बनवाती लोगों में से हूं 
+[38:87] ये तो एक हिदायत है तमाम जहां वालों के लिए 
+[38:88] और थोड़ी मुद्दत ही गुज़रेगी के तुम्हें इसका हाल खुद मालूम हो जाएगा 
+
+सूरह 39: अज़-ज़ुमर (कंपनियाँ) 
+------------------------------------------------ 
+[39:1] क्या किताब का नुज़ुल अल्लाह ज़बरदस्त और दाना (हिकमत वाला/बुद्धि से भरा) की तरफ से है 
+[39:2] (ऐ मुहम्मद) ये किताब हमने तुम्हारी तरफ बरहक्क नाज़िल की है, लिहाज़ा तुम अल्लाह ही की बंदगी करो दीन को उसके लिए खालिस करते हुए 
+[39:3] खबरदार, दीन ए खालिस अल्लाह का हक है। रहे वो लोग जिन्होन ने उसके सिवा दूसरे सरपरस्त बना रक्खे हैं (और अपने फेल की तौजीह ये करते हैं) है के) हम तो उनकी इबादत सिर्फ इसके लिए करते हैं के वो अल्लाह तक हमारी रसाई करादीन (हमें अल्लाह के करीब लाओ)। अल्लाह यकीनन उनके दरमियान उन तमाम बातों का फैसला कर देगा जिन में वो इख्तिलाफ कर रहे हैं। अल्लाह किसी ऐसे शक्स को हिदायत नहीं देता जो झूठा और मुनकिर ए हक हो 
+[39:4] अगर अल्लाह किसी को बेटा बनाना चाहता तो अपने मखलूक में से जिसको चाहता बरगुजिदा कर लेता, पाक है वो इसे (के कोई उसका बेटा हो), वो अल्लाह है अकेला और सब पर गालिब
+[39:5] उसने आसमान और ज़मीन को बारहक़ अदा किया है। वही दिन पर रात और रात पर दिन को लपेटा-ता है।उसी ने सूरज और चांद को इस तरह मुसक्कर कर रखा है के हर एक एक वक्त ए मुकर्रर तक चले जा रहा है। जान राखो, वो ज़बरदस्त है और दरगुज़ार करने वाला है 
+[39:6] उसी ने तुमको एक जान से पैदा किया, फिर वही है जिसने उस जान से इसका जोड़ा बनाया और उसने तुम्हारे लिए मवेशियों में से आठ (आठ) नर ओ माडा पैदा किया। वो तुम्हारी मांओं के पैठों में तीन तीन तारीख (अंधेरे) परदों के अंदर तुम्हें एक के बाद एक शकल देता चला जाता है। याही अल्लाह (जिसके ये काम हैं) तुम्हारा रब है, बादशाही उसी की है, कोई माबूद उसके सिवा नहीं है, फिर तुम किधर से फिर जा रहे हो 
+[39:7] अगर तुम कुफ्र करो तो अल्लाह तुमसे बे नियाज है, लेकिन वो अपने बंदों के लिए कुफ्र को पसंद नहीं करता। और अगर तुम शुक्र करो तो उसे वो तुम्हारे लिए पसंद करता है। कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ ना उठेगा। आखिर ए कार तुम सब को अपनी रब की तरफ पलटना है, फिर वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या करते रहे हो, वो तो दिलों का हाल तक जानता है 
+[39:8] इंसान पर जब कोई आफत आती है तो वो अपनी रब की तरफ रूजू (वापसी) करके उसे पुकारता है, फिर जब उसका रब उसे अपनी नियामत से नवाज देता है तो वो हमें मुसिबत को भूल जाता है जिसपर वो पहले पुकार रहा था और दूसरे को अल्लाह का हमसर ठहराता है ता-के उसकी राह से गुमराह करे। (ऐ नबी) उसे कहो के थोड़े दिन अपने कुफ्र से लुत्फ उठा ले, यकीनन तू दोज़ख में जाने वाला है 
+[39:9] (क्या शक्स की रवीश बेहतर है या हमारे शक्स की) जो मुती-ए-फरमान है, रात की घड़ियों में खड़ा रहता है और सजदे करता है, आख़िरत से डरता और अपने रब की रहमत से उम्मीद लगता है? इन से पूछो, क्या जाने वाले और ना जाने वाले दोनों कभी यक्सन हो सकते हैं? हिदायत तो अक़ल रखने वाले ही क़बूल करते हैं 
+[39:10] (ऐ नबी) कहो के ऐ मेरे बंदन जो ईमान लाए हो, अपने रब से डरो। जिन लोगों ने इस दुनिया में नई रवैय्या इख्तियार किया है उनके लिए भलाई है। और खुदा की ज़मीन वसीह है, सब्र करने वालों को तो उनका अजर बे-हिसाब दिया जाएगा 
+[39:11] (ऐ नबी) इनसे कहो, मुझे हुकुम दिया है के दीन को अल्लाह के लिए खालिस करके उसकी बंदगी करूं 
+[39:12] और मुझे हुकुम दिया है के सबसे पहले मैं खुद मुस्लिम बनूं 
+[39:13] कहो, अगर मैं अपने रब की नाफ़रमानी करूं तो मुझे एक बड़े दिन के अज़ाब का खौफ है 
+[39:14] कहदो के मैं तो अपने दीन को अल्लाह के लिए खालिस करके उसकी बंदगी करूंगा 
+[39:15] तुम उसके सिवा जिस की बंदगी करना चाहो करते रहो। कहो असल दीवालिये (हारे हुए) तो वही हैं जिन्हों ने कयामत के रोज़ अपने आप को और अपने अहल-ओ-अयाल को घाटे में डाल दिया। खूब सुन राखो, यही खुला दिवाला (नुकसान) है
+[39:16] उन्पर आग की छतरियां ऊपर से भी चयी होंगी और नीचे से भी। ये वो अंजाम है जिसे अल्लाह अपने बंदों को डराता है, पास ऐ मेरे बंदों, मेरे गजब से बचाओ 
+[39:17] बा-खिलाफ इसके जिन लोगों ने टैगुत (झूठे देवताओं) की बंदगी से इज्तिनाब किया और अल्लाह की तरफ रूजू करलिया उनके लिए खुश खबरी है। पास (ऐ नबी) बशारत देदो मेरे उन बंदों को 
+[39:18] जो बात को गौर से सुनते हैं और उसके बेहतर पहलू की जोड़ी बनाते हैं, ये वो लोग हैं जिनको अल्लाह ने हिदायत बख्शी है और यहीं दानिशमंद (समझ के साथ) हैं 
+[39:19] (ऐ नबी) हमारे शक्स को कौन बचा सकता है जिसपर अज़ाब का फैसला चस्पां हो चूका हो? क्या तुम उसे बचा सकते हो जो आग में गिर चुका हो 
+[39:20] अलबत्ता जो लोग अपने रब से डर कर रहे हैं उनके लिए बुलंद इमानतें हैं मंजिल पर मंजिल बनी हुई हैं जिनके बारे में नीचे कहा जा रहा है। ये अल्लाह का वादा है, अल्लाह कभी अपने वादे की खिलाफत वारजी नहीं करता 
+[39:21] क्या तुम नहीं देखते कि अल्लाह ने आसमां से पानी बरसाया, फिर उसको सोते और चश्मे (झरने और झरने) और दरियाओं की शकल में जमीन के अंदर जारी किया। फिर इस पानी के ज़रिये से वो तरह-तरह की खेतियाँ निकलती हैं जिनकी किस्मत मुख्तलिफ़ हैं, फिर वो खेतियाँ पक कर सुख जाती हैं, फिर तुम देखते हो के वो ज़रद (पीली) पड़ गई, फिर आख़िर ई कर अल्लाह उनको भुस बना देता है। दर हकीकत इस में एक सबक है अक्ल रखने वालों के लिए 
+[39:22] अब क्या वो शक्स जिसका सीना अल्लाह ने इस्लाम के लिए खोल दिया और वो अपने रब की तरफ से एक रोशनी पर चल रहा है (उस शक्स की तरह हो सकता है जिसने बातों से कोई सबक न लिया) लिया)? तबाही है उन लोगों के लिए जिनके दिल अल्लाह की हिदायत से और ज्यादा सख्त हो गए। वो खुली गुमराही में पड़े हुए हैं 
+[39:23] अल्लाह ने बहतरीन कलाम उतारा है, एक ऐसी किताब जिसके तमाम अज़्ज़ा हमरंग हैं और जिस में बार-बार मजामीन (सामग्री) दोहराए गए हैं, उसे सुनकर उन लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं जो अपने रब से डरें वाले हैं, और फिर उनका जिस्म और उनका दिल नरम होकर अल्लाह के जिक्र की तरफ रागिब हो जाते हैं। ये अल्लाह की हिदायत है जिसे वो राह ए रास्ते पर ले आता है जिसे चाहता है और जिसे अल्लाह ही हिदायत ना दे उसके लिए फिर कोई हादी नहीं है 
+[39:24] अब हम शक्स की बद-हाली का तुम क्या अंदाज़ा कर सकते हो जो कयामत के रोज़ अज़ाब की तरह मार अपने मुँह पर लेगा? ऐसे ज़ालिमों से तो कहदिया जाएगा के अब चक्को मजा हमें कमाई का जो तुम करते रहे थे 
+[39:25] इनसे पहले भी बहुत से लोग इसी तरह झूठला चुके हैं। आख़िर उन्पर अज़ाब ऐसे रुख़ से आया जिधर उनका ख़याल भी ना जा सकता था 
+[39:26] फिर अल्लाह ने उनको दुनिया ही कहा कि ज़िंदगी में रुसवे का मज़ा चखाया, और आख़िरत का अज़ाब तो इस तरह छाया हुआ है, काश ये लोग जानते हैं 
+[39:27] हमने कुरान में लोगों को तरह बताया है तरह की मिसालें दी हैं के ये होश में आएं
+[39:28] ऐसा कुरान जो अरबी ज़ुबान में है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है, ता-के ये बुरे अंजाम से बचें 
+[39:29] अल्लाह एक मिसाल देता है एक शक्स तो वो है जिसकी मिलकियत में बहुत से काज खुल्क (कई झगड़ालू उस्ताद) आका शरीक हैं जो उसे अपनी-अपनी तरफ खींचते हैं और दूसरा शक्स पूरे का पूरा एक ही आका का गुलाम है। क्या इन दोनो का हाल यकसन हो सकता है? अल्हम्दुलिल्लाह, मगर अक्सर लोग नादानी में पड़े हुए हैं 
+[39:30] (ऐ नबी) तुम्हें भी मरना है और इन लोगों को भी मरना है 
+[39:31] आखिर ए कार कयामत के रोज तुम सब अपने रब के हुजूर अपना अपना मुकद्दमा पेश करोगी 
+[39:32] फिर हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जिसने अल्लाह पर झूठ बांधा और जब सच्ची उसके सामने आई तो उसे झूठला दिया। क्या ऐसे काफिरों के लिए जहन्नुम में कोई ठिकाना नहीं है 
+[39:33] और जो शक्स सच्ची लेकर आया और जिन्हों ने उसको सच माना, वही अज़ाब से बचने वाले हैं 
+[39:34] उन्हें अपने रुब के हां वो सब कुछ मिलेगा जिसकी वो ख्वाहिश करेंगे। ये है नेकी करने वालों की जजा 
+[39:35] ता-के जो बख्तरीन आमाल उन्होन ने किए थे उन्हें अल्लाह उनके हिसाब से साकीत करदे और जो बेहतरे आमाल वो करते रहे उनके लिहाज़ से उनको अजर अता फरमाये 
+[39:36] (ऐ नबी) क्या अल्लाह अपने बंदे के लिए काफी नहीं है? ये लोग उसके सिवा दूसरे से तुमको डराते हैं, हलांके अल्लाह जिसे गुमराही में डाल दे उसे कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं 
+[39:37] और जिसे वो हिदायत दे उसे भटकने वाला भी कोई नहीं। क्या अल्लाह ज़बरदस्त और इन्तेक़ाम लेने वाला नहीं है 
+[39:38] लोगों से अगर तुम पूछो के ज़मीन और आसमान को किसने अदा किया है तो ये खुद कहेंगे के अल्लाह ने। इनसे कहो, जब हकीकत ये है तो तुम्हारा क्या ख्याल है कि अगर अल्लाह मुझे कोई नुक्सान पहुंचाना चाहे तो क्या तुम्हारी ये देवियां (देवी) जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़ कर पुकारते हो, मुझे उसे पाहुंचाए हुए नुक्सान से बचा लूंगी? या अल्लाह मुझ पर मेहरबानी करना चाहे तो क्या ये उसकी रहमत को रोक सकेगी? बस इनसे कहदो के मेरे लिए अल्लाह ही काफी है, भरोसा करने वाले उसी पर भरोसा करते हैं 
+[39:39] इनसे साफ कहो के “ऐ मेरी कौम के लोगों, तुम अपनी जगह अपना काम किये जाओ, मैं अपना काम करता रहूंगा, अकारिब तुम्हें मालूम हो जाएगा।” 
+[39:40] के किस्पर रुसवा-कुन अज़ाब आता है और किसी को वो सज़ा मिलती है जो कभी तलने वाली नहीं” 
+[39:41] (ऐ नबी) हमने सब इंसानों के लिए ये किताबे बार-हक़ तुमपर नाज़िल कर दी है। अब जो सीधा रास्ता इख्तियार करेगा अपने लिए करेगा और जो भटकेगा उसके भटकने का बदला उसी पर होगा। तुम उनके ज़िम्मेदार नहीं हो
+[39:42] वो अल्लाह हाय है जो मौत के वक्त रूहें क़ब्ज़ करता है और जो अभी नहीं मारा है उसकी रूह नींद में क़ब्ज़ कर लेता है, फिर जिसपर वो मौत का फैसला नफ़ीज़ करता है उसे रोक लेता है और दूसरों की रूहें एक वक़्त ए मुकर्रर के लिए वापस भेज देता है. क्या मैं बड़ी निशानियां हूं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फिक्र करने वाले हैं 
+[39:43] क्या हमें खुदा को छोड़ कर लोगों ने दूसरों को शफी (मध्यस्थ) बना रखा है? इनसे कहो, क्या वो शफा-अत करेंगे ख्वा उनके इख्तियार में कुछ ना हो और वो समझे भी ना हों 
+[39:44] कहो, शफा-अत (हिम्मत) सारी की सारी अल्लाह के इख्तियार में है। आसमान और ज़मीन की बादशाही का वही मालिक है, फिर उसकी तरफ तुम पलटाये जाने वाले हो 
+[39:45] जब अकेले अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो आख़िरत पर ईमान न रखने वालों के दिल कुदने लगते हैं। और जब उसके सिवा दूसरे का जिक्र होता है तो यकीनन वो खुशी से खिल उठते हैं 
+[39:46] कहो, खुदाया! आसमानो और ज़मीन के भुगतान करने वाले, हाज़िर ओ गैब के जान-ने वाले, तू ही अपने बंदों के दरमियान उस चीज़ का फैसला करेगा जिसमें वो इख्तिलाफ करते रहेंगे 
+[39:47] अगर जालिमों के पास ज़मीन की सारी दौलत भी हो, और उतनी ही और भी, तो ये रोज़-ए-क़यामत के बुरे अज़ाब से बचने के लिए सब कुछ फ़िडिये (प्रायश्चित/ छुड़ाने) में देने के लिए तैयार हो जाएंगे। वहां अल्लाह की तरफ से इनके सामने वो कुछ आएगा जिसका इन्होन ने कभी अंदाज़ा ही नहीं किया है 
+[39:48] वहां अपनी कमाई के सारे बुरे नटैज अंदर खुल जाएंगे और वही चीज़ अंदर मुसल्लत हो जाएगी जिसका ये मज़ाक उड़ाते रहे हैं 
+[39:49] यहीं इंसान जब ज़रा सी मुसीबत इसे छू जाती है तो हमें पुकारता है, और जब हम इसे अपनी तरफ से नियामत दे कर ऊपर देते हैं तो कहते हैं के ये तो मुझे इल्म की बिना पर दिया गया है। नहीं! बलके ये आजमाइश है, मगर इनमें से अक्सर लोग जानते नहीं हैं 
+[39:50] यही बात इनसे पहले गुजरे हुए लोग भी कह चुके हैं, मगर जो कुछ वो कमाते थे वो उनके किसी काम ना आया 
+[39:51] फिर अपनी कमाई के बुरे नटैज उन्हें न भुगते, और इन लोगों में से भी जो जालिम हैं वो अंकारीब अपनी कमाई के बारे में बताते हैं। ये हमें अजीज (निराश) करने वाले नहीं हैं 
+[39:52] और क्या इन्हें मालूम नहीं है के अल्लाह जिसका चाहता है रिज्क कुशादा (बड़ा करना) करता है और जिसका चाहता है तंग करदेता है? इस में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं 
+[39:53] (ऐ नबी) कहदो के ऐ मेरे बंदों, जिन्होन ने अपनी जानो पर ज़्यादती (ज्यादती) की है, अल्लाह की रहमत से मयुस न हो जाओ, यकीनन अल्लाह सारे गुनाह माफ करता है, वो तो गफूर ओ रहीम है क्षमा करने वाला, सबसे दयालु) 
+[39:54] पलट आओ अपने रब की तरफ और मुती (विनम्र) बन जाओ उसके, कबूल इसके के तुमपर अज़ाब आ जाए और फिर कहीं से तुम्हें मदद न मिल सके
+[39:55] और जोड़ी इख्तियार करलो अपने रब की भेजी हुई किताब के बहतरीन पहलू की, कबूल इसके तुम अचानक अजब आए और तुमको खबर भी ना हो 
+[39:56] कहीं ऐसा ना हो के बाद में कोई शक कहे "अफसोस मेरी उस तक़सीर(लापरवाही) पर जो मैं अल्लाह की जनाब में करता रहा, बलके मैं तो उलटा मज़ाक उड़ाने वालों में शामिल था" 
+[39:57] या कहे "काश अल्लाह ने मुझे हिदायत बख्शी होती तो मैं भी मुत्तक़ियों में से होता" 
+[39:58] हां अज़ाब देख कर कह" काश मुझे एक मौका और मिल जाए और मैं भी जल्द अमल करने वालों में शामिल हो जाऊं।” 
+[39:59] (और हमारा वक्त उसे ये जवाब मिले के) "क्यों नहीं मेरी आयत तेरे पास आ चुकी पतली, फिर तू नहीं उनको झुटलाया और तकब्बुर किया और तू काफिरों में से था" 
+[39:60] आज जिन लोगों ने खुदा पर झूठ बांधे हैं कयामत के रोज तुम देखोगे के उनके मुँह काले होंगे। क्या जानहुम में मुतकब्बिरों (घमंडी) के लिए काफी जगह नहीं है 
+[39:61] इसके बार-अक्स जिन लोगों ने यहां तकवा किया है उनके असबाब-ए-कामियाबी की वजह से अल्लाह उनको नजात देगा, उनको कोई गजनद (नुकसान) पहुंचाएगा न वो घूमेंगे 
+[39:62] अल्लाह हर चीज का खालिक (निर्माता) है और वही हर चीज पर निगहबान है 
+[39:63] जमीन और आसमान के खजानो की कुंजियां (कुंजियां) उसके पास हैं और जो लोग अल्लाह की आयत से कुफ्र करते हैं वही घाटे (नुकसान) में रहने वाले हैं 
+[39:64] (ऐ) नबी) इनसे कहो “फिर क्या ऐ जाहिलों (अज्ञानी), तुम अल्लाह के सिवा किसी और की बंदगी करने के लिए मुझसे कहते हो?” 
+[39:65] (ये बात तुम्हें उन्हें साफ कहना चाहिए क्योंकि) तुम्हारी तरफ और तुमसे पहले गुजरे हुए तमाम अंबिया की तरफ ये वही (खुलासा) भेजी जा चुकी है के अगर तुमने शिर्क किया तो तुम्हारा अमल जाय हो जाएगा और तुम खासे (नुक्सान) मैं रहोगे 
+[39:66] लिहाज़ा (ऐ नबी) तुम बस अल्लाह ही की बंदगी करो और शुक्र-गुज़ार बंदों में से हो जाओ 
+[39:67] इन लोगों ने अल्लाह की कदर ही न की जैसा के उसकी कदर करने का हक है (उसकी कुदरत ए कामिला का हाल तो ये है के) कयामत के रोज पूरी ज़मीन उसकी मुट्टी में होगी और आसमान उसके दस्त ए रास्ते (दाहिने हाथ) में लिपटे हुए होंगे। पाक और बाला-तार है वो हमसे शिर्क से जो ये लोग करते हैं 
+[39:68] और वो रोज़ सुर (तुरही) फूंका जाएगा और वो सब मरकर गिर जाएंगे जो आसमान और ज़मीन में हैं उनके सिवाए जिन्हें अल्लाह जिंदा रखना चाहे। फिर एक दूसरा सुर (तुरही) फूंका जाएगा और यकीन सबके सब उठ कर देखने लगेंगे 
+[39:69] ज़मीन अपने रुब के नूर से चमक उठेगी, किताब ए अमल ला कर रख दी जाएगी, अंबिया और तमाम गवाह हाज़िर कर दिए जाएंगे, लोगों के दरमियान ठीक ठीक हक के साथ फैसला कर दिया जाएगा और उन पर कोई जुल्म न होगा 
+[39:70] और हर मुतनफ्फिस को जो कुछ भी उसने अमल किया था उसका पूरा बदला दिया जाएगा। लोग जो कुछ भी करते हैं अल्लाह उसको खूब जानता है
+[39:71] (इस फैसले के बाद) वो लोग जिन्हों ने कुफ्र किया था जहन्नुम की तरफ गिरो ​​डर गिरो ​​हांके जाएंगे, यहां तक ​​के जब वो वहां पहनेंगे तो उसके दरवाजे खोले जाएंगे और उसके कारिंदे (रखवाले) उनसे कहेंगे "क्या तुम्हारे पास तुम्हारे अपने अपने लोगों में से ऐसे रसूल नहीं आए थे, जिन्होनें तुमको तुम्हारे रब की आयतें सुनाईं हों और तुम्हें हमसे बात से डराया हो के एक वक्त तुम्हें ये दिन भी देखना होगा?” वो जवाब देंगे "हां, आए थे, मगर अज़ाब का फैसला काफिरों पर चिपक गया" 
+[39:72] कह जाएगा, दाखिल हो जाओ जहन्नुम के दरवाजे में, यहां अब तुम्हें हमेशा रहना है, बड़ा ही बुरा ठिकाना है ये मुतकब्बिरों (अहंकारी) के लिए 
+[39:73] और जो लोग अपने रब की नफ़रमानी से परहेज़ करते थे उन्हें गिरो ​​दर गिरो ​​जन्नत की तरफ ले जाया जाएगा यहां तक ​​के जब वो वहां पहनेंगे, और उसके दरवाजे पहले ही खोले जा चुके होंगे, तो उसका मुंतज़िमिन उनसे कहेंगे के "सलाम हो तुमपर" , बहुत अच्छा रहे, दाखिल हो जाओ इसमें हमेशा के लिए” 
+[39:74] और वो कहेंगे “शुक्र है हमें खुदा का जिसने हमारे साथ अपना वादा सच कर दिखाया और हमको जमीन का वारिस बना दिया, अब हम जन्नत में जहां चाहें अपनी जगह बना सकते हैं” पास बेहतरी अजर हैं अमल करने वालों के लिए 
+[39:75] और तुम देखोगे के फरिश्ते अर्श के गिर्द हलका (सर्कल) बनाए हुए अपने रब की हम्द और तस्बीह कर रहे होंगे, और लोगों के दरमियान ठीक हक के साथ फैसला चुका दिया जाएगा, और पुकार दिया जयेगा के हम्द है अल्लाह रब्बुल आलमीन के लिए 
+
+सूरह 40: अल-मोमीन (आस्तिक) 
+------------------------------------------------ 
+[40:1] हा मीम 
+[40:2] इस किताब का नुज़ुल अल्लाह की तरफ से है जो ज़बरदस्त है, सब कुछ जानने वाला है 
+[40:3] गुनाह माफ़ करने वाला और तौबा क़बूल करने वाला है, सच सजा देने वाला और बड़ा साहब ए फ़ज़ल है। कोई माबूद उसके सिवा नहीं, उसकी तरफ सबको पलटना है 
+[40:4] अल्लाह की आयत में झगड़े नहीं करते मगर सिर्फ वो लोग जिन्होन ने कुफ्र किया है। इसके बाद दुनिया के मुल्कों में उनकी चलती फिरत तुम्हें कोई धोखे में ना डाले 
+[40:5] इनसे पहले नूंह की क़ौम भी झूठला चुकी है, और उसके बाद बहुत से दूसरे समूहों (समूहों) ने भी ये काम किया है। हर क़ौम अपने रसूल पर झपटी ता-के उसे गिरफ्तार करे, उन सब ने बातिल के हत्यारों से हक़ को नीचा दिखाने की कोशिश की। मगर आखिर ए कार मैंने उनको पकड़ लिया, फिर देखलो के मेरी सजा कैसी थी 
+[40:6] इसी तरह तेरे रब का ये फैसला भी उन सब लोगों पर चस्पां हो चुका है जो कुफ्र के मुर्तकीब हुए हैं के वो वासिल-बा-जहन्नुम होने वाले हैं
+[40:7] अर्श ए इलाही के हामिल फ़रिश्ते और वो जो अर्श के गिर्द ओ पेश हाज़िर रहते हैं, सब अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह कर रहे हैं, वो उसपर ईमान रखते हैं और ईमान लाने वालों के हक़ में दुआ ए मगफिरत करते हैं, वो कहते हैं हैं: “ऐ हमारे रब, तू अपनी रहमत और अपने इल्म के साथ हर चीज़ पर छाया हुआ है, पास माफ़ करदे और अज़ाब ए दोज़ख से बचा ले उन लोगों को जिन्हों ने तौबा की है और तेरा रास्ता इख्तियार करलिया है 
+[40:8] ऐ हमारे रब, और दाख़िल कर उनको हमेशा रहने वाली उन जन्नतों में जिनका तू ने उनसे वादा किया है, और उनके वाल्दैन और बीवीयों और औलाद में से जो सालेह (नेक) होन (उन्हें भी वहां उनके साथ पाहुंचा दे)। तू बिला शुभा कादिर ए मुल्ताक (सबसे ताकतवर) और हकीम (सबसे बुद्धिमान) है 
+[40:9] और बच्चा दे उनको बुराइयों से। जिसको तू नई कयामत के दिन बुराइयों से बचा लिया उसपर तू नई बड़ा रहम किया। यहीं बड़ी कामयाबी है 
+[40:10] जिन लोगों ने कुफ़्र किया है, क़यामत के रोज़ उनको पुकार कर कहा जाएगा "आज तुम्हें जितना छायादार गुस्सा अपने ऊपर आ रहा है , अल्लाह तुम्पर उसे ज्यादा गजबनाक हमारा वक्त होता था जब तुम्हें ईमान की तरफ बुलाया जाता था और तुम कुफ्र करते थे” 
+[40:11] वो कहेंगे “ऐ हमारे रब, तू नहीं जानता हमें दो दफा मौत और दो दफा जिंदगी दे दी।” अब हम अपने कसूरों का ऐतराफ़ करते हैं। क्या अब यहाँ से निकलने की भी कोई सबील है?” 
+[40:12] (जवाब मिलेगा) “ये हालत जिसमें तुम मुबतला हो, इस वजह से है कि जब अकेले अल्लाह की तरफ बुलाया जाता था तो तुम मन्ने से इंकार कर देते थे और जब उसके साथ दूसरों को मिला जाता था तो तुम मान लेते थे। अब फैसला अल्लाह बुज़ुर्ग ओ बरतर के हाथ है” 
+[40:13] वही है जो तुमको अपनी निशानियां दिखाता है और आसमां से तुम्हारे लिए रिज़्क नाज़िल करता है, मगर (निहसानियों के मुशाहिदे से) सबक सिर्फ वही शक्स लेता है जो अल्लाह की तरफ रूजू करने वाला हो 
+[40:14] (पस ऐ रूजू करने वालों) अल्लाह ही को पुकारो अपने दीन को उसके लिए खालिस करके, ख्वाह तुम्हारा ये फेल (काम/अमल) काफिरों को कितना ही नागावर हो 
+[40:15] वो बुलंद दर्जों वाला, मालिक ए अर्श है अपने बंदों में से जिसपर चाहता है है अपने हुकुम से रूह नाज़िल कर देता है ता-के वो मुलाक़ात के दिन से ख़बरदार करदे 
+[40:16] वो दिन जबके सब लोग बे पर्दा होंगे, अल्लाह से उनकी कोई बात भी छुपी हुई ना होगी (हमें रोज़ पुकार कर पूछेगा) आज बादशाही किसकी है? (सारा आलम पुकार उठेगा) अल्लाह वाहिद-ए-कहर (सर्वशक्तिमान) की 
+[40:17] (कहा जाएगा) आज हर मुतनफ्फिस को उस कमाई का बदला दिया जाएगा जो उसने की थी। आज किसी पर कोई ज़ुल्म न होगा और अल्लाह हिसाब लेने में बहुत तेज़ है 
+[40:18] (ऐ नबी) दारा दो लोगों को उस दिन से जो करीब आ लगा है, जब कालिज (जिगर) मुंह को आ रहे होंगे और लोग चुप चाप गम के घूंट पी खाड़े होंगे। ज़ालिमों का ना कोई मुश्फ़िक दोस्त होगा और ना कोई शफ़ी जिसकी बात मानी जाएगी
+[40:19] अल्लाह निगाहों की चोरी तक से वाकिफ है और वो राज तक जानता है जो सीने ने छुपा रखा है 
+[40:20] और अल्लाह ठीक ठीक बे-लाग (न्याय के साथ) फैसला करेगा। रहे वो जिनको (ये मुशरिकेन) अल्लाह को छोड़ कर पुकारते हैं, वो किसी चीज का भी फैसला करने वाले नहीं हैं। बिला शुभ अल्लाह हाय सब कुछ सुनने और देखने वाला है 
+[40:21] क्या ये लोग कभी ज़मीन में चले फिरे नहीं हैं के इनहे उन लोगों का अंजाम नज़र आता है जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं? वो इनसे ज्यादा ताकतवार थे और इनसे ज्यादा जबरदस्त असर जमीन में छूट गए हैं। मगर अल्लाह ने उनके गुनाहों पर उन्हें पकड़ लिया और उनको अल्लाह से बचाने वाला कोई ना था 
+[40:22] ये उनका अंजाम इस लिए हुआ के उनके पास उनके 
+[40:23] हमने मूसा को 
+[40:24] फिरौन और हामान और क़ारून की तरफ अपनी निशानियां और नुमाया सनद-ए-मामोरियत के साथ भेजा। मगर उनहों ने कहा “साहिर (जादूगर) है, कज़्ज़ब (झूठा) है” 
+[40:25] फिर जब वो हमारी तरफ से हक उनके सामने ले आया तो उनहों ने कहा “जो लोग ईमान ला कर इसके साथ शामिल हुए हैं सबके लड़कों को कत्ल करो और लड़कियों को जीता (जिंदा) छोड़ करना"। मगर काफ़िरों की चाल अकारत (व्यर्थ) ही गई 
+[40:26] एक रोज़ फ़िरौन ने अपने दरबारियों से कहा "छोड़ो मुझे मैं इस मूसा को क़त्ल किये देता हूँ, और पुकार देखे ये अपने रब को। मुझे अंदेशा है के ये तुम्हारा दीन बदल डालेगा, या मुल्क में फ़साद बरपा करेगा” 
+[40:27] मूसा ने कहा “मैंने तो हर उस मुतकब्बिर (घमंडी) के मुकाबले में जो यौम उल हिसाब पर ईमान नहीं रखा अपना रब और तुम्हारे रब की पनाह ले ली है” 
+[40:28] इस मौके पर आले फिरौन में से एक मोमिन शक्स, जो अपना ईमान छुपे हुए थे, बोल उठा: "क्या तुम एक शक्स को सिर्फ इस बिना पर क़त्ल करदोगे के वो कहता है मेरा रब अल्लाह है? हलांके वो तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास बैयिनत ले आया, अगर वो झूठा है तो उसका झूठ खुद उसी पर पलट पड़ेगा, लेकिन अगर वो सच्चा है तो जिन 
+हौलनाक नातिज का वो तुमको खौफ फैलाता है उनमें से कुछ तो तुम जरूर आ जाओगे हासिल है और ज़मीन में तुम गालिब हो, लेकिन अगर खुदा का अज़ाब हमपर आ गया तो फिर कौन है जो हमारी मदद कर सकेगा?” फ़िरौन ने कहा "मैं तो तुम लोगों को वही राय दे रहा हूँ जो मुझे मुनासिब नज़र आती है और मैं उसी रास्ते की तरफ तुम्हारी रहनुमाई करता हूँ जो ठीक है" 
+[40:30] वो शक्स जो ईमान लाया था उसने कहा "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, मुझे ख़ौफ़ है के कहीं" तुमपर भी वो दिन ना आ जाए जो इस पहले बहुत से जत्थों (पार्टियों) पर आ चूका है 
+[40:31] जैसा दिन क़ौम ए नूह और आद और समूद, और उनके बाद वाली क़ौम पर आया था और ये हकीकत है के अल्लाह अपने बंदों पर ज़ुल्म का कोई इरादा नहीं। रख्ता
+[40:32] ऐ क़ौम, मुझे डर है के कहीं तुम्पर फरियाद ओ फुगान का दिन (बुलाने का दिन) ना आ जाए 
+[40:33] जब तुम एक दूसरे को पुकारोगे और भाग जाओगे फिरोगे, मगर हमें वक्त अल्लाह से बचाने वाला कोई ना होगा। सच ये है के जिसे अल्लाह भटका दे उसे फिर कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं होता 
+[40:34] इसके पहले युसुफ तुम्हारे पास बैयिनत लेकर आये थे मगर तुम उनकी लाई हुई तालीम की तरफ से शक्क ही में पड़े रहे। फिर जब उनका इंतिक़ाल हो गया तो तुमने कहा अब उनके बाद अल्लाह कोई रसूल हरगिज़ ना भेजेगा।” इसी तरह अल्लाह उन सब लोगों को गुमराह करने में डाल देता है जो हद से गुज़रने वाले और शकी (शक) करते हैं 
+[40:35] और अल्लाह की आयत में झगड़े करते हैं बिना इसके के उनके पास कोई सनद या दलील आई हो।ये रवैय्या अल्लाह और ईमान लाने वालों के नाज़दिक सख़्त मबगुज़ (ना-पसंद) है। इसी तरह अल्लाह हर मुतकब्बिर ओ जब्बार के दिल पर थप्पड़ लगा देता है 
+[40:36] फ़िरौन ने कहा "ऐ हामान, मेरे लिए एक बुलंद इमारत बना ता-के मैं रास्ते तक पहुँच सकूँ 
+[40:37] आसमान के रास्ते तक, और मूसा के खुदा को झाँक कर देखूँ। मुझे तो ये मूसा झूठा ही मालूम होता है।” इस तरह फिरौन के लिए उसकी बढ़-अमली खुशनुमा बना दी गई और वो राह ए रास्ते से रुक गया। फ़िरौन की सारी चालबाज़ी (उसकी अपनी) तबाही के रास्ते ही में सिर्फ (इस्तेमाल/इस्तेमाल) हुई 
+[40:38] वो शक्स जो ईमान लाया था बोला “ ऐ मेरी क़ौम के लोगों, मेरी बात मानो, मैं तुम्हें सही रास्ता बताता हूँ 
+[40:39] ऐ क़ौम, ये दुनिया कि जिंदगी तो चांद रोजा है, हमेशा के लिए कयाम (स्थायी निवास) की जगह आखिरी ही है 
+[40:40] जो बुरा करेगा उसको उतना ही बदला मिलेगा जितनी उसने बुराई की होगी और जो नीक अमल करेगा, ख्वाह वो मर्द हो या औरत, बशारत ये के हो वो मोमिन, ऐसे सब लोग जन्नत में दाख़िल होंगे जहां उनको बे हिसाब रिज़क दिया जाएगा 
+[40:41] ऐ क़ौम, आख़िर ये क्या माजरा है के मई तो तुम लोगों को निजात (मोक्ष) की तरफ बुलाता हूं और तुमलोग मुझे आग की तरफ दावत देते हो 
+[40:42] तुम मुझे इस बात की दावत देते हो के मैं अल्लाह से कुफ्र करूं और उसके साथ उन हस्तियों को शरीक ठहरूं जिनहें मैं नहीं जानता हलांके मैं तुम्हें जबरदस्त मगफिरत करने वाले खुदा की तरफ बुला रहा हूं 
+[40:43] नहीं, हक ये है और इसके खिलाफ नहीं हो सकता है जिनकी तरफ तुम मुझे बुला रहे हो उनके लिए ना दुनिया में कोई दावत है ना आखिररात में, और हम सबको पलटना अल्लाह ही की तरफ है, और हद से गुजारने वाले आग में जाने वाले हैं 
+[40:44] आज जो कुछ मैं कह रहा हूं, अंकरीब वह वक्त आएगा जब तुम उसे याद करोगे और अपना मामला मैं अल्लाह के हवाले करता हूं, वह अपने बंदों का निगहबान है" 
+[40:45] आखिर ए कार उन लोगों ने जो बुरी से बुरी चलें हमें मोमिन के खिलाफ़ चलें, अल्लाह ने उन्हें सबसे बचाया, और फिरौन के साथी खुद बद्तरीन अज़ाब के फेर में आ गए
+[40:46] दोज़ख की आग है जिसके सामने सुबह ओ शाम वो पेश किए जाते हैं, और जब कयामत की घड़ी आ जाएगी तो हुकुम होगा के आले फिरौन को छाया-तार अज़ाब में दाख़िल करो 
+[40:47] फिर ज़रा ख़याल करो उस वक़्त का जब ये लोग दोज़ख़ में एक दूसरे से झगड़ रहे होंगे। दुनिया में जो लोग कमज़ार थे वो बड़े बन-ने वालों से कहेंगे के “हम तुम्हारे तबे (अनुयायी) थे, अब क्या यहाँ तुम नार-ए-जहन्नुम (नरक की आग) की तकलीफ़ के कुछ इसी से हमको बचा लोगे 
+[40:48] वो बड़े बनने वाले जवाब देंगे” हम सब यहाँ एक हाल में हैं, और अल्लाह बंदों के दरमियान फैसला कर चूका है” 
+[40:49] फिर ये दोज़ख़ में पड़े हुए लोग जहन्नुम के अहल-कारून (नर्क के रखवाले) से कहेंगे “अपने रब से दुआ करो के हमारे अज़ाब में बस एक दिन की तफ़्फ़िफ़ करदे” 
+[40:50] वो पूछेंगे “क्या तुम्हारे पास तुम्हारे रसूल बैयिनत (स्पष्ट सबूत) लेकर नहीं आ रहे थे?” वो कहेंगे "हां" जहन्नुम के अहलकार बोलेंगे: "फिर तुम ही दुआ करो, और काफिरों की दुआ अकारत (व्यर्थ) ही जाने वाली है।" 
+[40:51] यकीन जानो के हम अपने रसूलन और ईमान लाने वालों की मदद करते हैं इस दुनिया की जिंदगी में भी लाज़िमन करते हैं, और हम रोज़ भी करेंगे जब गवाह खड़े होंगे 
+[40:52] जब ज़ालिमों को उनकी मज़ार (बहाने) कुछ भी फ़ायदा ना देगी और अनपर लानत पड़ेगी और बेहतरीन ठिकाना उनको में आएगा 
+[40:53] आख़िर देखलो के मूसा की हमने रहमुमयी की और बनी इसराइल को उस किताब का वारिस बना दिया 
+[40:54] जो अक़ल ओ दानिश रखने वालों के लिए हिदायत ओ हिदायत है 
+[40:55] पास (ऐ नबी), सब्र करो, अल्लाह का वादा बार-हक़्क़ है, अपने कसूर की माफ़ी चाहो और सुबह ओ शाम अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करते रहो 
+[40:56] हकीकत ये है के जो लोग किसी सनद या हुज्जत के बगैर जो उनके पास आए हो, अल्लाह की आयत में झगड़े कर रहे हैं उनके दिलों में किब्र (घमंड/गर्व) भरा हुआ है। मगर वो हमें बदनाम करने वाले नहीं हैं जिसका वो घमंड रखते हैं। बस अल्लाह की पनाह मांग लो, वो सब कुछ देखता और सुनता है 
+[40:57] आसमानो और ज़मीन का भुगतान करना इंसानों को भुगतान करना कि बा-निस्बत यकीनन ज्यादा बड़ा काम है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं 
+[40:58] और ये नहीं हो सकता के अंधा (अंधा) और बीना (देखने वाला) यकसन हो जाए, और इमानदार ओ सालेह और बदमाश बराबर ठहरें। मगर तुमलोग कम ही कुछ समझते हो 
+[40:59] यकीनन क़यामत की घड़ी आने वाली है। उसके आने में कोई शक्क नहीं, मगर अक्सर लोग नहीं मानते 
+[40:60] तुम्हारा रब कहता है “मुझे पुकारो, मैं तुम्हारी दुआएं कबूल करूंगा। जो लोग घमंड में आ कर मेरी इबादत से मुह मोड़ते हैं, जरूर वो ज़लील ओ ख़्वार हो कर जहन्नुम में दाख़िल होंगे”
+[40:61] वाह अल्लाह हाय तो है जिसने तुम्हारे लिए रात बनाई ता-के तुम हमें सुकून हासिल करो, और दिन को रोशन किया। हकीकत ये है के अल्लाह लोगों पर बड़ा फजल फरमान वाला है मगर अक्सर लोग शुक्र अदा नहीं करते 
+[40:62] वही अल्लाह (जिसने तुम्हारे लिए ये कुछ किया है) तुम्हारा रब है। हर चीज का खालिक उसके सिवा कोई माबूद नहीं। फिर तुम किधर से बहकाए जा रहे हो 
+[40:63] इसी तरह वो सब लोग बहकाए जा रहे हैं जो अल्लाह की आयत का इंकार करते हैं 
+[40:64] वो अल्लाह ही है तो है जिसने तुम्हारे लिए जमीन को जाए क़रार (निवास स्थान) बनाया और ऊपर आसमान का गुम्बद (चंदवा) बना दिया, जिसने तुम्हारी सूरत बनाई और बड़ी ही उमड़ी बनाई। जिसने तुम्हें पाकीज़ा चीज़ का रिज़्क दिया। वही अल्लाह (जिसका ये काम है) तुम्हारा रब है, बे हिसाब बराकतों वाला है वो कायनात का रब 
+[40:65] वही जिंदा है उसके सिवा कोई माबूद नहीं।उसी को तुम पुकारो अपने दीन को उसके लिए खाली करके। सारी तारीफ अल्लाह रब्बुल आलमीन ही के लिए है 
+[40:66] (ऐ नबी), लोगों से कहदो के "मुझे तो उन हस्तियों की इबादत से मना कर दिया गया है जिनको तुम अल्लाह को छोड़ कर पुकारते हो। (मैं ये काम कैसे कर सकता हूं) जबके मेरे पास मेरे रब की तरफ से बैयिनत आ चुकी हैं। मुझे हुकुम दिया है के मुख्य रब उल आलमीन के आगे सर-ए-तस्लीम ख़म करदुन।” 
+[40:67] वही तो है जिसने तुमको मिट्टी से पेदा किया, फिर से, फिर खून के लोथड़े से, फिर वो तुम्हें बच्चे की शक्ल में नीलकलता है, फिर तुम्हें बढ़ाता है ताके तुम अपनी पूरी ताक़त को पाहुंच जाओ, फिर और बढ़ता है ता-के तुम बुढ़ापे को पकड़ो और तुम में से कोई पहले ही वापस बुला लिया जाता है। ये सब कुछ इसके लिए किया जाता है ता-के तुम अपने मुकर्रर वक्त तक पहुंच जाओ, और इस लिए के तुम हकीकत को समझो 
+[40:68] वही है जिंदगी देने वाला, और वही मौत देने वाला है। वो जिस बात का भी फैसला करता है, बस एक हुकुम देता है कि वो हो जाए और वो जो जाती है 
+[40:69] तुमने देखा उन लोगों को जो अल्लाह की आयत में झगड़ा करते हैं, कहां से वो फिराए जा रहे हैं 
+[40:70] ये लोग जो इस किताब को और उन सारी किताबों को झूठलते हैं जो हमने अपने रसूलों के साथ भेजी थी अंकारीब उन्हें मालूम हो जाएगा 
+[40:71] जब तौक (बेड़ियां) उनकी गर्दनों में होंगी, और जंजीरें, जिनसे पकड़ कर 
+[40:72] वो खुलते हुए पानी की तरफ खिंच जाएंगे और फिर दोज़ख कि आग में झोंक दिए जाएंगे 
+[40:73] फिर उनसे पूछा जाएगा के अब कहां है अल्लाह के सिवा वो दूसरे खुदा जिनको तुम शरीक करते थे 
+[40:74] वो जवाब देंगे "खोए गए वो हमसे, बलके हम इसे पहले किसी चीज को ना पुकारते थे"। इस तरह अल्लाह काफ़िरों का गुमराह होना मुतहक़्क़िक़ (गलती में ठोकर खाना) कर देगा 
+[40:75] उनसे कहा जाएगा "ये तुम्हारा अंजाम इस लिए हुआ है के तुम ज़मीन में ग़ैर हक़ पर मगन था और फिर हम पर इतराते थे
+[40:76] अब जाओ, जहन्नुम के दरवाज़ों में दाख़िल हो जाओ हमेशा तुमको वहीं रहना है, बहुत ही बुरा ठिकाना है मुतकब्बिरन (गर्व) का" 
+[40:77] पस ऐ नबी, सब्र करो अल्लाह का वादा बरहक्क है। अब ख्वाह हम तुम्हारे सामने ही इनको उन बुरे नाताइज का कोई हिसा दिखा दें जिनसे हम इन्हें डरा रहे हैं, या (उससे पहले) तुम्हें दुनिया से उठा लें, पलट कर आना तो इन्हें हमारी ही तरफ है 
+[40:78] ऐ नबी, तुमसे पहले हम बहुत से रसूल भेज चुके हैं जिनसे बाज़ के हालात हमने तुमको बताए हैं और बाज़ के नहीं बताते. किसी रसूल की भी ये ताक़त न थी के अल्लाह के इज़ान के बिना खुद कोई निशानी ले आता। फिर जब अल्लाह का हुकुम आ गया तो हक के मुताबिक फैसला कर दिया गया और हमें वक्त गलत-कार लोग खासे (नुकसान) में पढ़ गए 
+[40:79] अल्लाह ही ने तुम्हारे लिए ये मवेशी जानवर बनाए हैं ता-के इन से किसी पर तुम सवार हो और किसी का गोश्त खाओ 
+[40:80] इनके अंदर तुम्हारे लिए और भी बहुत से मुनाफ़े हैं, वो काम भी आते हैं के तुम्हारे दिलों में जहां जाने की हाज़त हो वहां तुम उन्पर पाहुंच सको, उन्पार भी और कश्तियां पर भी तुम सवार हो जाते हो 
+[40:81] अल्लाह अपनी ये निशानियां तुम्हें दिखा रहा है, आखिर तुम उसकी किन किन निशानियों का इंकार करोगी 
+[40:82] फिर क्या ये जमीन में चले फिर नहीं हैं के इनको उन लोगों का अंजाम नज़र आता जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं? वो इनसे तदाद में ज्यादा था, इनसे बढ़कर ताकतवार था, और ज़मीन में इनसे ज्यादा शानदार असर छोड़ गए हैं। जो कुछ कमाई उनहों ने की थी आख़िर वो उनके किसी काम आई 
+[40:83] जब उनके रसूल उनके पास बैयिनत (स्पष्ट प्रमाण) लेकर आए तो वो उसी इल्म में मगन रहे जो उनके अपने पास था, और फिर उसी चीज़ के फिर में आ गए जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे 
+[40:84] जब उन्होन ने हमारा अज़ाब देख लिया तो पुकार उठे के हमने मान लिया अल्लाह वहीदाहु ला शरीक को और हम इनकार करते हैं उन सब मआबूदों का जिन्हें हम शरीक ठहरते थे 
+[40:85] मगर हमारा अजब-गजब देख लेने के बाद उनका ईमान उनके लिए कुछ भी नाफे (फायदमंद) ना हो सकता था, क्योंकि यही अल्लाह का मुकर्रर ज़ब्ता है जो हमेशा उसके बंदों में जारी रह रहा है, और हम वक्त काफिर लोग खासरे (नक्सन) में पढ़ गए 
+
+सूरह 41: हा मीम (हा मीम) 
+------------------------------------------------ 
+[41:1] हा मीम 
+[41:2] ये खुदा ए रहमान ओ रहीम की तरफ से नाज़िल करदा चीज़ है 
+[41:3] एक ऐसी किताब जिसकी आयत खूब खोल कर बयान की गई हैं, अरबी ज़ुबान का कुरान, उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं 
+[41:4] बशारत (खुश-खबरी) देने वाला और दारा देने वाला मगर लोगों में से अक्सर ने इस रु-गर्दानी की और वो सुनकर नहीं देते
+[41:5] कहते हैं "जिस चीज की तरफ तू हमें बुला रहा है उसके लिए हमारे दिलों पर गिलाफ (परदे) चढ़े हैं, हमारे कान बहरे (बहरे) हो गए हैं, और हमारे और तेरे दरमियान एक हिजाब हयाल हो गया है। तू अपना काम कर, हम अपना काम किये जायेंगे” 
+[41:6] ऐ नबी, इनसे कहो, मैं तो एक बशर हूं तुम जैसा। मुझे वही के ज़रिये से बताया जाता है कि तुम्हारा खुदा तो बस एक ही खुदा है, लिहाज़ा तुम सीधे उसी का रुख इख्तियार करो और उसे माफ़ी चाहो। तबाही है उन मुशरिकों के लिए 
+[41:7] जो जकात नहीं देते और आखिररात के मुनकिर हैं 
+[41:8] रहे वो लोग जिन्होन ने मान लिया और नेक अमाल किए, उनके लिए यकीनन ऐसा अजर है जिसका सिलसिला कभी टूटने वाला नहीं है 
+[41:9] ऐ नबी! इनसे कहो, क्या तुम हमें खुदा से कुफ्र करते हो और दूसरे को उसका हमसर (शारीरिक/बराबर) थेरेते हो जिसने जमीन को दो (दो) दिनों में बना दिया? वही तो सारे जहां वालों का रब है 
+[41:10] उसने (जमीन को वजूद में लाने के बाद) ऊपर से इसपर पहाड़ (पहाड़) जमा दिए और इसमें बरकतें रख दी और इसके अंदर सब मांगने वालों के लिए हर एक की तालाब ओ हाजात के मुताबिक ठीक अंदाज से ख़ुराक का सामान मुहइया करदिया। ये सब काम चार (चार) दिन में हो गए 
+[41:11] फिर वो आसमान की तरफ मुतवज्जे हुआ जो हमें वक्त महज़ धुआं (धुआं) था। उसने आसमां और ज़मीन से कहा "वजूद में आ जाओ, ख्वा तुम चाहो या ना चाहो।" दोनों ने कहा “हम आ गए फरमा बैरदारों की तरह” 
+[41:12] तब उसने दो दिन के अंदर सात (सात) आसमान बना दिए, और हर आसमान में उसका कानून वही (खुलासा) कर दिया। और आसमान ए दुनिया को हमने चिरागों से सजाया (सजाया) और इसे खूब महफूज करदिया। ये सब कुछ एक ज़बरदस्त हस्ती का मंसूबा (योजना) है 
+[41:13] अब अगर ये लोग मुँह मोड़ते हैं तो इनसे कहदो के "मैं तुमको उसी तरह के एक अचानक टूट पड़ने वाले अज़ाब से डरता हूँ जैसा आद और समूद पर नाज़िल हुआ था।" 
+[41:14] जब खुदा के रसूल उनके पास आए और पीछे, हर तरफ से आए और उन्हें समझा के अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी ना करो तो उन्हें ने कहा "हमारा रब चाहता तो फरिश्ते भेजता, लिहाजा हम उस बात को नहीं मानते जिसके लिए तुम भेजे गए हो।" 
+[41:15] आद का हाल ये था के वो ज़मीन में किसी हक़ के बिना बदले बन बैठे और कहने लगे: "कौन है हमसे ज़्यादा ज़ोरावर?" उनको ये ना सूझा के जिस खुदा ने उनको पेदा किया है वो उनसे ज़्यादा ज़ोरावर है? वो हमारी आयत का इंकार ही करते रहें 
+[41:16] आख़िर ए कार हमने चाँद मनहूस दिनों में सच तूफ़ानी हवा उन्पर भेज दी ता-के उनको दुनिया ही कि जिंदगी में ज़िल्लत ओ रुसवाई के अज़ाब का मज़ा चक दे। रुसवा-कुन है. वहां कोई उनकी मदद करने वाला ना होगा
+[41:17] रहे समूद, तो उनके सामने हमने राह ए रास्ते पेश की मगर उनको ने रास्ता देखने के बजाय अंधा (अंधा) बना रहना पसंद किया। आख़िर उनके कार्टूनों की बदौलत ज़िल्लत का अज़ाब उन पर टूट पड़ा 
+[41:18] और हमने उन लोगों को बचा लिया जो ईमान लाए थे और गुमराही ओ बद-अमली से परहेज़ करते थे 
+[41:19] और ज़रा उस वक़्त का ख्याल करो जब अल्लाह के ये दुश्मन दोज़ख की तरफ जाने के लिए घर लाए जाएंगे उनके अगलों को पिचलों के आने तक रोक रक्खा जाएगा 
+[41:20] फिर जब सब वहां पहुंच जाएंगे तो उनके कान और उनकी आंखें और उनके जिस्म की खालें उन पर गवाही देंगी के वो दुनिया में क्या कुछ करते रहेंगे 
+[41:21] वो अपने जिस्म की ख़ालों से कहेंगे " तुमने हमारे ख़िलाफ क्यों गवाही दी? " वो जवाब देंगे " हमने उसे खुदा ने गोया (भाषण) दी है जिसने हर चीज़ को गोया (भाषण) कर दिया है। उसी ने तुमको पहली मरतबा पैदा किया था और अब उसकी तरफ तुम वापस लाए जा रहे हो 
+[41:22] तुम दुनिया में जराहिम (अपराध) करते वक्त छुपते थे तो तुम्हें ये ख्याल ना था कि कभी तुम्हारे अपने कान और तुम्हारी आंखें और तुम्हारे जिस्म की खालें तुमपर गवाही देंगी बालके तुमने ये समझ था के तुम्हारे बहुत से अमल की अल्लाह को भी खबर नहीं है 
+[41:23] तुम्हारा यही गुमान जो तुमने अपने रुब के साथ किया था, तुम्हें ले डूबा और इसकी बर्बादी तुम खासे (नुकसान) में पढ़ गए” 
+[41:24] क्या हालात में वो सब्र करें (या ना करें) आग हाय उनका ठिकाना होगी, और अगर रूजू का मौका चाहेगा तो कोई मौका उन्हें ना दिया जाएगा 
+[41:25] हमने उन पर ऐसे साथी मुसल्लत कर दिए थे जो उन्हें आगे और पीछे हर चीज खुशनुमा बनकर दिखाते थे। आख़िर ए कार उन पर भी वही फ़ैसला ए अज़ाब चस्पां हो कर रहा जो उन से पहले गुजरे हुए जिन्नो और इंसानों के गिरोहों पर चस्पां हो चूका था, यकीनन वो खासे (नुकसान) में रह जाने वाले थे 
+[41:26] ये मुनकिरीन ए हक़ कहते हैं "क्या कुरान को है" हरगिज ना सुनो और जब ये सुनाया जाए तो इस्मेन खलल डालो, शायद के इस तरह तुम गालिब आ जाओ” 
+[41:27] काफिरों को हम सख्त अजाब का मजा चखा कर रहेंगे और जो बद्तरीन हरकतें ये करते रहेंगे हैं उनका पूरा पूरा बदला इन्हें देंगे 
+[41:28] वो दोज़ख है जो अल्लाह के दुश्मनों को बदले में मिलेगी, उसी में हमेशा हमेशा के लिए इनका घर होगा। ये है सज़ा इस जुर्म की के वो हमारी आयत का इंकार करते रहे 
+[41:29] वहां ये काफ़िर कहेंगे के “ऐ हमारे रब, ज़रा हमें दिखा दे उन जिन्नो और इंसानों को जिन्हों ने हमें गुमराह किया था, हम उन्हें पांव (पैर) तले रूंध डालें ता-के वो ख़ूब ज़लील ओ ख़्वार होन।” 
+[41:30] जिन लोगों ने कहा के अल्लाह हमारा रब है और फिर वो इसपर साबित क़दम रहे, यकीनन उन पर फरिश्ते नाज़िल होते हैं, और उनसे कहते हैं के "ना डरो, ना गम करो, और खुश हो जाओ हमें जन्नत की बशारत (खुश खबरी) से जिसका तुमसे वादा किया गया है
+[41:31] हम इस दुनिया की जिंदगी में भी तुम्हारे साथी हैं और आख़िरत में भी। वहां जो तुम चाहोगे तुम्हें मिलेगा और हर चीज जिसकी तुम तमन्ना करोगे वो तुम्हारी होगी 
+[41:32] ये है समां ए ज़ियाफत उस हस्ती की तरफ से जो गफूर और रहीम है” 
+[41:33] और हमारे शेखों की बात से अच्छी बात और किसकी होगी जिसने अल्लाह की तरफ बुलाया और नेक अमल किया और कहा के मैं मुसलमान हूं 
+[41:34] [और ऐ नबी], नेकी और बड़ी यकसन (बराबर) नहीं है, तुम बड़ी को हमने नेकी से दफा करो जो बेहतरीन हो, तुम देखोगे के तुम्हारे साथ जिसकी अदावत (दुश्मनी) पड़ी हुई थी वो जिगरी दोस्त बनाया है 
+[41:35] ये सिफत नसीब नहीं होती मगर उन लोगों को जो सब्र करते हैं, और ये मुकाम हासिल नहीं होता मगर उन लोगों को जो बड़े नसीब वाले हैं 
+[41:36] और अगर तुम शैतान की तरफ से कोई उक्साहत (प्रलोभन) महसूस करो तो अल्लाह की पनाह मांग लो, वो सब कुछ सुनता और जानता है 
+[41:37] अल्लाह की निशानियों में से हैं ये रात और दिन और सूरज और चाँद। सूरज को और चांद को सजदा ना करो बलके हमसे खुदा को सजदा करो जिसने उन्हें अदा किया है अगर फिल वक़ै तुम उसकी इबादत करने वाले हो 
+[41:38] लेकिन अगर ये लोग गुरुर में आ कर अपनी ही बात पर अड़े रहे तो परवाह नहीं, जो फरिश्ते तेरे रब के मुकर्रब हैं वो शब-ओ-रोज़ (रात और दिन) उसकी तस्बीह कर रहे हैं और कभी नहीं थकते 
+[41:39] और अल्लाह की निशानियों में से एक ये है के तुम देखते हो ज़मीन सूनी (बंजर) पड़ी हुई है, फिर जून-हाय के हमने उसपर पानी बरसाया, यक़ीनन वह फबक उठती है और फूल जाती है। वाला है। यकीनन वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है 
+[41:40] जो लोग हमारी आयतों को उलटे माने पहचानते हैं (हमारे संकेतों को विकृत करते हैं) वो हमसे कुछ छुपे हुए नहीं हैं। खुद ही सोचलो के आया वो शक्स बेहतर है जो आग में झोंका जाने वाला है या वो जो कयामत के रोज़ अमन की हालत में हाज़िर होगा? करते रहो जो तुम चाहो, तुम्हारी सारी हरकतों को अल्लाह देख रहा है 
+[41:41] ये वो लोग हैं जिनके सामने कलाम-ए-नसीहत आया तो उन्हें ने इसे मान-ने से इंकार कर दिया, मगर हकीकत ये है के ये एक ज़बरदस्त किताब है 
+[41:42] बातिल ना सामने से इसपर आ सकता है ना पीछे से, ये एक हकीम (सबसे बुद्धिमान) ओ हमीद (बेहद प्रशंसनीय) की नाज़िल करदा चीज़ है 
+[41:43] ऐ नबी, तुमसे जो कुछ कह रहा है उसमें कोई चीज़ भी ऐसी नहीं है जो तुमसे पहले गुजरे हुए रसूलों से ना कहीं जा चुकी हो। बेशक तुम्हारा रब बड़ा दरगुज़ार करने वाला है, और उसके साथ बड़ी दर्दनाक सजा देने वाला है
+[41:44] अगर हम इसको अजामी (गैर अरबी) कुरान बाना कर भेजते हैं तो ये लोग कहते हैं "क्यों ना इसकी आयत खोल कर बयान की गई? क्या अजीब बात है के कलाम अजामी (गैर अरबी) है और मुखातिब अरबी"।इनसे कहो ये कुरान ईमान लाने वालों के लिए हिदायत और शिफा है, मगर जो लोग ईमान नहीं लाते उनके लिए ये कानों की दात (प्लग/बेहरापन) और आंखों की पट्टी (कवरिंग) है। उनका हाल तो ऐसा है जैसे उनको दरवाजे से पुकारा जा रहा हो 
+[41:45] इस्के पहले हमने मूसा को किताब दी थी और उसके मामले में bhi yahi ikhtilaf hua tha. अगर तेरे रुब ने पहले ही एक बात ताई न करदी होती तो इन इख्तिलाफ करने वालों के दरमियान फैसला चुका दिया जाता, और हकीकत ये है के ये लोग उसकी तरफ से सख्त इजतराब अंगेज (सख्त बेचैन करने वाले/बेचैन करने वाले) शक्क में पैदा हुए हैं 
+[41:46] जो कोई नया अमल करेगा अपने ही लिए अच्छा करेगा, जो बड़ी (बुराई) करेगा उसका वबाल उसी पर होगा, और तेरा रब अपने बंदों के हक में जालिम नहीं है 
+[41:47] हमें सा-अथ (घंटा/कयामत) का इल्म अल्लाह ही की तरफ राज़ होता है, वही उन सारे फालों (फल) को जानता है जो अपने शगूफों (आवरण/आवरण) में से निकलता है, उसे पता है कि कौनसी मां (महिला) हमीला (गर्भधारण) हुई है और किसने बच्चा पैदा करना (जन्म देना) है। फिर जिस रोज़ वो लोगों को पुकारेगा के कहाँ हैं मेरे वो शरीक? ये कहेंगे, "हम अर्ज़ कर चुके हैं, आज हममें से कोई इसकी गवाही देने वाला नहीं है।" 
+[41:48] हमें वक्त वो सारे मबूद इनसे गम हो जाएंगे जिन्हे ये इसे पहले पुकारते थे, और ये लोग समझ लेंगे इनके लिए अब कोई जाए पनाह नहीं है 
+[41:49] इंसान कभी भलाई की दुआ मांगता नहीं थकता, और जब कोई आफत इसपर आ जाती है तो मयूस ओ दिल शिकस्त हो जाता है 
+[41:50] मगर सिर्फ वक्त गुजर जाने के बाद हम इसे अपने रहमान का मजा चखते हैं, ये कहता है के "मैं इसका मुस्तहिक हूं, और मैं नहीं समझूंगा कि कयामत कभी आएगी, लेकिन अगर वकै मैं अपने रब की तरफ पलट गया तो वहां भी मजे करूंगा”। हालंके कुफ्र करने वालों को लाज़िमन हम बता कर रहेंगे के वो क्या करके आये हैं, और उन्हें हम बदाए गंदे अज़ाब का मजा दिखाएंगे 
+[41:51] इंसान को जब हम नियामत देते हैं तो वो मुहं फेरता है और अकड़ जाता है, और जब उसे कोई आफत छू जाती है तो लंबी चौड़ी दुआएं करने लगता है 
+[41:52] (ऐ नबी), इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अगर वाकाई ये कुरान खुदा ही की तरफ से हुआ और तुम इसका इनकार करते रहे तो हमारे शक्स से बढ़ कर भटका हुआ और कौन होगा जो इसकी मुखालफत में दूर तक निकल गया हो 
+[41:53] अंकरिब हम उनको अपनी निशानियां आफाक (क्षितिज) में भी दिखाएंगे और इनके अपने नफ्स में भी यहां तक-के अंदर ये बात खुल जाएगी के ये कुरान वाक़ई बरहक़ है, क्या ये बात काफ़ी नहीं है के तेरा रब हर चीज़ का शाहिद(गवाह) है
+[41:54] आगाह रहो, ये लोग अपने रब की मुलाक़ात में शक्क रखते हैं। सुन रक्खो वो हर चीज़ पर मुहीत (पूरी तरह से सब कुछ शामिल है) है 
+
+सूरह 42: अश-शूरा (वकील) 
+------------------------------------------------ 
+[42:1] हा मीम 
+[42:2] ऐन देखा क़ाफ़ 
+[42:3] इसी तरह अल्लाह गालिब ओ हकीम (सबसे शक्तिशाली, सबसे बुद्धिमान) तुम्हारी तरफ और तुमसे पहले गुज़रे हुए (रसूलों) की तरफ वही करता है 
+[42:4] आसमान और ज़मीन में जो कुछ भी है उसी का है, वो बारात और अज़ीम है 
+[42:5] करीब है के आसमान ऊपर से फट पड़े फरिश्ते अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह कर रहे हैं, और ज़मीन वालों के हक़ में दरगुज़र की डार्कहस्टीन किये जाते हैं। आगा रहो, हकीकत में अल्लाह गफूर ओ रहीम ही है 
+[42:6] जिन लोगों ने उनको छोड़ कर अपने दूसरे सरपरस्त बना रक्खे हैं, अल्लाह ही उन्पार निगरानी है, तुम उनके हवाला दार नहीं हो 
+[42:7] हां, इसी तरह ऐ नबी, ये कुरान ए अरबी हमने तुम्हारी तरफ वही (खुलासा) किया है ता-के तुम बस्तियां के मरकज (शहर ए मक्का) और उसके गिर्द ओ पेश रहने वालों को खबरदार बनाओ, और जमा होने के दिन से डर दो जिसके आने में कोई शक्क नहीं। एक गिररूह को जन्नत में जाना है और दूसरा गिरूह को दोज़ख में 
+[42:8] अगर अल्लाह चाहता तो सबको एक ही उम्मत बना देता, मगर वो जिसे चाहता है अपनी रहमत में दखल करता है। और जालिमों का ना कोई वाली है ना मददगार 
+[42:9] क्या ये (ऐसी नादान हैं के) इन्हों ने उसे छोड़ कर दूसरे वाली (रक्षक) बना रखा है? वली (रक्षक) अल्लाह ही है, वही मुर्दों (मृत) को जिंदा करता है, और वह हर चीज पर कादिर है 
+[42:10] तुम्हारे दरमियान जिस मामले में भी इख्तिलाफ हो, उसका फैसला करना अल्लाह का काम है। वही अल्लाह मेरा रब है, उसी पर मैंने भरोसा किया, और उसकी तरफ मैं रूजू करता हूं 
+[42:11] आसमानों और जमीन का बनाने वाला, जिसने तुम्हारी अपनी जिंदगी से तुम्हारे लिए जोड़ी बनाई, और इसी तरह के जानवरों में भी (उन्ही के हम जिन्स) जोडे (जोड़े) बनाएं, और इस तारीख से वो तुम्हारी नस्लें (पीढ़ियां) फैलती हैं। क़यानत की कोई चीज़ उसके मुशाबेह नहीं, वो सब कुछ सुनने और देखने वाला है 
+[42:12] आसमान और ज़मीन के खज़ानो की कुंजी उसके पास हैं। जिसे चाहता है खुला रिज़्क देता है और जिसे चाहता है नपा तुला देता है। उसे हर चीज़ का इल्म है
+[42:13] उसने तुम्हारे लिए दीन का वही तरीक़ा मुकर्रर किया है जिसका हुकुम उसने नूह को दिया था, और जैसे (ऐ मुहम्मद) अब तुम्हारी तरफ़ हमने वही के ज़रिये से भेजा है, और जिसकी हिदायत हम इब्राहिम और मूसा और ईसा को दे चुके हैं, के साथ ले लिया गया है क़याम करो इस दीन को और हममें मुतफ़र्रिक न हो जाओ। यही बात मुशरिकिन को सख्त नगावार हुई है जिसकी तरफ ऐ मुहम्मद तुम इन्हें दावत दे रहे हो। अल्लाह जिसे चाहता है अपना कर लेता है, और वो अपनी तरफ आने का रास्ता उसी को दिखाता है जो उसकी तरफ रूजू करे 
+[42:14] लोगों में जो तफ़रका (इख्तिलाफ़) रुनुमा हुआ वो इसके बाद हुआ के उनके पास इल्म आ चूका था और इस बिना पर हुआ के वो आपस में एक दूसरे पर ज़्यादा करना चाहते थे। अगर तेरा रब पहले ही ये ना फरमा चूका होता के एक वक्त ए मुकर्रर तक फैसला मुलतवी रक्खा जाएगा तो इनका काजिया चूका दिया गया होता। और हकीकत ये है के एग्लोन के बाद जो लोग किताब के वारिस बन गए वो उसकी तरफ से बदले इस्तराब अंगेज शक्क में पड़े हुए हैं 
+[42:15] जिनके ये हालत पैदा हो चुकी है इसलिए ऐ मुहम्मद (स.अ.स.) अब तुम उसी दीन की तरफ दावत दो, और जिस तरह तुम्हीं हुकुम दिया गया है उस पर मज़बूती के साथ कायम हो जाओ, और लोगों की ख्वाहिश की इतिबा ना करो। और इनसे केहदो के: "अल्लाह ने जो किताब भी नाज़िल की है मैं उसपर ईमान लाया, मुझे हुकुम दिया है के मैं तुम्हारे दरमियान इन्साफ करूं। अल्लाह ही हमारा रब भी है और तुम्हारा रब भी। हमारे अमल हमारे लिए हैं और तुम्हारे अमल तुम्हारे लिए। हमारे और तुम्हारे दरमियान कोई झगड़ा नहीं। अल्लाह एक रोज़ हम सब को जमा करेंगे और उसकी तरफ सब को जाना है” 
+[42:16] अल्लाह की दावत पर लब्बैक कहे जाने के बाद जो लोग (लब्बैक कहने वालों से) अल्लाह के दीन के मुआमले में झगड़े करते हैं, उनकी हुज्जत बाजी उनके रब के नाज़दिक बात है, और उन पर उसका ग़ज़ब है और उनके लिए सख्त अज़ाब है 
+[42:17] वो अल्लाह हाय है जिसने हक़ के साथ ये किताब और मिज़ान नाज़िल की है और तुम्हें क्या खबर, शायद के फैसले की घड़ी करीब ही आ लगी हो 
+[42:18] जो लोग उसके आने पर ईमान नहीं रखते वो तो हमारे लिए जल्दी मचाते हैं, मगर जो उसपर ईमान रखते हैं वो उसे डरते हैं और जानते हैं के यकीनन वो आने वाली है। खूब सुनलो, जो लोग हमें घड़ी के आने में शक्क डालने वाली बातें (तर्क) करते हैं वो गुमराही में बहुत दूर निकल गए हैं 
+[42:19] अल्लाह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है जिसे जो कुछ चाहता है देता है। वो बड़ी कुव्वत वाला और ज़बरदस्त है 
+[42:20] जो कोई आख़िरत की खेती चाहता है उसकी खेती को हम बढ़ाते हैं, और जो दुनिया की खेती चाहता है उसे दुनिया ही में से अलग कर देती है मगर आख़िरत में उसका कोई हिसा नहीं है
+[42:21] क्या ये लोग कुछ ऐसे शारिक ए खुदा रखते हैं जिन्हों ने इनके लिए दीन की नोइयत रखने वाला एक ऐसा तरीका मुकर्रर कर दिया है जिसका अल्लाह ने इज़ान नहीं दिया? अगर फैसला की बात पहले ताई ना हो गई तो इनका क़ज़िया चुका दिया गया हो गया। यकीनन इन जालिमों के लिए दर्दनक अज़ाब है 
+[42:22] तुम देखोगे के ये जालिम हमें वक्त अपने किए के अंजाम से डर रहेंगे और वो अंदर आ कर रहेंगे। बा-खिलाफ इसके जो लोग ईमान ले आए हैं और जिन्होन ने नेक अमल किए हैं वो जन्नत के गुलिस्तानों में होंगे, जो कुछ भी वो चाहेंगे अपने रब के हां पाएंगे, यही बड़ा फजल है 
+[42:23] ये है वो चीज जिसकी खुश खबरी अल्लाह अपने उन बंदों को देता है जिन्होनें ने मान लिया और नीक अमल किये। ऐ नबी, लोगों से कहदो के मैं इस काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं। अलबत्ता क़राबत (रिश्तेदारों) की मुहब्बत ज़रूर चाहता हूँ। जो कोई भलाई कमाएगा हम उसके लिए हमें भलाई में खूबी का इज़ाफ़ा कर देंगे। बेशक अल्लाह बड़ा दरगुज़ार करने वाला और क़दरदान है 
+[42:24] क्या ये लोग कहते हैं कि इस शक्स ने अल्लाह पर झूठा बोहतन गड़बड़ लिया है? अगर अल्लाह चाहे तो तुम्हारे दिल पर मोहर लगा दे। वो बातिल को मिटा देता है और हक को अपने फरमान से हक कर दिखाता है। वो सीने के छुपे हुए राज जानता है 
+[42:25] वही है जो अपने बंदों से तौबा कबूल करता है और बुराइयों से दरगुजर करता है, हालंके तुम लोगों के सब अफाल (जो कुछ कर रहे हो) का उसका इल्म है 
+[42:26] वो ईमान लाने वालों और नेक अमल करने वालों की दुआ क़बूल करता है और अपने फ़ज़ल से उनको और ज़्यादा देता है। रहे इंकार करने वाले, तो उनके लिए दर्दनक सजा है 
+[42:27] अगर अल्लाह अपने सब बंदों (नौकरों) को खुला रिज्क दे देता तो वो ज़मीन में सरकशी का तूफ़ान बरपा कर देता, मगर वो एक हिसाब से जितना चाहता है नाज़िल करता है, यकीनन वो अपना बंदों से बा खबर है और उन पर निगाह रखता है 
+[42:28] वही है जो लोगों के मयौस हो जाने के बाद में (बारिश) बरसात है और अपनी रहमत फैला देता है, और वही काबिल ए तारीफ वाली है 
+[42:29] उसकी निशानियों में से है ये ज़मीन और आसमान की पैदाइश, और ये जानदार मखलूकत जो उसने दोनों जगह फैला रखा है। वो जब चाहे इन्हें इकठ्ठा कर सकता है 
+[42:30] तुम्पर जो मुसीबत भी आई है, तुम्हारे अपने हाथों की कमाई से आई है, और बहुत से कसूरों से वो वैसे ही इकठ्ठा कर जाता है 
+[42:31] तुम ज़मीन में अपने खुदा को आजिज (निराश) करदेने वाले नहीं हो, और अल्लाह के मुकाबले में तुम कोई हमी ओ नासिर (रक्षक या सहायक) नहीं रखते 
+[42:32] उसके निशानियों में से हैं ये जहाज (जहाज) जो समंदर में पहाड़ों की तरह नजर आते हैं 
+[42:33] अल्लाह जब चाहे हवा को साकिन (गतिहीन) करदे और ये समंदर की पीठ (पीछे) पर खड़े रह जाएं। इसमें बड़ी निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो कमाल दर्ज सब्र ओ शुक्र करने वाला हो
+[42:34] या (अनपार सवार होने वालों के) बहुत से गुनाहों से दर गुजर करते हुए उनके चांद ही कार्टूनों की दुनिया में उन्हें डुबो (डूब) दे 
+[42:35] और हम वक्त हमारी आयत में झगड़े करने वालों को पता चल जाए के उनके लिए कोई जाए पनाह नहीं है 
+[42:36] जो कुछ भी तुम लोगों को दिया गया है वो मेहज़ दुनिया की चंद रोजा जिंदगी का सर ओ सामान है, और जो कुछ अल्लाह के हान है वो बेहतर भी है और भुगतान भी। वो उन लोगों के लिए है जो ईमान लाए हैं और अपने रुब पर भरोसा करते हैं 
+[42:37 
+] जो अपने रुब का हुकुम मानते हैं, नमाज कायम करते हैं, अपने मामले आपस के मशवरे से चलते हैं, हमने जो कुछ भी रिज्क उन्हें दिया है उसमें से खर्च करते हैं 
+[42:39] और जब अनपर ज्यादा की जाती है तो उसका मुकाबला करते हैं 
+[42:40] बुरे का बदला वैसी ही बुरा है, फिर जो कोई माफ़ करे और इस्लाह करे उसका अजर अल्लाह के ज़िम्मे है। अल्लाह ज़ालिमों को पसंद नहीं करता 
+[42:41] और जो लोग ज़ुल्म होने के बाद बदला लें उनको मलामत नहीं कि जा सकती 
+[42:42] मलामत के मुस्तहिक तो वो हैं जो दूसरों पर ज़ुल्म करते हैं और ज़मीन में ना हक ज़्यादा करते हैं। ऐसे लोगों के लिए दर्दनक अज़ाब है 
+[42:43] अलबत्ता जो शक्स सब्र से काम ले और दरगुज़ार करे, तो ये बदी उल आज़मी के कामों में से है 
+[42:44] जिस को अल्लाह ही गुमराही में फेंक दे हमें का कोई संभालने वाला अल्लाह के बाद नहीं है। तुम देखो गी ये जालिम जब अज़ाब देखेंगे तो कहेंगे अब पलटने की भी कोई सबील है 
+[42:45] और तुम देखोगे के ये जहन्नुम के सामने जब ले जायेंगे तो ज़िल्लत के मारे झुके जा रहे होंगे और उसको नज़र बचा कर कान लगाओगे (गुप्त नज़र) से देखेंगे। हमें वक्त वो लोग जो ईमान लाए थे कहेंगे के वाकाई असल जियान कर ([सच्चे] हारे हुए) वही हैं जिन्हों ने आज कयामत के दिन अपना आपको और अपने मुतालिकिन को खसरे में डाल दिया। ख़बरदार रहो, ज़ालिम लोग मुस्तक़िल अज़ाब में होंगे 
+[42:46] और उनके कोई हमी ओ सरपरस्त न होंगे जो अल्लाह के मुक़ाबले में उनकी मदद को आएंगे। जिसे अल्लाह गुमराही में फेंक दे उसे बचाने के लिए कोई सबील नहीं 
+[42:47] मान लो अपने रब की बात कबूल इसके के वो दिन आए जिसको तलने की कोई सूरत अल्लाह की तरफ से नहीं है। हमारे दिन तुम्हारे लिए कोई जाए पनाह ना होगी और ना कोई तुम्हारे हाल को बदलने की कोशिश करने वाला होगा 
+[42:48] अब अगर ये लोग मुंह मोड़ते हैं तो ऐ नबी हमें तुमको अनपर निगाहें बना कर तो नहीं भेजा जाता है। तुमपर तो सिर्फ बात पाहुंचा देने की जिम्मेदारी है। इंसान का हाल ये है कि जब हम उसे अपनी रहमत का मजा चखाते हैं तो उसपर फूल जाता है। और अगर उसके अपने हाथों का किया धरा किसी मुसीबत की शक्ल में उसपर उलट पड़ता है तो सच में शुक्र बन जाता है
+[42:49] अल्लाह ज़मीन और आसमान की बादशाही का मालिक है। जो कुछ चाहता है भुगतान करता है। जिसे चाहता है लड़कियां, जैसा चाहता है लड़के देता है 
+[42:50] जिसे चाहता है लड़के और लड़कियां मिला-जुला कर देता है और जिसे चाहता है बांझ (बंजर) कर देता है। वो सब कुछ जानता है और हर चीज़ पर कादिर है 
+[42:51] किसी बशर (इंसान) का ये मुकाम नहीं है कि अल्लाह हमसे रू-बरू बात करे, उसकी बात या तो वही (इशारे/रहस्योद्घाटन) के तौर पर होती है, या दिन के पीछे से, या फिर वो कोई पैगम्बर (फ़रिश्ता) भेजता है और वो उसके हुकुम से जो कुछ वो चाहता है, वही करता है। वो बारतार और हकीम (बुद्धिमान) है 
+[42:52] और इसी तरह (ऐ मुहम्मद स.स.) हमने अपने हुकुम से एक रूह तुम्हारी तरफ वही की है। तुम्हें कुछ पता नहीं था कि किताब क्या होती है और ईमान क्या होता है, मगर हमें रूह को हमने एक रोशनी बना दिया जिसे हम राह दिखाते हैं अपने बंदों में से जिसे चाहते हैं। यकीनन तुम सीधे रास्ते की तरफ रहनुमाई कर रहे हो 
+[42:53] हमें खुदा के रास्ते की तरफ जो जमीन और आसमान की हर चीज का मालिक है। ख़बरदार रहो, सारे मुआमलात अल्लाह ही की तरफ रूजू करते हैं 
+
+सूरह 43: अज़-ज़ुखरुफ़ (सोना) 
+------------------------------------------------ 
+[43:1] हा मीम 
+[43:2] कसम है इस वाज़ेह किताब की 
+[43:3] के हमने इसे अरबी ज़ुबान का कुरान बनाया है ता-के तुमलोग इसे समझो 
+[43:4] और दर हकीकत ये उम्मुल किताब में सब्त (प्रतिलिपिबद्ध) है, हमारे हां बड़ी बुलंद मौत और हिकमत से लबरेज किताब 
+[43:5] अब क्या हम तुमसे बेज़ार होकर ये दर्स-ए-नसीहत तुम्हारे यहां भेजना छोड़ दें सिर्फ इसलिए तुम हद से गुजारे हुए लोग हो 
+[43:6] पहले गुज़री हुई क़ौमों में भी बारहा (बार-बार) हमने नबी भेजे हैं 
+[43:7] कभी ऐसा नहीं हुआ के कोई नबी उनके हां (यहां) आया हो और उन्हें ने उसका मज़ाक न उदय हो 
+[43:8] फिर जो लोग इनसे बदरजा ज़्यादा ताक़तवार थे उन्हें हमने हलक करदिया. पिछली क़ौमों की मिसालें गुज़र चुकी हैं 
+[43:9] अगर तुम लोगों से पूछो के ज़मीन और आसमान को किसने पाया है तो ये खुद कहेंगे के उसमें उसकी ज़बरदस्त इल्मी हस्ती ने चुकाया है 
+[43:10] वही ना जिसने तुम्हारे लिए इस ज़मीन को गहवारा किया है (पालना) बनाया और इसमें तुम्हारी खातिर रास्ते बना दिए ता-के तुम अपनी मंजिल ए मकसूद की राह पा सको 
+[43:11] जिसने एक खास मिकदर में आसमान से पानी उतारा और उसकी ज़रिये से मुर्दा (मृत) ज़मीन को जिला उठाया। इसी तरह एक रोज तुम जमीन से बारामद किए जाओगे 
+[43:12] वही जिसने ये तमाम जोड़े (जोड़े) बनाए, और जिसने तुम्हारे लिए कश्तियां (जहाज) और जानवरों को सवारी बनाई ता-के तुम उनकी पुश (पीठ) पर चढ़ो
+[43:13] और जब उन्पर बैठो (बैठो) तो अपने रब का एहसान याद करो और कहो के "पाक है वो जिसने हमारे लिए चीज़ों को मुस्कुराकर (बस में) करदिया वरना हम उन्हें काबू में लाने की ताक़त न रखते थे 
+[43:14] और एक रोज़ हमें अपने रब की तरफ पलटना है” 
+[43:15] (ये सब कुछ जानते और मानते हैं भी) लोगों ने उसके बंदों (नौकरों) में से बाज़ को उसका जुज (हिस्सा) बना डाला, हकीकत ये है के इंसान खुला एहसान फरामोश है 
+[43:16] क्या अल्लाह ने अपनी मखलूक में से अपने लिए बेटियां इंतिखाब (चुने हुए) की और तुम्हारे बेटों (बेटों) से नवाजा 
+[43:17] और हाल ये है कि जिस औलाद को ये लोग खुदा ए रहमान की तरफ मंसूब करते हैं उसकी विलादत का संदेश (खबर/समाचार/खबर) जब खुद में से किसी को दिया जाता है तो उसके मुहं पर सियाही छा जाती है और वो ग़म से भर जाता है 
+[43:18] क्या अल्लाह के हिसे में वो औलाद आई जो ज़ेवरों (गहने) में पाली जाती है और बेहस ओ हुज्जत में अपना मुद्दा पूरी तरह वाज़े भी नहीं कर सकती 
+[43:19] उन्होन ने फ़रिश्तों को, जो खुदा ए रहमान के खास बंदे हैं, औरतें करार दे लिया। क्या उनके जिस्म की सच्चाई इन्होनें देखी है? इनकी गवाही लिख ली जाएगी और इन्हें इसके जवाब-दही करनी होगी 
+[43:20] ये कहते हैं "अगर खुदा-ए-रहमान चाहता (के हम उनकी इबादत ना करें) तो हम कभी उनको ना पूजते" ये मामले की हकीकत को कतई नहीं जानते, महज़ तीर तुक्के लड़ते हैं (केवल अनुमान लगा रहे हैं/अनुमान लगा रहे हैं) 
+[43:21] क्या हमने इसे पहले कोई किताब इनको दी थी जिसकी सनद [अपने इस मलाईका (फरिश्ते) परस्ती के लिए] ये अपने पास रखते हैं 
+[43:22] नहीं, बल्के ये कहते हैं के हमने अपने बाप दादा को एक तारीख पर पाया है और हम उनको नक्शे कदम पर चल रहे हैं 
+[43:23] इसी तरह तुमसे पहले जिस बस्ती में भी हमने कोई नज़ीर (दाराने वाला) भेजा, उसके खाते-पीते लोगों ने यहीं कहा के हमने अपने बाप दादा को एक तारीख़ पर पाया है और हम उन्हें नक्शे क़दम की जोड़ी कर रहे हैं 
+[43:24] हर नबी ने उनसे पूछा, क्या तुम उसी डगर पर कहले जाओगे ख्वाह में उस रास्ते से ज्यादा सही रास्ता तुम्हें बताऊं जिसपर तुमने अपने बाप दादा को पाया? उनहों ने सारे रसूलों को यही जवाब दिया के जिस दीन की तरफ बुलाए के लिए तुम भेज गए हो हम उसके काफिर हैं 
+[43:25] आखिर ए कार हमने उनकी खबर ले डाली और देख लो के झूठलेन वालों का क्या अंजाम हुआ 
+[43:26] याद करो वो वक्त जब इब्राहिम ने अपने बाप और अपनी क़ौम से कहा था के "तुम जिनकी बंदगी करते हो मेरा उनसे कोई ताक़ नहीं 
+[43:27] मेरा तल्लुक सिर्फ उसे है जिसने मुझे भुगतान किया, वही मेरी रहनुमाई करेगी" 
+[43:28] और इब्राहिम यहीं कलिमा अपने पीछे अपनी औलाद में छोड़ गया ता-के वो इसकी तरफ रूजू करें
+[43:29] (इस के बावज़ूद जब ये लोग दूसरे की बंदगी करने लगे तो मैंने इनको मिटा नहीं दिया) बलके मैं इन्हें और इनके बाप को माता-ए-हयात देता रहा यहां तक ​​के इनके पास हक़, और खोल खोल कर बयान करने वाला रसूल आ गया 
+[43:30] मगर जब वो हक़ इनके पास आया तो इन्हों ने कह दिया ये तो जादू है और हम इसको मन्ने से इनकार करते हैं 
+[43:31] कहते हैं, ये कुरान दोनों शहरों के बदाए आदमियों में से किसी पर क्यों ना नाज़िल किया गया 
+[43:32] क्या तेरे रब की रहमत हाँ log takseem karte hain? दुनिया की जिंदगी में इनकी गुजर बसर के ज़रिये तो हमने इनके दरमियान तकसीम किये हैं, और इसमें कुछ लोगों को कुछ दूसरे लोगों पर हमने बदरजा-हा फौकियात दी है ता-के ये एक दूसरे से खिदमत लें और तेरे रब की रहमत हमें दौलत से ज्यादा कीमती है जो (इनके) रहीस) समेट रहे हैं 
+[43:33] अगर ये अंदेशा ना होता के सारे लोग एक ही तारीख के हो जाएंगे तो हम खुदा ए रहमान से कुफ्र करने वालों के घरों की छतें (छतरियां), और उनकी सीढ़ियां (सीढ़ियां) जिनसे वो अपने बाला खानों पर चढ़ते हैं 
+[43:34] और उनके दरवाजे, और उनके तख्त जिनपर वो तकिए (तकिये) लगा कर बैठते हैं 
+[43:35] सब चांदी और सोने (सोना) के बनवा देते हैं। ये तो महज़ हयात ए दुनिया की मताह हैं। और आखिरी तेरे रब के हां सिर्फ मुत्तक़ीन के लिए हैं 
+[43:36] जो शक्स रहमान के जिक्र से तगाफुल (गफलत) बरात-ता है, हम इसपर एक शैतान मुसल्लत कर देते हैं और वो उसका रफीक बन जाता है 
+[43:37] ये शयातीन ऐसे लोगों को राह ए रास्ते पर आने से रोकते हैं, और वो अपनी जगह ये समझते हैं के हम ठीक जा रहे हैं 
+[43:38] आख़िर ए कार जब ये शक्स हमारे हाँ पहुँचेगा तो अपने शैतान से कहेगा "काश मेरे और तेरे दरमियान मशरिक़ ओ मगरिब का बोध (दूरी/दूरी) होता, तू तो बढ़ता साथी निकला" 
+[43:39] लोगों में हमारा वक़्त से कहा जाएगा के जब तुम ज़ुल्म कर चुके तो आज ये बात तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं है के तुम और तुम्हारी शयातें अज़ाब में मुश्तारिक हैं 
+[43:40] अब क्या ऐ नबी तुम बहरों (बहरे) को सुनाओगे? हां अंधों (अंधा) और सारे गुमराही में पड़े हुए लोगों को राह दिखोगे 
+[43:41] अब तो हमें इनको सज़ा देनी है ख्वाह तुम्हें दुनिया से उठा लें 
+[43:42] हां तुमको आंखों से इनका वो अंजाम दिखा दें जिसका हमने इसे वादा किया है। हमें इनपर पूरी क़ुदरत हासिल है 
+[43:43] तुम बहार-हाल उस किताब को मज़बूती से थामे रहो जो वही के ज़रिये से तुम्हारे पास भेज दी गई है, यकीनन तुम सीधे रास्ते पर हो 
+[43:44] हकीकत ये है के ये किताब तुम्हारे लिए और तुम्हारी क़ौम के लिए एक बहुत बड़ा शराफ है और अंकारिब तुम लोगों को इसका जवाब-दही करनी होगी 
+[43:45] तुमसे पहले हमने जितने रसूल भेजे थे उन सब से पूछ देखो, क्या हमने खुदा ए रहमान के सिवा कुछ दूसरे माबूद भी मुकर्रर किए थाय के उनकी बंदगी की जाए
+[43:46] हमने मूसा को अपनी निशानियों के साथ फिरौन और उसके अयान-ए-सल्तनत के पास भेजा, और उसने जा कर कहा के मैं रब उल आलमीन का रसूल हूं 
+[43:47] फिर जब उसने हमारी निशानियां उनके सामने पेश की तो वो थट्टे (हंसी) मारने लगे 
+[43:48] हम एक पर एक ऐसी निशानी उनको दिखाते चले गए जो पहली से बढ़ चढ़ कर थी, और हमने उनको अज़ाब में धर लिया ता-के वो अपनी रवीश से बाज़ आएं 
+[43:49] हर अज़ाब के मौके पर वो कहते, ऐ साहिर (जादूगर/जादूगर), अपने रब की तरफ से जो मनसब तुझे हासिल है उसकी बिना पर हमारे लिए उसकी दुआ कर, हम जरूर राह-ए-रास्त पर आ जाएंगे 
+[43:50] मगर जून ही के हम उन्पर से अजाब हटा देते हैं वो अपनी बात से फिर जाते थे 
+[43:51] एक रोज फिरौन ने अपनी कौम के दरमियान पुकार कर कह, "लोगन, क्या मिसर (मिस्र) की बादशाही मेरी नहीं है, और ये नहरें (धाराएं) मेरे नीचे नहीं दिख रही हैं? क्या तुम लोगों को नज़र नहीं आती 
+[43:52] मैं बेहतर हूं या ये शक्स जो ज़लील ओ हक़ीर है और अपनी बात भी खोल कर बयान नहीं कर सकता 
+[43:53] क्यों न इसपर सोने (सोना) के कंगन (चूड़ियाँ) उतारे गए? या फरिश्तों का एक दस्ता इसकी अर्दली में ना आया?” 
+[43:54] उसने अपनी कौम को हल्का समझा और उनहों ने उसकी इताअत की, दर हकीकत वो था हाय फासिक लोग 
+[43:55] आखिर ए कार जब उनहों ने हमें गजबनाक करदिया तो हमने उनसे इंतकाम लिया और उनको इकत्था गर्क (डूबना) किया 
+[43:56] और बाद वालों के लिए पेश-रो और नामोना इब्रत बनाकर रख दिया 
+[43:57] और जॉनी के इब्ने मरियम (यीशु) की मिसाल दी गई, तुम्हारी क़ौम के लोगों ने उसपर गुल मचा दिया (चिल्ला उठे/ शोर मचाया) 
+[43:58] और लगे कहने के हमारे माबूद अच्छे hain ya woh? ये मिसाल वो तुम्हारे सामने महज़ कच-बेहसी (तर्क/विवाद) के लिए लाए हैं, हकीकत ये है के ये हैं झगड़लू लोग 
+[43:59] इब्ने मरियम (जीसस) इसके सिवा कुछ ना था एक बंदा था जिसपर हमने इनाम किया और बानी इसराइल के लिए अपनी क़ुदरत का एक नामुना बना दिया 
+[43:60] हम चाहें तो तुमसे फ़रिश्ते अदा कर दें जो ज़मीन में तुम्हारे जनाशीं (उत्तराधिकारी) हों 
+[43:61] और वो दर-असल कयामत की एक निशानी है, पास तुम हमें शक्क ना करो मेरी बात मान लो, यही सीधा रास्ता है 
+[43:62] ऐसा ना हो शैतान तुमको उसे रोक दे के वो तुम्हारा खुला दुश्मन है 
+[43:63] और जब ईसा (यीशु) सारे निशानियां लिए हुए आये थे तो उसने कहा था के "मैं तुम लोगों के पास हिकमत लेकर आया हूं, और इसलिए आया हूं के तुमपर बाज़ उन बातों की हकीकत खोल दूं जिन में तुम इख्तिलाफ कर रहे हो, लिहाजा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो 
+[43:64] हकीकत ये है के अल्लाह ही मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी।उसी की तुम इबादत करो, यही सीधा रास्ता है”
+[43:65] मगर (उसकी इस साफ तालीम के बावजूद) गिरोहोन (गुटों) ने आपस में इख्तिलाफ किया, पास तबही है उन लोगों के लिए जिन्होन ने ज़ुल्म किया एक दर्दनाक दिन के अज़ाब से 
+[43:66] क्या ये लोग अब बस इसी चीज़ के मुंतज़िर हैं के अचानक अंदर क़ियामत आ जाए और इन्हें ख़बर भी ना हो 
+[43:67] वो दिन जब आएगा तो मुत्तक़िन को छोड़ कर बाकी सब दोस्त एक दूसरे के दुश्मन हो जाएंगे 
+[43:68] हम रोज़ उन लोगों से जो हमारी आयत पर ईमान लाए थे और मुती-ए-फ़रमान बनकर रहेंगे 
+[43:69] कह जाएगा के "ऐ मेरे बंदों (नौकरों), आज तुम्हारे लिए कोई खौफ नहीं और ना तुम्हें कोई गम लाहिक होगा 
+[43:70] दाखिल हो जाओ जन्नत में तुम और तुम्हारी बीवीयां, तुम्हें खुश कर दिया जाएगा" 
+[43:71] उनके आगे जल्द ही (सुनहरा) के थल (प्लेटर्स) और सागर गर्दिश कराएंगे और हर मन भाती और निगाहों को लज्जत देने वाली चीज वहां मौजूद होगी। उनसे कहा जाएगा, "तुम अब यहां हमेशा रहोगे 
+[43:72] तुम इस जन्नत के वारिस अपने उन अमल की वजह से हुए हो जो तुम दुनिया में करते रहे 
+[43:73] तुम्हारे लिए यहां बकसरत फ़वाके (प्रचुर मात्रा में फल) मौजूद हैं जिनमें तुम खाओगे" 
+[43:74] रहे मुजरिम, तो वो हमेशा जहन्नुम के अज़ाब में मुबतला रहेंगे 
+[43:75] कभी उनके अज़ाब में कमी न होगी, और वो हममें मयुस पैदा होंगे 
+[43:76] उन्पर हमने ज़ुल्म नहीं किया बलके वो खुद ही अपने ऊपर ज़ुल्म करते रहेंगे 
+[43:77] वाह पुकारेंगे, "ऐ मालिक, तेरा रब हमारा काम ही तमाम का दे तो अच्छा है" वो जवाब देगा "तुम यूं ही पड़े रहोगे 
+[43:78] हम तुम्हारे पास हक़ लेकर आए थे, मगर तुम में से अक्सर को हक़ ही नगावार था" 
+[43:79] लोगों ने क्या कहा इक़दाम (कथानक) करने का फ़ैसला कर लिया है? अच्छा तो हम भी फिर एक फैसला लेते हैं 
+[43:80] क्या इन्हों ने ये समझा रखा है कि हम इनकी राज की बातें और इनकी सरगोशियां सुनते नहीं हैं? हम सब कुछ सुन रहे हैं और हमारे फरिश्ते इनके पास ही लिख रहे हैं 
+[43:81] इनसे कहो, अगर वक्त रहमान की कोई औलाद होती तो सबसे पहले इबादत करने वाला मैं होता” 
+[43:82] पाक है आसमान और जमीन का फरमा, अर्श का मालिक, उन सारी बातों से जो ये लोग हमारी तरफ मंसूब करते हैं 
+[43:83] अच्छा, इन्हें अपनी बात ख़यालत में गर्क और अपने खेल में मुनाहमिक रहने दो, यहाँ तक के ये अपना वो दिन देख लें जिसका इन्हें खौफ़ दिलाया जा रहा है 
+[43:84] वही एक आसमान मैं भी खुदा है और ज़मीन में भी खुदा, और वही हकीम ओ अलीम है 
+[43:85] बहुत बाला-ओ-बरतर है वो जिसका क़ब्ज़ में ज़मीन और आसमान और हर उस चीज़ की बादशाही है जो ज़मीन ओ आसमान के दरमियान पाई जाती है। और वही कयामत की घड़ी का इल्म रखा है, और उसकी तरफ तुम सब पलटे जाने वाले हो
+[43:86] उसको छोड़ कर ये लोग जिन्हें पुकारते हैं वो किसी शफात का इख्तियार नहीं रखते, इल्ला ये के कोई इल्म की बिना पर हक की शहादत दे 
+[43:87] और अगर तुम इनसे पूछो के इन्हें किसने चुकाया है तो ये खुद कहेंगे के अल्लाह ने। फिर कहां से ये धोखा खा रहे हैं 
+[43:88] कसम है रसूल के इस क़ौल की ऐ रब, ये वो लोग हैं जो मान कर नहीं देते 
+[43:89] अच्छा, ऐ नबी इनसे दरगुज़र करो और कहदो के सलाम हैं तुम्हें, अनकरीब इन्हें मालूम हो जाएगा 
+
+सूरह 44: अद-दुखन (सूखा) 
+------------------------------------------------ 
+[44:1] हा मीम 
+[44:2] कसम है इस किताब ए मुबीन की 
+[44:3] के हमने इसे एक बड़ी खैर ओ बरकत वाली रात में नाज़िल किया है, क्योंकि हम लोगों को मुतनब्बह (चेतावनी) करने का इरादा रखते थे 
+[44:4] ये वो रात थी जिसमें हर मामले का हकीमना फैसला 
+[44:5] हमारे हुकुम से सादिर किया जाता है। हम एक रसूल भेजने वाले थे 
+[44:6] तेरे रब की रहमत के तौर पर। यकीनन वही सब कुछ सुनने और जाने वाला है 
+[44:7] आसमानो और ज़मीन का रब और हर उस चीज़ का रुब जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान है अगर तुम लोग वाक़ई यक़ीन रखो वाले हो 
+[44:8] कोई माबूद उसके सिवा नहीं है। वही जिंदगी अता करता है और वही मौत देता है।तुम्हारा रब और तुम्हारे उन असलाफ (पूर्वजों) का रब जो पहले गुजर चुके हैं 
+[44:9] (मगर फिल-वक़्हे इन लोगों को यकीन नहीं है) बल्के ये अपने शक्क में पड़े खेल रहे हैं 
+[44:10] अच्छा इंतजार करो उस दिन का जब आसमान सारे धुवां (धुआं) के लिए आएगा 
+[44:11] और वो लोगों पर छा जाएगा, ये है दर्दनाक सजा 
+[44:12] (अब कहते हैं के) "परवरदिगार, हमपर से ये अजब ताल दे, हम ईमान लाते हैं" 
+[44:13] इनकी गफ़लत कहाँ डर होती है? इनका हाल तो ये है के इन के पास रसूल ए मुबीन आ गया 
+[44:14] फिर भी ये उसकी तरफ मुल्ताफ़ित ना हुए और कहा के “ये तो सिखाया पड़ा बावला है” 
+[44:15] हम जरा अजब हटाये देते हैं, तुम लोग फिर वही कुछ करोगे जो पहले कर रहे थे 
+[44:16] जिस रोज़ हम बड़ी ज़र्ब (हमला) लगाएंगे वो दिन होगा जब हम तुमसे इंतिक़ाम लेंगे 
+[44:17] हम इनसे पहले फिरौन की क़ौम को इसी आज़माइश में डाल चुके हैं। उनके पास एक निहायत शरीफ़ रसूल आया 
+[44:18] और उसने कहा "अल्लाह के बंदों को मेरे हवाले करो, मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं 
+[44:19] अल्लाह के मुक़ाबले में सरकशी न करो। मैं तुम्हारे सामने (अपनी ममुरिअत की) सारी सनद (स्पष्ट अधिकार) पेश करता हूं 
+[44:20] और मैं अपना रुब और तुम्हारे रुब की पनाह ले चूका हूं इसके लिए तुम मुझपर हमला-आवार (हमला) हो 
+[44:21] अगर तुम मेरी बात नहीं मानते तो मुझपर हाथ डालने से बाज रहो”
+[44:22] आख़िर ए कार उसने अपने रब को पुकारा के ये लोग मुजरिम हैं 
+[44:23] (जवाब दिया गया) अच्छा तो रात-ओ-रात मेरे बंदों (नौकरों) को लेकर चल पढ़। तुम लोगों का पीछा किया जाएगा 
+[44:24] समंदर को उसके हाल पर खुला छोड़ दे। ये सारा लश्कर गर्क (डूबने) होने वाला है 
+[44:25] कितने ही बाग और चश्मे 
+[44:26] और खेत (बगीचे) और शानदार महल थे जो वो छोड़ गए 
+[44:27] कितने हाय ऐश के सर-ओ-समां, जिन में वो मजे कर रहे थे उनके पीछे धरे रह गए 
+[44:28] ये हुआ उनका अंजाम, और हमने दूसरों को इन चीज़ों का वारिस बना दिया 
+[44:29] फिर ना आसमां अनपर रोया ना ज़मीन, और ज़रा सी मोहलत भी उनको ना दी गई 
+[44:30] इस तरह बनी इसराइल को हमने ज़िल्लत के अज़ाब 
+[44:31] फ़िरौन से नजात दी जो हद से गुजर जाने वालों में फिल वक़्क़े बदे अनचे दर्जे का आदमी था 
+[44:32] और उनकी हालात जानते हैं, उनको दुनिया की पुरानी क़ौम पर तर्जीह दी 
+[44:33] और उन्हें ऐसी निशानियां दिखाई गईं जिनमें सारी आजमाइश थी 
+[44:34] ये लोग कहते हैं 
+[44:35] "हमारी पहली मौत के सिवा और कुछ नहीं उसके बाद हम दोबारा उठे जाने वाले नहीं हैं 
+[44:36] अगर तुम सच्चे हो तो उठ लाओ हमारे बाप दादा को" 
+[44:37] ये बेहतर है या तुब्बा की क़ौम और उसे पहले के लोग? हमने उनको इसी बिना पर तबाह किया के वो मुजरिम हो गए थे 
+[44:38] ये आसमान ओ ज़मीन और इनके दरमियान की चीजें हमने कुछ खेल के तौर पर नहीं बना दी है 
+[44:39] इनको हमने बार-हक़ अदा किया है, मगर अक्सर लोग जानते हैं 
+[44:40] सबके उठाए जाने के लिए थे-शुदा वक़्त फ़ैसले का दिन है 
+[44:41] वो दिन जब कोई अज़ीज़ क़रीब अपने किसी अज़ीज़ क़रीब के लिए कुछ भी काम नहीं आएगा। और न कहीं से उन्हें कोई मदद मांगेगी 
+[44:42] सिवाय इसके अल्लाह ही किसी पर रहम करे, वो ज़बरदस्त और रहीम है 
+[44:43] ज़ख़्म का दरख्त (पेड़) 
+[44:44] गुनहगार का खा-जा (खाना/भोजन) होगा 
+[44:45] पूंछ (तेल) की तिलझट (ड्रेग्स) जैसा, पैट (बेलीज़) में इस तरह जोश खाएगा 
+[44:46] जैसा खौलता (उबलता) हुआ पानी जोश खाता है 
+[44:47] पकाडो इसे और क्रोधित-ते (घसीटते हुए) हुए ले जाओ इसको जहन्नुम के बीचों बीच 
+[44:48] और उंधैल (डालो) दो इसके सर पर खुलते (उबलता हुआ) पानी का अज़ाब 
+[44:49] चक्ख इसका मजा, बड़ा जबरदस्त इज्जतदार आदमी है तू 
+[44:50] ये वही चीज है जिसके आने में तुमलोग शक्क रखते थे” 
+[44:51] खुदा तरस लोग अमन की जगह में होंगे 
+[44:52] बाघों (बगीचे) और चश्मे में 
+[44:53] हरीर-ओ-दीबा (रेशम और ब्रोकेड) के लिबास पहने, आमने सामने बैठे होंगे 
+[44:54] ये होगी इनकी शान और हम गोरी गोरी आह-ओ-चश्म औरतें उन्हें बियाह देंगे
+[44:55] वहां वो इत्मिनान से हर तरह की लज़ीज़ चीज़ तालाब करेंगे 
+[44:56] वहां मौत का मज़ा वो कभी ना छोड़ेंगे। बस दुनिया में जो मौत आ चुकी सो आ चुकी और अल्लाह अपने फज़ल से 
+[44:57] उनको जहन्नुम के अज़ाब से बच्चा देगा यही बड़ी कामयाबी है 
+[44:58] ऐ नबी (एसएएस) हमने इस किताब को तुम्हारी जुबान में सहल (आसान/आसान) बना दिया है ताके ये लोग हिदायत हासिल करें 
+[44:59] अब तुम भी इंतज़ार करो, ये भी मुंतज़िर (इंतज़ार कर रहे) हैं 
+
+सूरह 45: अल-जथियाह (घुटना टेकना) 
+------------------------------------------------ 
+[45:1] हा मीम 
+[45:2] क्या किताब का नुज़ुल अल्लाह की तरफ से है जो ज़बरदस्त और हकीम है 
+[45:3] हकीकत ये है के आसमां और ज़मीन में बेशुमार निशानियां हैं ईमान लाने वालों के लिए 
+[45:4] और तुम्हारी अपनी पैदाइश में, और उन हैवानत (जानवरों) में जिनको अल्लाह (जमीन में) फैला रहा है, बड़ी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो यकीन लाने वाले हैं 
+[45:5] और शब-ओ-रोज़ (रात और दिन) के फर्क ओ इख्तिलाफ में, और हम रिज्क में जैसे अल्लाह आसमान से नाज़िल फरमाता है फिर उसके ज़रिये से मुर्दा ज़मीन को जिला उठाता है, और हवाओं की गर्दिश में बहुत निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक़ल से काम लेते हैं 
+[45:6] ये अल्लाह की निशानियां हैं जिनमें हम तुम्हारे सामने ठीक ठीक बयान कर रहे हैं। अब आखिर अल्लाह और उसकी आयत के बाद और कौन सी बात है जिसपर ये लोग ईमान लाएंगे 
+[45:7] तबाही है हर हमारे झूठे बाद अमल शक्स के लिए 
+[45:8] जिसके सामने अल्लाह की आयतें पड़ी जाती हैं, और वह उनको सुनता है, फिर पूरे इस्तकबार के साथ अपने कुफ्र पर है एडीए रहता है गोया उसने उनको सुना ही नहीं। ऐसे शक्स को दर्दनक अज़ाब का मसला सुना दो 
+[45:9] हमारी आयत में से कोई बात जब उसके इल्म में आती है तो वो उनका मज़ाक बना लेता है। ऐसे सब लोगों के लिए ज़िल्लत का अज़ाब है 
+[45:10] उनके आगे जहन्नुम है। जो कुछ भी उन्हें दुनिया में कमाया है उसमें से कोई चीज उनके किसी काम ना आएगी। ना उनके वो सरपरस्त ही उनके लिए कुछ कर पाएंगे जिनमें अल्लाह को छोड़ कर उन्हें ने अपना वली बना रक्खा है। उनके लिए बड़ा अज़ाब है 
+[45:11] ये कुरान सरसर हिदायत है, और उन लोगों के लिए बला का दर्दनाक अज़ाब है जिन्हों ने अपने रब की आयत को मान-ने से इंकार किया 
+[45:12] वाह अल्लाह हाय तो है जिसने तुम्हारे लिए समंदर को मुसक्कर किया ता-के उसके हुकुम से कश्तियां उसमें चलें और तुम उसका फजल तलाश करो और शुक्र गुजार हो 
+[45:13] उसने जमीन और आसमान की सारी ही चीजों को तुम्हारे लिए मुस्कुरा कर दिया, सब कुछ अपने पास से। इसमें बड़ी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फिक्र करने वाले हैं
+[45:14] (ऐ नबी) ईमान लाने वालों से कहदो के जो लोग अल्लाह की तरफ से बुरे दिन आने का कोई अंदाज़ा नहीं रखते, उनकी हरकतों पर दरगुज़र से काम लें ता-के अल्लाह खुद एक गिरोह को उसकी कमाई का बदला दे 
+[45:15] जो कोई नेक अमल करेगा अपने ही लिए करेगा, और जो बुरा करेगा वो आप ही उसका खुम्याज़ा (परिणाम) भुगतेगा। फिर जाना तो सबको अपनी रुब ही की तरफ है 
+[45:16] इस पहले बानी इजराइल को हमने किताब और हुकुम और नबुवत अता की थी, उनको हमने उमड़ा समान ए ज़िस्त से नवाजा, दुनिया भर के लोगों पर उन्हें फजीलत अता की 
+[45:17] और दीन के मामले में उन्हें वाज़ेह हिदायत दे दी। फिर जो इख्तिलाफ़ उनके दरमियान रुनामा हुआ वो (नवाक़िफ़ियत की वजह से नहीं बलके) इल्म आ जाने के बाद हुआ और उस बिना पर हुआ के वो आपस में एक दूसरे पर ज़्यादा करना चाहते थे। अल्लाह कयामत के रोज़ उन मामलात का फैसला फरमादेगा जिनमें वो इख्तिलाफ करते रहेंगे 
+[45:18] इसके बाद ऐ नबी हमने तुमको दिन के मामले में एक साफ शाह-राह (शरीयत) पर कायम किया है। लिहाज़ा तुम उसी पर चलो और उन लोगों की ख्वाहिश का इत्तिबा न करो जो इल्म नहीं रखते 
+[45:19] अल्लाह के मुक़ाबले में वो तुम्हारे कुछ भी काम नहीं आ सकते। ज़ालिम लोग एक दूसरे के साथी हैं, और मुत्तक़ियों का साथी अल्लाह है 
+[45:20] ये बसीरत की रोशनी हैं सब लोगों के लिए और हिदायत और रहमत उन लोगों के लिए जो यकीन लायें 
+[45:21] क्या वो लोग जिन्होन ने बुराइयों का इर्तिक़ाब किया है ये समझे बैठे हैं के हम उन्हें और ईमान लाने वालों और नेक अमल करने वालों को एक जैसा कर देंगे के इनका जीना और मरना यक्सन हो जाए? बहुत बुरे हुकुम हैं जो ये लोग लगाते हैं 
+[45:22] अल्लाह ने तो आसमानो और ज़मीन को बरहक़्क अदा किया है और इसके लिए किया है कि हर मुतनफ़िस को उसकी कमाई का बदला दिया जाए। लोगों पर ज़ुल्म हरगिज़ ना किया जाएगा 
+[45:23] फिर क्या तुमने कभी उस शक्स के हाल पर भी गौर किया जिसने अपनी ख्वाहिश ए नफ़्स को अपना खुदा बना लिया और अल्लाह ने इल्म के बावज़ूद उसे गुमराही में फेंक दिया और उसके दिल और कानो (कान) पर मोहर लगा दी और उसकी आँखों पर पर्दा डाल दिया? अल्लाह के बाद अब कौन है जो उसे हिदायत दे? क्या तुम लोग कोई सबक नहीं लेते 
+[45:24] ये लोग कहते हैं कि "जिंदगी बस यहीं हमारी दुनिया की जिंदगी है, यहीं हमारा मरना और जीना है और गर्दिश-ए-अय्याम (समय बीतना) के सिवा कोई चीज नहीं हो हमें हलाक करती हो।" दर हकीकत इस मामले में इनके पास कोई इल्म नहीं है ये महज़ गुमान की बिना पर ये बातें करते हैं 
+[45:25] और जब हमारी वजह आयत उन्हें सुनाई जाती है तो इनके पास कोई हुज्जत इसके सिवा नहीं होती के उठ लाओ हमारे बाप दादा को अगर तुम सच्चे हो 
+[45:26] ऐ नबी इनसे कहो अल्लाह हाय तुम्हें जिंदगी बक्शता है, फिर वही तुम्हें मौत देता है, फिर वही तुमको उस कयामत के दिन जमा करेगा जिसके आने में कोई शक्क नहीं। मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं
+[45:27] ज़मीन और आसमानों की बादशाही अल्लाह ही की है, और जिस रोज़ क़यामत की घड़ी आ खड़ी होगी उस दिन बातिल परस्त खसारे (नुक्सान) में पढ़ जायेंगे 
+[45:28] हमारा वक्त तुम हर गिरू को घुटनो (घुटनों) के बल गिरा देखोगे। हर गिरोह को पुकारा जायेगा के आये और अपना नाम अमल देखे। उनसे कहा जाएगा: "आज तुम लोगों को उन अमल का बदला दिया जाएगा जो तुम करते रहे थे 
+[45:29] ये हमारा तैयार किया हुआ अमल नामा है जो तुम्हारे ऊपर ठीक ठीक शहादत दे रहा है, जो कुछ भी तुम करते थे उसे हम लिखवाते जा रहे थे" 
+[45:30] फिर जो लोग ईमान लाए थे और नेक अमल करते रहे थे उनको रब्ब अपनी रहमत में दखल करेगा। और यही सारी कामयाबियां हैं 
+[45:31] और जिन लोगों ने कुफ्र किया था उनसे कहा जाएगा "क्या मेरी आयत तुमको नहीं सुनती जाती थी? मगर तुमने तकब्बुर किया और मुजरिम बनकर रहे 
+[45:32] और जब कहा जाता था कि अल्लाह का वादा बार- हक़ है और कयामत के आने में कोई शक्क नहीं, तो तुम कहते थे के हम नहीं जानते कयामत क्या होती है, हम तो बस एक गुमान सा रखते हैं, यकीन हम को नहीं है” 
+[45:33] हमारा वक्त उनके अमल की बुराइयां खुल जाएंगी और वो उसी चीज के फेर में आ जाएंगी जिसका वो मज़ाक उड़ाया करते थे 
+[45:34] और इनसे कहा जाएगा के "आज हम भी उसी तरह तुम्हें भुला देते हैं, जिस तरह तुम इस दिन की मुलाकात को भूल गए थे। तुम्हारा ठिकाना अब दोज़ख़ है और कोई तुम्हारी मदद करने वाला नहीं है 
+[45:35] ये तुम्हारा अंजाम इस लिए हुआ है कि तुमने अल्लाह की आयत बना लिया था और तुमने दुनिया की जिंदगी में धोखे में डाल दिया था, आज ना ये लोग दोज़ख से निकल जाएंगे और ना इनसे कहा जाएगा माफ़ी मांग कर अपने रब को राजी करो” 
+[45:36] पास तारीफ अल्लाह ही के लिए है जो जमीन और आसमानों का मालिक और सारे जहां वालों का परवरदिगार है 
+[45:37] जमीन और आसमान में बदाई उसके लिए है और वही जबरदस्त (सबसे ताकतवर) और दाना (सबसे बुद्धिमान) है 
+
+सूरह 46: अल-अहकाफ (द) सैंडहिल्स) 
+------------------------------------------------ 
+[46:1] हा मीम 
+[46:2] इस किताब का नुज़ुल अल्लाह ज़बरदस्त और दाना की तरफ से है 
+[46:3] हमने ज़मीन और आसमान को और उन सारी चीज़ों को जो उनके दरमियान हैं बार-हक़्क़ और एक मुद्दत ए ख़ास के तायूँ के साथ अदा किया है। मगर ये काफ़िर लोग हमें हकीकत से मुंह मोड़े हुए हैं जिन्होंने उनको खबरदार किया है 
+[46:4] ऐ नबी, इनसे कहो, "कभी तुमने आंखें खोल कर देखा भी के वो हस्तियां हैं क्या जिन्हे तुम खुदा को छोड़ कर पुकारते हो? ज़रा मुझे दिखाओ तो सही के" ज़मीन में उनको ने क्या पेदा किया है, या आसमान की तख़लीक़ ओ तदबीर में उनका क्या हिसा है।
+[46:5] आखिर उस शक्स से ज्यादा बहका हुआ इंसान और कौन होगा जो अल्लाह को छोड़ कर उनको पुकारे जो कयामत तक उसे जवाब नहीं दे सके, बलके इसे भी बेखबर हैं के पुकारने वाले उनको पुकार रहे हैं 
+[46:6] और जब तमाम इंसान जमा किए जाएंगे हमें वक्त वो अपने पुकारने वालों के दुश्मन और उनकी इबादत के मुनकिर होंगे 
+[46:7] इन लोगों को जब हमारी साफ आयतें सुनाई जाती हैं और हक इनके सामने आ जाता है तो ये काफिर लोग उसके मुतालिक कहते हैं के ये तो खुला जादू है 
+[46:8] क्या उनका कहना ये है के रसूल ने इसे खुद गढ़ लिया है? इनसे कहो " अगर मैंने इसे खुद गढ़ लिया है तो तुम मुझे खुदा की पकड़ से कुछ भी न बचा पाओगे। जो बातें तुम बनाते हो अल्लाह उनको खूब जानता है, मेरे और तुम्हारे दरमियान वही गवाही देने के लिए काफी है, और वह बड़ा दरगुजर करने वाला है और रहीम है” 
+[46:9] इनसे कहो “मैं कोई निराला रसूल तो नहीं हूं, मैं नहीं जानता कि कल तुम्हारे साथ क्या होना है और मेरे साथ क्या। कुछ नहीं हूं" 
+[46:10] ऐ नबी, इनसे कहो "कभी तुमने सोचा भी के अगर ये कलाम अल्लाह ही की तरफ से हुआ और तुम ने इसका इंकार कर दिया (तो तुम्हारा क्या अंजाम होगा)?और इस जैसा एक कलाम पर तो बानी इजराइल का एक गवाह शहादत भी दे चुका है। वो ईमान ले आया और तुम अपने घमंड में पड़े रहोगे। ऐसे ज़ालिमों को अल्लाह हिदायत नहीं दिया करता” 
+[46:11] जिन लोगों ने मान-ने से इंकार कर दिया है वो ईमान लाने वालों के मुतालिक कहते हैं “के अगर इस किताब को मान लेना कोई अच्छा काम होता तो ये लोग इस मामले में हमसे हैं सबकात न लेजा सक्ते”। चुनके इन्हों ने उसे हिदायत न पाई, अब ये जरूर कहेंगे के ये तो पुराना झूठ है 
+[46:12] हलांके इसे पहले मूसा की किताब रहनुमा और रहमत बनकर आ चुकी है, और ये किताब उसकी तस्दीक करने वाली जुबान-ए-अरबी में आई है ताके ज़ालिमों को मुतनब्बे (चेतावनी) करदे और नीक रवीश इख्तियार करने वालों को बशारत दे दे 
+[46:13] यकीनन जिन लोगों ने केहदिया के अल्लाह ही हमारा रब है, फिर हम पर जम गए, उनके लिए ना कोई खौफ है और ना वो गमगीन होंगे 
+[46:14] ऐसे सब लोग जन्नत में जाने वाले हैं। जहां वो हमेशा रहेंगे अपने उन अमल के बदले जो वो दुनिया में करते रहेंगे
+[46:15] हमने इंसान को हिदायत की कि वो अपने वालिदाओं के साथ नई बात करें। उसकी माँ ने मुशक्कत उठा कर उसे पैत में रक्खा और मुशक्कत उठा कर ही उसको जाना। और उसके हमाल और दूध छुड़ाने में तीस (तीस) महीने लग गए। यहां तक ​​के जब वो अपनी पूरी ताक़त को पाहुंचा और चालीस (चालीस) साल का हो गया तो उसने कहा “ऐ मेरे रब मुझे तौफ़ीक़ दे के मैं तेरी उन नियामतों का शुक्र अदा करूं जो तू ने मुझे और मेरे वालिदैं को अता फैमई, और ऐसा नीक अमल करूं जिस से तू राजी हो, और मेरी औलाद को भी नेक बना कर मुझे सुख दे, मैं तेरे हुजूर तौबा करता हूं और ताबे फरमान (मुस्लिम) बंदों में से हूं” 
+[46:16] इस तरह के लोगों से हम उनके बहतरीन अमल को कबूल करते हैं और उनकी बुराइयों से दरगुजर कर जाते हैं हैन. ये जन्नती लोगों में शामिल होंगे हमें सच्चे वादे के मुताबिक जो इनसे क्या जानता है 
+[46:17] और जिस शक्स ने अपने वाल्डेन से कहा "उफ्फ, तंग कर दिया तुमने" क्या तुम मुझे ये खौफ फैलाते हो के मैं मरने के बाद फिर से काबर से निकल जाऊंगा मुझ से पहले बहुत सी नसलें (पीढ़ियां) गुजर चुकी हैं (उनमें से कोई उठ कर न आया)'' मां और बाप अल्लाह की दुहाई देकर कहते हैं '' अरे बदनसीब, मान जा, अल्लाह का वादा सच्चा है'' मगर वो कहता है '' ये सब अगले वक्त की फरसुदा (कथाएं) कहानियाँ हैं" 
+[46:18] ये वो लोग हैं जिनपर अज़ाब का फैसला चस्पां हो चूका है। इनसे पहले जिन्नो और इंसानों के जो तोले (समुदाय) (इसी क़ौम के) हो गुज़रे हैं उनमें ये भी जा शामिल होंगे। बेशक ये घाटे (नुकसान) में रह जाने वाले लोग हैं 
+[46:19] दोनों गिरोहोन में से हर एक के दर्जे उनके अमल के लिहाज़ से हैं ता-के अल्लाह उनके किए का पूरा पूरा बदला उनको दे। उनपर जुल्म हरगिज़ न किया जाए 
+[46:20] फिर जब ये काफिर आग के सामने ला खड़े किए जाएंगे तो उनसे कहा जाएगा: "तुम अपने हिसाब की नियम अपनी दुनिया की जिंदगी में ख़तम कर चुके और उनका लुत्फ तुमने उठा लिया, अब जो तकब्बुर तुम ज़मीन में किसी हक़ के बिना करते रहो और जो नफ़रमानियाँ तुमने कि उनके पद में आज तुमको ज़िल्लत का अज़ाब दिया जाएगा” 
+[46:21] ज़रा इन्हें आद के भाई (हुद) का किस्सा सुनाओ जबके उसने अहकाफ में अपनी कौम को खबरदार बनाया था और ऐसे खबरदार करने वाले उसे पहले भी गुजर चुके थे और उसके बाद भी आते रहे के "अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी ना करो, मुझे तुम्हारे हक में एक बदाई" हौलनाक दिन के अज़ाब का अंदेशा है” 
+[46:22] उनहों ने कहा “क्या तू इसलिए आया है के हमें बेहका कर हमारे मबूदों से बरगश्ता कर दे? अच्छा तो ले आ अपना वो अजब जिसे तू हमें डराता है अगर वक्त तू सच्चा है” 
+[46:23] उसने कहा के “इसका इल्म तो अल्लाह को है, मैं सिर्फ वो पैग़ाम तुम्हें पहन रहा हूं जिसे देकर मुझे भेजा गया है। मगर मैं देख रहा हूँ के तुमलोग जहालत बरात रहे हो”
+[46:24] फिर जब उनहों ने हमें अज़ाब को अपनी वादियों (घाटियों) की तरफ आते देखा तो कहने लगे "ये बादल है जो हमको सैराब कर देगा"। बलके ये वही चीज़ है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थे, ये हवा का तूफान है जिसमें दर्दनक अज़ाब चला आ रहा है 
+[46:25] अपने रब के हुकुम से हर चीज को तबाह कर डालेगा"। आखिर ई कार उनका हाल ये हुआ के उनके रहने के जघोन के सिवा वहां कुछ नजर ना आता था। इस तरह हम मुजरिमों को बदला दिया करते हैं 
+[46:26] उनको हमने वो कुछ दिया था जो तुम लोगों को नहीं दिया है, आंखें और दिल सब कुछ दे रखे थे, मगर ना वो कौन है। आँखें, ना दिल, क्योंकि वो अल्लाह की आयत का इन्कार करते थे, और उसी चीज़ के फिर में वो आ गए जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे 
+[46:27] तुम्हारे घेरे ओ पेश के इलाक़ों में बहुत से बस्तियों को हम परेशान कर चुके हैं। हमने अपनी आयत भेज कर बार-बार तरह तरह से उनको समझा, शायद के वो बाज़ आ जाएं 
+[46:28] फिर क्यों ना उन हस्तियों ने उनकी मदद की जिनमें अल्लाह को छोड़ कर उन्होन ने तकरारब-ए-इलल्लाह का ज़रिया समझे हुए मबूद बना लिया था? बल्के वो तो उनसे खोए गए। मैं और ये था उनके झूठ और उन बनावती अकीदों का अंजाम जो उन्होन ने घड रक्खे थे 
+[46:29] (और वो वाकिया भी काबिल ए जिक्र है) जब हम जिन्नो के एक गिरूह को तुम्हारी तरफ ले आए थे ता-के कुरान सुने। जब वो हमें जगह पाहुंचे (जहां तुम कुरान पढ़ रहे थे) तो उनको ने आपस में कहा खामोश हो जाओ, फिर जब वो पढ़ा जा चुका तो वो खबरदार करने वाले बन कर अपनी क़ौम की तरफ पलटे(लौटा) 
+[46:30] उनहोन ने जा कर कहा "ऐ हमारी" कौम के लोग, हमने एक किताब सुनी है जो मूसा के बाद नाज़िल की गई है, तस्दीक (पुष्टि करें) करने वाली है अपने से पहले आई हुई किताबों की, रहनुमाई करती है हक़ और राह-ए-रास्त की तरफ 
+[46:31] ऐ हमारी क़ौम के लोगों, अल्लाह की तरफ बुलाने वाले की दावत क़बूल करलो और इसपर ईमान ले आओ, अल्लाह तुम्हारे गुनाहों से दरगुज़र पैदा करेगा और तुम्हें अज़ाब ए आलिम से बचाएगा 
+। हमी-ओ-सरपरस्त (रक्षक) हैं के अल्लाह से उसको बचा लें। ऐसे लोग खुली गुमराही में पड़े हुए हैं 
+[46:33] और क्या इन लोगों को ये समझाई नहीं देता के जिस खुदा ने ये ज़मीन और आसमां पैदा किया है और इनको बनाते हुए जो ना थका, वो जरूर इसपर कादिर है के मुर्दों (मृत) को जिला उठे? क्यों नहीं, यक़ीनन वो हर चीज़ की क़ुदरत रखता है 
+[46:34] जिस रोज़ ये काफिर आग के सामने लाये जायेंगे, हमें वक़्त उनसे पूछा जायेगा "क्या ये हक़ नहीं है?" ये कहेंगे " हां, हमारे रब की कसम (ये वाकाई हक़ है)" अल्लाह फरमायेगा " अच्छा तो अब अज़ाब का मजा चक्खो अपने हमें इंकार की याद में जो तुम करते रहे थे"
+[46:35] पस ऐ नबी, सब्र करो जिस तरह से उलूल अज्म (दृढ़ इच्छाशक्ति) रसूलों ने सब्र किया है, और इनके मामले में जल्दी ना करो। जिस रोज़ ये लोग हमें चीज़ को देख लेंगे जिसका इन्हें ख़ौफ़ दिलाया जा रहा है तो इन्हें यूं मालूं होगा के जैसे दुनिया में दिन की एक घड़ी भर से ज्यादा नहीं रह रहे थे। बात पहुंचा दी गई, अब क्या नफरमान लोगों के सिवा और कोई हलक होगा 
+
+सूरह 47: मुहम्मद (मुहम्मद) 
+------------------------------------------------ 
+[47:1] जिन लोगों ने कुफ्र किया और अल्लाह के रास्ते से रोका अल्लाह ने उनके अमल को बर्बाद (व्यर्थ) कर दिया 
+[47:2] और जो लोग ईमान लाए और जिन्होन ने नेक अमल किये और उस चीज़ को मान लिया जो मुहम्मद पर नाज़िल हुई है और है वो सरसर हक़ उनके रब की तरफ से अल्लाह ने उनकी बुराइयाँ (बुरे काम) उनसे दूर करदी और उनका हाल दुरुस्त करदिया 
+[47:3] ये इस लिए के कुफ्र करने वालों ने बातिल (झूठ) की जोड़ी बनाई है और ईमान लेन वालों ने हमें हक की जोड़ी दी है जो उनके रब की तरफ से आया है। इस तरह अल्लाह लोगों को उनकी ठीक-ठीक हकीकत बता देता है 
+[47:4] जब काफिरों से तुम्हारी मुठ-भैद (लड़ाई) हो तो पहला काम गर्दनें (गर्दन) मारना है, यहां तक ​​के जब तुम उनको अच्छी तरह से कुचल दो तब कैदियों (बंदियों) को मजबूत बांधो। इसके बाद (तुम्हें इख्तियार है) एहसान करो या फ़िदिये (फिरौती) का मुआमला करलो, ता-आंके लड़ायी अपनी हत्या डाल दे। ये है तुम्हारे करने का काम. अल्लाह चाहता है तो खुद ही उनसे निमत लेता है, मगर (ये तारीख़ा हमें ने इसके लिए इख्तियार किया है) ता-के तुम लोगों को एक दूसरे के ज़रीए से आज़माए और जो लोग अल्लाह की राह में मारे जाएंगे अल्लाह उनके अमल को हरगिज़ ज़या ना करेगा 
+[47:5] वो उनकी रहनुमाई फरमायेगा, उनका हाल दुरुस्त कर देगा 
+[47:6] और उनको हम जन्नत में दाख़िल करेगा जिसने उन्हें वाकिफ़ करा चुका है 
+[47:7] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम अल्लाह की मदद करोगे तो वो तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हारा क़दम मज़बूत जमा देगा 
+[47:8] रहे वो लोग जिन्हों ने कुफ्र किया है, तो उनके लिए हलाकत है और अल्लाह ने उनके आमाल को भटका दिया है 
+[47:9] क्योंकि उन्होन ने हमें चीज को नापसंद किया है जैसे अल्लाह ने नाज़िल किया है, लिहाजा अल्लाह ने उनके आमाल को बर्बाद कर दिया है 
+[47:10] क्या वो जमीन में चले फिर ना थे के उन लोगों का अंजाम देखते हैं जो उनसे पहले गुजर चुके हैं? अल्लाह ने उनका सब कुछ उलट दिया, और काफिरों के लिए मुकद्दर में ऐसी ही नटाईज है 
+[47:11] ये है उनके लिए ईमान लाने वालों का हमी ओ नासिर (रक्षक) अल्लाह है और काफिरों का हमी ओ नासिर (रक्षक) कोई नहीं 
+[47:12] ईमान लाने वालों और नीक अमल करने वालों को अल्लाह उन जन्नतों में दाख़िल करेगा जिनके बारे में नीचे बताया गया है, और कुफ्र करने वाले बस दुनिया की चंद रोजा जिंदगी के मजे लूट रहे हैं, जानवरों की तरह खा पी रहे हैं, और उनका आखिरी ठिकाना जहन्नुम है
+[47:13] ऐ नबी (एसएएस) कितनी ही बस्तियां ऐसी गुजर चुकी हैं जो तुम्हारे उस बस्ती से बहुत ज्यादा जोरावर थी जिसने तुम्हें निकल दिया है? उन्हें हमने इस तरह हलक करदिया के कोई उनका बचाने वाला ना था 
+[47:14] भला कहीं ऐसा हो सकता है कि जो अपने रब की तरफ से एक साफ ओ सारी हिदायत पर हो, वो उन लोगों की तरह हो जाए जिनके लिए उनका बुरा अमल खुशनुमा बना दिया गया है और वो अपनी ख़्वाहिशात के जोड़े बन गए हैं 
+[47:15] परवाह-ऑन के लिए जिस जन्नत का वादा किया गया है उसकी शान तो ये है के उसमें नेह्रेइन बेह राही होंगी निथरे (अक्षम/अप्रदूषित) हुए पानी की, नेह्रेन बेह राही होंगी ऐसे दूध की जिसकी मजा (स्वाद) में जरा फर्क ना आया होगा, नहरें बेह राही होंगी ऐसी शराब की जो पीने वालों के लिए लजीज (स्वादिष्ट) होंगी, नहरें बह रही होंगी साफ शफाफ शेहद (शहद) की। उसमें उनके लिए हर तरह के फल होंगे और उनके रब की तरफ से बख्शीश। (क्या वो शक्स जिसके हिस्से में ये जन्नत आने वाली है) उन लोगों की तरह हो सकता है जो जहन्नम में हमेशा रहेंगे और जिनमें ऐसा गरम (गर्म) पानी पिलाया जाएगा जो उनके आंतें (आंत) तक काट देगा 
+[47:16] उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो कान लगा कर तुम्हारी बात सुनते हैं और फिर जब तुम्हारे पास से निकलते हैं उन लोगों से जिन्हें इल्म की नियामत बक्शी गई है पूछते हैं के अभी अभी इन्होन ने क्या कहा था?ये वो लोग हैं जिनके दिलों पर अल्लाह ने थप्पड़ (सील) लगा दिया है और ये अपनी अपनी ख्वाहिश के जोड़े बने हुए हैं है 
+[47:17] रहे वो लोग जिन्होन ने हिदायत पाई है, अल्लाह उनको और ज्यादा हिदायत देता है और उनको हिससे का तकवा अता फरमाता है 
+[47:18] अब क्या ये लोग बस कयामत ही के मुंतजिर हैं के वो अचानक अंदर आ जाए? उसकी अलामत तो आ चुकी है जब वो खुद आ जाएगी तो इनके लिए हिदायत कबूल करने का कौनसा मौका बाकी रह जाएगा 
+[47:19] पस ऐ नबी, खूब जान लो के अल्लाह के सिवा कोई इबादत का मुस्तहिक नहीं है, और माफ़ी मांगो अपने कसूर के लिए भी और मोमिन मर्दन और औरतों के लिए भी। अल्लाह तुम्हारी सरगर्मियों को भी जानता है और तुम्हारे ठिकाने से भी वाकिफ है 
+[47:20] जो लोग ईमान लाए हैं वो कह रहे थे कि कोई सूरत क्यों नहीं नाज़िल की जाती (जिस में जंग का हुकुम दिया जाए) मगर जब एक मोहकम सूरत नाज़िल हो गई जिसमें जंग का जिक्र था तो तुमने देखा के जिनके दिलों में बीमारी थी वो तुम्हारी तरफ इस तरह देख रहे हैं जैसे किसी पर मौत छा गई हो। अफ़सोस उनके हाल पर 
+[47:21] (उनकी ज़ुबान पर है) इत्ता का इकरार और अच्छी अच्छी बातें। मगर जब कतई हुकुम दे दिया गया हमें वक्त वो अल्लाह से अपने अहद में सच्चे निकलते तो उनके लिए अच्छा था 
+[47:22] अब क्या तुम लोगों से इसके सिवा कुछ और तवक्कु की जा सकती है के अगर तुम उल्टे मुंह फिर गए तो जमीन में फिर फसाद बरपा करोगे और आपस में एक दूसरे के गले कटोगे
+[47:23] ये लोग हैं जिनपर अल्लाह ने लानत की और इनको अंधा (अंधा) और बेहरा बना दिया 
+[47:24] क्या उन लोगों ने कुरान पर गौर नहीं किया, या दिलों पर उनके कुफल (ताले) चढ़े हैं 
+[47:25] हकीकत ये है के जो लोग हिदायत वाजे हो जाने के बाद उसे फिर से गए उनके लिए शैतान ने इस रवीश को सहल बना दिया है और झूठी तवाक्कत का सिलसिला उनके लिए दराज़ कर रक्खा है 
+[47:26] क्या उनके लिए अल्लाह के नाज़िल करदा दीन को नापसंद करने वालों से केहदिया के बाज़ मामलात में हम तुम्हारी मानेंगे।अल्लाह उनकी ये खुफिया बातें खूब जानता है 
+[47:27] फिर हमें वक्त क्या हाल होगा जब फरिश्ते इनकी रूहें क़ब्ज़ करेंगी और इनके मुंह और पीठ पर मरते हुए इन्हें ले जाएंगे 
+[47:28] ये इसी के लिए तो होगा के इन्होनें हमें तारीख़ की जोड़ी की जो अल्लाह को नाराज़ करने वाला है और हमें रज़ा का रास्ता इख्तियार करना पसंद नहीं है। इसी बिना पर उसने इनके सब आमाल जया कर दिए 
+[47:29] क्या वो लोग जिनके दिलों में बीमार है ये समझे बैठे हैं के अल्लाह उनके दिलों के खोट (कीना) जाहिर नहीं करेगा 
+[47:30] हम चाहें तो उन्हें तुमको आंखों से दिखा दें और उनके चेहरों से तुम उनको पहचान लो मगर उनके अंदाज़ ए कलाम से तो तुम उनको जान ही लोगे। अल्लाह तुम सब के अमल से ख़ूब वाकिफ़ है 
+[47:31] हम ज़रूर तुम लोगों को आज़माइश में डालेंगे ताकि तुम्हारे हालात की जाँच करें और देख लें के तुम में मुजाहिद और साबित क़दम कौन हैं 
+[47:32] जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह की राह से रोका और रसूल से झगड़ा किया जबके अनपर राह ए रास्ता वज़ेह हो चुकी थी, दर हकीकत वो अल्लाह का कोई नुक्सान भी नहीं कर सकता, बल्कि अल्लाह ही उनका सब किया करा देगा। 
+[47:33] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम अल्लाह की इबादत करो और रसूल की इबादत करो और अपने अमल को बरबाद ना करो 
+[47:34] कुफ्र करने वालों और राह ए खुदा से रुकने वालों और मरते दम तक कुफ्र पर जमे रहने वालों को तो अल्लाह हरगिज माफ ना करेगा 
+[47:35] पस तुम बोदेह (बेहोश दिल) ना बनो और सुलह की अंधेरा ना करो। तुम ही ग़ालिब रहने वाले हो. अल्लाह तुम्हारे साथ है और तुम्हारे अमल को वो हरगिज जया ना करेगा 
+[47:36] ये दुनिया की जिंदगी तो एक खेल और तमाशा है अगर तुम ईमान रखोगे और तकवे की रवीश पर चलते रहो अल्लाह तुम्हारे अजर तुमको देगा और वो तुम्हारे माल तुमसे ना मांगे गा 
+[47:37] अगर कहीं वो तुम्हारे माल तुमसे मांग ले और सब के सब तुमसे तालाब करले तो तुम भूखल (कंजूसी / कंजूसी / कंजूस) करोगे और वह तुम्हारे खोट (असफलता) उबर लाएगा
+[47:38] देखो, तुम लोगों को दावत दी जा रही है कि अल्लाह की राह में माल खर्च करो इसपर तुम में से कुछ लोग हैं जो कंजूसी कर रहे हैं। हलाँके जो बुख़ल (कठिनाई) करता है वो डर हकीकत अपने आप ही से बुख़ाल कर रहा है। अल्लाह तो गनी (सर्व-पर्याप्त) है, तुम्हीं उसके मोहताज हो। अगर तुम अल्लाह से मुहं जोड़ोगे, तुम्हारी जगह किसी और कौम को ले आएगी और वो तुम जैसे ना होंगे 
+
+सूरह 48: अल-फतह (विजय) 
+------------------------------------------------ 
+[48:1] ऐ नबी, हमने तुमको खुली फतह अता करदी 
+[48:2] ता-के अल्लाह तुम्हारी अगली पिचली हर कोटाही से दरगुर्जर फरमाये, और तुम अपनी नियामत की तकमील (पूरी) करदे, और तुम्हें सीधा रास्ता दिखाये 
+[48:3] और तुमको जबरदस्त नुसरत बख्शे 
+[48:4] वही है जिसने मोमिनो के दिलों में सकीनत ((शांति) नाज़िल फरमायी ता-के अपने ईमान के साथ वो एक ईमान और बड़ा लें. ज़मीन और आसमान के सब लश्कर अल्लाह के कब्ज़ा-ए-क़ुदरत में हैं, और वो आलिम ओ हकीम है 
+[48:5] (उसने ये काम किया है) ता-के मोमिन मर्दन और औरतों को हमेशा रहने के लिए ऐसी जन्नत में दाख़िल फरमाये जिनके नीचे नहरेन बेह राही होंगी और उनकी बुराइयां उनसे दूर करदे। अल्लाह के नाज़दीक ये बदी कमियाबी है 
+[48:6] और उन मुनाफिक मर्दों और औरतों और मुशरिक मर्दों और औरतों को सज़ा दे जो अल्लाह के मुतालिक बुरे गुमान रखते हैं। बुरेई के फेर में वो खुद ही आ गए हैं, अल्लाह का गजब असमान हुआ और उसने असमान लानत की और उनके लिए जहन्नुम मुहैय्या करदी जो बहुत ही बुरा ठिकाना है 
+[48:7] जमीन और आसमानों के लश्कर अल्लाह ही के क़ब्ज़ा-ए-क़ुदरत में हैं और वह ज़बरदस्त और हकीम (बुद्धिमान) है 
+[48:8] ऐ नबी हममें तुमको शहादत (गवाह) देने वाला बशारत (खुशखबरी) देने वाला और खबरदार कार्डने वाला बना कर भेजा है 
+[48:9] ता-के ऐ लोगों, तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और उसका साथ दो, उसकी ताज़िम-ओ-तौकीर (उसका समर्थन करो, और सम्मान करो) करो और सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते रहो 
+[48:10] ऐ नबी, जो लोग तुमसे बैत कर रहे थे। उनके हाथ पर अल्लाह का हाथ था. अब जो इस अहद को तोड़ेगा उसकी अहद शिकनी का वबल उसकी अपनी ही जात पर होगा, और जो हमें अहद को वफा करेगा जो उसने अल्लाह से किया है, अल्लाह अंककारिब उसको बड़ा अजर अता फरमाएगा 
+[48:11] ऐ नबी, बदवी (बेडौंस) अरब में से जो लोग पिचे छोड़ दिए गए थे अब वो आ कर जरूर तुमसे कहेंगे के हमें अपने अमवाल और बाल बच्चों की फिक्र ने मशगुल कर रक्खा था. आप हमारे लिए मगफिरत की दुआ फ़मायें। ये लोग अपनी जुबान से वो बातें कहते हैं जो उनके दिलों में नहीं होती। उनसे कहना "अच्छा, यही बात है तो कौन तुम्हारे मामले में अल्लाह के फैसले को रोक दे का कुछ भी इख्तियार रखता है अगर वो तुम्हें कोई नुक्सान पहचानना चाहिए या नफा बक्शना चाहिए? तुम्हारे अमल से तो अल्लाह ही बा-खबर है
+[48:12] (मगर असल बात वो नहीं है जो तुम कह रहे हो) बलके तुमने यूं समझा के रसूल और मोमिनीन अपने घर वालों में हरगिज पलट कर ना आ सकेंगे और ये ख्याल तुम्हारे दिलों को बहुत अच्छा लगेगा। और तुमने बहुत बुरे गुमान किये और तुम बहुत बुरे बातें (बेहद बुरे) लोग हो” 
+[48:13] अल्लाह और उसके रसूल पर जो लोग ईमान न रखते हों ऐसे काफिरों के लिए हमने नफरत आग मुहैय्या कर रखी है 
+[48:14] आसमानो और ज़मीन की बादशाही का मालिक अल्लाह हाय है। जिसे चाहे माफ करे और जिसे चाहे सजा दे। और वो गफूर ओ रहीम है 
+[48:15] जब तुम माल-ए-गनीमत हासिल करने के लिए जाओगे तो ये पीछे छोड़े जाने वाले लोग तुमसे जरूर कहेंगे के ये चाहते हैं के अल्लाह के फरमान को बदल दें। इनसे साफ कह देना के "तुम हरगिज हमारे साथ नहीं चल सकते। अल्लाह पहले ही ये फरमा चुका है" ये कहेंगे के "नहीं, बलके तुमलोग हमसे हसद कर रहे हो" (हलांके बात हसद की नहीं है) बल्के ये लोग सही बात को कम ही समझते हैं 
+[48:16] पिचे छोड़े जाने वाले बादवी (बेडौइन) अरब से कहना के "अंकरीब तुम्हें ऐसे लोगों से लड़ने के लिए बुलाया जाएगा जो बड़े जोरावर हैं। तुमको उनसे जंग करनी होगी या वो मुती (समर्पण) हो जाएंगे।" हमें वक्त है अगर तुमने हुकुम ए जिहाद की इताअत की तो अल्लाह तुम्हें अच्छा अजर देगा। और अगर तुम फिर उसी तरह मुंह मोड़ गए जिस तरह पहले मोड़ चुके हो तो अल्लाह तुम्हें दर्दनक सजा देगा 
+[48:17] अगर अंधा और लंगड़ा और मरिज जिहाद के लिए ना आए तो कोई हराज नहीं। जो कोई अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करेगा अल्लाह उसे उन जन्नतों में दाख़िल करेगा जिनके बारे में पहले से पता नहीं होगा, और जो मुँह फेरेगा उसे वो दर्दनक अज़ाब देगा” 
+[48:18] अल्लाह मोमिनो से ख़ुश हो गया जब वो दरख्त के आला तुमसे बैत (वफ़ादारी की कसम) कर रहे थे। उनके दिलों का हाल उसको मालूम था। इस लिए उसने उन्पर सकीनात (आंतरिक शांति) नाज़िल फरमाई, उनको इनाम में करीबी फतह बख्शी 
+[48:19] और बहुत सा माल-ए-गनीमत उन्हें अता कर दिया वो (अंकारीब) हासिल करेंगे हकीम (बुद्धिमान) है 
+[48:20] अल्लाह तुमसे ब-कसरत अमल-ए-गनीमत का वादा करता है जिन्हें तुम हासिल करोगे। फौरी तौर पर तो ये फतह उसने तुम्हें अता करदी और लोगों के हाथ तुम्हारे खिलाफ उथने से रोक दिए, ता-के ये मोमिनो के लिए एक निशानी बन जाए और अल्लाह सीधे रास्ते की तरफ तुम्हें हिदायत बख्शे 
+[48:21] इसके अलावा दूसरे और गनीमतों का भी वो तुमसे वादा करता है जिनपर तुम अभी तक कादिर नहीं हुए हो और अल्लाह ने इनको घेर रखा है, अल्लाह हर चीज पर कादिर है 
+[48:22] ये काफिर लोग अगर इस वक्त तुमसे हैं लड़ गए होते तो यकीनन पीठ फेर जाते और कोई हमी ओ मददगार न पाते 
+[48:23] ये अल्लाह की सुन्नत है जो पहले से चली आ रही है और तुम अल्लाह की सुन्नत में कोई तबदीली न पाओगे
+[48:24] वही है जिसने मक्का की वादी में उनके हाथ तुमने और तुम्हारे हाथ उन्हें रोक दिए, हलांके वो उन पर तुम्हारे साथ गलाबा अता कर चूका था और जो कुछ तुम कर रहे थे अल्लाह उसे देख रहा था 
+[48:25] वहां लोग तो हैं जिन्होन ने कुफ्र किया और तुमको मस्जिद ए हरम से रोका और हादी (कुर्बानी) के ऊंटों (ऊंटों) को उनकी कुर्बानी की जगह न पहनने दिया। अगर (मक्का में) ऐसे मोमिन मर्द ओ औरत मौजुद न होते जिन्हे तुम नहीं जानते, और ये खतरा ना होता के नादानस्तागी में तुम उन्हें प्यार करोगे और उससे तुमपर हरफ आएगा (तो जंग ना रुकी जाती। रोकी वो इस लिए हो गई) ता-के अल्लाह अपनी रहमत मैं जिसको चाहे दाख़िल करले। वो मोमिन अलग हो गए होते तो (एहले मक्का में से) जो काफिर थे उनको हम जरूर सजा देते 
+[48:26] (यही वजह है के) जब इन काफिरों ने अपने दिलों में जाहिलाना हमियत बिठा ली तो अल्लाह ने अपने रसूल और मोमिनो पर सकीनत नाजिल फरमायी और मोमिनो को तक्वा की बात का पाबंद रक्खा, के वही उसके ज्यादा हकदार और उसके एहेल थे। अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है 
+[48:27] फिल वाक़े अल्लाह ने अपने रसूल को सच्चा ख्वाब दिखाया था जो ठीक ठीक हक़ के मुताबिक़ था। इंशा अल्लाह तुम ज़रूर मस्जिद ए हरम में पूरे अमन के साथ दख़िल होंगे, अपने सर मुंडवा-ओगे (दाढ़ी) और बाल तरसवा-ओगे और तुम्हें कोई ख़ौफ़ ना होगा। वो उस बात को जानता था जैसे तुम ना जानते थे इस लिए वो ख्वाब पूरा होने से पहले उसने ये करीबी फतह तुमको अता फरमादी 
+[48:28] वाह अल्लाह ही है जिसने अपने रसूल को हिदायत और दीन ए हक़ के साथ भेजा है ता-के उसको पूरे जिन्स-ए-दीन पर गालिब करदे (हर धर्म पर हावी) और हकीकत पर अल्लाह की गवाही काफी है 
+[48:29] मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं, और जो लोग उनके साथ हैं वो कुफ्फार पर सच और आपस में रहीम हैं। तुम जब देखोगे उन्हें रुकु व सुजूद और अल्लाह के फजल और उसकी खुशनुदी की तालाब में मशगुल पाओगे। सुजूद के असर उनके चेहरों पर मौजुद हैं जिनसे वो अलग पहचाने जाते हैं। ये है उनकी सिफत तौरात में। और इंजील में उनकी मिसाल यूं दी गई है के गोया एक खेती है जिसने पहले कोपल निकाली, फिर हमें तक़्वियत दी, फिर वो गढ़राई, फिर अपने तनय (तने) पर खड़ी हो गई। काश्त (बोने वालों) करने वालों को वो ख़ुश करती है ता-के कुफ़्फ़ार इनके फ़लने फूलने पर जलें। क्या गिरोह के लोग जो ईमान लाए हैं और जिन्होन ने नीक अमल किए हैं अल्लाह ने उन्हें मगफिरत और बड़े अजर का वादा फरमाया है 
+
+सूरह 49: अल-हुजुरात (अपार्टमेंट) 
+------------------------------------------------ 
+[49:1] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह और उसके रसूल के आगे पेश कादमी न करो और अल्लाह से डरो, अल्लाह सब कुछ सुनने और जानने वाला है
+[49:2] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपनी आवाज नबी की आवाज से बुलंद न करो, और न नबी के साथ ऊंची आवाज से बात किया करो जिस तरह तुम आपस में एक दूसरे से करते हो, कहीं ऐसा न हो के तुम्हारा किया किया सब खराब हो जाए (कर्म व्यर्थ हो जाएं) और तुम खबर भी ना हो 
+[49:3] जो लोग रसूल-ए-खुदा के हुजूर बात करते हैं अपनी आवाज पिछले रखते हैं वो डर हकीकत वही लोग हैं जिनके दिलों को अल्लाह ने तकवा के लिए जांच लिया है। उनके लिए मगफिरत है और अजर-ए-अज़ीम 
+[49:4] ऐ नबी, जो लोग तुम्हें हुज्रों (अपार्टमेंट) के बाहर से पुकारते हैं उनमें से अक्सर बे-अकाल हैं 
+[49:5] अगर वो तुम्हारे बारामद होने तक सब्र करते तो उनके लिए बेहतर था, अल्लाह दरगुज़र करें वाला और रहीम है 
+[49:6] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, अगर कोई फासिक तुम्हारे पास कोई खबर लेकर आए तो तहकीक कर लिया करो, कहीं ऐसा न हो के तुम किसी गिरो ​​को नादानिश्ता (अनजाने में) नुक्सान पाहुंचा बैठो और फिर अपने किए पर पशेमां हो 
+[49:7] ख़ूब जान रक्खो के तुम्हारे दरमियान अल्लाह का रसूल मौजुद है। अगर वो बहुत से मामले में तुम्हारी बात मान लिया करे, तो तुम खुद ही मुश्किलात में मुबतला हो जाओ। मगर अल्लाह ने तुमको ईमान की मुहब्बत दी और उसको तुम्हारे लिए दिल पसंद बना दिया, और कुफ्र-ओ-फुसुक और नफरमानी से तुमको मुतनफिर (घृणित) कर दिया 
+[49:8] ऐसे ही लोग अल्लाह के फजल ओ एहसान से रस्त-रो हैं और अल्लाह आलिम-ओ-हकीम (सर्वज्ञ, ऑल-वाइज़) है 
+[49:9] और अगर एहले ईमान में से दो गिरो ​​आपस में लड़ जाएं, तो उनके दरमियान सुलह (शांति) कराओ। फिर अगर उनमें से एक गिरो ​​दूसरे गिरो ​​से ज्यादा करे, तो ज्यादा करने वाले से लड़ो यहां तक ​​के वो अल्लाह के हुकुम की तरफ पलट आए। फिर अगर वो पलट आए, तो उनके दरमियान अदल के साथ सुलह करा दो, और इन्साफ करो के अल्लाह इन्साफ करने वालों को पसंद करता है 
+[49:10] मोमिन तो एक दूसरे के भाई हैं, लिहाजा अपने भाइयों के दरमियान तालुकात को दुरुस्त करो और अल्लाह से डरो, उम्मीद है के तुमपर रहम किया जाएगा 
+[49:11] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ना मर्द दूसरे मर्दों का मजाक उड़ाएं, हो सकता है के वो उनसे बेहतर हों, और ना औरतें दूसरी औरतों का मजाक उड़ाएं, हो सकता है के वो उनसे बेहतर हों। आपस में एक दूसरे पर तान ना करो, और ना एक दूसरे को बुरे अलकाब (शीर्षक) से याद करो। ईमान लेन के बाद फिस्क में नाम पेदा करना बहुत बुरी बात है। जो लोग इस रवीश से बाज़ न आएं वही जालिम हैं 
+[49:12] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, बहुत गुमान (शक) करने से परहेज करो के बाज़ गुमान (शक) गुनाह होते हैं। तजस्सस (जसुसी) ना करो और तुम में से कोई किसी की गीबत ना करे। क्या तुम्हारे अन्दर कोई ऐसा है जो अपने मरे (मृत) हुए भाई का गोश्त खाना पसंद करेगा? देखो, तुम खुद इस से घी खाते हो। अल्लाह से डरो, अल्लाह बड़ा तौबा कबूल करने वाला और रहीम है
+[49:13] लोगन, हमने तुमको एक मर्द और एक औरत से प्यार किया और फिर तुम्हारी कौमें और बिरादरी बना दी ता-के तुम एक दूसरे को पहचानो। दर हक़ीक़त अल्लाह के नज़दीक तुम में सब से ज़्यादा इज़्ज़त वाला वो है जो तुम्हारे अंदर सब से ज़्यादा ज़रूरी है। यकीनन अल्लाह सब कुछ जान-ने वाला और बाख़बर है 
+[49:14] ये बदवी (बेडौइन्स) कहते हैं के "हम ईमान लाए" इनसे कहो: "तुम ईमान नहीं लाए, बलके यूं कहो के हम मुती (विनम्र) हो गए" ईमान अभी तुम्हारे दिलों में दाख़िल नहीं हुआ है। अगर तुम अल्लाह और उसके रसूल की फरमाबरदारी इख्तियार करो तो वो तुम्हारे अमल के अजर में कोई कमी ना करेगा। यकीनन अल्लाह बड़ा दरगुजर करने वाला और रहीम है 
+[49:15] हकीकत में तो मोमिन वो हैं जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए फिर उन्होन ने कोई शक्क ना किया और अपने जानो और मालों से अल्लाह की राह में जिहाद किया, वही सच्चे लोग हैं 
+[49:16] ऐ नबी, इन [मुदाययान ए ईमान (आस्था का ढोंग)] से कहो, क्या तुम अल्लाह को अपने दीन की इत्तिला दे रहे हो? हालंके अल्लाह ज़मीन और आसमान की हर चीज़ को जानता है और वो हर शाय का इल्म रखता है 
+[49:17] ये लोग तुमपर एहसान जताते हैं के इन्हों ने इस्लाम क़बूल करलिया। इनसे कहो अपने इस्लाम का एहसान मुझपर न रक्खो, बलके अल्लाह तुम अपना एहसान रखता है के उसने तुम्हें ईमान की हिदायत दी अगर तुम अपने दावा-ए-ईमान में सच्चे हो 
+[49:18] अल्लाह ज़मीन और आसमान की हर पोशीदा (छिपी हुई) चीज़ का इल्म रखा है और जो कुछ तुम करते हो वो सब उसकी निगाह में है 
+
+सूरह 50: क़ाफ़ (क़ाफ़) 
+------------------------------------------------ 
+[50:1] क़ाफ़, कसम है कुरान-ए-मजीद की 
+[50:2] बल्के इन लोगों को ताज्जुब इस बात पर हुआ के एक खबरदार करने वाला खुद में से इनके पास आ गया, फिर मुनकिरीन कहने लगे "ये तो अजीब बात है 
+[50:3] क्या जब हम मर जाएंगे और खाक (मिट्टी) हो जाएंगे (तो दोबारा उठेंगे)? ये वापसी तो अक्ल से खराब है" 
+[50:4] ज़मीन इनके जिस्म में से जो कुछ खाती है वो सब हमारे इल्म में है और हमारे पास एक किताब है जिसमें सब कुछ महफूज है 
+[50:5] बल्के इन लोगों ने तो जिसका वक्त हक इनके पास आया उसका वक्त उसे साफ झूठला दिया। इसी वजह से अब ये उलझन में पड़े हुए हैं 
+[50:6] अच्छा, तो क्या इन्होनें ने कभी अपने ऊपर आसमान की तरफ नहीं देखा? किस तरह हमने उसे बनाया और अरस्ता (ज़ीनत/सुंदरीकरण) किया, और उसमें कहीं कोई रखना (दरारें/दरारें) नहीं हैं 
+[50:7] और ज़मीन को हमने बिछाया और इसमें पहाड़ जमाये और उसके अंदर हर तरह की खुश मंज़र नबातात उगा दी 
+[50:8] ये सारी चीज़ें आंखें खोलने वाली और सबक देने वाली हैं हर हमें बंद करने के लिए जो (हक़ की तरफ) रूजू करने वाला हो 
+[50:9] और आसमान से हमने बरकत वाला पानी नाज़िल किया, फिर उसे बाग और फसल के गले
+[50:10] और बुलंद ओ बाला खजूर के दरख्त पेडा करदीए जिनपर फलन (फल) से लड़े खोशे तेह-बार-तेह लगते हैं (फलों को परतों में व्यवस्थित किया जाता है) हैं 
+[50:11] ये इंतिजाम है बंदों को रिज्क देने का इस पानी से हम एक मुर्दा जमीन को जिंदगी बख्श देते हैं (मारे) हुए इंसानों का ज़मीन से) निकलने भी इसी तरह होगा 
+[50:12] इन से पहले नूह की क़ौम, और अशब-उर-रस, और समूद 
+[50:13] और आद, और फिरौन, और लूट के भाई 
+[50:14] और ऐकाह (जंगल में रहने वाले) वाले, और तुब्बा की क़ौम के लोग भी झुटला चुके हैं हर एक ने रसूलों को झुटलाया, और आखिर ए कार मेरी वेद (धमकी) उन पर चस्पां हो गई 
+[50:15] क्या पहली बार की तहलीक (सृजन) से हम आजिज (घिसे-पिटे) थे? मगर एक नई तख़लीक की तरफ से ये लोग शक्क में पड़े हुए हैं 
+[50:16] हमने इंसान को भुगतान किया है और उसके दिल में उबरने वाले वतन तक को हम जानते हैं। हम तो हमारे राग-ए-गर्दन (गले की नस) से भी ज्यादा हमसे करीब हैं 
+[50:17] (और हमारे इस बारह-ए-रास्त इल्म के अलावा) दो कातिब (शास्त्री) उसके दिन और बायें बैठे (फरिश्ते) हर चीज सब्त (लिख) कर रहे हैं 
+[50:18] कोई लफ्ज हमसे कि जुबान से नहीं निकलता जिसे महफूज करने के लिए एक हाजिर बाश निगरान मौजूद ना हो 
+[50:19] फिर देखो, वो मौत की जान-कानी (मौत की पीड़ा) हक लेकर आ पाहुंची, ये वही चीज है जिसमें तू भागता था 
+[50:20] और फिर सुर (तुरही) फूँका गया, ये है वो दिन जिसका तुझे खौफ़ दिला दिया जाता था 
+[50:21] हर शक्स इस हाल में आ गया के उसके साथ एक हांक(ड्राइव) कर लेन वाला है और एक गवाही देने वाला 
+[50:22] क्या चीज़ की तरफ से तू गफ़लत में था, हमने वो पर्दा हटा दिया जो तेरे आगे पड़ा हुआ था और आज तेरी निगाह खूब तेज़ है 
+[50:23] उसके साथी ने अर्ज़ किया ये जो मेरी सुपुर्दगी में था हाज़िर है 
+[50:24] हुकुम दिया गया “फेंक दो जहन्नुम में हर कट्टे (कठोर, जिद्दी) काफिर को जो हक से इनाद रखता था 
+[50:25] खैर को रुकने वाला और हद से तजौज करने वाला था, शक्क में पड़ा हुआ था 
+[50:26] और अल्लाह के साथ किसी दूसरे को खुदा बना बैठा था। दाल दो उसे अकेले अज़ाब में” 
+[50:27] उसके साथी ने अर्ज़ किया “खुदा-वंदा, मैंने इसको व्यंग्य नहीं बनाया बलके ये खुद ही पारले दर्जे की गुमराही में पड़ा हुआ था” 
+[50:28] जवाब में इरशाद हुआ “मेरे हुजूर झगड़ा ना करो, मैं तुमको पहले ही अंजाम-ए-बद्द से ख़बरदार कर चूका था 
+[50:29] मेरे हाँ (यहाँ) बात पलटी नहीं जाती और मैं अपने बंदों पर ज़ुल्म तोड़ने वाला नहीं हूं" 
+[50:30] वो दिन जबके हम जहन्नुम से पूछेंगे क्या तू भर गई? और वो कहेगी क्या और कुछ है 
+[50:31] और जन्नत मुत्तक़िन के करीब ले आएगी, कुछ भी डर ना होगी 
+[50:32] इरशाद होगा "ये है वो चीज़ जिसका तुमसे वादा किया जाता था, हर उस शक्स के लिए जो बहुत रूजू का है"रोने वाला और बड़ी निगहदाश्त (उसके आचरण पर नजर रखने वाला) करने वाला था 
+[50:33] जो बे देखे रहमान से डरता था, और जो दिल-ए-गिरविदा के लिए आए हैं 
+[50:34] दखिल हो जाओ जन्नत में सलामती के साथ'' वो दिन हयात-ए-आबादी (अनंत काल) का दिन होगा 
+[50:35] वहां उनके लिए वो सब कुछ होगा जो वो चाहेंगे, और हमारे पास इसे ज्यादा भी बहुत कुछ उनके लिए है 
+[50:36] हम उनसे पहले बहुत सी कौमों को हलाक कर चुके हैं जो इनसे बहुत ज्यादा ताकतवार थी और दुनिया के मुल्कों को अनहोन ने चैन मारा था फिर क्या वो कोई जाए पनाह पा सके 
+[50:37] इस तारीख में इब्रत का सबक है हर उस शक्स के लिए जो दिल रखता हो, या जो तवज्जु से बात को सुने 
+[50:38] हमने जमीन और आसमानों को और उनके दरमियान की सारी चीज़ों को छै (छह) दिनों में अदा कर दिया और हमें कोई थकान लाहिक न हुई 
+[50:39] पास ऐ नबी, जो बातें ये लोग बनाते हैं उन पर सब्र करो, और अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करते रहो, तुलू-ए-आफताब (सूरज का उगना) और गुरुब-ए-आफताब (इसके डूबने से पहले) से पहले 
+[50:40] और रात के वक्त फिर उसकी तस्बीह करो और सजदा रिजियन से दूर होने के बाद भी (साष्टांग प्रणाम) 
+[50:41] और सुनो, जिस दिन मुनादी (पुकार) करने वाला (हर शक्स के)करीब ही से पुकारेगा 
+[50:42] जिस दिन सब लोग आवाज़-ए-हशर को ठीक ठीक सुन रहे होंगे, वो ज़मीन से मुर्दों के निकलने का दिन होगा 
+[50:43] हम ही जिंदगी बक्शते हैं और हम ही मौत देते हैं, और हमारी ही तरफ उस दिन सबको पलटना है 
+[50:44] जब ज़मीन फटेगी लोग उसके अंदर से निकल कर तेज तेज़ भागे जा रहे होंगे। ये हश्र हमारे लिए बहुत आसान है 
+[50:45] ऐ नबी, जो बातें ये लोग बना रहे हैं उन्हें हम खूब जानते हैं, और तुम्हारा काम इनसे जबरन (ज़बरदस्ती) बात मनवाना नहीं है। बस तुम कुरान के ज़रिये से हर उस शक्स को हिदायत करदो जो मेरी तम्बीह से डरे 
+
+सूरह 51: अद-धारियत (बिखरने वाले) 
+------------------------------------------------ 
+[51:1] कसम है उन हवाओं की जो गर्द (धूल) उड़ाने वाली हैं 
+[51:2] फिर पानी से लड़े हुए बादल उठने वाली हैं 
+[51:3] फिर सुबुक रफ़्तारी (सुचारू गति से) के साथ चलने वाली हैं 
+[51:4] फिर एक बदे काम (बारिश) की तकसीम करने वाली हैं 
+[51:5] हक ये है कि जिस चीज का तुम्हें खौफ दिलाया जा रहा है वो सच्ची है 
+[51:6] और जजा-ए-आमाल (इनाम) जरूर पेश आनी है 
+[51:7] कसम है मुत्तफ़रिक शकलों (अनेक रूप) वाले आसमान की 
+[51:8] (आख़िरत के बारे में) तुम्हारी बात एक दूसरे से मुख़्तलिफ़ है 
+[51:9] उसे वही बरगश्ता (भ्रमित/विमुख) होता है जो हक़ से फिरा हुआ है 
+[51:10] मारे गये क़यास-ओ-गुमान (अनुमान लगाने वाले) से हुकुम लगाने वाले 
+[51:11] जो जिहालत (अज्ञानता) में ग़र्क और गफ़लत में मदहोश हैं
+[51:12] पूछते हैं आख़िर वो रोज़-ए-जज़ा कब आएगा 
+[51:13] वो हमें रोज़ आएगा जब ये लोग आग पर तपेंगे 
+[51:14] (इनसे कहा जाएगा) अब चकखो मजा अपने फिटने का, ये वही चीज़ है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थाय 
+[51:15] अलबत्ता मुत्तकी लोग हमें रोज़ बागों (बगीचों) और चश्मो (फव्वारों) में होंगे 
+[51:16] जो कुछ उनका रब उन्हें देगा उसे ख़ुशी ख़ुशी ले रहे होंगे। वो उस दिन के आने से पहले नीकुकर (नेकी करने वाले) थे 
+[51:17] रातों (रातों) को कम ही सोते (नींद) थे 
+[51:18] फिर वही रात के पिछले पहरों में माफ़ी माँगते थे 
+[51:19] और उनके मालों (धन) में हक़ था साहिल (मांगने वाले) और महरूम (बेसहारा) के लिए 
+[51:20] ज़मीन में बहुत सी निशानियां हैं यकीन लाने वालों के लिए 
+[51:21] और खुद तुम्हारे अपने वजूद में हैं, क्या तुमको सूझता नहीं 
+[51:22] आसमान ही में है तुम्हारा रिज्क भी और वो चीज भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है 
+[51:23] पास कसम है आसमां और जमीन के मालिक की, ये बात हक है, ऐसी ही यकीनी जैसे तुम बोल रहे हो 
+[51:24] ऐ नबी, इब्राहिम के मुअज्जज मेहमान की हिकायत भी तुम्हें पाहुंची है 
+[51:25] जब वो उसके हां (यहां) आए तो कहां आपको सलाम है। उसने कहा "आप लोगों को भी सलाम है कुछ ना-आशना से लोग हैं" 
+[51:26] फिर वो चुपके से अपने घर वालों के पास गया, और एक मोटा ताज़ा बछड़ा (बछड़ा) ला कर 
+[51:27] मेहमानों के आगे पेश किया। उसने कहा आप हज़रत खाते नहीं 
+[51:28] फिर वो अपने दिल में उससे डर गया। उनहों ने कहा डरिए नहीं, और उसे एक ज़ी-इल्म लड़के की अदाइश का मुश्दा (अच्छी खबर/बशारत) सुनाया 
+[51:29] ये सुनकर उसकी बीवी चीखती हुई आगे बढ़ी और उसने अपना मुंह पीठ लिया और कहने लगी, "बूढ़ी बांज" 
+[51:30] उनहों ने कहा "यही कुछ फरमाया है" तेरे रब ने। वो हकीम है और सब कुछ जानता है 
+[51:31] इब्राहीम ने कहा “ऐ फरस्तादगान-ए-इलाही (दूत), क्या मोहिम आपको दर-पेश है 
+[51:32] उन्होन ने कहा “हम एक मुजरिम क़ौम की तरफ भेजे गए हैं 
+[51:33] ता-के उसपर पक्की हुई मिट्टी के पत्थर (मिट्टी-पत्थर) बरसा दे 
+[51:34] जो आपके रब के हां हद से गुज़र जाने वालों के लिए निशान ज़दा हैं” 
+[51:35] फिर हमने उन सब लोगों को निकाल लिया जो उस बस्ती में मोमिन थे 
+[51:36] और वहां हमने एक घर के सिवा मुसलमानों का कोई घर न पाया 
+[51:37] उसके बाद हमने वहां बस एक निशानी उन लोगों के लिए छोड़ दी जो दर्दनक अज़ाब से डरते थे 
+[51:38] और (तुम्हारे लिए निशानी है) मूसा के क़िस्से में जब हमने उसे सारी सनद (स्पष्ट अधिकार) के साथ फिरौन के पास भेजा 
+[51:39] तो वो अपने बाल-बूटे पर अकड़ गया और बोला ये जादूगर है या मजनूं (दीवाना) है
+[51:40] आख़िर-ए-कार हमने उसे और उसके लश्करों को पकड़ा और सबको समंदर में फेंक दिया और वो मलामत ज़्यादा होकर रह गया 
+[51:41] और (तुम्हारे लिए निशानी है) आद (आद के लोग) में, जबके हमने उनपर एक ऐसी ही हाय बे-खैर (विनाशकारी) हवा भेज दी 
+[51:42] के जिस चीज पर भी वह गुजर गई उसे बोसीदा (सड़ा हुआ) करके रख दिया 
+[51:43] और (तुम्हारे लिए निशानी है) समूद में, जब उनसे कहा गया था कि एक खास वक्त तक मजे करलो 
+[51:44] मगर क्या तम्बीह (चेतावनी) बराबर भी है उनहों ने अपने रब के हुकुम से सरताबी (बेशर्मी से अवज्ञा) की। आख़िर-ए-कर उनको देखते एक अचानक टूट पड़ने वाले अज़ाब ने उनको आ लिया 
+[51:45] फिर ना उनको उठने की ताकत थी और ना वो अपना बचाव कर सकते थे 
+[51:46] और सबसे पहले हमने नूह की क़ौम को हलाक किया क्योंके वो फ़ासीक (दुष्ट) लोग थे 
+[51:47] आसमान को हमने अपने ज़ोर से बनाया है और हम इसकी क़ुदरत रखते हैं 
+[51:48] ज़मीन को हमने बिछाया है और हम बड़े अच्छे हमवार(स्मूथर्स/स्प्रेड) करने वाले हैं 
+[51:49] और हर चीज़ के हमने जोड़े हैं बनाए हैं, शायद के तुम उसे सबक लो 
+[51:50] तो अल्लाह की तरफ से, मैं तुम्हारे लिए हमारे लिए साफ-साफ खबरदार करने वाला हूं 
+[51:51] और ना बनाओ अल्लाह के साथ कोई दूसरा माबूद। मैं तुम्हारे लिए उसकी तरफ से साफ साफ खबरदार करने वाला हूं 
+[51:52] यूं ही होता जा रहा है, इनसे पहले क़ौमों के पास भी कोई रसूल ऐसा नहीं आया जैसे उन्होन ने ये ना कहा हो के ये साहिर (जादूगर) है या मजनूं (दीवाना) 
+[51:53] क्या इन सब ने आपस में इसपर कोई समझौता किया है? नहीं, बलके ये सब सरकश लोग हैं 
+[51:54] पास ऐ नबी, इनसे रुख फेर लो, तुमपर कुछ मलामत नहीं 
+[51:55] अलबत्ता हिदायत करते रहो, क्योंके हिदायत ईमान लाने वालों के लिए नफ़ेह(फ़ैयदा-मंद) है 
+[51:56] मैने जिन और इंसान को इसके सिवा किसी काम के लिए भुगतान नहीं किया है के वो मेरी बंदगी करें 
+[51:57] मैं उनसे कोई रिज़्क नहीं चाहता और ना ये चाहता हूं के वो मुझे खिलाएं 
+[51:58] अल्लाह तो खुद ही रज्जाक है, बड़ी कुव्वत वाला और जबरदस्त 
+[51:59] पास जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उनके लिए वैसा ही अज़ाब तय्यार है जैसा इन्ही जैसे लोगों को उनके लिए का मिल चुका है, इसके लिए ये लोग जल्दी ना मचाएं 
+[51:60] आख़िर को तबाह है कुफ़्र करने वालों के लिए हमें रोज़ जिसका इन्हें ख़ौफ़ दिलाया जा रहा है 
+
+सूरह 52: अट-तूर (पहाड़) 
+------------------------------------------------ 
+[52:1] कसम है तूर (पर्वत) की 
+[52:2] और एक ऐसी खुली किताब की 
+[52:3] जो रकीक जिल्द (बारीक चर्मपत्र) में लिखी हुई है 
+[52:4] और आबाद (बहुत बार-बार आने वाला) घर की 
+[52:5] और ऊंची छत (चंदवा) की 
+[52:6] और मौजां समंदर (उफनता हुआ समुद्र) की
+[52:7] के तेरे रब का अज़ाब ज़रूर वक़हे होने वाला है 
+[52:8] जिसे कोई दफ़ा करने वाला नहीं 
+[52:9] वो रोज़ वक़हे होगा जब आसमां बुरी तरह डगमगाएगा 
+[52:10] और पहाड़ उड़े उड़े फिरेंगे 
+[52:11] तबाही है हम रोज़ उन पर झूठलाने वालों के लिए 
+[52:12] जो आज खेल के तौर पर अपनी हुज्जत बाजियों में लगे हुए हैं 
+[52:13] जिस दिन उन्हें धक्के मार कर नार-ए-जहन्नुम (नरक की आग) की तरफ ले चला जाएगा 
+[52:14] हमारा वक्त उन्हें कहा जाएगा के “ये वही” आग है जैसे तुम झुटलाया करते थे 
+[52:15] अब बताओ ये जादू है या तुम्हें समझ नहीं आ रहा है 
+[52:16] जाओ अब झुलसो इसके अंदर, तुम ख्वाह सब्र करो या ना करो, तुम्हारे लिए यक्सन है, तुम्हें वैसा ही बदला दिया जा रहा है जैसे तुम अमल कर रहे थे 
+[52:17] मुत्तकी लोग वहां बागों (बगीचों) और नियामतों में होंगे 
+[52:18] लुत्फ ले रहे होंगे उन चीज़ों से जो उनका रब उन्हें देगा, और उनका रब उन्हें दोज़ख के अज़ाब से बचा लेगा 
+[52:19] (उनसे कहा जाएगा) खाओ और पियो भूलभुलैया से अपने उन आमाल के सिली में जो तुम करते रहे हो 
+[52:20] वो आमने-सामने बिछे हुए तख्तों पर तकिए (सोफे) लगाएंगे बैठे होंगे और हम खूबसूरत आंखों वाली हूरें उन्हें बियाह (शादी) देंगे 
+[52:21] जो लोग ईमान लाए हैं और उनकी औलाद भी कोई दरजा-ए-ईमान में उनके नक्श-ए-कदम पर चली है, उनकी औलाद को भी मैं (जन्नत में) उनके साथ मिला देंगे और उनके अमल में कोई घाटा (नुकसान) उनको ना देंगे। हर शक्स अपने क़स्ब के बदले में रहता है 
+। उनको हर तरह के फल और गोश्त, जिस चीज को भी उनका जी चाहेगा खूब दिए चले जाएंगे 
+[52:23] वहां वो एक दूसरे से जाम-ए-शराब लपक लपक कर ले रहे होंगे जिसमें न यावा-गोई (बीमार भाषण) होगी न बद-किरदारी 
+[52:24] और उनकी खिदमत में वो लड़के दौड़ते (दौड़ते हुए) फिर रहेंगे जो उनके लिए मखसूस होंगे, ऐसे खूबसूरत जैसे छुपा कर रखे हुए मोती (मोती) 
+[52:25] ये लोग आपस में एक दूसरे से (दुनिया में गुज़रे हुए) हालात पूछेंगे 
+[52:26] ये कहेंगे के हम पहले अपने घर वालों में डरते हुए जिंदगी बसर करते थे 
+[52:27] आखिर ए कार अल्लाह ने हम पर फजल फरमाया और हमने झुलसा देने वाली हवा के अजाब से बचा लिया 
+[52:28] हम पिछली जिंदगी में उसकी से दुआएं मांगते थे, वो वक्त बड़ा हाय मोहसिन (परोपकारी) और रहीम है 
+[52:29] पास ऐ नबी, तुम हिदायत किए जाओ, अपने रब के फजल से ना तुम कहीं (भविष्यवक्ता) हो और ना मजनूं (पागल) 
+[52:30] क्या ये लोग कहते हैं के ये शक्स शायर है जिसका हक़ में हम गर्दिश-ए-अय्याम (दुर्भाग्य) के इंतिज़ार कर रहे हैं 
+[52:31] इनसे कहो, अच्छा इंतिज़ार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतिज़ार करता हूं
+[52:32] क्या इनकी अकालें ऐसी ही बातें करने के लिए कहती हैं? या दर-हकीकत ये इनाद (अपराध) में हद से गुज़रे हुए लोग हैं 
+[52:33] क्या ये कहते हैं कि इस शक्स ने ये क़ुरान ख़ुद ग़ाद (आविष्कृत/मनगढ़ंत) लिया है? असल बात ये है के ये ईमान नहीं लाना चाहते 
+[52:34] अगर ये अपने इस क़ौल (कहावत) में सच्चे हैं तो इसी शान का एक कलाम बना लें 
+[52:35] क्या ये किसी ख़लीक़ के बिना खुद पैदा हो गए हैं? या ये खुद अपने खालिक हैं 
+[52:36] या ज़मीन और आसमान को इन्हों ने पेदा किया है? असल बात ये है के ये यक़ीन नहीं रखते 
+[52:37] क्या तेरे रब के ख़ज़ाने इन के कब्ज़े में हैं? हां उन पर इनका हुकुम चलता है 
+[52:38] क्या इनके पास कोई सीढ़ी है जिसपर चढ़ कर ये इल्म-ए-बाला की सन-गन लेते हैं? उनमें से जिसने सूरज-गुन ली हो वो लाए को खुली दलील 
+[52:39] क्या अल्लाह के लिए तो हैं बेटियां और तुम लोगों के लिए हैं बेते (बेटे) 
+[52:40] क्या तुम इनसे कोई अजर मांगते हो की एह ज़बरदस्ती पड़ी हुई चट के बोझ तले दबे जाते हैं कर्ज के बोझ के साथ) 
+[52:41] क्या इनके पास गैब के हक़ीक़त का इल्म है कि उसकी बिना पर ये लिख रहे हूँ 
+[52:42] क्या ये कोई चाल चलना चाहता है? (अगर ये बात है) तो कुफ्र करने वालों पर इन की चाल उल्टी ही पड़ेगी 
+[52:43] क्या अल्लाह के सिवा ये कोई और माबूद रखते हैं? अल्लाह पाक है हमसे शिर्क से जो ये लोग कर रहे हैं 
+[52:44] ये लोग आसमान के टुकड़े भी गिरे हुए देख लें तो कहेंगे ये बादल हैं जो उम्मीद चले आ रहे हैं 
+[52:45] पास ऐ नबी, इन्हें इनके हाल पर छोड़ दो यहां तक ​​के ये अपने दिन को पाहुंच जाए जिसमें ये मार गिराए जाएंगे 
+[52:46] जिस दिन ना इनकी अपनी कोई चाल होगी इनका कोई काम आएगा ना कोई इनकी मदद को आएगा 
+[52:47] और हमारे वक्त के आने से पहले भी जालिमों के लिए एक अज़ाब है, मगर इनमें से अक्सर जानते नहीं हैं 
+[52:48] ऐ नबी, अपने रब का फैसला आने तक सब्र करो। तुम हमारी निगाह में हो. तुम जब उठो तो अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो 
+[52:49] रात को भी उसकी तस्बीह किया करो और सितारे जब पलटते हैं हमें वक्त भी 
+
+सूरह 53: अन-नज्म (द स्टार) 
+------------------------------------------------ 
+[53:1] कसम है तारे की जबके वो गुरूब हुआ 
+[53:2] तुम्हारा रफीक (साथी) ना भटका है ना बहका (भ्रमित) है 
+[53:3] वो अपनी ख्वाहिश-ए-नफ्स से नहीं बोलता 
+[53:4] ये तो एक वही (प्रेरणा/रहस्योद्घाटन) है जो उसपर नाज़िल की जाती है 
+[53:5] उसे ज़बरदस्त क़ुव्वत वाले ने तालीम दी है 
+[53:6] जो बड़ा साहिब-ए-हिकमत है 
+[53:7] वो सामने आ खड़ा हुआ जबके वो बलाई उफुक़ पार था (क्षितिज का सबसे ऊंचा हिस्सा) 
+[53:8] फिर करीब आया और ऊपर मुअल्लक हो गया।(निकला और उतरा)
+[53:9] यहां तक ​​के दो कमानों (धनुष की लंबाई) के बराबर या इसे कुछ कम फासला रह गया 
+[53:10] तब उसने अल्लाह के बंदे को वही (रहस्योद्घाटन) पाहुंचाई जो वही (रहस्योद्घाटन) भी उसे पाहुंचनी थी 
+[53:11] नजर ने जो कुछ देखा, दिल ने हमें झूठ ना मिलाया 
+[53:12] अब क्या तुम उस चीज़ पर उसके झगड़े हो जिसे वो आँखों से देखता है 
+[53:13] और एक मरतबा फिर उसने 
+[53:14] सिदरतुल मुंतहा के पास उसको (एंजेल जिब्रियल) देखा 
+[53:15] जहां पास ही जन्नत-उल-मावा है 
+[53:16] हमारा वक्त सिद्दरा पर चा रहा था जो कुछ कह रहा था 
+[53:17] निगाह ना चुन्धयी (वेवर / स्वर्व) ना हद से मुताजाविज (अपराध) हुई 
+[53:18] और उसने अपने रब की बड़ी बड़ी निशानियां देखी 
+[53:19] अब जरा बताओ, तुमने कभी इस लाट और इस उज्जा (बुतपरस्तों के नाम) मूर्तियां) 
+[53:20] और तीसरी (तीसरी) एक और देवी मानत की हकीकत पर कुछ गौर भी किया 
+[53:21] क्या बेटे (बेटे) तुम्हारे लिए हैं और बेटियां (बेटियां) खुदा के लिए 
+[53:22] ये तो बड़ी धांधली (अन्याय/अनुचित) की तकसीम हुई 
+[53:23] दरसल ये कुछ नहीं हैं मगर बस चांद नाम जो तुमने और तुम्हारे बाप दादा ने रख लिया है। अल्लाह ने इनके लिए कोई सनद नाज़िल नहीं की। हक़ीक़त ये है के लोग महेज़ वीहम-ओ-गुमान की जोड़ी कर रहे हैं और ख़्वाहिशात-ए-नफ़्स के मुरीद बने हुए हैं, हालंके उनके रब की तरफ से उनके पास हिदायत आ चुकी है 
+[53:24] क्या इंसान जो कुछ चाहे उसके लिए वही हक़ है 
+[53:25] दुनिया और आख़िरत का मालिक तो अल्लाह ही है 
+[53:26] आसमानों में कितने ही फ़रिश्ते मौजुद हैं, उनकी शफ़ाअत (हिम्मत) कुछ भी काम नहीं आ सकती जब तक अल्लाह किसी ऐसे शक्स के हक़ में उसकी इजाज़त न दे जिसके लिए वो कोई अर्ज़दाश्त (याचिका) सुनना चाहे और उसको पसंद करे 
+[53:27] मगर जो लोग आख़िरत को नहीं मानते वो फरिश्तों को देवियों (देवी) के नामो से मौसम करते हैं 
+[53:28] हलांके इस मामले का कोई इल्म (ज्ञान) उन्हें हासिल नहीं है। वो महज़ गुमान की जोड़ी कर रहे हैं, और गुमान हक़ की जगह कुछ भी काम नहीं दे सकते 
+[53:29] पास ऐ नबी, जो शक्स हमारे ज़िक्र से मुह फेरता है, और दुनिया की जिंदगी के सिवा जिसे कुछ मतलब नहीं है, उसे उसके हाल पर छोड़ दो 
+[53:30] इन लोगों का मबलाग-ए-इल्म (उनका अधिकतम ज्ञान) बस यही कुछ है, ये बात तेरा रब ही ज्यादा जानता है कि उसके रास्ते से कौन भटक गया है और कौन सीधे रास्ते पर है 
+[53:31] और जमीन और आसमान की हर चीज का मालिक अल्लाह ही है। ता-के अल्लाह बुराई करने वालों को उनके अमल का बदला दे और उन लोगों को अच्छी जजा से नवाजे जिन्हों ने नीक रवैय्या इख्तियार किया है
+[53:32] जो बदे बदे गुनाहों और खुले खुले कबीह अफाल (शर्मनाक कृत्य) से परहेज़ करते हैं, इल्ला ये के कुछ कसूर उनसे सरज़ाद हो जाए। बिला शुभा तेरे रुब का दामन-ए-मगफिरत बहुत वासिह है। वो तुम्हें हमारे वक्त से खूब जानता है जब उसने जमीन से तुम्हें जन्म दिया, और जब तुम अपनी माँ के पेट में अभी भी जानिन (भ्रूण) हाय थाय। पस अपने नफ़्स की पाकी के दावे ना करो। वही बेहतर जानता है कि वक्ती मुत्तकी कौन है 
+[53:33] फिर ऐ नबी, तुमने उस शक्स को भी देखा जो राह-ए-खुदा से फिर गया 
+[53:34] और थोड़ा सा दे कर रुक गया 
+[53:35] क्या उसके पास गैब का इल्म है कि वो हकीकत को देख रहा है 
+[53:36] क्या उसने उन बातों की कोई खबर नहीं पहुंची जो मूसा के सहीफों 
+[53:37] और हमारे इब्राहिम के सहीफों में बयां हुई है जिसने वफा का हक़ अदा कर दिया 
+[53:38] ये के कोई बोझ उठाने वाला दूसरे का बोझ नहीं उठेगा 
+[53:39] और ये के इंसान के लिए कुछ नहीं है मगर वो जिसकी हमें सई (कोशिश/प्रयास) की है 
+[53:40] और ये के उसकी सई (कोशिश/प्रयास) अनकरीब देखी जाएगी 
+[53:41] और उसकी पूरी जजा उसे दी जाएगी 
+[53:42] और ये के आख़िर-ए-कार पहचानना तेरे रुब ही के पास है 
+[53:43] और ये के उसी ने हास्य और उसी ने रुलाया 
+[53:44] और ये के उसी ने मौत दी और उसी ने जिंदगी बख्शी 
+[53:45] और ये के उसी ने नर (पुरुष) और मादा (महिला) का जोड़ा पैदा किया 
+[53:46] एक बूंद (शुक्राणु-बूंद) से जब वो टपकती है 
+[53:47] और ये के दूसरी जिंदगी बक्शना भी उसी के ज़िम्मे है 
+[53:48] और ये के उसे ने गनी (समृद्ध) किया और जयदाद बख्शी 
+[53:49] और ये के वही शेरा (सीरियस) / ताकतवर सितारा) का रब है 
+[53:50] और ये के उसी ने अद-ए-ऊला (आद के लोगों) को हलाक किया 
+[53:51] और समूद को ऐसा मिटाया के उनमें से किसी को बाकी ना चोदा 
+[53:52] और उसने पहले क़ौम-ए-नूह को तबाह किया क्योंकि वो वो था हाय साख्त ज़ालिम-ओ-सरकश लोग 
+[53:53] और औंधी गिरने वाली बस्तियों को उठा फेंका। (कौम-ए-लुत) 
+[53:54] फिर चाहा दिया उनपर वो कुछ जो (तुम जानते ही हो के) क्या चा दिया 
+[53:55] पास ऐ मुखातिब, अपने रब की किन नियमों में तू शक्क करेगा 
+[53:56] ये एक तम्बीह (चेतावनी) है पहले आए हुए तंबीहात (चेतावनी) में से 
+[53:57] आने वाली घड़ी करीब आ लगी है 
+[53:58] अल्लाह के सिवा कोई उसको हटाने वाला नहीं 
+[53:59] अब क्या यही वो बातें हैं जिनपर तुम इजहार-ए-ताजुब करते हो 
+[53:60] हंसते (हंसते) हो और रोते (रोते) नहीं हो 
+[53:61] और गा (गायन) बजा कर इन्हें टालते हो 
+[53:62] झुक जाओ अल्लाह के आगे और बंदगी बजा लाओ (आयत-ए-सजदा) 
+
+सूरह 54: अल-क़मर (चंद्रमा) 
+------------------------------------------------
+[54:1] कयामत की घड़ी करीब आ गई और चांद फट गया 
+[54:2] मगर इन लोगों का हाल ये है कि ख्वा कोई निशानी देख लें मुंह मोड़ लेते हैं और कहते हैं ये तो चलता हुआ जादू है 
+[54:3] इन्हों ने (इसको भी) झूठला दिया और अपनी ख्वाहिश-ए-नफ़्स ही की जोड़ी है। हर मामले को आख़िर-ए-कार एक अंजाम पर पहुंचाना है 
+[54:4] लोगों के सामने (पिछले क़ौमों के) वो हालात आ चुके हैं जिनमें सरकशी से बाज़ रखने के लिए काफी सामान-ए-इब्रत है 
+[54:5] और ऐसी हिकमत जो हिदायत के मक़सद को बा-दरजा-ए-आतम (पूर्ण ज्ञान) पूरा करती है मगर तंबीहत (चेतावनी) इन पर कारगर नहीं होती 
+[54:6] पस ऐ नबी, इनसे रुख फेर लो। जिस रोज पुकारने वाला एक सख्त नागावार चीज की तरफ पुकारेगा 
+[54:7] लोग सहमत हुए (डाउन-कास्ट) निगाहों के साथ अपनी कब्रों से इस तरह निकलेंगे गोया वो बिखरी हुई टिड्डियां (टिड्डियां) हैं 
+[54:8] पुकारने वाले की तरफ दौड़े जा रहेंगे होंगे और वही मुनकिरेन (जो दुनिया में इसका इन्कार करते थे)उसे वक्त कहेंगे के ये दिन तो बड़ा कहिन है 
+[54:9] इनसे पहले नूह की क़ौम झूठला चुकी है। उनहों ने हमारे बंदे को झूठा करार दिया और कहा के ये दीवाना है, और वो बुरी तरह झिडका गया 
+[54:10] आखिर-ए-कार उसने अपने रुब को पुकारा के "मैं मगलूब हो चूका, अब तू इनसे इंतकाम ले" 
+[54:11] तब हमने मौसला-धार बारिश से आसमान के दरवाज़े खोल दिये और ज़मीन को फाड़ कर चश्में में तबदील कर दिया 
+[54:12] और ये सारा पानी उस काम को पूरा करने के लिए मिल गया जो मुकद्दर हो चूका था 
+[54:13] और नूह को हमने एक तख्त (तख़्त) और कीलों (कीलों) वाली पर सवार कर दिया 
+[54:14] जो हमारी निगरानी में चल रही थी। ये था बदला उस शक्स की खातिर जिसकी ना-कादरी की गई थी 
+[54:15] उस कश्ती को हमने एक निशानी बना कर छोड़ दिया, फिर कोई है हिदायत कबूल करने वाला 
+[54:16] देखलो, कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तम्बीहत (चेतावनी) 
+[54:17] हमने कुरान को हिदायत के लिए आसान ज़रिया बना दिया है, फिर क्या है कोई हिदायत क़बूल करने वाला 
+[54:18] आद ने झुटलाया, तो देखलो के कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तंबीहाट (चेतावनी) 
+[54:19] हमने एक पैहम नहुसत (निरंतर दुर्भाग्य) के दिन साख तूफानी हवा उन्पर भेज दी जो लोगों को उठा उठा कर इस तरह फेंक रही थी 
+[54:20] जैसे वो जड़ (जड़ें) से उखाड़े हुए खजूर के तनी (चड्डी) माननीय 
+[54:21] पास देखो के कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तम्बीहत (चेतावनी) 
+[54:22] हमने कुरान को हिदायत के लिए आसाना ज़रिया बना दिया है, फिर क्या है कोई हिदायत क़बूल करने वाला 
+[54:23] समूद ने तम्बीहत को झुटलाया
+[54:24] और कहने लगे "एक अकेला आदमी जो हम ही में से है क्या अब हम उसके पीछे चलें? इसका इत्तिबाह हम कबूल करें तो इसके मानी ये होंगे के हम बहक गए हैं और हमारी अक्ल मारी गई है 
+[54:25] क्या हमारे दरमियान बस यहीं एक शक था जिसपर खुदा का जिक्र नाज़िल किया गया? नहीं, बलके ये पारले दर्जे का झूठा और बार-खुद गलत है” 
+[54:26] (हमने अपने पैगंबर से कहा) “कल ही इन्हें मालूम हुआ है के कौन पारले दर्जे का झूठा और बार खुद गलत है 
+[54:27] हम ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को इनके लिए फिटना बना कर भेज रहे हैं, अब जरा सब्र के साथ देख के इनका क्या अंजाम होता है 
+[54:28] इनको जता दे के पानी इनके और ऊंटनी (वह-ऊंटनी) के दरमियान तकसीम होगा और हर एक अपनी बारी के दिन पानी पर आएगा” 
+[54:29] आख़िर-ए-कार उन लोगों ने अपने आदमी को पुकारा और उसने इस काम का बेड़ा उठाया और ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को मार डाला 
+[54:30] फिर देख लो के कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तम्बीहत (चेतावनी) 
+[54:31] हमने बस एक ही धमाका छोड़ा और वो बड़े वाले की रोंधी हुई बाद के तरह भुस हो कर रह गया। (लो! हमने उन पर एक चिल्लाहट भेजी, और वे मवेशियों के बाड़े के निर्माता द्वारा (अस्वीकृत) सूखी टहनियों की तरह हो गए 
+[54:32] हमने कुरान को हिदायत के लिए आसान ज़रिया बना दिया है, अब है कोई हिदायत क़बूल करने वाला 
+[54:33] लूट की क़ौम ने तंबीहत को झुटलाया 
+[54:34] और हमने पत्थरो करने वाली हवा इस पर भेज दी। सिर्फ लुट के घर वाले उसे महफूज रहे [ 
+54:35] 
+उनको हमने अपने फजल से रात के पिछले पीहर बच्चा कर निकाल दिया। क़ौम के लोगों को हमारी पकड़ से ख़बरदार किया मगर वो सारी तंबीहत को मशकूक (संदिग्ध) समझ कर बातों में उड़ते रहे 
+[54:37] फिर उन्होन ने उसे अपने महमानो की हिफ़ाज़त से बाज़ रखने की कोशिश की। आख़िर-ए-कार हमने उनकी आंखें मूंद-दी (अंधा), के चक्खो अब मेरा अज़ाब और मेरी तम्बीहात का मज़ा 
+[54:38] सुबह सवेरे ही एक अटल अज़ाब ने उनको आ लिया 
+[54:39] चक्खो मजा अब मेरे अज़ाब का और मेरी तम्बीहात का 
+[54:40] हमने कुरान को है हिदायत के लिए आसान ज़रिया बना दिया है, पास है कोई हिदायत कबूल करने वाला 
+[54:41] और आल-ए-फिरौं के पास भी तम्बीहत आई थी 
+[54:42] मगर उनहों ने हमारी सारी निशानियों को झुटला दिया। आख़िर को हमने उन्हें पकड़ा जिसकी तरह कोई ज़बरदस्त क़ुदरत वाला पकड़ा है 
+[54:43] क्या तुम्हारे कुफ़र कुछ उन लोगों से बेहतर हैं? या आसमानी किताबों में तुम्हारे लिए कोई माफ़ी लिखी हुई है 
+[54:44] हां लोगों का कहना ये है कि हम एक मज़बूत जत्था (जमात) हैं, अपना बचाव कर लेंगे 
+[54:45] अंकरीब ये जत्था (जमात) सीख खा जाएगा और ये सब पीठ फिर कर भागते नजर आएंगे
+[54:46] बलके इनसे निमत्ने के लिए असल वादे का वक्त तो कयामत है और वो बड़ी आफत और ज्यादा तल्ख-सा-अत (बड़ी साख और कड़वी चीज) है 
+[54:47] ये मुजरिम लोग दर हकीकत गलत फहमी में मुबतला हैं और इनकी अक्ल मारी गई है 
+[54:48] जिस रोज़ ये मुँह के बल आग में घसीटते जाएंगे हमें रोज़ इनसे कहा जाएगा के अब छक्खो जहन्नुम की गोद का मजा 
+[54:49] हमने हर चीज़ एक तकदीर के साथ अदा की है 
+[54:50] और हमारा हुकुम बस एक ही हुकुम होता है और पलक झपकाते (पलक झपकाते हुए) वो अमल में आ जाता है 
+[54:51] तुम जैसे बहुत-सून को हम हलक कर चुके हैं। फिर है कोई हिदायत क़बूल करने वाला 
+[54:52] जो कुछ इन्हों ने किया है वो सब दफ्तरों (कार्यालय) में दर्ज है 
+[54:53] और हर छोटी बड़ी बात लिखी हुई मौजुद है 
+[54:54] नफ़रमानी से परहेज करने वाले यकीनन बागों और नहरों में होंगे 
+[54:55] सच्ची इज्जत की जगह, बदले ज़ीह-इक़तेदार बादशाह के करीब 
+
+सूरह 55: अर-रहमान (परोपकारी) 
+------------------------------------------------ 
+[55:1] रहमान ने 
+[55:2] क्या कुरान की तालीम दी है 
+[55:3] उसी ने इंसान को पढ़ाया 
+[55:4] और उसे बोलना सिखाया 
+[55:5] सूरज और चांद एक हिसाब के बंधन हैं 
+[55:6] और तारे और दरख्त सब सजदा-रीज हैं 
+[55:7] आसमान को उसने बुलंद किया और मिजान कायम करदी 
+[55:8] इसका तकाजा ये है के तुम मिजान में खलाल न डालो 
+[55:9] इन्साफ के साथ ठीक-ठीक तोलो (तौलो) और तराजू में डंडी (कंजूस) ना मारो 
+[55:10] जमीन को उसने सब मखलूकत (जीव) के लिए बनाया 
+[55:11] उसमें हर तरह के ब-कसरत लजीज फल हैं, खजूर के दरख्त हैं जिनके फल गिलाफों (शीथ्स) में लिपटे हुए हैं 
+[55:12] तरह तरह के गैले (मकई) हैं जिनमें भूसा भी होता है और दाना (अनाज) भी 
+[55:13] पस ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की किन नियमों को झुठलाओगे 
+[55:14] इंसान को उसने ठीकरी (कुम्हार) जैसे सुखे सादे (सड़ा हुआ) हुए गैरे से बनाया (मिट्टी की तरह [उस] मिट्टी के बर्तन 
+[55:15] और जिन को आग की लपट से पेदा किया 
+[55:16] पस ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब के रिश्तेदार अजायब-ए-कुदरत को झूठलाओगे 
+[55:17] डोनो मशरिक और डोनो मगरिब, सब का मालिक-ओ-परवरदिगार वही है 
+[55:18] पस ऐ जिन्न-ओ-इंस, तुम अपने रब के किन किन कुदरतों को झुटलोगे 
+[55:19] दो समंदरों (समुद्रों) को उसने छोड़ दिया के बहम मिल जायें 
+[55:20] फिर भी उनके दरमियान एक परदा हयाल (बाधा) है जिसे वो तजावुज़ (अपराध) नहीं करते 
+[55:21] पस ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की क़ुदरत के किन करिश्माओं को झूठलाओगे 
+[55:22] समंदरों से मोती और मोंगे (कोरल) निकलते हैं
+[55:23] पास ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की क़ुदरत के किन कमालात को झुठलाओगे 
+[55:24] और ये जहाज़ (जहाज) उसके हैं जो समंदर में पहाड़ों (पहाड़ों) की तरह ऊंचे उठे हैं 
+[55:25] पास ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब के साथ एहसानात को झुठलाओगे 
+[55:26] हर चीज़ जो इस ज़मीन पर है फ़ना (नाश) हो जाने वाली है 
+[55:27] और सिर्फ तेरे रुब की जलील-ओ-करीम ज़ात ही बाकी रहने वाली है 
+[55:28] पास ऐ जिन्न-ओ-इंस (इंसान), तुम अपने रब के कुदरतों के साथ कमाल से झूठ बोलोगे 
+[55:29] ज़मीन और आसमान में जो भी है सब अपनी हाजतें (ज़रूरतें) उसी से मांग रहे हैं, हर आन वो नई शान में है 
+[55:30] पास ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की किन-किन सिफत-ए-हमीदा को झुठलाओगे 
+[55:31] ऐ ज़मीन के बोझो(भार), अनकरीब हम तुमसे बाज़ पुर्स (सवाल करते हुए) करने के लिए फ़ारिग़ हुए जाते हैं 
+[55:32] (फिर देख लेंगे के) तुम अपने रुब के किन किन एहसानात को झुटलाते हो 
+[55:33] ऐ गिरो-ए-जिन्न-ओ-इन्सा (इंसान), गर तुम ज़मीन और आसमान की सरहदों से निकल कर भाग सकते हो तो भाग देखो, नहीं भाग सकते इसके लिए बड़ा ज़ोर चाहिए 
+[55:34] अपने रब की किन किन क़दरतों को तुम झूठलाओगे 
+[55:35] (भागने की कोशिश करोगी तो) तुमपर आग का शोला और धुआं (धुआं) छोड़ दिया जाएगा जिसका तुम मुकाबला ना कर सकोगे 
+[55:36] पस ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की तरह कुदरतों का इंकार करोगी 
+[55:37] फिर (क्या बनेगा हमारा वक्त) जब आसमां फटेगा (बंटवारा) और लाल चामदे (त्वचा) की तरह सुर्ख (लाल) हो जाएगा 
+[55:38] ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान) (हम वक्त) तुम अपने रब की रिश्तेदार कुदरतों को झुटलाओगे 
+[55:39] हमें रोज किसी इंसान और किसी जिन से उसका गुनाह पूछने के लिए जरूरी न होगी 
+[55:40] फिर (देख लिया जाएगा के) तुम दोनो गिरो ​​अपने रब के साथ एहसानात का इंकार करते हो 
+[55:41] मुजरिम वहां अपने चेहरों से पहचान के लिए जाएंगे और उन्हें पेशानी के बाल और पांव पकड़ पकड़ कर घसीटा जाएगा 
+[55:42] हमें वक्त तुम अपने रुब की तरह कुदरतों को झुठलाओगे 
+[55:43] (हमें वक्त कहा जाएगा) ये वही जहन्नुम है जिसको मुजरीमीन झूठ करार दिया करते थे 
+[55:44] उसी जहन्नुम और खौलते (उबलते) पानी के दरमियान वो गर्दिश करते रहेंगे 
+[55:45] फिर अपने रुब की किन किन कुदरतों को तुम झुठलाओगे 
+[55:46] और हर उस शक्स के लिए जो अपने रुब के हुजूर पेश होने का खौफ (डर) रखता हो, दो बाग (बगीचे) हैं 
+[55:47] अपने रुब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे 
+[55:48] हरी भरी डालियों से भरपुर 
+[55:49] अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे 
+[55:50] दोनों बागों में दो चश्मे (झरने) रावन 
+[55:51] अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे
+[55:52] दोनों बागों में हर फल की दो क़िस्में 
+[55:53] अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे 
+[55:54] जन्नती लोग ऐसे फरशोन पर तकिये लगा के बैठेंगे जिनके अस्तर दबीज रेशम (रेशम ब्रोकेड) के होंगे, और बागों की डालियां फालों से झुकी पढ़ रही होंगी 
+[55:55] अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे 
+[55:56] नियामतों के दरमियां शर्मिली निगाहों वलियों होंगी जिन्हे जन्नतियों से पहले कोई इंसान या जिन्न ने चुवा न होगा 
+[55:57] अपने रब के किन किन-किन इनामों को तुम झूठलाओगे 
+[55:58] ऐसी खूबसूरत जैसी हीरे (हीरे) और मोती 
+[55:59] अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झूठलाओगे 
+[55:60] नेकी का बदला, नेकी के सिवा और क्या हो सकता है 
+[55:61] फिर ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), अपने रब के रिश्तेदारों का इनाम-ए-हमीदा का तुम इंकार करोगी 
+[55:62] और उन दो बाघों के अलावा दो बाग और होंगे 
+[55:63] अपने रुब के रिश्तेदारों का इनाम करो तुम झूठलाओगे 
+[55:64] घने सर-सब्ज़ ओ शादाब बाग 
+[55:65] अपने रुब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे 
+[55:66] दोनो बागों में दो चश्में (झरनों) फव्वारों की तरह उबलते (उबलते) हुए 
+[55:67] अपने रुब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे 
+[55:68] उन में बा-कसरत फल और खजूरें और अनार (अनार) 
+[55:69] अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे 
+[55:70] नियामतों के दरमियान में खूब सीरत और खूबसूरत बीवियां 
+[55:71] अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे 
+[55:72] खीमो (टेंट) में ठहरी हुई हूरें (लड़कियां) 
+[55:73] अपने रुब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे 
+[55:74] जन्नतियों से पहले कभी किसी इंसान ने या जिन्न ने उनको न छुआ (स्पर्श) होगा 
+[55:75] अपने रुब के किन-किन इनाम को तुम झुटलाओगे 
+[55:76] वो जन्नती सब्ज़-क़लीनो (हरी गद्दियाँ) और नफीस ओ नादिर फरशोन (खूबसूरत कालीन) पर तकिए लगा के बैठेंगे 
+[55:77] अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुठलाओगे 
+[55:78] बड़ी बरकत वाला है तेरे रुब-ए-जलील-ओ-करीम (महिमा और महिमा) का नाम 
+
+सूरह 56: अल-वाकिआ (घटना) 
+------------------------------------------------ 
+[56:1] जब वो होने वाला वाकिया पेश आ जाएगा 
+[56:2] तो कोई उसके वक्ह (घटना) को झूठलाने वाला न होगा 
+[56:3] वो ताह-ओ-बाला (पास्त और बुलंद) करदेने वाली आफत होगी 
+[56:4] ज़मीन हमें वक़्त एक बार ही हिला डाली जाएगी 
+[56:5] और पहाड़ इस तरह रज़ा रेज़ा करदिये जायेंगे 
+[56:6] के परगंदा (बिखरा हुआ) गुबर (धूल) बन कर रह जायेंगे 
+[56:7] तुम लोग हम वक़्त तीन गिरोहों (जमात) में तकसीम हो जाओगे 
+[56:8] दयेन बाज़ू वाले, तो दिनें बाज़ू वालों (के खुश-नसीबी) का क्या कहना
+[56:9] और बाज़ू वाले, तो बाज़ू वालों (की बदनसीबी का) क्या ठिकाना 
+[56:10] और आगे वाले तो फिर आगे वाले ही हैं 
+[56:11] वही तो मुकर्रब (अल्लाह के सबसे करीब) लोग हैं 
+[56:12] नियामत भारी जन्नतों में रहेंगे 
+[56:13] अगलों में से बहुत होंगे 
+[56:14] और पिचलों में से कम 
+[56:15] मुरास्सा तखतों पर (सजे हुए सिंहासन पर) 
+[56:16] ताकिये लगायें आमने सामने बैठेंगे 
+[56:17] उनकी मजलिसों में आबादी लड़के शराब-ए-चश्मा-ए जारी से 
+[56:18] लब्रेज़ प्याले और कंतर (जुग) और सागर के लिए दौड़ते फिरते होंगे 
+[56:19] जिसे पी कर ना उनका सर चकराएगा ना उनका अक्ल में फतूर (नशे की लत) आएगा 
+[56:20] और वो उनके सामने तरह के लज़ीज़ फल (फल) पेश करेंगे जिसे चाहे चुन ले 
+[56:21] और परिन्दों के गोश्त पेश करेंगे के जिस परिंदे का चाहे इस्तिमाल करें 
+[56:22] और उनके लिए खुबसूरत आंखों वाली हूरें होंगी 
+[56:23] ऐसी हसीं जैसे छुपा कर रखे हुए मोती 
+[56:24] ये सब कुछ उन अमल की जजा के तौर पर उन्हें मिलेगा जो वो दुनिया मैं करते रहे थे 
+[56:25] वहां वो कोई बेहद कलाम या गुनाह की बात न सुनेंगे 
+[56:26] जो बात भी होगी ठीक ठीक होगी 
+[56:27] और दायें बाजू वाले, दायें बाजू वालों की खुश नसीब का क्या कहना 
+[56:28] वो बे-खर (कांटा रहित) बेरियों (लोटे के पेड़) 
+[56:29] और तेह बार तेह चढ़े हुए केलों (केले) 
+[56:30] और दूर तक फैली हुई छाँव (छाया) 
+[56:31] और हर दम रावन (घूसते हुए) पानी 
+[56:32] और कभी ख़तम न होने वाले 
+[56:33] और बे रोक-टोक मिलने वाले बा-कसरत फलन (फल) 
+[56:34] और ऊंची निशिस्ट गाहों (ऊंचे सिंहासन) में होंगे 
+[56:35] उनकी बिवियों को हम खास तौर पर नए सिरे से पैदा करेंगे 
+[56:36] और उन्हें बकीरा (कुंवारी) बना देंगे 
+[56:37] अपने शोहरों कि आशिक और उमर में हमसिन (समान उम्र) 
+[56:38] ये कुछ दिन बाज़ू वालों के लिए हैं 
+[56:39] वो एगलों में से बहुत होंगे 
+[56:40] और पिचलों में से भी बहुत 
+[56:41] और बाएँ (बाएँ) बाज़ू वाले, बाएँ बाज़ू वालों की बदनसीबी का क्या पूछना 
+[56:42] वो लू की लपट (चिलचिलाती हवा के बीच) और खुलते (उबलते) हुए पानी 
+[56:43] और काले धुएं (धुआं) के साये में होंगे 
+[56:44] जो ना ठंडा होगा ना आराम दे 
+[56:45] ये वो लोग होंगे जो इस अंजाम को पहनेंगे से पहले खुश हाल थे 
+[56:46] और गुनाह-ए-अज़ीम पर इसरार करते थे 
+[56:47] कहते थे "क्या जब हम मर कर खाक हो जाएंगे और हदियों का पंजर रह जाएंगे तो फिर उठ खड़े होंगे 
+[56:48] और क्या हमारे वो बाप दादा भी उठेंगे जो पहले गुज़र चुके हैं?”
+[56:49] ऐ नबी इन लोगों से कहो, यकीनन अगले और पिछले सब 
+[56:50] एक दिन जरूर जमा किए जाने वाले हैं जिसका वक्त मुकर्रर किया जा चुका है 
+[56:51] फिर ऐ गुमराहों और झूठलाने वालों 
+[56:52] तुम शजर-ए-जक्कम की गीज़ा खाने वाले हो 
+[56:53] उसी से तुम पैठ भरोगे 
+[56:54] और ऊपर से खौलता (उबलता हुआ) हुआ पानी 
+[56:55] टोंस (प्यास) लगे हुए ऊंट (ऊंट) की तरह पियोगी 
+[56:56] यहीं बैठें वालों की ज़ियाफत का सामान रोज-ए-जजा में 
+[56:57] हमने तुम्हें भुगतान किया है फिर क्यों तस्दीक (पुष्टि) नहीं करते 
+[56:58] कभी तुमने गौर किया, ये नुत्फा (शुक्राणु) जो तुम डालते हो 
+[56:59] उसे बच्चा तुम बनाते हो या उसके बनाने वाले हम हैं 
+[56:60] हमने तुम्हारे दरमियान मौत को तकसीम किया है, और हम इसे अजीज नहीं है 
+[56:61] के तुम्हारी शकलें बदल दें और किसी ऐसी शक्ल में तुम्हें पैदा कर दें जिसको तुम नहीं जानते 
+[56:62] अपनी पहली अदाइश को तो तुम जानते हो, फिर क्यों सबक नहीं लेते 
+[56:63] कभी तुमने सोचा, ये बीज (बीज) जो तुम बोते हो 
+[56:64] इनसे खेतियां तुम उगते हो या उनके उगने वाले हम हैं 
+[56:65] हम चाहें तो उन खेतों को भूस (मलबा) बना कर रख दें और तुम तरह-तरह की बातें बनाते रह जाओ 
+[56:66] के हम पर तो उल्टी चाटी पड़ गई (लो! हम कर्ज से दबे हुए हैं) 
+[56:67] बलके हमारे तो नसीब ही फूटे हुए हैं 
+[56:68] कभी तुमने आंखें खोल कर देखा, ये पानी जो तुम पीते हो 
+[56:69] इसे तुमने बादलों से बरसाया है या इसके बरसाने वाले हम हैं 
+[56:70] हम चाहें तो isey सच खरी (कड़वा) बना कर रख दें, फिर क्यों तुम शुकर गुजर नहीं होते 
+[56:71] कभी तुमने ख्याल किया, ये आग जो तुम सुलगते हो 
+[56:72] इसका दर्द तुम ने पेदा किया है या इसके पेदा करने वाले हम हैं 
+[56:73] हमने उसको याद-दिहानी (रिमाइंडर) का ज़रिया और हाजत-मंदों (जरूरतमंद) के लिए सामान-ए-ज़ीस्ट (प्रावधान) बनाया है 
+[56:74] पास ऐ नबी, अपने रब-ए-अज़ीम के नाम की तस्बीह करो 
+[56:75] पास नहीं मैं कसम खाता हूं तारों के मवाके, आदि) की 
+[56:76] अगर तुम समझो तो ये बहुत बड़ी क़सम है 
+[56:77] के ये एक बुलंद पाया कुरान है 
+[56:78] एक महफ़ूज़ किताब में सब्त (लिखा हुआ) 
+[56:79] जिसे मुतहरीन (शुद्ध) के सिवा कोई छू नहीं सकता 
+[56:80] ये रब्ब-उल-आलमीन का नाज़िल करदा है 
+[56:81] फिर क्या इस कलाम के साथ तुम बे-अतनयी (उदासीन) बारात-ते हो 
+[56:82] और इस नियामत में अपना हिसा तुमने ये रक्खा है के इसी झूठलाते हो 
+[56:83] तो जब मरने वाले की जान हलक तक पहुंच चुकी होती है है 
+[56:84] और तुम आँखों से देख रहे हो के वो मर रहा है
+[56:85] हमें वक्त तुम्हारे ब-निस्बत हम उसके ज्यादा करीब होते हैं मगर तुमको नजर नहीं आती 
+[56:86] अब अगर तुम किसी के महकूम नहीं हो और अपने इस ख्याल में सच्चे हो 
+[56:87] हमें वक्त उसकी निकलती हुई जान को वापस क्यों नहीं ले आते 
+[56:88] फिर वो मरने वाला अगर मुकर्रबीन (अल्लाह के करीब) में से हो 
+[56:89] तो उसके लिए राहत और उम्र रिज़क और नियामत भरी जन्नत है 
+[56:90] और अगर वो अशाब-ए-यमीन में से हो 
+[56:91] तो उसका इस्तकबाल (स्वागत) यूं होता है के सलाम है तुझ, तू असहाब-उल-यमीन (दाहिनी ओर के लोग) में से है 
+[56:92] और अगर वो झूठलाने वाले गुमराह लोगों में से हो 
+[56:93] तो उसकी तवाज़ू के लिए खौलता (उबलता हुआ) पानी है 
+[56:94] और जहन्नुम में झोंका जाना 
+[56:95] ये सब कुछ कताई हक़ है 
+[56:96] पास ऐ नबी अपने रुब-ए-अज़ीम के नाम की तस्बीह करो 
+
+सूरह 57: अल-हदीद (लोहा) 
+------------------------------------------------ 
+[57:1] अल्लाह की तस्बीह है हर उस चीज़ ने जो ज़मीन और आसमान में है, और वही ज़बरदस्त दाना (बुद्धिमान) है 
+[57:2] ज़मीन और आसमान की सल्तनत का मालिक वही है, ज़िंदगी बक्शता है और मौत देता है, और हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है 
+[57:3] वही अव्वल भी है और आख़िर भी, और ज़ाहिर भी है और मख़फ़ी (हिद्दीन) भी, और वो हर चीज़ का इल्म रखता है 
+[57:4] वही है जिसने आसमान और ज़मीन को (छह) दिनों में पेदा किया और फिर अर्श पर जलवा फरमा हुआ। उसके इल्म में है जो कुछ ज़मीन में जाता है और जो कुछ उसे निकलता है, और जो कुछ आसमान से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है। वो तुम्हारे साथ है जहाँ भी तुम हो। जो काम भी करते हो उसे वो देख रहा है 
+[57:5] वही ज़मीन और आसमान की बादशाही का मालिक है और तमाम मामले फैसले के लिए उसकी तरफ रूजू किये जाते हैं 
+[57:6] वही रात को दिन में और दिन को रात में दाख़िल करता है, और दिलों को के छुपे हुए राज़ तक जानता है 
+[57:7] ईमान लाओ अल्लाह और उसके रसूल पर और ख़र्च करो उन चीज़ों में से जिनपर उसने तुमको ख़लीफ़ा बनाया है। जो लोग तुम में से ईमान लाएंगे और माल खर्च करेंगे उनके लिए बड़ा अजर है 
+[57:8] तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह पर ईमान नहीं लाते हालंके रसूल तुम्हें अपने रब पर ईमान लाने की दावत दे रहा है, और वो तुमसे अहद (संविदा) ले चूका है, अगर तुम वकायी मानोगे वाले हो 
+[57:9] वाह अल्लाह हाय तो है जो अपने बंदे पर साफ साफ आयतें नाज़िल कर रहा है ता-के तुम्हें तारीख़ों (अंधेरे) से निकाल कर रोशनी में ले आये। और हक़ीक़त ये है के अल्लाह तुमपर निहायत शफ़ीक़ और मेहरबान है
+[57:10] आख़िर क्या वजह है कि तुम अल्लाह की राह में ख़र्च नहीं करते, ज़मीन और आसमान की मीरास (विरासत) अल्लाह ही के लिए है। तुम में से जो लोग फतह के बाद खर्च और जिहाद करेंगे वो कभी उन लोगों के बराबर नहीं हो सकते जिन्होन ने फतह से पहले खर्च और जिहाद किया है। जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बा-ख़बर है 
+[57:11] कौन है जो अल्लाह को क़र्ज़ दे? अच्छा क़र्ज़ ता-के अल्लाह उसे कै गुनाह बड़ा कर वापस दे। और उसके लिए बेहतरीन अजर है 
+[57:12] उस दिन जबके तुम मोमिन मर्दन और औरतों को देखोगे के उनका नूर उनके आगे आगे और उनके दिन जानिब दौड़ रहा होगा (उन्हें कहा जाएगा के) आज बशारत (खुशखबरी) है। तुम्हारे लिए जन्नतें होंगी जिनके बारे में खास बातें नहीं होंगी, जिन में वो हमेशा रहेंगे। यही है बड़ी कामयाबी 
+[57:13] हमें रोज़ मुनाफिक मर्दों और औरतों का हाल ये होगा के वो मोमिनो से कहेंगे ज़रा हमारी तरफ देखो ता-के हम तुम्हारे नूर से कुछ फ़ायदा उठायें। मगर उनसे कहा जाएगा पीछे हट जाओ, अपना नूर कहीं और तलाश करो। फिर उनके दरमियान एक दीवार होल करदी जाएगी जिसमें एक दरवाजा होगा उस दरवाज़े के अंदर रहमत होगी और बाहर अज़ाब 
+[57:14] वो मोमिनो से पुकार पुकार कर कहेंगे क्या हम तुम्हारे साथ ना थे? मोमिन जवाब देंगे हां, मगर तुमने अपने आप को खुद फिटने में डाला, मौका परस्त की, शक्क में पड़े रहे, और झूठी तवक्कुअत (उम्मीदें) तुम्हें फरेब देती रही यहां तक ​​के अल्लाह का फैसला आ गया। और आखिरी वक्त तक वो बड़ा धोखा बाज़ तुम्हें अल्लाह के मामले में धोखा देता रहा 
+[57:15] लिहाज़ा आज ना तुमसे कोई फ़िदिया कबूल किया जाएगा और ना उन लोगों से जिन्हों ने खुला खुला कुफ्र किया था। तुम्हारा ठिकाना जहन्नुम है. वही तुम्हारी खबर-गीरी करने वाली है और ये बद्तरीन अंजाम है 
+[57:16] क्या ईमान लाने वालों के लिए अभी वो वक्त नहीं आया के उनके दिल अल्लाह के जिक्र से पिगलें और उसके नाज़िल करदा हक के आगे झुकें और वो उन लोगों की तरह न हो जाएं जिन्हें पहली किताब दी गई थी, फिर एक लंबी मुद्दत उन पर गुजर गई तो उनका दिल सख्त हो गया और आज उनमें से अक्सर फासीक बने हुए हैं 
+[57:17] खूब जान लो के अल्लाह जमीन को उसकी मौत के बाद जिंदगी बक्शता है, हमने निशानियां तुमको साफ साफ दिखाया है, शायद के तुम अक़ल से काम लो 
+[57:18] मर्दन और औरतों में से जो लोग सदक़ात (दान) देने वाले हैं और जिन्होन ने अल्लाह को कर्ज़-ए-हसन दिया है, उनको यकीन कई गुनाह कर दिया जाएगा और उनके लिए बेहतरीन अजर है 
+[57:19] और जो लोग अल्लाह और उसके रसूलन पर ईमान लाए हैं वही अपने रब के नाज़दीक सिद्दीक और शहीद हैं। उनके लिए उनका अजर और उनका नूर है। और जिन लोगों ने कुफ़्र किया है और हमारी आयतों को झुटलाया है वो दोज़खी है
+[57:20] खूब जान लो के ये दुनिया की जिंदगी इसके सिवा कुछ नहीं के एक खेल और दिल-लगी और जाहिरी टिप टॉप और तुम्हारे आपस में एक दूसरे पर फक्र जताना और माल-ओ-औलाद में एक दूसरे से बढ़कर जाने की कोशिश करना है।इसकी मिसाल ऐसी है जैसी एक बारिश हो गई तो उसे पैदा होने वाली नबातात (वनस्पति) को देख कर काश्त-कार (किसान) खुश हो गई। फिर वही खेती पक जाती है और तुम देखते हो कि वो जर्द (पीली) हो गई है फिर वो भूस (चूरा चुरा/उखड़ जाती है) बनकर रह जाती है। इस्के बराक्स आख़िरत वो जगह है जहाँ सख्त अज़ाब है और अल्लाह की मगफिरत और उसकी खुशनुदी है। डंक्या की जिंदगी एक धोखे के टट्टी (धोखे का मतलब) के सिवा कुछ नहीं 
+[57:21] दौड़ो (रेस) और एक दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश करो अपने रब की मगफिरत और उसकी जन्नत की तरफ जिसकी वुस्सत (चौड़ाई) आसमान-ओ-जमीन जैसी है। जो मुहैय्या हो गई है उन लोगों के लिए जो अल्लाह और उसके रसूलन पर ईमान लाए हों। ये अल्लाह का फ़ज़ल है, जिसे चाहता है अता फ़र्माता है, और अल्लाह बदे फ़ज़ल वाला है 
+[57:22] कोई मुसीबत ऐसी नहीं है जो ज़मीन में या तुम्हारे अपने नफ़्स पर नाज़िल होती हो और हमने उसको अदा करने से पहले एक किताब में लिख न रखा हो। ऐसा करना अल्लाह के लिए बहुत आसान काम है 
+[57:23] (ये सब कुछ इसलिए है) ता-के जो कुछ भी नुक्सान तुम्हें हो उस पर तुम दिल-शिकस्ता (शोक) न हो और जो कुछ अल्लाह तुम्हें अता फरमाये उसपर फूल ना जाओ। अल्लाह ऐसे लोगों को पसंद नहीं करता जो अपने आप को बड़ी चीज समझता है और फक्र जताता है 
+[57:24] जो खुद बुखल (निगार्ड/कंजुसी) करते हैं और दूसरों को बुखल पर उक्साते हैं। अब अगर कोई रु-गर्दनी (मुंह फेरना) करता है तो अल्लाह के लिए बे-नियाज़ और सातोदा सिफत (बेहद प्रशंसनीय) है 
+[57:25] हमने अपने रसूलों को साफ-साफ निशानियां और हिदायत के साथ भेजा, और उनके साथ किताब और मिज़ान (संतुलन) नाज़िल की ताकाय लोग इन्साफ पर कायम माननीय और लोहा (आयरन) उतारा जिसमें बड़ा ज़ोर है और लोगों के लिए मुनाफ़ा है। ये इसलिए किया गया है कि अल्लाह को मालूम हो जाए कि कौन उसको देखे बिना उसकी और उसके रसूलों की मदद करता है। यकीनन अल्लाह बड़ी कुव्वत वाला और ज़बरदस्त है 
+[57:26] हमने नूह और इब्राहीम को भेजा और उन दोनों की नाक में नबुवत और किताब रख दी फिर उनकी औलाद में से किसी ने हिदायत इख्तियार की और बहुत से फासिक हो गए 
+[57:27] उनके बाद हमने पै डर पै (उत्तराधिकार) अपने रसूल भेजे, और सबके बाद ईसा इब्न-ए-मरियम को माबूस किया और उसको इंजील अता की, और जिन लोगों ने उसकी जोड़ी इख्तियार की उनके दिलों में हमने तरस (कोमलता) और रहम डाल दिया। और रहबनियात (मठवाद) उन्होन ने खुद इजाद करली, हमने उसे अनपर फर्ज नहीं किया था। मगर अल्लाह की ख़ुशनुदी की तालाब में उन्होन ने आप ही ये बिदात निकाली और फिर इसकी पबन्दी करने का जो हक़ था उसे अदा ना किया। उनमे से जो लोग ईमान लाए हुए थे उनका अजर हमने उनको अता किया, मगर उनमे से अक्सर लोग फासीक हैं
+[57:28] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो और उसके रसूल पर ईमान लाओ। अल्लाह तुम्हें अपनी रहमत का दोहरा हिसा अता फरमाएगा और तुम्हें वही नूर बख्शेगा जिसकी रोशनी में तुम चलोगे, और तुम्हारे कसूर माफ कर देंगे। अल्लाह बड़ा माफ करने वाला और मेहरबान है 
+[57:29] (तुमको ये रवीश इख्तियार करनी चाहिए) ता-के एहले किताब को मालूम हो जाए के अल्लाह के फज़ल पर उनका कोई इजारा (नियंत्रण/इख्तियार) नहीं है, और ये के अल्लाह का फजल उसके अपने ही हाथ में है, जिसे चाहता है अता फरमाता है। और वो बदे फ़ज़ल (इनाम) वाला है 
+
+सूरह 58: अल-मुजादिलाह (द विनती करने वाली महिला) 
+------------------------------------------------ 
+[58:1] अल्लाह ने सुन लिया हमें औरत की बात जो अपने शोहर के मामले में तुमसे तकरार कर रही है और अल्लाह से फरियाद की जाती है। 
+[58:2] तुम में से जो लोग अपनी बीवियों से ज़िहार (अपनी पत्नियों को अपनी मां घोषित करके तलाक दे देते हैं) करते हैं उनकी बीवियां उनकी मां नहीं हैं। उनकी मांएं तो वही हैं जिन्हों ने उनको जाना है। ये लोग एक सच्चा साथी और झूठी बात कहते हैं। और हक़ीक़त ये है के अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला और दरगुज़र फ़रमाने वाला है 
+[58:3] जो लोग अपनी बीवीयों से ज़िहार करें फिर अपनी हमसे बात से रूजू (वापस जाने के लिए) करें जो उन्होन ने कही थी, तो कबूल इसके के दोनों एक दूसरे को हाथ लगायें, एक गुलाम आज़ाद करना होगा. इस्से तुमको हिदायत की जाती है, और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बख़बर है 
+[58:4] और जो शक्स गुलाम ना पाए वो दो माहीन के पै डर पै (लगातार) रोज़े रक्खे क़बल इसके के दोनों एक दूसरे को हाथ लगायें और जो इसपर भी कादिर ना हो वो 60 मिस्किनो को खाना खिलाये. ये हुकुम इसलिए दिया जा रहा है कि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ। ये अल्लाह की मुकर्रर की हुई हदें (सीमाएं) हैं, और काफिरों के लिए दर्दनाक सजा है 
+[58:5] जो लोग अल्लाह की और उसके रसूल की मुखालफत करते हैं वो उसकी तरह ज़लील-ओ-ख़्वार कर दिए जाएंगे जिस तरह उनसे पहले के लोग ज़लील-ओ-ख़्वार किए जा चुके हैं। हमने साफ साफ आयतें नाज़िल कर दी हैं, और काफिरों के लिए ज़िल्लत का अज़ाब है 
+[58:6] उस दिन (ये ज़िल्लत का अज़ाब होना है) जब अल्लाह सबको फिर से जिंदा करके उठाएगा और यहीं बता देगा के वो क्या कुछ करके आए हैं। वो भूल गए हैं मगर अल्लाह ने सबका किया धारा गिन-गिन कर महफूज़ कर रखा है। और अल्लाह एक चीज़ पर शाहिद (गवाह) है 
+[58:7] क्या तुमको खबर नहीं है कि ज़मीन और आसमान की हर चीज़ का अल्लाह को इल्म है? कभी ऐसा नहीं होता के तीन आदमियों में कोई सरगोशी हो (चौथा) अल्लाह न हो, या पांच आदमियों में सरगोशी हो और उनके अंदर चट्टा (छठा) अल्लाह न हो, खुफिया बात करने वाला ख्वा इसे कम हो या ज्यादा जहां कहीं भी वो हो, अल्लाह उनके साथ होता है. फिर कयामत के रोज़ वो उनको बता देगा के अनहोन ने क्या कुछ किया है। अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है
+[58:8] क्या तुमने देखा नहीं उन लोगों को जिन्होंने सरगोशियां करने से मन करदिया गया था फिर भी वो वही हरकत किए जाते हैं जैसे उन्हें मन किया गया था? ये लोग चुप चुप कर आपस में गुनाह और ज्यादती और रसूल की नफ़रमानी की बातें करते हैं। और जब तुम्हारे पास आते हैं तो तुम्हें हमारी तरफ से सलाम करते हैं जिस तरह अल्लाह ने तुम्हारे पास सलाम नहीं किया है, और अपने दिलों में कहते हैं "हमारी इन बातों पर अल्लाह हमें अज़ाब क्यों नहीं देता"। उनके लिए जहन्नुम ही काफी है, उसका वो इंधन (ईंधन) बनेगा, बड़ा ही बुरा अंजाम है उनका 
+[58:9] ऐ लोग जो ईमान लाए हो जब तुम आपस में पोशिदा बात करो तो गुनाह और ज्यादती और रसूल की नफरमानी की बातें नहीं, बल्कि नेकी और तकवा की बातें करो और हमसे खुदा से डरते रहो जिसके हुजूर तुम्हें हश्र में पेश होना है 
+[58:10] काना-फूसी (फुसफुसाते हुए) तो एक शैतानी काम है, और वो इस्ली की जाति है के ईमान लेन वाले लोग उससे रंजीदा होन, हालंके बे-इज़ान-ए-खुदा (अल्लाह की इच्छा को छोड़कर) वो उन्हें कुछ भी नुक्सान नहीं पाहुंचा सकती, और मोमिनो को अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए 
+[58:11] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुमसे कहा जाए के अपनी मजलिसों में जगह बनाओ तो जगह बनाओ, अल्लाह तुम्हें कुशादगी बख्शेगा। और जब तुमसे कहा जाए के उठ जाओ तो उठ जया करो, तुम में से जो लोग ईमान रखने वाले हैं और जिनको इल्म बख्शा गया है, अल्लाह उनको बुलंद दर्जे अता फरमाएगा। और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह को उसकी खबर है 
+[58:12] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम रसूल से तख्लिए (गोपनीयता) में बात करो तो बात करने से पहले कुछ सदका दो। ये तुम्हारे लिए बेहतर और पाकीजा-तार है। अलबत्ता अगर तुम सदका देने के लिए अल्लाह गफूर-ओ-रहीम के लिए कुछ न पाओ 
+[58:13] क्या तुम डर गए इस बात से (गोपनीयता) में गुफ्तगू करने से पहले तुम्हें सदका देने होंगे? अच्छा, अगर तुम ऐसा न करो और अल्लाह ने तुमको इसे माफ कर दिया तो नमाज़ कायम करते रहो, ज़कात देते रहो और अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करते रहो। तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसे बख़बर है 
+[58:14] क्या तुमने देखा नहीं उन लोगों को जिन्हों ने दोस्त बनाया है एक ऐसे गिरोह (लोगों) को जो अल्लाह का मगज़बान (क्रोध) है? वो ना तुम्हारे हैं ना उनके, और वो जान बूझ कर झूठी बात पर कसमें खाते हैं 
+[58:15] अल्लाह ने उनके लिए खुद अज़ाब मुहैय्या कर रखा है। बड़े ही बुरे कलाकार हैं जो वो कर रहे हैं 
+[58:16] उन्होन ने अपनी कसमों को ढाल बना रखा है जिसकी आड़ में वो अल्लाह की राह से लोगों को रोकते हैं। इसपर उनके लिए ज़िल्लत का अज़ाब है 
+[58:17] अल्लाह से बचने के लिए ना उनके माल कुछ काम आएंगे ना उनकी औलाद। वो दोज़ख़ के यार हैं, उसमें वो हमेशा रहेंगे
+[58:18] जिस रोज़ अल्लाह उन सबको उठाएगा, वो उसके सामने भी उसकी तरह कसमें खाएंगे, जिस तरह तुम्हारे सामने खड़े हैं, और अपने नज़दीक ये समझेंगे के इस तरह उनका कुछ काम बन जाएगा। ख़ूब जान लो वो पारले दराज़ के झूठे हैं 
+[58:19] शैतान उस पर मुसल्लत हो चूका है और उसने खुदा की याद उनके दिल से भुला दी है।वो शैतान की पार्टी के लोग हैं। ख़बरदार हूँ, शैतान की पार्टी वाले ही खसरे में रहने वाले हैं 
+[58:20] यकीनन ज़लील तारीन मखलूक़त में से हैं वो लोग जो अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला करते हैं 
+[58:21] अल्लाह ने लिख दिया है कि मैं और मेरे रसूल ग़ालिब होकर रहेंगे। फिल वाकी अल्लाह जबरदस्त और जोरावर (सबसे मजबूत) है 
+[58:22] तुम कभी ये ना पाओगे के जो लोग अल्लाह और आखिरी पर ईमान रखने वाले हैं वो उन लोगों से मुहब्बत करते हैं जिन्होन ने अल्लाह और उसके रसूल की मुखालफत की है, ख्वा वो उनके बाप हूं, हां उनके बेटे, हां उनके भाई हां उनके एहले खानदान। ये वो लोग हैं जिनके दिलों में अल्लाह ने ईमान सब्त (लिखा/लिखा) कर दिया है और अपनी तरफ से एक रूह अता करके उनको कुव्वत बख्शी है, वो उनको ऐसी जन्नत में दाख़िल करेगा जिनके बारे में खास बातें होती होंगी। उनमें वो हमेशा रहेंगे. अल्लाह उन से रज़ी (प्रसन्न) हुआ और वो अल्लाह से रज़ी हुए। वो अल्लाह की पार्टी के लोग हैं। ख़बरदार रहो, अल्लाह की पार्टी वाले ही फलाह पैने वाले हैं 
+
+सूरह 59: अल-हश्र (द निर्वासन) 
+------------------------------------------------ 
+[59:1] अल्लाह ही की तस्बीह की है हर उस चीज़ ने जो आसमान और ज़मीन में है, और वही ग़ालिब और हकीम है 
+[59:2] वही है जिसने एहले किताब काफिरों को पहले ही हमले में उनके घरों से निकल बाहर किया।तुम्हें हरगिज ये गुमां ना था के वो निकल जाएंगे और वो भी ये समझे बैठे थे के उनकी गड़ियां (किले) उन्हें अल्लाह से बचा लेंगी।मगर अल्लाह ऐसे रुख से उन पर आया जिधर उनका ख्याल भी ना गया था. उसने उनके दिलों में रोब (आतंक) डाल दिया, नतीजा ये हुआ के वो खुद अपने हाथों से भी अपने घरों को बर्बाद कर रहे थे और मोमिनो के हाथों को भी बर्बाद करवा रहे थे। पस इब्रत हासिल करो ऐ दीधा-ए-बीना (समझदार आंखें) रखने वालों 
+[59:3] अगर अल्लाह ने उनके हक़ में जिला वतनी (निर्वासन) ना लिख ​​दी होती तो दुनिया ही में वो उन्हें अज़ाब दे देता। और आख़िरत में तो उनके लिए दोज़ख का अज़ाब है हाय 
+[59:4] ये सब कुछ इसलिए हुआ के उनको अल्लाह ने और उसके रसूल का मुक़ाबला किया। और जो भी अल्लाह का मुकाबला करे अल्लाह उसको सजा देने में बहुत सक्षम है 
+[59:5] तुम लोगों ने खजूरों (खजूरों) के जो दरख्त काटे या जिनको अपने जदों (जड़ों) पर खड़ा रहने दिया, ये सब अल्लाह ही के ईज़ान से थे और (अल्लाह ने ये इज़ान इस्लिये दिया) ता-के फ़ासीकों को ज़लील-ओ-ख़ार करे
+[59:6] और जो माल अल्लाह ने उनके कब्जे से निकल कर अपने रसूल की तरफ पलटा दिया, वो ऐसा माल नहीं है जिनपर तुमने अपने घोड़े और ऊंट (ऊंट) दौड़ाए। बलके अल्लाह अपने रसूलों को जिसपर चाहता है तसल्लुत (अधिकार/गलाबा) अता फरमा देता है। और अल्लाह हर चीज पर कादिर है 
+[59:7] जो कुछ भी अल्लाह बस्तियों के लोगों से अपने रसूल की तरफ पलटा दे वो अल्लाह, और रसूल, और रिश्तेदारों, और यतामा (अनाथों), और मसाकीन, और मुसाफिरों, के लिए है ता-के वो तुम्हारे मालदारों ही के दरमियान गर्दिश न करता रहे। जो कुछ रसूल तुम्हें दे वो लेलो और जिस चीज़ से वो तुम को रोक दे उसे रुक जाओ। अल्लाह से डरो, अल्लाह सज़ा देने वाला है 
+[59:8] (नीज़ वो माल) उन ग़रीब मुहाजिरीन के लिए है जो अपने घरों और ज़ैदादों से निकल बाहर हो गए हैं। ये लोग अल्लाह का फ़ज़ल और उसकी ख़ुशनुदी चाहते हैं और अल्लाह और उसके रसूल की हिम्मत पर क़मर-बस्ता रहते हैं। यही रस्त बाज़ (सच्चे) लोग हैं 
+[59:9] (और वो उन लोगों के लिए भी हैं) जो मुहाजिरीन की आमद से पहले ही ईमान ला कर दार-उल-हिजरात [निवास (हिजड़ा का)] में मुकीम था। ये उन लोगों से मुहब्बत करते हैं जो हिजरत करके इनके पास आए हैं और जो कुछ भी उनको दे दिया जाए उसकी कोई हाजत तक ये अपने दिलों में महसूस नहीं करते और अपनी जात पर दूसरे को तरजीह देते हैं, ख्वा अपनी जगह खुद मोहताज होन। हकीकत ये है के जो लोग अपने दिल की तंगी से बच गए वही फलाह पाने वाले हैं 
+[59:10] (और वो उन लोगों के लिए भी है) जो उन लोगों के बाद आए हैं, जो कहते हैं के “ऐ हमारे रब, हमें और हमारे उन सब भाइयों को बख्श दे जो हमसे पहले ईमान लाए हैं और हमारे दिलों में एहले ईमान के लिए कोई बुग्ज़ (द्वेष) न रख 
+। ये अपने काफ़िर एहले किताब भाईयों से कहते हैं "अगर तुम निकले तो हम तुम्हारे साथ निकलेंगे, और तुम्हारे मामले में हम किसी की बात हरगिज़ न मानेंगे, और अगर तुमसे जंग की गई तो हम तुम्हारी मदद करेंगे" मगर अल्लाह गवाह है के ये लोग कतई झूठे हैं 
+[59:12] अगर वो निकले गए तो ये उनके साथ हरगिज न निकलेंगे, और अगर वो जंग की गई तो ये उनकी हरगिज मदद न करेंगे, और अगर ये उनकी मदद करें भी तो पीट-पीट कर जाएंगे और फिर कहीं से कोई मदद न पाएंगे 
+[59:13] इनके दिलों में अल्लाह से बढ़ कर तुम्हारा खौफ है, क्योंकि ये ऐसे लोग हैं जो समझते हैं, नहीं रखते 
+[59:14] ये कभी इकट्ठे होकर (खुले मैदान में) तुम्हारा मुकाबला ना करेंगे, लड़ेंगे भी तो किला-बंद बस्तियों (गढ़वाली टाउनशिप) में बैठ कर या दीवारों के पीछे चुप कर. ये आपस की मुखालफत में बदायश हैं। तुम उन्हें इखत्ता समझते हो मगर इनके दिल एक दूसरे से फटे हुए हैं। इनका ये हाल है के ये अक्ल लोग हैं
+[59:15] ये उन्ही लोगों के मनिंद हैं जो इनसे थोड़ी ही मुद्दत पहले अपने किए का मजा चख चुके हैं और इनके लिए दर्दनाक अज़ाब है 
+[59:16] इनकी मिसाल शैतान की सी है के पहले वो इंसान से कहता है कुफ्र कर, और जब इंसान कुफ्र कर बैठता है तो वो कहता है मैं तुझसे बारी-उज-जिम्मा हूं, मुझे अल्लाह रब्ब-उल-आलमीन से डर लगता है 
+[59:17] फिर दोनों का अंजाम ये होना है के हमेशा के लिए जहन्नुम में जायें, और जालिमों की यही जजा है 
+[59:18] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो, और हर शक्स ये देखे के उसने कल के लिए क्या समान किया है। अल्लाह से डरते रहो, अल्लाह यकीनन तुम्हारे उन सब आमाल से बा-खबर है जो तुम करते हो 
+[59:19] उन लोगों की तरह ना हो जाओ जो अल्लाह को भूल गए तो अल्लाह ने उन्हें खुद अपना नफ्स भुला दिया। यही लोग फ़ासीक़ हैं 
+[59:20] दोज़ख में जाने वाले और जन्नत में जाने वाले कभी यक्सान नहीं हो सकते। जन्नत में जाने वाले ही असल में कामयाब हैं 
+[59:21] अगर हमने ये कुरान किसी पहाड़ पर भी उतार दिया होता तो तुम देखते के वो अल्लाह के खौफ से दबा जा रहा है, और फटा पड़ता है। ये मिसालें हम लोगों के सामने इस तरह बयान करते हैं के वो (अपने हालात पर) गौर करें 
+[59:22] वो अल्लाह हाय है जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, गायब और जाहिर हर चीज का जाने वाला, वही रहमान और रहीम है 
+[59:23] वो अल्लाह हाय है जिसके सिवा कोई माबूद नहीं वो बादशाह है, निहायत मुक़द्दस, सरसर सलामती (सर्व-शांति), अमन देने वाला (सुरक्षा देने वाला), निगाहबान, सब पर ग़ालिब, अपना हुकुम ब-ज़र नाफ़िज़ करने वाला, और बड़ा ही होकर रहने वाला। पाक है अल्लाह हमसे शिर्क से जो लोग कर रहे हैं 
+[59:24] वो अल्लाह ही है, जो तख़लीक़ (सृजन) का मनसूबा (योजना) बनाने वाला है, और उसको नफ़ीज़ करने वाला, और उसे मुताबिक सूरत-गारी (फैशनर) करने वाला है। उसके लिए बेहतरीन नाम हैं। हर चीज़ जो आसमान और ज़मीन में है उसकी तस्बीह कर रही है, और वह ज़बरदस्त और हकीम है 
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+सूरह 60: अल-मुमताहना (वह महिला जिसकी जांच की जाती है) 
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+[60:1] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम मेरी राह में जिहाद करने के लिए और मेरी रज़ा-जोई की खातिर (वतन छोड़ कर घरों से) निकले हो तो मेरे और अपने दुश्मनों को दोस्त ना बनाओ। तुम उनके साथ दोस्ती की तरह बदलते हो, हलांके जो हक तुम्हारे पास आया है उसको मन्ने से वो इनकार कर चुके हैं। और उनकी रवीश ये है के रसूल को और खुद तुमको सिर्फ इस कसूर पर जिला-वतन (निष्कासित) करते हैं कि तुम अपने रब, अल्लाह पर ईमान लाए हो। तुम छुपा कर उनको दोस्ताना पैग़ाम भेजते हो, हलाँके जो कुछ तुम छुपा कर करते हो और जो एलानिया (खुलेआम) करते हो, हर चीज़ को मैं ख़ूब जानता हूँ। जो शक्स भी तुम में से ऐसा करे वो यकीनन राह-ए-रास्त से भटक गया
+[60:2] उनका रवैय्या तो ये है के अगर तुम काबू पा जाओ तो तुम्हारे साथ दुश्मनी करें और हाथ और जुबान से तुम्हें अजर (चोट) दें, वो तो ये चाहते हैं के तुम किसी तरह काफिर हो जाओ 
+[60:3] कयामत के दिन ना तुम्हारे रिश्ते किसी का काम आएंगी न तुम्हारी औलाद. हमें रोज़ अल्लाह तुम्हारे दरमियान जुदाई डाल देगा। और वही तुम्हारे अमाल का देखने वाला है 
+[60:4] तुम लोगों के लिए इब्राहीम और उसके साथियों में एक अच्छा नामुना है के उन्होन ने अपनी क़ौम से साफ़ कहा "हम तुमसे और तुम्हारे इन माबूदोन (देवताओं) से जिनको तुम खुदा को छोड़ कर पूजते हो कताइ बेज़ार हैं। हमने तुमसे कुफ्र किया और हमारे और तुम्हारे दरमियान हमेशा के लिए अदावत होगी और बैर पढ़ गया (शत्रुता और नफरत) जब तक तुम अल्लाह वाहिद पर ईमान न लाओ”। मगर इब्राहीम का अपने बाप से ये कहना (इससे मुस्तस्ना है) के "मैं आपके लिए मगफिरत की अंधेरगर्दी जरूर करूंगा, और अल्लाह से आप के लिए कुछ हासिल कर लेना मेरे बस में नहीं है"। (और इब्राहिम व असहाब-ए-इब्राहिम की दुआ ये थी के) "ऐ हमारे रब, तेरे ही ऊपर हमने भरोसा किया और तेरी ही तरफ हमने रूजू (टर्न) कार्लिया और तेरे ही हुजूर हमें पलटना है 
+[60:5] ऐ हमारे रब, हमें काफिरों के लिए फितना (ट्रायल/टेस्ट) ना बना दे और ऐ हमारे रब, हमारे कसूरों से दरगुज़र फ़रमा। बेशक़ तू ही ज़बरदस्त (ताकतवर) और दाना (बुद्धिमान) है 
+[60:6] इन्ही लोगों के तर्ज़-ए-अमल में तुम्हारे लिए और हर उस शक्स के लिए अच्छा नामुना (उदाहरण) है जो अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर का उम्मीदवर हो. इस्से कोई मुनहरिफ़ हो (मुड़ जाता है) अल्लाह की ओर नियाज़ (सर्व-पर्याप्त) और अपनी ज़ात में आप महमूद हैं 
+[60:7] बैद नहीं के अल्लाह कभी तुम्हारे और उन लोगों के दरमियान मोहब्बत डाल दे जिनसे आज तुमने दुश्मनी मोल ली है। अल्लाह बड़ी क़ुदरत रखता है और वो गफूर-ओ-रहीम है 
+[60:8] अल्लाह तुम्हें इस बात से नहीं रोकता के तुम उन लोगों के साथ हो, और इन्साफ का वादा करो जिन्हों ने दीन के मामले में तुमसे जंग नहीं की है और तुम्हारे घरों से नहीं निकला है। अल्लाह इन्साफ करने वालों को पसंद करता है है 
+[60:9] वो तुम्हें जिस बात से रोकता है वो तो ये है कि तुम उन लोगों से दोस्ती करो जिन्हों ने तुमसे दीन के मामले में जंग की है और तुम्हारे घरों से निकला है और तुम्हारे इखराज (निष्कासन) में एक दूसरे की मदद की है। उनसे जो लोग दोस्ती करें वही ज़ालिम हैं
+[60:10] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब मोमिन औरतें हिजरत करके तुम्हारे पास आएं तो (उनके मोमिन होने की) जांच पडताल करलो। और उनके ईमान की हकीकत अल्लाह ही बेहतर जानता है। फिर जब तुम्हें मालूम हो जाए कि वो मोमिन हैं तो उन्हें कुफ्फार की तरफ वापस न करो। ना वो कुफ्फार के लिए हलाल हैं और ना कुफ्फार उनके लिए हलाल हैं। उनके काफिर शोहरों ने जो मेहर उनको दिए थे वो उन्हें फेर दो और उनसे निकाह कर लेने पर तुमसे कोई गुनाह नहीं जबके तुम उनके मेहर उनको अदा करदो। और तुम खुद भी काफिर औरतों को अपने निकाह में न रोके रहो, जो मेहर तुमने अपनी काफिर बीवीयों को दिए थे वो तुम वापस मांग लो और जो मेहर काफिरों ने अपनी मुसलमान बीवीयों को दिए थे उन्हें वो वापस मांग लें। ये अल्लाह का हुकुम है, वो तुम्हारा दरमियान फैसला करता है और अल्लाह अलीम-ओ-हकीम (सभी जानने वाला-सबसे बुद्धिमान) है 
+[60:11] और अगर तुम्हारी काफिर बीवीयों के मेहरों में से कुछ तुम्हें कुफ्फार से वापस न मिले और फिर तुम्हारी नौबत आये तो जिन लोगों की बीवीयाँ उधर रह गई हैं उनको इतनी रकम अदा करदो जो उनके दिए हुए मेहरों के बराबर हो। और हम खुदा से डरते रहो जिसपर तुम ईमान लाए हो 
+[60:12] ऐ नबी, जब तुम्हारे पास मोमिन औरतें बैत (प्रतिज्ञा) करने के लिए आएं और इस बात का अहद करें के वो अल्लाह के साथ किसी चीज को शरीक ना करेंगी, चोरी ना करेंगी, जीना ना करेंगी, अपनी औलाद को क़त्ल न करेंगी, अपने हाथ पैरों के आगे कोई बोहतन (कैलमनी) घड़ कर न लेंगी, और किसी अम्र-ए-मारूफ़ (कुछ भी अच्छा होने के लिए जाना जाता है) में तुम्हारी नफ़रमानी न करेंगी, तो उनसे बैत लेलो और उनके हक़ में अल्लाह से दुआ-ए-मगफिरत करो। यकीनन अल्लाह दरगुज़र (माफ़) फ़रमाने वाला और रहम करने वाला है 
+[60:13] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, उन लोगों को दोस्त न बनाओ जिनपर अल्लाह ने ग़ज़ब फरमाया है, जो आख़िरत से उसकी तरह मयौस हैं जिस तरह कब्रों में पड़े हुए काफिर मयौस हैं 
+
+सूरह 61: अस-सैफ़ (द रैंक्स) 
+------------------------------------------------ 
+[61:1] अल्लाह की तस्बीह की है हर उस चीज़ ने जो आसमान और ज़मीन में है, और वो ग़ालिब (ताकतवर) और हकीम (बुद्धिमान) है 
+[61:2] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम क्यों वो बात कहते हो जो करते नहीं हो 
+[61:3] अल्लाह के नाज़दीक ये सच ना पसंदीदा हरकत है के तुम कहो वो बात जो करते नहीं 
+[61:4] अल्लाह को तो पसंद वो लोग हैं जो उसकी राह में है इस तरह सफ़-बस्ता (पंक्ति) होकर लड़ते हैं गोया के वो एक सिसा पिलाई हुई दीवार हैं 
+[61:5] और याद करो मूसा की वो बात जो उसने अपनी क़ौम से कहीं थी "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, तुम क्यों मुझे अज़ियात (पीड़ा/नुकसान) देते हो हलांके तुम ख़ूब जानते हो के मैं तुम्हारी तरफ अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूं? फिर जब उन्होन ने टेढ इख्तियार की (विचलित) अल्लाह के लिए ने उनका दिल टेढ़े (विचलित) कर दिया, अल्लाह फासिकों को" हिदायत नहीं देता
+[61:6] और याद करो ईसा इब्न-ए-मरियम की वो बात जो उसने कही थी के "ऐ बनी इसराइल, मैं तुम्हारी तरफ अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूं, तस्दीक (सत्यापित/पुष्टि) करने वाला हूं उस तौरात की जो मुझसे पहले आई है मौजुद है, और बशारत (खुशखबरी) देने वाला हूं एक रसूल की जो मेरे बाद आएगा जिसका नाम अहमद होगा। मगर जब वो उनके पास खुली खुली निशानियां लेकर आया तो उनको ने कहा ये तो सारा धोखा है 
+[61:7] अब भला उस शक्स से बड़ा जालिम और कौन होगा जो अल्लाह पर झूठे बोहतन बंधे हलांके उसे इस्लाम (अल्लाह)। के आगे सर-ए-इताअत झुके) कि दावत दी जा रही हो? ऐसे जालिमों को अल्लाह हिदायत नहीं दिया करता 
+[61:8] ये लोग अपने मुंह की फूंकों से अल्लाह के नूर को बुझाना चाहते हैं, और अल्लाह का फैसला ये है कि वो अपने नूर को पूरा प्यार कर रहेगा ख्वा काफिरों को ये कितना ही नागावर हो 
+[61:9] वही तो है जिसने अपने रसूल को हिदायत और दीन-ए-हक़ के साथ भेजा है ता-के उसे पूरे के पूरे दीन पर ग़ालिब करदे ख्वा मुशरिकेन को ये कितना ही नागावर हो 
+[61:10] ऐ लोगन जो ईमान लाए हो, मैं बताऊँ तुमको वो तिजारत जो तुम्हें अज़ाब-ए-आलिम से बचा दे 
+[61:11] ईमान लाओ अल्लाह और उसके रसूल पर, और जिहाद करो अल्लाह की राह में अपने मालों से और अपनी जानो से, यहीं तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम जानो 
+[61:12] अल्लाह तुम्हारे गुनाह माफ कर देगा, और तुमको ऐसे बाघों में दाख़िल करेगा, जिनकी जगहें नहरें बहती होंगी, और आबादी (शाश्वत) क़याम की जन्नत में बहतरीन घर तुम्हें अता फरमायेगा। ये है बड़ी कामयाबी 
+[61:13] और वो दूसरी चीज़ जो तुम चाहते हो वो भी तुम्हें देगा, अल्लाह की तरफ से नुसरत (जीत) और करीब ही में हासिल हो जाने वाली फतह। ऐ नबी एहले ईमान को इसकी बशारत दे दो 
+[61:14] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह के मददगार बनो, जिस तरह ईसा इब्न-ए-मरियम ने हवारियों (चेलों) को खिताब करके कहा था "कौन है अल्लाह की तरफ (बुलाने) में मेरा मददगार"। और हवारियों (चेलों) ने जवाब दिया था: "हम हैं अल्लाह के मददगार"। हमें वक्त बानी इजराइल का एक गिरो ​​ईमान लाया और दूसरे गिरो ​​ने इंकार किया। फिर हमने ईमान लाने वालों की उनके दुश्मनों के मुकाबले में तय की (सहायता) और वही ग़ालिब होकर रहे 
+
+सूरह 62: अल-जुमुआ (सभा) 
+------------------------------------------------ 
+[62:1] अल्लाह की तस्बीह कर रही है हर वो चीज़ जो आसमानो में है और हर वो चीज़ जो ज़मीन में है, बादशाह है, कुद्दुस (पवित्र) है, ज़बरदस्त और हकीम (बुद्धिमान) है 
+[62:2] वही है जिसने उम्मियों (अन्यजातियों/अशिक्षित) के अंदर एक रसूल खुद को उनसे उठाया, जो उन्हें उसकी आयत सुनाता है, उनकी जिंदगी संवरता है, और उनको किताब और हिकमत की तालीम देता है, हलांके इस्से पहले वो खुली गुमराही में पड़े हुए थे 
+[62:3] और (इस रसूल की बिसात) उन दूसरे लोगों के लिए भी है जो अभी उनसे नहीं मिले हैं
+[62:4] अल्लाह ज़बरदस्त और हकीम है ये उसका फ़ज़ल है जिसे चाहता है देता है। और वो बड़ा फ़ज़ल फ़रमाने वाला है 
+[62:5] जिन लोगों को तौरात का हमील (चार गे) बनाया गया था मगर उन्होन ने उसका बार ना उठाया, उनकी मिसाल हमें गधे (गधा) की सी है जिसपर किताबे लाडी हुई होन। इस्से भी ज्यादा बुरी मिसाल है उन लोगों की जिन्होन ने अल्लाह की आयत को झूठला दिया है। ऐसे ज़ालिमों को अल्लाह हिदायत नहीं दिया करता 
+[62:6] इंसे कहो, “ऐ लोग जो यहुदी बन गए हो, अगर तुममें ये घमंड (अहंकार) है के बाकी सब लोगों को छोड़ कर बस तुम ही अल्लाह के चाहते (पसंदीदा) हो तो मौत की तमन्ना करो अगर तुम अपना इस ज़माना हो (दावा) मैं सच्चा हूं 
+[62:7] लेकिन ये हरगिज उसकी तमन्ना ना करेगी अपने कार्टूनों की वजह से जो ये कर चुके हैं। और अल्लाह जालिमों को खूब जानता है 
+[62:8] इनसे कहो, “जिस मौत से तुम भागते हो वो तो तुम आकार रहोगे। फिर तुम उसके सामने पेश हो जाओगे जो पोशिदा (छिपा हुआ) और जाहिर का जाने वाला है। और वो तुम्हे बता देगा के तुम क्या कुछ करते रहे हो 
+[62:9] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब पुकारा जाए नमाज़ के लिए जुमा के दिन तो अल्लाह के ज़िक्र की तरफ दाऊद और ख़त्म-ओ-फ़ारोख़त छोड़ दो। ये तुम्हारे लिए ज्यादा बेहतर है अगर तुम जानो 
+[62:10] फिर जब नमाज पूरी हो जाए तो जमीन में फैल जाओ और अल्लाह का फजल तलाश करो और अल्लाह को कसरत से याद करते रहो, शायद के तुम्हें फलाह (कामियाबी/समृद्धि) नसीब हो जाए 
+[62:11] और जब उनको ने तिजारत (व्यवसाय) और खेल तमाशा होते देखा तो उसकी तरफ लपक गए और तुम्हें खड़ा छोड़ दिया। इनसे कहो, जो कुछ अल्लाह के पास है वो खेल तमाशे और तिजारत से बेहतर है और अल्लाह सबसे बेहतर रिज्क (जीविका) देने वाला है 
+
+सूरह 63: अल-मुनाफिकुन (पाखंडी) 
+------------------------------------------------ 
+[63:1] ऐ नबी, जब ये मुनाफिक (पाखंडी) तुम्हारे पास आते हैं तो कहते हैं "हम गवाही देते हैं के आप यकीनन अल्लाह के रसूल हैं, "हाँ, अल्लाह जानता है के तुम ज़रूर उसके रसूल हो, मगर अल्लाह गवाही देता है के ये मुनाफिक क़तई झूठे हैं 
+[63:2] इन्हों ने अपनी कसमों को ढाल बना रक्खा है और इस तरह ये अल्लाह के रास्ते से खुद रुकते हैं और दुनिया को रोकते हैं। कैसी बुरी हरकतें हैं जो ये लोग कर रहे हैं 
+[63:3] ये सब कुछ इस वजह से है के इन लोगों ने ईमान ला कर फिर कुफ्र किया इस के लिए इनके दिलों पर मोहर लगा दी गई, अब ये कुछ नहीं समझते 
+[63:4] इन्हें देखो तो इनके जूस(जिस्म/निकायों) तुम्हें बड़े शानदार नज़र आएं बोलें तो तुम इनकी बातें सुनते रह जाओ, मगर असल में ये गोया लाखदी के कुंडे हैं (लकड़ी के बीम) जो दीवार के साथ चुन कर रख दिए गए माननीय। हर ज़ोर की आवाज़ को ये अपने ख़िलाफ समझते हैं। ये पक्के दुश्मन हैं इनसे बच कर रहो। अल्लाह की मार इनपर ये किधर उलटे फिराए जा रहे हैं
+[63:5] और जब इनसे कहा जाता है के आओ ता-के अल्लाह का रसूल तुम्हारे लिए मगफिरत की दुआ करे, तो सर झटकते हैं और तुम देखते हो के वो बड़े घमंड के साथ आने से रुकते हैं 
+[63:6] ऐ नबी, तुम चाहे इनके लिए मगफिरत की दुआ करो या ना करो, इनके लिए यक्सान है, अल्लाह हरगिज़ इन्हें माफ़ नहीं करेगा। अल्लाह फासिक लोगों (लोक का उल्लंघन करने वाले) को हरगिज हिदायत नहीं देता 
+[63:7] ये वही लोग हैं जो कहते हैं कि रसूल के साथियों पर खर्च करना बंद करदो ता-के ये मुंतशिर हो जाएं। हलाँके ज़मीन और आसमानों के खज़ानों का मालिक अल्लाह ही है, मगर ये मुनाफिक समझते नहीं हैं 
+[63:8] ये कहते हैं के हम मदीना वापस पहुँच जाएँ तो जो इज़्ज़त वाला है वो ज़लील को वहाँ से निकल बाहर करेगा। अल्लाह को हलांके इज्जत और उसके रसूल और मोमिनीन के लिए है, मगर ये मुनाफिक जानता नहीं है 
+[63:9] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम्हारे माल और तुम्हारी औलादें तुमको अल्लाह की याद से गाफिल ना करदें। जो लोग ऐसा करें वही खसरे (नुक्सान /नुकसान) में रहने वाले हैं 
+[63:10] जो रिज़क हमने तुम्हें दिया है उसमें से खर्च करो क़बल इसके के तुम में से किसी की मौत का वक्त आ जाए और हमें वक्त वो कहे "ऐ मेरे रब, क्यों ना तू ना मुझे थोड़ी सी महौलत और दे दी के मुख्य सदका देता और साले लोगों में शामिल हो जाता” 
+[63:11] हालंके जब किसी की महुलात-ए-अमल पूरी होने का वक्त आ जाता है तो अल्लाह हमें हरगिज़ मजीद महौलत नहीं देता, और जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उसे बाख़बर है 
+
+सूरह 64: अत-तगबुन (नुकसान का प्रकटीकरण) 
+------------------------------------------------ 
+[64:1] अल्लाह की तस्बीह कर रही है हर वह चीज जो आसमान में है और हर वह चीज जो जमीन में है उसकी बादशाही है और उसके लिए तारीफ है और वह हर चीज पर कादिर है 
+[64:2] वही है जिसने तुमको पेदा किया, फिर तुम में से कोई काफिर है और कोई मोमिन। और अल्लाह वो सब कुछ देख रहा है जो तुम करते हो 
+[64:3] उसने ज़मीन और आसमान को बरहक़्क अदा किया है, और तुम्हारी सूरत बनाई और बड़ी उम्मीद (उत्कृष्ट) बनाई है, और उसकी तरफ आख़िर-ए-कार तुम्हें पलटना है 
+[64:4] ज़मीन और आसमानो की हर चीज़ का इस्तेमाल इल्म है जो कुछ तुम छुपाते हो और जो कुछ तुम जाहिर करते हो सब हमें मालूम है। और वो दिलों का हाल तक जानता है 
+[64:5] क्या तुम्हें उन लोगों की कोई खबर नहीं पहुंची जिन्हों ने इसे पहले कुफर किया और फिर अपनी शामत-ए-आमाल (बुरा नतीजा) का मजा चख लिया? और आगे उनके लिए एक दर्दनाक अज़ाब है 
+[64:6] क्या अंजाम के मुस्तहिक वो इस लिए हुए हैं उनके पास उनके रसूल खुली खुली दलीलें (स्पष्ट संकेत) और निशानियां लेकर आते रहे, मगर उनहों ने कहा" क्या इंसान हमें हदायत देंगे?" इस तरह उनहों ने मन्ने से इंकार कर दिया और मुंह फिर ले लिया। तब अल्लाह भी उनसे बे-परवा हो गया और अल्लाह तो है ही बे नियाज़ और अपनी ज़ात में आप महमूद (प्रशंसनीय)
+[64:7] मुनकिरीन ने बदले दावे से कहा है कि वो मरने के बाद हरगिज़ दोबारा न उठेंगे। इनसे कहो" नहीं, मेरे रब की कसम तुम जरूर उठोगे, फिर जरूर तुम्हें बता देंगे (दुनिया में) क्या कुछ किया है और ऐसा करना अल्लाह के लिए बहुत आसान है 
+[64:8] पास ईमान लाओ अल्लाह पर, और उसके रसूल पर, और हम रोशनी पर जो हमने नाज़िल की है। जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बख़बर है 
+[64:9] (इसका पता तुम्हें रोज़ चल जाएगा) जब इज्तिमा (तुम्हें इकट्ठा करेगा) के दिन वो तुम सबको इकठ्ठा करेगा। वो दिन होगा एक दूसरे के मुकाबले में लोगों की हार जीत का नेक अमल कर्ता है, अल्लाह उसे गुनाह झाड़ देगा और उसे ऐसी जन्नत में दाख़िल करेगा जिनके बारे में पता चलेगा। ये लोग हमेशा हमेशा इनमें रहेंगे। यहीं बड़ी कामयाबी है 
+[64:10] और जिन लोगों ने कुफ्र किया है और हमारी आयतों को झुटलाया है वो दोज़ख के कैदी होंगे, जिनमें वो हमेशा रहेंगे। और वो बख्तरीन ठिकाना है 
+[64:11] कोई मुसीबत कभी नहीं आती मगर अल्लाह के इज़ान (अल्लाह की छुट्टी) ही से आती है। जो शख्स अल्लाह पर ईमान रखता है अल्लाह उसके दिल को हिदायत देता है। और अल्लाह को हर चीज़ का इल्म है 
+[64:12] अल्लाह की इताअत करो और रसूल की इताअत करो लेकिन अगर तुम इताअत से मुह मोड़ते हो तो हमारे रसूल पर सफ़ सफ़ हक़ पाहुंचा देने के सिवा कोई ज़िम्मेदारी नहीं है 
+[64:13] अल्लाह वो है जिसके सिवा कोई खुदा नहीं, लिहाज़ा ईमान लाने वालों को अल्लाह हाय पर भरोसा रखना चाहिए 
+[64:14] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारी बीवीयां और तुम्हारी औलाद में से बाज़ तुम्हारे दुश्मन हैं, इनसे होशियार रहो। और अगर तुम अफ्फु-ओ-दरगुज़ार (माफ़ कर दो और नज़रअंदाज) से काम लो और माफ़ कर दो अल्लाह गफूर-ओ-रहीम है 
+[64:15] तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तो एक आजमाइश है, और अल्लाह ही है जिसके पास बड़ा अजर है 
+[64:16] लिहाजा जहां तक ​​तुम्हारे बस में हो अल्लाह से डरते रहो, और सुनो और इताअत करो, और अपने माल खर्च करो, ये तुम्हारे ही लिए बेहतर है. जो अपने दिल की तंगी से महफ़ूज़ रह गए बस वही फलाह पाने वाले हैं 
+[64:17] अगर तुम अल्लाह को क़र्ज़-ए-हसन दो तो वो तुम्हें कई गुना (कई गुना) बढ़ा कर देगा और तुम्हारे कसूरों से दर गुजर फरमाएगा। अल्लाह बडा क़दरदान और बोझबर (सबसे सहनशील) है 
+[64:18] हाज़िर और गायब हर चीज़ को जानता है, ज़बरदस्त (शक्तिशाली) और दाना (सबसे बुद्धिमान) है 
+
+सूरा 65: एट-तलाक (तलाक) 
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+[65:1] ऐ नबी, जब तुम लोग औरतों को तलाक दो तो उनकी उनकी इद्दत (प्रतीक्षा अवधि) के लिए तलाक दिया करो और इद्दत के जमाने का ठीक ठीक शुरू करो, और अल्लाह से डरो जो तुम्हारा रब है (जमाना-ए-इद्दत में) ना तुम उन्हें उनके घरों से निकालो और ना वो खुद निकले, इल्ला ये के वो कोई सारी बुराई की मुर्तकिब हो। ये अल्लाह की मुकर्रर करदा हदें हैं, और जो कोई अल्लाह की हदों (सीमाओं/सीमाओं) से ताजुज़ करेगा वो अपने ऊपर खुद ज़ुल्म करेगा। तुम नहीं जानते शायद इसके बाद अल्लाह (मुवाफिकत/सुलह की) कोई सूरत अदा करदे 
+[65:2] फिर जब वो अपनी (इद्दत की) मुद्दत के ख़तम पर पहुंचें तो हां उन्हें भले तारिके से (अपने निकाह में) रोक रखो, हां भले तारिके पर उनसे जुदा हो जाओ, और दो ऐसे आदमियों को गवाह बना लो जो तुम मेरे साथ साहिब-ए-अदल हो, और (ऐ गवाह बनने वालों) गवाही ठीक ठीक अल्लाह के लिए अदा करो। ये बातें हैं जिनकी तुम लोगों को हिदायत की जाती है, हर उस शक्स को जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता हो। जो कोई अल्लाह से डरता है काम करेगा अल्लाह उसके लिए मुश्किल से निकलेगा का कोई रास्ता अदा कर देगा 
+[65:3] और उसे ऐसे रास्ते से रिज्क देगा जिधर उसका गुमान (कल्पना) भी ना जाता हो। जो अल्लाह पर भरोसा करे उसके लिए वो काफी है। अल्लाह अपना काम पूरा करके रहता है, अल्लाह ने हर चीज़ के लिए एक तकदीर मुक़र्रर कर रखी है 
+[65:4] और तुम्हारी औरतों में से जो हैज़ (माहवारी) से ज्यादा हो चुकी है, उनके मामले में अगर तुम लोगों को कोई शक़ नहीं है तो (तुम्हें मालूम हो के) उनकी इद्दत तीन महीनी है और यही हुकुम उनका है जिन्हें अभी हैज़ ना आया हो। और हामिला (गर्भवती) औरतों की इद्दत की हद ये है के उनका वाज़े हमल (डिलीवरी) हो जाए। जो शख़्स अल्लाह से डरे उसके मामले में वो सहूलत पैदा कर देता है 
+[65:5] ये अल्लाह का हुकुम है जो उसने तुम्हारी तरफ नाज़िल किया है। जो अल्लाह से डरेगा अल्लाह उसकी बुराइयों को उससे दूर कर देगा और उसको बड़ा अजर देगा 
+[65:6] उनको (जमाना-ए-इद्दत में) उसकी जगह रख्खो जहां तुम रहते हो, जैसी कुछ भी जगह तुम्हें मुयस्सर हो, और उन्हें तंग करने के लिए उनको ना सताओ। और अगर वो हमें परेशान करते हैं तो हमें वक्त तक खर्च करते रहो जब तक उनका वजन हमल कर दिया जाए। फिर अगर वो तुम्हारे लिए (बच्चे को) दूध पिलाएं तो उनकी उजरत (बदला) उन्हें दो, और भले तरीक़े से (उजरत का मामला) बहामी गुफ़्त-ओ-शनीद से ताई कार्लो। लेकिन अगर तुमने (उजरत ताई करने में) एक दूसरे को तंग किया तो बच्चे को कोई और औरत दूध पिला लेगी 
+[65:7] खुशाल आदमी अपनी खुशहाली के मुताबिक नफ्का दे, और जिसका रिज़क काम दिया गया हो वो उसी माल में से खर्च करे जो अल्लाह ने उसे दिया है। अल्लाह ने जिसको जितना कुछ दिया है उसे ज़ियादा का वो उसे मुकल्लफ (बोझ) नहीं देता। बैद (दरवाजा) नहीं के अल्लाह तंगदस्ती के बाद फरख दस्ती भी अता फरमादे
+[65:8] कितनी ही बस्तियां हैं जिन्हों ने अपने रब और उसके रसूलों के हुकुम से सरताबी (विद्रोही) की तो हमने उनसे कहा, मुहासिबा किया और उनको बुरी तरह सजा दी 
+[65:9] उनहों ने अपने किया का मजा चख लिया और उनका अंजाम-ए-कार घाटा हाय घाटा (पूरी तरह से नुकसान) है 
+[65:10] अल्लाह ने (आखिरत में) उनके लिए सिर्फ अजब मुहैय्या कर रखा है। पस अल्लाह से डरो ऐ साहिब-ए-अक़ल लोग जो ईमान लाए हो। अल्लाह ने तुम्हारी तरफ एक हिदायत नाजिल कर दी है 
+[65:11] एक ऐसा रसूल जो तुमको अल्लाह की साफ साफ हदायत देने वाली आयत सुनाता है ता-के ईमान लाने वालों और नेक अमल करने वालों को तारिकियों (अंधेरे) से निकाल कर रोशनी में ले आए। जो कोई अल्लाह पर ईमान लाए और नेक अमल करे अल्लाह उसे ऐसी जन्नत में दाख़िल करेगा जिनके बारे में पता चलेगा। ये लोग इनमें हमेशा हमेशा रहेंगे। अल्लाह ने ऐसे शख़्स के लिए बेहतरीन रिज़क रक्खा है 
+[65:12] अल्लाह वो है जिसने सात (सात) आसमान बनाए और ज़मीन की क़िस्म से भी उन्हीं के इंसान। उनके दरमियान हुकुम नाज़िल होता रहता है। (ये बात तुम्हें बताती जा रही है) ताके तुम जान लो के अल्लाह हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है, और ये के अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर मुहीत (समावेशी) है 
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+सूरह 66: अत-तहरीम (निषेध) 
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+[66:1] ऐ नबी, तुम क्यों हमें चीज़ को हराम करता हूँ जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल किया है? (क्या इसके लिए) तुम अपनी बीवीयों की ख़ुशी चाहते हो? अल्लाह माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है 
+[66:2] अल्लाह ने तुम लोगों के लिए अपनी कसमों की किताब से निकले का तरीका मुकर्रर करदिया है अल्लाह तुम्हारा मौला (अभिभावक) है और वही आलिम-ओ-हकीम (सर्वज्ञ, सबसे बुद्धिमान) है 
+[66:3] (और ये मामला भी) काबिल-ए-तवज्जुह है के) नबी ने एक बात अपनी एक बीवी से राज में कहीं थी फिर जब उस बीवी ने (किसी और पर) वो राज जाहिर करदिया, और अल्लाह ने नबी को इस (इफ्शाए राज) की इत्तिला दे दी, तो नबी ने उसपर किसी हद तक (उस बीवी को) खबरदार किया और किसी हद तक उसे दार-गुज़ार किया। फिर जब नबी ने उसे (इफ्शाए राज़ की) ये बात बताई तो उसने पूछा आपको इसकी खबर किसने दी? नबी ने कहा "मुझे उसने खबर दी जो सब कुछ जानता है और खूब अखबार है" 
+[66:4] अगर तुम दोनों अल्लाह से तौबा करती हो (तो ये तुम्हारे लिए बेहतर है) क्योंकि तुम्हारे दिल सीधी राह से हाथ लग गए हैं, और अगर नबी के मुकाबले में तुमने बहाम जत्था-बंदी की (एक दूसरे का समर्थन करें) तो जान रक्खो के अल्लाह उसका मौला (रक्षक) है और उसके बाद जिबराईल और तम्मम सालेह एहले ईमान और सब मलिका उसके साथी और मददगार हैं 
+[66:5] बद (दरवाजा) नहीं के अगर नबी तुम सब बीवीयों को तलाक दे दो अल्लाह को ऐसी बीवीयां तुम्हारे बदले में अता फरमा दे जो तुमसे बेहतर हो, सच्ची मुसलमान, बा-इमान, इताअत गुजर, तौबा गुजर, इबादत गुजर, और रोजेदार, ख्वा शोहर दीधा हो या बकीरा (पहले से शादीशुदा और कुंवारी दोनों)
+[66:6] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपने आप को और अपने एहल-ओ-अयाल को (अपने आप को और अपने रिश्तेदारों को) बचाओ हमें आग से जिस का इंधन (ईंधन) इंसान और पत्थर होंगे, जिसपर निहायत तुंध-खू (भयंकर) और सख्त-गिर (कठोर) फरिश्ते मुकर्रर होंगे जो कभी अल्लाह के हुकुम की ना फरमानी करते हैं और जो हुक्म भी उन्हें दिया जाता है उसे बजाते हैं 
+[66:7] (उसे वक्त कहा जाएगा के) ऐ काफिरों आज मजारतें (बहाने) पेश ना करो, तुम्हें तो वैसा ही बदला दिया जा रहा है जैसे तुम अमल कर रहे हो 
+[66:8] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से तौबा करो, खालिस तौबा, बाएद (दरवाजा) नहीं कि अल्लाह तुम्हारी बुराइयां तुमसे दूर करदे और तुम्हीं ऐसी जन्नतों में दाख़िल फरमाड़े जिनके आला में बह रही होंगी, ये वो दिन होगा जब अल्लाह अपने नबी को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए हैं रुसवा ना करेगा, उनका नूर उनके आगे आगे और उनके दिन (दाएं) जानिब दौड़ रहा होगा और वो कह रहे होंगे के ऐ हमारे रब, हमारा नूर हमारे लिए मुकम्मल करदे और हमसे दरगुज़ार फरमा, तू हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है 
+[66:9] ऐ नबी , कुफ्फार और मुनाफिकेन से जिहाद करो और उनके साथ मिलकर पेश आओ, उनका ठिकाना जहन्नुम है और वो बहुत बुरा ठिकाना है 
+[66:10] अल्लाह काफिरों के मामले में नूह और लुट की बीवीयों को बतौर-ए-मिसाल पेश करता है, वो हमारे दो साले बंदो की ज़ौजियात (शादी/वेडलॉक) में थी, मगर उन्होन ने अपने शोहरों से ख़ायानत (विश्वासघात) की और वो अल्लाह के मुक़दमे में उनके कुछ भी ना काम आ सके। दोनों से कहदिया गया के जाओ आग में जाने वालों के साथ तुम भी चली जाओ 
+[66:11] और एहले ईमान के मामले में अल्लाह फिरौन की बीवी की मिसाल पेश करता है जबके उसने दुआ की "ऐ मेरे रब, मेरे लिए अपने हां जन्नत में एक घर बना दे और मुझे फिरौन और इसके अमल से बच्चा ले और जालिम क़ौम से मुझको निजात दे।” 
+[66:12] और इमरान की बेटी मरियम की मिसाल देता है जिसने अपनी शर्मगाह की हिफाजत की थी, फिर हमने उसे अंदर अपनी तरफ से रूह फूंक दी और उसने अपने रब के इरशादत और उसकी किताबों की तस्दीक की और वो इताअत गुजर (आज्ञाकारी) लोगों में से थी 
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+सूरह 67: अल-मुल्क (द किंगडम) 
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+[67:1] निहायत बुज़ुर्ग-ओ-बरतर है वो जिसके हाथ में कायनात की सल्तनत है, और वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है 
+[67:2] जिसने मौत और ज़िंदगी को इज़्ज़त किया ता-के तुम लोगों को आज़मा कर देखो तुम में से कौन बेहतर अमल करने वाला है, और वो ज़बरदस्त भी है और दरगुज़ार फ़रमाने वाला भी 
+[67:3] जिसने तह-बार-ते सात (सात) आसमान बनाए तुम रहमान की तख़लीक (रचना) में किसी किस्मत की बे-रब्ती (असंगति) ना पाओगे फिर पलट कर देखो, कहीं तुम्हें कोई खलल (दोष) नजर आता है 
+[67:4] बार-बार निगाह दौड़ाओ तुम्हारी निगाह थक कर न-मुराद पलट आएगी
+[67:5] हमने तुम्हारे करीब के आसमान को अज़ीम-ओ-शान चिरागों से सजाया है और उन्होंने शयातीन को मार भगाने का जरिया बना दिया है। शैतानों के लिए भड़कती हुई आग हमने मुहय्या कर रखी है 
+[67:6] जिन लोगों ने अपने रब से कुफ्र किया है उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब है और वो बहुत ही बुरा ठिकाना है 
+[67:7] जब वो हमें फेंकेंगे तो उसके दहाड़ने (दहाड़ने) की हिम्मत आवाज़ सुनेंगे और वो जोश खा रही होगी 
+[67:8] शिद्दत-ए-गज़ब से फटती होगी, हर बार जब कोई भीड़ (भीड़/समूह) हमें में डाल जाएगा उसके कारिंदे (रखवाले) उन लोगों से पूछेंगे “क्या तुम्हारे पास कोई खबरदार करने वाला नहीं आया था?” 
+[67:9] वो जवाब देंगे "हां, खबरदार करने वाला हमारे पास आया था, मगर हमने उसे झूठला दिया और कहा अल्लाह ने कुछ भी नाज़िल नहीं किया है, तुम बड़ी गुमराही में पड़े हुए हो" 
+[67:10] और वो कहेंगे "काश हम सुनते या समझते तो आज है भड़कती हुई आग के सजावरों में ना शामिल होते” 
+[67:11] इस तरह वो अपने कसूर का खुद एतराफ (कबूल) कर लेंगे, दोज़खियों में लानात है 
+[67:12] जो लोग देखें अपने रब से डरते हैं, यकीनन उनके लिए मगफिरत है और बड़ा अजर 
+[67:13] तुम ख्वाह चुपके से बात करो या ऊँची आवाज़ से (अल्लाह के लिए यक्सा है) वो तो दिलों का हाल तक जानता है 
+[67:14] क्या वही ना जानेगा जिसने भुगतान किया है? हालंके वो बारिक-बीन और खबर है 
+[67:15] वही तो है जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन को ताब कर रखा है, चलो उसकी चाटी पर और खाओ खुदा का रिज़क, उसके हुजूर तुम्हें दोबारा जिंदा हो कर जाना है 
+[67:16] क्या तुम इसे बे-खौफ हो के वो जो आसमान में है तुम्हें ज़मीन में ढासा दे और यकायक ये ज़मीन झकोले खाने लगे (हिंसक रूप से हिलाएं/रॉक करें) 
+[67:17] क्या तुम इस बे-ख़ौफ़ हो के वो जो आसमान में है तुम पर पत्थरों करने वाली हवा भेज दे? फिर तुम्हें मालूम हो जाएगा के मेरी तम्बीह (चेतावनी) कैसी होती है 
+[67:18] इनसे पहले गुजरे हुए लोग झुटला चुके हैं फिर देखलो के मेरी किस्मत कैसी थी 
+[67:19] क्या ये लोग अपने ऊपर उड़ने वाले परिन्दों को पार फैलाते और सुकते नहीं देखते हैं? रहमान के सिवा कोई नहीं जो इन्हें थमे हुए हो। वही हर चीज़ का निगाहबाँ है 
+[67:20] बताओ, आख़िर वो कौन सा लश्कर तुम्हारे पास है जो रहमान के मुक़ाबले में तुम्हारी मदद कर सकता है? हकीकत ये है के ये मुकीरीन धोखे में पड़े हैं 
+[67:21] हां फिर बताओ, कौन है जो तुम्हें रिज्क दे सकता है अगर रहमान अपना रिज्क रोक ले? दर-असल ये लोग सरकशी और हक से गुरेज पर आगे हुए हैं 
+[67:22] भला सोचो, जो शक्स मुंह औंधे (कराहना) चल रहा हो वो ज्यादा सही राह पाने वाला है या वो जो सर उठाए सीधा एक हमवार सड़क पर चल रहा है
+[67:23] इनसे कहो अल्लाह ही है जिसने तुमने पैदा किया, तुमको सनी और देखने की ताक़तें दी और सोचने वाले दिल दिए, मगर तुम काम ही शुक्र अदा करते हो 
+[67:24] इनसे कहो, अल्लाह ही है जिसने तुमने ज़मीन में फैलाया है और उसी की तरफ तुम साथ जाओगे 
+[67:25] ये कहते हैं "अगर तुम सच्चे हो तो बताओ ये वादा कब पूरा होगा?" 
+[67:26] कहो “इसका इल्म तो अल्लाह के पास है, मैं तो बस साफ, खबरदार बनाने वाला हूं 
+[67:27] फिर जब ये उस चीज को करीब देख लेंगे तो उन सब लोगों के चेहरे बिगाड़ जाएंगे जिन्हों ने इनकार किया है, और हमें वक्त उनसे कहा जाएगा के यहीं है वो चीज़ जिसके लिए तुम तकाज़े कर रहे थे 
+[67:28] इंसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अल्लाह ख्वा मुझे और मेरे साथियों को हलाक करदे या हम पर रहम करे, काफिरों को दर्दनक अज़ाब से कौन बचा लेगा 
+[67:29] इंसे कहो, वो बड़ा रहीम है, उसी पर हम ईमान लाए हैं, और उसी पर हमारा भरोसा है, करीब तुम्हें मालूम हो जाएगा के सारे गुमराह (प्रकट त्रुटि) में पड़ा हुआ कौन है 
+[67:30] इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अगर तुम्हारे कुओं (कुओं) का पानी जमीन में उतर जाये तो कौन है जो इस पानी की बहती हुई सोतें (बहता पानी) तुम्हें निकाल कर ला देगा 
+
+सूरह 68: अल-क़लम (कलम) 
+------------------------------------------------ 
+[68:1] दोपहर, कसम है क़लम की और उस चीज़ की जिसके लिखने वाले लिख रहे हैं 
+[68:2] तुम अपने रुब के फ़ज़ल से मजनूँ (दीवाने) नहीं हो 
+[68:3] और यकीनन तुम्हारे लिए ऐसा अजर (इनाम) है जिसका सिलसिला कभी खत्म होने वाला नहीं 
+[68:4] और बहस तुम अखलाक के बड़े मरतबे पर हो 
+[68:5] अंकारिब तुम भी देख लोगे और वो भी देख लेंगे 
+[68:6] के तुम में से कौन जुनून (पागलपन) में मुबतला है 
+[68:7] तुम्हारा रब उन लोगों को भी खूब जानता है जो उसकी राह से भटके हुए हैं, और वही उनको भी अच्छी तरह जानता है जो राह-ए-रास्त पर है 
+[68:8] झूठ बोलने वालों के दबाओ में हरगिज़ तुम आओ 
+[68:9] ये तो चाहते हैं कि तुम कुछ भी मुदाहनत (नरमी) करो तो ये भी मुदाहनत (नरमी) करें 
+[68:10] हरगिज ना दबो किसी ऐसे शक्स से जो बहुत कसम खाने वाला बे-वकात (बेकार) आदमी है 
+[68:11] ताने देता है, चुगलियां खाता फिरता है (निंदक, चुगली करने वाला) 
+[68:12] भलाई से रोकता है, ज़ुल्म-ओ-ज़्यादती में हद से गुज़र जाने वाला है, सख्त बध-अमल है, जफ़ा-कार है 
+[68:13] और इन सब उयब (ऐब) के साथ बढ़-अस्ल (नाजायज औलाद) है 
+[68:14] इस बिना पार के वो बहुत माल-ओ-औलाद रखता है 
+[68:15] जब हमारी आयतें उसको सुनाती हैं तो कहता है ये तो अगले वक्त के अफसाने हैं 
+[68:16] अंकरीब हम इसकी सूंड (थूथन) पर दाग लगाएंगे
+[68:17] हमने (एहले मक्का) को उसी तरह आजमाइश में डाला है, जिस तरह एक बाग (बगीचे) के मालिकों को आजमाइश में डाला था, जब उन्हें ने कसम खाई के सुबह सवेरे जरूर अपने बाग के फल तोड़ेंगे 
+[68:18] और वह कोई इस्तस्ना (अपवाद) नहीं कर रहे थे 
+[68:19] रात को वो सोए पड़े थे के तुम्हारे रब की तरफ से एक बला इस बाग पर फिर गई 
+[68:20] और उसका हाल ऐसा हो गया जैसा कटी हुई फसल हो 
+[68:21] सुबह उन लोगों ने एक दूसरे को पुकारा 
+[68:22] कहा अगर फल तोड़ने हैं तो सवेरे सवेरे अपनी खेती की तरफ निकल चलो 
+[68:23] चुनांचे वो चल पड़े और आपस में चुपके-चुपके कह जाते थे 
+[68:24] के आज कोई मिसकीन तुम्हारे पास बाग में ना आने पाए 
+[68:25] वो कुछ ना देने का फैसला किये हुए सुबह सवेरे जल्दी जल्दी इस तरह वहां गए जैसे के वो (फल तोड़ने पर) कादिर हैं 
+[68:26] मगर जब बाघ को देखा तो कहने लगे "हम रास्ता भूल गए हैं 
+[68:27] नहीं बलके हम महरूम रह गए" 
+[68:28] उन में जो सब से बेहतर आदमी वह था कहा “मैंने तुमसे कहा ना था के तुम तस्बीह क्यों नहीं करते?” 
+[68:29] वो पुकार उठे पाक है हमारा रब, हकीकत हम गुनहगार थे 
+[68:30] फिर उनमें से हर एक दूसरे को मालामाल करने लगा 
+[68:31] आखिर को अनहोन ने कहा "अफसोस हमारे हाल पर, बेशक हम परेशान हो गए थे 
+[68:32] बाएद (दरवाजा) नहीं के हमारा रब हमें बदले में इस तरह बेहतर बाग अता फरमाये, हम अपने रब की तरफ रूजू करते हैं 
+[68:33] ऐसा होता है अज़ाब और आख़िरत का अज़ाब इसे भी बड़ा है, काश ये लोग इसको जानते हैं 
+[68:34] यकीनन खुदा-तरस लोगों के लिए उनके रब के यहां नियम भारी जन्नतें हैं 
+[68:35] क्या हम फरमा-बरदारों का हाल मुजरिमों सा करदें 
+[68:36] तुम लोगों को क्या हो गया है, तुम कैसे हुकुम लगाते हो 
+[68:37] क्या तुम्हारे पास कोई किताब है जिसमें तुम ये पढ़ते हो 
+[68:38] के तुम्हारे लिए जरूर वहां वहीं कुछ है जो तुम अपने लिए पसंद करते हो 
+[68:39] या फिर क्या तुम्हारे लिए रोज-ए-कयामत तक हमपर कुछ अहद-ओ-पैमान (संविदा) साबित है के तुम्हें वही कुछ मिलेगा जिसका तुम हुकुम लगाओ 
+[68:40] इनसे पुचो तुम में से कौन इसकी ज़मीन (गारंटी/जिम्मेदार) है 
+[68:41] या फिर इनके ठहरे हुए कुछ साहिरे हैं (जिन्होन ने इसका ज़िम्मा लिया हो)?ये बात है तो लायें अपने शेयरों को अगर ये सच्चे हैं 
+[68:42] जिस रोज़ सही वक्त आ पड़ेगा और लोगों को सजदा करने के लिए बुलाया जाएगा तो ये लोग सजदा ना कर पाएंगे 
+[68:43] इनकी निगाहें नीचे होंगी, जिल्लत इनपर छा रही होगी। ये जब सही-ओ-सालिम था हमें वक्त यहीं सजदे के लिए (बुलाया जाता था) और ये इन्कार करते थे
+[68:44] पस ऐ नबी, तुम इस कलाम के झूठ बोलने वालों का मामला मुझपर छोड़ दो हम ऐसे तारिके से इनको बतादरीज तबाही की तरफ ले जाएंगे के इनको खबर भी ना होगी 
+[68:45] मैं इनकी रस्सी दराज़ कर रहा हूं, मेरी चाल बड़ी ज़बरदस्त है 
+[68:46] क्या तुम इनसे कोई अजर (मुआवजा) तालाब कर रहे हो के ये इस छत्ती के बोझ (कर्ज का बोझ महसूस कर रहे हैं) तले दबे जा रहे हूं 
+[68:47] क्या इनके पास गैब का इलम है जिसे ये लिख रहे हैं माननीय 
+[68:48] पास अपने रुब का फैसला होने तक सब्र करो और मछली wale (यूनिस) कि तरह ना हो जाओ, जब उसने पुकारा था और वो गम से भरा हुआ था 
+[68:49] अगर उसके रुब की मेहरबानी उसके शामिल-ए-हाल ना हो जाती तो वो मज़मूम (अपमान) होकर चटयाल मैदान में फेंक दिया जाता 
+[68:50] आखिर-ए-कार उसके रुब ने उसे बरगुज़िदा (उत्कृष्ट) फ़रमा लिया और उसे सालेह बंदों में शामिल करदिया 
+[68:51] जब ये काफिर लोग कलाम-ए-नसीहत (कुरान) सुनते हैं तो तुम्हें ऐसी नज़रों से देखते हैं के गोया तुम्हारे क़दम उखाड़ देंगे, और कहते हैं के ये ज़रूर दीवाना है 
+[68:52] हलाँके ये तो सारे जहाँ वालों के लिए एक हिदायत है 
+
+सूरह 69: अल-हक्का (निश्चित सत्य) 
+------------------------------------------------ 
+[69:1] होनी शुद्धि! (अनिवार्य) [सच-बहुत होने वाली] 
+[69:2] क्या है वो होनी शुधनी (अविश्वसनीय) 
+[69:3] और तुम क्या जानो के वो क्या है होनी शुधनी (अविश्वसनीय) 
+[69:4] समूद और आद ने हमें अचानक टूट पड़ने वाली आफत को झुटलाया 
+[69:5] समूद एक को सच हादसे में हलाक किए गए 
+[69:6] और एक बड़ी छायादार तूफानी आंधी (तूफान) से तबाह कर दिए गए 
+[69:7] अल्लाह ताला ने उसको मुसलसल सात (सात) रात और आठ (आठ) दिन उनपर मुसल्लत रक्खा (तुम वहां होते तो) देखते के वो वहां इस तरह फंसे पड़े jaise वो खजूर के बोसीदा (सड़े हुए) तनी (चड्डी) माननीय 
+[69:8] अब क्या उनमें से कोई तुम्हें बाकी नज़र आता है 
+[69:9] और इसी ख़ता-ए-अज़ीम का इर्तिक़ाब फिरौन और उसके पहले के लोगों ने और तलपत (पलट) हो जाने वाली बस्तियों ने किया 
+[69:10] उन सब ने अपने रुब के रसूल की बात ना मानी तो उसने उनको बड़े सक्ती के साथ पकड़ा 
+[69:11] जब पानी का तूफ़ान हद से गुज़र गया तो हमने तुमको कश्ती में सवार कर दिया था 
+[69:12] ता-के इस वक़िये को तुम्हारे लिए एक सबक-आमोज़ यादगार बना दें और याद रखने वाले कान इसकी याद महफूज रक्खें 
+[69:13] फिर जब एक दफा सुर में फूंक मार दी जाएगी 
+[69:14] और जमीन और पहाड़ों को उठा कर एक ही चोट में रेजा कर दिया जाएगा 
+[69:15] हमें रोज वो होने वाला वाकिया पेश आ जाएगा 
+[69:16] उसदिन आसमान फटेगा और उसकी बंदिश ढीली पढ़ जाएगी
+[69:17] फ़रिश्ते उसके अतराफ़-ओ-जवानीब में होंगे और आत (आठ) फ़रिश्ते उस रोज़ तेरे रब का अर्श अपने ऊपर उठेंगे होंगे 
+[69:18] वो दिन होगा जब तुम लोग पेश किये जाओगे, तुम्हारा कोई राज़ भी छुपा न रह जायेगा 
+[69:19] हमारा वक्त जिसका नाम-ए-आमाल उसके सीधे हाथ में दिया जाएगा वो कहेगा "लो देखो, पढ़ो मेरा नाम-ए-आमाल 
+[69:20] मैं समझता था कि मुझे जरूर अपना हिसाब मिलने वाला है" 
+[69:21] पास वो दिल पसंद ऐश में होगा 
+[69:22] आली मुकाम जन्नत में 
+[69:23] जिसके फलों के झुके पढ़ रहे होंगे 
+[69:24] (ऐसे लोगों से कहा जाएगा) मजे से खाओ और पियो अपने उन अमल के बदले जो तुमने गुजरे हुए दिनों में किए हैं 
+[69:25] और जिसका नाम-ए-आमाल उसके बायें (बाएं) हाथ में दिया जाएगा वो कहेगा “ काश मेरा अमल नाम मुझे ना दिया गया होता 
+[69:26] और मैं ना जानता के मेरा हिसाब क्या है 
+[69:27] काश मेरी वही मौत (जो दुनिया में आई थी) फैसला-कुन होती 
+[69:28] आज मेरा माल मेरे कुछ काम ना आया 
+[69:29] मेरा सारा इक्तेदार ख़तम हो गया 
+[69:30] (हुकुम होगा) पकड़ो इसे और इसकी गर्दन में तौक डाल दो 
+[69:31] फिर इसे जहन्नुम में झुक दो 
+[69:32] फिर इसको सत्तर (सत्तर) हाथ लंबी जंजीर में जकाद दो 
+[69:33] ये ना अल्लाह बुज़ुर्ग-ओ-बरतर पर ईमान लता था 
+[69:34] और ना मिस्कीन को खाना खिलाने की तरजीब देता था 
+[69:35] लिहाजा आज ना यहां इसका कोई यार-ए-गमखार है 
+[69:36] और ना जख्मों के धोवन (घावों को धोना) के सिवा इसके लिए कोई खाना 
+[69:37] जैसी खटकारोन (पापी) के सिवा कोई नहीं खाता 
+[69:38] पास नहीं, मैं कसम खाता हूं उन चीज़ों की भी जो तुम देखते हो 
+[69:39] और उनकी भी जिन्हें तुम नहीं देखते 
+[69:40] ये एक रसूल-ए-करीम का क़ौल (भाषण) है 
+[69:41] किसी शायर का क़ौल नहीं है, तुम लोग कम ही ईमान लाते हो 
+[69:42] और ना ये किसी काहिन (भविष्यवक्ता) का क़ौल है, तुम लोग कम ही गौर करते हो 
+[69:43] ये रब्ब-उल आलमीन की तरफ से नाज़िल हुआ है 
+[69:44] और अगर (नबी) ने खुद ग़ाद कर कोई बात हमारी तरफ इंसान की होती है 
+[69:45] तो हम इसका डायन (दाएं) हाथ पकड़ लेते हैं 
+[69:46] और इसकी राग-ए-गर्दन काट डालते हैं 
+[69:47] फिर तुम में से कोई (हमें)इस काम से रोकने वाला ना होता 
+[69:48] दर हकीकत ये जरूरी लोगों के लिए एक हिदायत है 
+[69:49] और हम जानते हैं कि तुम में से कुछ लोग झूठ बोलने वाले हैं 
+[69:50] ऐसे काफिरों के लिए यकीनन ये मुजीब-ए-हसरत (अफसोस का कारण) है 
+[69:51] और ये बिल्कुल यकीनी हक है 
+[69:52] पास ऐ नबी, अपने रुब-ए-अज़ीम के नाम की तस्बीह करो 
+
+सूरह 70: अल-मारिज (चढ़ाई के तरीके)
+------------------------------------------------ 
+[70:1] मंगने वाले ने अज़ाब मांगा है (वो अज़ाब) जो जरूर होने वाला है 
+[70:2] काफिरों के लिए है, कोई उसे दफा करने वाला नहीं 
+[70:3] हमें खुदा की तरफ से है जो उरूज के ज़ीनो (चढ़ते कदम) का मालिक है 
+[70:4] मलायका (फ़रिश्ते) और रूह (जिब्राइल) उसके हुज़ूर चढ़ कर जाते हैं एक ऐसे दिन में जिसका मिकदार पचास (पचास) हज़ार साल है 
+[70:5] पस ऐ नबी, सब्र करो, शाइस्ता सब्र 
+[70:6] ये लोग उसे दूर समझते हैं 
+[70:7] और हम उसे करीब देखते हैं रहे हैं 
+[70:8] (वो अज़ाब हमें रोज़ होगा) जिस रोज़ आसमान पिगली हुई चांदी की तरह हो जाएगा 
+[70:9] और पहाड़ रंग-बि-रंग के धुनके हुए ऊन (ऊन) जैसे हो जाएंगे 
+[70:10] और कोई जिगरी दोस्त अपने जिगरी दोस्त को ना पूछेगा 
+[70:11] हलांके वो एक दूसरे को दिखाये जायेंगे, मुजरिम चाहेगा के उस दिन के अज़ाब से बचने के लिए अपनी औलाद को 
+[70:12] अपनी बीवी को, अपने भाई को 
+[70:13] अपने करीब-तरीन खानदान को जो उसे पनाह देने वाला था 
+[70:14] और रूह-ए-जमीन के सब लोगों को फिदिया (बदले) में दे-दे और ये तदबीर उसे निजात दिला दे 
+[70:15] हरगिज नहीं वो तो भड़कती हुई आग की लपट होगी 
+[70:16] जो प्यार पोश्त को चाट जाएगी 
+[70:17] पुकार पुकार कर अपनी तरफ बुलाएगी हर उस शक्स को जिसने हक से मुंह मोड़ा और पीट फेरी 
+[70:18] और माल जमा किया और सेंत सेंत कर (संचित धन) रक्खा 
+[70:19] इंसान थुड़-दिला (अधीर) पैदा किया गया है 
+[70:20] जब उसपर मुसीबत आती है तो घबरा उठता है 
+[70:21] और जब उसे ख़ुश-हाली नसीब होती है तो भुल (कंजूसी) करने लगता है 
+[70:22] मगर वो लोग (इससे बचे हुए हैं) जो नमाज़ पढ़ने वाले हैं 
+[70:23] जो अपनी नमाज़ की हमेशा नमाज़ अदा करते हैं 
+[70:24] जिनके मालों में 
+[70:25] साहिल (मांगने) वाले) और महरूम का एक हक़ मुकर्रर है 
+[70:26] जो रोज़-ए-जज़ा को बरहक़ मानते हैं 
+[70:27] जो अपने रब के अज़ाब से डरते हैं 
+[70:28] क्योंकि उनके रब का अज़ाब ऐसी चीज़ नहीं है जिसमें कोई बेख़ौफ़ हो 
+[70:29] जो अपनी शर्मगाहों की हिफ़ाज़त करते हैं 
+[70:30] बा-जुज़ अपने बीवीयों या अपनी ममलूका औरतों के जिनसे महफ़ूज़ ना रखने में उनपर कोई मलामत नहीं 
+[70:31] अलबत्ता जो इसके अलावा कुछ और चाहे वही हद से तजावुज करने वाला है 
+[70:32] जो अपने अमानतों की हिफाजत और अपने अहद (संविदा) का पास करते हैं 
+[70:33] जो अपनी गवाही में रास्ते बाजी (सीधे) पर कायम रहते हैं 
+[70:34] और जो अपनी नमाज की हिफाजत करते हैं 
+[70:35] ये लोग इज्जत के साथ जन्नत के बाघों में रहेंगे 
+[70:36] पास ऐ नबी, क्या बात है ये मुनकिरिन दायें(बाएं) और बायें(दाएं) से
+[70:37] गिरोह (भीड़) दार गिरोह (भीड़) तुम्हारी तरफ दौड़े चले आ रहे हैं 
+[70:38] क्या इनमें से हर एक ये लालज रखता है के वो नियामत भारी जन्नत में दाख़िल कर दिया जाएगा 
+[70:39] हरगिज़ नहीं हमने जिस चीज़ से इनको पैदा किया है उसे ये खुद जानते हैं 
+[70:40] पास नहीं, मैं कसम खाता हूं मशरिकों और मगरिबों के मालिक की हम इसपर कादिर हैं 
+[70:41] के इनकी जगह इनसे बेहतर लोग ले आएं और कोई हमसे बाजी ले जाने वाला नहीं है 
+[70:42] लिहाजा इन्हें अपनी बेहुदा बातें और अपने खेल में पड़ा रहने दो यहां तक ​​के ये अपने हमें दिन को पाहुंच जाएंगे जिसका इनसे वादा किया जा रहा है 
+[70:43] जब ये अपने कब्रों से निकल कर इस तरह दउदे जा रहे होंगे जैसे अपने बुथों (मूर्तियों) के आस्थानो (वेदियों) की तरफ दौड़ रहे हों 
+[70:44] इनकी निगाहें झुकी होंगी, जिल्लत इनपर छा रही होगी, वो दिन है जिसका इनसे वादा किया जा रहा है 
+
+सूरह 71: नूह (नूह) 
+------------------------------------------------ 
+[71:1] हमने नूह को उसकी कौम की तरफ भेजा (इस हिदायत के साथ) के अपनी क़ौम के लोगों को ख़बरदार बनाने वाला क़ब्ल इसके के ऊपर एक दर्दनाक अज़ाब आए 
+[71:2] उसने कहा “ ऐ मेरी क़ौम के लोगों, मैं तुम्हारे लिए एक साफ़ ख़बर बनाने वाला (पैगंबर) हूं 
+[71:3] (तुमको आगाह करता हूं) के अल्लाह की बंदगी करो और उसे डरो और मेरी इताअत (फॉलो) करो 
+[71:4] अल्लाह तुम्हारे गुनाहों से दरगुजर फरमाएगा और तुम्हें एक वक्त-ए-मुकर्रर तक बाकी रखेगा। हकीकत ये है के अल्लाह का मुकर्रर किया हुआ वक्त जब आ जाता है तो फिर ताला नहीं जाता काश। तुम्हें इसका इल्म हो 
+[71:5] उसने अर्ज़ किया “ऐ मेरे रब, मैंने अपनी क़ौम के लोगों को शब-ओ-रोज़ (रात और दिन) पुकारा 
+[71:6] मगर मेरी पुकार ने उनको फ़रार ही में इज़ाफ़ा किया 
+[71:7] और जब भी मैंने उनको बुलाया ता-के तू उन्हें माफ़ करदे, उन्होन ने कानो में उंगलियां थूस ली और अपने कपडों से मुंह ढक लिया और अपनी रवीश पर आधा हो गए और बड़ा तकब्बुर (गर्व) किया 
+[71:8] फिर मैंने उनको हांके पुकारे (खुले तौर पर) की दावत दी 
+[71:9] फिर मैंने एलानिया (सार्वजनिक रूप से) भी उनको तबलीग की और चुपके चुपके भी समझा 
+[71:10] मैंने कहा अपने रब से माफ़ी मांगो,बेशक वो बड़ा माफ़ करने वाला है 
+[71:11] वो तुम्हारे आसमान से ख़ूब बारिशें बरसाएगा 
+[71:12] तुम्हें माल और औलाद से नवाजे गा, तुम्हारे लिए बाग़ पैदा करेगा और तुम्हारे लिए नेहरेन जारी करदेगा 
+[71:13] तुम्हें क्या हो गया है कि अल्लाह के लिए तुम किसी वकार (महिमा) की तवक्कू नहीं रखते 
+[71:14] हालांके उसने तरह तरह से तुम्हें बनाया है 
+[71:15] क्या देखते नहीं हो के अल्लाह ने किस तरह सात आसमान तह-बर-तह बनाया 
+[71:16] और उनमें चांद को नूर और सूरज को चिराग बनाया 
+[71:17] और अल्लाह ने तुमको ज़मीन से अजीब तरह उगया
+[71:18] फिर वो तुम्हें इसी ज़मीन में वापस ले जाएगा और इसे यकीनन तुमको निकल खड़ा करेगा 
+[71:19] और अल्लाह ने ज़मीन को तुम्हारे लिए फर्श की तरह बिछा दिया 
+[71:20] ता-के तुम उसके अंदर खुले रास्तों में चलो 
+[71:21] नूह ने कहा “मेरे रब, उनहों ने मेरी बात रद्द करदी और उन (रहीसों) की जोड़ी की जो माल और औलाद पा कर और ज़्यादा ना मुराद हो गए हैं 
+[71:22] इन लोगों ने बड़ा भारी मकर (प्लॉट) का जाल फैला रखा है 
+[71:23] इन्होन ने कहा हरगिज़ ना छोड़ो अपने मबूदोन (देवता) को, और ना छोड़ो वद्द और सुवा को और ना यगस और याऊक और नस्र को (मूर्ति के नाम) 
+[71:24] इन्होन ने बहुत लोगों को गुमराह किया है, और तू भी इन जालिमों को गुमराह के सिवा किसी चीज में तरक्की ना दे 
+[71:25] अपनी खतों की बिना पर ही वो गर्क (डूबना) किए गए और आग में झुक गए, फिर उन्हें अपने लिए अल्लाह से बचाने वाला कोई मददगार ना पाया 
+[71:26] और नूह ने कहा "मेरे रब, इन काफिरों में से कोई ज़मीन पर बसने वाला ना छोड़ 
+[71:27] अगर तू ने इन्हें छोड़ दिया तो ये तेरे बंदों को गुमराह" करेंगे और इनकी नाक से जो भी पैदा होगा बुरा और सख्त काफिर ही होगा 
+[71:28] मेरे रब, मुझे और मेरे वाल्डेन को और हर उस शक्स को जो मेरे घर में मोमिन की किस्मत से दखल हुआ है, और सब मोमिन मर्दों और औरतों को माफ फरमा दे, और जालिमों के लिए हलाकत के सिवा किसी चीज़ में इज़ाफ़ा ना कर 
+
+सूरह 72: अल-जिन्न (जिन्न) 
+------------------------------------------------ 
+[72:1] ऐ नबी, कहो, मेरी तरफ वही (रहस्योद्घाटन) भेजी गई है के जिन्नो के एक गिरोह (समूह) ने गौर से सुना फिर (जा कर अपने क़ौम के लोगों से) कहा: "हमने एक बड़ा ही अजीब कुरान सुना है 
+[72:2] जो राह-ए-रास्त की तरफ रहनुमाई करता है इसके लिए हम उसपर ईमान ले आए हैं और अब हम हरगिज अपने रुब के साथ किसी को शरीक नहीं करेंगे 
+[72:3] और ये के हमारे रुब की शान बहुत आला-ओ-अरफा है, उसने किसी को बीवी या बेटा नहीं बनाया 
+[72:4] और ये के हमारे नादान लोग अल्लाह के बारे में बहुत खिलाफ-ए-हक़्क़ बातें करते रहते हैं 
+[72:5] और ये के हमने समझा था के इंसान और जिन्न कभी खुदा के बारे में झूठ नहीं बोल जैसे 
+[72:6] और ये के इंसानों ने भी वही गुमान किया 
+जैसा तुम्हारा गुमान था के अल्लाह किसी को रसूल बना , इस तरह उन्होन ने जिन्नो का गुरु और ज्यादा बढ़ा दिया कर ना भेजेगा 
+[72:8] और ये के हमने आसमान को ततोला तो देखा के वो पहरे-दारों (भयानक रक्षकों) से पथ पड़ा है और शहाबों (शूटिंग उल्का) की बारिश हो रही है
+[72:9] और ये के पहले हम सूरज-गन लेने के लिए आसमान में बैठने की जगह पा लेते थे, मगर अब जो चोरी छुपे सुनने के लिए कोशिश करता है वो अपने लिए घाट में एक शहाबे साकिब (शूटिंग उल्का) लगा हुआ पाता है 
+[72:10] और ये के हमारी समझ में न आता था के आया ज़मीन वालों के साथ कोई बुरा मामला करने का इरादा किया गया है या उनका रब उन्हें राह-ए-रास्त दिखाना चाहता है 
+[72:11] और ये के हम में से कुछ लोग सालेह (ईमानदार) हैं और कुछ इस से दूर हैं, हम मुख़्तलिफ़ तरीक़ों (तरीके/गुट) में बताए (विभाजित) हुए हैं 
+[72:12] और ये के हम समझते थे के ना ज़मीन में हम अल्लाह को अजीज (निराश) कर सकते हैं और ना भाग कर उसे हरा सकते हैं 
+[72:13] और ये के हमने जब हिदायत की तालीम सुनी तो हम उसपर ईमान ले आए अब जो कोई भी अपने रब पर ईमान ले आएगा उसे कोई हक़-तलफ़ी या ज़ुल्म का ख़ौफ़ ना होगा 
+[72:14] और ये के हम में से कुछ मुस्लिम (अल्लाह के इताअत गुज़र) हैं और कुछ हक़ से मुनहरिफ़ (ईमानदारी से) तो जिन्होन ने इस्लाम (इताअत का रास्ता) इख्तियार कर लिया उनहों ने नवाजत की राह ढूंढ ली 
+[72:15] और जो हक़ से मुहनरिफ़ है वो जहन्नुम का इंधन (ईंधन) बनाने वाला है 
+[72:16] और (ऐ नबी कहो मुझपर ये वही भी की गई है के) लोग अगर राह-ए-रास्त पर साबित क़दामी (दृढ़ता से) से चलते तो हम उन्हें खूब सैराब करते (प्रचुर मात्रा में बारिश प्रदान करते हैं) 
+[72:17] ता-के इस नियामत से उनकी आजमाइश करें और जो अपने रब के जिक्र से मुंह मोड़ेगा उसका रब उसे सख्त अजाब में मुबतला कर देगा 
+[72:18] और ये के मस्जिद अल्लाह के लिए है, लिहाजा उन्मेन अल्लाह के साथ किसी और को ना पुकारो 
+[72:19] और ये के जब अल्लाह का बंदा उसको पुकारने के लिए खड़ा हुआ तो लोग उसपर टूट पड़ें के लिए तैयार हो गए 
+[72:20] ऐ नबी, कहो के मैं तो अपने रब को पुकारता हूं और उसके साथ किसी को शरीक नहीं करता 
+[72:21] कहो मैं तुम लोगों के लिए ना किसी नुक्सान का इख्तियार रखता हूं ना किसी को भलाई का 
+[72:22] कहो मुझे अल्लाह की गिरफ्त से कोई नहीं बचा सकता और ना मैं उसके दामन के सिवा कोई जाए पनाह (शरण) पा सकता हूं 
+[72:23] मेरा काम इसको सिवा कुछ नहीं है के अल्लाह की बात और उसको पैग़ामात पाहुंचा दूं। अब जो भी अल्लाह और उसके रसूल की बात न मानेगा उसके लिए जहन्नुम की आग है और ऐसे लोग उसमें हमेशा रहेंगे 
+[72:24] (ये लोग अपनी इस रवीश से बाज़ न आएंगे) यहां तक ​​के जब हमें चीज को देख लेंगे जिसका इनसे वादा किया जा रहा है तो इन्हें मालूम हो जाएगा के किसके मददगार कमज़ोर हैं और किसका जत्था (समूह) तदाद में कम है 
+[72:25] कहो, मैं नहीं जानता के जिस चीज़ का वादा तुमसे किया जा रहा है वो करीब है या मेरा रब उसके लिए कोई लंबी मुद्दत मुक़र्रर फ़माता है 
+[72:26] वो अलीमुल गैब है, अपने गैब पर किसी को मुत्तला (खुलासा/खुलासा) नहीं करता
+[72:27] सिवाय उस रसूल के जिसने हमें (गाइब का कोई इल्म देने के लिए) पसंद किया हो, तो उसके आगे और पीछे वो मुहाफिज (रक्षक) लगा देता है 
+[72:28] ता-के वो जान ले के उन्होन ने अपने रुब के पैगामात पहन दिए, और वो उनके पूरे महोल का इहाता (घेरें) किए हुए हैं और एक एक चीज को उसने जिन रक्खा है 
+
+सूरह 73: अल-मुजम्मिल (खुद को ढकने वाला) 
+------------------------------------------------ 
+[73:1] ऐ ओद लपेट कर (लिपटा हुआ) सोने वाले 
+[73:2] रात को नमाज में खड़े रहा करो मगर कम 
+[73:3] आधी रात 
+[73:4] या इस्से कुछ काम करलो या इस्से कुछ ज्यादा बढ़ा दो, और कुरान को खूब तेहर तेहर कर पढ़ो 
+[73:5] हम तुम्पर एक भारी कलाम नाज़िल करने वाले हैं 
+[73:6] दर हकीकत रात का उठना नफ्स पर काबू पाने के लिए बहुत जरूरी और कुरान ठीक पढ़ने के लिए ज्यादा मौजू (उपयुक्त) है 
+[73:7] दिन के औकात में तो तुम्हारे लिए बहुत मसरुफियत (लंबे समय तक कब्जा) है 
+[73:8] अपने रब के नाम का जिक्र किया करो और सबसे कट कर उसी के हो रहो 
+[73:9] वू मशरिक (पूर्व) ओ मगरिब (पश्चिम) का मालिक है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, उसे अपना वकील बना लो 
+[73:10] और जो बातें लोग बना रहे हैं उन पर सब्र करो और शराफत के साथ उनसे अलग हो जाओ 
+[73:11] झूठलाने वाले खुश हाल लोगों से निमत्ने का काम तुम मुझपर छोड़ दो और यहीं ज़रा कुछ देर इसी हालत पर रहने दो 
+[73:12] हमारे पास (इनके लिए) भारी बेड़ियां हैं और भड़कती हुई आग 
+[73:13] और हलक (गले) में फ़ंसने वाला खाना और दर्द-नाक अज़ाब 
+[73:14] ये हमारा दिन होगा जब ज़मीन और पहाड़ दर्द उठेंगे और पहाड़ों का हाल ऐसा हो जाएगा जैसे रेत (रेत) के ढेर है जो बिखर जा रहे हैं 
+[73:15] तुम लोगों के पास हमने उसकी तरह एक रसूल तुम पर गवाह बना कर भेजा है जिस तरह हमने फिरौन की तरफ एक रसूल भेजा था 
+[73:16] (फिर देखलो के जब) फिरौन ने हमें रसूल की बात ना मानी तो हमने उसको बड़ी ताकत के साथ पकड़ लिया 
+[73:17] अगर तुम मान-ने से इनकार करोगे तो उस दिन कैसे बच जाओगे जो बच्चों को बूढ़ा कर देगा 
+[73:18] और जिसकी ताकत से आसमान फटा जा रहा होगा?अल्लाह का वादा तो पूरा होकर हाय रहना है 
+[73:19] ये एक हिदायत है, अब जिसका जी चाहिए अपने रब की तरफ जाने का रास्ता इख्तियार करले
+[73:20] ऐ नबी, तुम्हारा रब जनता है के तुम कभी दो तिहाई (दो तिहाई) रात के करीब और कभी आधी रात और कभी एक तिहाई (एक तिहाई) रात इबादत में खड़े रहते हो, और तुम्हारे साथियों में से भी एक गिरोह ये अमल करता है, अल्लाह हाय रात और दिन के औकात का हिसाब रखा है। उसे मालूम है कि तुमलोग औकात का ठीक शाम नहीं कर सकते, लिहाजा उसने तुमपर मेहरबानी फरमायी, अब जितना कुरान आसान से पढ़ सके हो पढ़ लिया करो। उसे मालूम है कि तुम में कुछ मरिज होंगे, दूसरे लोग अल्लाह के फजल की तलाश में सफर करते हैं, और कुछ और लोग अल्लाह की राह में जंग करते हैं, जितना कुरान बा आसान पढ़ा जा सके पढ़ लिया करो, नमाज कायम करो, जकात दो और अल्लाह को अच्छा क़र्ज़ देते रहो, जो कुछ भलाई तुम अपने लिए आगे भेजोगे उसे अल्लाह के यहां मौजुद पाओगे, वही ज्यादा बेहतर है और उसका अजर बहुत बड़ा है। अल्लाह से मगफिरत मांगते रहो, बेशक अल्लाह बड़ा गफूर ओ रहीम है 
+
+सूरह 74: अल-मुद्दथिर (खुद को लपेटने वाला) 
+------------------------------------------------ 
+[74:1] ऐ ओद लपीत (आवरण) कर लेटने वाले 
+[74:2] उठो और खबरदार करो 
+[74:3] और अपने रब की बदाई का एलान करो 
+[74:4] और अपने कपड़े पकड़ कर रखो 
+[74:5] और गंदगी से दूर रहो 
+[74:6] और एहसान ना करो ज्यादा हासिल करने के लिए 
+[74:7] और अपने रुब की खातिर सब्र करो 
+[74:8] अच्छा जब सूरज में फुक मारी जाएगी 
+[74:9] वो दिन बड़ा ही सही दिन होगा 
+[74:10] काफिरों के लिए हल्का न होगा 
+[74:11] चोद दो मुझे और उस शक्स को जिसने मैंने अकेला पैदा किया है 
+[74:12] बहुत सा माल उसको दिया 
+[74:13] उसके साथ हाजिर रहने वाले बेटे दिए 
+[74:14] और उसके लिए रियासत की राह हमवार की 
+[74:15] फिर वो तम (लालची इच्छा) रखता है के मैं उसे और ज्यादा दूं 
+[74:16] हरगिज नहीं वो हमारी आयत से इनाथ (जिद्दी विरोध) रखता है 
+[74:17] मैं तो उसे इस्तेमाल करता हूं एक कथिन चढ़ै चढ़ाऊंगा 
+[74:18] उसने सोचा और कुछ बात बनाने की कोशिश की 
+[74:19] तो खुदा की मार उसपर, कैसी बात बनाने की कोशिश की 
+[74:20] हां, खुदा की मार उसपर, कैसी बात बनाने की कोशिश की 
+[74:21] फिर(लोगों की तरफ) देखा 
+[74:22] फिर पेशानी सुकेदी और मुंह बनाया 
+[74:23] फिर पलटा और तकब्बुर में पढ़ गया 
+[74:24] आख़िर ए कार बोला के ये कुछ नहीं है मगर एक जादू जो पहले से चला आ रहा है 
+[74:25] ये तो एक इंसानी कलाम है 
+[74:26] अंकरिब मैं उसे दोज़ख में झोंक दूंगा 
+[74:27] और तुम क्या जानो के क्या है वो दोज़ख 
+[74:28] ना बाकी राखे ना छोड़े 
+[74:29] ख़ाल (त्वचा) झूलस देने वाली 
+[74:30] उन्नीस (उन्नीस) कारकून उसपर मुक़र्रर हैं
+[74:31] हमने दोज़ख़ के ये कारकून फ़रिश्ते बनाए हैं, और उनकी तड़प को काफिरों के लिए फ़ितना बना दिया है, ता-के एहले किताब को यकीन आ जाए और ईमान लाने वालों का ईमान बढ़े, और एहले किताब और मोमिनीन किसी शक्क में ना रहे, और दिल के बीमार और कुफ्फार ये कहें कि भला अल्लाह का, अजीब बात से क्या मतलब हो सकता है। इस तरह अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह करता है और जिसे चाहता है हिदायत बख्श देता है और तेरे रब के लश्करों (सैनिकों) को खुद उसके सिवा कोई नहीं जानता, और इस दोज़क का ज़िक्र इसके सिवा किसी ग़रज़ के लिए नहीं किया गया है के लोगों को इसकी हिदायत हो 
+[74:32] हरगिज़ नहीं, कसम है चांद की 
+[74:33] और रात की जबके वो पलटती है 
+[74:34] और सुबह की जबके वो रोशन होती है 
+[74:35] ये दोज़ख भी बड़ी चीज़ों में से एक है 
+[74:36] इंसानों के लिए डरावा 
+[74:37] तुम में से हर शक्स के लिए डरवा जो आगे बढ़ना चाहे या पीछे रह जाना चाहे 
+[74:38] हर मुतनफ़्फ़िस, अपने क़स्ब के बदले रहन है (किसी के कर्मों का बंधक) 
+[74:39] दयाएं बाज़ू वालों के सिवा 
+[74:40] जो जन्नत में होंगे, वहां वो 
+[74:41] मुजरिमोन से पूछेंगे 
+[74:42] तुम्हें क्या चीज़ दोज़ख़ में ले गई 
+[74:43] वो कहेंगे “हम नमाज पढ़ने वालों में से ना थे 
+[74:44] और मिस्कीन को खाना नहीं खिलाते थे 
+[74:45] और हक़ के खिलाफ़ बातें बनाने वालों के साथ मिलकर हम भी बातें बनने लगते थे 
+[74:46] और रोज़-ए-जज़ा को झूठ करार देते थे 
+[74:47] यहां तक ​​के हमें यकीनी चीज़ से सबका पेश आ गया” 
+[74:48] हमें वक्त सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश उनके किसी काम ना आएगी 
+[74:49] आख़िर लोगों को क्या हो गया है कि ये इस हिदायत से मुंह मोड़ रहे हैं 
+[74:50] गोया ये जंगली गधे हैं 
+[74:51] जो शेर से डर कर भाग पड़े हैं 
+[74:52] बलके इनमें से तो हर एक ये चाहता है के उसके नाम खुले खत (स्क्रॉल/ग्रंथ) भेजे जाए 
+[74:53] हरगिज नहीं, असल बात ये है के ये आखिरी का खौफ नहीं रखते 
+[74:54] हरगिज नहीं, ये तो एक हिदायत है 
+[74:55] अब जिसका जी चाहे इसे सबक हासिल करले 
+[74:56] और ये कोई सबक हासिल न करेगा इल्ला ये के अल्लाह ही ऐसा चाहिए वो इसका हक़दार है के उसे तकवा किया जाए और वो इस्का एहल है के (तकवा करने वालों को) बख्श दे 
+
+सूरह 75: अल-क़ियामा (पुनरुत्थान) 
+------------------------------------------------ 
+[75:1] नहीं मैं कसम खाता हूं कयामत के दिन की 
+[75:2] और नहीं, मैं कसम खाता हूं मालामत करने वाले नफ्स की 
+[75:3] क्या इंसान ये समझ रहा है कि हम उसकी हदियों को जमा ना कर पाएंगे 
+[75:4] क्यों नहीं? हम तो उसकी उंगलियों के पोर पोर तक ठीक बना देने पर कादिर हैं
+[75:5] मगर इंसान चाहता है कि आगे भी बढ़-आमलियां करता रहे 
+[75:6] "पूछता है" आखिर कब आना है वो कयामत का दिन 
+[75:7] फिर जब डेढे पथरा जाएगी (दृष्टि चकित हो जाएगी) 
+[75:8] और चांद बे-नूर हो जाएगा 
+[75:9] और चांद सूरज मिला कर एक करदिया जाएगा 
+[75:10] हमें वक्त यही इंसान कहेगा कहां भाग कर जाऊं 
+[75:11] हरगिज नहीं, वहां कोई जाएगा पनाह न होगी 
+[75:12] हमें रोज तेरे रुब हाय के सामने आकर ठहरना होगा 
+[75:13] हमें रोज इंसान को उसका सब अगला पिछला किया कराया बता दिया जाएगा 
+[75:14] बलके इंसान खुद ही अपने आप को खूब जानता है 
+[75:15] चाहे वो कितनी ही मजारतें (बहाने) करे 
+[75:16] ऐ नबी, इस वही को जल्दी जल्दी याद करने के लिए अपनी जुबान को हरकत ना दो 
+[75:17] इसको याद करा देना और पढ़ावा देना हमारी जिम्मेदारी है 
+[75:18] लिहाजा जब हम इसे पढ़ रहे हों हमें वक्त देते रहो, तुम इसके किरात को गौर से सुनते रहो 
+[75:19] फिर इसका मतलब समझा देना भी हमारी जिम्मेदारी है 
+[75:20] हरगिज नहीं, असल बात हाँ है के तुम लोग जल्दी हासिल होने वाली चीज (यानी दुनिया) से मुहब्बत रखते हो 
+[75:21] और आखिरी को छोड़ देते हो 
+[75:22] हमें रोज कुछ चेहरे तार-ओ-ताजा होंगे 
+[75:23] अपने रब की तरफ देख रहे होंगे 
+[75:24] और कुछ चेहरे उदास होंगे 
+[75:25] और समझ रहेंगे होंगे के उनके साथ कमर-तोड़ तोड़ो होने वाला है 
+[75:26] हरगिज नहीं, जब जान हलक तक पहुंच जाएगी 
+[75:27] और कहा जाएगा के है कोई झाड़ फूंक करने वाला 
+[75:28] और आदमी समझ लेगा के ये दुनिया से जुदाई का वक्त है 
+[75:29] और पिंडली(पैर) से पिंडली(पैर) जुड़ जाएगी 
+[75:30] वो दिन होगा तेरे रब की तरफ रावंगी का 
+[75:31] मगर उसने ना सच माना, और ना नमाज पढ़ी 
+[75:32] बलके झुटलया और पलट गया 
+[75:33] फिर अकदता हुआ अपने घर वालों की तरफ चल दिया 
+[75:34] ये रवीश तेरे ही लिए सजा देती है और तुझ ही को ज़िब देती है 
+[75:35] हां ये रवीश तेरे ही लिए सजा देती है और तुझ ही को ज़िब देती है 
+[75:36] क्या इंसान ने ये समझ रखा है के वो यूं ही मोहमल (अकेला छोड़ दिया, बिना किसी सवाल के) छोड़ दिया जाएगा 
+[75:37] क्या वो एक हकीर पानी का नुत्फा (वीर्य से शुक्राणु) ना था जो (रहम-ए-मदार में) टपकया जाता है 
+[75:38] फिर वो एक खून (थक्का) बना, फिर अल्लाह ने उसका जिस्म बनाया और उसकी आजा दुरुस्त किए 
+[75:39] फिर उसे मर्द और औरत की दो क़िस्में बनाई 
+[75:40] क्या वो इसपर कादिर नहीं है के मरने वालों को फिर जिंदा करदे 
+
+सूरह 76: अल-इंसान (द मैन) 
+------------------------------------------------ 
+[76:1] क्या इंसान पर ला मुतानाही ज़माने का एक वक़्त ऐसा भी गुज़रा है जब वो कोई काबिल ए ज़िक्र चीज़ ना था
+[76:2] हमने इंसान को एक मख़लुत नटफ़े (अंतरमिश्रित शुक्राणु) से भुगतान किया ता-के उसका इम्तिहान लें और इस ग़रज़ के लिए हमने उसे सुने और देखने वाला बनाया 
+[76:3] हमने उसे रास्ता दिखाया, ख़्वाह शुकर करने वाला बने या कुफ़्र करने वाला 
+[76:4] कुफ़्र करने वालों के लिए हमने जंजीरें और तौक (बेड़ियां) और भड़कती हुई आग मुहैया कर रखी है 
+[76:5] नेक लोग (जन्नत में) शराब के ऐसे सागर पिएंगे जिनमें आबे काफूर की आमिश (मिश्रण) होगी 
+[76:6] ये एक बहता चश्मा (वसंत) होगा जिसके पानी के साथ अल्लाह के बंदे शराब पिएंगे और जहां चाहेंगे बा-सहुलत उसकी शाखें (निकल) लेंगे 
+[76:7] ये वो लोग होंगे जो (दुनिया में) नजर पूरी करते हैं, और उस दिन से डरते हैं जिसकी आफत हर तरफ फैली हुई होगी 
+[76:8] और अल्लाह कि मुहब्बत में मिस्कीन और यतीम और क़ैदी को खाना खिलाते हैं 
+[76:9] और उन्हें कहते हैं के (हम तुम्हें सिर्फ) अल्लाह की खातिर खिला रहे हैं, हम तुमसे ना कोई बदला चाहते हैं ना शुक्रिया 
+[76:10] हमें तो अपने रब से उस दिन के अज़ाब का खौफ़ लाहिक है जो सच मुसीबत का इन्तेहाई तवील दिन होगा 
+[76:11] पास अल्लाह ताला उन्हें हमारे दिन के शरर से बचा लेगा और उन्हें ताजगी और सुरूर बख्शेगा 
+[76:12] और उनके सब्र के बदले में उन्हें जन्नत और रेशमी लिबास अता करेगा 
+[76:13] वहां वो अनचे मस्नदों पर ताकिये लगाये बैठे होंगे, ना उन्हें धूप की गर्मी सतायेगी ना जादे की ठंड (कड़ाके की ठंड) 
+[76:14] जन्नत की छाँव उन पर झुकी हुई साया कर रही होगी, और उसके फल हर वक्त उनके बस में होंगे(के जिस तरह चाहे उन्हें तोड़ लें) 
+[76:15] उनके आगे चांदी के बर्तन और शेष के प्याले गर्दिश कराए जा रहे होंगे 
+[76:16] शेष भी वो जो चांदी की क़िस्म के होंगे, और उनको (मुंतज़मीन-ए-जन्नत नहीं) ठीक अंदाज़ के मुताबिक भरा होगा 
+[76:17] उनको वहां ऐसी शराब के जाम पिलाये जायेंगे जिसमें अदरक की आमद होगी 
+[76:18] ये जन्नत का एक चश्मा होगा जिसे सालसबिल कहा जाता है 
+[76:19] उनकी खिदमत के लिए ऐसे लड़के दौड़ते फिर रहेंगे होंगे जो हमेशा लड़के ही रहेंगे।तुम उन्हें देखो तो समझो के मोती (मोती) है जो बिखर गए हैं 
+[76:20] वहां जिधर भी तुम निगाह डालोगे नियामतें ही नियामतें और एक बड़ी सल्तनत का सर ओ समां तुम्हें नजर आएगा 
+[76:21] उनके ऊपर बारीक रेशम के सब्ज लिबास और एटलस ओ देबा के कपड़े (रिच) ब्रोकेड)होंगे, उनको चांदी के कंगन पहनेंगे जाएंगे, और उनका रब उनको निहायत पाकीजा शराब पिलाएगा 
+[76:22] ये है तुम्हारी जजा और तुम्हारी कार-गुजारी काबिल-ए-कदर ठहरी है 
+[76:23] ऐ नबी, हमने ही तुमपर ये कुरान थोड़ा थोड़ा करके नाज़िल किया है 
+[76:24] लिहाज़ा तुम अपने रुब के हुकुम पर सब्र करो, और मुझमें से कोई बढ़-अमल या मुनकिर-ए-हक की बात न मानो
+[76:25] अपने रब का नाम सुबह-ओ-शाम याद करो 
+[76:26] रात को भी उसके हुजूर सजदा रायज़ हो, और रात के तवील औकात में उसकी तस्बीह करते रहो 
+[76:27] ये लोग तो जल्दी हासिल होने वाली चीज (दुनिया) से मुहब्बत रखते हैं है और अगले जो भारी दिन आने वाला है उसे नज़र अंदाज़ करते हैं 
+[76:28] हमने ही इनको पेदा किया है और इनके जोड़ मजबूत किए हैं, और हम जब चाहें इनकी शक्लों को बदल कर रख दें 
+[76:29] ये एक हिदायत है, अब जिसका जी चाहिए अपने रब की तरफ जाने का रास्ता इख्तियार करले 
+[76:30] और तुम्हारे चाहने से कुछ नहीं होता जब तक कि अल्लाह न चाहे, यकीनन अल्लाह बड़ा अलीम-ओ-हकीम है 
+[76:31] अपनी रहमत में जिसका चाहता है दाख़िल करता है, और जालिमों के लिए उसने दर्दनाक अज़ाब तय्यार कर रक्खा है 
+
+सूरह 77: अल-मुर्सलात (वे भेजे गए) 
+------------------------------------------------ 
+[77:1] कसम है उन (हवाओं) की जो पै डर पै भेजती हैं 
+[77:2] फिर तूफानी रफ़्तार से चलती है 
+[77:3] और (बादलों को) उठा कर फैलाती है 
+[77:4] फिर (उनको) फाड़ कर जुदा करती है 
+[77:5] फिर (दिलों में खुदा की)याद डालती है 
+[77:6] उजार (औचित्य) के तौर पर या डरावे के तौर पर 
+[77:7] जिस चीज का तुमसे वादा किया जा रहा है वह जरूर होने वाली है 
+[77:8] फिर जब सितारे मांड (बुझाना) पड़ जाएगा 
+[77:9] और आसमान फाड़ दिया जाएगा 
+[77:10] और पहाड़ धुनक डाले जाएंगे (उड़ा दिया जाएगा) 
+[77:11] और रसूलों की हाजिरी का वक्त आ पहुंचेगा (उस रोज वो चीज पैदा हो जाएगी) 
+[77:12] किस रोज के आपके लिए ये काम उठा रखा गया है 
+[77:13] फ़ैसले के रोज़ के लिए 
+[77:14] और तुम्हें क्या खबर के वो फ़ैसले का दिन क्या है 
+[77:15] तबाही है उस दिन झूठ बोलने वालों के लिए 
+[77:16] क्या हमने एग्लोन को हलाक नहीं किया 
+[77:17] फिर उन्हीं के पीछे हम बाद वालों को चलाएंगे 
+[77:18] मुजरिमों के साथ हम यही कुछ करते हैं 
+[77:19] तबाही है उस दिन झुटलाने वालों के लिए 
+[77:20] क्या हमने एक हकीर पानी से तुम्हें पैदा नहीं किया 
+[77:21] और एक मुकर्ररा मुद्दत तक 
+[77:22] उसे एक महफूज जगह ठहरे रक्खा 
+[77:23] तो देखो, हम इसपर कादिर थे, पास हम बहुत अच्छी कुदरत रखने वाले हैं 
+[77:24] तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए 
+[77:25] क्या हमने ज़मीन को समेट कर रखने वाली नहीं बनाया 
+[77:26] ज़िंदों के लिए भी और मुर्दों के लिए भी 
+[77:27] और इस में बुलंद-ओ-बाला पहाड़ जमाए, और तुम्हें मीठा पानी पिलाया 
+[77:28] तबाही है हमें रोज़ झुटलाने वालों के लिए 
+[77:29] चलो अब उसी चीज़ की तरफ जिसे तुम झुटलाया करते थे
+[77:30] चलो हमें साए की तरफ जो तीन शाखों (कॉलम) वाला है 
+[77:31] ना ठंडक छूने वाला और ना आग की गोद से बचाने वाला 
+[77:32] वो आग महल (महल/किला) जैसी बड़ी बड़ी चिंगारियां फेंकेगी 
+[77:33] (जो उछलती हुई यूं मेहसूस होंगी )गोया के वो जर्द ऊंट (ऊंट) है 
+[77:34] तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए 
+[77:35] ये वो दिन है जिसमें वो ना कुछ बोलेंगे 
+[77:36] और ना उन्हें मौका दिया जाएगा के कोई उज्र(बहाना) पेश करें 
+[77:37] तबाही है उस दिन झूठलाने वालों के लिए 
+[77:38] ये फ़ैसले का दिन है हमने तुम्हें और तुमसे पहले गुज़रे हुए लोगों को जमा कर दिया है 
+[77:39] अब अगर कोई चल सकता है तो मेरे मुकाबले में चल देखो 
+[77:40] तबाही है उस दिन झूठलाने वालों के लिए 
+[77:41] मुत्तक़ी लोग आज साये और चश्में में हैं 
+[77:42] और जो फल वो चाहें (उनके लिए हाज़िर है) 
+[77:43] खाओ और पियो मजे से अपने उन अमल के सिली में जो तुम करते रहे हो 
+[77:44] हम नए लोग हैं को ऐसी ही जजा देते हैं 
+[77:45] तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए 
+[77:46] खा लो और मजे करलो थोड़े दिन, हकीकत में तुम लोग मुजरिम हो 
+[77:47] तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए 
+[77:48] जब इनसे कहा जाता है के (अल्लाह के आगे) झुको तो नहीं झुकते 
+[77:49] तबाही है उस रोज़ झुकने वालों के लिए 
+[77:50] अब (कुरान) के बाद और कौनसा कलाम ऐसा हो सकता है जिसपर ये ईमान लाये 
+
+सूरह 78: अन-नबा' (घोषणा) 
+------------------------------------------------ 
+[78:1] ये लोग किस चीज के बारे में पूछ-गज्ज कर रहे हैं 
+[78:2] क्या हम बड़ी खबर के बारे में हैं 
+[78:3] जिसका मुतालिक ये मुखतलिफ छे-मेई-गोइयां (असहमति) करने में लगे हुए हैं 
+[78:4] हरगिज नहीं एक-करीब इन्हें मालूम हो जाएगा 
+[78:5] हां हरगिज नहीं, करीब इन्हें मालूम हो जाएगा 
+[78:6] क्या ये वाकिया नहीं है के हमने जमीन को फर्श बनाया 
+[78:7] और पहाड़ों को पहाड़ो की तरह गाड़ दिया 
+[78:8] और तुम्हें (मर्दों और औरतों के) जोड़ो की शक्ल में पैदा किया 
+[78:9] और तुम्हारी नींद को ऐसे सुकून बनाया 
+[78:10] और रात को पर्दा पोश 
+[78:11] और दिन को मुआश का वक्त बनाया 
+[78:12] और तुम्हारे ऊपर सात मजबूत आसमान कायम किए 
+[78:13] और एक निहायत रोशन और गरम चिराग़ पैदा क्या 
+[78:14] और बादलों से लगता है बारिश बरसती है 
+[78:15] ता-के इसके ज़रिये से गल्ला (अनाज) और सब्जी 
+[78:16] और घने बाग उगे 
+[78:17] बाकी फ़ैसले का दिन एक मुकर्रर वक़्त है 
+[78:18] जिस रोज़ सूर में फुक मार दी जाएगी तुम फौज डर फौज निकल आओगे
+[78:19] और आसमान खोल दिया जाएगा हटा के वो दरवाजे ही दरवाजे बन कर रह जाएगा 
+[78:20] और पहाड़ चलाएंगे यहां तक ​​के वो साराब (मृगतृष्णा) हो जाएंगे 
+[78:21] दर हकीकत जहन्नुम एक घाट (घात) है 
+[78:22] सरकशों का ठिकाना 
+[78:23] जिसमें वो मुद्दतों पड़े रहेंगे 
+[78:24] उसके अंदर कोई ठंडक और पीने के काबिल किसी चीज का मजा वो न चखेंगे 
+[78:25] कुछ मिलेगा तो बस गरम पानी और जख्मों का धो-वान(पीप) 
+[78:26] (उनके करतूतों) का भारपुर बदला 
+[78:27] वो किसी हिसाब की तवक्कू ना रखते थे 
+[78:28] और हमारी आयतों को उन्होंने बिल्कुल झुटला दिया था 
+[78:29] और हाल ये था के हमने हर चीज गिन कर लिख रखी थी 
+[78:30] अब चाहो मजा, हम तुम्हारे लिए अज़ाब के सिवा किसी चीज में हरगिज इज़ाफा ना करेंगी 
+[78:31] यकीनन मुत्तकियों (पवित्र) के लिए कामरानी का एक मुकाम है 
+[78:32] बाघ और अंगुर 
+[78:33] और नौखेज हम्सिन लड़कियां 
+[78:34] और झलकते हुए जाम 
+[78:35] वहां कोई लगव(व्यर्थ) और झूठी बात वो ना सुनेंगे 
+[78:36] जजा और काफी इनाम तुम्हारे रब की तरफ से 
+[78:37] हमें निहायत मेहरबान खुदा की तरफ से जो जमीन और आसमान का और इनके दरमियान की हर चीज का मालिक है जिसके सामने किसी को बोलने का यारा नहीं 
+[78:38] जिस रोज़ रूह और मलाइका सफ़ बस खड़े होंगे। कोई ना बोलेगा सिवाए उसके जिसे रहमान इजाज़त दे और जो ठीक बात कहे 
+[78:39] वो दिन बार-हक़ है, अब जिसका जी चाहे अपने रब की तरफ पलटने का रास्ता इख्तियार करले 
+[78:40] हमने तुम लोगों को अज़ाब से डरा दिया है जो करीब आ लगा है. जिस रोज़ आदमी वो सब कुछ देख लेगा जो उसके हाथों ने आगे भेजा है, और काफ़िर पुकार उठेगा के काश में खाक (मिट्टी) होता है 
+
+सूरह 79: अन-नज़ी'अत (वे जो तरसते हैं) 
+------------------------------------------------ 
+[79:1] कसम है उन (फरिश्तों) की जो डूब कर खिंचते हैं 
+[79:2] और आहिस्तगी से (धीरे ​​से) निकल ले जाते हैं 
+[79:3] और (उन फ़रिश्तों की जो कायनात में) तेजी से तैरते फिरते हैं 
+[79:4] फिर (हुकुम बजा लाने में) सबक करते हैं 
+[79:5] फिर (एहकाम-इलाही के मुताबिक) मामलात का इंतिज़ाम चलते हैं 
+[79:6] जिस रोज़ हिला मारे गा ज़लज़ले का झटका 
+[79:7] और उसके पीछे एक और झटका पड़ेगा 
+[79:8] कुछ दिल होंगे जो हमें रोज़ खौफ से कांप रहे होंगे 
+[79:9] निगाहें उनकी सहमत (डाउनकास्ट) हुई होगी 
+[79:10] ये लोग कहते हैं “क्या वकै हम पलटा कर फिर वापस लाये जायेंगे?” 
+[79:11] "क्या जब हम खोकली बोसीदा (खोखला और सड़ा हुआ) हदियां बन चुके होंगे?" 
+[79:12] कहने लगे "ये वापसी तो फिर बड़े घाटे(नुक्सान) की होगी"
+[79:13] हलांके ये बस इतना काम है के एक ज़ोर की डांट पड़ेगी 
+[79:14] और यकायक ये खुले मैदान में मौजुद होंगे 
+[79:15] क्या तुम्हें मूसा के किस्से की खबर मिलती है 
+[79:16] जब उसके रब ने उसे तुवा के मुक़द्दस कहा वादी (घाटी) में पुकारा था 
+[79:17] के फिरौन के पास जा, वो व्यंग्य हो गया है 
+[79:18] और उसे कहा, क्या तू इसके लिए तैयार है के पाकीज़गी इख्तियार करे 
+[79:19] और मैं तेरे रब की तरफ तेरी रहनुमाई करूं तो (उसका) खौफ terey andar paida ho?” 
+[79:20] फिर मूसा ने (फिरौन के पास जा कर) उसको बड़ी निशानी दिखाई 
+[79:21] मगर उसने झुटला दिया और ना माना 
+[79:22] फिर चाल बाज़ियां करने के लिए पलटा 
+[79:23] और लोगों को जमा करके उसने पुकार कर कहा 
+[79:24] “मैं तुम्हारा सबसे बड़ा रब हूं” 
+[79:25] आख़िर-ए-कार अल्लाह ने उसे आख़िरत और दुनिया के अज़ाब में पकड़ लिया 
+[79:26] दर हकीकत इस में बड़ी इब्रत है हर उस शक्स के लिए जो डरे 
+[79:27] क्या तुम लोगों की तख़लीक़ (पैदाइश) ज़्यादा सच काम जय हो आसमान की? अल्लाह ने उसको बनाया 
+[79:28] उसकी छत (छत) खूब ऊंची उठाई फिर उसका तवाज़ुन क़याम किया (इसे समानुपातिक) 
+[79:29] और उसकी रात ढांकी और उसका दिन निकला 
+[79:30] इसके बाद ज़मीन को उसने बिछाया 
+[79:31] उसके अंदर से उसका पानी और चारा निकला 
+[79:32] और पहाड़ उसमें गढ़ दिए 
+[79:33] सामान-ए-ज़ीस्ट (प्रावधान) के तौर पर तुम्हारे लिए और तुम्हारे अवसरों के लिए 
+[79:34] फिर जब वो हंगामा-ए-अज़ीम बरपा होगा 
+[79:35] जिस रोज़ इंसान अपना सब किया धारा याद करेगा 
+[79:36] और हर देखने वाले के सामने दोज़क खोल कर रख दी जाएगी 
+[79:37] तो जिसने सरकशी की थी 
+[79:38] और दुनिया की जिंदगी को तारजी दी थी 
+[79:39] दोज़ख ही उसका ठिकाना होगी 
+[79:40] और जिसने अपने रुब के सामने खड़े होने का खौफ किया था और नफ्स को बुरी ख्वाहिशों से बाज़ रखा था 
+[79:41] जन्नत उसका ठिकाना होगी 
+[79:42] ये लोग तुमसे पूछते हैं के आखिर वो घड़ी कब आकर ठहरे गी 
+[79:43] तुम्हारा क्या काम है हमारे का वक़्त बताओ 
+[79:44] उस का इल्म तो अल्लाह पर ख़तम है 
+[79:45] तुम सिर्फ ख़बरदार करने वाले हो हर उस शक्स को जो उसका ख़ौफ़ करे 
+[79:46] जिस रोज़ ये लोग उसे देख लेंगे तो उन्हें यूं महसूस होगा के (ये दुनिया में या हालात-ए-मौत मेई) बस एक दिन के पिछले पहर या अगले पहर तक ठहरे है 
+
+सूरा 80: 'अबासा (उसने भौंहें चढ़ा लीं) 
+------------------------------------------------ 
+[80:1] [पैगंबर] तुर्श-रूह (भौंहें चढ़ाए हुए) हुआ और बेरुखी बारती 
+[80:2] इस बात पर के वो अंधा उसके पास आ गया 
+[80:3] तुम्हें क्या खबर, शायद वाह सुधार जाए
+[80:4] या हिदायत पर ध्यान दे और हिदायत करना हमारे लिए नफ़ेआ (फ़य्यादमंद) हो 
+[80:5] जो शक्स बे-परवाही बरता है 
+[80:6] उसकी तरफ तो तुम तवज्जुह करते हो 
+[80:7] हलांके अगर वो ना सुधरे तो तुम पर उसकी क्या ज़िम्मेदारी है 
+[80:8] और जो खुद तुम्हारे पास दौड़ा आता है 
+[80:9] और वह डर रहा है 
+[80:10] उससे तुम बेरुखी बारात-ते हो 
+[80:11] हरगिज नहीं ये तो एक हिदायत है 
+[80:12] जिसका जी चाहे इसे कबूल करे 
+[80:13] ये ऐसे सहीफों मैं दरज है जो मुकर्रम हैं 
+[80:14] बुलंद मरतबा हैं, पाकीज़ा हैं 
+[80:15] मुअज्जज़ और नीक कातिबों के 
+[80:16] हाथों में रहते हैं 
+[80:17] लानत हो इंसान पर कैसा सच मुन्किर-ए-हक (सच्चाई से इनकार करता है) है ये 
+[80:18] किस चीज से अल्लाह ने इसे पैदा किया है 
+[80:19] नुत्फा की एक बूंद से अल्लाह ने इसे पैदा किया फिर इसकी तकदीर मुकर्रर की 
+[80:20] फिर इसके लिए जिंदगी की राह आसान की 
+[80:21] फिर इसे मौत दी और क़ब्र में पाहुंचया 
+[80:22] फिर जब चाहिए वो इसे दोबारा उठा खड़ा करे 
+[80:23] हरगिज नहीं, इसने वो फर्ज अदा नहीं किया जिसका अल्लाह ने इसे हुकुम दिया था 
+[80:24] फिर जरा इंसान अपनी खुराक (खाने/खाने) को देखे 
+[80:25] हमने खूब पानी डाला (डाला) 
+[80:26] फिर जमीन को अजीब तरह फाड़ा 
+[80:27] फिर हमारे अंदर उगे गैले(अनाज) 
+[80:28] और अंगूर और तरकारियां 
+[80:29] और ज़ैतून और खजूरें 
+[80:30] और घने बाग(बगीचे) 
+[80:31] और तरह तरह के फल और चारे 
+[80:32] तुम्हारे आपके लिए तुम्हारे मवेशी (मवेशी) के लिए सामान-ए-ज़िस्ट (प्रावधान) के तौर पर 
+[80:33] आख़िर-ए-कार जब वो कान बहरे कर देने वाली आवाज़ बुलंद होगी 
+[80:34] उस रोज़ आदमी अपने भाई 
+[80:35] और अपनी माँ और अपने बाप 
+[80:36] और अपनी बीवी और अपनी औलाद से भागेगा 
+[80:37] उनमें हर शक्स पर उस दिन ऐसा वक्त आ पड़ेगा के उसे अपने सिवा किसी का होश न होगा 
+[80:38] कुछ चेहरे हमें रोज दमक रहे होंगे 
+[80:39] हशश बशश और खुश ओ खुर्रम होन्गी 
+[80:40] और कुछ चेहरों पर उस रोज़ खाक (धूल) उड़ रही होगी 
+[80:41] और कलों (अंधेरा) छाई हुई होगी 
+[80:42] यही काफिर ओ फजिर (अविश्वासी और दुष्ट) लोग हैं 
+
+सूरह 81: अत-तकवीर (द फोल्डिंग अप) 
+------------------------------------------------ 
+[81:1] जब सूरज लपेट दिया जाएगा 
+[81:2] और जब तारे बिखर जाएंगे 
+[81:3] और जब पहाड़ चलाये जाएंगे 
+[81:4] और जब दस महीने की हमीला ऊंटनियां (वह-ऊंटनी) अपने हाल पर छोड़ दी जाएंगी 
+[81:5] और जब जंगली जानवर समथ कर इखत्ते कर दिए जाएंगे
+[81:6] और जब समंदर भड़का दिए जाएंगे 
+[81:7] और जब जाने (जिस्म से) जोध दी जाएगी 
+[81:8] और जब जिंदा गाड़ी हुई (दफन) लड़की से पूछ जाएगी 
+[81:9] के वो किस कसूर में मरी गई 
+[81:10] और जब आमाल-नाम (कर्मों की पुस्तक) खोले जाएंगे 
+[81:11] और जब आसमान का परदा हटा दिया जाएगा 
+[81:12] और जब जहन्नम देहकै जाएगी 
+[81:13] और जब जन्नत करीब ले आएगी 
+[81:14] हमें वक्त हर शक्स को मालूम हो जाएगा के वो क्या लेकर आया है 
+[81:15] पास नहीं मैं कसम खाता हूं 
+[81:16] पलटने और चुप जाने वाले तारों की 
+[81:17] और रात की जबके वो रुक्सत हुई 
+[81:18] और सुबह की जबके उसने सांस लिया 
+[81:19] ये फिल वाकिया एक बुज़ुर्ग पैगाम-बार का क़ौल है 
+[81:20] जो बड़ी तवानाई (हो सकता है) रखता है, अर्श वाले के यहां बुलंद मरतबा है 
+[81:21] वहां उसका हुकुम मन जाता है, वो बा-एतमाद (भरोसेमंद) है 
+[81:22] और (ऐ एहले मक्का) तुम्हारा रफीक (साथी) मजनूं (पागल) नहीं है 
+[81:23] उसने पैगम्बर को रोशन उफ़ाक (स्पष्ट क्षितिज) पर देखा है 
+[81:24] और वह गैब (के इस इलम को लोगों तक पहुंच सके) के मामले में बख़ील नहीं है 
+[81:25] और यह किसी शैतान-ए-मर्दूद का क़ौल नहीं है 
+[81:26] फिर तुम लोग किधर चले जा रहे हो 
+[81:27] ये तो सारे जहां वालों के लिए एक हिदायत है 
+[81:28] तुम मेरे साथ हर उस शक्स के लिए जो राह-ए-रास्त पर चलना चाहता हो 
+[81:29] और तुम्हारे चाहने से कुछ नहीं होता जब तक अल्लाह रब्ब-उल-आलमीन न चाहिए 
+
+सूरह 82: अल-इन्फितर (क्लीविंग) 
+------------------------------------------------ 
+[82:1] जब आसमान फट जाएगा 
+[82:2] और जब तारे बिखर जाएंगे 
+[82:3] और जब समंदर फाड़ दिए जाएंगे 
+[82:4] और जब कब्रें खुल जाएंगी 
+[82:5] हमारा वक्त हर शक्स को उसका अगला पिछला सब किया धरा मालूम हो जाएगा 
+[82:6] ऐ इंसान किस चीज ने तुझे और अपने उस रब-ए-करीम की तरफ से धोखे में डाल दिया 
+[82:7] जिसने तुझ पेदा किया, तुझे नेक-सुक से दुरुस्त किया (आपको आकार दिया), तुझे मुतनसिब (अच्छी तरह से अनुपातिक) बनाया 
+[82:8] और जिस सूरत में चाहा तुझको जोड़ कर तैयार किया 
+[82:9] हरगिज नहीं बलके (असल बात ये है के) तुमलोग जजा-ओ-सजा को झुठलाते हो 
+[82:10] हलांके तुमपर निग्रां मुकर्रर हैं 
+[82:11] ऐसे मुअज्जज कातिब 
+[82:12] जो तुम्हारे हर फेल (अमल) को जानते हैं 
+[82:13] यक़ीनन नेक लोग मजे में होंगे 
+[82:14] और बेचैन होकर लोग जहन्नम में जाएंगे 
+[82:15] जजा के दिन वो इस में दाख़िल होंगे 
+[82:16] और हम से हरगिज़ गायब न होंगे
+[82:17] और तुम क्या जानते हो के वो जजा का दिन क्या है 
+[82:18] हां तुम्हें क्या खबर के वो जजा का दिन क्या है 
+[82:19] ये वो दिन है जब किसी शक के लिए कुछ करना किसी के बस में न होगा, फैसला उस दिन बिल्कुल अल्लाह के इख्तियार में होगा 
+
+सूरह 83: अत-तत्फीफ (कर्तव्य में चूक) 
+------------------------------------------------ 
+[83:1] तबाही है दांडी मारने वालों के लिए 
+[83:2] जिनका हाल ये है कि जब लोगों से लेते हैं तो पूरा पूरा लेते हैं 
+[83:3] और जब उनको नाप कर या टोल कर देते हैं तो उन्हें घाटा देते हैं है 
+[83:4] क्या ये लोग नहीं समझते के एक बड़े दिन 
+[83:5] ये उठा कर लाए जाने वाले हैं 
+[83:6] उस दिन जबके सब लोग रब्ब-उल-आलमीन के सामने खड़े होंगे 
+[83:7] हरगिज नहीं, यकीनन बदकारों का नाम-ए-आमाल क़ैद-ख़ाने के दफ़्तर में है 
+[83:8] और तुम्हें क्या मालूम के वो क़ैद-ख़ाने का दफ़्तर क्या है 
+[83:9] एक किताब है लिखी हुई 
+[83:10] तबाही है उस रोज़ झूठलाने वालों के लिए 
+[83:11] जो रोज़-ए-जज़ा को झुटलाते हैं 
+[83:12] और उसे नहीं झुटलता मगर हर वो शक्स जो हद से गुजर जाने वाला बद-अमल है 
+[83:13] उसे जब हमारी आयतें सुनाई जाती हैं तो कहता है ये तो अगले वक्त की कहानियां हैं 
+[83:14] हरगिज नहीं, बलके दरसल इन लोगों के दिलों पर इनके बुरे अमल का ज़ंग (जंग) चढ़ गया है 
+[83:15] हरगिज़ नहीं बिल यकीन हमें रोज़ ये अपने रब की दीदार (दीदार) से महरूम रखे जाएंगे 
+[83:16] फिर ये जहन्नुम में जा पड़ेंगे 
+[83:17] फिर इनसे कहा जाएगा के ये वही चीज़ है जैसे तुम झूठलाया करते थे 
+[83:18] हरगिज नहीं, बेशक नए आदमियों का नाम-ए-आमाल बुलंद पाया लोगों के दफ्तर में है 
+[83:19] और तुम्हें क्या खबर है क्या है वो बुलंद पाया लोगों का दफ्तर 
+[83:20] एक लिखी हुई किताब है 
+[83:21] जिसकी निगेह-दाश्त मुकर्रब फ़रिश्ते करते हैं 
+[83:22] बेशाख नेक लोग बादे मजे में होंगे 
+[83:23] ऊंची मसनादो (सोफे) पर बैठे नजरिए कर रहे होंगे 
+[83:24] उनके चेहरों पर तुम खुशहाली की रौनक महसूस करोगी 
+[83:25] उनको नफ़ीस तारें सरबंद शराब पिलाई जाएगी जिसपर मुश्क की मोहर (सील) लगेगी 
+[83:26] जो लोग दूसरों पर बाजी ले जाना चाहते हैं, वह इस चीज को हासिल करने में बाजी ले जाने की कोशिश करें 
+[83:27] हमें शराब में तस्नीम की आमेज (मिश्रण) होगी 
+[83:28] ये एक चश्मा है जिसके पानी के साथ मुकर्रब लोग शराब पिएंगे 
+[83:29] मुजरिम लोग दुनिया में ईमान लाने वालों का मज़ाक उड़ाते थे 
+[83:30] जब उनके पास से गुज़रते तो आंखें मार मार कर उनकी तरफ इशारे करते थे 
+[83:31] अपने घरोन की तरफ पलट-ते तो मजे लेते हुए पलट-ते थे
+[83:32] और जब उन्हें देखते तो कहते थे के ये बहके हुए लोग हैं 
+[83:33] हलांके वो उन पर निगरान बनकर नहीं भेजये गए थे 
+[83:34] आज ईमान लाने वाले कुफ्फार पर हंस रहे हैं 
+[83:35] मसनदों पर बैठे हुए उनका हाल देख रहे हैं 
+[83:36] मिल गया न काफिरों को उन हरकतों का सवाब जो वो किया करता था 
+
+सूरह 84: अल-इंशिकाक (द बर्स्टिंग असंडर) 
+------------------------------------------------ 
+[84:1] जब आसमां फट जाएगा 
+[84:2] और अपने रब का फमां की तमील करेगा और उसके लिए हक यहीं है (के अपने रुब का हुकुम माने) 
+[84:3] और जब ज़मीन फैला दी जाएगी 
+[84:4] और जो कुछ उसके अंदर है उसे बाहर फेंक कर खाली हो जाएगी 
+[84:5] और अपने रुब के हुकुम की तमील करेगी और उसके लिए हक यहीं है (काय उसकी तमील करे) 
+[84:6] ऐ इंसान तू काशान काशान अपने रब की तरफ चल जा रहा है और उसे मिलने वाला है 
+[84:7] फिर जिसका नाम-ए-आमाल उसके सीधे हाथ में दे दिया गया 
+[84:8] उसका हलका हिसाब लिया जाएगा 
+[84:9] और वो अपना लोगों की तरफ खुश ख़ुश पलटेगा 
+[84:10] रहा वो शक्स जिसका नाम-ए-आमाल उस की पीठ के पीछे दिया जाएगा 
+[84:11] तो वो मौत को पुकारेगा 
+[84:12] और भक्ति हुई आग में जा पड़ेगा 
+[84:13] वो अपने घर वालों में मगन था 
+[84:14] उसने समझ था के उसे कभी पलटना नहीं है 
+[84:15] पलटना कैसे ना था, उसका रब उसे करतूत देख रहा था 
+[84:16] पास नहीं मैं कसम खाता हूं शफक (ट्वाइलाइट) की 
+[84:17] और रात की और जो कुछ वही लेती है 
+[84:18] और चांद की जबके वो माह-ए-कामिल (पूर्ण) हो जाता है 
+[84:19] तुमको जरूर दरजा बा दरजा एक हालत से दूसरी हालत की तरफ गुज़रते जाना है 
+[84:20] फिर लोगों को क्या हो गया है के ये ईमान नहीं लाते 
+[84:21] और जब कुरान इनके सामने पड़ा जाता है सजदा नहीं करते 
+[84:22] बलके ये मुनकिरीन तो उल्टा झूठलाते हैं 
+[84:23] हलांके जो कुछ ये (अपने नाम-ए-आमाल में) जामा कर रहे हैं अल्लाह उसे खूब जानता है 
+[84:24] लिहाजा इनको दर्दनाक अज़ाब की बशारत देदो 
+[84:25] अलबत्ता जो लोग ईमान ले आये हैं और जिन्हो ने नेक अमल किये हैं उनके लिए कभी ख़तम न होने वाला अजर है 
+
+सूरह 85: अल-बुरूज (सितारे) 
+------------------------------------------------ 
+[85:1] कसम है मज़बूत क़लों वाले (अभेद्य महल) आसमान की 
+[85:2] और हमारे दिन की जिसका वादा किया गया है 
+[85:3] और देखने वाले की और देखी जाने वाली चीज की 
+[85:4] काय मारे गए गड्ढे वाले 
+[85:5] उस गड्ढे वाले] जिस में खूब भड़कते हुए इंधन की आग थी
+[85:6] जबके वो हमें गद्दे के किनारे पर बिठाए हुए थे 
+[85:7] और जो कुछ वो ईमान लाने वालों के साथ कर रहे थे उसे देख रहे थे 
+[85:8] और उन एहले ईमान से उनकी दुश्मनी इसके सिवा किसी वजह से ना थी के वो हमें खुदा पर ईमान ले आए था जो ज़बरदस्त और अपनी ज़ात में आप महमूद (प्रशंसनीय) हैं 
+[85:9] जो आसमान और ज़मीन की सल्तनत का मालिक है, और वो खुदा सब कुछ देख रहा है 
+[85:10] जिन लोगों ने मोमिन मर्दन और औरतों पर ज़ुल्म ओ सितम तोड़ा और फिर उसे तैयब ना हुए, यकीनन उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब है और उनके लिए जलाए जाने की सजा है 
+[85:11] जो लोग ईमान लाए और जिन्हो ने नीक अमल किया यकीनन उनके लिए जन्नत के बाग हैं जिनके बारे में खास बातें होंगी, ये है बड़ी कामयाब 
+[85:12] डार हकीकत तुम्हारे रब की पकड़ बड़ी है 
+[85:13] वही पहली बार पैदा करता है और वही दोबारा पैदा करेगा 
+[85:14] और वह बक्शने वाला है, मोहब्बत करने वाला है 
+[85:15] अर्श का मालिक है, बुज़ुर्ग-ओ-बरतर है 
+[85:16] और जो कुछ चाहिए कर डालने वाला है 
+[85:17] क्या तुम्हें लश्करों की खबर मिलती है 
+[85:18] फिरौन और समूद (के लश्करों) की 
+[85:19] मगर जिन्हो ने कुफ्र किया है वो झुटलाने में लगे हैं 
+[85:20] हलांके अल्लाह ने उनको घेरे में ले रखा है 
+[85:21] (उनके झूठलाने से इस कुरान का कुछ नहीं बिगड़ता) बाल्की ये कुरान बुलंद पाया है 
+[85:22] हमें लोह में (नक्श है) जो महफूज है 
+
+सूरह 86: अत-तारिक (रात को आने वाला) 
+------------------------------------------------ 
+[86:1] कसम है आसमान की और रात को नामदार होने वाले की 
+[86:2] और तुम क्या जानो क्या वो रात को नामदार होने वाला क्या है 
+[86:3] चमकता हुआ तारा 
+[86:4] कोई जान ऐसी नहीं है जिसका ऊपर कोई निगाह न हो 
+[86:5] फिर जरा इंसान यहीं देख ले के वो किस चीज से भुगतान किया गया है 
+[86:6] एक उछालने वाले पानी से भुगतान किया गया है 
+[86:7] जो पीत और सीने की हदियों के दरमियान से निकलता है 
+[86:8] यकीनन वो (खालीक) उसे दोबारा भुगतान करने पर कादिर है 
+[86:9] जिस रोज पोशिदा असर की जांच पडताल होगी 
+[86:10] हमें वक्त इंसान के पास न खुद अपना कोई ज़ोर होगा और न कोई उसकी मदद करने वाला होगा 
+[86:11] कसम है बारिश बरसाने वाले आसमान की 
+[86:12] और (नबातात उगते वक़्त) फट जाने वाली ज़मीन की 
+[86:13] ये एक जच्ची-तुली बात है 
+[86:14] हंसी मजाक नहीं है 
+[86:15] ये लोग कुछ चल रहे हैं 
+[86:16] और मैं भी एक चल रहा हूं 
+[86:17] पास छोड़ दो ऐ नबी, काफिरों को एक जरा की जरा इन के हाल पर छोड़ दो 
+
+सूरह 87: अल-अला (सर्वोच्च)
+------------------------------------------------ 
+[87:1] (ऐ नबी) अपने रब-ए-बरतर का नाम की तस्बीह करो 
+[87:2] जिसने पैदा किया और तनसुब कयाम किया (फिर अनुपातिक किया) 
+[87:3] जिसने तकदीर बनाई फिर राह दिखाई 
+[87:4] जिसने नबातात (चरागाह) उगई 
+[87:5] फिर उनको सिया कुदा करकट बना दिया 
+[87:6] हम तुम्हें पढ़ा देंगे फिर तुम नहीं भूलोगे 
+[87:7] सिवाय उसके जो अल्लाह चाहे। वो जाहिर को भी जानता है और जो कुछ पोशीदा (छिपा हुआ) है उसको भी 
+[87:8] और हम तुम्हें आसान तरीके की सलाह देते हैं देखते हैं 
+[87:9] लिहाज़ा तुम हिदायत करो अगर हिदायत नाफ़े (फ़ैयदमंद) हो 
+[87:10] जो शक्स डरता है वो हिदायत क़बूल करेगा 
+[87:11] और उसे गुरइज़ करेगा वो इंतेहाई बद-बख्त 
+[87:12] जो बड़ी आग में जाएगा 
+[87:13] फिर ना उसमें मरेगा और न जिएगा 
+[87:14] फलाह पा गया वो जिसने पाकीजगी इख्तियार की 
+[87:15] और अपने रब का नाम याद किया फिर नमाज पढ़ी 
+[87:16] मगर तुमलोग दुनिया की जिंदगी को तर्जीह देते हो 
+[87:17] हालांके आखिरी बेहतर है और बाकी रहने वाली है 
+[87:18] यही बात पहले आए हुए सहीफों (ग्रंथों) में भी कहीं गई थी 
+[87:19] इब्राहीम और मूसा के सहीफों में 
+
+सूरह 88: अल-ग़शियाह (जबरदस्त घटना) 
+------------------------------------------------ 
+[88:1] क्या तुम्हें हमें चाहिए वली आफत की खबर पसंद है 
+[88:2] कुछ चेहरे हमें रोज खौफ जादा होंगे 
+[88:3] सख्त मशक्कत कर रहे होंगे 
+[88:4] थके जाते होंगे, छायादार आग में झूलते रहेंगे 
+[88:5] खौलते (उबलते हुए) हुए चश्मे (वसंत) का पानी उन्हें पीने को दिया जाएगा 
+[88:6] खर-दर (कांटे-दार) सुखी घांस के सिवा कोई खाना उनके लिए ना होगा 
+[88:7] जो ना मोटा करे ना भूख मिटाए 
+[88:8] कुछ चेहरे उस रोज ब-रौनक होंगे 
+[88:9] अपने कर-गुजारी पर खुश होंगे 
+[88:10] आली मुकाम जन्नत में होंगे 
+[88:11] कोई बहुत बात वहां न सुनेंगे 
+[88:12] उसमें चश्में रावन होंगे 
+[88:13] उसके अंदर ऊंची मसनदें होंगी 
+[88:14] सागर राखे हुए होंगे 
+[88:15] गांव तकियां (कुशन लगाए हुए) के कतारें लगी होंगी 
+[88:16] और नफ़ीस फ़र्श बीचे हुए होंगे 
+[88:17] (ये लोग नहीं मानते) तो क्या ये उन्तों को नहीं देखते के कैसे बन गए 
+[88:18] आसमान को नहीं देखते के कैसे उठ गए 
+[88:19] पहाड़ों को नहीं देखते के कैसे जमाए गए 
+[88:20] और ज़मीन को नहीं देखते के कैसे बिछाई गई 
+[88:21] अच्छा तो (ऐ नबी) हिदायत किए जाओ, तुम बस हिदायत ही करने वाले हो 
+[88:22] कुछ इनपर जबर करने वाले नहीं हो
+[88:23] अलबत्ता जो शक्स मुंह मोड़ेगा और इंकार करेगा 
+[88:24] अल्लाह के लिए उसको भारी सजा देगा 
+[88:25] इन लोगों को पलटना हमारी तरफ ही है 
+[88:26] फिर इनका हिसाब लेना हमारे ही ज़िम्मे है 
+
+सूरह 89: अल-फज्र (द डेब्रेक) 
+------------------------------------------------ 
+[89:1] कसम है फज्र की 
+[89:2] और दस रातों की 
+[89:3] और जफ़्त(सम) और ताक़(विषम) की 
+[89:4] और रात की जबके वो रुक्सत हो रही हो 
+[89:5] क्या इसमे किसी साहब-ए-अकल के लिए कोई कसम है 
+[89:6] तुमने देखा नहीं के तुम्हारे रब ने क्या बरताओ किया 
+[89:7] अनचे सुतुनो वाले आद-ए-इरम के साथ 
+[89:8] जिनका मनिंद कोई क़ौम दुनिया के मुल्कों में पैदा नहीं हुई थी 
+[89:9] और समूद के साथ जिन्होन ने वादी में चट्टाने तराशी थी 
+[89:10] और मेखों वाले फिरौन के साथ 
+[89:11] ये वो लोग (थाय) जिन्होनें दुनिया के मुल्कों में बड़ी सरकशी की थी 
+[89:12] और उनमें बहुत फसाद फेलया था 
+[89:13] आखिर-ए-कार तुम्हारे रब ने इनपर अज़ाब का कोड़ा बरसा दिया 
+[89:14] हकीकत ये है काय तुम्हारा रुब घाट (सतर्क) लगाए हुए है 
+[89:15] मगर इंसान का हाल ये है काय उसका रुब जब उसको आजमाइश में डालता है और उसे इज्जत और नियामत देता है तो वो कहता है काय मेरे रुब ने मुझे इज्जतदार बना दिया 
+[89:16] और जब वो उसको आजमाइश में डालता है और उसका रिज़्क उसपर तंग कर देता है तो वो कहता है मेरे रब ने मुझे ज़लील कर दिया 
+[89:17] हरगिज़ नहीं, बलके तुम यतीम से इज़्ज़त का सुलुक नहीं करते 
+[89:18] और मिस्कीन को खाना खिलाने पर एक दूसरे को नहीं उक्साते 
+[89:19] और मीरास (विरासत) का सारा माल समान कर खा जाते हो 
+[89:20] और माल की मुहब्बत में बुरी तरह गिरफ़्तार हो 
+[89:21] हरगिज़ नहीं जब ज़मीन पै डर पै क़ुओत क़ुत् कर रेगज़ार बना दी जाएगी 
+[89:22] और तुम्हारा रब जलवा फरमा होगा हाल में के फरिश्ते सफ़ दर सफ़ खड़े होंगे 
+[89:23] और जहन्नुम उस रोज़ सामने ले आएगी, उस दिन इंसान को समझ आएगी और हमें वक़्त के साथ समझने का क्या हासिल होगा 
+[89:24] वो कहेगा के काश मैंने अपनी इस ज़िंदगी के लिए कुछ पेशगी समन किया होता 
+[89:25] फिर हमें दीन अल्लाह जो अज़ाब देगा वैसा अज़ाब देने वाला कोई नहीं 
+[89:26] और अल्लाह जैसा बंधे वैसा बांधने वाला कोई नहीं 
+[89:27] (दूसरी तरफ इरशाद होगा) ऐ नफसे मुतमैन(आश्वस्त आत्मा/पवित्र) 
+[89:28] चल अपने रब की तरफ इस हाल में के तू (अपने अंजाम-ए-नीक से) खुश (और अपने रुब काय नजदीक) पसंदीदा है 
+[89:29] शमिल हो जा मेरे (नीक) बंदों में 
+[89:30] और दखिल होजा मेरी जन्नत में 
+
+सूरह 90: अल-बलद (द सिटी) 
+------------------------------------------------
+[90:1] नहीं मैं कसम खाता हूं इस शहर की 
+[90:2] और हाल ये है के (ऐ नबी) इस शहर में तुमको हलाल कर लिया गया है 
+[90:3] और कसम खाता हूं बाप (एडम) की और उस औलाद की जो उसने पैदा की 
+[90:4] दर हकीकत हमने इंसान को मुशक्कत में पैदा किया है 
+[90:5] क्या उसने ये समझ रखा है कि उसपर कोई काबू ना पा सकेगा 
+[90:6] कहता है के मैंने ढेरों माल उड़ा दिया 
+[90:7] क्या वो समझता है कि किसी ने उसको नहीं देखा 
+[90:8] क्या हमने उसे दो आँखें 
+[90:9] और एक ज़ुबान और दो होंठ नहीं दिए 
+[90:10] और दोनों नुमायन रास्ते उसे (नहीं) दिखा दिए 
+[90:11] मगर उसने दशवार गुज़र घाटी (खड़ी) से गुज़रने की हिम्मत ना की 
+[90:12] और तुम क्या जानो क्या है वो दुस्वार गुजर घाटी 
+[90:13] किसी बगीचे को गुलामी से छुड़ाना 
+[90:14] या फाके के दिन 
+[90:15] किसी करीब यतीम 
+[90:16] या खाक नशीं मिसकीन को खाना खिलाना 
+[90:17] फिर (इसके साथ ये काय) आदमी उन लोगों में शामिल हो जो ईमान लाए और जिन्होन ने एक दूसरे को सब्र और (ख़ल्क-ए-खुदा पर) रहम की तालक़ीन की 
+[90:18] ये लोग हैं दयेन बाज़ू (दाहिने हाथ) वाले 
+[90:19] और जिन्हों ने हमारी आयत को मन-ने से इंकार किया वो बायें बाज़ू (बाएं हाथ) वाले हैं 
+[90:20] उन पर आग लगी हुई होगी 
+
+सूरह 91: राख-शम्स (सूरज) 
+------------------------------------------------ 
+[91:1] सूरज और उसकी धूप की कसम 
+[91:2] और चांद की कसम जबके वो उसके पीछे आता है 
+[91:3] और दिन की कसम जबके वो (सूरज को) नुमाया कर देता है 
+[91:4] और रात की कसम जबके वो (सूरज को) धन्यवाद लेती है 
+[91:5] और आसमान की और उस जात की कसम जिसने उसे इस्तेमाल किया 
+[91:6] और जमीन की और उस जात की कसम जिसने उसे इस्तेमाल किया 
+[91:7] और नफ्स-ए-इंसानी की और उस जात की कसम जिसने उसे इस्तेमाल किया 
+[91:8] फिर उसकी बदी और उसकी परहेजगारी उस पर इल्हाम कर दी 
+[91:9] यकीनन फलाह पा गया वो जिसने नफ्स का तजकिया किया 
+[91:10] और न-मुराद हुआ वो जिसने उसको दबा दिया 
+[91:11] समूद ने अपनी सरकशी की बिना पर झुटलाया 
+[91:12] जैब हमें क़ौम का सब से ज्यादा शकी (बदनसीब) आदमी बिफ़र कर उठा 
+[91:13] अल्लाह के रसूल ने उन लोगों से कहा के खबरदार अल्लाह की ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को (हाथ न लगाना) और उसके पानी पीना (मैं माने न होना) 
+[91:14] मगर उन लोगों ने उसकी बात को झूठा क़रार दिया और ऊंटनी को मार डाला। आख़िर-ए-कार उनके गुनाह के पैदाश में उनके रब ने उन्पर ऐसी आफत तूदी के एक साथ सबको पैवंद-ए-खाक कर दिया 
+[91:15] और उसे (अपने फेल काय) किसी बुरे नतीजे का कोई खौफ (डर) नहीं है 
+
+सूरह 92: अल-लैल (द नाइट)
+------------------------------------------------ 
+[92:1] कसम है रात की जबके वो छा जाए 
+[92:2] और दिन की जबके वो रोशन हो 
+[92:3] और उस जात की जिसने नर (पुरुष) और मादा (महिला) को भुगतान किया 
+[92:4] दर हकीकत तुम लोगों की कोशिशें मुख्तलिफ़ क़िस्म की है 
+[92:5] तो जिसने (राह ए खुदा में) माल दिया और (खुदा की नफरमानी से) परहेज किया 
+[92:6] और भलाई को सच माना 
+[92:7] उसको हम आसान रास्ते के लिए सहुलत देंगे 
+[92:8] और जिसने (अपने खुदा से) कहा नियाज़ी (आत्मनिर्भर/स्वतंत्र) बारती 
+[92:9] और भलाई को झुटलाया 
+[92:10] उसको हम मजबूत रास्ते के लिए सहुलत देंगे 
+[92:11] और उसका माल आखिर उसका किस काम आएगा जबके वो हलाक हो जाए 
+[92:12] बेशक रास्ता बताना हमारे ज़िम्मी है 
+[92:13] और दर हकीकत आख़िरत और दुनिया दोनों का हम ही मालिक हैं 
+[92:14] पास मैंने तुमको ख़बरदार कर दिया है भड़कती हुई आग से 
+[92:15] उसमें नहीं झुलसेगा मगर वो इंतिहायी बदबक्थ 
+[92:16] जिसने झूठ बोला और मुह फेरा 
+[92:17] और उसे दूर रक्खा जाएगा वो निहायत परहेजगार 
+[92:18] जो पाकीजा होने की खातिर अपना माल देता है 
+[92:19] उसपर किसी का कोई एहसान नहीं है जिसका बदला उसे देना हो 
+[92:20] वो तो सिर्फ अपने रुब-ए-बरतर की रजा जोई के लिए ये काम करता है 
+[92:21] और जरूर वो (हमसे) खुश होगा 
+
+सूरह 93: अद-दुहा (दिन की चमक) 
+------------------------------------------------ 
+[93:1] कसम है रोज़े रोशन की 
+[93:2] और रात की जबके वो सुकून के साथ तारी हो जाए 
+[93:3] (ऐ नबी) तुम्हारे रब ने तुमको हरगिज नहीं छोड़ा और न वो नाराज हुआ 
+[93:4] और यकीनन तुम्हारे लिया बाद का दौर पहले दौर से बेहतर है 
+[93:5] और अनकरीब तुम्हारा रुब तुमको इतना देगा के तुम खुश हो जाओगे 
+[93:6] क्या उसने तुमको यतीम नहीं पाया और फिर ठिकाना फरहम किया 
+[93:7] और तुम्हें नवाज़ीफ-ए-राह पाया और फिर हिदायत बख्शी 
+[93:8] और तुम्हें नादर (चाहते हुए) पाया और फिर मालदार कर दिया 
+[93:9] लिहाज़ा यतीम पर शायद न करो 
+[93:10] और सायेल( मांगने) वाले) को ना झिडको 
+[93:11] और अपने रब की नियामत का इज़हार करो 
+
+सूरह 94: अल-इंशिराह (विस्तार) 
+------------------------------------------------ 
+[94:1] (ऐ नबी) क्या हमने तुम्हारा सीना तुम्हारे लिए खोल नहीं दिया 
+[94:2] और तुमपर से वो भारी बोझ उतर दिया 
+[94:3] जो तुम्हारी कमर तोढे डाल रहा था 
+[94:4] और तुम्हारी खातिर तुम्हारे जिक्र का आवाज बुलंद कर दिया 
+[94:5] पास हकीकत ये है काय तंगी काय सात फारखी भी है 
+[94:6] बेशाक टांगी काय साथ फारखी भी है
+[94:7] लिहाज़ा जब तुम फारिग हो तो इबादत की मुशक्कत में लग जाओ 
+[94:8] और अपने रब की तरफ रागिब हो 
+
+सूरह 95: अत-तिन (चित्र) 
+------------------------------------------------ 
+[95:1] कसम है इंजीर (अंजीर) की और ज़ैतून की 
+[95:2] और तूर-ए-सीना (सिनाई पर्वत) 
+[95:3] और इस पुर-अमन शहर (मक्का) की 
+[95:4] हमने इंसान को बहतरीन साख्त पर भुगतान किया 
+[95:5] फिर उसे उल्टा फेर कर हमने सब नीचों से नीच कर दिया 
+[95:6] सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और नेक अमल करते रहे उनके लिए कभी खत्म ना होने वाला अजर है 
+[95:7] पास (ऐ नबी) इसके बाद कौन जजा ओ सजा के मामले में तुमको झूठ बोल सकता है 
+[95:8] क्या अल्लाह सब हकीमों से बड़ा हकीम नहीं है 
+
+सूरह 96: अल-अलक (द क्लॉट) 
+------------------------------------------------ 
+[96:1] पढ़ो (ऐ नबी) अपने रब के नाम के साथ जिसने पढ़ा किया 
+[96:2] जमे हुए खून के एक लड़के से इंसान की तख़लीक़ की 
+[96:3] पढ़ो और तुम्हारा रब बड़ा करीम है 
+[96:4] जिसने क़लम के ज़रिया से इल्म सिखाया 
+[96:5] इंसान को वो इल्म दिया जिसने वो ना जानता था 
+[96:6] हरगिज नहीं, इंसान सरकशी करता है 
+[96:7] इस बिना पार के वो अपने आप को बे नियाज देखता है 
+[96:8] (हलांके) पलटना यकीनन तेरे रब ही की तरफ है 
+[96:9] तुमने देखा हमें शक्स को 
+[96:10] जो एक बंदे को मना करता है जबके वो नमाज पढ़ता हो 
+[96:11] तुम्हारा क्या ख्याल है अगर (वो बंदा) राह ए रास्ते पर हो 
+[96:12] या परहेजगारी की तलाक़ करता हो 
+[96:13] तुम्हारा क्या ख्याल है अगर (ये मन करने वाला शख़्स हक़ को) झुटलता और मुँह मोड़ता हो 
+[96:14] क्या वो नहीं जानता के अल्लाह देख रहा है 
+[96:15] हरगिज़ नहीं अगर वो बाज़ ना आया तो हम उसकी पेशानी के बाल पकड़ कर उसे खींचेगे 
+[96:16] उस पेशानी को जो झूठी और खतरनाक है 
+[96:17] वो बुलाले अपने हामियों की टोली को 
+[96:18] हम भी अज़ाब के फरिश्तों को बुला लेंगे 
+[96:19] हरगिज़ नहीं, उसकी बात न मानो और सजदा करो और (अपने रब का) क़ुरब हासिल करो 
+
+सूरह 97: अल-क़द्र (महामहिम) 
+------------------------------------------------ 
+[97:1] हमने (कुरान) को शब-ए-क़दर में नाज़िल किया है 
+[97:2] और तुम क्या जानो, शब-ए-क़द्र क्या है 
+[97:3] शब-ए-क़द्र हज़ार महिनो से ज़्यादा बेहतर है 
+[97:4] फ़रिश्ते और रूह (जिब्राइल) हमसे अपने रब के इज़्न (अनुमति) से हर हुक्म ले कर उतरते हैं 
+[97:5] वो रात सरसर सलामती है तुलू ए फज्र तक 
+
+सूरह 98: अल-बयिनह (स्पष्ट साक्ष्य) 
+------------------------------------------------
+[98:1] एहले किताब और मुशरिकिन में से जो लोग काफिर थे (वो अपने कुफ्र से) बाज़ आने वाले ना थे जब तक के उनके पास दलील ए रोशन ना आ जाए 
+[98:2] (यानी) अल्लाह के तरफ से एक रसूल जो पाक सही पढ़ कर सुनाए 
+[98:3] जिन में बिल्कुल रास्ता और दुरुस्त तस्वीरें लिखी हुई हो 
+[98:4] पहले जिन लोगों को किताब दी गई थी उनमें तफ़रका बरपा (विभाजन/विभाजन) नहीं हुआ मगर इस के बाद के उन के पास (राहे रास्ते का) बयान ए वजह आ चूका था 
+[98:5] और उनको इसके सिवा कोई हुकुम नहीं दिया गया था के अल्लाह के बंदगी अपने दीन को उसके लिए खालिस करके। बिल्कुल यक्सू हो कर, और नमाज़ क़याम करें और जकात दे यही निहायत सही-ओ-दुरूस्त दीन है 
+[98:6] एहले किताब और मुशरिकिन में से जिन लोगों ने कुफ्र किया है वो यकीनन जहन्नम की आग में जाएंगे और हमेशा उसमें रहेंगे, ये लोग बढ़-तारीन ए खलायेक (सृजन) हैं 
+[98:7] जो लोग ईमान ले आए और जिन्होन नै नेक अमल किए वो यक़ीनन बहतरीन-ए-खलायेक है 
+[98:8] उनकी जाज़ा उनके रब के यहां दायमी (अनन्त) क़याम की जन्नतें हैं जिनके आला नेहरेन बेह राही होंगी। वो उनमें हमेशा हमेशा रहेंगे। अल्लाह उनसे राजी हुआ और वो अल्लाह से राजी हुए। ये कुछ है हमारे शक्स के लिए जिसने अपने रब का खौफ किया हो 
+
+सूरा 99: अल-ज़िलज़ल (द शेकिंग) 
+------------------------------------------------ 
+[99:1] जब ज़मीन अपनी पूरी शिद्दत के साथ हिला डाली जाएगी 
+[99:2] और ज़मीन अपने अंदर का सारे बोझ निकल कर बहार डाल देगी 
+[99:3] और इंसान कहेगा के ये इसको क्या हो रहा है 
+[99:4] उस रोज वो अपने (ऊपर गुजरे हुए) हालात बयान करेगी 
+[99:5] क्योंकि तेरे रब ने उसे (ऐसा करने का) हुक्म दिया होगा 
+[99:6] उस रोज लोग मुताफर्रिक हालात में पलटेंगे ताके उनके अमल उनको दिखाये जायें 
+[99:7] फिर जिसने जरा बराबर नेकी की होगी वो उसको देख लेगा 
+[99:8] और जिसने जरा बराबर बदी की होगी वो उसको देख लेगा 
+
+सूरह 100: अल-अदियत (हमलावर) 
+------------------------------------------------ 
+[100:1] कसम है उन (घोड़ों) की जो फुंकारे मारते हुए ढूंढते हैं 
+[100:2] फिर (अपने तपों से) चिंगारियां झड़ते हैं 
+[100:3] फिर सुबह सवेरे चपा मरते हैं 
+[100:4] फिर इस मौके पर गार्ड ओ गुबार उड़ाते हैं 
+[100:5] फिर इसी हालात में कोई मजे के अंदर जा घुसते हैं 
+[100:6] हकीकत ये है के इंसान अपने रुब का बड़ा नाशुक्र है 
+[100:7] और वह खुद इस पर गवाह है 
+[100:8] और वह माल-ओ-दौलत की मुहब्बत में बुरी तरह मुबतला है 
+[100:9] तो क्या वो हमें वक्त को नहीं जानता जब कब्रों में जो कुछ (मडफन) है उसे निकाल लिया जाएगा 
+[100:10] और सीने में जो कुछ (मख्फी) है उसे बारामाद करके उसकी जांच पडताल की जाएगी 
+[100:11] यकीनन उनका रब हमें रोज उनसे खूब बख़बर होगा
+
+सूरह 101: अल-क़रीआ (विपत्ति) 
+------------------------------------------------ 
+[101:1] अज़ीम हदीसा 
+[101:2] क्या है वो अज़ीम हदीसा 
+[101:3] तुम क्या जानो के वो अज़ीम हदीसा क्या है 
+[101:4] वो दिन जब लोग बिखरे हुए परवानों की तरह 
+[101:5] और पहाड़ रंग बी रंगी धुनकी हुई ऊन के तरह होंगे 
+[101:6] फिर जिसके पलड़े भारी होंगे 
+[101:7] वो दिल पसंद ऐश में होगा 
+[101:8] और जिस के पलड़े हल्के होंगे 
+[101:9] उसकी जाए करार गहरी खाई होगी 
+[101:10] और तुम्हें क्या खबर काय वो क्या चीज है 
+[101:11] भड़कती हुई आग 
+
+सूरह 102: अत-ताकाथुर (धन की प्रचुरता) 
+------------------------------------------------ 
+[102:1] तुम लोगों को ज्यादा से ज्यादा और एक दूसरे से बढ़कर दुनिया हासिल करने की धुन ने गफलत में डाल रखा है 
+[102:2] यहां तक ​​के (आईएसआई) फ़िक्र में) तुम लब-ए-गौर तक पहुँच जाते हो 
+[102:3] हरगिज़ नहीं, अनकरीब तुमको मालूम हो जाएगा 
+[102:4] फिर (सुनलो के) हरगिज नहीं, अनकरीब तुमको मालूम हो जाए 
+[102:5] हरगिज नहीं अगर तुम यकीनी इल्म की हकीकत से (रविश है) के अंजाम को) जानते होते (तो तुम्हारा ये तर्जे अमल ना होता) 
+[102:6] तुम दोज़ख देख कर रहोगे 
+[102:7] फिर (सुन लो के) तुम बिल्कुल यकीन के साथ उसे देख लोगे 
+[102:8] फिर ज़रूर उस रोज़ तुम से इन नेअमतों के बारे में जवाब तलबी की जाएगी 
+
+सूरह 103: अल-असर (द टाइम) 
+------------------------------------------------ 
+[103:1] ज़माने की क़सम 
+[103:2] इंसान दर हक़ीक़त बड़े ख़सारे (नुक्सान) में है 
+[103:3] सिवाए उन लोगों के जो ईमान लाए और नेक अमल करते रहें और एक दूसरे को हक की हिदायत और sabr की तालक़ीन करते रहे 
+
+सूरह 104: अल-हमज़ा (निंदक) 
+------------------------------------------------ 
+[104:1] तबाही है हर उस शक्स के लिए जो (चाँद दर चाँद) लोगों पर तान और (पीठ पीछे) बुराइयां करने का खुगर है 
+[104:2] जिसने माल जमा किया और उसे गिन गिन कर रक्खा 
+[104:3] वो समझता है कि हमें का माल हमेशा उसके पास रहेगा 
+[104:4] हरगिज नहीं, वो शक्स तो चकना-चूर कर देने वाली जगह में फेंक दिया जाएगा 
+[104:5] और तुम क्या जानो के क्या हो वो चकना-चूर कर देने वाली जगह 
+[104:6] अल्लाह की आग खूब भड़काई हुई 
+[104:7] जो दिलों तक पहुंचें गी 
+[104:8] वो उन पर ढांक कर बंद कर दी जाएगी 
+[104:9] (इस हालात में के वो) अनचे अनचे सुतुनो मेई (घिरे हुए होंगे) 
+
+सूरह 105: अल-फिल (द हाथी) 
+------------------------------------------------ 
+[105:1] तुमने देखा नहीं के तुम्हारे रब ने हाथी वालों के साथ क्या किया 
+[105:2] क्या उसने उनकी तदबीर को आकार नहीं दिया
+[105:3] और उन पर परिंदों के झुंड के झुंड भेज दिए 
+[105:4] जो उन पर पके हुए मिट्टी के पत्थर फेंक रहे थे 
+[105:5] फिर उनका ये हाल कर दिया जैसे जानवरों का खाया हुआ भूसा 
+
+सूरह 106: अल-कुरैश (द कुरैश) 
+------------------------------------------------ 
+[106:1] चंके कुरैश मानूस हुए 
+[106:2] (यानी) जाड़े (सर्दियों) और गर्मी के सफ़रों से मानूस 
+[106:3] लिहाज़ा उन को चाहिए के इस घर के रब की इबादत करें 
+[106:4] जिसने उन्हें भूख से बचा कर खाने को दिया और खौफ से बचा कर अमन अता किया 
+
+सूरह 107: अल-मौन (दयालुता के कार्य) 
+------------------------------------------------ 
+[107:1] तुम ने देखा उस शक्स को जो आख़िरत की जजा व सजा को झुटलता है 
+[107:2] वही तो है जो यतीम को धक्के देता है 
+[107:3] और मिस्कीन का खाना देने पर नहीं उक्सता 
+[107:4] फिर तबाही है उन नमाज पढ़ने वालों के लिए 
+[107:5] जो अपनी नमाज से गफ़लत बारात-ते हैं 
+[107:6] जो रिया-कारी (दिखावा) करते हैं 
+[107:7] और मामुली ज़रुरत की चीज़ (लोगों को) देने से गुरेज करते हैं 
+
+सूरह 108: अल-कौथर (द) भलाई की प्रचुरता) 
+------------------------------------------------ 
+[108:1] (ऐ नबी) हमने तुम्हें कौसर अता कर दिया 
+[108:2] पास तुम अपने रब ही के लिए नमाज पढ़ो और कुर्बानी करो 
+[108:3] तुम्हारा दुश्मन हाय जध-काटा है 
+
+सूरह 109: अल-काफिरुन (अविश्वासी) 
+------------------------------------------------ 
+[109:1] केहदो के ऐ काफिरों 
+[109:2] मैं उनकी इबादत नहीं करता जिनकी इबादत तुम करते हो 
+[109:3] और ना तुम उसकी इबादत करने वाले हो जिसकी इबादत मैं करता हूं 
+[109:4] और ना मैं उनकी इबादत करने वाला हूं जिनकी इबादत तुम ने की है 
+[109:5] और ना तुम उसकी इबादत करने वाले हो जिसकी इबादत मैं करता हूं 
+[109:6] तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन है और मेरे लिए मेरा दीन 
+
+सूरह 110: अन-नस्र (मदद) 
+------------------------------------------------ 
+[110:1] जब अल्लाह की मदद आ जाए और फतह नसीब हो जाए 
+[110:2] और (ऐ नबी सास) तुम देख लो के लोग फौज दार फौज अल्लाह के दीन में दखल हो रहे हैं 
+[110:3] तो अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो और हमसे मगफिरत की दुआ मांगो। बेशाक़ वो बड़ा तौबा क़बूल करने वाला है 
+
+सूरह 111: अल-लहब (द फ्लेम) 
+------------------------------------------------ 
+[111:1] टूट गए अबू लहब के हाथ और ना-मुराद हो गया वो 
+[111:2] उसका माल और जो कुछ उसने कमाया वो उसका कोई काम ना आया 
+[111:3] ज़रूर वो शोला ज़ान आग में डाला जाएगा 
+[111:4] और (हमारे साथ) उसकी जोरू (पत्नी) भी लगाई बुझाई करने वाली
+[111:5] उस की गरदन (गर्दन) में मूंज की रस्सी होगी 
+
+सूरह 112: अल-इखलास (एकता) 
+------------------------------------------------ 
+[112:1] कहो वो अल्लाह है, यक्ता 
+[112:2] अल्लाह सब से बे-नियाज़ है और सब हमें का मोहताज हैं 
+[112:3] ना उसकी कोई औलाद है और ना वो किसी की औलाद 
+[112:4] और कोई उसका हमसर नहीं है 
+
+सूरह 113: अल-फलक (द डॉन) 
+------------------------------------------------ 
+[113:1] कहो मैं पनाह मांगता हूं सुबह के रब की 
+[113:2] हर उस चीज के शर से जो उसने पैदा किया है 
+[113:3] और रात की तारीख के शरर से जब के वो चा जाए 
+[113:4] और गिरहों में फूंकने वालों (या वालियों) के शरर से 
+[113:5] और हसीद (ईर्ष्या) के शरर से जब के वो हसद (ईर्ष्या) करे 
+
+सूरह 114: एन-नास (पुरुष) 
+------------------------------------------------ 
+[114:1] कहो, मैं पनाह मांगता हूं इंसानों के रब 
+[114:2] इंसानों के बादशाह 
+[114:3] इंसानों के हकीकी माबूद की 
+[114:4] हमें बर्बाद करने वाले शहर से जो बार-बार पलट कर आता है 
+[114:5] जो लोगों के दिलों में वसीयत डालता है 
+[114:6] ख्वाह वो जिन्नो में से हो या इंसानों में से
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Surah 1: Al-Fatihah (The Opening)

Meccan🕐 Revelation #5📜 7 Verses🕮 Juz 1
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Surah 1: Al-Fatihah (The Opening)

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Surah 1: Al-Fatihah (The Opening)

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Surah 1: Al-Fatihah (The Opening)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
🕮 Juz 1 begins here
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ke naam se jo Rehman o Raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Sab tareef Allah Taalaa kay liye hai jo tamam jahanon ka palney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के नाम से जो रहमान ओ रहीम है
عَرَبِيالحَمدُ لِلَّهِ رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)हर प्रकार की प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जो सारे संसारों का पालनहार है।
Roman Urdu (Maududi)Tareef Allah hi ke liye hai jo tamaam qayinaat ka Rubb hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bara meharban nihayat reham kerney wala
Devnagri Urdu (Maududi)तारीफ अल्लाह ही के लिए है जो तमाम क़ायनात का रब है
عَرَبِيالرَّحمٰنِ الرَّحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Rehman aur Raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Badlay kay din (yani qayamat) ka maalik hai
Devnagri Urdu (Maududi)रहमान और रहीम है
عَرَبِيمالِكِ يَومِ الدّينِ
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हिन्दी (Al-Omari)जो बदले के दिन का मालिक है।
Roman Urdu (Maududi)Roz e jaza ka maalik hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum sirf teri hi ibadat kertay hain aur sirf tujh hi say madad chahatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)रोज़ ए जजा का मालिक है
عَرَبِيإِيّاكَ نَعبُدُ وَإِيّاكَ نَستَعينُ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ अल्लाह!) हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझी से सहायता माँगते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hum teri hi ibadat karte hain aur tujh hi se madad maangte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Humen seedhi (aur sachi) raah dikha
Devnagri Urdu (Maududi)हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझ ही से मदद माँगते हैं
عَرَبِياهدِنَا الصِّراطَ المُستَقيمَ
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हिन्दी (Al-Omari)हमें सीधे मार्ग पर चला।
Roman Urdu (Maududi)Humein seedha raasta dikha
Roman Urdu (Junagarhi)Unn logon ki raah jin per tu ney inaam kiya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने सीधा रास्ता दिखा
عَرَبِيصِراطَ الَّذينَ أَنعَمتَ عَلَيهِم غَيرِ المَغضوبِ عَلَيهِم وَلَا الضّالّينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों का मार्ग, जिनपर तूने अनुग्रह किया। उनका नहीं, जिनपर तेरा प्रकोप हुआ और न ही उनका, जो गुमराह हैं।
Roman Urdu (Maududi)Un logon ka raasta jinpar tu nay inam farmaya, jo maatoob nahin huey (na unka jinpar tera gazab hota raha) , jo bhatke huey nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)unn ka nahi jin per ghazab kiya gaya aur nagumrahon ka
Devnagri Urdu (Maududi)उन लोगों का रास्ता जिनपर तू नई इनाम फरमाया, जो मातूब नहीं हुए (ना उनका जिनपर तेरा गजब होता रहा), जो भटके हुए नहीं हैं
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Surah 1: Al-Fatihah (The Opening)

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Surah 1: Al-Fatihah (The Opening)

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Surah 1: Al-Fatihah (The Opening)

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Surah 1: Al-Fatihah (The Opening)

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Surah 1: Al-Fatihah (The Opening)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

Medinan🕐 Revelation #87📜 286 Verses🕮 Juz 1–3
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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالم
हिन्दी (Al-Omari)अलिफ़, लाम, मीम।
Roman Urdu (Maududi)Alif Laam Meem
Roman Urdu (Junagarhi)Alif laam meem
Devnagri Urdu (Maududi)अलिफ़ लाम मीम
عَرَبِيذٰلِكَ الكِتابُ لا رَيبَ ۛ فيهِ ۛ هُدًى لِلمُتَّقينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह (क़ुरआन) वह पुस्तक है, जिसमें कोई संदेह नहीं, परहेज़गारों के लिए सर्वथा मार्गदर्शन है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Allah ki kitab hai, is mein koi shakk nahin, hidayat hai un parheizgaar logon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kitab (kay Allah ki kitab honey) mein koi shak nahi perhezgaron ko raah dikhaney wali hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये अल्लाह की किताब है, इसमें कोई शक्क नहीं, हिदायत है उन परहेज़गार लोगों के लिए
عَرَبِيالَّذينَ يُؤمِنونَ بِالغَيبِ وَيُقيمونَ الصَّلاةَ وَمِمّا رَزَقناهُم يُنفِقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे लोग जो ग़ैब (परोक्ष) पर ईमान लाते हैं, और नमाज़ की स्थापना करते हैं और जो कुछ हमने उन्हें दिया है, उसमें से ख़र्च करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo gaib par iman latey hain, namaz qayam karte hain , jo rizq humne unko diya hai usmein se kharch karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log ghaib per eman latay hain aur namaz ko qaeem rakhtay hain aur humaray diye huye (maal) mein say kharach kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो गैब पर ईमान लाते हैं, नमाज़ क़याम करते हैं, जो रिज़क हमने उनको दिया है उसमें से ख़र्च करते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ يُؤمِنونَ بِما أُنزِلَ إِلَيكَ وَما أُنزِلَ مِن قَبلِكَ وَبِالآخِرَةِ هُم يوقِنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जो उसपर ईमान लाते हैं जो तुम्हारी ओर उतारा गया और जो तुमसे पहले उतारा गया और आख़िरत पर वही लोग विश्वास रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo kitab tumpar nazil ki gayi hai (yani Quran) aur jo kitabein tumse pehle nazil ki gayi thi un sab par iman latey hain aur aakhirat par yaqeen rakhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log eman latay hain uss per jo aap ki taraf utara gaya aur jo aap say pehlay utara gaya aur woh aakhirat per bhi yaqeen rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो किताबें तुमसे पहले नाज़िल की गई हैं (यानी क़ुरान) और जो किताबें तुमसे पहले नाज़िल की गई थीं उन सब पर ईमान लाते हैं और आख़िरत पर यक़ीन रखते हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ عَلىٰ هُدًى مِن رَبِّهِم ۖ وَأُولٰئِكَ هُمُ المُفلِحونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यही लोग अपने पालनहार के बताए हुए मार्ग पर हैं तथा यही लोग सफल हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aisey log apne Rubb ki taraf se raah e raast par hain aur wahi falaah paney waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi log apney rab ki taraf say hidayat per hain aur yehi log falah aur nijat paney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसे लोग अपने रब की तरफ से राह ए रास्ते पर हैं और वही फलाह पीते हैं wale हैं
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا سَواءٌ عَلَيهِم أَأَنذَرتَهُم أَم لَم تُنذِرهُم لا يُؤمِنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उनपर बराबर है, चाहे आपने उन्हें डराया हो या उन्हें न डराया हो, वे ईमान नहीं लाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne (in baaton ko tasleem karne se) inkar kardiya, unke liye yaksan hai, khwa tum unhein khabardaar karo ya na karo, bahar haal woh maanne waley nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kafiron ko aap ka darana ya na darana barabar hai yeh log eman na layen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने (बातों को तस्लीम करने से) इनकार करदिया, उनके लिए यक्सन है, ख्वा तुम उन्हें खबरदार करो या ना करो, बाहर हाल वो मन्ने वाले नहीं है
عَرَبِيخَتَمَ اللَّهُ عَلىٰ قُلوبِهِم وَعَلىٰ سَمعِهِم ۖ وَعَلىٰ أَبصارِهِم غِشاوَةٌ ۖ وَلَهُم عَذابٌ عَظيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने उनके दिलों पर तथा उनके कानों पर मुहर लगा दी और उनकी आँखों पर भारी पर्दा है तथा उनके लिए बहुत बड़ी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne unke dilon aur unke kaano par mohar laga di hai aur unki aankhon par purda padh gaya hai, woh sakht saza ke mustahiq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney inn kay dilon per aur inn kay kanon per mohar laga di hai aur inn ki aankhon per parda hai aur inn kay liye bara azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने उनके दिलों और उनके कानों पर मोहर लगा दी है और उनकी आंखों पर परदा पढ़ गया है, वो सच साज़ा के मुस्तहिक हैं
عَرَبِيوَمِنَ النّاسِ مَن يَقولُ آمَنّا بِاللَّهِ وَبِاليَومِ الآخِرِ وَما هُم بِمُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और कुछ लोग ऐसे हैं, जो कहते हैं कि हम अल्लाह पर तथा आख़िरत के दिन पर ईमान लाए, हालाँकि वे हरगिज़ मोमिन नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Baaz log aisey bhi hain jo kehte hain ke hum Allah par aur aakhirat ke din par iman laye hain, halaanke dar-haqeeqat woh momin nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)baaz log kehtay hain kay hum Allah Taalaa per aur qayamat kay din per eman rakhtay hain lekin dar haqeeqat woh eman walay nahi hain
Devnagri Urdu (Maududi)बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो कहते हैं कि हम अल्लाह पर और आख़िरत के दिन पर ईमान लाए हैं, हलांके दर-हक़ीक़त वो मोमिन नहीं हैं
عَرَبِييُخادِعونَ اللَّهَ وَالَّذينَ آمَنوا وَما يَخدَعونَ إِلّا أَنفُسَهُم وَما يَشعُرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे अल्लाह तथा ईमान वालों से धोखाबाज़ी करते हैं। हालाँकि वे अपनी जानों के सिवा किसी को धोखा नहीं दे रहे, परंतु वे समझते नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah aur iman laney walon ke saath dhoke-baazi kar rahey hain, magar darasal woh khud apne aap hi ko dhoke mein daal rahey hain aur unhein iska shaoor nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh Allah Taalaa ko aur eman walon ko dhoka detay hain lekin dar-asal woh khud apney aap ko dhoka dey rahey hain magar samajhtay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह और ईमान लाने वालों के साथ धोखे-बाज़ी कर रहे हैं, मगर दरसल वो खुद अपने आप ही को धोखे में डाल रहे हैं और उन्हें इसका शूर नहीं है
عَرَبِيفي قُلوبِهِم مَرَضٌ فَزادَهُمُ اللَّهُ مَرَضًا ۖ وَلَهُم عَذابٌ أَليمٌ بِما كانوا يَكذِبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनके दिलों ही में एक रोग है, तो अल्लाह ने उन्हें रोग में और बढ़ा दिया और उनके लिए दर्दनाक यातना है, इस कारण कि वे झूठ बोलते थे।
Roman Urdu (Maududi)Unke dilon mein ek bimari hai jisey Allah ne aur zyada bada diya, aur jo jhoot woh bolte hain, uski padash mein unke liye dardnaak saza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay dilon mein beemari thi Allah Taalaa ney unhen beemari mein mazeed barha diya aur unn kay jhoot ki waja say unn kay liye dard naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनके दिलों में एक बीमारी है जिसे अल्लाह ने और ज्यादा बुरा दिया, और जो झूठ वो बोलते हैं, उसकी मानसिकता में उनके लिए दर्दनाक सजा है
عَرَبِيوَإِذا قيلَ لَهُم لا تُفسِدوا فِي الأَرضِ قالوا إِنَّما نَحنُ مُصلِحونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब उनसे कहा जाता है कि धरती में उपद्रव न करो, तो कहते हैं कि हम तो केवल सुधार करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab kabhi unse kaha gaya ke zameen mein fasaad barpa na karo to unhon ne yahi kaha ke hum to islaah karne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab inn say kaha jata hai kay zamin mein fasaad na kero o jawab detay hain kay hum to sirf islaah kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब कभी उन्हें कहा गया के ज़मीन में फ़साद बरपा ना करो तो उन्हें ने यही कहा के हम तो इस्लाह करने वाले हैं
عَرَبِيأَلا إِنَّهُم هُمُ المُفسِدونَ وَلٰكِن لا يَشعُرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सावधान! निश्चय वही तो उपद्रव करने वाले हैं, परंतु वे नहीं समझते।
Roman Urdu (Maududi)Khabardaar! Haqeeqat mein yahi log mufsid (fasaad karne waley) hain magar unhein shaoor nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Khabardaar ho! yaqeenan yehi log fasaad kerney walay hain lekin shaoor (samajh) nahi rakhtay
Devnagri Urdu (Maududi)ख़बरदार! हकीकत में यही लोग मुफसिद (फसाद करने वाले) हैं मगर उन्हें शूर नहीं है
عَرَبِيوَإِذا قيلَ لَهُم آمِنوا كَما آمَنَ النّاسُ قالوا أَنُؤمِنُ كَما آمَنَ السُّفَهاءُ ۗ أَلا إِنَّهُم هُمُ السُّفَهاءُ وَلٰكِن لا يَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जब उनसे कहा जाता है : ईमान लाओ जिस तरह लोग ईमान लाए हैं, तो कहते हैं : क्या हम ईमान लाएँ, जैसे मूर्ख ईमान लाए हैं? सुन लो! निःसंदेह वे स्वयं ही मूर्ख हैं, परंतु वे नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab unse kaha gaya jis tarah dusre log iman laye hain usi tarah tum bhi iman lao to unhon ne yahi jawab diya “kya hum bewaqoofon ki tarah iman layein?” khabardaar! Haqeeqat mein to yeh khud bewaqoof hain, magar yeh jantey nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab inn say kaha jata hai kay aur logon (yani sahaba) ki tarah tum bhi eman lao to jawab detay hain kay kiya hum aisa eman layen jaisa bey waqoof laye hain khabardaar hojao! yaqeenan yehi bey waqoof hain lekin jantay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और जब उन्हें कहा गया जिस तरह दूसरे लोग ईमान लाए हैं उसकी तरह तुम भी ईमान लाओ तो उन्होन ने यही जवाब दिया "क्या हम बेवकूफों की तरह ईमान लाए हैं?" ख़बरदार! हकीकत में तो ये खुद बेवकूफ हैं, मगर ये जानते नहीं हैं
عَرَبِيوَإِذا لَقُوا الَّذينَ آمَنوا قالوا آمَنّا وَإِذا خَلَوا إِلىٰ شَياطينِهِم قالوا إِنّا مَعَكُم إِنَّما نَحنُ مُستَهزِئونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जब वे ईमान लाने वालों से मिलते हैं, तो कहते हैं कि हम ईमान ले आए और जब अकेले में अपने शैतानों (प्रमुखों) के साथ होते हैं, तो कहते हैं कि निःसंदेह हम तुम्हारे साथ हैं। हम तो केवल उपहास करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab yeh ehle iman se milte hain, to kehte hain ke hum iman laye hain aur jab alaidagi (alone/privy) mein apne shaytano se milte hain, to kehte hain ke asal mein to hum tumhare saath hain aur in logon se mehaz mazaaq kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab eman walon say miltay hain to kehtay hain kay hum bhi eman walay hain aur jab apney baron kay pass jatay hain to kehtay hain kay hum to tumharay sath hain hum to inn say sirf mazaq kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब ये एहले ईमान से मिलते हैं, तो कहते हैं के हम ईमान लाए हैं और जब अलैदागी (अकेले/प्राइवी) में अपने शैतानों से मिलते हैं, तो कहते हैं के असल में तो हम तुम्हारे साथ हैं और इन लोगों से महज़ मज़ाक कर रहे हैं
عَرَبِياللَّهُ يَستَهزِئُ بِهِم وَيَمُدُّهُم في طُغيانِهِم يَعمَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह उनका मज़ाक़ उड़ाता है और उन्हें ढील दे रहा है, अपनी सरकशी में भटकते फिरते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Allah unse mazaq kar raha hai, woh inki rassi daraaz kiye jata hai, aur yeh apni sarkashi mein andhon (blind) ki tarah bhatakte chale jatay hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa bhi inn say mazaq kerta hai aur enhen inn ki sirkashi aur behkaway mein aur barha deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह उन्हें मज़ाक कर रहा है, वो इनकी रस्सी दराज़ किए जात है, और ये अपनी सरकशी में अंधों (अंधों) की तरह भटकते चले जाते हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ اشتَرَوُا الضَّلالَةَ بِالهُدىٰ فَما رَبِحَت تِجارَتُهُم وَما كانوا مُهتَدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही लोग हैं, जिन्होंने हिदायत (मार्गदर्शन) के बदले गुमराही खरीद ली। तो न उनके व्यापार ने लाभ दिया और न वे हिदायत पाने वाले बने।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hain jinhon ne hidayat ke badle gumaraahi khareed li hai, magar yeh sauda inke liye nafa-baksh nahin hai aur yeh hargiz saheeh raaste par nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh woh log hain jinhon ney gumrahi ko hidayat kay badlay mein khareed liya pus na to inn ki tijarat ney inn ko faeeda phonchaya aur na yeh hidayat walay huye
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग हैं जिन्हों ने हिदायत के बदले गुमराही ख़त्म ली है, मगर ये सौदा इनके लिए नफा-बख्श नहीं है और ये हरगिज सही रास्ते पर नहीं हैं
عَرَبِيمَثَلُهُم كَمَثَلِ الَّذِي استَوقَدَ نارًا فَلَمّا أَضاءَت ما حَولَهُ ذَهَبَ اللَّهُ بِنورِهِم وَتَرَكَهُم في ظُلُماتٍ لا يُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनका उदाहरण उस व्यक्ति के उदाहरण जैसा है, जिसने एक आग भड़काई, फिर जब उसने उसके आस-पास की चीज़ों को प्रकाशित कर दिया, तो अल्लाह ने उनका प्रकाश छीन लिया और उन्हें कई तरह के अँधेरों में छोड़ दिया कि वे नहीं देखते।
Roman Urdu (Maududi)Inki misaal aisey hai jaise ek shaks ne aag roshan ki aur jab usne sarey maahol ko roshan kardiya to Allah ne inka noor e basarat (vision) salb karliya aur inhein is haal mein chodh diya ke taareekiyon (andheron) mein inhein kuch nazar nahin aata
Roman Urdu (Junagarhi)Inn ki misal uss shaks ki si hai jiss ney aag jalaee pus aas pass ki cheezen roshni mein aaee hi thin kay Allah unn kay noor ko ley gaya aur enhen andheron mein chor diya jo nahi dekhtay
Devnagri Urdu (Maududi)इनकी मिसाल ऐसी है जैसे एक शक्स ने आग रोशन की और जब उसने सारे माहौल को रोशन कर दिया तो अल्लाह ने इनका नूर ए बसारत (दृष्टिकोण) साल्ब करलिया और इन्हें इस हाल में छोड़ दिया के तारिकियों (अंधेरों) में इन्हें कुछ नज़र नहीं आता
عَرَبِيصُمٌّ بُكمٌ عُميٌ فَهُم لا يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(वे) बहरे हैं, गूँगे हैं, अंधे हैं। अतः वे नहीं लौटते।
Roman Urdu (Maududi)Yeh behre hain, gungay hain, andhey hain, yeh ab na paltenge
Roman Urdu (Junagarhi)Behray goongay andhay hain. Pus woh nahi lottay
Devnagri Urdu (Maududi)ये बाहर हैं, गुंगे हैं, अंधे हैं, ये अब ना पलटेंगे
عَرَبِيأَو كَصَيِّبٍ مِنَ السَّماءِ فيهِ ظُلُماتٌ وَرَعدٌ وَبَرقٌ يَجعَلونَ أَصابِعَهُم في آذانِهِم مِنَ الصَّواعِقِ حَذَرَ المَوتِ ۚ وَاللَّهُ مُحيطٌ بِالكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)या आकाश से होने वाली वर्षा के समान, जिसमें कई अँधेरे हैं, तथा गरज और चमक है। वे कड़कने वाली बिजलियों के कारण मृत्यु के भय से अपनी उंगलियाँ अपने कानों में डाल लेते हैं और अल्लाह काफ़िरों को घेरे हुए है।
Roman Urdu (Maududi)Ya phir inki misaal yun samajho ke aasman se zoar ki baarish ho rahi hai aur iske saath andheri ghata aur kadak chamak bhi hai, yeh bijli ki kadake sunkar apni jaano ke khauf se kaano mein ungliyan thunse lete hain aur Allah in munkireen e haqq ko har taraf se gherey mein liye huey hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ya aasmani barsaat ki tarah jiss mein andheriyan aur garaj aur bijli ho maut ki darr say karakay ki waja say apni ungliyan apney kaanon mein daal letay hain. Aur Allah Taalaa kafiron ko gherney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)हां फिर इनकी मिसाल यूं समझो के आसमान से ज़ोर की बारिश हो रही है और इसके साथ अंधेरी घटा और कड़क चमक भी है, ये बिजली की कड़क सुन कर अपनी जानो के खौफ से कानो में उंगली थूंसे लेते हैं और अल्लाह इन मुनकिरीन ए हक को हर तरफ से घेरे में लिए हुए हैं
عَرَبِييَكادُ البَرقُ يَخطَفُ أَبصارَهُم ۖ كُلَّما أَضاءَ لَهُم مَشَوا فيهِ وَإِذا أَظلَمَ عَلَيهِم قاموا ۚ وَلَو شاءَ اللَّهُ لَذَهَبَ بِسَمعِهِم وَأَبصارِهِم ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निकट है कि बिजली उनकी आँखों को उचक ले जाए। जब भी वह उनके लिए रोशनी करती है, तो उसमें चल पड़ते हैं और जब वह उनपर अँधेरा कर देती है, तो खड़े हो जाते हैं। और यदि अल्लाह चाहता, तो अवश्य उनके कान और उनकी आँखों को ले जाता। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Chamak se inki haalat yeh ho rahi hai ke goya anqareeb bijli inki basarat (vision) uchak le jayegi, jab zara kuch roshni inhein mehsoos hoti hai to ismein kuch door chal lete hain aur jab inpar andhera cha jata hai to khade ho jatay hain. Allah chahta to inki samaat (hearing) aur basarat bilkul hi salb karleta, yaqeenan woh har cheez par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Qareeb hai kay bijli inn ki aankhen uchak ley jaye jab inn kay liye roshni kerti hai to chaltay phirtay hain aur jab inn per andhera kerti hai to kharay hojatay hain aur agar Allah Taalaa chahaye to inn kay kanon aur aankhon ko bey kaar kerdey. Yaqeenan Allah Taalaa her cheez per qudrat rakhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)चमक से इनकी हालत ये हो रही है के गोया अनकारीब बिजली इनकी बसारत (दृष्टि) उचक ले जाएगी, जब ज़रा कुछ रोशनी यहीं महसूस होती है तो इसमें कुछ दूर चल लेते हैं और जब अंदर अंधेरा छा जाता है तो खड़े हो जाते हैं। अल्लाह चाहता है तो इनकी समाअत (सुनना) और बसारत बिल्कुल ही सलब करलेता, यकीनन वो हर चीज पर कादिर है
عَرَبِييا أَيُّهَا النّاسُ اعبُدوا رَبَّكُمُ الَّذي خَلَقَكُم وَالَّذينَ مِن قَبلِكُم لَعَلَّكُم تَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो! अपने उस पालनहार की इबादत करो, जिसने तुम्हें तथा तुमसे पहले के लोगों को पैदा किया, ताकि तुम बच जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Logon! Bandagi ikhtiyar karo apne us Rubb ki jo tumhara aur tumse pehle jo log ho guzre hain un sabka khaliq hai, tumhare bachne ki tawaqqu isi surat se ho sakti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey logo! apney uss rab ki ibadat kero jiss ney tumhen aur tum say pehlay kay logon ko peda kiya yehi tumhara bachao hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन! बंदगी इख्तियार करो अपने हमसे रूब की जो तुम्हारा और तुमसे पहले जो लोग हो गुजरे हैं उन सबका खालिक है, तुम्हारे बच्चों की तवक्कू इसी सूरत से हो सकती है
عَرَبِيالَّذي جَعَلَ لَكُمُ الأَرضَ فِراشًا وَالسَّماءَ بِناءً وَأَنزَلَ مِنَ السَّماءِ ماءً فَأَخرَجَ بِهِ مِنَ الثَّمَراتِ رِزقًا لَكُم ۖ فَلا تَجعَلوا لِلَّهِ أَندادًا وَأَنتُم تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसने तुम्हारे लिए धरती को एक बिछौना तथा आकाश को एक छत बनाया और आकाश से कुछ पानी उतारा, फिर उससे कई प्रकार के फल तुम्हारी जीविका के लिए पैदा किए। अतः अल्लाह के लिए किसी प्रकार के साझी न बनाओ, जबकि तुम जानते हो।
Roman Urdu (Maududi)Wahi to hai jisne tumhare liye zameen ka farsh bichaya, aasman ki chath banayi, upar se pani barsaya aur uske zariye se har tarah ki paidwaar nikal kar tumhare liye rizq baham pahunchaya, pas jab tum yeh jaante ho to dusron ko Allah ka madd e muqabil na thehrao
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ney tumharay liye zamin ko farash aur aasman ko chatt banaya aur aasman say pani utaar ker uss say phal peda ker kay tumhen rozi di khabardaar bawajood janney kay Allah kay shareek muqarrar na kero
Devnagri Urdu (Maududi)वही तो है जिसने तुम्हारे लिए जमीन का फर्श बिछाया, आसमान की छठ बनाई, ऊपर से पानी बरसाया और उसके ज़रीये से हर तरह की पेडवार निकल कर तुम्हारे लिए रिज़क बाहम पहुंचाया, पास जब तुम ये जानते हो तो दूसरे को अल्लाह का मद्द ए मुक़ाबिल न ठहरो
عَرَبِيوَإِن كُنتُم في رَيبٍ مِمّا نَزَّلنا عَلىٰ عَبدِنا فَأتوا بِسورَةٍ مِن مِثلِهِ وَادعوا شُهَداءَكُم مِن دونِ اللَّهِ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम उस (पुस्तक) के बारे में किसी संदेह में हो, जो हमने अपने बंदे पर उतारा है, तो उसके समान एक सूरत ले आओ और अल्लाह के सिवा अपने समर्थकों को भी बुला लो, यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar tumhein is amr mein shakk hai ke yeh kitab jo humne apne bandey par utari hai, yeh hamari hai ya nahin, to iske manind (similar) ek hi surat bana lao, apne saarey humnawa ko bula lo (associates to assist you), ek Allah ko chodh kar baki jis jis ki chaho madad lelo agar tum sacchey ho to yeh kaam karke dikhao
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney jo kuch apney banday per utara hai uss mein agar tumhen shak ho aur tum sachay ho to iss jaisi aik surat to bana lao tumhen ikhtiyar hai kay Allah Taalaa kay siwa apney madadgaron ko bhi bula lo
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर तुम्हारे पास अमृत है के ये किताब जो हमने अपने बंदे पर उतारी है, ये हमारी है या नहीं, तो इसके मानिंद (समान) एक ही सूरत बना लाओ, अपने सारे हमनवा को बुला लो (आपकी सहायता के लिए सहयोगी), एक अल्लाह को छोड़ कर बाकी जिसकी चाहो मदद लेलो अगर तुम सच्चे हो तो ये काम करके दिखाओ
عَرَبِيفَإِن لَم تَفعَلوا وَلَن تَفعَلوا فَاتَّقُوا النّارَ الَّتي وَقودُهَا النّاسُ وَالحِجارَةُ ۖ أُعِدَّت لِلكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि तुमने ऐसा न किया और तुम ऐसा कभी नहीं कर पाओगे, तो उस आग से बचो, जिसका ईंधन मानव तथा पत्थर हैं, जो काफ़िरों के लिए तैयार की गई है।
Roman Urdu (Maududi)Lekin agar tumne aisa na kiya aur yaqeenan kabhi nahin kar sakte, to daro us aag se jiska indhan (fuel) banengey Insan aur patthar, jo muhaiyya ki gayi hai munkireen e haqq ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Pus agar tum ney na kiya aur tum hergiz nahi ker saktayto (issay sacha maan ker) uss aag say bacho jiss ka endhan insan aur pathar hain jo kafiron kay liye tayyar ki gaee hai
Devnagri Urdu (Maududi)लेकिन अगर तुमने ऐसा ना किया और यक़ीनन कभी नहीं कर सकते, तो डरो हमें आग से जिसका इंधन (ईंधन) बनाएंगे इंसान और पत्थर, जो मुहैय्या की गई है मुनकिरीन ए हक़ के लिए
عَرَبِيوَبَشِّرِ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ أَنَّ لَهُم جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ ۖ كُلَّما رُزِقوا مِنها مِن ثَمَرَةٍ رِزقًا ۙ قالوا هٰذَا الَّذي رُزِقنا مِن قَبلُ ۖ وَأُتوا بِهِ مُتَشابِهًا ۖ وَلَهُم فيها أَزواجٌ مُطَهَّرَةٌ ۖ وَهُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) उन लोगों को शुभ सूचना दे दो, जो ईमान लाए तथा उन्होंने अच्छे काम किए कि निःसंदेह उनके लिए ऐसे स्वर्ग हैं, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। जब कभी उनमें से कोई फल उन्हें खाने के लिए दिया जाएगा, तो कहेंगे : यह तो वही है, जो इससे पहले हमें दिया गया था, तथा उन्हें एक-दूसरे से मिलता-जुलता फल दिया जाएगा तथा उनके लिए उनमें पवित्र पत्नियाँ होंगी और वे उनमें हमेशा रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey paighambar), jo log is kitab par iman le aaye aur (iske mutabiq) apne aamaal durust karlein, unhein khushkhabri dedo ke unke liye aisey baagh hain, jinke nichey nehrein behti hongi. Un baaghon ke phal surat mein duniya ke phalon se miltey jhulte honge, jab koi phal unhein khane ko diya jayega, to woh kahenge ke aisey hi phal issey pehle duniya mein humko diye jatay thay. Unke liye wahan pakeeza biwiyan hongi, aur woh wahan hamesha rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur eman walon aur nek amal kerney walon ko unn jannaton ki khushkhabriyan do jin kay neechay nehren beh rahi hain. Jab kabhi woh phalon ka rizq diye jayen gay aur hum shakal laye jayen gay to kahen gay yeh wohi hain jo hum iss say pehlay diye gaye thay aur unn kay liye biwiyan hain saaf suthri aur unn jannaton mein hamesha rehney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ पैगम्बर), जो लोग इस किताब पर ईमान ले आए और (इस्के मुताबिक) अपने अमल दुरुस्त कर लें, अनहेन ख़ुशख़बरी देदो के उनके लिए ऐसे बाघ हैं, जिनके बारे में खास बातें होंगी। उन बाघों के फाल सूरत में दुनिया के फालों से मिलते होंगे, जब कोई फल उन्हें खाने को दिया जाएगा, तो वो कहेंगे के ऐसे ही फाल इस्से पहले दुनिया में हमको दिए जाते हैं। उनके लिए वहां पाकीज़ा बीवियां होंगी, और वो वहां हमेशा रहेंगे
عَرَبِي۞ إِنَّ اللَّهَ لا يَستَحيي أَن يَضرِبَ مَثَلًا ما بَعوضَةً فَما فَوقَها ۚ فَأَمَّا الَّذينَ آمَنوا فَيَعلَمونَ أَنَّهُ الحَقُّ مِن رَبِّهِم ۖ وَأَمَّا الَّذينَ كَفَروا فَيَقولونَ ماذا أَرادَ اللَّهُ بِهٰذا مَثَلًا ۘ يُضِلُّ بِهِ كَثيرًا وَيَهدي بِهِ كَثيرًا ۚ وَما يُضِلُّ بِهِ إِلَّا الفاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह मच्छर अथवा उससे तुच्छ चीज़ की मिसाल देने से नहीं शरमाता। फिर जो ईमान लाए, वे जानते हैं कि यह उनके पालनहार की ओर से सत्य है और रहे वे जिन्होंने कुफ़्र किया, तो वे कहते हैं : अल्लाह ने इसके साथ उदाहरण देकर क्या इरादा किया है? वह इसके साथ बहुतों को गुमराह करता है और इसके साथ बहुतों को हिदायत देता है तथा वह इसके साथ केवल अवज्ञाकारियों को गुमराह करता है।
Roman Urdu (Maududi)Haan, Allah issey hargiz nahin sharmata ke machhar ya issey bhi haqeer-tar (insignificant) kisi cheez ki tamseelein (examples) de. Jo log haqq baat ko qabool karne waley hain , woh inhi tamseelon ko dekh kar jaan lete hain ke yeh haqq hai jo unke Rubb hi ki taraf se aaya hai, aur jo maanne waley nahin hain, woh inhein sunkar kehne lagte hain ke aisi tamseelon se Allah ko kya sarokar? Is tarah Allah ek hi baat se bahuton ko gumraahi mein mubtila kardeta hai aur bahuton ko raah e raast dikha deta hai. Aur gumraahi mein woh unhi ko mubtila karta hai jo faasiq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan Allah Taalaa kissi misal kay biyan kerney say nahi sharmata khuwa machar ki ho ya iss say bhi halki cheez ki. eman walay to issay apney rab ki janib say sahih samajhtay hain aur kuffaar kehtay hain kay iss misal say Allah Taalaa ney kiya murad li hai? iss kay zariye baishtar ko gumrah kerta hai aur aksar logon ko raah-e-raast per lata hai aur gumrah to sirf fasiqon ko hi kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)हां, अल्लाह इसे हरगिज़ नहीं शरमाता के मच्छर या इसे भी हकीर-तार (महत्वहीन) किसी चीज़ की तमसीलें (उदाहरण) दे। जो लोग हक़ बात को क़बूल करने वाले हैं, वो इन्हीं तमसीलों को देख कर जान लेते हैं के ये हक़ है जो उनके रब ही की तरफ से आया है, और जो मन्ने वाले नहीं हैं, वो इन्हें सुनकर कहने लगते हैं कि ऐसी तमसीलों से अल्लाह को क्या सरोकार? इस तरह अल्लाह एक ही बात से बहुतों को गुमराह करने में मदद करता है और बहुतों को राह और रास्ता दिखाता है। और गुमराही में वो उनको मुब्तिला करता है जो फ़ासीक़ है
عَرَبِيالَّذينَ يَنقُضونَ عَهدَ اللَّهِ مِن بَعدِ ميثاقِهِ وَيَقطَعونَ ما أَمَرَ اللَّهُ بِهِ أَن يوصَلَ وَيُفسِدونَ فِي الأَرضِ ۚ أُولٰئِكَ هُمُ الخاسِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो अल्लाह से पक्का वचन करने के बाद उसे भंग कर देते हैं तथा जिसे अल्लाह ने जोड़ने का आदेश दिया है, उसे तोड़ते हैं और धरती में उपद्रव करते हैं, यही लोग घाटा उठाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Allah ke ahad ko mazboot baandh lene ke baad todh dete hain, Allah ne jisey jodhne ka hukum diya hai usey kaat-te hain, aur zameen mein fasaad barpa karte hain. Haqeeqat mein yahi log nuqsan uthane waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log Allah Taalaa kay mazboot ehad ko tor detay hain aur Allah Taalaa ney jin cheezon kay jorney ka hukum diya hai unhen kaattay aur zamin mein fasaad phelatay hain yehi log nuksan uthaney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के अहद को मज़बूत बांध लेने के बाद तोड़ देते हैं, अल्लाह ने जिसे जोड़ने का हुकुम दिया है उसे काट-ते हैं, और ज़मीन में फ़साद बरपा करते हैं। हकीकत में यही लोग नुक्सान उठाने वाले हैं
عَرَبِيكَيفَ تَكفُرونَ بِاللَّهِ وَكُنتُم أَمواتًا فَأَحياكُم ۖ ثُمَّ يُميتُكُم ثُمَّ يُحييكُم ثُمَّ إِلَيهِ تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम अल्लाह का इनकार कैसे करते हो? जबकि तुम निर्जीव थे, तो उसने तुम्हें जीवन दिया, फिर वह तुम्हें मौत देगा, फिर तुम्हें (परलोक में) जीवित करेगा, फिर तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Tum Allah ke saath kufr ka rawayya kaise ikhtiyar karte ho halaanke tum bay-jaan thay , usne tumko zindagi ata ki, phir wahi tumhari jaan salb karega, phir wahi tumhein dobara zindagi ata karega, phir usi ki taraf tumhein palat kar jana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum Allah kay sath kaisay kufur kertay ho? Halankay tum murda thay uss ney tumhen zinda kiya phir tumhen maar dalay ga phir zinda keray ga phir ussi ki taraf lotaye jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम अल्लाह के साथ कुफ्र का रवैय्या कैसे इख्तियार करते हो हालांके तुम बे-जान थे, उसने तुमको जिंदगी अता की, फिर वही तुम्हारी जान सब करेगा, फिर वही तुम्हें दोबारा जिंदगी अता करेगा, फिर उसी की तरफ तुम्हें पलट कर जाना है
عَرَبِيهُوَ الَّذي خَلَقَ لَكُم ما فِي الأَرضِ جَميعًا ثُمَّ استَوىٰ إِلَى السَّماءِ فَسَوّاهُنَّ سَبعَ سَماواتٍ ۚ وَهُوَ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है, जिसने धरती में जो कुछ है, सब तुम्हारे लिए पैदा किया, फिर आकाश की ओर रुख़ किया, तो उन्हें ठीक करके सात आकाश बना दिया और वह प्रत्येक चीज़ को ख़ूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi to hai, jisne tumhare liye zameen ki saari cheezein paida ki, phir upar ki taraf tawajju farmayi aur saat aasman ustwaar kiye aur woh har cheez ka ilm rakhne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh Allah jiss ney tumharay liye zamin ki tamam cheezon ko peda kiya phir aasman ki taraf qasad kiya aur unn ko theek thaak saat aasman banaya aur woh her cheez ko janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही तो है, जिसने तुम्हारे लिए जमीन की सारी चीजें पैदा कीं, फिर ऊपर की तरफ तवाज्जु फरमाई और सात आसमान उस्तवार किए और वह हर चीज का इल्म रखने वाला है
عَرَبِيوَإِذ قالَ رَبُّكَ لِلمَلائِكَةِ إِنّي جاعِلٌ فِي الأَرضِ خَليفَةً ۖ قالوا أَتَجعَلُ فيها مَن يُفسِدُ فيها وَيَسفِكُ الدِّماءَ وَنَحنُ نُسَبِّحُ بِحَمدِكَ وَنُقَدِّسُ لَكَ ۖ قالَ إِنّي أَعلَمُ ما لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी! याद कीजिए) जब आपके पालनहार ने फ़रिश्तों से कहा कि मैं धरती में एक ख़लीफ़ा बनाने वाला हूँ। उन्होंने कहा : क्या तू उसमें उसको बनाएगा, जो उसमें उपद्रव करेगा तथा बहुत रक्तपात करेगा, जबकि हम तेरी प्रशंसा के साथ तेरा गुणगान करते और तेरी पवित्रता का वर्णन करते हैं। (अल्लाह ने) फरमाया : निःसंदेह मैं जानता हूँ जो तुम नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Phir zara us waqt ka tasavvur karo jab tumhare Rubb ne Farishton se kaha tha ke “ main zameen mein ek khalifa banane wala hoon” unhon ne arz kiya : “kya aap zameen mein kisi aisey ko muqarrar karne waley hain, jo iske intezaam ko bigadh dega aur khoon-reziyan karega? Aap ki hamd o sana ke saath tasbeeh aur aap ke liye taqdees to hum kar hi rahey hain.” Farmaya: “ main jaanta hoon jo kuch tum nahin jaante.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab teray rab ney farishton say kaha kay mein zamin mein khalifa bananey wala hun to unhon ney kaha aisay shaks ko kiyon khalifa peda kerta hai jo zamin mein fasaad keray aur khoon bahaye? Aur hum teri tasbeeh hamd aur pakeezgi biyan kerney wala hain. Allah Taalaa ney farmaya jo mein janta hun tum nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जरा हमें वक़्त का तसव्वुर करो जब तुम्हारे रब ने फरिश्तों से कहा था के "मैं जमीन में एक खलीफा बनने वाला हूं" उनहोन ने अर्ज़ किया: "क्या आप जमीन में किसी ऐसे को मुकर्रर करने वाले हैं, जो इसके इंतेजाम को बिगाड़ देगा और खून-रेजियां करेगा? आप की हम्द ओ सना के साथ तस्बीह और आप के लिए तकदीस तो हम कर ही रहे हैं।” फरमाया: "मैं जानता हूं जो कुछ तुम नहीं जानते।"
عَرَبِيوَعَلَّمَ آدَمَ الأَسماءَ كُلَّها ثُمَّ عَرَضَهُم عَلَى المَلائِكَةِ فَقالَ أَنبِئوني بِأَسماءِ هٰؤُلاءِ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उस (अल्लाह) ने आदम को सभी नाम सिखा दिए, फिर उन्हें फ़रिश्तों के समक्ष प्रस्तुत किया, फिर फरमाया : मुझे इनके नाम बताओ, यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)Iske baad Allah ne Adam ko saari cheezon ke naam sikhaye, phir unhein Farishton ke samne pesh kiya aur farmaya “agar tumhara khayal saheeh hai (ke kisi khalifa ke taqarrur se intezam bigad jayega) to zara in cheezon ke naam batao.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa ney aadam ko tamam naam sikha ker unn cheezon ko farishton kay samney paish kiya aur farmaya agar tum sachay ho to inn cheezon kay naam batao
Devnagri Urdu (Maududi)इसके बाद अल्लाह ने आदम को सारी चीज़ों के नाम सिखाए, फिर उन्हें फरिश्तों के सामने पेश किया और फरमाया "अगर तुम्हारा ख्याल सही है (के किसी खलीफा के तकरार से इंतेज़ाम बिगड़ जाएगा) तो ज़रा इन चीज़ों के नाम बताओ।"
عَرَبِيقالوا سُبحانَكَ لا عِلمَ لَنا إِلّا ما عَلَّمتَنا ۖ إِنَّكَ أَنتَ العَليمُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : तू पवित्र है। हमें कुछ ज्ञान नहीं परंतु जो तूने हमें सिखाया। निःसंदेह तू ही सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne arz kiya: “nuqs (defect) se paak to aap hi ki zaat hai, hum to bas itna hi ilm rakhte hain, jitna aapne humko de diya hai, haqeeqat mein sab kuch jaanne aur samajhne wala aap ke siwa koi nahin”
Roman Urdu (Junagarhi)Unn sab ney kaha aey Allah ! Teri zaat pak hai hum to sirf utna hi ilm hai jitna tu ney humen sikha rakha hai pooray ilm-o-hikmat wala to tu hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)अनहोन ने अर्ज़ किया: "नुक़्स (दोष) से ​​पाक तो आप ही की ज़ात है, हम तो बस इतना ही इल्म रखते हैं, जितना आपने हमको दे दिया है, हकीकत में सब कुछ जाने और समझने वाला आप के सिवा कोई नहीं"
عَرَبِيقالَ يا آدَمُ أَنبِئهُم بِأَسمائِهِم ۖ فَلَمّا أَنبَأَهُم بِأَسمائِهِم قالَ أَلَم أَقُل لَكُم إِنّي أَعلَمُ غَيبَ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَأَعلَمُ ما تُبدونَ وَما كُنتُم تَكتُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) फरमाया : ऐ आदम! उन्हें इनके नाम बताओ। तो जब उस (आदम) ने उन्हें उनके नाम बता दिए, तो अल्लाह ने कहा : क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि निःसंदेह मैं ही आकाशों तथा धरती की छिपी बातों को जानता हूँ तथा जानता हूँ जो कुछ तुम ज़ाहिर करते हो और जो कुछ तुम छिपाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Phir Allah ne Adam se kaha: “ tum inhein in cheezon ke naam batao” jab usne unko un sabke naam bata diye, to Allah ne farmaya : “ maine tum se kaha na tha ke main aasmano aur zameen ki woh saari haqeeqatein jaanta hoon jo tumse makhfi (chupi) hain, jo kuch tum zaahir karte ho, woh bhi mujhey maloom hai aur jo kuch tum chupate ho, usey bhi main jaanta hoon.”
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney (hazrat) aadam (alh-e-salam) say farmaya tum inn kay naam bata do. Jab unhon ney bata diye to to farmaya kay kiya mein ney tumhen (pehlay hi) na kaha tha kay zamin aur aasmanon ka ghaib mein hi janta hun aur meray ilm mein hai jo tum zahir ker rahey ho aur jo tum chupatay thay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अल्लाह ने आदम से कहा: "तुम इन्हें इन चीज़ों के नाम बताओ" जब उसने उनको उन सबके नाम बता दिए, तो अल्लाह ने फरमाया: "मैंने तुम से कहा ना था के मैं आसमान और ज़मीन की वो सारी हकीकत जानता हूं जो तुमसे मख़फ़ी (चुपी) हैं, जो कुछ तुम ज़ाहिर करते हो, वो भी मुझे मालूम है और जो कुछ तुम छुपते हो, उसे भी मैं जानता हूं।”
عَرَبِيوَإِذ قُلنا لِلمَلائِكَةِ اسجُدوا لِآدَمَ فَسَجَدوا إِلّا إِبليسَ أَبىٰ وَاستَكبَرَ وَكانَ مِنَ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब हमने फ़रिश्तों से कहा : आदम को सजदा करो, तो उन्होंने सजदा किया सिवाय इबलीस के। उसने इनकार किया और अभिमान किया और काफ़िरों में से हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab humne Farishton ko hukum diya ke Adam ke aagey jhuk jao, to sab jhuk gaye, magar Iblis ne inkar kiya, woh apni badayi ke ghamand mein padh gaya aur nafarmaano mein shamil ho gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab hum ney farishton say kaha kay aadam ko sajda kero to iblees kay siwa sab ney sajda kiya. Uss ney inkar kiya aur takabbur kiya aur woh kafiron mein hogaya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब हमने फरिश्तों को हुकुम दिया के आदम के आगे झुक जाओ, तो सब झुक गए, मगर इब्लीस ने इंकार किया, वो अपनी बदाई के घमंड में पढ़ गया और नफरमानों में शामिल हो गया
عَرَبِيوَقُلنا يا آدَمُ اسكُن أَنتَ وَزَوجُكَ الجَنَّةَ وَكُلا مِنها رَغَدًا حَيثُ شِئتُما وَلا تَقرَبا هٰذِهِ الشَّجَرَةَ فَتَكونا مِنَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने कहा : ऐ आदम! तुम और तुम्हारी पत्नी जन्नत में निवास करो और दोनों उसमें से जहाँ से चाहो वहाँ से (आराम और) बहुतायत से खाओ। और तुम दोनों इस वृक्ष के क़रीब न जाना, अन्यथा तुम दोनों अत्याचारियों में से हो जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir humne Adam se kaha ke “Tum aur tumhari biwi, dono jannat mein raho aur yahan ba-faraagat jo chaho khao, magar is darakht ka rukh na karna, warna zaalimon mein shumaar honge”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney keh diya kay aey aadam! Tum aur tumhari biwi jannat mein raho aur jahan kahin say chahao ba faraghat khao piyo lekin uss darakht kay qareeb na jana werna zalim hojao gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमने आदम से कहा के "तुम और तुम्हारी बीवी, दोनों जन्नत मैं रहो और यहां ब-फरागत जो चाहो खाओ, मगर इस डरख्त का रुख न करना, वरना ज़ालिमों में शामिल होंगे”
عَرَبِيفَأَزَلَّهُمَا الشَّيطانُ عَنها فَأَخرَجَهُما مِمّا كانا فيهِ ۖ وَقُلنَا اهبِطوا بَعضُكُم لِبَعضٍ عَدُوٌّ ۖ وَلَكُم فِي الأَرضِ مُستَقَرٌّ وَمَتاعٌ إِلىٰ حينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो शैतान ने दोनों को उससे फिसला दिया, चुनाँचे उन्हें उससे निकाल दिया, जिसमें वे दोनों थे और हमने कहा : उतर जाओ, तुम एक-दूसरे के शत्रु हो और तुम्हारे लिए धरती में एक समय तक ठहरना तथा लाभ उठाना है।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar shaytan ne in dono ko is darakht ki targeeb dekar hamare hukum ki pairwi se hata diya aur inhein us haalat se nikalwa kar chodha jismein woh thay. Humne hukum diya ke, ab tum sab yahan se utar jao, tum ek dusre ke dushman ho aur tumhein ek khaas waqt tak zameen (mein) theharna aur wahin guzar basar karna hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin shetan ney unn ko behka ker wahan say nikwa hi diya aur hum ney keh diya kay utar jao! um aik doosray kay dushman ho aur aik waqt-e-muqarrara tak tumharay liye zamin mein theharna aur faeeda uthana hai
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार शैतान ने दोनों को इस दरख्त की तरजीब देकर हमारे हुकुम की जोड़ी से हटा दिया और उनमें हमें हालत से निकालवा कर छोड़ा जिसमें वो थे। हमने हुकुम दिया के, अब तुम सब यहां से उतर जाओ, तुम एक दूसरे के दुश्मन हो और तुम्हें एक खास वक्त तक जमीन (में) ठहरना और वहीं गुजर बसर करना है”
عَرَبِيفَتَلَقّىٰ آدَمُ مِن رَبِّهِ كَلِماتٍ فَتابَ عَلَيهِ ۚ إِنَّهُ هُوَ التَّوّابُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर आदम ने अपने पालनहार से कुछ शब्द सीख लिए, तो उसने उसकी तौबा क़बूल कर ली। निश्चय वही है जो बहुत तौबा क़बूल करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt Adam ne apne Rubb se chandh kaleemat seekh kar tauba ki, jisko uske Rubb ne qabool karliya, kyunke woh bada maaf karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)(hazrat) aadam (alh-e-salam) ney apney rab say chand baaten seekh lin aur Allah Taalaa ney unn ki tauba qabool farmaee be-shak wohi tauba qabool kerney wala aur reham kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)उस वक्त आदम ने अपने रब से चंद कलीमात सीख कर तौबा की, जिसको उसके रब ने कबूल करलिया, क्योंकि वो बड़ा माफ करने वाला और रहम फरमाने वाला है
عَرَبِيقُلنَا اهبِطوا مِنها جَميعًا ۖ فَإِمّا يَأتِيَنَّكُم مِنّي هُدًى فَمَن تَبِعَ هُدايَ فَلا خَوفٌ عَلَيهِم وَلا هُم يَحزَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)हमने कहा : सब के सब इससे उतर जाओ। फिर यदि तुम्हारे पास मेरी ओर से कोई मार्गदर्शन आए, तो जिसने मेरे मार्गदर्शन का पालन किया, तो उनपर न कोई डर है और न वे शोकाकुल होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Humne kaha ke, “tum sab yahan se utar jao phir jo meri taraf se koi hidayat tumhare paas pahunche, to jo log meri hidayat ki pairwi karenge, unke liye kisi khauf aur ranjh ka mauqa na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney kaha tum sab yahan say chalay jao jab kabhi tumharay pass meri hidayat phonchay to uss ki tabey daari kerney walon per koi khof-o-ghum nahi
Devnagri Urdu (Maududi)हमने कहा के, "तुम सब यहां से उतर जाओ फिर जो मेरी तरफ से कोई हिदायत तुम्हारे पास पहुंचें, तो जो लोग मेरी हिदायत की जोड़ी बनाएंगे, उनके लिए कोई खौफ और रांझ का मौका ना होगा
عَرَبِيوَالَّذينَ كَفَروا وَكَذَّبوا بِآياتِنا أُولٰئِكَ أَصحابُ النّارِ ۖ هُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन्होंने कुफ़्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वही लोग आग (नरक) वाले हैं, वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo isko qabool karne se inkar karenge aur hamari aayat ko jhutlayenge, woh aag mein janey waley log hain, jahan woh hamesha rahenge.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo inkar keren aur meri aayaton ko jhutlayen woh jahannumi hain aur hamesha ussi mein rahey gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जो इसको कबूल करने से इंकार करेंगे और हमारी आयत को झुठलाएंगे, वो आग में जाने वाले लोग हैं, जहां वो हमेशा रहेंगे।”
عَرَبِييا بَني إِسرائيلَ اذكُروا نِعمَتِيَ الَّتي أَنعَمتُ عَلَيكُم وَأَوفوا بِعَهدي أوفِ بِعَهدِكُم وَإِيّايَ فَارهَبونِ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ बनी इसराईल! मेरी वह नेमत याद करो, जो मैंने तुम्हें प्रदान की, तथा तुम मेरी प्रतिज्ञा को पूरा करो, मैं तुम्हारी प्रतिज्ञा को पूरा करूँगा, तथा केवल मुझी से डरो।
Roman Urdu (Maududi)Aey bani-Israel ! zara khayal karo meri us niyamat ka jo maine tumko ata ki thi, mere saath tumhara jo ahad (covenant) tha usey tum poora karo, to mera jo ahad tumhare saath tha usey main poora karunga aur mujh hi se tum daro
Roman Urdu (Junagarhi)Aey bani israeel! meri uss nemat ko yaad kero jo mein ney tum per inam ki aur meray ehad ko poora kero mein tumharay ehad ko poora keroon ga aur mujh say hi daro
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ बानी-इज़राइल! जरा ख्याल करो मेरी उस नियामत का जो मैंने तुमको अता की थी, मेरे साथ तुम्हारा जो अहद (संविदा) था उसे तुम पूरा करो, तो मेरा जो अहद तुम्हारे साथ था उसे मैं पूरा करूंगा और मुझ ही से तुम डरो
عَرَبِيوَآمِنوا بِما أَنزَلتُ مُصَدِّقًا لِما مَعَكُم وَلا تَكونوا أَوَّلَ كافِرٍ بِهِ ۖ وَلا تَشتَروا بِآياتي ثَمَنًا قَليلًا وَإِيّايَ فَاتَّقونِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उस (क़ुरआन) पर ईमान लाओ, जो मैंने उतारा है, उसकी पुष्टि करने वाला है जो तुम्हारे पास है और तुम सबसे पहले इससे कुफ़्र करने वाले न बनो तथा मेरी आयतों के बदले थोड़ा मूल्य न लो और केवल मुझी से डरो।
Roman Urdu (Maududi)Aur maine jo kitab bheji hai uspar iman lao, yeh us kitab ki taeed (confirm) mein hai jo tumhare paas pehle se maujood thi, lihaza sabse pehle tum hi iske munkir na ban jao thodi keemat par meri aayat ko na bech daalo aur mere gazab se bacho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss kitab per eman lao jo mein ney tumhari kitabon ki tasdeeq mein nazil farmaee hai aur uss kay sath tum hi pehlay kafir na bano aur meri aayaton ko thori thori qeematon per na farokht kero aur sirf mujh hi say daro
Devnagri Urdu (Maududi)और मैंने जो किताब भेजी है उसपर ईमान लाओ, ये उस किताब की ताईद (पुष्टि) में है जो तुम्हारे पास पहले से मौजूद थी, लिहाजा सबसे पहले तुम ही इसके मुनीर ना बन जाओ थोड़ी कीमत पर मेरी आयत को ना बेच डालो और मेरे गजब से बचाओ
عَرَبِيوَلا تَلبِسُوا الحَقَّ بِالباطِلِ وَتَكتُمُوا الحَقَّ وَأَنتُم تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा सत्य को असत्य से न मिलाओ और न सत्य को जानते हुए छिपाओ।
Roman Urdu (Maududi)Baatil ka rang chadha kar haqq ko mushtaba (confusing) na banao aur na jaante boojhte haqq ko chupane ki koshish karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur haq ko baatil kay sath khalat malat na kero aur na haq ko chupao tumhen to khud iss ka ilm hai
Devnagri Urdu (Maududi)बातिल का रंग चढ़ा कर हक को मुश्तबा (भ्रमित) ना बनाओ और ना जानते बूझते हक़ को छुपाने की कोशिश करो
عَرَبِيوَأَقيمُوا الصَّلاةَ وَآتُوا الزَّكاةَ وَاركَعوا مَعَ الرّاكِعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो और झुकने वालों के साथ झुक जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Namaz qayam karo, zakaat do aur jo log mere aagey jhuk rahey hain unke saath tum bhi jhuk jao
Roman Urdu (Junagarhi)Aur namazon ko qaeem kero aur zakat do aur rukoo kerney walon kay sath rukoo kero
Devnagri Urdu (Maududi)नमाज़ क़ायम करो, ज़कात दो और जो लोग मेरे आगे झुक रहे हैं उनके साथ तुम भी झुक जाओ
عَرَبِي۞ أَتَأمُرونَ النّاسَ بِالبِرِّ وَتَنسَونَ أَنفُسَكُم وَأَنتُم تَتلونَ الكِتابَ ۚ أَفَلا تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम लोगों को सत्कर्म का आदेश देते हो और अपने आपको भूल जाते हो, हालाँकि तुम पुस्तक पढ़ते हो! तो क्या तुम नहीं समझते?
Roman Urdu (Maududi)Tum dusron ko to neki ka raasta ikhtiyar karne ke liye kehte ho, magar apne aap ko bhool jatay ho? Halaanke tum kitab ki tilawat karte ho, kya tum aqal se bilkul hi kaam nahin letay
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya logon ko bhalaiyon ka hukum kertay ho? Aur khud apney aap ko bhool jatay ho ba wajood yeh kay tum kitab parhtay ho kiya itni bhi tum mein samajh nahi
Devnagri Urdu (Maududi)तुम दूसरे को तो नेकी का रास्ता इख्तियार करने के लिए कहते हो हो, मगर अपने आप को भूल जाता हो? हलाँके तुम किताब की तिलावत करते हो, क्या तुम अक़ल से बिल्कुल ही काम नहीं लेते
عَرَبِيوَاستَعينوا بِالصَّبرِ وَالصَّلاةِ ۚ وَإِنَّها لَكَبيرَةٌ إِلّا عَلَى الخاشِعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा सब्र और नमाज़ से मदद माँगो और निःसंदेह वह (नमाज़) निश्चय बहुत भारी है, परंतु अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण करने वालों पर (नहीं)।
Roman Urdu (Maududi)Sabar aur namaz se madad lo, beshak namaz ek sakht mushkil kaam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur sabar aur namaz kay sath madad talab kero yeh cheezen shaaq hain magar darr rakhney walon per
Devnagri Urdu (Maududi)साबर और नमाज से मदद लो, बेशक नमाज एक मुश्किल मुश्किल काम है
عَرَبِيالَّذينَ يَظُنّونَ أَنَّهُم مُلاقو رَبِّهِم وَأَنَّهُم إِلَيهِ راجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो विश्वास रखते हैं कि निःसंदेह वे अपने पालनहार से मिलने वाले हैं और यह कि निःसंदेह वे उसी की ओर लौटने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar un farma-bardaar bandon ke liye mushkil nahin hai jo samajhte hain ke aakhir e kaar unhein apne Rubb se milna aur usi ki taraf palat kar jana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo jantay hain kay be-shak woh apney rab say mulaqat kerney walay aur yaqeenan woh ussi ki taraf lot ker janey walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उन फरमा-बरदार बंदों के लिए मुश्किल नहीं है जो समझते हैं कि आखिर ए कार उन्हें अपने रब से मिलना और उसकी तरफ पलट कर जाना है
عَرَبِييا بَني إِسرائيلَ اذكُروا نِعمَتِيَ الَّتي أَنعَمتُ عَلَيكُم وَأَنّي فَضَّلتُكُم عَلَى العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ इसराईल की संतान! मेरे उस अनुग्रह को याद करो, जो मैंने तुमपर किया और यह कि निःसंदेह मैंने ही तुम्हें संसार वालों पर श्रेष्ठता प्रदान की।
Roman Urdu (Maududi)Aey bani Israel! Yaad karo meri us niyamat ko , jissey maine tumhein nawaza tha aur is baat ko ke maine tumhein duniya ki saari qaumon par fazilat ata ki thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aey aulad-e-yaqoob! Meri uss nemat ko yaad kero jo mein ney tum per inam ki aur mein ney tumhen tamam jahanon per fazilat di
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ बानी इजराइल! याद करो मेरी उस नियामत को, जिसमें मैंने तुम्हें नवाजा था और इस बात को कहा था कि मैंने तुम्हें दुनिया की सारी कौमों पर फजीलत अता की थी
عَرَبِيوَاتَّقوا يَومًا لا تَجزي نَفسٌ عَن نَفسٍ شَيئًا وَلا يُقبَلُ مِنها شَفاعَةٌ وَلا يُؤخَذُ مِنها عَدلٌ وَلا هُم يُنصَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उस दिन से डरो, जब कोई किसी के कुछ काम न आएगा, और न उससे कोई अनुशंसा (सिफ़ारिश) स्वीकार की जाएगी, और न उससे कोई फ़िदया (दंड राशि) लिया जाएगा और न उनकी मदद की जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur daro us din se jab koi kisi ke zara kaam na aayega, na kisi ki taraf se sifarish qabool hogi, na kisi ko fidiya lekar choda jayega, aur na mujreemon ko kahin se madad mil sakegi
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din say dartay raho jab koi kissi ko nafa na dey sakay ga aur na hi uss ki babat ki koi sifarish qabool hogi aur na koi badla uss kay ewaz liya jaye ga aur na woh madad kiye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और डरो उस दिन से जब कोई किसी के जरा काम न आएगा, न किसी की तरफ से सिफरिश कबूल होगी, न किसी को फिदिया लेकर चोदा जाएगा, और ना मुजर्रिमों को कहीं से मदद मिल सकेगी
عَرَبِيوَإِذ نَجَّيناكُم مِن آلِ فِرعَونَ يَسومونَكُم سوءَ العَذابِ يُذَبِّحونَ أَبناءَكُم وَيَستَحيونَ نِساءَكُم ۚ وَفي ذٰلِكُم بَلاءٌ مِن رَبِّكُم عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (वह समय याद करो) जब हमने तुम्हें फ़िरऔनियों से मुक्ति दिलाई, जो तुम्हें बुरी यातना देते थे; तुम्हारे बेटों को बुरी तरह ज़बह कर देते थे तथा तुम्हारी स्त्रियों को जीवित छोड़ देते थे। इसमें तुम्हारे पालनहार की ओर से बड़ी परीक्षा थी।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo woh waqt, jab humne tumko Firouniyon ki ghulami se nijaat bakshi, unhon ne tumhein sakht azaab mein mubtila kar rakkha tha, tumhare ladkon ko zibah karte thay aur tumhari ladkiyon ko zinda rehne dete thay aur is haalat mein tumhare Rubb ki taraf se tumhari badi aazmaish thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab hum ney tumhen firaoniyon say nijat di jo tumhen bad tareen azab detay thay jo tumharay larkon ko maar daltay thay aur tumhari larkiyon ko chor detay thay uss nijat denay mein tumharay rab ki bari meharbani thi
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो वो वक्त, जब हमने तुमको फिरौनियों की गुलामी से निजात बख्शी, उन्हें ने तुम्हें मजबूत अजाब में मुब्तिला कर रखा था, तुम्हारे लड़कों को जिबाह करते थे और तुम्हारी लड़कियों को जिंदा रहने देते थे और इस हालात में तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारी बड़ी आजमाइश थी
عَرَبِيوَإِذ فَرَقنا بِكُمُ البَحرَ فَأَنجَيناكُم وَأَغرَقنا آلَ فِرعَونَ وَأَنتُم تَنظُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (उस समय को याद करो) जब हमने तुम्हारे लिए सागर को फाड़ दिया, फिर हमने तुम्हें बचा लिया और फ़िरऔनियों को डुबो दिया और तुम देख रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo woh waqt, jab humne samandar phadh kar tumhare liye raasta banaya, phir ismein se tumhein ba-khairiyat guzarwa diya, phir wahin tumhari aankhon ke saamne Firouniyon ko garqaab (drown) kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab hum ney tumharay liye dariya cheer (phaar) diya aur tumhen uss say paar ker diya aur firaoniyon ko tumhari nazron kay samney uss mein dobo diya
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो वो वक्त, जब हमने समंदर पार कर तुम्हारे लिए रास्ता बनाया, फिर इस्में से तुम्हें ब-खैरियत गुजारवा दिया, फिर वहीं तुम्हारी आंखों के सामने फिरौनियों को बर्बाद कर दिया
عَرَبِيوَإِذ واعَدنا موسىٰ أَربَعينَ لَيلَةً ثُمَّ اتَّخَذتُمُ العِجلَ مِن بَعدِهِ وَأَنتُم ظالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद करो) जब हमने मूसा को (तौरात प्रदान करने के लिए) चालीस रातों का वादा किया, फिर उसके बाद तुमने बछड़े को (पूज्य) बना लिया और तुम अत्याचारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo, jab humne Moosa ko chalis shabana roz ki qarardaad par bulaya, to uske peechey tum bachdey (calf) ko apna mabood bana baithey us waqt tumne badi zyadati ki thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney (hazrat) musa (alh-e-salam) say chalees raaton ka wada kiya phir tum ney uss kay baad bachra poojna shuroo ker diya aur zalim bann gaye
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो, जब हमने मूसा को चालीस शबाना रोज़ की क़रारदाद पर बुलाया, तो उसके पीछे तुम बचदे (बछड़े) को अपना मबूद बना बैठे हमें वक़्त तुमने बड़ी ज़्यादा की थी
عَرَبِيثُمَّ عَفَونا عَنكُم مِن بَعدِ ذٰلِكَ لَعَلَّكُم تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने इसके बाद तुम्हें क्षमा कर दिया, ताकि तुम शुक्रगुज़ार बनो।
Roman Urdu (Maududi)Magar ispar bhi humne tumhein maaf kardiya ke shayad ab tum shukar-guzar bano
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin hum ney ba wajood iss kay phir tumhen moaf ker diya takay tum shukar kero
Devnagri Urdu (Maududi)मगर इसपर भी हमने तुम्हें माफ़ कर दिया के शायद अब तुम शुकर-गुज़ार बनो
عَرَبِيوَإِذ آتَينا موسَى الكِتابَ وَالفُرقانَ لَعَلَّكُم تَهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (हमारी वह अनुग्रह भी याद करो) जब हमने मूसा को पुस्तक (तौरात) और (सत्य एवं असत्य के बीच) अंतर करने वाली चीज़ प्रदान की, ताकि तुम मार्गदर्शन पा सको।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo ke (theek us waqt jab tum yeh zulm kar rahey thay) humne Moosa ko kitab aur furqan ata ki taa-ke tum uske zariye se seedha raasta paa sako
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney (hazrat) musa (alh-e-salam) ko tumhari hidayat kay liye kitab aur moajzay ata farmaye
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो के (हमें ठीक करो) वक़्त जब तुम ये ज़ुल्म कर रहे थे) हमने मूसा को किताब और फुरकान अता की ता-के तुम उसके ज़रिये से सीधा रास्ता पा सको
عَرَبِيوَإِذ قالَ موسىٰ لِقَومِهِ يا قَومِ إِنَّكُم ظَلَمتُم أَنفُسَكُم بِاتِّخاذِكُمُ العِجلَ فَتوبوا إِلىٰ بارِئِكُم فَاقتُلوا أَنفُسَكُم ذٰلِكُم خَيرٌ لَكُم عِندَ بارِئِكُم فَتابَ عَلَيكُم ۚ إِنَّهُ هُوَ التَّوّابُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (वह समय याद करो) जब मूसा ने अपनी जाति से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! निःसंदेह तुमने बछड़े को पूज्य बनाकर अपने आपपर अत्याचार किया है। अतः तुम अपने पैदा करने वाले के समक्ष तौबा करो और आपस में एक-दूसरे को क़त्ल करो। यही तुम्हारे लिए तुम्हारे पैदा करने वाले के निकट बेहतर है। फिर उसने तुम्हारी तौबा क़बूल कर ली। निःसंदेह वही बहुत तौबा क़बूल करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jab Moosa ( yeh niyamat lete huey palta, to us) ne apni qaum se kaha ke “logon, tumne bachde ko mabood bana kar apne upar sakht zulm kiya hai, lihaza tum log apne khaliq ke huzoor tauba karo aur apni jaano ko halaak karo, isi mein tumhare khaliq ke nazdeek tumhari behtari hai” us waqt tumhare khaliq ne tumhari tauba qabool karli ke woh bada maaf karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jab (hazrat) musa (alh-e-salam) ney apni qom say kaha kay aey meri qom! bachray ko mabood bana ker tum ney apni janon per zulm kiya hai abb tum apney peda kerney walay ki taraf rujoo kero apney ko aapas mein qatal kero tumhari behtri Allah Taalaa kay nazdeek issi mein hai to uss ney tumhari tauba qabool ki woh tauba qabool kerney wala aur reham-o-karam kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जब मूसा (ये नियामत लेते हुए पलटा, हमसे) ने अपनी क़ौम से कहा के ''लोगन, तुमने बचदे को'' माबूद बना कर अपना ऊपर सख्त ज़ुल्म किया है, लिहाज़ा तुम लोग अपने खालिक के हुजूर तौबा करो और अपनी जानो को हलाक करो, इसी में तुम्हारे खालिक के नजरिए तुम्हारी बेहतरी है” हमारा वक्त तुम्हारे खालिक ने तुम्हारी तौबा कबूल कर ली के वो बड़ा माफ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِيوَإِذ قُلتُم يا موسىٰ لَن نُؤمِنَ لَكَ حَتّىٰ نَرَى اللَّهَ جَهرَةً فَأَخَذَتكُمُ الصّاعِقَةُ وَأَنتُم تَنظُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (वह समय याद करो) जब तुमने कहा : ऐ मूसा! हम कदापि तुम्हारा विश्वास नहीं करेंगे, यहाँ तक कि हम अल्लाह को खुल्लम-खुल्ला देख लें! तो तुम्हें बिजली की कड़क ने पकड़ लिया और तुम देख रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jab tumne Moosa se kaha tha ke hum tumhare kehne ka hargiz yaqeen na karenge, jab tak ke apni aankhon se alaniya khuda ko ( tumse kalaam karte) na dekhlein, us waqt tumhare dekhte dekhte ek zabardast saayqe ne(thunderbolt struck) tumko aa liya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (tum ussay bhi yaad kero) tum ney (hazrat) musa (alh-e-salam) say kaha tha kay jab tak hum apney rab ko apney samney na dekh len hergiz eman na layen gay (jiss ki gustakhi ki saza mein) tum per tumharay dekhtay huye bijli giri
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जब तुमने मूसा से कहा था कि हम तुम्हारे कहने का हरगिज़ यकीन ना करेंगे, जब तक के अपनी आंखों से एलानिया खुदा को (तुमसे कलाम करते) ना देखो, हम वक्त तुम्हारे देखते हैं एक ज़बरदस्त सायेके ने (वज्रपात) तुमको आ लिया
عَرَبِيثُمَّ بَعَثناكُم مِن بَعدِ مَوتِكُم لَعَلَّكُم تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने तुम्हें तुम्हारे मरने के बाद जीवित किया, ताकि तुम आभार प्रकट करो।
Roman Urdu (Maududi)Tum be-jaan hokar gir chuke thay, magar phir humne tumko jila uthaya, shayad ke is ehsan ke baad tum shukar-guzar ban jao
Roman Urdu (Junagarhi)Phir iss liye kay tum shukar guzari kero iss maut kay baad bhi hum ney tumhen zinda ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)तुम बे-जान होकर गिर चुके थे, मगर फिर हमने तुमको जिला उठाया, शायद के इस एहसान के बाद तुम शुक्र-गुजार बन जाओ
عَرَبِيوَظَلَّلنا عَلَيكُمُ الغَمامَ وَأَنزَلنا عَلَيكُمُ المَنَّ وَالسَّلوىٰ ۖ كُلوا مِن طَيِّباتِ ما رَزَقناكُم ۖ وَما ظَلَمونا وَلٰكِن كانوا أَنفُسَهُم يَظلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने तुमपर बादलों की छाया की, तथा हमने तुमपर 'मन्न' और 'सलवा' उतारा, (और तुमसे कहा :) उन अच्छी पाक चीज़ों में से खाओ, जो हमने तुम्हें प्रदान की हैं। और उन्होंने हमपर अत्याचार नहीं किया, परंतु वे अपने आप ही पर अत्याचार किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Humne tumpar abar ka saya (cloud to overshadow) kiya, mann o salwa ki giza tumhare liye faraham ki aur tumse kaha ke jo paak cheezein humne tumhein bakshi hain, unhein khao, magar tumhare aslaaf (forefathers) ne jo kuch kiya, woh humpar zulm na tha, balke unhon ne aap apne hi upar zulm kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney tum per badal ka saya kiya aur tum per mann-o-salwa utara (aur keh diya) kay humari di hui pakeeza cheezen khao aur unhon ney hum per zulm nahi kiya albatta woh khud apni janon per zulm kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)हमने तुमपर अबर का साया (बादल छा जाना) किया, मन ओ सलवा की गीज़ा तुम्हारे लिए फराह की और तुमसे कहा के जो पाक चीजें हमने तुम्हें बख्शी हैं, उन्हें खाओ, मगर तुम्हारे असलाफ (पूर्वजों) ने जो कुछ किया, वो हमपर जुल्म ना था, बलके उन्होन ने आपने अपना ही ऊपर जुल्म किया
عَرَبِيوَإِذ قُلنَا ادخُلوا هٰذِهِ القَريَةَ فَكُلوا مِنها حَيثُ شِئتُم رَغَدًا وَادخُلُوا البابَ سُجَّدًا وَقولوا حِطَّةٌ نَغفِر لَكُم خَطاياكُم ۚ وَسَنَزيدُ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (याद करो) जब हमने कहा : इस बस्ती में प्रवेश कर जाओ, फिर इसमें से जहाँ से चाहो, (आराम और) बहुतायत से खाओ, और इसके द्वार से सिर झुकाए हुए प्रवेश करो, और कहो क्षमा कर दे, तो हम तुम्हारे पापों को क्षमा कर देंगे तथा हम नेकी करने वालों को शीघ्र ही अधिक प्रदान करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir yaad karo jab humne kaha tha ke, “yeh basti jo tumhare saamne hai, ismein dakhil ho jao, iski paidawaar jis tarah chaho mazey se khao, magar basti ke darwaze mein sajda-reiz hotey huey daakhil hona aur kehte jana hitta-tun hitta-tun (Relieve us of our burdens/magfirat), hum tumhari khataon se darguzar karenge aur neikukaron ko mazeed fazal o karam se nawazenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney tum say kaha uss basti mein jao aur jo kuch ja kahin say chahao ba faraghat khao piyo aur darwazay mein sajday kertay huye guzro aur zaban say hitta kaho hum tumhari khatayen moaf farma den gay aur neki kerney walon ko aur ziyada den gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर याद करो जब हमने कहा था के, "ये बस्ती जो तुम्हारे सामने है, इसमें दखल हो जाओ, इसकी अदायगी जिस तरह चाहो मजे से खाओ, मगर बस्ती के दरवाज़े में सजदा-रेज़ होते हुए दाख़िल होना और कहते जाना हित्ता-तुन हित्ता-तुन (हमें हमारे बोझ/मगफिरत से छुटकारा दिलाओ), हम तुम्हारी खतों से दरगुज़र करेंगे और नीकुकरोन को मज़ीद फ़ज़ल ओ करम से नवाज़ेंगे”
عَرَبِيفَبَدَّلَ الَّذينَ ظَلَموا قَولًا غَيرَ الَّذي قيلَ لَهُم فَأَنزَلنا عَلَى الَّذينَ ظَلَموا رِجزًا مِنَ السَّماءِ بِما كانوا يَفسُقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर इन अत्याचारियों ने बात को उसके विपरीत बदल दिया, जो उनसे कही गई थी। तो हमने इन अत्याचारियों पर आकाश से एक यातना उतारी, इस कारण कि वे अवज्ञा करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Magar jo baat kahi gayi thi, zalimon ne usey badal kar kuch aur kardiya, aakhir e kaar humne zulm karne walon par aasman se azaab nazil kiya, yeh saza thi un na-farmaniyon ki jo woh kar rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Phir unn zalimon ney uss baat ko jo unn say kahi gaee thi badal daali hum ney bhi unn zalimon per unn kay fisq-o-nafarmani ki waja say aasmani azab nazil kiya
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जो बात कहीं गई थी, ज़ालिमों ने उसे बदल कर कुछ और करदिया, आख़िर ए कार हमने ज़ुल्म करने वालों पर आसमान से अज़ाब नाज़िल किया, ये सज़ा थी उन ना-फ़रमानियों की जो वो कर रहे थे
عَرَبِي۞ وَإِذِ استَسقىٰ موسىٰ لِقَومِهِ فَقُلنَا اضرِب بِعَصاكَ الحَجَرَ ۖ فَانفَجَرَت مِنهُ اثنَتا عَشرَةَ عَينًا ۖ قَد عَلِمَ كُلُّ أُناسٍ مَشرَبَهُم ۖ كُلوا وَاشرَبوا مِن رِزقِ اللَّهِ وَلا تَعثَوا فِي الأَرضِ مُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (वह समय याद करो) जब मूसा ने अपनी जाति के लिए पानी माँगा, तो हमने कहा : अपनी लाठी पत्थर पर मारो। तो उससे बारह सोते फूट निकले। निःसंदेह सब लोगों ने अपने पीने के स्थान को जान लिया। अल्लाह के दिए हुए में से खाओ और पियो और धरती में बिगाड़ फैलाते न फिरो।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo, jab Moosa ne apni qaum ke liye pani ki dua ki to humne kaha ke falaan chattan par apna asa maaro chunanchey ussey barah (twelve) chashmey (springs) phoot nikle aur har qabiley ne jaan liya ke kaunsi jagah uske pani lene ki hai. Us waqt yeh hidayat kardi gayi thi ke Allah ka diya hua rizq khao, pio aur zameen mein fasaad na phaylate phiro
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab musa (alh-e-salam) ney apni qom kay liye pani maanga to hum ney kaha kay apni laathi pathar per maaro jiss say baara chashmey phoot niklay aur her giroh ney apna chashma pehchan liya (aur hum ney keh diya kay) Allah Taalaa ka rizq khao piyo aur zamin mein fasaad na kertay phiro
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो, जब मूसा ने अपनी क़ौम के लिए पानी की दुआ की तो हमने कहा कि फलां चट्टान पर अपना आसा मारो चुनान्चे उसे बारह (बारह) चश्मे (स्प्रिंग्स) फूट निकले और हर काबिले ने जान लिया के कौन सी जगह उसके पानी लेने की है। हमें वक्त ये हिदायत कर दी गई थी कि अल्लाह का दिया हुआ रिज़क खाओ, पियो और जमीन में फसाद न फैलते फिरो
عَرَبِيوَإِذ قُلتُم يا موسىٰ لَن نَصبِرَ عَلىٰ طَعامٍ واحِدٍ فَادعُ لَنا رَبَّكَ يُخرِج لَنا مِمّا تُنبِتُ الأَرضُ مِن بَقلِها وَقِثّائِها وَفومِها وَعَدَسِها وَبَصَلِها ۖ قالَ أَتَستَبدِلونَ الَّذي هُوَ أَدنىٰ بِالَّذي هُوَ خَيرٌ ۚ اهبِطوا مِصرًا فَإِنَّ لَكُم ما سَأَلتُم ۗ وَضُرِبَت عَلَيهِمُ الذِّلَّةُ وَالمَسكَنَةُ وَباءوا بِغَضَبٍ مِنَ اللَّهِ ۗ ذٰلِكَ بِأَنَّهُم كانوا يَكفُرونَ بِآياتِ اللَّهِ وَيَقتُلونَ النَّبِيّينَ بِغَيرِ الحَقِّ ۗ ذٰلِكَ بِما عَصَوا وَكانوا يَعتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (उस समय को याद करो) जब तुमने कहा : ऐ मूसा! हम एक (ही प्रकार के) खाने पर कदापि संतोष नहीं करेंगे। अतः हमारे लिए अपने पालनहार से प्रार्थना करो, वह हमारे लिए कुछ ऐसी चीज़ें निकाले जो धरती अपनी तरकारी, और अपनी ककड़ी, और अपने गेहूँ, और अपने मसूर और अपने प्याज़ में से उगाती है। (मूसा ने) कहा : क्या तुम उत्तम वस्तु के बदले कमतर वस्तु माँग रहे हो? किसी नगर में जा उतरो, तो निश्चय तुम्हारे लिए वह कुछ होगा, जो तुमने माँगा। तथा उनपर अपमान और निर्धनता थोप दी गई और वे अल्लाह की ओर से भारी प्रकोप के साथ लौटे। यह इसलिए कि वे अल्लाह की आयतों का इनकार करते और नबियों की अकारण हत्या करते थे। यह इसलिए कि उन्होंने अवज्ञा की तथा वे (धर्म की) सीमा का उल्लंघन करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo, jab tumne kaha tha ke, “Aey Moosa, hum ek hi tarah ke khane par sabr nahin kar saktey, apne Rubb se dua karo ke hamare liye zameen ki paidawaar saag, tarkari, kheera, kakdi, gehoon, lasan, pyaz, daal wagaira paida karey” to Moosa ne kaha “ “kya ek behtar cheez ke bajaye tum adna darje ki cheezein lena chahte ho? Accha, kisi shehri aabaadi mein jaa raho, jo kuch tum maangte ho wahan mil jayega”. Aakhir e kaar naubat yahan tak pahunchi ke zillat o khwari aur pasti o badhaali unpar musallat ho gayi aur woh Allah ke gazab mein ghir gaye, yeh nateeja tha iska jo woh Allah ki aayat se kufr karne lagey aur paighambaron ko na-haqq qatal karne lagey, yeh nateeja tha unki nafarmaaniyon ka aur is baat ka ke woh hudood e sharaa se nikal nikal jatay thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab tum ney kah aey musa! hum say aik hi qisam kay khaney per sabar na hosakay ga iss liye apeny rab say dua kijiye kay woh humen zamin ki peda waar saag kakri gehon masoor aur piyaz dey aap ney farmaya behtar cheez kay badlay adna cheez kiyon talab kertay ho! acha shehar mein jao wahan tumhari chahat ki yeh sab cheezen milen gi. Unn per zillat aur miskeeni daal di gaee aur Allah ka ghazab ley ker woh lotay yeh iss liey kay woh Allah ki aayaton kay sath kufur kertay thay aur nabiyon ko na haq qatal kertay thay yeh unn ki na farmaniyon aur ziyadtiyon ka nateeja hai
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो, जब तुमने कहा था के, "ऐ मूसा, हम एक ही तरह के खाने पर सब्र नहीं कर सकते, अपने रब से दुआ करो के हमारे लिए जमीन की पैदावार साग, तरकारी, खीरा, ककड़ी, गेहूं, लसन, प्याज, दाल वगैरा पैदा करे" तो मूसा ने कहा “ “क्या एक बेहतर चीज़ के बजाये तुम अदना डरजे की चीज़ लेना चाहते हो? अच्छा, किसी शहरी आबादी में जा रहो, जो कुछ तुम माँगते हो वहाँ मिल जायेगा। करने लगे और पैगम्बरों को ना-हक़ क़त्ल करने लगे, ये नतीज़ा था उनकी नफ़रमानियों का और इस बात का के वो हुदूद ए शरा से निकल जाता है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا وَالَّذينَ هادوا وَالنَّصارىٰ وَالصّابِئينَ مَن آمَنَ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ وَعَمِلَ صالِحًا فَلَهُم أَجرُهُم عِندَ رَبِّهِم وَلا خَوفٌ عَلَيهِم وَلا هُم يَحزَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग ईमान लाए, और जो यहूदी बने, तथा ईसाई और साबी, जो भी अल्लाह तथा अंतिम दिन पर ईमान लाएगा और अच्छे कर्म करेगा, तो उनके लिए उनका प्रतिफल उनके पालनहार के पास है और उनपर न कोई डर है और न वे शोकाकुल होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeen jaano ke Nabi e arabi ko maanne waley hon ya yahudi, Isayi hon ya Sabyi, jo bhi Allah aur roz e aakhir par iman layega aur neik amal karega, uska ajar uske Rubb ke paas hai aur uske liye kisi khauf aur ranjh ka mauqa nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Musalman hon yahudi hon nasaara hon ya saabi hon jo koi bhi Allah Taalaa per aur qayamat kay din per eman laye aur nek amal keray unn kay ajar un kay rab kay pass hain aur unn per na o koi khof hai na udasi
Devnagri Urdu (Maududi)यकीन जानो के नबी ए अरबी को मन्ने वाले होन या यहूदी, इसाई होन या सबी, जो भी अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान लाएगा और नीक अमल करेगा, उसका अजर उसके रुब के पास है और उसके लिए कोई खौफ और रांझ का मौका नहीं है
عَرَبِيوَإِذ أَخَذنا ميثاقَكُم وَرَفَعنا فَوقَكُمُ الطّورَ خُذوا ما آتَيناكُم بِقُوَّةٍ وَاذكُروا ما فيهِ لَعَلَّكُم تَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (उस समय को याद करो) जब हमने तुमसे दृढ़ वचन लिया और तूर (पर्वत) को तुम्हारे ऊपर उठाया। हमने जो (पुस्तक) तुम्हें दी है, उसे मज़बूती से पकड़ो और जो उसमें (आदेश-निर्देश) है, उसे याद करो; ताकि तुम (अज़ाब से) बच जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo woh waqt, jab humne Tur (tur pahad) ko tumpar utha kar tumse pukhta ahad liya tha aur kaha tha ke “jo kitab hum tumhein de rahey hain usey mazbooti ke saath thamna aur jo ehkaam o hidayaat ismein darj hain unhein yaad rakhna, isi zariye se tawaqqu ki ja sakti hai ke tum taqwa ki rawish par chal sakogey”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab hum ney tum say wada liya aur tum per toor pahar laa khara ker diya (aur kaha) jo hum ney tumhen diya hai ussay mazbooti say thaam lo aur jo kuch iss mein hain ussay yaad kero takay tum bach sako
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो वो वक्त, जब हमने तूर (तूर पहाड़) को तुम से उठाकर अहद लिया था और कहा था के "जो किताब हम तुम्हें दे रहे हैं उसे मज़बूती के साथ थम्ना और जो एहकाम ओ हिदायत इसमें दर्ज हैं उन्हें याद रखना, इसी जरूरी से तवक्कु की जा सकती है के तुम तकवा की रवीश पर चल सकोगे"
عَرَبِيثُمَّ تَوَلَّيتُم مِن بَعدِ ذٰلِكَ ۖ فَلَولا فَضلُ اللَّهِ عَلَيكُم وَرَحمَتُهُ لَكُنتُم مِنَ الخاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर तुम उसके बाद फिर गए। तो यदि तुमपर अल्लाह का अनुग्रह और उसकी दया न होती, तो निश्चय तुम नुक़सान उठाने वालों में से होते।
Roman Urdu (Maududi)Magar iske baad tum apne ahad se phir gaye ispar bhi Allah ke fazal aur uski rehmat ne tumhara saath na choda, warna tum kabhi ke tabaah ho chuke hotay
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin tum iss kay baad bhi phir gaye phir agar Allah Taalaa ka fazal aur uss ki rehmat tum per na hoti to tum nuksan walay ho jatay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर इसके बाद तुम अपने अहद से फिर गए इसपर भी अल्लाह के फजल और उसकी रहमत ने तुम्हारा साथ न छोड़ा, वरना तुम कभी के तबाह हो चुके होतय
عَرَبِيوَلَقَد عَلِمتُمُ الَّذينَ اعتَدَوا مِنكُم فِي السَّبتِ فَقُلنا لَهُم كونوا قِرَدَةً خاسِئينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह तुम उन लोगों को जान चुके हो, जो तुममें से शनिवार (के दिन) में सीमा से बढ़ गए। तो हमने उनसे कहा कि तुम अपमानित बंदर बन जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Phir tumhein apni qaum ke un logon ka qissa to maloom hi hai jinhon ne Sabt (sabbath) ka kanoon toda tha, humne unhein kehdiya ke bandar ban jao aur is haal mein raho ke har taraf se tumpar dhutkaar phitkaar padey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqeenan tumhen unn logon ka ilm bhi hai jo tum mein say haftay kay baray mein hadd say barh gaye aur hum ney bhi keh diya kay tum zaleel bandar bann jao
Devnagri Urdu (Maududi)फिर तुम्हें अपनी कौम के उन लोगों का क़िस्सा तो मालूम ही है जिन्होन ने सब्त (सब्बाथ) का कानून तोड़ा था, हमने उन्हें केहदिया के बंदर बन जाओ और इस हाल में रहो के हर तरफ से तुमपर धुतकर फिटकर पड़े
عَرَبِيفَجَعَلناها نَكالًا لِما بَينَ يَدَيها وَما خَلفَها وَمَوعِظَةً لِلمُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने इसे उन लोगों के लिए जो इसके सामने थे और जो इसके पीछे थे, एक इबरत और (अल्लाह से) डरने वालों के लिए एक उपदेश बना दिया।
Roman Urdu (Maududi)Is tarah humne unke anjaam ko us zamane ke logon aur baad ki aane wali nasalon ke liye ibrat aur darne walon ke liye naseehat bana kar choda
Roman Urdu (Junagarhi)Issay hum ney aglon pichlon kay liye ibrat ka sabab bana diya aur perhezgaron kay liye waaz-o-naseehat ka
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह हमने उनके अंजाम को हमें जमाने के लोगों और बाद में आने वाली नसलों के लिए इब्रत और डरने वालों के लिए हिदायत बना कर छोड़ा
عَرَبِيوَإِذ قالَ موسىٰ لِقَومِهِ إِنَّ اللَّهَ يَأمُرُكُم أَن تَذبَحوا بَقَرَةً ۖ قالوا أَتَتَّخِذُنا هُزُوًا ۖ قالَ أَعوذُ بِاللَّهِ أَن أَكونَ مِنَ الجاهِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद करो) जब मूसा ने अपनी जाति से कहा : निःसंदेह अल्लाह तुम्हें एक गाय ज़बह करने का आदेश देता है। उन्होंने कहा : क्या आप हमें मज़ाक़ बनाते हैं? (मूसा ने) कहा : मैं अल्लाह की पनाह माँगता हूँ कि मैं मूर्खों में से हो जाऊँ।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh waqiya yaad karo, jab Moosa ne apne qaum se kaha ke, Allah tumhein ek gai (cow) zibaah karne ka hukm deta hai. Kehne lagey kya tum humse mazaaq karte ho? Moosa ne kaha, main issey khuda ki panaah maangta hoon ke jaahilon ki si baatein karoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (hazrat) musa (alh-e-salam) ney jab apni qom say kaha kay Allah Taalaa tumhen aik gaaye zibah kerney ka hukum deta hai to unhon ney kaha hum say mazak kiyon kertay ho? Aap ney jawab diya kay mein aisa jahil honey say Allah ki panah pakarta hun
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो वाकिया याद करो, जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा के, अल्लाह तुम्हें एक गाय (गाय) ज़िबा करने का हुक्म देता है। कहने लगे क्या तुम हमसे मज़ाक करते हो? मूसा ने कहा, मैं इस खुदा की पनाह मांगता हूं कि जाहिलों की सी बातें करूं
عَرَبِيقالُوا ادعُ لَنا رَبَّكَ يُبَيِّن لَنا ما هِيَ ۚ قالَ إِنَّهُ يَقولُ إِنَّها بَقَرَةٌ لا فارِضٌ وَلا بِكرٌ عَوانٌ بَينَ ذٰلِكَ ۖ فَافعَلوا ما تُؤمَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हमारे लिए अपने पालनहार से प्रार्थना करो, वह हमारे लिए स्पष्ट कर दे वह (गाय) क्या है? (मूसा ने) कहा : निःसंदेह वह कहता है : निःसंदेह वह ऐसी गाय है, जो न बूढ़ी है और न बछड़ी, इसके बीच आयु की है। अतः तुम्हें जो आदेश दिया जा रहा है, उसका पालन करो।
Roman Urdu (Maududi)Bole, accha apne Rubb se darkhwast karo ke woh humein is gai ki kuch tafseel bataye, Moosa ne kaha, Allah ka irshad hai ke woh aisi gai honi chahiye jo na boodhi ho na bachhiya, balke ausat umar ki ho, lihaza jo hukm diya jata hai uski tameel karo
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha aey musa! dua kijiye kay Allah Taalaa humaray liye iss ki maahiyat biyan ker dey aap ney farmaya suno! woh gaaye na to bilkul burhiya ho na bacha bulkay darmiyani umar ki no jawan ho abb jo tumhen hukum diya gaya hai baja lao
Devnagri Urdu (Maududi)बोले, अच्छा अपने रब से अंधेरा करो के वो हमें इस गाई की कुछ तफसील बताई, मूसा ने कहा, अल्लाह का इरशाद है के वो ऐसी गाई होनी चाहिए जो ना बूढ़ी हो ना बचिया, बलके औसत उमर की हो, लिहाजा जो हुक्म दिया जाता है उसकी तमील करो
عَرَبِيقالُوا ادعُ لَنا رَبَّكَ يُبَيِّن لَنا ما لَونُها ۚ قالَ إِنَّهُ يَقولُ إِنَّها بَقَرَةٌ صَفراءُ فاقِعٌ لَونُها تَسُرُّ النّاظِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हमारे लिए अपने पालनहार से प्रार्थना करो, वह हमारे लिए स्पष्ट कर दे उसका रंग क्या है? (मूसा ने) कहा : निःसंदेह वह कहता है कि निःसंदेह वह गाय पीले रंग की है, उसका रंग ख़ूब गहरा है, देखने वालों को प्रसन्न करती है।
Roman Urdu (Maududi)Phir kehne lagey apne Rubb se yeh aur puch do ke uska rang kaisa ho, Moosa ne kaha woh farmata hai zard (yellow) rang ki gai honi chahiye, jiska rang aisa shukh (bright) ho ke dekhne walon ka jee khush ho jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Woh phir kehnay lagay kay dua kijiye kay Allah Taalaa biyan keray uss ka rang kiya hai? Farmaya woh kehta hai kay woh gaaye zard rang ki hai chamkeela aur dekhney walon ko bhala lagney wala uss ka rang hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर कहने लगे अपने रब से ये और पूछ दो के उसका रंग कैसा हो, मूसा ने कहा वो फरमाता है जर्द (पीला) रंग की गाई होनी चाहिए, जिसका रंग ऐसा शुख (उज्ज्वल) हो के देखने वालों का जी खुश हो जाए
عَرَبِيقالُوا ادعُ لَنا رَبَّكَ يُبَيِّن لَنا ما هِيَ إِنَّ البَقَرَ تَشابَهَ عَلَينا وَإِنّا إِن شاءَ اللَّهُ لَمُهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हमारे लिए अपने पालनहार से प्रार्थना करो, वह हमारे लिए स्पष्ट कर दे वह (गाय) क्या है? निःसंदेह गायें हमपर एक-दूसरे से मिलती-जुलती हो गई हैं। और निश्चय हम यदि अल्लाह ने चाहा, तो उद्देश्य तक पहुँचने ही वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir boley apne Rubb se saaf saaf puch kar batao kaisi gai matloob hai, humein iski taayun mein ishtabah (confusion) ho gaya hai, Allah ne chaha to hum iska pata paa lenge
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kehney lagay apney rab say aur dua kijiye kay humen uss ki mazeed maahiyat batlaye iss qisam ki gaye to boht hain pata nahi chalta agar Allah ney chaha to hum hidayat walay hojayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर बोले अपने रब से साफ साफ पूछ कर बताओ कैसी गई मतलूब है, हमें इसकी तायुं में इश्तबा (भ्रम) हो गया है, अल्लाह ने चाहा तो हम इसका पता पा लेंगे
عَرَبِيقالَ إِنَّهُ يَقولُ إِنَّها بَقَرَةٌ لا ذَلولٌ تُثيرُ الأَرضَ وَلا تَسقِي الحَرثَ مُسَلَّمَةٌ لا شِيَةَ فيها ۚ قالُوا الآنَ جِئتَ بِالحَقِّ ۚ فَذَبَحوها وَما كادوا يَفعَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : निःसंदेह वह कहता है कि निःसंदेह वह ऐसी गाय है जो न (जोतने हेतु) सधाई हुई है कि भूमि जोतती हो, और न खेती को पानी देती है। सही-सालिम (दोष रहित) है, उसमें किसी और रंग का निशान नहीं। उन्होंने कहा : अब तू सही बात लाया है। फिर उन्होंने उसे ज़बह़ किया, और वे क़रीब न थे कि करते।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne jawab diya: Allah kehta hai ke woh aisi gai hai jissey khidmat nahin li jati, na zameen joth-ti hai na pani kheenchti hai, saheeh saalim aur be-daag hai, ispar woh pukaar utthey ke haan, ab tumne theek pata bataya hai,phir unhone usey zibaah kiya, warna woh aisa karte maloom na hotay thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ney farmaya kay Allah ka farman hai kay woh gaaye kaam kerney wali zamin mein hal jootney wali aur kheton ko pani pilaney wali nahi woh tandrust aur bey daagh hai unhon ney kaha abb aap ney haq wazeh ker diya go woh hukum bardari kay qarib na thay lekin ussay mana aur gaaye zibah ker di
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने जवाब दिया: अल्लाह कहता है के वो ऐसी गई है जिसकी खिदमत नहीं ली जाती, ना ज़मीन जोत-ती है ना पानी खींचती है, सही सलीम और बे-दाग है, इसपर वो पुकार उठे के हां, अब तुमने ठीक पता बताया है, फिर उन्हें ज़िबा किया, वरना वो ऐसा करते मालूम न होते थे
عَرَبِيوَإِذ قَتَلتُم نَفسًا فَادّارَأتُم فيها ۖ وَاللَّهُ مُخرِجٌ ما كُنتُم تَكتُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (वह समय याद करो) जब तुमने एक व्यक्ति की हत्या कर दी, फिर तुमने उसके बारे में झगड़ा किया और अल्लाह उस बात को निकालने वाला था, जो तुम छिपा रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhein yaad hai woh waqia jab tumne ek shaks ki jaan li thi, phir uske barey mein jhagadne aur ek dusre par qatal ka ilzam thopne lagey thay aur Allah ne faisla karliya tha ke jo kuch tum chupate ho usey khol kar rakh dega
Roman Urdu (Junagarhi)Jab tum ney aik shaks ko qatal ker dala phir uss mein ikhtilaf kerney lagay aur tumhari posheedgi ko Allah Taalaa zahir kerney wala tha
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हें याद है वो वाकिया जब तुमने एक शक्स की जान ली थी, फिर उसके बारे में झगड़े में और एक दूसरे पर क़त्ल का इल्ज़ाम थोपने लगे थे और अल्लाह ने फैसला करलिया था के जो कुछ तुम छुपाते हो इस्तेमाल खोल कर रख देगा
عَرَبِيفَقُلنَا اضرِبوهُ بِبَعضِها ۚ كَذٰلِكَ يُحيِي اللَّهُ المَوتىٰ وَيُريكُم آياتِهِ لَعَلَّكُم تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः हमने कहा इस (मक़्तूल) पर उस (गाय) का कोई टुकड़ा मारो। इसी प्रकार अल्लाह मुर्दों को जीवित करता है और तुम्हें अपनी निशानियाँ दिखाता है; ताकि तुम समझो।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt humne hukm diya ke maqtool ki laash ko uske ek hissey se zarb lagaoo, dekho is tarah Allah murdon ko zindagi bakshta hai aur tumhein apni nishaniyan dikhata hai taa-ke tum samjho
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney kaha iss gaaye ka aik tukra maqtool kay jism ko laga do (woh ji utahay ga) issi tarah Allah Taalaa murdon ko zinda ker kay tumhen tumhari aqal mandi kay liye apni nishaniyan dikhata hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त हमने हुक्म दिया के मकतूल ​​की लाश को उसके एक हिस्से से ज़र्ब लगाओ, देखो इस तरह अल्लाह मुर्दों को जिंदगी बक्शा है और तुम्हें अपनी निशानियां दिखती है ता-के तुम समझो
عَرَبِيثُمَّ قَسَت قُلوبُكُم مِن بَعدِ ذٰلِكَ فَهِيَ كَالحِجارَةِ أَو أَشَدُّ قَسوَةً ۚ وَإِنَّ مِنَ الحِجارَةِ لَما يَتَفَجَّرُ مِنهُ الأَنهارُ ۚ وَإِنَّ مِنها لَما يَشَّقَّقُ فَيَخرُجُ مِنهُ الماءُ ۚ وَإِنَّ مِنها لَما يَهبِطُ مِن خَشيَةِ اللَّهِ ۗ وَمَا اللَّهُ بِغافِلٍ عَمّا تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर इन (निशानियों को देखने) के बाद तुम्हारे दिल कठोर हो गए, तो वे पत्थरों के समान हैं, या कठोरता में (उनसे भी) बढ़कर हैं; और निःसंदेह पत्थरों में से कुछ ऐसे हैं, जिनसे नहरें फूट निकलती हैं, और निःसंदेह उनमें से कुछ वे हैं जो फट जाते हैं, तो उनसे पानी निकलता है, और निःसंदेह उनमें से कुछ वे हैं जो अल्लाह के डर से गिर पड़ते हैं और अल्लाह उससे बिल्कुल ग़ाफ़िल नहीं जो तुम कर रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Magar aisi nishaniyan dekhne ke baad bhi aakhir e kaar tumhare dil sakht hogaye, pattharon ki tarah sakht, balke sakhti mein kuch inse bhi badey huey, kyunke pattharon mein se to koi aisa bhi hota hai jismein se chashme phoot behte hain, koi phathta hai aur ismein se pani nikal aata hai aur koi khuda ke khauf se laraz kar girr bhi padhta hai. Allah tumhare kartooton se bekhabar nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir iss kay baad tumharay dil pathar jaisay bulkay iss bhi ziyada sakhta hogaye baaz patharon say to nehren beh nikalti hain aur baaz phat jatay hain aur baaz Allah Taalaa kay darr say gir gir partay hain aur tum Allah Taalaa ko apney aemaal say ghafil na jano
Devnagri Urdu (Maududi)मगर ऐसी निशानियां देखने के बाद भी आखिर ए कार तुम्हारा दिल मजबूत हो जाएगा, पत्थरों की तरह सच, बलके पत्थरों में कुछ इनसे भी बड़े हुए, क्योंकि पत्थरों में से तो कोई ऐसा भी होता है जिसमें से चश्मे फूटते हैं, कोई निकलता है और इसमें से पानी निकल आता है और कोई खुदा के खौफ से लरज़ कर गिर भी पढ़ता है। अल्लाह तुम्हारे कार्टूनों से बेख़बर नहीं है
عَرَبِي۞ أَفَتَطمَعونَ أَن يُؤمِنوا لَكُم وَقَد كانَ فَريقٌ مِنهُم يَسمَعونَ كَلامَ اللَّهِ ثُمَّ يُحَرِّفونَهُ مِن بَعدِ ما عَقَلوهُ وَهُم يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या तुम आशा रखते हो कि वे तुम्हारी बात मान लेंगे, जबकि उनमें से कुछ लोग ऐसे रहे हैं, जो अल्लाह की वाणी (तौरात) को सुनते हैं, फिर उसे बदल डालते हैं, इसके बाद कि उसे समझ चुके होते हैं और वे जानते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aey Musalmano! Ab kya in logon se tum yeh tawaqqu rakhte ho ke yeh tumhari dawat par iman le ayenge? Halaanke inmein se ek giroh ka shewa yeh raha hai ke Allah ka kalaam suna aur phir khoob samajh boojh kar danista ismein tehreef (changes) ki
Roman Urdu (Junagarhi)(musalmano!) kiya tumhari khuwaish hai kay yeh log eman daar bann jayen halankay inn mein aisay log bhi hain jo kalam ullah ko sunn ker aqal-o-ilm walay hotay huye phir bhi badal dala kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ मुसलमानो! अब क्या लोगों से तुम ये तवाक्कू रखते हो के ये तुम्हारी दावत पर ईमान ले आओगे? हालांके इनमें से एक गिरोह का शेवा ये रहा है के अल्लाह का कलाम सुना और फिर खूब समझ बूझ कर दानिस्ता इस्में तहरीफ (बदलाव) की
عَرَبِيوَإِذا لَقُوا الَّذينَ آمَنوا قالوا آمَنّا وَإِذا خَلا بَعضُهُم إِلىٰ بَعضٍ قالوا أَتُحَدِّثونَهُم بِما فَتَحَ اللَّهُ عَلَيكُم لِيُحاجّوكُم بِهِ عِندَ رَبِّكُم ۚ أَفَلا تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब वे ईमान लाने वालों से मिलते हैं, तो कहते हैं कि हम ईमान ले आए और जब वे आपस में एक-दूसरे के साथ एकांत में होते हैं, तो कहते हैं क्या तुम उन्हें वे बातें बताते हो, जो अल्लाह ने तुमपर खोली हैं, ताकि वे उनके साथ तुम्हारे पालनहार के पास तुमसे झगड़ा करें, तो क्या तुम नहीं समझते?
Roman Urdu (Maududi)(Muhammad Rasool Allah par) iman laney walon se milte hain to kehte hain ke hum bhi unhein maante hain, aur jab aapas mein ek dusre se takhliye (private) ki baat chit hoti hai to kehte hain ke bewaqoof ho gaye ho? In logon ko woh baatein batate ho jo Allah ne tumpar kholi hain taa-ke tumhare Rubb ke paas tumhare muqable mein unhein hujjat mein pesh karein
Roman Urdu (Junagarhi)Jab eman walon say miltay hain to apni eman daari zahir kertay hain aur jab aapas mein miltay hain to kehtay hain kay musalmanon ko kiyon woh baaten phonchatay ho jo Allah Taalaa ney tumhen sikhaee hain kiya jantay nahi kay yeh to Allah Taalaa kay pass tum per inn ki hujjat hojaye gi
Devnagri Urdu (Maududi)(मुहम्मद रसूल अल्लाह पार) ईमान लाने वालों से मिलते हैं तो कहते हैं के हम भी उन्हें मानते हैं, और जब आपस मैं एक दूसरे से तख़लीये (निजी) की बात चिन्त होती है तो कहते हैं के बेवकूफ़ हो गए हो? लोगों को वो बातें बताते हैं कि अल्लाह ने तुमपर खोली है ता-के तुम्हारे रब के पास तुम्हारे मुकाबले में उन्हें हुज्जत में पेश किया है
عَرَبِيأَوَلا يَعلَمونَ أَنَّ اللَّهَ يَعلَمُ ما يُسِرّونَ وَما يُعلِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और क्या वे नहीं जानते कि निःसंदेह अल्लाह जानता है, जो कुछ वे छिपाते हैं और जो कुछ ज़ाहिर करते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Aur kya yeh jaante nahin hain ke jo kuch yeh chupate hain aur jo kuch zaahir karte hain, Allah ko sab baaton ki khabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh nahi janatay kay Allah Taalaa inn ki posheedgi aur zahri daari sab ko janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या ये जानते नहीं हैं के जो कुछ ये छुपाते हैं और जो कुछ जाहिर करते हैं, अल्लाह को सब बातों की ख़बर है
عَرَبِيوَمِنهُم أُمِّيّونَ لا يَعلَمونَ الكِتابَ إِلّا أَمانِيَّ وَإِن هُم إِلّا يَظُنّونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनमें से कुछ अनपढ़ हैं, जो पुस्तक का ज्ञान नहीं रखते सिवाय कुछ कामनाओं के, तथा वे केवल अनुमान लगाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Inmein ek dusra giroh ummiyon ka hai, jo kitab ka to ilm rakhte nahin, bas apni bay-buniyad ummedon aur aarzuon ko liye baithey hain aur mehaz weham o gumaan par chale jaa rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein say baaz un parh aisay bhi hain kay jo kitab kay sirf zahiri alfaaz ko hi jantay hain aur sirf guman aur atkal hi per hain
Devnagri Urdu (Maududi)इनमें एक दूसरा गिरो ​​उम्मियों का है, जो किताब का तो इल्म रखते नहीं, बस अपनी बे-बुनियाद उम्मीद और आरज़ूओं को लिए बैठे हैं और महज़ वेहम ओ गुमान पर चले जा रहे हैं
عَرَبِيفَوَيلٌ لِلَّذينَ يَكتُبونَ الكِتابَ بِأَيديهِم ثُمَّ يَقولونَ هٰذا مِن عِندِ اللَّهِ لِيَشتَروا بِهِ ثَمَنًا قَليلًا ۖ فَوَيلٌ لَهُم مِمّا كَتَبَت أَيديهِم وَوَيلٌ لَهُم مِمّا يَكسِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन लोगों के लिए बड़ा विनाश है, जो अपने हाथों से पुस्तक लिखते हैं, फिर कहते हैं कि यह अल्लाह की ओर से है, ताकि उसके द्वारा थोड़ा मूल्य हासिल करें! तो उनके लिए बड़ा विनाश उसके कारण है, जो उनके हाथों ने लिखा और उनके लिए बड़ा विनाश उसके कारण है जो वे कमाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Pas halakat aur tabahi hai un logon ke liye jo apne haathon se sharaa ka nawishta likhte hain (who write books with their own hands), phir logon se kehte hain ke yeh Allah ke paas se aaya hua hai taa-ke iske muawze mein thoda sa faiyda hasil karlein. Unke haathon ka likha bhi unke liye tabahi ka samaan hai aur unki yeh kamayi bhi unke liye mujeeb e halakat
Roman Urdu (Junagarhi)Unn logon kay liye well hai jo apni haathon ki likhi hui kitab ko Allah Taalaa ki taraf ki kehtay hain aur iss tarag duniya kamatay hain inn ki haathon ki likhaee ko aur inn ki kamaee ko well (halakat) aur afsos hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास हलाकत और तबाही है उन लोगों के लिए जो अपने हाथों से शरा का नविस्ता लिखते हैं (जो अपने हाथों से किताबें लिखते हैं), फिर लोगों से कहते हैं कि ये अल्लाह के पास से आया है ता-के इसके मुआवज़े में थोड़ा सा फ़ायदा हासिल करना। उनके हाथों का लिखा भी उनके लिए तबाही का सामान है और उनकी ये कमाई भी उनके लिए मुजीब ए हलाकत
عَرَبِيوَقالوا لَن تَمَسَّنَا النّارُ إِلّا أَيّامًا مَعدودَةً ۚ قُل أَتَّخَذتُم عِندَ اللَّهِ عَهدًا فَلَن يُخلِفَ اللَّهُ عَهدَهُ ۖ أَم تَقولونَ عَلَى اللَّهِ ما لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा कि हमें जहन्नम की आग गिनती के कुछ दिनों के सिवा हरगिज़ नहीं छुएगी। (ऐ नबी!) कह दीजिए कि क्या तुमने अल्लाह से कोई वचन ले रखा है, तो अल्लाह कदापि अपने वचन के विरुद्ध नहीं करेगा, या तुम अल्लाह पर वह बात कहते हो, जिसका तुम्हें ज्ञान नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Woh kehte hain ke dozakh ki aag humein hargiz choone wali nahin illa yeh ke chandh roz ki saza mil jaye to mil jaye. Inse pucho , kya tumne Allah se koi ahad le liya hai, jiski khilaf-warzi woh nahin kar sakta? Ya baat yeh hai ke tum Allah ke zimme daal kar aisi baatein kehdete ho jinke mutaaliq tumhein ilm nahin hai ke usne inka zimma liya hai? Aakhir tumhein dozakh ki aag kyun na chooeygi
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log kehtay hain kay hum to sirf chand roz jahannum mein rahen gay inn say kaho kay kiya tumharay pass Allah Taalaa ka koi parwana hai? Agar hai to yaqeenan Allah Taalaa apney waday kay khilaf nahi keray ga (hergiz nahi) bulkay tum to Allah kay zimmay woh baaten lagatay ho jinhen tum nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)वो कहते हैं के दोज़ख़ की आग हमें हरगिज़ छूने वाली नहीं इल्ला ये के चंद रोज़ की सज़ा मिल जाए तो मिल जाए। इनसे पूछो, क्या तुमने अल्लाह से कोई अहद ले लिया है, जिसका खिलाफत-वारज़ी वो नहीं कर सकता? हां बात ये है कि तुम अल्लाह के जिम्मे डाल कर ऐसी बातें कहते हो जिनका मुतालिक तुम्हें इल्म नहीं है कि उन्होंने इनका ज़िम्मा लिया है? आख़िर तुम्हें दोज़ख की आग क्यों न लगेगी
عَرَبِيبَلىٰ مَن كَسَبَ سَيِّئَةً وَأَحاطَت بِهِ خَطيئَتُهُ فَأُولٰئِكَ أَصحابُ النّارِ ۖ هُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्यों नहीं! जिसने बड़ी बुराई कमाई और उसके पाप ने उसे घेर लिया, तो वही लोग आग (जहन्नम) वाले हैं, वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo bhi badhi kamayega aur apni khata-kaari ke chakkar mein pada rahega, woh dozakhi hai aur dozakh hi mein woh hamesha rahega
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan jiss ney bhi buray kaam kiye aur uss ki na farmaniyon ney ussay gher liya woh hamesha kay liye jahannumi hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो भी बड़ी कमाई करेगा और अपनी खाता-कारी के चक्कर में पड़ा रहेगा, वो दोज़खी है और दोज़ख ही में वो हमेशा रहेगा
عَرَبِيوَالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ أُولٰئِكَ أَصحابُ الجَنَّةِ ۖ هُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कार्य किए, वही जन्नत वाले हैं, वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log imam layenge aur neik amal karnege wahi jannati hain aur jannat mein woh hamesha rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log eman laye aur nek kaam keren woh jannati hain jo jannat mein hamesha rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग इमाम लाएंगे और नेक अमल करेंगे वही जन्नती हैं और जन्नत में वो हमेशा रहेंगे
عَرَبِيوَإِذ أَخَذنا ميثاقَ بَني إِسرائيلَ لا تَعبُدونَ إِلَّا اللَّهَ وَبِالوالِدَينِ إِحسانًا وَذِي القُربىٰ وَاليَتامىٰ وَالمَساكينِ وَقولوا لِلنّاسِ حُسنًا وَأَقيمُوا الصَّلاةَ وَآتُوا الزَّكاةَ ثُمَّ تَوَلَّيتُم إِلّا قَليلًا مِنكُم وَأَنتُم مُعرِضونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (उस समय को याद करो) जब हमने बनी इसराईल से पक्का वचन लिया कि तुम अल्लाह के सिवा किसी की इबादत नहीं करोगे, तथा माता-पिता, रिश्तेदारों, अनाथों और निर्धनों के साथ अच्छा व्यवहार करोगे। और लोगों से भली बात कहो, तथा नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो। फिर तुम में से थोड़े लोगों के सिवा सब फिर गए और तुम मुँह फेरने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo, Israel ki aulad se humne pukhta ahad liya tha ke Allah ke siwa kisi ki ibadat na karna, Maa Baap ke saath, rishtedaaron ke saath, yateemon aur miskeeno ke saath neik sulook karna, logon se bhali baat kehna , Namaz qayam karna aur zakaat dena, magar thode aadmiyon ke siwa tum sab us ahad se phir gaye aur ab tak phirey huey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab hum ney bani israeel say wada liya kay tum Allah Taalaa kay siwa doosray ki ibadat na kerna aur maa baap kay sath acha sulook kerna issi tarah qarabat daron yateemon aur miskeenon kay sath aur logon ko achi baaten kehna namazen qaeem rakhna aur zakat detay raha kerna lekin thoray say logon kay ilawa tum sab phir gaye aur mun mor liya
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो, इजराइल की औलाद से हमने पुख्ता अहद लिया था कि अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करना, मां बाप के साथ, रिश्तेदारों के साथ, यतीमों और मिस्कीनो के साथ नेक सुलूक करना, लोगों से अच्छी बात कहना, नमाज कायम करना और जकात देना, मगर थोड़े आदमियों के सिवा तुम सब उस अहद से फिर गए और अब तक फिर हुए हो
عَرَبِيوَإِذ أَخَذنا ميثاقَكُم لا تَسفِكونَ دِماءَكُم وَلا تُخرِجونَ أَنفُسَكُم مِن دِيارِكُم ثُمَّ أَقرَرتُم وَأَنتُم تَشهَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद करो) जब हमने तुमसे पक्का वचन लिया कि तुम अपने ख़ून नहीं बहाओगे और न अपने आपको अपने घरों से निकालोगे। फिर तुमने स्वीकार किया और तुम स्वयं गवाही देते हो।
Roman Urdu (Maududi)Phir zara yaad karo, humne tumse mazboot ahad liya tha ke aapas mein ek dusre ka khoon na bahana aur na ek dusre ko ghar se be-ghar karna, tumne iska iqrar kiya tha, tum khud ispar gawah ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab hum ney tum say wada liya kay aapas mein khoon na bahana (qatal na kerna) aur aapas walon ko jila watan na kerna tum ney iqrar kiya aur tum iss kay shahid banay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर ज़रा याद करो, हमने तुमसे मज़बूत अहद लिया था के आपस में एक दूसरे का खून ना बहाना और ना एक दूसरे को घर से बे-घर करना, तुमने इसका इक़रार किया था, तुम खुद इसपर गवाह हो
عَرَبِيثُمَّ أَنتُم هٰؤُلاءِ تَقتُلونَ أَنفُسَكُم وَتُخرِجونَ فَريقًا مِنكُم مِن دِيارِهِم تَظاهَرونَ عَلَيهِم بِالإِثمِ وَالعُدوانِ وَإِن يَأتوكُم أُسارىٰ تُفادوهُم وَهُوَ مُحَرَّمٌ عَلَيكُم إِخراجُهُم ۚ أَفَتُؤمِنونَ بِبَعضِ الكِتابِ وَتَكفُرونَ بِبَعضٍ ۚ فَما جَزاءُ مَن يَفعَلُ ذٰلِكَ مِنكُم إِلّا خِزيٌ فِي الحَياةِ الدُّنيا ۖ وَيَومَ القِيامَةِ يُرَدّونَ إِلىٰ أَشَدِّ العَذابِ ۗ وَمَا اللَّهُ بِغافِلٍ عَمّا تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर तुम ही वे लोग हो कि अपने आपकी हत्या करते हो और अपने में से एक गिरोह को उनके घरों से निकालते हो, उनके विरुद्ध पाप तथा अत्याचार के साथ एक-दूसरे की मदद करते हो और यदि वे बंदी होकर तुम्हारे पास आएँ, तो उनका फ़िदया देते हो, हालाँकि उन्हें निकालना ही तुमपर ह़राम (निषिद्ध) है। तो क्या तुम पुस्तक के कुछ भाग पर ईमान रखते हो और कुछ का इनकार करते हो? फिर तुममें से जो ऐसा करे, उसका प्रतिफल इसके सिवा क्या है कि सांसारिक जीवन में अपमान हो तथा क़ियामत के दिन वे अत्यंत कठोर यातना (अज़ाब) की ओर लौटाए जाएँगे? और अल्लाह बिलकुल उससे असावधान नहीं जो तुम करते हो!
Roman Urdu (Maududi)Magar aaj wahi tum ho ke apne bhai bandhon ko qatal karte ho, apni biradri ke kuch logon ko be-khanuma (be-ghar) kardete ho, zulm o zyadati ke saath unke khilaf jatthey bandiyan (grouping / cooperating) karte ho , aur jab woh ladayi mein pakde huey tumhare paas aate hain to unki rihayi ke liye fidiye ka lein dain karte ho, halaanke unhein unke gharon se nikalna hi seray se tumpar haraam tha. To kya tum kitab ke ek hissey par iman latey ho aur dusre hissey ke saath kufr karte ho? Phir tum mein se jo log aisa karein unki saza iske siwa aur kya hai ke duniya ki zindagi mein zaleel o khwar hokar rahein aur aakhirat mein shadeed-tareen azaab ki taraf pher diye jayein? Allah un harkaat se be-khabar nahin hai jo tum kar rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin phir bhi tum ney aapas mein qatal kiya aur aapas kay aik firqay ko jila watan bhi kiya aur gunah aur ziyadti kay kaamon mein inn kay khilaf doosray ki taraf daari ki haan woh jab qaidi ho ker tumharay pass aaye to tum ney unn kay fidye diye lekin inn ka nikalna jo tum per haram tha (uss ka kuch khayal na kiya) kiya baaz ehkaam per eman rakhtay ho aur baaz kay sath kufur kertay ho? Tum mein say jo bhi aisa keray uss ki saza iss kay siwa kiya ho kay duniya mein ruswaee aur qayamat kay din sakht azab ki maar aur Allah Taalaa tumharay aemaal say bey khabar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)मगर आज वही तुम हो के अपने भाई बंधों को कत्ल करते हो, अपनी बिरादरी के कुछ लोगों को बे-खानुमा (बे-घर) करते हो, ज़ुल्म ओ ज्यादा के साथ उनके खिलाफ जत्थे बंदियां (समूह बनाना/सहयोग करना) करते हो, और जब वो लड़यी में पकड़े हो ह्यूय तुम्हारे पास आते हैं तो उनकी रिहाई के लिए फ़िदिये का लेन डेन करते हो, हलांके उन्हें उनके घरों से निकालना ही सारा से तुमपर हराम था। तो क्या तुम किताब के एक हिस्सी पर ईमान लाते हो और दूसरे हिस्सी के साथ कुफ्र करते हो? फिर तुम में से जो लोग ऐसा करें उनकी सजा इसके सिवा और क्या है कि दुनिया की जिंदगी में ज़लील ओ ख़्वार होकर रहें और आख़िरत में छायादार अज़ाब की तरफ फेर दिए जाएं? अल्लाह उन हरकत से बे-ख़बर नहीं है जो तुम कर रहे हो
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ اشتَرَوُا الحَياةَ الدُّنيا بِالآخِرَةِ ۖ فَلا يُخَفَّفُ عَنهُمُ العَذابُ وَلا هُم يُنصَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही वे लोग हैं, जिन्होंने आख़िरत (परलोक) के बदले सांसारिक जीवन ख़रीद लिया। अतः न उनसे अज़ाब हल्का किया जाएगा और न उनकी सहायता की जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hain jinhon ne aakhirat bech kar duniya ki zindagi khareed li hai, lihaza na inki saza mein ko takhfeef (kami) hogi aur na unhein koi madad pahunch sakegi
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh woh log hai jinhon ney duniya ki zindagi ko aakhirat kay badlay khareed liya hai inn kay na to azab halkay hongay aur na inn ki madad ki jaye gi
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग हैं जिन्हों ने आख़िरत बेच कर दुनिया की ज़िंदगी ख़त्म कर ली है, लिहाज़ा ना इनकी सज़ा में को तक़फ़ीफ़ (कामी) होगी और ना उनको कोई मदद पाहुंच सकेगी
عَرَبِيوَلَقَد آتَينا موسَى الكِتابَ وَقَفَّينا مِن بَعدِهِ بِالرُّسُلِ ۖ وَآتَينا عيسَى ابنَ مَريَمَ البَيِّناتِ وَأَيَّدناهُ بِروحِ القُدُسِ ۗ أَفَكُلَّما جاءَكُم رَسولٌ بِما لا تَهوىٰ أَنفُسُكُمُ استَكبَرتُم فَفَريقًا كَذَّبتُم وَفَريقًا تَقتُلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने मूसा को पुस्तक (तौरात) प्रदान की और उसके बाद लगातार रसूल भेजे, और हमने मरयम के पुत्र ईसा को खुली निशानियाँ दीं और रूह़ुल-क़ुदुस (पवित्र-आत्मा) द्वारा उन्हें शक्ति प्रदान की। फिर क्या जब कभी कोई रसूल तुम्हारे पास वह चीज़ लेकर आया जिसे तुम्हारे दिल न चाहते थे, तो तुमने अभिमान किया, चुनाँचे एक समूह को झुठला दिया और एक समूह की हत्या करते रहे।
Roman Urdu (Maududi)Humne Moosa ko kitab di, iske baad pai dar pai Rasool bheje, aakhir e kaar Isa Ibn Maryam ko roshan nishaniyan dekar bheja aur rooh e paak se uski madad ki, phir yeh tumhara kya dhang hai ke jab bhi koi Rasool tumhari khwahishaat e nafs ke khilaf koi cheez lekar tumhare paas aaya, to tumne uske muqable mein sarkashi hi ki, kisi ko jhutlaya aur kisi ko qatal kar daala
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney (hazrat) musa ko kitab di aur inn kay peechay aur rasool bhejay aur hum ney (hazrat) essa ibn-e-marium ko roshan daleelen din aur rooh-ul-qudus say unn ki taeed kerwaee. Lekin jab kabhi tumharay pass rasool woh cheez laye jo tumhari tabiyaton kay khilaf thi tum ney jhat say takabbur kiya pus baaz ko to jhutla diya aur baaz ko qatal bhi ker dala
Devnagri Urdu (Maududi)हमने मूसा को किताब दी, इसके बाद पै दर पै रसूल भेजे, आखिर ए कार ईसा इब्न मरियम को रोशन निशानियां देकर भेजा और रूह ए पाक से उसकी मदद की, फिर ये तुम्हारा क्या ढांग है के जब भी कोई रसूल तुम्हारी ख्वाहिशात ए नफ्स के खिलाफ कोई चीज लेकर तुम्हारे पास आया, तो तुमने उसे मुक़दमे में सरकशी ही की, किसी को झुटलाया और किसी को क़त्ल कर डाला
عَرَبِيوَقالوا قُلوبُنا غُلفٌ ۚ بَل لَعَنَهُمُ اللَّهُ بِكُفرِهِم فَقَليلًا ما يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा कि हमारे दिल तो बंद हैं। बल्कि अल्लाह ने उनके कुफ़्र (इनकार) के कारण उन्हें धिक्कार दिया है। इसलिए वे बहुत कम ईमान लाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh kehte hain, hamare dil mehfooz hain, nahin asal baat yeh hai ke unke kufr ki wajah se unpar Allah ki phitkar padi hai, isliye woh kam hi iman latey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kehtay hain kay humaray dil ghilaaf walay hain nahi nahi bulkay inn kay kufur ki waja say enhen Allah Taalaa ney malaoon ker diya hai inn ka eman boht hi thora hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो कहते हैं, हमारे दिल महफ़ूज़ हैं, नहीं असल बात ये है के उनके कुफ्र की वजह से असमान अल्लाह की फितर पड़ी है, इसलिए वो कम ही ईमान लाते हैं
عَرَبِيوَلَمّا جاءَهُم كِتابٌ مِن عِندِ اللَّهِ مُصَدِّقٌ لِما مَعَهُم وَكانوا مِن قَبلُ يَستَفتِحونَ عَلَى الَّذينَ كَفَروا فَلَمّا جاءَهُم ما عَرَفوا كَفَروا بِهِ ۚ فَلَعنَةُ اللَّهِ عَلَى الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनके पास अल्लाह की ओर से एक पुस्तक (क़ुरआन) आई, जो उसकी पुष्टि करने वाली है, जो उनके पास है, हालाँकि वे इससे पूर्व काफ़िरों पर विजय की प्रार्थना किया करते थे, फिर जब उनके पास वह चीज़ आ गई, जिसे उन्होंने पहचान लिया, तो उन्होंने उसका इनकार कर दिया। तो काफ़िरों पर अल्लाह की लानत है।
Roman Urdu (Maududi)Aur ab jo ek kitab Allah ki taraf se unke paas aayi hai, uske saath unka kya bartaao hai? Bawajood yeh ke woh us kitab ki tasdeeq karti hai jo unke paas pehle se maujood thi, bawajood yeh ke iski aamad se pehle woh khud kuffar ke muqable mein fatah o nusrat ki duaein maanga karte thay, magar jab woh cheez aa gayi jisey woh pehchan bhi gaye to unhon ne usey maanne se inkar kardiya, khuda ki laanat in munkireen par
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kay pass jab Allah Taalaa ki kitab inn ki kitab ko sacha kerney wali aaee halankay pehlay yeh khud (iss kay zariye) kafiron per fatah chahatay thay to ba wajood aajaney aur ba wajood pehchan lenay kay phir kufur kerney lagay Allah Taalaa ki laanat ho kafirion per
Devnagri Urdu (Maududi)और अब जो एक किताब अल्लाह की तरफ से उनके पास आई है, उसके साथ उनका क्या बरताओ है? दावा ये के वो हमें किताब की तस्दीक करती है जो उनके पास पहले से मौजूद थी, विवाद ये के इसकी आमद से पहले वो खुद कुफ्फार के मुकाबले में फतह ओ नुसरत की दुआएं मंगा करते थे, मगर जब वो चीज आ गई जिसे वो पहचान भी गए तो अनहोन ने उसे मन्ने से इंकार कर दिया, खुदा की लानत मुनकिरीन पर
عَرَبِيبِئسَمَا اشتَرَوا بِهِ أَنفُسَهُم أَن يَكفُروا بِما أَنزَلَ اللَّهُ بَغيًا أَن يُنَزِّلَ اللَّهُ مِن فَضلِهِ عَلىٰ مَن يَشاءُ مِن عِبادِهِ ۖ فَباءوا بِغَضَبٍ عَلىٰ غَضَبٍ ۚ وَلِلكافِرينَ عَذابٌ مُهينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)बहुत बुरी है वह चीज़ जिसके बदले उन्होंने अपने आपको बेच डाला, कि उस चीज़ का इनकार कर दें, जो अल्लाह ने उतारी है, इस द्वेष (हठ) के कारण कि अल्लाह अपना कुछ अनुग्रह अपने बंदों में से जिसपर चाहता है, उतारता है। अतः वे प्रकोप पर प्रकोप लेकर लौटे और (ऐसे) काफ़िरों के लिए अपमानजनक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Kya bura zariya hai jissey yeh apne nafs ki tasalli hasil karte hain ke jo hidayat Allah ne nazil ki hai, usko qabool karne se sirf is zidd ki bina par inkar kar rahey hain ke Allah ne apne fazal (wahee o risalat) se apne jis banday ko khud chaha, nawaz diya! Lihaza ab yeh gazab balaa e gazab ke mustahiq ho gaye hain aur aisey kafiron ke liye sakht zillat aamez saza muqarrar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Boht buri hai woh cheez jiss kay badlay enhon ney apney aap ko baich dala woh inn kay kufur kerna hai. Allah Taalaa ki taraf say nazil shuda cheez kay sath mehaz iss baat say jal ker kay Allah Taalaa ney apna fazal apney jiss banday per chaha nazil farmaya iss kay baees ye log ghazab per ghazab kay mustahiq hogaye aur inn kafiron kay liye ruswa kerney wala azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या बुरा ज़रिया है जिसे ये अपने नफ़्स की तसल्ली हासिल करते हैं के जो हिदायत अल्लाह ने नाज़िल की है, उसको क़बूल करने से सिर्फ इस जिद्द की बिना पर इंकार कर रहे हैं के अल्लाह ने अपने फज़ल (वही ओ रिसालत) से अपने जिस बंदे को खुद चाहा, नवाज़ दीया! लिहाज़ा अब ये गजब बला ए गजब के मुस्तहिक हो गए हैं और ऐसे काफिरों के लिए सख्त ज़िल्लत आमेज़ सज़ा मुकर्रर है
عَرَبِيوَإِذا قيلَ لَهُم آمِنوا بِما أَنزَلَ اللَّهُ قالوا نُؤمِنُ بِما أُنزِلَ عَلَينا وَيَكفُرونَ بِما وَراءَهُ وَهُوَ الحَقُّ مُصَدِّقًا لِما مَعَهُم ۗ قُل فَلِمَ تَقتُلونَ أَنبِياءَ اللَّهِ مِن قَبلُ إِن كُنتُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनसे कहा जाता है उस पर ईमान लाओ जो अल्लाह ने उतारा है, तो कहते हैं : हम उसपर ईमान रखते हैं जो हमपर उतारा गया है, और जो उसके अलावा है, उसका वे इनकार करते हैं! जबकि वही सत्य है, उनके पास जो कुछ है उसकी पुष्टि करने वाला है। आप (उनसे) कह दीजिए कि अगर तुम ईमान वाले थे, तो फिर इससे पहले अल्लाह के नबियों की हत्या क्यों किया करते थे?
Roman Urdu (Maududi)Jab unse kaha jata hai ke jo kuch Allah ne nazil kiya hai uspar iman lao to woh kehte hain “hum to sirf us cheez par iman latey hain jo hamare haan (yani nasal e Israel) mein utri hai” is daiyre ke bahar jo kuch aaya hai usey maanne se woh inkar karte hain, halaanke woh haqq hai aur us taleem ki tasdeeq o taeed kar raha hai jo unke haan pehle se maujood thi. Accha, unse kaho : agar tum us taleem hi par iman rakhne waley ho jo tumhare haan aayi thi, to issey pehle Allah ke un paighambaron ko (jo khud bani Israel mein paida huey thay) kyun qatal karte rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab inn say kaha jata hai kay Allah Taalaa ki utari hui kitab per eman lao to keh detay hain kay jo hum per utari gaee uss per humara eman hai. Halankay iss kay baad wali kay sath jo inn ki kitab ki tasdeeq kerney wali hai kufur kertay hain acha inn say yeh to daryaft keren kay agar tumhara eman pehli kitabon per hai to phir tum ney aglay anbiya ko kiyon qatal kiya
Devnagri Urdu (Maududi)जब उनसे कहा जाता है के जो कुछ अल्लाह ने नाज़िल किया है उसपर ईमान लाओ तो वो कहते हैं "हम तो सिर्फ उस चीज़ पर ईमान लाते हैं जो हमारे हां (यानी नाक ए इसराइल) में उतरी है” इस दिन के बहार जो कुछ आया है उसके मन से वो इनकार करते हैं, हालांके वो हक़ है और उस तालीम की तस्दीक ओ ताईद कर रहा है जो उनके हां पहले से मौजूद थी। अच्छा, उन्हें कहो: अगर तुम हमें तालीम ही पर ईमान रखने वाले हो जो तुम्हारे हां आई थी, तो इसे पहले अल्लाह के उन पैगंबरों को (जो खुद बनी इसराइल में पैदा हुए थे) क्यूं क़तल करते रहे
عَرَبِي۞ وَلَقَد جاءَكُم موسىٰ بِالبَيِّناتِ ثُمَّ اتَّخَذتُمُ العِجلَ مِن بَعدِهِ وَأَنتُم ظالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह मूसा तुम्हारे पास खुली निशानियाँ लेकर आए, फिर तुमने उसके बाद बछड़े को (पूज्य) बना लिया और तुम अत्याचारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Tumhare paas Moosa kaisi kaisi roshan nishaniyon ke saath aaya phir bhi tum aisey zalim thay ke iske peeth moadte hi bachde ko mabood bana baithey
Roman Urdu (Junagarhi)Tumharay pass to musa yehi daleelen ley ker aaye lekin phir bhi tum ney bachra pooja tum ho hi zalim
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारे पास मूसा कैसी रोशन निशानियों के साथ आया फिर भी तुम ऐसे जालिम था के, इसकी पीठ मोड़ते ही बच्चे को मबूद बना बैठे
عَرَبِيوَإِذ أَخَذنا ميثاقَكُم وَرَفَعنا فَوقَكُمُ الطّورَ خُذوا ما آتَيناكُم بِقُوَّةٍ وَاسمَعوا ۖ قالوا سَمِعنا وَعَصَينا وَأُشرِبوا في قُلوبِهِمُ العِجلَ بِكُفرِهِم ۚ قُل بِئسَما يَأمُرُكُم بِهِ إيمانُكُم إِن كُنتُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (याद करो) जब हमने तुमसे पक्का वचन लिया और तुम्हारे ऊपर तूर पर्वत उठा लिया। (हमने कहा :) हमने तुम्हें जो दिया है, उसे मज़बूती से पकड़ो और सुनो। उन्होंने कहा : हमने सुना और नहीं माना। और उनके कुफ़्र के कारण उनके दिलों में बछड़े की मुहब्बत पिला दी गई। (ऐ नबी!) आप कह दीजिए : बुरी है वह चीज़, जिसका आदेश तुम्हें तुम्हारा ईमान देता है, यदि तुम ईमान वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Phir zara us misaq (covenant) ko yaad karo jo Tur (mount Tur) ko tumhare upar utha kar humne tumse liya tha, humne taaqeed ki thi ke jo hidayaat hum de rahey hain, unki sakhti ke saath pabandi karo aur kaan laga kar suno. Tumhare aslaaf ne kaha ke humne sun liya, magar maanenge nahin aur inki baatil parasti ka yeh haal tha ke dilon mein unke bachda (calf) hi basa hua tha. Kaho: agar tum momin ho to yeh ajeeb iman hai jo aisi buri harakat ka tumhein hukum deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jab hum ney tum say wada liya aur tum per toor ko khara ker diya (aur keh diya) kay humari di hui cheez ko mazboot thaamo aur suno! To enhon ney kaha hum ney suna aur na famani ki aur inn kay dilon mein bachray ki mohabbat (goya) pila di gaee ba sabab inn kay kufur kay. Inn say keh dijiye kay tumhara eman tumhen bura hukum dey raha hai agar tum momin ho
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जरा हमें मिसाक (संविदा) को याद करो जो तूर (तूर पर्वत) को तुम ऊपर उठा कर हमने तुमसे लिया था, हमने ताकीद की थी के जो हिदायत हम दे रहे हैं, उनको शक्ति के साथ पाबन्दी करो और कान लगा कर सुनो। तुम्हारे असलफ ने कहा के हमने सुन लिया, मगर मानेंगे नहीं और इनकी बात परस्ती का ये हाल था के दिलों में उनके बछड़ा (बछड़ा) ही बसा हुआ था। कहो: अगर तुम मोमिन हो तो ये अजीब ईमान है जो ऐसी बुरी हरकत का तुम्हें हुकुम देता है
عَرَبِيقُل إِن كانَت لَكُمُ الدّارُ الآخِرَةُ عِندَ اللَّهِ خالِصَةً مِن دونِ النّاسِ فَتَمَنَّوُا المَوتَ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दीजिए : यदि आख़िरत का घर अल्लाह के पास सब लोगों को छोड़कर विशेष रूप से तुम्हारे ही लिए है, तो तुम मौत की कामना करो, यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)Inse kaho ke agar waqayi Allah ke nazdeek aakhirat ka ghar tamaan insaano ko chodh kar sirf tumhare hi liye makhsoos hai, tab to tumhein chahiye ke maut ki tamanna karo agar tum apne is khayal mein sacchey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay agar aakhirat ka ghar sirf tumharay liye hai Allah kay nazdeek aur kissi kay liye nahi to aao apni sachaee kay saboot mein maut talab kero
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो के अगर वक्त अल्लाह के नाजदीक आखिरी का घर तमां इंसानों को चोद कर सिर्फ तुम्हारे लिए मखसूस है, तब तो तुम्हें चाहिए के मौत की तमन्ना करो अगर तुम अपने इस खयाल में सच्चे हो
عَرَبِيوَلَن يَتَمَنَّوهُ أَبَدًا بِما قَدَّمَت أَيديهِم ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ بِالظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे हरगिज़ उसकी कामना कभी नहीं करेंगे, उसके कारण जो उनके हाथों ने आगे भेजा और अल्लाह अत्याचारियों को ख़ूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeen jaano ke yeh kabhi iski tamanna na karenge, isliye ke apne haathon jo kuch kamaa kar unhon ne wahaan bheja hai, uska iqtaza yahi hai (ke yeh wahan janey ki tamanna na karein) Allah in zalimon ke haal se khoob waqif hai
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin apney kartooton ko dekhtay huye kabhi bhi maut nahi maangen gay Allah Taalaa zalimon ko khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)यकीन जानो के ये कभी इसकी तमन्ना ना करेंगे, क्योंकि अपने हाथों में जो कुछ काम कर उन्हें ने वहां भेजा है, उसका इक्ताजा यहीं है (के ये वहां जाने की तमन्ना ना करें) अल्लाह जालिमों के हाल में है ख़ूब वाकिफ़ है
عَرَبِيوَلَتَجِدَنَّهُم أَحرَصَ النّاسِ عَلىٰ حَياةٍ وَمِنَ الَّذينَ أَشرَكوا ۚ يَوَدُّ أَحَدُهُم لَو يُعَمَّرُ أَلفَ سَنَةٍ وَما هُوَ بِمُزَحزِحِهِ مِنَ العَذابِ أَن يُعَمَّرَ ۗ وَاللَّهُ بَصيرٌ بِما يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह तुम उन्हें सब लोगों से बढ़कर किसी भी तरह जीने का लोभी पाओगे और उनसे भी जिन्होंने शिर्क किया। उनका (हर) एक व्यक्ति चाहता है काश! उसे हज़ार वर्ष की आयु दी जाए। हालाँकि यह उसे अज़ाब से बचाने वाला नहीं कि उसे लंबी आयु दी जाए और अल्लाह ख़ूब देखने वाला है, जो कुछ वे कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tum inhein sabse badh kar jeene ka harees paogey hatta ke yeh is maamle mein mushrikon se bhi badey huey hain . Inmein se ek ek shaks yeh chahta hai ke kisi tarah hazaar baras jiye, halaanke lambi umar bahar haal usey azaab to dur nahin phenk sakti. Jaise kuch aamaal yeh kar rahey hain, Allah to inhein dekh hi raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay sab say ziyada duniya ki zindagi ka harees aey nabi! Aap enhin ko paayen gay. Yeh hirs-e-zindagi mein mushrikon say bhi ziyada hai inn mein say to her shaks aik aik hazar saal ki umar chahata hai go yeh umar diya jana bhi enhen azab say nahi chura sakta Allah Taalaa inn kay kaamon ko bakhoobi dekh raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम इनमें सबसे ज्यादा कर जीने का हरिस पाओगी हट्टा के ये इस मामले में मुशरिकों से भी बड़े हुए हैं। इनमें से एक शक ये चाहता है कि कोई तरह हज़ार बरस जिए, हलांके लंबी उमर बहार हाल उसे अज़ाब तो दूर नहीं फेंक सकती। जैसा कुछ अमाल ये कर रहे हैं, अल्लाह तो इन्हें देख ही रहा है
عَرَبِيقُل مَن كانَ عَدُوًّا لِجِبريلَ فَإِنَّهُ نَزَّلَهُ عَلىٰ قَلبِكَ بِإِذنِ اللَّهِ مُصَدِّقًا لِما بَينَ يَدَيهِ وَهُدًى وَبُشرىٰ لِلمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दीजिए कि जो व्यक्ति जिबरील का शत्रु हो, तो निःसंदेह उसने इसे आपके दिल पर अल्लाह के आदेश से उतारा है, उसकी पुष्टि करने वाला है, जो इससे पूर्व है तथा ईमान वालों के लिए मार्गदर्शन एवं शुभ समाचार है।
Roman Urdu (Maududi)Inse kaho ke jo koi Jibrael se adawat (dushmani) rakhta ho, usey maloom hona chahiye ke Jibrael ne Allah hi ke izan se yeh Quran tumhare qalb par nazil kiya hai, jo pehle aayi hui kitabon ki tasdeeq o taeed karta hai aur iman laney walon ke liye hidayat aur kamiyabi ki basharat bankar aaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)(aey nabi!) aap keh dijiye kay jo jibraeel ka dushman ho jiss ney aap kay dil per paygham-e-baari taalaa utaara hai jo paygham inn kay pass ki kitab ki tasdeeq kerney wala aur mominon ko hidayat aur khushkhabri denay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो के जो कोई जिबराईल से अदावत (दुश्मनी) रखता है, उसे मालूम होना चाहिए के जिबराईल ने अल्लाह ही के इज़ान से ये कुरान तुम्हारे क़ल्ब पर नाज़िल किया है, जो पहले आई हुई किताबों की तस्दीक ओ ताईद करता है और ईमान लाने वालों के लिए हिदायत और कामियाबी की बशारत बनकर आया है
عَرَبِيمَن كانَ عَدُوًّا لِلَّهِ وَمَلائِكَتِهِ وَرُسُلِهِ وَجِبريلَ وَميكالَ فَإِنَّ اللَّهَ عَدُوٌّ لِلكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो कोई अल्लाह और उसके फ़रिश्तों और उसके रसूलों और जिबरील तथा मीकाल का शत्रु हो, तो निःसंदेह अल्लाह सब काफ़िरों का शत्रु है।
Roman Urdu (Maududi)(Agar Jibrael se inki adawat ka sabab yahi hai, to kehdo ke) jo Allah aur uske Farsihton aur uske Rasoolon aur Jibrael aur Michael ke dushman hain, Allah un kafiron ka dushman hai
Roman Urdu (Junagarhi)(To Allah bhi uss ka dushman hai) jo shaks Allah ka aur uss kay farishton aur uss kay rasoolon aur jibraeel aur mikaeel ka dushman ho aisay kafiron ka dushman khud Allah hai
Devnagri Urdu (Maududi)(अगर जिब्राइल से इनकी अदावत का सबाब यहीं है, तो केहदो के) जो अल्लाह और उसके फरिश्तों और उसके रसूलन और जिब्राईल और माइकल के दुश्मन हैं, अल्लाह उन काफिरों का दुश्मन है
عَرَبِيوَلَقَد أَنزَلنا إِلَيكَ آياتٍ بَيِّناتٍ ۖ وَما يَكفُرُ بِها إِلَّا الفاسِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने (ऐ नबी!) आपकी ओर खुली आयतें उतारी हैं और उनका इनकार केवल वही लोग करते हैं, जो फ़ासिक़ (अवज्ञा करने वाले) हैं।
Roman Urdu (Maududi)Humne tumhari taraf aisi ayaat nazil ki hain jo saaf saaf haqq ka izhar karne wali hain aur inki pairwi se sirf wahi log inkar karte hain jo fasiq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqeenan hum ney aap ki taraf roshan daleelen bheji hain jin ka inkar siwaye bad kaaron kay koi nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)हमने तुम्हारी तरफ ऐसी आयतें नाज़िल की हैं जो साफ साफ हक का इजहार करने वाली हैं और इनकी जोड़ी से सिर्फ वही लोग इंकार करते हैं जो फासिक हैं
عَرَبِيأَوَكُلَّما عاهَدوا عَهدًا نَبَذَهُ فَريقٌ مِنهُم ۚ بَل أَكثَرُهُم لا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और क्या जब कभी उन्होंने कोई वचन दिया, तो उनके एक समूह ने उसे तोड़ दिया? बल्कि उनमें अधिकतर ईमान नहीं रखते।
Roman Urdu (Maududi)Kya hamesha aisa hi nahin hota raha hai ke jab unhon ne koi ahad kiya, to unmein se ek na ek giroh ne usey zaroor hi balaa e talq rakh diya (set them aside)? Balke inmein se aksar aisey hi hain jo sacchey dil se iman nahin latey
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log jab kabhi koi ehad kertay hain to inn kay aik na aik jamat issay tor deti hai bulkay inn mein say aksar eman say khali hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हमेशा ऐसा ही नहीं हो रहा है के जब उन्होन ने कोई अहद किया, तो उनमें से एक ना एक गिरोह ने उसे जरूर बला ए तलाक रख दिया? बलके इनमें से अक्सर ऐसे ही हैं जो सच्चे दिल से ईमान नहीं लाते
عَرَبِيوَلَمّا جاءَهُم رَسولٌ مِن عِندِ اللَّهِ مُصَدِّقٌ لِما مَعَهُم نَبَذَ فَريقٌ مِنَ الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ كِتابَ اللَّهِ وَراءَ ظُهورِهِم كَأَنَّهُم لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब उनके पास अल्लाह की ओर से एक रसूल उसकी पुष्टि करने वाला आया, जो उनके पास है, तो उन लोगों में से एक समूह ने, जिन्हें पुस्तक दी गई थी, अल्लाह की पुस्तक को अपनी पीठों के पीछे ऐसे फेंक दिया, जैसे वे नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab inke paas Allah ki taraf se koi Rasool us kitab ki tasdeeq o taeed karta hua aaya jo inke haan pehle se maujood thi to in ehle kitab mein se ek giroh ne kitab Allah ko is tarah pas-e-pusht (behind their backs) dala goya ke woh kuch jaante hi nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Jab kabhi inn kay pass Allah ka koi rasool inn ki kitab ki tasdeeq kerney wala aaya inn ehal-e-kitab kay aik firqay ney Allah ki kitab ko iss tarah peeth peechay daal diya goya jantay hi na thay
Devnagri Urdu (Maududi)और जब इनके पास अल्लाह की तरफ से कोई रसूल उस किताब की तस्दीक ओ ताईद करता हुआ आया जो इनके हां पहले से मौजूद थी तो एहले किताब में से एक गिरोह ने किताब अल्लाह को इस तरह पास-ए-पुश्त (पीठ के पीछे) डाला गोया के वो कुछ जानते ही नहीं
عَرَبِيوَاتَّبَعوا ما تَتلُو الشَّياطينُ عَلىٰ مُلكِ سُلَيمانَ ۖ وَما كَفَرَ سُلَيمانُ وَلٰكِنَّ الشَّياطينَ كَفَروا يُعَلِّمونَ النّاسَ السِّحرَ وَما أُنزِلَ عَلَى المَلَكَينِ بِبابِلَ هاروتَ وَماروتَ ۚ وَما يُعَلِّمانِ مِن أَحَدٍ حَتّىٰ يَقولا إِنَّما نَحنُ فِتنَةٌ فَلا تَكفُر ۖ فَيَتَعَلَّمونَ مِنهُما ما يُفَرِّقونَ بِهِ بَينَ المَرءِ وَزَوجِهِ ۚ وَما هُم بِضارّينَ بِهِ مِن أَحَدٍ إِلّا بِإِذنِ اللَّهِ ۚ وَيَتَعَلَّمونَ ما يَضُرُّهُم وَلا يَنفَعُهُم ۚ وَلَقَد عَلِموا لَمَنِ اشتَراهُ ما لَهُ فِي الآخِرَةِ مِن خَلاقٍ ۚ وَلَبِئسَ ما شَرَوا بِهِ أَنفُسَهُم ۚ لَو كانوا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे उस चीज़ के पीछे लग गए जो शैतान सुलैमान के शासन काल में पढ़ते थे। तथा सुलैमान ने कुफ़्र नहीं किया, लेकिन शैतानों ने कुफ़्र किया कि लोगों को जादू सिखाते थे, (और वे उस चीज़ के पीछे लग गए) जो बाबिल में दो फ़रिश्तों; हारूत और मारूत पर उतारी गई। हालाँकि वे दोनों किसी को भी नहीं सिखाते थे, यहाँ तक कि कह देते कि हम केवल एक आज़माइश हैं, इसलिए तू कुफ़्र न कर। फिर वे उन दोनों से वह चीज़ सीखते, जिसके द्वारा वे आदमी और उसकी पत्नी के बीच जुदाई डाल देते। और वे अल्लाह की अनुमति के बिना उसके द्वारा किसी को हानि पहुँचाने वाले न थे। और वे ऐसी चीज़ सीखते थे, जो उन्हें हानि पहुँचाती और उन्हें लाभ न देती थी। हालाँकि निःसंदेह वे भली-भाँति जान चुके थे कि जिसने इसे ख़रीदा, आख़िरत में उसका कोई भाग नहीं। और निःसंदेह बुरी है वह चीज़ जिसके बदले उन्होंने अपने आपको बेच डाला। काश! वे जानते होते।
Roman Urdu (Maududi)Aur lagey un cheezon ki pairwi karne jo shayateen Sulaiman ki sultanat ka naam lekar pesh kiya karte thay, halaanke Sulaiman ne kabhi kufr nahin kiya, kufr ke murtaqib to woh shayateen thay jo logon ko jaadugari ki taleem dete thay.Woh pichey padey us cheez ke jo babil (babylon) mein do Farishton, Harut o Marut par nazil ki gayi thi, halaanke woh (Farishtey) jab bhi kisi ko uski taleem dete thay to pehle saaf taur par mutanabbey (warn) kardiya karte thay ke “dekh, hum mehaz ek aazmaish hain, tu kufr mein mubtila na ho”.Phir bhi yeh log unse woh cheez seekhte thay jissey shohar aur biwi mein judai daal dein, zaahir tha ke izan e ilahi ke bagair woh is zariye se kisi ko bhi zarar (harm) na pahuncha sakte thay, magar iske bawajood woh aisi cheez seekhte thay jo khud inke liye nafa baksh nahin, balke nuqsan-de thi aur unhein khoob maloom tha ke jo is cheez ka khareedar bana uske liye aakhirat mein koi hissa nahin. Kitni buri mataa thi jiske badle unhon ne apni jaano ko bech dala, kaash unhein maloom hota
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss cheez kay peechay parr gaye jissay shayateen (hazrat) suleman ki hukoomat mein parhtay thay. Suleman ney to kufur na kiya tha bulkay yeh kufur shetanon ka tha woh logon ko jadoo sikhaya kertay thay aur babul mein haroot maroot do farishton per jo utaara gaya tha woh dono bhi kissi shaks ko uss waqt tak nahi sikhatay thay jab tak yeh na keh den kay hum to aik aazmaeesh hain tu kufur na ker phir log inn say woh seekhtay jiss say khawind-o-biwi mein judaee daal den aur dar-asal woh baghair Allah Taalaa ki marzi kay kissi ko koi nuksan nahi phoncha saktay yeh log woh seekhtay hain jo enhen nuksan phonchaye aur nafa na phoncha sakay aur woh bil yaqeen jantay hain kay iss key lenay walay ka aakhirat mein koi hissa nahi. Aur woh bad tareen cheez hai jiss kay badlay mein woh apney aap ko farokht ker rahey hain kaash kay yeh jantay hotay
Devnagri Urdu (Maududi)और लगे उन चीज़ों की जोड़ी बनाने जो शयातीन सुलेमान की सल्तनत का नाम लेकर पेश किया करते थे, हलांके सुलेमान ने कभी कुफ़्र नहीं किया, कुफ़्र के मुर्तक़िब तो वो शयातीन थे जो लोगन को जादूगरी की तालीम देते थे। वो पिछे पड़े हमें चीज के जो बाबिल (बेबीलोन) में दो फरिश्तों, हारुत ओ मारुत पर नाज़िल की गई थी, हलांके वो (फरिश्ते) जब भी किसी को उसकी तालीम देते थे तो पहले साफ तौर पर मुतनब्बे (चेतावनी) करदिया करते थे के "देख, हम" मेहज़ एक आज़माइश है, तू कुफ्र में मुब्तिला ना हो"। फिर भी ये लोग उनसे वो चीज़ सीखते थे, जिसमें शोहर और बीवी में जुदाई डाल दें, जाहिर था के इज़ान ए इलाही के बिना वो इस ज़री से किसी को भी जरूर (नुकसान) न पहुंचा सकता था, मगर इसके दावे वो ऐसी चीज सीखते थे जो खुद इनके लिए नफा बख्श नहीं, बल्के नुक्सान-दे थी और उन्हें खूब मालूम था के जो इस चीज का खरीददार बना उसके लिए आखिरी में कोई हिसा नहीं। कितनी बुरी माता थी जिसके बदले उन्हें ने अपनी जानों को बेच डाला, काश उन्हें मालूम होता
عَرَبِيوَلَو أَنَّهُم آمَنوا وَاتَّقَوا لَمَثوبَةٌ مِن عِندِ اللَّهِ خَيرٌ ۖ لَو كانوا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वे सचमुच ईमान लाते और अल्लाह से डरते, तो निश्चय अल्लाह के पास से थोड़ा बदला भी बहुत बेहतर था, काश! वे जानते होते।
Roman Urdu (Maududi)Agar woh iman aur taqwa ikhtiyar karte, to Allah ke haan iska jo badla milta to unke liye zyada behtar tha, kaash unhein khabar hoti
Roman Urdu (Junagarhi)Agar yeh log sahib-e-eman mutaqqi bann jatay to Allah Taalaa ki taraf say behtareen sawab enehn milta agar yeh jantay hotay
Devnagri Urdu (Maududi)अगर वो ईमान और तकवा इख्तियार करते, तो अल्लाह के हां इसका जो बदला मिला तो उनके लिए ज्यादा बेहतर था, काश उन्हें खबर होती
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَقولوا راعِنا وَقولُوا انظُرنا وَاسمَعوا ۗ وَلِلكافِرينَ عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! तुम 'राइना' (हमारा ध्यान रखिए) न कहो, और 'उन्ज़ुरना' (हमारी ओर देखिए) कहो और सुनो तथा काफ़िरों के लिए दुखदायी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho! Raina (Listen to us) na kaha karo, balke unzurna (make us understand) kaho aur tawajju se baat ko suno, yeh kafir to azaab e aleem ke mustahiq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tum nabi (PBUH ko) Raaeena na kaha kero un-zurna kaho yani humari taraf dekhiye aur suntay raha kero aur kafiron kay liye dard naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो! रैना (हमारी बात सुनो) ना कहो, बलके अनज़ुर्ना (हमें समझाओ) कहो और तवज्जु से बात को सुनो, ये काफ़िर तो अज़ाब ए अलीम के मुस्तहिक़ हैं
عَرَبِيما يَوَدُّ الَّذينَ كَفَروا مِن أَهلِ الكِتابِ وَلَا المُشرِكينَ أَن يُنَزَّلَ عَلَيكُم مِن خَيرٍ مِن رَبِّكُم ۗ وَاللَّهُ يَختَصُّ بِرَحمَتِهِ مَن يَشاءُ ۚ وَاللَّهُ ذُو الفَضلِ العَظيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)काफ़िर लोग, अह्ले किताब में से हों या मुश्रिकों (अनेकेश्वरवादियों) में से, नहीं चाहते कि तुम पर तुम्हारे पालनहार की ओर से कोई भलाई उतारी जाए और अल्लाह जिसे चाहता है, अपनी दया के साथ खास कर लेता है और अल्लाह बहुत बड़े अनुग्रह वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log jinhon ne dawat e haqq ko qabool karne se inkar kardiya hai, khwah ehle kitab mein se hon ya mushrik hon, hargiz yeh pasand nahin karte ke tumhare Rubb ki taraf se tumpar koi bhalayi nazil ho, magar Allah jisko chahta hai apni rehmat ke liye chun leta hai aur woh bada fazal farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Na to ehal-e-kitab kay kafir aur na mushrikeen chahatay hain kay tum per tumharay rab ki koi bhalaee nazil ho (inn kay iss hasad say kiya hua) Allah Taalaa jissay chahaye apni rehmat-e-khusoosiyat say ata farmaye Allah Taalaa baray fazal wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग जिन्हों ने दावत ए हक़ को क़बूल करने से इंकार कर दिया है, ख़्वाह एहले किताब में से होन या मुशरिक माननीय, हरगिज़ ये पसंद नहीं करते के तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर कोई भलाई नाज़िल हो, मगर अल्लाह जिसको चाहता है अपनी रहमत के लिए चुन लेता है और वो बड़ा फ़ज़ल फ़रमाने वाला है
عَرَبِي۞ ما نَنسَخ مِن آيَةٍ أَو نُنسِها نَأتِ بِخَيرٍ مِنها أَو مِثلِها ۗ أَلَم تَعلَم أَنَّ اللَّهَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)हम जो भी आयत मन्सूख़ (निरस्त) करते हैं, या उसे भुला देते हैं, तो उससे बेहतर, या उसके समान (और) ले आते हैं। क्या तुमने नहीं जाना कि निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Hum apni jis ayat ko mansookh (abrogate) kardete hain ya bhula dete hain, uski jagah ussey behtar le aate hain ya kam az kam waisi hi. Kya tum jaante nahin ho ke Allah har cheez par qudart rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss aayat ko hum mansookh ker den ya bhula den iss say behtar ya iss jaisi aur latay hain kiya tu nahi janta kay Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)हम अपनी जिस आयत को मनसूख (निरस्त) करते हैं हां भुला देते हैं, उसकी जगह उसे बेहतर ले आते हैं या काम अज़ काम वैसी ही। क्या तुम जानते नहीं हो कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है
عَرَبِيأَلَم تَعلَم أَنَّ اللَّهَ لَهُ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۗ وَما لَكُم مِن دونِ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلا نَصيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुमने नहीं जाना कि आकाशों एवं धरती का राज्य अल्लाह ही के लिए है और अल्लाह के सिवा तुम्हारा न कोई दोस्त है और न कोई सहायक।
Roman Urdu (Maududi)Kya tumhein khabar nahin hai ke zameen aur asmaano ki farma rawayi Allah hi ke liye hai aur uske siwa koi tumhari khabargiri karne aur tumhari madad karne wala nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tujhay nahi maloom kay zamin-o-aasman ka mulk Allah hi kay liye hai aur Allah kay siwa tumhara koi wali aur madadgar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम्हें ख़बर नहीं है कि ज़मीन और आसमान की फ़ार्मा रवाई अल्लाह ही के लिए है और उसके सिवा कोई तुम्हारी ख़बरगिरी करने और तुम्हारी मदद करने वाला नहीं है
عَرَبِيأَم تُريدونَ أَن تَسأَلوا رَسولَكُم كَما سُئِلَ موسىٰ مِن قَبلُ ۗ وَمَن يَتَبَدَّلِ الكُفرَ بِالإيمانِ فَقَد ضَلَّ سَواءَ السَّبيلِ
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हिन्दी (Al-Omari)या तुम चाहते हो कि अपने रसूल से सवाल करो, जैसे इससे पहले मूसा से सवाल किए गए? और जो कोई ईमान के बदले कुफ़्र को अपना ले, तो निःसंदे वह सीधे मार्ग से भटक गया।
Roman Urdu (Maududi)Phir kya tum apne Rasool se us qism ke sawalaat aur mutalabe karna chahte ho jaise issey pehle Moosa se kiye ja chuke hain? Halaanke jis shaks ne iman ki rawish ko kufr ki rawish se badal liya woh raah e raast se bhatak gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum apney rasool say yehi poochna chahatay ho jo iss say pehlay musa (alh-e-salam) poocha gaya tha? (suno) eman ko kufur say badalney wala seedhi raah say bhatak jata hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्या तुम अपने रसूल से उस क़िस्म का सवाल और मुतालबे करना चाहते हो जैसे इसे पहले मूसा से किये जा चुके हैं? हलांके जिस शक्स ने ईमान की रवीश को कुफ्र की रवीश से बदल लिया वो राह ए रास्ते से भटक गया
عَرَبِيوَدَّ كَثيرٌ مِن أَهلِ الكِتابِ لَو يَرُدّونَكُم مِن بَعدِ إيمانِكُم كُفّارًا حَسَدًا مِن عِندِ أَنفُسِهِم مِن بَعدِ ما تَبَيَّنَ لَهُمُ الحَقُّ ۖ فَاعفوا وَاصفَحوا حَتّىٰ يَأتِيَ اللَّهُ بِأَمرِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)बहुत-से अह्ले किताब चाहते हैं काश! वे तुम्हें तुम्हारे ईमान के बाद फिर काफ़िर बना दें, अपने दिलों की ईर्ष्या के कारण, इसके बाद कि उनके लिए सत्य ख़ूब स्पष्ट हो चुका। तो तुम क्षमा करो और माफ़ कर दो, यहाँ तक कि अल्लाह अपना हुक्म ले आए। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Ehle kitab mein se aksar log yeh chahte hain ke kisi tarah tumhein iman se pher kar phir kufr ki taraf palta le jayein agarche haqq unpar zaahir ho chuka hai, magar apne nafs ke hasad ki bina par tumhare liye unki yeh khwahish hai iske jawab mein tum afu o darguzar (forgive and overlook) se kaam lo, yahan tak ke Allah khud hi apna faisla nafiz karde. Mutmaeen raho ke Allah taala har cheez par qudrat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn ehal-e-kitab kay aksay log ba wajood haq wazeh ho janey kay mehaz hasad-o-bughz ki bina per tumhen bhi eman say hata dena chahatay hain tum bhi moad kero aur choro yahan tak kay Allah Taalaa apna hukum laye. Yaqeenan Allah Taalaa her cheez per qudrat rakhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)एहले किताब में से अक्सर लोग ये चाहते हैं के किसी तरह तुम्हें ईमान से फेर कर फिर कुफ्र की तरफ पलटा ले जाएं अगरचे हक उनपर जाहिर हो चूका है, मगर अपने नफ़्स के हसद की बिना पर तुम्हारे लिए उनकी ये ख्वाहिश है इसके जवाब में तुम अफ़ु ओ दरगुज़र (माफ़ कर दो और नज़रअंदाज) से काम लो, यहां तक ​​के अल्लाह खुद ही अपना फैसला नफीज़ करदे। मुतमइन रहो के अल्लाह ताला हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है
عَرَبِيوَأَقيمُوا الصَّلاةَ وَآتُوا الزَّكاةَ ۚ وَما تُقَدِّموا لِأَنفُسِكُم مِن خَيرٍ تَجِدوهُ عِندَ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ بِما تَعمَلونَ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो और जो भी भलाई तुम अपने लिए आगे भेजोगे, उसे अल्लाह के पास पा लोगे। निःसंदेह अल्लाह जो कुछ तुम करते हो, उसे ख़ूब देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Namaz qayam karo aur zakat do. Tum apni aaqibat ke liye jo bhalayi kamaa kar aagey bhejoge, Allah ke haan usey maujood paogey. Jo kuch tum karte ho woh sab Allah ki nazar mein hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum namazen qaeem rakho aur zakat detay raha kero aur jo kuch bhalaee tum apney liye aagay bhejo gay sab kuch Allah kay pass paa lo gay be-shak Allah Taalaa tumharay aemaalon ko khoob dekh raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो। तुम अपनी अकीबत के लिए जो भलाई कमा कर आगे भेजोगे, अल्लाह के हन उसे मौजुद पाओगे। जो कुछ तुम करते हो वो सब अल्लाह की नज़र में है
عَرَبِيوَقالوا لَن يَدخُلَ الجَنَّةَ إِلّا مَن كانَ هودًا أَو نَصارىٰ ۗ تِلكَ أَمانِيُّهُم ۗ قُل هاتوا بُرهانَكُم إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा जन्नत में हरगिज़ नहीं जाएँगे, परंतु जो यहूदी होंगे या ईसाई। ये उनकी कामनाएँ ही हैं। (उनसे) कहो : लाओ अपने प्रमाण, यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)Unka kehna hai ke koi shaks jannat mein na jayega jab tak ke woh yahudi na ho (ya Isaiyon ke khayal ke mutabiq) Isayi na ho. Yeh unki tamannayein hain, inse kaho apni daleel pesh karo agar tum apne dawey mein sacchey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kehtay hain kay jannat mein yahud-o-nasaaraa kay siwa aur koi na jayega yeh sirf inn ki aarzooyen hain inn say kaho agar tum sachay ho to koi daleel to paish kero
Devnagri Urdu (Maududi)उनका कहना है कि कोई शक्स जन्नत में ना जाएगा जब तक के वो यहूदी ना हो (या ईसाइयों के ख्याल के मुताबिक) इसाई ना हो। ये उनकी तमन्नाएं हैं, इनसे कहो अपनी दलील पेश करो अगर तुम अपने दावे में सच्चे हो
عَرَبِيبَلىٰ مَن أَسلَمَ وَجهَهُ لِلَّهِ وَهُوَ مُحسِنٌ فَلَهُ أَجرُهُ عِندَ رَبِّهِ وَلا خَوفٌ عَلَيهِم وَلا هُم يَحزَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्यों नहीं, जिसने अपना चेहरा अल्लाह के अधीन कर दिया और वह अच्छा कार्या करने वाला हो, तो उसके लिए उसका बदला उसके पालनहार के पास है और न उनपर कोई भय है और न वे शोकाकुल होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Darasal na tumhari kuch khususiyat hai na kisi aur ki, haqq yeh hai ke jo bhi apni hasti ko Allah ki itaat mein somp de aur amalan neik rawish par chale, uske liye uske Rubb ke paas uska ajar hai aur aisey logon ke liye kisi khauf ya ranjh ka koi mauqa nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Suno! Jo bhi apney aap ko khuloos kay sath Allah kay samney jhuka dey. Be-shak ussay uss ka rab poora badla dey ga iss per na to koi khof hoga na ghum aur udasi
Devnagri Urdu (Maududi)दरसल ना तुम्हारी कुछ खुसियत है ना किसी और की, हक ये है के जो भी अपनी हस्ती को अल्लाह की इताअत में सोम्प दे और अमल नेक रवीश पर चले, उसके उसके रब के पास उसका अजर है और ऐसे लोगों के लिए किसी का खौफ या रांझ का कोई मौका नहीं
عَرَبِيوَقالَتِ اليَهودُ لَيسَتِ النَّصارىٰ عَلىٰ شَيءٍ وَقالَتِ النَّصارىٰ لَيسَتِ اليَهودُ عَلىٰ شَيءٍ وَهُم يَتلونَ الكِتابَ ۗ كَذٰلِكَ قالَ الَّذينَ لا يَعلَمونَ مِثلَ قَولِهِم ۚ فَاللَّهُ يَحكُمُ بَينَهُم يَومَ القِيامَةِ فيما كانوا فيهِ يَختَلِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यहूदियों ने कहा कि ईसाई किसी चीज़ पर नहीं हैं और ईसाइयों ने कहा कि यहूदी किसी चीज़ पर नहीं हैं। हालाँकि वे पुस्तक पढ़ते हैं। इसी तरह उन लोगों ने भी जो कुछ ज्ञान नहीं रखते, उनकी बात जैसी बात कही। अब अल्लाह उनके बीच क़ियामत के दिन उस बारे में फैसला करेगा, जिसमें वे मतभेद किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Yahudi kehte hain: Isaiyon ke paas kuch nahin, Isayi kehte hain: Yahudiyon ke paas kuch nahin, halaanke ke dono hi kitab padhte hain aur isi qism ke dawey un logon ke bhi hain jinke paas kitab ka ilm nahin hai, yeh ikhtilafaat jin mein yeh log mubtila hain inka faisla Allah qayamat ke roz kardega
Roman Urdu (Junagarhi)Yahud kehtay hain kay nasrani haq per nahi aur nasrani kehtay hain kay yahudi haq per nahi halankay yeh sab log toraat parhtay hain issi tarah inn hi jaisi baat bey ilm bhi kehtay hain. Qayamat kay din Allah inn kay iss ikhtilaf ka faisla inn kay darmiyan ker dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)यहुदी कहते हैं: इसाईयों के पास कुछ नहीं, इसाई कहते हैं: यहुदियों के पास कुछ नहीं, हलांके के दोनों ही किताब पढ़ते हैं और यही क़िस्म के दावे उन लोगों के भी हैं जिनके पास किताब का इल्म नहीं है, ये इख्तिलाफात जिन में ये लोग मुब्तिला हैं इनका फैसला अल्लाह कयामत के रोज कर देगा
عَرَبِيوَمَن أَظلَمُ مِمَّن مَنَعَ مَساجِدَ اللَّهِ أَن يُذكَرَ فيهَا اسمُهُ وَسَعىٰ في خَرابِها ۚ أُولٰئِكَ ما كانَ لَهُم أَن يَدخُلوها إِلّا خائِفينَ ۚ لَهُم فِي الدُّنيا خِزيٌ وَلَهُم فِي الآخِرَةِ عَذابٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और उससे बड़ा अत्याचारी कौन है, जो अल्लाह की मस्जिदों में उसके नाम का स्मरण करने से रोके और उन्हें उजाड़ने का प्रयास करे? ऐसे लोगों का हक़ नहीं कि उनमें प्रवेश करते परंतु डरते हुए। उनके लिए संसार ही में अपमान है और उनके लिए आख़िरत में बड़ी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur us shaks se badhkar zalim kaun hoga jo Allah ke maabadon (places of worship) mein uske naam ki yaad se rokay aur unki veerani ke darpe ho? Aisey log is qabil hain ke unki ibadat-gaahon mein qadam na rakkhein aur agar wahan jayein bhi to darte huey jayein, unke liye to duniya mein ruswayi hai aur aakhirat mein azaab e azeem
Roman Urdu (Junagarhi)Uss shaks say barh ker zalim kaun hai jo Allah Taalaa ki masjidon mein Allah Taalaa kay zikar kiye janey ko rokay aur unn ki barbadi ki kosish keray aisay logon ko khof khatay huye hi iss mein jana chahaiye inn kay liye duniya mein bhi ruswaee hai aur aakhirat mein bhi bara azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारे शक्स से बढ़कर जालिम कौन होगा जो अल्लाह के मबादनों (पूजा स्थलों) में उसके नाम की याद से रोके और उनकी वीरानी के दर्पे हो? ऐसे लोग काबिल हैं के उनकी इबादत-गाहों में क़दम न रखें और अगर वहां जाएं भी तो डरते हुए जाएं, उनके लिए तो दुनिया में रुसवाई है और आख़िरत में अज़ाब ए अज़ीम
عَرَبِيوَلِلَّهِ المَشرِقُ وَالمَغرِبُ ۚ فَأَينَما تُوَلّوا فَثَمَّ وَجهُ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ واسِعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा पूर्व और पश्चिम अल्लाह ही के हैं, तो तुम जिस ओर रुख करो, सो वहीं अल्लाह का चेहरा है। निःसंदेह अल्लाह विस्तार वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Mashrik aur magrib sab Allah ke hain, jis taraf bhi tum rukh karoge usi taraf Allah ka rukh hai,Allah badi wusat wala aur sabkuch jaanne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mashriq aur maghrib ka maalik Allah hi hai. Tum jidhar bhi mun kero udhar hi Allah ka mun hai Allah Taalaa kushadgi aur wusat wala aur baray ilm wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)मशरिक और मगरिब सब अल्लाह के हैं, जिसकी तरफ भी तुम रुख़ करोगे उसकी तरफ अल्लाह का रुख है, अल्लाह बड़ी मुसीबत वाला और सब कुछ जानने वाला है
عَرَبِيوَقالُوا اتَّخَذَ اللَّهُ وَلَدًا ۗ سُبحانَهُ ۖ بَل لَهُ ما فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ كُلٌّ لَهُ قانِتونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा कि अल्लाह ने कोई संतान बना रखी है, वह पवित्र है। बल्कि उसी का है जो कुछ आकाशों तथा धरती में है, सब उसी के आज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unka qaul hai ke Allah ne kisi ko beta banaya hai, Allah paak hai in baaton se. Asal haqeeqat yeh hai ke zameen aur asmaano ki tamaam maujudaat uski milk (milkiyat) hain, sabke sab uske mutii o farmaan hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kehtay hain kay Allah Taalaa ki aulad hai (nahi bulkay) woh pak hai zamin-o-aasman ki tamam makhlooq uss ki milkiyat mein hai aur her aik uss ka farmanbardar hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनका क़ौल है कि अल्लाह ने किसी को बेटा बनाया है, बातों में अल्लाह पाक है। असल हकीकत ये है के ज़मीन और आसमान की तमाम मौजुदात उसकी दूध (मिल्कियत) हैं, सबके सब उसके मुती ओ फ़रमान हैं
عَرَبِيبَديعُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ وَإِذا قَضىٰ أَمرًا فَإِنَّما يَقولُ لَهُ كُن فَيَكونُ
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हिन्दी (Al-Omari)वह आकाशों तथा धरती का आविष्कारक है और जब किसी काम का निर्णय करता है, तो उससे मात्र यही कहता है कि "हो जा" तो वह हो जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Woh asmaano aur zameen ka mujid (originator) hai aur jis baat ka woh faisla karta hai uske liye bas yeh hukum deta hai ke “hoja” aur woh ho jati hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh zamin aur aasmanon ka ibtida’an peda kerney wala hai woh jiss kaam ko kerna chahye keh deta hai kay hoja bus woh wahin hojata hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो आसमान और ज़मीन का मुजिद (प्रवर्तक) है और जिस बात का वो फैसला करता है उसके लिए बस ये हुकुम देता है के "होजा" और वो हो जाती है
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ لا يَعلَمونَ لَولا يُكَلِّمُنَا اللَّهُ أَو تَأتينا آيَةٌ ۗ كَذٰلِكَ قالَ الَّذينَ مِن قَبلِهِم مِثلَ قَولِهِم ۘ تَشابَهَت قُلوبُهُم ۗ قَد بَيَّنَّا الآياتِ لِقَومٍ يوقِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन लोगों ने कहा जो ज्ञान नहीं रखते : अल्लाह हमसे बात क्यों नहीं करता? या हमारे पास कोई निशानी क्यों नहीं आती? इसी प्रकार उन लोगों ने जो इनसे पूर्व थे, इनकी बात जैसी बात कही। इनके दिल एक-दूसरे जैसे हो गए हैं। निःसंदेह हमने उन लोगों के लिए निशानियाँ खोलकर बयान कर दी हैं, जो विश्वास करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Naadaan kehte hain ke Allah khud humse baat kyun nahin karta ya koi nishani hamare paas kyun nahin aati? Aisi hi baatein inse pehle log bhi kiya karte thay , in sab (agle pichle gumraahon) ki zehniyatein (mentality) ek jaisi hain. Yakeen laney walon ke liye to hum nishaniyan saaf saaf numayan kar chuke hain
Roman Urdu (Junagarhi)Issi tarah bey ilm logon ney bhi kaha kay khud Allah Taalaa hum say baaten kiyon nahi kerta ya humaray pass koi nishani kiyon nahi aati? Issi tarah aisi hi baat inn kay aglon ney bhi kahi thi unn kay aur inn kay dil yaksan hogaye. Hum ney to yaqeen kerney walon kay liye nishaniyan biyan ker den
Devnagri Urdu (Maududi)नादान कहते हैं कि अल्लाह खुद हमसे बात क्यों नहीं करता या कोई निशानी हमारे पास क्यों नहीं आती? ऐसी ही बातें इनसे पहले लोग भी किया करते थे, इन सब (अगले पिछले गुमराहों) की मानसिकता (मानसिकता) एक जैसी हैं। यकीन लाने वालों के लिए तो हम निशानियां साफ-साफ नुमायां कर चुके हैं
عَرَبِيإِنّا أَرسَلناكَ بِالحَقِّ بَشيرًا وَنَذيرًا ۖ وَلا تُسأَلُ عَن أَصحابِ الجَحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह (ऐ नबी!) हमने आपको सत्य के साथ खुशख़बरी देने वाला तथा डराने वाला बनाकर भेजा है। और आपसे दोज़ख़ियों के बारे में नहीं पूछा जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)(Issey badh kar nishani kya hogi ke) humne tumko ilm e haqq ke saath khush khabri dene wala aur darane wala bana kar bheja, ab jo log jahannum se rishta jodh chuke hain unki taraf se tum zimmedaar o jawabdey nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney aap ko haq kay sath khushkhabri denay wala aur daraney wala bana ker bheja hai aur jahannumiyon kay baray mein aap say pursish nahi hogi
Devnagri Urdu (Maududi)(इससे बढ़ कर निशानी क्या होगी के) हमने तुमको इल्म ए हक के साथ खुश खबरी देने वाला और डराने वाला बना कर भेजा, अब जो लोग जहन्नुम से रिश्ता जोड़ चुके हैं उनकी तरफ से तुम जिम्मेदार ओ जवाबदे नहीं हो
عَرَبِيوَلَن تَرضىٰ عَنكَ اليَهودُ وَلَا النَّصارىٰ حَتّىٰ تَتَّبِعَ مِلَّتَهُم ۗ قُل إِنَّ هُدَى اللَّهِ هُوَ الهُدىٰ ۗ وَلَئِنِ اتَّبَعتَ أَهواءَهُم بَعدَ الَّذي جاءَكَ مِنَ العِلمِ ۙ ما لَكَ مِنَ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلا نَصيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) यहूदी तथा ईसाई आपसे हरगिज़ राज़ी न होंगे, यहाँ तक कि आप उनके धर्म की पैरवी करें। आप कह दीजिए कि निःसंदेह अल्लाह का मार्गदर्शन ही असल मार्गदर्शन है, और यदि आपने उनकी इच्छाओं का अनुसरण किया, उस ज्ञान के बाद जो आपके पास आया है, तो अल्लाह से (बचाने में) आपका न कोई मित्र होगा और न कोई सहायक।
Roman Urdu (Maududi)Yahudi aur Isayi tumse hargiz raazi na honge, jab tak tum unke tareeqe par na chalne lago. Saaf kehdo ke raasta bas wahi hai jo Allah ne bataya hai, warna agar us ilm ke baad jo tumhare paas aa chuka hai tumne unki khwahishaat ki pairwi ki to Allah ki pakad se bachane wala koi dost aur madadgaar tumhare liye nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap say yahud-o-nasaaraa hergiz razi nahi hongay jab tak kay aap inn kay mazaahib kay tabey na bann jayen aap keh dijiye kay Allah ki hidayat hi hidayat hai aur agar aap ney apney pass ba wajood ilm aajaney kay phir inn ki khuwaishon ki pairwee ki to Allah kay pass aap ka na to koi wali hoga aur na madadgar
Devnagri Urdu (Maududi)यहुदी और इसै तुमसे हरगिज़ राजी ना होंगे, जब तक तुम उनके तरीक़े पर ना चलने लगो। साफ कहदो के रास्ते बस वही है जो अल्लाह ने बताया है, वरना अगर उस इल्म के बाद जो तुम्हारे पास आ चूका है तुमने उनकी ख्वाहिश की जोड़ी तो अल्लाह की पकड़ से बचाने वाला कोई दोस्त और मददगार तुम्हारे लिए नहीं है
عَرَبِيالَّذينَ آتَيناهُمُ الكِتابَ يَتلونَهُ حَقَّ تِلاوَتِهِ أُولٰئِكَ يُؤمِنونَ بِهِ ۗ وَمَن يَكفُر بِهِ فَأُولٰئِكَ هُمُ الخاسِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग जिन्हें हमने किताब दी है, उसे पढ़ते हैं जैसे उसे पढ़ने का हक़ है, ये लोग उसपर ईमान रखते हैं और जो कोई उसका इनकार करे, तो वही लोग घाटा उठाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ko humne kitab di hai, woh usey is tarah padhte hain jaisa ke padhne ka haqq hai, woh ispar sacchey dil se iman latey hain aur jo iske saath kufr ka rawayya ikhtiyar karein wahi asal mein nuqsaan uthane waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jinhen hum ney kitab di hai aur woh issay parhney kay haq kay sath parhtay hain woh iss kitab per bhi eman rakhtay hain aur jo iss kay sath kufur keray woh nuksan wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों को हमने किताब दी है, वो उसका इस्तेमाल है तरह पढ़ते हैं जैसा के पढ़ने का हक है, वो इसपर सच्चे दिल से ईमान लाते हैं और जो इसके साथ कुफ्र का रावय्या इख्तियार करते हैं वही असल में नुक्सान उठाने वाले हैं
عَرَبِييا بَني إِسرائيلَ اذكُروا نِعمَتِيَ الَّتي أَنعَمتُ عَلَيكُم وَأَنّي فَضَّلتُكُم عَلَى العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ इसराईल की संतान! मेरे उस अनुग्रह को याद करो, जो मैंने तुमपर किया और यह कि निःसंदेह मैंने ही तुम्हें संसार वालों पर श्रेष्ठता प्रदान की।
Roman Urdu (Maududi)Aey bani Israel! Yaad karo meri woh niyamat jissey maine tumhein nawaza tha, aur yeh ke maine tumhein duniya ki tamaam qaumon par fazilat di thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aey aulad-e-yaqoob! Mein ney jo nematen tum per inam ki hain unhen yaad kero aur mein to tumhen tamam jahanon per fazilat dey rakhi thi
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ बानी इजराइल! याद करो मेरी वो नियामत जिसकी मैंने तुम्हें नवाजा थी, और ये के मैंने तुम्हें दुनिया की तमाम कौमों पर फजीलत दी थी
عَرَبِيوَاتَّقوا يَومًا لا تَجزي نَفسٌ عَن نَفسٍ شَيئًا وَلا يُقبَلُ مِنها عَدلٌ وَلا تَنفَعُها شَفاعَةٌ وَلا هُم يُنصَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उस दिन से डरो, जब कोई किसी के कुछ काम न आएगा, और न उससे कोई फ़िदया (दंड राशि) स्वीकार किया जाएगा और न उसे कोई अनुशंसा (सिफ़ारिश) लाभ देगी, और न उनकी मदद की जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur daro us din se, jab koi kisi ke zara kaam na aayega, na kisi se fidiya (ransom) qabool kiya jayega, na koi sifarish hi aadmi ko faiyda degi, aur na mujreemo ko kahin se koi madad pahunch sakegi
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din say daro jiss din koi nafss kissi nafss ko kuch faeeda na phoncha sakay ga na kissi shaks say koi fidya qabool kiya jayega na ussay koi shifaat nafa dey gi na unn ki madad ki jayegi
Devnagri Urdu (Maududi)और डरो उस दिन से, जब कोई किसी के जरा काम न आएगा, न किसी से फिदिया (फिरौती) कबूल किया जाएगा, न कोई सिफरिश हाय आदमी को फ़ायदा देगी, और ना मुजरेमो को कहीं से कोई मदद मांग सकेगी
عَرَبِي۞ وَإِذِ ابتَلىٰ إِبراهيمَ رَبُّهُ بِكَلِماتٍ فَأَتَمَّهُنَّ ۖ قالَ إِنّي جاعِلُكَ لِلنّاسِ إِمامًا ۖ قالَ وَمِن ذُرِّيَّتي ۖ قالَ لا يَنالُ عَهدِي الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (उस समय को याद करो) जब इबराहीम को उसके पालनहार ने कुछ बातों के साथ आज़माया, तो उसने उन्हें पूरा कर दिया। उसने कहा : निःसंदेह मैं तुम्हें लोगों का इमाम (पेशवा) बनाने वाला हूँ। (इबराहीम ने) कहा : तथा मेरी संतान में से भी? (अल्लाह ने) फरमाया : मेरा वचन अत्याचारियों को नहीं पहुँचता।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo ke jab Ibrahim ko uske Rubb ne chandh baaton mein aazmaya aur woh un sab mein poora utar gaya, to usne kaha : “main tujhey sab logon ka peshwa banane wala hoon” Ibrahim ne arz kiya: “ aur kya meri aulad se bhi yahi waada hai?” Usne jawab diya: “mera waada zalimon se mutaaliq nahin hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab ibrhim (alh-e-salam) ko unn kay rab ney kaee kaee baaton say aazmaya aur unhon ney sab ko poora ker diya to Allah ney farmaya mein tumhen logon ka imam bana doon ga araz kerney lagay aur meri aulad ko farmaya mera wada zalimon say nahi
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो के जब इब्राहिम को उसके रब ने चंद बातों में आज़माया और वो उन सब में पूरा उतर गया, तो उसने कहा: "मैं तुझसे सब लोगों का पेशवा बनने वाला हूं" इब्राहिम ने अर्ज़ किया: “और क्या मेरी औलाद से भी यही वादा है?” उसने जवाब दिया: "मेरा वादा ज़ालिमों से मुतालिक नहीं है।"
عَرَبِيوَإِذ جَعَلنَا البَيتَ مَثابَةً لِلنّاسِ وَأَمنًا وَاتَّخِذوا مِن مَقامِ إِبراهيمَ مُصَلًّى ۖ وَعَهِدنا إِلىٰ إِبراهيمَ وَإِسماعيلَ أَن طَهِّرا بَيتِيَ لِلطّائِفينَ وَالعاكِفينَ وَالرُّكَّعِ السُّجودِ
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हिन्दी (Al-Omari)और (उस समय को याद करो) जब हमने इस घर (काबा) को लोगों के लिए लौट कर आने की जगह तथा सर्वथा शांति बनाया, तथा (आदेश दिया) तुम 'मक़ामे इबराहीम' (इबराहीम के खड़े होने की जगह) को नमाज़ का स्थान बनाओ। तथा हमने इबराहीम और इसमाईल को ताकीदी हुक्म दिया कि तुम दोनों मेरे घर को तवाफ़ (परिक्रमा) करने वालों तथा एतिकाफ़ करने वालों और रुकू' एवं सजदा करने वालों के लिए पवित्र (साफ़) रखो।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke humne is ghar (kaaba) ko logon ke liye markaz aur aman ki jagah qaraar diya tha aur logon ko hukum diya tha ke Ibrahim jahan ibadat ke liye khada hota hai us muqaam ko mustaqil jaaye namaz bana lo aur Ibrahim aur Ismael ko taqeed ki thi ke mere is ghar ko tawaf aur aiteqaf aur ruku aur sajda karne walon ke liye paak rakkho
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney bait-ullah ko logon kay liye sawab aur aman-o-aman ki jagah banaee tum muqam-e-ibrahim ko jaye namaz muqarrar ker lo hum ney ibrahim (alh-e-salam) aur ismail (alh-e-salam) say wada liya kay tum meray ghar ko tawaf kerney walon aur aeytikaaf kerney walon aur rukoo sajda kerney walon kay pak saaf rakho
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के हमने इस घर (काबा) को लोगों के लिए मरकज़ और अमन की जगह क़रार दिया था और लोगों को हुकुम दिया था कि इब्राहिम जहां इबादत के लिए खड़ा होता है उस मुकाम को मुस्तक़िल जाए नमाज़ बना लो और इब्राहिम और इस्माइल को तक़ीद की थी के मेरे इस घर को तवाफ और एतेकाफ और रुकू और सजदा करने वालों के लिए पाक रक्खो
عَرَبِيوَإِذ قالَ إِبراهيمُ رَبِّ اجعَل هٰذا بَلَدًا آمِنًا وَارزُق أَهلَهُ مِنَ الثَّمَراتِ مَن آمَنَ مِنهُم بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ ۖ قالَ وَمَن كَفَرَ فَأُمَتِّعُهُ قَليلًا ثُمَّ أَضطَرُّهُ إِلىٰ عَذابِ النّارِ ۖ وَبِئسَ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)और (उस समय को याद करो) जब इबराहीम ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! इस (जगह) को शांति वाला नगर बना दे और इसके वासियों को फलों से रोज़ी दे, जो उनमें से अल्लाह और अंतिम दिन पर ईमान लाए। (अल्लाह ने) फरमाया : और जिसने कुफ़्र किया, तो मैं उसे भी थोड़ा-सा लाभ दूँगा, फिर उसे आग की यातना की ओर विवश करूँगा और वह लौटने का बुरा स्थान है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke Ibrahim ne dua ki: “Aey mere Rubb, is shehar ko aman ka shehar bana dey, aur iske bashindon (people) mein jo Allah aur aakhirat ko maanein, unhein har qism ke phalon ka rizq de”. Jawab mein uske Rubb ne farmaya: “aur jo na maanega ,duniya ki chandh roza zindagi ka samaan to main usey bhi dunga magar aakhir e kaar usey azaab e jahannum ki taraf ghaseetunga, aur woh badhtareen thikana hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab ibrahim ney kaha aey perwerdigar! Tu iss jagah ko aman wala shehar bana aur yahan kay bashindon ko jo Allah Taalaa per aur qayamat kay din per eman rakhney walay hon phalon ki roziyan dey. Allah Taalaa ney farmaya: mein kafiron ko bhi thora faeeda doon ga phir unhen aag kay azab ki taraf bey bus ker doon ga yeh phonchney ki jagah buri hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के इब्राहीम ने दुआ की: "ऐ मेरे रब, इस शहर को अमन का शहर बना दे, और इसके बाशिंदों (लोग) में जो अल्लाह और आख़िरत को माने, उन्हें हर क़िस्म के फ़लों का रिज़क दे”। जवाब में उसके रुब ने फरमाया: "और जो ना मानेगा, दुनिया की चंद रोजा जिंदगी का सामान तो मैं उसे भी दूंगा मगर आखिर ए कार उसे अजाब ए जहन्नुम की तरफ घसीटूंगा, और वो बढतारीन ठिकाना है"
عَرَبِيوَإِذ يَرفَعُ إِبراهيمُ القَواعِدَ مِنَ البَيتِ وَإِسماعيلُ رَبَّنا تَقَبَّل مِنّا ۖ إِنَّكَ أَنتَ السَّميعُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)और (याद करो) जब इबराहीम और इसमाईल इस घर की बुनियादें उठा रहे थे (और कह रहे थे :) ऐ हमारे पालनहार! हमसे स्वीकार कर ले। निःसंदेह तू ही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yaad karo Ibrahim aur Ismail jab is ghar ki deewarein utha rahey thay , to dua karte jatay thay : “Aey hamare Rubb, humse yeh khidmat qabool farma le, tu sabki sunne aur sab kuch jaanne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ibrahim (alh-e-salam) aur ismail (alh-e-salam) kaaba ki bunyaden aur deewaren uthatay jatay thay aur kehtay jaa rahey thay kay humaray perwerdigar! Tu hum say qabool farma tu hi sunnay wala aur janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और याद करो इब्राहिम और इस्माइल जब इस घर की दीवारें हैं उठ रहे थे, तो दुआ करते जाते थे: "ए हमारे रब, हमसे ये खिदमत क़बूल फरमा ले, तू सबकी सुनने और सब कुछ जानने वाला है
عَرَبِيرَبَّنا وَاجعَلنا مُسلِمَينِ لَكَ وَمِن ذُرِّيَّتِنا أُمَّةً مُسلِمَةً لَكَ وَأَرِنا مَناسِكَنا وَتُب عَلَينا ۖ إِنَّكَ أَنتَ التَّوّابُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारे पालनहार! और हमें अपना आज्ञाकारी बना और हमारी संतान में से भी एक समुदाय अपना आज्ञाकारी बना और हमें अपनी इबादत के तरीक़े दिखा तथा हमारी तौबा क़बूल फरमा। निःसंदेह तू ही बहुत तौबा क़बूल करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Rubb, hum dono ko apna muslim (mutii e farmaan) bana, hamari nasal se ek aisi qaum utha jo teri muslim ho, humein apni ibadat ke tareeqe bata, aur hamari kotahiyon se darguzar farma, tu bada maaf karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey humaray rab! Humen apne farmanbardar bana ley aur humari aulad mein say bhi aik jamat ko apni ita’at guzaar rakh aur humen apni ibadaten sikha aur humari tauba qabool farma tu tauba qabool farmaney wala aur reham-o-karam kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ए रब, हम दोनों को अपना मुस्लिम (मुती ए फरमान) बना, हमारी नाक से एक ऐसी क़ौम उठो जो तेरी मुस्लिम हो, हमें अपनी इबादत के तौर-तरीके बता, और हमारी कहानियों से दरगुज़र फ़रमा, तू बड़ा माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِيرَبَّنا وَابعَث فيهِم رَسولًا مِنهُم يَتلو عَلَيهِم آياتِكَ وَيُعَلِّمُهُمُ الكِتابَ وَالحِكمَةَ وَيُزَكّيهِم ۚ إِنَّكَ أَنتَ العَزيزُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारे पालनहार! और उनमें उन्हीं में से एक रसूल भेज, जो उनपर तेरी आयतें पढ़े, और उन्हें पुस्तक (क़ुरआन) तथा ह़िकमत (सुन्नत) की शिक्षा दे और उन्हें पाक करे। निःसंदेह तू ही सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur aey Rubb, un logon mein khud unhi ki qaum se ek aisa Rasool uthaiyo jo unhein teri ayaat sunaye, unko kitab aur hikmat ki taleem de aur unki zindagiyan sanwarey, tu bada muqtadar (All-Powerful) aur hakeem hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey humaray rab! Inn mein inhi mein say rasool bhej jo inn kay pass teri aayaten parhay enhen kitab-o-hikmat sikhaye aur enhen pak keray yaqeena tu ghalbay wala aur hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐ रब, उन लोगों में खुद उनकी क़ौम से एक ऐसा रसूल उठियो जो उन्हें तेरी आयत सुनाए, उनको किताब और हिकमत की तालीम दे और उनकी जिंदगी संवारे, तू बड़ा मुक्तदर (सर्वशक्तिमान) और हकीम है।
عَرَبِيوَمَن يَرغَبُ عَن مِلَّةِ إِبراهيمَ إِلّا مَن سَفِهَ نَفسَهُ ۚ وَلَقَدِ اصطَفَيناهُ فِي الدُّنيا ۖ وَإِنَّهُ فِي الآخِرَةِ لَمِنَ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा कौन है जो इबराहीम के धर्म से विमुख होगा, सिवाय उसके जिसने अपने आपको मूर्ख बना लिया। निःसंदेह हमने उसे संसार में चुन लिया तथा निःसंदेह वह आख़िरत (परलोक) में निश्चय सदाचारियों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Ab kaun hai, jo Ibrahim ke tareeqe se nafrat karey? Jisne khud apne aap ko himaqat o jihalat mein mubtila karliya ho, uske siwa kaun yeh harakat kar sakta hai? Ibrahim to woh shaks hai jisko humne duniya mein apne kaam ke liye chun liya tha aur aakhiarat mein uska shumaar saliheen mein hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Deen-e-ibrahim say wohi bey raghabti keray ga jo mehaz bey waqoof ho hum ney to ussay duniya mein bhi bar gazeedah kiya tha aur aakhirat mein bhi woh nekon kaaron mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)अब कौन है, जो इब्राहिम के तरीक़े से नफ़रत करे? जिसने खुद को हिम्मत ओ जिहालत में मुब्तिला करलिया हो, उसके सिवा कौन ये हरकत कर सकता है? इब्राहीम तो वो शक्स है जिसको हमने दुनिया में अपने काम के लिए चुन लिया था और आख़िरत में उसका शुमार सालिहें में होगा
عَرَبِيإِذ قالَ لَهُ رَبُّهُ أَسلِم ۖ قالَ أَسلَمتُ لِرَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब उसके पालनहार ने उससे कहा : (मेरा) आज्ञाकारी हो जा। उसने कहा : मैं सर्व संसार के पालनहार का आज्ञाकारी हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Uska haal yeh tha ke jab uske Rubb ne ussey kaha : “Muslim ho ja” to usne fawran kaha : “main maalik e qaiynaat ka ‘muslim’ ho gaya.”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab kabhi bhi unhen unn kay rab ney kaha farmanbardar hoja unhon ney kaha mein ney rab-ul-aalameen ki farmanbardari
Devnagri Urdu (Maududi)उसका हाल ये था के जब उसके रब ने उसे कहा: "मुस्लिम हो जा" तो उसने फ़वारान कहा: "मैं मालिक ए कायनात का 'मुस्लिम' हो गया।”
عَرَبِيوَوَصّىٰ بِها إِبراهيمُ بَنيهِ وَيَعقوبُ يا بَنِيَّ إِنَّ اللَّهَ اصطَفىٰ لَكُمُ الدّينَ فَلا تَموتُنَّ إِلّا وَأَنتُم مُسلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इसी की वसीयत इबराहीम ने अपने बेटों को की और याक़ूब ने भी। ऐ मेरे बेटो! निःसंदेह अल्लाह ने तुम्हारे लिए यह धर्म (इस्लाम) चुन लिया है। सो, तुम हरगिज़ न मरना परंतु इस हाल में कि तुम मुसलमान (आज्ञाकारी) हो।
Roman Urdu (Maududi)Isi tareeqe par chalne ki hidayat usne apni aulad ko ki thi aur isi ki wasiyat Yakub apni aulad ko kar gaya, usne kaha tha ke : “mere bacchon! Allah ne tumhare liye yahi deen pasand kiya hai lihaza marte dum tak Muslim hi rehna”
Roman Urdu (Junagarhi)Issi ki wasiyat ibrahim aur yaqoob ney apni aulad ko ki kay humaray bacho! Allah Taalaa ney tumharay liye iss deen ko pasand farma liya hai khabradar! Tum musalman hi marna
Devnagri Urdu (Maududi)इसी तारीख पर चलने की हिदायत हमें अपनी औलाद की थी और याकूब अपनी औलाद को कर गया, उसने कहा था के: "मेरे बच्चों! अल्लाह ने तुम्हारे लिए यही दीन पसंद किया है लिहाजा मरते दम तक मुस्लिम ही रहना"
عَرَبِيأَم كُنتُم شُهَداءَ إِذ حَضَرَ يَعقوبَ المَوتُ إِذ قالَ لِبَنيهِ ما تَعبُدونَ مِن بَعدي قالوا نَعبُدُ إِلٰهَكَ وَإِلٰهَ آبائِكَ إِبراهيمَ وَإِسماعيلَ وَإِسحاقَ إِلٰهًا واحِدًا وَنَحنُ لَهُ مُسلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या तुम मौजूद थे, जब याक़ूब की मृत्यु का समय आया, जब उसने अपने बेटों से कहा : तुम मेरे बाद किसकी इबादत करोगे? उन्होंने उत्तर दिया : हम तेरे पूज्य और तेरे बाप-दादा इबराहीम और इसमाईल और इसहाक़ के पूज्य की इबादत करेंगे, जो एक ही पूज्य है, और हम उसी के आज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir kya tum us waqt maujood thay jab Yakub is duniya se ruksat ho raha tha? Usne marte waqt apne bacchon se pucha: “ bacchon! Mere baad tum kiski bandagi karoge?” un sab ne jawab diya : “ hum usi ek khuda ki bandagi karenge jisey aap ne aur aapke buzurgon Ibrahim, Ismail, aur Ishaq ne khuda maana hai aur hum usi ke muslim hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya (hazrat) yaqoob kay intiqal kay waqt tum mojood thay? Jab unhon ney apni aulad ko kaha kay meray baad tum kiss ki ibadat kero gay? To sab ney jawab diya kayk aap kay mabood ki aur aap kay aaba-o-ajdaad ibrahim (alh-e-salam) aur ismail (alh-e-salam) aur ishaq (alh-e-salam) kay mabood ki jo mabood aik hi hai aur hum ussi kay farmanbardar rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्या तुम उस वक्त मौजूद थे जब याकूब इस दुनिया से रुक्सत हो रहा था? उसने मरते वक्त अपने बच्चों से पूछा: "बच्चों! मेरे बाद तुम किसकी बंदगी करोगे?" उन सब ने जवाब दिया: "हम उसकी एक खुदा की बंदगी करेंगे जैसे आप ने और आपके बुजुर्ग इब्राहिम, इस्माइल और इशाक ने खुदा माना है और हम उसके मुस्लिम हैं"
عَرَبِيتِلكَ أُمَّةٌ قَد خَلَت ۖ لَها ما كَسَبَت وَلَكُم ما كَسَبتُم ۖ وَلا تُسأَلونَ عَمّا كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह एक समुदाय था, जो गुज़र चुका। उसके लिए वह है जो उसने कमाया, और तुम्हारे लिए वह है जो तुमने कमाया। और तुमसे उसके बारे में नहीं पूछा जाएगा, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Woh kuch log thay jo guzar gaye, jo kuch unhon ne kamaya woh unke liye hai aur jo kuch tum kamaoge, woh tumhare liye hai. Tumse yeh na pucha jayega ke woh kya karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh jamat to guzar chuki jo unhon ney kaha woh unn kay liye hai aur jo tum kero gay woh tumharay liye hai. Unn kay aemaal kay baray mein tum nahi poochay jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)वो कुछ लोग थे जो गुजर गए, जो कुछ उन्होंने बनाया, जो उनके लिए है और जो कुछ तुम कमाओगे, वो तुम्हारे लिए है। तुमसे ये ना पूछा जाएगा के वो क्या करते थे
عَرَبِيوَقالوا كونوا هودًا أَو نَصارىٰ تَهتَدوا ۗ قُل بَل مِلَّةَ إِبراهيمَ حَنيفًا ۖ وَما كانَ مِنَ المُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने कहा : यहूदी अथवा ईसाई हो जाओ, मार्गदर्शन पा जाओगे। आप कह दें : बल्कि (हम) इबराहीम के धर्म (का अनुसरण करेंगे), जो एक अल्लाह का होने वाला था और अनेकेश्वरवादियों में से नहीं था।
Roman Urdu (Maududi)Yahudi kehte hain: Yahudi ho to raah e raast paogey, Isayi kehte hain: Isayi ho to hidayat milegi , inse kaho: “nahin, balke sabko chodh kar Ibrahim ka tareeqa, aur Ibrahim mushrikon mein se na tha.”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kehtay hain kay yahud-o-nasaaraa bann jao to hidayat pao gay. Tum kaho bulkay sahih raah per millat-e-ibrahimi walay hain aur ibrahim khalis Allah kay paristaar thay aur mushrik na thay
Devnagri Urdu (Maududi)यहुदी कहते हैं: यहुदी हो तो राह ए रास्ते पाओगे, इसे कहते हैं: इसे कहो: “नहीं, बलके सबको छोड़ कर इब्राहिम का तरीका, और इब्राहीम मुशरिकों में से ना था।”
عَرَبِيقولوا آمَنّا بِاللَّهِ وَما أُنزِلَ إِلَينا وَما أُنزِلَ إِلىٰ إِبراهيمَ وَإِسماعيلَ وَإِسحاقَ وَيَعقوبَ وَالأَسباطِ وَما أوتِيَ موسىٰ وَعيسىٰ وَما أوتِيَ النَّبِيّونَ مِن رَبِّهِم لا نُفَرِّقُ بَينَ أَحَدٍ مِنهُم وَنَحنُ لَهُ مُسلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ मुसलमानो!) तुम कह दो : हम अल्लाह पर ईमान लाए और उसपर जो हमारी ओर उतारा गया, और जो इबराहीम और इसमाईल और इसह़ाक़ और याक़ूब तथा उसकी संतान की ओर उतारा गया, और जो मूसा एवं ईसा को दिया गया तथा जो समस्त नबियों को उनके पालनहार की ओर से दिया गया। हम उनमें से किसी एक के बीच अंतर नहीं करते और हम उसी (अल्लाह) के आज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Musalmaano)! Kaho ke: “hum iman laye Allah par aur us hidayat par jo hamari taraf nazil hui hai aur jo Ibrahim, Ismail, Ishaq, Yakub aur aulad e Yakub ki taraf nazil hui thi aur jo Moosa aur Isa aur dusre tamaam paighambaron ko unke Rubb ki taraf se di gayi thi. Hum unke darmiyan koi tafreeq nahin karte aur hum Allah ke Muslim hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey musalmano! Tum sab kaho kay hum Allah per eman laye aur uss cheez per bhi jo humari taraf utari gaee aur jo cheez ibrahim ismail ishaq yaqoob (aleyhim-us-salam) aur inn ki aulad per utari gaee aur jo kuch Allah ki janib say musa aur essa (aleyhim-us-salam) aur doosray anbiya (aleyhim-us-salam) diye gaye. Hum inn say mein say kissi kay darmiyan farq nahi kertay hum Allah kay farmanbardar hain
Devnagri Urdu (Maududi)(मुसलमानो)! कहो के: "हम ईमान लाए अल्लाह पर और हमें हिदायत पर जो हमारी तरफ नाज़िल हुई है और जो इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब की तरफ नाज़िल हुई थी और जो मूसा और ईसा और दूसरे तमाम पैगम्बरों को उनके रब की तरफ से दी" गई थी. हम उनके दरमियान कोई तफ़रीक़ नहीं करते और हम अल्लाह के मुस्लिम हैं”
عَرَبِيفَإِن آمَنوا بِمِثلِ ما آمَنتُم بِهِ فَقَدِ اهتَدَوا ۖ وَإِن تَوَلَّوا فَإِنَّما هُم في شِقاقٍ ۖ فَسَيَكفيكَهُمُ اللَّهُ ۚ وَهُوَ السَّميعُ العَليمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि वे उस जैसी चीज़ पर ईमान लाएँ, जिसपर तुम ईमान लाए हो, तो निश्चय वे मार्गदर्शन पा गए और यदि वे फिर जाएँ, तो वे मात्र विरोध में पड़े हुए हैं। अतः निकट ही अल्लाह तुझे उनके मुक़ाबले में काफ़ी हो जाएगा और वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Phir agar woh isi tarah iman layein, jis tarah tum laye ho, to hidayat par hain, aur agar issey mooh pherein to khuli baat hai ke woh hathdharmi (schism) mein padh gaye hain, lihaza itminaan rakkho ke unke muqable mein Allah tumhari himayat ke liye kafi hai. Woh sabkuch sunta aur jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar woh tum jaisa eman layen to hidayat payen aur agar mun moren to woh sareeh ikhtilaf mein hain Allah Taalaa inn say un qarib aap ki kifayat keray ga aur woh khoob sunnay aur janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अगर वो इसी तरह ईमान लायें, जिस तरह तुम लाए हो, तो हिदायत पर हैं, और अगर इसके मुह फिरें तो खुली बात है के वो हथधर्मी (विवाद) में पढ़ गए हैं, लिहाज़ा इत्मिनान रख्खो के उनके मुक़ाबले में अल्लाह तुम्हारी हिमायत के लिए काफी है। वो सब कुछ सुनता और जानता है
عَرَبِيصِبغَةَ اللَّهِ ۖ وَمَن أَحسَنُ مِنَ اللَّهِ صِبغَةً ۖ وَنَحنُ لَهُ عابِدونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह का रंग ग्रहण करो और रंग में अल्लाह से बेहतर कौन है? और हम उसी की इबादत करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kaho: “ Allah ka rang ikhtiyar karo uske rang se accha aur kiska rang hoga? Aur hum usi ki bandagi karne waley log hain.”
Roman Urdu (Junagarhi)Allah ka rang ikhtiyar kero aur Allah Taalaa say acha rang kiss ka hoga? Hum to ussi ki ibadat kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)कहो: “अल्लाह का रंग इख्तियार करो उसके रंग से अच्छा और किसका रंग होगा? और हम उसी की बंदगी करने वाले लोग हैं।”
عَرَبِيقُل أَتُحاجّونَنا فِي اللَّهِ وَهُوَ رَبُّنا وَرَبُّكُم وَلَنا أَعمالُنا وَلَكُم أَعمالُكُم وَنَحنُ لَهُ مُخلِصونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दो : क्या तुम हमसे अल्लाह के बारे में झगड़ते हो? हालाँकि वही हमारा पालनहार तथा तुम्हारा पालनहार है और हमारे लिए हमारे कर्म हैं और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म, और हम उसी के लिए मुख़्लिस (निष्ठावान) हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi! Inse kaho : “Kya tum Allah ke barey mein humse jhagadte ho? Halaanke wahi hamara Rubb hai aur tumhara Rubb bhi. Hamare aamaal hamare liye hain, tumhare aamaal tumhare liye , aur hum Allah hi ke liye apni bandagi ko khalis kar chuke hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay kiya tum hum say Allah kay baray mein jhagartay ho jo humara aur tumhara rab hai humaray liye humaray aemaal hain aur tumharay liye tumharay aemaal hum to ussi kay liye mukhlis hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी! इनसे कहो: "क्या तुम अल्लाह के बारे में हमसे झगड़ा करते हो? हलांके वही हमारा रब है और तुम्हारा रब भी। हमारे अमाल हमारे लिए हैं, तुम्हारे अमाल तुम्हारे लिए, और हम अल्लाह हाय के लिए अपनी बंदगी को खालिस कर चुके हैं
عَرَبِيأَم تَقولونَ إِنَّ إِبراهيمَ وَإِسماعيلَ وَإِسحاقَ وَيَعقوبَ وَالأَسباطَ كانوا هودًا أَو نَصارىٰ ۗ قُل أَأَنتُم أَعلَمُ أَمِ اللَّهُ ۗ وَمَن أَظلَمُ مِمَّن كَتَمَ شَهادَةً عِندَهُ مِنَ اللَّهِ ۗ وَمَا اللَّهُ بِغافِلٍ عَمّا تَعمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ अह्ले किताब!) या तुम कहते हो कि इबराहीम और इसमाईल और इसह़ाक़ और याक़ूब तथा उनकी औलाद यहूदी या ईसाई थे? (ऐ नबी! उनसे) कह दो : क्या तुम अधिक जानते हो अथवा अल्लाह? और उससे बड़ा अत्याचारी कौन है, जिसने वह गवाही छिपा ली, जो उसके पास अल्लाह की ओर से थी। और अल्लाह हरगिज़ उससे ग़ाफ़िल नहीं जो तुम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Ya phir kya tumhara kehna yeh hai ke Ibrahim , Ismail, Ishaq, Yakub aur aulad e Yakub sab ke sab yahudi thay ya nasrani thay? Kaho: “tum zyada jaante ho ya Allah? Us shaks se bada zalim aur kaun hoga jiske zimme Allah ki taraf se ek gawahi ho aur woh usey chupaye? Tumhari harakat se Allah gaafil to nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum kehtay ho kay ibrahim aur ismail aur ishaq aur yaqoob (aleyhim-us-salam) aur unn ki aulad yahudi ya nasrani thay? Keh do kiya tum ziyada jantay ho ya Allah Taalaa? Allah kay pass shahdat chupney walay say ziyada zalim aur kaun hai? Aur Allah tumharay kaamon say ghafil nahi
Devnagri Urdu (Maududi)या फिर क्या तुम्हारा कहना ये है कि इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब सब के सब यहूदी थे या नसरानी थे? कहो: "तुम ज़्यादा जानते हो या अल्लाह? हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जिसका ज़िमे अल्लाह की तरफ़ से एक गवाही हो और वो उसे छुपाए? तुम्हारी हरकत से अल्लाह ग़ाफ़िल तो नहीं है
عَرَبِيتِلكَ أُمَّةٌ قَد خَلَت ۖ لَها ما كَسَبَت وَلَكُم ما كَسَبتُم ۖ وَلا تُسأَلونَ عَمّا كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह एक समुदाय था, जो गुज़र चुका। उसके लिए वह है जो उसने कमाया, और तुम्हारे लिए वह है जो तुमने कमाया। और तुमसे उसके बारे में नहीं पूछा जाएगा, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Woh kuch log thay jo guzar chuke, unki kamayi unke liye thi aur tumhari kamayi tumhare liye. Tumse unke aamaal ke mutaaliq sawal nahin hoga.”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh ummat hai jo guzar chuki jo unhon ney kiya unn kay liye hai aur jo tum ney kiya tumharay liye tum unn kay aemaal kay baray mein sawal na kiye jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)वो कुछ लोग थे जो गुज़र चुके, उनकी कमाई उनके लिए थी और तुम्हारी कमाई तुम्हारे लिए। तुमसे उनके अमाल का सवाल नहीं होगा।
🕮 Juz 2 begins here
عَرَبِي۞ سَيَقولُ السُّفَهاءُ مِنَ النّاسِ ما وَلّاهُم عَن قِبلَتِهِمُ الَّتي كانوا عَلَيها ۚ قُل لِلَّهِ المَشرِقُ وَالمَغرِبُ ۚ يَهدي مَن يَشاءُ إِلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
हिन्दी (Al-Omari)शीघ्र ही मूर्ख लोग कहेंगे कि उन्हें उनके उस क़िबले से, जिस पर वे थे किस चीज़ ने फेर दिया? (ऐ नबी!) कह दीजिए कि पूर्व और पश्चिम अल्लाह ही के हैं। वह जिसे चाहता है, सीधी राह पर लगा देता है।
Roman Urdu (Maududi)Nadaan log zaroor kahenge : inhein kya hua ke pehle yeh jis qible ki taraf rukh karke namaz padhte thay ussey yakayak phir gaye? (Aey Nabi) Inse kaho : “mashriq aur magrib sab Allah ke hain, Allah jisey chahta hai seedhi raah dikha deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Un qarib nadan log kahen gay kay jiss qabeelay per yeh thay iss say enhen kiss cheez na hataya? Aap keh dijiye kay mashriq-o-maghrib ka maalik Allah Taalaa hi hai woh jissay chahaye seedhi raah ki hidayat ker dey
Devnagri Urdu (Maududi)नादान लोग जरूर कहेंगे: इन्हें क्या हुआ के पहले ये जिस क़िबले की तरफ रुख करके नमाज पढ़ते थे उसे यकीन फिर से हो गया? (ऐ नबी) इनसे कहो: "मशरिक और मगरिब सब अल्लाह के हैं, अल्लाह जिसे चाहता है सीधी राह दिखा देता है
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ جَعَلناكُم أُمَّةً وَسَطًا لِتَكونوا شُهَداءَ عَلَى النّاسِ وَيَكونَ الرَّسولُ عَلَيكُم شَهيدًا ۗ وَما جَعَلنَا القِبلَةَ الَّتي كُنتَ عَلَيها إِلّا لِنَعلَمَ مَن يَتَّبِعُ الرَّسولَ مِمَّن يَنقَلِبُ عَلىٰ عَقِبَيهِ ۚ وَإِن كانَت لَكَبيرَةً إِلّا عَلَى الَّذينَ هَدَى اللَّهُ ۗ وَما كانَ اللَّهُ لِيُضيعَ إيمانَكُم ۚ إِنَّ اللَّهَ بِالنّاسِ لَرَءوفٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार हमने तुम्हें सबसे बेहतर उम्मत (समुदाय) बनाया; ताकि तुम लोगों पर गवाही देने वाले बनो और रसूल तुमपर गवाही देने वाला बने। और हमने वह क़िबला जिसपर तुम थे, इसलिए निर्धारित किया था, ताकि हम जान लें कि कौन (इस) रसूल का अनुसरण करता है, उससे (अलग करके) जो अपनी ऐड़ियों पर फिर जाता है। और निःसंदेह यह बात निश्चय बहुत बड़ी थी, परंतु उन लोगों पर (नहीं) जिन्हें अल्लाह ने हिदायत दी और अल्लाह कभी ऐसा नहीं कि तुम्हारा ईमान (अर्थात् क़िबला बदलने से पहले पढ़ी गई नमाज़ों) को व्यर्थ कर दे। निःसंदेह अल्लाह लोगों पर अत्यंत करुणा करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur isi tarah to humne tumhein ek “ummat e wasat (middle nation)” banaya hai taa-ke tum duniya ke logon par gawah ho aur Rasool tumpar gawah ho. Pehle jis taraf tum rukh karte thay, usko to humne sirf yeh dekhne ke liye qibla muqarrar kiya tha ke kaun Rasool ki pairwi karta hai aur kaun ulta phir jata hai. Yeh maamla tha to bada sakht, magar un logon ke liye kuch bhi sakht na saabit hua jo Allah ki hidayat se faiziyaab thay, Allah tumhare is iman ko hargiz zaya na karega. Yaqeen jaano ke woh logon ke haqq mein nihayat shafeeq o raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney issi tarah tumhen aadil ummat banaya hai takay tum logon per gawah hojao aur rasool (PBUH) tum per gawah hojayen jiss qiblay per tum pehlay say thay ussay hum ney iss liye muqarrar kiya tha kay hum jaan len kay rasool ka sacha tabey daar kaun hai aur kaun hai jo apni aeyrhiyon kay ball palat jata hai go yeh kaam mushkil hai magar jinhen Allah ney hidayat di hai (unn per koi mushkil nahi) Allah Taalaa tumharay aemaal zaya na keray ga Allah Taalaa logon kay sath shafqat aur meharbani kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और इसी तरह तो हमने तुम्हें एक "उम्मत ए वसत (मध्य देश)" बनाया है ता-के तुम दुनिया के लोगों पर गवाह हो और रसूल तुमपर गवाह हो। पहले जिस तरफ तुम रुख करते थे, उसको तो हमने सिर्फ ये देखने के लिए किबला मुकर्रर किया था कि कौन रसूल की जोड़ी बनाता है और कौन उल्टा फिर जाता है, मगर उन लोगों के लिए कुछ भी नहीं साबित हुआ जो अल्लाह की। हिदायत से फ़ैज़ियाब था, अल्लाह तुम्हारे इस ईमान को हरगिज़ ज़या न करेगा। यकीन जानों के वो लोगों के हक़ में निहायत शफीक ओ रहीम है
عَرَبِيقَد نَرىٰ تَقَلُّبَ وَجهِكَ فِي السَّماءِ ۖ فَلَنُوَلِّيَنَّكَ قِبلَةً تَرضاها ۚ فَوَلِّ وَجهَكَ شَطرَ المَسجِدِ الحَرامِ ۚ وَحَيثُ ما كُنتُم فَوَلّوا وُجوهَكُم شَطرَهُ ۗ وَإِنَّ الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ لَيَعلَمونَ أَنَّهُ الحَقُّ مِن رَبِّهِم ۗ وَمَا اللَّهُ بِغافِلٍ عَمّا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय (ऐ नबी!) हम आपके चेहरे का बार-बार आकाश की ओर उठना देख रहे हैं। तो निश्चय हम आपको उस क़िबले की ओर अवश्य फेर देंगे, जिसे आप पसंद करते हैं। तो (अब) अपना चेहरा मस्जिदे ह़राम की ओर फेर लें, तथा तुम जहाँ भी हो, तो अपने चेहरे उसी की ओर फेर लो। निःसंदेह वे लोग जिन्हें किताब दी गई है निश्चय जानते हैं कि निःसंदेह उनके पालनहार की ओर से यही सत्य है और अल्लाह उससे हरगिज़ ग़ाफ़िल नहीं जो वे कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh tumhare mooh ka baar baar asmaan ki taraf uthna hum dekh rahey hain, lo hum isi qible ki taraf tumhein phere dete hain jisey tum pasand karte ho, Masjid e haraam ki taraf rukh pher do ab jahan kahin tum ho usi ki taraf mooh karke namaz padha karo. Yeh log jinhein kitab di gayi thi khoob jaante hain ke (tahweel e qibla ka/change of qibla) yeh hukum unke Rubb hi ki taraf se hai aur bar-haqq hai magar iske bawajood jo kuch yeh kar rahey hain Allah ussey gaafil nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum aap kay chehray ko baar baar aasman ki taraf uthtay uthtay huye dekh rahey hain abb hum aap ko uss qiblay ki janib mutawajja keren gay jiss say aap khush hojayen aap apna mun masjid-e-haram ki taraf pher len aur aap jahan kahin hon apna mun ussi taraf phera keren. Ehal-e-kitab ko iss baat kay Allah ki taraf say bar haq honey ka qataee ilm hai aur Allah Taalaa unn aemaal say ghafil nahi jo yeh kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये तुम्हारे मुँह का बार-बार आसमान की तरफ उठना हम देख रहे हैं, लो हम इसी क़िबले की तरफ तुम्हें फेर देते हैं जिसे तुम पसंद करते हो, मस्जिद ए हराम की तरफ रुख़ फेर दो अब जहां कहीं तुम हो उसकी तरफ मुंह करके नमाज पढ़ा करो। ये लोग जिन्हें किताब दी गई थी खूब जानते हैं के (तहवील ए क़िबला का/क़िबला का परिवर्तन) ये हुकुम उनके रब ही की तरफ से है और बार-हक़्क़ है मगर इसके बावज़ूद जो कुछ ये कर रहे हैं अल्लाह उसे ग़ाफ़िल नहीं है
عَرَبِيوَلَئِن أَتَيتَ الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ بِكُلِّ آيَةٍ ما تَبِعوا قِبلَتَكَ ۚ وَما أَنتَ بِتابِعٍ قِبلَتَهُم ۚ وَما بَعضُهُم بِتابِعٍ قِبلَةَ بَعضٍ ۚ وَلَئِنِ اتَّبَعتَ أَهواءَهُم مِن بَعدِ ما جاءَكَ مِنَ العِلمِ ۙ إِنَّكَ إِذًا لَمِنَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय यदि आप उन लोगों के पास जिन्हें किताब दी गई है, हर निशानी भी ले आएँ, वे आपके क़िबले का अनुसरण नहीं करेंगे और न आप उनके क़िबले का अनुसरण करने वाले हैं। और न उनमें से कोई दूसरे के क़िबले का अनुसरण करने वाला है। और निश्चय यदि आपने उनकी इच्छाओं का पालन किया, उस ज्ञान के बाद जो आपके पास आया है, तो निःसंदेह उस समय आप अवश्य अत्याचारियों में से हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Tum in ehle kitab ke paas khwa koi nishani le aao, mumkin nahin ke yeh tumhare qible ki pairwi karne lagein, aur na tumhare liye yeh mumkin hai ke inke qible ki pairwi karo, aur inmein se koi giroh bhi dusre ke qible ki pairwi ke liye tayyar nahin hai, aur agar tumne is ilm ke baad jo tumhare paas aa chuka hai inki khwahishaat ki pairwi ki to yaqeenan tumhara shumaar zalimon mein hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aap agar cheh ehal-e-kitab ko tamam daleelen dey den lekin woh aap kay qiblay ki pairwi nahi keren gay aur na aap inn kay qiblay ko manney walay hain aur na yeh aapas mein aik doosray kay qiblay ko manney walay hain aur agar aap ba wajood yeh kay aap kay pass ilm aa chuka phir bhi inn ki khuwaishon kay peechay lag jayen to bil yaqeen aap bhi zalimon mein say hojayen
Devnagri Urdu (Maududi)तुम एहले किताब के पास ख्वा कोई निशानी ले आओ, मुमकिन नहीं के ये तुम्हारे क़िबले की जोड़ी बनाने लगें, और न तुम्हारे लिए ये मुमकिन है के इनके क़िबले कि जोड़ी करो, और इनमें से कोई गिरो ​​भी दूसरे के क़िबले की जोड़ी के लिए तैयार नहीं है, और अगर तुमने इस इल्म के बाद जो तुम्हारे पास आ चुका है इनकी ख्वाहिशात की जोड़ी कि तो यकीनन तुम्हारा शुमार ज़ालिमों में होगा
عَرَبِيالَّذينَ آتَيناهُمُ الكِتابَ يَعرِفونَهُ كَما يَعرِفونَ أَبناءَهُم ۖ وَإِنَّ فَريقًا مِنهُم لَيَكتُمونَ الحَقَّ وَهُم يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन्हें हमने पुस्तक दी है, वे उसे वैसे ही जानते हैं, जैसे अपने बेटों को पहचानते हैं, और निःसंदेह उनमें से एक समूह जानते हुए भी सत्य को छिपाता है।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ko humne kitab di hai woh is muqaam ko (jisey qible banaya gaya hai) aisa pehchante hain jaisa apni aulad ko pehchante hain, magar unmein se ek giroh jaante boojhte haqq ko chupa raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jinhen hum ney kitab di hai woh to issay aisa pehchantay hain jaisay koi apney bachon ko pehchaney inn kay aik jamat haq ko pehchan ker phri chupati hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों को हमने किताब दी है वो इस मुकाम को (जिसे क़िबला बनाया गया है) ऐसा पहचानते हैं जैसा अपनी औलाद को पहचानते हैं, मगर उनमें से एक गिरोह जानते हैं बूझते हक़ को छुपा रहा है
عَرَبِيالحَقُّ مِن رَبِّكَ ۖ فَلا تَكونَنَّ مِنَ المُمتَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह सत्य आपके पालनहार की ओर से है। अतः आप कदापि संदेह करने वालों में से न हों।
Roman Urdu (Maududi)Yeh qataii ek amr e haqq hai tumhare Rubb ki taraf se, lihaza iske mutaaliq tum hargiz kisi shakk mein na padho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kay rab ki taraf say yeh sira sir haq hai khabardaar aap shak kerney walon mein say na hona
Devnagri Urdu (Maududi)ये क़तई एक अमर ए हक़ है तुम्हारे रब की तरफ से, लिहाज़ा इसके मुतालिक तुम हरगिज़ किसी शक्क में ना पढ़ो
عَرَبِيوَلِكُلٍّ وِجهَةٌ هُوَ مُوَلّيها ۖ فَاستَبِقُوا الخَيراتِ ۚ أَينَ ما تَكونوا يَأتِ بِكُمُ اللَّهُ جَميعًا ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)प्रत्येक के लिए एक दिशा है, जिसकी ओर वह मुख करने वाला है। अतः तुम भलाइयों में एक-दूसरे आगे बढ़ो। तुम जहाँ कही भी होगे, अल्लाह तुम्हें इकट्ठा करके लाएगा। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Har ek ke liye ek rukh hai jiski taraf woh mudta hai, pas bhalaiyon ki taraf sabaqat karo. Jahan bhi tum hogey Allah tumhein paa lega, uski qudrat se koi cheez bahar nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Her shaks aik na aik tarf mutawajja horaha hai tum nekiyon ki taraf doro. Jahan kahin bhi tum hogay Allah tumhen ley aaye ga. Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)हर एक के लिए एक रुख है जिसकी तरफ वो मुदता है, पस भलाईयों की तरफ सबक करो। जहां भी तुम होगे अल्लाह तुम्हें पा लेगा, उसकी क़ुदरत से कोई चीज़ बाहर नहीं
عَرَبِيوَمِن حَيثُ خَرَجتَ فَوَلِّ وَجهَكَ شَطرَ المَسجِدِ الحَرامِ ۖ وَإِنَّهُ لَلحَقُّ مِن رَبِّكَ ۗ وَمَا اللَّهُ بِغافِلٍ عَمّا تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आप जहाँ से भी निकलें, तो अपना चेहरा मस्जिदे-ह़राम की ओर फेर लें। और निःसंदेह यही आपके पालनहार की ओर से सत्य है और अल्लाह उससे हरगिज़ ग़ाफ़िल नहीं जो तुम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara guzar jis muqaam se bhi ho wahin apna rukh (namaz ke waqt) masjid e haraam ki taraf pher do, kyunke yeh tumhare Rubb ka bilkul bar-haqq faisla hai aur Allah tum logon ke aamaal se be-khabar nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap jahan say niklay apna mun (namaz kay liye) masjid-e-haram ki taraf ker liya keren yehi haq hai aap kay rab ki taraf say jo kuch tum ker rahey ho uss say Allah Taalaa bey khabar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा गुजर जिस मुकाम से भी हो वहीं अपना रुख (नमाज के वक्त) मस्जिद ए हराम की तरफ फेर दो, क्योंकि ये तुम्हारे रब का बिल्कुल बार-हक्क फैसला है और अल्लाह तुम लोगों के अमाल से बे-खबर नहीं है
عَرَبِيوَمِن حَيثُ خَرَجتَ فَوَلِّ وَجهَكَ شَطرَ المَسجِدِ الحَرامِ ۚ وَحَيثُ ما كُنتُم فَوَلّوا وُجوهَكُم شَطرَهُ لِئَلّا يَكونَ لِلنّاسِ عَلَيكُم حُجَّةٌ إِلَّا الَّذينَ ظَلَموا مِنهُم فَلا تَخشَوهُم وَاخشَوني وَلِأُتِمَّ نِعمَتي عَلَيكُم وَلَعَلَّكُم تَهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आप जहाँ से भी निकलें, अपना चेहरा मस्जिदे-ह़राम की ओर फेर लें। और (ऐ मुसलमानों!) तुम जहाँ भी हो, अपने चेहरे उसी की ओर फेर लो। ताकि लोगों के पास तुम्हारे विरुद्ध कोई हुज्जत (तर्क) न रहे, सिवाय उनके जिन्होंने उनमें से अत्याचार किया। अतः उनसे मत डरो, (बल्कि) मुझसे डरो, और ताकि मैं अपनी नेमत तुमपर पूरी करूँ और ताकि तुम मार्गदर्शन पाओ।
Roman Urdu (Maududi)Aur jahan se bhi tumhara guzar ho apna rukh masjid e haraam ki taraf phera karo, aur jahan bhi tum ho usi ki taraf mooh karke namaz padho taa-ke logon ko tumhare khilaf koi hujjat na miley. Haan jo zalim hain unki zubaan kisi haal mein bandh na hogi to unsey tum na daro balke mujhse daro aur isliye ke main tumpar apni niyamat poori kardoon aur is tawaqqu par ke mere is hukum ki pairwi se tum isi tarah falaah ka raasta paogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss jagah say aap niklen apna mun masjid-e-haram ki taraf pher len aur jahan kahin tum ho apney chehray issi taraf kiya kero takay logon ki koi hujjat tum per baqi na reh jaye siwaye unn logon kay jinhon ney inn mein say zulm kiya hai tum inn say na daro mujh hi say daro aur takay mein apni nemat tum per poori keroon aur iss liye bhi kay tum raah-e-raast pao
Devnagri Urdu (Maududi)और जहां से भी तुम्हारा गुजर हो अपना रुख मस्जिद ए हराम की तरफ फेरा करो, और जहां भी तुम हो उसकी तरफ मुंह करके नमाज पढ़ो ता-के लोगों को तुम्हारे खिलाफ कोई हुज्जत ना मिले। हां जो जालिम हैं उनकी जुबान किसी हाल में बंद न होगी तो उनसे तुम न डरो बलके मुझसे डरो और इसलिए के मैं तुमपर अपनी नियामत पूरी कर दूं और इस तवक्कु पर के मेरे इस हुकुम की जोड़ी से तुम इसी तरह फलाह का रास्ता पाओगे
عَرَبِيكَما أَرسَلنا فيكُم رَسولًا مِنكُم يَتلو عَلَيكُم آياتِنا وَيُزَكّيكُم وَيُعَلِّمُكُمُ الكِتابَ وَالحِكمَةَ وَيُعَلِّمُكُم ما لَم تَكونوا تَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिस तरह हमने तुम्हारे बीच एक रसूल तुम्हीं में से भेजा, जो तुमपर हमारी आयतें पढ़ता और तुम्हें पाक करता और तुम्हें किताब (क़ुरआन) तथा ह़िकमत (सुन्नत) सिखाता है और तुम्हें वह कुछ सिखाता है, जो तुम नहीं जानते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jis tarah (tumhein is cheez se falaah naseeb hui ke) maine tumhare darmiyaan khud tum mein se ek Rasool bheja jo tumhein meri ayaat sunata hai, tumhari zindagiyon ko sanwaarta hai, tumhein kitab aur hikmat ki taleem deta hai aur tumhein woh baatein sikhata hai jo tum na jaante thay
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss tarah hum ney tum mein tumhin mein say rasool bheja jo humari aayaten tumharay samney tilawat kerta hai aur tumhen kitab-o-hikmat aur woh cheezen sikhata hai jin say tum bey ilm nahi
Devnagri Urdu (Maududi)जिस तरह (तुम्हें वह चीज है) से फलाह नसीब हुई के) मैंने तुम्हारे दरमियान खुद तुम में से एक रसूल भेजा जो तुम्हें मेरी आयत सुनाता है, तुम्हारी जिंदगी को संवारता है, तुम्हें किताब और हिकमत की तालीम देता है और तुम्हें वो बातें सिखाता है जो तुम ना जानते थे
عَرَبِيفَاذكُروني أَذكُركُم وَاشكُروا لي وَلا تَكفُرونِ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः तुम मुझे याद करो, मैं तुम्हें याद करूँगा। और मेरा शुक्र अदा करो तथा मेरी नाशुक्री न करो।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza tum mujhey yaad rakkho main tumhein yaad rakhunga aur mera shukar ada karo, kufran e niyamat na karo
Roman Urdu (Junagarhi)Iss liye tum mera ziker kero mein bhi tumhen yaad keroon ga meri shukar guzari kero aur na shukri say bacho
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाज़ा तुम मुझे याद रक्खो मैं तुम्हें याद रखूंगा और मेरा शुक्र अदा करो, कुफरान ए नियामत न करो
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا استَعينوا بِالصَّبرِ وَالصَّلاةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ مَعَ الصّابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! धैर्य तथा नमाज़ के साथ मदद प्राप्त करो। निःसंदेह अल्लाह धैर्य रखने वालों के साथ है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho sabr aur namaz se madad lo, Allah sabr karne walon ke saath hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Sabar aur namaz kay zariye madad chahao Allah Taalaa sabar kerney walon ka sath deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो सब्र और नमाज से मदद लो, अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है
عَرَبِيوَلا تَقولوا لِمَن يُقتَلُ في سَبيلِ اللَّهِ أَمواتٌ ۚ بَل أَحياءٌ وَلٰكِن لا تَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो अल्लाह की राह में मारे जाएँ, उन्हें मुर्दा न कहो, बल्कि (वे) ज़िंदा हैं, परंतु तुम नहीं समझते।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log Allah ki raah mein maarey jayein unhein murda na kaho, aisey log to haqeeqat mein zinda hain, magar tumhein unki zindagi ka shaoor nahin hota
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa ki raah kay shaheedon ko murda mat kaho woh zinda hain lekin tum nahi samajhtay
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग अल्लाह की राह में हैं मारे जायें उन्हें मुर्दा ना कहो, ऐसे लोग तो हकीकत में जिंदा हैं, मगर तुम्हें उनकी जिंदगी का शूर नहीं होता
عَرَبِيوَلَنَبلُوَنَّكُم بِشَيءٍ مِنَ الخَوفِ وَالجوعِ وَنَقصٍ مِنَ الأَموالِ وَالأَنفُسِ وَالثَّمَراتِ ۗ وَبَشِّرِ الصّابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निश्चय हम तुम्हें भय और भूख तथा धनों, प्राणों और फलों की कमी में से किसी न किसी चीज़ के साथ अवश्य आज़माएँगे। और (ऐ नबी!) सब्र करने वालों को शुभ समाचार सुना दें।
Roman Urdu (Maududi)Aur hum zaroor tumhein khauf o khatar , faaqa kashi (bhook), jaan o maal ke nuqsanaat aur aamadaniyon ke ghatey(nuqsaan) mein mubtila karke tumhari aazmaish karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum kissi na kissi tarah tumhari aazmaish zaroor keren gay dushman kay darr say bhook piyas say maal-o-jaan aur phalon ki kami say aur unn sabar kerney walon ko khushkhabri dey dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)और हम जरूर तुम्हें खौफ ओ खतरा, फाका काशी (भूख), जान ओ माल के नुक्सानात और आदमियों के घाटे(नुक्सान) में मुब्तिला करके तुम्हारी आजमाइश करेंगे
عَرَبِيالَّذينَ إِذا أَصابَتهُم مُصيبَةٌ قالوا إِنّا لِلَّهِ وَإِنّا إِلَيهِ راجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग कि जब उन्हें कोई मुसीबत पहुँचती है, तो कहते हैं : निःसंदेह हम अल्लाह के हैं और निःसंदेह हम उसी की ओर लौटने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)In halaat mein jo log sabr karein aur jab koi museebat padey to kahein ke : “ hum Allah hi ke hain aur Allah hi ki taraf humein palat kar jana hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Jinhen jab koi musibat aati hai to keh diya kertay hain kay hum to khud Allah Taalaa ki milkiyat hain aur hum ussi ki taraf lotney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हालात में जो लोग सब्र करें और जब कोई मुसीबत पड़े तो कहे के: "हम अल्लाह ही के हैं और अल्लाह ही की तरफ हमें पलट कर जाना है"
عَرَبِيأُولٰئِكَ عَلَيهِم صَلَواتٌ مِن رَبِّهِم وَرَحمَةٌ ۖ وَأُولٰئِكَ هُمُ المُهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही लोग हैं जिनपर उनके रब की ओर से कई कृपाएँ तथा बड़ी दया है, और यही लोग मार्गदर्शन पाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhein khush-khabri dedo unpar unke Rubb ki taraf se badi inayat hogi, uski rehmat unpar saya karegi aur aisey hi log raast-ro hain
Roman Urdu (Junagarhi)Unn per unn kay rab ki nawazishen aur rehmaten hain aur yehi log hidayat yaafta hain
Devnagri Urdu (Maududi)उन्हें खुश-खबरी देदो उन्पर उनके रब की तरफ से बड़ी इनायत होगी, उसकी रहमत अनपर साया करेगी और ऐसे ही लोग रस्त-रो हैं
عَرَبِي۞ إِنَّ الصَّفا وَالمَروَةَ مِن شَعائِرِ اللَّهِ ۖ فَمَن حَجَّ البَيتَ أَوِ اعتَمَرَ فَلا جُناحَ عَلَيهِ أَن يَطَّوَّفَ بِهِما ۚ وَمَن تَطَوَّعَ خَيرًا فَإِنَّ اللَّهَ شاكِرٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह सफ़ा और मरवा अल्लाह की निशानियों में से हैं। अतः जो कोई इस घर का हज्ज करे या उम्रा करे, तो उसपर कोई दोष नहीं कि इन दोनों का तवाफ़ करे। और जो कोई स्वेच्छा से भलाई का कार्य करे, तो निःसंदेह अल्लाह (उसकी) क़द्र करने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan safa aur marwa Allah ki nishaniyon mein se hain, lihaza jo shaks baitullah ka hajj ya umra karey, uske liye koi gunaah ki baat nahin ke woh in dono pahadiyon ke darmiyan sayi karle aur jo bariza o ragbat(with a willing heart) koi bhalayi ka kaam karega Allah ko iska ilm hai aur woh iski qadr karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Safa aur marwa Allah Taalaa ki nishaniyon mein say hain iss liye bait ullah ka hajj aur umrah kerney walay per inn ka tawaf ker lenay mein bhi koi gunah nahi apni khushi say bhalaee kerney walon ka Allah qadar daan hai aur unhen khoob janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन सफा और मरवा अल्लाह की निशानियों में से हैं, लिहाजा जो शक्स बैतुल्लाह का हज या उमर करे, उसके लिए कोई गुनाह की बात नहीं के वो इन दोनों पहाड़ों के दरमियां सई कार्ले और जो बरीज़ा ओ रगबत (खुले दिल से) कोई भलाई का काम करेगा अल्लाह को इसका इल्म है और वो इसकी कदर करने वाला है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يَكتُمونَ ما أَنزَلنا مِنَ البَيِّناتِ وَالهُدىٰ مِن بَعدِ ما بَيَّنّاهُ لِلنّاسِ فِي الكِتابِ ۙ أُولٰئِكَ يَلعَنُهُمُ اللَّهُ وَيَلعَنُهُمُ اللّاعِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग उसको छिपाते हैं जो हमने स्पष्ट प्रमाणों और मार्गदर्शन में से उतारा है, इसके बाद कि हमने उसे लोगों के लिए किताब में स्पष्ट कर दिया है, उनपर अल्लाह लानत करता है और सब लानत करने वाले उनपर लानत करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo log hamari nazil ki hui roshan taleemat aur hidayaat ko chupate hain, daraan haal yeh ke hum inhein sab Insano ki rehnumayi ke liye apni kitab mein bayan kar chuke hain, yaqeen jaano ke Allah bhi unpar lanat karta hai aur tamaam lanat karne waley bhi unpar lanat bhejte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log humari utari hui daleelon aur hidayat ko chupatay hain ba wajood yeh kay hum ussay apni kitab mein logon kay liye biyan ker chukay hain unn logon per Allah ki aur tamam laanat kerney walon ki laanat hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग हमारी नाज़िल की हुई रोशन तालीमत और हिदायत को छुपाते हैं, डरन हाल ये के हम इन्हें सब इंसानों की रहनुमाई के लिए अपनी किताब में बयान कर चुके हैं, यकीन जानो के अल्लाह भी अपर लानत करता है और तमाम लानत करने वाले भी अनपर लानत भेजते हैं
عَرَبِيإِلَّا الَّذينَ تابوا وَأَصلَحوا وَبَيَّنوا فَأُولٰئِكَ أَتوبُ عَلَيهِم ۚ وَأَنَا التَّوّابُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु वे लोग जिन्होंने तौबा कर ली और सुधार कर लिया और खोलकर बयान कर दिया, तो ये लोग हैं जिनकी मैं तौबा स्वीकार करता हूँ और मैं ही बहुत तौबा क़बूल करने वाला, अत्यंत दयावान् हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jo is rawish se baaz aa jayein aur apne tarz e amal ki islah karlein aur jo kuch chupate thay usey bayan karne lagein, unko main maaf kardunga aur main bada darguzar karne wala aur reham karne wala hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Magar woh log jo tauba ker len aur islaah ker len aur biyan ker den to mein unn ki tauba qabool ker leta hun aur mein tauba qabool kerney wala aur reham-o-karam kerney wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जो इस रवीश से बाज़ आ जाए और अपने तर्ज़ ए अमल की इस्लाह कार्लें और जो कुछ छुपाते थे उसे बयान करने लगें, उनको मैं माफ कर दूंगा और मैं बड़ा दरगुजार करने वाला और रहम करने वाला हूं
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا وَماتوا وَهُم كُفّارٌ أُولٰئِكَ عَلَيهِم لَعنَةُ اللَّهِ وَالمَلائِكَةِ وَالنّاسِ أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया और इस हाल में मर गए कि वे काफ़िर थे, ऐसे लोग हैं जिनपर अल्लाह की और फ़रिश्तों तथा लोगों की, सब की लानत है।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne kufr ka rawayya ikhtiyar kiya aur kufr ki haalat mein hi jaan di, unpar Allah aur farishton aur tamaam Insano ki lanat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan jo kuffaar apney kufur mein hi marr jayen unn per Allah Taalaa ki farishton ki aur tamam logon ki laanat hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया और कुफ्र की हालत में ही जान दी, उन लोगों ने अल्लाह और फरिश्तों और तमाम इंसानों की लानत है
عَرَبِيخالِدينَ فيها ۖ لا يُخَفَّفُ عَنهُمُ العَذابُ وَلا هُم يُنظَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे हमेशा इसी (दशा) में रहने वाले हैं, न उनसे यातना हल्की की जाएगी और न उन्हें मोहलत दी जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Isi lanat zadahgi ki haalat mein woh hamesha rahenge, na unki saza mein takhfif hogi aur na unhein phir koi dusri mohlat di jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss mein yeh hamesha rahen gay na unn say azab halka kiya jayega aur na unhen dheel di jaye gi
Devnagri Urdu (Maududi)इसी लानत ज़दहगी की हालत में वो हमेशा रहेंगे, ना उनकी सज़ा में तक़फ़ीफ़ होगी और ना उन्हें फिर कोई दूसरी मोहलत दी जाएगी
عَرَبِيوَإِلٰهُكُم إِلٰهٌ واحِدٌ ۖ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ الرَّحمٰنُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम्हारा पूज्य (मा'बूद) एक ही पूज्य (मा'बूद) है, उसके सिवा कोई पूज्य (मा'बूद) नहीं, अत्यंत दयावान्, असीम दयालु है।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara khuda ek hi khuda hai, us rehman aur raheem ke siwa koi aur khuda nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum sab ka mabood aik hi mabood hai uss kay siwa koi mabood-e-bar haq nahi woh boht reham kerney wala aur bara meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा ख़ुदा एक ही खुदा है, उस रहमान और रहीम के सिवा कोई और ख़ुदा नहीं है
عَرَبِيإِنَّ في خَلقِ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَاختِلافِ اللَّيلِ وَالنَّهارِ وَالفُلكِ الَّتي تَجري فِي البَحرِ بِما يَنفَعُ النّاسَ وَما أَنزَلَ اللَّهُ مِنَ السَّماءِ مِن ماءٍ فَأَحيا بِهِ الأَرضَ بَعدَ مَوتِها وَبَثَّ فيها مِن كُلِّ دابَّةٍ وَتَصريفِ الرِّياحِ وَالسَّحابِ المُسَخَّرِ بَينَ السَّماءِ وَالأَرضِ لَآياتٍ لِقَومٍ يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आकाशों और धरती की रचना तथा रात और दिन के बदलने में, तथा उन नावों में जो लोगों को लाभ देने वाली चीज़ें लेकर सागरों में चलती हैं, और उस पानी में जो जो अल्लाह ने आकाश से उतारा, फिर उसके द्वारा धरती को उसकी मृत्यु के पश्चात् जीवित कर दिया और उसमें हर प्रकार के जानवर फैला दिए, तथा हवाओं को फेरने (बदलने) में और उस बादल में, जो आकाश और धरती के बीच वशीभूत किया हुआ है, (इन सब चीज़ों में) उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो समझ-बूझ रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Is haqeeqat ko pehchanne ke liye agar koi nishani aur alamat darkaar hai to) jo log aqal se kaam lete hain unke liye asmaano aur zameen ki saakht (creation) mein, raat aur din ke paiham ek dusre ke baad aane mein, un kashtiyon mein jo Insaan ke nafaa ki cheezein liye huey daryaon aur samandaron mein chalti phirti hain, baarish ke us pani mein jisey Allah upar se barsata hai, phir uske zariye se zameen ko zindagi bakshta hai aur apne isi intezam ki badaulat zameen mein har qism ki jaandaar makhlooq ko phaylata hai, hawaon ki gardish mein, aur un baadalon mein jo asmaan aur zameen ke darmiyan tabey farmaan bana kar rakkhey gaye hain, beshumaar nishaniyan hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmanon aur zamin ki pedaeesh raat din ka hair pher kashtiyon ka logon ko nafa denay wali cheezon ko liye huye samandar mein chalna aasman say pani utaar ker murda zamin ko zinda ker dena iss mein her qisam kay janwaron ko phela dena hawaon kay rukh badalna aur badal jo aasmana ur zamin kay darmiyan musakhhar hain unn mein aqal mandon kay liye qudrat-e-elahee ki nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)(क्या हकीकत को पहचानने के लिए अगर कोई निशानी और आलमत अंधेरा है तो) जो लोग अक़ल से काम लेते हैं उनके लिए आसमानो और ज़मीन की सच्चाई (सृजन) में, रात और दिन के पैहम एक दूसरे के बाद आने में, उन कश्तियों में जो इंसान के नफ़ा की चीज़ों के लिए हुए दरियाँ और समंदरों में चलती फिरती हैं, बारिश के हमारे पानी में जैसे अल्लाह ऊपर से बरसता है, फिर उसके ज़रीए से ज़मीन को जिंदगी बक्शता है और अपनी इसी इंतज़ाम की बदौलत ज़मीन में हर क़िस्म की जानदार मख़लूक को फैलाता है, हवाओं की गर्दिश में, और उन बादलों में जो आसमान और ज़मीन के दरमियान तबे फ़रमान बना कर रख दिए गए हैं, बेशुमार निशानियां हैं
عَرَبِيوَمِنَ النّاسِ مَن يَتَّخِذُ مِن دونِ اللَّهِ أَندادًا يُحِبّونَهُم كَحُبِّ اللَّهِ ۖ وَالَّذينَ آمَنوا أَشَدُّ حُبًّا لِلَّهِ ۗ وَلَو يَرَى الَّذينَ ظَلَموا إِذ يَرَونَ العَذابَ أَنَّ القُوَّةَ لِلَّهِ جَميعًا وَأَنَّ اللَّهَ شَديدُ العَذابِ
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हिन्दी (Al-Omari)कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अल्लाह के सिवा कुछ साझी बना लेते हैं, जिनसे वे अल्लाह के प्रेम जैसा प्रेम करते हैं। तथा वे लोग जो ईमान लाए, अल्लाह से प्रेम में सबसे बढ़कर होते हैं। और काश! वे लोग जिन्होंने अत्याचार किया उस समय को देख लें जब वे यातना को देखेंगे, (तो जान लें) कि निःसंदेह शक्ति सब की सब अल्लाह ही के लिए है और यह कि निःसंदेह अल्लाह बहुत सख़्त अज़ाब वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Magar wehdat e khudawandi par dalalat karne waley in khule khule aasaar ke hotey huey bhi) kuch log aisey hain jo Allah ke siwa dusron ko uska humsar aur madd e muqabil (equals and rivals) banate hain aur unke aisey girwida(adore) hain jaise Allah ke saath girwidgi honi chahiye, halaanke iman rakhne waley log sabse badhkar Allah ko mehboob rakhte hain, kaash jo kuch azaab ko saamne dekhkar unhein soojhne wala hai woh aaj hi in zalimeen ko soojh jaye ke saari taaqatein aur saare ikhtiyaraat Allah hi ke qabze mein hain aur yeh ke Allah saza dene mein bhi bahut sakht hai
Roman Urdu (Junagarhi)Baaz log aisay bhi hain jo Allah kay shareek auron ko thehra ker uss say aisi mohabbat rakhtay hain jaisi mohabbat Allah say honi chahaiye aur eman walay Allah ki mohabbat mein boht sakht hotay hain kaash kay mushrik log jantay jab kay Allah kay azab ko dekh ker (jaan len gay) kay tamam taqat Allah hi ko hai aur Allah Taalaa sakht azab denay wala hai (to hergiz shirk na kertay)
Devnagri Urdu (Maududi)(मगर वेहदत ए ख़ुदावंदी पर दलालत करने वाले खुले खुले आसमां के होते हुए भी) कुछ लोग ऐसे हैं जो अल्लाह के सिवा दूसरो को उसका हमसर और मद्द ए मुक़ाबिल (बराबर और प्रतिद्वंदी) बनाते हैं और उनके ऐसे गिरविदा (प्यार) हैं जैसे अल्लाह के साथ गिरविदगी होनी चाहिए, हलांके ईमान रखने वाले लोग सबसे बढ़कर अल्लाह को मेहबूब रखते हैं, काश जो कुछ अज़ाब को सामने देखकर उन्हें सूझने वाला है वो आज ही जालिमीन को समझ जाए के सारी ताक़तें और सारे इख्तियारात अल्लाह ही के क़ब्ज़े में हैं और ये के अल्लाह सज़ा देने में भी बहुत सक्षम है
عَرَبِيإِذ تَبَرَّأَ الَّذينَ اتُّبِعوا مِنَ الَّذينَ اتَّبَعوا وَرَأَوُا العَذابَ وَتَقَطَّعَت بِهِمُ الأَسبابُ
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हिन्दी (Al-Omari)जब वे लोग जिनका अनुसरण किया गया था, उन लोगों से बिल्कुल अलग हो जाएँगे जिन्होंने (उनकी) पैरवी की और वे यातना को देख लेंगे और उनके आपस के संबंध पूर्णतया समाप्त हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh saza dega us waqt kaifiyat yeh hogi ke wahi peshwa aur rehnuma jinki duniya mein pairwi ki gayi thi apne pairawon se be-taaluqi zahir karenge, magar saza paa kar rahenge aur unke saare asbaab o wasail ka silsila katt jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss waqt paishwa log apney tabey daron say bey zaar hojayen gay aur azab ko apni aankhon say dekh len gay aur kul rishtay naatay toot jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो सज़ा देगा हमें वक़्त कैफियत ये होगी के वही पेशवा और रहनुमा जिनकी दुनिया में जोड़ी की गई थी अपने जोड़े से बे-तालुकी जाहिर करेंगे, मगर सजा पा कर रहेंगे और उनके सारे असबाब ओ वसील का सिलसिला खत्म हो जाएगा
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ اتَّبَعوا لَو أَنَّ لَنا كَرَّةً فَنَتَبَرَّأَ مِنهُم كَما تَبَرَّءوا مِنّا ۗ كَذٰلِكَ يُريهِمُ اللَّهُ أَعمالَهُم حَسَراتٍ عَلَيهِم ۖ وَما هُم بِخارِجينَ مِنَ النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने अनुसरण किया था, कहेंगे : काश! हमारे लिए एक बार पुनः (संसार में) जाना होता, तो हम इनसे वैसे ही बिल्कुल अलग हो जाते, जैसे ये हमसे बिल्कुल अलग हो गए। ऐसे ही अल्लाह उनके कर्मों को उनके लिए अफ़सोस बनाकर दिखाएगा और वे किसी भी तरह आग से निकलने वाले नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh log jo duniya mein unki pairwi karte thay, kahenge ke kaash humko phir ek mauqa diya jata to jis tarah aaj yeh humse bezari zaahir kar rahey hain hum inse bezaar hokar dikha detey, yun Allah in logon ke woh aamaal jo yeh duniya mein kar rahey hain inke saamne is tarah layega ke yeh hasraton aur pashemaniyon ke saath haath malte rahenge, magar aag se nikalne ki koi raah na payenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tabey daar log kehney lagen gay kaash hum duniya ki taraf doobara jayen to hum bhi inn say aisay hi bey zaar hojayen jaisay yeh hum say hain issi tarah Allah Taalaa unhen unn kay aemaal dikhaye ga unn ko hasrat dilaney ko yeh hergiz jahannum say na niklen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और वो लोग जो दुनिया में उनकी जोड़ी बनाते थे, कहेंगे के काश हमको फिर एक मौका दिया जाता है तो जिस तरह आज ये हमसे बेज़ारी जाहिर कर रहे हैं हम इनसे बेज़ार होकर दिखा देते हैं, यूं अल्लाह इन लोगों के वो अमाल जो ये दुनिया में कर रहे हैं इनके सामने इस तरह लाएगा के ये हसरतन और पशेमानियों के साथ हाथ बदलते रहेंगे, मगर आग से निकलना कि कोई राह न पायेगा
عَرَبِييا أَيُّهَا النّاسُ كُلوا مِمّا فِي الأَرضِ حَلالًا طَيِّبًا وَلا تَتَّبِعوا خُطُواتِ الشَّيطانِ ۚ إِنَّهُ لَكُم عَدُوٌّ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो! उन चीज़ों में से खाओ जो धरती में ह़लाल, पाकीज़ा हैं और शैतान के पदचिह्नों का अनुसरण न करो। निःसंदेह वह तुम्हारा खुला शत्रु है।
Roman Urdu (Maududi)Logon! Zameen mein jo halal aur paak cheezein hain unhein khao aur shaytan ke bataye huey raaston par na chalo, woh tumhara khula dushman hai
Roman Urdu (Junagarhi)Logn! Zamin mein jitni bhi halal aur pakeezah cheezen hain unhen khao piyo aur shetani raah per na chalo woh tumhara khula hua dushman hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन! ज़मीन में जो हलाल और पाक चीज़े हैं उन्हें खाओ और शैतान के बताए हुए रस्तों पर ना चलो, वो तुम्हारा खुला दुश्मन है
عَرَبِيإِنَّما يَأمُرُكُم بِالسّوءِ وَالفَحشاءِ وَأَن تَقولوا عَلَى اللَّهِ ما لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह तो तुम्हें बुराई और निर्लज्जता ही का आदेश देता है और यह कि तुम अल्लाह पर वह बात कहो, जो तुम नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Tumhein badhi(vice) aur fahash (indecency) ka hukum deta hai aur yeh sikhata hai ke tum Allah ke naam par woh baatein kaho jinke mutaaliq tumhein ilm nahin hai ke woh Allah ne farmayi hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh tumhen sirf buraee aur bey hayaee ka aur Allah Taalaa per unn baaton kay kehnay ka hukum deta hai jin ka tumhen ilm nahi
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हें बुराई और फ़हाश (अभद्रता) का हुकुम देता है और ये सिखाता है कि तुम अल्लाह के नाम पर वो बातें कहो जिनको मुतालिक तुम्हें इल्म नहीं है के वो अल्लाह ने फरमायी है
عَرَبِيوَإِذا قيلَ لَهُمُ اتَّبِعوا ما أَنزَلَ اللَّهُ قالوا بَل نَتَّبِعُ ما أَلفَينا عَلَيهِ آباءَنا ۗ أَوَلَو كانَ آباؤُهُم لا يَعقِلونَ شَيئًا وَلا يَهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनसे कहा जाता है कि उसका अनुसरण करो जो अल्लाह ने (क़ुरआन) उतारा है, तो कहते हैं : बल्कि हम तो उसका अनुसरण करेंगे जिसपर हमने अपने बाप-दादा को पाया है। क्या अगरचे उनके बाप-दादा न कुछ समझते हों और न मार्गदर्शन पाते हों?
Roman Urdu (Maududi)Inse jab kaha jata hai ke Allah ne jo ehkaam nazil kiye hain unki pairwi karo to jawab dete hain ke hum to usi tareeqe ki pairwi karenge jispar humne apne baap dada ko paya hai, accha agar inke baap dada ne aqal se kuch bhi kaam na liya ho aur raah e raast na payi ho to kya phir bhi yeh unhin ki pairwi kiye chale jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn say jab kabhi kaha jata hai kay Allah Taalaa ki utari hui kitab ki tabeydari kero to jawab detay hain kay hum to iss tareeqay ki pairwi keren gay jiss per hum ney apney baap dadon ko paya go inn kay baap daday bey aqal aur gum kerda raahon mein hon
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे जब कहा जाता है के अल्लाह ने जो एहकाम नाज़िल किये हैं उनकी जोड़ी करो तो जवाब देते हैं के हम तो उसी तारीख की जोड़ी करेंगे जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है, अच्छा अगर इनके बाप दादा ने अक्ल से कुछ भी काम न लिया हो और राह ए रास्ते न पाई हो तो क्या फिर भी ये उनहिन की जोड़ी चले जायेंगे
عَرَبِيوَمَثَلُ الَّذينَ كَفَروا كَمَثَلِ الَّذي يَنعِقُ بِما لا يَسمَعُ إِلّا دُعاءً وَنِداءً ۚ صُمٌّ بُكمٌ عُميٌ فَهُم لا يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों का उदाहरण जिन्होंने कुफ़्र किया, उस व्यक्ति के उदाहरण जैसा है, जो उन जानवरों को पुकारता है, जो पुकार और आवाज़ के सिवा कुछ नहीं सुनते। वे बहरे हैं, गूँगे हैं, अंधे हैं, इसलिए वे नहीं समझते।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log jinhon ne khuda ke bataye huey tareeqe par chalne se inkar kardiya hai inki haalat bilkul aisi hai jaise charwaha jaanwaron ko pukarta hai aur woh haank pukaar ki sada ke siwa kuch nahin suntey. Yeh behre hain , gungay hain andhey hain, isliye koi baat inki samajh mein nahin aati
Roman Urdu (Junagarhi)Kuffaar ki misal unn janwaron ki tarah hai jo apney charwahey ki sirf pukar aur aawaz hi ko suntay hain (samajhtay nahi) woh behray goongay andhay hain enhan aqal nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग जिन्हों ने खुदा के बताए हुए तारीख पर चलने से इंकार कर दिया है इनकी हालत बिल्कुल ऐसी है जैसे चारवाहा जानवरों को पुकारता है और वो हांक पुकार की सदा के सिवा कुछ नहीं सुनते। ये बाहर हैं, गुंगे हैं अंधे हैं, क्योंकि कोई बात इनकी समझ में नहीं आती
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا كُلوا مِن طَيِّباتِ ما رَزَقناكُم وَاشكُروا لِلَّهِ إِن كُنتُم إِيّاهُ تَعبُدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! उन पवित्र चीज़ों में से खाओ, जो हमने तुम्हें प्रदान की हैं तथा अल्लाह का शुक्र अदा करो, यदि तुम केवल उसी की इबादत करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, agar tum haqeeqat mein Allah hi ki bandagi karne waley ho to jo paak cheezein humne tumhein bakshi hain unhein be-takalluf khao aur Allah ka shukar ada karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Jo pajeeza cheezen hum ney tumhen dey rakhi hain unhen khao piyo aur Allah Taalaa ka shukar kero agar tum khaas ussi ki ibadat kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम हकीकत में अल्लाह ही की बंदगी करने वाले हो तो जो पाक चीजें हमने तुम्हें बख्शी हैं उन्हें बे-तकल्लुफ खाओ और अल्लाह का शुकर अदा करो
عَرَبِيإِنَّما حَرَّمَ عَلَيكُمُ المَيتَةَ وَالدَّمَ وَلَحمَ الخِنزيرِ وَما أُهِلَّ بِهِ لِغَيرِ اللَّهِ ۖ فَمَنِ اضطُرَّ غَيرَ باغٍ وَلا عادٍ فَلا إِثمَ عَلَيهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उस (अल्लाह) ने तो तुमपर केवल मुर्दार और ख़ून और सूअर का माँस और हर वह चीज़ हराम की है, जिसपर ग़ैरुल्लाह (अल्लाह के अलावा) का नाम पुकारा जाए। फिर जो (इनमें से कोई चीज़ खाने पर) विवश हो जाए, इस हाल में कि वह न अवज्ञा करने वाला हो और न सीमा से आगे बढ़ने वाला, तो उसपर कोई दोष नहीं। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki taraf se agar koi pabandi tumpar hai to woh yeh hai ke murdaar na khao, khoon se aur suwar (swine) ke gosht se parheiz karo aur koi aisi cheez na khao jispar Allah ke siwa kisi aur ka naam liya gaya ho, haan jo shaks majboori ki haalat mein ho aur woh inmein se koi cheez kha le bagair iske ke woh kanoon shikani ka irada rakhta ho ya zaroorat ki hadd se tajawuz karey, to uspar kuch gunaah nahin. Allah bakshne wala aur reham karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum per murda aur (baha hua) khoon aur sooar ka gosht aur her woh cheez jiss per Allah kay siwa doosron ka naam pukara gaya ho haram hai phir jo majboor hojaye aur hadd say barhney wala aur ziyadti kerney wala na ho uss per inn kay khaney mein koi gunah nahi Allah Taalaa baksish kerney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की तरफ से अगर कोई बंदी तुम्पर है तो वो ये है के मुर्दार ना खाओ, खून से और सूअर (सूअर) के गोश्त से परहेज करो और कोई ऐसी चीज ना खाओ जिस्पर अल्लाह के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो, हां जो शक्स मजबूरी की हालात में हो और वो इनमें से कोई चीज खा ले बिना इसके के वो कानून शिकानी का इरादा रखता हो या जरूरत की हद से तजावुज़ करे, तो उसपर कुछ गुनाह नहीं। अल्लाह बख्शने वाला और रहम करने वाला है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يَكتُمونَ ما أَنزَلَ اللَّهُ مِنَ الكِتابِ وَيَشتَرونَ بِهِ ثَمَنًا قَليلًا ۙ أُولٰئِكَ ما يَأكُلونَ في بُطونِهِم إِلَّا النّارَ وَلا يُكَلِّمُهُمُ اللَّهُ يَومَ القِيامَةِ وَلا يُزَكّيهِم وَلَهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग छिपाते हैं जो अल्लाह ने किताब में से उतारा है और उसके बदले थोड़ा मूल्य प्राप्त करते हैं, वे लोग अपने पेटों में आग के सिवा कुछ नहीं खा रहे। तथा न अल्लाह क़ियामत के दिन उनसे बात करेगा और न उन्हें पाक करेगा और उनके लिए दुःखदायी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Haqq yeh hai ke jo log un ehkam ko chupate hain jo Allah ne apni kitab mein nazil kiye hain aur thode se duniyavi faiydon par unhein bhent chadhate hain woh darasal apne pait aag se bhar rahey hain , qayamat ke roz Allah hargiz unse baat na karega, na unhein pakeeza therayega, aur unke liye dardnaak saza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jo log Allah Taalaa ki utari hui kitab chupatay hain ussay thori thori si qeemat per baichtay hain yaqeen mano kay yeh apney pet mein aag bhar rahey hain qayamat kay din Allah unn say baat bhi na keray ga na unhen pak keray ga bulkay unn kay liye dard naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)हक़ ये है के जो लोग उन एहकाम को छुपाते हैं जो अल्लाह ने अपनी किताब में नाज़िल किए हैं और थोड़े से दुनिया फ़ायदों पर उन्हें भेंट चढ़ते हैं वो दरसल अपने पैत आग से भर रहे हैं, कयामत के रोज़ अल्लाह हरगिज उनसे बात ना करेगा, ना उन्हें पाकीजा ठहरेगा, और उनके लिए दर्दनाक सजा है
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ اشتَرَوُا الضَّلالَةَ بِالهُدىٰ وَالعَذابَ بِالمَغفِرَةِ ۚ فَما أَصبَرَهُم عَلَى النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)यही लोग हैं, जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही तथा क्षमा के बदले यातना ख़रीद ली। तो वे आग पर कितना अधिक सब्र करने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hain jinhon ne hidayat ke badle zalalat kharidi aur magfirat ke badle azaab moal le liya, kaisa ajeeb hai inka hausla ke jahannum ka azaab bardasht karne ke liye tayyar hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh woh log hain jinhon ney gumrahi ko hidayat kay badlay aur azab ko maghfirat kay badlay khareed liya hai yeh log aag ka azab kitan bardasht kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग हैं जिन्हों ने हिदायत के बदले ज़लालत खरीदी और मगफिरत के बदले अज़ाब मोल ले लिया, कैसा अजीब है इनका हौसला के जहन्नुम का अज़ाब बर्दाश्त करने के लिए तैयार हैं
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ نَزَّلَ الكِتابَ بِالحَقِّ ۗ وَإِنَّ الَّذينَ اختَلَفوا فِي الكِتابِ لَفي شِقاقٍ بَعيدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)यह (यातना) इस कारण है कि निःसंदेह अल्लाह ने यह पुस्तक सत्य के साथ उतारी है, और निःसंदेह जिन लोगों ने पुस्तक में मतभेद किया है, निश्चय वे बहुत दूर के विरोध में (पड़े) हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh sab kuch is wajah se hua ke Allah ne to theek theek haqq ke mutabiq kitab nazil ki thi magar jin logon ne kitab mein ikhtilafat nikale woh apne jhagdon mein haqq se bahut door nikal gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Inn azabon ka baees yeh hi hai kay Allah Taalaa ney sachi kitab utari aur iss kitab mein ikhtilaf kerney walay yaqeenan door kay khilaf mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये सब कुछ इस वजह से हुआ के अल्लाह ने तो ठीक ठीक हक़ के मुताबिक़ किताब नाज़िल की थी मगर जिन लोगों ने किताब में इख़्तिलाफ़ात निकला वो अपने झगड़े में हक़ से बहुत दूर निकल गए
عَرَبِي۞ لَيسَ البِرَّ أَن تُوَلّوا وُجوهَكُم قِبَلَ المَشرِقِ وَالمَغرِبِ وَلٰكِنَّ البِرَّ مَن آمَنَ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ وَالمَلائِكَةِ وَالكِتابِ وَالنَّبِيّينَ وَآتَى المالَ عَلىٰ حُبِّهِ ذَوِي القُربىٰ وَاليَتامىٰ وَالمَساكينَ وَابنَ السَّبيلِ وَالسّائِلينَ وَفِي الرِّقابِ وَأَقامَ الصَّلاةَ وَآتَى الزَّكاةَ وَالموفونَ بِعَهدِهِم إِذا عاهَدوا ۖ وَالصّابِرينَ فِي البَأساءِ وَالضَّرّاءِ وَحينَ البَأسِ ۗ أُولٰئِكَ الَّذينَ صَدَقوا ۖ وَأُولٰئِكَ هُمُ المُتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)नेकी केवल यही नहीं कि तुम अपने मुँह पूर्व और पश्चिम की ओर फेर लो! बल्कि असल नेकी तो उसकी है, जो अल्लाह और अंतिम दिन (आख़िरत) और फ़रिश्तों और पुस्तकों और नबियों पर ईमान लाए, और धन दे उसके मोह के बावजूद रिशतेदारों और अनाथों और निर्धनों और यात्री तथा माँगने वालों को और गर्दनें छुड़ाने में, और नमाज़ क़ायम करे और ज़कात दे, और जो अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने वाले हैं जब प्रतिज्ञा करें, और जो तंगी और कष्ट में और लड़ाई के समय धैर्य रखने वाले हैं। यही लोग हैं जो सच्चे सिद्ध हुए तथा यही (अल्लाह से) डरने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Neki yeh nahin hai ke tumne apne chehre mashriq (east) ki taraf karliye ya magrib(west) ki taraf, balke neki yeh hai ke aadmi Allah ko aur yaum e aakhir aur malaika ko aur Allah ki nazil ki hui kitab aur uske paighambaron ko dil se maane aur Allah ki muhabbat mein apna dil pasand maal rishtedaaron aur yateemon par, miskeeno aur musafiron par, madad ke liye haath phaylane walon par aur ghulamo ki rihayi par kharch karey, namaz qayam karey aur zakaat de aur neik woh log hain ke jab ahad karein to usey wafa karein, aur tanggi o museebat ke waqt mein aur haqq o baatil ki jung mein sabr karein, yeh hain raast baaz log aur yahi log muttaqi (pious) hain
Roman Urdu (Junagarhi)Sari achaee mashriq-o-maghrib ki taraf mun kerney mein hi nahi bulkay acha woh shaks hai jo Allah Taalaa per qayamat kay din per aur farishton per kitab ullah per aur nabiyon per eman rakhney wala ho jo maal say mohabbat kerney kay bawajood qarabat daron yateemon miskeenon musafiron aur sawal kerney walon ko dey ghulamon ko aazad keray namaz ki pabandi aur zakat ki adaeegi keray jab wada keray tab ussay poora keray tangdast dukh dard aur laraee kay waqt sabar keray yehi sachay log hain aur yehi perhezgar hain
Devnagri Urdu (Maududi)नेकी ये नहीं है के तुमने अपने चेहरे मशरिक (पूर्व) की तरफ करलिये या मगरिब (पश्चिम) की तरफ, बलके नेकी ये है कि आदमी अल्लाह को और यौम ए आखिर और मलिका को और अल्लाह की नाज़िल की हुई किताब और उसके पैगम्बरों को दिल से माने और अल्लाह की मुहब्बत में अपना दिल पसंद माल रिश्तेदारों और यतीमों पर, मिस्किनो और मुसाफ़िरों पर, मदद के लिए हाथ फैलाने वालों पर और ग़ुलामों की रिहाई पर ख़र्च करे, नमाज़ क़याम करे और ज़कात दे और नेक वो लोग हैं के जब अहद करें तो उसे वफ़ा करें, और तांगी ओ मुसीबत के वक़्त में और हक़ ओ बातिल की जंग में सब्र करें, ये हैं रस्त बाज़ लोग और यही लोग मुत्तक़ी (पवित्र) हैं
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا كُتِبَ عَلَيكُمُ القِصاصُ فِي القَتلَى ۖ الحُرُّ بِالحُرِّ وَالعَبدُ بِالعَبدِ وَالأُنثىٰ بِالأُنثىٰ ۚ فَمَن عُفِيَ لَهُ مِن أَخيهِ شَيءٌ فَاتِّباعٌ بِالمَعروفِ وَأَداءٌ إِلَيهِ بِإِحسانٍ ۗ ذٰلِكَ تَخفيفٌ مِن رَبِّكُم وَرَحمَةٌ ۗ فَمَنِ اعتَدىٰ بَعدَ ذٰلِكَ فَلَهُ عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! तुमपर क़त्ल किए गए व्यक्तियों के बारे में क़िसास (बदला लेना) फ़र्ज़ (अनिवार्य) कर दिया गया है। आज़ाद के बदले आज़ाद, ग़ुलाम के बदले ग़ुलाम और औरत के बदले औरत (को क़त्ल किया जाएगा)। फिर जिसे उसके भाई की ओर से कुछ भी क्षमा कर दिया जाए, तो ऐसे में सामान्य रीति के अनुसार (क़ातिल का) अनुसरण करना चाहिए और भले तरीक़े से उसके पास पहुँचा देना चाहिए। यह तुम्हारे पालनहार की ओर से एक प्रकार की सुविधा तथा एक दया है। फिर जो इसके बाद अत्याचार करे, तो उसके लिए दर्दनाक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, tumhare liye qatal ke muqaddamo mein qisas (retribution) ka hukum likh diya gaya hai. Azad aadmi ne qatal kiya ho to us azad hi se badla liya jaye, ghulam qatil ho to woh ghulam hi qatal kiya jaye, aur aurat is jurm ki murtakib ho to us aurat hi se qisas liya jaye, haan agar kisi qatil ke saath iska bhai kuch narmi karne ke liye tayyar ho to maroof tareeqe ke mutabiq khoon baha (blood money) ka tasfiya hona chahiye aur qatil ko lazim hai ke raasti ke saath khoon baha ada karey, yeh tumhare Rubb ki taraf se takhfif aur rehmat hai, ispar bhi jo zyadati karey uske liye dardnaak saza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walon! Tum per maqtoolon ka qisass lena farz kiya gaya hai aazad aazad kay badlay ghulam ghulam kay badlay aurat aurat kay badlay. Haan jiss kissi ko uss kay bhai kay badlay moafi dey di jaye ussay bhalaee ki ittaba kerni chahaiye aur aasani kay sath deeyat ada kerni chahaiye. Tumharay rab ki taraf say yeh takhfeef aur rehmat hai iss kay baad bhi jo sirkashi keray ussay dard naak azab hoga
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारे लिए क़तल के मुक़द्दमो में क़िस्स (प्रतिशोध) का हुकुम लिख दिया गया है। आज़ाद आदमी ने क़त्ल किया हो तो हमें आज़ाद हाय से बदला लिया जाए, ग़ुलाम क़ातिल हो तो वो ग़ुलाम हाय क़ातिल किया जाए, और औरत इस जुर्म की मुर्तकीब हो तो हमें औरत हाय से क़िस्स लिया जाए, हाँ अगर किसी कातिल के साथ इसका भाई कुछ नरमी करने के लिए तैयार हो तो मारूफ तारीख के मुताबिक खून बहा (खून से पैसा) का तसफिया होना चाहिए और कातिल को लाज़िम है के रास्ते के साथ खून बहा अदा करे, ये तुम्हारे रब की तरफ से तकफीफ और रहमत है, इसपर भी जो ज्यादा करे उसके लिए दर्दनाक सजा है
عَرَبِيوَلَكُم فِي القِصاصِ حَياةٌ يا أُولِي الأَلبابِ لَعَلَّكُم تَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और ऐ बुद्धि वालो! तुम्हारे लिए क़िसास (बदला) लेने में जीवन है, ताकि तुम तक़वा अपनाओ।
Roman Urdu (Maududi)(Aqal o khird rakhne walon)! Tumhare liye qisas mein zindagi hai, umeed hai ke tum is kanoon ki khilaf warzi se parheiz karoge
Roman Urdu (Junagarhi)Aqal mandon! Qisass mein tumharay liye zindagi hai iss baees tum (qatal-e-na haq say) ruko gay
Devnagri Urdu (Maududi)(अक़ल ओ खिरद रखने वालों)! तुम्हारे लिए क़िसास में ज़िन्दगी है, उम्मीद है कि तुम इस क़ानून की ख़िलाफ़त वारज़ी से परहेज़ करोगे
عَرَبِيكُتِبَ عَلَيكُم إِذا حَضَرَ أَحَدَكُمُ المَوتُ إِن تَرَكَ خَيرًا الوَصِيَّةُ لِلوالِدَينِ وَالأَقرَبينَ بِالمَعروفِ ۖ حَقًّا عَلَى المُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब तुममें से किसी की मृत्यु का समय आ पहुँचे और वह धन छोड़ रहा हो, तो उसपर माता-पिता और रिश्तेदारों के लिए अच्छे तरीक़े से वसिय्यत करना ज़रूरी कर दिया गया है। यह अल्लाह से डरने वालों पर सुनिश्चित (आवश्यक) है।
Roman Urdu (Maududi)Tum par farz kiya gaya hai ke jab tum mein se kisi ki maut ka waqt aaye aur woh apne pichey maal chodh raha ho, to walidain aur rishtedaaron ke liye maroof tareeqe se wasiyat karey, yeh haqq hai muttaqi logon par
Roman Urdu (Junagarhi)Tum per farz ker diya gaya hai kay jab tum mein say koi marney lagay aur maal chor jata ho to apney maa baap aur qarabat daron kay liye achai kay sath waseeyat ker jaye perhezgaron per yeh haq aur sabit hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम पर फ़र्ज़ किया गया है कि जब तुम में से किसी की मौत का वक़्त आए और वो अपने पीछे माल छोड़ रहा हो, तो वालिदाएं और रिश्तेदारों के लिए मारूफ़ तारीख़े से वसीयत करे, ये हक़ है मुत्तक़ी लोगों पर
عَرَبِيفَمَن بَدَّلَهُ بَعدَما سَمِعَهُ فَإِنَّما إِثمُهُ عَلَى الَّذينَ يُبَدِّلونَهُ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَميعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जो व्यक्ति उसे उसके सुनने के बाद बदल दे, तो उसका पाप उन्हीं लोगों पर है, जो उसे बदल दें। निश्चय अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Phir jinhon ne wasiyat suni aur baad mein usey badal dala to iska gunaah un badalne walon par hoga, Allah sabkuch sunta aur jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Abb jo shaks issay sunney kay baad badal dey uss ka gunah badlaney walay per hi hoga waqaee Allah Taalaa sunney wala janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जिन्हों ने वसीयत सुनी और बाद में उसे बदल डाला तो इसका गुनाह उन बदलने वालों पर होगा, अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है
عَرَبِيفَمَن خافَ مِن موصٍ جَنَفًا أَو إِثمًا فَأَصلَحَ بَينَهُم فَلا إِثمَ عَلَيهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु जिस व्यक्ति को किसी वसीयत करने वाले से किसी प्रकार के पक्षपात या पाप का डर हो, फिर वह उनके बीच सुधार कर दे, तो उसपर कोई पाप नहीं। निश्चय अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jisko yeh andesha ho ke wasiyat karne waley ne nadanishta ya qasdan haqq talafi ki hai aur phir maamle se taaluq rakhne walon ke darmiyan woh islah karey, to uspar kuch gunaah nahin hai, Allah bakshne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Haan jo shaks waeeyat kerney walay ki janib daari ya gunah ki waseeyat ker denay say daray pus woh inn mein aapas mein islaah kera dey to uss per gunah nahi Allah Taalaa bakshney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जिसको ये अंदेशा हो के वसीयत करने वाले ने नदानिश्ता या क़स्दन हक़ तलाफ़ी की है और फिर मामले से तालुक़ रखने वालों के दरमियान वो इस्लाह करे, तो उसपर कुछ गुनाह नहीं है, अल्लाह बख्शने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا كُتِبَ عَلَيكُمُ الصِّيامُ كَما كُتِبَ عَلَى الَّذينَ مِن قَبلِكُم لَعَلَّكُم تَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! तुमपर रोज़ा रखना फ़र्ज़ (अनिवार्य) कर दिया गया है, जैसे उन लोगों पर फ़र्ज़ (अनिवार्य) किया गया जो तुमसे पहले थे, ताकि तुम परहेज़गार बन जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, tumpar roze farz kardiye gaye jis tarah tumse pehle ambiya ke pairawon par farz kiye gaye thay, issey tawaqqu hai ke tum mein taqwa ki siffat paida hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tum per rozay rakhna farz kiya gaya jiss tarah tum say pehlay logon per farz kiye gaye thay takay tum taqwa ikhtiyar kero
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम रोज़ फ़र्ज़ करदिये गए जिस तरह तुमसे पहले अंबिया के जोड़े पर फ़र्ज़ किए गए थे, इस्से तवाक्कु है के तुम में तक़वा की सिफ़त पैदा होगी
عَرَبِيأَيّامًا مَعدوداتٍ ۚ فَمَن كانَ مِنكُم مَريضًا أَو عَلىٰ سَفَرٍ فَعِدَّةٌ مِن أَيّامٍ أُخَرَ ۚ وَعَلَى الَّذينَ يُطيقونَهُ فِديَةٌ طَعامُ مِسكينٍ ۖ فَمَن تَطَوَّعَ خَيرًا فَهُوَ خَيرٌ لَهُ ۚ وَأَن تَصوموا خَيرٌ لَكُم ۖ إِن كُنتُم تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)गिने हुए चंद दिनों में। फिर तुममें से जो बीमार हो, अथवा किसी यात्रा पर हो, तो दूसरे दिनों से गिनती पूरी करना है। और जो लोग इसकी शक्ति रखते हों (परंतु रोज़ा न रखें), उनपर फ़िदया एक निर्धन का खाना है। फिर जो व्यक्ति स्वेच्छा से नेकी करे, तो वह उसके लिए बेहतर है। और तुम्हारा रोज़ा रखना तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम जानते हो।
Roman Urdu (Maududi)Chandh muqarrar dino ke roze hain, agar tum mein se koi bimaar ho, ya safar par ho to dusre dino mein utni hi tadaad poori karle aur jo log roza rakhne ki qudrat rakhte hon (phi na rakhein) to woh fidya dein, ek roze ka fidiya ek miskeen ko khana khilana hai aur jo apni khushi se kuch zyada bhalayi karey to yeh usi ke liye behtar hai, lekin agar tum samjho to tumhare haqq mein accha yahi hai ke roza rakkho
Roman Urdu (Junagarhi)Ginti kay chand hi din hain lekin tum mein say jo shaks beemar ho ya safar mein ho to woh aur dinon mein ginti ko poora ker ley aur iss ki taqat rakhney walay fidiye mein aik miskeen ko khana den phir jo shaks neki mein sabqat keray woh ussi kay liye behtar hai lekin tumharay haq mein behtareen kaam rozay rakhna hi hai agar tum ba ilm ho
Devnagri Urdu (Maududi)चंद मुक़र्रर दीनो के रोज़ हैं, अगर तुम में से कोई बीमार हो, या सफ़र पर हो तो दूसरे दिनों में उतनी ही तड़प पूरी करले और जो लोग रोज़ा रखने की क़ुदरत रखते हों (फी ना रखें) तो वो फ़िद्या दीन, एक रोज़ का फ़िदिया एक मिसकीन को खाना खिलाना है और जो अपनी ख़ुशी से कुछ ज़्यादा भलाई करे तो ये उसके लिए बेहतर है, लेकिन अगर तुम समझो तो तुम्हारे हक़ में अच्छा यहीं है के रोज़ा रक्खो
عَرَبِيشَهرُ رَمَضانَ الَّذي أُنزِلَ فيهِ القُرآنُ هُدًى لِلنّاسِ وَبَيِّناتٍ مِنَ الهُدىٰ وَالفُرقانِ ۚ فَمَن شَهِدَ مِنكُمُ الشَّهرَ فَليَصُمهُ ۖ وَمَن كانَ مَريضًا أَو عَلىٰ سَفَرٍ فَعِدَّةٌ مِن أَيّامٍ أُخَرَ ۗ يُريدُ اللَّهُ بِكُمُ اليُسرَ وَلا يُريدُ بِكُمُ العُسرَ وَلِتُكمِلُوا العِدَّةَ وَلِتُكَبِّرُوا اللَّهَ عَلىٰ ما هَداكُم وَلَعَلَّكُم تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)रमज़ान का महीना वह है, जिसमें क़ुरआन उतारा गया, जो लोगों के लिए मार्गदर्शन है तथा मार्गदर्शन और (सत्य एवं असत्य के बीच) अंतर करने के स्पष्ट प्रमाण हैं। अतः तुममें से जो व्यक्ति इस महीने में उपस्थित हो, तो वह इसका रोज़ा रखे। तथा जो बीमार हो अथवा किसी यात्रा पर हो, तो दूसरे दिनों से गिनती पूरी करना है। अल्लाह तुम्हारे साथ आसानी चाहता है, तुम्हारे साथ तंगी नहीं चाहता। और ताकि तुम गिनती पूरी करो और ताकि तुम इस बात पर अल्लाह की महिमा का वर्णन करो कि उसने तुम्हें मार्गदर्शन प्रदान किया और ताकि तुम उसका शुक्र अदा करो।
Roman Urdu (Maududi)Ramazan woh mahina hai jismein Quran nazil kiya gaya jo Insaano ke liye sarasar hidayat hai aur aisi wazey taleemaat par mushtamil hai jo raah e raast dikhane wali aur haqq o baatil ka farq khol kar rakh dene wali hai, lihaza ab se jo shaks is mahine ko paye usko lazim hai ke is poorey mahine ke roze rakkhey aur jo koi mareez ho ya safar par ho to woh dusre dino mein rozon ki tadaad poori karey. Allah tumhare saath narmi karna chahta hai, sakhti karna nahin chahta, isliye yeh tareeqa tumhein bataya jaa raha hai taa-ke tum rozon ki tadaad poori kar sako aur jis hidayat se Allah ne tumhein sarfaraz kiya hai uspar Allah ki kibriyayi ka izhar o aitraf karo aur shukarguzar bano
Roman Urdu (Junagarhi)Maah-e-ramzan woh hai jiss mein quran utaara gaya jo logon ko hidayat kerney wala hai aur jiss mein hidayat ki aur haq-o-baatil ki tameez ki nishaniyan hain tum mein say jo shaks iss maheeney ko paye ussay roza rakhna chahaiye haan jo beemar ho ya musafir ho ussay doosray dinon mein yeh ginti poori kerni chahaiye Allah Taalaa ka irada tumharay sath aasani ka hai sakhti ka nahi woh chahata hai kay tum ginti poori ker lo aur Allah Taalaa ki di hui hidayat per uss ki baraiyan biyan kero aur uss ka shukar kero
Devnagri Urdu (Maududi)रमज़ान वो महीना है जिसमें कुरान नाज़िल किया गया जो इंसानों के लिए सरसर हिदायत है और ऐसी वाज़े तालीमात पर मुश्तमिल है जो राह ए रस्त दिखने वाली और हक़ ओ बातिल का फर्क खोल कर रख देने वाली है, लिहाज़ा अब से जो शक्स इस माहीने को पाए उसको लाज़िम है के इस पूरे माहीने के रोज़ रखे और जो कोई मरीज़ हो या सफ़र पर हो तो वो दूसरे दिनो में रोज़ की तदाद पूरी करे। अल्लाह तुम्हारे साथ नरमी करना चाहता है, शक्ति करना नहीं चाहता, इसलिए ये तारीख तुम्हें बता रहा है ता-के तुम रोज़ों की तदाद पूरी कर सको और जिस हिदायत से अल्लाह ने तुम्हें सरफराज किया है उसपर अल्लाह की किताब का इज़हार ओ एतराफ करो और शुकरगुज़र बानो
عَرَبِيوَإِذا سَأَلَكَ عِبادي عَنّي فَإِنّي قَريبٌ ۖ أُجيبُ دَعوَةَ الدّاعِ إِذا دَعانِ ۖ فَليَستَجيبوا لي وَليُؤمِنوا بي لَعَلَّهُم يَرشُدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) जब मेरे बंदे आपसे मेरे बारे में पूछें, तो निश्चय मैं (उनसे) क़रीब हूँ। मैं पुकारने वाले की दुआ क़बूल करता हूँ जब वह मुझे पुकारता है। तो उन्हें चाहिए कि वे मेरी बात मानें तथा मुझपर ईमान लाएँ, ताकि वे मार्गदर्शन पाएँ।
Roman Urdu (Maududi)(Aur aey Nabi)! Mere bandey agar tumse mere mutaaliq puchein, to unhein bata do ke main unse kareeb hi hoon, pukaarne wala jab mujhey pukarta hai, mai uski pukaar sunta aur jawab deta hoon, lihaza unhein chahiye ke meri dawat par labbaik kahein aur mujhpar iman layein, yeh baat tum unhein suna do, shayad ke woh raah e raast paa lein
Roman Urdu (Junagarhi)Jab meray banday meray baray mein aap say sawal keren to aap keh den kay mein boht hi qarib hun her pukarney walay ki pukar ko jab kabhi woh mujhay pukaray qabool kerta hun iss liye logon ko bhi chahaiye kay woh meri baat maan liya keren aur mujh per eman rakhen yehi unn ki bhalaee ka baees hai
Devnagri Urdu (Maududi)(और ऐ नबी)! मेरे बंदे अगर तुमसे मेरे मुतालिक पूछें, तो उन्हें बता दो के मैं उनसे करीब ही हूं, पुकारने वाला जब मुझे पुकारता है, मैं उसकी पुकार सुनता और जवाब देता हूं, लिहाजा उन्हें चाहिए के मेरी दावत पर लब्बैक कहें और मुझपर ईमान लायें, ये बात तुम उन्हें सुना दो, शायद के वो राह ए रास्ते पा लें
عَرَبِيأُحِلَّ لَكُم لَيلَةَ الصِّيامِ الرَّفَثُ إِلىٰ نِسائِكُم ۚ هُنَّ لِباسٌ لَكُم وَأَنتُم لِباسٌ لَهُنَّ ۗ عَلِمَ اللَّهُ أَنَّكُم كُنتُم تَختانونَ أَنفُسَكُم فَتابَ عَلَيكُم وَعَفا عَنكُم ۖ فَالآنَ باشِروهُنَّ وَابتَغوا ما كَتَبَ اللَّهُ لَكُم ۚ وَكُلوا وَاشرَبوا حَتّىٰ يَتَبَيَّنَ لَكُمُ الخَيطُ الأَبيَضُ مِنَ الخَيطِ الأَسوَدِ مِنَ الفَجرِ ۖ ثُمَّ أَتِمُّوا الصِّيامَ إِلَى اللَّيلِ ۚ وَلا تُباشِروهُنَّ وَأَنتُم عاكِفونَ فِي المَساجِدِ ۗ تِلكَ حُدودُ اللَّهِ فَلا تَقرَبوها ۗ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ آياتِهِ لِلنّاسِ لَعَلَّهُم يَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारे लिए रोज़े की रात में अपनी स्त्रियों से सहवास करना ह़लाल कर दिया गया है। वे तुम्हारे लिए वस्त्र हैं तथा तुम उनके लिए वस्त्र हो। अल्लाह ने जान लिया कि तुम अपने आपसे ख़यानत करते थे। तो उसने तुमपर दया करते हुए तुम्हारी तौबा स्वीकार कर ली तथा तुम्हें क्षमा कर दिया। तो अब तुम उनसे (रात में) सहवास करो और जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिखा है उसे तलब करो, तथा खाओ और पियो, यहाँ तक कि तुम्हारे लिए भोर की सफेद धारी रात की काली धारी से स्पष्ट हो जाए, फिर रोज़े को रात (सूर्य डूबने) तक पूरा करो। और उनसे सहवास न करो, जबकि तुम मस्जिदों में ऐतिकाफ़ में हो। ये अल्लाह की सीमाएँ हैं, अतः इनके क़रीब न जाओ। इसी प्रकार अल्लाह लोगों के लिए अपनी आयतों को स्पष्ट करता है, ताकि वे बच जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Tumhare liye rozon ke zamane mein raaton ko apni biwiyon ke paas jana halal kardiya gaya hai, woh tumhare liye libas hain aur tum unke liye. Allah ko maloom ho gaya ke tumlog chupke chupke apne aap se khayanat kar rahey thay, magar usne tumhara kasoor maaf kardiya aur tumse darguzar farmaya , ab tum apni biwiyon ke saath shab-baashi (intercourse) karo aur jo lutf Allah ne tumhare liye jayiz kardiya hai, usey hasil karo, neiz raaton ko khao pio yahan tak ke tumko syahi e shab ki dhari se sapedha subh ki dhari numaya nazar aa jaye tab yeh sab kaam chodh kar raat tak apna roza poora karo aur jab tum masjid mein mautakif (itteqaf mein) hon to biwiyon se mubashrat na karo, yeh Allah ki bandhi hui haddein hain, inke kareeb ba phatakna, is tarah Allah apne ehkam logon ke liye ba-sarahat (clearly) bayan karta hai, tawaqqu hai ke woh galat rawiyye se bachenge
Roman Urdu (Junagarhi)Rozay ki raaton mein apni biwiyon say milna tumharay liye halal kiya gaya woh tumhara libas hain aur tum unn kay libas ho tumhari posheeda khayanaton ka Allah Taalaa ko ilm hai uss ney tumhari tauba qabool farma ker tum say dar guzar farma liya abb tumhen inn say mubashirat ki aur Allah Taalaa ki likhi hui cheez ko talash kerney ki ijazat hai tum khatay peetay raho yahan tak kay subha ka safaid dhaga siyah dhagay say zahir hojaye. Phir raat tak rozay ko poora kero aur aurton say uss waqt mubashirat na kero jab kay tum masjidon mein aeytikaaf mein ho. Yeh Allah Taalaa ki hudood hain tum unn kay qarib bhi na jao. Issi tarah Allah Taalaa apni aayaten logon kay liye biyan farmata hai takay woh bachen
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारे लिए रोज़ों के ज़माने में रातों को अपनी बीवीयों के पास जाना हलाल कर दिया गया है, वो तुम्हारे लिए लिबास हैं और तुम उनके लिए। अल्लाह को मालूम हो गया के तुमलोग चुपके-चुपके अपने आप से ख़यानत कर रहे थे, मगर उसने तुम्हारा कसूर माफ कर दिया और तुमसे दरगुज़र फरमाया, अब तुम अपनी बीवीयों के साथ शब-बाशी (संभोग) करो और जो लुत्फ़ अल्लाह ने तुम्हारे लिए जायज़ करदिया है, उसे हासिल किया करो, नई रातों को खाओ पियो यहां तक ​​के तुमको स्याही ए शब की धारी से सपेधा सुभ की धारी नुमाया नजर आ जाए तब ये सब काम छोड़ कर रात तक अपना रोजा पूरा करो और जब तुम मस्जिद में मौताकिफ (इत्तेकाफ में) होन तो बिवियों से मुबारकत ना करो, ये अल्लाह की बंदिश हुई हदें हैं, इनके करीब बा फटकना, इस तरह अल्लाह अपने एहकाम लोगों के लिए बा-सरहत (स्पष्ट रूप से) बयान करता है, तवक्कू है के वो गलत राविये से बचेंगे
عَرَبِيوَلا تَأكُلوا أَموالَكُم بَينَكُم بِالباطِلِ وَتُدلوا بِها إِلَى الحُكّامِ لِتَأكُلوا فَريقًا مِن أَموالِ النّاسِ بِالإِثمِ وَأَنتُم تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आपस में एक-दूसरे का धन अवैध रूप से न खाओ और न उन्हें अधिकारियों के पास ले जाओ, ताकि लोगों के धन का कुछ भाग गुनाह के साथ खा जाओ, हालाँकि तुम जानते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur tum log na to aapas mein ek dusre ke maal narawa tareeqe se khao aur na hakeemo ke aagey inko is garz ke liye pesh karo ke tumhein dusron ke maal ka koi hissa qasdan zalimana tareeqe se khane ka mauqa mil jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aik doosray ka maal na haq na khaya kero na hakimon ko rishwat phoncha ker kissi ka kuch maal zulm-o-sitam say apna liya kero halankay tum jantay ho
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम लोग ना तो आपस में एक दूसरे के माल नरवा तारीख से खाओ और ना हकीमो के आगे इनको इस गरज के लिए पेश करो के तुम्हें दूसरों के माल का कोई हिसा क़स्दन ज़ालिमाना तरीक़े से खाने का मौका मिल जाए
عَرَبِي۞ يَسأَلونَكَ عَنِ الأَهِلَّةِ ۖ قُل هِيَ مَواقيتُ لِلنّاسِ وَالحَجِّ ۗ وَلَيسَ البِرُّ بِأَن تَأتُوا البُيوتَ مِن ظُهورِها وَلٰكِنَّ البِرَّ مَنِ اتَّقىٰ ۗ وَأتُوا البُيوتَ مِن أَبوابِها ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ لَعَلَّكُم تُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) लोग आपसे नये चाँदों के बारे में पूछते हैं। आप कह दें, वे लोगों के लिए और हज्ज के लिए समय जानने के माध्यम हैं। और नेकी हरगिज़ यह नहीं कि घरों में उनके पीछे से आओ। बल्कि नेकी उसकी है जो (अल्लाह की अवज्ञा से) बचे। तथा घरों में उनके द्वारों से आओ और अल्लाह से डरो, ताकि तुम सफल हो जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Log tumse chand ki ghathti badhti suraton ke mutaaliq puchte hain, kaho : yeh logon ke liye taarekon ki taayin ki aur hajj ki alamatein hain. Neiz unsey kaho : yeh koi neki ka kaam nahin hai ke apne gharon mein pichey ki taraf daakhil hote ho, neki to asal mein yeh hai ke aadmi Allah ki naraazi se bachey, lihaza tum apne gharon mein darwaze hi se aaya karo, albatta Allah se darte raho shayad ke tumhein falaah naseeb ho jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Log aap say chaand kay baray mein sawal kertay hain aap keh dijiye kay yeh logon (ki ibadat) kay waqton aur hajj kay mausam kay liye hai (ehraam ki halat main) aur gharon kay peechay say tumhara aana kuch neki nahi bulkay neki wala woh hai jo muttaqi ho. Aur gharon mein to darwazon say aaya kero aur Allah say dartay raho takay tum kaamyaab hojao
Devnagri Urdu (Maududi)लोग तुमसे चाँद की घटती बढ़ती सूरतों के मुतालिक पूछते हैं, कहो : ये लोगों के लिए तारेकॉन की तायिन की और हज की अलमतें हैं। नेज़ अनसे कहो: ये कोई नेकी का काम नहीं है के अपने घरों में पीछे की तरफ दाख़िल होते हो, नेकी तो असल में ये है के आदमी अल्लाह की नाराज़गी से बचे, लिहाज़ा तुम अपने घरों में दरवाज़े ही से आया करो, अलबत्ता अल्लाह से डरते रहो शायद के तुम्हें फलाह नसीब हो जाए
عَرَبِيوَقاتِلوا في سَبيلِ اللَّهِ الَّذينَ يُقاتِلونَكُم وَلا تَعتَدوا ۚ إِنَّ اللَّهَ لا يُحِبُّ المُعتَدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह की राह में, उनसे युद्ध करो, जो तुमसे युद्ध करते हैं, और अत्याचार न करो, निःसंदेह अल्लाह अत्याचार करने वालों से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Aur tum Allah ki raah mein un logon se lado, jo tumse ladte hain, magar zyadati na karo ka Allah zyadati karne walon ko pasand nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Laro Allah ki raah mein unn say jo tum say lartay hain aur ziyadti na kero Allah Taalaa ziyadti kerney walon ko pasand nahi fermata
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम अल्लाह की राह में उन लोगों से लड़ो, जो तुमसे लड़ते हैं, मगर ज्यादा न करो का अल्लाह ज्यादा करने वालों को पसंद नहीं करता
عَرَبِيوَاقتُلوهُم حَيثُ ثَقِفتُموهُم وَأَخرِجوهُم مِن حَيثُ أَخرَجوكُم ۚ وَالفِتنَةُ أَشَدُّ مِنَ القَتلِ ۚ وَلا تُقاتِلوهُم عِندَ المَسجِدِ الحَرامِ حَتّىٰ يُقاتِلوكُم فيهِ ۖ فَإِن قاتَلوكُم فَاقتُلوهُم ۗ كَذٰلِكَ جَزاءُ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्हें क़त्ल करो जहाँ उन्हें पाओ, और उन्हें वहाँ से निकालो जहाँ से उन्होंने तुम्हें निकाला है, और फ़ितना, क़त्ल करने से अधिक सख़्त है। और उनसे मस्जिदे ह़राम के पास युद्ध न करो, जब तक वे तुमसे वहाँ युद्ध न करें। फिर यदि वे तुमसे युद्ध करें, तो उन्हें क़त्ल करो, ऐसे ही काफ़िरों का बदला है।
Roman Urdu (Maududi)Unse lado jahan bhi tumhara unse muqabla pesh aaye aur unhein nikalo jahan se unhon ne tumko nikala hai, isliye ke qatal agarche bura hai, magar fitna issey bhi zyada bura hai aur masjid e haraam ke kareeb jab tak woh tumse na ladein tum bhi na lado, magar jab woh wahan ladne se na chukein, to tum bhi be-takalluf unhein maro ke aise kafrion ki yahi saza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Enhen maaro jahan bhi pao aur enhen nikalo jahan say enhon ney tumhen nikala hai aur (suno) fitna qatal say ziyada sakht hai aur masjid-e-haram kay pass inn say laraee na kero jabtak kay yeh khu tum say na laren agar yeh tum say laren to tum bhi enhen maaro kafiron ka badla yehi hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनसे लड़ो जहां भी तुम्हारा उनसे मुकाबला पेश आए और उन्हें निकालो जहां से उनहों ने तुमको निकला है, इस्ली के क़त्ल अगरचे बुरा है, मगर फ़ितना इसे भी ज़्यादा बुरा है और मस्जिद ए हराम के करीब जब तक वो तुमसे ना लड़ें तुम भी ना लड़ो, मगर जब वो वहां लड़ने से ना चूकें, तो तुम भी बे-तकल्लुफ़ उन्हें मारो के ऐसे काफ़्रियों की यही सज़ा है
عَرَبِيفَإِنِ انتَهَوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि वे (युद्ध से) रुक जाएँ, तो निःसंदेह अल्लाह बेहद क्षमा करनेवाला, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Phir agar woh baaz aa jayein, to jaan lo ke Allah maaf karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar yeh baaz aajyen to Allah Taalaa bakshney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अगर वो बाज़ आ जाएँ, तो जान लो के अल्लाह माफ़ करने वाला और रहम फ़रमान वाला है
عَرَبِيوَقاتِلوهُم حَتّىٰ لا تَكونَ فِتنَةٌ وَيَكونَ الدّينُ لِلَّهِ ۖ فَإِنِ انتَهَوا فَلا عُدوانَ إِلّا عَلَى الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनसे युद्ध करो, यहाँ तक कि कोई फ़ितना शेष न रहे और धर्म अल्लाह के लिए हो जाए। फिर यदि वे बाज़ आ जाएँ, तो अत्याचारियों के सिवा किसी पर कोई ज़्यादती (जायज़) नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Tum unse ladte raho yahan tak ke fitna baki na rahey aur deen Allah ke liye hojaye, phir agar woh baaz aa jayein, to samajh lo ke zalimon ke siwa aur kisi par dast-darazi rawa nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say laro jabtak kay fitna na mitt jaye aur Allah Taalaa ka deen ghalib na aajaye agar yeh ruk jayen (to tum bhi ruk jao) ziyadti to sirf zalimon per hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम उनसे लड़ते रहो यहाँ तक के फ़ितना बाकी ना रहे और दीन अल्लाह के लिए होजाए, फिर अगर वो बाज़ आ जाएँ, तो समझ लो के जालिमों के सिवा और किसी पर दस्त-दराज रवा नहीं
عَرَبِيالشَّهرُ الحَرامُ بِالشَّهرِ الحَرامِ وَالحُرُماتُ قِصاصٌ ۚ فَمَنِ اعتَدىٰ عَلَيكُم فَاعتَدوا عَلَيهِ بِمِثلِ مَا اعتَدىٰ عَلَيكُم ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ وَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ مَعَ المُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)हुरमत वाला महीना, हुरमत वाले महीने के बदले है और सब हुरमतों में क़िसास (बराबरी का बदला) है। अतः जो तुमपर ज़्यादती करे, तो तुम उसपर उसी के समान ज़्यादती करो, जैसी उसने तुमपर ज़्यादती की है तथा अल्लाह से डरो और जान लो कि अल्लाह डरने वालों के साथ है।
Roman Urdu (Maududi)Maah e haraam ka badla haraam hi hai aur tamaam hurmaton ka lihaz barabari ke saath hoga, lihaza jo tumpar dast darazi karey, tum bhi usi tarah uspar dast darazi karo, albatta Allah se darte raho aur yeh jaan rakkho ke Allah unhi logon ke saath hai jo uski hudood todne se paheiz karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hurmat walay maheeney hurmat walay maheenon kay badlay hain aur hurmaten adlay badlay ki hain jo tum per ziyadti keray tum bhi ussi tarah ussi ki misil ziyadti kero jo tum per ki hai aur Allah Taalaa say dartay raha kero aur jaan rakho kay Allah Taalaa perhezgaron kay sath hai
Devnagri Urdu (Maududi)माह ए हराम का बदला हराम ही है और तमाम हुर्मतों का लिहाज़ बाराबरी के साथ होगा, लिहाज़ा जो तुमपर दस्त दराज़ी करे, तुम भी उसी तरह उसपर दस्त दराज़ी करो, अलबत्ता अल्लाह से डरते रहो और ये जान रक्खो के अल्लाह उन्ही लोगों के साथ है जो उसकी हुदूद todne se paheiz karte hain
عَرَبِيوَأَنفِقوا في سَبيلِ اللَّهِ وَلا تُلقوا بِأَيديكُم إِلَى التَّهلُكَةِ ۛ وَأَحسِنوا ۛ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह के मार्ग में (धन) ख़र्च करो और अपने आपको विनाश में न डालो तथा नेकी करो, निःसंदेह अल्लाह नेकी करने वालों से प्रेम करता है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki raah mein kharch karo aur apne haathon apne aap ko halakat mein na daalo, ehsan ka tareeqa ikhtiyar karo ke Allah mohsino ko pasand karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ki raah mein kharach kero aur apney haathon halakat mein na paro aur sulook-o-ehsan kero Allah Taalaa ehsan kerney walon ko dost rakhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की राह में ख़र्च करो और अपने हाथों अपने आप को हलकत में ना डालो, एहसान का तरीक़ा इख्तियार करो के अल्लाह मोहसिनों को पसंद करता है
عَرَبِيوَأَتِمُّوا الحَجَّ وَالعُمرَةَ لِلَّهِ ۚ فَإِن أُحصِرتُم فَمَا استَيسَرَ مِنَ الهَديِ ۖ وَلا تَحلِقوا رُءوسَكُم حَتّىٰ يَبلُغَ الهَديُ مَحِلَّهُ ۚ فَمَن كانَ مِنكُم مَريضًا أَو بِهِ أَذًى مِن رَأسِهِ فَفِديَةٌ مِن صِيامٍ أَو صَدَقَةٍ أَو نُسُكٍ ۚ فَإِذا أَمِنتُم فَمَن تَمَتَّعَ بِالعُمرَةِ إِلَى الحَجِّ فَمَا استَيسَرَ مِنَ الهَديِ ۚ فَمَن لَم يَجِد فَصِيامُ ثَلاثَةِ أَيّامٍ فِي الحَجِّ وَسَبعَةٍ إِذا رَجَعتُم ۗ تِلكَ عَشَرَةٌ كامِلَةٌ ۗ ذٰلِكَ لِمَن لَم يَكُن أَهلُهُ حاضِرِي المَسجِدِ الحَرامِ ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ وَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ شَديدُ العِقابِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा ह़ज्ज और उमरा अल्लाह के लिए पूरा करो। फिर यदि तुम रोक दिए जाओ, तो क़ुर्बानी में से जो उपलब्ध हो (कर दो)। और अपने सिर न मुँडाओ, जब तक कि क़ुर्बानी अपने ज़बह के स्थान तक न पहुँच जाए। फिर तुममें से जो व्यक्ति बीमार हो या उसके सिर में कोई तकलीफ़ हो (और उसके कारण सिर मुँडा ले), तो रोज़े या सदक़ा या क़ुर्बानी में से कोई एक फ़िदया है। फिर जब तुम निश्चिंत हो जाओ, तो (ऐसे में) जो व्यक्ति ह़ज्ज (के एहराम बाँधने) तक उमरे से लाभ उठाए, तो क़ुर्बानी में से जो उपलब्ध हो, करे। फिर जिसके पास (क़ुर्बानी) उपलब्ध न हो, तो वह तीन रोज़े ह़ज्ज के दौरान रखे और सात दिन के उस समय रखे, जब तुम (घर) वापस जाओ। ये पूरे दस हैं। ये उसके लिए हैं, जिसके घर वाले मस्जिदे-ह़राम के निवासी न हों। और अल्लाह से डरो तथा जान लो कि निःसंदेह अल्लाह बहुत सख़्त अज़ाब वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki khushnudi ke liye jab hajj aur umra ki niyat karo to usey poora karo aur agar kahin ghir jao (detained/prevented) to jo qurbani muyassar aaye Allah ki janaab mein pesh karo aur apne sarr na mundo(shave) jabtak ke qurbani apni jagah na pahunch jaye, magar jo shaks mareez ho ya jiske sarr mein koi takleef ho aur is bina par apna sar mundwa le to usey chahiye ke fidiye ke taur par roze rakkhey ya sadaqa de ya qurbani karey, phir agar tumhein aman naseeb ho jaye (aur tum hajj se pehle Makkah pahunch jao), to jo shaks tum mein se hajj ka zamana aane tak umra ka faiyda uthaye woh hasb-e-maqdoor (can afford) qurbani dey,aur agar qurbani muyassar na ho to teen roze hajj ke zamane mein aur saat ghar pahunch kar, is tarah poorey dus roze rakhle, yeh riayat un logon ke liye hai jinke ghar baar masjid e haraam ke kareeb na hon. Allah ke in ehkam ki khilaf-warzi se bacho aur khoob jaan lo ke Allah sakht saza dene wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hajj aur umray ko Allah Taalaa kay liye poora kero haan agar tum rok liye jao to jo qurbani mayyassar ho ussay ker daalo aur apney sir na mundwao jabtak kay qurbani qurban gaah tak na phonch jaye albatta tum mein say jo beemar ho ya uss kay sir mein koi takleef ho (jiss ki waja say sir munda ley) to uss per diya hai khuwa rozay rakh ley khuwa sadqa dey dey khuwa qurabi keray pus tum amann ki halat mein hojao to jo shaks umray say ley ker hajj tak tamatto keray pus ussay jo qurabni mayyassar ho ker dalay jissay taqat hi na ho to woh teen rozay to hajj kay dinon mein rakh ley aur saat wapsi mein yeh pooray das hogaye. Yeh hukum unn kay liye hai jo masjid-e-haram kay rehney walay na hon logo! Allah say dartay raho aur jaan lo kay Allah Taalaa sakht azab wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की ख़ुशनुदी के लिए जब हज और उमरा की नियत करो तो उसे पूरा करो और अगर कहीं घिर जाओ (हिरासत में/रोका गया) तो जो कुर्बानी मुयस्सर आए अल्लाह की जनाब में पेश करो और अपने सर न मुंडो (मुंडो) जबतक के कुर्बानी अपनी जगह न पाहुंच जाए, मगर जो शक्स मेराज हो या जिसका सर में कोई तकलीफ हो और इस बिना पर अपना सर मुंडवा ले तो उसे चाहिए के फिदिये के तौर पर रोजे रखें या सदका दे या कुर्बानी करे, फिर अगर तुम्हें अमन नसीब हो जाए (और तुम हज से पहले मक्का पहुंच जाओ), तो जो शक्स तुम में से हज का जमाना आने तक उमर का फैसला उठाये वो हस्ब-ए-मकदूर (अफोर्ड कर सकते हैं) कुर्बानी दे, और अगर कुर्बानी मुयस्सर ना हो तो तीन रोजे हज के जमाने में और सात घर पहुंच कर, इस तरह पूरे दस रोजे रखले, ये रियात उन लोगों के लिए है जिनके घर बार मस्जिद ए हराम के करीब ना हो। अल्लाह के इन एहकाम की खिलाफ़-वारज़ी से बचो और ख़ूब जान लो के अल्लाह सख़्त सज़ा देने वाला है
عَرَبِيالحَجُّ أَشهُرٌ مَعلوماتٌ ۚ فَمَن فَرَضَ فيهِنَّ الحَجَّ فَلا رَفَثَ وَلا فُسوقَ وَلا جِدالَ فِي الحَجِّ ۗ وَما تَفعَلوا مِن خَيرٍ يَعلَمهُ اللَّهُ ۗ وَتَزَوَّدوا فَإِنَّ خَيرَ الزّادِ التَّقوىٰ ۚ وَاتَّقونِ يا أُولِي الأَلبابِ
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हिन्दी (Al-Omari)ह़ज्ज चंद जाने-माने महीने हैं। फिर जो व्यक्ति इनमें ह़ज्ज अनिवार्य कर ले, तो ह़ज्ज के दौरान न कोई काम-वासना की बात हो और न कोई अवज्ञा और न कोई झगड़ा। तथा तुम जो भी नेकी का काम करोगे, अल्लाह उसे जान लेगा। और पाथेय ले लो, (और जान लो कि) सबसे अच्छा पाथेय परहेज़गारी है तथा ऐ बुद्धि वालो! मुझसे डरो।
Roman Urdu (Maududi)Hajj ke mahine sabko maloom hain , jo shaks in muqakkar mahino mein hajj ki niyat karey, usey khabardaar rehna chahiye ke hajj ke dauran mein ussey koi shehwani fail (sexual indulgence) , koi badh amali, koi ladayi jhagde ki baat sarzad na ho aur jo neik kaam tum karoge woh Allah ke ilm mein hoga. Safar e hajj ke liye zaad e raah (provisions) saath le jao, aur sabse behtar zaad e raah(provisions) parheizgaari hai, pas aey hosh-mandon! Meri nafarmani se parheiz karo
Roman Urdu (Junagarhi)Hajj kay maheenay muqarrar hain iss liye jo shaks inn mein hajj lazim ker ley woh apni biwi say milaap kerney gunah kerney aur laraee kerney say bachta rahey tum jo neki kero gay uss say Allah Taalaa ba khabar hai aur apney sath safar kharach ley liya kero sab say behtar tosha Allah Taalaa ka darr hai aur aey aqal mando! Mujh say dartay raha kero
Devnagri Urdu (Maududi)हज के महीने में सबको मालूम है, जो शक्स इन मुक्क्कर महिनो में हज की नियत करे, उसे खबरदार रहना चाहिए के हज के दौरन में उसे कोई शेहवानी फेल (यौन) भोग) , कोई बढ़ा अमली, कोई लड़े झगड़े की बात सरज़ाद ना हो और जो नया काम तुम करोगे वो अल्लाह के इल्म में होगा। सफ़र ए हज के लिए ज़ाद ए राह (प्रावधान) साथ ले जाओ, और सबसे बेहतर ज़ाद ए राह (प्रावधान) परहेज़गारी है, पास ऐ होश-मंदों! मेरी नफ़रमानी से परहेज़ करो
عَرَبِيلَيسَ عَلَيكُم جُناحٌ أَن تَبتَغوا فَضلًا مِن رَبِّكُم ۚ فَإِذا أَفَضتُم مِن عَرَفاتٍ فَاذكُرُوا اللَّهَ عِندَ المَشعَرِ الحَرامِ ۖ وَاذكُروهُ كَما هَداكُم وَإِن كُنتُم مِن قَبلِهِ لَمِنَ الضّالّينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुमपर कोई दोष नहीं कि अपने पालनहार का अनुग्रह (फ़ज़्ल) तलाश करो। फिर जब तुम अरफ़ात से प्रस्थान करो, तो मश्अरे ह़राम (मुज़दलिफ़ा) के पास अल्लाह को याद करो और उसको उसी तरह याद करो, जैसे उसने तुम्हारा मार्गदर्शन किया है। और निःसंदेह इससे पहले तुम गुमराह लोगों में से थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar hajj ke saath saath tum apne Rubb ka fazal (bounty) bhi talash karte jao to ismein koi muzahiqa nahin, phir jab arafat se chalo to mashhare haraam (muzdalifa) ke paas thehar kar Allah ko yaad karo aur us tarah yaad karo, jiski hidayat usne tumhein di hai, warna issey pehle tumlog bhatke huey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Tum per apney rab ka fazal ka talash kerney mein koi gunah nahi jab tum arfaat say loto to to mash’ar-e-haram kay pass zikar-e-elahee kero aur uss ka zikar kero jaisay kay uss ney tumhen hidayat di halankay tum iss say pehlay raah bhoolay huye thay
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर हज के साथ-साथ तुम अपने रुब का फ़ज़ल (इनाम) भी तलाश करते जाओ तो इस्मे कोई मुज़हिक़ा नहीं, फिर जब अराफ़ात से चलो तो मशहरे हराम (मुज़दलिफ़ा) के पास ठहर कर अल्लाह को याद करो और हमें तरह याद करो करो, जिसकी हिदायत उसने तुम्हें दी है, वरना इसे पहले तुमलोग भटके हुए थे
عَرَبِيثُمَّ أَفيضوا مِن حَيثُ أَفاضَ النّاسُ وَاستَغفِرُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर तुम उस जगह से वापस आओ, जहाँ से सब लोग वापस आएँ तथा अल्लाह से क्षमा माँगो। निश्चय अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Phir jahan se aur sab log palat-te hain wahin se tum bhi palato aur Allah se maafi chaho, yaqeenan woh maaf karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir tum uss jagah loto jiss jagah sab log lot’tay hain aur Allah Taalaa say talab-e-bakshish kertay raho yaqeenan Allah Taalaa bakshney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जहां से और सब लोग पलट-ते हैं वहीं से तुम भी पलटो और अल्लाह से माफ़ी चाहो, यकीनन वो माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِيفَإِذا قَضَيتُم مَناسِكَكُم فَاذكُرُوا اللَّهَ كَذِكرِكُم آباءَكُم أَو أَشَدَّ ذِكرًا ۗ فَمِنَ النّاسِ مَن يَقولُ رَبَّنا آتِنا فِي الدُّنيا وَما لَهُ فِي الآخِرَةِ مِن خَلاقٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब तुम अपने ह़ज्ज के कार्य पूरे कर लो, तो अल्लाह को याद करो, जैसे अपने बाप-दादा को याद किया करते थे, बल्कि उससे भी बढ़कर याद करो। फिर लोगों में से कोई तो ऐसा है जो कहता है : ऐ हमारे पालनहार! हमें दुनिया में दे दे। और आख़िरत में उसका कोई हिस्सा नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab apne hajj ke arkan ada kar chuko, to jis tarah pehle apne abaa o ajdad ka zikr karte thay, usi tarah ab Allah ka zikr karo, balke ussey bhi badkar (magar Allah ko yaad karne waley logon mein bhi bahut farq hai) un mein se koi to aisa hai, jo kehta hai ke aey hamare Rubb humein duniya hi mein sabkuch de de, aisey shaks ke liye aakhirat mein koi hissa nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab tum arkaan-e-hajj ada ker chuko to Allah Taalaa ka zikar kero jiss tarah tum apney baap dadon ka zikar kiya kertay thay bulkay iss say bhi ziyada baaz log woh bhi hain jo kehtay hain aey humaray rab! Humen duniya mein dey. Aisay logon ka aakhirat mein koi hissa nahi
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब अपने हज के अरकान अदा कर चुको, तो जिस तरह पहले अपने आबा ओ अजदाद का जिक्र करते थे, उसी तरह अब अल्लाह का जिक्र करो, बलके उसे भी बुरा (मगर अल्लाह को याद करने वाले लोगों में भी बहुत फर्क है) उन में से कोई तो ऐसा है, जो कहता है के ऐ हमारे रब हमें दुनिया ही में सब कुछ दे दे, ऐसे शक्स के लिए आख़िरत में कोई हिसा नहीं
عَرَبِيوَمِنهُم مَن يَقولُ رَبَّنا آتِنا فِي الدُّنيا حَسَنَةً وَفِي الآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنا عَذابَ النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनमें से कोई ऐसा है, जो कहता है : ऐ हमारे पालनहार! हमें दुनिया में भलाई तथा आख़िरत में भी भलाई दे और हमें आग के अज़ाब से बचा।
Roman Urdu (Maududi)Aur koi kehta hai ke aey hamare Rubb! Humein duniya mein bhalayi de aur aakhirat mein bhi bhalayi , aur aag ke azaab se humein bacha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur baaz log woh bhi hain jo kehtay hain aey humaray rab! Humen duniya mein neki dey aur aakhirat mein bhi bhalaee ata farma aur humen azab-e-jahannum say nujat dey
Devnagri Urdu (Maududi)और कोई कहता है के ऐ हमारे रब! हमने दुनिया में भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई, और आग के अज़ाब से हमें बचाया
عَرَبِيأُولٰئِكَ لَهُم نَصيبٌ مِمّا كَسَبوا ۚ وَاللَّهُ سَريعُ الحِسابِ
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हिन्दी (Al-Omari)यही लोग हैं, जिनके लिए उसमें से एक हिस्सा है, जो उन्होंने कमाया और अल्लाह बहुत जल्द ह़िसाब लेने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aisey log apni kamayi ke mutabiq (dono jagah) hissa payenge aur Allah ko hisaab chukate kuch dair nahin lagti
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh woh log hain jin kay liye unn kay aemaal ka hissa hai aur Allah Taalaa jalad hisab lenay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसे लोग अपनी कमाई के मुताबिक (दोनो जगह) हिसा पाएंगे और अल्लाह को हिसाब चुकाते कुछ देर नहीं लगती
عَرَبِي۞ وَاذكُرُوا اللَّهَ في أَيّامٍ مَعدوداتٍ ۚ فَمَن تَعَجَّلَ في يَومَينِ فَلا إِثمَ عَلَيهِ وَمَن تَأَخَّرَ فَلا إِثمَ عَلَيهِ ۚ لِمَنِ اتَّقىٰ ۗ وَاتَّقُوا اللَّهَ وَاعلَموا أَنَّكُم إِلَيهِ تُحشَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह को चंद गिने हुए दिनों में याद करो। फिर जो दो दिनों में (मिना से) जल्द चला जाए, तो उसपर कोई दोष नहीं और जो देर से निकले, तो उसपर भी कोई दोष नहीं, उस व्यक्ति के लिए जो (अल्लाह से) डरे तथा अल्लाह से डरो और जान लो कि निःसंदेह तुम उसी की ओर एकत्र किए जाओगो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ginti ke chandh roz hain, jo tumhein Allah ki yaad mein basar karne chahiye, phir jo koi jaldi karke do hi din mein wapas hogaya to koi harj nahin, aur jo kuch dair zyada thehar kar palta to bhi koi harj nahin bashart yeh din usne taqwa ke saath basar kiye ho. Allah ki nafarmani se bacho aur khoob jaan rakkho ke ek roz uske huzoor mein tumhari peshi honay wali hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa ki yaad unn ginti kay chand dinon (ayyaam-e-tashreeq) mein kero do din ki jaldi kerney walay per bhi koi gunah nahi aur jo peechay reh jaye uss per bhi koi gunah nahi yeh perhezgar kay liye hai aur Allah Taalaa say dartay raho aur jaan rakho kay tum sab ussi ki taraf jama kiye jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये गिनती के चांद रोज हैं, जो तुम्हें अल्लाह की याद में बसर करना चाहिए, फिर जो कोई जल्दी करके दो उसी दिन में वापस होगा तो कोई हर्ज नहीं, और जो कुछ देर ज्यादा ठहर कर पलटा तो भी कोई हर्ज नहीं बशारत ये दिन उसने तकवा के साथ बसर किये हो। अल्लाह की नफ़रमानी से बचो और ख़ूब जान रक्खो के एक रोज़ उसके हुज़ूर में तुम्हारी पेशी होने वाली है
عَرَبِيوَمِنَ النّاسِ مَن يُعجِبُكَ قَولُهُ فِي الحَياةِ الدُّنيا وَيُشهِدُ اللَّهَ عَلىٰ ما في قَلبِهِ وَهُوَ أَلَدُّ الخِصامِ
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हिन्दी (Al-Omari)लोगों में कोई व्यक्ति ऐसा भी है जिसकी बात सांसारिक जीवन के बारे में (ऐ नबी!) आपको अच्छी लगती है और वह अल्लाह को उसपर गवाह बनाता है जो उसके दिल में हैं, हालाँकि वह बड़ा झगड़ालू है।
Roman Urdu (Maududi)Insaano mein koi to aisa hai jiski baatein duniya ki zindagi mein tumhein bahut bhali maloom hoti hai, aur apni neik niyati par woh baar baar khuda ko gawah thehrata hai, magar haqeeqat mein woh badhtareen dushman e haqq hota hai
Roman Urdu (Junagarhi)Baaz logon ki dunyawi gharaz ki baaten aap ko khush ker deti hain aur woh apney dil ki baaton per Allah ko gawah kerta hai halankay dar asal woh zabardast jhagraloo hai
Devnagri Urdu (Maududi)इंसानों में कोई तो ऐसा है जिसकी बातें दुनिया की ज़िंदगी में तुम्हें बहुत अच्छी मालूम होती है, और अपनी नीक नियति पर वो बार-बार खुदा को गवाह ठहरता है, मगर हकीकत में वो बद्तरीन दुश्मन ए हक़ होता है
عَرَبِيوَإِذا تَوَلّىٰ سَعىٰ فِي الأَرضِ لِيُفسِدَ فيها وَيُهلِكَ الحَرثَ وَالنَّسلَ ۗ وَاللَّهُ لا يُحِبُّ الفَسادَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब वह वापस जाता है, तो धरती में दौड़-धूप करता है ताकि उसमें उपद्रव फैलाए तथा खेती और नस्ल (पशुओं) का विनाश करे और अल्लाह उपद्रव को पसंद नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Jab usey iqtedar hasil ho jata hai, to zameen mein uski saari daud dhoop isliye hoti hai ke fasaad phailaye, kheton ko gaarat karey aur nasal e Insaani ko tabaah karey , halaanke Allah (jisey woh gawah bana raha tha) fasaad ko hargiz pasand nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Jab woh lot ker jata hai to zamin mein fasad phelaney ki aur kheti aur nasal ki barbadi ki koshish mein laga rehta hai aur Allah Taalaa fasad ko na pasand kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जब उसे इक्तेदार हासिल हो जाता है, तो ज़मीन में उसकी सारी दौड़ धूप होती है के फ़साद फैलाये, खेतों को गैरत करे और नाक ए इंसान को तबाह करे, हलाँके अल्लाह (जिसे वो गवाह बना रहा था) फसाद को हरगिज पसंद नहीं करता
عَرَبِيوَإِذا قيلَ لَهُ اتَّقِ اللَّهَ أَخَذَتهُ العِزَّةُ بِالإِثمِ ۚ فَحَسبُهُ جَهَنَّمُ ۚ وَلَبِئسَ المِهادُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब उससे कहा जाता है कि अल्लाह से डर, तो उसका गौरव उसे पाप में पकड़े रखता है। अतः उसके (दंड के) लिए जहन्नम ही काफ़ी है और निश्चय वह बहुत बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab ussey kaha jata hai ke Allah se darr, to apne waqar ka khayal usko gunaah par jamaa deta hai, aisey shaks ke liye to bas jahannum hi kafi hai aur woh bahut bura thikana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab uss say kaha jaye kay Allah say darr to takabbur aur ta’assub ussay gunah per aamada ker deta hai aisay kay liye bus jahannum hi hai aur yaqeenan woh badtareen jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जब उसे कहा जाता है के अल्लाह से डर, तो अपने वकार का ख्याल उसको गुनाह पर जमा देता है, ऐसे शक्स के लिए तो बस जहन्नुम ही काफी है और वो बहुत बुरा ठिकाना है
عَرَبِيوَمِنَ النّاسِ مَن يَشري نَفسَهُ ابتِغاءَ مَرضاتِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ رَءوفٌ بِالعِبادِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा लोगों में ऐसा व्यक्ति भी है, जो अल्लाह की प्रसन्नता की खोज में अपना प्राण बेच देता है और अल्लाह उन बंदों पर अनंत करुणामय है।
Roman Urdu (Maududi)Dusri taraf Insaano hi mein koi aisa bhi hai jo raza e ilahi ki talab mein apni jaan khapa deta hai aur aisey bandon par Allah bahut meharbaan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur baaz log woh bhi hai jo Allah Taalaa ki raza mandi ki talab mein apni jaan tak baich detay daltay hain aur Allah Taalaa apney bandon per bari meharbani kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)दूसरी तरफ़ इंसानों ही में कोई ऐसा भी है जो रज़ा ए इलाही की तालाब में अपनी जान ख़पा देता है और ऐसे बंदों पर अल्लाह बहुत मेहरबान है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا ادخُلوا فِي السِّلمِ كافَّةً وَلا تَتَّبِعوا خُطُواتِ الشَّيطانِ ۚ إِنَّهُ لَكُم عَدُوٌّ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! इस्लाम में पूर्ण रूप से प्रेश कर जाओ और शैतान के पदचिह्नों पर न चलो। निश्चय वह तुम्हारा खुला दुश्मन है।
Roman Urdu (Maududi)Aey iman laney walon! Tum poorey ke poorey Islam mein aa jao aur shaytan ki pairwi na karo ke woh tumhara khula dushman hai
Roman Urdu (Junagarhi)Eman walo! Islam mein pooray pooray dakhil hojao aur shetan kay qadmon ki tabeydari na kero woh tumhara khula dushman hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ ईमान लाने वालों! तुम पूरे के पूरे इस्लाम में आ जाओ और शैतान की जोड़ी ना करो के वो तुम्हारा खुला दुश्मन है
عَرَبِيفَإِن زَلَلتُم مِن بَعدِ ما جاءَتكُمُ البَيِّناتُ فَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ عَزيزٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि इसके बाद फिसल जाओ कि तुम्हारे पास स्पष्ट दलीलें आ चुकीं, तो जान लो कि निःसंदेह अल्लाह अत्यंत प्रभुत्वशाली, पूर्ण ह़िकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jo saaf saaf hidayaat tumhare paas aa chuki hai agar unko paa lene ke baad phir tumne lagzish khayi, to khoob jaan rakkho ke Allah sab par gaalib aur hakeem o dana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum bawajoob tumharay daleel aajaney kay bhi phisal jao to jaan lo kay Allah Taalaa ghalbay wala aur hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो साफ साफ हिदायत तुम्हारे पास आ चुकी है अगर उनको पा लेने के बाद फिर तुमने लग्ज़िश खायी, तो खूब जान रक्खो के अल्लाह सब पर गालिब और हकीम ओ दाना है
عَرَبِيهَل يَنظُرونَ إِلّا أَن يَأتِيَهُمُ اللَّهُ في ظُلَلٍ مِنَ الغَمامِ وَالمَلائِكَةُ وَقُضِيَ الأَمرُ ۚ وَإِلَى اللَّهِ تُرجَعُ الأُمورُ
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हिन्दी (Al-Omari)वे (इन स्पष्ट प्रमाणों के बाद) इसके सिवा किस चीज़ की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि उनके पास अल्लाह बादलों के सायों में आ जाए तथा फ़रिश्ते भी और मामले का निर्णय कर दिया जाए और सब काम अल्लाह ही की ओर लौटाए जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(In saari naseehaton aur hidayaton ke baad bhi log seedhe na hon to) kya ab woh iske muntazir hain ke Allah baadalon ka chatar lagay farishton ke parey saath(canopies of clouds with a retinue of angels) liye khud saamne aa maujood ho aur faisla hi kar dala jaye? Aakhir e kaar saare maamlaat pesh to Allah hi ke huzoor honay waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya logon ko iss baat ka intizar hai kay unn kay pass khud Allah Taalaa abar kay sayebanon mein aajaye aur farishtay bhi aur kaam inteha tak phoncha diya jaye Allah hi ki taraf tamam kaam lotaye jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(सारी हिदायतों और हिदायतों के बाद भी लोग सीधे न हों तो) क्या अब वो इसके मुंतज़िर हैं के अल्लाह बादलों का चतर लगे फरिश्तों के परे साथ (स्वर्गदूतों की टोली के साथ बादलों की छतरियाँ) के लिए खुद सामने आ मौजूद हो और फैसला ही कर डाला जाए? आख़िर ए कार सारी मामलात पेश करने वाले अल्लाह ही के हुज़ूर होने वाले हैं
عَرَبِيسَل بَني إِسرائيلَ كَم آتَيناهُم مِن آيَةٍ بَيِّنَةٍ ۗ وَمَن يُبَدِّل نِعمَةَ اللَّهِ مِن بَعدِ ما جاءَتهُ فَإِنَّ اللَّهَ شَديدُ العِقابِ
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हिन्दी (Al-Omari)बनी इसराईल से पूछो कि हमने उन्हें कितनी खुली निशानियाँ दीं। और जो अल्लाह की नेमत को बदल दे, इसके बाद कि वह उसके पास आ चुकी हो, तो निश्चय अल्लाह बहुत सख़्त अज़ाब वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Bani Israel se pucho: kaisi khuli khuli nishaniyan humne unhein dikhayi hain (aur phir yeh bhi unhin se puch lo ke) Allah ki niyamat paney ke baad jo qaum isko shiqawat (wretchdness) se badalti hai usey Allah kaisi sakht saza deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bani israeel say poocho to kay hum ney unhen kiss qadar roshan nishaniyan ata farameen aur jo shaks Allah Taalaa ki nematon ko apney pass phonch janey kay baad badal dalay (woh jaan ley) kay Allah Taalaa sakht azabon wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)बानी इसराइल से पूछो: कैसी खुली खुली निशानियां हमने उन्हें दिखाई हैं (और फिर ये भी उनहिन से पूछ लो के) अल्लाह की नियामत पाने के बाद जो क़ौम इसको शिकावत (मनहूसियत) से बदलती है उसे अल्लाह कैसी सज़ा देता है
عَرَبِيزُيِّنَ لِلَّذينَ كَفَرُوا الحَياةُ الدُّنيا وَيَسخَرونَ مِنَ الَّذينَ آمَنوا ۘ وَالَّذينَ اتَّقَوا فَوقَهُم يَومَ القِيامَةِ ۗ وَاللَّهُ يَرزُقُ مَن يَشاءُ بِغَيرِ حِسابٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों के लिए जिन्होंने कुफ़्र किया, सांसारिक जीवन आकर्षक बना दिया गया है तथा वे ईमान लाने वालों का मज़ाक़ उड़ाते हैं। हालाँकि जो लोग (अल्लाह का) डर रखने वाले हैं, वे क़ियामत के दिन उनसे ऊपर होंगे तथा अल्लाह जिसे चाहता है, असंख्य जीविका प्रदान करता है।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne kufr ki raah ikhtiyar ki hai unke liye duniya ki zindagi badi mehboob o dil pasand bana di gayi hai, aisey log iman ki raah ikhtiyar karne walon ka mazaq udhate hain, magar qayamat ke roz parheizgaar log hi unke muqable mein aali muqaam honge, raha duniya ka rizq, to Allah ko ikhtiyar hai jisey chahe be-hisaab de
Roman Urdu (Junagarhi)Kafiron kay liye duniya ki zindagi khoob zeenat daar ki gaee hai woh eman walon say hansi mazaq kertay hain halankay perhezgar log qayamat kay din unn say aala hongay Allah Taalaa jisay chahata hai bey hisab rozi deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने कुफ्र की राह इख्तियार की है उनके लिए दुनिया की जिंदगी बड़ी मेहबूब ओ दिल पसंद बना दी गई है, ऐसे लोग ईमान की राह इख्तियार करने वालों का मजाक उड़ाते हैं, मगर कयामत के रोज़ परहेज़गार लोग ही उनके मुक़ाबले में आली मुक़ाम होंगे, राह दुनिया का रिज़क, तो अल्लाह को इख्तियार है जिसे चाहे बे-हिसाब दे
عَرَبِيكانَ النّاسُ أُمَّةً واحِدَةً فَبَعَثَ اللَّهُ النَّبِيّينَ مُبَشِّرينَ وَمُنذِرينَ وَأَنزَلَ مَعَهُمُ الكِتابَ بِالحَقِّ لِيَحكُمَ بَينَ النّاسِ فيمَا اختَلَفوا فيهِ ۚ وَمَا اختَلَفَ فيهِ إِلَّا الَّذينَ أوتوهُ مِن بَعدِ ما جاءَتهُمُ البَيِّناتُ بَغيًا بَينَهُم ۖ فَهَدَى اللَّهُ الَّذينَ آمَنوا لِمَا اختَلَفوا فيهِ مِنَ الحَقِّ بِإِذنِهِ ۗ وَاللَّهُ يَهدي مَن يَشاءُ إِلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)(आरंभ में) सब लोग एक ही समुदाय थे। (फिर विभेद हुआ) तो अल्लाह ने नबी भेजे, शुभ समाचार सुनाने वाले और डराने वाले, और उनपर सत्य के साथ पुस्तक उतारी, ताकि वह लोगों के बीच उन बातों का फैसला करे, जिनमें उन्होंने मतभेद किया था। और उसमें मतभेद उन्हीं लोगों ने किया, जिन्हें वह दी गई थी, इसके बाद कि उनके पास स्पष्ट निशानियाँ आ चुकीं, आपस के हठ के कारण। फिर जो लोग ईमान लाए, अल्लाह ने उन्हें अपनी आज्ञा से सत्य में से उस बात का मार्गदर्शन किया, जिसमें उन्होंने मतभेद किया था और अल्लाह जिसे चाहता है, सीधा मार्ग दर्शाता है।
Roman Urdu (Maududi)Ibtida mein sab log ek hi tareeqe par thay (phir yeh haalat baqi na rahi aur ikhtilafaat runuma huey) tab Allah ne Nabi bheje jo raast rawi par basharat dene waley aur kajhrawi ke nataij se darane waley thay, aur unke saath kitab e bar haqq nazil ki taa-ke haqq ke barey mein logon ke darmiyan jo ikhtilafaat runuma ho gaye thay unka faisla karey. (Aur in ikhtilafaat ke runuma honay ki wajah yeh na thi ke ibtidaa mein logon ko haqq bataya nahin gaya tha, nahin) ikhtilaf un logon ne kiya jinhein haqq ka ilm diya (ja) chuka tha, unhon ne roshan hidayaat paa lene ke baad mehaz isliye haqq ko chodh kar mukhtalif tareeqe nikale ke woh aapas mein zyadati karna chahte thay, pas jo log ambiya par iman le aaye unhein Allah ne apne izan se us haqq ka raasta dikha diya jismein logon ne ikhtilaf kiya tha, Allah jisey chahta hai raah e raast dikha deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Dar-asal log aik hi giroh thay Allah Taalaa ney nabiyon ko khushkhabri denay aur daraney wala bana ker bheja aur unn kay sath sachi kitaben nazil farmaeen takay logon kay her ikhtilafi amar ka faisla hojaye. Aur sirf unhi logon ney jinhen kitab di gaee thi apney pass dalaeel aa chukney kay baad aapas kay bughz-o-aeynaad ki waja say iss mein ikhtilaf kiya iss liye Allah pak ney eman walon ki iss ikhtilaf mein bhi haq ki taraf apni mashiyat say rehbari ki aur Allah jiss ko chahaye seedhi raah ki taraf rehbari kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)इब्तिदा में सब लोग एक ही तारीख पर थे (फिर ये हालात बाकी न रही और इख्तिलाफात रुनुमा हुए) तब अल्लाह ने नबी भेजे जो रस्त रावी पर बशारत देने वाले और कजरावी के नटाईज से डराने वाले थे, और उनके साथ किताब ए बार हक नाज़िल की ता-के हक़ के बारे में लोगों के दरमियान जो इख़्तिलाफ़ात रूनुमा हो गए थे उनका फ़ैसला करे। (और इख्तिलाफात के रूनुमा होने की वजह ये ना थी के इब्तिदा में लोगों को हक बताया नहीं गया था, नहीं) इख्तिलाफ उन लोगों ने किया जिन्होंने हक का इल्म दिया (जा) चूका था, उन्होन ने रोशन हिदायत पा लेने के बाद महज़ को हक़ को छोड़ दिया मुखतलिफ़ तारिके निकले के वो आपस में ज़्यादा करना चाहते थे, पास जो लोग अंबिया पर ईमान ले आए उनको अल्लाह ने अपने इज़ान से हमें हक़ का रास्ता दिखाया दिया जिसमें लोगों ने इख्तिलाफ़ किया था, अल्लाह जिसे चाहता है राह ए रास्ता दिखा देता है
عَرَبِيأَم حَسِبتُم أَن تَدخُلُوا الجَنَّةَ وَلَمّا يَأتِكُم مَثَلُ الَّذينَ خَلَوا مِن قَبلِكُم ۖ مَسَّتهُمُ البَأساءُ وَالضَّرّاءُ وَزُلزِلوا حَتّىٰ يَقولَ الرَّسولُ وَالَّذينَ آمَنوا مَعَهُ مَتىٰ نَصرُ اللَّهِ ۗ أَلا إِنَّ نَصرَ اللَّهِ قَريبٌ
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हिन्दी (Al-Omari)या तुमने समझ रखा है कि तुम जन्नत में प्रवेश कर जाओगे, हालाँकि अभी तक तुमपर उन लोगों जैसी दशा नहीं आई, जो तुमसे पूर्व थे। उन्हें तंगी और तकलीफ़ पहुँची तथा वे सख़्त हिला दिए गए, यहाँ तक कि वह रसूल और जो लोग उसके साथ ईमान लाए थे, कह उठे : अल्लाह की सहायता कब आएगी? सुन लो, निःसंदेह अल्लाह की सहायता क़रीब है।
Roman Urdu (Maududi)Phir kya tum logon ne yeh samajh rakkha hai ke yunhi jannat ka daakhila tumhein mil jayega, halaanke abhi tumpar woh sab kuch nahin guzra hai jo tumse pehle iman laney walon par guzar chuka hai? Unpar sakhtiyan guzri, museebatein aayi, hila maarey gaye, hatta ke waqt ka Rasool aur uske saathi ehle iman cheekh utthey ke Allah ki madad kab aayegi, us waqt unhein tasalli di gayi ke haan Allah ki madad qareeb hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum yeh guman kiye bethay ho kay jannat mein chalay jao gay halankay abb tak tum per woh halaat nahi aaye jo tum say aglay logon per aaye thay. Unehn beemariyan aur musibaten phonchi aur woh yahan tak jhanjoray gaye kay rasool aur uss kay sath kay eman walay kehney lagay kay Allah ki madad kab aaye gi? Sun rakho kay Allah ki madad qarib hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्या तुम लोगन ने ये समझ रखा है कि यूंही जन्नत का आखिरी तुम्हें मिल जाएगा, हालांके अभी तुमपर वो सब कुछ नहीं गुजरा है जो तुमसे पहले ईमान लाने वालों पर गुजर चूका है? उन्पर साख्तियां गुजरी, मुसिबतें आई, हिला मारे गए, हत्ता के वक्त का रसूल और उसके साथी एहले ईमान चीख उठे के अल्लाह की मदद कब आएगी, हमें वक्त उन्हें तसल्ली दी गई के हां अल्लाह की मदद करीब है
عَرَبِييَسأَلونَكَ ماذا يُنفِقونَ ۖ قُل ما أَنفَقتُم مِن خَيرٍ فَلِلوالِدَينِ وَالأَقرَبينَ وَاليَتامىٰ وَالمَساكينِ وَابنِ السَّبيلِ ۗ وَما تَفعَلوا مِن خَيرٍ فَإِنَّ اللَّهَ بِهِ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) वे आपसे पूछते हैं क्या चीज़ ख़र्च करें? (उनसे) कह दीजिए : तुम भलाई में से जो भी खर्च करो, तो वह माता-पिता, अधिक क़रीबी रिश्तेदारों, अनाथों, मिसकीनों (निर्धनों) तथा यात्रियों के लिए है। तथा तुम नेकी में से जो कुछ भी करोगे, तो निःसंदेह अल्लाह उसे भलि-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Log puchte hain ke hum kya kharch karein? Jawab do ke jo maal bhi tum kharch karo apne walidain par, rishtedaaron par, yateemo aur miskeeno aur musafiron par kharch karo aur jo bhalayi bhi tum karoge, Allah ussey ba-khabar hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aap say poochtay hain kay woh kiya kharach keren? Aap keh dijiye kay jo maal tum kharach kero woh maa baap kay liye hai aur rishtay daron aur yateemon aur miskeenon aur musafiron kay liye hai aur tum jo kuch bhalaee kero gay Allah Taalaa to uss ka ilm hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोग पूछते हैं कि हम क्या खर्च करते हैं? जवाब दो के जो माल भी तुम खर्च करो अपने वलियों पर, रिश्तों पर, यतीमो और मिस्कीनो और मुसाफिरों पर खर्च करो और जो भलाई भी तुम करोगे, अल्लाह उससे ब-खबर होगा
عَرَبِيكُتِبَ عَلَيكُمُ القِتالُ وَهُوَ كُرهٌ لَكُم ۖ وَعَسىٰ أَن تَكرَهوا شَيئًا وَهُوَ خَيرٌ لَكُم ۖ وَعَسىٰ أَن تُحِبّوا شَيئًا وَهُوَ شَرٌّ لَكُم ۗ وَاللَّهُ يَعلَمُ وَأَنتُم لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ ईमान वालो!) तुमपर युद्ध करना अनिवार्य कर दिया गया है, हालाँकि वह तुम्हें बिल्कुल नापसंद है। और हो सकता है कि तुम एक चीज़ को नापसंद करो और वह तुम्हारे लिए बेहतर हो और हो सकता कि तुम एक चीज़ को पसंद करो और वह तुम्हारे लिए बुरी हो। और अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Tumhein jung ka hukm diya gaya hai aur woh tumhein na-gawar hai, ho sakta hai ke ek cheez tumhein na-gawar ho aur wahi tumhare liye behtar ho aur ho sakta hai ke ek cheez tumhein pasand ho aur wahi tumhare liye buri ho.Allah jaanta hai, tum nahin jaante
Roman Urdu (Junagarhi)Tum per jihad farz kiya gaya go woh tumhen dushwar maloom ho mumkin hai tum kissi cheez ko buri jano aur wohi tumharay liye bhali ho aur yeh bhi mumkin hai kay tum kissi cheez ko achi samjho halankay woh tumharay liye buri ho haqeeqi ilm Allah hi ko hai tum mehaz bey khabar ho
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हें जंग का हुक्म दिया गया है और वो तुम ना-गवार हो, हो हो सकता है कि एक चीज तुम्हें पसंद हो और वही तुम्हारे लिए बुरी हो। अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते
عَرَبِييَسأَلونَكَ عَنِ الشَّهرِ الحَرامِ قِتالٍ فيهِ ۖ قُل قِتالٌ فيهِ كَبيرٌ ۖ وَصَدٌّ عَن سَبيلِ اللَّهِ وَكُفرٌ بِهِ وَالمَسجِدِ الحَرامِ وَإِخراجُ أَهلِهِ مِنهُ أَكبَرُ عِندَ اللَّهِ ۚ وَالفِتنَةُ أَكبَرُ مِنَ القَتلِ ۗ وَلا يَزالونَ يُقاتِلونَكُم حَتّىٰ يَرُدّوكُم عَن دينِكُم إِنِ استَطاعوا ۚ وَمَن يَرتَدِد مِنكُم عَن دينِهِ فَيَمُت وَهُوَ كافِرٌ فَأُولٰئِكَ حَبِطَت أَعمالُهُم فِي الدُّنيا وَالآخِرَةِ ۖ وَأُولٰئِكَ أَصحابُ النّارِ ۖ هُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) वे आपसे सम्मानित मास में युद्ध करने के बारे में पूछते हैं। आप उनसे कह दें कि उसमें युद्ध करना बहुत गंभीर (पाप) है, परंतु अल्लाह के मार्ग से रोकना और उसका इनकार करना और मस्जिदे-ह़राम से रोकना और उसके वासियों को उससे निकालना, अल्लाह के निकट उससे भी बड़ा (पाप) है, तथा फ़ितना (शिर्क), हत्या से अधिक बड़ा है। और वे तुमसे हमेशा युद्ध करते रहेंगे, यहाँ तक कि तुम्हें तुम्हारे धर्म से फेर दें, यदि कर सकें, और तुममें से जो व्यक्ति अपने धर्म (इस्लाम) से फिर जाए, फिर इस हाल में मरे कि वह काफ़िर हो, तो ये ऐसे लोग हैं जिनके कार्य दुनिया तथा आख़िरत में बर्बाद हो गए तथा यही लोग आग वाले हैं, वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Log puchte hain maah e haraam mein ladna kaisa hai? Kaho: ismein ladna bahut bura hai, magar raah e khuda se logon ko roakna aur Allah se kufr karna aur masjid e haram ka raasta khuda paraston par bandh karna aur haram ke rehne walon ko wahan se nikalna Allah ke nazdeek issey bhi zyada bura hai aur fitna khoon-rezi se shadeed-tar hai. Woh to tumse ladey hi jayenge hatta ke agar unka bas chale to tumhein is deen se pher le jayein (aur yeh khoob samajhlo ke) tum mein se jo koi is deen se phirega aur kufr ki haalat mein jaan dega, uske aamaal duniya aur aakhirat dono mein zaya ho jayenge, aisey sab log jahannumi hain aur hamesha jahannum hi mein rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Log aap say hurmat walay maheenon mein laraee ki babat sawal kertay hain aap keh dijiye kay inn mein laraee kerna bara gunah hai lekin Allah ki raah say rokna uss kay sath kufur kerna aur masjid-e-haram say rokna aur wahan kay rehney walon ko wahan say nikalna Allah kay nazdeek uss say bhi bara gunah hai yeh fitna qatal say bhi bara gunah hai yeh log tum say laraee bhiraee kertay hi rahen gay yahan tak kay agar hosakay to tumhen tumharay deen say murtid ker den aur tum mein say jo log apney deen say palat jayen aur issi kufur ki halat mein maren unn kay aemaal-e-duyawi aur ukhrawi sab ghaarat hojayen gay. Yeh log jahannumi hongay aur hamesha hamesha jahannum mein hi rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)लोग पूछते हैं माह ए हराम में लाना कैसा है? कहो: इसमें लड़ना बहुत बुरा है, मगर राह ए खुदा से लोगों को रोकना और अल्लाह से कुफ्र करना और मस्जिद ए हरम का रास्ता खुदा परस्तों पर बंद करना और हरम के रहने वालों को वहां से निकलना अल्लाह के नाजदीक इससे भी ज्यादा बुरा है और फितना खून-रेजी से छायादार-तार है. वो तो तुमसे लड़े ही जाएंगे हटा के अगर उनका बस चले तो तुम्हें इस दीन से फेर ले जाएं (और ये खूब समझलो के) तुम में से जो कोई इस दीन से फिरेगा और कुफ्र की हालत में जान देगा, उसके अमाल दुनिया और आखिरी दोनों में जया हो जाएगी, ऐसे सब लोग जहन्नुमी हैं और हमेशा जहन्नुम ही में रहेंगे
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا وَالَّذينَ هاجَروا وَجاهَدوا في سَبيلِ اللَّهِ أُولٰئِكَ يَرجونَ رَحمَتَ اللَّهِ ۚ وَاللَّهُ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और जिन्होंने हिजरत की तथा अल्लाह की राह में जिहाद किया, वही अल्लाह की दया की आशा रखते हैं तथा अल्लाह अत्यंत क्षमाशील, असीम दयालु है।
Roman Urdu (Maududi)Ba-khilaf iske jo log iman laye hain aur jinhon ne khuda ki raah mein apna ghar baar choda aur jihad kiya hai, woh rehmat e ilahi ke jayiz umeedwaar hain aur Allah unki lagzishon ko maaf karne wala aur apni rehmat se unhein nawazne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Alabatta eman laney walay hijrat kerney walay Allah ki raah mein jihad kerney walay hi rehmat-e-elahee kay umeedwar hain Allah Taalaa boht bakshney wala aur boht meharbani kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)बा-खिलाफ इसके जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्होन ने खुदा की राह में अपना घर बार छोड़ा और जिहाद किया है, वो रहमत ए इलाही के जायज़ उम्मेदवार हैं और अल्लाह उनकी लग्ज़िशों को माफ़ करने वाला और अपना रहमत से उन्हें नवाज़ने वाला है
عَرَبِي۞ يَسأَلونَكَ عَنِ الخَمرِ وَالمَيسِرِ ۖ قُل فيهِما إِثمٌ كَبيرٌ وَمَنافِعُ لِلنّاسِ وَإِثمُهُما أَكبَرُ مِن نَفعِهِما ۗ وَيَسأَلونَكَ ماذا يُنفِقونَ قُلِ العَفوَ ۗ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الآياتِ لَعَلَّكُم تَتَفَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) वे आपसे शराब और जुए के बारे में पूछते हैं। आप बता दें कि इन दोनों में बड़ा पाप है तथा लोगों के लिए कुछ लाभ हैं, और इन दोनों का पाप इनके लाभ से बड़ा है। तथा वे आपसे पूछते हैं कि क्या चीज़ ख़र्च करें। (उनसे) कह दीजिए जो आवश्यकता से अधिक हो। इसी प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए आयतों को स्पष्ट करता है, ताकि तुम सोच-विचार करो।
Roman Urdu (Maududi)Puchte hain : sharab aur juwey (gambling) ka kya hukum hai? Kaho: in dono cheezon mein badi kharabi hai agarchey inmein logon ke liye kuch munafey bhi hai, magar unka gunaah unke faiyde se bahut zyada hai. Puchte hain: hum raah e khuda mein kya kharch karein? Kaho: jo kuch tumhari zaroorat se zyada ho, is tarah Allah tumhare liye saaf saaf ehkaam bayaan karta hai, shayad ke tum duniya aur aakhirat dono ki fikr karo
Roman Urdu (Junagarhi)Log aap say sharab aur juye ka masla poochtay hain aap keh dijiye inn dono mein boht bara gunah hai aur logon ko iss say dunyawi faeeda bhi hota hai lekin inn ka gunah unn kay nafay say boht ziyada hai. Aap say yeh bhi daryaft kertay hain kay kiya kuch kharach keren? To aap keh dijiye hajat say zaeed cheez, Allah Taalaa issi taraf apney ehkaam saaf saaf tumharay liye biyan farma raha hai takay tum soch samajh sako
Devnagri Urdu (Maududi)पूछते हैं: शराब और जुवे (जुआ) का क्या हुकुम है? कहो: दोनों चीज़ों में बड़ी ख़राबी है अगर इनमें लोगों के लिए कुछ मुनाफ़े भी है, मगर उनका गुनाह उनके फ़ायदे से बहुत ज़्यादा है। पूछते हैं: हम राह ए खुदा में क्या खर्च करें? कहो: जो कुछ तुम्हारी ज़रूरत से ज्यादा हो, क्या वह अल्लाह तुम्हारे लिए साफ-साफ एहकाम बयान करता है, शायद के तुम दुनिया और आख़िरत दोनों की फ़िक्र करो
عَرَبِيفِي الدُّنيا وَالآخِرَةِ ۗ وَيَسأَلونَكَ عَنِ اليَتامىٰ ۖ قُل إِصلاحٌ لَهُم خَيرٌ ۖ وَإِن تُخالِطوهُم فَإِخوانُكُم ۚ وَاللَّهُ يَعلَمُ المُفسِدَ مِنَ المُصلِحِ ۚ وَلَو شاءَ اللَّهُ لَأَعنَتَكُم ۚ إِنَّ اللَّهَ عَزيزٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)दुनिया और आख़िरत के बारे में। और वे आपसे अनाथों के विषय में पूछते हैं। (उनसे) कह दीजिए उनके लिए सुधार करते रहना बेहतर है। यदि तुम उन्हें अपने साथ मिलाकर रखो, तो वे तुम्हारे भाई हैं और अल्लाह बिगाड़ने वाले को सुधारने वाले से जानता है। और यदि अल्लाह चाहता, तो तुम्हें अवश्य कष्ट में डाल देता। निःसंदेह अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Puchte hain : yateemon ke saath kya maamla kiya jaye? Kaho: jis tarz e amal mein unke liye bhalayi ho wahi ikhtiyar karna behtar hai. Agar tum apna aur unka kharch aur rehna sehna mushtarik (mix) rakkho to ismein koi muzahiqa nahin, aakhir woh tumhare bhai bandh hi to hain. Burayi karne waley aur bhalayi karne waley dono ka haal Allah par roshan hai, Allah chahta to is maamle mein tumpar sakhti karta, magar woh sahib e ikhtiyar honay ke saath sahib e hikmat bhi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Duniya aur aakhirat kay umoor ko. Aur tujh say yateemon kay baray mein bhi sawal kertay hain aap keh dijiye kay inn ki khair khuwahi behtar hai tum agar inn ka maal apney maal mein mila bhi lo to woh tumharay bhai hain bad niyat aur nek niyat her aik ko Allah khoob janta hai aur agar Allah chahata to tumhen mushaqqat mein daal deta yaqeenan Allah Taalaa ghalbay wala hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)पूछते हैं: यतीमों के साथ क्या मामला किया जाए? कहो: जिस तर्ज़ ए अमल में उनके लिए भलाई हो वही इख्तियार करना बेहतर है। अगर तुम अपना और उनका खर्च और रहना सहना मुश्तारिक (मिक्स) रख्खो तो इसमें कोई मुजाहिका नहीं, आखिर वो तुम्हारे भाई बंद ही तो हैं। बुराई करने वाले और भलाई करने वाले दोनों का हाल अल्लाह पर रोशन है, अल्लाह चाहता है तो इस मामले में तुमपर शक्ती करता, मगर वो साहब ए इख्तियार होने के साथ साहिब ए हिकमत भी है
عَرَبِيوَلا تَنكِحُوا المُشرِكاتِ حَتّىٰ يُؤمِنَّ ۚ وَلَأَمَةٌ مُؤمِنَةٌ خَيرٌ مِن مُشرِكَةٍ وَلَو أَعجَبَتكُم ۗ وَلا تُنكِحُوا المُشرِكينَ حَتّىٰ يُؤمِنوا ۚ وَلَعَبدٌ مُؤمِنٌ خَيرٌ مِن مُشرِكٍ وَلَو أَعجَبَكُم ۗ أُولٰئِكَ يَدعونَ إِلَى النّارِ ۖ وَاللَّهُ يَدعو إِلَى الجَنَّةِ وَالمَغفِرَةِ بِإِذنِهِ ۖ وَيُبَيِّنُ آياتِهِ لِلنّاسِ لَعَلَّهُم يَتَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मुश्रिक स्त्रियों से विवाह न करो, यहाँ तक कि वे ईमान ले आएँ और निश्चय एक ईमान वाली दासी किसी भी मुश्रिक स्त्री से उत्तम है, यद्यपि वह तुम्हें अच्छी लगे। और अपनी स्त्रियों का निकाह़ मुश्रिकों से न करो, यहाँ तक कि वे ईमान ले आएँ और निश्चय एक ईमान वाला दास किसी भी मुश्रिक (पुरुष) से उत्तम है, यद्यपि वह तुम्हें अच्छा लगे। ये लोग आग की ओर बुलाते हैं तथा अल्लाह अपनी आज्ञा से जन्नत और क्षमा की ओर बुलाता है और लोगों के लिए अपनी आयतें खोलकर बयान करता है, ताकि वे शिक्षा ग्रहण करें।
Roman Urdu (Maududi)Tum mushrik auraton se hargiz nikah na karna jab tak ke woh iman na le aayein, ek momin laundi (slave) mushrik sharif-zaadi se behtar hai agarche woh tumhein bahut pasand ho, aur apni auraton ke nikah mushrik mardon se kabhi na karna jab tak ke woh iman na le aayein. Ek momin ghulam mushrik sharif se behtar hai agarche woh tumhein bahut pasand ho. Yeh log tumhein aag ki taraf bulate hain aur Allah apne izan se tumko jannat aur magfirat ki taraf bulata hai, aur woh apne ehkaam wazey taur par logon ke saamne bayan karta hai, tawaqqu hai ke woh sabaq lenge aur naseehat qabool karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur shirk kerney wali aurton say tawaqt-e-kay woh eman na layen tum nikkah na kero eman walo londi bhi shiek kerney wali aazad aurat say boht behtar hai go tumhen mushrika hi achi lagti ho aur na shirk kerney walay mardon kay nikkah mein apni aurton ko do jab tak woh eman na layen eman wala ghulam aazad mushrik say behtar hai go mushrik tumhen acha lagay. Yeh log jahannum ki taraf bulatay hain aur Allah jannat ki taraf aur apni bakshish ki taraf apney hukum say bulata hai woh apni aayaten logon kay liye biyan farma raha hai takay woh naseehat hasil keren
Devnagri Urdu (Maududi)तुम मुशरिक औरतों से हरगिज़ निकाह ना करना जब तक के वो ईमान ना ले आइए, एक मोमिन लौंडी (गुलाम) मुशरिक शरीफ-जादी से बेहतर है अगरचे वो तुम्हें बहुत पसंद हो, और अपनी औरतों के निकाह मुशरिक मर्दों से कभी न करना जब तक के वो ईमान न ले आएं। एक मोमिन गुलाम मुशरिक शरीफ से बेहतर है अगर वो तुम्हें बहुत पसंद हो। ये लोग तुम्हें आग की तरफ बुलाते हैं और अल्लाह अपने इज़ान से तुमको जन्नत और मगफिरत की तरफ बुलाता है, और वो अपना एहकाम वाजे तौर पर लोगों के सामने बयान करता है, तवक्कू है के वो सबक लेंगे और हिदायत कबूल करेंगे
عَرَبِيوَيَسأَلونَكَ عَنِ المَحيضِ ۖ قُل هُوَ أَذًى فَاعتَزِلُوا النِّساءَ فِي المَحيضِ ۖ وَلا تَقرَبوهُنَّ حَتّىٰ يَطهُرنَ ۖ فَإِذا تَطَهَّرنَ فَأتوهُنَّ مِن حَيثُ أَمَرَكُمُ اللَّهُ ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ التَّوّابينَ وَيُحِبُّ المُتَطَهِّرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे आपसे मासिक धर्म के विषय में पूछते हैं। आप कह दें : वह एक तरह की गंदगी है। अतः मासिक धर्म की स्थिति में औरतों से अलग रहो और उनके पास न जाओ, यहाँ तक कि वे पाक हो जाएँ। फिर जब वे (स्नान करके) पाक-साफ़ हो जाएँ, तो उनके पास आओ, जहाँ से अल्लाह ने तुम्हें अनुमति दी है। निःसंदेह अल्लाह उनसे प्रेम करता है जो बहुत तौबा करने वाले हैं और उनसे प्रेम करता है जो बहुत पाक रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Puchte hain: haiz ka kya hukm hai? Kaho: woh ek gandagi ki haalat hai, ismein auraton se alag raho aur unke kareeb na jao, jab tak ke woh paak saaf na ho jayein, phir jab woh paak ho jayein to unke paas jao us tarah jaisa ke Allah ne tumko hukum diya hai, Allah un logon ko pasand karta hai jo badhi (gunaah) se baaz rahein aur pakeezgi ikhtiyar karein
Roman Urdu (Junagarhi)Aap say haiz kay baray mein sawal kertay hain keh dijiyewoh gandagi hai haiz halaton mein aurton say alag raho aur jab tak woh pak na hojayen unn kay qarib na jao han jab woh pak hojayen o unn kay pass jao jahan say Allah ney tumhen ijazat di hai Allah tauba kerney walon ko aur pak rehney walon ko pasand farmata hai
Devnagri Urdu (Maududi)पूछते हैं: हैज़ का क्या हुक्म है? कहो: वो एक गंदगी की हालत है, इसमें औरतों से अलग रहो और उनके करीब ना जाओ, जब तक के वो पाक साफ ना हो जाए, फिर जब वो पाक हो जाए तो उनके पास जाओ उस तरह जैसा के अल्लाह ने तुमको हुकुम दिया है, अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो गुनाहों से बाज आता है। राहें और पाकीज़गी इख्तियार करें
عَرَبِينِساؤُكُم حَرثٌ لَكُم فَأتوا حَرثَكُم أَنّىٰ شِئتُم ۖ وَقَدِّموا لِأَنفُسِكُم ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ وَاعلَموا أَنَّكُم مُلاقوهُ ۗ وَبَشِّرِ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारी पत्नियाँ तुम्हारे लिए खेती हैं। सो अपनी खेती में जिस तरह चाहो आओ और अपने लिए (अच्छे कार्य) आगे भेजो। तथा अल्लाह से डरो और जान लो कि निश्चय तुम उससे मिलने वाले हो और ईमान वालों को शुभ सूचना सुना दो।
Roman Urdu (Maududi)Tumhari auratein tumhari khetiyan hain, tumhein ikhtiyar hai jis tarah chaho apni kheti mein jao, magar apne mustaqbil ki fikr karo aur Allah ki narazi se bacho. Khoob jaan lo ke tumhein ek din ussey milna hai. Aur (aey Nabi)! Jo tumhari hidayaat ko maan lein unhein falaah o saadat ka musda (khushkhabri) suna do
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhari biwiyan tumhari khetiyan hain apni khetiyon mein jiss tarah chahao aao aur apney liye (nek aemaal) aagay bhejo aur Allah Taalaa say dartay raha kero aur jaan rakho kay tum uss say milney walay ho aur eman walon ko khushkhabri suna dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारी औरतें तुम्हारी खेतियाँ हैं, तुम्हें इख्तियार है जिस तरह चाहो अपनी खेती में जाओ, मगर अपने मुस्तकबिल की फ़िक्र करो और अल्लाह की नाराज़गी से बचो। ख़ूब जान लो के तुम्हें एक दिन उससे मिलना है। और (ऐ नबी)! जो तुम्हारी हिदायत को मान लें उन्हें फलाह ओ सआदत का मुस्दा (खुशखबरी) सुना दो
عَرَبِيوَلا تَجعَلُوا اللَّهَ عُرضَةً لِأَيمانِكُم أَن تَبَرّوا وَتَتَّقوا وَتُصلِحوا بَينَ النّاسِ ۗ وَاللَّهُ سَميعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह की क़सम को भलाई करने, परहेज़गारी की राह पर चलने और लोगों के बीच मेल-मिलाप कराने के विरुद्ध तर्क न बनाओ। और अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ke naam ko aisi kasamein khane ke liye istemal na karo jinse maqsood neki aur taqwa aur bandagaan e khuda ki bhalayi ke kaamon se baaz rehna ho. Allah tumhari sari baatein sun raha hai aur sabkuch jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa ko apni qasmon ka iss tarah nishana na banao kay bhalaee aur perhezgari aur logon kay darmiyan ki islaah ko chor betho aur Allah Taalaa sunney wala janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के नाम को ऐसी कसमें खाने के लिए इस्तमाल न करो जिनसे मकसूद नेकी और तकवा और बंदगान ए खुदा की भलाई के कामोनों से बाज़ रहना हो। अल्लाह तुम्हारी सारी बातें सुन रहा है और सब कुछ जानता है
عَرَبِيلا يُؤاخِذُكُمُ اللَّهُ بِاللَّغوِ في أَيمانِكُم وَلٰكِن يُؤاخِذُكُم بِما كَسَبَت قُلوبُكُم ۗ وَاللَّهُ غَفورٌ حَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह तुम्हें तुम्हारी क़समों में निरर्थक पर नहीं पकड़ता, बल्कि तुम्हें उसपर पकड़ता है, जिसका तुम्हारे दिलों ने इरादा किया है। और अल्लाह बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत सहनशील है।
Roman Urdu (Maududi)Jo be-maani kasamein tum bila irada kha liya karte ho unpar Allah giraft nahin karta, magar jo kasamein tum sachhey dil se khate ho unki baazpurs woh zaroor karega. Allah bahut darguzar karne wala aur burdbaar (Forbearing) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa tumhen tumhari unn qasmon per na pakray ga jo pukhta na hon haan uss ki pakar uss cheez per hai jo tumharay dilon ka fail ho Allah Taalaa bakshney wala aur burdbaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो बे-मानी कसमें तुम बिला इरादा खा लिया करते हो, लेकिन अल्लाह गिरफ़्तार नहीं करता, मगर जो कसमें तुम सच्चे दिल से खाते हो उनकी बाज़पुर्स वो ज़रूर करेगा। अल्लाह बहुत दरगुज़ार करने वाला और बर्दबार (सहिष्णु) है
عَرَبِيلِلَّذينَ يُؤلونَ مِن نِسائِهِم تَرَبُّصُ أَربَعَةِ أَشهُرٍ ۖ فَإِن فاءوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों के लिए जो अपनी पत्नियों से (संभोग न करने की) क़सम खा लेते हैं, चार महीने प्रतीक्षा करना है। फिर यदि वे (इस बीच) अपनी क़सम से फिर जाएँ, तो निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log apni auraton se taaluq na rakhne ki kasam kha baithey hain unke liye char mahine ki mohlat hai, agar unhon ne rujoo karliya to Allah maaf karne wala aur Raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log apni biwiyon say (talluq na rakhney) qasmen khayen unn kay liye chaar maheeney ki iddat hai phir agar woh lot aayen to Allah Taalaa bhi bakshney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग अपनी औरतों से ताल्लुक न रखें की कसम खा बैठे हैं उनके लिए चार महीने की मोहलत है, अगर उन्होन ने रूजू करलिया तो अल्लाह माफ करने वाला और रहीम है
عَرَبِيوَإِن عَزَمُوا الطَّلاقَ فَإِنَّ اللَّهَ سَميعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वे तलाक़ का पक्का इरादा कर लें, तो निःसंदेह अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar unhon ne talaq hi ki thaan li ho to jaane rahein ke Allah sabkuch sunta aur jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tallaq ka hi qasad ker len to Allah Taalaa sunney wala janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर उन्हें तलाक ही दिया जाए तो जाने रहें के अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है
عَرَبِيوَالمُطَلَّقاتُ يَتَرَبَّصنَ بِأَنفُسِهِنَّ ثَلاثَةَ قُروءٍ ۚ وَلا يَحِلُّ لَهُنَّ أَن يَكتُمنَ ما خَلَقَ اللَّهُ في أَرحامِهِنَّ إِن كُنَّ يُؤمِنَّ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ ۚ وَبُعولَتُهُنَّ أَحَقُّ بِرَدِّهِنَّ في ذٰلِكَ إِن أَرادوا إِصلاحًا ۚ وَلَهُنَّ مِثلُ الَّذي عَلَيهِنَّ بِالمَعروفِ ۚ وَلِلرِّجالِ عَلَيهِنَّ دَرَجَةٌ ۗ وَاللَّهُ عَزيزٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन स्त्रियों को तलाक़ दे दी गई है, वे तीन बार मासिक धर्म आने तक अपने आपको (विवाह से) प्रतीक्षा में रखें। और उनके लिए ह़लाल (वैध) नहीं कि वह चीज़ छिपाएँ जो अल्लाह ने उनके गर्भाशयों में पैदा की है, यदि वे अल्लाह तथा अंतिम दिन पर ईमान रखती हैं। तथा उनके पति इस अवधि में उन्हें वापस लौटाने के अधिक हक़दार हैं, यदि वे मामला ठीक रखने का इरादा रखते हों। तथा परंपरा के अनुसार उन (स्त्रियों) के लिए उसी तरह अधिकार (हक़) है, जैसे उनके ऊपर (पुरुषों का) अधिकार है। तथा पुरुषों को उन (स्त्रियों) पर एक दर्जा प्राप्त है और अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jin auraton ko talaq di gayi ho woh teen martaba ayaam e mahwari aane tak apne aap ko rokey rakkhein aur unke liye yeh jayiz nahin hai ke Allah ne unke reham (womb) mein jo kuch khalq (paida) farmaya ho usey chupayein. Unhein hargiz aisa na karna chahiye agar woh Allah aur roz e aakhir par iman rakhti hain. Unke shohar taaluqaat durust karlene par aamada hon to woh is iddat ke dauraan mein unhein phir apni zawjiyat mein wapas le lene ke haqdaar hain. Auraton ke liye bhi maroof tareeqe par waise hi huqooq hain jaise Mardon ke huqooq unpar hain. Albatta Mardon ko unpar ek darja hasil hai aur sab par Allah gaalib iqtedar rakhne wala aur hakeem o dana maujood hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tallaq wali aurten apney aap ko teen haiz tak rokay rakhen unhen halal nahi kay Allah ney unn kay reham mein jo paida kiya ho ussay chupayen agar unhen Allah Taalaa per aur qayamat kay din per eman ho unn kay khawind iss muddat mein unhen lota lenay kay pooray haq daar hain agar unn ka irada islaah ka ho. Aur aurton kay bhi wesay hi haq hain jaisay unn per mardon kay hain achai kay sath. Haan mardon ko aurton per fazeelat hai aur Allah Taalaa ghalib hai aur hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन औरतों को तलाक दे गई हो वो तीन मरतबा अयाम ए माहवारी आने तक अपने आप को रोके रखें और उनके लिए ये जायज नहीं है के अल्लाह ने उनके रहम (गर्भ) में जो कुछ ख़ल्क (पैदा) फरमाया हो उसे छुपाएं। उन्हें हरगिज़ ऐसा ना करना चाहिए अगर वो अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखता है। उनके शोहर तालुकात दुरुस्त कार्लें पर अमादा हों तो वो इस इद्दत के दौरन में उन्हें फिर अपनी ज़वजियात में वापस ले लेने के हक़दार हैं। औरतों के लिए भी मारूफ़ तारीख़ पर वैसे ही हुकूक़ हैं जैसे मर्दों के हुकूक़ अपर हैं। अलबत्ता मर्दों को उनपार एक दरजा हासिल है और सब पर अल्लाह गालिब इक्तेदार रखने वाला और हकीम ओ दाना मौजूद है
عَرَبِيالطَّلاقُ مَرَّتانِ ۖ فَإِمساكٌ بِمَعروفٍ أَو تَسريحٌ بِإِحسانٍ ۗ وَلا يَحِلُّ لَكُم أَن تَأخُذوا مِمّا آتَيتُموهُنَّ شَيئًا إِلّا أَن يَخافا أَلّا يُقيما حُدودَ اللَّهِ ۖ فَإِن خِفتُم أَلّا يُقيما حُدودَ اللَّهِ فَلا جُناحَ عَلَيهِما فيمَا افتَدَت بِهِ ۗ تِلكَ حُدودُ اللَّهِ فَلا تَعتَدوها ۚ وَمَن يَتَعَدَّ حُدودَ اللَّهِ فَأُولٰئِكَ هُمُ الظّالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह तलाक़ दो बार है। फिर या तो अच्छे तरीक़े से रख लेना है, या नेकी के साथ छोड़ देना है। और तुम्हारे लिए ह़लाल (वैध) नहीं कि उसमें से जो तुमने उन्हें दिया है, कुछ भी लो, सिवाय इसके कि उन दोनों को इस बात का डर हो कि वे अल्लाह की सीमाओं को क़ायम न रख सकेंगे। फिर यदि तुम्हें भय हो कि वे दोनों (पति-पत्नी) अल्लाह की सीमाओं को क़ायम न रख सकेंगे, तो उन दोनों पर उसमें कोई दोष (पाप) नहीं जो पत्नी अपनी जान छुड़ाने के बदले में दे दे। ये अल्लाह की सीमाएँ हैं, अतः इनसे आगे मत बढ़ो और जो अल्लाह की सीमाओं से आगे बढ़ेगा, तो यही लोग अत्याचारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Talaq do baar hai, phir ya to seedhi tarah aurat ko rok liya jaye ya bhale tareeqe se usko rukhsat kardiya jaye, aur rukhsat karte huey aisa karna tumhare liye jayiz nahin hai ke jo kuch tum unhein de chuke ho, usmein se kuch wapas lelo, albatta yeh surat mustasna hai ke zawjain ko Allah ke hudood par qayam na reh sakne ka andesha ho, aisi surat mein agar tumhein yeh khauf ho ke woh dono hudood e ilahi par qayam na rahenge, to un dono ke darmiyan yeh maamla ho janey mein muzahiqa nahin ke aurat apne shohar ko kuch muawaza dekar alaidagi (seperation) hasil karle, yeh Allah ke muqarrar karda huddod hain, inse tajawuz na karo, aur jo log hudood e ilahi se tajawuz karein wahi zalim hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh tallaqen do martaba hain phir ya to achai say rokna ya umdagi kay sath chor dena aur tumhen halal nahi kay tum ney unhen jo dey diya hai uss mein say kuch bhi lo haan yeh aur baat hai kay dono ko Allah ki hudood qaeem na rakh sakney ka khof ho iss liye agar tumhen darr ho kay yeh dono Allah ki haden qaeem na rakh saken gay to aurat rehaee paney kay liye kuch dey dalay iss mein dono per gunah nahi yeh Allah ki hudood hain khabardar inn say aagay na barhna aur jo log Allah ki haddon say tajawuz ker jayen woh zalim hain
Devnagri Urdu (Maududi)तलाक दो बार है, फिर या तो सीधी तरह औरत को रोक लिया जाए या भले तारिके से उसको रुखसत कर दिया जाए, और रुखसत करते हुए ऐसा करना तुम्हारे लिए जायज़ नहीं है के जो कुछ तुम उन्हें दे चुके हो, उसमें से कुछ वापस लेलो, अलबत्ता ये सूरत मुस्तसना है के ज़वजैन को अल्लाह के हुदूद पर क़याम न रह सके का अंदेशा हो, ऐसी सूरत में अगर तुम ये खौफ हो के वो डोनो हुदूद ए इलाही पर क़याम न रहेंगे, तो उन दोनों के दरमियान ये मामला हो जाने में मुज़हिक़ा नहीं के औरत अपने शहर को कुछ मुआवाज़ा देकर अलैदागी (अलगाव) हासिल करले, ये अल्लाह के मुकर्रर करदा हुद्दोद हैं, इनसे तजावुज़ ना करो, और जो लोग हुदूद ए इलाही से तजावुज करें वही जालिम हैं
عَرَبِيفَإِن طَلَّقَها فَلا تَحِلُّ لَهُ مِن بَعدُ حَتّىٰ تَنكِحَ زَوجًا غَيرَهُ ۗ فَإِن طَلَّقَها فَلا جُناحَ عَلَيهِما أَن يَتَراجَعا إِن ظَنّا أَن يُقيما حُدودَ اللَّهِ ۗ وَتِلكَ حُدودُ اللَّهِ يُبَيِّنُها لِقَومٍ يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि वह उसे (तीसरी) तलाक़ दे दे, तो उसके बाद वह उसके लिए ह़लाल (वैध) नहीं होगी, यहाँ तक कि उसके अलावा किसी अन्य पति से विवाह करे। फिर यदि वह उसे तलाक़ दे दे, तो (पहले) दोनों पर कोई पाप नहीं कि दोनों आपस में रुजू' (दोबारा मिलाप) कर लें, यदि वे दोनों समझें कि अल्लाह की सीमाओं को क़ायम रखेंगे। और ये अल्लाह की सीमाएँ हैं, वह उन्हें उन लोगों के लिए खोलकर बयान करता है, जो ज्ञान रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir agar (do baar talaq dene ke baad shohar ne aurat ko teesri baar) talaq de di to woh aurat phir uske liye halal na hogi, illa yeh ke uska Nikah kisi dusre shaks se ho aur woh usey talaq dede, tab agar pehla shohar aur yeh aurat dono yeh khayal karein ke hudood e ilahi par qayam rahenge, to unke liye ek dusre ki taraf rujoo karlene mein koi muzahiqa nahin. Yeh Allah ki muqarrar karda hadein hain jinhein woh un logon ki hidayat ke liye wazey kar raha hai jo (uski hudood ko todne ka anjaam) jaante hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir agar iss ko (teesri baar) tallaq dey dey to abb iss kay liye halal nahi jab tak kay woh aurat iss kay siwa doosray say nikkah na keray phir agar woh bhi tallaq dey dey to inn dono ko mail jol ker lenay mein koi gunah nahi ba shart-e-kay yeh jaan len kay Allah ki haddon ko qaeem rakh saken gay yeh Allah Taalaa ki hudood hain jinhen woh janney walon kay liye biyan farma raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अगर (दो बार तलाक देने के बाद शहर ने औरत को तीसरी बार) तलाक दे दी तो वो औरत फिर उसके लिए हलाल ना होगी, इल्ला ये के उसका निकाह किसी दूसरे शक्स से हो और वो उसे तलाक देदे, तब अगर पहला शोहर और ये औरत दोनों ये ख़याल करें के हुदूद ए इलाही पर क़याम रहेंगे, तो उनके लिए एक दूसरे की तरफ़ रूज़ू कार्लें में कोई मुज़हिक़ा नहीं। ये अल्लाह की मुकर्रर करदा हदें हैं जिन्होनें वो उन लोगों की हिदायत के लिए वाजे कर रहा है जो (उसकी हुदूद को तोड़ने का अंजाम) जानते हैं
عَرَبِيوَإِذا طَلَّقتُمُ النِّساءَ فَبَلَغنَ أَجَلَهُنَّ فَأَمسِكوهُنَّ بِمَعروفٍ أَو سَرِّحوهُنَّ بِمَعروفٍ ۚ وَلا تُمسِكوهُنَّ ضِرارًا لِتَعتَدوا ۚ وَمَن يَفعَل ذٰلِكَ فَقَد ظَلَمَ نَفسَهُ ۚ وَلا تَتَّخِذوا آياتِ اللَّهِ هُزُوًا ۚ وَاذكُروا نِعمَتَ اللَّهِ عَلَيكُم وَما أَنزَلَ عَلَيكُم مِنَ الكِتابِ وَالحِكمَةِ يَعِظُكُم بِهِ ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ وَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब तुम स्त्रियों को तलाक़ दे दो, फिर वे अपनी इद्दत (निश्चित अवधि) को पहुँच जाएँ, तो उन्हें भले तरीक़े से रख लो अथवा उन्हें भले तरीक़े से छोड़ दो। तथा उन्हें हानि पहुँचाने के लिए न रोके रखो, ताकि उनपर अत्याचार करो। और जो कोई ऐसा करे, तो निःसंदेह उसने स्वयं अपने आपपर अत्याचार किया। तथा अल्लाह की आयतों को मज़ाक़ न बनाओ। और अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करो तथा उसको भी (याद करो) जो उसने पुस्तक (क़ुरआन) एवं ह़िकमत (सुन्नत) में से तुमपर उतारा है, वह तुम्हें उसके साथ उपदेश देता है। तथा अल्लाह से डरो और जान लो कि अल्लाह हर चीज़ को ख़ूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab tum auraton ko talaq dedo aur unki iddat poori honay ko aa jaye, to ya bhale tareeqe se unhein rok lo ya bhale tareeqe se rukhsat kardo, mehaz satane ki khatir unhein na rokey rakhna, yeh zyadati hogi, aur jo aisa karega woh dar haqeeqat aap apne hi upar zulm karega. Allah ki ayaat ka khel na banao, bhool na jao ke Allah ne kis niyamat e uzma se tumhein sarfaraz kiya hai, woh tumhein naseehat karta hai ke jo kitab aur hikmat usne tumpar nazil ki hai, uska ehtaram malhooz rakkho. Allah se daro aur khoob jaan lo ke Allah ko har baat ki khabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jab tum aurton ko tallaq do aur woh apni iddat khatam kerney per aayen to abb enehn achi tarah basao ya bhalaee kay sath alag ker do aur enhen takleef phonchaney ki gharaz say zulm-o-ziyadti kay liye na roko jo shaks aisa keray uss ney apni jaan per zulm kiya. Tum Allah kay ehkaam ko hansi khel na banao aur Allah kay ehsan jo tum per hai yaad kero aur jo kuch kiab-o-hikmat uss ney nazil farmaee hai jiss say tumehn naseehat ker raha hai ussay bhi. Aur Allah Taalaa say dartay raha kero aur jaan rakho kay Allah Taalaa her cheez ko janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जब तुम औरतों को तलाक दे दो और उनकी इद्दत पूरी होने को आ जाए, तो हां भले तरीक़े से उन्हें रोक लो या भले तरीक़े से रुखसत करदो, मेहज़ सताने की खातिर उन्हें ना रोके रखना, ये ज़्यादा होगी, और जो ऐसा करेगा वो डर हकीकत आप अपना ही ऊपर ज़ुल्म करेंगे। अल्लाह की आयत का खेल न बनाओ, भूल न जाओ के अल्लाह ने किस नियामत ए उज्मा से तुम्हें सरफराज किया है, वो तुम्हें हिदायत करता है के जो किताब और हिकमत उसने तुमपर नाज़िल की है, उसका एहतराम मल्हूज़ रख्खो। अल्लाह से डरो और खूब जान लो के अल्लाह को हर बात की खबर है
عَرَبِيوَإِذا طَلَّقتُمُ النِّساءَ فَبَلَغنَ أَجَلَهُنَّ فَلا تَعضُلوهُنَّ أَن يَنكِحنَ أَزواجَهُنَّ إِذا تَراضَوا بَينَهُم بِالمَعروفِ ۗ ذٰلِكَ يوعَظُ بِهِ مَن كانَ مِنكُم يُؤمِنُ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ ۗ ذٰلِكُم أَزكىٰ لَكُم وَأَطهَرُ ۗ وَاللَّهُ يَعلَمُ وَأَنتُم لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब तुम स्त्रियों को तलाक़ दो, फिर वे अपनी निश्चित अवधि (इद्दत) को पहुँच जाएँ, तो उन्हें अपने पतियों से विवाह करने से न रोको, जबकि वे भले तरीक़े से आपस में विवाह करने पर सहमत हो जाएँ। यह बात है जिसका उपदेश तुममें से उसे दिया जा रहा है, जो अल्लाह तथा अंतिम दिन (प्रलय) पर ईमान रखता है। यह तुम्हारे लिए अधिक स्वच्छ तथा अधिक पवित्र है और अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Jab tum apni auraton ko talaq de chuko aur woh apni iddat poori karlein, to phir ismein maney na ho ke woh apne zerey tajweej shoharon se nikah karlein, jab ke woh maroof tareeqe se baham munakihat (marriage) par raazi hon. Tumhein naseehat ki jati hai ke aisi harakat hargiz na karna agar tum Allah aur roz e aakhir par iman laney wale ho, tumhare liye shaishta aur pakeeza tareeqa yahi hai ke issey baaz raho. Allah jaanta hai, tum nahin jaante
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab tum apni aurton ko tallaq do aur woh apni iddat poori ker len o unhen unn kay khawindon say nikkah kerney say na roko jab kay woh aapas mein dastoor kay mutabiq raza mand hon. Yeh naseehat unhen ki jati hai jinhen tum mein say Allah Taalaa per aur qayamat kay din per yaqeen-o-eman ho iss mein tumhari behtareen safaee aur pakeezgi hai. Allah Taalaa janta hai aur tum nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)जब तुम अपनी औरतों को तलाक दे चुको और वो अपनी इद्दत पूरी कर लें, तो फिर इसमें माने ना हो के वो अपने दूसरे ताजवीज शोहरों से निकाह कर लें, जब के वो मारूफ तारीख से बहम मुनकीहत (शादी) पर राजी हों। तुम्हें हिदायत की जाती है कि ऐसी हरकत हरगिज़ न करना अगर तुम अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान लाने वाले हो, तुम्हारे लिए शाइस्ता और पाकीज़ा तरीक़ा यहीं है के इसी बाज़ रहो। अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते
عَرَبِي۞ وَالوالِداتُ يُرضِعنَ أَولادَهُنَّ حَولَينِ كامِلَينِ ۖ لِمَن أَرادَ أَن يُتِمَّ الرَّضاعَةَ ۚ وَعَلَى المَولودِ لَهُ رِزقُهُنَّ وَكِسوَتُهُنَّ بِالمَعروفِ ۚ لا تُكَلَّفُ نَفسٌ إِلّا وُسعَها ۚ لا تُضارَّ والِدَةٌ بِوَلَدِها وَلا مَولودٌ لَهُ بِوَلَدِهِ ۚ وَعَلَى الوارِثِ مِثلُ ذٰلِكَ ۗ فَإِن أَرادا فِصالًا عَن تَراضٍ مِنهُما وَتَشاوُرٍ فَلا جُناحَ عَلَيهِما ۗ وَإِن أَرَدتُم أَن تَستَرضِعوا أَولادَكُم فَلا جُناحَ عَلَيكُم إِذا سَلَّمتُم ما آتَيتُم بِالمَعروفِ ۗ وَاتَّقُوا اللَّهَ وَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ بِما تَعمَلونَ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और माताएँ अपने बच्चों को पूरे दो वर्ष दूध पिलाएँ, उसके लिए जो चाहे कि दूध पीने की अवधि पूरी करे। और बच्चे के पिता के ज़िम्मे परंपरा के अनुसार उन (औरतों) का खाना और उनका कपड़ा है। किसी पर उसकी शक्ति से अधिक बोझ नहीं डाला जाएगा; न माँ को उसके बच्चे के कारण हानि पहुँचाई जाए और न पिता को उसके बच्चे की वजह से। और इसी प्रकार की ज़िम्मेदारी (उसके) वारिस पर भी है। फिर यदि दोनों आपस की सहमति तथा परस्पर परामर्श से (दो वर्ष से पहले) दूध छुड़ाना चाहें, तो दोनों पर कोई पाप नहीं। और यदि तुम्हारा इरादा (किसी अन्य स्त्री से) दूध पिलवाने का हो, तो तुमपर कोई पाप नहीं, जब रीति के अनुसार वह भुगतान कर दो, जो तुमने देना तय किया था। तथा अल्लाह से डरो और जान लो कि तुम जो कुछ करते हो, निःसंदेह अल्लाह उसे देख रहा है।
Roman Urdu (Maududi)Jo baap chahte hon ke unki aulad poori muddat e razaat tak doodh piye, to Maaein (mothers) apne bacchon ko kamil do saal doodh pilayein. Is surat mein bacchey ke baap ko maroof tareeqe se unhein khana, kapda dena hoga. Magar kisi par uski wusat se badhkar baar na daalna chahiye, na to Maa ko is wajah se takleef mein dala jaye ke baccha uska hai, aur na baap hi ko is wajah se tangg kiya jaye ke baccha uska hai. Doodh pilane wali ka yeh haqq jaisa bacchey ke baap par hai waisa hi uske waris par bhi hai , lekin agar fareeqain bahami razamandi aur mashware se doodh chudana chahein to aisa karne mein koi muzahiqa nahin, aur agar tumhara khayal apni aulad ko kisi gair aurat se doodh pilwane ka ho, to ismein bhi koi harj nahin bashart yeh ke iska jo kuch muawaza (compensation) tai karo, woh maroof tareeqe par ada kardo. Allah se daro aur jaan rakkho ke jo kuch tum karte ho, sab Allah ki nazar mein hai
Roman Urdu (Junagarhi)Mayen apni aulad ko do saal kamil doodh pilayen jin ka irada doodh pilaney ki muddat bilkul poori kerney ka ho aur jin kay bachay hain unn kay zimmay unn ka roti kapra hai jo mutabiq dastoor kay ho. Her shaks utni hi takleef diya jata hai jitni uss ki taqat ho. Maa ko uss kay bachay ki waja say ya baap ko uss ki aulad ki waja say koi zarar na phonchaya jaye waris per bhi issi jaisi zimmay dari hai phir agar dono (yani maa baap) apni raza mandi aur bahumi mashwaray say doodh churana chayen to dono per kuch gunah nahi aur agar tumhara irada apni aulad ko doodh pilwaney ka ho to bhi tum per koi gunah nahi jab kay tum unn ko muabiq dastoor kay jo dena ho woh inn kay hawalay ker do Allah Taalaa say dartay raho aur jantay raho kay Allah Taalaa tumharay aemaal ki dekh bhaal ker raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो बाप चाहता हो कि उनकी औलाद पूरी मुद्दत ए रजात तक दूध पिए, तो मांएं (माताओं) अपने बच्चों को कामिल दो साल दूध पिलाएं। क्या सूरत में बच्चे के बाप को मारूफ तारीख़ से उनको खाना, कपड़ा देना होगा। मगर किसी पर उसकी परेशानी से बुरा हक बार ना डालना चाहिए, ना तो मां को इस वजह से तकलीफ में डाला जाए के बच्चा उसका है, और ना बाप ही को इस वजह से तंग किया जाए के बच्चा उसका है। दूध पिलाने वाली का ये हक़ जैसा बच्चे के बाप पर है वैसा ही उसके वारिस पर भी है, लेकिन अगर फ़रीक़ैन बहामी रज़ामंडी और मैशवेयर से दूध छुड़ाना चाहिए तो ऐसा करने में कोई मुज़हिक़ा नहीं, और अगर तुम्हारा ख्याल अपनी औलाद को कोई गैर औरत से दूध पिलाने का हो, तो इसमें भी कोई हर्जा नहीं बशारत ये के इसका जो कुछ मुआवजा (मुआवजा) ताई करो, वो मारूफ तारीख पर अदा करदो। अल्लाह से डरो और जान रक्खो के जो कुछ तुम करते हो, सब अल्लाह की नजर में है
عَرَبِيوَالَّذينَ يُتَوَفَّونَ مِنكُم وَيَذَرونَ أَزواجًا يَتَرَبَّصنَ بِأَنفُسِهِنَّ أَربَعَةَ أَشهُرٍ وَعَشرًا ۖ فَإِذا بَلَغنَ أَجَلَهُنَّ فَلا جُناحَ عَلَيكُم فيما فَعَلنَ في أَنفُسِهِنَّ بِالمَعروفِ ۗ وَاللَّهُ بِما تَعمَلونَ خَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो लोग तुममें से मर जाएँ और पत्नियाँ छोड़ जाएँ, वे (पत्नियाँ) अपने आपको चार महीने और दस दिन प्रतीक्षा में रखें। फिर जब वे अपनी इद्दत (निर्धारित अवधि) को पहुँच जाएँ, तो तुमपर उसमें कोई पाप नहीं जो वे नियमानुसार अपने बारे में करें, तथा अल्लाह उससे जो कुछ तुम करते हो पूरी तरह अवगत है।
Roman Urdu (Maududi)Tum mein se jo log marr jayein, unke pichey agar unki biwiyan zinda hon, to woh apne aap ko char mahine dus din roke rakkhein, phir jab unki iddat poori ho jaye, to unhein ikhtiyar hai apni zaat ke maamle mein maroof tareeqe se jo chahien karein tumpar iski koi zimmedaari nahin. Allah tum sab ke aamaal se bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum mein say jo log fot ho jayen aur biwiyan chor jayen woh aurten apney aap ko chaar maheeney aur das (din) iddat mein rakhen phir jab muddat khatam ker len to jo achai kay sath woh apney liye keren uss mein tum per koi gunah nahi aur Allah Taalaa tumharay her amal say khabardar hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम में से जो लोग मर जाएंगे, उनके पीछे अगर उनकी बीवीयां जिंदा होंगी, तो वो अपने आप को चार महीने दस दिन रोके रखेंगे, फिर जब उनकी इद्दत पूरी हो जाए, तो उन्हें इख्तियार है अपनी जात के मामले में मारूफ तारीख़ से जो चाहें करें तुमपर इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं। अल्लाह तुम सब के आमाल से बख़बर है
عَرَبِيوَلا جُناحَ عَلَيكُم فيما عَرَّضتُم بِهِ مِن خِطبَةِ النِّساءِ أَو أَكنَنتُم في أَنفُسِكُم ۚ عَلِمَ اللَّهُ أَنَّكُم سَتَذكُرونَهُنَّ وَلٰكِن لا تُواعِدوهُنَّ سِرًّا إِلّا أَن تَقولوا قَولًا مَعروفًا ۚ وَلا تَعزِموا عُقدَةَ النِّكاحِ حَتّىٰ يَبلُغَ الكِتابُ أَجَلَهُ ۚ وَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ يَعلَمُ ما في أَنفُسِكُم فَاحذَروهُ ۚ وَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ غَفورٌ حَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुमपर इस बात में कोई गुनाह नहीं कि उन (इद्दत गुज़ारने वाली) स्त्रियों को विवाह के संदेश का संकेत दो, या (उसे) अपने मन में छिपाए रखो। अल्लाह जानता है कि तुम उन्हें अवश्य याद करोगे, परंतु उनसे गुप्त रूप से विवाह का वादा न करो, सिवाय इसके कि रीति के अनुसार कोई बात कहो। तथा विवाह का अनुबंध पक्का न करो, यहाँ तक कि लिखा हुआ हुक्म अपनी अवधि को पहुँच जाए। तथा जान लो कि निःसंदेह अल्लाह तुम्हारे मन की बातों को जानता है। अतः उससे डरो और जान लो कि अल्लाह बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत सहनशील है।
Roman Urdu (Maududi)Zamana e iddat mein khwa tum un bewa aurton ke saath mangni ki irada ishare kanayi mein zahir kardo, khwa dil mein chupaye rakkho, dono suraton mein koi muzahiqa nahin. Allah jaanta hai ke unka khayal to tumhare dil mein aayega hi magar dekho! Khufiya (hidden) ahad o paiman na karna agar koi baat karni hai to maroof tareeqe se karo aur aqd e nikah baandhne ka faisla us waqt tak na karo jab tak ke iddat poori na ho jaye, khoob samajh lo ke Allah tumhare dilon ka haal tak jaanta hai, lihaza ussey daro aur yeh bhi jaan lo ke Allah burdbaar hai, choti choti baaton se darguzar farmata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum per iss mein koi gunah nahi kay tum isharatan kanayatan inn aurton say nikkah ki babat kaho ya apney dil mein posheeda irada kero Allah Taalaa ko ilm hai kay kay tum zaroor inn ko yaad kero gay lekin tum inn say posheeda waday na ker lo haan yeh aur baat hai kay tum bhali baat bola kero aur aqad nikkah jab tak kay iddat khatam na hojaye pukhta na kero jaan rakho kay Allah Taalaa ko tumharay dilon ki baaton ka bhi ilm hai tum uss say khof khatay raha kero aur yeh bhi jaan rakho kay Allah Taalaa bakshish aur hilm wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़माना ए इद्दत में ख्वा तुम उन बेवा औरतों के साथ मंगनी की इरादा इशारे कनयी में जाहिर करदो, ख्वा दिल में छुपाये रक्खो, दोनों सूरतों में कोई मुज़हिक़ा नहीं। अल्लाह जानता है कि उनका ख्याल तो तुम्हारे दिल में आएगा ही मगर देखो! खुफिया (छिपा हुआ) अहद ओ पैमान न करना अगर कोई बात करनी है तो मारूफ तारीख से करो और अकद ए निकाह बांधने का फैसला हमें वक्त तक न करो जब तक के इद्दत पूरी न हो जाए, खूब समझ लो के अल्लाह तुम्हारे दिलों का हाल तक जानता है, लिहाजा उसे डरो और ये भी जान लो के अल्लाह बर्दबार है, छोटी छोटी बातों से दरगुजर फरमाता है
عَرَبِيلا جُناحَ عَلَيكُم إِن طَلَّقتُمُ النِّساءَ ما لَم تَمَسّوهُنَّ أَو تَفرِضوا لَهُنَّ فَريضَةً ۚ وَمَتِّعوهُنَّ عَلَى الموسِعِ قَدَرُهُ وَعَلَى المُقتِرِ قَدَرُهُ مَتاعًا بِالمَعروفِ ۖ حَقًّا عَلَى المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुमपर कोई पाप नहीं, यदि तुम स्त्रियों को तलाक़ दे दो जबकि तुमने (अभी) उन्हें न हाथ लगाया हो और न उनके लिए कुछ महर निर्धारित किया हो। (लेकिन) उन्हें रीति के अनुसार कुछ सामान दे दो; विस्तार वाले पर अपनी क्षमता के अनुसार तथा तंगदस्त पर अपनी क्षमता के अनुसार देय है। सत्कर्म करने वालों पर यह हक़ है।
Roman Urdu (Maududi)Tumpar kuch gunaah nahin, agar tum apni auraton ko talaq dedo qabl iske ke haath lagane ki naubat aaye ya mehar muqarrar ho, is surat mein unhein kuch na kuch dena zaroor chahiye. Khush haal aadmi apni maqdarat ke mutabiq aur gareeb apni madarat ke mutabiq maroof tareeqe se dey, yeh haqq hai neik aadmiyon par
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum aurton ko baghair haath lagaye aur baghair mehar muqarrar kiye tallaq dey do to bhi tum per koi gunah nahi haan unhen kuch na kuch faeeda do. Khushal apney andaz say aur tangdast apni taqat kay mutabiq dasatoor kay mutabiq acha faeeda dey. Bhalaee kerney walon per yeh lazim hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुमपर कुछ गुनाह नहीं, अगर तुम अपनी औरत को तलाक दे दो कबूल इसके के हाथ लगाने की नौबत आए या मेहर मुकर्रर हो, इस सूरत में उन्हें कुछ ना कुछ देना जरूर चाहिए. ख़ुश हाल आदमी अपनी मक़दरत के मुताबिक़ और ग़रीब अपनी मक़दरत के मुताबिक़ मारूफ़ तारीख़ से दे, ये हक़ है नए आदमियों पर
عَرَبِيوَإِن طَلَّقتُموهُنَّ مِن قَبلِ أَن تَمَسّوهُنَّ وَقَد فَرَضتُم لَهُنَّ فَريضَةً فَنِصفُ ما فَرَضتُم إِلّا أَن يَعفونَ أَو يَعفُوَ الَّذي بِيَدِهِ عُقدَةُ النِّكاحِ ۚ وَأَن تَعفوا أَقرَبُ لِلتَّقوىٰ ۚ وَلا تَنسَوُا الفَضلَ بَينَكُم ۚ إِنَّ اللَّهَ بِما تَعمَلونَ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम उन्हें इससे पहले तलाक़ दे दो कि उन्हें हाथ लगाओ, जबकि तुम उनके लिए कोई महर निर्धारित कर चुके हो, तो तुमने जो महर निर्धारित किया है उसका आधा देना अनिवार्य है, सिवाय इसके कि वे (पत्नियाँ) माफ़ कर दें, अथवा वह पुरुष माफ़ कर दे जिसके हाथ में विवाह का बंधन है। और यह (बात) कि तुम माफ़ कर दो तक़वा (परहेज़गारी) के अधिक क़रीब है। और आपस में उपकार करना न भूलो। निःसंदेह अल्लाह उसे ख़ूब देखने वाला है, जो तुम कर रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar tumne haath lagane se pehle talaq di ho, lekin mehar muqarrar kiya ja chuka ho, to us surat mein nisf (half) mehar dena hoga, yeh aur baat hai ke aurat narmi barte (aur mehar na le) ya woh Mard jiske ikhtiyar mein aqd e nikah hai, narmi se kaam le (aur poora mehar de de), aur tum (yani Mard) narmi se kaam lo to yeh taqwa se zyada munasibat rakhta hai, aapas ke maamlaat mein fayyazi ko na bhoolo, Tumhare aamal ko Allah dekh raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tum aurton ko iss say pehlay tallaq dey do kay tum ney unhen haath lagaya ho aur tum ney unn ka mehar bhi muqarrar ker diya ho to muqarrar mehar ka aadha mehar dey do yeh aur baat hai kay woh khud moaf ker den ya woh shaks moaf ker dey jiss kay haath mein nikkah ki girah hai tumhara moaf ker dena taqwa say boht nazdeek hai aur aapas ki fazeelat aur buzrugi ko faramosh na kero yaqeenan Allah Taalaa tumharay aemaal ko dekh raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर तुमने हाथ लगाने से पहले तलाक दी हो, लेकिन मेहर मुकर्रर किया जा चुका हो, तो हमें सूरत में निस्फ (आधा) मेहर देना होगा, ये और बात है के औरत नरमी बरते (और मेहर ना ले) या वो मर्द जिसका इख्तियार में अकद ए निकाह है, नरमी से काम ले (और पूरा मेहर दे दे), और तुम (यानी मर्द) नरमी से काम लो तो ये तकवा से ज्यादा मुनासिबत रखा है, आपस में मामलात में फैयाज़ी को ना भूलो, तुम्हारे अमल को अल्लाह देख रहा है
عَرَبِيحافِظوا عَلَى الصَّلَواتِ وَالصَّلاةِ الوُسطىٰ وَقوموا لِلَّهِ قانِتينَ
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हिन्दी (Al-Omari)सब नमाज़ों का और (विशेषकर) बीच की नमाज़ (अस्र) का ध्यान रखो तथा अल्लाह के लिए आज्ञाकारी होकर (विनयपूर्वक) खड़े रहो।
Roman Urdu (Maududi)Apni namazon ki nigehdaasht rakkho, khususan aisi namaaz ki jo mohasan salawat ki jamey (middle prayer) ho. Allah ke aage is tarah khade ho jaise farmabardaar ghulam khade hotay hain
Roman Urdu (Junagarhi)Namazon ki hifazat kero bilkhusoos darmiyan wali namaz ki aur Allah Taalaa kay liye ba adab kharay raha kero
Devnagri Urdu (Maududi)अपनी नमाज़ों की निगेहदाश्त रक्खो, ख़ुसूसन ऐसी नमाज़ की जो मोहासन सलावत की जामे (मध्य प्रार्थना) हो। अल्लाह के आगे इस तरह खड़े हो जैसे फरमाबरदार गुलाम खड़े हो गए हैं
عَرَبِيفَإِن خِفتُم فَرِجالًا أَو رُكبانًا ۖ فَإِذا أَمِنتُم فَاذكُرُوا اللَّهَ كَما عَلَّمَكُم ما لَم تَكونوا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि तुम्हें भय हो, तो पैदल (नमाज़) पढ़ लो या सवार। फिर जब भय दूर हो जाए, तो अल्लाह को याद करो जैसे उसने तुम्हें सिखाया है, जो तुम नहीं जानते थे।
Roman Urdu (Maududi)Badh-amani ki haalat ho, to khwa paidal ho, khwa sawaar , jis tarah mumkin ho namaz padho aur jab aman mayassar aa jaye to Allah ko us tareeqe se yaad karo jo usne tumhein sikha diya hai, jissey tum pehle na-waqif thay
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tumhen khof ho to paidal hi sahih ya sawari hi sahih haan jab aman hojaye to Allah ka zikar kero jiss tarah ka uss ney tumhen uss baat ki taleem di jissay tum nahi jantay thay
Devnagri Urdu (Maududi)बाढ़-अमानी की हालत हो, तो ख्वा पेदल हो, ख्वा सवार, जिस तरह मुमकिन हो नमाज पढ़ो और जब अमन मयस्सर आ जाए तो अल्लाह को उस तारीख से याद करो जो उसने तुम्हें सिखाया है, जिसने तुम पहले ना-वाक़िफ़ थे
عَرَبِيوَالَّذينَ يُتَوَفَّونَ مِنكُم وَيَذَرونَ أَزواجًا وَصِيَّةً لِأَزواجِهِم مَتاعًا إِلَى الحَولِ غَيرَ إِخراجٍ ۚ فَإِن خَرَجنَ فَلا جُناحَ عَلَيكُم في ما فَعَلنَ في أَنفُسِهِنَّ مِن مَعروفٍ ۗ وَاللَّهُ عَزيزٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो लोग तुममें से मृत्यु पा जाते हैं तथा पत्नियाँ छोड़ जाते हैं, वे अपनी पत्नियों के लिए एक वर्ष तक घर से निकाले बिना खर्च देने की वसीयत करें। परंतु यदि वे (स्वयं) निकल जाएँ, तो तुमपर उसमें कोई पाप नहीं जो वे रीति के अनुसार अपने बारे में करें, और अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Tum mein se jo log wafaat payein aur pichey biwiyan chodh rahey hon, unko chahiye ke apni biwiyon ke haqq mein yeh wasiyat kar jayein ke ek saal tak unko naan-o-nafaqa (maintenance) diya jaye aur woh ghar se na nikali jayein. Phir agar woh khud nikal jayein to apni zaat ke maamle mein maroof tareeqe se woh jo kuch bhi karein uski koi zimmedari tumpar nahin hai. Allah sab par gaalib iqtedar rakhne wala aur hakeem o daana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log tum mein say fot hojayen aur biwiyan chor jayen woh waseeyat ker jayen kay unn ki biwiyan saal bhar tak faeeda uthayen unhen koi na nikalay haan agar woh khud nikal jayen to tum per iss mein koi gunah nahi jo woh apney liye achai say keren Allah Taalaa ghalib aur hakeem hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम में से जो लोग वफ़ात पाएं और पीछे बीवीयां छोड़ रहे हों, उनको चाहिए के अपनी बीवीयों के हक़ में ये वसीयत कर जाएं के एक साल तक उनको नान-ओ-नफ़ाका (रखरखाव) दिया जाए और वो घर से ना निकली जायें. फिर अगर वो खुद निकल जाए तो अपनी जात के मामले में मारूफ तारीख से वो जो कुछ भी करें उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। अल्लाह सब पर गालिब इक्तेदार रखने वाला और हकीम ओ दाना है
عَرَبِيوَلِلمُطَلَّقاتِ مَتاعٌ بِالمَعروفِ ۖ حَقًّا عَلَى المُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन स्त्रियों को तलाक़ दी गई है, उन्हें रीति के अनुसार कुछ न कुछ सामग्री देना आवश्यक है, डर रखने वालों पर यह हक़ (अनिवार्य) है।
Roman Urdu (Maududi)Isi tarah jin auraton ko talaq di gayi ho, unhein bhi munasib taur par kuch na kuch de kar rukhsat kiya jaye, yeh haqq hai muttaqi logon par
Roman Urdu (Junagarhi)Tallaq waliyon ko achi tarah faeeda dena perhezgaron per lazim hai
Devnagri Urdu (Maududi)इसी तरह जिन औरतों को तलाक दी गई हो, उन्हें भी मुनासिब तौर पर कुछ न कुछ दे कर रुखसत किया जाए, ये हक है मुत्तकी लोगों पर
عَرَبِيكَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُم آياتِهِ لَعَلَّكُم تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)इसी तरह अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी आयतें खोलकर बयान करता है, ताकि तुम समझो।
Roman Urdu (Maududi)Is tarah Allah apne ehkam tumhein saaf saaf batata hai, umeed hai ke tum samajh boojh kar kaam karo
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa issi tarah apni aayaten tum per zahir ker raha farma raha hai takay tum samjho
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह अल्लाह अपने एहकाम तुम्हें साफ साफ़ बताता है, उम्मीद है के तुम समझ बूझ कर काम करो
عَرَبِي۞ أَلَم تَرَ إِلَى الَّذينَ خَرَجوا مِن دِيارِهِم وَهُم أُلوفٌ حَذَرَ المَوتِ فَقالَ لَهُمُ اللَّهُ موتوا ثُمَّ أَحياهُم ۚ إِنَّ اللَّهَ لَذو فَضلٍ عَلَى النّاسِ وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) क्या आपने उन लोगों को नहीं देखा जो मौत के भय से अपने घरों से निकले, जबकि वे कई हज़ार थे, तो अल्लाह ने उनसे कहा कि मर जाओ, फिर उन्हें जीवित कर दिया। निःसंदेह अल्लाह लोगों पर बड़े अनुग्रह वाला है, लेकिन अधिकांश लोग शुक्रिया अदा नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Tumne un logon ke haal par bhi kuch gaur kiya, jo maut ke darr se apne ghar baar chodh kar nikle thay aur hazaaron ki tadaad mein thay? Allah ne unse farmaya: marr jao , phir usne unko dobara zindagi bakshi, haqeeqat yeh hai ke Allah Insaan par bada fazal farmane wala hai magar aksar log shukar ada nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum ney unhen nahi dekha jo hazaron ki tadaad mein thay aur maut kay darr kay maaray apney gharon say nikal kharay huye thay Allah Taalaa ney unhen farmaya marr jao phir unhen zinda ker diya be-shak Allah Taalaa logon per bara fazal wala hai lekin aksar log na shukray hain
Devnagri Urdu (Maududi)तुमने उन लोगों के हाल पर भी कुछ गौर किया, जो मौत के डर से अपने घर बार छोड़ कर निकले थे और हज़ारों की ताड़ाद में थे? अल्लाह ने उनसे फरमाया: मर जाओ, फिर हमने उनको दोबारा जिंदगी बख्शी, हकीकत ये है के अल्लाह इंसान पर बड़ा फजल फरमान वाला है मगर अक्सर लोग शुक्र अदा नहीं करते
عَرَبِيوَقاتِلوا في سَبيلِ اللَّهِ وَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ سَميعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम अल्लाह के मार्ग में युद्ध करो और जान लो कि अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Musalmano)! Allah ki raah mein jung karo, aur khoob jaan rakkho ke Allah sunne wala aur jaanne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah ki raah mein jihad kero aur jaan lo kay Allah Taalaa sunta janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)(मुसलमानो)! अल्लाह की राह में जंग करो, और ख़ूब जान रक्खो के अल्लाह सुनने वाला और जाने वाला है
عَرَبِيمَن ذَا الَّذي يُقرِضُ اللَّهَ قَرضًا حَسَنًا فَيُضاعِفَهُ لَهُ أَضعافًا كَثيرَةً ۚ وَاللَّهُ يَقبِضُ وَيَبسُطُ وَإِلَيهِ تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)कौन है वह जो अल्लाह को अच्छा क़र्ज़ दे, तो वह उसे उसके लिए बहुत अधिक गुना बढ़ा दे, तथा अल्लाह ही तंगी करता और विस्तार करता है और तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Tum mein kaun hai jo Allah ko qarz e hasan (good loan) de taa-ke Allah usey kai gunaa badha chadha kar wapas karey? Ghatana bhi Allah ke ikhtiyar mein hai aur badana bhi, aur usi ki taraf tumhein palat kar jana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aisa bhi koi hai jo Allah Taalaa ko acha qarz dey pus Allah Taalaa ussay boht barha charha ker ata farmaye Allah hi tangi aur kushadgi kerta hai aur tum sab ussi ki taraf lotaye jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम में कौन है जो अल्लाह को क़र्ज़ ए हसन (अच्छा ऋण) दे ता-के अल्लाह उसे कोई गुनाह बढ़ा कर वापस करे? घाटना भी अल्लाह के इख्तियार में है और बदन भी, और उसकी तरफ तुम्हें पलट कर जाना है
عَرَبِيأَلَم تَرَ إِلَى المَلَإِ مِن بَني إِسرائيلَ مِن بَعدِ موسىٰ إِذ قالوا لِنَبِيٍّ لَهُمُ ابعَث لَنا مَلِكًا نُقاتِل في سَبيلِ اللَّهِ ۖ قالَ هَل عَسَيتُم إِن كُتِبَ عَلَيكُمُ القِتالُ أَلّا تُقاتِلوا ۖ قالوا وَما لَنا أَلّا نُقاتِلَ في سَبيلِ اللَّهِ وَقَد أُخرِجنا مِن دِيارِنا وَأَبنائِنا ۖ فَلَمّا كُتِبَ عَلَيهِمُ القِتالُ تَوَلَّوا إِلّا قَليلًا مِنهُم ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ بِالظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) क्या आपने मूसा के बाद बनी इसराईल के प्रमुखों को नहीं देखा, जब उन्होंने अपने एक नबी से कहा : हमारे लिए एक बादशाह निर्धारित कर दो कि हम अल्लाह के मार्ग में युद्ध करें। उस (नबी) ने कहा : ऐसा न हो कि यदि तुमपर युद्ध करना अनिवार्य कर दिया जाए, तो तुम युद्ध न करो? उन्होंने कहा : और हमें क्या है कि हम अल्लाह के मार्ग में युद्ध न करें, हालाँकि हमें हमारे घरों और हमारे बेटों से निकाल दिया गया है? फिर जब उनपर युद्ध करना अनिवार्य कर दिया गया, तो उनमें से बहुत थोड़े लोगों के सिवा सब फिर गए। और अल्लाह उन अत्याचारियों को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Phir tumne us maamle par bhi gaur kiya, jo Moosa ke baad sardaraan e bani Israel ko pesh aaya tha? Unhon ne apne Nabi se kaha: hamare liye ek baadshah muqarrar kardo taa-ke hum Allah ki raah mein jung karein, Nabi ne pucha : kahin aisa to na hoga ke tumko ladayi ka hukum diya jaye aur phir tum na lado? Woh kehne lagey : bhala yeh kaise ho sakta hai ke hum raah e khuda mein na ladein, jabke humein apne gharon se nikaal diya gaya hai aur hamare baal bacchey humse juda kardiye gaye hain? Magar jab unko jung ka hukum diya gaya to ek qaleel tadaad ke siwa woh sab peeth moad gaye, aur Allah unmein se ek ek zalim ko jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney (hazrat) musa kay baad wali bani israeel ki jamat ko nahi dekha jab kay unhon ney apney payghumbar say kaha kay kissi ko humara badshah bana dijiye takay hum Allah ki raah mein jihad keren. Payghumbar ney kaha mumkin hai jihad farz hojaney kay baad tum jihad na kero unhon ney kaha bhala hum Allah ki raah mein jihad kiyon na keren gay? Hum to apney gharon say ujaray gaye hain aur bachon say door ker diye gaye hain. Phir jab unn per jihad farz hua to siwaye thoray say logon kay sab phir gaye aur Allah Taalaa zalimon ko khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर तुमने उस मामले पर भी गौर किया, जो मूसा के बाद सरदारन ए बानी इजराइल को पेश आया था? उनहों ने अपने नबी से कहा: हमारे लिए एक बादशाह मुकर्रर करदो ता-के हम अल्लाह की राह में जंग करें, नबी ने पूछा: कहीं ऐसा तो न होगा के तुमको लड़ाई का हुकुम दिया जाए और फिर तुम न लड़ो? वो कहने लगे: भला ये कैसे हो सकता है कि हम राह ए खुदा में ना लड़ें, जबके हमने अपने घरों से निकल दिया है और हमारे बाल बच्चे हमसे जुदा कर दिए गए हैं? मगर जब उनको जंग का हुकुम दिया गया तो एक कलील तड़ाद के सिवा वो सब पीठ मोड़ गए, और अल्लाह उनमें से एक एक जालिम को जानता है
عَرَبِيوَقالَ لَهُم نَبِيُّهُم إِنَّ اللَّهَ قَد بَعَثَ لَكُم طالوتَ مَلِكًا ۚ قالوا أَنّىٰ يَكونُ لَهُ المُلكُ عَلَينا وَنَحنُ أَحَقُّ بِالمُلكِ مِنهُ وَلَم يُؤتَ سَعَةً مِنَ المالِ ۚ قالَ إِنَّ اللَّهَ اصطَفاهُ عَلَيكُم وَزادَهُ بَسطَةً فِي العِلمِ وَالجِسمِ ۖ وَاللَّهُ يُؤتي مُلكَهُ مَن يَشاءُ ۚ وَاللَّهُ واسِعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके नबी ने उनसे कहा : निःसंदेह अल्लाह ने तुम्हारे लिए 'तालूत' को बादशाह निर्धारित किया है। उन्होंने कहा : उसका राज्य हमपर कैसे हो सकता है, जबकि हम राज्य के उससे अधिक हक़दार हैं और उसे धन का विस्तार भी प्राप्त नहीं? उस (नबी) ने कहा : निःसंदेह अल्लाह ने उसे तुमपर चुन लिया है और उसे अधिक ज्ञान तथा शारीरिक बल प्रदान किया है। और अल्लाह अपना राज्य जिसे चाहता है, प्रदान करता है तथा अल्लाह बहुत विस्तार वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Unke Nabi ne unse kaha ke Allah ne Talut ko tumhare liye baadshah muqarrar kiya hai, yeh sunkar woh bole : “humpar baadshah banney ka woh kaise haqqdaar hogaya? Uske muqable mein baadshahi ke hum zyada mustahiq hain, woh to koi bada maaldaar aadmi nahin hai”. Nabi ne jawab diya: “Allah ne tumhare muqable mein usi ko muntakhab kiya hai aur usko dimaagi o jismani dono kism ki ehliyatein farawani ke saath ata farmayi hain aur Allah ko ikhtiyar hai ke apna mulk jisey chahe dey, Allah badi wusat rakhta hai aur sabkuch uske ilm mein hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unhen unn kay nabi ney farmaya kay Allah Taalaa ney taloot ko tumahra badshah bana diya hai to kehney lagay bhala uss ki hum per hukoomat kaisay ho sakti hai? Uss say to boht ziyada haq daar badshaat kay hum hain uss ko to maali kushadgi bhi nahi di gaee. Nabi ney farmaya suno Allah Taalaa ney ussi ko tum per bar gazeedah kiya hai aur ussay ilmi aur jismani bartari bhi ata farmaee hai baat yeh hai kay Allah jisay chahaye apna mulk dey Allah Taalaa kushadgi wala aur ilm wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनके नबी ने उन्हें कहा के अल्लाह ने तालुत को तुम्हारे लिए बादशाह मुकर्रर किया है, ये सुनकर वो बोले: "हमपर बादशाह बनने का वो कैसे हक़दार होगा? उसके मुकाबले में बादशाही के हम ज़्यादा मुस्तहक़ हैं, वो तो कोई बड़ा मालदार आदमी नहीं है"। नबी ने जवाब दिया: "अल्लाह ने तुम्हारे मुक़ाबले में उसे मुंतख़ब किया है और उसको दिमाग़ी ओ जिस्मानी दोनों किस्मत की एहलियातें फ़रावानी के साथ अता फरमाई हैं और अल्लाह को इख्तियार है के अपना मुल्क जिसे चाहे दे, अल्लाह बदी वुसत रखता है और सब कुछ उसके इल्म में है"
عَرَبِيوَقالَ لَهُم نَبِيُّهُم إِنَّ آيَةَ مُلكِهِ أَن يَأتِيَكُمُ التّابوتُ فيهِ سَكينَةٌ مِن رَبِّكُم وَبَقِيَّةٌ مِمّا تَرَكَ آلُ موسىٰ وَآلُ هارونَ تَحمِلُهُ المَلائِكَةُ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً لَكُم إِن كُنتُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके नबी ने उनसे कहा : निःसंदेह उसके राजा होने की निशानी यह है कि तुम्हारे पास वह ताबूत (संदूक़) आ जाएगा, जिसमें तुम्हारे पालनहार की ओर से एक संतोष (सांत्वना) है तथा मूसा और हारून के घराने के छोड़े हुए अवशेष हैं, उसे फ़रिश्ते उठाए हुए होंगे। निःसंदेह इसमें तुम्हारे लिए निश्चय एक निशानी है, यदि तुम ईमान वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Iske saath unke Nabi ne unko yeh bhi bataya ke “khuda ki taraf se uske baadshah muqarrar honay ki alamat yeh hai ke uske ahad mein woh sandook tumhein wapas mil jayega, jismein tumhare Rubb ki taraf se tumhare liye sukoon e qalb ka samaan hai, jismein aale Moosa aur aale Haroon ke chodey huey tabarrukaat hain, aur jisko is waqt Farishte sambhale huey hain agar tum momin ho, to yeh tumhare liye bahut badi nishani hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay nabi ney unhen phir kaha kay uss ki badshaat ki zahiri nishani yeh hai kay tumharay pass woh sandooq aa jaye ga jiss mein tumharay rab ki taraf say dil jamaee aur aal-e-musa aur aal-e-haroon ka baqiya tarqa hai farishtay ussay utha ker layen gay. Yaqeenan yeh to tumharay liye khuli daleel hai agar tum eman laye ho
Devnagri Urdu (Maududi)इसके साथ उनके नबी ने उनको ये भी बताया के "खुदा की तरफ से उसके बादशाह मुकर्रर होने की अलामत ये है के उसके अहद में वो संदूक तुम्हें वापस मिल जाएगा, जिसमें तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे लिए सुकून ए क़ल्ब का सामान" है, जिसमें आले मूसा और आले हारून के छोड़े हुए तबर्रुकात हैं, और जिसको इस वक्त फरिश्ते संभाले हुए हैं अगर तुम मोमिन हो, तो ये तुम्हारे लिए बहुत बड़ी निशानी है
عَرَبِيفَلَمّا فَصَلَ طالوتُ بِالجُنودِ قالَ إِنَّ اللَّهَ مُبتَليكُم بِنَهَرٍ فَمَن شَرِبَ مِنهُ فَلَيسَ مِنّي وَمَن لَم يَطعَمهُ فَإِنَّهُ مِنّي إِلّا مَنِ اغتَرَفَ غُرفَةً بِيَدِهِ ۚ فَشَرِبوا مِنهُ إِلّا قَليلًا مِنهُم ۚ فَلَمّا جاوَزَهُ هُوَ وَالَّذينَ آمَنوا مَعَهُ قالوا لا طاقَةَ لَنَا اليَومَ بِجالوتَ وَجُنودِهِ ۚ قالَ الَّذينَ يَظُنّونَ أَنَّهُم مُلاقُو اللَّهِ كَم مِن فِئَةٍ قَليلَةٍ غَلَبَت فِئَةً كَثيرَةً بِإِذنِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ مَعَ الصّابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब तालूत सेनाएँ लेकर चला, तो उसने कहा : निःसंदेह अल्लाह एक नहर द्वारा तुम्हारी परीक्षा लेने वाला है। अतः जिसने उसमें से पिया, तो वह मुझमें से नहीं है और जिसने उसे नहीं चखा, तो निःसंदेह वह मुझमें से है। परंतु जो अपने हाथ से एक चुल्लू भर पानी ले ले (तो कोई बात नहीं)। तो उनमें से थोड़े लोगों के सिवा सबने उसमें से पी लिया। फिर जब वह (तालूत) और उसके साथ ईमान वाले नहर पार कर गए, तो उन्होंने कहा : आज हमारे पास जालूत और उसकी सेनाओं से लड़ने की कोई शक्ति नहीं है। (परंतु) जो लोग समझते थे कि निश्चय वे अल्लाह से मिलने वाले हैं, उन्होंने कहा : कितने ही थोड़े समूह, अल्लाह की अनुमति से, बड़े समूहों पर विजय प्राप्त कर चुके हैं और अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab Talut laskar lekar chala, to usne kaha: “ek dariya par Allah ki taraf se tumhari aazmaish honay wali hai, jo uska pani piyega, woh mera saathi nahin. Mera saathi sirf woh hai jo ussey pyas na bujhaye, haan ek aadh chillu koi pee ley to pee ley”. Magar ek giroh e qaleel ke siwa woh sab us dariya se sairaab huey, phir jab Talut aur uske saathi musalman dariya paar karke aagey badey to unhon ne Talut se kehdiya ke aaj hum mein Jaaluth (goliath) aur uske lashkaron ka muqabla karne ki taaqat nahin hai, lekin jo log yeh samajhte thay ke unhein ek din Allah se milna hai, unhone ne kaha: “ baaraha aisa hua hai ke ek qaleel giroh Allah ke izan se ek badey giroh par gaalib aa gaya hai, Allah sabr karne walon ka saathi hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab (hazrat) taloot lashkaron ko ley ker niklay to kaha suno Allah Taalaa tumhen aik nehar say aazmaney wala hai jiss ney uss mein say pani pi liya woh mera nahi aur jo ussay na chakhay woh mera hai haan yeh aur baat hai kay apney haath say aik chillo bhar ley. Lekin siwaye chand kay baqi sab ney woh pani pi liya (hazrat) taloot momineen samet jab nehar say guzar gaye to woh kehney lagay aaj to hum mein taqat nahi kay jaloot aur uss kay lashkaron say laren. Lekin Allah Taalaa ki mulaqat ka yaqeen rakhney walon ney kaha basa oqat choti aur thori si jamaten bari aur boht si jamaton per Allah kay hukum say ghalba paa leti hain Allah Taalaa sabar kerney walon kay sath hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब तलुत लस्कर लेकर चला, तो उसने कहा: "एक दरिया पर अल्लाह की तरफ से तुम्हारी आजमाइश होने वाली है, जो उसका पानी पिएगा, वो मेरा साथी नहीं। मेरा साथी सिर्फ वो है जो उसे प्यास न बुझाए, हां एक आधा चिल्लू कोई पेशाब ले तो पेशाब ले। जालूथ (गोलियाथ) और उसके लश्करों का मुकाबला करने की ताक़त नहीं है, लेकिन जो लोग ये समझते थे के उनको एक दिन अल्लाह से मिलना है, उनको ने कहा: “बारहा ऐसा हुआ है के एक कलील गिरो, अल्लाह के इज़ान से एक बड़े गिरोह पर गालिब आ गया है, अल्लाह सब्र करने वालों का साथी है।”
عَرَبِيوَلَمّا بَرَزوا لِجالوتَ وَجُنودِهِ قالوا رَبَّنا أَفرِغ عَلَينا صَبرًا وَثَبِّت أَقدامَنا وَانصُرنا عَلَى القَومِ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब वे जालूत और उसकी सेनाओं के सामने हुए, तो दुआ की : ऐ हमारे पालनहार! हमपर धैर्य उँडेल दे तथा हमारे पैरों को जमा दे और इन काफ़िरों के विरुद्ध हमारी सहायता कर।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab woh Jaaluth aur uske lashkaron ke muqable par nikle to unhon ne dua ki: “aye hamare Rubb humpar sabr ka faizan kar, hamare qadam jamaa de aur is kafir giroh par humein fatah naseeb kar.”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab unn ka jaloot aur uss kay lashkar say muqabla hua to unhon ney dua maangi kay aey perwerdigar humen sabar dey sabit qadmi dey aur qom-e-kuffaar per humari madad farma
Devnagri Urdu (Maududi)और जब वो जलूथ और उसके लश्करों के मुक़ाबले पर निकले तो उन्होन ने दुआ की: "ऐ हमारे रब हमपर सब्र का फ़ैज़ान कर, हमारे क़दम जमा दे और इस काफ़िर गिरो ​​पर हमें फ़तह नसीब कर।"
عَرَبِيفَهَزَموهُم بِإِذنِ اللَّهِ وَقَتَلَ داوودُ جالوتَ وَآتاهُ اللَّهُ المُلكَ وَالحِكمَةَ وَعَلَّمَهُ مِمّا يَشاءُ ۗ وَلَولا دَفعُ اللَّهِ النّاسَ بَعضَهُم بِبَعضٍ لَفَسَدَتِ الأَرضُ وَلٰكِنَّ اللَّهَ ذو فَضلٍ عَلَى العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्होंने अल्लाह की अनुज्ञा से उन्हें पराजित कर दिया और दाऊद ने जालूत को क़त्ल कर दिया तथा अल्लाह ने उस (दाऊद) को राज्य और ह़िकमत प्रदान की तथा उसे जो कुछ चाहता था, सिखा दिया। और यदि अल्लाह का कुछ लोगों को कुछ लोगों द्वारा हटाना न होता, तो निश्चय धरती की व्यवस्था बिगड़ जाती। परंतु अल्लाह संसार वालों पर बड़े अनुग्रह वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar Allah ke izan se unhon ne kafiron ko maar bhagaya aur Dawood ne Jaaluth ko qatal kardiya aur Allah ne usey sultanat aur hikmat se nawaza aur jin jin cheezon ka chaha usko ilm diya, agar is tarah Allah insaano ke ek giroh ko dusre giroh ke zariye se hatata na rehta, to zameen ka nizam bigad jata, lekin duniya ke logon par Allah ka bada fazl hai (ke woh is tarah dafey fasaad ka intezam karta rehta hai)
Roman Urdu (Junagarhi)Chunacha Allah Taalaa kay hukum say unhon ney jalootiyon ko shikast dey di aur (hazrat) dawood (alh-e-salam) ko mamlikat-o-hikmat aur jitna kuch chaha ilm bhi ata farmaya. Agar Allah Taalaa baaz logon ko baaz say dafa na kerta to zamin mein fasad phel jata lekin Allah Taalaa duniya walon per bara fazal-o-karam kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार अल्लाह के इज़ान से उन्होन ने काफ़िरों को मार डाला और दाऊद ने जालुथ को क़त्ल कर दिया और अल्लाह ने उसे सल्तनत और हिकमत से नवाजा और जिन चीज़ों का चाहा उसको इल्म दिया, अगर इस तरह अल्लाह इंसानों के एक गिरोह को दूसरे गिरोह के ज़रिये से हटाता ना रहता, तो ज़मीन का निज़ाम बिगाड़ जाता, लेकिन दुनिया के लोगों पर अल्लाह का बड़ा फ़ज़ल है (के वो इस तरह दफ़े फ़साद का इंतेज़ाम करता रहता है)
عَرَبِيتِلكَ آياتُ اللَّهِ نَتلوها عَلَيكَ بِالحَقِّ ۚ وَإِنَّكَ لَمِنَ المُرسَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) ये अल्लाह की आयतें हैं, हम उन्हें सत्य के साथ आपपर पढ़ते हैं, और निःसंदेह आप निश्चय रसूलों में से हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Allah ki aayaat hain jo hum theek theek tumko suna rahey hain aur tum yaqeenan un logon mein se ho jo Rasool bana kar bheje gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh Allah Taalaa ki aayaten hain jinhen hum haqqaaniyat kay sath aap per parhtay hain bil yaqeen aap rasoolon mein say hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये अल्लाह की आयत हैं जो हम ठीक ठीक तुमको सुना रहे हैं और तुम यकीनन उन लोगों में से हो जो रसूल बना कर भेजे गए हैं
🕮 Juz 3 begins here
عَرَبِي۞ تِلكَ الرُّسُلُ فَضَّلنا بَعضَهُم عَلىٰ بَعضٍ ۘ مِنهُم مَن كَلَّمَ اللَّهُ ۖ وَرَفَعَ بَعضَهُم دَرَجاتٍ ۚ وَآتَينا عيسَى ابنَ مَريَمَ البَيِّناتِ وَأَيَّدناهُ بِروحِ القُدُسِ ۗ وَلَو شاءَ اللَّهُ مَا اقتَتَلَ الَّذينَ مِن بَعدِهِم مِن بَعدِ ما جاءَتهُمُ البَيِّناتُ وَلٰكِنِ اختَلَفوا فَمِنهُم مَن آمَنَ وَمِنهُم مَن كَفَرَ ۚ وَلَو شاءَ اللَّهُ مَا اقتَتَلوا وَلٰكِنَّ اللَّهَ يَفعَلُ ما يُريدُ
हिन्दी (Al-Omari)ये रसूल हैं, हमने इनमें से कुछ को कुछ पर श्रेष्ठता प्रदान की। इनमें से कुछ वे हैं जिनसे अल्लाह ने बात की, और उनमें से कुछ के उसने दर्जे ऊँचे किए। तथा हमने मरयम के पुत्र ईसा को खुली निशानियाँ दीं और उसे रूह़ुल-क़ुदुस द्वारा शक्ति प्रदान की। और यदि अल्लाह चाहता, तो उनके बाद आने वाले लोग उनके पास खुली निशानियाँ आ जाने के पश्चात आपस में न लड़ते। परंतु उन्होंने मतभेद किया, तो उनमें से कोई तो वह था जो ईमान लाया और उनमें से कोई वह था जिसने कुफ़्र किया। और यदि अल्लाह चाहता, तो वे आपस में न लड़ते, लेकिन अल्लाह जो चाहता है, करता है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Rasool (jo hamari taraf se Insaano ki hidayat par mamoor huey) humne unko ek dusre se badh chadh kar martabe ata kiye, unmein koi aisa tha jissey khuda khud hum-kalaam hua, kisi ko usne dusri haisyaton se buland darje diye, aur aakhir mein Isa Ibn-Mariyam ko roshan nishaniyan ata ki aur rooh e paak se uski madad ki , agar Allah chahta to mumkin na tha ke in Rasoolon ke baad jo log roshan nishaniyan dekh chuke thay wo aapas mein ladte , magar (Allah ki mashiyat yeh na thi ke woh logon ko jabran ikhtilaaf se roke, is wajah se) unhon ne baham ikhtilaaf kiya, phir koi iman laya aur kisi ne kufr ki raah ikhtiyar ki, haan , Allah chahta to woh hargiz na ladte, magar Allah jo chahta hai karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh rasool hain jin mein say hum ney baaz ko baaz per fazilat di hai inn mein say baaz woh hain jin say Allah Taalaa ney baat cheet ki hai aur baaz kay darjay buland kiye hain aur hum ney essa bin marium ko moajzaat ata farmaye aur rooh-ul-qudus say unn ki taeed ki. Agar Allah Taalaa chahata to unn kay baad aaney walay apney pass daleel aajaney kay baad hegiz aapas mein laraee bhiraee na kertay lekin unn logon ney ikhtilaf kiya inn mein say baaz to momin huye aur baaz kafir aur agar Allah Taalaa chahata to yeh aapas mein na lartay lekin Allah Taalaa jo chahata hai kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये रसूल (जो हमारी तरफ से इंसानों की हिदायत पर मामूर हुए) हमने उनको एक दूसरे से बढ़ चढ़ कर मरताबे अता किया, उनमें कोई ऐसा था जिसका खुदा खुद हम-कलाम हुआ, किसी को उसने दूसरी जिंदगी से बुलंद दर्जे दिए, और आखिर में ईसा इब्न-मरियम को रोशन निशानियां अता की और रूह ए पाक से उसकी मदद की, अगर अल्लाह चाहता तो मुमकिन ना था के रसूलों के बाद में जो लोग रोशन निशानियां देख चुके थे वो आपस में लड़ते, मगर (अल्लाह की मशियत ये ना थी के वो लोगों को जबरान इख्तिलाफ से) रोके, इस वजह से) उन्होन ने बहम इख्तिलाफ किया, फिर कोई ईमान लाया और किसी ने कुफ्र की राह इख्तियार की, हां, अल्लाह चाहता तो वो हरगिज ना लड़ते, मगर अल्लाह जो चाहता है करता है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا أَنفِقوا مِمّا رَزَقناكُم مِن قَبلِ أَن يَأتِيَ يَومٌ لا بَيعٌ فيهِ وَلا خُلَّةٌ وَلا شَفاعَةٌ ۗ وَالكافِرونَ هُمُ الظّالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! उसमें से ख़र्च करो, जो हमने तुम्हें दिया है, इससे पहले कि वह दिन आ जाए, जिसमें न कोई क्रय-विक्रय होगा और न कोई दोस्ती और न कोई अनुशंसा (सिफ़ारिश)। तथा काफ़िर लोग ही अत्याचारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, jo kuch maal mataa humne tumko baksha hai, usmein se kharch karo, qabl iske ke woh din aaye jismein na khareed o farokht hogi, na dosti kaam aayegi aur na sifarish chalegi aur zalim asal mein wahi hain jo kufr ki rawish ikhtiyar karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walon hum ney tumhen dey rakha hai uss mein say kharach kertay raho iss say pehlay kay woh din aaye jiss mein na tijarat hai na dosti aur shifaat aur kafir hi zalim hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जो कुछ माल माता हमने तुमको बक्शा है, उसमें से ख़र्च करो, क़ब्ल इसके के वो दिन आए जिसमें न ख़त्म ओ फ़रोख़्त होगी, न दोस्ती काम आएगी और न सिफ़ारिश चलेगी और ज़ालिम असल में वही हैं जो कुफ़्र की रवीश इख्तियार करते हैं
عَرَبِياللَّهُ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ الحَيُّ القَيّومُ ۚ لا تَأخُذُهُ سِنَةٌ وَلا نَومٌ ۚ لَهُ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۗ مَن ذَا الَّذي يَشفَعُ عِندَهُ إِلّا بِإِذنِهِ ۚ يَعلَمُ ما بَينَ أَيديهِم وَما خَلفَهُم ۖ وَلا يُحيطونَ بِشَيءٍ مِن عِلمِهِ إِلّا بِما شاءَ ۚ وَسِعَ كُرسِيُّهُ السَّماواتِ وَالأَرضَ ۖ وَلا يَئودُهُ حِفظُهُما ۚ وَهُوَ العَلِيُّ العَظيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह (वह है कि) उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। (वह) जीवित है, हर चीज़ को सँभालने (क़ायम रखने) वाला है। न उसे कुछ ऊँघ पकड़ती है और न नींद। उसी का है जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है। कौन है, जो उसके पास उसकी अनुमति के बिना अनुशंसा (सिफ़ारिश) करे? वह जानता है जो कुछ उनके सामने और जो कुछ उनके पीछे है। और वे उसके ज्ञान में से किसी चीज़ को (अपने ज्ञान से) नहीं घेर सकते, परंतु जितना वह चाहे। उसकी कुर्सी आकाशों और धरती को व्याप्त है और उन दोनों की रक्षा उसे नहीं थकाती। और वही सबसे ऊँचा, सबसे महान है।
Roman Urdu (Maududi)Allah woh zinda e javed (hamesha rehne wali) hasti hai, jo tamaam qayinaat ko sambhale huey hai, uske siwa koi khuda nahin hai, woh na sota hai aur na usey oung lagti hai, zameen aur asmaano mein jo kuch hai usi ka hai, kaun hai jo uski janaab mein uski ijazat ke bagair sifarish kar sakey? Jo kuch bandon ke saamne hai usey bhi woh jaanta hai aur jo kuch unsey ojhal hai ussey bhi woh waqif hai, aur uski maloomaat mein se koi cheez unki giraft e idraak mein nahin aa sakti illa yeh ke kisi cheez ka ilm woh khud hi unko dena chahey, uski hukumat asmaano aur zameen par chayi hui hai aur unki nigehbaani uske liye koi thaka dene wala kaam nahin hai, bas wahi ek buzurg o bartar zaat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa hi mabood-e-bar haq hai jiss kay siwa koi mabood nahi jo zinda aur sab kay thamney wala hai jissay na oongh aaye na neend uss ki milkiyat mein zamin aur aasmanon ki tamam cheezen hain. Kaun hai jo uss ki ijazat kay baghair uss kay samney shifaat ker sakay woh janta hai jo inn kay samney hai aur jo inn kay peechay hai aur woh iss kay ilm mein say kissi cheez ka ehaata nahi ker saktay magar jitna woh chahaye uss ki kursi ki wusat ney zamin-o-aasman ko gher rakha hai aur Allah Taalaa inn ki hifazat say na thakta na uktata hai woh to boht buland aur boht bara hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह वो ज़िंदा ए जावेद (हमेशा रहने वाली) हस्ती है, जो तमाम कायनात को संभाले हुए है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, वो ना सोता है और ना उसे लंबी लगती है, जमीन और आसमान में जो कुछ है उसका है, कौन है जो उसके जनाब में उसकी इज्जत के बिना सिफ़ारिश कर सके? जो कुछ बंदों के सामने है उसे भी वो जानता है और जो कुछ उन्हें ओझल है उसे भी वो वाक़िफ़ है, और उसकी मालूमात में से कोई चीज़ उनकी गिरफ़्तार ए इद्राक में नहीं आ सकती इल्ला ये के किसी चीज़ का इल्म वो खुद ही उनको देना चाहिए, उसकी हुकुमत अस्मानो और ज़मीन पर चाय हुई है और उनकी निगाहबानी उसके लिए कोई थका देने वाला काम नहीं है, बस वही एक बुज़ुर्ग ओ बरतर जात है
عَرَبِيلا إِكراهَ فِي الدّينِ ۖ قَد تَبَيَّنَ الرُّشدُ مِنَ الغَيِّ ۚ فَمَن يَكفُر بِالطّاغوتِ وَيُؤمِن بِاللَّهِ فَقَدِ استَمسَكَ بِالعُروَةِ الوُثقىٰ لَا انفِصامَ لَها ۗ وَاللَّهُ سَميعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)धर्म के मामले में कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं। निःसंदेह सन्मार्ग, पथभ्रष्टता से स्पष्ट हो चुका है। अतः जो कोई ताग़ूत (अल्लाह के सिवा अन्य पूज्यों) का इनकार करे और अल्लाह पर ईमान लाए, तो निश्चय उसने मज़बूत कड़े को थाम लिया, जिसे किसी भी तरह टूटना नहीं। तथा अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Deen ke maamle mein koi zoar zabardasti nahin hai, saheeh baat galat khayalat se alag chaant kar rakh di gayi hai, ab jo koi taagut ka inkar karke Allah par iman le aaya, usne ek aisa mazboot sahara thaam liya jo kabhi tootne wala nahin, aur Allah ( jiska sahara usne liya hai) sabkuch sunne aur jaanne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Deen kay baray mein koi zabardasti nahi hodayat zalalat say roshan ho chuki hai iss liye jo shaks Allah Taalaa kay siwa doosray maboodon ka inkar ker kay Allah Taalaa per eman laye uss ney mazboot karay ko thaam liya jo kabhi na tootay ga aur Allah Taalaa sunney wala janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)दीन के मामले में कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं है, सही बात गलत ख़यालत से अलग चांट कर रख दी गई है, अब जो कोई तागूत का इंकार करके अल्लाह पर ईमान ले आया, उसने एक ऐसा मजबूत सहारा थाम लिया जो कभी टूटने वाला नहीं, और अल्लाह (जिसका सहारा उसने लिया है) सब कुछ सुनने और जाने वाला है
عَرَبِياللَّهُ وَلِيُّ الَّذينَ آمَنوا يُخرِجُهُم مِنَ الظُّلُماتِ إِلَى النّورِ ۖ وَالَّذينَ كَفَروا أَولِياؤُهُمُ الطّاغوتُ يُخرِجونَهُم مِنَ النّورِ إِلَى الظُّلُماتِ ۗ أُولٰئِكَ أَصحابُ النّارِ ۖ هُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ईमान वालों का दोस्त (संरक्षक) है, वह उन्हें अँधेरों से निकालकर प्रकाश की ओर लाता है। और काफ़िरों के दोस्त 'ताग़ूत' (असत्य पूज्य) हैं, वे उन्हें प्रकाश से निकालकर अँधेरों की ओर ले जाते हैं। ये लोग आग (जहन्नम) वाले हैं, वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo log iman latey hain, unka haami o madadgaar Allah hai aur woh unko tareekiyon (andhere) se roshni mein nikaal laata hai aur jo log kufr ki raah ikhtiyar karte hain unke haami o madadgaar taagut hain aur woh unhein roshni se tareekiyon ki tafaf khench le jatay hain, yeh aag mein janey waley log hain jahan yeh hamesha rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Eman laney walon ka kaar saaz Allah Taalaa khud hai woh eunhen andheron say roshni ki taraf nikal ley jata hai aur kafiron kay auliya shayateen hain. Woh enhen roshni say nikal ker andheron ki taraf ley jatay hain yeh log jahannumi hain jo hamesha issi mein paray rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ईमान लाते हैं, उनका हमी ओ मददगार अल्लाह है और वो उनको तरीकियों (और यहां) से रोशनी में निकल लाता है और जो लोग कुफ्र की राह इख्तियार करते हैं उनके हामी ओ मददगार तागुत हैं और वो उन्हें रोशनी से तारीखों की तफफ खींच ले जाते हैं, ये आग में जाने वाले लोग हैं जहां ये हमेशा रहेंगे
عَرَبِيأَلَم تَرَ إِلَى الَّذي حاجَّ إِبراهيمَ في رَبِّهِ أَن آتاهُ اللَّهُ المُلكَ إِذ قالَ إِبراهيمُ رَبِّيَ الَّذي يُحيي وَيُميتُ قالَ أَنا أُحيي وَأُميتُ ۖ قالَ إِبراهيمُ فَإِنَّ اللَّهَ يَأتي بِالشَّمسِ مِنَ المَشرِقِ فَأتِ بِها مِنَ المَغرِبِ فَبُهِتَ الَّذي كَفَرَ ۗ وَاللَّهُ لا يَهدِي القَومَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) क्या तुमने उस व्यक्ति को नहीं देखा, जिसने इबराहीम से उसके पालनहार के विषय में झगड़ा किया, इस कारण कि अल्लाह ने उसे राज्य दिया था? जब इबराहीम ने कहा : मेरा पालनहार वह है, जो जीवित करता और मृत्यु देता है। उसने कहा : मैं भी जीवित करता और मृत्यु देता हूँ। इबराहीम ने कहा : निःसंदेह अल्लाह तो सूर्य को पूरब से लाता है, तो तू उसे पश्चिम से ले आ। (यह सुनकर) वह काफ़िर चकित रह गया और अल्लाह अत्याचारियों को मार्गदर्शन नहीं देता।
Roman Urdu (Maududi)Kya tumne us shaks ke haal par gaur nahin kiya jisne Ibrahim se jhagda kiya tha? Jhagda is baat par ke Ibrahim ka Rubb kaun hai, aur is bina par ke us shaks ko Allah ne hukumat de rakkhi thi. Jab Ibrahim ne kaha ke “mera Rubb woh hai, jiske ikhtiyar mein zindagi aur maut hai, to usne jawab diya : “zindagi aur maut mere ikhtiyar mein hai” Ibrahim ne kaha: “ accha, Allah Suraj ko mashirq se nikalta hai, tu zara usey magrib se nikaal la”. Yeh sunkar woh munkir e haqq shashtar (astonish) reh gaya, magar Allah zalimon ko raah e raast nahin dikhaya karta
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tu ney ussay nahi dekha jo saltanat paa ker ibrahim (alh-e-salam) say uss kay rab kay baray mein jhagar raha tha jab ibrahim (alh-e-salam) ney kaha mera rab to woh hai jo jilata aur maarta hai woh kehney laga mein bhi jilata aur maarta hun ibrahim (alh-e-salam) ney kaha Allah Taalaa sooraj ko mashriq ki taraf say ley aata hai tu issay maghrib ki janib say ley aa. Abb to woh kafir bhoncka reh gaya aur Allah Taalaa zalimon ko hidayat nahi deta
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम हमें बताओ शक्स के हाल पर गौर नहीं किया जिसने इब्राहिम से झगड़ा किया था? झगड़ा इस बात पर है कि इब्राहिम का रुब कौन है, और इस बिना पर हमारे शक्स को अल्लाह ने हुकूमत दे रखी थी। जब इब्राहिम ने कहा के "मेरा रब वो है, जिसका इख्तियार में जिंदगी और मौत है, तो उसने जवाब दिया: "जिंदगी और मौत मेरे इख्तियार में है" इब्राहिम ने कहा: " अच्छा, अल्लाह सूरज को मशिर्क से निकलता है, तू जरा उसे मगरिब से निकाल ला"। ये सुनकर वो मुनकिर ए हक्क शश्तर (आश्चर्यचकित) रह गया, मगर अल्लाह ज़ालिमों को राह ए रस्त नहीं दिखाया करता
عَرَبِيأَو كَالَّذي مَرَّ عَلىٰ قَريَةٍ وَهِيَ خاوِيَةٌ عَلىٰ عُروشِها قالَ أَنّىٰ يُحيي هٰذِهِ اللَّهُ بَعدَ مَوتِها ۖ فَأَماتَهُ اللَّهُ مِائَةَ عامٍ ثُمَّ بَعَثَهُ ۖ قالَ كَم لَبِثتَ ۖ قالَ لَبِثتُ يَومًا أَو بَعضَ يَومٍ ۖ قالَ بَل لَبِثتَ مِائَةَ عامٍ فَانظُر إِلىٰ طَعامِكَ وَشَرابِكَ لَم يَتَسَنَّه ۖ وَانظُر إِلىٰ حِمارِكَ وَلِنَجعَلَكَ آيَةً لِلنّاسِ ۖ وَانظُر إِلَى العِظامِ كَيفَ نُنشِزُها ثُمَّ نَكسوها لَحمًا ۚ فَلَمّا تَبَيَّنَ لَهُ قالَ أَعلَمُ أَنَّ اللَّهَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अथवा उस व्यक्ति की तरह, जो एक बस्ती के पास से गुज़रा और वह अपनी छतों पर गिरी हुई थी? उसने कहा : अल्लाह इसे इसके मरने के बाद कैसे जीवित करेगा? तो अल्लाह ने उसे सौ वर्ष तक मृत्यु दे दी। फिर उसे जीवित किया। फरमाया : तू कितनी देर (मृत्यु अवस्था में) रहा? उसने कहा : मैं एक दिन अथवा दिन का कुछ हिस्सा रहा हूँ। (अल्लाह ने) कहा : बल्कि, तू सौ वर्ष रहा है। सो अपने खाने और अपने पीने की चीज़ें देख कि प्रभावित (ख़राब) नहीं हुईं तथा अपने गधे को देख, और ताकि हम तुझे लोगों के लिए एक निशानी बना दें, तथा (गधे की) हड्डियों को देख हम उन्हें कैसे उठाकर जोड़ते हैं, फिर उनपर मांस चढ़ाते हैं? फिर जब उसके लिए ख़ूब स्पष्ट हो गया, तो उसने कहा : मैं जानता हूँ कि निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Ya phir misaal ke taur par us shaks ko dekho jiska guzar ek aisi basti par hua jo apni chathon (canopies) par aundhi giri padi thi. Usne kaha : “yeh abaadi , jo halaak ho chuki hai, isey Allah kis tarah dobara zindagi bakshega ?” Ispar Allah ne uski rooh qabz karli aur woh sau (hundred) baras tak murda pada raha, phir Allah ne usey dobara zindagi bakshi aur ussey pucha: “batao, kitni muddat padey rahey ho?” Usne kaha: “ ek din ya chandh ghante raha honga”. Farmaya: “ tumpar sau baras isi halat mein guzar chuke hain, ab zara apne khane aur pani ko dekho ke ismein zara tagayyur (changes) nahin aaya hai, dusri taraf zara apne gadhey (donkey) ko bhi dekho [ke iska panjar (skeleton) tak boseeda(rot) ho raha hai] aur yeh humne isliye kiya hai ke hum tumhein logon ke liye ek nishani bana dena chahte hain, phir dekho ke haddiyon ke is panjar (skeleton) ko hum kis tarah utha kar gosht posht ispar chadhate hain”. Is tarah jab haqeeqat uske saamne bilkul numayan ho gayi, to usne kaha: “main jaanta hoon ke Allah har cheez par qudrat rakhta hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Ya uss shaks ki manind kay jiss ka guzar uss basti per hua jo chatt kay bal ondhi pari hui thi woh kehney laga iss ki maut kay baad Allah Taalaa issay kiss tarah zinda keray ga? To Allah Taalaa ney ussay maar diya so saal kay liye phir ussay uthaya pooha kitni muddat tujh pe guzri? Kehney laga aik din ya din ka kuch hissa farmaya bulkay tu so saal tak raha phir abb tu apney khaney peenay ko dekh kay bilkul kharab nahi hua aur apney gadhay ko bhi dekh hum tujhay logon kay liye aik nishani banatay hain tu dekh kay hum haddiyon ko kiss tarah uthatay hain phir unn per gosht charhatay hain jab yeh sab zahir ho chuka to kehney laga mein janta hun kay Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)हां फिर मिसाल के तौर पर उस लड़के को देखो जिसका गुजर एक ऐसी बस्ती पर हुआ जो अपनी छतों पर औंधी गिरी पड़ी थी। उसने कहा: "ये आबादी, जो हलाक हो चुकी है, इसी अल्लाह किस तरह दोबारा जिंदगी बख्शेगा?" इस्पर अल्लाह ने उसकी रूह क़ब्ज़ करली और वो सौ (सौ) बरस तक मुर्दा पड़ा रहा, फिर अल्लाह ने उसे दोबारा जिंदगी बख्शी और उससे पूछा: "बताओ, कितनी मुद्दत पैदा रहे हो?" उसने कहा: "एक दिन या चाँद घंटे रहेगा"। फरमाया: “तुम्हारे सौ बरस इसी हालत में गुजर चुके हैं, अब जरा अपने खाने और पानी को देखो के इसमे जरा तगय्यूर (परिवर्तन) नहीं आया है, दूसरी तरफ जरा अपने गधे (गधे) को भी देखो [के इसका पंजर (कंकाल) तक बोसीदा (सड़) हो रहा है] और ये हमने इसलिए किया है कि हम तुम्हें लोगों के लिए एक निशानी बना देना चाहते हैं, फिर देखो के हड्डियों के इस पंजर (कंकाल) को हम किस तरह उठा कर गोश्त पोश्ट इसपर चढ़ाते हैं। इस तरह जब हकीकत उसके सामने बिल्कुल नुमायन हो गई, तो उसने कहा: "मैं जानता हूं के अल्लाह हर चीज पर क़ुदरत रखता है"
عَرَبِيوَإِذ قالَ إِبراهيمُ رَبِّ أَرِني كَيفَ تُحيِي المَوتىٰ ۖ قالَ أَوَلَم تُؤمِن ۖ قالَ بَلىٰ وَلٰكِن لِيَطمَئِنَّ قَلبي ۖ قالَ فَخُذ أَربَعَةً مِنَ الطَّيرِ فَصُرهُنَّ إِلَيكَ ثُمَّ اجعَل عَلىٰ كُلِّ جَبَلٍ مِنهُنَّ جُزءًا ثُمَّ ادعُهُنَّ يَأتينَكَ سَعيًا ۚ وَاعلَم أَنَّ اللَّهَ عَزيزٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद करें) जब इबराहीम ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मुझे दिखा कि तू मरे हुए लोगों को कैसे ज़िंदा करेगा? (अल्लाह ने) कहा : क्या तुमने विश्वास नहीं किया? उसने कहा : क्यों नहीं? लेकिन इसलिए कि मेरे दिल को (पूर्ण) संतोष हो जाए। (अल्लाह ने) कहा : फिर चार पक्षी लो और उन्हें अपने से परचा लो। फिर हर पर्वत पर उनका एक हिस्सा रख दो। फिर उन्हें बुलाओ। वे तुम्हारे पास दौड़े चले आएँगे। और यह (अच्छी तरह) जान लो कि निःसंदेह अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh waqiya bhi pesh e nazar rahey, jab Ibrahim ne kaha tha ke: “ mere maalik, mujhey dikha de tu murdon ko kaise zinda karta hai” Farmaya: “kya tu iman nahin rakhta?” usne arz kiya “iman to rakhta hoon, magar dil ka itminaan darkaar hai”, Farmaya: “ accha to chaar parindey le aur unko apne se manoos (incline/tame) karle phir unka ek ek juz (part) ek ek pahaad par rakhde phir unko pukaar, woh tere paas daude chale aayenge, khoob jaan le ke Allah nihayat ba iqtedar aur hakeem hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab ibrahim (alh-e-salam) ney kaha aey meray perwerdigar! Mujhay dikha tu murdon ko kiss tarah zinda keray ga? (janab-e-bari taalaa ney) farmaya kiya tumhen eman nahi? Jawab diya eman to hai lekin meray dil ko taskeen hojayegi farmaya chaar parind lo unn kay tukray ker dalo phir her pahar per inn ka aik aik tukra rakh do phir enehn pukaro tumharay pass dortay huye aajayen gay aur jaan rakho kay Allah Taalaa ghalib hai hikmaton wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वो वाकिया भी पेश ए नज़र रहे, जब इब्राहिम ने कहा था के: "मेरे मालिक, मुझे दिखा दे तू मुर्दों को कैसे ज़िंदा करता है" फ़रमाया: “क्या तू ईमान नहीं रखता?” उसने अर्ज़ किया "ईमान तो रखता हूं, मगर दिल का इत्मीनान अंधेरा है", फरमाया: "अच्छा तो चार परिंदे ले और उनको अपने से मानो (झुकाव/तम) कार्ले फिर उनका एक जज (भाग) एक एक पहाड़ पर रखदे फिर उनको पुकार, वो तेरे पास दौड़े चले आएंगे, खूब जान ले के अल्लाह निहायत बा इक्तेदार और हकीम है”
عَرَبِيمَثَلُ الَّذينَ يُنفِقونَ أَموالَهُم في سَبيلِ اللَّهِ كَمَثَلِ حَبَّةٍ أَنبَتَت سَبعَ سَنابِلَ في كُلِّ سُنبُلَةٍ مِائَةُ حَبَّةٍ ۗ وَاللَّهُ يُضاعِفُ لِمَن يَشاءُ ۗ وَاللَّهُ واسِعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों का उदाहरण जो अपने माल अल्लाह के मार्ग में ख़र्च करते हैं, एक दाने के उदाहरण की तरह है जिसने सात बालियाँ उगाईं, प्रत्येक बाली में सौ दाने हैं। और अल्लाह जिसके लिए चाहता है, बढ़ा देता है तथा अल्लाह विस्तार वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log apne maal Allah ki raah mein sarf (kharch) karte hain, unke kharch ki misaal aisi hai, jaise ek dana boya (sow) jaye aur uske saat (seven) baalein niklein aur har baal mein sau (hundred) daaney hon, isi tarah Allah jiske amal ko chahta hai afzoni (manifold/zyada) ata farmata hai , woh faraag dast (All-Embracing) bhi hai aur aleem bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log apna maal Allah Taalaa ki raah mein kharach kertay hain uss ki misal uss daney jaisi hai jiss mein saat baliyan niklen aur her bali mein so daney hon aur Allah Taalaa jissay chahaye barha charha ker dey aur Allah Taalaa kushadgi wala aur ilm wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग अपने माल अल्लाह की राह में सिर्फ (खर्च) करते हैं, उनके खर्च की मिसाल ऐसी है, जैसे एक दाना बोया (सो) जाए और उसके सात (सात) बालें निकलें और हर बाल में सौ (सौ) दानी होन, इसी तरह अल्लाह जिसका अमल चाहता है अफज़ोनी (मैनिफोल्ड/ज्यादा) अता फरमाता है, वो फराग दस्त (सर्व-गले लगाने वाला) भी है और अलीम भी
عَرَبِيالَّذينَ يُنفِقونَ أَموالَهُم في سَبيلِ اللَّهِ ثُمَّ لا يُتبِعونَ ما أَنفَقوا مَنًّا وَلا أَذًى ۙ لَهُم أَجرُهُم عِندَ رَبِّهِم وَلا خَوفٌ عَلَيهِم وَلا هُم يَحزَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग अपना धन अल्लाह के मार्ग में ख़र्च करते हैं, फिर उन्होंने जो खर्च किया उसके बाद न किसी प्रकार का उपकार जताते हैं और न कोई कष्ट पहुँचाते हैं, उनके लिए उनका प्रतिफल उनके पालनहार के पास है और उनपर न कोई डर है और न वे शोकाकुल होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jo log apne maal Allah ki raah mein kharch karte hain aur kharch karke phir ehsan nahin jatate na dukh dete hain, unka ajar unke Rubb ke paas hai aur unke liye kisi ranjh aur khauf ka mauqa nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log apna maal Allah Taalaa ki raah mein kharach kertay hain phir uss kay baad na to ehsan jatatay hain aur na ezza detay hain unn ka ajar unn kay rab kay pass hai unn per na to kuch khof hai na woh udas hongay
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग अपने माल अल्लाह की राह में खर्च करते हैं और खर्च करके फिर एहसान नहीं जाते ना दुख देते हैं, उनका अजर उनके रुब के पास है और उनके लिए कोई रांझ और खौफ का मौका नहीं
عَرَبِي۞ قَولٌ مَعروفٌ وَمَغفِرَةٌ خَيرٌ مِن صَدَقَةٍ يَتبَعُها أَذًى ۗ وَاللَّهُ غَنِيٌّ حَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)भली बात कहना तथा क्षमा कर देना, उस दान से बेहतर है, जिसके पीछे किसी प्रकार का कष्ट पहुँचाना हो। और अल्लाह बहुत बेनियाज़, अत्यंत सहनशील है।
Roman Urdu (Maududi)Ek meetha bol aur kisi nagawaar baat par zara si chasm poshi (forbearance) us khairaat se behtar hai, jiske pichey dukh ho. Allah be-niyaz hai aur burdbaari (forbearing) uski siffat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Naram baat kehna aur moaf ker dena uss sadqay say behtar hai jiss kay baad ezza rasani ho aur Allah Taalaa bey niaz aur burdbaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)एक मीठा बोल और कोई नगावार बात पर जरा सी खाई पोशी (सहनशीलता) हमें खैरात से बेहतर है, जिसके पीछे दुख हो। अल्लाह बे-नियाज़ है और बर्दबारी (सहिष्णु) उसकी सिफ़त है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تُبطِلوا صَدَقاتِكُم بِالمَنِّ وَالأَذىٰ كَالَّذي يُنفِقُ مالَهُ رِئَاءَ النّاسِ وَلا يُؤمِنُ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ ۖ فَمَثَلُهُ كَمَثَلِ صَفوانٍ عَلَيهِ تُرابٌ فَأَصابَهُ وابِلٌ فَتَرَكَهُ صَلدًا ۖ لا يَقدِرونَ عَلىٰ شَيءٍ مِمّا كَسَبوا ۗ وَاللَّهُ لا يَهدِي القَومَ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अपने दान को उपकार जताकर और कष्ट पहुँचाकर नष्ट न करो, उस व्यक्ति की तरह, जो अपना धन लोगों को दिखाने के लिए खर्च करता है और अल्लाह तथा अंतिम दिन पर ईमान नहीं रखता। तो उसका उदाहरण एक चिकने पत्थर के उदाहरण जैसा है, जिसपर थोड़ी-सी मिट्टी हो, फिर उसपर एक ज़ोर की वर्षा हो, तो उसे एक साफ़ चट्टान की दशा में छोड़ जाए। वे उसमें से किसी चीज़ पर सक्षम नहीं हो सकेंगे जो उन्होंने कमाया, और अल्लाह काफ़िर लोगों का मार्गदर्शन नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Aey iman laney walon! Apne sadaqat ko ehsan jata kar aur dukh dekar us shaks ki tarah khaakh mein na mila do, jo apna maal mehaz logon ke dikhane ko kharch karta hai aur na Allah par iman rakhta hai na aakhirat par, uske kharch ki misaal aisi hai jaise ek chattan (rock) thi, jispar mitti ki teh jami hui thi, ispar jab zoar ka meh (barish) barsa, to saari mitti bhi gayi aur saaf chattan ki chattan reh gayi, aisey log apne nazdeek khayraat karke jo neki kamate hain, ussey kuch bhi unke haath nahin aata, aur kaafiron ko seedhi raah dikhana Allah ka dastoor nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walon apni kheyraat ko ehsan jata ker aur ezza phoncha ker barbad na kero! Jiss tarah woh shaks apna maal logon kay dikhaway kay liye kharach keray aur na Allah Taalaa per eman rakhay na qayamat per uss ki misal uss saaf pathar ki tarah hai jiss per thori si mitti ho phir uss per zor daar meenh barsay aur woh issay bilkul saaf aur sakht chor dey inn riya kaaron ko apni kamaee mein say kuch cheez haath nahi lagti aur Allah Taalaa kafiron ki qom ko (seedhi) raah nahi dikhata
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ ईमान लाने वालों! अपने सदाकत को एहसान जता कर और दुख देकर उस शक्स की तरह खाख में ना मिला दो, जो अपना माल महज़ लोगों के दिखाने को खर्च करता है और ना अल्लाह पर ईमान रखता है ना आख़िरत पर, उसके खर्च की मिसाल ऐसी है जैसी एक चट्टान (रॉक) थी, जिसपर मिट्टी की तह जमी हुई थी, इसपर जब जोर का मेह (बारिश) बरसा, तो सारी मिट्टी भी गई और साफ चट्टानों की चट्टानें रह गईं, ऐसे लोग अपने नाजदीक खैरात करके जो नेकी कमाते हैं, उसमें कुछ भी उनके हाथ नहीं आता, और काफिरों को सीधी राह दिखाना अल्लाह का दस्तूर नहीं है
عَرَبِيوَمَثَلُ الَّذينَ يُنفِقونَ أَموالَهُمُ ابتِغاءَ مَرضاتِ اللَّهِ وَتَثبيتًا مِن أَنفُسِهِم كَمَثَلِ جَنَّةٍ بِرَبوَةٍ أَصابَها وابِلٌ فَآتَت أُكُلَها ضِعفَينِ فَإِن لَم يُصِبها وابِلٌ فَطَلٌّ ۗ وَاللَّهُ بِما تَعمَلونَ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन लोगों का उदाहरण, जो अपना धन अल्लाह की प्रसन्नता चाहते हुए और अपने दिलों को स्थिर रखते हुए ख़र्च करते हैं, उस बाग़ के उदाहरण जैसा है, जो किसी ऊँचे स्थान पर हो, जिसपर एक भारी बारिश बरसे, तो वह अपना फल दोगुना कर दे। फिर यदि उसपर भारी बारिश न बरसे, तो एक हल्की बारिश ही काफ़ी हो। तथा अल्लाह जो कुछ तुम कर रहे हो, उसे ख़ूब देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Bakhilaf iske jo log apne maal mehaz Allah ki raza-joyi ke liye dil ke poorey sabaat o qarar (single-minded) ke saath kharch karte hain, unke kharch ki misaal aisi hai, jaise kisi satah martafa (plateau) par ek baagh ho , agar zoar ki baarish ho jaye to duguna(twofold) phal laye, aur agar zoar ki baarish na bhi ho to ek halki phawar (light shower) hi uske liye kafi ho jaye, tum jo kuch karte ho, sab Allah ki nazar mein hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unn logon ki misal jo apna maal Allah Taalaa ki raza mandi ki talab mein dil ki khushi aur yaqeen kay sath kharach kertay hain uss baagh jaisi hai jo oonchi zamin per ho aur zor daar barish uss per barsay aur woh apna phal dugna laway aur agar uss per barish na bhi barsay o phuwar hi kafi hai aur Allah tumharay kaam dekh raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)बख़िलाफ़ इसके जो लोग अपने माल महज़ अल्लाह की रजा-जोई के लिए दिल के पूरे सबात ओ करार (एकल दिमाग वाले) के साथ खर्च करते हैं, उनके खर्च की मिसाल ऐसी है, जैसे कोई सताए मरतफा (पठार) पर एक बाग हो, अगर ज़ोर की बारिश हो जाए तो डुगुना (दो गुना) फल लाए, और अगर जोर की बारिश ना भी हो तो एक हल्की बारिश (हल्की बौछार) हाय उसके लिए काफी हो जाए, तुम जो कुछ करते हो, सब अल्लाह की नजर में है
عَرَبِيأَيَوَدُّ أَحَدُكُم أَن تَكونَ لَهُ جَنَّةٌ مِن نَخيلٍ وَأَعنابٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ لَهُ فيها مِن كُلِّ الثَّمَراتِ وَأَصابَهُ الكِبَرُ وَلَهُ ذُرِّيَّةٌ ضُعَفاءُ فَأَصابَها إِعصارٌ فيهِ نارٌ فَاحتَرَقَت ۗ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الآياتِ لَعَلَّكُم تَتَفَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुममें से कोई चाहेगा कि उसके पास खजूरों तथा अँगूरों का एक बाग़ हो, जिसके नीचे से नहरें बहती हों, उसमें उसके लिए प्रत्येक प्रकार के कुछ न कुछ फल हों और उसे बुढ़ापा आ जाए और उसके कमज़ोर बच्चे हों, फिर उस (बाग़) पर एक बगूला आ पहुँचे जिसमें एक आग हो, तो वह जल के राख हो जाए। इसी तरह अल्लाह तुम्हारे लिए निशानियाँ उजागर करता है, ताकि तुम सोच-विचार करो।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum mein se koi yeh pasand karta hai ke uske paas ek hara bhara baagh ho, nehron se sairaab, khajooron aur angooron aur har qism ke phalon se ladha hua, aur woh ain us waqt ek teiz baghule (fiery whirlwind) ki zard mein aakar jhulas jaye, jabke woh khud boodha ho aur uske kamsin (small) bacchey abhi kisi layaq na hon? Is tarah Allah apni baatein tumhare saamne bayan karta hai, shayad ke tum gaur o fikr karo
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum mein say koi yeh bhi chahata hai kay uss ka khujooron aur angooron ka baagh ho jiss mein nehren beh rahi hon aur her qisam kay phal mojood hon uss shaks ka burhapa aagaya ho uss kay nannhay nannhay say bachay bhi hon aur achanak baagh ko bagoola lag jaye jiss mein aag bhi ho pus woh baagh jal jaye issi tarah Allah Taalaa tumhara liye aayaten biyan kerta hai takay tum ghor-o-fikar kero
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम में से कोई ये पसंद करता है के उसके पास एक हरा भरा बाग हो, नेहरोन से सैराब, खजूरों और अंगूरों और हर क़िस्म के फूलों से लड़ा हुआ, और वो ऐन हमें वक़्त एक तेज़ बवंडर (उग्र बवंडर) की ज़र्द में आकर झूलस जाए, जबके वो खुद बूढ़ा हो और उसके कमसिन (छोटा) बच्चे अभी कोई लायक ना हो? इस तरह अल्लाह अपनी बातें तुम्हारे सामने बयान करता है, शायद तुम गौर ओ फिक्र करो
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا أَنفِقوا مِن طَيِّباتِ ما كَسَبتُم وَمِمّا أَخرَجنا لَكُم مِنَ الأَرضِ ۖ وَلا تَيَمَّمُوا الخَبيثَ مِنهُ تُنفِقونَ وَلَستُم بِآخِذيهِ إِلّا أَن تُغمِضوا فيهِ ۚ وَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ غَنِيٌّ حَميدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! उन पाक और अच्छी चीज़ों में से ख़र्च करो जो तुमने कमाई हैं तथा उनमें से भी, जो हमने तुम्हारे लिए धरती से निकाली हैं तथा उसमें से रद्दी चीज़ का इरादा न करो, जिसे तुम खर्च करते हो, हालाँकि तुम उसे बिल्कुल लेने वाले नहीं, सिवाय इसके कि तुम उसके बारे में अनदेखी कर जाओ। तथा जान लो कि अल्लाह बड़ा बेनियाज़, बहुत ख़ूबियों वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, jo maal tumne kamaye hain aur jo kuch humne zameen se tumhare liye nikala hai, usmein se behtar hissa raah e khuda mein kharch karo, aisa na ho ke uski raah mein dene ke liye buri se buri cheez chaantne (pick out) ki koshish karne lago, halaanke wahi cheez agar koi tumhein dey to tum hargiz usey lena gawara na karoge illa yeh ke isko qabool karne mein tum igmaaz (disdain) barat jao, tumhein jaan lena chahiye ke Allah bay-niyaz hai aur behtareen sifaat se muttasif hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Apni pakeeza kamaee mein say aur zamin mein say tumharay liye humari nikali hui cheezon mein kharach kero inn mein say buri cheezon kay kharach kerney ka qasad na kerna jissay tum khud lenay walay nahi ho haan agar aankhen band ker lo to aur jaan lo kay Allah Taalaa bey perwah aur khoobiyon wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जो माल तुमने कमाए हैं और जो कुछ हमने जमीन से तुम्हारे लिए निकाला है, उसमें से बेहतर हिसा राह ए खुदा में खर्च करो, ऐसा ना हो के उसकी राह में देने के लिए बुरी से बुरी चीज चांटने (पिक आउट) की कोशिश करने लगो, हलांके वही चीज अगर कोई तुम्हें दे तो तुम उसे लेना गवारा ना करोगे इल्ला ये के इसको कबूल करने में तुम इग्माज़ (तिरस्कार) बरात जाओ, तुम्हें जान लेना चाहे के अल्लाह बे-नियाज़ है और बेहतरीन सिफ़ात से मुत्तसिफ़ है
عَرَبِيالشَّيطانُ يَعِدُكُمُ الفَقرَ وَيَأمُرُكُم بِالفَحشاءِ ۖ وَاللَّهُ يَعِدُكُم مَغفِرَةً مِنهُ وَفَضلًا ۗ وَاللَّهُ واسِعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)शैतान तुम्हें निर्धनता से डराता है तथा निर्लज्जता का आदेश देता है, जबकि अल्लाह तुम्हें अपनी ओर से क्षमा और अनुग्रह का वादा देता है। तथा अल्लाह विस्तार वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Shaytan tumhein muflisi (poverty) se darata hai aur sharmnaak tarz-e-amal ikhtiyar karne ki targeeb deta hai, magar Allah tumhein apni bakshish aur fazal ki umeed dilata hai, Allah bada farag-dast aur daana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Shetan tumhen faqeeri say dhamkata hai aur bey hayaee ka hukum deta hai aur Allah Taalaa tum say apni bakshish aur fazal ka wada kerta hai Allah Taalaa wusat wala aur ilm wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)शैतान तुम्हें मुफ़लिसी (गरीबी) से डराता है और शर्मनाक तर्ज़-ए-अमल इख्तियार करने की तरजीब देता है, मगर अल्लाह तुम्हें अपनी बख्शीश और फ़ज़ल की उम्मीद दिलाती है, अल्लाह बदा फराग-दस्त और दाना है
عَرَبِييُؤتِي الحِكمَةَ مَن يَشاءُ ۚ وَمَن يُؤتَ الحِكمَةَ فَقَد أوتِيَ خَيرًا كَثيرًا ۗ وَما يَذَّكَّرُ إِلّا أُولُو الأَلبابِ
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हिन्दी (Al-Omari)वह जिसे चाहता है, हिकमत प्रदान करता है और जिसे हिकमत प्रदान कर दी जाए, तो निःसंदेह उसे बड़ी भलाई दे दी गई। और उपदेश वही ग्रहण करते हैं, जो बुद्धि वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jisko chahta hai hikmat ata karta hai, aur jisko hikmat (wisdom) mili usey haqeeqat mein badi daulat mil gayi, in baaton se sirf wahi log sabaq lete hain jo danishmand hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh jissay chahaye hikmat aur danaee deta hai aur jo shaks hikmat aur samajh diya jaye woh boht sari bhalaee diya gaya aur naseehat sirf aqal mand hi hasil kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जिसको चाहता है हिकमत अता करता है, और जिसको हिकमत (बुद्धि) मिली उसे हकीकत में बड़ी दौलत मिल गई, बातों से सिर्फ वही लोग सबक लेते हैं जो दानिशमंद हैं
عَرَبِيوَما أَنفَقتُم مِن نَفَقَةٍ أَو نَذَرتُم مِن نَذرٍ فَإِنَّ اللَّهَ يَعلَمُهُ ۗ وَما لِلظّالِمينَ مِن أَنصارٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम जो भी दान करो अथवा मन्नत मानो, तो निःसंदेह अल्लाह उसे जानता है और अत्याचारियों के लिए कोई सहायक नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Tumne jo kuch bhi kharch kiya ho aur jo nazar bhi maani ho, Allah ko uska ilm hai, aur zalimon ka koi madadgaar nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Tum jitna kuch kharach kero yani kheyraat aur jo kuch naza maano ussay Allah Taalaa bakhoobi janta hai aur zalimon ka koi madadgar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)तुमने जो कुछ भी खर्च किया हो और जो नजर भी मानी हो, अल्लाह को उसका इल्म है, और जालिमों का कोई मददगार नहीं
عَرَبِيإِن تُبدُوا الصَّدَقاتِ فَنِعِمّا هِيَ ۖ وَإِن تُخفوها وَتُؤتوهَا الفُقَراءَ فَهُوَ خَيرٌ لَكُم ۚ وَيُكَفِّرُ عَنكُم مِن سَيِّئَاتِكُم ۗ وَاللَّهُ بِما تَعمَلونَ خَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि तुम खुले तौर पर दान करो, तो यह अच्छी बात है और यदि उन्हें छिपाओ और उन्हें ग़रीबों को दे दो, तो यह तुम्हारे लिए ज़्यादा अच्छा है। और यह तुमसे तुम्हारे कुछ पापों को दूर कर देगा तथा अल्लाह उससे जो तुम कर रहे हो, पूरी तरह अवगत है।
Roman Urdu (Maududi)Agar apne sadaqaat elaniya (openly) do to yeh bhi accha hai, lekin agar chupa kar haajat-mandon ko do to yeh tumhare haqq mein zyada behtar hai, tumhari bahut si buraiyan is tarz e amal se mehw (expiate) ho jati hain .Aur jo kuch tum karte ho Allah ko bahar haal uski khabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum sadqay kheyraat ko zahir kero to woh bhi acha hai aur agar tum issay posheeda posheeda miskeenon ko dey do to yeh tumharay haq mein behtar hai Allah Taalaa tumharay gunahon ko mita dey ga aur Allah Taalaa tumharay tamam aemaal ki khabar rakhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर अपने सदकात ऐलान (खुले तौर पर) करो तो ये भी अच्छा है, लेकिन अगर छुपा कर हाजत-मंदों को दो तो ये तुम्हारे हक में ज्यादा बेहतर है, तुम्हारी बहुत सी बुराइयां तर्ज ए है अमल से मेह्व (प्रायश्चित) हो जाती है। और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह को बाहर हाल उसकी खबर है
عَرَبِي۞ لَيسَ عَلَيكَ هُداهُم وَلٰكِنَّ اللَّهَ يَهدي مَن يَشاءُ ۗ وَما تُنفِقوا مِن خَيرٍ فَلِأَنفُسِكُم ۚ وَما تُنفِقونَ إِلَّا ابتِغاءَ وَجهِ اللَّهِ ۚ وَما تُنفِقوا مِن خَيرٍ يُوَفَّ إِلَيكُم وَأَنتُم لا تُظلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) उन्हें हिदायत देना, आपका दायित्व नहीं; परंतु अल्लाह जिसे चाहता है, हिदायत देता है तथा तुम जो भी धन ख़र्च करोगे, तो तुम्हारे अपने ही (भले के) लिए है और तुम अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए ही ख़र्च करते हो। तथा तुम जो भी धन ख़र्च करोगे, तुम्हें उसका भरपूर बदला दिया जाएगा और तुमपर अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Logon ko hidayat baksh dene ki zimmedari tumpar nahin hai, hidayat to Allah hi jisey chahta hai bakshta hai aur khairaat mein jo maal tum kharch karte ho woh tumhare apne liye bhala hai, aakhir tum isi liye to kharch karte ho ke Allah ki raza hasil ho, to jo kuch maal tum khairaat mein kharch karoge uska poora poora ajar tumhein diya jayega aur tumhari haqq talafi hargiz na hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Enhen hidayat per laa khara kerna teray zimmay nahi bulkay hidayat Allah Taalaa deta hai jissay chahata hai aur tum jo bhali cheez Allah ki raah mein do gay uss ka faeeda khud pao gay. Tumhen sirf Allah ki raza mandi ki talab kay liye hi kharach kerna chahaiye tum jo kuch maal kharach kero gay uss ka poora poora badla umhen diya jaye ga aur tumhara haq na maara jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों को हिदायत बख्श देने की जिम्मेदारी नहीं है, अल्लाह को हिदायत हाय जिसे चाहता है बख्शता है और खैरात में जो माल तुम खर्च करते हो वो तुम्हारे अपने लिए भला है, आखिर तुम इसी लिए तो खर्च करते हो के अल्लाह की रजा हासिल हो, तो जो कुछ माल तुम खैरात में खर्च करोगे उसका पूरा पूरा अजर तुम्हें दिया जाएगा और तुम्हारी हक तलफी हरगिज ना होगी
عَرَبِيلِلفُقَراءِ الَّذينَ أُحصِروا في سَبيلِ اللَّهِ لا يَستَطيعونَ ضَربًا فِي الأَرضِ يَحسَبُهُمُ الجاهِلُ أَغنِياءَ مِنَ التَّعَفُّفِ تَعرِفُهُم بِسيماهُم لا يَسأَلونَ النّاسَ إِلحافًا ۗ وَما تُنفِقوا مِن خَيرٍ فَإِنَّ اللَّهَ بِهِ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(यह दान) उन निर्धनों के लिए है, जो अल्लाह के मार्ग में रोके गए हैं, धरती में यात्रा नहीं कर सकते, अनजान उन्हें किसी के सामने हाथ फैलाने से बचने के कारण धनवान् समझता है, तुम उन्हें उनके लक्षणों से पहचान लोगे, वे लोगों के पीछे पड़कर नहीं माँगते। तथा तुम जो भी धन ख़र्च करोगे, तो निश्चय अल्लाह उसे भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Khaas taur par madad ke mustahiq to tangdast log hain jo Allah ke kaam mein aisey ghir gaye hain ke apni zaati kasb-e-maash (livelihood) ke liye zameen mein koi daud-dhoop nahin kar sakte. Unki khuddaari dekh kar nawaqif aadmi gumaan karta hai ke yeh khush-haal hain, tum unke chehron se unki andaruni haalat pehchan sakte ho magar woh aisey log nahin hain ke logon ke pichey padh kar kuch maangein. Unki iyanat mein jo kuch maal tum kharch karoge woh Allah se posheeda na rahega
Roman Urdu (Junagarhi)Sadqaat kay mustahiq sirf woh ghurba hain jo Allah ki raah mein rok diye gaye hain jo mulk mein chal phir nahi saktay nadan log inn ki bey sawali ki waja say enhen maal daar khayal kertay hain app inn kay chehray dekh ker qayafa say enhen pehchan len gay woh logon say chimat ker sawal nahi kertay tum jo kuch maal kharach kero to Allah Taalaa uss ka janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)खास तौर पर मदद के मुस्तहिक से तंगदस्त लोग हैं जो अल्लाह के काम में ऐसे घिर गए हैं कि अपनी जाति कस्बे-ए-माश (आजीविका) के लिए जमीन में कोई दौड़-धूप नहीं कर सकता। उनकी खुद्दारी देख कर नवाज़ीफ आदमी गुमान करता है के ये ख़ुश-हाल हैं, तुम उनके चेहरों से उनकी अंदरुनी हालत पहचान सकते हो मगर वो ऐसे लोग नहीं हैं के लोगों के पीछे पढ़ कर कुछ माँगें। उनकी इयानत में जो कुछ माल तुम खर्च करोगे वो अल्लाह से पोशीदा ना रहेगा
عَرَبِيالَّذينَ يُنفِقونَ أَموالَهُم بِاللَّيلِ وَالنَّهارِ سِرًّا وَعَلانِيَةً فَلَهُم أَجرُهُم عِندَ رَبِّهِم وَلا خَوفٌ عَلَيهِم وَلا هُم يَحزَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग अपने धन रात और दिन, छिपे और खुले खर्च करते हैं, तो उनके लिए उनका प्रतिफल उनके पालनहार के पास है और उन्हें न कोई डर है और न वे शोकाकुल होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jo log apne maal shab-o-roz khule aur chupe kharch karte hain unka ajar unke Rubb ke paas hai aur unke liye kisi khauf aur ranjh ka muqaam nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log apney maalon ko raat din chupay khulay kharach kertay hain unn kay liye unn kay rab taalaa kay pass ajar hai aur na unhen khof hai aur na ghumgeeni
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग अपने माल शब-ओ-रोज़ खुले और छुपे खर्च करते हैं उनका अजर उनके रब के पास है और उनके लिए कोई खौफ और रांझ का मुकाम नहीं
عَرَبِيالَّذينَ يَأكُلونَ الرِّبا لا يَقومونَ إِلّا كَما يَقومُ الَّذي يَتَخَبَّطُهُ الشَّيطانُ مِنَ المَسِّ ۚ ذٰلِكَ بِأَنَّهُم قالوا إِنَّمَا البَيعُ مِثلُ الرِّبا ۗ وَأَحَلَّ اللَّهُ البَيعَ وَحَرَّمَ الرِّبا ۚ فَمَن جاءَهُ مَوعِظَةٌ مِن رَبِّهِ فَانتَهىٰ فَلَهُ ما سَلَفَ وَأَمرُهُ إِلَى اللَّهِ ۖ وَمَن عادَ فَأُولٰئِكَ أَصحابُ النّارِ ۖ هُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग ब्याज खाते हैं, वे (क़ियामत के दिन अपनी क़ब्रोंं से) ऐसे उठेंगे, जैसे वह व्यक्ति उठता है, जिसे शैतान ने छूकर पागल बना दिया हो। यह इसलिए कि उन्होंने कहा व्यापार तो ब्याज ही जैसा है। हालाँकि अल्लाह ने व्यापार को ह़लाल (वैध) किया तथा ब्याज को हराम (अवैध) ठहराया। फिर जिसके पास उसके पालनहार की ओर से कोई उपदेश आए, सो वह (ब्याज खाने से) रुक जाए, तो जो पहले हो चुका, वह उसी का है और उसका मामला अल्लाह के हवाले है। और जो दोबारा ऐसा करे, तो वही आग वाले हैं, वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar jo log sood (usury) khate hain, unka haal us shaks ka sa hota hai, jisey Shaytan ne choo kar bawla (deewana) kardiya ho aur is haalat mein unke mubtila hone ki wajah yeh hai ke woh kehte hain : “ tijarat bhi to aakhir sood hi jaisi cheez hai”, halanke Allah ne tijarat ko halal kiya hai aur sood ko haraam. Lihaza jis shaks ko uske Rubb ki taraf se yeh naseehat pahunche aur aainda ke liye woh sood-khori se baaz aa jaye , to jo kuch woh pehle kha chuka, so kha chuka, uska maamla Allah ke hawale hai aur jo is hukm ke baad phir isi harakat ka iaada (repeat) karey, toh jahannami hai, jahan woh hamesha rahega
Roman Urdu (Junagarhi)Sood khor log na kharay hongay magar ussi tarah jiss tarah woh khara hota hai jissay shetan chu ker khabti bana dey yeh iss liye kay yeh kaha kertay thay kay tijarat bhi to sood hi ki tarah hai halankay Allah Taalaa ney tijarat ko halal kiya aur sood ko haram jo shaks apney pass aaee hui Allah Taalaa ki naseehat sunn ker ruk gaya uss kay liye woh hai jo guzra aur uss ka moamla Allah Taalaa ki taraf hai aur jo phir doobara (haram ki taraf) lota woh jahannumi hai aisay log hamesha hi uss mein rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जो लोग सूद (सूदखोरी) खाते हैं, उनका हाल उस शक्स का सा होता है, जिसे शैतान ने छू कर बावला (दीवाना) कर दिया है और इस हालात में उनको मुब्तिला होने की वजह ये है कि वो कहते हैं: "तिजारत भी तो आखिर सूद ही जैसी चीज है", हालंके अल्लाह ने तिजारत को हलाल किया है और सूद को हराम। लिहाजा जिस शक्स को उसके रब की तरफ से ये हिदायत पाहुंचे और आंदा के लिए वो सूद-खोरी से बाज़ आ जाए, तो जो कुछ वो पहले खा चुका, सो खा चुका, उसका मामला अल्लाह के हवाले है और जो इस हुक्म के बाद फिर इसी हरकत का इरादा (दोहराना) करे, तो जहन्नामी है, जहां वो हमेशा रहेगा
عَرَبِييَمحَقُ اللَّهُ الرِّبا وَيُربِي الصَّدَقاتِ ۗ وَاللَّهُ لا يُحِبُّ كُلَّ كَفّارٍ أَثيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ब्याज को मिटाता है और दान को बढ़ाता है और अल्लाह किसी ऐसे व्यक्ति को पसंद नहीं करता जो बहुत अकृतज्ञ, घोर पापी हो।
Roman Urdu (Maududi)Allah Sood ka matth maar deta hai (deprives interest of all blessing ) aur sadaqaat ko nasho numa deta hai, aur Allah kisi nashukre badh-amal Insaan ko pasand nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa sood ko mitata aur sadqay ko barhata hai aur Allah Taalaa kissi na shukray aur gunehgar say mohabbat nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह सूद का मत्था मार देता है (सभी आशीर्वादों के ब्याज से वंचित करता है) और सदकात को नाशो नुमा देता है, और अल्लाह किसी नाशुक्रे बध-अमल इंसान को पसंद नहीं करता
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ وَأَقامُوا الصَّلاةَ وَآتَوُا الزَّكاةَ لَهُم أَجرُهُم عِندَ رَبِّهِم وَلا خَوفٌ عَلَيهِم وَلا هُم يَحزَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कार्य किए और नमाज़ क़ायम की और ज़कात दी, उनके लिए उनका प्रतिफल उनके पालनहार के पास है और उनपर न कोई भय है और न वे शोकाकुल होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Haan, jo log iman le ayein aur neik amal karein aur namaz qayam karein aur zakaat dein, unka ajar beshak unke Rubb ke paas hai aur unke liye kisi khauf aur ranjh ka mauqa nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jo log eman kay sath (sunnat kay mutabiq) nek kaam kertay hain namazon ko qaeem kertay aur zakat ada kertay hain unn ka ajar unn kay rab taalaa kay pass hai unn per na to koi khof hai na udasi aur ghum
Devnagri Urdu (Maududi)हां, जो लोग ईमान ले आयें और नेक अमल करें और नमाज कयाम करें और जकात दें, उनका अजर बहस उनके रुब के पास है और उनके लिए कोई खौफ और रांझ का मौका नहीं
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَذَروا ما بَقِيَ مِنَ الرِّبا إِن كُنتُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अल्लाह से डरो और ब्याज में से जो शेष रह गया है, उसे छोड़ दो, यदि तुम ईमान रखने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, khuda se daro aur jo kuch tumhara sood logon par baki reh gaya hai usye chodh do, agar waqayi tum iman laye ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Allah Taalaa say daro aur jo sood baqi reh gaya hai woh chor do agar tum sach much eman walay ho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, खुदा से डरो और जो कुछ तुम्हारा सूद लोगों पर बाकी रह गया है उसे छोड़ दो, अगर हकीकत तुम ईमान लाए हो
عَرَبِيفَإِن لَم تَفعَلوا فَأذَنوا بِحَربٍ مِنَ اللَّهِ وَرَسولِهِ ۖ وَإِن تُبتُم فَلَكُم رُءوسُ أَموالِكُم لا تَظلِمونَ وَلا تُظلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि तुमने ऐसा न किया, तो अल्लाह और उसके रसूल की ओर से युद्ध की घोषणा से सावधान हो जाओ। और यदि तुम तौबा कर लो, तो तुम्हारे लिए तुम्हारे मूलधन हैं, न तुम अत्याचार करोगे और न तुमपर अत्याचार किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Lekin agar tumne aisa na kiya, to aagaah ho jao ke Allah aur uske Rasool ki taraf se tumhare khilaf elan-e-jung hai. Ab bhi tawba karlo (aur sood chod do) to apna asal sarmaya lene ke tum haqqdaar ho, na tum zulm karo , na tumpar zulm kiya jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar aisa nahi kertay to Allah Taalaa say aur uss kay rasool say larney kay liye tayyar hojao haan agar tauba kerlo to tumhara asal maal tumhara hi hai na tum zulm kero na tum per zulm kiya jaye
Devnagri Urdu (Maududi)लेकिन अगर तुमने ऐसा ना किया, तो आगाह हो जाओ के अल्लाह और उसके रसूल की तरफ से तुम्हारे खिलाफ एलान-ए-जंग है। अब भी तौबा करलो (और सूद चोद दो) तो अपना असल सरमाया लेने के तुम हक़दार हो, ना तुम ज़ुल्म करो, ना तुमपर ज़ुल्म किया जाए
عَرَبِيوَإِن كانَ ذو عُسرَةٍ فَنَظِرَةٌ إِلىٰ مَيسَرَةٍ ۚ وَأَن تَصَدَّقوا خَيرٌ لَكُم ۖ إِن كُنتُم تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि कोई तंगी वाला हो, तो (उसे) आसानी तक मोहलत देनी चाहिए और दान कर दो, तो यह तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम जानते हो।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara qarzdaar tangdast ho, to haath khulne tak usey mohlat do, aur jo sadaqa kardo to yeh tumhare liye zyada behtar hai, agar tum samjho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar koi tangi wala ho to ussay aasani tak mohlat deni chahaiye aur sadqa kero to tumharya liye boht hi behtar hai agar tum mein ilm ho
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा क़र्ज़दार तंगदस्त हो, तो हाथ खुलने तक उसे मोहलत दो, और जो सदका करदो तो ये तुम्हारे लिए ज़्यादा बेहतर है, अगर तुम समझो
عَرَبِيوَاتَّقوا يَومًا تُرجَعونَ فيهِ إِلَى اللَّهِ ۖ ثُمَّ تُوَفّىٰ كُلُّ نَفسٍ ما كَسَبَت وَهُم لا يُظلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उस दिन से डरो, जिसमें तुम अल्लाह की ओर लौटाए जाओगे, फिर प्रत्येक प्राणी को उसके किए हुए का पूरा बदला दिया जाएगा तथा उनपर अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Us din ki ruswayi o museebat se bacho, jabke tum Allah ki taraf wapas hongey, wahan har shaks ko uski kamayi hui neki ya badhi ka poora poora badla mil jayega aur kisi par zulm hargiz na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss din say daro jiss mein tum sab Allah ki taraf lotaye jao gay aur her shaks ko uss kay aemaal ka poora poora badla diya jayega aur unn per zulm nahi kiya jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)उस दिन की रुसवेई ओ मुसीबत से बचो, जबके तुम अल्लाह की तरफ वापस होंगे, वहां हर शक्स को उसकी कमाई हुई नेकी या बड़ी का पूरा बदला मिल जाएगा और किसी पर ज़ुल्म हरगिज़ ना होगा
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِذا تَدايَنتُم بِدَينٍ إِلىٰ أَجَلٍ مُسَمًّى فَاكتُبوهُ ۚ وَليَكتُب بَينَكُم كاتِبٌ بِالعَدلِ ۚ وَلا يَأبَ كاتِبٌ أَن يَكتُبَ كَما عَلَّمَهُ اللَّهُ ۚ فَليَكتُب وَليُملِلِ الَّذي عَلَيهِ الحَقُّ وَليَتَّقِ اللَّهَ رَبَّهُ وَلا يَبخَس مِنهُ شَيئًا ۚ فَإِن كانَ الَّذي عَلَيهِ الحَقُّ سَفيهًا أَو ضَعيفًا أَو لا يَستَطيعُ أَن يُمِلَّ هُوَ فَليُملِل وَلِيُّهُ بِالعَدلِ ۚ وَاستَشهِدوا شَهيدَينِ مِن رِجالِكُم ۖ فَإِن لَم يَكونا رَجُلَينِ فَرَجُلٌ وَامرَأَتانِ مِمَّن تَرضَونَ مِنَ الشُّهَداءِ أَن تَضِلَّ إِحداهُما فَتُذَكِّرَ إِحداهُمَا الأُخرىٰ ۚ وَلا يَأبَ الشُّهَداءُ إِذا ما دُعوا ۚ وَلا تَسأَموا أَن تَكتُبوهُ صَغيرًا أَو كَبيرًا إِلىٰ أَجَلِهِ ۚ ذٰلِكُم أَقسَطُ عِندَ اللَّهِ وَأَقوَمُ لِلشَّهادَةِ وَأَدنىٰ أَلّا تَرتابوا ۖ إِلّا أَن تَكونَ تِجارَةً حاضِرَةً تُديرونَها بَينَكُم فَلَيسَ عَلَيكُم جُناحٌ أَلّا تَكتُبوها ۗ وَأَشهِدوا إِذا تَبايَعتُم ۚ وَلا يُضارَّ كاتِبٌ وَلا شَهيدٌ ۚ وَإِن تَفعَلوا فَإِنَّهُ فُسوقٌ بِكُم ۗ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۖ وَيُعَلِّمُكُمُ اللَّهُ ۗ وَاللَّهُ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! जब तुम आपस में एक निश्चित अवधि के लिए उधार का लेन-देन करो, तो उसे लिख लिया करो। और एक लिखने वाला तुम्हारे बीच न्याय के साथ लिखे। और कोई लिखने वाला उस तरह लिखने से इनकार न करे, जैसे अल्लाह ने उसे सिखाया है। सो उसे चाहिए कि लिखे और वह व्यक्ति लिखवाए जिसपर हक़ (क़र्ज़) हो, तथा वह अपने पालनहार अल्लाह से डरे और उस (कर्ज़) में से कुछ भी कम न करे। फिर यदि वह व्यक्ति जिसके ज़िम्मे हक़ (क़र्ज़) है, नासमझ या कमज़ोर है, या वह स्वयं लिखवाने में सक्षम न हो, तो उसका वली (अभिभावक) न्याय के साथ लिखवा दे। तथा अपने पुरुषों में से दो गवाहों को गवाह बना लो। फिर यदि दो पुरुष न हों, तो एक पुरुष तथा दो स्त्रियाँ उन लोगों में से जिन्हें तुम गवाहों में से पसंद करते हो। (इसलिए) कि दोनों में से एक भूल जाए, तो उनमें से एक दूसरी को याद दिला दे। तथा गवाह जब भी बुलाए जाएँ, इनकार न करें। तथा मामला छोटा हो या बड़ा, उसे उसकी अवधि तक लिखने से न उकताओ। यह काम अल्लाह के निकट अधिक न्यायसंगत, तथा गवाही को अधिक ठीक रखने वाला है और अधिक निकट है कि तुम संदेह में न पड़ो, परंतु यह कि नक़द सौदा हो, जिसका तुम आपस में लेन-देन करते हो, तो उसे न लिखने में तुमपर कोई दोष नहीं। तथा जब आपस में क्रय-विक्रय करो, तो गवाह बना लिया करो। और न किसी लिखने वाले को हानि पहुँचाई जाए और न किसी गवाह को। और यदि ऐसा करोगो, तो निःसंदेह यह तुम में (पाई जाने वाली बहुत) बड़ी अवज्ञा है। तथा अल्लाह से डरो और अल्लाह तुम्हें सिखाता है और अल्लाह हर चीज़ को ख़ूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, jab kisi muqarrar muddat ke liye tum aapas mein qarz ka lein dein karo to usey likh liya karo. Fareeqain ke darmiyan insaaf ke saath ek shaks dastawez (document) tehrir karey. Jisey Allah ne likhe padhne ki kaabiliyat bakshi ho, usey likhne se inkar na karna chahiye. Woh likhey aur imla (dictate) woh shaks karaye jispar haqq aata hai (yaani qarz lene wala), aur usey Allah, apne Rubb se darna chahiye ke jo maamla tai ho usmein koi kami beshi na karey. Lekin agar qarz lene wala khud nadaan ya zaeef ho, ya imla na kara sakta ho, to uska wali insaaf ke saath imla karaye, phir apne mardon mein se do aadmiyon ki ispar gawahi karalo aur agar do Mard na hon to ek Mard aur do auratein hon, taa-ke ek bhool jaye to dusri usey yaad dila de. Yeh gawaah aisey logon mein se honi chahiye jinki gawahi tumhare darmiyan maqbool ho. Gawahon ko jab gawaah banney ke liye kaha jaye, to unhein inkar na karna chahiye. Maamla khwa chota ho ya bada, miyaad ki taeen (specified term) ke saath uski dastawez (documents) likhwa lene mein tasahul (neglect) na karo. Allah ke nazdeek yeh tareeqa tumhare liye zyada mabni bar Insaaf hai, issey shahadat qayam honay mein zyada sahulat hoti hai, aur tumhare shukook o shubhaaat mein mubtila honay ka imkan kam reh jata hai. Haan jo tijarati lein dein dast ba dast tumlog aapas mein karte ho, usko na likha jaye to koi harj nahin, magar tijarati maamle tai karte waqt gawah karliya karo. Kaatib (scribe) aur gawah ko sataya na jaye , aisa karoge to gunaah ka irteqaab karoge. Allah ke gazab se bacho, woh tumko saheeh tareeq e amal ki taleem deta hai aur usey har cheez ka ilm hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walon! Jab tum aapas mein tum aik doosray say miyaad-e-muqarrar per qaraz ka moamla kero to issay likh liya kero aur likhney walay ko chahaiye kay tumhara aapas ka moamla adal say likhay kaaib ko chahaiye kay likhney say inkar na keray jaisay Allah Taalaa ney ussay sikhaya hai pus ussay bhi likh dena chahaiye aur jiss kay zimmay haq ho woh likhwaye aur apney Allah say daray jo uss ka rab hai aur haq mein say kuch ghataye nahi haan jiss shkas kay zimmay haq hai woh agar nadan ho ya kamzor ho ya likhwaney ki taqat na rakhta ho to uss ka wali adal kay sath likhwa dey aur apney mein say do mard gawah rakh lo agar do mard na hon to aik mard aur do aurten jinhen tum gawahon mein sy pasand ker lo takay aik ki bhool chook ko doosri yaad dila dey aur gawahon ko chahaiye kay woh jab bulayen jayen to inkar na keren aur qaraz ko jiss ko muddat muqarrar hai khuwa chota ho ya bara ho likhney mein kahili na kero Allah Taalaa key nazdeek yeh baat boht insaf wali hai aur gawahi ko bhi durust rakhney wali aur shak-o-shuba say bhi bachaney wali hai haan yeh aur baat hai kay woh moamla naqad tijarat ki shakal mein ho jo aapas mein tum lain dain ker rahey ho to tum per iss kay na likhney mein koi gunah nahi. Khareed-o-farokht kay waqt bhi gawah muqarrar ker liya kero aur (yaad rakho kay) na to likhney walay ko nuksan phonchaya jaye na gawah ko aur agar tum yeh kero to yeh tumhari khuli na farmani hai Allah Taalaa say daro Allah tumhen taleem dey raha hai aur Allah Taalaa her cheez ko khoob janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब किसी मुकर्रर मुद्दत के लिए तुम आपस में क़र्ज़ का लें दीन करो तो उसे लिख लिया करो। फ़रीक़ैन के दरमियान इन्साफ़ के साथ एक शक्स दस्तावेज़ (दस्तावेज़) तहरीर करे। जिसे अल्लाह ने लिखा पढ़ने की काबिलियत बख्शी हो, उसे लिखने से इंकार न करना चाहिए। वो लिखे और इम्ला (हुक्म) वो शक्स कराए जिसपर हक़ आता है (यानी क़र्ज़ लेने वाला), और उसे अल्लाह, अपने रब से डरना चाहिए के जो मामला ताई हो उसमें कोई कमी बेशी ना करे। लेकिन अगर क़र्ज़ लेने वाला खुद नादाँ या ज़ईफ़ हो, या इमला ना करा सकता हो, तो उसका वली इन्साफ के साथ इमला कराये, फिर अपने मर्दों में से दो आदमियों की इसपर गवाही करालो और अगर दो मर्द ना हो तो एक मर्द और दो औरतें हो, ता-के एक भूल जाये तो दूसरी उसे याद दिला दे। ये गवाह ऐसे लोगों में से होनी चाहिए जिनकी गवाही तुम्हारे दरमियान मकबूल हो। गवाहों को जब गवाह बनने के लिए कहा जाए, तो उन्हें इंकार न करना चाहिए। मामला ख़्वा छोटा हो या बड़ा, मियाद की तैं (निर्दिष्ट अवधि) के साथ उसकी दस्तावेज़ (दस्तावेज़) लिखवा लेने में तसहुल (उपेक्षा) न करो। अल्लाह के नाज़दीक ये तरीक़ा तुम्हारे लिए ज़्यादा मब्नी बार इन्साफ़ है, इस शहादत क़याम होने में ज़्यादा सहुलत होती है, और तुम्हारे शुकुक ओ शुबाअत में मुब्तिला होने का इम्कान कम रह जाता है। हां जो तिजारती लें दीन दस्त बा दस्त तुमलोग आपस में करते हो, उसको ना लिखा जाए तो कोई हर्ज नहीं, मगर तिजाराती मामले तै करते वक्त गवाह कार्लिया करो। कातिब (मुंशी) और गवाह को सताया ना जाए, ऐसा करोगे तो गुनाह का इर्तेक़ाब करोगे। अल्लाह के गजब से बचो, वो तुमको सही तारीख ए अमल की तालीम देता है और उसे हर चीज का इल्म है
عَرَبِي۞ وَإِن كُنتُم عَلىٰ سَفَرٍ وَلَم تَجِدوا كاتِبًا فَرِهانٌ مَقبوضَةٌ ۖ فَإِن أَمِنَ بَعضُكُم بَعضًا فَليُؤَدِّ الَّذِي اؤتُمِنَ أَمانَتَهُ وَليَتَّقِ اللَّهَ رَبَّهُ ۗ وَلا تَكتُمُوا الشَّهادَةَ ۚ وَمَن يَكتُمها فَإِنَّهُ آثِمٌ قَلبُهُ ۗ وَاللَّهُ بِما تَعمَلونَ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम किसी सफ़र पर हो और कोई लिखने वाला न पाओ, तो ऐसी गिरवी आवश्यक है जो क़ब्ज़े में ले ली गई हो। फिर यदि तुममें से कोई किसी पर भरोसा करे, तो जिसपर भरोसा किया गया है वह अपनी अमानत अदा करे और अपने पालनहार अल्लाह से डरे। तथा गवाही न छिपाओ और जो उसे छिपाए, तो निःसंदेह उसका दिल पापी है। तथा अल्लाह जो कुछ तुम कर रहे हो, उसे ख़ूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum safar ki haalat mein ho aur dastawez likhne ke liye koi kaatib (scribe) na miley to rehan bil qabz (security of a pledge in hand ) par maamla karo, agar tum mein se koi shaks dusre par bharosa karke iske saath koi maamla karey to jispar bharosa kiya gaya hai usey chahiye ke amanat ada karey aur Allah apne Rubb se darey aur shahadat hargiz na chupao. Jo shahadat chupata hai uska dil gunaah mein aaluda hai aur Allah tumhare aamaal se bekhabar nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tum safar mein ho aur likhney wala na pao to rehan qabzay mein rakh liya kero haan agar aapas mein aik doosray say mutmaeen ho to jissay amanat di gaee hai woh ussay ada ker dey aur Allah Taalaa say darat rahey jo uss ka rab hai aur gawahi ko na chupao aur jo issay chupa ley woh gunehgar dil wala hai aur jo kuch tum kertay ho ussay Allah Taalaa khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम सफ़र की हालत में हो और दस्तावेज़ लिखने के लिए कोई कातिब (मुंशी) ना मिले तो रेहान बिल क़ब्ज़ (हाथ में प्रतिज्ञा की सुरक्षा) पर मामला करो, अगर तुम में से कोई शक्स दूसरे पर भरोसा करके इसके साथ कोई मामला करे तो जिसका भरोसा किया गया है उसे चाहिए के अमानत अदा करे और अल्लाह अपने रब से डरे और शहादत हरगिज़ ना छुपाओ। जो शहादत छुपाता है उसका दिल गुनाह में आलूदा है और अल्लाह तुम्हारे अमाल से बेखबर नहीं है
عَرَبِيلِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۗ وَإِن تُبدوا ما في أَنفُسِكُم أَو تُخفوهُ يُحاسِبكُم بِهِ اللَّهُ ۖ فَيَغفِرُ لِمَن يَشاءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشاءُ ۗ وَاللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही का है जो कुछ आकाशों में और जो धरती में है, और यदि तुम उसे प्रकट करो जो तुम्हारे दिलों में है, या उसे छिपाओ, अल्लाह तुमसे उसका ह़िसाब लेगा। फिर जिसे चाहेगा, माफ़ कर देगा और जिसे चाहेगा, यातना देगा और अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Asmaano aur zameen mein jo kuch hai sab Allah ka hai, tum apne dil ki baatein khwa zaahir karo ya chupao, Allah bahar haal unka hisaab tumse le lega, phir usey ikhtiyar hai jisey chahe maaf karde aur jisey chahe saza de, woh har cheez par qudrat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmanon aur zamin ki her cheez Allah Taalaa hi ki milkiyat hai. Tumharay dilon mein jo kuch hai ussay tum zahir kero ya chupao Allah Taalaa uss ka hisab tum say ley ga. Phir jissay chahaye bakshay aur jissay chahaye saza dey aur Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)आसमानो और ज़मीन में जो कुछ है सब अल्लाह का है, तुम अपने दिल की बातें ख्वा जाहिर करो या छुपाओ, अल्लाह बाहर हाल उनका हिसाब तुमसे ले लेगा, फिर उसे इख्तियार है जिसे चाहे माफ करदे और जिसे चाहे सजा दे, वो हर चीज पर क़ुदरत रखता है
عَرَبِيآمَنَ الرَّسولُ بِما أُنزِلَ إِلَيهِ مِن رَبِّهِ وَالمُؤمِنونَ ۚ كُلٌّ آمَنَ بِاللَّهِ وَمَلائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ لا نُفَرِّقُ بَينَ أَحَدٍ مِن رُسُلِهِ ۚ وَقالوا سَمِعنا وَأَطَعنا ۖ غُفرانَكَ رَبَّنا وَإِلَيكَ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)रसूल उस चीज़ पर ईमान लाए, जो उनकी तरफ़ उनके पालनहार की ओर से उतारी गई तथा सब ईमान वाले भी। हर एक अल्लाह और उसके फ़रिश्तों और उसकी पुस्तकों और उसके रसूलों पर ईमान लाया। (वे कहते हैं) हम उसके रसूलों में से किसी एक के बीच अंतर नहीं करते। और उन्होंने कहा हमने सुना और हमने आज्ञापालन किया। हम तेरी क्षमा चाहते हैं ऐ हमारे पालनहार! और तेरी ही ओर लौटकर जाना है।
Roman Urdu (Maududi)Rasool us hidayat par iman laya hai jo uske Rubb ki taraf se uspar nazil hui hai aur jo log is Rasool ke maanne waley hain unhon ne bhi is hidayat ko dilse tasleem karliya hai, yeh sab Allah aur uske Farishton aur uski kitabon aur uske Rasoolon ko maante hain aur unka qaul yeh hai ke : “hum Allah ke Rasoolon ko ek dusre se alag nahin karte, humne hukum suna aur itaat qabool ki. Malik! Hum tujhse khata-bakhsi (bakshish) ke taalib hain aur humein teri hi taraf palatna hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Rasool eman laya uss cheez pe jo uss per Allah Taalaa ki janib say utri aur momin bhi eman laye yeh sab Allah Taalaa aur uss kay farishton per aur uss ki kitabon per aur uss kay rasoolon per eman laye uss kay rasoolon mein say kissi mein hum tafareeq nahi kertay unhon ney keh diya kay hum ney suna aur itaat ki hum teri bakshish talab kertay hain aey humaray rab! Aur humen teri taraf hi lotna hai
Devnagri Urdu (Maududi)रसूल हमें हिदायत पर ईमान लाया है जो उसके रब की तरफ से उसपर नाज़िल हुई है और जो लोग इस रसूल के मन्ने वाले हैं उन्होन ने भी हिदायत को दिलसे तस्लीम कार्लिया है, ये सब अल्लाह और उसके फरिश्तों और उसकी किताबों और उसके रसूलों को मानते हैं और उनका क़ौल ये है के: "हम अल्लाह के रसूलों को एक दूसरे से अलग नहीं करते, हमने हुकुम सुना और इताअत क़बूल की। ​​मालिक! हम तुझसे ख़ता-बख्शी (बख्शीश) के तालिब हैं और हमें तेरी ही तरफ पलटना है।”
عَرَبِيلا يُكَلِّفُ اللَّهُ نَفسًا إِلّا وُسعَها ۚ لَها ما كَسَبَت وَعَلَيها مَا اكتَسَبَت ۗ رَبَّنا لا تُؤاخِذنا إِن نَسينا أَو أَخطَأنا ۚ رَبَّنا وَلا تَحمِل عَلَينا إِصرًا كَما حَمَلتَهُ عَلَى الَّذينَ مِن قَبلِنا ۚ رَبَّنا وَلا تُحَمِّلنا ما لا طاقَةَ لَنا بِهِ ۖ وَاعفُ عَنّا وَاغفِر لَنا وَارحَمنا ۚ أَنتَ مَولانا فَانصُرنا عَلَى القَومِ الكافِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह किसी प्राणी पर भार नहीं डालता परंतु उसकी क्षमता के अनुसार। उसी के लिए है जो उसने (नेकी) कमाई और उसी पर है जो उसने (पाप) कमाया। ऐ हमारे पालनहार! हमारी पकड़ न कर यदि हम भूल जाएँ या हमसे चूक हो जाए। ऐ हमारे पालनहार! और हमपर कोई भारी बोझ न डाल, जैसे तूने उसे उन लोगों पर डाला जो हमसे पहले थे। ऐ हमारे पालनहार! और हमसे वह चीज़ न उठवा जिस (के उठाने) की हम में शक्ति न हो। तथा हमें माफ़ कर और हमें क्षमा कर दे और हमपर दया कर। तू ही हमारा स्वामी (संरक्षक) है, इसलिए काफ़िरों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर।
Roman Urdu (Maududi)Allah kisi mutanaffis par uski maqdarat (taqat) se badkar zimmedari ka bojh nahin daalta, har shaks ne jo neki kamayi hai uska phal usi ke liye hai aur jo badhi sameti hai uska wabaal usi par hai, (Iman laney walon! Tum yun dua kiya karo) aey hamare Rubb! Humse bhool chuk mein jo kasoor ho jayein unpar giraft na kar, Malik! Humpar woh bojh na daal jo tu-nay humse pehle logon par daley thay. Parwardigaar ! jis baar ko uthane ki taaqat hum mein nahin hai woh humpar na rakh, hamare saath narmi kar, humse darguzar farma, humpar reham kar, tu hamara maula hai, kafiron ke muqable mein hamari madad kar
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa kissi jaan ko uss ki taqat say ziyada akleef nahi deta jo neki woh keray woh uss kay liye aur jo buraee woh keray woh uss per hai aey humaray rab! Agar hum bhool gaye hon ya khata ki ho to humen na pakarna aey humaray rab! Hum per woh bojh na daal jo hum say pehlay logon pe dala tha aey humaray rab! Hum per woh bojh na daal jiss ki humen taqat na ho aur hum say dar guzar farma! Aur humen baksh dey aur hum per reham ker! Tu hi humara maalik hai humen kafiron ki qom per ghalba ata farma
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह किसी मुतनफ्फिस पर उसकी मक़दरत (ताक़त) से ख़राब ज़िम्मेदारी का बोझ नहीं डालता, हर शक्स ने जो नेकी कमाई है उसका फ़ल उसी के लिए है और जो बड़ी समेटी है उसका वबाल उसी पर है, (ईमान लाने वालों! तुम यूं दुआ किया करो) ऐ हमारे रब! हमसे भूल चुक में जो कसूर हो जाए अनपर गिरफ़्तार ना कर, मलिक! हमपर वो बोझ ना डाल जो तू-नहीं हमसे पहले लोगों पर डाले थे। परवरदिगार ! जिस बार को उठने की ताक़त हम में नहीं है वो हमपर ना रख, हमारे साथ नरमी कर, हमसे दरगुज़र फरमा, हमपर रहम कर, तू हमारा मौला है, काफिरों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर
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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 2: Al-Baqarah (The Cow)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

Medinan🕐 Revelation #89📜 200 Verses🕮 Juz 1–4
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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالم
हिन्दी (Al-Omari)अलिफ़, लाम, मीम।
Roman Urdu (Maududi)Alif laam meem
Roman Urdu (Junagarhi)Alif Laam meem
Devnagri Urdu (Maududi)अलिफ़ लाम मीम
عَرَبِياللَّهُ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ الحَيُّ القَيّومُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह (वह है कि) उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। (वह) जीवित है, हर चीज़ को सँभालने (क़ायम रखने) वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah , woh zinda e javed hasti (Self-Subsisting), jo nizam e qayinaat ko sambhale huey hai, haqeeqat mein uske siwa koi khuda nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa woh hai jiss kay siwa koi mabood nahi jo zinda aur sab ka nigehban hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह , वो जिंदा ए जावेद हस्ती (सेल्फ सब्सिस्टिंग), जो निज़ाम ए कायनात को संभाले हुए है, हकीकत में उसके सिवा कोई खुदा नहीं है
عَرَبِينَزَّلَ عَلَيكَ الكِتابَ بِالحَقِّ مُصَدِّقًا لِما بَينَ يَدَيهِ وَأَنزَلَ التَّوراةَ وَالإِنجيلَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने आप पर (यह) पुस्तक सत्य के साथ उतारी, जो उसकी पुष्टि करने वाली है जो इससे पूर्व है, और उसने तौरात तथा इंजील उतारी।
Roman Urdu (Maududi)Usne tumpar yeh kitab nazil ki hai, jo haqq lekar aayi hai aur un kitabon ki tasdeeq kar rahi hai jo pehle se aayi hui thi, issey pehle woh insaano ki hidayat ke liye taurat aur injil nazil kar chukka hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ney aap per haq kay sath iss kitab ko nazil farmaya hai jo apney say pehlay ki tasdeeq kerney wali hai ussi ney iss say pehlay toraat aur injeel ko utara tha
Devnagri Urdu (Maududi)उसने तुमपर ये किताब नाज़िल की है, जो हक लेकर आई है और उन किताबों की तस्दीक कर रही है जो पहले से आई हुई थी, इसे पहले वो इंसानों की हिदायत के लिए तौरात और इंजील नाज़िल कर चुक्का है
عَرَبِيمِن قَبلُ هُدًى لِلنّاسِ وَأَنزَلَ الفُرقانَ ۗ إِنَّ الَّذينَ كَفَروا بِآياتِ اللَّهِ لَهُم عَذابٌ شَديدٌ ۗ وَاللَّهُ عَزيزٌ ذُو انتِقامٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)इससे पहले, लोगों के मार्गदर्शन के लिए। और उसने फ़ुरक़ान (सत्य और असत्य में अंतर करने वाला मानदंड) उतारा। निःसंदेह जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों का इनकार किया, उनके लिए बहुत कड़ी यातना है। और अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली, बदला लेने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur usne woh kasauti (criteria) utari hai (jo haqq aur baatil ka farq dikhane wali hai). Ab jo log Allah ke farameen ko qabool karne se inkar karein, unko yaqeenan sakht saza milegi. Allah be-panaah taaqat ka maalik hai aur burayi ka badla dene wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Iss say pehlay logon ko hidayat kerney wali bana ker aur quran bhi ussi ney utara jo log Allah Taalaa ki aayaton say kufur kertay hain unn kay liye sakht azab hai aur Allah Taalaa ghalib hai badla lenay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और उसने वो कसौटी (मानदंड) उतारी है (जो हक़ और बातिल का फर्क दिखाने वाली है)। अब जो लोग अल्लाह के फ़रामीन को क़बूल करने से इनकार करते हैं, उनको यकीनन सज़ा मिलेगी। अल्लाह बे-पनाह ताक़त का मालिक है और बुराई का बदला देने वाला है
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ لا يَخفىٰ عَلَيهِ شَيءٌ فِي الأَرضِ وَلا فِي السَّماءِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह वह है जिससे न धरती में कोई चीज़ छिपी रहती है और न आकाश में।
Roman Urdu (Maududi)Zameen aur asmaan ki koi cheez Allah se posheeda nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan Allah Taalaa per zamin-o-aasman ki koi cheez posheeda nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन और आसमान की कोई चीज़ अल्लाह से पोशीदा नहीं
عَرَبِيهُوَ الَّذي يُصَوِّرُكُم فِي الأَرحامِ كَيفَ يَشاءُ ۚ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वही है जो गर्भाशयों में तुम्हारे रूप बनाता है, जिस तरह चाहता है। उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, (वह) सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi to hai jo tumhari Maaon (mothers) ke pait mein tumhari suratein , jaisi chahta hai, banata hai. Us zabardast hikmat waley ke siwa koi aur khuda nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh maa kay pet mein tumhari soorten jiss tarah ki chahta hai banata hai. Uss kay siwa koi mabood-e-bar haq nahi woh ghalib hai hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही तो है जो तुम्हारी माँओं के पैत में तुम्हारी सूरतें, जैसी चाहता है, बनता है। हमें ज़बरदस्त हिकमत वाले के सिवा कोई और खुदा नहीं है
عَرَبِيهُوَ الَّذي أَنزَلَ عَلَيكَ الكِتابَ مِنهُ آياتٌ مُحكَماتٌ هُنَّ أُمُّ الكِتابِ وَأُخَرُ مُتَشابِهاتٌ ۖ فَأَمَّا الَّذينَ في قُلوبِهِم زَيغٌ فَيَتَّبِعونَ ما تَشابَهَ مِنهُ ابتِغاءَ الفِتنَةِ وَابتِغاءَ تَأويلِهِ ۗ وَما يَعلَمُ تَأويلَهُ إِلَّا اللَّهُ ۗ وَالرّاسِخونَ فِي العِلمِ يَقولونَ آمَنّا بِهِ كُلٌّ مِن عِندِ رَبِّنا ۗ وَما يَذَّكَّرُ إِلّا أُولُو الأَلبابِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) वही है जिसने आप पर (यह) पुस्तक उतारी, जिसमें से कुछ आयतें मोह़कम (स्पष्ट तर्क वाली) हैं, वही पुस्तक का मूल हैं, तथा कुछ दूसरी (आयतें) मुतशाबेह (छिपे हुए और पोशीदा अर्थ वाली) हैं। फिर जिनके दिलों में टेढ़ है, तो वे फ़ित्ने की तलाश में तथा उसके असल आशय की तलाश के उद्देश्य से, सदृश अर्थों वाली आयतों का अनुसरण करते हैं। हालाँकि उनका वास्तविक अर्थ अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता। तथा जो लोग ज्ञान में पक्के हैं, वे कहते हैं हम उसपर ईमान लाए, सब हमारे पालनहार की और से है। और शिक्षा वही लोग ग्रहण करते हैं, जो बुद्धि वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Wahi khuda hai, jisne yeh kitab tumpar nazil ki hai. Is kitab mein do tarah ki ayaat hain : ek mohkamaat, jo kitab ki asal buniyaad hain aur dusri mutashaabihaat (ambiguous). Jin logon ke dilon mein tedh hai, woh fitne ki talash mein hamesha mutashabihaat hi ke pichey padey rehte hain aur unko maani pehnane ki koshish kiya karte hain, halaanke unka haqiqi mafhoom Allah ke siwa koi nahin jaanta. Bakhilaf iske jo log ilm mein pukhta-kaar hain, woh kehte hain ke “ hamara unpar iman hai, yeh sab hamare Rubb hi ki taraf se hain” aur sach yeh hai ke kisi cheez se saheeh sabaq sirf daanishmand log hi hasil karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi Allah Taalaa hai jiss ney tujh per kitab utari jiss mein wazeh mazboot aayaten hain jo asal kitab hain aur baaz mutashabeh aayaten hain. Pus jin kay dilon mein kuji hai woh to iss ki mutashabeh aayaton kay peechay lag jatay hain fitney ki talab aur inn kay murad ki justujoo kay liye halankay inn ki haqeeqi murad ko siwaye Allah Taalaa kay koi nahi janta aur pukhta aur mazboor ilm walay yehi kehtay hain kay hum to inn per eman laa chukay yeh humaray rab ki taraf say hain aur naseehat to sirf aqal mand hi hasil kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)वही खुदा है, जिसने ये किताब तुम्हारी नाज़िल की है। क्या किताब में दो तरह की आयतें हैं: एक मोहकमात, जो किताब की असल बुनियाद हैं और दूसरी मुताशाबीहात (अस्पष्ट)। जिन लोगों के दिलों में टेढ़ा है, वो फ़िटने की तलाश में हमेशा मुतास्बिहात ही के पीछे पड़े रहते हैं और उनको मानी पहचान की कोशिश करते हैं, हलांके उनका हक़ीक़ी मफ़हूम अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता। बख़िलाफ़ इसके जो लोग इल्म में पुख्ता-कार हैं, वो कहते हैं के "हमारा अनोखा ईमान है, ये सब हमारे रब ही की तरफ से हैं" और सच ये है के किसी चीज़ से सही सबक सिर्फ दानिशमंद लोग ही हासिल करते हैं
عَرَبِيرَبَّنا لا تُزِغ قُلوبَنا بَعدَ إِذ هَدَيتَنا وَهَب لَنا مِن لَدُنكَ رَحمَةً ۚ إِنَّكَ أَنتَ الوَهّابُ
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हिन्दी (Al-Omari)(तथा वे कहते हैं :) ऐ हमारे पालनहार! हमें हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को टेढ़ा न कर, और हमें अपनी ओर से दया प्रदान कर। निःसंदेह तू ही बहुत बड़ा दाता है।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah se dua karte rehte hain ke “ parwardigaar! Jab tu humein seedhe raste par laga chukka hai, to phir kahin hamare dilon ko kaji (crookedness) mein mubtila na kardijiyo. Humein apne khazane faiz se rehmat ata kar ke tu hi fayyaz e haqiqi (ata farmane wala) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey humaray rab! Humen hidayat denay kay baad humaray dil tehray na ker dey aur humen apney pass say rehmat ata farma yaqeena tu hi boht bari ata denay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह से दुआ करते रहते हैं हैं के "परवरदिगार! जब तू हमें सीधे रास्ते पर लगा चुका है, तो फिर कहीं हमारे दिलों को काजी (टेढ़ापन) में मुब्तिला न करदीजियो। हमें अपने खज़ाने फ़ैज़ से रहमत अता कर के तू ही फ़ैयाज़ ए हक़ीक़ी (अता फ़रमाने वाला) है
عَرَبِيرَبَّنا إِنَّكَ جامِعُ النّاسِ لِيَومٍ لا رَيبَ فيهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ لا يُخلِفُ الميعادَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारे पालनहार! निःसंदेह तू सब लोगों को उस दिन के लिए इकट्ठा करने वाला है, जिस (के आने) में कोई शक नहीं। निःसंदेह अल्लाह वादे के विरुद्ध नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Parwardigaar! Tu yaqeenan sab logon ko ek roz jamaa karne wala hai, jiske aane mein koi shubha (shakk) nahin, tu hargiz apne wadey se talne wala nahin hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey humaray rab! Tu yaqeenan logon ko aik din jama kerney wala hai jiss kay aaney mein koi shak nahi yaqeenan Allah Taalaa wada khilafi nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)परवरदिगार! तू यकीनन" सब लोगों को एक रोज़ जमा करने वाला है, जिसके आने में कोई शुभ (शक्क) नहीं, तू हरगिज़ अपने वादे से तलने वाला नहीं है”
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا لَن تُغنِيَ عَنهُم أَموالُهُم وَلا أَولادُهُم مِنَ اللَّهِ شَيئًا ۖ وَأُولٰئِكَ هُم وَقودُ النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उनके धन तथा उनकी संतान उन्हें अल्लाह (की यातना) से (बचाने में) कदापि कुछ काम नहीं आएँगे, तथा वही आग का ईंधन हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne kufr ka rawayya ikhtiyar kiya hai, unhein Allah ke muqable mein na unka maal kuch kaam dega, na aulad , woh dozakh ka indhan (fuel) bankar rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Kafiron ko unn kay maal aur unn ki aulad Allah Taalaa (kay azab) say churaney mein kuch kaam na aayen gi yeh to jahannum ka endhan hi hain
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया है, उन्हें अल्लाह के मुक़ाबले में ना उनका माल कुछ काम देगा, ना औलाद, वो दोज़ख का इंधन (ईंधन) बनकर रहेंगे
عَرَبِيكَدَأبِ آلِ فِرعَونَ وَالَّذينَ مِن قَبلِهِم ۚ كَذَّبوا بِآياتِنا فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ بِذُنوبِهِم ۗ وَاللَّهُ شَديدُ العِقابِ
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हिन्दी (Al-Omari)(इनका हाल) फ़िरऔनियों तथा उन लोगों के हाल की तरह है जो उनसे पहले थे। उन्होंने हमारी आयतों (निशानियों) को झुठलाया, तो अल्लाह ने उन्हें उनके गुनाहों के कारण पकड़ लिया और अल्लाह बहुत सख़्त अज़ाब वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Unka anjaam waisa hi hoga, jaisa Firoun ke saathiyon aur unse pehle ke nafarmaano ka ho chukka hai ke unhon ne ayaat e ilahi ko jhutlaya, nateeja yeh hua ke Allah ne unke gunaahon par unhein pakad liya aur haqq yeh hai ke Allah sakht saza dene wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jaisa aal-e-firaon ka haal hua aur unn ka jo inn say pehlay thay unhon ney humari aayaton ko jhutlaya phir Allah Taalaa ney bhi unhen unn kay gunahon per pakar liya aur Allah Taalaa sakht azab wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनका अंजाम वैसा ही होगा, जैसा फिरौन के साथियों और उन्हें पहले के नफरमानों का हो चुका है कि उनको ने आयत ए इलाही को झुटलाया, नतीजा ये हुआ के अल्लाह ने उनके गुनाहों पर उन्हें पकड़ लिया और हक़ ये है के अल्लाह सज़ा देने वाला है
عَرَبِيقُل لِلَّذينَ كَفَروا سَتُغلَبونَ وَتُحشَرونَ إِلىٰ جَهَنَّمَ ۚ وَبِئسَ المِهادُ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) काफ़िरों से कह दें कि तुम जल्द ही पराजित किए जाओगे तथा जहन्नम की ओर इकट्ठे किए जाओगे और वह बहुत बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Pas (aey Muhammad) ! jin logon ne tumhari dawat ko qabool karne se inkar kardiya hai, unse kehdo ke qareeb hai woh waqt , jab tum magloob ho jaogey aur jahannum ki taraf haanke jaogey aur jahannum bada hi bura thikana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kafiron say keh dijiye! Kay tum un-qarib maghloob kiye jao gay aur jahannum ki taraf jama kiye jao gay aur woh bura thikana hai
Devnagri Urdu (Maududi)पस (ऐ मुहम्मद) ! जिन लोगों ने तुम्हारी दावत को कबूल करने से इंकार कर दिया है, उनसे कहदो के करीब है वो वक्त, जब तुम मगरूब हो जाओगे और जहन्नुम की तरफ हांके जाओगे और जहन्नुम बड़ा ही बुरा ठिकाना है
عَرَبِيقَد كانَ لَكُم آيَةٌ في فِئَتَينِ التَقَتا ۖ فِئَةٌ تُقاتِلُ في سَبيلِ اللَّهِ وَأُخرىٰ كافِرَةٌ يَرَونَهُم مِثلَيهِم رَأيَ العَينِ ۚ وَاللَّهُ يُؤَيِّدُ بِنَصرِهِ مَن يَشاءُ ۗ إِنَّ في ذٰلِكَ لَعِبرَةً لِأُولِي الأَبصارِ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय तुम्हारे लिए उन दो दलों में बड़ी निशानी थी, जिनमें (बद्र के मैदान में) मुठभेड़ हुई। एक दल अल्लाह के मार्ग में लड़ता था और दूसरा काफ़िर था। ये (मुसलमान) उन (काफ़िरों) को अपनी आँखों से अपने से दुगना देख रहे थे। और अल्लाह जिसे चाहता है अपनी सहायता से शक्ति प्रदान करता है। निःसंदेह इसमें आँखों वालों के लिए निश्चय बड़ी इबरत (सीख) है।
Roman Urdu (Maududi)Tumhare liye un do giroohon mein ek nishan e ibrat tha, jo (badr mein) ek dusre se nabard aazma (encountered) huey, ek giroh Allah ki raah mein ladd raha tha aur dusra giroh kafir tha, dekhne waley ba-chashm e sar dekh rahey thay ke kafir giroh momin giroh se do chandh (twice the number) hai magar (nateeje ne saabit kardiya ke) Allah apni fatah o nusrat se jisko chahta hai madad deta hai. Deedha e beena(eyes to see) rakhne walon ke liye ismein bada sabaq posheeda hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tumharay liye ibrat ki nishani thi unn do jamaton mein jo guth gaee thin aik jamat to Allah Taalaa ki raah mein larr rahi thi aur doosra giroh kafiron ka tha woh unhen apni aankhon say apney say dugna dekhtay thay aur Allah Taalaa jisay chahaye apni madad say qavi kerta hai. Yaqeenan iss mein aankhon walon kay liye bari ibrat hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारे लिए उन दो गिरोहों में एक निशान ए इब्रत था, जो (बदर में) एक दूसरे से नाबार्ड आज़मा (मुठभेड़) हुए, एक गिरोह अल्लाह की राह में लड़ रहा था और दूसरा गिरोह काफ़िर था, देखने वाले ब-चश्म ए सर देख रहे थे के काफिर गिरोह मोमिन गिरोह से दो चाँद (दोगुने नंबर) है मगर (नतीजे ने) साबित करदिया के) अल्लाह अपनी फतह ओ नुसरत से जिसको चाहता है मदद देता है। दीधा ए बीना (देखने वाली आंखें) रखने वालों के लिए इसमें बड़ा सबक पोशीदा है
عَرَبِيزُيِّنَ لِلنّاسِ حُبُّ الشَّهَواتِ مِنَ النِّساءِ وَالبَنينَ وَالقَناطيرِ المُقَنطَرَةِ مِنَ الذَّهَبِ وَالفِضَّةِ وَالخَيلِ المُسَوَّمَةِ وَالأَنعامِ وَالحَرثِ ۗ ذٰلِكَ مَتاعُ الحَياةِ الدُّنيا ۖ وَاللَّهُ عِندَهُ حُسنُ المَآبِ
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हिन्दी (Al-Omari)लोगों के लिए भौतिक इच्छाओं का प्यार सुसज्जित कर दिया गया है, जो औरतें, बेटे, सोने और चाँदी के ढेर, निशान लगाए हुए घोड़े, मवेशी तथा खेती हैं। ये सांसारिक जीवन के सामान हैं और उत्तम ठिकाना अल्लाह के पास है।
Roman Urdu (Maududi)Logon ke liye margoobaat e nafs (naturally tempted by the lure of) auratein, aulad, soney chandi ke dhair, cheeda ghodey(branded horses) maweshi aur zarayi zameenein badi khush-aand bana di gayi hain. Magar yeh sab duniya ki chandh roza zindagi ke samaan hain , haqeeqat mein jo behtar thikana hai woh to Allah ke paas hai
Roman Urdu (Junagarhi)Marghoob cheezon ki mohabbat logon kay liye muzayyen ker di gaee hai jaisay aurten aur betay aur soney aur chandi kay jama kiye huye khazaney aur nishandaar ghoray aur chopaye aur kheti yeh duniya ki zidagi ka saman hai aur lotney ka acha thikana to Allah Taalaa hi kay pass hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों के लिए मरगूबात ए नफ़्स (स्वाभाविक रूप से लालच से लुभाया गया) औरतें, औलाद, सोने चांदी के ढेर, चीदा घोड़े (ब्रांडेड घोड़े) मवेशी और ज़राय ज़मीनें बड़ी ख़ुश-आनंद बना दी गई है। मगर ये सब दुनिया की चांद रोजा जिंदगी के सामान हैं, हकीकत में जो बेहतर ठिकाना है वो तो अल्लाह के पास है
عَرَبِي۞ قُل أَؤُنَبِّئُكُم بِخَيرٍ مِن ذٰلِكُم ۚ لِلَّذينَ اتَّقَوا عِندَ رَبِّهِم جَنّاتٌ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها وَأَزواجٌ مُطَهَّرَةٌ وَرِضوانٌ مِنَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ بَصيرٌ بِالعِبادِ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दें : क्या मैं तुम्हें उससे बेहतर चीज़ बताऊँ? उन लोगों के लिए जो (अल्लाह से) डरने वाले हैं उनके पालनहार के पास ऐसे बाग़ हैं, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, (वे) उनमें हमेशा रहने वाले हैं और (उनके लिए उसमें) पवित्र पत्नियाँ तथा अल्लाह की प्रसन्नता है और अल्लाह बंदों को ख़ूब देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Kaho: main tumhein bataoon ke inse zyada acchi cheez kya hai? Jo log taqwa ki rawish ikhtiyar karein, unke liye unke Rubb ke paas baagh hain, jinke nichey nehrein behti hongi, wahan unhein hameshgi ki zindagi haasil hogi, pakeeza biwiyan unki rafeeq (companions) hongi aur Allah ki raza se woh sarfaraz honge. Allah apne bandon ke rawayye par gehri nazar rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye! Kiya mein tumhen iss say boht hi behat cheez bataon? Taqwa walon kay liye unn kay rab taalaa kay pass jannaten hain jin kay neechay nehren beh rahi hain jin mein woh hamesha rahen gay aur pakeeza biwiyan aur Allah Taalaa ki raza mandi hai sab banday Allah Taalaa ki nigah mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)कहो: मैं तुम्हें बताऊं के इनसे ज्यादा अच्छी चीज क्या है? जो लोग तक्वा की रवीश इख्तियार करते हैं, उनके लिए उनके रब के पास बाग हैं, जिनकी जगहें नफरतें बहती होंगी, वहां उन्हें हमेशा की जिंदगी हासिल होगी, पाकीजा बीवीयां उनके रफीक (साथी) होंगी और अल्लाह की रजा से वो सरफराज होंगे। अल्लाह अपने बंदों के रवये पर गहरी नज़र रखता है
عَرَبِيالَّذينَ يَقولونَ رَبَّنا إِنَّنا آمَنّا فَاغفِر لَنا ذُنوبَنا وَقِنا عَذابَ النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)जो कहते हैं : ऐ हमारे पालनहार! निःसंदेह हम ईमान लाए। इसलिए हमारे गुनाह माफ़ कर दे और हमें दोज़ख़ के अज़ाब से बचा।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hain, jo kehte hain ke “ maalik ! hum iman laye, hamari khataon se darguzar farma aur humein aatish e dozakh se bacha ley”
Roman Urdu (Junagarhi)Jo kehtay hain kay aey humaray rab! Hum eman laa chukay iss liey humaray gunah moaf farma aur humen aag kay azab say bacha
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग हैं, जो कहते हैं " मालिक! हम ईमान लाए, हमारी ख़ातों से दरगुज़र फ़रमा और हमें आतिश ए दोज़ख से बचा ले"
عَرَبِيالصّابِرينَ وَالصّادِقينَ وَالقانِتينَ وَالمُنفِقينَ وَالمُستَغفِرينَ بِالأَسحارِ
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हिन्दी (Al-Omari)जो धैर्य रखने वाले, सत्यवादी, आज्ञाकारी, दानशील और रात की अंतिम घड़ियों में (अल्लाह से) क्षमा याचना करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log sabr karne waley hain, raastbaaz hain, farmabardaar aur fayyaz hain aur raat ki aaakhri ghadiyon mein Allah se magfirat ki duaein maanga karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo sabar kerney walay aur sach bolney walay aur farmanbardari kerney walay aur Allah ki raah mein kharach kerney walay aur pichli raat ko baksish maangney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग सब्र करने वाले हैं, रस्तबाज़ हैं, फ़रमाबरदार और फैयाज हैं और रात की आखिरी घड़ियों में अल्लाह से मगफिरत की दुआएं मांगते हैं
عَرَبِيشَهِدَ اللَّهُ أَنَّهُ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ وَالمَلائِكَةُ وَأُولُو العِلمِ قائِمًا بِالقِسطِ ۚ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने गवाही दी कि निःसंदेह उसके सिवा कोई पूज्य नहीं, तथा फ़रिश्तों और ज्ञान वालों ने भी, इस हाल में कि वह न्याय को क़ायम करने वाला है। उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne khud shahadat di hai ke uske siwa koi khuda nahin hai, aur ( yahi shahadat) Farishton aur sab ehle ilm ne bhi di hai, woh insaaf par qayam hai, us zabardast hakeem ke siwa fil waqeh koi khuda nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa farishtay aur ehal-e-ilm iss baat ki gawahi detay hain kay Allah kay siwa koi mabood nahi aur woh adal ko qaeem rakhney wala hai uss ghalib aur hikmata walay kay siwa koi ibadat kay laeeq nahi
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने खुद शहादत दी है के उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, और (यही शहादत) फरिश्तों और सब एहले इल्म ने भी दी है, वो इन्साफ पर कायम है, हमें ज़बरदस्त हकीम के सिवा फिल वक़हे कोई खुदा नहीं है
عَرَبِيإِنَّ الدّينَ عِندَ اللَّهِ الإِسلامُ ۗ وَمَا اختَلَفَ الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ إِلّا مِن بَعدِ ما جاءَهُمُ العِلمُ بَغيًا بَينَهُم ۗ وَمَن يَكفُر بِآياتِ اللَّهِ فَإِنَّ اللَّهَ سَريعُ الحِسابِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह दीन (धर्म) अल्लाह के निकट इस्लाम ही है और किताब वालों ने अपने पास ज्ञान आ जाने के पश्चात आपस में ईर्ष्या के कारण ही मतभेद किया। तथा जो अल्लाह की आयतों का इनकार करे, तो निःसंदेह अल्लाह बहुत जल्द ह़िसाब लेने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ke nazdeek deen sirf Islam hai, is deen se hatt kar jo mukhtalif tareeqe un logon ne ikhtiyar kiye jinhein kitab di gayi thi, unke is tarz e amal ki koi wajah iske siwa na thi ke unhon ne ilm aa janey ke baad aapas mein ek dusre par zyadati karne ke liye aisa kiya. Aur jo koi Allah ke ehkaam o hidayaat ki itaat se inkar karde, Allah ko ussey hisaab lete kuch dair nahin lagti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak Allah Taalaa kay nazdeek deen islam hi hai aur ehal-e-kitab ney apney pass ilm aa janey kay baad aapas ki sirkashi aur hasad ki bina per hi ikhtilaf kiya hai aur Allah Taalaa ki aayaton kay sath jo bhi kufur keray Allah Taalaa uss ka jald hisab lenay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के नाज़दीक दीन सिर्फ इस्लाम है, इस दीन से हट कर जो मुख्तलिफ तारीख उन लोगों ने इख्तियार किये जिन्होनें किताब दी गई थी, उनके इस तर्ज़ ए अमल की कोई वजह इसके सिवा ना थी के उनहोन ने इल्म आ जाने के बाद आपस में एक दूसरे पर ज़्यादा करने के लिए ऐसा किया। और जो कोई अल्लाह के एहकाम ओ हिदायत की इबादत से इन्कार करदे, अल्लाह को उसका हिसाब लेते कुछ देर नहीं लगती
عَرَبِيفَإِن حاجّوكَ فَقُل أَسلَمتُ وَجهِيَ لِلَّهِ وَمَنِ اتَّبَعَنِ ۗ وَقُل لِلَّذينَ أوتُوا الكِتابَ وَالأُمِّيّينَ أَأَسلَمتُم ۚ فَإِن أَسلَموا فَقَدِ اهتَدَوا ۖ وَإِن تَوَلَّوا فَإِنَّما عَلَيكَ البَلاغُ ۗ وَاللَّهُ بَصيرٌ بِالعِبادِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि वे आपसे झगड़ा करें, तो कह दीजिए कि मैंने अपना चेहरा अल्लाह के अधीन कर दिया और उसने भी जिसने मेरा अनुसरण किया, तथा उन लोगों से जिन्हें किताब दी गई और अनपढ़ लोगों से कह दो कि क्या तुम आज्ञाकारी हो गए? यदि वे आज्ञाकारी हो जाएँ, तो निःसंदेह मार्गदर्शन पा गए और यदि वे मुँह फेर लें, तो आपका दायित्व केवल (संदेश) पहुँचा देना है तथा अल्लाह बंदों को ख़ूब देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar yeh log tumse jhaghda karein, to inse kaho : “ maine aur mere pairawon (followers) ne to Allah ke aagey sar tasleem kham kardiya hai”. Phir ehle kitab aur gair ehle kitab dono se pucho: “ kya tumne bhi uski itaat o bandagi qabool ki?” Agar ki to woh raah e raast paa gaye, aur agar issey mooh moda to tumpar sirf paigaam pahuncha dene ki zimmedari thi, aagey Allah khud apne bandon ke maamlaat dekhne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir bhi agar yeh aap say jhagren to aap keh den kay mein aur meray tabey daaron ney Allah Taalaa kay samney apna sir tasleem khum ker diya hai aur ehal-e-kitab say aur un-parh logon say keh dijiye! Kay kiya tum bhi ita’at kertay ho? Pus agar yeh bhi tabye daar bann jayen to yaqeenan hidayat walay hain aur agar yeh roo gardani keren to aap per sirf phoncha dena hai aur Allah bandon ko khoob dekh bhaal raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर ये लोग तुमसे झगड़ा करें, तो इनसे कहो: "मैंने और मेरे जोड़े (अनुयायियों) ने तो अल्लाह के आगे सर तस्लीम ख़त्म कर दिया है"। फिर एहले किताब और गैर एहले किताब दोनों से पूछो: “क्या तुमने भी उसकी इताअत ओ बंदगी कबूल की?” अगर की तो वो राह ए रस्त पा गए, और अगर इस से मुहं मोड़ा तो तुम सिर्फ पैगाम पाहुंचा देने की जिम्मेदारी थी, आगे अल्लाह खुद अपने बंदों के मामले देखने वाला है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يَكفُرونَ بِآياتِ اللَّهِ وَيَقتُلونَ النَّبِيّينَ بِغَيرِ حَقٍّ وَيَقتُلونَ الَّذينَ يَأمُرونَ بِالقِسطِ مِنَ النّاسِ فَبَشِّرهُم بِعَذابٍ أَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग अल्लाह की आयतों का इनकार करते हैं तथा नबियों को नाह़क़ क़त्ल करते हैं और उन लोगों को क़त्ल करते हैं, जो लोगों में से न्याय करने का आदेश देते हैं, उन्हें एक दर्दनाक अज़ाब की शुभ सूचना सुना दीजिए।
Roman Urdu (Maududi)Jo log Allah ke ehkaam o hidayaat ko maanne se inkar karte hain aur uske paigambaron ko na-haqq qatal karte hain aur aisey logon ki jaan ke darpe ho jatey hain jo khalq e khuda mein adal o raasti ka hukum dene ke liye uthein, unko dardnaak saza ki khushkhabri suna do
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log Allah Taalaa ki aayaton say kufur kertay hain aur na haq nabiyon ko qatal ker daaltay hain aur jo log adal-o-insaf ki baat kahen unhen bhi qatal ker daaltay hain to aey nabi! Enhen dard naak azab ki khabar dey dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग अल्लाह के एहकाम ओ हिदायत को मानने से इंकार करते हैं और उसके पैगम्बरों को ना-हक़ क़त्ल करते हैं और ऐसे लोगों की जान के डरपे हो जाते हैं जो ख़ल्क़ ए ख़ुदा में अदल ओ रस्तियों का हुकुम देने के लिए उठें, उनको दर्दनाक सज़ा की ख़ुशख़बरी सुना दो
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ حَبِطَت أَعمالُهُم فِي الدُّنيا وَالآخِرَةِ وَما لَهُم مِن ناصِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही वे लोग हैं, जिनके कर्म दुनिया तथा आख़िरत में बर्बाद हो गए और उनकी मदद करने वाले कोई नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hain jinke aamaal duniya aur aakhirat dono mein zaya ho gaye, aur inka madadgaar koi nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay aemaal duniya-o-aakhirat mein ghaarat hain aur inn ka koi madadgar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग हैं जिनके अमाल दुनिया और आखिरी दोनों में ज़या हो गए, और इनका मददगार कोई नहीं है
عَرَبِيأَلَم تَرَ إِلَى الَّذينَ أوتوا نَصيبًا مِنَ الكِتابِ يُدعَونَ إِلىٰ كِتابِ اللَّهِ لِيَحكُمَ بَينَهُم ثُمَّ يَتَوَلّىٰ فَريقٌ مِنهُم وَهُم مُعرِضونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) क्या आपने उनका हाल नहीं देखा, जिन्हें पुस्तक का एक भाग दिया गया, वे अल्लाह की पुस्तक की ओर बुलाए जाते हैं, ताकि वह उनके बीच निर्णय करे। फिर उनमें से एक समूह मुँह फेर लेता है, इस हाल में कि वे उपेक्षा करने वाले होते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tumne dekha nahin ke jin logon ko kitab ke ilm mein se kuch hissa mila hai, unka haal kya hai? Unhein jab kitab e ilahi ki taraf bulaya jata hai taa-ke woh unke darmiyan faisla karey, to unmein se ek fareeq issey pehlu-tahi (turns away) karta hai aur is faisle ki taraf aane se mooh pher jata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney unhen nahi dekha jinhen aik hissa kitab ki diya gaya hai woh apney aapas kay faislon kay liye Allah Taalaa ki kitab ki taraf bulaye jatay hain phir bhi aik jamat inn ki mun pher ker lot jati hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुमने देखा नहीं के जिन लोगों को किताब के इल्म में से कुछ हिसा मिला है, उनका हाल क्या है? उन्हें जब किताब ए इलाही की तरफ बुलाया जाता है ता-के वो उनके दरमियान फैसला करे, तो उनसे एक फरीक इस्से पहलु-ताही (मुड़ जाता है) करता है और इस फैसले की तरफ आने से मुह फेर जाता है
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّهُم قالوا لَن تَمَسَّنَا النّارُ إِلّا أَيّامًا مَعدوداتٍ ۖ وَغَرَّهُم في دينِهِم ما كانوا يَفتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनका यह हाल इसलिए है कि उन्होंने कहा कि दोज़ख़ की आग हमें गिनती के कुछ दिन ही छुएगी! तथा उन्हें उनके धर्म (के बारे) में उन बातों ने धोखा दिया, जो वे गढ़ा करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Unka yeh tarz-e-amal is wajah se hai ke woh kehte hain “ aatish e dozakh to humein mass (choo) tak na karegi aur agar dozakh ki saza humko milegi bhi to bas chandh roz”. Unke khud saakhta aqeedon ne unko apne deen ke maamle mein badi galat fehmiyon mein daal rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Iss ki waja inn ka yeh kehna hai kay humen to ginay chuney chand din hi aag jalaye gi inn ki ghari gharaee baaton ney enhen inn kay deen kay baray mein dhokay mein daal rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनका ये तर्ज-ए-अमल इस वजह से है के वो कहते हैं हैं "आतिश ए दोज़ख तो हमें मास (छू) तक न करेगी और अगर दोज़ख की सज़ा हमको मिलेगी भी तो बस चंद रोज़"। उनको खुद कहा अकीदों ने उनको अपने दीन के मामले में बड़ी गलत फहमियों में दाल रक्खा है
عَرَبِيفَكَيفَ إِذا جَمَعناهُم لِيَومٍ لا رَيبَ فيهِ وَوُفِّيَت كُلُّ نَفسٍ ما كَسَبَت وَهُم لا يُظلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उस समय (उनका) क्या हाल होगा, जब हम उन्हें उस दिन के लिए एकत्र करेंगे, जिसमें कोई संदेह नहीं तथा प्रत्येक प्राणी को उसके किए का भरपूर बदला दिया जाएगा और उनपर अत्याचार नहीं किया जाएगा?
Roman Urdu (Maududi)Magar kya banegi unpar jab hum unhein us roz jamaa karenge jiska aana yaqeeni hai? Us roz har shaks ko uski kamayi ka badla poora poora de diya jayega aur kisi par zulm na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Pus kiya haal hoga jabkay hum enhen uss din jama keren gay? Jiss kay aaney mein koi shak nahi aur her shaks apna apna kiya poora poora diya jayega aur inn per koi zulm na kiya jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)मगर क्या बनेगी जब हम उन्हें रोज जमा करेंगे जिसका आना यकीनी है? हमसे रोज़ हर शक्स को उसकी कमाई का बदला पूरा-पूरा दे दिया जाएगा और किसी पर ज़ुल्म न होगा
عَرَبِيقُلِ اللَّهُمَّ مالِكَ المُلكِ تُؤتِي المُلكَ مَن تَشاءُ وَتَنزِعُ المُلكَ مِمَّن تَشاءُ وَتُعِزُّ مَن تَشاءُ وَتُذِلُّ مَن تَشاءُ ۖ بِيَدِكَ الخَيرُ ۖ إِنَّكَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दें : ऐ अल्लाह! राज्य के स्वामी! तू जिसे चाहे, राज्य देता है और जिससे चाहे, राज्य छीन लेता है तथा जिसे चाहे, सम्मान देता है और जिसे चाहे, अपमानित कर देता है। तेरे ही हाथ में सारी भलाई है। निःसंदेह तू हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Kaho! Khudaya! Mulk ke maalik! Tu jisey chahey, hukumat de aur jissey chahey cheen le, jisey chahey izzat bakshey aur jisko chahey zillat de. Bhalayi tere ikhtiyar mein hai. Beshak tu har cheez par qaadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye aey Allah ! Aey tamam jahaan kay maalik! Tu jissay chahaye badshahi dey aur jiss say chahaye saltanat cheen ley aur tu jissay chahaye izzat dey aur jissay chahaye zillat dey teray hi haath mein sab bhalaiyan hain be-shak tu her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)कहो! ख़ुदाया! मुल्क के मालिक! तू जिसे चाहे, हुकूमत दे और जिसे चाहे छीन ले, जिसे चाहे इज्जत बख्शी और जिसे चाहे ज़िल्लत दे। भलाई तेरे इख्तियार में है. बेशक तू हर चीज़ पर क़ादिर है
عَرَبِيتولِجُ اللَّيلَ فِي النَّهارِ وَتولِجُ النَّهارَ فِي اللَّيلِ ۖ وَتُخرِجُ الحَيَّ مِنَ المَيِّتِ وَتُخرِجُ المَيِّتَ مِنَ الحَيِّ ۖ وَتَرزُقُ مَن تَشاءُ بِغَيرِ حِسابٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तू रात को दिन में दाख़िल करता है तथा दिन को रात में दाख़िल करता है। और तू जीवित को मृत से निकालता है तथा मृत को जीवित से निकालता है और तू जिसे चाहे असंख्य जीविका देता है।
Roman Urdu (Maududi)Raat ko din mein pirota hua le aata hai aur din ko raat mein, jaandaar mein se be-jaan ko nikalta hai aur be-jaan mein se jaandaar ko, aur jisey chahta hai be-hisaab rizq deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tu hi raat ko din mein dakhil kerta hai aur din ko raat mein ley jata hai tu hi bey jaan say jaandar peda kerta hai aur tu jaandar say bey jaan peda kerta hai tu hi hai kay jissay chahata hai bey shumar rozi deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)रात को दिन में पिरोता हुआ ले आता है और दिन को रात में, जानदार में से बे-जान निकलता है और बे-जान में से जानदार को, और जिसे चाहता है बे-हिसाब रिज़क़ देता है
عَرَبِيلا يَتَّخِذِ المُؤمِنونَ الكافِرينَ أَولِياءَ مِن دونِ المُؤمِنينَ ۖ وَمَن يَفعَل ذٰلِكَ فَلَيسَ مِنَ اللَّهِ في شَيءٍ إِلّا أَن تَتَّقوا مِنهُم تُقاةً ۗ وَيُحَذِّرُكُمُ اللَّهُ نَفسَهُ ۗ وَإِلَى اللَّهِ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)ईमान वालों को चाहिए कि वे मोमिनों को छोड़कर काफ़िरों को मित्र न बनाएँ और जो ऐसा करेगा, उसका अल्लाह से कोई संबंध नहीं। परंतु यह कि तुम उनसे अपना बचाव करो, और अल्लाह तुम्हें अपने आपसे डराता है और अल्लाह ही की ओर लौटकर जाना है।
Roman Urdu (Maududi)Momineen ehle iman ko chodh kar kafiron ko apna rafeeq aur dost hargiz na banayein, jo aisa karega uska Allah se koi talluq nahin, haan yeh maaf hai ke tum unke zulm se bachne ke liye bazahir aisa tarz e amal ikhtiyar kar jao, magar Allah tumhein apne aap se darata hai aur tumhein usi ki taraf palat kar jana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Mominon ko chahaiye kay eman walon ko chor ker kafiron ko apna dost na banayen aur jo aisa keray ga woh Allah Taalaa ki kissi himayat mein nahi magar yeh kay inn kay sharr say kissi tarah bachao maqsood ho aur Allah Taalaa khus tumhen apni zaat say dara raha hai aur Allah Taalaa hi ki taraf lot jana hai
Devnagri Urdu (Maududi)मोमिनीन एहले ईमान को छोड़ कर काफिरों को अपना रफीक और दोस्त हरगिज ना बनाएं, जो ऐसा करेगा उसका अल्लाह से कोई तलाक नहीं, हां ये माफ है के तुम उनके ज़ुल्म से बचने के लिए बजाहिर ऐसा तर्ज ए अमल इख्तियार कर जाओ, मगर अल्लाह तुम्हें अपने आप से डराता है और तुम्हें उसकी तरफ पलट कर जाना है
عَرَبِيقُل إِن تُخفوا ما في صُدورِكُم أَو تُبدوهُ يَعلَمهُ اللَّهُ ۗ وَيَعلَمُ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۗ وَاللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दीजिए : यदि तुम उसे छिपाओ जो तुम्हारे सीनों में है, या उसे प्रकट करो, अल्लाह उसे जान लेगा तथा वह जानता है जो कुछ आकाशों में है और जो धरती में है, और अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi)! Logon ko khabardaar kardo ke tumhare dilon mein jo kuch hai, usey khwa tum chupao ya zaahir karo, Allah bahar haal usey jaanta hai. Zameen o asmaan ki koi cheez uske ilm se bahar nahin hai aur uska iqtedar har cheez par haawi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! Kay khuwa tum apney seenon ki baaten chupao khuwa zahir kero Allah Taalaa (bahar haal) janta hai aasmanon aur zamin mein jo kuch hai sab ussay maloom hai aur Allah Taalaa jer cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी)! लोगों को खबरदार करो के तुम्हारे दिलों में जो कुछ है, उसे ख्वा तुम छुपाओ या जाहिर करो, अल्लाह बाहर हाल उसे जानता है। ज़मीन ओ आसमान की कोई चीज़ उसके इल्म से बाहर नहीं है और उसका इक्तेदार हर चीज़ पर हावी है
عَرَبِييَومَ تَجِدُ كُلُّ نَفسٍ ما عَمِلَت مِن خَيرٍ مُحضَرًا وَما عَمِلَت مِن سوءٍ تَوَدُّ لَو أَنَّ بَينَها وَبَينَهُ أَمَدًا بَعيدًا ۗ وَيُحَذِّرُكُمُ اللَّهُ نَفسَهُ ۗ وَاللَّهُ رَءوفٌ بِالعِبادِ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन प्रत्येक व्यक्ति अपनी की हुई नेकी को हाज़िर किया हुआ पाएगा, तथा जिसने बुराई की होगी, वह कामना करेगा कि उसके तथा उसकी बुराई के बीच बहुत दूर का फ़ासला होता। तथा अल्लाह तुम्हें अपने आपसे डराता है और अल्लाह अपने बंदों के प्रति अत्यंत करुणामय है।
Roman Urdu (Maududi)Woh din aane wala hai, jab har nafs apne kiye ka phal hazir payega khwa usne bhalayi ki ho ya burayi. Us roz aadmi yeh tamanna karega ke kaash abhi yeh din ussey bahut door hota! Allah tumhein apne aap se darata hai aur woh apne bandon ka nihayat khair khwa hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din her nafss (shaks) apni ki hui nekiyon ko aur apni ki hui buraiyon ko mojood paa ley ga aarzoo keray ga kay kaash! Uss kay aur buraiyon kay darmiyan boht hi doori hoti. Allah Taalaa tumhen apni zaat say dara raha hai aur Allah Taalaa apney bandon per bara hi meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो दिन आने वाला है, जब हर नफ़्स अपने किये का फल हाज़िर पायेगा ख्वा उसने हमें बुलाया कि हो या बुरा। हमें रोज़ आदमी ये तमन्ना करेगा के काश अभी ये दिन उसे बहुत दूर होता! अल्लाह तुम्हें अपने आप से डरता है और वो अपने बंदों का निहायत खैर ख्वाह है
عَرَبِيقُل إِن كُنتُم تُحِبّونَ اللَّهَ فَاتَّبِعوني يُحبِبكُمُ اللَّهُ وَيَغفِر لَكُم ذُنوبَكُم ۗ وَاللَّهُ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दीजिए : यदि तुम अल्लाह से प्रेम करते हो, तो मेरा अनुसरण करो, अल्लाह तुमसे प्रेम करेगा तथा तुम्हें तुम्हारे पाप क्षमा कर देगा और अल्लाह बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi)! Logon se kehdo ke “agar tum haqeeqat mein Allah se muhabbat rakhte ho , to meri pairwi ikhtiyar karo, Allah tumse muhabbat karega aur tumhari khataon se darguzar farmayega, woh bada maaf karne wala aur Raheem hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! Kay agar tum Allah Taalaa say mohabbat rakhtay ho to meri tabeydari kero khud Allah Taalaa tum say mohabbat keray ga aur tumharay gunah moaf farma dey ga aur Allah Taalaa bara bakshney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी)! लोगों से कहो के "अगर तुम हकीकत में अल्लाह से मुहब्बत रखते हो, तो मेरी जोड़ी इख्तियार करो, अल्लाह तुमसे मुहब्बत करेगा और तुम्हारी खतों से दरगुजर फरमाएगा, वो बड़ा माफ करने वाला और रहीम है"
عَرَبِيقُل أَطيعُوا اللَّهَ وَالرَّسولَ ۖ فَإِن تَوَلَّوا فَإِنَّ اللَّهَ لا يُحِبُّ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें : अल्लाह और रसूल की आज्ञा का अनुपालन करो। फिर यदि वे मुँह फेर लें, तो निःसंदेह अल्लाह काफ़िरों से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Unse kaho ke “Allah aur Rasool ki itaat qabool karlo” phir agar woh tumhari dawat qabool na karein, to yaqeenan yeh mumkin nahin hai ke Allah aise logon se muhabbat karey jo uski aur uske Rasool ki itaat se inkar karte hon
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! Kay Allah Taalaa aur rasool ki ita’at kero agar yeh mun pher len to be-shak Allah Taalaa kafiron say mohabbat nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)उनसे कहो के "अल्लाह और रसूल की इत्ता कबूल है" करलो” फिर अगर वो तुम्हारी दावत क़बूल ना करें, तो यकीनन ये मुमकिन नहीं है के अल्लाह ऐसे लोगों से मुहब्बत करे जो उसकी और उसके रसूल की इताअत से इंकार करे
عَرَبِي۞ إِنَّ اللَّهَ اصطَفىٰ آدَمَ وَنوحًا وَآلَ إِبراهيمَ وَآلَ عِمرانَ عَلَى العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ने आदम और नूह़ को तथा इबराहीम के घराने और इमरान के घराने को संसार वासियों में से चुन लिया।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne Adam aur Nooh aur aale- Ibrahim aur aal-e-Imran ko tamaam duniya walon par tarjeeh dekar ( apni risalat ke liye) muntakhab kiya tha
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak Allah Taalaa ney tamam jahaan kay logon mein say aadam (alh-e-salam) ko aur nooh (alh-e-salam) ko aur ibrahim (alh-e-salam) kay khandan aur imran kay khandanon ko muntakhib farma liya
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने आदम और नूह और आले- इब्राहिम और आल-ए-इमरान को तमाम दुनिया वालों पर तर्जीह देकर ( अपनी रिसालत के लिए) मुंतखब किया था
عَرَبِيذُرِّيَّةً بَعضُها مِن بَعضٍ ۗ وَاللَّهُ سَميعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ये एक-दूसरे की संतान हैं और अल्लाह सब कुछ सुनने वाला और सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ek silsile ke log thay, jo ek dusre ki nasal se paida huey thay, Allah sabkuch sunta aur jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kay yeh sab aapas mein aik doosray ki nasal say hain aur Allah Taalaa sunta janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये एक सिलसिले के लोग थे, जो एक दूसरे की नाक से पैदा हुए थे, अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है
عَرَبِيإِذ قالَتِ امرَأَتُ عِمرانَ رَبِّ إِنّي نَذَرتُ لَكَ ما في بَطني مُحَرَّرًا فَتَقَبَّل مِنّي ۖ إِنَّكَ أَنتَ السَّميعُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)जब इमरान की पत्नी ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! निःसंदेह मैंने तेरे लिए उसकी मन्नत मानी है, जो मेरे पेट में है कि आज़ाद छोड़ा हुआ होगा। सो मुझसे स्वीकार कर। निःसंदेह तू ही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Woh us waqt sun raha tha) jab Imran ki aurat keh rahi thi ke, “ mere parwardigaar! Main is bacchey ko jo mere pait mein hai teri nazar karti hoon, woh tere hi kaam ke liye waqf hoga, meri is peshkash ko qabool farma, tu sunne aur jaanne wala hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab imran ki biwi ney kaha aey meray rab! Meray pet mein jo kuch hai ussay mein ney teray naam azad kerney ki nazar maani tu meri taraf say qabool farma! Yaqeenan tu khoob sunney wala aur poori tarah janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(वो हमारा वक्त सुन रहा था) जब इमरान की औरत कह रही थी के, “मेरे परवरदिगार! मुख्य है” बच्चों को जो मेरे पैत में है तेरी नज़र रखती हूँ, वो तेरे ही काम के लिए वक्फ होगा, मेरी इस पेशकश को क़बूल फरमा, तू सुनने और जाने वाला है।”
عَرَبِيفَلَمّا وَضَعَتها قالَت رَبِّ إِنّي وَضَعتُها أُنثىٰ وَاللَّهُ أَعلَمُ بِما وَضَعَت وَلَيسَ الذَّكَرُ كَالأُنثىٰ ۖ وَإِنّي سَمَّيتُها مَريَمَ وَإِنّي أُعيذُها بِكَ وَذُرِّيَّتَها مِنَ الشَّيطانِ الرَّجيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उसने उसे जना, तो कहा : ऐ मेरे पालनहार! यह तो मैंने लड़की जनी है! और अल्लाह अधिक जानने वाला है जो उसने जना और लड़का इस लड़की जैसा नहीं, निःसंदेह मैंने उसका नाम मरयम रखा है और निःसंदेह मैं उसे तथा उसकी संतान को धिक्कारे हुए शैतान से तेरी पनाह में देती हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab woh bacchi uske haan paida hui to usne kaha “Maalik! Mere haan to ladki paida ho gayi hai, halaanke jo kuch usne janaa(delivered) tha, Allah ko iski khabar thi aur ladka ladki ki tarah nahin hota. Khair, maine uska naam Maryam rakh diya hai aur main usey aur uski aainda nasal ko shaytan mardood ke fitne se teri panaah mein deti hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab bachi hui to kehney lagin kay perwerdigar! Mujhay to larki hui Allah Taalaa ko khoob maloom hai kay kiya aulad hui hai aur larka larki jaisa nahi mein ney uss ka naam marium rakha mein issay aur iss ki aulad ko shetan mardood say teri panah mein deti hun
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब वो बच्ची उसे हां पैदा हुई तो उसने कहा "मालिक! मेरे हां तो लड़की पैदा हो गई है, हालांके जो कुछ उसने जाना था, अल्लाह को इसकी खबर थी और लड़के लड़की की तरह नहीं होता। खैर, मैंने उसका नाम मरियम रख दिया है और मैं उसका इस्तेमाल करती हूं।" उसकी आइंदा नाक को शैतान मरदूद के फिटने से तेरी पनाह में देती हूं”
عَرَبِيفَتَقَبَّلَها رَبُّها بِقَبولٍ حَسَنٍ وَأَنبَتَها نَباتًا حَسَنًا وَكَفَّلَها زَكَرِيّا ۖ كُلَّما دَخَلَ عَلَيها زَكَرِيَّا المِحرابَ وَجَدَ عِندَها رِزقًا ۖ قالَ يا مَريَمُ أَنّىٰ لَكِ هٰذا ۖ قالَت هُوَ مِن عِندِ اللَّهِ ۖ إِنَّ اللَّهَ يَرزُقُ مَن يَشاءُ بِغَيرِ حِسابٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उसके पालनहार ने उसे अच्छी स्वीकृति के साथ स्वीकार किया और उसका अच्छी तरह पालन-पोषण किया और उसका अभिभावक ज़करिय्या को बना दिया। जब कभी ज़करिय्या उसके पास मेह़राब (उपासना की जगह) में जाता, उसके पास कोई न कोई खाने की चीज़ पाता। उसने कहा : ऐ मरयम! यह तेरे लिए कहाँ से है? उसने कहा : यह अल्लाह के पास से है। निःसंदेह अल्लाह जिसे चाहता है, बेहिसाब रोज़ी प्रदान करता है।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar uske Rubb ne us ladki ko ba-khushi qabool farma liya , usey badi acchi ladki banakar uthaya aur Zakariya ko uska sarparast bana diya. Zakariya jab kabhi uske paas mehraab (sanctuary) mein jaata to uske paas kuch na kuch khane peene ka samaan paata. Puchta Maryam! Yeh tere paas kahan se aaya? Woh jawab deti Allah ke paas se aaya hai, Allah jisey chahta hai be-hisaab deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus issay uss kay perwerdigar ney achi tarah qabool farmaya aur ussay behtareen perwerish di. Uss ki khair khabar lenay wala zakariya (alh-e-salam) ko banaya jab kabhi zakariya (alh-e-salam) unn kay hujray mein jatay unn kay pass rozi rakhi hui patay woh poochtay aey marium! Yeh rozi tumharay pass kahan say aaee? Woh jawab detin kay yeh Allah Taalaa kay pass say hai be-shak Allah Taalaa jissay chahaye bey shumar rozi dey
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार उसके रब ने उस लड़की को ब-खुशी कबूल फरमा लिया, उसे बड़ी अच्छी लड़की बनाकर उठाया और जकारिया को उसका सरपरस्त बना दिया। ज़कारिया जब कभी उसके पास महराब (अभयारण्य) में जाता तो उसके पास कुछ न कुछ खाने पीने का सामान मिलता। पुछता मरियम! ये तेरे पास कहाँ से आया? वो जवाब देती अल्लाह के पास से आया है, अल्लाह जिसे चाहता है बे-हिसाब देता है
عَرَبِيهُنالِكَ دَعا زَكَرِيّا رَبَّهُ ۖ قالَ رَبِّ هَب لي مِن لَدُنكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً ۖ إِنَّكَ سَميعُ الدُّعاءِ
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हिन्दी (Al-Omari)वहीं ज़करिय्या ने अपने पालनहार से प्रार्थना की, कहा : ऐ मेरे पालनहार! मुझे अपनी ओर से एक पवित्र संतान प्रदान कर। निःसंदेह तू ही प्रार्थना को बहुत सुनने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh haal dekh kar Zakariya ne apne Rubb ko pukara “parwardigaar! Apni qudrat se mujhey neik aulad ata kar, tu hi dua sunne wala hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi jagah zakariya (alh-e-salam) ney apney rab say dua ki kaha kay aey meray perwerdigar! Mujhay apney pass say pakeeza aulad ata farma be-shak tu dua ka sunney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये हाल देख कर जकारिया ने अपने रब को पुकारा "परवरदिगार! अपनी कुदरत से मुझे नई औलाद अता कर, तू ही दुआ सुनने वाला है"
عَرَبِيفَنادَتهُ المَلائِكَةُ وَهُوَ قائِمٌ يُصَلّي فِي المِحرابِ أَنَّ اللَّهَ يُبَشِّرُكَ بِيَحيىٰ مُصَدِّقًا بِكَلِمَةٍ مِنَ اللَّهِ وَسَيِّدًا وَحَصورًا وَنَبِيًّا مِنَ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो फ़रिश्तों ने उन्हें आवाज़ दी, जबकि वह मेह़राब (इबादतगाह) में खड़े नमाज़ पढ़ रहे थे कि निःसंदेह अल्लाह आपको 'यह़या' की ख़ुशख़बरी देता है, जो अल्लाह के एक कलिमे (ईसा अलैहिस्सलाम) की पुष्टि करने वाला, सरदार तथा संयमी और सदाचारियों में से नबी होगा।
Roman Urdu (Maududi)Jawab mein Farishton ne awaaz di, jab ke woh mehraab mein khada namaz padh raha tha ke “Allah tujhey Yahya ki khushkhabri deta hai , woh Allah ki taraf se ek farmaan ki tasdeeq karne wala bankar aayega, usmein sardari o buzurgi ki shaan hogi kamal darje ka zaabit (utterly chaste) hoga, nabuwat se sarfaraz hoga aur saliheen mein shumaar kiya jayega”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus farishton ney unhen aawaz di jabkay woh hujray mein kharay namaz parh rahey thay kay Allah Taalaa tujhay yahya ki yaqeeni khushkhabri deta hai jo Allah Taalaa kay kalmay ki tasdeeq kerney wala sardar zaabit nafss aur nabi hai nek logon mein say
Devnagri Urdu (Maududi)जवाब में फरिश्तों ने आवाज दी, जब के वो मेहराब में खड़ा नमाज पढ़ रहा था के "अल्लाह तुझे याह्या की ख़ुशख़बरी देता है, वो अल्लाह की तरफ से एक फरमान की तस्दीक करने वाला बनकर आएगा, उसमें सरदार ओ बुज़ुर्गी की शान होगी कमाल दर्जे का ज़ाबित (पूरी तरह से पवित्र) होगा, नबुवत से" सरफराज होगा और सालिहें में शामिल हो जाएगा”
عَرَبِيقالَ رَبِّ أَنّىٰ يَكونُ لي غُلامٌ وَقَد بَلَغَنِيَ الكِبَرُ وَامرَأَتي عاقِرٌ ۖ قالَ كَذٰلِكَ اللَّهُ يَفعَلُ ما يَشاءُ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे हाँ पुत्र कैसे होगा, जबकि मुझे बुढ़ापा आ पहुँचा है और मेरी पत्नी बाँझ है? (अल्लाह ने) कहा : इसी प्रकार अल्लाह करता है जो चाहता है।
Roman Urdu (Maududi)Zakariya ne kaha,“Parwardigaar! Bhala mere haan ladka kahan se hoga, main to boodha ho chuka hoon aur meri biwi baanjh hai, “ jawab mila, aisa hi hoga, Allah jo chahta hai karta hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney lagay aey meray rab! Meray haan bacha kaisay hoga? Mein bilkul boorha hogaya hun aur meri biwi baanjh hai farmaya issi tarah Allah jo chahaye kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़कारिया ने कहा,“परवरदिगार! भला मेरे हां लड़का कहां से होगा, मैं तो बूढ़ा हूं चुका हूं और मेरी बीवी बांझ है, "जवाब मिला, ऐसा ही होगा, अल्लाह जो चाहता है करता है"
عَرَبِيقالَ رَبِّ اجعَل لي آيَةً ۖ قالَ آيَتُكَ أَلّا تُكَلِّمَ النّاسَ ثَلاثَةَ أَيّامٍ إِلّا رَمزًا ۗ وَاذكُر رَبَّكَ كَثيرًا وَسَبِّح بِالعَشِيِّ وَالإِبكارِ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए कोई निशानी बना दे। (अल्लाह ने) फरमाया : तुम्हारी निशानी यह है कि तुम तीन दिन लोगों से बात नहीं करोगे परंतु इशारे से। तथा तुम अपने पालनहार को बहुत अधिक याद करो और शाम एवं सुबह उसकी पवित्रता का वर्णन करो।
Roman Urdu (Maududi)Arz kiya “Maalik! Phir koi nishani mere liye muqarrar farma de”. Kaha, Nishani yeh hai ke tum teen din tak logon se isharey ke siwa koi baat-chit na karoge (ya na kar sakoge), is dauraan mein apne Rubb ko bahut yaad karna aur subah o sham uski tasbeeh karte rehna.”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney lagay perwerdigar! Meray liye iss ki koi nishani muqarrar ker dey farmaya nishani yeh hai kay teen din tak tu logon say baat na ker sakay ga sirf isharay say samjhaye ga tu apney rab kay zikar kasrat say ker aur subha-o-shaam ussi ki tasbeeh biyan kerta reh
Devnagri Urdu (Maududi)अर्ज़ किया "मालिक! फिर कोई निशानी मेरे लिए मुकर्रर फरमा दे"। कहा, निशानी ये है कि तुम तीन दिन तक लोगों से इशारे के सिवा कोई बात-चित ना करोगे, इस दौरन में अपने रब को बहुत याद करना और सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते रहना।”
عَرَبِيوَإِذ قالَتِ المَلائِكَةُ يا مَريَمُ إِنَّ اللَّهَ اصطَفاكِ وَطَهَّرَكِ وَاصطَفاكِ عَلىٰ نِساءِ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (याद करो) जब फ़रिश्तों ने कहा : ऐ मरयम! निःसंदेह अल्लाह ने तुम्हारा चयन कर लिया तथा तुम्हें पवित्र कर दिया और सर्व संसार की स्त्रियों पर तुम्हें चुन लिया है।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh waqt aaya jab Maryan se Farishton ne aakar kaha, “ Aey Maryam! Allah ne tujhey barguzeeda kiya aur pakeezgi ata ki aur tamaam duniya ki auraton par tujhko tarjeeh dekar apni khidmat ke liye chun liya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab farishton ney kaha aey marium! Allah Taalaa ney tujhay bar gazeedah ker liya aur tujhay pak ker diya aur saray jahaan ki aurton mein say tera intikhab ker liya
Devnagri Urdu (Maududi)फ़िर वो वक़्त आया जब मरियाँ से फ़रिश्तों ने आकार कहा, " ऐ मरियम! अल्लाह ने तुझे बरगुज़ीदा किया और पाकीज़गी अता की और तमाम दुनिया की औरतों पर तुझको तर्जीह देकर अपनी खिदमत के लिए चुन लिया
عَرَبِييا مَريَمُ اقنُتي لِرَبِّكِ وَاسجُدي وَاركَعي مَعَ الرّاكِعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मरयम! अपने पालनहार का आज्ञापालन करती रहो और सजदा करो तथा रुकू करने वालों के साथ रुकू करती रहो।
Roman Urdu (Maududi)Aey Maryam! Apne Rubb ki tabeh farmaan bankar reh, uske aagey sar ba-sajood ho, aur jo banday uske huzoor jhukne waley hain unke saath tu bhi jhuk ja”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey marium! Tu apney rab ki ita’at ker aur sajda ker aur rukoo kerney walon kay sath rukoo ker
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ मरियम! अपने रब की तबह फरमान बनकर रेह, उसके आगे सर ब-सजूद हो, और जो बंदे उसके हुज़ूर झुकने वाले हैं उनके साथ तू भी झुक जा”
عَرَبِيذٰلِكَ مِن أَنباءِ الغَيبِ نوحيهِ إِلَيكَ ۚ وَما كُنتَ لَدَيهِم إِذ يُلقونَ أَقلامَهُم أَيُّهُم يَكفُلُ مَريَمَ وَما كُنتَ لَدَيهِم إِذ يَختَصِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) ये ग़ैब (परोक्ष) की कुछ सूचनाएँ हैं, जो हम आपकी ओर वह़्य कर रहे हैं और आप उस समय उनके पास मौजूद न थे, जब वे अपनी क़लमों को फेंक रहे थे कि उनमें से कौन मरयम की किफ़ालत करे और न आप उस समय उनके पास थे, जब वे झगड़ रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! Yeh gaib ki khabrein hain jo hum tumko wahee ke zariye se bata rahey hain, warna tum us waqt wahan maujood na thay jab haykal ke khadim yeh faisla karne ke liye ke Mayram ka sarparast kaun ho apne apne qalam phenk rahey thay, aur na tum us waqt hazir thay jab unke darmiyaan jhagda barpa tha
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh ghaib ki ghabron mein say hai jissay hum teri taraf wahee say phonchatay hain tu unn kay pass na tha jabkay woh apney qalam daal rahey thay kay marium ko inn mein say kaun paa ley ga? Aur na tu unn kay jhagray kay waqt unn kay pass tha
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! ये गैब की खबरें हैं जो हम तुमको वही के ज़रिये से बता रहे हैं, वरना तुम हमें वक्त वहां मौजुद ना था जब हकल के खादिम ये फैसला करने के लिए के मयराम का सरदार कौन हो अपना अपना कलाम फेंक रहे थे, और ना तुम हमें वक्त हाज़िर था जब उनके दरमियान झगड़ा बरपा था
عَرَبِيإِذ قالَتِ المَلائِكَةُ يا مَريَمُ إِنَّ اللَّهَ يُبَشِّرُكِ بِكَلِمَةٍ مِنهُ اسمُهُ المَسيحُ عيسَى ابنُ مَريَمَ وَجيهًا فِي الدُّنيا وَالآخِرَةِ وَمِنَ المُقَرَّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी! उस समय को याद करें) जब फ़रिश्तों ने कहा : ऐ मरयम! निःसंदेह अल्लाह तुम्हें अपनी ओर से एक शब्द की शुभ सूचना देता है, जिसका नाम 'मसीह़ ईसा बिन मरयम' है। वह दुनिया तथा आख़िरत में महान स्थान वाला और निकटवर्ती लोगों में से होगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab Farishton ne kaha, “Aey Maryam! Allah tujhey apne ek farmaan ki khush-khabri deta hai, uska naam Maseeh Isa Ibn e Maryam hoga, duniya aur aakhirat mein muazzaz (highly honoured) hoga, Allah ke muqarrab bandon mein shumaar kiya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jab farishton ney kaha aey marium! Allah Taalaa tujhay apney aik kalmay ki khushkhabri deta hai jiss kay naam maseeh essa bin marium hai jo duniya aur aakhirat mein zee izzat hai aur woh meray muqarrabeen mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जब फ़रिश्तों ने कहा, "ऐ मरियम! अल्लाह तुझे अपने एक फ़रमान की ख़ुश-ख़बरी देता है, उसका नाम मसीह ईसा इब्न ए मरियम होगा, दुनिया और आख़िरत में मुअज़्ज़ाज़ (अत्यधिक सम्मानित) होगा, अल्लाह के मुकर्रब बंदों में" शुमार किया जाएगा
عَرَبِيوَيُكَلِّمُ النّاسَ فِي المَهدِ وَكَهلًا وَمِنَ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वह लोगों से पालने में बात करेगा तथा अधेड़ आयु में भी और नेक लोगों में से होगा।
Roman Urdu (Maududi)Logon se gehware(cradle) mein bhi kalaam(baat) karega aur badi umar ko pahunch kar bhi, aur woh ek mard e saleeh hoga”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh logon say apney gehwaray mein baaten keray ga aur adher umar mein bhi aur woh nek logon mein say hoga
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों से बर्तनों में भी कलाम (बात) करेगा और बड़ी उमर को पहुंच कर भी, और वो एक मर्द ए सालीह होगा”
عَرَبِيقالَت رَبِّ أَنّىٰ يَكونُ لي وَلَدٌ وَلَم يَمسَسني بَشَرٌ ۖ قالَ كَذٰلِكِ اللَّهُ يَخلُقُ ما يَشاءُ ۚ إِذا قَضىٰ أَمرًا فَإِنَّما يَقولُ لَهُ كُن فَيَكونُ
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हिन्दी (Al-Omari)उस (मरयम) ने (आश्चर्य से) कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे हाँ पुत्र कैसे होगा, हालाँकि किसी पुरुष ने मुझे हाथ नहीं लगाया? उसने कहा : इसी तरह अल्लाह पैदा करता है जो चाहता है। जब वह किसी काम का निर्णय कर लेता है, तो उससे यही कहता है : "हो जा", तो वह हो जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh sunkar Maryam boli, “parwardigaar! Mere haan bacha kahan se hoga, muhjey to kisi shaks ne haath tak nahin lagaya” jawab mila, “aisa hi hoga, Allah jo chahta hai paida karta hai. Woh jab kisi kaam ke karne ka faisla farmata hai to bas kehta hai ke hoja aur woh ho jata hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney lagin ilahee mujhay larka kaisay hoga? Halankay mujhay to kissi insan ney haath bhi nahi lagaya farishtay ney kaha issi tarah Allah Taalaa jo chahaye peda kerta hai jab kabhi woh kissi kaam ko kerna chahata hai to sirf yeh keh deta hai kay ho ja! To woh ho jata hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये सुनकर मरियम बोली, “परवरदिगार! मेरे हां बच्चा कहां से होगा, मुझे तो किसी शक्स ने हाथ तक नहीं लगाया'' जवाब मिला, ''ऐसा ही होगा, अल्लाह जो चाहता है अदा करता है। वो जब किसी काम के करने का फैसला फरमाता है तो बस कहता है कि होजा और वो हो जाता है”
عَرَبِيوَيُعَلِّمُهُ الكِتابَ وَالحِكمَةَ وَالتَّوراةَ وَالإِنجيلَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह उसे लेखन, ह़िकमत, तौरात और इंजील की शिक्षा देगा।
Roman Urdu (Maududi)(Farishton ne phir silsila e kalaam mein kaha) “Aur Allah usey kitab aur hikmat ki taleem dega, Taurat aur Injil ka ilm sikhayega
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ussay likhna aur hikmat aur toraat aur injeel sikhaya ga
Devnagri Urdu (Maududi)(फरिश्तों ने फिर सिलसिला ए कलाम में कहा) “और अल्लाह उसे किताब और हिकमत की तालीम देगा, तौरात और इंजील का इल्म सिखाएगा
عَرَبِيوَرَسولًا إِلىٰ بَني إِسرائيلَ أَنّي قَد جِئتُكُم بِآيَةٍ مِن رَبِّكُم ۖ أَنّي أَخلُقُ لَكُم مِنَ الطّينِ كَهَيئَةِ الطَّيرِ فَأَنفُخُ فيهِ فَيَكونُ طَيرًا بِإِذنِ اللَّهِ ۖ وَأُبرِئُ الأَكمَهَ وَالأَبرَصَ وَأُحيِي المَوتىٰ بِإِذنِ اللَّهِ ۖ وَأُنَبِّئُكُم بِما تَأكُلونَ وَما تَدَّخِرونَ في بُيوتِكُم ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً لَكُم إِن كُنتُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (वह) बनी इसराईल की ओर रसूल होगा। (वह कहेगा :) निःसंदेह मैं तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से बड़ी निशानी लेकर आया हूँ कि निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए मिट्टी से पक्षी के रूप जैसी आकृति बनाता हूँ, फिर उसमें फूँक मारता हूँ, तो वह अल्लाह की अनुमति से पक्षी बन जाती है और मैं अल्लाह की अनुमति से जन्म से अंधे तथा कोढ़ी को स्वस्थ कर देता हूँ और मुर्दों को जीवित कर देता हूँ। तथा तुम्हें बता देता हूँ जो कुछ तुम अपने घरों में खाते हो और जो संग्रह करते हो। निःसंदेह इसमें तुम्हारे लिए एक निशानी है, यदि तुम ईमान वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur bani Israel ki taraf apna Rasool muqarrar karega” (aur jab woh bahaisiyat e Rasool bani Israel ke paas aaya to usne kaha) “ main tumhare Rubb ki taraf se tumhare paas nishani lekar aaya hoon, main tumhare samne mitti se parinde ki surat mein ek mujassama banata hoon aur usmein phoonk maarta hoon, woh Allah ke hukum se parinda ban jata hai, main Allah ke hukum se madar zaadh (by birth) andhey aur kodi (leper) ko accha karta hoon aur murde ko zinda karta hoon, main tumhein batata hoon ke tum kya khate ho aur kya apne gharon mein zakheera (store) karke rakhte ho. Ismein tumhare liye kaafi nishani hai agar tum iman laney waley ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh bani isareel ki taraf rasool hoga kay mein tumharay pass tumharay rab ki nishani laya hun mein tumharay liye parinday ki shakal ki tarah mitti ka parinda banata hun phir uss mein phoonk maarta hun to woh Allah Taalaa kay hukum say parinda bann jata hai aur Allah Taalaa kay hukum say mein maadar zaad andhay ko aur korhi ko acha ker deta hun aur murdon ko zinda kerta hun aur jo kuch tum khao aur jo apney gharon mein zakheera kero mein tumhen bata deta hun iss mein tumharay liye bari nishani hai agar tum eman laney walay ho
Devnagri Urdu (Maududi)और बानी इस्राइल की तरफ अपना रसूल मुकर्रर करेगा'' (और जब वो बहैसियत ए रसूल बानी इस्राइल के पास आया तो उसने कहा) '' मैं तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास निशानी लेकर आया हूं, मैं तुम्हारे सामने मिट्टी से परिंदे की सूरत में एक मुजस्समा बनाता हूं और उसमें फूंक मारता हूं, वो अल्लाह के हुकुम से परिंदा बन जाता है, मैं अल्लाह के हुकुम से मदार जाद (जन्म से) अंधे और कोढ़ी (कोढ़ी) को अच्छा कर्ता हूं और मुर्दे को जिंदा कर्ता हूं, मैं तुम्हें बताता हूं के तुम क्या खाते हो और क्या अपने घरों में ज़खीरा (स्टोर) रखकर हो। इसमें तुम्हारे लिए काफी निशानी है अगर तुम ईमान लाने वाले हो
عَرَبِيوَمُصَدِّقًا لِما بَينَ يَدَيَّ مِنَ التَّوراةِ وَلِأُحِلَّ لَكُم بَعضَ الَّذي حُرِّمَ عَلَيكُم ۚ وَجِئتُكُم بِآيَةٍ مِن رَبِّكُم فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطيعونِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अपने से पहले की किताब तौरात की पुष्टि करने वाला हूँ और ताकि मैं तुम्हारे लिए कुछ वे चीज़ें हलाल कर दूँ, जो तुम पर हराम कर दी गई थीं तथा मैं तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से बड़ी निशानी लेकर आया हूँ। अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरा कहना मानो।
Roman Urdu (Maududi)Aur main us taleem o hidayat ki tasdeeq karne wala bankar aaya hoon jo Taurat mein se is waqt mere zamane mein maujood hai, aur isliye aaya hoon ke tumhare liye baaz un cheezon ko halal kardoon jo tumpar haraam kardi gayi hain. Dekho main tumhare Rubb ki taraf se tumhare paas nishani lekar aaya hoon , lihaza Allah se daro aur meri itaat karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mein toraat ki tasdeeq kerney wala hun jo meray samney hai aur mein iss liye aaya hun kay tum per baaz woh cheezen halal keroon jo tum per haram ker di gaeen hain aur mein tumharay pass tumharay rab ki nishani laya hun iss liye tum Allah Taalaa say daro aur meri farmanbardari kero
Devnagri Urdu (Maududi)और मैं हमें तालीम ओ हिदायत की तस्दीक करने वाला बनकर आया हूं जो तौरात में से इस वक्त मेरे जमाने में मौजूद है, और इसलिए आया हूं के तुम्हारे लिए बाज़ उन चीज़ों को हलाल कर दूं जो तुमपर हराम कर दी गई है। देखो मैं तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास निशानी लेकर आया हूं, लिहाजा अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ رَبّي وَرَبُّكُم فَاعبُدوهُ ۗ هٰذا صِراطٌ مُستَقيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ही मेरा पालनहार और तुम्हारा पालनहार है। अतः उसी की इबादत करो। यही सीधा मार्ग है।
Roman Urdu (Maududi)Allah mera Rubb hai aur tumhara Rubb bhi, lihaza tum usi ki bandagi ikhtiyar karo, yahi seedha raasta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeen maano! Mera aur tumhara rab Allah hi hai tum sab ussi ki ibadat kero yehi seedhi raah hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह मेरा रब है और तुम्हारा रब भी, लिहाजा तुम उसी कि बंदगी इख्तियार करो, यही सीधा रास्ता है
عَرَبِي۞ فَلَمّا أَحَسَّ عيسىٰ مِنهُمُ الكُفرَ قالَ مَن أَنصاري إِلَى اللَّهِ ۖ قالَ الحَوارِيّونَ نَحنُ أَنصارُ اللَّهِ آمَنّا بِاللَّهِ وَاشهَد بِأَنّا مُسلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब ईसा ने उनसे कुफ़्र महसूस किया, तो कहा : कौन हैं जो अल्लाह की ओर (बुलाने में) मेरे सहायक हैं? ह़वारियों (साथियों) ने कहा : हम अल्लाह के सहायक हैं। हम अल्लाह पर ईमान लाए और तुम गवाह रहो कि निःसंदेह हम आज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab Isa ne mehsoos kiya ke bani Israel kufr o inkar par aamaada hain to usne kaha “kaun Allah ki raah mein mera madadgaar hota hai?” Hawariyon (desciples) ne jawab diya, “hum Allah ke madadgaar hain, hum Allah par iman laye, gawah raho ke hum muslim (Allah ke aagey sar itaat jhuka dene waley) hain
Roman Urdu (Junagarhi)Maga jab hazrat essa (alh-e-salam) ney unn ka kufur mehsoos ker liya to kehney lagay Allah Taalaa ki raah mein meri madad kerney wala kaun kaun hai? Hawariyon ney jawab diya kay hum Allah Taalaa ki raah kay madadgar hain hum Allah Taalaa per eman laye aur aap gawah rahiye kay hum tabeydaar hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब ईसा ने महसूस किया के बानी इसराइल कुफ्र ओ इंकार पर आमादा हैं तो उसने कहा "कौन अल्लाह की राह में मेरा मददगार होता है?" हवारियों (शिष्यों) ने जवाब दिया, "हम अल्लाह के मददगार हैं, हम अल्लाह पर ईमान लाए, गवाह रहो के हम मुसलमान (अल्लाह के आगे सर इताअत झुका देने वाले) हैं
عَرَبِيرَبَّنا آمَنّا بِما أَنزَلتَ وَاتَّبَعنَا الرَّسولَ فَاكتُبنا مَعَ الشّاهِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारे पालनहार! हम उसपर ईमान लाए, जो तूने उतारा और हमने रसूल का अनुसरण किया, अतः तू हमें गवाही देने वालों के साथ लिख ले।
Roman Urdu (Maududi)Maalik! Jo farmaan tu nay nazil kiya hai humne usey maan liya aur Rasool ki pairwi qabool ki, hamara naam gawahi dene walon mein likh le”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey humaray paalney walay mabood! Hum teri utari hui wahee per eman laye aur hum ney teray rasool ki ittaba ki pus tu humen gawahon mein likh ley
Devnagri Urdu (Maududi)मालिक! जो फरमान तू ने नाज़िल किया है हमने उसे मान लिया और रसूल की जोड़ी क़बूल की, हमारा नाम गवाही देने वालों में लिख ले”
عَرَبِيوَمَكَروا وَمَكَرَ اللَّهُ ۖ وَاللَّهُ خَيرُ الماكِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने गुप्त योजना बनाई और अल्लाह ने (भी) गुप्त योजना बनाई और अल्लाह सब गुप्त योजना बनाने वालों से बेहतर है।
Roman Urdu (Maududi)Phir bani Israel ( Maseeh ke khilaf) khufiya tadbeerein karne lagey, jawab mein Allah ne bhi apni khufiya tadbeer ki aur aisi tadbeeron mein Allah sab se badh kar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kafiron ney makar kiya aur Allah Taalaa ney bhi (makar) khufiya tadbeer ki aur Allah Taalaa sab khufiya tadbeer kerney walon say behtar hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर बनी इस्राइल (मसीह के खिलाफ) खुफिया तद्बीरें करने लगे, जवाब में अल्लाह ने भी अपनी खुफिया तदबीर की और ऐसी तदबीरों में अल्लाह सब से बुरा कर है
عَرَبِيإِذ قالَ اللَّهُ يا عيسىٰ إِنّي مُتَوَفّيكَ وَرافِعُكَ إِلَيَّ وَمُطَهِّرُكَ مِنَ الَّذينَ كَفَروا وَجاعِلُ الَّذينَ اتَّبَعوكَ فَوقَ الَّذينَ كَفَروا إِلىٰ يَومِ القِيامَةِ ۖ ثُمَّ إِلَيَّ مَرجِعُكُم فَأَحكُمُ بَينَكُم فيما كُنتُم فيهِ تَختَلِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब अल्लाह ने कहा : ऐ ईसा! मैं तुझे क़ब्ज़ करने वाला हूँ और तुझे अपनी ओर उठाने वाला हूँ, तथा तुझे उन लोगों से पवित्र करने वाला हूँ जिन्होंने कुफ़्र किया और तेरे अनुयायियों को क़ियामत के दिन तक काफ़िरों के ऊपर करने वाला हूँ। फिर मेरी ही ओर तुम्हारा लौटकर आना है। तो मैं तुम्हारे बीच उस चीज़ के बारे में निर्णय करूँगा, जिसमें तुम मतभेद किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)(Woh Allah ki khufiya tadbeer hi thi) jab usne kaha, “ aey Isa! Ab main tujhey wapas le lunga aur tujhko apni taraf utha lunga aur jinhon ne tera inkar kiya unse (yani inki maiyat se aur unke gandey maahol mein unke saath rehne se) tujhey paak kardunga aur teri pairwi karne walon ko qayamat tak un logon par balaadast rakhunga jinhon ne tera inkar kiya hai. Phir tum sabko aakhir mere paas aana hai, us waqt main un baaton ka faisla kardunga jinmein tumhare darmiyan ikhtilaf hua hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jab Allah Taalaa ney farmaya kay aey essa! Mein tujhay poora lenay wala hun aur tujhay apni janib uthaney wala hun aur tujhay kafiron say pak kerney wala hun aur teray tabeydaron ko kafiron kay upper ghalib kerney wala hun qayamat kay din tak phir tum sab ka lotna meri hi taraf hai mein hi tumharay aapas kay tamam tar ikhtilafaat ka faisla keroon ga
Devnagri Urdu (Maududi)(वो अल्लाह की खुफिया तदबीर हाय थी) जब उसने कहा, " ऐ ईसा! अब मैं तुझे वापस ले लूंगा और तुझको अपनी तरफ उठा लूंगा और जिन्हों ने तेरा इनकार किया उनसे (यानी इनकी मां से और उनके गांडेय माहोल में उनके साथ रहने से) तुझे पाक कर दूंगा और तेरी जोड़ी बनाने वालों को कयामत तक उन लोगों पर बालादस्त रखूंगा जिन्हों ने तेरा इंकार किया है। फिर तुम सबको आखिर मेरे पास आना है, हम वक्त में उन बातों का फैसला कर देंगे जिनमें तुम्हारे दरमियान इख्तिलाफ हुआ है
عَرَبِيفَأَمَّا الَّذينَ كَفَروا فَأُعَذِّبُهُم عَذابًا شَديدًا فِي الدُّنيا وَالآخِرَةِ وَما لَهُم مِن ناصِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जिन लोगों ने कुफ़्र किया, तो मैं उन्हें दुनिया एवं आख़िरत में बहुत कड़ी यातना दूँगा और कोई उनके सहायक न होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne kufr o inkar ki rawish ikhtiyar ki hai unhein duniya aur aakhirat dono mein sakht saza dunga aur woh koi madadgaar na payenge
Roman Urdu (Junagarhi)Phir kafiron ko to mein duniya aur aakhirat mein sakhta tar azab doon ga aur unn ka koi madadgar na hoga
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने कुफ्र ओ इंकार की रवीश इख्तियार की है उनहें दुनिया। और आखिरी दोनो में साख सजा दूंगा और वो कोई मददगार न पायेगा
عَرَبِيوَأَمَّا الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ فَيُوَفّيهِم أُجورَهُم ۗ وَاللَّهُ لا يُحِبُّ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा रहे वे लोग जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, तो वह उन्हें उनका बदला पूरा-पूरा देगा तथा अल्लाह अत्याचारियों से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Aur jinhon ne iman aur neik amal ka rawayya ikhtiyar kiya hai unhein unke ajar poorey poorey de diye jayenge, aur khoob jaan le ke zalimon se Allah hargiz muhabbat nahin karta”
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin eman walon aur nek aemaal logon ko Allah Taalaa unn ka sawab poora poora dey ga aur Allah Taalaa zalimon say mohabbat nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)और जिन्होन ने ईमान और नीक अमल का रवैय्या इख्तियार किया है उनको अजर पूरे पूरे दे दिये जायेंगे, और खूब जान ले के जालिमों से अल्लाह हरगिज मुहब्बत नहीं करता''
عَرَبِيذٰلِكَ نَتلوهُ عَلَيكَ مِنَ الآياتِ وَالذِّكرِ الحَكيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) यह है जिसे हम आयतों (निशानियों) और हिकमत से परिपूर्ण (दृढ़) उपदेश में से आपको पढ़कर सुनाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ayaat aur hikmat se labrez tazkeere hain jo hum tumhein suna rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh jisay hum teray samney parh rahey hain aayaten hain aur hikmar wali naseehat hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये आयत और हिकमत से लबरेज़ तज़किरे हैं जो हम तुम्हें सुना रहे हैं
عَرَبِيإِنَّ مَثَلَ عيسىٰ عِندَ اللَّهِ كَمَثَلِ آدَمَ ۖ خَلَقَهُ مِن تُرابٍ ثُمَّ قالَ لَهُ كُن فَيَكونُ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह ईसा का उदाहरण अल्लाह के निकट आदम के उदाहरण की तरह है कि उसे थोड़ी-सी मिट्टी से बनाया, फिर उसे कहा : "हो जा", तो वह हो जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ke nazdeek Isa ki misaal Adam ki si hai ke Allah ne usey mitti se paida kiya aur hukum diya ke hoja aur woh hogaya
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa kay nazdeek essa (alh-e-salam) ki misal hoo ba hoo aadam (alh-e-salam) ki misal hai jissay mitti say bana ker keh diya kay ho ja! Pus woh hogaya
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के नाज़दीक ईसा की मिसाल आदम की सी है के अल्लाह ने उसे मिट्टी से पैदा किया और हुकुम दिया के होजा और वो होगा
عَرَبِيالحَقُّ مِن رَبِّكَ فَلا تَكُن مِنَ المُمتَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह सत्य आपके पालनहार की ओर से है। अतः आप संदेह करने वालों में से न हों।
Roman Urdu (Maududi)Yeh asal haqeeqat hai jo tumhare Rubb ki tarf se batayi jaa rahi hai aur tum un logon mein shamil na ho jo ismein shakk karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Teray rab ki taraf say haq yehi hai khabardar shak kerney walon mein say na hona
Devnagri Urdu (Maududi)ये असल हकीकत है जो तुम्हारे रब की तरफ से बताई जा रही है और तुम उन लोगों में शामिल न हो जो इसमें शक करते हैं
عَرَبِيفَمَن حاجَّكَ فيهِ مِن بَعدِ ما جاءَكَ مِنَ العِلمِ فَقُل تَعالَوا نَدعُ أَبناءَنا وَأَبناءَكُم وَنِساءَنا وَنِساءَكُم وَأَنفُسَنا وَأَنفُسَكُم ثُمَّ نَبتَهِل فَنَجعَل لَعنَتَ اللَّهِ عَلَى الكاذِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जो व्यक्ति आपसे उसके बारे में झगड़ा करे, इसके बाद कि आपके पास ज्ञान आ चुका, तो कह दें : आओ! हम अपने पुत्रों तथा तुम्हारे पुत्रों और अपनी स्त्रियों तथा तुम्हारी स्त्रियों को बुला लें और अपने आपको और तुम्हें भी, फिर गिड़गिड़ाकर प्रार्थना करें और झूठों पर अल्लाह की ला'नत भेजें।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ilm aa janey ke baad ab koi us maamle mein tumse jhagda karey to (aey Muhammad)! Ussey kaho, “ aao hum aur tum khud bhi aa jayein aur apne apne baal bacchon ko bhi le aayein aur khuda se dua karein ke jo jhuta ho uspar khuda ki laanat ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Iss liye jo shaks aap kay pass iss ilm kay aajaney kay baad bhi aap say iss mein jhagray to aap keh den kay aao hum tum apney apney farzandon ko aur hum tum apni apni aurton ko aur hum tum khas apni apni janon ko bula len phir hum aajzi kay sath iltija keren aur jhooton per Allah ki laanat keren
Devnagri Urdu (Maududi)ये इल्म आ जाने के बाद अब कोई उस मामले में तुमसे झगड़ा करे तो (ऐ मुहम्मद)! उसे कहो, "आओ हम और तुम खुद भी आ जाएं और अपने-अपने बाल बच्चों को भी ले आएं और खुदा से दुआ करें के जो झूठा हो उसपर खुदा की लानत हो"
عَرَبِيإِنَّ هٰذا لَهُوَ القَصَصُ الحَقُّ ۚ وَما مِن إِلٰهٍ إِلَّا اللَّهُ ۚ وَإِنَّ اللَّهَ لَهُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यही निश्चय सत्य वर्णन है तथा अल्लाह के सिवा कोई भी पूज्य नहीं। और निःसंदेह अल्लाह, निश्चय वही सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh bilkul saheeh waqiyaat hain, aur haqeeqat yeh hai ke Allah ke siwa koi khuda-wand nahin hai, aur woh Allah hi ki hasti hai jiski taaqat sabse baala aur jiski hikmat nizaam-e-aalam mein kaar farma hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan sirf yehi sacha biyan hai aur koi mabood bar haq nahi ba-juz Allah Taalaa kay aur be-shak ghalib aur hikmat wala Allah Taalaa hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये बिल्कुल सही वाकियात हैं, और हकीकत ये है के अल्लाह के सिवा कोई खुदा-वंद नहीं है, और वो अल्लाह ही की हस्ती है जिसकी ताक़त सबसे अच्छी है और जिसकी हिकमत निज़ाम-ए-आलम में काम फरमा है
عَرَبِيفَإِن تَوَلَّوا فَإِنَّ اللَّهَ عَليمٌ بِالمُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि वे मुँह फेरें, तो निःसंदेह अल्लाह फ़साद करने वालों को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Pas agar yeh log ( is shart par muqable mein aane se) mooh moadein to (unka mufsid hona saaf khul jayega) aur Allah to mufsidon ke haal se waqif hi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir bhi agar qabool na keren to Allah Taalaa bhi sahih tor per fasadiyon ko janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास अगर ये लोग (इस शर्त पर मुक़ाबले में आने से) मुह मोअदें तो (उनका मुफ़सीद होना साफ़ खुल जाएगा) और अल्लाह तो मुफ़सीदों के हाल से वाकिफ ही है
عَرَبِيقُل يا أَهلَ الكِتابِ تَعالَوا إِلىٰ كَلِمَةٍ سَواءٍ بَينَنا وَبَينَكُم أَلّا نَعبُدَ إِلَّا اللَّهَ وَلا نُشرِكَ بِهِ شَيئًا وَلا يَتَّخِذَ بَعضُنا بَعضًا أَربابًا مِن دونِ اللَّهِ ۚ فَإِن تَوَلَّوا فَقولُوا اشهَدوا بِأَنّا مُسلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दीजिए : ऐ किताब वालो! आओ एक ऐसी बात की ओर जो हमारे बीच और तुम्हारे बीच समान (बराबर) है; यह कि हम अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करें और उसके साथ किसी चीज़ को साझी न बनाएँ तथा हममें से कोई किसी को अल्लाह के सिवा रब न बनाए। फिर यदि वे मुँह फेर लें, तो कह दो कि तुम गवाह रहो कि हम (अल्लाह के) आज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, “aey ehle kitab! Aao ek aisi baat ki taraf jo hamare aur tumhare darmiyan yaksaan hai , yeh ke hum Allah ke siwa kisi ki bandagi na karein, uske saath kisi ko shareek na thehrayein , aur hum mein se koi Allah ke siwa kisi ko apna Rubb na bana ley”. Is dawat ko qabool karne se agar woh mooh moadein to saaf kehdo ke gawah raho, hum to Muslim (sirf khuda ki bandagi o itaat karne waley) hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay aey ehal-e-kitab! Aisi insaf wali baat ki taraf aao jo hum mein tum mein barabar hai kay hum Allah Taalaa kay siwa kissi ki ibadat na keren na uss kay sath kissi ko shareek banayen na Allah Taalaa ko chor ker aapas mein aik doosray ko hi rab banayen. Pus agar woh mun pher len to tum keh do kay gawah raho hum to musalman hain
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, "ऐ एहले किताब! आओ एक ऐसी बात की तरफ जो हमारे और तुम्हारे दरमियान यक्सान हैं, ये के हम अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी ना करें, उसके साथ किसी को शरीक ना ठहरें, और हम में से कोई अल्लाह के सिवा किसी को अपना रब ना बना ले” इस दावत को क़बूल करने से अगर वो मुहब्बत तो साफ कहदो के गवाह रहो, हम तो मुस्लिम (सिर्फ खुदा की बंदगी ओ इताअत करने वाले) हैं
عَرَبِييا أَهلَ الكِتابِ لِمَ تُحاجّونَ في إِبراهيمَ وَما أُنزِلَتِ التَّوراةُ وَالإِنجيلُ إِلّا مِن بَعدِهِ ۚ أَفَلا تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ किताब वालो! तुम इबराहीम के (धर्म के) बारे में क्यों झगड़ते हो? जबकि तौरात और इंजील तो उसके पश्चात ही उतारे गए हैं, तो क्या तुम समझते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Aey ehle kitab! Tum Ibrahim ke barey mein humse kyun jhagda karte ho? Taurat aur Injil to Ibrahim ke baad hi nazil hui hai, phir kya tum itni baat bhi nahin samajhte
Roman Urdu (Junagarhi)Aey ehal-e-kitab! Tum ibrahim ki babat kiyon jhagartay ho halankay toraat-o-injeel to unn kay baad nazil ki gaeen kiya tum phir bhi nahi samjhtay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ एहले किताब! तुम इब्राहिम के बारे में हमसे क्यों झगड़ा करते हो? तौरात और इंजील तो इब्राहीम के बाद ही नाज़िल हुई है, फिर क्या तुम इतनी बात भी नहीं समझते
عَرَبِيها أَنتُم هٰؤُلاءِ حاجَجتُم فيما لَكُم بِهِ عِلمٌ فَلِمَ تُحاجّونَ فيما لَيسَ لَكُم بِهِ عِلمٌ ۚ وَاللَّهُ يَعلَمُ وَأَنتُم لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)देखो, तुम वे लोग हो कि तुमने उस विषय में वाद-विवाद किया, जिसके बारे में तुम्हें कुछ ज्ञान था, तो उस विषय में क्यों वाद-विवाद करते हो, जिसका तुम्हें कुछ ज्ञान नहीं? तथा अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Tum log jin cheezon kai ilm rakhte ho unmein to khoob behasein (arguments) kar chuke, ab un maamlaat mein kyun behas karne chale ho jinka tumhare paas kuch bhi ilm nahin .Allah jaanta hai , tum nahin jaantey
Roman Urdu (Junagarhi)Suno! Tum uss mein jhagar chukay jiss ka tumhen ilm tha phir abb iss baat mein kiyon jhagartay ho jiss ka tumhen ilm hi nahi? Aur Allah Taalaa janta hai aur tum nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम लोग जिन चीज़ों का इल्म रखते हो उनमें तो खूब बहसें (तर्क) कर चुके, अब उन मामले में बेहस क्यों करने चले हो जिनका तुम्हारे पास कुछ है भी इल्म नहीं .अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते
عَرَبِيما كانَ إِبراهيمُ يَهودِيًّا وَلا نَصرانِيًّا وَلٰكِن كانَ حَنيفًا مُسلِمًا وَما كانَ مِنَ المُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)इबराहीम न यहूदी थे और न ईसाई, बल्कि वह एकाग्रचित आज्ञाकारी थे। तथा वह बहुदेववादियों में से न थे।
Roman Urdu (Maududi)Ibrahim na yahudi tha na isayi , balke woh ek Muslim, yaksu tha aur woh hargiz Mushirkon mein se na tha
Roman Urdu (Junagarhi)Ibrahim to na yahudi thay na nasrani thay bulkay woh to yak tarfa (khalis) musalman thay woh mushrik bhi na thay
Devnagri Urdu (Maududi)इब्राहीम ना यहुदी था ना इसायी, बल्के वो एक मुस्लिम था, यक्सू था और वो हरगिज मुशीरकोन में से ना था
عَرَبِيإِنَّ أَولَى النّاسِ بِإِبراهيمَ لَلَّذينَ اتَّبَعوهُ وَهٰذَا النَّبِيُّ وَالَّذينَ آمَنوا ۗ وَاللَّهُ وَلِيُّ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह लोगों में इबराहीम से सबसे अधिक निकट निश्चय वही लोग हैं, जिन्होंने उनका अनुसरण किया तथा यह नबी और वे लोग जो ईमान लाए। और अल्लाह ही ईमान वालों का दोस्त (संरक्षक) है।
Roman Urdu (Maududi)Ibrahim se nisbat rakhne ka sabse zyada haqq agar kisi ko pahunchta hai to un logon ko pahunchta hai jinhon ne uski pairwi ki aur ab yeh Nabi aur uske maanne waley is nisbat ke zyada haqqdar hain. Allah sirf unhi ka haami o madadgaar hai jo iman rakhte hon
Roman Urdu (Junagarhi)Sab logon say ziyada ibrahim say nazdeek tar woh log hain jinhon ney unn ka kaha maana aur yeh nabi aur jo log eman laye mominon ka wali aur shahara Allah hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)इब्राहीम से निस्बत रखने का सबसे ज्यादा हक अगर किसी को पहुंचता है तो उन लोगों को pahunchta है जिन्हों ने उसकी जोड़ी की और अब ये नबी और उसके मन्ने वाले इस निस्बत के ज़्यादा हक़दार हैं। अल्लाह सिर्फ उनकी का हमी ओ मददगार है जो ईमान रखते हैं
عَرَبِيوَدَّت طائِفَةٌ مِن أَهلِ الكِتابِ لَو يُضِلّونَكُم وَما يُضِلّونَ إِلّا أَنفُسَهُم وَما يَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अह्ले किताब के एक समूह ने चाहा काश! वे तुम्हें पथभ्रष्ट कर दें। हालाँकि वे अपने सिवा किसी को पथभ्रष्ट नहीं कर रहे हैं। और उन्हें इसका एहसास नहीं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Iman laney walon) ehle kitab mein se ek giroh chahta hai ke kisi tarah tumhein raah e raast se hata de, halaanke dar haqeeqat woh apne siwa kisi ko gumraahi mein nahin daal rahey hain magar unhein iska shaoor nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ehal-e-kitab ki aik jamat chahati hai kay tumhen gumrah ker den dar-asal woh khud apney aap ko gumrah ker rahey hain aur samajhtay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ ईमान लाने वालों) एहले किताब में से एक गिरह चाहता है कि कोई तरह तुम्हें राह ए रास्ते से हटा दे, हलांके दर हकीकत वो अपने सिवा किसी को गुमराह करने में नहीं डाल रहे हैं मगर उन्हें इसका शूर नहीं है
عَرَبِييا أَهلَ الكِتابِ لِمَ تَكفُرونَ بِآياتِ اللَّهِ وَأَنتُم تَشهَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ अह्ले किताब! तुम क्यों अल्लाह की आयतों का इनकार करते हो, जबकि तुम खुद गवाही देते हो?
Roman Urdu (Maududi)Aey ehle kitab! Kyun Allah ki ayaat ka inkar karte ho halaanke tum khud inka mushahida kar rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aey ehal-e-kitab tum (ba wajood qaeel honey kay phir bhi) daanista Allah ki aayaat ka kiyon kufur ker rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ एहले किताब! क्यों अल्लाह की आयत का इन्कार करते हो हलाँके तुम खुद इनका मुशाहिदा कर रहे हो
عَرَبِييا أَهلَ الكِتابِ لِمَ تَلبِسونَ الحَقَّ بِالباطِلِ وَتَكتُمونَ الحَقَّ وَأَنتُم تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ किताब वालो! तुम क्यों सत्य को असत्य के साथ गड्डमड्ड करते हो और सत्य को छिपाते हो, हालाँकि तुम जानते हो?
Roman Urdu (Maududi)Aey ehle kitab! Kyun haqq ko baatil ka rang chadha kar mushtaba (confound ) banate ho? Kyun jaante boojhte haqq ko jhutlate ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aey ehal-e-kitab! Ba wajood janney kay haq-o-baatil ko kiyon khalat malat ker rahey ho aur kiyon haq ko chupa rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ एहले किताब! क्यों हक़ को बातिल का रंग चढ़ा कर मुश्तबा (भ्रमित) बनाते हो? क्यों जानते हैं बूझते हक़ को झुठलाते हो
عَرَبِيوَقالَت طائِفَةٌ مِن أَهلِ الكِتابِ آمِنوا بِالَّذي أُنزِلَ عَلَى الَّذينَ آمَنوا وَجهَ النَّهارِ وَاكفُروا آخِرَهُ لَعَلَّهُم يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और किताब वालों में से एक समूह ने कहा तुम दिन के आरंभ में उसपर ईमान ले आओ, जो उन लोगों पर उतारा गया है जो ईमान लाए हैं और उसके अंत में इनकार कर दो, ताकि वे (भी) वापस लौट आएँ।
Roman Urdu (Maududi)Ehle kitab mein se ek giroh kehta hai ke is Nabi ke maanne walon par jo kuch nazil hua hai uspar subah iman lao aur sham ko issey inkar kardo, shayad is tarkeeb se yeh log apne iman se phir jayein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ehal-e-kitab ki aik jamat ney kaha kay jo kuch eman walon per utara gaya hai uss per din charhay to eman lao aur shaam kay waqt kafir bann jao takay yeh log bhi palat jayen
Devnagri Urdu (Maududi)एहले किताब में से एक गिरोह कहता है कि इस नबी के मन्ने वालों पर जो कुछ नाज़िल हुआ है उसपर सुबह ईमान लाओ और शाम को इस तरह इनकार करदो, शायद इस तरकीब से ये लोग अपने ईमान से फिर जाएं
عَرَبِيوَلا تُؤمِنوا إِلّا لِمَن تَبِعَ دينَكُم قُل إِنَّ الهُدىٰ هُدَى اللَّهِ أَن يُؤتىٰ أَحَدٌ مِثلَ ما أوتيتُم أَو يُحاجّوكُم عِندَ رَبِّكُم ۗ قُل إِنَّ الفَضلَ بِيَدِ اللَّهِ يُؤتيهِ مَن يَشاءُ ۗ وَاللَّهُ واسِعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और केवल उसी की मानो, जो तुम्हारे (धर्म) का अनुसरण करे। (ऐ नबी!) कह दो कि वास्तविक मार्गदर्शन तो अल्लाह का मार्गदर्शन है। (यह मत मानो) कि जो कुछ तुम्हें दिया गया है, वैसा किसी और को भी दिया जाएगा, अथवा वे तुमसे तुम्हारे पालनहार के पास झगड़ा करेंगे। कह दो निःसंदेह सब अनुग्रह अल्लाह के हाथ में है, वह उसे जिसको चाहता है, देता है और अल्लाह विस्तार वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Neiz yeh log aapas mein kehte hain ke apne mazhab waley ke siwa kisi ki baat na maano. Aey Nabi! Insey kehdo ke, “asal mein hidayat to Allah ki hidayat hai aur yeh usi ki dain hai ke kisi ko wahi kuch de diya jaye jo kabhi tumko diya gaya tha, ya yeh ke dusron ko tumhare Rubb ke huzoor pesh karne ke liye tumhare khilaf koi hujjat mil jaye. “(Aey Nabi)! Inse kaho ke, “ fazal o sharf Allah ke ikhtiyar mein hai, jisey chahe ata farmaye. Woh waseeh ul nazar hai aur sab kuch jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur siwaye tumharay deen per chalney walon kay aur kissi ka yaqeen na kero. Aap keh dijiye kay be-shak hidayat to Allah hi ki hidayat hai (aur yeh bhi kehtay hain kay iss baat ka bhi yaqeen na kero) kay koi uss jaisa diya jaye jaisa tum diye gaye ho ya yeh kay yeh tum say tumharay rab kay pass jhagra keren gay aap keh dijiye kay fazal to Allah Taalaa hi kay haath mein hai woh jissay chahaye ussay dey Allah Taalaa wusat wala aur janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)नीज़ ये लोग आपस में कहते हैं कि अपने मजहब वाले के सिवा किसी की बात ना मानो। ऐ नबी! इनसे कहदो के, “असल में हिदायत तो अल्लाह की हिदायत है और ये उसी का दिन है के किसी को वही कुछ दे दिया जाए जो कभी तुमको दिया गया था, हां ये के दूसरे को तुम्हारे रब के हुजूर पेश करने के लिए तुम्हारे खिलाफ कोई हुज्जत मिल जाए।” नबी)! इनसे कहो के, "फज़ल ओ शर्फ अल्लाह के इख्तियार में है, जिसे चाहे अता फरमाये। वो वसीह उल नजर है और सब कुछ जानता है
عَرَبِييَختَصُّ بِرَحمَتِهِ مَن يَشاءُ ۗ وَاللَّهُ ذُو الفَضلِ العَظيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)वह जिसे चाहता है अपनी रहमत (दया) के लिए विशिष्ट कर लेता है तथा अल्लाह बहुत बड़े अनुग्रह वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Apni rehmat ke liye jisko chahta hai makhsoos karleta hai aur uska fazal bahut bada hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh apni rehmat kay sath jissay chahaye makhsoos ker ley aur Allah Taalaa baray fazal wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अपनी रहमत के लिए जिसको चाहता है मखसूस करता है और उसका फजल बहुत बुरा है।"
عَرَبِي۞ وَمِن أَهلِ الكِتابِ مَن إِن تَأمَنهُ بِقِنطارٍ يُؤَدِّهِ إِلَيكَ وَمِنهُم مَن إِن تَأمَنهُ بِدينارٍ لا يُؤَدِّهِ إِلَيكَ إِلّا ما دُمتَ عَلَيهِ قائِمًا ۗ ذٰلِكَ بِأَنَّهُم قالوا لَيسَ عَلَينا فِي الأُمِّيّينَ سَبيلٌ وَيَقولونَ عَلَى اللَّهِ الكَذِبَ وَهُم يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा किताब वालों में से कोई तो ऐसा है कि यदि तुम उसके पास ढेर सारा धन अमानत रख दो, तो वह तुम्हें उसे लौटा देगा तथा उनमें से कोई ऐसा है कि यदि तुम उसके पास एक दीनार अमानत रखो, वह उसे तुम्हें अदा नहीं करेगा जब तक तुम उसके सिर पर खड़े न रहो। यह इसलिए कि उन्होंने कहा कि हमपर उन उम्मियों (अनपढ़ों) के बारे में (पकड़ का) कोई रास्ता नहीं तथा वे अल्लाह पर झूठ बोलते हैं, हालाँकि वे जानते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ehle kitab mein koi to aisa hai ke agar tum uske aitamaad(bharose) par maal o daulat ka ek dhair bhi dedo to woh tumhara maal tumhein ada kardega, aur kisi ka haal yeh hai ke agar tum ek dinar ke maamle mein bhi uspar bharosa karo to woh ada na karega, illa yeh ke tum uske sar par sawar ho jao, unki is akhlaqi haalat ka sabab yeh hai ke woh kehte hain, “ummiyon (gair yahudi logon) ke maamle mein humpar koi mwazkhza (blame) nahin hai” aur yeh baat woh mehaz jhoot ghadh kar Allah ki taraf mansoob karte hai, halaanke unhein maloom hai ke Allah ne aisi koi baat nahin farmayi hai.( Aakhir kyun unse baaz purs na hogi)
Roman Urdu (Junagarhi)Baaz ehal-e-kitab to aisay hain kay agar tu enhen khazaney ka amin bana dey to bhi woh tujhay wapis ker den aur inn mein say baaz aisay bhi hain kay agar tu enhen aik dinar bhi amanat dey to tujhay ada na keren. Haan yeh aur baat hai kay tu uss kay sir per hi khara rahey yeh iss liye kay enhon ney keh rakha hai kay hum per inn jahilon (ghair yahudiyon) kay haq ka koi gunah nahi yeh log ba wajood janney kay Allah Taalaa per jhoot kehtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)एहले किताब में कोई तो ऐसा है के अगर तुम उसके एत्माद (भरोसे) पर माल ओ दौलत का एक धैर्य भी देदो तो वो तुम्हारा माल तुम्हें अदा कर देगा, और किसी का हाल ये है के अगर तुम एक दिन के मामले में भी उसपर भरोसा करो तो वो अदा ना करेगा, इल्ला ये के तुम उसके सर पर सवार हो जाओ, उनकी इस अखलाकी हालत का सबाब ये है के वो कहते हैं, "उम्मियों (गैर यहूदी लोगों) के मामले में हमपर कोई मवाज़ख़्ज़ा (दोष) नहीं है" और ये बात वो मेहज़ झूठ ग़द कर अल्लाह की तरफ मंसूब करते हैं, हालांके उन्हें मालूम है के अल्लाह ने ऐसी कोई बात नहीं फरमायी है
عَرَبِيبَلىٰ مَن أَوفىٰ بِعَهدِهِ وَاتَّقىٰ فَإِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ المُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्यों नहीं! जो व्यक्ति अपना वचन पूरा करे और (अल्लाह से) डरे, तो निश्चय अल्लाह डरने वालों से प्रेम करता है।
Roman Urdu (Maududi)Jo bhi apne ahad ko poora karega aur burayi se bachkar rahega woh Allah ka mehboob banega, kyunke parheizgaar log Allah ko pasand hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiyon nahi (moakhiza hoga) albatta jo shaks apna qarar poora keray aur perhezgari keray to Allah Taalaa bhi aisay perhezgaron say mohabbat kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يَشتَرونَ بِعَهدِ اللَّهِ وَأَيمانِهِم ثَمَنًا قَليلًا أُولٰئِكَ لا خَلاقَ لَهُم فِي الآخِرَةِ وَلا يُكَلِّمُهُمُ اللَّهُ وَلا يَنظُرُ إِلَيهِم يَومَ القِيامَةِ وَلا يُزَكّيهِم وَلَهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग अल्लाह के वचन तथा अपनी क़समों के बदले तनिक मूल्य प्राप्त करते हैं, उनका आख़िरत (परलोक) में कोई हिस्सा नहीं। अल्लाह क़ियामत के दिन न उनसे बात करेगा और न उनकी ओर देखेगा और न उन्हें पवित्र करेगा। तथा उनके लिए दर्दनाक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jo Allah ke ahad aur apne kasamo ko thodi keemat par bech daalte hain, to unke liye aakhirat mein koi hissa nahin, Allah qayamat ke roz na unse baat karega na unki taraf dekhega aur na unhein paak karega, balke unke liye to sakht dardnaak saza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jo log Allah Taalaa kay ehad aur apni qasmon ko thori qeemat mein baich daaltay hain unn kay liye aakhirat mein koi hissa nahi Allah Taalaa na to unn say baat cheet keray ga na unn ki taraf qayamat kay din dekhay ga na unhen pak keray ga aur unn kay liye dard naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जो अल्लाह के अहद और अपने कसमों को थोड़ी कीमत पर बेच देते हैं, उनके लिए आख़िरत में कोई हिसा नहीं, अल्लाह कयामत के रोज़ ना उनसे बात करेगा ना उनकी तरफ देखेगा और ना उन्हें पाक करेगा, उनके लिए तो सच दर्दनाक सज़ा है
عَرَبِيوَإِنَّ مِنهُم لَفَريقًا يَلوونَ أَلسِنَتَهُم بِالكِتابِ لِتَحسَبوهُ مِنَ الكِتابِ وَما هُوَ مِنَ الكِتابِ وَيَقولونَ هُوَ مِن عِندِ اللَّهِ وَما هُوَ مِن عِندِ اللَّهِ وَيَقولونَ عَلَى اللَّهِ الكَذِبَ وَهُم يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह उनमें से निश्चय कुछ लोग ऐसे हैं, जो किताब (पढ़ने) के साथ अपनी ज़बानें मरोड़ते हैं, ताकि तुम उसे पुस्तक में से समझो, हालाँकि वह पुस्तक में से नहीं और कहते हैं, यह अल्लाह की ओर से है। हालाँकि वह अल्लाह की ओर से नहीं और अल्लाह पर झूठ कहते हैं, हालाँकि वे जानते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unmein kuch log aise hain jo kitab padhte huey is tarah zubaan ka ulat pher karte hain ke tum samjho jo kuch woh padh rahey hain woh kitab hi ki ibarat hai, halaanke woh kitab ki ibarat nahin hoti. Woh kehte hain ke yeh jo kuch hum padh rahey hain yeh khuda ki taraf se hai, halaanke woh khuda ki taraf se nahin hota. Woh jaan boojh kar jhoot baat Allah ki taraf mansoob kardete hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan inn mein aisa giroh bhi hai jo kitab parhtay huye apni zaban marorta hai takay tum ussay kitab hi ki ibarat khayal kero halankay kay dar-asal woh kitab mein say nahi aur yeh kehtay bhi hain kay woh Allah Taalaa ki taraf say hai halankay woh dar-asal Allah Taalaa ki taraf say nahi woh to daanista Allah Taalaa ki taraf jhoot boltay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो किताब पढ़ते हुए इस तरह ज़ुबान का उल्टा फेर करते हैं कि तुम समझो जो कुछ वो पढ़ रहे हैं वो किताब ही की इबारत है, हलांके वो किताब की इबारत नहीं होती। वो कहते हैं के ये जो कुछ हम पढ़ रहे हैं ये खुदा की तरफ से है, हलांके वो खुदा की तरफ से नहीं होता। वो जान बूझ कर झूठ बात अल्लाह की तरफ मंसूब करते हैं
عَرَبِيما كانَ لِبَشَرٍ أَن يُؤتِيَهُ اللَّهُ الكِتابَ وَالحُكمَ وَالنُّبُوَّةَ ثُمَّ يَقولَ لِلنّاسِ كونوا عِبادًا لي مِن دونِ اللَّهِ وَلٰكِن كونوا رَبّانِيّينَ بِما كُنتُم تُعَلِّمونَ الكِتابَ وَبِما كُنتُم تَدرُسونَ
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हिन्दी (Al-Omari)किसी मनुष्य का यह अधिकार नहीं कि अल्लाह उसे पुस्तक, निर्णय शक्ति और नुबुव्वत (पैग़ंबरी) प्रदान करे, फिर वह लोगों से कहे कि अल्लाह को छोड़कर मेरे बंदे बन जाओ, बल्कि (वह तो यही कहेगा कि) तुम रब वाले बनो, इसलिए कि तुम पुस्तक की शिक्षा दिया करते थे और इसलिए कि तुम पढ़ा करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Kisi Insaan ka yeh kaam nahin hai ke Allah to usko kitab aur hukum aur nabuwat ata farmaye aur woh logon se kahey ke Allah ke bajaye tum mere banday ban jao. Woh to yahi kahega ke sacchey Rabbani bano jaisa ke is kitab ki taleem ka taqaza hai jisey tum padhte aur padhate ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kissi aisay insan ko jissay Allah Taalaa kitab-o-hikmat aur nabooat dey yeh laeeq nahi kay phir bhi woh logon say kahey kay tum Allah Taalaa ko chor ker meray banday bann jao bulkay woh to kahey ga kay tum sab rab kay ho jao tumharay kitab sikhaney kay baees aur tumharay kitab parhney kay sabab
Devnagri Urdu (Maududi)किसी इंसान का ये काम नहीं है के अल्लाह तो उसको किताब और हुकुम और नबुवत अता फरमाये और वो लोगों से कहे के अल्लाह के बजाए तुम मेरे बंदे बन जाओ। वो तो यही कहेगा के सच्चे रब्बानी बानो जैसा के इस किताब की तालीम का तकाजा है जिसे तुम पढ़ते और पढ़ते हो
عَرَبِيوَلا يَأمُرَكُم أَن تَتَّخِذُوا المَلائِكَةَ وَالنَّبِيّينَ أَربابًا ۗ أَيَأمُرُكُم بِالكُفرِ بَعدَ إِذ أَنتُم مُسلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा न यह (अधिकार है) कि तुम्हें आदेश दे कि फ़रिश्तों और नबियों को रब (पूज्य) बना लो। क्या वह तुम्हें कुफ़्र का आदेश देगा, इसके बाद कि तुम मुसलमान (अल्लाह के आज्ञाकारी) हो?
Roman Urdu (Maududi)Woh tumse hargiz yeh na kahega ke Farishton ko ya paigambaron ko apna Rubb bana lo, kya yeh mumkin hai ke ek Nabi tumhein kufr ka hukum de jab ke tum Muslim ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh nahi (hosakta) kay woh tumhen fariston aur nabiyon ko rab bana lenay ka hukum keray kiya woh tumharay musalman honey kay baad bhi tumhen kufur ka hukum dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)वो तुमसे हरगिज ये ना कहेगा के फरिश्तों को या पैगम्बरों को अपना रब बना लो, क्या ये मुमकिन है के एक नबी तुम्हें कुफ्र का हुकुम दे जब के तुम मुस्लिम हो
عَرَبِيوَإِذ أَخَذَ اللَّهُ ميثاقَ النَّبِيّينَ لَما آتَيتُكُم مِن كِتابٍ وَحِكمَةٍ ثُمَّ جاءَكُم رَسولٌ مُصَدِّقٌ لِما مَعَكُم لَتُؤمِنُنَّ بِهِ وَلَتَنصُرُنَّهُ ۚ قالَ أَأَقرَرتُم وَأَخَذتُم عَلىٰ ذٰلِكُم إِصري ۖ قالوا أَقرَرنا ۚ قالَ فَاشهَدوا وَأَنا مَعَكُم مِنَ الشّاهِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद करो) जब अल्लाह ने सब नबियों से दृढ़ वचन लिया कि मैं किताब और हिकमत में से जो कुछ तुम्हें दूँ, फिर तुम्हारे पास कोई रसूल आए जो उसकी पुष्टि करने वाला हो जो तुम्हारे पास है, तो तुम उसपर अवश्य ईमान लाओगे और अवश्य उसका समर्थन करोगे। (अल्लाह ने) कहा : क्या तुमने स्वीकार किया और उसपर मेरी प्रतिज्ञा क़बूल की? उन्होंने कहा : हमने स्वीकार कर लिया। (अल्लाह ने) कहा : तो तुम गवाह रहो और मैं भी तुम्हारे साथ गवाहों में से हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo , Allah ne paigambaron se ahad liya tha ke, “aaj humne tumhein kitab aur hikmat o Danish se Nawaza hai, kal agar koi doosra Rasool tumhare paas usi taleem ki tasdeeq karta hua aaye jo pehle se tumhare paas maujood hai, to tumko uspar iman lana hoga aur uski madad karni hogi”. Yeh irshad farma kar Allah be pucha, “kya tum iska iqrar karte ho aur ispar meri taraf se ahad ki bhari zimmedari uthate ho?” Unhon ne kaha haan hum iqrar karte hain, Allah ne farmaya, “accha to gawah raho aur main bhi tumhare saath gawaah hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Jab Allah Taalaa ney nabiyon say ehad liya kay jo kuch mein tumhen kitab-o-hikmat doon phir tumharay pass woh rasool aaye jo tumharay pass ki cheez ko sach bataye to tumharay liye uss per eman lana aur uss ki madad kerna zaroori hai. Farmaya kay tum iss kay iqrari ho aur iss per mera zimma ley rahey ho? Sab ney kaha humen iqrar hai farmaya to abb gawah raho aur khud mein bhi tumharay sath gawahon mein hun
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो, अल्लाह ने पैगंबर से अहद लिया था के, "आज हमने तुम्हें किताब और हिकमत ओ दानिश से नवाजा है, कल अगर कोई दूसरा रसूल तुम्हारे पास उसी तालीम की तस्दीक करता हुआ आए जो पहले से तुम्हारे पास मौजुद है, तो तुमको उसपर ईमान लाना होगा और उसकी मदद करनी होगी।" उन्होन ने कहा हन हम इक़रार करते हैं, अल्लाह ने फरमाया, "अच्छा तो गवाह रहो और मैं भी तुम्हारे साथ गवाह हूं
عَرَبِيفَمَن تَوَلّىٰ بَعدَ ذٰلِكَ فَأُولٰئِكَ هُمُ الفاسِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जो इसके बाद फिर जाए, तो यही लोग अवज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Iske baad jo apne ahad se phir jaye wahi faasiq hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus iss kay baad jo palat jayen woh yaqeenan pooray na farman hain
Devnagri Urdu (Maududi)इसके बाद जो अपने अहद से फिर जाए वही फासिक है"
عَرَبِيأَفَغَيرَ دينِ اللَّهِ يَبغونَ وَلَهُ أَسلَمَ مَن فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ طَوعًا وَكَرهًا وَإِلَيهِ يُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वे अल्लाह के धर्म (इस्लाम) के अलावा कुछ और तलाश करते हैं? जबकि आकाशों और धरती में जो भी है स्वेच्छा से और अनिच्छा से उसी का आज्ञाकारी है तथा वे उसी की ओर लौटाए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Ab kya yeh log Allah ki itaat ka tareeqa (deen Allah) chodh kar koi aur tareeqa chahte hain? Halaanke asmaan o zameen ki saari cheezein char o nachaar (willingly or un willingly) Allah hi ki taabeh farmaan (Muslim) hain aur usi ki taraf sabko palatna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh Allah Taalaa kay deen kay siwa aur deen ki talash mein hain? Halankay tamam aasmanon walay aur sab zamin walay Allah Taalaa hi kay farmanbardar hain khushi say hon ya na khushi say sab ussi ki taraf lotaye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)अब क्या ये लोग अल्लाह की इताअत का तरीक़ा (दीन अल्लाह) छोड़ कर कोई और तरीक़ा चाहते हैं? हलाँके आसमान ओ ज़मीन की सारी चीज़ें चार ओ नाचार (इच्छा से या अनिच्छा से) अल्लाह ही की तबेह फ़रमान (मुस्लिम) हैं और उसकी तरफ सबको पलटना है
عَرَبِيقُل آمَنّا بِاللَّهِ وَما أُنزِلَ عَلَينا وَما أُنزِلَ عَلىٰ إِبراهيمَ وَإِسماعيلَ وَإِسحاقَ وَيَعقوبَ وَالأَسباطِ وَما أوتِيَ موسىٰ وَعيسىٰ وَالنَّبِيّونَ مِن رَبِّهِم لا نُفَرِّقُ بَينَ أَحَدٍ مِنهُم وَنَحنُ لَهُ مُسلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ रसूल!) कह दो : हम अल्लाह पर ईमान लाए और उसपर जो हमपर उतारा गया, और जो इबराहीम, इसमाईल, इसह़ाक़, याक़ूब तथा उनकी संतान पर उतारा गया, और जो मूसा तथा ईसा और दूसरे नबियों को उनके पालनहार की ओर से दिया गया, हम इनमें से किसी एक के बीच अंतर नहीं करते और हम उसी (अल्लाह) के आज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi)! Kaho ke “ hum Allah ko maante hain, us taleem ko maante hain jo humpar nazil ki gayi hai, un taleemat ko bhi maante hain jo Ibrahim, Ismael, Ishaq, Yaqub aur aulad e Yaqub par nazil hui thi aur un hidayaat par bhi iman rakhte hain jo Moosa aur Isa aur dusre paigambaron ko unke Rubb ki taraf se di gayi. Hum inke darmiyan farq nahin karte aur hum Allah ke taabey farmaan (Muslim) hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay hum Allah Taalaa per aur jo kuch hum per utara gaya hai aur jo kuch ibrahim (alh-e-salam) aur ismail (alh-e-salam) aur yaqoob (alh-e-salam) aur unn ki aulad per utara gaya aur jo kuch musa (alh-e-salam) aur essa (alh-e-salam) aur doosray anbiya Allah Taalaa ki taraf say diya gaye unn sab per eman laye hum inn mein say kissi kay darmiyan farq nahi kertay aur hum Allah Taalaa kay farmanbardar hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी)! कहो के “हम अल्लाह को मानते हैं, उस तालीम को मानते हैं जो हमपर नाज़िल की गई है, उन तालीम को भी मानते हैं जो इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब पर नाज़िल हुई थी और उन हिदायत पर भी ईमान रखते हैं जो मूसा और ईसा और दूसरे पैगम्बरों को उनके रुब की तरफ से दी गई। हम इनके दरमियान फ़र्क़ नहीं करते और हम अल्लाह के ताबे फ़रमान (मुस्लिम) हैं”
عَرَبِيوَمَن يَبتَغِ غَيرَ الإِسلامِ دينًا فَلَن يُقبَلَ مِنهُ وَهُوَ فِي الآخِرَةِ مِنَ الخاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो इस्लाम के अलावा कोई और धर्म तलाश करे, तो वह उससे हरगिज़ स्वीकार नहीं किया जाएगा और वह आख़िरत में घाटा उठाने वालों में से होगा।
Roman Urdu (Maududi)Is farmabardari (Islam) ke siwa jo shaks koi aur tareeqa ikhtiyar karna chahe uska woh tareeqa hargiz qabool na kiya jayega aur aakhirat mein woh nakaam o na-murad rahega
Roman Urdu (Junagarhi)Jo shaks islam kay siwa aur deen talash keray uss ka deen qabool na kiya jayega aur woh aakhirat mein nuksan paney walon mein hoga
Devnagri Urdu (Maududi)इस फ़रमाबरदारी (इस्लाम) के सिवा जो शक्स कोई और तरीक़ा इख्तियार करना चाहे उसका वो तरीक़ा हरगिज़ क़बूल न किया जाएगा और आख़िरत में वो नाकाम ओ। ना-मुराद रहेगा
عَرَبِيكَيفَ يَهدِي اللَّهُ قَومًا كَفَروا بَعدَ إيمانِهِم وَشَهِدوا أَنَّ الرَّسولَ حَقٌّ وَجاءَهُمُ البَيِّناتُ ۚ وَاللَّهُ لا يَهدِي القَومَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह उन लोगों को कैसे हिदायत देगा, जिन्होंने अपने ईमान के बाद कुफ़्र किया और (इसके बाद कि) उन्होंने गवाही दी कि निश्चय यह रसूल सच्चा है तथा उनके पास स्पष्ट प्रमाण आ चुके?! और अल्लाह अत्याचारियों को हिदायत नहीं देता।
Roman Urdu (Maududi)Kaise ho sakta hai ke Allah un logon o hidayat bakshe jinhon ne niyamat e iman paa lene ke baad phir kufr ikhtiyar kiya halaanke woh khud is baat par gawahi de chuke hain ke yeh Rasool haqq par hai aur inke paas roshan nishaniyan bhi aa chuki hain, Allah zalimon ko to hidayat nahin diya karta
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa unn logon ko kaisay hidayat dey ga jo apney eman laney aur rasool ko haqqaniyat ki gawahi denay aur apney pass roshan daleel aajaney kay baad kafir hojayen Allah Taalaa aisay bey insaf logon ko raah-e-raast per nahi laata
Devnagri Urdu (Maududi)कैसा हो सकता है अल्लाह उन लोगों ओ हिदायत बख्शे जिन्हों ने नियामत ए ईमान पा लेने के बाद फिर कुफ्र इख्तियार किया हलांके वो खुद इस बात पर गवाही दे चुके हैं के ये रसूल हक़ पर है और इनके पास रोशन निशानियां भी आ चुकी हैं, अल्लाह ज़ालिमों को तो हिदायत नहीं दीया
عَرَبِيأُولٰئِكَ جَزاؤُهُم أَنَّ عَلَيهِم لَعنَةَ اللَّهِ وَالمَلائِكَةِ وَالنّاسِ أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐसे लोगों का बदला यह है कि उनपर अल्लाह की, फ़रिश्तों की और समस्त लोगों की ला'नत (धिक्कार) है।
Roman Urdu (Maududi)Unke zulm ka saheeh badla yahi hai ke unpar Allah aur Farishton aur tamaam Insaano ki phitkar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn ki to yehi saza hai kay inn per Allah Taalaa ki aur farishton ki aur tamam logon ki laanat ho
Devnagri Urdu (Maududi)उनके ज़ुल्म का सही बदला यहीं है के बेपरवाह अल्लाह और फ़रिश्तों और तमाम इंसानों की तरह फिटकर है
عَرَبِيخالِدينَ فيها لا يُخَفَّفُ عَنهُمُ العَذابُ وَلا هُم يُنظَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)हमेशा उसमें रहने वाले हैं, न उनका अज़ाब हल्का किया जाएगा और न उन्हें मोहलत दी जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Isi halat mein woh hamesha rahenge, na unki saza mein takhfif(kami) hogi aur na unhein mohlat di jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss mein yeh hamesha paray rahen gay na to inn say azab halka kiya jayega na enhen mohlat di jaye gi
Devnagri Urdu (Maududi)इसी हालात में वो हमेशा रहेंगे, ना उनकी सज़ा में तख़्फ़िफ़ (कामी) होगी और ना उन्हें मोहलत दी जाएगी
عَرَبِيإِلَّا الَّذينَ تابوا مِن بَعدِ ذٰلِكَ وَأَصلَحوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु जिन लोगों ने इसके बाद तौबा कर ली तथा सुधार कर लिया, तो निश्चय अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Albatta woh log bach jayenge jo iske baad tawba karke apne tarz e amal ki islah karlein, Allah bakhsne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Magar jo log iss kay baad tauba aur islaah ker len to be-shak Allah Taalaa bakshney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता वो लोग बच जायेंगे जो इसके बाद तौबा करके अपने तर्ज़ ए अमल की इस्लाह कार्लें, अल्लाह बख्शने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا بَعدَ إيمانِهِم ثُمَّ ازدادوا كُفرًا لَن تُقبَلَ تَوبَتُهُم وَأُولٰئِكَ هُمُ الضّالّونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने अपने ईमान के बाद कुफ़्र किया, फिर कुफ़्र में बढ़ गए, उनकी तौबा कदापि स्वीकार न की जाएगी तथा वही लोग पथभ्रष्ट हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar jin logon ne iman laney ke baad kufr ikhtiyar kiya phir apne kufr mein badhte chale gaye unki tawba bhi qabool na hogi, aisey log to pakke gumraah hain
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jo log apney eman laney kay baad kufur keren phir kufur mein barh jayen unn ki tauba hergiz hergiz qabool na ki jaye gi yehi gumrah log hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जिन लोगों ने ईमान लेन के बाद कुफ़्र इख्तियार किया फिर अपने कुफ़्र में बढ़ते चले गए उनकी तौबा भी क़बूल न होगी, ऐसे लोग तो पक्के गुमराह हैं
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا وَماتوا وَهُم كُفّارٌ فَلَن يُقبَلَ مِن أَحَدِهِم مِلءُ الأَرضِ ذَهَبًا وَلَوِ افتَدىٰ بِهِ ۗ أُولٰئِكَ لَهُم عَذابٌ أَليمٌ وَما لَهُم مِن ناصِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया और इस हाल में मर गए कि वे काफ़िर थे, तो उनके किसी एक से धरती के बराबर सोना भी हरगिज़ स्वीकार नहीं किया जाएगा, चाहे वह उसे फ़िदया (छुड़ौती) में दे दे। ये लोग हैं जिनके लिए दर्दनाक यातना है और उनके लिए कोई मदद करने वाले नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeen rakkho, jin logon ne kufr ikhtiyar kiya aur kufr hi ki haalat mein jaan di unmein se koi agar apne aap ko saza se bachane ke liye rooh-e-zameen bhar kar bhi sona(gold) fidye (expiation) mein de to usey qabool na kiya jayege, aisey logon ke liye dardnaak saza tayyar hai aur woh apna koi madadgaar na payenge
Roman Urdu (Junagarhi)Haan jo log kufur keren aur martay dum tak kafir rahen unn mein agar koi zamin bhar sona go fidiye mein hi ho to bhi hergiz qabool na kiya jayega yehi log hain jin kay liye takleef denay wala azab hai aur jin ka koi madadgar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)यकीन रख्खो, जिन लोगों ने कुफ्र इख्तियार किया और कुफ्र ही की हालत में जान दी उनमें से कोई अगर अपने आप को सज़ा से बचाने के लिए रूह-ए-ज़मीन भर कर भी सोना (सोना) फ़िदे (प्रायश्चित) में दे तो उसे क़बूल न किया जाएगा, ऐसे लोगों के लिए दर्दनक सजा तय है और वो अपना कोई मददगार ना पाएगा
🕮 Juz 4 begins here
عَرَبِيلَن تَنالُوا البِرَّ حَتّىٰ تُنفِقوا مِمّا تُحِبّونَ ۚ وَما تُنفِقوا مِن شَيءٍ فَإِنَّ اللَّهَ بِهِ عَليمٌ
हिन्दी (Al-Omari)तुम नेकी को कदापि नहीं प्राप्त कर सकते, जब तक तुम उन चीज़ों में से (अल्लाह के मार्ग में) खर्च न करो, जो तुम्हें प्रिय हैं। तथा तुम जो चीज़ भी खर्च करोगे, निःसंदेह अल्लाह उसे भली-भांति जानता है।
Roman Urdu (Maududi)Tum neki ko nahin pahunch sakte jab tak ke apni woh cheezein (khuda ki raah mein) kharch na karo jinhein tum azeez rakthe to, aur jo kuch tum kharch karoge Allah ussey be khabar na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Jab tak tum apni pasandeedah cheez say Allah Taalaa ki raah mein kharach na kero gay hergiz bhalaee na pao gay aur tum jo kharach kero ussay Allah Taalaa bakhoobi janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम नेकी को नहीं पाहुंच सकते जब तक के अपनी वो चीज (खुदा की राह में) खर्च ना करो जिन्हे तुम अजीज रखते हो, और जो कुछ तुम खर्च करोगे अल्लाह उसे खबर हो ना होगा
عَرَبِي۞ كُلُّ الطَّعامِ كانَ حِلًّا لِبَني إِسرائيلَ إِلّا ما حَرَّمَ إِسرائيلُ عَلىٰ نَفسِهِ مِن قَبلِ أَن تُنَزَّلَ التَّوراةُ ۗ قُل فَأتوا بِالتَّوراةِ فَاتلوها إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)खाने की समस्त चीज़ें बनी इसराईल के लिए हलाल (वैध) थीं, सिवाय उसके जिसे इसराईल (याक़ूब अलैहिस्सलाम) ने तौरात उतरने से पहले अपने ऊपर हराम (अवैध) कर लिया था। (ऐ नबी!) आप कह दीजिए कि यदि तुम सच्चे हो, तो तौरात लाओ और उसे पढ़ो।
Roman Urdu (Maududi)Khane ki yeh saari cheezein (jo shariyat e Muhammadi mein halal hain) bani Israel ke liye bhi halal thi, albatta baaz chezein aisi thi jinhein Tourat ke nazil kiye janey se pehle Israel (Yakub) ne khud apne upar haraam karliya tha. Unsey kaho, agar tum (apne aitraaz mein) sacchey ho to lao Taurat aur pesh karo uski koi ibarat
Roman Urdu (Junagarhi)Toraat kay nuzool say pehlay (hazrat) yaqoob (alh-e-salam) ney jiss cheez ko apney upper haram ker liya tha uss kay siwa tamam khaney bani israeel per halal thay aap keh dijiye kay agar tum sachay ho to toraat ley aao aur parh sunao
Devnagri Urdu (Maududi)खाने की ये सारी चीज़ें (जो शरीयत ए मुहम्मदी में हलाल हैं) बानी इसराइल के लिए भी हलाल थी, अलबत्ता बाज़ चीज़े ऐसी थी जिनहें तौरात के नाज़िल किये जाने से पहले इज़राइल (याकूब) ने खुद अपने ऊपर हराम करलिया था। उनसे कहो, अगर तुम (अपने ऐतराज में) सच्चे हो तो लाओ तौरात और पेश करो उसकी कोई इबारत
عَرَبِيفَمَنِ افتَرىٰ عَلَى اللَّهِ الكَذِبَ مِن بَعدِ ذٰلِكَ فَأُولٰئِكَ هُمُ الظّالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अब इसके बाद भी जो व्यक्ति अल्लाह पर मिथ्या आरोप लगाए, तो ऐसे ही लोग अत्याचारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Iske baad bhi jo log apni jhooti ghadi hui baatein Allah ki taraf mansoob karte rahein wahi dar-haqeeqat zalim hain
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kay baad bhi jo log Allah Taalaa per jhoot bohtan bandhen wohi zalim hain
Devnagri Urdu (Maududi)इसके बाद भी जो लोग अपनी झूठी घड़ी हुई बातें अल्लाह की तरफ मंसूब करते रहें वही दर-हकीकत जालिम हैं
عَرَبِيقُل صَدَقَ اللَّهُ ۗ فَاتَّبِعوا مِلَّةَ إِبراهيمَ حَنيفًا وَما كانَ مِنَ المُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दीजिए कि अल्लाह ने सच कहा है। अतः तुम इबराहीम (अलैहिस्सलाम) के धर्म का अनुसरण करो, जो एकेश्वरवादी थे और वह बहुदेववादियों में से नहीं थे।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, Allah ne jo kuch farmaya hai sach farmaya hai. Tumko yaksu hokar Ibrahim ke tareeqe ki pairwi karni chahiye, aur Ibrahim shirk karne walon mein se na tha
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay Allah Taalaa sacha hai tum sab ibrahim hanif kay millat ki pairwi kero jo mushrik na thay
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, अल्लाह ने जो कुछ फरमाया है सच फरमाया है। तुमको यक्सू होकर इब्राहिम के तरीक़े की जोड़ी करनी चाहिए, और इब्राहिम शिर्क करने वालों में से ना था
عَرَبِيإِنَّ أَوَّلَ بَيتٍ وُضِعَ لِلنّاسِ لَلَّذي بِبَكَّةَ مُبارَكًا وَهُدًى لِلعالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह पहला घर जो मानव के लिए बनाया गया, वह वही है जो मक्का में है, जो बरकत वाला तथा समस्त संसार के लिए मार्गदर्शन है।
Roman Urdu (Maududi)Beshak sabse pehli ibadat-gaah jo Insaano ke liye tameer hui woh wahi hai jo Makkah mein waqeh hai, usko khair o barakat di gayi thi aur tamaam jahaan walon ke liye markaz e hidayat banaya gaya tha
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ka pehla ghar jo logon kay liye muqarrar kiya gaya woh hai jo makkah (sharif) mein hai jo tamam duniya kay liye barkat-o-hidayat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)बेशक सबसे पहली इबादत-गाह जो इंसानों के लिए तामीर हुई वो वही है जो मक्का में वाक़े है, उसको ख़ैर ओ बरकत दी गई थी और तमाम जहां वालों के लिए मरकज़ ए हिदायत बनाया गया था
عَرَبِيفيهِ آياتٌ بَيِّناتٌ مَقامُ إِبراهيمَ ۖ وَمَن دَخَلَهُ كانَ آمِنًا ۗ وَلِلَّهِ عَلَى النّاسِ حِجُّ البَيتِ مَنِ استَطاعَ إِلَيهِ سَبيلًا ۚ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ اللَّهَ غَنِيٌّ عَنِ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसमें खुली निशानियाँ हैं, (जिनमें) मक़ामे इबराहीम है, तथा जो उसमें प्रवेश कर गया, वह सुरक्षित हो गया। तथा अल्लाह के लिए लोगों पर इस घर का हज्ज अनिवार्य है, जो वहाँ तक पहुँचने का सामर्थ्य रखता हो, और जिसने इनकार किया तो निःसंदेह अल्लाह (उससे, बल्कि) समस्त संसार से निस्पृह (बेनियाज़) है।
Roman Urdu (Maududi)Ismein khuli hui nishaniyan hain, Ibrahim ka muqaam e ibadat hai, aur iska haal yeh hai ke jo ismein dakhil hua mamoon(secure) ho gaya. Logon par Allah ka yeh haqq hai ke jo is ghar tak pahuchne ki istitaat rakhta ho woh iska hajj karey, aur jo koi is hukum ki pairwi se inkar karey to usey maloom ho jana chahiye ke Allah tamaam duniya walon se be-niyaz hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss mein khuli khuli nishaniyan hain muqam-e-ibrahim hai iss mein jo aajaye aman wala hojata hai Allah Taalaa ney unn logon per jo uss ki taraf raah paa saktay hon uss ghar ka hajj farz ker diya hai. Aur jo koi kufur keray to Allah Taalaa (uss sau bulkay) tamam duniya say bey perwah hai
Devnagri Urdu (Maududi)इस्मेन खुली हुई निशानियां हैं, इब्राहिम का मुकाम ए इबादत है, और इसका हाल ये है के जो इस्मेन दखिल हुआ मामून (सुरक्षित) हो गया। लोगों पर अल्लाह का ये हक़ है कि जो इस घर तक पहुंचें कि इस्तितात रखे हो वो इसका हज करे, और जो कोई इस हुकुम की जोड़ी से इंकार करे तो उसे मालूम हो जाना चाहिए के अल्लाह तमाम दुनिया वालों से बे-नियाज़ है
عَرَبِيقُل يا أَهلَ الكِتابِ لِمَ تَكفُرونَ بِآياتِ اللَّهِ وَاللَّهُ شَهيدٌ عَلىٰ ما تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दीजिए कि ऐ किताब वालो! तुम अल्लाह की आयतों का क्यों इनकार करते हो, हालाँकि जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उससे अवगत हैॽ
Roman Urdu (Maududi)Kaho, aey ehle kitab! Tum kyun Allah ki baatein maanne se inkar karte ho? Jo harkatein tum kar rahey ho Allah sab kuch dekh raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay ehal-e-kitab tum Allah Taalaa ki aayaton kay sath kufur kiyon kertay ho? Jo kuch tum kertay ho Allah Taalaa uss per gawah hai
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, ऐ एहले किताब! तुम अल्लाह की बातें मन से क्यों कहते हो? जो हरकतें तुम कर रहे हो अल्लाह सब कुछ देख रहा है
عَرَبِيقُل يا أَهلَ الكِتابِ لِمَ تَصُدّونَ عَن سَبيلِ اللَّهِ مَن آمَنَ تَبغونَها عِوَجًا وَأَنتُم شُهَداءُ ۗ وَمَا اللَّهُ بِغافِلٍ عَمّا تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी) आप कह दीजिए : ऐ किताब वालो! तुम ईमान लाने वालों को अल्लाह के रास्ते से क्यों रोकते होॽ तुम्हें उसमें कुटिलता की तलाश रहती है। जबकि तुम (उसके सच्चे होने के) गवाह होॽ और अल्लाह तुम्हारे कर्मों से अनभिज्ञ नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, aey ehle kitab! yeh tumhari kya rawish hai ke jo Allah ki baat maanta hai usey bhi tum Allah ke raaste se rokte ho aur chahte ho ke woh tedhi raah chale, halaanke tum khud (iske raah e raast honay par) gawah ho. Tumhari harkaton se Allah gaafil nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn ehal-e-kitab say kaho kay tum Allah Taalaa ki raah say logon ko kiyon roktay ho? Aur iss mein aib tatoltay ho halankay tum khud shahid ho Allah Taalaa tumharay aemaal say bey khabar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, ऐ एहले किताब! ये तुम्हारी क्या रवानी है के जो अल्लाह की बात मानता है उसे भी तुम अल्लाह के रास्ते से रोकते हो और चाहते हो के वो टेढ़ी राह चले, हलांके तुम खुद (इसकी राह ए रास्ते होने पर) गवाह हो। तुम्हारी हरकतों से अल्लाह गाफिल नहीं है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِن تُطيعوا فَريقًا مِنَ الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ يَرُدّوكُم بَعدَ إيمانِكُم كافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! यदि तुम किताब वालों के किसी समूह की बात मानोगे, तो वे तुम्हारे ईमान लाने के बाद फिर तुम्हें काफ़िर बना देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, agar tumne in ehle kitab mein se ek giroh ki baat maani to yeh tumhein iman se phir kufr ki taraf pher le jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Agar tum ehal-e-kitab ki kissi jamat ki baaten maano gay to woh tumhen tumharay eman laney kay baad murtid kafir bana den gay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुमने एहले किताब में से एक गिरोह की बात मानी तो ये तुम्हारे ईमान से फिर कुफ्र की तरफ फिर ले जाएंगे
عَرَبِيوَكَيفَ تَكفُرونَ وَأَنتُم تُتلىٰ عَلَيكُم آياتُ اللَّهِ وَفيكُم رَسولُهُ ۗ وَمَن يَعتَصِم بِاللَّهِ فَقَد هُدِيَ إِلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यह कैसे हो सकता है कि तुम (फिर से) कुफ़्र को स्वीकार कर लो, जबकि तुम्हारे सामने अल्लाह की आयतें पढ़ी जा रही हैं और तुम्हारे बीच उसका रसूल मौजूद हैॽ और जो अल्लाह को मज़बूत थाम ले, तो वास्तव में उसे सीधा मार्ग दिखा दिया गया।
Roman Urdu (Maududi)Tumhare liye kufr ki taraf janey ka ab kya mauqa baki hai jabke tumko Allah ki aayat sunayi jaa rahi hain aur tumhare darmiyan uska Rasool maujood hai? Jo Allah ka daaman mazbooti ke saath thaamega woh zaroor raah e raast payega
Roman Urdu (Junagarhi)(go yeh zahir hai kay) tum kaisay kufur ker saktay ho? Bawajood yeh kay tum per Allah Taalaa ki aayaten parhi jati hain aur tum mein rasool (PBUH) mojood hain. Jo shaks Allah Taalaa (kay deen) ko mazboot thaam ley to bila shuba ussay raah-e-raast dikha di gaee
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारे लिए कुफ्र की तरफ जाने का अब क्या मौका बाकी है जब तुमको अल्लाह की आयत सुनाई जा रही है और तुम्हारे दरमियान उसका रसूल मौजूद है? जो अल्लाह का दामन मज़बूती के साथ थमेगा वो ज़रूर राह ए रास्ते पाएगा
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ حَقَّ تُقاتِهِ وَلا تَموتُنَّ إِلّا وَأَنتُم مُسلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अल्लाह से डरो, जैसा कि उससे डरना चाहिए तथा तुम्हारी मृत्यु न आए परंतु इस स्थिति में कि तुम मुसलमान हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, Allah se daro jaisa ke ussey darne ka haqq hai, tumko maut na aaye magar is haal mein ke tum Muslim ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Allah Taalaa say daro jitna uss say darna chahaiye aur dekho martay dum tak musalman hi rehna
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो जैसा के उसे डरने का हक़ है, तुमको मौत ना आए मगर इस हाल में तुम मुस्लिम हो
عَرَبِيوَاعتَصِموا بِحَبلِ اللَّهِ جَميعًا وَلا تَفَرَّقوا ۚ وَاذكُروا نِعمَتَ اللَّهِ عَلَيكُم إِذ كُنتُم أَعداءً فَأَلَّفَ بَينَ قُلوبِكُم فَأَصبَحتُم بِنِعمَتِهِ إِخوانًا وَكُنتُم عَلىٰ شَفا حُفرَةٍ مِنَ النّارِ فَأَنقَذَكُم مِنها ۗ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُم آياتِهِ لَعَلَّكُم تَهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह की रस्सी को सब मिलकर मज़बूती से पकड़ लो और विभेद में न पड़ो तथा अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करो कि तुम एक-दूसरे के शत्रु थे, फिर उसने तुम्हारे दिलों को जोड़ दिया और तुम उसकी कृपा से भाई-भाई हो गए। तथा तुम आग के गड्ढे के किनारे खड़े थे, तो उसने तुम्हें उससे बचा लिया। इसी प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी आयतों को खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि तुम मार्गदर्शन पा जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Sab milkar Allah ki rassi ko mazboot pakad lo aur tafraqe (divide) mein na pado. Allah ke us ehsan ko yaad rakkho jo usne tumpar kiya hai, tum ek dusre ke dusman thay, usne tumhare dil joad diye aur uske fazal o karam se tum bhai bhai ban gaye. Tum aag se bhare huey ek gadhe (pit) ke kinare khade thay, Allah ne tumko ussey bacha liya, is tarah Allah apni nishaniyan tumhare saamne roshan karta hai shayad ke in alamaton se tumhein apni falaah ka seedha raasta nazar aa jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ki rassi ko mill ker sab mazbooti say thaam lo aur phoot na dalo aur Allah Taalaa ki uss waqt ki nemta ko yaad kero jab tum aik doosray kay dushman thay to uss ney tumharay dilon mein ulfat daal di pus tum uss ki meharbani say bhai bhai hogaye aur tum aag kay garhay kay kinaray phonch chukay thay to uss ney tumhen bacha liya. Allah Taalaa issi tarah tumharay liye apni nishaniyan biyan kerta hai takay tum hidayat pao
Devnagri Urdu (Maududi)सब मिलकर अल्लाह की रस्सी को मज़बूत पकड़ लो और तफ़रक़े (फूट डालो) में ना पड़ो। अल्लाह के हमें एहसान को याद रखो जो उसने तुम पर किया है, तुम एक दूसरे के दुश्मन थे, उसने तुम्हारा दिल जोड़ दिया और उसके फजल ओ करम से तुम भाई-भाई बन गए। तुम आग से भरे हुए एक गधे (गड्ढे) के किनारे खड़े थे, अल्लाह ने तुमको उसे बचा लिया, इस तरह अल्लाह अपनी निशानियां तुम्हारे सामने रोशन करता है शायद इन आलमतों से तुम अपने फलाह का सीधा रास्ता नजर आ जाओ
عَرَبِيوَلتَكُن مِنكُم أُمَّةٌ يَدعونَ إِلَى الخَيرِ وَيَأمُرونَ بِالمَعروفِ وَيَنهَونَ عَنِ المُنكَرِ ۚ وَأُولٰئِكَ هُمُ المُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुममें एक समूह ऐसा होना चाहिए, जो भलाई की ओर बुलाए, अच्छे कामों का आदेश दे और बुरे कामों से रोके और वही सफलता प्राप्त करने वाले लोग हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tum mein kuch log to aisey zaroor hi rehne chahiye jo neki ki taraf bulayein, bhalayi ka hukum dein, aur burayion se roakte rahein, jo log yeh kaam karenge wahi falaah payenge
Roman Urdu (Junagarhi)Tum mein say aik jamat aisi honi chahaiye jo bhalaee ki taraf bulaye aur nek kaamon ka hukum keray aur burray kaamon say rokay aur yehil log falah aur nijat paney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)तुम में कुछ लोग तो ऐसे जरूर हाय रहने चाहिए जो नेकी की तरफ बुलाएं, भलाई का हुकुम दें, और बुराइयों से रोते रहें, जो लोग ये काम करेंगे वही फलाह पाएंगे
عَرَبِيوَلا تَكونوا كَالَّذينَ تَفَرَّقوا وَاختَلَفوا مِن بَعدِ ما جاءَهُمُ البَيِّناتُ ۚ وَأُولٰئِكَ لَهُم عَذابٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके समान न हो जाओ, जो संप्रदायों में बट गए, और उनके पास स्पष्ट निशानियाँ आ जाने के पश्चात आपस में मतभेद कर बैठे, और उन्हीं के लिए बड़ी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Kahin tum un logon ki tarah na ho jana jo firqon mein batt gaye aur khuli khuli wazeh hidayaat paney ke baad phir ikhtilafaat mein mubtila huey. Jinhon ne yeh rawish ikhtiyar ki woh us roz sakht saza payenge
Roman Urdu (Junagarhi)Tum unn logon ki tarah na hojana jinhon ney apney pass roshan daleelen aajaney kay baad bhi tafarrqa daala aur ikhtilaf kiya enhin logon kay liye bara azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)कहीं तुम उन लोगों की तरफ ना हो जाना जो फिरकों में बत्त गए और खुली खुली वजह हिदायत पाने के बाद फिर इख्तिलाफात में मुब्तिला हुए। जिन्हों ने ये रवीश इख्तियार की वो रोज सख्त सजा पाएंगे
عَرَبِييَومَ تَبيَضُّ وُجوهٌ وَتَسوَدُّ وُجوهٌ ۚ فَأَمَّا الَّذينَ اسوَدَّت وُجوهُهُم أَكَفَرتُم بَعدَ إيمانِكُم فَذوقُوا العَذابَ بِما كُنتُم تَكفُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन कुछ चेहरे उज्जवल होंगे और कुछ चेहरे काले होंगे। फिर जिनके चेहरे काले होंगे (उनसे कहा जाएगा :) क्या तुमने अपने ईमान के बाद कुफ़्र कर लिया थाॽ तो अब अपने कुफ़्र करने के कारण यातना का स्वाद चखो।
Roman Urdu (Maududi)Jabke kuch log surkhru (bright) hongey aur kuch ka mooh kala hoga, jinka mooh kala hoga (unse kaha jayega ke) niyamat e iman paney ke baad bhi tumne kaafirana rawayya ikhtiyar kiya? Accha to ab is kufraan e niyamat ke siley mein azaab ka maza chakkho
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din baaz chehray safaid hongay aur baaz siyah, siyah chehray walon (say kaha jayega) kay kiya tum ney eman laney kay baad kufur kiya? Abb apney kufur ka azab chakho
Devnagri Urdu (Maududi)जबके कुछ लोग सुरखरू (उज्ज्वल) होंगे और कुछ का मुंह काला होगा, जिनका मुंह काला होगा (उन्हें कहा जाएगा के) नियामत ए ईमान पाने के बाद भी तुमने काफिराना रवैय्या इख्तियार किया? अच्छा तो अब इस कुफ़्रान ए नियामत के सिली में अज़ाब का मजा चक्खो
عَرَبِيوَأَمَّا الَّذينَ ابيَضَّت وُجوهُهُم فَفي رَحمَةِ اللَّهِ هُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिनके चेहरे चमक रहे होंगे, वे अल्लाह की दया (जन्नत) में होंगे, वे सदैव उसी में रहेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jinke chehre roshan hongay to unko Allah ke daaman e rehmat mein jagah milegi aur hamesha woh isi haalat mein rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur safaid chehray walay Allah Taalaa ki rehmat mein dakhil hongay aur iss mein hamesha rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जिनके चेहरे रोशन होंगे तो उनको अल्लाह के दामन ए रहमत में जगह मिलेगी और हमेशा वो इसी हालात में रहेंगे
عَرَبِيتِلكَ آياتُ اللَّهِ نَتلوها عَلَيكَ بِالحَقِّ ۗ وَمَا اللَّهُ يُريدُ ظُلمًا لِلعالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ये अल्लाह की आयतें हैं, जो हम आपको हक़ के साथ सुना रहे हैं और अल्लाह संसार वालों पर अत्याचार नहीं करना चाहता।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Allah ke irshadaat hain jo hum tumhein theek theek suna rahey hain kyunke Allah duniya walon par zulm karne ka koi irada nahin rakhta
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi! Hum inn haqqani aayaton ki tilawat aap per ker rahey hain aur Allah Taalaa ka irada logon per zulm kerney ka nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ये अल्लाह के इरशाद हैं जो हम तुम्हें ठीक ठीक सुना रहे हैं क्योंकि अल्लाह दुनिया वालों पर ज़ुल्म करने का कोई इरादा नहीं रखता
عَرَبِيوَلِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۚ وَإِلَى اللَّهِ تُرجَعُ الأُمورُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है सब अल्लाह ही के लिए है और सारे मामले अल्लाह ही की ओर लौटाए जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Zameen o asmaan ki sari cheezon ka maalik Allah hai aur sarey maamlaat Allah hi ke huzoor pesh hotey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa hi kay liye hai jo kuch aasmanon aur zamin mein hai aur Allah Taalaa hi ki taraf tamam kaam lotaye jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन ओ आसमान की सारी चीज़ों का मालिक अल्लाह है और सारे ममलात अल्लाह ही के हुज़ूर पेश होते हैं
عَرَبِيكُنتُم خَيرَ أُمَّةٍ أُخرِجَت لِلنّاسِ تَأمُرونَ بِالمَعروفِ وَتَنهَونَ عَنِ المُنكَرِ وَتُؤمِنونَ بِاللَّهِ ۗ وَلَو آمَنَ أَهلُ الكِتابِ لَكانَ خَيرًا لَهُم ۚ مِنهُمُ المُؤمِنونَ وَأَكثَرُهُمُ الفاسِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम सर्वश्रेष्ठ समुदाय हो, जिसे लोगों के लिए निकाला गया है। तुम भलाई का आदेश देते हो और बुराई से रोकते हो और अल्लाह पर ईमान (विश्वास) रखते हो। और यदि किताब वाले ईमान लाते, तो उनके लिए बेहतर होता। उनमें कुछ ईमान वाले भी हैं, लेकिन उनमें अधिकतर लोग अवज्ञाकारी ही हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ab duniya mein woh behtareen giroh tum ho jisey Insano ki hidayat o Islah ke liye maidan mein laya gaya hai, tum neki ka hukum dete ho, badi (burayi) se roakte ho aur Allah par iman rakhte ho. Yeh ehle kitab iman latey to inhi ke haqq mein behtar tha, agarchey inmein kuch log imandaar bhi paye jatey hain magar inke beshtar (aksar) afraad nafarmaan hain
Roman Urdu (Junagarhi)Tum behtareen ummat ho jo logon kay liye peda ki gaee ho kay tum nek baaton ka hukum kertay ho aur buri baaton say roktay ho aur Allah Taalaa per eman rakhtay ho agar ehal-e-kitab bhi eman latay to unn kay liye behtar hota unn mein eman walay bhi hain lekin aksar to fasiq hain
Devnagri Urdu (Maududi)अब दुनिया में वो बेहतरीन गिरो ​​तुम हो जैसे इंसानों की हिदायत ओ इस्लाह के लिए मैदान में लाया गया है, तुम नेकी का हुकुम देते हो, बुरी (बुरायी) से रोते हो और अल्लाह पर ईमान रखते हो। ये एहले किताब ईमान लाते तो इन्हीं के हक में बेहतर था, अगर इनमें कुछ लोग इमानदार भी पाए जाते हैं मगर इनके बेहतर (अक्सर) अफ़राद नफ़रमान हैं
عَرَبِيلَن يَضُرّوكُم إِلّا أَذًى ۖ وَإِن يُقاتِلوكُم يُوَلّوكُمُ الأَدبارَ ثُمَّ لا يُنصَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे तुम्हें थोड़ा कष्ट पहुँचाने के सिवा कदापि कोई हानि नहीं पहुँचा सकेंगे और यदि वे तुमसे युद्ध करेंगे, तो तुम्हारे सामने पीठ फेरकर भाग खड़े होंगे। फिर उनकी कोई सहायता (भी) नहीं की जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Yeh tumhara kuch bigaad nahin sakte, zyada se zyada bas kuch sataa sakte hain, agar yeh tumse ladenge to muqable mein peet dikhayenge, phir aisey bebas honge ke kahin se inko madad na milegi
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh tumhen sataney kay siwa aur ziyada kuch zarar nahi phoncha saktay agar laraee kay moqa aajaye to peeth mor len gay phir madad na kiye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये तुम्हारा कुछ बिगाड़ नहीं सकता, ज़्यादा से ज़्यादा बस कुछ सता सकता है, अगर ये तुमसे लड़ेंगे तो मुकाबले में पीट दिखाएंगे, फिर ऐसी बेबस होंगे के कहीं से इनको मदद ना मिलेगी
عَرَبِيضُرِبَت عَلَيهِمُ الذِّلَّةُ أَينَ ما ثُقِفوا إِلّا بِحَبلٍ مِنَ اللَّهِ وَحَبلٍ مِنَ النّاسِ وَباءوا بِغَضَبٍ مِنَ اللَّهِ وَضُرِبَت عَلَيهِمُ المَسكَنَةُ ۚ ذٰلِكَ بِأَنَّهُم كانوا يَكفُرونَ بِآياتِ اللَّهِ وَيَقتُلونَ الأَنبِياءَ بِغَيرِ حَقٍّ ۚ ذٰلِكَ بِما عَصَوا وَكانوا يَعتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)इन (यहूदियों) पर हर जगह, अपमान थोप दिया गया है, (यह और बात है कि) अल्लाह की शरण अथवा लोगों की शरण में आ जाएँ, और ये अल्लाह के प्रकोप के पात्र हुए तथा इनपर दरिद्रता थोप दी गई। यह इस कारण हुआ कि ये अल्लाह की आयतों का इनकार करते थे और नबियों की अनाधिकार हत्या करते थे। यह इस कारण (भी) है कि इन्होंने अवज्ञा की और (धर्म की) सीमा का उल्लंघन करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh jahan bhi paye gaye inpar zillat ki maar hi padi, kahin Allah ke zimme ya Insaano ke zimme mein panaah mil gayi to yeh aur baat hai, yeh Allah ke gazab mein ghir chuke hain, inpar mohtaji o magloobi musallat kardi gayi hai (Allah's wrath, and humiliation is stuck upon them), aur yeh sabkuch sirf is wajah se hua hai ke yeh Allah ki aayat se kufr karte rahey aur inhon ne paigambaron ko na-haqq qatal kiya. Yeh inki nafarmaniyon aur zyadatiyon ka anjam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn per her jagah zillat ki maar pari illa yeh kay Allah Taalaa ki ya logon ki panah mein hon yeh ghazab-e-elahee kay mustahiq hogaye aur inn per faqeeri daal di gaee yeh iss liye kay yeh log Allah Taalaa ki aayaton say kufur kertay thay aur bey waja anbiya ko qatal kiya kertay thay yeh badla hai inn ki na farmaniyon aur ziyadtiyon ka
Devnagri Urdu (Maududi)ये जहां भी पये गए इनपर जिल्लत की मार ही पड़ी, कहीं अल्लाह के ज़िम्मे या इंसान के ज़िम्मे में पनाह मिल गई तो ये और बात है, ये अल्लाह के गजब में घिर चुके हैं, इनपर मोहताजी ओ मगलूबी मुसल्लत कर दी गई है (अल्लाह का प्रकोप और अपमान है) उन पर अटक गया), और ये सब कुछ सिर्फ वजह से हुआ है के ये अल्लाह की आयत से कुफ्र करते रहे और इन्होन ने पैगम्बरों को ना-हक़ क़तल किया। ये इनकी नफ़रमानियों और ज़्यादाातियों का अंजाम है
عَرَبِي۞ لَيسوا سَواءً ۗ مِن أَهلِ الكِتابِ أُمَّةٌ قائِمَةٌ يَتلونَ آياتِ اللَّهِ آناءَ اللَّيلِ وَهُم يَسجُدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे सभी समान नहीं हैं; किताब वालों में एक समूह (सत्य पर) स्थापित है, जो रात की घड़ियों में अल्लाह की आयतें पढ़ते हैं और वे सजदे करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar sarey ehle kitab yaksan nahin hain, inmein kuch log aisey bhi hain jo raah e raast par qayam hain, raaton ko Allah ki ayaat padhte hain aur uske aagey sajdarez hotey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh saray kay saray yaksan nahi bulkay inn ehal-e-kitab mein aik jamat (haq per) qaeem rehney wali bhi hai jo raaton kay waqt bhi kalam ullah ki tilawat kertay hain aur sajday bhi kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर सारे एहले किताब यक़सान नहीं हैं, इनमें कुछ लोग ऐसे भी हैं जो राह ए रास्ते पर क़याम हैं, रातों को अल्लाह की आयत पढ़ते हैं और उसके आगे सजदारेज़ होते हैं
عَرَبِييُؤمِنونَ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ وَيَأمُرونَ بِالمَعروفِ وَيَنهَونَ عَنِ المُنكَرِ وَيُسارِعونَ فِي الخَيراتِ وَأُولٰئِكَ مِنَ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे अल्लाह तथा अंतिम दिन (क़यामत) पर ईमान रखते हैं और भलाई का आदेश देते हैं और बुराई से रोकते हैं और भलाई के कामों में जल्दी करते हैं और वही अच्छे लोगों में से हैं।
Roman Urdu (Maududi)Allah aur roz e aakhirt par iman rakhte hain, neki ka hukum dete hain, buraiyon se roakte hain aur bhalayi ke kaamon mein sargarm rehte hain, yeh saleh log hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh Allah Taalaa per aur qayamat kay din per eman bhi rakhtay hain bhalaiyon ka hukum kertay hain aur buraiyon say roktay hain aur bhalaee kay kaamon mein jaldi kertay hain. Yeh nek bakht logon mein say hain
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखते हैं, नेकी का हुकुम देते हैं, बुराइयों से रोते हैं और भलाई के कामों में सरगर्म रहते हैं, ये साले लोग हैं
عَرَبِيوَما يَفعَلوا مِن خَيرٍ فَلَن يُكفَروهُ ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ بِالمُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे जो भी भलाई करेंगे, उसकी उपेक्षा नहीं की जाएगी और अल्लाह परहेज़गारों को भली-भाँति जानता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo neki bhi yeh karenge uski na-qadari na ki jayegi, Allah parheizgaar logon ko khoob jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh jo kuch bhi bhalaiyan keren unn ki na qadri na ki jaye gi aur Allah Taalaa perhezgaron ko khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जो नेकी भी ये करेंगे उसकी ना-क़ादरी ना की जाएगी, अल्लाह परहेज़गार लोगों को खूब जानता है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا لَن تُغنِيَ عَنهُم أَموالُهُم وَلا أَولادُهُم مِنَ اللَّهِ شَيئًا ۖ وَأُولٰئِكَ أَصحابُ النّارِ ۚ هُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन्होंने कुफ़्र किया, उन्हें अल्लाह (के अज़ाब) से (बचाने में) न उनके धन कुछ काम आएँगे, न उनकी संतान। तथा वही लोग नरकवासी हैं जो उसमें हमेशा रहेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jinhon ne kufr ka rawayya ikhtiyar kiya to Allah ke muqable mein unko na unka maal kuch kaam dega na aulad, woh to aag mein janey waley log hain aur aag hi mein hamesha rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Kafiron ko unn kay maal aur unn ki aulad Allah kay haan kuch kaam na aayen gi yeh to jahannumi hain jo hamesha issi mein paray rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जिन्होन ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया तो अल्लाह के मुकाबले में उनको ना उनका माल कुछ काम देगा ना औलाद, वो तो आग में जाने वाले लोग हैं और आग ही में हमेशा रहेंगे
عَرَبِيمَثَلُ ما يُنفِقونَ في هٰذِهِ الحَياةِ الدُّنيا كَمَثَلِ ريحٍ فيها صِرٌّ أَصابَت حَرثَ قَومٍ ظَلَموا أَنفُسَهُم فَأَهلَكَتهُ ۚ وَما ظَلَمَهُمُ اللَّهُ وَلٰكِن أَنفُسَهُم يَظلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे इस सांसारिक जीवन में जो कुछ भी ख़र्च करते हैं, वह उस हवा के समान है, जिसमें पाला (अत्यधिक ठंड) हो, जो किसी ऐसी क़ौम की खेती को लग जाए, जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किया हो और उसको नष्ट कर दे। तथा अल्लाह ने उनपर अत्याचार नहीं किया, बल्कि वे स्वयं अपने आप पर अत्याचार करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jo kuch woh apni is duniya ki zindagi mein kharch kar rahey hain uski misaal us hawa ki si hai jismein pala ho (accompanied with frost) aur woh un logon ki kheti par chale jinhon ne apne upar aap zulm kiya hai aur usey barbaad karke rakhde, Allah ne inpar zulm nahin kiya, darhaqeeqat yeh khud apne upar zulm kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kuffaar jo kharach ikhraajaat keren uss ki misal yeh hai kay aik tund hawa chali jiss mein pala tha jo zalimon ki kheti per para aur ussay tehus nehus ker diya. Allah Taalaa ney unn per zulm nahi kiya bulkay woh khud apni janon per zulm kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)जो कुछ वो अपनी इस दुनिया की जिंदगी में खर्च कर रहे हैं उसकी मिसाल हमें हवा की सी है जिसमें पाला हो (ठंढ के साथ) और वो उन लोगों की खेती पर चले जिन्होन ने अपने ऊपर आप जुल्म किया है और उसे बरबाद करके रखदे, अल्लाह ने इनपर जुल्म नहीं किया, दरहकीकत ये खुद अपने ऊपर जुल्म कर रहे हैं
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَتَّخِذوا بِطانَةً مِن دونِكُم لا يَألونَكُم خَبالًا وَدّوا ما عَنِتُّم قَد بَدَتِ البَغضاءُ مِن أَفواهِهِم وَما تُخفي صُدورُهُم أَكبَرُ ۚ قَد بَيَّنّا لَكُمُ الآياتِ ۖ إِن كُنتُم تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! तुम अपनों के सिवा किसी दूसरे को अपना अंतरंग मित्र न बनाओ, वे तुम्हें बर्बाद करने में कोई कमी नहीं करते। उन्हें वही बात भाती है, जिससे तुम्हें कष्ट पहुँचे। उनके मुखों से शत्रुता प्रकट हो चुकी है तथा जो उनके दिल छुपा रखे हैं, वह इससे बढ़कर है। हमने तुम्हारे लिए आयतों का वर्णन कर दिया है, यदि तुम समझबूझ रखते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, apni jamaat ke logon ke siwa dusron ko apna raazdaar na banao, woh tumhari kharabi ke kisi mauqe se faiyda uthane mein nahin chukte, tumhein jis cheez se nuqsan pahunche wahi unko mehboob hai, unke dil ka bugz unke mooh se nikla padhta hai aur jo kuch woh apne seeno mein chupaye huey hain woh issey shadeed-tar hai. Humne tumhein saaf saaf hidayaat de di hain, agar tum aqal rakhte ho (to unsey taaluq rakhne mein ehtiyat bartoge)
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tum apna dili dost eman walon kay siwa kissi ko na banao. (tum to) nahi dekhtay doosray log tumhari tabahi mein koi kasar utha nahi rakhtay woh to chahtay hain kay tum dukh mein paro inn ki adawat to khud inn ki zaban say zahir ho chuki hai aur jo inn kay seenon mein posheeda hai woh boht ziyada hai hum ney tumharay liye aayaten biyan ker den
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगन जो इमान लाए हो, अपनी जमात के लोगों के सिवा दूसरे को अपना राज़दार ना बनाओ, वो तुम्हारी बर्बादी के किसी मौके से फ़ायदा उठाने में नहीं छूटते, तुम्हें जिस चीज़ से नुक्सान मिले वही उनको मेहबूब है, उनके दिल का बुज़ुर्ग उनके मुँह से निकला पढ़ता है और जो कुछ वो अपने सीने में छुपाए हुए हैं वो इसी शेडेड-टार है। हमने तुम्हें साफ-साफ हिदायत दे दी है, अगर तुम अक्ल रखते हो (तो उनसे तालुक रखने में एहतियत बरतोगे)
عَرَبِيها أَنتُم أُولاءِ تُحِبّونَهُم وَلا يُحِبّونَكُم وَتُؤمِنونَ بِالكِتابِ كُلِّهِ وَإِذا لَقوكُم قالوا آمَنّا وَإِذا خَلَوا عَضّوا عَلَيكُمُ الأَنامِلَ مِنَ الغَيظِ ۚ قُل موتوا بِغَيظِكُم ۗ إِنَّ اللَّهَ عَليمٌ بِذاتِ الصُّدورِ
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हिन्दी (Al-Omari)देखो तुम तो उनसे प्रेम करते हो, परंतु वे तुमसे प्रेम नहीं करते और तुम सभी पुस्तकों पर ईमान रखते हो, औ (उनका हाल यह है कि) वे जब तुमसे मिलते हैं, तो कहते हैं कि हम ईमान लाए हैं और जब वे अकेले में होते हैं, तो तुमपर क्रोध के मारे उंगलियां चबाते हैं। कह दो कि अपने क्रोध में मर जाओ। निःसंदेह अल्लाह सीनों के भेद को जानता है।
Roman Urdu (Maududi)Tum unse muhabbat rakhte ho magar woh tumse muhabbat nahin rakhte, halaanke tum tamaam kutoob e asmaani ko maante ho. Jab woh tumse milte hain to kehte hain ke humne bhi (tumhare Rasool aur tumhari kitab ko) maan liya hai, magar jab juda hotey hain to tumhare khilaf unke gaiz o gazab ka yeh haal hota hai ke apni ungliyan chabane lagte hain. Unsey kehdo ke apne gussey mein aap jal maro, Allah dilon ke chupey huey raaz tak jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar aqal mand ho (to ghor kero) haan tum to enhen chahtay ho aur woh tum say mohabbat nahi rakhtay tum poori kitab ki mantay ho (woh nahi mantay phir mohabbat kaisi?) yeh tumharay samney to apney eman ka iqrar kertay hain lekin tanahi mein maaray gussay kay ungliyan chabatay hain kehdo kay apney gussay hi mein marr jao Allah Taalaa dilon kay raazon ko bakhoobi janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम उन्हें मुहब्बत रखते हो मगर वो तुमसे मुहब्बत नहीं रखते, हलांके तुम तमाम कुतुब ए आसमानी को मानते हो। जब वो तुमसे मिलते हैं तो कहते हैं कि हमने भी (तुम्हारे रसूल और तुम्हारी किताब को) मान लिया है, मगर जब जुदा होते हैं तो तुम्हारे खिलाफ उनके गाने या गजब का ये हाल होता है कि अपनी उंगलियां चबाने लगते हैं। उनसे कहदो के अपने गुस्से में आप जल मारो, अल्लाह दिलों के छुपे हुए राज़ तक जानता है
عَرَبِيإِن تَمسَسكُم حَسَنَةٌ تَسُؤهُم وَإِن تُصِبكُم سَيِّئَةٌ يَفرَحوا بِها ۖ وَإِن تَصبِروا وَتَتَّقوا لا يَضُرُّكُم كَيدُهُم شَيئًا ۗ إِنَّ اللَّهَ بِما يَعمَلونَ مُحيطٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि तुम्हारा कुछ भला हो, तो उन्हें बुरा लगता है और यदि तुम्हारा कुछ बुरा हो जाए, तो वे उससे प्रसन्न होते हैं। और यदि तुम धैर्य करते रहे और अल्लाह से डरते रहे, तो उनका छल तुम्हें कोई हानि नहीं पहुँचाएगा। निःसंदेह अल्लाह उनके सभी कार्यों से अवगत है।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara bhala hota hai to unko bura maloom hota hai, aur tumpar koi museebat aati hai to yeh khush hotey hain, magar inki koi tadbeer tumhare khilaf kaargar nahin ho sakti basharth yeh ke tum sabr se kaam lo aur Allah se darr kar kaam karte raho. Jo kuch yeh kar rahey hain Allah uspar haawi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhen agar bhalaee milay to yeh na khush hotay hain haan! Agar buraee phonchay to khush hotay hain tum agar sabar kero aur perhezgari kero to inn ka makar tumhen kuch nuksan na dey ga. Allah Taalaa ney inn kay aemaal ka ehata ker rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा भला होता है तो उनको बुरा मालूम होता है, और तुमपर कोई मुसीबत आती है तो ये खुश होते हैं, मगर इनकी कोई तदबीर तुम्हारे खिलाफ कारगर नहीं हो सकती बशरथ ये के तुम सब्र से काम लो और अल्लाह से डर कर काम करते रहो। जो कुछ ये कर रहा है अल्लाह उसपर हावी है
عَرَبِيوَإِذ غَدَوتَ مِن أَهلِكَ تُبَوِّئُ المُؤمِنينَ مَقاعِدَ لِلقِتالِ ۗ وَاللَّهُ سَميعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ नबी! वह समय याद करो) जब आप अपने घर से निकले, ईमान वालों को युद्ध के मोर्चों पर नियुक्त कर रहे थे तथा अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey paigambar! Musalmano ke samne us mauqe ka zikr karo) jab tum subah sawere apne ghar se nikle thay aur ( Uhud ke maidan mein) musalmaano ko jung ke liye ja-baja mamoor (placed the believers in battle arrays) kar rahey thay , Allah saari baatein sunta hai aur woh nihayat bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi! Uss waqt ko bhi yaad kero jab subha hi subha aap apney ghar say nikal ker musalmanon ko maidan-e-jang mein laraee kay morchon mein bitha rahey thay Allah Taalaa sunney janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ पैगम्बर! मुसलमानों के सामने हमें मौके का जिक्र करो) जब तुम सुबह सवेरे अपने घर से निकले थे और (उहुद के मैदान में) मुसलमानों को जंग के लिए जा-बाजा मामूर (ईमानवालों को युद्ध की कतार में खड़ा कर दिया) कर रहे थे, अल्लाह सारी बातें सुनते हैं और वो निहायत बाख़बर है
عَرَبِيإِذ هَمَّت طائِفَتانِ مِنكُم أَن تَفشَلا وَاللَّهُ وَلِيُّهُما ۗ وَعَلَى اللَّهِ فَليَتَوَكَّلِ المُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद करो) जब तुम्हारे दो समूहों ने साहसहीनता दिखाने (पीछे हटने) का इरादा किया और अल्लाह उनका समर्थक व सहायक था, तथा ईमान वालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jab tum mein se do giroh buzdili dikhane par aamaada ho gaye thay, halaanke Allah unki madad par maujood tha aur mominon ko Allah hi par bharosa rakhna chahiye
Roman Urdu (Junagarhi)Jab tumhari do jamaten pust himmati ka irada ker chuki thin Allah Taalaa unn ka wali aur madadgar hai. Aur ussi ki pak zaat per mominon ko bharosa rakhna chahaiye
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जब तुम में से दो गिरो ​​बुज़दिली दिखाने पर आमादा हो गए थे, हलाँके अल्लाह उनकी मदद पर मौजूद था और मोमिनों को अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए
عَرَبِيوَلَقَد نَصَرَكُمُ اللَّهُ بِبَدرٍ وَأَنتُم أَذِلَّةٌ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ لَعَلَّكُم تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह बद्र (के युद्ध) में तुम्हारी सहायता कर चुका है, जबकि तुम कमज़ोर थे। अतः अल्लाह से डरो, ताकि तुम उसके प्रति आभारी हो सको।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir issey pehle jung e badr mein Allah tumhari madad kar chuka tha , halaanke us waqt tum bahut kamzoar thay, lihaza tumko chahiye ke Allah ki nashukri se bacho, umeed hai ke ab tum shukarguzar banoge
Roman Urdu (Junagarhi)Jang-e-badar mein Allah Taalaa ney ain uss waqt tumhari madad farmaee thi jabkay tum nihayat giri hui halat mein thay iss liye Allah hi say daro!(na kiss aur say) takay tumhen shukar guzari ki tofiq ho
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर इसी पहले जंग ए बद्र में अल्लाह तुम्हारी मदद कर चूका था, हलाँके हमें वक्त तुम बहुत कमज़ार थे, लिहाज़ा तुमको चाहिए के अल्लाह की नाशुक्र से बचो, उम्मीद है के अब तुम शुक्रगुज़ार बनोगे
عَرَبِيإِذ تَقولُ لِلمُؤمِنينَ أَلَن يَكفِيَكُم أَن يُمِدَّكُم رَبُّكُم بِثَلاثَةِ آلافٍ مِنَ المَلائِكَةِ مُنزَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी! वह समय भी याद करें) जब आप ईमान वालों से कह रहे थे : क्या तुम्हारे लिए यह काफ़ी नहीं है कि तुम्हारा पालनहार (आकाश से) तीन हज़ार फ़रिश्ते उतारकर तुम्हारी सहायता करेॽ
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jab tum momino se keh rahey thay, “ kya tumhare liye yeh baat kafi nahin ke Allah teen hazaar farishte utar kar tumhari madad karey?”
Roman Urdu (Junagarhi)(aur yeh shukar guzari baees-e-nusrat-o-imdad ho) jab aap momino ko tasalli dey rahey thay kiya aasman say teen hazar farishtay utaar ker Allah Taalaa ka tumhari madad kerna tumhen kafi na hoga
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जब तुम मोमिनो से कह रहे थे, “क्या तुम्हारे लिए ये बात काफ़ी नहीं के अल्लाह तीन हज़ार फ़रिश्ते उतार कर तुम्हारी मदद करेगी?”
عَرَبِيبَلىٰ ۚ إِن تَصبِروا وَتَتَّقوا وَيَأتوكُم مِن فَورِهِم هٰذا يُمدِدكُم رَبُّكُم بِخَمسَةِ آلافٍ مِنَ المَلائِكَةِ مُسَوِّمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्यों नहीं, यदि तुम धैर्य से काम लो और अल्लाह से डरो और फिर ऐसा हो कि वे (दुश्मन) उसी घड़ी तुमपर चढ़ आएँ, तो तुम्हारा पालनहार (तीन नहीं, बल्कि) पाँच हज़ार चिह्न लगे फ़रिश्तों द्वारा तुम्हारी मदद करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Beshak, Agar tum sabr karo aur khuda se darte huey kaam karo to jis aan dushman tumhare upar chadh kar aayenge usi aan tumhara Rubb (teen hazaar nahin) paanch hazaar saahib e nishan farishton se tumhari madad karega
Roman Urdu (Junagarhi)Kiyon nahi bulkay agar tum sabar-o-perhezgari kero aur yeh log ussi dum tumharay pass aajayen to tumhara rab tumhari imdad paanch hazar farishton say keray ga jo nishandaar hongay
Devnagri Urdu (Maududi)बेश्क, अगर तुम सब्र करो और खुदा से डरते हुए काम करो तो जिस आन दुश्मन तुम्हारे ऊपर चढ़ कर आएंगे उसकी आन तुम्हारा रब (तीन हजार नहीं) पांच हजार साहब ए निशान फरिश्तों से तुम्हारी मदद करेगा
عَرَبِيوَما جَعَلَهُ اللَّهُ إِلّا بُشرىٰ لَكُم وَلِتَطمَئِنَّ قُلوبُكُم بِهِ ۗ وَمَا النَّصرُ إِلّا مِن عِندِ اللَّهِ العَزيزِ الحَكيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ने इस (मदद) को तुम्हारे लिए केवल शुभ सूचना बनाया है और ताकि तुम्हारे दिल उससे संतुष्ट हो जाएँ और सहायता तो केवल अल्लाह ही के पास से आती है, जो प्रभुत्वशाली, हिकमत वाला (तत्वदर्शी) है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh baat Allah ne tumhein isliye bata di hai ke tum khush ho jao aur tumhare dil mutmaeen ho jayein, fatah o nusrat jo kuch bhi hai Allah ki taraf se hai jo badi quwwat wala aur dana o beena hai (the All-Mighty, the All-Wise)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh to mehaz tumharay dil ki khuwaish aur itminan-e-qalb kay liye hai werna madad to Allah hi ki taraf say hai jo ghalib aur hikmaton wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये बात अल्लाह ने तुम्हें दी है इसलिए बता दी है कि तुम खुश हो जाओ और तुम्हारे दिल मुतमीन हो जाएं, फतह ओ नुसरत जो कुछ भी है अल्लाह की तरफ से है जो बड़ी कुव्वत वाला और दाना ओ बीना है (सर्व-शक्तिशाली, सर्व-बुद्धिमान)
عَرَبِيلِيَقطَعَ طَرَفًا مِنَ الَّذينَ كَفَروا أَو يَكبِتَهُم فَيَنقَلِبوا خائِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि वह काफ़िरों के एक हिस्से को काट दे या उन्हें अपमानित कर दे, फिर वे विफल होकर वापस हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)(Aur yeh madad woh tumhein isliye dega) taa-ke kufr ki raah chalne waalon ka ek bazu kaat de, ya unko aisi zaleel shikast de ke woh na-muradi ke saath paspan ho jayein
Roman Urdu (Junagarhi)(iss imdad-e-elahee ka maqsad yeh tha kay Allah ) kafiron ki aik jamat ko kaat dey ya unhen zaleel ker dalay aur (saray kay saray) nu murad ho ker wapis chalay jayen
Devnagri Urdu (Maududi)(और ये मदद वो तुम्हें इसलिए देगा) ता-के कुफ्र की राह चलने वालों का एक बाज़ू काट दे, या उनको ऐसी ज़लील शिकस्त दे के वो ना-मुरादी के साथ पसंद हो जाएँ
عَرَبِيلَيسَ لَكَ مِنَ الأَمرِ شَيءٌ أَو يَتوبَ عَلَيهِم أَو يُعَذِّبَهُم فَإِنَّهُم ظالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) इस मामले में आपको कोई अधिकार नहीं, अल्लाह चाहे तो उनकी तौबा क़बूल करे या उन्हें दंड दे, क्योंकि वे अत्याचारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey paigambar) faisle ke ikhtiyaraat mein tumhara koi hissa nahin, Allah ko ikhtiyar hai chahey unhein maaf karey chahey saza de, kyunke woh zalim hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aey payghumbar! Aap kay ikhtiyar mein kuch nahi Allah Taalaa chahaye to unn ki tauba qabool keray ya azab dey kiyon kay woh zalim hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ पैगम्बर) फैसले के इख्तियारात में तुम्हारा कोई हिसा नहीं, अल्लाह को इख्तियार है चाहे उन्हें माफ करे चाहे सज़ा दे, क्यूँके वो ज़ालिम हैं
عَرَبِيوَلِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۚ يَغفِرُ لِمَن يَشاءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشاءُ ۚ وَاللَّهُ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है, सब अल्लाह ही का है। वह जिसे चाहे क्षमा कर दे और जिसे चाहे यातना दे, तथा अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Zameen aur asmaano mein jo kuch hai uska Maalik Allah hai, jisko chahe baksh de aur jisko chahe azaab de, woh maaf karne wala aur raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmanon aur zamin mein jo kuch hai sab Allah hi ka hai woh jissay chahaye bakshay aur jissay chahaye azab keray Allah Taalaa bakshish kerney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन और आसमान में जो कुछ है उसका मालिक अल्लाह है, जिसको चाहे बख्श दे और जिसको चाहे अज़ाब दे, वो माफ़ करने वाला और रहीम है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَأكُلُوا الرِّبا أَضعافًا مُضاعَفَةً ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ لَعَلَّكُم تُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! कई-कई गुणा करके ब्याज न खाओ। तथा अल्लाह से डरो, ताकि तुम सफल हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho , yeh badhta aur chadhta sood (usury) khana chodh do aur Allah se daro, umeed hai ke falaah paogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Barha charha ker sood na khao aur Allah Taalaa say daro takay tumhen nijat milay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ये बढ़ता और चढ़ता सूद (सूदखोरी) खाना छोड़ दो और अल्लाह से डरो, उम्मीद है के फलाह पाओगे
عَرَبِيوَاتَّقُوا النّارَ الَّتي أُعِدَّت لِلكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उस आग से डरो (बचो), जो काफ़िरों के लिए तैयार की गई है।
Roman Urdu (Maududi)Us aag se bacho jo kafiron ke liye muhaiyya ki gayi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss aag say daro jo kafiron kay liye tayyar ki gaee hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमसे आग से बचो जो काफिरों के लिए मुहय्या की गई है
عَرَبِيوَأَطيعُوا اللَّهَ وَالرَّسولَ لَعَلَّكُم تُرحَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह और रसूल का आज्ञापालन करो, ताकि तुमपर दया की जाए।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah aur Rasool ka hukum maan lo, tawaqqu hai ke tumpar reham kiya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah aur uss kay rasool ki farmanbardari kero takay tum per raham kiya jaye
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह और रसूल का हुकुम मान लो, तवक्कू है के तुमपर रहम किया जाएगा
عَرَبِي۞ وَسارِعوا إِلىٰ مَغفِرَةٍ مِن رَبِّكُم وَجَنَّةٍ عَرضُهَا السَّماواتُ وَالأَرضُ أُعِدَّت لِلمُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अपने पालनहार की क्षमा और उस स्वर्ग की ओर तेज़ी से बढ़ो, जिसकी चौड़ाई आकाशों तथा धरती के बराबर है। वह अल्लाह से डरने वालों के लिए तैयार किया गया है।
Roman Urdu (Maududi)Daud kar chalo us raah par jo tumhare Rubb ki bakshish aur us jannat ki taraf jati hai jiski wusat (vastness) zameen aur asmaano jaisi hai, aur woh un khuda-tars logon ke liye muhaiyaa ki gayi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney rab ki bakshish ki taraf aur uss jannat ki taraf doro jiss ka araz aasamanon aur zamin kay barabar hai jo perhezgaron kay liye tayyar ki gaee hai
Devnagri Urdu (Maududi)दाऊद कर चलो उस राह पर जो तुम्हारे रब की बख्शीश और उस पर जन्नत की तरफ जाती है जिसकी वुसअत (विशालता) ज़मीन और आसमानो जैसी है, और वो उन खुदा-तरस लोगों के लिए मुहैया की गई
عَرَبِيالَّذينَ يُنفِقونَ فِي السَّرّاءِ وَالضَّرّاءِ وَالكاظِمينَ الغَيظَ وَالعافينَ عَنِ النّاسِ ۗ وَاللَّهُ يُحِبُّ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो कठिनाई और आसानी की प्रत्येक स्थिति में (अल्लाह के मार्ग में) खर्च करते हैं, तथा ग़ुस्सा पी जाते हैं और लोगों को क्षमा कर देते हैं। और अल्लाह ऐसे अच्छे कार्य करने वालों से प्रेम करता है।
Roman Urdu (Maududi)Jo har haal mein apne maal kharch karte hain khwah badh haal hon ya khush haal , jo gussey ko pee jatey hain aur dusron ke kasoor maaf kardete hain, aisey neik log Allah ko bahut pasand hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log aasani mein aur sakhti kay moqay per bhi Allah kay rastay mein kharach kertay hain gussa peenay walay aur logon say dar guzar kerney walay hain Allah Taalaa unn neko kaaron say mohabbat kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो हर हाल में अपने माल खर्च करते हैं ख़्वाह बढ़ हाल होन या ख़ुश हाल, जो गुस्से को पी जाते हैं और दूसरों के कसूर माफ करते हैं, ऐसे लोग अल्लाह को बहुत पसंद हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ إِذا فَعَلوا فاحِشَةً أَو ظَلَموا أَنفُسَهُم ذَكَرُوا اللَّهَ فَاستَغفَروا لِذُنوبِهِم وَمَن يَغفِرُ الذُّنوبَ إِلَّا اللَّهُ وَلَم يُصِرّوا عَلىٰ ما فَعَلوا وَهُم يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे ऐसे लोग हैं कि जब उनसे कोई जघन्य पाप हो जाता है या वे अपने ऊपर अत्याचार कर कर बैठते हैं, तो उन्हें अल्लाह याद आ जाता है। फिर वे अपने पापों के लिए क्षमा माँगते हैं, और अल्लाह के सिवा कौन है जो पापों का क्षमा करने वाला होॽ और वे अपने किए पर जान बूझकर अड़े नहीं रहते।
Roman Urdu (Maududi)Aur jinka haal yeh hai ke agar kabhi koi fahash kaam unse sarzad ho jata hai ya kisi gunaah ka irtikaab karke woh apne upar zulm kar baithte hain to ma’an Allah unhein yaad aa jata hai aur ussey woh apne kasooron ki maafi chahte hain, kyunke Allah ke siwa aur kaun hai jo gunaah maaf kar sakta ho aur woh deedha o daanista(wilfully persist) apne kiye par israr nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Jab unn say koi na shaista kaam hojaye ya koi gunah ker bethen to foran Allah ka zikar aur apney gunahon kay liye istaghfaar kertay hain fil waqey Allah Taalaa kay siwa aur kaun gunahon ko baksh sakta hai? Aur woh log ba wajood ilm kay kissi buray kaam per arr nahi jatay
Devnagri Urdu (Maududi)और जिनका हाल ये है कि अगर कभी कोई फ़हाश काम उनसे सरज़द हो जाता है या किसी गुनाह का इर्तिक़ाब करके वो अपने ऊपर ज़ुल्म कर बैठते हैं तो मान अल्लाह उन्हें याद आ जाता है और उसे वो अपने कसूरों की माफ़ी चाहते हैं, क्योंकि अल्लाह के सिवा और कौन है जो गुनाह माफ़ कर सकता है और वो दीधा ओ दानिस्ता (जानबूझकर कायम रहेगा) अपने किये पर इसरार नहीं करते
عَرَبِيأُولٰئِكَ جَزاؤُهُم مَغفِرَةٌ مِن رَبِّهِم وَجَنّاتٌ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها ۚ وَنِعمَ أَجرُ العامِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वही लोग हैं जिनका बदला उनके पालनहार की ओर से क्षमा तथा ऐसे बाग़ हैं जिनके नीचे से नहरें बहती होंगी। उनमें वे सदैव रहेंगे। औ क्या ही अच्छा बदला है नेक काम करने वालों का।
Roman Urdu (Maududi)Aisey logon ki jazaa unke Rubb ke paas yeh hai ke woh unko maaf kardega aur aise baaghon mein unhein daakil karega jinke nichey nehrein bethi hongi aur wahan woh hamesha rahenge. Kaisa accha badla hai neik amal karne walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Enhin kay badla unn kay rab ki taraf say maghfirat hai aur jannaten hain jin kay neechay nehren behti hain jin mein woh hamesha rahen gay inn nek kaamon kay kerney walon ka sawab kiya hi acha hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसे लोगों की जजा उनके रब के पास ये है के वो उनको माफ़ कर देगा और ऐसे बाघों में उन्हें डॉक्टर करेगा जिनके बारे में आला नेहरेन बेथी होगी और वहां वो हमेशा रहेंगे। कैसा अच्छा बदला है नई अमल करने वालों के लिए
عَرَبِيقَد خَلَت مِن قَبلِكُم سُنَنٌ فَسيروا فِي الأَرضِ فَانظُروا كَيفَ كانَ عاقِبَةُ المُكَذِّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुमसे पहले भी समान परंपराएं (परिस्थितियाँ) गुज़र चुकी हैं। इसलिए तुम धरती में चलो-फिरो और देखो कि झुठलाने वालों का अंत कैसे हुआॽ
Roman Urdu (Maududi)Tumse pehle bahut se daur guzar chuke hain, zameen mein chal phir kar dekhlo ke un logon ka kya anjaam hua jinhon ne (Allah ke ehkam o hidayat ko) jhutlaya
Roman Urdu (Junagarhi)Tum say pehlay bhi aisay waqiyaat guzar chukay hain so zamin mein chal phir ker dekh lo kay (aasmani taleem kay) jhutlaney walon ka kiya anjam hua
Devnagri Urdu (Maududi)तुमसे पहले बहुत से दौर गुजर चुके हैं, ज़मीन में चल फिर कर देखलो के उन लोगों का क्या अंजाम हुआ जिन्होन ने (अल्लाह के एहकाम ओ हिदायत को) झूठलाया
عَرَبِيهٰذا بَيانٌ لِلنّاسِ وَهُدًى وَمَوعِظَةٌ لِلمُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह (क़ुरआन) लोगों के लिए (सत्य का) वर्णन और (अल्लाह का) भय रखने वालों के लिए मार्गदर्शन और उपदेश है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh logon ke liye ek saaf aur sareeh tambeeh hai aur jo Allah se darte hon unke liye hidayat aur naseehat
Roman Urdu (Junagarhi)Aam logon kay liye to yeh (quran) biyan hai aur perhezgari kay liye hidayat-o-naseehat hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोगों के लिए एक साफ और सारी तम्बीह है और जो अल्लाह से डरता हूं उनके लिए हिदायत और हिदायत
عَرَبِيوَلا تَهِنوا وَلا تَحزَنوا وَأَنتُمُ الأَعلَونَ إِن كُنتُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम कमज़ोर न बनो और न ही शोक करो। और तुम ही सर्वोच्च रहोगे, यदि तुम ईमान वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Dil shikasta na ho, gham na karo , tum hi galib rahoge agar tum momin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Tum na susti kero aur na ghumgeen ho tum hi ghalib raho gay agar tum eman daar ho
Devnagri Urdu (Maududi)दिल शिकस्त ना हो, गम ना करो, तुम ही गालिब रहोगे अगर तुम मोमिन हो
عَرَبِيإِن يَمسَسكُم قَرحٌ فَقَد مَسَّ القَومَ قَرحٌ مِثلُهُ ۚ وَتِلكَ الأَيّامُ نُداوِلُها بَينَ النّاسِ وَلِيَعلَمَ اللَّهُ الَّذينَ آمَنوا وَيَتَّخِذَ مِنكُم شُهَداءَ ۗ وَاللَّهُ لا يُحِبُّ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि तुम्हें आघात पहुँचा है, तो उन लोगों को भी इसी के समान आघात पहुँच चुका है। तथा इन दिनों को हम लोगों के बीच फेरते रहते हैं। और ताकि अल्लाह उन लोगों को जान ले जो ईमान वाले हैं, और तुममें से कुछ लोगों को शहादत नसीब करे। और अल्लाह अत्याचार करने वालों को पसंद नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Is waqt agar tumhein chot(wound) lagi hai to issey pehle aisi hi chot tumhare mukhalif fareeq ko bhi lag chuki hai. Yeh to zamane ke nasheb o faraaz hain jinhein hum logon ke darmiyan gardish dete rehte hain, tumpar yeh waqt isliye laya gaya ke Allah dekhna chahta tha ke tum mein sacchey momin kaun hain, aur un logon ko chant lena chahta tha jo waqayi (raasti ke) gawaah hon, kyunke zalim log Allah ko pasand nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum zakhmi huye ho to tumharay mukhalif log bhi to aisay hi zakhmi ho chukay hain hum inn dino ko logon kay darmiyan adaltay badaltay rehtay hain. (shikast-e-ohod) iss liye thi kay Allah Taalaa eman walon ko zahir ker dey aur tum mein say baaz ko shahdat ka darja ata farmaye Allah Taalaa zalimon say mohabbat nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वक्त अगर तुम्हें चोट लगी है तो इसे पहले ऐसी ही चोट तुम्हारे मुखालिफ फ़रीक़ को भी लग चुकी है। ये तो ज़माने के नशीब ओ फ़राज़ हैं जिनमें हम लोगों के दरमियान गर्दिश देते रहते हैं, तुम ये वक्त इस तरह लाया गया के अल्लाह देखना चाहता था के तुम में सच्चे मोमिन कौन हैं, और उन लोगों को जपना चाहता था जो वकायी (रास्ती के) गवाही हो, क्योंके ज़ालिम लोग अल्लाह को पसंद नहीं हैं
عَرَبِيوَلِيُمَحِّصَ اللَّهُ الَّذينَ آمَنوا وَيَمحَقَ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा ताकि अल्लाह ईमान वालों को विशुद्ध कर दे और काफ़िरों को विनष्ट कर दे।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh is aazmaish ke zariye se momino ko alag chant (purge )kar kafiron ki sarkobi (blot out )kardena chahta tha
Roman Urdu (Junagarhi)(yeh waja bhi thi) kay Allah Taalaa eman walon ko bilkul alag kerdey aur kafiron ko mita dey
Devnagri Urdu (Maududi)और वो इस आजमाइश के ज़रीए से मोमिनो को अलग जप (शुद्ध) कर काफिरों की सरकोबी (ब्लॉट आउट) करना चाहता था
عَرَبِيأَم حَسِبتُم أَن تَدخُلُوا الجَنَّةَ وَلَمّا يَعلَمِ اللَّهُ الَّذينَ جاهَدوا مِنكُم وَيَعلَمَ الصّابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुमने समझ रखा है कि जन्नत में प्रवेश कर जाओगे, जबकि अल्लाह ने अभी (परीक्षाकर) यह नहीं परखा है कि तुममें से कौन जिहाद करने वाले हैं और कौन (संकट के समय) डटे रहने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya tumne yeh samajh rakkha hai ke yunhi jannat mein chale jaogey halaanke abhi Allah ne yeh to dekha hi nahin ke tum mein kaun woh log hain jo uski raah mein jaanein ladane waley aur uski khatir sabr karne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum yeh samajh bethay ho kay tum jannat mein chalay jao gay halankay abb tak Allah Taalaa ney yeh zahir nahi kiya kay tum mein say jihad kerney walay kaun hain aur sabar kerney walay kaun hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुमने ये समझ रखा है के यूं ही जन्नत में चले जाओगे हलांके अभी अल्लाह ने ये तो देखा ही नहीं के तुम में कौन वो लोग हैं जो उसकी राह में जानेन लड़ने वाले और उसकी खातिर सब्र करने वाले हैं
عَرَبِيوَلَقَد كُنتُم تَمَنَّونَ المَوتَ مِن قَبلِ أَن تَلقَوهُ فَقَد رَأَيتُموهُ وَأَنتُم تَنظُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम तो मौत की कामनाएँ कर रहे थे, जब तक वह तुम्हारे सामने नहीं आई थी। लो, अब वह तुम्हारे सामने है, और तुम उसे देख रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Tum to maut ki tamannayein kar rahey thay ! magar yeh us waqt ki baat thi jab maut samne na aayi thi, lo ab woh tumhare samne aa gayi aur tumne usey aankhon dekh liya
Roman Urdu (Junagarhi)Jang say pehlay to tum shahdat ki aarzoo mein thay abb issay apni aankhon say apney samney dekh liya
Devnagri Urdu (Maududi)तुम तो मौत की तमन्नाएं कर रहे थे! मगर ये हमें वक्त की बात थी जब मौत सामने ना आई थी, लो अब वो तुम्हारे सामने आ गई और तुमने उसकी आंखें देख लिया
عَرَبِيوَما مُحَمَّدٌ إِلّا رَسولٌ قَد خَلَت مِن قَبلِهِ الرُّسُلُ ۚ أَفَإِن ماتَ أَو قُتِلَ انقَلَبتُم عَلىٰ أَعقابِكُم ۚ وَمَن يَنقَلِب عَلىٰ عَقِبَيهِ فَلَن يَضُرَّ اللَّهَ شَيئًا ۗ وَسَيَجزِي اللَّهُ الشّاكِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और मुह़म्मद केवल एक रसूल हैं। उनसे पहले बहुत-से रसूल गुज़र चुके हैं। तो क्या यदि वह मर जाएँ अथवा मार दिए जाएँ, तो तुम अपनी एड़ियों के बल फिर जाओगे? तथा जो अपनी एड़ियों के बल फिर जाएगा, वह अल्लाह का कुछ नहीं बिगाड़ेगा और अल्लाह शीघ्र ही आभारियों को बदला प्रदान करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Muhammad iske siwa kuch nahin ke bas ek Rasool hain, unsey pehle aur Rasool bhi guzar chuke hain. Phir kya agar woh marr jayein ya qatal kardiye jayein to tum log ultey paon phir jaogey? Yaad rakkho! Jo ulta phir gaya woh Allah ka kuch nuksaan na karega, albatta jo Allah ke shukarguzar banday bankar rahenge unhein woh iski jaza dega
Roman Urdu (Junagarhi)(hazrat) Muhammad (PBUH) sirf rasool hi hain inn say pehlay boht say rasool ho chukay hain kiya agar inn ka intiqal hojaye ya yeh shaheed hojayen to tum islam say apni aeyrhiyon kay ball phir jaogay? Aur jo koi phir jaye apni aeyrhiyon per to hergiz Allah Taalaa ka kuch na bigaray ga un-qarib Allah Taalaa shukar guzaron ko nek badla dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)मुहम्मद इसके सिवा कुछ नहीं के बस एक रसूल हैं, उनसे पहले और रसूल भी गुजर चुके हैं। फिर क्या अगर वो मर जाए या क़त्ल कर दी जाए तो तुम लोग उल्टे पांव फिर जाओगे? याद रक्खो! जो उल्टा फिर गया वो अल्लाह का कुछ नुक्सान ना करेगा, अलबत्ता जो अल्लाह के शुक्रगुज़ार बंदे बनकर रहेंगे उनको वो इसकी जजा देगा
عَرَبِيوَما كانَ لِنَفسٍ أَن تَموتَ إِلّا بِإِذنِ اللَّهِ كِتابًا مُؤَجَّلًا ۗ وَمَن يُرِد ثَوابَ الدُّنيا نُؤتِهِ مِنها وَمَن يُرِد ثَوابَ الآخِرَةِ نُؤتِهِ مِنها ۚ وَسَنَجزِي الشّاكِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)किसी प्राणी के लिए यह संभव नहीं है कि अल्लाह की अनुमति के बिना मर जाए। मृत्यु का एक निर्धारित समय लिखा हुआ है। जो दुनिया का बदला चाहेगा, हम उसे इस दुनिया में से कुछ देंगे, तथा जो आख़िरत का बदला चाहेगा, हम उसे उसमें से देंगे, और हम शुक्र करने वालों को जल्द ही बदला देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Koi zi rooh Allah ke izan ke bagair nahin marr sakta. Maut ka waqt to likha hua hai, jo shaks sawab e duniya ke irade se kaam karega usko hum duniya hi mein se denge, aur jo sawab e aakhirat ke irade se kaam karega woh aakhirat ka sawab payega aur shukar karne walon ko hum unki jaza zaroor ata karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Baghair Allah Taalaa kay hukum kay koi jaandaar nahi marr sakta muqarrar shuda waqt likha hua hai duniya ki chahat walon ko hum kuch duniya dey detay hain aur aakhirat ka sawab chahaney walon ko hum woh bhi den gay. Aue ehsan manney walon ko hum boht jald nek badla den gay
Devnagri Urdu (Maududi)कोई ज़ि रूह अल्लाह के इज़ान के बिना नहीं मर सकता। मौत का वक्त तो लिखा हुआ है, जो शक्स सवाब ए दुनिया के इरादे से काम करेगा उसको हम दुनिया ही में से देंगे, और जो सवाब ए आखिरी के इरादे से काम करेगा वो आखिरी का सवाब पाएगा और शुक्र करने वालों को हम उनकी जजा जरूर अता करेंगे
عَرَبِيوَكَأَيِّن مِن نَبِيٍّ قاتَلَ مَعَهُ رِبِّيّونَ كَثيرٌ فَما وَهَنوا لِما أَصابَهُم في سَبيلِ اللَّهِ وَما ضَعُفوا وَمَا استَكانوا ۗ وَاللَّهُ يُحِبُّ الصّابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और कितने ही नबी थे, जिनके साथ होकर बहुत-से अल्लाह वालों ने युद्ध किया, तो उन्होंने अल्लाह के मार्ग में पहुँचने वाली मुसीबतों के कारण न हिम्मत हारी और न कमज़ोरी दिखाई और न वे (दुश्मन के सामने) झुके, तथा अल्लाह धैर्य रखने वालों से प्रेम करता है।
Roman Urdu (Maududi)Issey pehle kitne hi Nabi aisey guzar chuke hain jinke saath milkar bahut se khuda paraston ne jung ki, Allah ki raah mein jo museebatein unpar padin unse woh dil shikashta nahin huey, unhon ne kamzori nahin dikhayi, woh ( baatil ke aagey) sarnagon (abase) nahin huey, aisey hi saabiron ko Allah pasand karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Boht say nabiyon kay hum rakaab ho ker boht say Allah walay jihad ker chukay hain unhen bhi Allah ki raah mein takleefen phonchi lekin na to unhon ney himmat haari na sust rahey aur na dabay aur Allah sabar kerney walon ko (hi) chahata hai
Devnagri Urdu (Maududi)इसके पहले कितने ही नबी ऐसे गुजर चुके हैं जिनके साथ मिलकर बहुत से खुदा परस्तों ने जंग की, अल्लाह की राह में जो मुसिबतें उन्पर पढ़ीं उनसे वो दिल सीखा नहीं हुए, उन्हें कामजोरी नहीं दिखाई, वो (बातिल के आगे) सरनागों (अपशब्द) नहीं हुए, ऐसे ही साबिरों को अल्लाह पसंद करता है
عَرَبِيوَما كانَ قَولَهُم إِلّا أَن قالوا رَبَّنَا اغفِر لَنا ذُنوبَنا وَإِسرافَنا في أَمرِنا وَثَبِّت أَقدامَنا وَانصُرنا عَلَى القَومِ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने इससे अधिक कुछ नहीं कहा कि : ऐ हमारे पालनहार! हमारे पापों को और हमारे मामले में हमसे होने वाली अति (ज़्यादती) को क्षमा कर दे। तथा हमारे पैरों को जमाए रख और काफ़िर क़ौम पर हमें विजय प्रदान कर।
Roman Urdu (Maududi)Unki dua bas yeh thi ke “aey hamare Rubb! Hamari galatiyon aur kotahiyon se darguzar farma, hamare kaam mein tere hudood se jo kuch tajawuz ho gaya ho usey maaf karde, hamare qadam jamaa de aur kafiron ke muqable mein hamari madad kar.”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh yehi kehtay rahey kay aey perwerdigar! Humaray gunahon ko baksh dey aur hum say humaray kaamon mein jo bey jaa ziyadti hui hai ussay bhi moaf farma aur humen sabit qadmi ata farma aur humen kafiron ki qom per madad dey
Devnagri Urdu (Maududi)उनकी दुआ बस ये थी के "ऐ हमारे रब! हमारी गलतियों और कहानियों से बेहतर फरमा, हमारे काम में तेरे हुदूद से जो कुछ तजावुज हो गया हो उसे माफ करदे, हमारे कदम जमा दे और काफिरों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर।”
عَرَبِيفَآتاهُمُ اللَّهُ ثَوابَ الدُّنيا وَحُسنَ ثَوابِ الآخِرَةِ ۗ وَاللَّهُ يُحِبُّ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो अल्लाह ने उन्हें दुनिया का बदला तथा आख़िरत का अच्छा बदला प्रदान किया। तथा अल्लाह अच्छे काम करने वाले लोगों से प्रेम करता है।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar Allah ne unko duniya ka sawab bhi diya aur issey behtar sawab e aakhirat bhi ata kiya. Allah ko aisey hi neik amal log pasand hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney unehn duniya ka sawab bhi diya aur aakhirat kay sawab ki khoobi bhi ata farmaee aur Allah Taalaa nek logon say mohabbat kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार अल्लाह ने उनको दुनिया का सवाब भी दिया और इसे बेहतर सवाब ए आख़िरत भी आता किया। अल्लाह को ऐसे ही नेक अमल लोग पसंद हैं
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِن تُطيعُوا الَّذينَ كَفَروا يَرُدّوكُم عَلىٰ أَعقابِكُم فَتَنقَلِبوا خاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! यदि तुम काफ़िरों के कहने पर चलोगे, तो वे तुम्हें तुम्हारी एड़ियों के बल फेर देंगे, फिर तुम घाटे में पड़ जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, agar tum un logon ke isharon par chaloge jinhon ne kufr ki raah ikhtiyar ki hai to woh tumko ulta pher le jayenge aur tum na-murad ho jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Agar tum kafiron ki baaten maano gay to woh tumhen tumhari aeyrhiyon kay ball palta den gay (yani tumhen murtid bana den gay) phir tum na murad ho jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम उन लोगों के इशारों पर चलोगे जिन्होन ने कुफ्र की राह इख्तियार की है तो वो तुमको उल्टा फेर ले जाएंगे और तुम ना-मुराद हो जाओगे
عَرَبِيبَلِ اللَّهُ مَولاكُم ۖ وَهُوَ خَيرُ النّاصِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि अल्लाह ही तुम्हारा संरक्षक है तथा वह सबसे अच्छा सहायक है।
Roman Urdu (Maududi)(Unki baatein galat hain) haqeeqat yeh hai ke Allah tumhara haami o madadgaar hai aur woh behtareen madad karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay Allah hi tumhara mola hai aur woh behtareen madadgar hai
Devnagri Urdu (Maududi)(उनकी बातें गलत हैं) हकीकत ये है के अल्लाह तुम्हारा हमी ओ मददगार है और वो बेहतरीन मदद करने वाला है
عَرَبِيسَنُلقي في قُلوبِ الَّذينَ كَفَرُوا الرُّعبَ بِما أَشرَكوا بِاللَّهِ ما لَم يُنَزِّل بِهِ سُلطانًا ۖ وَمَأواهُمُ النّارُ ۚ وَبِئسَ مَثوَى الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)हम जल्द ही काफ़िरों के दिलों में धाक बिठा देंगे, इस कारण कि उन्होंने ऐसी चीज़ों को अल्लाह का साझी बनाया है, जिन (के साझी होने) का कोई प्रमाण अल्लाह ने नहीं उतारा है। और इनका ठिकाना जहन्नम है और वह ज़ालिमों का क्या ही बुरा ठिकाना है?
Roman Urdu (Maududi)Anqareeb woh waqt aane wala hai jab hum munkireen e haqq ke dilon mein roab (terror/darr) bitha denge, isliye ke unhon ne Allah ke saath unko khudayi mein shareek thehraya hai jinke shareek honay par Allah ne koi sanad nazil nahin ki, unka aakhri thikana jahannum hai aur bahut hi buri hai woh qayaam-gaah jo un zalimon ko naseeb hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Hum un-qarib kafiron kay dilon mein rob daal den gay iss waja say kay yeh Allah kay sath unn cheezon ko sharik kertay hain jiss ki koi daleel Allah ney nahi utaari inn ka thikana jahannum hai aur inn zalimon ki buri jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)अनकारीब वो वक्त आने वाला है जब हम मुनकिरीन ए हक के दिलों में रोब (आतंक/डर) बिठा देंगे, इसली के अनहोन ने अल्लाह के साथ उनको खुदाई में शरीक ठहराया है जिनके शरीक होने पर अल्लाह ने कोई सनद नाज़िल नहीं की, उनका आखिरी ठिकाना जहन्नुम है और बहुत ही बुरी है वो क़याम-गाह जो उन ज़ालिमों को नसीब होगी
عَرَبِيوَلَقَد صَدَقَكُمُ اللَّهُ وَعدَهُ إِذ تَحُسّونَهُم بِإِذنِهِ ۖ حَتّىٰ إِذا فَشِلتُم وَتَنازَعتُم فِي الأَمرِ وَعَصَيتُم مِن بَعدِ ما أَراكُم ما تُحِبّونَ ۚ مِنكُم مَن يُريدُ الدُّنيا وَمِنكُم مَن يُريدُ الآخِرَةَ ۚ ثُمَّ صَرَفَكُم عَنهُم لِيَبتَلِيَكُم ۖ وَلَقَد عَفا عَنكُم ۗ وَاللَّهُ ذو فَضلٍ عَلَى المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह ने तुम्हें अपना वचन सच कर दिखाया, जब तुम उसकी अनुमति से उन्हें काट रहे थे। यहाँ तक कि जब तुमने कायरता दिखाई, तथा (रसूल के) आदेश (के अनुपालन) में विवाद कर लिया और अवज्ञा की। (यह सब कुछ) इसके बाद (हुआ) कि अल्लाह ने तुम्हें वह चीज़ दिखा दी थी, जिसे तुम पसंद करते थे। तुममें से कुछ लोग दुनिया चाहते थे तथा कुछ लोग आख़िरत के इच्छुक थे। फिर उसने तुम्हें उनके मुक़ाबले से हटा दिया, ताकि तुम्हारी परीक्षा ले। निश्चय ही उसने तुम्हें क्षमा कर दिया और अल्लाह ईमान वालों के लिए अनुग्रहशील है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne (taeed o nusrat ka) jo wada tumse kiya tha woh to usne poora kardiya, ibteda mein uske hukum se tumhi unko qatal kar rahey thay magar jab tumne kamzori dikhayi aur apne kaam mein baham ikhtilaf kiya, aur junhi ke woh cheez Allah ne tumhein dikhayi jiski muhabbat mein tum giraftar thay ( yani maal o ganeemat) tum apne sardar ke hukum ki khilaf warzi kar baithey isliye ke tum mein se kuch log duniya ke taalib thay aur kuch aakhirat ki khwahish rakhte thay, tab Allah ne tumhein kafiron ke muqable mein paspan kardiya taa-ke tumhari aazmaish karey aur haqq yeh hai ke Allah ne phir bhi tumhein maaf hi kardiya kyunke momino par Allah badi nazar e inayat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney tum say apna wada sacha ker dikhaya jabkay tum uss kay hukum say enhen kaat rahey thay. Yahan tak kay jab tum ney pust himmati ikhtiyar ki aur kaam mein jhagarney lagay aur na farmani ki uss kay baad uss ney tumhari chahat ki cheez tumhen dikha di tum mein say baaz duniya chahatay thay aur baaz ka irada aakhirat ka tha to phir uss ney tumhen unn say pher diya kay tum ko aazmaye aur yaqeenan uss ney tumhari laghzish say dar guzar farma diya aue eman walon per Allah baray fazal wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने (ताईद ओ नुसरत का) जो वादा तुमसे किया था वो तो उसने पूरा करदिया, इब्तेदा में उसके हुकुम से तुम उनको कत्ल कर रहे थे मगर जब तुमने कमजोरी दिखाई और अपने काम में बहम इख्तिलाफ किया, और जून के वो चीज अल्लाह ने तुम्हें दिखाई जिसकी मुहब्बत में तुम गिरफ्तार थे (यानी माल ओ गनीमत) तुम अपने सरदार के हुकुम की खिलाफत वारज़ी कर बैठे हैं इसलिए कि तुम में से कुछ लोग दुनिया के तालिब थे और कुछ आख़िरत की ख्वाहिश रखते थे, तब अल्लाह ने तुम्हें काफिरों के मुक़ाबले में पसंद कर दिया ता-के तुम्हारी आज़माइशें और हक़ ये है के अल्लाह ने फिर भी तुम्हें माफ़ ही करदिया क्यूँके मोमिनो पर अल्लाह बड़ी नज़र ए इनायत रखता है
عَرَبِي۞ إِذ تُصعِدونَ وَلا تَلوونَ عَلىٰ أَحَدٍ وَالرَّسولُ يَدعوكُم في أُخراكُم فَأَثابَكُم غَمًّا بِغَمٍّ لِكَيلا تَحزَنوا عَلىٰ ما فاتَكُم وَلا ما أَصابَكُم ۗ وَاللَّهُ خَبيرٌ بِما تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(और याद करो) जब तुम चढ़े (भागे) जा रहे थे और किसी को मुड़कर नहीं देख रहे थे और रसूल तुम्हें तुम्हारे पीछे से पुकार रहे थे। अतः इसके बदले में (अल्लाह ने) तुम्हें शोक पर शोक दिया ताकि जो तुम्हारे हाथ से निकल गया और जो मुसीबत तुम्हें पहुँची, उसपर शोकाकुल न हो। तथा अल्लाह उससे सूचित है, जो तुम कर रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jab tum bhaage chale jaa rhey thay, kisi ki taraf palat kar dekhne tak ka hosh tumhein na tha, aur Rasool tumhare pichey tumko pukar raha tha us waqt tumhari is rawish ka badla Allah ne tumhein yeh diya ke tumko ranjh par ranjh diye taa-ke aainda ke liye tumhein yeh sabaq miley ke jo kuch tumhare haath se jaye ya jo museebat tumpar nazil ho uspar malul (grieve)na ho, Allah tumhare sab amaal se bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay tum charhay chalay jarahey thay aur kissi ki taraf tawajja tak nahi kertay thay aur Allah kay rasool tumhen tumharay peechay say aawazen dey rahey thay bus tumhen ghum per ghum phoncha takay tum fot shuda cheez per ghumgeen na ho aur na phonchney wali (takleef) per udas ho Allah Taalaa tumharay tamam aemaal say khabardaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जब तुम भागे चले जा रहे थे, किसी की तरफ पलट कर देखने तक का होश तुम्हें ना था, और रसूल तुम्हारे पीछे तुमको पुकार रहा था हमारा वक्त तुम्हारी इस रवीश का बदला है, अल्लाह ने तुम्हें ये दिया के तुमको रांझ पर रांझ दिए ता-के आंदा के लिए तुम्हें ये सबक मिले के जो कुछ तुम्हारे हाथ से जाए या जो मुसीबत तुम्पर नाज़िल हो उसपर मालुल (शोक) ना हो, अल्लाह तुम्हारे सब अमल से बख़बर है
عَرَبِيثُمَّ أَنزَلَ عَلَيكُم مِن بَعدِ الغَمِّ أَمَنَةً نُعاسًا يَغشىٰ طائِفَةً مِنكُم ۖ وَطائِفَةٌ قَد أَهَمَّتهُم أَنفُسُهُم يَظُنّونَ بِاللَّهِ غَيرَ الحَقِّ ظَنَّ الجاهِلِيَّةِ ۖ يَقولونَ هَل لَنا مِنَ الأَمرِ مِن شَيءٍ ۗ قُل إِنَّ الأَمرَ كُلَّهُ لِلَّهِ ۗ يُخفونَ في أَنفُسِهِم ما لا يُبدونَ لَكَ ۖ يَقولونَ لَو كانَ لَنا مِنَ الأَمرِ شَيءٌ ما قُتِلنا هاهُنا ۗ قُل لَو كُنتُم في بُيوتِكُم لَبَرَزَ الَّذينَ كُتِبَ عَلَيهِمُ القَتلُ إِلىٰ مَضاجِعِهِم ۖ وَلِيَبتَلِيَ اللَّهُ ما في صُدورِكُم وَلِيُمَحِّصَ ما في قُلوبِكُم ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ بِذاتِ الصُّدورِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर इस शोक के बाद उसने तुमपर शांति उतारी (यानी) ऊँघ जो तुम्हारे एक समूह को घेर रही थी और एक समूह को केवल अपने प्राणों की चिंता थी। वे अल्लाह के बारे में अनुचित अज्ञानता काल का गुमान कर रहे थे। वे कहते थे कि क्या (इस) मामले में हमारा भी कोई अधिकार है? (ऐ नबी!) कह दें कि सब अधिकार अल्लाह को है। वे अपने दिलों में वह (बात) छिपाते हैं जो आपके सामने प्रकट नहीं करते हैं। वे कहते हैं कि यदि (इस) मामले में हमारा भी कुछ अधिकार होता, तो हम यहाँ मारे न जाते। आप कह दें : यदि तुम अपने घरों में भी होते, तब भी जिनके (भाग्य में) मारा जाना लिख दिया गया था, वे अवश्य अपने मरने के स्थानों की ओर निकल आते। और ताकि अल्लाह जो कुछ तुम्हारे सीनों में है, उसे आज़माए और जो कुछ तुम्हारे दिलों में है, उसे विशुद्ध कर दे। और अल्लाह दिलों के भेदों से अवगत है।
Roman Urdu (Maududi)Is gham ke baad phir Allah ne tum mein se kuch logon par aisi itminaan ki si halat taari kardi ke woh unghne lagey, magar ek dusra giroh jiske liye sari ehmiyat bas apne mafaad hi ki thi, Allah ke mutaaliq tarah tarah ke jahilana gumaan karne laga jo sarasar khilaf e haqq thay, yeh log ab kehte hain ke, “ is kaam ke chalane mein hamara bhi koi hissa hai?” Unsey kaho, (kisi ka koi hissa nahin) is kaam ke sarey ikhtiyaraat Allah ke haath mein hain. “Darasal yeh log apne dilon mein jo baat chupaye huey hain usey tumpar zaahir nahin karte, inka asal matlab yeh hai ke, “agar (qayadat ke) ikhtiyaraat mein hamara kuch hissa hota to yahan hum na maarey jatey”. Insey kehdo ke, “agar tum apne gharon mein bhi hotey to jin logon ki maut likhi hui thi woh khud apni qatal-gaahon ki taraf nikal aatey”, aur yeh maamla jo pesh aaya, yeh to isliye tha ke jo kuch tumhare seeno mein posheeda(hidden) hai Allah usey aazma le aur jo khot tumhare dilon mein hai usey chaant de. Allah dilon ka haal khoob jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir uss ney iss ghum kay baad tum per aman nazil farmaya aur tum mein say aik jamat ko aman ki neend aaney lagi. Haan kuch woh log bhi thay kay unhen apni janon ki pari hui thi woh Allah Taalaa kay sath na haq jahalat bhari bad gumani ker rahey thay aur kehtay thay kiya humen bhi kissi cheez ka ikhtiyar hai? Aap keh dijiye kay kaam kul ka kul Allah hi kay ikhtiyar mein hai yeh log apney dilon kay bhed aap ko nahi batatay kehtay hain kay agar humen kuch bhi ikhtiyar hota to yahan qatal na kiye jatay. Aap keh dijiye kay go tum apney gharon mein hotay phir bhi jin ki qismat mein qatal hona tha woh to maqtal ki taraf chal kharay hotay Allah Taalaa ko tumharay seenon ki andar ki cheez ka aazmana aur jo kuch tumharay dilon mein hai uss ko pak kerna tha aur Allah Taalaa seenon kay bhed say aagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)इस ग़म के बाद फिर अल्लाह ने तुम में से कुछ लोगों पर ऐसी इत्मिनान की सी हालत तारी करदी के वो उगने लगे, मगर एक दूसरा गिरो ​​जिसके लिए सारी एहमियत बस अपने मफ़ाद ही की थी, अल्लाह के मुतालिक तरह तरह के जहिलाना गुमान करने लगा जो सरसर ख़िलाफ ए हक था, ये लोग अब कहते हैं के, "क्या काम के चलने में हमारा भी कोई हिस्सा है?" उनसे कहो, (किसी का कोई हिसा नहीं) इस काम के सारे इख्तियारात अल्लाह के हाथ में हैं। "दरअसल ये लोग अपने दिलों में जो बात छुपाए हुए हैं उसे तुमपर जाहिर नहीं करते, इनका असल मतलब ये है के," अगर (क़यादत के) इख्तियारत में हमारा कुछ हिसाब होता तो यहां हम ना मारे जाते।" इंसे कहदो के, "अगर तुम अपने घरों में भी होते तो जिन लोगों की मौत लिखी हुई थी वो खुद अपने खून-गाहों की तरफ निकल आते थे'', और ये मामला जो पेश आया, ये तो इसलिए था के जो कुछ तुम्हारे सीने में पोशीदा (छिपा हुआ) है अल्लाह उसे आजमा ले और जो खोट तुम्हारे दिलों में है उसे चांट दे। अल्लाह दिलों का हाल खूब जानता है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ تَوَلَّوا مِنكُم يَومَ التَقَى الجَمعانِ إِنَّمَا استَزَلَّهُمُ الشَّيطانُ بِبَعضِ ما كَسَبوا ۖ وَلَقَد عَفَا اللَّهُ عَنهُم ۗ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ حَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)वस्तुतः तुममें से जिन लोगों ने दो गिरोहों के आमने सामने होने के दिन पीठ दिखाई, उन्हें शैतान ने उनके कुछ कर्मों के कारण फिसला दिया था। और अल्लाह उन्हें क्षमा कर चुका है। वास्तव में, अल्लाह अति क्षमावान्, सहनशील है।
Roman Urdu (Maududi)Tum mein se jo log muqable ke din peeth pher gaye thay unki is lagzish ka sabab yeh tha ke unki baaz kamzoriyon ki wajah se shaytan nay unke qadam dagmaga diye thay. Allah ne unhein maaf kardiya, Allah bahut darguzar karne wala aur burdbaar (All-Forbearing) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum mein say jin logon ney uss din peeth dikhaee jiss din dono jamaton ki mudd bher hui thi yeh log apney baaz kartooton kay baees shetan kay phuslaney mein aagaye lakin yaqeen jano kay Allah Taalaa ney unhen moaf ker diya Allah Taalaa hai bakshney wala aur tahammul wala
Devnagri Urdu (Maududi)तुम में से जो लोग मुकाबला के दिन पीठ फेर गए थे, उनकी इस लग्ज़िश का सबब ये था के उनकी बाज़ कमज़ोरियों की वजह से शैतान ने उन्हें कदम डगमगा दिया था। अल्लाह ने उन्हें माफ कर दिया, अल्लाह बहुत दरगुज़ार करने वाला और बर्दबार (सर्व सहनशील) है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَكونوا كَالَّذينَ كَفَروا وَقالوا لِإِخوانِهِم إِذا ضَرَبوا فِي الأَرضِ أَو كانوا غُزًّى لَو كانوا عِندَنا ما ماتوا وَما قُتِلوا لِيَجعَلَ اللَّهُ ذٰلِكَ حَسرَةً في قُلوبِهِم ۗ وَاللَّهُ يُحيي وَيُميتُ ۗ وَاللَّهُ بِما تَعمَلونَ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! तुम उन लोगों के समान न हो जाओ, जिन्होंने कुफ़्र किया और अपने भाइयों के बारे में जबकि वे यात्रा पर गए हों या जिहाद के लिए निकले यह कहने लगे कि : यदि वे हमारे पास रहते तो न मरते और न क़त्ल किए जाते। (ऐसी बात उनके दिल में इसलिए आती है) ताकि अल्लाह इसे उनके दिलों में संताप का कारण बना दे। तथा अल्लाह ही जीवित करता और मृत्यु देता है। और तुम जो कुछ करते हो, अल्लाह उसे देख रहा है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, kafiron ki si baatein na karo jinke azeez o aqarib agar kabhi safar par jatey hain ya jung mein shareek hotey hain ( aur wahan kisi haadse se do-char ho jatey hain ) to woh kehte hain ke agar woh hamare paas hotey to na marey jatey aur na qatal hotey. Allah is qism ki baaton ko unke dilon mein hasrat o andoh ka sabab bana deta hai, warna dar-asal maarne aur jilane wala to Allah hi hai aur tumhari tamaam harakaat par wahi nigraan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tum unn logon ki tarah na ho jana jinhon ney kufur kiya aur apney bhaiyon kay haq mein jabkay woh safar mein hon ya jihad mein hon kaha kay agar yeh humaray pass hotay to na martay aur na maaray jatay iss ki waja yeh thi kay iss khayal ko Allah Taalaa unn ki dili hasrat ka sabab bana dey Allah Taalaa jilata aur maarta hai aur Allah tumharay amal ko dekh raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, काफिरों की सी बातें ना करो जिनके अज़ीज़ ओ अक़रीब अगर कभी सफ़र पर जाते हैं या जंग में शरीक होते हैं (और वहां किसी हादसे से) दो-चार हो जाते हैं) तो वो कहते हैं के अगर वो हमारे पास होते तो ना मारे जाते और ना क़त्ल होते। अल्लाह क़िस्म की बातों को उनके दिलों में हसरत ओ एंडो का सबाब बना देता है, वरना दर-असल मरने और जेलाने वाला तो अल्लाह ही है और तुम्हारी तमाम हरकत पर वही निगरानी है
عَرَبِيوَلَئِن قُتِلتُم في سَبيلِ اللَّهِ أَو مُتُّم لَمَغفِرَةٌ مِنَ اللَّهِ وَرَحمَةٌ خَيرٌ مِمّا يَجمَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम अल्लाह के मार्ग में क़त्ल कर दिए जाओ या मर जाओ, तो अल्लाह की क्षमा और दया उससे बेहतर है, जो वे लोग बटोर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum Allah ki raah mein maarey jao ya marr jao to Allah ki jo rehmat aur bakshish tumhare hissey mein aayegi woh un saari cheezon se zyada behtar hai jinhein yeh log jamaa karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai agar Allah Taalaa ki raah mein shaheed kiye jao ya apni maut maro to be-shak Allah Taalaa ki bakshish-o-rehmat uss say behtar hai jisay yeh jama ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम अल्लाह की राह में मारे जाओ या मर जाओ तो अल्लाह की जो रहमत और बख्शीश है तुम्हारे हिस्से में आएगी वो उन सारी चीजों से ज्यादा बेहतर है जिन्हें ये लोग जमा करते हैं
عَرَبِيوَلَئِن مُتُّم أَو قُتِلتُم لَإِلَى اللَّهِ تُحشَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यदि तुम मर गए या मार दिए गए, तो निश्चित रूप से तुम अल्लाह ही के पास इकट्ठे किए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur khwah tum maro ya maarey jao bahar-haal tum sabko simat kar jana Allah hi ki taraf hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bil yaqeen tum marr jao ya maar dalay jao jama to Allah Taalaa hi ki taraf kiye jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)और ख्वाह तुम मारो या मारे जाओ बहार-हाल तुम सबको सिमत कर जाना अल्लाह ही की तरफ है
عَرَبِيفَبِما رَحمَةٍ مِنَ اللَّهِ لِنتَ لَهُم ۖ وَلَو كُنتَ فَظًّا غَليظَ القَلبِ لَانفَضّوا مِن حَولِكَ ۖ فَاعفُ عَنهُم وَاستَغفِر لَهُم وَشاوِرهُم فِي الأَمرِ ۖ فَإِذا عَزَمتَ فَتَوَكَّل عَلَى اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ المُتَوَكِّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह की दया के कारण (ऐ नबी!) आप उनके लिए सरल स्वभाव के हैं। और यदि आप प्रखर स्वभाव और कठोर हृदय के होते, तो वे आपके पास से छट जाते। अतः आप उन्हें माफ़ कर दें और उनके लिए क्षमा याचना करें। तथा उनसे मामलों में परामर्श करें। फिर जब आप दृढ़ संकल्प कर लें, तो अल्लाह पर भरोसा करें। निःसंदेह अल्लाह भरोसा करने वालों को पसंद करता है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey paighambar) yeh Allah ki badi rehmat hai ke tum in logon ke liye bahut narm mijaz waqey huye ho, warna agar kahin tum tundh-khu (rough) aur sangh dil hotey to yeh sab tumhare gird o pesh se chath jatey. Inke kasoor maaf kardo, inke haqq mein dua-e-magfirat karo, aur deen ke kaam mein inko bhi shareek e mashwara rakkho. Phir jab tumhara azam (resolve) kisi rai par mustahkam ho jaye to Allah par bharosa karo, Allah ko woh log pasand hain jo usi ke bharose par kaam karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ki rehmat kay baees aap inn per naram dil hain aur agar aap bad zaban aur sakht dil hotay to yeh sab aap kay pass say chatt jatay so aap inn say dar guzar keren aur inn kay liye istaghfaar keren aur kaam ka mashwara inn say kiya keren phir jab aap ka pukhta irada hojaye to Allah Taalaa per bharosa keren be-shak Allah Taalaa tawakkal kerney walon say mohabbat kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ पैगम्बर) ये अल्लाह की बड़ी रहमत है के तुम इन लोगों के लिए बहुत नरम मिजाज पैदा हुए हो, वरना अगर कहीं तुम तुंध-खु (कठोर) और संघ दिल होते तो ये सब तुम्हारे गिर्द ओ पेश से छठ जाते। इनके कसूर माफ़ करदो, इनके हक़ में दुआ-ए-मगफिरत करो, और दीन के काम में इनको भी शरीक ए मशवरा रक्खो। फिर जब तुम्हारा आजम (संकल्प) किसी राय पर मुस्तहकम हो जाए तो अल्लाह पर भरोसा करो, अल्लाह को वह लोग पसंद हैं जो उसके भरोसे पर काम करते हैं
عَرَبِيإِن يَنصُركُمُ اللَّهُ فَلا غالِبَ لَكُم ۖ وَإِن يَخذُلكُم فَمَن ذَا الَّذي يَنصُرُكُم مِن بَعدِهِ ۗ وَعَلَى اللَّهِ فَليَتَوَكَّلِ المُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि अल्लाह तुम्हारी सहायता करे, तो कोई तुमपर प्रभावी नहीं हो सकता। और यदि वह तुम्हें असहाय छोड़ दे, तो फिर कौन है जो उसके बाद तुम्हारी सहायता कर सकेॽ अतः ईमान वालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।
Roman Urdu (Maududi)Allah tumhari madad par ho to koi taaqat tumpar gaalib aane wali nahin, aur woh tumhein chodh de to iske baad kaun hain jo tumhari madad kar sakta ho? Pas jo sacchey momin hain unko Allah hi par bharosa rakhna chahiye
Roman Urdu (Junagarhi)Agar Allah Taalaa tumhari madad keray to tum per koi ghalib nahi aa sakta aur agar woh tumhen chor dey to uss kay baad kaun hai jo tumhari madad keray? Emal walon ko Allah Taalaa per hi bharosa rakhan chahaiye
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह तुम्हारी मदद पर हो तो कोई ताकत तुम पर गालिब आने वाली नहीं, और वो तुम्हें छोड़ दे तो इसके बाद कौन है जो तुम्हारी मदद कर सकता है? पास जो सच्चा मोमिन है उनको अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए
عَرَبِيوَما كانَ لِنَبِيٍّ أَن يَغُلَّ ۚ وَمَن يَغلُل يَأتِ بِما غَلَّ يَومَ القِيامَةِ ۚ ثُمَّ تُوَفّىٰ كُلُّ نَفسٍ ما كَسَبَت وَهُم لا يُظلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह किसी नबी के लिए संभव नहीं है कि ग़नीमत के धन में ख़यानत करे, और जो ख़यानत करेगा तो जो उसने ख़यानत की होगी उसके साथ क़ियामत के दिन उपस्थित होगा। फिर प्रत्येक प्राणी को उसके किए का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा और उनपर अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Kisi Nabi ka yeh kaam nahin ho sakta ke woh khayanat kar jaye aur jo koi khayanat karey to woh apni khayanat samaith qayamat ke roz hazir ho jayega, phir har mutanaffis ko uski kamayi ka poora poora badla mil jayega aur kisi par kuch zulm na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Na mumkin hai kay nabi say khayanat hojaye her khayanat kerney wala khayanat ko liye huye qayamat kay din hazir hoga phir her shaks apney aemaal ka poora poora badla diya jayega aur woh zulm na kiye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)किसी नबी का ये काम नहीं हो सकता के वो खयानत कर जाए और जो कोई खयानत करे तो वो अपनी खयानत के साथ कयामत के रोज़ हाज़िर हो जाएगा, फिर हर मुतनफ़िस को उसकी कमाई का पूरा पूरा बदला मिल जाएगा और किसी पर कुछ ज़ुल्म न होगा
عَرَبِيأَفَمَنِ اتَّبَعَ رِضوانَ اللَّهِ كَمَن باءَ بِسَخَطٍ مِنَ اللَّهِ وَمَأواهُ جَهَنَّمُ ۚ وَبِئسَ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या जिसने अल्लाह की प्रसन्नता का अनुसरण किया, उस व्यक्ति के समान हो सकता है जो अल्लाह का क्रोध लेकर वापस हुआ और जिसका आवास नरक हैॽ और वह बहुत बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Bhala yeh kaise ho sakta hai ke jo shaks hamesha Allah ki raza par chalne wala ho woh us shaks ke say kaam karey jo Allah ke gazab mein ghir gaya ho, aur jiska aakhri thikana jahannum ho jo badhtareen thikana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya pus woh shaks jo Allah Taalaa ki khushnoodi kay dar pay hain uss shaks jaisa hai jo Allah Taalaa ki narazgi ley ker lot’ta hai? Aur jiss ki jagah jahannum hai jo bad tareen jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)भला ये कैसा हो सकता है के जो शक्स हमेशा अल्लाह की रज़ा पर चलने वाला हो वो हम शक्स के कहे काम करे जो अल्लाह के गजब में घिर गया हो, और जिसका आखिरी ठिकाना जहन्नुम हो जो बढ़ता है ठिकाना है
عَرَبِيهُم دَرَجاتٌ عِندَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ بَصيرٌ بِما يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह के पास उनके (विभिन्न) दर्जे हैं, तथा वे जो कुछ कर रहे हैं अल्लाह उसे देख रहा है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ke nazdeek dono qism ke aadmiyon mein badarjaha farq hai aur Allah sabke aamaal par nazar rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa kay pass inn kay alag alag darjay hain aur inn kay tamam aemaal ko Allah bakhoobi dekh raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के नाज़दीक डोनो क़िस्म के आदमियों में बदरजहा फर्क है और अल्लाह सबके आमाल पर नजर रखता है
عَرَبِيلَقَد مَنَّ اللَّهُ عَلَى المُؤمِنينَ إِذ بَعَثَ فيهِم رَسولًا مِن أَنفُسِهِم يَتلو عَلَيهِم آياتِهِ وَيُزَكّيهِم وَيُعَلِّمُهُمُ الكِتابَ وَالحِكمَةَ وَإِن كانوا مِن قَبلُ لَفي ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ने ईमान वालों पर बड़ा उपकार किया कि उनके अंदर उन्हीं में से एक रसूल भेजा, जो उन्हें (अल्लाह) की आयतें पढ़कर सुनाता है और उन्हें पवित्र करता है तथा उन्हें किताब (क़ुरआन) और ह़िकमत (सुन्नत) की शिक्षा देता है। निःसंदेह वे इससे पहले खुली गुमराही में थे।
Roman Urdu (Maududi)Dar-haqeeqat ehle iman par to Allah ne yeh bahut bada ehsaan kiya hai ke unke darmiyan khud unhi mein se ek aisa paigambar uthaya jo uski ayaat unhein sunata hai, unki zindagiyon ko sanwaarta hai aur unko kitab aur danayi (wisdom) ki taleem deta hai, halaanke issey pehle yahi log sareeh gumraahiyon mein padey huey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak musalmanon per Allah Taalaa ka bara ehsan hai kay inn hi mein say aik rasool inn mein bheja jo enhen uss ki aayaten parh ker sunata hai aur enhen pak kerta hai aur enhen kitab aur hikmat sikhata hai yaqeenan yeh sab iss say pehlay khuli gumrahi mein thay
Devnagri Urdu (Maududi)दार-हकीकत एहले ईमान पर अल्लाह ने ये बहुत बड़ा एहसान किया है के उनके दरमियान खुद उन्ही में से एक ऐसा पैगम्बर उठाया जो उसकी आयत उन्हें सुनाता है, उनकी जिंदगी को संवारता है और उनको किताब और ज्ञान (बुद्धि) की तालीम देता है, हलांके इसे पहले यहीं लोग सारे गुमराहियों में पड़े हुए थे
عَرَبِيأَوَلَمّا أَصابَتكُم مُصيبَةٌ قَد أَصَبتُم مِثلَيها قُلتُم أَنّىٰ هٰذا ۖ قُل هُوَ مِن عِندِ أَنفُسِكُم ۗ إِنَّ اللَّهَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या जब तुम्हें एक ऐसी विपत्ति पहुँची, जिसकी दोगुनी विपत्ति तुम (काफ़िरों को) पहुँचा चुके थे, तो तुम कहने लगे कि : यह कहाँ से आ गई? (ऐ नबी!) कह दीजिए : यह तुम्हारे ही पास से आई है। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh tumhara kya haal hai ke jab tumpar museebat aa padi to tum kehne lagey yeh kahan se aayi? Halaanke ( jung e Badr mein) issey dugni (double) museebat tumhare haathon [ fareeq e mukhalif (enemies) par] padh chuki hai. (Aey Nabi)! Insey kaho, yeh museebat tumhari apni layi hui hai, Allah har cheez par qaadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)(kiya baat hai kay) kay jab tumhen aik aisi takleef phonchi kay tum iss jaisi do chand phonch chukay to yeh kehney lagay kay yeh kahan say aagaee? Aap keh dijiye kay yeh khud tumhari taraf say hai be-shak Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये तुम्हारा क्या हाल है के जब तुमपर मुसीबत आ पड़ी तो तुम कहने लगे ये कहां से आई? हलाँके (जंग ए बद्र में) इस्से दुगनी (डबल) मुसीबत तुम्हारे हाथों [फ़ारिक ए मुख़ालिफ़ (दुश्मनों) पर] पढ़ चुकी है। (ऐ नबी)! इनसे कहो, ये मुसीबत तुम्हारी अपनी लाई हुई है, अल्लाह हर चीज पर कादिर है
عَرَبِيوَما أَصابَكُم يَومَ التَقَى الجَمعانِ فَبِإِذنِ اللَّهِ وَلِيَعلَمَ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और दोनों गिरोहों के मुठभेड़ के दिन जो विपत्ति तुम्हें पहुँची है, वह अल्लाह के आदेश से पहुँची है। और ताकि वह (अल्लाह) ईमान वालों को (अच्छी तरह) जान ले।
Roman Urdu (Maududi)Jo nuqsaan ladayi ke din tumhein pahuncha woh Allah ke izan se tha aur isliye tha ke Allah dekhle tum mein se momin kaun hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tumhen jo kuch uss din phoncha jiss din do jamaton mein mudd bher hui thi woh sab Allah kay hukum say tha aur iss liye kay Allah Taalaa eman walon ko zahiri tor per jaan ley
Devnagri Urdu (Maududi)जो नुक्सान लड़ायी के दिन तुम्हें पहुंचा वो अल्लाह के इज़ान से था और इसलिए था के अल्लाह देखले तुम में से मोमिन कौन है
عَرَبِيوَلِيَعلَمَ الَّذينَ نافَقوا ۚ وَقيلَ لَهُم تَعالَوا قاتِلوا في سَبيلِ اللَّهِ أَوِ ادفَعوا ۖ قالوا لَو نَعلَمُ قِتالًا لَاتَّبَعناكُم ۗ هُم لِلكُفرِ يَومَئِذٍ أَقرَبُ مِنهُم لِلإيمانِ ۚ يَقولونَ بِأَفواهِهِم ما لَيسَ في قُلوبِهِم ۗ وَاللَّهُ أَعلَمُ بِما يَكتُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और ताकि उन लगों को भी जान ले, जो मुनाफ़िक़ हैं, जिनसे कहा गया कि आओ अल्लाह की राह में युद्ध करो अथवा (आम मुसलमानों की) रक्षा करो, तो उन्होंने कहा कि यदि हम जानते कि युद्ध होगा, तो अवश्य तुम्हारा साथ देते। वे उस दिन ईमान की अपेक्षा कुफ़्र के अधिक निकट थे। वे अपने मुँह से ऐसी बातें बोलते हैं, जो उनके दिलों में नहीं होती। तथा अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है जो वे छिपाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur munafiq kaun. Woh munafiq ke jab unsey kaha gaya, aao Allah ki raah mein jung karo ya kam az kam (apne shehar ki) mudafiyat (defense) hi karo, to kehne lagey agar humein ilm hota ke aaj jung hogi to hum zaroor tumhare saath chalte. Yeh baat jab woh keh rahey thay us waqt woh iman ki ba-nisbat kufr se zyada qareeb thay. Woh apni zubaano se woh baatein kehte hain jo unke dilon mein nahin hoti, aur jo kuch woh dilon mein chupate hain Allah usey khoob jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur munafiqon bhi maloom kerley jin say kaha gaya kay aao Allah ki raah mein jihad kero ya kafiron ko hatao to woh kehney lagay kay agar hum laraee jantay hotay to zaroor sath detay woh uss din ba nisbat eman kay kufur say boht qarib thay apney mun say woh baaten banatay hain jo inn kay dilon mein nahi aur Allah Taalaa khoob janta hai jisay woh chupatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और मुनाफिक कौन। वो मुनाफिक के जब उनसे कहा गया, आओ अल्लाह की राह में जंग करो या काम अज़ काम (अपने शहर की) मुदाफ़ियात (रक्षा) ही करो, तो कहने लगेंगे अगर हमें इल्म होता के आज जंग होगी तो हम ज़रूर तुम्हारे साथ चलते हैं। ये बात जब वो कह रहे थे हमें वक्त वो ईमान की ब-निस्बत कुफ्र से ज्यादा करीब था। वो अपनी जुबान से वो बातें कहते हैं जो उनके दिलों में नहीं होती, और जो कुछ वो दिलों में छुपते हैं अल्लाह उसे खूब जानता है
عَرَبِيالَّذينَ قالوا لِإِخوانِهِم وَقَعَدوا لَو أَطاعونا ما قُتِلوا ۗ قُل فَادرَءوا عَن أَنفُسِكُمُ المَوتَ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ये वही लोग हैं जो स्वयं तो (लड़ाई से) पीछे बैठे रहे और अपने भाइयों के बारे में कहने लगे : यदि वे हमारी बात मानते, तो मारे न जाते! (ऐ नबी!) कह दीजिए : फिर तो मौत से अपनी रक्षा कर लो, यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh wahi log hain jo khud to baithey rahey aur unke jo bhai-band ladne gaye aur maarey gaye unke mutaaliq inhon ne kehdiya ke agar woh hamari baat maan lete to na marey jatey. Insey kaho agar tum apne is qaul mein sachhey ho to khud tumhari maut jab aaye usey taal kar dikha dena
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh woh log hai jo khud bhi behtay rahey aur apney bhaiyon ki babat kaha kay agar woh bhi humari baat maan letay to qatal na kiye jatay. Keh dijiye! kay agar tum sachay ho to apni janon say maut ko hata do
Devnagri Urdu (Maududi)ये वही लोग हैं जो खुद तो बैठे रहे और उनके जो भाई-बंद लादने गए और मारे गए उनके मुतालिक इन्हों ने केहदिया के अगर वो हमारी बात मान लेते तो ना मारे जाते। इनसे कहो अगर तुम अपने इस क़ौल में सच्चे हो तो खुद तुम्हारी मौत जब आए उसे ताल कर दिखा देना
عَرَبِيوَلا تَحسَبَنَّ الَّذينَ قُتِلوا في سَبيلِ اللَّهِ أَمواتًا ۚ بَل أَحياءٌ عِندَ رَبِّهِم يُرزَقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग अल्लाह के मार्ग में मारे गए हैं, उन्हें कदापि मृत न समझो, बल्कि वे जीवित हैं, अपने पालनहार के पास रोज़ी दिए जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo log Allah ki raah mein qatal huey hain unhein murda na samjho, woh to haqeeqat mein zinda hain, apne Rubb ke paas rizq paa rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log Allah ki raah mein shaheed kiye gaye hain unn ko hergiz murda na samjhen bulkay woh zinda hain apney rab kay pass say roziyan diye jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग अल्लाह की राह में क़त्ल हुए हैं उन्हें मुर्दा ना समझो, वो तो हकीकत में ज़िंदा हैं, अपने रब के पास रिज़्क पा रहे हैं
عَرَبِيفَرِحينَ بِما آتاهُمُ اللَّهُ مِن فَضلِهِ وَيَستَبشِرونَ بِالَّذينَ لَم يَلحَقوا بِهِم مِن خَلفِهِم أَلّا خَوفٌ عَلَيهِم وَلا هُم يَحزَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे उससे प्रसन्न हैं, जो अल्लाह ने अपनी कृपा से उन्हें प्रदान किया है, और उन लोगों के लिए भी खुश हो रहे हैं, जो उनके पीछे रह गए हैं, अभी उनसे मिले नहीं हैं कि उन्हें भी न कोई भय होगा और न वे दुःखी होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jo kuch Allah ne apne fazal se unhein diya hai uspar khush o khurram hain, aur mutmaeen hain ke jo ehle iman unke pichey duniya mein reh gaye hain aur abhi wahaan nahin pahunchey hain unke liye bhi kisi khauf aur ranjh ka mauqa nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney jo apna fazal unhen dey rakha hai uss say boht khush hain aur khushiyan mana rahey hain unn logon ki babat jo abb tak unn say nahi milay unn kay peechay hain iss per kay unhen na koi khof hai aur na woh ghumgeen hongay
Devnagri Urdu (Maududi)जो कुछ अल्लाह ने अपने फजल से उन्हें दिया है उसपर खुश ओ खुर्रम हैं, और मुतमईन हैं के जो एहले ईमान उनके पीछे दुनिया में रह गए हैं और अभी वहां नहीं पहुंच पाए हैं उनके लिए भी कोई खौफ और रांझ का मौका नहीं है
عَرَبِي۞ يَستَبشِرونَ بِنِعمَةٍ مِنَ اللَّهِ وَفَضلٍ وَأَنَّ اللَّهَ لا يُضيعُ أَجرَ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे अल्लाह के अनुग्रह और उसकी कृपा से खुश हो रहे हैं और इससे कि अल्लाह ईमान वालों का बदला नष्ट नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah ke inam aur uske fazal par shadaan o farhaan hain aur unko maloom ho chuka hai ke Allah momino ke ajar ko zaya nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Woh khush hotay hain Allah ki nemat aur fazal say aur iss say bhi kay Allah Taalaa eman walon kay ajar ko barbad nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)वाह अल्लाह के इनाम और उसके फ़ज़ल पर शादान ओ फ़रहान हैं और उनको मालूम हो चुका है के अल्लाह मोमिनो के अजर को ज़या नहीं करता
عَرَبِيالَّذينَ استَجابوا لِلَّهِ وَالرَّسولِ مِن بَعدِ ما أَصابَهُمُ القَرحُ ۚ لِلَّذينَ أَحسَنوا مِنهُم وَاتَّقَوا أَجرٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन लोगों ने अल्लाह और रसूल की पुकार को स्वीकार किया, इसके पश्चात् कि उन्हें आघात पहुँच चुका था। उनमें से सत्कर्म करने वालों और (अल्लाह से) डरने वालों के लिए महान प्रतिफल है।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne zakm khane ke baad bhi Allah aur Rasool ki pukar par labbaik kaha(responded) un mein jo ashkhaas neikukar aur parheizgaar hain unke liye bada ajar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ney Allah aur uss kay rasool kay hukum ko qabool kiya iss kay baad kay unhen pooray zakham lag chukay thay inn mein say jinhon ney neki ki aur perezgari barti unn kay liye boht ziyada ajar hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने ज़ख्म खाने के बाद भी अल्लाह और रसूल की पुकार पर लब्बैक कहा (उत्तर दिया) उन में जो अशखास नीकुकर और परहेज़गार हैं उनके लिए बड़ा अजर है
عَرَبِيالَّذينَ قالَ لَهُمُ النّاسُ إِنَّ النّاسَ قَد جَمَعوا لَكُم فَاخشَوهُم فَزادَهُم إيمانًا وَقالوا حَسبُنَا اللَّهُ وَنِعمَ الوَكيلُ
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हिन्दी (Al-Omari)ये वही लोग हैं जिनसे लोगों ने कहा कि दुश्मनों ने तुम्हारे विरुद्ध सेना इकट्ठा कर ली है। अतः उनसे डरो। तो इस (सूचना) ने उनके ईमान को और बढ़ा दिया और उन्होंने कहा : हमारे लिए अल्लाह काफ़ी है और वह बहुत अच्छा कार्यसाधक (काम बनाने वाला) है।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh jinse logon ne kaha ke, “ tumhare khilaf badi faujein jamaa hui hain, unsey daro”, to yeh sunkar unka iman aur badh gaya (increased) aur unhon ne jawab diya ke hamare liye Allah kafi hai aur wahi behtareen kaarsaaz hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh log kay jab inn say logon ney kaha kay kafiron ney tumharay muqabley mein lashkar jama ker liye hain tum unn say khof khao to iss baat ney unhen eman mein aur barha diya aur kehne lagay humen Allah kafi hai aur woh boht acha kaar saaz hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वो जिनसे लोगों ने कहा के, “तुम्हारे ख़िलाफ बड़ी फौजें जमा हुई” हैं, उनसे डरो", तो ये सुनकर उनका ईमान और बढ़ गया (बढ़ा) और उनको ने जवाब दिया के हमारे लिए अल्लाह काफी है और वही बेहतरीन कार्साज है
عَرَبِيفَانقَلَبوا بِنِعمَةٍ مِنَ اللَّهِ وَفَضلٍ لَم يَمسَسهُم سوءٌ وَاتَّبَعوا رِضوانَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ ذو فَضلٍ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)चुनांचे वे अल्लाह की ओर से प्राप्त होने वाली नेमत और अनुग्रह के साथ लौटे। उन्हें कोई तकलीफ़ नहीं पहुँची। तथा वे अल्लाह की प्रसन्नता के मार्ग पर चले। और अल्लाह बड़े अनुग्रह वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar woh Allah taala ki niyamat aur fazal ke saath palat aaye, unko kisi qism ka zarar bhi na pahuncha aur Allah ki raza par chalne ka sharaf bhi unhein haasil ho gaya, Allah bada fazal farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)(nateeja yeh hua kay) Allah ki nemat-o-fazal kay sath yeh lotay enhen koi buraee na phonchi enhon ney Allah Taalaa ki raza mandi ki pairwi ki Allah boht baray fazal wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार वो अल्लाह ताला की नियामत और फज़ल के साथ पलट आए, उनको किसी क़िस्म का ज़रार भी ना चाहिए और अल्लाह कि रजा पर चलने का शरफ भी उन्हें हासिल हो गया, अल्लाह बड़ा फजल फरमाने वाला है
عَرَبِيإِنَّما ذٰلِكُمُ الشَّيطانُ يُخَوِّفُ أَولِياءَهُ فَلا تَخافوهُم وَخافونِ إِن كُنتُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह तो शैतान है, जो तुम्हें अपने सहयोगियों से डरा रहा है। अतः तुम उनसे न डरो और केवल मुझसे डरो, यदि तुम ईमान वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Ab tumhein maloom hogaya ke woh dar-asal shaytan tha jo apne doston se khwa-ma-khwa (tumko) dara raha tha, lihaza aainda tum Insaano se na darna, mujhse darna agar tum haqeeqat mein saahib e iman ho
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh khabar denay wala sird shetan hi hai jo apney doston say darata hai tum inn kafiron say na daro aur mera khof rakho agar tum momin ho
Devnagri Urdu (Maududi)अब तुम्हें मालूम होगा के वो दर-असल शैतान था जो अपने दोस्तों से ख्वा-मा-ख्वा (तुमको) डरा रहा था, लिहाजा आइंदा तुम इंसानों से ना डरना, मुझसे डरना अगर तुम हकीकत में साहिब ए ईमान हो
عَرَبِيوَلا يَحزُنكَ الَّذينَ يُسارِعونَ فِي الكُفرِ ۚ إِنَّهُم لَن يَضُرُّوا اللَّهَ شَيئًا ۗ يُريدُ اللَّهُ أَلّا يَجعَلَ لَهُم حَظًّا فِي الآخِرَةِ ۖ وَلَهُم عَذابٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) वे लोग आपको दुःखी न करें, जो कुफ़्र में तेज़ी दिखा रहे हैं। वे अल्लाह को कदापि कोई हानि नहीं पहुँचा सकेंगे। अल्लाह चाहता है कि आख़िरत (परलोक) में उनका कोई हिस्सा न रखे तथा उनके लिए बड़ी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Paighambar) jo log aaj kufr ki raah mein badi daud dhoop kar rahey hain unki sargarmiyan tumhein azurda na karein(grieve you). Yeh Allah ka kuch bhi na bigaad sakenge. Allah ka irada yeh hai ke unke liye aakhirat mein koi hissa na rakkhey, aur bil aakhir unko sakht saza milne wali hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kufur mein aagay barhney walay log tumhen ghum naak naa keren yaqeen maano kay yeh Allah Taalaa ka kuch na bigar saken gay Allah Taalaa ka irada hai kay inn ka liye aakhirat ka koi hissa ata na keray aur inn kay liye bara azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ पैगम्बर) जो लोग आज कुफ्र की राह में बड़ी दौड़ धूप कर रहे हैं उनकी सरगर्मियां तुम्हें दुखी न करें। ये अल्लाह का कुछ भी ना बिगाड़ पाएंगे. अल्लाह का इरादा ये है कि उनके लिए आख़िरत में कोई हिसा ना रखे, और बिल आख़िर उनको सज़ा मिलने वाली है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ اشتَرَوُا الكُفرَ بِالإيمانِ لَن يَضُرُّوا اللَّهَ شَيئًا وَلَهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने ईमान के बदले कुफ़्र का सौदा किया, वे अल्लाह का कुछ नहीं बिगाड़ेंगे। तथा उनके लिए दुःखदायी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log iman ko chodh kar kufr ke kharidaar baney hain woh yaqeenan Allah ka koi nuqsaan nahin kar rahey hain. Unke liye dardnaak azaab tayyar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kufur ko eman kay badlay khareedney walay hergiz hergiz Allah Taalaa ko koi nuksan nahi phoncha saktay aur inn hi kay liye alam naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ईमान को छोड़ कर कुफ़्र के ख़रिदार बने हैं वो यक़ीनन अल्लाह का कोई नुक्सान नहीं कर रहे हैं। उनके लिए दर्दनक अजब तय्यर है
عَرَبِيوَلا يَحسَبَنَّ الَّذينَ كَفَروا أَنَّما نُملي لَهُم خَيرٌ لِأَنفُسِهِم ۚ إِنَّما نُملي لَهُم لِيَزدادوا إِثمًا ۚ وَلَهُم عَذابٌ مُهينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग काफ़िर हो गए, वे हरगिज़ यह न समझें कि हमारा उन्हें ढील देना, उनके लिए अच्छा है। वास्तव में, हम उन्हें इसलिए ढील दे रहे हैं, ताकि उनके पाप और बढ़ जाएँ। तथा उनके लिए अपमानजनक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh dheel jo hum unhein diye jatey hain isko yeh kaafir apne haqq mein behtari na samjhein. Hum to unhein isliye dheel de rahey hain ke yeh khoob baar-e-gunaah sameit lein, phir unke liye sakht zaleel karne wali saza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kafir log humari di hui mohlat ko apney haq mein behtar na samjhen yeh mohlat to iss liye hai kay woh gunahon mein aur barh jayen inn hi kay liye zaleel kerney wala azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये धीरे-धीरे जो हम उन्हें दिए जाते हैं इसको ये काफिर अपने हक में बेहतरी ना समझे। हम तो उन्हें इस तरह से ढील दे रहे हैं के ये खूब बार-ए-गुनाह समित लें, फिर उनके लिए सख्त ज़लील करने वाली सजा है
عَرَبِيما كانَ اللَّهُ لِيَذَرَ المُؤمِنينَ عَلىٰ ما أَنتُم عَلَيهِ حَتّىٰ يَميزَ الخَبيثَ مِنَ الطَّيِّبِ ۗ وَما كانَ اللَّهُ لِيُطلِعَكُم عَلَى الغَيبِ وَلٰكِنَّ اللَّهَ يَجتَبي مِن رُسُلِهِ مَن يَشاءُ ۖ فَآمِنوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ ۚ وَإِن تُؤمِنوا وَتَتَّقوا فَلَكُم أَجرٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐसा नहीं है कि अल्लाह ईमान वालों को उसी (हाल) पर छोड़ दे, जिसपर तुम (इस समय) हो, जब तक कि बुरे को अच्छे से अलग न कर दे। और ऐसा भी नहीं है कि अल्लाह तुम्हें ग़ैब (परोक्ष) से सूचित कर दे। परंतु अल्लाह अपने रसूलों में से जिसे चाहता है (ग़ैब की कुछ बातें बताने के लिए) चुन लेता है। अतः तुम अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाओ। यदि तुम ईमान लाओ और अल्लाह से डरते रहो, तो तुम्हारे लिए बड़ा प्रतिफल है।
Roman Urdu (Maududi)Allah momino ko is haalat mein hargiz na rehne dega jismein tum is waqt paye jatey ho. Woh paak logon ko napaak logon se alag karke rahega. Magar Allah ka yeh tareeqa nahin hai ke tumko gaib par muttala karde. Gaib ki baatein batane ke liye to woh apne Rasoolon mein jisko chahta hai muntakhab karleta hai. Lihaza (umoor e gaib ke baarey mein) Allah aur uske Rasool par iman rakkho agar tum iman aur khuda tarsi ki rawish par chaloge to tumko bada ajar milega
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss haal per tum ho ussi per Allah eman walon ko na chor dey ga jab tak kay pak aur na pak ko alag alag na ker dey aur na Allah Taalaa aisa hai kay tumhen ghaib say aagah ker dey bulkay Allah Taalaa apney rasoolon mein say jiss ka chahaye intikhab ker leta hai iss liye tum Allah Taalaa per aur uss kay rasoolon per eman rakho agar tum eman lao aur taqwa kero to tumharay liye bhari ajar hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह मोमिनो को इस हालात में हरगिज़ न रहने देगा जिसमें तुम इस वक्त पे जाते हो। वो पाक लोगों को नापाक लोगों से अलग करके रहेगा। मगर अल्लाह का ये तरीक़ा नहीं है कि तुमको गैब पर मुत्तला करदे। गैब की बातें बताने के लिए तो वो अपने रसूलों में जिसको चाहता है मुंतखब करता है। लिहाजा (उमूर ए गैब के बारे में) अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रक्खो अगर तुम ईमान और खुदा तरसी की रवीश पर चलोगे तो तुमको बड़ा अजर मिलेगा
عَرَبِيوَلا يَحسَبَنَّ الَّذينَ يَبخَلونَ بِما آتاهُمُ اللَّهُ مِن فَضلِهِ هُوَ خَيرًا لَهُم ۖ بَل هُوَ شَرٌّ لَهُم ۖ سَيُطَوَّقونَ ما بَخِلوا بِهِ يَومَ القِيامَةِ ۗ وَلِلَّهِ ميراثُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۗ وَاللَّهُ بِما تَعمَلونَ خَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग उस चीज़ में कंजूसी करते हैं, जो अल्लाह ने उन्हें अपने अनुग्रह से प्रदान किया है, वे कदापि यह न समझें कि (उनका) यह (कृत्य) उनके लिए अच्छा है। बल्कि यह उनके लिए बुरा है। उन्होंने जिस चीज़ में कंजूसी की होगी, उसे क़ियामत के दिन उनके गले का तौक़ बना दिया जाएगा। और आकाशों तथा धरती का उत्तराधिकार (विरासत) अल्लाह के लिए है और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उससे सूचित है।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ko Allah ne apne fazal se nawaza hai aur phir woh bukhl (kanjoosi/niggardly) se kaam lete hain woh is khayal mein na rahein ke yeh bakheeli unke liye acchi hai. Nahin, yeh unke haqq mein nihayat buri hai, Jo kuch woh apni kanjoosi se jamaa kar rahey hain wahi qayamat ke roz unke galey ka tauq ban jayega. Zameen aur asmaano ki miras Allah hi ke liye hai aur tum jo kuch karte ho Allah ussey bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jinhen Allah Taalaa ney apney fazal say kuch dey rakha hai woh iss mein apni kanjoosi ko apney liye behtar khayal na keren bulkay woh inn kay liye nihayat bad tar hai un-qarib qayamat walay din yeh apni kanjoosi ki cheez kay toq daalay jayen gay aasmanon aur zamin ki meeras Allah Taalaa hi kay liye aur jo kuch tum ker rahey ho uss say Allah Taalaa aagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों को अल्लाह ने अपने फजल से नवाजा है और फिर वो भुख्ल (कंजूसी/कठिनाई) से काम लेते हैं वो इस ख़याल में ना रहें के ये बख़ैली उनके लिए अच्छी है। नहीं, ये उनके हक में निहायत बुरी है, जो कुछ वो अपनी कंजूसी से जमा कर रहे हैं वही कयामत के रोज उनके गले का तौक बन जाएगा। ज़मीन और आसमानों की मीरास अल्लाह ही के लिए है और तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसे बाख़बर है
عَرَبِيلَقَد سَمِعَ اللَّهُ قَولَ الَّذينَ قالوا إِنَّ اللَّهَ فَقيرٌ وَنَحنُ أَغنِياءُ ۘ سَنَكتُبُ ما قالوا وَقَتلَهُمُ الأَنبِياءَ بِغَيرِ حَقٍّ وَنَقولُ ذوقوا عَذابَ الحَريقِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ने उन लोगों की बात सुन ली है, जिन्होंने कहा कि "अल्लाह निर्धन है और हम धनवान हैं!" उन्होंने जो कुछ कहा है, हम उसे लिख लेंगे और उनके नबियों को अनाधिकार क़त्ल करने को भी। तथा हम (उनसे) कहेंगे कि (अब तुम) जलाने वाली यातना का मज़ा चखो।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne un logon ka qaul suna jo kehte hain ke Allah fakeer hai aur hum gani hain. Unki yeh baatein bhi hum likh lenge, aur issey pehle jo woh paigambaron ko na-haqq qatal karte rahey hain woh bhi unke naam e aamaal mein sabt hai (jab faisle ka waqt aayega us waqt) hum unse kahenge ke lo ab azaab e jahannum ka maza chakkho
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan Allah Taalaa ney unn logon ka qol bhi suna jinhon ney kaha kay Allah Taalaa faqir hai aur hum to toongar hain unn kay iss qol ko hum likh len gay. Aur inn ka anbiya ko bila waja qatal kerna bhi aur hum inn say kahen gay kay jalney wala azab chakho
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने उन लोगों का क़ौल सुना जो कहते हैं के अल्लाह फ़कीर है और हम गनी हैं। उनकी ये बातें भी हम लिख लेंगे, और इस पहले जो वो पैगम्बरों को ना-हक़ क़त्ल करते रहे हैं वो भी उनके नाम ए अमाल में सब्त है (जब फ़ैसले का वक़्त आएगा उस वक़्त) हम उनसे कहेंगे के लो अब अज़ाब ए जहन्नुम का मजा चक्खो
عَرَبِيذٰلِكَ بِما قَدَّمَت أَيديكُم وَأَنَّ اللَّهَ لَيسَ بِظَلّامٍ لِلعَبيدِ
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हिन्दी (Al-Omari)यह तुम्हारे हाथों की कमाई का बदला है और निःसंदेह अल्लाह अपने बंदों पर तनिक भी अत्याचार करने वाला नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh tumhare apne haathon ki kamayi hai, Allah apne bandon ke liye zalim nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh tumharay paish kerda aemaal ka badla hai aur Allah Taalaa apney bandon per zulm kerney wala nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ये तुम्हारे अपने हाथों की कमाई है, अल्लाह अपने बंदों के लिए जालिम नहीं है
عَرَبِيالَّذينَ قالوا إِنَّ اللَّهَ عَهِدَ إِلَينا أَلّا نُؤمِنَ لِرَسولٍ حَتّىٰ يَأتِيَنا بِقُربانٍ تَأكُلُهُ النّارُ ۗ قُل قَد جاءَكُم رُسُلٌ مِن قَبلي بِالبَيِّناتِ وَبِالَّذي قُلتُم فَلِمَ قَتَلتُموهُم إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ये वही लोग हैं जिन्होंने कहा : अल्लाह ने हमें वसीयत की है कि हम किसी रसूल पर ईमान न लाएँ यहाँ तक कि वह हमारे सामने ऐसी क़ुरबानी पेश करे, जिसे आग खा जाए। (ऐ नबी!) आप कह दें कि मुझसे पहले तुम्हारे पास कई रसूल खुली निशानियाँ और वह (चमत्कार) भी लेकर आए जो तुम कहते हो, तो फिर तुमने उनकी हत्या क्यों की, यदि तुम सच्चे हो?
Roman Urdu (Maududi)Jo log kehte hain “Allah ne humko hidayat kardi hai ke hum kisi ko Rasool tasleem na karein jab tak woh hamare saamne aisi qurbani na karey jisey (gaib se aakar) aag kha le”, unsey kaho, “ tumhare paas mujhse pehle bahut se Rasool aa chuke hain jo bahut si roshan nishaniyan laye thay aur woh nishani bhi laye thay jiska tum zikr karte ho. Phir agar (iman laney ke liye yeh sharth pesh karne mein) tum sacchey ho to un Rasoolon ko tumne kyun qatal kiya?”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh woh log hai jonhon ney kaha kay Allah Taalaa ney humen hukum diya hai kay kissi rasool ko na manen jab tak woh humaray pass aisi qurbani na laye jissay aag kha jaye. Aap keh dijiye kay agar um sachay ho to mujh say pehlay tumharay pass jo rasool deegar moajzon kay sath yeh bhi laye jissay tum keh rahey ho to phir tum ney unhen kiyon maar dala
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग कहते हैं "अल्लाह ने हमको हिदायत करदी है कि हम किसी को रसूल तस्लीम न करें जब तक वो हमारे सामने ऐसी कुर्बानी न करे जिसमें (गाइब से आकार) आग खा ले", उनसे कहो, "तुम्हारे पास मुझसे पहले बहुत से रसूल आ चुके हैं जो बहुत सी" रोशन निशानियां लाए थे और वो निशानियां भी लाए थे जिसका तुम ज़िक्र करते हो (ईमान लाने के लिए ये शर्त पेश करने में) तुम सच्चे हो तो उन रसूलों को तुमने क्यों क़त्ल किया?”
عَرَبِيفَإِن كَذَّبوكَ فَقَد كُذِّبَ رُسُلٌ مِن قَبلِكَ جاءوا بِالبَيِّناتِ وَالزُّبُرِ وَالكِتابِ المُنيرِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि वे आपको झुठलाते हैं, तो आपसे पहले बहुत-से रसूल झुठलाए जा चुके हैं, जो खुली निशानियाँ, तथा (आकाशीय) ग्रंथ और प्रकाशक पुस्तक लाए।
Roman Urdu (Maududi)Ab (aey Muhammad)!Agar yeh log tumhein jhutlate hain to bahut se Rasool tumse pehle jhutlaye jaa chuke hain jo khuli khuli nishaniyan aur sahifey (scriptures) aur roshni bakshne wali kitabein laye thay
Roman Urdu (Junagarhi)Phir bhi agar yeh log aap ko jhutlayen to aap say pehlay bhi boht say woh rasool jhutlaye gaye hain jo roshan daleelen aur munawar kitab ley ker aaye
Devnagri Urdu (Maududi)अब (ऐ मुहम्मद)!अगर ये लोग तुम्हें झुठलाते हैं तो बहुत से रसूल तुमसे पहले झुटले जा चुके हैं जो खुली खुली निशानियां और सहीफे (ग्रंथ) और रोशनी बख्शने वाली किताबें लाए थे
عَرَبِيكُلُّ نَفسٍ ذائِقَةُ المَوتِ ۗ وَإِنَّما تُوَفَّونَ أُجورَكُم يَومَ القِيامَةِ ۖ فَمَن زُحزِحَ عَنِ النّارِ وَأُدخِلَ الجَنَّةَ فَقَد فازَ ۗ وَمَا الحَياةُ الدُّنيا إِلّا مَتاعُ الغُرورِ
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हिन्दी (Al-Omari)प्रत्येक प्राणी को मौत का स्वाद चखना है और तुम्हें क़ियामत के दिन तुम्हारे कर्मों का भरपूर प्रतिफल दिया जाएगा। (उस दिन) जो व्यक्ति जहन्नम से बचा लिया गया और जन्नत में प्रवेश पा गया, वह वास्तव में सफल हो गया। तथा दुनिया की ज़िंदगी धोखे की पूंजी के सिवा कुछ नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar har shaks ko marna hai aur tum sab apne apne poorey ajar qayamat ke roz paney waley ho. Kamiyab dar-asal woh hai jo wahaan aatish e dozakh se bach jaye aur jannat mein dakhil kardiya jaye. Rahi yeh duniya, to yeh mehaz ek zaahir fareb cheez hai
Roman Urdu (Junagarhi)Her jaan maut ka maza chakhney wali hai aur qayamat kay din tum apney badlay pooray pooray diye jao gay pus jo shaks aag say hata diya jaye aur jannat mein dakhil ker diya jaye be-shak woh kaamyaab hogaya aur duniya ki zindagi to sirf dhokay ki jinss hai
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार हर शक्स को मरना है और तुम सब अपने-अपने पूरे अजर कयामत के रोज़ पाने वाले हो। कमियाब दर-असल वो है जो वहां आतिश ए दोज़ख से बच जाए और जन्नत में दखल कर दिया जाए। राही ये दुनिया, तो ये महज़ एक ज़ाहिर फरेब चीज़ है
عَرَبِي۞ لَتُبلَوُنَّ في أَموالِكُم وَأَنفُسِكُم وَلَتَسمَعُنَّ مِنَ الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ مِن قَبلِكُم وَمِنَ الَّذينَ أَشرَكوا أَذًى كَثيرًا ۚ وَإِن تَصبِروا وَتَتَّقوا فَإِنَّ ذٰلِكَ مِن عَزمِ الأُمورِ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ ईमान वालो!) तुम अपने धनों और प्राणों के बारे में ज़रूर परीक्षा में डाले जाओगे और तुम अवश्य ही उन लोगों से जो तुमसे पहले किताब दिए गए थे तथा उन लोगों से जो शिर्क में पड़े हुए हैं, बहुत-सी दुःखद बातें सुनोगे। लेकिन यदि तुम धैर्य से काम लो और (अल्लाह से) डरते रहो, तो यह बड़े साहस का काम है।
Roman Urdu (Maududi)(Musalmaano)! Tumhein maal aur jaan dono ki aazmaishein pesh aakar rahengi, aur tum ehle kitab aur mushrikeen se bahut se takleef-de baatein sunogey. Agar in sab haalat mein tum sabr aur khuda tarsi ki rawish par qayam raho to yeh baday hausle ka kaam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tumharay maalon aur tumhari jaanon say tumhari aazmaish ki jaye gi aur yeh bhi yaqeen hai kay tumhen unn logon ki jo tum say pehlay kitab diye gaye aur mushrikon ki boht si dukh denay wali baaten bhi sunni paren gi aur agar tum sabar kerlo aur perhezgari ikhtiyar kero to yaqeenan yeh boht bari himmat ka kaam hai
Devnagri Urdu (Maududi)(मुसलमानो)! तुम्हें माल और जान दोनों की आजमाइशें पेश आकर रहेंगी, और तुम एहले किताब और मुशरिकेन से बहुत से तकलीफ-दे बातें सुनोगे। अगर सब हालात में तुम सब्र और खुदा तरसी की रवीश पर कायम रहो तो ये बदे हौसलों का काम है
عَرَبِيوَإِذ أَخَذَ اللَّهُ ميثاقَ الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ لَتُبَيِّنُنَّهُ لِلنّاسِ وَلا تَكتُمونَهُ فَنَبَذوهُ وَراءَ ظُهورِهِم وَاشتَرَوا بِهِ ثَمَنًا قَليلًا ۖ فَبِئسَ ما يَشتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ नबी! याद करो) जब अल्लाह ने किताब वालों से पक्का वचन लिया था कि तुम अवश्य इसे लोगों के सामने बयान करते रहोगे और इसे छुपाओगे नहीं, तो उन्होंने इस वचन को पीठ पीछे डाल दिया और उसके बदले तनिक मूल्य प्राप्त कर लिया। तो वे कितनी बुरी चीज़ खरीद रहे हैं?
Roman Urdu (Maududi)In ehle kitab ko woh ahad bhi yaad dilao jo Allah ne unse liya tha ke tumhein kitab ki taleemat ko logon mein phaylana hoga, inhein posheeda rakhna nahin hoga. Magar unhon ne kitab ko pas-e-pusht (behind their backs) daal diya aur thodi keemat par usey bech daala. Kitna bura kaarobaar hai jo yeh kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa ney jab ehal-e-kitab say ehad liya kay tum issay sab logon say zaroor biyan kero gay aur issay chupao gay nahi to phir bhi inn logon ney iss ehad ko apni peeth peechay daal diya aur issay boht kum qeemat per baich daala. Inn kay yeh beopaar boht bura hai
Devnagri Urdu (Maududi)एहले किताब को वो अहद भी याद दिलाओ जो अल्लाह ने उनसे लिया था के तुमने किताब की तालीमात को लोगों में फैलाना होगा, उनमें पोशीदा रखना नहीं होगा. मगर उनहों ने किताब को पास-ए-पुश्त (पीठ के पीछे) डाल दिया और थोड़ी कीमत पर उसे बेच डाला। कितना बुरा करोबार है जो ये कर रहे हैं
عَرَبِيلا تَحسَبَنَّ الَّذينَ يَفرَحونَ بِما أَتَوا وَيُحِبّونَ أَن يُحمَدوا بِما لَم يَفعَلوا فَلا تَحسَبَنَّهُم بِمَفازَةٍ مِنَ العَذابِ ۖ وَلَهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) जो लोग अपने कृत्यों पर प्रसन्न हो रहे हैं और चाहते हैं कि उन्हें उन कामों के लिए (भी) सराहा जाए, जो उन्होंने नहीं किए हैं, तो आप हरगिज़ यह न समझें कि वे यातना से बच जाएँगे। उनके लिए तो दुःखदायी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Tum un logon ko azaab se mehfooz na samjho jo apne kartooton par khush hain aur chahte hain ke aisey kaamon ki tareef unhein hasil ho jo fil waqey unhon ne nahin kiye hain. Haqeeqat mein unke liye dardnaak saza tayyar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh log jo apney kartooton per khush hain aur chahatay hain kay jo unhon ney nahi kiya uss per bhi unn ki tareef ki jayen aap unhen azab say chutkaray mein na samjhiye inn kay liye to dard naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम उन लोगों को अजब से महफ़ूज़ ना समझो जो अपने कार्टून पर खुश हैं और चाहते हैं कि ऐसे कामों की तारीफ़ उन्हें हासिल हो जो फ़िलहाल उन्होन ने नहीं किया है। हकीकत में उनके लिए दर्दनाक सजा तय्यार है
عَرَبِيوَلِلَّهِ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۗ وَاللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आकाशों और धरती का राज्य अल्लाह ही का है तथा अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Zameen aur asmaano ka maalik Allah hai aur uski qudrat sab par haawi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmanon aur zamin ki badshahi Allah hi kay liye hai aur Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)जमीन और आसमान का मालिक अल्लाह है और उसकी कुदरत सब पर हावी है
عَرَبِيإِنَّ في خَلقِ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَاختِلافِ اللَّيلِ وَالنَّهارِ لَآياتٍ لِأُولِي الأَلبابِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आसमानों और ज़मीन की रचना तथा रात और दिन के आने-जाने में, बुद्धिमानों के लिए निशानियाँ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Zameen aur asmaano ki paidaish mein aur raat aur din ke bari bari se aane mein un hoshmand logon ke liye bahut nishaniyan hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmanon aur zamin ki pedaish mein aur raat din kay hair pher mein yaqeenan aqal mandon kay liye nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)जमीन और आसमान की अदायगी में और रात और दिन के बारी बारी से आने में उन होशमंद लोगों के लिए बहुत निशानियां हैं
عَرَبِيالَّذينَ يَذكُرونَ اللَّهَ قِيامًا وَقُعودًا وَعَلىٰ جُنوبِهِم وَيَتَفَكَّرونَ في خَلقِ السَّماواتِ وَالأَرضِ رَبَّنا ما خَلَقتَ هٰذا باطِلًا سُبحانَكَ فَقِنا عَذابَ النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)जो खड़े और बैठे और अपनी करवटों पर लेटे हुए अल्लाह को याद करते हैं तथा आसमानों और ज़मीन की रचना में सोच-विचार करते हैं। (वे कहते हैं :) ऐ हमारे पालनहार! तूने यह सब कुछ बेकार नहीं रचा है। अतः हमें आग के अज़ाब से बचा ले।
Roman Urdu (Maududi)Jo uthte, baithte aur latetey, har haal mein khuda ko yaad karte hain aur asmaan o zameen ki saakht (creation) mein gaur o fikr karte hain. (Woh be-ikhtiyar bol uthte hain) “ parwardigar! Yeh sab kuch tu nay fizul aur be-maqsad nahin banaya hai, tu paak hai issey ke abas (bekar / in vain) kaam karey. Pas aey Rubb! Humein dozakh ke azaab se bacha le
Roman Urdu (Junagarhi)Jo Allah Taalaa ka zikar kharay aur bethay aur apni kerwaton per letay huye kertay hain aur aasmanon-o-zamin ki pedaish mein ghor-o-fiker kertay hain aur kehtay hain aey humaray perwerdigar! Tu ney yeh bey faeeda nahi banaya tu pak hai pus humen aag kay azab say bacha ley
Devnagri Urdu (Maududi)जो उठते, बैठते और लेटते, हर हाल में खुदा को याद करते हैं और आसमान ओ ज़मीन की सच्चाई (सृजन) में गौर ओ फ़िक्र करते हैं। (वो बे-इख्तियार बोल उठते हैं) "परवरदिगार! ये सब कुछ तू नई फ़िज़ुल और बे-मकसद नहीं बनाया है, तू पक गया है इसके अबस (बेकार / व्यर्थ) काम करे। पास ऐ रब! हमें दोज़ख के अज़ाब से बचा ले
عَرَبِيرَبَّنا إِنَّكَ مَن تُدخِلِ النّارَ فَقَد أَخزَيتَهُ ۖ وَما لِلظّالِمينَ مِن أَنصارٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारे पालनहार! तूने जिसे नरक में डाल दिया, तो वास्तव में तूने उसे अपमानित कर दिया। और ज़ालिमों का कोई सहायक नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Tu nay jisey dozakh mein dala usey dar haqeeqat badi zillat o ruswayi mein daal diya, aur phir aisey zalimon ka koi madadgaar na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aey humaray palney walay! Tu jissay jahannum mein dalay yaqeenan tu ney ussay ruswa kiya aur zalimon ka madadgar koi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)तू नहीं जिसे दोज़ख में डाला उसे डार हकीकत बड़ी ज़िल्लत ओ रुसवाई में दाल दिया, और फिर ऐसे ज़ालिमों का कोई मददगार न होगा
عَرَبِيرَبَّنا إِنَّنا سَمِعنا مُنادِيًا يُنادي لِلإيمانِ أَن آمِنوا بِرَبِّكُم فَآمَنّا ۚ رَبَّنا فَاغفِر لَنا ذُنوبَنا وَكَفِّر عَنّا سَيِّئَاتِنا وَتَوَفَّنا مَعَ الأَبرارِ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारे पालनहार! हमने एक पुकारने वाले को ईमान की ओर बुलाते हुए सुना कि अपने पालनहार पर ईमान लाओ, तो हम ईमान ले आए। ऐ हमारे पालनहार! तो अब तू हमारे पापों को क्षमा कर दे तथा हमारी बुराइयों को हमसे दूर कर दे और हमें सदाचारियों के साथ मृत्यु दे।
Roman Urdu (Maududi)Maalik! Humne ek pukarne waley ko suna jo iman ki taraf bulata tha aur kehta tha ke apne Rubb ko maano, humne uski dawat qabool karli, pas aey hamare aaqa! Jo kasoor humse huey hain unsey darguzar farma. Jo buraiyan hum mein hain unhein door karde aur hamara khaatma neik logon ke saath kar
Roman Urdu (Junagarhi)Aey humaray rab! Hum ney suna kay munadi kerney wala ba-aawaz buland eman ki taraf bula raha hai kay logo! Apney rab per eman lao pus hum eman laye. Ya elahee! Abb to humaray gunah moaf farma aur humari buraiyan hum say door ker dey aur humari maut nekon kay sath ker
Devnagri Urdu (Maududi)मालिक! हमने एक पुकारने वाले को सुना जो ईमान की तरफ बुलाता था और कहता था के अपने रब को मानो, हमने उसकी दावत कबूल की, हमारे पास। आक़ा! जो कसूर हमसे हुए हैं उनसे दरगुज़र फ़रमा। जो बुराइयां हम में हैं उनसे दूर करदे और हमारा ख़तमा नीक लोगों के साथ कर
عَرَبِيرَبَّنا وَآتِنا ما وَعَدتَنا عَلىٰ رُسُلِكَ وَلا تُخزِنا يَومَ القِيامَةِ ۗ إِنَّكَ لا تُخلِفُ الميعادَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारे पालनहार! और हमें वह चीज़ प्रदान कर जिसका तूने अपने रसूलों के द्वारा हमसे वादा किया है तथा क़यामत के दिन हमें अपमानित न कर। वास्तव में तू अपने वादे के विरुद्ध नहीं करता है।
Roman Urdu (Maududi)Khudawanda! Jo wadey tu nay apne Rasoolon ke zariye se kiye hain unko hamare saath poora kar aur qayamat ke din humein ruswayi mein na daal, beshak tu apne wadey ke khilaf karne wala nahin hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey humaray palney walay mabood! Humen woh dey jiss ka wada tu ney hum say apney rasoolon ki zabani kiya hai aur humen qayamat kay din ruswa na ker yaqeenan tu wada khilafi nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)ख़ुदावंदा! जो वादे तू नहीं अपने रसूलों के ज़रिये से किये हैं उनको हमारे साथ पूरा कर और कयामत के दिन हमें रुसवाई में ना डाल, बेशक तू अपने वादे के ख़िलाफ़ करने वाला नहीं है”
عَرَبِيفَاستَجابَ لَهُم رَبُّهُم أَنّي لا أُضيعُ عَمَلَ عامِلٍ مِنكُم مِن ذَكَرٍ أَو أُنثىٰ ۖ بَعضُكُم مِن بَعضٍ ۖ فَالَّذينَ هاجَروا وَأُخرِجوا مِن دِيارِهِم وَأوذوا في سَبيلي وَقاتَلوا وَقُتِلوا لَأُكَفِّرَنَّ عَنهُم سَيِّئَاتِهِم وَلَأُدخِلَنَّهُم جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ ثَوابًا مِن عِندِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عِندَهُ حُسنُ الثَّوابِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उनके पालनहार ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली (और फरमाया) कि मैं किसी नेकी करने वाले की नेकी को नष्ट नहीं करता, चाहे वह नर हो या नारी। तुम सब आपस में एक-दूसरे से हो। अतः जिन लोगों ने हिजरत की और अपने घरों से निकाले गए और मेरे मार्ग में सताए गए और उन्होंने जिहाद किया और शहीद किए गए, मैं अवश्य उनकी बुराइयाँ उनसे दूर कर दूँगा और अवश्य ही उन्हें ऐसे बागों में दाख़िल करूँगा, जिनके नीचे नहरें बह रही हैं। यह अल्लाह के पास से उनका बदला होगा और अल्लाह ही के पास सबसे अच्छा बदला है।
Roman Urdu (Maududi)Jawab mein unke Rubb ne farmaya, “ mai tum mein se kisi ka amal zaya karne wala nahin hoon, khwa mard ho ya aurat, tum sab ek dusre ke hum jins ho. Lihaza jin logon ne meri khatir apne watan chodey aur jo meri raah mein apne gharon se nikale gaye aur sataye gaye aur mere liye ladey aur maarey gaye unke sab kasoor mai maaf kardunga aur unhein aisey baaghon mein daakhil karunga jinke nichey nehrein behti hongi. Yeh unki jaza hai Allah ke haan aur behtareen jaza Allah hi ke paas hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus unn kay rab ney unn ki dua qabool farma li kay tum say kissi kaam kerney walay kay kaam ko khuwa woh mard ho ya aurat mein hergiz zaya nahi kerta tum aapas mein aik doosray kay hum jinss ho iss liye woh log jinhon ney hijrat ki aur apney gharon say nikal diye gaye aur jinhen meri raah mein izza di gaee aur jinhon ney jihad kiya aur shaheed kiye gaye mein zaroor zaroor unn ki buraiyan unn say door kerdoon ga aur bil yaqeen unhen unn jannaton mein ley jaon ga jin key neechay nehren beh rahi han yeh hai sawab Allah Talaa ki taraf say aur Allah Taalaa hi kay pass behtareen sawab hai
Devnagri Urdu (Maududi)जवाब में उनके रुब ने फरमाया, “मैं तुम में से किसी का अमल ज़या करने वाला नहीं हूं, ख्वा मर्द हो या औरत, तुम सब एक दूसरे के हम जिन हो। लिहाजा जिन लोगों ने मेरी खातिर अपने वतन छोड़े और जो मेरी राह में अपने घरों से निकले गए और सताए गए और मेरे लिए लड़े और मारे गए उनके सब कसूर माई माफ कर दूंगा और उन्हें ऐसे बागों में दाखिल करूंगा जिनका आला जरूरी है होंगी. ये उनकी जजा है अल्लाह के हान और बेहतरीन जजा अल्लाह ही के पास है"
عَرَبِيلا يَغُرَّنَّكَ تَقَلُّبُ الَّذينَ كَفَروا فِي البِلادِ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) नगरों में काफ़िरों का (सुविधा के साथ) चलना-फिरना आपको धोखे में न डाले।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi)! Duniya ke mulkon mein khuda ke nafarmaan logon ki chalat phirat tumhein kisi dhoke mein na daaley
Roman Urdu (Junagarhi)Tujhay kafiron ka shehron mein chalna phirna fareb mein na daal dey
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी)! दुनिया के मुल्कों में खुदा के नफरमान लोगों की चलती फिरत तुम्हें किसी धोखे में ना डाले
عَرَبِيمَتاعٌ قَليلٌ ثُمَّ مَأواهُم جَهَنَّمُ ۚ وَبِئسَ المِهادُ
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हिन्दी (Al-Omari)यह थोड़ी-सी सुख-सामग्री है, फिर उनका ठिकाना जहन्नम है और वह बहुत बुरा ठिकाना है!
Roman Urdu (Maududi)Yeh mehaz chandh roza zindagi ka thoda sa lutf hai, phir yeh sab jahannum mein jayenge jo badhtareen jaaye qaraar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh to boht hi thora faeeda hai iss kay baad unn ka thikana to jahannum hai aur woh buri jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये महज़ चंद रोजा जिंदगी का थोड़ा सा लुत्फ है, फिर ये सब जहन्नुम में जायेंगे जो बद्दतरें जाये क़रार है
عَرَبِيلٰكِنِ الَّذينَ اتَّقَوا رَبَّهُم لَهُم جَنّاتٌ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها نُزُلًا مِن عِندِ اللَّهِ ۗ وَما عِندَ اللَّهِ خَيرٌ لِلأَبرارِ
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हिन्दी (Al-Omari)परन्तु जो लोग अपने पालनहार से डरते रहे, उनके लिए ऐसी जन्नतें हैं, जिनके नीचे नहरें बह रही हैं। वे उनमें हमेशा रहेंगे। यह अल्लाह के पास से अतिथि सत्कार होगा। तथा जो कुछ अल्लाह के पास है, वह नेक लोगों के लिए सबसे अच्छा है।
Roman Urdu (Maududi)Baraks iske jo log apne Rubb se darte huey zindagi basar karte hain unke liye aisey baagh hain jinke nichey nehrein behti hain, in baaghon mein woh hamesha rahenge, Allah ki taraf se yeh samaan e ziyafat hai unke liye, aur jo kuch Allah ke paas hai neik logon ke liye wahi sabse behtar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin jo log apney rab say dartay rahey unn kay liye jannaten hain jin kay neechay nehren jari hain inn mein woh hamesha rahen gay yeh mehmani hai Allah ki taraf say aur nek kaaron kay liye jo kuch Allah Taalaa kay pass hai woh boht hi behtar hai
Devnagri Urdu (Maududi)बरक्स इसके जो लोग अपने रब से डरते हुए जिंदगी बसर करते हैं उनके लिए ऐसे बाग हैं जिनका आला नेहरेन बहती हैं, बागों में वो हमेशा रहेंगे, अल्लाह की तरफ से ये समां ए ज़ियाफ़त है उनके लिए, और जो कुछ अल्लाह के पास है नए लोगों के लिए वही सबसे बेहतर है
عَرَبِيوَإِنَّ مِن أَهلِ الكِتابِ لَمَن يُؤمِنُ بِاللَّهِ وَما أُنزِلَ إِلَيكُم وَما أُنزِلَ إِلَيهِم خاشِعينَ لِلَّهِ لا يَشتَرونَ بِآياتِ اللَّهِ ثَمَنًا قَليلًا ۗ أُولٰئِكَ لَهُم أَجرُهُم عِندَ رَبِّهِم ۗ إِنَّ اللَّهَ سَريعُ الحِسابِ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह किताब वालों (यहूदियों और ईसाइयों) में से कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अल्लाह पर ईमान रखते हैं, तथा जो कुछ तुम्हारी ओर उतारा गया और जो स्वयं उनकी ओर उतारा गया है, उसपर भी ईमान रखते हैं। वे अल्लाह के सामने विनम्र रहने वाले हैं। और उसकी आयतों को थोड़ी क़ीमत पर बेचते नहीं हैं। उनका बदला उनके रब के पास है। निःसंदेह अल्लाह जल्द ही हिसाब लेने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Ehle kitab mein bhi kuch log aisey hain jo Allah ko maante hain, us kitab par iman latey hain jo tumhari taraf bheji gayi hai aur us kitab par bhi iman rakhte hain jo issey pehle khud unki taraf bheji gayi thi. Allah ke aagey jhuke huey hain, aur Allah ki aayaat ko thodi si keemat par bech nahin dete. Inka ajar inke Rubb ke paas hai aur Allah hisaab chukane mein dair nahin lagata
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan ehal-e-kitab mein say baaz aisay bhi hain jo Allah Taalaa per eman latay hain aur tumhari taraf jo utaata gaya hai aur unn ki janib jo nazil hua uss per bhi Allah Taalaa say dartay hain aur Allah Taalaa ki aayaton ko thori thori qeemat per baichtay bhi nahi inn ka badla inn kay rab kay pass hai yaqeenan Allah Taalaa jald hisab lenay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)एहले किताब में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो अल्लाह को मानते हैं, उस किताब पर ईमान लाते हैं जो तुम्हारी तरफ भेजी गई है और उस किताब पर भी ईमान रखते हैं जो इसे पहले खुद उनकी तरफ भेजी गई थी। अल्लाह के आगे झुके हैं, और अल्लाह की आयत को थोड़ी सी कीमत पर बेच नहीं देते। इनका अजर इनके रब के पास है और अल्लाह हिसाब चुकाने में डर नहीं लगता
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا اصبِروا وَصابِروا وَرابِطوا وَاتَّقُوا اللَّهَ لَعَلَّكُم تُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! तुम धैर्य से काम लो और (अपने दुश्मन की तुलना में) अधिक धैर्य दिखाओ, तथा जिहाद के लिए तैयार रहो और अल्लाह से डरते रहो, ताकि तुम सफल हो सको।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, Sabr se kaam lo, baatil paraston ke muqable mein pa-mardi dikhao, haqq ki khidmat ke liye kamar-basta ho jao, aur Allah se darte raho, umeed hai ke falaah paogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tum sabit qadam raho aur aik doosray ko thamay rakho aur jihad kay liye tayyar raho aur Allah Taalaa say dartay raho takay tum murad ko phoncho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, सब्र से काम लो, बातिल पारसन के मुक़ाबले में पा-मरदी दिखाओ, हक़ की खिदमत के लिए कमर-बस्ता हो जाओ, और अल्लाह से डरते रहो, उम्मीद है के फलाह पाओगे
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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran)

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Surah 4: An-Nisa' (The Women)

Medinan🕐 Revelation #92📜 176 Verses🕮 Juz 1–6
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Surah 4: An-Nisa' (The Women)

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Surah 4: An-Nisa' (The Women)

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Surah 4: An-Nisa' (The Women)

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Surah 4: An-Nisa' (The Women)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِييا أَيُّهَا النّاسُ اتَّقوا رَبَّكُمُ الَّذي خَلَقَكُم مِن نَفسٍ واحِدَةٍ وَخَلَقَ مِنها زَوجَها وَبَثَّ مِنهُما رِجالًا كَثيرًا وَنِساءً ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذي تَساءَلونَ بِهِ وَالأَرحامَ ۚ إِنَّ اللَّهَ كانَ عَلَيكُم رَقيبًا
हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो! अपने उस पालनहार से डरो, जिसने तुम्हें एक जीव (आदम) से पैदा किया तथा उसी से उसके जोड़े (हव्वा) को पैदा किया और उन दोनों से बहुत-से नर-नारी फैला दिए। उस अल्लाह से डरो, जिसके माध्यम से तुम एक-दूसरे से माँगते हो, तथा रिश्ते-नाते को तोड़ने से डरो। निःसंदेह अल्लाह तुम्हारा निरीक्षक है।
Roman Urdu (Maududi)Logon! Apne Rubb se daro jisne tumko ek jaan se paida kiya aur usi jaan se uska joda banaya aur un dono se bahut mard o aurat duniya mein phayla diye, us khuda se daro jiska waasta dekar tum ek dusre se apne haqq maangte ho, aur rishta o qarabat ke taluqaat ko bigaadne se parheiz karo, yaqeen jaano ke Allah tumpar nigrani kar raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey logo apney perwerdigar say daro jiss ney tumhen aik jaan say peda kiya aur ussi say uss ki biwi ko peda ker kay unn dono say boht say mard aur aurten phela den uss Allah say daro jiss kay naam per aik doosray say maangtay ho aur rishtay naatay toryney say bhi bacho be-shak Allah Taalaa tum per nigehbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन! अपने रब से डरो जिसने तुमको एक जान से अदा किया और उसी जान से उसका जोड़ा बनाया और उन दोनो से बहुत मर्द ओ औरत दुनिया में फैल गए, हमसे खुदा से डरो जिसका वास्ता देकर तुम एक दूसरे से अपना हक मांगते हो, और रिश्ता ओ क़राबत के ताल्लुकात को बिगाड़ने से परहेज करो, यकीन जानो के अल्लाह तुमपर निगरानी कर रहा है
عَرَبِيوَآتُوا اليَتامىٰ أَموالَهُم ۖ وَلا تَتَبَدَّلُوا الخَبيثَ بِالطَّيِّبِ ۖ وَلا تَأكُلوا أَموالَهُم إِلىٰ أَموالِكُم ۚ إِنَّهُ كانَ حوبًا كَبيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा अनाथों को उनका माल दे दो और पवित्र व हलाल चीज़ के बदले अपवित्र व हराम चीज़ न लो और उनके माल को अपने माल के साथ मिलाकर न खाओ। निःसंदेह यह बहुत बड़ा पाप है।
Roman Urdu (Maududi)Yateemon ke maal unko wapas do, acchey maal ko burey maal se na badal lo, aur unke maal apne maal ke saath mila kar na kha jao, yeh bahut bada gunaah hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yateemon ko unn kay maal dey do aur pak aur halal cheez kay badlay na pak aur haram cheez na lo aur apney maalon kay sath unn kay maal mila ker kha na jao be-shak yeh boht bara gunah hai
Devnagri Urdu (Maududi)यतीमों के माल उनको वापस दो, अच्छे माल को बुरे माल से ना बदल लो, और उनके माल अपने माल के साथ मिलकर कर ना खा जाओ, ये बहुत बड़ा गुनाह है
عَرَبِيوَإِن خِفتُم أَلّا تُقسِطوا فِي اليَتامىٰ فَانكِحوا ما طابَ لَكُم مِنَ النِّساءِ مَثنىٰ وَثُلاثَ وَرُباعَ ۖ فَإِن خِفتُم أَلّا تَعدِلوا فَواحِدَةً أَو ما مَلَكَت أَيمانُكُم ۚ ذٰلِكَ أَدنىٰ أَلّا تَعولوا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम्हें डर हो कि अनाथ लड़कियों (से विवाह) के मामले में न्याय न कर सकोगे, तो अन्य औरतों में से जो तुम्हें पसंद हों, दो-दो, या तीन-तीन, या चार-चार से विवाह कर लो। लेकिन यदि तुम्हें डर हो कि (उनके बीच) न्याय नहीं कर सकोगे, तो एक ही से विवाह करो अथवा जो दासी तुम्हारे स्वामित्व में हो (उससे लाभ उठाओ)। यह इस बात के अधिक निकट है कि तुम अन्याय न करो।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar tum yateemon ke saath be-insafi karne se darte ho to jo auratein tumko pasand aayein unmein se do do, teen teen, char char se nikah karlo, lekin agar tumhein andesha ho ke unke saath adal na kar sakoge to phir ek hi biwi karo ya un auraton ko zaojiyat mein lao jo tumhare qabze mein aayi hain, be insafi se bachne ke liye yeh zyada qareen e sawab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tumhen darr ho kay yateem larkiyon say nikkah ker kay tum insaf na rakh sako gay to aur aurton mein say jo bhi tumhen achi lagen tum unn say nikkah kerlo do do teen teen chaar chaar say lekin agar tumhen barabari na ker sakney ka khof ho to aik hi kafi hai ya tumhari milkiyat ki londi yeh ziyada qarib hai kay (aisa kerney say na insafi aur) aik taraf jhuk parney say bach jao
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर तुम यतीमों के साथ बे-इंसाफी करने से डरते हो तो जो औरतें तुमको पसंद आये उन्हें दो दो, तीन तीन, चार चार से निकाह करलो, लेकिन अगर तुम्हें अंदेशा हो के उनके साथ अदल ना कर सकोगे तो फिर एक ही बीवी करो या उन औरतों को जजियत में लाओ जो तुम्हारे क़ब्ज़े में आई है, इन्साफ़ी से बचने के लिए ये ज़्यादा क़रीन ए सवाब है
عَرَبِيوَآتُوا النِّساءَ صَدُقاتِهِنَّ نِحلَةً ۚ فَإِن طِبنَ لَكُم عَن شَيءٍ مِنهُ نَفسًا فَكُلوهُ هَنيئًا مَريئًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा स्त्रियों को उनके अनिवार्य मह्र खुशी से अदा कर दो। फिर यदि वे अपनी इच्छा से उसमें से कुछ तुम्हारे लिए छोड़ दें, तो उसे हलाल व पाक समझकर खाओ।
Roman Urdu (Maududi)Aur auraton ke mehar khush dili ke saath (farz jaante huey) ada karo, albatta agar woh khud apni khushi se mehar ka koi hissa tumhein maaf kardein to usey tum mazey se kha sakte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aurton ko unn kay mehar razi khushi dey do haan agar woh khud apni khushi say kuch mehar chor den to issay shoq say khush ho ker kha lo
Devnagri Urdu (Maududi)और औरतों के मेहर खुश दिली के साथ (फर्ज जानते हुए) अदा करो, अलबत्ता अगर वो खुद अपनी खुशी से मेहर का कोई हिसा तुम्हें माफ कर दें तो उसे तुम मजे से खा सकते हो
عَرَبِيوَلا تُؤتُوا السُّفَهاءَ أَموالَكُمُ الَّتي جَعَلَ اللَّهُ لَكُم قِيامًا وَارزُقوهُم فيها وَاكسوهُم وَقولوا لَهُم قَولًا مَعروفًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा अपना धन, जिसे अल्लाह ने तुम्हारे लिए जीवन-यापन का साधन बनाया है, नासमझ लोगों को न दो। और उन्हें उसमें से खिलाते और पहनाते रहो और उनसे भली बात कहो।
Roman Urdu (Maududi)Aur apne woh maal jinhein Allah ne tumhare liye qayaam e zindagi ka zairya banaya hai, nadaan logon ke hawale na karo, albatta unhein khane aur pehanne ke liye do aur unhein neik hidayat karo
Roman Urdu (Junagarhi)Bey aqal logon ko apna maal na dey do jiss maal ko Allah Taalaa ney tumhari guzraan kay qaeem rakhney ka zariya banaya hai haan unhen iss maal say khilao pilao pehnao orahao aur unhen maqooliyat say naram baat kaho
Devnagri Urdu (Maududi)और अपने वो माल जिनहे अल्लाह ने तुम्हारे लिए कयाम ए ज़िन्दगी का ज़ैरया बनाया है, नादान लोगों के हवाले ना करो, अलबत्ता उन्हें खाने और पहनने के लिए दो और उन्हें नई हिदायत करो
عَرَبِيوَابتَلُوا اليَتامىٰ حَتّىٰ إِذا بَلَغُوا النِّكاحَ فَإِن آنَستُم مِنهُم رُشدًا فَادفَعوا إِلَيهِم أَموالَهُم ۖ وَلا تَأكُلوها إِسرافًا وَبِدارًا أَن يَكبَروا ۚ وَمَن كانَ غَنِيًّا فَليَستَعفِف ۖ وَمَن كانَ فَقيرًا فَليَأكُل بِالمَعروفِ ۚ فَإِذا دَفَعتُم إِلَيهِم أَموالَهُم فَأَشهِدوا عَلَيهِم ۚ وَكَفىٰ بِاللَّهِ حَسيبًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा अनाथों को जाँचते रहो, यहाँ तक कि जब वे वयस्कता की आयु को पहुँच जाएँ, तो यदि तुम देखो कि उनमें समझ-बूझ आ गई है, तो उनका माल उन्हें सौंप दो। और उसे फ़िज़ूल खर्ची से काम लेते हुए जल्दी-जल्दी इसलिए न खा जाओ कि वे बड़े हो जाएँगे (और अपने माल पर क़ब्ज़ा कर लेंगे)। और जो धनी हो, वह (अनाथ का माल खाने से) बचे तथा जो निर्धन हो, वह परंपरागत रूप से खा सकता है। तथा जब तुम उनका धन उनके हवाले करो, तो उनपर गवाह बना लो। और अल्लाह हिसाब लेने के लिए काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yateemon ki aazmaish karte raho yaha tak ke woh nikah ke qabil umar ko pahunch jayein. Phir agar tum unke andar ehliyat paao (mature of mind) to unke maal unke hawale kardo , aisa kabhi na karna ke hadd e insaf se tajawuz karke is khauf se unke maal jaldi jaldi kha jao ke woh baday hokar apne haqq ka mutaliba karenge. Yateem ka jo sarparast maaldaar ho woh parheizgari se kaam le aur jo gareeb ho woh maroof tareeqe se khaye. Phir jab unke maal unke hawale karne lago to logon ko ispar gawah bana lo, aur hisab lene ke liye Allah kafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yateemon ko unn kay baligh ho janey tak sidhartay aur aazmatay raho phir agar inn mein tum hoshiyari aur husn-e-tadbeer pao to enhen inn kay maal sonp do aur inn kay baray ho janey kay darr say inn kay maalon ko jaldi jaldi fazool kharchiyon mein tabah na kerdo maal daron ko chahaiye kay (inn kay maal say) bachtay rahen haan miskeen mohtaj ho to dastoor kay mutabiq wajibi tor say kha ley phir jab enhen inn kay maal sonpo to gawah bana lo dar asal hisab lenay wala Allah Taalaa hi kafi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और यतीमों की आजमाइश करते रहो यहाँ तक के वो निकाह के काबिल उमर को पाहुंच जाएँ। फिर अगर तुम उनके अंदर एहलियात पाओ (मानसिक रूप से परिपक्व) तो उनके माल उनके हवाले करदो, ऐसा कभी न करना के हद ए इन्साफ से तजावुज करके इस खौफ से उनके माल जल्दी जल्दी खा जाओ के वो बदाए होकर अपने हक का मुतालिबा करेंगे। यतीम का जो सरपरस्त मालदार हो वो परहेज़गारी से काम ले और जो ग़रीब हो वो मारूफ़ तारीख़ से खाए। फिर जब उनके माल उनके हवाले करने लगो तो लोगों को इसपर गवाह बना लो, और हिसाब लेने के लिए अल्लाह काफी है
عَرَبِيلِلرِّجالِ نَصيبٌ مِمّا تَرَكَ الوالِدانِ وَالأَقرَبونَ وَلِلنِّساءِ نَصيبٌ مِمّا تَرَكَ الوالِدانِ وَالأَقرَبونَ مِمّا قَلَّ مِنهُ أَو كَثُرَ ۚ نَصيبًا مَفروضًا
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हिन्दी (Al-Omari)पुरुषों के लिए उस (धन) में से हिस्सा है, जो माता-पिता और क़रीबी रिश्तेदार छोड़ जाएँ, तथा स्त्रियों के लिए भी उसमें से हिस्सा है, जो माता-पिता और क़रीबी रिश्तेदार छोड़ जाएँ, वह थोड़ा हो या अधिक। ये हिस्से (अल्लाह की ओर से) निर्धारित हैं।
Roman Urdu (Maududi)Mardon ke liye us maal mein hissa hai jo Maa Baap aur rishtedar ne choda ho, aur auraton ke liye bhi us maal mein hissa hai jo Maa Baap aur rishtedaron ne choda ho, khwah thoda ho ya bahut , aur yeh hissa (Allah ki taraf se) muqarrar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Maa baap aur khawesh-o-aqarib kay tarkay mein mardon ka hissa bhi hai aur aurton ka bhi. (jo maal maa baap aur khawesh-o-aqarib chor maren) khuwa woh maal kum ho ya ziyada (uss mein) hissa muqarrar kiya hua hai
Devnagri Urdu (Maududi)मर्दों के लिए उस माल में हिसा है जो मां बाप और रिश्तेदार ने छोड़ा हो, और औरतों के लिए भी उस माल में हिसा है जो मां बाप और रिश्तेदार ने छोड़ा हो, ख्वाह थोड़ा हो या बहुत, और ये हिसा (अल्लाह की तरफ से) मुकर्रर है
عَرَبِيوَإِذا حَضَرَ القِسمَةَ أُولُو القُربىٰ وَاليَتامىٰ وَالمَساكينُ فَارزُقوهُم مِنهُ وَقولوا لَهُم قَولًا مَعروفًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब (विरासत के) बंटवारे के समय (गैर-वारिस) रिश्तेदार, अनाथ और निर्धन उपस्थित हों, तो उसमें से थोड़ा बहुत उन्हें भी दे दो और उनसे भली बात कहो।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab taqseem ke mauqe par kumbe(family) ke log aur yateem aur miskeen aayein to is maal mein se unko bhi kuch do aur unke saath bhale manas-on (insano) ki si baat karo(speak to them kindly)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab taqseem kay waqt qarabat daar aur yateem aur miskeen aajayen to tum uss mein say thor boht enhen bhi dey do aur inn sa narmi say bolo
Devnagri Urdu (Maududi)और जब तकसीम के मौके पर कुंबे (परिवार) के लोग और यतीम और मिस्कीन आएं तो इस माल में से उनको भी कुछ दो और उनके साथ भले मानस-ऑन (इंसान) की सी बात करो उन्हें कृपया)
عَرَبِيوَليَخشَ الَّذينَ لَو تَرَكوا مِن خَلفِهِم ذُرِّيَّةً ضِعافًا خافوا عَلَيهِم فَليَتَّقُوا اللَّهَ وَليَقولوا قَولًا سَديدًا
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हिन्दी (Al-Omari)और उन लोगों को डरना चाहिए कि यदि वे अपने पीछे कमज़ोर संतान छोड़ जाते, तो उन्हें उनके बारे में कैसा भय होता। अतः उन्हें चाहिए कि अल्लाह से डरें और भली बात कहें।
Roman Urdu (Maududi)Logon ko is baat ka khayal karke darna chahiye ke agar woh khud apne pichey bebas aulad chodhte to marte waqt unhein apne bacchon ke haqq mein kaise kuch andeshey lahiq hotey. Pas chahiye ke woh khuda ka khauf karein aur raasti ki baat karein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur chahaiye kay woh iss baat say daren kay agar woh khud apney peechay (nannhay nannhay) na tawan bachay chor jatay jin kay zaya ho janey ka andesha rehta hai (to unn ki chahat kiya hoti) pus Allah Taalaa say darr ker jachi tuli baat kaha kero
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों को इस बात का ख्याल करके डरना चाहिए के अगर वो खुद अपने पीछे बेबस औलाद छोड़ते तो मरते वक्त उन्हें अपने बच्चों के हक में कैसे कुछ अंदेशे लाहिक होते। पास चाहिए के वो खुदा का खौफ करें और रस्ती की बात करें
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يَأكُلونَ أَموالَ اليَتامىٰ ظُلمًا إِنَّما يَأكُلونَ في بُطونِهِم نارًا ۖ وَسَيَصلَونَ سَعيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग अनाथों का धन अन्यायपूर्ण तरीक़े से खाते हैं, वे अपने पेट में आग भरते हैं और वे शीघ्र ही जहन्नम की आग में प्रवेश करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jo log zulm ke saath yateemon ke maal khate hain dar-haqeeqat woh apne pait aag se bharte hain aur woh zaroor jahannum ki bhadakti hui aag mein jhonke jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log na haq zulm say yateemon ka maal kha jatay hain woh apney pet mein aag hi bhar rahey hain aur un qarib woh dozakh mein jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ज़ुल्म के साथ यतीमों के माल खाते हैं दर-हकीकत वो अपने पैत आग से भरते हैं और वो जरूर जहन्नुम की भड़कती हुई आग में झोंके जाएंगे
عَرَبِييوصيكُمُ اللَّهُ في أَولادِكُم ۖ لِلذَّكَرِ مِثلُ حَظِّ الأُنثَيَينِ ۚ فَإِن كُنَّ نِساءً فَوقَ اثنَتَينِ فَلَهُنَّ ثُلُثا ما تَرَكَ ۖ وَإِن كانَت واحِدَةً فَلَهَا النِّصفُ ۚ وَلِأَبَوَيهِ لِكُلِّ واحِدٍ مِنهُمَا السُّدُسُ مِمّا تَرَكَ إِن كانَ لَهُ وَلَدٌ ۚ فَإِن لَم يَكُن لَهُ وَلَدٌ وَوَرِثَهُ أَبَواهُ فَلِأُمِّهِ الثُّلُثُ ۚ فَإِن كانَ لَهُ إِخوَةٌ فَلِأُمِّهِ السُّدُسُ ۚ مِن بَعدِ وَصِيَّةٍ يوصي بِها أَو دَينٍ ۗ آباؤُكُم وَأَبناؤُكُم لا تَدرونَ أَيُّهُم أَقرَبُ لَكُم نَفعًا ۚ فَريضَةً مِنَ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ كانَ عَليمًا حَكيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह तुम्हारे संतान के संबंध में तुम्हें आदेश देता है कि पुत्र का हिस्सा, दो पुत्रियों के बराबर है। यदि (दो या) दो से अधिक पुत्रियाँ ही हों, तो उनके लिए छोड़े हुए धन का दो तिहाई हिस्सा है। और यदि एक ही (लड़की) हो, तो उसके लिए आधा हिस्सा है। और अगर उस (मृतक) की कोई संतान है, तो उसके माता-पिता में से प्रत्येक के लिए उसके छोड़े हुए धन का छठवाँ हिस्सा है। और यदि उसकी कोई संतान नहीं है और उसके वारिस उसके माता-पिता ही हों, तो उसकी माँ के लिए तिहाई (हिस्सा) है (और शेष पिता का होगा)। फिर यदि (माता पिता के सिवा) उसके (एक से अधिक) भाई (या बहन) हों, तो उसकी माँ के लिए छठवाँ हिस्सा है, यह (विरासत का बंटवारा) उस (मृतक) की वसिय्यत का निष्पादन करने, या उसका क़र्ज़ चुकाने के बाद होगा। तुम्हारे बाप हों या तुम्हारे बेटे, तुम नहीं जानते कि उनमें से कौन तुम्हारे लिए अधिक लाभदायक है। यह अल्लाह का निर्धारित किया हुआ हिस्सा है। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला और हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Tumhari aulad ke barey mein Allah tumhein hidayat karta hai ke : Mard ka hissa do auraton ke barabar hai, agar ( mayyat ki waris) do se zayid ladkiyan hon to unhein tarke(inheritance) ka do tihayi (2/3rd) diya jaye, aur agar ek hi ladki waris ho to aadha (half) tarka uska hai, agar mayyat sahib e aulad ho to uske walidain mein se har ek ko tarke ka chatta (sixth) hissa milna chahiye, aur agar woh sahib e aulad na ho aur walidain hi uske waris hon to Maa ko tisra (third) hissa diya jaye aur agar mayyat ke bhai behan bhi hon to Maa chattey (sixth) hissey ki haqqdar hogi. (Yeh sab hissey us waqt nikale jayein) jabke wasiyat jo mayyat ne ki ho poori kardi jaye aur qarz jo uspar ho ada kardiya jaye. Tum nahin jaante ke tumhare Maa Baap aur tumhari aulad mein se kaun balihaaz-e-nafa tumse qareeb tarr hai. Yeh hissey Allah ne muqarrar kardiye hain, aur Allah yaqeenan sab haqeeqaton se waqif aur saari maslihaton ka jaanne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa tumhen tumhari aulad kay baray mein hukum kerta hai kay aik larkay ka hissa do larkiyon kay barabar hai aur agar sirf larkiyan hi hon aur do say ziyada hon to unhen maal matrooka ka do tehaee milay ga. Aur agar aik hi larki ho to uss kay liye aadha hai aur mayyat kay maa baap mein say her aik kay liye uss kay choray huye maal ka chatha hissa hai agar iss (mayyat) ki aulad ho aur agar aulad na ho aur maa baap waris hotay hon to uss ki maa kay liye teesra hissa hai haan agar mayyat kay kaee bhai hon to phir uss ki maa ka chatha hissa hai. Yeh hissay uss wasiyat (ki takmeel) kay baad hain jo marney wala ker gaya ho ya aday-e-qarz kay baad tumharay baap hon ya tumharay betay tumhen nahi maloom kay unn mein say kaun tumhen nafa phonchaney mein ziyada qarib hai yeh hissay Allah Taalaa ki taraf say muqarrar kerda hain be-shak Allah Taalaa pooray ilm aur kaamil hikmaton wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारी औलाद के बारे में अल्लाह तुम्हें हिदायत करता है के: मर्द का हिसा दो औरतों के बराबर है, अगर (मय्यत की वारिस) दो से ज़ायद लड़कियाँ हों तो उन्हें तर्क (विरासत) का दो तिहाई (2/3) दिया जाए, और अगर एक ही लड़की वारिस हो तो आधा (आधा) उसका। है, अगर मय्यत साहब ए औलाद हो तो उसके वलियों में से हर एक को तर्क का चाटा (छठा) हिसा मिलना चाहिए, और अगर वो साहब ए औलाद न हो और उसके वारिस हों तो मां को तिसरा (तीसरा) हिसा दिया जाए और अगर मय्यत के भाई बहन भी हो तो मां चाटे (छठा) इसकी हक़दार होगी। (ये सब इसी से वक्त निकले जाएंगे) जबके वसीयत जो मय्यत ने की हो पूरी करदी जाए और क़र्ज़ जो उसपर हो अदा करदिया जाए। तुम नहीं जानते कि तुम्हारे माँ बाप और तुम्हारी औलाद में से कौन बलिहाज़-ए-नफ़ा तुमसे करीब है। ये इसी तरह अल्लाह ने मुकर्रर कर दिया है, और अल्लाह यकीनन सब हकीकत से वाकिफ और सारी मसलहतों का जाने वाला है
عَرَبِي۞ وَلَكُم نِصفُ ما تَرَكَ أَزواجُكُم إِن لَم يَكُن لَهُنَّ وَلَدٌ ۚ فَإِن كانَ لَهُنَّ وَلَدٌ فَلَكُمُ الرُّبُعُ مِمّا تَرَكنَ ۚ مِن بَعدِ وَصِيَّةٍ يوصينَ بِها أَو دَينٍ ۚ وَلَهُنَّ الرُّبُعُ مِمّا تَرَكتُم إِن لَم يَكُن لَكُم وَلَدٌ ۚ فَإِن كانَ لَكُم وَلَدٌ فَلَهُنَّ الثُّمُنُ مِمّا تَرَكتُم ۚ مِن بَعدِ وَصِيَّةٍ توصونَ بِها أَو دَينٍ ۗ وَإِن كانَ رَجُلٌ يورَثُ كَلالَةً أَوِ امرَأَةٌ وَلَهُ أَخٌ أَو أُختٌ فَلِكُلِّ واحِدٍ مِنهُمَا السُّدُسُ ۚ فَإِن كانوا أَكثَرَ مِن ذٰلِكَ فَهُم شُرَكاءُ فِي الثُّلُثِ ۚ مِن بَعدِ وَصِيَّةٍ يوصىٰ بِها أَو دَينٍ غَيرَ مُضارٍّ ۚ وَصِيَّةً مِنَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ حَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम्हारे लिए उस (धन) का आधा है जो तुम्हारी पत्नियाँ छोड़ जाएँ, यदि उनकी संतान न हो। लेकिन यदि उनकी संतान हो, तो तुम्हारे लिए उस (धन) का चौथाई होगा जो वे छोड़ गई हों, उनकी वसिय्यत का निष्पादन करने या क़र्ज़ चुकाने के बाद। तथा उन (पत्नियों) के लिए तुम्हारे छोड़े हुए धन का चौथाई हिस्सा है, यदि तुम्हारी संतान न हो। लेकिन यदि तुम्हारी संतान हो, तो उनके लिए उस (धन) का आठवाँ (हिस्सा) होगा जो तुमने छोड़ा है, तुम्हारी वसिय्यत पूरी करने अथवा क़र्ज़ चुकाने के बाद। तथा यदि किसी ऐसे पुरुष या स्त्री की विरासत हो, जो 'कलाला' हो (अर्थात् उसकी न संतान हो, न पिता) तथा (दूसरी माता से) उसका कोई भाई अथवा बहन हो, तो उनमें से हर एक के लिए छठवाँ (हिस्सा) होगा। लेकिन यदि वे एक से अधिक हों, तो वे सब एक तिहाई में साझीदार होंगे, उसकी वसिय्यत का निष्पादन करने या क़र्ज़ चुकाने के बाद, जबकि वह किसी को हानि पहुँचाने वाला न हो। यह अल्लाह की ओर से वसिय्यत है और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, अत्यंत सहनशील है।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhari biwiyon ne jo kuch choda ho uska aadha hissa tumhein milega agar woh be-aulad hon, warna aulad honay ki surat mein tarke ka ek chuthayi (one fourth) hissa tumhara hai jabke wasiyat jo unhon ne ki ho poori kardi jaye, aur qarz jo unhon ne choda ho ada kardiya jaye, aur woh tumhare tarke mein se chauthayi ki haqqdar hongi agar tum be-aulad ho, warna sahib e aulad honay ki surat mein unka hissa aathwa (eighth) hoga, baad iske ke jo wasiyat tumne ki ho woh poori kardi jaye aur jo qarz tumne choda ho woh ada kardiya jaye aur agar woh mard ya aurat ( jiski miras taqseem talab hai) be-aulad bhi ho aur uske Maa baap bhi zinda na hon, magar uska ek bhai ya ek behan maujood ho to bhai aur behan har ek ko chatta(sixth) hissa milega, aur bhai behan ek se zyada hon to kul tarke ke ek tihayi (one third) mein woh sab shareek honge, jabke wasiyat jo ki gayi ho poori kardi jaye, aur qarz jo mayyat ne choda ho ada kardiya jaye, bashrat ye ke woh zarrar rasan na ho (causes no injury). Yeh hukum Allah ki taraf se aur Allah daana o beena aur narm-khu hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhari biwiyan jo kuch chor maren aur unn ki aulad na ho to aadhon aadh tumhara hai aur agar unn ki aulad ho to unn kay choray huye maal say tumharay liye chothaee hissa hai. Uss wasiyat ki adaayegi kay baad jo woh ker gaee hon ya qarz kay baad. Aur jo (tarka) tum chor jao uss mein unn kay liye aik chothaee hai agar tumhari aulad na ho aur agar tumhari aulad ho to phir unhen tumharay tarkay ka aathwan hissa milay ga uss wasiyat kay baad jo tum ker gaye ho aur qarz ki adaayegi kay baad. Aur jin ki meerass li jati hai woh mard ya aurat kalala ho yani uss ka baap beta na ho aur uss ka aik bhai ya aik behan ho to inn dono mein say her aik ka chatha hissa hai aur agar iss say ziyada hon to aik tehaee mein sab shareek hain uss wasiyat kay baad jo ki jaye aur qarz kay baad jabkay auron ka nuksan na kiya gaya ho yeh muqarrar kiya hua Allah Taalaa ki taraf say hai aur Allah Taalaa daana hai burdbaar
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हारी बीवीयों ने जो कुछ छोड़ा हो उसका आधा हिसा तुम्हें मिलेगा अगर वो बे-औलाद हो, वरना औलाद होने की सूरत में तर्क का एक चौथाई (एक चौथाई) हिसा तुम्हारा है जबके वसीयत जो उन्होन ने की हो पूरी करदी जाए, और क़र्ज़ जो उन्होन ने छोड़ा हो अदा करदिया जाए, और वो तुम्हारे तर्क में से चौथी कि हक़दार होगी अगर तुम बे-औलाद हो, वरना साहब ए औलाद होने की सूरत में उनका हिसा आठवां होगा, बाद इसके के जो वसीयत तुमने की हो वो पूरी कर दी जाए और जो क़र्ज़ तुमने छोड़ा हो वो अदा कर दिया जाए और अगर वो मर्द या औरत (जिसकी मीरास तकसीम तलब है) बे-औलाद भी हो और उसकी मां बाप भी जिंदा न हो, मगर उसका एक भाई या एक बहन मौजूद हो तो भाई और बहन हर एक को चट्टा (छठा) हिसा मिलेगा, और भाई बहन एक से ज्यादा हो तो कुल तरके के एक तिहाई (एक तिहाई) में वो सब शरीक होंगे, जबके वसीयत जो की गई हो पूरी कर दी जाए, और क़र्ज़ जो मय्यत ने छोड़ा हो अदा करदिया जाए, बशरत ये के वो ज़रार रसन ना हो (कोई चोट नहीं पहुंचाता)। ये हुकुम अल्लाह की तरफ से और अल्लाह दाना ओ बीना और नरम-खु है
عَرَبِيتِلكَ حُدودُ اللَّهِ ۚ وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَرَسولَهُ يُدخِلهُ جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها ۚ وَذٰلِكَ الفَوزُ العَظيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)ये अल्लाह की (निर्धारित की हुई) सीमाएँ हैं। और जो अल्लाह तथा उसके रसूल का आज्ञापालन करेगा, अल्लाह उसे ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी। उनमें वे हमेशा रहेंगे तथा यही बड़ी सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Allah ki muqarrar ki hui haddein (limits) hain. Jo Allah aur uske Rasool ki itaat karega usey Allah aisey baaghon mein dakhil karega jinke nichey nehrein behti hongi aur un baaghon mein woh hamesha rahega aur yahi badi kamiyabi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hadden Allah Taalaa ki muqarrar ki hui hain aur jo Allah Taalaa ki aur uss kay rasool (PBUH) ki farmanbardari keray ga ussay Allah Taalaa jannaton mein ley jaye ga jin kay neechay nehren beh rahi hain jin mein woh hamesha rahen gay aur yeh boht bari kaamyaabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये अल्लाह की मुकर्रर की हुई हदें (सीमाएं) हैं। जो अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करेगा उसे अल्लाह ऐसे बाघों में दखल करेगा जिनकी जगहें नहरें बहती होंगी और उन बाघों में वो हमेशा रहेगा और यही बड़ी कामयाबी है
عَرَبِيوَمَن يَعصِ اللَّهَ وَرَسولَهُ وَيَتَعَدَّ حُدودَهُ يُدخِلهُ نارًا خالِدًا فيها وَلَهُ عَذابٌ مُهينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो अल्लाह और उसके रसूल की अवज्ञा करेगा तथा उसकी सीमाओं का उल्लंघन करेगा, (अल्लाह) उसे आग (नरक) में डालेगा, जिसमें वह सदैव रहेगा और उसके लिए अपमानजनक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo Allah aur uske Rasool ki nafarmani karega aur uski muqarrar ki hui haddon (limits) se tajawuz kar jayega usey Allah aag mein daalega jismein woh hamesha rahega aur uske liye ruswa-kun saza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo shaks Allah Taalaa aur uss kay rasool (PBUH) ki na farmani keray aur uss ki muqarrara haddon say aagay niklay ussay woh jahannum mein daal dey ga jiss mein woh hamesha rahey ga aison hi kay liye ruswa kun azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जो अल्लाह और उसके रसूल की नफरमानी करेगा और उसकी मुकर्रर की हुई हदन (हद) से तजावुज कर जाएगा उसे अल्लाह आग में डालेगा जिसमें वह हमेशा रहेगा और उसके लिए रुसवा-कुन सजा है
عَرَبِيوَاللّاتي يَأتينَ الفاحِشَةَ مِن نِسائِكُم فَاستَشهِدوا عَلَيهِنَّ أَربَعَةً مِنكُم ۖ فَإِن شَهِدوا فَأَمسِكوهُنَّ فِي البُيوتِ حَتّىٰ يَتَوَفّاهُنَّ المَوتُ أَو يَجعَلَ اللَّهُ لَهُنَّ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम्हारी स्त्रियों में से जो व्यभिचार कर बैठें, उनपर अपनों में से चार पुरुषों को गवाह लाओ। यदि वे गवाही दे दें, तो उन औरतों को घरों में बंद रखो, यहाँ तक कि उन्हें मौत आ जाए या अल्लाह उनके लिए कोई रास्ता निकाल दे।
Roman Urdu (Maududi)Tumhari auraton mein se jo badhkari ki murtakib hon unpar apne mein se char aadmiyon ki gawahi lo , aur agar char aadmi gawahi de dein to unko gharon mein bandh rakkho yahan tak ke unhein maut aa jaye ya Allah unke liye koi raasta nikal de
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhari aurton mein say jo bey hayaee ka kaam keren unn per apney mein say chaar gawah talab kero agar woh gawahi den to inn aurton ko gharon mein qaid rakho yahan tak kay maut unn ki umaren poori ker dey ya Allah Taalaa unn kay liye koi aur raasta nikalay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारी औरतों में से जो बदकारी की मुर्तकिब हूं, अपने में से चार आदमियों की गवाही लो, और अगर चार आदमी गवाही दे दें तो उनको घरों में बंद रखें यहां तक ​​के उन्हें मौत आ जाए या अल्लाह उनके लिए कोई रास्ता निकाल दे
عَرَبِيوَاللَّذانِ يَأتِيانِها مِنكُم فَآذوهُما ۖ فَإِن تابا وَأَصلَحا فَأَعرِضوا عَنهُما ۗ إِنَّ اللَّهَ كانَ تَوّابًا رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और तुममें से जो दो पुरुष यह कर्म करें, उन्हें यातना दो। फिर यदि वे तौबा कर लें और अपने आपको सुधार लें, तो उन्हें छोड़ दो। निःसंदेह अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur tum mein se jo is fail ka irtekab karein un dono ko takleef do , phir agar woh tawba karein aur apni islah karlein to unhein chodh do ke Allah bahut tawba qabool karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum say jo do fard aisa kaam ker len unhen ezza do agar woh tauba aur islaah ker len to unn say mun pher lo be-shak Allah Taalaa tauba kerney wala aur reham kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम में से जो इस फेल का इर्तेकाब करें उन दोनों को तकलीफ दो, फिर अगर वो तौबा करें और अपनी इस्लाह कार्लें तो उन्हें छोड़ दो के अल्लाह बहुत तौबा क़बूल करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِيإِنَّمَا التَّوبَةُ عَلَى اللَّهِ لِلَّذينَ يَعمَلونَ السّوءَ بِجَهالَةٍ ثُمَّ يَتوبونَ مِن قَريبٍ فَأُولٰئِكَ يَتوبُ اللَّهُ عَلَيهِم ۗ وَكانَ اللَّهُ عَليمًا حَكيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह के पास उन्हीं लोगों की तौबा स्वीकार्य है, जो अनजाने में बुराई कर बैठते हैं, फिर शीघ्र ही तौबा कर लेते हैं। तो अल्लाह ऐसे ही लोगों की तौबा क़बूल करता है। तथा अल्लाह सब कुछ जानने वाला हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Haan yeh jaan lo ke Allah par tawba ki qabooliyat ka haqq unhi logon ke liye hai jo nadaani ki wajah se koi bura fail (amal) kar guzarte hain aur uske baad jaldi hi tawba karlete hain. Aise logon par Allah apni nazar e inayat se phir mutawajjaeh ho jata hai aur Allah saari baaton ki khabar rakhne wala aur hakeem o dana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa sirf unhi logon ki tauba qabool farmata hai jo ba waja nadani koi buraee ker guzren phir jald uss sa baaz aajayen aur tauba keren to Allah Taalaa bhi unn ki tauba qabool kerta hai Allah Taalaa beray ilm wala hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)हां ये जान लो के अल्लाह पर तौबा की क़बूलियत का हक़ उन्ही लोगों के लिए है जो नादानी की वजह से कोई बुरा फेल (अमल) कर गुज़रते हैं और उसके बाद जल्दी ही तौबा करते हैं। ऐसे लोगों पर अल्लाह अपनी नजर ए इनायत से फिर मुतवज्जैह हो जाता है और अल्लाह सारी बातों की खबर रखने वाला और हकीम ओ दाना है
عَرَبِيوَلَيسَتِ التَّوبَةُ لِلَّذينَ يَعمَلونَ السَّيِّئَاتِ حَتّىٰ إِذا حَضَرَ أَحَدَهُمُ المَوتُ قالَ إِنّي تُبتُ الآنَ وَلَا الَّذينَ يَموتونَ وَهُم كُفّارٌ ۚ أُولٰئِكَ أَعتَدنا لَهُم عَذابًا أَليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और उनकी तौबा स्वीकार्य नहीं, जो बुराइयाँ करते जाते हैं, यहाँ तक कि जब उनमें से किसी की मौत का समय आ जाता है, तो कहने लगता है : "अब मैंने तौबा कर ली!" और न ही उनकी (तौबा स्वीकार्य है) जो काफ़िर रहते हुए मर जाते हैं। उन्हीं के लिए हमने दुःखदायी यातना तैयार कर रखी है।
Roman Urdu (Maududi)Magar tawba un logon ke liye nahin hai jo burey kaam kiye chale jatey hain yahan tak ke jab unmein se kisi ki maut ka waqt aa jata hai us waqt woh kehta hai ke ab maine tawba ki, aur isi tarah tawba unke liye bhi nahin hai jo marte dum tak kafir rahein .Aisey logon ke liye to humne dardnaak saza tayyar kar rakkhi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unn ki tauba nahi jo buraiyan kertay chalay jayen yahan tak kay jab inn mein say kissi kay pass maut aajaye to keh dey kay mein ney abb tauba ki aur unn ki tauba bhi qabool nahi jo kufur per hi marr jayen yehi log hain jin kay liye hum ney alam naak azab tayyar ker rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)मगर तौबा उन लोगों के लिए नहीं है जो बुरे काम किए चले जाते हैं यहां तक ​​के जब उनमें से किसी की मौत का वक्त आ जाता है हमें वक्त वो कहता है कि अब मैंने तौबा की, और इसी तरह तौबा उनके लिए भी नहीं है जो मरते दम तक काफिर रहे। ऐसे लोगों के लिए तो हमने दर्दनाक सजा तय्यार कर रखी है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا يَحِلُّ لَكُم أَن تَرِثُوا النِّساءَ كَرهًا ۖ وَلا تَعضُلوهُنَّ لِتَذهَبوا بِبَعضِ ما آتَيتُموهُنَّ إِلّا أَن يَأتينَ بِفاحِشَةٍ مُبَيِّنَةٍ ۚ وَعاشِروهُنَّ بِالمَعروفِ ۚ فَإِن كَرِهتُموهُنَّ فَعَسىٰ أَن تَكرَهوا شَيئًا وَيَجعَلَ اللَّهُ فيهِ خَيرًا كَثيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! तुम्हारे लिए हलाल (वैध) नहीं कि ज़बरदस्ती स्त्रियों के वारिस बन जाओ। और उन्हें इसलिए न रोके रखो कि तुमने उन्हें जो कुछ दिया है, उसमें से कुछ ले लो, सिवाय इसके कि वे खुली बुराई कर बैठें। तथा उनके साथ भली-भाँति जीवन व्यतीत करो। फिर यदि तुम उन्हें नापसंद करो, तो संभव है कि तुम किसी चीज़ को नापसंद करो और अल्लाह उसमें बहुत ही भलाई रख दे।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, tumhare liye yeh halal nahin hai ke zabardasti auraton ke waris ban baitho aur na yeh halal hai ke unhein tangg karke us mehar ka kuch hissa udha lene ki koshish karo jo tum unhein de chuke ho. Haan agar woh kisi sareeh badh-chalani ki murtakib hon (to zaroor tumhein tangg karne ka haqq hai). Unke saath bhale tareeqe se zindagi basar karo, agar woh tumhein na-pasand hon to ho sakta hai ke ek cheez tumhein pasand na ho magar Allah ne usi mein bahut kuch bhalayi rakh di ho
Roman Urdu (Junagarhi)Eman walo! Tumhen halal nahi kay zabardasti aurton ko virsay mein ley betho unhen iss liye rok na rakho kay jo tum ney unhen dey rakha hai uss mein say kuch ley lo haan yeh aur baat hai kay woh koi khuli buraee aur bey hayaee keren unn kay sath achay tareeqay say bod-o-baash rakho go tum unhen na pasand kero lekin boht mumkin hai kay tum kissi cheez ko bura jano aur Allah Taalaa iss mein boht hi bhalaee ker dey
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारे लिए ये हलाल नहीं है के ज़बरदस्ती औरतों के वारिस बन बैठो और ना ये हलाल है के उन्हें तंग करके हमसे महर का कुछ हिसा उधार लेने की कोशिश करो जो तुम उन्हें दे चुके हो। हां अगर वो किसी सारी हद-चलनी की मुर्तकीब है (तो जरूर तुम्हें तंग करने का हक है)। उनके साथ भले तरीक़े से ज़िंदगी बसर करो, अगर वो तुम्हें ना पसंद हो तो हो सकता है कि एक चीज़ तुम्हें पसंद ना हो मगर अल्लाह ने उसमें बहुत कुछ भलाई रख दी हो
عَرَبِيوَإِن أَرَدتُمُ استِبدالَ زَوجٍ مَكانَ زَوجٍ وَآتَيتُم إِحداهُنَّ قِنطارًا فَلا تَأخُذوا مِنهُ شَيئًا ۚ أَتَأخُذونَهُ بُهتانًا وَإِثمًا مُبينًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम एक पत्नी के स्थान पर दूसरी पत्नी लाना चाहो और तुमने उनमें से किसी को (महर में) ढेर सारा धन दे रखा हो, तो उसमें से कुछ न लो। क्या तुम उसे अनाधिकार और खुला गुनाह होते हुए भी ले लोगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar tum ek biwi ki jagah dusri biwi le aane ka irada hi karlo to khwah tumne usey dhair sa maal hi kyun na diya ho, usmein se kuch wapas na lena, kya tum usey bohtan laga kar aur sareeh zulm karke wapas logey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tum aik biwi ki jagah doosri biwi kerna hi chahao aur inn mein say kissi ko tum ney khazana ka khazana hi dey rakha ho to bhi uss mein say kuch na lo kiya tum issay na haq aur khula gunah hotay huye bhi ley lo gay tum issay kaisay ley lo gay
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर तुम एक बीवी की जगह दूसरी बीवी ले आने का इरादा ही करलो तो ख्वाह तुमने उसे ढेर सा माल ही क्यों ना दिया हो, उसमें से कुछ वापस ना लेना, क्या तुम उसे बहुत ज्यादा लगा कर और सारे ज़ुल्म करके वापस लोगे
عَرَبِيوَكَيفَ تَأخُذونَهُ وَقَد أَفضىٰ بَعضُكُم إِلىٰ بَعضٍ وَأَخَذنَ مِنكُم ميثاقًا غَليظًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम उसे कैसे ले सकते हो, जबकि तुम एक-दूसरे से मिलन कर चुके हो और वे तुमसे (विवाह के समय) दृढ़ वचन (भी) ले चुकी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur aakhir tum usey kis tarah le logey jabke tum ek dusre se lutf-andoz ho chuke ho aur woh tumse pukhta ahad le chuki hain
Roman Urdu (Junagarhi)Halankay tum aik doosray say mill chukay ho aur inn aurton ney tum say mazboot ehad-o-paymaan ley rakh hai
Devnagri Urdu (Maududi)और आख़िर तुम उसे किस तरह ले लोगे जबके तुम एक दूसरे से लुत्फ़-अंदोज़ हो चुके हो और वो तुमसे पुख़्ता अहद ले चुकी हैं
عَرَبِيوَلا تَنكِحوا ما نَكَحَ آباؤُكُم مِنَ النِّساءِ إِلّا ما قَد سَلَفَ ۚ إِنَّهُ كانَ فاحِشَةً وَمَقتًا وَساءَ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और उन स्त्रियों से विवाह न करो, जिनसे तुम्हारे पिताओं ने विवाह किया हो, परंतु जो पहले हो चुका (सो हो चुका)। वास्तव में, यह निर्लज्जता तथा क्रोध की बात और बुरी रीति है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jin auraton se tumhare baap nikah kar chuke hon unse hargiz nikah na karo, magar jo pehle ho chuka so ho chuka. Dar-haqeeqat yeh ek behayayi ka fail (kaam) hai, napasandida hai aur bura chalan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn aurton say nikkah na kero jin say tumharay baapon ney nikkah kiya hai magar jo guzar chuka hai yeh bey hayaee ka kaam aur bughz ka sabab hai aur bari buri raah hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जिन औरतों से तुम्हारे बाप निकाह कर चुके हैं, उनसे हरगिज़ निकाह ना करो, मगर जो पहले हो चूका सो हो चुका। दार-हकीकत ये एक बेहाय का फेल (काम) है, नपसंददा है और बुरा चलन है
عَرَبِيحُرِّمَت عَلَيكُم أُمَّهاتُكُم وَبَناتُكُم وَأَخَواتُكُم وَعَمّاتُكُم وَخالاتُكُم وَبَناتُ الأَخِ وَبَناتُ الأُختِ وَأُمَّهاتُكُمُ اللّاتي أَرضَعنَكُم وَأَخَواتُكُم مِنَ الرَّضاعَةِ وَأُمَّهاتُ نِسائِكُم وَرَبائِبُكُمُ اللّاتي في حُجورِكُم مِن نِسائِكُمُ اللّاتي دَخَلتُم بِهِنَّ فَإِن لَم تَكونوا دَخَلتُم بِهِنَّ فَلا جُناحَ عَلَيكُم وَحَلائِلُ أَبنائِكُمُ الَّذينَ مِن أَصلابِكُم وَأَن تَجمَعوا بَينَ الأُختَينِ إِلّا ما قَد سَلَفَ ۗ إِنَّ اللَّهَ كانَ غَفورًا رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तुमपर हराम (निषिद्ध) कर दी गई हैं; तुम्हारी माताएँ, तुम्हारी बेटियाँ, तुम्हारी बहनें, तुम्हारी फूफियाँ, तुम्हारी मौसियाँ (खालाएँ) और भतीजियाँ, भाँजियाँ, तुम्हारी वे माताएँ जिन्होंने तुम्हें दूध पिलाया है, दूध के रिश्ते से तुम्हारी बहनें, तुम्हारी पत्नियों की माताएँ (सासें) , तुम्हारी गोद में पालित-पोषित तुम्हारी उन पत्नियों की बेटियाँ जिनसे तुम संभोग कर चुके हो। यदि तुमने उनसे संभोग न किया हो, तो तुमपर (उनकी बेटियों से विवाह करने में) कोई गुनाह नहीं, और तुम्हारे सगे बेटों की पत्नियाँ और यह कि तुम दो बहनों को (निकाह में) एकत्रित करो, परंतु जो (अज्ञानता के काल में) बीत चुका, (सो बीत चुका)। निःसंदेह अल्लाह अत्यंत क्षमाशील, असीम दयावान है।
Roman Urdu (Maududi)Tum par haram ki gayi tumhari Maayein (mothers) , betiyan, behnein, phoopiyan, khalayein , bhatijiyan, bhanjiyan aur tumhari woh Maayein jinhon ne tumko doodh pilaya ho, aur tumhari doodh shareek behnein, aur tumhari biwiyon ki maayein, aur tumhari biwiyon ki ladkiyan jinhon ne tumhari godhon (laps) mein parwarish payi hai , un biwiyon ki ladkiyan jinsey tumhara taaluq zan o shaw (intimate relation) ho chukka ho warna agar (sirf nikah hua ho aur) taaluq e zan o shaw (intimate relation) na hua ho to (unhein chodh kar unki ladkiyon se nikah karlene mein) tumpar koi mwazkhza nahin hai, aur tumhare un beton ki biwiyan jo tumhari sulb se hon (sprung from you loins) aur yeh bhi tumpar haram kiya gaya hai ke nikah mein do behon ko jamaa karo, magar jo pehle ho gaya so ho gaya, Allah bakshne wala aur reham karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Haram ki gaeen tum per tumhari maayen aur tumhari larkiyan tumhari behnen tumhari phoopiyan aur tumhari khalaayen aur bhai ki larkiyan aur behan ki larkiyan aur tumhari woh maayen jinhon ney tumhen doodh pilaya ho aur tumhari doodh sharik behnen aur tumhari saas aur tumhari woh perwerish kerda larkiyan jo tumhari godd mein hain tumhari unn aurton say jin say tum dakhool ker chukay ho haan agar tum ney unn say jamaa na kiya ho to tum oer koi gunah nahi aur tumharay salbi sagay beton ki biwiyan aur tumhara do behnon ka jama kerna haan jo guzar chuka so guzar chuka yaqeenan Allah Taalaa bakshney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम पर हराम की गई तुम्हारी मांएं, बेटियां, बहनें, फुपियां, खलाएं, भतीजियां, भंजियां और तुम्हारी वो मांएं जिन्हों ने तुमको दूध पिलाया हो, और तुम्हारी दूध शरीक बहनें, और तुम्हारी बीवियों की मायें, और तुम्हारी बीवियों की लड़कियाँ जिन्हों ने तुम्हारी गोदों में परवरिश पाई है, उन बीवियों की लड़कियाँ जिनसे तुम्हारा तालुक ज़ान ओ शॉ (अंतरंग संबंध) हो चुक्का हो वरना अगर (सिर्फ निकाह हुआ हो और) तालुक ए ज़ान ओ शॉ (अंतरंग संबंध) ना हुआ हो तो (उन्हें छोड़ कर उनकी लड़कियों से निकाह करने में) तुम्पर कोई मवाज़ख्ज़ा नहीं है, और तुम्हारे उन बेटों की बियाएं जो तुम्हारी हल्ब से पैदा हुईं (तुम्हारे दिलों से निकली) और ये भी तुम्पर हराम किया गया है के निकाह में दो बेहोन को जमा करो, मगर जो पहले हो गया सो हो गया, अल्लाह बक्शने वाला और रहम करने वाला है
🕮 Juz 5 begins here
عَرَبِي۞ وَالمُحصَناتُ مِنَ النِّساءِ إِلّا ما مَلَكَت أَيمانُكُم ۖ كِتابَ اللَّهِ عَلَيكُم ۚ وَأُحِلَّ لَكُم ما وَراءَ ذٰلِكُم أَن تَبتَغوا بِأَموالِكُم مُحصِنينَ غَيرَ مُسافِحينَ ۚ فَمَا استَمتَعتُم بِهِ مِنهُنَّ فَآتوهُنَّ أُجورَهُنَّ فَريضَةً ۚ وَلا جُناحَ عَلَيكُم فيما تَراضَيتُم بِهِ مِن بَعدِ الفَريضَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ كانَ عَليمًا حَكيمًا
हिन्दी (Al-Omari)तथा उन स्त्रियों से (विवाह करना हराम है), जो दूसरों के निकाह़ में हों, सिवाय तुम्हारी दासियों के। यह अल्लाह ने तुम्हारे लिए अनिवार्य कर दिया है। और इनके सिवा दूसरी स्त्रियाँ तुम्हारे लिए ह़लाल कर दी गई हैं कि तुम अपना धन (महर) खर्च करके उनसे विवाह कर लो (बशर्ते कि तुम्हारा उद्देश्य) सतीत्व की रक्षा हो, अवैध तरीके से काम वासना की तृप्ति न हो। फिर उन औरतों में से जिनसे तुम लाभ उठाओ, उन्हें उनका महर अवश्य चुका दो। तथा यदि महर निर्धारित करने के बाद आपसी सहमति (से कोई कमी-बेशी) कर लो, तो तुमपर कोई गुनाह नहीं है। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh auratein bhi tumpar haram hain jo kisi dusre ke nikah mein hon (mohsenaat) albatta aisi auratein issey mustasna hain jo (jung mein ) tumhare haath aayein. Yeh Allah ka kanoon hai jiski pabandi tumpar lazim kardi gayi hai. Inke ma-siwa jitni auratein hain unhein apne amwal ke zariye se hasil karna tumhare liye halal kardiya gaya hai, bashart ye ke hisaar nikah mein unko mehfooz karo, na yeh ke azaad shehwat rani (satisfaction of lust) karne lago, phir jo izdhwaji zindagi ka lutf tum unsey uthao uske badle unke mehar batoar farz ada karo. Albatta mehar ki karaardaad ho janey ke baad aapas ki razamandi se tumhare darmiyan agar koi samjhota ho jaye to ismein koi haraj nahin. Allah Aleem aur Dana(wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (haram ki gaeen) shoher wali aurten magar woh jo tumhari milkiyat mein aajayen Allah Taalaa ney yeh ehkaam tum per farz ker diye hain aur inn aurton kay siwa aur aurten tumharay liye halal ki gaeen kay apney maal kay mehar say tum inn say nikkah kerna chahao buray kaam say bachne kay liye na kay shewat rani kay liye iss liye jin say tum faeeda uthao unhen unn ka muqarrar kiya hua mehar dey do aur mehar muqarrar ho janey kay baad tum aapas ki raza mandi say jo tey ker lo uss mein tum per koi gunah nahi be-shak Allah Taalaa ilm wala hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वो औरतें भी तुमपर हराम हैं जो किसी दूसरे के निकाह में हो (मोहसिनात) अलबत्ता ऐसी औरतें इसे मुस्तसना हैं जो (जंग में) तुम्हारे हाथ आएं। ये अल्लाह का कानून है जिसकी पाबंदी तुमपर लाज़िम कर दी गई है। इनके माँ-सिवा जितनी औरतें हैं उन्हें अपने अमवाल के ज़रिये से हासिल करना तुम्हारे लिए हलाल कर दिया गया है, बशारत ये के हिसार निकाह में उनको महफ़ूज़ करो, ना ये के आज़ाद शेहवत रानी (वासना की संतुष्टि) करने लगो, फिर जो इज़्ज़वाजी जिंदगी का लुत्फ़ तुम उन्हें उठाओ उसके बदले उनके मेहर बटोअर फ़र्ज़ अदा करो। अलबत्ता महर की करारादाद हो जाने के बाद आपस की रजामंडी से तुम्हारे दरमियान अगर कोई समझा हो जाए तो इसमें कोई हराज नहीं। अल्लाह अलीम और दाना (बुद्धिमान) है
عَرَبِيوَمَن لَم يَستَطِع مِنكُم طَولًا أَن يَنكِحَ المُحصَناتِ المُؤمِناتِ فَمِن ما مَلَكَت أَيمانُكُم مِن فَتَياتِكُمُ المُؤمِناتِ ۚ وَاللَّهُ أَعلَمُ بِإيمانِكُم ۚ بَعضُكُم مِن بَعضٍ ۚ فَانكِحوهُنَّ بِإِذنِ أَهلِهِنَّ وَآتوهُنَّ أُجورَهُنَّ بِالمَعروفِ مُحصَناتٍ غَيرَ مُسافِحاتٍ وَلا مُتَّخِذاتِ أَخدانٍ ۚ فَإِذا أُحصِنَّ فَإِن أَتَينَ بِفاحِشَةٍ فَعَلَيهِنَّ نِصفُ ما عَلَى المُحصَناتِ مِنَ العَذابِ ۚ ذٰلِكَ لِمَن خَشِيَ العَنَتَ مِنكُم ۚ وَأَن تَصبِروا خَيرٌ لَكُم ۗ وَاللَّهُ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुममें से जो व्यक्ति ईमान वाली आज़ाद स्त्रियों से विवाह करने की क्षमता न रखे, वह तुम्हारे हाथों में आई हुई तुम्हारी ईमान वाली दासियों से विवाह कर ले। अल्लाह तुम्हारे ईमान को भली-भाँति जानता है। तुम सब परस्पर एक ही हो। अतः तुम उनके मालिकों की अनुमति से उन (दासियों) से विवाह कर लो और नियमानुसार उन्हें उनका महर चुका दो। जबकि वे सतीत्व की रक्षा करने वाली हों, खुल्लम खुल्ला व्यभिचार करने वाली न हों, तथा गुप्त रूप से व्यभिचार के लिए मित्र रखने वाली न हों। फिर यदि वे विवाहित हो जाने के बाद व्यभिचार करें, तो उनपर आज़ाद स्त्रियों का आधा दंड है। यह (दासियों से विवाह की अनुमति) तुममें से उसके लिए है, जिसे व्यभिचार में पड़ने का डर हो, और तुम्हारा धैर्य से काम लेना तुम्हारे लिए बेहतर है और अल्लाह अत्यंत क्षमाशील, बड़ा दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo shaks tum mein se itni maqdarat na rakhta ho ke khandani musalmaan auraton (mohsenaat) se nikah kar sakey usey chahiye ke tumhari un laudhiyon mein se kisi ke saath nikah karle jo tumhare qabze mein hon aur momina hon. Allah tumhare imaano ka haal khoob jaanta hai. Tum sab ek hi giroh ke log ho, lihaza unke sarparaston(guradians) ki ijazat se unke saath nikah karlo aur maroof tareeqe se unke mehar ada kardo, taa-ke woh hisar e nikah mein mehfooz (mohsenaat) hokar rahein, azaad shehwat-rani karti phirein aur na chori chupe aashnayian karein(secret love affairs). Phir jab woh hisar e nikah mein mehfooz ho jayein aur uske baad kisi badh-chalni ki murtakib hon to unpar us saza ki ba-nisbat aadhi saza hai jo khandani auraton (mohsenaat) ke liye muqarrar hai. Yeh sahulat tum mein se un logon ke liye paida ki gayi hai jinko shadi na karne se bandh-e-taqwa ke toot jaane ka andesha ho. Lekin agar tum sabr karo to yeh tumhare liye behtar hai. Aur Allah bakshne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum mein say jiss kissi ko aazad musalman aurton say nikkah kerney ki poori wus’at-o-taqat na ho to woh musalman londiyon say jin kay tum maalik ho (apna nikkah ker ley) Allah tumharay aemaal ko ba khoobi janney wala hai tum sab aapas mein aik hi to ho iss liye unn kay maalikon ki ijazat say unn say nikkah kerlo aur qaeeday kay mutabiq unn kay mehar unn ko do woh pak daaman hon na kay aelaaniya bad kaari kerney waliyan na khufia aashnaee kerney waliyan pus jab yeh londiyan nikkah mein aajayen phir agar woh bey hayaee ka kaam keren to unhen aadhi saza hai uss saza say jo aazad aurton ki hai. Kaneezon say nikkah ka yeh hukum tum mein say unn logon kay liye hai jinhen gunah aur takleef ka andesha ho aur tumhara zabt kerna boht behtar hai aur Allah Taalaa bara bakshney wala aur bari rehmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जो शक्स तुम में से इतनी मक़दरत न रखता हो के खानदानी मुसलमान औरतों (मोहसिनात) से निकाह कर सके उसे चाहिए के तुम्हारी उन लड़कियों में से किसी के साथ निकाह करले जो तुम्हारे क़ब्ज़े में माननीय और मोमिना हों। अल्लाह तुम्हारे ईमानो का हाल खूब जानता है। तुम सब एक ही गिरोह के लोग हो, लिहाजा उनके सरपरस्तों (गुराडियंस) की इजाजत से उनके साथ निकाह करलो और मारूफ तारीख से उनके मेहर अदा करदो, ता-के वो हिसार ए निकाह में महफूज (मोहसेनात) होकर रह रहे हैं, आजाद शेखवत-रानी करती फिरें और ना चोरी छिपे आशनाइयां करें(गुप्त प्रेम प्रसंग)। फिर जब वह हिसार ए निकाह में महफूज हो जाए और उसके बाद किसी की बद-चलनी की मुर्तकीब हो तो उस पर उस सजा की बा-निस्बत आधी सजा है जो खानदानी औरतों (मोहसिनात) के लिए मुकर्रर है। ये सहुलत तुम में से उन लोगों के लिए भुगतान की गई है जिनको शादी ना करने से बंद-ए-तकवा के टूट जाने का अंदेशा हो। लेकिन अगर तुम सब्र करो तो ये तुम्हारे लिए बेहतर है। और अल्लाह बख्शने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِييُريدُ اللَّهُ لِيُبَيِّنَ لَكُم وَيَهدِيَكُم سُنَنَ الَّذينَ مِن قَبلِكُم وَيَتوبَ عَلَيكُم ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह चाहता है कि तुम्हारे लिए स्पष्ट कर दे और तुम्हें उन लोगों के तरीक़ों का मार्गदर्शन करे जो तुमसे पहले हुए हैं और तुम्हारी तौबा क़बूल करे। अल्लाह सब कुछ जानने वाला, हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah chahta hai ke tumpar un tareeqon ko wazeh karey aur unhi tareeqon par tumhein chalaye jinki pairwi tumse pehle guzre huey sulaha (righteous) karte thay. Woh apni rehmat ke saath tumhari taraf mutawajjeh honay ka irada rakhta hai. Aur woh aleem bhi hai aur dana bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa chahata hai kay tumharay wastay khoob khol ker biyan keray aur tumhen tum say pehlay kay (nek) logon ki raah per chalaye aur tumhari tauba qabool keray aur Allah Taalaa janney wala hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह चाहता है कि तुम उन तरीक़ों को वाज़ेह करे और उन्ही तरीक़ों पर तुम्हें चलाये जिनकी जोड़ी तुमसे पहले गुज़रे हुए सुलह (धर्मी) करते थे। वो अपनी रहमत के साथ तुम्हारी तरफ मुतवज्जे होने का इरादा रखता है। और वो अलीम भी है और दाना भी
عَرَبِيوَاللَّهُ يُريدُ أَن يَتوبَ عَلَيكُم وَيُريدُ الَّذينَ يَتَّبِعونَ الشَّهَواتِ أَن تَميلوا مَيلًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह तो यह चाहता है कि तुम्हारी तौबा क़बूल करे तथा जो लोग इच्छाओं के पीछे पड़े हुए हैं, वे चाहते हैं कि तुम (हिदायत के मार्ग से) बहुत दूर हट जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Haan, Allah to tumpar rehmat ke saath tawajju karna chahta hai magar jo log khud apni khwahishat e nafs ki pairwi kar rahey hain woh chahte hein ke tum raah e raast se hatt kar door nikal jao
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah chahata hai kay tumhari tauba qabool keray aur jo log khuwaishaat kay pairoo hain woh chahtay hain kay tum iss say boht door hatt jao
Devnagri Urdu (Maududi)हां, अल्लाह तो तुमपर रहमत के साथ तवज्जु करना चाहता है मगर जो लोग खुद अपनी ख्वाहिशत ए नफ्स की जोड़ी बना रहे हैं वो चाहते हैं के तुम राह ए रास्ते से हट कर दूर निकल जाओ
عَرَبِييُريدُ اللَّهُ أَن يُخَفِّفَ عَنكُم ۚ وَخُلِقَ الإِنسانُ ضَعيفًا
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह चाहता है कि तुम्हारा बोझ हल्का कर दे तथा मानव कमज़ोर पैदा किया गया है।
Roman Urdu (Maududi)Allah tumpar se pabandiyon ko halka karna chahta hai kyunke insan kamzoar paida kiya gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah chahta hai kay tum say takhfeef ker dey kiyon kay insan kamzor peda kiya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह तुमपर से पाबंदियां को हल्का करना चाहता है क्योंकि इंसान कर्ज चुकाया गया है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَأكُلوا أَموالَكُم بَينَكُم بِالباطِلِ إِلّا أَن تَكونَ تِجارَةً عَن تَراضٍ مِنكُم ۚ وَلا تَقتُلوا أَنفُسَكُم ۚ إِنَّ اللَّهَ كانَ بِكُم رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! आपस में एक-दूसरे का धन अवैध रूप से न खाओ, सिवाय इसके कि वह तुम्हारी आपसी सहमति से कोई व्यापार हो। तथा अपने आपको क़त्ल न करो। निःसंदेह अल्लाह तुमपर अति दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, aapas mein ek dusre ke maal batil tareeqon se na khao, lein dein hona chahiye aapas ki razamandi se aur apne aap ko qatal na karo yaqeen maano ke Allah tumhare upar meharban hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Apney aapas kay maal na jaeez tareeqay say mat khao magar yeh kay tumhari aapas ki raza mandi say ho khareed-o-farokht aur apney aap ko qatal na kero yaqeenan Allah Taalaa tum per nihayat meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, आपस में एक दूसरे के माल बातिल तारीखों से ना खाओ, लें देइन होना चाहिए आपस की रजामंडी से और अपने आप को कत्ल ना करो यकीन मानो के अल्लाह तुम्हारे ऊपर मेहरबान है
عَرَبِيوَمَن يَفعَل ذٰلِكَ عُدوانًا وَظُلمًا فَسَوفَ نُصليهِ نارًا ۚ وَكانَ ذٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जो ज़ुल्म और ज़्यादती से ऐसा करेगा, तो शीघ्र ही हम उसे आग में झोंक देंगे और यह अल्लाह के लिए सरल है।
Roman Urdu (Maududi)Jo shaks zulm aur zyadati ke saath aisa karega usko hum zaroor aag mein jhonkenge aur yeh Allah ke liye koi mushkil kaam nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo shaks yeh (na farmaniyan) sirkashi aur zulm say keray ga to un qarib hum uss ko aag mein dakhil keren gay. Aur yeh Allah per aasan hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो शक्स ज़ुल्म और ज़्यादा के साथ ऐसा करेगा उसको हम ज़रूर आग में झोंकेंगे और ये अल्लाह के लिए कोई मुश्किल काम नहीं है
عَرَبِيإِن تَجتَنِبوا كَبائِرَ ما تُنهَونَ عَنهُ نُكَفِّر عَنكُم سَيِّئَاتِكُم وَنُدخِلكُم مُدخَلًا كَريمًا
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हिन्दी (Al-Omari)यदि तुम, उन बड़े पापों से बचते रहे, जिनसे तुम्हें रोका जा रहा है, तो हम तुम्हारे (छोटे) गुनाहों को क्षमा कर देंगे और तुम्हें प्रतिष्ठित स्थान में दाख़िल करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum un baday baday gunaahon se parheiz karte raho jinse tumhein mana kiya jaa raha hai to tumhari choti moti buraiyon ko hum tumhare hisaab se saqit kardenge aur tumko izzat ki jagah dakhil karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum unn baray gunahon say bachtay raho gay jin say tum ko mana kiya jata hai to hum tumharay chotay gunah door ker den gay aur izzat aur buzrugi ki jagah dakhil keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम उन बदे गुनाहों से परहेज़ करते रहो जिनसे तुम मन किया जा रहा है तो तुम्हारी छोटी मोटी बुराइयों को हम तुम्हारे हिसाब से साबित कर देंगे और तुमको इज्जत की जगह दाख़िल करेंगे
عَرَبِيوَلا تَتَمَنَّوا ما فَضَّلَ اللَّهُ بِهِ بَعضَكُم عَلىٰ بَعضٍ ۚ لِلرِّجالِ نَصيبٌ مِمَّا اكتَسَبوا ۖ وَلِلنِّساءِ نَصيبٌ مِمَّا اكتَسَبنَ ۚ وَاسأَلُوا اللَّهَ مِن فَضلِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ كانَ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह ने जिस चीज़ के द्वारा तुममें से कुछ को दूसरों पर प्रतिष्ठा प्रदान की है, उसकी कामना न करो। पुरुषों के लिए उसमें से हिस्सा है, जो उन्होंने कमाया और स्त्रियों के लिए उसमें से हिस्सा है, जो उन्होंने कमाया है। तथा अल्लाह से उसका अनुग्रह माँगते रहो। निःसंदेह, अल्लाह सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo kuch Allah ne tum mein se kisi ko dusron ke muqable mein zyada diya hai uski tamanna na karo. Jo kuch Mardon ne kamaya hai uske mutabiq unka hissa hai aur jo kuch auraton ne kamaya hai uske mutabiq unka hissa. Haan Allah se uske fazl ki dua maangte raho. Yaqeenan Allah har cheez ka ilm rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss cheez ki aarzoo na kero jiss kay baees Allah Taalaa ney tum mein say baaz ko baaz per buzrugi di hai. Mardon kay uss mein say hissa hai jo unhon ney kamaya aur aurton kay liye uss mein say hain jo unhon ney kamaya aur Allah Taalaa say uss ka fazal maango yaqeenan Allah her cheez ka janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जो कुछ अल्लाह ने तुम में से किसी को दूसरे के मुकाबले में ज्यादा दिया है उसकी तमन्ना ना करो। जो कुछ मर्दों ने कमाया है उसे मुताबिक़ उनका हिसा है और जो कुछ औरतों ने कमाया है उसे मुताबिक़ उनका हिसा। हां अल्लाह से उसके फजल की दुआ मांगते रहो। यकीनन अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है
عَرَبِيوَلِكُلٍّ جَعَلنا مَوالِيَ مِمّا تَرَكَ الوالِدانِ وَالأَقرَبونَ ۚ وَالَّذينَ عَقَدَت أَيمانُكُم فَآتوهُم نَصيبَهُم ۚ إِنَّ اللَّهَ كانَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ شَهيدًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने तुममें से हर एक के हक़दार बना दिए हैं, जो माता-पिता और क़रीबी रिश्तेदारों की छोड़ी हुई संपत्ति के वारिस होंगे। तथा जिनसे तुमने समझौता किया हो, तो उन्हें उनका हिस्सा दो। निःसंदेह अल्लाह हमेशा प्रत्येक वस्तु से सूचित है।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne har us tarke(inheritance) ke haqqdar muqarrar kardiye hain jo waldain aur rishtedar chodein, ab rahey woh log jinse tumhare ahad o paiman hon to unka hissa unhein do. Yaqeenan Allah har cheez par nigraan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Maa baap ya qarabat daar jo chor maren uss kay waris hum ney her shaks kay muqarrar ker diye hain aur jin say tum ney apney haathon mohaeeda kiya hai unhen unn ka hissa do haqeeqatan Allah Taalaa her cheez per hazir hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने हर हमसे तर्के (विरासत) के हक़दार मुक़र्रर करदी हैं जो वाल्दैन और रिश्तेदार छोड़ें, अब रहे वो लोग जिनसे तुम्हारे अहद ओ पैमान हों तो उनका हिसा उन्हें दो। यकीनन अल्लाह हर चीज़ पर निगरान है
عَرَبِيالرِّجالُ قَوّامونَ عَلَى النِّساءِ بِما فَضَّلَ اللَّهُ بَعضَهُم عَلىٰ بَعضٍ وَبِما أَنفَقوا مِن أَموالِهِم ۚ فَالصّالِحاتُ قانِتاتٌ حافِظاتٌ لِلغَيبِ بِما حَفِظَ اللَّهُ ۚ وَاللّاتي تَخافونَ نُشوزَهُنَّ فَعِظوهُنَّ وَاهجُروهُنَّ فِي المَضاجِعِ وَاضرِبوهُنَّ ۖ فَإِن أَطَعنَكُم فَلا تَبغوا عَلَيهِنَّ سَبيلًا ۗ إِنَّ اللَّهَ كانَ عَلِيًّا كَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)पुरुष स्त्रियों के संरक्षक हैं, इस कारण कि अल्लाह ने उनमें से कुछ को कुछ पर फ़ज़ीलत दी है तथा इस कारण कि पुरुषों ने अपना धन ख़र्च किया है। अतः अच्छी औरतें आज्ञाकारी होती हैं तथा अपने पतियों की अनुपस्थिति में अल्लाह के संरक्षण में उनके अधिकारों की रक्षा करती हैं। फिर तुम्हें जिन औरतों की अवज्ञा का डर हो, उन्हें समझाओ और सोने के स्थानों में उनसे अलग रहो तथा उन्हें मारो। फिर यदि वे तुम्हारी बात मानें, तो उनके विरुद्ध कोई रास्ता न ढूँढो। निःसंदेह अल्लाह सर्वोच्च, सबसे बड़ा है।
Roman Urdu (Maududi)Mard auraton par qawwam (protectors and maintainers) hain, is bina par ke Allah ne unmein se ek ko dusre par fazilat di hai, aur is bina par ke Mard apne maal kharch karte hain. Pas jo saleh auratein hain woh itaat shiaar (obedient) hoti hain aur Mardon ke pichey Allah ki hifazat o nigrani mein unke huqooq ki hifazat karti hain. Aur jin auraton se tumhein sarkashi ka andesha ho unhein samjhao, khwabgaahon mein (in beds) unse alaheda (separate) raho aur maaro, phir agar woh tumhari mutii(obedient) ho jayein to khwa ma khwa unpar dast darazi keliye bahane talash (seek ways to harm )na karo. Yaqeen rakkho ke upar Allah maujood hai jo bada aur baalatar hai (Exalted, Great)
Roman Urdu (Junagarhi)Mard aurton per haakim hain iss waja say kay Allah Taalaa ney aik ko doosray per fazilat di hai aur iss waja say kay mardon ney apney maal kharach kiye hain pus nek farman bardaar aurten khawind ki adam mojoodgi mein ba hifazat-e-elahee nigehdasht rakhen waliyan hain aur jin aurton ki na farmani aur bad dimaghi ka tumhen khof ho unhen naseehat kero aur unhen alag biostaron per chor do aur unhen maar ki saza do phir agar woh tabey daari keren to unn per koi raasta talash na kero be-shak Allah Taalaa bari bulandi aur baraee wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)मर्द औरतों पर कव्वाम (रक्षक और रखवाले) हैं, इस बिना पर के अल्लाह ने उनमें से एक को दूसरे पर फजीलत दी है, और इस बिना पर के मर्द अपने माल खर्च करते हैं। पास जो साले औरतें हैं वो इताअत शिया (आज्ञाकारी) होती हैं और मर्दों के पीछे अल्लाह की हिफ़ाज़त ओ निगरानी में उनके हुकूक़ की हिफ़ाज़त करती हैं। और जिन औरतों से तुम सरकशी का अंदेशा हो उन्हें समझाओ, ख्वाबगाहों में (बिस्तरों में) उन्हें अलहेदा (अलग) रहो और मारो, फिर अगर वो तुम्हारी मुती (आज्ञाकारी) हो जाए तो ख्वा मा ख्वा अनपर दस्त दार्जी केलिए बहाने तलाश (नुकसान पहुंचाने के तरीके ढूंढो) ना करो। यकीन रक्खो के ऊपर अल्लाह मौजूद है जो बड़ा और महान है
عَرَبِيوَإِن خِفتُم شِقاقَ بَينِهِما فَابعَثوا حَكَمًا مِن أَهلِهِ وَحَكَمًا مِن أَهلِها إِن يُريدا إِصلاحًا يُوَفِّقِ اللَّهُ بَينَهُما ۗ إِنَّ اللَّهَ كانَ عَليمًا خَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम्हें दोनों के बीच अलगाव का डर हो, तो एक मध्यस्थ पति के घराने से तथा एक मध्यस्थ पत्नी के घराने से नियुक्त करो, यदि दोनों (मध्यस्थ) सुधार करना चाहेंगे, तो अल्लाह दोनों (पति-पत्नी) के बीच मेल का रास्ता निकाल देगा। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला और हर चीज़ की ख़बर रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar tum logon ko kahin miya aur biwi ke taaluqqat bigad janey ka andesha ho to ek hakam (arbitrator) mard ke rishtedaaron mein se aur ek aurat ke rishtedaaron mein se muqarrar karo. Woh dono islah karna chahenge to Allah unke darmiyan muwafiqat ki surat nikal dega. Allah sabkuch jaanta hai aur bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tumhen miyan biwi kay darmiyan aapas ki ann bann ka khof ho to aik munsif mard walon mein say aur aik aurat kay ghar walon mein say muqarrar kero agar yeh dono sulah kerana chahayen gay to Allah dono mein milaap kera dey ga yaqeenan Allah Taalaa pooray ilm wala poori khabar wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर तुम लोगों को कहीं मिया और बीवी के तालुक्कत बिगाद जाने का अंदेशा हो तो एक हकम (मध्यस्थ) मर्द के रिश्तेदारों में से और एक औरत के रिश्तेदारों में से मुकर्रर करो। वो दोनों इस्लाह करना चाहेंगे अल्लाह के लिए उनके दरमियान मुवाफिकत की सूरत निकल देगा। अल्लाह सब कुछ जानता है और बाख़बर है
عَرَبِي۞ وَاعبُدُوا اللَّهَ وَلا تُشرِكوا بِهِ شَيئًا ۖ وَبِالوالِدَينِ إِحسانًا وَبِذِي القُربىٰ وَاليَتامىٰ وَالمَساكينِ وَالجارِ ذِي القُربىٰ وَالجارِ الجُنُبِ وَالصّاحِبِ بِالجَنبِ وَابنِ السَّبيلِ وَما مَلَكَت أَيمانُكُم ۗ إِنَّ اللَّهَ لا يُحِبُّ مَن كانَ مُختالًا فَخورًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह की इबादत करो और किसी चीज़ को उसका साझी न बनाओ तथा माता-पिता, रिश्तेदारों, अनाथों, निर्धनों, नातेदार पड़ोसी, अपरिचित पड़ोसी, साथ रहने वाले साथी, यात्री और अपने दास-दासियों के साथ अच्छा व्यवहार करो। निःसंदेह अल्लाह उससे प्रेम नहीं करता, जो इतराने वाला, डींगें मारने वाला हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur tum sab Allah ki bandagi karo, uske saath kisi ko shareek na banao, Maa Baap ke saath neik bartao karo, qarabatdaaron (kins) aur yateemon aur miskeeno ke saath husn e sulook se pesh aao, aur padosi rishtedaar se, ajnabi humsaye (neighbor) se, pehlu ke saathi (companion by your side) aur musafir se , aur un laundi ghulamon se jo tumhare qabze mein hon, ehsan ka maamla rakkho, yaqeen jaano Allah kisi aisey shaks ko pasand nahin karta jo apne pindaar mein magroor ho aur apni badayi par fakr karey(arrogant and the boastful)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa ki ibadat kero aur uss kay sath kissi ko shareek na kero aur maa baap kay sath salook-o-ehsan kero aur rishtay daron say aur yateemon say aur miskeenon say aur qarabat daar humsaya say aur ajnabi humsaya say aur pehloo kay sathi say aur raah kay musafir say aur unn say jin kay maalik tumharay haath hain (ghulam kaneez) yaqeenan Allah Taalaa takabbur kerney walon aur shekhi khoron ko pasand nahi farmata
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम सब अल्लाह की बंदगी करो, उसके साथ किसी को शरीक न बनाओ, माँ बाप के साथ नीक बरताओ करो, क़राबतदारों (रिश्तेदारों) और यतीमों और मिस्कीनो के साथ हुस्न ए सुलूक से पेश आओ, और पड़ोसि रिश्तेदार से, अजनबी हमसाए (पड़ोसी) से, पहलू के साथी (अपनी तरफ से साथी) और मुसाफिर से, और उन लौंडी गुलामों से जो तुम्हारे क़ब्ज़े में हो, एहसान का मामला रखो, यकीन जानो अल्लाह किसी ऐसे शक्स को पसंद नहीं करता जो अपने पिंडार में मगरूर हो और अपनी बदाई पर फक्र करे (अभिमानी और घमंडी)
عَرَبِيالَّذينَ يَبخَلونَ وَيَأمُرونَ النّاسَ بِالبُخلِ وَيَكتُمونَ ما آتاهُمُ اللَّهُ مِن فَضلِهِ ۗ وَأَعتَدنا لِلكافِرينَ عَذابًا مُهينًا
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हिन्दी (Al-Omari)जो खुद कृपणता करते हैं तथा दूसरों को भी कृपणता का आदेश देते हैं और उस (नेमत) को छिपाते हैं, जो अल्लाह ने उन्हें प्रदान की है। और हमने काफ़िरों के लिए अपमानकारी अज़ाब तैयार कर रखा है।
Roman Urdu (Maududi)Aur aise log bhi Allah ko pasand nahin hain jo kanjoosi karte hain aur dusron ko bhi kanjossi ki hidayat karte hain, aur jo kuch Allah ne apne fazal se unhein diya hai usey chupate hain. Aisey kafir-e-niyamat logon ke liye humne ruswa-kun azaab muhaiyya kar rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log khud bakheeli kertay hain aur doosron ko bhi bakheeli kerney ko kehtay hain aur Allah Taalaa ney jo apna fazal unhen dey rakha hai ussay chupa letay hain hum ney unn kafiron kay liye zillat ki maar tayyar ker rakhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐसे लोग भी अल्लाह को पसंद नहीं हैं जो कंजूसी करते हैं और दूसरों को भी हिदायत करते हैं, और जो कुछ अल्लाह ने अपने फज़ल से उन्हें दिया है उसे छुपाते हैं। ऐसे काफ़िर-ए-नियामत लोगों के लिए हमने रुसवा-कुन अज़ाब मुहैय्या कर रखा है
عَرَبِيوَالَّذينَ يُنفِقونَ أَموالَهُم رِئَاءَ النّاسِ وَلا يُؤمِنونَ بِاللَّهِ وَلا بِاليَومِ الآخِرِ ۗ وَمَن يَكُنِ الشَّيطانُ لَهُ قَرينًا فَساءَ قَرينًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग अपना धन, लोगों को दिखाने के लिए दान करते हैं और अल्लाह तथा अंतिम दिन पर ईमान नहीं रखते। तथा शैतान जिसका साथी हो, तो वह बहुत बुरा साथी है।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh log bhi Allah ko na-pasand hain jo apne maal mehaz logon ko dikhane ke liye kharch karte hain aur dar haqeeqat na Allah par iman rakhte hain na roz e aakhir par, sach yeh hai ke shaytan jiska rafeeq (companion) hua usey bahut hi buri rafaqat muyassar aayi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log apna maal logon kay dikhaway kay liye kharach kertay hain aur Allah Taalaa per aur qayamat kay din per eman nahi rakhtay aur jiss ka humnasheen aur sathi shetan ho woh bad tareen sathi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वो लोग भी अल्लाह को ना-पसंद हैं जो अपने माल महज़ लोगों को दिखाने के लिए खर्च करते हैं और दर हकीकत ना अल्लाह पर ईमान रखते हैं ना रोज़ ए आख़िर पर, सच ये है के शैतान जिसका रफीक (साथी) हुआ उसे बहुत ही बुरी रफाकत मुयस्सर आई
عَرَبِيوَماذا عَلَيهِم لَو آمَنوا بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ وَأَنفَقوا مِمّا رَزَقَهُمُ اللَّهُ ۚ وَكانَ اللَّهُ بِهِم عَليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और उनका क्या बिगड़ जाता, यदि वे अल्लाह तथा अन्तिम दिन पर ईमान रखते और अल्लाह ने उन्हें जो कुछ दिया है, उसमें से खर्च करते? और अल्लाह उन्हें भली-भाँति जानता है।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir in logon par kya aafat aa jati agar yeh Allah aur roz e aakhir par iman rakthe aur jo kuch Allah ne diya hai usmein se kharch karte? Agar yeh aisa karte to Allah se inki neki ka haal chupa na reh jata
Roman Urdu (Junagarhi)Bhala unn ka kiya nuksan tha agar yeh Allah Taalaa per aur qayamat kay din per eman latay aur Allah Taalaa ney jo unhen dey rakha hai uss mein say kharach kertay Allah Taalaa unhen khoob janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर लोगों पर क्या आफत आ जाती अगर ये अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान रखते और जो कुछ अल्लाह ने दिया है उसमें से खर्च करते? अगर ये ऐसा करता तो अल्लाह से इनकी नेकी का हाल छुपा न रह जाता
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ لا يَظلِمُ مِثقالَ ذَرَّةٍ ۖ وَإِن تَكُ حَسَنَةً يُضاعِفها وَيُؤتِ مِن لَدُنهُ أَجرًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह एक कण बराबर भी किसी पर अत्याचार नहीं करता, यदि (किसी ने) कोई नेकी (की) हो, तो उसे कई गुना बढ़ा देता है तथा अपने पास से बड़ा बदला प्रदान करता है।
Roman Urdu (Maududi)Allah kisi par zarra barabar bhi zulm nahin karta, agar koi ek neki karey to Allah usey do chandh karta hai aur phir apni taraf se bada ajar ata farmata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak Allah Taalaa aik zarra barabar zulm nahi kerta aur agar neki ho to ussay doogni ker deta hai aur khaas apney pass say boht bara sawab deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह किसी पर जरा बराबर भी जुल्म नहीं करता, अगर कोई एक नेकी करे तो अल्लाह उसे दो चांद करता है और फिर अपनी तरफ से बड़ा अजर अता फरमाता है
عَرَبِيفَكَيفَ إِذا جِئنا مِن كُلِّ أُمَّةٍ بِشَهيدٍ وَجِئنا بِكَ عَلىٰ هٰؤُلاءِ شَهيدًا
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हिन्दी (Al-Omari)तो उस समय क्या हाल होगा, जब हम प्रत्येक उम्मत (समुदाय) से एक गवाह लाएँगे और (ऐ नबी!) हम आपको इनपर गवाह (बनाकर) लाएँगे?
Roman Urdu (Maududi)Phir socho ke us waqt yeh kya karenge jab hum har ummat mein se ek gawah layenge aur in logon par tumhein [yani Muhammad (s.a.s) ko] gawah ki haisiyat se khada karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Pus kiya haal hoga jiss waqt kay her ummat mein say aik gawah hum layen gay aur aap ko inn logon per gawah bana ker layen gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर सोचो के हमें वक्त ये क्या करेंगे जब हम हर उम्मत में से एक गवाह लाएंगे और लोगों पर तुम्हारे साथ [यानी मुहम्मद (सस) को] गवाह की हैसियत से खड़ा करेंगे
عَرَبِييَومَئِذٍ يَوَدُّ الَّذينَ كَفَروا وَعَصَوُا الرَّسولَ لَو تُسَوّىٰ بِهِمُ الأَرضُ وَلا يَكتُمونَ اللَّهَ حَديثًا
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन, काफ़िर तथा रसूल की अवज्ञा करने वाले यह कामना करेंगे कि काश! उनके सहित धरती बराबर कर दी जाती! और वे अल्लाह से कोई बात छिपा नहीं सकेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt woh sab log jinhon ne Rasool ki baat na maani aur uski nafarmani karte rahey, tamanna karenge ke kaash zameen phatt jaye aur woh is mein samaa jayein, wahan yeh apni koi baat Allah se na chupa sakenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss roz kafir aur rasool kay na farman aarzoo keren gay kay kaash! Enhen zamin kay sath humwaar ker diya jata aur Allah Taalaa say koi baat na chupa saken gay
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त वो सब लोग जिन्हों ने रसूल की बात न मानी और उसकी नफ़रमानी करते रहेंगे, तमन्ना करेंगे के काश ज़मीन फट जाए और वो इस में समा जाए, वहां ये अपनी कोई बात अल्लाह से ना छुपाएंगे
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَقرَبُوا الصَّلاةَ وَأَنتُم سُكارىٰ حَتّىٰ تَعلَموا ما تَقولونَ وَلا جُنُبًا إِلّا عابِري سَبيلٍ حَتّىٰ تَغتَسِلوا ۚ وَإِن كُنتُم مَرضىٰ أَو عَلىٰ سَفَرٍ أَو جاءَ أَحَدٌ مِنكُم مِنَ الغائِطِ أَو لامَستُمُ النِّساءَ فَلَم تَجِدوا ماءً فَتَيَمَّموا صَعيدًا طَيِّبًا فَامسَحوا بِوُجوهِكُم وَأَيديكُم ۗ إِنَّ اللَّهَ كانَ عَفُوًّا غَفورًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! जब तुम नशे (की हालत) में हो, तो नमाज़ के क़रीब न जाओ, यहाँ तक कि जो कुछ ज़बान से कह रहे हो, उसे (ठीक) से समझने लगो और न जनाबत की हालत में, (मस्जिदों के क़रीब जाओ) यहाँ तक कि स्नान कर लो। परंतु रास्ता पार करते हुए (चले जाओ, तो कोई बात नहीं)। यदि तुम बीमार हो अथवा यात्रा में हो या तुममें से कोई शौच से आए या तुमने स्त्रियों से सहवास किया हो, फिर पानी न पा सको, तो पवित्र मिट्टी से तयम्मुम कर लो; उसे अपने चेहरे तथा हाथों पर फेर लो। निःसंदेह अल्लाह माफ करने वाला और क्षमा करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, jab tum nashey ki halat mein ho to namaz ke qareeb na jao, namaz us waqt padhni chahiye jab tum jaano ke kya keh rahey ho, aur isi tarah janabat ki halat mein bhi namaz ke qareeb na jao jab tak ke ghusl na karlo, illa yeh ke raaste se guzarte ho. Aur agar kabhi aisa ho ke tum bimar ho, ya safar mein ho, ya tum mein se koi shaks rafey hajat karke aaye, ya tumne auraton se lams (intimate relation) kiya ho, aur phir pani na miley to paak mitti se kaam lo aur issey apne chehron aur haathon par masaah karlo. Beshak Allah narmi se kaam lene wala aur bakshish farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Jab tum nashay mein mast ho namaz kay qarib bhi na jao jab tak kay apni baat ko samajhney na lago aur janabat ki halat mein jab tak kay ghusul na kerlo haan agar raah chaltay guzar janey walay ho to aur baat hai aur agar tum beemar ho ya safar mein ho ya tum mein say koi qazay-e-haajat say aaya ho ya tum ney aurton say mubashirat ki ho aur tumhen pani na milay to pak mitti ka qasad kero aur apney mun aur apney haath mall lo. Be-shak Allah Taalaa moaf kerney wala bakshney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम नशे की हालत में हो तो नमाज के करीब ना जाओ, नमाज हमें वक्त पढ़ना चाहिए जब तुम जानो के क्या कह रहे हो, और इसी तरह जनाब की हालत में भी नमाज के करीब ना जाओ, जब तक के ग़ुस्ल ना करो, इल्ला ये के रास्ते से गुज़रते हो. और अगर कभी ऐसा हो कि तुम बीमार हो, या सफर में हो, या तुम में से कोई शक्स रफे खतरे में डालकर आये, या तुमने औरतों से अंतरंग संबंध बनाया हो, और फिर पानी ना मिले तो पाक मिट्टी से काम लो और इसे अपने चेहरों और हाथों पर मसला करो। बेशक अल्लाह नरमी से काम लेने वाला और बख्शीश फरमाने वाला है
عَرَبِيأَلَم تَرَ إِلَى الَّذينَ أوتوا نَصيبًا مِنَ الكِتابِ يَشتَرونَ الضَّلالَةَ وَيُريدونَ أَن تَضِلُّوا السَّبيلَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने उन लोगों को नहीं देखा, जिन्हें पुस्तक का कुछ भाग दिया गया है कि वे गुमराही ख़रीद रहे हैं तथा चाहते हैं कि तुम भी सीधे मार्ग से भटक जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Tumne un logon ko bhi dekha jinhein kitab ke ilm ka kuch hissa diya gaya hai? Woh khud zalalat ke kharidaar baney (purchased error for themselves) hain aur chahte hain ke tum bhi raah ghum kardo
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum ney unhen nahi dekha? Jinhen kitab ka kuch hissa diya gaya hai woh gumrahi khareedtay hain aur chahtay hain kay tum bhi raah say bhatak jao
Devnagri Urdu (Maududi)तुमने उन लोगों को भी देखा जिन्होंने किताब के इल्म का कुछ हिसाब दिया है? वो खुद जलालत के खरीदार बने (खुद के लिए खरीदी गई त्रुटि) हैं और चाहते हैं के तुम भी राह गम करदो
عَرَبِيوَاللَّهُ أَعلَمُ بِأَعدائِكُم ۚ وَكَفىٰ بِاللَّهِ وَلِيًّا وَكَفىٰ بِاللَّهِ نَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह तुम्हारे शत्रुओं को अच्छी तरह जानता है और (तुम्हारे लिए) अल्लाह की रक्षा तथा उसकी सहायता काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Allah tumhare dushmano ko khoob jaanta hai aur tumhari himayat o madadgaari ke liye Allah hi kafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa tumharay dushmanon ko khoob jannay wala hai aur Allah Taalaa ka dost hona kafi hai aur Allah Taalaa ka madadgar hona bus hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह तुम्हारे दुश्मनों को खूब जानता है और तुम्हारी हिमायत ओ मददगार के लिए अल्लाह ही काफी है
عَرَبِيمِنَ الَّذينَ هادوا يُحَرِّفونَ الكَلِمَ عَن مَواضِعِهِ وَيَقولونَ سَمِعنا وَعَصَينا وَاسمَع غَيرَ مُسمَعٍ وَراعِنا لَيًّا بِأَلسِنَتِهِم وَطَعنًا فِي الدّينِ ۚ وَلَو أَنَّهُم قالوا سَمِعنا وَأَطَعنا وَاسمَع وَانظُرنا لَكانَ خَيرًا لَهُم وَأَقوَمَ وَلٰكِن لَعَنَهُمُ اللَّهُ بِكُفرِهِم فَلا يُؤمِنونَ إِلّا قَليلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) यहूदियों में से कुछ लोग ऐसे हैं, जो शब्दों को उनके (वास्तविक) स्थानों से फेर देते हैं और (आपसे) कहते हैं कि "हमने सुन लिया तथा (आपकी) अवज्ञा की" और "आप सुनिए, आप सुनाए न जाएँ!" तथा अपनी ज़ुबानें मोड़कर और सत्य धर्म पर लांक्षन लगाते हुए "राइना" कहते हैं। हालाँकि, यदि वे "हमने सुन लिया और आज्ञा का पालन किया" तथा "आप सुनिए और हमें देखिए" कहते, तो उनके लिए उत्तम तथा अधिक न्यायसंगत होता। परन्तु, अल्लाह ने उनके कुफ़्र के कारण उन्हें धिक्कार दिया है। अतः वे बहुत कम ईमान लाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo log Yahudi ban gaye hain unmein kuch log hain jo alfaz ko unke mahal se pher dete hain aur deen e haqq ke khilaf nesh-zani (alter the words from their context) karne ke liye apni zubaano ko toad moad kar kehte hain ‘sameena wa asayna’ (We have heard and we disobey) aur ‘isma gair musmaa’ (Do hear us, may you turn dumb) aur ‘raina’ (Hearken to us). Halanke agar woh kehte ‘sameena wa atana’ (we have heard and we obey), aur Isma aur unzurna [Do listen to us, and look at us (with kindness)] to yeh unhi ke liye behtar tha aur zyada raastbazi ka tareeqa tha. Magar unpar to unki baatil parasti ki badaulat Allah ki phitkar padi hui hai is liye woh kam hi iman latey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Baaz yahud kalmaat ko unn ki theek jagah say hair pher ker detay hain aur kehtay hain kay hum ney suna aur na farmani ki aur sunn iss kay baghair kay tu suna jaye aur humari riyayat ker! (lekin iss kay kehney mein) apni zaban ko paich detay hain aur deen mein taana detay hain aur agar yeh log kehtay kay hum ney suna aur hum ney farmanbardari ki aur aap suniye aur humen dekhiye to yeh inn kay liye boht behtar aur nihayat hi munasib tha lekin Allah Taalaa ney inn kay kufur ki waja say enhen laanat ki hai. Pus yeh boht hi kum eman latay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग यहुदी बन गए हैं उनमें कुछ लोग हैं जो अल्फ़ाज़ को उनके महल से फेर देते हैं और दीन ए हक़ के ख़िलाफ नेश-ज़ानी (शब्दों को उनके संदर्भ से बदलें) करने के लिए अपनी ज़ुबानो को तोड़ मोड़ कर कहते हैं 'समीना वा असयना' (हमने सुना है और हमने अवज्ञा की है) और 'इस्मा ग़ैर मुस्मा' (हमें ज़रूर सुनें, कहीं आप गूंगे न हो जाएं) और 'रैना' (सुनें हम)। हालंके अगर वो कहते 'समीना वा अताना' (हमने सुना है और हम मानते हैं), और इस्मा और अनज़ुर्ना [हमारी बात जरूर सुनें, और हमारी तरफ देखें (दया के साथ)] तो ये उनके लिए बेहतर था और ज्यादा रस्तबाजी का तरीका था। मगर उन पर उनकी बातिल परस्ती की बदौलत अल्लाह की फिटकर पड़ी हुई है उसके लिए वो कम ही ईमान लाते हैं
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ آمِنوا بِما نَزَّلنا مُصَدِّقًا لِما مَعَكُم مِن قَبلِ أَن نَطمِسَ وُجوهًا فَنَرُدَّها عَلىٰ أَدبارِها أَو نَلعَنَهُم كَما لَعَنّا أَصحابَ السَّبتِ ۚ وَكانَ أَمرُ اللَّهِ مَفعولًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ किताब वालो! उस (क़ुरआन) पर ईमान लाओ, जिसे हमने उन (पुस्तकों) की पुष्टि करने वाला बनाकर उतारा है, जो तुम्हारे पास मौजूद हैं, इससे पहले कि हम (लोगों के) चेहरे बिगाड़कर उलटा कर दें अथवा उन्हें वैसे ही धिक्कारें, जैसे शनिवार वालों को धिक्कारा था। और अल्लाह का आदेश पूरा होकर रहने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey woh logon jinhein kitab di gayi thi! Maan lo us kitab ko jo humne ab nazil ki hai aur jo us kitab ki tasdeeq o taeed karti hai jo tumhare paas pehle se maujood thi. Ispar iman le aao qabl iske ke hum chere bigaad kar pichey pher dein ya unko usi tarah laanat zadah kardein jis tarah sabt (Sabbath) walon ke saath humne kiya tha, aur yaad rakkho ke Allah ka hukum nafiz hokar rehta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey ehal-e-kitab! Jo kuch hum ney nazil farmaya hai jo uss ki bhi tasdeeq kerney wala hai jo tumharay pass hai iss per eman lao iss say pehlay hum chehray bigaar den aur enhen lota ker peeth ki taraf ker den ya inn per laanat bhejen jaisay hum ney haftay kay din walon per laanat ki aur hai Allah Taalaa ka kaam kiya gaya
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ वो लोगन जिनहेन किताब दी गई थी! मान लो उस किताब को जो हमने अब नाज़िल की है और जो उस किताब की तस्दीक या तय करती है जो तुम्हारे पास पहले से मौजुद थी। इसपर ईमान ले आओ क़ब्ल इसके के हम चेरे बिगाड कर पीछे फेर दें या उनको उसी तरह लानत जदा करदें जिस तरह सब्त (सब्बाथ) वालों के साथ हमने किया था, और याद रक्खो के अल्लाह का हुकुम नफीज होकर रहता है
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ لا يَغفِرُ أَن يُشرَكَ بِهِ وَيَغفِرُ ما دونَ ذٰلِكَ لِمَن يَشاءُ ۚ وَمَن يُشرِك بِاللَّهِ فَقَدِ افتَرىٰ إِثمًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह, अल्लाह यह क्षमा नहीं करेगा कि उसका साझी बनाया जाए और इसके सिवा जिसे चाहेगा, क्षमा कर देगा। और जिसने अल्लाह का साझी बनाया, उसने बहुत बड़ा पाप गढ़ लिया।
Roman Urdu (Maududi)Allah bas shirk hi ko maaf nahin karta, iske ma-siwa dusre jis qadar gunaah hain woh jiske liye chahta hai maaf kardeta hai. Allah ke saath jisne kisi aur ko shareek thehraya usne to bahut hi bada jhoot tasneef kiya aur badey sakht gunnah ki baat ki
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan Allah Taalaa apney sath sahreek kiye janey ko nahi bakshta aur iss kay siwa jissay chahaye baksh deta hai aur jo Allah Taalaa kay sath shareek muqarrar keray uss ney boht bara gunah aur bohtan bandha
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह बस शिर्क ही को माफ नहीं कर्ता, इसके मा-सिवा दूसरे जिस कदर गुनाह हैं वो जिसके लिए चाहता है माफ करता है। अल्लाह के साथ जिसने और को शरीक ठहरया उसने तो बहुत ही बड़ा झूठ तसनीफ किया और बदले में गुनाह की बात की
عَرَبِيأَلَم تَرَ إِلَى الَّذينَ يُزَكّونَ أَنفُسَهُم ۚ بَلِ اللَّهُ يُزَكّي مَن يَشاءُ وَلا يُظلَمونَ فَتيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने उन्हें नहीं देखा, जो अपने आपको पवित्र कहते हैं? बल्कि अल्लाह ही जिसे चाहे, पवित्र बनाता है और उन पर एक धागे के बराबर भी अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Tumne un logon ko bhi dekha jo bahut apni pakeezgi e nafs ka dum bharte (who boast of their righteousness) hain? Halanke pakeezgi to Allah hi jisey chahta hai ata karta hai, aur (unhein jo pakeezgi nahin milti to dar haqeeqat) unpar zarra barabar bhi zulm nahin kiya jata
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney unhen nahi dekha jo apni pakeezgi aur sataeesh khud kertay hain? Bulkay Allah Taalaa jissay chahaye pakeeza kerta hai kissi per aik dhagay kay barabar zulm na kiya jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)तुमने उन लोगों को भी देखा जो बहुत अपनी पाकीज़गी ए नफ़्स का दम भरते (जो अपनी धार्मिकता का घमंड करते हैं) हैं? हलांके पाकीजगी तो अल्लाह ही जिसे चाहता है अता करता है, और (उन्हें जो पाकीजगी नहीं मिलती तो डर हकीकत) उन्पर जरा बराबर भी ज़ुल्म नहीं किया जाता
عَرَبِيانظُر كَيفَ يَفتَرونَ عَلَى اللَّهِ الكَذِبَ ۖ وَكَفىٰ بِهِ إِثمًا مُبينًا
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हिन्दी (Al-Omari)देखो तो सही, वे लोग कैसे अल्लाह पर मिथ्या आरोप लगा रहे हैं! और यह खुला पाप होने के लिए पर्याप्त है।
Roman Urdu (Maududi)Dekho to sahih, yeh Allah par bhi jhoote iftara ghadhne se (forge lies) nahin chukte aur inke sareehan gunaahgaar honay ke liye yahi ek gunaah kafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Dekho yeh log Allah Taalaa per kiss tarah jhoot bandhtay hain aur yeh (harkat) sareeh gunah honey kay liye kafi hai
Devnagri Urdu (Maududi)देखो तो सही, ये अल्लाह पर भी झूठे इफ्तारा गढ़ने से (झूठ गढ़ना) नहीं छोड़ते और इनके सरीहन गुनाहगार होने के लिए यही एक गुनाह काफी है
عَرَبِيأَلَم تَرَ إِلَى الَّذينَ أوتوا نَصيبًا مِنَ الكِتابِ يُؤمِنونَ بِالجِبتِ وَالطّاغوتِ وَيَقولونَ لِلَّذينَ كَفَروا هٰؤُلاءِ أَهدىٰ مِنَ الَّذينَ آمَنوا سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) क्या आपने उन लोगों को नहीं देखा, जिन्हें पुस्तक का कुछ भाग दिया गया? वे मूर्तियों तथा शैतान पर ईमान (विश्वास) रखते हैं और काफ़िरों के बारे में कहते हैं कि ये ईमान वालों से अधिक सीधी डगर पर हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya tumne un logon ko nahin dekha jinhein kitab ke ilm mein se kuch hissa diya gaya hai, aur unka haal yeh hai ke jibth (baseless superstitions) aur taguth ( false dieties) ko maante hain aur kafiron ke mutalliq kehte hain ke iman laney walon se to yahi zyada saheeh raaste par hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney unhen nahi dekha jinhen kitab ka kuch hissa mila hai? Jo butt ka aur baatil mabood ka aetiqaad rakhtay hain aur kafiron kay haq mein kehtay hain kay yeh log eman walon say ziyada raah-e-raast per hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिन्होंने किताब के इल्म में से कुछ हिसा दिया है, और उनका हाल ये है के जिब्थ (निराधार अंधविश्वास) और तागुथ (झूठे आहार) को मानते हैं और काफिरों के मुतल्लिक कहते हैं के ईमान लाने वालों से तो यही ज्यादा सही रास्ते पर हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ لَعَنَهُمُ اللَّهُ ۖ وَمَن يَلعَنِ اللَّهُ فَلَن تَجِدَ لَهُ نَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)यही लोग हैं, जिनपर अल्लाह ने लानत की है और जिसपर अल्लाह लानत कर दे, तो आप उसका कदापि कोई सहायक नहीं पाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aisey bhi log hain jinpar Allah ne laanat ki hai, aur jispar Allah laanat karde phir tum uska koi madadgaar nahin paogey
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi woh log hain jinhen Allah Taalaa ney laanat ki hai aur jissay Allah Taalaa laanat kerdey tu uss ka koi madadgar na paye ga
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसे भी लोग हैं जिनपर अल्लाह ने लानत की है, और जिसपर अल्लाह लानत करदे फिर तुम उसका कोई मददगार नहीं पाओगे
عَرَبِيأَم لَهُم نَصيبٌ مِنَ المُلكِ فَإِذًا لا يُؤتونَ النّاسَ نَقيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उनके पास राज्य का कोई हिस्सा है? यदि ऐसा हो तो वे लोगों को (उसमें से) खजूर की गुठली के ऊपर के गड्ढे के बराबर भी नहीं देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Kya hukumat mein unka koi hissa hai? Agar aisa hota to yeh dusron ko ek phooti kowdi takk na detay
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn ka koi hissa saltanat mein hai? Agar aisa ho to phir yeh kissi ko aik khujoor ki guthli kay shigaaf kay barabar bhi kuch na den gay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हुकूमत में उनका कोई हिसा है? अगर ऐसा होता तो ये दुसरों को एक फूटी कौड़ी तक न दे देते
عَرَبِيأَم يَحسُدونَ النّاسَ عَلىٰ ما آتاهُمُ اللَّهُ مِن فَضلِهِ ۖ فَقَد آتَينا آلَ إِبراهيمَ الكِتابَ وَالحِكمَةَ وَآتَيناهُم مُلكًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि वे लोगों से उस पर ईर्ष्या करते हैं जो अल्लाह ने उन्हें अपने अनुग्रह से प्रदान किया है। तो हमने (पहले भी) इबराहीम के वंशज को पुस्तक तथा ह़िकमत दी है और हमने उन्हें विशाल राज्य प्रदान किया है।
Roman Urdu (Maududi)Phir kya yeh dusron se is liye hasad karte hain ke Allah ne unhein apne fazal se nawaz diya? Agar yeh baat hai to unhein maloom ho ke humne to Ibrahim ki aulad ko kitab aur hikmat ata ki aur mulk e azeem baksh diya
Roman Urdu (Junagarhi)Ya yeh logon say hasad kertay hain iss per jo Allah Taalaa ney apney fazal say unhen diya hai pus hum ney to aal-e-ibrahim ko kitab aur hikmat bhi di hai aur bari saltanat bhi ata farmaee hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्या ये दुसरों से इस लिए हसद करते हैं के अल्लाह ने उन्हें अपने फज़ल से नवाज दिया? अगर ये बात है तो उन्हें मालूम हो के हमने तो इब्राहिम की औलाद को किताब और हिकमत अता की और मुल्क ए अजीम बख्श दिया
عَرَبِيفَمِنهُم مَن آمَنَ بِهِ وَمِنهُم مَن صَدَّ عَنهُ ۚ وَكَفىٰ بِجَهَنَّمَ سَعيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उनमें से कुछ उसपर ईमान लाया और उनमें से कुछ ने उससे मुँह फेर लिया। और (मुँह फेरने वालों के लिए) जहन्नम की दहकती आग काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Magar unmein se koi uspar iman laya aur koi ussey mooh moad gaya, aur mooh moadne walon ke liye to bas jahannum ki bhadakti hui aag hi kafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir inn mein say baaz ney to iss kitab ko maana aur baaz iss say ruk gaye aur jahannum ka jalana kafi hai
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उनमें से कोई उसपर ईमान लाया और कोई उसे मुंह मोड़ गया, और मुंह मोड़ने वालों के लिए तो बस जहन्नुम की भड़कती हुई आग ही काफी है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا بِآياتِنا سَوفَ نُصليهِم نارًا كُلَّما نَضِجَت جُلودُهُم بَدَّلناهُم جُلودًا غَيرَها لِيَذوقُوا العَذابَ ۗ إِنَّ اللَّهَ كانَ عَزيزًا حَكيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)वास्तव में, जिन लोगों ने हमारी आयतों के साथ कुफ़्र किया, हम उन्हें नरक में झोंक देंगे। जब भी उनकी खालें पक जाएँगी (जल चुकी होंगी), हम उनकी खालें बदल देंगे, ताकि वे यातना चखते रहें। निःसंदेह अल्लाह प्रभुत्वशाली, हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne hamari aayat ko maanne se inkar kardiya hai unhein bil-yakeen hum aag mein jhonkenge, aur jab unke badan ki khaal (skin) gal jaye(gets roasted) to uski jagah dusri khaal paida kardenge taa-ke woh khoob azaab ka maza chakkhein. Allah badi qudrat rakhta hai aur apne faislon ko amal mein lanay ki hikmat khoob jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ney humari aayaton say kufur kiya unhen hum yaqeenan aag mein daal den gay jab unn ki khaalen pakk jayen gi to hum inn kay siwa aur khaalen badal den gay takay woh azab chakhtay rahen yaqeenan Allah Taalaa ghalib hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने हमारी आयत को मन्ने से इंकार कर दिया है उन्हें बिल-यकीन हम आग में झोंकेंगे, और जब उनके बदन की खल (त्वचा) गल जाएगी (भुन जाएगी) तो उसकी जगह दूसरी खल पेदा करदेंगे ता-के वो खूब अज़ाब का मजा चखें। अल्लाह बड़ी क़ुदरत रखता है और अपने फ़ैसलों को अमल में लाने की हिकमत ख़ूब जानता है
عَرَبِيوَالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ سَنُدخِلُهُم جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها أَبَدًا ۖ لَهُم فيها أَزواجٌ مُطَهَّرَةٌ ۖ وَنُدخِلُهُم ظِلًّا ظَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जो लोग ईमान लाए तथा अच्छे कर्म किए, हम उन्हें ऐसी जन्नतों (बागों) में दाख़िल करेंगे, जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी, जिनमें वे सदैव रहेंगे। उनके लिए उनमें पवित्र पत्नियाँ होंगी और हम उन्हें घनी छाँव में रखेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jin logon ne hamari aayat ko maan liya aur neik amal kiye unko hum aisey baaghon mein dakhil karenge jinke nichey nehrein behti hongi, jahan woh hamesha hamesha rahenge aur unko pakeeza biwiyan milengi aur unhein hum ghani chaon (shadows) mein rakhenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log eman laye aur shaista aemaal kiye hum un qarib unhen unn jannaton mein ley jayen gay jin kay neechay nehren beh rahi hain jin mein woh hamesha hamesha rahen gay unn kay liye wahan saaf suthri biwiyan hongi aur hum unhen ghani chahaon (aur poori rahat) mein ley jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जिन लोगों ने हमारी आयतों को मान लिया और नेक अमल किये उनको हम ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेंगे जिनका आला नेहरेन बहती होगी, जहां वो हमेशा हमेशा रहेंगे और उनको पाकीजा बिवियां मिलेंगी और उन्हें हम घनी छांव (छाया) में रखेंगे
عَرَبِي۞ إِنَّ اللَّهَ يَأمُرُكُم أَن تُؤَدُّوا الأَماناتِ إِلىٰ أَهلِها وَإِذا حَكَمتُم بَينَ النّاسِ أَن تَحكُموا بِالعَدلِ ۚ إِنَّ اللَّهَ نِعِمّا يَعِظُكُم بِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ كانَ سَميعًا بَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि अमानतों को उनके मालिकों के हवाले कर दो और जब तुम लोगों के बीच फैसला करो, तो न्याय के साथ फैसला करो। निश्चय अल्लाह तुम्हें कितनी अच्छी नसीहत करता है। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ सुनने, सब कुछ देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Musalmaano! Allah tumhein hukum deta hai ke amanatein ehle amaat ke supurd kardo, aur jab logon ke darmiyan faisla karo to adal ke saath karo. Allah tumko nihayat umdah naseehat karta hai aur yaqeenan Allah sab kuch sunta aur dekhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa tumhen takeedi hukum deta hai kay amanat walon ki amanaten unhen phonchao! Aur jab logon ka faisla kero to adal-o-insaf say faisla kero! Yaqeenan woh behtar cheez hai jiss ki naseehat tumhen Allah Taalaa ker raha hai. Be-shak Allah Taalaa sunta hai dekhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)मुसलमानो! अल्लाह तुम्हें हुकुम देता है के अमानतें एहले अमानत के सुपुर्द करदो, और जब लोगों के दरमियान फैसला करो तो अदल के साथ करो। अल्लाह तुमको निहायत उमराह हिदायत करता है और यकीनन अल्लाह सब कुछ सुनता और देखता है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا أَطيعُوا اللَّهَ وَأَطيعُوا الرَّسولَ وَأُولِي الأَمرِ مِنكُم ۖ فَإِن تَنازَعتُم في شَيءٍ فَرُدّوهُ إِلَى اللَّهِ وَالرَّسولِ إِن كُنتُم تُؤمِنونَ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ ۚ ذٰلِكَ خَيرٌ وَأَحسَنُ تَأويلًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो और अपने में से अधिकार वालों (शासकों) का। फिर यदि तुम आपस में किसी चीज़ में मतभेद कर बैठो, तो उसे अल्लाह और रसूल की ओर लौटाओ, यदि तुम अल्लाह तथा अंतिम दिन (परलोक) पर ईमान रखते हो। यह (तुम्हारे लिए) बहुत बेहतर है और परिणाम की दृष्टि से बहुत अच्छा है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, itaat karo Allah ki aur itaat karo Rasool ki aur un logon ki jo tum mein se sahib e amr hon, phir agar tumhare darmiyan kisi maamle mein nizaa (dispute/differ) ho jaye to usey Allah aur Rasool ki taraf pher do agar tum waqayi Allah aur roz e aakhir par iman rakhte ho. Yahi ek saheeh tareeqe kaar hai aur anjaam ke aitbaar se bhi behtar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Farmanbardari kero Allah Taalaa ki aur farmanbardari kero rasool (PBUH) ki aur tum mein say ikhtiyar walon ki. Phir agar kissi cheez mein ikhtilaf kero to ussay lotao Allah Taalaa ki taraf aur rasool ki taraf agar tumhen Allah Taalaa per aur qayamat kay din per eman hai. Yeh boht behtar hai aur ba aetbaar anjam kay boht acha hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, इत्तला करो अल्लाह की और इताअत करो रसूल की और उन लोगों की जो तुम में से साहब ए अम्र हो, फिर अगर तुम्हारे दरमियान किसी मामले में निज़ा (विवाद/मतभेद) हो जाए तो उसे अल्लाह और रसूल की तरफ, फेर दो अगर तुम वक़ाई अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखते हो। यही एक सही तारीख़ है और अंजाम के ऐतबार से भी बेहतर है
عَرَبِيأَلَم تَرَ إِلَى الَّذينَ يَزعُمونَ أَنَّهُم آمَنوا بِما أُنزِلَ إِلَيكَ وَما أُنزِلَ مِن قَبلِكَ يُريدونَ أَن يَتَحاكَموا إِلَى الطّاغوتِ وَقَد أُمِروا أَن يَكفُروا بِهِ وَيُريدُ الشَّيطانُ أَن يُضِلَّهُم ضَلالًا بَعيدًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) क्या आपने उन लोगों को नहीं देखा, जिनका यह दावा है कि जो कुछ आपकी ओर उतारा गया है और जो कुछ आपसे पहले उतारा गया है उसपर वे ईमान रखते हैं, किंतु वे चाहते हैं कि अपने विवाद के निर्णय के लिए ताग़ूत (अल्लाह की शरीयत के अलावा से फैसला करने वाले) के पास जाएँ, जबकि उन्हें उस (ताग़ूत) का इनकार करने का आदेश दिया गया है? और शैतान चाहता है कि उन्हें सच्चे धर्म से बहुत दूर कर दे।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi! Tumne dekha nahin un logon ko jo dawa to karte hain ke hum iman laye hain us kitab par jo tumhari taraf nazil ki gayi hai aur un kitabon par jo tumse pehle nazil ki gayi thi, magar chahte hain ke apne maamalaat ka faisla karane ke liye taghut ki taraf rujoo karein, halanke unhein taghut se kufr karne ka hukum diya gaya tha. Shaytan unhein bhatka kar raah e raast se bahut door le jana chahta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney unhen nahi dekha? Jin ka daawa to yeh hai kay jo kuch aap per aur jo kuch aap say pehlay utara gaya hai uss per unn ka eman hai lekin woh apney faislay ghair ullah ki taraf ley jana chahtay hain halankay unhen hukum diya gaya hai kay shetan ka inkar keren shetan to yeh chahata hai unhen behka ker door daal dey
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी! तुमने देखा नहीं उन लोगों को जो दावा तो करते हैं के हम ईमान लाए हैं उस किताब पर जो तुम्हारी तरफ नाज़िल की गई है और उन किताबों पर जो तुमसे पहले नाज़िल की गई थी, मगर चाहते हैं के अपने मामले का फैसला करने के लिए तघुत की तरफ रूजू करें, हलांके उन्हें टैगहुट से कुफ्र करने का हुकुम दिया गया था। शैतान उन्हें भटका कर राह ए रास्ते से बहुत दूर ले जाना चाहता है
عَرَبِيوَإِذا قيلَ لَهُم تَعالَوا إِلىٰ ما أَنزَلَ اللَّهُ وَإِلَى الرَّسولِ رَأَيتَ المُنافِقينَ يَصُدّونَ عَنكَ صُدودًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब उनसे कहा जाता है कि आओ उसकी ओर जो अल्लाह ने उतारा है और (आओ) रसूल की ओर, तो आप मुनाफ़िक़ों को देखेंगे कि वे आप (के पास आने) से कतराते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab unse kaha jaata hai ke aao us cheez ki taraf jo Allah ne nazil ki hai aur aao Rasool ki taraf to in munafiqon ko tum dekhte ho ke yeh tumhari taraf aane se katrate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say jab kabhi kaha jaye kay Allah Taalaa kay nazil kerda kalaam ki aur rasoll lullah (PBUH) ki taraf aao to aap dekh len gay kay yeh munafiq aap say mun pher kay rukay jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जब उन्हें कहा जाता है कि आओ हमें चीज की तरफ से अल्लाह ने नाज़िल किया है और आओ रसूल की तरफ से मुनाफिकों को तुम देखते हो के ये तुम्हारी तरफ आने से कतराते हैं
عَرَبِيفَكَيفَ إِذا أَصابَتهُم مُصيبَةٌ بِما قَدَّمَت أَيديهِم ثُمَّ جاءوكَ يَحلِفونَ بِاللَّهِ إِن أَرَدنا إِلّا إِحسانًا وَتَوفيقًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उस समय उनका क्या हाल होता है जब उनके करतूतों के कारण उनपर कोई आपदा आ पड़ती है, फिर वे आपके पास आकर अल्लाह की क़समें खाते हैं कि हमारा इरादा तो केवल भलाई तथा (आपस में) मेल कराना था।
Roman Urdu (Maududi)Phir us waqt kya hota hai jab inke apne haathon ki layi hui museebat inpar aa padhti hai? Us waqt yeh tumhare paas kasamein khate huey aate hain aur kehte hain ke khuda ki kasam hum to sirf bhalayi chahte thay aur hamari to niyat yeh thi ke fareeqain (two parties)
Roman Urdu (Junagarhi)Phir kiya baat hai kay jab inn per inn kay kertoot kay baees koi musibat aa parti hai to phir yeh aap kay pass aa ker Allah Taalaa ki qasmen khatay hain kay humara irada to sirf bhalaee aur mail milaap hi ka tha
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमें वक्त क्या होता है जब इनके अपने हाथों की लाई हुई मुसीबत इनपर आ पढ़ती है? हमें वक्त ये तुम्हारे पास कसमें खाते हुए आते हैं और कहते हैं के खुदा की कसम हम तो सिर्फ भलाई चाहते थे और हमारी तो नियत ये थी के फरीक़ैन (दो पक्ष)
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ يَعلَمُ اللَّهُ ما في قُلوبِهِم فَأَعرِض عَنهُم وَعِظهُم وَقُل لَهُم في أَنفُسِهِم قَولًا بَليغًا
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हिन्दी (Al-Omari)ये वो लोग हैं जिनके दिलों की बातें अल्लाह भली-भाँति जानता है। अतः आप उनकी उपेक्षा करें और उन्हें नसीहत करते रहें और उनसे ऐसी प्रभावकारी बात कहें जो उनके दिलों में उतर जाए।
Roman Urdu (Maududi)Allah jaanta hai jo kuch unke dilon mein hai, unse taaruz mat karo (Leave them alone), unhein samjhao aur aisi naseehat karo jo unke dilon mein utar jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh woh log hain kay inn kay dilon ka bhed Allah Taalaa per bakhoobi roshan hai aap inn say chasham poshi kijiye enehn naseehat kertay rahiye aur enhen woh baat kahiye! Jo inn kay dilon mein ghar kerney wali ho
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह जानता है जो कुछ उनके दिलों में है, उन्हें तारुज़ मत करो (उन्हें अकेला छोड़ दो), उन्हें समझाओ और ऐसी हिदायत करो जो उनके दिलों में उतर जाए
عَرَبِيوَما أَرسَلنا مِن رَسولٍ إِلّا لِيُطاعَ بِإِذنِ اللَّهِ ۚ وَلَو أَنَّهُم إِذ ظَلَموا أَنفُسَهُم جاءوكَ فَاستَغفَرُوا اللَّهَ وَاستَغفَرَ لَهُمُ الرَّسولُ لَوَجَدُوا اللَّهَ تَوّابًا رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने जो भी रसूल भेजा, वह इसलिए (भेजा) कि अल्लाह की अनुमति से उसका आज्ञापालन किया जाए। और यदि वे लोग, जब उन्हों ने अपनी जानों पर अत्याचार किया था, आपके पास आते, फिर अल्लाह से क्षमा याचना करते और रसूल भी उनके लिए क्षमा याचना करते, तो वे अवश्य अल्लाह को बहुत तौबा क़बूल करने वाला, अत्यन्त दयावान पाते।
Roman Urdu (Maududi)(Unhein batao ke) humne jo Rasool bhi bheja hai isi liye bheja hai ke izn e khudawandi (by the leave of Allah) ki bina par uski itaat ki jaye, agar unhone yeh tareeqa ikhtiyar kiya hota ke jab yeh apne nafs par zulm kar baithey thay to tumhare paas aa jatey aur Allah se maafi maangte, aur Rasool bhi unke liye maafi ki darkhwast karta, to yaqeenan Allah ko bakshne wala aur reham karne wala paatey
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney her her rasool ko sirf iss liye bheja kay Allah Taalaa kay hukum say uss ki farmanbardari ki jaye aur agar yeh log jab enhon ney apni janon per zulm kiya tha teray pass aajatay aur Allah Taalaa say istaghfaar kertay aur rasool bhi inn kay liye istaghfaar kertay to yaqeenan yeh log Allah Taalaa ko moaf kerney wala meharban patay
Devnagri Urdu (Maududi)(उन्हें बताओ के) हमने जो रसूल भी भेजा है इसी के लिए भेजा है के इज़्न ए खुदावंदी (अल्लाह की इजाजत से) कि बिना पर उसकी इताअत की जाए, अगर उन्हें ये तारीख इख्तियार किया होता के जब ये अपने नफ़्स पर ज़ुल्म कर बैठे थे तो तुम्हारे पास आ जाते थे और अल्लाह से माफ़ी मांगते थे, और रसूल भी उनके लिए माफ़ी की अंधेरगर्दी करता था, तो यकीनन अल्लाह को बख्शने वाला और रहम करने वाला पाते
عَرَبِيفَلا وَرَبِّكَ لا يُؤمِنونَ حَتّىٰ يُحَكِّموكَ فيما شَجَرَ بَينَهُم ثُمَّ لا يَجِدوا في أَنفُسِهِم حَرَجًا مِمّا قَضَيتَ وَيُسَلِّموا تَسليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तो (ऐ नबी!) आपके पालनहार की क़सम! वे कभी ईमान वाले नहीं हो सकते, जब तक अपने आपस के विवाद में आपको निर्णायक न बनाएँ, फिर आप जो निर्णय कर दें, उससे अपने दिलों में तनिक भी तंगी महसूस न करें और उसे पूरी तरह से स्वीकार कर लें।
Roman Urdu (Maududi)Nahin, (aey Muhammad) tumhare Rubb ki kasam yeh kabhi momin nahin ho sakte jab tak ke apne bahami ikhtilafaat mein yeh tumko faisla karne wala na maan lein, phir jo kuch tum faisla karo uspar apne dilon mein bhi koi tanggi na mehsoos karein, balke sar ba sar tasleem karlein
Roman Urdu (Junagarhi)So qasam hai teray perwerdigar ki! Yeh momin nahi ho saktay jab tak kay tamam aapas kay ikhtilaf mein aap ko haakim na maan len phir jo faisla aap inn mein ker den inn say apney dil mein kissi tarah ki tangi aur na khushi na payen aur farmanbardari kay sath qabool kerlen
Devnagri Urdu (Maududi)नहीं, (ऐ मुहम्मद) तुम्हारे रब की कसम ये कभी मोमिन नहीं हो सकता जब तक के अपनी बहामी इख्तिलाफात में ये तुमको फैसला करने वाला ना मान लें, फिर जो कुछ तुम फैसला करो उसपर अपने दिलों में भी कोई तंगी ना महसूस करें, बलके सर बा सर तसलीम कार्लें
عَرَبِيوَلَو أَنّا كَتَبنا عَلَيهِم أَنِ اقتُلوا أَنفُسَكُم أَوِ اخرُجوا مِن دِيارِكُم ما فَعَلوهُ إِلّا قَليلٌ مِنهُم ۖ وَلَو أَنَّهُم فَعَلوا ما يوعَظونَ بِهِ لَكانَ خَيرًا لَهُم وَأَشَدَّ تَثبيتًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम उनपर अनिवार्य कर देते कि अपने आपको को क़त्ल करो या अपने घरों से निकल जाओ, तो उनमें से कुछ लोगों के सिवा कोई भी ऐसा नहीं करता। और यदि वे लोग उसका पालन करते जिसकी उन्हें नसीहत की जाती है, तो यह उनके लिए बेहतर और (सच्चे रास्ते पर) अधिक दृढ़ता का कारण होता।
Roman Urdu (Maududi)Agar humne inhein hukum diya hota ke apne aap ko halaak kardo ya apne gharon se nikal jao to inmein se kam hi aadmi ispar amal karte, halaanke jo naseehat inhein ki jaati hai, agar yeh ispar amal karte to yeh inke liye zyada behtari aur zyada sabit qadami ka maujeb hota
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum inn per yeh farz ker detay kay apni janon ko qatal ker daalo! Ya apney gharon say nikal jao! To issay inn mein say boht hi kum log baja latay aur agar yeh wohi kerne jiss ki enhen naseehat ki jati hai to yaqeenan yehi inn kay liye behtar aur boht ziyada mazbooti wala ho
Devnagri Urdu (Maududi)अगर हमने इन्हें हुकुम दिया होता है के अपने आप को हलाक करदो या अपने घर से निकल जाओ तो इनमें से कम ही आदमी इसपर अमल करते हैं, हलांके जो हिदायत इन्हें की जाती है, अगर ये इसपर अमल करते तो ये इनके लिए ज्यादा बेहतरी और ज्यादा साबित कादमी का मौजब होता
عَرَبِيوَإِذًا لَآتَيناهُم مِن لَدُنّا أَجرًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और तब तो हम अवश्य उन्हें अपने पास से बहुत बड़ा बदला देते।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab yeh aisa karte to hum inhein apni taraf se bahut bada ajar dete
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tab to enhen hum apney pass say bara sawab den
Devnagri Urdu (Maududi)और जब ये ऐसा करते हैं तो हम इनमें अपनी तरफ से बहुत बड़ा अजर देते हैं
عَرَبِيوَلَهَدَيناهُم صِراطًا مُستَقيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हम अवश्य उन्हें सीधा रास्ता दिखाते।
Roman Urdu (Maududi)Aur inhein seedha raasta dikha dete
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqeenan enhen raah-e-raast dikha den
Devnagri Urdu (Maududi)और इन्हें सीधा रास्ता दिखाते हैं
عَرَبِيوَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَالرَّسولَ فَأُولٰئِكَ مَعَ الَّذينَ أَنعَمَ اللَّهُ عَلَيهِم مِنَ النَّبِيّينَ وَالصِّدّيقينَ وَالشُّهَداءِ وَالصّالِحينَ ۚ وَحَسُنَ أُولٰئِكَ رَفيقًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो भी अल्लाह और रसूल का आज्ञापालन करेगा, वह उन लोगों के साथ होगा, जिन्हें अल्लाह ने पुरस्कृत किया है, अर्थात नबियों, सिद्दीक़ों (सत्यवादियों), शहीदों और सदाचारियों के साथ। और ये लोग सबसे अच्छे साथी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo Allah aur Rasool ki itaat karega woh un logon ke saath hoga jinpar Allah ne inam farmaya hai, yani ambiya, aur siddiqeen aur shuhada aur saliheen, kaise acchey hain yeh rafeeq jo kisi ko muyassar aayein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo bhi Allah Taalaa ki aur rasool (PBUH) ki farmanbardari keray woh unn logon kay sath hoga jin per Allah Taalaa ney inam kiya hai jaisay nabi aur siddique aur shaheed aur nek log yeh behtareen rafiq hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो अल्लाह और रसूल की इबादत करेगा वो उन लोगों के साथ होगा जिनपर अल्लाह ने इनाम फरमाया है, यानी अंबिया, और सिद्दीकीन और शुहदा और सालिहें, कैसे अच्छे हैं ये रफीक जो किसी को मुयस्सर आए
عَرَبِيذٰلِكَ الفَضلُ مِنَ اللَّهِ ۚ وَكَفىٰ بِاللَّهِ عَليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)यह अनुग्रह एवं कृपा अल्लाह की ओर से है और अल्लाह काफी है जानने वाला।
Roman Urdu (Maududi)Yeh haqeeqi fazal hai jo Allah ki taraf se milta hai aur haqeeqat jaanne ke liye bas Allah hi ka ilm kafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh fazal Allah Taalaa ki taraf say hai aur kafi hai Allah Taalaa janney wala
Devnagri Urdu (Maududi)ये हकीकत फजल है जो अल्लाह की तरफ से मिलता है और हकीकत जाने के लिए बस अल्लाह ही का इल्म काफी है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا خُذوا حِذرَكُم فَانفِروا ثُباتٍ أَوِ انفِروا جَميعًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अपने (शत्रुओं से) बचाव का सामान ले लो, फिर अलग-अलग समूहों में अथवा सब के सब इकट्ठे होकर निकल पड़ो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, muqable ke liye har waqt tayyar raho, phir jaisa mauqa ho alag alag daston (groups) ki shakal mein niklo ya ikatthey hokar
Roman Urdu (Junagarhi)Aey musalmano! Apney bachao ka saman ley lo phir giroh giroh bann ker kooch kero ya sab kay sab ikhttay ho ker nikal kharay ho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, मुकाबला के लिए हर वक़्त तय्यार रहो, फिर जैसा मौका हो अलग अलग दास्तान (समूहों) की शक्ल में निकलो या इकत्थे होकर
عَرَبِيوَإِنَّ مِنكُم لَمَن لَيُبَطِّئَنَّ فَإِن أَصابَتكُم مُصيبَةٌ قالَ قَد أَنعَمَ اللَّهُ عَلَيَّ إِذ لَم أَكُن مَعَهُم شَهيدًا
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह तुममें कोई ऐसा भी है, जो (दुश्मन से लड़ाई के लिए निकलने में) निश्चय देर लगाएगा। फिर यदि (युद्ध के दौरान) तुमपर कोई आपदा आ पड़े, तो कहेगा : अल्लाह ने मुझपर बड़ा उपकार किया कि मैं उनके साथ उपस्थित नहीं था।
Roman Urdu (Maududi)Haan, tum mein koi aadmi aisa bhi hai jo ladayi se jee churata hai, agar tumpar koi museebat aaye to kehta hai ke Allah ne mujhpar bada fazal kiya ke main in logon ke saath na gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqeenan tum mein baaz woh bhi hain jo pus-o-paish kertay hain phir agar tumhen koi nuksan hota hai wo woh kehtay hain kay Allah Taalaa ney mujh per bara fazal kiya kay mein inn kay sath mojood na tha
Devnagri Urdu (Maududi)हां, तुम में कोई आदमी ऐसा भी है जो लड़ाई से जीता है, अगर तुमपर कोई मुसीबत आए तो कहता है कि अल्लाह ने मुझपर बड़ा फ़ज़ल किया के मुख्य इन लोगों के साथ ना गया
عَرَبِيوَلَئِن أَصابَكُم فَضلٌ مِنَ اللَّهِ لَيَقولَنَّ كَأَن لَم تَكُن بَينَكُم وَبَينَهُ مَوَدَّةٌ يا لَيتَني كُنتُ مَعَهُم فَأَفوزَ فَوزًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम्हें अल्लाह का अनुग्रह प्राप्त हो जाए, तो वह अवश्य इस तरह कहेगा मानो तुम्हारे और उसके बीच कोई मित्रता ही नहीं थी कि ऐ काश! मैं भी उनके साथ होता, तो बड़ी सफलता प्राप्त कर लेता!
Roman Urdu (Maududi)Aur agar Allah ki taraf se tumpar fazal ho to kehta hai aur is tarah kehta hai ke goya tumhare aur uske darmiyaan muhabbat ka to koi taaluq tha hi nahin ke kaash main bhi inke saath hota to bada kaam ban jata
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tumhen Allah Taalaa ka koi fazal mill jaye to iss tarah kay goya tum mein inn mein dost thi hi nahi kehtay hain kaash! Mein bhi inn kay humrah hota to bari kaamyaabi ko phonchta
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर अल्लाह की तरफ से तुम्पर फ़ज़ल हो तो कहता है और इस तरह कहता है कि गोया तुम्हारे और उसके दरमियान मुहब्बत का तो कोई तालुक़ था ही नहीं के काश मैं भी इनके साथ होता तो बड़ा काम बन जाता
عَرَبِي۞ فَليُقاتِل في سَبيلِ اللَّهِ الَّذينَ يَشرونَ الحَياةَ الدُّنيا بِالآخِرَةِ ۚ وَمَن يُقاتِل في سَبيلِ اللَّهِ فَيُقتَل أَو يَغلِب فَسَوفَ نُؤتيهِ أَجرًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तो जो लोग आख़िरत के बदले सांसारिक जीवन को बेच चुके हैं, उन्हें अल्लाह के मार्ग में लड़ना चाहिए। और जो अल्लाह के मार्ग में युद्ध करेगा, चाहे वह मारा जाए अथवा विजयी हो जाए, तो हम उसे बड़ा बदला प्रदान करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)(Aisey logon ko maloom ho ke ) Allah ki raah mein ladna chahiye un logon ko jo aakhirat ke badle duniya ki zindagi ko farokth kardein, phir jo Allah ki raah mein ladega aur mara jayega ya gaalib rahega usey zaror hum ajar e azeem ata karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jo log duniya ki zindagi ko aakhirat kay badlay baich chukay hain unhen Allah Taalaa ki raah mein jihad kerna chahaiye aur jo shaks Allah Taalaa ki raah mein jihad kertay huye shahdat paa ley ya ghalib aajaye yaqeenan hum ussay bara sawab inayat farmayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐसे लोगों को मालूम हो के) अल्लाह कि राह में लड़ना चाहिए उन लोगों को जो आख़िरत के बदले दुनिया की ज़िंदगी से फ़र्क दिलाएं, फिर जो अल्लाह की राह में लड़ेगा और मारा जाएगा या ग़ालिब रहेगा उसे ज़रूर हम अजर ए अज़ीम अता करेंगे
عَرَبِيوَما لَكُم لا تُقاتِلونَ في سَبيلِ اللَّهِ وَالمُستَضعَفينَ مِنَ الرِّجالِ وَالنِّساءِ وَالوِلدانِ الَّذينَ يَقولونَ رَبَّنا أَخرِجنا مِن هٰذِهِ القَريَةِ الظّالِمِ أَهلُها وَاجعَل لَنا مِن لَدُنكَ وَلِيًّا وَاجعَل لَنا مِن لَدُنكَ نَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम्हें क्या हो गया है कि अल्लाह के मार्ग में तथा उन कमज़ोर पुरुषों, स्त्रियों और बच्चों को छुटकारा दिलाने के लिए युद्ध नहीं करते, जो पुकार रहे हैं कि ऐ हमारे पालनहार! हमें इस नगर से निकाल दे, जिसके वासी अत्याचारी हैं और हमारे लिए अपनी ओर से कोई रक्षक बना दे और हमारे लिए अपनी ओर से कोई सहायक बना दे?!
Roman Urdu (Maududi)Aakhir kya wajah hai ke tum Allah ki raah mein un be-bas mardon, auraton aur bacchon ki khatir na lado jo kamzoar paakar daba liye gaye hain aur fariyaad kar rahey hain ke khudaya humko is basti se nikal jiske bashinday zalim hain aur apni taraf se hamara koi haami o madadgaar paida karde
Roman Urdu (Junagarhi)Bhala kiya waja hai kay tum Allah ki raah mein aur inn na tawan mardon aurton aur nannhay nannhay bachon kay chutkaray kay liye jihad na kero? Jo yun duayen maang rahey hain kay aey humaray perwerdigar! Inn zalimon ki basti say humen nijat dey aur humaray pass khud apney pass say himayati muqarrar ker dey aur humaray liye khaas apney pass say madadgar bana
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर क्या वजह है कि तुम अल्लाह की राह में उन बे-बस मर्दों, औरतों और बच्चों की खातिर ना लड़ो जो कमज़ार पाकर दबा लिए गए हैं और फरियाद कर रहे हैं के खुदाया हमको इस बस्ती से निकल जिसका बाशिंदा जालिम हैं और अपनी तरफ से हमारा कोई हमी ओ मददगार पैदा करदे
عَرَبِيالَّذينَ آمَنوا يُقاتِلونَ في سَبيلِ اللَّهِ ۖ وَالَّذينَ كَفَروا يُقاتِلونَ في سَبيلِ الطّاغوتِ فَقاتِلوا أَولِياءَ الشَّيطانِ ۖ إِنَّ كَيدَ الشَّيطانِ كانَ ضَعيفًا
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग ईमान लाए, वे अल्लाह के मार्ग में युद्ध करते हैं और जो काफ़िर हैं, वे ताग़ूत (शैतान) के मार्ग में युद्ध करते हैं। अतः तुम शैतान के मित्रों से युद्ध करो। निःसंदेह शैतान की चाल कमज़ोर होती है।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne iman ka raasta ikhtiyar kiya hai, woh Allah ki raah mein ladte hain aur jinhon ne kufr ka raasta ikhtiyar kiya hai, woh taagut ki raah mein ladte hain, pas shaytan ke saathiyon se lado aur yaqeen jaano ke shaytaan ki chaalein haqeeqat mein nihayat kamzoar hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log eman laye hain woh to Allah Taalaa ki raah mein jihad kertay hain aur jin logon ney kufur kiya hai woh Allah Taalaa kay siwa auron ki raah mein lartay hain. Pus tum shetan kay doston say jang kero! Yaqeen maano kay shetani heela (bilkul boda aur) sakht kamzor hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने ईमान का रास्ता इख्तियार किया है, वो अल्लाह की राह में लड़ते हैं और जिन्होन ने कुफ्र का रास्ता इख्तियार किया है, वो तागुत की राह में लड़ते हैं, पास शैतान के साथियों से लड़ो और यकीन जानो के शैतान की चालें हकीकत में निहायत कमज़ार हैं
عَرَبِيأَلَم تَرَ إِلَى الَّذينَ قيلَ لَهُم كُفّوا أَيدِيَكُم وَأَقيمُوا الصَّلاةَ وَآتُوا الزَّكاةَ فَلَمّا كُتِبَ عَلَيهِمُ القِتالُ إِذا فَريقٌ مِنهُم يَخشَونَ النّاسَ كَخَشيَةِ اللَّهِ أَو أَشَدَّ خَشيَةً ۚ وَقالوا رَبَّنا لِمَ كَتَبتَ عَلَينَا القِتالَ لَولا أَخَّرتَنا إِلىٰ أَجَلٍ قَريبٍ ۗ قُل مَتاعُ الدُّنيا قَليلٌ وَالآخِرَةُ خَيرٌ لِمَنِ اتَّقىٰ وَلا تُظلَمونَ فَتيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) क्या आपने उनका हाल नहीं देखा, जिनसे कहा गया था कि अपने हाथों को (युद्ध से) रोके रखो, नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो? परंतु जब उनके ऊपर युद्ध को अनिवार्य कर दिया गया, तो देखा गया कि उनमें से एक समूह लोगों से ऐसे डर रहा है, जैसे अल्लाह से डरता है या उससे भी अधिक। तथा वे कहने लगे कि ऐ हमारे पालनहार! तूने हमारे ऊपर युद्ध को क्यों अनिवार्य कर दिया? क्यों न हमें थोड़े दिनों का और अवसर दिया? कह दें कि सांसारिक सुख बहुत थोड़ा है और परलोक उसके लिए अधिक अच्छा है, जो अल्लाह से डरे। और तुमपर खजूर की गुठली के धागे के बराबर भी अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Tumne un logon ko bhi dekha jinse kaha gaya tha ke apne haath rokey rakkho aur namaz qayam karo aur zakat do? Ab jo unhein ladayi ka hukum diya gaya to unmein se ek fareeq ka haal yeh hai ke logon se aisa darr rahey hain jaisa khuda se darna chahiye ya kuch issey bhi badhkar. Kehte hain khudaya! Yeh humpar ladayi ka hukum kyun likh diya? Kyun na humein abhi kuch aur mohlat di? Unse kaho, duniya ka sarmaya e zindagi thoda hai, aur aakhirat ek khuda-tars Insan ke liye zyada behtar hai, aur tumpar zulm ek shamma (husk of a date-stone) barabar bhi ba kiya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum ney unhen nahi dekha jinhen hukum kiya gaya tha kay apney haathon ko rokay rakho aur namazen parhtay raho aur zakat ada kertay raho. Phir jab unhen jihad ka hukum diya gaya to ussi waqt unn ki aik jamat logon say iss qadar darney lagi jaisay Allah Taalaa ka darr ho bulkay iss say bhi ziyada aur kehney lagay aey humaray rab! Tu ney hum per jihad kiyon farz ker diya? Kiyon humen thori si zindagi aur na jeenay di? Aap keh dijiye kay duniya ki sood mandi to boht hi kum hai aur perhezgaron kay liye aakhirat hi behtar hai aur tum per aik dhagay kay barabar bhi sitam rawa na rakha jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)तुमने उन लोगों को भी देखा जिनसे कहा गया था कि अपने हाथ रोके रखो और नमाज़ क़याम करो और ज़कात दो? अब जो उन्होंने लड़ाई का हुकुम दिया है तो उनमें से एक फरीक का हाल ये है के लोगों से ऐसा डर रहे हैं जैसा खुदा से डरना चाहिए या कुछ इस तरह भी बढ़कर। कहते हैं खुदाया! ये हमपर लड़ै का हुकुम क्यों लिख दिया? क्यों ना हमें अभी कुछ और मोहलत दी? उनसे कहो, दुनिया का सरमाया ए जिंदगी थोड़ी है, और आखिरी एक खुदा-तर्स इंसान के लिए ज्यादा बेहतर है, और तुमपर जुल्म एक शम्मा (खजूर की भूसी) बराबर भी बा किया जाएगा
عَرَبِيأَينَما تَكونوا يُدرِككُمُ المَوتُ وَلَو كُنتُم في بُروجٍ مُشَيَّدَةٍ ۗ وَإِن تُصِبهُم حَسَنَةٌ يَقولوا هٰذِهِ مِن عِندِ اللَّهِ ۖ وَإِن تُصِبهُم سَيِّئَةٌ يَقولوا هٰذِهِ مِن عِندِكَ ۚ قُل كُلٌّ مِن عِندِ اللَّهِ ۖ فَمالِ هٰؤُلاءِ القَومِ لا يَكادونَ يَفقَهونَ حَديثًا
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हिन्दी (Al-Omari)तुम जहाँ भी रहो, तुम्हें मौत आ पकड़ेगी, यद्यपि मज़बूत दुर्गों में क्यों न रहो। तथा उन्हें यदि कोई भलाई पहुँचती है, तो कहते हैं कि यह अल्लाह की ओर से है और यदि कोई बुराई पहुँचती है, तो कहते हैं कि यह आपके कारण है। (ऐ नबी!) उनसे कह दें कि सब अल्लाह की ओर से है। इन लोगों को क्या हो गया है कि कोई बात समझने के क़रीब ही नहीं आते?!
Roman Urdu (Maududi)Rahi maut, to jahan bhi tum ho woh bahar haal tumhein aakar rahegi khwa tum kaisi hi mazboot imaraton mein ho, agar unhein koi faiyda pahunchta hai to kehte hain yeh Allah ki taraf se hai, aur agar koi nuksaan pahunchta hai to kehte hain yeh tumhari badaulat hai. Kaho, sabkuch Allah hi ki taraf se hai, aakhir in logon ko kya ho gaya hai ke koi baat inki samajhe mein nahin aati
Roman Urdu (Junagarhi)Tum jahan kahin bhi ho maut tumhen aa pakray gi go tum mazboor qilon mein ho aur gar enhen koi bhalaee milti hai to kehtay hain kay yeh Allah Taalaa ki taraf say hai aur agar koi buraee phonchti hai to to keh uthtay hain kay yeh teri taraf say hai. Enhen keh do kay yeh kuch Allah Taalaa ki taraf say hai. Enhen kiya hogaya hai kay koi baat samajhney kay bhi qarib nahi
Devnagri Urdu (Maududi)राही मौत, तो जहां भी तुम हो वो बाहर हाल तुम्हें आकार रहेगी ख्वा तुम कैसी ही मजबूत इमारत में हो, अगर उन्हें कोई फ़ायदा मिलता है तो कहते हैं ये अल्लाह की तरफ से है, और अगर कोई नुक्सान पहनता है तो कहते हैं ये तुम्हारी बदौलत है। कहो, सब कुछ अल्लाह ही की तरफ से है, आख़िर लोगों को क्या हो गया है कि कोई बात इनकी समझ में नहीं आती
عَرَبِيما أَصابَكَ مِن حَسَنَةٍ فَمِنَ اللَّهِ ۖ وَما أَصابَكَ مِن سَيِّئَةٍ فَمِن نَفسِكَ ۚ وَأَرسَلناكَ لِلنّاسِ رَسولًا ۚ وَكَفىٰ بِاللَّهِ شَهيدًا
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हिन्दी (Al-Omari)तुझे जो भलाई पहुँचती है, वह अल्लाह की ओर से है तथा जो बुराई पहुँचती है, वह ख़ुद तुम्हारे (बुरे कर्मों के) कारण है और हमने आप को सभी लोगों के लिए रसूल (संदेष्टा) बनाकर भेजा है और (इस बात के लिए) अल्लाह की गवाही काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Insaan! Tujhey jo bhalayi bhi haasil hoti hai Allah ki inayat se hoti hai, aur jo museebat tujhpar aati hai woh tere apne kasb o amal (your own action) ki badaulat hai. (Aey Muhammad) humne tumko logon ke liye Rasool bana kar bheja hai aur ispar khuda ki gawahi kafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tujhay jo bhalaee milti hai Allah Taalaa ki taraf say hai aur jo buraee phonchti hai woh teray apney nafss ki taraf say hai hum ney tujhay tamam logon ko payghaam phonchaney wala bana ker bheja hai aur Allah Taalaa gawah kafi hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ इंसान! तुझे जो भलाई भी हासिल होती है अल्लाह की इनायत से होती है, और जो मुसीबत तुझपर आती है वो तेरे अपने क़स्ब ओ अमल की बदौलत है। (ऐ मुहम्मद) हमने तुमको लोगों के लिए रसूल बना कर भेजा है और इसपर खुदा की गवाही काफी है
عَرَبِيمَن يُطِعِ الرَّسولَ فَقَد أَطاعَ اللَّهَ ۖ وَمَن تَوَلّىٰ فَما أَرسَلناكَ عَلَيهِم حَفيظًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिसने रसूल की आज्ञा का पालन किया, (वास्तव में) उसने अल्लाह की आज्ञा का पालन किया तथा जिसने मुँह फेर लिया, तो (ऐ नबी!) हमने आपको उनपर संरक्षक बनाकर नहीं भेजा है।
Roman Urdu (Maududi)Jisne Rasool ki itaat ki usne dar-asal khuda ki itaat ki aur jo mooh moad gaya, to bahar haal humne tumhein in logon par pasbaan (keeper/guardian) bana kar to nahin bheja hai
Roman Urdu (Junagarhi)Iss rasool (PBUH) ko jo ita’at keray ussi ney Allah Taalaa ki farmanbardari ki aur jo mun pher ley to hum ney aap ko kuch inn per nigehbaan bana ker nahi bheja
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने रसूल की इत्ता की हमें दर-असल खुदा की इताअत की और जो मुंह मोड़ गया, तो बहार हाल हमने तुम्हें इन लोगों पर पासबान (रक्षक/अभिभावक) बना कर तो नहीं भेजा है
عَرَبِيوَيَقولونَ طاعَةٌ فَإِذا بَرَزوا مِن عِندِكَ بَيَّتَ طائِفَةٌ مِنهُم غَيرَ الَّذي تَقولُ ۖ وَاللَّهُ يَكتُبُ ما يُبَيِّتونَ ۖ فَأَعرِض عَنهُم وَتَوَكَّل عَلَى اللَّهِ ۚ وَكَفىٰ بِاللَّهِ وَكيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे (आपके सामने) कहते हैं कि हम आज्ञाकारी हैं। परन्तु, जब वे आपके पास से चले जाते हैं, तो उनमें से एक गिरोह, आपकी बात के विरुद्ध रात में षड्यंत्र करता है। जो कुछ वे षड्यंत्र करते है, अल्लाह उसे लिख रहा है। अतः आप उनसे मुँह फेर लें और अल्लाह पर भरोसा रखें, तथा अल्लाह का कार्यसाधक होना काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Woh mooh par kehte hain ke hum mutii e farmaan hain magar jab tumhare paas se nikalte hain to inmein se ek giroh raaton ko jamaa hokar tumhari baaton ke khilaf mashware karta hai. Allah unki yeh saari sarkashiyan likh raha hai, tum unki parwaah na karo aur Allah par bharosa rakkho, wahi bharose ke liye kafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kehtay to hain kay ita’at hai phir jab aap kay pass say uth ker bahir nikaltay hain to inn mein ki aik jamat jo baat aap ney ya uss ney kahi hai uss kay khilaf raaton ko mashwaray kerti hai inn ki raaton ki baat cheet Allah Taalaa likh raha hai to aap inn say mun pher len aur Allah per bharosa rakhen Allah Taalaa kafi kaar saaz hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो मुहं पर कहते हैं के हम मुती ए फरमान हैं मगर जब तुम्हारे पास से निकलते हैं तो उनमें से एक गिरह रातों को जमा होकर तुम्हारी बातों के खिलाफ मशवरे करता है। अल्लाह उनकी ये सारी सरकशियां लिख रहा है, तुम उनकी परवा न करो और अल्लाह पर भरोसा रखो, वही भरोसे के लिए काफी है
عَرَبِيأَفَلا يَتَدَبَّرونَ القُرآنَ ۚ وَلَو كانَ مِن عِندِ غَيرِ اللَّهِ لَوَجَدوا فيهِ اختِلافًا كَثيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वे क़ुरआन पर चिंतन मनन नहीं करते? यदि वह अल्लाह के सिवा किसी और की ओर से होता, तो वे उसमें बहुत-सा अंतर्विरोध (असंगति) पाते।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log Quran par gaur nahin karte? Agar yeh Allah ke siwa kisi aur ki taraf se hota to ismein bahut kuch ikhtilaf bayani payi jaati
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh log quran mein ghor nahi kertay? Agar yeh Allah Taalaa kay siwa kissi aur ki taraf say hota to yaqeenan iss mein boht kuch ikhtilaf patay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग कुरान पर गौर नहीं करते? अगर ये अल्लाह के सिवा किसी और की तरफ से होता तो इसमे बहुत कुछ इख्तिलाफ बयानी पाई जाती
عَرَبِيوَإِذا جاءَهُم أَمرٌ مِنَ الأَمنِ أَوِ الخَوفِ أَذاعوا بِهِ ۖ وَلَو رَدّوهُ إِلَى الرَّسولِ وَإِلىٰ أُولِي الأَمرِ مِنهُم لَعَلِمَهُ الَّذينَ يَستَنبِطونَهُ مِنهُم ۗ وَلَولا فَضلُ اللَّهِ عَلَيكُم وَرَحمَتُهُ لَاتَّبَعتُمُ الشَّيطانَ إِلّا قَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनके पास सुरक्षा या भय की कोई सूचना आती है, तो उसे चारों ओर फैला देते हैं। हालाँकि, यदि वे उसे अल्लाह के रसूल तथा अपने में से प्राधिकारियों की ओर लौटा देते, तो उनमें से जो लोग उसका सही निष्कर्ष निकाल सकते हैं, उसकी वास्तविकता को अवश्य जान लेते। और यदि तुमपर अल्लाह की अनुकंपा तथा दया न होती, तो तुममें से कुछ को छोड़कर, सब शैतान का अनुसरण करने लगते।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log jahan koi itminaan baksh ya khaufnaak khabar sun patey hain usey lekar phayla dete hain, halaanke agar yeh usey Rasool aur apni jamaat ke zimmedaar ashaab tak pahunchayein to woh aise logon ke ilm mein aa jaye jo inke darmiyan is baat ki salahiyat rakhte hain ke issey saheeh nateeja akhaz kar sakein. Tum logon par Allah ki meharbaani aur rehmat na hoti to (tumhari kamzoriyan aisi thi ke) madood e chandh(few of you) ke siwa tum sab Shaytaan ke pichey lag gaye hotey
Roman Urdu (Junagarhi)Jahan enhen koi khabar aman ya khof ki mili enhon ney ussay mashoor kerna shuroo ker diya halankay agar yeh log issay rasool (PBUH) kay aur apney mein say aisi baaton ki teh tak phonchney walon kay hawalay ker detay to iss ki haqeeqat woh log maloom ker letay jo nateeja akhaz kertay hain aur agar Allah Taalaa ka fazal aur uss ki rehmat tum per na hoti to maddoday chand kay ilawa tum sab shetan kay pairo kaar bann jatay
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग जहां कोई इत्मिनान बख्श या खौफनाक खबर सुन पाते हैं उसे लेकर फैला देते हैं, हलांके अगर ये उसे रसूल और अपनी जमात के जिम्मेदार असहाब तक पहुंचाएं तो वो ऐसे लोगों के इल्म में आ जाए जो इनके दरमियान इस बात की सलाह है रखते हैं के इसे सही नतीजा आख़ज़ कर सकें। तुम लोगों पर अल्लाह की मेहरबानी और रहमत न होती तो (तुम्हारी कमजोरियां ऐसी थी के) मदूद ए चांद (आप में से कुछ) के सिवा तुम सब शैतान के पीछे लग गए होते
عَرَبِيفَقاتِل في سَبيلِ اللَّهِ لا تُكَلَّفُ إِلّا نَفسَكَ ۚ وَحَرِّضِ المُؤمِنينَ ۖ عَسَى اللَّهُ أَن يَكُفَّ بَأسَ الَّذينَ كَفَروا ۚ وَاللَّهُ أَشَدُّ بَأسًا وَأَشَدُّ تَنكيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)अतः (ऐ नबी!) आप अल्लाह के मार्ग में युद्ध करें। आपपर अपने सिवा किसी और की ज़िम्मेदारी नहीं है। तथा ईमान वालों को (युद्ध के लिए) उभारें। संभव है कि अल्लाह काफ़िरों का बल तोड़ दे। अल्लाह बड़ा शक्तिशाली और बहुत कठोर दंड देने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Pas aey Nabi) tum Allah ki raah mein ladoo (fight), tum apni zaat ke siwa kisi aur ke liye zimmedaar nahin ho, albatta ehle iman ko ladne ke liye uksaoo, baeed nahin ke Allah kafiron ka zoar toad de. Allah ka zoar sabse zyada zabardast aur uski saza sabse zyada sakht hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tu Allah Taalaa ki raah mein jihad kerta reh tujhay sirf teri zaat ki nisbat hukum diya jata hai haan eman walon ko raghbat dilata reh boht mumkin hai kay Allah Taalaa kafiron ki jang ko rok dey aur Allah Taalaa sakht qooat wala hai aur saza denay mein bhi sakht hai
Devnagri Urdu (Maududi)(पस ऐ नबी) तुम अल्लाह की राह में लड्डू (लड़ाई), तुम अपनी जात के सिवा किसी और के ज़िम्मेदार नहीं हो, अलबत्ता एहले ईमान को लड़ने के लिए उक्साओ, बैद नहीं के अल्लाह काफ़िरों का ज़ोर तोड़ दे। अल्लाह का ज़ोर सबसे ज़्यादा ज़बरदस्त और उसकी सज़ा सबसे ज़्यादा सख्त है
عَرَبِيمَن يَشفَع شَفاعَةً حَسَنَةً يَكُن لَهُ نَصيبٌ مِنها ۖ وَمَن يَشفَع شَفاعَةً سَيِّئَةً يَكُن لَهُ كِفلٌ مِنها ۗ وَكانَ اللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ مُقيتًا
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हिन्दी (Al-Omari)जो अच्छी सिफ़ारिश करेगा, उसके लिए उसमें से हिस्सा होगा तथा जो बुरी सिफ़ारिश करेगा, उसके लिए उसमें से हिस्सा होगा, और अल्लाह प्रत्येक चीज़ का साक्षी व संरक्षक है।
Roman Urdu (Maududi)Jo bhalayi ki sifarish karega woh usmein se hissa payega aur jo burayi ki sifarish karega woh usmein se hissa payega, aur Allah har cheez par nazar rakhne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo shaks kissi neki ya bhalay kaam ki sifarish keray ussay bhi uss ka kuch hissa milay ga aur jo buraee aur badi ki sifarish keray uss kay liye uss mein say aik hissa hai aur Allah Taalaa her cheez per qudrat rakhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो भलाई की सिफ़ारिश करेगा वो उसमें से हिसा पाएगा और जो बुराई की सिफ़ारिश करेगा वो उसमें से हिसा पाएगा, और अल्लाह हर चीज़ पर नज़र रखने वाला है
عَرَبِيوَإِذا حُيّيتُم بِتَحِيَّةٍ فَحَيّوا بِأَحسَنَ مِنها أَو رُدّوها ۗ إِنَّ اللَّهَ كانَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ حَسيبًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब तुमसे सलाम किया जाए, तो उससे अच्छा उत्तर दो अथवा उसी को दोहरा दो। निःसंदेह अल्लाह प्रत्येक चीज़ का ह़िसाब लेने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab koi ehtaraam ke sath tumhein salaam karey to usko ussey behtar tareeqe ke sath jawab do ya kam-az-kam usi tarah, Allah har cheez ka hisaab lene wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab tumhen salam kiya jaye to tum uss say acha jawab do ya unhi alfaaz ko lota do be-shak Allah Taalaa her cheez ka hisab lenay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जब कोई एहतराम के साथ तुम्हें सलाम करे तो उसको हमसे बेहतर तारीख के साथ जवाब दो या कम-अज़-कम उसी तरह, अल्लाह हर चीज का हिसाब लेने वाला है
عَرَبِياللَّهُ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۚ لَيَجمَعَنَّكُم إِلىٰ يَومِ القِيامَةِ لا رَيبَ فيهِ ۗ وَمَن أَصدَقُ مِنَ اللَّهِ حَديثًا
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, वह तुम्हें प्रलय के दिन अवश्य एकत्र करेगा, जिसमें कोई संदेह नहीं, तथा अल्लाह से अधिक सच्ची बात वाला और कौन होगा?
Roman Urdu (Maududi)Allah woh hai jiske siwa koi khuda nahin hai, woh tum sabko us qayamat ke din jamaa karega jiske aane mein koi shubha (doubt) nahin, aur Allah ki baat se badhkar sacchi baat aur kiski ho sakti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah woh hai jiss kay siwa koi mabood (bar haq) nahi woh tum sab ko yaqeenan qayamat kay din jama keray ga jiss kay (aaney) mein koi shak nahi Allah Taalaa say ziyada sachi baat wala aur kaun hoga
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह वो है जिसके सिवा कोई खुदा नहीं है, वो तुम सबको कयामत के दिन जमा करेगा जिसको आने दो मुझमें कोई शुभा (संदेह) नहीं, और अल्लाह की बात से बढ़कर सच्ची बात और कौन हो सकती है
عَرَبِي۞ فَما لَكُم فِي المُنافِقينَ فِئَتَينِ وَاللَّهُ أَركَسَهُم بِما كَسَبوا ۚ أَتُريدونَ أَن تَهدوا مَن أَضَلَّ اللَّهُ ۖ وَمَن يُضلِلِ اللَّهُ فَلَن تَجِدَ لَهُ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हें क्या हो गया है कि मुनाफ़िक़ों के बारे में दो पक्ष बन गए हो, जबकि अल्लाह ने उनकी करतूतों के कारण उन्हें उल्टा फेर दिया है? क्या तुम उसे सही रास्ता दिखाना चाहते हो, जिसे अल्लाह ने पथभ्रष्ट कर दिया है? और जिसे अल्लाह पथभ्रष्ट कर दे, तुम उसके लिए कदापि कोई रास्ता नहीं पाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir yeh tumhein kya ho gaya hai ke munafiqeen ke barey mein tumhare darmiyan do rayein(opinions) payi jaati hain, halanke jo buraiyan unhon ne kamayi hain unki badaulat Allah unhein ulta pher chukka hai. Kya tum chahte ho ke jisey Allah ne hidayat nahin bakshi usey tum hidayat baksh do? Halaanke jisko Allah ne raaste se hata diya uske liye tum koi raasta nahin paa sakte
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhen kiya hogaya hai? Kay munafiqon kay baray mein do giroh ho rahey ho? Unhen to unn kay aemaal ki waja say Allah Taalaa ney ondha ker diya hai. Abb kiya tum yeh mansoobay bandh rahey ho kay Allah Taalaa kay gumrah kiye huwon ko tum raah-e-raast per laa khara kero jissay Allah Taalaa raah bhula dey tu hergiz uss kay liye koi raah na paye ga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर ये तुम्हें क्या हो गया है के मुनाफिकीन के बारे में तुम्हारे दरमियान दो रायें (राय) पाई जाती हैं, हालंके जो बुराइयां उनको ने कमायी हैं उनकी बदौलत अल्लाह उन्हें उल्टा फेर चुका है। क्या तुम चाहते हो कि जिसे अल्लाह ने हिदायत नहीं बख्शी उसे तुम हिदायत बख्श दो? हलांके जिसको अल्लाह ने रास्ते से हटा दिया उसके लिए तुम कोई रास्ता नहीं पा सकते
عَرَبِيوَدّوا لَو تَكفُرونَ كَما كَفَروا فَتَكونونَ سَواءً ۖ فَلا تَتَّخِذوا مِنهُم أَولِياءَ حَتّىٰ يُهاجِروا في سَبيلِ اللَّهِ ۚ فَإِن تَوَلَّوا فَخُذوهُم وَاقتُلوهُم حَيثُ وَجَدتُموهُم ۖ وَلا تَتَّخِذوا مِنهُم وَلِيًّا وَلا نَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ ईमान वालो!) वे चाहते हैं कि जिस तरह वे काफ़िर हो गए, तुम भी काफ़िर हो जाओ ताकि तुम उनके बराबर हो जाओ। अतः तुम उनमें से किसी को मित्र न बनाओ, जब तक वे अल्लाह की राह में हिजरत न करें। यदि वे इससे मुँह फेरें, तो जहाँ भी पाओ, उन्हें पकड़ो और क़त्ल करो और उनमें से किसी को अपना मित्र और सहायक न बनाओ।
Roman Urdu (Maududi)Woh to yeh chahte hain ke jis tarah woh khud kafir hain isi tarah tum bhi kafir ho jao, taa-ke woh sab yaksan ho jayein. Lihaza unmein se kisi ko apna dost na banao jab tak ke woh Allah ki raah mein hijrat karke na aa jayein, aur agar woh hijrat se baaz rahey to jahan paao unhein pakdo aur qatal karo aur unmein se kisi ko apna dost aur madadgaar na banao
Roman Urdu (Junagarhi)Inn ki chahat to yeh kay jiss tarah kay kafir woh hain tum bhi unn ki tarah kufur kerney lago aur phir sab yaksan ho jao pus jab tak yeh islam ki khatir watan na choren inn mein say kissi ko haqeeqi dost na banao phir agar yeh mun pher len to enhen pakro aur qatal kero jahan bhi yeh haath lag jayen khabardaar! Inn mein say kissi ko apna rafiq aur madadgar na samajh bethna
Devnagri Urdu (Maududi)वो तो ये चाहते हैं के जिस तरह वो खुद काफिर हैं इसी तरह तुम भी काफिर हो जाओ, ता-के वो सब यक्सन हो जाएं। लिहाजा उनमें से किसी को अपना दोस्त न बनाओ जब तक के वो अल्लाह की राह में हिजरत करके न आ जाए, और अगर वो हिजरत से बाज़ रहे तो जहां पाओ उन्हें पकड़ो और कत्ल करो और उनमें से किसी को अपना दोस्त और मददगार न बनाओ
عَرَبِيإِلَّا الَّذينَ يَصِلونَ إِلىٰ قَومٍ بَينَكُم وَبَينَهُم ميثاقٌ أَو جاءوكُم حَصِرَت صُدورُهُم أَن يُقاتِلوكُم أَو يُقاتِلوا قَومَهُم ۚ وَلَو شاءَ اللَّهُ لَسَلَّطَهُم عَلَيكُم فَلَقاتَلوكُم ۚ فَإِنِ اعتَزَلوكُم فَلَم يُقاتِلوكُم وَأَلقَوا إِلَيكُمُ السَّلَمَ فَما جَعَلَ اللَّهُ لَكُم عَلَيهِم سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु उनमें से जो लोग किसी ऐसी क़ौम से जा मिलें, जिनके और तुम्हारे बीच समझौता हो, या वे लोग जो तुम्हारे पास इस अवस्था में आएँ कि उनके दिल इस बात से तंग हो रहे हों कि वे तुमसे युद्ध करें अथवा (तुम्हारे साथ मिलकर) अपनी जाति से युद्ध करें। और यदि अल्लाह चाहता, तो उन्हें तुमपर हावी कर देता, फिर वे तुमसे ज़रूर युद्ध करते। अतः यदि वे तुमसे अलग रहें और तुमसे युद्ध न करें और संधि के लिए तुम्हारी ओर हाथ बढ़ाएँ, तो अल्लाह ने उनके विरुद्ध् तुम्हारे लिए (युद्ध का) कोई रास्ता नहीं बनाया है।
Roman Urdu (Maududi)Albatta woh munafiq is hukum se mustasna (exception) hain jo kisi aisi qaum se jaa milein jiske saath tumhara muhaida (covenant) hai, isi tarah woh munafiq bhi mustasna hain jo tumhare paas aate hain aur ladayi se dil bardashta hain(their hearts shrink from fighting), na tumse ladna chahte hain na apni qaum se. Allah chahta to unko tumpar musallat kardeta aur woh bhi tumse ladte, lihaza agar woh tumse kinara kash ho jayein aur ladne se baaz rahein aur tumhari taraf sulah o ashti(offer you peace) ka haath badayein to Allah ne tumhare liye unpar dast darazi ki koi sabeel nahin rakhi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Siwaye unn kay jo uss qom say talluq rakhtay hon jin say tumhara mohaeeda ho chuka hai ya jo tumharay pass iss halat mein aayen kay tum say jang kerney say bhi tang dil hain aur apni qom say bhi jang kerney say tang dil hain aur agar Allah Taalaa chahata to enhen tum per musallat ker deta aur woh yaqeenan tum say jang kertay pus agar yeh log tum say kinara kashi ikhtiyar ker len aur tum say laraee na keren aur tumhari janib sulah ka payghaam dalen to Allah Taalaa ney tumharay liye inn per koi raah laraee ki nahi ki
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता वो मुनाफिक है हुकुम से मुस्तसना (अपवाद) हैं जो किसी ऐसी क़ौम से जा मिलें जिसके साथ तुम्हारा मुहैदा (संविदा) है, इसी तरह वो मुनाफिक भी मुस्तसना हैं जो तुम्हारे पास आते हैं और लड़यी से दिल बर्दाश्त हैं (उनके दिल लड़ने से कतराते हैं), ना तुमसे लड़ना चाहते हैं ना अपनी क़ौम से. अल्लाह चाहता है तो उनको तुम मुसल्लत करदे और वो भी तुमसे लड़े, अगर वो तुमसे किनारा कश हो जाए और लड़ने से बाज रहे और तुम्हारी तरफ सुलह ओ अष्टी का हाथ बदाएं अल्लाह ने तुम्हारे लिए उनपर दस्तूर दर्जी की कोई सबील नहीं रखी है
عَرَبِيسَتَجِدونَ آخَرينَ يُريدونَ أَن يَأمَنوكُم وَيَأمَنوا قَومَهُم كُلَّ ما رُدّوا إِلَى الفِتنَةِ أُركِسوا فيها ۚ فَإِن لَم يَعتَزِلوكُم وَيُلقوا إِلَيكُمُ السَّلَمَ وَيَكُفّوا أَيدِيَهُم فَخُذوهُم وَاقتُلوهُم حَيثُ ثَقِفتُموهُم ۚ وَأُولٰئِكُم جَعَلنا لَكُم عَلَيهِم سُلطانًا مُبينًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम कुछ दूसरे लोगों को ऐसा भी पाओगे, जो चाहते हैं कि तुम्हारी ओर से निश्चिन्त रहें और अपनी क़ौम की ओर से भी निश्चिन्त रहें। परन्तु जब भी वे उपद्रव की ओर लौटाए जाते हैं, तो उसमें औंधे मुँह जा गिरते हैं। यदि वे तुमसे अलग-थलग न रहें और तुम्हारी ओर संधि का हाथ न बढ़ाएँ, और अपने हाथ न रोकें, तो तुम उन्हें पकड़ो और क़त्ल करो जहाँ कहीं भी पाओ। यही लोग हैं, जिनके विरुद्ध हमने तुम्हें स्पष्ट तर्क दिया है।
Roman Urdu (Maududi)Ek aur qisam ke munafiq tumhein aise milenge jo chahte hain ke tumse bhi aman mein rahein aur apni qaum se bhi, magar jab kabhi fitne ka mauqa payenge usmein kood padenge. Aisey log agar tumhare muqable se baaz na rahein aur sulah o salamati tumhare aagey pesh na karein aur apne haath na rokein to jahan woh milein unhein pakdo aur maaro, unpar haath uthane ke liye humne tumhein khuli hujjat de di hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum kuch aur logon ko aisa bhi pao gay jin ki (ba zahir) chahat hai kay tum say bhi aman mein rahen. Aur apni qom say bhi aman mein rahen (lekin) jab kabhi fitna angezi ki taraf lotaye jatay hain to ondhay mun iss mein daal diye jatay hain pus agar yeh log tum say kinara kashi na keren aur tum say sulah ka silsila jannbaee na keren aur apney haath na rok len to unhen pakro aur maar dalo jahan kahin bhi paa lo! Yehi woh hain jin per hum ney tumhen zahir hujjat inayat farmaee hai
Devnagri Urdu (Maududi)एक और क़िस्म के मुनाफ़िक तुम्हें ऐसे मिलेंगे जो चाहते हैं कि तुमसे भी अमन में रहें और अपनी क़ौम से भी, मगर जब कभी फ़ितने का मौक़ा पाएंगे उसमें कूद पड़ेंगे। ऐसे लोग अगर तुम्हारे मुकाबले से बाज ना रहें और सुलह ओ सलामती तुम्हारे आगे पेश ना करें और अपने हाथ ना रोकें तो जहां वो मिले उन्हें पकड़ो और मारो, उन्पर हाथ उठाने के लिए हमने तुम्हें खुली हुज्जत दे दी है
عَرَبِيوَما كانَ لِمُؤمِنٍ أَن يَقتُلَ مُؤمِنًا إِلّا خَطَأً ۚ وَمَن قَتَلَ مُؤمِنًا خَطَأً فَتَحريرُ رَقَبَةٍ مُؤمِنَةٍ وَدِيَةٌ مُسَلَّمَةٌ إِلىٰ أَهلِهِ إِلّا أَن يَصَّدَّقوا ۚ فَإِن كانَ مِن قَومٍ عَدُوٍّ لَكُم وَهُوَ مُؤمِنٌ فَتَحريرُ رَقَبَةٍ مُؤمِنَةٍ ۖ وَإِن كانَ مِن قَومٍ بَينَكُم وَبَينَهُم ميثاقٌ فَدِيَةٌ مُسَلَّمَةٌ إِلىٰ أَهلِهِ وَتَحريرُ رَقَبَةٍ مُؤمِنَةٍ ۖ فَمَن لَم يَجِد فَصِيامُ شَهرَينِ مُتَتابِعَينِ تَوبَةً مِنَ اللَّهِ ۗ وَكانَ اللَّهُ عَليمًا حَكيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)किसी ईमान वाले के लिए शोभनीय नहीं कि वह किसी ईमान वाले की हत्या कर दे, परंतु यह कि चूक से ऐसा हो जाए। जो व्यक्ति किसी ईमान वाले की गलती से हत्या कर दे, वह एक ईमान वाला दास मुक्त करे और उस (हत) के वारिसों को दियत (हत्या का अर्थदंड) पहुँचाए, परंतु यह कि वे क्षमा कर दें। फिर यदि वह (हत) तुम्हारी शत्रु क़ौम से हो और वह (ख़ुद) ईमान वाला हो, तो केवल एक ईमान वाला दास मुक्त करना ज़रूरी है। और यदि वह ऐसी क़ौम से हो, जिसके और तुम्हारे बीच समझौता हो, तो उसके घर वालों को हत्या का अर्थदंड पहुँचाया जाए तथा एक ईमान वाला दास मुक्त करना ज़रूरी है। फिर जो (दास) न पाए, वह निरंतर दो महीने रोज़े रखे। अल्लाह की ओर से (उसके पाप की) यही क्षमा है और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Kisi momin ka yeh kaam nahin hai ke dusre momin ko qatal karey, illa yeh ke ussey chook ho jaye, aur jo shaks kisi momin ko galati se qatal karde to uska kaffara yeh hai ke ek momin ko gulami se azad karey aur maqtool ke warison ko khoon baha (blood-money) de, illa yeh ke woh khoon-baha maaf kardein. Lekin agar woh musalman maqtool kisi aisi qaum se tha jissey tumhari dushmani ho to uska kaffara ek momin gulam azad karna hai aur agar woh kisi aisi gair muslim qaum ka fard tha jissey tumhara muhaida ho to iske warison ko khoon-baha (blood-money) diya jayega aur ek momin gulam ko azad karna hoga. Phir jo gulam na paye woh pai dar pai do mahine ke roze rakkhey. Yeh is gunaah par Allah se tawba karne ka tareeqa hai .Aur Allah aleem o daana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kissi momin ko doosray momin ka qatal ker dena zaiba nahi magar ghalati say hojaye (to aur baat hai) jo shaks kissi musalman ko bila qasad maar dalay uss per aik musalman ghulam ki gardan aazad kerna aur maqtool kay azizon ko khoon baha phonchana hai haan yeh aur baat hai kay woh log bator sadqa moaf ker denaur maqtool agar tumhari dushman qom ka ho aur ho woh musalman to sirf aik momin ghulam ki gardan aazad kerni lazmi hai. Aur agar maqtool uss qom say ho kay tum mein aur unn mein ehad-o-paymaan hai to khoon baha lazim hai jo uss kay kunbay walon ko phonchaya jaye aur aik musalman ghulam ka aazad kerna bhi (zaroori hai) pus jo na paye uss kay zimmay do maheeney kay lagataar raozay hain Allah Taalaa say bakshwaney kay liye aur Allah Taalaa bakhoobi janney wala aur hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)किसी मोमिन का ये काम नहीं है के दूसरे मोमिन को क़त्ल करे, इल्ला ये के उसे छोड़ दे, और जो शक्स किसी मोमिन को गलती से क़त्ल करदे तो उसका कफ़्फ़ारा ये है के एक मोमिन को गुलामी से आज़ाद करे और मक़तूल के वारिसों को खून बहा (खून-पैसा) दे, इल्ला ये के वो खून-बहा माफ करदें। लेकिन अगर वो मुसलमान मकतूल ​​किसी ऐसी क़ौम से था जिसकी तुम्हारी दुश्मनी हो तो उसका कफ़्फ़ारा एक मोमिन गुलाम आज़ाद करना है और अगर वो किसी ऐसी गैर मुस्लिम क़ौम का फ़र्द था जिसकी तुम्हारी दुश्मनी हो तो उसके वारिसों को ख़ून-बहा (खून-पैसा) दिया जाएगा और एक मोमिन गुलाम को आज़ाद करना होगा। फिर जो गुलाम ना पाए वो पै डर पै दो माहीने के रोज़ रख्खे। ये गुनाह है पर अल्लाह से तौबा करने का तरीका है। और अल्लाह आलिम ओ दाना है
عَرَبِيوَمَن يَقتُل مُؤمِنًا مُتَعَمِّدًا فَجَزاؤُهُ جَهَنَّمُ خالِدًا فيها وَغَضِبَ اللَّهُ عَلَيهِ وَلَعَنَهُ وَأَعَدَّ لَهُ عَذابًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जो किसी ईमान वाले की जानबूझकर हत्या कर दे, उसका बदला नरक है, जिसमें वह हमेशा रहेगा और उसपर अल्लाह का क्रोध तथा धिक्कार है और अल्लाह ने उसके लिए बड़ी यातना तैयार कर रखी है।
Roman Urdu (Maududi)Raha woh shaks jo kisi momin ko jaan boojh kar qatal karey to uski jaza jahannum hai jismein woh hamesha rahega. Uspar Allah ka gazab aur uski laanat hai aur Allah ne uske liye sakht azaab muhaiyya kar rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo koi kiss momin ko qasadan qatal ker dalay uss ki saza dozakh hai jiss mein woh hamesha rahey ga iss per Allah Taalaa ka ghazab hai issay Allah Taalaa ney laanat ki hai aur iss ka liye bara azab tayyar rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)रहा वो शक्स जो किसी मोमिन को जान बूझ कर कत्ल करे तो उसकी जजा जहन्नुम है जिसमें वो हमेशा रहेगा। उसपर अल्लाह का ग़ज़ब और उसकी लानत है और अल्लाह ने उसके लिए सख़्त अज़ाब मुहैय्या कर रखा है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِذا ضَرَبتُم في سَبيلِ اللَّهِ فَتَبَيَّنوا وَلا تَقولوا لِمَن أَلقىٰ إِلَيكُمُ السَّلامَ لَستَ مُؤمِنًا تَبتَغونَ عَرَضَ الحَياةِ الدُّنيا فَعِندَ اللَّهِ مَغانِمُ كَثيرَةٌ ۚ كَذٰلِكَ كُنتُم مِن قَبلُ فَمَنَّ اللَّهُ عَلَيكُم فَتَبَيَّنوا ۚ إِنَّ اللَّهَ كانَ بِما تَعمَلونَ خَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! जब तुम अल्लाह के मार्ग में (जिहाद के लिए) निकलो, तो छानबीन कर लिया करो। और जो तुम्हें सलाम करे, उसे यह न कहो कि तुम ईमान वाले नहीं हो। तुम सांसारिक जीवन का सामान चाहते हो, तो अल्लाह के पास बहुत-सी ग़नीमतें हैं। पहले तुम भी ऐसे ही थे, फिर अल्लाह ने तुमपर उपकार किया। अतः ठीक से छानबीन कर लिया करो। निःसंदेह अल्लाह तुम्हारे कर्मों से सूचित है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, jab tum Allah ki raah mein jihad ke liye niklo to dost dushman mein tameez karo aur jo tumhari taraf salaam se takdeem (offers you greeting of peace) karey usey fawran na kehdo ke tu momin nahin hai, agar tum duniyavi faiyda chahte ho to Allah ke paas tumhare liye bahut se amwal e ganeemat hain. Aakhir isi halat mein tum khud bhi to issey pehle mubtala reh chuke ho, phir Allah ne tumpar ehsan kiya. Lihaza tehqeeq se kaam lo. Jo kuch tum karte ho Allah ussey bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Jab tum Allah ki raah mein jaa rahey ho to tehqeeq ker liya kero aur jo tum say salam-alaik keray tum ussay yeh na kehdo kay tu eman wala nahi. Tum dunyawi zindagi kay asbaab ki talash mein ho to Allah Taalaa kay pass boht si ghanimaten hain. Pehlay tum bhi aisay hi thay phir Allah Taalaa ney tum per ehsan kiya lehaza tum zaroor tehqeeq-o-tafteesh ker liya kero be-shak Allah Taalaa tumahray aemaal say ba khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, जब तुम अल्लाह की राह में जिहाद के लिए निकलो तो दोस्त दुश्मन में तमीज़ करो और जो तुम्हारी तरफ सलाम से तकदीम शांति) करे उसे फ़वारान न कहदो के तू मोमिन नहीं है, अगर तुम दुनियावी फ़ायदा चाहते हो तो अल्लाह के पास तुम्हारे लिए बहुत से अमल ए गनीमत है। आख़िर इसी हालात में तुम खुद भी तो इसे पहले मुबतला रह चुके हो, फिर अल्लाह ने तुमपर एहसान किया। लिहाजा तहकीक से काम लो. जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बख़बर है
عَرَبِيلا يَستَوِي القاعِدونَ مِنَ المُؤمِنينَ غَيرُ أُولِي الضَّرَرِ وَالمُجاهِدونَ في سَبيلِ اللَّهِ بِأَموالِهِم وَأَنفُسِهِم ۚ فَضَّلَ اللَّهُ المُجاهِدينَ بِأَموالِهِم وَأَنفُسِهِم عَلَى القاعِدينَ دَرَجَةً ۚ وَكُلًّا وَعَدَ اللَّهُ الحُسنىٰ ۚ وَفَضَّلَ اللَّهُ المُجاهِدينَ عَلَى القاعِدينَ أَجرًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)बिना किसी उज़्र (कारण) के बैठे रहने वाले मोमिन और अल्लाह की राह में अपने धनों और प्राणों के साथ जिहाद करने वाले, बराबर नहीं हो सकते। अल्लाह ने अपने धनों तथा प्राणों के साथ जिहाद करने वालों को पद के एतिबार से, जिहाद से बैठे रहने वालों पर प्रधानता प्रदान किया है। जबकि अल्लाह ने सब के साथ भलाई का वादा किया है।तथा अल्लाह ने जिहाद करने वालों को महान प्रतिफल देकर, जिहाद से बैठे रहने वालों पर वरीयता प्रदान किया है।
Roman Urdu (Maududi)Musalmaano mein se woh log jo kisi maazuri (disabling injury) ke bagair ghar baithe rehte hain aur woh jo Allah ki raah mein jaan o maal se jihad karte hain dono ki haisiyat yaksan nahin hai. Allah ne baithne walon ki ba nisbat jaan o maal se jihad karne walon ka darja bada rakkha hai, agarche har ek ke liye Allah ne bhalayi ka wada farmaya hai, magar uske haan mujaahidon ki khidmat ka muawaza baithne walon se bahut zyada hai
Roman Urdu (Junagarhi)Apni janon aur maalon say Allah ki raah mein jihad kerney walay momin aur baghair uzur kay beth rehney walay momin barabar nahi apney maalon aur apni janon say jihad kerney walon ko beth rehney walon per Allah Taalaa ney darjon mein boht fazeelat dey rakhi ahi aur yun to Allah Taalaa ney her aik ko khoobi aur achai kay wada diya hai lekin mujahideen ko beth rehney walon per boht baray ajar ki fazeelat dey rakhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)मुसलमानों में से वो लोग जो किसी मजूरी (अक्षम चोट) के बिना घर बैठे रहते हैं और वो जो अल्लाह की राह में जान ओ माल से जिहाद करते हैं दोनों की हैसियत यक्सान नहीं है। अल्लाह ने बैठने वालों की बा निस्बत जान ओ माल से जिहाद करने वालों का दरजा बड़ा रक्खा है, अगर हर एक के लिए अल्लाह ने भलाई का वादा फरमाया है, मगर उसके हां मुजाहिदों की खिदमत का मुआवजा बैठने वालों से बहुत ज्यादा है
عَرَبِيدَرَجاتٍ مِنهُ وَمَغفِرَةً وَرَحمَةً ۚ وَكانَ اللَّهُ غَفورًا رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)(यह सवाब) अल्लाह की ओर से दर्जे (पद) है, तथा क्षमा और दयालुता है, और अल्लाह बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Unke liye Allah ki taraf se badey darje hain aur magfirat aur rehmat hai, aur Allah bada maaf karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Apni taraf say martabay ki bhi aur baksish ki bhi aur rehmat ki bhi aur Allah Taalaa bakshish kerney wala aur reham kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनके लिए अल्लाह की तरफ से बड़े दर्जे हैं और मगफिरत और रहमत है, और अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ تَوَفّاهُمُ المَلائِكَةُ ظالِمي أَنفُسِهِم قالوا فيمَ كُنتُم ۖ قالوا كُنّا مُستَضعَفينَ فِي الأَرضِ ۚ قالوا أَلَم تَكُن أَرضُ اللَّهِ واسِعَةً فَتُهاجِروا فيها ۚ فَأُولٰئِكَ مَأواهُم جَهَنَّمُ ۖ وَساءَت مَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह फ़रिश्ते जिन लोगों के प्राण इस हाल में निकालते हैं कि वे (कुफ़्र के देश से हिजरत न करके) अपने ऊपर अत्याचार करने वाले होते हैं, तो उनसे पूछते हैं कि तुम किस हाल में थे? वे कहते हैं : हम धरती में कमज़ोर थे। तब फ़रिश्ते कहते हैं : क्या अल्लाह की धरती विशाल न थी कि तुम उसमें हिजरत कर जाते? सो यही लोग हैं जिनका ठिकाना जहन्नम है और वह बहुत बुरा ठिकाना है!
Roman Urdu (Maududi)Jo log apne nafs par zulm kar rahey thay unki roohein jab farishton ne qabz ki to unse pucha ke yeh tum kis haal mein mubtila thay? Unhon ne jawab diya ke hum zameen mein kamzoor o majboor thay, farishton ne kaha, kya khuda ki zameen waseeh na thi ke tum usmein hijrat karte? Yeh woh log hain jinka thikana jahannum hai aur bada hi bura thikana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log apni janon per zulm kerney walay hain jab farishtay unn ki rooh qabz kertay hain to poochtay hain tum kiss haal mein thay? Yeh jawab detay hain kay hum apni jagah kamzor aur maghloob thay. Farishtay kehtay hain kiya Allah Taalaa ki zamin kushada na thi kay tum hijrat ker jatay? Yehi log hain jin ka thikana dozakh hai aur woh phonchney ki buri jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग अपने नफ़्स पर ज़ुल्म कर रहे थे उनकी रूहें जब फ़रिश्तों ने क़ब्ज़ की तो उनसे पूछा के ये तुम किस हाल में मुब्तिला थे? उनको ने जवाब दिया के हम ज़मीन में कमज़ूर ओ मजबूर थे, फ़रिश्तों ने कहा, क्या ख़ुदा की ज़मीन वसीह न थी के तुम हमसे हिजरत करते थे? ये वो लोग हैं जिनका ठिकाना जहन्नुम है और बड़ा ही बुरा ठिकाना है
عَرَبِيإِلَّا المُستَضعَفينَ مِنَ الرِّجالِ وَالنِّساءِ وَالوِلدانِ لا يَستَطيعونَ حيلَةً وَلا يَهتَدونَ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)सिवाय उन असहाय पुरुषों, स्त्रियों और बच्चों के जो कोई उपाय नहीं कर सकते और न (वहाँ से निकलने का) कोई रास्ता पाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Haan jo Mard, auratein aur bacchey waqayi bebas hain aur nikalne ka koi raasta aur zariya nahin paatey
Roman Urdu (Junagarhi)Magar jo mard aurten aur bachay bey bus hain jinhen na to kissi charaa-e-kaar ki taqat aur na kiss raastay ka ilm hai
Devnagri Urdu (Maududi)हां जो मर्द, औरतें और बच्चे हकीकत हैं बेबस हैं और निकलने का कोई रास्ता और जरिया नहीं पाते
عَرَبِيفَأُولٰئِكَ عَسَى اللَّهُ أَن يَعفُوَ عَنهُم ۚ وَكانَ اللَّهُ عَفُوًّا غَفورًا
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हिन्दी (Al-Omari)तो निश्चय अल्लाह उन्हें क्षमा कर देगा। निःसंदेह अल्लाह बहुत माफ़ करने वाला, क्षमाशील है।
Roman Urdu (Maududi)Baeed nahin ke Allah unhein maaf karde, Allah bada maaf karne wala aur darguzar farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Boht mumkin hai kay Allah Taalaa unn say dar guzar keray Allah Taalaa dar guzar kerney wala aur moaf farmaney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)बैद नहीं के अल्लाह उन्हें माफ करदे, अल्लाह बड़ा माफ करने वाला और दरगुजर फरमाने वाला है
عَرَبِي۞ وَمَن يُهاجِر في سَبيلِ اللَّهِ يَجِد فِي الأَرضِ مُراغَمًا كَثيرًا وَسَعَةً ۚ وَمَن يَخرُج مِن بَيتِهِ مُهاجِرًا إِلَى اللَّهِ وَرَسولِهِ ثُمَّ يُدرِكهُ المَوتُ فَقَد وَقَعَ أَجرُهُ عَلَى اللَّهِ ۗ وَكانَ اللَّهُ غَفورًا رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो कोई अल्लाह के मार्ग में हिजरत करेगा, वह धरती में बहुत-से प्रवास स्थान तथा समाई (विस्तार) पाएगा। और जो व्यक्ति अपने घर से अल्लाह और उसके रसूल की ओर हिजरत की खातिर निकले, फिर उसे (रास्ते ही में) मौत आ जाए, तो उसका बदला अल्लाह के पास निश्चित हो गया और अल्लाह अति क्षमाशील, दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Jo koi Allah ki raah mein hijrat karega woh zameen mein panaah lene ke liye bahut jagah aur basar awqat ke liye badi gunjaish payega, aur jo apne ghar se Allah aur Rasool ki taraf hijrat ke liye nikle, phir raaste hi mein usey maut aa jaye uska ajar Allah ke zimme wajib ho gaya. Allah bahut bakshish farmane wala aur Raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo koi Allah ki raah mein watan ko choray ga woh zamin mein boht si qayam ki jagahen bhi paye ga aur kushaadgi bhi aur jo koi apney ghar say Allah Taalaa aur uss kay rasool (PBUH) ki taraf nikal khara hua phir ussay maut ney aa pakra to bhi yaqeenan uss ka ajar Allah Taalaa kay zimmay sabit hogaya aur Allah Taalaa bara bakshney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो कोई अल्लाह की राह में हिजरत करेगा वो ज़मीन में पनाह लेने के लिए बहुत जगह और बसर अवकत के लिए बड़ी गुंजाईश पाएगा, और जो अपने घर से अल्लाह और रसूल की तरफ हिजरत के लिए निकले, फिर रास्ते ही में उसकी मौत आ जाए उसका अजर अल्लाह के ज़िम्मे वाजिब हो गया। अल्लाह बहुत बख्शीश फ़रमाने वाला और रहीम है
عَرَبِيوَإِذا ضَرَبتُم فِي الأَرضِ فَلَيسَ عَلَيكُم جُناحٌ أَن تَقصُروا مِنَ الصَّلاةِ إِن خِفتُم أَن يَفتِنَكُمُ الَّذينَ كَفَروا ۚ إِنَّ الكافِرينَ كانوا لَكُم عَدُوًّا مُبينًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब तुम धरती में यात्रा करो, तो नमाज़ क़स्र (संक्षिप्त) करने में तुमपर कोई गुनाह नहीं है, यदि तुम्हें डर हो कि काफ़िर तुम्हें कष्ट पहुँचाएँगे। वास्तव में, काफ़िर तुम्हारे खुले दुश्मन हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab tumlog safar ke liye niklo to koi muzaika (blame) nahin agar namaz mein ikhtesar(shorten) kardo (khususan) jabke tumhein andesha ho ke kafir tumhein satayenge kyunke woh khullam khulla tumhari dushmani par tuley huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jab tum safar mein jaa rahey ho to tum per namazon kay qasar kerney mein koi gunah nahi agar tumhen darr ho kay kafir tumhen satayen gay yaqeenan kafir tumharay khulay dushman hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जब तुम लोग सफ़र के लिए निकलो तो कोई मुज़ैका (दोष) नहीं, अगर नमाज़ में इख्तेसर (छोटा) करदो (ख़ुसुसान) जबके तुम्हीं अंदेशा हो के काफ़िर तुम्हीं सताएंगे क्योंके वो खुल्लम खुल्ला तुम्हारी दुश्मनी पर तूले हुए हैं
عَرَبِيوَإِذا كُنتَ فيهِم فَأَقَمتَ لَهُمُ الصَّلاةَ فَلتَقُم طائِفَةٌ مِنهُم مَعَكَ وَليَأخُذوا أَسلِحَتَهُم فَإِذا سَجَدوا فَليَكونوا مِن وَرائِكُم وَلتَأتِ طائِفَةٌ أُخرىٰ لَم يُصَلّوا فَليُصَلّوا مَعَكَ وَليَأخُذوا حِذرَهُم وَأَسلِحَتَهُم ۗ وَدَّ الَّذينَ كَفَروا لَو تَغفُلونَ عَن أَسلِحَتِكُم وَأَمتِعَتِكُم فَيَميلونَ عَلَيكُم مَيلَةً واحِدَةً ۚ وَلا جُناحَ عَلَيكُم إِن كانَ بِكُم أَذًى مِن مَطَرٍ أَو كُنتُم مَرضىٰ أَن تَضَعوا أَسلِحَتَكُم ۖ وَخُذوا حِذرَكُم ۗ إِنَّ اللَّهَ أَعَدَّ لِلكافِرينَ عَذابًا مُهينًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ नबी!) जब आप (युद्ध के मैदान में) उनके साथ मौजूद हों और उनके लिए नमाज़ क़ायम करें, तो उनका एक गिरोह आपके साथ खड़ा हो जाए और वे अपने हथियार लिए रहें और जब वे सज्दा कर लें, तो तुम्हारे पीछे हो जाएँ तथा दूसरा गिरोह आए, जिसने नमाज़ नहीं पढ़ी है और वे तुम्हारे साथ नमाज़ पढ़ें और अपने हथियार लिए सावधान रहें। काफ़िर चाहते हैं कि तुम अपने हथियारों और अपने सामान से असावधान हो जाओ, तो तुमपर यकायक धावा बोल दें। तथा तुमपर कोई दोष नहीं, यदि वर्षा के कारण तुम्हें कष्ट हो अथवा तुम बीमार हो कि अपने हथियार उतार दो तथा अपने बचाव का ध्यान रखो। निःसंदेह अल्लाह ने काफ़िरों के लिए अपमानकारी अज़ाब तैयार कर रखा है।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Nabi)! Jab tum musalmaano ke darmiyan ho aur (halat e jung mein) unhein namaz padhane khade ho to chahiye ke unmein se ek giroh tumhare saath khada ho aur aslaha (arms) liye rahey, phir jab woh sajda karle to pichey chala jaye aur dusra giroh jisne abhi namaz nahin padhi hai aakar tumhare saath padhey aur woh bhi chaukanna rahey aur apne aslaha(arms) liye rahey, kyunke kuffar is taak mein hain ke tum apne hathiyaron aur apne samaan ki taraf se zara gaafil ho to woh tumpar ek-baar hi toot padein. Albatta agar tum baarish ki wajah se takleef mehsoos karo ya bimaar ho to aslaha rakh dene mein koi muzaika nahin, magar phir bhi chaukanne raho , yaqeen rakkho ke Allah ne kafiron ke liye ruswa kun azaab muhaiyya kar rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jab tum inn mein ho aur inn kay liye namaz khari kero to chahaiye kay inn ki aik jamat tumharay sath apney hathyaar liye khari ho phir jab yeh sajda ker chuken to yeh hatt ker tumharay peechay aajayen aur woh doosti jamat jiss ney namaz nahi parhi woh aajaye aur teray sath namaz ada keray aur apna bachao aur apney hathyaar liye rahey kafir chahtay hain kay kissi tarah tum apney hathyaaron aur apney saman say bey khabar ho jao to woh tum per achanak dhaawa bol den haan apney hathyaar utaar rakhney mein uss waqt tum per koi gunah nahi jab kay tumhen takleef ho ya ba waja barish kay ya ba sabab beemar hojaney kay aur apney bachao ki cheezen sath liye raho. Yaqeenan Allah Taalaa ney munkiron kay liye zillat ki maar tayyar ker rakhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ नबी)! जब तुम मुसलमानों के दरमियान हो और (हालत ए जंग में) उन्हें नमाज़ पढाने खड़े हो तो चाहिए के उनमें से एक गिरोह तुम्हारे साथ खड़ा हो और असलहा (हथियार) ले रहे, फिर जब वो सजदा करले तो पीछे चला जाए और दूसरा गिरोह जिसने अभी नमाज नहीं पढ़ी है आकार तुम्हारे साथ पढ़े और वो भी चौकन्ना रहे और अपने असलहा (हथियार) के लिए रहे, क्योंकि कुफ्फार इस ताक में है कि तुम अपने हथियारों और अपने सामान की तरफ से जरा गाफिल हो तो वो तुमपर एक बार ही टूट पड़े। अलबत्ता अगर तुम बारिश की वजह से तकलीफ़ करो या बीमार हो तो असलहा रख देने में कोई मुज़ैका नहीं, मगर फिर भी चौकन्ने रहो, यकीन रखो के अल्लाह ने काफिरों के लिए रुसवा कुन अज़ाब मुहैय्या कर रक्खा है
عَرَبِيفَإِذا قَضَيتُمُ الصَّلاةَ فَاذكُرُوا اللَّهَ قِيامًا وَقُعودًا وَعَلىٰ جُنوبِكُم ۚ فَإِذَا اطمَأنَنتُم فَأَقيمُوا الصَّلاةَ ۚ إِنَّ الصَّلاةَ كانَت عَلَى المُؤمِنينَ كِتابًا مَوقوتًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब तुम नमाज़ पूरी कर लो, तो खड़े और बैठे और लेटे (प्रत्येक स्थिति में) अल्लाह को याद करते रहो और जब तुम भयमुक्त हो जाओ, तो (पहले की तरह) नमाज़ क़ायम करो। निःसंदेह नमाज़ ईमान वालों पर निर्धारित समय पर फ़र्ज़ की गई है।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab namaz se farig ho jao to khade aur baithey aur letay, har haal mein Allah ko yaad karte raho aur jab itminaan naseeb ho jaye to poori namaz padho , namaz dar haqeeqat aisa farz hai jo pabandi e waqt ke saath ehle iman par lazim kiya gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab tum namaz ada ker chuko to uthtay bethtay aur letay Allah Taalaa ka ziker kertay raho aur jab itminan pao to namaz qaeem kero! Yaqeenan namaz mominon per muqarrara waqton per farz hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब नमाज से फारिग हो जाओ तो खड़े और बैठे और लेते, हर हाल में अल्लाह को याद करते रहो और जब इत्मीनान नसीब हो जाए तो पूरी नमाज पढ़ो, नमाज दार हकीकत ऐसा फर्ज है जो पाबंदी ए वक्त के साथ एहले ईमान पर लाज़िम किया गया है
عَرَبِيوَلا تَهِنوا فِي ابتِغاءِ القَومِ ۖ إِن تَكونوا تَألَمونَ فَإِنَّهُم يَألَمونَ كَما تَألَمونَ ۖ وَتَرجونَ مِنَ اللَّهِ ما لا يَرجونَ ۗ وَكانَ اللَّهُ عَليمًا حَكيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम (दुश्मन) क़ौम का पीछा करने में कमज़ोर न पड़ो, यदि तुम्हें पीड़ा होती है, तो निःसंदेह उन्हें भी पीड़ा होती है जिस तरह तुम्हें पीड़ा होती है और तुम अल्लाह से जिस चीज़ की आशा रखते हो, वे उसकी आशा नहीं रखते। तथा अल्लाह सब कुछ जानने वाला, बहुत हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Is giroh ke taaqub mein kamzori na dikhao, agar tum takleef utha rahey ho to tumhari tarah woh bhi takleef utha rahey hain aur tum Allah se us cheez ke umeedwaar ho jiske woh umeedwaar nahin hain. Allah sabkuch jaanta hai aur woh hakeem o dana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn logon ka peecha kerney say haaray dil ho ker beth na raho! Agar tumhen bey aarami hoti hai to unhen bhi tumhari tarah bey aarami hoti hai aur tum Allah Taalaa say woh umeeden rakhtay ho jo umeeden unhen nahi aur Allah Taalaa daana aur hakim hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या गिरोह के ताक़ुब में है कम्ज़ोरी ना दिखाओ, अगर तुम तकलीफ़ उठा रहे हो तो तुम्हारी तरह वो भी तकलीफ़ उठा रहे हैं और तुम अल्लाह से हमें चीज़ के उम्मीददार हो जिसकी वो उम्मीद नहीं है। अल्लाह सबको जानता है और वो हकीम ओ दाना है
عَرَبِيإِنّا أَنزَلنا إِلَيكَ الكِتابَ بِالحَقِّ لِتَحكُمَ بَينَ النّاسِ بِما أَراكَ اللَّهُ ۚ وَلا تَكُن لِلخائِنينَ خَصيمًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) हमने आपकी ओर सत्य पर आधारित पुस्तक अवतरित की है, ताकि आप लोगों के बीच उसके अनुसार फ़ैसला करें, जो अल्लाह ने आपको दिखाया है और आप ख़यानत करने वालों के तरफ़दार न बनें।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi)! Humne yeh kitab haqq ke saath tumhari taraf nazil ki hai taa-ke jo raah e raast Allah ne tumhein dikhayi hai uske mutabiq logon ke darmiyan faisla karo. Tum bad-dayanat(dishonest) logon ki taraf se jhagadne waley na bano
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney tumhari taraf haq kay sath apni kitab nazil farmaee hai takay tum logon mein iss cheez kay mutabiq faisla kero jiss say Allah ney tum ko shanasa kiya hai aur khayanat kerney walon kay himayati na bano
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी)! हमने ये किताब हक़ के साथ तुम्हारी तरफ नाज़िल की है ता-के जो राह ए रास्ते अल्लाह ने तुम्हें दिखाई है उसके मुताबिक़ लोगों के दरमियान फैसला करो। तुम बद-दयानत (बेईमान) लोगों की तरफ से झगड़ा करने वाले न बनो
عَرَبِيوَاستَغفِرِ اللَّهَ ۖ إِنَّ اللَّهَ كانَ غَفورًا رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह से क्षमा याचना करें। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, बड़ा दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah se darguzar (forgiveness) ki darkhwast karo, woh bada darguzar farmane wala aur Raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa say bakshish maango! Be-shak Allah Taalaa baksish kerney wala meharbani kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह से दरगुजर (माफी) की अंधेरगर्दी करो, वो बड़ा दरगुजर फरमान वाला और रहीम है
عَرَبِيوَلا تُجادِل عَنِ الَّذينَ يَختانونَ أَنفُسَهُم ۚ إِنَّ اللَّهَ لا يُحِبُّ مَن كانَ خَوّانًا أَثيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और आप ऐसे लोगों का पक्ष न लें, जो अपने आपसे विश्वासघात करते हैं। निःसंदेह अल्लाह विश्वासघात करने वाले, पापी से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Jo log apne nafs se khayanat karte hain tum unki himayat na karo, Allah ko aisa shaks pasand nahin hai jo khayanatkaar (who betrays trust) aur maasiyat pesha (persists in sin) ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn ki taraf say jhagra na kero jo khud apni hi khayanat kertay hain yaqeenan dagha baaz gunehgar Allah Taalaa ko acha nahi lagta
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग अपने नफ्स से खयानत करते हैं तुम उनकी हिमायत न करो, अल्लाह को ऐसा शक्स पसंद नहीं है जो खयानतकार (जो विश्वास को धोखा देता है) और मासीयत पेशा (पाप में लगा रहता है) हो
عَرَبِييَستَخفونَ مِنَ النّاسِ وَلا يَستَخفونَ مِنَ اللَّهِ وَهُوَ مَعَهُم إِذ يُبَيِّتونَ ما لا يَرضىٰ مِنَ القَولِ ۚ وَكانَ اللَّهُ بِما يَعمَلونَ مُحيطًا
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोगों से छिपते हैं, परंतु अल्लाह से नहीं छिपते। हालाँकि वह उनके साथ होता है, जब वे रात में उस बात की गुप्त योजना बनाते हैं, जिससे वह प्रसन्न नहीं होता। तथा वे जो कुछ करते हैं, अल्लाह उसे घेरे हुए है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log Insano se apni harakat chupa sakte hain magar khuda se nahin chupa sakte , woh to us waqt bhi unke saath hota hai jab yeh raaton ko chupkar uski marzi ke khilaf mashware karte hain, inke sarey aamal par Allah muheet (encompasses) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh logon say to chup jatay hain (lekin) Allah Taalaa say nahi chup saktay woh raaton kay waqt jabkay Allah ki na pasndeedah baaton kay khufia mashwaray kertay hain uss waqt bhi Allah unn kay pass hota hai unn kay tamam aemaal ko woh gheray huye hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग इंसानों से अपनी हरकत छुपा सकते हैं, मगर खुदा से नहीं छुपा सकते, वो तो हमें वक्त भी उनके साथ होता है जब ये रातों को चुपकर उसकी मर्जी के खिलाफ मैशवेयर करते हैं, इनके सारे अमल पर अल्लाह मुहीत है
عَرَبِيها أَنتُم هٰؤُلاءِ جادَلتُم عَنهُم فِي الحَياةِ الدُّنيا فَمَن يُجادِلُ اللَّهَ عَنهُم يَومَ القِيامَةِ أَم مَن يَكونُ عَلَيهِم وَكيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)सुनो, तुम लोगों ने सांसारिक जीवन में तो उनकी ओर से झगड़ लिया। परंतु क़यामत के दिन उनकी ओर से अल्लाह से कौन झगड़ेगा या कौन उनका वकील होगा?
Roman Urdu (Maududi)Haan! Tum logon ne in mujreemon ki taraf se duniya ki zindagi mein to jhagda karliya, magar qayamat ke roz inki taraf se kaun jhagda karega? Aakhir wahan kaun inka wakeel hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Haan to yeh ho tum log kay duniya mein tum ney inn ki himayat ki lekin Allah Taalaa kay samney qayamat kay din inn ki himayat kaun keray ga? Aur woh kaun hai jo inn ka wakeel bann ker khara ho sakay ga
Devnagri Urdu (Maududi)हान! तुम लोगों ने मुजरिमों की तरफ से दुनिया की जिंदगी में तो झगड़ा किया, मगर कयामत के रोज इनकी तरफ से कौन झगड़ा करेगा? आखिर वहां कौन इनका वकील होगा
عَرَبِيوَمَن يَعمَل سوءًا أَو يَظلِم نَفسَهُ ثُمَّ يَستَغفِرِ اللَّهَ يَجِدِ اللَّهَ غَفورًا رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)जो व्यक्ति कोई बुरा काम करे अथवा अपने ऊपर अत्याचार करे, फिर अल्लाह से क्षमा माँगे, तो वह अल्लाह को बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान् पाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Agar koi shaks bura fail (amal) kar guzre ya apne nafs par zulm kar jaye aur iske baad Allah se darguzar (forgiveness) ki darkhwast karey to Allah ko darguzar (maaf) karne wala aur raheem payega
Roman Urdu (Junagarhi)Jo shaks koi buraee keray ya apni jaan per zulm keray phir Allah Taalaa say istaghfaar keray to woh Allah ko bakshney wala meharbani kerney wala payega
Devnagri Urdu (Maududi)अगर कोई शक्स बुरा फेल (अमल) कर गुजरे या अपने नफ्स पर जुल्म कर जाए और इसके बाद अल्लाह से दरगुजर (माफी) की अंधेरगर्दी करे तो अल्लाह को दरगुजर (माफ) करने वाला और रहीम पाएगा
عَرَبِيوَمَن يَكسِب إِثمًا فَإِنَّما يَكسِبُهُ عَلىٰ نَفسِهِ ۚ وَكانَ اللَّهُ عَليمًا حَكيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जो व्यक्ति कोई पाप करता है, तो निःसंदेह वह उसका भार अपने ऊपर ही लादता है, तथा अल्लाह सब कुछ जानने वाला, हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Magar jo burayi kama ley to uski yeh kamayi usi ke liye wabal hogi. Allah ko sab baaton ki khabar hai aur woh hakeem o dana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo gunah kerta hai uss ka bojh ussi per hai aur Allah bakhoobi janney wala aur poori hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जो बुराई कमा ले तो उसकी ये कमाई उसके लिए बढ़िया होगी। अल्लाह को सब बातों की खबर है और वह हकीम ओ दाना है
عَرَبِيوَمَن يَكسِب خَطيئَةً أَو إِثمًا ثُمَّ يَرمِ بِهِ بَريئًا فَقَدِ احتَمَلَ بُهتانًا وَإِثمًا مُبينًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जो व्यक्ति कोई ग़लती अथवा पाप करे, फिर उसका आरोप किसी निर्दोष पर लगा दे, तो उसने मिथ्या दोषारोपण तथा खुले पाप का बोझ उठा लिया।
Roman Urdu (Maududi)Phir jisne koi khata ya gunaah karke uska zaam (blame) kisi be-gunaah par thop diya usne to baday bohtaan aur sareeh gunaah ka baar sameith liya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo shaks koi gunah ya khata ker kay kissi bey gunah kay zimmay thop dey uss ney boht bara bohtaan uthaya aur khula gunah kiya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जिसने कोई खता या गुनाह करके उसका ज़म (दोष) किसी बे-गुनाह पर थोप दिया उसने तो बदाए बोहतान और सारे गुनाह का बार समान लिया
عَرَبِيوَلَولا فَضلُ اللَّهِ عَلَيكَ وَرَحمَتُهُ لَهَمَّت طائِفَةٌ مِنهُم أَن يُضِلّوكَ وَما يُضِلّونَ إِلّا أَنفُسَهُم ۖ وَما يَضُرّونَكَ مِن شَيءٍ ۚ وَأَنزَلَ اللَّهُ عَلَيكَ الكِتابَ وَالحِكمَةَ وَعَلَّمَكَ ما لَم تَكُن تَعلَمُ ۚ وَكانَ فَضلُ اللَّهِ عَلَيكَ عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) यदि आपपर अल्लाह का अनुग्रह और उसकी दया न होती, तो उनके एक समूह ने निश्चय आपको बहकाने का इरादा कर लिया था। हालाँकि वे केवल अपने आप को ही पथभ्रष्ट कर रहे हैं और वे आपको कुछ भी हानि नहीं पहुँचा सकते। और अल्लाह ने आपपर पुस्तक तथा हिकमत अवतरित की है और आपको वह कुछ सिखाया है, जो आप नहीं जानते थे। और आपपर अल्लाह का अनुग्रह बहुत बड़ा है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi)! Agar Allah ka fazal tumpar na hota aur uski rehmat tumhare shamil e haal na hoti to inmein se ek giroh ne to tumhein galat fehmi mein mubtila karne ka faisla kar hi liya tha, halaanke dar-haqeeqat woh khud apne siwa kisi ko galat fehmi mein mubtila nahin kar rahey thay, aur tumhara koi nuqsaan na kar sakte thay. Allah ne tumpar kitab aur hikmat nazil ki hai aur tumko woh kuch bataya hai jo tumhein maloom na tha aur uska fazl tumpar bahut hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar Allah Taalaa ka fazal-o-reham tujh per na hota to inn kay aik jamat to tujhay behkaney ka qasad ker hi liya tha magar dar asal yeh apney aap ko hi gumrah kertay hain yeh tera kuch nahi bigar saktay Allah Taalaa ney tujh per kitab-o-hikmat utari hai aur tujhay woh sikhaya hai jisay tu nahi janta tha aur Allah Taalaa ka tujh per bara bhari fazal hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी)! अगर अल्लाह का फ़ज़ल तुंपार न होता और उसकी रहमत तुम्हारे शामिल ए हाल न होती तो उनमें से एक गिरो ​​ने तो तुम्हें ग़लत फ़हमी में मुब्तिला करने का फैसला कर ही लिया था, हलांके दर-हक़ीक़त वो खुद अपने सिवा किसी को ग़लत फ़हमी में मुब्तिला नहीं कर रहे थे, और तुम्हारा कोई नुक्सान ना कर सकता था। अल्लाह ने तुमपर किताब और हिकमत नाज़िल की है और तुमको वो कुछ बताया है जो तुम्हें मालूम न था और उसका फ़ज़ल तुमपर बहुत है
عَرَبِي۞ لا خَيرَ في كَثيرٍ مِن نَجواهُم إِلّا مَن أَمَرَ بِصَدَقَةٍ أَو مَعروفٍ أَو إِصلاحٍ بَينَ النّاسِ ۚ وَمَن يَفعَل ذٰلِكَ ابتِغاءَ مَرضاتِ اللَّهِ فَسَوفَ نُؤتيهِ أَجرًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)उनकी अधिकतर कानाफूसियों में कोई भलाई नहीं होती, परन्तु जो दान या नेकी या लोगों के बीच संधि कराने का आदेश दे (तो इसमें भलाई है), और जो कोई ऐसे कर्म अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए करेगा, हम जल्द ही उसे बहुत बड़ा बदला प्रदान करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Logon ki khufiya sargoshiyon(secret talks) mein aksar o beshtar koi bhalayi nahin hoti, haan agar koi posheeda taur par sadaqa o khairaat ki talqeen karey ya kisi neik kaam ke liye ya logon ke maamlaat mein islah karne ke liye kisi se kuch kahey to yeh albatta bhali baat hai. Aur jo koi Allah ki raza-joyi ke liye aisa karega usey hum bada ajar ata karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay aksay khufia mashwaron mein koi khair nahi haan! Bhalaee uss kay mashwaray mein hai jo kheyraat kay ya nek baat ka ya logon mein sulah keraney ka hukum keray aur jo shaks sirf Allah Taalaa ki raza mandi hasil kerney kay iraday say yeh kaam keray ussay hum yaqeenan boht bara sawab den gay
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों की खुफिया सरगोशियों (गुप्त वार्ता) में अक्सर ओ बेश्तर कोई भलाई नहीं होती, हां अगर कोई पोशीदा तौर पर सदका ओ खैरात की तालक़ीन करे या किसी नए काम के लिए या लोगों के मामले में इस्लाह करने के लिए किसी से कुछ कहे तो ये अलबत्ता भली बात है। और जो कोई अल्लाह की रजा-जोई के लिए ऐसा करेगा उसे हम बड़ा अजर अता करेंगे
عَرَبِيوَمَن يُشاقِقِ الرَّسولَ مِن بَعدِ ما تَبَيَّنَ لَهُ الهُدىٰ وَيَتَّبِع غَيرَ سَبيلِ المُؤمِنينَ نُوَلِّهِ ما تَوَلّىٰ وَنُصلِهِ جَهَنَّمَ ۖ وَساءَت مَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो व्यक्ति अपने सामने मार्गदर्शन स्पष्ट हो जाने के बाद रसूल का विरोध करे और ईमान वालों के मार्ग के अलावा (किसी दूसरे मार्ग) पर चले, हम उसे उधर ही फेर देंगे, जिधर वह (स्वयं) फिर गया है और उसे नरक में झोंक देंगे। और वह बहुत बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Magar jo shaks Rasool ki mukhalifat par qamar basta ho aur ehle iman ki rawish ke siwa kisi aur rawish par chaley, daraan haal yeh ke uspar raah e raast wazeh ho chuki ho, to usko hum usi taraf chalayenge jidhar woh khud phir gaya aur usey jahannum mein jhonkenge jo badhtareen jaye qarar (evil destination) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo shaks ba wajood raah-e-hidayat kay wazeh ho janey kay bhi rasool (PBUH) ka khilaf keray aur tamam mominon ki raah chor ker chalay hum ussay udhar hi mutawajja ker den gay jidhar woh khud mutawajja ho aur dozakh mein daal den gay woh phonchney ki boht hi buri jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जो शक्स रसूल की मुखालिफत पर कमर बस्ता हो और एहले ईमान की रवीश के सिवा किसी और रवीश पर चले, डरन हाल ये के उसपर राह ए रस्त वाज़ेह हो चुकी हो, तो उसको हम उसकी तरफ चलाएंगे जिधर वो खुद फिर गया और उसे जहन्नुम में झोंकेंगे जो बदतरीन जाए करार (बुरी मंजिल) है
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ لا يَغفِرُ أَن يُشرَكَ بِهِ وَيَغفِرُ ما دونَ ذٰلِكَ لِمَن يَشاءُ ۚ وَمَن يُشرِك بِاللَّهِ فَقَد ضَلَّ ضَلالًا بَعيدًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह अपने साथ साझी ठहराए जाने को क्षमा नहीं करेगा और इससे कमतर पाप जिसके लिए चाहेगा, क्षमा कर देगा। तथा जो अल्लाह का साझी बनाता है, वह यक़ीनन भटककर बहुत दूर जा पड़ा।
Roman Urdu (Maududi)Allah ke haan bas shirk hi ki bakshish nahin hai, iske siwa aur sab kuch maaf ho sakta hai jisey woh maaf karna chahe. Jisne Allah ke saath kisi ko shareek thehraya woh to gumraahi mein bahut door nikal gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Ussay Allah Taalaa qatan na bakshay ga kay uss kay sath shareek muqarrar kiya jaye haan shirk kay ilawa gunah jiss kay chahaye moaf farma deta hai aur Allah kay sath sharik kerney wala boht door ki gumrahi mein jaa para
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के हां बस शिर्क ही कि बख्शीश नहीं है, इसके सिवा और सब कुछ माफ हो सकता है जिसे वो माफ करना चाहे। जिसने अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहरया वो तो गुमराही में बहुत दूर निकल गया
عَرَبِيإِن يَدعونَ مِن دونِهِ إِلّا إِناثًا وَإِن يَدعونَ إِلّا شَيطانًا مَريدًا
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हिन्दी (Al-Omari)ये (बहुदेववादी), अल्लाह को छोड़कर मात्र देवियों को पुकारते हैं और वास्तव में ये केवल उद्दंड शैतान को पुकारते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah ko chodh kar dewiyon (godesses) ko mabood banate hain, Woh us baagi shaytaan ko mabood banate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh to Allah Taalaa ko chor ker sirf aurton ko pukartay hain aur dar asal yeh sirf sirkash shetan ko poojtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह को छोड़ कर देवियों (देवियों) को माबूद बनाते हैं, वो हमें बागी शैतान को माबूद बनाते हैं
عَرَبِيلَعَنَهُ اللَّهُ ۘ وَقالَ لَأَتَّخِذَنَّ مِن عِبادِكَ نَصيبًا مَفروضًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिसे अल्लाह ने धिक्कार दिया है। तथा उसने कहा था कि मैं तेरे बंदों में से एक निश्चित हिस्सा अवश्य लेकर रहूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Jisko Allah ne laanat zadah kiya hai (woh us shaytaan ki itaat kar rahey hain) jisne Allah se kaha tha ke “main tere bandon se ek muqarrar hissa lekar rahunga
Roman Urdu (Junagarhi)Jissay Allah ney laanat ki hai aur uss ney baira utahaya hai kay teray bandon mein say mein muqarrar shuda hissa ley ker rahon ga
Devnagri Urdu (Maududi)जिसको अल्लाह ने लानत ज्यादा किया है (वो हमें शैतान की इताअत) कर रहे हैं) जिसने अल्लाह से कहा था के “मैं तेरे बंदों से एक मुकर्रर हिसा लेकर रहूंगा
عَرَبِيوَلَأُضِلَّنَّهُم وَلَأُمَنِّيَنَّهُم وَلَآمُرَنَّهُم فَلَيُبَتِّكُنَّ آذانَ الأَنعامِ وَلَآمُرَنَّهُم فَلَيُغَيِّرُنَّ خَلقَ اللَّهِ ۚ وَمَن يَتَّخِذِ الشَّيطانَ وَلِيًّا مِن دونِ اللَّهِ فَقَد خَسِرَ خُسرانًا مُبينًا
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हिन्दी (Al-Omari)और मैं उन्हें अवश्य पथभ्रष्ट करूँगा, और उन्हें अवश्य आशाएँ दिलाऊँगा और उन्हें अवश्य आदेश दूँगा तो वे पशुओं के कान चीरेंगे तथा निश्चय उन्हें आदेश दूँगा, तो वे अवश्य अल्लाह की रचना में परिवर्तन करेंगे। तथा जो अल्लाह को छोड़कर शैतान को अपना मित्र बना ले, वह निश्चय खुले घाटे में पड़ गया।
Roman Urdu (Maududi)Main unhein behkaunga, main unhein aarzuon(vain desires) mein uljhaunga, main unehin hukum dunga aur woh mere hukum se jaanwaron ke kaan phadenge aur main unhein hukum dunga aur woh mere hukum se khudayi saakht mein radd o badal (disfigure Allah's creation) karenge”. Us Shaytan ko jisne Allah ke bajaye apna wali o sarparast bana liya woh sareeh nuqsaan mein padh gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur enhen raah say behkata rahon ga aur baatil umeeden dilata rahon ga aur enhen sikhaon ga kay janweron kay kaan cheer den aur inn say kahon ga kay Allah Taalaa ki banaee hui soorat ko bigar den suno! Jo shaks Allah ko chor ker shetan ko apna rafiq banaye ga woh sareeh nuksan mein doobay ga
Devnagri Urdu (Maududi)मैं उन्हें बहकाऊंगा, मैं उन्हें अरज़ूओं (व्यर्थ इच्छाओं) में उलझाऊंगा, मैं उन्हें हुकुम दूंगा और वो मेरे हुकुम से जानवरों के कान फाड़ेंगे और मैं उन्हें हुकुम दूंगा और वो मेरे हुकुम से खुदाई साख्त में रद्द ओ बदल करेंगे।'' हमें शैतान को जिसने अल्लाह के बजाय अपना वाली ओ सरपरस्त बना लिया वो सारे नुक्सान में पढ़ गया
عَرَبِييَعِدُهُم وَيُمَنّيهِم ۖ وَما يَعِدُهُمُ الشَّيطانُ إِلّا غُرورًا
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हिन्दी (Al-Omari)वह (शैतान) उनसे वादे करता है और उन्हें आशाएँ दिलाता है। (परंतु) शैतान उनसे जो वादे करता है, वे धोखे के सिवा कुछ नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh in logon se wadey karta hai aur inhein umeedein dilate hai, magar Shaytan ke saarey wadey bajuz fareb ke aur kuch nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh inn say zabani waday kerta rahey ga aur sabz baagh dikhata rahey ga (magar yad rakho!) shetan kay jo waday inn say hain woh sirasir fareb kaariyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो इन लोगों से वादे करता है और यहीं उम्मीदें फैलाती हैं, मगर शैतान के सारे वादे बाज़ु फ़रेब के और कुछ नहीं हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ مَأواهُم جَهَنَّمُ وَلا يَجِدونَ عَنها مَحيصًا
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हिन्दी (Al-Omari)वही लोग है जिनका ठिकाना जहन्नम है और वे उससे भागने का कोई रास्ता नहीं पाएंगे।
Roman Urdu (Maududi)In logon ka thikana jahannum hai jissey khalasi (escape) ki koi surat yeh na payenge
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh woh log hain jin ki jagah jahannum hai jahan say enhen chutkara na milay ga
Devnagri Urdu (Maududi)इन लोगों का ठिकाना जहन्नुम है जिसमें खलासी (पलायन) की कोई सूरत ये ना पायेगा
عَرَبِيوَالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ سَنُدخِلُهُم جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها أَبَدًا ۖ وَعدَ اللَّهِ حَقًّا ۚ وَمَن أَصدَقُ مِنَ اللَّهِ قيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम किए, हम उन्हें ऐसी जन्नतों में दाख़िल करेंगे, जिनके नीचे नहरें बहती हैं। वे उनमें हमेशा रहेंगे। यह अल्लाह का सच्चा वादा है और अल्लाह से अधिक सच्ची बात किसकी हो सकती है?
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jo iman le aayein aur neik amal karein, to unhein hum aisey baaghon mein dakhil karenge jinke nichey nehrein behti hongi aur woh wahan hamesha hamesha rahenge. Yeh Allah ka saccha wada hai aur Allah se badhkar kaun apni baat mein saccha hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo eman laye aur bhalay kaam keren humen unhen unn jannaton mein ley jayen gay jin kay neechay chashmay jari hain jahan yeh abad-al-abad rahen gay yeh hai Allah ka wada jo siasir sacha hai aur kaun hai jo apni baat mein Allah say ziyada sacha ho
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जो ईमान ले आयें और नेक अमल करें, तो उन्हें हम ऐसे बाघों में दखल देंगे जिनके बारे में पता चलता है और वो वहां हमेशा हमेशा रहेंगे. ये अल्लाह का सच्चा वादा है और अल्लाह से बढ़कर कौन अपनी बात में सच्चा होगा
عَرَبِيلَيسَ بِأَمانِيِّكُم وَلا أَمانِيِّ أَهلِ الكِتابِ ۗ مَن يَعمَل سوءًا يُجزَ بِهِ وَلا يَجِد لَهُ مِن دونِ اللَّهِ وَلِيًّا وَلا نَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)(मोक्ष) न तुम्हारी कामनाओं पर निर्भर है, न अह्ले किताब की कामनाओं पर। जो भी बुरा काम करेगा, उसका बदला पाएगा तथा अल्लाह के सिवा अपना कोई रक्षक और सहायक नहीं पाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Anjaam-e- kaar na tumhari aarzuon par mauquf hai na ehle kitab ki aarzuon par. Jo bhi burayi karega uska phal payega aur Allah ke muqable mein apne liye koi haami o madadgaar na paa sakega
Roman Urdu (Junagarhi)Haqeeqat-e-haal na to tumhari aarzoo kay mutabiq hai aur na ehal-e-kitab ki umeedon per moqoof hai jo bura keray ga uss ki saza paye ga aur kissi ko na paye ga jo uss ki himayat-o-madad Allah kay pass ker sakay
Devnagri Urdu (Maududi)अंजाम-ए- कार ना तुम्हारी आरज़ूओं पर मौक़ुफ़ है न एहले किताब की आरज़ूओं पर। जो भी बुरा करेगा उसका फल पाएगा और अल्लाह के मुकाबले में अपने लिए कोई हमी ओ मददगार न पा सकेगा
عَرَبِيوَمَن يَعمَل مِنَ الصّالِحاتِ مِن ذَكَرٍ أَو أُنثىٰ وَهُوَ مُؤمِنٌ فَأُولٰئِكَ يَدخُلونَ الجَنَّةَ وَلا يُظلَمونَ نَقيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो अच्छे कार्य करेगा, चाहे नर हो या नारी, जबकि वह मोमिन हो, तो ऐसे लोग जन्नत में प्रवेश पाएँगे और उनका खजूर की गुठली के ऊपरी भाग के गड्ढे के बराबर भी हक़ नहीं मारा जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo neik amal karega, khwa mard ho ya aurat, bashart ye ke ho woh momin, to aisey hi log Jannat mein daakhil honge aur unki zarra barabar haqq talafi na honay payegi
Roman Urdu (Junagarhi)Jo eman wala ho mard ho ya aurat aur woh nek aemaal keray yaqeenan aisay log jannat mein jayen gay aur khujoor ki guthli kay shigaf kay barabar bhi unn ka haq na maara jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)और जो नया अमल करेगा, ख्वा मर्द हो या औरत, बशारत ये के हो वो मोमिन, तो ऐसे ही लोग जन्नत में दाखिल होंगे और उनकी ज़र्रा बराबर हक़ तलाफ़ी ना होने देगी
عَرَبِيوَمَن أَحسَنُ دينًا مِمَّن أَسلَمَ وَجهَهُ لِلَّهِ وَهُوَ مُحسِنٌ وَاتَّبَعَ مِلَّةَ إِبراهيمَ حَنيفًا ۗ وَاتَّخَذَ اللَّهُ إِبراهيمَ خَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उस व्यक्ति से अच्छा धर्म किसका हो सकता है, जिसने अपना शीश अल्लाह के सामने झुका दिया और वह अच्छे कार्य करने वाला (भी) हो तथा इबराहीम के तरीक़े का अनुसरण करे, जो बहुदेववाद से कटकर एकेश्वरवाद की ओर एकाग्र थे, और अल्लाह ने इबराहीम को अपना मित्र बनाया था।
Roman Urdu (Maududi)Us shaks se behter aur kiska tareeqe zindagi ho sakta hai jisne Allah ke aagey sar-e-tasleem kham kardiya aur apna rawayya neik rakkha aur yaksu hokar Ibrahim ke tareeqe ki pairwi ki, us Ibrahim ke tareeqe ki jisey Allah ne apna dost bana liya tha
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-aetbaar deen kay uss say acha kaun hai? Jo apney ko Allah kay tabey ker dey aur ho bhi neko kaar sath hi yaksui walay ibrahim kay deen ki pairwee ker raha ho aur ibrahim (alh-e-salam) ko Allah ney apna dost bana liya hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमसे बेहतर और किसका तारीख़े ज़िंदगी हो सकती है जिसने अल्लाह के आगे सर-ए-तस्लीम ख़म करदिया और अपना रवैय्या नीक रक्खा और यक्सू होकर इब्राहिम के तारीख़े की जोड़ी की, उस इब्राहिम के तारीख़े की जिसने अल्लाह ने अपना दोस्त बना लिया था
عَرَبِيوَلِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۚ وَكانَ اللَّهُ بِكُلِّ شَيءٍ مُحيطًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है, सब अल्लाह ही का है और अल्लाह हर चीज़ को घेरे हुए है।
Roman Urdu (Maududi)Aasmaano aur zameen mein jo kuch hai Allah ka hai aur Allah har cheez par muhit hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aasamanon aur zamin mein jo kuch hai sab Allah hi ka hai aur Allah Taalaa her cheez ko gherney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)आसमान और ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह का है और अल्लाह हर चीज़ पर निर्भर है
عَرَبِيوَيَستَفتونَكَ فِي النِّساءِ ۖ قُلِ اللَّهُ يُفتيكُم فيهِنَّ وَما يُتلىٰ عَلَيكُم فِي الكِتابِ في يَتامَى النِّساءِ اللّاتي لا تُؤتونَهُنَّ ما كُتِبَ لَهُنَّ وَتَرغَبونَ أَن تَنكِحوهُنَّ وَالمُستَضعَفينَ مِنَ الوِلدانِ وَأَن تَقوموا لِليَتامىٰ بِالقِسطِ ۚ وَما تَفعَلوا مِن خَيرٍ فَإِنَّ اللَّهَ كانَ بِهِ عَليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) लोग आपसे स्त्रियों के बारे में फ़तवा (शरई हुक्म) पूछते हैं। आप कह दें कि अल्लाह तुम्हें उनके बारे में फतवा देता है, तथा किताब की वे आयतें भी जो अनाथ स्त्रियों के बारे में तुम्हें पढ़कर सुनाई जाती हैं, जिन्हें तुम उनके निर्धारित अधिकार नहीं देते और तुम चाहते हो कि उनसे विवाह कर लो, तथा कमज़ोर बच्चों के बारे में भी यही हुक्म है, और यह कि तुम अनाथों के मामले में न्याय पर क़ायम रहो। तथा तुम जो भी भलाई करते हो, अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है।
Roman Urdu (Maududi)Log tumse auraton ke maamle mein fatwa puchte hain, kaho Allah tumhein unke maamale mein fatwa deta hai, aur saath hi woh ehkam bhi yaad dilata hai jo pehle se tumko is kitab mein sunaye jaa rahey hain, yani woh ehkaam jo un yateem ladkiyon ke mutaaliq hain jinke haqq tum ada nahin karte aur jinke nikah karne se tum baaz rehte ho (ya lalaj ki bina par tum khud unsey nikah karlena chahte ho), aur woh ehkam jo un bacchon ke mutaaliq hain jo bechare koi zoar nahin rakhte , Allah tumhein hidayat karta hai ke yateemon ke saath insaf par qayam raho, aur jo bhalayi tum karoge woh Allah ke ilm se chupi na reh jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aap say aurton kay baray mein hukum daryaft kertay hain aap keh dijiye! Kay khud Allah unn kay baray mein hukum dey raha hai aur quran ki woh aayaten jo tum per inn yateem larkiyon kay baray mein parhi jati hain jinhen inn ka muqarrar haq tum nahi detay aur enhen apney nikkah mein laaney ki raghbat rakhtay ho aur kamzor bachon kay baray mein aur iss baray mein kay yateemon ki kaar guzari insaf kay sath kero. Tum jo nek kaam kero bey shuba Allah ussay poori tarah janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोग तुमसे औरतों के मामले में फतवा पूछते हैं, कहो अल्लाह तुम्हें उनके मामले में फतवा देता है, और साथ ही वह एहकाम भी याद दिलाता है जो पहले से तुमको इस किताब मैं सुनाए जा रहे हैं, यानी वो एहकाम जो उन यतीम लड़कियों के मुतालिक हैं जिनका हक तुम अदा नहीं करते और जिनका निकाह करने से तुम बाज रहते हो (या लालेज की बिना पर तुम खुद उनसे निकाह करना चाहते हो), और वो एहकाम जो उन बच्चों के मुतालिक हैं जो बेचारे कोई ज़ोर नहीं रखते, अल्लाह तुम्हें हिदायत करता है कि यतीमों के साथ इन्साफ पर कायम रहो, और जो भलाई तुम करोगे वो अल्लाह के इल्म से छुपी न रह जाएगी
عَرَبِيوَإِنِ امرَأَةٌ خافَت مِن بَعلِها نُشوزًا أَو إِعراضًا فَلا جُناحَ عَلَيهِما أَن يُصلِحا بَينَهُما صُلحًا ۚ وَالصُّلحُ خَيرٌ ۗ وَأُحضِرَتِ الأَنفُسُ الشُّحَّ ۚ وَإِن تُحسِنوا وَتَتَّقوا فَإِنَّ اللَّهَ كانَ بِما تَعمَلونَ خَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि किसी स्त्री को अपने पति की ओर से ज़्यादती या बेरुखी का डर हो, तो उन दोनों पर कोई दोष नहीं कि आपस में समझौता कर लें और समझौता कर लेना ही बेहतर है। तथा लोभ एवं कंजूसी तो मानव स्वभाव में शामिल है। परंतु यदि तुम एक-दूसरे के साथ उपकार करो और (अल्लाह से) डरते रहो, तो निःसंदेह अल्लाह तुम्हारे कर्मों से सूचित है।
Roman Urdu (Maududi)Jab kisi aurat ko apne shohar se badhsulooki ya be rukhi ka khatara ho to koi muzahiqa nahin agar miya aur biwi (kuch huqooq ki kami beshi par) aapas mein sulah karlein, sulah bahar haal behtar hai. Nafs tangg dili ke taraf jaldi mayil ho jatey hain, lekin agar tumlog ehsan se pesh aao aur khuda tarsi se kaam lo to yaqeen rakkho ke Allah tumhare is tarz-e-amal se be-khabar na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Agar kissi aurat ko apney shohar ki bad dimaghi aur bey perwahi ka khof ho to dono aapas mein jo sulah ker len uss mein kissi per koi gunah nahi. Sulah boht behtar cheez hai tama her her cheez mein shamil ker di gaee hai. Agar tum acha sulook kero aur perhezgari kero to tum jo ker rahey ho uss per Allah Taalaa poori tarah khabardaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)जब किसी औरत को अपने शोहर से बढ़ सुलूकी या रुखी का ख़तरा हो तो कोई मुज़हिक़ा नहीं अगर मिया और बीवी (कुछ हुक़ूक़ की कमी पर) आपस में सुलह कर लें, सुलह बाहर हाल बेहतर है। नफ़्स तंग दिली के तरफ जल्दी मईल हो जाते हैं, लेकिन अगर तुमलोग एहसान से पेश आओ और खुदा तरसी से काम लो तो यकीन रखों के अल्लाह तुम्हारे इस तर्ज़-ए-अमल से बे-खबर न होगी
عَرَبِيوَلَن تَستَطيعوا أَن تَعدِلوا بَينَ النِّساءِ وَلَو حَرَصتُم ۖ فَلا تَميلوا كُلَّ المَيلِ فَتَذَروها كَالمُعَلَّقَةِ ۚ وَإِن تُصلِحوا وَتَتَّقوا فَإِنَّ اللَّهَ كانَ غَفورًا رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम पत्नियों के बीच पूर्ण न्याय कदापि नहीं कर सकते, चाहे तुम इसके कितने ही इच्छुक हो। अतः (अवांछित पत्नी से) पूरी तरह विमुख न हो जाओ कि उसे अधर में लटकी हुई छोड़ दो। और यदि तुम आपस में सामंजस्य बना लो और (अल्लाह से) डरते रहो, तो निःसंदेह अल्लाह क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान है।
Roman Urdu (Maududi)Biwiyon ke darmiyan poora poora adal karna tumhare bas mein nahin hai, tum chaho bhi to ispar qaadir nahin ho sakte, lihaza (kanoon e ilahi ka mansha poora karne ke liye yeh kafi hai ke) ek biwi ki taraf is tarah na jhuk jao ke dusri ko adhar latakta (in suspense) chodh do. Agar tum apna tarz e amal durust rakkho aur Allah se darte raho to Allah chashm poshi (All-Forgiving) karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum say yeh to kabhi na ho sakay ga kay apni tamam biwiyon mein her tarah adal kero go tum iss ki kitni hi khuwaish-o-kosish ker lo iss liye bilkul hi aik ki taraf maeel ho ker doosri ko udhar latakti hui na choro aur agar tum islaah kero aur taqwa ikhtiyar kero to be-shak Allah Taalaa bari maghfirat aur rehmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)बीवीयों के दरमियाँ पूरा-पूरा अदल करना तुम्हारे बस में नहीं है, तुम चाहो भी तो इसपर कादिर नहीं हो सकते, लिहाजा (कानून ए इलाही का इरादा पूरा करने के लिए ये काफी है के) एक बीवी की तरफ इस तरह ना झुक जाओ के दूसरी को अधर लटकता (सस्पेंस में) छोड़ दो। अगर तुम अपना तर्ज़ ए अमल दुरुस्त रखो और अल्लाह से डरते रहो अल्लाह के लिए चश्म पोशी (सर्व-क्षमाशील) करने वाला और रहम फ़रमान वाला है
عَرَبِيوَإِن يَتَفَرَّقا يُغنِ اللَّهُ كُلًّا مِن سَعَتِهِ ۚ وَكانَ اللَّهُ واسِعًا حَكيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि दोनों अलग हो जाएँ, तो अल्लाह अपने व्यापक अनुग्रह से हर-एक को (दूसरे से) बेनियाज़ कर देगा और अल्लाह व्यापक अनुग्रह वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Lekin agar zawjain ek dusre se alag hi ho jayen to Allah apni waseeh qudrat se har ek ko dusre ki mohtaji se be niyaz kardega. Allah ka daaman bahut kushada hai aur woh dana o beena hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar miyan biwi huda hojayen to Allah Taalaa apni wusat say her aik ko bey niaz ker dey ga Allah Taalaa wusat wala hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)लेकिन अगर ज़वजैन एक दूसरे से अलग ही हो जाएं तो अल्लाह अपनी वसीह क़ुदरत से हर एक को दूसरे की मोहताजी से बे नियाज़ करडेगा. अल्लाह का दामन बहुत कुशादा है और वो दाना ओ बीना है
عَرَبِيوَلِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۗ وَلَقَد وَصَّينَا الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ مِن قَبلِكُم وَإِيّاكُم أَنِ اتَّقُوا اللَّهَ ۚ وَإِن تَكفُروا فَإِنَّ لِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۚ وَكانَ اللَّهُ غَنِيًّا حَميدًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो कुछ आकाशों और धरती में है, सब अल्लाह ही का है। और हमने तुमसे पूर्व किताब दिए गए लोगों को तथा (खुद) तुम्हें आदेश दिया है कि अल्लाह से डरते रहो। और यदि तुम कुफ़्र करोगे, तो (याद रखो कि) जो कुछ आकाशों तथा धरती में है, वह अल्लाह ही का है तथा अल्लाह बेनियाज़ और स्तुत्य है।
Roman Urdu (Maududi)Aasmano aur zameen mein jo kuch bhi hai sab Allah hi ka hai, tumse pehle jinko humne kitab di thi unhein bhi yahi hidayat ki thi aur ab tumko bhi yahi hidayat karte hain ke khuda se darte huey kaam karo, lekin agar tum nahin maante to na maano, aasman o zameen ki saari cheezon ka maalik Allah hi hai aur woh beniyaz hai, har tareef ka mustahiq
Roman Urdu (Junagarhi)Zamain-o-aasamanon ki her her cheez Allah Taalaa hi ki milkiyat mein hai aur waqaee hum ney unn logon ko jo tum say pehlay kitab diye gaye thay aur tum ko bhi yehi hukum kiya hai kay Allah say dartay raho aur agar tum kufur kero to yaad rakho kay Allah kay liye hai jo kuch aasmanon mein hai aur jo kuch zamin mein hai aur Allah boht bey niaz aur tareef kiya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)आसमानो और ज़मीन में जो कुछ भी है सब अल्लाह ही का है, तुमसे पहले जिनको हमने किताब दी थी उन्हें भी यहीं हिदायत की थी और अब तुमको भी यही हिदायत करते हैं के खुदा से डरते हुए काम करो, लेकिन अगर तुम नहीं मानते तो ना मानो, आसमान ओ ज़मीन की सारी चीज़ों का मालिक अल्लाह हाय है और वो बेनियाज़ है, हर तारीफ का मुस्तहिक
عَرَبِيوَلِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۚ وَكَفىٰ بِاللَّهِ وَكيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आकाशों एवं धरती की सारी चीज़ें अल्लाह ही की हैं और अल्लाह कार्यसाधक के रूप में काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Haan Allah hi maalik hai un sab cheezon ka jo aasmano mein hain aur jo zameen mein hain, aur kaarsaazi ke liye bas wahi kafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah kay ikthiyar mein hain aasmanon ki sab cheezen aur zamin ki bhi aur Allah kaar saaz kafi hai
Devnagri Urdu (Maududi)हाँ अल्लाह हाय मालिक है उन सब चीज़ों का जो आसमान में है और जो ज़मीन में है, और कारसाज़ी के लिए बस वही काफ़ी है
عَرَبِيإِن يَشَأ يُذهِبكُم أَيُّهَا النّاسُ وَيَأتِ بِآخَرينَ ۚ وَكانَ اللَّهُ عَلىٰ ذٰلِكَ قَديرًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो! यदि वह चाहे, तो तुम्हें ले जाए और (तुम्हारे स्थान पर) दूसरों को ले आए तथा अल्लाह ऐसा करने पर पूरी शक्ति रखता है।
Roman Urdu (Maududi)Agar woh chahe to tum logon ko hata kar tumhari jagah dusron ko le aaye, aur woh iski poori qudrat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar ussay manzoor ho to aey logo! Woh tum sab ko ley jaye aur doosron ko ley aaye Allah Taalaa iss per poori qudrat rakhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर वो चाहे तो तुम लोगों को हटा कर तुम्हारी जगह दूसरे को ले आये, और वो इसकी पूरी क़ुदरत रखता है
عَرَبِيمَن كانَ يُريدُ ثَوابَ الدُّنيا فَعِندَ اللَّهِ ثَوابُ الدُّنيا وَالآخِرَةِ ۚ وَكانَ اللَّهُ سَميعًا بَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)जो व्यक्ति दुनिया का बदला चाहता है, तो (जान लो कि) अल्लाह के पास दुनिया और आखिरत (दोनों) का बदला है तथा अल्लाह सब कुछ सुनने वाला और सब कुछ देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jo shaks mehaz sawab e duniya ka taalib ho usey maloom hona chahiye ke Allah ke paas sawab e duniya bhi hai aur sawab e aakhirat bhi, aur Allah sami o baseer (sunnay aur dekhne wala) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo shaks duniya ka sawab chahta ho to (yaad rakho kay) Allah Taalaa kay pass to duniya aur aakhirat (dono) ka sawab mojood hai aur Allah Taalaa boht sunney wala aur khoob dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो शक्स महज़ सवाब ए दुनिया का तालिब हो उसे मालूम होना चाहिए के अल्लाह के पास सवाब ए दुनिया भी है और सवाब ए आख़िरत भी, और अल्लाह समी ओ बसीर (सुनने और देखने वाला) है
عَرَبِي۞ يا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا كونوا قَوّامينَ بِالقِسطِ شُهَداءَ لِلَّهِ وَلَو عَلىٰ أَنفُسِكُم أَوِ الوالِدَينِ وَالأَقرَبينَ ۚ إِن يَكُن غَنِيًّا أَو فَقيرًا فَاللَّهُ أَولىٰ بِهِما ۖ فَلا تَتَّبِعُوا الهَوىٰ أَن تَعدِلوا ۚ وَإِن تَلووا أَو تُعرِضوا فَإِنَّ اللَّهَ كانَ بِما تَعمَلونَ خَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! मज़बूती के साथ न्याय पर जम जाने वाले और अल्लाह की प्रसन्नता के लिए गवाही देने वाले बन जाओ। चाहे वह (गवाही) स्वयं तुम्हारे अपने या माता-पिता और रिश्तेदारों के विरुद्ध ही क्यों न हो। यदि कोई धनवान अथवा निर्धन हो, तो अल्लाह उन दोनों (के हित) का अधिक हक़दार है। अतः तुम मन की इच्छा का पालन न करो कि न्याय छोड़ दो। यदि तुम घुमा फिरा के गवाही दोगे या गवाही देने से कतराओगे, तो निःसंदेह अल्लाह तुम्हारे कार्यों से सूचित है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, insaf ke alambardaar aur khuda wastey ke gawah bano agarchey tumhare insaaf aur tumhari gawahi ki zadh (against) khud tumhari apni zaat par ya tumhare walidain aur rishtedaaron par hi kyun na padhti ho, fareeq maamala khwa maaldaar ho ya gareeb, Allah tumse zyada unka khair khwa hai. Lihaza apni khwahish e nafs ki pariwi mein adal (insaf) se baaz na raho aur agar tumne lagi lipti baat kahi ya sacchayi se pehlu bachaya to jaan rakkho ke jo kuch tum karte ho Allah koi uski khabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Adal-o-insaf per mazbooti say jamm janey walay aur khushnoodi-e-maula kay liye sachi gawahi denay walay bann jao go woh khud tumharay apney khilaf ho ya apney maa baap kay ya rishtay daar azizon kay woh shaks agar amir ho to aur faqir ho to dono kay sath Allah ko ziyada talluq hai iss liye tum khuwaish-e-nafss kay peechay parr ker insaf na chor dena aur gar tum ney kajj biyani ya pehloo tahi ki to jaan lo kay jo kuch tum kero gay Allah Taalaa poori tarah uss say ba khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, इन्साफ के अलंबरदार और खुदा बर्बादी के गवाह बनो अगरचे तुम्हारे इन्साफ और तुम्हारी गवाही की जड़ (खिलाफ) खुद तुम्हारी अपनी जात पर या तुम्हारे वलीदीन और रिश्तेदारों पर ही क्यों ना पढ़ती हो, फरीक मामला ख्वा मालदार हो या गरीब, अल्लाह तुमसे ज्यादा उनका खैर ख्वाह है। लिहाजा अपनी ख्वाहिश ए नफ्स की परिवार में अदल (इंसाफ) से बाज़ न रहो और अगर तुमने लंबी लिपटी बात कही या सच्चाई से पहलू बचाया तो जान रख्खो के जो कुछ तुम करते हो अल्लाह कोई उसकी खबर है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا آمِنوا بِاللَّهِ وَرَسولِهِ وَالكِتابِ الَّذي نَزَّلَ عَلىٰ رَسولِهِ وَالكِتابِ الَّذي أَنزَلَ مِن قَبلُ ۚ وَمَن يَكفُر بِاللَّهِ وَمَلائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ وَاليَومِ الآخِرِ فَقَد ضَلَّ ضَلالًا بَعيدًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अल्लाह, उसके रसूल और उस पुस्तक पर ईमान लाओ जो अल्लाह ने अपने रसूल (मुहम्मद) पर उतारी और उस किताब पर भी जो उसने इससे पहले उतारी। और जो व्यक्ति अल्लाह, उसके फ़रिश्तों, उसकी पुस्तकों और अंतिम दिवस (परलोक) का इनकार करे, वह निश्चय बहुत दूर की गुमराही में जा पड़ा।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, iman lao Allah par aur uske Rasool par aur us kitab par jo Allah ne apne Rasool par nazil ki hai aur har us kitab par jo ussey pehle woh nazil kar chuka hai. Jisne Allah aur uske malaika aur uski kitabon aur uske Rasoolon aur roz e aakhirat se kufr kiya woh gumrahi mein bhatak kar bahut door nikal gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Allah Taalaa per uss kay rasool (PBUH) per aur uss kitab per jo uss ney apney rasool (PBUH) per utari hai aur unn kitabon per jo iss say pehlay uss ney nazil farmaee hain eman lao! Jo shaks Allah Taalaa say aur uss kay farishton say aur uss ki kitabon say aur uss kay rasoolon say aur qayamat kay din say kufur keray woh to boht baray door ki gumrahi mein jaa para
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ईमान लाओ अल्लाह पर और उसके रसूल पर और उस किताब पर जो अल्लाह ने अपने रसूल पर नाज़िल की है और हर उस किताब पर जो उसने पहले वो नाज़िल कर चुका है। जिसने अल्लाह और उसकी मलिका और उसकी किताबें और उसके रसूलन और रोज ए आखिरीरत से कुफ्र किया वो गुमराही में भटक कर बहुत दूर निकल गया
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا ثُمَّ كَفَروا ثُمَّ آمَنوا ثُمَّ كَفَروا ثُمَّ ازدادوا كُفرًا لَم يَكُنِ اللَّهُ لِيَغفِرَ لَهُم وَلا لِيَهدِيَهُم سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो ईमान लाए, फिर काफ़िर हो गए, फिर ईमान लाए, फिर काफ़िर हो गए, फिर कुफ़्र में बढ़ते चले गए,अल्लाह उन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा और न उन्हें सीधा मार्ग दिखाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jo iman laye , phir kufr kiya, phir iman laye , phir kufr kiya, phir apne kufr mein badhte chale gaye, to Allah hargiz unko maaf na karega aur na kabhi unko raah e raast dikhaeyga
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ney eman qabool ker kay phir kufur kiya phir eman laa ker phir kufur kiya phir apney kufur mein barh gaye Allah Taalaa yaqeenan unhen na bakshay ga aur na unhen raah-e-hidayat sujhaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जो ईमान लाए, फिर कुफ्र किया, फिर ईमान लाए, फिर कुफ्र किया, फिर अपने कुफ्र में बढ़ते चले गए, अल्लाह हरगिज उनको माफ न करेगा और न कभी उनको राह ए रास्ता दिखाएगा
عَرَبِيبَشِّرِ المُنافِقينَ بِأَنَّ لَهُم عَذابًا أَليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) को शुभ-सूचना सुना दें कि उनके लिए दुःखदायी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo munafiq ehle iman ko chodh kar kafiron ko apna rafeeq banate hain unhein yeh musda (give tidings) suna do ke unke liye dardnaak saza tayyar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Munafiqon ko iss amar ki khabar phonca do kay unn kay liye dard naak azab yaqeeni hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जो मुनाफिक एहले ईमान को छोड़ कर काफिरों को अपना रफीक बनाते हैं उन्हें ये मुस्दा (खबर दें) सुना दो के उनके लिए दर्दनाक सजा तय्यार है
عَرَبِيالَّذينَ يَتَّخِذونَ الكافِرينَ أَولِياءَ مِن دونِ المُؤمِنينَ ۚ أَيَبتَغونَ عِندَهُمُ العِزَّةَ فَإِنَّ العِزَّةَ لِلَّهِ جَميعًا
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हिन्दी (Al-Omari)जो ईमान वालों को छोड़कर काफ़िरों को अपना मित्र बनाते हैं, क्या वे उनके पास मान-सम्मान ढूँढ़ते हैं? तो निःसंदेह सब मान-सम्मान अल्लाह ही के लिए है।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log izzat ki talab mein unke paas jatey hain? Halaanke izzat to sari ki sari Allah hi ke liye hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jin ki yeh halat hai kay musalmanon ko chor ker kafiron ko dost banatay phirtay hain kiya unn kay pass izzat ki talash mein jatay hain? (to yaad rakhen kay) izzat to sari ki sari Allah Taalaa kay qabzay mein hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग इज्जत की तालाब में उनके पास जाते हैं? हालांके इज्जत तो सारी की सारी अल्लाह ही के लिए है
عَرَبِيوَقَد نَزَّلَ عَلَيكُم فِي الكِتابِ أَن إِذا سَمِعتُم آياتِ اللَّهِ يُكفَرُ بِها وَيُستَهزَأُ بِها فَلا تَقعُدوا مَعَهُم حَتّىٰ يَخوضوا في حَديثٍ غَيرِهِ ۚ إِنَّكُم إِذًا مِثلُهُم ۗ إِنَّ اللَّهَ جامِعُ المُنافِقينَ وَالكافِرينَ في جَهَنَّمَ جَميعًا
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ने तुम्हारे लिए अपनी पुस्तक में (यह आदेश) अवतिरत किया है कि जब तुम सुनो कि अल्लाह की आयतों का इनकार किया जा रहा है तथा उनका मज़ाक़ उड़ाया जा रहा है, तो ऐसा करने वालों के साथ न बैठो, यहाँ तक कि वे दूसरी बात में लग जाएँ। अन्यथा तुम भी उन्हीं जैसे हो जाओगे। निश्चय अल्लाह मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) और काफ़िरों को एक साथ जहन्नम में इकट्ठा करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah is kitab mein tumko pehle hi hukum de chuka hai ke jahan tum suno ke Allah ki aayat ke khilaf kufr baka jaa raha hai aur unka mazaq udaya jaa raha hai wahan na baitho jab tak ke log kisi dusri baat mein na lag jayein, ab agar tum aisa karte ho to tum bhi unhi ki tarah ho. Yaqeen jaano ke Allah munafiqon aur kafiron ko jahannum mein ek jagah jamaa karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa tumharay pass apni kitab mein yeh hukum utaar chuka hai kay tum jab kissi majlis walon ko Allah Taalaa ki aayaton kay sath kufur kertay aur mazaq uratay huye suno to uss majmay mein unn kay sath na betho! Jab tak kay woh iss kay ilawa aur baaten na kerney lagen (werna) tum bhi uss waqt unhi jaisay ho yaqeenan Allah Taalaa tamam kafiron aur sab munafiqon ko jahannum mein jama kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह किताब में तुमको पहले ही हुकुम दे चुका है के जहां तुम सुनो अल्लाह की आयत के खिलाफ कुफ्र बका जा रहा है और उनका मजाक उड़ाया जा रहा है वहां ना बैठो जब तक के लोग किसी दूसरी बात में ना लग जायें, अब अगर तुम ऐसा करते हो तो तुम भी उनकी तरह हो। यकीन जानो के अल्लाह मुनाफिकों और काफिरों को जहन्नुम में एक जगह जमा करने वाला है
عَرَبِيالَّذينَ يَتَرَبَّصونَ بِكُم فَإِن كانَ لَكُم فَتحٌ مِنَ اللَّهِ قالوا أَلَم نَكُن مَعَكُم وَإِن كانَ لِلكافِرينَ نَصيبٌ قالوا أَلَم نَستَحوِذ عَلَيكُم وَنَمنَعكُم مِنَ المُؤمِنينَ ۚ فَاللَّهُ يَحكُمُ بَينَكُم يَومَ القِيامَةِ ۗ وَلَن يَجعَلَ اللَّهُ لِلكافِرينَ عَلَى المُؤمِنينَ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)जो तुम्हारी (अच्छी या बुरी स्थिति की) प्रतीक्षा में रहते हैं; यदि अल्लाह की ओर से तुम्हें विजय प्राप्त हो, तो वे कहते हैं : क्या हम तुम्हारे साथ न थे? और यदि काफ़िरों को कोई भाग प्राप्त हो, तो (उनसे) कहते हैं : क्या हम तुम्हारी मदद के लिए खड़े नहीं हुए थे और तुम्हें ईमान वालों से बचाया नहीं था? अतः अल्लाह क़ियामत के दिन तुम्हारे बीच निर्णय करेगा और अल्लाह काफ़िरों के लिए ईमान वालों पर हरगिज़ कोई रास्ता नहीं बनाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Yeh munafiq tumhare maamale mein intezar kar rahey hain (ke ount kis karwat baithta hai) Agar Allah ki taraf se fatah tumhari hui to aa kar kahenge ke kya hum tumhare saath na thay? Agar kafiron ka palla bhari raha to unse kahenge ke kya hum tumhare khilaf ladne par qaadir na thay aur phir bhi humne tumko musalmaano se bachaya? Bas Allah hi tumhare aur unke maamle ka faisla qayamat ke roz karega aur (is faisley mein) Allah ne kafrion ke liye musalmaano par gaalib aane ki hargiz koi sabeel nahin rakkhi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log tumharay anjam kaar ka intizar kertay rehtay hain phir agar tumhen Allah fatah dey to yeh kehtay hain kay kiya hum tumharay sathi nahi aur kafiron ko thora sa ghlba mill jaye to (unn say) kehtay hain kay hum tum per ghalib na aaney lagay thay aur kiya hum ney tumhen musalmanon kay haathon say na bachaya tha? Pus qayamat mein khud Allah Taalaa tumharay darmiyan faisla keray ga aur Allah Taalaa kafiron ko eman walon per hergiz raah na dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)ये मुनाफिक तुम्हारे मामले में इंतजार कर रहे हैं (किस करवट बैठा है) अगर अल्लाह की तरफ से फतह तुम्हारी हुई तो आ कर कहेंगे के क्या हम तुम्हारे साथ ना थे? अगर काफिरों का पल्ला भारी रहा तो वे कहेंगे कि क्या हम तुम्हारे खिलाफ लड़ने पर कादिर न थे और फिर भी हमने तुमको मुसलमानों से बचाया? बस अल्लाह ही तुम्हारे और उनके मामले का फैसला कयामत के रोज करेगा और (इस फैसले में) अल्लाह ने काफिरों के लिए मुसलमानों पर गालिब आने की हरगिज कोई सबील नहीं रखी है
عَرَبِيإِنَّ المُنافِقينَ يُخادِعونَ اللَّهَ وَهُوَ خادِعُهُم وَإِذا قاموا إِلَى الصَّلاةِ قاموا كُسالىٰ يُراءونَ النّاسَ وَلا يَذكُرونَ اللَّهَ إِلّا قَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मुनाफ़िक़ लोग अल्लाह को धोखा दे रहे हैं, हालाँकि उसी ने उन्हें धोखे में डाल रखा है। और जब वे नमाज़ के लिए खड़े होते हैं, तो आलसी होकर खड़े होते हैं। वे लोगों के सामने दिखावा करते हैं और अल्लाह को बहुत कम ही याद करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh munafiq Allah ke saath dhoke-baazi kar rahey hain halaanke dar haqeeqat Allah hi ne inhein dhoke mein daal rakkha hai. Jab yeh namaz ke liye uthte hain to kasmasate huey mehaz logon ko dikhane ki khatir uthte hain, aur khuda ko kam hi yaad karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak munafiq Allah say chaal baziyan ker rahey hain aur woh enhen iss chaal bazi ka badla denay wala hai aur jab namaz ko kharay hotay hain to bari kaahili ki halat mein kharay hotay hain sirf logon ko dikhatay hain aur yaad-e-elahee to yun hi si baraye naam kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये मुनाफिक अल्लाह के साथ धोखे-बाजी कर रहे हैं हलांके दर हकीकत अल्लाह हाय ने इन्हें धोखे में डाल रखा है। जब ये नमाज के लिए उठते हैं तो कसमसाते हुए मेहज़ लोगों को दिखाने की खातिर उठते हैं, और खुदा को काम ही याद करते हैं
عَرَبِيمُذَبذَبينَ بَينَ ذٰلِكَ لا إِلىٰ هٰؤُلاءِ وَلا إِلىٰ هٰؤُلاءِ ۚ وَمَن يُضلِلِ اللَّهُ فَلَن تَجِدَ لَهُ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)वे कुफ़्र और ईमान के बीच असमंजस में पड़े हुए हैं, न इनके साथ और न उनके साथ। दरअसल, जिसे अल्लाह गुमराह कर दे, आप उसके लिए हरगिज़ कोई रास्ता नहीं पाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Kufr o iman ke darmiyan dawa-dol hain, na purey is taraf hain na purey us taraf. Jisey Allah ne bhatka diya ho uske liye tum koi raasta nahin paa sakte
Roman Urdu (Junagarhi)Woh darmiyan mein hi moalliq dagmaga rahey hain na pooray unn ki taraf aur na sahih tor per unn ki taraf aur jisay Allah Taalaa gumrahi mein daal dey to tu uss kay liye koi raah na paye ga
Devnagri Urdu (Maududi)कुफ्र ओ ईमान के दरमियान दावा-डोल हैं, ना पूरे इस तरफ हैं ना पूरे हमारी तरफ। जैसे अल्लाह ने भटका दिया हो उसके लिए तुम कोई रास्ता नहीं पा सकते
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَتَّخِذُوا الكافِرينَ أَولِياءَ مِن دونِ المُؤمِنينَ ۚ أَتُريدونَ أَن تَجعَلوا لِلَّهِ عَلَيكُم سُلطانًا مُبينًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! मोमिनों को छोड़कर काफ़िरों को मित्र न बनाओ। क्या तुम अपने विरुद्ध अल्लाह को खुला तर्क देना चाहते हो?
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, momin ko chodh kar kafiron ko apna rafeeq na banao. Kya tum chahte ho ke Allah ko apne khilaf sareeh hujjat dedo
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Mominon ko chor ker kafiron ko dost na banao kiya tum yeh chahtay ho kay apney upper Allah Taalaa ki saaf hujjat qaeem kerlo
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, मोमिन को छोड़ कर काफिरों को अपना रफीक ना बनाओ। क्या तुम चाहते हो के अल्लाह को अपना खिलाफ़ सरीह हुज्जत देदो
عَرَبِيإِنَّ المُنافِقينَ فِي الدَّركِ الأَسفَلِ مِنَ النّارِ وَلَن تَجِدَ لَهُم نَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय ही मुनाफ़िक़ लोग नरक के सबसे निचले स्थान में होंगे और तुम उनका हरगिज़ कोई सहायक नहीं पाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeen jaano ke munafiq jahannum ke sabse nichey tabqe mein jayenge aur tum kisi ko unka madadgaar na paogey
Roman Urdu (Junagarhi)Munafiq to yaqeenan jahannum kay sab say neechay kay tabqay mein jayen gay na mumkin hai kay tu inn ka koi madadgar paa ley
Devnagri Urdu (Maududi)यकीन जानो के मुनाफिक जहन्नुम के सबसे आला तबके में जाएंगे और तुम किसी को उनका मददगार न पाओगे
عَرَبِيإِلَّا الَّذينَ تابوا وَأَصلَحوا وَاعتَصَموا بِاللَّهِ وَأَخلَصوا دينَهُم لِلَّهِ فَأُولٰئِكَ مَعَ المُؤمِنينَ ۖ وَسَوفَ يُؤتِ اللَّهُ المُؤمِنينَ أَجرًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)परन्तु जिन लोगों ने पश्चाताप कर लिया, और अपना सुधार कर लिया, और अल्लाह (के धर्म) को मज़बूती से थाम लिया और अपने धर्म को अल्लाह के लिए विशिष्ट कर दिया, तो वही लोग ईमान वालों के साथ होंगे और अल्लाह ईमान वालों को बहुत बड़ा बदला प्रदान करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jo unmein se taaib ho jayein aur apne tarz e amal ki islah karlein aur Allah ka daaman thaam lein aur apne deen ko Allah ke liye khalis kardein, aisey log momino ke saath hain aur Allah momino ko zaroor ajar e azeem ata farmayega
Roman Urdu (Junagarhi)Haan jo tauba ker len aur islaah ker len aur Allah Taalaa per kaamil yaqeen rakhen aur khalid Allah hi kay liye deen daari keren to yeh log mominon kay sath hain Allah Taalaa mominon ko boht bara ajar dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जो उनमें से तैयब हो जाएं और अपने तर्ज ए अमल की इस्लाह कार्लें और अल्लाह का दामन थाम लें और अपने दीन को अल्लाह के लिए खाली कर दें, ऐसे लोग मोमिनो के साथ हैं और अल्लाह मोमिनो को जरूर अजर ए अजीम अता फरमायेगा
عَرَبِيما يَفعَلُ اللَّهُ بِعَذابِكُم إِن شَكَرتُم وَآمَنتُم ۚ وَكانَ اللَّهُ شاكِرًا عَليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह तुम्हें यातना देकर क्या करेगा, यदि तुम आभारी बनो और ईमान लाओ। और अल्लाह बड़ा क़द्रदान (गुणग्राहक) सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir Allah ko kya padi hai ke tumhein khwa ma khwa saza de agar tum shukarguzar banday baney raho aur iman ki rawish par chalo? Allah bada qadardaan hai aur sabke haal se waqif hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa tumhen saza dey ker kiya keray ga? Agar tum shukar guzari kertay raho aur ba eman raho Allah Taalaa boht qadar kerney wala aur poora ilm rakhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर अल्लाह को क्या पड़ी है के तुम्हें ख्वा मा ख्वा सजा दे अगर तुम शुकरगुजर बंदे बने रहो और ईमान क्या रवीश पर चलो? अल्लाह बड़ा कदरदान है और सबके हाल से वाकिफ है
🕮 Juz 6 begins here
عَرَبِي۞ لا يُحِبُّ اللَّهُ الجَهرَ بِالسّوءِ مِنَ القَولِ إِلّا مَن ظُلِمَ ۚ وَكانَ اللَّهُ سَميعًا عَليمًا
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह बुरी बात के साथ आवाज़ ऊँची करना पसंद नहीं करता, परंतु जिसपर अत्याचार किया गया हो (उसके लिए अनुमेय है)। और अल्लाह हमेशा से सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah isko pasand nahin karta ke aadmi badhgoyi par zubaan kholey (speaking evil publicly), illa ye ke kisi par zulm kiya gaya ho. Aur Allah sab kuch sunne aur jaanne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Buraee kay sath aawaz buland kerney ko Allah Taalaa pasand nahi farmata magar mazloom ko ijazat hai aur Allah Taalaa khoob sunta janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह इसको पसंद नहीं करता के आदमी बिगड़ेगी पर जुबान खोले, इल्ला ये के किसी पर जुल्म किया गया हो। और अल्लाह सब कुछ सुनने और जाने वाला है
عَرَبِيإِن تُبدوا خَيرًا أَو تُخفوهُ أَو تَعفوا عَن سوءٍ فَإِنَّ اللَّهَ كانَ عَفُوًّا قَديرًا
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हिन्दी (Al-Omari)यदि तुम कोई नेकी प्रकट करो या उसे छिपाओ, या किसी बुराई को क्षमा कर दो, तो निःसंदेह अल्लाह हमेशा से बहुत माफ़ करने वाला, सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)(Mazloom honay ki surat mein agarche tumpar badhgoyi ka haqq hai) lekin agar tum zaahir o baatin mein bhalayi hi kiye jao, ya kam az kam burayi se darguzar karo, to Allah ki siffat bhi yahi hai ke wo bada maaf karne wala hai, Halaanke saza dene par poori qudrat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum kissi neki ko aelaaniya kero ya posheeda ya kiss buraee say dar guzar kero pus yaqeenan Allah Taalaa poori moafi kerney wala aur poori qudrat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(मज़लूम होने की सूरत में अगरचे तुमपर बढ़ोगी का हक़ है) लेकिन अगर तुम जाहिर ओ बातों में भलाई ही किए जाओ, या कम अज़ कम बुरायी से दरगुज़र करो, तो अल्लाह की सिफ़ात भी यही है के वो बड़ा माफ़ करने वाला है, हलाँके सज़ा देने पर पूरी क़ुदरत रखता है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يَكفُرونَ بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ وَيُريدونَ أَن يُفَرِّقوا بَينَ اللَّهِ وَرُسُلِهِ وَيَقولونَ نُؤمِنُ بِبَعضٍ وَنَكفُرُ بِبَعضٍ وَيُريدونَ أَن يَتَّخِذوا بَينَ ذٰلِكَ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग अल्लाह और उसके रसूलों के साथ कुफ़्र करते हैं और चाहते हैं कि अल्लाह तथा उसके रसूलों के बीच अंतर करें तथा कहते हैं कि हम कुछ पर ईमान रखते हैं और कुछ का इनकार करते हैं और चाहते हैं कि इसके बीच कोई राह अपनाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Jo log Allah aur uske Rasoolon se kufr karte hain, aur chahte hain ke Allah aur uske Rasoolon ke darmiyan tafreeq karein, aur kehte hain ke hum kisi ko maanenge aur kisi ko na maanenge, aur kufr o iman ke beech mein ek raah nikalne ka irada rakhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log Allah kay sath aur uss kay payghumbar kay sath kufur kertay hain aur jo log yeh chahtay hain kay Allah aur uss kay rasool kay darmiyan farq keren aur jo log kehtay hain kay baaz nabiyon per to humara eman hai aur baaz per nahi aur chahtay hain kay iss kay aur uss kay bain bain koi raah nikalen
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग अल्लाह और उसके रसूलों से कुफ्र करते हैं, और चाहते हैं के अल्लाह और उसके रसूलों के दरमियान तफ़रीक़ करें, और कहते हैं कि हम किसी को मानेंगे और किसी को ना मानेंगे, और कुफ्र ओ ईमान के बीच में एक राह निकालने का इरादा रखते हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ هُمُ الكافِرونَ حَقًّا ۚ وَأَعتَدنا لِلكافِرينَ عَذابًا مُهينًا
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हिन्दी (Al-Omari)यही लोग वास्तविक काफ़िर हैं और हमने काफ़िरों के लिए अपमानकारी यातना तैयार कर रखी है।
Roman Urdu (Maududi)Woh sab pakke kafir hain aur aise kafrion ke liye humne woh saza muhaiyya kar rakkhi hai jo unhein zaleel o khwar kardene wali hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeen mano kay yeh sab log asli kafir hain aur kafiron kay liye hum ney ehanat aamez saza tayyar ker rakhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो सब पक्के काफिर हैं और ऐसे काफिरों के लिए हमने वो सज़ा मुहैय्या कर रखी है जो उन्हें ज़लील ओ ख़्वार करने वाली होगी
عَرَبِيوَالَّذينَ آمَنوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ وَلَم يُفَرِّقوا بَينَ أَحَدٍ مِنهُم أُولٰئِكَ سَوفَ يُؤتيهِم أُجورَهُم ۗ وَكانَ اللَّهُ غَفورًا رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे लोग जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए और उन्होंने उनमें से किसी के बीच अंतर नहीं किया, यही लोग हैं जिन्हें वह शीघ्र ही उनका बदला प्रदान करेगा तथा अल्लाह हमेशा से अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Ba-khilaf iske jo log Allah aur uske tamaam Rasoolon ko maanein, aur unke darmiyan tafreeq na karein, unko hum zaroor unke ajar ata karenge, aur Allah bada darguzar farmane wala aur Reham karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log Allah per aur uss kay tamam payghumbaron per eman latay hain aur inn mein say kissi mein farq nahi kertay yeh hain jinhen Allah unn kay poora sawab dey ga aur Allah bari maghfirat wala bari rehmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)बा-ख़िलाफ़ इसके जो लोग अल्लाह और उसके तमाम रसूलों को मानें, और उनके दरमियान तफ़रीक़ न करें, उनको हम ज़रूर उनके अजर अता करेंगे, और अल्लाह बड़ा दरगुज़र फ़रमाने वाला और रहम करने वाला है
عَرَبِييَسأَلُكَ أَهلُ الكِتابِ أَن تُنَزِّلَ عَلَيهِم كِتابًا مِنَ السَّماءِ ۚ فَقَد سَأَلوا موسىٰ أَكبَرَ مِن ذٰلِكَ فَقالوا أَرِنَا اللَّهَ جَهرَةً فَأَخَذَتهُمُ الصّاعِقَةُ بِظُلمِهِم ۚ ثُمَّ اتَّخَذُوا العِجلَ مِن بَعدِ ما جاءَتهُمُ البَيِّناتُ فَعَفَونا عَن ذٰلِكَ ۚ وَآتَينا موسىٰ سُلطانًا مُبينًا
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हिन्दी (Al-Omari)किताब वाले (ऐ नबी!) आपसे माँग करते हैं कि आप उनपर आकाश से कोई पुस्तक उतार लाएँ। तो वे तो मूसा से इससे भी बड़ी माँग कर चुके हैं। चुनाँचे उन्होंने कहा : हमें अल्लाह को खुल्लम-खुल्ला दिखा दो। तो उन्हें बिजली ने उनके अत्याचार के कारण पकड़ लिया। फिर उन्होंने अपने पास खुली निशानियाँ आने के बाद बछड़े को पूज्य बना लिया। तो हमने उसे क्षमा कर दिया और हमने मूसा को स्पष्ट प्रमाण प्रदान किया।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ehle kitab agar aaj tumse mutalaba kar rahey hain ke tum aasman se koi tehrir (written) unpar nazil karao to issey badh chadh kar mujreemana mutalibe ye pehle Moosa se kar chuke hain. Ussey to inhon ne kaha tha ke humein khuda ko alaniya (with our own eyes) dikha do aur isi sarkashi ki wajah se yakayak inpar bijli toot padi thi. Phir inhon ne bachde(calf) ko apna mabood bana liya, halaanke yeh khuli khuli nishaniyan dekh chuke thay is par bhi humne inse darguzar kiya. Humne Moosa ko sareeh farmaan ata kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aap say yeh ehal-e-kitab darkhuast kertay hain kay aap inn kay pass koi aasmani kitab layen hazrat musa (alh-e-salam) say to enhon ney iss say boht bari darkhuast ki thi kay humen khullam khula Allah Taalaa ko dikha dey pus inn kay iss zulm kay baees inn per karakay ki bijli aa pari phir bawajood yeh kay inn kay pass boht daleel phonch chuki thi enhon ney bachray ko apna mabood bana liya lekin hum ney yeh bhi moaf farma diya aur hum ney musa ko khula ghalba (aur sareeh daleel) inayat farmaee
Devnagri Urdu (Maududi)ये एहले किताब अगर आज तुमसे मुतालबा कर रहे हैं कि तुम आसमान से कोई तहरीर (लिखित) उन्पर नाज़िल कराओ तो इस तरह से बढ़ चढ़ कर मुजरेमाना मुतालिबे ये पहले मूसा से कर चुके हैं। उसे तो इन्हों ने कहा था के हमें खुदा को एलानिया (अपनी आंखों से) दिखा दो और इसी सरकशी की वजह से यकायक इनपर बिजली टूट पड़ी थी। फिर इन्होन ने बछड़े (बछड़े) को अपना मबूद बना लिया, हलाँके ये खुली खुली निशानियाँ देख चुके थे इस पर भी हमने इनसे दरगुज़र किया। हमने मूसा को सारे फ़रमान अता किया
عَرَبِيوَرَفَعنا فَوقَهُمُ الطّورَ بِميثاقِهِم وَقُلنا لَهُمُ ادخُلُوا البابَ سُجَّدًا وَقُلنا لَهُم لا تَعدوا فِي السَّبتِ وَأَخَذنا مِنهُم ميثاقًا غَليظًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उनसे दृढ़ वचन लेने के साथ तूर (पर्वत) को उनके ऊपर उठा लिया और हमने उनसे कहा : दरवाज़े में सजदा करते हुए प्रवेश करो। तथा हमने उनसे कहा कि शनिवार के बारे में अति न करो और हमने उनसे एक दृढ़ वचन लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur in logon par Toor (mount Toor) ko utha kar inse (us farmaan ki itaat ka) ahad liya, humne inko hukum diya ke darwaze mein sajda-raiz hotay huey daakhil hon, humne inse kaha ke sabath ka kanoon na todo aur ispar insey pukhta ahad liya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn ka qol lenay kay liye hum ney inn kay saron per toor pahaar laa khara ker diya aur enhen hukum diya kay sajda kertay huye darwazay mein jao aur yeh bhi farmaya kay haftay kay din mein tajawuz na kerna aur hum ney inn say sakht say sakht qol-o-qarar liye
Devnagri Urdu (Maududi)और लोगों पर तूर (माउंट तूर) को उठा कर इनसे (उस फ़रमान की इताअत का) अहद लिया, हमने इनको हुकुम दिया के दरवाज़े में सजदा-राइज़ होते हुए दाख़िल होन, हमने इनसे कहा के सबथ का कानून ना तोड़ो और इसपर इंसे पुख्ता अहद लिया
عَرَبِيفَبِما نَقضِهِم ميثاقَهُم وَكُفرِهِم بِآياتِ اللَّهِ وَقَتلِهِمُ الأَنبِياءَ بِغَيرِ حَقٍّ وَقَولِهِم قُلوبُنا غُلفٌ ۚ بَل طَبَعَ اللَّهُ عَلَيها بِكُفرِهِم فَلا يُؤمِنونَ إِلّا قَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उनके अपने वचन को तोड़ देने ही के कारण (हमने उनपर ला'नत की) और उनके अल्लाह की आयतों का इनकार करने और उनके नबियों को बिना किसी अधिकार के क़त्ल करने तथा उनके यह कहने के कारण कि हमारे दिल आवरण में सुरक्षित हैं, बल्कि अल्लाह ने उनपर उनके कुफ़्र की वजह से मुहर लगा दी है। अतः वे बहुत कम ही ईमान लाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar inki ahad shikani (breaking the covenant) ki wajah se, aur is wajah se ke inhon ne Allah ki aayat ko jhutlaya, aur mutaadid paighambaron ko na-haqq qatal kiya, aur yahan tak kaha ke hamare dil gilafon mein mehfooz hain. Halaanke dar haqeeqat inki baatil parasti ke sabab se Allah ne inke dilon par thappa (seal) laga diya hai aur isi wajah se yeh bahut kam iman latey hain
Roman Urdu (Junagarhi)(yeh saza thi) ba sabab inn ki ehad shikni kay aur ehkaam-e-elahee kay sath kufur kerney kay aur Allah kay nabiyon ko na haq qatal ker daalney kay aur iss sabab say kay yun kehtay hain kay humaray dilon per ghilaf hai. Halankay dar asal inn kay kufur ki waja say inn kay dilon per Allah Taalaa ney mohar laga di hai iss liye yeh qadar-e-qaleel hi eman latay hain
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार इनकी अहद शिकानी (संधि तोड़ना) कि वजह से, और इस वजह से के इन्होन ने अल्लाह की आयत को झुटलाया, और मुताअदीद पैगम्बरों को ना-हक़ क़तल किया, और यहाँ तक कहा के हमारे दिल गिलाफ़ों में महफ़ूज़ हैं। हलांके दर हकीकत इनकी बातिल परस्ती के सबाब से अल्लाह ने इनके दिलों पर थप्पड़ (सील) लगा दिया है और इसी वजह से ये बहुत कम ईमान लाते हैं
عَرَبِيوَبِكُفرِهِم وَقَولِهِم عَلىٰ مَريَمَ بُهتانًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके कुफ़्र के कारण और मरयम पर उनके घोर आरोप लगाने के कारण।
Roman Urdu (Maududi)Phir apne kufr mein itne badhe ke Mariyam par sakht bohtan (slander) lagaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kay kufur kay baees aur marium per boht bara bohtan bandhney kay baees
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अपने कुफ्र में इतने बढ़े के मरियम पर सख्त बोहतन (बदनामी) लगाया
عَرَبِيوَقَولِهِم إِنّا قَتَلنَا المَسيحَ عيسَى ابنَ مَريَمَ رَسولَ اللَّهِ وَما قَتَلوهُ وَما صَلَبوهُ وَلٰكِن شُبِّهَ لَهُم ۚ وَإِنَّ الَّذينَ اختَلَفوا فيهِ لَفي شَكٍّ مِنهُ ۚ ما لَهُم بِهِ مِن عِلمٍ إِلَّا اتِّباعَ الظَّنِّ ۚ وَما قَتَلوهُ يَقينًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके (गर्व से) यह कहने के कारण कि निःसंदेह हमने ही अल्लाह के रसूल मरयम के पुत्र ईसा मसीह को क़त्ल किया। हालाँकि न उन्होंने उसे क़त्ल किया और न उसे सूली पर चढ़ाया, बल्कि उनके लिए (किसी को मसीह का) सदृश बना दिया गया। निःसंदेह जिन लोगों ने इस मामले में मतभेद किया, निश्चय वे इसके संबंध में बड़े संदेह में हैं। उन्हें इसके संबंध में अनुमान का पालन करने के सिवा कोई ज्ञान नहीं, और उन्होंने उसे निश्चित रूप से क़त्ल नहीं किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur khud kaha ke humne Maseeh, Isa Ibn-Mariyam Rasool Allah ko qatal kardiya hai halaanke filwaqey inhon ne na usko qatal kiya na saleeb (cross) par chadhaya, balke maamla inke liye mushtaba (made dubious to them) kardiya gaya, aur jin logon ne iske baarey mein ikhtilaf kiya hai woh bhi dar-asal shakk mein mubtila hain, unke paas is maamle mein koi ilm nahin hai, mehaz gumaan hi ki pairwi hai. Unhon ne Maseeh ko yaqeen ke saath qatal nahin kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yun kehney kay baees kay hum ney Allah kay rasool maseeh essa bin marium ko qatal ker diya halankay na to enhon ney ussay qatal kiya na sooli charhaya bulkay inn kay liye unn (essa) ki shabeeh bana diya gaya tha. Yaqeen jano kay hazrat essa (alh-e-salam) kay baray mein ikhtilaf kerney walay unn kay baray mein shak mein hain unhen iss ka koi yaqeen nahi ba-juz takhmeeni baaton per amal kerney kay itna yaqeeni hai kay enhon ney unhen qatal nahi kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और खुद कहा के हमने मसीहा, ईसा इब्न-मरियम रसूल अल्लाह को क़त्ल करदिया है हालानके फ़िलवाक़े इन्होन ने ना उसको क़त्ल किया ना सलीब (क्रॉस) पर चढ़ाया, बलके मामला इनके लिए मुश्तबा (उन्हें संदिग्ध बना दिया) करदिया गया, और जिन लोगों ने इसके बारे में इख्तिलाफ़ किया है वो भी दर-असल शक्क में मुब्तिला है, उनके पास इस मामले में कोई इल्म नहीं है, महज़ गुमान ही की जोड़ी है। उनहों ने मसीह को यकीन के साथ क़त्ल नहीं किया
عَرَبِيبَل رَفَعَهُ اللَّهُ إِلَيهِ ۚ وَكانَ اللَّهُ عَزيزًا حَكيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि अल्लाह ने उसे अपनी ओर उठा लिया तथा अल्लाह सदा से हर चीज़ पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Balke Allah ne usko apni taraf uthaya, Allah zabardast taaqat rakhne wala aur hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay Allah Taalaa ney unhen apni taraf utha liya aur Allah bara zabardast aur poori hikmaton wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)बल्के अल्लाह ने उसको अपनी तरफ उठाया, अल्लाह ज़बर्दस्त ताक़त रखने वाला और हकीम है
عَرَبِيوَإِن مِن أَهلِ الكِتابِ إِلّا لَيُؤمِنَنَّ بِهِ قَبلَ مَوتِهِ ۖ وَيَومَ القِيامَةِ يَكونُ عَلَيهِم شَهيدًا
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हिन्दी (Al-Omari)और किताब वालों में से कोई न होगा, परंतु उसकी मौत से पहले उसपर अवश्य ईमान लाएगा और वह क़ियामत के दिन उनपर गवाह होगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur ehle kitab mein se koi aisa na hoga jo uski maut se pehle uspar iman na le aayega aur qayamat ke roz woh unpar gawahi dega
Roman Urdu (Junagarhi)Ehal-e-kitab mein aik bhi aisa na bachay ga jo hazrat essa (alh-e-salam) ki maut say pehlay unn per eman na laa chukay aur qayamat kay din aap unn per gawah hongay
Devnagri Urdu (Maududi)और एहले किताब में से कोई ऐसा ना होगा जो उसकी मौत से पहले उसपर ईमान ना ले आएगा और कयामत के रोज़ वो उनपार गवाही देगा
عَرَبِيفَبِظُلمٍ مِنَ الَّذينَ هادوا حَرَّمنا عَلَيهِم طَيِّباتٍ أُحِلَّت لَهُم وَبِصَدِّهِم عَن سَبيلِ اللَّهِ كَثيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)चुनाँचे यहूदी बन जाने वालों के बड़े अत्याचार ही के कारण हमने उनपर कई पाक चीज़ें हराम कर दीं, जो उनके लिए हलाल की गई थीं तथा उनके अल्लाह के रास्ते से बहुत अधिक रोकने का कारण।
Roman Urdu (Maududi)Garz in yahudi ban janey walon ke isi zalimana rawaiyye ki bina par, aur is bina par ke yeh bakasrat Allah ke raaste se roakte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo nafees cheez inn kay liye halal ki gaee thi woh hum ney inn per haram ker di inn kay zulm kay baees aur Allah Taalaa ki raah say aksar logon ko rokney kay baees
Devnagri Urdu (Maududi)ग़रज़ इन यहूदी बन जाने वालों के इसी ज़ालिमाना रवैये की बिना पर, और इस बिना पार के ये बकसरत अल्लाह के रास्ते से रोते हैं
عَرَبِيوَأَخذِهِمُ الرِّبا وَقَد نُهوا عَنهُ وَأَكلِهِم أَموالَ النّاسِ بِالباطِلِ ۚ وَأَعتَدنا لِلكافِرينَ مِنهُم عَذابًا أَليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके ब्याज लेने के कारण, जबकि निश्चय उन्हें इससे रोका गया था और उनके लोगों का धन अवैध रूप से खाने के कारण। तथा हमने उनमें से काफ़िरों के लिए दर्दनाक यातना तैयार कर रखी है।
Roman Urdu (Maududi)Aur sood (usury) lete hain jissey inhein mana kiya gaya tha, aur logon ke maal najayiz tareeqon se khate hain , humne bahut si woh paak cheezein inpar haraam kardi jo pehle inke liye halaal thi. Aur jo log inmein se kafir hain unke liye humne dardnaak azaab tayyar kar rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur sood jiss say mana kiye gaye thay ussay lenay kay baees aur logon ka maal na haq maar khaney kay baees aur inn mein jo kuffaar hain hum ney unn kay liye alam naak azab mohiyya ker rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)और सूद (सूदखोरी) लेते हैं जिसने इन्हें मना किया था, और लोगों के माल नजायज़ तरीक़ों से खाते हैं, हमने बहुत सी वो पाक चीज़ें इनपर हराम करदी जो पहले इनके लिए हलाल थी। और जो लोग इनमें से काफिर हैं उनके लिए हमने दर्दनक अज़ाब तय्यार कर रखा है
عَرَبِيلٰكِنِ الرّاسِخونَ فِي العِلمِ مِنهُم وَالمُؤمِنونَ يُؤمِنونَ بِما أُنزِلَ إِلَيكَ وَما أُنزِلَ مِن قَبلِكَ ۚ وَالمُقيمينَ الصَّلاةَ ۚ وَالمُؤتونَ الزَّكاةَ وَالمُؤمِنونَ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ أُولٰئِكَ سَنُؤتيهِم أَجرًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु उन (यहूदियों) में से जो लोग ज्ञान में पक्के हैं और जो ईमान वाले हैं, वे उस (क़ुरआन) पर ईमान लाते हैं जो आपपर उतारा गया और जो आपसे पहले उतारा गया, और जो विशेषकर नमाज़ क़ायम करने वाले हैं, और जो ज़कात देने वाले और अल्लाह तथा अंतिम दिन पर ईमान लाने वाले हैं। ये लोग हैं जिन्हें हम बहुत बड़ा प्रतिफल प्रदान करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Magar inmein jo log pukhta ilm rakhne waley hain aur imandaar hain woh sab us taleem par iman latey hain jo tumhari taraf nazil ki gayi hai aur jo tumse pehle nazil ki gayi thi. Is tarah ke iman laney waley aur namaz o zakat ki pabandi karne waley aur Allah aur roz-e-aakhir par saccha aqeeda rakhne waley logon ko hum zaroor ajar e azeem ata karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin inn mein say kaamil aur mazboot ilm walay hain aur eman walay hain jo uss per eman latay hain jo aap ki taraf utara gaya hai aur jo aap say pehlay utara gaya aur namzon ko qaeem rakhney walay hain aur zakat kay ada kerney walay hain aur Allah per aur qayamat kay din per eman rakhney walay hain yeh hain jinhen hum boht baray ajar ata farmayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उनमें जो लोग पूछते इल्म रखने वाले हैं और इमानदार हैं वो सब हमसे तालीम पर ईमान लाते हैं जो तुम्हारी तरफ नाज़िल की गई है और जो तुमसे पहले नाज़िल की गई है थी. इस तरह के ईमान लाने वाले और नमाज़ ओ ज़कात की पाबन्दी करने वाले और अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर पर सच्चा अकीदा रखने वाले लोगों को हम ज़रूर अजर ए अज़ीम अता करेंगे
عَرَبِي۞ إِنّا أَوحَينا إِلَيكَ كَما أَوحَينا إِلىٰ نوحٍ وَالنَّبِيّينَ مِن بَعدِهِ ۚ وَأَوحَينا إِلىٰ إِبراهيمَ وَإِسماعيلَ وَإِسحاقَ وَيَعقوبَ وَالأَسباطِ وَعيسىٰ وَأَيّوبَ وَيونُسَ وَهارونَ وَسُلَيمانَ ۚ وَآتَينا داوودَ زَبورًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) निःसंदेह हमने आपकी ओर वह़्य भेजी, जैसे हमने नूह़ और उसके बाद (दूसरे) नबियों की ओर वह़्य भेजी। और हमने इबराहीम, इसमाईल, इसहाक़, याक़ूब और उसकी संतान, तथा ईसा, अय्यूब, यूनुस, हारून और सुलैमान की ओर वह़्य भेजी और हमने दाऊद को ज़बूर प्रदान की।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! Humne tumhari taraf usi tarah wahee bheji hai jis tarah Noah aur uske baad ke paighambaron ki taraf bheji thi, humne Ibrahim , Ismail , Ishaq, Yaqub aur aulad e yaqub, Isa, Ayub , Yunus, Haroon aur Sulaiman ki taraf wahee bheji, humne Dawood ko Zubur di
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney aap ki taraf issi tarah wahee ki hai jaisay kay nooh (alh-e-salam) aur inn kay baad walay nabiyon ki taraf ki aur hum ney wahee ki ibrahim aur isamail aur ishaq aur yaqoob aur unn ki aulad per aur essa aur ayub aur younus aur haroon aur suleman ki taraf. Aur hum ney dawood (alh-e-salam) ko zaboor ata farmaee
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! हमने तुम्हारी तरफ उसी तरह वही भेजी थी जिस तरह नूह और उसके बाद के पैगम्बरों की तरफ भेजी थी, हमने इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब, ईसा, अयूब, यूनुस, हारून और सुलेमान की तरफ वही भेजी, हमने दाऊद को जुबुर दी
عَرَبِيوَرُسُلًا قَد قَصَصناهُم عَلَيكَ مِن قَبلُ وَرُسُلًا لَم نَقصُصهُم عَلَيكَ ۚ وَكَلَّمَ اللَّهُ موسىٰ تَكليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और (हमने) कुछ रसूल ऐसे (भेजे), जिनके बारे में हम पहले तुम्हें बता चुके हैं, और कुछ रसूल ऐसे (भेजे), जिनके बारे में हमने तुम्हें कुछ नहीं बताया। और अल्लाह ने मूसा से वास्तव में बात की।
Roman Urdu (Maududi)Humne un Rasoolon par bhi wahee nazil ki jinka zikr hum issey pehle tumse kar chuke hain aur un Rasoolon par bhi jinka zikar tumse nahin kiya, humne Moosa se is tarah guftagu ki jis tarah guftagu ki jati hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aap say pehlay kay boht say rasoolon kay waqiyaat hum ney aap say biyan kiye hain aur boht say rasoolon kay nahi bhi kiye aur musa (alh-e-salam) say Allah Taalaa ney saaf tor per kalaam kiya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उन रसूलों पर भी वही नाज़िल की जिनका ज़िक्र हम इस पहले तुमसे कर चुके हैं और उन रसूलों पर भी जिनका ज़िक्र तुमसे नहीं किया, हमने मूसा से इस तरह गुफ्तगू की जाती है
عَرَبِيرُسُلًا مُبَشِّرينَ وَمُنذِرينَ لِئَلّا يَكونَ لِلنّاسِ عَلَى اللَّهِ حُجَّةٌ بَعدَ الرُّسُلِ ۚ وَكانَ اللَّهُ عَزيزًا حَكيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐसे रसूल जो शुभ सूचना सुनाने वाले और डराने वाले थे। ताकि लोगों के पास रसूलों के बाद अल्लाह के मुक़ाबले में कोई तर्क न रह जाए। और अल्लाह सदा से सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh sarey Rasool khush khabri dene waley aur darane waley bana kar bheje gaye thay taa-ke unko maboos kardene ke baad logon ke paas Allah ke muqable mein koi hujjat na rahey aur Allah bahar haal gaalib rehne wala aur hakeem o dana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney enhen rasool banaya hai khushkhabriyan sunaney walay aur aagah kerney walay takay logon ki koi hujjat aur ilzam rasoolon kay bhejney kay baad Allah Taalaa per reh na jaye. Allah Taalaa bara ghalib aur bara hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये सारे रसूल ख़ुश ख़बरी देने वाले और डराने वाले बाना कर भेजे गए थे ता-के उनको मबूस करदीन के बाद लोगों के पास अल्लाह के मुकाबले में कोई हुज्जत ना रहे और अल्लाह बाहर हाल गालिब रहने वाला और हकीम ओ दाना है
عَرَبِيلٰكِنِ اللَّهُ يَشهَدُ بِما أَنزَلَ إِلَيكَ ۖ أَنزَلَهُ بِعِلمِهِ ۖ وَالمَلائِكَةُ يَشهَدونَ ۚ وَكَفىٰ بِاللَّهِ شَهيدًا
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु अल्लाह गवाही देता है उस (क़ुरआन) के संबंध में, जो उसने आपकी ओर उतारा है कि उसने उसे अपने ज्ञान के साथ उतारा है तथा फ़रिश्ते गवाही देते हैं। और अल्लाह गवाही देने वाला काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)(Log nahin maante to na maanein) magar Allah gawahi deta hai ke jo kuch usne tumpar nazil kiya hai apne ilm se nazil kiya hai, aur ispar malaika (Farishtey) bhi gawah hain, agarche Allah ka gawah hona bilkul kifayat karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo kuch aap ki taraf utara hai uss ki babat khud Allah Taalaa gawahi deta hai kay issay apney ilm say utara hai aur farishtay bhi gawahi detay hain aur Allah Taalaa bator gawah kafi hai
Devnagri Urdu (Maududi)(लोग नहीं मानते तो ना माने) मगर अल्लाह गवाही देता है के जो कुछ उसने तुमपर नाज़िल किया है अपने इल्म से नाज़िल किया है, और इसपर मलिका (फरिश्ते) भी गवाह हैं, अगरचे अल्लाह का गवाह होना बिल्कुल किफायत करता है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا وَصَدّوا عَن سَبيلِ اللَّهِ قَد ضَلّوا ضَلالًا بَعيدًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह की राह से रोका, निश्चय वे गुमराह होकर बहुत दूर जा पड़े।
Roman Urdu (Maududi)Jo log isko maanne se khud inkar karte hain aur dusron ko khuda ke raaste se roakte hain woh yaqeenan gumraahi mein haqq se bahut door nikal gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ney kufur kiya aur Allah Taalaa ki raah say auron ko roka woh yaqeenan gumrahi mein door nikal gay
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग इसको मन से खुद इनकार करते हैं और दूसरों को खुदा के रास्ते से रोकते हैं वो यकीनन गुमराही में हक से बहुत दूर निकल गए हैं
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا وَظَلَموا لَم يَكُنِ اللَّهُ لِيَغفِرَ لَهُم وَلا لِيَهدِيَهُم طَريقًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अत्याचार किया, अल्लाह कभी ऐसा नहीं कि उन्हें क्षमा कर दे और न यह कि उन्हें कोई राह दिखा दे।
Roman Urdu (Maududi)Is tarah jin logon ne kufr o bagawat ka tareeqa ikhtiyar kiya aur zulm o sitam par utar aaye Allah unko hargiz maaf na karega aur unhein koi raasta
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ney kufur kiya aur zulm kiya unhen Allah Taalaa hergiz hergiz na bakshay ga aur na unhen koi raah dikhaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह जिन लोगों ने कुफ्र ओ बगावत का तरीका इख्तियार किया और जुल्म ओ सितम पर उतर आए अल्लाह उनको हरगिज माफ न करेगा और उन्हें कोई रास्ता
عَرَبِيإِلّا طَريقَ جَهَنَّمَ خالِدينَ فيها أَبَدًا ۚ وَكانَ ذٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)सिवाय जहन्नम के मार्ग के, जिसमें वे सदा-सर्वदा रहने वाले हैं और यह सदा से अल्लाह के लिए बहुत आसान है।
Roman Urdu (Maududi)Bajuz jahannum ke raaste ke na dikahyega jismein woh hamesha rahenge. Allah ke liye yeh koi mushkil kaam nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-juz jahannum ki raah kay jiss mein woh hamesha hamesha paray rahen gay aur yeh Allah Taalaa per bilkul aasan hai
Devnagri Urdu (Maududi)बजुज जहन्नुम के रास्ते के ना दिखाऊंगा जिसमें वो हमेशा रहेंगे। अल्लाह के लिए ये कोई मुश्किल काम नहीं है
عَرَبِييا أَيُّهَا النّاسُ قَد جاءَكُمُ الرَّسولُ بِالحَقِّ مِن رَبِّكُم فَآمِنوا خَيرًا لَكُم ۚ وَإِن تَكفُروا فَإِنَّ لِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ وَكانَ اللَّهُ عَليمًا حَكيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो! निःसंदेह तुम्हारे पास यह रसूल सत्य के साथ तुम्हारे पालनहार की ओर से आए हैं। अतः तुम ईमान ले आओ, तुम्हारे लिए बेहतर होगा। तथा यदि इनकार करो, तो (याद रखो कि) निःसंदेह अल्लाह ही का है जो कुछ आकाशों और धरती में है और अल्लाह सदा से सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Logon! yeh Rasool tumhare paas tumhare Rubb ki taraf se haqq lekar aagaya hai, iman le aao, tumhare hi liye behtar hai, aur agar inkar karte ho to jaan lo ke aasmano aur zameen mein jo kuch hai sab Allah ka hai aur Allah aleem bhi hai aur hakeem bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Aey logo! Tumharay pass tumharya rab ki taraf say haq ley ker rasool aagaya hai pus tum eman lao takay tumharay liye behtri ho aur agar tum kafir hogaye to Allah hi ki hai her woh cheez jo aasmanon aur zamin mein hai aur Allah daana hai hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन! ये रसूल तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से हक़ लेकर आया है, ईमान ले आओ, तुम्हारे लिए ही बेहतर है, और अगर इनकार करते हो तो जान लो के आसमान और ज़मीन में जो कुछ है सब अल्लाह का है और अल्लाह अलीम भी है और हकीम भी
عَرَبِييا أَهلَ الكِتابِ لا تَغلوا في دينِكُم وَلا تَقولوا عَلَى اللَّهِ إِلَّا الحَقَّ ۚ إِنَّمَا المَسيحُ عيسَى ابنُ مَريَمَ رَسولُ اللَّهِ وَكَلِمَتُهُ أَلقاها إِلىٰ مَريَمَ وَروحٌ مِنهُ ۖ فَآمِنوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ ۖ وَلا تَقولوا ثَلاثَةٌ ۚ انتَهوا خَيرًا لَكُم ۚ إِنَّمَا اللَّهُ إِلٰهٌ واحِدٌ ۖ سُبحانَهُ أَن يَكونَ لَهُ وَلَدٌ ۘ لَهُ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۗ وَكَفىٰ بِاللَّهِ وَكيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ किताब वालो! अपने धर्म में हद से आगे न बढ़ो और अल्लाह के बारे में सत्य के सिवा कुछ न कहो। मरयम का पुत्र ईसा मसीह केवल अल्लाह का रसूल और उसका 'शब्द' है, जिसे (अल्लाह ने) मरयम की ओर भेजा तथा उसकी ओर से एक आत्मा है। अतः अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाओ और यह न कहो कि (पूज्य) तीन हैं। बाज़ आ जाओ! तुम्हारे लिए बेहतर होगा। अल्लाह केवल एक ही पूज्य है। वह इससे पवित्र है कि उसकी कोई संतान हो। उसी का है जो कुछ आकाशों में हैं और जो कुछ धरती में है और अल्लाह कार्यसाधक के रूप में काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Aey ehle kitab! apne deen mein ghulu (excess) na karo aur Allah ki taraf haqq ke siwa koi baat mansoob na karo, Maseeh Isa Ibne Mariyam iske siwa kuch na tha ke Allah ka ek Rasool tha aur ek farmaan tha jo Allah ne Maryam ki taraf bheja aur ek Rooh thi Allah ki taraf se (jisne Maryam ke reham mein bacchey ki shakal ikhtiyar ki) pas tum Allah aur uske Rasoolon par iman lao, aur na kaho ke “Teen (trinity)” hain baaz aa jao , yeh tumhare hi liye behtar hai, Allah to bas ek hi khuda hai , woh baala-tar hai issey ke koi uska beta ho. Zameen aur aasmano ki saari cheezein uski milk hain, aur inki kafalat o khabargiri ke liye bas wahi kaafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey ehal-e-kitab! Apney deen kay baray mein hadd say na guzar jao aur Allah per ba-juz haq kay aur kuch na kaho maseeh essa bin marium (alh-e-salam) to sirf Allah Taalaa kay rasool aur uss kay kalma (kunn say peda shuda) hain jisay marium (alh-e-salam) ki taraf daal diya tha aur uss kay pass ki rooh hain iss liye tum Allah ko aur uss kay sab rasoolon ko maano aur na kaho kay Allah teen hain iss say baaz aajao kay tumharay liye behtri hai Allah ibadat kay laeeq to sirf aik hi hai aur woh iss say pak hai kay uss ki aulad ho ussi kay liye hai jo kuch aasmanon mein hai aur jo kuch zamin mein hai. Aur Allah kafi hai kaam bananey wala
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ एहले किताब! अपने दीन में घुलु (अति) न करो और अल्लाह की तरफ हक़ के सिवा कोई बात मंसूब न करो, मसीह ईसा इब्ने मरियम इसके सिवा कुछ न था के अल्लाह का एक रसूल था और एक फरमान था जो अल्लाह ने मरियम की तरफ भेजा और एक रूह थी अल्लाह की तरफ से (जिसने मरियम के रहम में) बच्चों की शकल इख्तियार की) पास तुम अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाओ, और ना कहो के "तीन (त्रिमूर्ति)" हैं बाज़ आ जाओ, ये तुम्हारे ही लिए बेहतर है, अल्लाह तो बस एक ही खुदा है, वो बाला-तर है इस्के कोई उसका बेटा हो। ज़मीन और आसमान की सारी चीज़ें उसका दूध हैं, और इनकी कफ़लत ओ ख़बरगीरी के लिए बस वही काफ़ी है
عَرَبِيلَن يَستَنكِفَ المَسيحُ أَن يَكونَ عَبدًا لِلَّهِ وَلَا المَلائِكَةُ المُقَرَّبونَ ۚ وَمَن يَستَنكِف عَن عِبادَتِهِ وَيَستَكبِر فَسَيَحشُرُهُم إِلَيهِ جَميعًا
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हिन्दी (Al-Omari)मसीह़ हरगिज़ इससे तिरस्कार महसूस नहीं करेगा कि वह अल्लाह का बंदा हो और न निकटवर्ती फ़रिश्ते ही, और जो भी उसकी बंदगी से तिरस्कार महसूस करे और अभिमान करे, तो वह (अल्लाह) उन सभी को अपने पास एकत्र करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Maseeh ne kabhi is baat ko aar (disdain) nahin samjha ke woh Allah ka banda ho, aur na muqarrab-tareen farishtey isko apne liye aar (disdain) samajhte hain. Agar koi Allah ki bandagi ko apne liye aar samajhta hai aur taqabbur karta hai to ek waqt aayega jab Allah sabko gher kar apne saamne haazir karega
Roman Urdu (Junagarhi)Maseeh (alh-e-salam) ko Allah ka banda honey mein ko nang-o-aar ya takabbur-o-inkar hergiz ho hi nahi sakta aur na muqarrab farishton ko uss ki bandagi say jo bhi dil churaye aur takabbur-o-inkar keray Allah Taalaa unn sab ko ikhatta apni taraf jama keray ga
Devnagri Urdu (Maududi)मसीह ने कभी इस बात को आर (तिरस्कार) नहीं समझा के वो अल्लाह का बंदा हो, और ना मुकर्रब-तरीन फ़रिश्ते इसको अपने लिए एआर (तिरस्कार) समझते हैं. अगर कोई अल्लाह की बंदगी को अपने लिए जानता है और तकब्बुर करता है तो एक वक्त आएगा जब अल्लाह सबको घेर कर अपने सामने हाज़िर करेगा
عَرَبِيفَأَمَّا الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ فَيُوَفّيهِم أُجورَهُم وَيَزيدُهُم مِن فَضلِهِ ۖ وَأَمَّا الَّذينَ استَنكَفوا وَاستَكبَروا فَيُعَذِّبُهُم عَذابًا أَليمًا وَلا يَجِدونَ لَهُم مِن دونِ اللَّهِ وَلِيًّا وَلا نَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, तो वह उन्हें उनका भरपूर बदला देगा और उन्हें अपने अनुग्रह से अधिक भी देगा। रहे वे लोग जिन्होंने (अल्लाह की इबादत को) तिरस्कार समझा और अभिमान किया, तो वह उन्हें दर्दनाक यातना देगा। तथा वे अपने लिए अल्लाह के सिवा न कोई मित्र पाएँगे और न कोई सहायक।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt woh log jinhon ne iman laa kar neik tarz e amal iktiyar kiya hai apne ajar poorey poorey payenge aur Allah apne fazal se unko mazeed ajar ata farmayega. Aur jin logon ne bandagi ko aar samjha aur takabbur kiya hai unko Allah dardnaak saza dega aur Allah ke siwa jin jin ki sarparasti o madadgaari par woh bharosa rakhte hain unmein se kisi ko bhi woh wahan na payenge
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jo log eman laye hain aur shaista aemaal kiye hain unn ko unn ka poora poora sawab inayat farmaye ga aur apney fazal say unhen aur ziyada dey ga aur jin logon ney nang-o-aar aur sikashi aur inkar kiya unhen alam naak azab dey ga aur woh apney liye siwaye Allah kay koi himayati aur imdad kerney wala na payen gay
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त वो लोग जिन्हों ने ईमान ला कर नीक तर्ज ए अमल इक्तियार किया है अपने अजर पूरे पूरे पायेंगे और अल्लाह अपने फजल से उनको मजीद अजर अता फरमायेगा। और जिन लोगों ने बंदगी को आर समझा और तकब्बुर किया है उनको अल्लाह दर्दनाक सजा देगा और अल्लाह के सिवा जिन की सरपरस्ती ओ मददगार पर वो भरोसा रखते हैं उनमें से किसी को भी वो वहां ना पाएंगे
عَرَبِييا أَيُّهَا النّاسُ قَد جاءَكُم بُرهانٌ مِن رَبِّكُم وَأَنزَلنا إِلَيكُم نورًا مُبينًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो! तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण आया है और हमने तुम्हारी ओर एक स्पष्ट प्रकाश उतारा है।
Roman Urdu (Maududi)Logon! Tumhare Rubb ki taraf se tumhare paas daleel e roshan aa gayi hai aur humne tumhari taraf aisi roshni bhej di hai jo tumhein saaf saaf raasta dikhane wali hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey logo tumharay pass tumharay rab ki taraf say sanad aur daleel aa phonchi aur hum ney tumhari janib wazeh aur saaf noor utaar diya hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन! तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास दलील ए रोशन आ गई है और हमने तुम्हारी तरफ ऐसी रोशनी भेज दी है जो तुम्हें साफ साफ रास्ता दिखाने वाली है
عَرَبِيفَأَمَّا الَّذينَ آمَنوا بِاللَّهِ وَاعتَصَموا بِهِ فَسَيُدخِلُهُم في رَحمَةٍ مِنهُ وَفَضلٍ وَيَهديهِم إِلَيهِ صِراطًا مُستَقيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए तथा इस (क़ुरआन) को मज़बूती से थाम लिया, तो वह उन्हें अपनी विशेष दया तथा अनुग्रह में दाख़िल करेगा और उन्हें अपनी ओर सीधी राह दिखाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Ab jo log Allah ki baat maan lenge aur uski panaah dhundenge unko Allah apni rehmat aur apne fazal o karam ke daaman mein le lega aur apni taraf aane ka seedha raasta unko dikha dega
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jo log Allah Taalaa per eman laye aur ussay mazboot pakar liya unhen to woh un-qarib apni rehmat mein ley ley ga aur unhen apni taraf ki raah-e-raast dikha dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)अब जो लोग अल्लाह की बात मान लेंगे और उसकी पनाह ढूंढेंगे उनको अल्लाह अपनी रहमत और अपने फजल ओ करम के दामन में ले लेगा और अपनी तरफ आने का सीधा रास्ता उनको दिखा देगा
عَرَبِييَستَفتونَكَ قُلِ اللَّهُ يُفتيكُم فِي الكَلالَةِ ۚ إِنِ امرُؤٌ هَلَكَ لَيسَ لَهُ وَلَدٌ وَلَهُ أُختٌ فَلَها نِصفُ ما تَرَكَ ۚ وَهُوَ يَرِثُها إِن لَم يَكُن لَها وَلَدٌ ۚ فَإِن كانَتَا اثنَتَينِ فَلَهُمَا الثُّلُثانِ مِمّا تَرَكَ ۚ وَإِن كانوا إِخوَةً رِجالًا وَنِساءً فَلِلذَّكَرِ مِثلُ حَظِّ الأُنثَيَينِ ۗ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُم أَن تَضِلّوا ۗ وَاللَّهُ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) वे आपसे फतवा (शरई आदेश) पूछते हैं। आप कह दें : अल्लाह तुम्हें 'कलाला' के विषय में फतवा देता है। यदि कोई व्यक्ति मर जाए, जिसकी कोई संतान न हो, और उसकी एक बहन हो, तो उसके लिए उस (धन) का आधा है जो उसने छोड़ा और वह (स्वयं) उस (बहन) का वारिस होगा, यदि उस (बहन) की कोई संतान न हो। फिर यदि वे दो (बहनें) हों, तो उनके लिए उसमें से दो तिहाई होगा जो उसने छोड़ा। और यदि वे कई भाई-बहन पुरुष और महिलाएँ हों, तो पुरुष के लिए दो महिलाओं के हिस्से के बराबर होगा। अल्लाह तुम्हारे लिए खोलकर बयान करता है कि तुम गुमराह न हो जाओ। तथा अल्लाह हर चीज़ को ख़ूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Log tumse ‘kalalah’(inheritance from those woh have left behind no lineal heirs) ke maamle mein fatwa puchte hain. Kaho Allah tumhein fatwa deta hai: agar koi shaks be-aulad marr jaye aur uski ek behan ho to woh uske tarke (what he has left behind) mein se nisf(half) paayegi, aur agar behan be-aulad marey to bhai uska waris hoga. Agar mayyat ki waris do behnein hon to woh tarke mein se do-tihayi (two-third) ki haqqdar hongi, aur agar kayi bhai behnein hon to auraton ka ekehra aur mardon ka dohra hissa (then the male shall have the share of two females) hoga. Allah tumhare liye ehkaam ki tauzeeh (makes clear) karta hai taa-ke tum bhatakte na phiro aur Allah har cheez ka ilm rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap say fatwa poochtay hain aap keh dijiye kay Allah Taalaa (khud) tumhen kalala kay baray mein fatwa deta hai. Agar koi shaks marr jaye jiss ki aulad na ho aur aik behan ho to uss kay liye choray huye maal ka aadha hissa hai aur woh bhai uss behan ka waris hoga agar uss ki aulad na ho. Pus agar behnen do hon to unhen kul choray huye ka do tehaee milay ga. Aur agar koi shaks iss natay kay hain mard bhi aur aurten bhi to mard kay liye hissa hai misil do aurton kay Allah Taalaa tumharay liye biyan farma raha hai kay aisa na ho kay tum behak jao aur Allah Taalaa her cheez say waqif hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोग तुमसे 'कलालाह' (उन लोगों से विरासत जो अपने पीछे कोई वंशानुगत उत्तराधिकारी नहीं छोड़े हैं) के मामले में फतवा पूछते हैं। कहो अल्लाह तुम्हें फतवा देता है: अगर कोई शक्स बे-औलाद मर जाए और उसकी एक बहन हो तो वो उसके तर्क (जो उसने पीछे छोड़ दिया है) में से निस्फ़ (आधा) पाएगी, और अगर बहन बे-औलाद मारे तो भाई उसका वारिस होगा। अगर मय्यत की वारिस दो बहनें हों तो वो तर्के में से दो-तिहाई (दो-तिहाई) की हक़दार होंगी, और अगर कई भाई बहनें हों तो औरतों का इकहरा और मर्दों का दोहरा हिस्सा (तब पुरुष को दो महिलाओं का हिस्सा मिलेगा) होगा। अल्लाह तुम्हारे लिए एहकाम की तौज़ीह (स्पष्ट करता है) करता है ता-के तुम भक्त न फिरो और अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है
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Surah 4: An-Nisa' (The Women)

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Surah 4: An-Nisa' (The Women)

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Surah 5: Al-Ma'idah (The Food)

Medinan🕐 Revelation #112📜 120 Verses🕮 Juz 1–7
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا أَوفوا بِالعُقودِ ۚ أُحِلَّت لَكُم بَهيمَةُ الأَنعامِ إِلّا ما يُتلىٰ عَلَيكُم غَيرَ مُحِلِّي الصَّيدِ وَأَنتُم حُرُمٌ ۗ إِنَّ اللَّهَ يَحكُمُ ما يُريدُ
हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! प्रतिज्ञाओं (अनुबंधों) को पूरा करो। तुम्हारे लिए चौपाए जानवर (मवेशी) ह़लाल किए गए हैं, सिवाय उनके जो तुमपर पढ़े जाएँगे, इस हाल में कि शिकार को हलाल जानने वाले न हो, जबकि तुम एह़राम की हालत में हो। बेशक अल्लाह फैसला करता है जो चाहता है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, bandishon ki puri pabandi karo, tumhare liye maweshi ki qisam ke sab jaanwar halaal kiye gaye, siwaye unke jo aagey chalkar tumko bataye jayenge, lekin ehram ki halat mein shikar ko apne liye halal na karlo. Beshak Allah jo chahta hai hukum deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Ehad-o-paymaan pooray kero tumharay liye maweshi chopaye halal kiye gaye hain ba-juz unn kay jin kay naam parh ker suna diye jayen gay magar halat-e-ehraam mein shikar ko halal jannay walay na banna yaqeenan Allah jo chahaye hukum kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, बंदिशों की पूरी पाबंदी करो, तुम्हारे लिए मवेशी की क़िसम के सब जानवर हलाल हो गए, सिवाय उनके जो आगे चलकर तुमको बताएँगे, लेकिन एहराम की हालत में शिकार को अपने लिए हलाल न करलो। बेशाक़ अल्लाह जो चाहता है हुकुम देता है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تُحِلّوا شَعائِرَ اللَّهِ وَلَا الشَّهرَ الحَرامَ وَلَا الهَديَ وَلَا القَلائِدَ وَلا آمّينَ البَيتَ الحَرامَ يَبتَغونَ فَضلًا مِن رَبِّهِم وَرِضوانًا ۚ وَإِذا حَلَلتُم فَاصطادوا ۚ وَلا يَجرِمَنَّكُم شَنَآنُ قَومٍ أَن صَدّوكُم عَنِ المَسجِدِ الحَرامِ أَن تَعتَدوا ۘ وَتَعاوَنوا عَلَى البِرِّ وَالتَّقوىٰ ۖ وَلا تَعاوَنوا عَلَى الإِثمِ وَالعُدوانِ ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۖ إِنَّ اللَّهَ شَديدُ العِقابِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अल्लाह की निशानियों का अनादर न करो, न सम्मानित महीने का, न ह़रम की क़ुर्बानी का, न पट्टे वाले जानवरों का, और न उन लोगों का जो अपने पालनहार के अनुग्रह और उसकी प्रसन्नता की खोज में सम्मानित घर (काबा) की ओर जा रहे हों। और जब एह़राम खोल दो, तो शिकार करो। और किसी गिरोह की दुश्मनी, इस कारण कि उन्होंने तुम्हें मस्जिदे-ह़राम से रोका था, तुम्हें इस बात पर न उभारे कि अत्याचार करने लगो। तथा नेकी और परहेज़गारी पर एक-दूसरे का सहयोग करो और पाप तथा अत्याचार पर एक-दूसरे की सहायता न करो। और अल्लाह से डरो। निःसंदेह अल्लाह कड़ी यातना देने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, khuda parasti ki nishaniyon ko be-hurmat na karo, na haram mahino(months) mein se kisi ko halal karlo, na qurbaani ke jaanwaron par dast darazi karo, na un jaanwaron par haath daalo jinki gardano mein nazar e khuda-wandi ki alamat ke taur par pattey padey (wearing collars) huey hon, na un logon ko chedo jo apne Rubb ke fazal aur uski khushnudi ki talash mein makaan-e-mohtaram (kaaba) ki taraf jaa rahey hon. Haan jab ehram ki halat khatam ho jaye to shikar tum kar sakte ho aur dekho ek giroh ne jo tumhare liye masjid e haraam ka rasta bandh kardiya hai to ispar tumhara gussa tumhein itna mushtail na karde ke tum bhi unke muqable mein narawa zyadatiyan karne lago. Nahin! Jo kaam neki aur khuda tarsi ke hain un sab mein taawun (help one another) karo aur jo gunaah aur zyadati ke kaam hain unmein kisi se taawun (help one another) na karo. Allah se daro, uski saza bahut sakht hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Allah Taalaa kay shaaeer ki bey hurmati na kero na adab walay maheenon ki na haram mein qurban honey walay aur pattay pehnaye gaye janwaron ki jo kaaba ko ja rahey hon aur na unn logon ki jo bait-ullah kay qasad say apney rab taalaa kay fazal aur uss ki raza joee ki niyat say ja rahey hon haan jab tum ehraam utaar dalo to shikar khel saktay ho jin logon ney tumhen masjid-e-haram say roka tha unn ki dushmani tumhen iss baat per aamaadah na keray kay tum hadd say guzar jao neki aur perhezgari mein aik doosray ki imdad kertay raho aur gunah aur zulm-o-ziyadti mein madad na kero aur Allah Taalaa say dartay raho be-shak Allah Taalaa sakht saza denay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, खुदा परस्ती की निशानियों को बे-हुरमत न करो, न हराम महिनो (महीने) में से किसी को हलाल करो, न कुर्बानी के जाँवरों पर दस्तूर करो, न उन जानवरों पर हाथ डालो जिनकी गर्दन में नज़र ए खुदा-वंदी की हालत पर पत्ते पड़े (कॉलर पहने हुए) हुए हों, न उन लोगों को छेड़ो जो अपने रब के फजल और उसकी खुशनुदी की तलाश में मकान-ए-मोहतरम (काबा) की तरफ जा रहे हों। हां जब एहराम की हालत खत्म हो जाए तो शिकार तुम कर सकते हो और देखो एक गिरो ​​ने जो तुम्हारे लिए मस्जिद ए हराम का रास्ता बंद कर दिया है तो इसपर तुम्हारा गुस्सा तुम्हें इतना मुश्तैल ना करदे के तुम भी उनके मुकाबले में नरवा ज्यादतियां करने लगो। नहीं! जो काम नेकी और खुदा तरसी के हैं उन सब में तावुन (एक दूसरे की मदद) करो और जो गुनाह और ज्यादा के काम हैं उनमें किसी से तावुन (एक दूसरे की मदद) ना करो। अल्लाह से डरो, उसकी सज़ा बहुत ज़रूरी है
عَرَبِيحُرِّمَت عَلَيكُمُ المَيتَةُ وَالدَّمُ وَلَحمُ الخِنزيرِ وَما أُهِلَّ لِغَيرِ اللَّهِ بِهِ وَالمُنخَنِقَةُ وَالمَوقوذَةُ وَالمُتَرَدِّيَةُ وَالنَّطيحَةُ وَما أَكَلَ السَّبُعُ إِلّا ما ذَكَّيتُم وَما ذُبِحَ عَلَى النُّصُبِ وَأَن تَستَقسِموا بِالأَزلامِ ۚ ذٰلِكُم فِسقٌ ۗ اليَومَ يَئِسَ الَّذينَ كَفَروا مِن دينِكُم فَلا تَخشَوهُم وَاخشَونِ ۚ اليَومَ أَكمَلتُ لَكُم دينَكُم وَأَتمَمتُ عَلَيكُم نِعمَتي وَرَضيتُ لَكُمُ الإِسلامَ دينًا ۚ فَمَنِ اضطُرَّ في مَخمَصَةٍ غَيرَ مُتَجانِفٍ لِإِثمٍ ۙ فَإِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तुमपर ह़राम किया गया है मुर्दार, (बहता हुआ) रक्त, सूअर का माँस और वह जिसपर (ज़बह करते समय) अल्लाह के अलावा का नाम पुकारा जाए, तथा गला घुटने वाला जानवर, और जिसे चोट लगी हो, तथा गिरने वाला और जिसे सींग लगा हो और जिसे दरिंदे ने खाया हो, परंतु जो तुम (इनमें से) ज़बह कर लो। और जो थानों पर ज़बह किया गया हो और यह कि तुम तीरों के साथ भाग्य मालूम करो। यह सब (अल्लाह की) अवज्ञा है। आज वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, तुम्हारे धर्म से निराश हो गए। तो तुम उनसे न डरो, केवल मुझसे डरो। आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म परिपूर्ण कर दिया, तथा तुमपर अपनी नेमत पूरी कर दी और तुम्हारे लिए इस्लाम को धर्म के तौर पर पसंद कर लिया। फिर जो व्यक्ति भूख की किसी सूरत में मजूबर कर दिया जाए, इस हाल में कि किसी पाप की ओर झुकाव रखने वाला न हो, तो निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Tumpar haram kiya gaya murdar(carrion/dead meat), khoon, suwar ka gosht, woh jaanwar jo khuda ke siwa kisi aur ke naam par zibah kiya gaya ho, woh jo gala ghunt(strangulate) kar , ya chot (wound) kha kar, ya bulandi se gir kar, ya takkar kha kar mara ho, ya jisey kisi darinde ne phada ho siwaye uske jisey tumne zinda paa kar zibah karliya, aur woh jo kisi aastaane(altars) par zibah kiya gaya ho, neiz yeh bhi tumhare liye najayiz hai ke paanson ke zariye se apni kismat maloom karo(your fate by divining arrows). Yeh sab afaal fisq (sinful acts) hain. Aaj kaafrion ko tumhare deen ki taraf se poori mayousi ho chuki hai lihaza tum unsey na daro balke mujhse daro. Aaj maine tumhare deen ko tumhare liye mukammal kardiya hai aur apni niyamat tumpar tamaam kardi hai aur tumhare liye Islam ko tumhare deen ki haisiyat se qabool karliya hai. (Lihaza haram o halal ki jo quyood tumpar aayad kardi gayi hain unki pabandi karo) albatta jo shaks bhook se majboor hokar unmein se koi cheez kha le , bagair iske ke gunaah ki taraf uska mailan(wilfully inclined) ho to beshak Allah maaf karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum per haram kiya gaya murdaar aur khoon aur khinzeer ka gosht aur jiss per Allah kay siwa doosray ka naam pukara gaya ho aur jo gala ghutney say mara ho aur jo kissi zarab say marr gaya ho aur jo oonchi jagah say girr ker marra ho aur jo kissi kay seeng maarney say marra ho aur jissay darindon ney phaar khaya ho lekin ussay tum zibah ker dalo to haram nahi aur jo aastanon per zibah kiya gaya ho aur yeh bhi kay quraa kay teeron kay zariye faal geeri kero yeh sab bad tareen gunah hain aaj kuffaar tumharay deen say na umeed hogaye khabardaar! Tum inn say na darna aur mujh say dartay rehna aaj mein ney tumharay liye deen ko kaamil ker diya aur tum per apna inam bharpoor ker diya aur tumharay liye islam kay deen honey per raza mand hogaya. Pus jo shaks shiddat ki bhook mein bey qarar hojaye ba-shart-e-kay kissi gunah ki taraf uss ka meelaan na ho to yaqeenan Allah Taalaa moaf kerney wala aur boht bara meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुमपर हराम किया गया मुर्दर (मृत मांस), खून, सुवर का गोश्त, वो जानवर जो खुदा के सिवा किसी और के नाम पर जिबाह किया गया हो, वो जो गला घोंट (गला घोंट) कर, या चोट (घाव) खा कर, या बुलंदी से गिर कर, या टक्कर खा कर मारा हो, हां जिसके किसी दरिंदे ने फाड़ा हो, सिवाय उसके जिसने तुमने जिंदा पा कर जिबाह करलिया, और वो जो किसी आस्ताने (वेदियों) पर जिबाह किया गया हो, लेकिन ये भी तुम्हारे लिए जरूरी है कि पैंसों के ज़रिये से अपनी किस्मत मालूम करो। दिव्य बाण)। ये सब अफ़ज़ल फ़िस्क (पाप कर्म) हैं। आज काफ़रियों को तुम्हारे दीन की तरफ़ से पूरी मयूसी हो चुकी है लिहाज़ा तुम उनसे ना डरो बलके मुझसे डरो। आज मैंने तुम्हारे लिए मुकम्मल कर दिया है और अपनी नियामत तुमपर तमाम कर दी है और तुम्हारे लिए इस्लाम को तुम्हारे दीन की हैसियत से कबूल कर लिया है। (लिहाजा हराम ओ हलाल की जो क़ुयूद तुंपार आयद करदी गई है उनकी पबंदी करो) अलबत्ता जो शक्स भूख से मजबूर होकर उनमें से कोई चीज़ खा ले, बिना इसके के गुनाह की तरफ उसका मेलन (जानबूझकर झुका हुआ) हो तो अल्लाह माफ करने वाला और रहम फरमाने वाला है
عَرَبِييَسأَلونَكَ ماذا أُحِلَّ لَهُم ۖ قُل أُحِلَّ لَكُمُ الطَّيِّباتُ ۙ وَما عَلَّمتُم مِنَ الجَوارِحِ مُكَلِّبينَ تُعَلِّمونَهُنَّ مِمّا عَلَّمَكُمُ اللَّهُ ۖ فَكُلوا مِمّا أَمسَكنَ عَلَيكُم وَاذكُرُوا اسمَ اللَّهِ عَلَيهِ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَريعُ الحِسابِ
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हिन्दी (Al-Omari)वे आपसे पूछते हैं कि उनके लिए क्या हलाल किया गया है? आप कह दें कि तुम्हारे लिए अच्छी पवित्र चीजें हलाल की गई हैं। और शिकारी जानवरों में से जो तुमने सधाए हैं, (जिन्हें तुम) शिकारी बनाने वाले हो, उन्हें उसमें से सिखाते हो जो अल्लाह ने तुम्हें सिखाया है। तो उसमें से खाओ जो (शिकार) वे तुम्हारे लिए रोक रखें, और उसपर अल्लाह का नाम लो। तथा अल्लाह से डरो। निःसंदेह अल्लाह शीघ्र हिसाब लेने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Log puchte hain ke unke liye kya halal kiya gaya hai, kaho tumhare liye sari paak cheezein halal kardi gayi hain aur jin shikari jaanwaron ko tumne sadhaya ho (teach, training them to hunt) jinko khuda ke diye huey ilam ki bina par tum shikar ki taleem diya karte ho, woh jis jaanwar ko tumhare liye pakad rakkhein usko bhi tum kha sakte ho, albatta uspar Allah ka naam lelo aur Allah ka kanoon todne se daro.Allah ko hisaab lete kuch dair nahin lagti
Roman Urdu (Junagarhi)Aap say daryaft kertay hain kay unn kay liye kiya kuch halal hai? Aap keh dijiye kay tamam pak cheezen tumharay liye halal ki gaee hain aur jin shikar khelney walay janwaron ko tum ney sidha rakha hai yani jinhen tum thora boht woh sikhatay ho jiss ki taleem Allah Taalaa ney tumhen dey rakhi hai pus jiss shikar ko woh tumharay liye pakar ker rok rakhen to tum uss say kha lo aur iss per Allah Taalaa kay naam ka zikar ker liya kero. Aur Allah Taalaa say dartay raho yaqeenan Allah Taalaa jald hisab lenay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)लॉग पूछते हैं कि उनके लिए क्या हलाल किया गया है, कहो तुम्हारे लिए सारी चीजें हलाल कर दी गई हैं और जिन शिकारी जानवरों को तुमने सिखाया हो (उन्हें शिकार करना सिखाओ, प्रशिक्षित करो) जिनको खुदा के दिए हुए इलम की बिना पर तुम शिकार की तालीम दिया करते हो, वो जिस जानवर को तुम्हारे लिए पकड़ रक्खें उसको भी तुम खा सकते हो, अलबत्ता उसपर अल्लाह का नाम लेलो और अल्लाह का कानून तोड़ने से डरो। अल्लाह को हिसाब लेते कुछ देर नहीं लगती
عَرَبِياليَومَ أُحِلَّ لَكُمُ الطَّيِّباتُ ۖ وَطَعامُ الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ حِلٌّ لَكُم وَطَعامُكُم حِلٌّ لَهُم ۖ وَالمُحصَناتُ مِنَ المُؤمِناتِ وَالمُحصَناتُ مِنَ الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ مِن قَبلِكُم إِذا آتَيتُموهُنَّ أُجورَهُنَّ مُحصِنينَ غَيرَ مُسافِحينَ وَلا مُتَّخِذي أَخدانٍ ۗ وَمَن يَكفُر بِالإيمانِ فَقَد حَبِطَ عَمَلُهُ وَهُوَ فِي الآخِرَةِ مِنَ الخاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आज तुम्हारे लिए अच्छी पवित्र चीज़ें हलाल कर दी गईं और उन लोगों का खाना तुम्हारे लिए हलाल है जिन्हें किताब दी गई, और तुम्हारा खाना उनके लिए हलाल है, और ईमान वाली औरतों में से पाक-दामन औरतें तथा उन लोगों की पाक-दामन औरतें जिन्हें तुमसे पहले किताब दी गई, जब तुम उन्हें उनके महर दे दो, इस हाल में कि तुम विवाह में लाने वाले हो, व्यभिचार करने वाले नहीं और न चोरी-छिपे याराना करने वाले। और जो ईमान से इनकार करे, तो निश्चय उसका कर्म व्यर्थ हो गया तथा वह आख़िरत में घाटा उठाने वालों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Aaj tumhare liye sari paak cheezein halal kardi gayi hain, ehle kitab ka khana tumhare liye halal hai aur tumhara khana unke liye aur mehfooz auratein bhi tumhare liye halal hain khwa woh ehle iman ke giroh se hon ya un qaumon mein se jinko tumse pehle kitaab di gayi thi, bashart-ye-ke tum unke mehar ada karke nikah mein unke muhafiz (protectors) bano, na yeh ke azad shehwat (lust) rani karne lago ya chori chupe ashnaiyan karo. Aur jo kisi ne iman ki rawish par chalne se inkar kiya to uska sara karnama e zindagi zaye ho jayega aur woh aakhirat mein diwaliya (among the utter losers) hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Kul pakeezah cheezen aaj tumharay liye halal ki gaeen aur ehal-e-kitab ka zabeeha tumharay liye halal hai aur tumhara zabeeha unn kay liye halal hai aur pak daaman musalman aurten aur jo log tum say pehlay kitab diye gaye hain unn ki pak daaman aurten bhi halal hain jabkay tum unn kay mehar ada kero iss tarah kay tum unn say ba-qaeeda nikkah kero yeh nahi kay aelaaniya zinna kero ya posheedah bad kaari kero munkireen-e-eman kay aemaal zaya aur ikaarat hain aur aakhirat mein woh haarney walon mein say hain
Devnagri Urdu (Maududi)आज तुम्हारे लिए सारी पाक चीजें हलाल हो गई हैं, एहले किताब का खाना तुम्हारे लिए हलाल है और तुम्हारा खाना उनके लिए और महफूज औरतें भी तुम्हारे लिए हलाल हैं ख्वा वो एहले ईमान के गिरो ​​से होन या उन क़ौमों में से जिनको तुमसे पहले किताब दी गई थी, बशारत-ये-के तुम उनके मेहर अदा करके निकाह में उनके मुहाफ़िज़ (रक्षक) बानो, ना हाँ के आजाद शेहवत (वासना) रानी करने लगो या चोरी छुपे आशनाईयां करो। और जो किसी ने ईमान की रवीश पर चलने से इनकार किया तो उसका सारा कारनामा ए जिंदगी जाय हो जाएगा और वो आखिरत में दीवालिया (पूरी तरह से हारे हुए लोगों के बीच) होगा
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِذا قُمتُم إِلَى الصَّلاةِ فَاغسِلوا وُجوهَكُم وَأَيدِيَكُم إِلَى المَرافِقِ وَامسَحوا بِرُءوسِكُم وَأَرجُلَكُم إِلَى الكَعبَينِ ۚ وَإِن كُنتُم جُنُبًا فَاطَّهَّروا ۚ وَإِن كُنتُم مَرضىٰ أَو عَلىٰ سَفَرٍ أَو جاءَ أَحَدٌ مِنكُم مِنَ الغائِطِ أَو لامَستُمُ النِّساءَ فَلَم تَجِدوا ماءً فَتَيَمَّموا صَعيدًا طَيِّبًا فَامسَحوا بِوُجوهِكُم وَأَيديكُم مِنهُ ۚ ما يُريدُ اللَّهُ لِيَجعَلَ عَلَيكُم مِن حَرَجٍ وَلٰكِن يُريدُ لِيُطَهِّرَكُم وَلِيُتِمَّ نِعمَتَهُ عَلَيكُم لَعَلَّكُم تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! जब तुम नमाज़ के लिए उठो, तो अपने चेहरों को और अपने हाथों को कुहनियों समेत धो लो और अपने सिरों का मसह़ करो तथा अपने पाँवों को टखनों समेत (धो लो)। और यदि तुम जनाबत की हालत में हो, तो स्नान कर लो। तथा यदि तुम बीमार हो, अथवा यात्रा में हो, अथवा तुममें से कोई शौचकर्म से आया हो, अथवा तुमने स्त्रियों से सहवास किया हो, फिर कोई पानी न पाओ, तो पाक मिट्टी का क़सद करो और उससे अपने चेहरों तथा हाथों पर मसह कर लो। अल्लाह नहीं चाहता कि तुमपर कोई तंगी करे। लेकिन वह चाहता है कि तुम्हें पाक करे और ताकि अपनी नेमत तुमपर पूरी करे, ताकि तुम शुक्र करो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, jab tum namaz ke liye utho to chahiye ke apne mooh aur haath kohniyon tak dho lo, siron(heads) par haath pher lo aur paon takno tak dho liya karo, agar janabat ki halat mein ho to naha kar paak ho jao , agar bimaar ho ya safar ki halat mein ho ya tum mein se koi shaks rafe hajat(reliving himself) karke aaye ya tumne auraton ko haath lagaya ho, aur pani na miley, to paak mitti se kaam lo, bas uspar haath maar kar apne mooh aur haathon par pher liya karo. Allah tumpar zindagi ko tangg nahin karna chahta, magar woh chahta hai ke tumhein paak karey aur apni niyamat tumpar tamaam karde, shayad ke tum shukarguzar bano
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Jab tum namaz kay liye utho to apney mun ko aur apney haathon ko kohniyon samet dho lo aur apney siron ka masah kero aur apney paon ko takhnon samet dho lo aur agar tum janabat ki halat mein ho to ghusul kerlo haan agar tum beemar ho ya safar ki halat mein ho ya tum mein say koi hajat zaroori say farigh ho ker aaya ho ya tum aurton say milay ho aur tumhen pani na milay to tum pak mitti say tayammum kerlo issay apney chehron per aur haathon per mall lo Allah Taalaa tum per kissi qisam ki tangi nahi daalna chahata bulkay uss ka irada tumhen pak kerney ka aur tumhen apni bharpoor nemat denay ka hai takay tum shukar ada kertay raho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम नमाज के लिए उठो तो चाहिए के अपने मुंह और हाथ कोहनी तक धो लो, सिरों पर हाथ फेर लो और पांव तक धो लिया करो, अगर जनाब की हालत में हो तो नहा कर पक जाओ, अगर बीमार हो या सफर की हालत में हो या तुम में से कोई शक्स रफे हाजत (खुद को राहत देते हुए) करके आए या तुमने औरतों को हाथ लगाया हो, और पानी ना मिले, तो पाक मिट्टी से काम लो, बस उसपर हाथ मार कर अपने मुंह और हाथों पर फेर लिया करो। अल्लाह तुमपर जिंदगी को तंग नहीं करना चाहता, मगर वो चाहता है कि तुम्हें पाक करे और अपनी नियामत तुमपर तमाम करदे, शायद के तुम शुक्रगुज़ार बनो
عَرَبِيوَاذكُروا نِعمَةَ اللَّهِ عَلَيكُم وَميثاقَهُ الَّذي واثَقَكُم بِهِ إِذ قُلتُم سَمِعنا وَأَطَعنا ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَليمٌ بِذاتِ الصُّدورِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अपने ऊपर अल्लाह की नेमत याद करो और उसका वह वचन जो उसने तुमसे दृढ़ रूप से लिया है, जब तुमने कहा था : "हमने सुना और हमने मान लिया" तथा अल्लाह से डरो। निःसंदेह अल्लाह सीनों की बात को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne tumko jo niyamat ata ki hai uska khayal rakkho aur us pukhta ahad ko na bhoolo jo usne tumse liya hai, yani tumhara yeh qaul ke , “humne suna aur itaat qabool ki” Allah se daro , Allah dilon ke raaz jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum per Allah Taalaa ki jo nematen nazil hui hain unhen yaad rakho aur uss kay uss ehad ka bhi jiss ka tum say mohida hua hai jabkay tum ney kaha hum ney suna aur maana aur Allah Taalaa say dartay raho yaqeenan Allah Taalaa dilon ki baaton ka jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने तुमको जो नियामत अता की है उसका ख्याल रक्खो और हमें पुख्ता अहद को ना भूलो जो उसने तुमसे लिया है, यानी तुम्हारा ये क़ौल के, "हमने सुना और इताअत क़बूल की" अल्लाह से डरो, अल्लाह दिलों के राज़ जानता है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا كونوا قَوّامينَ لِلَّهِ شُهَداءَ بِالقِسطِ ۖ وَلا يَجرِمَنَّكُم شَنَآنُ قَومٍ عَلىٰ أَلّا تَعدِلُوا ۚ اعدِلوا هُوَ أَقرَبُ لِلتَّقوىٰ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ خَبيرٌ بِما تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अल्लाह के लिए मज़बूती से क़ायम रहने वाले, न्याय के साथ गवाही देने वाले बन जाओ। तथा किसी समूह की शत्रुता तुम्हें इस बात पर हरगिज़ न उभारे कि तुम न्याय न करो। न्याय करो, यह तक़्वा (अल्लाह से डरने) के अधिक निकट है, और अल्लाह से डरो। निःसंदेह अल्लाह उससे भली-भाँति अवगत है जो तुम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho! Allah ki khatir raasti (upright) par qayam rehne waley aur insaf ki gawahi dene waley bano, kisi giroh ki dushmani tumko itna mushtail (move) na karde ke insaf se phir jao. Adal (insaf) karo, yeh khuda tarsi se zyada munasibat rakhta hai, Allah se darr kar kaam karte raho, jo kuch tum karte ho Allah ussey puri tarah ba-khabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tum Allah ki khatir haq per qaeem hojao raasti aur insaf kay sath gawahi denay walay bann jao kissi qom ki adawat tumhen khilaf-e-adal per aamaada na ker dey adal kiya kero jo perhezgari kay ziyada qarib hai aur Allah Taalaa say dartay raho yaqeen mano kay Allah Taalaa tumharay aemaal say ba khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों जो ईमान लाए हो! अल्लाह की खातिर रास्ता (सीधा) पर क़याम रहने वाले और इंसाफ की गवाही देने वाले बनो, किसी गिरोह की दुश्मनी तुमको इतना मुशतैल (चाल) ना करदे के इंसाफ से फिर जाओ। अदल (इंसाफ) करो, ये खुदा तरसी से ज्यादा मुनासिबत रखता है, अल्लाह से डर कर काम करते रहो, जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे पूरी तरह ब-खबर है
عَرَبِيوَعَدَ اللَّهُ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ ۙ لَهُم مَغفِرَةٌ وَأَجرٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने उन लोगों से वादा किया है, जो ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए कि उनके लिए क्षमादान तथा बड़ा बदला है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log iman layein aur neik amal karein, Allah ne unsey wada kiya hai ke unki khataon se darguzar kiya jayega aur unhein bada ajar milega
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ka wada hai jo eman layen aur nek kaam keren unn kay liye wasee maghfirat aur boht bara ajar-o-sawab hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ईमान लाए और नेक अमल करें, अल्लाह ने उनसे वादा किया है कि उनकी खतों से दरगुजर किया जाएगा और उन्हें बड़ा अजर मिलेगा
عَرَبِيوَالَّذينَ كَفَروا وَكَذَّبوا بِآياتِنا أُولٰئِكَ أَصحابُ الجَحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने कुफ़्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वही भड़कती आग वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jo kufr karein aur Allah ki aayat ko jhutlayein , to woh dozakh mein janey waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin logon ney kufur kiya aur humaray ehkaam ko jhutlaya woh dozakhi hain
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जो कुफ्र करें और अल्लाह की आयतें बताएं, तो वो दोज़ख़ में जाने वाले हैं
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا اذكُروا نِعمَتَ اللَّهِ عَلَيكُم إِذ هَمَّ قَومٌ أَن يَبسُطوا إِلَيكُم أَيدِيَهُم فَكَفَّ أَيدِيَهُم عَنكُم ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَليَتَوَكَّلِ المُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करो, जब कुछ लोगों ने इरादा किया कि तुम्हारी ओर अपने हाथ बढ़ाएँ, तो उसने उनके हाथों को तुमसे रोक दिया। तथा अल्लाह से डरो और ईमान वालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, Allah ke us ehsan ko yaad karo jo usne (abhi haal mein) tumpar kiya hai, jabke ek giroh ne tumpar dast darazi (stretch their hands against you) ka irada karliya tha, magar Allah ne unke haath tumpar uthne se roak diye, Allah se darr kar kaam karte raho, iman rakhne walon ko Allah hi par bharosa karna chahiye
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Allah Taalaa ney jo ehsan tum per kiya hai ussay yaad kero jabkay aik qom ney tum per dast darazi kerni chahai to Allah Taalaa ney unn kay haathon ko tum tak phonchney say rok diya aur Allah Taalaa say dartay raho aur mominon ko Allah Taalaa hi per bharosa kerna chahaiye
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, अल्लाह के हमें एहसान को याद करो जो उसने (अभी हाल में) तुमपर किया है, जबके एक गिरो ​​ने tumpar दस्त दारज़ी (अपने खिलाफ हाथ फैलाएं) का इरादा कार्लिया था, मगर अल्लाह ने उनके हाथ तुम पर खड़े से रोक दिए, अल्लाह से डर कर काम करते रहो, ईमान रखने वालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए
عَرَبِي۞ وَلَقَد أَخَذَ اللَّهُ ميثاقَ بَني إِسرائيلَ وَبَعَثنا مِنهُمُ اثنَي عَشَرَ نَقيبًا ۖ وَقالَ اللَّهُ إِنّي مَعَكُم ۖ لَئِن أَقَمتُمُ الصَّلاةَ وَآتَيتُمُ الزَّكاةَ وَآمَنتُم بِرُسُلي وَعَزَّرتُموهُم وَأَقرَضتُمُ اللَّهَ قَرضًا حَسَنًا لَأُكَفِّرَنَّ عَنكُم سَيِّئَاتِكُم وَلَأُدخِلَنَّكُم جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ ۚ فَمَن كَفَرَ بَعدَ ذٰلِكَ مِنكُم فَقَد ضَلَّ سَواءَ السَّبيلِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह अल्लाह ने बनी इसराईल से दृढ़ वचन लिया और हमने उनमें से बारह प्रमुख नियुक्त किए। तथा अल्लाह ने फरमाया : निःसंदेह मैं तुम्हारे साथ हूँ, यदि तुमने नमाज़ क़ायम की और ज़कात अदा की और मेरे रसूलों पर ईमान लाए और उनका समर्थन किया तथा अल्लाह को अच्छा क़र्ज़ दिया। तो निश्चय मैं तुमसे तुम्हारे पाप अवश्य क्षमा कर दूँगा और निश्चय तुम्हें ऐसे बाग़ों में अवश्य दाख़िल करूँगा, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। फिर जिसने इसके बाद तुममें से कुफ़्र किया, तो निश्चय वह सीधे रास्ते से भटक गया।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne bani Israel se pukhta ahad liya tha aur in mein barah (twelve) naqeeb(leaders) muqarrar kiye thay aur unse kaha tha ke “main tumhare saath hoon, agar tumne namaz qayam rakkhi aur zakaat di aur mere Rasoolon ko maana ar unki madad ki aur apne khuda ko accha qarz dete rahey to yaqeen rakkho ke main tumhari buraiyan tumse zayal (wipe out) kardunga aur tumko aisey baaghon (gardens) mein dakhil karunga jinke nichey nehrein behti hongi, magar iske baad jisne tum mein se kufr ki rawish ikhtiyar ki to dar haqeeqat usne swa-sabeel gum kardi (gone astray from the right way)”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa ney bani israeel say ehad-o-paymaan liya aur unhi mein say baara sardar hum ney muqarrar farmaye aur Allah Taalaa ney farma diya kay yaqeenan mein tumharay sath hun agar tum namaz qaeem rakho gay aur zakat detay raho gay aur meray rasoolon ko maantay raho gay aur unn ki madad kertay raho gay aur Allah Taalaa ko behtar qarz detay raho gay to yaqeenan mein tumhari buraiyan tum say door rakhoon ga aur tumhen unn jannaton mein ley jaon ga jin kay neechay chashmay beh rahey hain abb iss ehas-o-paymaan kay baad bhi tum mein say jo inkari ho jaye woh yaqeenan raah-e-raast say bhatak gaya
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने बानी इसराइल से पुख्ता अहद लिया था और में बारह (बारह) नकीब (नेताओं) ने मुकर्रर किया था और उनसे कहा था के "मैं तुम्हारे साथ हूं, अगर तुमने नमाज कायम रक्खी और जकात दी और मेरे रसूलों को माना अर उनकी मदद की और अपने खुदा को अच्छा कर्ज देते रहे तो यकीन रखिए के मैं तुम्हारी बुराइयां तुमसे ज़याल (मिटा दो) कर दूंगा और तुमको ऐसे बाघों (बगीचों) में दाख़िल करुंगा जिनका आला नहरें बहती होंगी, मगर इसके बाद जिसने तुम में से कुफ्र की रवीश इख्तियार की तो दर हक़ीक़त उसने स्व-सबील गम करदी (सही रास्ते से भटक गए)”
عَرَبِيفَبِما نَقضِهِم ميثاقَهُم لَعَنّاهُم وَجَعَلنا قُلوبَهُم قاسِيَةً ۖ يُحَرِّفونَ الكَلِمَ عَن مَواضِعِهِ ۙ وَنَسوا حَظًّا مِمّا ذُكِّروا بِهِ ۚ وَلا تَزالُ تَطَّلِعُ عَلىٰ خائِنَةٍ مِنهُم إِلّا قَليلًا مِنهُم ۖ فَاعفُ عَنهُم وَاصفَح ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उनके अपने वचन को भंग करने ही के कारण, हमने उन्हें धिक्कार दिया और उनके दिलों को कठोर कर दिया कि वे शब्दों को उनके स्थानों से फेर देते हैं। तथा वे उसमें से एक हिस्सा भूल गए जिसकी उन्हें नसीहत की गई थी। और आपको हमेशा उनके किसी न किसी विश्वासघात का पता चलता रहेगा, सिवाय उनके थोड़े-से लोगों के। अतः आप उन्हें क्षमा कर दें और उन्हें जाने दें। निःसंदेह अल्लाह उपकार करने वालों से प्रेम करता है।
Roman Urdu (Maududi)Phir yeh unka apne ahad ko toad daalna tha jiski wajah se humne unko apni rehmat se door phenk diya aur unke dil sakht kardiye. Ab unka haal yeh hai ke alfaz ka ulat pher karke baat ko kahin se kahin le jatey hain, jo taleem inhein di gayi thi uska bada hissa bhool chuke hain, aur aaye din tumhein unki kisi na kisi khayanat ka pata chalta rehta hai. Inmein se bahut kam log is aib(burayi) se bachey huey hain, [pas jab yeh is haal ko pahunch chuke hain to jo shararatein bhi yeh karein woh inse ain mutwaqqe (expected) hain, lihaza inhein maaf karo aur inki harakat se chasm-poshi (overlook) karte raho. Allah un logon ko pasand karta hai jo ehsan ki rawish rakhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir unn ki ehad shikni ki waja say hum ney unn per apni laanat nazil farma di aur unn kay dil sakht ker diye kay woh kalaam ko uss ki jagah say badal daaltay hain aur jo kuch naseehat unhen ki gaee thi uss ka boht bara hissa bhula bethay unn ki aik na aik khayanat per tujhay itlaa milti hi rahey gi haan thoray say aisay nahi bhi hain pus tu unhen moaf kerta jaa aur dar guzar kerta reh be-shak Allah Taalaa ehsan kerney walon say mohabbat kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर ये उनका अपने अहद को तोड़ देना था जिसकी वजह से हमने उनको अपनी रहमत से दूर फेंक दिया और उनका दिल मजबूत कर दिया। अब उनका हाल ये है कि अल्फ़ाज़ का उलट फेर करके बात को कहीं से कहीं ले जाते हैं, जो तालीम उन्हें दी गई थी उसका बड़ा हिसा भूल चुके हैं, और आए दिन तुम्हें उनकी कोई ना किसी खयानत का पता चलता रहता है। इनमें से बहुत कम लोग इस ऐब (बुराई) से बचे हुए हैं, [पास जब ये इस हाल को पाहुंच चुके हैं तो जो शरारतें भी ये करें वो इनसे ऐन मुतवक्क (अपेक्षित) हैं, लिहाजा इन्हें माफ करो और इनकी हरकत से चश्मा-पोशी (नजरअंदाज) करते रहो। अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो एहसान की रवीश रखते हैं
عَرَبِيوَمِنَ الَّذينَ قالوا إِنّا نَصارىٰ أَخَذنا ميثاقَهُم فَنَسوا حَظًّا مِمّا ذُكِّروا بِهِ فَأَغرَينا بَينَهُمُ العَداوَةَ وَالبَغضاءَ إِلىٰ يَومِ القِيامَةِ ۚ وَسَوفَ يُنَبِّئُهُمُ اللَّهُ بِما كانوا يَصنَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने कहा कि हम ईसाई हैं, हमने उनसे (भी) दृढ़ वचन लिया, फिर वे उसका एक हिस्सा भूल गए जिसका उन्हें उपदेश दिया गया था। अतः हमने उनके बीच क़ियामत के दिन तक के लिए दुश्मनी और द्वेष भड़का दिया। और शीघ्र ही अल्लाह उन्हें उसकी ख़बर देगा, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Isi tarah humne un logon se bhi pukhta ahad liya tha jinhon ne kaha tha ke “hum nasara (christians) hain” magar unko bhi jo sabaq yaad karaya gaya tha uska ek bada hissa unhon ne faramosh kardiya. Aakhir e kaar humne unke darmiyan qayamat tak ke liye dushmani aur aapas ke bugz o inaad (spite) ka beej bo (seed sow) diya, aur zaroor ek waqt aayega jab Allah unhein batayega ke woh duniya mein kya banate rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo apney aap ko nasrani kehtay hain hum ney unn say bhi ehad-o-paymaan liya unhon ney bhi iss ka bara hissa faramosh ker diya jo unhen naseehat ki gaee thi to hum ney bhi unn kay aapas mein bughz-o-adawat daal di jo ta-qayamat rahey gi aur jo kuch yeh kertay thay un-qarib Allah Taalaa unhen sab bata dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)इसी तरह हमने उन लोगों से भी पुख्ता अहद लिया था जिन्होन ने कहा था कि "हम नसारा (ईसाई) हैं" लेकिन उनको भी जो सबक याद करवाया गया था उसका एक बड़ा हिसा उनहोन ने फरामोश करदिया। आख़िर ए कार हमने उनके दरमियान कयामत तक के लिए दुश्मनी और आपस के बुग्ज़ ओ इनाद (बावजूद) का बीज बो (बीज बोना) दिया, और जरूर एक वक्त आएगा जब अल्लाह उन्हें बताएगा कि वो दुनिया में क्या बना रहे हैं
عَرَبِييا أَهلَ الكِتابِ قَد جاءَكُم رَسولُنا يُبَيِّنُ لَكُم كَثيرًا مِمّا كُنتُم تُخفونَ مِنَ الكِتابِ وَيَعفو عَن كَثيرٍ ۚ قَد جاءَكُم مِنَ اللَّهِ نورٌ وَكِتابٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ किताब वालो! तुम्हारे पास हमारे रसूल आ गए हैं, जो तुम्हारे लिए उनमें से बहुत-सी बातें खोलकर बयान करते हैं, जिन्हें तुम किताब में से छिपाया करते थे और बहुत-सी बातों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। निःसंदेह तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से एक प्रकाश तथा स्पष्ट पुस्तक (क़ुरआन) आई है।
Roman Urdu (Maududi)Aey ehle kitaab! Hamara Rasool tumhare paas aa gaya hai jo kitab e ilahi ki bahut si un baaton ko tumhare saamne khol raha hai jinpar tum purda dala karte thay, aur bahut si baaton se darguzar bhi kar jata hai. Tumhare paas Allah ki taraf se roshni aa gayi hai aur ek aisi haqq numa kitab
Roman Urdu (Junagarhi)Aey ehal-e-kitab! Tumhara pass humara rasool (PBUH) aa chuka hai jo tumahray samney kitab-ullah ki bakasrat aisi baaten zahir ker raha hai jinhen tum chupa rahey thay aur boht si baaton say dar guzar kerta hai tumharay pass Allah Taalaa ki taraf say noor aur wazeh kitab aa chuki hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ एहले किताब! हमारा रसूल तुम्हारे पास आ गया है जो किताब ए इलाही की बहुत सी उन बातों को तुम्हारे सामने खोल रहा है जब तक तुम पर्दा डाला करते थे, और बहुत सी बातों से दरगुज़र भी कर लिया जाता है। तुम्हारे पास अल्लाह की तरफ से रोशनी आ गई है और एक ऐसी हक़ नुमा किताब
عَرَبِييَهدي بِهِ اللَّهُ مَنِ اتَّبَعَ رِضوانَهُ سُبُلَ السَّلامِ وَيُخرِجُهُم مِنَ الظُّلُماتِ إِلَى النّورِ بِإِذنِهِ وَيَهديهِم إِلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसके द्वारा अल्लाह उन लोगों को शांति के मार्ग दिखाता है, जो उसकी प्रसन्नता के पीछे चलें। और उन्हें अपनी अनुमति से अँधेरों से प्रकाश की ओर निकालता है और उन्हें सीधे रास्ते का मार्गदर्शन प्रदान करता है।
Roman Urdu (Maududi)Jiske zariye se Allah taala un logon ko jo uski raza ke taalib hain salamati ke tareeqe batata hai aur apne izan se unko andheron se nikal kar ujale ki taraf lata hai aur raah e raast ki taraf unki rehnumayi karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss kay zariye say Allah Taalaa unhen jo raza-e-rab kay darpay hon salamti ki raahen batlata hai aur apni tofiq say andheron say nikal ker noor ki taraf laata hai aur raah-e-raast ki taraf unn ki rehbari kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिसकी ज़रिये से अल्लाह ताला उन लोगों को जो उसकी रज़ा के तालिब हैं सलामती के तारीख़े बताता है और अपने इज़ान से उनको अँधेरों से निकाल कर उजाले की तरफ लाता है और राह ए रास्ते की तरफ उनकी रहनुमाई करता है
عَرَبِيلَقَد كَفَرَ الَّذينَ قالوا إِنَّ اللَّهَ هُوَ المَسيحُ ابنُ مَريَمَ ۚ قُل فَمَن يَملِكُ مِنَ اللَّهِ شَيئًا إِن أَرادَ أَن يُهلِكَ المَسيحَ ابنَ مَريَمَ وَأُمَّهُ وَمَن فِي الأَرضِ جَميعًا ۗ وَلِلَّهِ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَما بَينَهُما ۚ يَخلُقُ ما يَشاءُ ۚ وَاللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय वे लोग काफ़िर हो गए, जिन्होंने कहा कि निःसंदेह अल्लाह मरयम का पुत्र मसीह ही तो है। (ऐ नबी!) कह दें : यदि अल्लाह मसीह बिन मरयम और उसकी माता तथा धरती में मौजूद सभी लोगों को विनष्ट करना चाहे, तो कौन अल्लाह को रोकने का अधिकार रखता है? तथा अल्लाह ही के लिए आकाशों और धरती का राज्य है और उसकी भी जो उन दोनों के बीच है। वह पैदा करता है जो चाहता है तथा अल्लाह हर चीज़ का पूर्ण सामर्थ्य रखता है।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan kufr kiya un logon ne jinhon ne kaha Maseeh ibn Mariyam khuda hai. (Aey Muhammad)! Inse kaho ke agar khuda Maseeh Ibn Mariyam ko aur uski Maa aur tamaam zameen walon ko halaak kardena chahe to kiski majaal hai ke usko is irade se baaz rakh sakey? Allah to zameen aur aasmano ka aur un sab cheezon ka malik hai jo zameen aur aasmano ke darmiyan payi jati hain, jo kuch chahta hai paida karta hai aur uski qudrat har cheez par haawi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan woh log kafir hogaye jinhon ney kaha kay Allah hi maseeh ibn-e-mariyum hai aap inn say keh dijiye kay agar Allah maseeh ibn-e-marium aur uss ki walida aur ruy-e-zamin kay sab logon ko halak ker dena chahaye to kaun hai jo Allah Taalaa per kuch bhi ikhtiyar rakhta ho? Aasmanon-o-zamin aur dono kay darmiyan ka kul mulk Allah Taalaa hi ka hai woh jo chahata hai peda kerta hai aur Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन कुफ्र किया उन लोगों ने जिन्हों ने कहा मसीह इब्न मरियम खुदा है। (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के अगर खुदा मसीह इब्न मरियम को और उसकी माँ और तमाम ज़मीन वालों को हलाक करना चाहे तो किसकी मजाल है कि उसको इस इरादे से बाज़ रख सके? अल्लाह तो ज़मीन और आसमान का और उन सब चीज़ों का मालिक है जो ज़मीन और आसमान के दरमियान पाई जाती है, जो कुछ चाहता है अदा करता है और उसकी क़ुदरत हर चीज़ पर हावी है
عَرَبِيوَقالَتِ اليَهودُ وَالنَّصارىٰ نَحنُ أَبناءُ اللَّهِ وَأَحِبّاؤُهُ ۚ قُل فَلِمَ يُعَذِّبُكُم بِذُنوبِكُم ۖ بَل أَنتُم بَشَرٌ مِمَّن خَلَقَ ۚ يَغفِرُ لِمَن يَشاءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشاءُ ۚ وَلِلَّهِ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَما بَينَهُما ۖ وَإِلَيهِ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यहूदियों और ईसाइयों ने कहा कि हम अल्लाह के पुत्र और उसके प्यारे हैं। आप कह दें : फिर वह तुम्हें तुम्हारे पापों के कारण सज़ा क्यों देता है? बल्कि तुम (भी) उसके पैदा किए हुए प्राणियों में से एक मनुष्य हो। वह जिसे चाहता है, क्षमा करता है और जिसे चाहता है, सज़ा देता है। तथा अल्लाह ही के लिए आकाशों और धरती का राज्य है और उसका भी जो उन दोनों के बीच है। और उसी की ओर लौटकर जाना है।
Roman Urdu (Maududi)Yahud aur nasara kehte hain ke hum Allah ke bete aur uske chahite (beloved) hain, inse pucho, phir woh tumhare gunaahon par tumhein saza kyun deta hai? Dar haqeeqat tum bhi wasie hi Insaan ho jaise aur Insaan khuda ne paida kiye hain. Woh jisey chahta hai maaf karta hai aur jisey chahta hai saza deta hai. Zameen aur aasman aur inki saari maujudaat uski milk( milkiyat) hain. Aur usi ki taraf sabko jana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yahud-o-nasaara kehtay hain kay hum Allah kay betay aur uss kay dost hain aap keh dijiye kay phir tumhen tumharay gunahon kay baees Allah kiyon saza deta hai? Nahi bulkay tum bhi uss ki makhlooq mein say aik insan ho woh jisay chahata hai bakhsh deta hai aur jisay chahata hai azab kerta hai zamin-o-aasman aur inn kay darmiyan ki her cheez Allah Taalaa ki milkiyat hai aur ussi ki taraf lotna hai
Devnagri Urdu (Maududi)यहूद और नसारा कहते हैं कि हम अल्लाह के बेटे और उसके चाहते हैं (प्यारे) हैं, इनसे पूछो, फिर वो तुम्हारे गुनाहों पर तुम्हें सजा क्यों देता है? दर हकीकत तुम भी वही इंसान हो जैसे और इंसान खुदा ने अदा किये हैं। वो जिसे चाहता है माफ़ करता है और जिसे चाहता है सज़ा देता है। ज़मीन और आसमान और इनकी सारी मौजुदात उसका दूध है। और उसकी तरफ सबको जाना है
عَرَبِييا أَهلَ الكِتابِ قَد جاءَكُم رَسولُنا يُبَيِّنُ لَكُم عَلىٰ فَترَةٍ مِنَ الرُّسُلِ أَن تَقولوا ما جاءَنا مِن بَشيرٍ وَلا نَذيرٍ ۖ فَقَد جاءَكُم بَشيرٌ وَنَذيرٌ ۗ وَاللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ किताब वालो! निःसंदेह तुम्हारे पास हमारा रसूल आया है, जो तुम्हारे लिए खोलकर बयान करता है, रसूलों के एक अंतराल के बाद, ताकि तुम यह न कहो कि हमारे पास न कोई शुभ सूचना देने वाला आया और न डराने वाला। तो निश्चय तुम्हारे पास एक शुभ सूचना देने वाला और डराने वाला आ चुका है। तथा अल्लाह हर चीज़ पर शक्ति रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey ehle kitab! Hamara yeh Rasool aise waqt tumhare paas aaya hai aur deen ki wazeh taleem tumhein de raha hai jabke Rasoolon ki aamad ka silsila ek muddat se bandh tha, taa-ke tum yeh na keh sako ke hamare paas koi basharat dene wala aur darane wala nahin aaya. So dekho! Ab woh basharat dene wala aur darane wala aa gaya aur Allah har cheez par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey ehal-e-kitab! Bil yaqeen humara rasool tumharay pass rasoolon ki aamad kay aik waqfay kay baad aa phoncha hai. Jo tumharay liye saaf saaf biyan ker raha hai takay tumhari yeh baat na reh jaye kay humaray pass to koi bhalaee buraee sunaney wala aaya hi nahi pus abb to yaqeenan khushkhabri sunaney wala aur aagah kerney wala aa phoncha aur Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ एहले किताब! हमारा ये रसूल ऐसे वक्त तुम्हारे पास आया है और दीन की वजह से तालीम तुम्हें दे रहा है जब रसूलों की आमद का सिलसिला एक मुद्दत से बंद था, ता-के तुम ये ना कह सको के हमारे पास कोई बशारत देने वाला और डराने वाला नहीं आया। तो देखो! अब वो बशारत देने वाला और डराने वाला आ गया और अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है
عَرَبِيوَإِذ قالَ موسىٰ لِقَومِهِ يا قَومِ اذكُروا نِعمَةَ اللَّهِ عَلَيكُم إِذ جَعَلَ فيكُم أَنبِياءَ وَجَعَلَكُم مُلوكًا وَآتاكُم ما لَم يُؤتِ أَحَدًا مِنَ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद करो) जब मूसा ने अपनी जाति से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करो, जब उसने तुममें नबी बनाए और तुम्हें बादशाह बना दिया तथा तुम्हें वह कुछ दिया, जो समस्त संसार में किसी को नहीं दिया।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jab Moosa ne apni qaum se kaha tha ke “ Aey meri qaum ke logon! Allah ki us niyamat ka khayal karo jo usne tumhein ata ki thi, usne tum mein Nabi paida kiye, tumko farma rawa banaya, aur tumko woh kuch diya jo duniya mein kisi ko na diya tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaad kero musa (alh-e-salam) ney apni qom say kaha aey meri qom kay logo! Allah Taalaa kay uss ehsan ka zikar kero kay uss ney tum mein say payghumbar banaye aur tumhen badshah bana diya aur tumhen woh diya jo tamam aalam mein kissi ko nahi diya
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा था के "ऐ मेरी क़ौम के लोगों! अल्लाह की हमें नियामत का ख्याल करो जो उसने तुम्हें अता की थी, उसने तुम में नबी पैदा किया, तुमको फरमा रवा बनाया, और तुमको वो कुछ दिया जो दुनिया में किसी को ना दिया था
عَرَبِييا قَومِ ادخُلُوا الأَرضَ المُقَدَّسَةَ الَّتي كَتَبَ اللَّهُ لَكُم وَلا تَرتَدّوا عَلىٰ أَدبارِكُم فَتَنقَلِبوا خاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरी जाति के लोगो! उस पवित्र धरती (बैतुल मक़दिस) में प्रवेश कर जाओ, जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिख दी है और अपनी पीठों पर न फिर जाओ, अन्यथा घाटा उठाने वाले होकर लौटोगो।
Roman Urdu (Maududi)Aey biradraan e qaum! us muqaddas sar-zameen mein dakhil ho jao jo Allah ne tumhare liye likh di hai, pichey na hato warna nakaam o na-murad paltogey”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meri qom walo! Iss muqaddas zamin mein dakhil ho jao jo Allah Taalaa ney tumharay naam likh di hai aur apni pusht kay ball roo gardaani na kero kay phir nuksan mein jaa paro
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ बिरादरान ए क़ौम! हमें मुक़द्दस सर-ज़मीन में दाख़िल हो जाओ जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिख दिया है, पीछे ना हटो वरना नाकाम ओ ना-मुराद पलटोगे”
عَرَبِيقالوا يا موسىٰ إِنَّ فيها قَومًا جَبّارينَ وَإِنّا لَن نَدخُلَها حَتّىٰ يَخرُجوا مِنها فَإِن يَخرُجوا مِنها فَإِنّا داخِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ मूसा! उसमें बड़े बलवान लोग रहते हैं और निःसंदेह हम उसमें हरगिज़ प्रवेश न करेंगे, यहाँ तक कि वे उससे निकल जाएँ। यदि वे उससे निकल जाएँ, तो हम अवश्य प्रवेश करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhone jawab diya “Aey Moosa! Wahan to badey zabardast log rehte hain, hum wahan hargiz na jayenge jab tak woh wahan se nikal na jayein, haan agar woh nikal gaye to hum dakhil honay ke liye tayyar hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney jawab diya kay aey musa wahan to zor aawar sirkash log hain aur jab tak woh wahan say na nikal jayen hum to hergiz wahan na jayen gay haan agar woh wahan say nikal jayen phir to hum (ba khushi) chalay jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)अनहोनी जवाब दीया "ऐ मूसा! वहां तो बड़े ज़बरदस्त लोग रहते हैं, हम वहां हरगिज़ ना जाएंगे जब तक वो वहां से निकल न जाएं, अगर वो निकल गए तो हम दखल देने के लिए तैयार हैं"
عَرَبِيقالَ رَجُلانِ مِنَ الَّذينَ يَخافونَ أَنعَمَ اللَّهُ عَلَيهِمَا ادخُلوا عَلَيهِمُ البابَ فَإِذا دَخَلتُموهُ فَإِنَّكُم غالِبونَ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَتَوَكَّلوا إِن كُنتُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)दो व्यक्तियों ने कहा, जो उन लोगों में से थे जो (अल्लाह से) डरते थे, जिनपर अल्लाह ने अनुग्रह किया था : तुम उनपर दरवाज़े में प्रवेश कर जाओ। जब तुम वहाँ प्रवेश कर गए, तो निश्चय तुम विजेता हो। तथा अल्लाह ही पर भरोसा करो, यदि तुम ईमान वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Un darne walon mein do shaks aisey bhi thay jinko Allah ne apni niyamat se nawaza tha, unhon ne kaha ke “ in jabbaron ke muqable mein darwaze ke andar ghus jao, jab tum andar pahunch jaogey to tum hi gaalib (victors) rahogey. Allah par bharosa rakkho agar tum momin ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Do shakson ney jo khuda taras logon mein say thay jin per Allah Taalaa ka fazal tha kaha kay tum unn kay pass darwazay mein to phonch jao darwazay mein qadam rakhtay hi yaqeenan tum ghalib aajao gay aur agar tum momin ho to tumhen Allah Taalaa hi per bharosa rakhna chahaiye
Devnagri Urdu (Maududi)उन डरने वालों में दो शक्स ऐसे भी थे जिनको अल्लाह ने अपनी नियामत से नवाजा था, उनहों ने कहा के "जबरों के मुकाबले में दरवाजे के अंदर घुस जाओ, जब तुम अंदर पहुंच जाओगे तो तुम ही गालिब रहोगे। अल्लाह पर भरोसा रखो अगर तुम मोमिन हो"
عَرَبِيقالوا يا موسىٰ إِنّا لَن نَدخُلَها أَبَدًا ما داموا فيها ۖ فَاذهَب أَنتَ وَرَبُّكَ فَقاتِلا إِنّا هاهُنا قاعِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ मूसा! निःसंदेह हम हरगिज़ उसमें कभी प्रवेश नहीं करेंगे, जब तक वे उसमें मौजूद हैं। अतः तुम और तुम्हारा पालनहार जाओ। फिर तुम दोनों लड़ो, निःसंदेह हम यहीं बैठने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Lekin unhon ne phir yahi kaha ke “ Aey Moosa! Hum to wahan kabhi na jayenge jab tak woh wahan maujood hain, bas tum aur tumhara Rubb, dono jao aur lado, hum yahan baithey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Qom ney jawab diya kay aey musa! Jab tak woh wahan hain tab tak hum hergiz wahan na jayen gay iss liye tum aur tumhara perwerdigar jaa ker dono hi larr bhiro hum yahin bethay huye hain
Devnagri Urdu (Maududi)लेकिन उनहों ने फिर यहीं कहा के " ऐ मूसा! हम तो वहां कभी ना जाएंगे जब तक वो वहां मौजूद हैं, बस तुम और तुम्हारा रब, दोनों जाओ और लाडो, हम यहां बैठे हैं
عَرَبِيقالَ رَبِّ إِنّي لا أَملِكُ إِلّا نَفسي وَأَخي ۖ فَافرُق بَينَنا وَبَينَ القَومِ الفاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उस (मूसा) ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मैं अपने और अपने भाई के सिवा किसी पर कोई अधिकार नहीं रखता। अतः तू हमारे तथा इन अवज्ञाकारी लोगों के बीच अलगाव कर दे।
Roman Urdu (Maududi)Ispar Moosa ne kaha “Aey mere Rubb, mere ikhtiyar mein koi nahin magar ya meri apni zaat ya mera bhai, pas tu humein in nafarmaan logon se alag karde.”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) kehney lagay elahee! Mujhay to ba-juz apney aur meray bhai kay kissi aur per koi ikhtiyar nahi pus tu hum mein aur inn na farmanon mein judaee ker dey
Devnagri Urdu (Maududi)इस्पर मूसा ने कहा "ऐ मेरे रब, मेरे इख्तियार में कोई नहीं मगर या मेरी अपनी जात या मेरा भाई, पास तू हमें इन नफ़रमान लोगों से अलग करदे।"
عَرَبِيقالَ فَإِنَّها مُحَرَّمَةٌ عَلَيهِم ۛ أَربَعينَ سَنَةً ۛ يَتيهونَ فِي الأَرضِ ۚ فَلا تَأسَ عَلَى القَومِ الفاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) कहा : निःसंदेह वह (धरती) उनपर चालीस वर्षों के लिए हराम (वर्जित) कर दी गई। (इस दौरान) वे धरती में भटकते रहेंगे। अतः तुम इन अवज्ञाकारी लोगों पर शोक न करो।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne jawab diya ‘ accha to woh mulk chalis (forty) saal tak inpar haram hai, yeh zameen mein maarey maarey phirenge. In nafarmaano ki halat par hargiz taras na khao”
Roman Urdu (Junagarhi)Irshad hua kay abb zamin inn per chalees saal tak haram ker di gaee hai yeh khana badosh idhar udhar sir gardan phirtay rahen gay iss liye tum inn fasiqon kay baray mein ghumgeen na hona
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने जवाब दिया ' अच्छा तो वो मुल्क चालीस (चालीस) साल तक इनपर हराम है, ये ज़मीन में मारे मारे फिरेंगे। इन नफ़रमानों की हालत पर हरगिज़ तरस न खाओ”
عَرَبِي۞ وَاتلُ عَلَيهِم نَبَأَ ابنَي آدَمَ بِالحَقِّ إِذ قَرَّبا قُربانًا فَتُقُبِّلَ مِن أَحَدِهِما وَلَم يُتَقَبَّل مِنَ الآخَرِ قالَ لَأَقتُلَنَّكَ ۖ قالَ إِنَّما يَتَقَبَّلُ اللَّهُ مِنَ المُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्हें आदम के दो बेटों का समाचार सच्चाई के साथ सुना दो, जब उन दोनों ने कुछ क़ुर्बानी प्रस्तुत की, तो उनमें से एक की स्वीकार कर ली गई और दूसरे की स्वीकार न की गई। उस (दूसरे) ने कहा : मैं तुझे अवश्य ही क़त्ल कर दूँगा। उसने उत्तर दिया : निःसंदेह अल्लाह डरने वालों ही से स्वीकार करता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur zara inhein Adam ke do beton ka qissa bhi be kam-o-kaasht suna do jab un dono ne qurbani ki, to un mein se ek ki qurbani qabool ki gayi aur dusre ki na ki gayi , usne kaha “ main tujhey maar dalunga” Usne jawab diya “Allah to muttaqiyon hi ki nazarein(offerings) qabool karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aadam (alh-e-salam) kay dono beton ka khara khara haal bhi enhen suna do unn dono ney aik nazrana paish kiya inn mein say aik ki nazar qabool hogaee aur doosray ki maqbool na hui to woh kehney laga mein tujhay maar hi daalon ga uss ney kaha Allah Taalaa taqwa walon ka hi amal qabool kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ज़रा इनमें आदम के दो बेटों का क़िस्सा भी बे कम-ओ-काश्त सुना दो जब उन दोनों ने क़ुर्बानी की, तो उन में से एक क़ुर्बानी क़बूल की गई और दूसरे की न की गई, उसने कहा “मैं तुझे मार डालूंगा” उसने जवाब दिया “अल्लाह तो मुत्तक़ियों ही की नज़रें (प्रसाद) क़बूल करता है
عَرَبِيلَئِن بَسَطتَ إِلَيَّ يَدَكَ لِتَقتُلَني ما أَنا بِباسِطٍ يَدِيَ إِلَيكَ لِأَقتُلَكَ ۖ إِنّي أَخافُ اللَّهَ رَبَّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि तूने मुझे मार डालने के लिए मेरी ओर अपना हाथ बढ़ाया, तो मैं हरगिज़ अपना हाथ तेरी ओर इसलिए बढ़ाने वाला नहीं कि तुझे क़त्ल करूँ। निःसंदेह मैं अल्लाह से डरता हूँ, जो सारे संसार का पालनहार है।
Roman Urdu (Maududi)Agar tu mujhey qatal karne ke liye haath uthayega to main tujhey qatal karne ke liye haath na uthaunga. Main Allah Rabbul aalameen se darta hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Go tu meray qatal kay liye dast darazi keray lekin mein teray qatal ki taraf hergiz apney haath na barhaon ga mein to Allah Taalaa perwerdigar-e-aalam say khof khata hun
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तू मुझे क़त्ल करने के लिए हाथ उठाएगा तो मैं तुझे क़त्ल करने के लिए हाथ न उठाऊंगा। मैं अल्लाह रब्बुल आलमीन से डरता हूं
عَرَبِيإِنّي أُريدُ أَن تَبوءَ بِإِثمي وَإِثمِكَ فَتَكونَ مِن أَصحابِ النّارِ ۚ وَذٰلِكَ جَزاءُ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)मैं तो यह चाहता हूँ कि तू मेरे पाप और अपने पाप के साथ लौटे, फिर तू आग वालों में से हो जाए। और यही अत्याचारियों का बदला है।
Roman Urdu (Maududi)Main chahta hoon ke mera aur apna gunaah tu hi sameit le aur dozakhi bankar rahey. Zalimon ke zulm ka yahi theek badla hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Mein to chahata hun kay tu mera gunah aur apney gunah apney sir rakh ley aur dozakhiyon mein shaamil hojaye zalimon ka yehi badla hai
Devnagri Urdu (Maududi)मैं चाहता हूं कि मेरा और अपना गुनाह तू ही समइत ले और दोज़खी बनकर रहे। ज़ालिमों के ज़ुल्म का यही ठीक बदला है।”
عَرَبِيفَطَوَّعَت لَهُ نَفسُهُ قَتلَ أَخيهِ فَقَتَلَهُ فَأَصبَحَ مِنَ الخاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अंततः उसके मन ने उसके लिए अपने भाई की हत्या को सुसज्जित कर दिया, तो उसने उसे क़त्ल कर दिया, सो वह घाटा उठाने वालों में से हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar uske nafs ne apne bhai ka qatal uske liye aasaan kardiya aur woh usey maar kar un logon mein shamil ho gaya jo nuqsan uthane waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Pus ussay uss kay nafs nay apney bhai kay qatal per aamaada ker diya aur uss ney ussay qatal ker daala jiss say nuksan paney walon mein say hogaya
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार उसके नफ़्स ने अपने भाई का क़त्ल उसके लिए आसान कर दिया और वो उसे मार कर उन लोगों में शामिल हो गया जो नुक्सान उठाने वाले हैं
عَرَبِيفَبَعَثَ اللَّهُ غُرابًا يَبحَثُ فِي الأَرضِ لِيُرِيَهُ كَيفَ يُواري سَوءَةَ أَخيهِ ۚ قالَ يا وَيلَتا أَعَجَزتُ أَن أَكونَ مِثلَ هٰذَا الغُرابِ فَأُوارِيَ سَوءَةَ أَخي ۖ فَأَصبَحَ مِنَ النّادِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर अल्लाह ने एक कौआ भेजा, जो भूमि कुरेदता था, ताकि उसे दिखाए कि वह अपने भाई के शव को कैसे छिपाए। कहने लगा : हाय मेरा विनाश! क्या मैं इस कौए जैसा भी न हो सका कि अपने भाई का शव छिपा सकूँ। फिर वह लज्जित होने वालों में से हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Phir Allah ne ek kawwa (crow) bheja jo zameen khodne laga taa-ke usey bataye ke apne bhai ki laash kaise chupaye. Yeh dekh kar woh bola afsos mujhpar ! main is kawwe jaisa bhi na ho saka ke apne bhai ki laash chupane ki tadbeer nikal leta, iske baad woh apne kiye par bahut pachtaya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir Allah Taalaa ney aik kawway ko bheja jo zamin khod raha tha takay ussay dikhaye kay woh kiss tarah apney bhai ki naash ko chupa dey woh kehnay laga haaye afsos! Kiya mein aisa kerney say bhi gaya guzra hogaya kay iss kawway ki tarah apney bhai ki laash ko dafna deta? Phir to (bara hi) pashemaan aur sharminda hogaya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अल्लाह ने एक कौवा (कौआ) भेजा जो ज़मीन खोदने लगा ता-के उसे बताए के अपने भाई की लाश कैसे छुपाये। ये देख कर वो बोला अफ़सोस मुझपर! मैं इस कव्वे जैसा भी ना हो सका के अपने भाई की लाश छुपाने की तद्बीर निकाल लेता, इसके बाद वो अपने किये पर बहुत पछताया
عَرَبِيمِن أَجلِ ذٰلِكَ كَتَبنا عَلىٰ بَني إِسرائيلَ أَنَّهُ مَن قَتَلَ نَفسًا بِغَيرِ نَفسٍ أَو فَسادٍ فِي الأَرضِ فَكَأَنَّما قَتَلَ النّاسَ جَميعًا وَمَن أَحياها فَكَأَنَّما أَحيَا النّاسَ جَميعًا ۚ وَلَقَد جاءَتهُم رُسُلُنا بِالبَيِّناتِ ثُمَّ إِنَّ كَثيرًا مِنهُم بَعدَ ذٰلِكَ فِي الأَرضِ لَمُسرِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)इसी कारण, हमने बनी इसराईल पर लिख दिया कि निःसंदेह जिसने किसी प्राणी की किसी प्राणी के खून (के बदले) अथवा धरती में विद्रोह के बिना हत्या कर दी, तो मानो उसने सारे इनसानों की हत्या कर दी, और जिसने उसे जीवन प्रदान किया, तो मानो उसने सारे इनसानों को जीवन प्रदान किया। तथा निःसंदेह उनके पास हमारे रसूल स्पष्ट प्रमाण लेकर आए। फिर निःसंदेह उनमें से बहुत से लोग उसके बाद भी धरती में निश्चय सीमा से आगे बढ़ने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Isi wajah se bani Israel par humne yeh farmaan likh diya tha ke “ jisne kisi Insan ko khoon ke badle ya zameen mein fasaad phaylane ke siwa kisi aur wajah se qatal kiya usne goya tamaam Insaano ko qatal kardiya aur jisne kisi ki jaan bachayi usne goya tamaam Insaano ko zindagi baksh di”. Magar unka haal yeh hai ke hamare Rasool pai dar pai unke paas khuli khuli hidayat lekar aaye phir bhi unmein bakasrat log zameen mein zyadatiyan(commit excesses ) karne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Issi waja say hum ney bani israeel per yeh likh diya kay jo shaks kissi ko baghair iss kay, kay woh kissi ka qatil ho ya zamin mein fasaad machaney wala ho qatal ker daalay to goya uss ney tamam logon ko qatal ker diya aur jo shaks kissi aik ki jaan bacha ley uss ney goya tamam logon ko zinda ker diya aur unn kay pass humara boht say rasool zahir daleelen ley ker aaye lekin phir uss kay baad bhi unn mein kay aksar log zamin mein zulm-o-ziyadti aur zabadasti kerney walay hi rahey
Devnagri Urdu (Maududi)इसी वजह से बनी इजराइल पर हमने ये फरमान लिख दिया था के “जिसने किसी इंसान को खून के बदले या ज़मीन में फ़साद फ़ैलाने के सिवा किसी और वजह से क़त्ल किया उसने गोया तमाम इंसानों को क़त्ल कर दिया और जिसने किसी की जान बचाई उसने गोया तमाम इंसानों को ज़िंदगी बख्श दी”। मगर उनका हाल ये है कि हमारे रसूल पै डर पै उनके पास खुली खुली हिदायत लेकर आये फिर भी उनमें बकसरत लोग ज़मीन में ज़्यादतियां (ज्यादती करना) करने वाले हैं
عَرَبِيإِنَّما جَزاءُ الَّذينَ يُحارِبونَ اللَّهَ وَرَسولَهُ وَيَسعَونَ فِي الأَرضِ فَسادًا أَن يُقَتَّلوا أَو يُصَلَّبوا أَو تُقَطَّعَ أَيديهِم وَأَرجُلُهُم مِن خِلافٍ أَو يُنفَوا مِنَ الأَرضِ ۚ ذٰلِكَ لَهُم خِزيٌ فِي الدُّنيا ۖ وَلَهُم فِي الآخِرَةِ عَذابٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से जंग करते हैं तथा धरती में उपद्रव करने का प्रयास करते हैं, उनका दंड यही है कि उन्हें बुरी तरह क़त्ल कर दिया जाए, या उन्हें बुरी तरह सूली दी जाए, या उनके हाथ-पाँव विपरीत दिशाओं से बुरी तरह काट दिए जाएँ, या उन्हें (उस) देश से निकाल दिया जाए। यह उनके लिए दुनिया में अपमान है तथा आख़िरत में उनके लिए बहुत बड़ी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log Allah aur uske Rasool se ladte hain aur zameen mein is liye tag-o-dou karte phirte hain ke fasaad(mischeif) barpa karein unki saza yeh hai ke qatal kiye jayein , ya suli par chadhaye jayein, ya unke haath aur paaon mukhalif simton se kaat daley jayein, ya woh jila watan(banished from the land) kardiye jayein. Yeh zillat o ruswayi to unke liye duniya mein hai aur aakhirat mein unke liye issey badi saza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo Allah Taalaa say aur uss kay rasool say laren aur zamin mein fasaad kertay phiren unn ki saza yehi hai kay woh qatal ker diye jayen ya sooli charha diya jayen ya unhen jila watan ker diya jaye yeh to hui inn ki dunyawi zillat aur khuwari aur aakhirat mein inn kay liye bara bhari azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से लड़ते हैं और ज़मीन में हैं टैग-ओ-दो करते फिरते हैं के फ़साद (शरारत) बरपा करें उनकी सज़ा ये है के क़त्ल किये जायें, या सूली पर चढ़ाये जायें, या उनके हाथ और पैरों मुखालिफ़ सिमतों से काट डाले जायें, या वो जिला वतन (जमीन से निर्वासित) कर दिये जायें। ये ज़िल्लत ओ रुसवाई तो उनके लिए दुनिया में है और आख़िरत में उनके लिए इसे बड़ी सज़ा है
عَرَبِيإِلَّا الَّذينَ تابوا مِن قَبلِ أَن تَقدِروا عَلَيهِم ۖ فَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु जो लोग इससे पहले तौबा कर लें कि तुम उनपर क़ाबू पाओ, तो जान लो कि निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Magar jo log tawba karlein qabl iske ke tum unpar qaabu pao. Tumhein maloom hona chahiye ke Allah maaf karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Haan jo log iss say pehlay tauba ker len kay tum unn per qaboo paalo to yaqeen mano kay Allah Taalaa boht bari bakhsish aur reham-o-karam wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जो लोग तौबा कार्लें क़बल इसके के तुम उन्पर क़ाबू पाओ। तुम्हें मालूम होना चाहिए के अल्लाह माफ करने वाला और रहम फरमाने वाला है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَابتَغوا إِلَيهِ الوَسيلَةَ وَجاهِدوا في سَبيلِهِ لَعَلَّكُم تُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अल्लाह से डरो और उसकी ओर निकटता तलाश करो तथा उसके मार्ग में जिहाद करो, ताकि तुम सफल हो जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, Allah se daro aur uski janaab mein baaryabi (closeness) ka zariya talash karo, aur uski raah mein jidd o jahad karo, shayad ke tumhein kamiyabi naseeb ho jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Musalmano! Allah Taalaa say dartay raho aur uss ka qurb talash kero aur uss ki raah mein jihad kero takay tumhara bhala ho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो और उसकी जनाब में बैरयाबी (नज़दीकी) का ज़रिया तलाश करो, और उसकी राह में जिद ओ जहद करो, शायद के तुम्हें कामयाबी नसीब हो जाये
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا لَو أَنَّ لَهُم ما فِي الأَرضِ جَميعًا وَمِثلَهُ مَعَهُ لِيَفتَدوا بِهِ مِن عَذابِ يَومِ القِيامَةِ ما تُقُبِّلَ مِنهُم ۖ وَلَهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया, यदि उनके पास वह सब कुछ हो जो धरती में है और उतना ही उसके साथ और भी हो, ताकि वे यह सब कुछ क़ियामत के दिन की यातना से छुड़ौती के रूप मे दे दें, तो उनकी ओर से स्वीकार नहीं किया जाएगा और उनके लिए दर्दनाक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Khoob jaan lo ke jin logon ne kufr ka rawayya ikhtiyar kiya hai, agar unke qabze mein saari zameen ki daulat ho aur itni hi aur iske saath aur woh chahein ke isey fidiye(badlay/expiation) mein de kar roz e qayamat ke azaab se bach jayein, tab bhi woh unse qabool na ki jayegi aur unhein dardnaak saza milkar rahegi
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeen mano kay kafiron kay liye agar woh sab kuch ho jo saari zamin mein hai bulkay issay kay misil aur bhi ho aur woh iss sab ko qayamat kay din azab kay badlay fidiye mein dena chahayen to bhi na mumkin hai kay inn ka fidya qabool ker liya jaye inn kay liye to dard naak azab hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)खूब जान लो के जिन लोगों ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया है, अगर उनके क़ब्ज़े में सारी ज़मीन की दौलत हो और इतनी ही और इसके साथ और वो चाहे के इसी फिदिये (बदले/प्रायश्चित) में दे कर रोज़ ए कयामत के अज़ाब से बच जाएं, तब भी वो उनसे क़बूल ना की जाएगी और उन्हें दर्दनाक सज़ा मिलकर रहेगी
عَرَبِييُريدونَ أَن يَخرُجوا مِنَ النّارِ وَما هُم بِخارِجينَ مِنها ۖ وَلَهُم عَذابٌ مُقيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)वे चाहेंगे कि आग से निकल जाएँ, हालाँकि वे उससे हरगिज़ निकलने वाले नहीं और उनके लिए हमेशा रहने वाली यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Woh chahenge ke dozakh ki aag se nikal bhaagein magar na nikal sakenge aur unhein qayam (hamesha) rehne wala azaab diya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh chahayen gay kay dozakh mein say nikal jayen lekin yeh hergiz iss mein say na nikal saken gay inn kay liye to dawami azab hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो चाहे के दोज़ख की आग से निकल भागें मगर ना निकल सकेंगे और उन्हें क़याम (हमेशा) रहने वाला अज़ाब दिया जाएगा
عَرَبِيوَالسّارِقُ وَالسّارِقَةُ فَاقطَعوا أَيدِيَهُما جَزاءً بِما كَسَبا نَكالًا مِنَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عَزيزٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो चोरी करने वाला (पुरुष) और जो चोरी करने वाली (स्त्री) है, सो दोनों के हाथ काट दो, उसके बदले में जो उन दोनों ने कमाया, अल्लाह की ओर से इबरत (भय) दिलाने के लिए। और अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur chor, khwa aurat ho ya mard, dono ke haath kaat do, yeh unki kamayi ka badla hai aur Allah ki taraf se ibratnaak saza. Allah ki qudrat sab par galib hai aur woh dana o beena hai
Roman Urdu (Junagarhi)Chori kerney walay aurat aur mard kay haath kaat diya kero. Yeh badla hai uss ka jo enhon ney kiya azab Allah ki taraf say aur Allah Taalaa qooat aur hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और चोर, ख्वा औरत हो या मर्द, दोनों के हाथ काट दो, ये उनकी कमाई का बदला है और अल्लाह की तरफ़ से इब्रातनाक सज़ा। अल्लाह की क़ुदरत सब पर ग़ालिब है और वो दाना ओ बीना है
عَرَبِيفَمَن تابَ مِن بَعدِ ظُلمِهِ وَأَصلَحَ فَإِنَّ اللَّهَ يَتوبُ عَلَيهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जो व्यक्ति अपने अत्याचार (चोरी) के बाद तौबा कर ले और सुधार करे, तो निश्चय अल्लाह उसकी तौबा स्वीकार करेगा। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Phir jo zulm karne ke baad tawba karey aur apni islah karle to Allah ki nazar e inayat phir uspar mayil ho jayegi, Allah bahut darguzar karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo shaks apney gunah kay baad tauba ker ley aur islaah ker ley to Allah Taalaa rehmat kay sath uss ki taraf lot’ta hai yaqeenan Allah Taalaa moaf farmaney wala meharbani kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जो ज़ुल्म करने के बाद तौबा करे और अपना इस्लाह करले तो अल्लाह की नज़र ए इनायत फिर उसपर मय्यल हो जाएगी, अल्लाह बहुत दरगुज़र करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِيأَلَم تَعلَم أَنَّ اللَّهَ لَهُ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ يُعَذِّبُ مَن يَشاءُ وَيَغفِرُ لِمَن يَشاءُ ۗ وَاللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुमने नहीं जाना कि निःसंदेह अल्लाह ही है जिसके पास आकाशों तथा धरती का राज्य है? वह जिसे चाहता है, दंड देता है और जिसे चाहता है, क्षमा कर देता है। तथा अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum jaante nahin ho ke Allah zameen aur aasmano ki sultanat ka malik hai? Jisey chahe saza de aur jisey chahe maaf karde, woh har cheez ka ikhtiyar rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tujhay maloom nahi kay Allah Taalaa hi kay liye zamin-o-aasman ki badshahat hai? Jissay chahaye saza dey aur jissay chahaye moad ker dey Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम जानते नहीं हो के अल्लाह ज़मीन और आसमान की सल्तनत का मालिक है? जिसे चाहे सजा दे और जिसे चाहे माफ करदे, वो हर चीज का इख्तियार रखता है
عَرَبِي۞ يا أَيُّهَا الرَّسولُ لا يَحزُنكَ الَّذينَ يُسارِعونَ فِي الكُفرِ مِنَ الَّذينَ قالوا آمَنّا بِأَفواهِهِم وَلَم تُؤمِن قُلوبُهُم ۛ وَمِنَ الَّذينَ هادوا ۛ سَمّاعونَ لِلكَذِبِ سَمّاعونَ لِقَومٍ آخَرينَ لَم يَأتوكَ ۖ يُحَرِّفونَ الكَلِمَ مِن بَعدِ مَواضِعِهِ ۖ يَقولونَ إِن أوتيتُم هٰذا فَخُذوهُ وَإِن لَم تُؤتَوهُ فَاحذَروا ۚ وَمَن يُرِدِ اللَّهُ فِتنَتَهُ فَلَن تَملِكَ لَهُ مِنَ اللَّهِ شَيئًا ۚ أُولٰئِكَ الَّذينَ لَم يُرِدِ اللَّهُ أَن يُطَهِّرَ قُلوبَهُم ۚ لَهُم فِي الدُّنيا خِزيٌ ۖ وَلَهُم فِي الآخِرَةِ عَذابٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ रसूल! वे लोग आपको शोकाकुल न करें, जो कुफ़्र में दौड़कर जाते हैं, उन लोगों में से जिन्होंने अपने मुँह से कहा कि हम ईमान लाए, हालाँकि उनके दिल ईमान नहीं लाए और उन लोगों में से जो यहूदी बने। बहुत सुनने वाले हैं झूठ को, बहुत सुनने वाले हैं दूसरे लोगों के लिए जो आपके पास नहीं आए, वे शब्दों को उनके स्थानों के बाद फेर देते हैं। वे कहते हैं : यदि तुम्हें यह दिया जाए तो ले लो, और यदि तुम्हें यह न दिया जाए, तो बचकर रहो। और जिसे अल्लाह अपनी परीक्षा में डालना चाहे, तो उसे (ऐ रसूल!) आप अल्लाह से बचाने के लिए कुछ नहीं कर सकते। ये वे लोग हैं कि अल्लाह ने नहीं चाहा कि उनके दिलों को पवित्र करे। उनके लिए दुनिया में अपमान है और उनके लिए आख़िरत में बहुत बड़ी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Aey paigambar! Tumhare liye baais-e-ranjh (grieve) na hon woh log jo kufr ki raah mein badi teiz gaami dikha rahey hain khwa woh unmein se hon jo mooh se kehte hain hum iman laye magar dil unke iman nahin laye , ya unmein se hon jo yahudi ban gaye hain, jinka haal yeh hai ke jhoot ke liye kaan lagate hain, aur dusre logon ki khatir jo tumhare paas kabhi nahin aaye, sun gun lete phirte hain, kitab-Allah ke alfaz ko unka saheeh mahal mutayin honay ke bawajood asal maani se pherte hain. Aur logon se kehte hain ke agar tumhein yeh hukum diya jaye to maano nahin to na maano, jisey Allah hi ne fitne mein daalne ka irada karliya ho to usko Allah ki giraft se bachane keliye tum kuch nahin kar sakte. Yeh woh log hain jinke dilon ko Allah ne paak karna na chaha. Inke liye duniya mein ruswayi hai aur aakhirat mein sakht saza
Roman Urdu (Junagarhi)Aey rasool! Aap inn logon kay peechay na kurhiye jo kufur mein sabqat ker rahey hain khuwa woh inn (munfiqon) mein say hon jo zabani to eman ka dawa kertay hain lekin haqeeqatan unn kay dil ba eman nahi aur yahundiyon mein say kuch log aisay hain jo ghalat baaten sunnay kay aadi hain aur inn logon kay jasoos hain jo abb tak aap kay pass nahi aaye woh kalmaat kay asli moqay ko chor ker enhen mutaghayyur ker diya kertay hain kehtay hain kay agar tum yehi hukum diye jao to qabool ker lena aur agar yeh hukum na diye jao to alag thalag rehna aur jiss ka kharab kerna Allah ko manzoor ho to aap uss kay liye khudaee hidayat mein kissi cheez kay mukhtaar nahi. Allah Taalaa ka irada inn kay dilon ko pak kerney ka nahi inn kay liye duniya mein bhi bari zillat aur ruswaee hai aur aakhirat mein bhi inn kay liye bari sakht saza hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ पैगम्बर! तुम्हारे लिए बाइस-ए-रंझ (शोक) ना हो वो लोग जो कुफ्र की राह में बड़ी तेजी से गमी दिखा रहे हैं ख्वा वो उनमें से हो जो मुंह से कहते हैं हम ईमान लाए मगर दिल उनके ईमान नहीं लाए, हां उनमें से हो जो यहुदी बन गए हैं, जिनका हाल ये है के झूठ के लिए कान लगाते हैं, और दूसरे लोगों की खातिर जो तुम्हारे पास कभी नहीं आए, सुन गुन लेते फिरते हैं, किताब-अल्लाह के अल्फाज़ को उनका सही महल मुतायिन होना के बकवास असल मानी से फेरते हैं। और लोग कहते हैं कि अगर तुम ये हुकुम दिया जाए तो मानो नहीं तो ना मानो, जैसे अल्लाह ही ने फिटने में डालने का इरादा करलिया हो तो उसको अल्लाह की नजरों से बचाने के लिए तुम कुछ नहीं कर सकते। ये वो लोग हैं जिनके दिलों को अल्लाह ने पाक करना ना चाहा। इनके लिए दुनिया में रूसवाई है और आख़िरत में साज़ा है
عَرَبِيسَمّاعونَ لِلكَذِبِ أَكّالونَ لِلسُّحتِ ۚ فَإِن جاءوكَ فَاحكُم بَينَهُم أَو أَعرِض عَنهُم ۖ وَإِن تُعرِض عَنهُم فَلَن يَضُرّوكَ شَيئًا ۖ وَإِن حَكَمتَ فَاحكُم بَينَهُم بِالقِسطِ ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ المُقسِطينَ
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हिन्दी (Al-Omari)बहुत सुनने वाले हैं झूठ को, बहुत खाने वाले हैं हराम को। फिर यदि वे आपके पास आएँ, तो आप उनके बीच निर्णय करें या उनसे मुँह फेर लें, और यदि आप उनसे मुँह फेर लें, तो वे आपको हरगिज़ कोई हानि नहीं पहुँचा सकेंगे और यदि आप निर्णय करें, तो उनके बीच न्याय के साथ निर्णय करें। निःसंदेह अल्लाह न्याय करने वालों से प्रेम करता है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh jhoot sunne waley aur haram ke maal khane waley hain, lihaza agar yeh tumhare paas (apne muqaddamaat lekar) aayein to tumhein ikhtiyar diya jata hai ke chaho inka faisla karo warna inkar kardo. Inkar kardo to yeh tumhara kuch bigaad nahin sakte, aur faisla karo to phir theek theek insaf ke saath karo ke Allah insaf karne walon ko pasand karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kaan laga laga ker jhoot kay sunnay walay aur ji bhar bhar ker haram kay khaney walay hain agar yeh tumharay pass aayen to tumhen ikhtiyar hai khuwa inn kay aapas ka faisla kero khuwa inn ko taal do agar tum inn say mun bhi phero gay to bhi yeh tum ko hergiz zarar nahi phoncha saktay aur agar tum faisla kero to inn mein adal-o-insaf kay sath faisla kero yaqeenan adal walon kay sath Allah mohabbat rakhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये झूठ सुनने वाले और हराम के माल खाने वाले हैं, लिहाज़ा अगर ये तुम्हारे पास (अपने मुक़द्दमात लेकर) आएं तो तुम्हें इख्तियार दिया जाता है के चाहो इनका फैसला करो वरना इंकार करदो. इंकार करदो तो ये तुम्हारा कुछ बिगाड़ नहीं सकता, और फैसला करो तो फिर ठीक ठीक इन्साफ के साथ करो के अल्लाह इन्साफ करने वालों को पसंद करता है
عَرَبِيوَكَيفَ يُحَكِّمونَكَ وَعِندَهُمُ التَّوراةُ فيها حُكمُ اللَّهِ ثُمَّ يَتَوَلَّونَ مِن بَعدِ ذٰلِكَ ۚ وَما أُولٰئِكَ بِالمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे आपको कैसे न्यायकर्ता बनाते हैं, जबकि उनके पास तौरात है, जिसमें अल्लाह का हुक्म (मौजूद) है! फिर वे उसके पश्चात मुँह फेर लेते हैं। और ये लोग कदापि ईमान वाले नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh tumhein kaise hakam (Judge) banate hain jabke inke paas taurat (torah) maujood hai jismein Allah ka hukum likha hua hai aur phir yeh ussey mooh moad rahey hain? Asal baat yeh hai ke yeh log iman hi nahin rakhte
Roman Urdu (Junagarhi)(tajjub ki baat hai kay) woh kaisay apney pass toraat hotay huye jiss mein ehkaam-e-elahee hain tum ko munsif banatay hain phir iss kay baad bhi phir jatay hain dar asal yeh eman-o-yaqeen walay hain hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और ये तुम्हें कैसे हकम (जज) बनाते हैं जबके इनके पास तौरात (तोराह) मौजूद है जिसमें अल्लाह का हुकुम लिखा हुआ है और फिर ये उसे मुंह मोड़ रहे हैं? असल बात ये है के ये लोग ईमान ही नहीं रखते
عَرَبِيإِنّا أَنزَلنَا التَّوراةَ فيها هُدًى وَنورٌ ۚ يَحكُمُ بِهَا النَّبِيّونَ الَّذينَ أَسلَموا لِلَّذينَ هادوا وَالرَّبّانِيّونَ وَالأَحبارُ بِمَا استُحفِظوا مِن كِتابِ اللَّهِ وَكانوا عَلَيهِ شُهَداءَ ۚ فَلا تَخشَوُا النّاسَ وَاخشَونِ وَلا تَشتَروا بِآياتي ثَمَنًا قَليلًا ۚ وَمَن لَم يَحكُم بِما أَنزَلَ اللَّهُ فَأُولٰئِكَ هُمُ الكافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने तौरात उतारी, जिसमें मार्गदर्शन और प्रकाश था। उसके अनुसार वे नबी जो आज्ञाकारी थे उन लोगों के लिए फ़ैसला करते थे, जो यहूदी बने, तथा अल्लाह वाले और विद्वान लोग भी (उसी के अनुसार फ़ैसला करते थे)। क्योंकि वे अल्लाह की पुस्तक के रक्षक बनाए गए थे और वे उसके (सत्य होने के) गवाह थे। अतः तुम लोगों से न डरो, केवल मुझसे डरो और मेरी आयतों के बदले तनिक मूल्य न खरीदो। और जो उसके अनुसार फ़ैसला न करे जो अल्लाह ने उतारा है, तो वही लोग काफ़िर हैं।
Roman Urdu (Maududi)Humne Taurat nazil ki jismein hidayat aur roshni thi. Sarey Nabi jo muslim thay, usi ke mutaaliq in yahudi ban janey walon ke maamlaat ka faisla karte thay, aur isi tarah Rabbani aur ehbar (scholars and jurists) bhi (isi par faisley ka madaar rakhte thay). Kyunke unhein kitab Allah ki hifazat ka zimmedar banaya gaya tha aur woh ispar gawaah they. Pas (aey giroh e yahud!) tum logon se na daro balke mujhse daro, aur meri aayat ko zara zara se mawize (trivial gain/keemat) lekar bechna chodh do. Jo log Allah ke nazil karda kanoon ke mutabiq faisla na karein wahi kafir hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney toraat nazil farmaee hai jiss mein hidayat-o-noor hai yahudiyon mein issi toraat kay sath Allah Taalaa kay mannay walay anbiya (alheem-us-salam) aur ehal-ullah aur ulama faislay kertay thay kiyon kay unhen Allah ki iss kitab ki hifazat ka hukum diya gaya tha. Aur woh iss per iqrari gawah thay abb tumhen chahaiye kay logon say na darro aur sirf mera darr rakho meri aayaton ko thoray thoray mol per na becho jo log Allah ki utari hui wahee kay sath faislay na keren woh (pooray aur pukhta) kafir hain
Devnagri Urdu (Maududi)हमने तौरात नाज़िल की जिसमें हिदायत और रोशनी थी। सारे नबी जो मुस्लिम थे, यहूदी बन जाने वालों के मामले में उसी के मुतालिक थे, और इसी तरह रब्बानी और एहबर (विद्वान और न्यायविद) भी (इसी पर फैसले का मदार रखते थे)। क्योंके उन्हें किताब अल्लाह की हिफ़ाज़त का ज़िम्मेदार बनाया गया था और वो इसपर गवाह थे। पस (ऐ गिरो ​​ए यहूद!) तुम लोगों से ना डरो बलके मुझसे डरो, और मेरी आयत को जरा जरा से नुकसान पहुंचाओ (तुच्छ लाभ/कीमत) लेकर बेचना छोड़ दो। जो लोग अल्लाह के नाजिल करदा कानून के मुताबिक फैसला न करें वही काफिर हैं
عَرَبِيوَكَتَبنا عَلَيهِم فيها أَنَّ النَّفسَ بِالنَّفسِ وَالعَينَ بِالعَينِ وَالأَنفَ بِالأَنفِ وَالأُذُنَ بِالأُذُنِ وَالسِّنَّ بِالسِّنِّ وَالجُروحَ قِصاصٌ ۚ فَمَن تَصَدَّقَ بِهِ فَهُوَ كَفّارَةٌ لَهُ ۚ وَمَن لَم يَحكُم بِما أَنزَلَ اللَّهُ فَأُولٰئِكَ هُمُ الظّالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उस (तौरात) में उन (यहूदियों) पर लिख दिया कि प्राण के बदले प्राण है और आँख के बदले आँख, नाक के बदले नाक, कान के बदले कान, दाँत के बदले दाँत तथा सभी घावों में बराबर बदला है। फिर जो इस (बदला) को दान (माफ़) कर दे, तो वह उसके (पापों के) लिए प्रायश्चित है। तथा जो उसके अनुसार फ़ैसला न करे जो अल्लाह ने उतारा है, तो वही लोग अत्याचारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Taurat mein humne yahudiyon par yeh hukum likh diya tha ke jaan ke badle jaan, aankh ke badle aankh, naak ke badle naak, kaan ke badle kaan, daant ke badle daant, aur tamaam zakhmon ke liye barabar ka badla, phir jo qisas ka sadaqa karde to woh uske liye kaffara hai aur jo log Allah ke nazil karda kanoon ke mutabiq faisla na karein wahi zalim hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney yahudiyon kay zimmay toraat mein yeh baat muqarrar ker di thi kay jaan kay badlay jaan aur aankh kay badlay aankh aur naak kay badlay naak aur kaan kay badlay kaan aur daant kay badlay daant aur khaas zakhmon ka bhi badla hai phri jo shaks iss ko moaf ker dey to woh iss kay liye kuffara hai aur jo log Allah kay nazil kiye huye kay mutabiq hukum na keren wohi log zalim hain
Devnagri Urdu (Maududi)तौरात में हमने यहुदियों पर ये हुकुम लिख दिया था के जान के बदले जान, आंख के बदले आंख, नाक के बदले नाक, कान के बदले कान, दांत के बदले दांत, और तमाम जख्मों के लिए बराबर का बदला, फिर जो क़िस्स का सदका करदे तो वो उसके लिए कफारा है और जो लोग अल्लाह के नाज़िल करदा कानून के मुताबिक़ फैसला ना करें वही जालिम हैं
عَرَبِيوَقَفَّينا عَلىٰ آثارِهِم بِعيسَى ابنِ مَريَمَ مُصَدِّقًا لِما بَينَ يَدَيهِ مِنَ التَّوراةِ ۖ وَآتَيناهُ الإِنجيلَ فيهِ هُدًى وَنورٌ وَمُصَدِّقًا لِما بَينَ يَدَيهِ مِنَ التَّوراةِ وَهُدًى وَمَوعِظَةً لِلمُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उनके पीछे उन्हीं के पद-चिन्हों पर मरयम के बेटे ईसा को भेजा, जो उससे पहले (उतरने वाली) तौरात की पुष्टि करने वाला था तथा हमने उसे इंजील प्रदान की, जिसमें मार्गदर्शन और प्रकाश थी और वह उससे पूर्व (उतरने वाली किताब) तौरात की पुष्टि करने वाली थी तथा वह (अल्लाह से) डरने वालों के लिए सर्वथा मार्गदर्शन और उपदेश थी।
Roman Urdu (Maududi)Phir humne in paigambaron ke baad Maryam ke bete Isa ko bheja , Taurat mein se jo kuch uske samne maujood tha woh uski tasdeeq karne wala tha aur humne usko Injeel ata ki jismein rehnumayi aur roshni thi aur woh bhi Taurat mein se jo kuch us waqt maujood tha uski tasdeeq karne wali thi aur khuda tars logon keliye sarasar hidayat aur naseehat thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unn kay peechay essa bin marium ko bheja jo apney say pehlay ki kitab yaani toraat ki tasdeeq kerney walay thay aur hum ney unhen injeel ata farmaee jiss mein noor aur hidayat thi aur woh apney say pehlay ki kitab toraat ki tasdeeq kerti thi aur woh sira sir hidayat-o-naseehat thi paarsa logon kay liye
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमने पैगंबर के बाद मरियम के बेटे ईसा को भेजा, तौरात में से जो कुछ उसके सामने मौजूद था वो उसकी तस्दीक करने वाली थी और हमने उसको इंजील अता की जिसकी रहनुमाई और रोशनी थी और वो भी तौरात में से जो कुछ हमें वक्त मिला उसकी तस्दीक करने वाली थी और खुदा तरस लोगों को हिदायत और हिदायत थी
عَرَبِيوَليَحكُم أَهلُ الإِنجيلِ بِما أَنزَلَ اللَّهُ فيهِ ۚ وَمَن لَم يَحكُم بِما أَنزَلَ اللَّهُ فَأُولٰئِكَ هُمُ الفاسِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और इंजील वालों को चाहिए कि उसी के अनुसार फ़ैसला करें, जो अल्लाह ने उसमें उतारा है। और जो उसके अनुसार फ़ैसला न करे, जो अल्लाह ने उतारा है, तो वही लोग अवज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hamara hukum tha ke ehle Injeel us kanoon ke mutabiq faisla karein jo Allah ne ismein nazil kiya hai aur jo log Allah ke nazil karda kanoon ke mutaabiq faisla na karein wahi fasiq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur injeel walon ko bhi chahaiye kay Allah Taalaa ney jo kuch injeel mein nazil farmaya hai ussi kay mutabiq hukum keren aur jo Allah Taalaa kay nazil kerda say hi hukum na keren woh (bad kaar) faasiq hain
Devnagri Urdu (Maududi)हमारा हुकुम था के एहले इंजील उस कानून के मुताबिक फैसला करें जो अल्लाह ने इसमे नाजिल किया है और जो लोग अल्लाह के नाजिल करदा कानून के मुताबिक फैसला न करें वही फासिक हैं
عَرَبِيوَأَنزَلنا إِلَيكَ الكِتابَ بِالحَقِّ مُصَدِّقًا لِما بَينَ يَدَيهِ مِنَ الكِتابِ وَمُهَيمِنًا عَلَيهِ ۖ فَاحكُم بَينَهُم بِما أَنزَلَ اللَّهُ ۖ وَلا تَتَّبِع أَهواءَهُم عَمّا جاءَكَ مِنَ الحَقِّ ۚ لِكُلٍّ جَعَلنا مِنكُم شِرعَةً وَمِنهاجًا ۚ وَلَو شاءَ اللَّهُ لَجَعَلَكُم أُمَّةً واحِدَةً وَلٰكِن لِيَبلُوَكُم في ما آتاكُم ۖ فَاستَبِقُوا الخَيراتِ ۚ إِلَى اللَّهِ مَرجِعُكُم جَميعًا فَيُنَبِّئُكُم بِما كُنتُم فيهِ تَختَلِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) हमने आपकी ओर यह पुस्तक (क़ुरआन) सत्य के साथ उतारी, जो अपने पूर्व की पुस्तकों की पुष्टि करने वाली तथा उनकी संरक्षक है। अतः आप उनके बीच उसके अनुसार फ़ैसला करें, जो अल्लाह ने उतारा है, तथा आपके पास जो सत्य आया है, उससे मुँह मोड़कर उनकी इच्छाओं का पालन न करें। हमने तुममें से हर (समुदाय) के लिए एक शरीयत तथा एक मार्ग निर्धारित किया है। और यदि अल्लाह चाहता, तो तुम्हें एक समुदाय बना देता, लेकिन ताकि वह तुम्हारी उसमें परीक्षा ले, जो कुछ उसने तुम्हें दिया है। अतः भलाइयों में एक-दूसरे से आगे बढ़ो, अल्लाह ही की ओर तुम सबको लौटकर जाना है। फिर वह तुम्हें बताएगा, जिन बातों में तुम मतभेद किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir (aey Muhammad!) humne tumhari taraf yeh kitab bheji jo haqq lekar aayi hai aur al-kitab mein se jo kuch iske aagey maujood hai uski tasdeeq karne wali aur iski muhafiz o nigehban hai. Lihaza tum khuda ke nazil karda kanoon ke mutabiq logon ke maamlaat ka faisla karo aur jo haqq tumhare paas aaya hai ussey mooh moad kar inki khwahishat ki pairwi na karo. Humne tum mein se har ek keliye ek shariyat aur ek raah e amal muqarrar ki , agarche tumhara khuda chahta to tum sabko ek ummat bhi bana sakta tha, lekin usne yeh isliye kiya ke jo kuch usne tum logon ko diya hai usmein tumhari aazmaish karey, lihaza bhalaiyon mein ek dusre se sabaqat le janey ki koshish karo. Aakhir e kaar tum sab ko khuda ki taraf palat kar jana hai, phir woh tumhein asal haqeeqat bata dega jis mein tum ikhtilaf karte rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney aap ki taraf haq kay sath yeh kitab nazil farmaee hai jo apney say agli kitabon ki tasdeeq kerney wali hai aur inn ki mohafiz hai. Iss liye aap inn kay aapas kay moamlaat mein issi utari hui kitab kay sath hukum kijiye iss haq say hatt ker inn ki khuwaishon kay peechay na jaiye tum mein say her aik kay liye hum ney aik dastoor aur raah muqarrar ker di hai. Agar manzoor maula hota to tum sab ko aik hi ummat bana deta lekin uss ki chahat hai kay jo tumhen diya hai uss mein tumhen aazmaye tum nekiyon ki taraf jaldi kero tum sab ka rujoo Allah hi ki taraf hai phir woh tumhen her woh cheez bata dey ga jiss mein tum ikhtilaf kertay rehtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)फिर (ऐ मुहम्मद!) हमने तुम्हारी तरफ ये किताब भेजी जो हक लेकर आई है और अल-किताब में से जो कुछ इसके आगे मौजूद है उसकी तस्दीक करने वाली और इसकी मुहाफिज ओ निगेहबान है। लिहाज़ा तुम खुदा के नाज़िल करदा कानून के मुताबिक़ लोगों के मामले का फैसला करो और जो हक तुम्हारे पास आया है उससे मुह मोड़ कर इनकी ख्वाहिश की जोड़ी ना करो। हमने तुम में से हर एक केलिये एक शरीयत और एक राह ए अमल मुकर्रर की, अगर तुम्हारा खुदा चाहता तो तुम सबको एक उम्मीद भी बना सकता था, लेकिन उसने ये इसलिए किया के जो कुछ उसने तुम लोगों को दिया है उसमें तुम्हारी आजमाइश करे, लिहाजा भलाईयों में एक दूसरे से सबक ले जाने की कोशिश करो। आख़िर ए कार तुम सब को खुदा की तरफ पलट कर जाना है, फिर वो तुम्हें असल हकीकत बता देगा जिसमें तुम इख्तिलाफ करते रहोगे
عَرَبِيوَأَنِ احكُم بَينَهُم بِما أَنزَلَ اللَّهُ وَلا تَتَّبِع أَهواءَهُم وَاحذَرهُم أَن يَفتِنوكَ عَن بَعضِ ما أَنزَلَ اللَّهُ إِلَيكَ ۖ فَإِن تَوَلَّوا فَاعلَم أَنَّما يُريدُ اللَّهُ أَن يُصيبَهُم بِبَعضِ ذُنوبِهِم ۗ وَإِنَّ كَثيرًا مِنَ النّاسِ لَفاسِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ नबी!) आप उनके बीच उसी के अनुसार निर्णय करें, जो अल्लाह ने उतारा है, और उनकी इच्छाओं का पालन न करें, तथा उनसे सावधान रहें कि वे आपको किसी ऐसे हुक्म से बहका दें, जो अल्लाह ने आपकी ओर उतारा है। फिर यदि वे फिर जाएँ, तो जान लें कि अल्लाह यही चाहता है कि उन्हें उनके कुछ पापों का दंड पहुँचाए। और निःसंदेह बहुत-से लोग निश्चय उल्लंघनकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Pas (aey Muhammad)! Tum Allah ke nazil karda kanoon ke mutabiq in logon ke maamlaat ka faisla karo aur inki khwahishat ki pairwi na karo. Hoshiyar raho ke yeh log tumko fitne mein daal kar us hidayat se zarra barabar munharif na karne paye jo khuda ne tumhari taraf nazil ki hai.Phir agar yeh issey mooh moadein to jaan lo ke Allah ne inke baaz gunaahon ki padash mein inko mubtala e museebat karne ka irada hi karliya hai, aur yeh haqeeqat hai ke in logon mein se aksar faasiq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap inn kay moamlaat mein khuda ki nazil kerda wahee kay mutabiq hi hukum kijiye inn ki khuwaishon ki tabeydaari na kijiye aur inn say hoshiyaar rahiye kay kahin yeh aap ko Allah kay utaray huye kissi hukum say idhar udhar na keren agar yeh log mun pher len to yaqeen keren kay Allah ka irada yehi hai kay enhen inn kay baaz gunahon ki saza dey hi daalay aur aksar log na farmaan hi hotay hain
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ मुहम्मद)! तुम अल्लाह के नाज़िल करदा क़ानून के मुताबिक़ में लोगों के ममलात का फ़ैसला करो और इनकी ख्वाहिश की जोड़ी ना करो। होशियार रहो के ये लोग तुमको फ़िटने में डाल कर हमें हिदायत से ज़रा बराबर मुनहरिफ़ ना करने पाए जो खुदा ने तुम्हारी तरफ नाज़िल की है। फिर अगर ये इसी मुह मोड़ें तो जान लो के अल्लाह ने इनके बाज़ गुनाहों की याद में इनको मुबतला ए मुसीबत करने का इरादा ही कर लिया है, और ये हकीकत है के इन लोगों में से अक्सर फ़ासीक़ हैं
عَرَبِيأَفَحُكمَ الجاهِلِيَّةِ يَبغونَ ۚ وَمَن أَحسَنُ مِنَ اللَّهِ حُكمًا لِقَومٍ يوقِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर क्या वे जाहिलिय्यत (पूर्व-इस्लामिक काल) का फ़ैसला चाहते हैं? और अल्लाह से बेहतर फ़ैसला करने वाला कौन है, उन लोगों के लिए जो विश्वास रखते हैं?
Roman Urdu (Maududi)(agar yeh khuda ke kanoon se mooh moadte hain) to kya phir jahiliyat ka faisla chahte hain? Halanke jo log Allah par yaqeen rakhte hain unke nazdeek Allah se behtar faisla karne wala koi nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh log phir say jaheeliyat kay faisla chahtay hain yaqeen rakhney walay logon kay liye Allah Taalaa say behtar faislay aur hukum kerney wala kaun ho sakta hai
Devnagri Urdu (Maududi)(अगर ये खुदा के कानून से मुह मोड़ते हैं) तो क्या फिर जेलियत का फैसला चाहते हैं? हालंके जो लोग अल्लाह पर यकीन रखते हैं उनके नजरिए से अल्लाह से बेहतर फैसला करने वाला कोई नहीं है
عَرَبِي۞ يا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَتَّخِذُوا اليَهودَ وَالنَّصارىٰ أَولِياءَ ۘ بَعضُهُم أَولِياءُ بَعضٍ ۚ وَمَن يَتَوَلَّهُم مِنكُم فَإِنَّهُ مِنهُم ۗ إِنَّ اللَّهَ لا يَهدِي القَومَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! तुम यहूदियों तथा ईसाइयों को मित्र न बनाओ। वे परस्पर एक-दूसरे के मित्र हैं। और तुममें से जो उन्हें मित्र बनाएगा, तो निश्चय वह उन्हीं में से है। निःसंदेह अल्लाह अत्याचारियों को मार्गदर्शन प्रदान नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho! Yahudiyon(Jews) aur Isaiyon (Christians) ko apna rafeeq (dost) na banao. Yeh aapas hi mein ek dusre ke rafeeq hain. Aur agar tum mein se koi inko apna rafeeq banata hai to uska shumar bhi phir inhi mein hai.Yaqeenan Allah zaalimon ko apni rehnumayi se mehroom kar deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tum yahud-o-nasaara ko dost na banao yeh to aapas mein hi aik doosray kay dost hain. Tum mein say jo bhi inn mein say kissi say dosti keray woh be-shak enhi mein say hai zalimon ko Allah Taalaa hergiz raah-e-raast nahi dikhata
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो! यहुदियों (यहूदियों) और ईसाइयों (ईसाइयों) को अपना रफीक (दोस्त) न बनाओ। ये आपस में ही एक दूसरे के रफीक हैं। और अगर तुम में से कोई इनको अपना रफीक बनाता है तो उसका शूमर भी फिर इसी में है। यकीनन अल्लाह ज़ालिमों को अपनी रहनुमाई से महरूम कर देता है
عَرَبِيفَتَرَى الَّذينَ في قُلوبِهِم مَرَضٌ يُسارِعونَ فيهِم يَقولونَ نَخشىٰ أَن تُصيبَنا دائِرَةٌ ۚ فَعَسَى اللَّهُ أَن يَأتِيَ بِالفَتحِ أَو أَمرٍ مِن عِندِهِ فَيُصبِحوا عَلىٰ ما أَسَرّوا في أَنفُسِهِم نادِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर (ऐ नबी!) आप उन लोगों को देखेंगे जिनके दिलों में एक रोग है कि वे दौड़कर उनमें जाते हैं। वे कहते हैं : हम डरते हैं कि हमपर कोई विपत्ति (न) आ जाए। तो निकट है कि अल्लाह विजय प्रदान कर दे या अपनी ओर से कोई और मामला (प्रकट कर दे)। फिर वे उसपर, जो उन्होंने अपने दिलों में छिपाया था, लज्जित हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Tum dekhte ho ke jinke dilon mein nifaq ki bimari hai woh unhi mein daud-dhoop karte phirte hain, kehte hain “humein darr lagta hai ke kahin hum kisi museebat ke chakkar mein na phans jayein” magar baeed nahin ke Allah jab tumhein faisla-kun fatah (decisive victory) bakshega ya apni taraf se koi aur baat zaahir karega to yeh log apne is nifaaq (hypocrisy) par jisey yeh dilon mein chupaye huey hain naadim honge
Roman Urdu (Junagarhi)Aap dekhen gay jin kay dilon mein beemari hai woh dor dor ker inn mein ghuss rahey hain aur kehtay hain kay humen khatra hai aisa na ho kay koi haadsa hum per parr jaye boht mumkin hai kay Allah Taalaa fatah dey dey. Ya apney pass say koi aur cheez laye phir to yeh apney dilon mein chupaee hui baaton per (bey tarah) naadim honey lagen gay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम देखते हो के जिनके दिलों में निफ़ाक की बीमारी है वो उन्ही में दौड़-धूप करते फिरते हैं, कहते हैं हैं "हमें डर लगता है के कहीं हम किसी मुसीबत के चक्कर में न फंस जाएं" मगर बाद नहीं कि अल्लाह जब तुम्हें फैसला-कुन फतह (निर्णायक जीत) बक्शेगा या अपनी तरफ से कोई और बात जाहिर करेगा तो ये लोग अपने इस निफाक (पाखंड) पर जैसे येह दिलों में छुपे हुए हैं नदीम होंगे
عَرَبِيوَيَقولُ الَّذينَ آمَنوا أَهٰؤُلاءِ الَّذينَ أَقسَموا بِاللَّهِ جَهدَ أَيمانِهِم ۙ إِنَّهُم لَمَعَكُم ۚ حَبِطَت أَعمالُهُم فَأَصبَحوا خاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा ईमान वाले कहते हैं : क्या यही लोग हैं, जिन्होंने अपनी मज़बूत क़समें खाते हुए अल्लाह की क़सम खाई थी कि निःसंदेह वे निश्चय तुम्हारे साथ हैं। उनके कार्य नष्ट हो गए, अतः वे घाटा उठाने वाले हो गए।
Roman Urdu (Maududi)Aur us waqt ehle iman kahenge “kya yeh wahi log hain jo Allah ke naam se kadi kadi kasmein kha kar yaqeen dilate thay ke hum tumhare saath hain?” Unke sab aamal zaaya hogaye aur aakhir e kaar yeh nakaam o na-murad hokar rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur eman walay kahen gay kiya yehi woh log hain jo baray mubalighay say Allah ki qasmen kha kha ker kehtay hain kay hum tumharay sath hain. Inn kay aemaal ghaarat huye aur yeh na kaam hogaye
Devnagri Urdu (Maududi)और हम वक्त एहले ईमान कहेंगे "क्या ये वही लोग हैं जो अल्लाह के नाम से कड़ी कसमें खा कर यकीन दिलाते थे के हम तुम्हारे साथ हैं?" उनके सब अमल ज़ाया होगे और आख़िर ए कार ये नाकाम ओ ना-मुराद होकर रहे
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا مَن يَرتَدَّ مِنكُم عَن دينِهِ فَسَوفَ يَأتِي اللَّهُ بِقَومٍ يُحِبُّهُم وَيُحِبّونَهُ أَذِلَّةٍ عَلَى المُؤمِنينَ أَعِزَّةٍ عَلَى الكافِرينَ يُجاهِدونَ في سَبيلِ اللَّهِ وَلا يَخافونَ لَومَةَ لائِمٍ ۚ ذٰلِكَ فَضلُ اللَّهِ يُؤتيهِ مَن يَشاءُ ۚ وَاللَّهُ واسِعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! तुममें से जो कोई अपने धर्म से फिर जाए, तो अल्लाह निकट ही ऐसे लोग लाएगा, जिनसे वह प्रेम करेगा और वे उससे प्रेम करेंगे। वे ईमान वालों के प्रति बहुत नरम तथा काफ़िरों के प्रति बहुत कठोर होंगे, अल्लाह की राह में जिहाद करेंगे और किसी निंदा करने वाले की निंदा से नहीं डरेंगे। यह अल्लाह का अनुग्रह है, वह उसे देता है जिसको चाहता है और अल्लाह विस्तार वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, agar tum mein se koi apne deen se phirta hai (to phir jaye) Allah aur bhut se log aisey paida kardega jo Allah ko mehboob honge aur Allah unko mehboob hoga, jo momino par narm aur kuffar par sakht honge, jo Allah ki raah mein jidd o jahad karenge aur kisi malamat karne waley ki malamat se na darenge. Yeh Allah ka fazal hai, jisey chahta hai ata karta hai. Allah waseeh zaraye ka malik hai aur sab kuch jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tum mein say jo shaks apney deen say phir jaye to Allah Taalaa boht jald aisi qom ko laye ga jo Allah ki mehboob hogi aur woh bhi Allah say mohabbat rakhti hogi woh naram dil hongay musalmanon per aur sakht aur tez hongay kuffaar per Allah ki raah mein jihad keren gay aur kissi malamat kerney walay ki malamat ki perwah bhi na keren gay yeh hai Allah Taalaa ka fazal jissay chahaye dey Allah Taalaa bari wusat wala aur zabardast ilm wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम में से कोई अपने दीन से फिरता है (तो फिर जाए) अल्लाह और भूत से लोग ऐसा अदा कर देंगे जो अल्लाह को मेहबूब होंगे और अल्लाह उनको मेहबूब होगा, जो मोमिनो पर नर्म और कुफ्फार पर सख्त होंगे, जो अल्लाह की राह में जिद ओ जहद करेंगे और किसी को मलामत करने वाले से न डरेंगे। ये अल्लाह का फ़ज़ल है, जिसे चाहता है अता करता है। अल्लाह वसीह ज़राए का मालिक है और सब कुछ जानता है
عَرَبِيإِنَّما وَلِيُّكُمُ اللَّهُ وَرَسولُهُ وَالَّذينَ آمَنُوا الَّذينَ يُقيمونَ الصَّلاةَ وَيُؤتونَ الزَّكاةَ وَهُم راكِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारे मित्र तो केवल अल्लाह और उसका रसूल तथा वे लोग हैं जो ईमान लाए, जो नमाज़ क़ायम करते और ज़कात देते हैं और वे (अल्लाह के आगे) झुकने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tumhare rafeeq to haqeeqat mein sirf Allah aur Allah ka Rasool aur woh ehle iman hain jo namaz qayam karte hain, zakat dete hain aur Allah ke aagey jhukne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)(musalmano)! Tumhara dosat khud Allah hai aur uss ka rasool hai aur eman walay hain jo namazon ki pabandi kertay hain aur zakat ada kertay hain aur woh rukoo (khushoo-o-khuzoo) kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारे रफीक तो हकीकत में सिर्फ अल्लाह और अल्लाह का रसूल और वह एहले ईमान हैं जो नमाज़ क़याम करते हैं, ज़कात देते हैं और अल्लाह के आगे झुकने वाले हैं
عَرَبِيوَمَن يَتَوَلَّ اللَّهَ وَرَسولَهُ وَالَّذينَ آمَنوا فَإِنَّ حِزبَ اللَّهِ هُمُ الغالِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो कोई अल्लाह और उसके रसूल को और उन लोगों को दोस्त बनाए, जो ईमान लाए हैं, तो निश्चय अल्लाह का दल ही वे लोग हैं जो प्रभावी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo Allah aur uske Rasool aur ehle iman ko apna rafeeq bana lein usey maloom ho ke Allah ki jamaat hi gaalib rehne wali hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo shaks Allah Taalaa say aur uss kay rasool say aur musalmanon say dosti keray woh yaqeen manay kay Allah Taalaa ki jamat hi ghalib rahey gi
Devnagri Urdu (Maududi)और जो अल्लाह और उसके रसूल और एहले ईमान को अपना रफीक बना लें उसे मालूम हो के अल्लाह की जमात ही गालिब रहने वाली है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَتَّخِذُوا الَّذينَ اتَّخَذوا دينَكُم هُزُوًا وَلَعِبًا مِنَ الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ مِن قَبلِكُم وَالكُفّارَ أَولِياءَ ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ إِن كُنتُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! उन लोगों को जिन्होंने तुम्हारे धर्म को उपहास और खेल बना लिया, उन लोगों में से जिन्हें तुमसे पहले पुस्तक दी गई है और काफ़िरों को मित्र न बनाओ और अल्लाह से डरो, यदि तुम ईमान वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, tumhare peshraw ehle kitab mein se jin logon ne tumhare deen ko mazaq aur tafreeh ka samaan bana liya hai, unhein aur dusre kaafiron ko apna dost aur rafeeq na banao. Allah se daro agar tum momin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Musalmano! Unn logon ko dost na banao jo tumharay deen ko hansi khel banaye huye hain (khuwa) woh unn mein say hon jo tum say pehlay kitab diye gaye ya kuffaar hon agar tum momin hoto Allah Taalaa say dartay raho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारे पेश्रा एहले किताब में से जिन लोगों ने तुम्हारे दीन को मजाक और तफरीह का सामान बना लिया है, उन्हें और दूसरे काफिरों को अपना दोस्त और रफीक ना बनाओ। अल्लाह से डरो अगर तुम मोमिन हो
عَرَبِيوَإِذا نادَيتُم إِلَى الصَّلاةِ اتَّخَذوها هُزُوًا وَلَعِبًا ۚ ذٰلِكَ بِأَنَّهُم قَومٌ لا يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब तुम नमाज़ के लिए पुकारते हो, तो वे उसे उपहास और खेल बना लेते हैं। यह इसलिए कि वे ऐसे लोग हैं जो समझते नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Jab tum namaz keliye munadi (call) karte ho to woh iska mazaaq udate aur issey khelte hain. Iski wajah yeh hai ke woh aqal nahin rakhte
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab tum namaz kay liye pukartay ho wo woh issay hansi khel thehra letay hain. Yeh iss wastay kay bey aqal hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब तुम नमाज़ के लिए मुनादी (कॉल) करते हो तो वो इसका मज़ाक उड़ाते और इसे खेलते हैं। इसकी वजह ये है के वो अक्ल नहीं रखते
عَرَبِيقُل يا أَهلَ الكِتابِ هَل تَنقِمونَ مِنّا إِلّا أَن آمَنّا بِاللَّهِ وَما أُنزِلَ إِلَينا وَما أُنزِلَ مِن قَبلُ وَأَنَّ أَكثَرَكُم فاسِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें : ऐ किताब वालो! तुम्हें हमारी केवल यह बात बुरी लगती है कि हम अल्लाह पर ईमान लाए और उसपर जो हमारी ओर उतारा गया और उसपर भी जो हमसे पहले उतारा गया और यह कि निःसंदेह तुममें से अधिकतर लोग अवज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho “Aey ehle kitaab! Tum jis baat par humse bigde ho (hate us) woh iske siwa aur kya hai ke hum Allah par aur deen ki us taleem par iman le aaye hain jo hamari taraf nazil hui hai aur humse pehle bhi nazil hui thi? Aur tum mein se aksar log fasiq hain.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay aey yahudiyon aur nasraniyo! Tum hum say sirf iss waja say dusmaniyan ker rahey ho kay hum Allah Taalaa per aur jo kuch humari janib nazil kiya gaya hai aur jo kuch iss say pehlay utara gaya hai uss per eman laye hain aur iss liye bhi kay tum mein aksar faasiq hain
Devnagri Urdu (Maududi)इंसे कहो "ऐ एहले किताब! तुम जिस बात पर हमसे बड़े हो (हमसे नफरत करो) वो इसके सिवा और क्या है के हम अल्लाह पर और दीन की उस तालीम पर ईमान ले आए हैं जो हमारी तरफ नाज़िल हुई है और हमसे पहले भी नाज़िल हुई थी? और तुम में से अक्सर लोग फ़ासिक हैं।”
عَرَبِيقُل هَل أُنَبِّئُكُم بِشَرٍّ مِن ذٰلِكَ مَثوبَةً عِندَ اللَّهِ ۚ مَن لَعَنَهُ اللَّهُ وَغَضِبَ عَلَيهِ وَجَعَلَ مِنهُمُ القِرَدَةَ وَالخَنازيرَ وَعَبَدَ الطّاغوتَ ۚ أُولٰئِكَ شَرٌّ مَكانًا وَأَضَلُّ عَن سَواءِ السَّبيلِ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : क्या मैं तुम्हें अल्लाह के निकट इससे अधिक बुरा बदला वाले लोग बताऊँ, वे लोग जिनपर अल्लाह ने ला'नत की और जिनपर क्रोधित हुआ, और जिनमें से बंदर और सूअर बना दिए और जिन्होंने 'ताग़ूत' की पूजा की। ये लोग दर्जे में अधिक बुरे तथा सीधे मार्ग से अधिक भटके हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir kaho “kya main un logon ki nishandahi karoon jinka anjaam khuda ke haan fasiqon ke anjam se bhi badhtar hai? Woh jinpar khuda ne lanat ki, jinpar uska gazab toota, jinmein se bandar aur suwar banaye gaye, jinhon ne taghut ki bandagi ki unka darja aur bhi zyada bura hai aur woh sawa-e-sabeel (right path) se bahut zyada bhatke huye hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay kiya mein tumehn bataon? Kay iss say bhi ziyada bura ajar paaney wala Allah kay nazdeek kaun hai? Woh jiss per Allah Taalaa ney laanat ki aur uss per woh ghussa hua aur unn mein say baaz ko bandar aur sooar bana diya aur jinhon ney maboodaan-e-baatil ki parastish ki yehi log bad tar darjay walay hain aur yehi raah-e-raast say boht ziyada bhatakney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)फिर कहो "क्या मैं उन लोगों की निशानदेही करूं जिनका अंजाम खुदा के हां फासीकों के अंजाम से भी बढ़ता है? वो जिनपर खुदा ने लानत की, जिनपर उसका गजब टूटा, जिनमें से बंदर और सुवर बन गए, जिन्होन ने टैगहुट की बंदगी की उनका दरजा और भी ज़्यादा बुरा है और वो सवा-ए-सबील (सही रास्ता) से बहुत ज़्यादा भटके हुए हैं”
عَرَبِيوَإِذا جاءوكُم قالوا آمَنّا وَقَد دَخَلوا بِالكُفرِ وَهُم قَد خَرَجوا بِهِ ۚ وَاللَّهُ أَعلَمُ بِما كانوا يَكتُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब वे तुम्हारे पास आते हैं, तो कहते हैं कि हम ईमान लाए, हालाँकि निश्चय वे कुफ़्र के साथ प्रवेश किए और निश्चय उसी के साथ वे निकल गए। तथा अल्लाह अधिक जानने वाला है, जो वे छिपाते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jab yeh tum logon ke paas aate hain to kehte hain ke hum iman laye, halanke kufr liye huey aaye thay aur kufr hi liye huye wapas gaye, aur Allah khoob jaanta hai jo kuch yeh dilon mein chupaye huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab tumharay pass aatay hain to kehtay hain kay hum eman laye halankay woh kufur liye huye hi aaye thay aur iss kufur kay sath hi gaye bhi aur yeh jo kuch chupa rahey hain ussay Allah khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जब ये तुम लोगों के पास आते हैं तो कहते हैं कि हम ईमान लाए, हालंके कुफ़्र लिए हुए आए थे और कुफ़्र ही लिए हुए वापस गए, और अल्लाह ख़ूब जानता है है जो कुछ ये दिलों में छुपे हुए हैं
عَرَبِيوَتَرىٰ كَثيرًا مِنهُم يُسارِعونَ فِي الإِثمِ وَالعُدوانِ وَأَكلِهِمُ السُّحتَ ۚ لَبِئسَ ما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप उनमें से बहुतों को देखेंगे कि वे पाप तथा अत्याचार और अपनी हरामख़ोरी में दौड़कर जाते हैं। निश्चय बहुत बुरा है, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Tum dekhte ho ke inmein se bakasrat log gunaah aur zulm o zyadati ke kaamon mein daud-dhoop karte phirte hain, aur haraam ke maal khate hain, bahut buri harakaat hain jo yeh kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap dekhen gay kay inn mein say aksar gunah kay kaamon ki taraf aur zulm-o-ziyadti ki taraf aur maal haram khaney ki taraf lapak rahey hain jo kuch yeh ker rahey hain woh nihayat buray kaam hain
Devnagri Urdu (Maududi)तुम देखते हो कि इनमें से बकसरत लोग गुनाह और ज़ुल्म ओ ज़्यादा के कामोन में धूप-धूप करते हैं, और हराम के माल खाते हैं, बहुत बुरी हरकत हैं जो ये कर रहे हैं
عَرَبِيلَولا يَنهاهُمُ الرَّبّانِيّونَ وَالأَحبارُ عَن قَولِهِمُ الإِثمَ وَأَكلِهِمُ السُّحتَ ۚ لَبِئسَ ما كانوا يَصنَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्हें अल्लाह वाले तथा विद्वान उनके झूठ कहने तथा उनके हराम खाने से क्यों नहीं रोकते? निश्चय बुरा है, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Kyun inke ulema, aur mashahik (jursits) inhein gunaah par zubaan kholne aur haraam khane se nahin roakte? Yaqeenan bahut hi bura kaarnama e zindagi hai jo woh tayyar kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Enhen inn kay abid-o-aalim jhoot baaton kay kehney aur haram cheezon kay khaney say kiyon nahi roktay be-shak bura kaam hai jo yeh ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्यों इनके उलेमा, और मशाहिक (जुर्सिट्स) इन्हें गुनाह पर ज़ुबान खोलने और हराम खाने से नहीं रोकते? यकीनन बहुत ही बुरा कारनामा ए जिंदगी है जो वो तय्यार कर रहे हैं
عَرَبِيوَقالَتِ اليَهودُ يَدُ اللَّهِ مَغلولَةٌ ۚ غُلَّت أَيديهِم وَلُعِنوا بِما قالوا ۘ بَل يَداهُ مَبسوطَتانِ يُنفِقُ كَيفَ يَشاءُ ۚ وَلَيَزيدَنَّ كَثيرًا مِنهُم ما أُنزِلَ إِلَيكَ مِن رَبِّكَ طُغيانًا وَكُفرًا ۚ وَأَلقَينا بَينَهُمُ العَداوَةَ وَالبَغضاءَ إِلىٰ يَومِ القِيامَةِ ۚ كُلَّما أَوقَدوا نارًا لِلحَربِ أَطفَأَهَا اللَّهُ ۚ وَيَسعَونَ فِي الأَرضِ فَسادًا ۚ وَاللَّهُ لا يُحِبُّ المُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यहूदियों ने कहा कि अल्लाह का हाथ बँधा हुआ है। उनके हाथ बाँधे गए और उनपर ला'नत की गई, उसके कारण जो उन्होंने कहा। बल्कि उसके दोनों हाथ खुले हुए हैं। वह जैसे चाहता है, खर्च करता है। और निश्चय जो कुछ (ऐ रसूल!) आपकी ओर आपके पालनहार की तरफ़ से उतारा गया है, वह उनमें से बहुत-से लोगों को सरकशी (उद्दंडता) और कुफ़्र में अवश्य बढ़ा देगा। तथा हमने उनके बीच क़ियामत के दिन तक शत्रुता और द्वेष डाल दिया। जब कभी वे लड़ाई की कोई आग भड़काते हैं, अल्लाह उसे बुझा देता है। तथा वे धरती में उपद्रव का प्रयास करते रहते हैं और अल्लाह उपद्रव करने वालों से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Yahudi kehte hain Allah ke haath bandhey huey hain. Baandhey gaye inke haath, aur laanat padi inpar us bakwas ki badaulat jo yeh karte hain. Allah ke haath to kushada hain, jis tarah chahta hai kharch karta hai. Haqeeqat yeh hai ke jo kalaam tumhare Rubb ki taraf se tumpar nazil hua hai woh inmein se aksar logon ki sarkashi o baatil parasti mein ultey izafey ka mujeeb ban gaya hai, aur (iski padash mein) humne inke darmiyan qayamat tak ke liye adawat aur dushmani daal di hai. Jab kabhi yeh jung ki aag bhadkate hain Allah usko thanda kardeta hai. Yeh zameen mein fasaad phaylane ki sai(try) kar rahey hain, magar Allah fasaad barpa karne walon ko hargiz pasand nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yahudiyon ney kaha Allah Taalaa kay haath bandhay huye hain aur inn kay iss qol ki waja say inn per laanat ki gaee bulkay Allah Taalaa kay dono haath khulay huye hain. Jiss tarah chahata hai kharach kerta hai aur jo kuch teri taraf teray rab ki janib say utara jata hai woh inn mein say aksar ko to sirkashi aur kufur mein barha deta hai aur hum ney inn mein aapas mein hi qayamat tak kay liye adawat aur bughz daal diya hai aur jab kabhi laraee ki aag ko bharkana chahatay hain to Allah Taalaa ussay bujha deta hai yeh mulk bhar mein shar-o-fasaad machatay phirtay hain aur Allah Taalaa fasaadiyon say mohabbat nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)यहूदी कहते हैं अल्लाह के हाथ बांधे हुए हैं। बांधे गए इनके हाथ, और लानत पड़ी इनपर हमें बकवस की बदौलत जो ये करते हैं। अल्लाह के हाथ तो कुशादा हैं, जिसकी तरह चाहता है खर्च करता है। हकीकत ये है कि जो कलाम तुम्हारे रब की तरफ से तुम पर नाज़िल हुआ है वो इनमें से अक्सर लोगों की सरकशी ओ बातिल परस्ती में उलटे इज़ाफ़े का मुजीब बन गया है, और (इसकी पैदाइश में) हमने इनके दरमियान कयामत तक के लिए अदावत और दुश्मनी डाल दी है। जब कभी ये जंग भड़कती है तो अल्लाह उसको ठंडा कर देता है। ये ज़मीन में फ़साद फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, मगर अल्लाह फ़साद बरपा करने वालों को हरगिज़ पसंद नहीं करता
عَرَبِيوَلَو أَنَّ أَهلَ الكِتابِ آمَنوا وَاتَّقَوا لَكَفَّرنا عَنهُم سَيِّئَاتِهِم وَلَأَدخَلناهُم جَنّاتِ النَّعيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वास्तव में अह्ले किताब ईमान ले आते तथा (अल्लाह से) डरते, तो हम अवश्य उनकी बुराइयाँ उनसे दूर कर देते और उन्हें अवश्य नेमतों वाली जन्नतों में दाखिल करते।
Roman Urdu (Maududi)Agar (is sarkashi ke bajaye) yeh ehle kitab iman le aate aur khuda tarsi ki rawish ikhtiyar karte to hum inki buraiyan insey door kardete aur inko niyamat bhari jannaton mein pahunchate
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar yeh ehal-e-kitab eman latay aur taqwa ikhtiyar kertay to hum inn ki tamam burayian moaf farma detay aur zaroor enhen rahat-o-aaram ki jannaton mein ley jatay
Devnagri Urdu (Maududi)अगर (इस सरकशी के बजाये) ये एहले किताब ईमान ले आते और खुदा तरसी की रवीश इख्तियार करते तो हम इनकी बुराइयां इनसे दूर करदेते और इनको नियामत भरी जन्नतों में पहचानते हैं
عَرَبِيوَلَو أَنَّهُم أَقامُوا التَّوراةَ وَالإِنجيلَ وَما أُنزِلَ إِلَيهِم مِن رَبِّهِم لَأَكَلوا مِن فَوقِهِم وَمِن تَحتِ أَرجُلِهِم ۚ مِنهُم أُمَّةٌ مُقتَصِدَةٌ ۖ وَكَثيرٌ مِنهُم ساءَ ما يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यदि वे वास्तव में तौरात और इंजील का पालन करते और उसका जो उनके पालनहार की तरफ़ से उनकी ओर उतारा गया है, तो निश्चय वे अपने ऊपर से तथा अपने पैरों के नीचे से खाते। उनमें से एक समूह मध्यम मार्ग पर है और उनमें से बहुत-से लोग जो कर रहे हैं, वह बहुत बुरा है।
Roman Urdu (Maududi)Kaash inhon ne Taurat aur Injeel aur un dusri kitaabon ko qayam kiya hota jo inke Rubb ki taraf se inke paas bheji gayi thi. Aisa karte to inke liye upar se rizq barasta aur nichey se ubalta ,agarche inmein kuch log raast-ro bhi hain lekin inki aksariyat sakht badh-amal hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar yeh log toraat aur injeel aur inn ki janib jo kuch Allah Taalaa ki taraf say nazil farmaya gaya hai inn kay pooray paband rehtay to yeh log apney upper say aur neechay say roziyan patay aur khatay aik jamat to inn mein say darmiyana ravish ki hai baqi inn mein say boht say logon kay buray aemaal hain
Devnagri Urdu (Maududi)काश इन्हों ने तौरात और इंजील और उन दूसरी किताबों को क़याम किया होता जो इनके रब की तरफ से इनके पास भेज दी गई थी। ऐसा करते तो इनके लिए ऊपर से रिज़क बरसात और नीचे से उबाल, अगर इनमें कुछ लोग रास्ते-रो भी हैं लेकिन इनकी अक्सरियत बहुत ज्यादा है
عَرَبِي۞ يا أَيُّهَا الرَّسولُ بَلِّغ ما أُنزِلَ إِلَيكَ مِن رَبِّكَ ۖ وَإِن لَم تَفعَل فَما بَلَّغتَ رِسالَتَهُ ۚ وَاللَّهُ يَعصِمُكَ مِنَ النّاسِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لا يَهدِي القَومَ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ रसूल! जो कुछ आपपर आपके पालनहार की ओर से उतारा गया है, उसे पहुँचा दें। और यदि आपने (ऐसा) न किया, तो आपने उसका संदेश नहीं पहुँचाया। और अल्लाह आपको लोगों से बचाएगा। निःसंदेह अल्लाह काफ़िर लोगों को मार्गदर्शन नहीं प्रदान करता।
Roman Urdu (Maududi)Aey Paigambar! Jo kuch tumhare Rubb ki taraf se tumpar nazil kiya gaya hai woh logon tak pahuncha do , agar tumne aisa na kiya to uski paigambari ka haqq ada na kiya. Allah tumko logon ke sharr se bachaane wala hai. Yaqeen rakkho ke woh kafiron ko (tumhare muqable mein) kamiyabi ki raah hargiz na dikhayega
Roman Urdu (Junagarhi)Aey rasool jo kuch bhi aap ki taraf aap kay rab ki janib say nazil kiya gaya hai phoncha dijiye. Agar aap ney aisa na kiya to aap ney Allah ki risalat ada nahi kiaur aap ko Allah Taalaa logon say bacha ley ga be-shak Allah Taalaa kafir logon ko hidayat nahi deta
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ पैगम्बर! जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है वो लोगों तक पहुंच दो, अगर तुमने ऐसा ना किया तो उसकी पैगम्बरी का हक़ अदा ना किया। अल्लाह तुमको लोगों के शरर से बचाने वाला है। यकीन रख्खो के वो काफिरों को (तुम्हारे मुकाबले में) कामयाबी की राह हरगिज न दिखायेगा
عَرَبِيقُل يا أَهلَ الكِتابِ لَستُم عَلىٰ شَيءٍ حَتّىٰ تُقيمُوا التَّوراةَ وَالإِنجيلَ وَما أُنزِلَ إِلَيكُم مِن رَبِّكُم ۗ وَلَيَزيدَنَّ كَثيرًا مِنهُم ما أُنزِلَ إِلَيكَ مِن رَبِّكَ طُغيانًا وَكُفرًا ۖ فَلا تَأسَ عَلَى القَومِ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें : ऐ अह्ले किताब! तुम किसी चीज़ पर नहीं हो, यहाँ तक कि तुम तौरात और इंजील को क़ायम करो और उसको जो तुम्हारी ओर तुम्हारे पालनहार की तरफ़ से उतारा गया है। तथा निश्चय जो कुछ आपकी ओर आपके पालनहार की तरफ़ से उतारा गया है, वह उनमें से बहुत से लोगों को उल्लंघन और कुफ़्र में अवश्य बढ़ा देगा। अतः आप काफ़िर लोगों पर दुखी न हों।
Roman Urdu (Maududi)Saaf kehdo ke “ Aey ehle kitaab! Tum hargiz kisi asal par nahin ho jab tak ke Taurat aur Injeel aur un dusri kitabon ko qayam na karo jo tumhare Rubb ki taraf se nazil ki gayi hain”. Zaroor hai ke yeh farmaan jo tumpar nazil kiya gaya hai inmein se aksar ki sarkashi aur inkar ko aur zyada badha dega, magar inkar karne walon ke haal par kuch afsos na karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay ehal-e-kitab! Tum dar asal kissi cheez per nahi jab tak kay toraat aur injeel ko aur jo kuch tumhari taraf tumharay rab ki taraf say utara gaya hai qaeem na kerojo kuch aap ki janib aap kay rab ki taraf say utra hai woh inn mein say bohton ko shararat aur inkaar mein aur bhi barhaye ga hi to aap inn kafiron per ghumgeen na hon
Devnagri Urdu (Maududi)साफ कहदो के "ऐ एहले किताब! तुम हरगिज किसी असल पर नहीं हो जब तक के तौरात और इंजील और उन दूसरी किताबों को कायम न करो जो तुम्हारे रब की तरफ से नाज़िल की गई हैं”। जरूर है के ये फरमान जो तुमपर नाज़िल किया गया है उनमें से अक्सर की सरकशी और इंकार को और ज्यादा बढ़ा देगा, मगर इंकार करने वालों के हाल पर कुछ अफ़सोस ना करो
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا وَالَّذينَ هادوا وَالصّابِئونَ وَالنَّصارىٰ مَن آمَنَ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ وَعَمِلَ صالِحًا فَلا خَوفٌ عَلَيهِم وَلا هُم يَحزَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और जो यहूदी बने, तथा साबी और ईसाई, जो भी अल्लाह तथा अंतिम दिन पर ईमान लाया और उसने अच्छा कर्म किया, तो उनपर न कोई डर है और न वे शोकाकुल होंगे।
Roman Urdu (Maududi)yaqeen jaano ke yahan ijara (exclusive claim to the truth) kisi ka bhi nahin hai) musalman ho ya yahudi, sabiy (sabiyans) hon ya Isayi (Christians), jo bhi Allah aur roz e aakhir par iman layega aur neik amal karega, beshak uske liye na kisi khauf ka muqaam hai na ranjj ka
Roman Urdu (Junagarhi)Musalman yahudi sitara parast aur nasrani koi ho jo bhi Allah Taalaa per aur qayamat kay din per eman laye aur nek amal keray woh mehaz bey khof rahey ga aur bilkul bey ghum hojaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)यकीन जानो के यहां इजारा (सच्चाई का विशेष दावा) किसी का भी नहीं है) मुसलमान हो या यहूदी, सबी (सबिया) हो या इसाई (ईसाई), जो भी अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान लाएगा और नेक अमल करेगा, उसके लिए ना किसी खौफ का मुकाम है ना रंज का
عَرَبِيلَقَد أَخَذنا ميثاقَ بَني إِسرائيلَ وَأَرسَلنا إِلَيهِم رُسُلًا ۖ كُلَّما جاءَهُم رَسولٌ بِما لا تَهوىٰ أَنفُسُهُم فَريقًا كَذَّبوا وَفَريقًا يَقتُلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने बनी इसराईल से दृढ़ वचन लिया तथा उनकी ओर कई रसूल भेजे। जब कभी कोई रसूल उनके पास वह चीज़ लेकर आया, जिसे उनके दिल नहीं चाहते थे, तो उन्होंने एक गिरोह को झुठला दिया तथा एक गिरोह को क़त्ल करते रहे।
Roman Urdu (Maududi)Humne bani Israel se pukhta ahad liya aur unki taraf bahut se Rasool bheje, magar jab kabhi unke paas koi Rasool unki khwahishat e nafs ke khilaf kuch lekar aaya to kisi ko unhon ne jhutlaya aur kisi ko qatal kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney bil yaqeen bano israeel say ehad-o-paymaan liya aur unn ki taraf rasoolon ko bheja jab kabhi rasool unn kay pass woh ehkaam ley ker aaye jo unn ki apni mansha kay khilaf thay to unhon ney unn ki jamat ki takzeeb ki aur aik jamat ko qatal ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने बनी इजराइल से पुख्ता अहद लिया और उनकी तरफ बहुत से रसूल भेजे, मगर जब कभी उनके पास कोई रसूल उनकी ख्वाहिशत ए नफ्स के खिलाफ कुछ लेकर आया तो किसी को अनहोन ने झुटलाया और किसी को कत्ल कर दिया
عَرَبِيوَحَسِبوا أَلّا تَكونَ فِتنَةٌ فَعَموا وَصَمّوا ثُمَّ تابَ اللَّهُ عَلَيهِم ثُمَّ عَموا وَصَمّوا كَثيرٌ مِنهُم ۚ وَاللَّهُ بَصيرٌ بِما يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने सोचा कि कोई फ़ितना (परीक्षण या दंड) नहीं होगा, इसलिए वे अंधे और बहरे हो गए। फिर अल्लाह ने उन्हें क्षमा कर दिया। फिर उनमें से बहुत से अंधे और बहरे हो गए। तथा अल्लाह ख़ूब देखने वाला है, जो वे करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur apne nazdeek yeh samajhe ke koi fitna runama na hoga, isliye andhey aur behre ban gaye, phir Allah ne unhein maaf kiya to unmein se aksar log aur zyada andhey aur behre bantey chale gaye. Allah unki yeh sab harakaat dekhta raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh samajh bethay kay koi pakar na hogi pus andhay behray bann bethay phir Allah Taalaa ney unn ki tauba qabool ki iss kay baad bhi unn mein say aksar andhay behray hogaye. Allah Taalaa unn kay aemaal ko ba-khoobi dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अपने नजरिये ये समझे के कोई फ़ितना रुनामा ना होगा, इसलिए अंधे और बाहर बन गए, फिर अल्लाह ने उन्हें माफ़ किया तो उनमें से अक्सर लोग और ज़्यादा अंधे और बाहर चले गए। अल्लाह उनकी ये सब हरकत देख रहा है
عَرَبِيلَقَد كَفَرَ الَّذينَ قالوا إِنَّ اللَّهَ هُوَ المَسيحُ ابنُ مَريَمَ ۖ وَقالَ المَسيحُ يا بَني إِسرائيلَ اعبُدُوا اللَّهَ رَبّي وَرَبَّكُم ۖ إِنَّهُ مَن يُشرِك بِاللَّهِ فَقَد حَرَّمَ اللَّهُ عَلَيهِ الجَنَّةَ وَمَأواهُ النّارُ ۖ وَما لِلظّالِمينَ مِن أَنصارٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह उन लोगों ने कुफ़्र किया, जिन्होंने कहा कि निःसंदेह अल्लाह तो मरयम का बेटा मसीह ही है। जबकि मसीह ने कहा : ऐ बनी इसराईल! अल्लाह की इबादत करो, जो मेरा पालनहार तथा तुम्हारा पालनहार है। निःसंदेह सच्चाई यह है कि जो भी अल्लाह के साथ साझी बनाए, तो निश्चय उसपर अल्लाह ने जन्नत हराम (वर्जित) कर दी और उसका ठिकाना आग (जहन्नम) है। तथा अत्याचारियों के लिए कोई मदद करने वाले नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan kufr kiya un logon ne jinhon ne kaha ke Allah Maseeh ibne Mariyam hi hai, halanke Maseeh ne kaha tha ke “ aey bani Israel! Allah ki bandagi karo jo mera Rubb bhi hai aur tumhara Rubb bhi”. Jisne Allah ke saath kisi ko shareek thehraya uspar Allah ne Jannat haraam kardi aur uska thikana jahannum hai aur aisey zaalimon ka koi madadgaar nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak woh log kafir hogaye jin ka qol hai kay maseeh ibn-e-marium hi Allah hain halankay khud maseeh ney unn say kaha tha aey bani israeel! Allah hi ki ibadat kero jo mera aur tumhara sab ka rab hai yaqeen mano kay jo shaks Allah kay sath shareek kerta hai Allah Taalaa ney uss per jannat haram ker di hai uss ka thikana jahannum hi hai aur gunehgaron ki madad kerney wala koi nahi hoga
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन कुफ्र किया उन लोगों ने जिन्होन ने कहा के अल्लाह मसीह इब्ने मरियम ही है, हालंके मसीह ने कहा था के "ऐ बानी इस्राइल! अल्लाह की बंदगी करो जो मेरा रुब भी है और तुम्हारा रुब भी"। जिसने अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहरया उसपर अल्लाह ने जन्नत हराम करदी और उसका ठिकाना जहन्नुम है और ऐसे ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं
عَرَبِيلَقَد كَفَرَ الَّذينَ قالوا إِنَّ اللَّهَ ثالِثُ ثَلاثَةٍ ۘ وَما مِن إِلٰهٍ إِلّا إِلٰهٌ واحِدٌ ۚ وَإِن لَم يَنتَهوا عَمّا يَقولونَ لَيَمَسَّنَّ الَّذينَ كَفَروا مِنهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह उन लोगों ने कुफ़्र किया, जिन्होंने कहा : निःसंदेह अल्लाह तीन में से तीसरा है! हालाँकि कोई भी पूज्य नहीं है, परंतु एक पूज्य। और यदि वे उससे नहीं रुके जो वे कहते हैं, तो निश्चय उनमें से जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उन्हें अवश्य दर्दनाक यातना पहुँचेगी।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan kufr kiya un logon ne jinhon ne kaha ke Allah teen (trinity)mein ka ek hai, halaanke ek khuda ke siwa koi khuda nahin hai. Agar yeh log apni in baaton se baaz na aaye to inmein se jis jisne kufr kiya hai usko dardnaak saza di jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Woh log bhi qatan kafir hogaye jinhon ney kaha Allah teen mein ka teesra hai dar asal so Allah Taalaa key koi mabood nahi. Agar yeh log apney iss qol say baaz na rahey to inn mein say jo kufur per rahen gay unhen alam naak azab zarror phonchay ga
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन कुफ्र किया उन लोगों ने जिन्होन ने कहा के अल्लाह तीन (त्रिमूर्ति) में का एक है, हलांके एक खुदा के सिवा कोई खुदा नहीं है. अगर ये लोग अपनी बातों से बाज ना आएं तो इनमें से जिसने कुफ्र किया है उसको दर्दनाक सजा दी जाएगी
عَرَبِيأَفَلا يَتوبونَ إِلَى اللَّهِ وَيَستَغفِرونَهُ ۚ وَاللَّهُ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वे अल्लाह के समक्ष तौबा नहीं करते तथा उससे क्षमा याचना नहीं करते, और अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Phir kya yeh Allah se tauba na karenge aur ussey maafi na maangenge? Allah bahut darguzar farmane wala aur reham karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log kiyon Allah Taalaa ki taraf nahi jhuktay aur kiyon istaghfar nahi kertay? Allah Taalaa boht hi bakhshney wala aur bara hi meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्या ये अल्लाह से तौबा ना करेंगे और उसे माफ़ी ना मांगेंगे? अल्लाह बहुत दरगुज़र फ़रमाने वाला और रहम करने वाला है
عَرَبِيمَا المَسيحُ ابنُ مَريَمَ إِلّا رَسولٌ قَد خَلَت مِن قَبلِهِ الرُّسُلُ وَأُمُّهُ صِدّيقَةٌ ۖ كانا يَأكُلانِ الطَّعامَ ۗ انظُر كَيفَ نُبَيِّنُ لَهُمُ الآياتِ ثُمَّ انظُر أَنّىٰ يُؤفَكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)मरयम का बेटा मसीह एक रसूल के सिवा कुछ नहीं। निश्चय उससे पहले बहुत-से रसूल गुज़र चुके और उसकी माँ सिद्दीक़ा (अत्यंत सच्ची) है। दोनों खाना खाया करते थे। देखो, हम उनके लिए किस तरह निशानियाँ स्पष्ट करते हैं। फिर देखो, वे किस तरह फेरे जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Maseeh ibne Mariyam iske siwa kuch nahin ke bas ek Rasool tha, ussey pehle aur bhi bahut se Rasool guzar chuke thay, uski Maa ek raast-baaz(righteous) aurat thi, aur woh dono khana khate thay, dekho hum kis tarah inke saamne haqeeqat ki nishaniyan wazeh karte hain, phir dekho yeh kidhar ulte phire jatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Maseeh ibn-e-marium siwa payghumbar honey kay aur kuch bhi nahi uss say pehlay bhi boht say payghumbar ho chukay hain unn ki walida aik raast baaz aurat thi dono maa betay khana khaya kertay thay aap dekhiye kay kiss tarah hum inn kay samney daleelen rakhtay hain phir ghor kijiye kay kiss tarah woh phiray jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मसीह इब्ने मरियम इसके सिवा कुछ नहीं के बस एक रसूल था, उसके पहले और भी बहुत से रसूल गुज़र चुके थे, उसकी माँ एक रस्त-बाज़ (नेक) औरत थी, और वो दोनों खाना खाते थे, देखो हम किस तरह इनके सामने हक़ीक़त की निशानियाँ दिखाते हैं, फिर देखो ये किधर उलटे फिर जाते हैं
عَرَبِيقُل أَتَعبُدونَ مِن دونِ اللَّهِ ما لا يَملِكُ لَكُم ضَرًّا وَلا نَفعًا ۚ وَاللَّهُ هُوَ السَّميعُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : क्या तुम अल्लाह के सिवा उसकी इबादत करते हो, जो तुम्हारे लिए न किसी हानि का मालिक है और न लाभ का? तथा अल्लाह ही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho, kya tum Allah ko chodh kar uski parastish karte ho jo na tumhare liye nuqsaan ka ikhtiyar rakhta hai na nafey ka? Halanke sabki sunney wala aur sabkuch jaanne wala to Allah hi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay kiya tum Allah kay siwa unn ki ibadat kertay ho jo na tumharay kiss nuksan kay maalik hain na kissi nafay kay Allah hi khoob sunnay aur poori tarah jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)इंसे कहो, क्या तुम अल्लाह को छोड़ कर उसकी तरफदारी करते हो जो ना तुम्हारे लिए नुक्सान का इख्तियार रखता है ना नफ़े का? हालंके सबकी सुनने वाला और सबको जानने वाला तो अल्लाह ही है
عَرَبِيقُل يا أَهلَ الكِتابِ لا تَغلوا في دينِكُم غَيرَ الحَقِّ وَلا تَتَّبِعوا أَهواءَ قَومٍ قَد ضَلّوا مِن قَبلُ وَأَضَلّوا كَثيرًا وَضَلّوا عَن سَواءِ السَّبيلِ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दो : ऐ अह्ले किताब! अपने धर्म में नाहक़ अतिशयोक्ति न करो और उन लोगों की इच्छाओं के पीछे न चलो, जो इससे पहले पथभ्रष्ट हुए और बहुतों को पथभ्रष्ट किया और सीधे मार्ग से भटक गए।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, aey ehle kitab! Apne deen mein na-haqq ghulu (go beyond bounds/ commit excess) na karo aur un logon ke taqelaat (inclinations/khwahishat) ki pairwi na karo jo tumse pehle khud gumraah huey aur bahuton ko gumrah kiya, aur “ sawa e sabeel (right path)” se bhatak gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye aey ehal-e-kitab! Apney deen mein na haq ghuloov aur ziyadti na kero aur unn logon ki nafsani khuwaishon perwi na kero jo pehlay say behak chukay hain aur bohton ko behka bhi chukay hain aur seedhi raah say hatt gaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, ऐ एहले किताब! अपने दीन में ना-हक़ ग़ुलू (सीमा से परे जाना/ज्यादती करना) ना करो और उन लोगों के तक़लात (झुकाव/ख्वाहिशात) की जोड़ी ना करो जो तुमसे पहले खुद गुमराह हुए और बहुतों को गुमराह किया, और "सवा ए सबील (सही रास्ता)" से भटक गए
عَرَبِيلُعِنَ الَّذينَ كَفَروا مِن بَني إِسرائيلَ عَلىٰ لِسانِ داوودَ وَعيسَى ابنِ مَريَمَ ۚ ذٰلِكَ بِما عَصَوا وَكانوا يَعتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)बनी इसराईल में से जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उनपर दाऊद तथा मरयम के बेटे ईसा की ज़बान पर ला'नत (धिक्कार) की गई। यह इस कारण कि उन्होंने अवज्ञा की तथा वे हद से आगे बढ़ते थे।
Roman Urdu (Maududi)Bani Israel mein se jin logon ne kufr ki raah ikhtiyar ki unpar Dawood aur Isa Ibn Mariyam ki zubaan se lanat ki gayi, kyunke woh sarkash ho gaye thay aur zyadatiyan karne lagey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Bani israeek kay kafiron per (hazrat) dawood (alh-e-salam) aur (hazrat) essa bin marium (alh-e-salam)ki zabani laanat ki gaee iss waja say kay woh na farmaniyan kertay thay aur hadd say aagay barh jatay thay
Devnagri Urdu (Maududi)बानी इसराइल में से जिन लोगों ने कुफ्र की राह इख्तियार की अनपर दाऊद और ईसा इब्न मरियम की जुबान से लानत की गई, क्योंकि वो सरकश हो गए थे और ज्यादतियां करने लगे थे
عَرَبِيكانوا لا يَتَناهَونَ عَن مُنكَرٍ فَعَلوهُ ۚ لَبِئسَ ما كانوا يَفعَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे एक-दूसरे को किसी बुराई से, जो उन्होंने की होती, रोकते न थे। निःसंदेह बहुत बुरा था, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne ek dusre ko burey afaal ke irteqab se roakna chodh diya tha, bura tarz e amal tha jo unhon ne ikhtiyar kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aapas mein aik doosray ko buray kaamon say jo woh kertay thay roktay na thay jo kuch bhi yeh kertay thay yaqeenan woh boht hi bura tha
Devnagri Urdu (Maududi)उन्होन ने एक दूसरे को बुरे अफाल के इरतेकाब से रोकना छोड़ दिया था, बुरा तर्ज ए अमल था जो unhon ne ikhtiyar kiya
عَرَبِيتَرىٰ كَثيرًا مِنهُم يَتَوَلَّونَ الَّذينَ كَفَروا ۚ لَبِئسَ ما قَدَّمَت لَهُم أَنفُسُهُم أَن سَخِطَ اللَّهُ عَلَيهِم وَفِي العَذابِ هُم خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप उनमें से बहुतेरे लोगों को देखेंगे कि वे उन लोगों से मित्रता रखते हैं, जिन्होंने कुफ़्र किया। निश्चय बुरा है जो उन्होंने अपने लिए आगे भेजा कि अल्लाह उनपर क्रुद्ध हो गया तथा यातना ही में वे हमेशा रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aaj tum unmein ba-kasrat aisey log dekhte ho jo (ehle iman ke muqable mein) kuffar ki himayat o rafaqat karte hain, yaqeenan bahut bura anjaam hai jiski tayyari unke nafson ne unke liye ki hai. Allah unpar gazab-naak ho gaya hai aur woh daimi azaab mein mubtila honay waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein say boht say logon ko aap dekhen gay kay woh kafiron say dostiyan kertay hain jo kuch enhon ney apney liye aagay bhej rakha hai woh boht bura hai kay Allah Taalaa inn say naraz hua aur woh hamesha jahannum mein rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)आज तुम उनमें ब-कसरत ऐसे लोग देखते हो जो (एहले ईमान के मुकाबले में) कुफ्फार की हिमायत ओ रफाकत करते हैं, यकीनन बहुत बुरा अंजाम है जिसकी तैयारी उनके नफ्सों ने उनके लिए की है। अल्लाह उन्पर गज़ब-नाक हो गया है और वो दैमी अज़ाब में मुब्तिला होने वाले हैं
عَرَبِيوَلَو كانوا يُؤمِنونَ بِاللَّهِ وَالنَّبِيِّ وَما أُنزِلَ إِلَيهِ مَا اتَّخَذوهُم أَولِياءَ وَلٰكِنَّ كَثيرًا مِنهُم فاسِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वे अल्लाह और नबी पर और उसपर ईमान रखते होते जो उसकी ओर उतारा गया है, तो उन्हें मित्र न बनाते, लेकिन उनमें से बहुत से अवज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Agar fil-waqayi yeh log Allah aur paigambar aur us cheez ke maanne waley hotay jo paigmbar par nazil hui thi to kabhi (ehle iman ke muqable mein) kafiron ko apna rafeeq na banate, magar inmein se to beshtar log khuda ki itaat se nikal chuke hain
Roman Urdu (Junagarhi)Agar enhen Allah Taalaa per aur nabi per aur jo nazil kiya gaya hai uss per eman hota to yeh kuffaar say dostiyan na kertay lekin inn mein kay aksar log faasiq hain
Devnagri Urdu (Maududi)अगर फिल-वाकई ये लोग अल्लाह और पैगम्बर और उस चीज के मन्ने वाले हो गए जो पैगम्बर पर नाज़िल हुई थी तो कभी (एहले ईमान के मुकाबल में) काफिरों को अपना रफीक ना बनते, मगर इनमें से तो बेहतर लोग खुदा की इताअत से निकल चुके हैं
🕮 Juz 7 begins here
عَرَبِي۞ لَتَجِدَنَّ أَشَدَّ النّاسِ عَداوَةً لِلَّذينَ آمَنُوا اليَهودَ وَالَّذينَ أَشرَكوا ۖ وَلَتَجِدَنَّ أَقرَبَهُم مَوَدَّةً لِلَّذينَ آمَنُوا الَّذينَ قالوا إِنّا نَصارىٰ ۚ ذٰلِكَ بِأَنَّ مِنهُم قِسّيسينَ وَرُهبانًا وَأَنَّهُم لا يَستَكبِرونَ
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) निश्चय आप उन लोगों के लिए जो ईमान लाए हैं, सब लोगों से अधिक सख़्त दुश्मनी रखने वाले यहूदियों को तथा उन लोगों को पाएँगे, जिन्होंने शिर्क किया। तथा निश्चय आप उन लोगों के लिए जो ईमान लाए हैं, उनमें से मित्रता में सबसे निकट उनको पाएँगे, जिन्होंने कहा निःसंदेह हम ईसाई हैं। यह इसलिए कि निःसंदेह उनमें विद्वान तथा पादरी (उपासक) हैं और इसलिए कि निःसंदेह वे अभिमान नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Tum ehle iman ki adawat (dushmani) mein sabse zyada sakht yahud aur mushrikeen ko paogey, aur iman laney walon ke liye dosti mein qareeb-tar un logon ko paogey jinhon ne kaha tha ke hum nasara (Christians) hain, is wajah se ke unmein ibadat-guzaar aalim aur tareek ud duniya fakeer (monks) paye jatey hain aur unmein guroor e nafs (arrogant) nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan aap eman walon ka sab say ziyada dushman yahudiyon aur mushrikon ko payen gay aur eman walon say sab say ziyada dosti kay qareeb aap yaqeenan unhen payen gay jo apney aap ko nasaara kehtay hain yeh iss liye kay inn mein ulama aur ibadat kay liye gosha nasheen afraad paye jatay hain aur iss waja say kay woh takabbur nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम एहले ईमान की अदावत (दुश्मनी) में सबसे ज्यादा सख्त यहूद और मुशरिकेन को पाओगे, और ईमान लाने वालों के लिए दोस्ती में करीब-तार उन लोगों को पाओगे जिन्हों ने काहा था के हम नसारा (ईसाइयों) हैं, इस वजह से कि उनमें इबादत-गुज़ार आलिम और तारिक उद दुनिया फकीर (भिक्षु) पाए जाते हैं और उनमें गुरुर ए नफ़्स (अभिमानी) नहीं है
عَرَبِيوَإِذا سَمِعوا ما أُنزِلَ إِلَى الرَّسولِ تَرىٰ أَعيُنَهُم تَفيضُ مِنَ الدَّمعِ مِمّا عَرَفوا مِنَ الحَقِّ ۖ يَقولونَ رَبَّنا آمَنّا فَاكتُبنا مَعَ الشّاهِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब वे उस (क़ुरआन) को सुनते हैं, जो रसूल की ओर उतारा गया है, तो आप देखते हैं कि उनकी आँखें आँसुओं से बह रही होती हैं, इस कारण कि उन्होंने सत्य को पहचान लिया। वे कहते हैं : ऐ हमारे पालनहार! हम ईमान ले आए। अतः हमें (सत्य) की गवाही देने वालों के साथ लिख ले।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh us kalaam ko sunte hain jo Rasool par utara hai to tum dekhte ho ke haqq shanasi(recognize truth) ke asar se unki aankhein aansuon (tears) se tarr ho jati hain, woh bol uthte hain ke “ parwardigar! Hum iman laye, hamara naam gawahi dene walon mein likh le”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab woh rasool ki taraf nazil kerda (kalaam) ko suntay hain to aap unn ki aankhen aansoo say behti hui dekhtay hain iss sabab say kay enhon ney haq pehchan liya woh kehtay hain kay aey humaray rab! Hum eman ley aaye pus tu hum ko bhi unn logon kay sath likh ley jo tasdeeq kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो हमें कलाम को सुनते हैं जो रसूल पर उतरते हैं तो तुम देखते हो के हक़ शनासी (सच्चाई को पहचानो) के असर से उनकी आंखें आंसुओं से छलनी हो जाती हैं, वो बोल उठते हैं के "परवरदिगार! हम ईमान लाए, हमारा नाम गवाही देने वालों में लिख ले"
عَرَبِيوَما لَنا لا نُؤمِنُ بِاللَّهِ وَما جاءَنا مِنَ الحَقِّ وَنَطمَعُ أَن يُدخِلَنا رَبُّنا مَعَ القَومِ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमें क्या है कि हम अल्लाह पर तथा उस सत्य पर ईमान न लाएँ, जो हमारे पास आया है? जबकि हम आशा रखते हैं कि हमारा पालनहार हमें सदाचारियों के साथ दाखिल कर लेगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh kehte hain ke “ aakhir kyun na hum Allah par iman layein aur jo haqq hamare paas aaya hai usey kyun na maan lein, jabke hum is baat ki khwahish rakhte hain ke hamara Rubb humein saleh logon mein shamil karey?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur humaray pass konsa uzur hai kay hum Allah Taalaa per aur jo haq hum ko phoncha hai uss per eman na layen aur hum iss baat ki umeed rakhtay hain kay humara rab hum ko nek logon ki rafaqat mein dakhil ker dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और वो कहते हैं के "आख़िर क्यों ना हम अल्लाह पर ईमान लायें और जो हक़ हमारे पास आया है उसे क्यों ना मान लें, जबके हम इस बात की ख्वाहिश रखते हैं के हमारा रब हमें साले लोगों में शामिल करें?”
عَرَبِيفَأَثابَهُمُ اللَّهُ بِما قالوا جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها ۚ وَذٰلِكَ جَزاءُ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो अल्लाह ने उनके यह कहने के बदले में उन्हें ऐसे बाग़ प्रदान किए, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, जिनमें वे सदैव रहने वाले हैं तथा यही सत्कर्मियों का बदला है।
Roman Urdu (Maududi)Unke is qaul ki wajah se Allah ne unko aisi jannatein ata ki jinke nichey nehrein behti hain aur woh unmein hamesha rahenge. Yeh jaza hai neik rawayya ikhtiyar karne walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Iss liye inn ko Allah Taalaa inn kay iss qol ki waja say aisay baagh dey ga jin kay neechay nehren jari hongi yeh inn mein hamesha hamesha rahen gay aur nek logon ka yehi badla hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनके इस क़ौल की वजह से अल्लाह ने उनको ऐसी जन्नतें अता की जिनके बारे में पता है कि वो हमेशा साथ रहेंगी। ये जजा है नीक रवैय्या इख्तियार करने वालों के लिए
عَرَبِيوَالَّذينَ كَفَروا وَكَذَّبوا بِآياتِنا أُولٰئِكَ أَصحابُ الجَحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने कुफ़्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वही लोग भड़कती आग वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jinhon ne hamari aayat ko maanne se inkar kiya aur unhein jhutlaya, to woh jahannum ke mustahiq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin logon ney kufur kiya aur humari aayaat ko jhutlatay rahey woh log dozakh walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जिन्हों ने हमारी आयतों को मन्ने से इंकार किया और उन्हें झुटलाया, तो वो जहन्नुम के मुस्तहिक़ हैं
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تُحَرِّموا طَيِّباتِ ما أَحَلَّ اللَّهُ لَكُم وَلا تَعتَدوا ۚ إِنَّ اللَّهَ لا يُحِبُّ المُعتَدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! उन स्वच्छ पवित्र चीज़ों को, जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल (वैध) की हैं, हराम (अवैध) न ठहराओ और सीमा से आगे न बढ़ो। निःसंदेह अल्लाह हद से आगे बढ़ने वालों से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, jo paak cheezein Allah ne tumhare liye halal ki hain unhein haram na karlo aur hadd se tajawuz na karo, Allah ko zyadati karne waley sakht napasand hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Allah Taalaa ney jo pakeezah cheezen tumharay wastay halal ki hain unn ko haram mat kero aur hadd say aagay mat niklo be-shak Allah Taalaa hadd say nikalney walon ko pasan nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जो पाक चीज़ अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल की हैं उन्हें हराम न करलो और हद से तजावुज़ न करो, अल्लाह को ज़्यादा करने वाले सख़्त नापसंद हैं
عَرَبِيوَكُلوا مِمّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ حَلالًا طَيِّبًا ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذي أَنتُم بِهِ مُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह ने तुम्हें जो कुछ दिया है, उसमें से हलाल, पवित्र (चीज़) खाओ और उस अल्लाह से डरो, जिसपर तुम ईमान रखते हो।
Roman Urdu (Maududi)Jo kuch halaal o tayyab rizq Allah ne tumko diya hai usey khao peo aur us khuda ki nafarmani se bachte raho jispar tum iman laye ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa ney jo cheezen tum ko di hain unn mein say halal marghoob cheezen khao aur Allah Taalaa say daro jiss per tum eman rakhtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)जो कुछ हलाल ओ तय्यब रिज़्क अल्लाह ने तुमको दिया है उसे खाओ पियो और उस खुदा की नफ़रमानी से बचते रहो जिसपर तुम ईमान लाए हो
عَرَبِيلا يُؤاخِذُكُمُ اللَّهُ بِاللَّغوِ في أَيمانِكُم وَلٰكِن يُؤاخِذُكُم بِما عَقَّدتُمُ الأَيمانَ ۖ فَكَفّارَتُهُ إِطعامُ عَشَرَةِ مَساكينَ مِن أَوسَطِ ما تُطعِمونَ أَهليكُم أَو كِسوَتُهُم أَو تَحريرُ رَقَبَةٍ ۖ فَمَن لَم يَجِد فَصِيامُ ثَلاثَةِ أَيّامٍ ۚ ذٰلِكَ كَفّارَةُ أَيمانِكُم إِذا حَلَفتُم ۚ وَاحفَظوا أَيمانَكُم ۚ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُم آياتِهِ لَعَلَّكُم تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह तुम्हें तुम्हारी व्यर्थ क़समों पर नहीं पकड़ता, परंतु तुम्हें उसपर पकड़ता है जो तुमने पक्के इरादे से क़समें खाई हैं। तो उसका प्रायश्चित दस निर्धनों को भोजन कराना है, औसत दर्जे का, जो तुम अपने घर वालों को खिलाते हो, अथवा उन्हें कपड़े पहनाना, अथवा एक दास मुक्त करना। फिर जो न पाए, तो तीन दिन के रोज़े रखना है। यह तुम्हारी क़समों का प्रायश्चित है, जब तुम क़सम खा लो तथा अपनी क़समों की रक्षा करो। इसी प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी आयतें (आदेश) खोलकर बयान करता है, ताकि तुम आभार व्यक्त करो।
Roman Urdu (Maududi)Tum log jo mohmal (utter vainly) kasamein kha lete ho unpar Allah giraft nahin karta, magar jo kasamein tum jaan boojh kar khate ho unpar woh tumse zaroor mawaqeza (take you to task) karega. (Aisi kasam toadne ka) kaffara yeh hai ke dus miskeeno ko woh awsat (average) darje ka khana khilao jo tum apne baal bacchon ko khilate ho, ya unhein kapde pehnao, ya ek gulaam azad karo, aur jo iski istitaat (capability) na rakhta ho woh teen din ke roze rakkhe. Yeh tumhari kasamon ka kaffara hai jabke tum kasam kha kar toad do. Apni kasamon ki hifazat kiya karo, is tarah Allah apne ehkaam tumhare liye wazeh karta hai shayad ke tum shukar ada karo
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa tumhari qasmon mein laghv qasam per tum say moaakhiza nahi farmata lekin moaakhiza uss per farmata hai kay tum jin qasmon ko mazboot ker do. Iss ka kaffaara das mohtajon kko khana dena hai osat darjay ka jo apney ghar walon ko khilatay ho ya unn ko kapra dena ya aik ghulam ya londi aazad kerna hai aur jiss ko maqdoor na ho to teen din kay rozay hain yeh tumhari qasmon ka kaffaara hai jabkay tum qasam kha lo aur apni qasmon ka khayal rakho1 issi tarah Allah Taalaa tumharay wastay apney ehkaam biyan farmata hai takay tum shukar kero
Devnagri Urdu (Maududi)तुम लोग जो मोहमल (व्यर्थ रूप से) कसमें खा लेते हो उन्पर अल्लाह गिरफ़्तार नहीं करता, मगर जो कसमें तुम जान बूज़ कर खाते हो उन्पर वो तुमसे ज़रूर मवाक़ेज़ा करेगा। (ऐसी कसम तोड़ने का) कफारा ये है के दस मिस्किनो को वो औसत (औसत) दर्जे का खाना खिलाओ जो तुम अपने बाल बच्चों को खिलाते हो, या उन्हें कपडे पहनो, या एक गुलाम आज़ाद करो, और जो इसकी क्षमता (क्षमता) ना रखता हो वो तीन दिन के रोज़ रक्खे. ये तुम्हारी कसमों का कफ़्फ़ारा है जबके तुम कसम खा कर तोड़ दो। अपनी कसमों की हिफ़ाज़त किया करो, इस तरह अल्लाह अपने एहकाम तुम्हारे लिए वाज़ेह करता है शायद तुम शुक्र अदा करो
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِنَّمَا الخَمرُ وَالمَيسِرُ وَالأَنصابُ وَالأَزلامُ رِجسٌ مِن عَمَلِ الشَّيطانِ فَاجتَنِبوهُ لَعَلَّكُم تُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! बात यही है कि शराब, जुआ, देवथान और फ़ाल निकालने के तीर सर्वथा गंदे और शैतानी कार्य हैं। अतः इनसे दूर रहो, ताकि तुम सफल हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho , yeh sharab(intoxication) aur juwa (gambling) aur yeh aastaane[(dedication of) stones] aur paasein [(divination by) arrows], yeh sab gandey shaytaani kaam hain, insey parheiz karo, umeed hain ke tumhein falaah naseeb hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Baat yehi hai kay sharab aur juaa aur thaan aur faal nikalney ka paansay kay teer yeh sab gandi baaten shetani kaam hain inn say bilkul alag raho takay tum falah yaab ho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, ये शराब (नशा) और जुवा (जुआ) और ये आस्ताने [(समर्पण) पत्थर] और पासें [(तीरों द्वारा भविष्यवाणी], ये सब गंदे शैतानी काम हैं, इनसे परहेज करो, उम्मीद हैं के तुम्हें फलाह नसीब होगी)
عَرَبِيإِنَّما يُريدُ الشَّيطانُ أَن يوقِعَ بَينَكُمُ العَداوَةَ وَالبَغضاءَ فِي الخَمرِ وَالمَيسِرِ وَيَصُدَّكُم عَن ذِكرِ اللَّهِ وَعَنِ الصَّلاةِ ۖ فَهَل أَنتُم مُنتَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)शैतान तो यही चाहता है कि शराब तथा जुए के द्वारा तुम्हारे बीच बैर तथा द्वेष डाल दे और तुम्हें अल्लाह के स्मरण तथा नमाज़ से रोक दे, तो क्या तुम रुकने वाले हो?
Roman Urdu (Maududi)Shaytan to yeh chahta hai ke sharab aur juwey ke zariye se tumhare darmiyan adawat aur bugz (enmity and hatred) daal de aur tumhein khuda ki yaad se aur namaz se roak de, phir kya tum in cheezon se baaz rahogey
Roman Urdu (Junagarhi)Shetan to yun chahata hai kay sharab aur juaey kay zariye say tumharay aapas mein adawat aur bughz waqey kera dey aur Allah Taalaa ki yaad say aur namaz say tum ko baaz rakhay so abb bhi baaz aajao
Devnagri Urdu (Maududi)शैतान तो ये चाहता है के शराब और जुवे के ज़रिये से तुम्हारे दरमियान अदावत और बुग़्ज़ (दुश्मनी और नफरत) डाल दे और तुम्हें खुदा की याद से और नमाज़ से रोक दे, फिर क्या तुम इन चीज़ों से बाज़ रहोगे
عَرَبِيوَأَطيعُوا اللَّهَ وَأَطيعُوا الرَّسولَ وَاحذَروا ۚ فَإِن تَوَلَّيتُم فَاعلَموا أَنَّما عَلىٰ رَسولِنَا البَلاغُ المُبينُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो और (अवज्ञा से) सावधान रहो। फिर यदि तुम विमुख हुए, तो जान लो कि हमारे रसूल पर केवल स्पष्ट रूप से (संदेश) पहुँचा देना है।
Roman Urdu (Maududi)Allah aur uske Rasool ki baat maano aur baaz aa jao, lekin agar tumne hukum adauli ki (if you turn back) to jaan lo ke hamare Rasool par bas saaf saaf hukum panhuncha dene ki zimmedari thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum Allah Taalaa ki ita’at kertay raho aur rasool ki ita’at kertay raho aur ehtiyaat rakho. Agar aeyraaz kero gay to yeh jaan rakho kay humaray rasool kay zimmay sirf saaf saaf phoncha dena hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह और उसके रसूल की बात मानो और बाज़ आ जाओ, लेकिन अगर तुमने हुकुम अदाउली की (अगर तुम पीछे मुड़ते हो) तो जान लो के हमारे रसूल पर बस साफ साफ हुकुम पंहुंचा देने की जिम्मेदारी थी
عَرَبِيلَيسَ عَلَى الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ جُناحٌ فيما طَعِموا إِذا مَا اتَّقَوا وَآمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ ثُمَّ اتَّقَوا وَآمَنوا ثُمَّ اتَّقَوا وَأَحسَنوا ۗ وَاللَّهُ يُحِبُّ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों पर जो ईमान लाए तथा उन्होंने अच्छे कर्म किए, उसमें कोई पाप नहीं जो वे खा चुके, जबकि वे अल्लाह से डरे तथा ईमान लाए और सत्कर्म किए, फिर वे डरते रहे और ईमान पर स्थिर रहे, फिर वे अल्लाह से डरे और उन्होंने अच्छे कार्य किए और अल्लाह अच्छे कार्य करने वालों से प्रेम करता है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log iman le aaye aur neik amal karne lagey unhon ne pehle jo kuch khaya piya tha uspar koi giraft na hogi, bashart-e-ke woh aainda un cheezon se bachey rahein jo haraam ki gayi hain aur iman par sabit qadam rahein aur acchey kaam karein. Phir jis jis cheez se roka jaye ussey rukein aur jo farmaan e ilahi ho usey maanein, phir khuda tarsi ke saath neik rawayya rakkhein, Allah neik kirdar logon ko pasand karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aisay logon per jo kay eman rakhtay hon aur nek kaam kertay hon iss cheez mein koi gunah nahi jiss ko woh khatay peetay hon jabkay woh log taqwa rakhtay hon aur eman rakhtay hon aur nek kaam kertay hon phir perhezgari kertay hon aur khoob nek amal kertay hon Allah aisay neko kaaron say mohabbat rakhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ईमान ले आए और नेक अमल करने लगे उन्होन ने पहले जो कुछ खाया पिया था उसपर कोई गिरफ़्तार न होगी, बशारत-ए-के वो आइंदा उन चीज़ों से बचे रहे जो हराम की गई हैं और ईमान पर साबित क़दम रखें और अच्छे काम करें। फिर जिस चीज़ से रोका जाए उसे रुकें और जो फरमान ए इलाही हो उसे माने, फिर खुदा तरसी के साथ नेक रवैय्या रक्खें, अल्लाह नेक किरदार लोगों को पसंद करता है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لَيَبلُوَنَّكُمُ اللَّهُ بِشَيءٍ مِنَ الصَّيدِ تَنالُهُ أَيديكُم وَرِماحُكُم لِيَعلَمَ اللَّهُ مَن يَخافُهُ بِالغَيبِ ۚ فَمَنِ اعتَدىٰ بَعدَ ذٰلِكَ فَلَهُ عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! निश्चय अल्लाह शिकार में से किसी चीज़ के साथ तुम्हारी अवश्य परीक्षा लेगा, जिसपर तुम्हारे हाथ तथा भाले पहुँचते होंगे, ताकि अल्लाह जान ले कि कौन उससे बिन देखे डरता है। फिर जो उसके पश्चात सीमा से बढ़े, तो उसके लिए दर्दनाक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, Allah tumhein us shikar ke zariye se sakht aazmaish mein daalega jo bilkul tumhare haathon aur neizon(lances) ki zadh mein hoga, yeh dekhne ke liye ke tum mein se kaun ussey gayibana darta hai, phir jisne is tambeeh (warning) ke baad Allah ki muqarrar ki hui hadh se tajawuz kiya uske liye dardnaak saza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Allah Taalaa qadray shikar say tumhara imtehan keray ga jin tak tumharay haath aur tumharay naizay phonch saken gay takay Allah Taalaa maloom ker ley kay kaun shaks iss say binn dekhay darta hai so jo shaks iss kay baad hadd say niklay ga uss kay wastay dard naak saza hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह तुम्हें शिकार के ज़रिये से सख्त आजमाइश में डालेगा जो बिल्कुल तुम्हारे हाथ और नेज़ों (लांस) की ज़द में होगा, ये देखने के लिए कि तुम में से कौन उसे गायबाना डरता है, फिर जिसने तम्बीह (चेतावनी) के बाद अल्लाह की मुकर्रर की हुई हद से तजावुज़ किया उसके लिए दर्दनाक सज़ा है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَقتُلُوا الصَّيدَ وَأَنتُم حُرُمٌ ۚ وَمَن قَتَلَهُ مِنكُم مُتَعَمِّدًا فَجَزاءٌ مِثلُ ما قَتَلَ مِنَ النَّعَمِ يَحكُمُ بِهِ ذَوا عَدلٍ مِنكُم هَديًا بالِغَ الكَعبَةِ أَو كَفّارَةٌ طَعامُ مَساكينَ أَو عَدلُ ذٰلِكَ صِيامًا لِيَذوقَ وَبالَ أَمرِهِ ۗ عَفَا اللَّهُ عَمّا سَلَفَ ۚ وَمَن عادَ فَيَنتَقِمُ اللَّهُ مِنهُ ۗ وَاللَّهُ عَزيزٌ ذُو انتِقامٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! शिकार को न मारो, जबकि तुम एहराम की स्थिति में हो। तथा तुममें से जो उसे जान-बूझकर मारे, तो चौपायों में से उसी जैसा बदला है जो उसने मारा है, जिसका निर्णय तुममें से दो न्यायप्रिय व्यक्ति करेंगे, जो क़ुर्बानी के रूप में काबा पहुँचने वाली है, या प्रायश्चित के रूप में निर्धनों को खाना खिलाना है, या उसके बराबर रोज़े रखने हैं, ताकि वह अपने किए का कष्ट चखे। अल्लाह ने क्षमा कर दिया जो कुछ हो चुका और जो फिर करे, तो अल्लाह उससे बदला लेगा और अल्लाह सबपर प्रभुत्वशाली, बदला लेने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho! Ehram ki halat mein shikar na maaro, aur agar tum mein se koi jaan boojh kar aisa kar guzre to jo jaanwar usne maara ho usi ke hum pala (similar) ek jaanwar usi maweshiyon mein se nazar dena hoga, jiska faisla tum mein se do aadil (just) aadmi karenge, aur yeh nazarana Kaaba pahunchaya jayega, ya nahin to is gunaah ke kaffare mein chandh miskeeno ko khana khilana hoga, ya iske ba-qadr roze rakhne honge, taa-ke woh apne kiye ka maza chakkhey, pehle jo kuch ho chukka usey Allah ne maaf kardiya, lekin ab agar kisi ne is harkat ka iaada kiya to ussey Allah badla lega, Allah sab par gaalib hai aur badla lene ki taaqat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! (wehshi) shikar ko qatal mat kero jabkay tum halat-e-ehraam mein ho. Aur jo shaks tum mein say iss ko jaan boojh ker qatal keray ga to uss per fidya wajib hoga jo kay masawi hoga uss janwar kay jiss ko iss ney qatal kiya hai jiss ka faisla tum mein say do moatbar shaks ker den khuwa woh fidya khaas chopayon mein say ho jo niaz kay tor per kaaba tak phonchaya jaye aur khuwa kaffaara masakeen ko dey diya jaye aur khuwa iss kay barabar rozay rakh liye jayen takay apney kiye ki shamat ka maza chakhay Allah Taalaa ney guzishat ko moaf ker diya aur jo shaks phir aisi hi herkat keray ga to Allah Taalaa intiqam ley ga aur Allah zabardast hai intiqam lenay wala
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ logon jo iman laye ho! एहराम की हालत में शिकार न मारो, और अगर तुम में से कोई जान बूझ कर ऐसा कर गुजरे तो जो जानवर उसने मारा हो उसी के हम पाला (इसी तरह) एक जानवर उसी मछली में से नजर देना होगा, जिसका फैसला तुम में से दो आदिल (सिर्फ) आदमी करेंगे, और ये नजराना काबा पाहुंचाया जाएगा, हां नहीं तो इस गुनाह के कफरे में चांद मिसकीनो को खाना खिलाना होगा, हां इसके ब-काद्र रोजे रखने होंगे, ता-के वो अपने किए का मजा चक्खे, पहले जो कुछ हो चुका उसे अल्लाह ने माफ कर दिया, लेकिन अब अगर किसी ने इस हरकत का इरादा किया तो उसे अल्लाह बदला लेगा, अल्लाह सब पर गालिब है और बदला लेने की ताक़त रखता है
عَرَبِيأُحِلَّ لَكُم صَيدُ البَحرِ وَطَعامُهُ مَتاعًا لَكُم وَلِلسَّيّارَةِ ۖ وَحُرِّمَ عَلَيكُم صَيدُ البَرِّ ما دُمتُم حُرُمًا ۗ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذي إِلَيهِ تُحشَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम्हारे लिए समुद्र (जल) का शिकार और उसका खाना हलाल कर दिया गया, तुम्हारे तथा यात्रियों के लाभ के लिए, तथा तुमपर भूमि का शिकार हराम कर दिया गया है जब तक तुम एहराम की स्थिति में रहो, और अल्लाह (की अवज्ञा) से डरो, जिसकी ओर तुम एकत्र किए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Tumhare liye samandar ka shikar aur uska khana halaal kardiya gaya, jahan tum thehro wahan bhi usey kha sakte ho aur kafilay(travellers) ke liye zaad-e-raah bhi bana sakte ho. Albatta khushki(land) ka shikar jab tak tum ehram ki halat mein ho tumpar haraam kiya gaya hai. Pas bacho us khuda ki nafarmani se jiski peshi mein tum sabko gher kar haazir kiya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Tumharay liye dariya ka shikar pakrna aur iss ka khana halal kiya gaya hai. Tumharay faeeday kay wastay aur musafiron kay wastay aur khushki ka shikar pakarna tumharay liye haram kiya gaya hai jab tak tum halat-e-ehraam mein raho aur Allah Taalaa say daro jiss kay pass jama kiye jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारे लिए समंदर का शिकार और उसका खाना हलाल कर दिया गया, जहां तुम ठहरो वहां भी उसे खा सकते हो और काफ़िले (यात्रियों) के लिए ज़ाद-ए-राह भी बना सकते हो। अलबत्ता खुश्की (जमीन) का शिकार जब तक तुम एहराम की हालत में हो तुम पर हराम किया गया है। पास बचाओ हमें खुदा की नफरमानी से जिसकी पेशी में तुम सबको घेर कर हाज़िर किया जाएगा
عَرَبِي۞ جَعَلَ اللَّهُ الكَعبَةَ البَيتَ الحَرامَ قِيامًا لِلنّاسِ وَالشَّهرَ الحَرامَ وَالهَديَ وَالقَلائِدَ ۚ ذٰلِكَ لِتَعلَموا أَنَّ اللَّهَ يَعلَمُ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ وَأَنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने सम्मानित घर काबा को लोगों के लिए स्थापना का साधन बनाया है तथा सम्मानित महीनों और (हज्ज की) क़ुर्बानी के जानवरों तथा गर्दन में पट्टे लगे हुए जानवरों को। यह इसलिए कि तुम जान लो कि निःसंदेह अल्लाह जानता है, जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, तथा यह कि निःसंदेह अल्लाह प्रत्येक वस्तु को ख़ूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne makaan e mohtaram, Kaaba ko logon ke liye (ijtimayi zindagi ke) qayam ka zariya banaya aur maah e haraam aur qurbani ke jaanwaron aur qaladon[garlands (by which they are identified)] ko bhi (is kaam mein muawin bana diya) taa-ke tumhein maloom ho jaye ke Allah aasmaano aur zameen ke sab haalaat se bakhabar hai aur usey har cheez ka ilam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah ney kaaba ko jo kay adab ka makan hai logon kay qaeem rehney ka sabab qarar dey diya aur izzat walay maheeney ko bhi aur haram mein qurbani honey walay janwar ko bhi aur unn janwaron ko bhi jin kay galay mein pattay hon yeh iss liye takay tum iss baat ka yaqeen ker lo kay be-shak Allah tamam aasmanon aur zamin kay andar ki cheezon ka ilm rakhta hai aur be-shak Allah sab cheezon ko khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने मकान ए मोहतरम, काबा को लोगों के लिए (इज्तिमय जिंदगी के) कयाम का जरिया बनाया और माह ए हराम और कुर्बानी के जंवरों और कलादोन[मालाएं (जिससे) वे पहचाने जाते हैं)] को भी (इस काम में मुआविन बना दिया) ता-के तुम्हें मालूम हो जाए के अल्लाह आसमान और ज़मीन के सब हालात से बेख़बर हैं और उसे हर चीज़ का इलम है
عَرَبِياعلَموا أَنَّ اللَّهَ شَديدُ العِقابِ وَأَنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जान लो! निःसंदेह अल्लाह बहुत कठोर दंड वाला है और निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Khabardar ho jao!Allah saza dene mein bhi sakht hai aur iske saath bahut darguzar aur reham bhi karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum yaqeen jano kay Allah Taalaa saza bhi sakht denay wala hai aur Allah Taalaa bari maghfirat aur bari rehmat wala bhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)ख़बरदार हो जाओ!अल्लाह सज़ा देने में भी शामिल है और इसके साथ बहुत दरगुज़ार और रहम भी करने वाला है
عَرَبِيما عَلَى الرَّسولِ إِلَّا البَلاغُ ۗ وَاللَّهُ يَعلَمُ ما تُبدونَ وَما تَكتُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)रसूल पर (संदेश) पहुँचा देने के सिवा कुछ नहीं और अल्लाह जानता है जो तुम प्रकट करते हो और जो छिपाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Rasool par to sirf paigam pahuncha dene ki zimmedari hai, aagey tumhare khule aur chupe sab halaat ka jaanne wala Allah hai
Roman Urdu (Junagarhi)Rasool kay zimmay to sirf phonchana hai. Aur Allah Taalaa sab janta hai jo kuch tum zahir kertay ho aur jo kuch tum posheedah rakhtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)रसूल पर तो सिर्फ पैग़ाम पाहुंचा देने की ज़िम्मेदारी है, आगे तुम्हारे खुले और छुपे सब हालात का जाने वाला अल्लाह है
عَرَبِيقُل لا يَستَوِي الخَبيثُ وَالطَّيِّبُ وَلَو أَعجَبَكَ كَثرَةُ الخَبيثِ ۚ فَاتَّقُوا اللَّهَ يا أُولِي الأَلبابِ لَعَلَّكُم تُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दो कि अपवित्र (बुरी चीज़) तथा पवित्र (अच्छी चीज़) समान नहीं, चाहे अपवित्र (बुरी चीज़) की बहुतायत तुम्हें भली लगे। तो ऐ बुद्धि वालो! अल्लाह से डरो, ताकि तुम सफल हो जाओ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey paigambar!) insey kehdo ke paak aur napaak bahar haal yaksan nahin hain, khwa napaak ki bohtaat (abundance) tumhein kitni hi farifta (pleased) karne wali ho. Pas aey logon jo aqal rakhte ho! Allah ki nafarmani se bachte raho, umeed hai ke tumhein falaah naseeb hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Aap farma dijiye kay na pak aur pak barabar nahi go aap ko na pak ki kasrat bhali lagti ho Allah Taalaa say dartay raho aey aqal mando! Takay tum kaamyaab ho
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ पैगम्बर!) इनसे कहदो के पाक और नापाक बहार हाल यकसन नहीं हैं, ख्वा नापाक की बोहतत (बहुतायत) तुम्हें कितनी ही खुशी (प्रसन्नता) करने वाली हो। पास ऐ लोगन जो अक़ल रखते हो! अल्लाह की नफरमानी से बचते रहो, उम्मीद है के तुम्हें फलाह नसीब होगी
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَسأَلوا عَن أَشياءَ إِن تُبدَ لَكُم تَسُؤكُم وَإِن تَسأَلوا عَنها حينَ يُنَزَّلُ القُرآنُ تُبدَ لَكُم عَفَا اللَّهُ عَنها ۗ وَاللَّهُ غَفورٌ حَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! उन चीज़ों के विषय में प्रश्न न करो, जो यदि तुम्हारे लिए प्रकट कर दी जाएँ, तो तुम्हें बुरी लगें, तथा यदि तुम उनके विषय में उस समय प्रश्न करोगे, जब क़ुरआन उतारा जा रहा है, तो वे तुम्हारे लिए प्रकट कर दी जाएँगी। अल्लाह ने उन्हें क्षमा कर दिया और अल्लाह बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत सहनशील है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, aisi baatein na pucha karo jo tumpar zaahir kardi jayein to tumhein nagawaar hon, lekin agar tum unhein aise waqt puchoge jab ke Quran nazil ho raha ho to woh tumpar khol di jayengi, ab tak jo kuch tumne kiya usey Allah ne maaf kardiya, woh darguzar karne wala aur burdbaar(All-Forbearing) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo!aisi baaten mat poocho kay kay agar tum per zahir ker di jayen to tumhen na gawar ho aur agar tum zamaanaay-e-nuzool-e-quran mein inn baaton ko poocho gay to tum per zahir ker di jayen gi sawalaat-e-guzishta Allah ney moaf ker diye aur Allah bari maghfirat wala bara hilm wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ऐसी बातें ना पूछो करो जो तुमपर जाहिर कर दी जाए तो तुम्हें नगावार हो, लेकिन अगर तुम उन्हें ऐसे वक्त पूछोगे जब के कुरान नाजिल हो रहा हो तो वो तुमपर खोल दी जाएगी, अब तक जो तुमने किया उसे अल्लाह ने माफ कर दिया, वो दरगुज़ार करने वाला और बर्दबार (सर्व सहनशील) है
عَرَبِيقَد سَأَلَها قَومٌ مِن قَبلِكُم ثُمَّ أَصبَحوا بِها كافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुमसे पहले कुछ लोगों ने ऐसी ही बातों के बारे में प्रश्न किया, फिर वे इसके कारण काफ़िर हो गए।
Roman Urdu (Maududi)Tumse pehle ek giroh ne isi qism ke sawalaat kiye thay, phir woh log inhi baaton ki wajah se kufr mein mubtala ho gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aisi baaten tum say pehlay aur logon ney bhi poochi thin phir inn baaton kay munkir hogaye
Devnagri Urdu (Maududi)तुमसे पहले एक गिरोह ने इसी क़िस्म के सवाल किए थे, फिर वो लोग इन्हीं बातों की वजह से कुफ़्र में मुबतला हो गए
عَرَبِيما جَعَلَ اللَّهُ مِن بَحيرَةٍ وَلا سائِبَةٍ وَلا وَصيلَةٍ وَلا حامٍ ۙ وَلٰكِنَّ الَّذينَ كَفَروا يَفتَرونَ عَلَى اللَّهِ الكَذِبَ ۖ وَأَكثَرُهُم لا يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने कोई बह़ीरा, साइबा, वसीला और ह़ाम नियुक्त नहीं किया। परंतु जिन लोगों ने कुफ़्र किया वे अल्लाह पर झूठ बाँधते हैं और उनमें से अधिकतर नहीं समझते।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne koi Bahirah (cattle devoted to idols) muqarrar kiya hai na Saiba(a she-camel let loose for free pasture for their false gods, e.g. idols, etc) aur na wasilah (a she-camel set free for idols because it has given birth to a she-camel at its first delivery) aur na Ham (a stallion-camel freed from work for their idols, after it had finished a number of copulations assigned for it) magar yeh kafir Allah par jhooti tohmat lagate hain aur inmein se aksar be-aqal hain (kahan aisey wahamiyat ko maan rahey hain)
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney na bahiyyra ko mashroo kiya hai aur na saaeeba ko na waseela ko aur na haam ko lekin jo log kafir hain woh Allah Taalaa per jhoot lagatay hain aur kasay kafir aqal nahi rakhtay
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने कोई बहिराह (मूर्तियों को समर्पित मवेशी) मुकर्रर किया है ना साइबा (एक ऊंटनी को अपने झूठे देवताओं, जैसे मूर्तियों, आदि के लिए मुक्त चरागाह के लिए खुला छोड़ दिया जाता है) और ना वसीला (एक ऊंटनी को मूर्तियों के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया जाता है क्योंकि उसने अपनी पहली डिलीवरी में एक मादा ऊंट को जन्म दिया है) और ना हाम (एक ऊंटनी-ऊंटनी को अपनी मूर्तियों के लिए काम से मुक्त कर दिया जाता है, जब वह काम पूरा कर लेती है। इसके लिए निर्धारित युग्मों की संख्या) मगर ये काफिर अल्लाह पर झूठी तोहमत लगाते हैं और इनमें से अक्सर बे-अकाल हैं (कहां ऐसे वहामियत को मान रहे हैं)
عَرَبِيوَإِذا قيلَ لَهُم تَعالَوا إِلىٰ ما أَنزَلَ اللَّهُ وَإِلَى الرَّسولِ قالوا حَسبُنا ما وَجَدنا عَلَيهِ آباءَنا ۚ أَوَلَو كانَ آباؤُهُم لا يَعلَمونَ شَيئًا وَلا يَهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनसे कहा जाता है : आओ उसकी ओर जो अल्लाह ने उतारा है और रसूल की ओर, तो कहते हैं : हमें वही काफ़ी है, जिसपर हमने अपने बाप-दादा को पाया है। क्या अगरचे उनके बाप-दादा कुछ भी न जानते हों और न मार्गदर्शन पाते हों।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab inse kaha jata hai ke aao us kanoon ki taraf jo Allah ne nazil kiya hai aur aao paigambar ki taraf, to woh jawab dete hain ke hamare liye to bas wahi tareeqa kaafi hai jispar humne apne baap dada ko paya hai. Kya yeh baap dada hi ki taqleed kiye chale jayenge khwa woh kuch na jaante hon aur saheeh raaste ki unhein khabar hi na ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab inn say kaha jata hai kay Allah Taalaa ney jo ehkaam nazil farmay hain unn ki taraf aur rasool ki taraf rujoo kero to kehtay hain hum ko wohi kafi hai jiss per hum ney apney baron ko paya kiya agar cheh inn kay baray na kuch samajh rakhtay hon aur na hidayat rakhtay hon
Devnagri Urdu (Maududi)और जब इनसे कहा जाता है के आओ उस कानून की तरफ जो अल्लाह ने नाज़िल किया है और आओ पैगम्बर की तरफ, तो वाह जवाब देते हैं हमारे लिए तो बस वही तरीक़ा काफ़ी है जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है। क्या ये बाप दादा ही हैं कि तक्लीद किए चले जाएंगे ख्वा वो कुछ ना जानते हों और सही रास्ते की उनको खबर ही ना हो
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا عَلَيكُم أَنفُسَكُم ۖ لا يَضُرُّكُم مَن ضَلَّ إِذَا اهتَدَيتُم ۚ إِلَى اللَّهِ مَرجِعُكُم جَميعًا فَيُنَبِّئُكُم بِما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! तुमपर अपनी चिंता अनिवार्य है। तुम्हें वह व्यक्ति हानि नहीं पहुँचाएगा, जो गुमराह हो गया, जब तुम मार्गदर्शन पा चुके। अल्लाह ही की ओर तुम सबको लौटकर जाना है। फिर वह तुम्हें बताएगा, जो कुछ तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, apni fikr karo, kisi dusre ki gumraahi se tumhara kuch nahin bigadta agar tum khud raah e raast par ho, Allah ki taraf tum sab ko palat kar jana hai, phir woh tumhein bata dega ke tum kya karte rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Apni fiker kero jab tum raah-e-raast per chal rahey ho to jo shaks gumrah rahey uss say tumahara koi nuksan nahi. Allah hi kay pass tum sab ko jana hai phir woh tum sab ko batla dey ga jo kuch tum sab kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपनी फिक्र करो, किसी दूसरे की गुमराही से तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ता अगर तुम खुद राह ए रास्ते पर हो, अल्लाह की तरफ़ तुम सबको पलट कर जाना है, फिर वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या करते रहेंगे हो
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا شَهادَةُ بَينِكُم إِذا حَضَرَ أَحَدَكُمُ المَوتُ حينَ الوَصِيَّةِ اثنانِ ذَوا عَدلٍ مِنكُم أَو آخَرانِ مِن غَيرِكُم إِن أَنتُم ضَرَبتُم فِي الأَرضِ فَأَصابَتكُم مُصيبَةُ المَوتِ ۚ تَحبِسونَهُما مِن بَعدِ الصَّلاةِ فَيُقسِمانِ بِاللَّهِ إِنِ ارتَبتُم لا نَشتَري بِهِ ثَمَنًا وَلَو كانَ ذا قُربىٰ ۙ وَلا نَكتُمُ شَهادَةَ اللَّهِ إِنّا إِذًا لَمِنَ الآثِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! जब तुममें से किसी की मृत्यु आ पहुँचे, तो वसिय्यत के समय तुम्हारे बीच गवाही (के लिए) तुममें से दो न्यायप्रिय व्यक्ति हों या तुम्हारे ग़ैरों में से दूसरे दो व्यक्ति हों, यदि तुम धरती में यात्रा कर रहे हो, फिर तुम्हें मरण की आपदा आ पहुँचे। तुम उन दोनों को नमाज़ के बाद रोक लोगे, यदि तुम्हें (उनपर) संदेह हो। फिर वे दोनों अल्लाह की क़सम खाएँगे कि हम उसके साथ कोई मूल्य नहीं लेंगे, यद्यपि वह निकट का संबंधी हो और न हम अल्लाह की गवाही छिपाएँगे, निःसंदेह हम उस समय निश्चय पापियों में से होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, jab tum mein se kisi ki maut ka waqt aa jaye aur woh wasiyat kar raha ho to uske liye shahadat ka nisab yeh hai ke tumhari jamaat mein se do (two) sahib-e-adal aadmi gawah banaye jayein, ya agar tum safar ki halat mein ho aur wahan maut ki museebat pesh aa jaye to gair muslimon hi mein se do gawah le liye jaye. Phir agar koi shakk padh jaye to namaz ke baad dono gawahon ko (masjid mein) roak liya jaye aur woh khuda ki kasam kha kar kahein ke “hum kisi zaati faiyde ke evaz shahadat bechne waley nahin hain, aur khwa koi hamara rishtedaar hi kyun na ho ( hum uski riayat karne waley nahin) aur na khuda waste ki gawahi ko hum chupane waley hain, agar humne aisa kiya to gunaah-gaaron mein shumar hongey”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tumharay aapas mein do shaks ka gawah hona munasib hai jabkay tum mein say kissi ko maut aaney lagay aur waseeat kerney ka waqt ho woh do shaks aisay hon kay deen daar hon khuwa tum mein say hon ya ghair logon mein say do shaks hon agar tum kahin safar mein gaye ho aur tumhen maut aajaye agar tum ko shuba hoto inn dono ko baad namaz rok lo phir dono Allah ki qasmen khayen kay hum iss qasam kay ewaz koi nafa nahi lena chahatayagar cheh koi qarabat daar bhi ho aur Allah Taalaa ki baat ko hum posheedah keren gay hum iss halat mein sakht gunehgar hongay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम में किसी की मौत का वक़्त आ जाए और वो वसीयत कर रहा हो तो उसके लिए शहादत का निसाब ये है के तुम्हारी जमात में से दो (दो) साहिब-ए-अदल आदमी गवाह बन जाएं, अगर तुम सफर की हालत में हो और वहां मौत की मुसीबत पेश आ जाए तो गैर मुस्लिम ही में से दो गवाह ले लिए जाए। फिर अगर कोई शक्क पढ़ जाए तो नमाज के बाद दोनों गवाहों को (मस्जिद में) रोक लिया जाए और वो खुदा की कसम खा कर कहे के "हम किसी जाति फैसले के बदले शहादत बेचने वाले नहीं हैं, और ख्वा कोई हमारा रिश्तेदार ही क्यों ना हो (हम उसकी रियात" करने वाले नहीं) और ना खुदा बर्बादी की गवाही को हम छुपाने वाले हैं, अगर हमने ऐसा किया तो गुनाह-गैरों में शामिल होंगे”
عَرَبِيفَإِن عُثِرَ عَلىٰ أَنَّهُمَا استَحَقّا إِثمًا فَآخَرانِ يَقومانِ مَقامَهُما مِنَ الَّذينَ استَحَقَّ عَلَيهِمُ الأَولَيانِ فَيُقسِمانِ بِاللَّهِ لَشَهادَتُنا أَحَقُّ مِن شَهادَتِهِما وَمَا اعتَدَينا إِنّا إِذًا لَمِنَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि पता चले कि निःसंदेह वे दोनों (गवाह) किसी पाप के पात्र हुए हैं, तो उन दोनों के स्थान पर, दो अन्य गवाह खड़े हों, उनमें से जिनका हक़ दबाया गया है, जो (मरे हुए व्यक्ति के) अधिक निकट हों। फिर वे दोनों अल्लाह की क़समें खाएँ कि हमारी गवाही उन दोनों की गवाही से अधिक सच्ची है और हमने कोई ज़्यादती नहीं की। निःसंदेह हम उस समय निश्चय अत्याचारियों में से होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Lekin agar pata chal jaye ke in dono ne apne aap ko gunaah mein mubtila kiya hai to phir inki jagah do aur shaks jo inki ba-nisbat shahadat dene ke liye ehal-tar hon un logon mein se khade hon jinki haqq talfi hui ho, aur who khuda ki qasam kha kar kahen ke “hamari shahadat unki shahadat se zyada bar-haqq hai aur humne apni gawahi mein koi zyadati nahin ki hai, agar hum aisa karein to zalimon mein se hongey”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir gar iss ki itlaa ho kay woh dono gawah kissi gunah kay murtakib huye hain to inn logon mein say jin kay muqablay mein gunah ka irtakaab hua tha woh do shaks jo sab mein qareeb tar hain jahan woh dono kharay huye thay yeh dono kharay hon phir dono Allah ki qasam khayen kay bil yaqeen humari yeh qasam inn dono ki uss qasam say ziyada raast hai aur hum ney zara tajawuz nahi kiya hum iss halat mein sakht zalim hongay
Devnagri Urdu (Maududi)लेकिन अगर पता चल जाए के इन दोनो ने अपने आप को गुनाह में मुब्तिला किया है तो फिर इनकी जगह दो और शक्स जो इनकी बा-निस्बत शहादत देने के लिए एहल-तर होन उन लोगों में से खड़े होन जिनका हक़ तलफ़ी हुई हो, और जो खुदा की क़सम खा कर काहें के "हमारी शहादत उनकी शहादत से ज़्यादा बार-हक़ है और हमने अपनी गवाही में कोई ज़्यादा नहीं की है, अगर हम ऐसा करें तो ज़ालिमों में से होंगे"
عَرَبِيذٰلِكَ أَدنىٰ أَن يَأتوا بِالشَّهادَةِ عَلىٰ وَجهِها أَو يَخافوا أَن تُرَدَّ أَيمانٌ بَعدَ أَيمانِهِم ۗ وَاتَّقُوا اللَّهَ وَاسمَعوا ۗ وَاللَّهُ لا يَهدِي القَومَ الفاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह अधिक निकट है कि वे गवाही को उसके (वास्तविक) तरीक़े पर दें, अथवा इस बात से डरें कि (उनकी) क़समें उन (संबंधियों) की क़समों के बाद रद्द कर दी जाएँगी तथा अल्लाह से डरो और सुनो और अल्लाह अवज्ञाकारियों को मार्गदर्शन प्रदान नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Is tareeqe se zyada tawaqqu ki ja sakti hai ke log theek theek shahadat denge, ya kam az kam is baat hi ka khauff karenge ke unki kasamon ke baad dusri kasamon se kahin unki tardeed na ho jaye. Allah se daro aur suno, Allah nafarmani karne walon ko apni rehnumayi se mehroom kar deta nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh qareeb zariya hai iss amar ka kay woh log waqiya ko theek tor per zahir keren ya iss baat say darr jayen kay inn say qasmen lenay kay baad qasmen ulti parr jayen gi aur Allah Taalaa say daro aur suno! Aur Allah Taalaa faasiq logon ko hidayat nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तारीख़ से ज़्यादा तवक्कु की जा सकती है के लोग ठीक ठीक शहादत देंगे, या काम आज भी बात है का खौफ करेंगे कि उनकी कसमों के बाद दूसरी कसमों से कहीं उनकी देरी न हो जाए। अल्लाह से डरो और सुनो, अल्लाह नफ़रमानी करने वालों को अपनी रहनुमाई से महरूम कर देता नहीं है
عَرَبِي۞ يَومَ يَجمَعُ اللَّهُ الرُّسُلَ فَيَقولُ ماذا أُجِبتُم ۖ قالوا لا عِلمَ لَنا ۖ إِنَّكَ أَنتَ عَلّامُ الغُيوبِ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन अल्लाह रसूलों को एकत्र करेगा, फिर कहेगा : तुम्हें क्या उत्तर दिया गया? वे कहेंगे : हमें कोई ज्ञान नहीं। निःसंदेह तू ही छिपी बातों को ख़ूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz Allah sab Rasoolon ko jamaa karke puchega ke tumhein kya jawab diya gaya hai, to woh arz karenge ke humein kuch ilm nahin, aap hi tamaam posheeda(hidden) haqeeqaton ko jaante hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss roz Allah Taalaa tamam payghumbaron ko jama keray ga phir irshad farmaye ga tum ko kiya jawab mila tha woh arz keren gay kay hum ko kuch khabar nahi tu hi be-shak posheedah baaton ko poora jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ अल्लाह सब रसूलों को जमा करके पूछेगा के तुमने क्या जवाब दिया है, तो वो अर्ज़ करेंगे के हमें कुछ इल्म नहीं, आप ही तमाम पोशीदा (छिपा हुआ) हकीकतों को जानते हैं
عَرَبِيإِذ قالَ اللَّهُ يا عيسَى ابنَ مَريَمَ اذكُر نِعمَتي عَلَيكَ وَعَلىٰ والِدَتِكَ إِذ أَيَّدتُكَ بِروحِ القُدُسِ تُكَلِّمُ النّاسَ فِي المَهدِ وَكَهلًا ۖ وَإِذ عَلَّمتُكَ الكِتابَ وَالحِكمَةَ وَالتَّوراةَ وَالإِنجيلَ ۖ وَإِذ تَخلُقُ مِنَ الطّينِ كَهَيئَةِ الطَّيرِ بِإِذني فَتَنفُخُ فيها فَتَكونُ طَيرًا بِإِذني ۖ وَتُبرِئُ الأَكمَهَ وَالأَبرَصَ بِإِذني ۖ وَإِذ تُخرِجُ المَوتىٰ بِإِذني ۖ وَإِذ كَفَفتُ بَني إِسرائيلَ عَنكَ إِذ جِئتَهُم بِالبَيِّناتِ فَقالَ الَّذينَ كَفَروا مِنهُم إِن هٰذا إِلّا سِحرٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(तथा याद करो) जब अल्लाह कहेगा : ऐ मरयम के पुत्र ईसा! अपने ऊपर तथा अपनी माता के ऊपर मेरा अनुग्रह याद कर, जब मैंने पवित्रात्मा (जिबरील) द्वारा तेरी सहायता की। तू गोद (पालने) में तथा अधेड़ आयु में लोगों से बातें करता था। तथा जब मैंने तुझे किताब और हिकमत तथा तौरात और इंजील की शिक्षा दी। और जब तू मेरी अनुमति से मिट्टी से पक्षी की आकृति की तरह (रूप) बनाता था, फिर तू उसमें फूँक मारता तो वह मेरी अनुमति से पक्षी बन जाता था और तू जन्म से अंधे तथा कोढ़ी को मेरी अनुमति से स्वस्थ कर देता था और जब तू मुर्दों को मेरी अनुमति से निकाल (जीवित) खड़ा करता था। और जब मैंने बनी इसराईल को तुझसे रोका, जब तू उनके पास खुली निशानियाँ लेकर आया, तो उनमें से कुफ़्र करने वालों ने कहा : यह तो स्पष्ट जादू के सिवा कुछ नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Phir tasawwur karo us mauqe ka jab Allah farmayega ke “Aey Maryam ke bete Isa! Yaad kar meri us niyamat ko jo maine tujhey aur teri Maa ko ata ki thi, maine rooh-e-paak se teri madad ki, tu gehware (cradle) mein bhi logon se baat karta tha aur badi umar ko pahunch kar bhi. Maine tujhko kitaab aur hikmat aur Taurat aur injil ki taleem di, tu mere hukum se mitti ka putla parinde ki shakal ka banata aur us mein phoonkta tha aur woh mere hukum se parinda ban jata tha, tu madar-zaad (by birth) andhey(blind) aur kodhi (leper) ko mere hukum se accha karta tha, tu murdon ko mere hukum se nikalta tha. Phir jab tu bani Israel ke paas sareeh nishaniyan lekar pahunhca aur jo log un mein se munkir e haqq thay unhon ne kaha ke yeh nishaniyan jaadugari ke siwa aur kuch nahin hain, to maine hi tujhey unsey bachaya
Roman Urdu (Junagarhi)Jab kay Allah Taalaa irshad farmaye ga kay aey essa bin marium mera inam yaad kero jo tum per aur tumhari walida per hua hai jab mein ney tumhen rooh-ul-quddus say taeed di. Tum logon say kalaam kertay thay godd mein bhi aur bari umar mein bhi aur jabkay mein ney tum ko kitab aur hikmat ki baaten aur toraat aur injeel ki taleem di aur jab kay tum meray hukum say gaaray say aik shakal banatay thay jaisay parinday ki shakal hoti hai phir tum iss kay andar phoonk maar detay thay jiss say woh parind bann jata tha meray hukum say aur tum acha ker detay thay maadar zaad andhay ko aur korhi ko meray hukum say aur jab kay tum murdon ko nikal khara ker letay thay meray hukum say aur jab kay mein ney bani israeel ko tum say baaz rakha jab tum unn kay pass daleelen ley ker aaye thay phir unn mein jo kafir thay unhon ney kaha tha kay ba-juz khullay jadoo kay yeh aur kuch bhi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)फिर तसव्वुर करो उस मौके का जब अल्लाह फरमायेगा के "ए मरियम के बेटे ईसा! याद कर मेरी उस नियामत को जो मैंने तुझे और तेरी मां को अता की थी, मैंने रूह-ए-पाक से तेरी मदद की, तू गहवरे (पालना) में भी लोगों से बात करता था और बड़ी उमर को पहुंच कर भी। मैंने तुझको किताब और हिकमत और तौरात और इंजील की तालीम दी, तू मेरे हुकुम से मिट्टी का पुतला परिंदे की शक्ल का बनता था और वो मेरे हुकुम से परिंदा बन जाता था, तू मदार-ज़ाद (जन्म से अंधा) और कोढ़ी (कोढ़ी) को मेरे हुकुम से अच्छा करता था, तू मुर्दो को मेरे हुकुम से निकलता था. फिर जब तू बनी इजराइल के पास सारी निशानियां लेकर पहुंचूं और जो लोग उन में से मुनकिर ए हक था था उनहों ने कहा के ये निशानियां जादूगरी के सिवा और कुछ नहीं हैं, तो मैंने ही तुझसे बचाया
عَرَبِيوَإِذ أَوحَيتُ إِلَى الحَوارِيّينَ أَن آمِنوا بي وَبِرَسولي قالوا آمَنّا وَاشهَد بِأَنَّنا مُسلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद कर) जब मैंने हवारियों के दिलों में यह बात डाल दी कि मुझपर तथा मेरे रसूल (ईसा) पर ईमान लाओ। उन्होंने कहा : हम ईमान लाए और तू गवाह रह कि हम आज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab maine hawariyon (disciples) ko ishara kiya ke mujhpar aur mere Rasool par iman lao, tab unhon ne kaha ke “ hum iman laye aur gawah raho ke hum muslim hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jabkay mein ney hawareen ko hukum diya kay tum mujh per aur meray rasool per eman laao unhon ney kaha hum eman laye aur aap shahid rahiye kay hum pooray farman bardaar hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जब मैंने हवारियों (चेलों) को इशारा किया के मुझपर और मेरे रसूल पर ईमान लाओ, तब उनहों ने कहा के "हम ईमान लाए और गवाह रहो के हम मुसलमान हैं"
عَرَبِيإِذ قالَ الحَوارِيّونَ يا عيسَى ابنَ مَريَمَ هَل يَستَطيعُ رَبُّكَ أَن يُنَزِّلَ عَلَينا مائِدَةً مِنَ السَّماءِ ۖ قالَ اتَّقُوا اللَّهَ إِن كُنتُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब हवारियों ने कहा : ऐ मरयम के पुत्र ईसा! क्या तेरा पालनहार यह कर सकता है कि हमपर आकाश से एक थाल (भोजन सहित दस्तर-ख़्वान) उतार दे? उस (ईसा) ने कहा : अल्लाह से डरो, यदि तुम ईमान वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)(Hawariyon ke silsile mein) yeh waqia bhi yaad rahey ke jab hawariyon ne kaha, Aey Isa ibne Mariyam! Kya aap ka Rubb humpar aasmaan se khane ka ek khwan (table spread) utar sakta hai? To Isa ne kaha Allah se daro agar tum momin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Woh waqt yaad kay qabil hai jab kay hawariyon ney arz kiya kay essa bin marium! Kiya aap ka rab aisa ker sakta hai kay hum per aasman say aik khuwaan nazil farma dey? Aap ney farmaya Allah say daro agar tum eman laye ho
Devnagri Urdu (Maududi)(हवारियों के सिलसिले में) ये वाकिया भी याद रहे के जब हवारियों ने कहा, ऐ ईसा इब्ने मरियम! क्या आप का रुब हमपर आसमान से खाने का एक ख़्वान उतर सकता है? तो ईसा ने कहा अल्लाह से डरो अगर तुम मोमिन हो
عَرَبِيقالوا نُريدُ أَن نَأكُلَ مِنها وَتَطمَئِنَّ قُلوبُنا وَنَعلَمَ أَن قَد صَدَقتَنا وَنَكونَ عَلَيها مِنَ الشّاهِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हम चाहते हैं कि उसमें से खाएँ और हमारे दिलों को संतोष हो जाए तथा हम जान लें कि निश्चय तूने हमसे सच कहा है और हम उसपर गवाहों में से हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha hum bas yeh chahte hain ke is khwan se khana khayein aur hamare dil mutmaeen (staisfied) hon aur humein maloom ho jaye ke aap ne jo kuch humse kaha hai woh sach hai aur hum ispar gawah hon
Roman Urdu (Junagarhi)Woh bolay kay hum yeh chahatay hain kay uss mein say khayen aur humaray dilon ko poora itminaan hojaye aur humaray yeh yaqeen aur barh jaye kay aap ney hum say sach bola hai aur hum gawahi denay walon mein say hojayen
Devnagri Urdu (Maududi)उन्होन ने कहा हम बस ये चाहते हैं के इस ख़्वान से खाना खायें और हमारे दिल मुतमीन (स्थिर) हों और हमें मालूम हो जाये के आप ने जो कुछ हमसे कहा है वो सच है और हम इसपर गवाह हैं
عَرَبِيقالَ عيسَى ابنُ مَريَمَ اللَّهُمَّ رَبَّنا أَنزِل عَلَينا مائِدَةً مِنَ السَّماءِ تَكونُ لَنا عيدًا لِأَوَّلِنا وَآخِرِنا وَآيَةً مِنكَ ۖ وَارزُقنا وَأَنتَ خَيرُ الرّازِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)मरयम के पुत्र ईसा ने प्रार्थना की : ऐ अल्लाह! ऐ हमारे पालनहार! हम पर आकाश से एक थाल उतार, जो हमारे तथा हमारे पश्चात् के लोगों के लिए उत्सव (का दिन) बन जाए तथा तेरी ओर से एक निशानी (हो)। तथा हमें जीविका प्रदान कर, तू ही सबसे उत्तम जीविका प्रदान करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Ispar Isa ibn-e-Mariyam ne dua ki “ khudaya ! hamare Rubb! Humpar aasman se ek khwan nazil kar jo hamare liye aur hamare aglon pichlon ke liye khushi ka mauqa qaraar paye aur teri taraf se ek nishani ho, humko rizq de aur tu behtareen raziq hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Essa ibn-e-marium ney dua ki kay aey Allah aey humaray perwerdigar! Hum per aasman say khana nazil farma! Kay woh humara liye yaani hum mein jo awwal hain aur jo baad kay hain sabb kay liye aik khushi ki baat ho jaye aur teri taraf say aik nishani hojaye aur tu hum ko rizq ata farma dey aur tu sab ata kerney walon say acha hai
Devnagri Urdu (Maududi)इसपर ईसा इब्न-ए-मरियम ने दुआ की "खुदाया! हमारे रब!" हमपर आसमान से एक ख्वान नाज़िल कर जो हमारे लिए और हमारे एग्लोन पिचलों के लिए ख़ुशी का मौका क़रार पाए और तेरी तरफ से एक निशानी हो, हमको रिज़क दे और तू बेहतरीन राज़िक है”
عَرَبِيقالَ اللَّهُ إِنّي مُنَزِّلُها عَلَيكُم ۖ فَمَن يَكفُر بَعدُ مِنكُم فَإِنّي أُعَذِّبُهُ عَذابًا لا أُعَذِّبُهُ أَحَدًا مِنَ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने कहा : निःसंदेह मैं उसे तुमपर उतारने वाला हूँ। फिर जो उसके बाद तुममें से कुफ़्र (अविश्वास) करेगा, तो निःसंदेह मैं उसे दंड दूँगा, ऐसा दंड कि संसार वासियों में से किसी को न दूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne jawab dia “ main usko tumpar nazil karne wala hoon , magar uske baad jo tum mein se kufr karega usey main aisi saza dunga jo duniya mein kisi ko na di hogi”
Roman Urdu (Junagarhi)Haq Taalaa ney irshad farmaya kay mein woh khana tum logon per nazil kerney wala hun phir jo shaks tum mein say iss kay baad na haq shanasi keray ga to mein uss ko aisi saza doon ga kay woh saza duniya jahaan walon mein say kissi ko na doon ga
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने जवाब दिया “मैं उसको तुमसे नाज़िल करने वाला हूं” , मगर उसके बाद जो तुम में से कुफ्र करेगा उसे मैं ऐसा सजा दूंगा जो दुनिया में किसी को ना दी होगी”
عَرَبِيوَإِذ قالَ اللَّهُ يا عيسَى ابنَ مَريَمَ أَأَنتَ قُلتَ لِلنّاسِ اتَّخِذوني وَأُمِّيَ إِلٰهَينِ مِن دونِ اللَّهِ ۖ قالَ سُبحانَكَ ما يَكونُ لي أَن أَقولَ ما لَيسَ لي بِحَقٍّ ۚ إِن كُنتُ قُلتُهُ فَقَد عَلِمتَهُ ۚ تَعلَمُ ما في نَفسي وَلا أَعلَمُ ما في نَفسِكَ ۚ إِنَّكَ أَنتَ عَلّامُ الغُيوبِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब अल्लाह (क़ियामत के दिन) कहेगा : ऐ मरयम के पुत्र ईसा! क्या तुमने लोगों से कहा था कि मुझे तथा मेरी माँ को अल्लाह के अलावा दो पूज्य बना लो? वह कहेगा : तू पवित्र है, मुझसे यह कैसे हो सकता है कि ऐसी बात कहूँ, जिसका मुझे कोई अधिकार नहीं? यदि मैंने यह बात कही थी, तो निश्चय तूने उसे जान लिया। तू जानता है, जो मेरे मन में है और मैं नहीं जानता जो तेरे मन में है। निश्चय तू ही सब छिपी बातों (परोक्ष)) को बहुत ख़ूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Garz jab ( yeh ehsanaat yaad dilakar) Allah farmayega ke “aey Isa ibn-e-Mariyam kya tu nay logon se kaha tha ke khuda ke siwa mujhey aur meri Maa ko bhi khuda bana lo?” To woh jawab mein arz karega ke “ Suban Allah! Mera yeh kaam na tha ke woh baat kehta jiske kehne ka mujhey haqq na tha, agar maine aisi baat kahi hoti, to aapko zaroor ilm hota, aap jaante hain jo kuch mere dil mein hai aur main nahin jaanta jo kuch aapke dil mein hai, aap to saari poshida haqeeqaton ke aalim hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh waqt bhi qabil-e-ziker hai jab kay Allah Taalaa farmaye ga kay aey essa ibn-e-marium kiya tum ney inn logon say keh diya tha kay mujh ko aur meri maa ko bhi ilawa Allah kay mabood qarar dey lo! Essa arz keren gay kay mein to tujh ko munza samajhta hun mujh ko kissi tarah zeba na tha kay mein aisi baat kehta jiss ka kehney ka mujh ko koi haq nahi agar mein ney kaha hoga to tujh ko iss ka ilm hoga. Tu to meray dil kay andar ki baat bhi janta hai aur mein teray nafs mein jo kuch hai uss ko nahi janta. Tamam ghaibon ka jannay wala tu hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)गरज जब (ये एहसानात याद दिलाकर) अल्लाह फरमायेगा के "ऐ ईसा इब्न-ए-मरियम क्या तू नये लोगों से कहा था के खुदा के सिवा मुझे और मेरी मां को भी खुदा बना लो?" तो वो जवाब में अर्ज़ करेगा के " सुबान अल्लाह! मेरा ये काम ना था के वो बात कहता जिसके कहने का मुझे हक़ ना था, अगर मैंने ऐसी बात कहीं होती, तो आपको ज़रूर इल्म होता, आप जानते हैं जो कुछ मेरे दिल में है और मैं नहीं जानता जो कुछ आपके दिल में है, आप तो सारी पोशिदा हकीकतों के आलिम हैं
عَرَبِيما قُلتُ لَهُم إِلّا ما أَمَرتَني بِهِ أَنِ اعبُدُوا اللَّهَ رَبّي وَرَبَّكُم ۚ وَكُنتُ عَلَيهِم شَهيدًا ما دُمتُ فيهِم ۖ فَلَمّا تَوَفَّيتَني كُنتَ أَنتَ الرَّقيبَ عَلَيهِم ۚ وَأَنتَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ شَهيدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)मैंने उनसे उसके सिवा कुछ नहीं कहा, जिसका तूने मुझे आदेश दिया था कि अल्लाह की इबादत करो, जो मेरा पालनहार और तुम्हारा पालनहार है। और मैं उनपर गवाह था, जब तक उनमें रहा, फिर जब तूने मुझे उठा लिया, तो तू ही उनपर निरीक्षक था और तू हर चीज़ पर गवाह है।
Roman Urdu (Maududi)Maine unse uske siwa kuch nahin kaha jiska aapne hukum diya tha, yeh ke Allah ki bandagi karo jo mera Rubb bhi hai aur tumhara Rubb bhi, main usi waqt tak unka nigraan tha jab tak ke main unke darmiyan tha, jab aapne mujhey wapas bula liya to aap unpar nigraan thay aur aap to saari hi cheezon par nigraan hain
Roman Urdu (Junagarhi)Mein ney to inn say aur kuch nahi kaha magar sirf wohi jo tu ney mujh say kehney ko farmaya tha kay tum Allah ki bandagi ikhtiyar kero jo mera bhi rab hai aur tumhara bhi rab hai. Mein inn per gawah raah jab tak inn mein raah. Phir jab tu ney mujh ko utha liya to tu hi inn per mutlaa raha. Aur tu her cheez ki poori khabar rakhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)मैंने उनके सिवा कुछ नहीं कहा जिसका आपने हुकुम दिया था, ये अल्लाह की बंदगी करो जो मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी, मैं उसका वक्त तक उनका निगरान था जब तक मैं उनके दरमियान था, जब आपने मुझे वापस बुला लिया तो आप उन पर नजर रख रहे थे और आप तो सारी ही चीजों पर नजर रख रहे हैं
عَرَبِيإِن تُعَذِّبهُم فَإِنَّهُم عِبادُكَ ۖ وَإِن تَغفِر لَهُم فَإِنَّكَ أَنتَ العَزيزُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि तू उन्हें दंड दे, तो निःसंदेह वे तेरे बंदे हैं और यदि तू उन्हें क्षमा कर दे, तो निःसंदेह तू ही सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar aap unhein saza dein to woh aapke banday hain aur agar maaf kardein to aap galib aur dana hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tu inn ko saza dey to yeh teray banday hain aur agar tu inn ko moaf farma dey to tu zabardast hai hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर आप उन्हें सजा दें तो वो आपके बंद हैं और अगर माफ कर दें तो आप गालिब और दाना हैं”
عَرَبِيقالَ اللَّهُ هٰذا يَومُ يَنفَعُ الصّادِقينَ صِدقُهُم ۚ لَهُم جَنّاتٌ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها أَبَدًا ۚ رَضِيَ اللَّهُ عَنهُم وَرَضوا عَنهُ ۚ ذٰلِكَ الفَوزُ العَظيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह कहेगा : यह वह दिन है कि सच्चों को उनका सच ही लाभ देगा। उन के लिए ऐसे बाग़ हैं, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, उनमें हमेशा-हमेशा के लिए रहने वाले हैं। अल्लाह उनसे प्रसन्न हो गया तथा वे अल्लाह से प्रसन्न हो गए, यही बहुत बड़ी सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)Tab Allah farmayega “ yeh woh din hai jismein sacchon ko unki sachhayi nafa deti hai, unke liye aisey baagh hain jinke nichey nehrein beh rahi hain, yahan woh hamesha rahenge, Allah unse razi hua aur woh Allah se, yahi badi kamiyabi hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Allah irshad farmaye ga kay yeh woh din hai kay jo log sachay thay unn ka sacha hona unn kay kaam aayega unn ko baagh milen gay jin kay neechay nehren jari hongi jin mein woh hamesha hamesha ko rahen gay. Allah Taalaa inn say razi aur khush aur yeh Allah say razi aur khush hain yeh bari (bhaari) kamyaabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)तब अल्लाह फरमायेगा “ ये वो दिन है जिसकी सच्चाई को उनकी सच्चाई नफ़ा देती है, उनके लिए ऐसे बाग़ हैं जिनके बारे में वो नफ़रत कर रही हैं, यहाँ वो हमेशा रहेंगे, अल्लाह उनसे रज़ी हुआ और वो अल्लाह से, यही बड़ी कामयाबी है"
عَرَبِيلِلَّهِ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَما فيهِنَّ ۚ وَهُوَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)आकाशों और धरती तथा जो कुछ उनमें है, उन सबका राज्य अल्लाह ही के लिए है और वह हर चीज़ पर शक्ति रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Zameeen aur aasmano aur tamaam maujoodaat ki baadshahi Allah hi ke liye hai aur woh har cheez par qudrat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah hi ki hai saltanat aasmanon ki aur zamin ki aur unn cheezon ki jo inn mein mojood hain aur woh her sheh per poori qudrat rakhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन और आसमान और तमाम मौजुदात की बादशाही अल्लाह ही के लिए है और वह हर चीज पर कुदरत रखता है
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Surah 5: Al-Ma'idah (The Food)

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Surah 5: Al-Ma'idah (The Food)

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Surah 5: Al-Ma'idah (The Food)

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Surah 5: Al-Ma'idah (The Food)

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Surah 6: Al-An'am (The Cattle)

Meccan🕐 Revelation #55📜 165 Verses🕮 Juz 1–8
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Surah 6: Al-An'am (The Cattle)

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Surah 6: Al-An'am (The Cattle)

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Surah 6: Al-An'am (The Cattle)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالحَمدُ لِلَّهِ الَّذي خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ وَجَعَلَ الظُّلُماتِ وَالنّورَ ۖ ثُمَّ الَّذينَ كَفَروا بِرَبِّهِم يَعدِلونَ
हिन्दी (Al-Omari)सब प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जिसने आकाशों तथा धरती को पैदा किया और अँधेरों और प्रकाश को बनाया, फिर (भी) वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, अपने रब के साथ (दूसरों को) बराबर ठहराते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tareef Allah ke liye hai jisne zameen aur aasmaan banaye, roshni aur tareekiyan (darkness) paida ki, phir bhi woh log jinhon ne dawat e haqq ko maanne se inkar kardiya hai durson ko apne Rubb ka humsar thehra rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Tamam tareefen Allah hi kay laeeq hain jiss ney aasamanon aur zamin ko peda kiya aur tareekiyon aur noor ko banaya phir bhi kafir log (ghair Allah ko) apney rab kay barabar qarar detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)तारीफ अल्लाह के लिए है जिसने जमीन और आसमान बनाया, रोशनी और तारिकियां (अंधेरा) पैदा की, फिर भी वो लोग जिन्होन ने दावत ए हक को मन्ने से इंकार कर दिया है डर्सन को अपने रब का हमसर ठहरे हुए हैं
عَرَبِيهُوَ الَّذي خَلَقَكُم مِن طينٍ ثُمَّ قَضىٰ أَجَلًا ۖ وَأَجَلٌ مُسَمًّى عِندَهُ ۖ ثُمَّ أَنتُم تَمتَرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वही है जिसने तुम्हें तुच्छ मिट्टी से पैदा किया, फिर एक अवधि निर्धारित कर दी तथा एक और अवधि उसके पास निर्धारित है। फिर (भी) तुम संदेह करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jisne tumko mitti se paida kiya, phir tumhare liye zindagi ki ek muddat muqarrar kardi, aur ek dusri muddat aur bhi hai jo uske haan tai shuda hai magar tum log ho ke shakk mein padey huey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Woh aisa hai jiss ney tum ko mitti say banaya phir aik waqt moyyen kiya aur (doosra) moyyen waqt khaas Allah hi kay nazdeek hai phir bhi tum shak rakhtay
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिसने तुमको मिट्टी से पैदा किया, फिर तुम्हारे लिए जिंदगी की एक मुद्दत मुकर्रर करदी, और एक दूसरी मुद्दत और भी है जो उसकी हां ताई शुदा है मगर तुम लोग हो के शक में पड़े हुए हो
عَرَبِيوَهُوَ اللَّهُ فِي السَّماواتِ وَفِي الأَرضِ ۖ يَعلَمُ سِرَّكُم وَجَهرَكُم وَيَعلَمُ ما تَكسِبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा आकाशों में और धरती में वही (एकमात्र) अल्लाह है, वह तुम्हारे छिपे और तुम्हारे खुले को जानता है तथा जानता है जो तुम कमाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Wahi ek khuda aasmano mein bhi hai aur zameen mein bhi. Tumhare khule aur chupe sab haal jaanta hai aur jo burayi ya bhalayi tum kamate ho ussey khoob waqif hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wohi hai mabood-e-bar haq aasmanon mein bhi aur zamin mein bhi woh tumharay posheeda ehwaal ko bhi aur tumharay zahir ehwaal ko bhi janta hai aur tum jo kuch amal kertay ho uss ko bhi janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही एक खुदा आसमान में भी है और ज़मीन में भी। तुम्हारे खुले और छुपे सब हाल जानता है और जो बुराई या भलाई तुम कमाते हो उसे खूब वाकिफ है
عَرَبِيوَما تَأتيهِم مِن آيَةٍ مِن آياتِ رَبِّهِم إِلّا كانوا عَنها مُعرِضينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उनके पास उनके पालनहार की आयतों (निशानियों) में से कोई आयत (निशानी) नहीं आती, परंतु वे उससे मुँह फेरने वाले होते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Logon ka haal yeh hai ke unke Rubb ki nishaniyon mein se koi nishani aisi nahin jo unke saamne aayi ho aur unhon ne ussey mooh na moad liya ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kay pass koi nishani bhi unn kay rab ki nishaniyon mein say nahi aati magar woh iss say aeyraaz hi kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों का हाल ये है के उनके रब की निशानियों में से कोई निशानी ऐसी नहीं जो उनके सामने आई हो और उनको ने उसे मुंह ना मोड़ लिया हो
عَرَبِيفَقَد كَذَّبوا بِالحَقِّ لَمّا جاءَهُم ۖ فَسَوفَ يَأتيهِم أَنباءُ ما كانوا بِهِ يَستَهزِئونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)चुनाँचे निःसंदेह उन्होंने सत्य को झुठला दिया, जब वह उनके पास आया। तो शीघ्र ही उनके पास उसके समाचार आ जाएँगे, जिसका वे उपहास किया करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Chunanchey ab jo haqq unke paas aaya to usey bhi unhon ne jhutla diya. Accha, jis cheez ka woh ab tak mazaaq udate rahey hain anqareeb uske mutaaliq kuch khabrein unhein pahunchengi
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney iss sachi kitab ko bhi jhutlaya jabkay woh inn kay pass phonchi so jaldi hi inn ko khabar mill jayegi uss cheez ki jiss kay sath yeh istehzaa kiya kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)चुनांचे अब जो हक उनके पास आया तो उसे भी अनहोन ने झुटला दिया। अच्छा, जिस चीज़ का वो अब तक मज़ाक उड़ाते रहे हैं अंकारिब उसके मुतालिक कुछ खबरें उन्हें पहनेंगे
عَرَبِيأَلَم يَرَوا كَم أَهلَكنا مِن قَبلِهِم مِن قَرنٍ مَكَّنّاهُم فِي الأَرضِ ما لَم نُمَكِّن لَكُم وَأَرسَلنَا السَّماءَ عَلَيهِم مِدرارًا وَجَعَلنَا الأَنهارَ تَجري مِن تَحتِهِم فَأَهلَكناهُم بِذُنوبِهِم وَأَنشَأنا مِن بَعدِهِم قَرنًا آخَرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने उनसे पहले कितने समुदायों को नष्ट कर दिया, जिन्हें हमने धरती में वह सत्ता (शक्ति एवं अधिकार) दी थी, जो सत्ता तुम्हें नहीं दी, और हमने उनपर मूसला धार वर्षा की, और हमने नहरें बनाईं, जो उनके नीचे से बहती थीं। फिर हमने उन्हें उनके पापों के कारण विनष्ट कर दिया, और उनके पश्चात् दूसरे समुदायों को पैदा कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Kya unhon ne dekha nahin ke unse pehle kitni aisi qaumom ko hum halaak kar chuke hain jinka apne apne zamane mein doar dora raha hai? Unko humne zameen mein woh iqtedar baksha tha jo tumhein nahin baksha hai. Unpar humne aasman se khoob baarishein barsayi aur unke nichey nehrein baha di, (magar jab unhon ne kufraan e niyamat kiya to) aakhir e kaar humne unke gunahon ki padash mein unhein tabaah kardiya aur unki jagah dusre daur ki qaumon ko uthaya
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya enhon ney dekha nahi kay hum inn say pehlay kitni jamaton ko halak ker chukay hain jin ko hum ney duniya mein aisi qooat di thi kay tum ko woh qooat nahi di aur hum ney unn per khoob barishen barsaeen aur hum ney unn kay neechay say nehren jari kin. Phir hum ney unn ko unn kay gunahon kay sabab halak ker daala aur unn kay baad doosri jamaton ko peda ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)क्या अनहोन ने देखा नहीं के उनसे पहले कितनी ऐसी क़ौम को हम हलाक कर चुके हैं जिनका अपने अपने जमाने में प्यार हो रहा है? उनको हमने ज़मीन में वो इक्तेदार बख्शा था जो तुम्हें नहीं बख्शा है। उन्पर हमने आसमान से ख़ूब बारिशें बरसाईं और उन्हें नीची नहरें बहा दी, (मगर जब उनको ने कुफ़्रां ए नियामत किया तो) आख़िर ए कार हमने उनके गुनाहों की याद में उन्हें तबाह कर दिया और उनकी जगह दूसरे दौर की क़ौमों को उठाया
عَرَبِيوَلَو نَزَّلنا عَلَيكَ كِتابًا في قِرطاسٍ فَلَمَسوهُ بِأَيديهِم لَقالَ الَّذينَ كَفَروا إِن هٰذا إِلّا سِحرٌ مُبينٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) यदि हम आपपर काग़ज़ में लिखी हुई कोई पुस्तक उतारते, फिर वे उसे अपने हाथों से छूते, तो निश्चय वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, यही कहते कि यह तो स्पष्ट जादू के सिवा कुछ नहीं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey paigambar)! Agar hum tumhare upar koi kagaz mein likhi likhayi kitab bhi utaar dete aur log usey apne haathon se choo kar bhi dekh lete tab bhi jihon ne haqq ka inkar kiya hai woh yahi kehte ke yeh to sareeh jaadu hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum kaghaz per likha hua koi navishta aap per nazil farmatay phir uss ko yeh log apney haathon say chu bhi letay tab bhi yeh kafir log yeh kehtay kay yeh kuch bhi nahi magar sareeh jadoo hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ पैगम्बर)! अगर हम तुम्हारे ऊपर कोई कागज में लिखी किताब भी उतार देते और लोग उसे अपने हाथों से छू कर भी देख लेते तब भी जिहों ने हक का इंकार किया है वो यहीं कहते के ये तो सारे जादू है
عَرَبِيوَقالوا لَولا أُنزِلَ عَلَيهِ مَلَكٌ ۖ وَلَو أَنزَلنا مَلَكًا لَقُضِيَ الأَمرُ ثُمَّ لا يُنظَرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा : इस (नबी) पर कोई फ़रिश्ता क्यों न उतारा गया? और यदि हम कोई फ़रिश्ता उतारते, तो अवश्य काम तमाम कर दिया जाता, फिर उन्हें मोहलत न दी जाती।
Roman Urdu (Maududi)Kehte hain ke is Nabi par koi Farishta kyun nahin utara gaya? Agar kahin humne Farishta utaar diya hota, to abtak kabhi ka faisla ho chuka hota, phir inhein koi mohlat na di jati
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh log yun kehtay hain kay inn kay pass koi farishta kiyon nahi utara gaya aur agar hum koi farishat bhej detay to sara qissa hi khatam ho jata. Phir inn ko zara mohlat na di jati
Devnagri Urdu (Maududi)कहते हैं के इस नबी पर कोई फरिश्ता क्यों नहीं उतरा गया? अगर कहीं हमने फ़रिश्ता उतार दिया होता, तो अब तक कभी का फैसला हो चुका होता, फिर इन्हें कोई मोहलत न दी जाती
عَرَبِيوَلَو جَعَلناهُ مَلَكًا لَجَعَلناهُ رَجُلًا وَلَلَبَسنا عَلَيهِم ما يَلبِسونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम उसे फ़रिश्ता बनाते, तो निश्चय उसे आदमी (के रूप में) बनाते और अवश्य उनपर वही संदेह डाल देते, जिस संदेह में वे (अब) पड़े हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar hum Farishte ko utaarte tab bhi usey Insani shakal hi mein utaarte aur is tarah inhein usi shubhey mein mubtala kardete jismein ab yeh mubtala hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum iss ko farishta tajveez kertay to hum uss ko aadmi hi banatay aur huamray iss fail say phir inn per wohi ashkaal hota jo abb ashkaal ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर हम फ़रिश्ते को उतारते तब भी उसे इंसानी शक्ल ही में उतारते और इस तरह उन्हें उसी शुभे में मुबतला कर देते जिसमें अब ये मुबतला है
عَرَبِيوَلَقَدِ استُهزِئَ بِرُسُلٍ مِن قَبلِكَ فَحاقَ بِالَّذينَ سَخِروا مِنهُم ما كانوا بِهِ يَستَهزِئونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह (ऐ नबी!) आपसे पहले कई रसूलों का उपहास किया गया, तो उन लोगों को जिन्होंने उनमें से उपहास किया था, उसी चीज़ ने घेर लिया, जिसका वे उपहास किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! Tumse pehle bhi bahut se Rasoolon ka mazaak udaya jaa chuka hai, magar in mazaak udane walon par aakhir e kaar wahi haqeeqat musallat hokar rahi jiska woh mazaak udate thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur waqaee aap say pehlay jo payghumbar huye hain unn kay sath bhi istehzaa kiya gaya hai. Phir jin logon ney unn say mazaq kiya tha unn ko uss azab ney aa ghera jiss kay tamaskhur uratay thay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! तुमसे पहले भी बहुत से रसूलों का मज़ाक उड़ाया जा चूका है, मगर मज़ाक उड़ाने वालों पर आख़िर ए कार वही हकीकत मुसल्लत होकर रही जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे
عَرَبِيقُل سيروا فِي الأَرضِ ثُمَّ انظُروا كَيفَ كانَ عاقِبَةُ المُكَذِّبينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें कि धरती में चलो-फिरो, फिर देखो कि झुठलाने वालों का परिणाम कैसा हुआ?
Roman Urdu (Maududi)Inse kaho, zara zameen mein chal phir kar dekho jhutlane walon ka kya anjaam hua hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap farma dijiye kay zara zamin mein chalo phiro phir dekh lo kay takzeeb kerney walon ka kiya anjam hua
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, ज़रा ज़मीन में चल फिर कर देखो झूठलाने वालों का क्या अंजाम हुआ है
عَرَبِيقُل لِمَن ما فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ قُل لِلَّهِ ۚ كَتَبَ عَلىٰ نَفسِهِ الرَّحمَةَ ۚ لَيَجمَعَنَّكُم إِلىٰ يَومِ القِيامَةِ لا رَيبَ فيهِ ۚ الَّذينَ خَسِروا أَنفُسَهُم فَهُم لا يُؤمِنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) (उनसे) पूछिए कि जो कुछ आकाशों तथा धरती में है, वह किसका है? कह दें : अल्लाह का है! उसने अपने ऊपर दया करना लिख दिया है। निश्चय वह तुम्हें क़ियामत के दिन की ओर (ले जाकर) अवश्य एकत्र करेगा, जिसमें कोई संदेह नहीं। जिन लोगों ने अपने-आपको क्षति में डाला, वही ईमान नहीं लाते।
Roman Urdu (Maududi)Inse pucho, aasmaano aur zameen mein jo kuch hai woh kiska hai? Kaho sab kuch Allah hi ka hai, usne reham o karam ka shaiwa apne upar lazim karliya hai (isi liye woh nafarmaniyon aur sarkashiyon par tumhein jadli se nahin pakad leta), Qayamat ke roz woh tum sab ko zaroor jamaa karega, yeh bilkul ek gair mushtaba haqeeqat hai, magar jin logon ne apne aap ko khud tabahi ke khatray mein mubtila karliya hai woh usey nahin maante
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kahiye kay jo kuch aasmano aur zamin mein mojood hai yeh sab kiss ki milkiyat hai aap keh dijiye kay sab Allah hi ki milkiyat hai Allah ney meharbani farmana apney upper laazim farma liya hai tum ko Allah qayamat kay roz jama keray ga iss mein koi shak nahi jin logon ney apney aap ko ghatay mein daala hai so woh eman nahi layen gay
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पूछो, आसमानों और ज़मीन में जो कुछ है वो किसका है? कहो सब कुछ अल्लाह ही का है, उसने रहम ओ करम का शैवा अपने ऊपर लाज़िम करलिया है (इसके लिए वो नफरमानियों और सरकशियों पर तुम्हें जदली से नहीं पकड़ लेता), कयामत के रोज वो तुम सब को जरूर जमा करेगा, ये बिल्कुल एक गैर मुश्तबा हकीकत है, मगर जिन लोगों ने अपने आप को खुद तबाही के खतरे में मुब्तिला करलिया है वो उसे नहीं मानते
عَرَبِي۞ وَلَهُ ما سَكَنَ فِي اللَّيلِ وَالنَّهارِ ۚ وَهُوَ السَّميعُ العَليمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उसी (अल्लाह) का है, जो कुछ रात और दिन में बस रहा है और वह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Raat ke andhere aur din ke ujale mein jo kuch thehra hua hai sab Allah ka hai, aur woh sab kuch sunta aur jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah hi kay mulk hain woh sab kuch jo raat mein aur din mein rehti hain aur wohi bara sunnay wala bara jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)रात के अंधेरे और दिन के उजाले में जो कुछ ठहरा हुआ है सब अल्लाह का है, और वो सब कुछ सुनता और जानता है
عَرَبِيقُل أَغَيرَ اللَّهِ أَتَّخِذُ وَلِيًّا فاطِرِ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَهُوَ يُطعِمُ وَلا يُطعَمُ ۗ قُل إِنّي أُمِرتُ أَن أَكونَ أَوَّلَ مَن أَسلَمَ ۖ وَلا تَكونَنَّ مِنَ المُشرِكينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दो : क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई सहायक बनाऊँ, जो आकाशों तथा धरती का बनाने वाला है, हालाँकि वह खिलाता है और उसे नहीं खिलाया जाता। आप कहिए : निःसंदेह मुझे आदेश दिया गया है कि सबसे पहला व्यक्ति बनूँ जो आज्ञाकारी हुआ, तथा तुम कदापि साझी बनाने वालों में से न हो।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, Allah ko chodh kar kya main kisi aur ko apna sarparast bana loon? Us khuda ko chodh kar jo zameen o aasmaan ka khaliq hai aur jo rozi deta hai rozi leta nahin hai (one who feeds but doesn’t need to be fed) ? Kaho, mujhey to yahi hukum diya gaya hai ke sabse pehle main uske aagey sar tasleem kham karoon (aur takeed ki gayi hai ke koi shirk karta hai to karey) tu bahar-haal mushrikon mein shamil na ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kahiye kay kiya Allah kay siwa jo kay aasmanon aur zamin ka peda kerney wala hai aur jo kay khaney ko deta hai aur uss ko koi khaney ko nahi deta aur kissi ko mabood qarar doon aap farma dijiye kay mujh ko yeh hukum hua hai kay sab say pehlay mein islam qabool keroon aur tu mushrikeen mein say hergiz na hona
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, अल्लाह को छोड़ कर क्या मैं किसी और को अपना सरपरस्त बना लूं? हमें खुदा को छोड़ कर जो ज़मीन ओ आसमान का खालिक है और जो रोज़ी देता है रोज़ी लेता नहीं है? कहो, मुझे तो यही हुकुम दिया है के सबसे पहले मैं उसके आगे सर तस्लीम ख़त्म करूं (और ले ली है के कोई शिर्क करता है तो करे) तू बहार-हाल मुशरिकों में शामिल ना हो
عَرَبِيقُل إِنّي أَخافُ إِن عَصَيتُ رَبّي عَذابَ يَومٍ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि यदि मैं अपने पालनहार की अवज्ञा करूँ, तो निःसंदेह मैं एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, agar main apne Rubb ki nafarmani karoon to darta hoon ke ek badey (khaufnaak) din mujhey saza bhugatni padegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay mein agar apney rab ka kehna na manon to mein aik baray din kay azab say darta hun
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, अगर मैं अपने रब की नफ़रमानी करूं तो डरता हूं के एक बड़े (ख़ौफ़नाक) दिन मुझे सज़ा भुगतनी पड़ेगी
عَرَبِيمَن يُصرَف عَنهُ يَومَئِذٍ فَقَد رَحِمَهُ ۚ وَذٰلِكَ الفَوزُ المُبينُ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस व्यक्ति से उस दिन वह हटा लिया जाएगा, तो निश्चय अल्लाह ने उसपर दया कर दी और यही खुली सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)Us din jo saza se bach gaya uspar Allah ne bada hi reham kiya aur yahi numayan kamiyabi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss shaks say uss roz woh azab hata diya jaye to uss per Allah ney bara reham kiya aue yeh sareeh kaamyabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)उस दिन जो सज़ा से बच गया उसपर अल्लाह ने बड़ा ही रहम किया और यही नुमायन कमियाबी है
عَرَبِيوَإِن يَمسَسكَ اللَّهُ بِضُرٍّ فَلا كاشِفَ لَهُ إِلّا هُوَ ۖ وَإِن يَمسَسكَ بِخَيرٍ فَهُوَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि अल्लाह तुझे कोई हानि पहुँचाए, तो उसके सिवा कोई उसे दूर करने वाला नहीं, और यदि वह तुझे कोई भलाई पहुँचाए, तो वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Agar Allah tumhein kisi qisam ka nuqsan pahunchaye to uske siwa koi nahin jo tumhein is nuksaan se bacha sakey, aur agar woh tumhein kisi bhlayi se behramand karey to woh har cheez par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tujh ko Allah Taalaa koi takleef phonchaye to uss ka door kerney wala siwaye Allah Taalaa kay aur koi nahi. Aur agar tujh ko Allah Taalaa koi nafa phonchaye to woh her cheez per poori qudrat rakhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर अल्लाह तुम्हें किसी क़िस्म का नुक्सान पहुंचाए तो उसके सिवा कोई नहीं जो तुम्हें इस नुक्सान से बच्चा सके, और अगर वो तुम्हें किसी से बेहरामद करे तो वो हर चीज़ पर कादिर है
عَرَبِيوَهُوَ القاهِرُ فَوقَ عِبادِهِ ۚ وَهُوَ الحَكيمُ الخَبيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वही अपने बंदों पर ग़ालिब (हावी) है तथा वही पूर्ण हिकमत वाला, हर चीज़ की ख़बर रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Woh apne bandon par kaamil ikhtiyarat rakhta hai aur dana aur ba-khabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wohi Allah apney bandon kay upper ghalib hai bar tar hai aur wohi bari hikmat wala aue poori khabar rakhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो अपने बंदों पर कामिल इख्तियारत रखता है और दाना और बा-खबर है
عَرَبِيقُل أَيُّ شَيءٍ أَكبَرُ شَهادَةً ۖ قُلِ اللَّهُ ۖ شَهيدٌ بَيني وَبَينَكُم ۚ وَأوحِيَ إِلَيَّ هٰذَا القُرآنُ لِأُنذِرَكُم بِهِ وَمَن بَلَغَ ۚ أَئِنَّكُم لَتَشهَدونَ أَنَّ مَعَ اللَّهِ آلِهَةً أُخرىٰ ۚ قُل لا أَشهَدُ ۚ قُل إِنَّما هُوَ إِلٰهٌ واحِدٌ وَإِنَّني بَريءٌ مِمّا تُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप (इन मुश्रिकों से) पूछें कि कौन-सी चीज़ गवाही में सबसे बड़ी है? आप कह दें कि अल्लाह मेरे और तुम्हारे बीच गवाह है तथा मेरी ओर यह क़ुरआन वह़्य (प्रकाशना) द्वारा भेजा गया है, ताकि मैं तुम्हें इसके द्वारा डराऊँ और उसे भी जिस तक यह पहुँचे। क्या निःसंदेह तुम वास्तव में यह गवाही देते हो कि बेशक अल्लाह के साथ कुछ और पूज्य भी हैं? आप कह दें कि मैं तो इसकी गवाही नहीं देता। आप कह दें कि वह तो केवल एक ही पूज्य है तथा निःसंदेह मैं उससे बरी हूँ जो तुम शरीक ठहराते हो।
Roman Urdu (Maududi)Inse pucho, kiski gawahi sabse badhkar hai? Kaho, mere aur tumhare darmiyan Allah gawah hai, aur yeh Quran meri taraf bazariye wahee bheja gaya hai taa-ke tumhein aur jis jis ko yeh pahunchey, sabko mutanabbey(warn) kardoon. Kya waqayi tum log yeh shahadat de sakte ho ke Allah ke saath dusre khuda bhi hain? Kaho, main to iski shahadat hargiz nahin de sakta. Kaho, khuda to wahi ek hai aur main us shirk se qatai bezar hoon jismein tum mubtala ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kahiye kay sab say bari cheez gawahi denay kay liye kaun hai aap kahiye kay meray aur tumharay darmiyan Allah gawah hai aur meray pass yeh quran bator wahee kay bheja gaya hai takay mein iss quran kay zariye say tum ko aur jiss ko yeh quran phonchay unn sab ko daraon kiya tum sach much yehi gawahi do gay kay Allah Taalaa kay sath kuch aur mabood bhi hain aap keh dijiye kay mein to gawahee nahi deta. Aap farma dijiye kay bus woh to aik hi mabood hai aur be-shak mein tumharay shirk say bey zaar hun
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पूछो, किसकी गवाही सबसे ज्यादा खराब है? कहो, मेरे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह गवाह है, और ये कुरान मेरी तरफ बाजारिये वही भेजा गया है ता-के तुम्हें और जिस को ये पहुंचे, सबको मुतनब्बे(चेतावनी) कर्दून। क्या सच है तुम लोग ये शहादत दे सकते हो कि अल्लाह के साथ दूसरे खुदा भी हैं? कहो, मैं तो इसकी शहादत हरगिज़ नहीं दे सकता। कहो, ख़ुदा तो वही एक है और मैं हमसे शिर्क से क़तई बेज़ार हूं जिसमें तुम मुबतला हो
عَرَبِيالَّذينَ آتَيناهُمُ الكِتابَ يَعرِفونَهُ كَما يَعرِفونَ أَبناءَهُمُ ۘ الَّذينَ خَسِروا أَنفُسَهُم فَهُم لا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन लोगों को हमने पुस्तक प्रदान की, वे उसे उसी प्रकार पहचानते हैं, जैसे वे अपने बेटों को पहचानते हैं। वे लोग जिन्होंने स्वयं को क्षति में डाला, तो वे ईमान नहीं लाते।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ko humne kitab di hai woh is baat ko is tarah gair mushtaba taur par pehchante hain jaise unko apne beton ke pehnchanne mein koi ishtibaah pesh nahin aata, magar jinhon ne apne aap ko khud khasare mein daal diya hai woh isey nahin maante
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ko hum ney kitab di hai woh log rasoolon ko pehchantay hain jiss tarah apney beton ko pehchantay hain. Jin logon ney apney aap ko ghatay mein daala hai so woh eman nahi layen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों को हमने किताब दी है वो इस बात को इस तरह गैर मुश्तबा तौर पर पहचानते हैं जैसे उनको अपने बेटों के पहचानने में कोई इश्तिबाह पेश नहीं आता, मगर जिन्होन ने अपने आप को खुद खासरे में डाल दिया है वो इसे नहीं मानते
عَرَبِيوَمَن أَظلَمُ مِمَّنِ افتَرىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَو كَذَّبَ بِآياتِهِ ۗ إِنَّهُ لا يُفلِحُ الظّالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उससे बड़ा अत्याचारी कौन है, जिसने अल्लाह पर कोई झूठ गढ़ा, या उसकी आयतों को झुठलाया। निःसंदेह अत्याचारी कभी सफल नहीं होते।
Roman Urdu (Maududi)Aur us shaks se badhkar zalim kaun hoga jo Allah par jhoota bohtan lagaye, ya Allah ki nishaniyon ko jhutlaye? Yaqeenan aise zalim kabhi falaah nahin paa sakte
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss say ziyada bey insaf kaun hoga jo Allah Taalaa per jhoot bandhay ya Allah ki aayaat ko jhoota batlaye aisay bey insafon ko kaamyabi na hogi
Devnagri Urdu (Maududi)और हम शक्स से बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठा बोहतन लगाए, या अल्लाह की निशानियों को झुठलाए? यकीनन ऐसे जालिम कभी फलाह नहीं पा सकते
عَرَبِيوَيَومَ نَحشُرُهُم جَميعًا ثُمَّ نَقولُ لِلَّذينَ أَشرَكوا أَينَ شُرَكاؤُكُمُ الَّذينَ كُنتُم تَزعُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन हम उन सबको एकत्र करेंगे, फिर हम उन लोगों से कहेंगे, जिन्होंने साझी ठहराए : तुम्हारे वे साझी कहाँ हैं, जिनका तुम दावा करते थे?
Roman Urdu (Maududi)Jis roz hum in sabko ikattha karenge aur mushrikon se puchenge ke ab woh tumhare thehraye huey shareek kahan hain jinko tum apna khuda samajhte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh waqt bhi yaad kerney kay qabil hai jiss roz hum unn tamam khaleeq ko jama keren gay phir hum mushrikeen say kahen gay kay tumharay woh shurka jin kay mabood honey ka tum dawa kertay thay kahan gaye
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज हम सबको इकट्ठ करेंगे और मुशरिकों से पूछेंगे के अब वो तुम्हारे ठहरे हुए शरीक कहां हैं जिनको तुम अपना खुदा समझते थे
عَرَبِيثُمَّ لَم تَكُن فِتنَتُهُم إِلّا أَن قالوا وَاللَّهِ رَبِّنا ما كُنّا مُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उनका कोई बहाना न होगा सिवाय इसके कि वे कहेंगे : अल्लाह की क़सम! जो हमारा पालनहार है, हम मुश्रिक न थे।
Roman Urdu (Maududi)To woh iske siwa koi fitna na utha sakenge ke (yeh jhoota bayan dein ke) aey hamare aaqa! Teri qasam hum hargiz mushrik na thay
Roman Urdu (Junagarhi)Phir unn kay shirk ka anjam iss kay siwa aur kuch bhi na hoga kay woh yun kahen gay kay qasam Allah ki apney perwerdigar ki hum mushrik na thay
Devnagri Urdu (Maududi)तो वो इसके सिवा कोई फिट ना उठे सकेंगे के (ये झूठा बयां देन के) ऐ हमारे आका! तेरी कसम हम हरगिज मुशरिक न थे
عَرَبِيانظُر كَيفَ كَذَبوا عَلىٰ أَنفُسِهِم ۚ وَضَلَّ عَنهُم ما كانوا يَفتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)देखो उन्होंने कैसे अपने आपपर झूठ बोला और उनसे गुम हो गया, जो वे झूठ बनाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Dekho, us waqt yeh kis tarah apne upar aap jhoot ghadenge, aur wahan unke sarey banawati mabood ghum ho jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Zara dekho to enhon ney kiss tarah jhoot bola apni janon per aur jin cheezon ko woh jhoot moot tarasha kertay thay woh sab ghaeeb hogaye
Devnagri Urdu (Maududi)देखो, हमें वक्त ये किस तरह अपने ऊपर आप झूठ घड़ेंगे, और वहां उनके सारे बनवाती माबूद गम हो जाएंगे
عَرَبِيوَمِنهُم مَن يَستَمِعُ إِلَيكَ ۖ وَجَعَلنا عَلىٰ قُلوبِهِم أَكِنَّةً أَن يَفقَهوهُ وَفي آذانِهِم وَقرًا ۚ وَإِن يَرَوا كُلَّ آيَةٍ لا يُؤمِنوا بِها ۚ حَتّىٰ إِذا جاءوكَ يُجادِلونَكَ يَقولُ الَّذينَ كَفَروا إِن هٰذا إِلّا أَساطيرُ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनमें से कुछ ऐसे हैं जो आपकी ओर कान लगाते हैं, और हमने उनके दिलों पर परदे डाल दिए हैं, कि बात न समझें और उनके कानों में बोझ डाल दिया है। यदि वे प्रत्येक निशानी देख लें, (तब भी) उसपर ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि जब वे आपके पास झगड़ते हुए आते हैं, तो वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, कहते हैं : ये पहले लोगों की कल्पित कथाओं के सिवा कुछ नहीं।
Roman Urdu (Maududi)In mein se baaz log aise hain jo kaan laga kar tumhari baat sunte hain magar haal yeh hai ke humne unke dilon par purdey daal rakkhey hain jinki wajah se woh isko kuch nahin samajhte aur inke kaano mein girani daal di hai (ke sab kuch sunne par bhi kuch nahin suntey).Woh khwa koi nishani dekh lein, uspar iman laa kar na denge , hadd yeh hai ke jab woh tumhare paas aa kar tumse jahgadte hain to inmein se jin logon ne inkar ka faisla karliya hai woh (saari baatein sunne ke baad) yahi kehte hain ke yeh ek dastaan e paarina (ancient tales) ke siwa kuch nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn mein baaz aisay hain kay aap ki taraf kaan lagatay hain aur hum ney inn kay dilon per parda daal rakha hai iss say kay woh iss ko samjhen aur inn kay kanon mein daat dey rakhi hai aur agar woh log tamam dalaeel ko dekh len to bhi inn per kabhi eman na layen yahan tak kay jab yeh log aap kay pass aatay hain to aap say khuwa ma-khuwa jhagartay hain yeh log jo kafir hain yun kehtay hain kay yeh to kuch bhi nahi sirf bey sanad baaten hain jo pehlon say chali aarahi hain
Devnagri Urdu (Maududi)मेरे अंदर से बाज़ लोग ऐसे हैं जो कान लगा कर तुम्हारी बात सुनते हैं मगर हाल ये है के हमने उनके दिलों पर पूरे डाल रखे हैं जिनकी वजह से वो इसको कुछ नहीं समझते और इनके कानों में गिरानी डाल देते हैं। वो ख्वा कोई निशानी देख लें, उसपर ईमान ला कर ना देंगे, हद ये है के जब वो तुम्हारे पास आ कर तुमसे झगड़ा करते हैं तो इनमें से जिन लोगों ने इंकार का फैसला कर लिया है वो (सारी बातें सुनने के बाद) यहीं कहते हैं के ये एक दास्तां ए इतिहास (प्राचीन कथाएं) के सिवा कुछ नहीं
عَرَبِيوَهُم يَنهَونَ عَنهُ وَيَنأَونَ عَنهُ ۖ وَإِن يُهلِكونَ إِلّا أَنفُسَهُم وَما يَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे उससे (लोगों को) रोकते हैं और (स्वयं भी) उससे दूर रहते हैं, और वे मात्र अपने आपको विनष्ट कर रहे हैं और वे नहीं समझते।
Roman Urdu (Maududi)Woh is amr e haqq ko qabool karne se logon ko roakte hain aur khud bhi issey door bhaagte hain (woh samajte hain ke is harakat se woh tumhara kuch bigaad rahey hain) halanke dar asal woh khud apni hi tabahi ka samaan kar rahey hain magar unhein iska shahoor nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh log iss say doosron ko bhi roktay hain aur khud bhi iss say door door rehtay hain aur yeh log apney hi ko tabah ker rahey hain aur kuch khabar nahi raktay
Devnagri Urdu (Maududi)वो इस अमर ए हक़ को क़बूल करने से लोगों को रोकते हैं और खुद भी इस तरह दूर भागते हैं (वो समझते हैं के इस हरकत से वो तुम्हारा कुछ बिगाड रहे हैं) हालंके दर असल वो खुद अपनी ही तबाही का सामान कर रहे हैं मगर उन्हें इसका शहर नहीं है
عَرَبِيوَلَو تَرىٰ إِذ وُقِفوا عَلَى النّارِ فَقالوا يا لَيتَنا نُرَدُّ وَلا نُكَذِّبَ بِآياتِ رَبِّنا وَنَكونَ مِنَ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ नबी!) यदि आप उस समय देखें, जब वे आग पर खड़े किए जाएँगे, तो वे कहेंगे : ऐ काश! हम वापस भेजे जाएँ और अपने पालनहार की आयतों को न झुठलाएँ और हम ईमान वालों में से हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Kaash tum us waqt ki halat dekh sakte jab woh dozakh ke kinarey khade kiye jayenge, us waqt woh kahenge ke kaash koi surat aisi ho ke hum duniya mein phir wapas bheje jayein aur apne Rubb ki nishaniyon ko na jhutlayein aur iman laney walon mein shamil hon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar aap uss waqt dekhen jab yeh dozakh kay pass kharay kiye jayen to kahen gay haaye kiya achi baat ho kay hum phir wapis bhej diye jayen aur agar aisa hojaye to hum apney rab ki aayaat ko jhoota na batlayen aur hum eman walon mein say hojayen
Devnagri Urdu (Maududi)काश तुम हमें वक्त की हालत देख सकते हो जब वो दोज़ख़ के किनारे खड़े किये जायेंगे, हमें वक़्त वो कहेंगे के काश कोई सूरत ऐसी हो के हम दुनिया में फिर वापस भेज देंगे और अपने रब की निशानियों को ना झुटलायें और ईमान लाने वालों में शामिल हों
عَرَبِيبَل بَدا لَهُم ما كانوا يُخفونَ مِن قَبلُ ۖ وَلَو رُدّوا لَعادوا لِما نُهوا عَنهُ وَإِنَّهُم لَكاذِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि उनके लिए वह प्रकट हो गया, जो वे इससे पहले छिपाते थे। और यदि उन्हें वापस भेज दिया जाए, तो अवश्य फिर वही करेंगे, जिससे उन्हें रोका गया था। और निःसंदेह वे निश्चय झूठे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Dar-haqeeqat yeh baat woh mehaz is wajah se kahenge ke jis haqeeqat par unhon ne purda daal rakkha tha woh us waqt be-naqaab hokar unke saamne aa chuki hogi, warna agar unhein sabiq zindagi ki taraf wapas bheja jaye to phir wahi sab kuch karein jissey unhein mana kiya gaya hai. Woh to hain hi jhoote ( isliye apni is khwahish ke izhar mein bhi jhoot hi se kaam lenge)
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay jiss cheez ko iss say qabal chupaya kertay thay woh inn kay samney aagaee hai aur gar yeh log phir wapis bhej diye jayen tab bhi yeh wohi kaam keren gay jiss say inn ko mana kiya gaya tha aur yaqeenan yeh bilkul jhootay hain
Devnagri Urdu (Maududi)दार-हक़ीक़त ये बात वो महज़ है वजह से कहेंगे के जिस हकीकत पर उन्हें ने पर्दा डाल रखा था वो हमें वक्त बे-नकाब होकर उनके सामने आ चुकी होगी, वरना अगर उन्हें साबिक जिंदगी की तरफ वापस भेजा जाए तो फिर वही सब कुछ करें जिसमें उन्हें मन किया गया है। वो तो हैं ही झूठे (इसलिये अपनी इस ख्वाहिश के इजहार में भी झूठ ही से काम लेंगे)
عَرَبِيوَقالوا إِن هِيَ إِلّا حَياتُنَا الدُّنيا وَما نَحنُ بِمَبعوثينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने कहा : जीवन तो बस यही हमारा सांसारिक जीवन है। और हम हरगिज़ उठाए जाने वाले नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Aaj yeh log kehte hain ke zindagi mein jo kuch bhi hai bas yahi duniya ki zindagi hai aur hum marne ke baad hargiz dobara na uthaye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kehtay hain kay sirf yeh dunyawi zindagi humari zindagi hai aur hum zinda na kiye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)आज ये लोग कहते हैं कि जिंदगी में जो कुछ भी है बस यहीं दुनिया की जिंदगी है और हम मरने के बाद हरगिज दोबारा ना उठेंगे
عَرَبِيوَلَو تَرىٰ إِذ وُقِفوا عَلىٰ رَبِّهِم ۚ قالَ أَلَيسَ هٰذا بِالحَقِّ ۚ قالوا بَلىٰ وَرَبِّنا ۚ قالَ فَذوقُوا العَذابَ بِما كُنتُم تَكفُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यदि आप उस समय देखें, जब वे अपने पालनहार के समक्ष खड़े किए जाएँगे।वह कहेगा : क्या यह (जीवन) सत्य नहीं है? वे कहेंगे : क्यों नहीं, हमारे पालनहार की क़सम! वह (अल्लाह) कहेगा : तो अब यातना चखो उसके बदले जो तुम कुफ़्र किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Kaash woh manzar tum dekh sako jab yeh apne Rubb ke samne khade kiye jayenge us waqt inka Rubb insey puchega “kya yeh haqeeqat nahin hai?” Yeh kahenge “haan aey hamare Rubb! Yeh haqeeqat hi hai”, woh farmayega “accha! to ab apne inkar e haqeeqat ki padash mein azaab ka maza chakho”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar aap uss waqt dekhen jab yeh apeny rab kay samey kharay kiye jayen gay. Allah farmaye ga kay kiya yeh amar waqaee nahi hai? Woh kahen gay be-shak qasam apney rab ki. Allah Taalaa farmaye ga to abb apney kufur kay ewaz azab chakho
Devnagri Urdu (Maududi)काश वो मंज़र तुम देख सको जब ये अपने रुब के सामने खड़े किये जायेंगे हमें वक्त इनका रुब इनसे पूछेगा “क्या ये हकीकत नहीं है?” ये कहेंगे "हां ऐ हमारे रब! ये हकीकत ही है", वो फरमायेगा "अच्छा! तो अब अपने इंकार ए हकीकत की याद में अज़ाब का मजा चाहो"
عَرَبِيقَد خَسِرَ الَّذينَ كَذَّبوا بِلِقاءِ اللَّهِ ۖ حَتّىٰ إِذا جاءَتهُمُ السّاعَةُ بَغتَةً قالوا يا حَسرَتَنا عَلىٰ ما فَرَّطنا فيها وَهُم يَحمِلونَ أَوزارَهُم عَلىٰ ظُهورِهِم ۚ أَلا ساءَ ما يَزِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय वे लोग घाटे में रहे, जिन्होंने अल्लाह से मिलने को झुठलाया, यहाँ तक कि जब क़ियामत उनपर अचानक आ पहुँचेगी, तो कहेंगे : हाय अफ़सोस! उसपर जो हमने इसमें कोताही की। और वे अपने (पापों के) बोझ अपनी पीठों पर उठाए होंगे। सुन लो! बहुत बुरा बोझ है, जो वे उठाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Nuqsan mein pad gaye woh log jinhon ne Allah se apni mulaqaat ki ittila ko jhoot qarar diya, jab achanak woh ghadi aa jayegi to yahi log kahenge “afsos! Humse is maamle mein kaisi takseer hui ” aur inka haal yeh hoga ke apni peethon (backs) par apne gunaahon ka bojh laadhey huey hongey. Dekho! Kaisa bura bojh hai jo yeh utha rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak khasaray mein paray woh log jinhon ney Allah say milney ki takzeeb ki yahan tak kay jab woh moyyen waqt unn per dafatan aa phonchay ga kahen gay kay haaye afsos humari kotahi per jo iss kay baray mein hui aur halat inn ki yeh hogi kay woh apney baar apni peethon per laaday hongay khoob sunn lo kay buri hogi woh cheez jiss ko woh laaden gay
Devnagri Urdu (Maududi)नुक्सान में पड़ गए वो लोग जिन्होन ने अल्लाह से अपनी मुलाकात की इत्तिला को झूठ करार दिया, जब अचानक वो घड़ी आ जाएगी तो यही लोग कहेंगे "अफसोस! हमसे इस मामले में कैसी तकसीर हुई" और इनका हाल ये होगा के अपनी पीठ पर अपने गुनाहों का बोझ लड़े होंगे। देखो! कैसा बुरा बोझ है जो ये उठा रहे हैं
عَرَبِيوَمَا الحَياةُ الدُّنيا إِلّا لَعِبٌ وَلَهوٌ ۖ وَلَلدّارُ الآخِرَةُ خَيرٌ لِلَّذينَ يَتَّقونَ ۗ أَفَلا تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा सांसारिक जीवन खेल और मनोरंजन के सिवा कुछ नहीं, तथा निश्चय आख़िरत का घर उन लोगों के लिए बेहतर है जो (अल्लाह से) डरते हैं, तो क्या तुम नहीं समझते?
Roman Urdu (Maududi)Duniya ki zindagi to ek khel aur ek tamasha hai, haqeeqat mein aakhirat hi ka muqaam un logon ke liye behtar hai jo ziyan kaari se bachna chahte hain (seek to ward off their ruin), phir kya tumlog aqal se kaam na logey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur dunyawi zindagi to kuch bhi nahi ba-juz lahoo-o-laab kay. Aur daar-e-aakhirat mutaqqiyon kay liye behtar hai. Kiya tum sochtay samajhtay nahi ho
Devnagri Urdu (Maududi)दुनिया की जिंदगी तो एक खेल और एक तमाशा है, हकीकत में आखिरी ही का मुकाम उन लोगों के लिए बेहतर है जो जियान कारी से बचना चाहते हैं, फिर क्या तुम लोग अक्ल से काम ना लोगे
عَرَبِيقَد نَعلَمُ إِنَّهُ لَيَحزُنُكَ الَّذي يَقولونَ ۖ فَإِنَّهُم لا يُكَذِّبونَكَ وَلٰكِنَّ الظّالِمينَ بِآياتِ اللَّهِ يَجحَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम जानते हैं कि निश्चय (ऐ नबी!) आपको वह बात दुखी करती है, जो वे कहते हैं। तो वास्तव में वे आपको नहीं झुठलाते, परंतु वे अत्याचारी अल्लाह की आयतों ही का इनकार करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! Humein maloom hai ke jo baatein yeh log banate hain insey tumhein ranjj hota hai, lekin yeh log tumhein nahin jhutlatey balke yeh zalim dar asal Allah ki aayat ka inkar kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum khoob jantay hain kay aap ko inn kay aqwaal maghmoom kertay hain so yeh log aap ko jhoota nahi kehtay lekin yeh zalim to Allah ki aayaton ka inkar kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! हमें मालूम है कि जो बातें ये लोग बनाते हैं इनसे तुम्हें रंज होता है, लेकिन ये लोग तुम्हें नहीं झुठलाते हैं बल्के ये जालिम दार असल अल्लाह की आयत का इंकार कर रहे हैं
عَرَبِيوَلَقَد كُذِّبَت رُسُلٌ مِن قَبلِكَ فَصَبَروا عَلىٰ ما كُذِّبوا وَأوذوا حَتّىٰ أَتاهُم نَصرُنا ۚ وَلا مُبَدِّلَ لِكَلِماتِ اللَّهِ ۚ وَلَقَد جاءَكَ مِن نَبَإِ المُرسَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह आपसे पहले कई रसूल झुठलाए गए, तो उन्होंने अपने झुठलाए जाने और कष्ट दिए जाने पर सब्र किया, यहाँ तक कि उनके पास हमारी सहायता आ गई। तथा कोई अल्लाह की बातों को बदलने वाला नहीं और निःसंदेह आपके पास (उन) रसूलों के कुछ समाचार आ चुके हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tumse pehle bhi bahut se Rasool jhutlaye ja chuke hain, magar us takzeeb par aur un aziyaton (persecution) par jo unhein pahunchayi gayi unhon ne sabr kiya, yahan tak ke unhein hamari madad pahunch gayi. Allah ki baaton ko badalne ki taaqat kisi mein nahin hai, aur pichle Rasoolon ke saath jo kuch pesh aaya uski khabrein tumhein pahunch hi chuki hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur boht say payghumbar jo aap say pehlay huye hain unn ki bhi takzeeb ki jaa chuki hai so unhon ney iss per sabar hi kiya unn ki takzeeb ki gaee unn ko ezza phonchaee gaeen yahan tak kay humari imdad unn ko phonchi aur Allah ki baaton ka koi badalney wala nahi aur aap kay pass baaz payghumbaron ki baaz khabren phonch chuki hain
Devnagri Urdu (Maududi)तुमसे पहले भी बहुत से रसूल झुटलाए जा चुके हैं, मगर हमें तकज़ीब पर और उन अज़ियातों (उत्पीड़न) पर जो उन्हें पहुंच गई उनहों ने सब्र किया, यहां तक ​​के उन्हें हमारी मदद पहुंच गई। अल्लाह की बातों को बदलने की ताक़त किसी में नहीं है, और पिछले रसूलों के साथ जो कुछ पेश आया उसकी खबरें तुम्हें पाहुंच ही चुकी हैं
عَرَبِيوَإِن كانَ كَبُرَ عَلَيكَ إِعراضُهُم فَإِنِ استَطَعتَ أَن تَبتَغِيَ نَفَقًا فِي الأَرضِ أَو سُلَّمًا فِي السَّماءِ فَتَأتِيَهُم بِآيَةٍ ۚ وَلَو شاءَ اللَّهُ لَجَمَعَهُم عَلَى الهُدىٰ ۚ فَلا تَكونَنَّ مِنَ الجاهِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि आपपर उनकी विमुखता भारी गुज़र रही है, तो यदि आपसे हो सके कि धरती में कोई सुरंग अथवा आकाश में कोई सीढ़ी ढूँढ निकालें, फिर उनके पास कोई निशानी (चमत्कार) ले आएँ, (तो ले आएँ) और यदि अल्लाह चाहता, तो निश्चय उन्हें मार्गदर्शन पर एकत्र कर देता। अतः आप कदापि अज्ञानियों में से न हों।
Roman Urdu (Maududi)Taaham agar in logon ki be-rukhi tumse bardasht nahin hoti to agar tum mein kuch zoar hain to zameen mein koi surang dhundo ya Aasmaan mein seedi (ladder) lagao aur inke paas koi nishani laney ki koshish karo. Agar Allah chahta to in sabko hidayat par jamaa kar sakta tha, lihaza nadaan mat bano
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar aap ko inn ka aeyraaz giran guzarta hai to agar aap ko yeh qudrat hai kay zamin mein koi surang ya aasman mein koi seerhi dhoond lo phir koi moajza ley aao to kero aur agar Allah ko manzoor hota to inn sab ko raah-e-raast per jama ker deta so aap nadanon mein say na ho jaiye
Devnagri Urdu (Maududi)ताहम अगर लोगों की बे-रूखी तुमसे बर्दाश्त नहीं होती तो अगर तुम में कुछ ज़ोर है तो ज़मीन में कोई सुरंग ढूंढो या आसमान में सीढ़ी लगाओ और इनके पास कोई निशानी लाने की कोशिश करो। अगर अल्लाह चाहता तो इन सबको हिदायत पर जमा कर सकता था, लिहाजा नादान मत बनो
عَرَبِي۞ إِنَّما يَستَجيبُ الَّذينَ يَسمَعونَ ۘ وَالمَوتىٰ يَبعَثُهُمُ اللَّهُ ثُمَّ إِلَيهِ يُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)स्वीकार तो केवल वही लोग करते हैं, जो सुनते हैं। और जो मुर्दे हैं, उन्हें अल्लाह उठाएगा, फिर वे उसी की ओर लौटाए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Dawat e haqq par labbaik wahi log kehte hain jo sunne waley hain. Rahey murde, to unhein to Allah bas qabaron hi se uthayega aur phir woh (uski adalat mein pesh honay keliye) wapas laye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi log qabool kertay hain jo suntay hain. Murdon ko Allah zinda ker kay uthaye ga phir sab Allah hi ki taraf laye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)दावत ए हक पर लब्बैक वही लोग कहते हैं जो सुनने वाले हैं। रहे मुर्दे, तो उन्हें अल्लाह के पास बस क़बरों से ही उठाया जाएगा और फिर वो (उसकी अदालत में पेश होने के लिए) वापस ले जाएंगे
عَرَبِيوَقالوا لَولا نُزِّلَ عَلَيهِ آيَةٌ مِن رَبِّهِ ۚ قُل إِنَّ اللَّهَ قادِرٌ عَلىٰ أَن يُنَزِّلَ آيَةً وَلٰكِنَّ أَكثَرَهُم لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा : उस (नबी) पर उसके पालनहार की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं उतारी गई? आप कह दें : निःसंदेह अल्लाह इसका सामर्थ्य रखता है कि कोई निशानी उतारे, परंतु उनके अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log kehte hain ke is Nabi par uske Rubb ki taraf se koi nishani kyun nahin utri? Kaho, Allah nishani utaarne ki puri qudrat rakhta hai, magar in mein se aksar log naadani mein mubtila hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh log kehtay hain kay inn per koi moajza kiyon nahi nazil kiya gaya inn kay rab ki taraf say aap farma dijiye kay Allah Taalaa ko bey shak poori qudrat hai iss per kay woh moajza nazil farma dey lekin inn mein aksar bey khabar hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग कहते हैं के इस नबी पर उसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों नहीं उतरी? कहो, अल्लाह निशानी उतारने की पूरी क़ुदरत रखता है, मगर मेरे अंदर से अक्सर लोग नादानी में मुब्तिला हैं
عَرَبِيوَما مِن دابَّةٍ فِي الأَرضِ وَلا طائِرٍ يَطيرُ بِجَناحَيهِ إِلّا أُمَمٌ أَمثالُكُم ۚ ما فَرَّطنا فِي الكِتابِ مِن شَيءٍ ۚ ثُمَّ إِلىٰ رَبِّهِم يُحشَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा धरती में न कोई चलने वाला है तथा न कोई उड़ने वाला, जो अपने दो पंखों से उड़ता है, परंतु तुम्हारी जैसी जातियाँ हैं। हमने पुस्तक में किसी चीज़ की कमी नहीं छोड़ी। फिर वे अपने पालनहार की ओर एकत्र किए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Zameen mein chalne waley kisi jaanwar aur hawa mein paron (wings) se udne waley kisi parinde ko dekh lo, yeh sab tumhari hi tarah ki anwaa(communities) hain. Humne inki taqdeer ke nawishte(record) mein koi kasar nahin chodi hai, phir yeh sab apne Rubb ki taraf samete jatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jitney qisam kay jaandaar zamin per chalney walay hain aur jitney qisam kay parind janwar hain kay apnay dono baazoo’on per urtay hain inn mein koi qisam aisi nahi kay jo kay tumhari tarah kay giroh na hon hum ney daftar mein koi cheez nahi chori phir sab apney perwerdigar kay pass jama kiye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन में चलने वाले किसी जानवर और हवा में परों (पंखों) से उड़ने वाले किसी परिंदे को देख लो, ये सब तुम्हारी ही तरह की अनवा (समुदाय) है. हमने इनकी तकदीर के नविस्ते (रिकॉर्ड) में कोई कसर नहीं छोड़ी है, फिर ये सब अपने रब की तरफ जाते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِنا صُمٌّ وَبُكمٌ فِي الظُّلُماتِ ۗ مَن يَشَإِ اللَّهُ يُضلِلهُ وَمَن يَشَأ يَجعَلهُ عَلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने हमारी आयतों (निशानियों) को झुठलाया, वे बहरे और गूँगे है, अँधेरों में पड़े हुए हैं। जिसे अल्लाह चाहता है, पथभ्रष्ट कर देता है और जिसे चाहता है, सीधे मार्ग पर लगा देता है।
Roman Urdu (Maududi)Magar jo log hamari nishaniyon ko jhutlate hain woh behre (dumb) aur gungay hain, tareekiyon (darkness) mein padey huey hain, Allah jisey chahta hai bhatka deta hai aur jisey chahta hai seedhe raaste par laga deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log humari aayaton ki takzeeb kertay hain woh to tarah tarah ki zulmaton mein behray goongay ho rahey hain Allah jiss ko chahaye bey raah ker dey aur woh jiss ko chahaye seedhi raah laga dey
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जो लोग हमारे निशानियों को झुठलाते हैं वो बहरे (गूंगा) और गुंगे हैं, तारिकियों (अंधेरे) में पड़े हुए हैं, अल्लाह जिसे चाहता है है भटका देता है और जिसे चाहता है सीधे रास्ते पर लगा देता है
عَرَبِيقُل أَرَأَيتَكُم إِن أَتاكُم عَذابُ اللَّهِ أَو أَتَتكُمُ السّاعَةُ أَغَيرَ اللَّهِ تَدعونَ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) उनसे कहो, भला बताओ तो सही कि यदि तुमपर अल्लाह की यातना आ जाए, या तुमपर क़ियामत आ जाए, तो क्या तुम अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारोगे? यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)Inse kaho, zara gaur karke batao, agar kabhi tumpar Allah ki taraf se koi badi museebat aa jati hai ya aakhri gahdi aa pahunchti hai to kya us waqt tum Allah ke siwa kisi aur ko pukrate ho? Bolo agar tum sacchey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kahiye kay apney haal to batlao kay agar tum per Allah ka koi azab aa paray ya tum per qayamat hi aa phonchay to kiya Allah kay siwa kissi aur ko pukaro gay. Agar tum sachay ho
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, जरा गौर करके बताओ, अगर कभी तुमपर अल्लाह की तरफ से कोई बड़ी मुसीबत आ जाती है या आखिरी घड़ी आ जाती है तो क्या हम वक्त तुम अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारते हो? बोलो अगर तुम सच्चे हो
عَرَبِيبَل إِيّاهُ تَدعونَ فَيَكشِفُ ما تَدعونَ إِلَيهِ إِن شاءَ وَتَنسَونَ ما تُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि तुम उसी को पुकारोगे, फिर वह दूर कर देगा (उस विपत्ति को) जिसके लिए तुम उसे पुकारोगे, यदि उसने चाहा, और तुम भूल जाओगे जिसे साझी बनाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt tum Allah hi ko pukarte ho, phir agar woh chahta hai to is museebat ko tumpar se taal deta hai, aisey mauqon par tum apne thehraye huey shareekon ko bhool jatey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay khaas ussi ko pukaro gay phir jiss kay liye tum pukaro gay agar woh chahaye to uss ko hata bhi dey aur jin ko tum shareek thehratay ho unn sab ko bhool bhaal jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त तुम अल्लाह ही को पुकारते हो, फिर अगर वो चाहता है तो इस मुसीबत को तुमपर से ताल देता है, ऐसे मौके पर तुम अपने रुके हुए शरीकों को भूल जाते हो
عَرَبِيوَلَقَد أَرسَلنا إِلىٰ أُمَمٍ مِن قَبلِكَ فَأَخَذناهُم بِالبَأساءِ وَالضَّرّاءِ لَعَلَّهُم يَتَضَرَّعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने आपसे पहले कई समुदायों की ओर रसूल भेजे, फिर हमने उन्हें दरिद्रता और कष्ट के साथ पकड़ा, ताकि वे गिड़गिड़ाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Tumse pehle bahut si qaumon ki taraf humne Rasool bheje aur un qaumon ko masaib o alaam (with misfortune and hardship) mein mubtila kiya taa-ke woh aajizi (humbleness) ke saath hamare saamne jhuk jayein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney aur ummaton ki taraf bhi jo kay aap say pehlay guzar chuki hain payghumbar bhejay thay so hum ney unn ko tangdasti aur beemari say pakra takay woh izhar-e-ijz ker saken
Devnagri Urdu (Maududi)तुमसे पहले बहुत सी क़ौमों की तरफ हमने रसूल भेजा और उन क़ौमों को मसाइब ओ आलम (दुर्भाग्य और कठिनाई के साथ) में मुब्तिला किया ता-के वो आजिजी (विनम्रता) के साथ हमारे सामने झुक जाएं
عَرَبِيفَلَولا إِذ جاءَهُم بَأسُنا تَضَرَّعوا وَلٰكِن قَسَت قُلوبُهُم وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيطانُ ما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वे क्यों न गिड़गिड़ाए, जब उनपर हमारी यातना आई? परंतु उनके दिल कठोर हो गए तथा शैतान ने उनके लिए उसे सुंदर बना दिया, जो कुछ वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Pas jab hamari taraf se unpar sakhti aayi to kyun na unhon ne aajizi ikhtiyar(humbleness) ki? Magar unke dil to aur sakht ho gaye aur Shaytan ne unko itminaan dilaya ke jo kuch tum kar rahey ho khoob kar rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)So jab unn ko humari saza phonchi thi to unhon ney aajzi kiyon nahi ikhtiyar ki? Lekin unn kay quloob sakht hogaye aur shetan ney unn kay aemaal ko unn kay khayal mein aaraasta ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)पास जब हमारी तरफ से अनपर शक्ति आई तो क्यों न उन्होन ने आजिजी इख्तियार (विनम्रता) की? मगर उनके दिल तो और सख्त हो गए और शैतान ने उनको इत्मिनान दिला दिया के जो कुछ तुम कर रहे हो खूब कर रहे हो
عَرَبِيفَلَمّا نَسوا ما ذُكِّروا بِهِ فَتَحنا عَلَيهِم أَبوابَ كُلِّ شَيءٍ حَتّىٰ إِذا فَرِحوا بِما أوتوا أَخَذناهُم بَغتَةً فَإِذا هُم مُبلِسونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वे उसको भूल गए, जिसका उन्हें उपदेश दिया गया था, तो हमने उनपर हर चीज़ के द्वार खोल दिए। यहाँ तक कि जब वे उन चीज़ों पर खुश हो गए, जो उन्हें दी गई थीं, हमने उन्हें अचानक पकड़ लिया तो वे निराश होकर रह गए।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab unhon ne us naseehat ko, jo unhein ki gayi thi, bhula diya to humne har tarah ki khush-haaliyon ke darwaze unke liye khol diye, yahan tak ke jab woh un bakshihon mein jo unhein ata ki gayi thi khoob magan ho gaye to achanak humne unhein pakad liya aur ab haal yeh tha ke woh har khair se mayous thay
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab woh log unn cheezon ko bhoolay rahey jin ki unn ko naseehat ki jati thi to hum ney unn per her cheez kay darwazay kushada ker diye yahan tak kay jab unn cheezon per jo kay unn ko mili thin woh khoob itra gaye hum ney unn ko dafatan pakar liya phir to woh bilkul mayyus hogaye
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब उन्हें ने हमें हिदायत को, जो उन्हें मिल गई थी, भुला दिया तो हमने हर तरह की खुश-हालियों के दरवाजे उनके लिए खोल दिए, यहां तक ​​के जब वो उन बख्शीशों में जो उन्हें अता की गई थी खूब मगन हो गए तो अचानक हमने उन्हें पकड़ लिया और अब हाल ये था के वो हर खैर से मायुस थे
عَرَبِيفَقُطِعَ دابِرُ القَومِ الَّذينَ ظَلَموا ۚ وَالحَمدُ لِلَّهِ رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन लोगों की जड़ काट दी गई, जिन्होंने अत्याचार किया। और सब प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है, जो सारे संसारों का पालनहार है।
Roman Urdu (Maududi)Is tarah un logon ki jadh(root) kaat kar rakh di gayi jinhon ne zulm kiya tha aur tareef hai Allah Rabbul aalameen ke liye ( ke usne unki jadh kaat di)
Roman Urdu (Junagarhi)Phir zalim logon ki jarr kat gaee aur Allah Taalaa ka shukar hai jo tamam aalam ka perwerdigar hai
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह उन लोगों की जड़ (जड़) काट कर रख दी गई जिन्हों ने ज़ुल्म किया था और तारीफ है अल्लाह रब्बुल आलमीन के लिए (के उसने उनकी जद काट दी)
عَرَبِيقُل أَرَأَيتُم إِن أَخَذَ اللَّهُ سَمعَكُم وَأَبصارَكُم وَخَتَمَ عَلىٰ قُلوبِكُم مَن إِلٰهٌ غَيرُ اللَّهِ يَأتيكُم بِهِ ۗ انظُر كَيفَ نُصَرِّفُ الآياتِ ثُمَّ هُم يَصدِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी! आप कह दें कि भला बताओ तो सही कि यदि अल्लाह तुम्हारे सुनने तथा देखने की शक्ति छीन ले और तुम्हारे दिलों पर मुहर लगा दे, तो अल्लाह के सिवा कौन-सा पूज्य है, जो तुम्हें ये चीज़ें लाकर दे? देखो, हम कैसे तरह-तरह से आयतें बयान करते हैं, फिर (भी) वे मुँह फेर लेते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! Inse kaho, kabhi tumne yeh bhi socha ke agar Allah tumhari binayi (eye-sight) aur samaat (hearing) tumse cheen le aur tumhare dilon par mohar karde to Allah ke siwa aur kaun sa khuda hai jo yeh quwwatein tumhein wapas dila sakta ho? Dekho, kis tarah hum baar baar apni naishaniyan unke samne pesh karte hain aur phir yeh kis tarah unse nazar chura jatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kahiye kay yeh batlao agar Allah Taalaa tumhari sama’at aur basarat biluk ley ley aur tumhary dilon per mohar ker dey to Allah Taalaa kay siwa aur koi mabood hai kay yeh tum ko phir dey dey. Aap dekhiye to hum kiss tarah dalaeel ko mukhtalif pehloo’on say paish ker rahey hain phir bhi yeh aeyraaz kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अगर अल्लाह तुम्हारी बिनई (आँख-देखना) और समात (सुनना) तुमसे छीन ले और तुम्हारे दिलों पर मोहर करदे तो अल्लाह के सिवा और कौन सा खुदा है जो ये कुव्वतें तुम्हें वापस दिला सकता है? देखो, किस तरह हम बार-बार अपनी नैशनियां उनके सामने पेश करते हैं और फिर ये किस तरह उन्हें नजर चुरा लेते हैं
عَرَبِيقُل أَرَأَيتَكُم إِن أَتاكُم عَذابُ اللَّهِ بَغتَةً أَو جَهرَةً هَل يُهلَكُ إِلَّا القَومُ الظّالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें, भला बताओ तो सही कि यदि तुमपर अल्लाह की यातना अचानक या खुल्लम-खुल्ला आ जाए, तो क्या अत्याचारी लोगों के सिवा कोई और विनष्ट किया जाएगा?
Roman Urdu (Maududi)Kaho, kabhi tumne socha ke agar Allah ki taraf se achanak ya elaniya tumpar azaab aa jaye to kya zalim logon ke siwa koi aur halaak hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kahiye kay yeh batlao agar tum per Allah Taalaa ka azab aa paray khuwa achanak ya aelaaniya to kiya ba-juz zalim logon kay aur bhi koi halak kiya jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, कभी तुमने सोचा के अगर अल्लाह की तरफ से अचानक या एलानिया तुमपर अज़ाब आ जाए तो क्या जालिम लोगों के सिवा कोई और हलाक होगा
عَرَبِيوَما نُرسِلُ المُرسَلينَ إِلّا مُبَشِّرينَ وَمُنذِرينَ ۖ فَمَن آمَنَ وَأَصلَحَ فَلا خَوفٌ عَلَيهِم وَلا هُم يَحزَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हम रसूलों को केवल इसलिए भेजते हैं कि वे (आज्ञाकारियों को) शुभ सूचना दें तथा (अवज्ञाकारियों को) डराएँ। फिर जो व्यक्ति ईमान ले आए और अपना सुधार कर ले, तो उनपर कोई भय नहीं और न वे शोकाकुल होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Hum jo Rasool bhejte hain isi liye to bhejte hain ke woh neik kirdaar logon ke liye khush-khabri dene waley aur badh kirdaron ke liye darane waley hon. Phir jo log unki baat maan lein aur apne tarz e amal ki islah karlein unke liye kisi khauf aur ranjj ka mauqa nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum payghumbaron ko sirf iss wastay bheja kertay hain kay woh bisharat den aur darayen phir jo eman ley aaye aur durusti ker ley so unn logon per koi andesha nahi aur na woh maghmoom hongay
Devnagri Urdu (Maududi)हम जो रसूल भेजते हैं इसी के लिए तो भेजते हैं के वो नए किरदार लोगों के लिए खुश-खबरी देने वाले और बड़े किरदारों के लिए दाराने वाले माननीय। फिर जो लोग उनकी बात मान लें और अपनी तरज़ ए अमल की इस्लाह कार्लें उनके लिए कोई खौफ और रंज का मौका नहीं है
عَرَبِيوَالَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِنا يَمَسُّهُمُ العَذابُ بِما كانوا يَفسُقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया, उन्हें यातना पहुँचेगी इस कारणवश कि वे अवज्ञा करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo hamari aayat ko jhutlayein woh apni nafarmaniyon ki padash mein saza bhugat kar rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log humari aayaton ko jhoota batlayen unn ko azab phonchay ga ba-waja iss kay, kay woh na farmani kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जो हमारी आयतों को झुटलाएं वो अपनी नफ़रमानियों की याद में सज़ा भुगत कर रहेंगे
عَرَبِيقُل لا أَقولُ لَكُم عِندي خَزائِنُ اللَّهِ وَلا أَعلَمُ الغَيبَ وَلا أَقولُ لَكُم إِنّي مَلَكٌ ۖ إِن أَتَّبِعُ إِلّا ما يوحىٰ إِلَيَّ ۚ قُل هَل يَستَوِي الأَعمىٰ وَالبَصيرُ ۚ أَفَلا تَتَفَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें : मैं तुमसे यह नहीं कहता कि मेरे पास अल्लाह के ख़ज़ाने हैं, और न मैं परोक्ष (ग़ैब) का ज्ञान रखता हूँ, और न मैं तुमसे यह कहता हूँ कि मैं कोई फ़रिश्ता हूँ। मैं तो केवल उसी का अनुसरण करता हूँ, जो मेरी ओर वह़्य (प्रकाशना) की जाती है। आप कह दें : क्या अंधा और देखने वाला बराबर होते हैं? तो क्या तुम सोच-विचार नहीं करते?
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! Inse kaho, “main tumse yeh nahin kehta ke mere paas Allah ke khazane hain, na main gaib ka ilm rakhta hoon, aur na yeh kehta hoon ke main Farishta hoon. Main to sirf us wahee ki pairwi karta hoon jo mujhpar nazil ki jati hai”. Phir inse pucho kya andha aur aankhon wala dono barabar ho sakte hain? Kya tum gaur nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay na to mein tum say yeh kehta hun kay meray pass Allah kay khazaney hain aur na mein ghaib janta hun aur na mein tum say yeh kehta hun kay mein farishta hun. Mein to sirf jo kuch meray pass wahee aati hai uss ka ittabaa kerta hun aap kahiye kay andha aur beena kahin barabar ho sakta hai. So kiya tum ghor nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो, "मैं तुमसे ये नहीं कहता के मेरे पास अल्लाह के ख़ज़ाने हैं, ना मैं गैब का इल्म रखता हूँ, और ना ये कहता हूँ के मैं फ़रिश्ता हूँ। मैं तो सिर्फ हमें वही की जोड़ी कर्ता हूँ जो मुझपर नाज़िल की जाती है"। फिर इनसे पूछो क्या अंधा और आँखों वाला दोनों बराबर हो सकते हैं? क्या तुम गौर नहीं करते
عَرَبِيوَأَنذِر بِهِ الَّذينَ يَخافونَ أَن يُحشَروا إِلىٰ رَبِّهِم ۙ لَيسَ لَهُم مِن دونِهِ وَلِيٌّ وَلا شَفيعٌ لَعَلَّهُم يَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और इस (क़ुरआन) के द्वारा उन लोगों को डराएँ, जो इस बात का भय रखते हैं कि वे अपने पालनहार के पास (क़ियामत के दिन) एकत्र किए जाएँगे, उनके लिए उस (अल्लाह) के सिवा न कोई सहायक होगा और न कोई सिफ़ारिशी, ताकि वे (अल्लाह से) डरें।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! Tum is (ilm e wahee) ke zariye se un logon ko naseehat karo jo is baat ka khauf rakhte hain ke apne Rubb ke samne kabhi is haal mein pesh kiye jayenge ke uske siwa wahan koi (aisa zi iqteqar) na hoga jo unka haami o madadgaar ho, ya unki sifarish karey, Shayad ke (is nasihat se mutanabbeh hokar) woh khuda-tarsi ki rawish ikhtiyar karlein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aisay logon ko daraiye jo iss baat say andesha rakhtay hain kay apney rab kay pass aisi halat mein jama kiye jayen gay kay jitney ghair Allah hain na koi unn ka madadgar hoga aur na koi shafi hoga iss umeed per kay woh darr jayen
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! तुम इस (इल्म ए वही) के ज़रिये से उन लोगों को हिदायत करो जो इस बात का ख़ौफ़ रखते हैं कि अपने रब के सामने कभी इस हाल में पेश किये जायेंगे के उसके सिवा वहां कोई (ऐसा ज़ि इक्तेकर) ना होगा जो उनका हमी ओ मददगार हो, या उनकी सिफ़रिश करे, शायद के (है) हिदायत से मुतनब्बेह होकर) वो खुदा-तरसी की रवीश इख्तियार कार्लें
عَرَبِيوَلا تَطرُدِ الَّذينَ يَدعونَ رَبَّهُم بِالغَداةِ وَالعَشِيِّ يُريدونَ وَجهَهُ ۖ ما عَلَيكَ مِن حِسابِهِم مِن شَيءٍ وَما مِن حِسابِكَ عَلَيهِم مِن شَيءٍ فَتَطرُدَهُم فَتَكونَ مِنَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ नबी!) आप उन लोगों को (अपने से) दूर न करें, जो सुबह और शाम अपने पालनहार को पुकारते हैं, वे उसका चेहरा चाहते हैं। आपपर उनके हिसाब में से कुछ नहीं और न आपके हिसाब में से उनपर कुछ है कि आप उन्हें दूर हटा दें, फिर आप अत्याचारियों में से हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log apne Rubb ko raat din pukarte rehte hain aur uski khushnudi ki talab mein lagey huey hain unhein apne se door na phenko, unke hisaab mein se kisi cheez ka baar tumpar nahin hai aur tumhare hisab mein se kisi cheez ka baar unpar nahin. Ispar bhi agar tum unhein door phenko ge to zalimon mein shumar hogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn logon ko na nikaliye jo subha-o-shaam apney perwerdigar ki ibadat kertay hain khaas ussi ki raza ka qasad rakhtay hain. Unn ka hisab zara bhi aap kay mutalliq nahi aur aap ka hisab zara bhi unn kay mutalliq nahi kay aap unn ko nikal den. Werna aap zulm kerney walon mein say hojayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग अपने रब को रात दिन पुकारते रहते हैं और उसकी खुशनुदी की तालाब में लगे हुए हैं उन्हें अपने से दूर ना फेंको, उनके हिसाब में से किसी चीज का बार तुमपर नहीं है और तुम्हारे हिसाब में किसी चीज़ का बार ऊपर नहीं। इसपर भी अगर तुम उन्हें दूर फेंकोगे तो ज़ालिमों में शामिल होगे
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ فَتَنّا بَعضَهُم بِبَعضٍ لِيَقولوا أَهٰؤُلاءِ مَنَّ اللَّهُ عَلَيهِم مِن بَينِنا ۗ أَلَيسَ اللَّهُ بِأَعلَمَ بِالشّاكِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार हमने उनमें से कुछ को कुछ के द्वारा परीक्षा में डाला, ताकि वे कहें : क्या यही लोग हैं, जिनपर अल्लाह ने हमारे बीच में से उपकार किया है? क्या अल्लाह शुक्र करने वालों को अधिक जानने वाला नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Dar-asal humne is tarah in logon mein se baaz ko baaz ke zariye se aazmaish mein dala hai taa-ke woh inhein dekh kar kahein “ kya yeh hain woh log jinpar hamare darmiyan Allah ka fazal o karam hua hai?” Haan ! kya khuda apne shukar guzar bandon ko inse zyada nahin jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur issi tarah say hum ney baaz ko baaz kay zariye say aazmaeesh mein daal rakha hai takay yeh log kaha keren kiya yeh log hain kay hum sab mein say inn per Allah Taalaa ney fazal kiya hai. Kiya yeh baat nahi hai kay Allah Taalaa shukar guzaron ko khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)दर-असल हमें इस तरह लोगों में से बाज़ को बाज़ के ज़रिये से आज़माइश में डाला गया है ता-के वो इन्हें देख कर कहें "क्या ये हैं वो लोग जिनपर हमारे दरमियान अल्लाह का फ़ज़ल ओ करम हुआ है?" हान ! क्या खुदा अपने शुक्र गुजर बंदों को इनसे ज्यादा नहीं जानता है
عَرَبِيوَإِذا جاءَكَ الَّذينَ يُؤمِنونَ بِآياتِنا فَقُل سَلامٌ عَلَيكُم ۖ كَتَبَ رَبُّكُم عَلىٰ نَفسِهِ الرَّحمَةَ ۖ أَنَّهُ مَن عَمِلَ مِنكُم سوءًا بِجَهالَةٍ ثُمَّ تابَ مِن بَعدِهِ وَأَصلَحَ فَأَنَّهُ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ नबी!) जब आपके पास वे लोग आएँ, जो हमारी आयतों (क़ुरआन) पर ईमान रखते हैं, तो आप कह दें कि तुमपर सलाम (शांति) है। तुम्हारे रब ने दया करना अपने ऊपर अनिवार्य कर लिया है कि निःसंदेह तुममें से जो व्यक्ति अज्ञानतावश कोई बुराई करे, फिर उसके पश्चात् तौबा (क्षमा याचना) करे और अपना सुधार कर ले, तो निश्चय वह (अल्लाह) अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Jab tumhare paas woh log aayein jo hamari aayat par iman latey hain to unse kaho “tumpar salamati hai tumhare Rubb ne reham o karam ka shewa apne upar lazim karliya hai. Yeh uska reham o karam hi hai ke agar tum mein se koi nadaani ke saath kisi burayi ka irtikaab kar baitha ho phir uske baad tawba karey aur islah karle to woh usey maaf kardeta hai aur narmi se kaam leta hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh log jab aap kay pass ayen jo humari aayaton per eman rakhtay hain to (yun) keh dijiye kay tum per salamti hai tumharay rab ney meharbani farmana apney zimmay muqarrar ker liya hai kay jo shaks tum mein say bura kaam ker bethay jahalat say phir woh iss kay baad tauba ker ley aur islah rakhay to Allah (ki shaan hai kay woh) bari maghfirat kerney wala aur bari rehmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जब तुम्हारे पास वो लोग आएं जो हमारी आयत पर ईमान लाते हैं तो उनसे कहो "तुम्हारे सलामती है तुम्हारे रब ने रहम ओ करम का शेवा अपने ऊपर लाज़िम करलिया है। ये उसका रहम ओ करम ही है के अगर तुम में से कोई नादानी के साथ किसी बुराई का इर्तिकाब कर बैठा हो फिर उसके बाद तौबा करे और इस्लाह करले तो वो उसे माफ करता है और नरमी से काम लेता है”
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ نُفَصِّلُ الآياتِ وَلِتَستَبينَ سَبيلُ المُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार हम आयतों को खोलकर बयान करते हैं और ताकि अपराधियों का मार्ग स्पष्ट हो जाए।
Roman Urdu (Maududi)Aur is tarah hum apni nishaniyan khol khol kar pesh karte hain taa-ke mujreemon ki raah bilkul numayan ho jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Issi tarah hum aayaat ki tafseel kertay rehtay hain aur takay mujrimeen ka tareeqa zahir hojaye
Devnagri Urdu (Maududi)और इस तरह हम अपनी निशानियां खोल कर पेश करते हैं ता-के मुजरिमों की राह बिल्कुल नुमायन हो जाये
عَرَبِيقُل إِنّي نُهيتُ أَن أَعبُدَ الَّذينَ تَدعونَ مِن دونِ اللَّهِ ۚ قُل لا أَتَّبِعُ أَهواءَكُم ۙ قَد ضَلَلتُ إِذًا وَما أَنا مِنَ المُهتَدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप (मुश्रिकों से) कह दें : निःसंदेह मुझे मना किया गया है कि मैं उनकी इबादत करूँ, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो। आप कह दें : मैं तुम्हारी इच्छाओं के पीछे नहीं चलता। निश्चय मैं उस समय पथभ्रष्ट हो गया और मैं मार्गदर्शन पाने वालो में से न रहा।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! Inse kaho ke tum log Allah ke siwa jin dusron ko pukarte ho unki bandagi karne se mujhey manah kiya gaya hai. Kaho, main tumhari khwahishat ki pairwi nahin karunga, agar maine aisa kiya to gumraah ho gaya, raah e raast paney walon mein se na raha
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay mujh ko iss say moomaniyat ki gaee hai kay unn ki ibadat keroon jin ko tum log Allah Taalaa ko chor ker pukartay ho. Aap keh dijiye kay mein tumhari khuwaishaat ki ittabaa na keroon kiyon kay iss halat mein to mein bey raah hojaoon ga aur raah-e-raast per chalney walon mei na rahoon ga
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के तुम लोग अल्लाह के सिवा जिन दूसरों को पुकारते हो उनकी बंदगी करने से मुझे मना किया गया है। कहो, मैं तुम्हारी ख्वाहिश की जोड़ी नहीं बनाऊंगा, अगर मैंने ऐसा किया तो गुमराह हो गया, राह ए रास्ते पाने वालों में से ना रहा
عَرَبِيقُل إِنّي عَلىٰ بَيِّنَةٍ مِن رَبّي وَكَذَّبتُم بِهِ ۚ ما عِندي ما تَستَعجِلونَ بِهِ ۚ إِنِ الحُكمُ إِلّا لِلَّهِ ۖ يَقُصُّ الحَقَّ ۖ وَهُوَ خَيرُ الفاصِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि मैं अपने पालनहार की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर क़ायम हूँ और तुमने उसे झुठला दिया है। मेरे पास वह चीज़ नहीं है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे हो। निर्णय अल्लाह के सिवा किसी के अधिकार में नहीं। वह सत्य का वर्णन करता है और वही निर्णय करने वालों में सबसे बेहतर है।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, main apne Rubb ki taraf se ek daleel e roshan par qayam hoon aur tumne usey jhutla diya hai, ab mere ikhtiyar mein woh cheez hai nahin jiske liye tum jaldi macha rahey ho. Faisley ka sara ikhtiyar Allah ko hai, wahi amr e haqq bayan karta hai aur wahi behtareen faisla karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay meray pass to aik daleel hai meray rab ki taraf say aur tum iss ki takzeeb kertay ho jiss cheez ki tum jald baazi ker rahey ho woh meray pass nahi. Hukum kissi ka nahi ba-juz Allah Taalaa kay Allah Taalaa waqaee baat ko batla deta hai aur sab say acha faisla kerney wala wohi hai
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, मैं अपने रब की तरफ से एक दलील ए रोशन पर कायम हूं और तुमने उसे झुठला दिया है, अब मेरे इख्तियार में वो चीज है नहीं जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे हो। फ़ैसले का सारा इख़्तियार अल्लाह को है, वही अमर ए हक़ बयान करता है और वही बेहतरीन फ़ैसला करने वाला है
عَرَبِيقُل لَو أَنَّ عِندي ما تَستَعجِلونَ بِهِ لَقُضِيَ الأَمرُ بَيني وَبَينَكُم ۗ وَاللَّهُ أَعلَمُ بِالظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : यदि वाक़ई मेरे पास वह चीज़ होती जो तुम जल्दी माँग रहे हो, तो हमारे और तुम्हारे बीच मामले का निर्णय अवश्य कर दिया जाता तथा अल्लाह अत्याचारियों को अधिक जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, agar kahin woh cheez mere ikhtiyar mein hoti jiski tum jaldi macha rahey ho to mere aur tumhare darmiyan kabhi ka faisla ho chuka hota, magar Allah zyada behtar jaanta hai ke zalimon ke saath kya maamla kiya jana chahiye
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay agar meray pass woh cheez hoti jiss ka tum taqaza ker rahey ho to mera aur tumhara bahumi qissa-e-faisal ho chuka hota aur zalimon ko Allah Taalaa khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, अगर कहीं वो चीज़ मेरे इख़्तियार में होती जिसकी तुम जल्दी मचा रहे हो तो मेरे और तुम्हारे दरमियान कभी का फैसला हो चूका होता, मगर अल्लाह ज़्यादा बेहतर जानता है के जालिमों के साथ क्या मामला जाना चाहिए
عَرَبِي۞ وَعِندَهُ مَفاتِحُ الغَيبِ لا يَعلَمُها إِلّا هُوَ ۚ وَيَعلَمُ ما فِي البَرِّ وَالبَحرِ ۚ وَما تَسقُطُ مِن وَرَقَةٍ إِلّا يَعلَمُها وَلا حَبَّةٍ في ظُلُماتِ الأَرضِ وَلا رَطبٍ وَلا يابِسٍ إِلّا في كِتابٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसी (अल्लाह) के पास ग़ैब (परोक्ष) की कुंजियाँ हैं, उन्हें उसके सिवा कोई नहीं जानता। तथा वह जानता है जो कुछ थल और जल में है और कोई पत्ता नहीं गिरता, परंतु वह उसे जानता है। और धरती के अँधेरों में कोई दाना नहीं और न कोई गीली चीज़ है और न कोई सूखी चीज़, परंतु वह एक स्पष्ट पुस्तक में (अंकित) है।
Roman Urdu (Maududi)Usi ke paas gaib ki kunjiyan hain jinhein uske siwa koi nahin jaanta, bahr o barr (land and in the sea) mein jo kuch hai sabse woh waqif hai, darakht se girne wala koi patta aisa nahin jiska usey ilm na ho, zameen ke tareek (dark) pardon mein koi dana (grain) aisa nahin jissey woh bakhabar na ho, khusk o tarr (green or dry) sab kuch ek khuli kitab mein likha hua hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa hi kay pass hain ghaib ki kunjiyan (khazaney) inn ko koi nahi janta ba-juz Allah kay. Aur woh tamam cheezon ko janta hai jo kuch khushki mein hain aur jo kuch daryaon mein hain aur koi patta nahi girta magar woh iss ko bhi janta hai aur koi dana zamin kay tareek hisson mein nahi parta aur na koi tarr aur na koi khush cheez girti hai magar yeh sab kitab-e-mubeen mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)उसके पास गैब की कुंजी हैं जिनके पास उसके सिवा कोई नहीं जानता, बाहर ओ बर्र (जमीन और समुद्र में) में जो कुछ है सबसे वो वाकिफ है, दरख्त से गिरने वाला कोई पत्ता ऐसा नहीं जिसका उसे इल्म ना हो, ज़मीन के तारिक (अंधेरा) माफ़ में कोई दाना (अनाज) ऐसा नहीं जिसे वो बाख़बर ना हो, ख़ुस्क ओ तर (हरा या सूखा) सब कुछ एक खुली किताब में लिखा हुआ है
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي يَتَوَفّاكُم بِاللَّيلِ وَيَعلَمُ ما جَرَحتُم بِالنَّهارِ ثُمَّ يَبعَثُكُم فيهِ لِيُقضىٰ أَجَلٌ مُسَمًّى ۖ ثُمَّ إِلَيهِ مَرجِعُكُم ثُمَّ يُنَبِّئُكُم بِما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वही है, जो रात को तुम्हारी रूह़ क़ब्ज़ कर लेता है तथा जानता है जो कुछ तुमने दिन में कमाया। फिर वह तुम्हें उस (दिन) में उठा देता है, ताकि निर्धारित अवधि पूरी की जाए। फिर उसी की ओर तुम्हारा लौटना है, फिर वह तुम्हें बताएगा जो कुछ तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jo raat ko tumhari roohein (souls) qabz karta hai aur din ko jo kuch tum karte ho usey jaanta hai, phir dusre roz woh tumhein isi karobaar ke aalam mein wapas bhej deta hai taa-ke zindagi ki muqarrar muddat puri ho. Aakhir e kaar usi ki taraf tumhari wapsi hai, phir woh tumhein bata dega ke tum kya karte rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh aisa hai kay raat mein tumhari rooh ko (aik gona) qabz ker deta hai aur jo kuch tum din mein kertay ho uss ko janta hai phir tum ko jaga uthata hai takay miyaad-e-moyyen tamam ker di jaye phir ussi ki taraf tum ko jana hai phir tum ko batlaye ga jo kuch tum kiya kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जो रात को तुम्हारी रूहें (आत्माएं) क़ब्ज़ करता है और दिन को जो कुछ तुम करते हो उसे जानता है, फिर दूसरे रोज़ वो तुम्हें इसी करोबार के आलम में वापस भेज देता है ता-के जिंदगी की मुकर्रर मुद्दत पूरी हो। आख़िर ए कार उसकी तरफ तुम्हारी वापसी है, फिर वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या करते रहोगे
عَرَبِيوَهُوَ القاهِرُ فَوقَ عِبادِهِ ۖ وَيُرسِلُ عَلَيكُم حَفَظَةً حَتّىٰ إِذا جاءَ أَحَدَكُمُ المَوتُ تَوَفَّتهُ رُسُلُنا وَهُم لا يُفَرِّطونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वही अपने बंदों पर ग़ालिब (हावी) है और वह तुमपर रक्षकों को भेजता है। यहाँ तक कि जब तुममें से किसी को मौत आती है, तो हमारे फ़रिश्ते उसका प्राण निकाल लेते हैं और वे कोताही नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Apne bandon par woh puri qudrat rakhta hai aur tumpar nigrani karne waley muqarrar karke bhejta hai, yahan tak ke jab tum mein se kisi ki maut ka waqt aa jata hai to uske bheje huey Farishtey iski jaan nikal lete hain aur apna farz e anjaam dene mein zara kotahi(neglect) nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wohi apney bandon kay upper ghalib hai bar tar hai aur tum per nigehdaasht rakhney wala bhejta hai yahan tak kay jab tum mein say kissi ko maut aa phonchti hai uss ki rooh humaray bhejay huye farishtay qabz ker letay hain aur woh zara kotahi nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)अपने बंदों पर वो पूरी क़ुदरत रखता है और तुम्हारे निगरानी करने वाले मुकर्रर करके भेजता है, यहाँ तक के जब तुम में से किसी की मौत का वक़्त आ जाता है तो उसके भेजे हुए फरिश्ते इसकी जान निकल लेते हैं और अपना फर्ज ए अंजाम देने में जरा कोटाही (उपेक्षा) नहीं करते
عَرَبِيثُمَّ رُدّوا إِلَى اللَّهِ مَولاهُمُ الحَقِّ ۚ أَلا لَهُ الحُكمُ وَهُوَ أَسرَعُ الحاسِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वे अल्लाह की ओर लौटाए जाएँगे, जो उनका वास्तविक स्वामी है। सावधान! उसी को निर्णय करने का अधिकार है और वही सब हिसाब लेने वालों से अधिक शीध्र हिसाब लेने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Phir sabke sab Allah , apne haqiqi aaqa ki taraf wapas laye jatey hain. Khabardar ho jao, faisle ke sarey ikhtiyarat usi ko haasil hain aur woh hisab lene mein bahut tez hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir sab apney maalik-e-haqeeqi kay pass laye jayen gay. Khoob sunn lo faisla Allah hi ka hoga aur woh boht jald hisab ley ga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर सबके सब अल्लाह, अपने हकीकी आका की तरफ वापस ले लिए जाते हैं। ख़बरदार हो जाओ, फ़ैसले के सारे इख़तियारत उसी को हासिल हैं और वो हिसाब लेने में बहुत तेज़ है
عَرَبِيقُل مَن يُنَجّيكُم مِن ظُلُماتِ البَرِّ وَالبَحرِ تَدعونَهُ تَضَرُّعًا وَخُفيَةً لَئِن أَنجانا مِن هٰذِهِ لَنَكونَنَّ مِنَ الشّاكِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) उनसे पूछिए कि थल तथा जल के अँधेरों में तुम्हें कौन बचाता है? तुम उसे गिड़गिड़ाकर और चुपके-चुपके पुकारते हो कि निःसंदेह यदि वह हमें इससे बचा ले, तो हम अवश्य शुक्र करने वालों में से हो जाएँगे?
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! Insey pucho, sehra aur samandar ki tareekiyon (darkness) mein kaun tumhein khatraat se bachata hai? Kaun hai jissey tum (museebat ke waqt) gidhgida, gidhgida kar aur chupke chupke duaein maangte ho? Kissey kehte ho ke agar is balaa se tu nay humko bacha liya to hum zaroor shukar-guazar honge
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kahiye kay woh kaun hai jo tum ko khushki aur darya ki zulmat say nijat deta hai. Tum uss ko pukartay ho girr girra ker aur chupkay chupkay kay agar tu hum ko inn say nijat dey dey to hum zaroor shukar kerney walon mein say ho jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! इनसे पूछो, सेहरा और समंदर की तारीखों में कौन तुम्हें खतरे से बचाता है? कौन है जिसकी तुम (मुसीबत के वक्त) गिड़गिड़ा, गिड़गिड़ा कर और चुपके-चुपके दुआएं मांगते हो? किस्से कहते हो के अगर इस बला से तू नहीं हमको बचा लिया तो हम जरूर शुक्रगुजार होंगे
عَرَبِيقُلِ اللَّهُ يُنَجّيكُم مِنها وَمِن كُلِّ كَربٍ ثُمَّ أَنتُم تُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : अल्लाह ही तुम्हें इससे तथा प्रत्येक संकट से बचाता है। फिर (भी) तुम उसका साझी बनाते हो!
Roman Urdu (Maududi)Kaho, Allah tumhein ussey aur har takleef se nijaat deta hai phir tum dusron ko uska shareek thehrate ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay Allah hi tum ko inn say nijat deta hai aur her ghum say tum phir bhi shirk kerney lagtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, अल्लाह तुम्हें उसमें और हर तकलीफ से निजात देता है फिर तुम दूसरों को उसका शरीक ठहरते हो
عَرَبِيقُل هُوَ القادِرُ عَلىٰ أَن يَبعَثَ عَلَيكُم عَذابًا مِن فَوقِكُم أَو مِن تَحتِ أَرجُلِكُم أَو يَلبِسَكُم شِيَعًا وَيُذيقَ بَعضَكُم بَأسَ بَعضٍ ۗ انظُر كَيفَ نُصَرِّفُ الآياتِ لَعَلَّهُم يَفقَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप (उनसे) कह दें : वही इसका सामर्थ्य रखता है कि तुमपर तुम्हारे ऊपर से यातना भेज दे, या तुम्हारे पैरों के नीचे से, या तुम्हें विभिन्न समूह बनाकर परस्पर भिड़ा दे और तुममें से कुछ को कुछ की लड़ाई (का स्वाद) चखा दे। देखिए, हम कैसे आयतों को विभिन्न प्रकार से बयान करते हैं, ताकि वे समझें।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, woh ispar qadir hai ke tumpar koi azaab upar se nazil karde, ya tumhare qadamon ke nichey se barpa karde, ya tumhein girohon mein taqseem karke ek giroh ko dusre giroh ki taqat ka maza chakhwa de. Dekho, hum kis tarah baar baar mukhtalif tareeqon se apni nishaniyan inke saamne pesh kar rahey hain shayad ke yeh haqeeqat ko samajh lein
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kahiye kay iss per bhi wohi qadir hai kay tum per koi azab tumharay upper say bhej dey ya tumharay paon talay say ya kay tum ko giroh giroh ker kay sab ko bhira dey aur tumharay aik doosray ki laraee chakha dey. Aap dekhiye to sahi hum kiss tarah dalaeel mukhtalif pehloo’on say biyan kertay hain shayad woh samajh jayen
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, वह इसपर कादिर है के तुमपर कोई अजाब ऊपर से नाज़िल करदे, या तुम्हारे क़दमों के नीचे से बरपा करदे, या तुम्हें गिरोहों में तकसीम करके एक गिरोह को दूसरे गिरोह की ताकत का मजा चखवा दे। देखो, हम किस तरह बार-बार मुखतलिफ़ तरीक़ों से अपनी निशानियाँ इनके सामने पेश कर रहे हैं शायद के ये हकीकत को समझ लें
عَرَبِيوَكَذَّبَ بِهِ قَومُكَ وَهُوَ الحَقُّ ۚ قُل لَستُ عَلَيكُم بِوَكيلٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) आपकी जाति ने इस (क़ुरआन) को झुठला दिया, हालाँकि वह सत्य है।आप कह दें : मैं हरगिज़ तुमपर कोई निरीक्षक नहीं हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Tumhari qaum uska inkar kar rahi hai halaanke woh haqeeqat hai. Insey kehdo ke main tumpar hawaladaar nahin banaya gaya hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aap ki qom iss ki takzeeb kerti hai halankay woh yaqeeni hai. Aap keh dijiye kay mein tum per taaeenaat nahi kiya gaya hun
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारी क़ौम उसका इनकार कर रही है हलाँके वो हकीकत है। इनसे कहदो के मैं तुमपर हवालादार नहीं बना गया हूं
عَرَبِيلِكُلِّ نَبَإٍ مُستَقَرٌّ ۚ وَسَوفَ تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)प्रत्येक सूचना का एक समय नियत है और तुम शीघ्र ही जान लोगे।
Roman Urdu (Maududi)Har khabar ke zahoor mein aane ka ek waqt muqarrar hai, anqareeb tumko khud anjaam maloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Her khabar (kay waqoo) ka aik waqt hai aur jald hi tum ko maloom hojaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)हर खबर के जहूर में आने का एक वक्त मुकर्रर है, करीब तुमको खुद अंजाम मालूम हो जाएगा
عَرَبِيوَإِذا رَأَيتَ الَّذينَ يَخوضونَ في آياتِنا فَأَعرِض عَنهُم حَتّىٰ يَخوضوا في حَديثٍ غَيرِهِ ۚ وَإِمّا يُنسِيَنَّكَ الشَّيطانُ فَلا تَقعُد بَعدَ الذِّكرىٰ مَعَ القَومِ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब आप उन लोगों को देखें, जो हमारी आयतों के विषय में (उपहास के साथ) बात करते हैं, तो उनसे मुँह फेर लें, यहाँ तक कि वे उसके अलावा बात में लग जाएँ, और यदि कभी शैतान आपको भुला दे, तो याद आ जाने के बाद ऐसे अत्याचारी लोगों के साथ न बैठें।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Muhammad)! Jab tum dekho ke log hamari aayat par nukhta chiniyan (engaged in blasphemy) kar rahey hain to unke paas se hat jao yahan tak ke woh is guftagu ko chodh kar dusri baaton mein lag jayein aur agar kabhi shaytan tumhein bhulawe mein daal de to jis waqt tumhein is galati ka ehsaas ho jaye uske baad phir aisey zalim logon ke paas na baitho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab aap unn logon ko dekhen jo humari aayaat mein aib joee ker rahey hain to inn logon say kinara kash hojayen yahan tak kay woh kissi aur baat mein lagg jayen aur agar aap ko shetan bhula dey to yaad aaney kay baad phir aisay zalim logon kay sath mat bethen
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ मुहम्मद)! जब तुम देखो के लोग हमारी आयत पर नुक्ता चिनियां कर रहे हैं तो उनके पास से हट जाओ यहां तक ​​के वो इस गुफ्तगू को छोड़ कर दूसरी बातों में लग जाएं और अगर कभी शैतान तुम्हें भुलावे में डाल दे तो जिसका वक्त तुम्हें इस गलती का एहसास हो जाए उसके बाद फिर ऐसे जालिम लोगों के पास न बैठो
عَرَبِيوَما عَلَى الَّذينَ يَتَّقونَ مِن حِسابِهِم مِن شَيءٍ وَلٰكِن ذِكرىٰ لَعَلَّهُم يَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन लोगों पर जो अल्लाह से डरते हैं, इनके हिसाब का कुछ भार नहीं है, परंतु याद दिलाना है, ताकि वे बच जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Unke hisaab mein se kisi cheez ki zimmedari parheizgaar logon par nahin hai, albatta naseehat karna unka farz hai shayad ke woh galat rawi se bach jayein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log perhezgar hain unn per inn ki baaz purs ka koi asar na phonchay ga aur lekin inn kay zimmay naseehat ker dena hai shayad woh bhi taqwa ikhtiyar keren
Devnagri Urdu (Maududi)उनके हिसाब में से किसी चीज़ की ज़िम्मेदारी नहीं, लेकिन हिदायत करना उनका फ़र्ज़ है शायद के वो गलत रावी से बच जाएँ
عَرَبِيوَذَرِ الَّذينَ اتَّخَذوا دينَهُم لَعِبًا وَلَهوًا وَغَرَّتهُمُ الحَياةُ الدُّنيا ۚ وَذَكِّر بِهِ أَن تُبسَلَ نَفسٌ بِما كَسَبَت لَيسَ لَها مِن دونِ اللَّهِ وَلِيٌّ وَلا شَفيعٌ وَإِن تَعدِل كُلَّ عَدلٍ لا يُؤخَذ مِنها ۗ أُولٰئِكَ الَّذينَ أُبسِلوا بِما كَسَبوا ۖ لَهُم شَرابٌ مِن حَميمٍ وَعَذابٌ أَليمٌ بِما كانوا يَكفُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप उन लोगों को छोड़ दें, जिन्होंने अपने धर्म को खेल और मनोरंजन बना लिया और उन्हें सांसारिक जीवन ने धोखे में डाल रखा है। आप इस (क़ुरआन) के द्वारा उपदेश दें कि कहीं कोई प्राणी अपने कमाए हुए के बदले विनाश में न डाल दिया जाए, उसके लिए अल्लाह के सिवा कोई न कोई सहायक हो और न कोई सिफ़ारिश करने वाला। और यदि वह हर प्रकार की छुड़ौती दे, तो उससे न ली जाए। यही लोग हैं जो विनाश के हवाले किए गए, उसके बदले जो उन्होंने कमाया। उनके लिए पीने को खौलता हुआ पानी तथा दर्दनाक यातना है, इस कारण कि वे कुफ़्र करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Chodo un logon ko jinhon ne apne deen ko khel aur tamasha bana rakkha hai aur jinhein duniya ki zindagi fareb mein mubtila kiye huey hai. Haan magar yeh Quran suna kar naseehat aur tambeeh (warn) karte raho ke kahin koi shaks apne kiye kartooton ke wabal mein giraftar na ho jaye, aut giraftar bhi is haal mein ho ke Allah se bachane wala koi haami o madadgaar aur koi sifarishi iske liye na ho, aur agar woh har mumkin cheez fidiye mein dekar chootna chahe to woh bhi ussey qabool na ki jaye, kyunke aisey log to khud apni kamayi ke nateeje mein pakde jayenge, inko to apne inkar e haqq ke muawaze mein khaulta(boiling) hua pani peenay ko aur dardnaak azaab bhugatne ko milega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aisay logon say bilkul kinara kash rahen jinhon ney apney deen ko khel tamasha bana rakha hai aur dunyawi zindagi ney unhen dhokay mein daal rakha hai aur iss quran kay zariye say naseehat bhi kertay rahen takay koi shaks apney kirdaar kay sabab (iss tarah) na phans jaye kay koi ghair Allah uss ka na madagar ho aur na sifarshi aur yeh keyfiyar ho kay agar duniya bhar ka maawza bhi dey daalay tab bhi uss say na liya jaye. Aisay hi hain kay apney kirdaar kay sabab phans gaye unn kay liye nihayat tez garam pani peeney kay liye hoga aur dard naak saza hogi apney kufur kay sabab
Devnagri Urdu (Maududi)छोड़ो उन लोगों को जिन्हों ने अपने दीन को खेल और तमाशा बना रक्खा है और जिन्होनें दुनिया की जिंदगी फरेब में मुब्तिला किये हुए हैं। हां मगर ये कुरान सुना कर हिदायत और तम्बीह (चेतावनी) करते रहो कि कहीं कोई शक्स अपने किए कार्टूनों के जवाब में गिरफ़्तार ना हो जाए, और गिरफ़्तार भी इस हाल में हो के अल्लाह से बचाने वाला कोई हमी ओ मददगार और कोई सिफ़री इसके लिए ना हो, और अगर वो हर मुमकिन चीज़ फ़िदिये में देकर छूटना चाहे तो वो भी उसे क़बूल ना की जाए, क्योंकि ऐसे लोग तो खुद अपनी कमाई के नाते में पकड़े जाएंगे, इनको तो अपने इनकार ए हक के मुआवज़े में खौलता (उबलता हुआ) हुआ पानी पीने को और दर्दनक अज़ाब भुगतने को मीलेगा
عَرَبِيقُل أَنَدعو مِن دونِ اللَّهِ ما لا يَنفَعُنا وَلا يَضُرُّنا وَنُرَدُّ عَلىٰ أَعقابِنا بَعدَ إِذ هَدانَا اللَّهُ كَالَّذِي استَهوَتهُ الشَّياطينُ فِي الأَرضِ حَيرانَ لَهُ أَصحابٌ يَدعونَهُ إِلَى الهُدَى ائتِنا ۗ قُل إِنَّ هُدَى اللَّهِ هُوَ الهُدىٰ ۖ وَأُمِرنا لِنُسلِمَ لِرَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दीजिए : क्या हम अल्लाह के सिवा उसको पुकारें, जो न हमें लाभ पहुँचा सके और न हमें हानि पहुँचा सके और हम अपनी एड़ियों पर फेर दिए जाएँ, इसके बाद कि अल्लाह ने हमें मार्गदर्शन प्रदान किया है, उस व्यक्ति की तरह जिसे शैतानों ने धरती में बहका दिया, इस हाल में कि चकित है, उसके कुछ साथी हैं जो उसे सीधे मार्ग की ओर बुला रहे हैं कि हमारे पास चला आ। आप कह दें कि निःसंदेह अल्लाह का दर्शाया हुआ मार्ग ही असल मार्ग है और हमें आदेश दिया गया है कि हम सारे संसारों के पालनहार के आज्ञाकारी हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! Insey pucho, kya hum Allah ko chodh kar unko pukarein jo na humein nafa de sakte hain na nuksaan? Aur jabke Allah humein seedha raasta dikha chuka hai to kya ab hum ultey paon phir jayein? Kya hum apna haal us shaks ka sa karlein jisey Shaytaano ne sehra mein bhatka diya ho aur woh hairan o sargardan phir raha ho, daran haal yeh ke uske saathi usey pukar rahey hon ke idhar aa yeh seedhi raah maujood hai? Kaho, haqeeqat mein saheeh rehnumayi to sirf Allah hi ki rehnumayi hai aur uski taraf se humein yeh hukum mila hai ke maalik e qayinaat ke aagey sar e itaat kham kardo
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay kiya hum Allah Taalaa kay siwa aisi cheez ko pukaren kay na woh hum ko nafa phonchaye aur na hum ko nuksan phonchaye aur kiya hum ultay phir jayen iss kay baad kay hum ko Allah Taalaa ney hidayat ker di hai jaisay koi shaks ho kay uss ko shetanon ney kahin jangal mein bey raah ker diya ho aur woh bhatakta phirta ho uss kay kuch sathi bhi hon kay woh uss ko theek raastay ki taraf bula rahey hon kay humaray pass aa. Aap keh dijiye kay yaqeeni baat hai kay raah-e-raast woh khaas Allah hi ki raah hai aur hum ko yeh hukum hua hai kay hum perwerdigar-e-aalam kay pooray mootee hojayen
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! इनसे पूछो, क्या हम अल्लाह को छोड़ कर उनको पुकारें जो ना हमें नफा दे सकते हैं ना नुक्सान? और जबके अल्लाह हमें सीधा रास्ता दिखा चुका है तो क्या अब हम उल्टे पांव फिर जाएंगे? क्या हम अपना हाल उस शक्स का सा कहते हैं जिसमें शैतानों ने सेहरा में भटका दिया हो और वो हेयरन ओ सरगर्दन फिर रहा हो, डरन हाल ये के उसके साथी उसे पुकार रहे हों के इधर आ ये सीधी राह मौजूद है? कहो, हकीकत में सही रहनुमाई है तो सिर्फ अल्लाह ही की रहनुमाई है और उसकी तरफ से हमें ये हुकुम मिला है के मालिक ए कायनात के आगे सर ए इताअत खत्म करदो
عَرَبِيوَأَن أَقيمُوا الصَّلاةَ وَاتَّقوهُ ۚ وَهُوَ الَّذي إِلَيهِ تُحشَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह कि नमाज़ स्थापित करो और उस (अल्लाह) से डरो, तथा वही है, जिसकी ओर तुम इकट्ठे किए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Namaz qayam karo aur uski nafarmani se bacho, usi ki taraf tum samete jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay namaz ki pabandi kero aur iss say daro aur wohi hai jiss kay pass tum jama kiye jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)नमाज़ क़याम करो और उसकी नफ़रमानी से बचो, उसकी तरफ़ तुम साथ जाओगे
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ بِالحَقِّ ۖ وَيَومَ يَقولُ كُن فَيَكونُ ۚ قَولُهُ الحَقُّ ۚ وَلَهُ المُلكُ يَومَ يُنفَخُ فِي الصّورِ ۚ عالِمُ الغَيبِ وَالشَّهادَةِ ۚ وَهُوَ الحَكيمُ الخَبيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)और वही है, जिसने आकाशों तथा धरती की रचना सत्य के साथ की और जिस दिन वह कहेगा "हो जा" तो वह हो जाएगा। उसकी बात सत्य है और उसी का राज्य होगा, जिस दिन सूर में फूँका जाएगा। वह परोक्ष तथा प्रत्यक्ष को जानने वाला है और वही पूर्ण हिकमत वाला, हर चीज़ की खबर रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jisne aasman o zameen ko barhaqq paida kiya hai aur jis din woh kahega ke hashar (resurrection) ho jaye usi din woh ho jayega. Uska irshad ain-e-haqq hai aur jis roz soor phoonka jayega us roz baadshahi usi ki hogi, woh gaib aur shahadat (visible) har cheez ka aleem hai aur dana aur bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wohi hai jiss ney aasmanon aur zamin ko bar haq peda kiya aur jiss waqt Allah Taalaa itna keh dey ga tu ho ja bus woh ho paray ga. Uss ka kehna haq aur ba-asar hai. Aur sari hakoomat khaas ussi ki hogi jab kay soor mein phoonk maari jayegi woh jannay wala hai posheeda cheezon ka aur zahir cheezon ka aur wohi hai bari hikmat wala poori khabar rakhney wala
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिसने आसमान ओ ज़मीन को बारहक़ अदा किया है और जिस दिन वो कहेगा के हश्र (पुनरुत्थान) हो जाए उसका दिन वो हो जाएगा। उसका इरशाद ऐन-ए-हक़्क़ है और जिस रोज़ सूरज फूँका जाएगा उस रोज़ बादशाही उसी की होगी, वो गैब और शहादत (दृश्यमान) हर चीज़ का आलिम है और दाना और ख़बर है
عَرَبِي۞ وَإِذ قالَ إِبراهيمُ لِأَبيهِ آزَرَ أَتَتَّخِذُ أَصنامًا آلِهَةً ۖ إِنّي أَراكَ وَقَومَكَ في ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब इबराहीम ने अपने पिता आज़र से कहा : क्या आप मूर्तियों को पूज्य बनाते हो? निःसंदेह मैं आपको तथा आपकी जाति को खुली पथभ्रष्टता में देखता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Ibrahim ka waqia yaad karo jabke usne apne baap aazar se kaha tha, “kya tu buthon (idols) ko khuda banata hai? Main to tujhey aur teri qaum ko khuli gumraahi mein paata hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh waqt bhi yaad kerney kay qabil hai jab ibrahim (alh-e-salam) ney apney baap aazar say farmaya kay kiya tu button ko mabood qarar deta hai? Be-shak mein tujh ko aur teri sari qom ko sareeh gumrahi mein dekhta hun
Devnagri Urdu (Maududi)इब्राहीम का वाकिया याद करो जबके उसने अपने बाप का आज़र से कहा था, “क्या तू बुथों” (मूर्तियों) को खुदा बनाता है? मैं तो तुझे और तेरी क़ौम को खुली गुमराही में पाता हूं”
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ نُري إِبراهيمَ مَلَكوتَ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَلِيَكونَ مِنَ الموقِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार हम इबराहीम को आकाशों तथा धरती का महान राज्य दिखाते थे और ताकि वह परिपूर्ण विश्वास रखने वालों में से हो जाए।
Roman Urdu (Maududi)Ibrahim ko hum isi tarah zameen aur aasmano ka nizam e sultanat dikhate thay aur is liye dikhte thay ke woh yaqeen karne walon mein se ho jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney aisay hi tor per ibrahim (alh-e-salam) ko aasmanon aur zamin ki makhlooqaat dikhlaeen aur takay kaamil yaqeen kerney walon say hojayen
Devnagri Urdu (Maududi)इब्राहीम को हम इसी तरह ज़मीन और आसमान का निज़ाम ए सल्तनत दिखाते थे और इस लिए दिखते थे के वो यकीन करने वालों में से हो जाए
عَرَبِيفَلَمّا جَنَّ عَلَيهِ اللَّيلُ رَأىٰ كَوكَبًا ۖ قالَ هٰذا رَبّي ۖ فَلَمّا أَفَلَ قالَ لا أُحِبُّ الآفِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो जब उसपर रात छा गई, तो उसने एक तारा देखा। कहने लगा : यह मेरा पालनहार है। फिर जब वह डूब गया, तो उसने कहा : मैं डूबने वालों से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Chunanchey jab raat uspar taari hui to usne ek tara dekha, kaha yeh mera Rubb hai, magar jab woh doob gaya to bola doob janey walon ka to main girwida nahin hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab raat ki tareeki unn per cha gaee to unhon ney aik sitara dekha aap ney farmaya kay yeh mera rab hai magar jab woh ghuroob hogaya to aap ney farmaya kay mein ghuroob ho janey walon say mohabbat nahi rakhta
Devnagri Urdu (Maududi)चुनांचे जब रात उसपर तारी हुई तो उसने एक तारा देखा, कहा ये मेरा रब है, मगर जब वो डूब गया तो बोला डूब जाने वालों का तो मैं गिरविदा नहीं हूं
عَرَبِيفَلَمّا رَأَى القَمَرَ بازِغًا قالَ هٰذا رَبّي ۖ فَلَمّا أَفَلَ قالَ لَئِن لَم يَهدِني رَبّي لَأَكونَنَّ مِنَ القَومِ الضّالّينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उसने चाँद को चमकता हुआ देखा, तो कहा : यह मेरा पालनहार है। फिर जब वह डूब गया, तो उसने कहा : निःसंदेह यदि मेरे पालनहार ने मुझे मार्ग नहीं दिखाया, तो निश्चय मैं अवश्य पथभ्रष्ट लोगों में से हो जाऊँगा।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab chand chamakta nazar aaya to kaha yeh hai mera Rubb, magar jab woh bhi doob gaya to kaha agar mere Rubb ne meri rehnumayi na ki hoti to main bhi gumraah logon mein shamil ho gaya hota
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab chand ko dekha chamakta hua to farmaya kay yeh mera rab hai lekin jab woh ghuroob hogaya to aap ney farmaya kay agar mujh ko meray rab ney hidayat na ki to mein gumrah logon mein shamil ho jaon ga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब चांद चमकता नजर आया तो कहा ये मेरा रब है, मगर जब वो भी डूब गया गया तो कहा अगर मेरे रब ने मेरी रहनुमाई ना की होती तो मैं भी गुमराह लोगों में शामिल हो जाता
عَرَبِيفَلَمّا رَأَى الشَّمسَ بازِغَةً قالَ هٰذا رَبّي هٰذا أَكبَرُ ۖ فَلَمّا أَفَلَت قالَ يا قَومِ إِنّي بَريءٌ مِمّا تُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उसने सूर्य को चमकता हुआ देखा, तो कहा : यह मेरा पालनहार है। यह सबसे बड़ा है। फिर जब वह (भी) डूब गया, तो कहने लगे : ऐ मेरी जाति के लोगो! निःसंदेह मैं उससे बरी हूँ, जो तुम (अल्लाह के साथ) साझी बनाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab Suraj ko roshan dekha to kaha yeh hai mera Rubb, yeh sabse bada hai, magar jab woh bhi dooba to Ibrahim pukar uttha” Aey biradraan e qaum! Main un sab se bezaar hoon jinhein tum khuda ka shareek thehrate ho
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab aftab ko dekha chamakta hua to farmaya kay yeh mera rab hai yeh to sab say bara hai phir jab woh bhi ghuroob hogaya to aap ney farmaya be-shak mein tumharay shirk say bey zaar hun
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब सूरज को रोशन देखा तो कहा ये है मेरा रब, ये सबसे बड़ा है, मगर जब वो भी डूबा तो इब्राहीम पुकार उठा'' ऐ बिरादरान ए क़ौम! मैं उन सब से बेज़ार हूं जिन्हे तुम खुदा का शरीक ठहरते हो
عَرَبِيإِنّي وَجَّهتُ وَجهِيَ لِلَّذي فَطَرَ السَّماواتِ وَالأَرضَ حَنيفًا ۖ وَما أَنا مِنَ المُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मैंने एकाग्र होकर अपना चेहरा उसकी ओर कर लिया, जिसने आकाशों तथा धरती को पैदा किया है, और मैं मुश्रिकों में से नहीं हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Maine to yaksu hokar apna rukh us hasti ki taraf karliya jisne zameen aur aasmaano ko paida kiya hai aur main hargiz shirk karne walon mein se nahin hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Mein apna rukh uss ki taraf kerta hun jiss ney aasman-o-zamin ko peda kiya yaksoo hoker aur mein shirk kerney walon mein say nahi hun
Devnagri Urdu (Maududi)मैंने तो यक्सू होकर अपना रुख उस हस्ती की तरफ कार्लिया जिसने जमीन और आसमान को अदा किया है और मैं हरगिज शिर्क करने वालों में से नहीं हूं"
عَرَبِيوَحاجَّهُ قَومُهُ ۚ قالَ أَتُحاجّونّي فِي اللَّهِ وَقَد هَدانِ ۚ وَلا أَخافُ ما تُشرِكونَ بِهِ إِلّا أَن يَشاءَ رَبّي شَيئًا ۗ وَسِعَ رَبّي كُلَّ شَيءٍ عِلمًا ۗ أَفَلا تَتَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसकी जाति ने उससे झगड़ा किया, उसने कहा : क्या तुम मुझसे अल्लाह के विषय में झगड़ते हो, हालाँकि निश्चय उसने मुझे मार्गदर्शन प्रदान किया है तथा मैं उससे नहीं डरता, जिसे तुम उसके साथ साझी बनाते हो। परंतु यह कि मेरा पालनहार कुछ चाहे। मेरे पालनहार ने प्रत्येक वस्तु को अपने ज्ञान से घेर रखा है। तो क्या तुम उपदेश ग्रहण नहीं करते?
Roman Urdu (Maududi)Uski qaum issey jhagadne lagi to usne qaum se kaha “kya tumlog Allah ke maamle mein mujhse jhagadte ho? Halaanke usne mujhey raah e raast dikha di hai aur main tumhare thehraye huey shareekon se nahin darta. Haan agar mera Rubb kuch chahe to woh zaroor ho sakta hai. Mere Rubb ka ilm har cheez par chaya hua hai, phir kya tum hosh mein na aaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn say unn ki qom ney hujjat kerna shuroo kiya aap ney farmaya kiya tum Allah kay moamlay mein mujh say hujjat kertay ho halankay uss ney mujhay tareeqa batla diya hai aur mein unn cheezon say jin ko tum Allah kay sath shareek banatay ho nahi darta haan agar mera perwerdigar hi koi amar chahaye mera perwerdigar her cheez ko apney ilm mein gheray huye hai kiya tum phir bhi khayal nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी क़ौम इस्से झगड़ाने लगी तो उसने क़ौम से कहा “क्या तुम लोग अल्लाह के मामले में मुझसे झगड़ा करते हो? हलाँके उसने मुझे राह ए रस्त दिखा दी है और मैं तुम्हारे रुके हुए शेयरों से नहीं डरता। हां अगर मेरा रब कुछ चाहे तो वो जरूर हो सकता है। मेरे रब का इल्म हर चीज़ पर छाया हुआ है, फिर क्या तुम होश में ना आओगे
عَرَبِيوَكَيفَ أَخافُ ما أَشرَكتُم وَلا تَخافونَ أَنَّكُم أَشرَكتُم بِاللَّهِ ما لَم يُنَزِّل بِهِ عَلَيكُم سُلطانًا ۚ فَأَيُّ الفَريقَينِ أَحَقُّ بِالأَمنِ ۖ إِن كُنتُم تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और मैं उससे कैसे डरूँ, जिसे तुमने साझी बनाया है, हालाँकि तुम इस बात से नहीं डरते कि निःसंदेह तुमने अल्लाह के साथ उसको साझी बनाया है, जिसकी कोई दलील उसने तुमपर नहीं उतारी, तो दोनों पक्षों में शांति का अधिक हक़दार कौन है, यदि तुम जानते हो?
Roman Urdu (Maududi)Aur aakhir main tumhare thehraye huey shareekon se kaise daroon jabke tum Allah ke saath un cheezon ko khudayi mein shareek banate huey nahin darte jinke liye usne tumpar koi sanad nazil nahin ki hai? Hum dono fareeqon mein se kaun zyada be-khaufi o itminaan ka mustahiq hai? Batao agar tum kuch ilm rakhte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mein inn cheezon say kaisay darron jin ko tum ney shareek banaya hai halankay tum iss baat say nahi dartay kay tum ney Allah kay sath aisi cheezon ko shareek thehraya hai jin per Allah Taalaa ney koi daleel nazil nahi farmaee so inn do jamaton mein say aman ka ziyada mustahiq kaun hai agar tum khabar rakhtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)और आख़िर मैं तुम्हारे रुके हुए शरीकों से कैसे डरूँ जबके तुम अल्लाह के साथ उन चीज़ों को ख़ुदाई में शरीक बनाते हुए नहीं डरते जिनके लिए उसके पास कोई सनद नाज़िल नहीं है? हम दोनों फरीक़ों में से कौन ज़्यादा बे-खौफ़ी ओ इत्मिनान का मुस्तहिक है? बताओ अगर तुम कुछ इल्म रखते हो
عَرَبِيالَّذينَ آمَنوا وَلَم يَلبِسوا إيمانَهُم بِظُلمٍ أُولٰئِكَ لَهُمُ الأَمنُ وَهُم مُهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अपने ईमान को अत्याचार (शिर्क) के साथ नहीं मिलाया, यही लोग हैं जिनके लिए शांति है तथा वही मार्गदर्शन पाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat mein to aman unhi ke liye hai aur raah e raast par wahi hain jo iman laye aur jinhon ne apne iman ko zulm ke saath aluda (tarnish) nahin kya”
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log eman rakhtay hain aur apney eman ko shirk kay sath makhloot nahi kertay aison hi kay liye aman hai aur wohi raah-e-raast per chal rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत में तो अमन उनके लिए है और राह ए रास्ते पर वही हैं जो ईमान लाए और जिन्हों ने अपने ईमान को ज़ुल्म के साथ अलुदा (कलंकित) नहीं क्या”
عَرَبِيوَتِلكَ حُجَّتُنا آتَيناها إِبراهيمَ عَلىٰ قَومِهِ ۚ نَرفَعُ دَرَجاتٍ مَن نَشاءُ ۗ إِنَّ رَبَّكَ حَكيمٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यह हमारा तर्क है, जो हमने इबराहीम को उसकी जाति के विरुद्ध प्रदान किया। हम जिसे चाहते है, पदों में ऊँचा कर देते हैं। निःसंदेह आपका पालनहार पूर्ण हिकमत वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh thi hamari woh hujjat jo humne Ibrahim ko uski qaum ke muqable mein ata ki. Hum jisey chahte hain buland martabe ata karte hain. Haqq yeh hai ke tumhara Rubb nihayat dana(wise) aur aleem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh humari hujjat thi woh hum ney ibrahim (alh-e-salam) ko unn ki qom kay muqablay mein di thi hum jiss ko chahatay hain martabon mein barha detay hain. Be-shak aap ka rab bara hikmat wala bara ilm wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये थी हमारी वो हुज्जत जो हमने इब्राहिम को उसकी क़ौम के मुक़ाबले में आता है। हम जिसे चाहते हैं बुलंद मरतबे अता करते हैं। हक ये है के तुम्हारा रब निहायत दाना (बुद्धिमान) और अलीम है
عَرَبِيوَوَهَبنا لَهُ إِسحاقَ وَيَعقوبَ ۚ كُلًّا هَدَينا ۚ وَنوحًا هَدَينا مِن قَبلُ ۖ وَمِن ذُرِّيَّتِهِ داوودَ وَسُلَيمانَ وَأَيّوبَ وَيوسُفَ وَموسىٰ وَهارونَ ۚ وَكَذٰلِكَ نَجزِي المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसे (इबराहीम को) इसहाक़ और याक़ूब प्रदान किए, प्रत्येक को हमने मार्गदर्शन दिया और उससे पहले नूह को मार्गदर्शन प्रदान किया और उसकी संतति में से दाऊद और सुलैमान और अय्यूब और यूसुफ़ और मूसा तथा हारून को। और इसी प्रकार हम नेकी करने वालों को प्रतिफल प्रदान करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir humne Ibrahim ko Ishaq aur yakub jaisi aulad di aur har ek ko raah e raast dikhayi (wahi raah e raast jo) isse pehle Nooh ko dikhayi thi aur usi ki nasal se humne Dawood , Sulaiman, Ayub, Yusuf , Moosa aur Haroon ko (hidayat bakshi) is tarah hum neikukaron (righteous) ko unki neki ka badla dete hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unn ko ishaq diya aur yaqoob her aik ko hum ney hidayat ki aur pehlay zamney mein hum ney nooh ko hodayat ki aur unn ki aulad mein say dawood ko aur suleman ko aur ayub ko aur yousuf ko aur musa ko aur haroon ko aur issi tarah hum nek kaam kerney walon ko jaza diya kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमने इब्राहीम को इशाक और याकूब जैसा औलाद दी और हर एक को राह ए रास्त दिखाई (वही राह ए रास्त जो) इसके पहले नूह को दिखाई थी और उसकी नाक से हमने दाऊद, सुलेमान, अयूब, यूसुफ, मूसा और हारून को (हिदायत बख्शी) इस तरह हम नीकुकारों (धर्मी) को उनकी नेकी का बदला देते हैं
عَرَبِيوَزَكَرِيّا وَيَحيىٰ وَعيسىٰ وَإِلياسَ ۖ كُلٌّ مِنَ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा ज़करीया और यह़्या और ईसा और इलयास को। ये सभी सदाचारियों में से थे।
Roman Urdu (Maududi)(Usi ki aulad se) Zakariya, Yahya, Isa aur Ilyas ko (raah-yaab kiya) har ek unmein se saleh tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (naiz) zakriya ko aur yahya ko aur essa ko aur ilyas ko sab nek logon mein say thay
Devnagri Urdu (Maududi)(उसी की औलाद से) जकारिया, याह्या, ईसा और इलियास को (राह-याब किया) हर एक उनमें से साले था
عَرَبِيوَإِسماعيلَ وَاليَسَعَ وَيونُسَ وَلوطًا ۚ وَكُلًّا فَضَّلنا عَلَى العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इसमाईल और अल-यसअ, यूनुस और लूत को। और उन सबको हमने संसार वालों पर श्रेष्ठता प्रदान की है।
Roman Urdu (Maududi)(Usi ke khandaan se) Ismail , Al-yasa(Elisha) , aur Yunus aur Lut ko ( raasta dikhaya). In mein se har ek ko humne tamaam duniya walon par fazilat ata ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aur naiz ismail ko yasaa ko aur younus ko aur loot ko aur her aik ko tamam jahaan walon per hum ney fazeelat di
Devnagri Urdu (Maududi)(उसी के खानदान से) इस्माइल, अल-यासा (एलीशा), और यूनुस और लूत को (रास्ता दिखाया)। इनमे से हर एक को हमने तमाम दुनिया वालों पर फजीलत अता की
عَرَبِيوَمِن آبائِهِم وَذُرِّيّاتِهِم وَإِخوانِهِم ۖ وَاجتَبَيناهُم وَهَدَيناهُم إِلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके बाप-दादा और उनकी संतानों तथा उनके भाइयों में से भी कुछ को (तौफ़ीक़ दी) और हमने उन्हें चुन लिया और सीधे मार्ग की ओर उनका मार्गदर्शन किया।
Roman Urdu (Maududi)Neez inke aaba o ajdaad aur inki aulad aur unke bhai bandon mein se bahuton ko humne nawaza, unhein apni khidmat ke liye chun liya aur seedhey rastey ki taraf unki rehnumayi ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aur naiz inn kay kuch baap dadon ko aur kuch aulad ko aur kuch bhaiyon ko aur hum ney unn ko maqbool banaya aur hum ney unn ko raah-e-raast ki hidayat ki
Devnagri Urdu (Maududi)नीज़ इनके आबा ओ अजदाद और इनकी औलाद और उनके भाई बंदों में से बहुतों को हमने नवाजा, उन्होंने अपनी खिदमत के लिए चुन लिया और सीधे रास्ते की तरफ उनकी रहनुमाई की
عَرَبِيذٰلِكَ هُدَى اللَّهِ يَهدي بِهِ مَن يَشاءُ مِن عِبادِهِ ۚ وَلَو أَشرَكوا لَحَبِطَ عَنهُم ما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह अल्लाह का मार्गदर्शन है, जिसपर वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, चलाता है। और यदि ये लोग शिर्क करते, तो निश्चय उनसे वह सब नष्ट हो जाता जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Allah ki hidayat hai jiske saath woh apne bandon mein se jiski chahta hai rehnumayi karta hai lekin agar kahin in logon ne shirk kiya hota to inka sab kiya karaya ghaarat ho jata
Roman Urdu (Junagarhi)Allah ki hidayat hi hai jiss kay zariye apney bandon mein say jiss ko chahaye uss ko hidayat kerta hai aur agar farzan yeh hazraat bhi shirk kertay to jo kuch yeh aemaal kertay thay woh sab ikaarat ho jatay
Devnagri Urdu (Maududi)ये अल्लाह की हिदायत है जिसके साथ वो अपने बंदों में से जिसकी चाहत है रहनुमाई करता है लेकिन अगर कहीं लोगों ने शिर्क किया होता तो इनका सब किया किया घरात हो जाता
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ آتَيناهُمُ الكِتابَ وَالحُكمَ وَالنُّبُوَّةَ ۚ فَإِن يَكفُر بِها هٰؤُلاءِ فَقَد وَكَّلنا بِها قَومًا لَيسوا بِها بِكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही वे लोग हैं जिन्हें हमने पुस्तक, हिकमत एवं नुबुव्वत प्रदान की। फिर यदि ये (मुश्रिक) इन बातों का इनकार करें, तो हमने इन (बातों) के लिए ऐसे लोग नियत किए हैं, जो इनका इनकार करने वाले नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Woh log thay jinko humne kitab aur hukum aur nabuwat ata ki thi. Ab agar yeh log isko maanne se inkar karte hain to (parwa nahin) humne kuch aur logon ko yeh niyamat somp di hai jo issey munkir nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log aisay thay kay hum ney unn ko kitab aur hikmat aur naboowat ata ki thi so agar yeh log naboowat ka inkar keren to hum ney iss kay liye aisay boht say log muqarrar ker diye hain jo iss kay munkir nahi hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो लोग थे जिनको हमने किताब और हुकुम और नबुवत अता की थी। अब अगर ये लोग इसको मानने से इनकार करते हैं तो (परवा नहीं) हमने कुछ और लोगों को ये नियामत सोमप दी है जो इसे मुन्किर नहीं हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ هَدَى اللَّهُ ۖ فَبِهُداهُمُ اقتَدِه ۗ قُل لا أَسأَلُكُم عَلَيهِ أَجرًا ۖ إِن هُوَ إِلّا ذِكرىٰ لِلعالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही वे लोग हैं, जिन्हें अल्लाह ने मार्गदर्शन प्रदान किया, तो आप उनके मार्गदर्शन का अनुसरण करें। आप कह दें : मैं इस (कार्य) पर तुमसे कोई बदला नहीं माँगता। यह तो सारे संसारों के लिए एक उपदेश के सिवा कुछ नहीं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! wahi log Allah ki taraf se hidayat-yafta thay, unhi ke raaste par tum chalo, aur kehdo ke main (is tableeg o hidayat ke) kaam par tumse kisi ajar ka taalib nahin hoon. Yeh to ek aam naseehat hai tamaam duniya walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi log aisay thay jin ko Allah Taalaa ney hidayat ki thi so aap bhi inn hi kay tareeq per chaliye aap keh dijiye kay mein tum say iss per koi maawza nahi chahata yeh to sirf tamam jahaan walon kay wastay aik naseehat hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! वही लोग अल्लाह की तरफ से हिदायत-याफ्ता थे, उन्हीं के रास्ते पर तुम चलो, और कहदो के मैं (इस तबलीग ओ हिदायत के) काम पर तुमसे किसी का तालिब नहीं हूं। ये तो एक आम हिदायत है तमाम दुनिया वालों के लिए
عَرَبِيوَما قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدرِهِ إِذ قالوا ما أَنزَلَ اللَّهُ عَلىٰ بَشَرٍ مِن شَيءٍ ۗ قُل مَن أَنزَلَ الكِتابَ الَّذي جاءَ بِهِ موسىٰ نورًا وَهُدًى لِلنّاسِ ۖ تَجعَلونَهُ قَراطيسَ تُبدونَها وَتُخفونَ كَثيرًا ۖ وَعُلِّمتُم ما لَم تَعلَموا أَنتُم وَلا آباؤُكُم ۖ قُلِ اللَّهُ ۖ ثُمَّ ذَرهُم في خَوضِهِم يَلعَبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने अल्लाह की महिमा नहीं की, जो उसकी महिमा का हक़ था, जब उन्होंने कहा कि अल्लाह ने किसी मनुष्य पर कोई चीज़ नहीं उतारी। कहो : वह पुस्तक किसने उतारी, जो मूसा लेकर आए? जो लोगों के लिए प्रकाश तथा मार्गदर्शन थी, तुम उसे पन्नों में करके रखते हो, जिन्हें तुम प्रकट करते हो और बहुत-से छिपाते हो, तथा तुम्हें वह ज्ञान दिया गया, जिसे न तुम जानते थे और न तुम्हारे बाप-दादा। आप कह दें कि अल्लाह ने। फिर उन्हें छोड़ दें अपनी व्यर्थ की चर्चा में खेलते रहें।
Roman Urdu (Maududi)In logon ne Allah ka bahut galat andaza lagaya jab kaha ke Allah ne kisi bashar par kuch nazil nahin kiya hai. Inse pucho, phir woh kitab jisey Moosa laya tha, jo tamaam Insano ke liye roshni aur hidayat thi, jisey tum para para karke rakhte ho, kuch dikhate ho aur bahut kuch chupa jatey ho, aur jiske zariye se tumko woh ilm diya gaya jo na tumhein haasil tha aur na tumhare baap dada ko, aakhir uska nazil karne wala kaun tha? Bas itna kehdo ke Allah, phir unhein apni daleel baaziyon se khelne ke liye chodh do
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn logon ney Allah ki jaisi qadar kerna wajib thi wesi qadar na ki jab kay yun keh diya kay Allah ney kiss bashar per koi cheez nazil nahi ki aap yeh kahiye kay woh kitab kiss ney nazil ki hai jiss ko musa laye thay jiss ki keyfiyat yeh hai kay woh noor hai aur logon kay liye woh hidayat hai jiss ko tum ney inn mutafarriq oraaq mein rakh chora hai jin ko zahir kertay ho aur boht si baaton ko chupatay ho aur tum ko boht si aisi baaten bataee gaee hain jin ko na tum jantay thay aur na tumharay baray. Aap keh dijiye kay Allah ney nazil farmaya hai phir inn ko inn kay kharafaat mein kheltay rehney dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)इन लोगों ने अल्लाह का बहुत ग़लत अंदाज़ लगाया जब कहा के अल्लाह ने किसी बशर पर कुछ नाज़िल नहीं किया है। इनसे पूछो, फिर वो किताब जिसे मूसा लाया था, जो तमाम इंसानों के लिए रोशनी और हिदायत थी, जिसे तुम पारा करके रखते हो, कुछ दिखाते हो और बहुत कुछ छुपा लेते हो, और जिसकी ज़रिये से तुमको वो इल्म दिया गया जो ना तुम्हें हासिल था और ना तुम्हारे बाप दादा को, आख़िर उसका नाज़िल करने वाला कौन था? बस इतना कहदो के अल्लाह, फिर उन्हें अपनी दलीलों से खेलने के लिए छोड़ दो
عَرَبِيوَهٰذا كِتابٌ أَنزَلناهُ مُبارَكٌ مُصَدِّقُ الَّذي بَينَ يَدَيهِ وَلِتُنذِرَ أُمَّ القُرىٰ وَمَن حَولَها ۚ وَالَّذينَ يُؤمِنونَ بِالآخِرَةِ يُؤمِنونَ بِهِ ۖ وَهُم عَلىٰ صَلاتِهِم يُحافِظونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यह (क़ुरआन) एक पुस्तक है, जिसे हमने उतारा है, बड़ी बरकत वाली है, उसकी पुष्टि करने वाली है जो उससे पहले है, और ताकि आप बस्तियों के केंद्र (मक्का) तथा उसके चारों ओर के लोगों को डराएँ, तथा जो लोग आख़िरत पर ईमान रखते हैं, वे इसपर ईमान लाते हैं और वे अपनी नमाज़ों की रक्षा करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Usi kitab ki tarah) yeh ek kitab hai jisey humne nazil kiya hai badi khair o barakat wali hai, us cheez ki tasdeeq karti hai jo issey pehle aayi thi aur is liye nazil ki gayi hai ke iske zariye se tum bastiyon ke is markaz (yaani Makkah) aur iske atraaf mein rehne walon ko mutanabbeh (warn) karo. Jo log aakhirat ko maante hain woh is kitab par iman latey hain aur unka haal yeh hai ke apni namazon ki pabandi karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh bhi aisi hi kitab hai jiss ko hum ney nazil kiya hai jo bari barkat wali hai apney say pehlay kitabon ki tasdeeq kerney wali hai aur takay aap makkay walon ko aur aas pass walon ko darayen. Aur jo log aakhirat ka yaqeen rakhtay hain aisay log iss per eman ley aatay hain aur woh apni namaz per madawmat rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(उसी किताब की तरह) ये एक किताब है जिसने हमने नाज़िल किया है बड़ी खैर ओ बरकत वाली है, उस चीज़ की तस्दीक करती है जो इसे पहले आई थी और इसके लिए नाज़िल की गई है के इसके जरूर से तुम बस्तियों के इस मरकज (यानी मक्का) और इसके अतराफ में रहने वालों को मुतनब्बे (चेतावनी) करो। जो लोग आख़िरत को मानते हैं वो इस किताब पर ईमान लाते हैं और उनका हाल ये है कि अपनी नमाज़ की पाबन्दी करते हैं
عَرَبِيوَمَن أَظلَمُ مِمَّنِ افتَرىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَو قالَ أوحِيَ إِلَيَّ وَلَم يوحَ إِلَيهِ شَيءٌ وَمَن قالَ سَأُنزِلُ مِثلَ ما أَنزَلَ اللَّهُ ۗ وَلَو تَرىٰ إِذِ الظّالِمونَ في غَمَراتِ المَوتِ وَالمَلائِكَةُ باسِطو أَيديهِم أَخرِجوا أَنفُسَكُمُ ۖ اليَومَ تُجزَونَ عَذابَ الهونِ بِما كُنتُم تَقولونَ عَلَى اللَّهِ غَيرَ الحَقِّ وَكُنتُم عَن آياتِهِ تَستَكبِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उससे बढ़कर अत्याचारी कौन है, जो अल्लाह पर झूठ गढ़े, या कहे कि मेरी ओर वह़्य (प्रकाशना) की गई है, हालाँकि उसकी ओर कोई चीज़ वह़्य (प्रकाशना) नहीं की गई तथा जो कहे कि अल्लाह ने जो उतारा है, उसके समान मैं (भी) उतार दूँगा। और काश! (ऐ नबी!) आप देखें जब अत्याचारी लोग मौत की कठिनाइयों में होते हैं और फ़रिश्ते अपने हाथ फैलाए हुए होते हैं, (कहते हैं) : निकालो अपने प्राण! आज तुम्हें अपमानजनक यातना दी जाएगी, इस कारण कि तुम अल्लाह पर अनुचित (झूठ) बातें कहते थे और तुम उसकी आयतों (को मानने) से अभिमान करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur us shaks se bada zalim aur kaun hoga jo Allah par jhoota bohtan ghadey, ya kahey ke mujpar wahee aayi hai daraan haal yeh ke uspar koi wahee nazil na ki gayi ho, ya jo Allah ki nazil karda cheez ke muqable mein kahey ke main bhi aisi cheez nazil karke dikha dunga? Kaash tum zalimon ko is haalat mein dekh sako jabke woh sakarat-e-maut mein dubkiyan kha rahey hotey hain aur farishtey haath badha badha kar keh rahey hote hain ke “ lao , nikalo apni jaan, aaj tumhein un baaton ki padash mein zillat ka azaab diya jayega jo tum Allah par tohmat rakh kar na-haqq baka (spoke) karte thay aur uski aayat ke muqable mein sarkashi dikhate thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss shaks say ziyada kaun zalim hoga jo Allah Taalaa per jhoot tohmar lagaye ya yun kahey kay mujh per wahee aati hai halankay uss kay pass kissi baat ki bhi wahee nahi aaee aur jo shaks yun kahey kay jaisa kalaam Allah ney nazil kiya hai ussi tarah ka mein bhi laata hun aur agar aap uss waqt dekhen jabkay yeh zalim log maut ko sakhtiyon mein hongay aur farishtay apney haath barha rahey hongay kay haan apni jaanen nikal lo. Aaj tum ko zillat ki saza di jaye gi iss sabab say kay tum Allah Taalaa kay zimmay jhooti baaten lagatay thay aur tum Allah Taalaa ki aayaat say takabbur kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जो अल्लाह पर झूठा बोहतन घड़ी, या कहे के मुझपर वही आई है डरान हाल ये के उसपर कोई वही नाज़िल ना की गई हो, या जो अल्लाह की नाज़िल करदा चीज़ के मुक़ाबले में काहे के मैं भी ऐसी चीज़ नाज़िल करके दिखा दूंगा? काश तुम जालिमों को इस हालात में देख सको जबके वो साकारात-ए-मौत में डुबकियाँ खा रहे हैं और फरिश्ते हाथ बढ़ा कर कह रहे हैं के “लाओ, निकालो अपनी जान, आज तुम्हें उन बातों की याद में ज़िल्लत का अज़ाब दिया जाएगा जो तुम अल्लाह।” पर तोहमत रख कर ना-हक़ बका (बोला) करते थे और उसकी आयत के मुक़ाबले में सरकशी दिखाते थे”
عَرَبِيوَلَقَد جِئتُمونا فُرادىٰ كَما خَلَقناكُم أَوَّلَ مَرَّةٍ وَتَرَكتُم ما خَوَّلناكُم وَراءَ ظُهورِكُم ۖ وَما نَرىٰ مَعَكُم شُفَعاءَكُمُ الَّذينَ زَعَمتُم أَنَّهُم فيكُم شُرَكاءُ ۚ لَقَد تَقَطَّعَ بَينَكُم وَضَلَّ عَنكُم ما كُنتُم تَزعُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह तुम हमारे पास अकेले-अकेले आए हो, जैसे हमने तुम्हें प्रथम बार पैदा किया था, तथा हमने जो कुछ तु्म्हें दिया था, अपनी पीठों के पीछे छोड़ आए हो और हम तुम्हारे साथ तुम्हारे उन सिफ़ारिशियों को नहीं देखते, जिनके बारे में तुम्हारा भ्रम था कि निःसंदेह वे तुम्हारे कामों में (अल्लाह के) साझी हैं? निश्चय तुम्हारे बीच का संबंध कट गया और तुमसे गुम हो गया, जो कुछ तुम गुमान किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)(Aur Allah farmayega) “ lo ab tum waise hi tan-e- tanha (alone) hamare saamne hazir ho gaye jaisa humne tumhein pehli martaba akela paida kiya tha, jo kuch humne tumhein duniya mein diya tha woh sab tum pichey chodh aaye ho, aur ab hum tumhare saath tumhare un sifarishiyon ko bhi nahin dekhte jinke mutaaliq tum samajhte thay ke tumhare kaam banane mein unka bhi kuch hissa hai, tumhare aapas ke sab raabte (contacts) toot gaye aur woh sab tumse ghum ho gaye jinka tum zaam (imagination) rakhte thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum humaray pass tanha tanha aagaye jiss tarah hum ney awwal baar tum ko peda kiya tha aur jo kuch hum ney tum ko diya tha uss ko apney peechay hi chor aaye aur hum to tumharay humrah tumharay inn shafaat kerney walon ko nahi dekhtay jin ki nisbat tum dawa rakhtay thay kay woh tumharay moamlay mein shareek hain. Waqaee tumharay aapas mein to qata talluq hogaya aur woh tumhara sab tum say gaya guzra hua
Devnagri Urdu (Maududi)(और अल्लाह फरमाएगा) “लो अब तुम वैसे ही तन-ए-तन्हा (अकेले) हमारे सामने हाजिर हो गए जैसा हमने तुम्हें पहली मर्तबा अकेला पेदा किया था, जो कुछ हमने तुम्हें दुनिया में दिया था वो सब तुम पीछे छोड़ आये हो, और अब हम तुम्हारे साथ हैं तुम्हारे उन सिफ़रिशियों को भी नहीं देखते जिनका मुतालिक तुम समझते थे कि तुम्हारे काम बनाने में उनका भी कुछ हिस्सा है, तुम्हारे आपस के सब राब्ते (संपर्क) टूट गए और वो सब तुमसे गुम हो गए जिनका तुम ज़म (कल्पना) रखते थे”
عَرَبِي۞ إِنَّ اللَّهَ فالِقُ الحَبِّ وَالنَّوىٰ ۖ يُخرِجُ الحَيَّ مِنَ المَيِّتِ وَمُخرِجُ المَيِّتِ مِنَ الحَيِّ ۚ ذٰلِكُمُ اللَّهُ ۖ فَأَنّىٰ تُؤفَكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ही दाने तथा गुठलियों को फाड़ने वाला है। वह सजीव को निर्जीव से निकालता है तथा निर्जीव को सजीव से निकालने वाला है। यही अल्लाह है, फिर तुम कहाँ बहकाए जाते हो?
Roman Urdu (Maududi)Daney (grain) aur guthli ko phadne (sprout) wala Allah hai, wahi zinda ko murda se nikalta hai aur wahi murde ko zinda se kharij karta hai, yeh sarey kaam karne wala to Allah hai, phir tum kidhar behke chale jaa rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak Allah Taalaa daaney ko aur guthliyon ko phaarney wala hai woh jaandaar ko bey jaan say nikal laata hai aur woh bey jaan ko jaandaar say nikalney wala hai Allah Taalaa yeh hai so tum kahan ultay chalay jarahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)दाने (अनाज) और गुठली को फड़ने (अंकुरित) वाला अल्लाह है, वही जिंदा को मुर्दा से निकलता है और वही मुर्दे को जिंदा से खारिज करता है, ये सारे काम करने वाला तो अल्लाह है, फिर तुम किधर बहके चले जा रहे हो
عَرَبِيفالِقُ الإِصباحِ وَجَعَلَ اللَّيلَ سَكَنًا وَالشَّمسَ وَالقَمَرَ حُسبانًا ۚ ذٰلِكَ تَقديرُ العَزيزِ العَليمِ
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हिन्दी (Al-Omari)(वही) पौ फाड़ने वाला है और उसी ने रात को आराम के लिए तथा सूर्य और चाँद को हिसाब का साधन बनाया। यह अति प्रभुत्वशाली, सब कुछ जानने वाले का ठहराया हुआ अंदाज़ा है।
Roman Urdu (Maududi)Purda e shab (night) ko chaak karke wahi subah nikalta hai, usi ne raat ko sukoon ka waqt banaya hai usi ne Chand aur Suraj ke tulu-o-guroob ka hisaab muqarrar kiya hai. Yeh sab usi zabardast qudrat aur ilm rakhne waley ke thehraye huey andaze hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh subha ka nikalney wala hai aur uss ney raat ko rahat ki cheez banaya hai aur sooraj aur chand ko hisab say rakha hai. Yeh thehraee baat hai aisi zaat ki jo kay qadir hai baray ilm wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)परदा ए शब (रात) को चाक करके वही सुबह निकलता है, उसने रात को सुकून का वक्त बनाया है, उसने चांद और सूरज के तुलू-ओ-गुरूब का हिसाब मुकर्रर किया है। ये सब उसकी ज़बरदस्त क़ुदरत और इल्म रखने वाले के ठहरे हुए अंदाज़े हैं
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي جَعَلَ لَكُمُ النُّجومَ لِتَهتَدوا بِها في ظُلُماتِ البَرِّ وَالبَحرِ ۗ قَد فَصَّلنَا الآياتِ لِقَومٍ يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वही है जिसने तुम्हारे लिए तारे बनाए, ताकि तुम उनके द्वारा थल और समुद्र के अँधेरों में मार्ग पा सको। निःसंदेह हमने उन लोगों के लिए खोलकर निशानियाँ बयान कर दी हैं, जो ज्ञान रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur wahi hai jisne tumhare liye taaron ko sehra aur samandar ki tareekiyon mein raasta maloom karne ka zariya banaya. Dekho humne nishaniyan khol kar bayan kardi hain un logon ke liye jo ilm rakhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh aisay hai jiss ney sitaron ko peda kiya takay tum unn kay zariye say andheron mein khushki mein aur darya mein bhi raasta maloom ker sako. Be-shak hum ney dalaeel khoob khol khol ker biyan ker diye hain unn logon kay liye jo khabar rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और वही है जिसने तुम्हारे लिए तारों को सेहरा और समंदर की तरीकियों में रास्ता मालूम करने का ज़रिया बनाया। देखो हमने निशानियां खोल कर बयान कर दी हैं उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي أَنشَأَكُم مِن نَفسٍ واحِدَةٍ فَمُستَقَرٌّ وَمُستَودَعٌ ۗ قَد فَصَّلنَا الآياتِ لِقَومٍ يَفقَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है, जिसने तुम्हें एक जान से पैदा किया। फिर एक ठहरने का स्थान और एक सौंपे जाने का स्थान है। निःसंदहे हमने उन लोगों के लिए निशानियाँ खोलकर बयान कर दी हैं, जो समझते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur wahi hai jisne ek mutanaffis se tumko paida kiya phir har ek ke liye ek jaaye qaraar(time-limit) hai aur ek uske sompey janey ki jagah(resting place). Yeh nishaniyan humne wazeh kardi hain un logon ke liye jo samajh boojh rakhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh aisa hai jiss ney tum ko aik shaks say peda kiya phir aik jagah ziyada rehney ki hai aur aik jagah chanday rehney ki be-shak hum ney dalaeel khoob khoob khol khol ker biyan ker diye unn logon kay liye jo samajh boojh rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और वही है जिसने एक मुतनफ़्फ़िस से तुमको भुगतान किया फिर हर एक के लिए एक जाए क़रार (समय-सीमा) है और एक उसके सोमपे जाने की जगह (विश्राम स्थल)। ये निशानियाँ हमने वाज़ेह करदी हैं उन लोगों के लिए जो समझ बूझ रखते हैं
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي أَنزَلَ مِنَ السَّماءِ ماءً فَأَخرَجنا بِهِ نَباتَ كُلِّ شَيءٍ فَأَخرَجنا مِنهُ خَضِرًا نُخرِجُ مِنهُ حَبًّا مُتَراكِبًا وَمِنَ النَّخلِ مِن طَلعِها قِنوانٌ دانِيَةٌ وَجَنّاتٍ مِن أَعنابٍ وَالزَّيتونَ وَالرُّمّانَ مُشتَبِهًا وَغَيرَ مُتَشابِهٍ ۗ انظُروا إِلىٰ ثَمَرِهِ إِذا أَثمَرَ وَيَنعِهِ ۚ إِنَّ في ذٰلِكُم لَآياتٍ لِقَومٍ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वही है जिसने आकाश से कुछ पानी उतारा, फिर हमने उसके द्वारा प्रत्येक प्रकार के पौधे निकाले। फिर हमने उससे हरियाली निकाली। जिसमें से हम तह-ब-तह चढ़े हुए दाने निकालते हैं तथा खजूर के पेड़ों से उनके गाभे से झुके हुए गुच्छे हैं तथा अंगूरों के बाग़ और ज़ैतून और अनार मिलते-जुलते और न मिलने-जुलने वाले। उसके फल को देखो, जब वह फल लाए तथा उसके पकने की ओर। निःसंदेह इनमें उन लोगों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो ईमान लाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur wahi hai jisne aasman se pani barsaya, phir uske zariye se har qisam ki nabataat ugayi, phir ussey harey harey khet aur darakht paida kiye, phir unse tai ba tai chadey huey daaney(grains) nikale aur khajoor ke shagufon se phalon (fruits) ke gucchey ke gucchey paida kiye jo bojh ke maarey jhuke padte hain, aur angoor, zaitoon aur anaar ke baagh lagaye jinke phal ek dusre se milte julte bhi hain aur phir har ek ki khususiyat juda juda bhi hai. Yeh darakht jab phalte hain to inmein phal aane aur phir unke pakne ki kaifiyat zara gaur ki nazar se dekho, in cheezon mein nishaniyan hain un logon ke liye jo iman latey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh aisa hai jiss ney aasman say pani barsaya phir hum ney uss kay zariye say her qisam kay nabaat ko nikala phir hum ney uss say sabz shaakh nikali kay uss say hum upper talay daaney charhay huye nikaltay hain aur khujoor kay darakhton say yani unn kay guphay mein say khoshay hain jo neechay ko latkay jatay hain aur angooron kay baagh aur zaitoon aur anaar kay baaz aik doosray say miltay jultay hotay hain aur kuch aik doosray say miltay jultay nahi hotay. Her aik kay phal ko dekho jab woh phalta hai aur iss kay pakney ko dekho iss mein dalaeel hain unn logon kay liye jo eman rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और वही है जिसने आसमान से पानी बरसाया, फिर उसके ज़री से हर क़िस्म की नबात उगी, फिर उसने हरे हरे खेत और दरख्त पैदा किये, फिर उनसे ताई बा ताई चढ़े हुए दाने (अनाज) निकले और खजूर के शगूफों से फल (फल) के गुच्छे के गुच्छे पैदा किए जो बोझ के मारे झुके पड़ते हैं, और अंगूर, जैतून और अनार के बाग लगाए जिनका फल एक दूसरे से मिलते-जुलते भी हैं और फिर हर एक की ख़ुसूसियत जुदा जुदा भी है। ये दरख्त जब फालते हैं तो इनमें फल आने और फिर उन्हें पकड़ने की कैफियत जरा गौर की नजर से देखो, चीजों में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं
عَرَبِيوَجَعَلوا لِلَّهِ شُرَكاءَ الجِنَّ وَخَلَقَهُم ۖ وَخَرَقوا لَهُ بَنينَ وَبَناتٍ بِغَيرِ عِلمٍ ۚ سُبحانَهُ وَتَعالىٰ عَمّا يَصِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने जिन्नों को अल्लाह का साझी बना दिया। हालाँकि उस (अल्लाह) ने उन्हें पैदा किया है, तथा बिना कुछ ज्ञान के उसके लिए बेटे और बेटियाँ गढ़ लीं। वह पवित्र तथा सर्वोच्च है, उन बातों से, जो वे बयान करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ispar bhi logon ne Jinno ko Allah ka shareek thehra diya, halaanke woh unka khaliq hai,aur bay-janey boojhey uske liye bete aur betiyan tasneef kardi, halaanke woh paak aur baala –tar hai un baaton se jo yeh log kehte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur logon ney shayateen ko Allah Taalaa ko shareek qarar dey rakha hai halankay inn logon ko Allah hi ney peda kiya hai aur inn logon ney Allah kay haq mein betay aur betiyan bila sanad tarash rakhi hain aur woh pak aur bartar hai unn baaton say jo yeh kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)इसपर भी लोगों ने जिन्नो को अल्लाह का शरीक ठहर दिया, हलांके वो उनका खालिक है,और बे-जाने बूझे उसके लिए बेटे और बेटियां तसनीफ करदी, हलांके वो पाक और बाला-तार है उन बातों से जो ये लोग कहते हैं
عَرَبِيبَديعُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ أَنّىٰ يَكونُ لَهُ وَلَدٌ وَلَم تَكُن لَهُ صاحِبَةٌ ۖ وَخَلَقَ كُلَّ شَيءٍ ۖ وَهُوَ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)वह आकाशों तथा धरती का अविष्कारक है, उसकी संतान कैसे होगी, जबकि उसकी कोई पत्नी नहीं? तथा उसी ने हर चीज़ पैदा की और वह प्रत्येक वस्तु को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Woh to aasmano aur zameen ka mujid (originator) hai. Uska koi beta kaise ho sakta hai jabke koi uski shareek e zindagi hi nahin hai. Usne har cheez ko paida kiya hai aur woh har cheez ka ilm rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh aasmanon aur zamin ka mojid hai Allah Taalaa ki aulad kahan ho sakti hai halankay uss ki koi biwi to hai nahi aur Allah Taalaa ney her cheez ko peda kiya aur woh her cheez ko khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो तो आसमानो और जमीन का मुजिद (प्रवर्तक) है। उसका कोई बेटा कैसे हो सकता है जबके कोई उसकी शरीक और जिंदगी ही नहीं है। उसने हर चीज़ को पेदा किया है और वो हर चीज़ का इल्म रखता है
عَرَبِيذٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُم ۖ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۖ خالِقُ كُلِّ شَيءٍ فَاعبُدوهُ ۚ وَهُوَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ وَكيلٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यही अल्लाह तुम्हारा पालनहार है, उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, हर चीज़ का स्रष्टा है। अतः तुम उसी की इबादत करो तथा वह हर चीज़ का निरीक्षक है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hai Allah tumhara Rubb, koi khuda uske siwa nahin hai, har cheez ka khaliq, lihaza tum usi ki bandagi karo aur woh har cheez ka kafeel hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hai Allah Taalaa tumhara rab! Uss kay siwa koi ibadat kay laeeq nahi her cheez ka peda kerney wala hai to tum uss ki ibadat kero aur woh her cheez ka kaar saaz hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये है अल्लाह तुम्हारा रब, कोई खुदा उसके सिवा नहीं है, हर चीज़ का ख़ालिक, लिहाज़ा तुम उसकी बंदगी करो और वो हर चीज़ का कफ़ील है
عَرَبِيلا تُدرِكُهُ الأَبصارُ وَهُوَ يُدرِكُ الأَبصارَ ۖ وَهُوَ اللَّطيفُ الخَبيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)उसे निगाहें नहीं पातीं और वह सब निगाहों को पाता है और वही अत्यंत सूक्ष्मदर्शी, सब ख़बर रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Nigahein usko nahin paa sakti aur woh nigaahon ko paa leta hai, woh nihayat bareek been aur ba-khabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ko to kissi ki nigah moheet nahi ho sakti aur woh sab nigahon ka moheet ho jata hai aur wohi bara bareek been ba khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)निगाहें उसको नहीं पा जैसे और वो निगाहों को पा लेता है, वो निहायत बारीकियां और बा-खबर है
عَرَبِيقَد جاءَكُم بَصائِرُ مِن رَبِّكُم ۖ فَمَن أَبصَرَ فَلِنَفسِهِ ۖ وَمَن عَمِيَ فَعَلَيها ۚ وَما أَنا عَلَيكُم بِحَفيظٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से कई निशानियाँ आ चुकीं। फिर जिसने देख लिया, तो उसका लाभ उसी के लिए है और जो अंधा रहा, तो उसकी हानि उसी पर है और मैं तुमपर कोई संरक्षक नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Dekho, tumhare paas tumhare Rubb ki taraf se baseerat ki roshniyan aa gayi hain, ab jo beenayi se kaam lega apna hi bhala karega aur jo andha banega khud nuqsan uthayega, main tumpar koi paasbaan(keeper) nahin hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Abb bila shuba tumharay pass tumharay rab ki janib say haq beeni kay zaraye phonch chukay hain so jo shaks dekh ley ga woh apna faeeda keray ga aur jo shaks andha rahey ga woh apna nuksan keray ga aur mein tumhara nigaraan nahi hun
Devnagri Urdu (Maududi)देखो, तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से बसीरत की रोशनियां आ गई हैं, अब जो शादी से काम लेगा अपना ही भला करेगा और जो अंधा बनेगा खुद नुक्सान उठाएगा, मैं तुमपर कोई पासबान (कीपर) नहीं हूं
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ نُصَرِّفُ الآياتِ وَلِيَقولوا دَرَستَ وَلِنُبَيِّنَهُ لِقَومٍ يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार, हम आयतों को विविध ढंग से बयान करते हैं और ताकि वे (मुश्रिक) कहें : आपने पढ़ा है, और ताकि हम उसे उन लोगों के लिए उजागर कर दें, जो ज्ञान रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Is tarah hum apni aayat ko baar baar mukhtalif tareeqon se bayan karte hain aur is liye karte hain ke yeh log kahein tum kisi se padh aaye ho, aur jo log ilm rakhte hain unpar hum haqeeqat ko roshan kardein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum iss tor per dalaeel ko mukhtalif pehloo’on say biyan kertay hain takay yeh yun kahen kay aap ney kissi say parh liya hai aur takay hum iss ko danish mandon kay liye khoob zahir ker den
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह हम अपनी हैं आयतों को बार-बार मुख्तलिफ़ तरीक़ों से बयान करते हैं और इस लिए करते हैं कि ये लोग कहें तुम किसी से पढ़ आए हो, और जो लोग इल्म रखते हैं उन पर हम हकीकत को रोशन कर दें
عَرَبِياتَّبِع ما أوحِيَ إِلَيكَ مِن رَبِّكَ ۖ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۖ وَأَعرِض عَنِ المُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप उसका पालन करें, जो आपकी ओर आपके पालनहार की तरफ़ से वह़्य की गई है, उसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं और मुश्रिकों से किनारा कर लें।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! Us wahee ki pairwi kiye jao jo tumpar tumhare Rubb ki taraf se nazil hui hai, kyunke us ek Rubb ke siwa koi aur khuda nahin hai. Aur in mushrikeen ke peechey na pado
Roman Urdu (Junagarhi)Aap khud iss tareeq per chaltay rahiye jiss ki wahee aap kay rab ki taraf say aap kay pass aaee hai Allah Taalaa kay siwa koi laeeq-e-ibadat nahi aur mushrikeen ki taraf khayal na kijiye
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! हमें वही की जोड़ी बनाते जाओ जो तुम्हारे रब की तरफ से नाज़िल हुई है, क्योंकि हमारे पास एक रुब के सिवा कोई और खुदा नहीं है। और इन मुशरिकेन के पीछे ना पड़ो
عَرَبِيوَلَو شاءَ اللَّهُ ما أَشرَكوا ۗ وَما جَعَلناكَ عَلَيهِم حَفيظًا ۖ وَما أَنتَ عَلَيهِم بِوَكيلٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि अल्लाह चाहता, तो वे लोग साझी न बनाते, तथा हमने आपको उनपर संरक्षक नहीं बनाया और न आप उनके कोई निरीक्षक हैं।
Roman Urdu (Maududi)Agar Allah ki mashiyat hoti to (woh khud aisa bandobast kar sakta tha ke) yeh log shirk na karte, tumko humne inpar pasbaan (guardian) muqarrar nahin kiya hai aur na tum inpar hawaladaar ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar Allah Taalaa ko manzoor hota to yeh shirk na kertay aur hum ney aap ko inn ka nigraan nahi banaya. Aur na aap inn per mukhtaar hain
Devnagri Urdu (Maududi)अगर अल्लाह की मशियत होती तो (वो खुद ऐसा बंदोबस्त कर सकता था के) ये लोग शिर्क ना करते, तुमको हमने अंदर पासबान (अभिभावक) मुकर्रर नहीं किया है और ना तुम अंदर हवालादार हो
عَرَبِيوَلا تَسُبُّوا الَّذينَ يَدعونَ مِن دونِ اللَّهِ فَيَسُبُّوا اللَّهَ عَدوًا بِغَيرِ عِلمٍ ۗ كَذٰلِكَ زَيَّنّا لِكُلِّ أُمَّةٍ عَمَلَهُم ثُمَّ إِلىٰ رَبِّهِم مَرجِعُهُم فَيُنَبِّئُهُم بِما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ ईमान वालो!) उन्हें बुरा न कहो, जिन्हें ये (मुश्रिक) अल्लाह के सिवा पुकारते हैं। अन्यथा, वे अतिक्रम करते हुए अज्ञानतावश अल्लाह को बुरा कहेंगे। इसी प्रकार, हमने प्रत्येक समुदाय के लिए उनके कर्म को सुशोभित कर दिया है। फिर उनके पालनहार ही की ओर उनका लौटना है, तो वह उन्हें बताएगा, जो कुछ वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur (Aey iman laney walon!) yeh log Allah ke siwa jinko pukarte hain unhein gaaliyan na do, kahin aisa na ho ke yeh shirk se aagey badhkar jahalat ki bina par Allah ko gaaliyan dene lagein. Humne to isi tarah har giroh ke liye uske amal ko khushnumna bana diya hai, phir unhein apne Rubb hi ki taraf palat kar aana hai, us waqt woh unhein bata dega ke woh kya karte rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur gaali mat do unn ko jin ki yeh log Allah Taalaa ko chor ker ibadat kertay hain kiyon kay phir woh ba-raah-e-jahal hadd say guzar ker Allah Taalaa ki shaan mein gustakhi keren gay hum ney iss tarah her tareeqay walon ko unn ka amal marghoob bana rakha hai. Phir apney rab hi kay pass inn ko jana hai so woh inn ko batla dey ga jo kuch bhi woh kiya kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ ईमान) लाने वालों!) ये लोग अल्लाह के सिवा जिनको पुकारते हैं उन्हें गालियाँ न दो, कहीं ऐसा न हो के ये शिर्क से आगे बढ़कर जहालत की बिना पर अल्लाह को गालियाँ देने लगें। हमने तो इसी तरह हर गिरह के लिए उसके अमल को खुशनुमा बना दिया है, फिर उन्हें अपने रब ही की तरफ पलट कर आना है, हमें वक्त वो उन्हें बता देगा के वो क्या कर रहे हैं
عَرَبِيوَأَقسَموا بِاللَّهِ جَهدَ أَيمانِهِم لَئِن جاءَتهُم آيَةٌ لَيُؤمِنُنَّ بِها ۚ قُل إِنَّمَا الآياتُ عِندَ اللَّهِ ۖ وَما يُشعِرُكُم أَنَّها إِذا جاءَت لا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने अपनी मज़बूत क़समें खाते हुए अल्लाह की क़सम खाई कि निःसंदेह यदि उनके पास कोई आयत (निशानी) आई, तो वे उसपर अवश्य ही ईमान लाएँगे। आप कह दें : आयतें (निशानियाँ) तो केवल अल्लाह के पास हैं और (ऐ ईमान वालो!) तुम्हें क्या पता कि निःसंदेह वे निशानियाँ जब आ जाएँगी, तो वे ईमान नहीं लाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log kadi kadi kasamein kha kha kar kehte hain ke agar koi nishani hamare saamne aa jaye to hum uspar iman le aayenge. Aey Muhammad! Inse kaho, ke “nishaniyan to Allah ke paas hain” aur tumhein kaise samajhaya jaye ke agar nishaniyan aa bhi jayein to yeh iman laney waley nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn logon ney qasmon mein bara zor laga ker Allah Taalaa ki qasam khaee kay agar inn kay pass koi nishani aajaye to woh zaroor hi uss per eman ley aayen gay aap keh dijiye kay nishaniyan sab Allah kay qabzay mein hain aur tum ko iss ki kiya khabar kay woh nishaniyan jiss waqt aajayen gi yeh log tab bhi eman na layen gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग कड़ी कसमें खा खा कर कहते हैं अगर कोई निशानी हमारे सामने आ जाए तो हम उसपर ईमान ले आएंगे। ऐ मुहम्मद! इनसे कहो, के "निशानियां तो अल्लाह के पास हैं" और तुम्हें कैसे समझा जाए कि अगर निशानियां आ भी जाएं तो ये ईमान लाने वाले नहीं
عَرَبِيوَنُقَلِّبُ أَفئِدَتَهُم وَأَبصارَهُم كَما لَم يُؤمِنوا بِهِ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَنَذَرُهُم في طُغيانِهِم يَعمَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हम उनके दिलों और उनकी आँखों को फेर देंगे, जैसे वे पहली बार इस (क़ुरआन) पर ईमान नहीं लाए और हम उन्हें छोड़ देंगे, अपनी सरकशी में भटकते फिरेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Hum usi tarah inke dilon aur nigaahon ko pher rahey hain jis tarah yeh pehli martaba uspar iman nahin laye thay, hum inhein inki sarkashi hi mein bhatakne ke liye chodhe dete hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum bhi inn kay dilon ko aur inn ki nigahon ko pher den gay jaisa kay yeh log iss per pehli dafa eman na laye aur hum inn ko inn ki sirkashi mein heyraan rehney den gay
Devnagri Urdu (Maududi)हम उसी तरह इनके दिलों और निगाहों को फेर रहे हैं जिस तरह ये पहली मरतबा उसपर ईमान नहीं लाए थे, हम इनकी सरकशी ही में भटकने के लिए छोड़ देते हैं
🕮 Juz 8 begins here
عَرَبِي۞ وَلَو أَنَّنا نَزَّلنا إِلَيهِمُ المَلائِكَةَ وَكَلَّمَهُمُ المَوتىٰ وَحَشَرنا عَلَيهِم كُلَّ شَيءٍ قُبُلًا ما كانوا لِيُؤمِنوا إِلّا أَن يَشاءَ اللَّهُ وَلٰكِنَّ أَكثَرَهُم يَجهَلونَ
हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम उनकी ओर फ़रिश्ते उतार देते और उनसे मुर्दे बातें करते और हम प्रत्येक चीज़ उनके सामने लाकर इकट्ठा कर देते, तो भी वे ऐसे न थे कि ईमान लाते, परंतु यह कि अल्लाह चाहे, लेकिन उनमें से अधिकतर लोग अज्ञानता से काम लेते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Agar hum Farishtey bhi inpar nazil kardete aur murde inse baatein karte aur duniya bhar ki cheezon ko hum unki aankhon ke saamne jamaa kardete tab bhi yeh iman laney walay na thay, illa yeh ke mashiyat e ilahi yahi ho ke woh iman layein , magar aksar log nadaani ki baatein karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum inn kay pass farishton ko bhej detay aur inn say murday baaten kerney lagtay aur hum tamam mojodaat inn kay pass inn ki aankhon kay roo baroo laa ker jama ker detay hain tab bhi yeh log hergiz eman na latay haan agar Allah hi chahaye to aur baat hai lekin inn mein ziyada logo jahalat ki baaten kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अगर हम फरिश्ते भी इनपर नाजिल करते और मुर्दे इनसे बातें करते और दुनिया भर की चीजों को हम उनकी आंखों के सामने जमा कर देते तब भी ये ईमान लाने वाले ना थे, इल्ला ये के मसीहत ए इलाही यहीं हो के वो ईमान लायें, मगर अक्सर लोग नादानी की बातें करते हैं
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ جَعَلنا لِكُلِّ نَبِيٍّ عَدُوًّا شَياطينَ الإِنسِ وَالجِنِّ يوحي بَعضُهُم إِلىٰ بَعضٍ زُخرُفَ القَولِ غُرورًا ۚ وَلَو شاءَ رَبُّكَ ما فَعَلوهُ ۖ فَذَرهُم وَما يَفتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) इसी प्रकार, हमने हर नबी के लिए मनुष्यों एवं जिन्नों के शैतानों को शत्रु बना दिया, जो धोखा देने के लिए एक-दूसरे के मन में चिकनी-चुपड़ी बात डालते रहते हैं। और यदि आपका पालनहार चाहता, तो वे ऐसा न करते। तो आप उन्हें छोड़ दें और जो वे झूठ गढ़ते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne to isi tarah hamesha shaytan Insano aur shaytan Jinno ko har Nabi ka dushman banaya hai jo ek dusre par khushaind baatein dhoke aur fareb ke taur par ilqa karte rahey hain. Agar tumhare Rubb ki mashiyat yeh hoti ke woh aisa na karein to woh kabhi na karte. Pas tum unhein unke haal par chodh do ke apni iftara pardaziyan karte rahein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur issi tarah say hum ney her nabi kay dushman boht say shetan peda kiya thay kuch aadmi aur kuch jinn, jin mein say baaz baazon ko chikni chupri baaton ka waswasa daaltay rehtay thay takay unn ko dhokay mein daal den aur agar Allah Taalaa chahata to yeh aisay kaam na ker saktay so inn logon ko aur jo kuch yeh iftra perdaazi ker rahey hain uss ko aap rehney dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने तो इसी तरह हमेशा शैतान इंसानो और शैतान जिन्नो को हर नबी का दुश्मन बनाया है जो एक दूसरे पर ख़ुशैंद बातें धोखे और फ़रेब के तौर पर इल्का करते रहे हैं. अगर तुम्हारे रब की मशहुत ये होती के वो ऐसा ना करें तो वो कभी ना करते। पास तुम उन्हें उनके हाल पर छोड़ दो के अपनी इफ्तारा परदाज़ियां करते रहो
عَرَبِيوَلِتَصغىٰ إِلَيهِ أَفئِدَةُ الَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِالآخِرَةِ وَلِيَرضَوهُ وَلِيَقتَرِفوا ما هُم مُقتَرِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और ताकि उन लोगों के दिल उस (सुशोभित झूठ) की ओर झुक जाएँ, जो आख़िरत पर विश्वास नहीं रखते और ताकि वे उसे पसंद करें और ताकि वे भी वही कुकर्म करने लगें, जो ये करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Yeh sab kuch hum inhein isi liye karne de rahey hain ke) jo log aakhirat par iman nahin rakhte unke dil is (khushnuma dhoke) ki taraf mayil hon aur woh issey razi ho jayein aur un buraiyon ka iktisab karein jinka iktisab woh karna chahte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur takay uss ki taraf unn logon kay quloob maeel hojayen jo aakhirat per yaqeen nahi rakhtay aur takay uss ko pasand kerlen aur takay murtakib hojayen unn umoor kay jin kay woh murtakib hotay thay
Devnagri Urdu (Maududi)(ये सब कुछ हम इन्हें इसके लिए करने दे रहे हैं के) जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल इस (खुशनुमा धोखे) की तरफ़ मायिल होन और वो इस रज़ी हो जाएं और उन बुराइयों का इकतिसाब करें जिनका इकतिसाब वो करना चाहते हैं
عَرَبِيأَفَغَيرَ اللَّهِ أَبتَغي حَكَمًا وَهُوَ الَّذي أَنزَلَ إِلَيكُمُ الكِتابَ مُفَصَّلًا ۚ وَالَّذينَ آتَيناهُمُ الكِتابَ يَعلَمونَ أَنَّهُ مُنَزَّلٌ مِن رَبِّكَ بِالحَقِّ ۖ فَلا تَكونَنَّ مِنَ المُمتَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और न्यायकर्ता तलाश करूँ, हालाँकि उसी ने तुम्हारी ओर यह विस्तारपूर्ण पुस्तक उतारी है? तथा जिन लोगों को हमने पुस्तक प्रदान की है, वे जानते हैं कि निश्चय यह आपके पालनहार की ओर से सत्य के साथ अवतरित की गई है। अतः आप हरगिज़ संदेह करने वालों में से न हों।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab haal yeh hai to kya main Allah ke siwa koi aur faisla karne wala talash karoon, halaanke usne poori tafseel ke saath tumhari taraf kitab nazil kardi hai? Aur jin logon ko humne (tumse pehle) kitab di thi woh jantey hain ke yeh kitab tumhare Rubb hi ki taraf se haqq ke saath nazil hui hai, lihaza tum shakk karne walon mein shamil na ho
Roman Urdu (Junagarhi)To kiya Allah kay siwa kissi aur faisla kerney walay ko talash keroon halankay woh aisa hai kay uss ney aik kitab-e-kaamil tumharay pass bhej di hai iss kay mazmeen khoob saaf saaf biyan kiye gaye hain aur jin logon ko hum ney kitab di hai woh iss baat ko yaqeen kay sath jantay hain kay yeh aap kay rab ki taraf say haq kay sath bheji gaee hai so aap shuba kerney walon mein say na hon
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब हाल ये है तो क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और फैसला करने वाला तलाश करूं, हालांके उसने पूरी तफ़सील के साथ तुम्हारी तरफ किताब नाज़िल कर दी है? और जिन लोगों को हमने (तुमसे पहले) किताब दी थी वो जानती है कि ये किताब तुम्हारी रब ही है कि तरफ से हक़ के साथ नाज़िल हुई है, लिहाज़ा तुम शक्क करने वालों में शामिल ना हो
عَرَبِيوَتَمَّت كَلِمَتُ رَبِّكَ صِدقًا وَعَدلًا ۚ لا مُبَدِّلَ لِكَلِماتِهِ ۚ وَهُوَ السَّميعُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)आपके पालनहार की बात सत्य एवं न्याय की दृष्टि से पूरी हो गई। उसकी बातों को कोई बदलने वाला नहीं। और वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Tumhare Rubb ki baat sacchayi aur insaf ke aitebar se kamil hai, koi uske farameen ko tabdeel karne wala nahin hai aur woh sab kuch sunta aur jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kay rab ka kalaam sachaee aur insaf kay aetabaar say kaamil hai iss kay kalaam ko koi badalney wala nahi aur woh khoob sunnay wala khoob jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारे रुब की बात सच्ची और इंसाफ के ऐतबार से कामिल है, कोई उसके फ़रामीन को तबदील करने वाला नहीं है और वो सब कुछ सुनता और जानता है
عَرَبِيوَإِن تُطِع أَكثَرَ مَن فِي الأَرضِ يُضِلّوكَ عَن سَبيلِ اللَّهِ ۚ إِن يَتَّبِعونَ إِلَّا الظَّنَّ وَإِن هُم إِلّا يَخرُصونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) यदि आप उन लोगों में से अधिकतर का कहना मानें जो धरती पर हैं, तो वे आपको अल्लाह के मार्ग से भटका देंगे। वे तो केवल अनुमान का पालन करते हैं और वे इसके सिवा कुछ नहीं कि अटकल दौड़ाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Muhammad) ! agar tum un logon ki aksariyat ke kehne par chalo jo zameen mein baste hain to woh tumhein Allah ke raaste se bhatka denge, woh to mehaz gumaan par chalte aur qayaas-aaraiyan karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur duniya mein ziyada log aisay hain kay agar aap unn ka kehna mannay lagen to woh aap ko Allah ki raah say bey raah ker den woh mehaz bey asal khayalaat per chaltay hain aur bilkul qayassi baaten kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ मुहम्मद)! अगर तुम उन लोगों की अक्सरियत के कहने पर चलो जो ज़मीन में बसे हैं तो वो तुम्हें अल्लाह के रास्ते से भटका देंगे, वो तो मेहज़ गुमान पर चलते और क़यास-आराइयां करते हैं
عَرَبِيإِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعلَمُ مَن يَضِلُّ عَن سَبيلِهِ ۖ وَهُوَ أَعلَمُ بِالمُهتَدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आपका पालनहार ही उसे भली-भाँति जानने वाला है, जो उसके मार्ग से भटकता है तथा वही मार्गदर्शन पाने वालों को खूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Dar haqeeqat tumhara Rubb zyada behtar jaanta hai ke kaun uske raaste se hata hua hai aur kaun seedhi raah par hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bil yaqeen aap ka rab unn ko khoob janta hai jo iss ki raah say bey raah ho jata hai. Aur woh unn ko bhi khoob janta hai jo uss ki raah per chaltay hain
Devnagri Urdu (Maududi)दर हकीकत तुम्हारा रब्ब ज़्यादा बेहतर जानता है के कौन उसके रास्ते से हटा हुआ है और कौन सीधी राह पर है
عَرَبِيفَكُلوا مِمّا ذُكِرَ اسمُ اللَّهِ عَلَيهِ إِن كُنتُم بِآياتِهِ مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम उसमें से खाओ, जिसपर (ज़बह करते समय) अल्लाह का नाम लिया गया है, यदि तुम उसकी आयतों पर ईमान रखने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Phir agar tumlog Allah ki aayat par iman rakhte ho to jis jaanwar par Allah ka naam liya gaya ho uska gosht khao
Roman Urdu (Junagarhi)So jiss janwar per Allah ka naam liya jaye uss mein say khao! Agar tum uss kay ehkaam per eman rakhtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अगर तुम लोग अल्लाह की आयत पर ईमान रखते हो तो जिस जानवर पर अल्लाह का नाम लिया गया हो उसका गोश्त खाओ
عَرَبِيوَما لَكُم أَلّا تَأكُلوا مِمّا ذُكِرَ اسمُ اللَّهِ عَلَيهِ وَقَد فَصَّلَ لَكُم ما حَرَّمَ عَلَيكُم إِلّا مَا اضطُرِرتُم إِلَيهِ ۗ وَإِنَّ كَثيرًا لَيُضِلّونَ بِأَهوائِهِم بِغَيرِ عِلمٍ ۗ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعلَمُ بِالمُعتَدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम्हें क्या है कि तुम उसमें से न खाओ, जिसपर अल्लाह का नाम लिया गया है, हालाँकि निःसंदेह उसने तुम्हारे लिए वे चीज़ें खोलकर बयान कर दी हैं, जो उसने तुमपर हराम की हैं, परंतु जिसकी ओर तुम विवश कर दिए जाओ। और निःसंदेह बहुत-से लोग बिना किसी जानकारी के, अपनी इच्छाओं के द्वारा (लोगों को) पथभ्रष्ट करते हैं। निःसंदेह आपका पालनहार ही हद से बढ़ने वालों को अधिक जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir kya wajah hai ke tum woh cheez na khao jispar Allah ka naam liya gaya ho, halaanke jin cheezon ka istemal halat e iztarar (forbidden you unless you are constrained to) ke siwa dusri tamaam haalaton mein Allah ne haraam kardiya hai unki tafseel woh tumhein bata chuka hai, bakasrat logon ka haal yeh hai ke ilm ke bagair mehaz apni khwahishat ki bina par gumraah-kun baatein karte hain, in hadd se guzarne walon ko tumhara Rubb khoob jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aakhir kiya waja hai kay tum aisay janwar mein say na khao jiss per Allah ka naam liya gaya ho halankay Allah ney unn sab janwaron ki tafseel bata di hai jin ko tum per haram kiya hai magar woh bhi jab tum ko sakht zaroorat parr jaye to halal hai aur yeh yaqeeni baat hai kay boht say aadmi apney khayalaat per bila kissi sanad kay gumrah kertay hain. Iss mein koi shuba nahi kay Allah Taalaa hadd say nikal janey walon ko khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर क्या वजह है के तुम वो चीज ना खाओ जिस्पार अल्लाह का नाम लिया गया हो, हालांके जिन चीजों का इस्तमाल हालात ए इज़्तरार (जब तक आप विवश न हों तब तक आपको मना किया जाता है) के सिवा दूसरी तमाम हालात में अल्लाह ने हराम करदिया है उनकी तफ़सील वो तुम्हें बता चुका है, बकसरत लोगों का हाल ये है के इल्म के बिना महज़ अपनी ख्वाहिशत की बिना पर गुमराह-कुन बातें करते हैं, हद से में गुज़रने वालों को तुम्हारा रब खूब जानता है
عَرَبِيوَذَروا ظاهِرَ الإِثمِ وَباطِنَهُ ۚ إِنَّ الَّذينَ يَكسِبونَ الإِثمَ سَيُجزَونَ بِما كانوا يَقتَرِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ लोगो!) खुले पाप छोड़ दो और उसके छिपे को भी। निःसंदेह जो लोग पाप कमाते हैं, वे शीघ्र ही उसका बदला दिए जाएँगे जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Tum khule gunaahon se bhi bacho aur chupe gunaahon se bhi, jo log gunnah ka iktisaab karte hain woh apni is kamayi ka badla paa kar rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum zahiri gunah ko bhi chor do aur baatini gunah ko chor do. Bila shuba jo log gunah ker rahey hain unn ko unn kay kiye ki un-qarib saza milay gi
Devnagri Urdu (Maududi)तुम खुले गुनाहों से भी बचो और छुपे गुनाहों से भी, जो लोग गुनाहों का इक्तिसाब करते हैं वो अपनी इस कमाई का बदला पा कर रहेंगे
عَرَبِيوَلا تَأكُلوا مِمّا لَم يُذكَرِ اسمُ اللَّهِ عَلَيهِ وَإِنَّهُ لَفِسقٌ ۗ وَإِنَّ الشَّياطينَ لَيوحونَ إِلىٰ أَولِيائِهِم لِيُجادِلوكُم ۖ وَإِن أَطَعتُموهُم إِنَّكُم لَمُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसमें से न खाओ, जिसपर अल्लाह का नाम न लिया गया हो, तथा निःसंदेह यह (खाना) सर्वथा अवज्ञा है। तथा निःसंदेह शैतान अपने मित्रों के मन में संशय डालते रहते हैं, ताकि वे तुमसे झगड़ा करें। और यदि तुमने उनका कहा मान लिया, तो निःसंदेह तुम निश्चय बहुदेववादी हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur jis jaanwar ko Allah ka naam lekar zubah na kiya gaya ho uska gosht na khao, aisa karna fisq hai, shayateen apne saathiyon ke dilon mein shukook (doubts) aur aiterazaat ilqa karte hain taa-ke woh tumse jhagda karein, lekin agar tumne unki itaat qabool karli to yaqeenan tum mushrik ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aisay janwaron mein say mat khao jin per Allah ka naam na liya gaya ho aur yeh kaam na farmani ka hai aur yaqeenan shayateen apney doston kay dilon mein daaltay hain takay yeh tum say jidal keren aur agar tum inn logon ki ita’at kerney lago to yaqeenan tum mushrik hojao
Devnagri Urdu (Maududi)और जिस जानवर को अल्लाह का नाम लेकर जुबां न दिया गया हो उसका गोश्त ना खाओ, ऐसा करना फिस्क है, शयातीन अपने साथियों के दिलों में शुकूक (संदेह) और एतराजात इल्का करते हैं ता-के वो तुमसे झगड़ा करें, लेकिन अगर तुमने उनकी इताअत कबूल की तो यकीनन तुम मुशरिक हो
عَرَبِيأَوَمَن كانَ مَيتًا فَأَحيَيناهُ وَجَعَلنا لَهُ نورًا يَمشي بِهِ فِي النّاسِ كَمَن مَثَلُهُ فِي الظُّلُماتِ لَيسَ بِخارِجٍ مِنها ۚ كَذٰلِكَ زُيِّنَ لِلكافِرينَ ما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या वह व्यक्ति जो मृत था, फिर हमने उसे जीवित किया तथा उसके लिए ऐसा प्रकाश बना दिया, जिसके साथ वह लोगों में चलता-फिरता है, उस व्यक्ति की तरह है जिसका हाल यह है कि वह अँधेरों में है, उनसे कदापि निकलने वाला नहीं? इसी प्रकार काफ़िरों के लिए वे कार्य सुंदर बना दिए गए, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Kya woh shaks jo pehle murda tha phir humne usey zindagi bakhsi aur usko woh roshni ata ki jiske ujale mein woh logon ke darmiyan zindagi ki raah tai karta hai, us shaks ki tarah ho sakta hai jo tareekiyon (darkness) mein pada hua ho aur kisi tarah unsey na nikalta ho? Kaafiron ke liye to isi tarah unke aamal khushnuma bana diye gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aisa shaks jo pehlay murda tha phir hum ney uss ko zinda ker diya aur hum ney uss ko aik aisa noor dey diya kay woh iss ko liye huye aadmiyon mein chalta phirta hai. Kiya aisa shaks uss shaks ki tarah ho sakta hai? Jo tareekiyon say nikal hi nahi pata. Issi tarah kafiron ko unn kay aemaal khushnuma maloom hua kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वो शक्स जो पहले मुर्दा था फिर हमने उसे जिंदगी बख्शी और उसको वो रोशनी मिलती है जिसके उजाले में वो लोगों के दरमियान जिंदगी की राह तय करता है, उस शक्स की तरह हो सकता है जो तारिकियों (अंधेरे) में पड़ा हुआ हो और कोई तरह उनसे ना निकलता हो? काफ़िरों के लिए तो इसी तरह उन्हें अमल ख़ुशनुमा बना दिए गए हैं
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ جَعَلنا في كُلِّ قَريَةٍ أَكابِرَ مُجرِميها لِيَمكُروا فيها ۖ وَما يَمكُرونَ إِلّا بِأَنفُسِهِم وَما يَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार हमने प्रत्येक बस्ती में सबसे बड़े उसके अपराधियों को बना दिया, ताकि वे उसमें चालें चलें। हालाँकि वे अपने ही विरुद्ध चालें चलते है, परंतु वे नहीं समझते।
Roman Urdu (Maududi)Aur isi tarah humne har basti mein uske badey badey mujreemon ko laga diya hai ke wahan apne makar o fareb ka jaal phailayein, darasal woh apne fareb ke jaal mein aap phanste hain, magar unhein iska shaoor nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur issi tarah hum ney her basti mein wahan kay raeeson hi ko jaraeem ka murtakib banaya takay woh log wahan fareb keren. Aure woh log apney hi sath fareb ker rahey hian aur inn ko zara khabar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और इसी तरह हमने हर बस्ती में उसके बड़े-बड़े मुजरिमों को लगा दिया है के वहां अपने मकर ओ फरेब का जाल फैलाएं, दरसल वो अपने फरेब के जाल में आप फंसे हैं, मगर उन्हें इसका शूर नहीं है
عَرَبِيوَإِذا جاءَتهُم آيَةٌ قالوا لَن نُؤمِنَ حَتّىٰ نُؤتىٰ مِثلَ ما أوتِيَ رُسُلُ اللَّهِ ۘ اللَّهُ أَعلَمُ حَيثُ يَجعَلُ رِسالَتَهُ ۗ سَيُصيبُ الَّذينَ أَجرَموا صَغارٌ عِندَ اللَّهِ وَعَذابٌ شَديدٌ بِما كانوا يَمكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनके पास कोई निशानी आती है, तो कहते हैं कि हम कदापि ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि हमें उस जैसा दिया जाए, जो अल्लाह के रसूलों को दिया गया। अल्लाह अधिक जानने वाला है जहाँ वह अपनी पैग़ंबरी रखता है। शीघ्र ही उन लोगों को जिन्होंने अपराध किए, अल्लाह के पास बड़े अपमान तथा कड़ी यातना का सामना करना पड़ेगा, इस कारण कि वे चालबाज़ी (छल) किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jab unke samne koi ayat aati hai to woh kehte hain “hum na manenge jab tak ke woh cheez khud humko na di jaye jo Allah ke Rasoolon ko di gayi hai”. Allah zyada behtar jaanta hai ke apni paighambari ka kaam kissey ley aur kis tarah ley. kareeb hai woh waqt jab yeh mujreem apni makkariyon ki padash mein Allah ke haan zillat aur sakht azaab se do-char honge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab inn ko koi aayat phonchti hai to yun kehtay hain kay hum hergiz eman na layen gay jab tak kay hum ko bhi aisi hi cheez na di jaye jo Allah kay rasoolon ko di jati hai iss moqay ko to Allah hi khoob janta hai kay kahan woh apni payghumbari rakhay? Un-qarib inn logon ko jinhon ney jurm kiya hai Allah kay pass phonch ker zillat phonchay gi aur inn ki shararaton kay muqablay mein sazay-e-sakht
Devnagri Urdu (Maududi)जब उनके सामने कोई आयत आती है तो वो कहते हैं "हम ना मानेंगे जब तक के वो चीज़ खुद हमको ना दी जाए जो अल्लाह के रसूलों को दी गई है"। अल्लाह ज़्यादा बेहतर जानता है के अपनी पैगम्बरी का काम किस्से ले और किस तरह ले। करीब है वो वक्त जब ये मुजरिम अपनी मक्कारियों की याद में अल्लाह के हन जिलत और सख्त अजाब से दो-चार होंगे
عَرَبِيفَمَن يُرِدِ اللَّهُ أَن يَهدِيَهُ يَشرَح صَدرَهُ لِلإِسلامِ ۖ وَمَن يُرِد أَن يُضِلَّهُ يَجعَل صَدرَهُ ضَيِّقًا حَرَجًا كَأَنَّما يَصَّعَّدُ فِي السَّماءِ ۚ كَذٰلِكَ يَجعَلُ اللَّهُ الرِّجسَ عَلَى الَّذينَ لا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो वह व्यक्ति जिसे अल्लाह चाहता है कि उसे मार्गदर्शन प्रदान करे, उसका सीना इस्लाम के लिए खोल देता है और जिसे चाहता है कि उसे गुमराह करे, उसका सीना तंग, अत्यंत घुटा हुआ कर देता है, मानो वह बड़ी कठिनाई से आकाश में चढ़ रहा है। इसी प्रकार अल्लाह उन लोगों पर यातना भेज देता है, जो ईमान नहीं लाते।
Roman Urdu (Maududi)Pas (yeh haqeeqat hai ke) jisye Allah hidayat bakshne ka irada karta hai uska seena Islam ke liye khol deta hai aur jisey gumraahi mein daalne ka irada karta hai uske seene ko tangg kardeta hai aur aisa bhinchta hai ke (Islam ka tasavvur karte hi) usey yun maloom honay lagta hai ke goya uski rooh aasman ki taraf parwaz kar rahi hai. Is tarah Allah (haqq se faraar aur nafrat ki) napaaki un logon par musallat kardeta hai jo iman nahin latey
Roman Urdu (Junagarhi)So jiss shaks ko Allah Taalaa raastay per daalna chahaye uss key seenay ko islam kay liye kushada ker deta hai aur jiss ko bey raah rakhna chahaye uss kay seenay ko boht tang ker deta hai jaisay koi aasman mein charhta hai issi tarah Allah Taalaa eman na laney walo per na paki musallat ker deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ये हकीकत है के) जिसे अल्लाह हिदायत बख्शने का इरादा करता है उसका सीना इस्लाम के लिए खोल देता है और जिसे गुमराही में डालने का इरादा करता है उसके सीने को तंग करता है और ऐसा दिखाता है के (इस्लाम का तसव्वुर करता ही) उसे यूं मालूम होना लगता है के गोया उसकी रूह आसमान की तरफ़ परवाज़ कर रही है। इस तरह अल्लाह (हक़ से फ़रार और नफ़रत की) नापाकी उन लोगों पर मुसल्लत करदेता है जो ईमान नहीं लाते
عَرَبِيوَهٰذا صِراطُ رَبِّكَ مُستَقيمًا ۗ قَد فَصَّلنَا الآياتِ لِقَومٍ يَذَّكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यही आपके पालनहार का सीधा मार्ग है। निःसंदे हमने उन लोगों के लिए निशानियाँ खोलकर बयान कर दी हैं, जो उपदेश ग्रहण करते हों।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke yeh raasta tumhare Rubb ka seedha raasta hai aur iske nishanaat un logon ke liye wazeh kardiye gaye hain jo naseehat qabool karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yehi teray rab kay seedha raasta hai. Hum ney naseehat hasil kerney walon kay wastay inn aayaton ko saaf saaf biyan ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)हलानके ये रास्ता तुम्हारे रब का सीधा रास्ता है और इसके निशाना उन लोगों के लिए वाज़ेह कर दिए गए हैं जो हिदायत क़बूल करते हैं
عَرَبِي۞ لَهُم دارُ السَّلامِ عِندَ رَبِّهِم ۖ وَهُوَ وَلِيُّهُم بِما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनके लिए उनके पालनहार के पास सलामती का घर है। और वह उनका संरक्षक है, उन कर्मों के कारण, जो वे करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Unke liye unke Rubb ke paas salamati ka ghar hai aur woh unka sarparast hai us saheeh tarz-e-amal ki wajah se jo unhon ne ikhtiyar kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Inn logon kay wastay inn kay rab kay pass salamti ka ghar hai aur Allah Taalaa inn say mohabbat rakhta hai inn kay aemaal kay waja say
Devnagri Urdu (Maududi)उनके लिए उनके रब के पास सलामती का घर है और वो उनका सरपरस्त है हमें सही तर्ज़-ए-अमल की वजह से जो उनहों ने इख्तियार किया
عَرَبِيوَيَومَ يَحشُرُهُم جَميعًا يا مَعشَرَ الجِنِّ قَدِ استَكثَرتُم مِنَ الإِنسِ ۖ وَقالَ أَولِياؤُهُم مِنَ الإِنسِ رَبَّنَا استَمتَعَ بَعضُنا بِبَعضٍ وَبَلَغنا أَجَلَنَا الَّذي أَجَّلتَ لَنا ۚ قالَ النّارُ مَثواكُم خالِدينَ فيها إِلّا ما شاءَ اللَّهُ ۗ إِنَّ رَبَّكَ حَكيمٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ नबी! याद करें) जिस दिन अल्लाह उन सबको एकत्र करेगा, (फिर कहेगा :) ऐ जिन्नों के गिरोह! निःसंदेह तुमने बहुत-से मनुष्यों को गुमराह कर दिया है! और मनुष्यों में से उनके मित्र कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! हमने एक-दूसरे से लाभ उठाया और हम अपने उस समय को पहुँच गए, जो तूने हमारे लिए नियत किया था। (अल्लाह) कहेगा : आग ही तुम्हारा ठिकाना है, उसमें हमेशा रहने वाले हो, परंतु जो अल्लाह चाहे। निःसंदेह आपका पालनहार पूर्ण हिकमत वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz Allah in sab logon ko gher kar jama karega, us roz woh Jinno se khitab karke famayega ke “aey giroh e Jinn! Tumne to naw-e-Insani par khoob haath saaf kiya” Insano mein se jo unke rafeeq thay woh arz karenge “parwardigar! Hum mein se har ek ne dusre ko khoob istemal kiya hai, aur ab hum us waqt par aa pahunchey hain jo tu nay hamare liye muqarrar kardiya tha”. Allah farmayega “accha ab aag tumhara thinkana hai, ismein tum hamesha rahogey”.Ussey bachenge sirf wahi jinhein Allah bachana chahega, beshak tumhara Rubb dana aur aleem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss roz Allah Taalaa tamam khalaeeq ko jama keray ga (kahey ga) aey jamat jinnaat ki! Tum ney insanon mein say boht say apna liye jo insan inn kay sath talluq rakhney walay thay woh kahen gay aey humaray perwerdigar hum mein aik ney doosray say faeeda hasil kiya tha aur hum apni iss moyyen muddat tak aa phonchay jo tu ney humaray liye moyyen farmaee Allah farmaye ga kay tum sab ka thikana dozakh hai jiss mein hamesha raho gay haan agar Allah hi ko manzoor hoto doosri baat hai. Be-shak aap ka rab bari hikmat wala bara ilm wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ अल्लाह इन सब लोगों को घेर कर जमा करेगा, उस रोज़ वो जिन्नो से ख़िताब करके फ़ैमायेगा के “ऐ गिरो ए जिन्न! तुमने तो नव-ए-इंसानी पर खूब हाथ साफ किया” इंसानों में से जो उनके रफीक थे वो अर्ज़ करेंगे “परवरदिगार! हम में से हर एक ने दूसरे को खूब इस्तमाल किया है, और अब हम हमें वक्त पर आ रहे हैं जो तू नहीं हमारे लिए मुकर्रर करदिया था”। अल्लाह फरमाएगा "अच्छा अब आग तुम्हारा सोचना है, इसमें तुम हमेशा रहोगे"।उससे बचेंगे सिर्फ वही जिन्हें अल्लाह बचाना चाहेगा, बेशक तुम्हारा रब दाना और अलीम है
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ نُوَلّي بَعضَ الظّالِمينَ بَعضًا بِما كانوا يَكسِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार हम अत्याचारियों को एक-दूसरे का दोस्त बना देते हैं, उसके कारण जो वे कमाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Dekho, is tarha hum (aakhirat mein) zalimon ko ek dusre ka saathi banayenge us kamayi ki wajah se jo woh (duniya mein ek dusre ke saath milkar) karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur issi tarah hum baaz kuffaar ko baaz kay qarib rakhen gay unn kay aemaal kay sabab
Devnagri Urdu (Maududi)देखो, इस तरह हम (आखिरत में) जालिमों को एक दूसरे का साथी बनायेंगे हमें कमाई की वजह से जो वो (दुनिया में एक दूसरे के साथ मिलकर) करते थे
عَرَبِييا مَعشَرَ الجِنِّ وَالإِنسِ أَلَم يَأتِكُم رُسُلٌ مِنكُم يَقُصّونَ عَلَيكُم آياتي وَيُنذِرونَكُم لِقاءَ يَومِكُم هٰذا ۚ قالوا شَهِدنا عَلىٰ أَنفُسِنا ۖ وَغَرَّتهُمُ الحَياةُ الدُّنيا وَشَهِدوا عَلىٰ أَنفُسِهِم أَنَّهُم كانوا كافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(तथा अल्लाह कहेगा :) ऐ जिन्नों तथा मनुष्यों के समूह! क्या तुम्हारे पास तुममें से कोई रसूल नहीं आए, जो तुमपर मेरी आयतें बयान करते हों और तुम्हें तुम्हारे इस दिन की मुलाक़ात से डराते हों? वे कहेंगे : हम अपने आपपर गवाही देते हैं। तथा उन्हें सांसारिक जीवन ने धोखा दिया। और वे अपने आपपर गवाही देंगे कि निश्चय वे काफ़िर थे।
Roman Urdu (Maududi)(Is mauqe par Allah unse puchega ke) “Aey giroh e Jinn o Ins, kya tumhare paas khud tumhi mein se woh paigambar nahi aaye thay jo tumko meri aayat sunate aur is din ke anjaam se darate thay?” Woh kahenge “haan, hum apne khilaf khud gawahi dete hain”. Aaj duniya ki zindagi ne in logon ko dhoke mein daal raakha hai, magar us waqt woh khud apne khilaf gawahi denge ke woh kafir thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aey jinnaat aur insanon ki jamat! Kiya tumharay pass tum mein say hi payghumbar nahi aaye thay jo tum say meray ehkaam biyan kertay aur tum ko iss aaj kay din ki khabar detay? Woh sab arz keren gay kay hum apney upper iqrar kertay hain aur inn ko dunyawi zindagi ney bhool mein dalay rakha aur yeh log iqrar kerney walay hongay kay woh kafir thay
Devnagri Urdu (Maududi)(इस मौके पर अल्लाह उनसे पूछेगा के) "ऐ गिरो ​​ए जिन ओ इंस, क्या तुम्हारे पास खुद तुम्ही में से वो पैगंबर नहीं आए थे जो तुमको मेरी आयत सुनाते और इस दिन के अंजाम से डरते हाँ?” वो कहेंगे "हां, हम अपने खिलाफ़ खुद गवाही देते हैं"। आज दुनिया की जिंदगी ने लोगों को धोखे में डाल रखा है, मगर हमें वक्त वो खुद अपने खिलाफ गवाही देंगे के वो काफिर थे
عَرَبِيذٰلِكَ أَن لَم يَكُن رَبُّكَ مُهلِكَ القُرىٰ بِظُلمٍ وَأَهلُها غافِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) यह (नबियों का भेजना) इसलिए हुआ कि आपका पालनहार किसी बस्ती वालों को - कुफ़्र - इनकार के कारण ऐसी अवस्था में विनष्ट नहीं करता कि उसके निवासी बेखबर हों।
Roman Urdu (Maududi)(Yeh shahadat unse isliye li jaayegi ke yeh saabit ho jaye ke) tumhara Rubb bastiyon ko zulm ke saath tabaah karne wala nahin tha jabke unke bashindey haqeeqat se na-waqif hon
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss waja say hai kay aap ka rab kissi basti walon ko kufur kay sabab aisi halat mein halak nahi kerta kay uss basti kay rehney walay bey khabar hon
Devnagri Urdu (Maududi)(ये शहादत उनसे पूरी हो जाएगी के ये साबित हो जाए के) तुम्हारा रब बस्तियों को जुल्म के साथ तबाह करने वाला नहीं था जबके उनके बाशिंदे हकीकत से ना-वाक़िफ़ होन
عَرَبِيوَلِكُلٍّ دَرَجاتٌ مِمّا عَمِلوا ۚ وَما رَبُّكَ بِغافِلٍ عَمّا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा प्रत्येक व्यक्ति के लिए उसके कर्म के अनुसार पद हैं। और आपका पालनहार लोगों के कर्मों से अनभिज्ञ नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Har shaks ka darja uske amal ke lihaz se hai aur tumhara Rubb logon ke aamal se be khabar nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur her aik kay liye unn kay aemaal kay sabab darjay milen gay aur aap ka rab inn kay aemaal say bey khabar nahi hai
Devnagri Urdu (Maududi)हर शक्स का दरजा उसके अमल के लिहाज़ से है और तुम्हारे रब लोगों के अमल से बे खबर नहीं है
عَرَبِيوَرَبُّكَ الغَنِيُّ ذُو الرَّحمَةِ ۚ إِن يَشَأ يُذهِبكُم وَيَستَخلِف مِن بَعدِكُم ما يَشاءُ كَما أَنشَأَكُم مِن ذُرِّيَّةِ قَومٍ آخَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आपका पालनहार निस्पृह, दयाशील है। वह चाहे तो तुम्हें ले जाए और तुम्हारे स्थान पर दूसरों को ले आए। जैसे तुम लोगों को दूसरे लोगों की संतति से पैदा किया है।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara Rubb be-niyaz hai aur meharbani uska shewa hai. Agar woh chahey to tum logon ko le jaye aur tumhari jagah dusre jin logon ko chahe le aaye jis tarah usne tumhein kuch aur logon ki nasal se uthaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aap ka rab bilkul ghani hai rehmat wala hai agar woh chahaye to tum sab ko utha ley aur tumharay baad jiss ko chahaye tumhari jagah aabad keray jaisa kay tum ko aik doosri qom ki nasal say peda kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा रब बे-नियाज़ है और मेहरबानी उसका शेवा है। अगर वो चाहे तो तुम लोगों को ले जाए और तुम्हारी जगह दूसरे जिन लोगों को चाहे ले आए जिस तरह उसने तुम्हें कुछ और लोगों की नाक से उठाया है
عَرَبِيإِنَّ ما توعَدونَ لَآتٍ ۖ وَما أَنتُم بِمُعجِزينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हें जिस (क़ियामत) का वचन दिया जा रहा है, उसे अवश्य आना है। और तुम (अल्लाह को) विवश नहीं कर सकते।
Roman Urdu (Maududi)Tumse jis cheez ka wada kiya jaa raha hai woh yaqeenan aane wali hai aur tum khuda ko aajiz (frustrate) kardene ki taqat nahin rakhte
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss cheez ka tum say wada kiya jata hai woh be-shak aaney wali cheez hai aur tum aajiz nahi ker saktay
Devnagri Urdu (Maududi)तुमसे जिस चीज का वादा किया जा रहा है वो यकीनन आने वाली है और तुम खुदा को आजिज (निराश) करदेने की ताक़त नहीं रखते
عَرَبِيقُل يا قَومِ اعمَلوا عَلىٰ مَكانَتِكُم إِنّي عامِلٌ ۖ فَسَوفَ تَعلَمونَ مَن تَكونُ لَهُ عاقِبَةُ الدّارِ ۗ إِنَّهُ لا يُفلِحُ الظّالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ रसूल) आप कह दें : ऐ मेरी जाति के लोगो! (यदि तुम नहीं मानते) तो तुम अपनी जगह कर्म करते रहो। मैं भी कर्म कर रहा हूँ। शीघ्र ही तुम जान लोगे कि किसका अंत (परिणाम) अच्छा है। निःसंदेह अत्याचारी लोग सफल नहीं होंगे।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! Kehdo ke logon! Tum apni jagah amal karte raho aur main bhi apni jagah amal kar raha hoon. Anqareeb tumhein maloom ho jayega ke anjaam e kaar kiske haqq mein behtar hota hai. Bahar-haal yeh haqeeqat hai ke zalim kabhi falaah nahin paa sakte
Roman Urdu (Junagarhi)Aap yeh farma dijiye kay aey meri qom ! Tum apni halat per amal kertay raho mein bhi amal ker raha hun so abb jald hi tum ko maloom hua jata hai kay iss aalam ka anjam kaar kiss kay liye naafay hoga. Yeh yaqeeni baat hai kay haq talfi kerney walon ko kabhi falah na hogi
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! कहदो के लोगन! तुम अपनी जगह अमल करते रहो और मैं भी अपनी जगह अमल कर रहा हूँ। अंकारीब तुम्हें मालूम हो जाएगा के अंजाम ए कार किसके हक में बेहतर होता है। बहार-हाल ये हकीकत है के जालिम कभी फलाह नहीं पा सकते
عَرَبِيوَجَعَلوا لِلَّهِ مِمّا ذَرَأَ مِنَ الحَرثِ وَالأَنعامِ نَصيبًا فَقالوا هٰذا لِلَّهِ بِزَعمِهِم وَهٰذا لِشُرَكائِنا ۖ فَما كانَ لِشُرَكائِهِم فَلا يَصِلُ إِلَى اللَّهِ ۖ وَما كانَ لِلَّهِ فَهُوَ يَصِلُ إِلىٰ شُرَكائِهِم ۗ ساءَ ما يَحكُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने अल्लाह की पैदा की हुई खेती और पशुओं में उसका एक भाग निश्चित किया। फिर वे अपने विचार से कहते हैं : "यह अल्लाह का है और यह हमारे ठहराए हुए साझीदारों का।" फिर जो हिस्सा उनके बनाए हुए साझियों का है, वह तो अल्लाह को नहीं पहुँचता, परंतु जो हिस्सा अल्लाह का है, वह उनके साझियों को पहुँच जाता है। क्या ही बुरा निर्णय है, जो वे करते हैं!
Roman Urdu (Maududi)In logon ne Allah ke liye khud usi ki paida ki hui khetiyon aur maweshiyon mein se ek hissa muqarrar kiya hai aur kehte hain yeh Allah ke liye hai, bazaam e khud, aur yeh hamare thehraye huey shareekon ke liye. Phir jo hissa inke thehraye huey shareekon ke liye hai woh to Allah ko nahin pahunchta magar jo Allah ke liye hai woh inke shareekon ko pahunch jata hai. Kaise burey faisle karte hain yeh log
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa ney jo kheti aur mawashi peda kiye hain inn logon ney inn mein say kuch hissa Allah ka muqarrar kiya aur ba-zom khud kehtay hain kay yeh to Allah ka hai aur yeh humaray maboodon ka hai phir jo cheez inn kay maboodon ki hoti hai woh to Allah ki taraf nahi phonchti aur jo cheez Allah ki hoti hai woh inn kay maboodon ki taraf phonch jati hai kiya bura faisla woh kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों ने अल्लाह के लिए खुद की अदा की, जो हुई खेतों और मवेशियों में से एक हिसा मुकर्रर किया है और कहते हैं ये अल्लाह के लिए है, बज़म ए खुद, और ये हमारे ठहरे हुए शरीकों के लिए। फिर जो हिसा इनके ठहरे हुए शरीकों के लिए है वो तो अल्लाह को नहीं पहचानता मगर जो अल्लाह के लिए है वो इनके शरीकों को पहुंच जाता है। कैसे बुरे फैसले करते हैं ये लोग
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ زَيَّنَ لِكَثيرٍ مِنَ المُشرِكينَ قَتلَ أَولادِهِم شُرَكاؤُهُم لِيُردوهُم وَلِيَلبِسوا عَلَيهِم دينَهُم ۖ وَلَو شاءَ اللَّهُ ما فَعَلوهُ ۖ فَذَرهُم وَما يَفتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार, बहुत-से मुश्रिकों के लिए, उनके बनाए हुए साझियों ने, उनकी अपनी संतान की हत्या को सुंदर बना दिया है, ताकि उनका विनाश कर दें और ताकि उनके धर्म को उनपर संदिग्ध कर दें। और यदि अल्लाह चाहता, तो वे ऐसा न करते। अतः आप उन्हें छोड़ दें तथा उनकी बनाई हुई बातों को।
Roman Urdu (Maududi)Aur isi tarah bahut se mushreekon ke liye unke shareekon ne apni aulad ke qatal ko khushnuma bana diya hai taa-ke unko halakat mein mubtila karein aur unpar unke deen ko mushtaba(confusion) bana dein. Agar Allah chahta to yeh aisa na karte, lihaza inhein chodh do ke apni iftara pardaziyon mein lagey rahein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur issi tarah boht say mushrikeen kay khayal mein unn kay maboodon ney unn ki aulad kay qatal kerney ko mustehsan bana rakha hai takay woh inn ko barbad keren aur takay inn kay deen ko inn per mushtaba ker den aur agar Allah ko manzoor hota to yeh aisa kaam na kertay to aap inn ko aur jo kuch ghalat baaten yeh bana rahey hain yun hi rehney dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)और इसी तरह बहुत से मुशरिकों के लिए उनके शरीकों ने अपनी औलाद के कत्ल को खुशनुमा बना दिया है ता-के उनको हलकत में मुब्तिला करें और उनके दीन को मुश्तबा (भ्रम) बना दें। अगर अल्लाह चाहता तो ये ऐसा ना करते, लिहाजा इन्हें छोड़ दो के अपनी इफ्तारा पर्दाजियों में लगे रहेंगे
عَرَبِيوَقالوا هٰذِهِ أَنعامٌ وَحَرثٌ حِجرٌ لا يَطعَمُها إِلّا مَن نَشاءُ بِزَعمِهِم وَأَنعامٌ حُرِّمَت ظُهورُها وَأَنعامٌ لا يَذكُرونَ اسمَ اللَّهِ عَلَيهَا افتِراءً عَلَيهِ ۚ سَيَجزيهِم بِما كانوا يَفتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे कहते हैं कि ये पशु और खेत वर्जित हैं। इन्हें वही खा सकता है, जिसे हम खिलाना चाहें। ऐसा वे अपने ख़याल से कहते हैं। फिर कुछ पशु हैं, जिनकी पीठ हराम (वर्जित) हैं। और कुछ पशु हैं, जिनपर (ज़बह करते समय) अल्लाह का नाम नहीं लेते। यह उन्होंने अल्लाह पर झूठ गढ़ा है। उन्हें वह उनके इस झूठ गढ़ने का बदला अवश्य देगा।
Roman Urdu (Maududi)Kehte hain yeh jaanwar aur yeh khet mehfooz hain, inhein sirf wahi log kha sakte hain jinhein hum khilana chahein, halaanke yeh paabandi inki khud saaqta hai(by their claim). Phir kuch jaanwar hain jinpar sawari aur baar bardari (burden the backs) haraam kardi gayi hai aur kuch jaanwar hain jinpar Allah ka naam nahin letey. Aur yeh sab kuch inhon ne Allah par iftara (false fabrications) kiya hai, ankareeb Allah inhein in iftara pardaziyon ka badla dega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh apney khayal per yeh bhi kehtay hain kay yeh kuch mawashi hain aue khet hain jin ka isteymaal her shaks ko jaeez nahi inn ko koi nahi kha sakta siwaye unn kay jin ko hum chahayen aur mawashi hain jin per sawari ya baar bardari haram ker di gaee aue kuch mawashi hain jin per yeh log Allah Taalaa ka naam nahi letay mehaz Allah per iftra bandhney kay tor per. Abhi Allah Taalaa inn ko inn kay iftra ki saza diye deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)कहते हैं ये जानवर और ये खेत महफूज हैं, इनमें सिर्फ वही लोग खा सकते हैं जिन्हें हम खिलाना चाहते हैं, हलांके ये पाबंदी इनकी खुद साकता है (उनके दावे से)। फिर कुछ जानवर हैं जिनपर सवारी और बार बारदारी (पीठ पर बोझ) हराम कर दी गई है और कुछ जानवर हैं जिनपर अल्लाह का नाम नहीं लेते। और ये सब कुछ इन्हों ने अल्लाह पर इफ्तारा (झूठी मनगढ़ंत बातें) किया है, इफ्तारा परदाज़ियों का बदला देगा में अनकरीब अल्लाह इन्हें
عَرَبِيوَقالوا ما في بُطونِ هٰذِهِ الأَنعامِ خالِصَةٌ لِذُكورِنا وَمُحَرَّمٌ عَلىٰ أَزواجِنا ۖ وَإِن يَكُن مَيتَةً فَهُم فيهِ شُرَكاءُ ۚ سَيَجزيهِم وَصفَهُم ۚ إِنَّهُ حَكيمٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा कि इन पशुओं के पेट में जो कुछ है, वह हमारे पुरुषों ही के लिए है और हमारी पत्नियों के लिए वर्जित है। और यदि मरा हुआ हो, तो सभी उसमें शामिल होंगे। शीघ्र ही अल्लाह उन्हें उनके ऐसा कहने का बदला देगा। निःसंदेह वह हिकमत वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur kehte hain ke jo kuch in jaanwaron ke pait (bellies) mein hain yeh hamare mardon ke liye makhsoos hai aur hamari auraton par haraam, lekin agar woh murda ho (born dead) to dono iske khane mein shareek ho sakte hain. Yeh baatein jo inhon ne ghadh li hain inka badla Allah inhein dekar rahega. Yaqeenan woh hakeem hai aur sab baaton ki usey khabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh kehtay hain kay jo cheez inn mawashi kay pet mein hai woh khalis humaray mardon kay liye hai aur humari aurton per haram hai. Aur agar woh murda hai to iss mein sab barabar hain abhi Allah inn ko inn ki ghalat biyani ki saza diye deta hai bila shuba woh hikmat wala hai aur woh bara ilm wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और कहते हैं कि जानवरों के पेट में जो कुछ है ये हमारे मर्दों के लिए मखसूस है और हमारी औरतें पर हराम, लेकिन अगर वो मुर्दा हो (जन्म से मृत) तो दोनों इसके खाने में शरीक हो सकते हैं। ये बातें जो इन्हों ने गड़बड़ ली हैं इनका बदला अल्लाह इन्हें देकर रहेगा। यकीनन वो हकीम है और सब बातों की उपयोगी खबर है
عَرَبِيقَد خَسِرَ الَّذينَ قَتَلوا أَولادَهُم سَفَهًا بِغَيرِ عِلمٍ وَحَرَّموا ما رَزَقَهُمُ اللَّهُ افتِراءً عَلَى اللَّهِ ۚ قَد ضَلّوا وَما كانوا مُهتَدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय वे लोग क्षति में पड़ गए, जिन्होंने मूर्खता के कारण, बिना किसी ज्ञान के, अपने संतान की हत्या की। और उस जीविका को, जो अल्लाह ने उन्हें प्रदान की थी, अल्लाह पर आरोप लगाकर, अवैध बना लिया। वास्तव में, वे भटक गए और सीधी राह प्राप्त नहीं कर सके।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan khasare(nuksan) mein padh gaye woh log jinhon ne apni aulad ko jihalat (ignorance) o nadaani ki bina par qatal kiya aur Allah ke diye huye rizq ko Allah par iftara pardazi karke haraam thehra liya, yaqeenan woh bhatak gaye aur hargiz woh raah e raast paney walon mein se na thay
Roman Urdu (Junagarhi)Waqaee kharabi mein parr gaye woh log jinhon ney apni aulad ko mehaz barah-e-himaqat bila kiss sanad kay qatal ker dala aur jo cheez inn ko Allah ney khaney peeney ko di thin unn ko haram ker liya mehaz Allah per iftra bandhney kay tor per. Be-shak yeh log gumrahi mein parr gaye aur kabhi raah-e-raast per chalney walay nahi huye
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन खसरे (नुक्सान) में पढ़ गए वो लोग जिन्होन ने अपनी औलाद को जिहालत (अज्ञानता) ओ नादानी की बिना पर क़त्ल किया और अल्लाह के दिए हुए रिज़क को अल्लाह पर इफ्तारा परदाज़ी करके हराम ठहरा लिया, यकीनन वो भटक ​​गए और हरगिज वो राह ए रास्ते पाने वालों में से ना थे
عَرَبِي۞ وَهُوَ الَّذي أَنشَأَ جَنّاتٍ مَعروشاتٍ وَغَيرَ مَعروشاتٍ وَالنَّخلَ وَالزَّرعَ مُختَلِفًا أُكُلُهُ وَالزَّيتونَ وَالرُّمّانَ مُتَشابِهًا وَغَيرَ مُتَشابِهٍ ۚ كُلوا مِن ثَمَرِهِ إِذا أَثمَرَ وَآتوا حَقَّهُ يَومَ حَصادِهِ ۖ وَلا تُسرِفوا ۚ إِنَّهُ لا يُحِبُّ المُسرِفينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह वही है, जिसने बेलों वाले तथा बिना बेलों वाले बाग़ पैदा किए, तथा खजूर और खेती (पैदा की), जिनसे विभिन्न प्रकार की पैदावार प्राप्त होती है, और ज़ैतुन तथा अनार (पैदा किए), जो एक-दूसरे से मिलते-जुलते भी होते हैं और नहीं भी होते। जब वह फल दे, तो उसका फल खाओ और उकी कटाई के दिन उसका हक़ (ज़कात) अदा करो। और बेजा खर्च न करो। निःसंदेह अल्लाह बेजा ख़र्च करने वालों से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi hai jisne tarah tarah ke baagh aur taakistaan aur nakhlastan (the trellised and untrellised) paida kiye, khetiyan ugayi jinse qisam qisam ke makulaat haasil hotey hain (palm trees, and crops, all varying in taste) , zaitoon aur anaar ke darakht paida kiye jinke phal surat mein mushabeh (similar) aur mazey (taste) mein mukhtalif hotey hain. Khao unki paidawaar jabke yeh phalein, aur Allah ka haqq ada karo jab iski fasal kaato, aur hadd se na guzro ke Allah hadd se guzarne walon ko pasand nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wohi hai jiss ney baghaat peda kiye woh bhi jo tattiyon per charhaye jatay hain aur woh bhi jo tattiyon per nahi charhaye jatay aur khujoor kay adrakht aur kheti jin mein khaney ki cheezen mukhatalif tor ki hoti hain aur zaitoon aur anaar jo bahum aik doosray kay mushabay bhi hotay hain aur aik doosray kay mushabay nahi bhi hotay inn sab kay phalon mein say khao jab woh nikal aaye aue iss mein jo haq wajib hai woh iss kay kaatney kay din diya kero aur hadd say mat guzro yaqeenan woh hadd say guzarney walon ko na pasand kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह ही है जिसने तरह तरह के बाघ और ताकिस्तान और नखलास्तान (जालीदार और बिना जाली वाला) पैदा किए, खेतियां उगाई जिनसे क़िस्म क़िस्म के मकुलात हासिल होते हैं (ताड़ के पेड़, और फसलें, सभी स्वाद में भिन्न होते हैं), ज़ैतून और अनार के दरख़्त पैदा किये हैं जिनके फल सूरत में मुशाबेह (समान) और मज़ा (स्वाद) में मुख़्तलिफ़ होते हैं। खाओ उनकी पैदावर जबके ये फैलाएं, और अल्लाह का हक अदा करो जब इसकी फसल काटो, और हद से ना गुजरो के अल्लाह हद से गुजारने वालों को पसंद नहीं करता
عَرَبِيوَمِنَ الأَنعامِ حَمولَةً وَفَرشًا ۚ كُلوا مِمّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ وَلا تَتَّبِعوا خُطُواتِ الشَّيطانِ ۚ إِنَّهُ لَكُم عَدُوٌّ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा चौपायों में कुछ सवारी और बोझ लादने योग्य (पैदा किए) और कुछ धरती से लगे हुए। जो कुछ अल्लाह ने तुम्हें दिया है, उसमें से खाओ और शैतान के पदचिह्नों पर न चलो। निश्चय ही वह तुम्हारा खुला शत्रु है।
Roman Urdu (Maududi)Phri wahi hai jisne maweshiyon mein se woh jaanwar bhi paida kiye jinse sawari o baar-bardaari (burden) ka kaam liya jata hai aur woh bhi jo khane aur bichane ke kaam aate hain. Khao un cheezon mein se jo Allah ne tumhein bakshi hain aur shaytan ki pairwi na karo ke woh tumhara khula dushman hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mawashi mein oonchay qad kay aur chotay qad kay (peda kiye) jo kuch Allah ney tum ko diya hai khao aur shetan kay qadam ba qadam mat chalo bila shak woh tumhara sareeh dushman hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वही है जिसने मवेशियों में से वो जानवर भी पैदा किए जिनसे सवारी ओ बार-बारदारी (बोझ) का काम लिया जाता है और वो भी जो खाने और बेचने के काम आते हैं। खाओ उन चीज़ों में से जो अल्लाह ने तुम्हें बख्शी है और शैतान की जोड़ी ना करो के वो तुम्हारा खुला दुश्मन है
عَرَبِيثَمانِيَةَ أَزواجٍ ۖ مِنَ الضَّأنِ اثنَينِ وَمِنَ المَعزِ اثنَينِ ۗ قُل آلذَّكَرَينِ حَرَّمَ أَمِ الأُنثَيَينِ أَمَّا اشتَمَلَت عَلَيهِ أَرحامُ الأُنثَيَينِ ۖ نَبِّئوني بِعِلمٍ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) आठ नर-मादा (पैदा किए)। भेड़ में से दो और बकरी में से दो। आप उनसे पूछिए कि क्या अल्लाह ने दोनों नर हराम किए हैं अथवा दोनों मादा या उसे जो इन दोनों मादा के पेट में हो? मुझे किसी ज्ञान के आधार पर बताओ, यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh aath (eight) narr o mada (couples) hain, do bhedh (sheep) ki qisam se aur do bakri ki qisam se. (Aey Muhammad)! Insey pucho ke Allah ne unke narr haraam kiye hain ya maada, ya woh bacchey jo bhedon (sheeps) aur bakriyon ke pait mein hon? Theek theek ilm ke saath mujhey batao agar tum sacchey ho
Roman Urdu (Junagarhi)(peda kiye) aath narr-o-maada yani bhair mein do qisam aur bakri mein do qisam aap kahiye kay kiya Allah ney inn dono narron ko haram kiya hai ya dono maada ko? Ya uss ko jiss ko dono maada pet mein liye huye hon? Tum mujh ko kissi daleel say to batao agar sachay ho
Devnagri Urdu (Maududi)ये आठ (आठ) नर्र ओ माडा (जोड़े) हैं, दो भेड़ (भेड़) की क़िस्म से और दो बकरी की क़िस्म से। (ऐ मुहम्मद)! इनसे पूछो के अल्लाह ने उनके नार हराम किये हैं या माडा, या वो बच्चे जो भेड़ों (भेड़) और बकरियों के पेट में हैं? ठीक ठीक इल्म के साथ मुझे बताओ अगर तुम सच्चे हो
عَرَبِيوَمِنَ الإِبِلِ اثنَينِ وَمِنَ البَقَرِ اثنَينِ ۗ قُل آلذَّكَرَينِ حَرَّمَ أَمِ الأُنثَيَينِ أَمَّا اشتَمَلَت عَلَيهِ أَرحامُ الأُنثَيَينِ ۖ أَم كُنتُم شُهَداءَ إِذ وَصّاكُمُ اللَّهُ بِهٰذا ۚ فَمَن أَظلَمُ مِمَّنِ افتَرىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا لِيُضِلَّ النّاسَ بِغَيرِ عِلمٍ ۗ إِنَّ اللَّهَ لا يَهدِي القَومَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और ऊँट में से दो तथा गाय में से दो। आप पूछिए कि क्या अल्लाह ने दोनों नर हराम किए हैं अथवा दोनों मादा या उसे जो दोनों मादा के पेट में हो? क्या तुम उस समय उपस्थित थे, जब अल्लाह ने तुम्हें इसका आदेश दिया था? फिर उससे बड़ा अत्याचारी कौन होगा, जो अल्लाह पर झूठ गढ़े ताकि लोगों को बिना किसी ज्ञान के गुमराह करे? निश्चय अल्लाह अत्याचारियों को सत्य का मार्ग नहीं दिखाता।
Roman Urdu (Maududi)Aur isi tarah do ount ki qisam se hain aur do gai (cow) ki qisam se. Pucho, inke narr Allah ne haraam kiye hain ya maada, ya woh bacchey jo ountni (she-camel) aur gai ke pait mein hon? Kya tum us waqt haazir thay jab Allah ne inke haraam honay ka hukum tumhein diya tha? Phir us shaks se badh kar zalim aur kaun hoga jo Allah ki taraf mansoob karke jhooti baat kahey taa-ke ilm ke bagair logon ki galat rehnumayi karey. Yaqeenan Allah aisey zalimon ko raah e raast nahin dikhata
Roman Urdu (Junagarhi)Aur oont mein do qisam aur gaye mein do qisam aap kahiye kay kiya Allah Taalaa ney inn dono narron ko haram kiya hai ya dono maada ko? Ya uss ko jiss ko dono maada pet mein liye huye hon? Kiya tum hazir thay jiss waqt Allah Taalaa ney tum ko iss ka hukum diya? To uss say ziyada kaun zalim hoga jo Allah Taalaa per bila daleel jhooti tohmat lagaye takay logon ko gumrah keray yaqeenan Allah Taalaa zalim logon ko raasta nahi dikhlata
Devnagri Urdu (Maududi)और इसी तरह दो औंस की क़िस्म से हैं और दो गाय (गाय) की क़िस्म से। पूछो, इनके नर अल्लाह ने हराम किये हैं या माडा, या वो बच्चे जो ऊंटनी (वह-ऊंटनी) और गाई के पेट में हैं? क्या तुमने हमें वक्त हाजिर किया था जब अल्लाह ने इनको हराम होने का हुक्म तुम्हें दिया था? फिर उस शक्स से बढ़ कर जालिम और कौन होगा जो अल्लाह की तरफ मंसूब करके झूठी बात कहे ता-के इल्म के बगैर लोगों की गलत रहनुमाई करे। यकीनन अल्लाह ऐसे ज़ालिमों को राह ए रस्त नहीं दिखता
عَرَبِيقُل لا أَجِدُ في ما أوحِيَ إِلَيَّ مُحَرَّمًا عَلىٰ طاعِمٍ يَطعَمُهُ إِلّا أَن يَكونَ مَيتَةً أَو دَمًا مَسفوحًا أَو لَحمَ خِنزيرٍ فَإِنَّهُ رِجسٌ أَو فِسقًا أُهِلَّ لِغَيرِ اللَّهِ بِهِ ۚ فَمَنِ اضطُرَّ غَيرَ باغٍ وَلا عادٍ فَإِنَّ رَبَّكَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें कि मेरी ओर जो वह़्य (प्रकाशना) की गई है, उसमें मैं किसी खाने वाले पर, कोई चीज़ जो वह खाना चाहे, हराम नहीं पाता, सिवाय इसके कि मुरदार हो या बहता हुआ रक्त हो या सूअर का मांस हो; क्योंकि वह निश्चय ही नापाक है, या अवैध हो, जिसे अल्लाह के सिवा दूसरे के नाम पर ज़बह किया गया हो। परंतु जो विवश हो जाए (तो वह खा सकता है) यदि वह विद्रोही तथा सीमा लाँघने वाला न हो। निःसंदेह आपका पालनहार अति क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! Insey kaho ke jo wahee mere paas aayi hai usmein to main koi cheez aisi nahin paata jo kisi khane waley par haraam ho, illa yeh ke woh murdar (dead) ho, ya bahaya (out poured) hua khoon, ya suwwar ka gosht ho ke woh napaak hai, ya fisq (unclean) ho ke Allah ke siwa kisi aur ke naam par zubah kiya gaya ho, phir jo shaks majboori ki haalat mein ( koi cheez inmein se kha le) bagair iske ke woh nafarmani ka irada rakhta ho aur bagair iske ke woh hadd e zaroorat se tajawuz karey, to yaqeenan tumhara Rubb darguzar se kaam lene wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay jo kuch ehkaam ba-zariya wahee meray pass aaye hain unn mein to mein koi haram nahi pata kissi khaney walay kay liye jo uss ko khaye magar yeh kay woh murdaar ho ya khinzeer ka gosht ho kiyon kay woh bilkul na pak hai ya jo shirk ka zariya ho kay ghair Allah kay liye naamzad ker diya gaya ho. Phir jo shaks majboor hojaye ba-shart-e-kay na to taalib-e-lazzat ho aur na tajawuz kerney wala ho to waqaee aap ka rab ghafoor-ur-raheem hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के जो वही मेरे पास आई है उसमें तो मैं कोई चीज ऐसी नहीं पाता जो किसी खाने वाले पर हराम हो, इल्ला ये के वो मुर्दार (मृत) हो, या बहया (बाहर डाला गया) हुआ खून, या सुव्वर का गोश्त हो के वो नापाक है, या फिस्क (अस्वच्छ) हो के अल्लाह के सिवा किसी और के नाम पर जुबां किया गया हो, फिर जो शक्स मजबूरी की हालत में (कोई चीज इनमें से खा ले) बिना इसके के वो नफरमानी का इरादा रखता हूं और बिना इसके के वो हद ए जरुरत से तजावुज करे, तो यकीनन तुम्हारा रब दरगुजर से काम लेने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِيوَعَلَى الَّذينَ هادوا حَرَّمنا كُلَّ ذي ظُفُرٍ ۖ وَمِنَ البَقَرِ وَالغَنَمِ حَرَّمنا عَلَيهِم شُحومَهُما إِلّا ما حَمَلَت ظُهورُهُما أَوِ الحَوايا أَو مَا اختَلَطَ بِعَظمٍ ۚ ذٰلِكَ جَزَيناهُم بِبَغيِهِم ۖ وَإِنّا لَصادِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने यहूदियों पर नाखून वाले जानवर ह़राम कर दियए थे और उनपर गाय एवं बकरी की चर्बियाँ भी हराम कर दी थीं। परंतु जो दोनों की पीठों या आँतों से लगी हों अथवा जो किसी हड्डी से मिली हुई हो (हलाल है)। हमने उन्हें यह बदला उनकी अवज्ञा के कारण दिया था। तथा निश्चय ही हम सच्चे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jin logon ne yahudiyat ikhtiyar ki unpar humne sab nakhoon(nails) waley jaanwar haraam kardiye thay, aur gai aur bakri ki charbi (fat) bhi, bajuz uske jo unki peeth (back) ya unki anthon (entrails) se lagi hui ho ya haddi se lagi reh jaye. Yeh humne unki sarkashi ki saza unhein di thi aur yeh jo kuch hum keh rahey hain bilkul sach keh rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yahun per hum ney tamam nakhun walay janwar haram ker diye thay aur gaye aur bakri mein say inn dono ki charbiyan unn per hum ney haram ker di thin magar woh jo unn ki pusht per ya antriyon mein lagi ho ya jo haddi say milli ho. Unn ki shararat kay sabab hum ney unn ko yeh saza di aur hum yaqeenan sachay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जिन लोगों ने यहुदियात इख्तियार की अनपर हमने सब नाख़ून (नाखून) वाले जानवर हराम कर दिए थे, और गाय और बकरी की चारबी (मोटी) भी, बज़ुज़ उसके जो उनकी पीठ (पीठ) या उनकी एंथोन (अंतरिक्ष) से ​​लगी हुई हो या हड्डी से लगी रह जाये. ये हमने उनकी सरकशी की सजा उन्हें दी थी और ये जो कुछ हम कह रहे हैं बिल्कुल सच कह रहे हैं
عَرَبِيفَإِن كَذَّبوكَ فَقُل رَبُّكُم ذو رَحمَةٍ واسِعَةٍ وَلا يُرَدُّ بَأسُهُ عَنِ القَومِ المُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर (ऐ नबी!) यदि ये लोग आपको झुठलाएँ, तो कह दें कि तुम्हारा पालनहार व्यापक दया का मालिक है तथा उसकी यातना को अपराधियों से फेरा नहीं जा सकेगा।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar woh tumhein jhutlayein to unse kehdo ke tumhare Rubb ka daaman e rehmat waseeh hai aur mujreemon se uske azaab ko phera nahin jaa sakta
Roman Urdu (Junagarhi)Phir agar yeh aap ko kaazib kahen to aap farma dijiye kay tumhara rab bara wasee rehmat wala hai aur iss ka azab mujrim logon say na talay ga
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर वो तुम्हें झुटलाएएं तो उनसे कहदो के तुम्हारे रब का दामन ए रहमत वही है और मुजरिमों से उसके अज़ाब को फेरा नहीं जा सकता
عَرَبِيسَيَقولُ الَّذينَ أَشرَكوا لَو شاءَ اللَّهُ ما أَشرَكنا وَلا آباؤُنا وَلا حَرَّمنا مِن شَيءٍ ۚ كَذٰلِكَ كَذَّبَ الَّذينَ مِن قَبلِهِم حَتّىٰ ذاقوا بَأسَنا ۗ قُل هَل عِندَكُم مِن عِلمٍ فَتُخرِجوهُ لَنا ۖ إِن تَتَّبِعونَ إِلَّا الظَّنَّ وَإِن أَنتُم إِلّا تَخرُصونَ
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हिन्दी (Al-Omari)बहुदेववादी अवश्य कहेंगे कि यदि अल्लाह चाहता, तो हम तथा हमारे पूर्वज (अल्लाह का) साझी न बनाते और न हम किसी चीज़ को हराम ठहराते। ऐसे ही इनसे पहले के लोगों ने भी झुठलाया था, तो उन्हें हमारी यातना का स्वाद चखना पड़ा। (ऐ नबी!) उनसे पूछिए कि क्या तुम्हारे पास (इस विषय में) कोई ज्ञान है, जिसे तुम हमारे समक्ष प्रस्तुत कर सको? तुम तो केवल अनुमान पर चलते हो और केवल अटकल से काम लेते हो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh mushrik log (tumhari in baaton ke jawab mein) zaroor kahenge ke “agar Allah chahta to na hum shirk karte aur na hamare baap dada, aur na hum kisi cheez ko haraam thehrate”. Aisi hi baatein bana bana kar inse pehle ke logon ne bhi haqq ko jhutlaya tha, yahaan tak ke aakhir e kaar hamare azaab ka maza unhon ne chakh liya. Inse kaho “kya tumhare paas koi ilm hai jisey hamare saamne pesh kar sako? Tum to mehaz gumaan par chal rahey ho aur neri qayas aaraiyan karte ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh mushrikeen (yun) kahen gay kay agar Allah Taalaa ko manzoor hota to na hum shirk kertay aur na humaray baap dada aur na hum kissi cheez ko haram keh saktay. Issi tarah jo log inn say pehlay ho chukay hain unhon ney bhi takzeeb ki thi yahan tak kay unhon ney humaray azab ka maza chakha. Aap kahiye kay kiya tumharay pass koi daleel hai to iss ko humaray roo baroo zahir kero. Tum log mehaz khayali baaton per chaltay ho aur tum bilkul atkal say baaten banatay ho
Devnagri Urdu (Maududi)ये मुशरिक लोग (तुम्हारी इन बातों के जवाब में) जरूर कहेंगे के "अगर अल्लाह चाहता तो ना हम शिर्क करते और ना हमारे बाप दादा, और ना हम किसी चीज को हराम ठहराते"। ऐसी ही बातें बना बना कर इनसे पहले के लोगों ने भी हक को झुटलाया था, यहां तक ​​के आखिर ए कार हमारे अजब का मजा उन्होन ने चक लिया। इनसे कहो "क्या तुम्हारे पास कोई इल्म है जिसे हमारे सामने पेश कर सकते हो? तुम तो महज गुमान पर चल रहे हो और नेरी क़यास अराइयां करते हो"
عَرَبِيقُل فَلِلَّهِ الحُجَّةُ البالِغَةُ ۖ فَلَو شاءَ لَهَداكُم أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें कि पूर्ण तर्क तो अल्लाह ही का है। सो यदि वह चाहता, तो तुम सबको सीधे मार्ग पर लगा देता।
Roman Urdu (Maududi)Phir kaho (tumhari is hujjat ke muqable mein) “haqeeqat ras hujjat to Allah ke paas hai, beshak agar Allah chahta to tum sabko hidayat de deta”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kahiye kay bus poori hujjat Allah hi ki rahi. Phir agar woh chahata to tum sab ko raah-e-raast per ley aata
Devnagri Urdu (Maududi)फिर कहो (तुम्हारी इस हुज्जत के मुकाबले में) "हकीकत रस हुज्जत तो अल्लाह के पास है, अगर अल्लाह चाहता तो तुम सबको हिदायत दे देता”
عَرَبِيقُل هَلُمَّ شُهَداءَكُمُ الَّذينَ يَشهَدونَ أَنَّ اللَّهَ حَرَّمَ هٰذا ۖ فَإِن شَهِدوا فَلا تَشهَد مَعَهُم ۚ وَلا تَتَّبِع أَهواءَ الَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِنا وَالَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِالآخِرَةِ وَهُم بِرَبِّهِم يَعدِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि अपने गवाहों को लाओ, जो गवाही दें कि इसे अल्लाह ही ने हराम ठहराया है। फिर यदि वे गवाही दें, तो आप उनकी गवाही को न मानें। और उन लोगों की इच्छाओं पर न चलें, जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया और जो आख़िरत पर विश्वास नहीं रखते तथा दूसरों को अपने पालनहार का समकक्ष ठहराते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Inse kaho ke “lao apne woh gawah jo is baat ki shahadat dein ke Allah hi ne in cheezon ko haraam kiya hai”. Phir agar woh shahadat de dein to tum unke saath shahadat na dena, aur hargiz un logon ki khwahishat ke pichey na chalna jinhon ne hamari aayat ko jhutlaya hai, aur jo aakhirat ke munkir hain, aur jo dusron ko apne Rubb ka humsar banate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kahiye kay apney gawahon ko lao jo iss baat per shahadat den kay Allah ney inn cheezon ko haram ker diya hai phir agar woh gawahi dey den to aap iss ki shahadat na dijiye aur aisay logon kay baatil khayalaat ka ittabaa mat kijiye! Jo humari aayaton ki takzeeb kertay hain aur woh jo aakhirat per eman nahi rakhtay aur woh apney rab kay barabar doosron ko thehratay hain
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो के “लाओ अपने वो गवाह जो इस बात की शहादत दीन के अल्लाह ही ने इन चीज़ों को हराम किया है”। फिर अगर वो शहादत दे दें तो तुम उनके साथ शहादत न देना, और हरगिज उन लोगों की ख्वाहिश के पीछे ना चलना जिन्हों ने हमारी आयत को झुटलाया है, और जो आख़िरत के मुनकिर हैं, और जो दूसरों को अपने रुब का हमसर बनाते हैं
عَرَبِي۞ قُل تَعالَوا أَتلُ ما حَرَّمَ رَبُّكُم عَلَيكُم ۖ أَلّا تُشرِكوا بِهِ شَيئًا ۖ وَبِالوالِدَينِ إِحسانًا ۖ وَلا تَقتُلوا أَولادَكُم مِن إِملاقٍ ۖ نَحنُ نَرزُقُكُم وَإِيّاهُم ۖ وَلا تَقرَبُوا الفَواحِشَ ما ظَهَرَ مِنها وَما بَطَنَ ۖ وَلا تَقتُلُوا النَّفسَ الَّتي حَرَّمَ اللَّهُ إِلّا بِالحَقِّ ۚ ذٰلِكُم وَصّاكُم بِهِ لَعَلَّكُم تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप उनसे कह दें कि आओ, मैं तुम्हें (आयतें) पढ़कर सुना दूँ कि तुमपर, तुम्हारे पालनहार ने क्या हराम किया है? वह यह है कि किसी चीज़ को अल्लाह का साझी न बनाओ और माता-पिता के साथ उपकार करो तथा निर्धनता के भय से अपनी संतानों की हत्या न करो। हम तुम्हें रोज़ी देते हैं और उन्हें भी देंगे। और निर्लज्जता की बातों के निकट भी न जाओ, खुली हों अथवा छिपी। और किसी प्राणी की हत्य न करो, जिस (की हत्या) को अल्लाह ने हराम ठहराया हो, सिवाय इसके कि उसका कोई उचित कारण हो। ये बातें हैं, जिनकी अल्लाह ने तुम्हें ताकीद की है, ताकि तुम समझो।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)!Inse kaho ke aao main tumhein sunaoon tumhare Rubb ne tumpar kya pabandiyan aayad ki hain : yeh ke uske saath kisi ko shareek na karo, aur walidain (Maa Baap) ke saath neik sulook karo, aur apni aulad ko muflisi ke darr se qatal na karo, hum tumhein bhi rizq dete hain aur unko bhi denge, aur besharmi ki baaton ke qareeb bhi na jao, khwah woh khuli hon ya chupi. Aur kisi jaan ko jisey Allah ne mohtaram thehraya hai halaak na karo magar haqq ke saath. Yeh baatein hain jinki hidayat usne tumhein ki hai, shayad ke tum samajh boojh se kaam lo
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kahiye kay aao mein tum ko woh cheezen parh ker sunaon jin (yani jin ki mukhalifat) ko tumharay rab ney tum per haram farma diya hai woh yeh kay Allah kay sath kissi cheez ko shareek mat thehrao aur maa baap kay sath ehsan kero aur apni aulad ko aflaas kay sabab qatal mat kero. Hum tum ko aur unn ko rizk detay hain aur bey hayaee kay jitney tareeqay hain unn kay pass bhi mat jao khuwa woh aelaaniya hon khuwa posheeda aur jiss ka khoon kerna Allah Taalaa ney haram ker diya hai uss ko qatal mat kero haan magar haq kay sath inn ka tum ko takeedi hukum diya hai takay tum samjho
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के आओ मैं तुम्हें सुनाऊं तुम्हारे रब ने तुमपर क्या पाबंदियां आयद की हैं: ये उसके साथ किसी को शरीक ना करो, और वालिदें (मां बाप) के साथ नई सुलूक करो, और अपनी औलाद को मुफलिसी के डर से कत्ल ना करो, हम तुम्हें भी रिज्क देते हैं और उनको भी देंगे, और बेशर्मी की बातों के करीब भी ना जाओ, ख्वाह वो खुली हो या छुपी। और किसी जान को जैसे अल्लाह ने मोहतरम ठहरया है हलाक न करो मगर हक के साथ। ये बातें हैं जिनकी हिदायत हमें तुम्हें पसंद है, शायद के तुम समझ बूझ से काम लो
عَرَبِيوَلا تَقرَبوا مالَ اليَتيمِ إِلّا بِالَّتي هِيَ أَحسَنُ حَتّىٰ يَبلُغَ أَشُدَّهُ ۖ وَأَوفُوا الكَيلَ وَالميزانَ بِالقِسطِ ۖ لا نُكَلِّفُ نَفسًا إِلّا وُسعَها ۖ وَإِذا قُلتُم فَاعدِلوا وَلَو كانَ ذا قُربىٰ ۖ وَبِعَهدِ اللَّهِ أَوفوا ۚ ذٰلِكُم وَصّاكُم بِهِ لَعَلَّكُم تَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अनाथ के धन के पास न जाओ, परंतु ऐसे ढंग से जो उचित हो। यहाँ तक कि वह अपनी युवा अवस्था को पहुँच जाए। तथा नाप-तौल न्याय के साथ पूरा करो। हम किसी प्राणी पर उसकी शक्ति से अधिक बोझ नहीं डालते। और जब बोलो, तो न्याय की बात बोलो, यद्यपि मामला किसी निकटवर्ती का ही क्यों न हो। और अल्लाह का वचन पूरा करो। उसने तुम्हें इन बातों की ताकीद की है, ताकि तुम याद रखो।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke yateem ke maal ke qareeb na jao magar aisey tareeqe se jo behtareen ho, yahan tak ke woh apne seene-rushd (maturity) ko pahunch jaye, aur naap toal mein pura insaf karo. Hum har shaks par zimmedari ka utna hi baar (burden) rakhte hain jitna uske imkan mein (it can bear) hai, aur jab baat kaho insaf ki kaho khwa maamla apne rishtedar hi ka kyun na ho, aur Allah ke ahad(covenant) ko pura karo. In baaton ki hidayat Allah ne tumhein ki hai shayad ke tum naseehat qabool karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yateem kay maal kay pass na jao magar aisay tareeqay say jo kay mustehsan hai yahan tak kay woh apney sann rashd ko phonch jaye aur naap tol poori poori kero insaf kay sath hum kissi shaks ko uss ki taqat say ziyada takleef nahi detay. Aur jab tum baat kero to insaf kero go woh shaks qarabat daar hi ho aur Allah Taalaa say jo ehad kiya uss ko poora kero inn ka Allah Taalaa ney tum ko takeedi hukum diya hai takay tum yaad rakho
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के यतीम के माल के करीब ना जाओ मगर ऐसी तारीख से जो बेहतर हो, यहां तक ​​के वो अपने सीने-रुश्द (परिपक्वता) को पाहुंच जाए, और नाप टोल में पूरा इन्साफ करो. हम हर शक्स पर ज़िम्मेदारी का उतना ही बोझ रखते हैं जितना उसके इम्कान में (यह सहन कर सकता है) है, और जब बात कहो इन्साफ की कहो मामला अपने रिश्ते में ही का क्यों ना हो, और अल्लाह के अहद (वाचा) को पूरा करो। बातों की हिदायत में अल्लाह ने तुम्हें कहा है शायद तुम हिदायत कबूल करो
عَرَبِيوَأَنَّ هٰذا صِراطي مُستَقيمًا فَاتَّبِعوهُ ۖ وَلا تَتَّبِعُوا السُّبُلَ فَتَفَرَّقَ بِكُم عَن سَبيلِهِ ۚ ذٰلِكُم وَصّاكُم بِهِ لَعَلَّكُم تَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यह कि यही मेरा सीधा मार्ग है। सो तुम उसी पर चलो। और दूसरी राहों पर न चलो, अन्यथा वे तुम्हें उसकी राह से हटाकर इधर-उधर कर देंगे। यही वह बात है, जिसकी ताकीद उसने तुम्हें की है, ताकि तुम उसके आज्ञाकारी रहो।
Roman Urdu (Maududi)Neiz uski hidayat yeh hai ke yahi mera seedha raasta hai, lihaza tum isi par chalo aur dusre raaston par na chalo ke woh uske raaste se hata kar tumhein paraganda(scatter) kardenge. Yeh hai woh hidayat jo tumhare Rubb ne tumhein ki hai, shayad ke tum kajhrawi se bacho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay yeh deen mera raasta hai jo mustaqeem hai so iss raah per chalo aur doosri raahon per mat chalo kay woh raahen tum ko Allah ki raah say juda ker den gi. Iss ka tum ko Allah ney takeedi hukum diya hai takay tum perhezgari ikhtiyar kero
Devnagri Urdu (Maududi)नीज़ उसकी हिदायत ये है के यही मेरा सीधा रास्ता है, लिहाज़ा तुम इसी पर चलो और दूसरे रास्ते पर ना चलो के वो उसके रास्ते से हटा कर तुम्हें परागा(बिखरा) करदेंगे. ये है वो हिदायत जो तुम्हारे रब ने तुम्हें कहा है, शायद के तुम कजरवी से बचाओ
عَرَبِيثُمَّ آتَينا موسَى الكِتابَ تَمامًا عَلَى الَّذي أَحسَنَ وَتَفصيلًا لِكُلِّ شَيءٍ وَهُدًى وَرَحمَةً لَعَلَّهُم بِلِقاءِ رَبِّهِم يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने मूसा को पुस्तक प्रदान की, उनके अच्छे काम के लिए बदला के रूप में अनुग्रह को पूरा करने के लिए, तथा प्रत्येक वस्तु के विवरण और मार्गदर्शन एवं दया के लिए। ताकि वे अपने पालनहार से मिलने पर मिलने पर ईमान ले आएँ।
Roman Urdu (Maududi)Phir humne Moosa ko kitab ata ki thi jo bhalayi ki rawish ikhtiyar karne waley Insan par niyamat ki takmeel aur har zaroori cheez ki tafseel aur sarasar hidayat aur rehmat thi (aur isliye bani israel ko di gayi thi ke) shayad log apne Rubb ki mulaqat par iman layein
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney musa (alh-e-salam) ko kitab di thi jiss say achi tarah amal kerney walon per nemat poori ho aur sab ehkaam ki tafseel hojaye aur rehnumaee ho aur rehmat ho takay woh log apney rab kay milney per yaqeen layen
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमने मूसा को किताब अता की थी जो भलाई की रवीश इख्तियार करने वाले इंसान पर नियामत की तकमील और हर जरूरी चीज की तफसील और सरसर हिदायत और रहमत थी (और इस्लिये बानी इसराइल को दी गई थी के) शायद लोग अपने रब की मुलाकात पर ईमान लायें
عَرَبِيوَهٰذا كِتابٌ أَنزَلناهُ مُبارَكٌ فَاتَّبِعوهُ وَاتَّقوا لَعَلَّكُم تُرحَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यह एक बरकत वाली पुस्तक है, जिसे हमने उतारा है। अतः इसका अनुसरण करो और अल्लाह से डरते रहो, ताकि तुमपर दया की जाए।
Roman Urdu (Maududi)Aur isi tarah yeh kitab humne nazil ki hai, ek barakat wali kitab, pas tum iski pairwi karo aur taqwa ki rawish ikhtiyar karo, baeed nahin ke tumpar reham kiya jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aue yeh kay aik kitab hai jiss ko hum ney bheja bari khair-o-barkat wali so iss ka ittabaa kero aur daro takay tum per rahmat ho
Devnagri Urdu (Maududi)और इसी तरह ये किताब हमने नाज़िल की है, एक बरकत वाली किताब, पास तुम इसकी जोड़ी करो और तक़वा की रवीश इख्तियार करो, बाद नहीं के तुमपर रहम किया जाए
عَرَبِيأَن تَقولوا إِنَّما أُنزِلَ الكِتابُ عَلىٰ طائِفَتَينِ مِن قَبلِنا وَإِن كُنّا عَن دِراسَتِهِم لَغافِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि (ऐ अरब वासियो!) तुम यह न कहो कि पुस्तक तो हमसे पहले के दो समुदायों (यहूदी तथा ईसाई) पर उतारी गई थी और निश्चय हम उनके पढ़ने-पढ़ाने से अनजान थे।
Roman Urdu (Maududi)Ab tum yeh nahin keh sakte ke kitab to humse pehle ke do girohon ko di gayi thi, aur humko kuch khabar na thi ke woh kya padhte padhaate thay
Roman Urdu (Junagarhi)Kahin tum log yeh na kaho kay kitab to sirf hum say pehlay jo do firqay thay unn per nazil hui thi aur hum unn kay parheny parhaney say bey khabar thay
Devnagri Urdu (Maududi)अब तुम ये नहीं कह सकते कि किताब तो हमसे पहले के दो गिरोहों को दी गई थी, और हमको कुछ खबर ना थी के वो क्या पढ़ते पढ़ते थे
عَرَبِيأَو تَقولوا لَو أَنّا أُنزِلَ عَلَينَا الكِتابُ لَكُنّا أَهدىٰ مِنهُم ۚ فَقَد جاءَكُم بَيِّنَةٌ مِن رَبِّكُم وَهُدًى وَرَحمَةٌ ۚ فَمَن أَظلَمُ مِمَّن كَذَّبَ بِآياتِ اللَّهِ وَصَدَفَ عَنها ۗ سَنَجزِي الَّذينَ يَصدِفونَ عَن آياتِنا سوءَ العَذابِ بِما كانوا يَصدِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या यह न कहो कि यदि हमपर पुस्तक उतारी गई होती, तो हम उनसे भी अधिक सीधी राह पर होते। तो लो, अब तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से एक खुला तर्क और मार्गदर्शन एवं दया आ चुकी है। अतः उससे बड़ा अत्यचारी कौन होगा, जो अल्लाह की आयतों को मिथ्या कहे और उनसे कतरा जाए? और जो लोग हमारी आयतों से कतराते हैं, हम उनके कतराने के बदले उन्हें कड़ी यातना देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur ab tum yeh bahana bhi nahin kar sakte ke agar humpar kitab nazil ki gayi hoti to hum unse zyada raast-raw saabit hotey. Tumhare paas tumhare Rubb ki taraf se ek daleel e roshan aur hidayat aur rehmat aa gayi hai, ab issey badhkar zalim kaun hoga jo Allah ki aayat ko jhutlaye aur unse mooh moadey. Jo log hamari aayat se mooh moadte hain unhein is ruhgardani ki padash mein hum badhtareen saza de kar rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Ya yun na kaho kay agar hum per koi kitab nazil hoti to hum inn say bhi ziyada raah-e-raast per hotay. So abb tumharay pass tumhara rab kay pass say aik kitab wazeh aur rehnumaee ka zariya aur rehmat aa chuki hai. Abb iss shaks say ziyada kaun zalim hoga jo humari inn aayaton ko jhoota bataye aur iss say rokay. Hum jald hi inn logon ko jo kay humari aayaton say roktay hain inn kay iss rokney kay sabab sakht saza den gay
Devnagri Urdu (Maududi)और अब तुम ये बहाना भी नहीं कर सकते अगर हमपर किताब नाज़िल की गई होती तो हम उनसे ज़्यादा रस्ते-कच्चे साबित होते। तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से एक दलील ए रोशन और हिदायत और रहमत आ गई है, अब इस से बढ़कर जालिम कौन होगा जो अल्लाह की आयत को झुठलाए और उससे मुह मोड़ ले। जो लोग हमारी आयत से मुह मोड़ते हैं उन्हें इस रुहगर्दानी की पैदाइश में हम बढ़ाते हैं सज़ा दे कर रहेंगे
عَرَبِيهَل يَنظُرونَ إِلّا أَن تَأتِيَهُمُ المَلائِكَةُ أَو يَأتِيَ رَبُّكَ أَو يَأتِيَ بَعضُ آياتِ رَبِّكَ ۗ يَومَ يَأتي بَعضُ آياتِ رَبِّكَ لا يَنفَعُ نَفسًا إيمانُها لَم تَكُن آمَنَت مِن قَبلُ أَو كَسَبَت في إيمانِها خَيرًا ۗ قُلِ انتَظِروا إِنّا مُنتَظِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या वे इसी बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि उनके पास फ़रिश्ते आ जाएँ, या स्वयं उनका पालनहार आ जाए या आपके पालनहार की कोई निशानी आ जाए? जिस दिन आपके पालनहार की कोई निशानी आ जाएगी, तो किसी प्राणी को उसका ईमान लाभ नहीं देगा, जो पहले ईमान न लाया हो या अपने ईमान की हालत में कोई सत्कर्म न किया हो। आप कह दें कि तुम प्रतीक्षा करो, हम भी प्रतीक्षा कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya ab log iske muntazir hain ke unke saamne Farishte aa khadey hon, ya tumhara Rubb khud aa jaye, ya tumhare Rubb ki baaz sareeh nishaniyan namudaar ho jayein? Jis roz tumhare Rubb ki baaz makhsoos nishaniyan namudaar ho jayengi phir kisi aisey shaks ko uska iman kuch faiyda na dega jo pehle iman na laya ho ya jisne apne iman mein koi bhalayi na kamayi ho. (Aey Muhammad)! Insey kehdo ke accha, tum intezar karo, hum bhi intezar karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh log sirf iss amar kay muntazir hain kay inn kay pass farishtay aayen ya inn kay pass aap ka rab aaye ya aap kay rab ki koi (bari) nishani aaye? Jiss roz aap kay rab ki koi bari nishani aa phoncya gi kissi aisay shaks ka eman uss kay kaam na aaye ga jo pehlay say eman nahi rakhta. Ya uss ney apney eman mein koi nek amal na kiya ho. Aap farma dijiye kay tum muntazir raho hum bhi muntazir hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या अब लोग इसके मुंतज़िर हैं के उनके सामने फ़रिश्ते आ खड़े हैं, या तुम्हारा रुब खुद आ जाए, या तुम्हारे रुब की बाज़ सारे निशानियाँ नामदार हो जायेंगे? जिस रोज़ तुम्हारे रब की बाज़ मख़सूस निशानियां नामदार हो जाएंगी फिर किसी ऐसे शक्स को उसका ईमान कुछ फ़ायदा न देगा जो पहले ईमान न लाया हो या जिसने अपने ईमान में कोई भलाई न कमाई हो। (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहदो के अच्छा, तुम इंतज़ार करो, हम भी इंतज़ार करते हैं
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ فَرَّقوا دينَهُم وَكانوا شِيَعًا لَستَ مِنهُم في شَيءٍ ۚ إِنَّما أَمرُهُم إِلَى اللَّهِ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِما كانوا يَفعَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन लोगों ने अपने धर्म के टुकड़े-टुकड़े कर लिए और विभिन्न गिरोहों में बट गए, आपका उनसे कोई संबंध नहीं। उनका मामला अल्लाह के हवाले है। फिर वह उन्हें बता देगा कि वे क्या करते रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne apne deen ko tukde tukde kardiya aur giroh giroh ban gaye yaqeenan unse tumhara kuch waasta nahin. Unka maamla to Allah ke supurd hai, wahi unko batayega ke unhon ne kya kuch kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jin logon ney apney deen ko juda juda ker diya aur giroh giroh bann gaye aap ka unn say koi talluq nahi bus unn ka moamla Allah Taalaa kay hawalay hai. Phir inn ko inn ka kiya hua jatla den gay
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने अपने दीन को टुकड़े-टुकड़े कर दिया और गिरो-गिरोह बन गए यकीनन उनसे तुम्हारा कुछ वास्ता नहीं। उनका मामला तो अल्लाह के लिए सही है, वही उनको बताएगा के उन्होन ने क्या कुछ किया है
عَرَبِيمَن جاءَ بِالحَسَنَةِ فَلَهُ عَشرُ أَمثالِها ۖ وَمَن جاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَلا يُجزىٰ إِلّا مِثلَها وَهُم لا يُظلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो (क़ियामत के दिन) एक नेकी लेकर आएगा, उसे उसका दस गुना बदला मिलेगा और जो एक बुराई लेकर आएगा, उसे उसका बस उतना ही बदला दिया जाएगा और उनपर कोई अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Jo Allah ke huzoor neki lekar aayega uske liye dus guna (ten times) ajar hai, aur jo badhi (evil deed) lekar aayega usko unta hi balda diya jayega jitna usne kasoor kiya hai, aur kisi par zulm na kiya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jo shaks nek kaam keray ga uss ko uss kay das gunah milen gay aur jo shaks bura kaam keray ga uss ko iss kay barabar hi saza milay gi aur inn logon per zulm nahi hoga
Devnagri Urdu (Maududi)जो अल्लाह के हुज़ूर नेकी लेकर आएगा उसके लिए दस गुना (दस बार) अजर है, और जो बड़ी (बुरा काम) लेकर आएगा उसको उनता ही बलदा दिया जाएगा जितना उसने कसूर किया है, और किसी पर ज़ुल्म न किया जाएगा
عَرَبِيقُل إِنَّني هَداني رَبّي إِلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ دينًا قِيَمًا مِلَّةَ إِبراهيمَ حَنيفًا ۚ وَما كانَ مِنَ المُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें कि यकीनन मेरे पालनहार ने मुझे सीधी राह दिखा दी है। वही सीधा धर्म, जो एकेश्वरवादी इबराहीम का धर्म था। और वह बहुदेववादियों में से न था।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! Kaho mere Rubb ne bil-yaqeen mujhey seedha raasta dikha diya hai , bilkul theek deen jis mein koi tedh (crookedness) nahin, Ibrahim ka tareeqa jisey yaksu hokar usne ikhtiyar kiya tha aur woh mushrikon mein se na tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay mujh ko meray rab ney aik seedha raasta bata diya hai kay woh aik deen mustehkum hai jo tareeqa hai ibrahim (alh-e-salam) ka jo Allah ki taraf raksoo thay. Aur woh shirk kerney walon mein say na thay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! कहो मेरे रब ने बिल-यक़ीन मुझे सीधा रास्ता दिखाया है, बिल्कुल ठीक दीन जिस में कोई टेढ़ (टेढ़ापन) नहीं, इब्राहिम का तरीक़ा जिसने यक्सू होकर उसने इख्तियार किया था और वो मुशरिकों में से ना था
عَرَبِيقُل إِنَّ صَلاتي وَنُسُكي وَمَحيايَ وَمَماتي لِلَّهِ رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि निश्चय मेरी नमाज़, मेरी क़ुरबानी तथा मेरा जीवन-मरण सारे संसारों के पालनहार अल्लाह के लिए हैl
Roman Urdu (Maududi)Kaho, meri namaz, mere tamaam marasim ubudiyat (all my acts of worship) , mera jeena aur mera marna, sab kuch Allah Rabbul Aalameen ke liye hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap farma dijiye kay bil yaqeen meri namaz aur meri sari ibadat aur mera jeena aur mera marna yeh sab khalis Allah hi ka hai jo saray jahaan ka maalik hai
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, मेरी नमाज़, मेरे तमाम मरासिम उबुदियात (मेरे सभी इबादत), मेरा जीना और मेरा मरना, सब कुछ अल्लाह रब्बुल आलमीन के लिए है
عَرَبِيلا شَريكَ لَهُ ۖ وَبِذٰلِكَ أُمِرتُ وَأَنا أَوَّلُ المُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसका कोई साझी नहीं। मुझे इसी का आदेश दिया गया है। और मैं सबसे पहला मुसलमान हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Jiska koi shareek nahin, isi ka mujhey hukum diya gaya hai aur sabse pehle sar e itaat jhukane wala main hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ka koi shareek nahi aur mujh ko issi ka hukum hua hai aur mein sab mannay walon mein say pehla hun
Devnagri Urdu (Maududi)जिसका कोई शरीक नहीं, इसका मुझे हुकुम दिया गया है और सबसे पहले सर ए इताअत झुकने वाला मैं हूं
عَرَبِيقُل أَغَيرَ اللَّهِ أَبغي رَبًّا وَهُوَ رَبُّ كُلِّ شَيءٍ ۚ وَلا تَكسِبُ كُلُّ نَفسٍ إِلّا عَلَيها ۚ وَلا تَزِرُ وازِرَةٌ وِزرَ أُخرىٰ ۚ ثُمَّ إِلىٰ رَبِّكُم مَرجِعُكُم فَيُنَبِّئُكُم بِما كُنتُم فيهِ تَختَلِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप (उनसे) कह दें कि क्या मैं अल्लाह के सिवा किसी और पालनहार की खोज करूँ? जबकि वह प्रत्येक वस्तु का पालनहार है। तथा जो भी प्राणी कोई कार्य करेगा, उसका फल वही भोगेगा। और कोई किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा। फिर (अंततः) तुम्हें अपने पालनहार के पास ही जाना है। उस समय वह तुम्हें बता देगा, जिसमें तुम मतभेद किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, kya main Allah ke siwa koi aur Rubb talash karoon, halaanke wahi har cheez ka Rubb hai? Har shaks jo kuch kamaata hai uska zimmedar woh khud hai, koi bojh uthane wala dusre ka bojh nahin uthata. Phir tum sabko apne Rubb ki taraf palatna hai, us waqt woh tumhare ikhtilafat (differnces/disputes) ki haqeeat tumpar khol dega
Roman Urdu (Junagarhi)Aap farma dijiya kay kiya mein Allah kay siwa kissi aur ko rab bananey kay liye talash keroon halankay woh maalik hai her cheez ka aur jo shaks bhi koi amal kerta hai woh ussi per rehta hai aur koi kissi doosray ka bojh na uthaye ga. Phir tum sab ko apney rab kay pass jana hoga. Phir woh tum ko jatlaye ga jiss jiss cheez mein tum ikhtilaf kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और रब तलाश करूं, हालांके वही हर चीज का रब है? हर शक्स जो कुछ कमाता है उसका ज़िम्मेदार वो खुद है, कोई बोझ उठाने वाला दूसरे का बोझ नहीं उठता। फिर तुम सबको अपने रुब की तरफ पलटना है, हमारा वक्त वो तुम्हारे इख्तिलाफत (मतभेद/विवाद) की हक़ीक़त तुमपर खोल देगा
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي جَعَلَكُم خَلائِفَ الأَرضِ وَرَفَعَ بَعضَكُم فَوقَ بَعضٍ دَرَجاتٍ لِيَبلُوَكُم في ما آتاكُم ۗ إِنَّ رَبَّكَ سَريعُ العِقابِ وَإِنَّهُ لَغَفورٌ رَحيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वही है, जिसने तुम्हें धरती में उत्तराधिकारी बनाया और तुममें से कुछ लोगों के दरजे दूसरे लोगों की अपेक्षा ऊँचे रखे। ताकि उसने तुम्हें जो कुछ दिया है, उसमें तुम्हारी परीक्षा ले। निश्चय आपका पालनहार शीघ्र ही दंड देने वाला है। और निश्चय वह बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jisne tumko zameen ka khalifa banaya, aur tum mein se baaz ko baaz ke muqable mein zyada buland darje diya, taa-ke jo kuch tumko diya hai usi mein tumhari aazmaish karey. Behsak tumhara Rubb saza dene mein bhi bahut tez hai aur bahut darguzar karne aur reham farmane wala bhi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh aisa hai jiss ney tum ko zamin mein khalifa banaya aur aik ka doosray per rutba barhaya takay tum ko aazmaye unn cheezon mein jo tum ko di hain. Bil yaqeen aap ka rab jald saza denay wala hai aur bil yaqeen woh waqaee bari maghfirat kerney wala meharbani kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिसने तुमको ज़मीन का ख़लीफ़ा बनाया, और तुम में से बाज़ को बाज़ के मुकाबले में ज़्यादा बुलंद दर्जे दिया, ता-के जो कुछ तुमको दिया है उसमें तुम्हारी आजमाइश करे। बेहसाक तुम्हारा रुब सज़ा देने में भी बहुत तेज़ है और बहुत दरगुज़ार करने और रहम फ़रमाने वाला भी है
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Surah 6: Al-An'am (The Cattle)

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Surah 6: Al-An'am (The Cattle)

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Surah 6: Al-An'am (The Cattle)

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Surah 7: Al-A'raf (The Elevated Places)

Meccan🕐 Revelation #39📜 206 Verses🕮 Juz 1–9
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Surah 7: Al-A'raf (The Elevated Places)

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Surah 7: Al-A'raf (The Elevated Places)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالمص
हिन्दी (Al-Omari)अलिफ़, लाम, मीम, साद।
Roman Urdu (Maududi)Alif Laam Meem Saad
Roman Urdu (Junagarhi)Alif-laam-meem-suaad
Devnagri Urdu (Maududi)अलिफ़ लाम मीम साद
عَرَبِيكِتابٌ أُنزِلَ إِلَيكَ فَلا يَكُن في صَدرِكَ حَرَجٌ مِنهُ لِتُنذِرَ بِهِ وَذِكرىٰ لِلمُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह एक पुस्तक है, जो आपकी ओर उतारी गई है। अतः (ऐ नबी!) आपके सीने में इससे कोई तंगी न हो। ताकि आप इसके द्वारा (लोगों को) सावधान करें और (यह) ईमान वालों के लिए उपदेश है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ek kitab hai jo tumhari taraf nazil ki gayi hai, pas (aey Muhammad), tumhare dil mein issey koi jhijak na ho, iske utaarne ki garz yeh hai ke tum iske zariye se (munkireen ko) darao aur iman laney waley logon ko yaad dihani ho
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh aik kitab hai jo aap kay pass iss liye bheji gaee hai kay aap iss kay zariye say darayen so aap kay dil mein iss say bilkul tangi na ho aur naseehat hai eman walon kay liye
Devnagri Urdu (Maududi)ये एक किताब है जो तुम्हारी तरफ नाज़िल की गई है, पास (ऐ मुहम्मद), तुम्हारे दिल में इसे कोई परेशानी ना हो, इसके उतरने की ग़रज़ ये है के तुम इसके ज़रूरी से (मुनकिरीन को) डराओ और ईमान लाने वाले लोगों को याद दिहानी हो
عَرَبِياتَّبِعوا ما أُنزِلَ إِلَيكُم مِن رَبِّكُم وَلا تَتَّبِعوا مِن دونِهِ أَولِياءَ ۗ قَليلًا ما تَذَكَّرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ लोगो!) जो कुछ तुम्हारे पालनहार की ओर से तुम्हारी ओर उतारा गया है, उसका अनुसरण करो और उसके सिवा दूसरे सहायकों के पीछे न चलो। तुम बहुत ही कम उपदेश ग्रहण करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Logon, jo kuch tumhare Rubb ki taraf se tumpar nazil kiya gaya hai uski pairwi karo aur apne Rubb ko chodh kar dusre sarparaton ki pairwi na karo, magar tum naseehat kam hi maante ho
Roman Urdu (Junagarhi)Tum log uss ki ittabaa kero jo tumharay rab ki taraf say aaee hai aur Allah Taalaa ko chor ker mann gharat sir paraston ki ittabaa mat kero tum log boht hi kum naseehat pakartay ho
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन, जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है उसकी जोड़ी करो और अपने रब को छोड़ कर दूसरे सरपरतों की जोड़ी ना करो, मगर तुम हिदायत कम ही मानते हो
عَرَبِيوَكَم مِن قَريَةٍ أَهلَكناها فَجاءَها بَأسُنا بَياتًا أَو هُم قائِلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कितनी ही बस्तियाँ हैं, जिन्हें हमने विनष्ट कर दिया। तो उनपर हमारा प्रकोप रातों-रात आया या जब वे दोपहर में विश्राम करने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Kitni hi bastiyan hain jinhein humne halaak kardiya, unpar hamara azaab achanak raat ke waqt toot pada, ya din dahade aise waqt aaya jab woh aaraam kar rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur boht bastiyon ko hum ney tabah ker diya aur unn per humara azab raat kay waqt phonchaya aisi halat mein kay woh dophare kay waqt aaram mein thay
Devnagri Urdu (Maududi)कितनी ही बस्तियाँ हैं जिन्हें हमने हलक करदिया, उन पर हमारा अजब अचानक रात के वक्त टूट पड़ा, या दिन दहाड़े ऐसे वक्त आया जब वो आराम कर रहे थे
عَرَبِيفَما كانَ دَعواهُم إِذ جاءَهُم بَأسُنا إِلّا أَن قالوا إِنّا كُنّا ظالِمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उनपर हमारा प्रकोप आ पड़ा, तो उनकी पुकार यह कहने के सिवा कुछ नहीं थी : निश्चय हम ही अत्याचारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab hamara azaab unpar aa gaya to unki zubaan par iske siwa koi sadaa na thi ke waqayi hum zalim thay
Roman Urdu (Junagarhi)So jiss waqt unn per humara azab aaya uss waqt unn kay mun say ba-juz iss kay aur koi baat na nikli kay waqaee hum zalim thay
Devnagri Urdu (Maududi)और जब हमारा अजब उन्पर आ गया तो उनकी ज़ुबान पर इसके सिवा कोई सदा ना थी के वाकाई हम जालिम थे
عَرَبِيفَلَنَسأَلَنَّ الَّذينَ أُرسِلَ إِلَيهِم وَلَنَسأَلَنَّ المُرسَلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो निश्चय हम उन लोगों से अवश्य पूछेंगे, जिनके पास रसूल भेजे गए तथा निश्चय हम रसूलों से (भी) ज़रूर पूछेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Pas yeh zaroor hokar rehna hai ke hum un logon se baaz-purs karein jinki taraf humne paigambar bheje hain aur paigambaron se bhi puchein (ke unhon ne paigaam rasani ka farz kahan tak anjaam diya aur unhein iska kya jawab mila)
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum unn logon say zaroor poochen gay jin kay pass payghumbar bhejay gaye thay aur hum payghumbaron say zaroor poochen gay
Devnagri Urdu (Maududi)पास ये जरूर होकर रहना है के हम उन लोगों से बाज़-पुर्स करें जिनकी तरफ हमने पैगम्बर भेजे हैं और पैगम्बरों से भी पूछें (के उन्होन ने पैगाम रसानी का फर्ज कहां तक ​​अंजाम दिया और उन्हें इसका क्या जवाब मिला)
عَرَبِيفَلَنَقُصَّنَّ عَلَيهِم بِعِلمٍ ۖ وَما كُنّا غائِبينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर निश्चय हम पूरी जानकारी के साथ उनके सामने सब कुछ बयान कर देंगे और हम कहीं अनुपस्थित नहीं थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir hum khud purey ilm ke saath saari sargushist (whole account) unke aagey pesh kardenge. Aakhir hum kahin gayab to nahin thay
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum chunkay poori khabar rakhtay hain unn kay roo baroo biyan ker den gay. Aur hum kuch bey khabar na thay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हम खुद पूरे इल्म के साथ सारी सरगुशिस्ट (पूरा हिसाब) उनके आगे पेश कर देंगे। आख़िर हम कहीं गायब तो नहीं थे
عَرَبِيوَالوَزنُ يَومَئِذٍ الحَقُّ ۚ فَمَن ثَقُلَت مَوازينُهُ فَأُولٰئِكَ هُمُ المُفلِحونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उस दिन (कर्मों का) वज़न न्याय के साथ होगा। फिर जिसके पलड़े भारी हो गए, तो वही लोग सफल होने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur wazan us roz ain e haqq hoga, jinke padley bhaari hongey wahi falaah payenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss roz wazan bhi bar haq hai phir jiss shaks ka palla bhari hoga so aisay log kaamyab hongay
Devnagri Urdu (Maududi)और जिनके पैडले हल्के रहेंगे वही अपने आप को खासे (नुक्सान) में मुब्तिला करने वाले होंगे, क्योंकि वो हमारी आयत के साथ ज़ालिमाना बरताओ करते रहे थे
عَرَبِيوَمَن خَفَّت مَوازينُهُ فَأُولٰئِكَ الَّذينَ خَسِروا أَنفُسَهُم بِما كانوا بِآياتِنا يَظلِمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जिसके पलड़े हल्के हो गए, तो यही वे लोग हैं जिन्होंने अपने आपको घाटे में डाला, क्योंकि वे हमारी आयतों के साथ अन्याय करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jinke padley halke rahenge wahi apne aap ko khasarey (nuksan) mein mubtila karne waley hongey, kyunke woh hamari aayat ke saath zalimana bartao karte rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss shaks ka palla halka hoga so yeh woh log hongay jinhon ney apna nuksan ker liya ba-sabab iss kay kay humari aayaton kay sath zulm kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيوَلَقَد مَكَّنّاكُم فِي الأَرضِ وَجَعَلنا لَكُم فيها مَعايِشَ ۗ قَليلًا ما تَشكُرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने तुम्हें धरती में बसा दिया और उसमें तुम्हारे लिए जीवन के संसाधन बनाए। तुम बहुत कम शुक्र करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Humne tumhein zameen mein ikhtiyarat ke saath basaya aur tumhare liye yahan samaan e zeist faraham kiya Magar tumlog kam hi shukar-guzar hotey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur be-shak hum ney tum ko zamin per rehney ki jagah di aur hum ney tumaharay liye iss mein samaan-e-rizq peda kiya tum log boht hi kum shukar kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)हमने तुम्हें ज़मीन में इख्तियारत के साथ बसाया और तुम्हारे लिए यहां समां ए ज़िस्त फराहम किया मगर तुमलोग काम ही शुकर-गुज़ार होते हो
عَرَبِيوَلَقَد خَلَقناكُم ثُمَّ صَوَّرناكُم ثُمَّ قُلنا لِلمَلائِكَةِ اسجُدوا لِآدَمَ فَسَجَدوا إِلّا إِبليسَ لَم يَكُن مِنَ السّاجِدينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने तुम्हें पैदा किया, फिर तुम्हारा रूप बनाया, फिर फ़रिश्तों से कहा कि आदम को सजदा करो। तो उन्होंने सजदा किया, सिवाय इबलीस के। वह सदजा करने वालों में से न हुआ।
Roman Urdu (Maududi)Humne tumhari takhleeq (creation) ki ibteda ki, phir tumhari surat banayi, phir farishton se kaha Adam ko sajda karo. Is hukm par sabne sajda kiya magar Iblis sajda karne walon mein shamil na hua
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney tum ko peda kiya phri hum hi ney tumhari soorat banaee phir hum ney farishton say kaha aadam ko sajda kero so sab ney sajda kiya ba-juz iblees kay woh sajda kerney walon mein shamil na hua
Devnagri Urdu (Maududi)हमने तुम्हारी तख़लीक (सृजन) की इब्तेदा की, फिर तुम्हारी सूरत बनाई, फिर फ़रिश्टन से कहा आदम को सजदा करो. क्या हुक्म पर सबने सजदा किया मगर इब्लीस सजदा करने वालों में शामिल ना हुआ
عَرَبِيقالَ ما مَنَعَكَ أَلّا تَسجُدَ إِذ أَمَرتُكَ ۖ قالَ أَنا خَيرٌ مِنهُ خَلَقتَني مِن نارٍ وَخَلَقتَهُ مِن طينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) कहा : जब मैंने तुझे आदेश दिया था तो तुझे किस बात ने सजदा करने से रोका? उसने कहा : मैं उससे अच्छा हूँ। तूने मुझे आग से पैदा किया है और तूने उसे मिट्टी से बनाया है।
Roman Urdu (Maududi)Pucha, “ tujhey kis cheez ne sajda karne se roka jabke maine tujhko hukum diya tha?” bola , main ussey behtar hoon. Tu nay mujhey aag se paida kiya hai aur usey mitti se”
Roman Urdu (Junagarhi)Haq Taalaa ney farmayato jo sajda nahi kerta to tujh ko iss say kaun amr-e-maaney hai jabkay mein tujh ko hukum dey chuka kehney laga mein iss say behtar hun aap ney mujh ko aag say peda kiya hai aur iss ko aap ney khaak say peda kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)पूछा, “तुझे किस चीज ने सजदा करने से रोका जबके मैंने तुझको हुकुम दिया था?” बोला, मैं उससे बेहतर हूं। तू नहीं मुझे आग से पैदा किया है और उसे मिट्टी से''
عَرَبِيقالَ فَاهبِط مِنها فَما يَكونُ لَكَ أَن تَتَكَبَّرَ فيها فَاخرُج إِنَّكَ مِنَ الصّاغِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) कहा : फिर इस (जन्नत) से उतर जा। क्योंकि तेरे लिए यह न होगा कि तू इसमें घमंड करे। सो निकल जा। निश्चय ही तू अपमानित होने वालों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Farmaya, “accha tu yahan se nichey utar , tujhey haqq nahin hai ke yahan badayi ka ghamand karey, nikal jaa ke dar-haqeeqat tu un logon mein se hai jo khud apni zillat chahte hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Haq Taalaa ney farmaya tu aasman say utar tujh ko koi haq hasil nahi kay tu aasman mein reh ker takabbur keray so nikal bey shak to zaleelon mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया, ''अच्छा तू यहां से नीचे उतर, तुझे हक नहीं है के यहां बदाई का घमंड करे, निकल जा के डर-हकीकत तू उन लोगों में से है जो खुद अपनी ज़िल्लत चाहता है''
عَرَبِيقالَ أَنظِرني إِلىٰ يَومِ يُبعَثونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(इबलीस ने) कहा : मुझे उस दिन तक मोहलत दे, जब वे उठाए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Bola, “ mujhey us din tak mohlat de jabke yeh sab dobara uthaye jayenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney kaha mujh ko mohlat dijiye qayamat kay din tak
Devnagri Urdu (Maududi)बोला, "मुझे उस दिन तक मोहलत दे जबके ये सब दोबारा उठेंगे"
عَرَبِيقالَ إِنَّكَ مِنَ المُنظَرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) कहा : निःसंदेह तू मोहलत दिए जाने वालों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Farmaya “ tujhey mohlat hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney farmaya tujh ko mohlat di gaee
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया "तुझे मोहलत है।"
عَرَبِيقالَ فَبِما أَغوَيتَني لَأَقعُدَنَّ لَهُم صِراطَكَ المُستَقيمَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : फिर इस कारण कि तूने मुझे गुमराह किया है, मैं निश्चय उनके लिए तेरे सीधे मार्ग पर अवश्य बैठूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Bola, “accha to jis tarah tu nay mujhey gumraahi mein mubtala kiya main bhi ab teri seedhi raah par
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney kaha ba-sabab iss kay, kay aap ney mujhay gumrah kiya hai mein qasam khata hun kay mein inn kay liye aap ki seedhi raah per bethon ga
Devnagri Urdu (Maududi)बोला, “अच्छा तो जिस तरह तू नई मुझे गुमराही में मुबतला किया मैं भी अब तेरी सीधी राह पर
عَرَبِيثُمَّ لَآتِيَنَّهُم مِن بَينِ أَيديهِم وَمِن خَلفِهِم وَعَن أَيمانِهِم وَعَن شَمائِلِهِم ۖ وَلا تَجِدُ أَكثَرَهُم شاكِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर मैं उनके पास उनके आगे से, उनके पीछे से, उनके दाएँ से और उनके बाएँ से आऊँगा। और तू उनमें से अधिकतर लोगों को शुक्र करने वाला नहीं पाएगा।
Roman Urdu (Maududi)In Insaano ki ghaath mein laga rahunga, aagey aur pichey, dayein aur bayein, har taraf se inko gherunga aur tu in mein se aksar ko shukarguzar na payega”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir inn per hamla keroon ga aur inn kay aagay say bhi aur inn kay peechay say bhi aur inn ki dhaani janib say bhi aur inn ki bayen janib say bhi aur aap inn mein say aksar ko shukar guzar na payiye ga
Devnagri Urdu (Maududi)इंसानों की घाट में लगा रहूंगा, आगे और पीछे, दिनें और बायें, हर तरफ से इनको घेरूंगा और तू इनमें से अक्सर को शुक्रगुजार न पायेगा"
عَرَبِيقالَ اخرُج مِنها مَذءومًا مَدحورًا ۖ لَمَن تَبِعَكَ مِنهُم لَأَملَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنكُم أَجمَعينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) कहा : यहाँ से निंदित धिक्कारा हुआ निकल जा। निःसंदेह उनमें से जो तेरे पीछे चलेगा, मैं निश्चय ही तुम सब से नरक को अवश्य भर दूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Farmaya, “nikal jaa yahan se zaleel aur thukraya hua, yakeen rakh ke in mein se jo teri pairwi karenge, tujh sameith un sab se jahannum ko bhar doonga
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney farmaya kay yahan say zaleel-o-khuwar hoker nikal jaa jo shaks inn say mein tera kehna maney ga mein zaroor tum sab say jahannum ko bhar doon ga
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया, "निकल जा यहां से ज़लील और ठुकराया हुआ, यकीन रख के इनमें से जो तेरी जोड़ी करेगी, तुझ समेत उन सब से जहन्नुम को भर दूंगा
عَرَبِيوَيا آدَمُ اسكُن أَنتَ وَزَوجُكَ الجَنَّةَ فَكُلا مِن حَيثُ شِئتُما وَلا تَقرَبا هٰذِهِ الشَّجَرَةَ فَتَكونا مِنَ الظّالِمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और ऐ आदम! तुम और तुम्हारी पत्नी इस जन्नत में रहो। अतः दोनों जहाँ से चाहो, खाओ और इस पेड़ के पास मत जाना कि दोनों अत्याचारियों में से हो जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur aey Adam, tu aur teri biwi, dono is jannat mein raho, jahan jis cheez ko tumhara jee chahe khao, magar us darakht ke paas na phatakna warna zalimon mein se ho jaogey”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney hukum diya kay aey aadam! Tum aur tumhari biwi jannat mein raho. Phir jiss jagah say chahao dono khao aur uss darakht kay pass mat jao werna tum dono zalimon mein say hojao gay
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐ आदम, तू और तेरी बीवी, दोनों इस जन्नत में रहो, जहां जिस चीज़ को तुम्हारा जी चाहे खाओ, मगर उस दरख्त के पास न फटकना वरना ज़ालिमों में से हो जाओगे”
عَرَبِيفَوَسوَسَ لَهُمَا الشَّيطانُ لِيُبدِيَ لَهُما ما وورِيَ عَنهُما مِن سَوآتِهِما وَقالَ ما نَهاكُما رَبُّكُما عَن هٰذِهِ الشَّجَرَةِ إِلّا أَن تَكونا مَلَكَينِ أَو تَكونا مِنَ الخالِدينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर शैतान ने उन दोनों के हृदय में वसवसा डाला। ताकि उनके लिए प्रकट कर दे जो कुछ उनके गुप्तांगों में से उनसे छिपाया गया था, और उसने कहा : तुम दोनों के पालनहार ने तुम्हें इस पेड़ से केवल इसलिए मना किया है कि कहीं तुम दोनों फ़रिश्ते न बन जाओ, अथवा हमेशा रहने वालों में से न हो जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Phir Shaytan ne unko behkaya taa-ke unki sharmgaahein jo ek dusre se chupayi gayi thin unke saamne khol de. Usne unse kaha, “tumhare Rubb ne tumhein jo is darakh se roka hai iski wajah iske siwa kuch nahin hai ke kahin tum Farishtey na ban jao, ya tumhein hameshgi ki zindagi hasil na ho jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Phir shetan ney inn dono kay dilon mein waswasa dala takay inn ki sharamgahen jo aik doosray say posheeda thi dono kay roo baroo parda kerdey aur kehney laga kay tumharay rab ney tum dono ko iss darakht say aur kissi sabab say mana nahi farmaya magar mehaz iss waja say kay tum dono kahin farishtay hojao ya kahin hamesha zinda rehney walon mein say na hojao
Devnagri Urdu (Maududi)फिर शैतान ने उनको बहकाया ता-के उनकी शर्मगाहें जो एक दूसरे से छुपी गई पतली उनके सामने खोल दे। उसने उनसे कहा, “तुम्हारे रब ने तुम्हें जो इस दरख से रोका है इसकी वजह इसके सिवा कुछ नहीं है के कहीं तुम फरिश्ते ना बन जाओ, या तुम्हें हमेशा की जिंदगी हासिल ना हो जाए
عَرَبِيوَقاسَمَهُما إِنّي لَكُما لَمِنَ النّاصِحينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उसने उन दोनों से क़सम खाकर कहा : निःसंदेह मैं तुम दोनों का निश्चित रूप से हितैषी हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur usne kasam kha kar unse kaha ke main tumhara saccha khair-khwa hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn dono kay roo baroo qasam kha li kay yaqeen janiye mein tum dono ka khair khuwa hun
Devnagri Urdu (Maududi)और उसने कसम खा कर उनसे कहा के मैं तुम्हारा सच्चा खैर-ख्वा हूं
عَرَبِيفَدَلّاهُما بِغُرورٍ ۚ فَلَمّا ذاقَا الشَّجَرَةَ بَدَت لَهُما سَوآتُهُما وَطَفِقا يَخصِفانِ عَلَيهِما مِن وَرَقِ الجَنَّةِ ۖ وَناداهُما رَبُّهُما أَلَم أَنهَكُما عَن تِلكُمَا الشَّجَرَةِ وَأَقُل لَكُما إِنَّ الشَّيطانَ لَكُما عَدُوٌّ مُبينٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)चुनाँचे उसने उन दोनों को धोखे से नीचे उतार लिया। फिर जब उन दोनों ने उस वृक्ष को चखा, तो उनके लिए उनके गुप्तांग प्रकट हो गए और दोनों अपने आपपर जन्नत के पत्ते चिपकाने लगे। और उन दोनों को उनके पालनहार ने आवाज़ दी : क्या मैंने तुम दोनों को इस वृक्ष से रोका नहीं था और तुम दोनों से नहीं कहा था कि निःसंदेह शैतान तुम दोनों का खुला शत्रु है?
Roman Urdu (Maududi)Is tarah dhoka dekar woh un dono ko rafta rafta apne dhap par le aaya. Aakhir e kaar jab unhon ne us darakht ka maza chakkha to unke satr ek dusre ke saamne khul gaye aur woh apne jismon ko jannat ke patton se dhankne lagey. Tab unke Rubb ne unhein pukara, “kya maine tumhein is darakht se na roka tha aur na kaha tha ke shaytan tumhara khula dushman hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)So inn dono ko fareb say neechay le aaya pus inn dono ney jab darakht ko chakha dono ki sharamgahen aik doosray kay roo baroo bey parda hogayen aur dono apney upper jannat kay pattay jor jor ker rakhne lagay aur inn kay rab ney inn ko pukara mein tum dono ko iss darakht say mana nahi ker chuka tha aur yeh na keh chuka kay shetan tumhara sareeh dushman hai
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह धोखा देकर वो उन दोनों को रफ्ता रफ्ता अपना धप पार ले आया. आख़िर ए कार जब उनहों ने उस दरख्त का मजा चखा तो उनके सत्र एक दूसरे के सामने खुल गए और वो अपने जिस्म को जन्नत के पत्तों से ढँकने लगे। तब उनके रब ने उन्हें पुकारा, "क्या मैंने तुम्हें इस दरख्त से ना रोका था और ना कहा था के शैतान तुम्हारा खुला दुश्मन है?"
عَرَبِيقالا رَبَّنا ظَلَمنا أَنفُسَنا وَإِن لَم تَغفِر لَنا وَتَرحَمنا لَنَكونَنَّ مِنَ الخاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)दोनों ने कहा : ऐ हमारे पालनहार! हमने अपने आपपर अत्याचार किया है। और यदि तूने हमें क्षमा न किया तथा हमपर दया न की, तो निश्चय हम अवश्य घाटा उठाने वालों में से हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Dono bol utthey, “Aey Rubb, humne apne upar sitam (zulm) kiya, ab agar tu nay humse darguzar na farmaya aur reham na kiya to yakeenan hum tabaah ho jayenge.”
Roman Urdu (Junagarhi)Dono ney kaha aey humaray rab! Hum ney apna bara nuksan kiya aur agar tu humari maghfirat na keray ga aur hum per reham na keray ga wo waqaee hum nuksan paney walon mein say hojayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)दोनों बोल उठे, "ऐ रब, हमने अपना ऊपर सितम (ज़ुल्म) किया, अब अगर तू नहीं हमसे दरगुज़ार ना फरमाया और रहम ना किया तो यकीनन हम तबाह हो जाएंगे।"
عَرَبِيقالَ اهبِطوا بَعضُكُم لِبَعضٍ عَدُوٌّ ۖ وَلَكُم فِي الأَرضِ مُستَقَرٌّ وَمَتاعٌ إِلىٰ حينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) कहा : उतर जाओ। तुम एक-दूसरे के शत्रु हो और तुम्हारे लिए धरती में एक अवधि तक रहने का स्थान और कुछ जीवन-सामग्री है।
Roman Urdu (Maududi)Farmaya, “utar jao, tum ek dusre ke dushman ho. Aur tumhare liye ek khaas muddat tak zameen hi mein jaye-qarar (dwelling) aur samaan-e-zeist (dwelling and provision) hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Haq Taalaa ney farmaya kay neechay aisi halat mein aajao kay tum bahum aik doosray kay dushman hogay aur tumharay wastay zamin mein rehney ki jagah hai aur nafa hasil kerna hai aik waqt tak
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया, "उतर जाओ, तुम एक दूसरे के दुश्मन हो। और तुम्हारे लिए एक खास मुद्दत तक ज़मीन ही में जाए-क़रार (निवास) और सामान-ए-ज़िस्ट (निवास और प्रावधान) है"
عَرَبِيقالَ فيها تَحيَونَ وَفيها تَموتونَ وَمِنها تُخرَجونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : तुम उसी में जीवित रहोगे और उसी में मरोगे और उसी से निकाले जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur farmaya, “wahin tumko jeena aur wahin marna hai aur usi mein se tumko aakhir kaar nikala jayega.”
Roman Urdu (Junagarhi)Farmaya tum ko wahan hi zindagi basar kerna hai aur wahan hi marna hai aur issi mein phir nikalay jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)और फरमाया, "वहीं तुमको जीना और वहीं मरना है और उसी मुझसे तुमको आख़िरकार निकल जाएगा।”
عَرَبِييا بَني آدَمَ قَد أَنزَلنا عَلَيكُم لِباسًا يُواري سَوآتِكُم وَريشًا ۖ وَلِباسُ التَّقوىٰ ذٰلِكَ خَيرٌ ۚ ذٰلِكَ مِن آياتِ اللَّهِ لَعَلَّهُم يَذَّكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ आदम की संतान! निश्चय हमने तुमपर वस्त्र उतारा है, जो तुम्हारे गुप्तांगों को छिपाता है और शोभा भी है। और तक़वा (अल्लाह की आज्ञाकारिता) का वस्त्र सबसे अच्छा है। यह अल्लाह की निशानियों में से है, ताकि वे उपदेश ग्रहण करें।
Roman Urdu (Maududi)Aey aulad e Adam, humne tumpar libas nazil kiya hai ke tumhare jism ke qabil e sharm hisson ko dhaanke aur tumhare liye jism ki hifazat aur zeenat ka zariya bhi ho. Aur behtareen libas taqwe (piety) ka libas hai. Yeh Allah ki nishaniyon mein se ek nihsani hai, shayad ke log issey sabaq lein
Roman Urdu (Junagarhi)Aey aadam (alh-e-salam) ki aulad hum ney tumharay liye libas peda kiya jo tumhari sharamgahon ko bhi chupata hai aur mojib-e-zeenat bhi hai aur taqway ka libas yeh iss say barh ker hai. Yeh Allah Taalaa ki nishaniyon mein say hai takay yeh log yaad rakhen
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ औलाद ए आदम, हमने तुम्हारा लिबास नाज़िल किया है कि तुम्हारे जिस्म के काबिल ए शर्म हिस्सो को धन्यवाद और तुम्हारे लिए जिस्म की हिफ़ाज़त और ज़ीनत का ज़रिया भी हो। और बेहतरीन लिबास तकवे (पवित्रता) का लिबास है। ये अल्लाह की निशानियों में से एक निहसानी है, शायद के लोग इसे सबक लें
عَرَبِييا بَني آدَمَ لا يَفتِنَنَّكُمُ الشَّيطانُ كَما أَخرَجَ أَبَوَيكُم مِنَ الجَنَّةِ يَنزِعُ عَنهُما لِباسَهُما لِيُرِيَهُما سَوآتِهِما ۗ إِنَّهُ يَراكُم هُوَ وَقَبيلُهُ مِن حَيثُ لا تَرَونَهُم ۗ إِنّا جَعَلنَا الشَّياطينَ أَولِياءَ لِلَّذينَ لا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ आदम की संतान! ऐसा न हो कि शैतान तुम्हें लुभाए, जैसे उसने तुम्हारे माता-पिता को जन्नत से निकाल दिया; वह दोनों के वस्त्र उतारता था, ताकि दोनों को उनके गुप्तांग दिखाए। निःसंदेह वह तथा उसकी जाति, तुम्हें वहाँ से देखते हैं, जहाँ से तुम उन्हें नहीं देखते। निःसंदेह हमने शैतानों को उन लोगों का मित्र बनाया है, जो ईमान नहीं रखते।
Roman Urdu (Maududi)Aey bani Adam, aisa na ho ke shaytan tumhein phir usi tarah fitne mein mubtala karde jis tarah usne tumhare walidain ko jannat se nikalwaya tha aur unke libas unpar se utarwa diye thay taa-ke unke sharmgaahein ek dusre ke saamne khole. Woh aur uske saathi tumhein aisi jagah se dekhte hain jahan se tum unhein nahin dekh sakte. In shayateen ko humne un logon ka sarparast bana diya hai jo iman nahin latey
Roman Urdu (Junagarhi)Aey aulad-e-aadam! Shetan tum ko kissi kharabi mein na daal dey jaisa kay uss ney tumharay maa baap ko jannat say bahir kera diya aisi halat mein unn ka libas bhi utarwa diya takay woh inn ko inn ki sharamgahen dikhaye. Woh aur uss ka lashkar tum ko aisay tor per dekhta hai kay tum unn ko nahi dekhta ho. Hum ney shetanon ko unn hi logon ka dost banaya hai jo eman nahi latay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ बानी आदम, ऐसा ना हो के शैतान तुम्हें फिर उसी तरह फिटने में मुब्तला करदे जिस तरह उसने तुम्हारे वलियों को जन्नत से निकाला था और उनके लिबास उन्पर से उतरवा दिए थाय ता-के उनके शर्मगाहें एक दूसरे के सामने खोले। वो और उसके साथी तुम्हें ऐसी जगह से दिखते हैं जहां से तुम उन्हें नहीं देख सकते। शयातीन को हमने उन लोगों का सरपरस्त बना दिया है जो ईमान नहीं लाते
عَرَبِيوَإِذا فَعَلوا فاحِشَةً قالوا وَجَدنا عَلَيها آباءَنا وَاللَّهُ أَمَرَنا بِها ۗ قُل إِنَّ اللَّهَ لا يَأمُرُ بِالفَحشاءِ ۖ أَتَقولونَ عَلَى اللَّهِ ما لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब वे कोई निर्लज्जता का काम करते हैं, तो कहते हैं कि हमने अपने पूर्वजों को कि इसी (रीति) पर पाया तथा अल्लाह ने हमें इसका आदेश दिया है। (ऐ नबी!) आप उनसे कह दें : निःसंदेह अल्लाह निर्लज्जता का आदेश नहीं देता। क्या तुम अल्लाह पर ऐसी बात का आरोप धरते हो, जो तुम नहीं जानते?
Roman Urdu (Maududi)Yeh log jab koi sharmnaak kaam karte hain to kehte hain humne apne baap dada ko isi tareeqe par paya hai aur Allah hi ne humein aisa karne ka hukum diya hai. Insey kaho Allah be-hayayi ka hukm kabhi nahin diya karta. Kya tum Allah ka naam lekar woh baatein kehte ho jinke mutaaliq tumhein ilm nahin hai (woh Allah ki taraf se hain)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh log koi fahash kaam kertay hain to kehtay hain hum ney apney baap dada ko issi tareeq per paya hai aur Allah ney bhi hum ko yehi bataya hai. Aap keh dijiye kay Allah fahash baat ki taleem nahi deta kiya Allah kay zimmay aisi baat lagatay ho jiss ko tum sanad nahi rakhtay
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग जब कोई शर्मिंदा काम करते हैं तो कहते हैं हमने अपने बाप दादा को इसी तारीक पर पाया है और अल्लाह ही ने हमें ऐसा करने का हुकुम दिया है। इनसे कहो अल्लाह बे-हयायी का हुक्म कभी नहीं दिया करता। क्या तुम अल्लाह का नाम लेकर वो बातें कहते हो जिनका मुतालिक तुम्हें इल्म नहीं है (वो अल्लाह की तरफ से हैं)
عَرَبِيقُل أَمَرَ رَبّي بِالقِسطِ ۖ وَأَقيموا وُجوهَكُم عِندَ كُلِّ مَسجِدٍ وَادعوهُ مُخلِصينَ لَهُ الدّينَ ۚ كَما بَدَأَكُم تَعودونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : मेरे पालनहार ने न्याय का आदेश दिया है। तथा प्रत्येक नमाज़ के समय अपने चेहरे को सीधा रखो, और उसके लिए धर्म को विशुद्ध करते हुए उसे पुकारो। जिस तरह उसने तुम्हें पहली बार पैदा किया, उसी तरह वह तुम्हें दोबारा पैदा करेगा।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), insey kaho, mere Rubb ne to raasti o insaaf ka hukum diya hai, aur uska hukum to yeh hai ke har ibadat mein apna rukh theek rakkho aur usi ko pukaaro apne deen ko uske liye khaalis rakh kar, jis tarah usne tumhein ab paida kiya hai usi tarah tum phir paida kiye jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay meray rab ney hukum diya hai insaf ka aur yeh kay tum her sajda kay waqt apna rukh seedha rakha kero aur Allah Taalaa ki ibadat iss tor per kero kay iss ibadat ko khalis Allah hi kay wastay rakho. Tum ko Allah ney jiss tarah shuroo mein peda kiya tha issi tarah tum doobara peda hogay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), इनसे कहो, मेरे रब ने तो रस्ती ओ इन्साफ का हुकुम दिया है, और उसका हुकुम तो ये है कि हर इबादत में अपना रुख ठीक रखो और उसी को पुकारो अपने दीन को उसके लिए खालिस रख कर, जिस तरह उसने तुम्हें अब भुगतान किया है उसी तरह तुम फिर भुगतान किये जाओगे
عَرَبِيفَريقًا هَدىٰ وَفَريقًا حَقَّ عَلَيهِمُ الضَّلالَةُ ۗ إِنَّهُمُ اتَّخَذُوا الشَّياطينَ أَولِياءَ مِن دونِ اللَّهِ وَيَحسَبونَ أَنَّهُم مُهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)एक समूह का उसने मार्गदर्शन किया और एक समूह पर गुमराही सिद्ध हो गई। निःसंदेह उन्होंने अल्लाह को छोड़कर शैतानों को दोस्त बना लिया और समझते हैं कि निश्चय वे सीधे मार्ग पर हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ek giroh ko to usne seedha raasta dikha diya hai, magar dusre giroh par gumraahi chaspan hokar reh gayi hai, kyunke unhon ne khuda ke bajaye Shayateen ko apna sarparast bana liya hai aur woh samajh rahey hain ke hum seedhi raah par hain
Roman Urdu (Junagarhi)Baaz logon ko Allah ney hidayat di hai aur baaz per gumrahi sabit hogaee hai. Inn logon ney Allah Taalaa ko chor ker shetanon ko dost bana liya hai aur khayal rakhtay hain kay woh raast per hain
Devnagri Urdu (Maududi)एक गिरो ​​को तो उसने सीधा रास्ता दिखा दिया है, मगर दूसरे गिरो ​​पर गुमराही चस्पां होकर रह गई है, क्योंकि उन्हें नहीं खुदा के बजाये शयातीन को अपना सरपरस्त बना लिया है और वो समझ रहे हैं कि हम सीधी राह पर हैं
عَرَبِي۞ يا بَني آدَمَ خُذوا زينَتَكُم عِندَ كُلِّ مَسجِدٍ وَكُلوا وَاشرَبوا وَلا تُسرِفوا ۚ إِنَّهُ لا يُحِبُّ المُسرِفينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ आदम की संतान! प्रत्येक नमाज़ के समय अपनी शोभा धारण करो। तथा खाओ और पियो और हद से आगे न बढ़ो। निःसंदेह वह हद से आगे बढ़ने वालों से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Aey bani Adam, har ibadat ke muaqe par apni zeenat se aaraasta raho aur khao peeo aur hadd se tajauz na karo. Allah hadd se badhne walon ko pasand nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Aey aulad-e-aadam! Tum masjid ki her hazri kay waqt apna libas pehan liya kero. Aur khoob khao aur piyo aur hadd say mat niklo. Be-shak Allah hadd say nikal janey walon ko pasand nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ बानी आदम, हर इबादत के मुआक़े पर अपनी ज़ीनत से अरस्ता रहो और खाओ पियो और हद से तजौज़ न करो। अल्लाह हद से बढ़ने वालों को पसंद नहीं करता
عَرَبِيقُل مَن حَرَّمَ زينَةَ اللَّهِ الَّتي أَخرَجَ لِعِبادِهِ وَالطَّيِّباتِ مِنَ الرِّزقِ ۚ قُل هِيَ لِلَّذينَ آمَنوا فِي الحَياةِ الدُّنيا خالِصَةً يَومَ القِيامَةِ ۗ كَذٰلِكَ نُفَصِّلُ الآياتِ لِقَومٍ يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दें : किसने अल्लाह की उस शोभा को, जिसे उसने अपने बंदों के लिए पैदा किया है तथा खाने-पीने की पवित्र चीज़ों को हराम किया है? आप कह दें : ये चीज़ें सांसारिक जीवन में (भी) ईमान वालों के लिए हैं, जबकि क़ियामत के दिन केवल उन्हीं के लिए विशिष्ट होंगी। इसी तरह, हम निशानियों को उन लोगों के लिए खोल-खोलकर बयान करते हैं, जो जानते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), Insey kaho kisne Allah ki us zeenat ko haraam kardiya jisey Allah ne apne bandon ke liye nikala tha aur kisne khuda ki bakshi hui paak cheezein mamnu (forbidden) kardi? Kaho, yeh saari cheezein duniya ki zindagi mein bhi iman laney walon ke liye hain, aur qayamat ke roz to khaalisatan unhi ke liye hongi. Is tarah hum apni baatein saaf saaf bayaan karte hain un logon ke liye jo ilm rakhne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap farmaiye kay Allah Taalaa kay peda kiye huye asbaab-e-zeenat ko jin ko uss ney apney bandon kay wastay banaya hai aur khaney peenay ki halal cheezon ko kiss shaks ney haram kiya hai? Aap keh dijiye kay yeh ashiya iss tor per kay qayamat kay roz khalis hongi ehal-e-eman kay liye dunyawi zindagi mein mominon kay liye bhi hain. Hum issi tarah tamam aayaat ko samajh daron kay wastay saaf saaf biyan kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), इनसे कहो किसने अल्लाह की उस ज़ीनत को हराम कर दिया जैसे अल्लाह ने अपने बंदों के लिए निकला था और किसने खुदा की बख्शी हुई पाक चीज़ ममनू (मना) करदी? कहो, ये सारी चीजें दुनिया की जिंदगी में भी ईमान लाने वालों के लिए हैं, और कयामत के रोज तो खालीसतन उनके लिए होंगी। इस तरह हम अपनी बातें साफ-साफ बयान करते हैं उन लोगों के लिए जो इल्म रखने वाले हैं
عَرَبِيقُل إِنَّما حَرَّمَ رَبِّيَ الفَواحِشَ ما ظَهَرَ مِنها وَما بَطَنَ وَالإِثمَ وَالبَغيَ بِغَيرِ الحَقِّ وَأَن تُشرِكوا بِاللَّهِ ما لَم يُنَزِّل بِهِ سُلطانًا وَأَن تَقولوا عَلَى اللَّهِ ما لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें कि मेरे पालनहार ने तो केवल खुले एवं छिपे अश्लील कर्मों को तथा पाप एवं नाहक़ अत्याचार को हराम किया है, तथा इस बात को कि तुम उसे अल्लाह का साझी बनाओ, जिस (के साझी होने) का कोई प्रमाण उसने नहीं उतारा है तथा यह कि तुम अल्लाह पर ऐसी बात कहो, जो तुम नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), insey kaho ke mere Rubb ne jo cheezein haraam ki hain woh to yeh hain : besharmi ke kaam khwa khuley hon ya chupey, aur gunaah aur haqq ke khilaf ziyadati, aur yeh ke Allah ke saath tum kisi ko shareek karo jiske liye usne koi sanad nazil nahin ki, aur yeh ke Allah ke naam par koi aisi baat kaho jiske mutaaliq tumhein ilm na ho ke woh haqeeqat mein usi ne farmayi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap farmaiye kay albatta meray rab ney sirf haram kiya hai inn tamam fahash baaton ko jo ailaaniya hain aur jo posheeda hain aur her gunah ki baat ko aur na haq kissi per zulm kerney ko aur iss baat ko kay tum Allah kay sath kissi aisi cheez ko shareek thehrao jiss ki Allah ney koi sanad nazil nahi ki aur iss baat ko kay tum log Allah kay zimmay aisi baat laga do jiss ko tum jantay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), इनसे कहो के मेरे रब ने जो चीजें हराम की हैं वो तो ये हैं: बेशर्मी के काम ख्वा खुले हों या छुपे, और गुनाह और हक के खिलाफ ज़ियादती, और ये के अल्लाह के साथ तुम किसी को शरीक करो जिसके लिए उसने कोई सनद नाज़िल नहीं की, और ये के अल्लाह के नाम पर कोई ऐसी बात कहो जिसका मुतालिक तुम्हें इल्म ना हो के वो हकीकत में उसकी ने फरमायी है
عَرَبِيوَلِكُلِّ أُمَّةٍ أَجَلٌ ۖ فَإِذا جاءَ أَجَلُهُم لا يَستَأخِرونَ ساعَةً ۖ وَلا يَستَقدِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)प्रत्येक समुदाय का एक निर्धारित समय है। फिर जब उनका नियत समय आ जाता है, तो वे एक घड़ी न पीछे होते हैं और न आगे होते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Har qaum ke liye mohlat ki ek muddat muqarrar hai, phir jab kisi qaum ki muddat aan puri hoti hai to ek ghadi bhar ki takheer o taqdeem bhi nahin hoti
Roman Urdu (Junagarhi)Aur her giroh kay liye aik miyaad-e-moyyen hai so jiss waqt inn ki miyaad-e-moyyen aajayegi uss waqt aik sa’at na peechay hatt saken gay aur na aagay barh saken gay
Devnagri Urdu (Maududi)हर क़ौम के लिए मोहल्लत की एक मुद्दत मुकर्रर है, फिर जब किसी क़ौम की मुद्दत आन पूरी होती है तो एक घड़ी भर की तकदीम भी नहीं होती
عَرَبِييا بَني آدَمَ إِمّا يَأتِيَنَّكُم رُسُلٌ مِنكُم يَقُصّونَ عَلَيكُم آياتي ۙ فَمَنِ اتَّقىٰ وَأَصلَحَ فَلا خَوفٌ عَلَيهِم وَلا هُم يَحزَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ आदम की संतान! जब तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल आएँ, जो तुम्हें मेरी आयतें सुनाएँ, तो जो कोई डरा और अपना सुधार कर लिया, तो उनके लिए न तो कोई भय होगा और न वे शोक करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)(Aur yeh baat Allah ne aagaaz e takhleeq hi mein saaf farma di thi ke) aey bani Adam, yaad rakkho, agar tumhare paas khud tumhi mein se aisey Rasool aayein jo tumhein meri aayat suna rahey hon, to jo koi nafarmani se bachega aur apne rawayye ki islaah karlega uske liye kisi khauf aur ranjj ka mauqa nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey aulad-e-aadam! Agar tumharay pass payghumbar aayen jo tum hi mein say hon jo meray ehkaam tum say biyan keren to jo shaks taqwa ikhtiyar keray aur durusti keray so inn logon per na kuch andesha hai aur na woh ghumgeen hongay
Devnagri Urdu (Maududi)(और ये बात अल्लाह ने आगाज़ ए तख़लीक ही में साफ फरमा दी थी के) ऐ बानी आदम, याद रखो, अगर तुम्हारे पास खुद तुम्हीं से ऐसे रसूल आएं जो तुम्हें मेरी आयत सुना रहे हों, तो जो कोई नफ़रमानी से बचेगा और अपने रवये की इस्लाह करेगा उसके लिए कोई खौफ और रंज का मौका नहीं है
عَرَبِيوَالَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِنا وَاستَكبَروا عَنها أُولٰئِكَ أَصحابُ النّارِ ۖ هُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और उन्हें मानने से अभिमान किया, वही लोग आग (जहन्नम) वाले हैं, वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log hamari aayat ko jhutlayenge aur unke muqable mein sarkashi bartenge wahi ehle dozakh hongey jahan woh hamesha rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log humaray inn ehkaam ko jhutlayen aur inn say takabbur keren woh log dozakh walay hongay woh iss mein hamesha hamesha rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग हमारी आयतों को झूठलाएंगे और उनके मुक़ाबले में सरकशी बरतेंगे वही एहले दोज़ख होंगे जहां वो हमेशा रहेंगे
عَرَبِيفَمَن أَظلَمُ مِمَّنِ افتَرىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَو كَذَّبَ بِآياتِهِ ۚ أُولٰئِكَ يَنالُهُم نَصيبُهُم مِنَ الكِتابِ ۖ حَتّىٰ إِذا جاءَتهُم رُسُلُنا يَتَوَفَّونَهُم قالوا أَينَ ما كُنتُم تَدعونَ مِن دونِ اللَّهِ ۖ قالوا ضَلّوا عَنّا وَشَهِدوا عَلىٰ أَنفُسِهِم أَنَّهُم كانوا كافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उससे बड़ा अत्याचारी कौन है, जो अल्लाह पर झूठा आरोप लगाए या उसकी आयतों को झुठलाए? ये वही लोग हैं, जिन्हें लिखे हुए में से उनका हिस्सा मिलता रहेगा। यहाँ तक कि जब उनके पास हमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते) उनका प्राण निकालने के लिए आएँगे, तो कहेंगे : कहाँ हैं वे जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पुकारते थे? वे कहेंगे : वे हमसे गुम हो गए। तथा वे अपने ख़िलाफ़ गवाही देंगे कि वे वास्तव में काफ़िर थे।
Roman Urdu (Maududi)Zahir hai ke ussey bada zalim aur kaun hoga jo biklul jhooti baatein ghadh kar Allah ki taraf mansooq karey ya Allah ki sacchi aayat ko jhutlaye? Aisey log apne nawishta e taqdeer ke mutabiq apna hissa paatey rahenge, yahan tak ke woh ghadi aa jayegi jab hamare bheje huey Farishtey unki roohein(souls) qabz karne ke liye pahunchenge. Us waqt woh unse puchenge ke batao ab kahan hain tumhare woh mabood jinko tum khuda ke bajaye pukarte thay? Woh kahenge ke, “Sab humse ghum ho gaye” aur woh khud apne khilaaf gawahi denge ke hum waqayi munkir e haqq thay
Roman Urdu (Junagarhi)So uss shaks say ziyada zalim kaun hoga jo Allah Taalaa per jhoot banadhay ya uss ki aayaton ko jhoota bataye inn logon kay naseeb ka jo kuch kitab say hai woh inn ko mill jayega yahan tak kay jab inn kay pass humaray bhejay huye farishtay inn ki jaan qabz kerney aayen gay to kahen gay woh kahan gaye jin ki tum Allah ko chor ker ibadat kertay thay woh kahen gay kay hum say sab ghaeeb hogaye aur apney kafir honey ka iqrar keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)ज़ाहिर है के उसे बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जो बिकल झूठी बातें ग़द कर अल्लाह की तरफ मंसूर करे या अल्लाह की सच्ची आयत को झूठलाये? ऐसे लोग अपने नविस्ता ए तकदीर के मुताबिक अपना हिसा पाते रहेंगे, यहां तक ​​के वो घड़ी आ जाएगी जब हमारे भेजे हुए फरिश्ते उनकी रूहें (आत्माएं) क़ब्ज़ करने के लिए पहनेंगे। हमें वक्त है वो उनसे पूछेंगे के बताओ अब कहां हैं तुम्हारे वो माबूद जिनको तुम खुदा के बजाये पुकारते थे? वो कहेंगे के, "सब हमसे ग़म हो गए" और वो खुद अपने ख़िलाफ गवाही देंगे के हम वक़ाई मुनकिर ए हक़ थे
عَرَبِيقالَ ادخُلوا في أُمَمٍ قَد خَلَت مِن قَبلِكُم مِنَ الجِنِّ وَالإِنسِ فِي النّارِ ۖ كُلَّما دَخَلَت أُمَّةٌ لَعَنَت أُختَها ۖ حَتّىٰ إِذَا ادّارَكوا فيها جَميعًا قالَت أُخراهُم لِأولاهُم رَبَّنا هٰؤُلاءِ أَضَلّونا فَآتِهِم عَذابًا ضِعفًا مِنَ النّارِ ۖ قالَ لِكُلٍّ ضِعفٌ وَلٰكِن لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह कहेगा : उन समूहों के साथ जो जिन्नों और इनसानों में से तुमसे पहले गुज़र चुके हैं, आग में प्रवेश कर जाओ। जब भी कोई समूह प्रवेश करेगा, तो अपने साथ वाले समूह को लानत करेगा। यहाँ तक कि जब उसमें सभी एकत्र हो जाएँगे, तो उनमें से बाद में आने वाले लोग पहले आने वाले लोगों के बारे में कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! इन लोगों ने हमें गुमराह किया था। अतः इन्हें आग की दुगनी यातना दे! अल्लाह कहेगा : सभी के लिए दुगनी यातना है, परंतु तुम नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Allah farmayega jao, tum bhi usi jahannum mein chale jao jismein tumse pehle guzrey huey giroh Jinn o Ins (Insaan) jaa chuke hain. Har giroh jab jahannum mein dakhil hoga to apne peshrow giroh(that went before it) par laanat karta hua dakhil hoga, hatta ke jab sab wahan jamaa ho jayenge to har baad wala giroh pehle giroh ke haqq mein kahega ke aey Rubb, yeh log thay jinhon ne humko gumraah kiya, lihaza inhein aag ka dohra azaab de. Jawab mein irshad hoga, har ek ke liye dohra hi azaab hai magar tum jantey nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa farmaye ga jo firqay tum say pehlay guzar chukay hain jinnaat mein say bhi aur aadmiyon mein say bhi unn kay sath tum bhi dozakh mein jao. Jiss waqt bhi koi jamat dakhil hogi apni doosti jamat ko laanat keray gi yahan tak kay jab iss mein sab jama hojayen gay to pichlay log pehlay logon ki nisbat kahen gay kay humaray perwerdigar hum ko inn logon ney gumrah kiya tha so inn ko dozakh ka azab dugna dey. Allah Taala farmaye ga sab hi ka dugna hai lekin tum ko khabar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह फरमाएगा जाओ, तुम भी उसके जहन्नुम में चले जाओ जिस्म में तुमसे पहले गुजरे हुए गिरो ​​जिन्न ओ इंसान (इंसान) जा चुके हैं। हर गिरो ​​जब जहन्नुम में दाख़िल होगा तो अपने पेशरो गिरोह (जो इससे पहले चला गया था) पर लानत करता हुआ दाख़िल होगा, हत्ता के जब सब वहाँ जमा हो जायेंगे तो हर बाद वाला गिरोह पहले गिरोह के हक़ में कहेगा के ऐ रब, ये लोग थे जिन्हों ने हमको गुमराह किया, लिहाज़ा इन्हें आग का दोहरा अज़ाब दे। जवाब में इरशाद होगा, हर एक के लिए दोहरा ही अज़ाब है मगर तुम जानते नहीं हो
عَرَبِيوَقالَت أولاهُم لِأُخراهُم فَما كانَ لَكُم عَلَينا مِن فَضلٍ فَذوقُوا العَذابَ بِما كُنتُم تَكسِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनमें से पहला समूह अपने बाद के समूह से कहेगा : फिर तुम्हें हमपर कोई श्रेष्ठता नहीं है। अतः जो कुछ तुम कमाया करते थे उसके बदले में यातना का स्वाद चखो।
Roman Urdu (Maududi)Aur pehla giroh dusre giroh se kahega ke (agar hum qaabil e ilzam thay) to tumhi ko humpar kaunsi fazilat haasil thi, ab apni kamayi ke nateejey mein azaab ka maza chakkho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur pehlay log pichlay logon say kahen gay kay phir tum ko hum per koi foqiyat nahi so tum bhi apni kamaee kay badlay mein azab ka maza chakho
Devnagri Urdu (Maududi)और पहला गिरो ​​दूसरे गिरो ​​​​से कहेगा के (अगर हम काबिल ए इल्जाम थे) तो तुम्हीं को हमपर कौन सी फजीलत हासिल थी, अब अपनी कमाई के नतीजे में अज़ाब का मजा चक्खो
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِنا وَاستَكبَروا عَنها لا تُفَتَّحُ لَهُم أَبوابُ السَّماءِ وَلا يَدخُلونَ الجَنَّةَ حَتّىٰ يَلِجَ الجَمَلُ في سَمِّ الخِياطِ ۚ وَكَذٰلِكَ نَجزِي المُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और उन्हें स्वीकार करने से अहंकार किया, उनके लिए न आकाश के द्वार खोले जाएँगे और न वे जन्नत में प्रवेश करेंगे, यहाँ तक कि ऊँट सुई के नाके में प्रवेश कर जाए और हम अपराधियों को इसी प्रकार बदला देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeen jaano, jin logon ne hamari aayat ko jhutlaya hai aur inke muqable mein sarkashi ki hai unke liye aasman ke darwaze hargiz na kholey jayenge. Unka jannat mein jana utna hi namumkin hai jitna suii (needle) ke naake se ount(camel) ka guzarna. Mujreemon ko hamare haan aisa hi badla mila karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ney humari aayaton ko jhutlaya aur inn say takbbur kiya unn kay liye aasman kay darwazay na kholay jayen gay aur woh log kabhi jannat mein na jayengay jab tak oont sui kay nakay kay andar say na chala jaye aur hum mujrim logon ko aisi hi saza detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)यकीन जानो, जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुटलाया है और इनके मुकाबले में सरकशी की है उनके लिए आसमान के दरवाजे हरगिज ना खोले जाएंगे। उनका जन्नत में जाना उतना ही नामुमकिन है जितना सूई (सुई) के नाक से ऊंट (ऊंट) का गुजारना। मुजरेमोन को हमारे हाँ ऐसा ही बदला मिला करता है
عَرَبِيلَهُم مِن جَهَنَّمَ مِهادٌ وَمِن فَوقِهِم غَواشٍ ۚ وَكَذٰلِكَ نَجزِي الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनके लिए जहन्नम ही का बिछौना और उनके ऊपर का ओढ़ना होगा और हम अत्याचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unke liye to jahannum ka bichona hoga aur jahannum hi ka oadna. Yeh hai woh jaza jo hum zalimon ko diya karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay liye aatish-e-dozakh ka bichona hoga aur unn kay upper (issi) ka ordhna hoga aur hum aisay zalimon ko aisi hi saza detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उनके लिए तो जहन्नुम का बिछोना होगा और जहन्नुम ही का ओदना। ये है वो जजा जो हम जालिमों को दिया करते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ لا نُكَلِّفُ نَفسًا إِلّا وُسعَها أُولٰئِكَ أَصحابُ الجَنَّةِ ۖ هُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक काम किए, हम किसी पर उसके सामर्थ्य से बढ़कर भार नहीं डालते, वही लोग जन्नत वाले हैं, वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ba-khilaf iske jin logon ne hamari aayat ko maan liya hai aur acchey kaam kiye hain aur is baab mein hum har ek ko uski istetaat (capability) hi ke mutaabiq zimmedar thehrate hain. Woh ehle jannat hain jahan woh hamesha rahengey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log eman laye aur nek kaam kiye hum kissi shaks ko uss ki qudrat say ziyada kissi ka mukallaf nahi banatay wohi log jannat walay hain aur woh iss mein hamesha hamesha rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)बा-खिलाफ इसके जिन लोगों ने हमारी आयत को मान लिया है और अच्छे काम किए हैं और इस मामले में हम हर एक को उसकी क्षमता (क्षमता) ही देते हैं। वो एहले जन्नत हैं जहां वो हमेशा रहेंगे
عَرَبِيوَنَزَعنا ما في صُدورِهِم مِن غِلٍّ تَجري مِن تَحتِهِمُ الأَنهارُ ۖ وَقالُوا الحَمدُ لِلَّهِ الَّذي هَدانا لِهٰذا وَما كُنّا لِنَهتَدِيَ لَولا أَن هَدانَا اللَّهُ ۖ لَقَد جاءَت رُسُلُ رَبِّنا بِالحَقِّ ۖ وَنودوا أَن تِلكُمُ الجَنَّةُ أورِثتُموها بِما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके सीनों में जो भी द्वेष होगा, हम उसे निकाल देंगे। उनके नीचे से नहरें बहती होंगी। तथा वे कहेंगे : सब प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जिसने इसके लिए हमारा मार्गदर्शन किया। और यदि अल्लाह हमारा मार्गदर्शन न किया होता, तो हम कभी भी मार्ग न पाते। निश्चय ही हमारे पालनहार के रसूल सत्य लेकर आए। तथा उन्हें पुकार कर कहा जाएगा : यही वह जन्नत है, जिसके वारिस तुम उसके कारण बनाए गए हो, जो तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Unke dilon mein ek dusre ke khilaf jo kuch kadurat (rancour) hogi usey hum nikal denge, unke nichey nehrein behti hongi, aur woh kahenge ke “taareef khuda hi ke liye hai jisne humein yeh raasta dikhaya, hum khud raah na paa sakte thay agar khuda hamari rehnumayi na karta. Hamare Rubb ke bheje huey Rasool waqayi Haqq hi lekar aaye thay”. Us waqt nida (voice) aayegi ke “ yeh jannat jiske tum waris banaye gaye ho tumhein un aamal ke badle mein mili hai jo tum karte rahey thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo kuch inn kay dilon mein (keena) tha hum uss ko door ker den gay. Inn kay neechay nehren jari hongi. Aur woh log kahen gay kay Allah ka (lakh lakh) shukar hai jiss ney hum ko iss moqam tak phonchaya aur humari kabhi rasaee na hoti agar Allah Taalaa hum ko na pehchanta. Waqaee humaray rab kay payghumbar sachi baaten ley ker aaye thay. Aur inn say pukar ker kaha jayega iss jannata kay tum waris banaye gaye ho apney aemaal kay badlay
Devnagri Urdu (Maududi)उनके दिलों में एक दूसरे के खिलाफ जो कुछ कदुरत (द्वेष) होगी उसे हम निकल देंगे, उनके आला नेहरेन बहती होंगी, और वो कहेंगे के "तारीफ खुदा ही के लिए है जिसने हमने ये रास्ता दिखाया, हम खुद रह ना पा सकते थे अगर" ख़ुदा हमारी रहनुमाई न करता। हमारे रब के भेजे हुए रसूल वक़ै हक़ ही लेकर आये थे।” हमें वक्त निदा (आवाज) आएगी के "ये जन्नत जिसके तुम वारिस बन गए हो तुम्हें उन अमल के बदले में मिली है जो तुम करते रहे थे"
عَرَبِيوَنادىٰ أَصحابُ الجَنَّةِ أَصحابَ النّارِ أَن قَد وَجَدنا ما وَعَدَنا رَبُّنا حَقًّا فَهَل وَجَدتُم ما وَعَدَ رَبُّكُم حَقًّا ۖ قالوا نَعَم ۚ فَأَذَّنَ مُؤَذِّنٌ بَينَهُم أَن لَعنَةُ اللَّهِ عَلَى الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा स्वर्गवासी नरकवासियों को पुकारकर कहेंगे कि हमें, हमारे पालनहार ने जो वचन दिया था, उसे हमने सच पाया, तो क्या तुम्हारे पानलहार ने तुम्हें जो वचन दिया था, उसे तुमने सच पाया? वे कहेंगे कि हाँ! फिर उनके बीच एक पुकारने वाला पुकारेगा कि अत्याचारियों पर अल्लाह की लानत है।
Roman Urdu (Maududi)Phir yeh jannat ke log dozakh walon se pukar kar kahenge, “ humne un sarey waadon ko theek paa liya jo hamare Rubb ne humse kiye thay, kya tumne bhi un waadon ko theek paya jo tumhare Rubb ne kiye thay?” Woh jawab denge “haan” tab ek pukarne wala unke darmiyan pukarega ke “ khuda ki laanat un zalimon par
Roman Urdu (Junagarhi)Aue ehal-e-jannat ehal-e-dozakh ko pukaren gay kay hum say jo humaray rab ney wada farmaya tha hum ney to uss ko waqiyey kay mutabiq paya so tum say jo tumharay rab ney wada kiya tha tum ney bhi uss ko waqiyey kay mutabiq paya? Woh kahen gay haan phir aik pukarney wala dono kay darmiyan mein pukaray ga kay Allah ki maar ho inn zalimon per
Devnagri Urdu (Maududi)फिर ये जन्नत के लोग दोज़ख वालों से पुकार कर कहेंगे, "हमने उन सारे वादों को ठीक पा लिया जो हमारे रब ने हमसे किये थे, क्या तुमने भी उन वादों को ठीक पाया जो तुम्हारे रब ने किये थे?” वो जवाब देंगे "हां" तब एक पुकारने वाला उनको दरमियान पुकारेगा के "खुदा की लानत उन जालिमों पर
عَرَبِيالَّذينَ يَصُدّونَ عَن سَبيلِ اللَّهِ وَيَبغونَها عِوَجًا وَهُم بِالآخِرَةِ كافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो अल्लाह के मार्ग से रोकते हैं और उसमें टेढ़ापन ढूँढ़ते हैं तथा वे आख़िरत का इनकार करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo Allah ke rastey se logon ko roakte aur usey tedha karna chahte thay aur aakhirat ke munkir thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Jo Allah ki raah say aeyraaz kertay thay aur iss mein kuji talash kertay thay aur woh log aakhirat kay bhi munkir thay
Devnagri Urdu (Maududi)जो अल्लाह के रास्ते से लोगों को रोकते और उसे टेढ़ा करना चाहते थे और आख़िरत के मुनकिर थे"
عَرَبِيوَبَينَهُما حِجابٌ ۚ وَعَلَى الأَعرافِ رِجالٌ يَعرِفونَ كُلًّا بِسيماهُم ۚ وَنادَوا أَصحابَ الجَنَّةِ أَن سَلامٌ عَلَيكُم ۚ لَم يَدخُلوها وَهُم يَطمَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और दोनों के बीच एक परदा होगा। और उसकी ऊँचाइयों (आराफ़) पर कुछ आदमी होंगे, जो सभी को उनके लक्षणों से पहचानें गे। और वे जन्नत वालों को पुकारकर कहेंगे : तुमपर सलाम हो। वे उसमें दाखिल न हुए होंगे, जबकि उसकी आशा रखते होंगे।
Roman Urdu (Maududi)In dono girohon ke darmiyan ek oat (barrier) hayal hogi jiski bulandiyon (Araaf) par kuch aur log honge yeh har ek ko uske kiyafa (marks) se pehchanenge aur jannat walon se pukaar kar kahenge ke “salamati ho tumpar”. Yeh log jannat mein dakhil to nahin huey magar uske umeedwar honge”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn dono kay darmiyan aik aarr hogi aur aeyraaf kay upper boht say aadmi hongay woh log her aik ko unn kay qayafa say pehchaney gay aue ehal-e-jannat ko pukar ker kahen gay asslam-o-alaikum! Abhi yeh ehal-e-aeyraaf jannat mein dakhil nahi huye hongay aur iss kay umeed waar hongay
Devnagri Urdu (Maududi)दोनों गिरोहों के दरमियान एक ओट में (बैरियर) हायल होगी जिसकी बुलंदियां (अराफ) पर कुछ और लोग होंगे ये हर एक को उसका कियाफा (मार्क्स) से पहचानेंगे और जन्नत वालों से पुकार कर कहेंगे "सलामती हो तुमपर"। ये लोग जन्नत में शामिल तो नहीं हुए मगर उसके उम्मीदवर होंगे”
عَرَبِي۞ وَإِذا صُرِفَت أَبصارُهُم تِلقاءَ أَصحابِ النّارِ قالوا رَبَّنا لا تَجعَلنا مَعَ القَومِ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनकी आँखें जहन्नम वालों की ओर फेरी जाएँगी, तो कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! हमें अत्याचारी लोगों में सम्मिलित न करना।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab unki nigahein dozakh walon ki taraf phirengi to kahenge, “Aey Rubb! Humein in zalim logon mein shamil na kijiyo”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab inn ki nigahen ehal-e-dozakh ki taraf phiren gi to kahen gay aey humaray rab! Hum ko inn zalim logon kay sath shamil na ker
Devnagri Urdu (Maududi)और जब उनकी निगाहें दोज़ख वालों की तरफ फिरेंगी तो कहेंगे, “ऐ रब! हमने ज़ालिम लोगों में शामिल ना कीजियो”
عَرَبِيوَنادىٰ أَصحابُ الأَعرافِ رِجالًا يَعرِفونَهُم بِسيماهُم قالوا ما أَغنىٰ عَنكُم جَمعُكُم وَما كُنتُم تَستَكبِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आराफ़ (ऊँचाइयों) वाले कुछ लोगों को पुकारेंगे, जिन्हें वे उनके लक्षणों से पहचानते होंगे, कहेंगे : तुम्हारे काम न तुम्हारे जत्थे आए और न जो तुम बड़े बनते थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir yeh Araaf ke log dozakh ki chandh badi badi shakhsiyaton(personalities) ko unki alamaton se pehchan kar pukarenge ke “dekh liya tumne, aaj na tumhare jatthey (gatherings/numbers) tumhare kisi kaam aaye aur na woh saaz o samaan jinko tum badi cheez samajhte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ehal-e-aeyraaf boht say aadmiyon ko jin ko unn kay qayafa say pehchanen gay pukaren gay kahen gay kay tumhari jamat aur tumhara apney ko bara samajhna tumharay kuch kaam na aaya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर ये अराफ के लोग दोज़ख़ की चंद बड़ी बड़ी शख़्सियतों (व्यक्तित्वों) को उनकी अलमातों से पहचान कर पुकारेंगे के “देख लिया तुमने, आज ना तुम्हारे जत्थे (सभा/संख्याएँ) तुम्हारे किसी काम आये और ना वो साज़ ओ समां जिनको तुम बड़ी चीज़ समझते थे
عَرَبِيأَهٰؤُلاءِ الَّذينَ أَقسَمتُم لا يَنالُهُمُ اللَّهُ بِرَحمَةٍ ۚ ادخُلُوا الجَنَّةَ لا خَوفٌ عَلَيكُم وَلا أَنتُم تَحزَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(और अल्लाह काफ़िरों को फटकारते हुए कहेगा :) क्या ये वही लोग हैं, जिनके बारे में तुमने क़सम खाई थी कि अल्लाह उन्हें कोई दया प्रदान नहीं करेगा? (तथा अल्लाह मोमिनों से कहेगा :) जन्नत में प्रवेश कर जाओ। न तुम्हें कोई डर है और न तुम्हें शोक होगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur kya yeh ehle jannat wahi log nahin hain jinke mutaaliq tum kasamein kha kha kar kehte thay ke inko to khuda apni rehmat mein se kuch bhi na dega? Aaj inhi se kaha gaya ke dakhil ho jao jannat mein, tumhare liye na khauf hai na ranjj”
Roman Urdu (Junagarhi)Kiye yeh wohi hai jin ki nisbat tum qasmen kha kha ker kaha kertay thay kay Allah Taalaa inn per rehmat na keray ga inn ko yun hukum hoga kay jao jannat mein tum per na kuch khof hai aur na tum maghmoom hogay
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या ये एहले जन्नत वही लोग नहीं हैं जिनका मुतालिक तुम कसमें खा खा कर कहते थे उनको तो खुदा अपनी रहमत में से कुछ भी ना देगा? आज इनसे कहा गया के दखिल हो जाओ जन्नत में, तुम्हारे लिए ना खौफ है ना रंज"
عَرَبِيوَنادىٰ أَصحابُ النّارِ أَصحابَ الجَنَّةِ أَن أَفيضوا عَلَينا مِنَ الماءِ أَو مِمّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ ۚ قالوا إِنَّ اللَّهَ حَرَّمَهُما عَلَى الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जहन्नम वाले जन्नत वालों को पुकारेंगे कि हमपर कुछ पानी डाल दो, या उसमें से कुछ जो अल्लाह ने तुम्हें प्रदान किया है। वे कहेंगे : निःसंदेह अल्लाह ने ये दोनों चीज़ें काफ़िरों पर हराम कर दी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur dozakh ke log jannat walon ko pukarenge ke kuch thoda sa pani humpar daal do ya jo rizq Allah ne tumhein diya hai usi mein se kuch phenk do. Woh jawab denge ke “Allah ne yeh dono cheezein un munkireen e haqq par haraam kardi hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur dozakh walay jannat walon ko pukaren gay kay humaray upper thora pani hi daal do ya aur hi kuch dey do jo Allah ney tum ko dey rakha hai. Jannat walay kahen gay kay Allah Taalaa ney dono cheezon ki kafiron kay liye bandish ker di hai
Devnagri Urdu (Maududi)और दोज़ख के लोग जन्नत वालों को पुकारेंगे के कुछ थोड़ा सा पानी हमपर डाल दो या जो रिज्क अल्लाह ने तुम्हें दिया है उसमें से कुछ फेंक दो। वो जवाब देंगे के "अल्लाह ने" ये दोनों चीजें उन मुनकिरीन ए हक पर हराम करदी हैं
عَرَبِيالَّذينَ اتَّخَذوا دينَهُم لَهوًا وَلَعِبًا وَغَرَّتهُمُ الحَياةُ الدُّنيا ۚ فَاليَومَ نَنساهُم كَما نَسوا لِقاءَ يَومِهِم هٰذا وَما كانوا بِآياتِنا يَجحَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन्होंने अपने धर्म को तमाशा और खेल बना लिया तथा उन्हें सांसारिक जीवन ने धोखे में डाल रखा था। अतः आज हम उन्हें वैसे ही भुला देंगे, जैसे वे आज के दिन की मुलाकात को भूल गए और जैसे वे हमारे प्रमाणों का इनकार किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jinhon ne apne deen ko khel aur tafree bana liya tha. Aur jinhein duniya ki zindagi ne fareb mein mubtila kar rakkha tha. Allah farmata hai ke aaj hum bhi unhein usi tarah bhula denge jis tarah woh is din ki mulaqat ko bhoole rahey aur hamari aayaton ka inkar karte rahey”
Roman Urdu (Junagarhi)Jinhon ney apney deen ko khel tamasha bana rakha tha aur jin ko dunyawi zindagi dhokay mein daal rakha tha. So hum (bhi) aaj kay roz unn ka naam bhool jayengay jaisa kay woh iss din ko bhool gaye aur jaisa yeh humari aayaton ka inkar kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)जिन्होन ने अपने दीन को खेल और तफरी बना लिया था। और जिन्होंने दुनिया की जिंदगी ने फरेब में मुब्तिला कर रखा था। अल्लाह फरमाता है के आज हम भी उन्हें उसी तरह भूला देंगे जिस तरह वो इस दिन की मुलाकात को भूल रहे हैं और हमारी आयतों का इनकार करते रहेंगे”
عَرَبِيوَلَقَد جِئناهُم بِكِتابٍ فَصَّلناهُ عَلىٰ عِلمٍ هُدًى وَرَحمَةً لِقَومٍ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम उनके पास एक ऐसी पुस्तक लाए हैं, जिसे हमने ज्ञान के आधार पर सविस्तार बयान कर दिया है, उन लोगों के लिए मार्गदर्शन और दया बनाकर, जो ईमान रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hum in logon ke paas ek aisi kitab le aaye hain jisko humne ilm ki bina par mufassal (expounded) banaya hai aur jo iman laney walon ke liye hidayat aur rehmat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney inn logon kay pass aik aisi kitab phoncha di hai jiss ko hum ney apney ilm-e-kaamil say boht wazeh ker kay biyan ker diya hai woh zariya-e-hidayat aur rehmat unn logon kay liye hai jo eman laye hain
Devnagri Urdu (Maududi)हम लोगों के पास एक ऐसी किताब ले आए हैं जिसको हमने इल्म की बिना पर मुफस्सल (व्याख्यायित) बनाया है और जो ईमान लेन वालों के लिए हिदायत और रहमत है
عَرَبِيهَل يَنظُرونَ إِلّا تَأويلَهُ ۚ يَومَ يَأتي تَأويلُهُ يَقولُ الَّذينَ نَسوهُ مِن قَبلُ قَد جاءَت رُسُلُ رَبِّنا بِالحَقِّ فَهَل لَنا مِن شُفَعاءَ فَيَشفَعوا لَنا أَو نُرَدُّ فَنَعمَلَ غَيرَ الَّذي كُنّا نَعمَلُ ۚ قَد خَسِروا أَنفُسَهُم وَضَلَّ عَنهُم ما كانوا يَفتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे इसके परिणाम के सिवा किस चीज़ की प्रतीक्षा कर रहे हैं? जिस दिन इसका परिणाम आ पहुँचेगा, तो वे लोग, जिन्होंने इससे पहले इसे भुला दिया था, कहेंगे कि निश्चय हमारे पालनहार के रसूल सच लेकर आए। तो क्या हमारे लिए कोई सिफ़ारिशी हैं कि वे हमारे लिए सिफ़ारिश करें? या हमें वापस भेज दिया जाए, तो जो कुछ हम करते थे उसके विपरीत कार्य करें? निःसंदेह उन्होंने स्वयं को घाटे में डाल दिया और उनसे वह गुम हो गया, जो वे झूठ गढ़ा करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Ab kya yeh log iske siwa kisi aur baat ke muntazir hain ke woh anjaam saamne aa jaye jiski yeh kitab khabar de rahi hai? Jis roz woh anjaam saamne aa gaya to wahi log jinhon ne usey nazar-andaz kardiya tha kahenge ke “waqayi hamare Rubb ke Rasool haqq lekar aaye thay, phir kya ab humein kuch sifarishi milenge jo hamare haqq mein sifarish karein? Ya humein dobara wapas hi bhej diya jaye taa-ke jo kuch hum pehle karte thay uske bajaye ab dusre tareeqe par kaam karke dikhayein”. Unhon ne apne aap ko khasare (nuksaan) mein daal diya aur woh sarey jhoot jo unhon ne tasneef kar rakkhey thay aaj unse ghum ho gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Inn logon ko aur kissi baat ka intizar nahi sirf iss kay akheet nateejay ka intizar hai jiss roz iss ka akheet nateeja paish aaye ga aur uss roz jo log iss ko pehlay say bhoolay huye thay yun kahen gay kay waqaee humaray rab kay payghumbar sachi sachi baaten laye thay so abb kiya koi humara sifarshi hai kay woh humari sifarish ker dey ya kiya hum phir wapis bhejay jaa saktay hain takay hum log unn aemaal kay jo hum kiya kertay thay bar khilaf doosray aemaal keren. Be-shak inn logon ney apney aap ko khasaray mein daal diya aur yeh jo jo baaten tarashtay thay sab gum hogaeen
Devnagri Urdu (Maududi)अब क्या ये लोग इसके सिवा किसी और बात के मुंतजिर हैं के वो अंजाम सामने आ जाए जिसकी ये किताब खबर दे रही है? जिस रोज़ वो अंजाम सामने आ गया तो वही लोग जिन्हों ने उसे नज़र-अंदाज़ कर दिया था कहेंगे के "वक़ाई हमारे रब के रसूल हक़ लेकर आए थे, फिर क्या अब हमें कुछ सिफ़ारिश मिलेगी जो हमारे हक़ में सिफ़ारिश करें? हां हमें दोबारा वापस ही भेज" दिया जाये ता-के जो कुछ हम पहले करते थे उसके बजाये अब दूसरे तारिके पर काम करके दिखायें”। उनहों ने अपने आप को खासे (नुक्सान) में डाल दिया और वो सारे झूठ जो उनहों ने तसनीफ कर रक्खे थे आज उनसे गम हो गए
عَرَبِيإِنَّ رَبَّكُمُ اللَّهُ الَّذي خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ في سِتَّةِ أَيّامٍ ثُمَّ استَوىٰ عَلَى العَرشِ يُغشِي اللَّيلَ النَّهارَ يَطلُبُهُ حَثيثًا وَالشَّمسَ وَالقَمَرَ وَالنُّجومَ مُسَخَّراتٍ بِأَمرِهِ ۗ أَلا لَهُ الخَلقُ وَالأَمرُ ۗ تَبارَكَ اللَّهُ رَبُّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुम्हारा पालनहार वह अल्लाह है, जिसने आकाशों तथा धरती को छह दिनों में बनाया। फिर अर्श (सिंहासन) पर बुलंद हुआ। वह रात से दिन को ढाँप देता है, जो उसके पीछे दौड़ता हुआ चला आता है। तथा सूर्य और चाँद और तारे (बनाए), इस हाल में कि वे उसके आदेश के अधीन किए हुए हैं। सुन लो! सृष्टि करना और आदेश देना उसी का काम है। बहुत बरकत वाला है अल्लाह, जो सारे संसारों का पालनहार है।
Roman Urdu (Maududi)Dar haqeeqat tumhara Rubb Allah hi hai jisne aasman aur zameen ko chey( six) dino mein paida kiya, phir apne takht e sultanat par jalwa farma hua, jo raat ko din par dhank deta hai aur phir din raat ke pichey dauda chala aata hai, jisne Suraj aur chand aur taarey paida kiye sab uske farmaan ke tabeh hain. Khabardar raho! Usi ki khalq (creation) hai aur usi ka amr(command) hai. Bada ba-barakat hai Allah, sarey jahaano ka maalik o parwardigar
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak tumhara rab Allah hi hai jiss ney sab aasmanon aur zamin ko cheh roz mein peda kiya hai phir arsh per qaeem hua. Woh shab say din ko aisay tor per chupa deta hai kay woh shab uss din ko jaldi aa leti hai aur sooraj aur chand aur doosray sitaron ko peda kiya aisay tor per kay sab uss kay hukum kay tabey hain. Yaad rakho Allah hi kay liye khas hai khaliq hona aur haakim hona bari khoobiyon say bhara hua hai Allah jo tamam aalam ka perwerdigar hai
Devnagri Urdu (Maududi)दर हकीकत तुम्हारा रब अल्लाह हाय है जिसने आसमान और जमीन को छः (छह) दिनों में पैदा किया, फिर अपनी तख्त ए सल्तनत पर जलवा फरमा हुआ, जो रात को दिन पर धन देता है और फिर दिन रात के पीछे दौड़ा आता है, जिसने सूरज और चांद और तारे पैदा किये सब उसके फरमान के तबेह हैं। ख़बरदार रहो! उसी का ख़ल्क (सृजन) है और उसी का अमृत (आदेश) है। बड़ा बा-बरकत है अल्लाह, सारे जहांों का मालिक ओ परवरदिगार
عَرَبِيادعوا رَبَّكُم تَضَرُّعًا وَخُفيَةً ۚ إِنَّهُ لا يُحِبُّ المُعتَدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम अपने पालनहर को गिड़गिड़ाकर और चुपके-चुपके पुकारो। निःसंदेह वह हद से बढ़ने वालों से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ko pukaro gidgidate (with humility) huey aur chupke chupke. Yakeenan woh hadd se guzarne walon ko pasand nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Tum log apney perwerdigar say dua kiya kero girr gira kerkay bhi aur chupkay chupkay bhi. Waqaee Allah Taalaa unn logon ko na pasand kerta hai jo hadd say nikal jayen
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब को पुकारो गिड़गिदाते (विनम्रता के साथ) हुए और चुपके चुपके। यकीनन वो हद से गुज़रने वालों को पसंद नहीं करता
عَرَبِيوَلا تُفسِدوا فِي الأَرضِ بَعدَ إِصلاحِها وَادعوهُ خَوفًا وَطَمَعًا ۚ إِنَّ رَحمَتَ اللَّهِ قَريبٌ مِنَ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा धरती में उसके सुधार के पश्चात् बिगाड़ न पैदा करो, और उसे भय और लोभ के साथ पुकारो। निःसंदेह अल्लाह की दया अच्छे कर्म करने वालों के क़रीब है।
Roman Urdu (Maududi)Zameen mein fasaad barpa na karo jabke uski islaah ho chuki hai aur khuda hi ko pukaro khauff ke saath aur tama (umeed) ke saath. Yaqeenan Allah ki rehmat neik kirdaar (who do good) logon se qareeb hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur duniya mein iss kay iss ki durusti kerdi gaee hai fasaad mat phelao aur tum Allah ki ibadat kero uss say dartay huye aur umeed waar rehtay huye. Be-shak Allah Taalaa ki rehmat nek kaam kerney walon kay nazdik hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन में फ़साद बरपा ना करो जबके उसकी इस्लाह हो चुकी है और खुदा ही को पुकारो ख़ौफ़ के साथ और तम (उम्मीद) के साथ। यकीनन अल्लाह की रहमत नीक किरदार (जो अच्छा करते हैं) लोगों से करीब है
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي يُرسِلُ الرِّياحَ بُشرًا بَينَ يَدَي رَحمَتِهِ ۖ حَتّىٰ إِذا أَقَلَّت سَحابًا ثِقالًا سُقناهُ لِبَلَدٍ مَيِّتٍ فَأَنزَلنا بِهِ الماءَ فَأَخرَجنا بِهِ مِن كُلِّ الثَّمَراتِ ۚ كَذٰلِكَ نُخرِجُ المَوتىٰ لَعَلَّكُم تَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वही है, जो अपनी दया (वर्षा) से पहले हवाओं को (वर्षा) की शुभ सूचना देने के लिए भेजता है। यहाँ तक कि जब वे भारी बादल उठाती हैं, तो हम उसे एक मृत शहर की ओर ले जाते हैं। फिर हम उससे पानी उतारते हैं, फिर उसके साथ सभी प्रकार के कुछ फल पैदा करते हैं। इसी तरह हम मरे हुए लोगों को निकालेंगे। ताकि तुम उपदेश ग्रहण करो।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh Allah hi hai jo hawaon ko apni rehmat ke aagey aagey khush-khabri liye huey bhejta hai, phir jab woh pani se ladey huey badal utha leti hain to unhein kisi murda sar-zameen ki taraf harakat deta hai, aur wahan meh (barish) barsa kar (usi mari hui zameen se) tarah tarah ke phal nikal laata hai. Dekho, is tarah hum murdon ko halat e maut se nikalte hain, shayad ke tum is mushahide se sabaq lo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh aisa hai kay apni baaraan-e-rehmat say pehlay hawaon ko bhejta hai kay woh khush ker deti hain yahan tak kay woh hawayen jab badlon ko utha leti hain to hum iss badal ko kissi khushk sir zamin ki taraf haank ley jatay hain phir iss badal say pani barsatay hain phir iss pani say her qisam kay phal nikaltay hain. Yun hi hum murdon ko nikal khara keren gay takay tum samjho
Devnagri Urdu (Maududi)और वो अल्लाह ही है जो हवाएं अपनी रहमत के आगे खुश-खबरी के लिए भेजे जाते हैं, फिर जब वो पानी से लड़े हुए बादल उठा लेती हैं तो उन्हें कोई मुर्दा सर-जमीन की तरफ हरकत देता है, और वहां मेह (बारिश) बरसा कर (उसी मेरी हुई जमीन से) तरह तरह के फल निकल ला आता है। देखो, इस तरह हम मुर्दों को हालात ए मौत से निकलते हैं, शायद के तुम इस मुशाहिदे से सबक लो
عَرَبِيوَالبَلَدُ الطَّيِّبُ يَخرُجُ نَباتُهُ بِإِذنِ رَبِّهِ ۖ وَالَّذي خَبُثَ لا يَخرُجُ إِلّا نَكِدًا ۚ كَذٰلِكَ نُصَرِّفُ الآياتِ لِقَومٍ يَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अच्छी भूमि के पौधे उसके रब के आदेश से (भरपूर) निकलते हैं, और जो (भूमि) ख़राब है उससे आधी-अधूरी पैदावार के सिवा कुछ नहीं निकलता। इसी प्रकार हम निशानियों को उन लोगों के लिए फेर-फेरकर बयान करते हैं, जो शुक्र अदा करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo zameen acchi hoti hai woh apne Rubb ke hukum se khoob phal phool lati hai aur jo zameen kharab hoti hai ussey naqis (poor) paidawar ke siwa kuch nahin nikalta. Is tarah hum nishaniyon ko baar baar pesh karte hain un logon ke liye jo shukarguzar honay waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo suthri sir zamin hoti hai uss ki peda waar to Allah kay hukum say khoob nikalti hai aur jo kaharab hai ussi ki peda waar boht kum nikalti hai issi tarah hum dalaeel ko tarah tarah say biyan kertay hain unn logon kay liye jo shukar kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो जमीन अच्छी होती है वो अपने रब के हुकुम से खूब फल फूल लगती है और जो जमीन खराब होती है उसे नकीस (गरीब) पैदावर के सिवा कुछ नहीं निकलता। इस तरह हम निशानियों को बार-बार पेश करते हैं उन लोगों के लिए जो शुक्रगुज़ार होने वाले हैं
عَرَبِيلَقَد أَرسَلنا نوحًا إِلىٰ قَومِهِ فَقالَ يا قَومِ اعبُدُوا اللَّهَ ما لَكُم مِن إِلٰهٍ غَيرُهُ إِنّي أَخافُ عَلَيكُم عَذابَ يَومٍ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने नूह़ को उसकी जाति की ओर भेजा, तो उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। निःसंदेह मैं तुमपर एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Humne Nooh ko uski qaum ki taraf bheja, usne kaha “aey biradraan e qaum, Allah ki bandagi karo, uske siwa tumhara koi khuda nahin hai, main tumhare haqq mein ek haulnaak din (awesome day) ke azaab se darta hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney nooh (alh-e-salam) ko unn ki qom ki taraf bheja to unhon ney farmaya aey meri qom! Tum Allah ki ibadat kero uss kay siwa koi mabood honey kay qabil nahi mujh ko tumharay liye aik baray din kay azab ka andesha hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने नूह को उसकी क़ौम की तरफ भेजा, उसने कहा “ऐ बिरादरान ए क़ौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है, मैं तुम्हारा हक़ मैं एक शानदार दिन (कमाल का दिन) के अज़ाब से डरता हूं”
عَرَبِيقالَ المَلَأُ مِن قَومِهِ إِنّا لَنَراكَ في ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उसकी जाति के प्रमुखों ने कहा : निःसंदेह हम निश्चय तुझे खुली गुमराही में देख रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Uski qaum ke sardaron ne jawab diya “ humko to yeh nazar aata hai ke tum sareeh gumraahi mein mubtila ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Unn ki qom kay baray logon ney kaha hum tum ko sareeh ghalati mein dekhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी क़ौम के सरदारों ने जवाब दिया “हमको तो ये नज़र आता है के तुम सारे गुमराही में मुब्तिला हो”
عَرَبِيقالَ يا قَومِ لَيسَ بي ضَلالَةٌ وَلٰكِنّي رَسولٌ مِن رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! मुझमें कोई गुमराही नहीं है, बल्कि मैं सारे संसारों के पालनहार की ओर से एक रसूल हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Nooh ne kaha “aey biradraan e qaum, main kisi gumraahi mein nahin pada hoon balke, main Rubb ul alameen ka Rasool hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney farmaya kay aey meri qom! Mujh mein to zara bhi gumrahi nahi lekin mein perwerdigar-e-aalam ka rasool hun
Devnagri Urdu (Maududi)नूह ने कहा “ऐ बिरादरान ए क़ौम, मैं किसी गुमराही में नहीं पड़ा” हूं बलके, मैं रब उल आलमीन का रसूल हूं
عَرَبِيأُبَلِّغُكُم رِسالاتِ رَبّي وَأَنصَحُ لَكُم وَأَعلَمُ مِنَ اللَّهِ ما لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)मैं तुम्हें अपने पालनहार के संदेश पहुँचाता हूँ और तुम्हारी भलाई चाहता हूँ और अल्लाह की ओर से वे बातें जानता हूँ, जो तुम नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Tumhein apne Rubb ke paigamaat pahunchata hoon, tumhara khair-khwa hoon, aur mujhey Allah ki taraf se woh kuch maloom hai jo tumhein maloom nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum ko apney perwerdigar ka payghaam phonchata hun aur tumhari khair khuwaee kerta hun aur mein Allah ki taraf say unn umoor ki khabar rakhta hun jin ki tum ko khabar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हें अपने रुब के पैगाम पहुंचाता हूं, तुम्हारा खैर-ख्वाह हूं, और मुझे अल्लाह की तरफ से वो कुछ मालूम है जो तुम्हें मालूम नहीं है
عَرَبِيأَوَعَجِبتُم أَن جاءَكُم ذِكرٌ مِن رَبِّكُم عَلىٰ رَجُلٍ مِنكُم لِيُنذِرَكُم وَلِتَتَّقوا وَلَعَلَّكُم تُرحَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम्हें इस पार आश्चर्य हुआ कि तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से तुम्हीं में से एक आदमी पर नसीहत आई, ताकि वह तुम्हें डराए और ताकि तुम बच जाओ और ताकि तुमपर दया की जाए?
Roman Urdu (Maududi)Kya tumhein is baat par tajjub hua ke tumhare paas khud tumhari apni qaum ke ek aadmi ke zariye se tumhare Rubb ki yaad dehani aayi taa-ke tumhein khabardaar karey, aur tum galat rawi se bach jao aur tumpar reham kiya jaye?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kiya tum iss baat say tajjub kertay ho kay tumharay perwerdigar ki taraf say tumharay pass aik aisay shaks ki maarfat jo tumhari hi jinss ka hai koi naseehat ki baat aagaee takay woh shaks tum ko daraye aur takay tum darr jao aur takay tum per reham kiya jaye
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम्हें इस बात पर ताज्जुब हुआ के तुम्हारे पास खुद तुम्हारी अपनी क़ौम के एक आदमी के ज़रिये से तुम्हारे रब की याद देहनी आई ता-के तुम्हें ख़बरदार करे, और तुम गलत रावी से बच जाओ और तुमपर रहम किया जाए?”
عَرَبِيفَكَذَّبوهُ فَأَنجَيناهُ وَالَّذينَ مَعَهُ فِي الفُلكِ وَأَغرَقنَا الَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِنا ۚ إِنَّهُم كانوا قَومًا عَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उन्होंने उसे झुठला दिया, तो हमने उसे और उन लोगों को, जो नाव में उसके साथ थे, बचा लिया और उन लोगों को डुबो दिया, जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया। निश्चय ही वे अंधे लोग थे।
Roman Urdu (Maududi)Magar unhon ne usko jhutla diya. Aakhir e kaar humne usey aur uske saathiyon ko ek kashti mein najaat di aur un logon ko dubo diya jinhon ne hamari aayat ko jhutlaya tha. Yaqeenan woh andhey log thay
Roman Urdu (Junagarhi)So woh log unn ki takzeeb hi kertay rahey to hum ney nooh (alh-e-salam) ko aur unn ko jo unn kay sath kashti mein thay bacha liya aur jin logon ney humari aayaton ko jhutlaya tha unn ko hum ney gharq ker diya. Be-shal woh log andhay horahey thay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उनहों ने उसको झूठला दिया। आख़िर ई कार हमने उसे और उसके साथियों को एक कश्ती में सजा दी और उन लोगों को डुबो दिया जिन्हों ने हमारी आयत को झुटलाया था। यकीनन वो अंधे लोग थे
عَرَبِي۞ وَإِلىٰ عادٍ أَخاهُم هودًا ۗ قالَ يا قَومِ اعبُدُوا اللَّهَ ما لَكُم مِن إِلٰهٍ غَيرُهُ ۚ أَفَلا تَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और 'आद' (जाति) की ओर उनके भाई हूद को (भेजा)। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तो क्या तुम नहीं डरते?
Roman Urdu (Maududi)Aur Aad ki taraf humne unke bhai Hud ko bheja. Usne kaha “aey biradraan e qaum, Allah ki bandagi karo, uske siwa tumhara koi khuda nahin hai phir kya tum galat rawi se parheiz na karogey?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney qom-e-aad ki taraf unn kay bhai hood (alh-e-salam) ko bheja. Unhon ney farmaya aey meri qom! Tum Allah ki ibadat kero uss kay siwa tumhara koi mabood nahi so kiya tum nahi dartay
Devnagri Urdu (Maududi)और आद की तरफ हमने उनके भाई हद को भेजा। उसने कहा, "ऐ बिरादरान ए क़ौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है फिर क्या तुम ग़लत रावी से परहेज़ न करोगी?"
عَرَبِيقالَ المَلَأُ الَّذينَ كَفَروا مِن قَومِهِ إِنّا لَنَراكَ في سَفاهَةٍ وَإِنّا لَنَظُنُّكَ مِنَ الكاذِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसकी जाति में से उन सरदारों ने, जिन्होंने कुफ़्र किया, कहा : निःसंदेह हम निश्चय तुझे एक प्रकार की मूर्खता में (पीड़ित) देख रहे हैं और निःसंदेह हम निश्चय तुझे झूठे लोगों में से समझते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Uski qaum ke sardaron ne, jo uski baat maanne se inkar kar rahey thay, jawab mein kaha “ hum to tumhein be-aqali (in folly)mein mubtila samajhte hain aur humein gumaan hai ke tum jhootey ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Unn ki qom mein jo baray log kafir thay unhon ney kaha hum tum ko kum aqali mein dekhtay hain. Aur hum be-shak tum ko jhootay logon mein samajhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी क़ौम के सरदारों ने, जो उसकी बात मन्ने से इंकार कर रहे थे, जवाब में कहा “हम तो तुम्हें बे-अकाली (मूर्खता में) में मुब्तिला समझते हैं और हमें गुमान है के तुम झूठे हो”
عَرَبِيقالَ يا قَومِ لَيسَ بي سَفاهَةٌ وَلٰكِنّي رَسولٌ مِن رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! मुझमें कोई मूर्खता नहीं है, बल्कि मैं सारे संसारों के पालनहार की ओर से एक रसूल हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “ aey biradraan e qaum, main be-aqali mein mubtila nahin hoon balke main Rubb ul aalameen ka Rasool hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney farmaya aey meri qom! Mujh mein zara bhi kum aqali nahi lekin mein perwerdigar-e-aalam ka bheja hua payghumbar hun
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा “ ऐ बिरादरान ए क़ौम, मैं बे-अकाली में मुब्तिला नहीं हूं बलके मैं रब उल आलमीन का रसूल हूं
عَرَبِيأُبَلِّغُكُم رِسالاتِ رَبّي وَأَنا لَكُم ناصِحٌ أَمينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)मैं तुम्हें अपने पालनहार के संदेश पहुँचाता हूँ और मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार हितैषी हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Tumko apne Rubb ke paigaamaat pahunchata hoon, aur tumhara aisa khair-khwah hoon jispar bharosa kiya jaa sakta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum ko apney perwerdigar kay paygham phonchata hun aur mein tumhara amanatdaar aur khair khuwa hun
Devnagri Urdu (Maududi)तुमको अपने रुब के पैगाम पहुंचाता हूं, और तुम्हारा ऐसा खैर-ख्वाह हूं जिसपर भरोसा किया जा सकता है
عَرَبِيأَوَعَجِبتُم أَن جاءَكُم ذِكرٌ مِن رَبِّكُم عَلىٰ رَجُلٍ مِنكُم لِيُنذِرَكُم ۚ وَاذكُروا إِذ جَعَلَكُم خُلَفاءَ مِن بَعدِ قَومِ نوحٍ وَزادَكُم فِي الخَلقِ بَسطَةً ۖ فَاذكُروا آلاءَ اللَّهِ لَعَلَّكُم تُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम्हें इस पार आश्चर्य हुआ कि तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से तुम्हीं में से एक आदमी पर नसीहत आई, ताकि वह तुम्हें डराए तथा याद करो, जब उसने तुम्हें नूह़ की जाति के बाद उत्तराधिकारी बनाया और तुम्हें डील-डौल में भारी-भरकम बनाया। अतः अल्लाह की नेमतों को याद करो, ताकि तुम्हें सफलता प्राप्त हो।
Roman Urdu (Maududi)Kya tumhein is baat par tajjub hua ke tumhare paas khud tumhari apni qaum ke ek aadmi ke zariye se tumhare Rubb ki yaad dehani aayi taa-ke woh tumhein khabardaar karey? Bhool na jao ke tumhare Rubb ne Nooh ki qaum ke baad tumko uska jaanasheen(successors) banaya aur tumhein khoob tano-mand kiya(amply increased you in stature) , pas Allah ki qudrat ke karishmon ko yaad rakkho, umeed hai ke falaah paogey”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kiya tum iss baat say tajjub kertay ho kay tumharay perwerdigar ki taraf say tumharay pass aik aisay shaks ki maarfat jo tumhari hi jinss ka hai koi naseehat ki baat aagaee takay woh shaks tum ko daraye aur tum yeh halat yaad kero kay Allah ney tum ko qom-e-nooh kay baad ja nasheen banaya aur deel dol mein tum ko phelao ziyada diya so Allah ki nematon ko yaad kero takay tum ko falah ho
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम इस बात पर ताज्जुब हुआ के तुम्हारे पास खुद तुम्हारी अपनी क़ौम के एक आदमी के ज़रिये से तुम्हारे रब की याद देहनी आई ता-के वो तुम्हें ख़बरदार करे? भूल न जाओ के तुम्हारे रब ने नूह की क़ौम के बाद तुमको उसका जानशीं (उत्तराधिकारियों) बनाया और तुम्हें खूब तनो-मंद किया (तुम्हारे कद में काफी वृद्धि हुई), पास अल्लाह की क़ुदरत के करिश्माओं को याद रखो, उम्मीद है के फलाह पाओगे"
عَرَبِيقالوا أَجِئتَنا لِنَعبُدَ اللَّهَ وَحدَهُ وَنَذَرَ ما كانَ يَعبُدُ آباؤُنا ۖ فَأتِنا بِما تَعِدُنا إِن كُنتَ مِنَ الصّادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि हम अकेले अल्लाह की इबादत करें और उन्हें छोड़ दें जिनकी पूजा हमारे बाप-दादा करते थे? तो जिसकी तू हमें धमकी देता है, वह हमारे ऊपर ले आ, यदि तू सच्चों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “kya tu hamare paas is liye aaya hai ke hum akele Allah hi ki ibadat karein aur unhein chodh dein jinki ibadat hamare baap dada karte aaye hain? Accha to ley aa woh azaab jiski tu humein dhamki deta hai agar tu saccha hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha kiya aap humaray pass iss wastay aaye hain kay hum sirf Allah hi ki ibadat keren aur jin ko humaray baap dada poojtay thay unn ko chor den pus hum ko jiss azab ki dhamki detay ho uss ko humaray pass mangwa do agar tum sachay ho
Devnagri Urdu (Maududi)उनहोन ने जवाब दिया "क्या तू हमारे पास इस लिए आया है कि हम अकेले अल्लाह ही की इबादत करें और उन्हें छोड़ दें जिनकी इबादत हमारे बाप दादा करते आये हैं? अच्छा तो ले आ वो अजब जिसका तू हमें धमकी देता है अगर तू सच्चा है”
عَرَبِيقالَ قَد وَقَعَ عَلَيكُم مِن رَبِّكُم رِجسٌ وَغَضَبٌ ۖ أَتُجادِلونَني في أَسماءٍ سَمَّيتُموها أَنتُم وَآباؤُكُم ما نَزَّلَ اللَّهُ بِها مِن سُلطانٍ ۚ فَانتَظِروا إِنّي مَعَكُم مِنَ المُنتَظِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : निश्चय तुमपर तुम्हारे पालनहार की ओर से यातना और प्रकोप आ पड़ा है। क्या तुम मुझसे उन नामों के विषय में झगड़ते हो, जो तुमने तथा तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए हैं, जिनका अल्लाह ने कोई प्रमाण नहीं उतारा है? तो तुम प्रतीक्षा करो, निःसंदेह मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करने वालों में से हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “tumhare Rubb ki phitkar tum par padh gayi aur uska gazab toot pada, kya tum mujhse un naamo (names) par jhagadte ho jo tumne aur tumhare baap dada ne rakh liye hain, jinke liye Allah ne koi sanad nazil nahin ki hai. Accha to tum bhi intezaar karo aur main bhi tumhare saath intezaar karta hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney farmaya kay bus abb tum per Allah ki taraf say azab aur ghazab aaya hi chahata hai kiya tum mujh say aisay naamon kay baab mein jhagartay ho jin ko tum ney aur tumharay baap dadon ney thehra liya hai? Unn kay mabood honey ko Allah ney koi daleel nahi bheji. So tum muntazir raho mein bhi tumharay sath intizar ker raha hun
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा “तुम्हारे रब की फिटकर तुम पर पड़ गई और उसका गजब टूट पड़ा, क्या तुम मुझसे उन नमो (नामों) पर झगड़ा करते हो जो तुमने और तुम्हारे बाप दादा ने रख लिए हैं, जिनके लिए अल्लाह ने कोई सनद नाज़िल नहीं की है। अच्छा तो तुम भी इंतज़ार करो और मैं भी तुम्हारे साथ इंतज़ार करता हूँ”
عَرَبِيفَأَنجَيناهُ وَالَّذينَ مَعَهُ بِرَحمَةٍ مِنّا وَقَطَعنا دابِرَ الَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِنا ۖ وَما كانوا مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अंततः हमने उसे और उन लोगों को जो उसके साथ थे, अपनी रहमत से बचा लिया तथा उन लोगों की जड़ काट दी, जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया और वे ईमान लाने वाले न थे।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar humne apni meharbani se Hud aur uske saathiyon ko bacha liye aur un logo ki jadd (roots) kaat di jo hamari aayat ko jhutla chuke thay aur iman laney waley na thay
Roman Urdu (Junagarhi)Gharz hum ney unn ko aur unn kay sathiyon ko apni rehmat say bacha liya aur unn logon ki jarr kaat di jinhon ney humari aayaton ko jhutlaya tha aur woh eman laney walay na thay
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार हमने अपनी महरबानी से हद और उसके साथियों को बचा लिया और उन लोगों की जड (जड़ें) काट दी जो हमारी आयत को झुटला चुके थे और ईमान लेन वाले ना थे
عَرَبِيوَإِلىٰ ثَمودَ أَخاهُم صالِحًا ۗ قالَ يا قَومِ اعبُدُوا اللَّهَ ما لَكُم مِن إِلٰهٍ غَيرُهُ ۖ قَد جاءَتكُم بَيِّنَةٌ مِن رَبِّكُم ۖ هٰذِهِ ناقَةُ اللَّهِ لَكُم آيَةً ۖ فَذَروها تَأكُل في أَرضِ اللَّهِ ۖ وَلا تَمَسّوها بِسوءٍ فَيَأخُذَكُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और समूद की ओर उनके भाई सालेह़ को (भेजा)। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। निःसंदेह तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण आ चुका है। यह अल्लाह की ऊँटनी तुम्हारे लिए एक निशानी के रूप में है। अतः इसे छोड़ दो कि अल्लाह की धरती में खाती फिरे और इसे बुरे इरादे से हाथ न लगाना, अन्यथा तुम्हें एक दुःखदायी यातना घेर लेगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur Samood ki taraf humne unke bhai Saleh ko bheja. Usne kaha “aey biradraan e qaum, Allah ki bandagi karo, uske siwa tumhara koi khuda nahin hai. Tumhare paas tumhare Rubb ki khuli daleel aa gayi hai. Yeh Allah ki ounti (she-camel) tumhare liye ek nishani ke taur par hai, lihaza isey chodh do ke khuda ki zameen mein charti phirey, isko kisi burey irade se haath na lagana warna ek dardnaak azaab tumhein aa lega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney samood ki taraf unn kay bhai saleh (alh-e-salam) ko bheja. Unhon ney farmaya aey meri qom! Tum Allah ki ibadat kero uss kay siwa koi tumhara mabood nahi. Tumharay pass tumharay perwerdigar ki taraf say aik wazeh daleel aa chuki hai. Yeh oontni hai Allah ki jo tumharay liye daleel hai so iss ko chor do kay Allah Taalaa ki zamin mein khati phiray aur issko buraee kay sath haath bhi na lagana kay kahin tum ko dard naak azab aa pakray
Devnagri Urdu (Maududi)और समूद की तरफ हमने उनके भाई सालेह को भेजा। उसने कहा “ऐ बिरादरान ए कौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है।” तुम्हारे पास तुम्हारे रब की खुली जगह आ गई है। ये अल्लाह की औंती (वह-ऊंटनी) तुम्हारे लिए एक निशानी के तौर पर है, लिहाजा इसे छोड़ दो के खुदा की जमीन में चढ़ती फिर, इसको किसी बुरे इरादे से हाथ न लगाना वरना एक दर्दनाक अजब तुम्हें आ लेगा
عَرَبِيوَاذكُروا إِذ جَعَلَكُم خُلَفاءَ مِن بَعدِ عادٍ وَبَوَّأَكُم فِي الأَرضِ تَتَّخِذونَ مِن سُهولِها قُصورًا وَتَنحِتونَ الجِبالَ بُيوتًا ۖ فَاذكُروا آلاءَ اللَّهِ وَلا تَعثَوا فِي الأَرضِ مُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा याद करो जब उसने तुम्हें आद जाति के पश्चात् उत्तराधिकारी बनाया और तुम्हें धरती में बसाया, तुम उसके समतल भागों में भवन बनाते हो और पहाड़ों को घरों के रूप में तराशते हो। अतः अल्लाह की नेमतों को याद करो और धरती में बिगाड़ पैदा करते न फिरो।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo woh waqt jab Allah ne qaum e Aad ke baad tumhein uska jaanasheen (successors) banaya aur tumko zameen mein yeh manzilat bakshi ke aaj tum uske humwaar maidaano mein aali shaan mehal banate aur uske pahadon ko makanaat ki shakal mein tarashte ho. Pas uski qudrat ke karishmon se gaafil na ho jao aur zameen mein fasaad barpa na karo.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum yeh halat yaad kero kay Allah Taalaa ney tum ko aad kay baad janasheen banaya aur tum ko zamin per rehney ka thikana diya kay naram zamin per mehal banatay ho aur paharon ko taraash taraash ker unn mein ghar banatay ho so Allah Taalaa ki nematon ko yaad kero aur zamin mein fasaad mat phelao
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो वो वक्त जब अल्लाह ने क़ौम ए अद के बाद तुम्हें उसका जानशीं (उत्तराधिकारियों) बनाया और तुमको ज़मीन में ये मंजिल बख्शी के आज तुम उसके हमवार मैदानों में आली शान महल बनाते और उसके पहाड़ों को मकान की शक्ल में तराशते हो। पस उसकी क़ुदरत के करिश्माओं से ग़ाफ़िल ना हो जाओ और ज़मीन में फ़साद बरपा ना करो।
عَرَبِيقالَ المَلَأُ الَّذينَ استَكبَروا مِن قَومِهِ لِلَّذينَ استُضعِفوا لِمَن آمَنَ مِنهُم أَتَعلَمونَ أَنَّ صالِحًا مُرسَلٌ مِن رَبِّهِ ۚ قالوا إِنّا بِما أُرسِلَ بِهِ مُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसकी जाति के उन सरदारों ने जो बड़े बने हुए थे, उन लोगों से जो निर्बल समझे जाते थे, जो उनमें से ईमान लाए थे, कहा : क्या तुम जानते हो कि सचमुच सालेह़ अपने रब की ओर से भेजा हुआ है? उन्होंने कहा : निःसंदेह हम जो कुछ उसे देकर भेजा गया है उसपर ईमान लाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Uski qaum ke sardaron ne jo badey baney huey thay, kamzoor tabqey ke un logon se jo iman le aaye thay kaha “kya tum waqayi yeh jantey ho ke Saleh apne Rubb ka paigambar hai?” Unhon ne jawab diya “beshak jis paigam ke saath woh bheja gaya hai usey hum maante hain.”
Roman Urdu (Junagarhi)Unn ki qom mein jo mutakabbir sardar thay unhon ney gharib logon say jo kay inn mein say eman ley aaye thay poocha kiya tum ko iss baat ka yaqeen hai kay saleh (alh-e-salam) apney rab ki taraf say bhejay huye hain? Unhon ney kaha kay be-shak hum to iss per poora yaqeen rakhtay hain jo inn ko dey ker bheja gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी क़ौम के सरदारों ने जो बदे बने हुए थे, कामज़ूर तबक़ी के उन लोगों से जो ईमान ले आए थे कहा "क्या तुम यह जानते हो के सालेह अपने रब का पैगम्बर है?" उनको ने जवाब दिया “बेशक जिस पैगाम के साथ वो भेजा गया है उसे हम मानते हैं।”
عَرَبِيقالَ الَّذينَ استَكبَروا إِنّا بِالَّذي آمَنتُم بِهِ كافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग बड़े बने हुए थे, उन्होंने कहा : निःसंदेह हम उसका इनकार करने वाले हैं, जिसपर तुम ईमान लाए हो।
Roman Urdu (Maududi)Un burayi ke muddaiyon (haughty ones) ne kaha jis cheez ko tumne maana hai hum uske munkir hain.”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh mutakabbir log kehney lagay kay tum jiss baat per yaqeen laye ho hum to iss kay munkir hain
Devnagri Urdu (Maududi)उन बुराइयों के मुद्दैयों (घमण्डियों) ने कहा जिस चीज़ को तुमने माना है हम उसे मुनीर हैं।”
عَرَبِيفَعَقَرُوا النّاقَةَ وَعَتَوا عَن أَمرِ رَبِّهِم وَقالوا يا صالِحُ ائتِنا بِما تَعِدُنا إِن كُنتَ مِنَ المُرسَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उन्होंने ऊँटनी की हत्या कर दी और अपने पालनहार की आज्ञा का उल्लंघन किया, और उन्होंने कहा : ऐ सालेह! तू हमें जिसकी धमकी देता है, वह हमपर ले आ, यदि तू रसूलों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Phir unhon ne us ountni (she-camel) ko maar dala aur purey tammarrud (disdainfuliy disobeyed) ke saath apne Rubb ke hukum ki khilaf warzi kar guzrey. Aur Saleh se keh diya ke le aa woh azaab jiski tu humein dhamki deta hai agar tu waqayi paigambaron mein se hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus unhon ney uss oontni ko maar dala aur apney perwerdigar kay hukum say sirkashi ki aur kehney lagay kay aey saleh! Jiss ki aap hum ko dhamki detay thay uss ko mangwaiye agar aap payghumbar hain
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उनहोन ने हमें ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को मार डाला और पूरे तम्मारुद (तिरस्कारपूर्ण अवज्ञा) के साथ अपने रब के हुकुम की खिलाफ वारज़ी कर गुजरे। और सालेह से कह दिया के ले आ वो अजाब जिसकी तू हमें धमकी देता है अगर तू वाकयी पैगम्बरों में से है
عَرَبِيفَأَخَذَتهُمُ الرَّجفَةُ فَأَصبَحوا في دارِهِم جاثِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्हें भूकंप ने पकड़ लिया, तो वे अपने घरों में औंधे पड़े रह गए।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar ek dehla dene wali aafat ne unhein aa liya aur woh apne gharon mein aundhey paday ke paday reh gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Pus unn ko zalzalay ney aa pakra aur woh apney gharon mein ondhay kay ondhay paray reh gaye
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार एक देहला देने वाली आफत ने उन्हें आ लिया और वो अपने घरों में औंधे पड़े के पड़े रह गए
عَرَبِيفَتَوَلّىٰ عَنهُم وَقالَ يا قَومِ لَقَد أَبلَغتُكُم رِسالَةَ رَبّي وَنَصَحتُ لَكُم وَلٰكِن لا تُحِبّونَ النّاصِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो सालेह़ ने उनसे मुँह मोड़ लिया और कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! मैंने तुम्हें अपने पालनहार का संदेश पहुँचा दिया और मैंने तुम्हारे लिए मंगलकामना की, लेकिन तुम शुभचिंतकों को पसंद नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Aur Saleh yeh kehta hua unki bastiyon se nikal gaya ke “ aey meri qaum, maine apne Rubb ka paigam tujhey pahuncha diya aur maine teri bahut khair khwahi ki, magar main kya karoon ke tujhey apne khair khwah pasand hi nahin hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss waqt (saleh alh-e-salam) unn say mun mor ker chalay aur farmaney lagay aey meri qom! Mein to tum ko apney perwerdigar ka hukum phoncha diya tha aur mein ney tumhari khair khuwahi ki lekin tum log khair khuwahon ko pasand nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)और सालेह ये कहता हुआ उनकी बस्तियों से निकल गया के "ऐ मेरी क़ौम, मैंने अपने रब का पैगाम तुझे पहना दिया और मैंने तेरी बहुत खैर ख्वाही की, मगर मैं क्या करूं के तुझे अपने खैर ख्वाह पसंद ही नहीं हैं"
عَرَبِيوَلوطًا إِذ قالَ لِقَومِهِ أَتَأتونَ الفاحِشَةَ ما سَبَقَكُم بِها مِن أَحَدٍ مِنَ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा लूत को (भेजा), जब उसने अपनी जाति से कहा : क्या तुम ऐसी निर्लज्जता का कार्य करते हो, जिसे तुमसे पहले दुनिया में किसी ने नहीं किया?
Roman Urdu (Maududi)Aur Lut ko humne paigambar banakar bheja, phir yaad karo jab usne apni qaum se kaha, “ kya tum aisey be-haya ho gaye ho, ke woh fahash kaam karte ho jo tumse pehle duniya mein kisi ne nahin kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney loot (alh-e-salam) ko bheja jabkay unhon ney apni qom say farmaya tum aisa fahash kaam kertay ho jiss ko tum say pehlay kissi ney duniya jahaan walon mein say nahi kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और लुट को हमने पैगम्बर बनाकर भेजा, फिर याद करो जब उसने अपनी क़ौम से कहा, "क्या तुम ऐसे बे-हया हो गए हो, के वो फहाश काम करते हो जो तुमसे पहले दुनिया में किसी ने नहीं किया
عَرَبِيإِنَّكُم لَتَأتونَ الرِّجالَ شَهوَةً مِن دونِ النِّساءِ ۚ بَل أَنتُم قَومٌ مُسرِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुम स्त्रियों को छोड़कर काम-वासना की पूर्ति के लिए पुरुषों के पास आते हो। बल्कि तुम सीमा का उल्लंघन करने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Tum auraton ko chodh kar mardon se apni khwaish poori karte ho. Haqeeqat yeh hai ke tum bilkul hi hadd se guzar janey waley log ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Tum mardon kay sath shewat rani kertay ho aurton ko chor ker bulkay tum to hadd hi say guzar gaye ho
Devnagri Urdu (Maududi)तुम औरतों को चोद कर मर्दों से अपनी ख्वाहिश पूरी करते हो। हकीकत ये है के तुम बिलकुल ही हद से गुज़र जाने वाले लोग हो”
عَرَبِيوَما كانَ جَوابَ قَومِهِ إِلّا أَن قالوا أَخرِجوهُم مِن قَريَتِكُم ۖ إِنَّهُم أُناسٌ يَتَطَهَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसकी जाति का उत्तर इसके सिवा कुछ न था कि उन्होंने कहा : इन्हें अपनी बस्ती से बाहर निकालो। निःसंदेह ये ऐसे लोग हैं जो बड़े पाक बनते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar uski qaum ka jawab iske siwa kuch na tha ke “ nikalo in logon ko apni bastiyon se, badey paakbaaz bante hain yeh”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn ki qom say koi jawab na bann para ba-juz iss kay, kay aapas mein kehney lagay kay inn logon ko apni basti say nikal do. Yeh log baray pak saaf bantay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उसकी क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ ना था के “लोगों को अपनी बस्तियों से निकालो, बड़े पाकबाज़ बनते हैं ये”
عَرَبِيفَأَنجَيناهُ وَأَهلَهُ إِلَّا امرَأَتَهُ كانَت مِنَ الغابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उसे तथा उसके घर वालों को बचा लिया, उसकी पत्नी को छोड़कर, वह पीछे रहने वालों में से थी।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar humne Lut aur uske gharwalon ko bajuz uski biwi ke jo pichey reh janey walon mein thi
Roman Urdu (Junagarhi)So hum ney loot (alh-e-salam) ko aur unn kay ghar walon ko bacha liya ba-juz unn ki biwi kay, kay woh unn hi logon mein rahi jo azab mein reh gaye thay
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार हमने लूट और उसके घरवालों को बजाया उसकी बीवी के जो पीछे रह गए जाने वालों में थी
عَرَبِيوَأَمطَرنا عَلَيهِم مَطَرًا ۖ فَانظُر كَيفَ كانَ عاقِبَةُ المُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उनपर (पत्थरों की) भारी बारिश बरसाई। तो देखो अपराधियों का परिणाम कैसा हुआ?
Roman Urdu (Maududi)Bacha kar nikal diya aur us qaum par barsayi ek baarish, phir dekho ke un mujreemon ka kya anjaam hua
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unn per khaas tarah ka meenh barsaya pus dekho to sahi inn mujrimon ka anjam kaisa hua
Devnagri Urdu (Maududi)बच्चा कर निकल दिया और उस क़ौम पर बरसी एक बारिश, फिर देखो के उन मुजरिमों का क्या अंजाम हुआ
عَرَبِيوَإِلىٰ مَديَنَ أَخاهُم شُعَيبًا ۗ قالَ يا قَومِ اعبُدُوا اللَّهَ ما لَكُم مِن إِلٰهٍ غَيرُهُ ۖ قَد جاءَتكُم بَيِّنَةٌ مِن رَبِّكُم ۖ فَأَوفُوا الكَيلَ وَالميزانَ وَلا تَبخَسُوا النّاسَ أَشياءَهُم وَلا تُفسِدوا فِي الأَرضِ بَعدَ إِصلاحِها ۚ ذٰلِكُم خَيرٌ لَكُم إِن كُنتُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मद्यन की ओर उनके भाई शुऐब को (भेजा)। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। निःसंदेह तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण आ चुका है। अतः पूरा-पूरा नाप और तौलकर दो और लोगों की चीज़ों में कमी न करो। तथा धरती में उसके सुधार के पश्चात बिगाड़ न फैलाओ। यही तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम ईमानवाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur Madiyan walon ki taraf humne unke bhai Shoaib ko bheja. Usne kaha “ aey biradraan e qaum, Allah ki bandagi karo, uske siwa tumhara koi khuda nahin hai. Tumhare paas tumhare Rubb ki saaf rehnumayi aa gayi hai, lihaza wazan(weight) aur paimane purey karo. Logon ko unki cheezon mein ghaata(loss) na do, aur zameen mein fasaad barpa na karo jabke uski islaah ho chuki hai. Isi mein tumhari bhalayi hai agar tum waqayi momin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney madiyan ki taraf unn kay bhai shoaib (alh-e-salam) ko bheja. Unhon ney farmaya aey meri qom! Tum Allah ki ibadat kero iss kay siwa koi tumhara mabood nahi tumharay pass tumharay perwerdigar ki taraf say wazeh daleel aa chuki hai. Pus tum naap aur tol poora poora kiya kero aur logon ko unn ki cheezen kum kerkay mat do aur ruy-e-zamin mein iss kay baad kay iss ki durusti ker di gaee fasaad mat phelao yeh tumharay liye naafay hai agar tum tasdeeq kero
Devnagri Urdu (Maududi)और मदियां वालों की तरफ हमने उनके भाई शोएब को भेजा। उसने कहा " ऐ बिरादरान ए कौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है। तुम्हारे पास तुम्हारे रब की साफ रहनुमाई आ गई है, वजन (वजन) और पैमाने पूरे करो। लोगों को उनकी चीज में घाटा (नुकसान) ना दो, और जमीन में फ़साद बरपा ना करो जबके उसकी इस्लाह हो चुकी है
عَرَبِيوَلا تَقعُدوا بِكُلِّ صِراطٍ توعِدونَ وَتَصُدّونَ عَن سَبيلِ اللَّهِ مَن آمَنَ بِهِ وَتَبغونَها عِوَجًا ۚ وَاذكُروا إِذ كُنتُم قَليلًا فَكَثَّرَكُم ۖ وَانظُروا كَيفَ كانَ عاقِبَةُ المُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा प्रत्येक मार्ग पर न बैठो कि (लोगों को) धमकाते हो और उसको अल्लाह के रास्ते रोकते हो, जो उसपर ईमान लाए, और उसमें टेढ़ापन खोजते हो। तथा याद करो जब तुम थोड़े थे, तो उसने तुम्हें अधिक कर दिया। तथा देखो बिगाड़ पैदा करने वालों का परिणाम कैसा हुआ?
Roman Urdu (Maududi)Aur (zindagi ke) har rastey par rehzan (lie in ambush) bankar na baith jao ke logon ko khauf zadah karne aur iman laney walon ko khuda ke rastey se rokne lago, aur seedhi raah ko tedha karne ke darpe ho jao. Yaad karo woh zamana jabke tum thode thay phir Allah ne tumhein bahut kardiya, aur aakhein khol kar dekho ke duniya mein mufsidon ka kya anjaam hua hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum sarkaon per iss gharz say nahi betha kero kay Allah per eman laney walay ko dhamkiyan do aur Allah ki raah say roko aur iss mein kuji ki talash mein lagay raho. Aur uss halat ko yaad kero jabkay tum kum thay phir Allah ney tum ko ziyada ker diya aur dekho kay kaisa anjam hua fasaad kerney walon ka
Devnagri Urdu (Maududi)और (जिंदगी के) हर रास्ते पर घात लगाकर बैठ जाओ के लोगों को खौफ पैदा करने और ईमान लाने वालों को खुदा के रास्ते से रोकने लगो, और सीधी राह को टेढ़ा करने के डरपे हो जाओ। याद करो वो ज़माना जबके तुम थोड़े थे फिर अल्लाह ने तुम्हें बहुत कर दिया, और आखें खोल कर देखो दुनिया में मुफ़्सिदों का क्या अंजाम हुआ है
عَرَبِيوَإِن كانَ طائِفَةٌ مِنكُم آمَنوا بِالَّذي أُرسِلتُ بِهِ وَطائِفَةٌ لَم يُؤمِنوا فَاصبِروا حَتّىٰ يَحكُمَ اللَّهُ بَينَنا ۚ وَهُوَ خَيرُ الحاكِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुममें से एक समूह उसपर ईमान लाया है, जिसके साथ मैं भेजा गया हूँ और दूसरा समूह ईमान नहीं लाया, तो तुम धैर्य रखो, यहाँ तक कि अल्लाह हमारे बीच निर्णय कर दे और वह सब निर्णय करने वालों से बेहतर है।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum mein se ek giroh is taleem par jiske saath main bheja gaya hoon, iman laata hai aur dusra iman nahin laata, to sabr ke saath dekhte raho yahan tak ke Allah hamare darmiyan faisla karde, aur wahi sabse behtar faisla karne wala hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tum say kuch log iss hukum per jiss ko dey ker mujh ko bheja gaya eman ley aaye hain aur kuch eman nahi laye hain to zara thehar jao! Yahan tak kay humaray darmiyan Allah faisla kiye deta hai aur woh sab faisla kerney walon say behtar hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम में से एक गिरोह इस तालीम पर जिसके साथ मैं भेजा गया हूं, ईमान लाता है और दूसरा ईमान नहीं लता, तो सब्र के साथ देखते रहो यहाँ तक के अल्लाह हमारे दरमियान फैसला करदे, और वही सबसे बेहतर फैसला करने वाला है”
🕮 Juz 9 begins here
عَرَبِي۞ قالَ المَلَأُ الَّذينَ استَكبَروا مِن قَومِهِ لَنُخرِجَنَّكَ يا شُعَيبُ وَالَّذينَ آمَنوا مَعَكَ مِن قَريَتِنا أَو لَتَعودُنَّ في مِلَّتِنا ۚ قالَ أَوَلَو كُنّا كارِهينَ
हिन्दी (Al-Omari)उसकी जाति के उन प्रमुखों ने कहा जो बड़े बने हुए थे कि ऐ शुऐब! हम तुझे तथा उन लोगों को जो तेरे साथ ईमान लाए हैं, अपने नगर से अवश्य ही निकाल देंगे, या हर हाल में तुम हमारे धर्म में वापस आओगे। (शुऐब ने) कहा : क्या अगरचे हम नापसंद करने वाले हों?
Roman Urdu (Maududi)Uski qaum ke sardaron ne , jo apni badayi ke ghamand mein mubtila thay, ussey kaha ke “aey Shoaib , hum tujhey aur un logon ko jo tere saath iman laye hain apni basti se nikal denge warna tum logon ko hamari millat mein wapas aana hoga”. Shoaib ne jawab diya, “kya zabardasti humein phera jayega khwa hum razi na hon
Roman Urdu (Junagarhi)Unn ki qom kay mutakabbir sardaron ney kaha aey shoaib! Hum aap ko aur jo aap kay humrah eman laye hain unn ko apni basti say nikal den gay illa yeh kay tum humaray mazhab mein phir aajao. Shoaib (alh-e-salam) ney jawab diya kay kiya hum tumharay mazhab mein aajayen go hum iss ko makrooh hi samajhtay hon
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी क़ौम के सरदारों ने, जो अपनी बदाई के घमंड में मुब्तिला था, उसने कहा के “ऐ शोएब, हम तुझसे” और उन लोगों को जो तेरे साथ ईमान लाए हैं अपनी बस्ती से निकल देंगे वरना तुम लोगों को हमारी मिल्लत में वापस आना होगा।'
عَرَبِيقَدِ افتَرَينا عَلَى اللَّهِ كَذِبًا إِن عُدنا في مِلَّتِكُم بَعدَ إِذ نَجّانَا اللَّهُ مِنها ۚ وَما يَكونُ لَنا أَن نَعودَ فيها إِلّا أَن يَشاءَ اللَّهُ رَبُّنا ۚ وَسِعَ رَبُّنا كُلَّ شَيءٍ عِلمًا ۚ عَلَى اللَّهِ تَوَكَّلنا ۚ رَبَّنَا افتَح بَينَنا وَبَينَ قَومِنا بِالحَقِّ وَأَنتَ خَيرُ الفاتِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय हमने अल्लाह पर झूठ गढ़ा यदि हम तुम्हारे धर्म में फिर आ जाएँ, इसके बाद कि अल्लाह ने हमें उससे बचा लिया। और हमारे लिए संभव नहीं कि हम उसमें फिर आ जाएँ, परंतु यह कि हमारा पालनहार अल्लाह ही ऐसा चाहे। हमारा पालनहार प्रत्येक वस्तु को अपने ज्ञान के घेरे में लिए हुए है। हमने अल्लाह ही पर भरोसा किया। ऐ हमारे पालनहार! हमारे और हमारी जाति के बीच न्याय के साथ निर्णय कर दे। और तू सब निर्णय करने वालों से बेहतर है।
Roman Urdu (Maududi)Hum Allah par jhoot ghadne waley hongey agar tumhari millat mein palat aayein jabke Allah humein issey najaat de chuka hai. Hamare liye to iski taraf palatna ab kisi tarah mumkin nahin illa yeh ke khuda hamara Rubb hi aisa chahe. Hamare Rubb ka ilm har cheez par haawi hai, usi par humne aitamaad(bharosa) karliya. Aey Rubb, hamare aur hamari qaum ke darmiyan theek theek faisla karde aur tu behtareen faisla karne wala hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Hum Allah Taalaa per bari jhooti tohmat laganey walay hojayen gay agar hum tumharay deen mein aajayen iss kay baad kay Allah Taalaa ney hum ko iss say nijat di aur hum say mumkin nahi kay tumharay mazhab mein phir aajayen lekin haan yeh kay Allah hi ney humara maalik hai muqaddar kiya ho. Humaray rab kay ilm her cheez per moheet hai hum Allah hi per bharosa rakhtay hain. Aey humaray perwerdigar! Humaray aur humari qom kay darmiyan haq kay moafiq faisla ker dey aur tu sab say acha faisla kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيوَقالَ المَلَأُ الَّذينَ كَفَروا مِن قَومِهِ لَئِنِ اتَّبَعتُم شُعَيبًا إِنَّكُم إِذًا لَخاسِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसकी जाति के काफ़िर प्रमुखों ने कहा कि यदि तुम शुऐब के पीछे चले, तो निःसंदेह तुम उस समय अवश्य घाटा उठाने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Uski qaum ke Sardaron ne , jo uski baat maanne se inkar kar chuke thay, aapas mein kaha “agar tumne shoaib ki pairwi qabool karli to barbaad ho jaogey.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn ki qom kay kafir sardaron ney kaha agar tum shoaib (alh-e-salam) ki raah per chalo gay to be-shak bara nuksan uthao gay
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी क़ौम के सरदारों ने, जो उसकी बात मन्ने से इंकार कर चुके थे, आपस में कहा “अगर तुमने शोएब की जोड़ी क़बूल कर ली तो बरबाद हो जाओगे।”
عَرَبِيفَأَخَذَتهُمُ الرَّجفَةُ فَأَصبَحوا في دارِهِم جاثِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्हें भूकंप ने पकड़ लिया, तो वे अपने घरों में औंधे पड़े रह गए।
Roman Urdu (Maududi)Magar hua yeh ke ek dehla dene wali aafat ne unko aa liye aur woh apne gharon mein aundhey padey ke padey reh gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Pus unn ko zalzalay ney aa pakra so woh apney gharon mein ondhay kay ondhay paray reh gaye
Devnagri Urdu (Maududi)मगर हुआ ये के एक देहला देने वाली आफत ने उनको आ लिया और वो अपने घरों में औंधे पड़े के पड़े रह गए
عَرَبِيالَّذينَ كَذَّبوا شُعَيبًا كَأَن لَم يَغنَوا فيهَا ۚ الَّذينَ كَذَّبوا شُعَيبًا كانوا هُمُ الخاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन लोगों ने शुऐब को झुठलाया (वे ऐसे हो गए कि) मानो कभी वे उन (घरों) में बसे ही न थे। जिन लोगों ने शुऐब को झुठलाया, वही लोग घाटा उठाने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne Shoaib ko jhutlaya woh aisey mitey ke goya kabhi un gharon mein basey hi na thay. Shoaib ke jhutlane waley aakhir e kaar barbaad ho kar rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Jinhon ney shoaib (alh-e-salam) ki takzeeb ki thi unn ki yeh halat hogaee jaisay inn gharon mein kabhi basay hi na thay. Jinhon ney shoaib (alh-e-salam) ki takzeeb ki thi wohi kahasaray mein parr gaye
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने शोएब को झुटलाया वो ऐसे मिटे के गोया कभी उन घरों में बसे ही ना थे। शोएब के झूठलाने वाले आखिर ए कार बरबाद हो कर रहे
عَرَبِيفَتَوَلّىٰ عَنهُم وَقالَ يا قَومِ لَقَد أَبلَغتُكُم رِسالاتِ رَبّي وَنَصَحتُ لَكُم ۖ فَكَيفَ آسىٰ عَلىٰ قَومٍ كافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो शुऐब उनसे विमुख हो गए और कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! मैंने तुम्हें अपने पालनहार के संदेश पहुँचा दिए, तथा मैं तुम्हारा हितकारी रहा। तो फिर मैं काफ़िर जाति (के विनाश) पर कैसे शोक करूँ?
Roman Urdu (Maududi)Aur Shoaib yeh keh kar unki bastiyon se nikal gaya ke “aey biradraan e qaum , maine apne Rubb ke paigamaat tumhein pahuncha diye aur tumhari khair kwahi ka haqq ada kardiya, ab main us qaum par kaise afsos karoon jo qubool e haqq se inkar karti hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss waqt shoaib (alh-e-salam) unn say mun mor ker chalay aur farmaney lagay kay aey meri qom! Mein ney tum ko apney perwerdigar kay ehkaam phoncha diye thay aur mein ney tumhari khair khuwahi ki. Phir mein inn kafir logon per kiyon ranj keroon
Devnagri Urdu (Maududi)और शोएब ये कह कर उनकी बस्तियों से निकल गया के "ऐ बिरादरान ए क़ौम, मैंने अपने रब के पैगामत तुम्हें पाहुंचा दिए और तुम्हारी ख़ैर ख़ैर का हक़ अदा करदिया, अब मैं हमसे क़ौम पर हूँ" कैसे अफसोस करूं जो क़ुबूल ए हक़ से इंकार करती है”
عَرَبِيوَما أَرسَلنا في قَريَةٍ مِن نَبِيٍّ إِلّا أَخَذنا أَهلَها بِالبَأساءِ وَالضَّرّاءِ لَعَلَّهُم يَضَّرَّعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने जिस बस्ती में भी कोई नबी भेजा, तो उसके वासियों को तंगी और कष्ट से ग्रस्त कर दिया ताकि वे गिड़गिड़ाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Kabhi aisa nahin hua ke humne kisi basti mein Nabi bheja ho aur us basti ke logon ko pehle tanggi aur sakhti mein mubtila na kiya ho is khayal se ke shayad woh aajizi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney kissi basti mein koi nabi nahi bheja kay wahan kay rehney walon ko hum ney sakhti aur takleef mein na pakra hota kay woh girr girayen
Devnagri Urdu (Maududi)कभी ऐसा नहीं हुआ के हमने किसी बस्ती में नबी भेजा हो और उस बस्ती के लोगों को पहले तंग किया हो और शक्ति में मुब्तिला ना किया हो इस ख्याल से के शायद वो आजिजी
عَرَبِيثُمَّ بَدَّلنا مَكانَ السَّيِّئَةِ الحَسَنَةَ حَتّىٰ عَفَوا وَقالوا قَد مَسَّ آباءَنَا الضَّرّاءُ وَالسَّرّاءُ فَأَخَذناهُم بَغتَةً وَهُم لا يَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उस खराब स्थिति को अच्छी स्थिति में बदल दिया, यहाँ तक कि वे (संख्या और धन में) बहुत बढ़ गए और उन्होंने कहा यह दुख और सुख हमारे बाप-दादा को भी पहुँचा था। तो हमने उन्हें अचानक इस हाल में पकड़ लिया कि वे सोचते न थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir humne unki badh-haali ko khush haali se badal diya yahan tak ke woh khoob phale phoole aur kehne lagey ke “hamare aslaaf par bhi acchey aur burey din aate hi rahey hain”. Aakhir e kaar humne unhein achanak pakad liya aur unhein khabar tak na hui
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney uss bad haali ki jagah khushaali badal di yahan tak kay unn ko khoob taraqqi hui aur kehney lagay kay humaray aaba-o-ajdaad ko bhi tangi aur rahat paish aaee thi to hum ne unn ko dafatan pkara liya aur unn ko khabar bhi na thi
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमने उनकी बढ़-हाली को ख़ुश हाली से बदल दिया दिया यहां तक ​​के वो खूब फले फूले और कहने लगे के "हमारे असलफ पर भी अच्छे और बुरे दिन आते ही रहे हैं"
عَرَبِيوَلَو أَنَّ أَهلَ القُرىٰ آمَنوا وَاتَّقَوا لَفَتَحنا عَلَيهِم بَرَكاتٍ مِنَ السَّماءِ وَالأَرضِ وَلٰكِن كَذَّبوا فَأَخَذناهُم بِما كانوا يَكسِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि इन बस्तियों के वासी ईमान ले आते और डरते, तो हम अवश्य ही उनपर आकाश और धरती की बरकतों के द्वार खोल देते, परन्तु उन्होंने झुठला दिया। अतः हमने उनकी करतूतों के कारण उन्हें पकड़ लिया।
Roman Urdu (Maududi)Agar bastiyon ke log iman latey aur taqwa ki rawish ikhtiyar karte to hum unpar aasman aur zameen se barkaton ke darwaze khol dete, magar unhon ne to jhutlaya, lihaza humne us buri kamayi ke hisaab mein unhein pakad liya jo woh sameit rahye thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar unn bastiyon kay rehney walay eman ley aatay aur perhezgari ikhtiyar kertay to hum unn per aasman aur zamin ki barkaten khol detay lekin unhon ney takzeeb ki to hum ney unn kay aemaal ki waja say unn ko pakar liya
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيأَفَأَمِنَ أَهلُ القُرىٰ أَن يَأتِيَهُم بَأسُنا بَياتًا وَهُم نائِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या फिर इन बस्तियों के वासी इस बात से निश्चिंत हो गए हैं कि उनपर हमारी यातना रात के समय आ जाए, जबकि वे सोए हुए हों?
Roman Urdu (Maududi)Phir kya bastiyon ke log ab issey be khauf ho gaye hain ke hamari giraft (pakad) kabhi achanak unpar raat ke waqt na aa jayegi jabke woh sotey padey hon
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya phir bhi inn bastiyon kay rehney walay iss baat say bey fikar ho gaye hain kay unn per humara azab shab kay waqt aa paray jiss waqt woh sotay hon
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्या बस्तियों के लोग अब इससे खौफ हो गए हैं के हमारी गिरफ़्तार (पकड़) कभी अचानक उन रात के वक्त ना आ जाएगी जबके वो सोते पड़े माननीय
عَرَبِيأَوَأَمِنَ أَهلُ القُرىٰ أَن يَأتِيَهُم بَأسُنا ضُحًى وَهُم يَلعَبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और क्या नगर वासी इस बात से निश्चिंत हो गए हैं कि उनपर हमारी यातना दिन चढ़े आ जाए और वे खेल रहे हों?
Roman Urdu (Maududi)Ya unhein itminaan ho gaya hai ke hamara mazboot haath kabhi yakayak unpar din ke waqt na padega jabke woh khel rahey hon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kiya inn bastiyon kay rehney walay iss baat say bey fikar hogaye hain kay inn per humara azab din charhay aa paray jiss waqt kay woh apney khelon mein masghool hon
Devnagri Urdu (Maududi)हां उनको इत्मिनान हो गया है के हमारा मजबूत हाथ कभी यकायक अनपर दिन के वक्त ना पड़ेगा जबके वो खेल रहे होन
عَرَبِيأَفَأَمِنوا مَكرَ اللَّهِ ۚ فَلا يَأمَنُ مَكرَ اللَّهِ إِلَّا القَومُ الخاسِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वे अल्लाह के गुप्त उपाय से निश्चिंत हो गए हैं? तो (याद रखो!) अल्लाह के गुप्त उपाय से वही लोग निश्चिंत होते हैं, जो घाटा उठाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log Allah ki chaal se be khauf hain? Halanke Allah ki chaal se wahi qaum be-khauff hoti hai jo tabaah honay wali ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya pus woh Allah ki iss pakar say bey fikar hogaye. So Allah ki pakar say ba-juz unn kay jin ki shamat hi aagaee ho aur koi bey fikar nahi hota
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग अल्लाह की चाल से खौफ खा रहे हैं? हालंके अल्लाह की चाल से वही क़ौम बे-ख़ौफ़ होती है जो तबाह होने वाली हो
عَرَبِيأَوَلَم يَهدِ لِلَّذينَ يَرِثونَ الأَرضَ مِن بَعدِ أَهلِها أَن لَو نَشاءُ أَصَبناهُم بِذُنوبِهِم ۚ وَنَطبَعُ عَلىٰ قُلوبِهِم فَهُم لا يَسمَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या उन लोगों के लिए यह तथ्य स्पष्ट नहीं हुआ, जो धरती के अगले वासियों के बाद उसके वारिस हुए कि यदि हम चाहें, तो उन्हें उनके पापों के कारण पकड़ लें और उनके दिलों पर मुहर लगा दें, फिर वे कोई बात न सुन सकें?
Roman Urdu (Maududi)Aur kya un logon ko jo sabiq ehle zameen ke baad zameen ke waris hotey hain , is amr e waqayi ne kuch sabaq nahin diya ke agar hum chahein to unke kasooron par unhein pakad sakte hain? (Magar woh sabaq-aamoz haqaiq se tagaful baratte hain) aur hum unke dilon par mohar laga dete hain, phir woh kuch nahin suntey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kiya unn logon ko jo zamin kay waris huye wahan kay logon ki halakat kay baad (inn waqiyaat-e-mazkoor ney) yeh baat nahi batlaee kay agar hum chahayen to inn kay jurm kay sabab inn ko halak ker dalen aur hum inn kay dilon per band laga denpus woh na sunn saken
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या उन लोगों को जो साबिक एहले ज़मीन के बाद ज़मीन के वारिस होते हैं, इस अम्र ए वक़ाई ने कुछ सबक नहीं दिया के अगर हम चाहें तो उनके कसूरों पर उन्हें पकड़ें क्या आप जानते हैं? (मगर वो सबक-आमोज़ हक़ीक़ से तगाफुल बारातते हैं) और हम उनके दिलों पर मोहर लगा देते हैं, फिर वो कुछ नहीं सुनते
عَرَبِيتِلكَ القُرىٰ نَقُصُّ عَلَيكَ مِن أَنبائِها ۚ وَلَقَد جاءَتهُم رُسُلُهُم بِالبَيِّناتِ فَما كانوا لِيُؤمِنوا بِما كَذَّبوا مِن قَبلُ ۚ كَذٰلِكَ يَطبَعُ اللَّهُ عَلىٰ قُلوبِ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ये बस्तियाँ हैं, हम (ऐ नबी!) आपसे उनके कुछ वृत्तान्त सुना रहे हैं। निःसंदेह उनके पास उनके रसूल खुले प्रमाण लेकर आए, तो वे ऐसे न थे कि उस चीज़ पर ईमान ले आते, जिसे वे इससे पहले झुठला चुके थे। इसी प्रकार अल्लाह काफ़िरों के दिलों पर मुहर लगा देता है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh qaumein jinke qissey hum tumhein suna rahey hain (tumhare saamne misaal mein maujood hain). Unke Rasool unke paas khuli khuli nihsnaiyan lekar aaye, magar jis cheez ko woh ek dafa jhutla chuke thay phir usey woh maanne waley na thay. Dekho is tarah hum munkireen e haqq ke dilon par mohar laga dete hain
Roman Urdu (Junagarhi)Inn bastiyon kay kuch kuch qissay hum aap say biyan ker rahey hain aur inn sab kay pass unn kay payghumbar mojzaat ley ker aaye phir jiss cheez ko enhon ney ibtidaa mein jhoota keh diya yeh baat nahi hui kay phir iss ko maan letay Allah Taalaa issi tarah kafiron kay dilon per band laga deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये क़ौमें जिनके क़िस्से हम तुम्हें सुना रहे हैं (तुम्हारे सामने मिसाल में मौजूद हैं)। उनके रसूल उनके पास खुली खुली निहस्नाइयां लेकर आए, मगर जिस चीज को वो एक दफा झूठला चुके थे फिर उसे वो मन्ने वाले ना थे। देखो इस तरह हम मुनकिरीन ए हक़ के दिलों पर मोहर लगा देते हैं
عَرَبِيوَما وَجَدنا لِأَكثَرِهِم مِن عَهدٍ ۖ وَإِن وَجَدنا أَكثَرَهُم لَفاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उनमें से अधिकतर लोगों में प्रतिज्ञा पालन नहीं पाया तथा निःसंदेह हमने उनमें अधिकतर लोगों को अवज्ञाकारी ही पाया।
Roman Urdu (Maududi)Humne un mein se aksar mein koi paas e ahad na paya, balke aksar ko fasiq hi paya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aksar logon mein hum ney wafay-e-ehad na rakha aur hum ney aksar logon ko bey hukum hi paya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उन में से अक्सर में कोई पास ए अहद न पाया, बलके अक्सर को फ़ासीक़ ही पाया
عَرَبِيثُمَّ بَعَثنا مِن بَعدِهِم موسىٰ بِآياتِنا إِلىٰ فِرعَونَ وَمَلَئِهِ فَظَلَموا بِها ۖ فَانظُر كَيفَ كانَ عاقِبَةُ المُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उन (रसूलों) के बाद, हमने मूसा को अपनी आयतों (चमत्कारों) के साथ फ़िरऔन और उसके प्रमुखों के पास भेजा। तो उन्होंने उन (आयतों) के साथ अन्याय किया। तो देख लो कि बिगाड़ पैदा करने वालों का परिणाम कैसा हुआ?
Roman Urdu (Maududi)Phir un qaumon ke baad ( jinka zikr upar kiya gaya) humne Moosa ko apni nishaniyon ke saath Firoun aur uski qaum ke Sardaron ke paas bheja, magar unhon ne bhi hamari nishaniyon ke saath zulm kiya. Pas dekho ke in mufsidon ka kya anjaam hua
Roman Urdu (Junagarhi)Phir inn kay baad hum ney musa (alh-e-salam) ko apney dalaeel dey ker firaon aur uss kay umraa kay pass bheja magar unn logon ney inn kay bilkul haq ada na kiya. So dekhiye unn mufisdon ka kiya anjam hua
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उन क़ौमों के बाद (जिनका ज़िक्र ऊपर किया गया) हमने मूसा को अपनी निशानियों के साथ फ़िरौन और उसकी क़ौम के सरदारों के पास भेजा, मगर उनहों ने भी हमारी निशानियों के साथ ज़ुल्म किया। पास देखो के इन मुफ़्सिदों का क्या अंजाम हुआ
عَرَبِيوَقالَ موسىٰ يا فِرعَونُ إِنّي رَسولٌ مِن رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मूसा ने कहा : ऐ फ़िरऔन! निःसंदेह मैं सर्व संसार के पालनहार की ओर से भेजा हुआ (रसूल) हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha “Aey Firoun, main qayinaat ke maalik ki taraf se bheja hua aaya hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur musa (alh-e-salam) ney farmaya kay aey firaon! Mein rabbul aalameen ki taraf say payghumbr hun
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा "ऐ फिरौन, मैं क़ायनात के मालिक की तरफ से भेजा हुआ हूँ
عَرَبِيحَقيقٌ عَلىٰ أَن لا أَقولَ عَلَى اللَّهِ إِلَّا الحَقَّ ۚ قَد جِئتُكُم بِبَيِّنَةٍ مِن رَبِّكُم فَأَرسِل مَعِيَ بَني إِسرائيلَ
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हिन्दी (Al-Omari)मेरे लिए यही योग्य है कि अल्लाह पर सत्य के अतिरिक्त कोई बात न कहूँ। मैं तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से एक खुला प्रमाण लाया हूँ। इसलिए बनी इसराई को मेरे साथ भेज दे।
Roman Urdu (Maududi)Mera mansab yahi hai ke Allah ka naam lekar koi baat haqq ke siwa na kahoon. Main tum logon ke paas tumhare Rubb ki taraf se sareeh daleel e mamuriyat lekar aaya hoon. Lihaza tu bani Israel ko mere saath bhej de.”
Roman Urdu (Junagarhi)Meray liye yehi shayaan hai kay ba-juz sach kay Allah ki taraf koi baat mansoob na keroonmein tumharay pass tumhara rab ki taraf say aik bari daleel bhi laya hun so tu bani israeel ko meray sath bhej dey
Devnagri Urdu (Maududi)मेरा मनसब यहीं है के अल्लाह का नाम लेकर कोई बात हक़ के सिवा ना कहूँ। मैं तुम लोगों के पास तुम्हारे रब की।" तरफ से सारी दलील ए ममुरियत लेकर आया हूं। लिहाजा तू बनी इजराइल को मेरे साथ भेज दे।”
عَرَبِيقالَ إِن كُنتَ جِئتَ بِآيَةٍ فَأتِ بِها إِن كُنتَ مِنَ الصّادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : यदि तुम कोई प्रमाण (चमत्कार) लाए हो, तो प्रस्तुत करो, यदि तुम सच्चों में से हो।
Roman Urdu (Maududi)Firoun ne kaha “agar tu koi nishani laya hai aur apne dawey (claim) mein saccha hai to usey pesh kar”
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon ney kaha agar aap koi moajza ley ker aaye hain to iss ko abb paish kijiye! Agar aap sachay hain
Devnagri Urdu (Maududi)फ़िरौन ने कहा "अगर तू कोई निशानी लाया है और अपने दावे (दावा) में सच्चा है तो उसे पेश कर"
عَرَبِيفَأَلقىٰ عَصاهُ فَإِذا هِيَ ثُعبانٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने अपनी लाठी फेंकी, तो अचानक वह एक प्रत्यक्ष अजगर बन गई।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne apna asa (staff/rod) phenka aur yakayak woh ek jeeta jaagta azdaha (serpant) tha
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap ney apna asa daal diya so dafatan woh saaf aik azdaha bann gaya
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने अपना आसा (कर्मचारी/रॉड) फेंक और यकायक वो एक जीता जागता अजदहा (सर्पेंट) था
عَرَبِيوَنَزَعَ يَدَهُ فَإِذا هِيَ بَيضاءُ لِلنّاظِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अपना हाथ निकाला, तो अचानक वह देखने वालों के लिए चमक रहा था।
Roman Urdu (Maududi)Usne apni jeb se haath nikala aur sab dekhne walon ke saamne woh chamak raha tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apna haath bhair nikala so woh yakayak sab dekhney walon kay roo baroo boht hi chamkta hua hogaya
Devnagri Urdu (Maududi)उसने अपनी जेब से हाथ निकला और सब देखने वालों के सामने वो चमक रहा था
عَرَبِيقالَ المَلَأُ مِن قَومِ فِرعَونَ إِنَّ هٰذا لَساحِرٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फ़िरऔन की जाति के प्रमुखों ने कहा : निश्चय यह तो एक दक्ष जादूगर है।
Roman Urdu (Maududi)Ispar Firoun ki qaum ke sardaron ne aapas mein kaha ke “yaqeenan yeh shaks bada maahir jaadugar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Qom-e-firaon mein jo sardar log thay unhon ney kaha kay waqaee yeh shaks bara maahir jadoogar hai
Devnagri Urdu (Maududi)इसपर फिरौन की क़ौम के सरदारों ने आपस में कहा के "यकीनन ये शक्स बड़ा माहिर जादूगर है
عَرَبِييُريدُ أَن يُخرِجَكُم مِن أَرضِكُم ۖ فَماذا تَأمُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह चाहता है कि तुम्हें तुम्हारी धरती से निकाल दे, तो तुम क्या आदेश देते हो?
Roman Urdu (Maududi)Tumhein tumhari zameen se be-dakhal karna chahta hai. Ab kaho kya kehte ho?”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh chahata hai kay tum ko tumhari sir zamin say bahir ker dey so tum log kiya mashwara detay ho
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हें तुम्हारी ज़मीन से बे-दखल करना चाहता है। अब कहो क्या कहते हो?”
عَرَبِيقالوا أَرجِه وَأَخاهُ وَأَرسِل فِي المَدائِنِ حاشِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : इसे और इसके भाई के मामले को स्थगित कर दो और नगरों में जमा करने वाले भेज दो।
Roman Urdu (Maududi)Phir un sab ne Firoun ko mashwara diya ke isey aur iske bhai ko intezar mein rakkhiye aur tamaam shehron mein harkarey (heralds) bhej dijiye
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha aap inn ko aur inn kay bhai ko mohlat dijiye aur shehron mein harkaaron ko bhej dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उन सब ने फिरौन को मशवरा दिया के इसके और इसके भाई को इंतजार में रखिए और तमाम शहरों में हरकारे (हेराल्ड) भेज दीजिए
عَرَبِييَأتوكَ بِكُلِّ ساحِرٍ عَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)वे तेरे पास हर कुशल जादूगर ले आएँ।
Roman Urdu (Maududi)Ke har maahir-e-fun jaadugar ko aapke paas le aayein
Roman Urdu (Junagarhi)Kay woh sab maahir jadoogaron ko aap kay pass laa ker hazir ker den
Devnagri Urdu (Maududi)के हर माहिर-ए-फन जादूगर को आपके पास ले आइए
عَرَبِيوَجاءَ السَّحَرَةُ فِرعَونَ قالوا إِنَّ لَنا لَأَجرًا إِن كُنّا نَحنُ الغالِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जादूगर फ़िरऔन के पास आए। उन्होंने कहा : यदि हम ही विजयी हुए, तो निश्चय हमें अवश्य कुछ पुरस्कार मिलेगा?
Roman Urdu (Maududi)Chunanchey jaadugar Firoun ke paas aa gaye. Unhon ne kaha “agar hum gaalib rahey to humein iska sila to zaroor milega?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh jadoogar firaon kay pass hazir huye kehney lagay kay agar hum ghalib aaye to hum ko koi bara sila milay ga
Devnagri Urdu (Maududi)चुनांचे जादूगर फिरौन के पास आ गए। उन्होन ने कहा “अगर हम गालिब रहे तो हमें इसका सिला तो जरूर मिलेगा?”
عَرَبِيقالَ نَعَم وَإِنَّكُم لَمِنَ المُقَرَّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : हाँ! और निश्चय तुम अवश्य निकटवर्तियों में से हो जाओगे ।
Roman Urdu (Maududi)Firoun ne jawab diya “haan, aur tum muqarrab e baargaah hogey”
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon ney kaha kay haan aur tum muqarrab logon mein shamil hojao gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौन ने जवाब दिया "हां, और तुम मुकर्रब ए बारगाह होंगे"
عَرَبِيقالوا يا موسىٰ إِمّا أَن تُلقِيَ وَإِمّا أَن نَكونَ نَحنُ المُلقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ मूसा! या तो तुम (पहले) फेंको, या हम ही फेंकने वाले हों?
Roman Urdu (Maududi)Phir unhon ne Moosa se kaha “tum phenkte ho ya hum phenkein?”
Roman Urdu (Junagarhi)Unn saahiron ney araz kiya aey musa! Khuwa aap daaliye aur ya hum hi daalen
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उनहों ने मूसा से कहा "तुम फेंकते हो या हम फेंकें?"
عَرَبِيقالَ أَلقوا ۖ فَلَمّا أَلقَوا سَحَروا أَعيُنَ النّاسِ وَاستَرهَبوهُم وَجاءوا بِسِحرٍ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)मूसा ने कहा : तुम्हीं फेंको। चुनाँचे जब उन्होंने (रस्सियाँ) फेंकीं, तो लोंगों की आँखों पर जादू कर दिया, और उन्हें सख़्त भयभीत कर दिया, और वे बहुत बड़ा जादू लेकर आए।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne jawab diya “tum hi phenko” unhon ne jo apne anchar [their rods]phenke to nigaahon ko mahsoor (enchanted the eyes) aur dilon ko khauf-zadah kardiya aur bada hi zabardast jaadu bana laye
Roman Urdu (Junagarhi)(musa alh-e-salam) ney farmaya kay tum hi dalo pur jab unhon ney dala to logon ki nazar bandi ker di aur unn per haibat ghalib ker di aur aik tarah ka bara jadoo dikhlaya
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने जवाब दिया "तुम ही फेंको" उन्होन ने जो अपने आंचर [उनकी छड़ें] फेंके तो निगाहों को महसूर (आंखों को मंत्रमुग्ध कर दिया) और दिलों को खौफ-जदा कर दिया और बड़ा ही जबरदस्त जादू बना लिया
عَرَبِي۞ وَأَوحَينا إِلىٰ موسىٰ أَن أَلقِ عَصاكَ ۖ فَإِذا هِيَ تَلقَفُ ما يَأفِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने मूसा को वह़्य की कि अपनी लाठी फेंको, तो अचानक वह उन चीज़ों को निगलने लगी, जो वे झूठ-मूठ बना रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Humne Moosa ko ishara kiya ke phenk apna asa, uska phenkna tha ke aan ki aan mein woh unke is jhoote tilism ko ningalta chala gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney (alh-e-salam) ko hukum diya kay apna asa daal dijiye! So asa ka daalna tha kay uss ney unn kay saray banay banaye khel ko nigalna shuroo kiya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने मूसा को इशारा किया के फेंक अपना आसा, उसका फेंकना था के आन की आन में वो उनके इस झूठे तिलिस्म को निंगालता चला गया
عَرَبِيفَوَقَعَ الحَقُّ وَبَطَلَ ما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः सत्य सामने आ गया और जो कुछ वे कर रहे थे, असत्य होकर रह गया।
Roman Urdu (Maududi)Is tarah jo haqq tha woh haqq saabit hua aur jo kuch unhon ne bana rakkha tha woh baatil hokar reh gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Pus haq zahir hogaya aur unhon ney jo kuch banaya tha sab jata raah
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह जो हक था वो हक साबित हुआ और जो कुछ अनहोन ने बना रक्खा था वो बातिल होकर रह गया
عَرَبِيفَغُلِبوا هُنالِكَ وَانقَلَبوا صاغِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अंततः वे उस जगह पराजित हो गए और अपमानित होकर लौटे।
Roman Urdu (Maududi)Firoun aur uske saathi maidan e muqable mein magloob huey aur (fatah-mand honay ke bajaye) ultey zaleel ho gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Pus woh log uss moqay per haar gaye aur khoob zaleel hoker phiray
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौन और उसके साथी मैदान ए मुकाबले में मगलूब हुए और (फतह-मंद होने के बजाये) उलटे जलील हो गए
عَرَبِيوَأُلقِيَ السَّحَرَةُ ساجِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जादूगर सजदे में गिर गए।
Roman Urdu (Maududi)Aur jaadugaron ka haal yeh hua ke goya kisi cheez ne andar se unhein sajde mein gira diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh jo saahir thay sajday mein gir gaye
Devnagri Urdu (Maududi)और जादूगरों का हाल ये हुआ के गोया किसी चीज ने अंदर से उनको सजदे में गिरा दिया
عَرَبِيقالوا آمَنّا بِرَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हम सर्व संसार के पालनहार पर ईमान लाए।
Roman Urdu (Maududi)Kehne lagey “ humne maan liya Rabbul aalameen ko
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney lagay hum eman laye rabbul aalameen per
Devnagri Urdu (Maududi)कहने लगे "हमने मान लिया रब्बुल आलमीन को
عَرَبِيرَبِّ موسىٰ وَهارونَ
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हिन्दी (Al-Omari)मूसा तथा हारून के पालनहार पर।
Roman Urdu (Maududi)Us Rubb ko jisey Moosa aur Haroon maantey hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Jo musa aur haroon ka bhi rab hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमें रुब को जिसने मूसा और हारून मानते हैं"
عَرَبِيقالَ فِرعَونُ آمَنتُم بِهِ قَبلَ أَن آذَنَ لَكُم ۖ إِنَّ هٰذا لَمَكرٌ مَكَرتُموهُ فِي المَدينَةِ لِتُخرِجوا مِنها أَهلَها ۖ فَسَوفَ تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फ़िरऔन ने कहा : इससे पहले कि मैं तुम्हें अनुमति दूँ, तुम उसपर ईमान ले आए? निःसंदेह यह एक चाल है, जो तुमने इस नगर में चली है, ताकि उसके निवासियों को उससे निकाल दो! तो शीघ्र ही तुम (इसका परिणाम) जान लोगे।
Roman Urdu (Maududi)Firoun ne kaha “ tum ispar iman le aaye qabl iske ke main tumhein ijazat doon? Yaqeenan yeh koi khufiya saazish thi jo tum logon ne is daar-us-sultanat mein ki taa-ke iske maalikon ko iqtedar se be-dakhal kardo. Accha to iska nateeja ab tumhein maloom hua jata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon kehney laga tum musa per eman laye hobaghair iss kay kay mein tum ko ijazat doon? Be-shak yeh saazish thi jiss per tumhara amal daramad hua hai iss shehar mein takay tum sab iss shehar say yahan kay rehney walon ko bahir nikal do. So abb tum ko haqeeqat maloom hui jati hai
Devnagri Urdu (Maududi)फ़िरौन ने कहा "तुम इसपर ईमान ले आए क़ब्ल इसके मैं तुम्हें इजाज़त दूं? यकीनन ये कोई ख़ुफ़िया साज़िश थी जो तुम लोगों ने इस दार-उस-सल्तनत में की ता-के इसके मालिकों को इक्तेदार से बे-दख़ल करदो नतीजा अब तुम्हें मालूम हुआ जाता है
عَرَبِيلَأُقَطِّعَنَّ أَيدِيَكُم وَأَرجُلَكُم مِن خِلافٍ ثُمَّ لَأُصَلِّبَنَّكُم أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय मैं अवश्य तुम्हारे हाथ और तुम्हारे पाँव विपरीत दिशाओं से बुरी तरह काटूँगा, फिर तुम सभी को अवश्य सूली चढ़ा दूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Main tumhare haath paon mukhalif simton se katwa dunga aur uske baad tum sabko suli par chadhaunga.”
Roman Urdu (Junagarhi)Mein tumharay aik taraf kay haath aur doosri taraf kay paon kaaton ga. Phir tum sab ko sooli per latka doon ga
Devnagri Urdu (Maududi)मैं तुम्हारे हाथ पांव मुखालिफ सिमटन से काटवा दूंगा और उसके बाद तुम सबको सूली पर चढ़ाऊंगा।
عَرَبِيقالوا إِنّا إِلىٰ رَبِّنا مُنقَلِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : निश्चय हम अपने पालनहार ही की ओर लौटने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “bahar-haal humein palatna apne Rubb hi ki taraf hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney jawab diya kay hum (marr ker) apney maalik hi kay pass jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने जवाब दिया "बहार-हाल हमें पलटना अपनी रब ही की तरफ है
عَرَبِيوَما تَنقِمُ مِنّا إِلّا أَن آمَنّا بِآياتِ رَبِّنا لَمّا جاءَتنا ۚ رَبَّنا أَفرِغ عَلَينا صَبرًا وَتَوَفَّنا مُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और तू हमसे केवल इस बात का बदला ले रहा है कि हम अपने पालनहार की निशानियों पर ईमान ले आए, जब वे हमारे पास आईं? ऐ हमारे पालनहार! हमपर धैर्य उड़ेल दे और हमें इस दशा में (संसार से) उठा कि तेरे आज्ञाकारी हों।
Roman Urdu (Maududi)Tu jis baat par humse intiqam lena chahta hai woh iske siwa nahin ke hamare Rubb ki nishaniyan jab hamare saamne aa gayi to humne umhein maan liya . Aey Rubb, humpar sabr ka faizan kar aur humein duniya se utha to is haal mein ke hum tere farma-bardaar hon”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tu ney hum mein konsa aib dekha hai ba-juz isskay kay hum apney rab per eman ley aaye jab woh humaray pass aaye. Aey humaray rab! Humaray upper sabar ka faizan farma aur humari jaan halat-e-islam per nikal
Devnagri Urdu (Maududi)तू जिस बात पर हमसे इंतिक़ाम लेना चाहता है वो इसके सिवा नहीं के हमारे रब की निशानियां जब हमारे सामने आ गई तो हमने उन्हें मान लिया। ऐ रब, हमपर सब्र का फैजान कर और हमें दुनिया से उठा तो इस हाल में के हम तेरे फरमा-बरदार हों”
عَرَبِيوَقالَ المَلَأُ مِن قَومِ فِرعَونَ أَتَذَرُ موسىٰ وَقَومَهُ لِيُفسِدوا فِي الأَرضِ وَيَذَرَكَ وَآلِهَتَكَ ۚ قالَ سَنُقَتِّلُ أَبناءَهُم وَنَستَحيي نِساءَهُم وَإِنّا فَوقَهُم قاهِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और फ़िरऔन की जाति के प्रमुखों ने (उससे) कहा : क्या तुम मूसा और उसकी जाति को छोड़े रखोगे कि वे देश में बिगाड़ फैलाएँ तथा तुम्हें और तुम्हारे पूज्यों को छोड़ दें? उसने कहा : हम उनके बेटों को बुरी तरह क़त्ल करेंगे और उनकी स्त्रियों को जीवित रखेंगे। निश्चय हम उनपर पूर्ण नियंत्रण रखने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Firoun se uski qaum ke Sardaron ne kaha “kya tu Moosa aur uski qaum ko yunhi chodh dega ke mulk mein fasaad phaylayein aur woh teri aur tere maboodon ki bandagi chodh baithey?” Firoun ne jawab diya “main unke beton ko qatal karaunga aur unki auraton ko jeeta rehne dunga. Hamare iqtedar ki giraft unpar mazboot hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur qom-e-fiaon kay sardaron ney kaha kay kiya aap musa (alh-e-salam) aur unn ki qom ko yun hi rehney den gay kay woh mulk mein fasaad kertay phiren aur woh aap ko aur aap kay maboodon ko tarak kiye rahen. Firaon ney kaha kay hum abhi inn logon kay beton ko qatal kerna shuroo ker den gay aur aurton ko zinda rehney den gay aur hum ko inn per her tarah ka zor hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौन से उसकी क़ौम के सरदारों ने कहा “क्या तू मूसा और उसकी क़ौम को यूं ही छोड़ देगा के मुल्क में फ़साद फैलाएं और वो तेरी और तेरे माबूदों की बंदगी छोड़ बैठे?” फ़िरौन ने जवाब दिया “मैं उनके बेटों को क़त्ल करुंगा और उनकी औरतों को जीता रहने दूंगा। हमारे इक्तेदार की गिरफ़्तार उन पर मज़बूत है"
عَرَبِيقالَ موسىٰ لِقَومِهِ استَعينوا بِاللَّهِ وَاصبِروا ۖ إِنَّ الأَرضَ لِلَّهِ يورِثُها مَن يَشاءُ مِن عِبادِهِ ۖ وَالعاقِبَةُ لِلمُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)मूसा ने अपनी जाति से कहा : अल्लाह से सहायता माँगो और धैर्य से काम लो। निःसंदेह धरती अल्लाह की है। वह अपने बंदों में जिसे चाहता है, उसका वारिस (उत्तराधिकारी) बनाता है। और अच्छा परिणाम परहेज़गारों के लिए है।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne apni qaum se kaha “Allah se madad maango aur sabr karo, zameen Allah ki hai, apne bandon mein se jisko chahta hai uska waris bana deta hai. Aur aakhri kamiyabi unhi ke liye jo ussey darte huey kaam karein”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) ney apni qom say farmaya Allah Taalaa ka sahara hasil kero aur sabar kero yeh zamin Allah Taalaa ki hai apney bandon mein say jiss ko chahaye woh maalik bana dey aur akheer kaamyabi unhi ki hoti hai jo Allah say dartay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने अपनी क़ौम से कहा "अल्लाह से मदद मांगो और सब्र करो, ज़मीन अल्लाह की है, अपने बंदों में से जिसका चाहता है उसका वारिस बना देता है। और आखिरी कामयाबियां उनके लिए जो उससे डरते हुए काम करें”
عَرَبِيقالوا أوذينا مِن قَبلِ أَن تَأتِيَنا وَمِن بَعدِ ما جِئتَنا ۚ قالَ عَسىٰ رَبُّكُم أَن يُهلِكَ عَدُوَّكُم وَيَستَخلِفَكُم فِي الأَرضِ فَيَنظُرَ كَيفَ تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हम तुम्हारे आने से पहले भी सताए गए और तुम्हारे आने के बाद भी (सताए जा रहे हैं)! (मूसा ने) कहा : निकट है कि तुम्हारा पालनहार तुम्हारे शत्रु को विनष्ट कर दे और तुम्हें देश में ख़लीफ़ा बना दे। फिर देखे कि तुम कैसे कर्म करते हो?
Roman Urdu (Maududi)Uski qaum ke logon ne kaha “tere aane se pehle bhi hum sataye jatey thay aur ab tere aane par bhi sataye jaa rahey hain”. Usne jawab diya “qareeb hai woh waqt ke tumhara Rubb tumhare dushman ko halaak karde aur tumko zameen mein khalifa banaye. Phir dekhe ke tum kaise amal karte ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Qom kay log kehney lagay kay hum to hamesha museebat hi mein rahey aap ki tashreef aawari say qabal bhi aur aap ki tashreef aawari kay baad bhi. Musa (alh-e-salam) ney farmaya kay boht jald Allah tumharay dushman ko halak ker dey ga aur bajaye unn kay tum ko iss sir zamin ka khalifa bana dey ga phir tumhara tarz-e-amal dekhay ga
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी क़ौम के लोगों ने कहा “तेरे आने से पहले भी हम सताए जाते थे और अब तेरे आने पर भी सताए जा रहे हैं”। उसने जवाब दिया "क़रीब है वो वक़्त के तुम्हारा रब तुम्हारे दुश्मन को हलाक करदे और तुमको ज़मीन में ख़लीफ़ा बने। फिर देखे के तुम कैसे अमल करते हो"
عَرَبِيوَلَقَد أَخَذنا آلَ فِرعَونَ بِالسِّنينَ وَنَقصٍ مِنَ الثَّمَراتِ لَعَلَّهُم يَذَّكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने फ़िरऔन की जाति को अकालों तथा फलों की कमी से ग्रस्त कर दिया, ताकि वे शिक्षा ग्रहण करें।
Roman Urdu (Maududi)Humne Firoun ke logon ko kayi saal tak kehat (drought) aur paidawaar ki kami mein mubtila rakkha ke shayad unko hosh aaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney firaon walon ko mubtila kiya qehat saali mein aur phalon ki kum peda waari mein takay woh naseehat qabool keren
Devnagri Urdu (Maududi)हमने फिरौन के लोगों को कई साल तक कहा (सूखा) और बर्बादी की कमी में मुब्तिला रक्खा के शायद उनको होश आए
عَرَبِيفَإِذا جاءَتهُمُ الحَسَنَةُ قالوا لَنا هٰذِهِ ۖ وَإِن تُصِبهُم سَيِّئَةٌ يَطَّيَّروا بِموسىٰ وَمَن مَعَهُ ۗ أَلا إِنَّما طائِرُهُم عِندَ اللَّهِ وَلٰكِنَّ أَكثَرَهُم لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उन्हें संपन्नता प्राप्त होती, तो कहते कि यह तो हमारा हक़ है और यदि उन्हें कोई विपत्ति पहुँचती, तो मूसा और उसके साथियों से अपशकुन लेते। सुन लो! उनका अपशकुन तो अल्लाह ही के पास है, परंतु उनमें से अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Magar unka haal yeh tha ke jab accha zamana aata to kehte ke hum isi ke mustahiq hain, aur jab bura zamana aata to Moosa aur uske saathiyon ko apne liye faal-e-badh (misfortune) thehrate, halanke dar haqeeqat unki faal e badh to Allah ke paas thi, magar un mein se aksar be-ilm thay
Roman Urdu (Junagarhi)So jab inn per khushali aajati to kehtay kay yeh to humaray liye hona hi chahaiye aur agar inn ko koi bad haali paish aati to musa (alh-e-salam) aur unn kay sathiyon ki nahoosat batlatay. Yaad rakho kay inn nahoosat Allah Taalaa kay pass hai lekin inn kay aksar log nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उनका हाल ये था के जब अच्छा जमाना आता तो कहते के हम इसी के मुस्तहिक हैं, और जब बुरा जमाना आता तो मूसा और उसके साथियों को अपने लिए फल-ए-बध (दुर्भाग्य) ठहरते, हालंके दर हकीकत उनकी फ़ल ए बद तो अल्लाह के पास थी, मगर उन में से अक्सर इल्म था
عَرَبِيوَقالوا مَهما تَأتِنا بِهِ مِن آيَةٍ لِتَسحَرَنا بِها فَما نَحنُ لَكَ بِمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने कहा : तू हमपर जादू करने के लिए हमारे पास जो निशानी भी ले आए, हम तेरा विश्वास करने वाले नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne Moosa se kaha ke “tu humein mahsoor karne ke (to enchant us) liye khwa koi nishani le aaye, hum to teri baat maanne waley nahin hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yun kehtay kaisi hi baat humaray samney lao kay inn kay zariye say hum per jadoo chalao jab bhi hum tumhari baat hergiz na maanen gay
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने मूसा से कहा के "तू हमें महसूर करने के (हमें मंत्रमुग्ध करने के लिए) लिए ख्वा कोई निशानी ले आए, हम तो तेरी बात मन्ने वाले नहीं हैं"
عَرَبِيفَأَرسَلنا عَلَيهِمُ الطّوفانَ وَالجَرادَ وَالقُمَّلَ وَالضَّفادِعَ وَالدَّمَ آياتٍ مُفَصَّلاتٍ فَاستَكبَروا وَكانوا قَومًا مُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उनपर तूफ़ान भेजा और टिड्डियाँ और जुएँ और मेंढक और रक्त, जो अलग-अलग निशानियाँ थीं। फिर भी उन्होंने अभिमान किया और वे अपराधी लोग थे।
Roman Urdu (Maududi)Aakir e kaar humne unpar toofaan bheja, tiddi-dal chodey, sarsaryan phaylaye (and locusts, and the lice ), mendak(frogs) nikale, aur khoon barsaya. Sab nishaniyan alag alag karke dikhaye, magar woh sarkashi kiye chaley gaye aur woh badey hi mujreem log thay
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney unn per toofan bheja aur tiddiyan aur ghun ka keera aur mendak aur khoon kay yeh sab khulay khulay moajzay thay. So woh takabbur kertay rahey aur woh log kuch tha hi jaraeem paisha
Devnagri Urdu (Maududi)आकर ए कार हमने उनपर तूफान भेजा, टिड्डी-दाल छोड़े, सरसरियां फैलाए (और टिड्डियां, और) जूँ), मेंढक (मेंढक) निकले, और खून बरसाया। सब निशानियां अलग-अलग करके दिखाये, मगर वो सरकशी किये चले गये और वो बदले ही मुजरिम लोग थे
عَرَبِيوَلَمّا وَقَعَ عَلَيهِمُ الرِّجزُ قالوا يا موسَى ادعُ لَنا رَبَّكَ بِما عَهِدَ عِندَكَ ۖ لَئِن كَشَفتَ عَنَّا الرِّجزَ لَنُؤمِنَنَّ لَكَ وَلَنُرسِلَنَّ مَعَكَ بَني إِسرائيلَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनपर यातना आती, तो कहते : ऐ मूसा! तुम अपने पालनहार से हमारे लिए उस प्रतिज्ञा के आधार पर दुआ करो, जो उसने तुमसे कर रखी है। यदि तुम (अपनी दुआ से) हमसे यह यातना दूर कर दो, तो हम अवश्य ही तुमपर ईमान ले आएँगे और तुम्हारे साथ बनी इसराईल को अवश्य भेज देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jab kabhi unpar balaa nazil ho jati to kehte “ aey Moosa , tujhey apne Rubb ki taraf se jo mansab hasil hai uski bina par hamare haqq mein dua kar. Agar ab ke tu humpar se yeh balaa talwa de to hum teri baat maan lenge aur bani Israel ko tere saath bhej denge”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab unn per koi azab waqey hota to yun kehtay kay aey musa! Humaray liye apney rab say iss baat ki dua ker dijiye! Jiss ka uss ney aap say ehad ker rakha hai agar aap iss azab ko hum say hata den to hum zaroor zaroor aap kay kehney say eman ley aayen gay aur hum bani israeel ko bhi (raah ker kay) aap kay humrah ker den gay
Devnagri Urdu (Maududi)जब कभी अनपर बला नाज़िल हो जाती तो कहते " ऐ मूसा, तुझे अपने रब की तरफ से जो मनसब हासिल है उसकी बिना पर हमारे हक़ में दुआ कर।" अगर अब के तू हमपर से ये बला तलवा दे तो हम तेरी बात मान लेंगे और बानी इजराइल को तेरे साथ भेज देंगे”
عَرَبِيفَلَمّا كَشَفنا عَنهُمُ الرِّجزَ إِلىٰ أَجَلٍ هُم بالِغوهُ إِذا هُم يَنكُثونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब हम उनसे यातना को उस समय तक दूर कर देते, जिसे वे पहुँचने वाले होते, तो अचानक वे वचन भंग कर देते थे।
Roman Urdu (Maududi)Magar jab hum unpar se apna azaab ek waqt e muqarrar tak keliye, jisko woh bahar haal pahunchne waley thay, hata letey to woh yaklakht apne ahad se phir jatey
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab unn sya iss azab ko aik khaas waqt tak kay uss tak unn ko phonchna tha hata detayto woh foran hi ehad shikni kerney lagtay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जब हम उनपार से अपना अजाब एक वक्त ए मुकर्रर तक केलिये, जिसको वो बाहर हाल पहन लेने वाले थे, हटा लेते तो वो यकलख्त अपने अहद से फिर जाते हैं
عَرَبِيفَانتَقَمنا مِنهُم فَأَغرَقناهُم فِي اليَمِّ بِأَنَّهُم كَذَّبوا بِآياتِنا وَكانوا عَنها غافِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अंततः हमने उनसे बदला लिया और उन्हें सागर में डुबो दिया, इस कारण कि उन्होंने हमारी आयतों (निशानियों) को झुठलाया और वे उनसे ग़ाफ़िल थे।
Roman Urdu (Maududi)Tab humne unsey inteqam liye aur unhein samandar mein garq kardiya kyunke unhon ne hamari nishaniyon ko jhutlaya tha aur unsey be-parwa hogaye thay
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney unn say badla liya yani unn ko darya mein gharq ker diya iss sabab say kay woh humari aayaton ko jhutlatay thay aur inn say bilkul hi ghaflat kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)तब हमने उनसे इंतकाम लिया और उन्हें समंदर में ग़र्क करदिया क्योंके उन्होन ने हमारी निशानियों को झुटलाया था और उन्हें बे-परवा होगा थाय
عَرَبِيوَأَورَثنَا القَومَ الَّذينَ كانوا يُستَضعَفونَ مَشارِقَ الأَرضِ وَمَغارِبَهَا الَّتي بارَكنا فيها ۖ وَتَمَّت كَلِمَتُ رَبِّكَ الحُسنىٰ عَلىٰ بَني إِسرائيلَ بِما صَبَروا ۖ وَدَمَّرنا ما كانَ يَصنَعُ فِرعَونُ وَقَومُهُ وَما كانوا يَعرِشونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उन लोगों को जो कमज़ोर समझे जाते थे, उस धरती के पूर्व और पश्चिम के भूभागों का वारिस बना दिया, जिसमें हमने बरकत रखी है। और (इस प्रकार) बनी इसराईल के हक़ में (ऐ नबी!) आपके पालनहार का शुभ वचन पूरा हो गया, इस कारण कि उन्होंने धैर्य से काम लिया। तथा फ़िरऔन और उसकी जाति के लोग जो कुछ बनाते थे और वे जो इमारते ऊँची करते थे, हमने उन्हें नष्ट कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur unki jagah humne un logon ko jo kamzoar bana kar rakkhey gaye thay, us sar-zameen ke mashriq o magrib ka waris bana diya jisey humne barakaton se maala maal kiya tha. Is tarah bani-Israel ke haqq mein tere Rubb ka wada e khair pura hua kyunke unhon ne sabr se kaam liya tha aur Firoun aur uski qaum ka woh sab kuch barbaad kardiya gaya jo woh banate aur chadhate thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unn logon ko jo kay bilkul kamzor shumat kiye jatay thay uss sir zamin kay poorab pachim ka maalik bana diya jiss mein hum ney barkat rakhi hai aur aap kay rab kay nek wada bani israeel kay haq mein unn kay sabar ki waja say poora hogaya aur hum ney firaon kay aur uss ki qom kay saakhita per daakhita kaar khanon ko aur jo kuch woh oonchi oonchi emarten banwatay thay sab ko darhum barhum ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)और उनकी जगह हमने उन लोगों को जो कमज़ोर बना कर रक्खे गए थे, उस सर-ज़मीन के मशरिक़ ओ मगरिब का वारिस बना दिया जिसे हमने बराकतों से माला माल किया था। इस तरह बानी-इज़राइल के हक़ में तेरे रुब का वादा ए ख़ैर पूरा हुआ क्योंकि उन्होंने सब्र से काम लिया था और फिरौन और उसकी क़ौम का वो सब कुछ बर्बाद कर दिया गया जो वो बनाते और चढ़ते थे
عَرَبِيوَجاوَزنا بِبَني إِسرائيلَ البَحرَ فَأَتَوا عَلىٰ قَومٍ يَعكُفونَ عَلىٰ أَصنامٍ لَهُم ۚ قالوا يا موسَى اجعَل لَنا إِلٰهًا كَما لَهُم آلِهَةٌ ۚ قالَ إِنَّكُم قَومٌ تَجهَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने बनी इसराईल को सागर के पार उतार दिया। तो वे एक ऐसी जाति पर आए, जो अपनी कुछ मूर्तियों पर जमी बैठी थी। उन्होंने कहा : ऐ मूसा! हमारे लिए कोई पूज्य बना दीजिए, जैसे इनके कुछ पूज्य हैं। (मूसा ने) कहा : निःसंदेह तुम ऐसे लोग हो जो नादानी करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Bani Israel ko humne samandar se guzaar diya, phir woh chale aur raaste mein ek aisi qaum par unka guzar hua jo apne chandh buthon (idols) ki girwida (devoted) hui thi. Kehne lagey, “Aey Moosa , hamare liye bhi koi aisa mabood bana de jaise in logon ke mabood hain”.Moosa ne kaha “tum log badi nadaani ki baatein karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney bani israeel ko darya kay paar utaar diya. Pus unn logon ka aik qom per guzar hua jo apney chand button say lagay bethay thay kehney lagay aey musa! Humaray liye bhi aik mabood aisa hi muqarrar ker dijiye! Jaisay inn kay yeh mabood hain. Aap ney farmaya kay waqaee tum logon mein bari jahalat hai
Devnagri Urdu (Maududi)बानी इज़राइल को हमने समंदर से गुज़र दिया, फिर वो चले और रास्ते में एक ऐसी क़ौम पर उनका गुज़र हुआ जो अपने चंद बुथों (मूर्तियों) की गिरविदा (समर्पित) हुई थी। कहने लगे, "ऐ मूसा, हमारे लिए भी कोई ऐसा माबूद बना दे जैसे लोगों के माबूद हैं"। मूसा ने कहा "तुम लोग बड़ी नादानी की बातें करते हो
عَرَبِيإِنَّ هٰؤُلاءِ مُتَبَّرٌ ما هُم فيهِ وَباطِلٌ ما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ये लोग जिस काम में लगे हुए हैं, निश्चय ही वह नष्ट किया जाने वाला है और वे जो कुछ करते चले आ रहे हैं, बिलकुल असत्य है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log jis tareeqe ki pairwi kar rahey hain woh to barbaad honay wala hai aur jo amal woh kar rahey hain woh sarasar baatil hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log jiss kaam mein lagay hain yeh tabah kiya jayega aur inn kay yeh kaam mehaz bey bunyad hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग जिस तारीक की जोड़ी बना रहे हैं वो तो बरबाद होने वाला है और जो अमल वो कर रहे हैं वो सरसर बातिल है।”
عَرَبِيقالَ أَغَيرَ اللَّهِ أَبغيكُم إِلٰهًا وَهُوَ فَضَّلَكُم عَلَى العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : क्या मैं अल्लाह के सिवा तुम्हारे लिए कोई पूज्य तलाश करूँ? हालाँकि उसने तुम्हें सारे संसार वालों पर श्रेष्ठता प्रदान की है।
Roman Urdu (Maududi)Phir Moosa ne kaha “kya main Allah ke siwa koi aur mabood tumhare liye talash karoon? Halaanke woh Allah hi hai jisne tumhein duniya bhar ki qaumon par fazilat bakshi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Farmaya kiya Allah Taalaa key siwa aur kissi ko tumhara mabood tajweez ker doon? Halankay uss ney tum ko tamam jahaan walon per foqiyat di hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर मूसा ने कहा "क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और माबूद तुम्हारे लिए तलाश करूं? हलांके वो अल्लाह ही है जिसने तुम्हें दुनिया भर की क़ौम पर फ़ज़िलत बख्शी है
عَرَبِيوَإِذ أَنجَيناكُم مِن آلِ فِرعَونَ يَسومونَكُم سوءَ العَذابِ ۖ يُقَتِّلونَ أَبناءَكُم وَيَستَحيونَ نِساءَكُم ۚ وَفي ذٰلِكُم بَلاءٌ مِن رَبِّكُم عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (वह समय याद करो) जब हमने तुम्हें फ़िरऔनियों से मुक्ति दिलाई, जो तुम्हें बुरी यातना देते थे; तुम्हारे पुत्रों को बुरी तरह मार डालते थे तथा तुम्हारी नारियों को जीवित रहने देते थे। इसमें तुम्हारे पालनहार की ओर से बहुत बड़ी परीक्षा थी।
Roman Urdu (Maududi)Aur (Allah farmata hai) woh waqt yaad karo jab humne Firoun walon se tumhein nijaat di jinka haal yeh tha ke tumhein sakht azaab mein mubtila rakhte thay, tumhare beton (sons) ko qatal karte aur tumhari auraton ko zinda rehne dete thay aur is mein tumhare Rubb ki taraf se tumhari badi aazmaish thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur qoh waqt yaad kero jab hum ney tum ko firaon walon say bacha liya jo tum ko bari sakht takleef phonchatay thay. Tumharay beton ko qatal ker daaltay thay aur tumhari aurton ko zinda chor detay thay aur iss mein tumharay perwerdigar ki taraf say bari bhari aazmaeesh thi
Devnagri Urdu (Maududi)और (अल्लाह फरमाता है) वो वक़्त याद करो जब हमने फिरौन वालों से तुम्हें निजात दी जिनका हाल ये था के तुम्हें अज़ाब में मुब्तिला रखते थे, तुम्हारे बेटे (बेटों) को कत्ल करते थे और तुम्हारी औरतों को जिंदा रहने देते थे और इस में तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारी बड़ी आजमाइश थी
عَرَبِي۞ وَواعَدنا موسىٰ ثَلاثينَ لَيلَةً وَأَتمَمناها بِعَشرٍ فَتَمَّ ميقاتُ رَبِّهِ أَربَعينَ لَيلَةً ۚ وَقالَ موسىٰ لِأَخيهِ هارونَ اخلُفني في قَومي وَأَصلِح وَلا تَتَّبِع سَبيلَ المُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने मूसा से तीस रातों का वादा किया और उसकी पूर्ति दस रातों से कर दी। तो तेरे पालनहार की निर्धारित अवधि चालीस रातें पूरी हो गई। तथा मूसा ने अपने भाई हारून से कहा : तुम मेरी जाति में मेरा उत्तराधिकारी बनकर रहना, और सुधार करते रहना तथा उपद्रवकारियों की नीति न अपनाना।
Roman Urdu (Maududi)Humne Moosa ko tees (thirty) shab o roz ke liye [koh e sina (mount sinai) par] talab kiya aur baad mein dus (ten) din ka aur izafa kardiya, is tarah uske Rubb ki muqarrar karda muddat puray chalis (forty) din ho gayi. Moosa ne chalte huey apne bhai Haroon se kaha ke “ mere pichey tum meri qaum mein meri jaanasheeni (take my place) karna aur theek kaam karte rehna aur bigaad paida karne walon ke tareeqe par na chalna”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney musa (alh-e-salam) say tees raaton kay wada kiya aur dus raat mazeed say inn tees raaton ko poora kiya. So inn kay perwerdigar ka waqt pooray chalees raat ka hogaya. Aur musa (alh-e-salam) ney apney bhai haroon (alh-e-salam) say kaha kay meray baad inn kay intizam rakhna aur islah kertay rehna aur bad nazam logon ki raaye per amal mat kerna
Devnagri Urdu (Maududi)हमने मूसा को तीस (तीस) शब ओ रोज़ के लिए [कोह ए सीना (माउंट सिनाई) पर] तालाब किया और बाद में दस (दस) दिन का और इज़ाफा करदिया, इस तरह उसके रब की मुकर्रर करदा मुद्दत पूरे चालीस (चालीस) दिन हो गई। मूसा ने चलते हुए अपने भाई हारून से कहा के "मेरे पीछे तुम मेरी क़ौम में मेरी जानशीनी (मेरी जगह ले लो) करना और ठीक काम करते रहना और बिगाड़ पैदा करने वालों के तारीख पर ना चलना"
عَرَبِيوَلَمّا جاءَ موسىٰ لِميقاتِنا وَكَلَّمَهُ رَبُّهُ قالَ رَبِّ أَرِني أَنظُر إِلَيكَ ۚ قالَ لَن تَراني وَلٰكِنِ انظُر إِلَى الجَبَلِ فَإِنِ استَقَرَّ مَكانَهُ فَسَوفَ تَراني ۚ فَلَمّا تَجَلّىٰ رَبُّهُ لِلجَبَلِ جَعَلَهُ دَكًّا وَخَرَّ موسىٰ صَعِقًا ۚ فَلَمّا أَفاقَ قالَ سُبحانَكَ تُبتُ إِلَيكَ وَأَنا أَوَّلُ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब मूसा हमारे निर्धारित समय पर आ गया और उसके पालनहार ने उससे बात की, तो उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मुझे दिखा कि मैं तुझे देखूँ। (अल्लाह ने) फरमाया : तू मुझे कदापि नहीं देख सकेगा। लेकिन इस पर्वत की ओर देख! यदि वह अपने स्थान पर स्थिर रहा, तो तू मुझे देख लेगा। फिर जब उसका पालनहार पर्वत के समक्ष प्रकट हुआ, तो उसे चूर-चूर कर दिया और मूसा बेहोश होकर गिर गया। फिर जब उसे होश आया, तो उसने कहा : तू पवित्र है! मैंने तेरी ओर तौबा की और मैं ईमान लाने वालों में सबसे पहला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh hamare muqarrar kiye huey waqt par pahuncha aur uske Rubb ne ussey kalaam kiya to usne ilteja ki ke “Aey Rubb, mujhey yaaraye nazar de ke main tujhey dekhun” . Farmaya “ Tu mujhey nahin dekh sakta, haan zara saamne ke pahad ki taraf dekh, agar woh apni jagah qayam reh jaye to albatta tu mujhey dekh sakega”. Chunanchey uske Rubb ne jab pahad par tajalli ki to usey reza reza kardiya aur Moosa gash kha kar gir pada (fell down in a swoon), jab hosh aaya to bola “paak hai teri zaat, main tere huzoor tawba karta hoon aur sabse pehla iman laney wala main hoon.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab musa (alh-e-salam) humaray waqt per aaye aur unn kay rab ney unn say baaten kin to arz kiya kay aey meray perwerdigar! Apna deedar mujh ko kera dijiye kay mein aik nazar aap ko dekh loon irshad hua kay tum mujh ko hergiz nahi dekh saktay lekin tum iss pahar ki taraf dekhtay raho woh agar apni jagah per bar qarar raha to tum bhi mujhay dekh sako gay. Pus jab unn kay rab ney pahar per tajalli farmaee to tajalli ney uss kay purkhachay ura diye aur musa (alh-e-salam) bey hosh ho ker girr paray. Phir jab hosh mein aaye to arz kiya be-shak aap ki zaat pak hai mein aap ki janab mein tauba kerta hun aur mein sab say pehlay aap per eman laney wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो हमारे मुकर्रर किए हुए वक्त पर पहुंच गए और उसके रब ने उसे कलाम किया तो उसने इल्तेजा की के "ए रब, मुझे याराए नजर दे के मैं तुझे देखूं"। फरमाया “तू मुझे नहीं देख सकता, हां जरा सामने के पहाड़ की तरफ देख, अगर वो अपनी जगह कायम रह जाए तो अलबत्ता तू मुझे देख सकेगा।” चुनान्चे उसके रब ने जब पहाड़ पर तजल्ली की तो उसे रेजा कर दिया और मूसा गश खा कर गिर पड़ा, जब होश आया तो बोला “पाक है तेरी जात, मैं तेरे हुजूर तौबा करता हूं और सबसे पहला ईमान लाने वाला मैं हूं।”
عَرَبِيقالَ يا موسىٰ إِنِّي اصطَفَيتُكَ عَلَى النّاسِ بِرِسالاتي وَبِكَلامي فَخُذ ما آتَيتُكَ وَكُن مِنَ الشّاكِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने कहा : ऐ मूसा! निःसंदेह मैंने तुम्हें अपने संदेशों तथा अपने वार्तालाप के साथ लोगों पर चुन लिया है। अतः जो कुछ मैंने तुम्हें प्रदान किया है, उसे ले लो और आभार प्रकट करने वालों में से हो जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Farmaya “Aey Moosa , maine tamaam logon par tarjeeh dekar tujhey muntakhab kiya ke meri paigambari karey aur mujhse hum-kalaam ho, pas jo kuch main tujhey doon usey le aur shukar baja laa”
Roman Urdu (Junagarhi)Irshad hua kay aey musa! Mein ney payghubari aur apni hum kalaami say aur logon per tum ko imtiaz diya hai to jo kuch tum ko mein ney ata kiya hai uss ko lo aur shukar kero
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया "ऐ मूसा, मैंने तमाम लोगों पर तरजीह देकर तुझे मुंतखब किया के मेरी पैगम्बरी करे और मुझे हम-कलाम हो, पास जो कुछ मैं तुझे दूं उसे ले और शुकर बजा ला"
عَرَبِيوَكَتَبنا لَهُ فِي الأَلواحِ مِن كُلِّ شَيءٍ مَوعِظَةً وَتَفصيلًا لِكُلِّ شَيءٍ فَخُذها بِقُوَّةٍ وَأمُر قَومَكَ يَأخُذوا بِأَحسَنِها ۚ سَأُريكُم دارَ الفاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसके लिए तख़्तियों पर हर चीज़ से संबंधित निर्देश और हर चीज़ का विवरण लिख दिया। (तथा कह दिया कि) इसे मज़बूती से पकड़ लो और अपनी जाति को आदेश दो कि वे उसके उत्तम निर्देशों का पालन करें। शीघ्र ही मैं तुम्हें अवज्ञाकारियों का घर दिखाऊँगा।
Roman Urdu (Maududi)Iske baad humne Moosa ko har shoba e zindagi ke mutaaliq naseehat aur har pehlu ke mutaaliq wazeh hidayat takhtiyon par likh kar de di, aur ussey kaha: “ in hidayaat ko mazboot haathon se sambhaal aur apni qaum ko hukum de ke inke behtar mafhoom ki pairwi karein. Anqareeb main tumhein fasiqon ke ghar dikhaunga
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney chand takhtiyon per her qisam ki naseehat aur her cheez ki tafseel unn ko likh ker di tum inn ko poori qooat say pakar lo aur apni qom ko hukum kero kay inn kay achay achay ehkaam per amal keren abb boht jald tum logon ko inn bey hukmon ka muqam dikhlata hun
Devnagri Urdu (Maududi)इसके बाद हमने मूसा को हर शोबा ए जिंदगी के मुतालिक हिदायत और हर पहलू के मुतालिक वाज़े हिदायत तख्तियों पर लिख कर दे दी, और उसे कहा: "हिदायत को मजबूत हाथों से संभाल और अपनी क़ौम को हुकुम दे के इनके बेहतर मफ़हूम की जोड़ी बनाएं। अनकारीब मैं तुम्हें फासीकों के घर दिखाऊंगा
عَرَبِيسَأَصرِفُ عَن آياتِيَ الَّذينَ يَتَكَبَّرونَ فِي الأَرضِ بِغَيرِ الحَقِّ وَإِن يَرَوا كُلَّ آيَةٍ لا يُؤمِنوا بِها وَإِن يَرَوا سَبيلَ الرُّشدِ لا يَتَّخِذوهُ سَبيلًا وَإِن يَرَوا سَبيلَ الغَيِّ يَتَّخِذوهُ سَبيلًا ۚ ذٰلِكَ بِأَنَّهُم كَذَّبوا بِآياتِنا وَكانوا عَنها غافِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)मैं अपनी आयतों (निशानियों) से उन लोगों को फेर दूँगा, जो धरती में नाहक़ बड़े बनते हैं। और यदि वे प्रत्येक निशानी देख लें, तब भी उसपर ईमान नहीं लाते। और यदि वे भलाई का मार्ग देख लें, तो उसे मार्ग नहीं बनाते और यदि गुमराही का मार्ग देखें, तो उसे मार्ग बना लेते हैं। यह इस कारण कि उन्होंने हमारी आयतों (निशानियों) को झुठलाया और वे उनसे ग़ाफ़िल थे।
Roman Urdu (Maududi)Main apne nishaniyon se un logon ki nigaahein pher dunga jo bagair kisi haqq ke zameen mein baday bantay hain, woh khwa koi nishani dekhlein kabhi uspar iman na layenge. Agar seedha raasta unke saamne aaye to usey ikhtiyar na karenge aur agar tedha raasta nazar aaye to uspar chal padenge, isliye ke unhon ne hamari nishaniyon ko jhutlaya aur unse be parwahi karte rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Mein aisay logon ko apney ehkaam say bar-gashta hi rakhon ga jo duniya mein takabbur kertay hain jiss ka unn ko koi haq hasil nahi aur agar tamam nishaniyan dekh len tab bhi woh inn per eman na layen aur agar hidayat ka raasta dekhen to iss ko apna tareeqa na banayen aur agar gumrahi ka raasta dekh len to iss ko apna tareeq bana len. Yeh iss sabab say hai kay enhon ney humari aayaton ko jhutlaya aur inn say ghafil rahey
Devnagri Urdu (Maududi)मैं अपने निशानियों से उन लोगों की निगाहें फेर दूंगा जो बिना किसी हक के जमीन में बदाये बांटते हैं, वो ख्वा कोई निशानी देखलें कभी उसपर ईमान ना लाएंगे। अगर सीधा रास्ता उनके सामने आए तो उसे इख्तियार ना करेंगे और अगर टेढ़ा रास्ता नजर आए तो उसपर चल पड़ेंगे, इसलिए हमने हमारी निशानियों को झुटलाया और उनसे परवाही करते रहे
عَرَبِيوَالَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِنا وَلِقاءِ الآخِرَةِ حَبِطَت أَعمالُهُم ۚ هَل يُجزَونَ إِلّا ما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने हमारी आयतों तथा परलोक (में हमसे) मिलने को झुठलाया, उनके कर्म व्यर्थ हो गए और उन्हें उसी का बदला मिलेगा, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Hamari nishaniyon ko jis kisi ne jhutlaya aur aakhirat ki peshi ka inkar kiya uske saarey aamal zaya ho gaye. Kya log iske siwa kuch aur jaza paa sakte hain ke jaisa karein waisa bharein?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh log jinon ney humari aayaton ko aur qayamat kay paish aaney ko jhutlaya unn kay sab kaam ghaarat gaye. Inn ko wohi saza di jayegi jo kuch yeh kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)हमारी निशानियों को जिस किसी ने झुटलाया और आखिरी की पेशी का इंकार किया उसके सारे अमल हो गया। क्या लोग इसके सिवा कुछ और जजा पा सकते हैं जैसा करें वैसा भरें?”
عَرَبِيوَاتَّخَذَ قَومُ موسىٰ مِن بَعدِهِ مِن حُلِيِّهِم عِجلًا جَسَدًا لَهُ خُوارٌ ۚ أَلَم يَرَوا أَنَّهُ لا يُكَلِّمُهُم وَلا يَهديهِم سَبيلًا ۘ اتَّخَذوهُ وَكانوا ظالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और मूसा की जाति ने उसके (पर्वत पर जाने के) पश्चात् अपने ज़ेवरों से एक बछड़ा बना लिया, जो एक शरीर था, जिसकी गाय जैसी आवाज़ थी। क्या उन्होंने यह नहीं देखा कि वह न तो उनसे बात करता है और न उन्हें कोई राह दिखाता है? उन्होंने उसे (पूज्य) बना लिया तथा वे अत्याचारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ke pichey uski qaum ke logon ne apne zewaron (ornaments) se ek bachde (calf) ka putla bana liya jis mein se bail (cow) ki si awaaz nikalti thi. Kya unhein nazar na aata tha ke woh na unsey bolta hai na kisi maamle mein unki rehnumayi karta hai? Magar phir bhi unhon ne usey mabood bana liya aur woh sakht zalim thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur musa (alh-e-salam) ki qom ney unn kay baad apney zewaron ka aik bachra mabood thehra liya jo kay aik qalib tha jiss mein aik aawaz thi. Kiya enhon ney yeh na dekha kay woh inn say baat nahi kerta tha aur na inn ko koi raah batlata tha uss ko enhon ney mabood qarar diya aur bari bey insafi ka kaam kiya
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा के पीछे उसकी क़ौम के लोगों ने अपने ज़ेवरों (आभूषणों) से एक बछड़े (बछड़े) का पुतला बना लिया जिसमें से जमानत (गाय) की सी आवाज़ निकलती थी। मगर फिर भी उनहों ने उसे माबूद बना लिया और वो सख्त जालिम थे
عَرَبِيوَلَمّا سُقِطَ في أَيديهِم وَرَأَوا أَنَّهُم قَد ضَلّوا قالوا لَئِن لَم يَرحَمنا رَبُّنا وَيَغفِر لَنا لَنَكونَنَّ مِنَ الخاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब वे (अपने किए पर) लज्जित हुए और उन्होंने देखा कि निःसंदेह वे तो पथभ्रष्ट हो गए हैं। तो कहने लगे : यदि हमारे पालनहार ने हमपर दया नहीं की और हमें क्षमा नहीं किया, तो हम अवश्य घाटा उठाने वालों में से हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab unki fareb khurdagi ka tilism toot gaya aur unhon ne dekh liya ke dar haqeeqat woh gumraah ho gaye hain to kehne lagey ke “agar hamare Rubb ne humpar reham na farmaya aur humse darguzar na kiya to hum barbaad ho jayenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab naadim huye aur maloom hua kay waqaee woh log gumrahi mein parr gaye to kehney lagay kay agar humara rab hum per reham na keray aur humara gunah moaf na keray to hum bilkul gaye guzray hojayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब उनकी फरेब खुदगी का तिलिस्म टूट गया और उनहों ने देख लिया के दर हकीकत वो गुमराह हो गए हैं तो कहने लगे के "अगर हमारे रब ने हमपर रहम न फरमाया और हमसे दरगुजर ना किया तो हम बरबाद हो जायेंगे”
عَرَبِيوَلَمّا رَجَعَ موسىٰ إِلىٰ قَومِهِ غَضبانَ أَسِفًا قالَ بِئسَما خَلَفتُموني مِن بَعدي ۖ أَعَجِلتُم أَمرَ رَبِّكُم ۖ وَأَلقَى الأَلواحَ وَأَخَذَ بِرَأسِ أَخيهِ يَجُرُّهُ إِلَيهِ ۚ قالَ ابنَ أُمَّ إِنَّ القَومَ استَضعَفوني وَكادوا يَقتُلونَني فَلا تُشمِت بِيَ الأَعداءَ وَلا تَجعَلني مَعَ القَومِ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब मूसा अपनी जाति की ओर क्रोध तथा दुःख से भरा हुआ वापस आया, तो उसने कहा : तुमने मेरे बाद मेरा बहुत बुरा प्रतिनिधित्व किया। क्या तुम अपने पालनहार की आज्ञा से पहले ही जल्दी कर गए? तथा उसने तख़्तियाँ डाल दीं और अपने भाई (हारून) का सिर पकड़कर अपनी ओर खींचने लगा। उसने कहा : ऐ मेरे माँ जाये भाई! लोगों ने मुझे कमज़ोर समझ लिया और निकट था कि वे मुझे मार डालें। अतः तू शत्रुओं को मुझपर हँसने का अवसर न दे और मुझे अत्याचारियों का साथी न बना।
Roman Urdu (Maududi)Udhar se Moosa gussey aur ranjj mein bhara hua apni qaum ki taraf palta. Aatey hi usne kaha “bahut buri jaanashini ki tum logon ne mere baad! Kya tumse itna sabr na hua ke apne Rubb ke hukum ka intezar kar letey?” Aur takhtiyan phenk di aur apne bhai (Haroon) ke sar ke baal pakad kar usey khincha. Haroon ne kaha “aey meri Maa ke bete, in logon ne mujhey daba liya aur qareeb tha ke mujhey maar daalte. Pas tu dushmano ko mujhpar hassne ka mauqa na de aur is zalim giroh ke saath mujhey na shamil kar”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab musa (alh-e-salam) apni qom ki taraf wapis aaye gussay aur ranj mein bharay huye to farmaya kay tum ney meray baad yeh bari buri janasheeni ki? Kiya apney rab kay hukum say pehlay hi tum ney jald baazi ker li aur jaldi say takhtiyan aik taraf rakhin aur apney bhai kay sir pakar ker unn ko apni taraf ghaseetney lagay. Haroon (alh-e-salam) ney kaha aey meray maa jaye! Inn logon ney mujh ko bey haqeeqat samjha aur qareeb tha kay mujh ko qatal ker dalen to tum mujh per dushmanon ko mat hansao aur mujh ko inn zalimon kay zail mein mat shumar kero
Devnagri Urdu (Maududi)उधर से मूसा गुस्से और रंज में भरा हुआ अपनी क़ौम की तरफ पलटा। आते ही उसने कहा "बहुत बुरी जानशिनी कि तुम लोगों ने मेरे बाद! क्या तुमसे इतना सब्र ना हुआ के अपने रब के हुकुम का इंतज़ार कर लेते?" और तख्तियां फेंक दी और अपने भाई (हारून) के सर के बाल पकड़ कर उसे खींचा। हारून ने कहा "ऐ मेरी मां के बेटे, इन लोगों ने मुझे दबाया लिया और करीब था के मुझे मार डाला। पास तू दुश्मनों को मुझपर हंसने का मौका ना दे और इस जालिम गिरो ​​के साथ मुझे ना शामिल कर"
عَرَبِيقالَ رَبِّ اغفِر لي وَلِأَخي وَأَدخِلنا في رَحمَتِكَ ۖ وَأَنتَ أَرحَمُ الرّاحِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मुझे तथा मेरे भाई को क्षमा कर दे और हमें अपनी दया में प्रवेश प्रदान कर दे और तू सब दया करने वालों से अधिक दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Tab Moosa ne kaha “Aey Rubb, mujhey aur mere bhai ko maaf kar aur humein apni rehmat mein dakhil farma, tu sabse badhkar raheem hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) ney kaha aey meray rab! Meri khata moaf farma aur meray bhai ki bhi aur hum dono ko apni rehmat mein dakhil farma aur tu sab reham kerney walon say ziyada reham kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)तब मूसा ने कहा "ऐ रब, मुझे और मेरे भाई को माफ कर और हमें अपनी रहमत में दखल फरमा, तू सबसे बढ़कर रहीम है।"
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ اتَّخَذُوا العِجلَ سَيَنالُهُم غَضَبٌ مِن رَبِّهِم وَذِلَّةٌ فِي الحَياةِ الدُّنيا ۚ وَكَذٰلِكَ نَجزِي المُفتَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने बछड़े को पूज्य बनाया, उन्हें उनके पालनहार की ओर से बड़ा प्रकोप और सांसारिक जीवन में अपमान पहुँचेगा और हम झूठ गढ़ने वालों को इसी प्रकार दंड देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Jawab mein irshad hua ke) “Jin logon ne bachdey (calf) ko mabood banaya woh zaroor apne Rubb ke gazab mein giraftaar hokar rahenge aur duniya ki zindagi mein zaleel hongey. Jhoot ghadne walon ko hum aisi hi saza dete hain
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jin logon ney go sala parasti ki hai unn per boht jald unn kay rab ki taraf say ghazab aur zillat iss dunyawi zindagi hi mein paray gi aur hum iftra pardazon ko aisi hi saza diya kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(जवाब में इरशाद हुआ के) "जिन लोगों ने बचदे (बछड़े) को माबूद बनाया वो जरूर अपने रब के गजब में गिरफ़्तार होकर रहेंगे और दुनिया की ज़िंदगी में ज़लील होंगे। झूठ घड़ने वालों को हम ऐसे ही सजा देते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ عَمِلُوا السَّيِّئَاتِ ثُمَّ تابوا مِن بَعدِها وَآمَنوا إِنَّ رَبَّكَ مِن بَعدِها لَغَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने बुरे कर्म किए, फिर उसके पश्चात् क्षमा माँग ली और ईमान ले आए, तो निःसंदेह तेरा पालनहार इसके बाद अवश्य अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log burey amal karein phir tawba karlein aur iman le aayein to yakeenan is tawba o iman ke baad tera Rubb darguzar aur reham farmane wala hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin logon ney gunah kay kaam kiye phir woh inn kay baad tauba ker len aur eman ley aayen to tumhara rab iss tauba kay baad gunah moaf ker denay wala rehmat kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग बुरे अमल करें फिर तौबा कार्लें और ईमान ले आएं तो यकीनान इस तौबा ओ ईमान के बाद तेरा रब दरगुजर और रहम फरमाने वाला है”
عَرَبِيوَلَمّا سَكَتَ عَن موسَى الغَضَبُ أَخَذَ الأَلواحَ ۖ وَفي نُسخَتِها هُدًى وَرَحمَةٌ لِلَّذينَ هُم لِرَبِّهِم يَرهَبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब मूसा का क्रोध शांत हो गया, तो उसने तख़्तियाँ उठा लीं, और उनके लेख में उन लोगों के लिए मार्गदर्शन तथा दया थी, जो केवल अपने पालनहार से डरते हों।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab Moosa ka gussa thanda hua to usne woh takhtiyan utha li jinki tehrir (writings) mein hidayat aur rehmat thi un logon ke liye jo apne Rubb se darte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab musa (alh-e-salam) ka gussa farad hua to inn takhtiyon ko utha liya aur inn kay mazameen mein unn logon kay liye jo apney rab say dartay thay hidayat aur rehmat thi
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब मूसा का गुस्सा ठंडा हुआ तो उसने वो तख्तियां उठा ली जिनकी तहरीर (लेखन) में हिदायत और रहमत थी उन लोगों के लिए जो अपने रब से डरते हैं
عَرَبِيوَاختارَ موسىٰ قَومَهُ سَبعينَ رَجُلًا لِميقاتِنا ۖ فَلَمّا أَخَذَتهُمُ الرَّجفَةُ قالَ رَبِّ لَو شِئتَ أَهلَكتَهُم مِن قَبلُ وَإِيّايَ ۖ أَتُهلِكُنا بِما فَعَلَ السُّفَهاءُ مِنّا ۖ إِن هِيَ إِلّا فِتنَتُكَ تُضِلُّ بِها مَن تَشاءُ وَتَهدي مَن تَشاءُ ۖ أَنتَ وَلِيُّنا فَاغفِر لَنا وَارحَمنا ۖ وَأَنتَ خَيرُ الغافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और मूसा ने हमारे निर्धारित समय के लिए अपनी जाति के सत्तर व्यक्तियों को चुन लिया। फिर जब उन्हें भूकंप ने पकड़ लिया, तो उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! यदि तू चाहता तो इससे पहले ही इन सबका और मेरा विनाश कर देता। क्या तू उसके कारण हमारा विनाश करता है, जो हममें से मूर्खों ने किया है? यह तो केवल तेरी ओर से एक परीक्षा है। जिसके द्वारा तू जिसे चाहता है, गुमराह करता है और जिसे चाहता है, सीधा मार्ग दिखाता है। तू ही हमारा संरक्षक है। अतः हमारे पापों को क्षमा कर दे और हमपर दया कर। तू क्षमा करने वालों में सबसे बेहतर है।
Roman Urdu (Maududi)Aur usne apni qaum ke satter (seventy) aadmiyon ko muntakhab kiya taa-ke woh (uske saath) hamare muqarrar kiye huey waqt par haazir hon. Jab in logon ko ek sakht zalzale ne aa pakda to Moosa ne arz kiya “ aey mere sarkar, aap chahte to pehle hi inko aur mujhey halaak kar sakte thay, kya aap us kasoor mein jo hum mein se chandh nadano ne kiya tha hum sab ko halaak kar denge? Yeh to aap ki daali hui ek aazmaish thi jiske zariye se aap jisey chahte hain gumrahi mein mubtila kardete hain aur jisey chahte hain hidayat baksh dete hain. Hamare sarparast to aap hi hain, pas humein maaf kardijiye aur humpar reham farmaiye. Aap sabse badhkar maaf farmane waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur musa (alh-e-salam) ney sattar aadmi apni qom mein say humaray waqt-e-moyyen kay liye muntakhib kiye so jab unn ko zalzalay ney aa pakra to musa (alh-e-salam) arz kerney lagay kay aey meray perwerdigar! Agar tujh ko yeh manzoor hota to iss say qabal hi inn ko aur mujh ko halak ker deta. Kiya tu hum mein say chand bey waqufon ki harkat per sab ko halak ker dey ga? Yeh waqiya teri taraf say mehaz aik imtehan hai aisay imtehanaat say jiss ko tu chahaye gumrahi mein daal dey aur jiss ko chahaye hidayat per qaeem rakhay. Tu hi to humara kaar saaz hai pus hum per maghfirat aur rehmat farma aur tu sab moafi denay walon say ziyada acha hai
Devnagri Urdu (Maududi)और उसने अपनी क़ौम के सत्तर (सत्तर) आदमियों को मुंतखब किया ता-के वो (उसके साथ) हमारे मुकर्रर किये हुए वक्त पर हाजिर हों। जब इन लोगों को एक सख्त ज़लज़ले ने आ पकड़ा तो मूसा ने अर्ज़ किया " ऐ मेरे सरकार, आप चाहते तो पहले ही इनको और मुझे हलाक कर सकते थे, क्या आप हमारे कसूर में जो हम में से चंद नादानों ने किया था हम सबको हलाक कर देंगे? हाँ तो आप की डाली हुई एक आजमाइश थी जिसकी वजह से आप जिसे चाहते हैं गुमराह करते हैं और जिसे चाहते हैं हिदायत बख्श देते हैं हमारे सरपरस्त तो आप ही हैं, पस हमें माफ कर दीजिए और हमपर रहम फरमाइए है
عَرَبِي۞ وَاكتُب لَنا في هٰذِهِ الدُّنيا حَسَنَةً وَفِي الآخِرَةِ إِنّا هُدنا إِلَيكَ ۚ قالَ عَذابي أُصيبُ بِهِ مَن أَشاءُ ۖ وَرَحمَتي وَسِعَت كُلَّ شَيءٍ ۚ فَسَأَكتُبُها لِلَّذينَ يَتَّقونَ وَيُؤتونَ الزَّكاةَ وَالَّذينَ هُم بِآياتِنا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमारे लिए इस संसार में भलाई लिख दे तथा परलोक (आख़िरत) में भी। निःसंदेह हम तेरी ओर लौट आए। अल्लाह ने कहा : मैं अपनी यातना से जिसे चाहता हूँ, ग्रस्त करता हूँ। और मेरी दया प्रत्येक चीज़ को घेरे हुए है। अतः मैं उसे उन लोगों के लिए अवश्य लिख दूँगा, जो डरते हैं और ज़कात देते है और जो हमारी आयतों पर ईमान लाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur hamare liye is duniya ki bhalayi bhi likh dijiye aur aakhirat ki bhi, humne aapki taraf rujoo kar liya”. Jawab mein irshad hua “saza to main jisey chahta hoon deta hoon, magar meri rehmat har cheez par chayi hui hai. Aur usey main un logon ke haqq mein likhunga jo nafarmani se parheiz karenge, zakat denge aur meri aayat par iman layenge.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum logon kay naam duniya mein bhi nek haali likh dey aur aakhirat mein bhi hum teri taraf rujoo kertay hain. Allah Taalaa ney farmaya kay mein apna azab ussi per waqey kerta hun aur meri rehmat tamam ashiya per moheet hai. To woh rehmat unn logon kay naam zaroor likhon ga jo Allah say dartay hain aur zakat detay hain aur jo humari aayaton per eman latay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारे लिए इस दुनिया की भलाई भी लिखिए और आख़िरत की भी, हमने आपकी तरफ रूजू कर लिया"। जवाब में इरशाद हुआ "सजा तो मैं जिसे चाहता हूं देता हूं, मगर मेरी रहमत हर चीज पर छाई हुई है। और उसे मैं उन लोगों के हक में लिखूंगा जो नफरमानी से परहेज करेंगे, जकात देंगे और मेरी आयत पर ईमान लाएंगे।”
عَرَبِيالَّذينَ يَتَّبِعونَ الرَّسولَ النَّبِيَّ الأُمِّيَّ الَّذي يَجِدونَهُ مَكتوبًا عِندَهُم فِي التَّوراةِ وَالإِنجيلِ يَأمُرُهُم بِالمَعروفِ وَيَنهاهُم عَنِ المُنكَرِ وَيُحِلُّ لَهُمُ الطَّيِّباتِ وَيُحَرِّمُ عَلَيهِمُ الخَبائِثَ وَيَضَعُ عَنهُم إِصرَهُم وَالأَغلالَ الَّتي كانَت عَلَيهِم ۚ فَالَّذينَ آمَنوا بِهِ وَعَزَّروهُ وَنَصَروهُ وَاتَّبَعُوا النّورَ الَّذي أُنزِلَ مَعَهُ ۙ أُولٰئِكَ هُمُ المُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग उस रसूल का अनुसरण करते हैं, जो उम्मी नबी है, जिसे वे अपने पास तौरात तथा इंजील में लिखा हुआ पाते हैं, जो उन्हें नेकी का आदेश देता है और बुराई से रोकता है, तथा उनके लिए पाकीज़ा चीज़ों को हलाल (वैध) करता और उनपर अपवित्र चीज़ों को हराम (अवैध) ठहराता है और उनसे उनका बोझ और वह तौक़ उतारता है, जो उनपर पड़े हुए थे। अतः जो लोग उसपर ईमान लाए, उसका समर्थन किया, उसकी सहायता की और उस प्रकाश (क़ुरआन) का अनुसरण किया, जो उसके साथ उतारा गया, वही लोग सफलता प्राप्त करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Pas aaj yeh rehmat un logon ka hissa hai) jo is paigambar, Nabi e ummi ki pairwi ikhtiyar karein jiska zikr unhein apne haan Taurat aur Injil mein likha hua milta hai. Woh unhein neki ka hukum deta hai, badhi (all corrupt things) se roakta hai, unke liye paak cheezein halaal aur napaak cheezein haraam karta hai, aur unpar se woh bojh utaarta hai jo unpar laday huey thay aur woh bandishein kholta hai jin mein woh jakdey huey thay. Lihaza jo log ispar iman layein aur iski himayat aur nusrat karein aur woh us roshni ki pairwi ikhtiyar karein jo iske saath nazil ki gayi hai, wahi falaah paney waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log aisay rasool nabi ummi ka ittabaa kertay hain jin ko woh log apney pass toraat-o-injeel mein likha hua patay hain. Woh inn ko nek baaton ka hukum farmatay hain aur buri baaton say mana kertay hain aur pakeezah cheezon ko halal batatay hain aur gandi cheezon ko inn per haram farmatay hain aur inn logon per jo bojh aur toq thay unn ko door kertay hain. So jo log iss nabi per eman latay hain aur inn ki himayat kertay hain aur inn ki madad kertay hain aur iss noor ka ittabaa kertay hain jo inn kay sath bheja gaya hai aisay log poori falah paney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(पास आज ये रहमत उन लोगों का हिसा है) जो पैगम्बर है, नबी ए उम्मी की जोड़ी इख्तियार करें जिसका जिक्र उन्हें अपने हां तौरात और इंजील में लिखा हुआ मिलता है। वो उनको नेकी का हुकुम देता है, बुरी (सभी भ्रष्ट चीजें) से रुका है, उनके लिए पाक चीजें हलाल और नापाक चीजें हराम करता है, और उन पर से वो बोझ उतरता है जो उन पर लड़य हुए थे और वो बंदिशें खोलता है जिनमें वो बंद हुए थे। लिहाज़ा जो लोग इसपर ईमान लाए और इसकी हिमायत और नुसरत करें और वो हमें रोशनी की जोड़ी इख्तियार करें जो इसके साथ नाज़िल की गई है, वही फलाह पाने वाले हैं
عَرَبِيقُل يا أَيُّهَا النّاسُ إِنّي رَسولُ اللَّهِ إِلَيكُم جَميعًا الَّذي لَهُ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ يُحيي وَيُميتُ ۖ فَآمِنوا بِاللَّهِ وَرَسولِهِ النَّبِيِّ الأُمِّيِّ الَّذي يُؤمِنُ بِاللَّهِ وَكَلِماتِهِ وَاتَّبِعوهُ لَعَلَّكُم تَهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें कि ऐ मानव जाति के लोगो! निःसंदेह मैं तुम सब की ओर उस अल्लाह का रसूल हूँ, जिसके लिए आकाशों तथा धरती का राज्य है। उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। वही जीवन देता और मारता है। अतः तुम अल्लाह पर और उसके रसूल उम्मी नबी पर ईमान लाओ, जो अल्लाह पर और उसकी सभी वाणियों (पुस्तकों) पर ईमान रखता है और उसका अनुसरण करो, ताकि तुम सीधा मार्ग पाओ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad) , kaho ke “ aey Insaano , main tum sab ki taraf us khuda ka paigambar hoon jo zameen aur aasmano ki baadshahi ka maalik hai, uske siwa koi khuda nahin hai, wahi zindagi bakshta hai aur wahi maut deta hai. Pas iman lao Allah par aur uske bheje huey Nabi e ummi par jo Allah aur uske irshadat ko maanta hai, aur pairwi ikhtiyar karo uski, umeed hai ke tum raah e raast paa logey
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay aey logo! Mein tum sab ki taraf uss Allah Taalaa ka bheja hua hun jiss ki badshahi tamam aasmanon aur zamin mein hai uss kay siwa koi ibadat kay laeeq nahi wohi zindagi deta hai aur wohi mot deta hai so Allah Taalaa per eman lao aur uss kay nabi ummi per jo kay Allah Taalaa per aur uss kay ehkaam per eman rakhtay hain aur inn ka ittabaa kero takay tum raah per aajao
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), कहो के “ऐ इंसानो, मैं तुम सब की तरफ हमें खुदा का पैगम्बर हूं जो जमीन और आसमान की बादशाही का मालिक है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, वही जिंदगी बक्शता है और वही मौत देता है। है के तुम राह ए रस्त पा लोगे
عَرَبِيوَمِن قَومِ موسىٰ أُمَّةٌ يَهدونَ بِالحَقِّ وَبِهِ يَعدِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और मूसा की जाति के अंदर एक गिरोह ऐसा है, जो सत्य के साथ मार्गदर्शन करता है और उसी के अनुसार न्याय करता है।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ki qaum mein ek giroh aisa bhi tha jo haqq ke mutabiq hidayat karta aur haqq hi ke mutabiq insaf karta tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur qom-e-musa mein aik jamat aisi bhi hai jo haq kay mutabiq hidayat kerti hai aur issi kay mutabiq insaf bhi kerti hai
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा की क़ौम में एक गिरोह ऐसा भी था जो हक़ के मुताबिक़ हिदायत करता था और हक़ ही के मुताबिक़ इन्साफ़ करता था
عَرَبِيوَقَطَّعناهُمُ اثنَتَي عَشرَةَ أَسباطًا أُمَمًا ۚ وَأَوحَينا إِلىٰ موسىٰ إِذِ استَسقاهُ قَومُهُ أَنِ اضرِب بِعَصاكَ الحَجَرَ ۖ فَانبَجَسَت مِنهُ اثنَتا عَشرَةَ عَينًا ۖ قَد عَلِمَ كُلُّ أُناسٍ مَشرَبَهُم ۚ وَظَلَّلنا عَلَيهِمُ الغَمامَ وَأَنزَلنا عَلَيهِمُ المَنَّ وَالسَّلوىٰ ۖ كُلوا مِن طَيِّباتِ ما رَزَقناكُم ۚ وَما ظَلَمونا وَلٰكِن كانوا أَنفُسَهُم يَظلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उन्हें बारह गोत्रों में विभाजित करके अलग-अलग समूह बना दिया। और जब मूसा की जाति ने उनसे पानी माँगा, तो हमने उनकी ओर वह़्य भेजी कि अपनी लाठी पत्थर पर मारो। तो उससे बारह स्रोत फूट निकले। निःसंदेह सब लोगों ने अपने पानी पीने का स्थान जान लिया। तथा हमने उनपर बादल की छाया की और उनपर मन्न और सलवा उतारा। (हमने कहा :) इन पाकीज़ा चीज़ों में से, जो हमने तुम्हें प्रदान की हैं, खाओ। और उन्होंने हमपर अत्याचार नहीं किया, परंतु वे अपने आप ही पर अत्याचार करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne us qaum ko barah (twelve) gharano mein takseem karke unhein mustaqil girohon ki shakal de di thi. Aur jab Moosa se uski qaum ne pani maanga to humne usko ishara kiya ke falaan chattan par apni lathi maaro. Chunanchey is chattan se yakayak barah chashme (twelve springs) phoot nikle aur har giroh ne apne pani lene ki jagah mutaiyyan karli. Humne unpar badal (cloud) ka saya kiya aur unpar mann o salwa (quails) utara, khao woh paak cheezein jo humne tumko bakshi hain magar iske baad unhon ne jo kuch kiya to humpar zulm nahin kiya balke aap apne hi upar zulm karte rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unn ko baara khaandanon mein taqseem ker kay sab ki alag alag jamat muqarrar ker di aur hum ney musa (alh-e-salam) ko hukum diya jabkay unn ki qom ney unn say pani maanga kay apney asa ko falan pathar per maaro pus foran uss say baara chashmay phoot niklay. Her her shaks ney apney pani peenay ka moqa maloom ker liya aur hum ney unn per abar ko saya figan kiya aur unn ko mann-o-salwa (taran jabeen aur bateren) phonchaen khao nafees cheezon say jo hum ney tum ko di hain aur unhon ney humara koi nuksan nahi kiya lekin apna hi nuksan kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने हमें क़ौम को बारह (बारह) घरानों में तकसीम करके उन्हें मुस्तक़िल गिरोहों की शक्ल दे दी थी। और जब मूसा से उसकी क़ौम ने पानी मांगा तो हमने उसको इशारा किया के फलां चट्टान पर अपनी लाठी मारो। चुनान्चे इस चट्टान से यकायक बारह चश्मे (बारह झरने) फूट निकले और हर गिरो ​​ने अपने पानी लेने की जगह मुतैयां करली। हमने उनपर बादल (बादल) का साया किया और उनपार मन ओ सलवा (बटेर) उतारा, खाओ वो पाक चीजें जो हमने तुमको बख्शी हैं मगर इसके बाद उन्होन ने जो कुछ किया तो हमपर जुल्म नहीं किया बलके आप अपने ही ऊपर जुल्म करते रहें
عَرَبِيوَإِذ قيلَ لَهُمُ اسكُنوا هٰذِهِ القَريَةَ وَكُلوا مِنها حَيثُ شِئتُم وَقولوا حِطَّةٌ وَادخُلُوا البابَ سُجَّدًا نَغفِر لَكُم خَطيئَاتِكُم ۚ سَنَزيدُ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनसे कहा गया कि इस नगर (बैतुल मक़्दिस) में बस जाओ और उसमें से जहाँ से इच्छा हो खाओ और कहो कि हमें क्षमा कर दे तथा द्वार में सज्दा करते हुए प्रवेश करो, हम तुम्हारे लिए तुम्हारे पाप क्षमा कर देंगे। हम सत्कर्मियों को और अधिक देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo woh waqt jab unsey kaha gaya tha ke is basti mein jaa kar bass(settle) jao aur iski paidawaar se apne hasb-e-mansha(whatever you please) rozi haasil karo aur hittatun hittatun(repentance) kehte jao aur shehar ke darwaze mein sajda-rez hotey huey daakhil ho. Hum tumhare khataein maaf karenge aur neik rawiyya rakhne walon ko mazeed fazal se nawazenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab inn ko hukum diya gaya kay tum log iss aabadi mein jaa ker raho aur khao uss say jiss jagah tum raghbat kero aur zaban say yeh kehtay jana kay tauba hai aur jhukay jhukay darwazon mein dakhil hona hum tumhari khatayen moaf ker den gay. Jo log nek kaam keren gay unn ko mazeed baran aur den gay
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो वो वक्त जब उनसे कहा गया था कि इस बस्ती में जा कर बास (बस जाओ) जाओ और इसकी अदायगी से अपने हस्ब-ए-मंशा (जो भी चाहो) रोज़ी हासिल करो और हित्ततुन हित्ततुन (पश्चाताप) कहते जाओ और शहर के दरवाज़े में सजदा-रेज़ होते हुए दाख़िल हो। हम तुम्हारी खातें माफ़ करेंगे और नेक राविया रखने वालों को मज़ीद फ़ज़ल से नवाज़ेंगे”
عَرَبِيفَبَدَّلَ الَّذينَ ظَلَموا مِنهُم قَولًا غَيرَ الَّذي قيلَ لَهُم فَأَرسَلنا عَلَيهِم رِجزًا مِنَ السَّماءِ بِما كانوا يَظلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उनमें से जो अत्याचारी थे, उन्होंने उस बात को जो उनसे कही गई थी, दूसरी बात से बदल दिया। तो हमने उनपर, उनके अत्याचार के कारण, आकाश से अज़ाब भेजा।
Roman Urdu (Maududi)Magar jo log unmein se zalim thay unhon ne us baat ko jo unse kahi gayi thi badal dala, aur nateeja yeh hua ke humne unke zulm ki padash mein unpar aasman se azaab bhej diya
Roman Urdu (Junagarhi)So badal daala inn zalimon ney aik aur kalma jo khilaf tha uss kalmay kay jiss ki inn say farmaeesh ki gaee thi iss per hum ney unn per aik aafat-e-samawi bheji iss waja say kay woh hukum ko zaya kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जो लोग उनमें से ज़ालिम थे उनहों ने हमें बात को जो उनसे कहीं गई थी बदल डाला, और नतीज़ा ये हुआ के हमने उनके ज़ुल्म की पैदाइश में असमान आसमान से अज़ाब भेज दिया
عَرَبِيوَاسأَلهُم عَنِ القَريَةِ الَّتي كانَت حاضِرَةَ البَحرِ إِذ يَعدونَ فِي السَّبتِ إِذ تَأتيهِم حيتانُهُم يَومَ سَبتِهِم شُرَّعًا وَيَومَ لا يَسبِتونَ ۙ لا تَأتيهِم ۚ كَذٰلِكَ نَبلوهُم بِما كانوا يَفسُقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ नबी!) उनसे उस बस्ती के संबंध में पूछें, जो समुद्र (लाल सागर) के किनारे पर थी, जब वे शनिवार के दिन के विषय में सीमा का उल्लंघन करते थे, जब उनके पास उनकी मछलियाँ उनके शनिवार के दिन पानी की सतह पर प्रत्यक्ष होकर आती थीं और जिस दिन उनका शनिवार न होता, वे उनके पास नहीं आती थीं। इस प्रकार हम उनका परीक्षण करते थे, इस कारण कि वे अवज्ञा करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur zara inse us basti ka haal bhi pucho jo samandar ke kinarey waqey thi, inhein yaad dilao woh waqiya ke wahan ke log sabt (sabbath/hafte) ke din ehkam e ilahi ki khilaf warzi karte thay aur yeh ke machliyan (fishes) sabt ke din ubhar ubhar kar satah (water's surface) par unke saamne aati thi aur sabt ke siwa baaki dino mein nahin aati thi. Yeh isliye hota tha ke hum unki nafarmaniyon ki wajah se unko aazmaish mein daal rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aap inn logon say uss basti walon ka jo kay darya-e(-shor) kay qarib aabad thay uss waqt ka haal poochiye! Jabkay woh haftay kay baray mein hadd say nikal rahey thay jabkay unn kay haftay kay roz to unn ki machliyan zahir ho ho ker unn kay samney aati thin aur jab haftay ka din na hota to unn kay samney na aati thin hum unn ki iss tarah per aazmaeesh kertay thay iss sabab say kay woh bey hukmi kiya kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और ज़रा उनसे बस्ती का हाल भी पूछो जो समंदर के किनारे थे, उन्हें याद दिलाओ वो वाकिया के वहां के लोग सब्त (सब्बाथ/हफ्ते) के दिन एहकाम ए इलाही की ख़िलाफ़ वारज़ी करते थे और ये के मछलियां (मछलियां) सब्त के दिन उबर कर सात (पानी की सतह) पर उनके सामने आती थी और सब्त के सिवा बाकी दिनों में नहीं आती थी। ये इसलिए होता था कि हम उनकी नफरमानियों की वजह से उनको आजमाइश में डाल रहे थे
عَرَبِيوَإِذ قالَت أُمَّةٌ مِنهُم لِمَ تَعِظونَ قَومًا ۙ اللَّهُ مُهلِكُهُم أَو مُعَذِّبُهُم عَذابًا شَديدًا ۖ قالوا مَعذِرَةً إِلىٰ رَبِّكُم وَلَعَلَّهُم يَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब उनमें से एक समूह ने कहा कि तुम ऐसे लोगों को क्यों समझा रहे हो, जिन्हें अल्लाह (उनकी अवज्ञा के कारण) विनष्ट करने वाला है, या उन्हें बहुत सख़्त यातना देने वाला है? उन्होंने कहा : तुम्हारे पालनहार के समक्ष उज़्र करने के लिए और इसलिए कि शायद वे डर जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur inhein yeh bhi yaad dilao ke jab unmein se ek giroh ne dusre giroh se kaha tha ke “tum aisey logon ko kyun naseehat karte ho jinhein Allah halaak karne wala ya sakht saza dene wala hai” to unhon ne jawab diya tha ke “hum yeh sab kuch tumhare Rubb ke huzoor apni maazirat (excuse) pesh karne ke liye karte hain aur is umeed par karte hain ke shayad yeh log uski nafarmani se parheiz karne lagein.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab kay unn mein say aik jamat ney yun kaha kay tum aisay logon ko kiyon naseehat kertay ho jin ko Allah bilkul halak kerney wala hai ya unn ko sakht saza denay wala hai? Unhon ney jawab diya kay tumharay rab kay roo baroo uzur kerney kay liye aur iss liye kay shayad yeh darr jayen
Devnagri Urdu (Maududi)और यहीं ये भी याद दिलाओ के जब उनमें से एक गिरोह ने दूसरे गिरो ​​से कहा था के "तुम ऐसे लोगों को क्यों हिदायत करते हो जिन्होनें अल्लाह हलाक करने वाला या सच साज़ा देने वाला है'' तो उनको ने जवाब दिया था के ''हम ये सब कुछ तुम्हारे रब के हुज़ूर अपनी मज़ीरत (बहाना) पेश करने के लिए करते हैं और इस उम्मीद पर करते हैं के शायद ये लोग उसकी नफ़रमानी से परहेज़ करने लगें।”
عَرَبِيفَلَمّا نَسوا ما ذُكِّروا بِهِ أَنجَينَا الَّذينَ يَنهَونَ عَنِ السّوءِ وَأَخَذنَا الَّذينَ ظَلَموا بِعَذابٍ بَئيسٍ بِما كانوا يَفسُقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वे उस बात को भूल गए, जिसकी उन्हें नसीहत की गई थी, तो हमने उन लोगों को बचा लिया, जो बुराई से रोक रहे थे, और उन लोगों को जिन्होंने अत्याचार किया, उनकी अवज्ञा के कारण कठोर यातना में पकड़ लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar jab woh un hidayaat ko bilkul hi faramosh kar gaye jo unhein yaad karayi gayi thin to humne un logon ko bacha liya jo burayi se roakte thay aur baqi sab logon ko jo zalim thay unki nafarmaniyon par sakht azaab mein pakad liya
Roman Urdu (Junagarhi)So jab woh iss ko bhool gaye jo inn ko samjhaya jata tha to hum ney unn logon ko to bacha liya jo iss buri aadat say mana kiya kertay thay aur unn logon ko jo kay ziyadti kertay thay aik sakht azab mein pakar liya iss waja say kay woh bey hukmi kiya kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार जब वो उन हिदायतों को बिल्कुल ही फ़रामोश कर गए जो उन्हें याद करई गई पतली तो हमने उन लोगों को बचा लिया जो बुराई से रोते थे और बाकी सब लोगों को जो ज़ालिम थे उनकी नफ़रमानियों पर सिर्फ अज़ाब में पकड़ लिया
عَرَبِيفَلَمّا عَتَوا عَن ما نُهوا عَنهُ قُلنا لَهُم كونوا قِرَدَةً خاسِئينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वे उस काम में सीमा से आगे बढ़ गए, जिससे वे रोके गए थे, तो हमने उनसे कहा कि अपमानित बंदर बन जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab woh puri sarkashi ke saath wahi kaam kiye chale gaye jissey unhein roka gaya tha, to humne kaha ke bandar ho jao zaleel aur khwar
Roman Urdu (Junagarhi)Yani jab woh jiss kaam say unn ko mana kiya gaya tha uss mein hadd say nikal gaye to hum ney unn ko keh diya tum zaleel bandar bann jao
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब वो पूरी सरकशी के साथ वही काम किये चले गये जिसमें उन्हें रोका गया था, तो हमने कहा के बंदर हो जाओ ज़लील और ख्वार
عَرَبِيوَإِذ تَأَذَّنَ رَبُّكَ لَيَبعَثَنَّ عَلَيهِم إِلىٰ يَومِ القِيامَةِ مَن يَسومُهُم سوءَ العَذابِ ۗ إِنَّ رَبَّكَ لَسَريعُ العِقابِ ۖ وَإِنَّهُ لَغَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और याद करो, जब आपके पालनहार ने घोषणा कर दी कि वह क़ियामत के दिन तक, उन (यहूदियों) पर, ऐसा व्यक्ति अवश्य भेजता रहेगा, जो उन्हें घोर यातना दे। निःसंदेह आपका पालनहार शीघ्र दंड देने वाला है और निःसंदेह वह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yaad karo jabke tumhare Rubb ne elan kardiya ke “woh qayamat tak barabar aisey log bani Israel par musallat karta rahega jo unko badhtareen azaab denge.” Yakeenan tumhara Rubb saza dene mein tez-dast (swift in chastising) hai aur yakeenan woh darguzar aur reham se bhi kaam lene waala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh waqt yaad kerna chahaiye kay aap kay rab ney yeh baat batla di kay woh inn yahud per qayamat tak aisay shaks ko zaroor musallat kerta rahey ga jo inn ko sazay-e-shadeed ki takleef phonchata rahey ga bila shuba aap ka rab jaldi hi saza dey deta hai aur bila shuba woh waqaee bari maghfirat aur bari rehmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और याद करो जबके तुम्हारे रब ने एलान करदिया के “वो कयामत तक बराबर ऐसे लोग बानी इजराइल पर मुसल्लत करता” रहेगा जो उनको बेहतरीन अज़ाब देंगे।” यकीनन तुम्हारा रुब सज़ा देने में तेज़-दस्त है और यकीनन वो दरगुज़ार और रहम से भी काम लेने वाला है
عَرَبِيوَقَطَّعناهُم فِي الأَرضِ أُمَمًا ۖ مِنهُمُ الصّالِحونَ وَمِنهُم دونَ ذٰلِكَ ۖ وَبَلَوناهُم بِالحَسَناتِ وَالسَّيِّئَاتِ لَعَلَّهُم يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उन्हें धरती में कई समूहों में टुकड़े-टुकड़े कर दिया। उनमें से कुछ लोग सदाचारी थे और उनमें से कुछ इसके अलावा थे। तथा हमने अच्छी परिस्थितियों और बुरी परिस्थितियों के साथ उनका परीक्षण किया, ताकि वे बाज़ आ जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Humne unko zameen mein tukde tukde karke bahut se qaumon mein taqseem kardiya, kuch log inmein neik thay aur kuch issey mukhtalif aur hum unko acchey aur burey halaat se aazmaish mein mubtila karte rahey ke shayad yeh palat aayein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney duniya mein inn ki mukhtalif jamaten ker den. Baaz inn mein nek thay aur baaz inn mein aur tarah thay aur hum inn ko khushaliyon aur bad haliyon say aazmatay rahey kay shayad baaz aajayen
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उनको ज़मीन में टुकड़े-टुकड़े करके बहुत से क़ौमों में तकसीम कर दिया, कुछ लोग इनमें शामिल थे और कुछ इसे मुख़्तलिफ़ और हम उनको अच्छे और बुरे हालात से आज़माइश में मुब्तिला करते रहे के शायद ये पलट आएं
عَرَبِيفَخَلَفَ مِن بَعدِهِم خَلفٌ وَرِثُوا الكِتابَ يَأخُذونَ عَرَضَ هٰذَا الأَدنىٰ وَيَقولونَ سَيُغفَرُ لَنا وَإِن يَأتِهِم عَرَضٌ مِثلُهُ يَأخُذوهُ ۚ أَلَم يُؤخَذ عَلَيهِم ميثاقُ الكِتابِ أَن لا يَقولوا عَلَى اللَّهِ إِلَّا الحَقَّ وَدَرَسوا ما فيهِ ۗ وَالدّارُ الآخِرَةُ خَيرٌ لِلَّذينَ يَتَّقونَ ۗ أَفَلا تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उनके बाद उनकी जगह नालायक़ उत्तराधिकारी आए, जो पुस्तक के वारिस बने, वे इस तुच्छ संसार का सामान लेते हैं और कहते हैं कि हमें क्षमा कर दिया जाएगा। और यदि उनके पास इस जैसा और सामान भी आ जाए, तो उसे भी ले लेते हैं। क्या उनसे पुस्तक का दृढ़ वचन नहीं लिया गया था कि अल्लाह पर सत्य के सिवा कुछ नहीं कहेंगे, और उन्होंने जो कुछ उसमें था, पढ़ भी लिया था। और आख़िरत का घर (जन्नत) उन लोगों के लिए उत्तम है, जो अल्लाह से डरते हैं। तो क्या तुम नहीं समझते?
Roman Urdu (Maududi)Phir agli nasalon ke baad aisey na-khalaf log unke janasheen (sucessors) huey jo kitab e ilahi ke waris hokar isi duniya e dani ke faiyde (goods of this world) sameit-te hain aur kehdete hain ke tawaqqu hai humein maaf kardiya jayega. Aur agar wahi mataa e duniya phir saamne aati hai to phir lapak kar usey le lete hain. Kya unse kitaab ka ahad nahin liya ja chuka hai ke Allah ke naam par wahi baat kahein jo haqq ho? Aur yeh khud padh chuke hain jo kitab mein likha hai, aakhirat ki qayamgaah to khuda-tars logon ke liye hi behtar hai, kya tum itni si baat nahin samajhte
Roman Urdu (Junagarhi)Phir inn kay baad aisay log inn kay janasheen huye kay kitab ko inn say hasil kiya woh iss duniya-e-faani ka maal mataa ley letay hain aur kehtay hain kay humari zaroor maghfirat hojaye gi halankay agar inn kay pass wesa hi maal mataa aaney lagay to iss ko bhi ley len gay. Kiya inn say iss kitab kay iss mazmoon ka ehad nahi liya gaya kay Allah ki taraf ba-juz haq baat kay aur kissi baat ki nisbat na keren aur enhon ney iss kitab mein jo kuch tha uss ko parh liya aur aakhirat wala ghar unn logon kay liye behtar hai jo taqwa rakhtay hain phri kiya tum nahi samajhtay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अगली नसलों के बाद ऐसे ना-खलाफ लोग उनके जानशीन (उत्तराधिकारी) हुए जो किताब ए इलाही के वारिस होकर इसी दुनिया ए दानी के फायदे (इस दुनिया का सामान) समित-ते हैं और कहते हैं के तवक्कू है हमें माफ कर दिया जाएगा। और अगर वही माता ए दुनिया फिर सामने आती है तो फिर लपक कर उसे ले लेते हैं। क्या उनसे किताब का अहद नहीं लिया जा चुका है कि अल्लाह के नाम पर वही बात कहे जो हक हो? और ये खुद पढ़ चुके हैं जो किताब में लिखा है, आख़िरत की क़यामगाह तो खुदा-टार्स लोगों के लिए ही बेहतर है, क्या तुम इतनी सी बात नहीं समझते
عَرَبِيوَالَّذينَ يُمَسِّكونَ بِالكِتابِ وَأَقامُوا الصَّلاةَ إِنّا لا نُضيعُ أَجرَ المُصلِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो लोग पुस्तक को दृढ़ता से पकड़ते हैं और उन्होंने नमाज़ क़ायम की, निश्चय हम सुधार करने वालों का प्रतिफल अकारथ नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Jo log kitab ki pabandi karte hain aur jinhon ne namaz qaayam rakkhi hai, yaqeenan aisey neik kirdar logon ka ajar hum zaya nahin karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log kitab kay paband hain aur namaz ki pabandi kertay hain hum aisay logon ko jo apni islah keren sawab zaya na keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग किताब की किताब पढ़ते हैं और जिन्होन ने नमाज़ क़याम रक्खी है, यकीनन ऐसे नए किरदार लोगों का अजर हम जया नहीं करेंगे
عَرَبِي۞ وَإِذ نَتَقنَا الجَبَلَ فَوقَهُم كَأَنَّهُ ظُلَّةٌ وَظَنّوا أَنَّهُ واقِعٌ بِهِم خُذوا ما آتَيناكُم بِقُوَّةٍ وَاذكُروا ما فيهِ لَعَلَّكُم تَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब हमने उनके ऊपर पर्वत को इस तरह उठा लिया, जैसे वह एक छतरी हो, और उन्हें विश्वास हो गया कि वह उनपर गिरने वाला है। (तथा यह आदेश दिया कि) जो (पुस्तक) हमने तुम्हें प्रदान की है, उसे मज़बूती से थाम लो तथा उसमें जो कुछ है, उसे याद रखो, ताकि तुम परहेज़गार हो जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Unhein woh waqt bhi kuch yaad hai jabke humne pahad ko hila kar unpar is tarah chaa diya tha ke goya woh chatri (umbrella/canopy) hai, aur yeh gumaan kar rahey thay ke woh inpar aa padega, aur us waqt humne unsey kaha tha ke jo kitaab hum tumhein de rahey hain isey mazbooti ke saath thaamo (pakdo) aur jo kuch ismein likha hai usey yaad raakho, tawaqqu hai ke tum galat-rawi se bachey rahogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh waqt bhi qabil-e-zikar hai jab hum ney pahar ko utha ker sayebaan ki tarah unn per moalliq ker diya aur inn ko yaqeen hogaya kay abb inn per gira aur kaha kay jo kitab hum ney tum ko di hai ussay mazbooti kay sath qabool kero aur yaad rakho jo ehkaam iss mein hain uss say tawaqqa hai kay tum mutaqqi bann jao
Devnagri Urdu (Maududi)उन्हें वो वक्त भी कुछ याद है जबके हमने पहाड़ को हिला कर उस तरफ इस तरह छा दिया था के गोया वो छतरी (छाता/छतरी) है, और ये गुमान कर रहे थे के वो अंदर आ पड़ेगा, और हम वक्त हमने उनसे कहा था कि जो किताब हम तुम्हें दे रहे हैं इसे मज़बूती के साथ थामो (पकड़ो) और जो कुछ इसमें लिखा है उसे याद रखो, तवक्कू है के तुम गलत-रवी से बचे रहोगे
عَرَبِيوَإِذ أَخَذَ رَبُّكَ مِن بَني آدَمَ مِن ظُهورِهِم ذُرِّيَّتَهُم وَأَشهَدَهُم عَلىٰ أَنفُسِهِم أَلَستُ بِرَبِّكُم ۖ قالوا بَلىٰ ۛ شَهِدنا ۛ أَن تَقولوا يَومَ القِيامَةِ إِنّا كُنّا عَن هٰذا غافِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (वह समय याद करें) जब आपके पालनहार ने आदम के बेटों की पीठों से उनकी संतति को निकाला और उन्हें स्वयं उनपर गवाह बनाते हुए कहा : क्या मैं तुम्हारा पालनहार नहीं हूँ? उन्होंने कहा : क्यों नहीं, हम (इसके) गवाह हैं। (ऐसा न हो) कि तुम क़ियामत के दिन कहो निःसंदेह हम इससे ग़ाफ़िल थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Nabi), logon ko yaad dilao woh waqt jabke tumhare Rubb ne bani Adam ki pushton se unki nasal ko nikala tha aur unhein khud unke upar gawah banate huey pucha tha, “kya main tumhara Rubb nahin hoon?”Unhon ne kaha, “ zaroor aap hi hamare Rubb hain, hum ispar gawahi dete hain”.Yeh humne is liye kiya ke kahin tum qayamat ke roz yeh na kehdo ke “hum to is baat se be khabar thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab aap kay rab ney aulad-e-aadam ki pusht say unn ki aulad ko nikala aur unn say unn hi kay mutalliq iqrar liya kay kiya mein tumhara rab nahi hun? Sab ney jawab diya kiyon nahi! Hum sab gawah bantay hain. Takay tum log qayamat kay roz yun na kaho kay hum to iss say mehaz bey khabar thay
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ नबी), लोगों को याद दिलाओ वो वक्त जबके तुम्हारे रब ने बनी आदम की पुश्तों से उनकी नाक को निकला था और उन्हें खुद उनके ऊपर गवाह बनाते हुए पूछा था, “क्या मैं तुम्हारा रुब नहीं हूं?” कयामत के रोज़ ये ना कहदो के "हम तो इस बात से खबर थे"
عَرَبِيأَو تَقولوا إِنَّما أَشرَكَ آباؤُنا مِن قَبلُ وَكُنّا ذُرِّيَّةً مِن بَعدِهِم ۖ أَفَتُهلِكُنا بِما فَعَلَ المُبطِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अथवा यह कहो कि शिर्क तो हमसे पहले हमारे बाप-दादा ही ने किया था और हम तो उनके बाद उनकी संतान थे। तो क्या तू गुमराहों के कर्म के कारण हमें विनष्ट करता है?
Roman Urdu (Maududi)Ya ye na kehne lago ke “shirk ki ibtida to hamare baap dada ne humse pehle ki thi aur hum baad ko unki nasal se paida huey, phir kya aap humein us kasoor mein pakadte hain jo galat kaar logon ne kiya tha”
Roman Urdu (Junagarhi)Ya yun kaho kay pehlay pehlay shirk to humaray baron ney kiya aur hum unn kay baad unn ki nasal mein huye so kiya inn ghalat raah walon kay fail per tu hum ko halakat mein daal dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)या ये ना कहने लगो के "शिर्क की इब्तिदा तो हमारे बाप दादा ने हमसे पहले की थी और हम बाद को उनकी नाक से पैदा हुए, फिर क्या आप हमें कसूर में पकड़ते हैं जो गलत काम लोगों ने किया था”
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ نُفَصِّلُ الآياتِ وَلَعَلَّهُم يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार, हम आयतों को खोल-खोल कर बयान करते हैं, और ताकि वे (सत्य की ओर) पलट आएँ।
Roman Urdu (Maududi)Dekho, is tarah hum nishanyan wazeh taur par pesh karte hain aur isliye karte hain ke yeh log palat aayein
Roman Urdu (Junagarhi)Hum issi tarah aayaat ko saaf saaf biyan kertay hain aur takay woh baaz ajayen
Devnagri Urdu (Maududi)देखो, इस तरह हम निशानियां वाज़ेह तौर पर पेश करते हैं और इसलिए करते हैं के ये लोग पलट आते हैं
عَرَبِيوَاتلُ عَلَيهِم نَبَأَ الَّذي آتَيناهُ آياتِنا فَانسَلَخَ مِنها فَأَتبَعَهُ الشَّيطانُ فَكانَ مِنَ الغاوينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्हें उस व्यक्ति का हाल पढ़कर सुनाएँ, जिसे हमने अपनी आयतें प्रदान कीं, तो वह उनसे निकल गया। फिर शैतान उसके पीछे लग गया, तो वह गुमराहों में से हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Muhammad), inke saamne us shaks ka haal bayan karo jisko humne apni aayat ka ilm ata kiya tha magar woh unki pabandi se nikal bhaga. Aakhir e kaar shaytan uske pichey padh gaya yahan tak ke woh bhatakne walon mein shamil hokar raha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn logon ko uss shaks ka haal parh ker sunaiye kay jiss ko hum ney apni aayaten den phir woh inn say bilkul hi nikal gaya phir shetan uss kay peechay lag gaya so woh gumrah logon mein shamil hogaya
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ मुहम्मद), इनके सामने उस शक्स का हाल बयान करो जिसको हमने अपनी आयत का इल्म अता किया था मगर वो उनकी पाबंदी से निकल भागा. आख़िर ए कार शैतान उसके पीछे पड़ गया यहाँ तक के वो भटकने वालों में शामिल होकर रहा
عَرَبِيوَلَو شِئنا لَرَفَعناهُ بِها وَلٰكِنَّهُ أَخلَدَ إِلَى الأَرضِ وَاتَّبَعَ هَواهُ ۚ فَمَثَلُهُ كَمَثَلِ الكَلبِ إِن تَحمِل عَلَيهِ يَلهَث أَو تَترُكهُ يَلهَث ۚ ذٰلِكَ مَثَلُ القَومِ الَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِنا ۚ فَاقصُصِ القَصَصَ لَعَلَّهُم يَتَفَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम चाहते, तो उन (आयतों) के द्वारा उसका पद ऊँचा कर देते, परंतु वह धरती से चिमट गया और अपनी इच्छा के पीछे लग गया। अतः उसकी दशा उस कुत्ते के समान हो गई, जिसे हाँको, तब भी जीभ निकाले हाँफता रहे और छोड़ दो, तब भी जीभ निकाले हाँफता है। यह उन लोगों की मिसाल है, जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया। तो आप ये कथाएँ (उन्हें) सुना दें, ताकि वे सोच-विचार करें।
Roman Urdu (Maududi)Agar hum chahte to usey un aayaton ke zariye se bulandi ata karte, magar woh to zameen hi ki taraf jhuk kar reh gaya aur apni khwahish e nafs hi ke pichey pada raha, lihaza uski haalat kuttey ki si ho gayi ke tum uspar hamla karo tab bhi zubaan latkaye rahey aur usey chodh do tab bhi zubaan latkaye rahey. Yahi misaal hai un logon ki jo hamari aayat ko jhutlate hain. Tum yeh hikayaat (parables) inko sunate raho, shayad ke yeh kuch gaur o fikr karein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum chahatay to uss ko inn aayaton ki badolat buland martaba ker detay lekin woh to duniya ki taraf maeel hogaya aur apni nafsaani khuwaish ki pairwi kerney laga so uss ki halat kuttay ki si hogaee kay agar tu iss per hamla keray tab bhi haanpay ya uss ko chor dey tab bhi haanpay yehi halat unn logon ki hai jinhon ney humari aayaton ko jhutlaya. So aap iss haal ko biyan ker dijiye shayad woh log kuch sochen
Devnagri Urdu (Maududi)अगर हम चाहते तो उसे उन आयतों के ज़रिये से बुलंदी अता करते, मगर वो तो ज़मीन ही की तरफ़ झुक कर रह गया और अपनी ख्वाहिश ए नफ़्स ही के पीछे पड़ा रहा, उसकी हालात कुत्ते की सी हो गई के तुम उसपर हमला करो तब भी ज़ुबान लटके रहे और उसे छोड़ दो तब भी ज़ुबान लटके रहे। यही मिसाल है उन लोगों की जो हमारी आयत को झुठलाते हैं। तुम ये हिकायत (दृष्टांत) इनको सुनाते रहो, शायद के ये कुछ गौर ओ फ़िक्र करें
عَرَبِيساءَ مَثَلًا القَومُ الَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِنا وَأَنفُسَهُم كانوا يَظلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों की मिसाल बहुत बुरी है, जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया और वे अपने ही ऊपर अत्याचार करते रहे।
Roman Urdu (Maududi)Badi hi buri misaal hai aisey logon ki jinhon ne hamari aayat ko jhutlaya, aur woh aap apne hi upar zulm karte rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Unn logon ki halat bhi buri halat hai jo humari aayaat ko jhutlatay hain aur woh apna nuksan kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)बड़ी ही बुरी मिसाल है ऐसे लोगों की जिन्होनें हमारी आयतों को झुटलाया, और वो आप अपने ही ऊपर ज़ुल्म करते रहे हैं
عَرَبِيمَن يَهدِ اللَّهُ فَهُوَ المُهتَدي ۖ وَمَن يُضلِل فَأُولٰئِكَ هُمُ الخاسِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसे अल्लाह मार्गदर्शन प्रदान कर दे, तो वही मार्गदर्शन पाने वाला है और जिसे वह गुमराह कर दे, तो वही घाटा उठाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jisey Allah hidayat bakshey bas wahi raah-e-raast paata hai aur jisko Allah apni rehnumayi se mehroon karde wahi nakaam o na-murad hokar rehta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ko Allah hidayat kerta hai so hidayat paney wala wohi hota hai aur jiss ko woh gumrah kerdey so aisay hi log khasaray mein parney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जिसे अल्लाह हिदायत बख्शी बस वही राह-ए-रास्त पाता है और जिसको अल्लाह अपनी रहनुमाई से मेहरून करदे वही नाकाम ओ ना-मुराद होकर रहता है
عَرَبِيوَلَقَد ذَرَأنا لِجَهَنَّمَ كَثيرًا مِنَ الجِنِّ وَالإِنسِ ۖ لَهُم قُلوبٌ لا يَفقَهونَ بِها وَلَهُم أَعيُنٌ لا يُبصِرونَ بِها وَلَهُم آذانٌ لا يَسمَعونَ بِها ۚ أُولٰئِكَ كَالأَنعامِ بَل هُم أَضَلُّ ۚ أُولٰئِكَ هُمُ الغافِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने बहुत-से जिन्न और इनसान जहन्नम ही के लिए पैदा किए हैं। उनके दिल हैं, जिनसे वे समझते नहीं, उनकी आँखें हैं, जिनसे वे देखते नहीं और उनके कान हैं, जिनसे वे सुनते नहीं। ये लोग पशुओं के समान हैं; बल्कि ये उनसे भी अधिक गुमराह हैं। यही लोग हैं जो ग़फ़लत में पड़े हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh haqeeqat hai ke bahut se Jinn aur Insaan aisey hain jinko humne jahannum ke liye paida kiya hai. Unke paas dil hain magar woh unse sochte nahin, unke paas aankhein hain magar woh unse dekhte nahin, unke paas kaan hain magar woh unse sunte nahin. Woh jaanwaron ki tarah hain balke unse bhi zyada gaye guzre. Yeh woh log hain jo gaflat mein khoye gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney aisay boht say jinn aur insan dozakh kay liye peda kiye hain jin kay dil aisay hain jin say nahi samajhtay aur jin ki aankhen aisi hain jin say nahi dekhtay aur jin kay kaam aisay hain jin say nahi suntay. Yeh log chopayon ki tarah hain bulkay yeh unn say bhi ziyada gumrah hain. Yeho log ghafil hain
Devnagri Urdu (Maududi)और ये हकीकत है के बहुत से जिन्न और इंसान ऐसे हैं जिनको हमने जहन्नुम के लिए पैदा किया है। उनके पास दिल हैं मगर वो उन्हें सोचते नहीं, उनके पास आंखें हैं मगर वो उन्हें देखते नहीं, उनके पास कान हैं मगर वो उन्हें सुनते नहीं। वो जानवरों की तरह हैं बलके उनसे भी ज्यादा गुजरे। ये वो लोग हैं जो गफ़लत में खो गए हैं
عَرَبِيوَلِلَّهِ الأَسماءُ الحُسنىٰ فَادعوهُ بِها ۖ وَذَرُوا الَّذينَ يُلحِدونَ في أَسمائِهِ ۚ سَيُجزَونَ ما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और सबसे अच्छे नाम अल्लाह ही के हैं। अतः उसे उन्हीं के द्वारा पुकारो और उन लोगों को छोड़ दो, जो उसके नामों के बारे में सीधे रास्ते से हटते हैं। उन्हें शीघ्र ही उसका बदला दिया जाएगा, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Allah acchey naamo ka mustahiq hai. Usko acchey hi naamo se pukaro, aur un logon ko chodh do jo uske naam rakhne mein raasti se munharif ho jatey hain. Jo kuch woh karte rahey hain uska badla woh paa kar rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur achay achay naam Allah hi kay liye hain so unn naamon say Allah hi ko mossom kiya kero aur aisay logon say talluq bhi na rakho jo uss kay naamon mein kuj ravi kertay hain unn logon ko unn kay kiye ki zaroor saza milay gi
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह अच्छे नमो का मुस्तहिक़ है। उसको अच्छे ही नामो से पुकारो, और उन लोगों को छोड़ दो जो उसका नाम रखने में रास्ते से मुन्हारिफ हो जाते हैं। जो कुछ वो करते रहेंगे उसका बदला वो पा कर रहेंगे
عَرَبِيوَمِمَّن خَلَقنا أُمَّةٌ يَهدونَ بِالحَقِّ وَبِهِ يَعدِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन लोगों में से जिन्हें हमने पैदा किया कुछ लोग ऐसे हैं, जो सत्य के साथ मार्गदर्शन करते और उसी के अनुसार न्याय करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hamari makhlooq mein ek giroh aisa bhi hai jo theek theek haqq ke mutaabiq hidayat aur haqq hi ke mutaabiq insaf karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur humari makhlooq mein aik jamat aisi bhi hai jo haq kay moafiq hidayat kerti hai aur uss kay moafiq insaf bhi kerti hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमारी मख़लूक़ में एक गिरोह ऐसा भी है जो ठीक ठीक हक़ के मुताबिक हिदायत और हक़ ही के मुताबिक इन्साफ़ करता है
عَرَبِيوَالَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِنا سَنَستَدرِجُهُم مِن حَيثُ لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया, हम उन्हें धीरे-धीरे (विनाश तक) ऐसे खींच कर ले जाएँगे कि उन्हें इसका ज्ञान नहीं होगा।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jinhon ne hamari aayat ko jhutla diya hai, to unhein hum ba-tadreej (step by step) aisey tareeqe se tabahi ki taraf le jayenge ke unhein khabar tak na hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log humari aayaat ko jhutlatay hain hum unn ko ba-tadreej (girift mein) liye jarahey hain iss tor per kay unn ko khabar bhi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जिन्होन ने हमारी आयत को झुटला दिया है, तो उन्हें हम ब-तदरीज (कदम दर कदम) ऐसे तरीक़े से तबाही की तरफ ले जायेंगे के उनको ख़बर तक न होगी
عَرَبِيوَأُملي لَهُم ۚ إِنَّ كَيدي مَتينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और मैं उन्हें मोहलत दूँगा। निःसंदेह मेरा गुप्त उपाय बहुत मज़बूत है।
Roman Urdu (Maududi)Main unko dheel de raha hoon, meri chaal ka koi toad nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn ko mohlat deta hun be-shak meri tadbeer bari mazboot hai
Devnagri Urdu (Maududi)मैं उनको ढील दे रहा हूँ, मेरी चाल का कोई तोड़ नहीं है
عَرَبِيأَوَلَم يَتَفَكَّروا ۗ ما بِصاحِبِهِم مِن جِنَّةٍ ۚ إِن هُوَ إِلّا نَذيرٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और क्या उन्होंने विचार नहीं किया कि उनके साथी में कोई पागलपन नहीं है? वह तो केवल खुले रूप से सचेत करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur kya in logon ne kabhi socha nahin? Inke rafeeq par junoon ka koi asar nahin hai, woh to ek khabardar hai jo (bura anjaam saamne aane se pehle) saaf saaf mutanabbey (warn) kar raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn logon ney iss baat per ghor nahi kiya kay inn kay sathi ko zara bhi junoon nahi woh to sirf aik saaf saaf daraney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या इन लोगों ने कभी सोचा नहीं? इनके रफीक पर जुनून का कोई असर नहीं है, वो तो एक खबरदार है जो (बुरा अंजाम सामने आने से पहले) साफ साफ मुतनब्बे (चेतावनी) कर रहा है
عَرَبِيأَوَلَم يَنظُروا في مَلَكوتِ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَما خَلَقَ اللَّهُ مِن شَيءٍ وَأَن عَسىٰ أَن يَكونَ قَدِ اقتَرَبَ أَجَلُهُم ۖ فَبِأَيِّ حَديثٍ بَعدَهُ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने आकाशों तथा धरती के विशाल राज्य पर और जो चीज़ भी अल्लाह ने पैदा की है, उसपर दृष्टि नहीं डाली, और इस बात पर कि हो सकता है कि उनका (निर्धारित) समय बहुत निकट आ गया हो? तो फिर इस (क़ुरआन) के बाद वे किस बात पर ईमान लाएँगे?
Roman Urdu (Maududi)Kya in logon ne aasman o zameen e intezam par kabhi gaur nahin kiya aur kisi cheez ko bhi jo khuda ne paida ki hai aankhein khol kar nahin dekha? Aur kya yeh bhi unhon ne nahin socha ke shayad inki mohlat e zindagi poori honay ka waqt kareeb aa laga ho? Phir aakhir paigambar ki is tambeeh (warning) ke baad aur kaunsi baat aisi ho sakti hai jispar yeh iman layein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kiya inn logon ney ghor nahi kiya aasamanon aur zamin kay aalam mein aur doosri cheezon mein jo Allah ney peda ki hain aur iss baat mein kay mumkin hai kay unn ki ajal qarib hi aa phonchi ho. Phir quran kay baad konsi baat per yeh log eman layen gay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इन लोगों ने आसमान ओ जमीन ए इंतजाम पर कभी गौर नहीं किया और किसी चीज को भी जो खुदा ने भुगतान की है आंखें खोल कर नहीं देखा? और क्या ये भी अनहोन ने नहीं सोचा के शायद इनकी मोहलत ए जिंदगी पूरी होने का वक्त करीब आ लगा हो? फिर आख़िर पैगंबर की इस तम्बीह (चेतावनी) के बाद और कौन सी बात ऐसी हो सकती है जिसपर ये ईमान लायें
عَرَبِيمَن يُضلِلِ اللَّهُ فَلا هادِيَ لَهُ ۚ وَيَذَرُهُم في طُغيانِهِم يَعمَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसे अल्लाह पथभ्रष्ट कर दे, उसे कोई मार्गदर्शन करने वाला नहीं और वह उन्हें उनकी सरकशी में भटकते हुए छोड़ देता है।
Roman Urdu (Maududi)Jisko Allah rehnumayi se mehroom karde uske liye phir koi rehnuma nahin hai, aur Allah inhein inki sarkashi hi mein bhatkata hua chodey deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ko Allah Taalaa gumrah kerdey uss ko koi raah per nahi laa sakta. Aur Allah Taalaa unn ko unn ki gumrahi mein bhataktay huye chor deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिसको अल्लाह रहनुमाई से महरूम करदे उसके लिए फिर कोई रहनुमा नहीं है, और अल्लाह इन्हें इनकी सरकशी ही में भटकता हुआ छोड़ देता है
عَرَبِييَسأَلونَكَ عَنِ السّاعَةِ أَيّانَ مُرساها ۖ قُل إِنَّما عِلمُها عِندَ رَبّي ۖ لا يُجَلّيها لِوَقتِها إِلّا هُوَ ۚ ثَقُلَت فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ لا تَأتيكُم إِلّا بَغتَةً ۗ يَسأَلونَكَ كَأَنَّكَ حَفِيٌّ عَنها ۖ قُل إِنَّما عِلمُها عِندَ اللَّهِ وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) वे आपसे क़ियामत के विषय में पूछते हैं कि वह कब घटित होगी? कह दें कि उसका ज्ञान तो मेरे पालनहार ही के पास है। उसे उसके समय पर वही प्रकट करेगा। वह आकाशों तथा धरती में बहुत भारी है। तुमपर अचानक ही आएगी। वे आपसे ऐसे पूछ रहे हैं, जैसे कि आप उसी की खोज में लगे हुए हों। आप कह दें कि उसका ज्ञान तो अल्लाह ही के पास है। परंतु अधिकांश लोग (इस तथ्य को) नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log tumse puchte hain ke aakhir woh qayamat ki ghadi kab nazil hogi? Kaho“Iska ilm mere Rubb hi ke paas hai, usey apne waqt par wahi zahir karega. Aasmano aur zameen mein woh bada sakht waqt hoga. Woh tumpar achanak aa jayega”. Yeh log uske mutaaliq tumse is tarah puchte hain goya ke tum uski khoj mein lagey huey ho. Kaho, “uska ilm to sirf Allah ko hai magar aksar log is haqeeqat se na-waqif hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log aap say qayamat kay mutalliq sawal kertay hain kay iss ka waqoo kabb hoga? Aap farma dijiye kay iss ka ilm sirf meray rab hi kay pass hai uss kay waqt per uss ko siwa Allah kay koi aur zahir na keray ga. Woh aasmanon aur zamin mein bara bhari (haadsa) hoga woh tum per mehaz achanak aa paray gi. Woh aap say iss tarah poochtay hain jaisay goya aap iss ki tehqiqaat ker chukay hain. Aap farma dijiye kay iss ka ilm khaas Allah hi kay pass hai lekin aksar log nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग तुमसे पूछते हैं कि आख़िर वो क़यामत की घड़ी कब नाज़िल होगी? कहो"इसका इल्म मेरे रब ही के पास है, उसे अपना वक्त पर वही जाहिर करेगा। आसमान और जमीन में वो बड़ा वक्त होगा। वो तुम्हारा अचानक आ जाएगा"। ये लोग उसके मुतालिक तुमसे इस तरह पूछते हैं गोया के तुम उसकी खोज में लगे हुए हो। कहो, "उसका इल्म तो सिर्फ अल्लाह को है मगर अक्सर लोग इस हकीकत से ना-वाक़िफ़ हैं"
عَرَبِيقُل لا أَملِكُ لِنَفسي نَفعًا وَلا ضَرًّا إِلّا ما شاءَ اللَّهُ ۚ وَلَو كُنتُ أَعلَمُ الغَيبَ لَاستَكثَرتُ مِنَ الخَيرِ وَما مَسَّنِيَ السّوءُ ۚ إِن أَنا إِلّا نَذيرٌ وَبَشيرٌ لِقَومٍ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि मैं अपने लिए किसी लाभ और हानि का मालिक नहीं हूँ, परंतु जो अल्लाह चाहे। और यदि मैं ग़ैब (परोक्ष) का ज्ञान रखता होता, तो अवश्य बहुत अधिक भलाइयाँ प्राप्त कर लेता और मुझे कोई कष्ट नहीं पहुँचता। मैं तो केवल उन लोगों को सावधान करने वाला तथा शुभ सूचना देने वाला हूँ, जो ईमान (विश्वास) रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), insey kaho “main apni zaat ke liye kisi nafey (faiyde) aur nuqsan ka ikhtiyar nahin rakhta, Allah hi jo kuch chahta hai woh hota hai aur agar mujhey gaib ka ilm hota to main bahut se faiyde apne liye haasil karleta aur mujhey kabhi koi nuqsan na pahunchta. Main to mehaz ek khabardaar karne wala aur khush-khabri sunane wala hoon un logon ke liye jo meri baat maanein”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap farma dijiye kay mein khud apni zaat-e-khaas kay liye kissi nafay ka ikhtiyar nahi rakhta aur na kissi zarar ka magar utna hi jitna Allah ney chaha ho aur agar mein ghaib ki baaten janta hota to mein boht say munafay hasil ker leta aur koi nuksan mujh ko na phonchta mein to mehaz daraney wala aur bisharat denay wala hun unn logon ko jo eman rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), इनसे कहो "मैं अपनी जात के लिए किसी नाफ़े (फ़ैयदे) और नुक्सान का इख्तियार नहीं रखता, अल्लाह ही जो कुछ चाहता है वो होता है और अगर मुझे गैब का इल्म होता तो मैं बहुत से फ़ायदे अपने लिए हासिल करता हूं और मुझे कभी कोई नुक्सान न मिलता। मैं तो महज़ एक खबरदार करने वाला और खुश-खबरी सुनने वाला हूं उन लोगों के लिए जो मेरी बात माने।''
عَرَبِي۞ هُوَ الَّذي خَلَقَكُم مِن نَفسٍ واحِدَةٍ وَجَعَلَ مِنها زَوجَها لِيَسكُنَ إِلَيها ۖ فَلَمّا تَغَشّاها حَمَلَت حَملًا خَفيفًا فَمَرَّت بِهِ ۖ فَلَمّا أَثقَلَت دَعَوَا اللَّهَ رَبَّهُما لَئِن آتَيتَنا صالِحًا لَنَكونَنَّ مِنَ الشّاكِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वही (अल्लाह) है, जिसने तुम्हें एक जान से पैदा किया और उसी से उसका जोड़ा बनाया, ताकि वह उसके पास सुकून हासिल करे। फिर जब उस (पति) ने उस (पत्नी) से सहवास किया, तो उसको हल्का सा गर्भ रह गया। तो वह उसे लेकर चलती फिरती रही, फिर जब वह बोझल हो गई, तो दोनों (पति-पत्नी) ने अपने पालनहार अल्लाह से दुआ की : निःसंदेह यदि तूने हमें अच्छा स्वस्थ बच्चा प्रदान किया, तो हम अवश्य ही आभार प्रकट करने वालों में से होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi hai jisne tumhein ek jaan se paida kiya aur usi ki jins se uska joda banaya taa-ke uske paas sukoon haasil karey. Phir jab mard ne aurat ko dhank liya to usey ek khafif sa hamal reh gaya jisey liye liye woh chalti phirti rahi, phir jab woh bojhal ho gayi to dono ne milkar Allah, apne Rubb se dua ki ke agar tu nay humko accha sa baccha diya to hum tere shukar guzar hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Woh Allah Taalaa aisa hai jiss ney tum ko aik tan-e-wahid say peda kiya aur iss say uss ka jora banaya takay woh iss apney joray say unss hasil keray phir jab miyan ney biwi say qurbat ki to uss ko hamal reh gaya halka sa. So woh uss ko liye huye phirti rahi phri jab woh bojhal hogaee to dono miyan biwi Allah say jo unn ka maalik hai dua kerney lagay kay agar tu ney hum ko sahih saalim aulad dey di to hum khoob shukar guzari keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह ही है जिसने तुम्हें एक जान से बचाया और उसकी जिंदगी से उसका जोड़ा बनाया ता-के उसके पास सुकून हासिल करे। फिर जब मर्द ने औरत को धन्यवाद लिया तो उसे एक खफीफ सा हमाल रह गया जिसके लिए वो चलती फिरती रही, फिर जब वो बोझल हो गई तो दोनों ने मिलकर अल्लाह, अपने रब से दुआ की के अगर तू नहीं हमको अच्छा सा बच्चा दिया तो हम तेरे शुक्र गुजार होंगे
عَرَبِيفَلَمّا آتاهُما صالِحًا جَعَلا لَهُ شُرَكاءَ فيما آتاهُما ۚ فَتَعالَى اللَّهُ عَمّا يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उस (अल्लाह) ने उन्हें एक स्वस्थ बच्चा प्रदान कर दिया, तो दोनों ने उस (अल्लाह) के लिए उसमें साझी बना लिए, जो उसने उन्हें प्रदान किया था। तो अल्लाह उससे बहुत ऊँचा है जो वे साझी बनाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar jab Allah ne unko ek sahih o saalim baccha de diya to woh uski is bakshish o inayat mein dusron ko uska shareek thehrane lagey. Allah bahut buland o bartar hai in mushrikana baaton se jo yeh log karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)So jab Allah ney dono ko sahih saalim aulad dey di to Allah ki di hui cheez mein woh dono Allah kay shareek qarar denay lagay so Allah pak hai unn kay shirk say
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जब अल्लाह ने उनको एक सही ओ सलीम बच्चा दे दिया तो वो उसकी इस बख्शीश ओ इनायत में दुसरों को उसका शरीक ठहरना लगे। अल्लाह बहुत बुलंद ओ बदले में है मुशरिकाना बातों से जो ये लोग करते हैं
عَرَبِيأَيُشرِكونَ ما لا يَخلُقُ شَيئًا وَهُم يُخلَقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या वे उन्हें (अल्लाह का) साझी बनाते हैं, जो कोई चीज़ पैदा नहीं करते और वे स्वयं पैदा किए जाते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kaise nadaan hain yeh log ke unko khuda ka shareek thehrate hain jo kisi cheez ko bhi paida nahin karte balke khud paida kiye jatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aison ko shareek thehratay hain jo kissi cheez ko peda na ker saken aur woh khud hi peda kiye gaye hon
Devnagri Urdu (Maududi)कैसी नादान हैं ये लोग के उनको खुदा का शरीक ठहरते हैं जो किसी चीज को भी पेदा नहीं करते बलके खुद पेदा किए जाते हैं
عَرَبِيوَلا يَستَطيعونَ لَهُم نَصرًا وَلا أَنفُسَهُم يَنصُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे न उनकी कोई सहायता कर सकते हैं और न स्वयं अपनी सहायता करते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Jo na unki madad kar sakte hain aur na aap apni madad hi par qadir hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh inn ko kissi qisam ki madad nahi dey saktay aur woh khud bhi madad nahi ker saktay
Devnagri Urdu (Maududi)जो ना उनकी मदद कर सकते हैं और ना आप अपनी मदद ही पर कादिर हैं
عَرَبِيوَإِن تَدعوهُم إِلَى الهُدىٰ لا يَتَّبِعوكُم ۚ سَواءٌ عَلَيكُم أَدَعَوتُموهُم أَم أَنتُم صامِتونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम उन्हें सीधी राह की ओर बुलाओ, तो वे तुम्हारे पीछे नहीं आएँगे। तुम्हारे लिए बराबर है, चाहे उन्हें पुकारो अथवा तुम चुप रहो।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum unhein seedhi raah par aane ki dawat do to woh tumhare pichey na aayein, tum khwa unhein pukaro ya khamosh raho, dono suraton mein tumhare liye yaksan hi rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tum inn ko koi baat batlaney ko pukaro to tumharay kehney per na chalen tumharay aetbaar say dono amar barabar hain khuwa tum inn ko pukaro ya tum khamosh raho
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम उन्हें सीधी राह पर आने की दावत दो तो वो तुम्हारे पीछे ना आएं, तुम ख्वा उन्हें पुकारो या खामोश रहो, दोनों सूरतों में तुम्हारे लिए यक्सन ही रहे
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ تَدعونَ مِن دونِ اللَّهِ عِبادٌ أَمثالُكُم ۖ فَادعوهُم فَليَستَجيبوا لَكُم إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, वे तुम्हारे ही जैसे (अल्लाह के) बंदे हैं। अतः तुम उन्हें पुकारो, तो वे तुम्हारी दुआ क़बूल करें, यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)Tum log khuda ko chodh kar jinhein pukarte ho woh to mehaz bandey(slaves) hain jaisey tum banday ho. Unsey duaein maang dekho. Yeh tumhari duaon ka jawab dein agar unke barey mein tumhare khayalaat sahih hain
Roman Urdu (Junagarhi)Waqaee tum Allah ko chor ker jin ki ibadat kertay ho woh bhi tum hi jaisay banday hain so tum unn ko pukaro phir unn ko chahaiye kay tumhara kehna ker den agar tum sachay ho
Devnagri Urdu (Maududi)तुम लोग खुदा को छोड़ कर जिन्हे पुकारते हो वो तो महज़ बंदे (गुलाम) हैं जैसे तुम बंदे हो। उनसे दुआएं मांग देखो. ये तुम्हारी दुआओं का जवाब दें अगर उनके बारे में तुम्हारा ख़यालत सही है
عَرَبِيأَلَهُم أَرجُلٌ يَمشونَ بِها ۖ أَم لَهُم أَيدٍ يَبطِشونَ بِها ۖ أَم لَهُم أَعيُنٌ يُبصِرونَ بِها ۖ أَم لَهُم آذانٌ يَسمَعونَ بِها ۗ قُلِ ادعوا شُرَكاءَكُم ثُمَّ كيدونِ فَلا تُنظِرونِ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या इन (पत्थर की मूर्तियों) के पाँव हैं, जिनसे वे चलती हैं? या उनके हाथ हैं, जिनसे वे पकड़ती हैं? या उनकी आँखें हैं, जिनसे वे देखती हैं? या उनके कान हैं, जिनसे वे सुनती हैं? आप कह दें कि अपने साझियों को बुला लो, फिर मेरे विरुद्ध उपाय करो और मुझे कोई अवसर न दो!
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh paon (legs) rakhte hain ke unse chalein? Kya yeh haath rakhte hain ke unse pakadein? Kya yeh aankhein rakhte hain ke unse dekhein? Kya yeh kaan rakhte hain ke unse sunein? (Aey Muhammad), insey kaho ke “ bula lo apne thehraye huey shareekon ko phir tum sab mil kar mere khilaf tadbeerein (scheme/plot) karo aur mujhey hargiz mohlat na do
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn kay paon hain jin say woh chaltay hon ya unn kay haath hain jin say woh kissi cheez ko thaam saken ya unn ki aankhen hain jin say woh dekhtay hon ya unn kay kaan hain jin say woh suntay hain aap keh dijiye! Tum apney sab shurka ko bula lo phir meri zarar saani ki tadbeer kero phir mujh ko zara mohlat mat do
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये पांव (पैर) रखते हैं कि उन्हें चलें? क्या ये हाथ रखते हैं के उन्हें पकाएँ? क्या ये आंखें रखते हैं कि उन्हें देखें? क्या ये कान रखते हैं के उनसे सुने? (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो के “ बुला लो अपने ठहरे हुए शरीकों को फिर तुम सब मिल कर मेरे खिलाफ तदबीरें (योजना/कथानक) करो और मुझे हरगिज़ मोहलत न दो
عَرَبِيإِنَّ وَلِيِّيَ اللَّهُ الَّذي نَزَّلَ الكِتابَ ۖ وَهُوَ يَتَوَلَّى الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मेरा संरक्षक अल्लाह है, जिसने यह पुस्तक (क़ुरआन) उतारी है और वही सदाचारियों का संरक्षण करता है।
Roman Urdu (Maududi)Mera haami-o-nasir (guardian)woh khuda hai jisne yeh kitab nazil ki hai, aur woh neik aadmiyon ki himayat karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan mera madadgar Allah Taalaa hai jiss ney yeh kitab nazil farmaee aur woh nek bandon ki madad kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)मेरा हामी-ओ-नासिर (अभिभावक) वो खुदा है जिसने ये किताब नाज़िल की है, और वो नए आदमियों की हिमायत करता है
عَرَبِيوَالَّذينَ تَدعونَ مِن دونِهِ لا يَستَطيعونَ نَصرَكُم وَلا أَنفُسَهُم يَنصُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, वे न तुम्हारी सहायता कर सकते हैं और न स्वयं अपनी सहायता करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ba-khilaf iske tum jinhein khuda ko chodh kar pukarte ho woh na tumhari madad kar sakte hain aur na khud apni madad hi karne ke qabil hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum jin logon ki Allah ko chor ker ibadat kertay ho woh tumhari kuch madad nahi ker saktay aur na woh apni madad ker saktay hain
Devnagri Urdu (Maududi)बा-खिलाफ इसके तुम जिन्हें खुदा को छोड़ कर पुकारते हो वो ना तुम्हारी मदद कर सकते हैं और ना खुद अपनी मदद ही करने के काबिल हैं
عَرَبِيوَإِن تَدعوهُم إِلَى الهُدىٰ لا يَسمَعوا ۖ وَتَراهُم يَنظُرونَ إِلَيكَ وَهُم لا يُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम उन्हें सीधी राह की ओर बुलाओ, तो वे नहीं सुनेंगे और (ऐ नबी!) आप उन्हें देखेंगे कि वे आपकी ओर देख रहे हैं, हालाँकि वे कुछ नहीं देखते।
Roman Urdu (Maududi)Balke agar tum unhein seedhi raah par aane ke liye kaho to woh tumhari baat sun bhi nahin sakte , ba-zaahir tumko aisa nazar aata hai ke woh tumhari taraf dekh rahey hain magar fil-waqeh woh kuch bhi nahin dekhte”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar inn ko koi baat batlaney ko pukaro to iss ko na sunen aur inn ko aap dekhtay hain kay goya woh aap ko dekh rahey hain aur woh kuch bhi nahi dekhtay
Devnagri Urdu (Maududi)बाल्के अगर तुम उन्हें सीधी राह पर आने के लिए कहो तो वो तुम्हारी बात सुन भी नहीं सकती, बा-ज़ाहिर तुमको ऐसा नज़र आता है के वो तुम्हारी तरफ़ देख रहे हैं मगर फ़िल-वाक़े वो कुछ भी नहीं देखते”
عَرَبِيخُذِ العَفوَ وَأمُر بِالعُرفِ وَأَعرِض عَنِ الجاهِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप क्षमा से काम लें, भलाई का आदेश दें तथा अज्ञानियों की ओर ध्यान न दें।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), Narmi o darguzar ka tareeqa ikhtiyar karo, maroof ki talqeen kiye jao (enjoin good), aur jahilon se na uljho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap dar guzar ko ikhtiyar keren nek kaam ki taleem den aur jahilon say aik kinara hojayen
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), नरमी ओ दरगुज़र का तरीक़ा इख़्तियार करो, मारूफ़ की तालक़ीन किये जाओ (आदेश दो) अच्छा), और जाहिलों से ना उलझो
عَرَبِيوَإِمّا يَنزَغَنَّكَ مِنَ الشَّيطانِ نَزغٌ فَاستَعِذ بِاللَّهِ ۚ إِنَّهُ سَميعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि शैतान आपको उकसाए, तो अल्लाह से शरण माँगिए। निःसंदेह वह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Agar kabhi shaytan tumhein uksaye to Allah ki panaah maango, woh sab kuch sunne aur jaanne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar aap ko koi waswasa shetan ki taraf say aaney lagay to Allah ki panah maang liya kijiye bila shuba woh khoob sunnay wala khoob jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर कभी शैतान तुम्हें अल्लाह की पनाह मांगो, वो सब कुछ सुनने और जाने वाला है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ اتَّقَوا إِذا مَسَّهُم طائِفٌ مِنَ الشَّيطانِ تَذَكَّروا فَإِذا هُم مُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय जो लोग (अल्लाह का) डर रखते हैं, यदि शैतान की ओर से उन्हें कोई बुरा विचार आ भी जाए, तो तत्काल संभल जाते हैं, फिर अचानक वे साफ़ देखने लगते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat mein jo log muttaqi (Allah se darne waley/pious) hain unka haal to yeh hota hai ke kabhi shaytan ke asar se koi bura khayal agar unhein choo bhi jata hai to woh fawran choukanne (alert) ho jatey hain aur phir unhein saaf nazar aane lagta hai ke unke liye saheeh tareeqe-kar kya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan jo log khud taras hain jab unn ko koi khatra shetan ki taraf say aajata hai to woh yaad mein lag jatay hain so yakayak unn ki aankhen khul jati hain
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत में जो लोग मुत्तकी (अल्लाह से डरने वाले/पवित्र) हैं उनका हाल तो ये होता है के कभी शैतान के असर से कोई बुरा ख्याल अगर उन्हें छू भी जाता है तो वो जानवर चौकन्ने (अलर्ट) हो जाते हैं और फिर उन्हें साफ नजर आने लगता है के उनके लिए सही तारीख-कर क्या है
عَرَبِيوَإِخوانُهُم يَمُدّونَهُم فِي الغَيِّ ثُمَّ لا يُقصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो उन (शैतानों) के भाई हैं, वे उन्हें गुमराही में बढ़ाते रहते हैं, फिर वे (उन्हें गुमराह करने में) तनिक भी कमी नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Rahey unke (yaani Shaytan ke) bhai bandh, to woh unhein unki kajrawi mein khinchey (deeper into error) liye chale jatey hain aur unhein bhatkane mein koi kasar utha nahin rakhte
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo shetan kay tabey hain woh inn ko gumrahi mein kheenchay ley jatay hain pus woh baaz nahi aatay
Devnagri Urdu (Maududi)रहे उनके (यानी शैतान के) भाई बंद, तो वो उनको उनकी कजरावी में खिंचे (त्रुटि में गहराई से) लिए चले जाते हैं और उन्हें भटकने में कोई कसर नहीं उठता
عَرَبِيوَإِذا لَم تَأتِهِم بِآيَةٍ قالوا لَولَا اجتَبَيتَها ۚ قُل إِنَّما أَتَّبِعُ ما يوحىٰ إِلَيَّ مِن رَبّي ۚ هٰذا بَصائِرُ مِن رَبِّكُم وَهُدًى وَرَحمَةٌ لِقَومٍ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब आप इन (बहुदेववादियों) के पास कोई आयत (निशानी) नहीं लाते, तो कहते हैं कि तुमने स्वयं कोई आयत क्यों न बना ली? आप कह दें कि मैं केवल उसी का अनुसरण करता हूँ, जो मेरे पालनहार के पास से मेरी ओर वह़्य की जाती है। यह (क़ुरआन) तुम्हारे पालनहार की ओर से सूझ की बातें (प्रमाण) है, तथा ईमान वालों के लिए मार्गदर्शन और दया है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), jab tum in logon ke saamne koi nishani (yani moajiza) pesh nahin karte to yeh kehte hain ke tumne apne liye koi nishani kyun na intekhab karli? Insey kaho “main to sirf us wahee ki pairwi karta hoon jo mere Rubb ne meri taraf bheji hai, yeh baseerat (vision) ki roshniyan hain tumhare Rubb ki taraf se aur hidayat aur rehmat hai un logon ke liye jo isey qabool karein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab aap koi moajza inn kay samney zahir nahi kertay to woh log kehtay hain kay aap yeh moajza kiyon na laye? Aap farma dijiye! Kay mein uss ka ittabaa kerta hun jo mujh per meray rab ki taraf say hukum bheja gaya hai yeh goya bohr si daleelen hain tumharay rab ki taraf say aur hodayat aur rehmat hai unn logon kay liye jo eman rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), जब तुम लोगों के सामने कोई निशानी (यानी मोअजिज़ा) पेश नहीं करते तो ये कहते हैं कि तुमने अपने लिए कोई निशाना क्यों नहीं इंतखाब किया? इनसे कहो "मैं तो सिर्फ हमें वही की जोड़ी करता हूं जो मेरे रब ने मेरी तरफ भेजी है, ये बसीरत (दृष्टि) की रोशनी हैं तुम्हारे रब की तरफ से और हिदायत और रहमत है उन लोगों के लिए जो इसे कबूल करें
عَرَبِيوَإِذا قُرِئَ القُرآنُ فَاستَمِعوا لَهُ وَأَنصِتوا لَعَلَّكُم تُرحَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब क़ुरआन पढ़ा जाए, तो उसे ध्यानपूर्वक सुनो तथा मौन साध लो। ताकि तुमपर दया की जाए।
Roman Urdu (Maududi)Jab Quran tumhare saamne padha jaye to isey tawajju se suno aur khamosh raho, shayad ke tumpar bhi rehmat ho jaye”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab quran parha jaya keray to iss ki taraf kaan laga diya kero aur khamosh raha kero umeed hai kay tum per rehmat ho
Devnagri Urdu (Maududi)जब कुरान तुम्हारे सामने पढ़ा जाए तो इसे।" तवज्जु से सुनो और खामोश रहो, शायद के तुमपर भी रहमत हो जाए”
عَرَبِيوَاذكُر رَبَّكَ في نَفسِكَ تَضَرُّعًا وَخيفَةً وَدونَ الجَهرِ مِنَ القَولِ بِالغُدُوِّ وَالآصالِ وَلا تَكُن مِنَ الغافِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) अपने पालनहार का स्मरण अपने दिल में विनयपूर्वक तथा डरते हुए और धीमे स्वर में प्रातः तथा संध्या करते रहो और ग़ाफ़िलों में से न हो जाओ।
Roman Urdu (Maududi)(Aye Nabi), apne Rubb ko subah o shaam yaad kiya karo dil hi dil mein zaari (humility) aur khauf ke saath, aur zubaan se bhi halki awaz ke saath. Tum un logon mein se na ho jao jo gaflat mein padey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aey shaks! Apney rab ki yaad kiya ker apney dil mein aajzi kay sath aur khof kay sath aur zor ki aawaz ki nisbat kum aawaz kay sath subha aur shaam aur ehal-e-ghaflat mein say mat hona
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), अपने रुब को सुबह ओ शाम याद किया करो दिल ही दिल में ज़ारी (विनम्रता) और खौफ के साथ, और जुबान से भी हल्की आवाज के साथ। तुम उन लोगों में से ना हो जाओ जो गफ़लत में पड़े हुए हैं
☉ Sajda
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ عِندَ رَبِّكَ لا يَستَكبِرونَ عَن عِبادَتِهِ وَيُسَبِّحونَهُ وَلَهُ يَسجُدونَ ۩
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो (फ़रिश्ते) आपके पालनहार के पास हैं, वे उसकी इबादत से अभिमान नहीं करते और उसकी पवित्रता का वर्णन करते हैं और उसी को सजदा करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo Farishtey tumhare Rubb ke huzoor taqarrub ka muqaam rakhte hain woh kabhi apni badayi ke ghamand mein aakar uski ibadat se mooh nahin moadte aur uski tasbeeh karte hain, aur uske aagey jhuke rehte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan jo teray rab kay nazdeek hain woh uss ki ibadat say takabbur nahi kertay aur uss ki paki biyan kertay hain aur uss ko sajda kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो फ़रिश्ते तुम्हारे रब के हुज़ूर तकर्रब का मुकाम रखते हैं वो कभी अपनी बदाई के घमंड में आकर उसकी इबादत से मुँह नहीं मोड़ते और उसकी तस्बीह करते हैं, और उसके आगे झुके रहते हैं
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Surah 7: Al-A'raf (The Elevated Places)

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Surah 7: Al-A'raf (The Elevated Places)

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Surah 7: Al-A'raf (The Elevated Places)

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Surah 7: Al-A'raf (The Elevated Places)

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Surah 8: Al-Anfal (Voluntary Gifts)

Medinan🕐 Revelation #88📜 75 Verses🕮 Juz 1–10
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِييَسأَلونَكَ عَنِ الأَنفالِ ۖ قُلِ الأَنفالُ لِلَّهِ وَالرَّسولِ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَصلِحوا ذاتَ بَينِكُم ۖ وَأَطيعُوا اللَّهَ وَرَسولَهُ إِن كُنتُم مُؤمِنينَ
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) वे (आपके साथी) आपसे युद्ध में प्राप्त धन के विषय में पूछते हैं। आप कह दें कि युद्ध में प्राप्त धन अल्लाह और रसूल के हैं। अतः अल्लाह से डरो और आपस में सुधार रखो तथा अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो, यदि तुम ईमान वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Tumse anfal(booty of war/ganimat ke maal) ke mutaaliq poochte hain? Kaho “yeh anfal to Allah aur uske Rasool ke hain, pas tum log Allah se daro aur apne aapas ke taaluqaat durust karo aur Allah aur uske Rasool ki itaat karo agar tum momin ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log aap say ghanimaton ka hukum daryaft kertay hain aap farma dijiye! Kay yeh ghanimaten Allah ki hain aur rasool ki hain so tum Allah say daro aur apny bahumi taalluqaat ki ki islaah kero aur uss kay rasool ki ita’at kero agar tum eman walay ho
Devnagri Urdu (Maududi)तुमसे अनफाल (युद्ध की लूट/गनीमत के माल) के मुतालिक पूछते हैं? कहो "ये अनफ़ल तो अल्लाह और उसके रसूल के हैं, लेकिन तुम लोग अल्लाह से डरो और अपने आपस के तालुकात दुरुस्त करो और अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करो अगर तुम मोमिन हो"
عَرَبِيإِنَّمَا المُؤمِنونَ الَّذينَ إِذا ذُكِرَ اللَّهُ وَجِلَت قُلوبُهُم وَإِذا تُلِيَت عَلَيهِم آياتُهُ زادَتهُم إيمانًا وَعَلىٰ رَبِّهِم يَتَوَكَّلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(वास्तव में) ईमान वाले तो वही हैं कि जब अल्लाह का ज़िक्र किया जाए, तो उनके दिल काँप उठते हैं, और जब उनके सामने उसकी आयतें पढ़ी जाएँ, तो उनका ईमान बढ़ा देती हैं, और वे अपने पालनहार ही पर भरोसा रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Sacchey ehle iman to woh log hain jinke dil Allah ka zikr sunkar laraz (fearful) jatey hain aur jab Allah ki aayat unke saamne padi jati hai to unka iman badh jata hai aur woh apne Rubb par aitamaad (bharosa) rakhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Bus eman walay to aisay hotay hain kay jab Allah Taalaa ka zikar aata hai to unn kay quloob darr jatay hain aur jab Allah ki aayaten unn ko parh ker sunaee jaatin hain hain to woh aayaten unn kay eman ko aur ziyada ker deti hain aur woh log apney rab per tawakkal kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)सच्चे एहले ईमान तो वो लोग हैं जिनके दिल अल्लाह का ज़िक्र सुनकर डर लगता है (भयभीत) जाते हैं और जब अल्लाह की आयत उनके सामने पड़ती है तो उनका ईमान बढ़ जाता है और वो अपने रब पर ऐतमाद (भरोसा) रखते हैं
عَرَبِيالَّذينَ يُقيمونَ الصَّلاةَ وَمِمّا رَزَقناهُم يُنفِقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे लोग जो नमाज़ स्थापित करते हैं तथा हमने उन्हें जो कुछ प्रदान किया है, उसमें से ख़र्च करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo namaz qayam karte hain aur jo kuch humne unko diya hai usmein se (hamari raah mein) kharch karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo kay namaz ki pabandi kertay hain aur hum ney unn ko jo kuch diya hai woh uss mein say kharch kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो नमाज कायम करते हैं और जो कुछ हमने उनको दिया है उसमें से (हमारी राह में) खर्च करते हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ هُمُ المُؤمِنونَ حَقًّا ۚ لَهُم دَرَجاتٌ عِندَ رَبِّهِم وَمَغفِرَةٌ وَرِزقٌ كَريمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वही सच्चे ईमान वाले हैं, उन्हीं के लिए उनके पालनहार के पास बहुत से दर्जे तथा बड़ी क्षमा और सम्मानित (उत्तम) जीविका है।
Roman Urdu (Maududi)Aisey hi log haqiqi momin hain. Unke liye unke Rubb ke paas badey darje hain, kasooron se darguzar hai aur behtareen rizq hai
Roman Urdu (Junagarhi)Sachay eman walay yeh log hain inn kay liye baray darjay hain inn kay rab kay pass aur maghfirat aur izzat ki rozi hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसे ही लोग हक़ीक़ी मोमिन हैं। उनके लिए उनके रुब के पास बड़े दर्जे हैं, कसूरों से दरगुज़ार है और बेहतरीन रिज़क है
عَرَبِيكَما أَخرَجَكَ رَبُّكَ مِن بَيتِكَ بِالحَقِّ وَإِنَّ فَريقًا مِنَ المُؤمِنينَ لَكارِهونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिस प्रकार आपके पालनहार ने आपको आपके घर (मदीना) से (बहुदेववादियों से युद्ध के लिए) सत्य के साथ निकाला, हालाँकि निश्चय ईमान वालों का एक समूह तो (इसे) नापसंद करने वाला था।
Roman Urdu (Maududi)(Is maal e ganimat ke maamle mein bhi waisi hi surat pesh aa rahi hai jaisi us waqt pesh aayi thi jabke) tera Rubb tujhey haqq ke saath tere ghar se nikal laya tha aur momino mein se ek giroh ko yeh sakht nagawar tha
Roman Urdu (Junagarhi)Jaisa kay aap kay rab ney aap kay ghar say haq kay sath aap ko rawana kiya aur musalmanon ki aik jamat iss ko giran samajhti thi
Devnagri Urdu (Maududi)(इस माल ए गनीमत के मामले में भी वैसी ही सूरत पेश आ रही है जैसी उस वक्त पेश आई थी जबके) तेरा रुब तुझी हक़ के साथ तेरे घर से निकल लाया था और मोमिनो में से एक गिरोह को ये सख्त नागावर था
عَرَبِييُجادِلونَكَ فِي الحَقِّ بَعدَما تَبَيَّنَ كَأَنَّما يُساقونَ إِلَى المَوتِ وَهُم يَنظُرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे आपसे सच के बारे में झगड़ते थे, इसके बाद कि वह स्पष्ट हो चुका था, जैसे उन्हें मौत की ओर हाँका जा रहा है और वे उसे देख रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh us haqq ke maamle mein tujhse jhagad rahey thay daraan haal(whereas) yeh ke woh saaf saaf numayan ho chuka tha, unka haal yeh tha ke goya woh aankhon dekhe maut ki taraf haanke (driven) jaa rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh iss haq kay baray mein iss kay baad kay uss ka zahoor hogaya tha aap say iss tarah jhagar rahey thay kay goya koi unn ko maut ki taraf haankay liye jata hai aur woh dekh rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो उस हक़ के मामले में तुझसे झगड़ा रहे थे दारान हाल (जबकि) ये के वो साफ़ साफ़ नुमायन हो चूका था, उनका हाल ये था के गोया वो आँखें देखे मौत की तरफ हांके (चालित) जा रहे हैं
عَرَبِيوَإِذ يَعِدُكُمُ اللَّهُ إِحدَى الطّائِفَتَينِ أَنَّها لَكُم وَتَوَدّونَ أَنَّ غَيرَ ذاتِ الشَّوكَةِ تَكونُ لَكُم وَيُريدُ اللَّهُ أَن يُحِقَّ الحَقَّ بِكَلِماتِهِ وَيَقطَعَ دابِرَ الكافِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा (वह समय याद करो) जब अल्लाह तुम्हें वचन दे रहा था कि दो गिरोहों में से एक तुम्हारे हाथ आएगा और तुम चाहते थे कि निर्बल (निःशस्त्र) गिरोह तुम्हारे हाथ लगे। और अल्लाह चाहता था कि अपने वचन द्वारा सत्य को सिद्ध कर दे और काफ़िरों की जड़ काट दे।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo wo mauqa jabke Allah tumse wada kar raha tha ke dono girohon mein se ek tumhein mil jayega. Tum chahte thay ke kamzor giroh tumhein miley magar Allah ka irada yeh tha ke apne irshadaat se haqq ko haqq kar dikhaye aur kafiron ki jadd kaat de
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum log uss waqt ko yaad kero! Jab kay Allah tum say unn do jamaton mein say aik ka wada kerta tha kay woh tumharay haath aajaye gi aur tum iss tamanna mein thay kay ghair musallah jamat tumharay haath aajaye aur Allah Taalaa ko yeh manzoor tha kay apney ehkaam say haq ka haq hona sabit kerdey aur inn kafiron ki jarr kaat dey
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो वो मौका जबके अल्लाह तुमसे वादा कर रहा था कि दोनों गिरोहोन में से एक तुम्हें मिल जाएगा। तुम चाहते थे के कमज़ोर गिरो ​​तुम्हें मिले मगर अल्लाह का इरादा ये था के अपने इरशादत से हक़ को हक़ कर दिखाये और काफ़िरों की जद्द काट दे
عَرَبِيلِيُحِقَّ الحَقَّ وَيُبطِلَ الباطِلَ وَلَو كَرِهَ المُجرِمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ताकि वह सत्य को सत्य कर दे और असत्य को असत्य कर दे, यद्यपि अपराधियों को बुरा लगे।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke haqq haqq hokar rahey aur baatil baatil hokar reh jaye khwa mujrimon ko yeh kitna hi nagawar ho
Roman Urdu (Junagarhi)Takay haq ka haq hona aur baatil ka baatil hona sabit kerdey go yeh mujrim log na pasand hi keren
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के हक़ हक़ होकर रहे और बातिल बातिल होकर रह जाये ख्वा मुजरिमों को ये कितना ही नागावर हो
عَرَبِيإِذ تَستَغيثونَ رَبَّكُم فَاستَجابَ لَكُم أَنّي مُمِدُّكُم بِأَلفٍ مِنَ المَلائِكَةِ مُردِفينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब तुम अपने पालनहार से (बद्र के युद्ध के समय) मदद माँग रहे थे, तो उसने तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार कर ली कि निःसंदेह मैं एक हज़ार फ़रिश्तों के साथ तुम्हारी सहायता करने वाला हूँ, जो एक-दूसरे के पीछे आने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh mauqa yaad karo jabke tum apne Rubb se fariyaad kar rahye thay jawab mein usne farmaya ke main tumhari madad ke liye pai dar pai ek hazar Farishtey bhej raha hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Uss waqt ko yaad kero jab tum apney rab say faryad ker rahey thay phir Allah Taalaa ney tumhari sunn li kay mein tum ko aik hazat farishton say madad doon ga jo lagataar chalen aayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और वो मौका याद करो जबके तुम अपने रब से फरियाद कर रहे थे जवाब में उसने फरमाया के मैं तुम्हारी मदद के लिए पै डर पै एक हजार फरिश्ते भेज रहा हूं
عَرَبِيوَما جَعَلَهُ اللَّهُ إِلّا بُشرىٰ وَلِتَطمَئِنَّ بِهِ قُلوبُكُم ۚ وَمَا النَّصرُ إِلّا مِن عِندِ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَزيزٌ حَكيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ने यह इसलिए किया कि (तुम्हारे लिए) शुभ सूचना हो और ताकि इसके साथ तुम्हारे दिल संतुष्ट हो जाएँ। अन्यथा सहायता तो अल्लाह ही की ओर से होती है। निःसंदेह अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh baat Allah ne tumhein sirf isliye bata di ke tumhein khush-khabri ho aur tumhare dil issey mutmaeen ho jayein. Warna madad to jab bhi hoti hai Allah hi ki taraf se hoti hai. Yaqeenan Allah zabardast aur dana (wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa ney yeh imdad mehaz iss lie ki kay bisharat ho aur takay tumharay dilon ko qarar ho jaye aur madad sirf Allah hi ki taraf say hai jo kay zabardast hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये बात अल्लाह ने तुम्हें सिर्फ इसलिए बताया है कि तुम्हें खुश-खबरी हो और तुम्हारा दिल इसे मुतमइन हो जाए। वरना मदद तो जब भी होती है अल्लाह ही की तरफ से होती है। यकीनन अल्लाह ज़बरदस्त और दाना (बुद्धिमान) है
عَرَبِيإِذ يُغَشّيكُمُ النُّعاسَ أَمَنَةً مِنهُ وَيُنَزِّلُ عَلَيكُم مِنَ السَّماءِ ماءً لِيُطَهِّرَكُم بِهِ وَيُذهِبَ عَنكُم رِجزَ الشَّيطانِ وَلِيَربِطَ عَلىٰ قُلوبِكُم وَيُثَبِّتَ بِهِ الأَقدامَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वह समय याद करो जब अल्लाह अपनी ओर से शांति के लिए तुमपर ऊँघ डाल रहा था और तुमपर आकाश से जल बरसा रहा था, ताकि उसके द्वारा तुम्हें पाक कर दे और तुमसे शैतान की मलिनता दूर कर दे और तुम्हारे दिलों को मज़बूत कर दे और उसके द्वारा (तुम्हारे) पाँव जमा दे।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh waqt jabke Allah apni taraf se gunoodgi (drowsiness) ki shakal mein tumpar itminaan o be-khaufi ki kaifiyat taari kar raha tha, aur aasman se tumhare upar pani barsa raha tha taa-ke tumhein paak karey aur tumse Shaytan ki daali hui najasat door karey aur tumhari himmat bandhaye aur iske zariye se tumhare qadam jamadey
Roman Urdu (Junagarhi)Uss waqt ko yaad kero jab kay Allah tum per oongh taari ker raha tha apni taraf say chain denay kay liye aur tum per aasman say pani barsa raha tha kay iss pani kay zariye say tum ko pak ker dey aur tum say shetani waswasay ko dafa kerdey aur tumharay dilon ko mazboot kerdey aur tumharay paon jama dey
Devnagri Urdu (Maududi)और वह वक्त जबके अल्लाह अपनी तरफ से गुनाह (उनींदापन) की शकल में तुम्हारे इत्मिनान ओ बे-खौफी की कैफियत तारी कर रहा था, और आसमान से तुम्हारे ऊपर पानी बरसा रहा था ता-के तुम्हें पाक करे और तुमसे शैतान की डाली हुई नजासत दूर करे और तुम्हारी हिम्मत बंधाए और इसके जरीए से तुम्हारे कदम जमादे
عَرَبِيإِذ يوحي رَبُّكَ إِلَى المَلائِكَةِ أَنّي مَعَكُم فَثَبِّتُوا الَّذينَ آمَنوا ۚ سَأُلقي في قُلوبِ الَّذينَ كَفَرُوا الرُّعبَ فَاضرِبوا فَوقَ الأَعناقِ وَاضرِبوا مِنهُم كُلَّ بَنانٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जब आपका पालनहार फ़रिश्तों की ओर वह़्य कर रहा था कि निःसंदेह मैं तुम्हारे साथ हूँ। अतः तुम ईमान वालों को स्थिर रखो। शीघ्र ही मैं काफ़िरों के दिलों में भय डाल दूँगा। तो (ऐ मुसलमानों!) तुम उनकी गरदनों के ऊपर मारो तथा उनके पोर-पोर पर आघात पहुँचाओ।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh waqt jabke tumhara Rubb farishton ko irshara kar raha tha ke “ main tumhare saath hoon, tum ehle iman ko saabit qadam rakkho, main abhi in kafiron ke dilon mein roab (terror) daley deta hoon. Pas tum unki gardano par zarb (strike) aur jod jod par chot lagao”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss waqt ko yaad kero jab kay aap ka rab farishton ko hukum deta tha kay mein tumhara sathi hun so tum eman walon ki himmar barhao mein abhi kuffaar kay dilon mein rob dalay deta hun so tum gardanon per maaro aur inn kay por por ko maaro
Devnagri Urdu (Maududi)और वह वक्त जबके तुम्हारा रब फरिश्तों को इरशारा कर रहा था के " मैं तुम्हारे साथ हूं, तुम एहले ईमान को साबित कदम रखो, मैं अभी काफिरों के दिलों में रोब (आतंक) डालता हूं। पस तुम उनकी गर्दन पर ज़र्ब (हड़ताल) और जोड़ जोड़ पर चोट लगाओ”
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّهُم شاقُّوا اللَّهَ وَرَسولَهُ ۚ وَمَن يُشاقِقِ اللَّهَ وَرَسولَهُ فَإِنَّ اللَّهَ شَديدُ العِقابِ
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हिन्दी (Al-Omari)यह इसलिए कि निःसंदेह उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल का विरोध किया तथा जो अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करे, तो निःसंदेह अल्लाह कड़ी यातना देने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh isliye ke in logon ne Allah aur uske Rasool ka muqabla kiya. Aur jo Allah aur uske Rasool ka muqabla karey Allah uske liye nihayat sakhtgeer (severe in punishment) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss baat ki saza hai kay enhon ney Allah ki aur uss kay rasool ki mukhlifat ki. Aur jo Allah ki aur uss kay rasool ki mukhlifat kerta hai so be-shak Allah Taalaa sakht saza denay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये इस तरह लोगों ने अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला किया। और जो अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला करे अल्लाह उसके लिए कड़ी सजा दे
عَرَبِيذٰلِكُم فَذوقوهُ وَأَنَّ لِلكافِرينَ عَذابَ النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)यह है (तुम्हारी यातना), तो इसका स्वाद चखो और (जान लो कि) निःसंदेह काफ़िरों के लिए जहन्नम की यातना (भी) है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hai tum logon ki saza, ab iska maza chakkho, aur tumhein maloom ho ke haqq ka inkar karne walon ke liye dozakh ka azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)So yeh saza chakho aur jaan rakho kay kafiron kay liye jahannum ka aza muqarrar hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये है तुम लोगों की सजा, अब इसका मजा चक्खो, और तुम्हें मालूम हो के हक का इनकार करने वालों के लिए दोज़ख का अज़ाब है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِذا لَقيتُمُ الَّذينَ كَفَروا زَحفًا فَلا تُوَلّوهُمُ الأَدبارَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! जब तुम काफ़िरों की सेना से भिड़ो, तो उनसे पीठें न फेरो।
Roman Urdu (Maududi)Aey iman laney walon, jab tum ek lashkar ki surat mein kuffar se do-char (encounter) ho to unke muqable mein pusht na phero (turn your backs)
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Jab tum kafiron say doo badoo muqabil hojao to unn say pusht mat pherna
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ ईमान लानी वालों, जब तुम एक लश्कर की सूरत में कुफ्फार से दो-चार (मुठभेड़) हो तो उनके मुकाबले में पीछे हटो (अपनी पीठ मोड़ो)
عَرَبِيوَمَن يُوَلِّهِم يَومَئِذٍ دُبُرَهُ إِلّا مُتَحَرِّفًا لِقِتالٍ أَو مُتَحَيِّزًا إِلىٰ فِئَةٍ فَقَد باءَ بِغَضَبٍ مِنَ اللَّهِ وَمَأواهُ جَهَنَّمُ ۖ وَبِئسَ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो कोई उस दिन उनसे अपनी पीठ फेरे, सिवाय उसके जो पलटकर आक्रमण करने वाला अथवा (अपने) किसी गिरोह से मिलने वाला हो, तो निश्चय वह अल्लाह के प्रकोप के साथ लौटा, और उसका ठिकाना जहन्नम है और वह लौटने की बुरी जगह है।
Roman Urdu (Maududi)Jisne aisey mauqe par peeth pehri, illa yeh ke jungi chaal ke taur par aisa karey ya kisi dusri fauj se jaa milne ke liye, to woh Allah ke gazab mein ghir jayega, uska thikana jahannum hoga. Aur woh bahut buri jaaye baaz gasth (evil destination) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo shaks unn say iss moqay per pusht pheray ga magar haan jo laraee kay liye paintra badalta ho ya jo (apni) jamat ki taraf panah lenay aata ho woh mustasna hai. Baqi aur jo aisa keray ga woh Allah kay ghazab mein aajaye ga. Aur uss ka thikana dozakh hoga woh boht hi buri jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने ऐसे मौके पर पीठ पहरी, इल्ला ये के जंगी चाल के दौरे पर ऐसा करे या किसी दूसरी फौज से जा मिल्ने के लिए, तो वो अल्लाह के गजब में घिर जाएगा, उसका ठिकाना जहन्नुम होगा। और वो बहुत बुरी जाए बाज़ गस्त (बुरी मंजिल) है
عَرَبِيفَلَم تَقتُلوهُم وَلٰكِنَّ اللَّهَ قَتَلَهُم ۚ وَما رَمَيتَ إِذ رَمَيتَ وَلٰكِنَّ اللَّهَ رَمىٰ ۚ وَلِيُبلِيَ المُؤمِنينَ مِنهُ بَلاءً حَسَنًا ۚ إِنَّ اللَّهَ سَميعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः (रणक्षेत्र में) तुमने उन्हें क़त्ल नहीं किया, परंतु अल्लाह ने उन्हें क़त्ल किया। और (ऐ नबी!) आपने नहीं फेंका जब आपने फेंका, परंतु अल्लाह ने फेंका। और (यह इसलिए हुआ) ताकि वह इसके द्वारा ईमान वालों को अच्छी तरह आज़माए। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Pas haqeeqat yeh hai ke tumne unhein qatal nahin kiya balke Allah ne unko qatal kiya, aur tu nay nahin phenka balke Allah ne phenka ( aur mominon ke haath jo is kaam mein istemal kiye gaye) to yeh isliye tha ke Allah momino ko ek behtareen aazmaish se kamiyabi ke saath guzaar de. Yakeenan Allah sunne wala aur janne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)So tum ney unhen qatal nahi kiya lekin Allah Taalaa ney unhen qatal kiya. Aur aap ney khaak ki muthi nahi phenki bulkay Allah Taalaa ney woh phenki aur takay musalmanon ko apni taraf say unn ki mehnat ka khoob ewaz dey bila shuba Allah Taalaa khoob sunnay wala khoob jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास हक़ीक़त ये है के तुमने उन्हें क़तल नहीं किया बलके अल्लाह ने उनको क़त्ल किया, और तू नहीं नहीं फेंका बलके अल्लाह ने फेंका (और मोमिनों के हाथ जो इस काम में इस्तमाल किए गए हैं) तो ये इसलिए था के अल्लाह मोमिनो को एक बेहतरीन आज़माइश से कामियाबी के साथ गुज़ार दे। यकीनन अल्लाह सुनने वाला और जाने वाला है
عَرَبِيذٰلِكُم وَأَنَّ اللَّهَ موهِنُ كَيدِ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह सब अल्लाह की ओर से है और निश्चय अल्लाह काफ़िरों की चालों को कमज़ोर करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh maamla to tumhare saath hai aur kafiron ke saath maamla yeh hai ke Allah unki chaalon ko kamzoor karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)(aik baat to) yeh hui aur (doosri baat yeh hai) Allah Taalaa ko kafiron ki tadbeer ko kamzor kerna tha
Devnagri Urdu (Maududi)ये मामला तो तुम्हारे साथ है और काफिरों के साथ मामला ये है के अल्लाह उनकी चालों को कामजूर करने वाला है
عَرَبِيإِن تَستَفتِحوا فَقَد جاءَكُمُ الفَتحُ ۖ وَإِن تَنتَهوا فَهُوَ خَيرٌ لَكُم ۖ وَإِن تَعودوا نَعُد وَلَن تُغنِيَ عَنكُم فِئَتُكُم شَيئًا وَلَو كَثُرَت وَأَنَّ اللَّهَ مَعَ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि तुम निर्णय चाहते हो, तो तुम्हारे पास निर्णय आ चुका, और यदि तुम रुक जाओ, तो वह तुम्हारे लिए बेहतर है। और यदि तुम फिर पहले जैसा करोगे, तो हम (भी) वैसा ही करेंगे, और तुम्हारा जत्था हरगिज़ तुम्हारे कुछ काम न आएगा, चाहे वह बहुत अधिक हो। और निश्चय अल्लाह ईमान वालों के साथ है।
Roman Urdu (Maududi)(in kaafiron se kehdo) “agar tum faisla chahte thay to lo , faisla tumhare samne aa gaya. Ab baaz aa jao to tumhare hi liye behtar hai. Warna phir palat kar usi himakat ka iaada karogey to hum bhi isi saza ka iaada karenge aur tumhari jamiat, khwa woh kitni hi zyada ho, tumhare kuch kaam na aa sakegi. Allah momino ke saath hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum log faisla chahatay ho to woh faisla tumharay samney aa mojood hua aur agar baaz ajao to yeh tumharay liye nihayat khoob hai aur agar tum phir wohi kaam kero gay to hum bhi phir wohi kaam keren gay aur tumhari jamiyat tumharay zara bhi kaam na aaye gi go kitni ziyada ho aur waqaee baat yeh hai kay Allah Taalaa eman walon kay sath hai
Devnagri Urdu (Maududi)(काफिरों से कहदो में) “अगर तुम फैसला चाहते थे तो लो, फैसला तुम्हारे सामने आ गया। अब बाज़ आ जाओ तो तुम्हारे लिए बेहतर है। वरना फिर पलट कर उसी का इरादा करोगी तो हम भी इसी सजा का इआदा करेंगे और तुम्हारी जमीअत, तुम्हारे कुछ काम न आ सकेगे।'
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا أَطيعُوا اللَّهَ وَرَسولَهُ وَلا تَوَلَّوا عَنهُ وَأَنتُم تَسمَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अल्लाह और उसके रसूल का आज्ञापालन करो और उससे मुँह न फेरो, जबकि तुम सुन रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey iman laney walon, Allah aur uske Rasool ki itaat karo aur hukum sunne ke baad ussey sartabi (turn away) na karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Allah ka aur uss kay rasool ka kaha mano aur uss (ka kaha mannay) say roo-gardani mat kero suntay jantay huye
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيوَلا تَكونوا كَالَّذينَ قالوا سَمِعنا وَهُم لا يَسمَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन लोगों के समान न हो जाओ, जिन्होंने कहा कि हमने सुन लिया, हालाँकि वे नहीं सुनते।
Roman Urdu (Maududi)Un logon ki tarah na ho jao jinhon ne kaha ke humne suna, halanke woh nahin sunte
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum unn logon ki tarah mat hona jo dawa to kertay hain kay hum ney sunn liya halankay woh suntay (sunatay kuch) nahi
Devnagri Urdu (Maududi)उन लोगों की तरह न हो जाओ जिन्हों ने कहा के हमने सुना, हालंके वो नहीं सुनते
عَرَبِي۞ إِنَّ شَرَّ الدَّوابِّ عِندَ اللَّهِ الصُّمُّ البُكمُ الَّذينَ لا يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह के निकट सब जानवरों से बुरे वे बहरे-गूँगे हैं, जो समझते नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan khuda ke nazdeek badhtareen qisam ke jaanwar woh behre gungey log hain jo aqal se kaam nahin letey
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak bad tareen khaleeq Allah Taalaa kay nazdeek woh log hain jo behray hain goongay hain jo kay (zara) nahi samajhtay
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन खुदा के नाज़दीक बदतरीन क़िसम के जानवर वो बाहर गूँगे लोग हैं जो अक्ल से काम नहीं लेते
عَرَبِيوَلَو عَلِمَ اللَّهُ فيهِم خَيرًا لَأَسمَعَهُم ۖ وَلَو أَسمَعَهُم لَتَوَلَّوا وَهُم مُعرِضونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि अल्लाह उनके अंदर कोई भलाई जानता, तो उन्हें अवश्य सुना देता और यदि वह उन्हें सुना देता, तो भी वे मुँह फेर जाते, इस हाल में कि वे उपेक्षा करने वाले होते।
Roman Urdu (Maududi)Agar Allah ko maloom hota ke unmein kuch bhi bhalayi hai to woh zaroor unhein sunne ki taufeeq deta, (lekin bhalayi ke bagair) agar woh unko sunwata to woh berukhi ke saath mooh pher jatey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar Allah Taalaa inn mein koi khoobi dekhta to inn ko sunnay ki tofiq dey deta aur agar inn ko abb suna dey to zaroor roo gardani keren gay bey rukhi kertay huye
Devnagri Urdu (Maududi)अगर अल्लाह को मालूम होता के उन्हें कुछ भी बुलाया जाता है तो वो जरूर उन्हें सुनने की तौफीक देता, (लेकिन भलाई के बगैर) अगर वो उनको सुनता तो वो बेरूखी के साथ मुंह फेर जाते
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا استَجيبوا لِلَّهِ وَلِلرَّسولِ إِذا دَعاكُم لِما يُحييكُم ۖ وَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ يَحولُ بَينَ المَرءِ وَقَلبِهِ وَأَنَّهُ إِلَيهِ تُحشَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अल्लाह और उसके रसूल के बुलावे को स्वीकार करो, जब वह तुम्हें उस चीज़ के लिए बुलाए, जो तुम्हें जीवन प्रदान करती है। और जान लो कि निःसंदेह अल्लाह आदमी और उसके दिल के बीच रुकावट बन जाता है। और यह कि निःसंदेह तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Aey iman laney walon, Allah aur uske Rasool ki pukar par labbaik kaho jabke Rasool tumhein us cheez ki taraf bulaye jo tumhein zindagi bakshne wali hai, aur jaan rakkho ke Allah aadmi aur uske dil ke darmiyan hayal hai, aur usi ki taraf tum sametay jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tum Allah aur rasool kay kehney ko baja lao jabkay rasool tum ko tumhari zindagi bakhsh cheez ki taraf bulatay hon. Aur jaan rakho kay Allah Taalaa aadmi kay aur uss kay qalb kay darmiyan aarr bann jaya kerta hai aur bila shuba tum sab ko Allah hi kay pass jama hona hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ ईमान लाने वालों, अल्लाह और उसके रसूल की पुकार पर लब्बैक कहो जबके रसूल तुम्हें उस चीज की तरफ बुलाए जो तुम्हें जिंदगी बक्शने वाली है, और जान रक्खो के अल्लाह आदमी और उसके दिल के दरमियान हयाल है, और उसकी तरफ तुम समते जाओगे
عَرَبِيوَاتَّقوا فِتنَةً لا تُصيبَنَّ الَّذينَ ظَلَموا مِنكُم خاصَّةً ۖ وَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ شَديدُ العِقابِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उस फ़ितने से बचो, जो तुममें से विशेष रूप से अत्याचारियों ही पर नहीं आएगा और जान लो कि अल्लाह कड़ी यातना देने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur bacho us fitne se jiski shamat makhsoos taur par sirf unhi logon tak mehdood na rahegi jinhon ne tum mein se gunaah kiya ho, aur jaan rakkho ke Allah sakht saza dene wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum aisay wabaal say bacho! Kay jo khaas ker sirf unhi logon per waqiya na hoga jo tum say inn gunhaon kay muratakib huye hain aur yeh jaan rakho kay Allah sakht saza denay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और बच्चों हमें फिटने से जिसकी शामत मखसूस तौर पर सिर्फ उन्हीं लोगों तक महदूद ना रहेगी जिन्हों ने तुम में से गुनाह किया हो, और जान रक्खो के अल्लाह सख्त सजा देने वाला है
عَرَبِيوَاذكُروا إِذ أَنتُم قَليلٌ مُستَضعَفونَ فِي الأَرضِ تَخافونَ أَن يَتَخَطَّفَكُمُ النّاسُ فَآواكُم وَأَيَّدَكُم بِنَصرِهِ وَرَزَقَكُم مِنَ الطَّيِّباتِ لَعَلَّكُم تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वह समय याद करो, जब तुम बहुत थोड़े थे, धरती (मक्का) में बहुत कमज़ोर समझे गए थे। तुम डरते थे कि लोग तुम्हें उचक कर ले जाएँगे। तो उस (अल्लाह) ने तुम्हें (मदीना में) शरण दी और अपनी सहायता द्वारा तुम्हें शक्ति प्रदान की और तुम्हें पवित्र चीज़ों से जीविका प्रदान की, ताकि तुम शुक्रिया अदा करो।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo woh waqt jabke tum thodey thay, zameen mein tumko be-zoar samjha jata tha, tum darte rehte thay ke kahin log tumhein mita na dein. Phir Allah ne tumko jaye panaah muhaiyaa kardi, apni madad se tumhare haath mazboot kiye aur tumhein accha rizq pahunchaya, shayad ke tum shukar-guzar bano
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss halat ko yaad kero! Jab tum zamin mein qaleel thay kamzor shumar kiye jatay thay. Iss andeshay mein rehtay thay kay tum ko log noch khasot na len so Allah ney tum ko rehney ki jagah di aur tum ko apni nusrat say qooat di aur tum ko nafees nafees cheezen ata farmaeen takay tum shukar kero
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो वो वक्त जबके तुम थोड़े थे, जमीन में तुमको बे-ज़ोर समझ जाता था, तुम डरते रहते थे के कहीं लोग तुम्हे मिटा ना दीन. फिर अल्लाह ने तुमको जाये पनाह मुहैय्या करदी, अपनी मदद से तुम्हारे हाथ मज़बूत किये और तुम्हें अच्छा रिज़्क मिल गया, शायद के तुम शुक्र-गुज़ार बनो
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَخونُوا اللَّهَ وَالرَّسولَ وَتَخونوا أَماناتِكُم وَأَنتُم تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अल्लाह तथा उसके रसूल के साथ विश्वासघात न करो और न अपनी अमानतों में ख़यानत करो, जबकि तुम जानते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey iman laney walon, jaante bujhte Allah aur uske Rasool ke saath khayanat(unfaithful) na karo, apni amanaton mein gaddari ke murtakib na ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tum Allah aur rasool (kay huqooq) mein jantay huye khayanat mat kero aur apni qaabil-e-hifazat cheezon mein khayanat na kero
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ ईमान लाने वालों, जानते बुझते अल्लाह और उसके रसूल के साथ खयानत(बेवफा) ना करो, अपनी अमानतों में गद्दारी के मुर्तकीब न हो
عَرَبِيوَاعلَموا أَنَّما أَموالُكُم وَأَولادُكُم فِتنَةٌ وَأَنَّ اللَّهَ عِندَهُ أَجرٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जान लो कि तुम्हारे धन और तुम्हारी संतान एक परीक्षण हैं और यह कि निश्चय अल्लाह के पास बहुत बड़ा प्रतिफल है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jaan rakkho ke tumhare maal aur tumhari aulad haqeeqat mein samaan e aazmaish hain aur Allah ke paas ajar dene ke liye bahut kuch hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum iss baat ko jaan rakho kay tumharay amwaal aur tumhari aulad aik imtehan ki cheez hai. Aur iss baat ko bhi jaan rakho kay Allah Taalaa kay pass bara bhari ajar hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जां रख्खो के तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद हकीकत में समां ए आजमाइश हैं और अल्लाह के पास अजर देने के लिए बहुत कुछ है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِن تَتَّقُوا اللَّهَ يَجعَل لَكُم فُرقانًا وَيُكَفِّر عَنكُم سَيِّئَاتِكُم وَيَغفِر لَكُم ۗ وَاللَّهُ ذُو الفَضلِ العَظيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! यदि तुम अल्लाह से डरोगे, तो वह तुम्हें (सत्य और असत्य के बीच) अंतर करने की शक्ति प्रदान करेगा तथा तुमसे तुम्हारी बुराइयाँ दूर कर देगा और तुम्हे क्षमा कर देगा। और अल्लाह बहुत बड़े अनुग्रह वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey iman laney walon, agar tum khuda-tarsi ikhtiyar karoge to Allah tumhare liye kasauti (criterion) baham pahuncha dega aur tumhari buraiyon ko tumse door kardega, aur tumhare kasoor maaf kardega. Allah bada fazal farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Agar tum Allah say dartay raho gay to Allah Taalaa tum ko aik faislay ki cheez dey ga aur tum say tumharay gunah door ker dey ga aur tum ko bakhsish dey ga aur Allah Taalaa baray fazal wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ ईमान लाने वालों, अगर तुम अल्लाह से खुदा-तरसी इख्तियार करोगे तुम्हारे लिए कसौटी (मानदंड) बहम पाहुंचा देगा और तुम्हारी बुराइयों को तुमसे दूर कर देगा, और तुम्हारे कसूर माफ कर देगा। अल्लाह बड़ा फ़ज़ल फ़रमाने वाला है
عَرَبِيوَإِذ يَمكُرُ بِكَ الَّذينَ كَفَروا لِيُثبِتوكَ أَو يَقتُلوكَ أَو يُخرِجوكَ ۚ وَيَمكُرونَ وَيَمكُرُ اللَّهُ ۖ وَاللَّهُ خَيرُ الماكِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ नबी! वह समय याद करो) जब (मक्का में) काफ़िर आपके विरुद्ध गुप्त उपाय कर रहे थे, ताकि आपको क़ैद कर दें, अथवा आपका वध कर दें अथवा आपको (देश से) बाहर निकाल दें। तथा वे गुप्त उपाय कर रहे थे और अल्लाह भी गुप्त उपाय कर रहा था और अल्लाह सब गुप्त उपाय करने वालों से बेहतर गुप्त उपाय करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Woh waqt bhi yaad karne ke qabil hai jabke munkireen e haqq tere khilaf tadbeerein soch rahey thay ke tujhey qaid kardein ya qatal kar dalein ya jila-watan (drive you away) kardein. Woh apni chaalein chal rahey thay aur Allah apni chaal chal raha tha. Aur Allah sab se behtar chaal chalne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss waqiye ka bhi zikar kijiye! Jabkay kafir log aap ki nisbat tadbeer soch rahey thay kay aap ko qaid ker len yaa aap ko qatal ker dalen yaa aap ko kharij-e-watan ker den aur woh to apni tadbeeren ker rahey thay aur Allah apni tadbeer ker raha tha aur sab say ziyada mustehkum tadbeer wala Allah hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो वक़्त भी याद करने के काबिल है जबके मुनकिरीन ए हक़ तेरे ख़िलाफ़ तदबीरें सोच रहे थे के तुझसे क़ैद करदें या क़तल कर डालें या जिला-वतन (दूर भगाओ) करदें। वो अपनी चालें चल रहे थे और अल्लाह अपनी चाल चल रहा था। और अल्लाह सब से बेहतर चाल चलने वाला है
عَرَبِيوَإِذا تُتلىٰ عَلَيهِم آياتُنا قالوا قَد سَمِعنا لَو نَشاءُ لَقُلنا مِثلَ هٰذا ۙ إِن هٰذا إِلّا أَساطيرُ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती है, तो वे कहते हैं : निःसंदेह हमने सुन लिया। यदि हम चाहें, तो निश्चय इस (क़ुरआन) जैसा हम भी कह दें। यह तो पहले लोगों की काल्पनिक कहानियों के सिवा कुछ नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Jab unko hamari aayat sunayi jati thi to kehte thay ke “ haan sun liya humne. Hum chahein to aisi hi baatein hum bhi bana sakte hain. Yeh to wahi purani kahaniyan hain jo pehle se log kehte chaley aa rahey hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab inn kay samney humari aayaten parhi jati hain to kehtay hain kay hum ney sunn liya agar hum chahayen to iss kay barabar hum bhi keh den yeh to kuch bhi nahi sirf bey sanad baaten hain jo pehlon say manqool chali aarahi hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब उनको हमारी आयतें सुनाई जाती थीं तो कहते थे के "हां सुन लिया हमने। हम चाहें तो ऐसी ही बातें हम भी बना सकते हैं। ये तो वही पुरानी कहानियां हैं जो पहले से लोग कहते चले आ रहे हैं"
عَرَبِيوَإِذ قالُوا اللَّهُمَّ إِن كانَ هٰذا هُوَ الحَقَّ مِن عِندِكَ فَأَمطِر عَلَينا حِجارَةً مِنَ السَّماءِ أَوِ ائتِنا بِعَذابٍ أَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद करो) जब उन्होंने कहा : ऐ अल्लाह! यदि यही तेरी ओर से सत्य है, तो हमपर आकाश से पत्थरों की वर्षा कर दे अथवा हमपर कोई दुःखदायी यातना ले आ।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh baat bhi yaad hai jo unhon ne kahi thi ke “khudaya agar yeh waqayi haqq hai aur teri taraf se hai to humpar aasman se patthar barsa de, ya koi dardnaak azaab humpar le aa”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jabkay inn logon ney kaha aey Allah ! Agar yeh quran aap ki taraf say waqaee hai to hum per aasman say pathar barsa ya hum per koi dard naak azab waqey kerdey
Devnagri Urdu (Maududi)और वो बात भी याद है जो उन्होन ने कही थी के "खुदया अगर ये हकीकत है और तेरी तरफ से है तो हमपर आसमान से पत्थर बरसा दे, या कोई दर्दनाक अजब हमपर ले आ"
عَرَبِيوَما كانَ اللَّهُ لِيُعَذِّبَهُم وَأَنتَ فيهِم ۚ وَما كانَ اللَّهُ مُعَذِّبَهُم وَهُم يَستَغفِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह कभी ऐसा नहीं कि उनमें आपके होते हुए उन्हें यातना दे, और अल्लाह उन्हें कभी यातना देने वाला नहीं, जब कि वे क्षमा याचना करते हों।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt to Allah unpar azaab nazil karne wala na tha jabke tu unke darmiyan maujood tha, aur na Allah ka yeh qaida hai ke log istegfar kar rahey hon aur woh unko azaab de de
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa aisa na keray ga inn mein aap kay hotay huye inn ko azab dey aur Allah inn ko azab na dey ga iss halat mein kay woh istaghfaar bhi kertay hon
Devnagri Urdu (Maududi)हमें अल्लाह का वक्त उन्पर अजाब नाजिल करने वाला ना था जबके तू उनके दरमियान मौजुद था, और ना अल्लाह का ये क़ायदा है के लोग इस्तेग़फ़र कर रहे हैं और वो उनको अज़ाब दे दे
عَرَبِيوَما لَهُم أَلّا يُعَذِّبَهُمُ اللَّهُ وَهُم يَصُدّونَ عَنِ المَسجِدِ الحَرامِ وَما كانوا أَولِياءَهُ ۚ إِن أَولِياؤُهُ إِلَّا المُتَّقونَ وَلٰكِنَّ أَكثَرَهُم لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्हें क्या है कि अल्लाह उन्हें यातना न दे, जबकि वे 'मस्जिदे ह़राम' (का'बा) से रोक रहे हैं, हालाँकि वे उसके संरक्षक नहीं। उसके संरक्षक तो केवल अल्लाह के डरने वाले बंदे हैं। परंतु उनके अधिकांश लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Lekin ab kyun na woh unpar azaab nazil karey jabke woh masjid e haraam ka rasta roak rahey hain, halanke woh is masjid ke jaiz mutawalli(guardians) nahin hain. Iske jaiz mutawalli to sirf ehle taqwa hi ho skate hain magar aksar log is baat ko nahin jantey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn mein kiya baat hai kay inn ko Allah Taalaa saza na dey halankay woh log masjid-e-haram say roktay hain jabkay woh log iss masjid kay mutawalli nahi. Iss kay mutawalli to siwaye muttaqiyon kay aur ashkhaas nahi lekin inn mein aksar log ilm nahi rakhtay
Devnagri Urdu (Maududi)लेकिन अब क्यों ना वो उन्पर अज़ाब नाज़िल करे जबके वो मस्जिद ए हराम का रास्ता रोक रहे हैं, हलांके वो मस्जिद के जायज है मुतवल्ली (अभिभावक) नहीं हैं। इसके जायज मुतवल्ली तो सिर्फ एहले तकवा ही हो स्केट हैं मगर अक्सर लोग इस बात को नहीं जानते
عَرَبِيوَما كانَ صَلاتُهُم عِندَ البَيتِ إِلّا مُكاءً وَتَصدِيَةً ۚ فَذوقُوا العَذابَ بِما كُنتُم تَكفُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनकी नमाज़ उस घर (काबा) के पास सीटियाँ बजाने और तालियाँ बजाने के सिवा कुछ भी नहीं होती। तो अब अपने कुफ़्र (इनकार) के बदले यातना का स्वाद चखो।
Roman Urdu (Maududi)Baytullah ke paas un logon ki namaz kya hoti hai, bas seetiyan (whistles) bajate aur taaliyan peethte hain. Pas ab lo, is azaab ka mazaa chakko apne us inkar e haqq ki padash mein jo tum karte rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn ki namaz kaaba kay sirf yeh thi seetiyan bajana aur taaliyan bajana. So apney kufur kay sabab iss azab ka maza chakho
Devnagri Urdu (Maududi)बैतुल्लाह के पास उन लोगों की नमाज क्या होती है, बस सीतियां बजाते और तालियां बजाते हैं। अब लो, इस अज़ाब का मजा चक्को अपने हमें इंकार ए हक़ की याद में जो तुम करते रहे हो
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا يُنفِقونَ أَموالَهُم لِيَصُدّوا عَن سَبيلِ اللَّهِ ۚ فَسَيُنفِقونَها ثُمَّ تَكونُ عَلَيهِم حَسرَةً ثُمَّ يُغلَبونَ ۗ وَالَّذينَ كَفَروا إِلىٰ جَهَنَّمَ يُحشَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया, वे अपने धन ख़र्च करते हैं ताकि अल्लाह के रास्ते से रोकें। तो वे उन्हें ख़र्च करते रहेंगे, फिर (ऐसा समय आएगा कि) वह उनके लिए पछतावे का कारण होगा। फिर वे पराजित होंगे। तथा जिन लोगों ने कुफ़्र किया, वे जहन्नम की ओर एकत्र किए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne haqq ko maanne se inkar kiya hai woh apne maal khuda ke raaste se roakne ke liye sarf kar rahe hain aur abhi aur kharch karte rahenge, magar aakhir e kaar yahi koshishein unke liye pachtawe ka sabab banenge, phir woh magloob hongey, phir yeh kafir jahannum ki taraf gher laye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Bila shak yeh kafir log apne maalon ko iss liye kharch ker rahey hain kay Allah ki raah say roken so yeh lo to apney maalon ko kharach kertay hi rahen gay phir woh maal inn kay haq mein baees-e-hasrat hojayen gay. Phir maghloob hojayen gay aur kafir logon ko dozakh ki taraf jama kiya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने हक़ को मन्ने से इंकार किया है वो अपने माल खुदा के रास्ते से रुकने के लिए सिर्फ कर रहे हैं और अभी और खर्च करते रहेंगे, मगर आख़िर ए कार यही कोशिशें उनके लिए पछतावे का सबाब बनेंगे, फिर वो मगलूब होंगे, फिर ये काफ़िर जहन्नुम की तरफ घेर ले जायेंगे
عَرَبِيلِيَميزَ اللَّهُ الخَبيثَ مِنَ الطَّيِّبِ وَيَجعَلَ الخَبيثَ بَعضَهُ عَلىٰ بَعضٍ فَيَركُمَهُ جَميعًا فَيَجعَلَهُ في جَهَنَّمَ ۚ أُولٰئِكَ هُمُ الخاسِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि अल्लाह अपवित्र को पवित्र से अलग कर दे, तथा अपवित्र को एक पर एक रखकर ढेर बना दे। फिर उसे जहन्नम में फेंक दे। यही लोग घाटे में पड़ने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke Allah gandagi ko pakeezgi se chaant kar alag karey aur har qism ki gandagi ko mila kar ikattha karey phir is palande (bundles) ko jahannum mein jhonk de, yahi log asli diwaliye(losers) hain
Roman Urdu (Junagarhi)Takay Allah Taalaa na pak ko pak say alag ker dey aur na pakon kay aik doosray say mila dey pus inn sab ko ikatha dher ker dey phir inn sab ko jahannum mein daal dey. Aisay log pooray khasaray mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के अल्लाह गंदगी को पाकीज़गी से मंत्र कर अलग करे और हर क़िस्म की गंदगी को मिला कर इकट्ठ करे फिर है पलांदे (बंडलों) को जहन्नुम में झोंक दे, यहीं लोग असली दीवालिये (हारे हुए) हैं
عَرَبِيقُل لِلَّذينَ كَفَروا إِن يَنتَهوا يُغفَر لَهُم ما قَد سَلَفَ وَإِن يَعودوا فَقَد مَضَت سُنَّتُ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) इन काफ़िरों से कह दें : यदि वे बाज़ आ जाएँ, तो जो कुछ हो चुका, उन्हें क्षमा कर दिया जाएगा, और यदि वे फिर ऐसा ही करें, तो पहले लोगों (के बारे में अल्लाह) का तरीक़ा गुज़र ही चुका है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), un kafiron se kaho ke agar ab bhi baaz aa jayein to jo kuch pehle ho chuka hai ussey darguzar karliya jayega, lekin agar yeh usi pichli rawish ka iaada karenge to guzishta qaumon ke saath jo kuch ho chuka hai woh sab ko maloom hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap inn kafiron say keh dijiye! Kay agar yeh log baaz aajayen to inn kay saray gunah jo pehlay ho chukay hain sab moaf ker diye jayen gay aur agar apni wohi aadat rakhen gay to (kuffaar) sabeyqeen kay haq mein qanoon nafiz ho chuka hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), उन काफिरों से कहो के अगर अब भी बाज़ आ जाएं तो जो कुछ पहले हो चुका है उसे शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन अगर ये उसकी पिछली राविश का इरादा करेंगे तो गुज़िश्ता क़ौम के साथ जो कुछ हो चुका है वो सबको मालूम है
عَرَبِيوَقاتِلوهُم حَتّىٰ لا تَكونَ فِتنَةٌ وَيَكونَ الدّينُ كُلُّهُ لِلَّهِ ۚ فَإِنِ انتَهَوا فَإِنَّ اللَّهَ بِما يَعمَلونَ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनसे युद्ध करो, यहाँ तक कि कोई फ़ितना न रह जाए और धर्म पूरा का पूरा अल्लाह के लिए हो जाए। फिर यदि वे बाज़ आ जाएँ, तो निःसंदेह अल्लाह जो कुछ वे कर रहे हैं, उसे खूब देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey iman laney walon, in kaafiron se jung karo yahan tak ke fitna baaki na rahey aur deen poora ka poora Allah ke liye ho jaye, phir agar woh fitne se ruk jayein to unke amal ka dekhne wala Allah hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum inn say iss hadd tak laro kay inn mein fasad aqeedah na rahey. Aur deen Allah hi ka hojaye phir agar yeh baaz aajayen to Allah Taalaa inn aemaal ko khoob dekhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ ईमान लाने वालों, काफिरों से जंग करो यहां तक ​​के फ़ितना बाकी न रहे और दीन पूरा का पूरा अल्लाह के लिए हो जाए, फिर अगर वो फ़िटने से रुक जाएं तो उनके अमल का देखने वाला अल्लाह है
عَرَبِيوَإِن تَوَلَّوا فَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ مَولاكُم ۚ نِعمَ المَولىٰ وَنِعمَ النَّصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वे मुँह फेरें, तो जान लो कि निश्चय अल्लाह तुम्हारा संरक्षक है। वह बहुत अच्छा संरक्षक तथा बहुत अच्छा सहायक है।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar woh na maanein to jaan rakkho ke Allah tumhara sarparast hai aur woh behtareen haami o madadgaar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar roo gardaani keren to yaqeen rakhen kay Allah Taalaa tumhara kaar saaz hai woh boht acha kaar saaz hai aur boht acha madadgar hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर वो ना माने तो जान रक्खो के अल्लाह तुम्हारा सरपरस्त है और वो बेहतरीन हामी ओ मददगार है
🕮 Juz 10 begins here
عَرَبِي۞ وَاعلَموا أَنَّما غَنِمتُم مِن شَيءٍ فَأَنَّ لِلَّهِ خُمُسَهُ وَلِلرَّسولِ وَلِذِي القُربىٰ وَاليَتامىٰ وَالمَساكينِ وَابنِ السَّبيلِ إِن كُنتُم آمَنتُم بِاللَّهِ وَما أَنزَلنا عَلىٰ عَبدِنا يَومَ الفُرقانِ يَومَ التَقَى الجَمعانِ ۗ وَاللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
हिन्दी (Al-Omari)और जान लो कि निःसंदेह तुम्हें जो कुछ भी ग़नीमत के रूप में मिले, तो निश्चय उसका पाँचवाँ भाग अल्लाह के लिए तथा रसूल के लिए और (आपके) निकट-संबंधियों तथा अनाथों, निर्धनों और यात्रियों के लिए है, यदि तुम अल्लाह पर तथा उस चीज़ पर ईमान लाए हो, जो हमने अपने बंदे पर निर्णय के दिन उतारी। जिस दिन, दो सेनाएँ भिड़ गईं और अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhein maloom ho ke jo kuch maal e ganimat tumne hasil kiya hai uska paanchwa (fifth) hissa Allah aur uske Rasool aur rishtedaaron aur yateemon aur miskeeno aur musafiron ke liye hai. Agar tum iman laye ho Allah par aur us cheez par jo faisle ke roz , yaani dono faujon ki mutbhed (armies met in battle) ke din, humne apne banday par nazil ki thi, (to yeh hissa ba-khushi ada karo). Allah har cheez par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jaan lo kay tum jiss qisam ki aur jo kuch ghanimat hasil kero uss mein say panchwa hissa Allah ka hai aur rasool ka aur qarabat daron ka aur yateemon ka aur miskeenon ka aur musafiron ka agar tum Allah per eman laye ho aur uss cheez per jo hum ney apney banday per uss din utara hai jo din haq-o-baatil ki judaee ka tha jiss din do fojen bhirr gaee thin. Allah her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हीं मालूम हो के जो कुछ माल ए गनीमत तुमने हासिल किया है उसका पांचवां (पांचवां) हिसा अल्लाह और उसके रसूल और रिश्तेदारों और यतीमों और मिस्कीनो और मुसाफिरों के लिए है. अगर तुम ईमान लाए हो अल्लाह पर और उस चीज पर जो फैसले के रोज, यानी दोनों फौजों की लड़ाई (युद्ध में सेनाएं मिलीं) के दिन, हमने अपने बंदे पर नाज़िल की थी, (तो ये हिसा बा-ख़ुशी अदा करो)। अल्लाह हर चीज पर कादिर है
عَرَبِيإِذ أَنتُم بِالعُدوَةِ الدُّنيا وَهُم بِالعُدوَةِ القُصوىٰ وَالرَّكبُ أَسفَلَ مِنكُم ۚ وَلَو تَواعَدتُم لَاختَلَفتُم فِي الميعادِ ۙ وَلٰكِن لِيَقضِيَ اللَّهُ أَمرًا كانَ مَفعولًا لِيَهلِكَ مَن هَلَكَ عَن بَيِّنَةٍ وَيَحيىٰ مَن حَيَّ عَن بَيِّنَةٍ ۗ وَإِنَّ اللَّهَ لَسَميعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उस समय को याद करो, जब तुम (घाटी के) निकटवर्ती छोर पर थे तथा वे (तुम्हारे शत्रु) दूरस्थ छोर पर थे और क़ाफ़िला तुमसे नीचे की ओर था। और अगर तुमने एक-दूसरे से वादा किया होता, तो तुम निश्चित रूप से नियत समय के बारे में आगे-पीछे हो जाते। लेकिन ताकि अल्लाह उस काम को पूरा कर दे, जो किया जाने वाला था। ताकि जो नष्ट हो, वह स्पष्ट प्रमाण के साथ नष्ट हो और जो जीवित रहे वह स्पष्ट प्रमाण के साथ जीवित रहे, और निःसंदेह अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo woh waqt jabke tum waadi ke is janib thay aur woh dusri janib padao(encamped) daley huey thay aur qafila(caravan) tumse nichey (sahil) ki taraf tha. Agar kahin pehle se tumhare aur unke darmiyan muqable ki qarardaad (mutual appointment) ho chuki hoti to tum zaroor is mauqe par pehlu tahi (decline) kar jatey. Lekin jo kuch pesh aaya woh is liye tha ke jis baat ka faisla Allah kar chuka tha usey zahoor mein le aaye taa-ke jisey halaak hona hai to daleel e roshan ke saath halaak ho aur jisey zinda rehna hai woh daleel e roshan ke saath zinda rahey. Yakeenan khuda sunne wala aur jaanne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay tumharay pass walay kinaray per thay aur woh door walay kinaray per thay aur qafila tum say neechay tha. Agar tum aapas mein waday kertay to yaqeenan tum waqt moyyen per phonchney mein mukhtalif hojatay. Lekin Allah ko to aik kaam ker hi daalna tha jo muqarrar ho chuka tha takay jo halak ho zaleel per (yani yaqeen jaan ker) halak ho aur zinda rahey woh bhi daleel per (haq pehchan ker) zinda rahey. Be-shak Allah boht sunnay wala khoob jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो वो वक्त जब तुम वादी के इस जानिब था और वो दूसरा जानिब पड़ाव (डेरा डाले हुए) डाले हुए थे और काफिला (कारवां) तुमसे नीचे (साहिल) की तरफ था। अगर कहीं पहले से तुम्हारे और उनके दरमियान मुक़ाबले की क़रारदाद (आपसी नियुक्ति) हो चुकी होती तो तुम ज़रूर इस मौक़े पर पहलू ताहि (अस्वीकार) कर लेते। लेकिन जो कुछ पेश आया वो इस लिए था कि जिस बात का फैसला अल्लाह कर चूका था उसे जहूर में ले आए ता-के जिसे हलाक होना है तो दलील ए रोशन के साथ हलक हो और जिसे जिंदा रहना है वो दलील ए रोशन के साथ जिंदा रहे। यकीनन खुदा सुनने वाला और जाने वाला है
عَرَبِيإِذ يُريكَهُمُ اللَّهُ في مَنامِكَ قَليلًا ۖ وَلَو أَراكَهُم كَثيرًا لَفَشِلتُم وَلَتَنازَعتُم فِي الأَمرِ وَلٰكِنَّ اللَّهَ سَلَّمَ ۗ إِنَّهُ عَليمٌ بِذاتِ الصُّدورِ
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हिन्दी (Al-Omari)जब अल्लाह आपको आपके सपने में उन्हें थोड़े दिखा रहा था, और यदि वह आपको उन्हें अधिक दिखाता, तो तुम अवश्य साहस खो देते और अवश्य इस मामले में आपस में झगड़ पड़ते। परंतु अल्लाह ने बचा लिया। निःसंदेह वह सीनों की बातों से भली-भाँति अवगत है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yaad karo woh waqt jabke (aey Nabi),khuda unko tumhare khwab mein thoda dikha raha tha. Agar kahin woh tumhein unki tadaad zyada dikha deta to zaroor tumlog himmat haar jatey aur ladayi ke maamle mein jhagda shuru kardete. Lekin Allah hi ne issey tumhein bachaya. Yakeenan woh seeno ka haal tak jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay Allah Taalaa ney tujhay teray khuwab mein unn ki taadaad kum dikhaee agar inn ki ziyadti dikhata to tum buzdil hojatay aur iss kaam kay baray mein aapas mein ikhtilaaf kertay lekin Allah Taalaa ney bacha liya woh dilon kay bhedon say khoob aagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)और याद करो वो वक्त जबके (ऐ नबी), खुदा उनको तुम्हारे ख्वाब में थोड़ा दिखा रहा था। अगर कहीं वो तुम्हें उनकी तदाद ज्यादा दिखा देता तो जरूर तुमलोग हिम्मत हार जाते और लड़ाई के मामले में झगड़ा शुरू कर देते। लेकिन अल्लाह ही ने इसे तुम्हें बचाया। यकीनन वो सीने का हाल तक जानता है
عَرَبِيوَإِذ يُريكُموهُم إِذِ التَقَيتُم في أَعيُنِكُم قَليلًا وَيُقَلِّلُكُم في أَعيُنِهِم لِيَقضِيَ اللَّهُ أَمرًا كانَ مَفعولًا ۗ وَإِلَى اللَّهِ تُرجَعُ الأُمورُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब वह तुम्हें, जब तुम्हारी परस्पर मुठभेड़ हुई, उनको तुम्हारी नज़रों में थोड़े दिखाता था, और तुमको उनकी नज़रों में बहुत कम करके दिखाता था, ताकि अल्लाह उस काम को पूरा कर दे, जो किया जाने वाला था। और सारे मामले अल्लाह ही की ओर लौटाए जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur yaad karo jabke muqable ke waat khuda ne tum logon ki nigahon mein dushmano ko thoda dikhaya aur unki nigahon mein tumhein kam karke pesh kiya, taa-ke jo baat honi thi usey Allah zahoor mein le aaye. Aur aakhir e kaar sarey maamlaat Allah hi ki taraf rujoo karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay uss ney ba-waqt-e-mulaqat unhen tumhari nighaon mein boht kum dikhaye aur tumhen unn ki nighaon mein kum dikhaye takay Allah Taalaa iss kaam ko anajm tak phoncha dey jo kerna hi tha aur sab kaam Allah hi ki taraf pheray jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और याद करो जबके मुकाबले के लिए खुदा ने तुम लोगों की निगाहों में दुश्मनों को थोड़ा दिखाया और उनकी निगाहों में तुम्हें काम करके पेश किया, ता-के जो बात होनी थी उसे अल्लाह ज़हूर में ले आए। और आख़िर ए कार सारी ममलात अल्लाह ही की तरफ रूजू करते हैं
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِذا لَقيتُم فِئَةً فَاثبُتوا وَاذكُرُوا اللَّهَ كَثيرًا لَعَلَّكُم تُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! जब तुम किसी गिरोह से भिड़ो, तो जमे रहो तथा अल्लाह को बहुत याद करो, ताकि तुम्हें सफलता प्राप्त हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey iman laney walon, jab kisi giroh se tumhara muqabla ho to saabit qadam raho aur Allah ko kasrat se yaad karo, tawaqqu hai ke tumhein kamiyabi naseeb hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Jab tum kissi mukhalif foj say bhirr jao to sabit qadam raho aur ba kasrat Allah ko yaad kero takay tumhen kaamyabi hasil ho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ ईमान लाने वालों, जब किसी गिरो ​​से तुम्हारा मुकाबला हो तो साबित क़दम रहो और अल्लाह को कसरत से याद करो, तवक्कू है के तुम्हें कामयाबी नसीब होगी
عَرَبِيوَأَطيعُوا اللَّهَ وَرَسولَهُ وَلا تَنازَعوا فَتَفشَلوا وَتَذهَبَ ريحُكُم ۖ وَاصبِروا ۚ إِنَّ اللَّهَ مَعَ الصّابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो और आपस में विवाद न करो, अन्यथा तुम कायर बन जाओगे और तुम्हारी हवा उखड़ जाएगी। तथा धैर्य रखो, निःसंदेह अल्लाह धैर्य रखने वालों के साथ है।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah aur uske Rasool ki itaat karo aur aapas mein jhagdo nahin warna tumhare andar kamzori paida ho jayegi aur tumhari hawa ukhad jayegi. Sabr se kaam lo, yakeenan Allah sabr karne walon ke saath hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah ki aur uss kay rasool ki farman bardari kertay raho aapas mein ikhtilaf na kero werna buzdil hojao gay aur tumhari hawa ukhar jaye gi aur sabar-o-sahaar rakho yaqeenan Allah Taalaa sabar kerney walon kay sath hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह और उसके रसूल की इत्ता करो और आपस में झगड़ा नहीं वरना तुम्हारे अंदर कमज़ोरी पैदा हो जाएगी और तुम्हारी हवा उखड़ जाएगी। सब्र से काम लो, यकीनन अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है
عَرَبِيوَلا تَكونوا كَالَّذينَ خَرَجوا مِن دِيارِهِم بَطَرًا وَرِئَاءَ النّاسِ وَيَصُدّونَ عَن سَبيلِ اللَّهِ ۚ وَاللَّهُ بِما يَعمَلونَ مُحيطٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन लोगों के समान न हो जाओ, जो अपने घरों से इतराते हुए तथा लोगों को दिखावा करते हुए निकले। और वे अल्लाह के मार्ग से रोकते थे। हालाँकि जो कुछ वे कर रहे थे, अल्लाह उसे (अपने ज्ञान के) घेरे में लिए हुए है।
Roman Urdu (Maududi)Aur un logon ke se rang-dhang na ikhtiyar karo jo apne gharon se itraate(exulting) aur logon ko apni shaan dikhate huye nikle aur jinki rawish yeh hai ke Allah ke raaste se roakte hain. Jo kuch woh kar rahey hain woh Allah ki giraft se bahar nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unn logon jaisay na bano jo itratay huye aur logon mein khud numaee kertay huye apney gharon say chalay aur Allah ki raah say roktay thay jo kuch woh ker rahey hain Allah ussay gher lenay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और उन लोगों के साथ रंग-ढंग ना इख्तियार करो जो अपने घरों से इतराते (खुश) और लोगों को अपनी शान दिखाते हुए निकले और जिनका रवीश ये है के अल्लाह के रास्ते से रोते हैं। जो कुछ वो कर रहे हैं वो अल्लाह की गिरफ़्तार से बाहर नहीं है
عَرَبِيوَإِذ زَيَّنَ لَهُمُ الشَّيطانُ أَعمالَهُم وَقالَ لا غالِبَ لَكُمُ اليَومَ مِنَ النّاسِ وَإِنّي جارٌ لَكُم ۖ فَلَمّا تَراءَتِ الفِئَتانِ نَكَصَ عَلىٰ عَقِبَيهِ وَقالَ إِنّي بَريءٌ مِنكُم إِنّي أَرىٰ ما لا تَرَونَ إِنّي أَخافُ اللَّهَ ۚ وَاللَّهُ شَديدُ العِقابِ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब शैतान ने उनके लिए उनके कर्मों को सुंदर बना दिया और कहा : आज लोगों में से कोई भी तुमपर प्रबल नहीं होगा और निश्चय मैं तुम्हारा समर्थक हूँ। फिर जब दोनों समूह आमने-सामने हुए, तो वह अपनी एड़ियों के बल फिर गया और उसने कहा : निःसंदेह मैं तुमसे अलग हूँ। निःसंदेह मैं वह कुछ देख रहा हूँ, जो तुम नहीं देखते। निश्चय मैं अल्लाह से डरता हूँ और अल्लाह बहुत कठोर यातना देने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Zara khayal karo us waqt ka jabke shaytan ne in logon ke kartoot inki nigahon mein khushnuma bana kar dikhaye thay aur insey kaha tha ke aaj koi tumpar gaalib nahin aa sakta, aur yeh ke main tumhare saath hoon. Magar jab dono girohon ka aamna saamna hua to woh ultey paaon phir gaya aur kehne laga ke mera tumhara saath nahin hai, main woh kuch dekh raha hoon jo tumlog nahin dekhte. Mujhey khuda se darr lagta hai aur khuda badi sakht saza dene wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay unn kay aemaal ko shetan zeenat daar dikha raha tha aur keh raha tha kay logon mein say koi bhi aaj tum per ghalib nahi aa sakta mein khud bhi tumhara himayati hun lekin jab donon jamaten namoo daar huen to apni aeriyon kay ball peechay hatt gaya aur kehnay laga mein tum say bari hun. Mein woh dekh raha hun jo tum nahi dekh rahey. Mein Allah say darta hun aur Allah Taalaa sakhta azab wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़रा ख़याल करो हमें वक़्त का जबके शैतान ने लोगों के दिलों में इनकी निगाहों में ख़ुशनुमा बना कर दिखाया था और इनसे कहा था के आज कोई तुम्हारे गालिब नहीं आ सकता, और ये के मैं तुम्हारे साथ हूँ. मगर जब दोनों गिरोहों का आमना सामना हुआ तो वो उल्टे पांव फिर गया और कहने लगा के मेरा तुम्हारा साथ नहीं है, मैं वो कुछ देख रहा हूं जो तुमलोग नहीं देखते। मुझे खुदा से डर लगता है और खुदा बड़ी ताकत सजा देने वाला है
عَرَبِيإِذ يَقولُ المُنافِقونَ وَالَّذينَ في قُلوبِهِم مَرَضٌ غَرَّ هٰؤُلاءِ دينُهُم ۗ وَمَن يَتَوَكَّل عَلَى اللَّهِ فَإِنَّ اللَّهَ عَزيزٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जब मुनाफ़िक़ तथा वे लोग जिनके दिलों में बीमारी थे, कह रहे थे : इन लोगों को इनके धर्म ने धोखा दिया है। हालाँकि जो अल्लाह पर भरोसा करे, तो निःसंदेह अल्लाह सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jabke munafiqeen aur woh sab log jinke dilon ko rog laga hua hai, keh rahey thay ke in logon ko to inke deen ne khabat(delusion) mein mubtila kar rakkha hai, halanke agar koi Allah par bharosa karey to yakeenan Allah bada zabardast aur dana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay munafiq keh rahey thay aur woh bhi jin kay dilon mein rog tha kay enhen to inn kay deen ney dhokay mein daal diya hai jo bhi Allah per bharosa keray Allah Taalaa bila shak-o-shuba ghalbay wala aur hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जबके मुनाफिकेन और वो सब लोग जिनके दिलों को रोग लगा हुआ है, कह रहे थे के इन लोगों को तो इनके दीन ने खबत (भ्रम) में मुब्तिला कर रखा है, हलांके अगर कोई अल्लाह पर भरोसा करे तो यकीनन अल्लाह बड़ा ज़बरदस्त और दाना है
عَرَبِيوَلَو تَرىٰ إِذ يَتَوَفَّى الَّذينَ كَفَرُوا ۙ المَلائِكَةُ يَضرِبونَ وُجوهَهُم وَأَدبارَهُم وَذوقوا عَذابَ الحَريقِ
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हिन्दी (Al-Omari)और काश! आप देखें, जब फ़रिश्ते काफ़िरों के प्राण निकालते हैं, उनके चेहरों और उनकी पीठों पर मारते हैं (और कहते हैं) जलाने वाली यातना का मज़ा चखो।
Roman Urdu (Maududi)Kaash tum us halat ko dekh sakte jabke Farishte maktool kafiron ki roohein qabz kar rahey thay, woh unke chehron aur unke kulhon(backs) par zarb lagate jatey thay aur kehte jatey thay “ lo ab jalne ki saza bhugto
Roman Urdu (Junagarhi)Kaash kay tu dekhta jabkay farishtay kafiron ki rooh qabz kertay hain unn kay mun aur sareenon per maar maartay hain (aur kehtay hain) tum jalney ka maza chakho
Devnagri Urdu (Maududi)काश तुम हमें हालात को देख सकते हो जबके फरिश्ते मकतूल ​​काफिरों की रूहें क़ब्ज़ कर रहे थे, वो उनके चेहरे और उनके कुल्होन पर ज़र्ब लगते जाते थे और कहते जाते थे “लो अब जलने की सजा भुगतो
عَرَبِيذٰلِكَ بِما قَدَّمَت أَيديكُم وَأَنَّ اللَّهَ لَيسَ بِظَلّامٍ لِلعَبيدِ
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हिन्दी (Al-Omari)यह उसके बदले में है जो तुम्हारे हाथों ने आगे भेजा और इसलिए कि निश्चय अल्लाह बंदों पर तनिक भी अत्याचार नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh jaza hai jiska samaan tumhare apne haathon ne peshgi muhaiyya kar rakkha tha. Warna Allah to apne bandon par zulm karne wala nahin hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh ba-sabab unn kaamon kay jo tumharay haathon ney pehlay hi bhej rakha hai be-shak Allah apney bandon per zulm kerney wala nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो जजा है जिसका सामान तुम्हारे अपने हाथों ने पेशगी मुहैय्या कर रखा था। वरना अल्लाह तो अपने बंदों पर ज़ुल्म करने वाला नहीं है।”
عَرَبِيكَدَأبِ آلِ فِرعَونَ ۙ وَالَّذينَ مِن قَبلِهِم ۚ كَفَروا بِآياتِ اللَّهِ فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ بِذُنوبِهِم ۗ إِنَّ اللَّهَ قَوِيٌّ شَديدُ العِقابِ
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हिन्दी (Al-Omari)(इनका हाल) फ़िरऔनियों तथा उनसे पहले के लोगों के हाल की तरह हुआ। उन्होंने अल्लाह की निशानियों का इनकार किया, तो अल्लाह ने उन्हें उनके गुनाहों के कारण पकड़ लिया। निःसंदेह अल्लाह बहुत शक्तिशाली, बहुत कठोर दंड वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh maamla unke saath usi tarah pesh aaya jis tarah aale Firoun aur unse pehle ke dusre logon ke saath pesh aata raha hai, ke unhon ne Allah ki aayat ko maanne se inkar kiya aur Allah ne unke gunahon par unhein pakad liya. Allah quwwat rakhta ahi aur sakht saza dene wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Misil friaoniyon kay haal kay aur unn say aglon kay, kay unhon ney Allah ki aayaton kay sath kufur kiya pus Allah ney unn kay gunahon kay baees unehn pakar liya. Allah Taalaa yaqeenan qooat wala aur sakht azab wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये मामला उनके साथ उसी तरह पेश आया जिस तरह आले फिरौन और उन्हें पहले के दूसरे लोगों के साथ पेश आता रहा है, के उनहों ने अल्लाह की आयतों को मानने से इनकार किया और अल्लाह ने उनके गुनाहों पर उन्हें पकड़ लिया। अल्लाह क़ुव्वत रखता है और सख़्त सज़ा देने वाला है
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ لَم يَكُ مُغَيِّرًا نِعمَةً أَنعَمَها عَلىٰ قَومٍ حَتّىٰ يُغَيِّروا ما بِأَنفُسِهِم ۙ وَأَنَّ اللَّهَ سَميعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यह इस कारण (हुआ) कि अल्लाह कभी भी उस नेमत को बदलने वाला नहीं है, जो उसने किसी जाति पर की हो, यहाँ तक कि वे (स्वयं) बदल दें जो उनके दिलों में है। और इसलिए कि अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Allah ki is sunnat ke mutabiq hua ke woh kisi niyamat ko jo usne kisi qaum ko ata ki ho us waqt tak nahin badalta jab tak ke woh qaum khud apne tarz e amal ko nahin badal deti. Allah sab kuch sunne aur jaanne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss liye kay Allah aisa nahi kay kissi qom per koi nemat inam farma ker phir badal dey jab tak kay woh khud apni uss halat ko na badal den jo kay unn ki apni thi aur yeh kay Allah sunnay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये अल्लाह की इस सुन्नत के मुताबिक हुआ के वो किसी नियामत को जो हमें किसी क़ौम को आता है कि हो हमें वक़्त तक नहीं बदलता जब तक के वो क़ौम खुद अपनी तर्ज़ ए अमल को नहीं बदल देती। अल्लाह सब कुछ सुनने और जाने वाला है
عَرَبِيكَدَأبِ آلِ فِرعَونَ ۙ وَالَّذينَ مِن قَبلِهِم ۚ كَذَّبوا بِآياتِ رَبِّهِم فَأَهلَكناهُم بِذُنوبِهِم وَأَغرَقنا آلَ فِرعَونَ ۚ وَكُلٌّ كانوا ظالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)इनकी दशा फ़िरऔनियों तथा उन लोगों जैसी हुई, जो उनसे पहले थे। उन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया, तो हमने उन्हें उनके पापों के कारण विनष्ट कर दिया तथा फ़िरऔनियों को डुबो दिया। और वे सभी अत्याचारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Aale Firoun aur unse pehle ki qaumon ke saath jo kuch pesh aaya woh isi zaabtey ke mutabiq tha. Unhon ne apne Rubb ki aayat ko jhutlaya, tab humne unke gunahon ki padash mein unhein halaak kiya aur aale-Firoun ko garq kardiya, Yeh sab zalim log thay
Roman Urdu (Junagarhi)Misil halat firaoniyon kay aur unn say pehlay kay logon kay, kay unhon ney apney rab ki baaten jhutlaeen. Pus unn kay gunahon kay baees hum ney unhen barbaad kiya aur firaoniyon ko dobo diya. Yeh saray zalim thay
Devnagri Urdu (Maududi)आले फिरौन और उनसे पहले कि क़ौमों के साथ जो कुछ पेश आया वो इसी ज़ब्ते के मुताबिक़ था। उनहों ने अपने रुब की आयतों को झुटलाया, तब हमने उनके गुनाहों की याद में उन्हें हलाक किया और आले-फिरौं को परेशान कर दिया, ये सब जालिम लोग थे
عَرَبِيإِنَّ شَرَّ الدَّوابِّ عِندَ اللَّهِ الَّذينَ كَفَروا فَهُم لا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह की दृष्टि में सभी जानवरों से बुरे वे लोग हैं, जिन्होंने कुफ़्र किया, इसलिए वे ईमान नहीं लाते।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan Allah ke nazdeek zameen par chalne wali makhlooq mein sabse badhtar woh log hain jinhon ne haqq ko maanne se inkar kardiya phir kisi tarah woh usey qabool karne par tayyar nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Tamam jaandaron say badtar Allah kay nazdik woh hain jo kufur keren phir woh eman na layen
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन अल्लाह के नाज़दीक ज़मीन पर चलने वाली मख़लूक़ में सबसे बेहतर वो लोग हैं जिन्हों ने हक़ को मन्ने से इनकार करदिया फिर किसी तरह वो उसे क़बूल करने पर तैयार नहीं हैं
عَرَبِيالَّذينَ عاهَدتَ مِنهُم ثُمَّ يَنقُضونَ عَهدَهُم في كُلِّ مَرَّةٍ وَهُم لا يَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग जिनसे तूने संधि की। फिर वे हर बार अपना वचन भंग कर देते हैं। और वे (अल्लाह से) नहीं डरते।
Roman Urdu (Maududi)(khusoosan) unmein se woh log jinke saath tu nay muahida (covenant) kiya phir woh har mauqe par usko todhte hain aur zara khuda ka khauf nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Jin say aap ney ehad-o-paymaan ker liya phir bhi woh apney ehad-o-paymaan ko her martaba tor detay hain aur bilkul perhez nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)(खुसूसन) उनमें से वो लोग जिनके साथ तू नहीं मुआहिदा (संविदा) किया फिर वो हर मौके पर उसको तोड़ते हैं और जरा खुदा का खौफ नहीं करते
عَرَبِيفَإِمّا تَثقَفَنَّهُم فِي الحَربِ فَشَرِّد بِهِم مَن خَلفَهُم لَعَلَّهُم يَذَّكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो यदि कभी तुम उन्हें युद्ध में पा जाओ, तो उनपर भारी प्रहार करने के साथ उन लोगों को भगा दो, जो उनके पीछे हैं, ताकि वे सीख ग्रहण करें।
Roman Urdu (Maududi)Pas agar yeh log tumhein ladayi mein mil jayein to inki aisi khabar lo ke inke baad jo dusre log aisi rawish ikhtiyar karne waley hon unke hawaas bakhta (admonished) ho jayein. Tawakku hai ke badh-ahadon ke is anjaam se woh sabaq lenge
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab kabhi tu laraee mein inn per ghalib aajaye enhen aisi maar maar kay inn kay pichlay bhi bhaag kharay hon ho sakta hai kay woh ibrat keren
Devnagri Urdu (Maududi)अगर ये लोग तुम्हें लड़ाई में मिल जाएं तो इनकी ऐसी खबर लो के इनके बाद जो दूसरे लोग ऐसे रवीश इख्तियार करने वाले हों उनके हवास बख्ता (चेतावनी दी) हो जाएं। तवक्कू है के बाद-अहदों के इस अंजाम से वो सबक लेंगे
عَرَبِيوَإِمّا تَخافَنَّ مِن قَومٍ خِيانَةً فَانبِذ إِلَيهِم عَلىٰ سَواءٍ ۚ إِنَّ اللَّهَ لا يُحِبُّ الخائِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि कभी आपको किसी जाति की ओर से किसी विश्वासघात का भय हो, तो समानता के आधार पर उनका वचन उन पर फेंक दें। निःसंदेह अल्लाह विश्वासघात करने वालों से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar kabhi kisi qaum se khayanat (treachery) ka andesha ho to uske muhaiday ko elaniya(publicly) uske aagey phenk do, yaqeenan Allah khayano (treacherous) ko pasand nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tujhay kissi qom ki khayanat ka darr ho to barabari ki haalat mein unn ka ehad naama tor dey Allah Taalaa khayanat kerney walon ko pasand nahi farmata
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर कभी किसी क़ौम से ख़यानत (विश्वासघात) का अंदाज़ा हो तो उसके मुहाएद को एलानिया (सार्वजनिक रूप से) उसके आगे फेंक दो, यक़ीनन अल्लाह ख़यानो (विश्वासघाती) को पसंद नहीं करता
عَرَبِيوَلا يَحسَبَنَّ الَّذينَ كَفَروا سَبَقوا ۚ إِنَّهُم لا يُعجِزونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन लोगों ने कुफ़्र किया, हरगिज़ न समझें कि वे बचकर निकले गए। निश्चय वे (हमें) विवश नहीं कर सकेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Munkireen e haqq is galat fahmi mein na rahein ke woh baazi le gaye, yaqeenan woh humko hara nahin sakte
Roman Urdu (Junagarhi)Kafir yeh khayal na keren kay woh bhaag niklay. Yaqeenan woh aajiz nahi ker saktay
Devnagri Urdu (Maududi)मुनकिरीन ई हक़ इस ग़लत फ़हमी में ना रहे के वो बाजी ले गए, यक़ीनन वो हमको हारा नहीं सकते
عَرَبِيوَأَعِدّوا لَهُم مَا استَطَعتُم مِن قُوَّةٍ وَمِن رِباطِ الخَيلِ تُرهِبونَ بِهِ عَدُوَّ اللَّهِ وَعَدُوَّكُم وَآخَرينَ مِن دونِهِم لا تَعلَمونَهُمُ اللَّهُ يَعلَمُهُم ۚ وَما تُنفِقوا مِن شَيءٍ في سَبيلِ اللَّهِ يُوَفَّ إِلَيكُم وَأَنتُم لا تُظلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जहाँ तक तुमसे हो सके, अपनी शक्ति बढ़ाकर और घोड़ों को तैयार करके उनके (मुक़ाबले के) लिए अपने उपकरण तैयार करो, जिसके साथ तुम अल्लाह के दुश्मन और अपने दुश्मन को और उनके अलावा कुछ और लोगों को भयभीत करोगे, जिन्हें तुम नहीं जानते, अल्लाह उन्हें जानता है। और तुम जो चीज़ भी अल्लाह की राह में खर्च करोगे, वह तुम्हें पूरी-पूरी लौटा दी जाएगी और तुमपर अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumlog, jahan tak tumahre bas chale, zyada se zyada taaqat aur tayyar bandhey rehne wale ghodey (well-readied horses ) unke muqable ke liye muhayya rakho, taa-ke iske zariye se Allah ke aur apne dushmano ko aur un dusre aadaa (others besides them) ko khauf zadah karo jinhein tum nahin jantey magar Allah jaanta hai. Allah ki raah mein jo kuch tum kharch karogey uska pura pura badal tumhari taraf paltaya jayega aur tumhare saath hargiz zulm na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Tum inn kay muqablay kay liye apni taqat bhar qooat ki tayyari kero aur ghoron ko tayyar rakhney ki kay iss say tum Allah kay dushmanon ko khof zada rakh sako aur inn kay siwa auron ko bhi jinhen tum nahi jantay Allah enhen khoob jaan raha hai jo kuch bhi Allah ki raah mein sarf kero gay woh tumhen poora poora diya jayega aur tumhara haq na maara jayega
Devnagri Urdu (Maududi)और तुमलोग, जहां तक ​​तुम्हारे बस चले, ज़्यादा से ज़्यादा ताक़त और तैयार बंधे रहने वाले घोड़े (अच्छी तरह से तैयार घोड़े) उनके मुकाबले के लिए मुहय्या राखो, ता-के इसके ज़रिये से अल्लाह के और अपने दुश्मनों को और उनके अलावा अन्य लोगों को खौफ़ ज़्यादा करो जिन्हे तुम नहीं जानते मगर अल्लाह जानता है। अल्लाह की राह में जो कुछ तुम खर्च करोगे उसका पूरा पूरा बदल तुम्हारी तरफ पलटया जाएगा और तुम्हारे साथ हरगिज ज़ुल्म न होगा
عَرَبِي۞ وَإِن جَنَحوا لِلسَّلمِ فَاجنَح لَها وَتَوَكَّل عَلَى اللَّهِ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّميعُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वे (शत्रु) संधि की ओर झुकें, तो आप भी उसकी ओर झुक जाएँ और अल्लाह पर भरोसा रखें। निःसंदेह वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Nabi), agar dushman sulah o salamati ki taraf mayal hon to tum bhi uske liye aamada ho jao aur Allah par bharosa karo, yaqeenan wahi sab kuch sunne aur jaane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar woh sulah ki taraf jhuken to tu bhi sulah ki taraf jhuk jaa aur Allah per bharosa rakh yaqeenan woh boht sunnay jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ नबी), अगर दुश्मन सुलह ओ सलामती की तरफ मायल हो तो तुम भी उसके लिए आमादा हो जाओ और अल्लाह पर भरोसा करो, यकीनन वही सब कुछ सुनने और जाने वाला है
عَرَبِيوَإِن يُريدوا أَن يَخدَعوكَ فَإِنَّ حَسبَكَ اللَّهُ ۚ هُوَ الَّذي أَيَّدَكَ بِنَصرِهِ وَبِالمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वे यह चाहें कि आपको धोखा दें, तो निःसंदेह आपके लिए अल्लाह ही काफ़ी है। वही है जिसने आपको अपनी मदद से और मोमिनों के द्वारा शक्ति प्रदान की।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar woh dhoke ki niyat rakhte hon to tumhare liye Allah kafi hai. Wahi to hai jisne apni madad se aur momino ke zariye se tumhari taeed ki (strengthened you)
Roman Urdu (Junagarhi)Agar woh tujh say dagha baazi kerna chahayen gay to Allah tujhay kafi hai ussi ney apni madad say aur mominon say teri taaeed ki hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर वो धोखे की नियत रखे तो तुम्हारे लिए अल्लाह काफी है। वही तो है जिसने अपनी मदद से और मोमिनो के जरीये से तुम्हारी तैद की (आपको मजबूत किया)
عَرَبِيوَأَلَّفَ بَينَ قُلوبِهِم ۚ لَو أَنفَقتَ ما فِي الأَرضِ جَميعًا ما أَلَّفتَ بَينَ قُلوبِهِم وَلٰكِنَّ اللَّهَ أَلَّفَ بَينَهُم ۚ إِنَّهُ عَزيزٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसने उनके दिलों को आपस में जोड़ दिया। यदि आप धरती में जो कुछ है, सब खर्च कर देते, तो भी उनके दिलों को जोड़ न पाते। लेकिन अल्लाह ने उन्हें आपस में जोड़ दिया। निःसंदेह वह सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur momino ke dil ek dusre ke saath joad diye. Tum rooh e zameen ki saari daulat bhi kharch kar daalte to in logon ke dil na joad sakte thay magar woh Allah hai jisne in logon ke dil joadey. Yaqeenan woh bada zabardast aur dana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay dilon mein bahumi ulfat bhi ussi ney dali hai. Zamin mein jo kuch hai agar sara ka sara bhi kharch ker dalta to bhi inn kay dil aapas mein na mila sakta. Yeh to Allah hi ney inn mein ulfat daal di hai woh ghalib hikmaton wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और मोमिनो के दिल एक दूसरे के साथ जोड़ दिये। तुम रूह ए ज़मीन की सारी दौलत भी खर्च कर डालते हो इन लोगों के दिल ना जुड़ते लेकिन वो अल्लाह है जिसने इन लोगों के दिल जोड़े। यकीनन वो बड़ा ज़बरदस्त और दाना है
عَرَبِييا أَيُّهَا النَّبِيُّ حَسبُكَ اللَّهُ وَمَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी! आपके लिए तथा आपके पीछे चलने वाले ईमानवालों के लिए अल्लाह काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, tumhare liye aur tumhare pairow (followers) ehle iman ke liye to bas Allah kafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi! Tujhay Allah kafi hai aur inn mominon ko jo teri pairwee ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, तुम्हारे लिए और तुम्हारे जोड़े (अनुयायियों) एहले ईमान के लिए तो बस अल्लाह काफ़ी है
عَرَبِييا أَيُّهَا النَّبِيُّ حَرِّضِ المُؤمِنينَ عَلَى القِتالِ ۚ إِن يَكُن مِنكُم عِشرونَ صابِرونَ يَغلِبوا مِائَتَينِ ۚ وَإِن يَكُن مِنكُم مِائَةٌ يَغلِبوا أَلفًا مِنَ الَّذينَ كَفَروا بِأَنَّهُم قَومٌ لا يَفقَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी! ईमान वालों को लड़ाई पर उभारें। यदि तुममें से बीस धैर्य रखने वाले हों, तो वे दो सौ पर विजय प्राप्त करेंगे, और यदि तुममें से एक सौ हों, तो वे कुफ़्र करने वालों में से एक हज़ार पर विजय प्राप्त करेंगे। यह इसलिए कि निःसंदेह वे ऐसे लोग हैं जो समझते नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, momino ko jung par ubharo. Agar tum mein se bees (twenty) aadmi saabir (who persevere) hon to do saw (two hundred) par gaalib aayenge, aur agar saw (hundred) aadmi aisey hon to munkireen e haqq mein se hazaar (thousand) aadmiyon par bhari rahenge, kyunke woh aisey log hain jo samajh nahin rakhte
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi! Eman walon ko jihad ka shoq dilao agar tum mein bees (20) bhi sabar kerney walay hongay to do so per ghalib rahey gay. Aur agar tum mein aik so hongay to aik hazar kafiron per ghalib rahen gay iss wastay kay woh bey samajh log hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, मोमिनो को जंग पर उभारो। अगर तुम में से बीस (बीस) आदमी साबिर (जो कायम रहे) माननीय तो दो आरा (दो सौ) पर गालिब आएंगे, और अगर तुम में (सौ) आदमी ऐसे हो तो मुनकिरीन ए हक में से हजार (हजार) आदमियों पर भारी रहेंगे, क्योंकि वो ऐसे लोग हैं जो समझ नहीं सकते रखे
عَرَبِيالآنَ خَفَّفَ اللَّهُ عَنكُم وَعَلِمَ أَنَّ فيكُم ضَعفًا ۚ فَإِن يَكُن مِنكُم مِائَةٌ صابِرَةٌ يَغلِبوا مِائَتَينِ ۚ وَإِن يَكُن مِنكُم أَلفٌ يَغلِبوا أَلفَينِ بِإِذنِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ مَعَ الصّابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अब अल्लाह ने तुम्हारा बोझ हल्का कर दिया और जान लिया कि तुम्हारे अंदर कुछ कमज़ोरी है। तो यदि तुममें से सौ धैर्य रखने वाले हों, तो दो सौ पर विजय प्राप्त करेंगे, और यदि तुममें से एक हज़ार आदमी हों, तो अल्लाह के हुक्म से दो हज़ार पर विजय प्राप्त करेंगे, और अल्लाह धैर्य रखने वालों के साथ है।
Roman Urdu (Maududi)Accha, ab Allah ne tumhara bojh halka kiya aur usey maloom hua ke abhi tum mein kamzori hai. Pas agar tum mein se saw (hundred) aadmi saabir hon to woh do saw (two hundred) par aur hazaar aadmi aisey hon to do hazaar par Allah ke hukum se gaalib aayenge. Aur Allah un logon ke saath hai jo sabr karne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Acha abb Allah tumhara bojh halka kerta hai woh khoob janta hai kay tum mein na tawani hai pus agar tum mein say aik so sabar kerney walay hongay to woh do so per ghalib rahen gay aur agar tum mein aik hazar hongay to woh Allah kay hukum say do hazar per ghalib rahen gay Allah sabar kerney walon kay sath hai
Devnagri Urdu (Maududi)अच्छा, अब अल्लाह ने तुम्हारा बोझ हल्का किया और उसे मालूम हुआ के अभी तुम में कमी है। अगर तुम में से एक (सौ) आदमी साबिर हो तो वो दो आरी (दो सौ) पर हो और एक हजार आदमी ऐसे हो तो दो हजार पर अल्लाह के हुकुम से गालिब आएंगे। और अल्लाह उन लोगों के साथ है जो सब्र करने वाले हैं
عَرَبِيما كانَ لِنَبِيٍّ أَن يَكونَ لَهُ أَسرىٰ حَتّىٰ يُثخِنَ فِي الأَرضِ ۚ تُريدونَ عَرَضَ الدُّنيا وَاللَّهُ يُريدُ الآخِرَةَ ۗ وَاللَّهُ عَزيزٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)किसी नबी के लिए उचित नहीं कि उसके पास बंदी हों, यहाँ तक कि वह धरती में (उनका) अच्छी तरह खून बहा ले। तुम संसार की सामग्री चाहते हो और अल्लाह आख़िरत (परलोक) चाहता है। और अल्लाह सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Kisi Nabi ke liye yeh zeba nahin hai ke uske paas qaidi hon jab tak ke woh zameen mein dushmano ko acchi tarah kuchal na de. Tum log duniya ke faiyde chahte ho, halanke Allah ke peshe nazar aakhirat hai. Aur Allah gaalib aur hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Nabi kay haath mein qaidi nahi chahaiye jabtak kay mulk mein achi khoonrezi ki jang na hojaye. Tum to duniya kay maal chahatay ho aur Allah ka irada aakhirat ka hai aur Allah zor aawar ba hikmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)किसी नबी के लिए ये ज़ेबा नहीं है के उसके पास क़ैदी होन जब तक के वो ज़मीन में दुश्मनों को अच्छी तरह कुचल ना दे। तुम लोग दुनिया के फ़ायदे चाहते हो, हलांके अल्लाह के पेशे नज़र आख़िर है। और अल्लाह गालिब और हकीम है
عَرَبِيلَولا كِتابٌ مِنَ اللَّهِ سَبَقَ لَمَسَّكُم فيما أَخَذتُم عَذابٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि अल्लाह के द्वारा लिखी गई बात न होती, जो पहले तय हो चुकी, तो तुमने जो कुछ भी लिया उसके कारण तुम्हें बहुत बड़ी यातना पहुँचती।
Roman Urdu (Maududi)Agar Allah ka nawishta (decree) pehle na likha ja chuka hota to jo kuch tum logon ne liya hai uski padash mein tumko badi saza di jati
Roman Urdu (Junagarhi)Agar pehlay hi say Allah ki taraf say baat likhi hui na hoti to jo kuch tum ney liya hai iss baray mein tumhen koi bari saza hoti
Devnagri Urdu (Maududi)अगर अल्लाह का नविस्ता (फरमा) पहले न लिखा जा चुका हो तो जो कुछ तुम लोगों ने लिया है उसकी पैदाइश में तुमको बड़ी सजा दी जाती है
عَرَبِيفَكُلوا مِمّا غَنِمتُم حَلالًا طَيِّبًا ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तो जो ग़नीमत का धन तुमने प्राप्त किया है, उसमें से खाओ, इस हाल में कि हलाल और पवित्र है, और अल्लाह से डरो। निःसंदेह अल्लाह बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान है।
Roman Urdu (Maududi)Pas jo kuch tumne maal haasil kiya hai usey khao ke woh halaal aur paak hai aur Allah se darte raho. Yakeenan Allah darguzar karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jo kuch halal aur pakeezah ghanimat tum ney hasil ki hai khoob khao piyo aur Allah say dartay raho yaqeenan Allah ghafoor-o-rahim hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास जो कुछ तुमने माल हासिल किया है उसे खाओ के वो हलाल और पाक है और अल्लाह से डरते हैं रहो. यकीनान अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِييا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِمَن في أَيديكُم مِنَ الأَسرىٰ إِن يَعلَمِ اللَّهُ في قُلوبِكُم خَيرًا يُؤتِكُم خَيرًا مِمّا أُخِذَ مِنكُم وَيَغفِر لَكُم ۗ وَاللَّهُ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी! तुम्हारे हाथों में जो बंदी हैं, उनसे कह दो : यदि अल्लाह तुम्हारे दिलों में कोई भलाई जानेगा, तो तुम्हें उससे बेहतर प्रदान करेगा, जो तुमसे लिया गया है और तुम्हें क्षमा कर देगा। और अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, tum logon ke qabze mein jo qaidi hain unse kaho agar Allah ko maloom hua ke tumhare dilon mein kuch khair hai to woh tumhein ussey badh chadh kar dega jo tumse liya gaya hai aur tumhari khataein maaf karega. Allah darguzar karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi apney haath talay kay qaidiyon say keh do kay agar Allah Taalaa tumharay dilon mein nek niyati dekhay ga to jo kuch tum say liya gaya hai uss say behtar tumhen dey ga aur phir gunah bhi moaf farmaye ga aur Allah bakhshney wala meharban hai hi
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, तुम लोगों के क़ब्ज़े में जो क़ैदी हैं उन्हें कहो अगर अल्लाह को मालूम हुआ के तुम्हारे दिलों में कुछ ख़ैर है तो वो तुम्हें उससे बढ़ कर देगा जो तुमसे लिया गया है और तुम्हारी ख़तें माफ़ करेगा. अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِيوَإِن يُريدوا خِيانَتَكَ فَقَد خانُوا اللَّهَ مِن قَبلُ فَأَمكَنَ مِنهُم ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वे आपके साथ विश्वासघात करना चाहें, तो निःसंदेह वे इससे पहले अल्लाह के साथ विश्वासघात कर चुके हैं। तो उसने (आपको) उनपर नियंत्रण दे दिया। तथा अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Lekin agar woh tere saath khayanat(betrayal) ka irada rakhte hain to issey pehle woh Allah ke saath khayanat kar chuke hain. Chunanchey usi ki saza Allah ne unhein di ke woh tere qaabu mein aa gaye. Allah sab kuch jaanta hai aur hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar woh tujh say khayanat ka khayal keren to yeh to iss say pehlay khud Allah ki khayanat ker chukay hain aakhir iss ney enhen giriftar kera diya aur Allah ilm-o-hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)लेकिन अगर वो तेरे साथ ख़यानत (विश्वासघात) का इरादा रखते हैं तो इसे पहले वो अल्लाह के साथ ख़यानत कर चुके हैं। चुनांचे उसकी सज़ा अल्लाह ने उन्हें दी के वो तेरे क़ाबू में आ गए। अल्लाह सब कुछ जानता है और हकीम है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا وَهاجَروا وَجاهَدوا بِأَموالِهِم وَأَنفُسِهِم في سَبيلِ اللَّهِ وَالَّذينَ آوَوا وَنَصَروا أُولٰئِكَ بَعضُهُم أَولِياءُ بَعضٍ ۚ وَالَّذينَ آمَنوا وَلَم يُهاجِروا ما لَكُم مِن وَلايَتِهِم مِن شَيءٍ حَتّىٰ يُهاجِروا ۚ وَإِنِ استَنصَروكُم فِي الدّينِ فَعَلَيكُمُ النَّصرُ إِلّا عَلىٰ قَومٍ بَينَكُم وَبَينَهُم ميثاقٌ ۗ وَاللَّهُ بِما تَعمَلونَ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और उन्होंने हिजरत की तथा अल्लाह के मार्ग में अपने धन और अपने प्राण के साथ जिहाद किया, तथा जिन लोगों ने (उन्हें) शरण दिया और सहायता की, ये लोग आपस में मित्र हैं। और जो लोग ईमान लाए और हिजरत नहीं की, तुम्हारे लिए उनकी मित्रता में से कुछ भी नहीं, यहाँ तक कि वे हिजरत करें। और यदि वे धर्म के बारें में तुमसे सहायता माँगें, तो तुमपर सहायता करना आवश्यक है। परंतु किसी ऐसी जाति के विरुद्ध नहीं, जिनके और तुम्हारे बीच कोई संधि हो। तथा जो कुछ तुम कर रहे हो, अल्लाह उसे ख़ूब देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne iman qabool kiya aur hijrat ki aur Allah ki raah mein apni jaanein ladayin aur apne maal khapaye , aur jin logon ne hijrat karne walon ko jagah di aur unki madad ki, wahi dar-asal ek dusre ke wali (allies) hain. Rahey woh log jo iman to le aaye magar hijrat karke (daar ul Islam mein) aa nahin gaye to unsey tumhara wilayat (alliance) ka koi talluq nahin hai jab tak ke woh hijrat karke na aa jayein. Haan agar woh deen ke maamle mein tumse madad maangein to unki madad karna tumpar farz hai lekin kisi aisi qaum ke khilaf nahin jissey tumhara muhaida ho. Jo kuch tum karte ho Allah usey dekhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log eman laye aur hijrat ki aur apney maalon aur janon say Allah ki raah mein jihad kiya aur jin logon ney inn ko panah di aur madad ki yeh sab aapas mein aik doosray kay rafiq hain aur jo eman to layen hain lekin hijrat nahi ki tumharay liye inn ki kuch bhi rafaqat nahi jabtak kay woh hijrat na keren. Haan agar woh tum say deen kay baray mein madad talab keren to tum per madad kerna zaroori hai siwaye inn logon kay kay tum mein aur inn mein ehad-o-payman hai tum jo kuch ker rahey ho Allah khoob dekhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने ईमान क़बूल किया और हिजरत की और अल्लाह की राह में अपनी जानेन लड़ें और अपने माल खापे, और जिन लोगों ने हिजरत करने वालों को जगह दी और उनकी मदद की, वही दर-असल एक दूसरे के वाली (सहयोगी) हैं। रहे वो लोग जो ईमान तो ले आए मगर हिजरत करके (दार उल इस्लाम में) आ नहीं गए तो उनसे तुम्हारा विलायत (गठबंधन) का कोई तल्लुक नहीं है जब तक के वो हिजरत करके ना आ जाए। हां अगर वो दीन के मामले में तुमसे मदद मांगे तो उनकी मदद करना तुम्हारा फर्ज है लेकिन कोई ऐसी कौम के खिलाफ नहीं जिसमें तुम्हारा मुहाएदा हो। जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे देखता है
عَرَبِيوَالَّذينَ كَفَروا بَعضُهُم أَولِياءُ بَعضٍ ۚ إِلّا تَفعَلوهُ تَكُن فِتنَةٌ فِي الأَرضِ وَفَسادٌ كَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने कुफ़्र किया, वे आपस में एक-दूसरे के मित्र हैं। यदि तुम ऐसा न करोगे, तो धरती में बड़ा फ़ितना तथा बहुत बड़ा बिगाड़ पैदा होगा।
Roman Urdu (Maududi)Jo log munkir e haqq hain woh ek dusre ki himayat karte hain, agar tum yeh na karoge to zameen mein fitna aur bada fasaad barpa hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Kafir aapas mein aik doosray kay rafiq hain agar tum ney aisa na kiya to mulk mein fitna hoga aur zabardast fasaad hojayega
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग मुनकिर ए हक़ है वो एक दूसरे की हिमायत करते हैं, अगर तुम ये ना करोगे तो ज़मीन में फ़ितना और बड़ा फ़साद बरपा होगा
عَرَبِيوَالَّذينَ آمَنوا وَهاجَروا وَجاهَدوا في سَبيلِ اللَّهِ وَالَّذينَ آوَوا وَنَصَروا أُولٰئِكَ هُمُ المُؤمِنونَ حَقًّا ۚ لَهُم مَغفِرَةٌ وَرِزقٌ كَريمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथ जो लोग ईमान लाए और उन्होंने हिजरत की और अल्लाह के मार्ग में जिहाद किया और जिन लोगों ने (उन्हें) शरण दी और सहायता की, वही सच्चे मोमिन हैं। उन्हीं के लिए बड़ी क्षमा और सम्मानजनक जीविका है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log iman laye aur jinhon ne Allah ki raah mein ghar baar chode aur jidd o jahad ki aur jinhon ne panaah di aur madad ki wahi sacchey momin hain. Unke liye khataon se darguzar hai aur behtareen rizq hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log eman laye aur hijrat ki aur Allah ki raah mein jihad kiya aur jinhon ney panah di aur madad phonchaee. Yehi log sachay momin hain inn kay liye bakhsish hai aur izzat ki rozi
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ईमान लाए और जिन्होन ने अल्लाह की राह में घर बार छोड़े और जिद ओ जहद की और जिन्हों ने पनाह दी और मदद की वही सच्चे मोमिन हैं। उनके लिए ख़तों से दरगुज़र है और बेहतरीन रिज़क है
عَرَبِيوَالَّذينَ آمَنوا مِن بَعدُ وَهاجَروا وَجاهَدوا مَعَكُم فَأُولٰئِكَ مِنكُم ۚ وَأُولُو الأَرحامِ بَعضُهُم أَولىٰ بِبَعضٍ في كِتابِ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग बाद में ईमान लाए और हिजरत की और तुम्हारे साथ मिलकर जिहाद किया, तो वे तुम ही में से हैं। और अल्लाह की किताब में रिश्तेदार एक-दूसरे के अधिक हक़दार हैं। निःसंदेह अल्लाह प्रत्येक चीज़ को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log baad mein iman laye aur hijrat karke aa gaye aur tumhare saath milkar jidd o jahad karne lagey woh bhi tumhi mein shamil hain. Magar Allah ki kitaab mein khoon ke rishtedar ek dusre ke zyada haqdaar hain.Yakeenan Allah har cheez ko jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log iss kay baad eman laye aur hijrat ki aur tumharay sath hoker jihad kiya. Pus yeh log bhi tum mein say hi hain aur rishtay naatay walay inn mein say baaz baaz ziyada nazdeek hain Allah kay hukum mein be-shak Allah Taalaa her cheez ka jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग बाद में ईमान लाए और हिजरत करके आ गए और तुम्हारे साथ मिलकर जिद्द ओ जहद करने लगे वो भी तुम्हीं में शामिल हैं। मगर अल्लाह की किताब में खून के रिश्तेदार एक दूसरे के ज्यादा हकदार हैं। यकीनन अल्लाह हर चीज को जानता है
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Surah 8: Al-Anfal (Voluntary Gifts)

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Surah 8: Al-Anfal (Voluntary Gifts)

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Surah 9: Al-Bara'at / At-Taubah(The Immunity)

Medinan🕐 Revelation #113📜 129 Verses🕮 Juz 1–11
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيبَراءَةٌ مِنَ اللَّهِ وَرَسولِهِ إِلَى الَّذينَ عاهَدتُم مِنَ المُشرِكينَ
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह तथा उसके रसूल की ओर से, उन बहुदेववादियों से ज़िम्मेदारी से बरी होने की घोषणा है, जिनसे तुमने संधि की थी।
Roman Urdu (Maududi)Elan e baraat (immunity) hai Allah aur uske Rasool ki taraf se un mushrikeen ko jinsey tumne muhaidey (treaties) kiye thay
Roman Urdu (Junagarhi)Allah aur uss kay rasool ki janib say beyzaari ka ailaan hai unn mushrikon kay baray mein jinn say tum ney ehad-o-paymaan kiya tha
Devnagri Urdu (Maududi)एलान ए बारात (प्रतिरक्षा) है अल्लाह और उसके रसूल की तरफ से उन मुशरिकेन को जिनसे तुमने मुहैदे (संधियाँ) किये थे
عَرَبِيفَسيحوا فِي الأَرضِ أَربَعَةَ أَشهُرٍ وَاعلَموا أَنَّكُم غَيرُ مُعجِزِي اللَّهِ ۙ وَأَنَّ اللَّهَ مُخزِي الكافِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो (ऐ बहुदेववादियो!) ! तुम धरती में चार महीने चलो-फिरो, तथा जान लो कि निःसंदेह तुम अल्लाह को विवश करने वाले नहीं, और यह कि निश्चय अल्लाह काफ़िरों को अपमानित करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Pas tum log mulk mein char (four) mahine aur chal phir lo aur jaan rakkho ke tum Allah ko aajiz (frustrate) karne waley nahin ho, aur yeh ke Allah munkireen e haqq ko ruswa karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus (aey mushriko!) tum mulk mein char maheenay tak to chal phir lo jaan lo kay tum Allah ko aajiz kerney walay nahi ho aur yeh (bhi yaad rahey) kay Allah kafiron ko ruswa kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास तुम लोग मुल्क में चार (चार) माहीन और चल फिर लो और जान रक्खो के तुम अल्लाह को अजीज (निराश) करने वाले नहीं हो, और ये के अल्लाह मुनकिरीन ए हक़ को रुसवा करने वाला है
عَرَبِيوَأَذانٌ مِنَ اللَّهِ وَرَسولِهِ إِلَى النّاسِ يَومَ الحَجِّ الأَكبَرِ أَنَّ اللَّهَ بَريءٌ مِنَ المُشرِكينَ ۙ وَرَسولُهُ ۚ فَإِن تُبتُم فَهُوَ خَيرٌ لَكُم ۖ وَإِن تَوَلَّيتُم فَاعلَموا أَنَّكُم غَيرُ مُعجِزِي اللَّهِ ۗ وَبَشِّرِ الَّذينَ كَفَروا بِعَذابٍ أَليمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह और उसके रसूल की ओर से, महा हज्ज के दिन, स्पष्ट घोषणा है कि अल्लाह बहुदेववादियों (मुश्रिकों) से अलग है तथा उसका रसूल भी। फिर यदि तुम तौबा कर लो, तो वह तुम्हारे लिए उत्तम है, और यदि तुम मुँह मोड़ो, तो जान लो कि निश्चय तुम अल्लाह को विवश करने वाले नहीं, और जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उन्हें दुखदायी यातना की शुभ सूचना दे दो।
Roman Urdu (Maududi)Ittila-e-aam hai Allah aur uske Rasool ki taraf se hajj e Akbar ke din tamaam logon ke liye ke Allah mushrikeen se bari uz-zimma (free from the treaty obligations ) hai aur uska Rasool bhi. Ab agar tum log tawba karlo to tumhare hi liye behtar hai aur jo mooh pherte ho to khoob samajh lo ke tum Allah ko aajiz karne waley nahin ho. Aur (aey Nabi), inkar karne walon ko sakht azaab ki khushkhabri suna do
Roman Urdu (Junagarhi)Allah aur uss kay rasool ki taraf say logon ko baray hajj kay din saaf itlaa hai kay Allah mushrikon say beyzaar hai aur uss ka rasool bhi agar abb bhi tum tauba kerlo to tumharay haq mein behtar hai aur agar tum roo gardaani kero to jaan lo kay tum Allah ko hara nahi saktay. Aur kafiron ko dukh ki maar ki khabar phonca dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)इत्तिला-ए-आम है अल्लाह और उसके रसूल की तरफ से हज ए अकबर के दिन तमाम लोगों के लिए के अल्लाह मुशरिकेन से बारी उज़-ज़िम्मा (संधि दायित्वों से मुक्त) है और उसका रसूल भी। अब अगर तुम लोग तौबा करो तो तुम्हारे लिए ही बेहतर है और जो मुंह फेरते हो तो खूब समझ लो के तुम अल्लाह को अजीज करने वाले नहीं हो। और (ऐ नबी), इंकार करने वालों को साख अज़ाब की ख़ुशख़बरी सुना दो
عَرَبِيإِلَّا الَّذينَ عاهَدتُم مِنَ المُشرِكينَ ثُمَّ لَم يَنقُصوكُم شَيئًا وَلَم يُظاهِروا عَلَيكُم أَحَدًا فَأَتِمّوا إِلَيهِم عَهدَهُم إِلىٰ مُدَّتِهِم ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ المُتَّقينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सिवाय उन मुश्रिकों के, जिनसे तुमने संधि की, फिर उन्होंने तुम्हारे साथ (संधि के पालन में) कोई कमी नहीं की और न तुम्हारे विरुद्ध किसी की सहायता की, तो उनके साथ उनकी संधि को उनकी अवधि तक पूरी करो। निश्चय अल्लाह डर रखने वालों से प्रेम करता है।
Roman Urdu (Maududi)Bajuz un mushrikeen ke jinsey tumne muhaide (treaties) kiya phir unhon ne apne ahad ko poora karne mein tumhare saath koi kami nahin ki aur na tumhare khilaf kisi ki madad ki, to aisey logon ke saath tum bhi muddat e muhaida tak wafa karo kyunke Allah muttaqiyon (poious) hi ko pasand karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-juz unn mushrikon kay jin say tumhara mohaeeda ho chuka hai aur unhon ney tumhen zara sa bhi nuksan nahi phonchaya na kissi ki tumharay khilaf madad ki hai to tum bhi unn kay mohaeeday ki muddat unn kay sath poori kero Allah Taalaa perhezgaron ko dost rakhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)बज़ुज़ उन मुशरिकेन के जिनसे तुमने मुहैदे (संधि) किया फिर उन्होन ने अपने अहद को पूरा करने में तुम्हारे साथ कोई कमी नहीं की और ना तुम्हारे ख़िलाफ़ किसी की मदद की, तो ऐसे लोगों के साथ में तुम भी मुद्दत ए मुहैदा तक वफ़ा करो क्योंकि अल्लाह मुत्तक़ियों (पवित्र) ही को पसंद करता है
عَرَبِيفَإِذَا انسَلَخَ الأَشهُرُ الحُرُمُ فَاقتُلُوا المُشرِكينَ حَيثُ وَجَدتُموهُم وَخُذوهُم وَاحصُروهُم وَاقعُدوا لَهُم كُلَّ مَرصَدٍ ۚ فَإِن تابوا وَأَقامُوا الصَّلاةَ وَآتَوُا الزَّكاةَ فَخَلّوا سَبيلَهُم ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः जब सम्मानित महीने बीत जाएँ, तो बहुदेववादियों (मुश्रिकों) को जहाँ पाओ, क़त्ल करो और उन्हें पकड़ो और उन्हें घेरो और उनके लिए हर घात की जगह बैठो। फिर यदि वे तौबा कर लें और नमाज़ क़ायम करें तथा ज़कात दें, तो उनका रास्ता छोड़ दो। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Pas jab haraam mahine guzar jayein to mushrikeen ko qatal karo jahan pao aur unhein pakado aur ghero aur har ghaath (ambush) mein unki khabar lene ke liye baitho. Phir agar woh tawba karlein aur namaz qayam karein aur zakaat dein to unhein chodh do. Allah darguzar karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hurmat walay maheenon kay guzartay hi mushrikon ko jahan pao qatal kero unhen giriftar kero unn ka mahasra kerlo aur unn ki taaq mein her ghaati mein ja betho haan agar woh tauba kerlen aur namaz kay paband hojayen aur zakar ada kerney lagen to tum unn ki rahen chor do. Yaqeenan Allah Taalaa bakhshney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास जब हराम माहीने गुजर जाएं तो मुशरिकेन को कत्ल करो जहां पाओ और उन्हें पकड़ो और घेरो और हर घात (घात) में उनकी खबर लें के लिए बैठो. फिर अगर वो तौबा करें और नमाज़ क़याम करें और ज़कात दें तो उन्हें छोड़ दो। अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِيوَإِن أَحَدٌ مِنَ المُشرِكينَ استَجارَكَ فَأَجِرهُ حَتّىٰ يَسمَعَ كَلامَ اللَّهِ ثُمَّ أَبلِغهُ مَأمَنَهُ ۚ ذٰلِكَ بِأَنَّهُم قَومٌ لا يَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि मुश्रिकों में से कोई तुमसे शरण माँगे, तो उसे शरण दे दो, यहाँ तक कि वह अल्लाह की वाणी सुने। फिर उसे उसके सुरक्षित स्थान तक पहुँचा दो। यह इसलिए कि निःसंदेह वे ऐसे लोग हैं, जो ज्ञान नहीं रखते।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar mushrikeen mein se koi shaks panaah maang kar tumhare paas aana chahe (taa-ke Allah ka kalaam suney) to usey panaah de do yahan tak ke woh Allah ka kalaam sunle phir usey uske maman (place of safety) tak pahuncha do, Yeh is liye karna chahiye ke yeh log ilm nahin rakhte
Roman Urdu (Junagarhi)Agar mushrikon mein say koi tujh say panah talab keray to tu ussay panah dey dey yahan tak kay woh kalam Allah sunn ley phir ussay apni jaye amaan tak phoncha dey. Yeh iss liye kay yeh log bey ilm hain
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर मुशरिकेन में से कोई शक्स पनाह मांग कर तुम्हारे पास आना चाहे (ता-के अल्लाह का कलाम सुने) तो उसे पनाह दे दो यहां तक ​​के वो अल्लाह का कलाम सुनले फिर उसे मामन (सुरक्षा का स्थान) तक पाहुंचा दो, ये है करना चाहिए के ये लोग इल्म नहीं रखते
عَرَبِيكَيفَ يَكونُ لِلمُشرِكينَ عَهدٌ عِندَ اللَّهِ وَعِندَ رَسولِهِ إِلَّا الَّذينَ عاهَدتُم عِندَ المَسجِدِ الحَرامِ ۖ فَمَا استَقاموا لَكُم فَاستَقيموا لَهُم ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ المُتَّقينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)इन मुश्रिकों (बहुदेववादियों) की अल्लाह और उसके रसूल के पास कोई संधि कैसे हो सकती है, सिवाय उनके जिनसे तुमने सम्मानित मस्जिद (काबा) के पास संधि की थी? तो जब तक वे तुम्हारे लिए (वचन पर) क़ायम रहें, तो तुम भी उनके लिए क़ायम रहो। निःसंदेह अल्लाह परहेज़गारों से प्रेम करता है।
Roman Urdu (Maududi)In mushrikeen ke liye Allah aur uske Rasool ke nazdeek koi ahad aakhir kaise ho sakta hai? Bajuz un logon ke jinsey tumne masjid e haraam ke paas muhaida kiya tha, to jab tak woh tumhare saath seedhe rahein tum bhi unke saath seedhe raho kyunke Allah muttaqiyon ko pasand karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Mushrikon kay liye ehad Allah aur uss kay rasool kay nazdeek kaisay reh sakta hai siwaye unn kay jin say tum ney ehad-o-paymaan masjid-e-haram kay pass kiya hai jab tak woh log tum say wada nibhayen tum bhi unn say wafa daari kero Allah Taalaa muttaqiyon say mohabbat rakhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)मुशरिकेन के लिए अल्लाह और उसके रसूल के नाज़दीक कोई अहद आख़िर कैसे हो सकता है? बाज़ुज़ उन लोगों के जिनसे तुमने मस्जिद ए हराम के पास मुहैदा किया था, जब तक वो तुम्हारे साथ सीधे रहे तुम भी उनके साथ सीधे रहो क्योंकि अल्लाह मुत्तक़ियों को पसंद करता है
عَرَبِيكَيفَ وَإِن يَظهَروا عَلَيكُم لا يَرقُبوا فيكُم إِلًّا وَلا ذِمَّةً ۚ يُرضونَكُم بِأَفواهِهِم وَتَأبىٰ قُلوبُهُم وَأَكثَرُهُم فاسِقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(उन लोगों की संधि) कैसे संभव है, जबकि वे यदि तुमपर अधिकार पा जाएँ, तो तुम्हारे विषय में न किसी रिश्तेदारी का सम्‍मान करेंगे और न किसी वचन का। वे तुम्हें अपने मुखों से प्रसन्न करते हैं, जबकि उनके दिल इनकार करते हैं और उनमें से अधिकांश अवज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar inke siwa dusre mushrikeen ke saath koi ahad kaise ho sakta hai jabke unka haal yeh hai ke tumpar qaabu paa jayein to na tumhare maamle mein kisi qarabat ka lihaz karein na kisi muhaide ki zimmedari ka. Woh apni zubaano se tumko razi karne ki koshish karte hain magar dil unke inkar karte hain aur unmein se aksar faasiq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay wadon ka kiya aitbaar unn ka agar tum per ghalba hojaye to na yeh qarabat daari ka khayal keren na ehad-o-paymaan ka apni zabanon say to tumhen parcha rahey hain lekin unn kay dil nahi mantay inn mein say aksar to fasiq hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर इनके सिवा दूसरे मुशरिकेन के साथ कोई अहद कैसा हो सकता है जबके उनका हाल ये है कि तुम काबू पा जाओ तो ना तुम्हारे मामले में किसी क़राबत का ज़िक्र करें ना किसी की ज़िम्मेदारी का। वो अपनी जुबान से तुमको राजी करने की कोशिश करते हैं मगर दिल उनको इनकार करते हैं और उनमें से अक्सर फासीक हैं
عَرَبِياشتَرَوا بِآياتِ اللَّهِ ثَمَنًا قَليلًا فَصَدّوا عَن سَبيلِهِ ۚ إِنَّهُم ساءَ ما كانوا يَعمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने अल्लाह की आयतों के बदले थोड़ा-सा मूल्य ले लिया, फिर उन्होंने अल्लाह की राह (इस्लाम) से रोका। निःसंदेह बुरा है, जो वे करते रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne Allah ki aayat ke badle thodi si keemat qabool karli phir Allah ke raaste mein sadde-raah bankar khade ho gaye (debarred others from His Way), bahut burey kartoot thay jo yeh karte rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney Allah ki aayaton ko boht kam qeematon mein baich diya aur uss ki raah say roka. Boht bura hai jo yeh ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)उन्होन ने अल्लाह की आयत के बदले थोड़ी सी कीमत कबूल कर ली फिर अल्लाह के रास्ते में सद्दे-राह बनकर खड़े हो गए (दूसरों को अपने रास्ते से रोक दिया), बहुत बुरे करतूत थे जो ये करते रहे
عَرَبِيلا يَرقُبونَ في مُؤمِنٍ إِلًّا وَلا ذِمَّةً ۚ وَأُولٰئِكَ هُمُ المُعتَدونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे किसी ईमान वाले के बारे में न किसी रिश्तेदारी का सम्मान करते हैं और न किसी वचन का, और यही लोग सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kisi momin ke maamle mein na yeh qarabat(kindred) ka lihaz karte hain aur na kisi ahad ki zimmedari ka aur zyadati hamesha inhi ki taraf se hui hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh to kissi musalman kay haq main kissi rishtay daari ka ya ehad ka mutlaq lehaz nahi kertay yeh hain hi hadd say guzarney walay
Devnagri Urdu (Maududi)किसी मोमिन के मामले में ना ये क़राबत का ज़िम्मा करते हैं और ना किसी अहद की ज़िम्मेदारी का और ज़्यादा हमेशा की तरफ से हुई है
عَرَبِيفَإِن تابوا وَأَقامُوا الصَّلاةَ وَآتَوُا الزَّكاةَ فَإِخوانُكُم فِي الدّينِ ۗ وَنُفَصِّلُ الآياتِ لِقَومٍ يَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः यदि वे तौबा कर लें और नमाज़ क़ायम करें और ज़कात दें, तो धर्म में तुम्हारे भाई हैं। और हम उन लोगों के लिए आयतें खोलकर बयान करते हैं, जो जानते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Pas agar yeh tawba karlein aur namaz qayam karein aur zakaat dein to tumhare deeni bhai hain aur janney walon ke liye hum apne ehkaam wazeh kiye dete hain
Roman Urdu (Junagarhi)Abb bhi agar yeh tauba kerlen aur namaz kay paband hojayen aur zakat detay rahen to tumharay deeni bhai hain. Hum to jannay walon kay liye aayaten khol khol ker biyan ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)अगर ये तौबा कर लें और नमाज कयाम करें और जकात दें तो तुम्हारे दीनी भाई हैं और जाने वालों के लिए हम अपना एहकाम वाज़ेह किये देते हैं
عَرَبِيوَإِن نَكَثوا أَيمانَهُم مِن بَعدِ عَهدِهِم وَطَعَنوا في دينِكُم فَقاتِلوا أَئِمَّةَ الكُفرِ ۙ إِنَّهُم لا أَيمانَ لَهُم لَعَلَّهُم يَنتَهونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि वे अपने वचन के बाद अपनी क़समें तोड़ दें और तुम्हारे धर्म की निंदा करें, तो कुफ़्र के प्रमुखों से युद्ध करो। क्योंकि उनकी क़समों का कोई विश्वास नहीं। ताकि वे (अत्याचार से) रुक जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar ahad karne ke baad yeh phir apni kasamon ko todh dalein aur tumhare deen par hamle karne shuru kardein to kufr ke alam-bardaaron (ringleaders) se jung karo kyunke unki kasamon ka koi aitbaar nahin, shayad ke (phir talwar hi ke zoar se) woh baaz ayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Agar yeh log ehad-o-paymaan kay baad bhi apni qasmon ko tor den aur tumharay deen mein taana zani keren to tum bhi unn sardaraan-e-kufur say bhir jao. Unn ki qasmen koi cheez nahi mumkin hai kay iss tarah woh baaz aajayen
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर अहद करने के बाद ये फिर अपनी कसमों को तोड़ दें और तुम्हारे दीन पर हमले करने शुरू कर दें तो कुफ्र के आलम-बरदारों (सरगना) से जंग करो क्योंकि उनकी कसमों का कोई ऐतबार नहीं, शायद के (फिर तलवार ही के ज़ोर से) वो बाज़ आएंगे
عَرَبِيأَلا تُقاتِلونَ قَومًا نَكَثوا أَيمانَهُم وَهَمّوا بِإِخراجِ الرَّسولِ وَهُم بَدَءوكُم أَوَّلَ مَرَّةٍ ۚ أَتَخشَونَهُم ۚ فَاللَّهُ أَحَقُّ أَن تَخشَوهُ إِن كُنتُم مُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम उन लोगों से नहीं लड़ोगे, जिन्होंने अपनी क़समें तोड़ दीं और रसूल को निकालने का इरादा किया, और उन्होंने ही तुमसे युद्ध का आरंभ किया है? क्या तुम उनसे डरते हो? तो अल्लाह अधिक हक़दार है कि तुम उससे डरो, यदि तुम ईमानवाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum na ladogey (fight) aisey logon se jo apne ahad todte rahey hain aur jinhon ne Rasool ko mulk se nikal dene ka qasd (conspire) kiya tha aur zyadati ki ibteda karne waley wahi thay? Kya tum unsey darte ho? Agar tum momin ho to Allah iska ziyada mustahiq hai ke ussey daro
Roman Urdu (Junagarhi)Tum inn logon ki sirkoobi kay liye kiyon tayyar nahi hotay jinhon ney apni qasmon ko tor diya aur payghumbar ko jila watan kerney ki fikar mein hain aur khud hi awwal baat unhon ney tum say cher ki hai. Kiya tum inn say dartay ho? Allah hi ziyada mustahiq hai kay tum uss ka darr rakho ba-shart-e-kay tum eman walay ho
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम ना लड़ोगे (लड़ाई) ऐसे लोगों से जो अपने अहद तोड़ते रहे हैं और जिन्होन ने रसूल को मुल्क से निकल देने का क़सद (साजिश) किया था और ज़्यादा की इब्तेदा करने वाले वही थे? क्या तुम उनसे डरते हो? अगर तुम मोमिन हो तो अल्लाह से इसका ज़ियादा मुस्तहिक़ है के उससे डरो
عَرَبِيقاتِلوهُم يُعَذِّبهُمُ اللَّهُ بِأَيديكُم وَيُخزِهِم وَيَنصُركُم عَلَيهِم وَيَشفِ صُدورَ قَومٍ مُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनसे युद्ध करो, अल्लाह उन्हें तुम्हारे हाथों से सज़ा देगा और उन्हें अपमानित करेगा और उनके विरुद्ध तुम्हारी सहायता करेगा और ईमान वालों के दिलों को ठंडा करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Unse lado (fight) , Allah tumhare haathon se unko saza dilwayega aur unhein zaleel o khwar karega aur unke muqable mein tumhari madad karega aur bahut se momino ke dil thanday karega
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say tum jang kero Allah Taalaa enhen tumharay hathon azab dey ga enhen zaleel-o-ruswa keray ga tumehn inn per madad dey ga aur musalmanon kay kalejay thanday keray ga
Devnagri Urdu (Maududi)उनसे लड़ो, अल्लाह तुम्हारे हाथों से उनको सज़ा दिलवायेगा और उन्हें ज़लील ओ ख़्वार करेगा और उनके मुकाबले में तुम्हारी मदद करेगा और बहुत से मोमिनो के दिल ठंडा करेगा
عَرَبِيوَيُذهِب غَيظَ قُلوبِهِم ۗ وَيَتوبُ اللَّهُ عَلىٰ مَن يَشاءُ ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ حَكيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उनके दिलों के क्रोध को दूर कर देगा और जिसकी चाहेगा, तौबा क़बूल करेगा और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur unke quloob (dilon) ki jalan mita dega, aur jisey chahega tawba ki taufeeq bhi dega. Allah sab kuch jaanney wala aur dana(wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn kay dil ka ghum-o-gussa door keray ga aur woh jiss ki taraf chahata hai rehmat say tawajja farmata hai. Allah khoob janta boojhta hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और उनके कुलूब (दिलों) की जलन मिटा देगा, और जिसे चाहेगा तौबा की तौफीक भी देगा। अल्लाह सब कुछ जानने वाला और दाना (बुद्धिमान) है
عَرَبِيأَم حَسِبتُم أَن تُترَكوا وَلَمّا يَعلَمِ اللَّهُ الَّذينَ جاهَدوا مِنكُم وَلَم يَتَّخِذوا مِن دونِ اللَّهِ وَلا رَسولِهِ وَلَا المُؤمِنينَ وَليجَةً ۚ وَاللَّهُ خَبيرٌ بِما تَعمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या तुमने समझ रखा है कि तुम यूँ ही छोड़ दिए जाओगे, हालाँकि अभी तक अल्लाह ने उन लोगों को नहीं जाना ही, जिन्होंने तुममें से जिहाद किया तथा अल्लाह और उसके रसूल और ईमान वालों के सिवाय किसी को भेदी मित्र नहीं बनाया? और अल्लाह उससे अच्छी तरह सूचित है, जो तुम कर रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum logon ne yeh samajh rakkha hai ke yunhi chodh diye jaogey halanke abhi Allah ne yeh to dekha hi nahin ke tum mein se kaun woh log hain jinhon ne (uski raah mein) jaanfishani (exerted your utmost) ki aur Allah aur uske Rasool aur momineen ke siwa kisi ko jigri dost na banaya, jo kuch tum karte ho Allah ussey ba-khabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum yeh samajh bethay ho kay tum chor diye jao gay halankay kay abb tak Allah ney tum mein unhen mumtaz nahi kiya jo mujahid hain aur jinhon ney Allah kay aur uss kay rasool kay aur mominon kay siwa kissi ko wali dost nahi banaya Allah khoob khabar daar hai jo tum ker rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम लोगों ने ये समझ रखा है कि यूं ही छोड़ दिए जाओगे हालंके अभी अल्लाह ने ये तो देखा ही नहीं के तुम में से कौन वो लोग हैं जिन्हों ने (उसकी राह में) जानफिशानी (अपना पूरा जोर लगाया) की और अल्लाह और उसके रसूल और मोमिनीन के सिवा किसी को जिगरी दोस्त ना बनाया, जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बा-खबर है
عَرَبِيما كانَ لِلمُشرِكينَ أَن يَعمُروا مَساجِدَ اللَّهِ شاهِدينَ عَلىٰ أَنفُسِهِم بِالكُفرِ ۚ أُولٰئِكَ حَبِطَت أَعمالُهُم وَفِي النّارِ هُم خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)मुश्रिकों (बहुदेववादियों) के लिए योग्य नहीं कि वे अल्लाह की मस्जिदों को आबाद करें, जबकि वे स्वयं अपने विरुद्ध कुफ़्र की गवाही देने वाले हैं। ये वही हैं जिनके कर्म व्यर्थ हो गए और वे आग ही में सदा के लिए रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Mushrikeen ka yeh kaam nahin hai ke woh Allah ki masjidon ke mujawar o khadim banein, daran haal yeh ke apne upar woh khud kufr ki shahadat de rahey hain. Unke to saarey aamal zaya ho gaye aur jahannum mein unhein hamesha rehna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Laeeq nahi kay mushrik Allah Taalaa ki masjidon ko abad keren. Daran halanakay woh khud apney kufur kay aap hi gawah hain inn kay aemaal gharat-o-ikarat hain aur woh daeemi tor per jahannumi hain
Devnagri Urdu (Maududi)मुशरिकेन का ये काम नहीं है के वो अल्लाह की मस्जिद के मुजावर ओ खादिम बने, डरन हाल ये के अपने ऊपर वो खुद कुफ्र की शहादत दे रहे हैन. उनके तो सारे अमल ज़ाय हो गए और जहन्नुम में उन्हें हमेशा रहना है
عَرَبِيإِنَّما يَعمُرُ مَساجِدَ اللَّهِ مَن آمَنَ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ وَأَقامَ الصَّلاةَ وَآتَى الزَّكاةَ وَلَم يَخشَ إِلَّا اللَّهَ ۖ فَعَسىٰ أُولٰئِكَ أَن يَكونوا مِنَ المُهتَدينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह की मस्जिदें तो वही आबाद करता है, जो अल्लाह पर और अंतिम दिन (क़ियामत) पर ईमान लाया, तथा उसने नमाज़ क़ायम की और ज़कात दी और अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरा। तो ये लोग आशा है कि मार्ग दर्शन पाने वालों में से होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki masjidon ke aabad-kaar (mujawar o khadim) to wahi log ho sakte hain jo Allah aur roz-e-aakhir ko manein aur namaz qayam karein, zakaat dein aur Allah ke siwa kisi se na darein , unhi se yeh tawaqqu hai ke seedhi raah chalenge
Roman Urdu (Junagarhi)Allah ki masjidon ki ronaq-o-abadi to unn kay hissay mein hai jo Allah per aur qayamat kay din per eman rakhtay hain namazon kay paband hon zakat detay hon Allah key siwa kissi say na dartay hontawaqqa hai kay yehi log yaqeenan hidayat yafta hain
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की मस्जिद के आबाद-कार (मुजावर ओ खादिम) तो वही लोग हो सकते हैं जो अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर को माने और नमाज़ क़याम करें, ज़कात दीन और अल्लाह के सिवा किसी से ना डरें, उन्हीं से ये तवाक्कु है के सीधी राह चलेंगे
عَرَبِي۞ أَجَعَلتُم سِقايَةَ الحاجِّ وَعِمارَةَ المَسجِدِ الحَرامِ كَمَن آمَنَ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ وَجاهَدَ في سَبيلِ اللَّهِ ۚ لا يَستَوونَ عِندَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ لا يَهدِي القَومَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुमने हाजियों को पानी पिलाना और मस्जिद-ए-हराम को आबाद करना, उसके जैसा बना दिया जो अल्लाह और अंतिम दिन पर ईमान लाया और उसने अल्लाह की राह में जिहाद किया? ये अल्लाह के यहाँ बराबर नहीं हैं तथा अल्लाह अत्याचारी लोगों को मार्ग नहीं दिखाता।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum logon ne hajiyon ko pani peelaney aur masjid e haraam (khane kaaba) ki mujawari karne ko us shaks ke kaam ke barabar thehra liya hai jo iman laya Allah par aur roz e aakhir par aur jisne jaanfishani (exerted his utmost) ki Allah ki raah mein? Allah ke nazdeek to yeh dono barabar nahin hain aur Allah zalimon ki rehnumayi nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum ney hajiyon ko pani pila dena aur masjis-e-haram ki khidmat kerna iss kay barabar ker diya hai jo Allah per aur aakhirat kay din per eman laye aur Allah ki raah mein jihad kiya yeh Allah kay nazdik barabar kay nahi aur Allah Taalaa zalimon ko hidayat nahi deta
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम लोगों ने हाजियों को पानी पिलाया और मस्जिद ए हराम (खाने काबा) की मुजावरी करने के लिए उस शक्स के काम के बराबर ठहर लिया है जो ईमान लाया अल्लाह पर और रोज ए आखिर पर और जिसने जांफिशानी (जोर दिया) उसकी अत्यंत) कि अल्लाह की राह में? अल्लाह के नाज़दीक तो ये दोनों बराबर नहीं हैं और अल्लाह जालिमों की रहनुमाई नहीं करता
عَرَبِيالَّذينَ آمَنوا وَهاجَروا وَجاهَدوا في سَبيلِ اللَّهِ بِأَموالِهِم وَأَنفُسِهِم أَعظَمُ دَرَجَةً عِندَ اللَّهِ ۚ وَأُولٰئِكَ هُمُ الفائِزونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग ईमान लाए तथा हिजरत की और अल्लाह की राह में अपने धनों और अपने प्राणों के साथ जिहाद किया, अल्लाह के यहाँ पद में अधिक बड़े हैं और वही लोग सफल हैं।
Roman Urdu (Maududi)Allah ke haan to unhi logon ka darja bada hai jo iman laye aur jinhon ne uski raah mein ghar baar chodey aur jaan o maal se jihad kiya, wahi kamiyaab hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log eman laye hijrat ki Allah ki raah mein apney maal aur apni jaan say jihad kiya woh Allah kay haan boht baray martabay walay hain aur yehi log murab paney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के हन तो उन्ही लोगों का दरजा बड़ा है जो ईमान लाए और जिन्होन ने उसकी राह में घर बार छोड़े और जान ओ माल से जिहाद किया, वही कामयाब हैं
عَرَبِييُبَشِّرُهُم رَبُّهُم بِرَحمَةٍ مِنهُ وَرِضوانٍ وَجَنّاتٍ لَهُم فيها نَعيمٌ مُقيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उनका पालनहार उन्हें अपनी ओर से दया और प्रसन्नता तथा ऐसे बाग़ों की शुभ सूचना देता है, जिनमें उनके लिए शाश्वत आनंद है।
Roman Urdu (Maududi)Unka Rubb unhein apni rehmat aur khushnudi aur aisi jannaton ki basharat deta hai jahan unke liye payedaar aish ke samaan hain
Roman Urdu (Junagarhi)Enhen unn ka rab khushkhabri deta hai apni rehmat ki aur raza mandi ki aur jannaton ki inn kay liye wahan dawami nemat hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनका रब उन्हें अपनी रहमत और खुशनुदी और ऐसी जन्नत की बशारत देता है जहां उनके लिए भुगतान ऐश के समान हैं
عَرَبِيخالِدينَ فيها أَبَدًا ۚ إِنَّ اللَّهَ عِندَهُ أَجرٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जिनमें वे हमेशा रहने वाले हैं। निःसंदेह अल्लाह ही के पास बड़ा बदला है।
Roman Urdu (Maududi)Unmein woh hamesha rahenge, yaqeenan Allah ke paas khidmaat ka sila dene ko bahut kuch hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wahan yeh hamesha rehney walay hain Allah kay pass yaqeenan boht baray sawab hain
Devnagri Urdu (Maududi)उन्हें वो हमेशा रहेंगे, यकीनन अल्लाह के पास खिदमत का सिला देने को बहुत कुछ है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَتَّخِذوا آباءَكُم وَإِخوانَكُم أَولِياءَ إِنِ استَحَبُّوا الكُفرَ عَلَى الإيمانِ ۚ وَمَن يَتَوَلَّهُم مِنكُم فَأُولٰئِكَ هُمُ الظّالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अपने बापों और अपने भाइयों को दोस्त न बनाओ, यदि वे ईमान की अपेक्षा कुफ़्र से प्रेम करें, और तुममें से जो व्यक्ति उनसे दोस्ती रखेगा, तो वही लोग अत्याचारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo imaan laye ho, apne baapon aur bhaiyon ko bhi apna rafeeq (allies) na banao agar woh iman par kufr ko tarjeeh (prefrence) dein, tum mein se jo unko rafeeq(allies) banayenge wahi zalim honge
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Apney baapon ko aur apney bhaiyon ko dost na banao agar woh kufur ko eman say ziyada aziz rakhen. Tum mein say jo bhi inn say mohabbat rakhay ga woh poora gunehgar zalim hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपने बापों और भाइयों को भी अपना रफीक (सहयोगी) ना बनाओ अगर वो ईमान पर कुफ्र को तर्जीह (प्रथम) दें, तुम में से जो उनको रफीक (सहयोगी) बनायेंगे वही जालिम होंगे
عَرَبِيقُل إِن كانَ آباؤُكُم وَأَبناؤُكُم وَإِخوانُكُم وَأَزواجُكُم وَعَشيرَتُكُم وَأَموالٌ اقتَرَفتُموها وَتِجارَةٌ تَخشَونَ كَسادَها وَمَساكِنُ تَرضَونَها أَحَبَّ إِلَيكُم مِنَ اللَّهِ وَرَسولِهِ وَجِهادٍ في سَبيلِهِ فَتَرَبَّصوا حَتّىٰ يَأتِيَ اللَّهُ بِأَمرِهِ ۗ وَاللَّهُ لا يَهدِي القَومَ الفاسِقينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दो कि यदि तुम्हारे बाप और तुम्हारे बेटे और तुम्हारे भाई और तुम्हारी पत्नियाँ और तुम्हारे परिवार और (वे) धन जो तुमने कमाए हैं और (वह) व्यापार जिसके मंदा होने से तुम डरते हो तथा रहने के घर जिन्हें तुम पसंद करते हो, तुम्हें अल्लाह तथा उसके रसूल और अल्लाह की राह में जिहाद करने से अधिक प्रिय हैं, तो प्रतीक्षा करो, यहाँ तक कि अल्लाह अपना हुक्म ले आए और अल्लाह अवज्ञाकारियों को मार्ग नहीं दिखाता।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), kehdo ke agar tumhare baap aur tumhare bete, aur tumhare bhai, aur tumhari biwiyan aur tumhare aziz-o-aqareb (near and dear ones) aur tumhare woh maal jo tumne kamaye hain, aur tumhare woh karobar (business) jinke maandh (decline) padh janey ka tumko khauf hai aur tumhare woh ghar jo tumko pasand hain, tumko Allah aur uske Rasool aur uski raah mein jihad se azeez-tar hain to intezar karo yahan tak ke Allah apna faisla tumhare saamne le aaye, aur Allah faasiq logon ki rehnumayi nahin kiya karta
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay agar tumharay baap aur tumharay larkay aur tumharay bhai aur tumhari biwiyan aur tumharay kunbay qabeelay aur tumharay kamaye huye maal aur woh tijarat jiss ki kami say tum dartay ho aur woh hawayliyan jinehn tum pasand kertay ho agar yeh tumhen Allah say aur uss kay rasool say aur uss ki raah mein jihad say bhi ziyada aziz hain to tum intizar kero Allah Taalaa apna azab ley aaye. Allah Taalaa fasiqon ko hidayat nahi deta
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), कहदो के अगर तुम्हारे बाप और तुम्हारे बेटे, और तुम्हारे भाई, और तुम्हारी बीवीयां और तुम्हारे अजीज-ओ-अकारेब (करीबी और प्रियजन) और तुम्हारे वो माल जो तुमने कमाए हैं, और तुम्हारे वो कारोबार (बिजनेस) जिनका मनध (गिरावट) पढ़ जाने का तुमको खौफ है और तुम्हारे वो घर जो तुमको पसंद हैं, तुमको अल्लाह और उसके रसूल और उसकी राह में जिहाद से अज़ीज़-तर हैं तो इंतज़ार करो यहाँ तक के अल्लाह अपना फैसला तुम्हारे सामने ले आए, और अल्लाह फासिक लोगों की रहनुमाई नहीं करता
عَرَبِيلَقَد نَصَرَكُمُ اللَّهُ في مَواطِنَ كَثيرَةٍ ۙ وَيَومَ حُنَينٍ ۙ إِذ أَعجَبَتكُم كَثرَتُكُم فَلَم تُغنِ عَنكُم شَيئًا وَضاقَت عَلَيكُمُ الأَرضُ بِما رَحُبَت ثُمَّ وَلَّيتُم مُدبِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ने बहुत-से स्थानों पर तुम्हारी सहायता की तथा हुनैन के दिन भी, जब तुम्हारी बहुतायत ने तुम्हें आत्ममुग्ध बना दिया, फिर वह तुम्हारे कुछ काम न आई तथा तुमपर धरती अपने विस्तार के उपरांत तंग हो गई, फिर तुम पीठ फेरते हुए लौट गए।
Roman Urdu (Maududi)Allah issey pehle bahut se mawaqe (occassions) par tumhari madad kar chuka hai, abhi gazwa e hunain ke roz (uski dastgiri ki shaan tum dekh chuke ho) ,us roz tumhein apni kasrat e tadaad ka garrah (proud) tha magar woh tumhare kuch kaam na aayi aur zameen apni wusat ke bawajood tumpar tangg ho gayi aur tum peeth pher kar bhaag nikle
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan Allah Taalaa ney boht say maidanon mein tumhen fatah di hai aur hunain ki laraee walay din bhi jabkay tumhen apni kasrat per naaz hogaya tha lekin uss ney tumhen koi faeeda na diya bulkay zamin bawajood apni kushadgi kay tum per tang hogaee phir tum peeth pher ker murr gaye
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह इस्से पहले बहुत से मौक़े (मौके पर) पर तुम्हारी मदद कर चुका है, अभी गज़वा ए हुनैन के रोज़ (उसकी दस्तगीरी की शान तुम देख चुके हो), उस रोज़ तुम्हें अपनी कसरत ए तड़ाद का गरारा (गर्व) था मगर वो तुम्हारे कुछ काम ना आई और ज़मीन अपनी वुसत के बकवास तुमपर तंग हो गई और तुम पीठ फेर कर भाग निकले
عَرَبِيثُمَّ أَنزَلَ اللَّهُ سَكينَتَهُ عَلىٰ رَسولِهِ وَعَلَى المُؤمِنينَ وَأَنزَلَ جُنودًا لَم تَرَوها وَعَذَّبَ الَّذينَ كَفَروا ۚ وَذٰلِكَ جَزاءُ الكافِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर अल्लाह ने अपने रसूल पर और ईमानवालों पर अपनी शांति उतारी, और ऐसी सेनाएँ उतारीं जिन्हें तुमने नहीं देखा, और उन लोगों को दंड दिया जिन्होंने कुफ़्र किया, और यही काफ़िरों का बदला है।
Roman Urdu (Maududi)Phir Allah ne apni sakeenat Rasool par aur mominin par nazil farmayi aur woh lashkar utarey jo tumko nazar na aate thay aur munkireen e haqq ko saza di ke yahi badla hai un logon ke liye jo haqq ka inkar karein
Roman Urdu (Junagarhi)Phir Allah ney apni taraf ki taskeen apney nabi per aur mominon per utari aur apney woh lashkar bhejay jinhen tum dekh nahi rahey thay aur kafiron ko poori saza di. Inn kuffaar kay yehi badla tha
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अल्लाह ने अपनी सकीनत रसूल पर और मोमिनीन पर नाज़िल फरमाई और वो लश्कर उतरे जो तुमको नज़र ना आते थे और मुनकिरीन ए हक़ को सज़ा दी के यही बदला है उन लोगों के लिए जो हक़ का इंकार करें
عَرَبِيثُمَّ يَتوبُ اللَّهُ مِن بَعدِ ذٰلِكَ عَلىٰ مَن يَشاءُ ۗ وَاللَّهُ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर इसके बाद अल्लाह जिसकी चाहेगा, तौबा क़बूल करेगा। और अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान है।
Roman Urdu (Maududi)Phir (tum yeh bhi dekh chuke ho ke) is tarah saza dene ke baad Allah jisko chahta hai tawba ki taufeeq bhi baksh deta hai, Allah darguzar karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir iss kay baad bhi jiss per chahaye Allah Taalaa apni rehmat ki tawajja farmaye ga Allah hi bakhsish-o-meharbani kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर (तुम ये भी देख चुके हो के) इस तरह सजा देने के बाद अल्लाह जिसको चाहता है तौबा की तौफीक भी बख्श देता है, अल्लाह दरगुजर करने वाला और रहम फरमाने वाला है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِنَّمَا المُشرِكونَ نَجَسٌ فَلا يَقرَبُوا المَسجِدَ الحَرامَ بَعدَ عامِهِم هٰذا ۚ وَإِن خِفتُم عَيلَةً فَسَوفَ يُغنيكُمُ اللَّهُ مِن فَضلِهِ إِن شاءَ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَليمٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान लाने वालो! निःसंदेह बहुदेववादी अशुद्ध हैं। अतः वे इस वर्ष के बाद मस्जिद-ए-हराम के पास न आएँ। और यदि तुम किसी प्रकार की गरीबी से डरते हो, तो अल्लाह जल्द ही तुम्हें अपनी कृपा से समृद्ध करेगा, यदि उसने चाहा। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey iman laney walon, mushrikeen napaak hain, lihaza is saal ke baad yeh masjid-e-haraam ke qareeb na phatakne payein, aur agar tumhein tangdasti ka khauf hai to baeed nahin ke Allah chahe to tumhein apne fazl se gani karde, Allah aleem o hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Be-shak mushrik bilkul hi na pak hain woh iss saal kay baad masjid-e-haram kay pass bhi na phatakney payen agar tumhen muflisi ka khof hai to Allah tumhen dolat mand ker dey ga apney fazal say agar chahaye Allah ilm-o-hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ ईमान लाने वालों, मुशरिकेन नापाक हैं, लिहाजा इस साल के बाद ये मस्जिद-ए-हराम के करीब न फटकने पाएं, और अगर तुम्हें तंगदस्ती का खौफ है तो बैद नहीं के अल्लाह चाहे तो तुम्हें अपने फजल से गनी करदे, अल्लाह आलिम ओ हकीम है
عَرَبِيقاتِلُوا الَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِاللَّهِ وَلا بِاليَومِ الآخِرِ وَلا يُحَرِّمونَ ما حَرَّمَ اللَّهُ وَرَسولُهُ وَلا يَدينونَ دينَ الحَقِّ مِنَ الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ حَتّىٰ يُعطُوا الجِزيَةَ عَن يَدٍ وَهُم صاغِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ ईमान वालो!) उन किताब वालों से युद्ध करो, जो न अल्लाह पर ईमान रखते हैं और न अंतिम दिन (क़ियामत) पर, और न उसे हराम समझते हैं, जिसे अल्लाह और उसके रसूल ने हराम (वर्जित) किया है और न सत्धर्म को अपनाते हैं, यहाँ तक कि वे अपमानित होकर अपने हाथ से जिज़या दें।
Roman Urdu (Maududi)Jung karo ehle kitaab mein se un logon ke khilaf jo Allah aur roz e aakhir par iman nahin latey aur jo kuch Allah aur uske Rasool ne haraam qarar diya hai usey haraam nahin karte aur deen e haqq ko apna deen nahin banate. (Unsey lado) yahan tak ke woh apne haath se jiziya dein aur chotey bankar rahein
Roman Urdu (Junagarhi)Unn logon say laro jo Allah per aur qayamat kay din per eman nahi latay jo Allah aur uss kay rasool ki haram kerda shey ko haram nahi jantay na deen-e-haq ko qabool kertay hain unn logon mein say jinhen kitab di gaee hai yahan tak kay woh zaleel-o-khuwar hoker apney hath say jizya ada keren
Devnagri Urdu (Maududi)जंग करो एहले किताब में से उन लोगों के खिलाफ जो अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान नहीं लाते और जो कुछ अल्लाह और उसके रसूल ने हराम करार दिया है उसे हराम नहीं करते और दीन ए हक को अपना दीन नहीं बनाते। (उनसे लड़ो) यहां तक ​​के वो अपने हाथ से जजिया दीन और छोटे बनकर रहें
عَرَبِيوَقالَتِ اليَهودُ عُزَيرٌ ابنُ اللَّهِ وَقالَتِ النَّصارَى المَسيحُ ابنُ اللَّهِ ۖ ذٰلِكَ قَولُهُم بِأَفواهِهِم ۖ يُضاهِئونَ قَولَ الَّذينَ كَفَروا مِن قَبلُ ۚ قاتَلَهُمُ اللَّهُ ۚ أَنّىٰ يُؤفَكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यहूदियों ने कहा कि उज़ैर अल्लाह का पुत्र है और ईसाइयों ने कहा कि मसीह अल्लाह का पुत्र है। ये उनके अपने मुँह की बातें हैं। वे उन लोगों जैसी बातें कर रहे हैं, जिन्होंने इनसे पहले कुफ़्र किया। उनपर अल्लाह की मार हो! वे कहाँ बहकाए जा रहे हैं?
Roman Urdu (Maududi)Yahudi kehte hain ke Uzair Allah ka beta hai aur isayi kehte hain ke Maseeh Allah ka beta hai. Yeh be-haqeeqat baatein hain jo woh apni zubaano se nikalte hain un logon ki dekha dekhi jo unsey pehle kufr mein mubtila huey thay. Khuda ki maar inpar, yeh kahan se dhoka kha rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yahood kehtay hain kay uzair Allah ka beta hai aur nasrani kehtay hain kay maseeh Allah ka beta hai yeh qol sirf unn kay mun ki baat hai. Aglay munkiron ki baat ki yeh bhi naqal kerney lagay Allah enehn ghaarat keray woh kaisay paltaye jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)यहुदी कहते हैं के उज़ैर अल्लाह का बेटा है और इसाई कहते हैं के मसीह अल्लाह का बेटा है। ये बे-हकीकत बातें हैं जो वो अपनी जुबान से निकलते हैं उन लोगों की देखा देखी जो उनसे पहले कुफ्र में मुब्तिला हुए थे। खुदा की मार इनपर, ये कहां से धोखा खा रहे हैं
عَرَبِياتَّخَذوا أَحبارَهُم وَرُهبانَهُم أَربابًا مِن دونِ اللَّهِ وَالمَسيحَ ابنَ مَريَمَ وَما أُمِروا إِلّا لِيَعبُدوا إِلٰهًا واحِدًا ۖ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۚ سُبحانَهُ عَمّا يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने अपने विद्वानों और अपने दरवेशों को अल्लाह के सिवा रब बना लिया तथा मरयम के पुत्र मसीह को (भी)। हालाँकि, उन्हें इसके सिवा आदेश नहीं दिया गया था कि वे एक पूज्य की इबादत करें, उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं। वह उससे पवित्र है, जो वे साझी बनाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Inhon ne apne ulema aur darweshiyon ko Allah ke siwa apna Rubb bana liya hai aur isi tarah Maseeh ibn Maryam ko bhi, halanke inko ek mabood ke siwa kisi ki bandagi karne ka hukum nahin diya gaya tha, woh jiske siwa koi mustahiq e ibadat nahin. Paak hai woh in mushrikana baaton se jo yeh log karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Inn logon ney Allah ko chor ker apney aalimon aur darwishon ko apna rab banaya hai aur marium kay betay maseeh ko halankay unhen sirf aik akelay Allah hi ki ibadat ka hukum diya gaya tha jiss kay siwa koi mabood nahi woh pak hai unn kay shareek muqarrar kerney say
Devnagri Urdu (Maududi)इन्होन ने अपने उलेमा और दरवेशियों को अल्लाह के सिवा अपना रुब बना लिया है और इसी तरह मसीह इब्न मरियम को भी, हालंके इनको एक माबूद के सिवा किसी की बंदगी करने का हुकुम नहीं दिया गया था, वो जिसके सिवा कोई मुस्तहिक ए इबादत नहीं। पाक है वो इन मुशरिकाना बातों से जो ये लोग करते हैं
عَرَبِييُريدونَ أَن يُطفِئوا نورَ اللَّهِ بِأَفواهِهِم وَيَأبَى اللَّهُ إِلّا أَن يُتِمَّ نورَهُ وَلَو كَرِهَ الكافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे चाहते हैं कि अल्लाह के प्रकाश को अपने मुँह से से बुझा दें, हालाँकि अल्लाह अपने प्रकाश को पूरा किए बिना नहीं रहेगा, भले ही काफिरों को बुरा लगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log chahte hain Allah ki roshni ko apni phoonkon se bujha dein magar Allah apni roshni ko mukammal kiye bagair maanne wala nahin hai khwah kafiron ko yeh kitna hi nagawaar ho
Roman Urdu (Junagarhi)Woh chahatay hain kay Allah kay noor ko apne mun say bujha den aur Allah Taalaa inkari hai magar issi baat ka kay apna noor poora keray go kafir na khush hon
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग चाहते हैं अल्लाह की रोशनी को अपनी फुँकों से बुझा दें मगर अल्लाह अपनी रोशनी को मुकम्मल किए बगैर मन्ने वाला नहीं है ख्वाह काफिरों को ये कितना ही नागावार हो
عَرَبِيهُوَ الَّذي أَرسَلَ رَسولَهُ بِالهُدىٰ وَدينِ الحَقِّ لِيُظهِرَهُ عَلَى الدّينِ كُلِّهِ وَلَو كَرِهَ المُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है जिसने अपने रसूल को मार्गदर्शन तथा सत्धर्म (इस्लाम) के साथ भेजा, ताकि उसे प्रत्येक धर्म पर प्रभुत्व प्रदान कर दे, भले ही बहुदेववादियों को बुरा लगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi hai jisne apne Rasool ko haidayat aur deen e haqq ke saath bheja taa-ke usey poori jins e deen par gaalib karde khwa mushrikon ko yeh kitna hi nagawaar ho
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney apney rasool ko hidayat aur sachay deen kay sath bheja hai kay issay aur tamam mazhabon per ghalib ker dey agar cheh mushrik bura manen
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह हाय है जिसने अपने रसूल को हिदायत और दीन ए हक के साथ भेजा ता-के उसे पूरे जिन ए दीन पर गालिब करदे ख्वा मुशरिकों को ये कितना ही नागावार हो
عَرَبِي۞ يا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِنَّ كَثيرًا مِنَ الأَحبارِ وَالرُّهبانِ لَيَأكُلونَ أَموالَ النّاسِ بِالباطِلِ وَيَصُدّونَ عَن سَبيلِ اللَّهِ ۗ وَالَّذينَ يَكنِزونَ الذَّهَبَ وَالفِضَّةَ وَلا يُنفِقونَها في سَبيلِ اللَّهِ فَبَشِّرهُم بِعَذابٍ أَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! निःसंदेह बहुत-से विद्वान तथा दरवेश निश्चित रूप से लोगों का धन अवैध तरीके से खाते हैं और अल्लाह की राह से रोकते हैं। तथा जो लोग सोना-चाँदी एकत्र करके रखते हैं और उसे अल्लाह की राह में खर्च नहीं करते, तो उन्हें दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो।
Roman Urdu (Maududi)Aey iman laney walon , in ehle kitab ke aksar ulema aur darweshon(monks) ka haal yeh hai ke woh logon ke maal baatil tareeqon se khate hain aur unhein Allah ki raah se rokte hain. Dardnaak saza ki khush-khabri do unko jo soney aur chandi jama karke rakhte hain aur uhnein khuda ki raah mein kharch nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Aksar ulama aur abid logon ka maal na haq kha jatay hain aur Allah ki raah say rok detay hain aur jo log soney chandi ka khazana rakhtay hain aur Allah ki raah mein kharach nahi kertay unhen dard naak azab ki khabar phoncha dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ ईमान लाने वालों, एहले किताब के अक्सर उलेमा और दरवेशों (भिक्षुओं) का हाल ये है कि वो लोगों के माल बातिल तरीक़ों से खाते हैं और उन्हें अल्लाह की राह से रोकते हैं। दर्दनाक सज़ा की ख़ुश-ख़बरी दो उनको जो सोनी और चांदी जमा करके रखते हैं और वे खुदा की राह में खर्च नहीं करते
عَرَبِييَومَ يُحمىٰ عَلَيها في نارِ جَهَنَّمَ فَتُكوىٰ بِها جِباهُهُم وَجُنوبُهُم وَظُهورُهُم ۖ هٰذا ما كَنَزتُم لِأَنفُسِكُم فَذوقوا ما كُنتُم تَكنِزونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन उसे जहन्नम की आग में तपाया जाएगा, फिर उससे उनके माथों और उनके पहलुओं और उनकी पीठों को दागा जाएगा। (कहा जाएगा :) यही है, जो तुमने अपने लिए कोश बनाया था। तो (अब) उसका स्वाद चखो जो तुम कोश बनाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Ek din aayega ke isi soney(gold) aur chandi par jahannum ki aag dhehkayi jayegi aur phir isi se un logon ki peshaniyon aur pehluon aur peethon ko daaga jayega, yeh hai woh khazana jo tumne apne liye jama kiya tha , lo ab apni samethi hui daulat ka maza chakkho
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din iss khazaney ko aatish-e-dozakh mein tapaya jaye ga phir iss say unn ki payshaniyan aur pehloo aur peethen daaghi jayengi (unn say kaha jayega) yeh hai jisay tum ney apney liye khazana bana rakha tha. Pus apney khazanon ka maza chakho
Devnagri Urdu (Maududi)एक दिन आएगा के इसी सोनी (गोल्ड) और चांदी पर जहन्नुम की आग ढेकाई जाएगी और फिर इसी से उन लोगों की पेशियां और पहलूओं और पीठों को दागा जाएगा, ये है वो खज़ाना जो तुमने अपने लिए जमा किया था, लो अब अपनी संपत्ति हुई दौलत का मजा चक्खो
عَرَبِيإِنَّ عِدَّةَ الشُّهورِ عِندَ اللَّهِ اثنا عَشَرَ شَهرًا في كِتابِ اللَّهِ يَومَ خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ مِنها أَربَعَةٌ حُرُمٌ ۚ ذٰلِكَ الدّينُ القَيِّمُ ۚ فَلا تَظلِموا فيهِنَّ أَنفُسَكُم ۚ وَقاتِلُوا المُشرِكينَ كافَّةً كَما يُقاتِلونَكُم كافَّةً ۚ وَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ مَعَ المُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह के निकट महीनों की संख्या, अल्लाह की किताब में बारह महीने है, जिस दिन उसने आकाशों तथा धरती की रचना की। उनमें से चार महीने हुरमत वाले हैं। यही सीधा धर्म है। अतः इनमें अपने प्राणों पर अत्याचार न करो। तथा बहुदेववादियों से सब मिलकर युद्ध करो, जैसे वे तुमसे मिलकर युद्ध करते हैं, और जान लो कि निःसंदेह अल्लाह मुत्तक़ी लोगों के साथ है।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke mahino ki tadaad jab se Allah ne aasmaan o zameen ko paida kiya hai Allah ke nawishte (record) mein bara (twelve) hi hai, aur inmein se chaar mahine haraam hain. Yahi theek zaabta hai lihaza in chaar (four) mahino mein apne upar zulm na karo aur mushrikon se sab milkar lado (fight) jis tarah woh sab milkar tumse ladte hain aur jaan rakkho ke Allah muttaqiyon hi ke saath hai
Roman Urdu (Junagarhi)Maheenon ki ginti Allah kay nazdeek kitab Allah mein baara ki hai ussi din say jab say aasman-o-zamin ko uss ney peda kiya hai inn mein say char hurmat-o-adab kay hain. Yehi durust deen hai tum inn maheenon mein apni janon per zulm na kero aur tum tamam mushrikon say jihad kero jaisay kay woh tum sab say lartay hain aur jaan rakho kay Allah Taalaa muttaqiyon kay sath hai
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के महिनो की तड़ाद जब से अल्लाह ने आसमां ओ ज़मीन को पैदा किया है अल्लाह के नवासे (रिकॉर्ड) मैं बारा (बारह) हाय है, और इनमें से चार महीने हराम हैं। यही ठीक ज़ब्ता है चार (चार) में लिहाज़ा महिनो में अपने ऊपर ज़ुल्म न करो और मुशरिकों से सब मिलकर लड़ो (लड़ो) जिस तरह वो सब मिलकर तुमसे लड़ते हैं और जान रक्खो के अल्लाह मुत्तक़ियों ही के साथ हैं
عَرَبِيإِنَّمَا النَّسيءُ زِيادَةٌ فِي الكُفرِ ۖ يُضَلُّ بِهِ الَّذينَ كَفَروا يُحِلّونَهُ عامًا وَيُحَرِّمونَهُ عامًا لِيُواطِئوا عِدَّةَ ما حَرَّمَ اللَّهُ فَيُحِلّوا ما حَرَّمَ اللَّهُ ۚ زُيِّنَ لَهُم سوءُ أَعمالِهِم ۗ وَاللَّهُ لا يَهدِي القَومَ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथ्य यह है कि महीनों को पीछे करना कुफ़्र में वृद्धि है, जिसके साथ वे लोग गुमराह किए जाते हैं जिन्होंने कुफ़्र किया। वे एक वर्ष उसे हलाल (वैध) कर लेते हैं और एक वर्ष उसे हराम (अवैध) कर लेते हैं। ताकि उन (महीनों) की गिनती पूरी कर लें, जो अल्लाह ने हराम किए हैं। फिर जो अल्लाह ने हराम (अवैध) किया है, उसे हलाल (वैध) कर लें। उनके बुरे काम उनके लिए सुंदर बना दिए गए हैं और अल्लाह काफ़िरों को सीधा रास्ता नहीं दिखाता।
Roman Urdu (Maududi)‘Nasi’ [the postponing (of restrictions within sacred months)] to kufr mein ek mazeed kafirana harakat hai jissey yeh kaafir log gumraahi mein mubtila kiye jatey hain. Kisi saal ek mahine ko halal karlete hain aur kisi saal usko haram kardete hain, taa-ke Allah ke haram kiye huey mahino ki tadaad puri bhi kardein aur Allah ka haram kiya hua halal bhi karlein. Inke burey aamal inke liye khushnuma bana diye gaye hain aur Allah munkireen e haqq ko hidayat nahin diya karta
Roman Urdu (Junagarhi)Meheenon ka aagey peechay ker dena kufur ki ziyadti hai iss say woh log gumrahi mein dalay jatay hain jo kafir hain. Aik saal to issay halal ker letay hain aur aik saal issi ko hurmat wala ker letay hain kay Allah ney jo hurmat rakhi hai uss kay shumar mein to moafiqat ker len phir ussay halal bana len jissay Allah ney haram kiya hai enhen inn kay buray kaam bhalay dikha diye gaye hain aur qom-e-kuffaar ki Allah rehnumaee nahi farmata
Devnagri Urdu (Maududi)'नसी' [स्थगन (पवित्र महीनों के भीतर प्रतिबंधों का)] कुफ्र में एक मजीद काफिराना हरकत है जिसे ये काफिर लोग गुमराही में मुब्तिला किये जाते हैं। किसी साल एक महीने को हलाल करते हैं और किसी साल उसको हराम करते हैं, ता-के अल्लाह के हराम किये हुए महिनो की ताड़द पूरी भी कर दें और अल्लाह का हराम किया हुआ हलाल भी कर लें। इनके बुरे आमाल इनके लिए ख़ुशनुमा बना दिए गए हैं और अल्लाह मुनकिरीन ए हक़ को हिदायत नहीं दिया करता
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا ما لَكُم إِذا قيلَ لَكُمُ انفِروا في سَبيلِ اللَّهِ اثّاقَلتُم إِلَى الأَرضِ ۚ أَرَضيتُم بِالحَياةِ الدُّنيا مِنَ الآخِرَةِ ۚ فَما مَتاعُ الحَياةِ الدُّنيا فِي الآخِرَةِ إِلّا قَليلٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुमसे कहा जाता है कि अल्लाह की राह में निकलो, तो तुम धरती की ओर बहुत बोझल हो जाते हो? क्या तुम आख़िरत (परलोक) की तुलना में दुनिया के जीवन से खुश हो गए हो? तो दुनिया के जीवन का सामान आख़िरत के मुकाबले में बहुत थोड़ा है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, tumhein kya ho gaya ke jab tumse Allah ki raah mein nikalne ke liye kaha gaya to tum zameen se chimat kar reh gaye? Kya tumne aakhirat ke muqable mein duniya ki zindagi ko pasand karliya? Aisa hai to tumhein maloom ho ke dunyavi zindagi ka yeh sab sar-o-samaan aakhirat mein bahut thoda niklega
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walon tumhen kiya hogaya hai kay jab tum say kaha jata hai kay chalo Allah kay raastay mein kooch kero to tum zamin say lagay jatay ho. Kiya tum aakhirat kay ewaz duniya ki zindagani per hi reejh gaye ho. Suno! Duniya ki zindagi to aakhirat kay muqablay mein kuch yun hi si hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम्हें क्या हो गया के जब तुमसे अल्लाह की राह में निकलने के लिए कहा गया तो तुम ज़मीन से झिझक कर रह गए? क्या तुमने आख़िरत के मुक़ाबले में दुनिया की ज़िंदगी को पसंद किया? ऐसा है तो तुम्हें मालूम हो कि दुनियावी जिंदगी का ये सब सर-ओ-समान आखिरी में बहुत थोड़ा निकलेगा
عَرَبِيإِلّا تَنفِروا يُعَذِّبكُم عَذابًا أَليمًا وَيَستَبدِل قَومًا غَيرَكُم وَلا تَضُرّوهُ شَيئًا ۗ وَاللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि तुम नहीं निकलोगे, तो वह तुम्हें दर्दनाक यातना देगा और तुम्हारे स्थान पर दूसरे लोगों को ले आएगा और तुम उसे कोई हानि नहीं पहुँचा सकोगे। और अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Tum na uthoge to khuda tumhein dardnaak saza dega, aur tumhari jagah kisi aur giroh ko uthayega, aur tum khuda ka kuch bhi na bigaad sakogey, woh har cheez par qudrat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum ney kooch na kiya to tumhen Allah Taalaa dard naak saza dey ga aur tumharay siwa aur logon ko badal laye ga tum Allah Taalaa ko koi nuksan nahi phoncha saktay aur Allah her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम ना उठोगे तो खुदा तुम्हें दर्दनाक सजा देगा, और तुम्हारी जगह किसी और गिरोह को उठेगा, और तुम खुदा का कुछ भी ना बिगाड़ोगे सकोगे, वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है
عَرَبِيإِلّا تَنصُروهُ فَقَد نَصَرَهُ اللَّهُ إِذ أَخرَجَهُ الَّذينَ كَفَروا ثانِيَ اثنَينِ إِذ هُما فِي الغارِ إِذ يَقولُ لِصاحِبِهِ لا تَحزَن إِنَّ اللَّهَ مَعَنا ۖ فَأَنزَلَ اللَّهُ سَكينَتَهُ عَلَيهِ وَأَيَّدَهُ بِجُنودٍ لَم تَرَوها وَجَعَلَ كَلِمَةَ الَّذينَ كَفَرُوا السُّفلىٰ ۗ وَكَلِمَةُ اللَّهِ هِيَ العُليا ۗ وَاللَّهُ عَزيزٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि तुम उनकी सहायता न करो, तो निःसंदेह अल्लाह ने उनकी सहायता की, जब उन्हें उन लोगों ने निकाल दिया जिन्होंने कुफ़्र किया, जब वह दो में दूसरा थे, जब वे दोनों गुफा में थे, जब वह अपने साथी से कह रहे थे : शोकाकुल न हो। निःसंदेह अल्लाह हमारे साथ है। तो अल्लाह ने उनपर अपनी ओर से शांति उतार दी और उन्हें ऐसी सेनाओँ के साथ शक्ति प्रदान की, जिन्हें तुमने नहीं देखे और उन लोगों की बात नीची कर दी जिन्होंने कुफ़्र किया, और अल्लाह की बात ही सबसे ऊँची है और अल्लाह सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Tumne agar Nabi ki madad na ki to kuch parwah nahin, Allah uski madad us waqt kar chuka hai jab kafiron ne usey nikal diya tha, jab woh sirf do mein ka dusra tha , jab woh dono ghaar (cave) mein thay, jab woh apne saathi se keh raha tha ke “ gham na kar, Allah hamare saath hai” us waqt Allah ne uspar apni taraf se sukoon e qalb (dil ka sukoon) nazil kiya aur uski madad aisey lashkaron se ki jo tumko nazar na aate thay, aur kafiron ka bol nicha kardiya aur Allah ka bol to unhca hi hai. Allah zabardast aur dana o beena hai (All-Mighty, All-Wise)
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum inn (nabi PBUH) ki madad na kero yo Allah hi ney inn ki madad ki uss waqt jabkay enhen kafiron ney (dess say) nikal diya tha do mein say doosra jabkay woh dono ghaar mein thay jab yeh apney sathi say keh rahey thay kay ghum na ker Allah humaray sath hai pus janab-e-baari ney apni taraf say taskeen uss per nazil farma ker unn lashkaron say unn ki madad ki jinhen tum ney dekha hi nahi uss ney kafiron ki baat pust ker di aur buland-o-aziz to Allah ka kalma hi hai Allah ghalib hai hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुमने अगर नबी की मदद न की तो कुछ परवा नहीं, अल्लाह उसकी मदद हमें वक्त कर चुका है जब काफिरों ने उसे निकल दिया था, जब वो सिर्फ दो में का दूसरा था, जब वो दोनों घर (गुफा) में थे, जब वो अपने साथी से कह रहा था के "गम ना कर, अल्लाह हमारे साथ है" हमें वक्त अल्लाह ने उसपर अपनी तरफ से सुकून ए क़ल्ब (दिल का सुकून) नाज़िल किया और उसकी मदद ऐसे लश्करों से कहा कि जो तुमको नज़र ना आते थे, और काफिरों का बोल नीचा करदिया और अल्लाह का बोल तो उनका हाय है. अल्लाह ज़बरदस्त और दाना ओ बीना है (सर्वशक्तिमान, सर्व-बुद्धिमान)
عَرَبِيانفِروا خِفافًا وَثِقالًا وَجاهِدوا بِأَموالِكُم وَأَنفُسِكُم في سَبيلِ اللَّهِ ۚ ذٰلِكُم خَيرٌ لَكُم إِن كُنتُم تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)हलके और बोझिल (हर स्थिति में) निकल पड़ो और अपने मालों और अपनी जानों के साथ अल्लाह के मार्ग में जिहाद करो। यह तुम्हारे लिए उत्तम है, यदि तुम जानते हो।
Roman Urdu (Maududi)Niklo, khwa halke ho ya bojhal, aur jihad karo Allah ki raah mein apne maalon aur apni jaano ke saath, yeh tumhare liye behtar hai agar tum jaano
Roman Urdu (Junagarhi)Nikal kharay hojao hulkay phulkay ho to bhi aur bhari bharkum ho to bhi aur raah-e-rab mein apni maal-o-jaan say jihad kero yehi tumharay liye behtar hai agar tum mein ilm ho
Devnagri Urdu (Maududi)निकलो, ख्वा हल्के हो या बोझल, और जिहाद करो अल्लाह की राह में अपने मालों और अपनी जानो के साथ, ये तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम जानो
عَرَبِيلَو كانَ عَرَضًا قَريبًا وَسَفَرًا قاصِدًا لَاتَّبَعوكَ وَلٰكِن بَعُدَت عَلَيهِمُ الشُّقَّةُ ۚ وَسَيَحلِفونَ بِاللَّهِ لَوِ استَطَعنا لَخَرَجنا مَعَكُم يُهلِكونَ أَنفُسَهُم وَاللَّهُ يَعلَمُ إِنَّهُم لَكاذِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि शीघ्र मिलने वाल सामान और मध्यम यात्रा होती, तो वे अवश्य आपके पीछे चल पड़ते, लेकिन फ़ासला उनपर दूर पड़ गया। और जल्द ही वे अल्लाह की क़समें खाएँगे कि अगर हमारे पास ताकत होती, तो हम तुम्हारे साथ अवश्य निकलते। वे अपने आपको नष्ट कर रहे हैं और अल्लाह जानता है कि वे निश्चित रूप से झूठे हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), agar faiyda sahal-ul-husool (prospect of immediate gain) ho aur safar halka hota to woh zaroor tumhare peechey chalne par aamada ho jatey. Magar unpar to yeh raasta bahut kathin (hard) ho gaya. Ab woh khuda ki kasam kha kha kar kahenge ke agar hum chal sakte to yaqeenan tumhare saath chalte. Woh apne aap ko halakat mein daal rahey hain, Allah khoob jaanta hai ke woh jhootey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Agar jald wasool honey wala maal-o-asbaab hota aur halka sa safar hota to yeh zaroor aap kay peechay ho letay lekin unn per doori aur daraz ki mushkil parr gaee. Abb ato yeh Allah ki qasmen khayen gay kay agar hum mein qooat-o-taqat hoti to hum yaqeenan aap kay sath nikaltay yeh apni janon ko khud hi halakat mein daal rahey hain inn kay jhootay honey ka sacha ilm Allah ko hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), अगर फैयदा सहल-उल-हुसूल (तत्काल लाभ की संभावना) हो और सफर हल्का होता तो वो जरूर तुम्हारे पीछे चलने पर आमदा हो जाती। मगर उन पर तो ये रास्ता बहुत मुश्किल हो गया। अब वो खुदा की कसम खा खा कर कहेंगे के अगर हम चल सकते हैं तो यकीनन तुम्हारे साथ चलते हैं। वो अपने आप को खतरे में डाल रहे हैं, अल्लाह खूब जानता है के वो झूठे हैं
عَرَبِيعَفَا اللَّهُ عَنكَ لِمَ أَذِنتَ لَهُم حَتّىٰ يَتَبَيَّنَ لَكَ الَّذينَ صَدَقوا وَتَعلَمَ الكاذِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने (ऐ नबी!) आपको क्षमा कर दिया, आपने उन्हें क्यों अनुमति दी, यहाँ तक कि आपके लिए वे लोग स्पष्ट हो जाते जिन्होंने सच कहा और आप झूठे लोगों को जान लेते।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), Allah tumhein maaf karey, tumne kyun unhein ruksat de di?(tumhein chahiye tha ke khud ruksat na dete) taa-ke tumpar khul jata ke kaun log sacchey hain aur jhooton (liars) ko bhi tum jaan letey
Roman Urdu (Junagarhi)Allah tujhay moaf farma dey tu ney enhen kiyon ijazat dey di? Baghair iss kay, kay teray samney sachay log khul jayen aur tu jhootay logon ko bhi jaan ley
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), अल्लाह तुम्हें माफ करे, तुमने क्यों उन्हें रुक्सत दे दी? और झूठों (झूठों) को भी तुम जान लेते हैं
عَرَبِيلا يَستَأذِنُكَ الَّذينَ يُؤمِنونَ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ أَن يُجاهِدوا بِأَموالِهِم وَأَنفُسِهِم ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ بِالمُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखते हैं, वे आपसे अपने धनों और अपनी जानों के साथ जिहाद करने से अनुमति नहीं माँगते, और अल्लाह मुत्तक़ी लोगों को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log Allah aur roz e aakhir par iman rakhte hain woh to kabhi tumse yeh darkhwast (request) na karenge ke unhein na apni jaan o maal ke saath jihad karne se maaf rakkha jaye, Allah muttaqiyon ko khoob jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah kay din per aur qayamat kay din per eman-o-yaqeen rakhney walay to maali aur jaani jihad say ruk rehney ki kabhi bhi tujh say ijazat talab nahi keren gay aur Allah Taalaa perhezgaron ko khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखते हैं वो तो कभी तुमसे ये अंधेरा (अनुरोध) ना करेंगे के उनको ना अपनी जान ओ माल के साथ जिहाद करने से माफ़ रक्खा जाए, अल्लाह मुत्तक़ियों को ख़ूब जानता है
عَرَبِيإِنَّما يَستَأذِنُكَ الَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ وَارتابَت قُلوبُهُم فَهُم في رَيبِهِم يَتَرَدَّدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आपसे अनुमति केवल वही लोग माँगते हैं, जो अल्लाह तथा अंतिम दिन (आख़िरत) पर ईमान नहीं रखते और उनके दिल संदेह में पड़े हुए हैं। सो वे अपने संदेह में भ्रमित भटक रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aisi darkhwastein (requests) to sirf wahi log karte hain jo Allah aur roz e aakhir par iman nahin rakhte, jinke dilon mein shakk hai aur woh apne shakk hi mein mutaraddid(wavering) ho rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh ijazat to tujh say wohi talab kertay hain jinhen na Allah per eman hai na aakhirat kay din ka yaqeen hai jin kay dil shak mein paray huye hain aur woh apney shak mein hi sir-gardan hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसी डार्कह्वास्टीन (अनुरोध) सिर्फ वही लोग करते हैं जो अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान नहीं रखते, जिनके दिलों में शक्क है और वो अपने शक्क ही में मुतरद्दिद (डगमगाते हुए) हो रहे हैं
عَرَبِي۞ وَلَو أَرادُوا الخُروجَ لَأَعَدّوا لَهُ عُدَّةً وَلٰكِن كَرِهَ اللَّهُ انبِعاثَهُم فَثَبَّطَهُم وَقيلَ اقعُدوا مَعَ القاعِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि वे निकलने का इरादा रखते, तो उसके लिए कुछ सामान अवश्य तैयार करते। लेकिन अल्लाह ने उनके उठने को नापसंद किया, तो उसने उन्हें रोक दिया। तथा कह दिया गया कि बैठने वालों के साथ बैठे रहो।
Roman Urdu (Maududi)Agar waqayi inka irada nikalne ka hota to woh iske liye kuch tayyari karte. Lekin Allah ko unka uthna pasand hi na tha, is liye usne unhein sust kardiya aur kehdiya ke baith raho baithne walon ke saath
Roman Urdu (Junagarhi)Agar inn ka irada jihad kay liye nikalney ka hota to woh iss safar kay liye saman ki tayyari ker rakhtay lekin Allah ko inn ka uthna pasand hi na tha iss liye enhen harkat say hi rok diya aur keh diya gaya kay tum bethney walon kay sath bethay hi raho
Devnagri Urdu (Maududi)अगर वक्त इनका इरादा निकलेगा तो वो इसके लिए कुछ तयारी करते हैं. लेकिन अल्लाह को उनका उठना पसंद ही ना था, इसके लिए उन्होंने उन्हें स्थिर करदिया और केहदिया के साथ रहो बैठने वालों के साथ
عَرَبِيلَو خَرَجوا فيكُم ما زادوكُم إِلّا خَبالًا وَلَأَوضَعوا خِلالَكُم يَبغونَكُمُ الفِتنَةَ وَفيكُم سَمّاعونَ لَهُم ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ بِالظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि वे तुम्हारे साथ निकलते, तो तुम्हारे अंदर बिगाड़ के सिवा किसी और चीज़ की वृद्धि नहीं करते। और तुम्हारे बीच उपद्रव पैदा करने के लिए दौड़-धूप करते। और तुम्हारे अंदर कुछ लोग उनकी बातें कान लगाकर सुनने वाले हैं। और अल्लाह इन अत्याचारियों को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Agar woh tumhare saath nikalte to tumhare andar kharabi ke siwa kisi cheez ka izafa na karte, woh tumhare darmiyan fitna pardazi ke liye daud-dhoop karte, aur tumhare giroh ka haal yeh hai ke abhi usmein bahut se aisey log maujood hain jo unki baatein kaan laga kar sunte hain, Allah in zaalimon ko khoob jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar yeh tum mein mill ker nikaltay bhi to tumharay liye siwaye fasad kay aur koi cheez na barhatay bulkay tumharay darmiyan khoob ghoray dora detay aur tum mein fitney dalney ki talash mein rehtay inn kay mannay walay khud tum mein mojood hain aur Allah inn zalimon ko khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर वो तुम्हारे साथ निकलते तो तुम्हारे अंदर ख़राबी के सिवा किसी चीज़ का इज़ाफ़ा ना करते, वो तुम्हारे दरमियान फ़िटना परदाज़ी के दौड़-धूप करते हुए, और तुम्हारे गिरो ​​का हाल ये है कि अभी हमसे बहुत से ऐसे लोग मौजूद हैं जो उनकी बातें कान लगा कर सुनते हैं, अल्लाह जालिमों को खूब जानता है
عَرَبِيلَقَدِ ابتَغَوُا الفِتنَةَ مِن قَبلُ وَقَلَّبوا لَكَ الأُمورَ حَتّىٰ جاءَ الحَقُّ وَظَهَرَ أَمرُ اللَّهِ وَهُم كارِهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह उन्होंने इससे पहले भी उपद्रव मचाना चाहा तथा आपके लिए कई मामले उलट-पलट किए। यहाँ तक कि सत्य आ गया और अल्लाह का आदेश प्रबल हो गया। हालाँकि वे नापसंद करने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Issey pehle bhi in logon ne fitna-angezi ki koshishein ki hain aur tumhein nakaam karne ke liye yeh har tarah ki tadbeeron ka ulat pher kar chuke hain yahan tak ke inki marzi ke khilaf haqq aa gaya aur Allah ka kaam hokar raha
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh to iss say pehlay bhi fitnay ki talash kertay rahey hain aur teray liye kaamon ko ulat pulat kertay rahey hain yahan tak kay haq aa phoncha aur Allah ka hukum ghalib aagaya bawajood yeh kay woh na khushi mein hi rahey
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों ने फितना-अंगेज़ी की कोशिशों में इसे पहले भी शामिल किया है और तुम्हें नाकाम करने के लिए ये हर तरह की तदबीरों का उल्टा फेर कर चुके हैं यहां तक ​​के इनकी मर्जी के खिलाफ हक आ गया और अल्लाह का काम होकर रहा
عَرَبِيوَمِنهُم مَن يَقولُ ائذَن لي وَلا تَفتِنّي ۚ أَلا فِي الفِتنَةِ سَقَطوا ۗ وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحيطَةٌ بِالكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनके अंदर ऐसा व्यक्ति भी है, जो कहता है कि आप मुझे अनुमति दे दें और मुझे फ़ितने में न डालें। सुन लो! वे फ़ितने ही में तो पड़े हुए हैं और निःसंदेह जहन्नम काफ़िरों को अवश्य घेरने वाली है।
Roman Urdu (Maududi)In mein se koi hai jo kehta hai ke “mujhey ruksat de dijiye aur mujhko fitne mein na daaliye.” Sun rakkho! Fitne hi mein to yeh log padey huey hain aur jahannum ne in kafiron ko gher rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein say koi to kehta hai mujhay ijazat dijiye mujhay fitnay mein na daliye aagah raho woh to fitnay mein parr chukay hain aur yaqeenan dozakh kafiron ko gher leney wali hai
Devnagri Urdu (Maududi)मेरे अंदर से कोई है जो कहता है के "मुझे रुक्सत दे दीजिए और मुझको फिटने में ना डालिए।" सुन रक्खो! फिटने ही में तो ये लोग पड़े हुए हैं और जहन्नुम ने काफिरों को घेर रखा है
عَرَبِيإِن تُصِبكَ حَسَنَةٌ تَسُؤهُم ۖ وَإِن تُصِبكَ مُصيبَةٌ يَقولوا قَد أَخَذنا أَمرَنا مِن قَبلُ وَيَتَوَلَّوا وَهُم فَرِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि आपको कोई भलाई पहुँचती है, तो उन्हें बुरी लगती है और यदि आपपर कोई आपदा आती है, तो कहते हैं : हमने तो पहले ही अपना बचाव कर लिया था और ऐसी अवस्था में पलटते हैं कि वे बहुत प्रसन्न होते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara bhala hota hai to inhein ranjj hota hai aur tumpar koi museebat aati hai to yeh mooh pher kar khush khush palat-te hain aur kehte jatey hain ke accha hua humne pehle hi apna maamla theek karliya tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ko agar koi bhalaee mill jaye to unhen bura lagata hai aur koi buraee phonch jaye to yeh kehtay hain hum ney to apna moamla pehlay say hi durust ker liya tha phir to baray hi itratay huye lottay hain
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा भला होता है तो इन्हें रंज होता है और तुमपर कोई मुसीबत आती है तो ये मुंह फेर कर खुश खुश पलट-ते हैं और कहते जाते हैं के अच्छा हुआ हमने पहले ही अपना मामला ठीक कार्लिया था
عَرَبِيقُل لَن يُصيبَنا إِلّا ما كَتَبَ اللَّهُ لَنا هُوَ مَولانا ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَليَتَوَكَّلِ المُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : हमें कुछ भी नहीं पहुँचेगा सिवाय उसके जो अल्लाह ने हमारे लिए लिख दिया है। वही हमारा मालिक है और अल्लाह ही पर ईमान वालों को भरोसा करना चाहिए।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho “humein hargiz koi (burayi ya bhalayi) nahin pahunchti magar woh jo Allah ne hamare liye likh di hai. Allah hi hamara maula (guradian) hai, aur ehle iman ko usi par bharosa karna chahiye”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay humen siwaye Allah kay humaray haq mein likhay huye kay koi cheez phonch hi nahi sakti woh humara kaar saaz aur mola hai. Mominon ko to Allah ki zaat pak per hi bharosa kerna chahaiye
Devnagri Urdu (Maududi)इंसे कहो "हमें हरगिज़ कोई (बुराई या भलाई) नहीं पहुंचती मगर वो जो अल्लाह ने हमारे लिए लिख दी है। अल्लाह ही हमारा मौला (गुराडियन) है, और एहले ईमान को उसी पर भरोसा करना चाहिए"
عَرَبِيقُل هَل تَرَبَّصونَ بِنا إِلّا إِحدَى الحُسنَيَينِ ۖ وَنَحنُ نَتَرَبَّصُ بِكُم أَن يُصيبَكُمُ اللَّهُ بِعَذابٍ مِن عِندِهِ أَو بِأَيدينا ۖ فَتَرَبَّصوا إِنّا مَعَكُم مُتَرَبِّصونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : तुम हमारे बारे में दो भलाइयों में से किसी एक के सिवा किसकी प्रतीक्षा कर रहे हो और हम तुम्हारे बारे में यह प्रतीक्षा कर रहे हैं कि अल्लाह तुम्हें अपने पास से यातना दे, या हमारे हाथों से। तो तुम प्रतीक्षा करो, निःसंदेह हम (भी) तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho, “tum hamare maamle mein jis cheez ke muntazir ho woh iske siwa aur kya hai ke do bhalaiyon mein se ek bhalayi hai aur hum tumhare maamle mein jis cheez ke muntazir hain woh yeh hai ke Allah khud tumko saza deta hai ya hamare haathon dilwata hai? Accha to ab tum bhi intezar karo aur hum bhi tumhare saath muntazir hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay tum humaray baray mein jiss cheez ka intizar ker rahey ho woh do bhalaeeyon mein say aik hai aur hum tumharay haq mein iss ka intizar kertay hain kay ya to Allah Taalaa apney pass say koi saza tumhen dey ya humaray hathon say pus aik taraf tum muntazir raho doosri janib tumharay sath hum bhi muntazir hain
Devnagri Urdu (Maududi)इंसे कहो, "तुम हमारे मामले में जिस चीज के मुंतजिर हैं वो इसके सिवा और क्या है कि दो भलइयाँ में से एक भलाई है और हम तुम्हारे मामले में जिस चीज के मुंतजिर हैं वो ये है के अल्लाह खुद तुमको सज़ा देता है या हमारे हाथों को दिलवाता है? अच्छा तो अब तुम भी इंतज़ार करो और हम भी तुम्हारे साथ मुंतज़िर हैं”
عَرَبِيقُل أَنفِقوا طَوعًا أَو كَرهًا لَن يُتَقَبَّلَ مِنكُم ۖ إِنَّكُم كُنتُم قَومًا فاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : तुम स्वेच्छापूर्वक दान करो अथवा अनिच्छापूर्वक, तुम्हारी ओर से हरगिज़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। निःसंदेह तुम हमेशा से अवज्ञाकारी लोग हो।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho “tum apne maal khwa razi khushi kharch karo ya ba-karahat(unwillingly), bahar-haal woh qabool na kiye jayenge kyunke tum fasiq log ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay tum khushi ya na khushi kissi tarah bhi kharach kero qabool to hergiz na kiya jayega yaqeenan tum fasiq log ho
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो "तुम अपने माल ख़्वा रज़ी ख़ुशी ख़र्च करो या बा-कराहत (अनिच्छा से), बाहर-हाल वो क़बूल ना किये जायेंगे क्योंकि तुम फ़सीक लोग हो"
عَرَبِيوَما مَنَعَهُم أَن تُقبَلَ مِنهُم نَفَقاتُهُم إِلّا أَنَّهُم كَفَروا بِاللَّهِ وَبِرَسولِهِ وَلا يَأتونَ الصَّلاةَ إِلّا وَهُم كُسالىٰ وَلا يُنفِقونَ إِلّا وَهُم كارِهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनकी ख़र्च की हुई चीज़ों को स्वीकार करने से उन्हें इसके सिवा किसी चीज़ ने नहीं रोका कि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया और वे नमाज़ के लिए आलसी होकर आते हैं तथा वे खर्च नहीं करते परंतु इस अवस्था में कि वे नाख़ुश होते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Inke diye huey maal qabool na honay ki koi wajah iske siwa nahin hai ke inhon ne Allah aur uske Rasool se kufr kiya hai, namaz ke liye aate hain to kasmasate huey aate hain aur raah e khuda mein kharch karte hain to ba-dil e na khwasta (unwilling hearts) kharch karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Koi sabab unn kay kharach ki qabooliyat kay na honey ka iss kay siwa nahi kay yeh Allah aur uss kay rasool kay munkir hain aur bari kaahili say hi namaz ko aatay hain aur buray dil say hi kharach kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)इनके दिये हुए माल क़बूल ना होने की कोई वजह इसके सिवा नहीं है के इन्हों ने अल्लाह और उसके रसूल से कुफ्र किया है, नमाज के लिए आते हैं तो कसमसाते हुए आते हैं और राह ए खुदा में खर्च करते हैं तो बा-दिल ए ना ख्वास्ता (अनचाहे दिल) खर्च करते हैं
عَرَبِيفَلا تُعجِبكَ أَموالُهُم وَلا أَولادُهُم ۚ إِنَّما يُريدُ اللَّهُ لِيُعَذِّبَهُم بِها فِي الحَياةِ الدُّنيا وَتَزهَقَ أَنفُسُهُم وَهُم كافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आपको न उनके धन भले लगें और न उनकी संतान। अल्लाह तो यही चाहता है कि उन्हें इनके द्वारा सांसारिक जीवन में यातना दे और उनके प्राण इस दशा में निकलें कि वे काफ़िर हों।
Roman Urdu (Maududi)Inke maal o daulat aur inke kasrat e aulad ko dekh kar dhoka na khao, Allah to yeh chahta hai ke inhi cheezon ke zariye se inko duniya ki zindagi mein bhi mubtila e azaab karey aur yeh jaan bhi dein to inkar e haqq hi ki halat mein dein
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap ko inn kay maal-o-aulad tajjub mein na daal den. Allah ki chahat yehi hai kay iss say enhen duniya ki zindagi mein hi saza dey aur inn kay kufur hi ki halat mein inn ki janen nikal jayen
Devnagri Urdu (Maududi)इनके माल ओ दौलत और इनके कसम ए औलाद को देख कर धोखा ना खाओ, अल्लाह तो ये चाहता है कि इन्हीं चीजों के ज़रिये से इनको दुनिया की जिंदगी में भी मुब्तिला ए अजब करे और ये जान भी दें तो इंकार ए हक ही की हालत में दें
عَرَبِيوَيَحلِفونَ بِاللَّهِ إِنَّهُم لَمِنكُم وَما هُم مِنكُم وَلٰكِنَّهُم قَومٌ يَفرَقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे (मुनाफ़िक़) अल्लाह की क़सम खाते हैं कि निःसंदेह वे अवश्य तुममें से हैं, हालाँकि वे तुममें से नहीं हैं, परंतु वे ऐसे लोग हैं जो डरते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh khuda ki kasam kha kha kar kehte hain ke hum tumhi mein se hain, halanke woh hargiz tum mein se nahin hain. Asal mein to woh aisey log hain jo tumse khauf-zadah(afraid) hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh Allah ki qasam kha kha ker kehtay hain yeh tumhari jamat kay log hain halankay woh dar-asal tumharay nahi baat sirf itni hai kay yeh darpok log hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो खुदा की कसम खा खा कर कहते हैं के हम तुम्हीं में से हैं, हलांके वो हरगिज तुम में से नहीं हैं. असल में तो वो ऐसे लोग हैं जो तुमसे खौफ-जदा (डरते हुए) हैं
عَرَبِيلَو يَجِدونَ مَلجَأً أَو مَغاراتٍ أَو مُدَّخَلًا لَوَلَّوا إِلَيهِ وَهُم يَجمَحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि वे कोई शरण स्थल, या कोई गुफाएँ या घुसने की कोई जगह पा जाएँ, तो अवश्य ही वे बगटुट उसकी ओर लौट जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Agar woh koi jaaye panaah (place of refuge) paa lein ya koi kho (cave) ya ghus baithne ki jagah, to bhaag kar us mein ja chupein
Roman Urdu (Junagarhi)Agar yeh koi bachao ki jagah ya koi ghaar ya koi bhi sir ghusaney ki jagah paa len to abhi uss taraf lagam tor ker ultay bhaag chooten
Devnagri Urdu (Maududi)अगर वो कोई जाए पनाह (शरण का स्थान) पा लें या कोई खो (गुफा) या घुस बैठने की जगह, तो भाग कर हमसे में जा छुपें
عَرَبِيوَمِنهُم مَن يَلمِزُكَ فِي الصَّدَقاتِ فَإِن أُعطوا مِنها رَضوا وَإِن لَم يُعطَوا مِنها إِذا هُم يَسخَطونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं, जो सदक़ों के (वितरण के) बारे में आपपर दोष लगाता हैं। फिर यदि उन्हें उनमें से दे दिया जाए, तो प्रसन्न हो जाते हैं और यदि उन्हें उनमें से न दिया जाए, तो तुरंत वे क्रोधित हो जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), in mein se baaz log sadaqaat ki takseem mein tumpar aitraazaat karte hain , agar is maal mein se inhein kuch de diya jaye to khush ho jayein, aur na diya jaye to bigadne lagte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein woh bhi hain jo kheyraati maal ki taqseem kay baray mein aap per aib rakhtay hain agar enhen iss mein say mill jaye to khush hain aur agar iss mein say na mila to foran hi bigar kharen huye
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), मुझमें से बाज़ लोग सदाकत की तकसीम में तुम्पर एतराजात करते हैं, अगर इस माल में से कुछ दे दिया जाए तो खुश हो जाएं, और ना दिया जाए तो बिगडने लगते हैं
عَرَبِيوَلَو أَنَّهُم رَضوا ما آتاهُمُ اللَّهُ وَرَسولُهُ وَقالوا حَسبُنَا اللَّهُ سَيُؤتينَا اللَّهُ مِن فَضلِهِ وَرَسولُهُ إِنّا إِلَى اللَّهِ راغِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (कितना अच्छा होता) यदि वे उससे संतुष्ट हो जाते, जो अल्लाह और उसके रसूल ने उन्हें दिया और कहते कि हमारे लिए अल्लाह काफ़ी है। जल्द ही अल्लाह हमें अपनी कृपा से प्रदान करेगा तथा उसका रसूल भी। निःसंदेह हम अल्लाह ही की ओर रूचि रखने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya accha hota ke Allah aur Rasool ne jo kuch bhi unhein diya tha uspar woh raazi rehte aur kehte ke “Allah hamare liye kafi hai, woh apne fazal se humein aur bahut kuch dega aur uska Rasool bhi humpar inayat farmayega, hum Allah hi ki taraf nazar jamaye huey hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Agar yeh log Allah aur uss kay rasool kay diye huye per khush rehtay aut keh detay kay Allah humen kafi hai Allah humen apney fazal say dey ga aur uss ka rasool bhi hum to Allah ki zaat say hi tawaqqa rakheny walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या अच्छा होता के अल्लाह और रसूल ने जो कुछ भी उन्हें दिया था उसपर वो राजी रहते और कहते के "अल्लाह हमारे" लिए काफ़ी है, वो अपने फ़ज़ल से हमें और बहुत कुछ देगा और उसका रसूल भी हमपर इनायत फरमाएगा, हम अल्लाह ही की तरफ नज़र जमाए हुए हैं”
عَرَبِي۞ إِنَّمَا الصَّدَقاتُ لِلفُقَراءِ وَالمَساكينِ وَالعامِلينَ عَلَيها وَالمُؤَلَّفَةِ قُلوبُهُم وَفِي الرِّقابِ وَالغارِمينَ وَفي سَبيلِ اللَّهِ وَابنِ السَّبيلِ ۖ فَريضَةً مِنَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ज़कात तो केवल फ़क़ीरों और मिस्कीनों के लिए और उसपर नियुक्त कार्यकर्ताओं के लिए तथा उनके लिए है जिनके दिलों को परचाना अभीष्ट हो, और दास मुक्त करने में और क़र्ज़दारों एवं तावान भरने वालों में और अल्लाह के मार्ग में तथा यात्रियों के लिए है। यह अल्लाह की ओर से एक दायित्व है और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh sadaqaat to dar-asal fakeeron aur miskeeno ke liye hain aur un logon ke liye jo sadaqaat ke kaam par mamoor hon, aur unke liye jinki taalif-e-qalb (whose hearts are to be won over) matloob ho neiz yeh gardano ke chudane(ransoming of slaves) aur qarzdaron ki madad karne mein aur raah e khuda mein aur musafir-nawazi mein istemal karne ke liye hain. Ek fareeza hai Allah ki taraf se aur Allah sab kuch jaanne wala aur dana o beena hai
Roman Urdu (Junagarhi)Sadqay sirf faqeeron kay liye hain aur miskeenon kay liye aur inn kay wasool kerney walon kay liye aur unn kay liye jin kay dil parchaye jatay hon aur gardan churaney mein aur qaraz daron kay liye aur Allah ki raah mein aur raah ro musafiron kay liye farz hai Allah ki taraf say aur Allah ilm-o-hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये सदक़ात तो दर-असल फ़कीरों और मिस्कीनो के लिए हैं और उन लोगों के लिए जो सदाकत के काम पर मामूर हों, और उनके लिए जिनकी तालिफ़-ए-क़लब (जिनके दिलों को जीतना है) मतलूब हो नीज़ ये गार्डानो के छुड़ाने (गुलामों की फिरौती) और क़र्ज़दारों की मदद करने में और राह ए खुदा में और मुसाफिर-नवाज़ी में इस्तेमाल करने के लिए हैं। एक फ़रीज़ा है अल्लाह की तरफ से और अल्लाह सब कुछ जानने वाला और दाना ओ बीना है
عَرَبِيوَمِنهُمُ الَّذينَ يُؤذونَ النَّبِيَّ وَيَقولونَ هُوَ أُذُنٌ ۚ قُل أُذُنُ خَيرٍ لَكُم يُؤمِنُ بِاللَّهِ وَيُؤمِنُ لِلمُؤمِنينَ وَرَحمَةٌ لِلَّذينَ آمَنوا مِنكُم ۚ وَالَّذينَ يُؤذونَ رَسولَ اللَّهِ لَهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन (मुनाफ़िक़ों) में से कुछ लोग ऐसे हैं जो नबी को दुःख देते हैं और कहते हैं कि वह तो निरा कान हैं! आप कह दें कि वह तुम्हारे लिए भलाई का कान हैं। वह अल्लाह पर विश्वास रखते हैं और ईमान वालों की बात का विश्वास करते हैं और तुममें से उन लोगों के लिए दया हैं, जो ईमान लाए हैं और जो लोग अल्लाह के रसूल को दुःख देते हैं, उनके लिए दर्दनाक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Inmein se kuch log hain jo apni baaton se Nabi ko dukh dete hain aur kehte hain ke yeh shaks kaano (ears) ka kaccha hai. Kaho, “woh tumhari bhalayi ke liye aisa hai, Allah par iman rakhta hai aur ehle iman par aitemaad (bharosa) karta hai aur sarasar rehmat hai un logon ke liye jo tum mein se imandaar hain. Aur jo log Allah ke Rasool ko dukh dete hain unke liye dardnaak saza hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein say woh bhi hain jo payghumbar ko ezza detay hain kehtay hain kay kaan ka kacha hai aap keh dijiye kay woh kaan tumharay bhalay kay liye hai woh Allah per eman rakha hai aur musalamanon ki baaton ka yaqeen kerta hai aur tum mein say jo ehal-e-eman hain yeh unn kay liye rehmat hai rasool Allah (PBUH) ko jo log ezze detay hain unn kay liye dukh ki maar hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनमें से कुछ लोग हैं जो अपनी बातों से नबी को दुख देते हैं और कहते हैं कि ये शक्स कानो (कानों) का कच्चा है। कहो, "वो तुम्हारी भलाई के लिए ऐसा है, अल्लाह पर ईमान रखता है और एहले ईमान पर एत्माद (भरोसा) करता है और सारा रहमत है उन लोगों के लिए जो तुम में से इमानदार हैं। और जो लोग अल्लाह के रसूल को दुख देते हैं उनके लिए दर्दनाक सजा है"
عَرَبِييَحلِفونَ بِاللَّهِ لَكُم لِيُرضوكُم وَاللَّهُ وَرَسولُهُ أَحَقُّ أَن يُرضوهُ إِن كانوا مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे तुम्हारे समक्ष अल्लाह की क़सम खाते हैं, ताकि तुम्हें प्रसन्न करें। हालाँकि अल्लाह और उसके रसूल अधिक योग्य हैं कि वे उन्हें प्रसन्न करें, अगर वे ईमान वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log tumhare saamne kasmein khate hain taa-ke tumhein raazi karein, halanke agar yeh momin hain to Allah aur Rasool iske zyada haqdar hain ke yeh unko raazi karne ki fikr karein
Roman Urdu (Junagarhi)Mehaz tumhen khush kerney kay liye tumharay samney Allah ki qasmen kha jatay hain halankey agar yeh eman daar hotay to Allah aur uss ka rasool raza mand kerney ka ziyada mustahiq thay
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग तुम्हारे सामने कसमें खाते हैं ता-के तुम्हें राजी करें, हलांके अगर ये मोमिन हैं तो अल्लाह और रसूल इसके ज्यादा हकदार हैं के ये उनको राजी करने की फिक्र करें
عَرَبِيأَلَم يَعلَموا أَنَّهُ مَن يُحادِدِ اللَّهَ وَرَسولَهُ فَأَنَّ لَهُ نارَ جَهَنَّمَ خالِدًا فيها ۚ ذٰلِكَ الخِزيُ العَظيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने नहीं जाना कि जो अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करता है, तो निःसंदेह उसके लिए जहन्नम की आग है, जिसमें वह सदैव रहने वाला है। यह बहुत बड़ा अपमान है।
Roman Urdu (Maududi)Kya inhein maloom nahin hai ke jo Allah aur uske Rasool ka muqabla karta hai uske liye dozakh ki aag hai jismein woh hamesha rahega. Yeh bahut badi ruswayi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh nahi jantay kay jo bhi Allah ki aur uss kay rasool ki mukhlifat keray ga yaqeenan uss kay liye dozakh ki aag hai jiss mein woh hamesha rehney wala hai yeh zabardast ruswaee hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या उन्हें मालूम नहीं है कि जो अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला करता है है उसके लिए दोज़ख की आग है जिसमें वो हमेशा रहेगा। ये बहुत बड़ी रुसवाई है
عَرَبِييَحذَرُ المُنافِقونَ أَن تُنَزَّلَ عَلَيهِم سورَةٌ تُنَبِّئُهُم بِما في قُلوبِهِم ۚ قُلِ استَهزِئوا إِنَّ اللَّهَ مُخرِجٌ ما تَحذَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)मुनाफ़िक़ों को इस बात का डर है कि उनपर कोई ऐसी सूरत न उतार दी जाए, जो उन्हें वे बातें बता दे जो इनके दिलों में हैं। आप कह दें : तुम मज़ाक़ उड़ाते रहो। निःसंदेह अल्लाह उन बातों को निकालने वाला है, जिनसे तुम डरते हो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh munafiq darr rahey hain ke kahin musalmano par koi aisi surat nazil na ho jaye jo inke dilon ke bhed khol kar rakh de. (Aey Nabi), insey kaho, “aur mazaq udao, Allah us cheez ko khol dene wala hai jiske khul janey se tum darte ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Mufiqon ko her waqt iss baat ka khutka laga rehta hai kay kahin musalmanon per koi surat na utray jo inn kay dilon ki baaten unhen batla dey. Keh dijiye kay tum mazaq uratay raho yaqeenan Allah Taalaa ussay zahir kerney wala hai jiss say tum darr dubak rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)ये मुनाफिक डर रहे हैं के कहीं मुसलमानों पर कोई ऐसी सूरत नाज़िल न हो जाए जो इनके दिलों के भेद खोल कर रख दे। (ऐ नबी), इनसे कहो, "और मज़ाक उड़ाओ, अल्लाह हमें चीज़ को खोलने वाला है जिसके खुल जाने से तुम डरते हो"
عَرَبِيوَلَئِن سَأَلتَهُم لَيَقولُنَّ إِنَّما كُنّا نَخوضُ وَنَلعَبُ ۚ قُل أَبِاللَّهِ وَآياتِهِ وَرَسولِهِ كُنتُم تَستَهزِئونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यदि आप उनसे पूछें, तो वे अवश्य ही कहेंगे : हम तो यूँ ही बातचीत और हँसी-मज़ाक़ कर रहे थे। आप कह दें : क्या तुम अल्लाह और उसकी आयतों और उसके रसूल के साथ मज़ाक कर रहे थे?
Roman Urdu (Maududi)Agar insey pucho ke tum kya baatein kar rahey thay, to jhat keh denge ke hum to hansi mazaq aur dil lagi kar rahey thay. Insey kaho, “kya tumhari hansi dil lagi Allah aur uski aayat aur uske Rasool hi ke saath thi
Roman Urdu (Junagarhi)Agar aap inn say poochen to saaf keh den gay kay hum to yun hi aapas mein hans bol rahey thay. Keh dijiye kay Allah ussi ki aayaten aur uss ka rasool hi tumharay hansi mazaq kay liye reh gaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)अगर इनसे पूछो के तुम क्या बातें कर रहे थे, तो झट कह देंगे के हम तो हंसी मज़ाक और दिल लगी कर रहे थे। इनसे कहो, "क्या तुम्हारी हंसी दिल लगी अल्लाह और उसकी आयत और उसके रसूल ही के साथ थे
عَرَبِيلا تَعتَذِروا قَد كَفَرتُم بَعدَ إيمانِكُم ۚ إِن نَعفُ عَن طائِفَةٍ مِنكُم نُعَذِّب طائِفَةً بِأَنَّهُم كانوا مُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम बहाने मत बनाओ, निःसंदेह तुमने अपने ईमान के बाद कुफ़्र किया। यदि हम तुममें से एक समूह को क्षमा कर दें, तो एक समूह को दंड देंगे, क्योंकि निश्चय ही वे अपराधी थे।
Roman Urdu (Maududi)Ab uzraat (excuses) na tarasho, tumne iman laney ke baad kufr kiya hai, agar humne tum mein se ek giroh ko maaf kar bhi diya to dusre giroh ko to hum zaroor saza denge kyunke woh mujreem hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Tum bahaney na banao yaqeenan tum apney eman kay baad bey eman hogaye agar hum tum mein say kuch logon say dar guzar bhi kerlen to kuch logon ko unn kay jurm ki sangeen saza bhi den gay
Devnagri Urdu (Maududi)अब उज़रात (बहाने) ना तराशो, तुमने ईमान लाने के बाद कुफ़्र किया है, अगर हमने तुम में से एक गिरोह को माफ़ कर भी दिया तो दूसरे गिरो ​​को तो हम ज़रूर सजा" देंगे क्यूँके वो मुजरिम है।”
عَرَبِيالمُنافِقونَ وَالمُنافِقاتُ بَعضُهُم مِن بَعضٍ ۚ يَأمُرونَ بِالمُنكَرِ وَيَنهَونَ عَنِ المَعروفِ وَيَقبِضونَ أَيدِيَهُم ۚ نَسُوا اللَّهَ فَنَسِيَهُم ۗ إِنَّ المُنافِقينَ هُمُ الفاسِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)मुनाफ़िक़ पुरुष और मुनाफिक़ स्त्रियाँ, वे सब एक-जैसे हैं। वे बुराई का आदेश देते हैं तथा भलाई से रोकते हैं और अपने हाथ बंद रखते हैं। वे अल्लाह को भूल गए, तो उसने उन्हें भुला दिया। निश्चय मुनाफ़िक़ लोग ही अवज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Munafiq Mard aur munafiq auratein sab ek dusre ke hum-rang hain, burayi ka hukum dete hain aur bhalayi se mana karte hain aur apne haath khair se roak rahey hain. Yeh Allah ko bhool gaye to Allah ne bhi inhein bhula diya, yaqeenan yeh munafiq hi fasiq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Tamam munafiq mard-o-aurat aapas mein aik hi hain yeh buri baaton ka hukum detay hain aur bhali baaton say roktay hain aur apni muthi band rakhtay hain yeh Allah ko bhool gaye enhen bhula diya be-shak munafiq hi fasiq-o-ba-dkirdar hain
Devnagri Urdu (Maududi)मुनाफिक मर्द और मुनाफिक औरतें सब एक दूसरे के हम-रंग हैं, बुरे का हुकुम देते हैं और भलाई से मन करते हैं और अपने हाथ खैर से रोक रहे हैं। ये अल्लाह को भूल गए तो अल्लाह ने भी इन्हें भुला दिया, यकीनन ये मुनाफिक ही फासीक है
عَرَبِيوَعَدَ اللَّهُ المُنافِقينَ وَالمُنافِقاتِ وَالكُفّارَ نارَ جَهَنَّمَ خالِدينَ فيها ۚ هِيَ حَسبُهُم ۚ وَلَعَنَهُمُ اللَّهُ ۖ وَلَهُم عَذابٌ مُقيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने मुनाफ़िक़ पुरुषों तथा मुनाफ़िक़ स्त्रियों और काफ़िरों से जहन्नम की आग का वादा किया है, जिसमें वे हमेशा रहने वाले हैं। वही उनके लिए प्रयाप्त है। और अल्लाह ने उनपर ला'नत की और उनके लिए सदैव रहने वाली यातना है।
Roman Urdu (Maududi)In munafiq mardon aur auraton aur kafiron ke liye Allah ne aatish e dozakh ka wada kiya hai jismein woh hamesha rahenge, wahi inke liye mauzun(proper place) hai, inpar Allah ki phitkar hai aur inke liye qayam rehne wala azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa inn munafiq mardon aurton aur kafiron say jahannum ki aag ka wada ker chuka hai jahan yeh hamesha rehney walay hain wohi enhen kafi hai inn per Allah ki phitkar hai aur inn hi kay liye daeemi azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)इन मुनाफिक मर्दों और औरतों और काफिरों के लिए अल्लाह ने आतिश ए दोजख का वादा किया है जिसमें वो हमेशा रहेंगे, वही इनके लिए मौजुन (उचित जगह) है, इनपर अल्लाह की फ़िटकर है और इनके लिए क़याम रहने वाला अज़ाब है
عَرَبِيكَالَّذينَ مِن قَبلِكُم كانوا أَشَدَّ مِنكُم قُوَّةً وَأَكثَرَ أَموالًا وَأَولادًا فَاستَمتَعوا بِخَلاقِهِم فَاستَمتَعتُم بِخَلاقِكُم كَمَا استَمتَعَ الَّذينَ مِن قَبلِكُم بِخَلاقِهِم وَخُضتُم كَالَّذي خاضوا ۚ أُولٰئِكَ حَبِطَت أَعمالُهُم فِي الدُّنيا وَالآخِرَةِ ۖ وَأُولٰئِكَ هُمُ الخاسِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों की तरह जो तुमसे पहले थे। वे शक्ति में तुमसे ज़्यादा मज़बूत तथा धन और संतान में तुमसे अधिक थे। तो उन्होंने अपने भाग का आनंद लिया। फिर तुमने अपने भाग का आनंद लिया, जैसे तुमसे पूर्व के लोगों ने आनंद लिया था और तुम (झूठ और असत्य के अंदर) घुसे, जैसे वे घुसे थे। यही लोग हैं, जिनके कर्म दुनिया एवं आखिरत में अकारथ हो गए और यही घाटा उठाने वाले लोग हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tum logon ke rang dhang wahi hain jo tumhare pesh-rawon ke thay, woh tumse zyada zorawar aur tumse badhkar maal aur aulad waley thay, phir unhon ne duniya mein apne hissey ke mazey loot liye aur tumne bhi apne hissey ke mazey isi tarah loote jaise unhon ne loote thay, aur waisi hi behason (arguments) mein tum bhi padey jaisi behason mein woh padey thay. So unka anjaam yeh hua ke duniya aur aakhirat mein unka sab kiya dhara zaya ho gaya aur wahi khasarey mein hain
Roman Urdu (Junagarhi)Misil unn logon kay jo tum say pehlay thay tum mein say woh ziyada qooat walay thay aur ziyada maal-o-aulad walay thay pus woh apna deeni hissa barat gaye phir tum ney bhi apna hissa barat liya jaisay tum say pehlay kay log apney hissay say faeeda mand huye thay aur tum ney bhi issi tarah mazaqan behas ki jaisay kay unhon ney ki thi. Unn kay aemaal duniya aur aakhirat mein ghaarat hogaye yehi log nuksan paney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)तुम लोगों के रंग ढांग वही हैं जो तुम्हारे पेश-रावों के थे, वो तुमसे ज़्यादा ज़ोरावर और तुमसे बढ़कर माल और औलाद वाले थे, फिर उनहोन ने दुनिया में अपनी हंसी के मजे लूटे लिए और तुमने भी अपनी तरह से मजे इसी तरह लूटे जैसे उनको ने लूटे थे, और वैसी ही बेहसों (तर्क) में तुम भी पड़े जैसी बेहसों में वो पड़े थे। तो उनका अंजाम ये हुआ के दुनिया और आख़िरत में उनका सब किया धरा ज़ाया हो गया और वही ख़ासियत में हैं
عَرَبِيأَلَم يَأتِهِم نَبَأُ الَّذينَ مِن قَبلِهِم قَومِ نوحٍ وَعادٍ وَثَمودَ وَقَومِ إِبراهيمَ وَأَصحابِ مَديَنَ وَالمُؤتَفِكاتِ ۚ أَتَتهُم رُسُلُهُم بِالبَيِّناتِ ۖ فَما كانَ اللَّهُ لِيَظلِمَهُم وَلٰكِن كانوا أَنفُسَهُم يَظلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या इनके पास उन लोगों की ख़बर नहीं आई, जो इनसे पहले थे? नूह़ की जाति और आद और समूद तथा इबराहीम की जाति और मदयन वाले और उलटी हुई बस्तियों के लोग? उनके पास उनके रसूल स्पष्ट प्रमाण लेकर आए, तो अल्लाह ऐसा नहीं था कि उनपर अत्याचार करता, परंतु वे स्वयं अपने आप पर अत्याचार करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Kya in logon ko apne peshrawon ki tareekh (history/story) nahin pahunchi? Nooh ki qaum, Aad , Samood, Ibrahim ki qaum , Madiyan ke log aur woh bastiyan jinhein ulat diya gaya. Unke Rasool unke paas khuli khuli nishaniyan lekar aaye, phir yeh Allah ka kaam na tha ke unpar zulm karta magar woh aap hi apne upar zulm karne waley thay
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya enhen apney say pehlay logon ki khabren nahi phonchin qom-e-nooh aur aad aur samood aur qom-e-ibrajhim aur ehal-e-madiyen aur ehal-e-motafiqaat (ulti hui bastiyon kay rehney walay) ki unn kau pass unn kay payghumbar daleel ley ker phonchay Allah aisa na tha kay unn per zulm keray bulkay unhon ney khud hi apney upper zulm kiya
Devnagri Urdu (Maududi)क्या लोगों को अपने पेशावरों की तारीख (इतिहास/कहानी) नहीं पता? नूंह की क़ौम, आद, समूद, इब्राहीम की क़ौम, मदियां के लोग और वो बस्तियां जिन्हें उलट दिया गया। उनके रसूल उनके पास खुली-खुली निशानियां लेकर आए, फिर ये अल्लाह का काम न था के अनपर ज़ुल्म करता मगर वो आप ही अपने ऊपर ज़ुल्म करने वाले थे
عَرَبِيوَالمُؤمِنونَ وَالمُؤمِناتُ بَعضُهُم أَولِياءُ بَعضٍ ۚ يَأمُرونَ بِالمَعروفِ وَيَنهَونَ عَنِ المُنكَرِ وَيُقيمونَ الصَّلاةَ وَيُؤتونَ الزَّكاةَ وَيُطيعونَ اللَّهَ وَرَسولَهُ ۚ أُولٰئِكَ سَيَرحَمُهُمُ اللَّهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزيزٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और ईमान वाले मर्द और ईमान वाली औरतें एक-दूसरे के दोस्त हैं, वे भलाई का हुक्म देते हैं और बुराई से मना करते हैं और नमाज़ क़ायम करते हैं और ज़कात देते हैं तथा अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करते हैं। यही लोग हैं जिनपर अल्लाह दया करेगा। निःसंदेह अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Momin mard aur momin auratein, yeh sab ek dusre ke rafeeq(comrades/allies) hain, bhalayi ka hukum dete aur burayi se roakte hain, Namaz qayam karte hain, zakat dete hain aur Allah aur uske Rasool ki itaat karte hain, yeh woh log hain jinpar Allah ki rehmat nazil hokar rahegi. Yaqeenan Allah sab par gaalib aur hakeem o dana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Momin mard-o-aurat aapas mein aik doosray kay (madadgar-o-maavin aur) dost hain woh bhalaiyon ka hukum detay hain aur buraiyon say roktay hain namazon ko pabandi say baja latay hain zakat ada kertay hain Allah ki aur uss kay rasool ki baat maantay hain yehi log hain jin per Allah Taalaa both jald reham faramaye ga be-shak Allah ghalbay wala hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)मोमिन मर्द और मोमिन औरतें, ये सब एक दूसरे के रफीक (साथी/सहयोगी) हैं, भलाई का हुकुम देते हैं और बुरे से रोकते हैं, नमाज कायम करते हैं, जकात देते हैं और अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करते हैं, ये वो लोग हैं जिनपर अल्लाह की रहमत नाज़िल होकर रहेगी। यकीनन अल्लाह सब पर ग़ालिब और हकीम ओ दाना है
عَرَبِيوَعَدَ اللَّهُ المُؤمِنينَ وَالمُؤمِناتِ جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها وَمَساكِنَ طَيِّبَةً في جَنّاتِ عَدنٍ ۚ وَرِضوانٌ مِنَ اللَّهِ أَكبَرُ ۚ ذٰلِكَ هُوَ الفَوزُ العَظيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने ईमान वाले पुरुषों तथा ईमान वाली स्त्रियों से ऐसे बाग़ों का वादा किया है जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, जिनमें वे सदैव रहने वाले होंगे, और स्थायी बाग़ों में अच्छे आवासों का (वादा किया है)। और अल्लाह की ओर से थोड़ी-सी प्रसन्नता सबसे बड़ी है, यही तो बहुत बड़ी सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)In momin mardon aur auraton se Allah ka wada hai ke inhein aise baagh dega jinke nichey nehrein behti hongi aur woh inmein hamesha rahenge, in sada-bahar baaghon mein unke liye pakeeza qayam-gaahein (dwelling places) hongi, aur sabse badhkar yeh ke Allah ki khushnudi(pleasure) inhein hasil hogi, yahi badi kamiyabi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn eman daar mardon aur aurton say Allah ney unn jannaton ka wada farmaya hai jin kay neechay nehren lehren ley rahi hain jahan woh hamesha hamesh rehney walay hain aur inn saaf suthray pakeezah mehallaat ka jo unn hameshgi wali jannaton mein hain aur Allah ki raza mandi sab say bari cheez hai yehi zabardast kaamyabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)मोमिन मर्दन और औरतों से अल्लाह का वादा है के इन्हें ऐसे बाग़ देगा जिनके आला नेहरेन बहती होंगी और वो इनमें हमेशा रहेंगे, सदा-बहार बागों में उनके लिए पाकीज़ा क़याम-गाहें (रहते हैं) जगहें) होंगी, और सबसे बढ़कर ये के अल्लाह की खुशनुदी (खुशी) इन्हें हासिल होगी, यही बड़ी कामयाबी है
عَرَبِييا أَيُّهَا النَّبِيُّ جاهِدِ الكُفّارَ وَالمُنافِقينَ وَاغلُظ عَلَيهِم ۚ وَمَأواهُم جَهَنَّمُ ۖ وَبِئسَ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी! काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों से जिहाद करें और उनपर सख़्ती करें। और उनका ठिकाना जहन्नम है और वह बहुत बुरा लौटकर जाने का स्थान है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, kuffar aur munafiqeen dono ka puri quwwat se muqabla karo aur inke saath sakhti se pesh aao, aakhir e kaar inka thikana jahannum hai aur woh badh-tareen jaaye karrar (abode) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi! Kafiron aur munafiqon say jihad jari rakho aur inn per sakht hojao inn ki asli jagah dozakh hai jo nihayat bad tareen jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, कुफ्फार और मुनाफिकेन दोनों का पूरी कुव्वत से मुकाबला करो और इनके साथ मिलकर पेश आओ, आखिर ए कार इनका ठिकाना जहन्नुम है और वो बढ़-तरीन जाए करार (निवास) है
عَرَبِييَحلِفونَ بِاللَّهِ ما قالوا وَلَقَد قالوا كَلِمَةَ الكُفرِ وَكَفَروا بَعدَ إِسلامِهِم وَهَمّوا بِما لَم يَنالوا ۚ وَما نَقَموا إِلّا أَن أَغناهُمُ اللَّهُ وَرَسولُهُ مِن فَضلِهِ ۚ فَإِن يَتوبوا يَكُ خَيرًا لَهُم ۖ وَإِن يَتَوَلَّوا يُعَذِّبهُمُ اللَّهُ عَذابًا أَليمًا فِي الدُّنيا وَالآخِرَةِ ۚ وَما لَهُم فِي الأَرضِ مِن وَلِيٍّ وَلا نَصيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)वे अल्लाह की क़सम खाते हैं कि उन्होंने (यह) बात नहीं कही। हालाँकि निःसंदेह उन्होंने कुफ़्र की बात कही और अपने इस्लाम लाने के पश्चात् काफ़िर हो गए और उन्होंने उस चीज़ का इरादा किया, जो उन्हें नहीं मिली। और उन्होंने केवल इसका बदला लिया कि अल्लाह और उसके रसूल ने उन्हें अपने अनुग्रह से समृद्ध कर दिया। अब यदि वे तौबा कर लें, तो उनके लिए बेहतर होगा और अगर वे मुँह फेर लें, तो अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब देगा और उनका धरती पर न कोई दोस्त होगा और न कोई मददगार।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log khuda ki kasam kha kha kar kehte hain ke humne woh baat nahin kahi, halanke inhon ne zaroor woh kaafirana baat kahi hai. Woh Islam laney ke baad kufr ke murtakib huey aur inhon ne woh kuch karne ka irada kiya jisey kar na sakey. Yeh inka saara gussa isi baat par hai na ke Allah aur uske Rasool ne apne fazal se inko gani(enrich) kardiya hai! ab agar yeh apni is rawish se baaz aa jayein to inhi ke liye behtar hai, aur agar yeh baaz na aaye to Allah inko nihayat dardnaak saza dega, duniya mein bhi aur aakhirat mein bhi, aur zameen mein koi nahin jo inka himayati aur madadgaar ho
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh Allah ki qasmen kha ker kehtay hain kay enhon ney nahi kaha halankay yaqeenan kufur ka kalma inn ki zaban say nikal chuka aur yeh apney islam kay baad kafir hogaye hain aur enhon ney iss kaam ka qasad bhi kiya jo poora na ker sakay. Yeh sirf issi baat ka intiqam ley rahey hain kay enhen Allah ney apney fazal say aur uss kay rasool ney dolat mand ker diya agar yeh abb bhi toba ker len to yeh inn kay haq mein behtar hai aur agar mun moray rahen to Allah Taalaa enhen duniya-o-aakhirat mein dard naak azab dey ga aur zamin bhar mein inn ka koi himayati aur madadgar na khara hoga
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग खुदा की कसम खा खा कर कहते हैं कि हमने वो बात नहीं कही, हालंके इन्हों ने जरूर वो काफिराना बात कही है। वो इस्लाम लाने के बाद कुफ़्र के मुर्तकीब हुए और इन्होन ने वो कुछ करने का इरादा किया जिसे कर ना सके। ये इनका सारा गुस्सा इसी बात पर है ना के अल्लाह और उसके रसूल ने अपने फज़ल से इनको गनी (समृद्ध) कर दिया है! अब अगर ये अपनी इस रवीश से बाज़ आ जाए तो इनके लिए बेहतर है, और अगर ये बाज़ ना आए अल्लाह के पास इन्हें निहायत दर्दनाक सजा देगा, दुनिया में भी और आखिरी में भी, और ज़मीन में कोई नहीं जो इनका हिमायती और मददगार हो
عَرَبِي۞ وَمِنهُم مَن عاهَدَ اللَّهَ لَئِن آتانا مِن فَضلِهِ لَنَصَّدَّقَنَّ وَلَنَكونَنَّ مِنَ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने अल्लाह को वचन दिया कि निश्चय यदि उसने हमें अपने अनुग्रह से कुछ प्रदान किया, तो हम अवश्य दान करेंगे और निश्चित रूप से नेक लोगों में से हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)In mein se baaz aise bhi hain jinhon ne Allah se ahad kiya tha ke agar usne apne fazal se humko nawaza to hum khairat karenge aur saleh ban kar rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein woh bhi hain jinhon ney Allah say ehad kiya tha kay agar woh humen apney fazal say maal dey ga to hum zaroor sadqa-o-kheyraat keren gay aur neko kaaron mein hojayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)इन में से बाज़ ऐसे भी हैं जिन्होन ने अल्लाह से अहद किया था के अगर हमने अपने फजल से हमको नवाजा तो हम खैरात करेंगे और सालेह बन कर रहेंगे
عَرَبِيفَلَمّا آتاهُم مِن فَضلِهِ بَخِلوا بِهِ وَتَوَلَّوا وَهُم مُعرِضونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उसने उन्हें अपने अनुग्रह से कुछ प्रदान किया, तो उन्होंने उसमें कंजूसी की और विमुख होकर फिर गए।
Roman Urdu (Maududi)Magar jab Allah ne apne fazl se inko daulat-mand kardiya to woh bukhl (kanjoosi) par utar aaye aur apne ahad se phire ke inhein uski parwa tak nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin jab Allah ney apney fazal say enhen diya to yeh iss mein bakheeli kerney lagay aur taal matol ker kay mun mor liya
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जब अल्लाह ने अपने फजल से इनको दौलत-मंद करदिया तो वो भुखल (कंजूसी) पर उतर आए और अपने अहद से फिर के येहिन उसकी परवा तक नहीं है
عَرَبِيفَأَعقَبَهُم نِفاقًا في قُلوبِهِم إِلىٰ يَومِ يَلقَونَهُ بِما أَخلَفُوا اللَّهَ ما وَعَدوهُ وَبِما كانوا يَكذِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो परिणाम यह हुआ कि उस (अल्लाह) ने उनके दिलों में उस दिन तक के लिए निफ़ाक़ डाल दिया, जब वे उससे मिलेंगे। क्योंकि उन्होंने अल्लाह से जो वादा किया था, उसका उल्लंघन किया और इसलिए कि वे झूठ बोलते थे।
Roman Urdu (Maududi)Nateeja yeh nikla ke inki is badh-ahadi(treachery) ki wajah se jo inhon ne Allah ke saath ki, aur us jhoot ki wajah se jo woh bolte rahey, Allah ne inke dilon mein nifaq(hypocrisy) bitha diya jo uske huzoor unki peshi ke din tak inka peecha na chodega
Roman Urdu (Junagarhi)Pus iss ki saza mein Allah ney inn kay dilon mein nafaq daal diya Allah say milney kay dinon tak kiyon kay enhon ney Allah say kiye huye waday ka khilaf kiya aur kiyon kay jhoot boltay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)नतीजा ये निकला के इनकी इस बद-अहादी (विश्वासघात) की वजह से जो इन्होन ने अल्लाह के साथ की, और उस झूठ की वजह से जो वो बोलते रहे, अल्लाह ने इनके दिलों में निफाक (पाखंड) बिठा दिया जो उसके हुजूर उनकी पेशी के दिन तक इनका पीछा न छोड़ेगा
عَرَبِيأَلَم يَعلَموا أَنَّ اللَّهَ يَعلَمُ سِرَّهُم وَنَجواهُم وَأَنَّ اللَّهَ عَلّامُ الغُيوبِ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्हें नहीं मालूम कि निःसंदेह अल्लाह उनके भेद और उनकी कानाफूसी को अच्छी तरह जानता है और यह कि निःसंदेह अल्लाह परोक्ष की सभी बातों को भली-भाँति जानने वाला है?
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log jantey nahin hain ke Allah ko inke makhfi (hidden) raaz aur inki posheeda sargoshiyan tak maloom hain aur woh tamaam gaib ki baaton se poori tarah bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh nahi jantay kay Allah Taalaa ko unn kay dil ka bhed aur unn ki sirgoshi sab maloom hai aur Allah Taalaa ghaib ki tamam baaton say khabardaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग जानते नहीं हैं कि अल्लाह को इनके मख़फ़ी (छिपे हुए) राज़ और इनकी पोशीदा सरगोशियां तक ​​मालूम हैं और वो तमाम गैब की बातों से पूरी तरह बख़बर है
عَرَبِيالَّذينَ يَلمِزونَ المُطَّوِّعينَ مِنَ المُؤمِنينَ فِي الصَّدَقاتِ وَالَّذينَ لا يَجِدونَ إِلّا جُهدَهُم فَيَسخَرونَ مِنهُم ۙ سَخِرَ اللَّهُ مِنهُم وَلَهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग जो स्वेच्छापूर्वक दान देने वाले मोमिनों को, उनके दान के विषय में, ताना देते हैं तथा उन लोगों को (भी) जो अपनी मेहनत के सिवा कुछ नहीं पाते। तो वे (मुनाफ़िक़) उनका उपहास करते हैं। अल्लाह ने उनका उपहास किया और उनके लिए दर्दनाक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)(Woh khoob jaanta hai un kanjoos daulat-mandon ko) jo ba-raza (willingly) o ragbat dene waley ehle iman ki maali qurbaniyon par baatein chant-te hain aur un logon ka mazaq udate hain jinke paas (raah e khuda mein dene ke liye) uske siwa kuch nahin hai jo woh apne upar mushakkat bardasht karke detey hain. Allah in mazaq udane walon ka mazaq udata hai aur inke liye dardnaak saza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log inn musalmanon per taanaa zani kertay hain jo dil khol ker kheyraat kertay hain aur unn logon per jinhen siwaye apni mehnat mazdoori kay aur kuch mayyasar hi nahi pus yeh unn ka mazaq uratay hain Allah bhi inn say tamaskhur kerta hai enhi kay liye dard naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)(वो ख़ूब जानता है उन कंजूस दौलत-मंदों को) जो बा-रज़ा (स्वेच्छा से) ओ रगबत देने वाले एहले ईमान की माली कुर्बानियों पर बातें जपते हैं और उन लोगों का मजाक उड़ाते हैं जिनके पास (राह ए खुदा में देने के लिए) उसके सिवा कुछ नहीं है जो वह अपने ऊपर मुशक्कत बर्दाश्त करके देते हैं। अल्लाह इन मज़ाक़ उड़ाने वालों का मज़ाक उड़ाता है और इनके लिए दर्दनाक सज़ा है
عَرَبِياستَغفِر لَهُم أَو لا تَستَغفِر لَهُم إِن تَستَغفِر لَهُم سَبعينَ مَرَّةً فَلَن يَغفِرَ اللَّهُ لَهُم ۚ ذٰلِكَ بِأَنَّهُم كَفَروا بِاللَّهِ وَرَسولِهِ ۗ وَاللَّهُ لا يَهدِي القَومَ الفاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप उनके लिए क्षमा याचना करें, या उनके लिए क्षमा याचना न करें, यदि आप उनके लिए सत्तर बार क्षमा याचना करें, तो भी अल्लाह उन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा। यह इस कारण कि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया और अल्लाह अवज्ञाकारी लोगों का मार्गदर्शन नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), tum khwa aise logon ke liye maafi ki darkhwast karo ya na karo, agar tum satter (seventy) martaba bhi inhein maaf kardene ki darkhwast karoge to Allah inhein hargiz maaf na karega, is liye ke inhon ne Allah aur uske Rasool ke saath kufr kiya hai, aur Allah fasiq logon ko raah e najaat nahin dikhata
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay liye istaghfaar ker ya na ker. Agar tu satter martaba bhi inn kay liye istaghfaar keray to bhi Allah enhen hergiz na bakhshay ga yeh iss liye kay enhon ney Allah say aur uss kay rasool say kufur kiya hai aisay fasiq logon ko rab karim hidayat nahi deta
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), तुम ख्वा ऐसे लोगों के लिए माफ़ी की अंधेरगर्दी करो या ना करो, अगर तुम सत्तर (सत्तर) मरतबा भी इन्हें माफ़ करदेने की अंधेरगर्दी करोगे तो अल्लाह इन्हें हरगिज़ माफ़ ना करेगा, इस लिए के इन्हों ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया है, और अल्लाह फासीक लोगों को राह ए नजात नहीं दिखाता
عَرَبِيفَرِحَ المُخَلَّفونَ بِمَقعَدِهِم خِلافَ رَسولِ اللَّهِ وَكَرِهوا أَن يُجاهِدوا بِأَموالِهِم وَأَنفُسِهِم في سَبيلِ اللَّهِ وَقالوا لا تَنفِروا فِي الحَرِّ ۗ قُل نارُ جَهَنَّمَ أَشَدُّ حَرًّا ۚ لَو كانوا يَفقَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग जो पीछे छोड़ दिए गए, अल्लाह के रसूल के पीछे अपने बैठ रहने पर खुश हो गए और उन्होंने नापसंद किया कि अपने धनों और अपने प्राणों के साथ अल्लाह के मार्ग में जिहाद करें और उन्होंने (अन्य लोगों से) कहा कि गर्मी में मत निकलो। आप कह दें : जहन्नम की आग कहीं अधिक गर्म है। काश! वे समझते होते।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ko peechey reh janey ki ijazat de di gayi thi woh Allah ke Rasool ka saath na dene aur ghar baithe rehne par khush huey aur unhein gawara na hua ke Allah ki raah mein jaan o maal se jihad karein. Unhone logon se kaha ke “ is shakht garmi mein na niklo”. Insey kaho ke jahannum ki aag issey zyada garam hai, kaash inhein iska shaoor hota
Roman Urdu (Junagarhi)Peefchay reh janey walay log rasool Allah (PBUH) kay janey kay baad apney bethay rehney per khush hain enhon ney Allah ki raah mein apney maal aur apni janon say jihad kerna na pasand rakha aur enhon ney keh diya kay iss garmi mein mat niklo. Keh dijiye kay dozakh ki aag boht hi sakht garam hai kaash kay woh samajhtay hotay
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों को पीछे रह जाने की इजाज़त दे दी गई थी वो अल्लाह के रसूल का साथ न दें और घर बैठे रहने पर खुश हुए और उन्हें गवारा ना हुआ के अल्लाह की राह में जान ओ माल से जिहाद करें। उन्होन लोगों से कहा के “इस मजबूत गर्मी में ना निकलो”। इनसे कहो के जहन्नुम की आग इस तरह ज्यादा गरम है, काश इन्हें इसका शूर होता है
عَرَبِيفَليَضحَكوا قَليلًا وَليَبكوا كَثيرًا جَزاءً بِما كانوا يَكسِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्हें चाहिए कि थोड़ा हँसें और बहुत अधिक रोएँ, उसके बदले जो वे कमाते रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ab chahiye ke yeh log hasna kam karein aur royein zyada, is liye ke jo badhi(evil) yeh kamate rahey hain iski jaza aise hi hai (ke inhein ispar rona chahiye)
Roman Urdu (Junagarhi)Pus enhen chahaiye kay boht kum hansen aur boht ziyada royen badlay mein uss kay jo yeh kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अब चाहिए के ये लोग हसना कम करें और रोयें ज्यादा, इसके लिए जो बुरी (बुराई) ये कमाते रह रहे हैं इसकी जजा ऐसी ही है (के इन्हें इसपर रोना चाहिए)
عَرَبِيفَإِن رَجَعَكَ اللَّهُ إِلىٰ طائِفَةٍ مِنهُم فَاستَأذَنوكَ لِلخُروجِ فَقُل لَن تَخرُجوا مَعِيَ أَبَدًا وَلَن تُقاتِلوا مَعِيَ عَدُوًّا ۖ إِنَّكُم رَضيتُم بِالقُعودِ أَوَّلَ مَرَّةٍ فَاقعُدوا مَعَ الخالِفينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो यदि अल्लाह आपको इन (मुनाफ़िक़ों) के किसी गिरोह की ओर वापस ले आए, फिर वे आपसे (युद्ध में) निकलने की अनुमति माँगें, तो आप कह दें : तुम मेरे साथ कभी नहीं निकलोगे और मेरे साथ मिलकर किसी शत्रु से नहीं लड़ोगे। निःसंदेह तुम प्रथम बार बैठे रहने पर प्रसन्न हुए, अतः पीछे रहने वालों के साथ बैठे रहो।
Roman Urdu (Maududi)Agar Allah inke darmiyan tumhein wapas le jaye aur aainda in mein se koi giroh jihad ke liye nikalne ki tumse ijazat maange to saaf keh dena, “ ab tum mere saath hargiz nahin chal sakte aur na meri maaiyat (company) mein kisi dushman se ladd sakte ho, tumne pehle baith rehne ko pasand kiya tha ab ghar baithne walon hi ke saath baithey raho”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus agar Allah Taalaa aap ko inn ki kissi jamat ki taraf lota ker wapis ley aaye phir yeh aap say maidan-e-jang mein nikalney ki ijazat talab keren to aap keh dijiye kay tum meray hergiz chal nahi saktay aur na meray sath tum dushmanon say laraee ker saktay ho. Tum ney pehli martaba hi beth rehney ko pasand kiya tha pus tum peechay reh janey walon mein hi bethay raho
Devnagri Urdu (Maududi)अगर अल्लाह इनके दरमियान तुम्हें वापस ले जाए और अंदर से कोई गिरो ​​जिहाद के लिए निकले कि तुमसे इज्जत मांगे तो साफ कह देना, "अब तुम मेरे साथ हरगिज नहीं चल सकते और न मेरी मइया (कंपनी) में किसी दुश्मन से लड़ सकते हो, तुमने पहले बैठ रहने को पसंद किया था अब घर बैठने वालों ही के साथ बैठे रहो”
عَرَبِيوَلا تُصَلِّ عَلىٰ أَحَدٍ مِنهُم ماتَ أَبَدًا وَلا تَقُم عَلىٰ قَبرِهِ ۖ إِنَّهُم كَفَروا بِاللَّهِ وَرَسولِهِ وَماتوا وَهُم فاسِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनमें से जो कोई मर जाए, उसका कभी जनाज़ा न पढ़ना और न उसकी क़ब्र पर खड़े होना। निःसंदेह उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया और इस अवस्था में मरे कि वे अवज्ञाकारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur aainda in mein se jo koi marey (die) uski namaz e janaza bhi tum hargiz na padhna aur na kabhi uski qabr par khade hona kyunke unhon ne Allah aur uske Rasool ke saath kufr kiya hai aur woh marey hain is haal mein ke woh fasiq thay
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein say koi marr jaye to aap uss kay janazay ki hergiz namaz na parhen aur na uss ki qabar per kharay hon. Yeh Allah aur uss kay rasool kay munkir hain aur martay dum tak bad kaar bey ita’at rahen hain
Devnagri Urdu (Maududi)और अंदर से जो कोई मरे (मर जाए) उसकी नमाज ए जनाज़ा भी तुम हरगिज़ न पढ़ना और न कभी उसकी क़ब्र पर खड़े होना क्योंकि उन्होन ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया है और वो मारे हैं इस हाल में के वो फासिक थे
عَرَبِيوَلا تُعجِبكَ أَموالُهُم وَأَولادُهُم ۚ إِنَّما يُريدُ اللَّهُ أَن يُعَذِّبَهُم بِها فِي الدُّنيا وَتَزهَقَ أَنفُسُهُم وَهُم كافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आपको उनके धन और उनकी संतान भले न लगें। अल्लाह तो यही चाहता है कि उन्हें इनके द्वारा सांसारिक जीवन में यातना दे और उनके प्राण इस हाल में निकलें कि वे काफ़िर हों।
Roman Urdu (Maududi)Inki maaldari aur inki kasrat e aulad tumko dhoke mein na daaley , Allah ne to irada karliya hai ke is maal o aulad ke zariye se inko is duniya mein saza dey aur inki jaanein is haal mein niklein ke woh kafir hon
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ko inn kay maal-o-aulad kuch bhi bhalay na lagen! Allah ki chahat yehi hai kay enhen inn cheezon say dunyawi saza dey aur yeh apni janen nikalney tak kafir hi rahen
Devnagri Urdu (Maududi)इनकी मालदारी और इनकी कसरत ए औलाद तुमको धोखे में ना डाले, अल्लाह ने तो इरादा करलिया है के इस माल ओ औलाद के ज़रिये से इनको इस दुनिया में सजा दे और इनकी जानें इस हाल में निकले के वो काफ़िर हूँ
عَرَبِيوَإِذا أُنزِلَت سورَةٌ أَن آمِنوا بِاللَّهِ وَجاهِدوا مَعَ رَسولِهِ استَأذَنَكَ أُولُو الطَّولِ مِنهُم وَقالوا ذَرنا نَكُن مَعَ القاعِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब कोई सूरत उतारी जाती है कि अल्लाह पर ईमान लाओ तथा उसके रसूल के साथ मिलकर जिहाद करो, तो उनमें से धनवान लोग आपसे अनुमति माँगते हैं और कहते हैं : आप हमें छोड़ दें कि हम बैठने वालों के साथ हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Jab kabhi koi surat is mazmoun (topic) ki nazil hui ke Allah ko maano aur uske Rasool ke saath milkar jihad karo to tumne dekha ke jo log in mein se saahib e maqdarat (capable people) thay wahi tumse darkhwast karne lage ke unhein jihad ki shirkat se maaf rakkha jaye, aur unhone kaha ke humein chodh dijiye ke hum baithne walon ke saath rahein
Roman Urdu (Junagarhi)Jab koi surat utari jati hai kay Allah per eman lao aur uss kay rasool kay sath mill ker jihad kero to inn mein say dolat mandon kay aik tabqa aap kay pass aaker yeh keh ker rukhsat ley leta hai kay humen to bethay rehney walon mein hi chor chor dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)जब कभी कोई सूरत इस मज़मून (विषय) की नाज़िल हुई कि अल्लाह को मानो और उसके रसूल के साथ मिलकर जिहाद करो तो तुमने देखा के जो लोग मेरे साथ हैं साहब ए मक़दरत (सक्षम लोग) था वही तुमसे अंधकार करने लगे के उन्हें जिहाद की शिर्कत से माफ़ रक्खा जाए, और उन्हें कहा के हमें छोड़ दीजिए के हम बैठने वालों के साथ रहें
عَرَبِيرَضوا بِأَن يَكونوا مَعَ الخَوالِفِ وَطُبِعَ عَلىٰ قُلوبِهِم فَهُم لا يَفقَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे इसपर राज़ी हो गए कि पीछे रहने वाली स्त्रियों के साथ हो जाएँ और उनके दिलों पर मुहर लगा दी गई। अतः वे नहीं समझते।
Roman Urdu (Maududi)In logon ne ghar baithne waliyon mein shamil hona pasand kiya aur inke dilon par thappa laga diya gaya, is liye inki samajh mein ab kuch nahin aata
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh to khana nasheen aurton ka sath denay per reejh gaye aur inn kay dilon per mohar laga di gaee abb woh kuch samajh aqal nahi rakhtay
Devnagri Urdu (Maududi)इन लोगों ने घर बैठने वालों में शामिल होना पसंद किया और इनके दिलों पर थप्पड़ लगा दिया, इस लिए इनकी समझ में अब कुछ नहीं आता
عَرَبِيلٰكِنِ الرَّسولُ وَالَّذينَ آمَنوا مَعَهُ جاهَدوا بِأَموالِهِم وَأَنفُسِهِم ۚ وَأُولٰئِكَ لَهُمُ الخَيراتُ ۖ وَأُولٰئِكَ هُمُ المُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु रसूल ने और उन लोगों ने जो उसके साथ ईमान लाए, अपने धनों और अपने प्राणों के साथ जिहाद किया और यही लोग हैं जिनके लिए सब भलाइयाँ हैं और यही सफल होने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ba-khilaf iske Rasool ne aur un logon ne jo Rasool ke saath iman laye thay apni jaan o maal se jihad kiya aur ab saari bhalaiyan unhi ke liye hain aur wahi falaah paaney waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin khud rasool Allah (PBUH) aur iss kay sath kay eman walay apney maalon aur janon say jihad kertay hain yehi log bhalaiyon walay hain aur yehi log kaamyabi hasil kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)बा-खिलाफ इसके रसूल ने और उन लोगों ने जो रसूल के साथ ईमान लाए थे अपनी जान ओ माल से जिहाद किया और अब सारी भलाईयां उन्हीं के लिए हैं और वही फलाह पाने वाले हैं
عَرَبِيأَعَدَّ اللَّهُ لَهُم جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها ۚ ذٰلِكَ الفَوزُ العَظيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने उनके लिए ऐसे बाग़ तैयार कर रखे हैं, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। वे उनमें हमेशा रहने वाले हैं। यही बहुत बड़ी सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne unke liye aise baagh tayyar rakkhey hain jinke nichey nehrein beh rahi hain, unmein woh hamesha rahenge. Yeh hai azeem o shaan kamiyabi
Roman Urdu (Junagarhi)Enhi kay liye Allah ney woh jannaten tayyar ki hain jin kay neechay nehren jaari hain jin mein yeh hamesha rehney walay hain yehi boht bari kaamyabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने उनके लिए ऐसे बाग तय्यर रक्खे हैं जिनका आला नेहरेन बेह राही हैं, उनमें वो हमेशा रहेंगे. ये है अज़ीम ओ शान कामियाबी
عَرَبِيوَجاءَ المُعَذِّرونَ مِنَ الأَعرابِ لِيُؤذَنَ لَهُم وَقَعَدَ الَّذينَ كَذَبُوا اللَّهَ وَرَسولَهُ ۚ سَيُصيبُ الَّذينَ كَفَروا مِنهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और देहातियों में से बहाना करने वाले लोग आए, ताकि उन्हें (युद्ध में शरीक न होने की) अनुमति दी जाए। तथा वे लोग (अपने घरों में) बैठ रहे, जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल से झूठ बोला। उनमें से उन लोगों को जिन्होंने कुफ़्र किया, जल्द ही दर्दनाक यातना पहुँचेगी।
Roman Urdu (Maududi)Badwi (bedouins) arabon mein se bhi bahut se log aaye jinhon ne uzar (excuse) kiye taa-ke unhein bhi pichey reh janey ki ijazat di jaye is tarah baith rahey woh log jinhon ne Allah aur uske Rasool se iman ka jhoota ahad kiya tha. In badwiyon (bedouins) mein se jin logon ne kufr ka tareeqa ikhtiyar kiya hai anqareeb woh dardnaak saza se do-chaar hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Badiya nasheenon mein say uzur walay log hazir huye kay enhen rukhsat dey di jaye aur woh beth rahey jinhon ney Allah say aur uss kay rasool say jhooti baaten banaee thin, abb to inn mein jitney kuffaar hain enhen dukh denay wali maar phonch ker rahey gi
Devnagri Urdu (Maududi)बदवी (बेडौइन्स) अरब में से भी बहुत से लोग आए जिन्हों ने उजार (बहाना) किए ता-के उन्हें भी पीछे छोड़ दिया रे जाने की इजाज़त दी जाए इस तरह बैठ रहे वो लोग जिन्होन ने अल्लाह और उसके रसूल से ईमान का झूठा अहद किया था। बदवियों (बेडौइन्स) में से जिन लोगों ने कुफ्र का तरीक़ा इख्तियार किया है अनक़रीब वो दर्दनाक सज़ा से दो-चार होंगे
عَرَبِيلَيسَ عَلَى الضُّعَفاءِ وَلا عَلَى المَرضىٰ وَلا عَلَى الَّذينَ لا يَجِدونَ ما يُنفِقونَ حَرَجٌ إِذا نَصَحوا لِلَّهِ وَرَسولِهِ ۚ ما عَلَى المُحسِنينَ مِن سَبيلٍ ۚ وَاللَّهُ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)न तो कमज़ोरों पर कोई हर्ज (पाप) है और न बीमारों पर और न उन लोगों पर जो वह चीज़ नहीं पाते जो ख़र्च करें, जब वे अल्लाह और उसके रसूल के प्रति निष्ठावान हों। सत्कर्म करने वालों पर (आपत्ति का) का कोई रास्ता नहीं। और अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान है।
Roman Urdu (Maududi)Zaeef (old) aur beemar log aur woh log jo shirkat e jihad ke liye raah nahin paatey, agar peechey reh jayein to koi harj nahin jabke woh khuloos e dil ke saath Allah aur uske Rasool ke wafadaar hon. Aisey mohsineen par aitraz ki koi gunjaish nahin hai aur Allah darguzar karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Zaeefon aur beemaron per aur unn per jin kay pass kharach kerney ko kuch bhi nahi koi haraj nahi ba-shart-e-kay woh Allah aur uss kay rasool ki khair khuwaee kertay rahen aisay nek kaaron per ilzam ki koi raah nahi Allah Taalaa bari maghfirat-o-rehmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़ीफ़ (पुराना) और बीमार लोग और वो लोग जो शिर्कत ए जिहाद के लिए राह नहीं पाते, अगर पीछे रह जाएं तो कोई हर्ज नहीं जबके वो खुलूस ए दिल के साथ अल्लाह और उसके रसूल के वफ़ादार माननीय। ऐसे मोहसिनेन पर ऐतराज़ की कोई गुंजाईश नहीं है और अल्लाह दरगुज़र करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِيوَلا عَلَى الَّذينَ إِذا ما أَتَوكَ لِتَحمِلَهُم قُلتَ لا أَجِدُ ما أَحمِلُكُم عَلَيهِ تَوَلَّوا وَأَعيُنُهُم تَفيضُ مِنَ الدَّمعِ حَزَنًا أَلّا يَجِدوا ما يُنفِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और न उन लोगों पर (कोई पाप है) कि जब वे आपके पास आए, ताकि आप उनके लिए सवारी की व्यवस्था कर दें, आपने कहा मैं वह चीज़ नहीं पाता जिसपर तुम्हें सवार करूँ, तो वे इस हाल में वापस हुए कि उनकी आँखें आँसुओं से बह रही थीं इस शोक के कारण कि वे खर्च करने के लिए कुछ नहीं पाते।
Roman Urdu (Maududi)Isi tarah un logon par bhi koi aiteraaz ka mauqa nahin hai jihon ne khud aa kar tumse darkhwast ki thi ke hamare liye sawariyan baham pahunchayi jayein, aur jab tumne kaha ke main tumhare liye sawariyon ka intizam nahin kar sakta to woh majbooran wapas gaye aur haal yeh tha ke unki aankhon se aansu (tears) jaari thay aur unhein is baat ka bada ranjj tha ke woh apne kharch par shareek e jihad honay ki maqdarat nahin rakhte
Roman Urdu (Junagarhi)Haan unn per bhi koi haraj nahi jo aap kay pass aatay hain kay aap unhen sawari mohiyya ker den to aap jawab detay hain kay mein to tumahri sawari kay liye kuch bhi nahi pata to woh ranj-o-ghum say apni aakhon say aansoo bahatay huye lot jatay hain kay enhen kharach kerney kay liye kuch bhi mayyasar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)इसी तरह उन लोगों पर भी कोई ऐतराज़ का मौका नहीं है जिहों ने खुद आ कर तुमसे अंधकार की थी के हमारे लिए सावरियां बहम पहन सकती हैं, और जब तुमने कहा के मैं तुम्हारे लिए सावरियों का इंतिज़ाम नहीं कर सकता तो वो मजबूरन वापस आ गए और हाल ये था के उनकी आंखों से आंसू जारी थे और उन्हें इस बात का बड़ा रंज था के वो अपने खर्च पर शरीक ए जिहाद होने की मक़दरत नहीं रखते
🕮 Juz 11 begins here
عَرَبِي۞ إِنَّمَا السَّبيلُ عَلَى الَّذينَ يَستَأذِنونَكَ وَهُم أَغنِياءُ ۚ رَضوا بِأَن يَكونوا مَعَ الخَوالِفِ وَطَبَعَ اللَّهُ عَلىٰ قُلوبِهِم فَهُم لا يَعلَمونَ
हिन्दी (Al-Omari)(आपत्ति का) का रास्ता तो केवल उन लोगों पर है, जो आपसे अनुमति माँगते हैं, हालाँकि वे मालदार हैं। वे इसपर राज़ी हो गए कि पीछे रहने वाली औरतों के साथ हो जाएँ और अल्लाह ने उनके दिलों पर मुहर लगा दी, सो वे नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Albatta aiteraaz un logon par hai jo maaldaar hain aur phir bhi tumse darkhwastein karte hain ke unhein shirkat e jihad se maaf rakkha jaye. Unhon ne ghar baithne waliyon mein shamil hona pasand kiya aur Allah ne unke dilon par thappa (seal) laga diya, is liye ke ab yeh kuch nahin jantey (ke Allah ke haan inki rawish ka kya nateeja nikalne wala hai)
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak unhin logon per raah-e-ilzam hai jo bawajood dolat mand honey kay aap say ijazat talab kertay hain. Yeh khana nasheen aurton ka sath denay per khush hain aur inn kay dilon per mohar-e-khudawandi lagg chuki hai jiss say woh mehaz bey ilm hogaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता एतराज उन लोगों पर है जो मालदार हैं और फिर भी तुमसे डार्कह्वास्टीन करते हैं के उन्हें शिर्कत ए जिहाद से माफ रखा जाएगा। उन्होन ने घर बैठने वालियों में शामिल होना पसंद किया और अल्लाह ने उनके दिलों पर थप्पड़ (सील) लगा दिया, इस लिए के अब ये कुछ नहीं जानते (के अल्लाह के हां इनकी रवीश का क्या नतीजा निकलने वाला है)
عَرَبِييَعتَذِرونَ إِلَيكُم إِذا رَجَعتُم إِلَيهِم ۚ قُل لا تَعتَذِروا لَن نُؤمِنَ لَكُم قَد نَبَّأَنَا اللَّهُ مِن أَخبارِكُم ۚ وَسَيَرَى اللَّهُ عَمَلَكُم وَرَسولُهُ ثُمَّ تُرَدّونَ إِلىٰ عالِمِ الغَيبِ وَالشَّهادَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब तुम उनकी ओर वापस जाओगे, तो वे तुम्हारे सामने बहाने पेश करेंगे। आप कह दें : हम तुम्हारा कभी विश्वास नहीं करेंगे, निःसंदेह अल्लाह हमें तुम्हारी कुछ ख़बरें बता चुका है, और जल्द ही अल्लाह तुम्हारे काम को देखेगा और उसका रसूल भी। फिर तुम हर परोक्ष और प्रत्यक्ष चीज़ को जानने वाले की ओर लौटाए जाओगे। फिर वह तुम्हें बताएगा जो कुछ तुम करते रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Tum jab palat kar inke paas pahunchoge to yeh tarah tarah ke uzraat (excuses) pesh karenge magar tum saaf keh dena ke “bahane na karo, hum tumhari kisi baat ka aitbaar na karenge, Allah ne humko tumhare halaat bata diye hain, ab Allah aur uska Rasool tumhare tarze amal ko dekhega phir tum uski taraf paltaye jaogey jo khule aur chupe sab ka janne wala hai aur woh tumhein bata dega ke tum kya kuch karte rahey ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log tumharay samney uzur paish keren gay jab tum inn kay pass wapis jaogay. Aap keh dijiye kay yeh uzur paish mat kero hum kabhi tum ko sacha na samjhen gay Allah Taalaa hum ko tumhari khabar dey chuka hai aur aaenda bhi Allah aur uss ka rasool tumhari kaar guzari dekh len gay phir aisay kay pass lotaye jaogay jo posheeda aur zahir sab ka jannay wala hai phir woh tum ko bata dey ga jo kuch tum kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम जब पलट कर इनके पास पहुंचोगे तो ये तरह तरह के उज़रात (बहाना) पेश करेंगे मगर तुम साफ कह देना के “बहाने ना करो, हम तुम्हारी किसी बात का ऐतबार ना करेंगे, अल्लाह ने हमको तुम्हारे हालात बता दिए हैं, अब अल्लाह और उसका रसूल तुम्हारे तर्जे अमल को देखेगा फिर तुम उसकी तरफ पलटोगे जो खुले और छुपे सब का जाने वाला है और वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या कुछ करते रहोगे”
عَرَبِيسَيَحلِفونَ بِاللَّهِ لَكُم إِذَا انقَلَبتُم إِلَيهِم لِتُعرِضوا عَنهُم ۖ فَأَعرِضوا عَنهُم ۖ إِنَّهُم رِجسٌ ۖ وَمَأواهُم جَهَنَّمُ جَزاءً بِما كانوا يَكسِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)शीघ्र ही जब तुम उनकी ओर वापस जाओगे, तो वे तुम्हारे सामने अल्लाह की क़समें खाएँगे, ताकि तुम उनसे ध्यान हटा लो। अतः उनकी उपेक्षा करो, निःसंदेह वे गंदे हैं और उनका ठिकाना जहन्नम है, उसके बदले जो वे कमाते रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tumhari wapsi par yeh tumhare saamne kasamein khayenge taa-ke tum insey sarf-e-nazar karo (to leave them alone) to beshak tum insey sarf-e-nazar hi karlo. Kyunke yeh gandagi hain aur inka asli muqaam jahannum hai jo inki kamayi ke badle mein inhein naseeb hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Haan woh abb tumharay samney Allah ki qasmen kha jayen gay jab tum unn kay pass wapis jaogay takay tum unn ko unn ki halat per chor do. So tum unn ko unn ki halat per chor do. Woh log bilkul ganday hain aur unn ka thikana dozakh hai unn kaamon kay badlay jinhen woh kiya kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारी वापसी पर ये तुम्हारे सामने कसमें खाएंगे ता-के तुम इनसे सिर्फ-ए-नजर करो (उन्हें अकेला छोड़ दो) तो बहकाओ तुम इनसे सिर्फ-ए-नजर ही करो। क्योंकि ये गंदी है और इनका असली मुकाम जहन्नुम है जो इनकी कमाई के बदले में इन्हें नसीब होगी
عَرَبِييَحلِفونَ لَكُم لِتَرضَوا عَنهُم ۖ فَإِن تَرضَوا عَنهُم فَإِنَّ اللَّهَ لا يَرضىٰ عَنِ القَومِ الفاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे तुम्हारे लिए क़समें खाएँगे, ताकि तुम उनसे राज़ी हो जाओ। तो यदि तुम उनसे राज़ी हो जाओ, तो निःसंदेह अल्लाह अवज्ञाकारी लोगों से राज़ी नहीं होता।
Roman Urdu (Maududi)Yeh tumhare saamne kasamein khayenge ke taa-ke tum inse raazi ho jao, halanke agar tum inse raazi ho bhi gaye to Allah hargiz aisey fasiq logon se raazi na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss liye qasmen khayen gay kay tum inn say razi hojao to Allah Taalaa to aisay fasiq logon say razi nahi hota
Devnagri Urdu (Maududi)ये तुम्हारे सामने कसमें खाएंगे के ता-के तुम इनसे राजी हो जाओ, हलांके अगर तुम इनसे राजी हो भी जाओगे तो अल्लाह हरगिज ऐसे फासिक लोगों से राज़ी ना होगा
عَرَبِيالأَعرابُ أَشَدُّ كُفرًا وَنِفاقًا وَأَجدَرُ أَلّا يَعلَموا حُدودَ ما أَنزَلَ اللَّهُ عَلىٰ رَسولِهِ ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)देहाती अविश्वास तथा पाखंड में अधिक बढ़े हुए हैं और इस बात के अधिक योग्य हैं कि उन सीमाओं को न जानें, जो अल्लाह ने अपने रसूल पर उतारी हैं, और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh badwi (bedouin) arab kufr o nifaq (hypocrisy) mein zyada sakht hain aur inke maamle mein is amr ke imkanaat (probability) zyada hain ke us deen ke hudood se na-waqif rahein jo Allah ne apne Rasool par nazil kiya hai. Allah sab kuch jaanta hai aur hakeem o dana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Dehati log kufur aur nifaq mein boht hi sakht hain aur unn ko aisa hona hi chahaiye kay unn ko inn kay ehkaam ka ilm na ho jo Allah Taalaa ney apney rasool per nazil farmaye hain aur Allah bara ilm wala bari hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये बदवी (बेदौइन) अरब कुफ्र ओ निफ़ाक (पाखंड) में ज़्यादा सच है और इनके मामले में इस अमृत के इम्कानात (संभावना) ज़्यादा हैं के हमें दीन के हुदूद से ना-वाक़िफ़ रहे जो अल्लाह ने अपने रसूल पर नाज़िल किया है। अल्लाह सब कुछ जानता है और हकीम ओ दाना है
عَرَبِيوَمِنَ الأَعرابِ مَن يَتَّخِذُ ما يُنفِقُ مَغرَمًا وَيَتَرَبَّصُ بِكُمُ الدَّوائِرَ ۚ عَلَيهِم دائِرَةُ السَّوءِ ۗ وَاللَّهُ سَميعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)देहातियों में कुछ ऐसे हैं कि जो कुछ ख़र्च करते हैं, उसे तावान समझते हैं और तुम्हारे लिए बुरे समय की प्रतीक्षा करते हैं। बुरा समय उन्हीं पर आए। और अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Un badwiyon mein aisey aisey log maujood hain jo raah e khuda mein kuch kharch karte hain to isey apne upar zabardasti ki chatti (penalty) samajhte hain aur tumhare haqq mein zamane ki gardishon ka intezar kar rahey hain (ke tum kisi chakkar mein phanso to woh apni gardan se us nizam ki itaat ka qalada utar phenkein jis mein tumne unhein kass diya hai) halanke badhi ka chakkar khud inhi par musallat hai aur Allah sab kuch sunta aur jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn dehatiyon mein baaz aisay hain kay jo kuch kharach kertay hain uss ko jurmana samajhtay hain aur tum musalmanon kay wastay buray waqt kay muntazir rehtay hain bura waqt inn hi per parney wala hai aur Allah sunnay wala aur jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)उन बदवियों में ऐसे ऐसे लोग मौजूद हैं जो राह ए खुदा में कुछ खर्च करते हैं तो इसे अपने ऊपर ज़बरदस्ती की छत्ती (जुर्माना) समझते हैं और तुम्हारे हक़ में ज़माने की गर्दिशों का इंतज़ार कर रहे हैं (के तुम किसी चक्कर में फँसो तो वो अपनी गर्दन से हमें निज़ाम की इताअत का क़लदा उतार फेंकें जिसमें तुमने उन्हें कस दिया है) हालंके बड़ी का चक्कर खुद इन्ही पर मुसल्लत है और अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है
عَرَبِيوَمِنَ الأَعرابِ مَن يُؤمِنُ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ وَيَتَّخِذُ ما يُنفِقُ قُرُباتٍ عِندَ اللَّهِ وَصَلَواتِ الرَّسولِ ۚ أَلا إِنَّها قُربَةٌ لَهُم ۚ سَيُدخِلُهُمُ اللَّهُ في رَحمَتِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और देहातियों में कुछ ऐसे हैं, जो अल्लाह तथा अंतिम दिन पर ईमान रखते हैं और जो कुछ ख़र्च करते हैं, उसे अल्लाह के यहाँ निकटता तथा रसूल की दुआओं (की प्राप्ति) का साधन समझते हैं। सुन लो! निःसंदेह यह उनके लिए निकटता का साधन है। शीघ्र ही अल्लाह उन्हें अपनी दया में दाखिल करेगा। निःसंदेह अल्लाह अत्यंत क्षमाशील, असीम दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur inhi badwiyon mein kuch log aisey bhi hain jo Allah aur roz-e-aakhir par iman rakhte hain aur jo kuch kharch karte hain usey Allah ke haan taqarrub(nearness) ka aur Rasool ki taraf se rehmat ki duaein lene ka zariya banate hain. Haan! Woh zaroor inke liye taqarrub (nearness) ka zariya hai aur Allah zaroor inko apni rehmat mein dakhil karega. Yaqeenan Allah darguzar karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur baaz ehal-e-dehaat mein aisay bhi hain jo Allah Taalaa per aur qayamat kay din per eman rakhtay hain aur jo kuch kharach kertay hain inn ko indallah qurb hasil honey ka zariya aur rasool ki dua ka zariya banatay hain yaad rakho kay inn kay yeh kharach kerna be-shak inn kay liye mojib-e-qurbat hai inn ko Allah Taalaa zaroor apni remat mein dakhil keray ga Allah Taalaa bari maghfirat wala bari rehmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और इन्ही बदियों में कुछ लोग ऐसी भी है जो अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर पर ईमान रखते हैं और जो कुछ ख़र्च करते हैं उसे अल्लाह के हान तक़र्रब (मंहगाई) का और रसूल की तरफ से रहमत की दुआएं लेने का ज़रिया बनाते हैं। हाँ! वो जरूर इनके लिए तकरारब (निकटता) का जरूरी है और अल्लाह जरूर इनको अपनी रहमत में दखल देगा। यकीनन अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِيوَالسّابِقونَ الأَوَّلونَ مِنَ المُهاجِرينَ وَالأَنصارِ وَالَّذينَ اتَّبَعوهُم بِإِحسانٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنهُم وَرَضوا عَنهُ وَأَعَدَّ لَهُم جَنّاتٍ تَجري تَحتَهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها أَبَدًا ۚ ذٰلِكَ الفَوزُ العَظيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा सबसे पहले (ईमान की ओर) आगे बढ़ने वाले मुहाजिरीन और अंसार और जिन लोगों ने नेकी के साथ उनका अनुसरण किया, अल्लाह उनसे प्रसन्न हो गया और वे उससे प्रसन्न हो गए तथा उसने उनके लिए ऐसी जन्नतें तैयार कर रखी हैं, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। वे उनके अंदर हमेशा रहेंगे। यही बड़ी सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)Woh muhajir o ansar jinhon ne sab se pehle dawat e iman par labbaik kehne mein sabaqat ki , neiz woh jo baad mein raastbaazi ke sath pichey aaye, Allah unsey razi hua aur woh Allah se razi huey , Allah ne unke liye aisey baagh muhaiyya kar rakkhe hain jinke nichey nehrein behti hongi aur woh unmein hamesha rahenge, yahi azeem o shaan kamiyabi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo mohajreen aur ansaar sabiq aur muqaddam hain aur jitney log ikhlaas kay sath unn kay pairo hain Allah unn sab say razi hua aur woh sab uss say razi huye aur Allah ney unn kay liye aisay baagh mohiyya ker rakhay hain jin kay neechay nehren jaari hongi jin mein hamesha rahen gay yeh bari kaamyabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो मुहाजिर ओ अंसार जिन्होन ने सब से पहले दावत ए ईमान पर लब्बैक कहने में सबकत की, नीज़ वो जो बाद में रस्तबाज़ी के साथ पिचे आए, अल्लाह उनसे रज़ी हुआ और वो अल्लाह से रज़ी हुए, अल्लाह ने उनके लिए ऐसे बाग मुहैय्या कर रखे हैं जिनके बारे में खास बातें होंगी और वो उनमें हमेशा रहेंगे, यही अज़ीम ओ शान कामयाब है
عَرَبِيوَمِمَّن حَولَكُم مِنَ الأَعرابِ مُنافِقونَ ۖ وَمِن أَهلِ المَدينَةِ ۖ مَرَدوا عَلَى النِّفاقِ لا تَعلَمُهُم ۖ نَحنُ نَعلَمُهُم ۚ سَنُعَذِّبُهُم مَرَّتَينِ ثُمَّ يُرَدّونَ إِلىٰ عَذابٍ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम्हारे आस-पास जो देहाती हैं, उनमें से कुछ लोग मुनाफ़िक़ हैं और मदीना वालों में से भी, जो अपने निफ़ाक़ (पाखंड) पर जमे हुए हैं। आप उन्हें नहीं जानते, हम ही उन्हें जानते हैं। जल्द ही हम उन्हें दो बार यातना देंगे। फिर वे बहुत बड़ी यातना की ओर लौटाए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Tumhare gird o pesh jo badwi rehte hain un mein bahut se munafiq hain aur isi tarah khud Medina ke bashindon mein bhi munafiq maujood hain jo nifaq mein taq (experts) ho gaye hain. Tum inhein nahin jaante, hum unko jaante hain. Qareeb hai woh waqt jab hum unko dohri saza denge, phir woh zyada badi saza ke liye wapas laye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kuch tumharay gird-o-paish walon mein aur kuch madinay walon mein aisay munafiq hain kay nifaq per aray huye hain aap inn ko nahi jantay inn ko hum jantay hain hum inn ko dohri saza den gay phir woh baray bhari azab ki taraf bhejay jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारे गिर्द ओ पेश जो बादवी रहते हैं उन में बहुत से मुनाफिक हैं और इसी तरह खुद मदीना के बाशिंदों में भी मुनाफिक मौजुद हैं जो निफाक में तक (विशेषज्ञ) हो गए हैं। तुम इन्हें नहीं जानते, हम उनको जानते हैं। करीब है वो वक्त जब हम उनको दोहरी सजा देंगे, फिर वो ज्यादा बड़ी सजा के लिए वापस ले जायेंगे
عَرَبِيوَآخَرونَ اعتَرَفوا بِذُنوبِهِم خَلَطوا عَمَلًا صالِحًا وَآخَرَ سَيِّئًا عَسَى اللَّهُ أَن يَتوبَ عَلَيهِم ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और कुछ अन्य लोग भी हैं, जिन्होंने अपने गुनाहों का इक़रार किया। उन्होंने कुछ काम अच्छे और कुछ दूसरे बुरे मिला दिए। निकट है कि अल्लाह उनपर फिर से दया करे। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Kuch aur log hain jinhon ne apne kasooron ka aitraaf karliya hai unka amal makhloot (mixed record of deeds, good and bad) hai. Kuch neik hain aur kuch badh. Baeed nahin ke Allah unpar phir meharbaan ho jaye kyunke woh darguzar karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kuch aur log hain jo apni khata kay iqrari hain jinhon ney milay julay amal kiye thay kuch bhalay aur kuch buray Allah say umeed hai kay unn ki toba qabool farmaye. Bila shuba Allah Taalaa bari maghfirat wala bari rehmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)कुछ और लोग हैं जिन्हों ने अपने कसूरों का ऐतराफ करलिया है उनका अमल मखलूट (कर्मों का मिश्रित रिकॉर्ड, अच्छे और बुरे) है। कुछ नया है और कुछ बढ़िया। बैद नहीं के अल्लाह उनपार फिर मेहरबान हो जाए क्योंकि वो दरगुज़र करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِيخُذ مِن أَموالِهِم صَدَقَةً تُطَهِّرُهُم وَتُزَكّيهِم بِها وَصَلِّ عَلَيهِم ۖ إِنَّ صَلاتَكَ سَكَنٌ لَهُم ۗ وَاللَّهُ سَميعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)आप उनके मालों में से दान लें, जिसके साथ आप उन्हें पवित्र और पाक-साफ़ करें, तथा उनके लिए दुआ करें। निःसंदेह आपकी दुआ उनके लिए शांति का कारण है और अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), tum inke amwal mein se sadaqa lekar inhein paak karo aur (neki ki raah mein) inhein badhao, aur inke haqq mein dua e rehmat karo kyunke tumhari dua inke liye wajah taskeen hogi. Allah sab kuch sunta aur jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap inn kay maalon mein sadqa ley lijiye jiss kay zariye say aap inn ko pak saaf ker den aur inn kay liye dua kijiye bila shuba aap ki dua inn kay liye mojib-e-itminaan hai aur Allah Taalaa khoob sunta hai khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), तुम इनके अमवाल में से सदक़ा लेकर इन्हें पाक करो और (नेकी की राह में) इन्हें बढ़ाओ, और इनके हक़ में दुआ ए रहमत करो क्यों तुम्हारी दुआ इनके लिए वजह तस्कीन होगी। अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है
عَرَبِيأَلَم يَعلَموا أَنَّ اللَّهَ هُوَ يَقبَلُ التَّوبَةَ عَن عِبادِهِ وَيَأخُذُ الصَّدَقاتِ وَأَنَّ اللَّهَ هُوَ التَّوّابُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या वे नहीं जानते कि निःसंदेह अल्लाह ही अपने बंदों की तौबा क़बूल करता और सदक़े लेता है और यह कि निःसंदेह अल्लाह ही है जो बहुत अधिक तौबा क़बूल करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Kya in logon ko maloom nahin hai ke woh Allah hi hai jo apne bandon ki tawba qabool karta hai aur unki khairaat ko qabooliyat ata farmata hai, aur yeh ke Allah bahut maaf karne wala aur raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn ko yeh khabar nahi kay Allah hi apney bandon ki toba qabool kerta hai aur wohi sadqaat ko qabool farmata hai aur yeh kay Allah hi toba qabool kerney mein aur rehmat kerney mein kaamil hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इन लोगों को मालूम नहीं है कि वो अल्लाह ही है जो अपने बंदों की तौबा कबूल करता है और उनकी खैरात को कबूलियत अता फरमाता है, और ये के अल्लाह बहुत माफ करने वाला और रहीम है
عَرَبِيوَقُلِ اعمَلوا فَسَيَرَى اللَّهُ عَمَلَكُم وَرَسولُهُ وَالمُؤمِنونَ ۖ وَسَتُرَدّونَ إِلىٰ عالِمِ الغَيبِ وَالشَّهادَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और कह दीजिए : तुम कर्म किए जाओ। जल्द ही अल्लाह तुम्हारे कर्मों को देखेगा, और उसके रसूल और ईमान वाले भी। और जल्द ही तुम हर परोक्ष और प्रत्यक्ष बात को जानने वाले की ओर लौटाए जाओगे। फिर वह तुम्हें बताएगा जो कुछ तुम किया करते थे
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Nabi), in logon se kehdo ke tum amal karo, Allah aur uska Rasool aur momineen sab dekhenge ke tumhara tarz-e-amal ab kya rehta hai , phir tum uski taraf paltaye jaogey jo khule aur chupe sab ko jaanta hai aur woh tumhein bata dega ke tum kya karte rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay tum amal kiye jao tumharay amal Allah khud dekh ley ga aur uss ka rasool aur eman walay (bhi dekh len gay) aur zaroor tum ko aisay kay pass jana hai jo tamam chupi aur khuli cheezon ka jannay wala hai. So woh tum ko tumhara sab kiya hua batla dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ नबी), में लोगों से कहदो के तुम अमल करो, अल्लाह और उसका रसूल और मोमिनीन सब देखेंगे के तुम्हारा तर्ज़-ए-अमल अब क्या रहता है, फिर तुम उसकी तरफ पलटे जाओगे जो खुले और छुपे सबको जानता है और वो तुम्हे बता देगा के तुम क्या करते रहोगे
عَرَبِيوَآخَرونَ مُرجَونَ لِأَمرِ اللَّهِ إِمّا يُعَذِّبُهُم وَإِمّا يَتوبُ عَلَيهِم ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और कुछ दूसरे लोग भी हैं, जिनका मामला अल्लाह का आदेश आने तक स्थगित है। या तो वह उन्हें यातना दे और या फिर उनकी तौबा क़बूल करे। तथा अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Kuch dusre log hain jinka maamla bhi khuda ke hukum par thehra hua hai, chahe unhein saza de aur chahe unpar azsar-e-naw (again) meharbaan ho jaye, Allah sab kuch jaanta hai aur hakeem o dana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kuch aur log hain jin ka moamla Allah kay hukum aaney tak mulatawee hai unn ko saza dey ga ya unn ki toba qabool ker ley ga aur Allah khoob jannay wala hai bara hikmata wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)कुछ दूसरे लोग हैं जिनका मामला भी खुदा के हुकुम पर ठहरा हुआ है, चाहे उन्हें सज़ा दे और चाहे उनपर अज़सर-ए-नव (फिर से) मेहरबान हो जाए, अल्लाह सब कुछ जानता है और हकीम ओ दाना है
عَرَبِيوَالَّذينَ اتَّخَذوا مَسجِدًا ضِرارًا وَكُفرًا وَتَفريقًا بَينَ المُؤمِنينَ وَإِرصادًا لِمَن حارَبَ اللَّهَ وَرَسولَهُ مِن قَبلُ ۚ وَلَيَحلِفُنَّ إِن أَرَدنا إِلَّا الحُسنىٰ ۖ وَاللَّهُ يَشهَدُ إِنَّهُم لَكاذِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (मुनाफ़िक़ों में से) वे लोग भी हैं, जिन्होंने एक मस्जिद बनाई; ताकि (मुसलमानों को) हानि पहुँचाएँ, कुफ़्र करें, ईमान वालों के बीच फूट डालें तथा ऐसे व्यक्ति के लिए घात लगाने का ठिकाना बनाएँ, जो इससे पहले अल्लाह और उसके रसूल से युद्ध कर चुका है। तथा निश्चय वे अवश्य क़समें खाएँगे कि हमारा इरादा भलाई के सिवा और कुछ न था, और अल्लाह गवाही देता है कि निःसंदेह वे निश्चय झूठे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kuch aur log hain jinhon ne ek masjid banayi is garz ke liye ke (dawat e haqq ko) nuqsaan pahunchayein, aur (khuda ki bandagi karne ke bajaye) kufr karein, aur ehle iman mein phoot (tafraqa/division) daalein, aur (is bazahir ibadat gaah ko) us shaks ke liye kameengaah (station) banayein jo issey pehle khuda aur Rasool ke khilaf barsar e paikar (in conflict) ho chuka hai. Woh zaroor kasmein kha kha kar kahenge ke hamara irada to bhalayi ke siwa kisi dusri cheez ka na tha magar Allah gawah hai ke woh qatayi jhootey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur baaz aisay hain jinhon ney inn aghraaz kay liye masjid banaee hai kay zarrar phonchayen aur kufur ki baaten keren aur eman daron mein tafreeq dalen aur uss shaks kay qayam ka saman keren jo iss say pehlay say Allah aur rasool ka mukhalif hai aur qasmen kha jayen gay kay ba-juz bhalaee kay aur humari kuch neeyat nahi aur Allah gawah hai kay woh bilkul jhootay hain
Devnagri Urdu (Maududi)कुछ और लोग हैं जिन्होंने एक मस्जिद बनाई है ग़रज़ के लिए के (दावत ए हक़ को) नुक़्सान पूछैं, और (ख़ुदा की बंदगी करने के बजाये) कुफ़्र करें, और एहले ईमान में फ़ुट (तफ़्राका/डिवीज़न) डालें, और (इस बज़हिर इबादत गाह को) हमें शक्स के लिए कमेंगाह (स्टेशन) बनाएं जो इस्से पहले खुदा और रसूल के ख़िलाफ़ बरस ए पाइकर (संघर्ष में) हो चूका है। वो जरूर कसमें खा खा कर कहेंगे के हमारा इरादा तो भलाई के सिवा किसी दूसरी चीज का ना था मगर अल्लाह गवाह है के वो काटते झूठे हैं
عَرَبِيلا تَقُم فيهِ أَبَدًا ۚ لَمَسجِدٌ أُسِّسَ عَلَى التَّقوىٰ مِن أَوَّلِ يَومٍ أَحَقُّ أَن تَقومَ فيهِ ۚ فيهِ رِجالٌ يُحِبّونَ أَن يَتَطَهَّروا ۚ وَاللَّهُ يُحِبُّ المُطَّهِّرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसमें कभी खड़े न होना। निश्चय वह मस्जिद जिसकी बुनियाद पहले दिन से परहेज़गारी पर रखी गई है, वह अधिक योग्य है कि आप उसमें खड़े हों। उसमें ऐसे लोग हैं, जो बहुत पाक-साफ़ रहना पसंद करते हैं और अल्लाह पाक-साफ़ रहने वालों से प्रेम करता है।
Roman Urdu (Maududi)Tum hargiz is imarat mein khade na hona. Jo masjid awwal roz se taqwa par qayam ki gayi thi, wahi iske liye zyada mauzoon(haqdaar/proper place) hai ke tum usmein (ibadat ke liye) khade ho. Usmein aisey log hain jo paak rehna pasand karte hain aur Allah ko pakeezgi ikhtiyar karne waley hi pasand hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap iss mein kabhi kharay na hon. Albatta jiss masjid ki bunyaad awwal din say taqwa per rakhi gaee hai woh iss laeeq hai kay aap iss mein kharay hon iss mein aisay aadmi hain kay woh khoob pak honey ko pasand kertay hain aur Allah Taalaa khoob pak honey walon ko pasand kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम हरगिज इस इमारत में खड़े ना होना। जो मस्जिद अव्वल रोज़ से तक़वा पर क़याम की गई थी, वही इसके लिए ज़्यादा मौज़ून (हक़दार/उचित जगह) है के तुम उसमें (इबादत के लिए) खड़े हो। उसमें ऐसे लोग हैं जो पाक रहना पसंद करते हैं और अल्लाह को पाकीज़गी इख्तियार करने वाले ही पसंद हैं
عَرَبِيأَفَمَن أَسَّسَ بُنيانَهُ عَلىٰ تَقوىٰ مِنَ اللَّهِ وَرِضوانٍ خَيرٌ أَم مَن أَسَّسَ بُنيانَهُ عَلىٰ شَفا جُرُفٍ هارٍ فَانهارَ بِهِ في نارِ جَهَنَّمَ ۗ وَاللَّهُ لا يَهدِي القَومَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वह व्यक्ति बेहतर है जिसने अपनी इमारत की नींव अल्लाह के डर और उसकी खुशी पर रखी, या वह जिसने अपनी इमारत की नींव एक गड्ढे के किनारे पर रखी जो ढहने वाला था? तो वह उसके साथ जहन्नम की आग में गिर पड़ा और अल्लाह ज़ालिमों को हिदायत नहीं देता।
Roman Urdu (Maududi)Phir tumhara kya khayal hai ke behtar Insaan woh hai jisne apni imarat ki buniyad khuda ke khauf aur uski raza ki talab par rakkhi ho ya woh jisne apni imarat ek waadi ki khokli besabaat kagar par uthayi (edge of a bank about to collapse) aur woh usey lekar seedhi jahannum ki aag mein jaa giri? Aisey zalim logon ko Allah kabhi seedhi raah nahin dikhata
Roman Urdu (Junagarhi)Phir aaya aisa shaks behtar hai jiss ney apni emaarat ki bunyaad Allah say darney per aur Allah ki khushnoodi per rakhi ho ya woh shaks kay jiss ney apni emaarat ki bunyaad kissi ghaati kay kinaray per jo kay girney hi ko ho rakhi ho phir woh iss ko ley ker aatish-e-dozakh mein girr paray aur Allah Taalaa aisay zalimon ko samajh hi nahi deta
Devnagri Urdu (Maududi)फिर तुम्हारा क्या ख्याल है के बेहतर इंसान वो है जिसने अपनी इमारत की बुनियाद खुदा के खौफ और उसकी रज़ा की तालाब पर राखी हो या वो जिसने अपनी इमारत एक वादी की खोकली बेसबात कगार पर उठाई (बैंक का किनारा गिरने वाला था) और वो उसे लेकर सीधी जहन्नुम की आग में जा गिरी? ऐसे जालिम लोगों को अल्लाह कभी सीधी राह नहीं दिखाता
عَرَبِيلا يَزالُ بُنيانُهُمُ الَّذي بَنَوا ريبَةً في قُلوبِهِم إِلّا أَن تَقَطَّعَ قُلوبُهُم ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उनका भवन जो उन्होंने बनाया है, उनके दिलों में हमेशा चिंता का स्रोत रहेगा, परंतु यह कि उनके दिलों के टुकड़े-टुकड़े हो जाएँ। तथा अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh imarat jo inhon ne banayi hai, hamesha inke dilon mein yaqeeni ki jadd (root) bani rahegi (jiske nikalne ki ab koi surat nahin) bajuz iske ke inke dil hi para para ho jayein. Allah nihayat bakhabar aur hakeem o dana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn ki yeh emaarat jo enhon ney banaee hai hamesha inn kay dilon mein shak ki bunyaad per (kaanta bann ker) khutakti rahey gi haan magar inn kay dil hi agar paash paash hojayen to khair aur Allah Taalaa bara ilm wala bari hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये इमारत जो इन्हों ने बनाई है, हमेशा इनके दिलों में यकीनी की जड (जड़) बनी रहेगी (जिसके निकलने की अब कोई सूरत नहीं) बजुज इसके के इनके दिल ही पारा हो जाएंगे। अल्लाह निहायत बाख़बर और हकीम ओ दाना है
عَرَبِي۞ إِنَّ اللَّهَ اشتَرىٰ مِنَ المُؤمِنينَ أَنفُسَهُم وَأَموالَهُم بِأَنَّ لَهُمُ الجَنَّةَ ۚ يُقاتِلونَ في سَبيلِ اللَّهِ فَيَقتُلونَ وَيُقتَلونَ ۖ وَعدًا عَلَيهِ حَقًّا فِي التَّوراةِ وَالإِنجيلِ وَالقُرآنِ ۚ وَمَن أَوفىٰ بِعَهدِهِ مِنَ اللَّهِ ۚ فَاستَبشِروا بِبَيعِكُمُ الَّذي بايَعتُم بِهِ ۚ وَذٰلِكَ هُوَ الفَوزُ العَظيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ने ईमान वालों के प्राणों तथा उनके धनों को इसके बदले ख़रीद लिया है कि निश्चय उनके लिए जन्नत है। वे अल्लाह की राह में युद्ध करते हैं, तो वे क़त्ल करते हैं और क़त्ल किए जाते हैं। यह तौरात और इंजील और क़ुरआन में उसके ज़िम्मे पक्का वादा है और अल्लाह से बढ़कर अपना वादा पूरा करने वाला कौन है? तो अपने उस सौदे पर प्रसन्न हो जाओ, जो तुमने उससे किया है और यही बहुत बड़ी सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke Allah ne momino se unke nafs (jaan) aur unke maal jannat ke badle khareed liye hain, woh Allah ki raah mein ladte aur maarte aur marte hain. Unse (jannat ka wada) Allah ke zimme ek pukhta wada hai taurat (torah) aur injil aur quran mein. Aur kaun hai jo Allah se badhkar apne ahad ka pura karne wala ho? Pas khushiyan manao apne us saude (deal) par jo tumne khuda se chuka liya hai, yahi sabse badi kamiyabi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bila shuba Allah Taalaa ney musalmanon say unn ki janon ko aur unn kay maalon ko iss baat kay ewaz mein khareed liya hai kay unn ko jannat milay gi. Woh log Allah ki raah mein lartay hain jiss mein qatal kertay hain aur qatal kiye jatay hain iss per sacha wada kiya gaya hai toraat mein aur injeel mein aur quran mein aur Allah say ziyada apney ehad ko kaun poora kerney wala hai to tum log apni iss bey per jiss ka tum ney moamla thehraya hai khsuhi manao aur yeh bari kaamyabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है कि अल्लाह ने मोमिनो से उनके नफ़्स (जान) और उनके माल जन्नत के बदले ख़त्म लिए हैं, वो अल्लाह की राह में लड़ते और मरते हैं। उनसे (जन्नत का वादा) अल्लाह के ज़िम्मे एक पुख्ता वादा है तौरात (तोराह) और इंजील और कुरान में। और कौन है जो अल्लाह से बढ़कर अपने अहद का पूरा करने वाला हो? पस ख़ुशियाँ मनाओ अपने हमसे सौदा (सौदा) पर जो तुमने खुदा से चुका लिया है, यही सबसे बड़ी कामयाबी है
عَرَبِيالتّائِبونَ العابِدونَ الحامِدونَ السّائِحونَ الرّاكِعونَ السّاجِدونَ الآمِرونَ بِالمَعروفِ وَالنّاهونَ عَنِ المُنكَرِ وَالحافِظونَ لِحُدودِ اللَّهِ ۗ وَبَشِّرِ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(वे मोमिन) तौबा करने वाले, इबादत करने वाले, स्तुति करने वाले, रोज़ा रखने वाले, रुकू' करने वाले, सजदा करने वाले, भलाई का आदेश देने वाले, बुराई से रोकने वाले और अल्लाह की सीमाओं की रक्षा करने वाले हैं, और (ऐ नबी!) आप ऐसे मोमिनों को शुभ-सूचना दे दें।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki taraf baar baar palatne waley, uski bandagi baja laney walyy, uski tareef ke gun gaane waley , uski khatir zameen mein gardish karne waley, uske aagey ruku aur sajde karne waley, neki ka hukum dene waley, badi se roakne waley, aur Allah ke hudood ki hifazat karne waley, (is shaan ke hote hain woh momin jo Allah se khareed o farokht ka yeh maamla tai karte hain) aur (aey Nabi), in momino ko khush khabri de do
Roman Urdu (Junagarhi)Woh aisay hain jo tauba kerney walay ibadat kerney walay hamd kerney walay roza rakhney walay (yaa raah-e-haq mein safar kerney walay) rukoo aur sajda kerney walay nek baaton ki taleem kerney walay aur buri baaton say baaz rakhney walay aur Allah ki haddon ka khayal rakhney walay hain aur aisay momineen ko aap khushkhabri suna dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की तरफ बार-बार पलटने वाले, उसकी बंदगी बाजा लाने वाले, उसकी तारीफ के गुन गाने वाले, उसकी खातिर ज़मीन में गर्दिश करने वाले वाले, उसके आगे रुकू और सजदे करने वाले, नेकी का हुकुम देने वाले, बड़ी से रोकने वाले, और अल्लाह के हुदूद की हिफाजत करने वाले, (इस शान के होते हैं वो मोमिन जो अल्लाह से खत्म ओ फारोखत का ये मामला ताई करते हैं) और (ऐ नबी), में मोमिनो को खुश खबरी दे दो
عَرَبِيما كانَ لِلنَّبِيِّ وَالَّذينَ آمَنوا أَن يَستَغفِروا لِلمُشرِكينَ وَلَو كانوا أُولي قُربىٰ مِن بَعدِ ما تَبَيَّنَ لَهُم أَنَّهُم أَصحابُ الجَحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)नबी तथा ईमान वालों के लिए मुशरिकों के लिए क्षमा की प्रार्थना करना कदापि जायज़ नहीं है, भले ही वे रिश्तेदार ही क्यों न हों, जबकि उनके लिए यह स्पष्ट हो गया कि निश्चय वे जहन्नम में जाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Nabi ko aur un logon ko jo iman laye hain, zeba nahin hai ke mushrikon ke liye magfirat ki dua karein, chahe woh unke rishtedar hi kyun na hon, jabke unpar yeh baat khul chuki hai ke woh jahannum ke mustahiq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Payghumbar ko aur doosray musalmanon ko jaaez nahi kay mushrikeen kay liye maghfirat ki dua maangen agar cheh woh rishtay daar hi hon iss amar kay zahir ho janey kay baad kay yeh log dozakhi hain
Devnagri Urdu (Maududi)नबी को और उन लोगों को जो ईमान लाए हैं, ज़ेबा नहीं है के मुशरिकों के लिए मगफिरत की दुआ करें, चाहे वो उनके रिश्तेदार ही क्यों न हों, जबके अनपर ये बात खुल चुकी है के वो जहन्नुम के मुस्तहिक़ हैं
عَرَبِيوَما كانَ استِغفارُ إِبراهيمَ لِأَبيهِ إِلّا عَن مَوعِدَةٍ وَعَدَها إِيّاهُ فَلَمّا تَبَيَّنَ لَهُ أَنَّهُ عَدُوٌّ لِلَّهِ تَبَرَّأَ مِنهُ ۚ إِنَّ إِبراهيمَ لَأَوّاهٌ حَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और इबराहीम का अपने बाप के लिए क्षमा की प्रार्थना करना, केवल उस वादे के कारण था जो उसने उससे किया था, फिर जब उसके सामने स्पष्ट हो गया कि वह वास्तव में अल्लाह का शत्रु है, तो उसने अपने आपको उससे अलग कर लिया। निःसंदेह इबराहीम बड़ा कोमल हृदय, अत्यंत सहनशील था।
Roman Urdu (Maududi)Ibrahim ne apne baap ke liye jo dua e magfirat ki thi woh to us wadey ki wajah se thi jo usne apne baap se kiya tha, magar jab uspar yeh baat khul gayi ke uska baap khuda ka dushman hai to woh ussey bezar ho gaya. Haqq yeh hai ke Ibrahim bada raqeeq-ul-qalb (tender-hearted) o khuda tars aur burdbaar (Godfearing and forbearing) aadmi tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ibrahim (alh-e-salam) ka apney baap kay liye dua-e-maghfirat maangna woh sirf wada kay sabab say tha jo unhon ney uss say wada ker liya tha phir jab unn per yeh baat zahir hogaee kay woh Allah ka dushman hai to woh iss say mehaz mehaz bey talluq hogaye waqaee ibrahim (alh-e-salam) baray naram dil aur burd baar thay
Devnagri Urdu (Maududi)इब्राहिम ने अपने बाप के लिए जो दुआ ए मगफिरत की थी वो तो हमसे वादे की वजह से थी जो उसने अपने बाप से किया था, मगर जब उसपर ये बात खुल गई के उसका बाप खुदा का दुश्मन है तो वो उससे बेज़ार हो गया। हक़ ये है के इब्राहीम बड़ा रक़ीक़-उल-क़ल्ब (कोमल हृदय) ओ खुदा तरस और बर्दबार (ईश्वर से डरने वाला और सहनशील) आदमी था
عَرَبِيوَما كانَ اللَّهُ لِيُضِلَّ قَومًا بَعدَ إِذ هَداهُم حَتّىٰ يُبَيِّنَ لَهُم ما يَتَّقونَ ۚ إِنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह कभी ऐसा नहीं कि किसी जाति को सीधा मार्ग दिखाने के बाद पथभ्रष्ट कर दे, जब तक उनके लिए वे बातें स्पष्ट न कर दे, जिनसे वे बचें। निःसंदेह अल्लाह प्रत्येक वस्तु को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ka yeh tareeqa nahin hai ke logon ko hidayat dene ke baad phir gumraahi mein mubtala karey jab tak ke unhein saaf saaf bata na de ke unhein kin cheezon se bachna chahiye. Dar haqeeqat Allah har cheez ka ilm rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah aisa nahi kerta kay kissi qom ko hidayat ker kay baad mein gumrah kerdey jab tak kay unn cheezon ko saaf saaf na batla dey jin say woh bachen be-shak Allah Taalaa her cheez ko khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह का ये तरीक़ा नहीं है के लोगों को हिदायत देने के बाद फिर गुमराही में मुबतला करे जब तक के उन्हें साफ साफ बता ना दे के उन्हें किन चीज़ों से बचना चाहिए। दर हक़ीक़त अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ لَهُ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ يُحيي وَيُميتُ ۚ وَما لَكُم مِن دونِ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلا نَصيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ही है, जिसके अधिकार में आकाशों तथा धरती का राज्य है। वही जीवन देता और मारता है और तुम्हारे लिए अल्लाह के सिवा न कोई मित्र है और न कोई सहायक।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh bhi waqia hai ke Allah hi ke qabze mein aasmaan o zameen ki sultanat hai, usi ke ikhtiyar mein zindagi o maut hai, aur tumhara koi haami o madadgaar aisa nahin hai jo tumhein ussey bacha sakey
Roman Urdu (Junagarhi)Bila shuba Allah hi ki saltanat hai aasmanon aur zamin mein. Wohi jilata aur maarta hai aur tumhara Allah kay siwa na koi yaar hai aur na koi madadgar hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये भी वक़िया है के अल्लाह ही के क़ब्ज़े में आसमां ओ ज़मीन की सल्तनत है, उसके इख्तियार में जिंदगी ओ मौत है, और तुम्हारा कोई हमी ओ मददगार ऐसा नहीं है जो तुम्हें बचा सके
عَرَبِيلَقَد تابَ اللَّهُ عَلَى النَّبِيِّ وَالمُهاجِرينَ وَالأَنصارِ الَّذينَ اتَّبَعوهُ في ساعَةِ العُسرَةِ مِن بَعدِ ما كادَ يَزيغُ قُلوبُ فَريقٍ مِنهُم ثُمَّ تابَ عَلَيهِم ۚ إِنَّهُ بِهِم رَءوفٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ने नबी तथा मुहाजिरों और अंसार की तौबा क़बूल कर ली, जिन्होंने तंगी के समय नबी का साथ दिया, इसके बाद कि उनमें से एक समूह के दिल क़रीब थे कि टेढ़े हो जाएँ। फिर उसने उनकी क्षमायाचना क़बूल कर ली। निश्चय वह उनके लिए अति करुणामय, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne maaf kardiya Nabi ko aur un muhajireen o ansar ko jinhon ne badi tanggi ke waqt mein Nabi ka saath diya, agarche unmein se kuch logon ke dil kaji ki taraf mayil (swerved aside) ho chuke thay (magar jab unhon ne us kaji (croockedness) ka itteba na kiya balke Nabi ka saath hi diya to) Allah ne unhein maaf kardiya, beshak uska maamla in logon ke saath shafaqat o meharbani ka hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney payghumber kay haal per tawajja farmaee aur mohajreen aur ansaar kay haal per bhi jinhon ney aisi tangi kay waqt payghumbar ka sath diya iss kay baad kay inn mein say aik giroh kay dilon mein kuch tazalzul ho chala tha. Phir Allah ney unn kay haal per tawajja farmaee. Bila shuba Allah Taalaa inn sab per boht hi shafiq meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने माफ कर दिया नबी को और उन मुहाजिरीन ओ अंसार को जिन्हों ने बड़ी तंगी के वक्त में नबी का साथ दिया, अगरचे उनमें से कुछ लोगों के दिल काजी की तरफ मायिल हो चुके थे (मगर जब उन्होन ने उस काजी (कुटिलता) का इत्तेबा ना किया बलके नबी का साथ हाय दिया तो) अल्लाह ने उन्हें माफ कर दिया, उसका मामला लोगों के साथ शफाकत ओ मेहरबानी का है
عَرَبِيوَعَلَى الثَّلاثَةِ الَّذينَ خُلِّفوا حَتّىٰ إِذا ضاقَت عَلَيهِمُ الأَرضُ بِما رَحُبَت وَضاقَت عَلَيهِم أَنفُسُهُم وَظَنّوا أَن لا مَلجَأَ مِنَ اللَّهِ إِلّا إِلَيهِ ثُمَّ تابَ عَلَيهِم لِيَتوبوا ۚ إِنَّ اللَّهَ هُوَ التَّوّابُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन तीन लोगों की भी (तौबा क़बूल कर ली), जिनका मामला स्थगित कर दिया गया था, यहाँ तक कि जब धरती उनपर अपने विस्तार के बावजूद तंग हो गई और उनपर उनके प्राण संकीर्ण हो गए और उन्होंने यक़ीन कर लिया कि अल्लाह से भागकर उनके लिए कोई शरण लेने का स्थान नहीं, परंतु उसी की ओर। फिर उसने उनपर दया करते हुए उन्हें तौबा की तौफ़ीक़ दी, ताकि वे तौबा करें। निश्चय अल्लाह ही है जो बहुत तौबा क़बूल करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur un teeno ko bhi usne maaf kiya jinke maamle ko multawi(put off) kardiya gaya tha, jab zameen apni saari wusat (vastness) ke bawajood unpar tangg ho gayi aur unki apni jaanein bhi unpar baar honay lagi aur unhon ne jaan liya ke Allah se bachne ke liye koi jaaye panaah khud Allah hi ke daaman e rehmat ke siwa nahin hai, to Allah apni meharbani se unki taraf palta taa-ke woh uski taraf palat aayein. Yaqeenan woh bada maaf karne wala aur raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur teen shakson kay haal per bhi jin ka moamla multawee chor diya gaya tha. Yahan tak kay jab zamin ba-waajood apni farakhi kay unn per tang honey lagi aur woh khud apni jaan say tang aagaye aur unhon ney samajh liya kay Allah say kahin panah nahi mill sakti be-juz iss kay kay ussi ki taraf rujoo kiya jaye phir unn kay haal per tawajja farmaee takay woh aaeenda bhi toba ker saken. Be-shak Allah Taalaa boht toba qabool kerney wala aur bara reham wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और उन तीनो को भी उसने माफ़ किया जिनके मामले को मुल्तावी कर दिया गया था, जब ज़मीन अपनी साड़ी वुसैट (विशालता) के बावज़ूद अपर टैंग हो गई और उनकी अपनी जानेन भी उन्पर बार होने लगी और उन्होन ने जान लिया के अल्लाह से बचने के लिए कोई जाए पनाह खुद अल्लाह ही के दामन ए रहमत के सिवा नहीं है, अल्लाह के पास अपनी मेहरबानी से उनकी तरफ पलटा ता-के वो उसकी तरफ पलट आएं। यकीनन वो बड़ा माफ करने वाला और रहीम है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَكونوا مَعَ الصّادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान लाने वालो! अल्लाह से डरो तथा सच्चे लोगों के साथ हो जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, Allah se daro aur sachche logon ka saath do
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Allah Taalaa say daro aur sachon kay sath raho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो और सच्चे लोगों का साथ दो
عَرَبِيما كانَ لِأَهلِ المَدينَةِ وَمَن حَولَهُم مِنَ الأَعرابِ أَن يَتَخَلَّفوا عَن رَسولِ اللَّهِ وَلا يَرغَبوا بِأَنفُسِهِم عَن نَفسِهِ ۚ ذٰلِكَ بِأَنَّهُم لا يُصيبُهُم ظَمَأٌ وَلا نَصَبٌ وَلا مَخمَصَةٌ في سَبيلِ اللَّهِ وَلا يَطَئونَ مَوطِئًا يَغيظُ الكُفّارَ وَلا يَنالونَ مِن عَدُوٍّ نَيلًا إِلّا كُتِبَ لَهُم بِهِ عَمَلٌ صالِحٌ ۚ إِنَّ اللَّهَ لا يُضيعُ أَجرَ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)मदीना के वासियों तथा उनके आस-पास के देहातियों को अधिकार नहीं था कि अल्लाह के रसूल से पीछे रहते और न यह कि अपने प्राणों को आपके प्राण से प्रिय समझते। यह इसलिए कि वे अल्लाह की राह में जो भी प्यास और थकान तथा भूख की तकलीफ़ उठाते हैं और जिस स्थान पर भी क़दम रखते हैं, जो काफ़िरों के क्रोध को भड़काए और किसी शत्रु के मुक़ाबले में जो भी सफलता प्राप्त करते हैं, तो उनके लिए, उसके बदले में एक सत्कर्म लिख दिया जाता है। निश्चय अल्लाह सत्कर्म करने वालों का कर्मफल व्यर्थ नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Medina ke bashindon aur gird o nawah (dwelling around)ke badwiyon ko yeh hargiz zeba na tha ke Allah ke Rasool ko chodh kar ghar baith rehte aur uski taraf se be-parwa hokar apne apne nafs ki fikr mein lag jatey. Is liye ke aisa kabhi na hoga ke Allah ki raah mein bhook pyas aur jismani mushakkat ki koi takleef woh jhelein, aur munkireen haqq ko jo raah nagawar hai uspar koi qadam woh uthayein, aur kisi dushman se [adawat (dushmani) e haqq ka ) koi inteqam woh lein aur iske badle unke haqq mein ek amal-e-saleh na likha jaye. Yakeenan Allah ke haan mohsinon ka haqq ul khidmat maara nahin jata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Madinay kay rehney walon ko aur jo dehaati unn kay gird-o-paish mein hain unn ko yeh zaiba na tha kay rasool Allah ko chor ker peechay reh jayen aur na yeh kay apni jaan ko unn ki jaan say aziz samajhen yeh iss sabab say key inn ko Allah ki raah mein jo piyas lagi aur jo thakaan phonchi aur jo bhook lagi aur jo kissi aisi jagah chalay jo kuffaar kay liye mojib-e-ghaiz hua ho aur dushmanon ki jo kuch khabar li inn sab per inn kay naam (aik aik) nek kaam likh gaya. Yaqeenan Allah Taalaa mukhliseen ka ajar zaya nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)मदीना के बशिंदों और गिर्द ओ नवाह (आसपास रहने वाले)के बदवियों को ये हरगिज़ ज़ेबा ना था के अल्लाह के रसूल को छोड़ कर घर बैठे रहते और उसकी तरफ से बे-परवा होकर अपने-अपने नफ़्स की फ़िक्र में लग जाते। इस लिए ऐसा कभी न होगा के अल्लाह की राह में भूख प्यास और जिस्मानी मुशक्कत की कोई तकलीफ वो झेलें, और मुनकिरीन हक को जो राह नागवार है उसपर कोई कदम वो उठाएं, और किसी दुश्मन से [अदावत (दुश्मनी) ए हक का) कोई इंतकाम वो लें और इसके बदले उनके हक में एक अमल-ए-सालेह न लिखा जाए। यकीनन अल्लाह के हां मोहसिनों का हक़ उल खिदमत मारा नहीं जाता है
عَرَبِيوَلا يُنفِقونَ نَفَقَةً صَغيرَةً وَلا كَبيرَةً وَلا يَقطَعونَ وادِيًا إِلّا كُتِبَ لَهُم لِيَجزِيَهُمُ اللَّهُ أَحسَنَ ما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे थोड़ा या अधिक, जो भी खर्च करते हैं और जो भी घाटी पार करते हैं, उसे उनके हक़ में लिख लिया जाता है, ताकि अल्लाह उन्हें उसका सबसे अच्छा बदला दे, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Isi tarah yeh bhi kabhi na hoga ke (raah e khuda mein) thoda ya bahut koi kharch woh uthayein aur ( sai e jihad mein) koi waadi(valley) woh paar karein aur unke haqq mein isey likh na liya jaye taa-ke Allah unke is acche kaarname ka sila unhein ata karey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo kuch chota bara enhon ney kharach kiya aur jitney maidan inn ko tey kerney paray yeh sab bhi inn kay naam likha gaya takay Allah Taalaa inn kay kaamon ka achay say acha badla dey
Devnagri Urdu (Maududi)इसी तरह ये भी कभी न होगा के (राह ए खुदा में) थोड़ा या बहुत कोई खर्च वो उठायें और (साईं ए जिहाद में) कोई वादी (घाटी) वो पार करें और उनके हक़ में इसे लिख ना लिया जाए ता-के अल्लाह उनके इस अच्छे कारनामे का सिला उन्हें अता करे
عَرَبِي۞ وَما كانَ المُؤمِنونَ لِيَنفِروا كافَّةً ۚ فَلَولا نَفَرَ مِن كُلِّ فِرقَةٍ مِنهُم طائِفَةٌ لِيَتَفَقَّهوا فِي الدّينِ وَلِيُنذِروا قَومَهُم إِذا رَجَعوا إِلَيهِم لَعَلَّهُم يَحذَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और संभव नहीं कि ईमान वाले सब के सब निकल पड़ें, तो उनके हर गिरोह में से कुछ लोग क्यों न निकले, ताकि वे धर्म में समझ हासिल करें और ताकि वे अपने लोगों को डराएँ, जब वे उनके पास वापस जाएँ, ताकि वे बच जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh kuch zaroori na tha ke ehle iman sarey ke sarey hi nikal khade hotey, magar aisa kyun na hua ke unki aabadi ke har hissey mein se kuch log nikal kar aate aur deen ki samajh paida karte aur wapas jaa kar apne ilaqe ke bashindon (people) ko khabardaar karte taa-ke woh ( gair muslimana rawish se) parheiz karte
Roman Urdu (Junagarhi)Aur musalmanon ko yeh na chahaiye kay sab kay sab nikal kharay hon so aisa kiyon na kiya jaye kay inn ki her bari jamat mein say aik choti jamat jaya keray takay woh deen ki samajh boojh hasil keren aur takay yeh log apni qom ko jabkay woh inn kay pass aayen darayen takay woh darr jayen
Devnagri Urdu (Maududi)और ये कुछ जरूरी ना था के एहले ईमान सारे के सारे ही निकल खड़े होते, मगर ऐसा क्यों ना हुआ के उनकी आबादी के हर हिस्से में से कुछ लोग निकल कर आते और दीन की samajh भुगतान करते और वापस जा कर अपने इलाक़े के बाशिंदों (लोगों) को ख़बरदार करते ता-के वो (गैर मुस्लिमाना राविश से) परहेज़ करते
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا قاتِلُوا الَّذينَ يَلونَكُم مِنَ الكُفّارِ وَليَجِدوا فيكُم غِلظَةً ۚ وَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ مَعَ المُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वलो! काफ़िरों में से जो तुम्हारे क़रीब हैं, उनसे लड़ो और ज़रूरी है कि वे तुममें कुछ सख्ती पाएँ और जान लो कि अल्लाह परहेज़गारों के साथ है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, jung karo un munkireen e haqq se jo tumse qareeb hain aur chahiye ke woh tumhare andar sakhti payein, aur jaan lo ke Allah muttaqiyon ke saath hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walon! inn kuffaar say laro jo tumharay aas pass hain aur inn ko tumharay andar sakhti pana chahaiye aur yeh yaqeen rakho kay Allah Taalaa muttaqi logon kay sath hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जंग करो उन मुनकिरीन ए हक से जो तुमसे करीब हैं और चाहिए के वो तुम्हारे अंदर ताकत पाएं, और जान लो के अल्लाह मुत्तक़ियों के साथ हैं
عَرَبِيوَإِذا ما أُنزِلَت سورَةٌ فَمِنهُم مَن يَقولُ أَيُّكُم زادَتهُ هٰذِهِ إيمانًا ۚ فَأَمَّا الَّذينَ آمَنوا فَزادَتهُم إيمانًا وَهُم يَستَبشِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब भी कोई सूरत उतारी जाती है, तो इन (मुनाफ़िक़ों) में से कुछ लोग कहते हैं कि इसने तुममें से किसके ईमान को बढ़ायाॽ चुनाँचे जो लोग ईमान लाए, तो इसने उनके ईमान को बढ़ा दिया और वे बहुत खुश होते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab koi nayi surat nazil hoti hai to inmein se baaz log (mazaq ke taur par musalmaano se) puchte hain ke “ kaho, tum mein se kiske iman mein issey izafa hua?” (iska jawab yeh hai ke) jo log iman laye hain unke iman mein to fil-waqai ( har nazil hone wali surat ne) izafa hi kiya hai aur woh issey dilshad (rejoicing) hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab koi surat nazil ki jati hai to baaz munafiqeen kehtay hain kay iss surat ney tum mein say kiss kay eman ko ziyada kiya hai so log jo eman walay hain iss surat ney unn kay eman ko ziyada kiya hai aur woh khush horahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब कोई नई सूरत नाज़िल होती है तो इनमें से बाज़ लोग (मज़ाक के तौर पर मुसलमानो से) पूछते हैं के "कहो, तुम में से किसके ईमान में इसकी इज़ाफ़ा हुआ?" (इसका जवाब ये है के) जो लोग ईमान लाए हैं उनके ईमान में तो फिल-वकाई (हर नाज़िल होने वाली सूरत ने) इजाफा ही किया है और वो इसी दिलशाद (खुशी मना रहे हैं) हैं
عَرَبِيوَأَمَّا الَّذينَ في قُلوبِهِم مَرَضٌ فَزادَتهُم رِجسًا إِلىٰ رِجسِهِم وَماتوا وَهُم كافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और रहे वे लोग जिनके दिलों में रोग है, तो उसने उनकी अशुद्धता पर अशुद्धता को और बढ़ा दिया और वे इस अवस्था में मरे कि वे काफ़िर थे।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jin logon ke dilon ko (nifaq ka) rog laga hua tha unki saabiq najasat (filth) par (har nayi surat ne ) ek aur najasat(filth) ka izafa kardiya aur woh marte dum tak kufr hi mein mubtala rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin kay dilon mein rog hai iss surat ney unn mein unn ki gandagi kay sath aur gandagi barha di aur woh halat-e-kufur hi mein marr gaye
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जिन लोगों के दिलों को (निफाक का) रोग लगा हुआ था उनकी साबिक नजासत (गंदगी) पर (हर नई सूरत ने) एक और नजासत (गंदगी) का इजाफा करदिया और वो मरते दम तक कुफ्र ही में मुबतला रहे
عَرَبِيأَوَلا يَرَونَ أَنَّهُم يُفتَنونَ في كُلِّ عامٍ مَرَّةً أَو مَرَّتَينِ ثُمَّ لا يَتوبونَ وَلا هُم يَذَّكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और क्या वे नहीं देखते कि निःसंदेह वे प्रत्येक वर्ष एक या दो बार आज़माए जाते हैं? फिर भी वे न तौबा करते हैं और न ही वे उपदेश ग्रहण करते हैं!
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log dekhte nahin ke har saal do martaba yeh aazmaish mein daley jatey hain? Magar ispar bhi na tawba karte hain na koi sabaq (lesson) letey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kiya inn ko nahi dikhlaee deta kay yeh log her saal aik baar ya do baar kissi na kissi aafat mein phanstay rehtay hain phir bhi na toba kertay aur na naseehat qabool kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग देखते नहीं के हर साल दो मरतबा ये आजमाइश में डाले जाते हैं? मगर इसपर भी ना तौबा करते हैं ना कोई सबक (पाठ) लेते हैं
عَرَبِيوَإِذا ما أُنزِلَت سورَةٌ نَظَرَ بَعضُهُم إِلىٰ بَعضٍ هَل يَراكُم مِن أَحَدٍ ثُمَّ انصَرَفوا ۚ صَرَفَ اللَّهُ قُلوبَهُم بِأَنَّهُم قَومٌ لا يَفقَهونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब भी कोई सूरत उतारी जाती है, तो उनमें से कुछ एक-दूसरे की तरफ देखते हैं कि क्या तुम्हें कोई देख रहा है? फिर वे वापस पलट जाते हैं। अल्लाह ने उनके दिलों को फेर दिया है, क्योंकि निःसंदेह वे ऐसे लोग हैं जो नहीं समझते।
Roman Urdu (Maududi)Jab koi surat nazil hoti hai to yeh log aankhon hi aankhon mein ek dusre se baatein karte hain ke kahin koi tumko dekh to nahin raha hai, phir chupke se nikal bhaagte hain. Allah ne inke dil pher diye hain kyunke yeh na-samajh log hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab koi surat nazil ki jati hai to aik doosray ko dekhney lagtay hain kay tum ko koi dekhta to nahi phir chal detay hain Allah Taalaa ney inn ka dil pher diya hai iss waja say kay woh bey samajh log hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब कोई सूरत नाज़िल होती है तो ये लोग आंखें ही आंखों में एक दूसरे से बातें करते हैं कि कहीं कोई तुमको देख तो नहीं रहा है, फिर चुपके से निकल भागते हैं। अल्लाह ने इनके दिल फेर दिये हैं क्योंकि ये ना-समझ लोग हैं
عَرَبِيلَقَد جاءَكُم رَسولٌ مِن أَنفُسِكُم عَزيزٌ عَلَيهِ ما عَنِتُّم حَريصٌ عَلَيكُم بِالمُؤمِنينَ رَءوفٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुम्हारे पास तुम्हीं में से एक रसूल आया है। तुम्हारा कठिनाई में पड़ना उसपर बहुत कठिन है। वह तुम्हारे कल्याण के लिए अति उत्सुक है, ईमान वालों के प्रति बहुत करुणामय, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Dekho! Tum logon ke paas ek Rasool aaya hai jo khud tumhi mein se hai, tumhara nuqsan mein padhna uspar shaaq (giran/grievous) hai, tumhari falaah ka woh harees(greedily anxious) hai, iman laney walon ke liye woh shafeeq aur raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tumharay pass aik aisay payghumber tashreef laye hain jo tumhari jinss mein say hain jin per tumhari takleef boht hi dushwaar guzarti hai jo tumhari bhalaee kay khuwan hain. Jo musalmanon per baray hi shafiq aur meharban hain
Devnagri Urdu (Maududi)देखो! तुम लोगों के पास एक रसूल आया है जो खुद तुम्हारे अंदर से है, तुम्हारा नुक्सान में पढ़ना उसपर शाक़ (गिरान/गंभीर) है, तुम्हारी फलाह का वो हार (लालची से चिंतित) है, ईमान लाने वालों के लिए वो शफीक और रहीम है
عَرَبِيفَإِن تَوَلَّوا فَقُل حَسبِيَ اللَّهُ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۖ عَلَيهِ تَوَكَّلتُ ۖ وَهُوَ رَبُّ العَرشِ العَظيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि वे मुँह फेरें, तो कह दें कि मेरे लिए अल्लाह ही काफ़ी है। उसके सिवा कोई (वास्तविक) पूज्य नहीं, मैंने उसी पर भरोसा किया है, और वही बड़े अर्श का रब है।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar yeh log tumse mooh pherte hain to (aey Nabi), insey kehdo ke “ mere liye Allah bas karta hai (kafi hai/suffices me), koi mabood nahin magar woh, usi par maine bharosa kiya aur woh maalik hai arsh e azeem ka”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir agar roo gardaani keren to aap keh dijiye kay meray liya Allah kafi hai iss kay siwa koi mabood nahi. Mein ney issi per bharosa kiya aur woh baray arsh ka maalik hai
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर ये लोग तुमसे मुह फेरते हैं हैं तो (ऐ नबी), इनसे कहदो के "मेरे लिए अल्लाह बस करता है (काफी है/मुझे काफी है), कोई माबूद नहीं मगर वो, उस पर मैंने भरोसा किया और वो मालिक है अर्श ए अज़ीम का"
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Surah 9: Al-Bara'at / At-Taubah(The Immunity)

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Surah 9: Al-Bara'at / At-Taubah(The Immunity)

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Surah 9: Al-Bara'at / At-Taubah(The Immunity)

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Surah 9: Al-Bara'at / At-Taubah(The Immunity)

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Surah 9: Al-Bara'at / At-Taubah(The Immunity)

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Surah 10: Yunus (Jonah)

Meccan🕐 Revelation #51📜 109 Verses🕮 Juz 1
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Surah 10: Yunus (Jonah)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالر ۚ تِلكَ آياتُ الكِتابِ الحَكيمِ
हिन्दी (Al-Omari)अलिफ़, लाम, रा। ये पूर्ण हिकमत वाली किताब की आयतें हैं।
Roman Urdu (Maududi)Alif laam Raa, Yeh us kitab ki aayat hain jo hikmat o danish se labrez hai
Roman Urdu (Junagarhi)Alif-laam-raa ye pur hikmat kitab ki aayaten hain
Devnagri Urdu (Maududi)अलिफ़ लाम रा, ये उस किताब की आयतें हैं जो हिकमत ओ दानिश से लबरेज है
عَرَبِيأَكانَ لِلنّاسِ عَجَبًا أَن أَوحَينا إِلىٰ رَجُلٍ مِنهُم أَن أَنذِرِ النّاسَ وَبَشِّرِ الَّذينَ آمَنوا أَنَّ لَهُم قَدَمَ صِدقٍ عِندَ رَبِّهِم ۗ قالَ الكافِرونَ إِنَّ هٰذا لَساحِرٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या लोगों के लिए आश्चर्य की बात है कि हमने उनमें से एक व्यक्ति की ओर वह़्य (प्रकाशना) भेजी कि लोगों को डराए और उन लोगों को शुभ-सूचना दे, जो ईमान लाए हैं कि उनके लिए उनके पालनहार के पास उच्च स्थान है। काफ़िरों ने कहा : निःसंदेह यह तो खुला जादूगर है।
Roman Urdu (Maududi)Kya logon ke liye yeh ek ajeeb baat ho gayi hai ke humne khud unhi mein se ek aadmi ko ishara kiya ke (gaflat mein padey huey) logon ko chauka de aur jo maan lein unko khush khabri de de ke unke liye unke Rubb ke paas sachhi izzat o sarfarazi hai? (Kya yahi woh baat hai jispar) munkireen ne kaha ke yeh shaks to khula jaadugar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn logon ko iss baat say tajjub hua kay hum ney inn mein say aik shaks kay pass wahee bhej di kay sab aadmiyon ko daraiye aur jo eman ley aaye unn ko yeh khushkhabri suniye kay inn kay rab kay pass inn ko poora ajar-o-martaba milay ga. Kafiron ney kaha yeh shaks to bila shuba sareeh jadoogar hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या लोगों के लिए ये एक अजीब बात हो गई है कि हमने खुद उन्ही में से एक आदमी को इशारा किया के (गफलत में पड़े हुए) लोगों को चौका दे और जो मान लें उनको खुश खबरी दे दे उनके लिए उनके लिए रब के पास सच्ची इज़्ज़त ओ सरफ़राज़ी है? (क्या यही वो बात है जिसपर) मुनकिरीन ने कहा के ये शक्स तो खुला जादूगर है
عَرَبِيإِنَّ رَبَّكُمُ اللَّهُ الَّذي خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ في سِتَّةِ أَيّامٍ ثُمَّ استَوىٰ عَلَى العَرشِ ۖ يُدَبِّرُ الأَمرَ ۖ ما مِن شَفيعٍ إِلّا مِن بَعدِ إِذنِهِ ۚ ذٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُم فَاعبُدوهُ ۚ أَفَلا تَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुम्हारा पालनहार अल्लाह ही है, जिसने आकाशों तथा धरती को छह दिनों में पैदा किया, फिर अर्श (सिंहासन) पर बुलंद हुआ। वह हर चीज़ की व्यवस्था चला रहा है। कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं परंतु उसकी अनुमति के बाद। वही अल्लाह तुम्हारा पालनहार है, अतः उसी की इबादत करो। क्या तुम उपदेश ग्रहण नहीं करतेॽ
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke tumahra Rubb wahi khuda hai jisne aasmano aur zameen ko chey (six) dino mein paida kiya, phir takht e hukumat par jalwa-gar hua aur qayinat ka intezaam chala raha hai. Koi shafaat (sifarish) karne wala nahin illa yeh ke iski ijazat ke baad shafaat karey. Yahi Allah tumhara Rubb hai lihaza tum usi ki ibadat karo. Phir kya tum hosh mein na aaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Bila shuba tumhara rab Allah hi hai jiss ney aasmanon aur zamin ko cheh roz mein peda ker diya phir arsh per qaeem hua woh her kaam ki tadbeer kerta hai. Uss ki ijazat kay baghair koi uss kay pass sifarish kerney wala nahi aisa Allah tumhara rab hai so tum uss ki ibadat kero kiya tum phir bhi nasihat nahi pakartay
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के तुम्हारा रब वही खुदा है जिसने आसमान और ज़मीन को छे (छह) दिनों में पेदा किया, फिर तख्त ए हुकुमत पर जलवा-गर हुआ और कायनात का इंतेज़ाम चल रहा है। कोई शफाअत (सिफारिश) करने वाला नहीं इल्ला ये के इसकी इजाजत के बाद शफाअत करे। याही अल्लाह तुम्हारा रब्ब है लिहाज़ा तुम उसकी इबादत करो। फिर क्या तुम होश में न आओगे
عَرَبِيإِلَيهِ مَرجِعُكُم جَميعًا ۖ وَعدَ اللَّهِ حَقًّا ۚ إِنَّهُ يَبدَأُ الخَلقَ ثُمَّ يُعيدُهُ لِيَجزِيَ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ بِالقِسطِ ۚ وَالَّذينَ كَفَروا لَهُم شَرابٌ مِن حَميمٍ وَعَذابٌ أَليمٌ بِما كانوا يَكفُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम सब को उसी की ओर लौटना है। यह अल्लाह का सच्चा वादा है। निःसंदेह वही रचना का आरंभ करता है, फिर उसे दोबारा पैदा करेगा, ताकि उन लोगों को न्याय के साथ बदला दे, जो ईमान लाए और अच्छे कर्म किए। तथा जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उनके लिए खौलते हुए जल का पेय और दर्दनाक यातना है, उसके बदले जो वे कुफ़्र किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Usi ki taraf tum sabko palat kar jana hai. Yeh Allah ka pakka wada hai. Beshak paidaish ki ibteda wahi karta hai, phir wahi dobara paida karega, taa-ke jo log iman laye aur jinhon ne neik aamaal kiye unko poorey insaf ke saath jaza de, aur jinhon ne kufr ka tareeqa ikhtiyar kiya woh khaulta(boiling) hua pani piyein aur dardnaak saza bhugtein us inkar e haqq ke padash mein jo woh karte rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Tum sab ko Allah hi kay pass jana hai Allah ney sacha wada ker rakha hai. Be-shak wohi pehli baar bhi peda kerta hai phir wohi doobara bhi peda keray ga takay aisay logon ko jo kay eman laye aur unhon ney nek kaam kiye insaf kay sath jaza dey aur jin logon ney kufur kiya unn kay wastay kholta hua pani peenay ko milay ga aur dard naak azab hoga unn kay kufur ki waja say
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी तरफ तुम सबको पलट कर जाना है। ये अल्लाह का पक्का वादा है. बेशक पैदाइश की इब्तेदा वही करता है, फिर वही दोबारा पैदा करेगा, ता-के जो लोग ईमान लाये और जिन्होन ने नीक अमाल किये उनको पूरे इन्साफ के साथ जजा दे, और जिन्होन ने कुफ्र का तरीक़ा इख्तियार किया वो खौलता (उबलता हुआ) हुआ पानी पियें और दर्दनाक साज़ा भुगतानें हमें इंकार ए हक के पद में जो वो करते रहे
عَرَبِيهُوَ الَّذي جَعَلَ الشَّمسَ ضِياءً وَالقَمَرَ نورًا وَقَدَّرَهُ مَنازِلَ لِتَعلَموا عَدَدَ السِّنينَ وَالحِسابَ ۚ ما خَلَقَ اللَّهُ ذٰلِكَ إِلّا بِالحَقِّ ۚ يُفَصِّلُ الآياتِ لِقَومٍ يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है जिसने सूर्य को ज्योति तथा चाँद को प्रकाश बनाया और उस (चाँद) की मंज़िलें निर्धारित कीं, ताकि तुम वर्षों की गिनती तथा हिसाब जान सको। अल्लाह ने इन सब को सत्य के साथ बनाया है। वह उन लोगों के लिए निशानियों को खोलकर बयान करता है, जो जानते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jisne Suraj ko ujyala banaya aur chand ko chamak di aur chand ke ghatne badhne ki manzilein theek theek muqarrar kardi taa-ke tum ussey barason (years) aur tareekhon ke hisaab maloom karo. Allah ne yeh sab kuch (khel ke taur par nahin balke) ba-maqsad hi banaya hai. Woh apni nishaniyoun ko khol khol kar pesh kar raha hai un logon ke liye jo ilm rakhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh Allah Taalaa aisa hai jiss ney aftab ko chamakta hua banaya aur chand ko noorani banaya aur uss kay liye manzilen muqarrar kin takay tum barson ki ginti aur hisab maloom ker liya kero. Allah Taalaa ney yeh cheezen bey faeeda nahi peda kin. Woh yeh dalaeel unn ko saaf saaf batla raha hai jo danish rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिसने सूरज को उजियाला बनाया और चांद को चमक दी और चांद के घटने बढ़ने की मंजिलें ठीक ठीक मुकर्रर करदी ता-के तुम हमें बरसों (साल) और तारीखों के हिसाब मालूम करो। अल्लाह ने ये सब कुछ (खेल के तौर पर नहीं बलके) ब-मकसद ही बनाया है। वो अपनी निशानियों को खोल खोल कर पेश कर रहा है उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं
عَرَبِيإِنَّ فِي اختِلافِ اللَّيلِ وَالنَّهارِ وَما خَلَقَ اللَّهُ فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ لَآياتٍ لِقَومٍ يَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह रात और दिन के एक-दूसरे के बाद आने में और उन चीज़ों में जो अल्लाह ने आकाशों तथा धरती में पैदा की हैं, निश्चय उन लोगों के लिए निशानियाँ हैं, जो अल्लाह का डर रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan raat aur din ke ulat pher mein aur har us cheez mein jo Allah ne zameen aur aasmano mein paida ki hai, nishaniyan hain un logon ke liye jo (galat beeni o galat rawi se) bachna chahte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Bila shuna raat aur din kay yakay baad deegray aaney mein aur Allah Taalaa ney jo kuch aasmanon aur zamin mein peda kiya hai inn sab mein unn logon kay liye dalaeel hain jo Allah ka darr rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन रात और दिन के उलट फेर में और हर उस चीज़ में जो अल्लाह ने ज़मीन और आसमान में पैदा की है, निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो (गलत बनी ओ) गलत रावी से) बचना चाहते हैं
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ لا يَرجونَ لِقاءَنا وَرَضوا بِالحَياةِ الدُّنيا وَاطمَأَنّوا بِها وَالَّذينَ هُم عَن آياتِنا غافِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग हमसे मिलने की आशा नहीं रखते और वे सांसारिक जीवन से प्रसन्न हो गए तथा उसी से संतुष्ट हो गए और वे लोग जो हमारी निशानियों से असावधान हैं।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke jo log humse milne ki tawaqqu (umeed) nahin rakhte aur duniya ki zindagi hi par razi aur mutmaeen ho gaye hain, aur jo log hamari nishaniyon se gafil hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ko humaray pass aaney ka yaqeen nahi hai aur woh dunyawi zindagi per razi hogaye hain aur iss mein ji laga bethay hain aur jo log humari aayaton say ghafil hain
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के जो लोग हमसे मिलने की तवाक्कु (उम्मीद) नहीं रखते और दुनिया की जिंदगी ही पर राजी और मुतमईन हो गए हैं, और जो लोग हमारी निशानियों से गाफिल हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ مَأواهُمُ النّارُ بِما كانوا يَكسِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही लोग हैं जिनका ठिकाना जहन्नम है, उसके बदले जो वे कमाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Unka aakhri thikana jahannum hoga un buraiyon ki padash mein jinka iktisab woh (apne is galat aqeede aur galat tarz-e-amal ki wajah se) karte rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Aisay logon ka thikana unn kay aemaal ki waja say dozakh hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनका आखिरी ठिकाना जहन्नुम होगा उन बुराइयों की याद में जिनका इकतिसाब वो (अपने इस गलत अकीदत और गलत तर्ज-ए-अमल की वजह से) करते रहें
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ يَهديهِم رَبُّهُم بِإيمانِهِم ۖ تَجري مِن تَحتِهِمُ الأَنهارُ في جَنّاتِ النَّعيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, उनका पालनहार उनके ईमान के कारण उनका मार्गदर्शन करेगा, उनके नीचे नेमत के बाग़ों में नहरें बहती होंगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh bhi haeeqat hai ke jo log iman laye (yani jinhon ne un sadaqaton ko qabool karliya jo is kitab mein pesh ki gayi hain) aur neik amal karte rahey unhein unka Rubb unke iman ki wajah se seedhi raah chalayega. Niyamat bhari jannaton mein unke nichey nehrein bahengi
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan jo log eman laye aur unhon ney nek kaam kiye unn ka rab unn ko unn kay eman kay sabab unn kay maqsad tak phoncha dey ga nemat kay baghon mein jin key neechay nehren jari hongi
Devnagri Urdu (Maududi)और ये भी हकीकत है के जो लोग ईमान लाए (यानी जिन्हों ने उन सदकातों को कबूल किया जो इस किताब में पेश की गई हैं) और नेक अमल करते रहे उन्हें उनका रब उनके ईमान की वजह से सीधी राह चलाएगा। नियामत भारी जन्नतों में उनके आला नेहरें बहेंगी
عَرَبِيدَعواهُم فيها سُبحانَكَ اللَّهُمَّ وَتَحِيَّتُهُم فيها سَلامٌ ۚ وَآخِرُ دَعواهُم أَنِ الحَمدُ لِلَّهِ رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनमें उनकी प्रार्थना यह होगी : ''ऐ अल्लाह! तू पवित्र है।'' और उनमें उनका अभिवादन 'सलाम' होगा, और उनकी प्रार्थना का अंत यह होगा कि : ''सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सारे संसारों का पालनहार है।''
Roman Urdu (Maududi)Wahan unki sada(pukar/awaz) yeh hogi ke “paak hai tu aey khuda”, unki dua yeh hogi ke “salamati ho: aur unki har baat ka khatma is par hoga ke “saari tareef Allah Rabbul Aalameen hi ke liye hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay mun say yeh baat niklay gi “ subhan Allah ” aur unn ka bahumi salam yeh hoga “Assalam-o-alaikum” aur unn ki akheer baat yeh hogi tamam tareefen Allah kay liye hain jo saray jahaan ka rab hai
Devnagri Urdu (Maududi)वहां उनकी सदा (पुकार/आवाज़) ये होगी के "पाक है तू ऐ खुदा", उनकी दुआ ये होगी के "सलामती हो: और उनकी हर बात का खात्मा इस पर होगा के "सारी तारीफ अल्लाह रब्बुल आलमीन ही के लिए है"
عَرَبِي۞ وَلَو يُعَجِّلُ اللَّهُ لِلنّاسِ الشَّرَّ استِعجالَهُم بِالخَيرِ لَقُضِيَ إِلَيهِم أَجَلُهُم ۖ فَنَذَرُ الَّذينَ لا يَرجونَ لِقاءَنا في طُغيانِهِم يَعمَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अगर अल्लाह लोगों को बुराई जल्दी दे दे, उन्हें बहुत जल्दी भलाई प्रदान करने की तरह, तो निश्चय उनकी ओर उनकी अवधि पूरी कर दी जाए। (किंतु) हम उन लोगों को जो हमसे मिलने की आशा नहीं रखते, उनकी सरकशी ही में भटकता हुआ छोड़ देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Agar kahin Allah logon ke saath bura maamla karne mein bhi itni hi jaldi karta jitni woh duniya ki bhalayi maangne mein jaldi karte hain to unki mohlat e amal kabhi ki khatam kardi gayi hoti, (magar hamara yeh tareeqa nahin hai). Is liye hum un logon ko jo humse milne ki tawaqqu nahin rakhte unki sarkashi mein bhatakne ke liye chooth de detay hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar Allah logon per jaldi say nuksan waaqay ker diya kerta jiss tarah woh faeeday kay liye jaldi machatay hain to unn ka wada kabhi ka poora ho chuka hota. So hum unn logon ko jin ko humaray pass aaney ka yaqeen nahi hai unn kay haal per chor rakhtay hain kay apni sirkashi mein bhataktay rahen
Devnagri Urdu (Maududi)अगर कहीं अल्लाह लोगों के साथ बुरा मामला करने में भी इतनी ही जल्दी करता जितनी वो दुनिया की भलाई मांगे में जल्दी करते हैं तो उनकी मोहलत और अमल कभी की खत्म हो जाती है, (मगर हमारा ये तरीका नहीं है)। मिलने की तवक्कु नहीं रखते उनकी सरकशी में भटकने के लिए चोट दे देते हैं
عَرَبِيوَإِذا مَسَّ الإِنسانَ الضُّرُّ دَعانا لِجَنبِهِ أَو قاعِدًا أَو قائِمًا فَلَمّا كَشَفنا عَنهُ ضُرَّهُ مَرَّ كَأَن لَم يَدعُنا إِلىٰ ضُرٍّ مَسَّهُ ۚ كَذٰلِكَ زُيِّنَ لِلمُسرِفينَ ما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब मनुष्य को कोई दुःख पहुँचता है, तो अपने पहलू पर, या बैठा हुआ या खड़ा हुआ हमें पुकारता है। फिर जब हम उससे उसका दुःख दूर कर देते हैं, तो ऐसे चल देता है, जैसे उसने हमें किसी दुःख के पहुँचने पर पुकारा ही नहीं। इसी प्रकार सीमा से आगे बढ़ने वालों के लिए शोभित कर दिया गया, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Insan ka haal yeh hai ke jab uspar koi sakht waqt aata hai to khade aur baithey aur letay (lying) humko pukarta hai, magar jab hum uski museebat taal dete hain to aisa chal naikalta hai ke goya usne kabhi apne kisi buray waqt par humko pukara hi na tha. Is tarah hadd se guzar janey walon ke liye unke kartoot khushnuma bana diye gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab insan ko koi takleef phonchti hai to hum ko pukarta hai letay bhi bethay bhi kharay bhi. Phir jab hum uss ki takleef uss say hata detay hain to woh aisa hojata hai kay goya uss ney apni takleef kay liye jo ussay phonchi thi kabhi humen pukara hi na tha inn hadd say guzarney walon kay aemaal ko unn kay liye issi tarah khushnuma bana diya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)इंसान का हाल ये है कि जब उसपर कोई सख्त वक्त आता है तो खड़े और बैठे और लेते हैं (झूठ बोलकर) हमको पुकारता है, मगर जब हम उसकी मुसीबत टाल देते हैं तो ऐसा चल नायकलता है कि गोया उसने कभी अपने किसी बुरे वक्त पर हमको पुकारा ही ना था। इस तरह हद से गुज़र जाने वालों के लिए उनके करतूत ख़ुशनुमा बना दिए गए हैं
عَرَبِيوَلَقَد أَهلَكنَا القُرونَ مِن قَبلِكُم لَمّا ظَلَموا ۙ وَجاءَتهُم رُسُلُهُم بِالبَيِّناتِ وَما كانوا لِيُؤمِنوا ۚ كَذٰلِكَ نَجزِي القَومَ المُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने तुमसे पहले बहुत-से समुदायों को विनष्ट कर दिया, जब उन्होंने अत्याचार किया। हालाँकि उनके रसूल उनके पास खुली निशानियाँ लेकर आए थे, परंतु वे ऐसे नहीं थे कि ईमान लाते। इसी प्रकार हम अपराधी लोगों को बदला दिया करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Logon, Tumse pehle ki qaumon ko ( jo apne apne zamane mein bar sar e urooj thi) humne halaak kardiya jab unhon ne zulm ki rawish ikhtiyar ki aur unke Rasool unke paas khuli khuli nishaniyan lekar aaye aur unhon ne iman laa kar hi na diya. Is tarah hum mujreemon ko unke jarayim (crime) ka badla diya karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney tum say pehlay boht say girohon ko halak ker diya jabkay unhon ney zulm kiya halankay unn kay pass unn kay payghumber bhi dalaeel ley ker aaye aur woh aisay kab thay kay eman ley aatay? Hum mujrim logon ko aisi hi saza diya kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन, तुमसे पहले की क़ौमों को (जो अपने अपने ज़माने में बार सर ई उरूज थी) हमने हलाक कर दिया जब उन्होन ने जुल्म की रवीश इख्तियार की और उनके रसूल उनके पास खुली खुली निशानियां लेकर आये और उन्होन ने ईमान ला कर ही ना दिया। इस तरह हम मुजरिमों को उनके जरायम (अपराध) का बदला दिया करते हैं
عَرَبِيثُمَّ جَعَلناكُم خَلائِفَ فِي الأَرضِ مِن بَعدِهِم لِنَنظُرَ كَيفَ تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उनके बद हमने तुम्हें धरती में उत्तराधिकारी बनाया, ताकि हम देखें कि तुम कैसे कार्य करते हो?
Roman Urdu (Maududi)Ab unke baad humne tumko zameen mein unki jagah di hai taa-ke dekhein tum kaise amal karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Phir unn kay baad hum ney duniya mein bajaye unn kay tum ko janasheen kiya takay hum dekh len kay tum kiss tarah kaam kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)अब उनके बाद हमने तुमको ज़मीन में उनकी जगह दी है ता-के देखें तुम कैसे अमल करते हो
عَرَبِيوَإِذا تُتلىٰ عَلَيهِم آياتُنا بَيِّناتٍ ۙ قالَ الَّذينَ لا يَرجونَ لِقاءَنَا ائتِ بِقُرآنٍ غَيرِ هٰذا أَو بَدِّلهُ ۚ قُل ما يَكونُ لي أَن أُبَدِّلَهُ مِن تِلقاءِ نَفسي ۖ إِن أَتَّبِعُ إِلّا ما يوحىٰ إِلَيَّ ۖ إِنّي أَخافُ إِن عَصَيتُ رَبّي عَذابَ يَومٍ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उन्हें हमारी स्पष्ट आयतें सुनाई जाती हैं, तो जो लोग हमसे मिलने की आशा नहीं रखते, वे कहते हैं : "इसके अलावा कोई और क़ुरआन ले आओ, या इसे बदल दो।" कह दो : मेरे लिए यह संभव नहीं है कि मैं इसे अपनी ओर से बदल दूँ। मैं तो केवल उसी का पालन करता हूँ, जो मेरी ओर वह़्य की जाती है। निःसंदेह, यदि मैं अपने पालनहार की अवज्ञा करूँ, तो मुझे एक बड़े दिन की यातना का डर है।
Roman Urdu (Maududi)Jab unhein hamari saaf saaf baatein sunayi jati hain to woh log jo humse milne ki tawaqqu nahin rakhte, kehte hain ke “iske bajaye koi aur Quran lao ya is mein kuch tarmeem (changes) karo. (Aey Muhammad), insey kaho “ mera yeh kaam nahin hai ke apni taraf se is mein koi taghayyur o tabaddul karloon. Main to bas us wahee ka pairo(follower) hoon jo mere paas bheji jati hai. Agar main apne Rubb ki nafarmani karoon to mujhey ek baday haulnaak din ke azaab ka darr hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab inn kay samney humari aayaten parhi jati hain jo bilkul saaf saaf hain to yeh log jin ko humaray pass aaney ki umeed nahi hai yun kehtay hain kay iss kay siwa koi doosra quran layiye ya iss mein kuch tarmeem ker dijiye. Aap keh dijiye kay mujhay yeh haq nahi kay mein apni taraf say iss mein tarmeem kerdoon bus mein to issi ki ittabaa keroon ga jo meray pass wahee kay zariye say phoncha hai agar mein apney rab ki na farmani keroon to mein aik baray din kay azab ka andesha rakhta hun
Devnagri Urdu (Maududi)जब उन्हें हमारी साफ-साफ बातें सुनाई जाती हैं तो वो लोग जो हमसे मिलने की बात करते हैं तवक्कू नहीं रखते, कहते हैं "इस्के बजाये कोई और कुरान लाओ या इस में कुछ तरमीम (परिवर्तन)" करो। (ऐ मुहम्मद), इंसे कहो "मेरा ये काम नहीं है के अपनी तरफ से इस में कोई तगय्युर ओ तबद्दुल कार्लून। मैं तो बस हमें वही का पेयरो (फॉलोअर) हूं जो मेरे पास भेजती है। अगर मैं अपने रब की नफ़रमानी करूं तो मुझे एक बड़ा मुश्किल दिन के अज़ाब का डर है"
عَرَبِيقُل لَو شاءَ اللَّهُ ما تَلَوتُهُ عَلَيكُم وَلا أَدراكُم بِهِ ۖ فَقَد لَبِثتُ فيكُم عُمُرًا مِن قَبلِهِ ۚ أَفَلا تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : यदि अल्लाह चाहता, तो मैं तुम्हें इसे पढ़कर न सुनाता और न वह तुम्हें इसकी ख़बर देता। फिर निःसंदेह मैं इससे पहले तुम्हारे बीच जीवन की एक अवधि व्यतीत कर चुका हूँ। तो क्या तुम नहीं समझतेॽ
Roman Urdu (Maududi)Aur kaho “agar Allah ki mashiyat na hoti to main yeh Quran tumhein kabhi na sunata aur Allah tumhein iski khabar tak na deta. Aakhir issey pehle main ek umar tumhare darmiyan guzaar chuka hoon. Kya tum aqal se kaam nahin letey
Roman Urdu (Junagarhi)Aap yun keh dijiye kay agar Allah ko manzoor hota to na to mein tum ko woh parh ker sunata aur na Allah Taalaa tum ko iss ki itlaa deta kiyon kay mein iss say pehlay to aik baray hissay umar tak mein tum mein reh chuka hun. Phir kiya tum aqal nahi rakhtay
Devnagri Urdu (Maududi)और कहो "अगर अल्लाह की मशियत न होती तो मैं ये कुरान तुम्हें कभी न सुनाता और अल्लाह तुम्हें इसकी खबर तक न देता। आखिर इस पहले मैं एक उमर तुम्हारे दरमियान गुजार चुका हूं। क्या तुम अक्ल से काम नहीं लेते
عَرَبِيفَمَن أَظلَمُ مِمَّنِ افتَرىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَو كَذَّبَ بِآياتِهِ ۚ إِنَّهُ لا يُفلِحُ المُجرِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उससे बढ़कर अत्याचारी कौन होगा, जो अल्लाह पर झूठा आरोप लगाए अथवा उसकी आयतों को झुठलाएॽ निःसंदेह अपराधी लोग सफल नहीं होते।
Roman Urdu (Maududi)Phir ussey badhkar zalim aur kaun hoga jo ek jhooti baat ghadh kar Allah ki taraf mansooq karey ya Allah ki waqai aayat ko jhoot qarar de? Yaqeenan mujreem kabhi falaah nahin paa sakte”
Roman Urdu (Junagarhi)So uss shaks say ziyada kaun zalim hoga jo Allah per jhoot bandhay ya uss ki aayaton ko jhoota batlaye yaqeenan aisay mujrimon ko aslan falah na hogi
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उससे बढ़कर जालिम और कौन होगा जो एक झूठी बात गड़बड़ कर अल्लाह की तरफ़ इंसान करे या अल्लाह की वक़ाई आयत को झूठ करार दे? यक़ीनन मुजरिम कभी फलाह नहीं पा सकते”
عَرَبِيوَيَعبُدونَ مِن دونِ اللَّهِ ما لا يَضُرُّهُم وَلا يَنفَعُهُم وَيَقولونَ هٰؤُلاءِ شُفَعاؤُنا عِندَ اللَّهِ ۚ قُل أَتُنَبِّئونَ اللَّهَ بِما لا يَعلَمُ فِي السَّماواتِ وَلا فِي الأَرضِ ۚ سُبحانَهُ وَتَعالىٰ عَمّا يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे लोग अल्लाह को छोड़कर उनको पूजते हैं, जो न उन्हें कोई हानि पहुँचाते हैं और न उन्हें कोई लाभ पहुँचाते हैं और कहते हैं कि ये लोग अल्लाह के यहाँ हमारे सिफ़ारिशी हैं। आप कह दें : क्या तुम अल्लाह को ऐसी बात की सूचना दे रहे हो, जिसे वह न आकाशों में जानता है और न धरती में? वह पवित्र है और उससे बहुत ऊँचा है, जिसे वे साझीदार ठहराते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log Allah ke siwa unki parastish kar rahey hain jo inko na nuksaan pahuncha sakte hain na nafaa (faiyda), aur kehte yeh hain ke yeh Allah ke haan hamare sifarishi hain. (Aey Muhammad), insey kaho “kya tum Allah ko us baat ki khabar dete ho jisey woh na aasmano mein jaanta hai na zameen mein?” Paak hai woh aur baala o bartar hai us shirk se jo yeh log karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh log Allah kay siwa aisi cheezon ki ibadat kertay hain jo na unn ko zarrar phoncha saken aur na unn ko nafa phoncha saken aur kehtay hain kay yeh Allah kay pass humaray sifarshi hain. Aap keh dijiye kay kiya tum Allah ko aisi cheez ki khabar detay ho jo Allah Taalaa ko maloom nahi na aasmanon mein aur na zamin mein woh pak aur bartar hai inn logon kay shirk say
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग अल्लाह के सिवा उनकी परस्ती कर रहे हैं जो इनको न नुक्सान पहुंचा सकते हैं न नफा (फ़ैयदा), और कहते ये हैं के ये अल्लाह के सिवा हमारे सिफ़ारिश हैं। (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो "क्या तुम अल्लाह को हमारी बात बताते हो जैसे वो ना आसमानों में जानता है ना ज़मीन में?" पाक है वो और बाला ओ बारतार है उस शिर्क से जो ये लोग करते हैं
عَرَبِيوَما كانَ النّاسُ إِلّا أُمَّةً واحِدَةً فَاختَلَفوا ۚ وَلَولا كَلِمَةٌ سَبَقَت مِن رَبِّكَ لَقُضِيَ بَينَهُم فيما فيهِ يَختَلِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा लोग एक ही समुदाय थे, फिर वे अलग-अलग हो गए और यदि वह बात न होती जो तुम्हारे पालनहार की ओर से पहले ही निश्चित हो चुकी, तो उनके बीच उसके बारे में अवश्य फ़ैसला कर दिया जाता, जिसमें वे विभेद कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ibtedaan (initially) sarey Insaan ek hi ummat thay, baad mein unhon ne mukhtalif aqeede aur maslak bana liye. Aur agar tere Rubb ki taraf se pehle hi ek baat tai na karli gayi hoti to jis cheez mein woh baham ikhtilaf kar rahey hain uska faisla kar diya jata
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tamam log aik hi ummat kay thay phir unhon ney ikhtilaf peda ker liya aur agar aik baat na hoti jo aap kay rab ki taraf say pehlay thehar chuki hai to jiss cheez mein yeh log ikhtilaf ker rahey hain unn ka qataee faisla ho chuka hota
Devnagri Urdu (Maududi)इब्तेदान (शुरुआत में) सारे इंसान एक ही उम्मत थी, बाद में उन्होन ने मुख्तलिफ अकीदे और मसलक बना लिया। और अगर तेरे रब की तरफ से पहले ही एक बात ताई ना करली गई होती तो जिस चीज में वो बहम इख्तिलाफ कर रहे हैं उसका फैसला कर दिया जाता
عَرَبِيوَيَقولونَ لَولا أُنزِلَ عَلَيهِ آيَةٌ مِن رَبِّهِ ۖ فَقُل إِنَّمَا الغَيبُ لِلَّهِ فَانتَظِروا إِنّي مَعَكُم مِنَ المُنتَظِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे कहते हैं कि उसपर उसके पालनहार की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं उतारी गईॽ आप कह दें : परोक्ष (का ज्ञान) तो केवल अल्लाह के पास है। अतः तुम प्रतीक्षा करो, मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करने वालों में से हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh jo woh kehte hain ke is Nabi par uske Rubb ki taraf se koi nishani kyun na utari gayi, to unse kaho “gaib ka malik o mukhtar to Allah hi hai. Accha , intezar karo , main bhi tumhare saath intezar karta hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh log yun kehtay hain kay inn per inn kay rab ki janib say koi nishani kiyon nahi nazil hoti? So aap farma dijiye kay ghaib ki khabar sirf Allah ko hai so tum bhi muntazir raho mein bhi tumharay sath munatazir hun
Devnagri Urdu (Maududi)और ये जो वो कहते हैं के इस नबी पर उसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों न उतारी गई, तो उनसे कहो "गैब का मालिक ओ मुख्तार तो अल्लाह ही है। अच्छा, इंतजार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतजार करता हूं"
عَرَبِيوَإِذا أَذَقنَا النّاسَ رَحمَةً مِن بَعدِ ضَرّاءَ مَسَّتهُم إِذا لَهُم مَكرٌ في آياتِنا ۚ قُلِ اللَّهُ أَسرَعُ مَكرًا ۚ إِنَّ رُسُلَنا يَكتُبونَ ما تَمكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब हम लोगों को उनके किसी तकलीफ़ में पड़ने के बाद कोई दया चखाते हैं, तो अचानक उनके लिए हमारी आयतों के बारे में कोई न कोई चाल होती है। कह दें कि अल्लाह अधिक तेज़ उपाय करने वाला है। निःसंदेह हमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते) लिख रहे हैं, जो तुम चाल चलते हो।
Roman Urdu (Maududi)Logon ka haal yeh hai ke museebat ke baad jab hum unko rehmat ka maza chakhate hain to fawran hi woh hamari nishaniyon ke mamle mein chaal baaziyan shuru kardete hain. Insey kaho “Allah apni chaal mein tumse zyada teiz hai, uske Farishte tumhari sab makkariyon ko kalam-bandh (recording) kar rahey hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab hum logon ko iss amar kay baad kay inn per koi museebat parr chuki ho kissi nemat ka maza chakha detay hain to woh foran hi humari aayaton kay baray mein caalen chalney lagtay hain aap keh dijiye kay Allah chaal chalney mein tum say ziyada tez hai bil yaqeen humaray farishtay tumhari sab chaalon ko likh rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों का हाल ये है के मुसीबत के बाद जब हम उनको रहमत का मजा चखाते हैं तो प्यार ही वो हमारी निशानियों के मामले में चल बज़ियां शुरू कार्डते हैं. इनसे कहो "अल्लाह अपनी चाल में तुमसे ज्यादा तेज है, उसके फरिश्ते तुम्हारी सब मक्कारियों को कलाम-बंद (रिकॉर्डिंग) कर रहे हैं"
عَرَبِيهُوَ الَّذي يُسَيِّرُكُم فِي البَرِّ وَالبَحرِ ۖ حَتّىٰ إِذا كُنتُم فِي الفُلكِ وَجَرَينَ بِهِم بِريحٍ طَيِّبَةٍ وَفَرِحوا بِها جاءَتها ريحٌ عاصِفٌ وَجاءَهُمُ المَوجُ مِن كُلِّ مَكانٍ وَظَنّوا أَنَّهُم أُحيطَ بِهِم ۙ دَعَوُا اللَّهَ مُخلِصينَ لَهُ الدّينَ لَئِن أَنجَيتَنا مِن هٰذِهِ لَنَكونَنَّ مِنَ الشّاكِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है जो तुम्हें जल और थल में चलाता है, यहाँ तक कि जब तुम नावों में होते हो और वे उन्हें लेकर अच्छी (अनुकूल) हवा के सहारे चल पड़ती हैं और वे उससे प्रसन्न हो उठते हैं, कि अचानक एक तेज़ हवा उन (नावों) पर आती है और उनपर प्रत्येक स्थान से लहरें आ जाती हैं और वे समझते हैं कि निःसंदेह उन्हें घेर लिया गया है, तो वे अल्लाह को इस तरह पुकारते हैं कि उसके लिए हर इबादत को विशुद्ध करने वाले होते हैं, निश्चय अगर तूने हमें उससे नजात दे दी, तो हम अवश्य ही शुक्रगुज़ारों में से होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi hai jo tumko khushki (land) aur tari (sea) mein chalata hai. Chunanche jab tum kashtiyon mein sawar hokar baad-e-mawafiq par farhan-o-shadan safar kar rahey hotey ho aur phir yakayak baad-e-mukhalif ka zoar hota hai (fierce gale appears) aur har taraf se maujon (waves) ke thapede lagte hain aur musafir samajh lete hain ke toofan mein ghir gaye, us waqt sab apne deen ko Allah hi ke liye khalis karke ussey duaein maangte hain ke “agar tu nay humko is bala se najat de di to hum shukar guzar banday banenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah aisa hai kay tum ko khushki aur darya mein chalata hai yahan tak kay jab tum kashti mein hotay ho aur woh kashtiyan logon ko mowafiq hawa kay zariye ley ker chalti hain aur woh log inn say khush hotay hain inn per aik jhonka sakht hawa ka aata hai aur her taraf say unn per mojen uthti chali aati hain aur woh samajhtay hain kay (buray) aa ghiray (ussa waqat) sab khalis aetiqaad ker kay Allah hi ko pukartay hain kay agar tu hum ko iss say bacha ley to hum zaroor shukar guzaar bann jayen
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह ही है जो तुमको खुश्की (जमीन) और तारी (समुद्र) में चलाता है। चुनांचे जब तुम कश्तियों में सवार होकर बाद-ए-मवाफिक पर फरहान-ओ-शादान सफर कर रहे हो और फिर यकीन बाद-ए-मुखालिफ़ का ज़ोर होता है (भयंकर आंधी आती है) और हर तरफ से मौजों (लहरें) के थपेड़े लगते हैं और मुसाफिर समझ लेते हैं के तूफ़ान में घिर गए, हमें वक्त सब अपने दीन को अल्लाह ही के लिए खालिस करके उसकी दुआएं मांगते हैं के "अगर तू नहीं हमको इस बाला से नजात दे दी तो हम शुक्र गुजार बंद करेंगे"
عَرَبِيفَلَمّا أَنجاهُم إِذا هُم يَبغونَ فِي الأَرضِ بِغَيرِ الحَقِّ ۗ يا أَيُّهَا النّاسُ إِنَّما بَغيُكُم عَلىٰ أَنفُسِكُم ۖ مَتاعَ الحَياةِ الدُّنيا ۖ ثُمَّ إِلَينا مَرجِعُكُم فَنُنَبِّئُكُم بِما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वह उन्हें बचा लेता है, तो वे अचानक धरती में नाहक़ सरकशी करने लगते हैं। ऐ लोगो! तुम्हारी सरकशी, तुम्हारे अपने ही विरुद्ध है। ये सांसारिक जीवन के कुछ लाभ हैं। फिर तुम्हें हमारी ही ओर लौटकर आना है। तब हम तुम्हें बताएँगे जो कुछ तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Magar jab woh unko bacha leta hai to phir wahi log haqq se munharif hokar zameen mein bagawat karne lagte hain. Logon, tumhari yeh bagawat ulti tumhare hi khilaf padh rahi hai, duniya ke chandh roza mazey hain (loot lo), phir hamari taraf tumhein palat kar aana hai, us waqt hum tumhein bata denge ke tum kya kuch karte rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Phri jab Allah Taalaa unn ko bacha leta hai to foran hi woh zamin mein na haq sirkashi kerney lagtay hain aey logo! Yeh tumhari sirkashi tumharay liye wabaal honey wali hai dunyawi zindagi kay (chand) faeeday hain phir humaray pass tum ko aana hai phir hum sab tumhara kiya hua tum ko batla den gay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जब वो उनको बचा लेता है तो फिर वही लोग हक से मुन्हारिफ होकर जमीन मैं बगावत करने लगता हूं। लोगन, तुम्हारी ये बगावत उल्टी तुम्हारे ही खिलाफ पढ़ रही है, दुनिया के चांद रोजा मजा आ रहा है (लूट लो), फिर हमारी तरफ तुम्हें पलट कर आना है, हमें वक्त हम तुम्हें बता देंगे के तुम क्या कुछ कर रहे हो
عَرَبِيإِنَّما مَثَلُ الحَياةِ الدُّنيا كَماءٍ أَنزَلناهُ مِنَ السَّماءِ فَاختَلَطَ بِهِ نَباتُ الأَرضِ مِمّا يَأكُلُ النّاسُ وَالأَنعامُ حَتّىٰ إِذا أَخَذَتِ الأَرضُ زُخرُفَها وَازَّيَّنَت وَظَنَّ أَهلُها أَنَّهُم قادِرونَ عَلَيها أَتاها أَمرُنا لَيلًا أَو نَهارًا فَجَعَلناها حَصيدًا كَأَن لَم تَغنَ بِالأَمسِ ۚ كَذٰلِكَ نُفَصِّلُ الآياتِ لِقَومٍ يَتَفَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)सांसारिक जीवन की मिसाल तो बस उस पानी जैसी है, जिसे हमने आकाश से बरसाया, तो उसके साथ धरती से उगने वाले पौधे ख़ूब मिल गए, जिन्हें इनसान और जानवर खाते हैं, यहाँ तक कि जब धरती ने अपनी शोभा पूरी कर ली और खूब ससज्जित हो गई और उसके मालिकों ने समझ लिया कि निःसंदेह वे उसपर सक्षम हैं, तो रात या दिन में उसपर हमारा आदेश आ गया, तो हमने उसे कटी हुई कर दिया, जैसे वह कल थी ही नहीं। इसी प्रकार हम उन लोगों के लिए आयतें खोलकर बयान करते हैं, जो मनन-चिंतन करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Duniya ki yeh zindagi (jis ke nashey mein mast hokar tum hamari nishaniyoun se gaflat barat rahey ho) iski misaal aisi hai jaise aasman se humne apne pani barsaya to zameen ki paidawar , jisey aadmi aur jaanwar sab khate hain, khoob ghani ho gayi, phir ain us waqt jabke zameen apni bahaar par thi aur khetiyan bani sanwari khadi thi aur unke malik yeh samajh rahey thay ke ab hum insey faiyda uthane par qadir hain, yakayak raat ko ya din ko hamara hukum aa gaya aur humne usey aisa ghaarat karke rakh diya ke goya kal wahan kuch tha hi nahin. Is tarah hum nishaniyan khol khol kar pesh karte hain un logon ke liye jo sochne samajhe waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Pus duniyawi zindagi ki halat to aisi hai jaisay hum ney aasman say pani barsaya phir uss say zamin ki nabataat jin ko aadmi aur chopaye khatay hain khoob gunjaan ho ker nikli. Yahan tak kay jab woh zamin apni ronaq ka poora hissa ley chuki aur uss ki khoob zebaeesh hogaee aur uss kay malikon ney samajh liya kay abb hum iss per bilkul qabiz ho chukay to din mein ya raat mein iss per humari taraf say koi hukum (azab) aa para so hum ney uss ko aisa saaf ker diya kay goya kal woh mojood hi na thay hum issi tarah aayat ko saaf saaf biyan kertay hainaisay logon kay liye jo sochtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)दुनिया की ये जिंदगी (जिस के नशे में मस्त होकर तुम हमारी निशानियां से गफलत बारात रहे हो) इसकी मिसाल ऐसी है जैसे आसमान से हमने अपना पानी बरसाया तो जमीन की पैदावर, जैसे आदमी और जानवर सब खाते हैं, खूब घनी हो गई, फिर ऐन हमारा वक्त जबके जमीन अपनी बहार पर थी और खेतियाँ बानी सांवरी खादी थी और उनके मालिक ये समझ रहे थे के अब हम इनसे फ़ायदा उठाने पर कादिर हैं, यकीन रात को या दिन को हमारा हुकुम आ गया और हमने उसे ऐसा घरत करके रख दिया के गोया कल वहां कुछ था ही नहीं। इस तरह हम निशानियां खोल खोल कर पेश करते हैं उन लोगों के लिए जो सोचने वाले हैं
عَرَبِيوَاللَّهُ يَدعو إِلىٰ دارِ السَّلامِ وَيَهدي مَن يَشاءُ إِلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह शांति के घर की ओर बुलाता है और जिसे चाहता है सीधा मार्ग दिखा देता है।
Roman Urdu (Maududi)(Tum is na payadar zindagi ke fareb mein mubtila ho rahey ho) aur Allah tumhein daar-us-salaam ki taraf dawat de raha hai, (hidayat uske ikhtiyar mein hai) jisko woh chahta hai seedha rasta dikha deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa salamti kay ghar ki taraf tum ko bulata hai aur jiss ko chahata hai raah-e-raast per chalney ki tofiq deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)(तुम इस ना पयार जिंदगी के फरेब में मुब्तिला हो रहे हो) और अल्लाह तुम्हें दार-उस-सलाम की तरफ दावत दे रहा है, (हिदायत उसके इख्तियार में है) जिसको वो चाहता है सीधा रास्ता दिखा देता है
عَرَبِي۞ لِلَّذينَ أَحسَنُوا الحُسنىٰ وَزِيادَةٌ ۖ وَلا يَرهَقُ وُجوهَهُم قَتَرٌ وَلا ذِلَّةٌ ۚ أُولٰئِكَ أَصحابُ الجَنَّةِ ۖ هُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन लोगों ने अच्छे कर्म किए, उन्हीं के लिए सबसे अच्छा बदला और कुछ अधिक है और उनके चेहरों पर न कोई कलौंस छाएगी और न ज़िल्लत। यही लोग जन्नत वाले हैं, वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne bhalayi ka tareeqa ikhtiyar kiya unke liye bhalayi hai aur mazeed fazal, unke chehron par ru-siyahi aur zillat na chayegi (neither gloom nor humiliation). Woh jannat ke mustahiq hain jahan woh hamesha rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ney neki ki hai unn kay wastay khoobi hai aur mazeed baran bhi aur unn kay chehron per na siayahi chahaye gi aur na zillat yeh log jannat mein rehney walay hain woh iss mein hamesha rehen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने भलाई का तरीका बताया इख्तियार किया उनके लिए भलाई है और माज़ीद फ़ज़ल, उनके चेहरों पर रु-सियाही और ज़िल्लत न चाएगी (न उदासी और न ही अपमान)। वो जन्नत के मुस्तहिक हैं जहां वो हमेशा रहेंगे
عَرَبِيوَالَّذينَ كَسَبُوا السَّيِّئَاتِ جَزاءُ سَيِّئَةٍ بِمِثلِها وَتَرهَقُهُم ذِلَّةٌ ۖ ما لَهُم مِنَ اللَّهِ مِن عاصِمٍ ۖ كَأَنَّما أُغشِيَت وُجوهُهُم قِطَعًا مِنَ اللَّيلِ مُظلِمًا ۚ أُولٰئِكَ أَصحابُ النّارِ ۖ هُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने बुराइयाँ कमाईं, तो किसी भी बुराई का बदला उसी के समान मिलेगा और उनपर अपमान छाया होगा। उन्हें अल्लाह से बचाने वाला कोई न होगा। मानो कि उनके चेहरों पर अँधेरी रात के बहुत-से टुकड़े ओढ़ा दिए गए हों। यही लोग जहन्नम वाले हैं। वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jin logon ne buraiyan kamayi unki burayi jaisi hai waisa hi woh badla payenge, zillat unpar musallat hogi, koi Allah se unko bachane wala na hoga, unke chehron par aisi tareeki chayi hui hogi jaise raat ke siyah(dark) purdey unpar padey huey hon. Woh dozakh ke mustahiq hain jahan woh hamesha rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin logon ney bad kaam kiye unn ki badi ki saza uss kay barabar milay gi aur unn ko zillat chahaye gi unn ko Allah Taalaa say koi na bacha sakay ga. Goya unn kay chehron per andheri raat kay parat kay parat lapet diye gaye hain. Yeh log dozakh mein rehney walay hain woh iss mein hamesha rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जिन लोगों ने बुराइयां कमाई उनकी बुराई जैसी है वैसा ही वो बदला पी आएंगे, ज़िल्लत उन्पर मुसल्लत होगी, कोई अल्लाह से उनको बचाने वाला न होगा, उनके चेहरों पर ऐसी तारीख़ चाय हुई होगी जैसी रात के सियाह (अंधेरा) परदे उनपर पड़े हुए माननीय। वो दोज़ख के मुस्तहक़ हैं जहां वो हमेशा रहेंगे
عَرَبِيوَيَومَ نَحشُرُهُم جَميعًا ثُمَّ نَقولُ لِلَّذينَ أَشرَكوا مَكانَكُم أَنتُم وَشُرَكاؤُكُم ۚ فَزَيَّلنا بَينَهُم ۖ وَقالَ شُرَكاؤُهُم ما كُنتُم إِيّانا تَعبُدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन हम उन सबको एकत्र करेंगे, फिर हम उन लोगों से, जिन्होंने शिर्क किया, कहेंगे : तुम अपने साझीदारों समेत अपनी जगह ठहरे रहो, फिर हम उनके बीच अलगाव कर देंगे और उनके साझीदार कहेंगे कि तुम हमारी इबादत तो नहीं किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz hum in sab ko ek saath(apni adalat mein) ikattha karenge, phir un logon se jinhon ne shirk kiya hai kahenge ke thehar jao tum bhi aur tumhare banaye huey shareek bhi. Phir hum unke darmiyan se ajnabiyat ka purda hata denge aur unke shareek kahenge ke “tum hamari ibadat to nahin karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh din bhi qabil-e-ziker hai jiss roz hum inn sab ko jama keren gay phir mushrikeen say kahen gay kay tum aur tumharay shareek apni jagah thehro phir hum inn kay aapas mein phoot daal den gay aur inn kay woh shurka kahen gay kay tum humari ibadat nahi kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ हम सब को एक साथ (अपनी अदालत में) इकठ्ठा करेंगे, फिर उन लोगों ने जिन्होनें शिर्क किया है कहेंगे के ठहर जाओ तुम भी और तुम्हारे बने शरीक भी। फिर हम उनके दरमियान से अजनबीयत का पर्दा हटा देंगे और उनके शरीक कहेंगे के “तुम हमारी इबादत तो नहीं करते थे
عَرَبِيفَكَفىٰ بِاللَّهِ شَهيدًا بَينَنا وَبَينَكُم إِن كُنّا عَن عِبادَتِكُم لَغافِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः हमारे और तुम्हारे बीच अल्लाह ही गवाह काफ़ी है कि निःसंदेह हम तुम्हारी इबादत से निश्चय बेख़बर थे।
Roman Urdu (Maududi)Hamare aur tumhare darmiyan Allah ki gawahi kafi hai ke (tum agar hamari ibadat karte bhi thay to) hum tumhari us ibadat se bilkul be-khabar thay.”
Roman Urdu (Junagarhi)So humaray tumharya darmiyan Allah kafi hai gawah kay tor per kay hum ko tumhari ibadat ki khabar bhi na thi
Devnagri Urdu (Maududi)हमारे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह की गवाही काफी है के (तुम अगर हमारी इबादत करते भी थे तो) हम तुम्हारी उस इबादत से बिल्कुल बे-खबर थाय।”
عَرَبِيهُنالِكَ تَبلو كُلُّ نَفسٍ ما أَسلَفَت ۚ وَرُدّوا إِلَى اللَّهِ مَولاهُمُ الحَقِّ ۖ وَضَلَّ عَنهُم ما كانوا يَفتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उस अवसर पर प्रत्येक व्यक्ति अपने पहले के किए हुए कामों को जाँच लेगा और वे अपने सच्चे मालिक अल्लाह की ओर लौटाए जाएँगे और वे जो कुछ झूठा आरोप लगाया करते थे, सब उनसे गुम हो जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt har shaks apne kiya ka maza chakh lega, sab apne haqiqi malik ki taraf pher diye jayenge aur woh sarey jhoot jo unhon ne ghadh rakkhey thay ghum ho jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Uss muqam per her shaks apney aglay kiye huye kaamon ki jaanch ker ley ga aur yeh log Allah ki taraf jo inn ka malik-e-haqeeqi hai lotaye jayen gay aur jo kuch jhoot bandha kertay thay sab unn say ghaeeb hojayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त हर शक्स अपने किया का मजा चख लेगा, सब अपने हकीकी मालिक की तरफ फेर दिए जाएंगे और वो सारे झूठ जो उनको ने घड रक्खे थे गम हो जाएंगे
عَرَبِيقُل مَن يَرزُقُكُم مِنَ السَّماءِ وَالأَرضِ أَمَّن يَملِكُ السَّمعَ وَالأَبصارَ وَمَن يُخرِجُ الحَيَّ مِنَ المَيِّتِ وَيُخرِجُ المَيِّتَ مِنَ الحَيِّ وَمَن يُدَبِّرُ الأَمرَ ۚ فَسَيَقولونَ اللَّهُ ۚ فَقُل أَفَلا تَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)कहो : वह कौन है जो तुम्हें आकाश और धरती से जीविका देता है? या फिर कान और आँख का मालिक कौन है? और कौन जीवित को मृत से निकालता और मृत को जीवित से निकालता है? और कौन है जो हर काम का प्रबंध करता है? तो वे ज़रूर कहेंगे : ''अल्लाह'', तो कहो : फिर क्या तुम डरते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Inse poocho, kaun tumko aasman aur zameen se rizq deta hai? Yeh samaat (hearing) aur beenayi (vision) ki quwwatein kiske ikhtiyar mein hai? Kaun be-jaan mein se jaandaar ko aur jaandaar mein se be-jaan ko nikalta hai? Kaun is nazm e alam ki tadbeer kar raha hai(governs all affairs of the universe)? Woh zaroor kahenge ke Allah, Kaho phir tum (haqeeqat ke khilaf chalne se) parheiz nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kahiye kay woh kaun hai jo tum ko aasman aur zamin say rizq phonchata hai ya woh kaun hai jo kanon aur aankhon per poora ikhtiyar rakhta hai aur woh kaun hai jo zinda ko murda say nikalta hai aur murda ko zinda say nikalta hai aur woh kaun hai jo tamam kaamon ki tadbeeren kerta hai? Zaroor woh yehi kahen gay kay “Allah” to unn say kahiye phir kiyon nahi dartay
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पूछो, कौन तुमको आसमान और जमीन से रिज्क देता है? ये समात (सुनना) और बीनायी (दृष्टि) की कुव्वतें किसके इख्तियार में हैं? कौन बे-जान में से जानदार को और जानदार में से कौन निकलता है? कौन है नज़्म ए आलम की तदबीर कर रहा है (ब्रह्मांड के सभी मामलों को नियंत्रित करता है)? वो जरूर कहेंगे के अल्लाह, कहो फिर तुम (हकीकत के खिलाफ चलने से) परहेज़ नहीं करते
عَرَبِيفَذٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمُ الحَقُّ ۖ فَماذا بَعدَ الحَقِّ إِلَّا الضَّلالُ ۖ فَأَنّىٰ تُصرَفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो वह अल्लाह ही तुम्हारा सच्चा पालनहार है, फिर सत्य के बाद पथभ्रष्टता के सिवा और क्या हैॽ फिर तुम कहाँ फेरे जाते हो?
Roman Urdu (Maududi)Tab to yahi Allah tumhara haqiqi Rubb hai phir haqq ke baad gumraahi ke siwa aur kya baqi reh gaya? Aakhir yeh tum kidhar phiraye jaa rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)So yeh hai Allah Taalaa jo tumahra rab haqeeqi hai. Phir haq kay baad aur kiya reh gaya ba-juz gumrahi kay phir kahan phiray jatay ho. Issi tarah aap kay rab ki yeh baat kay yeh eman na layen gay tamam fasiq logon kay haq mein sabit ho chuki hai
Devnagri Urdu (Maududi)तब तो यही अल्लाह तुम्हारा हक़ीक़ी रब है फिर हक के बाद गुमराही के सिवा और क्या बाकी रह गया? आख़िर ये तुम किधर फिराए जा रहे हो
عَرَبِيكَذٰلِكَ حَقَّت كَلِمَتُ رَبِّكَ عَلَى الَّذينَ فَسَقوا أَنَّهُم لا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)इसी प्रकार आपके पालनहार की बात उन लोगों के बारे में सत्य सिद्ध हुई जिन्होंने अवज्ञा की थी कि वे ईमान नहीं लाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi, dekho) is tarah nafarmani ikhtiyar karne walon par tumhare Rubb ki baat sadiq aa gayi ke woh maan kar na denge
Roman Urdu (Junagarhi)Aap yun kahiye kay kiya tumharay shurka mein koi aisa hai jo pehli baar bhi peda keray phir doobara bhi peda keray? Aap keh dijiye kay Allah hi pehli baar peda kerta hai phir wohi doobara bhi peda keray ga. Phir tum kahan phiray jatay ho
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी, देखो) इस तरह नफरमानी इख्तियार करने वालों पर तुम्हारे रब की बात सादिक आ गई के वो मान कर न देंगे
عَرَبِيقُل هَل مِن شُرَكائِكُم مَن يَبدَأُ الخَلقَ ثُمَّ يُعيدُهُ ۚ قُلِ اللَّهُ يَبدَأُ الخَلقَ ثُمَّ يُعيدُهُ ۖ فَأَنّىٰ تُؤفَكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(आप उनसे) कह दें : क्या तुम्हारे साझीदारों में से कोई है, जो सृष्टि का आरंभ करता हो, फिर उसे दोबारा बनाता होॽ आप कह दें : अल्लाह ही सृष्टि का आरंभ करता है, फिर उसे दोबारा बनाता है, तो तुम कहाँ बहकाए जाते होॽ
Roman Urdu (Maududi)Insey pucho, tumhare thehraye huye shareekon mein koi hai jo takhleeq(creation) ki ibteda bhi karta ho aur phir uska iaada bhi karey? Kaho woh sirf Allah hai jo takhleeq ki ibteda bhi karta hai aur uska iaada bhi, phir tum yeh kis ulti raah par chalaye jaa rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kahiye kay tumharay shurka mein koi aisa hai kay haq ka raasta batata ho? Aap keh dijiye kay Allah hi haq ka raasta batata hai. To phir aaya jo shaks haq ka raasta batata ho woh ziyada ittabaa kay laeeq hai ya woh shaks jiss ko baghair bataye khud hi raasta na soojhay? Pus tum ko kiya hogaya hai tum kaisay faislay kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पूछो, तुम्हारे रुके हुए हुए शेयरों में कोई है जो तख़लीक़ (सृजन) की इब्तेदा भी करता हो और फिर उसका इरादा भी करे? कहो वो सिर्फ अल्लाह है जो तकलीक की इब्तेदा भी करता है और उसका इरादा भी, फिर तुम ये किस उल्टी राह पर चलाये जा रहे हो
عَرَبِيقُل هَل مِن شُرَكائِكُم مَن يَهدي إِلَى الحَقِّ ۚ قُلِ اللَّهُ يَهدي لِلحَقِّ ۗ أَفَمَن يَهدي إِلَى الحَقِّ أَحَقُّ أَن يُتَّبَعَ أَمَّن لا يَهِدّي إِلّا أَن يُهدىٰ ۖ فَما لَكُم كَيفَ تَحكُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि क्या तुम्हारे साझीदारों में से कोई है, जो सत्य की ओर मार्गदर्शन करे? आप कह दें कि अल्लाह ही सत्य का मार्गदर्शन करता है। तो क्या जो सत्य की ओर मार्गदर्शन करे, वह अधिक हक़दार है कि उसका अनुसरण किया जाए, या वह जो स्वयं रास्ता नहीं पाता सिवाय इसके कि उसे रास्ता बताया जाए? फिर तुम्हें क्या है, तुम कैसे फ़ैसला करते होॽ
Roman Urdu (Maududi)Insey pucho, tumhare thehraye huey shareekon mein koi aisa bhi hai jo haqq ki taraf rehnumayi karta ho? Kaho woh sirf Allah hai jo haqq ki taraf rehnumayi karta hai. Phir bhala batao jo haqq ki taraf rehnumayi karta hai woh iska zyada mustahiq hai ke uski pairwi ki jaye ya woh jo khud raah nahin paata illa yeh ke uski rehnumayi ki jaye? Aakhir tumhein ho kya gaya hai, kaise ultey ultey faisle karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn mein say aksar log sirf gumaan per chal rahey hain. Yaqeenan gumaan haq (ki maarfat) mein kuch bhi kaam nahi dey sakta yeh jo kuch ker rahey hain yaqeenan Allah ko sab khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पूछो, तुम्हारे रुके हुए शरीकोन में कोई ऐसा भी है जो हक की तरफ रहनुमाई करता हो? कहो वो सिर्फ अल्लाह है जो हक की तरफ रहनुमाई करता है। फिर भला बताओ जो हक की तरफ रहनुमाई करता है वो इसका ज्यादा मुस्तहिक है के उसकी जोड़ी की जाए या वो जो खुद रह नहीं पता इल्ला ये के उसकी रहनुमायी की जाए? आख़िर तुम हो क्या गया है, कैसे उलटे-उल्टे फ़ैसले करते हो
عَرَبِيوَما يَتَّبِعُ أَكثَرُهُم إِلّا ظَنًّا ۚ إِنَّ الظَّنَّ لا يُغني مِنَ الحَقِّ شَيئًا ۚ إِنَّ اللَّهَ عَليمٌ بِما يَفعَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनमें से अधिकांश लोग केवल अनुमान का पालन करते हैं। निश्चित रूप से अनुमान सत्य की तुलना में किसी काम का नहीं है। निःसंदेह अल्लाह उसे भली-भाँति जानने वाला है, जो कुछ वे कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke in mein se aksar log mehaz qayas o guman (conjectures) ke peechey chaley jaa rahey hain, halanke gumaan haqq ki zaroorat ko kuch bhi poora nahin karta. Jo kuch yeh kar rahey hain Allah usko khoob jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh quran aisa nahi hai kay Allah (ki wahee) kay baghair (apney hi say) gharr liya gaya ho. Bulkay yeh to (unn kitabon ki) tasdeeq kerney wala hai jo iss kay qabal (nazil) ho chuki hain aur kitab (ehkaam-e-zarooriya) ki tafseel biyan kerney wala hai iss mein koi baat shak ki nahi kay rab-ul-aalameen ki taraf say hai
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है कि अक्सर लोग महज़ क़यास ओ गुमान (अनुमान) के पीछे चले जा रहे हैं, हालंके गुमान हक की ज़रूरत को कुछ भी पूरा नहीं करता। जो कुछ ये कर रहा है अल्लाह उसको खूब जानता है
عَرَبِيوَما كانَ هٰذَا القُرآنُ أَن يُفتَرىٰ مِن دونِ اللَّهِ وَلٰكِن تَصديقَ الَّذي بَينَ يَدَيهِ وَتَفصيلَ الكِتابِ لا رَيبَ فيهِ مِن رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह क़ुरआन ऐसा नहीं है कि अल्लाह के अलावा किसी और द्वारा घड़ लिया जाए, बल्कि यह उसकी पुष्टि करता है, जो इससे पहले है और किताब का विवरण (अर्थात् हलाल एवं हराम तथा धर्म के नियमों की व्याख्या) है। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह सारे संसारों के पालनहार की ओर से है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh Quran woh cheez nahin hai jo Allah ki wahee o taleem ke bagair tasneef (composed/written) karliya jaye. Balke yeh to jo kuch pehle aa chuka tha uski tasdeeq aur al-kitab ki tafseel hai. Ismein koi shakk nahin ke yeh farmarawa-e-qayinaat ki taraf se hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh log yun kehtay hain kay aap ney iss ko gharr liya hai? Aap keh dijiye kay phir tum iss ki misil aik hi surat lao aur jin jin ghair Allah ko bula sako bula lo agar sachay ho
Devnagri Urdu (Maududi)और ये कुरान वो चीज नहीं है जो अल्लाह की वही ओ तालीम के बगैर तसनीफ (रचित/लिखित) कार्लिया जाए। बल्के ये तो जो कुछ पहले आ चूका था उसकी तस्दीक और अल-किताब की तफ़सील है। इसमें कोई शक्क नहीं के ये फ़रमारवा-ए-क़ायनात की तरफ से है
عَرَبِيأَم يَقولونَ افتَراهُ ۖ قُل فَأتوا بِسورَةٍ مِثلِهِ وَادعوا مَنِ استَطَعتُم مِن دونِ اللَّهِ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या वे कहते हैं कि उसने इस (क़ुरआन) को स्वयं गढ़ लिया हैॽ आप कह दें : तो तुम इस जैसी एक सूरत ले आओ और अल्लाह के सिवा जिसे बुला सको बुला लो, यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log kehte hain ke paigambar ne isey khud tasneef karliya hai? Kaho “ agar tum apne is ilzaam mein sacchey ho to ek surat is jaisi tasneef kar lao aur ek khuda ko chodh kar jis jis ko bula sakte ho madad ke liye bula lo”
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay aisi cheezon ki takzeeb kerney lagay jiss ko apney ehaat-e-ilmi mein nahi laye aur hanooz inn ko iss ka akheer nateeja nahi mila
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग कहते हैं के पैगम्बर ने इसे खुद तसनीफ करलिया है? कहो "अगर तुम अपने इस इल्ज़ाम में सच्चे हो तो एक सूरत इस जैसी तसनीफ कर लाओ और एक खुदा को छोड़ दो जिसे बुला सकते हो मदद के लिए बुला लो"
عَرَبِيبَل كَذَّبوا بِما لَم يُحيطوا بِعِلمِهِ وَلَمّا يَأتِهِم تَأويلُهُ ۚ كَذٰلِكَ كَذَّبَ الَّذينَ مِن قَبلِهِم ۖ فَانظُر كَيفَ كانَ عاقِبَةُ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि उन्होंने उस चीज़ को झुठला दिया, जो उनके ज्ञान के घेरे में नहीं आया, हालाँकि उसका वास्तविक तथ्य अभी तक उनके पास नहीं आया था। इसी तरह उन लोगों ने झुठलाया जो इनसे पहले थे। तो देखो कि अत्याचारियों का परिणाम कैसा हुआ?
Roman Urdu (Maududi)Asal yeh hai ke jo cheez inke ilm ki giraft mein nahin aayi aur jiska ma’al bhi inke samne nahin aaya(whose final sequel was not apparent to them), usko inhon ne (khwa ma khwa atkal picchu) jhutla diya. Isi tarah to insey pehle ke log bhi jhutla chuke hain. Phir dekhlo un zalimon ka kya anjaam hua
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log inn say pehlay huye hain issi tarah unhon ney bhi jhutlaya tha so dekh lijiye unn zalimon ka anjam kaisa hua
Devnagri Urdu (Maududi)असल ये है के जो चीज़ इनके इल्म की गिरफ़्तार में नहीं आई और जिसका माल भी इनके सामने नहीं आया (जिसका अंतिम सीक्वल उन्हें स्पष्ट नहीं था), उसको इन्होन ने (ख्वा मा ख्वा अटकल पिचू) झूठला दिया। इसी तरह तो इनसे पहले के लोग भी झूठला चुके हैं। फिर देखलो उन जालिमों का क्या अंजाम हुआ
عَرَبِيوَمِنهُم مَن يُؤمِنُ بِهِ وَمِنهُم مَن لا يُؤمِنُ بِهِ ۚ وَرَبُّكَ أَعلَمُ بِالمُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनमें से कुछ ऐसे हैं जो इस (क़ुरआन) पर ईमान लाते हैं और उनमें से कुछ ऐसे हैं जो इसपर ईमान नहीं लाते और आपका पालनहार बिगाड़ पैदा करने वालों को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)In mein se kuch log iman layenge aur kuch nahin layenge. Aur tera Rubb un mufsidon(mischief-makers) ko khoob jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn mein say baaz aisay hain jo iss per eman ley aayen gay aur baaz aisay hain kay iss per eman na layen gay. Aur aap ka rab mufisdon ko khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)इसमें से कुछ लोग ईमान लाएंगे और कुछ नहीं लाएंगे। और तेरा रब उन मुफसीदों (शरारत करने वालों) को खूब जानता है
عَرَبِيوَإِن كَذَّبوكَ فَقُل لي عَمَلي وَلَكُم عَمَلُكُم ۖ أَنتُم بَريئونَ مِمّا أَعمَلُ وَأَنا بَريءٌ مِمّا تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वे आपको झुठलाएँ, तो आप कह दें कि मेरे लिए मेरा कर्म है और तुम्हारे लिए तुम्हारा कर्म। तुमपर उसका दोष नहीं, जो मैं करता हूँ और मुझपर उसका दोष नहीं, जो तुम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Agar yeh tujhey jhutlate hain to kehde ke “mera amal mere liye hai aur tumhara amal tumhare liye. Jo kuch main karta hoon uski zimmedari se tum bari ho aur jo kuch tum kar rahey ho uski zimmedari se main bari hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar aap ko jhutlatay rahen to yeh keh dijiye kay meray liye mera amal aur tumhara liye tumhara amal tum meray amal say bari ho aur mein tumharay amal say bari hun
Devnagri Urdu (Maududi)अगर ये तुझसे झूठ बोलते हैं तो कहदे के "मेरा अमल मेरे लिए है और तुम्हारा अमल तुम्हारे लिए। जो कुछ मैं करता हूं उसकी जिम्मेदारी से तुम बारी हो और जो कुछ तुम कर रहे हो उसकी ज़िम्मेदारी से मैं बारी हूँ”
عَرَبِيوَمِنهُم مَن يَستَمِعونَ إِلَيكَ ۚ أَفَأَنتَ تُسمِعُ الصُّمَّ وَلَو كانوا لا يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनमें से कुछ ऐसे हैं, जो आपकी ओर कान लगाते हैं। तो क्या आप बहरों को सुनाएँगे, अगरचे वे कुछ भी न समझते होंॽ
Roman Urdu (Maududi)In mein bahut se log hain jo teri baatein sunte hain, magar kya tu behron ko sunayega khwa woh kuch na samajte hon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn mein say baaz aisay hain jo aap ki taraf kaan lagaye bethay hain. Kiya aap behron ko sunatay hain go unn ko samajh bhi na ho
Devnagri Urdu (Maududi)इन में बहुत से लोग हैं जो तेरी बातें सुनते हैं, मगर क्या तू बेहरों को सुनेगा ख्वा वो कुछ ना समझता हूँ
عَرَبِيوَمِنهُم مَن يَنظُرُ إِلَيكَ ۚ أَفَأَنتَ تَهدِي العُميَ وَلَو كانوا لا يُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनमें से कुछ ऐसे हैं, जो आपकी ओर देखते हैं। तो क्या आप अंधों को मार्ग दिखाएँगे, यद्यपि वे न देखते होंॽ
Roman Urdu (Maududi)In mein bahut se log hain jo tujhey dekhte hain, magar kya tu andhon ko raah batayega khwa unhein kuch na soojhta ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn mein baaz aisay hain jo aap ko takk rahey hain. Phir kiya aap andhon ko raasta dikhlana chahatay hain go inn ko baseerat bhi na ho
Devnagri Urdu (Maududi)इन में बहुत से लोग हैं जो तुझे देखते हैं, मगर क्या तू अंधों को राह बताएगा ख्वा उन्हें कुछ ना सूझता हो
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ لا يَظلِمُ النّاسَ شَيئًا وَلٰكِنَّ النّاسَ أَنفُسَهُم يَظلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह लोगों पर कुछ भी अत्याचार नहीं करता, परंतु लोग स्वयं ही अपने ऊपर अत्याचार करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke Allah logon par zulm nahin karta, log khud hi apne upar zulm karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh yaqeeni baat hai kay Allah logon per kuch zulm nahi kerta lekin log khud hi apni janon per zulm kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के अल्लाह लोगों पर जुल्म नहीं करता, लोग खुद ही अपने ऊपर जुल्म करते हैं
عَرَبِيوَيَومَ يَحشُرُهُم كَأَن لَم يَلبَثوا إِلّا ساعَةً مِنَ النَّهارِ يَتَعارَفونَ بَينَهُم ۚ قَد خَسِرَ الَّذينَ كَذَّبوا بِلِقاءِ اللَّهِ وَما كانوا مُهتَدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन वह उन्हें इकट्ठा करेगा, (उन्हें लगेगा) मानो वे दिन की एक घड़ी भर ठहरे हों, वे एक-दूसरे को पहचानेंगे। निःसंदेह वे लोग घाटे में पड़ गए, जिन्होंने अल्लाह से मिलने को झुठलाया और वे मार्ग पाने वाले न हुए।
Roman Urdu (Maududi)(aaj yeh duniya ki zindagi mein mast hain) aur jis roz Allah inko ikattha karega to (yahi duniya ki zindagi inhein aisi mehsoos hogi) goya yeh mehaz ek ghadi bhar aapas mein jaan pehchan karne ko thehre thay . (Us waqt tehqeeq ho jayega ke) fil-waqey sakht ghatey (nuksan) mein rahey woh log jinhon ne Allah ki mulaqaat ko jhutlaya aur hargiz woh raah e raast par na thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn ko woh din yaad dulaiye jiss mein Allah inn ko (apney huzoor) jama keray ga (to inn ko aisa mehsoos hoga) kay goya woh (duniya mein) saray din ki aik aadh ghari rahey hongay aur aapas mein aik doosray ko pehchanney ko thehray hon. Waqaee khasaray mein paray woh log jinhon ney Allah kay pass janey ko jhutlaya aur woh hudayat paney walay na thay
Devnagri Urdu (Maududi)(आज ये दुनिया की जिंदगी में मस्त हैं) और जिस रोज अल्लाह इनको इकट्ठ करेगा तो (यही दुनिया की जिंदगी यहीं ऐसी है) महसूस होगी) गोया ये महज़ एक घड़ी भर आपस में जान पहचान करने को थे। (हमें वक्त तहकीक हो जाएगा के) फिल-वाक़े सख़्त घाटे (नुक्सन) में रहे वो लोग जिन्होन ने अल्लाह की मुलाक़ात को झुटलाया और हरगिज़ वो राह ए रास्ते पर ना थाय
عَرَبِيوَإِمّا نُرِيَنَّكَ بَعضَ الَّذي نَعِدُهُم أَو نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِلَينا مَرجِعُهُم ثُمَّ اللَّهُ شَهيدٌ عَلىٰ ما يَفعَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अगर कभी हम आपको उसका कुछ हिस्सा दिखा दें, जो हम उनसे वादा करते हैं, या आपको उठा ही लें, तो उनकी वापसी हमारी ही ओर है, फिर जो कुछ वे कर रहे हैं अल्लाह उसका गवाह है।
Roman Urdu (Maududi)Jin burey nataij se hum inhein dara rahey hain unka koi hissa hum tere jeete ji dikha dein ya issey pehle hi tujhey utha lein, bahar haal inhein aana hamari hi taraf hai aur jo kuch yeh kar rahey hain uspar Allah gawah hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss ka inn say hum wada ker rahey hain uss mein say kuch thora sa agar hum aap ko dikhla den ya (unn kay zahoor say pehlay) hum aap ko wafat dey den so humaray pass to inn ko aana hi hai. Phir Allah inn kay sab afaal per gawah hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन ब्यूरे नटैज से हम इन्हें डरा रहे हैं उनका कोई हिसा हम तेरे जीते जी दिखा दें या इसे पहले हाय तुझ उठा लें, बाहर हाल इन्हें आना हमारी ही तरफ है और जो कुछ ये कर रहे हैं उसपर अल्लाह गवाह है
عَرَبِيوَلِكُلِّ أُمَّةٍ رَسولٌ ۖ فَإِذا جاءَ رَسولُهُم قُضِيَ بَينَهُم بِالقِسطِ وَهُم لا يُظلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और प्रत्येक समुदाय के लिए एक रसूल है। फिर जब उनका रसूल आ जाता है, तो उनके बीच न्याय के साथ फ़ैसला कर दिया जाता है और उनपर अत्याचार नहीं किया जाता।
Roman Urdu (Maududi)Har ummat ke liye ek Rasool hai phir jab kisi ummat ke paas uska Rasool aa jata hai to uska faisla purey insaf ke saath chuka diya jata hai aur uspar zara barabar zulm nahin kiya jata
Roman Urdu (Junagarhi)Aur her ummat kay liye aik rasool hai so jab unn kay woh rasool aa chukta hai unn ka faisla insaf kay sath kiya jata hai aur unn per zulm nahi kiya jata
Devnagri Urdu (Maududi)हर उम्मत के लिए एक रसूल है फिर जब किसी उम्मत के पास उसका रसूल आ जाता है तो उसका फैसला पूरे इन्साफ के साथ चुका दिया जाता है और उसपर जरा बराबर जुल्म नहीं किया जाता
عَرَبِيوَيَقولونَ مَتىٰ هٰذَا الوَعدُ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे कहते हैं कि यह वादा कब पूरा होगा, यदि तुम सच्चे होॽ
Roman Urdu (Maududi)Kehte hain: agar tumhari yeh dhamki sacchi hai to aakhir yeh kab poori hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh log kehtay hain kay yeh wada kab hoga? Agar tum sachay ho
Devnagri Urdu (Maududi)कहते हैं: अगर तुम्हारी ये धमकी सच्ची है तो आखिर ये कब पूरी होगी
عَرَبِيقُل لا أَملِكُ لِنَفسي ضَرًّا وَلا نَفعًا إِلّا ما شاءَ اللَّهُ ۗ لِكُلِّ أُمَّةٍ أَجَلٌ ۚ إِذا جاءَ أَجَلُهُم فَلا يَستَأخِرونَ ساعَةً ۖ وَلا يَستَقدِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि मैं अपने लिए किसी हानि या लाभ का मालिक नहीं हूँ, परंतु जो अल्लाह चाहे। प्रत्येक समुदाय का एक समय है। जब उनका समय आ जाता है, तो वे एक घड़ी न पीछे रहते हैं और न आगे बढ़ते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kaho “mere ikhtiyar mein khud apna nafa (faiyda) o zarar (harm) bhi nahin. Sab kuch Allah ki mashiyat par mauquf hai. Har ummat ke liye mohlat ki ek muddat hai, jab yeh muddat poori ho jati hai to ghadi bhar ki taqdeem o takheer(delay) bhi nahin hoti”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap farma dijiye kay mein apni zaat kay liye to kissi nafay ka aur kissi zarrar ka ikhtiyar rakhta hi nahi magar jitna Allah ko manzoor ho. Her ummat kay liye aik moyyen waqt hai jab unn ka woh moyyen waqt aa phonchta hai to aik ghari na peechay hatt saktay hain aur na aagay sirak saktay hain
Devnagri Urdu (Maududi)कहो "मेरे इख्तियार में खुद अपना नफ़ा (फ़ैयदा) ओ ज़रार (नुकसान) भी नहीं। सब कुछ अल्लाह की मशियत पर मौक़ुफ़ है। हर उम्मत के लिए मोहलत की एक मुद्दत है, जब ये मुद्दत पूरी हो जाती है तो घड़ी भर की तकदीम ओ तक़हीर (देरी) भी नहीं होती”
عَرَبِيقُل أَرَأَيتُم إِن أَتاكُم عَذابُهُ بَياتًا أَو نَهارًا ماذا يَستَعجِلُ مِنهُ المُجرِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दें कि तुम बताओ, यदि उसकी यातना तुमपर रात को या दिन के समय आ जाए, तो अपराधी इसमें से कौन-सी चीज़ जल्दी माँग रहे हैं?
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho, kabhi tumne yeh bhi socha ke agar Allah ka azaab achanak raat ko ya din ko aa jaye (to tum kya kar sakte ho?) Aakhir yeh aisi kaunsi cheez hai jiske liye mujreem jaldi machayein
Roman Urdu (Junagarhi)Aap farma dijiye kay yeh batlao kay agar tum per Allah ka azab raat ko aa paray ya din ko to azab mein konsi cheez aisi hai kay mujrim log iss ko jaldi maang rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा था कि अगर अल्लाह का अजब अज़ाब अचानक रात को या दिन को आ जाए (तो तुम क्या कर सकते हो?) आख़िर ये ऐसी कौन सी चीज़ है जिसके लिए मुजरिम जल्दी मचाएँ
عَرَبِيأَثُمَّ إِذا ما وَقَعَ آمَنتُم بِهِ ۚ آلآنَ وَقَد كُنتُم بِهِ تَستَعجِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या फिर जब वह (यातना) आ जाएगी, तो उसपर ईमान लाओगे? क्या अब! हालाँकि निश्चय तुम इसी के लिए जल्दी मचा रहे थे?
Roman Urdu (Maududi)Kya jab woh tumpar aa padey usi waqt tum usey maanogey? Ab bachna chahte ho? Halanke tum khud hi iske jaldi aane ka takaza kar rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya phir jab woh aa hi paray ga uss per eman lao gay. Haan abb mana! Halankay tum iss ki jaldi machaya kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या जब वो तुमपर आ पाडेय वह समय तुम उसे मानोगे? अब बचना चाहते हो? हालंके तुम खुद ही इसके जल्दी आने का तकाजा कर रहे थे
عَرَبِيثُمَّ قيلَ لِلَّذينَ ظَلَموا ذوقوا عَذابَ الخُلدِ هَل تُجزَونَ إِلّا بِما كُنتُم تَكسِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर अत्याचारियों से कहा जाएगा कि स्थायी यातना का मज़ा चखो। तुम्हें उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम कमाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir zalimon se kha jayega ke ab hamesha ke azaab ka maza chakho, jo kuch tum kamate rahey ho uski padash ke siwa aur kya badla tumko diya ja sakta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phri zalimon say kaha jayega ka hamesha ka azab chakho. Tum ko to tumharay kiye ka hi badla mila hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जालिमों से खा जाएगा के अब हमेशा के अजब का मजा चखो, जो कुछ तुम कमा रहे हो उसकी याद के सिवा और क्या बदला तुमको दिया जा सकता है
عَرَبِي۞ وَيَستَنبِئونَكَ أَحَقٌّ هُوَ ۖ قُل إي وَرَبّي إِنَّهُ لَحَقٌّ ۖ وَما أَنتُم بِمُعجِزينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे आपसे पूछते हैं कि क्या यह बात सत्य ही है? आप कह दें : हाँ, मेरे पालनहार की क़सम! निःसंदेह यह अवश्य सत्य है और तुम अल्लाह को बिल्कुल भी विवश करने वाले नहीं हो।
Roman Urdu (Maududi)Phir poochte hain kya waqayi yeh sach hai jo tum keh rahey ho? Kaho “ mere Rubb ki kasam, yeh bilkul sach hai aur tum itna bal-boota nahin rakhte ke usey zahoor mein aane se rok do”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh aap say daryaft kertay hain kay kiya azab waqaee sach hai? Aap farma dijiye kay haan qasam hai meray rab ki woh waqaee sach hai aur tum kissi taraf Allah ko aajiz nahi ker saktay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर पूछते हैं क्या वाक़ई ये सच है जो तुम कह रहे हो? कहो "मेरे रब की कसम, ये बिल्कुल सच है और तुम इतना बाल-बूटा नहीं रखते के उसे ज़हूर में आने से रोक दो"
عَرَبِيوَلَو أَنَّ لِكُلِّ نَفسٍ ظَلَمَت ما فِي الأَرضِ لَافتَدَت بِهِ ۗ وَأَسَرُّوا النَّدامَةَ لَمّا رَأَوُا العَذابَ ۖ وَقُضِيَ بَينَهُم بِالقِسطِ ۚ وَهُم لا يُظلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि अपने आपपर अत्याचार करने वाले व्यक्ति के पास वह सब कुछ हो, जो धरती पर है, तो वह उसे अवश्य छुड़ौती के रूप में दे डाले। और जब वे यातना को देखेंगे, तो अपने पछतावे को छिपाएँगे। तथा उनके बीच न्याय के साथ फ़ैसला कर दिया जाएगा और उनपर कोई अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Agar har us shaks ke paas jisne zulm kiya hai, rooh e zameen ki daulat bhi ho to us azaab se bachne ke liye woh usey fidiya (expiation) mein dene par aamada ho jayega. Jab yeh log is azaab ko dekh lenge to dil hi dil mein pachtayenge magar unke darmiyan poorey insaf se faisla kiya jayega, koi zulm unpar na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar her jaan jiss ney zulm (shirk) kiya hai kay pass itna ho kay sari zamin bhar jaye tab bhi uss ko dey ker apni jaan bachaney lagay aur jab azab ko dekhen gay tp pasheymani ko posheeda rakhen gay. Aur inn ka faisla insaf kay sath hoga. Aur inn per zulm na hoga
Devnagri Urdu (Maududi)अगर हर उस शक्स के पास जिसने ज़ुल्म किया है, रूह ए ज़मीन की दौलत भी हो तो हमें अज़ाब से बचने के लिए वो इस्तेमाल फ़िदिया (प्रायश्चित) मुझे देने पर आमादा हो जाएगा। जब ये लोग इस अज़ाब को देख लेंगे तो दिल ही दिल में पछताएंगे मगर उनके दरमियान पूरे इन्साफ से फैसला किया जाएगा, कोई ज़ुल्म उनपार ना होगा
عَرَبِيأَلا إِنَّ لِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۗ أَلا إِنَّ وَعدَ اللَّهِ حَقٌّ وَلٰكِنَّ أَكثَرَهُم لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)सुनो! आकाशों और धरती में जो कुछ है, अल्लाह ही का है। सुनो! निःसंदेह अल्लाह का वादा सच्चा है, लेकिन उनमें से अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Suno! Aasmaano aur zameen mein jo kuch hai Allah ka hai. Sun rakkho! Allah ka wada saccha hai magar aksar Insaan jantey nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaad rakho kay jitni cheezen aasmanon aur zamin mein hain sab Allah hi kay mulk mein hain. Yaad rakho kay Allah Taalaa ka wada sacha hai lekin boht say aadmi ilm nahi rakhtay
Devnagri Urdu (Maududi)सुनो! आसमानो और ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह का है। सुन रक्खो! अल्लाह का वादा सच्चा है मगर अक्सर इंसान जानता नहीं है
عَرَبِيهُوَ يُحيي وَيُميتُ وَإِلَيهِ تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वही जीवन देता तथा मारता है और उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Wahi zindagi bakshta hai aur wahi maut deta hai aur usi ki taraf tum sab ko palatna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi jaan dalta hai aur wohi jaan nikalta hai aur tum sab ussi kay pass laye jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)वही जिंदगी बक्शता है और वही मौत देता है और उसकी तरफ तुम सबको पलटना है
عَرَبِييا أَيُّهَا النّاسُ قَد جاءَتكُم مَوعِظَةٌ مِن رَبِّكُم وَشِفاءٌ لِما فِي الصُّدورِ وَهُدًى وَرَحمَةٌ لِلمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो! निःसंदेह तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से बड़ी नसीहत और सीनों में जो कुछ (रोग) है उसके लिए पूर्णतया शिफ़ा और ईमान वालों के लिए सर्वथा हिदायत और रहमत आई है।
Roman Urdu (Maududi)Logon! Tumhare paas tumhare Rubb ki taraf se naseehat aa gayi hai. Yeh woh cheez hai jo dilon ke amraz (marz) ki shifa hai aur jo isey qabool karlein unke liye rehnumayi aur rehmat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey logo! Tumharay pass tumhara rab ki taraf say aik aisi cheez aaee hai jo naseehat hai aur dilon mein jo rog hain unn kay liye shifa hai aur rehnumaee kerney wali hai aur rehmat hai eman walon kay liye
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन! तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से हिदायत आ गई है। ये वो चीज़ है जो दिलों के अमराज़ (मर्ज) की शिफ़ा है और जो इसे क़बूल करें उनके लिए रहनुमाई और रहमत है
عَرَبِيقُل بِفَضلِ اللَّهِ وَبِرَحمَتِهِ فَبِذٰلِكَ فَليَفرَحوا هُوَ خَيرٌ مِمّا يَجمَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : (यह) अल्लाह के अनुग्रह और उसकी दया के कारण है। अतः उन्हें इसी पर प्रसन्न होना चाहिए। यह उससे उत्तम है, जो वे इकट्ठा कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), kaho ke “yeh allah ka fazal aur uski meharbani hai ke yeh cheez usne bheji, ispar to logon ko khushi manani chahiye. Yeh un sab cheezon se behtar hai jinhein log sameit rahey hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay bus logon ko Allah key iss inam aur rehmat per khush hona chahaiye. Woh iss say ba-darjaha behtar hai jiss ko woh jama ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), कहो के “ये अल्लाह का फ़ज़ल और उसकी मेहरबानी है के ये चीज़ हमें भेजी, इसपर तो लोगों को ख़ुशी मनानी चाहिए। येह। उन सब चीज़ों से बेहतर है जिन्हें लोग समेट रहे हैं”
عَرَبِيقُل أَرَأَيتُم ما أَنزَلَ اللَّهُ لَكُم مِن رِزقٍ فَجَعَلتُم مِنهُ حَرامًا وَحَلالًا قُل آللَّهُ أَذِنَ لَكُم ۖ أَم عَلَى اللَّهِ تَفتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दें : क्या तुमने देखा जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए रोज़ी उतारी है, फिर तुमने उसमें से कुछ को हराम और कुछ को हलाल ठहरा लिया? (आप उनसे) पूछें : क्या अल्लाह ने तुम्हें (इसकी) अनुमति दी है या तुम अल्लाह पर झूठा आरोप लगा रहे होॽ
Roman Urdu (Maududi)(Aye Nabi ) Insey kaho, “ tum logon ne kabhi yeh bhi socha hai ke jo rizq Allah ne tumhare liye utara tha usmein se tumne khud hi kisi ko haram aur kisi ko halal thehra liya!”. Insey pucho, Allah ne tumko iski ijazat di thi? Ya tum Allah par iftara (forge lies ) kar rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kahiye kay yeh to batao kay Allah ney tumharay liye jo kuch rizq bheja tha phri tum ney uss ka kuch hissa haram aur kuch halal qarar dey liya. Aap poochiye kay kiya tum ko Allah ney hukum diya tha ya Allah per iftra hi kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) इंसे कहो, “तुम लोगों ने कभी ये भी सोचा है के जो रिज़्क अल्लाह ने तुम्हारे लिए उतारा था उसमें से तुमने खुद को ही किसी को हराम और किसी को हलाल ठहरा लिया!”। इनसे पूछो, अल्लाह ने तुमको इसकी इजाज़त दी थी? या तुम अल्लाह पर इफ्तारा कर रहे हो
عَرَبِيوَما ظَنُّ الَّذينَ يَفتَرونَ عَلَى اللَّهِ الكَذِبَ يَومَ القِيامَةِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَذو فَضلٍ عَلَى النّاسِ وَلٰكِنَّ أَكثَرَهُم لا يَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो लोग अल्लाह पर झूठा आरोप लगा रहे हैं, उनका क़ियामत के दिन के बारे में क्या ख़याल हैॽ निःसंदेह अल्लाह तो लोगों पर बड़े अनुग्रह वाला है, परंतु उनमें से अक्सर शुक्र अदा नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Jo log Allah par yeh jhoot iftara bandhte (invent lies) hain unka kya gumaan hai ke qayamat ke roz unsey kya maamla hoga? Allah to logon par mehrabani ki nazar rakhta hai magar aksar Insaan aisey hain jo shukar nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log Allah per jhoot iftrra bandhtay hain unn ka qayamat ki nisbat kiya gumaan hai? Waqaee logon per Allah Taalaa ka bara hi fazal hai lekin aksar aadmi shukar nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग अल्लाह पर ये झूठ इफ्तार करते हैं (झूठ गढ़ते हैं) हैं उनका क्या गुमान है के कयामत के रोज़ उनसे क्या मामला होगा? अल्लाह तो लोगों पर मेहरबानी की नज़र रखता है मगर अक्सर इंसान ऐसे हैं जो शुक्र नहीं करते
عَرَبِيوَما تَكونُ في شَأنٍ وَما تَتلو مِنهُ مِن قُرآنٍ وَلا تَعمَلونَ مِن عَمَلٍ إِلّا كُنّا عَلَيكُم شُهودًا إِذ تُفيضونَ فيهِ ۚ وَما يَعزُبُ عَن رَبِّكَ مِن مِثقالِ ذَرَّةٍ فِي الأَرضِ وَلا فِي السَّماءِ وَلا أَصغَرَ مِن ذٰلِكَ وَلا أَكبَرَ إِلّا في كِتابٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप जिस दशा में भी होते हैं और क़ुरआन में से जो कुछ भी पढ़ते हैं, तथा (ऐ ईमान वालो!) तुम जो भी कर्म करते हो, हम तुम्हें देख रहे होते हैं, जब तुम उसमें लगे होतो हो। और आपके पालनहार से कोई कण भर भी चीज़ न तो धरती में छिपी रहती है और न आकाश में, तथा न उससे कोई छोटी चीज़ है और न बड़ी, परंतु एक स्पष्ट पुस्तक में मौजूद है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), tum jis haal mein bhi hotey ho aur Quran mein se kuch bhi sunate ho, aur logon, tum bhi jo kuch karte ho us sab ke dauran mein hum tumko dekhte rehte hain. Koi zarra barabar cheez aasman aur zameen mein aisi nahin hai, na choti na badi, jo tere Rubb ki nazar se posheeda (chupi) ho aur ek saaf daftar mein darj na ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aap kissi haal mein hon aur munjmila inn ehwaal kay aap kahin say quran parhtay hon aur jo kaam bhi kertay hon hum ko sab ki khabar rehti hai jab tum uss kaam mein mashghool hotay ho. Aur aap kay rab say koi cheez zarra barabar bhi ghaeeb nahi na zamin mein aur na aasman mein aur na koi cheez uss say choti aur na koi cheez bari magar yeh sab kitab-e-mubin mein hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), तुम जिस हाल में भी होते हो और कुरान में से कुछ भी सुनाते हो, और लोग, तुम भी जो कुछ करते हो हम सब के दौरों में हम तुमको देखते रहते हैं। कोई ज़रा बराबर चीज़ आसमान और ज़मीन में ऐसी नहीं है, ना छोटी ना बड़ी, जो तेरे रब की नज़र से पोशीदा (छुपी) हो और एक साफ़ दफ़्तर में दर्ज़ ना हो
عَرَبِيأَلا إِنَّ أَولِياءَ اللَّهِ لا خَوفٌ عَلَيهِم وَلا هُم يَحزَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)सुन लो! निःसंदेह अल्लाह के मित्रों को न कोई भय है और न वे शोकाकुल होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Suno! Jo Allah ke dost hain, jo iman laye aur jinhon ne taqwa ka rawayya ikhtiyar kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Yaad rakho kay Allah kay doston per na koi andesha hai aur na woh ghumgeen hotay hain
Devnagri Urdu (Maududi)सुनो! जो अल्लाह के दोस्त हैं, जो ईमान लाए और जिन्होन ने तक़वा का रवैय्या इख्तियार किया
عَرَبِيالَّذينَ آمَنوا وَكانوا يَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग जो ईमान लाए और अल्लाह से डरते थे।
Roman Urdu (Maududi)Unke liye kisi khauf aur ranjj ka mauqa nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh woh log hain jo eman laye aur (buraiyon say) perhez rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उनके लिए कोई खौफ और रंज का मौका नहीं है
عَرَبِيلَهُمُ البُشرىٰ فِي الحَياةِ الدُّنيا وَفِي الآخِرَةِ ۚ لا تَبديلَ لِكَلِماتِ اللَّهِ ۚ ذٰلِكَ هُوَ الفَوزُ العَظيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्हीं के लिए सांसारिक जीवन में शुभ सूचना है और आख़िरत में भी। अल्लाह की बातों के लिए कोई बदलाव नहीं है। यही बहुत बड़ी सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)Duniya aur aakhirat dono zindagiyon mein unke liye basharat (khush-khabri) hi basharat hai. Allah ki baatein badal nahin sakti. Yahi badi kamiyabi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay liye dunyawi zindagi mein bhi aur aakhirat mein bhi khushkhabri hai Allah Taalaa ki baaton mein kuch farq hua nahi kerta. Yeh bari kaamyabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)दुनिया और आखिरी दोनों जिंदगी में उनके लिए बशारत (खुश-खबरी) ही बशारत है। अल्लाह की बातें बदल नहीं सकतीं. यही बड़ी कामयाबी है
عَرَبِيوَلا يَحزُنكَ قَولُهُم ۘ إِنَّ العِزَّةَ لِلَّهِ جَميعًا ۚ هُوَ السَّميعُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ नबी!) आपको उनकी बात दुःखी न करे। निःसंदेह सारा प्रभुत्व अल्लाह ही के लिए है। वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi)! Jo baatein yeh log tujhpar banate hain woh tujhey ranjeeda na karein. Izzat saari ki saari khuda ke ikhtiyar mein hai, aur woh sab kuch sunta aur jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aap ko inn ki baaten ghum mein na daalen. Tamam tar ghalba Allah hi kay liye hai woh sunta janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी)! जो बातें ये लोग तुझपर बनाते हैं वो तुझसे रंजीदा ना करें। इज्जत सारी की सारी खुदा के इख्तियार में है, और वो सब कुछ सुनता और जानता है
عَرَبِيأَلا إِنَّ لِلَّهِ مَن فِي السَّماواتِ وَمَن فِي الأَرضِ ۗ وَما يَتَّبِعُ الَّذينَ يَدعونَ مِن دونِ اللَّهِ شُرَكاءَ ۚ إِن يَتَّبِعونَ إِلَّا الظَّنَّ وَإِن هُم إِلّا يَخرُصونَ
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हिन्दी (Al-Omari)सुन लो! निःसंदेह अल्लाह ही के लिए है जो कोई आसमानों में है और जो कोई ज़मीन में है और जो अल्लाह के सिवा दूसरे साझीदारों को पुकारते हैं, वे किस चीज़ की पैरवी कर रहे हैंॽ वे केवल अनुमान की पैरवी कर रहे हैं और वे मात्र अटकलें लगा रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aagaah raho! Aasman ke basney waley hon ya zameen ke , sab ke sab Allah ke mamlooq hain aur jo log Allah ke siwa kuch (apne khud saakhta) shareekon ko pukar rahey hain woh nirey weham o guman (conjectures and are merely guessing) ke pairo hain aur mehaz qayas aaraiyan (merely guessing) karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaad rakho kay jitney kuch aasman mein hain aur jitney zamin mein hain yeh sab Allah hi kay hain aur jo log Allah ko chor ker doosray shurka ki ibadat ker rahey hain kiss cheez ki ittabaa ker rahey hain aur mehaz atkalen laga rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)आगाह रहो! आसमान के बसने वाले हैं या ज़मीन के, सब के सब अल्लाह के ममलूक हैं और जो लोग अल्लाह के सिवा कुछ (अपने खुद का सच) शरीकों को पुकार रहे हैं वो निरे वेहम ओ गुमान (अनुमान और केवल अनुमान लगा रहे हैं) के पेयरो हैं और महज़ क़यास अराइयां (केवल अनुमान लगा रहे हैं) करते हैं
عَرَبِيهُوَ الَّذي جَعَلَ لَكُمُ اللَّيلَ لِتَسكُنوا فيهِ وَالنَّهارَ مُبصِرًا ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِقَومٍ يَسمَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है, जिसने तुम्हारे लिए रात बनाई, ताकि उसमें आराम करो और दिन को प्रकाशमान बनाया। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो सुनते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi hai jisne tumhare liye raat banayi ke usmein sukoon haasil karo aur din ko roshan banaya. Is mein nishaniyan hain un logon ke liye jo (khule kaano se paigambar ki dawat ko) sunte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh aisa hi hai jiss ney tumharay liye raat banaee takay tum iss mein aaram kero aur din bhi iss tor per banaya kay dekhney bhalney ka zariya hai tehqeeq iss mein dalaeel hain unn logon kay liye jo suntay hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह हाय है जिसने तुम्हारे लिए रात बनाई के हमें सुकून हासिल करो और दिन को रोशन बनाया। इस में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो (खुले कानों से पैगम्बर की दावत को) सुनते हैं
عَرَبِيقالُوا اتَّخَذَ اللَّهُ وَلَدًا ۗ سُبحانَهُ ۖ هُوَ الغَنِيُّ ۖ لَهُ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۚ إِن عِندَكُم مِن سُلطانٍ بِهٰذا ۚ أَتَقولونَ عَلَى اللَّهِ ما لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा कि अल्लाह ने कोई औलाद बना रखी है। वह पवित्र है, वह निस्पृह है। जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, उसी का है।तुम्हारे पास इसका कोई प्रमाण नहीं है। क्या तुम अल्लाह के विषय में ऐसी बात कहते हो, जिसे तुम नहीं जानते?
Roman Urdu (Maududi)Logon ne kehdiya ke Allah ne kisi ko beta banaya hai. Subhan Allah! Woh to be-niyaz hai. Aasmaano aur zameen mein jo kuch hai sab uski milk (milkiyat) hai. Tumhare paas is qaul ke liye aakhir daleel kya hai? Kya tum Allah ke mutaaliq woh baatein kehte ho jo tumhare ilm mein nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kehtay hain kay Allah aulad rakhta hai. Subhan Allah ! Who to kissi ka mohtaj nahi ussi ki milkiyat hai jo kuch aasmano mein hai aur jo kuch zamin mein hai. Tumharay pass iss per koi daleel nahi. Kiya Allah kay zimmay aisi baat lagatay ho jiss ka tum ilm nahi rakhtay
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों ने कहा कि अल्लाह ने किसी को बेटा बनाया है। सुभान अल्लाह! वो तो बे-नियाज़ है. आसमानो और ज़मीन में जो कुछ है सब उसका दूध है। तुम्हारे पास इस क़ौल के लिए आख़िर दलील क्या है? क्या तुम अल्लाह के मुतालिक वो बातें कहते हो जो तुम्हारे इल्म में नहीं हैं
عَرَبِيقُل إِنَّ الَّذينَ يَفتَرونَ عَلَى اللَّهِ الكَذِبَ لا يُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : निःसंदेह जो लोग अल्लाह पर झूठ गढ़ते हैं, वे सफल नहीं होंगे।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), kehdo ke jo log Allah par jhoote iftara bandhte hain (invent lie) woh hargiz falaah nahin paa saktey
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay jo log Allah per jhoot iftra kertay hain woh kaamyab na hongay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), कहदो के जो लोग अल्लाह पर झूठे इफ्तारा बांधते हैं (झूठ का अविष्कार करते हैं) वो हरगिज फलाह नहीं पा सकते
عَرَبِيمَتاعٌ فِي الدُّنيا ثُمَّ إِلَينا مَرجِعُهُم ثُمَّ نُذيقُهُمُ العَذابَ الشَّديدَ بِما كانوا يَكفُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)दुनिया में थोड़ा-सा फ़ायदा है, फिर हमारी ही तरफ़ उनकी वापसी है, फिर हम उन्हें बहुत सख़्त अज़ाब चखाएँगे, उसके कारण जो वे कुफ़्र करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Duniya ki chandh roza zindagi mein mazey karlein, phir hamari taraf unko palatna hai phir hum is kufr ke badle jiska irteqab woh kar rahey hain unko sakht azaab ka maza chakkayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh duniya mein thora sa aish hai phir humaray pass inn ko aana hai phir hum inn ko inn kay kufur kay badlay sakht azab chakhayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)दुनिया की चंद रोजा जिंदगी में मजे करलें, फिर हमारी तरफ उनको पलटना है फिर हम इस कुफ्र के बदले जिसका इर्तेक़ाब वो कर रहे हैं उनको साख अज़ाब का मजा चककाएंगे
عَرَبِي۞ وَاتلُ عَلَيهِم نَبَأَ نوحٍ إِذ قالَ لِقَومِهِ يا قَومِ إِن كانَ كَبُرَ عَلَيكُم مَقامي وَتَذكيري بِآياتِ اللَّهِ فَعَلَى اللَّهِ تَوَكَّلتُ فَأَجمِعوا أَمرَكُم وَشُرَكاءَكُم ثُمَّ لا يَكُن أَمرُكُم عَلَيكُم غُمَّةً ثُمَّ اقضوا إِلَيَّ وَلا تُنظِرونِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्हें नूह का समाचार सुनाएँ, जब उन्होंने अपनी जाति से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! यदि मेरा खड़ा होना और अल्लाह की आयतों के द्वारा नसीहत करना तुमपर भारी पड़ गया, तो मैंने अल्लाह ही पर भरोसा किया है। अतः तुम अपना मामला अपने साझीदारों के साथ मिलकर पक्का कर लो, फिर तुम्हारा मामला तुमपर किसी तरह रहस्य न रहे। फिर (जो करना हो) मेरे साथ कर डालो और मुझे मोहलत न दो।
Roman Urdu (Maududi)Inko Nooh ka qissa sunao, us waqt ka qissa jab usne apni qaum se kaha tha ke “aey biradraan e qaum, agar mera tumhare damiyan rehna aur Allah ki ayaat suna suna kar tumhein gaflat se bedaar karna tumhare liye na-qabil e bardasht ho gaya hai to mera bharosa Allah par hai.Tum apne thehraye huey shareekon ko saath lekar ek muttafiqa faisla karlo aur jo mansuba (plan) tumhare pesh e nazar ho usko khoob soch samajh lo taa-ke uska koi pehlu tumhari nigaah se posheeda na rahey, phir mere khilaf usko amal mein le aao aur mujhey hargiz mohlat na do
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aap inn ko nooh (alh-e-salam) ka qissa parh ker sunaiye jab kay unhon ney apni qom say farmaya kay aey meri qom! Agar tum ko mera rehna aur ehkaam-e-elahi ki naseehat kerna bhari maloom hota hai to mera to Allah hi per bharosa hai. Tum apni tadbeer maaye apney shurka kay pukhta kerlo phir tumhari tadbeer tumhari ghuttan ka baees nahi honi chahaiye. Aur phir meray sath ker guzro aur mujh ko mohlat na do
Devnagri Urdu (Maududi)इनको नूह का क़िस्सा सुनाओ, हमें वक़्त का क़िस्सा जब उसने अपनी क़ौम से कहा था के "ऐ बिरादरान ए क़ौम, अगर मेरा तुम्हारे दमियां रहना और अल्लाह की आयतें सुना सुना कर तुम्हें गफलत से बेदार करना तुम्हारे लिए न-काबिल ए बर्दाश्त हो गया है तो मेरा भरोसा अल्लाह पर है। तुम अपने रुके हुए शरीकों को साथ लेकर एक मुत्तफ़िका फैसला करलो और जो मंसूबा (योजना) तुम्हारे पेश ए नज़र हो उसको खूब सोच समझ लो ता-के उसका कोई पहलू तुम्हारी निगाह से पोशीदा ना रहे, फिर मेरे खिलाफ उसको अमल में ले आओ और मुझे हरगिज मोहलत ना दो
عَرَبِيفَإِن تَوَلَّيتُم فَما سَأَلتُكُم مِن أَجرٍ ۖ إِن أَجرِيَ إِلّا عَلَى اللَّهِ ۖ وَأُمِرتُ أَن أَكونَ مِنَ المُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि तुम मुँह फेर लो, तो मैंने तुमसे कोई पारिश्रमिक नहीं माँगा, मेरा पारिश्रमिक तो अल्लाह के ज़िम्मे है और मुझे आदेश दिया गया है कि मैं आज्ञाकारियों में से हो जाऊँ।
Roman Urdu (Maududi)Tumne meri naseehat se mooh moda (to mera kya nuksan kiya) main tumse kisi ajar ka talabgaar na tha, mera ajar to Allah ke zimme hai, aur mujhey hukum diya gaya hai ke (khwa koi maane ya na maane) main khud Muslim ban kar rahoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir bhi agar tum aeyraaz hi kiye jao to mein ney tum say koi maawza to nahi maanga mera maawza to sirf Allah hi kay zimmay hai aur mujh ko hukum kiya gaya hai kay mein musalmanon mein say rahon
Devnagri Urdu (Maududi)तुमने मेरी हिदायत से मुंह मोड़ा (तो मेरा क्या नुक्सान किया) मैं तुमसे किसी अजर का तालाब ना था, मेरा अजर तो अल्लाह के ज़िम्मे है, और मुझे हुकुम दिया है के (ख्वा कोई माने या ना माने) मैं खुद मुस्लिम बन कर रहूँ”
عَرَبِيفَكَذَّبوهُ فَنَجَّيناهُ وَمَن مَعَهُ فِي الفُلكِ وَجَعَلناهُم خَلائِفَ وَأَغرَقنَا الَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِنا ۖ فَانظُر كَيفَ كانَ عاقِبَةُ المُنذَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)किंतु उन्होंने उसे झुठला दिया, तो हमने उसे और उन लोगों को जो उसके साथ कश्ती में थे बचा लिया और उन्हें उत्तराधिकारी बना दिया और उन लोगों को डुबो दिया जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया था। तो देखिए उन लोगों का परिणाम कैसा हुआ जिन्हें डराया गया था।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne usey jhutlaya aur nateeja yeh hua ke humne usey aur un logon ko jo uske saath kashti mein thay, bacha liya aur unhi ko zameen mein janashin (successors) banaya aur un sab logon ko garq (drown) kardiya jinhon ne hamari aayat ko jhutlaya tha. Pas dekhlo ke jinhein mutanabbeh (warn) kiya gaya tha (aur phir bhi unhon ne maan kar na diya) unka kya anjaam hua
Roman Urdu (Junagarhi)So woh log inn ko jhutlatay rahey pus hum ney inn ko aur jo inn kay sath kashti mein thay unn ko nijat di aur unn ko janasheen banaya aur jinhon ney humari aayaton ko jhutlaya tha unn ko gharq ker diya. So dekhna chahaiye kaisa anjam hua unn logon ka jo daraye jaa chukay thay
Devnagri Urdu (Maududi)उन्होन ने उसे झुटलाया और नतीजा ये हुआ के हमने उसे और उन लोगों को जो उसके साथ कश्ती में थे, बचा लिया और उन्हें ज़मीन में जानशीन (उत्तराधिकारियों) ने बनाया और उन सब लोगों को गर्क (डूब) करदिया जिन्हों ने हमारी आयत को झुटलाया था, पास देखलो के जिन्हे मुतनब्बे (चेतावनी) किया गया था (और फिर भी उन्होन ने मान कर ना दिया) उनका क्या अंजाम हुआ।
عَرَبِيثُمَّ بَعَثنا مِن بَعدِهِ رُسُلًا إِلىٰ قَومِهِم فَجاءوهُم بِالبَيِّناتِ فَما كانوا لِيُؤمِنوا بِما كَذَّبوا بِهِ مِن قَبلُ ۚ كَذٰلِكَ نَطبَعُ عَلىٰ قُلوبِ المُعتَدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसके बाद हमने कई रसूल उनकी जाति की ओर भेजे, तो वे उनके पास खुली निशानियाँ लेकर आए। पर वे ऐसे न थे कि जिसे वे पहले झुठला चुके थे, उसपर ईमान लाते। इसी तरह हम सीमा से आगे बढ़ने वालों के दिलों पर मुहर लगा देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir Nooh ke baad humne mukhtalif paigambaron ko unki qaumon ki taraf bheja aur woh unke paas khuli khuli nishaniyan lekar aaye, magar jis cheez ko unhon ne pehle jhutla diya tha usey phir maan kar na diya. Is tarah hum hadd se guzar janey walon ke dilon par thappa laga dete hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir nooh (alh-e-salam) kay baad hum ney aur rasoolon ko unn ki qom ki taraf bheja so woh unn kay pass roshan daleelen ley ker aaye pus jiss cheez ko unhon ney awwal mein jhoota keh diya yeh na hua ka phir uss ko maan letay. Allah Taalaa issi tarah hadd say barhney walon kay dilon per band laga deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर नूह के बाद हमने मुखतलिफ़ पैगम्बरों को उनकी क़ौमों की तरफ भेजा और वो उनके पास खुली खुली निशानियां लेकर आये, मगर जिस चीज़ को उन्होन ने पहला झुटला दिया था उसे फिर मान कर ना दिया। इस तरह हम हद से गुजर जाने वालों के दिलों पर थप्पा लगा देते हैं
عَرَبِيثُمَّ بَعَثنا مِن بَعدِهِم موسىٰ وَهارونَ إِلىٰ فِرعَونَ وَمَلَئِهِ بِآياتِنا فَاستَكبَروا وَكانوا قَومًا مُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उनके बाद हमने मूसा और हारून को अपनी निशानियों के साथ फ़िरऔन और उसके सरदारों के पास भेजा, तो उन्होंने बहुत घमंड किया और वे अपराधी लोग थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir unke baad humne Moosa aur Haroon ko apni nishaniyon ke sath Firoun aur uske sardaron ki taraf bheja, magar unhon ne apni badayi ka ghamand kiya aur woh mujreem log thay
Roman Urdu (Junagarhi)Phir inn payghumbaron kay baad hum ney musa (alh-e-salam) aur haroon (alh-e-salam) ko firaon aur uss kay sardaron kay pass apni nishaniyan dey ker bheja. So unhon ney takabbur kiya aur woh log mujrim qom thay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उनके बाद हमने मूसा और हारून को अपने निशानियों के साथ फिरौन और उसके सरदारों की तरफ भेजा, मगर उनहों ने अपनी बदाई का घमंड किया और वो मुजरिम लोग थे
عَرَبِيفَلَمّا جاءَهُمُ الحَقُّ مِن عِندِنا قالوا إِنَّ هٰذا لَسِحرٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः जब उनके पास हमारी ओर से सत्य आया, तो उन्होंने कहा कि : नि:संदेह यह तो खुला जादू है।
Roman Urdu (Maududi)Pas jab hamare paas se haqq unke saamne aaya to unhon ne kehdiya ke yeh to khula jaadu hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab unn ko humaray pass say sahih daleel phonchi to woh log kehney lagay kay yaqeenan yeh sareeh jadoo hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास जब हमारे पास से हक उनके सामने आया तो उनको ने कहा के ये तो खुला जादू है
عَرَبِيقالَ موسىٰ أَتَقولونَ لِلحَقِّ لَمّا جاءَكُم ۖ أَسِحرٌ هٰذا وَلا يُفلِحُ السّاحِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)मूसा (अलैहिस्सलाम) ने कहा : क्या तुम सत्य के बारे में (ऐसा) कहते हो, जब वह तुम्हारे पास आया? क्या जादू है यह? हालाँकि, जादूगर सफल नहीं होते।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha: “tum haqq ko yeh kehte ho jabke woh tumhare saamne aa gaya, kya yeh jaadu hai? Halanke jaadugar falaah nahin paya karte”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) ney farmaya kay kiya tum iss sahih daleel ki nisbat jabkay woh tumharay pass phonchi aisi baat kehtay ho kiya yeh jadoo hai halankay jadoogar kaamyab nahi hua keray
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा: "तुम हक को ये कहते हो जबके वो तुम्हारे सामने आ गया, क्या ये जादू है? हालंके जादूगर फलाह नहीं पाया करते"
عَرَبِيقالوا أَجِئتَنا لِتَلفِتَنا عَمّا وَجَدنا عَلَيهِ آباءَنا وَتَكونَ لَكُمَا الكِبرِياءُ فِي الأَرضِ وَما نَحنُ لَكُما بِمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि हमको उस मार्ग से फेर दे जिसपर हमने अपने बाप-दादा को पाया है और इस देश में तुम दोनों की बड़ाई स्थापित हो जाए? और हम तुम दोनों को बिलकुल मानने वाले नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab mein kaha “kya tu is liye aaya hai ke humein us tareeqe se pher de jispar humne apne baap dada ko paya hai aur zameen mein badayi tum dono ki qayam ho jaye? Tumhari baat to hum maanne waley nahin hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh log kehney lagay kiya tum humaray pass iss liye aaye ho kay hum ko iss tareeqay say hata do jiss per hum ney apney baap dadon ko paya hai aur tum dono ko duniya mein baraee mill jaye aur hum tum dono ko kabhi na manen gay
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने जवाब में कहा "क्या तू इसके लिए आया है के हमें तरीक़े से फेर दे जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है और ज़मीन में बदाई तुम दोनो की क़याम हो जाए? तुम्हारी बात तो हम मन्ने वाले नहीं हैं"
عَرَبِيوَقالَ فِرعَونُ ائتوني بِكُلِّ ساحِرٍ عَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और फ़िरऔन ने कहा : हर कुशल जादूगर को मेरे पास लेकर आओ।
Roman Urdu (Maududi)Aur Firoun ne (apne aadmiyon se) kaha ke “ har maahir-e-fun (expert) jaadugar ko mere paas haazir karo”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur firaon ney kaha meray pass tamam maahir jadoogaron ko hazir kero
Devnagri Urdu (Maududi)और फिरौन ने (अपने आदमियों से) कहा के "हर" माहिर-ए-फन (विशेषज्ञ) जादूगर को मेरे पास हाजिर करो”
عَرَبِيفَلَمّا جاءَ السَّحَرَةُ قالَ لَهُم موسىٰ أَلقوا ما أَنتُم مُلقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब जादूगर आ गए, तो मूसा ने उनसे कहा : जो कुछ तुम फेंकने वाले हो, फेंको।
Roman Urdu (Maududi)Jab jaadugar aa gaye to moosa ne unsey kaha “jo kuch tumhein phenkna hai phenko.”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab jadoogar aaye to musa (alh-e-salam) ney unn say farmaya kay dalo jo kuch tum dalney walay ho
Devnagri Urdu (Maududi)जब जादूगर आ गए तो मूसा ने उन्हें कहा “जो कुछ तुम्हें फेंकना है फेंको।”
عَرَبِيفَلَمّا أَلقَوا قالَ موسىٰ ما جِئتُم بِهِ السِّحرُ ۖ إِنَّ اللَّهَ سَيُبطِلُهُ ۖ إِنَّ اللَّهَ لا يُصلِحُ عَمَلَ المُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उन्होंने फेंक दिया, तो मूसा ने कहा : तुम जो कुछ लाए हो, वह तो जादू है। निश्चय ही अल्लाह उसे शीघ्र ही निष्फल कर देगा। निःसंदेह अल्लाह बिगाड़ पैदा करने वालों का काम बनने नहीं देता।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab unhon ne apne anchar phenk [cast (their staffs)] diye to Moosa ne kaha, “ yeh jo kuch tumne phenka hai yeh jaadu hai, Allah abhi isey baatil kiye deta hai, mufsidon(mischief-makers) ke kaam ko Allah sudharne nahin deta
Roman Urdu (Junagarhi)So jab unhon ney dala to musa (alh-e-salam) ney farmaya kay yeh jo kuch tum laye ho jadoo hai. Yaqeeni baat hai kay Allah iss ko abhi darhum barhumkiye deta hai Allah aisay dasadiyon ka kaam bannay nahi deta
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब उन्होन ने अपने एंकर फेंके [कास्ट (उनके कर्मचारी)] दिए तो मूसा ने कहा, "ये जो तुमने फेंका है ये जादू है, अल्लाह अभी इसे बातिल किये देता है, मुफ़्सिदों (शरारत करने वालों) के काम को अल्लाह सुधरने नहीं देता
عَرَبِيوَيُحِقُّ اللَّهُ الحَقَّ بِكَلِماتِهِ وَلَو كَرِهَ المُجرِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह सत्य को, अपने शब्दों से, सत्य कर दिखाता है, यद्यपि अपराधियों को बुरा लगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah apne farmaano se haqq ko haqq kar dikhata hai, khwa mujreemo ko woh kitna hi nagawar ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa haq ko apney farmaan say sabit ker deta hai go mujrim kaisa hi na gawar samjhen
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह अपने फ़रमानों से हक को हक कर दिखाता है, ख्वा मुजरेमो को वो कितना ही नागावर हो”
عَرَبِيفَما آمَنَ لِموسىٰ إِلّا ذُرِّيَّةٌ مِن قَومِهِ عَلىٰ خَوفٍ مِن فِرعَونَ وَمَلَئِهِم أَن يَفتِنَهُم ۚ وَإِنَّ فِرعَونَ لَعالٍ فِي الأَرضِ وَإِنَّهُ لَمِنَ المُسرِفينَ
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हिन्दी (Al-Omari)चुनाँचे मूसा पर उसकी जाति के कुछ युवाओं के सिवा कोई ईमान न लाया, (वह भी) फ़िरऔन और उनके सरदारों से डरते हुए कि कहीं वे उन्हें आज़माइश में न डाल दें। और निःसंदेह फ़िरऔन का धरती में बड़ा प्रभुत्व था और निश्चय ही वह हद पार करने वालों में से था।
Roman Urdu (Maududi)(Phir dekho ke) Moosa ko uski qaum mein se chandh nawjawano ke siwa kisi ne na maana, Firoun ke darr se aur khud apni qaum ke sarbar-awardah (own chiefs )logon ke darr se (jinhein khauf tha ke) Firoun unko azaab mein mubtala karega. Aur waqiya yeh hai ke Firoun zameen mein galba rakhta tha aur woh un logon mein se tha jo kisi hadd par rukte nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Pus musa (alh-e-salam) per unn ki qom mein say sirf qadray qaleel aadmi eman laye woh bhi firaon say aur apney hukkaam say dartay dartay kay kahin unn ko takleef phonchaye uss mulk mein firaon tha bhi sirkash aur tha bhi woh insaf ki hadd say guzar janey walon mein
Devnagri Urdu (Maududi)(फिर देखो के) मूसा को उसकी क़ौम में से चंद नवाज़वानों के सिवा किसी ने ना माना, फिरौन के डर से और खुद अपनी क़ौम के सरबर-अवार्डा (अपने प्रमुख) लोगन के डर से (जिन्हें खौफ था के) फिरौन उनको अज़ाब में मुबतला करेगा। और वाकिया ये है के फिरौन ज़मीन में गलबा रखा था और वो उन लोगों में से था जो किसी हद पर रुकते नहीं हैं
عَرَبِيوَقالَ موسىٰ يا قَومِ إِن كُنتُم آمَنتُم بِاللَّهِ فَعَلَيهِ تَوَكَّلوا إِن كُنتُم مُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और मूसा ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! यदि तुम अल्लाह पर ईमान लाए हो, तो उसी पर भरोसा करो, यदि तुम आज्ञाकारी हो।
Roman Urdu (Maududi)Mossa ne apni qaum se kaha ke “logon, agar tum waqayi Allah par iman rakhte ho to uspar bharosa karo agar musalman ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur musa (alh-e-salam) ney farmaya aey meri qom! Agar tum Allah per eman rakhtay ho to ussi per tawakkal kero agar tum musalman ho
Devnagri Urdu (Maududi)मोसा ने अपनी क़ौम से कहा के "लोगन, अगर तुम अल्लाह पर ईमान रखते हो तो उसपर भरोसा करो अगर मुसलमान हो"
عَرَبِيفَقالوا عَلَى اللَّهِ تَوَكَّلنا رَبَّنا لا تَجعَلنا فِتنَةً لِلقَومِ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्होंने कहा : हमने अल्लाह ही पर भरोसा किया है। ऐ हमारे पालनहार! हमें अत्याचारी लोगों के लिए आज़माइश न बना।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “humne Allah hi par bharosa kiya, aey hamare Rubb, humein zalim logon ke liye fitna na bana
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney arz kiya kay hum ney Allah hi per tawakkal kiya. Aey humaray perwerdigar! Hum ko inn zalimon kay liye fitna na bana
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने जवाब दिया "हमने अल्लाह ही पर भरोसा किया, ऐ हमारे रब, हमें जालिम लोगों के लिए फितना न बना
عَرَبِيوَنَجِّنا بِرَحمَتِكَ مِنَ القَومِ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमें काफ़िर लोगों से अपनी रहमत से नजात दे।
Roman Urdu (Maududi)Aur apni rehmat se humko kafiron se nijaat de.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ko apni rehmat say inn kafir logon say nijat dey
Devnagri Urdu (Maududi)और अपनी रहमत से हमको काफिरों से निजात दे।"
عَرَبِيوَأَوحَينا إِلىٰ موسىٰ وَأَخيهِ أَن تَبَوَّآ لِقَومِكُما بِمِصرَ بُيوتًا وَاجعَلوا بُيوتَكُم قِبلَةً وَأَقيمُوا الصَّلاةَ ۗ وَبَشِّرِ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने मूसा तथा उनके भाई (हारून) की ओर वह़्य भेजी कि अपनी जाति के लिए मिस्र में कुछ घरों को उपासनागृह नियत कर लो, और अपने घरों को क़िबले की तरफ़ बना लो, और नमाज़ क़ायम करो, और ईमान वालों को ख़ुशख़बरी दे दो।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne Moosa aur uske bhai ko ishara kiya ke “Misr (Egypt) mein chandh makaan apni qaum ke liye muhaiyya karo aur apne in makaano (houses) ko qibla thehra lo aur namaz qayam karo aur ehle imaan ko basharat (khush khabri) de do”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney musa (alh-e-salam) aur unn kay bhai kay pass wahee bheji kay tum dono apney unn logon kay liye misir mein ghar bar-qarar rakho aur tum sab apney enhi gharon ko namaz parhney ki jagah qarar dey lo aur namaz kay paband raho aur aap musalmanon ko bisharat dey den
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने मूसा और उसके भाई को इशारा किया के "मिस्र (मिस्र) में चांद मकान अपनी क़ौम के लिए मुहय्या करो और अपने मकानों (घरों) को क़िबला ठहर लो और नमाज़ क़याम करो और एहले ईमान को बशारत (ख़ुश ख़बरी) दे दो"
عَرَبِيوَقالَ موسىٰ رَبَّنا إِنَّكَ آتَيتَ فِرعَونَ وَمَلَأَهُ زينَةً وَأَموالًا فِي الحَياةِ الدُّنيا رَبَّنا لِيُضِلّوا عَن سَبيلِكَ ۖ رَبَّنَا اطمِس عَلىٰ أَموالِهِم وَاشدُد عَلىٰ قُلوبِهِم فَلا يُؤمِنوا حَتّىٰ يَرَوُا العَذابَ الأَليمَ
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हिन्दी (Al-Omari)और मूसा ने कहा : ऐ हमारे पालनहार! तूने फ़िरऔन और उसके सरदारों को सांसारिक जीवन में शोभा-सामग्री तथा धन-संपत्ति प्रदान की है, ऐ हमारे पालनहार! ताकि वे (लोगों को) तेरे मार्ग से भटकाएँ। ऐ मेरे पालनहार! उनके धनों को मिटा दे और उनके दिलों को कसकर बाँध दे, ताकि वे ईमान न लाएँ, यहाँ तक कि दर्दनाक अज़ाब देख लें।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne dua ki “Aey hamare Rubb, tu nay Firoun aur uske sardaron ko duniya ki zindagi mein zeenat aur amwal (maal) se nawaz rakkha hai. Aey Rubb! Kya yeh is liye hai ke woh logon ko teri raah se bhatkayein? Aey Rubb, unke maal gharat (obliterate) karde aur unke dilon par aisi mohar karde ke iman na layein jab tak dardnaak azaab na dekh lein”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur musa (alh-e-salam) ney arz kiya aey humaray rab! Tu ney firaon ko aur uss kay sardaron ko saman-e-zeenat aur tarah tarah kay maal dunayawi zindagi mein diye. Aey humaray rab! (issi wastay diye hain kay) woh teri raah say gumrah keren. Aey humaray rab! Unn kay malon ko neest-o-nabood ker dey aur unn kay dilon ko sakht ker dey so yeh eman na laa payen yahan tak kay dard naak azab ko dekh len
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने दुआ की "ऐ हमारे रब, तू नहीं फिरौन और उसके सरदारों को दुनिया की जिंदगी में ज़ीनत और अमवाल (माल) से नवाज़ रक्खा है। ए रब! क्या ये तुम्हारे लिए है कि वो लोगों को तेरी राह से भटकाएं? ए रब, उनका माल ख़राब" (मिटाना) करदे और उनके दिलों पर ऐसी मोहर करदे के ईमान ना लायें जब तक दर्दनक अजब ना देख लें”
عَرَبِيقالَ قَد أُجيبَت دَعوَتُكُما فَاستَقيما وَلا تَتَّبِعانِّ سَبيلَ الَّذينَ لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने कहा : निःसंदेह तुम दोनों की प्रार्थना स्वीकार कर ली गई। अतः तुम दोनों दृढ़ रहो और उन लोगों के मार्ग पर न चलो, जो नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Allah taala ne jawab mein farmaya “tum dono ki dua qabool ki gayi, Sabit-qadam (steadfast) raho aur un logon ke tareeqe ki hargiz pairwi na karo jo ilm nahin rakhte”
Roman Urdu (Junagarhi)Haq Taalaa ney farmaya kay tum dono ki dua qabool ker li gaeeso tum sabit qadam raho aur unn logon ki raah na chalna jin ko ilm nahi
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ताला ने जवाब में फरमाया "तुम दोनों की दुआ कबूल की गई, साबित-कदम रहो और उन लोगों के तारीख की हरगिज जोड़ी न करो जो इल्म नहीं रखते"
عَرَبِي۞ وَجاوَزنا بِبَني إِسرائيلَ البَحرَ فَأَتبَعَهُم فِرعَونُ وَجُنودُهُ بَغيًا وَعَدوًا ۖ حَتّىٰ إِذا أَدرَكَهُ الغَرَقُ قالَ آمَنتُ أَنَّهُ لا إِلٰهَ إِلَّا الَّذي آمَنَت بِهِ بَنو إِسرائيلَ وَأَنا مِنَ المُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने बनी इसराईल को सागर पार करा दिया, तो फ़िरऔन और उसकी सेना ने सरकशी और ज़्यादती करते हुए उनका पीछा किया। यहाँ तक कि जब वह डूबने लगा, तो बोला : मैं ईमान ले आया कि निःसंदेह उसके सिवा कोई पूज्य नहीं, जिसपर बनी इसराईल ईमान लाए हैं और मैं आज्ञाकारियों में से हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur hum bani Israel ko samandar se guzar le gaye phir Firoun aur uske lashkar zulm aur zyadati ki garz se unke peechey chale hatta ke jab Firoun doobne laga to bol uttha “maine maan liya ke khudawand e haqiqi uske siwa koi nahin hai jispar bani Israel iman laye, aur main bhi sar e itaat jhuka dene walon mein se hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney bani israeel ko darya say paar ker diya phir unn kay peechay peechay firaon apney lashkar kay sath zulm aur ziyadti kay iraday say chala yahan tak kay jab dobney laga to kehney laga mein eman lata hun kay jiss per bani israeel eman laye hain uss kay siwa koi mabood nahi aur mein musalman mein say hun
Devnagri Urdu (Maududi)और हम बानी इसराइल को समंदर से गुजर ले गए फिर फिरौन और उसके लश्कर ज़ुल्म और ज़्यादा की ग़रज़ से उनके पीछे चले हट्टा के जब फ़िरौन डूबने लगा तो बोल उठा "मैंने मान लिया के खुदावंद ए हक़ीक़ी उसके सिवा कोई नहीं है जिसपर बानी इसराइल ईमान लाए, और मैं भी सर ए इताअत झुका देने वालों में से हूँ"
عَرَبِيآلآنَ وَقَد عَصَيتَ قَبلُ وَكُنتَ مِنَ المُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या अब? हालाँकि निःसंदेह तूने इससे पहले अवज्ञा की और तू बिगाड़ पैदा करने वालों में से था।
Roman Urdu (Maududi)(jawab diya gaya) ab iman lata hai ! halanke issey pehle tak tu nafarmani karta raha aur fasaad barpa karne walon (mischief-makers) mein se tha
Roman Urdu (Junagarhi)(jawab diya gaya kay) abb eman lata hai? Aur pehlay sirkashi kerta raha aur mufsidon mein dakhil raha
Devnagri Urdu (Maududi)(जवाब दिया गया) अब ईमान लता है! हालंके इस्से पहले तक तू नफरमानी करता रहा और फसाद बरपा करने वालों (शरारत करने वालों) में से था
عَرَبِيفَاليَومَ نُنَجّيكَ بِبَدَنِكَ لِتَكونَ لِمَن خَلفَكَ آيَةً ۚ وَإِنَّ كَثيرًا مِنَ النّاسِ عَن آياتِنا لَغافِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आज हम तेरे शरीर को बचा लेंगे, ताकि तू अपने बाद आने वालों के लिए एक बड़ी निशानी बन जाए और निःसंदेह बहुत-से लोग हमारी निशानियों से निश्चय ग़ाफ़िल हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ab to hum sirf teri laash (dead body) hi ko bachayenge taa-ke tu baad ki nasalon ke liye nishan e ibrat baney agarche bahut se Insaan aisey hain jo hamari nishaniyon se gaflat barat-te hain”
Roman Urdu (Junagarhi)So aaj hum sirf teri laash ko nijat den gay takay tu unn kay liye nishan-e-ibrat ho jo teray baad hain aur haqeeqat yeh hai kay boht say aadmi humari nishaniyon say ghafil hain
Devnagri Urdu (Maududi)अब तो हम सिर्फ तेरी लाश (शव) ही को बचाएंगे ता-के तू बाद की नसलों के लिए निशान ए इब्रत बने अगरचे बहुत से इंसान ऐसे हैं जो हमारी निशानियों से गफ़लत बरात-ते हैं"
عَرَبِيوَلَقَد بَوَّأنا بَني إِسرائيلَ مُبَوَّأَ صِدقٍ وَرَزَقناهُم مِنَ الطَّيِّباتِ فَمَا اختَلَفوا حَتّىٰ جاءَهُمُ العِلمُ ۚ إِنَّ رَبَّكَ يَقضي بَينَهُم يَومَ القِيامَةِ فيما كانوا فيهِ يَختَلِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने बनी इसराईल को सम्मानित ठिकाना दिया और उन्हें पाकीज़ा चीज़ों से जीविका प्रदान की। फिर उन्होंने आपस में मतभेद नहीं किया, यहाँ तक कि उनके पास ज्ञान आ गया। निःसंदेह आपका पालनहार क़ियामत के दिन उनके बीच उस चीज़ का निर्णय कर देगा, जिसमें वे मतभेद करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Humne bani Israel ko bahut accha thikana diya aur nihayat umdah wasail e zindagi unhein ata kiye, phir unhon ne baham ikhtilaf nahin kiya magar us waqt jabke ilm unke paas aa chuka tha. Yaqeenan tera Rubb qayamat ke roz unke darmiyan us cheez ka faisla kardega jismein woh ikhtilaf karte rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney bani israeel ko boht acha thikana rehney ko diya aur hum ney unhen pakeezah cheezen khaney ko den. So unhon ney ikhtilaf nahi kiya yahan tak kay unn kay pass ilm phonch gaya. Yaqeeni baat hai kay aap ka rab unn kay darmiyan qayamat kay din unn umoor mein faisla ker dey ga jinn mein woh ikhtilaf kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)हमने बनी इसराइल को बहुत अच्छा ठिकाना दिया और निहायत उम्मीद उमदा वासिल ए जिंदगी उन्हें अता किए, फिर उन्होन ने बहाम इख्तिलाफ नहीं किया मगर हमें वक्त जबके इल्म उनके पास आ चूका था। यकीनन तेरा रुब कयामत के रोज़ उनके दरमियान हमें चीज़ का फैसला कर देगा जिसमें वो इख्तिलाफ़ करते रहेंगे हैं
عَرَبِيفَإِن كُنتَ في شَكٍّ مِمّا أَنزَلنا إِلَيكَ فَاسأَلِ الَّذينَ يَقرَءونَ الكِتابَ مِن قَبلِكَ ۚ لَقَد جاءَكَ الحَقُّ مِن رَبِّكَ فَلا تَكونَنَّ مِنَ المُمتَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि आपको उसमें कुछ संदेह हो, जो हमने आपकी ओर उतारा है, तो उन लोगों से पूछ लें, जो आपसे पहले किताब पढ़ते हैं। निःसंदेह आपके पास आपके पालनहार की ओर से सत्य आ चुका है। अतः आप हरगिज़ संदेह करने वालों में से न हों।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar tujhey us hidayat ki taraf se kuch bhi shakk ho jo humne tujhpar nazil ki hai to un logon se pooch le jo pehle se kitab padh rahey hain. Fil-waqeh yeh tere paas haqq hi aaya hai tere Rubb ki taraf se, lihaza tu shakk karne walon mein se na ho
Roman Urdu (Junagarhi)Phir agar aap iss ki taraf say shak mein hon jiss ko hum ney aap kay pass bheja hai to aap unn logon say pooch dekhiye jo aap say pehlay kitabon ko parhtay hain. Be-shak aap kay pass aap kay rab ki taraf say sachi kitab aaee hai. Aap hergiz shak kerney walon mein say no hon
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर तुम्हें हिदायत की तरफ से कुछ भी शक हो जो हमें तुझपर नाज़िल की है तो उन लोगों से पूछ ले जो पहले से किताब पढ़ रहे हैं। फिल-वाक़े ये तेरे पास हक़ ही आया है तेरे रब की तरफ से, लिहाज़ा तू शक्क करने वालों में से ना हो
عَرَبِيوَلا تَكونَنَّ مِنَ الَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِ اللَّهِ فَتَكونَ مِنَ الخاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप उन लोगों में कभी न होना, जिन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया, अन्यथा आप घाटा उठाने वालों में से हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur un logon mein na shamil ho jinhon ne Allah ki aayat ko jhutlaya hai, warna tu nuksaan uthane walon mein se hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na unn logon mein say hon jinhon ney Allah Taalaa ki aayaton ko jhutalaya kahin aap khasara paaney walon mein say na hojayen
Devnagri Urdu (Maududi)और उन लोगों में ना शामिल हो जिन्होन ने अल्लाह की आयत को झुटलाया है, वरना तू नुक्सान उठाने वालों में से होगा
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ حَقَّت عَلَيهِم كَلِمَتُ رَبِّكَ لا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों के विरुद्ध आपके पालनहार का फ़ैसला सिद्ध हो चुका, वे ईमान नहीं लाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke jin logon par tere Rubb ka qaul raast aa gaya hai(word of your Lord has been fulfilled) unke saamne khwa koi nishani aa jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan jin logon kay haq mein aap kay rab ki baat sabit ho chuki hai woh eman na layen gay
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के जिन लोगों पर तेरे रब का क़ौल रस्त आ गया है (तुम्हारे रब का वचन पूरा हो गया है) उनके सामने ख्वा कोई निशानी आ जाए
عَرَبِيوَلَو جاءَتهُم كُلُّ آيَةٍ حَتّىٰ يَرَوُا العَذابَ الأَليمَ
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हिन्दी (Al-Omari)चाहे उनके पास हर निशानी आ जाए, यहाँ तक कि वे दर्दनाक अज़ाब देख लें।
Roman Urdu (Maududi)Woh kabhi iman laa kar nahin dete jab tak ke dardnaak azaab saamne aata na dekh lein
Roman Urdu (Junagarhi)Go inn kay pass tamam nishaniyan phonch jayen jab tak kay woh dard naak azab ko na dekh len
Devnagri Urdu (Maududi)वो कभी ईमान ला कर नहीं देते जब तक के दर्दनाक अज़ाब सामने न देख लें
عَرَبِيفَلَولا كانَت قَريَةٌ آمَنَت فَنَفَعَها إيمانُها إِلّا قَومَ يونُسَ لَمّا آمَنوا كَشَفنا عَنهُم عَذابَ الخِزيِ فِي الحَياةِ الدُّنيا وَمَتَّعناهُم إِلىٰ حينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो कोई ऐसी बस्ती क्यों न हुई जो ईमान लाई हो, फिर उसके ईमान ने उसे लाभ पहुँचाया हो, सिवाए यूनुस की जाति के लोगों के। जब वे ईमान ले आए, तो हमने उनसे सांसारिक जीवन में अपमान की यातना को टाल दिया और उन्हें एक निश्चित समय तक लाभ उठाने का अवसर दे दिया।
Roman Urdu (Maududi)Phir kya aisi koi misaal hai ke ek basti azaab dekh kar iman layi ho aur uska iman uske liye nafa baksh sabit hua ho? Yunus ki qaum ke siwa (iski koi nazeer nahin) woh qaum jab iman le aayi thi to albatta humne uspar se duniya ki zindagi mein ruswayi ka azaab taal diya tha aur usko ek muddat tak zindagi se behramand honay ka mauqa de diya tha
Roman Urdu (Junagarhi)Chunacha koi basti eman na laee kay eman lana uss ko nafey hota siwaye younus (alh-e-salam) ki qom kay. Jab woh eman ley aaye to hum ney ruswaee kay azab ko dunyawi zindagi mein unn per say taal diya aur unn ko aik waqt (khas) tak kay liye zindagi say faeeda uthaney (ka moqa) diya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्या ऐसी कोई मिसाल है के एक बस्ती अज़ाब देख कर ईमान लाई हो और उसका ईमान उसके लिए नफा बख्श साबित हुआ हो? यूनुस की क़ौम के सिवा (इसकी कोई नज़ीर नहीं) वो क़ौम जब ईमान ले आई थी तो अलबत्ता हमने उसपर से दुनिया की जिंदगी में रुसवाई का अजब ताल दिया था और उसको एक मुद्दत तक जिंदगी से बेहरमंद होने का मौका दे दिया था
عَرَبِيوَلَو شاءَ رَبُّكَ لَآمَنَ مَن فِي الأَرضِ كُلُّهُم جَميعًا ۚ أَفَأَنتَ تُكرِهُ النّاسَ حَتّىٰ يَكونوا مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि आपका पालनहार चाहता, तो निश्चय धरती में रहने वाले सभी लोग ईमान ले आते। तो क्या आप लोगों को बाध्य करेंगे कि वे मोमिन बन जाएँॽ
Roman Urdu (Maududi)Agar tere Rubb ki mashiyat (will) yeh hoti (ke zameen mein sab momin o farmabardar hi hon) to sarey ehle zameen iman le aaye hotey. Phir kya tu logon ko majboor karega ke woh momin ho jayein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar aap ka rab chahata to tamam roy-e-zamin kay log sab kay sab eman latay to kiya aap logon per zabardasti ker saktay hain yahan tak kay woh momin hi ho jayen
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तेरे रब की मशियत (इच्छा) ये होती (के ज़मीन में सब मोमिन ओ फ़रमाबरदार ही होते) तो सारे एहले ज़मीन ईमान ले आये होते। फिर क्या तू लोगों को मजबूर करेगा के वो मोमिन हो जाए
عَرَبِيوَما كانَ لِنَفسٍ أَن تُؤمِنَ إِلّا بِإِذنِ اللَّهِ ۚ وَيَجعَلُ الرِّجسَ عَلَى الَّذينَ لا يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)किसी प्राणी के लिए यह संभव नहीं है कि वह अल्लाह की अनुमति के बिना ईमान लाए और वह उन लोगों पर मलिनता डाल देता है, जो समझ नहीं रखते।
Roman Urdu (Maududi)Koi mutanaffis Allah ke izan ke bagair iman nahin laa sakta, aur Allah ka tareeqa yeh hai ke jo log aqal se kaam nahin letay unpar gandagi daal deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Halankay kissi shaks ka eman lana Allah kay hukum kay baghair mumkin nahi. Aur Allah Taalaa bey aqal logon per gandagi daal deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)कोई मुतनफ़्फ़िस अल्लाह के इज़ान के बिना ईमान नहीं ला सकता, और अल्लाह का तरीक़ा ये है के जो लोग अक़ल से काम नहीं लेते उनपर गंदगी डाल देता है
عَرَبِيقُلِ انظُروا ماذا فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ وَما تُغنِي الآياتُ وَالنُّذُرُ عَن قَومٍ لا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) उनसे कह दें : तुम देखो आकाशों और धरती में क्या कुछ है? तथा निशानियाँ और चेतावनियाँ उन लोगों के लिए किसी काम की नहीं हैं जो ईमान नहीं लाते।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho “zameen aur aasmano mein jo kuch hai usey ankhein khol kar dekho” aur jo log iman lana hi nahin chahte unke liye nishaniyan aur tambeehein (warnings) aakhir kya mufeed ho sakti hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay tum ghor kero kay kiya kiya cheezen aasmanon mein aur zamin mein hain aur jo log eman nahi latay unn ko nishaniyan aur dhamkiyan kuch faeeda nahi phonchatin
Devnagri Urdu (Maududi)इंसे कहो "ज़मीन और आसमान में जो कुछ है उसे आंखें खोल कर देखो” और जो लोग ईमान लाना ही नहीं चाहते उनके लिए निशानियां और तम्बीहें (चेतावनी) आखिर क्या मुफीद हो सकती हैं
عَرَبِيفَهَل يَنتَظِرونَ إِلّا مِثلَ أَيّامِ الَّذينَ خَلَوا مِن قَبلِهِم ۚ قُل فَانتَظِروا إِنّي مَعَكُم مِنَ المُنتَظِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या ये लोग उन लोगों के दिनों के समान (दिनों) की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो उनसे पहले गुज़र चुके हैंॽ आप कह दें : फिर प्रतीक्षा करो, निश्चय मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करने वालों में से हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Ab yeh log iske siwa aur kis cheez ke muntazir hain ke wahi burey din dekhein jo inse pehle guzre huey log dekh chuke hain? Insey kaho “accha, intezar karo, main bhi tumhare saath intezar karta hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)So woh log sirf unn logon kay say waqiyaat ka intizar ker rahey hain jo inn say pehlay guzr chukay hain. Aap farma dijiye kay acha to tum intizar mein raho mein bhi tumharay sath intizar kerney walon mein hun
Devnagri Urdu (Maududi)अब ये लोग इसके सिवा और किस चीज़ के मुंतज़िर हैं के वही बुरे दिन देखेंगे जो इनसे पहले गुज़रे हुए लोग देख चुके हैं? इनसे कहो "अच्छा, इंतजार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतजार करता हूं"
عَرَبِيثُمَّ نُنَجّي رُسُلَنا وَالَّذينَ آمَنوا ۚ كَذٰلِكَ حَقًّا عَلَينا نُنجِ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हम अपने रसूलों को और ईमान लाने वालों को बचा लेते हैं। इसी तरह हमपर हक़ है कि हम ईमान वालों को बचा लें।
Roman Urdu (Maududi)Phir (jab aisa waqt aata hai to) hum apne Rasoolon ko aur un logon ko bacha liya karte hain jo iman laye hon. Hamara yahi tareeqa hai. Humpar yeh haqq hai ke momino ko bacha lein
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum apney payghumbaron ko aur eman walon ko bacha letay thay issi tarah humaray zimmay hai kay hum eman walon ko nijat diya kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)फिर (जब ऐसा वक्त आता है तो) हम अपने रसूलों को और उन लोगों को बचा लिया करते हैं जो ईमान लाए हैं। हमारा यही तरीका है. हमपर ये हक़ है के मोमिनो को बचा लें
عَرَبِيقُل يا أَيُّهَا النّاسُ إِن كُنتُم في شَكٍّ مِن ديني فَلا أَعبُدُ الَّذينَ تَعبُدونَ مِن دونِ اللَّهِ وَلٰكِن أَعبُدُ اللَّهَ الَّذي يَتَوَفّاكُم ۖ وَأُمِرتُ أَن أَكونَ مِنَ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : ऐ लोगो! यदि तुम मेरे धर्म के बारे में किसी संदेह में हो, तो मैं उनकी इबादत नहीं करता, जिनकी तुम अल्लाह को छोड़कर इबादत करते हो, बल्कि मैं उस अल्लाह की इबादत करता हूँ, जो तुम्हें मौत देता है और मुझे आदेश दिया गया है कि मैं ईमान वालों में से जाऊँ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi!) kehdo ke logon, agar tum abhi tak mere deen ke mutaliq kisi shakk mein ho to sunlo ke tum Allah ke siwa jinki bandagi karte ho main unki bandagi nahin karta, balke sirf usi khuda ki bandagi karta hoon jiske qabze mein tumhari maut hai. Mujhey hukum diya gaya hai ke main iman laney walon mein se hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay aey logo! Tum meray deen ki taraf say shak mein ho to mein inn maboodon ki ibadat nahi kerta jin ki tum Allah ko chor ker ibadat kertay ho lekin haan uss Allah ki ibadat kerta hun jo tumhari jaan qabz kerta hai. Aur mujh ko yeh hukum hua hai kay mein eman laney walon mein say hun
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी!) कहदो के लोगों, अगर तुम अभी तक मेरे दीन के मुतालिक किसी शक्क में हो तो सुनलो के तुम अल्लाह के सिवा जिनकी बंदगी करते हो मैं उनकी बंदगी नहीं करता, बाल्के सिर्फ उसी खुदा की बंदगी करता हूं जिसे क़ब्ज़ में तुम्हारी मौत है। मुझे हुकुम दिया गया है के मैं ईमान लाने वालों में से हूं
عَرَبِيوَأَن أَقِم وَجهَكَ لِلدّينِ حَنيفًا وَلا تَكونَنَّ مِنَ المُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह कि आप एकाग्र होकर अपना मुख इस धर्म की ओर सीधा रखें और कदापि बहुदेववादियों में से न हों।
Roman Urdu (Maududi)Aur mujhse farmaya gaya hai ke tu yaksu hokar apne aap ko theek theek is deen par qayam karde, aur hargiz hargiz mushrikon mein se na ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay apna rukh yaksoo hoker (iss) deen ki taraf ker lena aur kabhi mushrikon mein say na hona
Devnagri Urdu (Maududi)और मुझसे फरमाया गया है के तू यक्सू होकर अपने आप को ठीक ठीक इस दीन पर कायम करदे, और हरगिज हरगिज मुशरिकों में से न हो
عَرَبِيوَلا تَدعُ مِن دونِ اللَّهِ ما لا يَنفَعُكَ وَلا يَضُرُّكَ ۖ فَإِن فَعَلتَ فَإِنَّكَ إِذًا مِنَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह को छोड़कर उसे न पुकारें, जो न आपको लाभ पहुँचाए और न आपको हानि पहुँचा सके। फिर यदि आपने ऐसा किया, तो निश्चय ही आप उस समय अत्याचारियों में से हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah ko chodh kar kisi aisi hasti ko na pukar jo tujhey na faiyda pahuncha sakti hai na nuksan. Agar tu aisa karega to zalimon mein se hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah ko chor ker aisi cheez ki ibadat mat kerna jo tujh ko na koi nafa phoncha sakay aur na koi zarrar phoncha sakay. Phir agar aisa kiya to tum iss halat mein zalimon mein say ho jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह को छोड़ कर कोई ऐसी हस्ती को न पुकार जो तुझे न फ़ायदा पाहुंचा सकती है न नुक्सान। अगर तू ऐसा करेगा तो जालिमों में से होगा
عَرَبِيوَإِن يَمسَسكَ اللَّهُ بِضُرٍّ فَلا كاشِفَ لَهُ إِلّا هُوَ ۖ وَإِن يُرِدكَ بِخَيرٍ فَلا رادَّ لِفَضلِهِ ۚ يُصيبُ بِهِ مَن يَشاءُ مِن عِبادِهِ ۚ وَهُوَ الغَفورُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि अल्लाह आपको कोई कष्ट पहुँचाए, तो उसके सिवा कोई उसे दूर करने वाला नहीं और यदि वह आपके लिए कोई भलाई चाहे, तो उसके अनुग्रह को कोई हटाने वाला नहीं। वह उसे अपने बंदों में से जिसे चाहता है, प्रदान करता है तथा वही बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Agar Allah tujhey kisi museebat mein daley to khud uske siwa koi nahin jo is museebat ko taal de, aur agar woh tere haqq mein kisi bhalayi ka irada karey to uske fazal ko pherne wala bhi koi nahin hai. Woh apne bandon mein se jisko chahta hai apne fazal se nawazta hai aur woh darguzar karne wala aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tum ko Allah koi takleef phonchaye to ba-juz uss kay aur koi uss ko door kerney wala nahi hai aur agar woh tum ko koi khair phonchana chahaye to uss kay fazal ka koi hataney wala nahi woh apna fazal apney bandon mein say jiss per chahaye nichawar kerdey aur woh bari maghfirat bari rehmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर अल्लाह तुझे किसी मुसीबत में डाले तो खुद उसके सिवा कोई नहीं जो इस मुसीबत को टाल दे, और अगर वो तेरे हक में किसी भलाई का इरादा करे तो उसके फजल को फिरने वाला भी कोई नहीं है। वो अपने बंदों में से जिसका चाहता है अपने फज़ल से नवाजता है और वो दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِيقُل يا أَيُّهَا النّاسُ قَد جاءَكُمُ الحَقُّ مِن رَبِّكُم ۖ فَمَنِ اهتَدىٰ فَإِنَّما يَهتَدي لِنَفسِهِ ۖ وَمَن ضَلَّ فَإِنَّما يَضِلُّ عَلَيها ۖ وَما أَنا عَلَيكُم بِوَكيلٍ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें : ऐ लोगो! निःसंदेह तुम्हारे पालनहार की ओर से तुम्हारे पास सत्य आ गया है। तो जो सीधे मार्ग पर आया, तो वह अपने आप ही के लिए मार्ग पर आता है और जो पथभ्रष्ट हुआ, तो वह अपने आप ही पर पथभ्रष्ट होता है और मैं तुमपर हरगिज़ कोई निरीक्षक नहीं हूँ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), kehdo ke “logon , tumhare paas tumhare Rubb ki taraf se haqq aa chuka hai, ab jo seedhi raah ikhtiyar karey uski raast-rawi usi ke liye mufeed hai, aur jo gumraah rahey uski gumraahi usi ke liye tabah-kun hai. Aur main tumhare upar koi hawaladaar nahin hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay aey logo! Tumharay pass haq tumharay rab ki taraf say phonch chuka hai iss liye jo shaks raah-e-raast per aajaye so woh apney wastay raah-e-raast per aaye ga aur jo shaks bey raah rahey ga uss ka bey raah hona ussi per paray ga aur mein tum per musallat nahi kiya gaya
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), कहदो के "लोगन, तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से हक़ आ चुका है, अब जो सीधी राह इख्तियार करे उसकी रास्ता-रवी उसके लिए मुफीद है, और जो गुमराह रहे उसकी गुमराही उसके लिए तबह-कुन है और मैं तुम्हारे ऊपर कोई हवालादार नहीं हूं”
عَرَبِيوَاتَّبِع ما يوحىٰ إِلَيكَ وَاصبِر حَتّىٰ يَحكُمَ اللَّهُ ۚ وَهُوَ خَيرُ الحاكِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आप उसी का अनुसरण करें, जो आपकी ओर वह़्य की जाती है और धैर्य से काम लें, यहाँ तक कि अल्लाह फ़ैसला कर दे और वह सब फ़ैसला करने वालों से बेहतर है।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Nabi), tum is hidayat ki pairwi kiye jao jo tumhari taraf bazariye wahee (revelation) bheji jaa rahi hai, aur sabr karo yahan tak ke Allah faisla karde, aur wahi behtareen faisla karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aap uss ki ittabaa kertay rahiye jo kuch aap kay pass wahee bheji jati hai aur sabar kijiye yahan tak kay Allah faisla ker dey aur woh sab faisla kerney walon mein acha hai
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ नबी), तुम हिदायत की जोड़ी बनाओ जो तुम्हारी तरफ बाजारिये वही (खुलासा) भेजो। राही है, और सब्र करो यहां तक ​​के अल्लाह फैसला करदे, और वही बेहतर फैसला करने वाला है
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Surah 10: Yunus (Jonah)

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Surah 10: Yunus (Jonah)

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Surah 10: Yunus (Jonah)

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Surah 10: Yunus (Jonah)

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Surah 10: Yunus (Jonah)

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Surah 11: Hud (Hud)

Meccan🕐 Revelation #52📜 123 Verses🕮 Juz 1–12
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Surah 11: Hud (Hud)

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Surah 11: Hud (Hud)

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Surah 11: Hud (Hud)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالر ۚ كِتابٌ أُحكِمَت آياتُهُ ثُمَّ فُصِّلَت مِن لَدُن حَكيمٍ خَبيرٍ
हिन्दी (Al-Omari)अलिफ, लाम, रा। यह एक पुस्तक है, जिसकी आयतें सुदृढ़ की गईं, फिर उन्हें सविस्तार स्पष्ट किया गया एक पूर्ण हिकमत वाले की ओर से जो पूरी ख़बर रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Alif Laam Raa. Farmaan hai , jiski aayatin pukhta aur mufassal irshad hui hain, ek dana(wise) aur bakhabar hasti ki taraf se
Roman Urdu (Junagarhi)Alif-laam-raa yeh aik aisi kitab hai kay iss ki aayaten mohkum ki gaee hain phir saaf saaf biyan ki gaee hain aik hakeem ba khabar ki taraf say
Devnagri Urdu (Maududi)अलिफ लाम रा. फरमान है, जिसकी आयतें पुख्ता और मुफस्सल इरशाद हुई हैं, एक दाना और बाख़बर हस्ती की तरफ से
عَرَبِيأَلّا تَعبُدوا إِلَّا اللَّهَ ۚ إِنَّني لَكُم مِنهُ نَذيرٌ وَبَشيرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह कि अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करो। निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से एक डराने वाला तथा शुभ सूचना देने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Ke tum na bandagi karo magar sirf Allah ki. Main uski taraf se tumko khabardaar karne wala bhi hoon aur basharat dene wala bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kay Allah kay siwa kissi ki ibadat mat kero mein tum ko Allah ki taraf say daraney wala aur bisharat denay wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)के तुम ना बंदगी करो मगर सिर्फ अल्लाह की। मैं उसकी तरफ से तुमको खबरदार करने वाला भी हूं और बशारत देने वाला भी
عَرَبِيوَأَنِ استَغفِروا رَبَّكُم ثُمَّ توبوا إِلَيهِ يُمَتِّعكُم مَتاعًا حَسَنًا إِلىٰ أَجَلٍ مُسَمًّى وَيُؤتِ كُلَّ ذي فَضلٍ فَضلَهُ ۖ وَإِن تَوَلَّوا فَإِنّي أَخافُ عَلَيكُم عَذابَ يَومٍ كَبيرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यह कि अपने पालनहार से क्षमा माँगो, फिर उसकी ओर पलट आओ। वह तुम्हें एक निर्धारित अवधि तक उत्तम सामग्री प्रदान करेगा और प्रत्येक अतिरिक्त सत्कर्म करने वाले को उसका अतिरिक्त बदला देगा और यदि तुम फिर गह, तो मैं तुमपर एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke tum apne Rubb se maafi chaho aur uski taraf palat aao to woh ek khaas muddat tak tumko accha samaan e zindagi dega aur har sahib-e-fazl ko uska fazal ata karega. Lekin agar tum mooh pherte ho to main tumhare haqq mein ek baday haulnaak din ke azaab se darta hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay tum apney gunah apney rab say moaf kerao phir ussi ki taraf mutawajja raho woh tum ko waqt-e-muqarrara tak acha saman (zindagi) dey ga aur her ziyada amal kerney walay ko ziyada sawab dey ga. Aur agar tum log aeyraaz kertay rahey to mujh ko tumharay liye aik baray din kay azab ka andesha hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के तुम अपने रब से माफ़ी चाहो और उसकी तरफ पलट आओ तो वो एक खास मुद्दत तक तुमको अच्छा समान ए जिंदगी देगा और हर साहब-ए-फजल को उसका फजल अता करेगा. लेकिन अगर तुम मुह फेरते हो तो मैं तुम्हारे हक में एक बड़ा दिन के अज़ाब से डरता हूं
عَرَبِيإِلَى اللَّهِ مَرجِعُكُم ۖ وَهُوَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही की ओर तुम्हारा लौटना है और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Tum sabko Allah ki taraf palatna hai aur woh sab kuch kar sakta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum ko Allah hi kay pass jana hai aur woh her shey per poori qudrat rakhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम सबको अल्लाह की तरफ पलटना है और वह सब कुछ कर सकता है
عَرَبِيأَلا إِنَّهُم يَثنونَ صُدورَهُم لِيَستَخفوا مِنهُ ۚ أَلا حينَ يَستَغشونَ ثِيابَهُم يَعلَمُ ما يُسِرّونَ وَما يُعلِنونَ ۚ إِنَّهُ عَليمٌ بِذاتِ الصُّدورِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सुन लो! निःसंदेह वे अपने सीनों को मोड़ते हैं, ताकि उस (अल्लाह) से छिपे रहें। सुन लो! जब वे अपने कपड़े ख़ूब लपेट लेते हैं, वह जानता है जो कुछ वे छिपाते हैं और जो कुछ प्रकट करते हैं। निःसंदेह वह सीनों की बातों को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Dekho! Yeh log apne seeno ko moadte hain taa-ke ussey chup jayein. Khabardaar! Jab yeh kapdon se apne aap ko dhampte hain Allah unke chupe ko bhi jaanta hai aur khule ko bhi.Woh to un bhedon se bhi waqif hai jo seeno mein hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaad rakho woh log apney seenon ko dohra kiye detay hain takay apni baaten (Allah) sau chupa saken. Yaad rakho kay woh log jiss waqt apney kapray lapettay hain woh uss waqt bhi sab janta hai jo kuch chupatay hain aur jo kuch woh zahir kertay hain. Bil yaqeen woh dion kay andar ki baaten janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)देखो! ये लोग अपने सीने को मोड़ते हैं ता-के उसे चुप जाएं। ख़बरदार! जब ये कप्तानों से अपने आप को धमकाते हैं अल्लाह उनके छुपे को भी जानता है और खुले को भी।वो तो उन भेदों से भी वाकिफ है जो सीने में हैं
🕮 Juz 12 begins here
عَرَبِي۞ وَما مِن دابَّةٍ فِي الأَرضِ إِلّا عَلَى اللَّهِ رِزقُها وَيَعلَمُ مُستَقَرَّها وَمُستَودَعَها ۚ كُلٌّ في كِتابٍ مُبينٍ
हिन्दी (Al-Omari)और धरती पर चलने-फिरने वाला जो भी प्राणी है, उसकी रोज़ी अल्लाह के ज़िम्मे है। वह उसके ठहरने के स्थान तथा उसके सौंपे जाने के स्थान को जानता है। सब कुछ एक स्पष्ट पुस्तक में (अंकित) है।
Roman Urdu (Maududi)Zameen mein chalne wala koi jaandaar aisa nahin hai jiska rizq Allah ke zimme na ho aur jiske mutaaliq woh na jaanta ho ke kahan woh rehta hai aur kahan wo sompa jata hai, sab kuch ek saaf daftar mein darj hai
Roman Urdu (Junagarhi)Zamin per chlaney phirney walay jitney jaandaar hain sab ki roziyan Allah Taalaa per hain wohi unn kay rehney sehney ki jagah ko janta hai aur unn kay sonpay janey ki jagah ko bhi sab kuch wazeh kitab mein mojood hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन में चलने वाला कोई जानदार ऐसा नहीं है जिसका रिज़क़ अल्लाह के ज़िम्मे ना हो और जिसका मुतालिक वो ना जानता हो के कहाँ वो रहता है और कहाँ सो जाता है, सब कुछ एक साफ़ दफ़्तर में दर्ज है
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ في سِتَّةِ أَيّامٍ وَكانَ عَرشُهُ عَلَى الماءِ لِيَبلُوَكُم أَيُّكُم أَحسَنُ عَمَلًا ۗ وَلَئِن قُلتَ إِنَّكُم مَبعوثونَ مِن بَعدِ المَوتِ لَيَقولَنَّ الَّذينَ كَفَروا إِن هٰذا إِلّا سِحرٌ مُبينٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वही है, जिसने आकाशों तथा धरती को छः दिनों में पैदा किया। उस समय उसका सिंहासन पानी पर था। ताकि तुम्हारी परीक्षा ले कि तुममें किसका कर्म सबसे उत्तम है। और (ऐ नबी!) यदि आप उनसे कहें कि निःसंदेह तुम मरने के बाद पुनः जीवित किए जाओगे, तो जिन लोगों ने कुफ़्र किया, वे अवश्य कहेंगे कि यह तो खुला जादू है।
Roman Urdu (Maududi)Aur wahi hai jisne aasmano aur zameen ko chey (six) dino mein paida kiya jabke issey pehle uska arsh pani par tha taa-ke tumko aazma kar dekhe tum mein kaun behtar amal karne wala hai. Ab agar (aey Muhammad) tum kehte ho ke logon, marne ka baad tum dobara uthaye jaogey, to munkireen fawran bol uthte hain ke yeh to sareeh jaadugari hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah hi woh hai jiss ney cheh din mein aasman-o-zamin ko peda kiya aur uss ka arsh pani per tha takay woh tumhen aazmaye kay tum mein say achay amal wala kaun hai agar aap inn say kahen kay tum log marney kay baad utha kharay kiye jaogay to kafir log palat ker jawab den gay kay yeh to nira saaf saaf jadoo hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वही है जिसने आसमानो और ज़मीन को चे (छह) दिनों में भुगतान किया जबके इसे पहले उसका अर्श पानी पर था ता-के तुमको आज़मा कर देखो तुम में कौन बेहतर अमल करने वाला है। अब अगर (ऐ मुहम्मद) तुम कहते हो के लोग, मरने का बाद तुम दोबारा उठोगे, तो मुनकिरेन फवारान बोल उठते हैं के ये तो सारी जादूगरी है
عَرَبِيوَلَئِن أَخَّرنا عَنهُمُ العَذابَ إِلىٰ أُمَّةٍ مَعدودَةٍ لَيَقولُنَّ ما يَحبِسُهُ ۗ أَلا يَومَ يَأتيهِم لَيسَ مَصروفًا عَنهُم وَحاقَ بِهِم ما كانوا بِهِ يَستَهزِئونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम एक गिनी-चुनी अवधि तक उनसे यातना को विलंबित कर दें, तो अवश्य कहेंगे कि किस चीज़ ने उसे रोक रखा है? सुन लो! वह जिस दिन उनपर आ जाएगी, तो उनपर से टाली नहीं जाएगी। और वह (यातना) उन्हें घेर लेगी, जिसकी वे हँसी उड़ाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar hum ek khaas muddat tak unki saza ko taalte hain to woh kehne lagte hain ke aakhir kis cheez ne usey rok rakkha hai? Suno! Jis roz us saza ka waqt aa gaya to woh kisi ke phere na phir sakega aur wahi cheez unko aa gheregi jiska woh mazaq uda rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum inn say azab ko gini chuni muddat tak kay liye peechay daal den to yeh zarror pukar uthen gay kay azab ko kaun si cheez rokay huye hai suno! Jiss din woh inn kay pass aayega phir inn say talney wala nahi phir to jiss cheez ki hansi ura rahey thay woh enhen gher ley gi
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर हम एक खास मुद्दत तक उनकी सजा को टालते हैं तो वो कहने लगते हैं के आखिर किस चीज ने इस्तेमाल किया रोक रक्खा है? सुनो! जिस रोज़ उस सज़ा का वक़्त आ गया तो वो किसी के फेर ना फिर बनायेगा और वही चीज़ उनको आ घेरेगी जिसका वो मज़ाक उड़ा रहे हैं
عَرَبِيوَلَئِن أَذَقنَا الإِنسانَ مِنّا رَحمَةً ثُمَّ نَزَعناها مِنهُ إِنَّهُ لَيَئوسٌ كَفورٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम मनुष्य को अपनी तरफ़ से किसी दया (नेमत) का स्वाद चखा दें, फिर उसे उससे छीन लें, तो निश्चय ही वह अति निराश, बड़ा नाशुक्रा हो जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Agar kabhi hum Insaan ko apni rehmat se nawazne ke baad phir ussey mehroom kardete hain to woh mayous hota hai aur nashukri karne lagta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar hum insan ko apni kissi nemat ka zaeeqa chakha ker phir ussay iss say ley len to boht hi na umeed aur bara hi na shukra bann jata hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर कभी हम इंसान को अपनी रहमत से नवाज़ने के बाद फिर उसे महरूम करते हैं तो वो मयुस होता है और नाशुक्र करने लगता है
عَرَبِيوَلَئِن أَذَقناهُ نَعماءَ بَعدَ ضَرّاءَ مَسَّتهُ لَيَقولَنَّ ذَهَبَ السَّيِّئَاتُ عَنّي ۚ إِنَّهُ لَفَرِحٌ فَخورٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम उसे विपत्ति पहुँचने के बाद कोई नेमत चखाएँ, तो निश्चय ही वह अवश्य कहेगा : समस्त विपत्तियाँ मुझसे दूर हो गईं। निःसंदेह वह बहुत इतराने वाला, बहुत गर्व करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar us museebat ke baad jo uspar aayi thi hum usey niyamat ka maza chakhate hain to kehta hai mere to sarey diladdar(sakhtiyan) paar ho gaye, phir woh phoola nahin samata aur akadne lagta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum ussay koi nemat chakhayen iss sakhti kay baad jo ussay phonch chuki thi wo woh kehney lagta hai kay bus buraiyan mujh say jati rahin yaqeenan woh bara hi itraney wala shekhi khor hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर हमें मुसीबत के बाद जो उसपर आई थी तो हम उसे नियामत का मजा चखाते हैं तो कहते हैं मेरे तो सारे दिलादार (सख्तियां) पार हो गए, फिर वो फूला नहीं समता और अचानक लगता है
عَرَبِيإِلَّا الَّذينَ صَبَروا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ أُولٰئِكَ لَهُم مَغفِرَةٌ وَأَجرٌ كَبيرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)परन्तु जिन लोगों ने धैर्य से काम लिया और अच्छे कर्म करते रहे, ऐस लोगों के लिए क्षमा और बड़ा प्रतिफल है।
Roman Urdu (Maududi)Is aieb se paak agar koi hain to bas woh log jo sabr karne waley hain aur neikokar hain aur wahi hain jinke liye darguzar bhi hai aur bada ajar bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Siwaye unn kay jo sabar kertay hain aur nek kaamon mein lagay rehtay hain, enhi logon kay liye bakhsish bhi hai aur boht bara nek badla bhi
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ऐब से पाक अगर कोई है तो बस वो लोग जो सब्र करने वाले हैं और वही हैं जिनके लिए दरगुज़ार भी हैं और बड़ा अजर भी हैं
عَرَبِيفَلَعَلَّكَ تارِكٌ بَعضَ ما يوحىٰ إِلَيكَ وَضائِقٌ بِهِ صَدرُكَ أَن يَقولوا لَولا أُنزِلَ عَلَيهِ كَنزٌ أَو جاءَ مَعَهُ مَلَكٌ ۚ إِنَّما أَنتَ نَذيرٌ ۚ وَاللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ وَكيلٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो (ऐ नबी!) संभवतः आप अपनी ओर की जाने वाली वह़्य के कुछ भाग (का प्रसार) छोड़ देने वाले हैं, और उसके (प्रसार के) कारण आपका सीना तंग हो रहा है कि वे कहेंगे कि इसपर कोई ख़ज़ाना क्यों नहीं उतारा गया या इसके साथ कोई फरिश्ता क्यों नहीं आया? (तो सुनिए) आप केवल सचेत करने वाले हैं और अल्लाह ही प्रत्येक चीज़ का संरक्षक है।
Roman Urdu (Maududi)To aey paigambar! Kahin aisa na ho ke tum un cheezon mein se kisi cheez ko (bayan karne se) chodh do jo tumhari taraf wahee ki jaa rahi hai. Aur is baat par dil tangg ho ke woh kahenge “is shaks par koi khazana kyun na utara gaya” ya yeh ke “iske saath koi farishta kyun na aaya”. Tum to mehaz khabardaar karne waley ho, aagey har cheez ka hawaladaar Allah hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus shayad kay aap iss wahee kay kissi hissay ko chor deney walay hain jo aap ki taraf nazil ki jati hai aur iss say aap ka dil tang hai sirf inn ki iss baat per kay iss per koi khazana kiyon nahi utra? Ya iss kay sath koi farishta hi aata sunn lijiye! Aap to sirf daraney walay hi hain aur her cheez ka zimmay daar Allah Taalaa hai
Devnagri Urdu (Maududi)तो ऐ पैगम्बर! कहीं ऐसा ना हो कि तुम उन चीज़ों में से किसी चीज़ को (बयान करने से) छोड़ दो जो तुम्हारी तरफ वही की जा रही है। और इस बात पर दिल तंग हो के वो कहेंगे "इस शक्स पर कोई खजाना क्यों ना उतारा गया" हां ये के "इसके साथ कोई फरिश्ता क्यों ना आया"। तुम तो महज खबरदार करने वाले हो, आगे हर चीज का हवालादार अल्लाह है
عَرَبِيأَم يَقولونَ افتَراهُ ۖ قُل فَأتوا بِعَشرِ سُوَرٍ مِثلِهِ مُفتَرَياتٍ وَادعوا مَنِ استَطَعتُم مِن دونِ اللَّهِ إِن كُنتُم صادِقينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि क्या वे कहते हैं कि उसने इस (क़ुरआन) को स्वयं गढ़ लिया है? आप कह दें कि इस जैसी गढ़ी हुई दस सूरतें ले आओ और अल्लाह के सिवा, जिसे बुला सकते हो, बुला लो, यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh kehte hain ke paigmbar ne yeh kitab khud ghadh li hai? Kaho, “accha yeh baat hai to is jaisi ghadi hui dus suratein tum bana lao aur Allah ke siwa aur jo jo (tumhare mabood) hain unko madad ke liye bula sakte ho to bula lo agar tum (unhein mabood samajhne mein) sacchey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh kehtay hain kay iss quran ko issi ney gharha hai jawab dijiye kay phir tum bhi issi ju misil das surten ghari hui ley aao aur Allah kay siwa jissay chahao apney sath bula bhi lo agar tum sachay ho
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये कहते हैं के पैगम्बर ने ये किताब खुद गढ़ ली है? कहो, “अच्छा ये बात है तो इस जैसी घड़ी हुई दस सूरतें तुम बना लाओ और अल्लाह के सिवा और जो (तुम्हारे माबूद) हैं उनको मदद के लिए बुला सकते हो तो बुला लो अगर तुम (उन्हें माबूद समझने में) सच्चे हो
عَرَبِيفَإِلَّم يَستَجيبوا لَكُم فَاعلَموا أَنَّما أُنزِلَ بِعِلمِ اللَّهِ وَأَن لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۖ فَهَل أَنتُم مُسلِمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि वे तुम्हारी मांग पूरी न करें, तो जान लो कि यह (क़ुरआन) अल्लाह के ज्ञान के साथ उतारा गया है और यह कि उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। तो क्या तुम मुसलमान होते हो?
Roman Urdu (Maududi)Ab agar woh (tumhare mabood) tumhari madad ko nahin pahunchte to jaan lo ke yeh Allah ke ilm se nazil hui hai aur yeh ke Allah ke siwa koi haqiqi mabood nahin hai phir kya tum ( is amr e haqq ke aagey) sar-e-tasleem kham karte ho?”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir agar woh tumhari iss baat ko qabool na keren to tum yaqeen say jaan lo kay yeh quran Allah kay ilm kay sath utara gaya hai aur yeh kay Allah kay siwa koi mabood nahi pus kiya tum musalman hotay ho
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर वो (तुम्हारे) माबूद) तुम्हारी मदद को नहीं पहचानते तो जान लो के ये अल्लाह के इल्म से नाज़िल हुई है और ये के अल्लाह के सिवा कोई हक़ीक़ी माबूद नहीं है फिर क्या तुम (क्या अम्र ए हक़ के आगे) सर-ए-तस्लीम ख़त्म करते हो?”
عَرَبِيمَن كانَ يُريدُ الحَياةَ الدُّنيا وَزينَتَها نُوَفِّ إِلَيهِم أَعمالَهُم فيها وَهُم فيها لا يُبخَسونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो व्यक्ति सांसारिक जीवन तथा उसकी शोभा चाहता हो, हम ऐसे लोगों को उनके कर्मों का बदला इसी (दुनिया) में दे देते हैं और इसमें उनका कोई हक़ नहीं मारा जाता।
Roman Urdu (Maududi)Jo log bas isi duniya ki zindagi aur iski khush numaiyon ke taalib hotey hain unki kaarguzari ke sara phal hum yahin unko de dete hain aur ismein unke saath koi kami nahin ki jati
Roman Urdu (Junagarhi)Jo shaks duniya ki zindagi aur iss ki zeenat per farifta hua chahata ho hum aison ko unn kay kul aemaal (ka badla) yahin bharpoor phoncha detay hain aur yahan enhen koi kami nahi ki jati
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग बस इसी दुनिया की जिंदगी और इसकी खुश नुमाइयों के तालिब होते हैं उनकी कारगुजारी के सारा फल हम यहीं उनको दे देते हैं और इसमे उनके साथ कोई काम नहीं की जाती
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ لَيسَ لَهُم فِي الآخِرَةِ إِلَّا النّارُ ۖ وَحَبِطَ ما صَنَعوا فيها وَباطِلٌ ما كانوا يَعمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यही वे लोग हैं, जिनके लिए आख़िरत में आग के सिवा कुछ नहीं है और उनके दुनिया में किए हुए समस्त कार्य व्यर्थ हो जाएँगे और उनका सारा किया-धरा अकारथ होकर रह जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Magar aakhirat mein aisey logon ke liye aag ke siwa kuch nahin hai. (Wahan maloom ho jayega ke) jo kuch unhon ne duniya mein banaya woh sab maliyameit (worthless) hoga aur ab unka saara kiya dhara mehaz baatil hai
Roman Urdu (Junagarhi)Haan yehi woh log hain jin kay liye aakhirat mein siwaye aag kay aur kuch nahi aur jo kuch enhon ney yahan kiya hoga wahan sab ikarat hai aur jo kuch inn kay aemaal thay sab barbad honey walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर आखिरी में ऐसे लोगों के लिए आग के सिवा कुछ नहीं है। (वहां मालूम हो जाएगा के) जो कुछ उनको ने दुनिया में बनाया वो सब बेकार होगा और अब उनका सारा किआ धरा महज़ बातिल है
عَرَبِيأَفَمَن كانَ عَلىٰ بَيِّنَةٍ مِن رَبِّهِ وَيَتلوهُ شاهِدٌ مِنهُ وَمِن قَبلِهِ كِتابُ موسىٰ إِمامًا وَرَحمَةً ۚ أُولٰئِكَ يُؤمِنونَ بِهِ ۚ وَمَن يَكفُر بِهِ مِنَ الأَحزابِ فَالنّارُ مَوعِدُهُ ۚ فَلا تَكُ في مِريَةٍ مِنهُ ۚ إِنَّهُ الحَقُّ مِن رَبِّكَ وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वह व्यक्ति जो अपने पालनहार की ओर से स्पष्ट प्रमाण रखता हो और उसके बाद अल्लाह की ओर से एक गवाह भी आ जाए, तथा उससे पहले मूसा की पुस्तक मार्गदर्शक और दया के रूप में उपस्थित रही हो (वह गुमराही में पड़े हुए लोगों के समान हो सकता है?) ऐसे ही लोग इस (क़ुरआन) पर ईमान रखते हैं। और इन समूहों में से जो व्यक्ति भी इसका इनकार करेगा, तो उसके वादा की जगह (ठिकाना) दोज़ख है। अतः आप इसके बारे में किसी संदेह में न पड़ें। निःसंदेह यह आपके पालनहार की ओर से सत्य है। परंतु अधिकतर लोग ईमान (विश्वास) नहीं रखते।
Roman Urdu (Maududi)Phir bhala woh shaks jo apne Rubb ki taraf se ek saaf shahadat(evidence) rakhta tha, iske baad ek gawah bhi parwardigar ki taraf se (is shahadat ki taeed mein) aa gaya, aur pehle Moosa ki kitab rehnuma aur rehmat ke taur par aayi hui bhi maujood thi (kya woh bhi duniya paraston ki tarah issey inkar kar sakta hai?) Aisey log to ispar iman hi layenge. Aur Insaani girohon mein se jo koi iska inkar karey to uske liye jis jagah ka wada hai woh dozakh hai. Pas (aey paigambar) , tum is cheez ki taraf se kisi shakk mein na padna, yeh haqq hai tumhare Rubb ki taraf se magar aksar log nahin maante
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh shaks jo apney rab kay pass ki daleel per ho aur uss kay sath Allah ki taraf gawah ho aur iss say pehlay musa ki kitab (gawah ho) jo paishwa aur rehmat hai (auron kay barabar ho sakta hai?). yehi log hain jo iss per eman rakhtay hain aur tamam firqon mein say jo bhi iss ka munkir ho uss kay aakhri waday ki jagah jahannum hai pus tu iss mein kissi qisam kay shubay mein na reh yaqeenan yeh teray rab ki janib say sirasir bar haq hai lekin aksat log eman laney walay nahi hotay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर भला वो शक्स जो अपने रब की तरफ से एक साफ शहादत (सबूत) रखता था, उसके बाद एक गवाह भी परवरदिगार की तरफ से (इस शहादत की ताईद में) आ गया, और पहले मूसा की किताब रहनुमा और रहमत के तौर पर आई भी मौजूद थी (क्या वो भी दुनिया की तरह, इसका इंकार कर सकता है?) ऐसे लोग तो इसपर ईमान ही लाएंगे। और इंसानी गिरोहों में से जो कोई इसका इंकार करे तो उसके लिए जिस जगह का वादा है वो दोज़ख है। पास (ऐ पैगम्बर), तुम इस चीज़ की तरफ से किसी शक्क में न पड़ना, ये हक़ है तुम्हारे रब की तरफ से मगर अक्सर लोग नहीं मानते
عَرَبِيوَمَن أَظلَمُ مِمَّنِ افتَرىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا ۚ أُولٰئِكَ يُعرَضونَ عَلىٰ رَبِّهِم وَيَقولُ الأَشهادُ هٰؤُلاءِ الَّذينَ كَذَبوا عَلىٰ رَبِّهِم ۚ أَلا لَعنَةُ اللَّهِ عَلَى الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उससे बड़ा अत्याचारी कौन होगा, जो अल्लाह पर झूठ गढ़े? ऐसे लोग अपने पालनहार के समक्ष प्रस्तुत किए जाएँगे और गवाही देने वाले कहेंगे कि यही वे लोग हैं जिन्होंने अपने पालनहार पर झूठ गढ़ा था। सुन लो! अत्याचारियों पर अल्लाह की धिक्कार है।
Roman Urdu (Maududi)aur us shaks se badh kar zalim aur kaun hoga jo Allah par jhoot ghaday? Aisey log apne Rubb ke huzoor pesh hongey aur gawah shahadat denge ke yeh hain woh log jinhon ne apne Rubb par jhoot ghada tha. Suno! khuda ki laanat hai zalimon par
Roman Urdu (Junagarhi)Uss say barh ker zalim kaun hoga jo Allah per jhoot banadhay aur yeh log apney perwerdigar kay samney paish kiye jayen gay aur saray gawan kahen gay kay yeh woh log hain jinhon ney apney perwerdigar per jhoot bandha khabaradar ho kay Allah ki laanat hai zalimon per
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारे शक्स से बढ़ कर जालिम और कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ घड़े? ऐसे लोग अपने रब के हुज़ूर पेश होंगे और गवाह शहादत देंगे के ये हैं वो लोग जिन्हों ने अपने रब पर झूठ घड़ा था। सुनो! खुदा की लानत है जालिमों पर
عَرَبِيالَّذينَ يَصُدّونَ عَن سَبيلِ اللَّهِ وَيَبغونَها عِوَجًا وَهُم بِالآخِرَةِ هُم كافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो अल्लाह के मार्ग से रोकते हैं और उसे टेढ़ा बनाना चाहते हैं और वही आख़िरत का इनकार करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Un zalimon par jo khuda ke raaste se logon ko roakte hain, uske raaste ko teda karna chahte hain aur aakhirat ka inkar karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo Allah ki raah say roktay hain aur iss mein kuji talash ker letay hain. Yehi aakhirat kay munkir hain
Devnagri Urdu (Maududi)उन जालिमों पर जो खुदा के रास्ते से लोगों को रोकते हैं, उसके रास्ते को टेढ़ा करना चाहते हैं और आख़िरत का इंकार करते हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ لَم يَكونوا مُعجِزينَ فِي الأَرضِ وَما كانَ لَهُم مِن دونِ اللَّهِ مِن أَولِياءَ ۘ يُضاعَفُ لَهُمُ العَذابُ ۚ ما كانوا يَستَطيعونَ السَّمعَ وَما كانوا يُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे धरती में अल्लाह की यातना से बचकर भाग नहीं सकते और न उनका अल्लाह के सिवा कोई सहायक है। उनके लिए यातना दुगुनी कर दी जाएगी। वे (दुनिया में) न सुन सकते थे, न देख सकते थे।
Roman Urdu (Maududi)Woh zameen mein Allah ko bay-bas karne waley na thay aur na Allah ke muqable mein koi unka haami (protector) tha. Unhein ab dohra (double) azaab diya jayega. Woh na kisi ki sun hi sakte thay aur na khud hi unhein kuch soojhta tha
Roman Urdu (Junagarhi)Na yeh log duniya mein Allah ko hara sakay aur na inn ka koi himayati Allah kay siwa hua inn kay liye azab dugna kiya jayega na yeh sunnay ki taqat rakhtay thay aur na yeh dekhtay hi thay
Devnagri Urdu (Maududi)वो ज़मीन में अल्लाह को बे-बस करने वाले ना थे और ना अल्लाह के मुक़ाबले में कोई उनका हमी (रक्षक) था. उन्हें अब दोहरा (डबल) अजब दिया जाएगा। वो ना किसी की सुन ही सकता था और ना खुद ही उनको कुछ सूझता था
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ خَسِروا أَنفُسَهُم وَضَلَّ عَنهُم ما كانوا يَفتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ये वही लोग हैं, जिन्होंने अपने आपको घाटे में डाला और वह सब कुछ उनसे खो गया, जो वे झूठ गढ़ा करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hain jinhon ne apne aap ko khud ghaatey (nuksan) mein dala aur woh sab kuch unse khoya gaya jo unhon ne ghadh rakkha tha
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi hain jinhon ney apna nuksan aap ker liya aur woh sab kuch inn say kho gaya jo enhon ney gharr rakha tha
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने आप को खुद घाटे (नुक्सान) में डाला और वो सब कुछ उनसे खोया गया जो उन्होन ने गढ़ रखा था
عَرَبِيلا جَرَمَ أَنَّهُم فِي الآخِرَةِ هُمُ الأَخسَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)इसमें कोई संदेह नहीं कि यही लोग आख़िरत में सबसे अधिक घाटा उठाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Naguzeer hai ke wahi aakhirat mein sabse badhkar ghatey(loss) mein rahein
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak yehi log aakhirat mein ziyan kaar hongay
Devnagri Urdu (Maududi)नागुज़ीर है के वही आख़िरत में सबसे बढ़कर घाटे (नुकसान) में रहेंगे
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ وَأَخبَتوا إِلىٰ رَبِّهِم أُولٰئِكَ أَصحابُ الجَنَّةِ ۖ هُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, तथा अपने पालनहार के सामने विनम्रता प्रकट की, वही लोग जन्नत वाले हैं। वे उसमें हमेशा रहेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jo iman laye aur jinhon ne neik amal kiye aur apne Rubb hi ke hokar rahey, to yaqeenan woh jannati log hain aur jannat mein woh hamesha rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan jo log eman laye aur unhon ney kaam bhi nek kiye aur apney paalney walay ki taraf jhuktay rahey wohi jannat mein janey walay hain jahan woh hamesha hi rehney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जो ईमान लाए और जिन्होन ने नीक अमल किए और अपने रब हाय के होकर रहे, तो यकीनन वो जन्नती लोग हैं और जन्नत में वो हमेशा रहेंगे
عَرَبِي۞ مَثَلُ الفَريقَينِ كَالأَعمىٰ وَالأَصَمِّ وَالبَصيرِ وَالسَّميعِ ۚ هَل يَستَوِيانِ مَثَلًا ۚ أَفَلا تَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)दोनों पक्षों का उदाहरण अंधे और बहरे तथा देखने और सुनने वाले की तरह है। क्या ये दोनों उदाहरण में बराबर हो सकते हैं? क्या तुम (इससे) नसीहत नहीं पकड़ते?
Roman Urdu (Maududi)In dono fareeqon ki misal aisi hai jaise ek aadmi to ho andha behra aur dursa ho dekhne aur sunne wala. Kya yeh dono yaksan ho sakte hain? Kya tum (is misaal se) koi sabaq nahin letey
Roman Urdu (Junagarhi)Inn dono firqon ki misal andhay behray aur dekhney sunnay walay jaisi hai. Kiya yeh dono misal mein barabar hain? Kiya phir bhi tum naseehat hasil nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)डोनो फ़रीक़ों की में मिसल ऐसा है जैसा एक आदमी तो हो अंधा बेहरा और दूसरा हो देखने और सुनने वाला। क्या ये डोनो यक्सन हो सकते हैं? क्या तुम (इस मिसाल से) कोई सबक नहीं लेते
عَرَبِيوَلَقَد أَرسَلنا نوحًا إِلىٰ قَومِهِ إِنّي لَكُم نَذيرٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने नूह़ को उसकी जाति की ओर रसूल बनाकर भेजा। (उन्होंने कहा :) निःसंदेह मैं तुम्हें साफ़-साफ़ सावधान करने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)(aur aisey hi halaat thay jab) humne Nooh ko uski qaum ki taraf bhejha tha. (Usne kaha) “ main tum logon ko saaf saaf kahbardaar karta hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney nooh (alh-e-salam) ko uss ki qom ki taraf rasool bana ker bheja kay mein tumhen saaf saaf hoshiyar ker denay wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)(और ऐसी ही हालत थी जब) हमने नहीं को उसकी क़ौम की तरफ भेजा था। (उसने कहा) "मैं तुम लोगों को साफ-साफ कहबरदार करता हूं
عَرَبِيأَن لا تَعبُدوا إِلَّا اللَّهَ ۖ إِنّي أَخافُ عَلَيكُم عَذابَ يَومٍ أَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)कि तुम केवल अल्लाह की इबादत करो। निःसंदेह मैं तुमपर एक दर्दनाक दिन की यातना से डरता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)ke Allah ke siwa kisi ki bandagi na karo, warna mujhey andesha hai ke tumpar ek roz dardnaak azaab aayega.”
Roman Urdu (Junagarhi)Kay tum sirf Allah hi ki ibadat kero mujhay to tum per dard naak din kay azab ka khof hai
Devnagri Urdu (Maududi)के अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी न करो, वरना मुझे अंदेशा है के तुमपर एक रोज़ दर्दनाक अज़ाब आएगा।"
عَرَبِيفَقالَ المَلَأُ الَّذينَ كَفَروا مِن قَومِهِ ما نَراكَ إِلّا بَشَرًا مِثلَنا وَما نَراكَ اتَّبَعَكَ إِلَّا الَّذينَ هُم أَراذِلُنا بادِيَ الرَّأيِ وَما نَرىٰ لَكُم عَلَينا مِن فَضلٍ بَل نَظُنُّكُم كاذِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उनकी जाति के उन प्रमुखों ने कहा, जिन्होंने कुफ्र किया था : हम तो तुम्हें अपने ही जैसा इनसान समझते हैं और हम देख रहे हैं कि तुम्हारा अनुसरण केवल वही लोग कर रहे हैं, जो हम में नीच हैं, जिन्होंने बिना सोचे-समझे तुम्हारी पैरवी की है।और हम अपने ऊपर तुम्हारी कोई श्रेष्ठता भी नहीं देखते। बल्कि हम तो तुम्हें झूठा समझते हैं।
Roman Urdu (Maududi)jawab mein uski qaum ke sardar, jinhon ne uski baat maanne se inkar kiya tha, bole “ hamari nazar mein to tum iske siwa kuch nahin ho ke bas ek Insaan ho hum jaise, aur hum dekh rahey hain ke hamari qaum mein se bas un logon ne jo hamare haan arazil thay(adna darje / lowliest) be-soochey samjhey tumhari pairwi ikhtiyar karli hai. Aur hum koi cheez bhi aisi nahin patey jis mein tumlog humse kuch badhey huye ho. Balke hum to tumhein jhoota samajhte hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ki qom kay kafiron kay sardaron ney jawab diya kay hum to tujhay apnye jaisa insan hi dekhtay hain aur teray tabeydaron ko bhi hum dekhtay hain kay yeh log wazeh tor per siwaye neech logon kay aur koi nahi jo bey sochay samajhay (tumhari pairwi ker rahey hain) hum to tumhari kissi qisam ki bartari apney upper nahi dekh rahey bulkay hum to tumhen jhoota samajh rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)जवाब में उसकी क़ौम के सरदार, जिन्हों ने उसकी बात मन से इंकार किया था, बोले "हमारी नज़र में तो तुम इसके सिवा कुछ नहीं हो के बस एक इंसान हो हम जैसे, और हम देख रहे हैं के हमारी क़ौम में से बस उन लोगों ने जो हमारे हन अराज़िल थाय (अदना दर्जे / सबसे नीच) बे-सोचे समझे तुम्हारी जोड़ी इख्तियार करली है। और हम कोई चीज भी ऐसी नहीं जानते, जिसमें तुमलोग हमसे कुछ बढ़े हुए हो।
عَرَبِيقالَ يا قَومِ أَرَأَيتُم إِن كُنتُ عَلىٰ بَيِّنَةٍ مِن رَبّي وَآتاني رَحمَةً مِن عِندِهِ فَعُمِّيَت عَلَيكُم أَنُلزِمُكُموها وَأَنتُم لَها كارِهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)नूह़ ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या तुमने इस बात पर विचार किया कि यदि मैं अपने पालनहार की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अपने पास से दया प्रदान की हो, फिर वह तुम्हें सुझाई न दे, तो क्या हम तुम्हें उसको मानने पर मजबूर कर सकते हैं, जबकि तुम उसे नापसंद करते हो?
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “aey biradran e qaum, zara socho to sahih ke agar main apne Rubb ki taraf se ek khuli shahadat par qayam tha aur phir usne mujhko apni khaas rehmat se bhi nawaz diya, magar woh tumko nazar na aayi, to aakhir hamare paas kya zariya hai ke tum maanna na chaho aur hum zabardasti usko tumhare sar chapaik dein
Roman Urdu (Junagarhi)Nooh ney kaha meri qom walo! Mujhay batao to agar mein apney rab ki taraf say kissi daleel per hua aur mujhay uss ney apney pass ki koi rehmat ata ki ho phir woh tumhari nigahon mein na aaee to kiya zabardasti mein ussay tumharay galay mandh doon halankay tum iss say bey zaar ho
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा "ऐ बिरादरान ए क़ौम, जरा सोचो तो सही के अगर मैं अपने रब की तरफ से एक खुली शहादत पर कायम था और फिर उसने मुझको अपनी खास रहमत से भी नवाज दिया, मगर वो तुमको नजर ना आई, तो आखिर हमारे पास क्या जरूरी" है के तुम मनाना न चाहो और हम ज़बरदस्ती उसको तुम्हारे सर छपाईक दीन
عَرَبِيوَيا قَومِ لا أَسأَلُكُم عَلَيهِ مالًا ۖ إِن أَجرِيَ إِلّا عَلَى اللَّهِ ۚ وَما أَنا بِطارِدِ الَّذينَ آمَنوا ۚ إِنَّهُم مُلاقو رَبِّهِم وَلٰكِنّي أَراكُم قَومًا تَجهَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और ऐ मेरी जाति के लोगो! मैं इस (संदेश के प्रचार) पर तुमसे कोई धन नहीं माँगता। मेरा बदला बस अल्लाह के ऊपर है। और मैं (अपने यहाँ से) उन लोगों को दूर नहीं हटा सकता, जो ईमान लाए हैं। निःसंदेह वे अपने पालनहार से मिलने वाले हैं। परन्तु मैं देख रहा हूँ कि तुम जाहिलों जैसी बातें कर रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur aey biradran e qaum, main is kaam par tumse koi maal nahin maangta , mera ajar to Allah ke zimme hai aur main un logon ko dhakke dene se bhi raha jinhon ne meri baat maani hai. Woh aap hi apne Rubb ke huzoor janey waley hain magar main dekhta hoon ke tumlog jahalat barat rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Meri qom walo! Mein tum say iss per koi maal nahi maangta. Mera sawab to sirf Allah Taalaa kay haan hai na mein eman walon ko apnay pass say nikal sakta hun unhen apney rab say milna hai lekin mein dekhta hun kay tum log jahalat ker rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐ बिरादरन ए क़ौम, मैं इस काम पर तुमसे कोई माल नहीं मांगता, मेरा अजर तो अल्लाह के ज़िम्मे है और मैं उन लोगों को धक्के देने से भी रहा जिन्हों ने मेरी बात मानी है अपने रब के हुजूर जाने वाले हैं मगर मैं देखता हूं कि तुमलोग जहलत बरात रहे हो
عَرَبِيوَيا قَومِ مَن يَنصُرُني مِنَ اللَّهِ إِن طَرَدتُهُم ۚ أَفَلا تَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह के मुक़ाबले में कौन मेरी सहायता करेगा, यदि मैं उन्हें अपने पास से निष्कासित कर दूँ? क्या तुम विचार नहीं करते?
Roman Urdu (Maududi)Aur aey qaum, main in logon ko dhutkaar doon to khuda ki pakad se kaun mujhey bachane aayega? Tum logon ki samajh mein kya itni baat bhi nahin aati
Roman Urdu (Junagarhi)Meri qom kay logo! Agar mein inn mominon ko apney pass say nikal doon to Allah kay muqablay mein meri madad kaun ker sakta hai? Kiya tum kuch bhi naseehat nahi pakartay
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐ क़ौम, मैं लोगों को धुतकार दूं तो खुदा की पकड़ से कौन मुझे बचाने आएगा? तुम लोगों की समझ में क्या इतनी बात भी नहीं आती
عَرَبِيوَلا أَقولُ لَكُم عِندي خَزائِنُ اللَّهِ وَلا أَعلَمُ الغَيبَ وَلا أَقولُ إِنّي مَلَكٌ وَلا أَقولُ لِلَّذينَ تَزدَري أَعيُنُكُم لَن يُؤتِيَهُمُ اللَّهُ خَيرًا ۖ اللَّهُ أَعلَمُ بِما في أَنفُسِهِم ۖ إِنّي إِذًا لَمِنَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और मैं तुमसे यह नहीं कहता कि मेरे पास अल्लाह के ख़ज़ाने हैं और न मुझे परोक्ष का ज्ञान है और न मैं यह कहता हूँ कि निःसंदेह मैं एक फ़रिश्ता हूँ और न ही मैं उन लोगों के बारे में जिन्हें तुम्हारी आँखें तुच्छ समझती हैं, यह कहता हूँ कि अल्लाह उन्हें हरगिज़ कोई भलाई नहीं देगा। अल्लाह अधिक जानता है, जो कुछ उनके दिलों में है। (यदि मैं ऐसा कहूँ,) तो निश्चय ही मैं अत्याचारियों में से हो जाऊँगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur main tumse nahin kehta ke mere paas Allah ke khazane hain, na yeh kehte hoon ke main gaib ka ilm rakhta hoon, na yeh mera dawa hai ke main farishta hoon aur yeh bhi main nahin keh sakta ke jin logon ko tumhari aankhein hikarat se dekhti hain unhein Allah ne koi bhalayi nahin di. Unke nafs ka haal Allah hi behtar jaanta hai. Agar main aisa kahoon to zalim honga”
Roman Urdu (Junagarhi)Mein tum say nahi kehta kay meray pass Allah kay khazaney hain (suno!) mein ghaib ka ilm bhi nahi rakhta na mein yeh kehta hun kay mein koi farishta hun na mera yeh qol hai kay jin per tumhari nigahen zillat say parr rahi hain unhen Allah Taalaa koi nemat dey ga hi nahi inn kay dil mein jo hai ussay Allah hi khoob janta hai agar mein aisi baat kahon to yaqeenan mera shumar zalimon mein ho jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)और मैं तुमसे नहीं कहता कि मेरे पास अल्लाह के खज़ाने हैं, ना ये कहता हूँ के मैं गैब का इल्म रखता हूँ, ना ये मेरा दावा है के मैं फ़रिश्ता हूँ और ये भी मैं नहीं कह सकता कि जिन लोगों को तुम्हारी आँखें हिकारत से देखती हैं उन्हें अल्लाह ने कोई भलायी नहीं डि उनके नफ़्स का हाल अल्लाह ही बेहतर जानता है। अगर मैं ऐसा कहूं तो ज़ालिम होगा”
عَرَبِيقالوا يا نوحُ قَد جادَلتَنا فَأَكثَرتَ جِدالَنا فَأتِنا بِما تَعِدُنا إِن كُنتَ مِنَ الصّادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों ने कहा : ऐ नूह़! तुमने हमसे झगड़ा किया और बहुत झगड़ लिया। अतः अब वह (यातना) हम पर ले आओ, जिसका तुम हमसे वादा करते हो, यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar un logon ne kaha ke “ aey Nooh, tumne humse jhagda kiya aur bahut karliya ab to bas woh azaab le aao jiski tum humein dhamki dete ho agar sacchey ho”
Roman Urdu (Junagarhi)(Qom kay logon ney) kaha aey nooh! Tu ney hum say behas ker li. Abb tu jiss cheez say humen dhamka raha hai wohi humaray pass ley aa agar tu sachon mein hai
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार उन लोगों ने कहा के “ ऐ नूह, तुमने हमसे झगड़ा किया और बहुत कार्लिया अब तो बस वो अज़ाब ले आओ जिसकी तुम हमें धमकी देते हो अगर सच्चे हो”
عَرَبِيقالَ إِنَّما يَأتيكُم بِهِ اللَّهُ إِن شاءَ وَما أَنتُم بِمُعجِزينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : उसे तो तुम्हारे पास अल्लाह ही लाएगा, यदि वह चाहेगा और तुम (उसे) विवश करने वाले नहीं हो।
Roman Urdu (Maududi)Nooh ne jawab diya,“ woh to Allah hi layega , agar chahega, aur tum itna bal-boota nahin rakhte ke isey roak do
Roman Urdu (Junagarhi)Jawab diya kay ussay bhi Allah Taalaa hi laye ga agar woh chahaye aur haan tum ussay haraney walay nahi ho
Devnagri Urdu (Maududi)नूह ने जवाब दिया,“ वाह तो अल्लाह हाय लाएगा, अगर चाहेगा, और तुम इतना बाल-बूटा नहीं रखते के इसे रोक दो
عَرَبِيوَلا يَنفَعُكُم نُصحي إِن أَرَدتُ أَن أَنصَحَ لَكُم إِن كانَ اللَّهُ يُريدُ أَن يُغوِيَكُم ۚ هُوَ رَبُّكُم وَإِلَيهِ تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और मेरा उपदेश करना तुम्हें कोई लाभ नहीं देगा, अगर मैं तुम्हें उपदेश करना चाहूँ, जबकि अल्लाह तुम्हें गुमराह करना चाहता हो। वही तुम्हारा पालनहार है और तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar main tumhari kuch khair khwahi karna bhi chahoon to meri khair khwahi tumhein koi faiyda nahin de sakti jabke Allah hi ne tumhein bhatka dene ka irada karliya ho. Wahi tumahra Rubb hai aur usi ki taraf tumhein palatna hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhen meri khair khuaee kuch bhi nafa nahi dey sakti go mein kitni hi tumhari khair khuaee kiyon na chahaon ba-shart-e-kay Allah ka irada tumhen gumrah kerney ka ho wohi tum sab ka perwerdigar hai aur ussi ki taraf tum lotaye jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर मैं तुम्हारी कुछ खैर ख्वाही करना भी चाहूं तो मेरी खैर ख्वाही तुम्हें कोई फैयदा नहीं दे सकती जबके अल्लाह ही ने तुम्हें भटका देने का इरादा करलिया हो. वही तुम्हारा रब है और उसकी तरफ तुम्हारी पलटना है”
عَرَبِيأَم يَقولونَ افتَراهُ ۖ قُل إِنِ افتَرَيتُهُ فَعَلَيَّ إِجرامي وَأَنا بَريءٌ مِمّا تُجرِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या वे कहते हैं कि उसने इसे गढ़ लिया है? तुम कह दो कि यदि मैंने इसे गढ़ लिया है, तो मेरा अपराध मुझी पर है और मैं उससे निर्दोष हूँ, जो अपराध तुम कर रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad),kya yeh log kehte hain ke is shaks ne yeh sab kuch khud ghadh(forged) liya hai?Insey kaho “ agar maine yeh khud ghada hai to mujhpar apne jurm ki zimmedari hai, aur jo jurm tum kar rahey ho uski zimmedari se main bari hoon.”
Roman Urdu (Junagarhi)Kiye yeh kehtay hain kay issay khud issi nay gharr liya hai? To jawab dey kay agar mein ney issay gharr liya ho mera gunah mujh per hai aur mein unn gunhaon say bari hun jo tum ker rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), क्या ये लोग कहते हैं कि इस शक्स ने ये सब कुछ खुद गढ़ लिया है? इनसे कहो “ अगर मैंने ये खुद घड़ा है तो मुझ पर अपने जुर्म की जिम्मेदारी है, और जो जुर्म है तुम कर रहे हो उसकी ज़िम्मेदारी से मैं बारी हूँ।”
عَرَبِيوَأوحِيَ إِلىٰ نوحٍ أَنَّهُ لَن يُؤمِنَ مِن قَومِكَ إِلّا مَن قَد آمَنَ فَلا تَبتَئِس بِما كانوا يَفعَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और नूह़ की ओर वह़्य (प्रकाशना) की गई कि तुम्हारी जाति में से जो लोग ईमान ला चुके हैं, अब उनके सिवा कोई ईमान नहीं लाएगा। अतः वे जो कुछ कर रहे हैं, उससे तुम दुःखी न हो।
Roman Urdu (Maududi)Nooh par wahee ki gayi ke tumhari qaum mein se jo log iman laa chuke bas woh laa chuke, ab koi maanne wala nahin hai. Inke kartooton par ghum khana chodo
Roman Urdu (Junagarhi)Nooh ki taraf wahee bheji gaee kay teri qom mein sa yjo eman laa chukay unn kay siwa aur koi abb eman laye ga hi nahi pus tu inn kay kaamon per ghumgeen na ho
Devnagri Urdu (Maududi)नहीं पर वही कि गई के तुम्हारी क़ौम में से जो लोग ईमान ला चुके बस वो ला चुके, अब कोई मन्ने वाला नहीं है। इनके कार्टूनों पर घूम खाना छोड़ो
عَرَبِيوَاصنَعِ الفُلكَ بِأَعيُنِنا وَوَحيِنا وَلا تُخاطِبني فِي الَّذينَ ظَلَموا ۚ إِنَّهُم مُغرَقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमारी आँखों के सामने और हमारी वह़्य के अनुसार एक नाव बनाओ और मुझसे उन लोगों के बारे में कुछ न कहना, जिन्होंने अत्याचार किया है। निःसंदेह वे डुबाए जाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur hamari nigrani mein hamari wahee ke mutabiq ek kashti banani shuru kardo. Aur dekho, jin logon ne zulm kiya hai unke haqq mein mujhse koi sifarish na karna. Yeh sarey ke sarey ab doobne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aik kashti humari aankhon kay samney aur humari wahee say tayyar ker aur zalimon kay baray mein hum say koi baat cheet na ker woh pani mein dobo diye janey walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारी निगरानी में हमारी वही के मुताबिक़ एक कश्ती बनानी शुरू करदो। और देखो, जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उनके हक़ में मुझसे कोई सिफ़रिश ना करना। ये सारे के सारे अब डूबने वाले हैं
عَرَبِيوَيَصنَعُ الفُلكَ وَكُلَّما مَرَّ عَلَيهِ مَلَأٌ مِن قَومِهِ سَخِروا مِنهُ ۚ قالَ إِن تَسخَروا مِنّا فَإِنّا نَسخَرُ مِنكُم كَما تَسخَرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वह नाव बनाने लगा। और जब भी उसकी जाति के प्रमुख लोग उसके पास से गुज़रते, तो उसकी हँसी उड़ाते। नूह़ ने कहा : यदि तुम हमारी हँसी उड़ाते हो, तो हम भी ऐसे ही (एक दिन) तुम्हारी हँसी उड़ाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Nooh kashti bana raha tha aur uski qaum ke sardaron mein se jo koi uske paas se guzarta tha woh uska mazaaq udata tha. Usne kaha “ agar tum humpar haste ho to hum bhi tumpar hass rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh (nooh) kashti bananey lagay unn ki qom kay jo sardar unn ka pass say guzartay woh unn ka mazaq uratay woh kehtay agar tum humara mazaq uratay ho to hum bhi tum per aik din hansen gay jaisay tum hum per hanstay ho
Devnagri Urdu (Maududi)नहीं कश्ती बना रहा था और उसकी क़ौम के सरदारों में से जो कोई उसके पास से गुज़रता था वो उसका मज़ाक उड़ाता था। उसने कहा “अगर तुम हमपर हंसते हो तो हम भी तुमपर हंस रहे हैं
عَرَبِيفَسَوفَ تَعلَمونَ مَن يَأتيهِ عَذابٌ يُخزيهِ وَيَحِلُّ عَلَيهِ عَذابٌ مُقيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर तुम्हें जल्द ही पता चल जाएगा कि किसपर अपमानकारी यातना आती है और किसपर स्थायी यातना उतरती है?
Roman Urdu (Maududi)Anqareeb tumhein khud maloom ho jayega ke kis par woh azaab aata hai jo usey ruswa kardega, aur kispar woh balaa toot padti hai jo taley nahin taleygi”
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhen boht jald maloom hojaye ga kay kiss per azab aata hai jo ussay ruswa keray aur uss per hameshgi ki saza utar aaye
Devnagri Urdu (Maududi)अनकरीब तुम्हें खुद मालूम हो जाएगा कि किस पर वो अजब आता है जो उसे रुसवा कर देगा, और किसपर वो बला टूट पड़ती है जो तले नहीं तलेगी”
عَرَبِيحَتّىٰ إِذا جاءَ أَمرُنا وَفارَ التَّنّورُ قُلنَا احمِل فيها مِن كُلٍّ زَوجَينِ اثنَينِ وَأَهلَكَ إِلّا مَن سَبَقَ عَلَيهِ القَولُ وَمَن آمَنَ ۚ وَما آمَنَ مَعَهُ إِلّا قَليلٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि जब हमारा आदेश आ गया और तन्नूर उबलने लगा, तो हमने (नूह़ से) कहा : "उसमें प्रत्येक प्रकार के जीवों में से जोड़े-जोड़े चढ़ा लो और अपने परिजनों को (भी चढ़ा लो) सिवाय उसके जिसके बारे में पहले ही बता दिया गाय है और उन लोगों को (भी चढ़ा लो) जो ईमान लाए हैं।" और उसके साथ थोड़े लोग ही ईमान लाए थे।
Roman Urdu (Maududi)Yahan tak ke jab hamara hukum aa gaya aur woh tannoor (oven) ubal pada. To humne kaha “ har qism ke jaanwaron ka ek ek joda kashti mein rakh lo , apne ghar walon ko bhi siwaye un ashkaas ke jinki nishaan-dahi pehle ki jaa chuki hai is mein sawaar kara do, aur un logon ko bhi bitha lo jo imaan laaye hain”. Aur thode hi log thay jo Nooh ke saath iman laye thay
Roman Urdu (Junagarhi)Yahan tak kay jab humara hukum aa phoncha aur tanoor ubalney laga hum ney kaha kay iss kashti mein her qisam kay (jaandaron mein say) joray (yani) do (janwar aik nurr aur aik mada) sawar kera ley aur apney ghar kay logon ko bhi siwaye unn kay jin per pehlay say baat parr chuki hai aur sab eman walon ko bhi uss kay sath eman laney walay boht hi kum thay
Devnagri Urdu (Maududi)यहां तक ​​के जब हमारा हुकुम आ गया और वो तन्नूर (ओवन) उबल गया। तो हमने कहा “हर क़िस्म के जानवरों का एक जोड़ा कश्ती में रख लो, अपने घर वालों को भी सिवाय उन अश्कों के जिनके निशान-दही पहले की जा चुकी है इस में सवार करा दो, और उन लोगों को भी बिठा लो जो ईमान लाए हैं”। और थोड़े ही लोग थे जो नूह के साथ ईमान लाए थे
عَرَبِي۞ وَقالَ اركَبوا فيها بِسمِ اللَّهِ مَجراها وَمُرساها ۚ إِنَّ رَبّي لَغَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और नूह़ ने कहा : इसमें सवार हो जाओ। अल्लाह के नाम ही से इसका चलना तथा इसका ठहरना है। निःसंदेह मेरा पालनहार बड़ा क्षमाशील, दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Nooh ne kaha “sawaar ho jao ismein , Allah hi ke naam se hai iska chalna bhi aur iska theharna bhi. Mera Rubb bada gafoor o raheem hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Nooh (alh-e-salam) ney kaha iss kashti mein beth jao Allah hi kay naam say iss ka chalna aur theharna hai yaqeenan mera rab bari bakhsish aur baray reham wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)नूह ने कहा "सवार हो जाओ इसमीं, अल्लाह ही के नाम से है इसका चलना भी और इसका ठहरना भी। मेरा रब बड़ा गफूर ओ रहीम है"
عَرَبِيوَهِيَ تَجري بِهِم في مَوجٍ كَالجِبالِ وَنادىٰ نوحٌ ابنَهُ وَكانَ في مَعزِلٍ يا بُنَيَّ اركَب مَعَنا وَلا تَكُن مَعَ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वह उन्हें लिए पर्वतों जैसी ऊँची लहरों में चलती रही। और नूह़ ने अपने बेटे को, जो (उनसे) अलग-थलग था, पुकारा : ऐ मेरे बेटे! मेरे साथ सवार हो जा और काफ़िरों के साथ न रह।
Roman Urdu (Maududi)kashti un logon ko liye chali jaa rahi thi aur ek ek mauj pahad ki tarah uth rahi thi. Nooh ka beta door faasle par tha, Nooh ne pukar kar kaha “beta , hamare saath sawaar hoja, kafiron ke saath na reh.”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kashti unhen paharon jaisi mojon mein ley ker jaa rahi thi aur nooh (alh-e-salam) ney apney larkay ko jo aik kinaray per tha pukar ker kaha aey meray piyaray bachay humaray sath sawar hoja aur kafiron mein shamil na reh
Devnagri Urdu (Maududi)कश्ती उन लोगों के लिए चली जा रही थी और एक एक मौज पहाड़ की तरह उठ रही थी। नूह का बेटा दूर फासले पर था, नूह ने पुकार कर कहा "बेटा, हमारे साथ सवार होजा, काफिरों के साथ ना रह।"
عَرَبِيقالَ سَآوي إِلىٰ جَبَلٍ يَعصِمُني مِنَ الماءِ ۚ قالَ لا عاصِمَ اليَومَ مِن أَمرِ اللَّهِ إِلّا مَن رَحِمَ ۚ وَحالَ بَينَهُمَا المَوجُ فَكانَ مِنَ المُغرَقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : मैं किसी पर्वत की ओर शरण ले लूँगा, जो मुझे पानी से बचा लेगा। नूह़ ने कहा : आज अल्लाह के आदेश (यातना) से कोई बचाने वाला नहीं। यह और बात है कि किसी पर उसकी दया हो जाए। और (इतने ही में) दोनों के बीच एक लहर आ गई और वह डूबने वालों में से हो गया।
Roman Urdu (Maududi)usne palat kar jawab diya “main abhi ek pahad par chadha jata hoon jo mujhey pani se bacha lega”. Nooh ne kaha, aaj koi cheez Allah ke hukum se bachane wali nahin hai siwaye iske ke Allah hi kisi par reham farmaye”. Itne mein ek mauj dono ke darmiyan hayal ho gayi aur woh bhi doobne walon mein shamil ho gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney jawab diya kay mein to kissi baray pahar ki taraf panah mein aajaon ga jo mujhay pani say bacha ley ga nooh (alh-e-salam) ney kaha aaj Allah kay amar say bachaney wala koi nahi sirf wohi bachen gay jin per Allah ka reham hua. Ussi waqt unn dono kay darmiyan moj haeel hogaee aur woh dobney walon mein say ho gaya
Devnagri Urdu (Maududi)उसने पलट कर जवाब दिया "मैं अभी एक पहाड़ पर चढ़ा जाता हूं जो मुझे पानी से बचा लेगा"। नूह ने कहा, आज कोई चीज अल्लाह के हुकुम से बचाने वाली नहीं है सिवाय इसके कि अल्लाह ही किसी पर रहम फरमाये।'' इतने में एक मौज दोनों के दरमियान हायल हो गई और वो भी डूबने वालों में शामिल हो गया
عَرَبِيوَقيلَ يا أَرضُ ابلَعي ماءَكِ وَيا سَماءُ أَقلِعي وَغيضَ الماءُ وَقُضِيَ الأَمرُ وَاستَوَت عَلَى الجودِيِّ ۖ وَقيلَ بُعدًا لِلقَومِ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और कहा गया : ऐ धरती! अपना पानी निगल जा और ऐ आकाश! थम जा और पानी उतर गया और आदेश पूरा कर दिया गया और नाव 'जूदी' पर ठहर गई और कहा गया कि अत्याचारियों के लिए (अल्लाह की दया से) दूरी है।
Roman Urdu (Maududi)Hukum hua “aey zameen, apna saara paani ningal ja aur aey aasmaan, ruk ja” chunanchey pani zameen mein baith gaya , faisla chuka diya gaya, kashti judi par tik gayi, aur keh diya gaya ke door huyi zalimon ki qaum
Roman Urdu (Junagarhi)Farma diya gaya kay aey zamin apney pani ko nigal jaa aur aey aasman bus ker thum jaa ussi waqt pani sukha diya gaya aur kaam poora ker diya gaya aur kashti “jodi” naami pahar per jaa lagi aur farma diya gaya kay zalim logon per laanat nazil ho
Devnagri Urdu (Maududi)हुकुम हुआ ''ऐ जमीन, अपना सारा पानी तैयार हो गया और ऐ आसमान, रुक जा” चुनांचे पानी ज़मीन में बैठ गया, फैसला चुका दिया गया, कश्ती जूड़ी पर टिक गई, और कह दिया गया के दरवाज़े जालिमों की क़ौम
عَرَبِيوَنادىٰ نوحٌ رَبَّهُ فَقالَ رَبِّ إِنَّ ابني مِن أَهلي وَإِنَّ وَعدَكَ الحَقُّ وَأَنتَ أَحكَمُ الحاكِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा नूह़ ने अपने पालनहार को पुकारा और कहा : मेरे पालनहार! मेरा बेटा मेरे घर वालों में से है और निःसंदेह तेरा वचन सत्य है तथा तू ही सबसे अच्छा निर्णय करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Nooh ne apne Rubb ko pukara , kaha “Aey Rubb! mera beta mere ghar walon mein se hai aur tera wada saccha hai aur tu sab hakimo se bada aur behtar hakim hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Nooh (alh-e-salam) ney apney perwerdigar ko pukara aur kaha kay meray rab mera beta to meray ghar walon mein say hai yaqeenan tera wada bilkul sacha hai aur tu tamam hakimon say behtar haakim hai
Devnagri Urdu (Maududi)नूह ने अपने रुब को पुकारा, कहा “ऐ रब! मेरा बेटा मेरे घर वालों में से है और तेरा वादा सच्चा है और तू सब हकीमो से बड़ा और बेहतर हकीम है”
عَرَبِيقالَ يا نوحُ إِنَّهُ لَيسَ مِن أَهلِكَ ۖ إِنَّهُ عَمَلٌ غَيرُ صالِحٍ ۖ فَلا تَسأَلنِ ما لَيسَ لَكَ بِهِ عِلمٌ ۖ إِنّي أَعِظُكَ أَن تَكونَ مِنَ الجاهِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) कहा : ऐ नूह़! वह तेरे घर वालों में से नहीं है। यह माँग उचित नहीं है। अतः मुझसे उस चीज़ का प्रश्न न कर, जिसका तुझे कोई ज्ञान नहीं। मैं तुझे समझाता हूँ कि अज्ञानियों में से न हो जा।
Roman Urdu (Maududi)Jawab mein irshad hua “aey Nooh, woh tere ghar walon mein se nahin hai. Woh to ek bigda hua kaam hai. Lihaza tu us baat ki mujhse darkhwast na kar jiski haqeeqat tu nahin jaanta. Main tujhey naseehat karta hoon ke apne aap ko jaahilon ki tarah na bana le”
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney farmaya aey nooh yaqeenan woh teray gharaney say nahi hai uss kay kaam bilkul hi na shaista hain tujhay hergiz woh cheez na maangni chahaiye jiss ka tujhay mutlaqan ilm na ho mein tujhay naseehat kerta hun kay tu jahilon mein say apna shumar keraney say baaz rahey
Devnagri Urdu (Maududi)जवाब में इरशाद हुआ “ऐ नूह, वो तेरे घर वालों में से नहीं है। वो तो एक बड़ा हुआ काम है. लिहाजा तू हमसे बात करता है कि मुझसे अंधेरा न कर जिसकी हकीकत तू नहीं जानता। मैं तुझे हिदायत करता हूं के अपने आप को जहिलों की तरह ना बना ले”
عَرَبِيقالَ رَبِّ إِنّي أَعوذُ بِكَ أَن أَسأَلَكَ ما لَيسَ لي بِهِ عِلمٌ ۖ وَإِلّا تَغفِر لي وَتَرحَمني أَكُن مِنَ الخاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)नूह़ ने कहा : मेरे पालनहार! मैं तेरी शरण चाहता हूँ इस बात से कि मैं तुझसे ऐसी चीज़ का प्रश्न करूँ, जिस (की वास्तविक्ता) का मुझे कोई ज्ञान नहीं और यदि तूने मुझे क्षमा नहीं किया और मुझपर दया नहीं की, तो मैं नुक़सान उठाने वालों में से हो जाऊँगा।
Roman Urdu (Maududi)Nooh ne fawran arz kiya “Aey mere Rubb, main teri panaah maangta hoon issey ke woh cheez tujhse maangoon jiska mujhey ilam nahin. Agar tu nay mujhey maaf na kiya aur reham na farmaya to main barbaad ho jaunga
Roman Urdu (Junagarhi)Nooh ney kaha meray paalanhaar mein teri hi panah chahata hun uss baat say kay tujh say woh maangoon jiss ka mujhay ilm hi na ho agar tu mujhay na bakhshay ga aur tu mujh per reham na farmaye ga to mein khasara paaney walon mein hojaonga
Devnagri Urdu (Maududi)नूह ने फवारान अर्ज़ किया “ऐ मेरे रब, मैं तेरी पनाह मांगता हूं इसके के वो चीज तुझसे मांगूं जिसका मुझे इलम नहीं। अगर तू नहीं मुझे माफ़ ना किया और रहम ना फरमाया तो मैं बरबाद हो जाऊंगा
عَرَبِيقيلَ يا نوحُ اهبِط بِسَلامٍ مِنّا وَبَرَكاتٍ عَلَيكَ وَعَلىٰ أُمَمٍ مِمَّن مَعَكَ ۚ وَأُمَمٌ سَنُمَتِّعُهُم ثُمَّ يَمَسُّهُم مِنّا عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)कहा गया : ऐ नूह़! हमारी ओर से सुरक्षा और बरकतों के साथ उतर जाओ, जो तुम पर और उन समूहो पर हैं जो तुम्हारे साथ हैं। तथा कुछ समूह ऐसे हैं, जिन्हें हम (दुनिया में) जीवन-यापन सामग्री प्रदान करेंगें, फिर उन्हें हमारी ओर से कष्टदायक यातना पहुँचेगी।
Roman Urdu (Maududi)Hukum hua “ aey Nooh utar jaa hamari taraf se salamati aur barkatein hain tujhpar aur un girohon par jo tere saath hain. Aur kuch giroh aisey bhi hain jinko hum kuch muddat samaan e zindagi bakshenge phir unhein hamari taraf se dardnaak azaab pahunchega”
Roman Urdu (Junagarhi)Farma diya gaya kay aey nooh! Humari janib say salamti aur unn barkaton kay sath utar jo tujh per hain aur teray sath ki boht si jamaton per aur boht si woh ummaten hongi jinhen hum faeeda to zaroor phonchayen gay lekin phir unhen humari taraf say dard naak azab phonchay ga
Devnagri Urdu (Maududi)हुकुम हुआ " ऐ नूह उतर जा हमारी तरफ से सलामती और बरकतें हैं तुझपर और उन गिरोहोन पर जो तेरे साथ हैं। और कुछ गिरोह ऐसे भी हैं जिनको हम कुछ मुद्दत समान ए जिंदगी बख्शेंगी फिर उन्हें हमारी तरफ से दर्दनक अजब पहचानेगा”
عَرَبِيتِلكَ مِن أَنباءِ الغَيبِ نوحيها إِلَيكَ ۖ ما كُنتَ تَعلَمُها أَنتَ وَلا قَومُكَ مِن قَبلِ هٰذا ۖ فَاصبِر ۖ إِنَّ العاقِبَةَ لِلمُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ये ग़ैब (परोक्ष) की कुछ बातें हैं, जिन्हें (ऐ नबी!) हम आपकी ओर वह़्य कर रहे हैं। इससे पूर्व न तो आप इन्हें जानते थे और न आपकी जाति के लोग। अतः आप सब्र करें। निःसंदेह अच्छा परिणाम तक़वा वालों के लिए है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), yeh gaib ki khabrein hain jo hum tumhari taraf wahee kar rahey hain, issey pehle na tum inko jantey thay aur na tumhari qaum. Pas sabr karo, anjaam-e-kaar muttaqiyon ke haqq mein hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh khabren ghaib ki khabron mein say hain jin ki wahee hum aap ki taraf kertay hain enhen iss say pehlay aap jantay thay aur na aap ki qom iss liye aap sabar kertay rahiye yaqeen maniye kay anjam kaar perhezgaron kay liye hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), ये गायब की खबरें हैं जो हम तुम्हारी तरफ वही कर रहे हैं, इसे पहले ना तुम इनको जानते थे और ना तुम्हारी क़ौम। पस सब्र करो, अंजाम-ए-कार मुत्तक़ियों के हक़ में है
عَرَبِيوَإِلىٰ عادٍ أَخاهُم هودًا ۚ قالَ يا قَومِ اعبُدُوا اللَّهَ ما لَكُم مِن إِلٰهٍ غَيرُهُ ۖ إِن أَنتُم إِلّا مُفتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और 'आद' (जाति) की ओर उनके भाई हूद को भेजा। उन्होंने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत (उपासना) करो। उसके अलावा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तुम तो केवल झूठी बातें गढ़ने वाले लोग हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur Aad ki taraf humne unke bhai Hud ko bheja. Usne kaha “aey biradraan e qaum, Allah ki bandagi karo, tumhara koi khuda uske siwa nahin hai, tumne mehaz jhoot ghadh rakkhey hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur qom-e-aad ki taraf inn kay bhai hood ko bheja uss ney kaha meri qom walo! Allah hi ki ibadat kero uss kay siwa tumhara koi mabood nahi tum to sirf bohtaan bandh rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)और आद की तरफ हमने उनके भाई हुद को भेजा। उसने कहा "ऐ बिरादरान ए क़ौम, अल्लाह की बंदगी करो, तुम्हारा कोई खुदा उसके सिवा नहीं है, तुमने महज़ झूठ घड़ रखा है
عَرَبِييا قَومِ لا أَسأَلُكُم عَلَيهِ أَجرًا ۖ إِن أَجرِيَ إِلّا عَلَى الَّذي فَطَرَني ۚ أَفَلا تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरी जाति के लोगो! मैं तुमसे इस (उपदेश) पर कोई बदला नहीं चाहता; मेरा पारिश्रमिक (बदला) उसी (अल्लाह) पर है, जिसने मुझे पैदा किया है। तो क्या तुम (इसे) नहीं समझते?
Roman Urdu (Maududi)Aey biradraan e qaum is kaam par main tumse koi ajar nahin chahta. Mera ajar to uske zimme hai jisne mujhey paida kiya hai. Kya tum aqal se zara kaam nahin letey
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meri qom! Mein tum say iss ki koi ujrat nahi maangta mera ajar uss kay zimmay hai jiss ney mujhay peda kiya hai to kiya phir bhi tum aqal say kaam nahi letay
Devnagri Urdu (Maududi)ए बिरादरान ए क़ौम इस काम पर मैं तुमसे कोई अजर नहीं चाहता। मेरा अजर तो उसका ज़िम्मे है जिसने मुझे भुगतान किया है क्या तुम अक्ल से जरा काम नहीं लेते
عَرَبِيوَيا قَومِ استَغفِروا رَبَّكُم ثُمَّ توبوا إِلَيهِ يُرسِلِ السَّماءَ عَلَيكُم مِدرارًا وَيَزِدكُم قُوَّةً إِلىٰ قُوَّتِكُم وَلا تَتَوَلَّوا مُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरी जाति के लोगो! अपने पालनहार से क्षमा याचना करो। फिर उसकी ओर पलट आओ। वह आकाश से तुमपर खूब बारिश बरसाएगा और तुम्हारी शक्ति और अधिक बढ़ा देगा और विमुख हो कर अपराधी न बनो।
Roman Urdu (Maududi)Aur aey meri qaum ke logon, apne Rubb se mafi chaho, phir uski taraf palato. Woh tumpar aasmaan ke dahane khol dega aur tumhari maujooda quwwat(strength) par mazeed quwwat ka izafa karega. Mujreemon ki tarah mooh na phero”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meri qom kay logo! Tum apney paalney walay say apni taqseeron ki moafi talab kero aur uss ki janib mein toba kero takay woh barasney walay badal tum per bhej dey aur tumahri taqat per aur taqat qooat barha dey aur tum jurum kertay huye roo gardani na kero
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अपने रब से माफ़ी चाहो, फिर उसकी तरफ पलटो। वो तुम्हारे आसमान के दहाने खोल देगा और तुम्हारी मौजुदा कुव्वत (ताकत) पर मजीद कुव्वत का इजाफा करेगा। मुजरेमोन की तरह मुँह न फेरो”
عَرَبِيقالوا يا هودُ ما جِئتَنا بِبَيِّنَةٍ وَما نَحنُ بِتارِكي آلِهَتِنا عَن قَولِكَ وَما نَحنُ لَكَ بِمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ हूद! तुम हमारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण लेकर नहीं आए तथा हम तुम्हारी बात के कारण अपने पूज्यों को छोड़ने वाले नहीं हैं और न हम तुम्हारा विश्वास करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya, “aey Hud, tu hamare paas koi sareeh shahadat(evidence) lekar nahin aaya hai, aur tere kehne se hum apne maboodon ko nahin chodh sakte. Aur tujhpar hum iman laney waley nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha aey hood! Tu humaray pass koi daleel to laya nahi aur hum sirf teray kehney say apney maboodon ko chorney walay nahi aur na hum tujh per eman laney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उन्होन ने जवाब दिया, “ऐ हुद, तू हमारे पास कोई सारी शहादत (सबूत) लेकर नहीं आया है, और तेरे कहने से हम अपने माबूदों को नहीं छोड़ सकते। और तुझपर हम ईमान लाने वाले नहीं हैं
عَرَبِيإِن نَقولُ إِلَّا اعتَراكَ بَعضُ آلِهَتِنا بِسوءٍ ۗ قالَ إِنّي أُشهِدُ اللَّهَ وَاشهَدوا أَنّي بَريءٌ مِمّا تُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)हम तो यही कहेंगे कि हमारे किसी देवता ने तुझे पागल बना दिया है। हूद ने कहा : मैं अल्लाह को (गवाह) बनाता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि मैं उस शिर्क से बरी हूँ, जो तुम कर रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Hum to yeh samajhte hain ke tere upar hamare maboodon mein se kisi ki maar padh gayi hai”. Hud ne kaha, “main Allah ki shahadat pesh karta hoon aur tum gawah raho ke yeh jo Allah ke siwa dusron ko tumne khudayi mein shareek thehra rakkha hai ussey main bezaar hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay hum to yehi kehtay hain kay tu humaray kissi mabood kay buray jhaptay mein aagaya hai. Uss ney jawab diya kay mein Allah ko gawah kerta hun aur tum bhi gawah raho kay mein to Allah kay siwa unn sab say bey zaar hun jinhen tum shareek bana rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)हम तो ये समझते हैं कि तेरे ऊपर हमारे मबूदों में से किसी की मौत हो गई है।'' हुड ने कहा, ''मैं अल्लाह की शहादत पेश करता हूं और तुम गवाह रहो के ये जो अल्लाह के सिवा दूसरों को तुमने खुदाई में शरीक किया ठहरे रक्खा है उसे मैं बेज़ार हूं
عَرَبِيمِن دونِهِ ۖ فَكيدوني جَميعًا ثُمَّ لا تُنظِرونِ
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हिन्दी (Al-Omari)उस (अल्लाह) के सिवा। अतः तुम सब मिलकर मेरे विरुद्ध चाल चलो, फिर मुझे मोहलत न दो।
Roman Urdu (Maududi)Tum sab ke sab milkar mere khilaf apne karni mein kasar na uttha rakkho aur mujhey zara mohlat na do
Roman Urdu (Junagarhi)Acha tum sab mill ker meray khilaf chalen chal lo aur mujhay bilkul mohlat bhi na do
Devnagri Urdu (Maududi)तुम सब मिलकर मेरे खिलाफ अपनी करनी में कसार ना उठा रख और मुझे जरा मोहलत ना दो
عَرَبِيإِنّي تَوَكَّلتُ عَلَى اللَّهِ رَبّي وَرَبِّكُم ۚ ما مِن دابَّةٍ إِلّا هُوَ آخِذٌ بِناصِيَتِها ۚ إِنَّ رَبّي عَلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मैंने अपने पालनहार और तुम्हारे पालनहार, अल्लाह पर भरोसा किया है। कोई चलने वाला जीव नहीं, परंतु वह उसके माथे के बालों को पकड़े हुए है। निश्चय ही मेरा पालनहार सीधे रास्ते पर है।
Roman Urdu (Maududi)Mera bharosa Allah par hai jo mera Rubb bhi hai aur tumhara Rubb bhi. Koi jaandaar aisa nahin jiski choti uske haath mein na ho. Beshak mera Rubb seedhi raah par hai
Roman Urdu (Junagarhi)Mera bharosa sirf Allah Taalaa per hi hai jo mera aur tum sab ka perwerdigar hai jitney bhi paon dharney walay hain sab ki payshani wohi thamay huye hai. Yaqeenan mera rab bilkul sahih raah per hai
Devnagri Urdu (Maududi)मेरा भरोसा अल्लाह पर है जो मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी। कोई जानदार ऐसा नहीं जिसकी छोटी उसके हाथ में ना हो। बेशक मेरा रब सीधी राह पर है
عَرَبِيفَإِن تَوَلَّوا فَقَد أَبلَغتُكُم ما أُرسِلتُ بِهِ إِلَيكُم ۚ وَيَستَخلِفُ رَبّي قَومًا غَيرَكُم وَلا تَضُرّونَهُ شَيئًا ۚ إِنَّ رَبّي عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ حَفيظٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि तुम मुँह फेरो, तो मैं तुम्हें वह संदेश पहुँचा चुका, जिसे देकर मुझे तुम्हारी ओर भेजा गया था। और मेरा पालनहार तुम्हारे स्थान पर किसी अन्य जाति को ले आएगा और तुम उसे कुछ भी हानि नहीं पहुँचा सकोगे। निःसंदेह मेरा पालनहार प्रत्येक चीज़ पर संरक्षक है।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum mooh pherte ho to pher lo, jo paigham de kar main tumhare paas bhejha gaya tha woh main tumko pahuncha chuka hoon. Ab mera Rubb tumhari jagah dusri qaum ko uthayega aur tum uska kuch na bigaad sakoge. Yaqeenan mera Rubb har cheez par nigraan hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus agar tum roo garadani kero to kero mein to tumhen woh paygham phonch chuka jo dey ker mujhay tumhari taraf bheja gaya tha. Mera rab tumharya qaeem muqam aur logon ko ker dey ga aur tum uss ka kuch na bigar sakogay yaqeenan mera perwerdigar her cheez per nigehban hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम मुंह फेरते हो तो फिर लो, जो पैगाम दे कर मैं तुम्हारे पास भेज गया था वह मैं तुमको पाहुंचा चूका हूं। अब मेरा रब तुम्हारी जगह दूसरी कौम को उठाएगा और तुम उसका कुछ न बिगाड़ पाओगे। यकीनन मेरा रब हर चीज़ पर नज़र है।”
عَرَبِيوَلَمّا جاءَ أَمرُنا نَجَّينا هودًا وَالَّذينَ آمَنوا مَعَهُ بِرَحمَةٍ مِنّا وَنَجَّيناهُم مِن عَذابٍ غَليظٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब हमारा आदेश आ पहुँचा, तो हमने हूद और उसके साथ ईमान लाने वालों को अपनी दया से बचा लिया। तथा हमने उन्हें एक कठोर यातना से छुटकारा दिया।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab hamara hukum aa gaya to humne apni rehmat se Hud ko aur un logon ko jo uske saath iman laye thay nijaat de di aur ek sakht azaab se unhein bacha liya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab humara hukum aa phoncha to hum ney hood ko aur uss kay musalman sathiyon ko apni khas rehmat say nijat ata farmaee aur hum ney unn sab ko sakht azab say bacha liya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब हमारा हुकुम आ गया तो हमने अपनी रहमत से हुद को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे निजात दे दी और एक मजबूत अज़ाब से उन्हें बचा लिया
عَرَبِيوَتِلكَ عادٌ ۖ جَحَدوا بِآياتِ رَبِّهِم وَعَصَوا رُسُلَهُ وَاتَّبَعوا أَمرَ كُلِّ جَبّارٍ عَنيدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ये वही 'आद' (जाति) के लोग हैं, जिन्होंने अपने पालनहार की आयतों (निशानियों) का इनकार किया और उसके रसूलों की बात नहीं मानी और हर ऐसे व्यक्ति के पीछे चलते रहे, जो अभिमानी, उद्दंड हो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hain Aad. Apne Rubb ki aayaat se unhon ne inkar kiya, uske Rasoolon ki baat na maani, aur har jabbar dushman e haqq ki pairwi karte rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh thi qom-e-aad jinhon ney apney rab ki aayaton ka inkar kiya aur uss kay rasoolon ki na farmani ki aur her aik sirkash na farman kay hukum ki tabeydari ki
Devnagri Urdu (Maududi)ये हैं आद। अपने रुब की आयतों से उनको ने इंकार किया, उसके रसूलों की बात ना मानी, और हर जब्बार दुश्मन ए हक़ की जोड़ी बनाते रहे
عَرَبِيوَأُتبِعوا في هٰذِهِ الدُّنيا لَعنَةً وَيَومَ القِيامَةِ ۗ أَلا إِنَّ عادًا كَفَروا رَبَّهُم ۗ أَلا بُعدًا لِعادٍ قَومِ هودٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और इस संसार में उनके साथ धिक्कार लगा दी गई तथा क़ियामत के दिन भी लगी रहेगी। सुनो! आद ने अपने पालनहार का इनकार किया। सुनो! हूद की जाति आद के लिए दूरी हो!
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar is duniya mein bhi inpar phitkar padi aur qayamat ke roz bhi. Suno! Aad ne apne Rubb se kufr kiya, Suno! Door phenk diye gaye Aad, Hud ki qaum ke log
Roman Urdu (Junagarhi)Duniya mein bhi inn kay peechay laanat laga di gaee aur qayamat kay din bhi dekh lo qom-e-aad ney apney rab say kufur kiya hood ki qom aad per doori ho
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार इस दुनिया में भी अंदर फिटकर पड़ी और कयामत के रोज़ भी। सुनो! आद ने अपने रब से कुफ्र किया, सुनो! दूर फेंक दिये गये आद, हद की क़ौम के लोग
عَرَبِي۞ وَإِلىٰ ثَمودَ أَخاهُم صالِحًا ۚ قالَ يا قَومِ اعبُدُوا اللَّهَ ما لَكُم مِن إِلٰهٍ غَيرُهُ ۖ هُوَ أَنشَأَكُم مِنَ الأَرضِ وَاستَعمَرَكُم فيها فَاستَغفِروهُ ثُمَّ توبوا إِلَيهِ ۚ إِنَّ رَبّي قَريبٌ مُجيبٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और समूद की ओर उनके भाई सालेह़ को भेजा। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत (पूजा) करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं है। उसी ने तुम्हें धरती से पैदा किया और तुम्हें उसमें बसाया। अतः उससे क्षमा माँगो; फिर उसकी ओर पलट आओ। निःसंदेह मेरा पालनहार निकट है (और प्रार्थनाओं को) स्वीकार करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur Samood ki taraf humne unke bhai Saleh ko bheja. Usne kaha, “aey meri qaum ke logon, Allah ki bandagi karo, uske siwa tumhara koi khuda nahin hai. Wahi hai jisne tumko zameen se paida kiya hai aur yahan tumko basaya hai. Lihaza tum ussey maafi chaho aur uski taraf palat aao. Yaqeenan mera Rubb qareeb hai aur woh duaon ka jawab dene wala hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur qom-e-samood ki taraf unn kay bhai saleh ko bheja uss ney kaha aey meri qom tum Allah ki ibadat kero uss kay siwa tumahra koi mabood nahi ussi ney tumhen zamin say peda kiya hai aur ussi ney tumhen iss zamin mein basaya hai pus tum uss say moafi talab kero aur uss ki taraf rujoo kero. Be-shak mera rab qarib aur duaon ka qabool kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और समूद की तरफ़ हमने उनके भाई सालेह को भेजा। उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है। वही है जिसने तुमको ज़मीन से पैदा किया है और यहां तुमको बसाया है। लिहाज़ा तुम उसे माफ़ी चाहो और उसकी तरफ पलट आओ। यकीनन मेरा रब करीब है और वो।" दुआओं का जवाब देने वाला है”
عَرَبِيقالوا يا صالِحُ قَد كُنتَ فينا مَرجُوًّا قَبلَ هٰذا ۖ أَتَنهانا أَن نَعبُدَ ما يَعبُدُ آباؤُنا وَإِنَّنا لَفي شَكٍّ مِمّا تَدعونا إِلَيهِ مُريبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ सालेह! हमें इससे पहले तुझसे बड़ी आशाएँ थीं। क्या तू हमें उन (बुतों) की पूजा करने से रोक रहा है, जिनकी पूजा हमारे बाप-दादा करते आए हैं? तू जिस चीज़ की ओर हमें बुला रहा है, निःसंदेह उसके बारे में हमें (ऐसा) संदेह है, जो हमें दुविधा में डाले हुए है।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “Aey Saleh, issey pehle tu hamare darmiyan aisa shaks tha jissey badi tawaqquat (expectations) wabasta thi. Kya tum humein in maboodon ki parastish se roakna chahta hai jinki parastish hamare baap dada karte thay? Tu jis tareeqe ki taraf humein bula raha hai iske baarey mein humko sakht shubha(doubt) hai jisne humein khaljaan (disquieting doubt ) mein daal rakkha hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha aey saleh! Iss say pehlay to hum tujh say boht kuch umeeden lagaye huye thay kiya tu humen unn ki ibadaton say rok raha hai jinki ibadat humaray baap dada kertay chalay aaye humen to iss deen mein heyran kun shaq hai jiss ki taraf tu humen bula raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)उन्होन ने कहा “ऐ सालेह, इसके पहले तू हमारे दरमियान ऐसा शक्स था जिसकी बड़ी तवाक्कत (उम्मीदें) वबस्ता थी। क्या तुम हमें माबूदों की परस्तियों से रोकना चाहते हैं जिनकी परस्तियां हमारे बाप दादा करते थे? तू जिस तारीख़ की तरफ हमें बुला रहा है, इसके बारे में हमको शक है, जिसने हमें ख़लजान (परेशान करने वाला शक) में डाल रखा है।”
عَرَبِيقالَ يا قَومِ أَرَأَيتُم إِن كُنتُ عَلىٰ بَيِّنَةٍ مِن رَبّي وَآتاني مِنهُ رَحمَةً فَمَن يَنصُرُني مِنَ اللَّهِ إِن عَصَيتُهُ ۖ فَما تَزيدونَني غَيرَ تَخسيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उस (सालेह़) ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या तुमने विचार किया कि यदि मैं अपने पालनहार की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अपनी दया प्रदान की हो, फिर मैं उसकी अवज्ञा करूँ, तो कौन है, जो अल्लाह के मुक़ाबले में मेरी सहायता करेगा? तुम मुझे घाटे में डालने के सिवा कुछ नहीं करोगे।
Roman Urdu (Maududi)Saleh ne kaha “ aey biradaraan-e-qaum, tumne kuch is baat par bhi gaur kiya ke agar main apne Rubb ki taraf se ek saaf shahadat rakhta tha, aur phir usne apne rehmat se bhi mujhko nawaz diya to iske baad Allah ki pakad se mujhey kaun bachayega agar main uski nafarmani karoon? Tum mere kis kaam aa sakte ho siway iske ke mujhey aur zyada khasare(nuksan) mein daal do
Roman Urdu (Junagarhi)Iss ney jawab diya kay aey meri qom kay logo! Zara batao to agar mein apney rab ki taraf say kissi mazboot daleel per hua aur uss ney mujhay apney pass ki rehmat ata ki ho phir agar mein ney uss ki na farmani ker li to kaun hai jo uss kay muqablay mein meri madad keray? Tum to mera nuksan hi barha rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)सालेह ने कहा " ऐ बिरादरान-ए-कौम, तुमने कुछ इस बात पर भी गौर किया के अगर मैं अपने रब की तरफ से एक साफ शहादत रखता था, और फिर उसने अपने रहमत से भी मुझको नवाज दिया तो इसके बाद अल्लाह की पकड़ से मुझे कौन बचाएगा अगर मैं उसकी नफरमानी करूं? तुम मेरे किस काम आ सकते हो सिवाय इसके मुझे और ज्यादा खसरे (नुक्सान) में डाल दो
عَرَبِيوَيا قَومِ هٰذِهِ ناقَةُ اللَّهِ لَكُم آيَةً فَذَروها تَأكُل في أَرضِ اللَّهِ وَلا تَمَسّوها بِسوءٍ فَيَأخُذَكُم عَذابٌ قَريبٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और ऐ मेरी जाति के लोगो! यह अल्लाह की ऊँटनी तुम्हारे लिए एक निशानी है। अतः इसे छोड़ दो, अल्लाह की धरती में चरती फिरे और इसे कोई कष्ट न पहुँचाओ, अन्यथा तुम्हें अति शीघ्र यातना पकड़ लेगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur aey meri qaum ke logon, dekho yeh Allah ki ountni (she-camel) tumhare liye ek nishani hai, isey khuda ki zameen mein charne ke liye azad chodh do. Issey zara taaruz na karna (do not hurt her) warna kuch zyada dair na guzregi ke tumpar khuda ka azaab aa jayega”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aey meri qom walo! Yeh Allah ki bheji hui oontni hai jo tumhary liye aik moajza hai abb tum issay Allah ki zamin mein khati hui chor do aur issay kissi tarah ki eza na phonchao werna fori azab tumhen pakar ley ga
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐ मेरी कौम के लोगों, देखो ये अल्लाह की ऊंटनी (वह-ऊंटनी) तुम्हारे लिए एक निशानी है, इसे खुदा की जमीन में बदलना है के लिए आज़ाद छोड़ दो। इस्से ज़रा तरुज़ ना करना (उसे चोट मत पहुँचाओ) वर्ना कुछ ज्यादा देर न गुजरेगी के तुमपर खुदा का अज़ाब आ जाएगा”
عَرَبِيفَعَقَروها فَقالَ تَمَتَّعوا في دارِكُم ثَلاثَةَ أَيّامٍ ۖ ذٰلِكَ وَعدٌ غَيرُ مَكذوبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्होंने उसे मार डाला। तब सालेह़ ने कहा : तुम अपने नगर में तीन दिन अपने जीवन का आनंद लो! यह वचन झूठा सिद्ध होने वाला नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Magar unhon ne ountni ko maar dala ispar Saleh ne unko khabardaar kardiya ke “ bas ab teen din apne gharon mein aur reh bas lo. Yeh aisi miyad (promise ) hai jo jhooti na sabit hogi”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir bhi inn logon ney iss oontni kay paon kaat dalay iss per saleh ney kaha acha tum apney gharon mein teen teen din tak to reh seh lo yeh wada jhoota nahi hai
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उनहोन ने औंटनी को मार डाला इसपर सालेह ने उनको खबरदार कर दिया के “बस अब तीन दिन अपने घरों में और रह बस लो। ये ऐसी मियाद (वादा) है जो झूठी ना साबित होगी”
عَرَبِيفَلَمّا جاءَ أَمرُنا نَجَّينا صالِحًا وَالَّذينَ آمَنوا مَعَهُ بِرَحمَةٍ مِنّا وَمِن خِزيِ يَومِئِذٍ ۗ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ القَوِيُّ العَزيزُ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब हमारा आदेश आ गया, तो हमने सालेह़ को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे, अपनी दया से बचा लिया और उस दिन के अपमान से भी (उन्हें सुरक्षित रखा)। निःसंदेह आपका पालनहार ही शक्तिशाली, प्रभुत्वशाली है।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir-e-kaar jab hamare faisle ka waqt aa gaya to humne apni rehmat se Saleh ko aur un logon ko jo uske saath iman laye thay bacha liya, aur us din ki ruswayi se unko mehfooz rakkha. Beshak tera Rub hi dar-asal taaqatwar aur bala-dast (All-Mighty) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab humara farman aa phoncha hum ney saleh ko aur unn per eman laney walon ko apni rehmat say uss say bacha liya aur uss din ki ruswaee say bhi yaqeenan tera rab nihayat nihayat tawana aur ghalib hai
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर-ए-कार जब हमारे फैसले का वक्त आ गया तो हमने अपनी रहमत से सालेह को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे बचा लिया, और उस दिन की रुसवाई से उनको महफूज रक्खा। बेशाक तेरा रब ही दर-असल ताक़तवार और बाला-दस्त (ऑल-माइटी) है
عَرَبِيوَأَخَذَ الَّذينَ ظَلَمُوا الصَّيحَةُ فَأَصبَحوا في دِيارِهِم جاثِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अत्याचारियों को भयंकर आवाज़ (चीत्कार) ने पकड़ लिया और वे अपने घरों में औंधे पड़े रह गए।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jinhon ne zulm kiya tha to ek sakht dhamake ne unko dhar liya aur woh apni bastiyon mein is tarah be-hiss o harkat (lay lifeless) padey ke padey reh gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur zlimon ko baray zor ki chinghar ney aa dabocha phir to woh apney gharon mein ondhay paray huye reh gaye
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जिन्होन ने ज़ुल्म किया था तो एक मजबूत धमाके ने उनको धर लिया और वो अपनी बस्तियों में इस तरह बे-हिस्स ओ हरकत (बेजान पड़ा हुआ) पड़े के पड़े रह गए
عَرَبِيكَأَن لَم يَغنَوا فيها ۗ أَلا إِنَّ ثَمودَ كَفَروا رَبَّهُم ۗ أَلا بُعدًا لِثَمودَ
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हिन्दी (Al-Omari)जैसै वे वहाँ कभी बसे ही नहीं थे। सावधान! समूद ने अपने पालनहार का इनकार किया। सुन लो! समूद के लिए (अल्लाह की दया से) दूरी हो।
Roman Urdu (Maududi)Ke goya woh wahan kabhi basay hi na thay. Suno! Samood ne apne Rubb se kufr kiya , Suno! Door phenk diye gaye Samood
Roman Urdu (Junagarhi)Aisay kay goya woh wahan kabhi abad hi na thay aagah raho kay qom-e-samood ney apney rab say kufur kiya. Sunn lo! Inn samoodiyon per phitkaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)के गोया वो वहां कभी बसाए ही ना थे। सुनो! समूद ने अपने रब से कुफ्र किया, सुनो! दूर फेंक दिए गए समूद
عَرَبِيوَلَقَد جاءَت رُسُلُنا إِبراهيمَ بِالبُشرىٰ قالوا سَلامًا ۖ قالَ سَلامٌ ۖ فَما لَبِثَ أَن جاءَ بِعِجلٍ حَنيذٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमारे फ़रिश्ते इबराहीम के पास शुभ सूचना लेकर आए। उन्होंने सलाम कहा, तो इबराहीम ने सलाम का जवाब दिया। फिर देर न हुई कि वह एक भुना हुआ वछड़ा ले आया।
Roman Urdu (Maududi)Aur dekho, Ibrahim ke paas hamare Farishte khush khabri liye huey pahunche. Kaha tumpar salaam ho, Ibrahim ne jawab diya tumpar bhi salaam ho, phir kuch dair na guzri ke Ibrahim ek bhoona (roasted) hua bachda(calf) (unki ziyafat ke liye) le aaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur humaray bhejay huye payghaamber ibrahim kay pass khushkhabri ley ker phonchay aur salam kaha unhon ney bhi jawab-e-salam diya aur baghair kissi takheer kay gaye ka bhuna hua bachra ley aaye
Devnagri Urdu (Maududi)और देखो, इब्राहिम के पास हमारे फरिश्ते खुश खबरी के लिए हुए पहुंचे। कहां तुम्पर सलाम हो, इब्राहिम ने जवाब दिया तुम्पर भी सलाम हो, फिर कुछ देर ना गुजरी के इब्राहिम एक भुना (भुना हुआ) हुआ बछड़ा (बछड़ा) (उनकी जियाफत के लिए) ले आया
عَرَبِيفَلَمّا رَأىٰ أَيدِيَهُم لا تَصِلُ إِلَيهِ نَكِرَهُم وَأَوجَسَ مِنهُم خيفَةً ۚ قالوا لا تَخَف إِنّا أُرسِلنا إِلىٰ قَومِ لوطٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब देखा कि उनके हाथ खाने की ओर नहीं बढ़ रहे हैं, तो उनके प्रति अचंभे में पड़ गए और दिल में उनसे भय महसूस किया। उन्होंने कहा : भय न करो। दरअसल हम लूत की जाति की ओर भेजे गए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar jab dekha ke unke haath khane par nahin badhte to woh unse mushtaba (mistrusted them) ho gaya aur dil mein unse khauf mehsoos karne laga. Unhon ne kaha “daro nahin, hum to Lut ki qaum ki taraf bheje gaye hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Abb jo dekha kay unn kay hath bhi uss ki taraf nahi phonch rahey to unn say ajnabiyat mehsoos ker kay dil hi dil mein unn say khof kerney lagay unhon ney kaha darro nahi hum to qom-e-loot ki taraf bhejay huye aaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जब देखा के उनके हाथ खाने पर नहीं बढ़ते तो वो उनसे मुश्तबा (उन पर अविश्वास) हो गया और दिल में उनसे खौफ महसूस करने लगा। उनहों ने कहा "दारो नहीं, हम तो लूट की क़ौम की तरफ भेज गए हैं"
عَرَبِيوَامرَأَتُهُ قائِمَةٌ فَضَحِكَت فَبَشَّرناها بِإِسحاقَ وَمِن وَراءِ إِسحاقَ يَعقوبَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उस (इबराहीम) की पत्नी खड़ी थी। चुनाँचे वह हँस पड़ी, तो हमने उसे इसह़ाक़ की और इसह़ाक़ के बाद याक़ूब की शुभ सूचना दी।
Roman Urdu (Maududi)Ibrahim ki biwi khadi hui thi woh yeh sunkar hass di (laughed) phir humne usko Ishaq ki aur Ishaq ke baad Yaqub ki khushkhabri di
Roman Urdu (Junagarhi)Iss ki biwi jo khari hui thi woh hans pari to hum ney ussay ishaq ki aur ishaq kay peechay yaqoob ki khushkhabri di
Devnagri Urdu (Maududi)इब्राहिम की बीवी खड़ी हुई थी वो ये सुनकर हस दी (हँसे) फिर हमने उसको इशाक की और इशाक के बाद याकूब की ख़ुशख़बरी दी
عَرَبِيقالَت يا وَيلَتىٰ أَأَلِدُ وَأَنا عَجوزٌ وَهٰذا بَعلي شَيخًا ۖ إِنَّ هٰذا لَشَيءٌ عَجيبٌ
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हिन्दी (Al-Omari)वह बोली : हाय मेरा दुर्भाग्य! क्या मेरी संतान होगी, जबकि मैं बूढ़ी हो चुकी हूँ और मेरा यह पति भी बूढ़ा है? वास्तव में, यह बड़े आश्चर्य की बात है।
Roman Urdu (Maududi)Woh boli “haye meri kambakhti! Kya ab mere haan aulad hogi jabke main budhiya phoons ho gayi aur yeh mere miyan bhi boodhey ho chuke? Yeh to badi ajeeb baat hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kehney lagi haaye meri kum bakhti! Meray haan aulad kaisay hosakti hai mein khud burhiya aur yeh meray khawind bhi boht bari umar kay hain yeh to yaqeenan bari ajeeb baat hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो बोली "हाय मेरी कम्बख्त! क्या! अब मेरे हां औलाद होगी जबके मैं बुढ़िया फूल गई और ये मेरे मियां भी बूढ़े हो गए? ये तो बड़ी अजीब बात है''
عَرَبِيقالوا أَتَعجَبينَ مِن أَمرِ اللَّهِ ۖ رَحمَتُ اللَّهِ وَبَرَكاتُهُ عَلَيكُم أَهلَ البَيتِ ۚ إِنَّهُ حَميدٌ مَجيدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फ़रिश्तों ने कहा : क्या तू अल्लाह के आदेश पर आश्चर्य करती है? ऐ घर वालो! तुम सब पर अल्लाह की दया तथा बरकतों की वर्षा हो। निःसंदेह वह अति प्रशंसित, गौरवशाली है।
Roman Urdu (Maududi)Farishton ne kaha “Allah ke hukum par taajub karti ho? Ibrahim ke ghar walon, tum logon par to Allah ki rehmat aur uski barkatein hain, aur yaqeenan Allah nihayat qaabil-e-tareef aur badi shaan wala hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Farishton ney kaha kiya tu Allah ki qudrat say tajjub ker rahi hai? Tum per aey iss ghar kay logo Allah ki rehmat aur uss ki barkat nazil hon be-shak Allah hamd-o-sana ka saza waar aur bari shaan wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)फरिश्तों ने कहा ''अल्लाह के हुकुम पर ताज्जुब करती हो? यकीनन अल्लाह निहायत काबिल-ए-तारीफ और बड़ी शान वाला है”
عَرَبِيفَلَمّا ذَهَبَ عَن إِبراهيمَ الرَّوعُ وَجاءَتهُ البُشرىٰ يُجادِلُنا في قَومِ لوطٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब इबराहीम का भय दूर हो गया और उसे शुभ सूचना मिल गई, तो वह हमसे लूत की जाति के बारे में झगड़ने लगा।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab Ibrahim ki ghabrahat door ho gayi aur (aulad ki basharat se) uska dil khush ho gaya to usne qaum e Lut ke maamle mein humse jhagda shuru kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Jab ibrahim ka darr khof jata raha aur ussay bisharat bhi phonch chuki to hum say qom-e-loot kay baray mein kehney sunnay lagay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब इब्राहिम की घबराहट दूर हो गई और (औलाद की बशारत से) उसका दिल खुश हो गया तो उसने कौम ए लूट के मामले में हमसे झगड़ा शुरू किया
عَرَبِيإِنَّ إِبراهيمَ لَحَليمٌ أَوّاهٌ مُنيبٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह इबराहीम बड़ा सहनशील, बहुत विलाप करने वाला और हर मामले में अल्लाह की ओर पलटने वाला था।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat mein Ibrahim bada haleem aur narm dil aadmi tha aur har haal mein hamari taraf rujoo karta tha
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan ibrahim boht tahammul walay naram dil aur Allah ki janib jhukney walay thay
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत में इब्राहिम बड़ा हलीम और नरम दिल आदमी था और हर हाल में हमारी तरफ रूजू करता था
عَرَبِييا إِبراهيمُ أَعرِض عَن هٰذا ۖ إِنَّهُ قَد جاءَ أَمرُ رَبِّكَ ۖ وَإِنَّهُم آتيهِم عَذابٌ غَيرُ مَردودٍ
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हिन्दी (Al-Omari)(फ़रिश्तों ने कहा :) ऐ इबराहीम! इस बात को रहने दो। निःसंदेह तुम्हारे पालनहार का आदेश आ चुका तथा उनपर ऐसी यातना आने वाली है, जो हटाई जाने वाली नहीं।
Roman Urdu (Maududi)(Aakhir e kaar hamare Farishton ne ussey kaha) “Aey Ibrahim , issey baaz aa jao, tumhare Rubb ka hukum ho chuka hai aur ab un logon par woh azaab aa kar rahega jo kisi ke phere nahin phir sakta”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey ibrahim! Iss khayal ko chor dijiye aap kay rab ka hukum aa phoncha hai aur unn per na taalay janey wala azab zaroor aaney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(आख़िर ए कार हमारे फ़रिश्तों ने उसे कहा) "ऐ इब्राहिम, इसके बाज़ आ जाओ, तुम्हारे रब का हुकुम हो चुका है और अब उन लोगों पर वो अज़ाब आ कर रहेगा जो किसी के फेर नहीं फिर सकता"
عَرَبِيوَلَمّا جاءَت رُسُلُنا لوطًا سيءَ بِهِم وَضاقَ بِهِم ذَرعًا وَقالَ هٰذا يَومٌ عَصيبٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब हमारे फ़रिश्ते लूत के पास आए, तो उनका आना उसे बुरा लगा और उनके कारण व्याकुल हो गया और कहा : यह तो बड़ा कठोर दिन है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab hamare Farishte Lut ke paas pahunche to unki aamad se woh bahut ghabraya aur dil tangg hua aur kehne laga ke aaj badi museebat ka din hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jab humaray bhejay huye farishtay loot kay pass phonchay to woh inn ki waja say boht ghumgeen hogaye aur dil hi dil mein kurhney lagay aur kehney lagay kay aaj ka din bari musibat ka din hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जब हमारे फ़रिश्ते लुट के पास पहुँचे तो उनकी आमद से वो बहुत घबराया और दिल तंग हुआ और कहने लगा के आज बड़ी मुसीबत का दिन है
عَرَبِيوَجاءَهُ قَومُهُ يُهرَعونَ إِلَيهِ وَمِن قَبلُ كانوا يَعمَلونَ السَّيِّئَاتِ ۚ قالَ يا قَومِ هٰؤُلاءِ بَناتي هُنَّ أَطهَرُ لَكُم ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَلا تُخزونِ في ضَيفي ۖ أَلَيسَ مِنكُم رَجُلٌ رَشيدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसकी जाति के लोग दौड़ते हुए उसके पास आ गए और वे पहले से कुकर्म किया करते थे। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! ये मेरी बेटियाँ हैं, ये तुम्हारे लिए अधिक पवित्र हैं। अतः अल्लाह से डरो और मुझे मेरे अतिथियों में अपमानित न करो। क्या तुममें कोई भला आदमी नहीं?
Roman Urdu (Maududi)(In mehmaano ka aana tha ke) uski qaum ke log bay-ikhtiyar uske ghar ki taraf daud padey. Pehle se woh aisi hi badkariyon ke khugar thay. Lut ne unse kaha “bhaiyon, yeh meri betiyan maujood hain, yeh tumhare liye pakeeza-tarr hain. Kuch khuda ka khauf karo aur mere mehmano ke mamle mein mujhey zaleel na karo. Kya tum mein koi bhala aadmi nahin?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss ki qom dorti hui uss kay pass aa phonchi woh to pehlay hi say bad kaariyon mein mubtila thi loot (alh-e-salam) ney kaha aey qom kay logo! Yeh hain meri betiyan jo tumharay liye boht hi pakeeza hain Allah say daro aur mujhay meray mehamnon kay baray mein ruswa na kero. Kiya tum mein say aik bhi bhala aadmi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)(महमानो का आना था के) उसकी क़ौम के लोग बे-इख्तियार उसके घर की तरफ दौड़ पड़े। पहले से वो ऐसी ही बदकारियों के शौकीन थे। लुट ने उनसे कहा "भाइयों, ये मेरी बेटियां मौजूद हैं, ये तुम्हारे लिए पाकीजा-तरर हैं। कुछ खुदा का खौफ करो और मेरे मेहमानों के मामले में मुझे ज़लील न करो। क्या तुम में कोई भला आदमी नहीं?"
عَرَبِيقالوا لَقَد عَلِمتَ ما لَنا في بَناتِكَ مِن حَقٍّ وَإِنَّكَ لَتَعلَمُ ما نُريدُ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों ने कहा : निश्चय तुम तो जानते हो कि हमें तुम्हारी बेटियों से कोई मतलब नहीं। तथा निःसंदेह तुम भली-भाँति जानते हो कि हम क्या चाहते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “tujhey to maloom hi hai ke teri betiyon mein hamara koi hissa nahin hai aur tu yeh bhi jaanta hai ke hum chahte kya hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney jawab diya kay tu bakhoobi janta hai kay humen to teri betiyon per koi haq nahi hai aur tu humari asli chahat say bakhoobi waqif hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनको ने जवाब दिया "तुझे तो मालूम ही है के तेरी बेटियों में हमारा कोई हिसा नहीं है और तू ये भी जानता है के हम चाहते क्या हैं"
عَرَبِيقالَ لَو أَنَّ لي بِكُم قُوَّةً أَو آوي إِلىٰ رُكنٍ شَديدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)लूत ने कहा : काश, मेरे पास तुमसे मुक़ाबले की शक्ति होती या मैं किसी मज़बूत सहारे की शरण लेता!
Roman Urdu (Maududi)Lut ne kaha “ kaash mere paas itni taaqat hoti ke tumhein seedha kardeta, ya koi mazboot sahara hi hota ke uski panaah leta”
Roman Urdu (Junagarhi)Loot (alh-e-salam) ney kaha kaash kay mujh mein tum say muqabla kerney ki qooat hoti ya mein kissi zabardast ka aasra pakar pata
Devnagri Urdu (Maududi)लूट ने कहा " काश मेरे पास इतनी ताक़त होती के तुम्हें सीधा करदेता, या कोई मज़बूत सहारा ही होता के" उसकी पनाह लेता”
عَرَبِيقالوا يا لوطُ إِنّا رُسُلُ رَبِّكَ لَن يَصِلوا إِلَيكَ ۖ فَأَسرِ بِأَهلِكَ بِقِطعٍ مِنَ اللَّيلِ وَلا يَلتَفِت مِنكُم أَحَدٌ إِلَّا امرَأَتَكَ ۖ إِنَّهُ مُصيبُها ما أَصابَهُم ۚ إِنَّ مَوعِدَهُمُ الصُّبحُ ۚ أَلَيسَ الصُّبحُ بِقَريبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फ़रिश्तों ने कहा : ऐ लूत! हम तेरे पालनहार के भेजे हुए (फ़रिश्ते) हैं। वे कदापि तेरे पास नहीं पहुँच सकेंगे। अतः तू रात के किसी हिस्से में अपने घरवालों को लेकर निकल जा और तुममें से कोई पीछे मुड़कर न देखे, सिवाय तेरी पत्नी के। उसपर भी वही बीतने वाला है, जो उनपर बीतेगा। उनकी यातना का निर्धारित समय प्रातः काल है। क्या प्रातः काल निकट नहीं है?
Roman Urdu (Maududi)Tab Farishton ne ussey kaha ke “aey Lut, hum tere Rubb ke bheje huye Farishtey hain. Yeh log tera kuch na bigad sakenge. Bas tu kuch raat rahey apne ehal o ayal ko lekar nikal jaa aur dekho, tum mein se koi shaks peechey palat kar na dekhey magar teri biwi (saath nahin jayegi) kyunke uspar bhi wahi kuch guzarne wala hai jo in logon par guzarna hai. Unki tabahi ke liye subah ka waqt muqarrar hai. Subah hotey ab dair hi kitni hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Abb farishton ney kaha aey loot! Hum teray perwerdigar kay bhejay huye hain na mumkin hai kay yeh tujh tak phonch payen pus tu apney ghar walon ko ley ker kuch raat rahey nikal khara ho. Tum mein say kissi ko murr ker bhi na dekhna chahaiye ba-juz teri biwi kay iss liye kay ussay bhi wohi phonchney wala hai jo inn sab ko phonchay ga yaqeenan inn kay waday ka waqt subha ka hai kiya subha bilkul qarib nahi
Devnagri Urdu (Maududi)तब फ़रिश्तों ने उसे कहा के “ऐ लुट, हम तेरे रब के भेजे हुए फ़रिश्ते हैं। ये लोग तेरा कुछ न बिगाड़ सकेंगे। बस तू कुछ रात रहे अपने एहल ओ अयाल को लेकर निकल जा और देखो, तुम में से कोई शक्स पीछे पलट कर।” ना देखे मगर तेरी बीवी (साथ नहीं जाएगी) क्योंकि उसपर भी वही कुछ गुज़रने वाला है जो इन लोगों पर गुज़रना है। उनकी तबाही के लिए सुबह का वक्त मुकर्रर है। सुबह होते अब दिन ही कितनी है”
عَرَبِيفَلَمّا جاءَ أَمرُنا جَعَلنا عالِيَها سافِلَها وَأَمطَرنا عَلَيها حِجارَةً مِن سِجّيلٍ مَنضودٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब हमारा आदेश आ गया, तो हमने उस बस्ती को तहस-नहस कर दिया और उनपर कंकरियों की ताबड़-तोड़ बारिश कर दी।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab hamare faisle ka waqt aa pahuncha to humne us basti ko talpat (upside down) kardiya aur uspar paki hui mitti (baked clay) ke patthar tabad-tod barsaye
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab humara hukum aa phoncha hum ney uss basti ko zair-o-zabar ker diya upper ka hissa neechay ker diya aur unn per kankreelay pathar barsaye jo teh ba teh thay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब हमारे फैसले का वक्त आ गया तो हमने हमें बस्ती को तलपट (उल्टा) करदिया और उसपर पकी हुई मिट्टी (पकी हुई मिट्टी) के पत्थर तोड़-तोड़ बरसाये
عَرَبِيمُسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ ۖ وَما هِيَ مِنَ الظّالِمينَ بِبَعيدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जो तेरे पालनहार के यहाँ चिह्न लगाई हुई थीं और वह अत्याचारियों से कुछ दूर नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Jin mein se har patthar tere Rubb ke haan nishaan zadah tha aur zalimon se yeh saza kuch door nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Teray rab ki taraf say nishan daar thay aur woh inn zalimon say kuch door na thay
Devnagri Urdu (Maududi)जिन में से हर पत्थर तेरे रुब के हां निशान ज़्यादा था और ज़ालिमों से ये सज़ा कुछ दूर नहीं है
عَرَبِي۞ وَإِلىٰ مَديَنَ أَخاهُم شُعَيبًا ۚ قالَ يا قَومِ اعبُدُوا اللَّهَ ما لَكُم مِن إِلٰهٍ غَيرُهُ ۖ وَلا تَنقُصُوا المِكيالَ وَالميزانَ ۚ إِنّي أَراكُم بِخَيرٍ وَإِنّي أَخافُ عَلَيكُم عَذابَ يَومٍ مُحيطٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और मदयन की ओर उनके भाई शुऐब को भेजा। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत (उपासना) करो, उसके सिवा कोई तुम्हारा पूज्य नहीं और नाप-तौल में कमी न करो। निःसंदेह मैं तुम्हें अच्छी स्थिति में देख रहा हूँ। और निःसंदेह मैं तुमपर एक घेर लेने वाले दिन की यातना से डरता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur Madiyan walon ki taraf humne unke bhai Shoaib ko bheja. Usne kaha “aey meri qaum ke logon, Allah ki bandagi karo, uske siwa tumhara koi khuda nahin hai. Aur naap toal mein kami na kiya karo. Aaj main tumko acchey haal mein dekh raha hoon, magar mujhey darr hai ke kal tumpar aisa din aayega jiska azaab sabko gher lega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney madiyan walon ki taraf unn kay bhai shoaib ko bhej a uss ney kaha aey meri qom! Allah ki ibadat kero aur uss kay siwa tumhara koi mabood nahi aur tum naap tol mein bhi kami na kero mein to tumhen aasooda haal dekh raha hun aur mujhay tum per gherney walay din kay azab ka khof (bhi) hai
Devnagri Urdu (Maududi)और मदियां वालों की तरफ हमने उनके भाई शोएब को भेजा. उसने कहा "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है। और नाप तौल में कमी ना किया करो। आज मैं तुम्हारे अच्छे हाल में देख रहा हूँ, मगर मुझे डर है के कल तुम्पर ऐसा दिन आएगा जिसका अज़ाब सबको घेर लेगा"
عَرَبِيوَيا قَومِ أَوفُوا المِكيالَ وَالميزانَ بِالقِسطِ ۖ وَلا تَبخَسُوا النّاسَ أَشياءَهُم وَلا تَعثَوا فِي الأَرضِ مُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरी जाति के लोगो! न्याय के साथ नाप और तौल को पूरा रखो और लोगों को उनकी चीज़ें कम न दो तथा धरती में उपद्रव फैलाते न फिरो।
Roman Urdu (Maududi)Aur aey biradraan e quam, theek theek insaf ke saath pura naapo aur tolo (measure) aur logon ko unki cheezon mein ghata (loss) na diya karo aur zameen mein fasaad na phaylate phiro
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meri qom! Naap tol insaf kay sath poori poori kero logon ko unn ki cheezen kum na do aur zamin main fasad aur kharabi na machao
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐ बिरादरान ए क़ौम, ठीक ठीक इन्साफ के साथ पूरा नापो और तोलो (माप) और लोगों को उनकी चीज़ में घाटा (नुकसान) ना दिया करो और ज़मीन में फ़साद ना फ़ायलते फिरो
عَرَبِيبَقِيَّتُ اللَّهِ خَيرٌ لَكُم إِن كُنتُم مُؤمِنينَ ۚ وَما أَنا عَلَيكُم بِحَفيظٍ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह की दी हुई बचत, तुम्हारे लिए अच्छी है, यदि तुम ईमान वाले हो और मैं तुमपर कोई संरक्षक नहीं हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki di hui bachat (gains) tumhare liye betar hai agar tum momin ho aur bahar-haal main tumhare upar koi nigraan e kaar nahin hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ka halal kiya hua jo bach rahey tumharya liye boht hi behtar hai agar tum eman walay ho mein tum per kuch nigehban (aur darogha) nahi hun
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की दी हुई बचत (लाभ) तुम्हारे लिए बेतार है अगर तुम मोमिन हो और बहार-हाल मैं तुम्हारे ऊपर कोई निगरानी ए कार नहीं हूं"
عَرَبِيقالوا يا شُعَيبُ أَصَلاتُكَ تَأمُرُكَ أَن نَترُكَ ما يَعبُدُ آباؤُنا أَو أَن نَفعَلَ في أَموالِنا ما نَشاءُ ۖ إِنَّكَ لَأَنتَ الحَليمُ الرَّشيدُ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ शुऐब! क्या तेरी नमाज़ (इबादत) तुझे आदेश दे रही है कि हम उसे त्याग दें, जिसकी पूजा हमारे बाप-दादा करते आए हैं? अथवा अपने धन में वह न करें जो करना चाहें? वास्तव में, तू बड़ा ही सहनशील तथा भला व्यक्ति है!
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “aey shoaib, kya teri namaz tujhey yeh sikhati hai ke hum un sarey maboodon ko chodh dein jinki parastish hamare baap dada karte thay? Ya yeh ke humko apne maal mein apne mansha(as we please) ke mutabiq tasrruf(spend/use) karne ka ikhtiyar na ho? Bas tu hi to ek aali zarf aur raastbaaz aadmi ( forbearing and right-directed) reh gaya hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney jawab diya kay aey shoaib! Kiya teri salaat tujhay yehi hukum deti hai kay hum apney baap dadon kay maboodon ko chor den tu to bara hi ba waqar aur nek chalan aadmi hai
Devnagri Urdu (Maududi)उन्होन ने जवाब दिया "ऐ शोएब, क्या तेरी नमाज़ तुझे ये सिखाती है के हम उन सारे माबूदों को छोड़ दें जिनकी परस्तिश हमारे बाप दादा करते थे? हां ये के हमको अपने माल में अपनी मंशा(जैसा हम चाहें) के मुताबिक तसर्रफ(खर्च/उपयोग) करने का इख्तियार ना हो? बस तू ही तो एक आली ज़र्फ और रस्तबाज़ आदमी (सहनशील और सही दिशा वाला) रह गया है”
عَرَبِيقالَ يا قَومِ أَرَأَيتُم إِن كُنتُ عَلىٰ بَيِّنَةٍ مِن رَبّي وَرَزَقَني مِنهُ رِزقًا حَسَنًا ۚ وَما أُريدُ أَن أُخالِفَكُم إِلىٰ ما أَنهاكُم عَنهُ ۚ إِن أُريدُ إِلَّا الإِصلاحَ مَا استَطَعتُ ۚ وَما تَوفيقي إِلّا بِاللَّهِ ۚ عَلَيهِ تَوَكَّلتُ وَإِلَيهِ أُنيبُ
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हिन्दी (Al-Omari)शुऐब ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम बताओ, यदि मैं अपने पालनहार की ओर से स्पष्ट प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अच्छी जीविका प्रदान की हो, (तो कैसे तुम्हारा साथ दूँ?) मैं नहीं चाहता कि तुम्हारा विरोध करते हुए वह कार्य करूँ, जिससे तुम्हें रोक रहा हूँ। मैं जहाँ तक हो सके, सुधार ही चाहता हूँ और यह जो कुछ करना चाहता हूँ, मुझे इसका सामर्थ्य अल्लाह ही से मिलेगा। मैंने उसी पर भरोसा किया है और उसी की ओर लौटता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Shoaib ne kaha “bhaiyon, tum khud hi socho ke agar main apne Rubb ki taraf se ek khuli shahadat par tha aur phir usne apne haan se mujhko accha rizq bhi ata kiya (to iske baad main tumhari gumraahiyon aur haraam-khoriyon mein tumhara shareek e haal kaise ho sakta hoon?) Aur main hargiz yeh nahin chahta ke jin baaton se main tumko roakta hoon unka khud irteqab karoon. Main to islaah karna chahta hoon jahan tak bhi mera bas chale aur yeh jo kuch main karna chachta hoon uska saara inhisaar Allah ki taufeeq par hai. Usi par maine bharosa kiya aur har maamle mein usi ki taraf main rujoo karta hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Kaha aey meri qom! Dekho to agar mein apney rab ki taraf say roshan daleel liye huye hon aur uss ney mujhay apney pass say behtareen rozi dey rakhi hai mera yeh irada bilkul nahi kay tumhara khilaf ker kay khud uss cheez ki taraf jhuk jaon jiss say tmhen rok raha hun meri irada to apni taqat bhar islaah kerney ka hi hai. Meri tofiq Allah hi ki madad say hai ussi per mera bharosa hai aur ussi ki taraf mein rujoo kerta hun
Devnagri Urdu (Maududi)शोएब ने कहा "भाइयों, तुम खुद ही सोचो के अगर मैं अपने रब की तरफ से एक खुली शहादत पर था और फिर उसने अपने हां से मुझको अच्छा रिज्क भी आता किया (तो इसके बाद मैं तुम्हारी गुमराहियां और हराम-खोरियों में तुम्हारा शरीक ए हाल कैसे हो सकता है) हूं?) और मैं हरगिज ये नहीं चाहता के जिन बातों से मैं तुमको रोकता हूं उनका खुद इर्तकाब करूं। मैं तो इस्लाह करना चाहता हूं जहां तक ​​भी मेरा बस चले और ये जो कुछ करना चाहता हूं उसका सारा इन्हिसार अल्लाह की तौफीक पर है किया और हर मामले में उसकी तरफ मैं रूजू करता हूं
عَرَبِيوَيا قَومِ لا يَجرِمَنَّكُم شِقاقي أَن يُصيبَكُم مِثلُ ما أَصابَ قَومَ نوحٍ أَو قَومَ هودٍ أَو قَومَ صالِحٍ ۚ وَما قَومُ لوطٍ مِنكُم بِبَعيدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम्हें मेरा विरोध इस बात पर न उभारे कि तुमपर वैसी ही यातना आ पड़े, जो नूह़ की जाति, या हूद की जाति, या सालेह़ की जाति पर आई। और लूत की जाति तुमसे कुछ दूर नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Aur aey biradraan e qaum, mere khilaf tumhari hadd dharmi kahin yeh naubat na pahuncha de ke aakhir e kaar tumpar bhi wahi azaab aa kar rahey jo Nooh ya Hood ya Saleh ki qaum par aaya tha. Aur Lut ki qaum to tumse kuch zyada door bhi nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aey meri qom (kay logo!) kahin aisa na ho kay tum ko meri mukhalifat unn azabon ka mustahiq bana dey jo qom-e-nooh aur qom-e-hood aur qom-e-saleh ko phonchay hain. Aur qom-e-loot to tum say kuch door nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐ बिरादरान ए क़ौम, मेरे खिलाफ़ तुम्हारी हद धर्मी कहीं ये नौबत न पाहुंचा दे के आख़िर ए कर तुमपर भी वही अज़ाब आ कर रहे जो नूह या हुड या सालेह की क़ौम पर आया था. और लुट की क़ौम तो तुमसे कुछ ज़्यादा दूर भी नहीं है
عَرَبِيوَاستَغفِروا رَبَّكُم ثُمَّ توبوا إِلَيهِ ۚ إِنَّ رَبّي رَحيمٌ وَدودٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और अपने पालनहार से क्षमा माँगो, फिर उसी की ओर पलट आओ। निःसंदेह मेरा पालनहार अति दयालु तथा प्रेम करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Dekho! Apne Rubb se maafi maango aur uski taraf palat aao, beshak mera Rubb raheem hai aur apni makhlooq se muhabbat rakhta hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Tum apney rab say istaghfaar kero aur uss ki taraf toba kero yaqeen mano kay mera rab bari meharbani wala aur boht mohabbat kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)देखो! अपने रब से माफ़ी मांगो और उसकी तरफ पलट आओ, बेशक मेरा रुब रहीम है और अपने मख़लूक से मुहब्बत रखता है”
عَرَبِيقالوا يا شُعَيبُ ما نَفقَهُ كَثيرًا مِمّا تَقولُ وَإِنّا لَنَراكَ فينا ضَعيفًا ۖ وَلَولا رَهطُكَ لَرَجَمناكَ ۖ وَما أَنتَ عَلَينا بِعَزيزٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ शुऐब! तुम्हारी बहुत-सी बातें हम नहीं समझते और हम तुम्हें अपने बीच निर्बल देख रहे हैं। और यदि तुम्हारा क़बीला (हमारे धर्म पर) न होता, तो हम तुम्हें पथराव करके मार डालते और तुम हमारी नज़र में प्रतिष्ठित भी नहीं हो।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “aey shoaib, teri bahut si baatein to hamari samajh hi mein nahin aati. Aur hum dekhte hain ke tu hamare darmiyan ek be-zoar aadmi hai. Teri biradari na hoti to hum kabhi ka tujhey sangsaar (stone to death) kar chuke hotey, tera balboota to itna nahin hai ke humpar bhari ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha aey shoaib! Teri aksar baaten to humari samajh mein hi nahi aatin aur hum to tujhay apney andar boht kamzor patay hain agar teray qabeelay ka khayal na hota to hum to tujhay sangsaar ker detay aur hum tujhay koi heysiyat wali hasti nahi gintay
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने जवाब दिया “ऐ शोएब, तेरी बहुत सी बातें तो हमारी समझ ही में नहीं आती. और हम देखते हैं कि तू हमारे दरमियान एक बे-ज़ार आदमी है। तेरी बिरादरी ना होती तो हम कभी का तुझसे संगसार (पत्थर से मौत के घाट उतार देते) कर चुके होते, तेरा बलबूटा तो इतना नहीं है के हमपर भारी हो”
عَرَبِيقالَ يا قَومِ أَرَهطي أَعَزُّ عَلَيكُم مِنَ اللَّهِ وَاتَّخَذتُموهُ وَراءَكُم ظِهرِيًّا ۖ إِنَّ رَبّي بِما تَعمَلونَ مُحيطٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या मेरा क़बीला तुम्हारे निकट अल्लाह से अधिक प्रभावशाली है?! और तुमने उस (अल्लाह) को पीठ पीछे डाल दिया है। निःसंदेह मेरा पालनहार उसे घेरे में लिए हुए है, जो कुछ तुम कर रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Shoaib ne kaha “bhaiyon, kya meri biradri tumpar Allah se zyada bhari hai ke tumne (biradri ka to khauf kiya aur) Allah ko bilkul pas e pusht (behind your back) daal diya? Jaan rakkho ke jo kuch tum kar rahey ho woh Allah ki giraft se bahar nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney jawab diya kay aey meri qom kay logo! Kiya tumharay nazdik meray qabeelay kay log Allah say bhi ziyada zee izzat hain tum ney ussay pas-e-pusht daal diya hai yaqeenan mera rab jo kuch tum ker rahey ho sab ko gheray huye hai
Devnagri Urdu (Maududi)शोएब ने कहा “भाइयों, क्या मेरी बिरादरी तुमपर अल्लाह से ज्यादा भारी है के तुमने (बिरादरी का तो खौफ किया और) अल्लाह को बिल्कुल पास ए पुश्त (तुम्हारे पीछे) वापस) दाल दिया? जान रक्खो के जो कुछ तुम कर रहे हो वो अल्लाह की गिरफ़्तार से बाहर नहीं है
عَرَبِيوَيا قَومِ اعمَلوا عَلىٰ مَكانَتِكُم إِنّي عامِلٌ ۖ سَوفَ تَعلَمونَ مَن يَأتيهِ عَذابٌ يُخزيهِ وَمَن هُوَ كاذِبٌ ۖ وَارتَقِبوا إِنّي مَعَكُم رَقيبٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम अपने तरीक़े पर काम करो, मैं (भी अपने तरीक़े पर) काम कर रहा हूँ। तुम्हें बहुत जल्द पता चल जाएगा कि किसपर अपमानित कर देने वाली यातना आती है और कौन झूठा है? तथा तुम प्रतीक्षा करो, मैं (भी) तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aey meri qaum ke logon, tum apne tareeqe par kaam kiye jao aur main apne tareeqe par karta rahoonga. Jaldi hi tumhein maloom ho jayega ke kis par zillat ka azaab aata hai aur kaun jhoota hai. Tum bhi intezaar karo aur main bhi tumhare saath chasm-bara hoon (I shall also watch with you)”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meri qom kay logo! Abb tum apni jagah amal kiye jao mein bhi amal ker raha hun tumhen un-qarib maloom hojayega kay kiss kay pass woh azab aata hai jo ussay ruswa ker dey aur kaun hai jo jhoota hai. Tum intizar kero mein bhi tumharay sath muntazir hun
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ मेरी क़ौम के लोगों, तुम अपने तरीक़े पर काम किये जाओ और मैं अपनी तारीख़ पर करता रहूँगा। जल्दी ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि किस पर ज़िल्लत का अज़ाब आता है और कौन झूठा है। तुम भी इंतजार करो और मैं भी तुम्हारे साथ चश्मा-बरा हूं (मैं भी तुम्हारे साथ देखूंगा)"
عَرَبِيوَلَمّا جاءَ أَمرُنا نَجَّينا شُعَيبًا وَالَّذينَ آمَنوا مَعَهُ بِرَحمَةٍ مِنّا وَأَخَذَتِ الَّذينَ ظَلَمُوا الصَّيحَةُ فَأَصبَحوا في دِيارِهِم جاثِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब हमारा आदेश आ गया, तो हमने शुऐब को और उसके साथ ईमान लाने वालों को अपनी दया से बचा लिया और अत्याचारियों को भयंकर आवाज़ (चीत्कार) ने पकड़ लिया। फिर वे अपने घरों में औंधे मुँह पड़े रह गए।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar jab hamare faisle ka waqt aa gaya to humne apni rehmat se shoaib aur uske saathi momino ko bacha liya aur jin logon ne zulm kiya tha unko ek sakht dhamake ne aisa pakda ke woh apni bastiyon mein bay-hiss o harkat (lay lifeless) padey ke padey reh gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Jab humara hukum (azab) aa phoncha hum ney shoaib ko aur unn kay sath (tamam) mominon ko apni khas rehmat say nijat bakhshi aur zalimon ko sakht chinghar kay azab ney dhar dabocha jiss say woh apney gharon mein ondhay paray huye hogaye
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार जब हमारे फैसले का वक्त आ गया तो हमने अपनी रहमत से शोएब और उसके साथी मोमिनो को बचा लिया और जिन लोगों ने जुल्म किया था उनको एक मौका धमाके ने ऐसा पकड़ा के वो अपनी बस्तियों में बे-हिस्स ओ हरकत (बेजान पड़ा हुआ) पड़े के पड़े रह गए
عَرَبِيكَأَن لَم يَغنَوا فيها ۗ أَلا بُعدًا لِمَديَنَ كَما بَعِدَت ثَمودُ
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हिन्दी (Al-Omari)जैसै वे वहाँ कभी बसे ही नहीं थे। सुन लो! मदयन वाले भी वैसे ही (अल्लाह की दया से) दूर कर दिए गए, जैसे समूद जाति के लोग दूर कर दिए गए।
Roman Urdu (Maududi)Goya woh kabhi wahan rahey basey hi na thay. Suno! Madiyan waley bhi door phenk diye gaye jis tarah Samood phenke gaye thay
Roman Urdu (Junagarhi)Goya kay woh inn gharon mein kabhi basay hi na thay aagah raho madiyan kay liye bhi waisi hi doori ho jaisi doori samood ko hui
Devnagri Urdu (Maududi)गोया वो कभी वहां रहे बेसी ही ना थाय. सुनो! मदियां वाले भी दूर फेंक दिए गए जिस तरह समूद फेंके गए थे
عَرَبِيوَلَقَد أَرسَلنا موسىٰ بِآياتِنا وَسُلطانٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने मूसा को अपनी निशानियों (चमत्कार) तथा स्पष्ट प्रमाण के साथ भेजा।
Roman Urdu (Maududi)Aur Moosa ko humne apni nishaniyon aur khuli khuli sanad e mamoriyat (clear authority) ke saath Firoun aur uske ayan e sultanat ki taraf bheja
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqeenan hum ney musa ko apni aayaat aur roshan daleelon kay sath bheja tha
Devnagri Urdu (Maududi)और मूसा को हमने अपने निशानियां और खुली खुली सनद ए ममोरियात (स्पष्ट अधिकार) के साथ फिरौन और उसके अयान ए सल्तनत की तरफ भेजा
عَرَبِيإِلىٰ فِرعَونَ وَمَلَئِهِ فَاتَّبَعوا أَمرَ فِرعَونَ ۖ وَما أَمرُ فِرعَونَ بِرَشيدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फ़िरऔन और उसके प्रमुखों की ओर। तो उन्होंने फ़िरऔन के आदेश का पालन किया। जबकि फ़िरऔन का आदेश सटीक नहीं था।
Roman Urdu (Maududi)Magar unhon ne Firoun ke hukum ki pairwi ki halanke Firoun ka hukum raasti (right-direction) par na tha
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon aur uss kay sardaron ki taraf phir bhi unn logon ney firaon kay ehkaam ki pairwi ki aur firaon ka koi hukum durust tha hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उनहों ने फिरौन के हुकुम की जोड़ी की हलनके फिरौन का हुकुम रास्ता (दाहिनी दिशा) पर ना था
عَرَبِييَقدُمُ قَومَهُ يَومَ القِيامَةِ فَأَورَدَهُمُ النّارَ ۖ وَبِئسَ الوِردُ المَورودُ
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हिन्दी (Al-Omari)वह क़ियामत के दिन अपनी जाति के आगे-आगे चलेगा और उनको नरक में उतारेगा और वह क्या ही बुरा उतरने का स्थान है!
Roman Urdu (Maududi)Qayamat ke roz woh apni qaum ke aagey aagey hoga aur apni peshwayi mein unhein dozakh ki taraf le jayega. Kaisi badhtar jaye wurood (wretched destination) hai yeh jis par koi pahunche
Roman Urdu (Junagarhi)Woh to qayamat kay din apni qom ka paish roo ho ker unn sab ko dozakh mein jaa khara keray ga woh boht hi bura ghaat hai jiss per laa kharay kiye jayengay
Devnagri Urdu (Maududi)कयामत के रोज़ वो अपनी क़ौम के आगे आगे होगा और अपनी पेशवाई में उन्हें दोज़ख की तरफ ले जाएगा। कैसी बिगड़ जाए वरूद (मनहूस मंजिल) है ये जिस पर कोई पहुंचे
عَرَبِيوَأُتبِعوا في هٰذِهِ لَعنَةً وَيَومَ القِيامَةِ ۚ بِئسَ الرِّفدُ المَرفودُ
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हिन्दी (Al-Omari)और इस दुनिया में उनके पीछे लानत (धिक्कार) लगा दी गई और क़ियामत के दिन भी। कैसा बुरा पुरस्कार है, जो उन्हें दिया जाएगा!
Roman Urdu (Maududi)Aur un logon par duniya mein bhi laanat padi aur qayamat ke roz bhi padeygi. Kaisa bura sila hai yeh jo kisi ko miley
Roman Urdu (Junagarhi)Unn per to iss duniya mein bhi laanat chipka di gaee aur qayamat kay din bhi bura inam hai jo diya gaya
Devnagri Urdu (Maududi)और उन लोगों पर दुनिया में भी लानत पड़ी और कयामत के रोज़ भी पड़ेंगे। कैसा बुरा सिला है ये जो किसी को मिले
عَرَبِيذٰلِكَ مِن أَنباءِ القُرىٰ نَقُصُّهُ عَلَيكَ ۖ مِنها قائِمٌ وَحَصيدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) ये बस्तियों के समाचार हैं, जिनका वर्णन हम आपके सामने कर रहे हैं। उनमें से कुछ खड़ी हैं और कुछ उजड़ चुकी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh chand bastiyaon ki sarguzisht (account) hai jo hum tumhein suna rahey hain. Inmein se baaz ab bhi khadi hain aur baaz ki fasal kat chuki hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bastiyon ki yeh baaz khabren jinhen hum teray samney biyan farma rahey hain inn mein say baaz to mojood hain aur baaz (ki faslen) kat gaee hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये चांद बस्तियां की सरगुज़िश्त (खाता) है जो हम तुम्हें सुना रहे हैं। इनमें से बाज़ अब भी खड़ी हैं और बाज़ की फ़सल कट चुकी है
عَرَبِيوَما ظَلَمناهُم وَلٰكِن ظَلَموا أَنفُسَهُم ۖ فَما أَغنَت عَنهُم آلِهَتُهُمُ الَّتي يَدعونَ مِن دونِ اللَّهِ مِن شَيءٍ لَمّا جاءَ أَمرُ رَبِّكَ ۖ وَما زادوهُم غَيرَ تَتبيبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उनपर अत्याचार नहीं किया, परंतु उन्होंने स्वयं अपने ऊपर अत्याचार किया। जब आपके पालनहार का आदेश आ गया, तो उनके वे पूज्य, जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पुकारा करते थे, उनके कुछ भी काम न आए और उन्होंने केवल उन्हें हानि ही पहुँचाया।
Roman Urdu (Maududi)Humne unpar zulm nahin kiya, unhon ne aap hi apne upar sitam dhaya. Aur jab Allah ka hukum aa gaya to unke woh mabood jinhein woh Allah ko chodh kar pukara karte thay unke kuch kaam na aa sakey. Aur unhon ne halakat o barbadi ke siwa unhein kuch faiyda na diya
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney unn per koi zulm nahi kiya bulkay khud unhon ney ho apney upper zulm kiya aur unhen unn kay maboodon ney koi faeeda na phonchaya jinhen woh Allah kay siwa pukartay thay jabkay teray perwerdigar ka hukum aa phoncha bulkay aur inn ka nuksan hi unhon ney barha diya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उनपर ज़ुल्म नहीं किया, उन्होन ने आप ही अपने ऊपर सितम ढाया। और जब अल्लाह का हुकुम आ गया तो उनके वो माबूद जिन्हे वो अल्लाह को छोड़ कर पुकारते थे, उनके कुछ काम ना आ सके। और उनको ने हलाकत ओ बरबादी के सिवा उन्हें कुछ फ़ायदा ना दिया
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ أَخذُ رَبِّكَ إِذا أَخَذَ القُرىٰ وَهِيَ ظالِمَةٌ ۚ إِنَّ أَخذَهُ أَليمٌ شَديدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और तेरे पालनहार की पकड़ ऐसी ही होती है, जब वह अत्याचार करने वाली बस्तियों को पकड़ता है। निःसंदेह उसकी पकड़ बहुत दर्दनाक, बहुत कठोर होती है।
Roman Urdu (Maududi)Aur tera Rubb jab kisi zalim basti ko pakadta hai to phir uski pakad aisi hi hua karti hai, fil waqeh uski pakad badi sakht aur dardnaak hoti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Teray perwerdiar ki pakar ka yehi tareeqa hai jabkay woh bastiyon kay rehney walay zalimon ko pakarta hai beshak uss ki pakar dukh denay wali aur nihayat sakht hai
Devnagri Urdu (Maududi)और तेरा रब्ब जब किसी जालिम बस्ती को पकड़ता है तो फिर उसकी पकड़ ऐसी ही हुआ करती है, फिल वक़हे उसकी पकड़ बड़ी सच और दर्दनाक होती है
عَرَبِيإِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً لِمَن خافَ عَذابَ الآخِرَةِ ۚ ذٰلِكَ يَومٌ مَجموعٌ لَهُ النّاسُ وَذٰلِكَ يَومٌ مَشهودٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय ही इसमें उसके लिए एक निशानी है, जो आख़िरत की यातना से डरे। वह ऐसा दिन होगा, जिसके लिए सभी लोग एकत्रित किए जाएँगे तथा उस दिन सभी लोग उपस्थित होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke is mein ek nishani hai har us shaks ke liye jo azaab e aakhirat ka khauf karey. Woh ek din hoga jismein sab log jamaa hongey aur phir jo kuch bhi us roz hoga sab ki aankhon ke saamne hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan iss mein unn logon kay liye nishan-e-ibrat hai jo qayamat kay azab say dartay hain. Woh din jiss mein sab log jama kiye jayen gay aur woh, woh din hai jiss mein sab hazir kiye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के इस में एक निशानी है हर उस शक्स के लिए जो अज़ाब ए आखिरी का खौफ करे। वो एक दिन होगा जिसमें सब लोग जमा होंगे और फिर जो कुछ भी हमें रोज़ होगा सब की आँखों के सामने होगा
عَرَبِيوَما نُؤَخِّرُهُ إِلّا لِأَجَلٍ مَعدودٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और हम उसे केवल एक निर्धारित अवधि के लिए पीछे कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hum uske laney mein kuch bahut zyada takheer nahin kar rahey hain, bas ek gini chuni muddat uske liye muqarrar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Issay hum jo multavi kertay hain woh sird aik muddat moyyen tak hai
Devnagri Urdu (Maududi)हम उसके लेन में कुछ बहुत ज़्यादा तक़रीर नहीं कर रहे हैं, बस एक गिनी चुनी मुद्दत उसके लिए मुकर्रर है
عَرَبِييَومَ يَأتِ لا تَكَلَّمُ نَفسٌ إِلّا بِإِذنِهِ ۚ فَمِنهُم شَقِيٌّ وَسَعيدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन वह आ जाएगा, तो अल्लाह की अनुमति के बिना कोई प्राणी बात नहीं कर सकेगा, फिर उनमें से कुछ अभागे होंगे और कुछ भाग्यशाली होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh aayega to kisi ko baat karne ki majal na hogi, illa yeh ke khuda ki ijazat se kuch arz karey, phir kuch log us roz badbakht hongey aur kuch neik bakht
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din woh aajayegi majal na hogi kay Allah ki ijazat kay baghair koi baat bhi kerley so inn mein koi bad bakht hoga aur koi nek bakht
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो आएगा तो किसी को बात करने का मजा ना होगा, इल्ला ये के खुदा की इज्जत से कुछ अर्ज़ करे, फिर कुछ लोग हमसे रोज़ बदबख्त होंगे और कुछ नई बख्त
عَرَبِيفَأَمَّا الَّذينَ شَقوا فَفِي النّارِ لَهُم فيها زَفيرٌ وَشَهيقٌ
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हिन्दी (Al-Omari)चुनाँचे जो लोग अभागे होंगे, वे नरक में होंगे, उसमें उन्हें चीखना और चिल्लाना होगा।
Roman Urdu (Maududi)Jo bad-bakht hongey woh dozakh mein jayenge (jahan garmi aur pyas ki shiddat se). Woh hanpenge aur phunkare marenge (sigh and groan)
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin jo bad bakht huye woh dozakh mein hongay wahan cheekhen gay chillayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जो बद-बख्त होंगे वो दोज़ख में जाएंगे (जहां गर्मी और प्यास की शिद्दत से)। वो हांपेंगे और फुनकारे मारेंगे (आह और कराह)
عَرَبِيخالِدينَ فيها ما دامَتِ السَّماواتُ وَالأَرضُ إِلّا ما شاءَ رَبُّكَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ فَعّالٌ لِما يُريدُ
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हिन्दी (Al-Omari)वे उसमें हमेशा रहेंगे, जब तक आकाश तथा धरती अवस्थित हैं। परन्तु यह कि आपका पालनहार कुछ और चाहे। निःसंदेह आपका पालनहार जो चाहे, करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur usi halat mein woh hamesha rahenge jab tak ke zameen o aasman qayam hain, illa yeh ke tera Rubb kuch aur chahe. Beshak tera Rubb poora ikhtiyar rakhta hai ke jo chahe karey
Roman Urdu (Junagarhi)Woh wahin hamesha rehney walay hain jab tak aasman-o-zamin bar qarar rahen siwaye uss waqt kay jo tumhara rab chahaye yaqeenan tera rab jo kuch chahaye ker guzarta hai
Devnagri Urdu (Maududi)और उसकी हालत में वो हमेशा रहेंगे जब तक के जमीन ओ आसमान कायम हैं, इल्ला ये के तेरा रब कुछ और चाहे। बेशक तेरा रब पूरा इख्तियार रखता है के जो चाहे करे
عَرَبِي۞ وَأَمَّا الَّذينَ سُعِدوا فَفِي الجَنَّةِ خالِدينَ فيها ما دامَتِ السَّماواتُ وَالأَرضُ إِلّا ما شاءَ رَبُّكَ ۖ عَطاءً غَيرَ مَجذوذٍ
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हिन्दी (Al-Omari)लेकिन जो भाग्यशाली हैं, तो (वे) स्वर्ग में होंगे, वे उसमें सदैव रहेंगे जब तक आकाश तथा धरती विद्यमान् हैं। परन्तु यह कि आपका पालनहार कुछ और चाहे। यह एक अनंत प्रदान है।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jo neik bakht niklenge , to woh jannat mein jayenge aur wahan hamesha rahenge jab tak zameen o aasman qayam hain, illa yeh ke tera Rubb kuch aur chache. Aisi bakshish unko milegi jiska silsila kabhi munqata (khatam) na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin jo nek bakht kiye gaye woh jannat mein hongay jahan hamesha rahen gay jab tak aasman-o-zamin baqi rahey magar jo tera perwerdigar chahaye. Yeh bey inteha bakhsish hai
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जो नइक बख्त निकलेंगे, तो वो जन्नत में जाएंगे और वहां हमेशा रहेंगे जब तक जमीन ओ आसमान कायम है, इल्ला ये के तेरा रुब कुछ और चचे। ऐसी बख्शीश उनको मिलेगी जिसका सिलसिला कभी मुनक्का (खतम) न होगा
عَرَبِيفَلا تَكُ في مِريَةٍ مِمّا يَعبُدُ هٰؤُلاءِ ۚ ما يَعبُدونَ إِلّا كَما يَعبُدُ آباؤُهُم مِن قَبلُ ۚ وَإِنّا لَمُوَفّوهُم نَصيبَهُم غَيرَ مَنقوصٍ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः (ऐ नबी!) आप उसके बारे में किसी संदेह में न रहें, जिसे ये पूजते हैं। ये उसी प्रकार पूजते हैं, जैसे इनसे पहले इनके बाप-दादा पूजते थे। निःसंदेह हम इन्हें इनका हिस्सा बिना किसी कमी के पूरा-पूरा देने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Pas (aey Nabi ), tu un maboodon ki taraf se kisi shakk mein na reh jinki yeh log ibadat kar rahey hain. Yeh to (bas lakeer ke fakeer baney huye) usi tarah pooja paat kiye ja rahey hain jis tarah pehle unke baap dada karte thay. Aur hum inka hissa inhein bharpur denge bagair iske ke is mein kuch kaat kasar ho
Roman Urdu (Junagarhi)Iss liye aap inn cheezon say shak-o-shuba mein na rahen jinhen yeh log pooj rahey hain inn ki pooja to iss tarah hai jiss tarah inn kay baap dadon ki iss say pehlay thi. Hum inn sab ko inn ka poora poora hissa baghair kissi kami kay denay walay hi hain
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ नबी), तू उन माबूदों की तरफ से किसी शक्क में न रह जिनकी ये लोग इबादत कर रहे हैं। ये तो (बस लकीर के फकीर बने हुए) उसकी तरह पूजा पात किये जा रहे हैं जिस तरह पहले उनके बाप दादा करते थे। और हम इनका हिसा इन्हें भरपुर देंगे बिना इसके इस में कुछ कासर हो
عَرَبِيوَلَقَد آتَينا موسَى الكِتابَ فَاختُلِفَ فيهِ ۚ وَلَولا كَلِمَةٌ سَبَقَت مِن رَبِّكَ لَقُضِيَ بَينَهُم ۚ وَإِنَّهُم لَفي شَكٍّ مِنهُ مُريبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने मूसा को पुस्तक (तौरात) प्रदान की। तो उसमें विभेद किया गया। और यदि आपके पालनहार ने पहले से एक बात निश्चित न की होती, तो उनके बीच निर्णय कर दिया गया होता। और निःसंदेह वे उस (क़ुरआन) के बारे में असमंजस में डाल देनेवाले संदेह में पड़े हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hum issey pehle Moosa ko bhi kitaab de chuke hain aur uske barey mein bhi ikhtilaf kiya gaya tha (jis tarah aaj is kitab ke barey mein kiya jaa raha hai jo tumhein di gayi hai). Agar tere Rubb ki taraf se ek baat pehle hi tai na kardi gayi hoti to in ikhtilaf karne walon ke darmiyan kabhi ka faisla chuka diya gaya hota. Yeh waqiya hai ke yeh log iski taraf se shakk aur khaljaan (disquieting doubt) mein padey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney musa (alh-e-salam) ko kitab di. Phir iss mein ikhtilaf kiya gaya agar pehlay hi aap kay rab ki baat sadir na hogaee hoti to yaqeenan inn ka faisla ker diya jata enhen to iss mein sakht shuba hai
Devnagri Urdu (Maududi)हम इसे पहले मूसा को भी किताब दे चुके हैं और उसके बारे में भी इख्तिलाफ किया गया था। अगर तेरे रब की तरफ से एक बात पहले ही ताई न करदी गई होती तो इख्तिलाफ करने वालों के दरमियान में कभी का फैसला चुका दिया जाता। ये वक़िया है के ये लोग इसकी तरफ़ से शक्क और ख़लजान (अशांत करने वाला संदेह) में पड़े हुए हैं
عَرَبِيوَإِنَّ كُلًّا لَمّا لَيُوَفِّيَنَّهُم رَبُّكَ أَعمالَهُم ۚ إِنَّهُ بِما يَعمَلونَ خَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह आपका पालनहार अवश्य प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों का पूरा बदला देगा। निश्चित रूप से वह उनके कर्मों से सूचित है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh bhi waqia hai ke tera Rabb inhein inke aamal ka poora poora badla de kar rahega. Yaqeenan woh inki sab harkaton se bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan inn mein say her aik jab unn kay roo baroo jayega to aap ka rab ussay uss kay aemaal ka poora poora badla dey ga. Be-shak woh jo ker rahey hain unn say woh ba khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये भी वक़िया है के तेरा रब इन्हें इनके अमल का पूरा पूरा बदला दे कर रहेगा। यक़ीनन वो इनकी सब हरकतों से ख़बर है
عَرَبِيفَاستَقِم كَما أُمِرتَ وَمَن تابَ مَعَكَ وَلا تَطغَوا ۚ إِنَّهُ بِما تَعمَلونَ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः (ऐ नबी!) आप सुदृढ़ रहें जैसा आपको आदेश दिया गया है और वे लोग भी जिन्होंने आपके साथ तौबा की। तथा तुम सीमा का उल्लंघन न करो, निःसंदेह वह (अल्लाह) जो कुछ तुम कर रहे हो, उसे ख़ूब देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Pas (aey Muhammad), tum aur tumhare woh saathi jo (kufr o bagawat se iman o itaat ki taraf) palat aaye hain, theek theek raah-e-raast par saabit qadam raho jaisa ke tumhein hukum diya gaya hai. Aur bandagi ki hadd se tajawuz na karo. Jo kuch tum kar rahey ho uspar tumhara Rubb nigaah rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap jamay rahiye jaisa kay aap ko hukum diya gaya hai aur woh log bhi jo aap kay sath toba ker chukay hain khabardaar tum hadd say na barhna Allah tumharay aemaal ka dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ मुहम्मद), तुम और तुम्हारे वो साथी जो (कुफ्र ओ बगावत से ईमान ओ इताअत की तरफ) पलट आए हैं, ठीक ठीक राह-ए-रास्त पर साबित क़दम रहो जैसा के तुम्हें हुकुम दिया गया है। और बंदगी की हद से तजावुज ना करो. जो कुछ तुम कर रहे हो उसपर तुम्हारा रब निगाह रखता है
عَرَبِيوَلا تَركَنوا إِلَى الَّذينَ ظَلَموا فَتَمَسَّكُمُ النّارُ وَما لَكُم مِن دونِ اللَّهِ مِن أَولِياءَ ثُمَّ لا تُنصَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अत्याचारियों की ओर न झुक पड़ो। अन्यथा तुम्हें भी आग पकड़ लेगी और अल्लाह के सिवा तुम्हारा कोई सहायक नहीं होगा (जो तुम्हें बचा सके)। फिर तुम्हारी सहायता नहीं की जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)In zaalimon ki taraf zara na jhukna warna jahannum ki lapeit mein aa jaaoge aur tumhein koi aisa wali o sarparast na milega jo khuda se tumhein bacha sakey aur kahin se tumko madad na pahunchegi
Roman Urdu (Junagarhi)Dekho zalimon ki taraf hergiz na jhukna werna tumhen bhi (dozakh ki) aag lagg jayegi aur Allah kay siwa aur tumhara madadgar na khara ho sakay ga aur na tum madad diye jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)जालिमों की तरफ़ ज़रा ना झुकना वरना जहन्नुम की लपेट में आ जाओगे और तुम्हें कोई ऐसी वाली ओ सरपरस्त ना मिलेगा जो खुदा से तुम बच सके और कहीं से तुमको मदद ना पहनोगे
عَرَبِيوَأَقِمِ الصَّلاةَ طَرَفَيِ النَّهارِ وَزُلَفًا مِنَ اللَّيلِ ۚ إِنَّ الحَسَناتِ يُذهِبنَ السَّيِّئَاتِ ۚ ذٰلِكَ ذِكرىٰ لِلذّاكِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप दिन के दोनों सिरों में और रात के कुछ क्षणों में नमाज़ क़ायम करें। निःसंदेह नेकियाँ बुराइयों को दूर कर देती हैं। यह एक शिक्षा है, शिक्षा ग्रहण करने वालों के लिए।
Roman Urdu (Maududi)Aur dekho, namaz qayam karo din ke dono siron par (two ends of the day) aur kuch raat guzarne par. Dar haqeeqat nekiyan buraiyon ko door kar deti hain, yeh ek yaad dihani hai un logon ke liye jo khuda ko yaad rakhne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Din kay dono siron mein namaz barpa rakh aur raat ki kaee sa’aton mein bhi yaqeenan nekiyan burayion ko door ker deti hain yeh naseehat hai naseehat pakarney walon kay liye
Devnagri Urdu (Maududi)और देखो, नमाज़ क़याम करो दिन के दोनों सिरों पर (दिन के दो छोर) और कुछ रात गुज़रने पर। दर हकीकत नेकियां बुराइयों को दूर कर देती हैं, ये एक याद दिहानी है उन लोगों के लिए जो खुदा को याद रखने वाले हैं
عَرَبِيوَاصبِر فَإِنَّ اللَّهَ لا يُضيعُ أَجرَ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप धैर्य से काम लें, क्योंकि अल्लाह सदाचारियों का प्रतिफल नष्ट नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Aur sabr kar, Allah neki karne walon ka ajar kabhi zaya nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Aap sabar kertay rahiye yaqeenan Allah Taalaa neki kerney walon ka ajar zaya nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)और सब्र कर, अल्लाह नेकी करने वालों का अजर कभी ज़या नहीं करता
عَرَبِيفَلَولا كانَ مِنَ القُرونِ مِن قَبلِكُم أُولو بَقِيَّةٍ يَنهَونَ عَنِ الفَسادِ فِي الأَرضِ إِلّا قَليلًا مِمَّن أَنجَينا مِنهُم ۗ وَاتَّبَعَ الَّذينَ ظَلَموا ما أُترِفوا فيهِ وَكانوا مُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर तुमसे पहले गुज़रे हुए समुदायों में ऐसे बचे खुचे भले-समझदार लोग क्यों न हुए, जो धरती में बिगाड़ से रोकते? सिवाय उन थोड़े-से लोगों के, जिन्हें हमने उनमें से बचा लिया। और अत्याचारी लोग तो उसी सुख-सामग्री के पीछे पड़े रहे, जिसमें वे रखे गए थे और वे तो थे ही अपराधी।
Roman Urdu (Maududi)Phir kyun na un qaumon mein jo tumse pehle guzar chuki hain aise ahle khair maujood rahey jo logon ko zameen mein fasaad barpa karne se rokte? Aisey log nikle bhi to bahut kam jinko humne un qaumon mein se bacha liya, warna zalim log to unhi mazon (ease and comfort) ke peechey padey rahey jinke samaan unhein farawani ke saath diye gaye thay (conferred upon them) aur woh mujreem bankar rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus kiyon na tum say pehlay zamaney kay logon mein say aisay ehal-e-khair log huye jo zamin mein fasad phelaney say roktay siwaye unn chand kay jinhen hum ney unn mein say nijat di thi zalim log to uss cheez kay peechay parr gaye thay jiss mein unhen aasoodgi di gaee thi aur woh gunehgar thay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्यों ना उन क़ौमों में जो तुमसे पहले गुज़र चुकी हैं ऐसे अहले ख़ैर मौज़ूद रहे जो लोगों को ज़मीन में फ़साद बरपा करने से रोकते हैं? ऐसे लोग निकले भी तो बहुत काम जिनको हमने उन क़ौमों में से बचा लिया, वरना जालिम लोग तो उन्ही मौजों (आसानी और आराम) के पीछे पड़े रहे, जिनके समान उन्हें फरवानी के साथ दिए गए थे (उन्हें सम्मानित किया गया) और वो मुजरिम बनकर रहे
عَرَبِيوَما كانَ رَبُّكَ لِيُهلِكَ القُرىٰ بِظُلمٍ وَأَهلُها مُصلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आपका पालनहार ऐसा नहीं है कि वह बस्तियों को अन्यायपूर्वक विनष्ट कर दे, जबकि उनके निवासी सुधार करने वाले हों।
Roman Urdu (Maududi)Tera Rubb aisa nahin hai ke bastiyon ko na-haqq tabah karde halanke unke bashinde islaah karne waley hon
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ka rab aisa nahi kay kissi basti ko zulm say halak ker dey aur wahan kay log neko kaar hon
Devnagri Urdu (Maududi)तेरा रब ऐसा नहीं है के बस्तियों को न-हक़्क़ तबह करदे हालंके उनके बशिंदे इस्लाह करने वाले माननीय
عَرَبِيوَلَو شاءَ رَبُّكَ لَجَعَلَ النّاسَ أُمَّةً واحِدَةً ۖ وَلا يَزالونَ مُختَلِفينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि आपका पालनहार चाहता, तो सब लोगों को एक ही समुदाय बना देता और वे सदैव विभेद करते ही रहेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Beshak tera Rubb agar chahta to tamaam Insaano ko ek giroh bana sakta tha, magar ab to woh mukhtalif tareeqon hi par chalte rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Agar aap ka perwerdigar chahata to sab logon ko aik hi raah per aik giroh ker deta. Woh to barabar ikhtilaf kerney walay hi rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)बेशक तेरा रब अगर चाहता तो तमाम इंसानों को एक गिरह बना सकता था, मगर अब तो वो मुख़्तलिफ़ तरीक़ों ही पर चलते रहेंगे
عَرَبِيإِلّا مَن رَحِمَ رَبُّكَ ۚ وَلِذٰلِكَ خَلَقَهُم ۗ وَتَمَّت كَلِمَةُ رَبِّكَ لَأَملَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنَ الجِنَّةِ وَالنّاسِ أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)सिवाय उसके, जिसपर आपका पालनहार दया करे और इसी के लिए उसने उन्हें पैदा किया। और आपके पालनहार की बात पूरी हो गई कि मैं नरक को सब जिन्नों तथा इनसानों से अवश्य भर दूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur be raah-rawiyon se sirf woh log bachenge jinpar tere Rubb ki rehmat hai. Isi (azadi intekhab o ikhtiyar) ke liye hi to usne unhein paida kiya tha aur tere Rubb ki woh baat puri ho gayi jo usne kahi thi ke main jahannum ko Jinn aur Insaan, sabse bhar doonga
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-juz unn per jin per aap ka rab reham farmaye unhen to issi lie peda kiya hai aur aap kay rab ki yeh baat poori hai kay mein jahannum ko jinno aur insanon sab say pur keroon ga
Devnagri Urdu (Maududi)और रहो राह-रवियों से सिर्फ वो लोग बचेंगे जब तक तेरे रब की रहमत है। इसी (आजादी इंतेखाब ओ इख्तियार) के लिए ही तो उसने उन्हें अदा किया था और तेरे रब की वो बात पूरी हो गई जो उसने कही थी के मैं जहन्नुम को जिन्न और इंसान, सबसे बाहर दूँगा
عَرَبِيوَكُلًّا نَقُصُّ عَلَيكَ مِن أَنباءِ الرُّسُلِ ما نُثَبِّتُ بِهِ فُؤادَكَ ۚ وَجاءَكَ في هٰذِهِ الحَقُّ وَمَوعِظَةٌ وَذِكرىٰ لِلمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हम रसूलों की खबरों में से आपको हर वह खबर सुनाते हैं, जिसके द्वारा हम आपके दिल को सुदृढ़ रखते हैं। और इसमें आपके पास सत्य आ गया है और ईमान वालों के लिए उपदेश और अनुस्मरण भी।
Roman Urdu (Maududi)Aur (Aey Muhammad), yeh paighambaron ke qissey jo hum tumhein sunate hain, woh cheezein hain jinke zariye se hum tumhare dil ko mazboot karte hain. Inke andar tumko haqeeqat ka ilam mila aur iman laney walon ko naseehat aur bedari naseeb hui
Roman Urdu (Junagarhi)Rasoolon kay sab ehwaal hum aap kay samney aap kay dil ki taskeen kay liye biyan farma rahey hain. Aap kay pass iss surat mein bhi haq phonch chuka jo nasihat aur waaz hai mominon kay liye
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ मुहम्मद), ये पैगंबरों के किस्से जो हम तुम्हें सुनाते हैं हैं, वो चीज़े हैं जिनके बारे में हम तुम्हारे दिल को मज़बूत करते हैं। इनके अंदर तुमको हकीकत का इलम मिला और ईमान लाने वालों को हिदायत और बेदारी नसीब हुई
عَرَبِيوَقُل لِلَّذينَ لا يُؤمِنونَ اعمَلوا عَلىٰ مَكانَتِكُم إِنّا عامِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) आप उनसे कह दें, जो ईमान नहीं लाते कि तुम अपने रास्ते पर काम करते रहो। निःसंदेह हम (भी) काम करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jo iman nahin latey, to unse kehdo ke tum apne tareeqe par kaam karte raho aur hum apne tareeqe par kiya jatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Eman na laney walon say keh dijiye kay tum apney tor per amal kiye jao hum bhi amal mein mashghool hain
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जो ईमान नहीं लाते, तो उनसे कहदो के तुम अपने तारीख पर काम करते रहो और हम अपने तारीख पर किया करते हैं
عَرَبِيوَانتَظِروا إِنّا مُنتَظِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम प्रतीक्षा करो, निःसंदेह हम भी प्रतीक्षा करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Anjaam e kaar ka tum bhi intezaar karo aur hum bhi muntazir(waiting) hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum bhi intizar kero aur hum bhi muntazir hain
Devnagri Urdu (Maududi)अंजाम ए कर का तुम भी इंतज़ार करो और हम भी मुंतज़िर (इंतज़ार) कर रहे हैं
عَرَبِيوَلِلَّهِ غَيبُ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَإِلَيهِ يُرجَعُ الأَمرُ كُلُّهُ فَاعبُدهُ وَتَوَكَّل عَلَيهِ ۚ وَما رَبُّكَ بِغافِلٍ عَمّا تَعمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही के पास आकाशों तथा धरती की छिपी हुई चीज़ों का ज्ञान है और सभी मामले उसी की ओर लौटाए जाते हैं। अतः आप उसी की इबादत (उपासना) करें और उसी पर भरोसा करें। और आपका पालनहार उससे अनभिज्ञ नहीं है, जो तुम कर रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Aasmaano aur zameen mein jo kuch chupa hua hai sab Allah ke qabze qudrat mein hai. Aur sara maamla usi ki taraf rujoo kiya jata hai. Pas (aey Nabi) tu uski bandagi kar aur usi par bharosa rakh. Jo kuch tumlog kar rahey ho tera Rubb ussey bekhabar nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Zaminon aur aasmanon ka ilm-e-ghaib Allah Taalaa hi ko hai tamam moamlaat ka rujoo bhi ussi ki janib hai pus tujhay ussi ki ibadat kerni chahaiye aur ussi per bharosa rakhan chahaiye aur tum jo kuch kertay ho uss say Allah Taalaa bey khabar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)आसमान और ज़मीन में जो कुछ छुपा हुआ है सब अल्लाह के क़ब्ज़े कुदरत में है। और सारा मामला उसी की तरफ रूजू किया जाता है। पास (ऐ नबी) तू उसकी बंदगी कर और उसी पर भरोसा रख। जो कुछ तुमलोग कर रहे हो तेरा रब उसे बेख़बर नहीं है
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Surah 11: Hud (Hud)

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Surah 11: Hud (Hud)

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Surah 11: Hud (Hud)

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Surah 11: Hud (Hud)

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Surah 11: Hud (Hud)

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Surah 12: Yusuf (Joseph)

Meccan🕐 Revelation #53📜 111 Verses🕮 Juz 1–13
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Surah 12: Yusuf (Joseph)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالر ۚ تِلكَ آياتُ الكِتابِ المُبينِ
हिन्दी (Al-Omari)अलिफ़, लाम, रा। ये स्पष्ट किताब की आयतें हैं।
Roman Urdu (Maududi)Alif, Laam, Raa .. Yeh us kitab ki aayat hain jo apna muddua (its object) saaf saaf bayan karti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Alif-laam-raa yeh roshan kitab ki aayaten hain
Devnagri Urdu (Maududi)अलिफ़, लाम, रा.. ये उस किताब की आयत है जो अपना मुद्दुआ (इसकी वस्तु) साफ़ साफ़ बयान करती है
عَرَبِيإِنّا أَنزَلناهُ قُرآنًا عَرَبِيًّا لَعَلَّكُم تَعقِلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने इस क़ुरआन को अरबी में उतारा है, ताकि तुम समझो।
Roman Urdu (Maududi)Humne isey nazil kiya hai Quran bana kar arabi zubaan mein taa-ke tum (ehle arab) isko acchi tarah samajh sako
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney iss quran ko arabi nazil farmaya hai kay tum samajh sako
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इसे नाज़िल किया है कुरान बना कर अरबी ज़ुबान मैं ता-के तुम (एहले अरब) इसको अच्छी तरह समझ सको
عَرَبِينَحنُ نَقُصُّ عَلَيكَ أَحسَنَ القَصَصِ بِما أَوحَينا إِلَيكَ هٰذَا القُرآنَ وَإِن كُنتَ مِن قَبلِهِ لَمِنَ الغافِلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) हम आपकी ओर इस क़ुरआन की वह़्य करके, आपके सामने एक बहुत अच्छा क़िस्सा बयान कर रहे हैं। निश्चय ही आप इससे पूर्व अनजानों में से थे।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), hum is Quran ko tumhari taraf wahee karke behtareen pairaye mein waqiyaat aur haqaiq tumse bayaan karte hain, warna issey pehle to (in cheezon se) tum bilkul hi be-khabar thay
Roman Urdu (Junagarhi)Hum aap kay samney behtareen biyan paish kertay hain iss waja say kay hum ney aap ki janib yeh quran wahee kay zariye nazil kiya hai aur yaqeenan aap iss say pehlay bey khabron mein say thay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), हम कुरान को तुम्हारी तरफ वही करके बेहतरीन जोड़ी में वाकियात और हक़ीक़त तुमसे बयां करते हैं, वरना इसे पहले तो (चीजों से) तुम बिल्कुल ही बे-खबर थे
عَرَبِيإِذ قالَ يوسُفُ لِأَبيهِ يا أَبَتِ إِنّي رَأَيتُ أَحَدَ عَشَرَ كَوكَبًا وَالشَّمسَ وَالقَمَرَ رَأَيتُهُم لي ساجِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब यूसुफ़ ने अपने पिता से कहा : ऐ मेरे पिता! मैंने सपना देखा है कि ग्यारह सितारे, सूर्य तथा चाँद मुझे सजदा कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh us waqt ka zikr hai jab Yusuf ne apne baap se kaha “abbajaan , maine khwab dekha hai ke gyarah(eleven) sitarey hain aur Suraj aur Chand hain aur woh mujhey sajda kar rahey hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab kay yousuf ney apney baap say ziker kiya kay abba jaan mein ney giyara sitaron ko aur sooraj chand ko dekha kay woh sab mujhay sajda ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये उस वक्त का जिक्र है जब यूसुफ ने अपने बाप से कहा "अब्बाजान, मैंने ख्वाब देखा है के ग्यारह (ग्यारह) सितारे हैं और सूरज और चाँद हैं और वो मुझे सजदा कर रहे हैं"
عَرَبِيقالَ يا بُنَيَّ لا تَقصُص رُؤياكَ عَلىٰ إِخوَتِكَ فَيَكيدوا لَكَ كَيدًا ۖ إِنَّ الشَّيطانَ لِلإِنسانِ عَدُوٌّ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरे बेटे! अपना स्वप्न अपने भाइयों को न बताना, अन्यथा वे तेरे विरुद्ध कोई चाल चलेंगे। निःसंदेह शैतान इनसान का खुला दुश्मन है।
Roman Urdu (Maududi)Jawab mein uke baap ne kaha, “beta, apna yeh khwab apne bhaiyon ko na sunana warna woh tere darpe azar ho jayenge(plot any evil scheme against you), haqeeqat yeh hai ke shaytan aadmi ka khula dushman hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqoob (alh-e-salam) ney kaha piyaray bachay! Apney iss khuwab ka ziker apney bhaiyon say na kerna. Aisa na ho kay woh teray sath koi fareb kaari keren shetan to insan ka khula dushman hai
Devnagri Urdu (Maududi)जवाब में उके बाप ने कहा, "बेटा, अपना ये ख्वाब अपने भाइयों को ना सुनाना वरना वो तेरे डरपे आजर हो जायेंगे(किसी भी बुराई की साजिश रचेंगे) के विरुद्ध योजना आप), हकीकत ये है के शैतान आदमी का खुला दुश्मन है
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ يَجتَبيكَ رَبُّكَ وَيُعَلِّمُكَ مِن تَأويلِ الأَحاديثِ وَيُتِمُّ نِعمَتَهُ عَلَيكَ وَعَلىٰ آلِ يَعقوبَ كَما أَتَمَّها عَلىٰ أَبَوَيكَ مِن قَبلُ إِبراهيمَ وَإِسحاقَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ عَليمٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और ऐसे ही तेरा पालनहार तुझे चुन लेगा तथा तुझे बातों (सपनों) का अर्थ सिखाएगा और तुझपर और याक़ूब के घराने पर अपना अनुग्रह पूरा करेगा, जिस तरह उसने इससे पहले उसे तेरे बाप-दादा इबराहीम और इसह़ाक़ पर पूरा किया था। निःसंदेह तेरा पालनहार सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur aisa hi hoga (jaisa tu nay khwab mein dekha hai ke) tera Rubb tujhey (apne kaam ke liye) muntakhab(choose) karega aur tumhey baaton ki teh tak pahunchna sikhayega aur tere upar aur aale Yaqub par apni niyamat usi tarah poori karega jis tarah issey pehle woh tere buzurgon , Ibrahim aur Ishaq par kar chuka hai, yaqeenan tera Rubb aleem (All-Knowing)-o-hakeem hai (All-Wise)”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur issi tarah tujhay tera perwerdigar bargazeedah keray ga aur tujhay moamla fehmi (ya khuwabon ki tabeer) bhi sikhaye ga aur apni nemat tujhay bharpoor ata farmaye ga aur yaqoob kay ghar walon ko bhi jaisay kay uss ney iss say pehlay teray dada aur per-dada yani ibrahim-o-ishaq ko bhi bhar poor apni nemat di yaqeenan tera rab boht baray ilm wala aur zabardast hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐसा ही होगा (जैसा तू ने ख्वाब में देखा है के) तेरा रब तुझ (अपने काम के लिए) मुंतखब (चुनें) करेगा और तुम्हें बातों की तह तक पहचानना सिखाएगा और तेरे ऊपर और आले याक़ूब पर अपनी नियामत उसी तरह पूरी करेगी जिस तरह इस तरह पहले वो तेरे बुज़ुर्गों, इब्राहीम और इस्हाक़ पर कर चुका है, यकीनन तेरा रब आलिम (सर्व-ज्ञानी)-ओ-हकीम है (सर्व-ज्ञानी)"
عَرَبِي۞ لَقَد كانَ في يوسُفَ وَإِخوَتِهِ آياتٌ لِلسّائِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वास्तव में, यूसुफ़ और उसके भाइयों (की कहानी) में पूछने वालों के लिए कई निशानियाँ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke Yusuf aur uske bhaiyon ke qissey mein in poochne walon ke liye badi nishaniyan hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan yousuf aur uss kay bhaiyon mein daryaft kerney walon kay liye (bari) nishaniyan hai
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के यूसुफ और उसके भाइयों के क़िस्से में पूछने वालों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं
عَرَبِيإِذ قالوا لَيوسُفُ وَأَخوهُ أَحَبُّ إِلىٰ أَبينا مِنّا وَنَحنُ عُصبَةٌ إِنَّ أَبانا لَفي ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जब उन (भाइयों) ने कहा : यूसुफ़ और उसका भाई हमारे पिता को, हमसे अधिक प्रिय हैं। जबकि हम एक गिरोह हैं। वास्तव में, हमारे पिता खुली गुमराही में हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh qissa yun shuru hota hai ke uske bhaiyon ne aapas mein kaha “yeh Yusuf aur iska bhai, dono hamare walid(baap) ko hum sab se zyada mehboob hai halanke hum ek pura jattha (band) hain. Sacchi baat yeh hai ke hamare abbajaan bilkul hi behak gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay unhon ney kaha kay yousuf aur uss ka bhai ba-nisbat humaray baap ko boht ziyada piyaray hain halankay hum (taqatwar) jamat hain koi shak nahi kay humaray abba sareeh ghalati mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये क़िस्सा यूं शुरू होता है के उसके भाइयों ने आपस में कहा “ये यूसुफ़ और इसका भाई, दोनों हमारे वालिद (बाप) को हम सब से ज़्यादा मेहबूब हैं हलांके हम एक पूरा जत्था (बैंड) हैं। सच्ची बात ये है के हमारे अब्बाजान बिलकुल ही बहक गए हैं
عَرَبِياقتُلوا يوسُفَ أَوِ اطرَحوهُ أَرضًا يَخلُ لَكُم وَجهُ أَبيكُم وَتَكونوا مِن بَعدِهِ قَومًا صالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यूसुफ़ को मार डालो या उसे किसी धरती में फेंक आओ। ताकि तुम्हारे पिता का ध्यान केवल तुम्हारी तरफ हो जाए और इसके बाद तुम नेक बन जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Chalo Yusuf ko qatal kardo ya usey kahin phenk do taa-ke tumhare walid ki tawajju (attention) sirf tumhari hi taraf ho jaye. Yeh kaam kar lene ke baad phir neik ban rehna”
Roman Urdu (Junagarhi)Yousuf ko to maar hi dalo yaa ussay kissi (na maloom) jagah phenk do kay tumharay walid ka rukh sirf tumhari taraf hi hojaye. Iss kay baad tum nek ho jana
Devnagri Urdu (Maududi)चलो यूसुफ को क़त्ल करदो या उसे कहीं फेंक दो ता-के तुम्हारे वालिद की तवज्जु (ध्यान दें) सिर्फ तुम्हारी तरफ हो जाए ये काम कर लेने के बाद फिर से तैयार रहना”
عَرَبِيقالَ قائِلٌ مِنهُم لا تَقتُلوا يوسُفَ وَأَلقوهُ في غَيابَتِ الجُبِّ يَلتَقِطهُ بَعضُ السَّيّارَةِ إِن كُنتُم فاعِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनमें से एक कहने वाले ने कहा : यूसुफ़ का वध न करो। उसे किसी गहरे कुएँ के अंदर डाल दो। उसे कोई कारवाँ निकाल ले जाएगा, यदि कुछ करने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Ispar un mein se ek bola “Yusuf ko qatal na karo, agar kuch karna hi hai to usey kisi andhey kuwein (well) mein daal do. Koi aata jata kafila (caravan) usey nikal le jayega”
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein say aik ney kaha yousuf ko qatal to na kero bulkay ussay kissi andhay koowen (ki teh) mein daal aao kay ussay koi (aata jata) qafila utha ley jaye agar tumhen kerne hi hai to yun kero
Devnagri Urdu (Maududi)इसपर उन में से एक बोला "यूसुफ को कत्ल न करो, अगर कुछ करना ही है तो उसे किसी अंधे कुवें (अच्छी तरह से) में डाल दो। कोई आता जाता काफिला (कारवां) उसे निकल ले जाएगा"
عَرَبِيقالوا يا أَبانا ما لَكَ لا تَأمَنّا عَلىٰ يوسُفَ وَإِنّا لَهُ لَناصِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ हमारे पिता! क्या बात है कि यूसुफ़ के विषय में आप हमपर विश्वास नहीं करते? जबकि हम लोग उसका भला चाहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Is qarardaad par unhon ne jaa kar apne baap se kaha, “abbajaan, kya baat hai ke aap Yusuf ke maamle mein humpar bharosa nahin karte halanke hum uske sacchey khair-khwa (well wishers)hain
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha abba! Aakhir aap yousuf (alh-e-salam) kay baray mein hum per aitbaar kiyon nahi kertay hum to iss kay khair khua hain
Devnagri Urdu (Maududi)इस कराराद पर उन्होन ने जा कर अपने बाप से कहा, “अब्बाजान, क्या बात है कि आप यूसुफ के मामले में हमपर भरोसा नहीं करते हलंके हम उसके सच्चे खैर-ख्वा (शुभचिंतक) हैं
عَرَبِيأَرسِلهُ مَعَنا غَدًا يَرتَع وَيَلعَب وَإِنّا لَهُ لَحافِظونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसे कल हमारे साथ भेज दें, वह खाए-पिए और खेले-कूदे, और निःसंदेह हम उसकी रक्षा करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kal usey hamare saath bhej dijiye, kuch char-chug (freely eat) lega aur khel-kood se bhi dil behlayega, hum uski hifazat ko maujood hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Kal aap zaroor issay humaray sath bhej dijiye kay khoob khaye piye aur khelay iss ki hifazat kay hum zimmay daar hain
Devnagri Urdu (Maududi)कल उसे हमारे साथ भेज दीजिए, कुछ चार-चुग (स्वतंत्र रूप से खाओ) लेगा और खेल-कूद से भी दिल बहलाएगा, हम उसकी हिफाज़त को मौजूद हैं"
عَرَبِيقالَ إِنّي لَيَحزُنُني أَن تَذهَبوا بِهِ وَأَخافُ أَن يَأكُلَهُ الذِّئبُ وَأَنتُم عَنهُ غافِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उस (याक़ूब) ने कहा : यह मेरे लिए दुःख की बात है कि तुम उसे ले जाओ, तथा मैं इस बात से (भी) डरता हूँ कि उसे भेड़िया खा जाए और तुम उसका ध्यान न रख सको।
Roman Urdu (Maududi)Baap ne kaha “tumhara isey le jana mujhey shaaq guzarta hai(troubles me) aur mujhko andesha hai ke kahin isey bhediya (wolf) na phaad khaye jabke tum issey gaafil ho”
Roman Urdu (Junagarhi)(yaqoob alh-e-salam ney) kay issay tumhara ley jana mujhay to sakht sadma dey ga aur mujhay yeh bhi khutka laga rahey ga kay tumhari ghaflat mein issay bheyriya kha jaye
Devnagri Urdu (Maududi)बाप ने कहा "तुम्हारा इसे ले जाना मुझे शक गुजारता है (मुझे परेशान करता है) और मुझको अंदेशा है के कहीं इसे भेड़िया (भेड़िया) ना फाड़ खाए जबके तुम इसे गाफिल हो"
عَرَبِيقالوا لَئِن أَكَلَهُ الذِّئبُ وَنَحنُ عُصبَةٌ إِنّا إِذًا لَخاسِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : यदि उसे भेड़िया खा गया, जबकि हम एक गिरोह हैं, तो वास्तव में, हम बड़े घाटे वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya, “agar hamare hotey isey bhediye (wolf) ne kha liya, jabke hum ek jattha (band) hain, tab to hum badey hi nikamme hongey”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney jawab diya kay hum jaisi (zor aawar) jamat ki mojoodgi mein bhi agar issay bheyriya kha jaye to hum bilkul nikammay hi huye
Devnagri Urdu (Maududi)उनको ने जवाब दिया, "अगर हमारे होते इसे भेदिये" (भेड़िया) ने खा लिया, जबके हम एक जत्था (बैंड) हैं, तब तो हम बदे ही निकम्मे होंगे''
عَرَبِيفَلَمّا ذَهَبوا بِهِ وَأَجمَعوا أَن يَجعَلوهُ في غَيابَتِ الجُبِّ ۚ وَأَوحَينا إِلَيهِ لَتُنَبِّئَنَّهُم بِأَمرِهِم هٰذا وَهُم لا يَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वे उसे ले गए और निश्चय कर लिया कि उसे गहरे कुएँ के अंदर डाल देंगे और हमने उस (यूसुफ़) की ओर वह़्य कर दी कि तुम अवश्य इन्हें इनके इस कर्म के बारे में बताओगे और वे कुछ जानते न होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Is tarah israr karke jab woh usey le gaye aur unhon ne tai kar liya ke usey ek andhey kuwein (well) mein chodh dein, to humne Yusuf ko wahee(revelation) ki ke “ek waqt aayega jab tu in logon ko inki yeh harakat jatayega , yeh apne fail ke nataij se be khabar hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab issay ley chalay aur sab ney mill ker thaan liya kay issay ghair abad gehray koowen ki teh mein phenk den hum ney yousuf (alh-e-salam) ki taraf wahee ki kay yaqeenan (waqt aaraha hai kay) tu enhen iss majray ki khabar iss haal mein dey ga kay woh jantay hi na hon
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह इसरार करके जब वो उसे ले गए और उनहों ने ताई कर लिया के उसे एक अंधे कुवें (खैर) में छोड़ दें, तो हमने यूसुफ को वही (खुलासा) की ''एक'' वक्त आएगा जब तू इन लोगों को इनकी ये हरकत बताएगा, ये अपने फेल के नटाईज से बे खबर हैं”
عَرَبِيوَجاءوا أَباهُم عِشاءً يَبكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे इशा के वक़्त रोते हुए अपने पिता के पास आए।
Roman Urdu (Maududi)Shaam ko woh rotey peeth-te (wailing) apne baap ke paas aaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur isha kay waqt (woh sab) apney baap kay pass rotay huye phonchay
Devnagri Urdu (Maududi)शाम को वो रोते पीठ-ते (विलाप करते हुए) अपने बाप के पास आए
عَرَبِيقالوا يا أَبانا إِنّا ذَهَبنا نَستَبِقُ وَتَرَكنا يوسُفَ عِندَ مَتاعِنا فَأَكَلَهُ الذِّئبُ ۖ وَما أَنتَ بِمُؤمِنٍ لَنا وَلَو كُنّا صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ हमारे पिता! हम आपस में दौड़ का मुक़ाबला करने लगे और यूसुफ़ को अपने सामान के पास छोड़ दिया। इतने में उसे भेड़िया खा गया। और आप तो हमारा विश्वास करने वाले नहीं हैं, यद्यपि हम सच ही क्यों न बोल रहे हों।
Roman Urdu (Maududi)Aur kaha “abbajaan, hum daud (running) ka muqabla karne mein lag gaye thay aur Yusuf ko humne apne samaan ke paas chodh diya tha ke itne mein bhediya (wolf) aakar usey kha gaya. Aap hamari baat ka yaqeen na karenge chahe hum sacchey hi hon”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kehney lagay kay abba jaan hum to aapas mein dor mein lagg gaye aur yousuf (alh-e-salam) ko hum ney asbaab kay pass chora pus ussay bheyriya kha gaya aap to humari baat nahi manen gay go hum bilkul sachay hi hon
Devnagri Urdu (Maududi)और कहा "अब्बाजान, हम दौड़ने का मुकाबला करने में लग गए थे और यूसुफ को हमने अपने सामान के पास छोड़ दिया था कि इतने में भेड़िया (भेड़िया) आकर उसे खा गया। आप हमारी बात का यकीन ना करेंगे चाहे हम सच्चे ही हों"
عَرَبِيوَجاءوا عَلىٰ قَميصِهِ بِدَمٍ كَذِبٍ ۚ قالَ بَل سَوَّلَت لَكُم أَنفُسُكُم أَمرًا ۖ فَصَبرٌ جَميلٌ ۖ وَاللَّهُ المُستَعانُ عَلىٰ ما تَصِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे उस (यूसुफ़) के कुर्ते पर झूठा रक्त लगाकर लाए। उस (याक़ूब) ने कहा : बल्कि तुम्हारे मन ने तुम्हारे लिए एक चीज़ को सुंदर बना दिया है! सो अब (मेरा काम) बेहतर सब्र करना है और जो बात तुम बना रहे हो, उसपर अल्लाह ही सहायक है।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh Yusuf ke kamees (shirt) par jhoot moot ka khoon laga kar lay aaye thay. Yeh sunkar unke baap ne kaha “balke tumhare nafs ne tumhare liye ek baday kaam ko aasaan bana diya. Accha sabr karunga aur bakhubi karunga. Jo baat tum bana rahey ho uspar Allah hi se madad maangi jaa sakti hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yousuf kay kurtay ko jhoot moot kay khoon say khoon aalood bhi ker laye thay baap ney kaha yun nahi bulkay tum ney apney dil hi say aik baat bana li hai. Pus sabar hi behtar hai aur tumahri banaee hui baaton per Allah hi say madad ki talab hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वो यूसुफ के कमीज (शर्ट) पर झूठ मूठ का खून लगा कर आये थे। ये सुनकर उनके बाप ने कहा, "बल्के तुम्हारे नफ्स ने तुम्हारे लिए एक बड़ा काम को आसान बना दिया। अच्छा सब्र करूंगा और खूबी करूंगा। जो बात तुम बना रहे हो उसपर अल्लाह ही से मदद मांगी जा सकती है।"
عَرَبِيوَجاءَت سَيّارَةٌ فَأَرسَلوا وارِدَهُم فَأَدلىٰ دَلوَهُ ۖ قالَ يا بُشرىٰ هٰذا غُلامٌ ۚ وَأَسَرّوهُ بِضاعَةً ۚ وَاللَّهُ عَليمٌ بِما يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और एक क़ाफ़िला आया। उसने अपने पानी भरने वाले को भेजा, उसने अपना डोल डाला, तो पुकार उठा : अरे, कितनी खुशी की बात है! यह तो एक बालक है। और उन्होंने उसे व्यापार का माल समझकर छिपा लिया और वे जो कुछ कर रहे थे अल्लाह उसे ख़ूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Udhar ek kafila aaya aur usne apne saqqe (water carrier) ko pani laney ke liye bheja. Saqqe(water carrier) ne jo kuwein mein dol (bucket) dala to (Yusuf ko dekh kar) pukar uttha “mubarak ho! yahan to ek ladka hai”. Un logon ne usko maal e tijarat samajh kar chupa liya, halanke jo kuch woh kar rahey thay khuda ussey bakhabar tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aik qafila aaya aur unhon ney apney pani laney walay ko bheja uss ney apna dol latkaya kehney laga waah waah khushi ki baat hai yeh to aik larka hai unhon ney issay maal-e-tijarat qarar dey ker chupa diya aur Allah Taalaa iss say ba khabar tha jo woh ker rahey thay
Devnagri Urdu (Maududi)उधर एक काफिला आया और उसने अपने पानी लाने के लिए भेजा। सक़्के (जल वाहक) ने जो कुवें में डोल (बाल्टी) डाला तो (यूसुफ को देख कर) पुकार उठा "मुबारक हो! यहाँ तो एक लड़का है"। उन लोगों ने उसको माल ए तिजारत समझ कर छुपा लिया, हालंके जो कुछ वो कर रहे थे खुदा उसे बाख़बर था
عَرَبِيوَشَرَوهُ بِثَمَنٍ بَخسٍ دَراهِمَ مَعدودَةٍ وَكانوا فيهِ مِنَ الزّاهِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने उसे थोड़े से मूल्य; गिनती के कुछ दिरहमों में बेच दिया और वे उसके बारे में कुछ अधिक की इच्छा नहीं रखते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar unhon ne usko thodi si keemat par chandh dirhamo ke evaz bech daala aur woh uski keemat ke maamle mein kuch zyada ke ummedwaar na thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unhon ney issay boht hi halki qeemat per ginti kay chand dirhamon per hi baich dala woh to yousuf kay baray mein boht hi bey raghbat thay
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार उन्होन ने उसको थोड़ी सी कीमत पर चंद दिरहमो के बदले बेच डाला और वो उसकी कीमत के मामले में कुछ ज्यादा के उम्मेदवार ना थाय
عَرَبِيوَقالَ الَّذِي اشتَراهُ مِن مِصرَ لِامرَأَتِهِ أَكرِمي مَثواهُ عَسىٰ أَن يَنفَعَنا أَو نَتَّخِذَهُ وَلَدًا ۚ وَكَذٰلِكَ مَكَّنّا لِيوسُفَ فِي الأَرضِ وَلِنُعَلِّمَهُ مِن تَأويلِ الأَحاديثِ ۚ وَاللَّهُ غالِبٌ عَلىٰ أَمرِهِ وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और मिस्र के जिस व्यक्ति ने उसे खरीदा था, उसने अपनी पत्नी से कहा : इसे आदर-मान से रखो। संभव है यह हमें लाभ पहुँचाए, अथवा हम इसे अपना पुत्र बना लें। इस प्रकार उस भूभाग में हमने यूसुफ़ के लिए क़दम जमाने की राह निकाली और ताकि उसे बातों (सपनों) का अर्थ सिखाएँ। और अल्लाह अपना आदेश पूरा करके रहता है। परन्तु अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Misr (Egypt) ke jis shaks ne usey khareeda usne apni biwi se kaha, “isko acchi tarah rakhna, baeed nahin ke yeh hamare liye mufeed(useful) sabit ho ya hum isey beta bana lein”.Is tarah humne Yusuf ke liye us sar-zameen mein qadam jamane ki surat nikali aur usey maamla fahmi ki taleem dene ka intezam kiya. Allah apna kaam karke rehta hai, magar aksar log jantey nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Misir walon mein say jiss ney ussay khareeda tha uss ney apni biwi say kaha issay boht izzat-o-ehtram kay sath rakho boht mumkin hai kay yeh humen faeeda phonchaye ya issay hum apna beta hi bana len yun to hum ney misir ki sir zamin yousuf ka qadam jama diya kay hum ussay khuwab ki tabeer ka kuch ilm sikha den. Allah apney iraday per ghalib hai lekin aksar log bey ilm hotay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मिसर (मिस्र) के जिस शक्स ने उसे खरीदा उसने अपनी बीवी से कहा, "इसको अच्छी तरह रखना, बाद नहीं के ये हमारे लिए मुफीद (उपयोगी) साबित हो या हम इसे बेटा बना लें"।इस तरह हमने यूसुफ के लिए हमें सर-जमीन में क़दम जमाने की सूरत निकली और उसे मामला फहमी की तालीम देने का इंतेज़ाम किया। अल्लाह अपना काम करके रहता है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं
عَرَبِيوَلَمّا بَلَغَ أَشُدَّهُ آتَيناهُ حُكمًا وَعِلمًا ۚ وَكَذٰلِكَ نَجزِي المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब वह अपनी जवानी को पहुँचा और मज़बूत व तवाना हो गया, तो हमने उसे प्रबोध तथा ज्ञान प्रदान किया और इसी प्रकार हम सदाचारियों को बदला देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab woh apni poori jawani ko pahuncha to humne usey quwwat e faisla aur ilam ata kiya, is tarah hum neik logon ko jaza dete hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab (yousuf) pukhtagi ki umar ko phonch gaye hum ney ussay qooat-e-faisla aur ilm diya hum neko karon ko issi tarah badla detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जब वह अपनी पूरी जवानी को पाहुंचा तो हमने उसे कुव्वत ए फैसला और इलम अता किया, इस तरह हम दूसरे लोगों को जजा देते हैं
عَرَبِيوَراوَدَتهُ الَّتي هُوَ في بَيتِها عَن نَفسِهِ وَغَلَّقَتِ الأَبوابَ وَقالَت هَيتَ لَكَ ۚ قالَ مَعاذَ اللَّهِ ۖ إِنَّهُ رَبّي أَحسَنَ مَثوايَ ۖ إِنَّهُ لا يُفلِحُ الظّالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उस स्त्री ने उसके मन को रिझाया, जिसके घर में वह था। और द्वार बंद कर लिए और बोली : आ जाओ। उसने कहा : अल्लाह की पनाह! वह मेरा मालिक है। उसने मेरे निवास को अच्छा बनाया। वास्तव में, ज़ालिम लोग सफल नहीं होते।
Roman Urdu (Maududi)Jis aurat ke ghar mein woh tha woh uspar dorey dalne lagi (began to tempt him) aur ek roz darwaze bandh karke boli “aaja”. Yusuf ne kaha, “khuda ki panaah, mere Rubb ne to mujhey acchi manzilat bakshi (aur main yeh kaam karoon?) Aisey zalim kabhi falaah nahin paya karte”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss aurat ney jiss kay ghar mein yousuf thay yousuf ko behlana phuslana shuroo kiya kay woh apney nafs ki nigrani chor dey aur darwazay band ker kay kehney lagi lo aajao. Yousuf ney kaha Allah ki panah! Woh mera rab hai mujhay uss ney boht achi tarah rakha hai. Bey insafi kerney walon ka bhala nahi hota
Devnagri Urdu (Maududi)जिस औरत के घर में वह था वो उसपर डोरे डालने लगी (उसे ललचाना शुरू कर दिया) और एक रोज़ दरवाज़े बंद करके बोली “आजा”। यूसुफ ने कहा, "खुदा की पनाह, मेरे रब ने तो मुझे अच्छी मंजिल बख्शी (और मैं ये काम करूं?) ऐसे जालिम कभी फलाह नहीं पाया करते"
عَرَبِيوَلَقَد هَمَّت بِهِ ۖ وَهَمَّ بِها لَولا أَن رَأىٰ بُرهانَ رَبِّهِ ۚ كَذٰلِكَ لِنَصرِفَ عَنهُ السّوءَ وَالفَحشاءَ ۚ إِنَّهُ مِن عِبادِنَا المُخلَصينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय ही वह स्त्री उसकी इच्छा कर चुकी थी। और वह (यूसुफ़) भी उसकी इच्छा कर लेता, यदि अपने पालनहार का प्रमाण न देख लेता। हमने ऐसा इसलिए किया ताकि बुराई एवं अश्लीलता को उससे दूर रखें। वास्तव में, वह हमारे चुने हुए बंदों में से था।
Roman Urdu (Maududi)Woh uski taraf badi aur Yusuf bhi uski taraf badta agar apne Rubb ki burhaan na dekh leta(the proof of his Lord) aisa hua. Taa-ke hum ussey badhi aur behayayi (indecency and immodesty) ko door kardein, dar-haqeeqat woh hamare chuney huey bandonmein se tha
Roman Urdu (Junagarhi)Uss aurat ney yousuf ki taraf qasad kiya aur yousuf uss ka qasad kertay agar woh apney perwerdigar ki daleel na dekhtay yun hi hua iss wastay kay hum uss say buraee aur bey hayaee door ker den. Be-shak woh humaray chunay huye bandon mein say tha
Devnagri Urdu (Maududi)वो उसकी तरफ बड़ी और यूसुफ भी उसकी तरफ बढ़ता अगर अपने रब की बुरहान ना देख लेता (अपने भगवान का सबूत) ऐसा हुआ। ता-के हम उसे बड़ी और बेहयायी (अभद्रता और अभद्रता) को दूर कर दें, दर-हकीकत वो हमारे चुने हुए बंदोंमें से था
عَرَبِيوَاستَبَقَا البابَ وَقَدَّت قَميصَهُ مِن دُبُرٍ وَأَلفَيا سَيِّدَها لَدَى البابِ ۚ قالَت ما جَزاءُ مَن أَرادَ بِأَهلِكَ سوءًا إِلّا أَن يُسجَنَ أَو عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और दोनों दरवाज़े की ओर दौड़े और उस (स्त्री) ने यूसुफ़ का कुर्ता पीछे से फाड़ डाला और दोनों ने उस (स्त्री) के पति को दरवाज़े के पास पाया। उस (स्त्री) ने कहा : जिसने तेरी पत्नी के साथ बुराई का इरादा किया, उसकी सज़ा इसके सिवा क्या हो सकती है कि उसे बंदी बनाया जाए या उसे दर्दनाक सज़ा (दी जाए)?
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar Yusuf aur woh aagey peechey darwaze ki taraf bhaage aur usne peechey se Yusuf ka kamees (khinch kar) phadh diya , darwaze par dono ne uske shohar ko maujood paya.Usey dekhte hi aurat kehne lagi, “ kya saza hai us shaks ki jo teri gharwali par niyyat kharab karey? Iske siwa aur kya saza ho sakti hai ke woh qaid kiya jaye ya usey sakht azaab diya jaye”
Roman Urdu (Junagarhi)Dono darwazay ki taraf doray aur uss aurat ney yousuf ka kurta peechay ki taraf say kheench ker phaar dala aur darwazay kay pass hi aurat ka shohar dono ko mill gaya to kehney lagi jo shaks teri biwi kay sath bura irada keray bus uss ki saza yehi hai kay ussay qaid ker diya jaye ya aur koi dard naak saza di jaye
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार यूसुफ और वो आगे पीछे दरवाजे की तरफ भागे और उसने पीछे से यूसुफ का कमीज (खींच कर) फाड़ दीया, दरवाज़े पर दोनो ने उसके शोहर को मौजुद पाया। उसे देखते ही औरत कहने लगी, "क्या सजा है उस लड़के की जो तेरी घरवाली पर नियत खराब करे? इसके सिवा और क्या सजा हो सकती है के वो क़ैद किया जाए या उसे सही अज़ाब दिया जाए"
عَرَبِيقالَ هِيَ راوَدَتني عَن نَفسي ۚ وَشَهِدَ شاهِدٌ مِن أَهلِها إِن كانَ قَميصُهُ قُدَّ مِن قُبُلٍ فَصَدَقَت وَهُوَ مِنَ الكاذِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : इसी ने मुझे रिझाना चाहा था और उस स्त्री के घराने से एक गवाह ने गवाही दी कि यदि उसका कुर्ता आगे से फाड़ा गया है, तो वह (महिला) सच्ची है और वह झूठा है।
Roman Urdu (Maududi)Yusuf ne kaha “yahi mujhey phaansne ki koshish kar rahi thi”. Is aurat ke apne kumbe(family) walon mein se ek shaks ne (qarene ki) shahadat pesh ki ke “agar Yusuf ka kamees aagey se phata ho to aurat sacchi hai aur yeh jhoota
Roman Urdu (Junagarhi)Yousuf ney kaha yeh aurat hi mujhay phusla rahi thi aur aurat kay qabeelay hi kay aik shaks ney gawahee di kay agar iss ka kurta aagay say phata hua ho to aurat sachi hai aur yousuf jhoot bolney walon mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)यूसुफ़ ने कहा "यही मुझे फांसने की कोशिश कर रही थी"। क्या औरत के अपने कुंबे (परिवार) वालों में से एक शक्स ने (कारने की) शहादत पेश की है, "अगर यूसुफ का कमीज़ आगे से फटा हो तो औरत सच्ची है और ये झूठा
عَرَبِيوَإِن كانَ قَميصُهُ قُدَّ مِن دُبُرٍ فَكَذَبَت وَهُوَ مِنَ الصّادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि उसका कुर्ता पीछे से फाड़ा गया है, तो वह (महिला) झूठी और वह (यूसुफ़) सच्चा है।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar uska kamees peeche se phata ho to aurat jhooti hai aur yeh saccha”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar iss ka kurat peechay ki janib say phaara gaya hai aur aurat jhooti hai aur yousuf sachon mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर उसका कमीज़ पीछे से फटा हो तो औरत झूठी है और ये सच्चा"
عَرَبِيفَلَمّا رَأىٰ قَميصَهُ قُدَّ مِن دُبُرٍ قالَ إِنَّهُ مِن كَيدِكُنَّ ۖ إِنَّ كَيدَكُنَّ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उस (अज़ीज़) ने देखा कि उसका कुर्ता पीछे से फाड़ा गया है, तो बोला : निःसंदेह ये तुम स्त्रियों की चाल है और निश्चय ही तुम्हारी चाल बड़ी घोर होती है।
Roman Urdu (Maududi)Jab shohar ne dekha ke Yusuf ka kamees peechey se phata hai to usne kaha “yeh tum auraton ki chalakiyan hain, waqayi badey gazab ki hoti hai tumhari chalein
Roman Urdu (Junagarhi)Khawind ney jo dekha kay yousuf ka kurta peeth ki janob say phaara gaya hai to saaf keh diya kay yeh to tum aurton ki chaal baazi hai be-shak tumhari chaal baazi both bari hai
Devnagri Urdu (Maududi)जब शोहर ने देखा के युसूफ का कमीज पीछे से फटा है तो उसने कहा "ये तुम औरतों की चालाकियां हैं, हकीकत बड़े गजब की होती हैं तुम्हारी चालें
عَرَبِييوسُفُ أَعرِض عَن هٰذا ۚ وَاستَغفِري لِذَنبِكِ ۖ إِنَّكِ كُنتِ مِنَ الخاطِئينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ यूसुफ़! तुम इस बात को जाने दो और (ऐ स्त्री!) तू अपने पाप की क्षमा माँग। निःसंदेह तू ही पापियों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Yusuf, is maamle se darguzar kar aur aey aurat, tu apne kasoor ki maafi maang, tu hi asal mein khatakaar thi.”
Roman Urdu (Junagarhi)Yousuf abb iss baat ko aati jati kero aur (aey aurat) tu apney gunah say toba ker be-shak tu gunehgaron mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)युसुफ, इस मामले से दरगुजर कर और ऐ औरत, तू अपने कसूर की माफी मांग, तू ही असल मैं ख़तरा थी।”
عَرَبِي۞ وَقالَ نِسوَةٌ فِي المَدينَةِ امرَأَتُ العَزيزِ تُراوِدُ فَتاها عَن نَفسِهِ ۖ قَد شَغَفَها حُبًّا ۖ إِنّا لَنَراها في ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)नगर की कुछ स्त्रियों ने कहा : अज़ीज़ (प्रमुख अधिकारी) की पत्नी, अपने दास को रिझा रही है! उसे उसके प्रेम ने मुग्ध कर दिया है। हमारे विचार में वह खुली गुमराही में है।
Roman Urdu (Maududi)Shehar ki auratein aapas mein charcha karne lagi ke “azeez ki biwi apne naujawan ghulaam ke peechey padi hui hai, muhabbat ne usko be-qaabu kar rakkha hai. Hamare nazdeek to woh sareeh galati kar rahi hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur shehar ki aurton mein charcha honey laga kay aziz ki biwi apney (jawan) ghulam ko apna matlab nikalney kay liye behlaney phuslaney mein lagi rehti hai inn kay dil mein yousuf ki mohabbat beth gaee hai humaray khayal mein to woh sarreh gumrahi mein hai
Devnagri Urdu (Maududi)शहर की औरतें आपस में चर्चा करने लगी के "अज़ीज़ की बीवी अपने नौजवान गुलाम के पीछे पड़ी हुई है, मुहब्बत ने उसको बे-क़ाबू कर रखा है। हमारे नज़दीक तो वो सारी गलती कर रही है"
عَرَبِيفَلَمّا سَمِعَت بِمَكرِهِنَّ أَرسَلَت إِلَيهِنَّ وَأَعتَدَت لَهُنَّ مُتَّكَأً وَآتَت كُلَّ واحِدَةٍ مِنهُنَّ سِكّينًا وَقالَتِ اخرُج عَلَيهِنَّ ۖ فَلَمّا رَأَينَهُ أَكبَرنَهُ وَقَطَّعنَ أَيدِيَهُنَّ وَقُلنَ حاشَ لِلَّهِ ما هٰذا بَشَرًا إِن هٰذا إِلّا مَلَكٌ كَريمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)चुनाँचे जब उसने उन स्त्रियों की छलकपट की बात सुनी, तो उन्हें बुला भेजा और उनके लिए गाव-तकिए लगवाए और प्रत्येक स्त्री को एक छुरी दे दी। और उसने (यूसुफ़ से) कहा : इनके सामने आ जाओ। फिर जब उन स्त्रियों ने उसे देखा, तो उन्होंने उसे बहुत बड़ा समझा और अपने हाथ काट डाले तथा बोल उठीं : अल्लाह की पनाह! यह मनुष्य नहीं है। यह तो कोई सम्मानित फ़रिश्ता है।
Roman Urdu (Maududi)Usne jo unki yeh makkarana baatein suni to unko bulawa bhej diya aur unke liye takiya-daar majlis aarasta ki aur ziyafat mein har ek ke aagey ek ek churi (knife) rakh di . (Phir ain us waqt jabke woh phal kaat kaat kar kha rahi thi) usne Yusuf ko ishara kiya ke unke saamne nikal aa. Jab un auraton ki nigaah uspar padi to woh dangg reh gayi aur apne haath kaat baithi aur be- saakhta (spontaneously) pukar utthi “ haasha-lil-laah(God protect us), yeh shaks Insaan nahin hai, yeh to koi buzurg farishta hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Iss ney jab unn ki iss pur fareb gheebat ka haal suna to unhen bulwa bheja aur unn kay liye aik majlis muattab ki aur unn mein say her aik ko aik churi di. Aur kaha aey yousuf! Inn kay samney chalay aao inn aurton ney jab ussay dekha to boht bara jana aur apney hath kaat liye aur zaban say nikal gaya kay hasha-lillah! Yeh insan to hergiz nahi yeh to yaqeenan koi boht hi buzurg farishta hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसने जो उनकी ये मकराना बातें सुनी तो उनको बुलावा भेज दिया और उनके लिए तकिया-दार मजलिस अरस्ता की और ज़ियाफत में हर एक के आगे एक चूड़ी (चाकू) रख दी। (फिर ऐन हमें वक्त जबके वो फाल काट कर खा रही थी) उसने यूसुफ को इशारा किया के उनके सामने निकल आ। जब उन औरतों की निगाह उसपर पड़ी तो वो दंग रह गई और अपने हाथ काट बैठी और सच (सहज) पुकार उठी " हाशा-लिल-लाह (भगवान हमारी रक्षा करें), ये शक्स इंसान नहीं है, ये तो कोई बुज़ुर्ग फ़रिश्ता है"
عَرَبِيقالَت فَذٰلِكُنَّ الَّذي لُمتُنَّني فيهِ ۖ وَلَقَد راوَدتُهُ عَن نَفسِهِ فَاستَعصَمَ ۖ وَلَئِن لَم يَفعَل ما آمُرُهُ لَيُسجَنَنَّ وَلَيَكونًا مِنَ الصّاغِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह बोली : यह वही है, जिसके बारे में तुम मेरी निंदा कर रही थीं। वास्तव में, मैंने ही उसे रिझाया था, मगर वह बच निकला। और यदि वह मेरी बात न मानेगा, तो अवश्य ही बंदी बना दिया जाएगा और अवश्य ही अपमानित होगा।
Roman Urdu (Maududi)Azeez ki biwi ne kaha “dekh liya! Yeh hai woh shaks jiske maamle mein tum mujhpar baatein banati thi. Beshak maine isey rujhane (seduce) ki koshish ki thi magar yeh bach nikla. Agar yeh mera kehna na maanega to qaid kiya jayega aur bahut zaleel o khwar hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Uss waqt aziz-e-misir ki biwi ney kaha yehi hain jin kay baray mein tum mujhay tanay dey rahi thin mein ney her chand iss say apna matlab hasil kerna chaha lekin yeh baal baal bacha raha aur jo kuch mein iss say keh rahi hun agar yeh na keray ga to yaqeenan yeh qaid ker diya jayega aur be-shak yeh boht hi bey izzat hoga
Devnagri Urdu (Maududi)अज़ीज़ की बीवी ने कहा "देख लिया! ये है वो शक्स जिसके मामले में तुम मुझपर बातें बनाती थी। बहस में मैंने इसे रुझाने (लुभाने) की कोशिश की थी मगर ये बच निकला। अगर ये मेरा कहना ना मानेगा तो क़ैद किया जाएगा और बहुत ज़लील ओ ख्वार होगा
عَرَبِيقالَ رَبِّ السِّجنُ أَحَبُّ إِلَيَّ مِمّا يَدعونَني إِلَيهِ ۖ وَإِلّا تَصرِف عَنّي كَيدَهُنَّ أَصبُ إِلَيهِنَّ وَأَكُن مِنَ الجاهِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यूसुफ़ ने प्रार्थना की : ऐ मेरे पालनहार! मुझे क़ैद उससे अधिक प्रिय है, जिसकी ओर ये औरतें मुझे बुला रही हैं। और यदि तूने मुझसे इनके छल को दूर नहीं किया, तो मैं इनकी ओर झुक जाऊँगा और अज्ञानियों में से हो जाऊँगा।
Roman Urdu (Maududi)Yusuf ne kaha “aey mere Rubb, qaid mujhey manzoor hai ba-nisbat iske ke main woh kaam karoon jo yeh log mujhse chahte hain aur agar tu nay inki chaalon ko mujhse dafa na kiya to main inke daam mein phans jaunga aur jahilon mein shamil ho rahunga
Roman Urdu (Junagarhi)Yousuf (alh-e-salam) ney dua ki kay aey meray perwerdigar! Jiss baat ki taraf yeh aurten mujhay bula rahi hain uss say to mujhay jail khana boht pasand hai agar tu ney inn ka fun fareb mujh say door na kiya to mein to inn ki taraf maeel hojaonga aur bilkul na danon mein ja milon ga
Devnagri Urdu (Maududi)यूसुफ ने कहा “ऐ मेरे रब, कैद मुझे मंजूर है बा-निस्बत इसके मैं वो काम करूं जो ये लोग मुझसे चाहते हैं और अगर तू नहीं इनकी चालों को मुझसे दफा ना किया तो मैं इनके दाम में फंस जाऊंगा और जाहिलों में शामिल हो जाऊंगा
عَرَبِيفَاستَجابَ لَهُ رَبُّهُ فَصَرَفَ عَنهُ كَيدَهُنَّ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّميعُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उसके पालनहार ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और उससे उनके छल को दूर कर दिया। निःसंदेह वह बड़ा सुनने वाला, बड़ा जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Uske Rubb ne uski dua qabool ki aur un auraton ki chalein ussey dafa kardi. Beshak wahi hai jo sab ki sunta aur sab kuch jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Uss kay rab ney uss ki dua qabool kerli aur inn aurton kay dao paich uss say pher diye yaqeenan woh sunnay wala jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसके रब ने उसकी दुआ कबूल की और उन औरतों की चलें उससे दफा करदी। बेचैन वही है जो सब की सुनता है और सब कुछ जानता है
عَرَبِيثُمَّ بَدا لَهُم مِن بَعدِ ما رَأَوُا الآياتِ لَيَسجُنُنَّهُ حَتّىٰ حينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उन लोगों ने निशानियाँ देख लेने के बाद यही उचित समझा कि उस (यूसुफ़) को एक अवधि तक के लिए जेल में रखें।
Roman Urdu (Maududi)Phir un logon ko yeh soojhi ke ek muddat ke liye usey qaid kardein halanke woh ( uski paak daamani aur khud apni auraton ke burey atwar ki) sareeh nishaniyan dekh chuke thay
Roman Urdu (Junagarhi)Phir inn tamam nishaniyon ko dekh lenay kay baad unhen yehi maslehat maloom hui kay yousuf ko kuch muddat kay liye qaid khanay mein rakhen
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उन लोगों को ये समझ के एक मुद्दत के लिए उसे क़ैद करदें हलंके वो (उसकी पाक दमानी और खुद अपनी औरतों के बुरे अतवर की) सारी निशानियां देख चुके थे
عَرَبِيوَدَخَلَ مَعَهُ السِّجنَ فَتَيانِ ۖ قالَ أَحَدُهُما إِنّي أَراني أَعصِرُ خَمرًا ۖ وَقالَ الآخَرُ إِنّي أَراني أَحمِلُ فَوقَ رَأسي خُبزًا تَأكُلُ الطَّيرُ مِنهُ ۖ نَبِّئنا بِتَأويلِهِ ۖ إِنّا نَراكَ مِنَ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और क़ैदखाने में उसके साथ दो युवक दाख़िल हुए। उनमें से एक ने कहा : मैंने स्वप्न देखा है कि शराब निचोड़ रहा हूँ। और दूसरे ने कहा : मैंने स्वप्न देखा है कि अपने सिर के ऊपर रोटी उठाए हुए हूँ, जिसमें से पक्षी खा रहे हैं। हमें इसका अर्थ बता दीजिए। हम देख रहे हैं कि आप सदाचारियों में से हैं।
Roman Urdu (Maududi)Qaid-khane(prison) mein do ghulaam aur bhi uske saath daakhil huey. Ek roz un mein se ek ne ussey kaha “ maine khwab mein dekha hai ke main sharaab kasheed kar raha hoon” dusre ne kaha, “maine dekha ke mere sar par rotiyan rakkhi hain aur parindey unko kha rahey hain”. Dono ne kaha “humein iski tabeer bataiye, hum dekhte hain ke aap ek neik aadmi hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss kay sath do aur jawan bhi qaid khanay mein dakhil huye inn mein say aik ney kaha kay mein ney khuwab mein apney aap ko sharab nichortay dekha hai aur doosray ney kaha mein ney apney aap ko dekha hai kay mein apney sir per roti uthaye huye hun jisay parinday kha rahey hain humen aap iss ki tabeer batiye humen to aap khoobiyon walay shaks dikhaee detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क़ैद-ख़ाने (जेल) में दो ग़ुलाम और भी उसके साथ दाख़िल हुए। एक रोज़ उन में से एक ने उसे कहा "मैंने ख़्वाब में देखा है के मैं शराब कशीद कर रहा हूँ" दूसरे ने कहा, "मैंने देखा के मेरे सर पर रोटियाँ रखी हैं और परिंदे उनको खा रहे हैं"। डोनो ने कहा "हमें इसकी ताबीर बताइए, हम देखते हैं के आप एक नए आदमी हैं"
عَرَبِيقالَ لا يَأتيكُما طَعامٌ تُرزَقانِهِ إِلّا نَبَّأتُكُما بِتَأويلِهِ قَبلَ أَن يَأتِيَكُما ۚ ذٰلِكُما مِمّا عَلَّمَني رَبّي ۚ إِنّي تَرَكتُ مِلَّةَ قَومٍ لا يُؤمِنونَ بِاللَّهِ وَهُم بِالآخِرَةِ هُم كافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यूसुफ़ ने कहा : तुम दोनों के पास जो भोजन आता है, उसके तुम्हारे पास आने से पहले ही मैं तुम्हें उसकी हक़ीक़त बता दूँगा; यह उन बातों में से है, जो मेरे पालनहार ने मुझे सिखाई हैं। मैंने उन लोगों का धर्म त्याग दिया है, जो अल्लाह पर ईमान नहीं रखते और जो आख़िरत का इनकार करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yusuf ne kaha: “yahan jo khana tumhein mila karta hai uske aane se pehle main tumhein in khwabon ki tabeer bata dunga. Yeh ilam un uloom se hai jo mere Rubb ne mujhey ata kiye hain. Waqiya yeh hai ke maine un logon ka tareeqa chodh kar jo Allah par iman nahin latey aur aakhirat ka inkar karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yousuf ney kaha tumhen jo khana diya jata hai uss kay tumharay pass phonchney say pehlay hi mein tumhen iss ki tabeer batla doon ga. Yeh sab uss ilm ki badolat hai jo mujhay meray rab ney sikhaya hai mein ney unn logon ka mazhab chor diya hai jo Allah per eman nahi rakhtay aur aakhirat kay bhi munkir hain
Devnagri Urdu (Maududi)यूसुफ ने कहा: "यहां जो खाना तुम्हें मिला करता है उसके आने से पहले मैं तुम्हें ख्वाबों की ताबीर बता दूंगा। ये इलम उन उलूम से है जो मेरे रब ने मुझे अता किए हैं। वाकिया ये है के मैंने उन लोगों का तरीक़ा छोड़ कर जो अल्लाह पर ईमान नहीं लाते और आख़िरत का इंकार करते हैं
عَرَبِيوَاتَّبَعتُ مِلَّةَ آبائي إِبراهيمَ وَإِسحاقَ وَيَعقوبَ ۚ ما كانَ لَنا أَن نُشرِكَ بِاللَّهِ مِن شَيءٍ ۚ ذٰلِكَ مِن فَضلِ اللَّهِ عَلَينا وَعَلَى النّاسِ وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और मैंने अपने बाप-दादाओं; इबराहीम, इसह़ाक़ और याक़ूब के धर्म का अनुसरण किया है। हमारे लिए वैध नहीं कि हम किसी चीज़ को अल्लाह का साझी बनाएँ। यह हमपर और लोगों पर अल्लाह की कृपा है। लेकिन अधिकतर लोग शुक्रिया अदा नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Apne buzurgon, Ibrahim, Ishaq aur yaqub ka tareeqa ikhtiyar kiya hai, hamara yeh kaam nahin hai ke Allah ke saath kisi ko shareek tehehrayein .Dar-haqeeqat yeh Allah ka fazal hai humpar aur Insaano par (ke usne apne siwa kisi ka banda humein nahin banaya) magar aksar log shukar nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Mein apney baap dadon kay deen ka paband hun yani ibrahim-o-ishaq aur yaqoob kay deen ka humen hergiz yeh saza waar nahi kay hum Allah Taalaa kay sath kissi ko bhi shareek keren hum per aur tamam aur logon per Allah Taalaa ka yeh khas fazal hai lekin aksar log na shukri kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अपने बुज़ुर्गों, इब्राहिम, इशाक और याक़ूब का तरीक़ा इख्तियार किया है, हमारा ये काम नहीं है के अल्लाह के साथ किसी को शरीक तेहरायें .दर-हकीकत ये अल्लाह का फजल है हमपर और इंसानों पर (के उसने अपने सिवा किसी का बंदा हमें नहीं बनाया) मगर अक्सर लोग शुक्र नहीं करते
عَرَبِييا صاحِبَيِ السِّجنِ أَأَربابٌ مُتَفَرِّقونَ خَيرٌ أَمِ اللَّهُ الواحِدُ القَهّارُ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे जेल के दोनों साथियो! क्या अलग-अलग अनेक पूज्य बेहतर हैं या एक प्रभुत्वशाली अल्लाह?
Roman Urdu (Maududi)Aey zindan(prison) ke saathiyon (fellow prisoners), tum khud hi socho ke bahut se mutafarriq(various) Rubb behtar hain ya woh ek Allah jo sab par gaalib hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meray qiad khaney kay sathiyo! Kiya mutafarriq kaee aik perwerdigar behtar hain? Ya aik Allah zabardast taqatwar
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ जिंदान (जेल) के साथियों (साथी कैदियों), तुम खुद ही सोचो के बहुत से मुतफ़र्रिक (विभिन्न) रब बेहतर हैं या वो एक अल्लाह जो सब पर गालिब है
عَرَبِيما تَعبُدونَ مِن دونِهِ إِلّا أَسماءً سَمَّيتُموها أَنتُم وَآباؤُكُم ما أَنزَلَ اللَّهُ بِها مِن سُلطانٍ ۚ إِنِ الحُكمُ إِلّا لِلَّهِ ۚ أَمَرَ أَلّا تَعبُدوا إِلّا إِيّاهُ ۚ ذٰلِكَ الدّينُ القَيِّمُ وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम अल्लाह के सिवा जिनकी इबादत (पूजा) करते हो, वे केवल नाम हैं, जो तुमने और तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए हैं। अल्लाह ने उनका कोई प्रमाण नहीं उतारा है। आदेश तो केवल अल्लाह का चलता है। उसने आदेश दिया है कि तुम एकमात्र उसी की इबादत (उपासना) करो। यही सीधा धर्म है। परन्तु अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Usko chodh kar tum jinki bandagi kar rahey ho woh iske siwa kuch nahin hain ke bas chandh naam hain jo tumne aur tumhare aabaa o ajdaad ne rakh liye hain. Allah ne unke liye koi sanad nazil nahin ki. Farma rawayi(Sovereignty) ka iqtedar Allah ke siwa kisi ke liye nahin hai. Uska hukum hai ke khud uske siwa tum kisi ki bandagi na karo, yahi theith seedha tareeq e zindagi hai, magar aksar log jaante nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Uss kay siwa tum jin ko pooja paat ker rahey ho woh sab naam hi naam hain jo tum ney aur tumharay baap dadon ney khud hi gharr liye hain. Allah Taalaa ney inn ki koi daleel nazil nahi farmaee farman-rawaee sirf Allah Taalaa hi ki hai uss ka famaan hai kay rum sab siwaye uss kay kissi aur ki ibadat na kero yehi deen durust hai lekin aksar log nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)उसको छोड़ कर तुम जिसकी बंदगी कर रहे हो वो इसके सिवा कुछ नहीं हैं के बस चंद नाम हैं जो तुमने और तुम्हारे आबा ओ अजदाद ने रख लिए हैं। अल्लाह ने उनके लिए कोई सनद नाज़िल नहीं की। फरमा रवायी (संप्रभुता) का इक्तेदार अल्लाह के सिवा किसी के लिए नहीं है। उसका हुकुम है के खुद उसके सिवा तुम किसी की बंदगी ना करो, यही थीथ सीधा तारीक ए जिंदगी है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं
عَرَبِييا صاحِبَيِ السِّجنِ أَمّا أَحَدُكُما فَيَسقي رَبَّهُ خَمرًا ۖ وَأَمَّا الآخَرُ فَيُصلَبُ فَتَأكُلُ الطَّيرُ مِن رَأسِهِ ۚ قُضِيَ الأَمرُ الَّذي فيهِ تَستَفتِيانِ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे जेल के दोनों साथियो! तुम दोनो में से एक तो अपने मालिक को शराब पिलाएगा, और रहा दूसरा तो उसे सूली पर चढ़ाया जाएगा, फिर पक्षी उसके सिर में से खाएँगे। जिसके संबंध में तुम दोनों पूछ रहे हो, उसका निर्णय किया जा चुका है।
Roman Urdu (Maududi)Aey zindan ke saathiyon , tumhare khwab ki tabeer yeh hai ke tum mein se ek to apne Rubb (shah e Misr) ko sharaab pilayega, raha dusra to usey suli par chadhaya jayega (crucified) aur parindey uska sar noch noch kar khayenge. Faisla ho gaya us baat ka jo tum puch rahey thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meray qaid khaney kay rafiqo! Tum dono mein say aik to apney badshah ko sharab pilaney per muqarrar hojayega lekin doosra sooli per charhaya jayega aur parinday uss ka sir noch noch khayen gay tum dono jiss kay baray mein tehqeeq ker rahey thay uss kaam ka faisla ker diya gaya
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ जिंदान के साथियों, तुम्हारे ख्वाब की ताबीर ये है के तुम में से एक तो अपने रब (शाह ए मिस्र) को शराब पिलाएगा, रहा दूसरा तो उसे सूली पर चढ़ाया जाएगा (सूली पर चढ़ाया जाएगा) और परिंदे उसका सर नोच नोच कर खाएंगे। फैसला हो गया उस बात का जो तुम पूछ रहे थे"
عَرَبِيوَقالَ لِلَّذي ظَنَّ أَنَّهُ ناجٍ مِنهُمَا اذكُرني عِندَ رَبِّكَ فَأَنساهُ الشَّيطانُ ذِكرَ رَبِّهِ فَلَبِثَ فِي السِّجنِ بِضعَ سِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (यूसुफ़ ने) उन दोनों में से जिसके बारे में समझा था कि वह रिहा होने वाला है, उससे कहा : अपने मालिक के पास मेरा ज़िक्र करना। परंतु शैतान ने उसे अपने मालिक के पास उसकी चर्चा करने की बात भुला दी। अतः वह (यूसुफ़) कई वर्ष तक जेल ही में रहा।
Roman Urdu (Maududi)Phir un mein se jiske mutaaliq khayal tha ke woh riha(release) ho jayega ussey Yusuf ne kaha ke “apne Rubb (shah-e-Misr) se mera zikr karna”. Magar shaytan ne usey aisa gaflat mein daala ke woh apne Rubb (Shah-e-Misr) se uska zikr karna bhool gaya aur Yusuf kai saal qaid-khane mein pada raha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss ki nisbat yousuf ka guman tha kay inn dono mein say yeh choot jayega uss say kaha kay apney badshah say mera ziker bhi ker dena phir ussay shetan ney apney badshah say ziker kerna bhula diya aur yousuf ney kaee saal qaid khaney mein hi kaatay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उनमें से जिसका मुतालिक ख्याल था के वो रिहा (रिलीज़) हो जाएगा उसे यूसुफ ने कहा के "अपने रब (शाह-ए-मिसर) से मेरा ज़िक्र करना"। मगर शैतान ने उसे ऐसा गफ़लत में डाला के वो अपने रब (शाह-ए-मिसर) से उसका ज़िक्र करना भूल गया और यूसुफ काई साल क़ैद-खाने में पड़ा रहा
عَرَبِيوَقالَ المَلِكُ إِنّي أَرىٰ سَبعَ بَقَراتٍ سِمانٍ يَأكُلُهُنَّ سَبعٌ عِجافٌ وَسَبعَ سُنبُلاتٍ خُضرٍ وَأُخَرَ يابِساتٍ ۖ يا أَيُّهَا المَلَأُ أَفتوني في رُؤيايَ إِن كُنتُم لِلرُّؤيا تَعبُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (एक दिन) राजा ने कहा : निःसंदेह मैं (सपने में) सात मोटी गायों को देखता हूँ, जिनको सात दुबली गाएँ खा रही हैं और सात हरी बालियाँ हैं और दूसरी सात सूखी हैं। ऐ प्रमुखो! यदि तुम स्वप्न का अर्थ बता सकते हो, तो मुझे मेरे स्वप्न के संबंध में बताओ?
Roman Urdu (Maududi)Ek roz baadshah ne kaha “ maine khwab mein dekha hai ke saat (seven) moti gaayein (cows) jinko saat (seven) dubli (lean) gaayein kha rahi hain, aur anaaj ke saat baalein hari (green) hain aur dursi saat sukhi. Aey ehle darbar , mujhey is khwab ki tabeer batao agar tum khwabon ka matlab samajhte ho.”
Roman Urdu (Junagarhi)Badshah ney kaha mein ney khuwab mein dekha hai kay saat moti taza farba gayen hain jin ko saat laaghar dubli patli gayen kha rahi hain aur saat baliyan hain hari hari aur doosri saat bilkul khushk. Aey darbariyo! Meray iss khuwab ki tabeer batlao agar tum khuwab ki tabeer dey saktay ho
Devnagri Urdu (Maududi)एक रोज़ बादशाह ने कहा “मैंने ख्वाब में देखा है के सात (सात) मोटी गायें (गायें) जिनको सात (सात) दुबली (दुबली) गायें खा राही हैं, और अनाज के सात बालें हरी (हरा) हैं और पुरानी सात सुखी हैं। ऐ एहले दरबार, मुझे इस ख्वाब की ताबीर बताओ अगर तुम ख्वाबों का मतलब समझते हो।”
عَرَبِيقالوا أَضغاثُ أَحلامٍ ۖ وَما نَحنُ بِتَأويلِ الأَحلامِ بِعالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ये तो उलझे सपनों का मिश्रण है और हम ऐसे सपनों के अर्थ से अवगत नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Logon ne kaha “yeh to pareshan khwabon ki baatein hain aur hum is tarah ke khwabon ka matlab nahin jantey”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney jawab diya kay yeh to urtay uratay pareshan khuwab hain aur aisay shoreedah pareshan khuwabon ki tabeer jannay walay hum nahi
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों ने कहा "ये तो परेशान ख्वाबों की बातें हैं और हम इस तरह के ख्वाबों का मतलब नहीं जानते"
عَرَبِيوَقالَ الَّذي نَجا مِنهُما وَادَّكَرَ بَعدَ أُمَّةٍ أَنا أُنَبِّئُكُم بِتَأويلِهِ فَأَرسِلونِ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन दोनों में से जो रिहा हुआ था और उसे एक अवधि के बाद याद आया, उसने कहा : मैं तुम्हें इसका अर्थ बताऊँगा। अतः मुझे भेजो।
Roman Urdu (Maududi)Un do qaidiyon mein se jo shaks bach gaya tha aur usey ek muddat daraaz ke baad ab baat yaad aayi, usne kaha “main aap hazraat ko iski taaweel batata hoon, mujhey zara (qaid-khane mein Yusuf ke paas) bhej dijiye”
Roman Urdu (Junagarhi)Unn do qadiyon mein say jo raha hua tha ussay muddat kay baad yaad aagaya aur kehney laga mein tumhen iss ki tabeer batla doon ga mujhay janay ki ijazat dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)उन दो क़ैदियों में से जो शक्स बच गया था और उसे एक मुद्दत दराज़ के बाद अब बात याद आई, उसने कहा "मैं आप हजरत को इसकी तावील बताता हूं, मुझे ज़रा (क़ैद-खाने में युसूफ के पास) भेज दीजिए”
عَرَبِييوسُفُ أَيُّهَا الصِّدّيقُ أَفتِنا في سَبعِ بَقَراتٍ سِمانٍ يَأكُلُهُنَّ سَبعٌ عِجافٌ وَسَبعِ سُنبُلاتٍ خُضرٍ وَأُخَرَ يابِساتٍ لَعَلّي أَرجِعُ إِلَى النّاسِ لَعَلَّهُم يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ यूसुफ़! ऐ सत्यवादी! हमें सात मोटी गायों के बारे में बताओ, जिन्हें सात दुबली गाएँ खा रही हैं और सात हरी बालियाँ हैं और सात सूखी, ताकि मैं लोगों के पास वापस जाऊँ, ताकि वे जान लें।
Roman Urdu (Maududi)Usne jaa kar kaha “Yusuf, aey sarapa raasti(O man of righteousness), mujhe is khwab ka matlab bata ke saat moti gaayein jinko saat dubli gaayein kha rahi hain aur saat baalein hari (green ears of corn ) hain aur saat sukhi , shayad ke main un logon ke paas jaaun aur shayad ke woh jaan lein”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey yousuf! Aey boht baray sachay yousuf! Aap humen iss khuwab ki tabeer batlaiye kay saat moti taza gayen hain jinhen saat dubli patli gayen kha rahi hain aur saat bilkul sabz khoshay hain aur saat hi doosray bhi bilkul khushk hain takay mein wapis jaa ker unn logon say kahon kay woh sab jaan len
Devnagri Urdu (Maududi)उसने जा कर कहा “यूसुफ, ऐ सरापा रस्ती (हे नेक इंसान), मुझे इस ख्वाब का मतलब बता के सात मोती गाएं जिनको सात दुबली गाएं खा रही हैं और सात बालें हरी (मक्के की हरी बालियाँ) हैं और सात सुखी, शायद के मैं उन लोगों के पास जाऊं और शायद के वो जान लें”
عَرَبِيقالَ تَزرَعونَ سَبعَ سِنينَ دَأَبًا فَما حَصَدتُم فَذَروهُ في سُنبُلِهِ إِلّا قَليلًا مِمّا تَأكُلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यूसुफ़ ने कहा : तुम सात वर्षों तक निरंतर खेती करोगे। चुनाँचे तुम जो (फ़सल) काटो, उसे उसकी बालियों ही में रहने दो सिवाय थोड़ी (मात्रा) के जो तुम खाओ।
Roman Urdu (Maududi)Yusuf ne kaha “saat baras tak lagataar tumlog kheti-baadi karte rahoge. Is dauraan mein jo fasalein (crops) tum kaato un mein se bas thoda sa hisaa, jo tumhari khuraak ke kaam aaye nikalo aur baaqi ko uski baalon hi mein rehne do
Roman Urdu (Junagarhi)Yousuf ney jawab diya kay tum saat saal tak pay dar pay lagataar hasb-e-aadat ghalla boya kerna aur fasal kaat ker ussay baaliyon samet hi rehney dena siwaye apney khaney ki thori si miqdaar kay
Devnagri Urdu (Maududi)युसूफ ने कहा “सात बरस तक लगतार तुमलोग खेती-बाड़ी करते रहोगे।” इस दौरन में जो फ़सलें (फसलें) तुम काटो उन में से बस थोड़ा सा हिसा, जो तुम्हारी खुराक के काम आए निकलो और बाकी को उसके बालों में ही रहने दो
عَرَبِيثُمَّ يَأتي مِن بَعدِ ذٰلِكَ سَبعٌ شِدادٌ يَأكُلنَ ما قَدَّمتُم لَهُنَّ إِلّا قَليلًا مِمّا تُحصِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर इसके बाद सात कठिन वर्ष आएँगे, जो उसे खा जाएँगे, जो तुमने उनके लिए पहले से इकट्ठा कर रखा होगा, सिवाय उस थोड़े-से हिस्से के जो तुम सुरक्षित कर लोगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir saat baras bahut sakht aayenge. Us zamane mein woh sab galla(corn) kha liya jayega jo tum us waqt ke liye jama karoge, agar kuch bachega to bas wahi jo tumne mehfooz kar rakkha ho
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kay baad saat saal nihayat sakht qehat kay aayen gay woh iss ghallay ko kha jayen gay jo tum ney unn kay liye zakheera rakh chora tha siwaye uss thoray say kay jo tum rol rakhtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)फिर सात बरस बहुत आएंगे। हमारे ज़माने में वो सब गल्ला (मकई) खा लिया जाएगा जो तुम हमारे लिए वक़्त के लिए जमा करोगे, अगर कुछ बचेगा तो बस वही जो तुमने महफ़ूज़ कर रखा हो
عَرَبِيثُمَّ يَأتي مِن بَعدِ ذٰلِكَ عامٌ فيهِ يُغاثُ النّاسُ وَفيهِ يَعصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसके बाद एक ऐसा वर्ष आएगा, जिसमें लोगों पर बारिश होगी तथा वे उसमें (रस) निचोड़ेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Iske baad phir ek saal aisa aayega jis mein baraan-e-rehmat (abundant rainfall) se logon ki fariyad rasi ki jayegi aur woh ras nichodenge (juice and oil)”
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kay baad jo saal aayega uss mein logon per khoob barish barsaee jayegi aur uss mein (sheera-e-angoor bhi) khoob nichoren gay
Devnagri Urdu (Maududi)इसके बाद फिर एक साल ऐसा आएगा जिसमें बारां-ए-रहमत (प्रचुर मात्रा में बारिश) से लोगों की फरियाद रस की जाएगी और वो रस निचोड़ेंगे”
عَرَبِيوَقالَ المَلِكُ ائتوني بِهِ ۖ فَلَمّا جاءَهُ الرَّسولُ قالَ ارجِع إِلىٰ رَبِّكَ فَاسأَلهُ ما بالُ النِّسوَةِ اللّاتي قَطَّعنَ أَيدِيَهُنَّ ۚ إِنَّ رَبّي بِكَيدِهِنَّ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और राजा ने कहा : उसे मेरे पास लाओ। फिर जब दूत यूसुफ़ के पास पहुँचा, तो उन्होंने (उससे) कहा : अपने मालिक के पास वापस जाओ और उससे पूछो कि उन स्त्रियों का क्या मामला है, जिन्होंने अपने हाथ काट लिए थे? निःसंदेह मेरा पालनहार उन स्त्रियों के छल से भली-भाँति अवगत है।
Roman Urdu (Maududi)Baadshah ne kaha usey mere paas lao. Magar jab shahi faristaada (royal envoy) Yusuf ke paas pahuncha to usne kaha “apne Rubb ke paas wapas ja aur ussey puch ke un auraton ka kya maamla hai jinhon ne apne haath kat liye thay? Mera Rubb to unki makkari se waqif hi hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur badshah ney kaha yousuf ko meray pass lao jab qasid yousuf kay pass phoncha to enhon ney kaha apney badshah kay pass wapis jaa aur uss say pooch kay unn aurton ka haqeeqi waqiya kiya hai jinhon ney apney hath kaat liye thay? Unn kay heelay ko (sahih tor per) jannay wala mera perwerdigar hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)बादशाह ने कहा उसे मेरे पास लाओ। मगर जब शाही फ़रिश्तादा (शाही दूत) यूसुफ़ के पास पहुंचा तो उसने कहा "अपने रब के पास वापस जा और उससे पूछ के उन औरतों का क्या मामला है जिन्हों ने अपने हाथ काट लिए थे? मेरा रब तो उनकी मक्कारी से वाकिफ़ ही है।"
عَرَبِيقالَ ما خَطبُكُنَّ إِذ راوَدتُنَّ يوسُفَ عَن نَفسِهِ ۚ قُلنَ حاشَ لِلَّهِ ما عَلِمنا عَلَيهِ مِن سوءٍ ۚ قالَتِ امرَأَتُ العَزيزِ الآنَ حَصحَصَ الحَقُّ أَنا راوَدتُهُ عَن نَفسِهِ وَإِنَّهُ لَمِنَ الصّادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)राजा ने (उन स्त्रियों से) पूछा : तुम्हारा क्या मामला था, जब तुमने यूसुफ़ के मन को रिझाया था? उन्होंने कहा : अल्लाह की पनाह! हमने उसमें कोई बुराई नहीं देखी। तब अज़ीज़ की पत्नी बोल उठी : अब सत्य खूब उजागर हो गया। मैंने ही उसके मन को रिझाया था और निःसंदेह वह सच्चा में से है।
Roman Urdu (Maududi)Is par baadshah ne un auraton se dariyaft kiya “tumhara kya tajurba hai us waqt ka jab tumne Yusuf ko rujhane(entice) ki koshish ki thi?” Sab ne ek zubaan hokar kaha “haasha lillah! (God protect us), humne to usmein badhi(evil) ka shaiba tak na paya.” Azeez ki biwi bol uthi, “ab haqq khul chuka hai, woh main hi thi jisne usko phuslane ki koshish ki thi. beshak woh bilkul saccha hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Badshah ney poocha aey aurto! Uss waqt ka sahih waqiya kiya hai jab tum dao fareb kerkay yousuf ko uss ki dili manshah say behkana chahati thi unhon ney saaf jawab diya kay maaz Allah hum ney yousuf mein koi buraee nahi paee phir to aziz ki biwi bhi bol uthi kay abb to sachi baat nithar aaee. Mein ney hi ussay warghalaya tha uss kay ji say aur yaqeenan woh sachon mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या पर बादशाह ने उन औरतों से दरियाफ्त किया है "तुम्हारा क्या ताजूरबा है उस वक्त का जब तुमने यूसुफ को रुझाने (लुभाने) की कोशिश की थी?" सब ने एक ज़ुबान होकर कहा "हाशा लिल्लाह! (भगवान हमारी रक्षा करें), हमने तो उसमें बुराई का शईबा तक ना पाया।" अज़ीज़ की बीवी बोल उठी, "अब हक़ खुल चुका है, वो मैं ही थी जिसने उसको फुसलाने की कोशिश की थी। बेशक वो बिल्कुल सच्चा है"
عَرَبِيذٰلِكَ لِيَعلَمَ أَنّي لَم أَخُنهُ بِالغَيبِ وَأَنَّ اللَّهَ لا يَهدي كَيدَ الخائِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(मैंने) यह इसलिए किया, ताकि वह जान ले कि मैंने उसकी अनुपस्थिति में उसके साथ विश्वासघात नहीं किया और निःसंदेह अल्लाह विश्वासघातियों के चाल को (सफलता का) मार्ग नहीं दिखाता।
Roman Urdu (Maududi)(Yusuf ne kaha) “Issey meri garz yeh thi ke (azeez) yeh jaan le ke maine dar-purda uski khayanat nahin ki thi, aur yeh ke jo khyanat karte hain unki chaalon ko Allah kamiyabi ki raah par nahin lagata
Roman Urdu (Junagarhi)(yousuf alh-e-salam ney kaha) yeh iss wastay kay (aziz) jaan ley kay mein ney uss ki peeth peechay uss ki khayanat nahi ki aur yeh bhi kay Allah dagha baazon kay hathkanday chalney nahi deta
Devnagri Urdu (Maududi)(यूसुफ ने कहा) "इससे मेरी ग़रज़ ये थी के (अज़ीज़) ये जान ले के मैंने डर-पुर्दा उसकी ख़यानत नहीं की थी, और ये के जो ख़ियानत करते हैं उनकी चालों को अल्लाह कामियाबी की राह पर नहीं लगता
🕮 Juz 13 begins here
عَرَبِي۞ وَما أُبَرِّئُ نَفسي ۚ إِنَّ النَّفسَ لَأَمّارَةٌ بِالسّوءِ إِلّا ما رَحِمَ رَبّي ۚ إِنَّ رَبّي غَفورٌ رَحيمٌ
हिन्दी (Al-Omari)और मैं खुद को बरी नहीं करती, निःसंदेह मन तो बुराई का बहुत आदेश देने वाला है, सिवाय उसके जिसपर मेरा पालनहार दया करे। निःसंदेह मेरा पालनहार अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Main kuch apne nafs ki baraat nahin kar raha hoon (not holding my soul to be immune from sin), nafs to badhi (burayi) par uksata hi hai , illa yeh ke kisi par mere Rubb ki rehmat ho, beshak mera Rubb bada gafoor o Raheem hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Mein apney nafs ki pakeezgi biyan nahi kerta. Be-shak nafs to buraee per ubharney wala hi hai magar yeh kay mera perwerdigar hi apna reham keray yaqeenan mera paalney wala bari bakhsish kerney wala aur boht meharbani farmaney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)मैं कुछ अपने नफ़्स की बारात नहीं कर रहा हूँ (अपनी आत्मा को पाप से मुक्त नहीं रखता), नफ़्स तो बड़ी (बुराई) पर उक्सता ही है, इल्ला ये के किसी पर मेरे रब की रहमत हो, बेशक मेरा रब बड़ा गफूर ओ रहीम है"
عَرَبِيوَقالَ المَلِكُ ائتوني بِهِ أَستَخلِصهُ لِنَفسي ۖ فَلَمّا كَلَّمَهُ قالَ إِنَّكَ اليَومَ لَدَينا مَكينٌ أَمينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और राजा ने कहा : उसे मेरे पास लाओ, उसे मैं अपने लिए विशेष कर लूँ और जब (राजा ने) उन (यूसुफ़) से बात की, तो कहा : निःसंदेह आप आज हमारे यहाँ पदाधिकारी, विश्वसनीय हैं।
Roman Urdu (Maududi)Baadshah ne kaha “unhein mere paas lao taa-ke main unko apne liye makhsoos kar loon”. Jab Yusuf ne ussey guftagu ki to usne kaha “ab aap hamare haan qadr o manzilat rakhte hain aur aap ki amanat par pura bharosa hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Badshah ney kaha issay meray pass lao kay mein ussay apney khas kaamon kay liye muqarrar ker loon phir jab uss say baat cheet ki to kehney laga kay aap humaray haan aaj say zee izzat aur amant daar hain
Devnagri Urdu (Maududi)बादशाह ने कहा "उन्हें मेरे पास लाओ ता-के मैं उनको अपने लिए मखसूस कर लूं"। जब यूसुफ ने उसे गुफ्तगू की तो उसने कहा "अब आप हमारे हां कादर ओ मंजिल रखते हैं और आप की अमानत पर पूरा भरोसा है”
عَرَبِيقالَ اجعَلني عَلىٰ خَزائِنِ الأَرضِ ۖ إِنّي حَفيظٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(यूसुफ़) ने कहा : मुझे इस देश के ख़ज़ानों पर नियुक्त कर दीजिए। निःसंदेह मैं संरक्षण करने वाला, बड़ा जानकार हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Yusuf ne kaha, “mulk ke khazane mere supurd kijiye , main hifazat karne wala bhi hoon aur ilam bhi rakhta hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)(Yousuf ney) kaha aap mujhay mulk kay khazano per muqarrar ker dijiye mein hifazat kerney wala aur ba khabar hun
Devnagri Urdu (Maududi)यूसुफ ने कहा, “मुल्क के खज़ाने मेरे सुपुर्द किजिए, मैं हिफाजत करने वाला भी हूं और इलम भी रखता हूं”
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ مَكَّنّا لِيوسُفَ فِي الأَرضِ يَتَبَوَّأُ مِنها حَيثُ يَشاءُ ۚ نُصيبُ بِرَحمَتِنا مَن نَشاءُ ۖ وَلا نُضيعُ أَجرَ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार, हमने यूसुफ़ को उस धरती (देश) में अधिकार प्रदान किया। वह उसमें जहाँ चाहते, रहते थे। हम अपनी दया जिसे चाहें, प्रदान करते हैं और हम सदाचारियों का प्रतिफल नष्ट नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Is tarah humne us sar-zameen mein Yusuf ke liye iqteqar (power) ki raah humwaar ki. Woh mukhtar tha ke usmein jahan chahe apni jagah banaye. Hum apni rehmat se jisko chahte hain nawazte hain. Neik logon ka ajar hamare haan maara nahin jata
Roman Urdu (Junagarhi)Issi tarah hum ney yousuf (alh-e-salam) ko mulk ka qabza dey diya. Kay woh jahan kahin chahaiye rahey sahey hum jisay chahayen apni rehmat phoncha detay hain. Hum neko kaaron ka sawab zaya nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तारा हमने हमें सर-जमीन में यूसुफ के लिए इक्तेकार (शक्ति) की राह हमवार की। वो मुख्तार था के उसमें जहां चाहे अपनी जगह बने। हम अपनी रहमत से जिसको चाहते हैं नवाजते हैं। नेक लोगों का अजर हमारे हां मारा नहीं जाता
عَرَبِيوَلَأَجرُ الآخِرَةِ خَيرٌ لِلَّذينَ آمَنوا وَكانوا يَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय आख़िरत का बदला उन लोगों के लिए अधिक बेहतर है, जो ईमान लाए और अल्लाह से डरते रहे।
Roman Urdu (Maududi)Aur aakhirat ka ajar un logon ke liye zyada behtar hai jo iman le aaye aur khuda-tarsi ke saath kaam karte rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan eman daron aur perhezgaron ka ukhrawi ajar boht hi behtar hai
Devnagri Urdu (Maududi)और आखिरी का अजर उन लोगों के लिए ज्यादा बेहतर है जो ईमान ले आए और खुदा-तरसी के साथ काम करते रहेंगे
عَرَبِيوَجاءَ إِخوَةُ يوسُفَ فَدَخَلوا عَلَيهِ فَعَرَفَهُم وَهُم لَهُ مُنكِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यूसुफ़ के भाई आए, फिर वे उसके पास गए, तो उसने उन्हें पहचान लिया, जबकि वे उसे पहचान नहीं सके।
Roman Urdu (Maududi)Yusuf ke bhai Misr(egypt) aaye aur uske haan hazir huye, usne unhein pehchan liya magar woh ussey na-aashna thay
Roman Urdu (Junagarhi)Yousuf kay bhai aaye aur yousuf kay pass gaye to uss ney unhen pehchan liya aur unhon ney ussay na pehchana
Devnagri Urdu (Maududi)यूसुफ के भाई मिस्र (मिस्र) आए और उसके हां हाजिर हुए, उसने उन्हें पहचान लिया मगर वो उसे ना-आशना था
عَرَبِيوَلَمّا جَهَّزَهُم بِجَهازِهِم قالَ ائتوني بِأَخٍ لَكُم مِن أَبيكُم ۚ أَلا تَرَونَ أَنّي أوفِي الكَيلَ وَأَنا خَيرُ المُنزِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनका सामान तैयार कर दिया, तो कहा : मेरे पास अपने उस भाई को लेकर आना जो तुम्हारे बाप की ओर से है। क्या तुम नहीं देखते कि मैं पूरी माप देता हूँ तथा मैं उत्तम अतिथि-सत्कार करने वाला हूँ?
Roman Urdu (Maududi)Phir jab usne unka samaan tayyar karwa diya to chalte waqt unse kaha, “apne sautelay bhai ko mere paas lana, dekte nahin ho ke main kis tarah paimana bhar kar deta hoon aur kaisa accha mehmaan nawaz hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Jab unhen unn ka asbaab muhayya ker diya to kaha kay tum meray pass apney uss bhai ko bhi lana j tumharay baap say hai kiya tum ney nahi dekha kay mein poora naap ker deta hun aur mein hun bhi behtareen maizbaani kerney walon mein
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब उसने उनका सामान तय्यार करवा दिया तो चलते वक्त उनसे कहा, “अपने सौतेले भाई को मेरे पास लाना, देखते नहीं हो के मैं किस तरह पैमाना भर कर देता हूं और कैसा अच्छा मेहमान नवाज हूं
عَرَبِيفَإِن لَم تَأتوني بِهِ فَلا كَيلَ لَكُم عِندي وَلا تَقرَبونِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि तुम उसे मेरे पास न लाए, तो तुम्हारे लिए मेरे पास न कोई माप होगा और न तुम मेरे पास आना।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum usey na laaogey to mere paas tumhare liye koi galla (grain) nahin hai balke tum mere qareeb bhi na phatakna”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus agar tum ussay ley ker pass na aaye to meri taraf say tumhen koi naap bhi na milay bulkay tum meray qarib bhi na phatakna
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम उसे ना लाओगे तो मेरे पास तुम्हारे लिए कोई गल्ला (अनाज) नहीं है बलके तुम मेरे करीब भी ना फटकना”
عَرَبِيقالوا سَنُراوِدُ عَنهُ أَباهُ وَإِنّا لَفاعِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे बोले : हम उसके पिता को इसके लिए राज़ी करने का पूरा प्रयास करेंगे और हम अवश्य ऐसा करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha, “hum koshish karenge ke walid sahab usey bhejne par razi ho jayein, aur hum aisa zaroor karenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha acha hum uss kay baap ko uss ki babat phuslayen gay aur poori kosish keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने कहा, “हम कोशिश करेंगे के वालिद साहब उसे भेजने पर राजी हो जाएं, और हम ऐसा जरूर करेंगे”
عَرَبِيوَقالَ لِفِتيانِهِ اجعَلوا بِضاعَتَهُم في رِحالِهِم لَعَلَّهُم يَعرِفونَها إِذَا انقَلَبوا إِلىٰ أَهلِهِم لَعَلَّهُم يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यूसुफ़ ने अपने सेवकों को आदेश दिया : उनका मूलधन उनकी बोरियों में रख दो। ताकि वे उसे पहचान लें, जब वे अपने परिजनों की ओर वापस जाएँ, शायद वे फिर आ जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Yusuf ne apne ghulaamo ko ishara kiya ke “in logon ne galle ke evaz jo maal diya hai woh chupke se unke samaan hi mein rakhdo”. Yeh Yusuf ne is ummed par kiya ke ghar pahunch kar woh apna wapas paya hua maal pehchan jayenge (ya is fayyazi par ehsan-mand hongey) aur ajab nahin ke phir paltein
Roman Urdu (Junagarhi)Apney khidmat garon say kaha kay inn ki poonji enhi ki boriyon mein rakh do kay jab lot ker apney ehal-o-ayal mein jayen aur poonjiyon ko pehchan len to boht mumkin hai kay yeh phir lot ker aayen
Devnagri Urdu (Maududi)यूसुफ ने अपने ग़ुलामो को इशारा किया के "इन लोगों ने गले के बदले जो माल दिया है वो चुपके से उनके समान ही में रखदो"। ये युसुफ ने इस उम्मीद पर किया के घर पहुंच कर वो अपना वापस पाया हुआ माल पहचान जाएगा (या इस फैयाज़ी पर एहसान-मंद होंगे) और अजब नहीं के फिर पलटें
عَرَبِيفَلَمّا رَجَعوا إِلىٰ أَبيهِم قالوا يا أَبانا مُنِعَ مِنَّا الكَيلُ فَأَرسِل مَعَنا أَخانا نَكتَل وَإِنّا لَهُ لَحافِظونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वे अपने पिता के पास लौटे, तो कहा : ऐ हमारे पिता! हमसे (भविष्य में) माप रोक लिया गया है। अतः हमारे साथ हमारे भाई को भेजें कि हम माप (ग़ल्ला) लेकर आएँ और निःसंदेह हम उसकी अवश्य रक्षा करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh apne baap ke paas gaye to kaha “abbajaan, aainda humko galla dene se inkar kardiya gaya hai, lihaza aap hamare bhai ko hamare saath bhej dijiye taa-ke hum galla lekar aayein aur uski hifazat ke hum zimmedaar hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab yeh log lot ker apney walid kay pass gaye to kehney lagay kay hum say to ghallay ka naap rok liye gaya. Abb aap humaray sath humaray bhai ko bhejiye kay hum paymana bhar ker layen hum uss ki nigehbani kay zimmay daar hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो अपने बाप के पास गए तो कहा "अब्बाजान, आइंदा हमको गल्ला देने से इंकार कर दिया है, लिहाजा आप हमारे भाई को हमारे साथ भेज दीजिए ता-के हम गल्ला लेकर आएं और उसकी हिफाजत के हम जिम्मेदार हैं"
عَرَبِيقالَ هَل آمَنُكُم عَلَيهِ إِلّا كَما أَمِنتُكُم عَلىٰ أَخيهِ مِن قَبلُ ۖ فَاللَّهُ خَيرٌ حافِظًا ۖ وَهُوَ أَرحَمُ الرّاحِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(याक़ूब अलैहिस्सलाम) ने कहा : क्या मैं इसके बारे में तुम्हारा वैसे ही विश्वास करूँ, जैसे इससे पहले इसके भाई (यूसुफ़) के बारे में तुम्हारा विश्वास किया था? तो अल्लाह ही बेहतर संरक्षण करने वाला है और वह सब दया करने वालों से अधिक दया करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Baap ne jawab diya “kya main uske maamle mein tumpar waisa hi bharosa karoon jaisa issey phele uske bhai ke maamle mein kar chuka hoon? Allah hi behtar muhafiz (Guardian) hai aur woh sabse badhkar reham farmane wala hai”
Roman Urdu (Junagarhi)(Yaqoob alh-e-salam) ney kaha mujhay to iss ki babat tumhara waisa hi aitbaar hai jaisa kay iss say pehlay iss kay bhai kay baray mein tha bus Allah hi behtareen hafiz hai aur woh sab meharbano say bara meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)बाप ने जवाब दिया "क्या मैं उसके मामले में तुम्हारे जैसा ही भरोसा करूं जैसा पहले उसके भाई के मामले में कर चूका हूं? अल्लाह ही बेहतर मुहाफिज (अभिभावक) है और वो सबसे बढ़कर रहम फरमाने वाला है"
عَرَبِيوَلَمّا فَتَحوا مَتاعَهُم وَجَدوا بِضاعَتَهُم رُدَّت إِلَيهِم ۖ قالوا يا أَبانا ما نَبغي ۖ هٰذِهِ بِضاعَتُنا رُدَّت إِلَينا ۖ وَنَميرُ أَهلَنا وَنَحفَظُ أَخانا وَنَزدادُ كَيلَ بَعيرٍ ۖ ذٰلِكَ كَيلٌ يَسيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उन्होंने अपना सामान खोला, तो देखा कि उनका मूलधन उन्हें लौटा दिया गया है। वे बोल उठे : पिता जी! हमें और क्या चाहिए? यह हमारा धन हमें वापस कर दिया गया है। (अब) हम अपने घर वालों के लिए ग़ल्ला लाएँगे और अपने भाई की रक्षा करेंगे और एक ऊँट के बोझभर (ग़ल्ला) अधिक लाएँगे। यह माप तो बहुत आसान है।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab unhon ne apna samaan khola to dekha ke unka maal bhi unhein wapas kardiya gaya hai. Yeh dekh kar woh pukar utthey “abbajaan, aur humein kya chahiye, dekhiye yeh hamara maal bhi humein wapas de diya gaya hai. Bas ab hum jayenge aur apne ehal o ayal ke liye rasad (provisions of food) le ayenge , apne bhai ki hifazat bhi karenge aur ek barishtar (an extra camel load of corn) aur zyada bhi le ayenge. Inte galley ka izafa aasani ke saath ho jayega”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab unhon ney apna asbaab khola to to apna sarmaya mojood paya jo unn ki janib lota diya gaya tha. Kehney lagay aey humaray baap humen aur kiya chahaiye. Dekhiye to yeh humara sarmaya bhi humen wapis lota diya gaya hai. Hum apney khaandan ko rasad laa den gay aur apney bhai ki nigrani bhi rakhen gay aur aik oont kay bojh ka ghalla ziyada layen gay. Yeh naap to boht aasan hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब उन्होन ने अपना सामान खोला तो देखा के उनका माल भी उन्हें वापस कर दिया गया है। ये देख कर वो पुकार उठे "अब्बाजान, और हमें क्या चाहिए, देखिए ये हमारा माल भी हमने वापस दे दिया है। बस अब हम जाएंगे और अपने एहल ओ अयाल के लिए रसद (भोजन का प्रावधान) ले आएंगे, अपने भाई की हिफाजत भी करेंगे और एक बरिश्तार (मक्के का एक अतिरिक्त ऊँट भार) और ज़्यादा भी ले आयेंगे। इन्ते गैले का इज़ाफ़ा आसनी के साथ हो जाएगा”
عَرَبِيقالَ لَن أُرسِلَهُ مَعَكُم حَتّىٰ تُؤتونِ مَوثِقًا مِنَ اللَّهِ لَتَأتُنَّني بِهِ إِلّا أَن يُحاطَ بِكُم ۖ فَلَمّا آتَوهُ مَوثِقَهُم قالَ اللَّهُ عَلىٰ ما نَقولُ وَكيلٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उस (याक़ूब) ने कहा : मैं उसे तुम्हारे साथ हरगिज़ नहीं भेजूँगा, यहाँ तक कि तुम मुझसे अल्लाह के नाम पर प्रतिज्ञा करो कि उसे मेरे पास अवश्य लाओगे, सिवाय इसके कि तुम (सब) को घेर लिया जाए। फिर जब उन्होंने उसे अपना दृढ़ वचन दिया, तो उस (याक़ूब) ने कहा : हम जो कुछ कह रहे हैं, उसपर अल्लाह निरीक्षक (गवाह) है।
Roman Urdu (Maududi)Unke baap ne kaha “main isko hargiz tumhare saath na bhejunga jab tak ke tum Allah ke naam se mujhko paimaan (pledge) na de do ke isey mere paas zaroor wapas lekar aaogey, illa yeh ke kahin tum gher hi liye jao”. Jab unhon ne usko apne apne paiman de diye to usne kaha “dekho, hamare is qaul par Allah nigehbaan hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqoob (alh-e-salam) ney kaha! Mein to issay hergiz hergiz tumharay sath nahi bhejon ga jabtak tum Allah ko beech mein rakh ker mujhay qol-o-qarar na do kay tum issay meray pass phoncha do gay siwaye uss aik soorat kay tum sab giriftaar ker liye jao. Jab enhon ney pakka qol-o-qarar dey diya to enhon ney kaha kay hum jo kuch kehtay hain Allah uss per nigehban hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनके बाप ने कहा “मैं इसको हरगिज़ तुम्हारे साथ ना भेजूंगा जब तक तुम अल्लाह के नाम से मुझको पैमान (प्रतिज्ञा) ना दे दो इसके लिए मेरे पास जरूर वापस लेकर आओगे।” इल्ला ये के कहीं तुम घर ही ले जाओ”। जब उनहों ने उसको अपना पैमान दे दिया तो उसने कहा "देखो, हमारे इस क़ौल पर अल्लाह निगेहबान हैं"
عَرَبِيوَقالَ يا بَنِيَّ لا تَدخُلوا مِن بابٍ واحِدٍ وَادخُلوا مِن أَبوابٍ مُتَفَرِّقَةٍ ۖ وَما أُغني عَنكُم مِنَ اللَّهِ مِن شَيءٍ ۖ إِنِ الحُكمُ إِلّا لِلَّهِ ۖ عَلَيهِ تَوَكَّلتُ ۖ وَعَلَيهِ فَليَتَوَكَّلِ المُتَوَكِّلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (जब वे जाने लगे) तो याक़ूब ने कहा : ऐ मेरे बेटो! तुम एक ही द्वार से (मिस्र में) प्रवेश न करना, बल्कि अलग-अलग द्वारों से प्रवेश करना। और मैं तुम्हें अल्लाह की ओर से (आने वाली) किसी चीज़ से नहीं बचा सकता। आदेश तो केवल अल्लाह का चलता है। मैंने उसी पर भरोसा किया और भरोसा करने वालों को उसी पर भरोसा करना चाहिए।
Roman Urdu (Maududi)Phir usne kaha “ mere bacchon, Misr ke dar-ul-sultanat mein ek darwaze se dakhil na hona balke mukhtalif darwazon se jana. Magar main Allah ki mashiyat se tumko nahin bacha sakta, hukum uske siwa kisi ka bhi nahin chalta. Usi par maine bharosa kiya, aur jisko bhi bharosa karna ho usi par karey”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (yaqoob alh-e-salam) ney kaha aey meray bacho! Tum sab aik darwazay say na jana bulkay kaee juda juda darwazon mein say dakhil hona. Mein Allah ki taraf say aaney wali kissi cheez ko tum say nahi taal sakta. Hukum sirf Allah hi ka chalta hai. Mera kaamil bharosa ussi per hai aur her aik bharosa kerney walay ko ussi per bharosa kerna chahaiye
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उसने कहा "मेरे बच्चों, मिसर के दार-उल-सल्तनत में एक दरवाज़े से दाख़िल न होना बलके मुख़्तलिफ़ दरवाज़ों से जाना। मगर मैं अल्लाह की मशियत से तुमको नहीं बचा सकता, हुकुम उसके सिवा किसी का भी नहीं चलता
عَرَبِيوَلَمّا دَخَلوا مِن حَيثُ أَمَرَهُم أَبوهُم ما كانَ يُغني عَنهُم مِنَ اللَّهِ مِن شَيءٍ إِلّا حاجَةً في نَفسِ يَعقوبَ قَضاها ۚ وَإِنَّهُ لَذو عِلمٍ لِما عَلَّمناهُ وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उन्होंने (मिस्र में उस तरह) प्रवेश किया, जैसे उनके पिता ने उन्हें आदेश दिया था, वह उन्हें अल्लाह की ओर से आने वाली किसी चीज़ से नहीं बचा सकते थे; परंतु याक़ूब के दिल में एक इच्छा थी, जो उन्होंने पूरी कर ली। और निःसंदेह वह बड़े ज्ञानवान थे, इस वजह से कि हमने उन्हें ज्ञान प्रदान किया था। लेकिन अधिकांश लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Aur waqia bhi yahi hua ke jab woh apne baap ki hidayat ke mutabiq shehar mein (mutafarriq darwazon se) dakhil huey to uski yeh ehtiyati tadbeer Allah ki mashiyat ke muqable mein kuch bhi kaam na aa saki. Haan bas Yaqub ke dil mein jo ek khatak thi usey door karne ke liye usne apni si koshish karli. Beshak woh hamari di hui taleem se saahib-e-ilam tha magar aksar log maamle ki haqeeqat ko jaante nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jab woh unhi raaston say jin ka hukum unn kay walid ney unhen diya tha gaye kuch na tha kay Allah ney jo baat muqarrar ker di hai woh iss say unhen zara bhi bacha ley. Magar yaqoob (alh-e-salam) kay dil mein aik khayal (peda hua) jissay uss ney poora ker liya bila shuba woh humaray sikhlaye huye ilm ka aalim tha lekin aksar log nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيوَلَمّا دَخَلوا عَلىٰ يوسُفَ آوىٰ إِلَيهِ أَخاهُ ۖ قالَ إِنّي أَنا أَخوكَ فَلا تَبتَئِس بِما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब वे यूसुफ़ के पास प्रवेश किए, तो उन्होंने अपने भाई को अपने पास जगह दी।(और) कहा : निःसंदेह मैं तुम्हारा भाई (यूसुफ़) हूँ। अतः जो (दुर्व्यवहार) वे करते रहे हैं उसपर दुःखी न हो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log Yusuf ke huzoor pahunchey to usne apne bhai ko apne paas alag bula liya aur usey bata diya ke “ main tera wahi bhai hoon (jo khoya gaya tha). Ab tu un baaton ka gham na kar jo yeh log karte rahey hain.”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh sab jab yousuf kay pass phonch gaye to uss ney apney bhai ko apney pass bitha liya aur kaha kay mein tera bhai (yousuf) hun pus yeh jo kuch kertay rahey uss ka kuch ranj na ker
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग युसूफ के हुजूर थे तो हमने अपने भाई को अपने पास अलग बुला लिया और उसे बता दिया के " मैं तेरा वही भाई हूं (जो खोया गया) था) अब तू उन बातों का गम ना कर जो ये लोग कर रहे हैं।”
عَرَبِيفَلَمّا جَهَّزَهُم بِجَهازِهِم جَعَلَ السِّقايَةَ في رَحلِ أَخيهِ ثُمَّ أَذَّنَ مُؤَذِّنٌ أَيَّتُهَا العيرُ إِنَّكُم لَسارِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उसने उन्हें उनके सामान के साथ तैयार कर दिया, तो (अनाज) मापने का बर्तन अपने भाई के सामान में रख दिया। फिर एक पुकारने वाले ने पुकारा : ऐ क़ाफ़िले वालो! निःसंदेह तुम निश्चय चोर हो!
Roman Urdu (Maududi)Jab Yusuf in bhaiyon ka samaan ladhwane (loading) laga to usne apne bhai ke samaan mein apna pyala (cup) rakh diya. Phir ek pukarne waley ne pukar kar kaha “aey kafile walon, tum log chor ho.”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab unhen unn ka saman asbaab theek thaak ker kay diya to apney bhai kay asbaab mein pani ka piyala rakh diya. Phir aik aawaz denay walay ney pukar ker kaha aey qafilay walo! Tum log to chor ho
Devnagri Urdu (Maududi)जब युसूफ ने भाइयों का सामान लधवाने (लोडिंग) लगाया तो उसने अपने भाई के सामान में अपना प्याला (कप) रख दिया। फिर एक पुकारने वाले ने पुकार कर कहा "ऐ काफिले वालों, तुम लोग चोर हो।"
عَرَبِيقالوا وَأَقبَلوا عَلَيهِم ماذا تَفقِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे उनकी ओर मुतवज्जेह होकर बोले : तुम्हारी क्या चीज़ खो गई है?
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne palat kar pucha “tumhari kya cheez khoi gayi?”
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney unn ki taraf mun pher ker kaha kay tumhari cheez khoi gaee hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने पलट कर पूछा "तुम्हारी क्या चीज़ खो गई?"
عَرَبِيقالوا نَفقِدُ صُواعَ المَلِكِ وَلِمَن جاءَ بِهِ حِملُ بَعيرٍ وَأَنا بِهِ زَعيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हमें राजा का मापक नहीं मिल रहा है। और जो उसे ले आए, उसके लिए एक ऊँट का बोझ (ग़ल्ला) है और मैं उसके लिए गारंटी देता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Sarkari mulazimon ne kaha “baadshah ka paimana humko nahin milta” [aur unke jamadar (headman) ne kaha] “jo shaks laakar dega uske liye ek barishutar (camel load of corn) inaam hai, iska main zimma leta hoon.”
Roman Urdu (Junagarhi)Jawab diya kay shahi paymana gumm hai jo issay ley aaye ussay aik oont kay bojh ka ghalla milay ga. Iss waday kay mein zaamin hun
Devnagri Urdu (Maududi)सरकारी मुलाजिमों ने कहा "बादशाह का पैमाना हमको नहीं मिलता" [और उनके जमादार (मुखिया) ने कहा] "जो शक्स लाकर देगा उसके लिए एक बारीशूतार (मकई का ऊंट लादना) इनाम है, इसका मैं ज़िम्मा लेता हूं।"
عَرَبِيقالوا تَاللَّهِ لَقَد عَلِمتُم ما جِئنا لِنُفسِدَ فِي الأَرضِ وَما كُنّا سارِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : अल्लाह की क़सम! निश्चय तुम जान चुके हो कि हम इस देश में बिगाड़ पैदा करने नहीं आए हैं और न हम कभी चोर थे।
Roman Urdu (Maududi)Un bhaiyon ne kaha “khuda ki kasam tum log khoob jaante ho ke hum is mulk mein fasad karne nahin aaye hain, aur hum choriyan karne waley log nahin hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney kaha Allah ki qasam! Tum ko khoob ilm hai kay hum mulk mein fasad phelaney kay liye nahi aaye aur na hum chor hain
Devnagri Urdu (Maududi)उन भाइयों ने कहा "खुदा की कसम तुम लोग खूब जानते हो के हम इस मुल्क में फ़साद करने नहीं आये हैं, और हम चोरियाँ करने वाले लोग नहीं हैं"
عَرَبِيقالوا فَما جَزاؤُهُ إِن كُنتُم كاذِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों ने कहा : फिर उसका क्या दंड है, यदि तुम झूठे निकले?
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “accha, agar tumhari baat jhooti nikli to chor ki kya saza hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney kaha acha chor ki kiya saza hai agar tum jhootay ho
Devnagri Urdu (Maududi)उनहोंने कहा "अच्छा, अगर तुम्हारी बात झूठी निकली तो चोर की क्या सजा है?"
عَرَبِيقالوا جَزاؤُهُ مَن وُجِدَ في رَحلِهِ فَهُوَ جَزاؤُهُ ۚ كَذٰلِكَ نَجزِي الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : उसका दंड यह है कि जिसके सामान में वह पाया जाए, वही व्यक्ति उसका दंड है। हम अत्याचारियों को इसी प्रकार दंड देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “uski saza? Jiske samaan mein se cheez nikle woh aap hi apni saza mein rakh liya jaye, hamare haan to aise zalimon ko saza dene ka yahi tareeqa hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Jawab diya kay uss ki saza yehi hai kay jiss kay asbaab mein say paya jaye wohi uss ka badla hai. Hum to aisay zalimon ko yehi saza diya kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने कहा "उसकी सजा? जिसके समां में से चीज निकले वो आप ही अपनी सजा में रख लिया जाए, हमारे हां तो ऐसे जालिमों को सजा देने का यही तरीका है।"
عَرَبِيفَبَدَأَ بِأَوعِيَتِهِم قَبلَ وِعاءِ أَخيهِ ثُمَّ استَخرَجَها مِن وِعاءِ أَخيهِ ۚ كَذٰلِكَ كِدنا لِيوسُفَ ۖ ما كانَ لِيَأخُذَ أَخاهُ في دينِ المَلِكِ إِلّا أَن يَشاءَ اللَّهُ ۚ نَرفَعُ دَرَجاتٍ مَن نَشاءُ ۗ وَفَوقَ كُلِّ ذي عِلمٍ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)चुनाँचे उसने अपने (सगे) भाई के थैले से पहले, उनके थैलों की तलाशी शुरू की। फिर उसे अपने भाई के थैले से निकाला। इस प्रकार, हमने यूसुफ़ के लिए उपाय किया। वह राजा के नियम के अनुसार अपने भाई को नहीं रख सकते थे, परंतु यह कि अल्लाह चाहे। हम जिसके चाहते हैं, पद ऊँचे कर देते हैं और प्रत्येक ज्ञानवान से ऊपर एक बड़ा ज्ञानवान है।
Roman Urdu (Maududi)Tab Yusuf ne apne bhai se pehle unki khurjhiyon (packs) ki talashi lena shuru ki. Phir apne bhai ki khurjhi (pack) se gumshuda cheez baramad karli. Is tarah humne Yusuf ki taeed (support) apni tadbeer se ki , uska yeh kaam na tha ke baadshah ke deen ( yani Misr ki shahi kanoon) mein apne bhai ko pakadta illa yeh ke Allah hi aisa chahe. Hum jiske darje chahte hain buland kardete hain, aur ek ilm rakhne wala aisa hai jo har sahib-e-ilam se balaa-tarr hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus yousuf ney inn kay saman ki talash kerna shuroo ki apney bhai kay saman ki talashi say pehlay phir uss paymaney ko apnay bhai kay saman (zanbeel) say nikala. Hum ney yousuf kay liye issi tarah yeh tadbeer ki. Uss badshah kay qanoon ki roo say yeh apney bhai ko na ley sakta tha magar yeh kay Allah ko manzoor ho. Hum jiss kay chahayen darjay buland ker den her zee ilm per foqiyat rakhney wala doosra zee ilm mojood hai
Devnagri Urdu (Maududi)तब यूसुफ ने अपने भाई से पहले उनकी खुर्जियां (पैक) की तलाश लेना शुरू की। फिर अपने भाई की खुर्जी (पैक) से गमशुदा चीज़ बारामद कार्ली। इस तरह हमने यूसुफ की ताईद (समर्थन) अपनी तदबीर से की, उसका ये काम ना था के बादशाह के दीन (यानी मिस्र का शाही कानून) में अपने भाई को पकड़ता इल्ला ये के अल्लाह ही ऐसा चाहे। हम जिसके दर्जे चाहते हैं बुलंद करते हैं, और एक इल्म रखने वाला ऐसा है जो हर साहिब-ए-इलम से बला-तार है
عَرَبِي۞ قالوا إِن يَسرِق فَقَد سَرَقَ أَخٌ لَهُ مِن قَبلُ ۚ فَأَسَرَّها يوسُفُ في نَفسِهِ وَلَم يُبدِها لَهُم ۚ قالَ أَنتُم شَرٌّ مَكانًا ۖ وَاللَّهُ أَعلَمُ بِما تَصِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : यदि इसने चोरी की है, तो निःसंदेह इससे पहले इसके एक भाई ने भी चोरी की थी। तो यूसुफ़ ने इस बात को अपने दिल ही में रखा और उनके सामने प्रकट नहीं किया। (यूसुफ़ ने अपने मन में) कहा : तुम सबसे बुरे स्थान वाले हो और जो कुछ तुम वर्णन कर रहे हो, अल्लाह उसे सबसे अधिक जानता है।
Roman Urdu (Maududi)Un bhaiyon ne kaha “yeh chori karey to kuch taajub ki baat bhi nahin, issey pehle iska bhai (Yusuf) bhi chori kar chuka hai”. Yusuf unki yeh baat sunkar pee gyaa (suppressed his feelings) haqeeqat unpar na kholi , bas (zeri-e-lab) itna kehkar reh gaya ke “badey hi burey ho tumlog, (mere mooh dar mooh mujhpar) jo ilzaam tum laga rahey ho uski haqeeqat khuda khoob jaanta hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney kaha kay agar iss ney chori ki (to koi tajjub ki baat nahi) iss ka bhai bhi pehlay chori ker chuka hai yousuf (alh-e-salam) ney iss baat ko apney dil mein rakh liya aur inn kay samney bilkul zahir na kiya. Kaha kay tum bad tar jagah mein ho aur jo tum biyan kertay ho ussay Allah hi khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)उन भाइयों ने कहा "ये चोरी करे तो कुछ ताजुब की बात भी नहीं, इसके पहले इसका भाई (यूसुफ) भी चोरी कर चूका है"। युसूफ उनकी ये बात सुनकर पी गया (अपनी भावनाओं को दबाते हुए) हकीकत उन्पर ना खोली, बस (ज़ेरी-ए-लब) इतना कहकर रह गया के "बड़े ही बुरे हो तुमलोग, (मेरे मुंह डर मुंह मुझपर) जो इल्जाम तुम लगा रहे हो उसकी हकीकत खुदा खूब जानता है"
عَرَبِيقالوا يا أَيُّهَا العَزيزُ إِنَّ لَهُ أَبًا شَيخًا كَبيرًا فَخُذ أَحَدَنا مَكانَهُ ۖ إِنّا نَراكَ مِنَ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ अज़ीज़! इसका एक बहुत बूढ़ा पिता है। इसलिए आप हममें से किसी को इसके स्थान पर रख लीजिए। निःसंदेह हम आपको उपकारी देखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “aey sardar zi-iqtedar (Aziz), iska baap bahut booda aadmi hai, iski jagah aap hum mein se kisi ko rakh lijiye. Hum aapko bada hi neik nafs Insaan patey hain.”
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney kaha aey aziz-e-misir! Iss kay walid boht bari umar kay bilkul boorhay shaks hain. Aap iss kay badlay hum mein say kissi ko ley lijiye. Hum dekhtay hain kay aap baray nek nafs hain
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने कहा "ऐ सरदार ज़ि-इक़तेदार (अज़ीज़), इसका बाप बहुत बूड़ा आदमी है, इसकी जगह आप हम में से किसी को रख लीजिए। हम आपको बड़ा ही नहीं नफ़्स इंसान पाते हैं।"
عَرَبِيقالَ مَعاذَ اللَّهِ أَن نَأخُذَ إِلّا مَن وَجَدنا مَتاعَنا عِندَهُ إِنّا إِذًا لَظالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यूसुफ़ ने कहा : अल्लाह की शरण चाहते हैं कि हम उसके अतिरिक्त किसी को पकड़ें, जिसके पास हमने अपना सामान पाया है! निश्चय उस समय तो हम अत्याचारी ठहरेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Yusuf ne kaha “panaah ba khuda, dusre kisi shaks ko hum kaise rakh sakte hain, jiske paas humne apna maal paya hai usko chodh kar dusre ko rakkhenge to hum zalim hongey.”
Roman Urdu (Junagarhi)Yousuf (alh-e-salam) ney kaha hum ney jiss kay pass apni cheez paee hai uss kay siwa doosray ki giriftari kerney say Allah ki panah chahatay hain aisa kerney say to hum yaqeenan na insafi kerney walay hojayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)यूसुफ ने कहा "पनाह बा खुदा, दूसरे किसी शक्स को हम कैसे रख सकते हैं, जिसके पास हमने अपना माल पाया है उसको छोड़ कर दूसरे को रखेंगे तो हम जालिम होंगे।"
عَرَبِيفَلَمَّا استَيأَسوا مِنهُ خَلَصوا نَجِيًّا ۖ قالَ كَبيرُهُم أَلَم تَعلَموا أَنَّ أَباكُم قَد أَخَذَ عَلَيكُم مَوثِقًا مِنَ اللَّهِ وَمِن قَبلُ ما فَرَّطتُم في يوسُفَ ۖ فَلَن أَبرَحَ الأَرضَ حَتّىٰ يَأذَنَ لي أَبي أَو يَحكُمَ اللَّهُ لي ۖ وَهُوَ خَيرُ الحاكِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वे उनसे बिल्कुल निराश हो गए, तो परामर्श करते हुए अलग जा बैठे। उनके बड़े ने कहा : क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारे पिता ने तुमसे अल्लाह को गवाह बनाकर दृढ़ वचन लिया है? और इससे पहले तुमने यूसुफ़ के बारे में जो कोताही की? (अब) मैं इस धरती (मिस्र) से हरगिज़ नहीं हिलूँगा, यहाँ तक कि मेरे पिता मुझे अनुमति प्रदान कर दें, या अल्लाह मेरे लिए फैसला कर दे और वह सब फैसला करने वालों से बेहतर है।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh Yusuf se mayous ho gaye to ek goshey mein jaa kar aapas mein mashwara karne lagey. Un mein jo sabse bada tha woh bola “tum jantey nahin ho ke tumhare walid tumse khuda ke naam par kya ahad o paiman le chuke hain, aur issey pehle Yusuf ke maamle mein jo zyadati tum kar chuke ho woh bhi tumko maloom hai. Ab main to yahan se hargiz na jaunga jab tak ke mere walid mujhey ijazat na dein, ya phir Allah hi mere haqq mein koi faisla farma de, ke woh sab se behtar faisla karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jab yeh iss say mayus hogaye to tanahee mein beth ker mashwara kerney lagay. Inn mein jo sab say bara tha uss ney kaha tumhen maloom nahi kay tumharay walid ney tum say Allah ki qasam ley ker pukhta qol-o-qarar liya hai aur iss say pehlay yousuf kay baray mein tum kotahi ker chukay ho. Pus mein to iss sir zamin say na taloo ga jabtak walid shab khud mujhay ijazat na den ya Allah Taalaa meray iss moamlay ka faisla ker den wohi behtareen faisla kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो युसूफ से मयूस हो गए तो एक गोशे में जा कर आपस में मशवरा करने लगे। उन में जो सबसे बड़ा था वो बोला "तुम जानते नहीं हो के तुम्हारे वालिद तुमसे खुदा के नाम पर क्या अहद ओ पैमान ले चुके हैं, और इस पहले यूसुफ के मामले में जो ज्यादा तुम कर चुके हो वो भी तुमको मालूम है। अब मैं तो यहां से हरगिज ना जाऊंगा जब तक मेरे वालिद मुझे इजाज़त न दें, या फिर अल्लाह ही मेरे हक में कोई फैसला फरमा दे, के वो सब से बेहतर फैसला करने वाला है
عَرَبِيارجِعوا إِلىٰ أَبيكُم فَقولوا يا أَبانا إِنَّ ابنَكَ سَرَقَ وَما شَهِدنا إِلّا بِما عَلِمنا وَما كُنّا لِلغَيبِ حافِظينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम अपने पिता के पास लौट जाओ और कहो, ऐ हमारे पिता! आपके पुत्र ने चोरी की है और हमने वही कहा, जो हमने जाना और हम ग़ैब जानने वाले नहीं थे।
Roman Urdu (Maududi)Tum jaa kar apne walid se kaho ke “abbajaan , aapke sahibzadey ne chori ki hai. Humne usey chori karte huey nahin dekha, jo kuch humein maloom hua hai bas wahi hum bayan kar rahey hain, aur gaib ki nigehbani to hum na kar sakte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Tum sab walid shab ki khidmat mein wapis jao aur kaho kay abba ji! Aap kay shabzaday ney chori ki aur hum ney wohi gawahi di thi jo hum jantay thay. Hum kuch ghaib ki hifazat kerney walay na thay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम जा कर अपने वालिद से कहो के “अब्बाजान, आपके साहिबजादे ने चोरी की है। हमने उसे चोरी करते हुए नहीं देखा, जो कुछ हमें मालूम हुआ है बस वही हम बयां कर रहे हैं, और गैब की निगेबानी तो हम ना कर सकते थे
عَرَبِيوَاسأَلِ القَريَةَ الَّتي كُنّا فيها وَالعيرَ الَّتي أَقبَلنا فيها ۖ وَإِنّا لَصادِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप उस बस्ती वालों से पूछ लें, जिसमें हम थे और उस क़ाफ़िले से भी, जिसके साथ हम आए हैं। और निःसंदेह हम बिलकुल सच्चे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aap us basti ke logon se puch lijiye jahan hum thay us kafile se daryaft kar lijiye jiske saath hum aaye hain. Hum apne bayan mein bilkul sacchey hain.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap uss shehar kay logon say daryaft farma len jahan hum thay aur uss qafilay say bhi pooch len jiss kay sath hum aaye hain aur yaqeenan hum bilkul sachay hain
Devnagri Urdu (Maududi)आप हमें बस्ती के लोगों से पूछ लीजिए जहां हम थे हमें काफिले से डरायाफ्त कर लीजिए जिसके साथ हम आये हैं. हम अपने बयां में बिल्कुल सच्चे हैं।”
عَرَبِيقالَ بَل سَوَّلَت لَكُم أَنفُسُكُم أَمرًا ۖ فَصَبرٌ جَميلٌ ۖ عَسَى اللَّهُ أَن يَأتِيَني بِهِم جَميعًا ۚ إِنَّهُ هُوَ العَليمُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)याक़ूब ने कहा : (ऐसा नहीं है), बल्कि तुम्हारे दिलों ने एक बात बना ली है। इसलिए मेरा काम उत्तम सब्र है। आशा है कि अल्लाह उन सब को मेरे पास ले आएगा। निःसंदेह वही सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Baap ne yeh daastan sun kar kaha “ dar-asal tumahre nafs ne tumhare liye ek aur badi baat ko sahal(aasaan) bana diya. Accha ispar bhi sabr karunga aur bakhubi karunga. Kya baeed hai ke Allah un sab ko mujhse laa milaye, woh sab kuch jaanta hai aur uske sab kaam hikmat par mabni hain.”
Roman Urdu (Junagarhi)(Yaqoob alh-e-salam ney) kaha yeh to nahi bulkay tum ney apni taraf say baat bana li pus abb sabar hi behtar hai. Qarib hai kay Allah Taalaa inn sab ko meray pass hi phoncha dey. Wohi ilm-o-hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)बाप ने ये दास्तां सुन कर कहा “दर-असल तुम्हारे नफ्स ने तुम्हारे लिए एक और बड़ी बात को आसान बना दिया।” अच्छा इसपर भी सब्र करूंगा और खूबी करूंगा। क्या बुरा है के अल्लाह उन सबको मुझसे ला मिलाये, वो सब कुछ जानता है और उसके सब काम हिकमत पर मबनी हैं।”
عَرَبِيوَتَوَلّىٰ عَنهُم وَقالَ يا أَسَفىٰ عَلىٰ يوسُفَ وَابيَضَّت عَيناهُ مِنَ الحُزنِ فَهُوَ كَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और वह उनसे वापस फिरा और कहा : हाय अफ़सोस, यूसुफ़ की जुदाई पर! और उसकी दोनों आँखें शोक के कारण सफेद हो गईं। तो वह शोक से भरा हुआ था।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh unki taraf se mooh pher kar baith gaya aur kehne laga ke “haaye Yusuf!” woh dil hi dil mein gham se ghuta jaa raha tha aur uski aankhein safed padh gayi thi
Roman Urdu (Junagarhi)Phir unn say mun pher liya aur kaha haaye yousuf! Inn ki aankhen ba waja ranj-o-ghum kay safaid ho chuki thin aur woh ghum ko dabaye huye thay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो उनकी तरफ से मुंह फेर कर बैठ गया और कहने लगा के "हाय यूसुफ!" वो दिल ही दिल में ग़म से घुटा जा रहा था और उसकी आँखें सफेद पढ़ गई थीं
عَرَبِيقالوا تَاللَّهِ تَفتَأُ تَذكُرُ يوسُفَ حَتّىٰ تَكونَ حَرَضًا أَو تَكونَ مِنَ الهالِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : अल्लाह की क़सम! आप बराबर यूसुफ़ को याद करते रहेंगे, यहाँ तक कि (शोक से) घुल जाएँ या अपना विनाश कर लें।
Roman Urdu (Maududi)Beton ne kaha “khuda-ra! Aap to bas Yusuf hi ko yaad kiye jatey hain naubat yeh aa gayi hai ke uske ghum mein apne aap ko ghula dein ya apni jaan halaak kar daalenge.”
Roman Urdu (Junagarhi)Beton ney kaha wallah! Aap hamesha yousuf ki yaad mein hi lagay rahen gay yahan tak kay ghul jayen ya khatam hi ho jayen
Devnagri Urdu (Maududi)बेटों ने कहा "ख़ुदा-रा! आप तो बस युसुफ़ ही को याद किये जाते हैं नौबत ये आ गई है के उसके गम में अपने आप को घुला दें या अपनी जान हलाक कर डालेंगे।"
عَرَبِيقالَ إِنَّما أَشكو بَثّي وَحُزني إِلَى اللَّهِ وَأَعلَمُ مِنَ اللَّهِ ما لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : मैं तो अपने दुःख तथा शोक की शिकायत केवल अल्लाह से करता हूँ और मैं अल्लाह की ओर से वह (बात) जानता हूँ, जो तुम नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “ main apni pareshani aur apne gham ki fariyad Allah ke siwa kisi se nahin karta. Aur Allah se jaisa main waqif hoon tum nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha mein to apni pareshaniyon aur ranj ki faryad Allah hi say ker raha hun mujhay Allah ki taraf say woh baaten maloom hain jo tum nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा " मैं अपनी परेशानी और अपने गम की फरियाद अल्लाह के सिवा किसी से नहीं करता। और अल्लाह से जैसा मैं वाकिफ हूं तुम नहीं हो
عَرَبِييا بَنِيَّ اذهَبوا فَتَحَسَّسوا مِن يوسُفَ وَأَخيهِ وَلا تَيأَسوا مِن رَوحِ اللَّهِ ۖ إِنَّهُ لا يَيأَسُ مِن رَوحِ اللَّهِ إِلَّا القَومُ الكافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे बेटो! जाओ और यूसुफ़ तथा उसके भाई का पता लगाओ। और अल्लाह की दया से निराश न हो। वास्तव में, अल्लाह की दया से वही निराश होते हैं, जो काफ़िर हैं।
Roman Urdu (Maududi)Mere bacchon, jaa kar Yusuf aur uske bhai ki kuch tohh lagao (make a search). Allah ki rehmat se mayous na ho, uski rehmat se to bas kafir hi mayous hua karte hain.”
Roman Urdu (Junagarhi)Meray piyaray bacho! Tum jao aur yousuf (alh-e-salam) ki aur uss kay bhai ki poori talash kero aur Allah ki rehmat say na umeed na ho. Yaqeenan rab ki rehmat say na umeed wohi hotay hain jo kafir hotay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मेरे बच्चों, जा कर यूसुफ और उसके भाई की कुछ तो लगाओ। अल्लाह की रहमत से मायुस न हो, उसकी रहमत से तो बस काफिर ही मायुस हुआ करते हैं।”
عَرَبِيفَلَمّا دَخَلوا عَلَيهِ قالوا يا أَيُّهَا العَزيزُ مَسَّنا وَأَهلَنَا الضُّرُّ وَجِئنا بِبِضاعَةٍ مُزجاةٍ فَأَوفِ لَنَا الكَيلَ وَتَصَدَّق عَلَينا ۖ إِنَّ اللَّهَ يَجزِي المُتَصَدِّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब (यूसुफ़ के भाई) उनके पास (मिस्र) गए, तो कहा : ऐ अज़ीज़! हमपर और हमारे घर वालों पर विपत्ति (अकाल) आ पड़ी है और हम थोड़ा-सा धन (मूल्य) लाए हैं। लेकिन हमें पूरी-पूरी माप प्रदान करें और हमें दान (भी) दें। निःसंदेह अल्लाह दान करने वालों को बदला देता है।
Roman Urdu (Maududi)Jab yeh log Misr jaa kar Yusuf ki peshi mein dakhil huey to unhon ne arz kiya ke “aey sardar ba iqtedar , hum aur hamare ehal o ayal sakht museebat mein mubtala hain aur hum kuch hakeer si poonji lekar aaye hain, aap humein bharpur galla inayat farmayein aur humko khairaat dein, Allah khairaat karne walon ko jaza deta hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab yeh log yousuf (alh-e-salam) kay pass phonchay to kehney lagay aey aziz! Hum ko aur humaray khaandan ko dukh phoncha hai. Hum haqeer poonji laye hain pus aap humen pooray ghallay ka naap dijiye aur hum per kheyraat kijiye Allah Taalaa kheyraat kerney walon ko badla deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जब ये लोग मिसर जा कर यूसुफ की पेशी में दख़िल हुए तो उन्होन ने अर्ज़ किया के "ए सरदार बा इक्तेदार, हम और हमारे एहल ओ अयाल सख्त मुसीबत में मुबतला हैं और हम कुछ हकीर सी पूंजी लेकर आये हैं, आप हमें भरपुर गल्ला इनायत फरमायें और हमको खैरात दें, अल्लाह खैरात करने वालों को जजा देता है।”
عَرَبِيقالَ هَل عَلِمتُم ما فَعَلتُم بِيوسُفَ وَأَخيهِ إِذ أَنتُم جاهِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यूसुफ़ ने कहा : क्या तुम्हें ज्ञात है कि तुमने यूसुफ़ तथा उसके भाई के साथ क्या कुछ किया, जब तुम नासमझ थे?
Roman Urdu (Maududi)(Yeh sunkar Yusuf se na raha gaya) usne kaha, “tumhein kuch yeh bhi maaloom hai ke tumne Yusuf aur uske bhai ke saath kya kiya tha jabke tum nadaan thay.”
Roman Urdu (Junagarhi)Yousuf ney kaha kay jantay bhi ho kay tum ney yousuf aur uss kay bhai kay sath apni nadani ki halat mein kiya kiya
Devnagri Urdu (Maududi)(ये सुनकर यूसुफ़ से ना रहा गया) उसने कहा, "तुम्हें कुछ ये भी मालूम है कि तुमने यूसुफ़ और उसके भाई के साथ क्या किया था जब तुम नादान थे।"
عَرَبِيقالوا أَإِنَّكَ لَأَنتَ يوسُفُ ۖ قالَ أَنا يوسُفُ وَهٰذا أَخي ۖ قَد مَنَّ اللَّهُ عَلَينا ۖ إِنَّهُ مَن يَتَّقِ وَيَصبِر فَإِنَّ اللَّهَ لا يُضيعُ أَجرَ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : क्या निश्चय वास्तव में आप ही यूसुफ़ हैं? यूसुफ़ ने कहा : मैं यूसुफ़ हूँ और यह मेरा भाई है। निश्चय अल्लाह ने हमपर उपकार किया है। निःसंदेह जो (अल्लाह से) डरता है तथा धैर्य रखता है, तो अल्लाह सदाचारियों का प्रतिफल नष्ट नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Woh chaunk kar bole “kya tum Yusuf ho?” usne kaha, “haan , main Yusuf hoon aur yeh mera bhai hai. Allah ne humpar ehsan farmaya. Haqeeqat yeh hai ke agar koi taqwa aur sabr se kaam ley to Allah ke haan aise neik logon ka ajar maara nahin jata.”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha kiya (waqaee) tu hi yousuf (alh-e-salam) hai. Jawab diya kay haan mein yousuf (alh-e-salam) hun aur yeh mera bhai hai. Allah ney hum per fazal-o-karam kiya. Baat yeh hai kay jo bhi perhezgari aur sabar keray to Allah Taalaa kissi neko kaar ka ajar zaya nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)वो चौंक कर बोले "क्या तुम यूसुफ हो?" उसने कहा, "हां, मैं यूसुफ हूं और ये मेरा भाई है। अल्लाह ने हमपर एहसान फरमाया। हकीकत ये है कि अगर कोई तकवा और सब्र से काम ले तो अल्लाह के हां ऐसे नए लोगों का अजर मारा नहीं जाता।"
عَرَبِيقالوا تَاللَّهِ لَقَد آثَرَكَ اللَّهُ عَلَينا وَإِن كُنّا لَخاطِئينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : अल्लाह की क़सम! निश्चय अल्लाह ने आपको हमपर श्रेष्ठता प्रदान की है। निःसंदेह हम वास्तव में दोषी थे।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “ba-khuda ke tumko Allah ne humpar fazilat bakshi aur waqayi hum khatakaar thay.”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha Allah ki qasam! Allah Taalaa ney tujhay hum per bartari di hai aur yeh bhi bilkul sach hai kay hum khata kaar thay
Devnagri Urdu (Maududi)उन्होन ने कहा "बा-खुदा के तुमको अल्लाह ने हमपर फजीलत बख्शी और वक्ती हम ख़तरा थे।"
عَرَبِيقالَ لا تَثريبَ عَلَيكُمُ اليَومَ ۖ يَغفِرُ اللَّهُ لَكُم ۖ وَهُوَ أَرحَمُ الرّاحِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यूसुफ़ ने कहा : आज तुम्हारी कोई भर्त्सना नहीं की जाएगी। अल्लाह तुम्हें क्षमा करे। वह दया करने वालों में सबसे अधिक दया करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Usne jawab diya, “aaj tumpar koi giraft nahin , Allah tumhein maaf karey, woh sab se badhkar reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jawab diya aaj tum per koi malamat nahi. Allah tumhen bakhshay woh sab meharbano say bara meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसने जवाब दिया, "आज तुमपर कोई गिरफ़्तार नहीं, अल्लाह तुम्हें माफ़ करे, वो सब से बढ़कर रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِياذهَبوا بِقَميصي هٰذا فَأَلقوهُ عَلىٰ وَجهِ أَبي يَأتِ بَصيرًا وَأتوني بِأَهلِكُم أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)मेरा यह कुर्ता ले जाओ और उसे मेरे पिता के चेहरे पर डाल दो, वह देखने लगेंगे। और अपने सभी घर वालों को मेरे पास ले आओ।
Roman Urdu (Maududi)Jao, mera yeh kamees le jao aur mere walid ke mooh par daal do, unki binayi palat aayegi. Aur apne sab ehal-o-ayal ko mere paas le aao.”
Roman Urdu (Junagarhi)Mera yeh kurta tum ley jao aur issay meray walid kay mun per daal do kay woh dekhney lagen aur aajayen aur apney tamam khaandan ko meray pass ley aao
Devnagri Urdu (Maududi)जाओ, मेरा ये कमीज़ ले जाओ और मेरे वालिद के मुँह पर डाल दो, उनकी बिनयि पलट आएगी। और अपने सब एहल-ओ-अयाल को मेरे पास ले आओ।”
عَرَبِيوَلَمّا فَصَلَتِ العيرُ قالَ أَبوهُم إِنّي لَأَجِدُ ريحَ يوسُفَ ۖ لَولا أَن تُفَنِّدونِ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब क़ाफ़िला चल पड़ा, तो उनके पिता ने कहा : निःसंदेह मुझे यूसुफ़ की सुगंध आ रही है, यदि तुम मुझे बहका हुआ न समझो।
Roman Urdu (Maududi)Jab yeh kafila (Misr se) rawana hua to unke baap ne (kanaan mein) kaha “main Yusuf ki khusboo mehsoos kar raha hoon, tum log kahin yeh na kehne lago ke main budhape mein satiya gaya hoon.”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab yeh qafila juda hua to unn kay walid ney kaha mujhay to yousuf ki khushboo aarahi hai agar tum mujhay sathyaya hua qarar na do
Devnagri Urdu (Maududi)जब ये काफिला (मिस्र से) रावना हुआ तो उनके बाप ने (कानन में) कहा "मैं यूसुफ की खुशबू महसूस कर रहा हूं, तुम लोग कहीं ये ना कहने लगो के मैं बुढ़ापे में सात हो गया हूं।"
عَرَبِيقالوا تَاللَّهِ إِنَّكَ لَفي ضَلالِكَ القَديمِ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों ने कहा : अल्लाह की क़सम! निश्चय आप अपनी पुरानी भ्रांति ही में पड़े हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ghar ke log bole “khuda ki kasam aap abhi tak apne usi purane khabt (old illusion) mein padey huey hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kehney lagay kay wallah apney issi puraney khabt mein mubtila hain
Devnagri Urdu (Maududi)घर के लोग बोले "खुदा की कसम आप अभी तक अपने उसी पुराने ख़ब्ते (पुराने भ्रम) में पड़े हैं"
عَرَبِيفَلَمّا أَن جاءَ البَشيرُ أَلقاهُ عَلىٰ وَجهِهِ فَارتَدَّ بَصيرًا ۖ قالَ أَلَم أَقُل لَكُم إِنّي أَعلَمُ مِنَ اللَّهِ ما لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जैसे ही शुभ सूचना देने वाला आया, उसने वह (कुर्ता) उनके मुख पर डाल दिया तो वह फिर से देखने लगे। कहने लगे : क्या मैंने तुमसे कहा नहीं था कि निःसंदेह मैं अल्लाह की ओर से जो जानता हूँ, तुम नहीं जानते?
Roman Urdu (Maududi)Phir jab khush-khabri laney wala aaya to usne Yusuf ka kamees Yaqub ke mooh par daal diya aur yakayak uski binayi oad kar aayi (sight carne back to him) . Tab usne kaha “main tumse kehta na tha main Allah ki taraf se woh kuch jaanta hoon jo tum nahin jantey.”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab khushkhabri denay walay ney phonch ker unn kay mun per woh kurta dala ussi waqt woh phir say beena hogaye. Kaha! Kiya mein tum say na kaha kerta tha kay mein Allah ki taraf say woh baaten janta hun jo tum nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब ख़ुश-ख़बरी लेने वाला आया तो उसने युसुफ़ का कमीज़ याक़ूब के मुँह पर डाल दिया और यक़ीन उसकी बिनयि ओद कर आई। उसे) । तब उसने कहा, "मैं तुमसे कहता था ना कि मैं अल्लाह की तरफ से वह कुछ जानता हूं जो तुम नहीं जानते।"
عَرَبِيقالوا يا أَبانَا استَغفِر لَنا ذُنوبَنا إِنّا كُنّا خاطِئينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ हमारे पिता! हमारे लिए हमारे पापों की क्षमा के लिए प्रार्थना करें। निश्चय हम ही दोषी थे।
Roman Urdu (Maududi)Sab bol utthey “abbajaan, aap hamare gunaahon ki bakshish ke liye dua karein, waqayi hum khatakaar thay.”
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney kaha abba ji! Aap humaray liye gunahon ki bakhsish talab kijiye be-shal hum qusoor waar hain
Devnagri Urdu (Maududi)सब बोल उत्थे "अब्बाजान, आप हमारे गुनाहों की बख्शीश के लिए दुआ करें, वाकाई हम खतरनाक थे।"
عَرَبِيقالَ سَوفَ أَستَغفِرُ لَكُم رَبّي ۖ إِنَّهُ هُوَ الغَفورُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)उस (याक़ूब) ने कहा : मैं तुम्हारे लिए अपने पालनहार से क्षमा की प्रार्थना करूँगा। निःसंदेह वही अत्यंत क्षमा करने वाला, असीम दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha ‘main apne Rubb se tumhare liye maafi ki darkhwast karunga, woh bada maaf karne wala aur raheem hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Kaha acha mein jald hi tumharay liye apney perwerdigar say bakhsish maangoo ga woh boht bara bakhshney wala aur nihayat meharbani kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा 'मैं अपने रब से तुम्हारे लिए माफ़ी की अंधेरगर्दी करुंगा, वो बड़ा माफ़ करने वाला और रहीम है।'
عَرَبِيفَلَمّا دَخَلوا عَلىٰ يوسُفَ آوىٰ إِلَيهِ أَبَوَيهِ وَقالَ ادخُلوا مِصرَ إِن شاءَ اللَّهُ آمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वे यूसुफ़ के पास पहुँचे, तो उन्होंने अपने माता-पिता को अपने पास जगह दी और कहा : सुरक्षित वि निश्चिंत मिस्र में प्रवेश करो, यदि अल्लाह ने चाहा।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab yeh log Yusuf ke paas pahunche to usne apne walidain ko apne saath bitha liya aur (apne sab kumbe walon se ) kaha “ chalo ab shehar mein chalo, Allah ne chaha to aman chain se rahoge.”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab yeh sara gharana yousuf kay pass phonch gaya to yousuf ney apney maa baap ko apney pass jagah di aur kaha kay Allah ko manzoor hai to aap sab aman-o-amaan kay sath misir mein aao
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब ये लोग युसूफ के पास पहुंचें तो हमने अपने वलियों को अपने साथ बिठा लिया और (अपने सब कुंबे वालों से) कहा " चलो अब शहर में चलो, अल्लाह ने चाहा तो अमन चैन से रहोगे।"
عَرَبِيوَرَفَعَ أَبَوَيهِ عَلَى العَرشِ وَخَرّوا لَهُ سُجَّدًا ۖ وَقالَ يا أَبَتِ هٰذا تَأويلُ رُؤيايَ مِن قَبلُ قَد جَعَلَها رَبّي حَقًّا ۖ وَقَد أَحسَنَ بي إِذ أَخرَجَني مِنَ السِّجنِ وَجاءَ بِكُم مِنَ البَدوِ مِن بَعدِ أَن نَزَغَ الشَّيطانُ بَيني وَبَينَ إِخوَتي ۚ إِنَّ رَبّي لَطيفٌ لِما يَشاءُ ۚ إِنَّهُ هُوَ العَليمُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसने अपने माता-पिता को सिंहासन पर ऊँचा बिठाया और सब उन (यूसुफ़) के आगे सजदे में गिर गए और यूसुफ़ ने कहा : ऐ मेरे पिता! यह मेरे पहले के स्वप्न का अर्थ है। निःसंदेह मेरे पालनहार ने उसे सच कर दिया। तथा निःसंदेह उसने मुझपर उपकार किया, जब मुझे कारावास से निकाला और आप लोगों को गाँव से ले आया, इसके पश्चात् कि शैतान ने मेरे तथा मेरे भाइयों के बीच झगड़ा डाल दिया। निःसंदेह मेरा पालनहार जो चाहे, उसका सूक्ष्म उपाय करने वाला है। निश्चय वही सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Shehar mein daakhil honay ke baad) usne apne walidain ko utha kar apne paas takht par bithaya aur sab uske aage be ikhtiyar sajde mein jhuk gaye. Yusuf ne kaha “abbajaan, yeh tabeer hai mere us khwab ki jo maine pehle dekha tha, mere Rubb ne usey haqeeqat bana diya. Uska ehsan hai ke usne mujhey qaid-khane se nikala aur aap logon ko sehra se laakar mujhse milaya, halanke shaytan mere aur mere bhaiyon ke darmiyan fasaad daal chuka tha. Waqiya yeh hai ke mera Rubb gair mehsoos tadbeeron (mysterious ways) se apni mashiyat puri karta hai, beshak woh aleem aur hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney takht per apney maa baap ko ooncha bithaya aur sab uss kay samney sajday mein girr gaye. Tab kaha kay abba ji! Yeh meray pehlay kay khuwab ki tabeer hai meray rab ney ussay sacha ker dikhaya uss ney meray sath bara ehsan kiya jab kay mujhay jail khaney say nikala aur aap logon ko sehra say ley aaya uss ikhtilaaf kay baad jo shetan ney mujh mein aur meray bhaiyon mein daal diya tha. Mera rab jo chahaye uss kay liye behtareen tadbeer kerney wala hai. Aur woh boht ilm-o-hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(शहर में दाख़िल होने के बाद) उसने अपने वलियों को उठा कर अपने पास तख्त पर बिठाया और सब उसके आगे बे इख्तियार सजदे में झुक गए। यूसुफ ने कहा "अब्बाजान, ये ताबीर है मेरे उस ख्वाब की जो मैंने पहले देखा था, मेरे रब ने उसे हकीकत बना दिया। उसका एहसान है के उसने मुझे कैद-खाने से निकाला और आप लोगों को सेहरा से लाकर मुझसे मिलाया, हलांके शैतान मेरे और मेरे भाइयों के दरमियान फसाद डाल चुका वाक़िया ये है के मेरा रब ग़ैर महसूस तदबीरों (रहस्यमय तरीके) से अपनी मशियत पूरी करता है, बेशक वो आलिम और हकीम है
عَرَبِي۞ رَبِّ قَد آتَيتَني مِنَ المُلكِ وَعَلَّمتَني مِن تَأويلِ الأَحاديثِ ۚ فاطِرَ السَّماواتِ وَالأَرضِ أَنتَ وَلِيّي فِي الدُّنيا وَالآخِرَةِ ۖ تَوَفَّني مُسلِمًا وَأَلحِقني بِالصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे पालनहार! तूने मुझे राज्य में से हिस्सा प्रदान किया तथा बातों के अर्थ (असल तथ्य) में से कुछ सिखाया। ऐ आकाशों तथा धरती के पैदा करने वाले! दुनिया तथा आख़िरत में तू ही मेरा संरक्षक है। मुझे मुसलमान होने की अवस्था में मृत्यु दे और मुझे सदाचारियों से मिला दे।
Roman Urdu (Maududi)Aey mere Rubb, tu nay mujhey hukumat bakshi aur mujhko baaton ki teh tak pahunchna sikhaya. Zameen o aasmaan ke banane waley, tu hi duniya aur aakhirat mein mera sarparast hai, mera khatma Islam par kar aur anjaam e kaar mujhey saliheen ke saath mila”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meray perwerdigar! Tu ney mujhay mulk ata farmaya aur tu ney mujhay khuwab ki tabeer sikhlaee. Aey aasman-o-zamin kay peda kerney walay! Tu hi duniya aur aakhirat mein mera wali (dost) aur kaar saaz hai tu mujhay islam ki halat mein fot ker aur neko mein mila dey
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ मेरे रब, तू नहीं मुझे हुकूमत बख्शी और मुझको बातों की तह तक। पाहुंचना सिखाया। ज़मीन ओ आसमान के बनाने वाले, तू ही दुनिया और आख़िरत में मेरा सरपरस्त है, मेरा ख़तमा इस्लाम पर कर और अंजाम ए कार मुझे सालिहें के साथ मिला''
عَرَبِيذٰلِكَ مِن أَنباءِ الغَيبِ نوحيهِ إِلَيكَ ۖ وَما كُنتَ لَدَيهِم إِذ أَجمَعوا أَمرَهُم وَهُم يَمكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) ये ग़ैब (परोक्ष) के कुछ समाचार हैं, जो हम आपकी ओर वह़्य करते हैं। और आप उन (भाइयों) के पास नहीं थे, जब उन्होंने अपने काम का दृढ़ निश्चय किया और वे गुप्त उपाय कर रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad) yeh qissa gaib ki khabron mein se hai jo hum tumpar wahee kar rahey hain, warna tum us waqt maujood na thay jab Yusuf ke bhaiyon ne aapas mein ittefaq karke saazish ki thi
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh ghaib ki khabron mein say hai jiss ki hum aap ki taraf wahee ker rahey hain. Aap unn kay pass na thay jab kay unhon ney apni baat thaan li thi aur woh fareb kerney lagay thay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद) ये क़िस्सा गैब की ख़बरों में से है जो हम तुमपर वही कर रहे हैं, वरना तुम उस वक्त मौजुद न थे जब यूसुफ के भाइयों ने आपस में इत्तेफाक करके साजिश की थी
عَرَبِيوَما أَكثَرُ النّاسِ وَلَو حَرَصتَ بِمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अधिकांश लोग, अगरचे आप उत्सुक हों, हरगिज़ ईमान लाने वाले नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar tum khwa kitna hi chaho inmein se aksar log maan kar dene waley nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Go aap laakh chahayen lekin aksar log eman daar na hongay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर तुम ख्वा कितना ही चाहो इनमें से अक्सर लोग मान कर देने वाले नहीं हैं
عَرَبِيوَما تَسأَلُهُم عَلَيهِ مِن أَجرٍ ۚ إِن هُوَ إِلّا ذِكرٌ لِلعالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि आप उनसे इस (धर्म प्रचार) पर कोई पारिश्रमिक नहीं माँगते। यह (क़ुरआन) तो संसार वालों के लिए मात्र एक उपदेश है।
Roman Urdu (Maududi)Halanke tum is khidmat par insey koi ujrat bhi nahin maangte ho, yeh to ek naseehat hai jo duniya walon ke liye aam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap inn say iss per koi ujrat talab nahi ker rahey hain. Yeh to tamam duniya kay liye niri naseehat hi naseehat hai
Devnagri Urdu (Maududi)हालंके तुम इस खिदमत पर इनसे कोई उजरत भी नहीं माँगते हो, ये तो एक हिदायत है जो दुनिया वालों के लिए आम है
عَرَبِيوَكَأَيِّن مِن آيَةٍ فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ يَمُرّونَ عَلَيها وَهُم عَنها مُعرِضونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आकाशों और धरती में कितनी ही निशानियाँ हैं, जिनपर से वे गुज़रते हैं और वे उनपर ध्यान नहीं देते।
Roman Urdu (Maududi)Zameen aur aasmano mein kitni hi nishaniyan hain jinpar se yeh log guzarte rehte hain aur zara tawajju nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmanon aur zamin mein bhot si nishaniyan hain. Jin say yeh mun moray guzr rahey jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन और आसमान में कितनी ही निशानियाँ हैं जिनपर से ये लोग गुज़रते रहते हैं और ज़रा तवज्जु नहीं करते
عَرَبِيوَما يُؤمِنُ أَكثَرُهُم بِاللَّهِ إِلّا وَهُم مُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनमें से अधिकांश अल्लाह पर ईमान नहीं रखते, परंतु इस हाल में कि वे साझी ठहराने वाले होते हैं।
Roman Urdu (Maududi)In mein se aksar Allah ko maante hain magar is tarah ke uske saath dusron ko shareek thehrate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein say aksar log ba-wajood Allah per eman rakhney kay bhi mushrik hi hain
Devnagri Urdu (Maududi)इनमें अक्सर अल्लाह को मानते हैं मगर है तरह के उसके साथ दूसरों को शरीक ठहरते हैं
عَرَبِيأَفَأَمِنوا أَن تَأتِيَهُم غاشِيَةٌ مِن عَذابِ اللَّهِ أَو تَأتِيَهُمُ السّاعَةُ بَغتَةً وَهُم لا يَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वे निर्भय हो गए हैं कि उनपर अल्लाह की यातना में से कोई ढांक लेने वाली विपत्ति आ पड़े, या उनपर अचानक क़ियामत आ जाए और वे सोचते भी न हों?
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh mutmaeen hain ke khuda ke azaab ki koi balaa inhein daboch na legi ya bekhabri mein qayamat ki ghadi achanak inpar na aa jaayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh iss baat say bey khof hogaye hain kay inn kay pass Allah kay azabon mein say koi aam azab aajaye ya inn per achanak qayamt toot paray aur woh bey khabar hi hon
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये मुतमइन हैं के खुदा के अज़ाब की कोई बला इन्हें दबोच ना लेगी या बेखबरी में कयामत की घड़ी अचानक अंदर ना आ जाएगी
عَرَبِيقُل هٰذِهِ سَبيلي أَدعو إِلَى اللَّهِ ۚ عَلىٰ بَصيرَةٍ أَنا وَمَنِ اتَّبَعَني ۖ وَسُبحانَ اللَّهِ وَما أَنا مِنَ المُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें : यही मेरा रास्ता है। मैं और मेरा अनुसरण करने वाले पूर्ण अंतर्दृष्टि तथा स्पष्ट प्रमाण के साथ अल्लाह की ओर बुलाते हैं। तथा अल्लाह पवित्र है और मैं मुश्रिकों (बहुदेववादियों) में से नहीं हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Tum insey saaf kehdo ke” mera rasta to yeh hai , main Allah ki taraf bulata hoon, main khud bhi puri roshni mein apna rasta dekh raha hoon aur mere saathi bhi, aur Allah paak hai aur shirk karne walon se mera koi waasta nahin.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay meri raah yehi hai. Mein aur meray muttabeyeen Allah ki taraf bula rahey hain pooray yaqeen aur aetmaad kay sath. Aur Allah pak hai aur mein mushrikon mein nahi
Devnagri Urdu (Maududi)तुम इनसे साफ कहदो के” मेरा रास्ता तो ये है, मैं अल्लाह की तरफ बुलाता हूं, मैं खुद भी पूरी रोशनी में अपना रास्ता देख रहा हूं और मेरे साथी भी, और अल्लाह पाक है और शिर्क करने वालों से मेरा कोई वास्ता नहीं।'
عَرَبِيوَما أَرسَلنا مِن قَبلِكَ إِلّا رِجالًا نوحي إِلَيهِم مِن أَهلِ القُرىٰ ۗ أَفَلَم يَسيروا فِي الأَرضِ فَيَنظُروا كَيفَ كانَ عاقِبَةُ الَّذينَ مِن قَبلِهِم ۗ وَلَدارُ الآخِرَةِ خَيرٌ لِلَّذينَ اتَّقَوا ۗ أَفَلا تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने आपसे पहले बस्तियों के रहने वालों में से केवल पुरुषों को नबी बनाकर भेजे, जिनकी ओर हम वह़्य किया करते थे। तो क्या ये धरती में चले-फिरे नहीं, कि देखते उनका परिणाम कैसा हुआ, जो इनसे पहले थे? और निश्चय आख़िरत (परलोक) का घर उनके लिए उत्तम है, जो अल्लाह से डरते रहे। तो क्या तुम समझते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), tumse pehle humne jo paighambar bhejey thay woh sab bhi Insan hi thay, aur inhi bastiyon ke rehne walon mein se thay, aur unhi ki taraf hum wahee bhejte rahey hain. Phir kya yeh log zameen mein chale phire nahin hain ke un qaumon ka anjaam inhein nazar na aaya jo insey pehle guzar chuki hain? Yaqeenan aakhirat ka ghar un logon ke liye aur zyada behtar hai jinhon ne (paigambaron ki baat maan kar) taqwe ke rawish ikhtiyar ki. Kya ab bhi tum log na samjhogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aap say pehlay basti walon mein hum ney jitney rasool bhejay hain sab mard hi thay jinki taraf hum wahee nazil farmatay gaye. Kiya zamin mein chal phir ker enhon ney dekha nahi kay inn say pehlay kay logon ka kaisa kuch anjam hua? Yaqeenan aakhirat ka ghar perhezgaron kay liye boht hi behtar hai kiya phir bhi tum nahi samajhtay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), तुमसे पहले हमने जो पैगम्बर भेजा था वो सब भी इंसान ही था, और इन्हीं बस्तियों के रहने वालों में से थे, और उनकी तरफ हम वही भेज रहे हैं क़ौमों का अंजाम इन्हें नज़र ना आया जो इनसे पहले गुज़र चुकी हैं? यक़ीनन आख़िरत का घर उन लोगों के लिए और ज़्यादा बेहतर है जिन्हों ने (पैगम्बरों की बात मान कर) तकवे के रवीश इख्तियार की। क्या अब भी तुम लोग ना समझोगे
عَرَبِيحَتّىٰ إِذَا استَيأَسَ الرُّسُلُ وَظَنّوا أَنَّهُم قَد كُذِبوا جاءَهُم نَصرُنا فَنُجِّيَ مَن نَشاءُ ۖ وَلا يُرَدُّ بَأسُنا عَنِ القَومِ المُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि जब रसूल बिलकुल निराश हो गए और लोगों को विश्वास हो गया कि निश्चय उनसे झूठ बोला गया था, तो उनके पास हमारी सहायता आ गई। फिर हम जिसे चाहते थे, उसे बचा लिया गया। और हमारी यातना अपराधियों से हटाई नहीं जाती।
Roman Urdu (Maududi)(pehle paigambaron ke saath bhi yahi hota raha hai ke woh muddaton naseehat karte rahey aur logon ne sunkar na diya) yahan tak ke jab paigambar logon se mayous ho gaye aur logon ne bhi samajh liya ke unse jhoot bola gaya tha, to yakayak hamari madad paigambaron ko pahunch gayi .Phir jab aisa mauqa aa jata hai to hamara qaida yeh hai ke jisey hum chahte hain bacha lete hain aur mujrimon par se to hamara azaab taala hi nahin jaa sakta
Roman Urdu (Junagarhi)Yahan tak kay jab rasool na umeed honey lagay aur woh (qom kay log) khayal kerney lagay kay unhen jhoot kaha gaya foran hi humari madad unn kay pass aa phonchi jissay hum ney chaha ussay nijat di gaee. Baat yeh hai kay humara azab gunehgaron say wapis nahi kiya jata
Devnagri Urdu (Maududi)(पहले पैगम्बरों के साथ भी यही हो रहा है कि वो मुद्दतों की हिदायतें करते रहे और लोगों ने सुनकर ना दिया) यहां तक ​​के जब पैगम्बर लोगों से मयुस हो गए और लोगों ने भी समझ लिया के उनसे झूठ बोला गया था, तो यकीनन हमारी मदद पैगम्बरों को नहीं मिल पाई। फिर जब ऐसा मौका आ जाता है तो हमारा कायदा ये है कि जिसे हम चाहते हैं बच्चा लेते हैं और मुजरिमों पर से तो हमारा अजब ताला ही नहीं जा सकता
عَرَبِيلَقَد كانَ في قَصَصِهِم عِبرَةٌ لِأُولِي الأَلبابِ ۗ ما كانَ حَديثًا يُفتَرىٰ وَلٰكِن تَصديقَ الَّذي بَينَ يَدَيهِ وَتَفصيلَ كُلِّ شَيءٍ وَهُدًى وَرَحمَةً لِقَومٍ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह उनकी कहानियों में, बुद्धिमानों के लिए बड़ी शिक्षा है। यह (क़ुरआन) हरगिज़ ऐसी बात नहीं, जो गढ़ ली जाए। लेकिन इससे पहले की पुस्तकों की पुष्टि करने वाला और प्रत्येक वस्तु का विवरण (ब्योरा) है, तथा उन लोगों के लिए, जो ईमान (विश्वास) रखते हैं, मार्गदर्शन और दया है।
Roman Urdu (Maududi)Agle logon ke in qisson mein aqal-o-hosh rakhne walon ke liye ibrat hai. Yeh jo kuch Quran mein bayan kiya jaa raha hai yeh banawati baatein nahin hain balke jo kitabein issey pehle aayi hui hain unhi ki tasdeeq hai, aur har cheez ki tafseel aur iman laney walon ke liye hidayat aur rehmat
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay biyan mein aqal walon kay liye yaqeenan naseehat aur ibrat hai yeh quran jhoot banaee hui baat nahi bulkay yeh tasdeeq hai unn kitabon ki jo iss say pehlay ki hain khol khol ker biyan kerney wala hai her cheez ko aur hidayat ko aur rehmat hai eman daar logon kay liye
Devnagri Urdu (Maududi)क़िस्सों में अगले लोगों के अक़ल-ओ-होश रखने वालों के लिए इबरत है। ये जो कुछ कुरान में बयान किया जा रहा है ये बनवाती बातें नहीं हैं बल्के जो किताबें इसे पहले आई हुई हैं उनकी तस्दीक है, और हर चीज की तफसील और ईमान लाने वालों के लिए हिदायत और रहमत
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Surah 12: Yusuf (Joseph)

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Surah 12: Yusuf (Joseph)

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Surah 12: Yusuf (Joseph)

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Surah 12: Yusuf (Joseph)

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Surah 12: Yusuf (Joseph)

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Surah 13: Ar-Ra'd (The Thunder)

Medinan🕐 Revelation #96📜 43 Verses🕮 Juz 1
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Surah 13: Ar-Ra'd (The Thunder)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالمر ۚ تِلكَ آياتُ الكِتابِ ۗ وَالَّذي أُنزِلَ إِلَيكَ مِن رَبِّكَ الحَقُّ وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يُؤمِنونَ
हिन्दी (Al-Omari)अलिफ़॰ लाम॰ मीम॰ रा॰। ये पूर्ण पुस्तक (क़ुरआन) की आयतें हैं। और जो कुछ (ऐ नबी!) आपपर, आपके पालनहार की ओर से उतारा गया है, सर्वथा सत्य है। परंतु अधिकतर लोग ईमान (विश्वास) नहीं लाते।
Roman Urdu (Maududi)Alif laam Meem Raa Yeh kitab-e-ilahi ki aayat hain, aur jo kuch tumhare Rubb ki taraf se tumpar nazil kiya gaya hai woh ain haqq hai, magar (tumhari qaum ke) aksar log maan nahin rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Alif –laam-meem-raa yeh quran ki aayaten hain aur jo kuch aap ki taraf aap kay rab ki janib say utara jata hai sab haq hai lekin aksar log eman nahi latay
Devnagri Urdu (Maududi)अलिफ़ लाम मीम रा ये किताब-ए-इलाही की आयत हैं, और जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है वो ऐन हक़ है, मगर (तुम्हारी क़ौम के) अक्सर लोग मान नहीं रहे हैं
عَرَبِياللَّهُ الَّذي رَفَعَ السَّماواتِ بِغَيرِ عَمَدٍ تَرَونَها ۖ ثُمَّ استَوىٰ عَلَى العَرشِ ۖ وَسَخَّرَ الشَّمسَ وَالقَمَرَ ۖ كُلٌّ يَجري لِأَجَلٍ مُسَمًّى ۚ يُدَبِّرُ الأَمرَ يُفَصِّلُ الآياتِ لَعَلَّكُم بِلِقاءِ رَبِّكُم توقِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह वह है, जिसने आकाशों को बिना स्तंभों के ऊँचा किया, जिन्हें तुम देखते हो। फिर वह अर्श (सिंहासन) पर बुलंद हुआ। तथा सूरज और चाँद को वशीभूत किया। प्रत्येक एक नियत समय के लिए चल रहा है। वह हर काम की व्यवस्था करता है। वह निशानियों को विस्तार से बयान करता है, ताकि तुम अपने पालनहार से मिलने का विश्वास कर लो।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi hai jisne aasmano ko aisey saharon (support) ke bagair qayam kiya jo tumko nazar aatey hon, phir woh apne takht e sultanat par jalwa farma hua, aur usne aftaab (Sun) o mahtaab (Moon) ko ek kanoon ka paband banaya. Is sarey nizam ki har cheez ek waqt-e-muqarrar tak ke liye chal rahi hai. Aur Allah hi is sarey kaam ki tadbeer farma raha hai. Woh nishaniyan khol khol kar bayan karta hai, shayad ke tum apne Rubb ki mulaqat ka yaqeen karo
Roman Urdu (Junagarhi)Allah woh hai jiss ney aasmanon ko baghair sutonon kay buland ker rakha hai kay tum ussay dekh rahey ho. Phir woh arsh per qarar pakray huye hai ussi ney sooraj aur chand ko ma-tehati mein laga rakha hai. Her aik miyad-e-moyyen per gasht ker raha hai wohi kaam ki tadbeer kerta hai woh apney nishanaat khol khol ker biyan ker raha hai kay tum apney rab ki mulaqat ka yaqeen kerlo
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह हाय है जिसने आसमानों को ऐसे सहरों (समर्थन) के बिना क़याम किया जो तुमको नज़र आते थे, फिर वो अपनी तख्त ए सल्तनत पर जलवा फरमा हुआ, और उसने आफताब (सूरज) ओ महताब (चांद) को एक कानून का बंधन बनाया। इस सारे निज़ाम की हर चीज़ एक वक़्त-ए-मुकर्रर तक के लिए चल रही है। और अल्लाह हाय सारे काम की तद्बीर फरमा रहा है। वो निशानियां खोल-खोल कर बयान करता है, शायद के तुम अपने रब की मुलाकात का यकीन करो
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي مَدَّ الأَرضَ وَجَعَلَ فيها رَواسِيَ وَأَنهارًا ۖ وَمِن كُلِّ الثَّمَراتِ جَعَلَ فيها زَوجَينِ اثنَينِ ۖ يُغشِي اللَّيلَ النَّهارَ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِقَومٍ يَتَفَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वही है, जिसने धरती को फैलाया और उसमें पर्वत और नदियाँ बनाईं और प्रत्येक फल के दो-दो प्रकार बनाए। वह रात को दिन पर उढ़ा देता है। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो सोच-विचार करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur wahi hai jisne zameen phayla rakkhi hai, is mein pahadon ke khunte gaad rakkhe hain aur dariya baha diye hain , usi ne har tarah ke phalon (fruits) ke jodey paida kiye hain, aur wahi din par raat taari karta hai. In saari cheezon mein badi nishaniyan hain un logon ke liye jo gaur o fikr se kaam letey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney zamin phela ker bicha di hai aur iss mein pahar aur nehren peda ker di hain. Aur iss mein her qisam kay phalon kay joray dohra dohray peda ker diye hain woh raat ko din say chupa deta hai. Yaqeenan ghor-o-fikar kerney walon kay liye iss mein boht si nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)और वही है जिसने जमीन फैला रखी है, इस में पहाड़ों के खूंटे गाड़ रखे हैं और दरिया बहा दिए हैं, उसी ने हर तरह के फल (फल) के जोडे पेदा किये हैं, और वही दिन पर रात तारी करता है। सारी चीज़ों में बड़ी निशानियाँ हैं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फ़िक्र से काम लेते हैं
عَرَبِيوَفِي الأَرضِ قِطَعٌ مُتَجاوِراتٌ وَجَنّاتٌ مِن أَعنابٍ وَزَرعٌ وَنَخيلٌ صِنوانٌ وَغَيرُ صِنوانٍ يُسقىٰ بِماءٍ واحِدٍ وَنُفَضِّلُ بَعضَها عَلىٰ بَعضٍ فِي الأُكُلِ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِقَومٍ يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और धरती में आपस में मिले हुए विभिन्न खंड हैं, तथा अंगूरों के बाग़, खेती और खजूर के पेड़ हैं, कई तनों वाले और एक तने वाले, जो एक ही जल से सींचे जाते हैं, और हम उनमें से कुछ को स्वाद आदि में कुछ से बढ़ा देते हैं। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो सूझ-बूझ रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur dekho, zameen mein alag alag khittey (regions) paye jatey hain jo ek dusre se muttasil (close to one another) waqeh hain angoor ke baagh hain, khetiyan hain, khajoor ke darakht hain jinmein se kuch ekehre(single) hain aur kuch dohre(double trunk). Sabko ek hi pani sairaab karta hai magar mazey mein hum kisi ko behtar bana dete hain aur kisi ko kamtar. In sab cheezon mein bahut si nishaniyan hain un logon ke liye jo aqal se kaam lete hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur zamin mein mukhtalif tukray aik doosray say lagtay lagatay hain aur angooron kay baghaat hain aur khet hain aur khujooron kay darakht hain shaakh daar aur baaz aisay hain jo bey shaakh hain sab aik hi pani pilaye jatay hain. Phir bhi hum aik ko aik per phalon mein bartari detay hain iss mein aql madon kay liye boht si nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)और देखो, ज़मीन में अलग-अलग खित्ते (क्षेत्र) पाये जाते हैं जो एक दूसरे से मुत्तसिल (एक दूसरे के करीब) वक़्त हैं अंगूर के बाग़ हैं, खेतियाँ हैं, खजूर के दरख्त हैं जिनमें से कुछ अकेले (सिंगल) हैं और कुछ दोहरे (डबल ट्रंक)। सबको एक ही पानी साराब करता है मगर मजे में हम किसी को बेहतर बना देते हैं और किसी को कमतर। सब चीज़ों में बहुत सी निशानियाँ हैं उन लोगों के लिए जो अक़ल से काम लेते हैं
عَرَبِي۞ وَإِن تَعجَب فَعَجَبٌ قَولُهُم أَإِذا كُنّا تُرابًا أَإِنّا لَفي خَلقٍ جَديدٍ ۗ أُولٰئِكَ الَّذينَ كَفَروا بِرَبِّهِم ۖ وَأُولٰئِكَ الأَغلالُ في أَعناقِهِم ۖ وَأُولٰئِكَ أَصحابُ النّارِ ۖ هُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यदि आप आश्चर्य करते हैं, तो उनका यह कहना बुत आश्चर्यपूर्ण है कि क्या जब हम मिट्टी हो जाएँगे, तो क्या वास्तव में हम निश्चय एक नया जीवन पाएँगे। यही लोग हैं जिन्होंने अपने पालनहार के साथ कुफ़्र किया, तथा यही हैं जिनकी गर्दनों में तौक़ होंगे और यही नरक वाले हैं, वे उसमें सदैव रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar tumhein tajjub karna hai to tajjub ke qabil logon ka yeh qaul hai ke “jab hum marr kar mitti ho jayenge to kya hum naye sirey se paida kiye jayenge?” Yeh woh log hain jinhon ne apne Rubb se kufr kiya hai, yeh woh log hain jinki gardano mein tauq(tauq/fetters) padey huey hain, yeh jahannumi hain aur hamesha rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tujhay tajjub ho to waqaee unn ka yeh kehna ajeeb hai kay kiya jab hum mitti hojayen gay to kiya hum naee pedaeesh mein hongay? Yehi woh log hain jnhon ney apney perwerdigar say kufur kiya. Yehi hain jin ki gardano mein toq hongay. Aur yehi hain jo jahannum kay rehney walay hain jo iss mein hamesha hamesh rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर तुम्हें तज्जुब करना है तो तज्जुब के काबिल लोगों का ये क़ौल है के "जब हम मर कर मिट्टी हो जायेंगे तो क्या हम नये सिरे से पैदा किये जायेंगे?" ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने रब से कुफ्र किया है, ये वो लोग हैं जिनके गर्दानो में तौक (तौक/बेड़ियाँ) पड़े हुए हैं, ये जहन्नुमी हैं और हमेशा रहेंगे
عَرَبِيوَيَستَعجِلونَكَ بِالسَّيِّئَةِ قَبلَ الحَسَنَةِ وَقَد خَلَت مِن قَبلِهِمُ المَثُلاتُ ۗ وَإِنَّ رَبَّكَ لَذو مَغفِرَةٍ لِلنّاسِ عَلىٰ ظُلمِهِم ۖ وَإِنَّ رَبَّكَ لَشَديدُ العِقابِ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे आपसे भलाई (रहमत) से पहले बुराई (यातना) को जल्दी माँगते हैं। जबकि इनसे पहले कई शिक्षाप्रद यातनाएँ गुज़र चुकी हैं। और निःसंदेह आपका पालनहार निश्चय लोगों को उनके अत्याचार के बावजूद बहुत क्षमा करने वाला है। तथा निःसंदेह आपका पालनहार निश्चय कड़ी यातना देने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log bhalayi se pehle burayi ke liye jaldi macha rahey hain, halanke insey pehle (jo log is rawish par chale hain unpar khda ke azaab ki) ibrat-naak misaalein guzar chuki hain. Haqeeqat yeh hai ke tera Rubb logo ki zyadatiyon ke bawajood unke saath chashm-poshi (forbearance) se kaam leta hai aur yeh bhi haqeeqat hai ke tera Rubb sakht saza dene wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo tujh say (saza ki talbi mein) jaldi ker rahey hain rahat say pehlay hi yaqeenan inn say pehlay sazayen (bator misal) guzar chuki hain aur be-shak tera rab albata bakhshney wala hai logon kay bey jaa zulm per bhi. Aur yeh bhi yaqeeni baat hai kay tera rab bari sakht saza deney wala bhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग भलाई से पहले बुराई के लिए जल्दी मचा रहे हैं, हलांके इनसे पहले (जो लोग इस रवीश पर चले हैं उनपर खुदा के अज़ाब की) इब्रत-नाक मिसालें गुजर चुकी हैं। हकीकत ये है के तेरा रब लोगो की ज्यादतियों के साथ उनके साथ चश्मे-पोशी (सहनशीलता) से काम लेता है और ये भी हकीकत है के तेरा रब सख्त सजा देने वाला है
عَرَبِيوَيَقولُ الَّذينَ كَفَروا لَولا أُنزِلَ عَلَيهِ آيَةٌ مِن رَبِّهِ ۗ إِنَّما أَنتَ مُنذِرٌ ۖ وَلِكُلِّ قَومٍ هادٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो काफ़िर हो गए, वे कहते हैं : उसपर उसके पालनहार की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं उतारी गई? आप तो केवल एक डराने वाले हैं। तथा प्रत्येक जाति के लिए एक मार्गदर्शक है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log jinhon ne tumhari baat maanne se inkar kardiya hai, kehte hain ke “Is shaks par iske Rubb ki taraf se koi nishani kyun na utari? Tum to mehaz khabardaar kardene waley ho, aur har qaum ke liye ek rehnuma hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kafir kehtay hain kay iss per iss kay rab ki taraf say koi nishani (moajzza) kiyon nahi utari gaee. Baat yeh hai kay aap to sirf aagah ker denay walay hain aur her qom kay liye hadi hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग जिन्हों ने तुम्हारी बात मन से इंकार कर दिया है, कहते हैं के “इस शक्स पर इसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों ना उतारी? तुम तो महज़ ख़बरदार होने वाले हो, और हर क़ौम के लिए एक रहनुमा है
عَرَبِياللَّهُ يَعلَمُ ما تَحمِلُ كُلُّ أُنثىٰ وَما تَغيضُ الأَرحامُ وَما تَزدادُ ۖ وَكُلُّ شَيءٍ عِندَهُ بِمِقدارٍ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह जानता है जो हर मादा (अपने पेट में) उठाए हुए है तथा जो कुछ गर्भाशय कम करते हैं और जो ज़्यादा करते हैं। और प्रत्येक चीज़ उसके यहाँ एक अनुमान से है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ek ek haamila (pregnant) ke pait se waqif hai, jo kuch usmein banta hai usey bhi woh jaanta hai aur jo kuch ismein kami ya beshi hoti hai ussey bhi woh bakhabar rehta hai. Har cheez ke liye uske haan ek miqdar muqarrar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Mada apney shikam mein jo kuch rakhti hai ussay Allah bakhoobi janta hai aur pet ka ghatna barhna bhi her cheez uss kay pass andazay say hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह एक हामिला (गर्भवती) के पति से वाकिफ है, जो कुछ उसमें बनता है उसे भी वह जानता है और जो कुछ इसमें कामी या बेशी होती है उसमें भी वह खबर रहता है। हर चीज के लिए उसके हां एक मिकदर मुकर्रर है
عَرَبِيعالِمُ الغَيبِ وَالشَّهادَةِ الكَبيرُ المُتَعالِ
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हिन्दी (Al-Omari)वह परोक्ष और प्रत्यक्ष को जानने वाला, बहुत बड़ा, अत्यंत ऊँचा है।
Roman Urdu (Maududi)Woh posheeda aur zaahir, har cheez ka aalim hai, woh buzurg hai aur har haal mein baala-tar rehne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Zahir-o-posheeda ka woh aalim hai (sab say) bara aur (sab say) buland-o-bala
Devnagri Urdu (Maududi)वो पोशीदा और जाहिर, हर चीज का आलिम है, वो बुजुर्ग है और हर हाल में बाला-तर रहने वाला है
عَرَبِيسَواءٌ مِنكُم مَن أَسَرَّ القَولَ وَمَن جَهَرَ بِهِ وَمَن هُوَ مُستَخفٍ بِاللَّيلِ وَسارِبٌ بِالنَّهارِ
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हिन्दी (Al-Omari)तुममें से जो चुपके से बात करे और जो ऊँची आवाज़ में बोले तथा जो रात के अंधेरे में छिपा हुआ है और जो दिन के उजाले में चलने वाला है, (उसके लिए) बराबर है।
Roman Urdu (Maududi)Tum mein se koi shaks khwa zoar se baat karey ya aahista, aur koi raat ki tareeki (darkness) mein chupa hua ho ya din ki roshni mein chal raha ho, uske liye sab yaksan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum mein say kissi ka pani baat ko chupa ker kehna aur ba-aawaz-e-buland ussay kehna aur jo raat ko chupa ho aur jo din mein chal raha ho sab Allah per barabar-o-yaksan hain
Devnagri Urdu (Maududi)तुम में से कोई शक्स ख्वा जोर से बात करे या आहिस्ता, और कोई रात की तारीकी (अंधेरे) में छुपा हुआ हो या दिन की रोशनी में चल रहा हो, उसके लिए सब यक्सन है
عَرَبِيلَهُ مُعَقِّباتٌ مِن بَينِ يَدَيهِ وَمِن خَلفِهِ يَحفَظونَهُ مِن أَمرِ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لا يُغَيِّرُ ما بِقَومٍ حَتّىٰ يُغَيِّروا ما بِأَنفُسِهِم ۗ وَإِذا أَرادَ اللَّهُ بِقَومٍ سوءًا فَلا مَرَدَّ لَهُ ۚ وَما لَهُم مِن دونِهِ مِن والٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उसके लिए उसके आगे और उसके पीछे बारी-बारी आने वाले कई पहरेदार (फरिश्ते) हैं, जो अल्लाह के आदेश से उसकी रक्षा करते हैं। निःसंदेह अल्लाह किसी जाति की दशा नहीं बदलता, जब तक वे स्वयं अपनी दशा न बदल लें। तथा जब अल्लाह किसी जाति के साथ बुराई का निश्चय कर ले, तो उसे हटाने का कोई उपाय नहीं, और उसके अलावा उनका कोई सहायक नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Har shaks ke aage aur peechey uske muqarrar kiye huey nigraan lage huey hain jo Allah ke hukum se uski dekh-bhal kar rahey hain. Haqeeqat yeh hai ke Allah kisi qaum ke haal ko nahin badalta jab tak woh khud apne awsaf ko nahin badal deti, aur jab Allah kisi qaum ki shamat(retribution) laney ka faisla karle to phir woh kisi ke taaley nahin tal sakti, na Allah ke muqable mein aisi qaum ka koi haami o madadgaar ho sakta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Uss kay pehray daar insan kay aagay peechay muqarrar hain jo Allah kay hukum say iss ki nigehbani kertay hain. Kissi qom ki halat Allah Taalaa nahi badalta jabtak kay woh khud ussay na badlen jo unn kay dilon mein hai. Allah Taalaa jab kissi qom ki saza ka irada ker leta hai to woh badla nahi kerta aur siwaye uss kay koi bhi unn ka kaar saaz nahi
Devnagri Urdu (Maududi)हर शक्स के आगे और पीछे उसके मुकर्रर किये हुए निगरान लगे हुए हैं जो अल्लाह के हुकुम से उसकी देख-भाल कर रहे हैं। हकीकत ये है कि अल्लाह किसी कौम के हाल को नहीं बदल सकता, जब तक वो खुद अपने अवसाफ को नहीं बदल देता, और जब अल्लाह किसी कौम की शामत (प्रतिशोध) लाने का फैसला करले तो फिर वो किसी के ताले नहीं बदल सकता, ना अल्लाह के मुकाबले में ऐसी कौम का कोई हामी ओ मददगार हो सकता है
عَرَبِيهُوَ الَّذي يُريكُمُ البَرقَ خَوفًا وَطَمَعًا وَيُنشِئُ السَّحابَ الثِّقالَ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है जो तुम्हें डराने और आशा दिलाने के लिए बिजली दिखाता है और भारी बादल पैदा करता है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jo tumhare saamne bijliyan chamkata hai jinhein dekh kar tumhein andeshe(fear) bhi lahaq hotey hain aur umeedein bhi bandhti hai, wahi hai jo pani se laday huey badal utarta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh Allah hi hai jo tumhen bijli ki chamak daraney aur umeed dilaney kay liye dikhata hai aur bhari baadlon ko peda kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जो तुम्हारे सामने बिजली चमकता है जिन्हें देख कर तुम्हें अंदेशे (डर) भी लहक होते हैं और उम्मीदें भी बांधती है, वही है जो पानी से लड़े हुए बादल उतारता है
عَرَبِيوَيُسَبِّحُ الرَّعدُ بِحَمدِهِ وَالمَلائِكَةُ مِن خيفَتِهِ وَيُرسِلُ الصَّواعِقَ فَيُصيبُ بِها مَن يَشاءُ وَهُم يُجادِلونَ فِي اللَّهِ وَهُوَ شَديدُ المِحالِ
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हिन्दी (Al-Omari)और बादल की गरज, अल्लाह की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का वर्णन करती है, और फ़रिश्ते भी उसके भय से (उसकी पवित्रता का गुणगान करते हैं)। और वह कड़कने वाली बिजलियाँ भेजता है, फिर उन्हें जिसपर चाहता है, गिरा देता है, जबकि वे अल्लाह के बारे में झगड़ रहे होते हैं, और वह बहुत शक्ति वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Badalon ki garaj uski hamd ke saath uski paaki bayan karti hai aur farishte uski haibat(awe) se larazte huey uski tasbeeh karte hain. Woh kadakti hui bijliyon ko bhejta hai aur (basa auqat) unhein jispar chahta hai ain is haal mein gira deta hai jabke log Allah ke barey mein jhagad rahey hotey hain. Fil waqeh uski chaal badi zabardast hai
Roman Urdu (Junagarhi)Garj iss ki tasbeeh-o-tareef kerti hai aur farishtay bhi iss kay khof say. Wohi aasman say bijliyan girata hai aur jiss per chahata hai uss per dalta hai kuffaar Allah ki babat larr jhagar rahey hain aur Allah sakht qooat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)बादलों की गरज उसकी हम्द के साथ उसकी पाकी बयां करती है और फरिश्ते उसकी हैबत(आवे) से लरजते हुए उसकी तस्बीह करते हैं। वो ताकत हुई बिजली को भेजता है और (बासा औकात) उन्हें जिसका प्यार चाहता है ऐन इस हाल में गिरा देता है जबके लोग अल्लाह के बारे में झगड़ा करते रहते हैं। फिल वक़हे उसकी चाल बड़ी ज़बरदस्त है
عَرَبِيلَهُ دَعوَةُ الحَقِّ ۖ وَالَّذينَ يَدعونَ مِن دونِهِ لا يَستَجيبونَ لَهُم بِشَيءٍ إِلّا كَباسِطِ كَفَّيهِ إِلَى الماءِ لِيَبلُغَ فاهُ وَما هُوَ بِبالِغِهِ ۚ وَما دُعاءُ الكافِرينَ إِلّا في ضَلالٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उसी को पुकारना सत्य है। और जिनको वे उसके सिवा पुकारते हैं, वे उनकी प्रार्थना कुछ भी स्वीकार नहीं करते, परंतु उस व्यक्ति की तरह जो अपनी दोनों हथेलियाँ पानी की ओर फैलाने वाला है, ताकि वह उसके मुँह तक पहुँच जाए, हालाँकि वह उस तक हरगिज़ पहुँचने वाला नहीं। और काफ़िरों की पुकार पूर्णतः व्यर्थ (निष्फल) है।
Roman Urdu (Maududi)Usi ko pukarna bar-haqq hai, rahi wo dusri hastiyan jinhein usko chodh kar yeh log pukarte hain, woh unki duaon ka koi jawab nahin de sakti, unhein pukarna to aisa hai jaise koi shaks pani ki tarf haath phaila kar ussey darkhwast karey ke tu mere mooh tak pahuch ja, halanke pani us tak pahunchne wala nahin, bas isi tarah kaafiron ki duaein bhi kuch nahin hai magar ek teer be hadaf (aimless efforts)
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ko pukarna haq hai. Jo log auron ko iss kay siwa pukartay hain woh unn (ki pukar) ka kuch bhi jawab nahi detay magar jaisay koi shaks apney dono hath pani ki taraf phelaye huye ho kay uss kay mun mein parr jaye halankay woh pani uss kay mun mein phonchney wala nahi inn munkiron ki jitni pukar hai sab gumrahi mein hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसे पुकारना बार-हक़्क़ है, राही वो दूसरी हस्तियां जिन्हें छोड़ कर ये लोग पुकारते हैं, वो उनकी दुआओं का कोई जवाब नहीं दे सकती, उन्हें पुकारना तो ऐसा है जैसे कोई शक्स पानी की तरफ हाथ फैला कर उसे अंधेरा कर दे के तू मेरे मुंह तक पहुंच जा, हलंके पानी उस तक पहुंचने वाला नहीं, बस इसी तरह काफिरों की दुआएं भी कुछ नहीं है मगर एक तीर हदफ (लक्ष्यहीन प्रयास)
☉ Sajda
عَرَبِيوَلِلَّهِ يَسجُدُ مَن فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ طَوعًا وَكَرهًا وَظِلالُهُم بِالغُدُوِّ وَالآصالِ ۩
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हिन्दी (Al-Omari)और आकाशों तथा धरती में जो भी है, अल्लाह ही को सजदा कर रहा है, स्वेच्छा से या अनिच्छा से और उनकी परछाइयाँ भी सुबह और शाम।
Roman Urdu (Maududi)Woh to Allah hi hai jisko zameen o aasman ki har cheez touan (willingly) o karhan (unwillingly) sajda kar rahi hai aur sab cheezon ke saaye subh-o-shaam uske aagey jhukte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah hi kay liye zamin aur aasmanon ki sab makhlooq khushi aur na aur na khushi say sajda kerti hai aur unn kay saye bhi subha-o-shaam
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह ही है जिसकी जमीन ओ आसमान की हर चीज तूं (स्वेच्छा से) ओ करहां (अनिच्छा से) सजदा कर रही है और सब चीज़ों के साये सुबह-ओ-शाम उसके आगे झुकते हैं
عَرَبِيقُل مَن رَبُّ السَّماواتِ وَالأَرضِ قُلِ اللَّهُ ۚ قُل أَفَاتَّخَذتُم مِن دونِهِ أَولِياءَ لا يَملِكونَ لِأَنفُسِهِم نَفعًا وَلا ضَرًّا ۚ قُل هَل يَستَوِي الأَعمىٰ وَالبَصيرُ أَم هَل تَستَوِي الظُّلُماتُ وَالنّورُ ۗ أَم جَعَلوا لِلَّهِ شُرَكاءَ خَلَقوا كَخَلقِهِ فَتَشابَهَ الخَلقُ عَلَيهِم ۚ قُلِ اللَّهُ خالِقُ كُلِّ شَيءٍ وَهُوَ الواحِدُ القَهّارُ
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हिन्दी (Al-Omari)उनसे पूछो : आकाशों तथा धरती का पालनहार कौन है? कह दो : अल्लाह। कहो : फिर क्या तुमने अल्लाह के सिवा उन्हें सहायक बना रखे हैं, जो अपने लिए न किसी लाभ का अधिकार रखते हैं और न किसी हानि का? उनसे कहो : क्या अंधा और देखने वाला बराबर होते हैं? या क्या अँधेरे और प्रकाश बराबर होते हैं? या उन्होंने अल्लाह के लिए कुछ साझी बना लिए हैं, जिन्होंने उसके पैदा करने की तरह पैदा किया है, अतः पैदा करने का मामला उनपर उलझ गया है? आप कह दें : अल्लाह ही प्रत्येक चीज़ को पैदा करने वाला है और वही अकेला, अत्यंत प्रभुत्वशाली है।
Roman Urdu (Maududi)Insey pucho, aasman o zameen ka Rubb kaun hai? Kaho, Allah, phir insey kaho ke jab haqeeqat yeh hai to kya tumne usey chodh kar aisey maboodon ko apna kaarsaaz thehra liya jo khud apne liye bhi kisi nafa o nuksaan ka ikhtiyar nahin rakhte? Kaho, kya andha aur aankhon wala barabar hua karta hai? Kya roshni aur tareekiyan yaksan hoti hai? Aur agar aisa nahin to kya inke thehraye huey shareekon ne bhi Allah ki tarah kuch paida kiya hai ke uski wajah se inpar takhleeq(creation) ka maamla mushtaba(seemed alike) ho gaya? Kaho, har cheez ka khaliq(creator) sirf Allah hai aur woh yakta hai, sab par galib
Roman Urdu (Junagarhi)Aap poochiye kay asmanon aur zamin ka perwerdigar kaun hai? Keh dijiye! Allah . Keh dijiye! Kiya tum phir bhi iss kay siwa auron ko himayati bana rahey ho jo khud apni jaan kay bhi bhalay buray ka ikhtiyar nahi rakhtay. Keh dijiye kay kiya andha aur beena barabar hosakta hai? Ya kiya andheriyan aur roshni barabar hosakti hai. Kiya jinhen yeh Allah kay shareek thehra rahey hain unhon ney bhi Allah ki tarah makhlooq peda ki hai kay inn ki nazar mein pedaeesh mushtaba hogaee ho keh dijiye kay sirf Allah hi tamam cheezon ka khaliq hai who akela hai aur zabardast ghalib hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पूछो, आसमान ओ ज़मीन का रुब कौन है? कहो, अल्लाह, फिर इनसे कहो के जब हकीकत ये है तो क्या तुमने उसे छोड़ कर ऐसे माबूदों को अपना करसाज़ ठहर लिया जो खुद अपने लिए भी कोई नफा ओ नुक्सान का इख्तियार नहीं रखते? कहो, क्या अंधा और आँखों वाला बराबर हुआ करता है? क्या रोशनी और तारीख़ें यक्सन होती हैं? और अगर ऐसा नहीं तो क्या इनके ठहरे हुए शरीकों ने भी अल्लाह की तरह कुछ अदा किया है कि उसकी वजह से अंदर तकलीक (सृजन) का मामला मुश्तबा (एक जैसा लग रहा था) हो गया? कहो, हर चीज का खालिक (निर्माता) सिर्फ अल्लाह है और वह जानता है, सब पर गालिब
عَرَبِيأَنزَلَ مِنَ السَّماءِ ماءً فَسالَت أَودِيَةٌ بِقَدَرِها فَاحتَمَلَ السَّيلُ زَبَدًا رابِيًا ۚ وَمِمّا يوقِدونَ عَلَيهِ فِي النّارِ ابتِغاءَ حِليَةٍ أَو مَتاعٍ زَبَدٌ مِثلُهُ ۚ كَذٰلِكَ يَضرِبُ اللَّهُ الحَقَّ وَالباطِلَ ۚ فَأَمَّا الزَّبَدُ فَيَذهَبُ جُفاءً ۖ وَأَمّا ما يَنفَعُ النّاسَ فَيَمكُثُ فِي الأَرضِ ۚ كَذٰلِكَ يَضرِبُ اللَّهُ الأَمثالَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने आकाश से कुछ पानी उतारा, तो कई नाले अपनी-अपनी समाई के अनुसार बह निकले। फिर (पानी के) रेले ने उभरा हुआ झाग उठा लिया। और जिस चीज़ को वे कोई आभूषण अथवा सामान बनाने के लिए आग में तपाते हैं, उससे भी ऐसा ही झाग उभरता है। इसी प्रकार, अल्लाह सत्य तथा असत्य का उदाहरण प्रस्तुत करता है। फिर जो झाग है, वह सूखकर नष्ट हो जाता है और जो चीज़ लोगों को लाभ पहुँचाती है, वह धरती में रह जाती है। इसी प्रकार, अल्लाह उदाहरण प्रस्तुत करता है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne aasman se pani barsaya aur har nadi naala apne zarf ke mutabiq isey lekar chal nikla, phir jab sailaab utha to satah par jhaag (foam) bhi aa gaye. Aur waise hi jhaag un dhaton (metals) par bhi uthte hain jinhein zewar (ornaments) aur bartan (utensils) wagairah banane ke liye log pighlaya karte hain. Isi misaal se Allah haqq aur baatil ke maamle ko wazeh karta hai. Jo jhaag hai woh udh (vanish) jaya karta hai aur jo cheez Insaano ke liye naafey (faiydamand) hai woh zameen mein thehar jati hai. Is tarah Allah misaalon se apni baat samjhata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney aasman say pani barsaya phir apni apni wusat kay mutabiq nalay beh niklay. Phir pani kay railay ney upper charhay jhaag ko utha liya aur uss cheez mein bhi jiss ko aag mein daal ker tapatay hain zewar ya saaz-o-saman kay liye issi tarah jay jhaag hain issi tarah Allah Taalaa haq-o-batil ki misal biyan farmata hai abb jhaag to nakara hoker chala jata hai lekin jo logon ko nafa denay wali cheez hai woh zamin mein thehri rehti hai Allah Taalaa issi tarah misalen biyan farmata hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया और हर नदी नाला अपने ज़र्फ के मुताबिक इसे लेकर चल निकला, फिर जब सैलाब उठा तो साथ पर झाग (फोम) भी आ गया। और वैसे ही झग उन धातुओं (धातुओं) पर भी उठते हैं जिनमें ज़ेवर (आभूषण) और बर्तन (बर्तन) बनाने के लिए लोग पिघलाया करते हैं। इसी मिसाल से अल्लाह हक़ और बातिल के मामले को वाज़ेह करता है। जो झगड़ा है वो उड़ (गायब) हो जाता है और जो चीज़ इंसानों के लिए नाफ़े (फ़ैय्यादमंद) है वो ज़मीन में ठहर जाती है। इस तरह अल्लाह मिसालों से अपनी बात समझता है
عَرَبِيلِلَّذينَ استَجابوا لِرَبِّهِمُ الحُسنىٰ ۚ وَالَّذينَ لَم يَستَجيبوا لَهُ لَو أَنَّ لَهُم ما فِي الأَرضِ جَميعًا وَمِثلَهُ مَعَهُ لَافتَدَوا بِهِ ۚ أُولٰئِكَ لَهُم سوءُ الحِسابِ وَمَأواهُم جَهَنَّمُ ۖ وَبِئسَ المِهادُ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन लोगों ने अपने पालनहार की बात स्वीकार कर ली, उन्हीं के लिए भलाई है। और जिन्होंने उसकी बात स्वीकार न की, यदि उनके पास वह सब कुछ हो जो धरती में हैं और उसके साथ उतना और भी हो, तो वे अवश्य उसे (अल्लाह के दंड से) छुड़ौती में दे दें। यही लोग हैं जिनके लिए बुरा हिसाब है तथा उनका ठिकाना नरक है और वह बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne apne Rubb ki dawat qabool karli hai unke liye bhalayi hai. Aur jinhon ne isey qabool na kiya woh agar zameen ki saari daulat ke bhi maalik hon aur utni hi aur faraham karlein to woh khuda ki pakad se bachne ke liye is sab ko fidiya (ransom) mein de daalne par tayyar ho jayenge. Yeh woh log hain jinsey buri tarah hisaab liya jayega, aur unka thikana jahannum hai, bahut hi bura thikana
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ney apney rab kay hukum ki baja aawri ki unn kay liye bhalee hai aur jin logon ney uss ki hukum bardari na ki agar unn kay liye zamin mein jo kuch hai sab kuch ho aur issi kay sath wisa hi aur bhi ho to woh sab kuch apney badlay mein dey den. Yehi hain jin kay liye bura hisab hai aur jin ka thikana jahannum hai jo boht buri jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने अपने रब की दावत कबूल की है उनके लिए भलाई है। और जिन्होन ने इसे क़बूल ना किया वो अगर ज़मीन की सारी दौलत के भी मालिक हों और उतनी ही और फ़राहम कार्लें तो वो ख़ुदा की पकड़ से बचने के लिए इस सब को फ़िदिया (फिरौती) में दे डालने पर तैयार हो जायेंगे। ये वो लोग हैं जिनसे बुरी तरह हिसाब लिया जाएगा, और उनका ठिकाना जहन्नुम है, बहुत ही बुरा ठिकाना
عَرَبِي۞ أَفَمَن يَعلَمُ أَنَّما أُنزِلَ إِلَيكَ مِن رَبِّكَ الحَقُّ كَمَن هُوَ أَعمىٰ ۚ إِنَّما يَتَذَكَّرُ أُولُو الأَلبابِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर क्या वह व्यक्ति जो जानता है कि जो कुछ आपके पालनहार की ओर से आपपर उतारा गया है, वही सत्य है, उस व्यक्ति के समान है, जो अंधा है? उपदेश तो बुद्धि और समझ वाले ही स्वीकार करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Bhala yeh kis tarah mumkin hai ke woh shaks jo tumhare Rubb ki is kitaab ko jo usne tumpar nazil ki hai haqq jaanta hai, aur woh shaks jo is haqeeqat ki taraf se andha hai, dono yaksan ho jayein? Naseehat to danishmand (wise) log hi qabool kiya karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh aik shaks jo yeh ilm rakhta ho kay aap ki taraf aap kay rab ki janib say jo utara gaya hai woh haq hai uss shaks jaisa ho sakta hai jo andha ho naseehat to woh qabool kertay hain jo aqal mand hon
Devnagri Urdu (Maududi)भला ये किस तरह मुमकिन है के वो शक्स जो तुम्हारे रब की इस किताब को जो उसने तुमपर नाज़िल की है हक़ जानता है, और वो शक्स जो इस हकीकत की है तरफ से अंधा है, दोनो यकसन हो जाये? हिदायत तो दानिशमंद (बुद्धिमान) लोग ही क़बूल किया करते हैं
عَرَبِيالَّذينَ يوفونَ بِعَهدِ اللَّهِ وَلا يَنقُضونَ الميثاقَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो अल्लाह के साथ की हुई प्रतिज्ञा को पूरा करते हैं और दृढ़ प्रतिज्ञा को नहीं तोड़ते।
Roman Urdu (Maududi)Aur unka tarz-e-amal yeh hota hai ke Allah ke saath apne ahad ko poora karte hain, usey mazboot baandhne ke baad todh nahin daalte
Roman Urdu (Junagarhi)Jo Allah kay ehad (o-paymaan) ko poora kertay hain aur qol-o-qarar ko tortay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और उनका तर्ज़-ए-अमल ये होता है के अल्लाह के साथ अपने अहद को पूरा करते हैं, उसे मज़बूत बांधने के बाद तोड़ नहीं डालते
عَرَبِيوَالَّذينَ يَصِلونَ ما أَمَرَ اللَّهُ بِهِ أَن يوصَلَ وَيَخشَونَ رَبَّهُم وَيَخافونَ سوءَ الحِسابِ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे जो उस चीज़ को जोड़ते हैं, जिसके जोड़ने का अल्लाह ने आदेश दिया है और अपने पालनहार का भय रखते हैं तथा बुरे हिसाब से डरते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unki rawish yeh hoti hai ke Allah ne jin jin rawabit ko barqarar rakhne ka hukum diya hai, unhein barqarar rakhte hain, apne Rubb se darte hain aur is baat ka khauf rakhte hain ke kahin unsey buri tarah hisab na liya jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah ney jin cheezon kay jorney ka hukum diya hai woh ussay jortay hain aur woh apney perwerdigar say dartay hain aur hisab ki sakhti ka andesha rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उनकी रवीश ये होती है के अल्लाह ने जिन जिन रावबित को बरक़रार रखने का हुकुम दिया है, उन्हें बरक़रार रखते हैं, अपने रुब से डरते हैं और इस बात का ख़ौफ़ रखते हैं के कहीं उन्हें बुरी तरह हिसाब ना लिया जाए
عَرَبِيوَالَّذينَ صَبَرُوا ابتِغاءَ وَجهِ رَبِّهِم وَأَقامُوا الصَّلاةَ وَأَنفَقوا مِمّا رَزَقناهُم سِرًّا وَعَلانِيَةً وَيَدرَءونَ بِالحَسَنَةِ السَّيِّئَةَ أُولٰئِكَ لَهُم عُقبَى الدّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे जिन्होंने अपने पालनहार का चेहरा चाहने के लिए धैर्य से काम लिया, और नमाज़ का आयोजन किया तथा हमने उन्हें जो कुछ प्रदान किया है, उसमें से छिपे और खुले ख़र्च किया, तथा भलाई के द्वारा बुराई को दूर करते हैं, यही लोग हैं जिनके लिए आख़िरत के घर का अच्छा परिणाम है।
Roman Urdu (Maududi)Unka haal yeh hota hai ke apne Rubb ki raza ke liye sabr se kaam lete hain, namaz qayam karte hai, hamare diye huye rizq mein se elaniya (openly) aur posheeda kharch karte hai, aur burayi ko bhalayi se dafa karte hain, aakhirat ka ghar unhi logon ke liye hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh apney rab ki raza mandi ki talab kay liye sabar kertay hain aur namazon ko barabar qaeem rakhtay hain aur jo kuch hum ney unhen dey rakha hai ussay chuppay khulay kharach kertay hain aur buraee ko bhi bhalee say taaltay hain inn hi kay liye aaqibat ka ghar hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनका हाल ये होता है के अपने रुब की रज़ा के लिए सब्र से काम लेते हैं, नमाज़ क़याम करते हैं, हमारे दिए हुए रिज़क में से एलानिया (खुले तौर पर) और पोशीदा खर्च करते हैं, और बुराइयों को भलाई से दफा करते हैं, आख़िरत का घर उन्हीं लोगों के लिए है
عَرَبِيجَنّاتُ عَدنٍ يَدخُلونَها وَمَن صَلَحَ مِن آبائِهِم وَأَزواجِهِم وَذُرِّيّاتِهِم ۖ وَالمَلائِكَةُ يَدخُلونَ عَلَيهِم مِن كُلِّ بابٍ
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हिन्दी (Al-Omari)सदैव रहने के बाग़, जिनमें वे प्रवेश करेंगे और उनके बाप-दादा और उनकी पत्नियों और उनकी संतानों में से जो नेक हुए (वे भी प्रवेश करेंगे)। तथा फ़रिश्ते प्रत्येक द्वार से उनके पास आएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Yani aisey baagh jo unki abadi qayamgaah honge. Woh khud bhi unmein daakhil honge aur unke aaba o ajdaad aur unki biwiyon aur unki aulad mein se jo jo saleh (righteous) hain woh bhi unke saath wahan jayenge. Malaika har taraf se unke isteqbal ke liye aayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Hamesha rehnay kay baghaat jahan yeh khud jayen gay aur inn kay baap dadon aur biwiyon aur auladon mein say bhi jo neko kaar hongay inn kay pass farishtay her her darwazay say aayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)यानी ऐसे बाग़ जो उनकी आबादी क़यामगाह होंगे। वो खुद भी उनमें दाखिल होंगे और उनके आबा ओ अजदाद और उनकी बीवीयां और उनकी औलाद में से जो सालेह (नेक) हैं वो भी उनके साथ वहां जाएंगे। मलायका हर तरफ से उनके इस्तेकबाल के लिए आएंगे
عَرَبِيسَلامٌ عَلَيكُم بِما صَبَرتُم ۚ فَنِعمَ عُقبَى الدّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)(वे कहेंगे :) सलाम (शांति) हो तुमपर उसके बदले जो तुमने धैर्य किया। तो क्या ही अच्छा है इस घर (आखिरत) का परिणाम!
Roman Urdu (Maududi)Aur unse kahenge ke “tumpar salamati hai, tumne duniya mein jis tarah sabr se kaam liya uski badaulat aaj tum iske mustahiq huey ho”. Pas kya hi khoob hai yeh aakhirat ka ghar
Roman Urdu (Junagarhi)Kahen gay tum per salamti ho sabar kay badlay kiya hi acha (badla) hai iss daar-e-aakhirat ka
Devnagri Urdu (Maududi)और उनसे कहेंगे के "तुम्हारे सलामती है, तुमने दुनिया में जिस तरह सब्र से काम लिया उसकी बदौलत आज तुम इसके मुस्तहिक हुए हो"। पास क्या ही ख़ूब है ये आख़िरत का घर
عَرَبِيوَالَّذينَ يَنقُضونَ عَهدَ اللَّهِ مِن بَعدِ ميثاقِهِ وَيَقطَعونَ ما أَمَرَ اللَّهُ بِهِ أَن يوصَلَ وَيُفسِدونَ فِي الأَرضِ ۙ أُولٰئِكَ لَهُمُ اللَّعنَةُ وَلَهُم سوءُ الدّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो लोग अल्लाह की प्रतिज्ञा को उसे दृढ़ करने के बाद तोड़ देते हैं और उस चीज़ को काट देते हैं, जिसे अल्लाह ने जोड़ने का आदेश दिया है और धरती में बिगाड़ पैदा करते हैं, यही लोगो हैं जिनके लिए लानत (धिक्कार) है और उन्हीं के लिए (आख़िरत का) बुरा घर है।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jo Allah ke ahad ko mazboot baandh lene ke baad toad daltey hain, jo un raabton(relations) ko kaat-te hain jinhein Allah ne jodne ka hukum diya hai, aur jo zameen mein fasaad phaylate hain, woh laanat ke mustahiq hain aur unke liye aakhirat mein bahut bura thikana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo Allah kay ehad ko uss ki mazbooti kay baad tor detay hain aur jin cheezon kay jorney ka Allah ney hukum diya hai unhen tortay hain aur zamin mein fasad phelatay hain unn ki liye laanaten hain aur unn kay liye bura ghar hai
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जो अल्लाह के अहद को मज़बूत बांध लेने के बाद तोड़ देते हैं, जो उन रबतों (रिश्ते) को काटते हैं जिन्हें अल्लाह ने जोड़ने का हुकुम दिया है, और जो ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं, वो लाते हैं के मुस्तहिक हैं और उनके लिए आख़िरत में बहुत बुरा ठिकाना है
عَرَبِياللَّهُ يَبسُطُ الرِّزقَ لِمَن يَشاءُ وَيَقدِرُ ۚ وَفَرِحوا بِالحَياةِ الدُّنيا وَمَا الحَياةُ الدُّنيا فِي الآخِرَةِ إِلّا مَتاعٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह जिसके लिए चाहता है, जीविका विस्तृत कर देता है और (जिसके लिए चाहता है) तंग कर देता है। और वे (काफ़िर) सांसारिक जीवन पर प्रसन्न हो गए। हालाँकि सांसारिक जीवन आख़िरत के मुक़ाबले में थोड़े-से सामान के सिवा कुछ नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Allah jisko chahta hai rizq ki farakhi bakshta hai aur jisey chahta hai napa-tula rizq deta hai.Yeh log dunyavi zindagi mein magan hain, halanke duniya ki zindagi aakhirat ke muqable mein ek mataa-e-qaleel (brief passing enjoyment) ke siwa kuch bhi nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa jiss ki rozi chahata hai barhata hai aur ghatata hai yeh to duniya ki zindagi mein mast hogaye halankay duniya aakhirat kay muqablay mein nihayat (haqeer) poonji hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह जिसको चाहता है रिज़क की फराखी बक्शता है और जिसे चाहता है नपा-तुला रिज़क देता है
عَرَبِيوَيَقولُ الَّذينَ كَفَروا لَولا أُنزِلَ عَلَيهِ آيَةٌ مِن رَبِّهِ ۗ قُل إِنَّ اللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشاءُ وَيَهدي إِلَيهِ مَن أَنابَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने कुफ़्र किया, वे कहते हैं : इसपर इसके पालनहार की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं उतारी गई? (ऐ नबी!) आप कह दें : निःसंदेह अल्लाह जिसे चाहता है, पथभ्रष्ट कर देता है। और अपनी ओर उसे राह दिखाता है, जो उसकी ओर ध्यानमग्न हो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log jinhon ne (risalat e Muhammadi ko manne se) inkar kardiya hai kehte hain “is shaks par iske Rubb ki taraf se koi nishani kyun na utri?” kaho, Allah jisey chahta hai gumraah kardeta hai aur woh apni taraf aane ka raasta usi ko dikhata hai jo uski taraf rujoo karey
Roman Urdu (Junagarhi)Kafir kehtay hain kay iss per koi nishani (moajzza) kiyon nahi nazil nahi kiya gaya? Jawab dey dijiye kay jisay Allah gumrah kerna chahaye ker deta hai aur jo uss ki taraf jhukay ussay raasta dikha deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيالَّذينَ آمَنوا وَتَطمَئِنُّ قُلوبُهُم بِذِكرِ اللَّهِ ۗ أَلا بِذِكرِ اللَّهِ تَطمَئِنُّ القُلوبُ
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हिन्दी (Al-Omari)वे जो ईमान लाए और उनके दिलों को अल्लाह की याद से संतुष्टि मिलती है। सुन लो! अल्लाह की याद ही से दिलों को संतुष्टि मिलती है।
Roman Urdu (Maududi)Aisey hi log hain woh jinhon ne (is Nabi ki dawat ko) maan liya hai aur unke dilon ko Allah ki yaad se itminaan naseeb hota hai, khabardar raho! Allah ki yaad hi woh cheez hai jissey dilon ko itminaan naseeb hua karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log eman laye unn kay dil Allah kay zikar say itminan hasil kertay hain. Yaad rakho Allah kay zikar say hi dilon ko tasalli hasil hoti hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसे ही लोग हैं वो जिन्होन ने (इस नबी की दावत को) मान लिया है और उनके दिलों को अल्लाह की याद से इत्मिनान नसीब होता है, खबरदार रहो! अल्लाह की याद ही वो चीज़ है जिसके दिलों को इत्मिनान नसीब हुआ करता है
عَرَبِيالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ طوبىٰ لَهُم وَحُسنُ مَآبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए आनंद और उत्तम ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Phir jin logon ne dawat-e-haqq ko maana aur neik amal kiye woh khush-naseeb hain aur unke liye accha anjaam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log eman laye aur jinhon ney nek kaam bhi kiye unn kay liye khushali hai aur behtareen thikana
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जिन लोगों ने दावत-ए-हक़ को माना और नेक अमल किये वो ख़ुश-नसीब हैं और उनके लिए अच्छा अंजाम है
عَرَبِيكَذٰلِكَ أَرسَلناكَ في أُمَّةٍ قَد خَلَت مِن قَبلِها أُمَمٌ لِتَتلُوَ عَلَيهِمُ الَّذي أَوحَينا إِلَيكَ وَهُم يَكفُرونَ بِالرَّحمٰنِ ۚ قُل هُوَ رَبّي لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ عَلَيهِ تَوَكَّلتُ وَإِلَيهِ مَتابِ
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हिन्दी (Al-Omari)इसी प्रकार हमने आपको एक ऐसे समुदाय में रसूल बनाकर भेजा, जिससे पहले बहुत-से समुदाय गुज़र चुके हैं। ताकि आप उन्हें वह संदेश सुनाएँ, जो हमने आपकी ओर वह़्य द्वारा भेजा है। इस हाल में कि वे अत्यंत दयावान् (अल्लाह) का इनकार करते हैं। आप कह दें : वही मेरा पालनहार है। उसके सिवा कोई पूज्य नहीं है। मैंने उसी पर भरोसा किया है और उसी की ओर मुझे जाना है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad) isi shaan se humne tumko Rasool bana kar bheja hai, ek aisi qaum mein jissey pehle bahut si qaumein guzar chuki hain, taa-ke tum in logon ko woh paigham sunao jo humne tumpar nazil kiya hai, is haal mein ke yeh apne nihayat meharbaan khuda ke kafir baney huey hain. Insey kaho ke wahi mera Rubb hai, uske siwa koi mabood nahin hai, usi par maine bharosa kiya aur wahi mera malja-o-mawi hai (He is my sole Resort/On Him is my trust, and to Him do I turn)
Roman Urdu (Junagarhi)Issi tarah hum ney aap ko iss ummat mein bheja hai jiss say pehlay boht si ummaten guzar chuki hain kay aap enhen humari taraf say jo wahee aap per utri hai parh ker sunaiye yeh Allah rehman kay munkir hain aap keh dijiye kay mera paalney wala to wohi hai uss kay siwa dar-haqeeqat koi bhi laeeq-e-ibadat nahi ussi kay upper mera bharosa hai aur ussi ki janib mera rujoo hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद) इसी शान से हमने तुमको रसूल बना कर भेजा है, एक ऐसी क़ौम में जिसके पहले बहुत सी क़ौमें गुज़र चुकी हैं, ता-के तुम इन लोगों को वो पैगाम सुनाओ जो हमने तुंपर नाज़िल किया है, इस हाल में के ये अपने निहायत मेहरबान खुदा के काफिर बने हुए हैं। इनसे कहो के वही मेरा रब है, उसके सिवा कोई मबूद नहीं है, उसी पर मैंने भरोसा किया और वही मेरा मालजा-ओ-मावी है (वह मेरा एकमात्र सहारा है/उसी पर मेरा भरोसा है, और मैं उसकी ओर मुड़ता हूं)
عَرَبِيوَلَو أَنَّ قُرآنًا سُيِّرَت بِهِ الجِبالُ أَو قُطِّعَت بِهِ الأَرضُ أَو كُلِّمَ بِهِ المَوتىٰ ۗ بَل لِلَّهِ الأَمرُ جَميعًا ۗ أَفَلَم يَيأَسِ الَّذينَ آمَنوا أَن لَو يَشاءُ اللَّهُ لَهَدَى النّاسَ جَميعًا ۗ وَلا يَزالُ الَّذينَ كَفَروا تُصيبُهُم بِما صَنَعوا قارِعَةٌ أَو تَحُلُّ قَريبًا مِن دارِهِم حَتّىٰ يَأتِيَ وَعدُ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ لا يُخلِفُ الميعادَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि निश्चय कोई ऐसा क़ुरआन होता जिसके द्वारा पहाड़ चलाए जाते, या उसके द्वारा धरती खंड-खंड कर दी जाती, या उसके द्वारा मुर्दों से बात की जाती (तो भी वे ईमान नहीं लाते)। बल्कि सारे का सारा काम अल्लाह ही के अधिकार में है। तो क्या जो लोग ईमान लाए हैं, निराश नहीं हुए कि यदि अल्लाह चाहे, तो निश्चय सब के सब लोगों को सीधी राह पर कर दे! और वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, हमेशा इस हाल में रहेंगे कि उन्हें उनकी करतूतों के कारण कोई न कोई आपदा पहुँचती रहेगी, अथवा उनके घर के निकट उतरती रेहगी, यहाँ तक कि अल्लाह का वादा आ जाए। निःसंदेह अल्लाह अपने वादे के विरुद्ध नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Aur kya ho jata agar koi aisa Quran utaar diya jata jiske zoar se pahad chalne lagey, ya zameen shaqq ho (phatt) jaati, ya murde qabaron se nikal kar bolne lagte? (Is tarah ki nishaniyan dikha dena kuch mushkil nahin hai) balke saara ikhtiyar hi Allah ke haath mein hai. Phir kya ehle iman (abhi tak kuffar ki talab ke jawab mein kisi nishani ke zahoor ki aas lagaye baithey hain aur woh yeh jaan kar) mayous nahin ho gaye ke agar Allah chahta to sarey Insaano ko hidayat de deta? Jin logon ne khuda ke saath kufr ka rawayya ikhtiyar kar rakkha hai unpar unke kartooton ki wajah se koi na koi aafat aati hi rehti hai ya unke ghar ke qareeb kahin nazil hoti hai.Yeh silsila chata rahega yahan tak ke Allah ka wada aan poora ho. Yaqeenan Allah apne wadey ki khilaf warzi nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Agar (bil farz) kissi quran (aasmani kitab) kay zariye pahar chala diye jatay ya zamin tukray tukray ker di jati ya murdon say baaten kerwa di jatin (phir bhi woh eman na latay) baat yeh hai kay sab kaam Allah kay hath mein hai to kiya eman walon ko iss baat per dil jamaee nahi kay agar Allah Taalaa chahaye to tamam logon ko hidayat dey dey. Kuffaar ko to inn kay kufur kay badlay hamesha hi koi na koi sakht saza phonchti rahey gi ya inn kay makano kay qarib nazil hoti rahey gi ta-waqt-e-kay wada-e-elahi aa phonchay. Yaqeenan Allah Taalaa wada khilafi nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या हो जाता अगर कोई ऐसा कुरान उतार दिया जाता जाता जिसका ज़ोर से पहाड़ चले लगे, या जमीन शक्क हो (फट्ट) जाती, या मुर्दे कब्रों से निकल कर बोलने लगते? (इस तरह की निशानियां दिखा देना कुछ मुश्किल नहीं है) बलके सारा इख्तियार हाय अल्लाह के हाथ में है। फिर क्या एहले ईमान (अभी तक कुफ्फार की तालाब के जवाब में किसी निशानी के जहूर की आस लगाए बैठे हैं और वो ये जान कर) अगर अल्लाह चाहता तो सारे इंसानों को हिदायत दे देता? जिन लोगों ने खुदा के साथ कुफ्र का रवैय्या इख्तियार कर रखा है उन पर उनके कार्टूनों की वजह से कोई ना कोई आफत आती ही रहती है या उनके घर के करीब कहीं नाज़िल होती है। ये सिलसिला चलता रहेगा यहां तक ​​के अल्लाह का वादा आन पूरा हो। यकीनन अल्लाह अपने वादे की खिलाफ वारज़ी नहीं करता
عَرَبِيوَلَقَدِ استُهزِئَ بِرُسُلٍ مِن قَبلِكَ فَأَملَيتُ لِلَّذينَ كَفَروا ثُمَّ أَخَذتُهُم ۖ فَكَيفَ كانَ عِقابِ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह आपसे पहले भी कई रसूलों का मज़ाक उड़ाया गया, तो मैंने काफ़िरों को मोहलत दी। फिर उन्हें पकड़ लिया। तो मेरी सज़ा कैसी थी?
Roman Urdu (Maududi)Tumse pehle bhi bahut se Rasoolon ka mazaak udaya jaa chuka hai, magar maine hamesha munkireen ko dheel di aur aakhir e kaar unko pakad liya, phir dekhlo ke meri saza kaisi sakht thi
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan aap say pehlay kay payghumber ka mazaq uraya gaya tha aur mein ney bhi kafiron ko dheel di thi phir unhen pakar liya tha pur mera azab kaisa raha
Devnagri Urdu (Maududi)तुमसे पहले भी बहुत से रसूलों का मज़ाक उड़ाया जा चूका है, मगर मैंने हमेशा मुनकिरेन को ढील दी और आख़िर ए कार उनको पकड़ लिया, फिर देखलो के मेरी सज़ा कैसी सच थी
عَرَبِيأَفَمَن هُوَ قائِمٌ عَلىٰ كُلِّ نَفسٍ بِما كَسَبَت ۗ وَجَعَلوا لِلَّهِ شُرَكاءَ قُل سَمّوهُم ۚ أَم تُنَبِّئونَهُ بِما لا يَعلَمُ فِي الأَرضِ أَم بِظاهِرٍ مِنَ القَولِ ۗ بَل زُيِّنَ لِلَّذينَ كَفَروا مَكرُهُم وَصُدّوا عَنِ السَّبيلِ ۗ وَمَن يُضلِلِ اللَّهُ فَما لَهُ مِن هادٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वह जो प्रत्येक प्राणी के कार्यों का संरक्षक है (वह उपासना के अधिक योग्य है या ये मूर्तियाँ?) और उन्होंने अल्लाह के कुछ साझी बना लिए हैं। आप कहिए कि उनके नाम बताओ। या क्या तुम उसे उस चीज़ की सूचना देते हो, जिसे वह धरती में नहीं जानता, या केवल ऊपर ही ऊपर बातें कर रहे हो? बल्कि उन लोगों के लिए जिन्होंने कुफ़्र किया, उनका छल सुंदर बना दिया गया और वे सीधे रास्ते से रोक दिए गए। और जिसे अल्लाह पथभ्रष्ट कर दे, फिर उसे कोई राह दिखाने वाला नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Phir kya woh jo ek ek mutanaffis(every soul) ki kamayi par nazar rakhta hai ( uske muqable mein yeh jasaratein ki jaa rahi hain ke) logon ne uske kuch shareek thehra rakkhey hain? (Aey Nabi), insey kaho (agar waqayi woh khuda ke apne banaye huey shareek hain to) zara unke naam lo ke woh kaun hain? Kya tum Allah ko ek nayi baat ki khabar de rahey ho jisey woh apni zameen mein nahin jaanta? Ya tum log bas yunhi jo mooh mein aata hai keh daalte ho? Haqeeqat yeh hai ke jin logon ne dawat e haqq ko maanne se inkar kiya hai unke liye unki makkariyan khushnuma bana di gayi hain aur woh raah-e-raast se roak diye gaye hain, phir jisko Allah gumraahi mein phenk de usey koi raah dikhane wala nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aaya woh Allah jo nigehbani kerney wala hai her shaks ki uss kay kiye huye aemaal per inn logon ney Allah kay shareek thehraye hain keh dijiye zara unn kay naam to lo kiya tum Allah ko woh baten batatay ho jo woh zamin mein janta hi nahi ya sirf oopri oopri baaten bata rahey ho baat asal yeh hai kay kufur kerney walon kay liye unn kay makar saja diye gaye hain aur woh sahih raah say rok diye gaye hain aur jiss ko Allah gumrah ker dey uss ko raha dikhaney wala koi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्या वो जो एक-एक मुतनफ़्फ़िस (हर आत्मा) की कमाई पर नज़र रखता है (उसके मुक़ाबले में ये जसरतें की जा रही हैं के) लोगों ने उसे कुछ शरीक वहीं रखा है? (ऐ नबी), इनसे कहो (अगर वक्त वो खुदा के अपने बने हुए शरीक हैं तो) जरा उनके नाम लो के वो कौन हैं? क्या तुम अल्लाह को एक नई बात की खबर दे रहे हो जैसे वो अपनी ज़मीन में नहीं जानता? हां तुम लोग बस यूं ही जो मुंह में आता है केह डालते हो? हकीकत ये है के जिन लोगों ने दावत ए हक को मन्ने से इंकार किया है उनके लिए उनकी मक्कारियां खुशनुमा बना दी गई हैं और वो राह-ए-रास्त से रुक गए हैं, फिर जिसको अल्लाह गुमराही में फेंक दे उसे कोई राह दिखाने वाला नहीं है
عَرَبِيلَهُم عَذابٌ فِي الحَياةِ الدُّنيا ۖ وَلَعَذابُ الآخِرَةِ أَشَقُّ ۖ وَما لَهُم مِنَ اللَّهِ مِن واقٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उनके लिए एक यातना सांसारिक जीवन में है और निश्चय आख़िरत की यातना अधिक कड़ी है। और उन्हें अल्लाह से कोई भी बचाने वाला नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Aisey logon ke liye duniya ki zindagi hi mein azaab hai, aur aakhirat ka azaab ussey bhi zyada sakht hai, koi aisa nahin jo unhein khuda se bachane wala ho
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay liye duniya ki zindagi mein bhi azab hai aur aakhirat ka azab to boht hi ziyada sakht hai enhen Allah kay ghazab say bachaney wala koi bhi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसे लोगों के लिए दुनिया की जिंदगी ही में अजाब है, और आखिरी का अजाब उसे भी ज्यादा पसंद है, कोई ऐसा नहीं जो उन्हें खुदा से बचाने वाला हो
عَرَبِي۞ مَثَلُ الجَنَّةِ الَّتي وُعِدَ المُتَّقونَ ۖ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ ۖ أُكُلُها دائِمٌ وَظِلُّها ۚ تِلكَ عُقبَى الَّذينَ اتَّقَوا ۖ وَعُقبَى الكافِرينَ النّارُ
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हिन्दी (Al-Omari)उस जन्नत की विशेषता, जिसका अल्लाह से डरने वालों (मुत्तक़ियों) से वादा किया गया है, यह है कि उसके नीचे से नहरें बह रही हैं, उसका फल हमेशा रहने वाला है और उसकी छाया भी। यह उन लोगों का परिणाम है, जो अल्लाह से डरते रहे। और काफ़िरों का परिणाम आग (जहन्नम) है।
Roman Urdu (Maududi)Khuda tars Insaano ke liye jis jannat ka wada kiya gaya hai uski shaan yeh hai ke uske nichey nehrein (canals) beh rahi hain, uske phal (fruits) daimi(eternal) hain aur uska saaya la-zawal (perpetual). Yeh anjaam hai muttaqi(pious) logon ka, aur munkireen e haqq ka anjaam yeh hai ke unke liye dozakh ki aag hai
Roman Urdu (Junagarhi)Uss jannat ki sift jiss ka wada perhezgaron ko diya gaya hai yeh hai kay uss key neechay nehren beh rahi hain. Uss ka mewa hameshgi wala hai aur uss ka saya bhi. Yeh hai anjam perhezgaron ka aur kafiron ka anjam kaar dozakh hai
Devnagri Urdu (Maududi)खुदा तरस इंसानों के लिए जिस जन्नत का वादा किया गया है उसकी शान ये है के उसके खास नहेरे (नहरें) बह रही हैं, उसके फल (फल) दैमी (अनन्त) हैं और उसका साया ला-ज़वाल (सनातन)। ये अंजाम है मुत्तक़ी (पवित्र) लोगों का, और मुनकिरीन ए हक़ का अंजाम ये है के उनके लिए दोज़ख की आग है
عَرَبِيوَالَّذينَ آتَيناهُمُ الكِتابَ يَفرَحونَ بِما أُنزِلَ إِلَيكَ ۖ وَمِنَ الأَحزابِ مَن يُنكِرُ بَعضَهُ ۚ قُل إِنَّما أُمِرتُ أَن أَعبُدَ اللَّهَ وَلا أُشرِكَ بِهِ ۚ إِلَيهِ أَدعو وَإِلَيهِ مَآبِ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन्हें हमने पुस्तक दी है, वे उस (क़ुरआन) से प्रसन्न होते हैं, जो आपकी ओर उतारा गया है। और कुछ समूह ऐसे हैं, जो उसकी कुछ बातों का इनकार करते हैं। आप कह दें कि मुझे तो यही आदेश दिया गया है कि मैं अल्लाह की इबादत करूँ और उसके साथ किसी को साझी न बनाऊँ। मैं उसी की ओर बुलाता हूँ और उसी की ओर मेरा लौटना है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), jin logon ko humne pehle kitab di thi woh is kitab se jo humne tumpar nazil ki hai khush hain aur mukhtalif girohon mein kuch log aisey bhi hain jo iski baaz baaton ko nahin maante. Tum saaf kehdo ke “mujhey to sirf Allah ki bandagi ka hukum diya gaya hai aur issey mana kiya gaya hai ke kisi ko uske saath shareek thehraoon, lihaza main usi ki taraf dawat deta hoon aur usi ki taraf mera rujoo hai (myself turn to Him)”
Roman Urdu (Junagarhi)Jinhen hum ney kitab di hai woh to jo kuch aap per utara jata hai uss say khush hotay hain aur doosray fiqay iss ki baaz baaton say munkir hain. Aap ailaan ker dijiye kay mujhay to sirf yehi hukum diya gaya hai kay mein Allah ki ibadat keroon aur uss kay sath shareek na keroon mein ussi ki taraf bula raha hun aur ussi ki janib mera lotna hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), जिन लोगों को हमने पहले किताब दी थी वो इस किताब से जो हमने तुमपर नाज़िल की है ख़ुश हैं और मुख़्तलिफ़ गिरोहों में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसकी बाज़ बातों को नहीं मानते। तुम साफ कहदो के "मुझे तो सिर्फ अल्लाह की बंदगी का हुकुम दिया है और इसे मना किया है कि किसी को उसके साथ शरीक ठहरूं, लिहाजा मैं उसकी तरफ दावत देता हूं और उसकी तरफ मेरा रूजू है"
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ أَنزَلناهُ حُكمًا عَرَبِيًّا ۚ وَلَئِنِ اتَّبَعتَ أَهواءَهُم بَعدَما جاءَكَ مِنَ العِلمِ ما لَكَ مِنَ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلا واقٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार, हमने इसे अरबी (भाषा का) फरमान बनाकर उतारा है। और यदि आपने अपने पास ज्ञान आ जाने के बाद उन लोगों की इच्छाओं का अनुसरण किया, तो अल्लाह के मुक़ाबले में आपका न कोई सहायक होगा और न कोई बचाने वाला।
Roman Urdu (Maududi)Isi hidayat ke saath humne yeh farmaan-e-arabi tumpar nazil kiya hai . Ab agar tumne is ilm ke bawajood jo tumhare paas aa chuka hai logon ki khwahishat ki pairwi ki to Allah ke muqable mein na koi tumhara haami o madadgaar hai aur na koi uski pakad se tumko bacha sakta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Issi tarah hum ney iss quran ko arabi zaban ka farman utara hai. Agar app ney inn ki khuwaishon ki pairwi kerli iss kay baad kay aap kay pass ilm aa chuka hai to Allah (kay azabon) say aap ko koi himayati milay ga aur na bachaney wala
Devnagri Urdu (Maududi)इसी हिदायत के साथ हमने ये फ़रमान-ए-अरबी तुमपर नाज़िल किया है। अब अगर तुमने इल्म के बारे में कहा है कि तुम्हारे पास आ चुका है लोगों की ख्वाहिश की जोड़ी अल्लाह के मुकाबले में ना कोई तुम्हारा हामी ओ मददगार है और ना कोई उसकी पकड़ से तुमको बचा सकता है
عَرَبِيوَلَقَد أَرسَلنا رُسُلًا مِن قَبلِكَ وَجَعَلنا لَهُم أَزواجًا وَذُرِّيَّةً ۚ وَما كانَ لِرَسولٍ أَن يَأتِيَ بِآيَةٍ إِلّا بِإِذنِ اللَّهِ ۗ لِكُلِّ أَجَلٍ كِتابٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय हमने आपसे पहले कई रसूल भेजे और उनके लिए बीवियाँ और बच्चे बनाए। और किसी रसूल के लिए संभव नहीं था कि वह अल्लाह की अनुमति के बिना कोई निशानी ले आता। हर समय के लिए एक लेख्य है।
Roman Urdu (Maududi)Tumse pehle bhi hum bahut se Rasool bhej chuke hain aur unko humne biwi bacchon wala hi banaya tha, aur kisi Rasool ki bhi yeh taaqat na thi ke Allah ke izan ke bagair koi nishani khud laa dikhata. Har daur ke liye ek kitab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum aap say pehlay bhi boht say rasool bhej chukay hain aur hum ney unn sab ko biwi bachon wala banaya tha kissi rasool say nahi hosakta kay koi nishani baghair Allah ki ijazat kay ley aaye her muqarrara waday ki aik likhat hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुमसे पहले भी हम बहुत से रसूल भेज चुके हैं और उनको हमने बीवी बच्चों वाला ही बनाया था, और किसी रसूल की भी ये ताक़त ना थी के अल्लाह के इज़ान के बगैर कोई निशानी खुद ला दिखता। हर दौर के लिए एक किताब है
عَرَبِييَمحُو اللَّهُ ما يَشاءُ وَيُثبِتُ ۖ وَعِندَهُ أُمُّ الكِتابِ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह जो चाहता है, मिटा देता है और बाक़ी रखता है। और उसी के पास मूल किताब है।
Roman Urdu (Maududi)Allah jo kuch chahta hai mitaa deta hai aur jis cheez ko chahta hai qayam rakhta hai, ummul kitab (Original Book) usi ke paas hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah jo chahaye mita dey aur jo chahaye sabit rakhay loh-e-mehfooz ussi kay pass hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह जो कुछ चाहता है मिटा देता है और जिस चीज को चाहता है क़याम रखता है, उम्मुल किताब (मूल किताब) उसके पास है
عَرَبِيوَإِن ما نُرِيَنَّكَ بَعضَ الَّذي نَعِدُهُم أَو نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِنَّما عَلَيكَ البَلاغُ وَعَلَينَا الحِسابُ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम वस्तुतः (ऐ नबी!) आपको उसमें से कुछ दिखा दें, जिसका हम उन (काफ़िरों) से वादा करते हैं या वास्तव में आपको उठा लें, तो आपका काम केवल उपदेश पहुँचा देना है और हमारे ज़िम्मे हिसाब लेना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur (Aey Nabi), jis burey anjaam ki dhamki hum in logon ko de rahey hain uska koi hissa khwa hum tumhare jeete jee dikha dein ya uske zahoor mein aane se pehle hum tumhein utha lein, bahar haal tumhara kaam sirf paigham pahuncha dena hai aur hisaab lena hamara kaam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say kiye huye wadon mein say koi agar hum aap ko dikha den ya aap ko hum fot ker len to aap per to sirf phoncha dena hi hai. Hisab to humaray zimmay hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ नबी), जिस बुरे अंजाम की धमकी हम इन लोगों को दे रहे हैं उसका कोई हिसा ख्वा हम तुम्हारे जीते जी दिखा दें या उसके ज़हूर में आने से पहले हम तुम्हें उठा लें, बाहर हाल तुम्हारा काम सिर्फ पैग़ाम पहनना है और हिसाब लेना हमारा काम है
عَرَبِيأَوَلَم يَرَوا أَنّا نَأتِي الأَرضَ نَنقُصُها مِن أَطرافِها ۚ وَاللَّهُ يَحكُمُ لا مُعَقِّبَ لِحُكمِهِ ۚ وَهُوَ سَريعُ الحِسابِ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने नहीं देखा कि हम धरती को, उसके किनारों से कम करते जा रहे हैं। और अल्लाह ही फ़ैसला करता है। उसके फ़ैसले को कोई लौटाने वाला नहीं। और वह शीघ्र हिसाब लेने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log dekhte nahin hain ke hum is sar-zameen par chale aa rahey hain aur iska daira (boundaries) har taraf se tangg karte chale aate hain? Allah hukumat kar raha hai, koi uske faislon par nazar-e-saani(revise) karne wala nahin hai, aur usey hisaab letey kuch dair nahin lagti
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh nahi dekhtay? Kay hum zamin ko iss kay kinaron say ghatatay chalay aarahey hain Allah hukum kerta hai koi uss kay ehkaam peechay dalney wala nahi woh jald hisab leney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग देखते नहीं हैं के हम इस सर-ज़मीन पर चले आ रहे हैं और इसका दायरा (सीमाएं) हर तरफ से तंग करते चले आते हैं? अल्लाह हुकुमत कर रहा है, कोई उसके फैसले पर नज़र-ए-सानी (संशोधन) करने वाला नहीं है, और उसे हिसाब लेते हुए कुछ देर नहीं लगती
عَرَبِيوَقَد مَكَرَ الَّذينَ مِن قَبلِهِم فَلِلَّهِ المَكرُ جَميعًا ۖ يَعلَمُ ما تَكسِبُ كُلُّ نَفسٍ ۗ وَسَيَعلَمُ الكُفّارُ لِمَن عُقبَى الدّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदहे उन लोगों ने (भी) उपाय किए, जो इनसे पहले थे, किंतु वास्तविक योजना तो पूरी की पूरी अल्लाह के हाथ में है। वह जानता है जो कुछ प्रत्येक प्राणी कर रहा है। और काफ़िरों को शीघ्र ही पता चल जाएगा कि उस घर का अच्छा परिणाम किसके लिए है?
Roman Urdu (Maududi)Insey pehle jo log ho guzre hain woh bhi badi badi chalein chal chuke hain, magar asal faisla-kun chaal to poori ki poori Allah hi ke haath mein hai. Woh jaanta hai ke kaun kya kuch kamayi kar raha hai, aur anqareeb yeh munkireen-e-haqq (disbelievers) dekh lenge ke anjaam kiska ba-khair hota hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say pehlay logon ney bhi apni makkari mein kami na ki thi lekin tamam tadbeeren Allah hi ki hain jo shaks jo kuch ker raha hai Allah kay ilm mein hai. Kafiron ko abhi maloom hojaye ga kay (uss) jahaan ki saza kiss kay liye hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पहले जो लोग हो गुज़रे हैं वो भी बड़ी-बड़ी चलें चल चुके हैं, मगर असल फैसला-कुन चल तो पूरी की पूरी अल्लाह ही के हाथ में है। वो जानता है कि कौन क्या कमाई कर रहा है, और अनकरीब ये मुनकिरीन-ए-हक़ (काफिर) देख लेंगे के अंजाम किसका ब-खैर होता है
عَرَبِيوَيَقولُ الَّذينَ كَفَروا لَستَ مُرسَلًا ۚ قُل كَفىٰ بِاللَّهِ شَهيدًا بَيني وَبَينَكُم وَمَن عِندَهُ عِلمُ الكِتابِ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, कहते हैं : आप किसी तरह रसूल नहीं हैं। आप कह दें : मेरे और तुम्हारे बीच अल्लाह ही गवाह पर्याप्त है, तथा वह व्यक्ति भी जिसके पास किताब का ज्ञान है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh munkireen kehte hain ke tum khuda ke bheje huey nahin ho. Kaho “mere aur tumhare darmiyan Allah ki gawahi kafi hai, aur phir har us shaks ki gawahi jo kitaab e aasmani ka ilm rakhta hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kafir kehtay hain kay aap Allah kay rasool nahi. Aap jawab dijiye kay mujh mein aur tum mein Allah gawahi denay wala kafi hai aur woh jiss kay pass kitab ka ilm hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये मुनकीरीन कहते हैं कि तुम खुदा के भेजे हुए नहीं हो। कहो "मेरे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह की गवाही काफी है, और फिर हर उस शक्स की गवाही जो किताब ए आसमानी का इल्म रखता है"
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Surah 13: Ar-Ra'd (The Thunder)

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Surah 13: Ar-Ra'd (The Thunder)

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Surah 13: Ar-Ra'd (The Thunder)

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Surah 13: Ar-Ra'd (The Thunder)

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Surah 13: Ar-Ra'd (The Thunder)

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Surah 14: Ibrahim (Abraham)

Meccan🕐 Revelation #72📜 52 Verses🕮 Juz 1
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Surah 14: Ibrahim (Abraham)

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Surah 14: Ibrahim (Abraham)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالر ۚ كِتابٌ أَنزَلناهُ إِلَيكَ لِتُخرِجَ النّاسَ مِنَ الظُّلُماتِ إِلَى النّورِ بِإِذنِ رَبِّهِم إِلىٰ صِراطِ العَزيزِ الحَميدِ
हिन्दी (Al-Omari)अलिफ़॰ लाम॰ रा॰। (यह क़ुरआन) एक पुस्तक है, जिसे हमने आपकी ओर अवतरित किया है; ताकि आप लोगों को, उनके पालनहार की अनुमति से, अंधेरों से निकालकर प्रकाश की ओर ले आएँ, उस (अल्लाह) के रास्ते की ओर जो सब पर प्रभुत्वशाली, असीम प्रशंसा वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Alif Laam Raa (aey Muhammad), yeh ek kitab hai jisko humne tumhari taraf nazil kiya hai taa-ke tum logon ko tareekiyon (andhere) se nikal kar roshni mein lao unke Rubb ki taufeeq se, us khuda ke raaste par jo zabardast aur apni zaat mein aap mehmood hai (qabil e tareef hai)
Roman Urdu (Junagarhi)Alif-laam-raa! Yeh aali shaan kitab hum ney aap ki taraf utari hai kay aap logon ko andheron say ujalay ki taraf layen inn kay perwerdigar kay hukum say zabardast aur tareefon walay Allah ki taraf
Devnagri Urdu (Maududi)अलिफ लाम रा (ऐ मुहम्मद), ये एक किताब है जिसको हमने तुम्हारी तरफ नाज़िल किया है ता-के तुम लोगों को तारिकियों (अंधेरे) से निकाल कर रोशनी में लाओ उनके रब की तौफीक से, हमें खुदा के रास्ते पर जो ज़बरदस्त और अपनी ज़ात में आप महमूद हैं (काबिल ए तारीफ है)
عَرَبِياللَّهِ الَّذي لَهُ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۗ وَوَيلٌ لِلكافِرينَ مِن عَذابٍ شَديدٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस अल्लाह के (रास्ते की ओर) कि उसी का है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है। तथा काफ़िरों के लिए कड़ी यातना के कारण बड़ा विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Aur zameen aur aasmano ki saari maujuddat (har cheez) ka maalik hai, aur sakht tabah-kun saza hai qabool e haqq se inkar karne walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss Allah ka hai jo kuch aamano aur zamin mein hai.aur kafiron kay liye to sakht azab ki kharabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ज़मीन और आसमान की सारी मौजुद्दत (हर चीज़) का मालिक है, और सख्त तबाह-कुन सजा है कबूल ए हक से इनकार करने वालों के लिए
عَرَبِيالَّذينَ يَستَحِبّونَ الحَياةَ الدُّنيا عَلَى الآخِرَةِ وَيَصُدّونَ عَن سَبيلِ اللَّهِ وَيَبغونَها عِوَجًا ۚ أُولٰئِكَ في ضَلالٍ بَعيدٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो आख़िरत के मुक़ाबले में सांसारिक जीवन को बहुत अधिक पसंद करते हैं और अल्लाह के मार्ग से रोकते और उसमें टेढ़ ढूँढते हैं। ये लोग बहुत दूर की गुमराही में हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo duniya ki zindagi ko aakhirat par tarjeeh (prefrence) detay hain, jo Allah ke rastey se logon ko rok rahey hain aur chahte hain ke yeh raasta (unki khwaishat ke mutabiq) teda (croocked) ho jaye. Yeh log gumraahi mein bahut door nikal gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo aakhirat kay muqablay mein dunyawi zindagi ko pasand rakhtay hain aur Allah ki raah say roktay hain aur iss mein terh pann peda kerna chahatay hain. Yehi log parli darjay ki gumrahi mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो दुनिया की जिंदगी को आखिरी पर तरजीह देता है, जो अल्लाह के रास्ते से लोगों को रोक रहे हैं और चाहते हैं कि ये रास्ता (उनकी ख्वाहिश के) मुताबिक) तेदा (टेढ़ा) हो जाये। ये लोग गुमराही में बहुत दूर निकल गए हैं
عَرَبِيوَما أَرسَلنا مِن رَسولٍ إِلّا بِلِسانِ قَومِهِ لِيُبَيِّنَ لَهُم ۖ فَيُضِلُّ اللَّهُ مَن يَشاءُ وَيَهدي مَن يَشاءُ ۚ وَهُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने कोई रसूल नहीं भेजा परंतु उसकी जाति की भाषा में, ताकि वह उनके लिए खोलकर बयान करे। फिर अल्लाह जिसे चाहता है, पथभ्रष्ट कर देता है और जिसे चाहता है, मार्गदर्शन प्रदान करता है। और वही सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Humne apna paigam dene ke liye jab kabhi koi Rasool bheja hai, usne apni qaum hi ki zubaan mein paigaam diya hai taa-ke woh unhein acchi tarah khol kar baat samjhaye. Phir Allah jisey chahta hai bhatka deta hai aur jisey chahta hai hidayat bakshta hai, woh baladast (galib/all powerful) aur hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney her her nabi ko uss ki qomi zaban mein hi bheja hai takay unn kay samney wazahat say biyan ker dey. Abb Allah Taalaa jisay chahaye gumrah ker dey aur jisay chahaye raah dikha dey woh ghalba aur hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने अपना पैगाम देने के लिए जब कभी कोई रसूल भेजा है, उसने अपनी क़ौम ही कि जुबान में पैगाम दिया है ता-के वो उन्हें अच्छी तरह से खोल कर बात समझाए। फिर अल्लाह जिसे चाहता है भटका देता है और जिसे चाहता है हिदायत बख्शता है, वो बालादस्त (गालिब/सर्वशक्तिमान) और हकीम है
عَرَبِيوَلَقَد أَرسَلنا موسىٰ بِآياتِنا أَن أَخرِج قَومَكَ مِنَ الظُّلُماتِ إِلَى النّورِ وَذَكِّرهُم بِأَيّامِ اللَّهِ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِكُلِّ صَبّارٍ شَكورٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने मूसा को अपनी निशानियों (चमत्कारों) के साथ भेजा कि अपनी जाति को अंधेरों से प्रकाश की ओर निकाल ला और उन्हें अल्लाह के दिन याद दिला। निःसंदेह इसमें हर ऐसे व्यक्ति के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो बहुत सब्र करने वाला, बहुत शुक्र करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Hum issey pehle Moosa ko bhi apni nishaniyon ke saath bhej chuke hain, usey bhi humne hukum diya tha ke apni qaum ko tareekiyon (darkness) se nikal kar roshni mein laa aur unhein tareekh-e-ilahi (Divine History) ke sabaq-aamoz waqiyat suna kar naseehat kar. In waqiyat mein badi nishaniyan hain har us shaks ke liye jo sabr aur shukar karne wala ho
Roman Urdu (Junagarhi)(yaad rakho jabkay) hum ney musa ko apni nishaniyan dey ker bheja kay tu apni qom ko andheron say roshni mein nikal aur enhen Allah kay ehsanaat yaad dila. Iss mein nishaniyan hain her aik sabar shukar kerney wlay kay liye
Devnagri Urdu (Maududi)हम इस पहले मूसा को भी अपनी निशानियों के साथ भेज चुके हैं, हमने भी हुकुम दिया था कि अपनी क़ौम को तरीकियों (अंधेरे) से निकल कर रोशनी में ला और उन्हें तारीख-ए-इलाही (ईश्वरीय इतिहास) के सबक-आमोज़ वाकियात सुना कर हिदायत कर। वाकियात में बड़ी निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो सब्र और शुक्र करने वाला हो
عَرَبِيوَإِذ قالَ موسىٰ لِقَومِهِ اذكُروا نِعمَةَ اللَّهِ عَلَيكُم إِذ أَنجاكُم مِن آلِ فِرعَونَ يَسومونَكُم سوءَ العَذابِ وَيُذَبِّحونَ أَبناءَكُم وَيَستَحيونَ نِساءَكُم ۚ وَفي ذٰلِكُم بَلاءٌ مِن رَبِّكُم عَظيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जब मूसा ने अपनी जाति से कहा : तुम अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करो, जब उसने तुम्हें फ़िरऔनियों से छुटकारा दिलाया, जो तुम्हें घोर यातना देते थे, तुम्हारे बेटों का बुरी तरह वध करते और तुम्हारी स्त्रियों को जीवित रखते थे। और इसमें तुम्हारे पालनहार की ओर से बहुत बड़ी आज़माइश थी।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jab Moosa ne apni qaum se kaha “Allah ke us ehsan ko yaad rakkho jo usne tumpar kiya hai, usne tumko Firoun walon se chudaya jo tumko sakht takleefein dete thay, tumhare ladkon ko qatal kar daalte thay aur tumhari auraton ko zinda bacha rakhte thay. Usmein tumhare Rubb ki taraf se tumhari badi aazmaish thi
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss waqt musa ney apni qom say kaha kay Allah kay woh ehsanaat yaad kero jo uss ney tum per kiye hain jabkay uss ney tumhen firaoniyon say nijat di jo tumhen baray dukh phonchatay thay. Tumharay larkon ko qatal kertay thay aut tumhari larkiyon ko zinda chortay thay iss mein tumharay rab ki taraf say tum per boht bari aamaeesh thi
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा "अल्लाह के हमें एहसान को याद रखो जो उसने तुमपर किया है, उसने तुमको फिरौन वालों से छुड़ाया जो तुमको मजबूत तकलीफें देते थे, तुम्हारे लड़कों को कत्ल कर डालते थे और तुम्हारी औरतों को जिंदा बच्चा रखते थे, तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारी बड़ी आजमाइश थी
عَرَبِيوَإِذ تَأَذَّنَ رَبُّكُم لَئِن شَكَرتُم لَأَزيدَنَّكُم ۖ وَلَئِن كَفَرتُم إِنَّ عَذابي لَشَديدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद करो) जब तुम्हारे पालनहार ने साफ घोषणा कर दी कि निःसंदेह यदि तुम शुक्र करोगे, तो मैं अवश्य ही तुम्हें अधिक दूँगा तथा निःसंदेह यदि तुम नाशुक्री करोगे, तो निःसंदेह मेरी यातना निश्चय बहुत कड़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yaad rakho, tumhare Rubb ne khabardar kardiya tha ke agar shukar-guzar banoge to main tumko aur zyada nawazunga aur agar kufran-e-niyamat (ungrateful) karoge to meri saza bahut sakht hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab tumharay perwerdigar ney tumhen aagah kerdiya kay agar tum shukar guzari kero gay to be-shak mein tumhen ziyada doon ga aur agar tum na shukri kero gay to yaqeenan mera azab boht sakht hai
Devnagri Urdu (Maududi)और याद रखो, तुम्हारे रब ने खबरदार बना दिया था तो मैं। तुमको और ज़्यादा नवाज़ूंगा और अगर कुफ़्रान-ए-नियामत (कृतघ्न) करोगे तो मेरी सज़ा बहुत ज़रूरी है”
عَرَبِيوَقالَ موسىٰ إِن تَكفُروا أَنتُم وَمَن فِي الأَرضِ جَميعًا فَإِنَّ اللَّهَ لَغَنِيٌّ حَميدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और मूसा ने कहा : यदि तुम और वे लोग जो धरती में हैं, सब के सब कुफ़्र करो, तो निःसंदेह अल्लाह निश्चय बड़ा बेनियाज़, असीम प्रशंसा वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur Moosa ne kaha ke “agar tum kufr karo aur zameen ke sarey rehne waley bhi kafir ho jayein to Allah be niyaz aur apni zaat mein aap mehmood hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) ney kaha kay agar tum sab aur ruy-e-zamin kay tamam insan Allah ki na shukri keren to bhi Allah bey niyaz aur tareefon wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और मूसा ने कहा के “अगर तुम कुफ़्र करो और ज़मीन के सारे रहने वाले भी काफ़िर हो जाएँ तो अल्लाह रहो नियाज़ और अपनी ज़ात में आप महमूद हैं”
عَرَبِيأَلَم يَأتِكُم نَبَأُ الَّذينَ مِن قَبلِكُم قَومِ نوحٍ وَعادٍ وَثَمودَ ۛ وَالَّذينَ مِن بَعدِهِم ۛ لا يَعلَمُهُم إِلَّا اللَّهُ ۚ جاءَتهُم رُسُلُهُم بِالبَيِّناتِ فَرَدّوا أَيدِيَهُم في أَفواهِهِم وَقالوا إِنّا كَفَرنا بِما أُرسِلتُم بِهِ وَإِنّا لَفي شَكٍّ مِمّا تَدعونَنا إِلَيهِ مُريبٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम्हारे पास उन लोगों की ख़बर नहीं आई, जो तुमसे पहले थे; नूह़ की जाति की, तथा आद और समूद की और उन लोगों की जो उनके बाद थे, जिन्हें अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता? उनके रसूल उनके पास स्पष्ट निशानियाँ लेकर आए, तो उन्होंने अपने हाथ अपने मुँहों में लौटा लिए और उन्होंने कहा : निःसंदेह हम उसे नहीं मानते, जिसके साथ तुम भेजे गए हो और निःसंदेह हम तो उसके बारे में जिसकी ओर तुम हमें बुलाते हो, एक उलझन में डाल देने वाले संदेह में पड़े हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya tumhein un qaumon ke halaat nahin pahunche jo tumse pehle guzar chuki hain? Qaum-e-Nooh, Aad, Samood aur unke baad aane wali bahut se qaumein jinka shumar Allah hi ko maloom hai? Unke Rasool jab unke paas saaf saaf baatein aur khuli khuli nishaniyan liye huey aaye to unhon ne apne mooh mein haath daba liye aur kaha ke “ jis paigaam ke saath tum bheje gaye ho hum usko nahin maante aur jis cheez ki tum humein dawat dete ho uski taraf se hum sakht khaljan aameiz shakk (disquieting doubt) mein padey huey hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tumharay pass tum say pehlay kay logon ki khabren nahi aaen? Yani qom-e-nooh ki aur aad-o-samood ki aur unn kay baad walon ki jinhen siwaye Allah Taalaa kay aur koi nahi janta unn kay pass unn kay rasool moajzzay laye lekin unhon ney apney hath apney mun mein daba liye aur saaf keh diya kay jo kuch tumhen dey ker bheja gaya hai hum uss kay munkir hain aur jiss cheez ki taraf tum humen bula rahey ho humen to iss mein bara bhari shuba hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम उन क़ौमों के हालात नहीं पाहुंचे जो तुमसे पहले गुज़र चुकी हैं? कौम-ए-नूह, आद, समूद और उनके बाद आने वाली बहुत से कौमें जिनका शूमर अल्लाह ही को मालूम है? उनके रसूल जब उनके पास साफ-साफ बातें और खुली-खुली निशानियां लिए हुए आए तो उन्हें ने अपने मुंह में हाथ दबा लिया और कहा के “जिस पैगाम के साथ तुम भेज गए हो हम उसको नहीं मानते और जिस चीज की तुम हमें दावत देते हो उसकी तरफ से हम सख्त खलजन हैं।” आमीज़ शक्क (बेचैन करने वाला संदेह) में पैदा हुए हैं”
عَرَبِي۞ قالَت رُسُلُهُم أَفِي اللَّهِ شَكٌّ فاطِرِ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ يَدعوكُم لِيَغفِرَ لَكُم مِن ذُنوبِكُم وَيُؤَخِّرَكُم إِلىٰ أَجَلٍ مُسَمًّى ۚ قالوا إِن أَنتُم إِلّا بَشَرٌ مِثلُنا تُريدونَ أَن تَصُدّونا عَمّا كانَ يَعبُدُ آباؤُنا فَأتونا بِسُلطانٍ مُبينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनके रसूलों ने कहा : क्या अल्लाह के बारे में कोई संदेह है, जो आकाशों तथा धरती का पैदा करने वाला है? वह तुम्हें इसलिए बुलाता है कि तुम्हारे लिए तुम्हारे कुछ पाप क्षमा कर दे और तुम्हें एक निर्धारित अवधि तक अवसर दे। उन्होंने कहा : तुम तो हमारे ही जैसे इनसान हो। तुम चाहते हो कि हमें उससे रोक दो, जिसकी पूजा हमारे बाप-दादा करते थे। तो तुम हमारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण लाओ।
Roman Urdu (Maududi)Unke Rasoolon ne kaha “kya khuda ke barey mein Shakk hai jo aasmano aur zameen ka khaliq hai? Woh tumhein bula raha hai taa-ke tumhare kasoor maaf karey aur tumko ek muddat-e-muqarrar tak mohlat de”. Unhon ne jawab diya “ tum kuch nahin ho magar waise hi Insaan jaise hum hain , tum humein un hastiyon ki bandagi se rokna chahte ho jinki bandagi baap dada se hoti chali aa rahi hai, accha to lao koi sareeh sanad(clear proof)”
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay rasoolon ney unhen kaha kay kiya haq taalaa kay baray mein tumhen shak hai jo aasmano aur zamin ka bananey wala hai woh to tumhen iss liye bula raha hai kay tumharay tamam gunah moaf farma dey aur aik muqarrara waqt tak tumhen mohlat ata farmaye unhon ney kaha kay tum to hum jaisay hi insan ho tum chahatay ho kay humen unn khudaon ki ibadat say rok do jin ki ibadat humaray baap dada kertay rahey acha to humaray samney koi khulli daleel paish kero
Devnagri Urdu (Maududi)उनके रसूलों ने कहा “क्या खुदा के बारे में शक्क है जो आसमान और ज़मीन का खालिक है? वो तुम्हें बुला रहा है ता-के तुम्हारे कसूर माफ़ करे और तुमको एक मुद्दत-ए-मुक़र्रर तक? मोहलात दे”। अनहोन ने जवाब दिया “तुम कुछ नहीं हो मगर वैसे ही इंसान जैसे हम हैं, तुम हमें उन हस्तियों की बंदगी से रोकना चाहते हो जिनकी बंदगी बाप दादा से होती चली आ रही है, अच्छा तो लाओ कोई सारी सनद (स्पष्ट प्रमाण)”
عَرَبِيقالَت لَهُم رُسُلُهُم إِن نَحنُ إِلّا بَشَرٌ مِثلُكُم وَلٰكِنَّ اللَّهَ يَمُنُّ عَلىٰ مَن يَشاءُ مِن عِبادِهِ ۖ وَما كانَ لَنا أَن نَأتِيَكُم بِسُلطانٍ إِلّا بِإِذنِ اللَّهِ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَليَتَوَكَّلِ المُؤمِنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनके रसूलों ने उनसे कहा : हम तो तुम्हारे जैसे इनसान ही हैं, परन्तु अल्लाह अपने बंदों में से जिसपर चाहे, उपकार करता है। और हमारे लिए कभी संभव नहीं कि अल्लाह की अनुमति के बिना तुम्हारे पास कोई प्रमाण ले आएँ और ईमान वालों को अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए।
Roman Urdu (Maududi)Unke Rasoolon ne unsey kaha “waqai hum kuch nahin hain magar tum hi jaise Insaan, lekin Allah apne bandon mein se jisko chahta hai nawazta hai aur yeh hamare ikhtiyar mein nahin hai ke tumhein koi sanad laa dein. Sanad to Allah hi ke izan (permission/will) se aa sakti hai. Aur Allah hi par ehle iman ko bharosa karna chahiye
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay payghumbaron ney unn say kaha yeh to sach hai kay hum tum jaisay hi insan hain lekin Allah Taalaa apney bandon mein say jiss per chahata hai apna fazal kerta hai. Allah kay hukum kay baghair humari majal nahi kay hum koi moajzza tumhen laa dikhayen aur eman walon ko sirf Allah Taalaa hi per bharosa rakhna chahiye
Devnagri Urdu (Maududi)उनके रसूलों ने उन्हें कहा “वाकई हम कुछ” नहीं हैं मगर तुम ही जैसे इंसान, लेकिन अल्लाह अपने बंदों में से जिसका चाहता है नवाजता है और ये हमारे इख्तियार में नहीं है कि तुम्हें कोई सनद ला दें अल्लाह ही के इज़ान (अनुमति/इच्छा) से आ सकता है चाहिए
عَرَبِيوَما لَنا أَلّا نَتَوَكَّلَ عَلَى اللَّهِ وَقَد هَدانا سُبُلَنا ۚ وَلَنَصبِرَنَّ عَلىٰ ما آذَيتُمونا ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَليَتَوَكَّلِ المُتَوَكِّلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमें क्या है कि हम अल्लाह पर भरोसा न करें, हालाँकि उसने हमें हमारे मार्ग दिखा दिए? और हम अवश्य उसपर धैर्य से काम लेंगे, जो तुम हमें कष्ट पहुँचाओगे। और भरोसा करने वालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।
Roman Urdu (Maududi)Aur hum kyun na Allah par bharosa karein jabke hamari zindagi ki raahon mein usne hamari rehnumayi ki hai? Jo aziyatein (takleefein) tum log humein de rahey ho unpar hum sabr karenge aur bharosa karne walon ka bharosa Allah hi par hona chahiye”
Roman Urdu (Junagarhi)Aakhir kiya waja hai kay hum Allah Taalaa per bharosa na rakhen jabkay ussi ney humen humari rahen sujhaee hain. Wallah jo ezayen tum humen do gay hum unn per sabar hi keren gay. Tawakkal kerney walon ko yehi laeeq hai kay Allah hi per tawakkal keren
Devnagri Urdu (Maududi)और हम क्यों न अल्लाह पर भरोसा करें जबके हमारी जिंदगी की राहों में उसने हमारी रहनुमाई की है? जो अज़ियातें (तक़लीफ़ीन) तुम लोग हमें दे रहे हो उन्पर हम सब्र करेंगे और भरोसा करने वालों का भरोसा अल्लाह ही पर होना चाहिए”
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ كَفَروا لِرُسُلِهِم لَنُخرِجَنَّكُم مِن أَرضِنا أَو لَتَعودُنَّ في مِلَّتِنا ۖ فَأَوحىٰ إِلَيهِم رَبُّهُم لَنُهلِكَنَّ الظّالِمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और काफ़िरों ने अपने रसूलों से कहा : हम अवश्य तुम्हें अपने भू-भाग से निकाल देंगे, या अवश्य तुम हमारे पंथ में वापस आओगे। तो उनके पालनहार ने उनकी ओर वह़्य की कि निश्चय हम इन अत्याचारियों को अवश्य विनष्ट कर देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir-e-kaar munkireen ne apne Rasoolon se kehdiya ke “ yaa to tumhein hamari millat mein wapas aana hoga warna hum tumhein apne mulk se nikal denge”. Tab unke Rubb ne unpar wahee bheji ke “hum in zalimon ko halaak kar denge
Roman Urdu (Junagarhi)Kafiron ney apney rasoolon say kaha kay hum tumhen mulk badar ker den gay ya tum phir say humaray mazhab mein lot aao. To unn kay perwerdigar ney unn ki taraf waahee bheji kay hum inn zalimon ko hi ghaarat ker den gay
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर-ए-कार मुनकिरीन ने अपने रसूलों से कहा के “ हां तो तुम हमारी मिल्लत में वापस आना होगा वरना हम तुम्हें अपने मुल्क से निकल देंगे”। तब उनके रब ने उन्पर वही भेजी के "हम इन जालिमों को हलाक कर देंगे
عَرَبِيوَلَنُسكِنَنَّكُمُ الأَرضَ مِن بَعدِهِم ۚ ذٰلِكَ لِمَن خافَ مَقامي وَخافَ وَعيدِ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय उनके बाद हम तुम्हें उस धरती में अवश्य बसा देंगे। यह उसके लिए है, जो मेरे समक्ष खड़ा होने से डरा तथा मेरी चेतावनी से डरा।
Roman Urdu (Maududi)Aur unke baad tumhein zameen mein aabaad karenge. Yeh inaam hai uska jo mere huzoor jawab-dehi (accountability) ka khauf rakhta ho aur meri waeed se darta ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kay baad hum khud tumhen iss zamin mein basayen gay. Yeh hai unn kay liye jo meray samney kharay honey ka darr rakhen aur meri waeed say khofzada rahen
Devnagri Urdu (Maududi)और उनके बाद तुम्हारी जमीन में आबाद करेंगे। ये इनाम है उसका जो मेरे हुजूर जवाब-देही (जवाबदेही) का खौफ रखता हो और मेरी वेद से डरता हो"
عَرَبِيوَاستَفتَحوا وَخابَ كُلُّ جَبّارٍ عَنيدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन (रसूलों) ने विजय की प्रार्थना की और प्रत्येक सरकश, हठधर्मी असफल हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne faisla chaha tha (to yun unka faisla hua) aur har jabbar (tyrant) dushman-e-haqq ne mooh ki khayi (suffered ignominy)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unhon ney faisla talab kiya aur tamam sirkash ziddi log na murad hogaye
Devnagri Urdu (Maududi)अनहोन ने फैसला चाहा था (तो यूं उनका फैसला हुआ) और हर जब्बार (अत्याचारी) दुश्मन-ए-हक़्क़ ने मुहं की खाई (अपमानिता झेली)
عَرَبِيمِن وَرائِهِ جَهَنَّمُ وَيُسقىٰ مِن ماءٍ صَديدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उसके आगे जहन्नम है और उसे पीप का पानी पिलाया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Phir iske baad aage uske liye jahannum hai, wahan usey kach-lahu (blood) ka sa pani peene ko diya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Uss kay samney dozakh hai jahan woh peep ka pani pilaya jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इसके बाद आगे उसके लिए जहन्नुम है, वहां उसे कच-लहू (खून) का सा पानी पीने को दिया जाएगा
عَرَبِييَتَجَرَّعُهُ وَلا يَكادُ يُسيغُهُ وَيَأتيهِ المَوتُ مِن كُلِّ مَكانٍ وَما هُوَ بِمَيِّتٍ ۖ وَمِن وَرائِهِ عَذابٌ غَليظٌ
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हिन्दी (Al-Omari)वह उसे कठिनाई से घूँट-घूँट पिएगा और उसे गले से न उतार सकेगा। और उसके पास मृत्यु प्रत्येक स्थान से आएगी। हालाँकि वह किसी प्रकार मरने वाला नहीं। और उसके सामने एक कठोर यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Jisey woh zabardasti halaq se utarne ki koshish karega aur mushkil hi se utaar sakega. Maut har taraf se uspar chayi rahegi magar woh marne na payega aur aagey ek sakht azaab uski jaan ka laagu rahega
Roman Urdu (Junagarhi)Jisay ba mushkil ghoont ghoont piye ga. Phir bhi ussay galay say utaar na sakay ga aur ussay her jagah say maut aati dikhaee dey gi lekin woh marney wala nahi. Phir uss kay peechay bhi sakhta azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिसे वाह ज़बरदस्ती हलक़ से उतरें की कोशिश करेगा और मुश्किल ही से उतार सकेगा। मौत हर तरफ़ से उसपर छायी रहेगी मगर वो मरने ना पायेगा और आगे एक साख अज़ाब उसकी जान का लागू रहेगा
عَرَبِيمَثَلُ الَّذينَ كَفَروا بِرَبِّهِم ۖ أَعمالُهُم كَرَمادٍ اشتَدَّت بِهِ الرّيحُ في يَومٍ عاصِفٍ ۖ لا يَقدِرونَ مِمّا كَسَبوا عَلىٰ شَيءٍ ۚ ذٰلِكَ هُوَ الضَّلالُ البَعيدُ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों का उदाहरण जिन्होंने अपने पालनहार के साथ कुफ़्र किया, उनके कार्य उस राख की तरह हैं, जिसपर आँधी वाले दिन में हवा बहुत प्रचंड चली। वे लोग अपने किए में से कुछ नहीं पा सकेंगे। यही (सत्य से) बहुत दूर की गुमराही है।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne apne Rubb se kufr kiya hai unke aamal ki misaal us raakh (ash) ki si hai jisey ek toofaani din ki aandhi ne uda diya ho. Woh apne kiye ka kuch bhi phal( na paa sakenge, yahi parle darje ki gum gashtagi (extreme deviation) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unn logon ki misal jihon ney apney paalney walay say kufur kiya unn kay aemaal misil uss raakh kay hain jiss per tez hawa aandhi walay din chalay. Jo bhi unhon ney kiya uss mein say kissi cheez per qadir na hongay yehi door ki gumrahi hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने अपने रब से कुफ्र किया है उनके अमाल की मिसाल हमें रख (राख) की सी है जिसने एक तूफानी दिन की आंधी ने उड़ा दिया हो। वो अपने किये का कुछ भी फल (ना पा सकेंगे, यहीं पारले दर्जे की गम गश्तगी (चरम विचलन) है
عَرَبِيأَلَم تَرَ أَنَّ اللَّهَ خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ بِالحَقِّ ۚ إِن يَشَأ يُذهِبكُم وَيَأتِ بِخَلقٍ جَديدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तूने नहीं देखा कि अल्लाह ने आकाशों तथा धरती की रचना सत्य के साथ की है? यदि वह चाहे, तो तुम सब को ले जाए और एक नई रचना ले आए।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum dekhte nahin ho ke Allah ne aasman o zameen ki takhleeq ko haqq par qayam kiya hai? Woh chahe to tum logon ko le jaye aur ek nayi khalqat (creation) tumhari jagah le aaye
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tu ney nahi dekha kay Allah Taalaa ney aasmano ko aur zamin ko behtareen tedbeer kay sath peda kiya hai. Agar woh chahaye to tum sab ko fana ker dey aur naee makhlooq laye
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह ने आसमां ओ ज़मीन की तहलीक को हक़ पर क़याम किया है? वो चाहे तो तुम लोगों को ले जाई और एक नई ख़ल्क़त (रचना) तुम्हारी जगह ले आओ
عَرَبِيوَما ذٰلِكَ عَلَى اللَّهِ بِعَزيزٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह अल्लाह के लिए कुछ भी कठिन नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Aisa karna uspar kuch bhi dushwar nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah per yeh kaam kuch bhi mushkil nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसा करना उसपर कुछ भी नहीं है
عَرَبِيوَبَرَزوا لِلَّهِ جَميعًا فَقالَ الضُّعَفاءُ لِلَّذينَ استَكبَروا إِنّا كُنّا لَكُم تَبَعًا فَهَل أَنتُم مُغنونَ عَنّا مِن عَذابِ اللَّهِ مِن شَيءٍ ۚ قالوا لَو هَدانَا اللَّهُ لَهَدَيناكُم ۖ سَواءٌ عَلَينا أَجَزِعنا أَم صَبَرنا ما لَنا مِن مَحيصٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे सब के सब अल्लाह के सामने पेश होंगे, तो कमज़ोर लोग उन लोगों से कहेंगे, जो बड़े बने हुए थे : निःसंदेह हम तुम्हारे अनुयायी थे, तो क्या तुम हमें अल्लाह की यातना से बचाने में कुछ भी काम आने वाले हो? वे कहेंगे : यदि अल्लाह ने हमें मार्ग दिखाया होता, तो हम तुम्हें अवश्य मार्ग दिखाते। अब हमारे लिए बराबर है कि हम व्याकुल हों, या हम धैर्य से काम लें। हमारे लिए भागने की कोई जगह नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh log jab ikatthey Allah ke saamne be-naqab hongey to us waqt in mein se jo duniya mein kamzor thay woh un logon se jo baday baney huey thay, kahenge “ duniya mein hum tumhare tabey thay, ab kya tum Allah ke azaab se humko bachane ke liye bhi kuch kar sakte ho?” Woh jawab denge “agar Allah ne humein najaat ki koi raah dikhayi hoti to hum zaroor tumhein bhi dikha dete, ab to yaksan hai, khwa hum jaza fazaa karein ya sabr, bahar haal hamare bachne ki koi surat nahin”
Roman Urdu (Junagarhi)Sab kay sab Allah kay samney roo-baroo kharay hongay uss waqt kamzor log baraee walon say kahen gay hum to tumharay tabeydaar thay to kiys tum Allah kay azabon mein say kuch azab hum say door ker sakney walay ho? Woh jawab den gay kay agar Allah humen hidayat deta to hum bhi zaroor tumhari rehnumaee kertay abb to hum per bey qarari kerna aur sabar kerna dono hi barabar hai humaray liye koi chutkara nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और ये लोग जब इकात्थे अल्लाह के सामने बे-नकाब होंगे तो हमारे वक्त में से जो दुनिया में कामजोर था वो उन लोगों से जो बदे बने हुए थे, कहेंगे "दुनिया में हम तुम्हारे तबे थे, अब तुम अल्लाह के अज़ाब से हमको बचाने के लिए भी कुछ कर सकते हो?” वो जवाब देंगे "अगर अल्लाह ने हमें नजात की कोई राह दिखाई होती तो हम जरूर तुम्हें भी दिखाते, अब तो यक्सन है, ख्वा हम जजा-फजा करें या सब्र, बाहर हाल हमारे बचने की कोई सूरत नहीं"
عَرَبِيوَقالَ الشَّيطانُ لَمّا قُضِيَ الأَمرُ إِنَّ اللَّهَ وَعَدَكُم وَعدَ الحَقِّ وَوَعَدتُكُم فَأَخلَفتُكُم ۖ وَما كانَ لِيَ عَلَيكُم مِن سُلطانٍ إِلّا أَن دَعَوتُكُم فَاستَجَبتُم لي ۖ فَلا تَلوموني وَلوموا أَنفُسَكُم ۖ ما أَنا بِمُصرِخِكُم وَما أَنتُم بِمُصرِخِيَّ ۖ إِنّي كَفَرتُ بِما أَشرَكتُمونِ مِن قَبلُ ۗ إِنَّ الظّالِمينَ لَهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब निर्णय कर दिया जाएगा, तो शैतान कहेगा : निःसंदेह अल्लाह ने तुमसे सच्चा वादा किया था। और मैंने (भी) तुमसे वादा किया था, तो मैंने तुमसे वादाखिलाफ़ी की। और मेरा तुमपर कोई आधिपत्य नहीं था, सिवाय इसके कि मैंने तुम्हें (अपनी ओर) बुलाया, तो तुमने मेरी बात मान ली। अब मेरी निंदा न करो, बल्कि स्वयं अपनी निंदा करो। न मैं तुम्हारी फ़रयाद सुन सकता हूँ और न तुम मेरी फ़रयाद सुन सकते हो। निःसंदेह मैं उसका इनकार करता हूँ, जो तुमने इससे पहले मुझे साझी बनाया। निश्चय अत्याचारियों के लिए दर्दनाक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab faisla chuka diya jayega to shaytan kahega “ haqeeqat yeh hai ke Allah ne jo wadey tumse kiye thay woh sab sachhey thay aur maine jitne wadey kiye un mein se koi bhi pura na kiya. Mera tumpar koi zoar to tha nahin, maine iske siwa kuch nahin kiya ke apne rastey ki taraf tumhein dawat di aur tumne meri dawat par labbaik kiya (qabool ki). Ab mujhey malamat na karo, apne aap hi ko malamat karo. Yahan na main tumhari fariyad-rasi kar sakta hoon aur na tum meri. Issey pehle jo tumne mujhey khudayi mein shareek bana rakkha tha main ussey bari uz-zimma (dissociate myself) hoon. Aisey zalimon ke liye dardnaak saza yaqeeni hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab aur kaam ka faisla ker diya hayega to shetan kahey ga kay Allah ney to tumhen sacha wada diya tha aur mein ney tum say jo waday kiye thay unn ka khilaf kiya mera tum per koi dabao to tha hi nahi haan mein ney tumhen pukara aur tum ney meri maan li pus tum mujhay ilzam na lagao bulkay khud apney aap ko malamat kero na mein tumhara faryad rus aur na tum meri faryad ko phonchney walay mein to siray say manta hi nahi kay tum mujhay iss say pehlay Allah ka shareek mantay rahey yaqeenan zalimon kay liye dard naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जब फैसला चुका दिया जाएगा तो शैतान कहेगा" हकीकत ये है के अल्लाह ने जो वादे तुमसे किए थे वो सब सच्चे थे और मैंने जितने वादे किए उन में से कोई भी पूरा ना किया, मैंने इसके अलावा कुछ नहीं किया के अपने रास्ते की तरफ तुम्हें दावत दी और। तुमने मेरी दावत पर लब्बैक किया (कबूल की)। अब मुझे मालामत ना करो, अपने आप को मालामत करो। यहां ना मैं तुम्हारी फरियाद-रसी कर सकता हूं और ना तुम मेरी। इस्से पहले जो तुमने मुझे ख़ुदाई में शरीक बना रक्खा था मैं उससे बारी उज़-ज़िम्मा (खुद को अलग कर लेना) हूं। ऐसे जालिमों के लिए दर्दनाक सजा यकीनी है”
عَرَبِيوَأُدخِلَ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها بِإِذنِ رَبِّهِم ۖ تَحِيَّتُهُم فيها سَلامٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कार्य किए, उन्हें ऐसी जन्नतों में प्रवेश कराया जाएगा, जिनके (महलों और पेड़ों के) नीचे से नहरें बहती हैं। वे अपने पालनहार की अनुमति से उनमें हमेशा रहने वाले होंगे। उसमें उनका अभिवादन 'सलाम' से होगा।
Roman Urdu (Maududi)Ba khilaf iske ke jo log duniya mein iman laye hain aur jinhon ne neik amal kiye hain woh aisey baaghon mein daakhil kiye jayenge jinke neechey nehrein behti hongi. Wahan woh apne Rubb ke izn(permission) se hamesha rahenge, aur wahan unka isteqbal salamati ki mubarak-baadi se hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log eman laye aur nek amal kiye woh inn jannaton mein dakhil kiye jayen gay jin kay neechay chashmay jari hain jahan unhen hameshgi hogi apney rab kay hukum say. Jahan unn ka khair maqdam salam say hoga
Devnagri Urdu (Maududi)बा खिलाफ इसके जो लोग दुनिया में ईमान लाए हैं और जिन्हों ने नीक अमल किए हैं वो ऐसे बागों में दाख़िल किए जाएंगे जिनके नीचे नेहरेन बहती होंगी। वहां वो अपने रब के इज्न (अनुमति) से हमेशा रहेंगे, और वहां उनका इस्तेकबाल सलामती की मुबारकबादी से होगा
عَرَبِيأَلَم تَرَ كَيفَ ضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا كَلِمَةً طَيِّبَةً كَشَجَرَةٍ طَيِّبَةٍ أَصلُها ثابِتٌ وَفَرعُها فِي السَّماءِ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह ने एक पवित्र कलिमा का उदाहरण कैसे दिया (कि वह) एक पवित्र वृक्ष की तरह है, जिसकी जड़ (भूमि में) सुदृढ़ है और जिसकी शाखा आकाश में है?
Roman Urdu (Maududi)Kya tum dekhte nahin ho ke Allah ne kalima-e-tayyib ko kis cheez se misaal di hai? Iski misaal aisi hai jaise ek acchi zaat ka darakht, jiski jadh(root) zameen mein gehri jami hui hai aur shaakhein (branches) aasman tak pahunchi hui hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney nahi dekha kay Allah Taalaa ney pakeeza baat ki misal kiss tarah biyan farmaee misil aik pakeeza darakht kay jiss ki jarr mazboot hai aur jiss ki tehniyan aasman mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह ने कलिमा-ए-तैयब को किस चीज से मिसाल दी है? इसकी मिसाल ऐसी है जैसे एक अच्छी ज़ात का दरख्त, जिसकी जड़ (जड़) ज़मीन में गहरी जमी हुई है और शाखें (शाखाएँ) आसमान तक पहुँची हुई हैं
عَرَبِيتُؤتي أُكُلَها كُلَّ حينٍ بِإِذنِ رَبِّها ۗ وَيَضرِبُ اللَّهُ الأَمثالَ لِلنّاسِ لَعَلَّهُم يَتَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह अपने पालनहार की अनुमति से प्रत्येक समय अपना फल देता है। और अल्लाह लोगों के लिए उदाहरण देता है, ताकि वे शिक्षा ग्रहण करें।
Roman Urdu (Maududi)Har aan woh apne Rubb ke hukum se apne phal de raha hai. Yeh misaalein Allah isliye deta hai ke log inse sabaq lein
Roman Urdu (Junagarhi)Jo apney perwerdigar kay hukum say her waqt apney phal laata hai aur Allah Taalaa logon kay samney misalen biyan farmata hai takay woh nasheehat hasil keren
Devnagri Urdu (Maududi)हर आन वो अपने रब के हुकुम से अपना फल दे रहा है। ये मिसालें अल्लाह इसलिए देता है के लोग इनसे सबक लें
عَرَبِيوَمَثَلُ كَلِمَةٍ خَبيثَةٍ كَشَجَرَةٍ خَبيثَةٍ اجتُثَّت مِن فَوقِ الأَرضِ ما لَها مِن قَرارٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और बुरी बात का उदाहरण एक बुरे पेड़ की तरह है, जो धरती की सतह से उखाड़ लिया गया, जिसमें कोई स्थिरता नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Aur kalima e khabisa (evil word) ki misaal ek badh-zaat darakht ki si hai jo zameen ki sath se ukhad phenka jaata hai, uske liye koi istehkam(stability) nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na pak baat ki misal ganday darakht jaisi hai jo zamin kay kuch hi upper say ukhaar liya gaya. Issay kuch sabaat to hai hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और कलिमा ए खबीसा (बुरा शब्द) की मिसाल एक बद-ज़ात दरख्त की सी है जो ज़मीन की साथ से उखाड़ फेंका जाता है, उसके लिए कोई इस्तेहकम (स्थिरता) नहीं है
عَرَبِييُثَبِّتُ اللَّهُ الَّذينَ آمَنوا بِالقَولِ الثّابِتِ فِي الحَياةِ الدُّنيا وَفِي الآخِرَةِ ۖ وَيُضِلُّ اللَّهُ الظّالِمينَ ۚ وَيَفعَلُ اللَّهُ ما يَشاءُ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ईमान लाने वालों को दृढ़ बात के द्वारा दुनिया तथा आख़िरत में स्थिरता प्रदान करता है तथा अत्याचारियों को गुमराह कर देता है। और अल्लाह जो चाहता है, करता है।
Roman Urdu (Maududi)Iman laney walon ko Allah ek qaul-e-sabit ki buniyad par duniya aur aakhirat, dono mein sabaat (steadfast) ata karta hai, aur zaalimon ko Allah bhatka deta hai. Allah ko ikhtiyar hai jo chahe karey
Roman Urdu (Junagarhi)Eman walon ko Allah Taalaa pakki baat kay sath mazboot rakhta hai duniya ki zindagi mein bhi aur aakhirat mein bhi haan na insaf logon ko Allah behka deta hai aur Allah jo chahaye ker guzray
Devnagri Urdu (Maududi)ईमान लाने वालों को अल्लाह एक क़ौल-ए-साबित की बुनियाद पर दुनिया और आख़िरत, दोनों में सबात (दृढ़) अता करता है, और ज़ालिमों को अल्लाह भटका देता है। अल्लाह को इख्तियार है जो चाहे करे
عَرَبِي۞ أَلَم تَرَ إِلَى الَّذينَ بَدَّلوا نِعمَتَ اللَّهِ كُفرًا وَأَحَلّوا قَومَهُم دارَ البَوارِ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने उन लोगों को नहीं देखा, जिन्होंने अल्लाह की नेमत को नाशुक्री से बदल दिया और अपनी जाति को विनाश के घर में ला उतारा।
Roman Urdu (Maududi)Tumne dekha un logon ko jinhon ne Allah ki niyamat payi aur usey kufran-e-niyamat (ingratitude) se badal dala aur (apne saath) apni qaum ko bhi halakat ke ghar mein jhonk diya
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney unn ki taraf nazar nahi daali jinhon ney Allah ki nemat kay badley na shukri ki aur apni qom ko halakat kay ghar mein laa utara
Devnagri Urdu (Maududi)तुमने देखा उन लोगों को जिन्होनें अल्लाह की नियामत पाई और उसे कुफ्रान-ए-नियामत (कृतघ्नता) से बदल डाला और (अपने साथ) अपनी क़ौम को भी हलाकत के घर में झोंक दिया
عَرَبِيجَهَنَّمَ يَصلَونَها ۖ وَبِئسَ القَرارُ
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हिन्दी (Al-Omari)(अर्थात्) जहन्नम में। वे उसमें प्रवेश करेंगे और वह बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Yani jahannum, jismein woh jhulse jayenge aur woh badhtareen jaye qarar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yani dozakh mein jiss mien yeh sab jayen gay jo bad tareen thikana hai
Devnagri Urdu (Maududi)यानी जहन्नुम, जिसमें वो झुलस जाएंगे और वो बढतरीन जाए करार है
عَرَبِيوَجَعَلوا لِلَّهِ أَندادًا لِيُضِلّوا عَن سَبيلِهِ ۗ قُل تَمَتَّعوا فَإِنَّ مَصيرَكُم إِلَى النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने अल्लाह के कुछ साझी बना लिए, ताकि उसके मार्ग से (लोगों को) पथभ्रष्ट करें। आप कह दें : लाभ उठा लो। फिर निःसंदेह तुम्हें आग की ओर लौटना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah ke kuch humsar (equals to Allah) tajweej karliye taa-ke woh unhein Allah ke rastey se bhatka dein. Insey kaho: accha mazey karlo, aakhir e kaar tumhein palat kar jana dozakh hi mein hai
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney Allah kay humsar bana liye kay logon ko Allah ki raah say behkayen. Aap keh dijiye kay khair mazay kerlo tumhari baaz gasht to aakhir jahannum hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह के कुछ हमसर (अल्लाह के बराबर) तजवीज कार्लिये ता-के वो उन्हें अल्लाह के रास्ते से भटका दें। इनसे कहो: अच्छा मजा करलो, आख़िर ए कार तुम्हें पलट कर जाना दोज़ख ही में है
عَرَبِيقُل لِعِبادِيَ الَّذينَ آمَنوا يُقيمُوا الصَّلاةَ وَيُنفِقوا مِمّا رَزَقناهُم سِرًّا وَعَلانِيَةً مِن قَبلِ أَن يَأتِيَ يَومٌ لا بَيعٌ فيهِ وَلا خِلالٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) मेरे उन बंदों से कह दो, जो ईमान लाए हैं कि वे नमाज़ क़ायम करें और उसमें से जो हमने उन्हें प्रदान किया है, छिपे और खुले ख़र्च करें, इससे पहले कि वह दिन आए, जिसमें न कोई क्रय-विक्रय होगा और न कोई मैत्री।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), mere jo bandey iman laye hain unse kehdo ke namaz qayam karein aur jo kuch humne unko diya hai, usmein se khuley aur chupe (raah e khair mein) kharch karein qabl iske ke woh din aaye jismein na khareed o farokht hogi aur na dost nawazi ho sakegi (dosti kaam aayegi)
Roman Urdu (Junagarhi)Meray eman walay bandon say keh dijiye kay namazon ko qaeem rakhen aur jo kuch hum ney dey rakha hai uss mein say kuch na kuch posheeda aur zahir kharach kertay rahen iss say pehlay kay woh din aajaye jiss mein na kharid-o-farokht hogi na dosti aur mohabbat
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), मेरे जो बंदे ईमान लाए हैं उनसे कहदो के नमाज़ क़याम करें और जो कुछ हमने उनको दिया है, उसमें से खुले और छुपे (राह ए ख़ैर में) ख़र्च करें क़बल इसके के वो दिन आए जिस्में ना ख़त्म ओ फ़रोख्त होगी और ना दोस्त नवाज़ी हो साकेगी (दोस्ती काम आएगी)
عَرَبِياللَّهُ الَّذي خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ وَأَنزَلَ مِنَ السَّماءِ ماءً فَأَخرَجَ بِهِ مِنَ الثَّمَراتِ رِزقًا لَكُم ۖ وَسَخَّرَ لَكُمُ الفُلكَ لِتَجرِيَ فِي البَحرِ بِأَمرِهِ ۖ وَسَخَّرَ لَكُمُ الأَنهارَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह वह है, जिसने आकाशों तथा धरती को पैदा किया, और आकाश से कुछ पानी उतारा, फिर उसके द्वारा तुम्हारे लिए फलों में से कुछ जीविका निकाली, और तुम्हारे लिए नौकाओं को वशीभूत कर दिया, ताकि वे सागर में उसके आदेश से चलें और तुम्हारे लिए नदियों को वशीभूत कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Allah wahi to hai jisne zameen aur aasmano ko paida kiya aur aasman se pani barsaya, phir uske zariye se tumhari rizq rasani ke liye tarah tarah ke phal paida kiye. Jisne kashti ko tumhare liye musakkhar kiya ke samadar mein uske hukum se chale aur dariyaon ko tumhare liye musakkhar kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Allah woh hai jiss ney aasmanon aur zamin ko peda kiya hai aur aasmanon say barish barsa ker iss kay zariye say tumhari rozi kay liye phal nikaley hain aur kashtiyon ko tumharay bus mein ker diya hai kay daryaon mein uss kay hukum say chalen phiren. Ussi ney nadiyan aur nehren tumharay ikhtiyar mein ker di hain
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह वही तो है जिसने जमीन और आसमान को पेदा किया और आसमान से पानी बरसाया, फिर उसकी ज़रिये से तुम्हारी रिज्क रसानी के लिए तरह तरह के फल पेदा किये। जिसने कश्ती को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया के समंदर में उसके हुकुम से चले और दरियाओं को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया
عَرَبِيوَسَخَّرَ لَكُمُ الشَّمسَ وَالقَمَرَ دائِبَينِ ۖ وَسَخَّرَ لَكُمُ اللَّيلَ وَالنَّهارَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम्हारे लिए सूर्य और चाँद को वशीभूत कर दिया कि निरंतर चलने वाले हैं, तथा तुम्हारे लिए रात और दन को वशीभूत कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Jisne Suraj aur chand ko tumhare liye musakkhar kiya ke lagataar chale jaa rahey hain aur raat aur din ko tumhare liye musakkhar kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney tumharay liye sooraj chand ko musakhar kerdiya hai kay barabar hi chal rahey hain aur raat din ko bhi tumharay kaam mein laga rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने सूरज और चांद को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया के लगतार चले जा रहे हैं और रात और दिन को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया किया
عَرَبِيوَآتاكُم مِن كُلِّ ما سَأَلتُموهُ ۚ وَإِن تَعُدّوا نِعمَتَ اللَّهِ لا تُحصوها ۗ إِنَّ الإِنسانَ لَظَلومٌ كَفّارٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम्हें हर उस चीज़ में से दिया, जो तुमने उससे माँगी। और यदि तुम अल्लाह की नेमत की गणना करो, तो उसकी गणना नहीं कर पाओगे। निःसंदेह मनुष्य निश्चय बड़ा अत्याचारी, बहुत नाशुक्रा है।
Roman Urdu (Maududi)Jinse woh sab kuch tumhein diya jo tumne maanga, agar tum Allah kin niyamaton ka shumar karna chaho to kar nahin sakte. Haqeeqat yeh hai ke Insaan bada hi bay-insaaf aur nashukra hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney tumhen tumhari mun mangi kul cheezon mein say dey rakha hai. Agar tum Allah kay ehsan ginna chahao to unhen pooray ginn bhi nahi saktay. Yaqeenan insan bara hi bey insaf aur na shukra hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिनसे वो सब कुछ तुम्हें दिया जो तुमने मांगा, अगर तुम अल्लाह किन नियमों का पालन करना चाहो तो कर नहीं सकते। हकीकत ये है कि इंसान बड़ा ही बे-इंसाफ और नाशुक्र है
عَرَبِيوَإِذ قالَ إِبراهيمُ رَبِّ اجعَل هٰذَا البَلَدَ آمِنًا وَاجنُبني وَبَنِيَّ أَن نَعبُدَ الأَصنامَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद करो) जब इबराहीम ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! इस नगर (मक्का) को शांति एवं सुरक्षा वाला बना दे, तथा मुझे और मेरे बेटों को मूर्तियों की पूजा करने से बचा ले।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo woh waqt jab Ibrahim ne dua ki thi ke “parwardigar, is shehar ko aman ka shehar bana aur mujhey aur meri aulad ko buth parasti (idol worship) se bacha
Roman Urdu (Junagarhi)(Ibrahim ki yeh dua bhi yaad kero) jab unhon ney kaha kay aey meray perwerdigar! Iss shehar ko aman wala bana dey aur mujhay aur meri aulad ko butt parasti say panah dey
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो वो वक्त जब इब्राहीम ने दुआ की थी के “परवरदिगार, इस शहर को अमन का शहर बना और मुझे और मेरी औलाद को बुथ परस्ती (मूर्ति पूजा) से बचा
عَرَبِيرَبِّ إِنَّهُنَّ أَضلَلنَ كَثيرًا مِنَ النّاسِ ۖ فَمَن تَبِعَني فَإِنَّهُ مِنّي ۖ وَمَن عَصاني فَإِنَّكَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे पालनहार! निःसंदेह इन्होंने बहुत-से लोगों को गुमराह कर दिया। अतः जो मेरे पीछे चला, वह मुझसे है और जिसने मेरी अवज्ञा की, तो निश्चय तू अत्यंत क्षमाशील, बड़ा दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Parwardigar, in buthon (idols) ne bahuton ko gumraahi mein dala hai (mumkin hai ke meri aulad ko bhi yeh gumraah kardein, lihaza unmein se) jo mere tareeqe par chale woh mera hai aur jo mere khilaf tareeqa ikhtiyar karey to yaqeenan tu darguzar karne wala mehrabaan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meray paalney walay mabood! Enhon ney boht say logon ko raah say bhatka diya hai. Pus meri tabeydaari kerney wala mera hai aur jo meri na farmani keray to tu boht hi moaf aur karam kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)परवरदिगार, बुथों (मूर्तियों) में ने बहुतों को गुमराही में डाला है (मुमकिन है के मेरी औलाद को भी ये गुमराह कर दें, लिहाज़ा उनमें से) जो मेरे तारीख पर चले वो मेरा है और जो मेरे खिलाफ़ तारीख इख्तियार करे तो यकीनन तू दरगुज़ार करने वाला मेहरबान है
عَرَبِيرَبَّنا إِنّي أَسكَنتُ مِن ذُرِّيَّتي بِوادٍ غَيرِ ذي زَرعٍ عِندَ بَيتِكَ المُحَرَّمِ رَبَّنا لِيُقيمُوا الصَّلاةَ فَاجعَل أَفئِدَةً مِنَ النّاسِ تَهوي إِلَيهِم وَارزُقهُم مِنَ الثَّمَراتِ لَعَلَّهُم يَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारे पालनहार! निःसंदेह मैंने अपनी कुछ संतान को इस घाटी में, जो किसी खेती वाली नहीं, तेरे सम्मानित घर (काबा) के पास, बसाया है। ऐ हमारे पालनहार! ताकि वे नमाज़ क़ायम करें। अतः कुछ लोगों के दिलों को ऐसे कर दे कि उनकी ओर झुके रहें और उन्हें फलों से जीविका प्रदान कर, ताकि वे शुक्रिया अदा करें।
Roman Urdu (Maududi)Parwardigar, maine ek be aab-o-giyah wadi (barren valley) mein apni aulad ke ek hissey ko tere mohtaram ghar ke paas laa basaya hai. Parwardigar, yeh maine is liye kya hai ke yeh log yahan namaz qayam karein. Lihaza tu logon ke dilon ko inka mushtaq bana (hearts of the people towards them) aur unhein khane ko phal de, shayad ke yeh shukarguzar banein
Roman Urdu (Junagarhi)Aey humaray perwerdigar! Mein ney apni kuch aulad iss bey kheti ki wadi mein teray hurmat walay ghar kay pass basaee hai. Aey humaray perwerdigar! Yeh iss liye kay woh namaz qaeem rakhen pus to kuch logon kay dilon ko inn ki taraf maeel ker dey. Aur enhen phalon ki roiziyan inayat farma takay yeh shukar guzari keren
Devnagri Urdu (Maududi)परवरदिगार, मैंने एक बे आब-ओ-गियाह वादी (बंजर घाटी) में अपनी औलाद के एक हिस्से को तेरे मोहतरम घर के पास ला बसाया है। परवरदिगार, ये मैंने इसके लिए क्या है के ये लोग यहां नमाज़ क़याम करें। लिहाज़ा तू लोगों के दिलों को इनका मुश्ताक बना (लोगों का दिल उनके प्रति) और उन्हें खाने को फल दे, शायद के ये शुक्रगुज़ार बनें
عَرَبِيرَبَّنا إِنَّكَ تَعلَمُ ما نُخفي وَما نُعلِنُ ۗ وَما يَخفىٰ عَلَى اللَّهِ مِن شَيءٍ فِي الأَرضِ وَلا فِي السَّماءِ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारे पालनहार! निश्चय तू जानता है, जो हम छिपाते हैं और जो हम प्रकट करते हैं। और अल्लाह से कोई चीज़ नहीं छिपती धरती में और न आकाश में।
Roman Urdu (Maududi)Parwardigar, tu jaanta hai jo kuch hum chupate hain aur jo kuch zaahir karte hain”. Aur waqayi Allah se kuch bhi chupa hua nahin hai, na zameen mein na asmano mein
Roman Urdu (Junagarhi)Aey humaray perwerdigar! Tu khoob janta hai jo hum chupayen aur jo zahir keren. Zamin-o-aasman ki koi cheez Allah per posheeda nahi
Devnagri Urdu (Maududi)परवरदिगार, तू जानता है जो कुछ हम छुपाते हैं और जो कुछ जाहिर करते हैं”। और वक़ई अल्लाह से कुछ भी छुपा हुआ नहीं है, न ज़मीन में न आसमानो में
عَرَبِيالحَمدُ لِلَّهِ الَّذي وَهَبَ لي عَلَى الكِبَرِ إِسماعيلَ وَإِسحاقَ ۚ إِنَّ رَبّي لَسَميعُ الدُّعاءِ
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हिन्दी (Al-Omari)सब प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जिसने मुझे बुढ़ापे के बावजूद (दो पुत्र) इसमाईल और इसहाक़ प्रदान किए। निःसंदेह मेरा पालनहार तो बहुत दुआ सुनने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)“Shukar hai us khuda ka jisne mujhey is budhape mein Ismail aur Ishaq jaisey bete diye, haqeeqat yeh hai ke mera Rubb zaroor dua sunta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah ka shukar hai jiss ney mujhay iss burhapay mein ismail (alh-e-salam) aur ishaq (alh-e-salam) ata farmaye. Kuch shak nahi kay mera palanhaar Allah duaon ka sunnay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)“शुक्र है हमें खुदा का जिसने मुझे इस बुढापे में इस्माइल और इशाक जैसे बेटे दिए, हकीकत ये है के मेरा रब ज़रूर दुआ सुनता है
عَرَبِيرَبِّ اجعَلني مُقيمَ الصَّلاةِ وَمِن ذُرِّيَّتي ۚ رَبَّنا وَتَقَبَّل دُعاءِ
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हिन्दी (Al-Omari)मेरे पालनहार! मुझे नमाज़ क़ायम करने वाला बना तथा मेरी संतान में से भी। ऐ हमारे पालनहार! और मेरी दुआ स्वीकार कर।
Roman Urdu (Maududi)Aey mere parwardigar, mujhey namaz qayam karne wala bana aur meri aulad se bhi (aise log utha jo yeh kaam karein) parwardigar, meri dua qabool kar
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meray paalney walay! Mujhay namaz ka paband rakh aur meri aulad say bhi aey humaray rab meri dua qabool farma
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ मेरे परवरदिगार, मुझे नमाज़ क़याम करने वाला बना और मेरी औलाद से भी (ऐसे लोग उठा जो ये काम करें) परवरदिगार, मेरी दुआ क़बूल कर
عَرَبِيرَبَّنَا اغفِر لي وَلِوالِدَيَّ وَلِلمُؤمِنينَ يَومَ يَقومُ الحِسابُ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारे पालनहार! मुझे क्षमा कर दे तथा मेरे माता-पिता को और ईमान वालों को, जिस दिन हिसाब लिया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Parwardigar, mujhey aur mere walidain ko aur sab iman laney walon ko us din maaf kardijiyo jabke hisaab qayam hoga”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey humaray perwerdigar! Mujhay bakhsh dey aur meray maa baap ko bhi bakhsh aur digar momino ko bhi bakhsh jiss din hisab honey lagay
Devnagri Urdu (Maududi)परवरदिगार, मुझे और मेरे वलियों को और सब ईमान लाने वालों को उस दिन माफ़ करदीजियो जबके हिसाब क़याम होगा”
عَرَبِيوَلا تَحسَبَنَّ اللَّهَ غافِلًا عَمّا يَعمَلُ الظّالِمونَ ۚ إِنَّما يُؤَخِّرُهُم لِيَومٍ تَشخَصُ فيهِ الأَبصارُ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम अल्लाह को उससे हरगिज़ असावधान न समझो, जो अत्याचारी लोग कर रहे हैं! वह तो उन्हें उस दिन के लिए विलंबित कर रहा है, जिस दिन आँखें खुली रह जाएँगी।
Roman Urdu (Maududi)Ab yeh zalim log jo kuch kar rahey hain Allah ko tum ussey gaafil na samjho. Allah to inhein taal raha hai us din ke liye jab haal yeh hoga ke aankhein phati ki phati reh gayi hain
Roman Urdu (Junagarhi)Na insafon kay aemaal say Allah ko ghafil na samajh woh to enhen uss din tak mohlat diye huye hai jiss din aankhen phati ki phati reh jayen gi
Devnagri Urdu (Maududi)अब ये जालिम लोग जो कुछ कर रहे हैं अल्लाह को तुम उसे गाफिल ना समझो। अल्लाह तो इन्हें टाल रहा है उस दिन के लिए जब हाल ये होगा के आंखें फटी की फटी रह गई हैं
عَرَبِيمُهطِعينَ مُقنِعي رُءوسِهِم لا يَرتَدُّ إِلَيهِم طَرفُهُم ۖ وَأَفئِدَتُهُم هَواءٌ
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हिन्दी (Al-Omari)इस हाल में कि वे तेज़ डौड़ने वाले, अपने सिर को ऊपर उठाने वाले होंगे। उनकी निगाह उनकी ओर नहीं लौटेगी और उनके दिल ख़ाली होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Sar uthaye bhaage chale jaa rahey hain, nazrein upar jami hain aur dil udey jatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh apney sir upper uthaye dor bhaag ker rahey hongay khud apni taraf bhi inn ki nighayen na loten gi aur inn kay dil khali aur array huye hongay
Devnagri Urdu (Maududi)सर उठे भाग चले जा रहे हैं, नजरें ऊपर जमी हैं और दिल उड़े जाते हैं
عَرَبِيوَأَنذِرِ النّاسَ يَومَ يَأتيهِمُ العَذابُ فَيَقولُ الَّذينَ ظَلَموا رَبَّنا أَخِّرنا إِلىٰ أَجَلٍ قَريبٍ نُجِب دَعوَتَكَ وَنَتَّبِعِ الرُّسُلَ ۗ أَوَلَم تَكونوا أَقسَمتُم مِن قَبلُ ما لَكُم مِن زَوالٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) लोगों को उस दिन से डराएँ, जब उनपर यातना आ जाएगी, तो वे लोग जिन्होंने अत्याचार किया, कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! हमें कुछ समय तक मोहलत दे दे, हम तेरा आमंत्रण स्वीकार करेंगे और रसूलों का अनुसरण करेंगे।(कहा जाएगा :) क्या तुमने इससे पहले क़समें नहीं खाई थीं कि तुम्हारे लिए कोई भी स्थानांतरण नहीं?
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), us din se tum inhein darao jabke azaab inhein aa lega us waqt yeh zaalim kahenge ke “aey hamare Rubb, humein thodi si mohlat aur de de, hum teri dawat ko labbaik kahenge aur Rasoolon ki paiwari karenge”. (Magar unhein saaf jawab de diya jayega ke) kya tum wahi log nahin ho jo issey pehle kasamein kha kha kar kehte thay ke humpar to kabhi zawaal (decline) aana hi nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Logon ko uss din say hoshiyaar ker dey jab kay unn kay pass azab aajaye ga aur zalim kahen gay aey humaray rab humen boht thoray qarib kay waqt tak ki hi mohlat dey kay hum teri tableegh maan len aur teray payghumbaron ki tabeydaari mein lagg jayen. Kiya tum iss say pehlay bhi qasmen nahi kha rahey thay? Kay tumharay liye duniya say talna hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), उस दिन से तुम इन्हें डराओ जबके अज़ाब इन्हें आ लेगा हमें वक्त ये जालिम कहेंगे के "ऐ हमारे रब, हमें थोड़ी सी मोहलत और दे दे, हम तेरी दावत को लब्बैक कहेंगे और रसूलों की पैवारी करेंगे"। (मगर उन्हें साफ जवाब दे दिया जाएगा के) क्या तुम वही लोग नहीं हो जो इसे पहले कसमें खा खा कर कहते थे थाय के हमपर तो कभी जवाब (गिरावट) आना ही नहीं है
عَرَبِيوَسَكَنتُم في مَساكِنِ الَّذينَ ظَلَموا أَنفُسَهُم وَتَبَيَّنَ لَكُم كَيفَ فَعَلنا بِهِم وَضَرَبنا لَكُمُ الأَمثالَ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम उन लोगों की बस्तियों में आबाद रहे, जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किया था और तुम्हारे लिए अच्छी तरह स्पष्ट हो गया कि हमने उनके साथ किस तरह किया? और हमने तुम्हारे लिए कई उदाहरण प्रस्तुत किए।
Roman Urdu (Maududi)Halanke tum un qaumon ki bastiyon mein reh bas chuke thay jinhon ne apne upar aap zulm kiya tha aur dekh chuke thay ke humne unsey kya sulook kiya aur unki misalein(examples) de de kar hum tumhein samjha bhi chuke thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kiya tum inn logon kay gharon mein rehtay sehtay na thay jinhon ney apni jano per zulm kiya aur kiya tum per woh moamla khula nahi kay hum ney unn kay sath kaisa kuch kiya. Hum ney (to tumharay samjhaney ko) boht si misalen biyan ker di thin
Devnagri Urdu (Maududi)हालंके तुम उन क़ौमों की बस्तियों में रह बस चुके थे जिन्होन ने अपने ऊपर आप ज़ुल्म किया था और देख चुके थे के हमने उनसे क्या सुलूक किया और उनकी मिसालें (उदाहरण) दे कर हम तुम्हें समझा भी चुके थे
عَرَبِيوَقَد مَكَروا مَكرَهُم وَعِندَ اللَّهِ مَكرُهُم وَإِن كانَ مَكرُهُم لِتَزولَ مِنهُ الجِبالُ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह उन्होंने अपना उपाय किया। और अल्लाह ही के पास उनका उपाय है। और उनका उपाय हरगिज़ ऐसा न था कि उससे पर्वत टल जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne apni saari hi chalein chal dekhi, magar unki har chaal ka todh Allah ke paas tha, agarche unki chaalein aisi gazab ki thi ke pahad unse tal jayein
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh apni apni chalen chal rahey hain aur Allah ko inn ki tamam chalon ka ilm hai aur inn ki chalen aisi na thin kay unn say pahar apni jagah say tal jayen
Devnagri Urdu (Maududi)उन्होन ने अपनी सारी ही चलें चल देखी, मगर उनकी हर चाल का तोड़ अल्लाह के पास था, अगर उनकी चालें ऐसी गजब की थी के पहाड़ उनसे ताल जाए
عَرَبِيفَلا تَحسَبَنَّ اللَّهَ مُخلِفَ وَعدِهِ رُسُلَهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزيزٌ ذُو انتِقامٍ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप हरगिज़ यह न समझें कि अल्लाह अपने रसूलों से किए हुए अपने वादे के विरुद्ध करने वाला है। निःसंदेह अल्लाह प्रभुत्वशाली, बदला लेने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Pas (aey Nabi), tum hargiz yeh gumaan na karo ke Allah kabhi apne Rasoolon se kiye huey wadon ke khilaf karega. Allah zabardast hai aur inteqam lene wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap hergiz yeh khayal na keren kay Allah apney nabiyon say wada khilafi keray ga Allah bara hi ghalib aur badla lenay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ नबी), तुम हरगिज ये गुमान न करो के अल्लाह कभी अपने रसूलों से किए हुए वादों के खिलाफ करेगा। अल्लाह ज़बरदस्त है और इंतक़ाम लेने वाला है
عَرَبِييَومَ تُبَدَّلُ الأَرضُ غَيرَ الأَرضِ وَالسَّماواتُ ۖ وَبَرَزوا لِلَّهِ الواحِدِ القَهّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन यह धरती अन्य धरती से बदल दी जाएगी और सब आकाश भी। तथा लोग अल्लाह के समक्ष प्रस्तुत होंगे, जो अकेला, सब पर प्रभुत्वशाली है।
Roman Urdu (Maududi)Darao inhein us din se jabke zameen aur aasmaan badal kar kuch se kuch kar diye jayenge aur sab ke sab Allah wahid e qahhar(the one the irressitible) ke saamne bay-naqab haazir ho jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din zamin iss zamin kay siwa aur hi badal dijayegi aur aasman bhi aur sab kay sab Allah wahid ghalbay walay kay roo-baroo hongay
Devnagri Urdu (Maududi)दारो इन्हें हम दिन से जबके ज़मीन और आसमां बदल कर कुछ कर देंगे और सब अल्लाह वाहिद ए कहार (एक जो चिड़चिड़ा है) के सामने बे-नक़ब हाज़िर हो जायेंगे
عَرَبِيوَتَرَى المُجرِمينَ يَومَئِذٍ مُقَرَّنينَ فِي الأَصفادِ
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हिन्दी (Al-Omari)और आप अपराधियों को उस दिन ज़ंजीरों में एक-दूसरे के साथ जकड़े हुए देखेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Us roz tum mujreemon ko dekhoge ke zanjeeron mein haath paaon jakde hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Aap uss din gunehgaron ko dekhen gay kay zanjeeron mein milay julay aik jagah jakray huye hongay
Devnagri Urdu (Maududi)हमें रोज़ तुम मुजर्रीमों को देखोगे के ज़ंजीरों में हाथ पाँव जकड़े होंगे
عَرَبِيسَرابيلُهُم مِن قَطِرانٍ وَتَغشىٰ وُجوهَهُمُ النّارُ
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हिन्दी (Al-Omari)उनके वस्त्र तारकोल के होंगे और उनके चेहरों को आग ढाँपे होगी।
Roman Urdu (Maududi)Taar-kol (liquid pitch/tar/dambar) ke libas pehne huey honge aur aag ke shole unke chehron par chaye jaa rahey honge
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay libad gandhak kay hongay aur aag unn kay chehron per bhi charhi hui hogi
Devnagri Urdu (Maududi)तार-कोल (तरल पिच/टार/डंबर) के लिबास पहने हुए होंगे और आग के शोले उनके चेहरों पर छाये जा रहे होंगे
عَرَبِيلِيَجزِيَ اللَّهُ كُلَّ نَفسٍ ما كَسَبَت ۚ إِنَّ اللَّهَ سَريعُ الحِسابِ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि अल्लाह प्रत्येक प्राणी को उसके किए का बदला दे। निःसंदेह अल्लाह शीघ्र हिसाब लेने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh is liye hoga ke Allah har mutanaffis ko uske kiye ka balda dega. Allah ko hisaab lete kuch dair nahin lagti
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss liye kay Allah Taalaa her shaks ko uss kay kiye huye aemaal ka badla dey be-shak Allah Taalaa ko hisab letay kuch dair nahi lagney ki
Devnagri Urdu (Maududi)ये इस लिए होगा के अल्लाह हर मुतनफ्फिस को उसके किये का बलदा देगा. अल्लाह को हिसाब लेते कुछ देर नहीं लगती
عَرَبِيهٰذا بَلاغٌ لِلنّاسِ وَلِيُنذَروا بِهِ وَلِيَعلَموا أَنَّما هُوَ إِلٰهٌ واحِدٌ وَلِيَذَّكَّرَ أُولُو الأَلبابِ
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हिन्दी (Al-Omari)यह लोगों के लिए एक सूचना है और ताकि उन्हें इसके साथ डराया जाए और ताकि वे जान लें कि वही एक सत्य पूज्य है और ताकि बुद्धि वाले लोग शिक्षा ग्रहण करें।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ek paigam hai sab Insaano ke liye, aur yeh bheja gaya hai is liye ke unko iske zariye se khabardaar kardiya jaye aur woh jaan lein ke haqeeqat mein khuda bas ek hi hai aur jo aqal rakhte hain woh hosh mein aa jayein
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh quran tamam logon kay liye itlaa naama hai kay iss kay zariye say woh hoshiyaar ker diye jayen aur bakhoobhi maloom kerlen kay Allah aik hi mabood hai aur takay aqal mand log soch samajh len
Devnagri Urdu (Maududi)ये एक पैगाम है सब इंसानों के लिए, और ये भेजा गया है इसके लिए कि उनको इसके जरीये से खबरदार कर दिया जाए और वो जान लें के हकीकत में खुदा बस एक ही है और जो अक्ल रखते हैं वो होश मैं आ जाइए
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Surah 14: Ibrahim (Abraham)

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Surah 14: Ibrahim (Abraham)

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Surah 14: Ibrahim (Abraham)

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Surah 14: Ibrahim (Abraham)

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Surah 14: Ibrahim (Abraham)

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Surah 15: Al-Hijr (The Rock)

Meccan🕐 Revelation #54📜 99 Verses🕮 Juz 14
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🕮 Juz 14 begins here
हिन्दी (Al-Omari)अलिफ़, लाम, रा। ये किताब और स्पष्ट क़ुरआन की आयतें हैं।
Roman Urdu (Maududi)Alif Laam Raa .. yeh aayat hain kitab e ilahi aur Quran e mubeen ki
Roman Urdu (Junagarhi)Alif –laam-raa yeh kitab-e-elahi ki aayaten hain aur khullay aur roshan quran ki
Devnagri Urdu (Maududi)अलिफ लाम रा .. ये आयत हैं किताब ए इलाही और कुरान ए मुबीन की
عَرَبِيرُبَما يَوَدُّ الَّذينَ كَفَروا لَو كانوا مُسلِمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(एक समय आएगा कि) काफ़िर चाहेंगे कि काश वे (दुनिया में) मुसलमान होते!
Roman Urdu (Maududi)Baeed nahin ke ek waqt woh aa jaye jab wahi log jinhon ne aaj ( dawah e Islam ko qabool karne se) inkar kardiya hai pachta pachta kar kahenge ke kaash humne sar e tasleem kham kardiya hota
Roman Urdu (Junagarhi)Woh bhi waqt hoga kay kafir apney musalman honey ki aarzoo keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)बैद नहीं के एक वक्त वो आ जाए जब वही लोग जिन्होन ने आज (दवा ए इस्लाम को कबूल करने से) इनकार कार्डिया है पछता-पछता कर कहेंगे के काश हमने सार ए तसलीम खाम करदिया होता
عَرَبِيذَرهُم يَأكُلوا وَيَتَمَتَّعوا وَيُلهِهِمُ الأَمَلُ ۖ فَسَوفَ يَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप उन्हें छोड़ दें। वे खाएँ और लाभ उठाएँ, तथा (लंबी) आशा उन्हें ग़ाफ़िल रखे, फिर शीघ्र ही जान लेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Chodo inhein khayein (eat) , peeyain (drink) mazey karein aur behlawe mein daale rahey inko jhooti umeed. Anqareeb inehin maloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Aap unhen khata nafa uthata aur (jhooti) umeedon mein masghool hota chor dijiye yeh khud abhi jaan len gay
Devnagri Urdu (Maududi)चोदो इन्हें खायें (खाएं), पीएं (पीएं) मजे करें और बहलावे में डाले रहें इनको झूठी उम्मीद। अनकारीब इन्हें मालूम हो जाएगा
عَرَبِيوَما أَهلَكنا مِن قَريَةٍ إِلّا وَلَها كِتابٌ مَعلومٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने जिस बस्ती को भी नष्ट किया, उसका एक निर्धारित समय था।
Roman Urdu (Maududi)Humne issey pehle jis basti ko bhi halaak kiya hai uske liye ek khaas mohlat e amal likhi jaa chuki thi
Roman Urdu (Junagarhi)Kissi basti ko hum ney halak nahi kiya magar yeh kay uss kay liye muqarrar navishta tha
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इसे पहले जिस बस्ती को भी हलाक किया है उसके लिए एक खास मोहलत ए अमल लिखी जा चुकी थी
عَرَبِيما تَسبِقُ مِن أُمَّةٍ أَجَلَها وَما يَستَأخِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कोई जाति अपने नियत समय से न आगे बढ़ती है और न वे पीछे रहते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Koi qaum na apne waqt e muqarrar se pehle halaak ho sakti hai, na uske baad chooth sakti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Koi giroh apni maut say na aagay barhta hai na peechay rehta hai
Devnagri Urdu (Maududi)कोई क़ौम ना अपने वक्त ए मुकर्रर से पहले हलाक हो सकती है, ना उसके बाद झूठ बोल सकती है
عَرَبِيوَقالوا يا أَيُّهَا الَّذي نُزِّلَ عَلَيهِ الذِّكرُ إِنَّكَ لَمَجنونٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उन (काफ़िरों) ने कहा : ऐ वह व्यक्ति जिसपर स्मरण (क़ुरआन) अवतरित किया गया है, निःसंदेह तू तो पागल है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log kehte hain “Aey woh shaks jis par zikr nazil hua hai, tu yaqeenan deewana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney kaha aey woh shaks jiss per quran utara gaya hai yaqeenan tu to koi deewana hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग कहते हैं "ऐ वो शक्स जिस पर ज़िक्र नाज़िल हुआ है, तू यकीनन दीवाना है
عَرَبِيلَو ما تَأتينا بِالمَلائِكَةِ إِن كُنتَ مِنَ الصّادِقينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यदि तू सच्चों में से है, तो हमारे पास फ़रिश्तों को क्यों नहीं ले आता?
Roman Urdu (Maududi)Agar tu saccha hai to hamare samne Farishton ko le kyun nahin aata?”
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tu sacha hi hai to humaray pass farishton ko kiyon nahi laata
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तू सच्चा है तो हमारे सामने फरिश्तों को ले क्यों नहीं आता?"
عَرَبِيما نُنَزِّلُ المَلائِكَةَ إِلّا بِالحَقِّ وَما كانوا إِذًا مُنظَرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हम फ़रिश्तों को सत्य के साथ ही उतारते हैं और उस समय उन्हें कोई मोहलत नहीं दी जाती।
Roman Urdu (Maududi)Hum Farishton ko yunhi nahin utaar diya karte, woh jab utarte hain to haqq ke saath utarte hain, aur phir logon ko mohlat nahin di jati
Roman Urdu (Junagarhi)Hum farishton ko haq kay sath hi utartay hain aur uss waqt woh mohlat diye gaye nahi hotay
Devnagri Urdu (Maududi)हम फरिश्तों को यूं ही नहीं उतारते, वो जब उतारते हैं तो हक के साथ उतारते हैं, और फिर लोगों को मोहलत नहीं देते
عَرَبِيإِنّا نَحنُ نَزَّلنَا الذِّكرَ وَإِنّا لَهُ لَحافِظونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने ही यह ज़िक्र (क़ुरआन) उतारी है और निःसंदेह हम ही इसकी अवश्य रक्षा करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Raha yeh zikr, to isko humne nazil kiya hai aur hum khud iske nigehbaan hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney iss quran ko nazil farmaya hai aur hum hi uss kay mohafiz hain
Devnagri Urdu (Maududi)रहा ये जिक्र, तो इसको हमने नाज़िल किया है और हम खुद इसके निगेहबान हैं
عَرَبِيوَلَقَد أَرسَلنا مِن قَبلِكَ في شِيَعِ الأَوَّلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने आपसे पहले विगत समुदायों के समूहों में रसूल भेजे हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), hum tumse pehle bahut si guzri hui qaumon mein Rasool bhej chuke hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney aap say pehlay agli ummaton mein bhi apney rasool (barabar) bhejay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), हम तुमसे पहले बहुत सी गुज़री हुई क़ौमों में रसूल भेज चुके हैं
عَرَبِيوَما يَأتيهِم مِن رَسولٍ إِلّا كانوا بِهِ يَستَهزِئونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उनके पास जो भी रसूल आता, वे उसका मज़ाक उड़ाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Kabhi aisa nahin hua ke unke paas koi Rasool aaya ho aur unhone uska mazaak na udaya ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (lekin) jo bhi rasool aata woh uss ka mazaq uratay
Devnagri Urdu (Maududi)कभी ऐसा नहीं हुआ के उनके पास कोई रसूल आया हो और उनको मज़ाक न उड़ाया हो
عَرَبِيكَذٰلِكَ نَسلُكُهُ في قُلوبِ المُجرِمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)इसी तरह हम यह (झुठलाने की प्रवृत्ति) अपराधियों के दिलों में डाल देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Mujrimeen ke dilon mein to hum is zikr ko isi tarah [salaakh ke manind(like a rod)] guzarte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Gunehgaron kay dilon mein hum issi tarah yehi racha diya kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मुजरीमीन के दिलों में तो हम इस ज़िक्र को इसी तरह [सलाख़ के मानिंद (छड़ी की तरह)] गुज़रते हैं
عَرَبِيلا يُؤمِنونَ بِهِ ۖ وَقَد خَلَت سُنَّةُ الأَوَّلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे उसपर ईमान नहीं लाते। और प्रथम जातियों से यही परंपरा चली आ रही है।
Roman Urdu (Maududi)Woh ispar iman nahin laya karte. Qadeem (ancient times) se is qumash ke logon ka yahi tareeqa chala aa raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh iss per eman nahi latay aur yaqeenan aglon ka tareeqa guzra hua hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो इसपर ईमान नहीं लाया करते। क़दीम (प्राचीन काल) से इस क़ौम के लोगों का यही तरीक़ा चला आ रहा है
عَرَبِيوَلَو فَتَحنا عَلَيهِم بابًا مِنَ السَّماءِ فَظَلّوا فيهِ يَعرُجونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम उनपर आकाश का कोई द्वार खोल दें, फिर वे उसमें चढ़ते चले जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Agar hum unpar aasman ka koi darwaza khol detay aur woh din dahade usmein chadhne bhi lagte
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum inn per aasman ka darwaza khol bhi den aur yeh wahan charhney bhi lag jayen
Devnagri Urdu (Maududi)अगर हम ऊपर आसमान का कोई दरवाज़ा खोल देते हैं और वो दिन दहाड़े हमें छूने भी लगते हैं
عَرَبِيلَقالوا إِنَّما سُكِّرَت أَبصارُنا بَل نَحنُ قَومٌ مَسحورونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तब भी निश्चय वे यही कहेंगे कि हमारी निगाहें बाँध दी गई हैं। बल्कि हमपर जादू कर दिया गया है।
Roman Urdu (Maududi)tab bhi woh yahi kehte ke hamari aankhon ko dhoka ho raha hai, balke humpar jaadu kardiya gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tab bhi yehi kahen gay humari nazar bandi ker di gaee hai bulkay hum logon per jadoo ker diya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)तब भी वो यहीं कहते के हमारी आँखों को धोखा हो रहा है, बलके हमपर जादू करदिया गया है
عَرَبِيوَلَقَد جَعَلنا فِي السَّماءِ بُروجًا وَزَيَّنّاها لِلنّاظِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने आकाश में कई बुर्ज (बड़े सितारे) बनाए हैं और उन्हें देखने वालों के लिए सुशोभित किया है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hamari kaar-farmayi hai ke aasman mein humne bahut se mazboot qiley (fortified spheres) banaye, unko dekhne walon ke liye muzayyan (adorn) kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney aasman mein burj banaye hain aur dekhney walon kay liye ussay saja diya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये हमारी कार-फरमाई है के आसमान में हमने बहुत से मजबूत गोले बनाए, उनको देखने वालों के लिए सजा लिया
عَرَبِيوَحَفِظناها مِن كُلِّ شَيطانٍ رَجيمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसे प्रत्येक धिक्कारे हुए शैतान से सुरक्षित किया है।
Roman Urdu (Maududi)Aur har shaytaan e mardood se unko mehfooz kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur issay her mardood shetan say mehfooz rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हर शैतान ए मरदूद से उनको महफूज कर दिया
عَرَبِيإِلّا مَنِ استَرَقَ السَّمعَ فَأَتبَعَهُ شِهابٌ مُبينٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)परंतु जो (शैतान) चोरी-छिपे सुनना चाहे, तो एक स्पष्ट ज्वाला (उल्का) उसका पीछा करती है।
Roman Urdu (Maududi)Koi shaytaan in mein raah nahin paa sakta, illa yeh ke kuch sun-gun le le, aur jab woh sun-gun lene ki koshish karta hai to ek shola roshan uska peecha karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Haan magar jo chori chuppay sunnay ki kosish keray uss kay peechay dehakta hua (khulla shola) lagta hai
Devnagri Urdu (Maududi)कोई शैतान में राह नहीं पा सकता, इल्ला ये के कुछ सन-गन ले ले, और जब वो सन-गन लेने की कोशिश करता है तो एक शोला रोशन उसका पीछा करता है
عَرَبِيوَالأَرضَ مَدَدناها وَأَلقَينا فيها رَواسِيَ وَأَنبَتنا فيها مِن كُلِّ شَيءٍ مَوزونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने धरती को फैलाया और उसमें पर्वत डाल (गाड़) दिए और उसमें हर चीज़ निर्धारित मात्रा में उगाई।
Roman Urdu (Maududi)Humne zameen ko phaylaya, us mein pahadh jamaye, usmein har naw ki nabataat theek theek napi tuli miqdar(measure) ke saath ugayi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur zamin ko hum ney phela diya hai aur iss per (atal) pahar bana diye hain aur iss mein hum ney her cheez aik moyyan miqdar say uga di hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने जमीन को फैलाया, हमें पहाड़ जमाये, उसमें हर नाव की नबातात ठीक ठीक नापी तुली मिकदार (माप) के साथ उगी
عَرَبِيوَجَعَلنا لَكُم فيها مَعايِشَ وَمَن لَستُم لَهُ بِرازِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसमें तुम्हारे लिए जीवन के संसाधन बना दिए। तथा उनके लिए (भी) जिन्हें तुम हरगिज़ रोज़ी देने वाले नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Aur is mein maishat ke asbaab faraham kiye, tumhare liye bhi aur un bahut si makhlooqat ke liye bhi jinke raziq tum nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur issi mein hum ney tumhari roziyan bana di hain aur jinhen tum rozi denay walay nahi ho
Devnagri Urdu (Maududi)और इस में मैशत के असबाब फराहम किए, तुम्हारे लिए भी और उन बहुत सी मखलूकत के लिए भी जिनका राज़िक तुम नहीं हो
عَرَبِيوَإِن مِن شَيءٍ إِلّا عِندَنا خَزائِنُهُ وَما نُنَزِّلُهُ إِلّا بِقَدَرٍ مَعلومٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और कोई चीज़ ऐसी नहीं है, जिसके ख़ज़ाने हमारे पास न हों। और हम उसे एक निश्चित मात्रा ही में उतारते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Koi cheez aisi nahin jiske khazane hamare paas na hon, aur jis cheez ko bhi hum nazil karte hain ek muqarrar miqdar(measure) mein nazil karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jitni bhi cheezen hain unn sab kay khazaney humaray pass hain aur hum her cheez ko uss kay muqarrar andaz say utartay hain
Devnagri Urdu (Maududi)कोई चीज़ ऐसी नहीं जिसका खज़ाने हमारे पास ना होन, और जिस चीज को भी हम नाज़िल करते हैं एक मुकर्रर मिकदार (माप) में नाज़िल करते हैं
عَرَبِيوَأَرسَلنَا الرِّياحَ لَواقِحَ فَأَنزَلنا مِنَ السَّماءِ ماءً فَأَسقَيناكُموهُ وَما أَنتُم لَهُ بِخازِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने बादलों को पानी से गर्भित करने वाली हवाओं को भेजा, फिर हमने आकाश से पानी उतारा, और उसे तुम्हें पिलाया, तथा तुम हरगिज़ उसे संग्रह करने वाले नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Baar-awar hawaon (fertilizing winds) ko hum hi bhejte hain, phir aasman se pani barsate hain, aur us pani se tumhein sairaab karte hain, is daulat ke khazana-daar tum nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum bhejtay hain bojhal hawayen phir aasman say pani barsa ker woh tumhen pilatay hain aur tum iss ka zakheera kerney walay nahi ho
Devnagri Urdu (Maududi)बार-बार हवाओं (उर्वरक हवाओं) को हम ही भेजते हैं, फिर आसमान से पानी बरसाते हैं, और हम पानी से तुम्हें सैराब करते हैं, इस दौलत के खज़ाना-दार तुम नहीं हो
عَرَبِيوَإِنّا لَنَحنُ نُحيي وَنُميتُ وَنَحنُ الوارِثونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हम ही जीवित करते और मारते हैं और हम ही (सबके) उत्तराधिकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Zindagi aur maut hum dete hain, aur hum hi sab ke waris honay waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum hi jilatay aur maartay hain aur hum hi (bil-aakhir) waris hain
Devnagri Urdu (Maududi)जिंदगी और मौत हम देते हैं, और हम ही सबके वारिस होने वाले हैं
عَرَبِيوَلَقَد عَلِمنَا المُستَقدِمينَ مِنكُم وَلَقَد عَلِمنَا المُستَأخِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हम तुम्हारे पहले लोगों को भी जानते हैं, और बाद में आने वालों को भी जानते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Pehle jo log tum mein se ho guzre hain unko bhi humne dekh rakkha hai, aur baad ke aaney waley bhi hamari nigaah mein hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum mein say aagay barhney walay aur peechay hatney walay bhi humaray ilm mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)पहले जो लोग तुम में से हो गुज़रे हैं उनको भी हमने देख रखा है, और बाद के आने वाले भी हमारी निगाह में हैं
عَرَبِيوَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحشُرُهُم ۚ إِنَّهُ حَكيمٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह आपका पालनहार ही उन्हें इकट्ठा करेगा। निश्चय वह पूर्ण हिकमत वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan tumhara Rubb in sabko ikattha karega, woh hakeem(All-Wise) bhi hai aur aleem(All-Knowing) bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ka rab sab logon ko jama keray ga yaqeenan woh bari hikmaton wala baray ilm wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन तुम्हारा रब सबको इकठ्ठा करेगा, वो हकीम भी है और आलिम भी
عَرَبِيوَلَقَد خَلَقنَا الإِنسانَ مِن صَلصالٍ مِن حَمَإٍ مَسنونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने मनुष्य को सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से बनाया है।
Roman Urdu (Maududi)Humne Insaan ko sadi (rotten) hui mitti ke sookhey gaarey (clay) se banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney insan ko kali aur sarhi hui khankhanati mitti say peda farmaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इंसान को साडी (सड़ी हुई) हुई मिट्टी के सूखे गारे से बनाया
عَرَبِيوَالجانَّ خَلَقناهُ مِن قَبلُ مِن نارِ السَّمومِ
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हिन्दी (Al-Omari)और इससे पहले जिन्नों को हमने धुँआ रहित अति गर्म आग से पैदा किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur ussey pehle Jinno ko hum aag ki lapat se paida kar chuke thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss say pehlay jinnat ko hum ney low wali aag say peda kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और उसके पहले जिन्नो को हमने आग की गोद से पैदा किया कर चुके थे
عَرَبِيوَإِذ قالَ رَبُّكَ لِلمَلائِكَةِ إِنّي خالِقٌ بَشَرًا مِن صَلصالٍ مِن حَمَإٍ مَسنونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और (याद करो) जब आपके पालनहार ने फ़रिश्तों से कहा : मैं सड़े हुए गारे की खनखनाती मिट्टी से एक मनुष्य पैदा करने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Phir yaad karo us mauqe ko jab tumhare Rubb ne Farishton se kaha ke “ main sadi hui mitti ke sookhey gaarey se ek bashar paida kar raha hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab teray perwerdigar ney farishton say farmaya kay mein aik insan ko kali aur sarhi hui khankhanati mitti say peda kerney wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)फिर याद करो उस मौके को जब तुम्हारे रब ने फरिश्तों से कहा के “मैं सदी हुई मिट्टी के सूखे गले से एक बशर अदा कर रहा हूं
عَرَبِيفَإِذا سَوَّيتُهُ وَنَفَختُ فيهِ مِن روحي فَقَعوا لَهُ ساجِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो जब मैं उसे पूरा बना लूँ और उसमें अपनी रूह़ फूँक दूँ, तो तुम उसके आगे सजदा करते हुए गिर जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Jab main usey poora bana chukun aur us mein apni rooh se kuch phoonk doon to tum sab uske aagey sajde mein gir jana”
Roman Urdu (Junagarhi)To jab mein ussay poora bana chukon aur iss mein apni rooh phoonk doon to tum sab iss kay liye sajday mein girr parna
Devnagri Urdu (Maududi)जब मैं उसे पूरा बना चुका हूं और हम अपनी रूह से कुछ फूंक दूं तो तुम सब उसके आगे सजदे में गिर जाना”
عَرَبِيفَسَجَدَ المَلائِكَةُ كُلُّهُم أَجمَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो सब के सब फ़रिश्तों ने सजदा किया।
Roman Urdu (Maududi)Chunanchey tamaam Farishton ne sajda kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Chunacha tamamam farishton ney sab kay sab ney sajda ker liya
Devnagri Urdu (Maududi)चुनांचे तमाम फरिश्तों ने सजदा किया
عَرَبِيإِلّا إِبليسَ أَبىٰ أَن يَكونَ مَعَ السّاجِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)सिवाय इबलीस के। उसने सजदा करने वालों के साथ शामिल होने से इनकार कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Siwaye Iblees ke, ke usne sajda karne walon ka saath dene se inkar kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Magar iblees kay. Kay uss ney sajda kerney walon mein shamooliyat kerney say (saaf) inkar kerdiya
Devnagri Urdu (Maududi)सिवाए इबलीस के, के हमें सजदा करने वालों का साथ देने से इनकार करदिया
عَرَبِيقالَ يا إِبليسُ ما لَكَ أَلّا تَكونَ مَعَ السّاجِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने पूछा : ऐ इबलीस! तुझे क्या हुआ कि तू सजदा करने वालों में शामिल नहीं हुआॽ
Roman Urdu (Maududi)Rubb ne pucha “ aey Iblis , tujhey kya hua ke tu nay sajda karne walon ka saath na diya?”
Roman Urdu (Junagarhi)(Allah Taalaa ) ney farmaya aey iblees tujhay kiya hua kay tu sajda kerney walon mein shamil na hua
Devnagri Urdu (Maududi)रब ने पूछा “ ऐ इब्लीस, तुझसे क्या हुआ के तू नहीं सजदा करने वालों का साथ ना दिया?”
عَرَبِيقالَ لَم أَكُن لِأَسجُدَ لِبَشَرٍ خَلَقتَهُ مِن صَلصالٍ مِن حَمَإٍ مَسنونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : मैं ऐसा नहीं कि एक मनुष्य को सजदा करूँ, जिसे तूने सड़े हुए गारे की खनखनाती मिट्टी से पैदा किया है।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “mera yeh kaam nahin hai ke main is bashar ko sajda karoon jisey tu nay sadi hui mitti ke sookhey gaarey se paida kiya hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh bola kay mein aisa nahi kay iss insan ko sajda keroon jissay tu ney kali aur sarhi hui khankhanati mitti say peda kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा "मेरा ये काम नहीं है के मैं इस बशर को सजदा करूं जिसमें तू नई सदी हुई मिट्टी के सूखे गले से पेदा किया है"
عَرَبِيقالَ فَاخرُج مِنها فَإِنَّكَ رَجيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने कहा : फिर तू यहाँ से निकल जा। क्योंकि निश्चय तू धिक्कारा हुआ है।
Roman Urdu (Maududi)Rubb ne farmaya “accha to nikal jaa yahan se kyunke tu mardood(accursed) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Farmaya abb tu bahisht say bikal jaa kiyon kay tu raand-e-dargah hai
Devnagri Urdu (Maududi)रब ने फरमाया "अच्छा तो निकल जा यहां से क्योंकि तू मरदूद (शापित) है
عَرَبِيوَإِنَّ عَلَيكَ اللَّعنَةَ إِلىٰ يَومِ الدّينِ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह तुझपर बदले (क़ियामत) के दिन तक धिक्कार है।
Roman Urdu (Maududi)Aur ab roz-e-jaza tak tujhpar lanat hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tujh per meri phitkaar hai qayamat kay din tak
Devnagri Urdu (Maududi)और अब रोज़-ए-जज़ा तक तुझपर लानत है"
عَرَبِيقالَ رَبِّ فَأَنظِرني إِلىٰ يَومِ يُبعَثونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उस (इबलीस) ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! तो फिर मुझे उस दिन तक मोहलत दे, जब वे (पुनः जीवित कर) उठाए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Usne arz kiya “mere Rubb, yeh baat hai to phir mujhey us roz tak ke liye mohlat de jabke sab Insaan dobara uthaye jayenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney laga aey meray rab! Mujhay uss din tak dheel dey kay log doobara utha kharay kiye jayen
Devnagri Urdu (Maududi)उसने अर्ज़ किया "मेरे रब, ये बात है तो फिर मुझे रोज़ तक के लिए मोहलत दे जबके सब इंसान दोबारा उठेंगे"
عَرَبِيقالَ فَإِنَّكَ مِنَ المُنظَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) कहा : तू निःसंदेह मोहलत दिए गए लोगों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Farmaya “ accha, tujhey mohlat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Farmaya acha tu unn mein say hai jinhen mohlat milli hai
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया " अच्छा, तुझ पर मोहलत है
عَرَبِيإِلىٰ يَومِ الوَقتِ المَعلومِ
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हिन्दी (Al-Omari)ज्ञात समय के दिन तक।
Roman Urdu (Maududi)Us din tak jiska waqt humein maloom hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Roz-e-muqarrara kay waqt tak ki
Devnagri Urdu (Maududi)उस दिन तक जिसका वक़्त हमें मालूम है”
عَرَبِيقالَ رَبِّ بِما أَغوَيتَني لَأُزَيِّنَنَّ لَهُم فِي الأَرضِ وَلَأُغوِيَنَّهُم أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह बोला : ऐ मेरे पालनहार! चूँकि तूने मुझे पथभ्रष्ट किया है, मैं अवश्य ही उनके लिए धरती में (पाप को) सुशोभित करूँगा और उन सभी को पथभ्रष्ट कर दूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Woh bola “mere Rubb, jaisa tu nay mujhey behkaya usi tarah ab main zameen mein inke liye dil farebiyan paida karke in sabko behka dunga
Roman Urdu (Junagarhi)(shetan ney) kaha aey meray rab! Chun kay tu ney mujhay gumraah kiya hai mujhay bhi qasam hai kay mein bhi zamin mein inn kay liye ma’asi ko muzayyan keroon ga aur inn sab ko behkaon ga
Devnagri Urdu (Maududi)वो बोला “मेरे रब, जैसा तू नहीं मुझे बहकाया उसकी तरह अब मैं ज़मीन में इनके लिए दिल फरेबियाँ अदा करके इन सबको बहका दूंगा
عَرَبِيإِلّا عِبادَكَ مِنهُمُ المُخلَصينَ
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हिन्दी (Al-Omari)सिवाय तेरे उनमें से चुने हुए बंदों के।
Roman Urdu (Maududi)Siwaye tere un bandon ke jinhein tu nay inmein se khaalis karliya ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Siwaye teray unn bandon kay jo muntakhib ker liye gaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)सिवाय तेरे उन बंदों के जिन्हें तू नहीं इनमें से खाली करलिया हो”
عَرَبِيقالَ هٰذا صِراطٌ عَلَيَّ مُستَقيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) कहा : यह रास्ता है जो मुझ तक सीधा है।
Roman Urdu (Maududi)Farmaya “yeh raasta hai jo seedha mujh tak pahunchta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Irshad hua kay haan yehi mujh tak phonchney ki seedhi raah hai
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया “ये रास्ता है जो सीधा मुझ तक पहुँचता है
عَرَبِيإِنَّ عِبادي لَيسَ لَكَ عَلَيهِم سُلطانٌ إِلّا مَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الغاوينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मेरे बंदों पर तेरा कोई वश नहीं, परंतु जो बहके हुए लोगों में से तेरे पीछे चले।
Roman Urdu (Maududi)Beshak , jo mere haqiqi banday hain unpar tera bas na chalega. Tera bas to sirf un behke huey logon hi par chalega jo teri pairwi karein
Roman Urdu (Junagarhi)Meray bandon per tujhay koi ghalba nahi lekin haan jo gumrah log teri pairwi keren
Devnagri Urdu (Maududi)बेशक, जो मेरे हक़ीक़ी बंदे हैं उनपर तेरा बस ना चलेगा। तेरा बस तो सिर्फ उन बहके हुए लोगों ही पर चलेगा जो तेरी जोड़ी बनाएं
عَرَبِيوَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمَوعِدُهُم أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय ही उन सब के वादा की जगह जहन्नम है।
Roman Urdu (Maududi)Aur un sab ke liye jahannum ki waeed(destined) hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan inn sab kay waday ki jagah jahannum hai
Devnagri Urdu (Maududi)और उन सब के लिए जहन्नुम की वईद (नियत) है”
عَرَبِيلَها سَبعَةُ أَبوابٍ لِكُلِّ بابٍ مِنهُم جُزءٌ مَقسومٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उस (जहन्नम) के सात द्वार हैं। और प्रत्येक द्वार के लिए उन (इबलीस के अनुयायियों) का एक विभाजित भाग है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh jahannum ( jiski waeed pairwan e Iblis ke liye ki gayi hai) uske saat (seven) darwaze hain, har darwaze keliye unmein se ek hissa makhsoos kardiya gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss kay saat darwazay hain, her darwazay kay liye inn ka bara hissa bata hua hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये जहन्नुम (जिसकी वईद जोड़ी ए इबलीस के लिए गई है) उसके सात (सात) दरवाजे हैं, हर दरवाजे केली उनमें से एक हिसा मखसूस करदिया गया है
عَرَبِيإِنَّ المُتَّقينَ في جَنّاتٍ وَعُيونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आज्ञाकारी लोग जन्नतों तथा स्रोतों में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Ba-khilaf iske muttaqi log baaghon (gardens) aur chashmon (fountains) mein hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Perhezgaar jannati log baghon aur chashmon mein hongay
Devnagri Urdu (Maududi)बा-खिलाफ इसके मुत्तकी लोग बाघों (बगीचे) और चश्में (फव्वारे) में होंगे
عَرَبِيادخُلوها بِسَلامٍ آمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(उनसे कहा जाएगा :) इसमें सलामती के साथ निर्भय होकर प्रवेश कर जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Aur unse kaha jayega ke dakhil ho jao inmein salamati ke saath bekhauf o khatar
Roman Urdu (Junagarhi)(unn say kaha jayega) salamti aur aman kay sath iss mein dakhil hojao
Devnagri Urdu (Maududi)और उन्हें कहा जाएगा के दखिल हो जाओ इनमें सलामती के साथ बेखौफ ओ खातिर
عَرَبِيوَنَزَعنا ما في صُدورِهِم مِن غِلٍّ إِخوانًا عَلىٰ سُرُرٍ مُتَقابِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हम निकाल देंगे उनके दिलों में जो कुछ द्वेष होगा। वे भाई-भाई होकर एक-दूसरे के आमने-सामने तख़्तों पर (बैठे) होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Unke dilon mein jo thodi bahut khot-kapat hogi usey hum nikal denge, woh aapas mein bhai bhai bankar aamne saamne takhaton par baithenge
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay dilon mein jo kuch ranjish-o-keena tha hum sab kuch nikal den gay woh bhai bhai banay huye aik doosray kay aamney samney takhton per behtay hongay
Devnagri Urdu (Maududi)उनके दिलों में जो थोड़ी बहुत खोट-कपट होगी उसे हम निकाल देंगे, वो आपस में भाई भाई बनकर आमने सामने तख्तों पर बैठेंगे
عَرَبِيلا يَمَسُّهُم فيها نَصَبٌ وَما هُم مِنها بِمُخرَجينَ
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हिन्दी (Al-Omari)न उसमें उन्हें कोई थकान होगी और न वे वहाँ से निकाले जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Unhein na wahan kisi mushaqqat se paala padega aur na woh wahan se nikale jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Na to unhen wahan koi rakleef chu sakti hai aur na wahan say kabhi nikalen jayegay
Devnagri Urdu (Maududi)उनको ना वहां किसी मुशक्कत से पाला पड़ेगा और ना वो वहां से निकल जाएंगे
عَرَبِي۞ نَبِّئ عِبادي أَنّي أَنَا الغَفورُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप मेरे बंदों को सूचित कर दें कि निःसंदेह मैं ही बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान् हूँ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), mere bandon ko khabar de do ke main bahut darguzar karne wala (Forgiving) aur Raheem hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Meray bandon ko khabar dey do kay mein boht hi bakhshney wala aur bara hi meharban hun
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), मेरे बंदों को खबर दे दो के मैं बहुत दरगुजर करने वाला (माफ करने वाला) और रहीम हूं
عَرَبِيوَأَنَّ عَذابي هُوَ العَذابُ الأَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह भी कि निःसंदेह मेरी यातना ही कष्टदायक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Magar iske saath mera azaab bhi nihayat dardnaak azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur sath hi meray azab bhi nihayat dard naak hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर इसके साथ मेरा अज़ाब भी निहायत दर्दनक अज़ाब है
عَرَبِيوَنَبِّئهُم عَن ضَيفِ إِبراهيمَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आप उन्हें इबराहीम (अलैहिस्सलाम) के अतिथियों के बारे में सूचित कर दें।
Roman Urdu (Maududi)Aur inhein zara Ibrahim ke mehmano ka qissa sunao
Roman Urdu (Junagarhi)Enhen ibrahim kay mehmanon ka (bhi) haal suna do
Devnagri Urdu (Maududi)और इन्हें जरा इब्राहिम के मेहमानों का क़िस्सा सुनाओ
عَرَبِيإِذ دَخَلوا عَلَيهِ فَقالوا سَلامًا قالَ إِنّا مِنكُم وَجِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब वे इबराहीम के पास आए, तो उन्होंने सलाम किया। उसने कहा : हमें तो तुमसे डर लग रहा है।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh aaye uske haan aur kaha “Salaam ho tumpar,” to usne kaha “humein tumse darr lagta hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Kay jab unhon ney unn kay pass aaker salam kiya to unhon ney kaha kay hum ko tum say darr lagta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो आए उसके हां और कहा "सलाम हो तुमपर," तो उसने कहा "हमें तुमसे डर लगता है"
عَرَبِيقالوا لا تَوجَل إِنّا نُبَشِّرُكَ بِغُلامٍ عَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : डरिए नहीं, निःसंदेह हम आपको एक ज्ञानी बालक की शुभ सूचना देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “ daro nahin, hum tumhein ek baday siyane ladke ki basharat dete hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha daro nahi hum tujhay aik saahib-e-ilm farzand ki bisharat detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उनको ने जवाब दिया " डरो नहीं, हम तुम्हें एक बदे सियाने लड़के की बशारत देते हैं”
عَرَبِيقالَ أَبَشَّرتُموني عَلىٰ أَن مَسَّنِيَ الكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : क्या तुम मुझे इस बुढ़ापे के आ जाने के उपरांत शुभ सूचना दे रहे हो? तो तुम किस आधार पर यह शुभ सूचना दे रहे होॽ
Roman Urdu (Maududi)Ibrahim ne kaha “ kya tum is budhape mein mujhey aulad ki basharat dete ho? Zara socho to sahih ke yeh kaisi basharat tum mujhey de rahey ho?”
Roman Urdu (Junagarhi)Kaha kiya iss burhapay kay aajaney kay baad tum mujhay khushkhabri detay ho! Yeh khushkhabri tum kaisay dey rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)इब्राहीम ने कहा “क्या तुम इस बुढापे में मुझे औलाद की बशारत देते हो? ज़रा सोचो तो सही के ये कैसी बशारत तुम मुझे दे रहे हो?”
عَرَبِيقالوا بَشَّرناكَ بِالحَقِّ فَلا تَكُن مِنَ القانِطينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हमने आपको सच्ची शुभ सूचना दी है। अतः आप निराश होने वालों में से न हों।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “ hum tumhein bar haqq basharat de rahey hain, tum mayous na ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha hum aap ko bilkul sachi khushkhabri sunatay hain aap mayus logon mein shamil na hon
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने जवाब दिया “हम तुम्हें बार हक बशारत दे रहे हैं, तुम मायौस ना हो”
عَرَبِيقالَ وَمَن يَقنَطُ مِن رَحمَةِ رَبِّهِ إِلَّا الضّالّونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(इबराहीम अलैहिस्सलाम ने) कहा : और पथभ्रष्टों के सिवा अपने पालनहार की दया से कौन निराश होता है।
Roman Urdu (Maududi)Ibrahim ne kaha “ apne Rubb ki rehmat se mayous to gumraah log hi hua karte hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya apney rab taalaa ki rehmat say na umeed to sirf gumrah aur behkay huye log hi hotay hain
Devnagri Urdu (Maududi)इब्राहिम ने कहा “अपने रब की रहमत से मायुस तो गुमराह लोग ही हुआ करते हैं”
عَرَبِيقالَ فَما خَطبُكُم أَيُّهَا المُرسَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ भेजे हुए फ़रिश्तो! तुम्हारा अभियान क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Phir Ibrahim ne pucha “aey faristaad-gaan-e-Ilahi(messengers of Allah), woh mohim (expedition) kya hai jispar aap hazraat tashreef laye hain?”
Roman Urdu (Junagarhi)Poocha kay Allah kay bhejay huye (farishto!) tumhara aisa kiya eham kaam hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इब्राहिम ने पूछा “ऐ फरीस्ताद-गान-ए-इलाही (अल्लाह के दूत), वो मोहिम (अभियान) क्या है जिसपार आप हजरत तशरीफ लाए हैं?”
عَرَبِيقالوا إِنّا أُرسِلنا إِلىٰ قَومٍ مُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने उत्तर दिया : निःसंदेह हम एक अपराधी जाति की ओर भेजे गए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh bole, “hum ek mujreem qaum ki taraf bhejhe gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney jawab diya kay hum mujrim qom ki taraf bhejay gaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो बोले, "हम एक मुजरिम क़ौम की तरफ भेज गए हैं
عَرَبِيإِلّا آلَ لوطٍ إِنّا لَمُنَجّوهُم أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)लूत के घर वालों के सिवा। निश्चय हम उन सभी को अवश्य बचा लेने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Sirf Lut ke ghar waley mustasna (exception) hain, un sab ko hum bacha lenge
Roman Urdu (Junagarhi)Magar khaandan-e-loot kay hum unn sab ko to zaroor bacha len gay
Devnagri Urdu (Maududi)सिर्फ लूट के घर वाले मुस्तस्ना (अपवाद) हैं, उन सबको हम बचा लेंगे
عَرَبِيإِلَّا امرَأَتَهُ قَدَّرنا ۙ إِنَّها لَمِنَ الغابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु लूत की पत्नी, हमने नियत कर दिया है कि निःसंदेह वह निश्चय ही पीछे रह जाने वालों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Siwaye uski biwi ke jiske liye (Allah farmata hai ke) humne muqaddar kardiya hai ke woh peechey reh janey walon mein shamil rahegi”
Roman Urdu (Junagarhi)Siwaye uss (loot) ki biwi kay kay hum ney ussay rukney aur baqi reh janey walon mein muqarrar ker diya hai
Devnagri Urdu (Maududi)सिवाये उसकी बीवी के जिसके लिए (अल्लाह फरमाता है के) हमने मुकद्दर कर दिया है के वो पीछे रह जाने वालों में शामिल रहेगी”
عَرَبِيفَلَمّا جاءَ آلَ لوطٍ المُرسَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब लूत के घर वालों के पास भेजे हुए (फ़रिश्ते) आए।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab yeh Faristaade Lut ke haan pahunchey
Roman Urdu (Junagarhi)Jab bhejay huye farishtay aal-e-loot kay pass phonchay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब ये फरीस्तादे लूट के हां पहुंचे
عَرَبِيقالَ إِنَّكُم قَومٌ مُنكَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उस (लूत अलैहिस्सलाम) ने कहा : तुम तो अपरिचित लोग हो।
Roman Urdu (Maududi)To usne kaha “aap log ajnabi maloom hotey hain”
Roman Urdu (Junagarhi)To unhon (loot alh-e-salam) ney kaha tum log to kuch anjan say maloon horahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)तो उसने कहा “आप लोग अजनबी मालूम होते हैं”
عَرَبِيقالوا بَل جِئناكَ بِما كانوا فيهِ يَمتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : (डरो नहीं) बल्कि हम तुम्हारे पास वह चीज़ लेकर आए हैं, जिसमें वे संदेह किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “nahin, balke hum wahi cheez lekar aaye hain jiske aane mein yeh log shakk kar rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha nahi bulkay hum teray pass woh cheez laye hain jiss mein yeh log shak-o-shuba ker rahey thay
Devnagri Urdu (Maududi)उनको ने जवाब दिया "नहीं, बलके हम वही चीज़ लेकर आए हैं जिसके आने में ये लोग शक्क कर रहे थे
عَرَبِيوَأَتَيناكَ بِالحَقِّ وَإِنّا لَصادِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हम तुम्हारे पास सत्य लेकर आए हैं और निःसंदेह हम निश्चय सच्चे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hum tumse sach kehte hain ke hum haqq ke saath tumhare paas aaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum to teray pass (sareeh) haq laye hain aur hain bhi bilkul sachay
Devnagri Urdu (Maududi)हम तुमसे सच कहते हैं के हम हक के साथ तुम्हारे पास आए हैं
عَرَبِيفَأَسرِ بِأَهلِكَ بِقِطعٍ مِنَ اللَّيلِ وَاتَّبِع أَدبارَهُم وَلا يَلتَفِت مِنكُم أَحَدٌ وَامضوا حَيثُ تُؤمَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः तुम अपने घर वालों को लेकर रात के किसी हिस्से में निकल जाओ और खुद उनके पीछे-पीछे चलो। और तुममें से कोई मुड़कर न देखे। तथा चले जाओ, जहाँ तुम्हें आदेश दिया जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza ab tum kuch raat rahey apne ghar walon ko lekar nikal jao aur khud unke peechey peechey chalo, tum mein se koi palat kar na dekhe bas seedhey chale jao jidhar jaane ka tumhein hukum diya jaa raha hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Abb tu apney khaandan samet iss raat kay kissi hissay mein chal dey aur aap inn kay peechay rehna aur (khabardaar) tum mein say koi (peechay) murr ker bhi na dekhay aur jahan ka tumhen hukum kiya jaraha hai wahan chalay jana
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाज़ा अब तुम कुछ रात रह रहे हैं अपने घर वालों को लेकर निकल जाओ और खुद उनके पीछे पीछे चलो, तुम में से कोई पलट कर ना देखे बस सीधे चले जाओ जिधर जाने का तुम्हें हुकुम दिया जा रहा है”
عَرَبِيوَقَضَينا إِلَيهِ ذٰلِكَ الأَمرَ أَنَّ دابِرَ هٰؤُلاءِ مَقطوعٌ مُصبِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसकी ओर इस बात की वह़्य कर दी कि इन लोगों की जड़ सुबह होते ही काट दी जाने वाली है।
Roman Urdu (Maududi)Aur usey humne apna yeh faisla pahuncha diya ke subah hotey hotey in logon ki jadd (roots) kaat di jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney uss ki taraf iss baat ka faisla ker diya kay subha hotay hotay inn logon ki jaren kaat di jayen gi
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने अपना ये फैसला पहनकर लोगों की सुबह होते होते जद्द (जड़ें) कट दी जाएंगी
عَرَبِيوَجاءَ أَهلُ المَدينَةِ يَستَبشِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उस नगर वाले इस हाल में आए कि बहुत खुश हो रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Itne mein shehar ke log khushi ke maarey betab hokar Lut ke ghar chadh aaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur shehar walay khushiyan manatay huye aaye
Devnagri Urdu (Maududi)इतने में शहर के लोग खुशी के मारे बेताब होकर लुट के घर चढ़ आए
عَرَبِيقالَ إِنَّ هٰؤُلاءِ ضَيفي فَلا تَفضَحونِ
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हिन्दी (Al-Omari)उस (लूत अलैहिस्सलाम) ने कहा : ये लोग तो मेरे अतिथि हैं। अतः मुझे अपमानित न करो।
Roman Urdu (Maududi)Lut ne kaha “bhaiyon, yeh mere mehmaan hain, meri fazihat (dishonour) na karo
Roman Urdu (Junagarhi)(loot alh-e-salam ney) kaha yeh log meray mehaman hain tum mujhay ruswa na kerna
Devnagri Urdu (Maududi)लुट ने कहा "भाइयों, ये मेरे मेहमान हैं, मेरी फजीहत (अपमान) ना करो
عَرَبِيوَاتَّقُوا اللَّهَ وَلا تُخزونِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह से डरो और मुझे अपमानित न करो।
Roman Urdu (Maududi)Allah se daro, mujhey ruswa na karo”
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa say daro aur mujhay ruswa na kero
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह से डरो, मुझे रुसवा ना करो"
عَرَبِيقالوا أَوَلَم نَنهَكَ عَنِ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : क्या हमने तुम्हें विश्व वासियों (को अतिथि बनाने) से मना नहीं किया?
Roman Urdu (Maududi)Woh boley “kya hum baaraha tumhein mana nahin kar chuke hain ke duniya bhar ke thekedar na bano?”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh bolay kiya hum ney tujhay duniya bhar (ki thekaydaari) say mana nahi ker rakha
Devnagri Urdu (Maududi)वो बोले “क्या हम बारह तुम्हें मना नहीं कर चुके हैं कि दुनिया भर के ठेकेदार ना बनो?”
عَرَبِيقالَ هٰؤُلاءِ بَناتي إِن كُنتُم فاعِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उस (लूत अलैहिस्सलाम) ने कहा : ये मेरी बेटियाँ हैं, यदि तुम कुछ करने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Lut ne aajiz hokar kaha “agar tumhein kuch karna hi hai to yeh meri betiyan maujood hain”
Roman Urdu (Junagarhi)(loot alh-e-salam ney) kaha agar tumhen kerne hi hai to yeh meri bachiyan mojood hain
Devnagri Urdu (Maududi)लूट ने अजीज होकर कहा "अगर तुम्हें कुछ करना ही है तो ये मेरी बेटियां मौजूद हैं"
عَرَبِيلَعَمرُكَ إِنَّهُم لَفي سَكرَتِهِم يَعمَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी! आपकी आयु की क़सम! निःसंदेह वे निश्चय अपनी मस्ती में भटके फिरते थे।
Roman Urdu (Maududi)Teri jaan ki kasam aey Nabi, us waqt unpar ek nasha sa chadha hua tha jismein woh aape se bahar huye jatey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Teri umar ki qasam ! woh to apni bad-masti mein sir gardan thay
Devnagri Urdu (Maududi)तेरी जान की कसम ऐ नबी, उस वक्त एक नशा सा चढ़ा हुआ था जिसमें वो आपे से बहार हुए जाते थे
عَرَبِيفَأَخَذَتهُمُ الصَّيحَةُ مُشرِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अंततः सूर्योदय के समय ही चिंघाड़ ने उन्हें पकड़ लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar pow phathte hi unko ek zabardast dhamake ne aa liya (severe blast overtook them at dawn)
Roman Urdu (Junagarhi)Pus sooraj nikaltay nikaltay unhen aik baray zor ki aawaz ney pakar liya
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ई कार पोव फटते ही उनको एक जबरदस्त धमाके ने आ लिया (भोर में भीषण विस्फोट ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया)
عَرَبِيفَجَعَلنا عالِيَها سافِلَها وَأَمطَرنا عَلَيهِم حِجارَةً مِن سِجّيلٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उस बस्ती के ऊपरी भाग को नीचे कर दिया और उनपर कंकड़ के पत्थर बरसाए।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne us basti ko talpat karke rakh diya aur unpar paki (baked) hui mitti ke pattharon ki baarish barsa di
Roman Urdu (Junagarhi)Bil aakhir hum ney iss shehar ko upper talay kerdiya aur inn logon per kankar walay pathar barsaye
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने उस बस्ती को तलपत करके रख दिया और ऊपर पाकी (बेक्ड) हुई मिट्टी के पत्थरों की बारिश बरसा दी
عَرَبِيإِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِلمُتَوَسِّمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह इसमें सोच-विचार करने वालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Is waqiye mein badi nishaniyan hain un logon ke liye jo saahib-e-firasat hain
Roman Urdu (Junagarhi)Bila shuba basirat walon kay liye iss mein boht si nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वाकिये में बड़ी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो साहिब-ए-फिरसत हैं
عَرَبِيوَإِنَّها لَبِسَبيلٍ مُقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह वह (बस्ती) एक सार्वजनिक मार्ग पर स्थित है।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh ilaqa (jahan yeh waqiya pesh aaya tha) guzar gaah e aam (high way) par waqeh hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh basti aisi raah per hai jo barabar chalti rehti (aam guzargaah) hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वो इलाक़ा (जहाँ ये वाकिया पेश आया था) गुज़र गाह ए आम (हाई वे) पर वक़्त है
عَرَبِيإِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً لِلمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह इसमें ईमान वलों के लिए निश्चय बड़ी निशानी है।
Roman Urdu (Maududi)Usmein samaan e ibrat hai un logon ke liye jo sahib e iman hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss mein eman walon kay liye bari nishani hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसमें समां ए इब्रत है उन लोगों के लिए जो साहिब ए ईमान हैं
عَرَبِيوَإِن كانَ أَصحابُ الأَيكَةِ لَظالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह 'ऐका' वाले निश्चित रूप से अत्याचारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Aikah waley zalim thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aeeka basti key rehney walay bhi baray zalim thay
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐका वले ज़ालिम थाय
عَرَبِيفَانتَقَمنا مِنهُم وَإِنَّهُما لَبِإِمامٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उनसे बदला लिया। और निःसंदेह वे दोनों (बस्तियाँ) स्पष्ट मार्ग पर हैं।
Roman Urdu (Maududi)To dekhlo ke humne unsey bhi inteqam liya, aur in dono qaumon ke ujade huey ilaqe khuley raaste par waqeh hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jin say (aakhir) hum ney intiqam ley hi liya. Yeh dono shehar khullay (aam) raastay per hain
Devnagri Urdu (Maududi)तो देखलो के हमने उनसे भी इंतेक़ाम लिया, और इन दोनों क़ौमों के उजाड़े हुए इलाक़े खुले रास्ते पर वक़्त हैं
عَرَبِيوَلَقَد كَذَّبَ أَصحابُ الحِجرِ المُرسَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह ह़िज्र के रहने वालों ने (भी) रसूलों को झुठलाया।
Roman Urdu (Maududi)Hijr ke log bhi Rasoolon ki takzeeb kar chuke hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hijr walon ney bhi rasoolon ko jhutalaya
Devnagri Urdu (Maududi)हिज्र के लोग भी रसूलों की तकज़ीब कर चुके हैं
عَرَبِيوَآتَيناهُم آياتِنا فَكانوا عَنها مُعرِضينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उन्हें अपनी निशानियाँ दीं, तो वे उनसे मुँह फेरने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Humne apni aayat unke paas bheji, apni nishaniyan unko dikhayi, magar woh sabko nazar-andaz (ignore) hi karte rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unn ko apni nishaniyan bhi ata farmaeen (lekin) tahum woh inn say roo gardani hi kertay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)हमने अपनी आयतें उनके पास भेजी, अपनी निशानियाँ उनको दिखाई, मगर वो सबको नज़र-अंदाज़ (अनदेखा) ही करते रहे
عَرَبِيوَكانوا يَنحِتونَ مِنَ الجِبالِ بُيوتًا آمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे निर्भय होकर पर्वतों को काटकर घर बनाते थे।
Roman Urdu (Maududi)Woh pahad tarash tarash kar makaan banate thay aur apni jagah bilkul be-khauf aur mutmaeen thay
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log paharon ko tarash tarash ker ghar banatay thay bey khof hoker
Devnagri Urdu (Maududi)वो पहाड़ तराश तराश कर मकान बनाते थे और अपनी जगह बिलकुल बे-ख़ौफ़ और मुतमइन थे
عَرَبِيفَأَخَذَتهُمُ الصَّيحَةُ مُصبِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अंततः सुबह होते ही उन्हें चिंघाड़ ने पकड़ लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar ek zabardast dhamake ne unko subah hotey hi aa liya
Roman Urdu (Junagarhi)Aakhir enhen bhi subha hotay hotay chinghaar ney aa dabocha
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ई कार एक ज़बरदस्त धमाके ने उनको सुबह होते ही आ लिया
عَرَبِيفَما أَغنىٰ عَنهُم ما كانوا يَكسِبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उनके किसी काम न आया, जो वे कमाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur unki kamayi unke kuch kaam na aayi
Roman Urdu (Junagarhi)Pus inn ki kissi tadbeer-o-amal ney unhen koi faeeda na diya
Devnagri Urdu (Maududi)और उनकी कमाई उनके कुछ काम न आई
عَرَبِيوَما خَلَقنَا السَّماواتِ وَالأَرضَ وَما بَينَهُما إِلّا بِالحَقِّ ۗ وَإِنَّ السّاعَةَ لَآتِيَةٌ ۖ فَاصفَحِ الصَّفحَ الجَميلَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने आकाशों तथा धरती और उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों को सत्य के साथ पैदा किया है। और निःसंदेह क़ियामत अवश्य आने वाली है। अतः (ऐ नबी!) आप (उन्हें) भले तौर पर क्षमा कर दें।
Roman Urdu (Maududi)Humne zameen aur aasman ko aur unki sab maujoodaat ko haqq ke siwa kisi aur buniyaad par khalq (create) nahin kiya hai, aur faisle ki ghadi yaqeenan aane wali hai. Pas (aey Muhammad), tum (in logon ki behudgiyon par) shareefana darguzar se kaam lo
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney aasmanon aur zamin ko aur inn kay darmiyan ki sabb cheezon ko haq kay sath peda farmaya hai aur qayamat zaroor zaroor aaney wali hai. Pus tu husn-o-khoobi (aur achai) say dar guzar kerley
Devnagri Urdu (Maududi)हमने जमीन और आसमान को और उनकी सब मौजूदत को हक़ के सिवा किसी और बुनियाद पर ख़ल्क (बनाना) नहीं बनाया है, और फैसले की घड़ी यकीनन आने वाली है। पस (ऐ मुहम्मद), तुम (लोगन की में)। बेहुदगियों पर) शरीफ़ाना दरगुज़ार से काम लो
عَرَبِيإِنَّ رَبَّكَ هُوَ الخَلّاقُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आपका पालनहार ही हर चीज़ को पैदा करने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan tumahra Rubb sab ka khaliq hai aur sab kuch jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tera perwerdigar hi peda kerney wala aur jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन तुम्हारा रब सब का खालिक है और सब कुछ जानता है
عَرَبِيوَلَقَد آتَيناكَ سَبعًا مِنَ المَثاني وَالقُرآنَ العَظيمَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ नबी!) हमने आपको बार-बार दोहराई जाने वाली सात आयतें और महान क़ुरआन प्रदान किया है।
Roman Urdu (Maududi)Humne tumko saat (seven) aisi aayatein de rakkhi hain jo baar baar dohrayi janey ke layiq hain, aur tumhein Quran e azeem ata kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney aap ko saat aayaten dey rakhi hain kay dohraee jati hain aur azeem quran bhi dey rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने तुमको सात (सात) ऐसी आयतें दे रखी हैं जो बार-बार दोहरायी जाने के लायक हैं, और तुम्हें कुरान ए अजीम अता किया है
عَرَبِيلا تَمُدَّنَّ عَينَيكَ إِلىٰ ما مَتَّعنا بِهِ أَزواجًا مِنهُم وَلا تَحزَن عَلَيهِم وَاخفِض جَناحَكَ لِلمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप उसकी ओर हरगिज़ न देखें, जो सुख-सामग्री हमने उनमें से विभिन्न प्रकार के लोगों को दे रखी है और न उनपर दुखी हों और ईमान वालों के लिए अपने बाज़ू झुका दें (यानी उनके लिए विनम्र रहें)।
Roman Urdu (Maududi)Tum us mata-e-duniya ki taraf aankh utha kar na dekho jo humne in mein se mukhtalif qisam ke logon ko de rakkhi hai, aur na inke haal par apna dil kudhao(grieve), inhein chodh kar iman laney walon ki taraf jhuko
Roman Urdu (Junagarhi)Aap hergiz apni nazren uss cheez ki taraf na dorayen jiss say hum ney inn mein say kaee qisam kay logon ko behra mand ker rakha hai na inn per aap afsos keren aur momino kay liye apney bazoo jhukaye rahen
Devnagri Urdu (Maududi)तुम हमें माता-ए-दुनिया की तरफ आंख उठा कर ना देखो जो हमने अपने अंदर से मुख्तलिफ क़िस्म के लोगों को दे रखा है, और ना इनके हाल पर अपना दिल कुढ़ाओ(शोक), इन्हें छोड़ कर ईमान लाने वालों की तरफ झुको
عَرَبِيوَقُل إِنّي أَنَا النَّذيرُ المُبينُ
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हिन्दी (Al-Omari)और कह दें कि निःसंदेह मैं तो खुल्लम-खुल्ला डराने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur (na maanne walon se) kehdo ke main to saaf saaf tambeeh(warn) karne wala hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur keh dijiye kay mein to khullam khulla daraney wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)और (ना मनने वालों से) कहदो के मैं तो साफ साफ तम्बीह (चेतावनी) करने वाला हूं
عَرَبِيكَما أَنزَلنا عَلَى المُقتَسِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जैसे कि हमने (अल्लाह की किताब को) विभाजित करने वालों पर (यातना) उतारी थी।
Roman Urdu (Maududi)Yeh usi ki tarah ki tambeeh hai jaisi humne un tafarraqe pardazon(those who make division) ki taraf bheji thi
Roman Urdu (Junagarhi)Jaisay kay hum ney unn taqseem kerney walon per utara
Devnagri Urdu (Maududi)ये उसकी तरह की तम्बीह है जैसी हमने उन तफ़रक़े परदाज़ों (जो बंटवारा करते हैं) की तरफ भेजी थी
عَرَبِيالَّذينَ جَعَلُوا القُرآنَ عِضينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन्होंने क़ुरआन को खंड-खंड कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Jinhon ne apne Quran ko tukde tukde kar dala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jinhon ney iss kitab-e-elahi kay tukray tukray ker diye
Devnagri Urdu (Maududi)जिन्होन ने अपने कुरान को टुकड़े-टुकड़े कर डाला है
عَرَبِيفَوَرَبِّكَ لَنَسأَلَنَّهُم أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आपके पालनहार की क़सम! हम उन सबसे अवश्य पूछेंगे।
Roman Urdu (Maududi)To kasam hai tere Rubb ki, hum zaroor in sabse puchenge
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai teray paalney walay ki! Hum unn sab say zaroor baaz purs keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)तो कसम है तेरे रब की, हम जरूर इन सबसे पूछेंगे
عَرَبِيعَمّا كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसके बारे में जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Ke tum kya karte rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Her uss cheez ki jo woh kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)के तुम क्या करते रहे हो
عَرَبِيفَاصدَع بِما تُؤمَرُ وَأَعرِض عَنِ المُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आपको जो आदेश दिया जा रहा है, उसका ऐलान कर दें और मुश्रिकों (अनेकेश्वरवादियो) से मुँह फेर लें।
Roman Urdu (Maududi)Pas (aey Nabi) jis cheez ka tumhein hukum diya jaa raha hai usey hankey pukare kehdo(proclaim publicly) aur shirk karne walon ki zara parwah na karo
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap iss hukum ko jo aap ko kiya jaa raha hai khol ker suna dijiye! Aur mushrikon say mun pher lijiye
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ नबी) जिस चीज का तुम्हें हुकुम दिया जा रहा है उसे हांके पुकारे कहदो (सार्वजनिक रूप से घोषित करो) और शिर्क करने वालों की जरा परवा ना करो
عَرَبِيإِنّا كَفَيناكَ المُستَهزِئينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम आपकी ओर से मज़ाक उड़ाने वालों के विरुद्ध काफ़ी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tumhari taraf se hum un mazaaq udane walon ki khabar lenay ke liye kafi hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap say jo log maskhra pann kertay hain unn ki saza kay liye hum kafi hain
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारी तरफ से हम उन मजाक उड़ाने वालों की खबरें लेने के लिए काफी हैं
عَرَبِيالَّذينَ يَجعَلونَ مَعَ اللَّهِ إِلٰهًا آخَرَ ۚ فَسَوفَ يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो अल्लाह के साथ दूसरा पूज्य बनाते हैं। तो उन्हें जल्द पता चल जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Jo Allah ke saath kisi aur ko bhi khuda qarar dete hain anqareeb unhein maloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jo Allah kay sath doosray mabood muqarrar kertay hain unhen un-qarib maloom hojayega
Devnagri Urdu (Maududi)जो अल्लाह के साथ किसी और को भी खुदा करार देते हैं अनकरीब उन्हें मालूम हो जाएगा
عَرَبِيوَلَقَد نَعلَمُ أَنَّكَ يَضيقُ صَدرُكَ بِما يَقولونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय हम जानते हैं कि उनकी बातों से आपका सीना तंग होता है।
Roman Urdu (Maududi)Humein maloom hai ke jo baatein yeh log tumpar banate hain unsey tumhare dil ko sakht koft hoti hai (heart is distressed)
Roman Urdu (Junagarhi)Humen khoob ilm hai inn baaton say aap ka dil tang hota hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमें मालूम है कि जो बातें ये लोग तुमपर बनाते हैं उनका दिल कोफ्त होता है व्यथित)
عَرَبِيفَسَبِّح بِحَمدِ رَبِّكَ وَكُن مِنَ السّاجِدينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः आप अपने रब की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का गान करें और सजदा करने वालों में शामिल हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Iska ilaaj yeh hai ke apne Rubb ki hamd ke saath uski tasbeeh karo, uski janaab mein sajda baja lao
Roman Urdu (Junagarhi)Aap apney perwerdigar ki tasbeeh aur hamd biyan kertay rahen aur sajda kerney walon mein shamil hojayen
Devnagri Urdu (Maududi)इसका इलाज ये है के अपने रुब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो, उसके जनाब में सजदा बजा लाओ
عَرَبِيوَاعبُد رَبَّكَ حَتّىٰ يَأتِيَكَ اليَقينُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और अपने रब की इबादत करते रहें, यहाँ तक कि आपके पास यक़ीन (मौत) आ जाए।
Roman Urdu (Maududi)Aur us aakhri ghadi tak apne Rubb ki bandagi karte raho jiska aana yaqeeni hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney rab ki ibadat kertay rahen yahan tak kay aap ko maut aajaye
Devnagri Urdu (Maududi)और हम आखिरी घड़ी तक अपने रुब की बंदगी करते रहो जिसका आना यकीनी है
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Surah 15: Al-Hijr (The Rock)

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Surah 15: Al-Hijr (The Rock)

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Surah 15: Al-Hijr (The Rock)

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Surah 15: Al-Hijr (The Rock)

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Surah 15: Al-Hijr (The Rock)

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Surah 16: An-Nahl (The Bee)

Meccan🕐 Revelation #70📜 128 Verses🕮 Juz 1
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Surah 16: An-Nahl (The Bee)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيأَتىٰ أَمرُ اللَّهِ فَلا تَستَعجِلوهُ ۚ سُبحانَهُ وَتَعالىٰ عَمّا يُشرِكونَ
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह का आदेश आ गया। अतः (ऐ काफ़िरो!) उसके जल्द आने की माँग न करो। वह (अल्लाह) पवित्र है और सर्वोच्च है उससे जो वे शरीक ठहराते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aagaya Allah ka faisla, ab iske liye jaldi na machao, paak hai woh aur baala-tar hai us shirk se jo yeh log kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ka hukum aa phoncha abb iss ki jaldi na machao. Tamam paki uss kay liye hai woh bartar hai unn sab say jinhen yeh Allah kay nazdik shareek batlatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अगला अल्लाह का फैसला, अब इसके लिए जल्दी ना मचाओ, पाक है वो और बाला-तर है उस शिर्क से जो ये लोग कर रहे हैं
عَرَبِييُنَزِّلُ المَلائِكَةَ بِالرّوحِ مِن أَمرِهِ عَلىٰ مَن يَشاءُ مِن عِبادِهِ أَن أَنذِروا أَنَّهُ لا إِلٰهَ إِلّا أَنا فَاتَّقونِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह फ़रिश्तों को वह़्य के साथ, अपने आदेश से, अपने बंदों में से जिस पर चाहता है, उतारता है कि (लोगों को) सावधान कर दो कि मेरे सिवा कोई (सत्य) पूज्य नहीं, अतः मुझ ही से डरो।
Roman Urdu (Maududi)Woh is rooh ko apne jis banday par chahta hai apne hukum se malaika ke zariye nazil farma deta hai (is hidayat ke saath ke logon ko) “aagah kardo, mere siwa koi tumhara mabood nahin hai, lihaza tum mujhi se daro”
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi farishton ko apni wahee dey ker apney hukum say apney bandon mein say jiss per chahata hai utarta hai kay tum logon ko aagah kerdo kay meray siwa aur koi mabood nahi pus tum mujh say daro
Devnagri Urdu (Maududi)वो इस रूह को अपने जिस बंदे पर चाहता है अपने हुकुम से मलिका के लिए नाज़िल फरमा देता है हिदायत के साथ के लोगों को) "आगा करदो, मेरे सिवा कोई तुम्हारा मबूद नहीं है, लिहाज़ा तुम मुझ से डरो"
عَرَبِيخَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ بِالحَقِّ ۚ تَعالىٰ عَمّا يُشرِكونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने आकाशों तथा धरती को सत्य के साथ पैदा किया। वह उससे बहुत ऊँचा है, जो वे शरीक बनाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Usne aasman o zameen ko barhaqq paida kiya hai, woh bahut baala o bartar hai us shirk se jo yeh log karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney aasmanon aur zamin ko haq kay sath peda kiya hai woh iss say bari hai jo mushrik kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उसने आसमान ओ ज़मीन को बरहक़्क अदा किया है, वो बहुत बाला ओ बरतर है उस शिर्क से जो ये लोग करते हैं
عَرَبِيخَلَقَ الإِنسانَ مِن نُطفَةٍ فَإِذا هُوَ خَصيمٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने मनुष्य को एक बूँद वीर्य से पैदा किया। फिर अकस्मात् वह खुला झगड़ालू बन गया।
Roman Urdu (Maududi)Usne Insaan ko ek zara si boondh se paida kiya aur dekhte dekhte sareehan woh ek jhagdalu hasti ban gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney insan ko nutfay say peda kiya phir woh sareeh jhagraloo bann betha
Devnagri Urdu (Maududi)उसने इंसान को एक ज़रा सी बूंद से खरीदा और देखते-देखते सारें वो एक झगड़ालु हस्ती बन गया
عَرَبِيوَالأَنعامَ خَلَقَها ۗ لَكُم فيها دِفءٌ وَمَنافِعُ وَمِنها تَأكُلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसने चौपायों को पैदा किया, जिनमें तुम्हारे लिए गर्मी प्राप्त करने का सामान और बहुत-से लाभ हैं और उन्हीं में से तुम खाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Usne jaanwar paida kiye jinmein tumhare liye poshak (clothing) bhi hai aur khurak bhi, aur tarah tarah ke dusre faiyde bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney chopaye peda kiye jin mein tumharay liye garmi kay libas hain aur bhi boht say nafay hain aur baaz tumharay khaney kay kaam aatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उसने जानवर पैदा किया जिनके पास तुम्हारे लिए पोशाक (कपड़े) भी हैं और खुराक भी, और तरह-तरह के दूसरे फायदे भी
عَرَبِيوَلَكُم فيها جَمالٌ حينَ تُريحونَ وَحينَ تَسرَحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनमें तुम्हारे लिए एक सौंदर्य है, जब तुम शाम को चराकर लाते हो और जब सुबह चराने को ले जाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Unmein tumhare liye jamal (pleasant look) hai jab ke subah tum unhein charne ke liye bhejte ho aur jabke shaam unhein wapas latey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn mein tumhari ronaq bhi hai jab chara ker laao tab bhi aur jab charaney ley jao tab bhi
Devnagri Urdu (Maududi)उन्मे तुम्हारे लिए जमाल (सुखद लुक) है जब के सुबह तुम उन्हें चरणों के लिए भेजते हो और जबके शाम उन्हें वापस लाते हो
عَرَبِيوَتَحمِلُ أَثقالَكُم إِلىٰ بَلَدٍ لَم تَكونوا بالِغيهِ إِلّا بِشِقِّ الأَنفُسِ ۚ إِنَّ رَبَّكُم لَرَءوفٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे तुम्हारे बोझ, उस नगर तक लादकर ले जाते हैं, जहाँ तक तुम बिना कठोर परिश्रम के कभी पहुँचने वाले न थे। निःसंदेह तुम्हारा पालनहार अति करुणामय, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Woh tumhare liye bojh dho (utha) kar aisey aisey muqaam tak le jatey hain jahan tum sakht jaanfishani (painful toil) ke bagair nahin pahunch sakte. Haqeeqat yeh hai ke tumhara Rubb bada hi shafeeq aur meharbaan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh tumharay bojh unn shehron tak utha ley jatay hain jahan tum baghair aadhi jaan kiye phonch hi nahi saktay thay. Yaqeenan tumhara rab bara hi shafiq aur nihayat meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो तुम्हारे लिए बोझ ढो (उठा) कर ऐसे ऐसे मुकाम तक ले जाते हैं जहां तुम मुश्किल जानफिशानी (दर्दनाक मेहनत) के बिना नहीं रह सकते कृपया. हकीकत ये है के तुम्हारा रब बड़ा ही शफीक और मेहरबान है
عَرَبِيوَالخَيلَ وَالبِغالَ وَالحَميرَ لِتَركَبوها وَزينَةً ۚ وَيَخلُقُ ما لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा घोड़े, खच्चर और गधे पैदा किए, ताकि तुम उनपर सवार हो और शोभा के लिए। तथा वह (अल्लाह) ऐसी चीज़ें पैदा करता है, जो तुम नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Usne ghodey (horses) aur khacchar (mule) aur gadhey paida kiya taa-ke tum unpar sawar ho aur woh tumhari zindagi ki raunak baney. Woh aur bhaut si cheezein (tumhare faiyde ke liye) paida karta hai jinka tumhein ilm tak nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ghoron ko khacharon ko gadhon ko uss ney peda kiya kay tum unn ki sawari lo aur baees-e-zeenat bhi hain. Aur bhi woh aisi boht cheezen peda kerta hai jin ka tumhen ilm bhi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)उसने घोड़े और खच्चर (खच्चर) और गधे पेदा किया ता-के तुम अपर सवार हो और वो तुम्हारी जिंदगी की रौनक बनी। वो और बहुत सी चीजें (तुम्हारे फायदे के लिए) भुगतान करता है जिनका तुम्हें इल्म तक नहीं है
عَرَبِيوَعَلَى اللَّهِ قَصدُ السَّبيلِ وَمِنها جائِرٌ ۚ وَلَو شاءَ لَهَداكُم أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ही के ज़िम्मे, सीधी राह बताना है। और उन (रास्तों) में से कुछ (रास्ते) टेढ़े हैं। तथा यदि अल्लाह चाहता, तो तुम सभी को सीधी राह दिखा देता।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah hi ke zimme hai seedha raasta batana jabke raaste tedhey bhi maujood hain. Agar woh chahta to tum sabko hidayat de deta
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah per seedhi raah ka bata dena hai aur baaz tairhi raahen hain aur agar woh chahata to tum sab ko raah-e-raast per laga deta
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह ही के ज़िम्मे है सीधा रास्ता बताना जबके रास्ते टेढ़े भी मौजूद हैं। अगर वो चाहता तो तुम सबको हिदायत दे देता
عَرَبِيهُوَ الَّذي أَنزَلَ مِنَ السَّماءِ ماءً ۖ لَكُم مِنهُ شَرابٌ وَمِنهُ شَجَرٌ فيهِ تُسيمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है, जिसने आकाश से कुछ पानी उतारा, जिसमें से तुम पीते हो तथा उसी से पेड़-पौधे उगते हैं, जिनमें तुम (पशुओं को) चराते हो।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jisne aasman se tumhare liye pani barsaya jissey tum khud bhi sairaab hotey ho aur tumahre jaanwaron ke liye bhi chara paida hota hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi tumharay faeeday kay liye aasman say pani barsata hai jissay tum peetay bhi ho aur ussi say ugay huye darakhton ko tum apney janwaron ko charatay ho
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिसने आसमान से तुम्हारे लिए पानी बरसाया जिसमें तुम खुद भी सरायब होते हो और तुम्हारे जानवरों के लिए भी चारा पैदा होता है
عَرَبِييُنبِتُ لَكُم بِهِ الزَّرعَ وَالزَّيتونَ وَالنَّخيلَ وَالأَعنابَ وَمِن كُلِّ الثَّمَراتِ ۗ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً لِقَومٍ يَتَفَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह तुम्हारे लिए उससे खेती, ज़ैतून, खजूर, अंगूर और प्रत्येक प्रकार के फल उगाता है। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए निश्चय बड़ी निशानी है, जो सोच-विचार करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh is pani ke zariye se khetiyan ugata hai aur zaitun aur khajoor aur angoor aur tarah tarah ke dusre phal paida karta hai. Is mein ek badi nishani hai un logon ke liye jo gaur-o-fikr karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Issi say woh tumharay liye kheti aur zaitoon aur khujoor aur angoor aur her qisam kay phal ugata hai be-shak unn logon kay liye iss mein bari nishani hai jo ghor-o-fikar kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो इस पानी के ज़रिये से खेतियां उगता है और ज़ैतून और खजूर और अंगूर और तरह तरह के दूसरे फल अदा करता है। इस में एक बड़ी निशानी है उन लोगों के लिए जो गौर-ओ-फिक्र करते हैं
عَرَبِيوَسَخَّرَ لَكُمُ اللَّيلَ وَالنَّهارَ وَالشَّمسَ وَالقَمَرَ ۖ وَالنُّجومُ مُسَخَّراتٌ بِأَمرِهِ ۗ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِقَومٍ يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसने रात और दिन, सूर्य और चाँद को तुम्हारे लिए कार्यरत कर रखा है, तथा तारे भी उसके आदेश के अधीन हैं। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो समझ-बूझ रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Usne tumhari bhalayi ke liye raat aur din ko aur Suraj aur Chand ko musakkhar kar rakkha hai, aur sab taare (stars) bhi usi ke hukum se musakkhar hain. Ismein bahut si nihsaniyan hain un logon ke liye jo aqal se kaam letey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney raat din aur sooraj chand ko tumharay liye tabey ker diya hai aur sitaray bhi ussi kay hukum kay matehat hain. Yaqeenan iss mein aqal mand logon kay liye kaee aik nishaniyan mojood hain
Devnagri Urdu (Maududi)उसने तुम्हारी भलाई के लिए रात और दिन को और सूरज और चांद को मुस्कुरा कर रखा है, और सब तारे (सितारे) भी उसी के हुकुम से मुस्कुरा रहे हैं। इसमें बहुत सी निहसानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं
عَرَبِيوَما ذَرَأَ لَكُم فِي الأَرضِ مُختَلِفًا أَلوانُهُ ۗ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً لِقَومٍ يَذَّكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसने तुम्हारे लिए धरती में जो विभिन्न रंगों की चीज़ें पैदा की हैं (उन्हें भी तुम्हारे वश में किया)। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए निश्चय बड़ी निशानी है, जो शिक्षा ग्रहण करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh jo bahut si rang bi rang ki cheezein usne tumhare liye zameen mein se paida kar rakkhi hai, in mein bhi zaroor nishani hai un logon ke liye jo sabaq haasil karne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bhi boht si cheezen tarah tarah kay rang roop ki uss ney tumharay liye zamin per phela rakhi hain. Be-shak naseehat qabool kerney walon kay liye iss mein bari bhari nishani hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये जो बहुत सी रंग बी रंग की चीजें हैं उसने तुम्हारे लिए जमीन में से भुगतान कर रखा है, उनमें भी जरूर निशानी है उन लोगों के लिए जो सबक हासिल है करने वाले हैं
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي سَخَّرَ البَحرَ لِتَأكُلوا مِنهُ لَحمًا طَرِيًّا وَتَستَخرِجوا مِنهُ حِليَةً تَلبَسونَها وَتَرَى الفُلكَ مَواخِرَ فيهِ وَلِتَبتَغوا مِن فَضلِهِ وَلَعَلَّكُم تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वही है, जिसने सागर को (तुम्हारे) वश में कर दिया, ताकि तुम उससे ताज़ा मांस खाओ और उससे आभूषण निकालो, जिसे तुम पहनते हो। तथा तुम नौकाओं को देखते हो कि उसमें पानी को चीरती हुई चलती हैं, और ताकि तुम उसका कुछ अनुग्रह तलाश करो और ताकि तुम शुक्रिया अदा करो।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jisne tumhare liye samandar ko musakkhar kar rakkha hai taa-ke tum ussey tarr-o-taaza gosht lekar khao aur ussey zeenat (adornment) ki woh cheezein nikalo jinhein tum pehna karte ho. Tum dekhte ho ke kashti samandar ka seena cheerti hui chalti hai, yeh sab kuch is liye hai ke tum apne Rubb ka fazal talash karo aur uske shukar-guzar bano
Roman Urdu (Junagarhi)Aur darya bhi ussi ney tumharay bus mein ker diye hain kay tum iss mein say (nikla hua) taza gosht khao aur iss mein say apney pehanney kay zaiwraat nikal sako aur tum dekhtay ho kay kashtiyan iss mein pani cheerti hui (chalti) hain aur iss liye bhi kay tum uss ka fazal talash kero aur hosakta hai kay tum shukar guzari bhi kero
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिसने तुम्हारे लिए समंदर को मुसक्कर कर रखा है ता-के तुम उसे तार-ओ-ताजा गोश्त लेकर खाओ और उसकी जीनत (सजावट) की वो चीज निकालो जिन्हें तुम पहचानते हो। तुम देखते हो के कश्ती समंदर का सीना चीरती हुई चलती है, ये सब कुछ इस तरह से है के तुम अपने रब का फज़ल तलाश करो और उसे शुकर-गुज़ार बनो
عَرَبِيوَأَلقىٰ فِي الأَرضِ رَواسِيَ أَن تَميدَ بِكُم وَأَنهارًا وَسُبُلًا لَعَلَّكُم تَهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसने धरती में पर्वत गाड़ दिए, ताकि वह (धरती) तुम्हें लेकर डगमगाने न लगे तथा नदियाँ और रास्ते बनाए, ताकि तुम मंज़िल तक पहुँच जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Usne zameen mein pahadon ki mekhein gaadh di taa-ke zameen tumko lekar dhulak na jaye, usne dariya jari kiya aur qudrati raaste banaye taa-ke tum hidayat pao
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss ney zamin mein pahar gaar diye hain takay tumhen ley ker hilay na aur nehren aur raahen bana den takay tum manzil-e-maqsood ko phoncho
Devnagri Urdu (Maududi)उसने ज़मीन में पहाड़ों की महक दी ता-के ज़मीन तुमको लेकर धूलक ना जाए, उसने दरिया जारी किया और क़दरती रास्ते बनाए ता-के तुम हिदायत पाओ
عَرَبِيوَعَلاماتٍ ۚ وَبِالنَّجمِ هُم يَهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा बहुत-से चिह्न (बनाए)। और वे सितारों से रास्ता मालूम करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Usne zameen mein raasta batane wali alamatein rakh di , aur taaron (stars) se bhi log hidayat paate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bhi boht si nishaniyan muqarrar farmaeen. Aur sitaron say bhi log raah hasil kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उसने ज़मीन में रास्ता बताने वाली अलमातें रख दी, और तारों (सितारों) से भी लोग हिदायत पाते हैं
عَرَبِيأَفَمَن يَخلُقُ كَمَن لا يَخلُقُ ۗ أَفَلا تَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वह जो (ये सब चीज़ें) पैदा करता है, उसके समान है, जो (कुछ भी) पैदा नहीं करता? फिर क्या तुम उपदेश ग्रहण नहीं करते?
Roman Urdu (Maududi)Phir kya woh jo paida karta hai aur woh jo kuch bhi paida nahin karte, dono yaksan hain? Kya tum hosh mein nahin aatey
Roman Urdu (Junagarhi)To kiya woh jo peda kerta hai uss jaisa hai jo peda nahi ker sakta? Kiya tum bilkul nahi sochtay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्या वो जो पेदा करता है और वो जो कुछ भी पेदा नहीं करता, dono yaksan hain? क्या तुम होश में नहीं आते
عَرَبِيوَإِن تَعُدّوا نِعمَةَ اللَّهِ لا تُحصوها ۗ إِنَّ اللَّهَ لَغَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम अल्लाह की नेमतों को गिनो, तो उन्हें गिन न सकोगे। निःसंदेह अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दया करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum Allah ki niyamaton ko ginna chaho to gin nahin sakte, haqeeqat yeh hai ke woh bada hi darguzar karne wala aur raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tum Allah ki nematon ka shumar kerna chahao to tum ussay nahi ker saktay. Be-shak Allah bara bakhshney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम अल्लाह की नियामतों को गिना चाहो तो गिना नहीं सकते, हकीकत ये है कि वो बड़ा ही दरगुजर करने वाला और रहीम है
عَرَبِيوَاللَّهُ يَعلَمُ ما تُسِرّونَ وَما تُعلِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह जानता है, जो तुम छिपाते हो और जो तुम प्रकट करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Halanke woh tumhare khule se bhi waqif hai aur chupey se bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo kuch tum chupao aur zahir kero Allah Taalaa sab kuch janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)हालंके वो तुम्हारे खुले से भी वाकिफ है और छुपे से भी
عَرَبِيوَالَّذينَ يَدعونَ مِن دونِ اللَّهِ لا يَخلُقونَ شَيئًا وَهُم يُخلَقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पुकारते हैं, वे कुछ भी पैदा नहीं करते। और वे स्वयं पैदा किए जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh dusri hastiyan jinhein Allah ko chodh kar log pukarte hain, woh kisi cheez ke bhi khaliq nahin hain balke khud makhlooq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin jin ko yeh log Allah Taalaa kay siwa pukartay hain woh kissi cheez ko peda nahi ker saktay bulkay woh khud peda kiye huye hain
Devnagri Urdu (Maududi)और वो दूसरे हस्तियां जिन्हें अल्लाह को छोड़ कर लोग पुकारते हैं, वो किसी चीज के भी खालिक नहीं हैं बलके खुद मखलूक हैं
عَرَبِيأَمواتٌ غَيرُ أَحياءٍ ۖ وَما يَشعُرونَ أَيّانَ يُبعَثونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे मृत हैं, जिनमें प्राण नहीं, और वे नहीं जानते कि कब उठाए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Murda hain na ke zinda aur unko kuch maloom nahin hai ke unhein kab (dobara zinda karke) uthaya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Murdey hain zinda nahi unhen to yeh bhi shaoor nahi kay kab uthayen jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)मुर्दा हैं ना के जिंदा और उनको कुछ मालूम नहीं है के उन्हें कब (दोबारा जिंदा करके) उठाया जाएगा
عَرَبِيإِلٰهُكُم إِلٰهٌ واحِدٌ ۚ فَالَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِالآخِرَةِ قُلوبُهُم مُنكِرَةٌ وَهُم مُستَكبِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारा पूज्य एक ही पूज्य है। तो वे लोग जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, उनके दिल इनकार करने वाले हैं और वे बहुत अभिमानी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara khuda bas ek hi khuda hai magar jo log aakhirat ko nahin maante unke dilon mein inkar baskar reh gaya hai aur woh ghamand mein padh gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Tum sab ka mabood sirf Allah Taalaa akela hai aur aakhirat per eman na rakhney walon kay dil munkir hain aur woh khud takabbur say bharay huye hain
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा खुदा बस एक ही खुदा है मगर जो लोग आखिरी को नहीं मानते उनके दिलों में इंकार बसकर रह गया है और वो घमंड में पढ़ गए हैं
عَرَبِيلا جَرَمَ أَنَّ اللَّهَ يَعلَمُ ما يُسِرّونَ وَما يُعلِنونَ ۚ إِنَّهُ لا يُحِبُّ المُستَكبِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय ही अल्लाह जानता है, जो वे छिपाते हैं तथा जो प्रकट करते हैं। निःसंदेह वह अभिमानियों से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Allah yaqeenan inke sab karoot jaanta hai chupe huye bhi aur khule huye bhi. Woh un logon ko hargiz pasand nahin karta jo guroor e nafs (puffed up with pride) mein mubtala hon
Roman Urdu (Junagarhi)Bey shak-o-shuba Allah Taalaa her uss cheez ko jissay woh log chupatay hain aur jissay zahir kertay hain bakhoobi janta hai. Woh ghuroor kerney walon ko pasand nahi farmata
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह यकीनन इनके सब करोत जानता है छुपे हुए भी और खुले हुए भी। वो उन लोगों को हरगिज़ पसंद नहीं करता जो गुरूर ए नफ़्स (गर्व से फूला हुआ) में मुबतला हो
عَرَبِيوَإِذا قيلَ لَهُم ماذا أَنزَلَ رَبُّكُم ۙ قالوا أَساطيرُ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनसे पूछा जाए कि तुम्हारे पालनहार ने क्या उतारा है? तो कहते हैं कि पहले लोगों की कल्पित कहानियाँ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab koi unse poochta hai ke tumhare Rubb ne yeh kya cheez nazil ki hai to kehte hain, “aji woh to agle waqton ki farsuda kahaniyan (ancient tales) hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say jab daryaft kiya jata hai kay tumharay perwerdigar ney kiya nazil farmaya hai? To jawab detay hain kay aglon ki kahaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जब कोई उनसे पूछता है कि तुम्हारे रब ने ये क्या चीज नाजिल की है तो कहते हैं, "अजी वो तो अगले वक्त की फरसुदा कहानियां (प्राचीन कथाएं) हैं"
عَرَبِيلِيَحمِلوا أَوزارَهُم كامِلَةً يَومَ القِيامَةِ ۙ وَمِن أَوزارِ الَّذينَ يُضِلّونَهُم بِغَيرِ عِلمٍ ۗ أَلا ساءَ ما يَزِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि वे क़ियामत के दिन अपने (पापों के) बोझ पूरे उठाएँ तथा कुछ बोझ उनके भी जिन्हें वे ज्ञान के बिना गुमराह करते हैं। सुन लो! बुरा है वह बोझ जो वे उठा रहे है!
Roman Urdu (Maududi)Yeh baatein woh isliye karte hain ke qayamat ke roz apne bojh bhi poore uthayein, aur saath saath kuch un logon ke bojh bhi sametein jinhien yeh baar binaye jihalat (in their ignorance) gumraah kar rahey hain. Dekho! Kaisi sakht zimmedari hai jo yeh apne sar ley rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Issi ka natija hoga kay qayamat kay din yeh log apney pooray bojh kay sath hi unn kay bojh kay bhi hissay daar hongay jinhen bey ilmi say gumraah kertay rahey. Dekho to kaisa bura bojh utha rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये बातें वो इसलिए करते हैं के कयामत के रोज अपने बोझ भी पूरे उठें, और साथ-साथ कुछ उन लोगों के बोझ भी समेटें, ये बार बिना जिहालत (उनकी अज्ञानता में) गुमराह कर रहे हैं। देखो! कैसी सख्त जिम्मेदारी है जो ये अपने सार ले रहे हैं
عَرَبِيقَد مَكَرَ الَّذينَ مِن قَبلِهِم فَأَتَى اللَّهُ بُنيانَهُم مِنَ القَواعِدِ فَخَرَّ عَلَيهِمُ السَّقفُ مِن فَوقِهِم وَأَتاهُمُ العَذابُ مِن حَيثُ لا يَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय इनसे पहले के लोगों ने भी साज़िशें कीं। तो अल्लाह ने उनके घरों को जड़ों से उखाड़ दिया। फिर उनपर उनके ऊपर से छत गिर पड़ी और उनपर वहाँ से यातना आई कि वे सोचते न थे।
Roman Urdu (Maududi)Inse pehle bhi bahut se log (haqq ko nicha dikhane ke liye) aisi hi makkariyan kar chuke hain, to dekhlo ke Allah ne unke makr ki imarat jadd (root) se ukhad phenki aur uski chatt upar se unke sar par aa rahi (roof fell down upon their heads from above them) aur aisey rukh se unpar azaab aaya jidhar se uske aane ka unko gumaan tak na tha
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say pehlay kay logon ney bhi makar kiya tha (aakhir) Allah ney (unn kay mansoobon) ki emarton ko jaron say ukher diya aur unn (kay saron) per (unn ki) chaten upper say gir paren aur unn kay pass azab wahan say aagaya jahan ka unn ko weham-o-guman bhi na tha
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पहले भी बहुत से लोग (हक को नीचा दिखाने के लिए) ऐसी ही मक्कारियां कर चुके हैं, तो देखलो के अल्लाह ने उनके मकर की इमारत जद्द (रूट) से उखाड़ फेंकी और उसकी छत ऊपर से उनके सर पर आ रही (ऊपर से उनके सिर पर छत गिर गई) और ऐसे रुख से अनपर अज़ाब आया जिधर से उसके आने का उनको गुमान तक ना था
عَرَبِيثُمَّ يَومَ القِيامَةِ يُخزيهِم وَيَقولُ أَينَ شُرَكائِيَ الَّذينَ كُنتُم تُشاقّونَ فيهِم ۚ قالَ الَّذينَ أوتُوا العِلمَ إِنَّ الخِزيَ اليَومَ وَالسّوءَ عَلَى الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर क़ियामत के दिन वह उन्हें अपमानित करेगा और कहेगा : कहाँ हैं मेरे वे साझी जिनके बारे में तुम लड़ते-झगड़ते थे? वे लोग जिन्हें ज्ञान दिया गया कहेंगे : निःसंदेह आज अपमान तथा बुराई (यातना) काफ़िरों पर है।
Roman Urdu (Maududi)Phir qayamat ke roz Allah unhein zaleel o khwar karega aur unse kahega “ batao, ab kahan hain mere woh shareek jinke liye tum (ehle haqq se) jhagde kiya karte thay?” Jin logon ko duniya mein ilm haasil tha woh kahenge “ aaj ruswayi aur badbakhti hai kafiron ke liye”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir qayamat walay din bhi Allah unn ko ruswa keray ga aur farmaye gay kay meray woh shareek kahan hain jin kay baray mein tum lartay jhagartay thay jinhen ilm diya gaya tha woh pukar uthen gay kay aaj to kafiron ko ruswaee aur buraee chimat gaee
Devnagri Urdu (Maududi)फिर कयामत के रोज़ अल्लाह उन्हें ज़लील ओ ख़्वार करेगा और उनसे कहेगा "बताओ, अब कहां हैं मेरे वो शरीक जिनके लिए तुम (एहले)। हक से) झगड़े किया करते थे?” जिन लोगों को दुनिया में इल्म हासिल था वो कहेंगे "आज रूसवाई और बदबख्ती है काफिरों के लिए"
عَرَبِيالَّذينَ تَتَوَفّاهُمُ المَلائِكَةُ ظالِمي أَنفُسِهِم ۖ فَأَلقَوُا السَّلَمَ ما كُنّا نَعمَلُ مِن سوءٍ ۚ بَلىٰ إِنَّ اللَّهَ عَليمٌ بِما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिनके प्राण फ़रिश्ते इस हाल में निकालते हैं कि वे अपने ऊपर अत्याचार करने वाले होते हैं, तो वे (मौत देखकर) आज्ञाकारी बन जाते हैं, (और कहते हैं कि) हम कोई बुरा काम नहीं किया करते थे। क्यों नहीं? निश्चय अल्लाह भली-भाँति जानने वाला है, जो तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Haan, unhi kaafiron ke liye jo apne nafs par zulm karte huey jab malaika ke haathon giraftar hotay hain to (sarkashi chodh kar) fawran dagein daal dete (surrender) hain aur kehte hain “hum to koi kasoor nahin kar rahey thay”. Malaika jawab dete hain “kar kaise nahin rahey thay! Allah tumhare kartooton se khoob waqif hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh jo apni jano per zulm kertay hain farishtay jab unn ki jaan qabz kerney lagatay hain uss waqt woh jhuk jatay hain kay hum buraee nahi kertay thay. Kiyon nahi? Allah Taalaa khoob jannay wala hai jo kuch tum kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)हां, उन्हीं काफिरों के लिए जो अपने नफ्स पर ज़ुल्म करते हुए जब मलिका के हाथ गिरफ़्तार होते हैं तो (सरकशी छोड़ कर) फ़ौरन दागें डाल देते (आत्मसमर्पण) हैं और कहते हैं "हम तो कोई कसूर नहीं कर रहे थे"। मलायका जवाब देते हैं "कर कैसे नहीं रहे थे! अल्लाह तुम्हारे कार्टूनों से खूब वाकिफ है
عَرَبِيفَادخُلوا أَبوابَ جَهَنَّمَ خالِدينَ فيها ۖ فَلَبِئسَ مَثوَى المُتَكَبِّرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः जहन्नम के द्वारों में प्रवेश कर जाओ। उसमें सदावासी रहोगे। तो क्या ही बुरा है अभिमानियों का ठिकाना!
Roman Urdu (Maududi)Ab jao, jahannum ke darwazon mein ghuss jao, wahin tumko hamesha rehna hai”. Pas haqeeqat yeh hai ke bada hi bura thikana hai mutakabbiron (haughty ones) ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Pus abb to hameshgi kay tor per tum jahannum kay darwazon mein dakhil hojao pus kiya hi bura thikana hai ghuroor kerney walon ka
Devnagri Urdu (Maududi)अब जाओ, जहन्नुम के दरवाज़ों में घुस जाओ, वहीं तुमको हमेशा रहना है"। पस हकीकत ये है के बड़ा ही बुरा ठिकाना है मुतकब्बिरों (घमंडी वालों) के लिए
عَرَبِي۞ وَقيلَ لِلَّذينَ اتَّقَوا ماذا أَنزَلَ رَبُّكُم ۚ قالوا خَيرًا ۗ لِلَّذينَ أَحسَنوا في هٰذِهِ الدُّنيا حَسَنَةٌ ۚ وَلَدارُ الآخِرَةِ خَيرٌ ۚ وَلَنِعمَ دارُ المُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अपने रब का भय रखने वालों से पूछा गया कि तुम्हारे रब ने क्या उतारा है? तो उन्होंने कहा : बेहतरीन बात। जिन लोगों ने भलाई की, उनके लिए इस दुनिया में बड़ी भलाई है और आख़िरत का घर (जन्नत) तो कहीं बेहतर है। और निश्चय वह भय रखने वालों का अच्छा घर है!
Roman Urdu (Maududi)Dusri taraf jab khuda tars logon se pucha jata hai ke yeh kya cheez hai jo tumhare Rubb ki taraf se nazil hui hai, to woh jawab dete hain ke “behtareen cheez utari hai”. Is tarah ke neikukar logon ke liye is duniya mein bhi bhalayi hai aur aakhirat ka ghar to zaroor hi unke haqq mein behtar hai. Bada accha ghar hai muttaqiyon (Allah se darne walon) ka
Roman Urdu (Junagarhi)Aur perhezgaron say poocha jata hai kay tumharya perwerdigar ney kiya nazil farmaya hai? Wo woh jawab detay hain kay achay say acha. Jin logon ney bhalee ki unn kay liye iss duniya mein bhalee hai aur yaqeenan aakhirat ka ghar to boht hi behtar hai aur kiya hi khoob perhezgaron ka ghar hai
Devnagri Urdu (Maududi)दूसरी तरफ जब खुदा तरस लोगों से पूछता है के ये क्या चीज है जो तुम्हारे रब की तरफ से नाज़िल हुई है, तो वो जवाब देते हैं के "बेहतरीन चीज़" उतारी है”। इस तरह के कुछ लोगों के लिए इस दुनिया में भी भलाई है और आख़िरत का घर तो ज़रूर है उनके हक में बेहतर है। बड़ा अच्छा घर है मुत्तक़ियों (अल्लाह से डरने वालों) का
عَرَبِيجَنّاتُ عَدنٍ يَدخُلونَها تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ ۖ لَهُم فيها ما يَشاءونَ ۚ كَذٰلِكَ يَجزِي اللَّهُ المُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)सदा रहने के बाग़, जिनमें वे प्रवेश करेंगे, उनके नीचे से नहरें बहती होंगी। उनके लिए उनमें जो वे चाहेंगे (उपस्थित) होगा। इसी तरह अल्लाह भय रखने वालों को बदला देता है।
Roman Urdu (Maududi)Daimi qayam (permanent residence) ki jannatein, jin mein woh dakhil hongey, nichey nehrein beh rahi hongi, aur sab kuch wahan ain unki khwahish ke mutabiq hoga. Yeh jaza deta hai Allah muttaqiyon (pious) ko
Roman Urdu (Junagarhi)Hameshgi walay baghaat jahan woh jayen gay jin kay neechay nehren beh rahi hain jo kuch yeh talab keren gay wahan unn kay liye mojood hoga. Perhezgaron ko Allah Taalaa issi tarah badlay ata farmata hai
Devnagri Urdu (Maududi)दैमी क़याम (स्थायी निवास) की जन्नतें, जिन में वो दख़िल होंगे, आला नेह्रेन बेह राही होंगी, और सब कुछ वहां ऐन उनकी ख्वाहिश के मुताबिक होगा। ये जज़ा देता है अल्लाह मुत्तक़ियों (पवित्र) को
عَرَبِيالَّذينَ تَتَوَفّاهُمُ المَلائِكَةُ طَيِّبينَ ۙ يَقولونَ سَلامٌ عَلَيكُمُ ادخُلُوا الجَنَّةَ بِما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिनके प्राण फ़रिश्ते इस हाल में निकालते हैं कि वे स्वच्छ-पवित्र होते हैं। वे (फ़रिश्ते) कहते हैं : तुमपर सलाम (शांति) हो। तुम अपने (अच्छे) कामों के बदले स्वर्ग में प्रवेश कर जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Un muttaqiyon ko jinki roohein pakeezgi ki haalat mein jab malaika qabz karte hain to kehte hain “salaam ho tumpar, jao jannat mein apne aamaal ke badle”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin ki janen farishtay iss haal mein qabz kertay hain kay woh pak saaf hon kehtay hain kay tumharay liye salamti hi salamti hai jao jannat mein apney unn aemaal kay badlay jo tum kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)उन मुत्तक़ियों को जिनकी रूहें पाकीज़गी की हालत में जब मलिका क़ब्ज़ करते हैं तो कहते हैं "सलाम हो तुमपर, जाओ जन्नत में अपने अमाल के बदले"
عَرَبِيهَل يَنظُرونَ إِلّا أَن تَأتِيَهُمُ المَلائِكَةُ أَو يَأتِيَ أَمرُ رَبِّكَ ۚ كَذٰلِكَ فَعَلَ الَّذينَ مِن قَبلِهِم ۚ وَما ظَلَمَهُمُ اللَّهُ وَلٰكِن كانوا أَنفُسَهُم يَظلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या वे इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि उनके पास फ़रिश्ते आ जाएँ, अथवा आपके पालनहार का आदेश आ पहुँचे? ऐसे ही उन लोगों ने किया, जो इनसे पहले थे और अल्लाह ने उनपर अत्याचार नहीं किया, लेकिन वे स्वयं अपने आपपर अत्याचार किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), ab jo yeh log intezar kar rahey hain to iske siwa ab aur kya baki reh gaya hai ke Malaika hi aa pahunchein, ya tere Rubb ka faisla saadir ho jaye? Is tarah ki dhitayi inse pehle bahut se log kar chuke hain, phir jo kuch unke saath hua woh unpar Allah ka zulm na tha balke unka apna zulm tha jo unhon ne khud apne upar kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh issi baat ka intizar ke rahey hain kay inn kay pass farishtay aajayen ya teray rab ka hukum aajaye? Aisa hi unn logon ney bhi kiya tha jo inn say pehlay thay. Unn per Allah Taalaa ney koi zulm nahi kiya bulkay woh khud apni janon per zulm kertay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), अब जो ये लोग इंतजार कर रहे हैं तो इसके सिवा अब और क्या बाकी रह गया है कि मलायका ही आ पूछूं, या तेरे रब का फैसला सादिर हो जाए? इस तरह की धिताई इनसे पहले बहुत से लोग कर चुके हैं, फिर जो कुछ उनके साथ हुआ वो असमान अल्लाह का ज़ुल्म ना था बल्के उनका अपना ज़ुल्म था जो उनहों ने खुद अपने ऊपर किया
عَرَبِيفَأَصابَهُم سَيِّئَاتُ ما عَمِلوا وَحاقَ بِهِم ما كانوا بِهِ يَستَهزِئونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उनके कुकर्मों की बुराइयाँ उनपर आ पड़ीं और उन्हें उसी (यातना) ने घेर लिया, जिसका वे मज़ाक उड़ाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Unke kartooton ki kharabiyan aakhir unki daamangeer ho gayi aur wahi cheez unpar musallat hokar rahi jiska woh mazaaq udaya karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Pus unn kay buray aemaal kay natijay unhen mill gaye aur jiss ki hansi uratay thay uss ney unn ko gher liya
Devnagri Urdu (Maududi)उनके कार्टूनों की ख़राबियां आख़िर उनकी दामनगीर हो गई और वही चीज़ असमान मुसल्लत होकर रही जिसका वो मज़ाक उड़ाया करता था
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ أَشرَكوا لَو شاءَ اللَّهُ ما عَبَدنا مِن دونِهِ مِن شَيءٍ نَحنُ وَلا آباؤُنا وَلا حَرَّمنا مِن دونِهِ مِن شَيءٍ ۚ كَذٰلِكَ فَعَلَ الَّذينَ مِن قَبلِهِم ۚ فَهَل عَلَى الرُّسُلِ إِلَّا البَلاغُ المُبينُ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह का साझी बनाने वालों ने कहा : यदि अल्लाह चाहता, तो न हम उसके सिवा किसी भी चीज़ की इबादत करते और न हमारे बाप-दादा। और न हम उसके बिना किसी भी चीज़ को हराम ठहराते। इसी तरह उन लोगों ने किया जो इनसे पहले थे। तो रसूलों का कार्य केवल स्पष्ट रूप से उपदेश पहुँचा देने के सिवा और क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Yeh mushrikeen kehte hain “agar Allah chahta to na hum aur na hamare baap dada uske siwa kisi aur ki ibadat karte aur na uske hukum ke bagair kisi cheez ko haraam thehrate”. Aisey hi bahane insey pehle ke log bhi banate rahey hain to kya Rasoolon par saaf saaf baat pahuncha dene ke siwa aur bhi koi zimmedari hai
Roman Urdu (Junagarhi)Mushrik logon ney kaha kay agar Allah Taalaa chahata to hum aur humaray baap daday uss kay siwa kissi aur ki ibadat hi na kertay na uss kay farman kay baghair kissi cheez ko haram kertay. Yehi fail inn say pehlay kay logon ka raha. To rasoolon per to sirf khullam khulla paygham phoncha dena hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये मुशरिकेन कहते हैं "अगर अल्लाह चाहता तो ना हम और ना हमारे बाप दादा उसके सिवा किसी और की इबादत करते और ना उसके हुकुम के बिना किसी चीज को हराम ठहराते"। ऐसे ही बहाने इनसे पहले के लोग भी बनाते रहे हैं तो क्या रसूलों पर साफ साफ बात पूछूंचा देने के सिवा और भी कोई जिम्मेदारी है
عَرَبِيوَلَقَد بَعَثنا في كُلِّ أُمَّةٍ رَسولًا أَنِ اعبُدُوا اللَّهَ وَاجتَنِبُوا الطّاغوتَ ۖ فَمِنهُم مَن هَدَى اللَّهُ وَمِنهُم مَن حَقَّت عَلَيهِ الضَّلالَةُ ۚ فَسيروا فِي الأَرضِ فَانظُروا كَيفَ كانَ عاقِبَةُ المُكَذِّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने प्रत्येक समुदाय में एक रसूल भेजा कि अल्लाह की इबादत करो और ताग़ूत (अल्लाह के अलावा की पूजा) से बचो। फिर उनमें से कुछ को अल्लाह ने सीधे मार्ग पर लगाया, तथा उनमें से कुछ पर पथभ्रष्टता सिद्ध हो गई। अतः तुम धरती में चलो-फिरो, फिर देखो कि झुठलाने वालों का परिणाम कैसा हुआ?
Roman Urdu (Maududi)Humne har ummat mein ek Rasool bhej diya, aur uske zariye se sabko khabardar kardiya ke “Allah ki bandagi karo aur taghut ki bandagi se bacho”. Iske baad in mein se kisi ko Allah ne hidayat bakshi aur kisi par zalalat musallat ho gayi. Phir zara zameen mein chal phir kar dekhlo ke jhutlane walon ka kya anjaam ho chuka hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney her ummat mein rasool bheja kay (logo!) sirf Allah ki ibadat kero aur uss kay siwa tamam maboodon say bacho. Pus baaz logon ko to Allah Taalaa ney hidayat di aur baaz per gumrahi sabit hogaee pus tum khud zamin mein chal phir ker dekh lo kay jhutlaney walon ka anjam kaisa kuch hua
Devnagri Urdu (Maududi)हमने हर उम्मत में एक रसूल भेज दिया, और उसकी ज़रिये से सबको खबरदार कर दिया के "अल्लाह की बंदगी करो और" टैगहुट की बंदगी से बचो”। इसके बाद मेरे से किसी को अल्लाह ने हिदायत बख्शी और किसी पर ज़लालत मुसल्लत हो गई। फिर ज़रा ज़मीन में चल फिर कर देखलो के झूठलेन वालों का क्या अंजाम हो चुका है
عَرَبِيإِن تَحرِص عَلىٰ هُداهُم فَإِنَّ اللَّهَ لا يَهدي مَن يُضِلُّ ۖ وَما لَهُم مِن ناصِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) यदि आप उनके मार्गदर्शन के लिए लालायित हैं, तो निःसंदेह अल्लाह उसे मार्गदर्शन प्रदान नहीं करता, जिसे वह गुमराह कर दे, और न कोई उनकी मदद करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), tum chahe inki hidayat ke liye kitne hi harees (desirous) ho, magar Allah jisko bhatka deta hai phir usey hidayat nahin diya karta aur is tarah ke logon ki madad koi nahin kar sakta
Roman Urdu (Junagarhi)Go aap inn ki hidayat kay khuwaish mand rahey hain lekin Allah Taalaa ussa hidayat nahi deta jissay gumrah kerdey aur na unn ka koi madadgar hota hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), तुम चाहे इनकी हिदायत के लिए कितने ही हारे हो, मगर अल्लाह जिसको भटका देता है फिर उसे हिदायत नहीं दिया करता और इस तरह के लोगों की मदद कोई नहीं कर सकता
عَرَبِيوَأَقسَموا بِاللَّهِ جَهدَ أَيمانِهِم ۙ لا يَبعَثُ اللَّهُ مَن يَموتُ ۚ بَلىٰ وَعدًا عَلَيهِ حَقًّا وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन (काफ़िरों) ने अपनी पक्की क़समें खाते हुए अल्लाह की क़सम खाई कि अल्लाह उसे पुनः जीवित नहीं करेगा, जो मर जाए। क्यों नहीं? यह तो उस (अल्लाह) के ऊपर एक सच्चा वादा है, परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log Allah ke naam se kadi kadi kasmein kha kar kehte hain ke “Allah kisi marne waley ko phir se zinda karke na uthayega”. Uthayega kyun nahin, yeh to ek wada hai jisey poora karna usne apne upar wajib karliye hai, magar aksar log jantey nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh log bari sakht sakht qasmen kha kha ker kehtay hain kay murdon ko Allah Taalaa zinda nahi keray ga. Kiyon nahi zaroor zinda keray ga yeh to uss ka bar haq lazmi wada hai leki aksar log jantay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग अल्लाह के नाम से छोटी-छोटी कसमें खा कर कहते हैं "अल्लाह किसी को मरने वाले को फिर से जिंदा करके ना उठाएगा"। उठायेगा क्यों नहीं, ये तो एक वादा है जिसका पूरा करना उसने अपने ऊपर वाजिब कर लिया है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं
عَرَبِيلِيُبَيِّنَ لَهُمُ الَّذي يَختَلِفونَ فيهِ وَلِيَعلَمَ الَّذينَ كَفَروا أَنَّهُم كانوا كاذِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि वह (अल्लाह) उनके लिए उस तथ्य को उजागर कर दे, जिसमें वे मतभेद करते हैं और ताकि काफ़िर लोग जान लें कि वे झूठे थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur aisa hona isliye zaroori hai ke Allah inke samne us haqeeqat ko khol de jiske barey mein yeh ikhtilaf kar rahey hain aur munkireen e haqq ko maloom ho jaye ke woh jhoote thay
Roman Urdu (Junagarhi)Iss liye bhi kay yeh log jiss cheez mein ikhtilaf kertay thay ussay Allah Taalaa saaf biyan kerdey aur iss liye bhi kay khud kafir apna jhoota hona jaan len
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐसा होना जरूरी है के अल्लाह इनके सामने हकीकत को खोल दे जिसके बारे में ये इख्तिलाफ कर रहे हैं और मुनकिरीन ए हक़ को मालूम हो जाए के वो झूठे थे
عَرَبِيإِنَّما قَولُنا لِشَيءٍ إِذا أَرَدناهُ أَن نَقولَ لَهُ كُن فَيَكونُ
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हिन्दी (Al-Omari)हमारा कहना किसी चीज़ को, जब हम उसका इरादा कर लें, इसके सिवा कुछ नहीं होता कि हम उसे कहते हैं : 'हो जा', तो वह हो जाती है।
Roman Urdu (Maududi)Raha uska imakan (possibility) to] humein kisi cheez ko wajood mein laney ke liye issey zyada kuch nahin karna hota ke usey hukum dein “ho ja” aur bas woh ho jaati hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum jab kissi cheez ka irada kertay hain to sirf humara yeh keh dena hota hai kay ho jaa pus woh hojati hai
Devnagri Urdu (Maududi)रहा उसका इमान (संभावना) तो] हमें किसी चीज़ को वजूद में लाने के लिए इसे ज़्यादा कुछ नहीं करना होता के उसे हुकुम दीन "हो जा" और बस वो हो जाती है
عَرَبِيوَالَّذينَ هاجَروا فِي اللَّهِ مِن بَعدِ ما ظُلِموا لَنُبَوِّئَنَّهُم فِي الدُّنيا حَسَنَةً ۖ وَلَأَجرُ الآخِرَةِ أَكبَرُ ۚ لَو كانوا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने अल्लाह के लिए घर-बार छोड़ा, इसके बाद कि उनपर अत्याचार किया गया, निःसंदेह हम उन्हें संसार में अवश्य अच्छा ठिकाना देंगे। और निश्चय आख़िरत का प्रतिफल सबसे बड़ा है। काश! वे जानते होते।
Roman Urdu (Maududi)Jo log zulm sehne ke baad Allah ki khatir hijrat kar gaye hain unko hum duniya hi mein accha thikana denge aur aakhirat ka ajar to bahut bada hai, kaash jaan lein woh mazloom
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ney zulm bardasht kerney kay baad Allah ki raah mein tark-e-watan kiya hai hum unhen behtar say behtar thikana duniya mein ata farmyen gay aur aakhirat ka sawab to boht hi bara hai kaash kay log iss say waqif hotay
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ज़ुल्म सहने के बाद अल्लाह की खातिर हिजरत कर गए हैं उनको हम दुनिया ही में अच्छा ठिकाना देंगे और आख़िरत का अजर तो बहुत बड़ा है, काश जान लें वो मज़लूम
عَرَبِيالَّذينَ صَبَروا وَعَلىٰ رَبِّهِم يَتَوَكَّلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग जिन्होंने धैर्य से काम लिया तथा अपने पालनहार ही पर भरोसा करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jinhon ne sabr kiya hai aur jo apne Rubb ke bharosey par kaam kar rahey hain (ke kaisa accha anjaam unka muntazir hai)
Roman Urdu (Junagarhi)Woh jinhon ney daman-e-sabar na chora aur apney palney walay hi per bharosa kertay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)जिन्हों ने सब्र किया है और जो अपने रब के भरोसे पर काम कर रहे हैं (के कैसा अच्छा अंजाम उनका) मुंतज़िर है)
عَرَبِيوَما أَرسَلنا مِن قَبلِكَ إِلّا رِجالًا نوحي إِلَيهِم ۚ فَاسأَلوا أَهلَ الذِّكرِ إِن كُنتُم لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) हमने आपसे पहले जो भी रसूल भेजे, वे सभी पुरुष थे, जिनकी ओर हम वह़्य (प्रकाशना) करते थे। अतः यदि तुम (स्वयं) नहीं जानते हो, तो ज्ञान वालों से पूछ लो।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), humne tumse pehle bhi jab kabhi Rasool bheje hain aadmi hi bheje hain jinki taraf hum apne paigamaat wahee kiya karte thay. Ehle zikr se puch lo agar tumlog khud nahin jaante
Roman Urdu (Junagarhi)Aap say pehlay bhi hum mardon ko hi bhejtay rahey jin ki janib wahee utara kertay thay pus agar tum nahi jantay to ehl-e-ilm say daryaft kerlo
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), हमने तुमसे पहले भी जब कभी रसूल भेजे हैं आदमी ही भेजे हैं जिनकी तरफ हम अपने पैगाम वही किया करते थे। एहले ज़िक्र से पूछ लो अगर तुमलोग खुद नहीं जानते
عَرَبِيبِالبَيِّناتِ وَالزُّبُرِ ۗ وَأَنزَلنا إِلَيكَ الذِّكرَ لِتُبَيِّنَ لِلنّاسِ ما نُزِّلَ إِلَيهِم وَلَعَلَّهُم يَتَفَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(उन्हें) स्पष्ट प्रमाणों तथा पुस्तकों के साथ (भेजा)। और हमने आपकी ओर यह शिक्षा (क़ुरआन) उतारी, ताकि आप लोगों के सामने खोल-खोलकर बयान कर दें, जो कुछ उनकी ओर उतारा गया है और ताकि वे सोच-विचार करें।
Roman Urdu (Maududi)Pichle Rasoolon ko bhi humne roshan nishaniyan aur kitabein de kar bheja tha, aur ab yeh zikr tumpar nazil kiya hai taa-ke tum logon ke saamne us taleem ki tashreeh o tawzeeh karte jao jo unke liye utari gayi hai, aur taa-ke log (khud bhi) gaur o fikr karein
Roman Urdu (Junagarhi)Daleelon aur kitabon kay sath yeh zikar (kitab) hum ney aap ki taraf utara hai kay logon ki janib jo nazil farmaya gaya hai aap ussay khol khol ker biyan ker den shayad kay woh ghoro-o-fikar keren
Devnagri Urdu (Maududi)पिछले रसूलों को भी हमने रोशन निशानियां और किताबें दे कर भेजा था, और अब ये ज़िक्र तुमपर नाज़िल किया है ता-के तुम लोगों के सामने उस तालीम की तशरीह ओ तौज़ीह करते जाओ जो उनके लिए उतारी गई है, और ता-के लोग (खुद भी) गौर ओ फिक्र करें
عَرَبِيأَفَأَمِنَ الَّذينَ مَكَرُوا السَّيِّئَاتِ أَن يَخسِفَ اللَّهُ بِهِمُ الأَرضَ أَو يَأتِيَهُمُ العَذابُ مِن حَيثُ لا يَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या बुरी चालें चलने वाले इस बात से निश्चिंत हो गए हैं कि अल्लाह उन्हें धरती में धँसा दे, अथवा उनपर यातना आ जाए, जहाँ से वे सोचते भी न हों?
Roman Urdu (Maududi)Phir kya woh log jo ( dawat e paigambar ki mukhalifat mein) badhtar se badhtar chalein chal rahey hain is baat se bilkul hi be khauf ho gaye hain ke Allah unko zameen mein dhansa de, ya aisey goshey mein unpar azaab le aaye jidhar se uske aane ka unko weham o gumaan tak na ho
Roman Urdu (Junagarhi)Bad tareen dao paich kerney walay kiya iss baat say bey khof hogaye hain kay Allah Taalaa unhen zamin mein dhansa dey ya unn kay pass aisi jagah say azab aajaye jahan ka unhen weham-o-guman bhi na ho
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्या वो लोग जो (दावत ए पैगम्बर की मुखालिफत में) बढ़तर से बढतर चलें चल रहे हैं इस बात से बिल्कुल ही बे खौफ हो गए हैं के अल्लाह उनको जमीन में धोखा दे, हां ऐसे गोशे में अनपर अज़ाब ले आए जिधर से उसके आने का उनको हम ओ गुमान तक ना हो
عَرَبِيأَو يَأخُذَهُم في تَقَلُّبِهِم فَما هُم بِمُعجِزينَ
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हिन्दी (Al-Omari)या वह उन्हें उनके चलने-फिरने को दौरान पकड़ ले। तो वे (अल्लाह को) किसी तरह विवश करने वाले नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ya achanak chalte phirte inko pakad le , ya aisi halat mein inhein pakde jabke unhein khud aane wali museebat ka khatka laga hua ho aur woh ussey bachne ki fikr mein chaukanne hon
Roman Urdu (Junagarhi)Ya unhen chaltay phirtay pakar ley. Yeh kissi soorat mein Allah Taalaa ko aajiz nahi ker saktay
Devnagri Urdu (Maududi)या अचानक चलते फिरते इनको पकड़ ले, या ऐसी हालत में उन्हें पकड़े जबके उन्हें खुद आने वाली मुसीबत का खटका लगा हुआ हो और वो उसे बचाने की फिक्र में चौकन्ने माननीय
عَرَبِيأَو يَأخُذَهُم عَلىٰ تَخَوُّفٍ فَإِنَّ رَبَّكُم لَرَءوفٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अथवा वह उन्हें भयभीत होने की दशा में पकड़ ले? निःसंदेह तुम्हारा पालनहार निश्चय अति करुणामय, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Woh jo kuch bhi karna chahe yeh log usko aajiz (frustrate) karne ki taaqat nahin rakhte, haqeeqat yeh hai ke tumhara Rubb bada hi narm-khu (very Lenient /shafaqat karne wala) aur raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ya unhen dara dhamka ker pakar ley pus yaqeenan tumhara perwerdigar aala shafqat aur intehaee reham wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो जो कुछ भी करना चाहे ये लोग उसको अजीज (निराश) करने की ताकत नहीं रखते, हकीकत ये है के तुम्हारा रब बड़ा ही नरम-खु (बहुत उदार/शफाकत करने वाला) और रहीम है
عَرَبِيأَوَلَم يَرَوا إِلىٰ ما خَلَقَ اللَّهُ مِن شَيءٍ يَتَفَيَّأُ ظِلالُهُ عَنِ اليَمينِ وَالشَّمائِلِ سُجَّدًا لِلَّهِ وَهُم داخِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने अल्लाह की पैदा की हुई कोई चीज़ नहीं देखी कि उसकी परछाइयाँ अल्लाह को सजदा करती हुई दाएँ तथा बाएँ झुकती हैं? जबकि वे विनम्र होती हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur kya yeh log Allah ki paida ki hui kisi cheez ko bhi nahin dekhte ke uska saaya kis tarah Allah ke huzoor sajda karte huey dayein aur bayein girta hai? Sab ke sab is tarah izhar e ijz (express their humility) kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya enhon ney Allah ki makhlooq mein kissi ko bhi nahi dekha? Kay uss kay saye dayen bayen jhuk jhuk ker Allah Taalaa kay samney sir ba sujood hotay aur aajzi ka izhar kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या ये लोग अल्लाह की अदा की हुई किसी चीज़ को भी नहीं देखते के उसका साया किस तरह अल्लाह के हुज़ूर सजदा करते हुए दिन और बयेन गिरता है? सब के सब इस तरह इज़हार ए इज्ज़ (अपनी विनम्रता व्यक्त करें) कर रहे हैं
عَرَبِيوَلِلَّهِ يَسجُدُ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ مِن دابَّةٍ وَالمَلائِكَةُ وَهُم لا يَستَكبِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आकाशों एवं धरती में जितने जीवधारी हैं, सब अल्लाह ही को सजदा करते हैं तथा फ़रिश्ते (भी)। और वे अहंकार नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Zameen aur aasmano mein jis qadar jaandaar makhlooqat hain aur jitne Malaika hain sab Allah ke aagey sar ba-sajood hain. Woh hargiz sarkashi nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan aasman-o-zamin kay kul jandar aur tamam farishtay Allah Taalaa kay samney sajday kertay hain aur zara bhi takabbur nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन और आसमान में जिस कदर जानदार मखलूक़त हैं और जितने मालिक हैं सब अल्लाह के आगे सर ब-सजूद हैं। वो हरगिज सरकशी नहीं करते
☉ Sajda
عَرَبِييَخافونَ رَبَّهُم مِن فَوقِهِم وَيَفعَلونَ ما يُؤمَرونَ ۩
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हिन्दी (Al-Omari)वे अपने पालनहार से डरते हैं, जो उनके ऊपर है। और वे वही करते हैं, जो आदेश दिेए जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb se jo unke upar hai, darte hain aur jo kuch hukum diya jata hai usi ke mutabik kaam karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney rab sau jo unn kay upper hai kapkapatay rehtay hain aur jo hukum mill jaye uss ki tameel kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब से जो उनके ऊपर है, डरते हैं और जो कुछ हुकुम दिया जाता है उसके मुताबिक काम करते हैं
عَرَبِي۞ وَقالَ اللَّهُ لا تَتَّخِذوا إِلٰهَينِ اثنَينِ ۖ إِنَّما هُوَ إِلٰهٌ واحِدٌ ۖ فَإِيّايَ فَارهَبونِ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ने कहा : दो पूज्य न बनाओ। वह तो केवल एक ही पूज्य है। अतः तुम मुझी से डरो।
Roman Urdu (Maududi)Allah ka farmaan hai ke “do khuda na bana lo, khuda to bas ek hi hai, lihaza tum mujhi se daro
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa irshad farma chuka hai kay do mabood na banao. Mabood to sirf wohi akela hai pus tum sab mera hi darr khof rakho
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह का फरमान है के "दो खुदा ना बना लो, खुदा तो बस एक ही है, लिहाजा तुम मुझ से डरो
عَرَبِيوَلَهُ ما فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ وَلَهُ الدّينُ واصِبًا ۚ أَفَغَيرَ اللَّهِ تَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसी का है, जो कुछ आकाशों में तथा जो कुछ धरती में है। और इबादत भी हमेशा उसी की है। तो क्या तुम अल्लाह के अलावा से डरते हो?
Roman Urdu (Maududi)Usi ka hai woh sab kuch jo aasmano mein hai aur jo zameen mein hai, aur khaalisan usi ka deen (saari qayinaat mein) chal raha hai. Phir kya Allah ko chodh kar tum kisi aur se taqwa (darr) karoge
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmanon mein aur zamin mein jo kuch hai sab ussi ka hai aur ussi ki ibadat lazim hai kiya phir tum uss kay siwa auron say dartay ho
Devnagri Urdu (Maududi)उसका है वो सब कुछ जो आसमान में है और जो ज़मीन में है, और खालिसन उसी का दीन (सारी कायनात में) चल रहा है। फिर क्या अल्लाह को छोड़ कर तुम किसी और से तकवा (डर) करोगे
عَرَبِيوَما بِكُم مِن نِعمَةٍ فَمِنَ اللَّهِ ۖ ثُمَّ إِذا مَسَّكُمُ الضُّرُّ فَإِلَيهِ تَجأَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारे पास जो भी नेमत है, वह अल्लाह ही की ओर से है। फिर जब तुम्हें दुःख पहुँचता है, तो उसी की ओर गिड़गिड़ाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Tumko jo niyamat bhi haasil hai Allah hi ki taraf se hai phir jab koi sakht waqt tumpar aata hai to tum log khud apni fariyadein lekar usi ki taraf daudte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Tumharay pass jitni bhi nematen hain sab ussi ki di hui hain abb bhi jab tumhen koi museebat paish aajaye to ussi ki taraf nala-o-faryad kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)तुमको जो नियामत भी हासिल है अल्लाह ही की। तरफ से है फिर जब कोई सख्त वक्त तुमपर आता है तो तुम लोग खुद अपनी फरियाद लेकर उसी की तरफ दौड़ते हो
عَرَبِيثُمَّ إِذا كَشَفَ الضُّرَّ عَنكُم إِذا فَريقٌ مِنكُم بِرَبِّهِم يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वह तुमसे उस कष्ट को दूर कर देता है, तो अचानक तुममें से कुछ लोग अपने रब के साथ साझी ठहराने लगते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar jab Allah us waqt ko taal deta hai to yakayak tum mein se ek giroh apne Rubb ke saath dusron ko (is meharbani ke shukriye mein) shareek karne lagta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jahan uss ney woh museebat tum say dafa ker di tum mein say kuch log apney rab kay sath shirk kerney lag jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जब अल्लाह हमें वक्त को ताल देता है तो यकीनन तुम में से एक गिरोह अपने रुब के साथ दूसरे को (इस मेहरबानी के शुक्रिया में) शरीक करने लगता है
عَرَبِيلِيَكفُروا بِما آتَيناهُم ۚ فَتَمَتَّعوا ۖ فَسَوفَ تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि हमने उन्हें, जो कुछ प्रदान किया है, उसकी नाशुक्री करें। तो तुम (कुछ दिन) लाभ उठा लो। फिर तुम जल्द ही जान लोगे।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke Allah ke ehsan ki nashukri karey, Accha mazey karlo, anqareeb tumhein maloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Kay humari di hui nematon ki na shukri keren. Acha kuch faeeda utha lo aakhir kaar tumhen maloom ho hi jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के अल्लाह के एहसान की नाशुकरी करे, अच्छा मजे करलो, अनकरीब तुम्हें मालूम हो जाएगा
عَرَبِيوَيَجعَلونَ لِما لا يَعلَمونَ نَصيبًا مِمّا رَزَقناهُم ۗ تَاللَّهِ لَتُسأَلُنَّ عَمّا كُنتُم تَفتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे हमारी दी हुई चीज़ों में उनका भाग लगाते हैं, जो कुछ नहीं जानते। अल्लाह की क़सम! तुम जो झूठ गढ़ते हो, उसके संबंध में तुमसे अवश्य पूछा जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log jinki haqeeqat se waqif nahin hain unke hissey hamare diye huye rizq mein se muqarrar karte hain. Khuda ki kasam, zaroor tumse pucha jayega ke yeh jhoot tumne kaise ghadh liye thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jisay jantay boojhtay bhi nahi uss ka hissa humari di hui rozi mein say muqarrar kertay hain wallah tumharay iss bohtan ka sawal tum say zaroor hi kiya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग जिनकी हकीकत से वाकिफ नहीं हैं, उनके लिए हमारे दिए हुए रिज्क में से मुकर्रर करते हैं। खुदा की कसम, जरूर तुमसे पूछा जाएगा के ये झूठ तुमने कैसे गड़बड़ ले लिया था
عَرَبِيوَيَجعَلونَ لِلَّهِ البَناتِ سُبحانَهُ ۙ وَلَهُم ما يَشتَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते हैं, वह पवित्र है! और अपने लिए वह, जो वे चाहते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Yeh khuda ke liye betiyan tajweez karte hain, SubhanAllah! Aur inke liye woh jo yeh khud chahein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh Allah subhana hu wa-Taalaa kay liye larkiyan muqarrar kertay hain aur apney liye woh jo apni khuwaish kay mutabiq ho
Devnagri Urdu (Maududi)ये खुदा के लिए बेटियां तजवीज करते हैं, सुभानअल्लाह! और इनके लिए वो जो ये खुद चाहते हैं
عَرَبِيوَإِذا بُشِّرَ أَحَدُهُم بِالأُنثىٰ ظَلَّ وَجهُهُ مُسوَدًّا وَهُوَ كَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनमें से किसी को बेटी (के जन्म) की शुभ सूचना दी जाती है, तो उसका मुख काला हो जाता है और वह दुख से भरा होता है।
Roman Urdu (Maududi)Jab in mein se kisi ko beti ke paida honay ki khush-khabri di jati hai to uske chehre par kaloons (grows dark) chaa jati hai aur woh bas khoon ka sa ghoont pee kar reh jata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein say jab kissi ko larki honey ki khabar di jaye to uss ka chehra seeha hojata hai aur dil hi dil mein ghutney lagta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जब मेरे बीच में किसी को बेटी के प्यार की खुशी-खबरी दी जाती है तो उसके चेहरे पर कलौंस (काला हो जाता है) चा जाती है और वो बस खून का सा घूंट पी कर रह जाता है
عَرَبِييَتَوارىٰ مِنَ القَومِ مِن سوءِ ما بُشِّرَ بِهِ ۚ أَيُمسِكُهُ عَلىٰ هونٍ أَم يَدُسُّهُ فِي التُّرابِ ۗ أَلا ساءَ ما يَحكُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह उस बुरी सूचना के कारण लोगों से छिपता फिरता है, जो उसे दी गई है। (सोचता है कि) क्या उसे अपमान के साथ रहने दे, अथवा उसे मिट्टी में गाड़ दे? देखो! बहुत बुरा है, जो वे निर्णय करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Logon se chupta phirta hai ke is buri khabar ke baad kya kisi ko mooh dikhaye. Sochta hai ke zillat ke saath beti ko liye rahey ya mitti mein daba de? Dekho kaise bure hukum hain jo yeh khuda ke barey mein lagate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Iss buri khabar say logon say chupa chupa phirta hai. Sochta hai kay kiya iss zillat ko sath liye huye hi rahey ya issay mitti mein daba dey aah! Kiya hi buray faislay kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों से छुपता फिरता है के इस बुरी खबर के बाद क्या किसी को मुंह दिखाया गया। सोचता है कि जिल्लत के साथ बेटी को लिए रहो हां मिट्टी में दबा दे? देखो कैसे बुरे हुकुम हैं जो ये खुदा के बारे में लगते हैं
عَرَبِيلِلَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِالآخِرَةِ مَثَلُ السَّوءِ ۖ وَلِلَّهِ المَثَلُ الأَعلىٰ ۚ وَهُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोग आख़िरत (परलोक) को नहीं मानते, उनकी बुरी मिसाल है। और अल्लाह की सर्वोच्च विशेषता है, तथा वही प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Buri siffat se muttasaf (be ascribed) kiya janey ke layak to woh log hain jo aakhirat ka yaqeen nahin rakhte. Raha Allah, to uske liye sab se bartar siffat hain, wahi to sab par gaalib aur hikmat mein kamil hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aakhirat per eman na rakhney walon ki hi buri misal hai Allah kay liye to boht hi buland sift hai woh bara hi ghalib aur ba hikmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)बुरी शिफत से मुत्तसफ (लिखा जाए) किया जाने के लायक तो वो लोग हैं जो आखिरी का यकीन नहीं रखते। रहा अल्लाह, तो उसके लिए सब से बरतार सिफ़्फ़त हैं, वही तो सब पर ग़ालिब और हिकमत में कामिल है
عَرَبِيوَلَو يُؤاخِذُ اللَّهُ النّاسَ بِظُلمِهِم ما تَرَكَ عَلَيها مِن دابَّةٍ وَلٰكِن يُؤَخِّرُهُم إِلىٰ أَجَلٍ مُسَمًّى ۖ فَإِذا جاءَ أَجَلُهُم لا يَستَأخِرونَ ساعَةً ۖ وَلا يَستَقدِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि अल्लाह, लोगों को उनके अत्याचार की वजह से पकड़े, तो धरती पर किसी जीवधारी को न छोड़े। परंतु वह उन्हें एक निर्धारित समय तक ढील देता है। फिर जब उनका समय आ जाता है, तो एक घड़ी न पीछे रहते हैं और न आगे बढ़ते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Agar kahin Allah logon ko unki zyadati par fauran hi pakad liya karta to rooh e zameen par kisi mutanaffis ko na chodhta. Lekin woh sab ko ek waqt e muqarrar tak mohalat deta hai. Phir jab woh waqt aa jata hai to ussey koi ek ghadi bhar bhi aagey peechey nahin ho sakta
Roman Urdu (Junagarhi)Agar logon kay gunah per Allah Taalaa unn ki girift kerta to roy-e-zamin per aik jandar baqi na rehta lekin woh to enhen aik waqt muqarrara tal dheel deta hai jab inn ka woh waqt aajata hai to woh aik sa’at na peechay reh saktay hain aur na aagay barh saktay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अगर कहीं अल्लाह लोगों को उनकी ज़्यादती पर फ़ौरन ही पकड़ लिया करता तो रूह ए ज़मीन पर किसी मुतनफ़्फ़िस को न छोड़ता। लेकिन वो सब को एक वक्त ए मुकर्रर तक मोहलत देता है। फिर जब वो वक्त आ जाता है तो उसे कोई एक घड़ी भर भी आगे पीछे नहीं हो सकता
عَرَبِيوَيَجعَلونَ لِلَّهِ ما يَكرَهونَ وَتَصِفُ أَلسِنَتُهُمُ الكَذِبَ أَنَّ لَهُمُ الحُسنىٰ ۖ لا جَرَمَ أَنَّ لَهُمُ النّارَ وَأَنَّهُم مُفرَطونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे अल्लाह के लिए वह कुछ ठहराते हैं, जिसे अपने लिए नापसंद करते हैं। और उनकी ज़बानें झूठ बोलती हैं कि उनके लिए अच्छा परिणाम है। कोई संदेह नहीं कि उन्हीं के लिए जहन्नम है और वे उसमें छोड़ दिए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aaj yeh log woh cheezein Allah ke liye tajweez kar rahey hain jo khud apne liye inhein napasand hain, aur jhoot kehti hain inki zubaanein ke inke liye bhala hi bhala hai. Inke liye to ek hi cheez hai, aur woh hai dozakh ki aag, zaroor yeh sab se pehle us mein pahunchaye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh apney liye jo jo na pasand rakhtay hain Allah kay liye sabit kertay hain aur inn ki zabanen jhooti baten biyan kerti hain kay inn kay liye khoobi hai. Nahi nahi dar-asal inn kay liye aag hai aur yeh dozakhiyon kay paish ro hain
Devnagri Urdu (Maududi)आज ये लोग वो चीज़े अल्लाह के लिए तजवीज़ कर रहे हैं जो खुद अपने लिए इन्हें नापसंद हैं, और झूठ कहती हैं इनकी ज़ुबानें के इनके लिए भला ही भला है। इनके लिए तो एक ही चीज़ है, और वो है दोज़ख की आग, ज़रूर ये सब से पहले हमें में पकड़ लेंगे
عَرَبِيتَاللَّهِ لَقَد أَرسَلنا إِلىٰ أُمَمٍ مِن قَبلِكَ فَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيطانُ أَعمالَهُم فَهُوَ وَلِيُّهُمُ اليَومَ وَلَهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह की क़सम! निश्चय हमने (ऐ नबी!) आपसे पहले बहुत-से समुदायों की ओर रसूल भेजे। तो शैतान ने उनके कुकर्मों को उनके लिए सुंदर बना दिया। अतः वही आज उनका सहायक है। और उन्हीं के लिए दुःखदायी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Khuda ki kasam, (aey Muhammad) tumse pehle bhi bahut si qaumon mein hum Rasool bhej chuke hain (aur pehle bhi yahi hota raha hai ke) shaytan ne unke burey kartoot unhein khushnuma bana kar dikhaye (aur Rasoolon ki baat unhon ne maan kar na di). Wahi shaytan aaj in logon ka bhi sarparast bana hua hai aur yeh dardnaak saza ke mustahiq ban rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Wallah! hum ney tumjh say pehlay ki ummaton ki taraf bhi apney rasool bhejay lekin shetan ney unn kay aemaal-e-bad unn ki nighaon mein aaraasta ker diye woh shetan aaj bhi unn ka rafiq bana hua hai aur unn kay liye dard naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)ख़ुदा की कसम, (ऐ मुहम्मद) तुमसे पहले भी बहुत सी क़ौमों में हम रसूल भेज चुके हैं (और पहले भी यहीं होता जा रहा है के) शैतान ने उनको खुशनुमा बना कर दिखाया (और रसूलों की बात उनको ने मान कर ना दी)। वही शैतान आज लोगों का भी सरपरस्त बना हुआ है और ये दर्दनक सजा के मुस्तहिक बन रहे हैं
عَرَبِيوَما أَنزَلنا عَلَيكَ الكِتابَ إِلّا لِتُبَيِّنَ لَهُمُ الَّذِي اختَلَفوا فيهِ ۙ وَهُدًى وَرَحمَةً لِقَومٍ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने आपपर यह पुस्तक (क़ुरआन) केवल इसलिए उतारी है कि आप उनके सामने वह बात खोल-खोलकर बयान कर दें, जिसमें उन्होंने मतभेद किया है। तथा उन लोगों के लिए मार्गदर्शन और दया के रूप में जो ईमान लाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Humne yeh kitaab tumpar is liye nazil ki hai ke tum un ikhtilafaat(differences) ki haqeeqat inpar khol do jin mein yeh padey huey hain. Yeh kitab rehnumayi aur rehmat bankar utri hai un logon ke liye jo isey maan lein
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kitab ko hum ney aap per iss liye utara hai kay aap inn kay liye her uss cheez ko wazeh kerden jiss mein woh ikhtilaf ker rahey hain aur yeh eman daron kay liye rehnumaee aur rehmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने ये किताब तुम्हारे लिए नाज़िल की है के तुम उन इख्तिलाफात (मतभेद) की हकीकत इनपर खोल दो जिनमें ये पड़े हुए हैं। ये किताब रहनुमाई और रहमत बनकर उतरी है उन लोगों के लिए जो इसे मान लें
عَرَبِيوَاللَّهُ أَنزَلَ مِنَ السَّماءِ ماءً فَأَحيا بِهِ الأَرضَ بَعدَ مَوتِها ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً لِقَومٍ يَسمَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ने आकाश से कुछ पानी बरसाया, फिर उससे धरती को उसके मृत होने के बाद जीवित कर दिया। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए निश्चय एक निशानी है, जो सुनते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Tum har barsaat mein dekhte ho ke) Allah ne aasman se pani barsaya aur yakayak murda padi hui zameen mein uski badaulat jaan daal di. Yaqeenan is mein ek nishani hain sunne walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah aasman say pani barsa ker iss say zamin ko uss ki maut kay bad zinda ker deta hai. Yaqeenan iss mein unn logon kay liye nishani hai jo sunen
Devnagri Urdu (Maududi)(तुम हर बरसात में देखते हो के) अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया और यकीन मुर्दा पड़ी हुई जमीन में उसकी बदौलत जान डाल दी। यकीनन इस में एक निशानी हैं सुनने वालों के लिए
عَرَبِيوَإِنَّ لَكُم فِي الأَنعامِ لَعِبرَةً ۖ نُسقيكُم مِمّا في بُطونِهِ مِن بَينِ فَرثٍ وَدَمٍ لَبَنًا خالِصًا سائِغًا لِلشّارِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह तुम्हारे लिए पशुओं में बड़ा उपदेश है। हम उन चीज़ों में से जो उनके पेटों में हैं, गोबर और रक्त के मध्य से तुम्हें शुद्ध दूध पिलाते हैं, जो पीने वालों के लिए रुचिकर होता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhare liye maweshiyon mein bhi ek sabaq maujood hai unke pait (stomach) se gobar aur khoon ke darmiyan hum ek cheez tumhein peelate hain, yaani khaalis doodh, jo peene walon ke liye nihayat khushgawar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tumharay liye to chopayon mein bhi bari ibrat hai kay hum tumhen uss kay pait mein jo kuch hai ussi mein say gobar aur lahoo kay darmiyan say khalis doodh pilatay hain jo peenay walon kay liye sehta pachta hai
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हारे लिए मवेशियों में भी एक सबक मौजूद है उनके पेट (पेट) से गोबर और खून के दरमियान हम एक चीज तुम्हें पिलाते हैं, यानी खाली दूध, जो पीने वालों के लिए निहायत खुशगवार है
عَرَبِيوَمِن ثَمَراتِ النَّخيلِ وَالأَعنابِ تَتَّخِذونَ مِنهُ سَكَرًا وَرِزقًا حَسَنًا ۗ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً لِقَومٍ يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा खजूरों और अंगूरों के फलों से भी, जिससे तुम मादक पदार्थ तथा उत्तम रोज़ी बनाते हो। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए एक निशानी है, जो समझ-बूझ रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Isi tarah) khajoor ke darakhton aur angoor ki beilon se bhi hum ek cheez tumhein pilatay hain jisey tum nasha-awar bhi bana letey ho aur paak rizq bhi. Yaqeenan is mein ek nishani hai aqal se kaam lene walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur khujoor aur angoor kay darakhton kay phalon say tum sharab bana letay ho aur umdah rozi bhi. Jo log aqal rakhtay hain unn kay liye to iss mein boht bari nishani hai
Devnagri Urdu (Maududi)(इसी तरह) खजूर के दरख्तों और अंगूर की बेलों से भी हम एक चीज तुम्हें पिलाते हैं जैसे तुम नशा-अवतार भी बना लेते हो और पाक रिज्क भी। यकीनन इस में एक निशानी है अक़ल से काम लेने वालों के लिए
عَرَبِيوَأَوحىٰ رَبُّكَ إِلَى النَّحلِ أَنِ اتَّخِذي مِنَ الجِبالِ بُيوتًا وَمِنَ الشَّجَرِ وَمِمّا يَعرِشونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और तेरे पालनहार ने मधुमक्खी को प्रेरित किया कि कुछ पर्वतों में से घर (छत्ते) बना तथा कुछ वृक्षों में से और कुछ उसमें से जो लोग छप्पर बनाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur dekho, tumhare Rubb ne shahed (honey) ki makkhi par yeh baat wahee kardi ke pahadon mein, aur darakhton mein, aur tattiyon par chadhayi hui bailon mein (mountains, trees and in the creepers over trellises) apne chattey bana (Build your hive)
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kay rab ney shehad ki makhi kay dil mein yeh baat daal di kay paharon mein darakhton logon ki banaee hui unchi unchi tatiyon mein apney ghar (chattay) bana
Devnagri Urdu (Maududi)और देखो, तुम्हारे रब ने शहीद (शहद) की मक्खी पर ये बात वही करदी के पहाड़ों में, और दरख्तों में, और टट्टियों पर चढ़यी हुई बैलों में (पहाड़ों, पेड़ों और लताओं में) जाली) अपने छत्ता बना (अपना छत्ता बनाएं)
عَرَبِيثُمَّ كُلي مِن كُلِّ الثَّمَراتِ فَاسلُكي سُبُلَ رَبِّكِ ذُلُلًا ۚ يَخرُجُ مِن بُطونِها شَرابٌ مُختَلِفٌ أَلوانُهُ فيهِ شِفاءٌ لِلنّاسِ ۗ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً لِقَومٍ يَتَفَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हर तरह के फलों से खा, फिर अपने पालनहार के प्रशस्त किए हुए रास्तों पर चल। उनके पेटों से विभिन्न रंगों का एक पेय निकलता है, जिसमें लोगों के लिए आरोग्य (शिफ़ा) है। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए निश्चय एक निशानी है, जो सोच-विचार करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur har tarah ke phoolon ka rass choos aur apne Rubb ki humwar ki hui raahon par chalti reh. Is makkhi ke andar se rang bi rang ka ek sharbat nikalta hai jismein shifa hai logon ke liye. Yaqeenan is mein bhi ek nishani hai un logon ke liye jo gaur o fikr karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur her tarah kay meway kha aur apney rab ki aasan raahon mein chalti phirti reh inn kay pait say rang barang ka mashroob nikalta hai jiss kay rang mukhtalif hain aur jiss mein logon kay liye shifa hai ghor-o-fiker kerney walon kay liye iss mein boht bari nishani hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हर तरह के फूलों का रस चूस और अपने रब की हमवार की हुई राहों पर चलती रह। इस मक्खी के अंदर से रंग बी रंग का एक शरबत निकलता है जिसका शिफा है लोगों के लिए। यक़ीनन इस में भी एक निशानी है उन लोगों के लिए जो गौर ओ फ़िक्र करते हैं
عَرَبِيوَاللَّهُ خَلَقَكُم ثُمَّ يَتَوَفّاكُم ۚ وَمِنكُم مَن يُرَدُّ إِلىٰ أَرذَلِ العُمُرِ لِكَي لا يَعلَمَ بَعدَ عِلمٍ شَيئًا ۚ إِنَّ اللَّهَ عَليمٌ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ही ने तुम्हें पैदा किया। फिर वही तुम्हें मौत देता है। और तुममें से कोई वह है जो अति वृद्धावस्था की ओर पहुँचा दिया जाता है, ताकि वह जान लेने के पश्चात् कुछ न जाने। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला, सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Aur dekho, Allah ne tumko paida kiya, phir woh tumko maut deta hai aur tum mein se koi badhtareen umar ko pahucha diya jata hai taa-ke sab kuch jaanne ke baad phir kuch na janey. Haqq yeh hai ke Allah hi ilm mein bhi kamil hai aur qudrat mein bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney hi tum sab ko peda kiya hai wohi phir tumhen fot keray ga tum mein aisay bhi hain jo bad tareen umar ki taraf lotaye jatay hain kay boht kuhc jannay boojhney kay baad bhi na janen. Be-shak Allah dana aur tawana hai
Devnagri Urdu (Maududi)और देखो, अल्लाह ने तुमको पैदा किया, फिर वो तुमको मौत देता है और तुम में से कोई बेहतरीन उमर को पाहुचा दिया जाता है ता-के सब कुछ जाने के बाद फिर कुछ ना जाने। हक़ ये है के अल्लाह ही इल्म में भी कामिल है और कुदरत में भी
عَرَبِيوَاللَّهُ فَضَّلَ بَعضَكُم عَلىٰ بَعضٍ فِي الرِّزقِ ۚ فَمَا الَّذينَ فُضِّلوا بِرادّي رِزقِهِم عَلىٰ ما مَلَكَت أَيمانُهُم فَهُم فيهِ سَواءٌ ۚ أَفَبِنِعمَةِ اللَّهِ يَجحَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ने तुममें से कुछ को, कुछ पर जीविका में श्रेष्ठता प्रदान की है। तो वे लोग जिन्हें श्रेष्ठता प्रदान की गई है, किसी तरह अपनी जीविका अपने दासों की ओर फेरने वाले नहीं कि वे उसमें बराबर हो जाएँ। तो क्या वे अल्लाह के उपकारों का इनकार करते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Aur dekho, Allah ne tum mein se baaz ko baaz par rizq mein fazilat ata ki hai, phir jin logon ko yeh fazeelat di gayi hai woh aisey nahin hain ke apna rizq apne ghulaamo ki taraf pher diya karte hon taa-ke dono is rizq mein barabar ke hissedaar ban jayein. To kya Allah hi ka ehsan maanne se in logon ko inkar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa hi ney tum mein say aik ko doosray per rozi mein ziyadti dey rakhi hai pus jinhen ziyadti di gaee hai woh apni rozi apney matehat ghulamon ko nahi detay kay woh aur yeh iss mein barabar hojayen to kiya yeh log Allah ki nematon kay munkir ho rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)और देखो, अल्लाह ने तुममें से बाज़ को बाज़ पर रिज़्क में फ़ज़िलत अता की है, फिर जिन लोगों को ये फ़ज़ीलत दी गई है वो ऐसे नहीं हैं के अपना रिज़्क अपने गुलामो की तरफ फेर दीया करते हुए ता-के डोनो इस रिज़क में बराबर के हिस्सेदार बन जाएं। तो क्या अल्लाह ही का एहसान मन्ने से इन लोगों को इंकार है
عَرَبِيوَاللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِن أَنفُسِكُم أَزواجًا وَجَعَلَ لَكُم مِن أَزواجِكُم بَنينَ وَحَفَدَةً وَرَزَقَكُم مِنَ الطَّيِّباتِ ۚ أَفَبِالباطِلِ يُؤمِنونَ وَبِنِعمَتِ اللَّهِ هُم يَكفُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ने तुम्हारे लिए खुद तुम्हीं में से पत्नियाँ बनाईं। और तुम्हारे लिए तुम्हारी पत्नियों से बेटे तथा पोते बनाए। और तुम्हें पवित्र चीज़ों से रोज़ी प्रदान की। तो क्या वे असत्य को मानते हैं और अल्लाह की नेमत का वे इनकार करते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Aur woh Allah hi hai jisne tumhare liye tumhari hum jins biwiyan banayi aur usi ne un biwiyon se tumhein bete potey (sons and grandsons) ata kiye aur acchi acchi cheezein tumhein khane ko di. Phir kya yeh log (yeh sab kuch dekhte aur jaante huey bhi) baatil ko maante hain, aur Allah ke ehsan ka inkar karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney tumharay liye tum mein say hi tumhari biwiyan peda kin aur tumhari biwiyon say tumharay liye tumharay betay aur potay peda kiye aur tumhen achi achi cheezen khaney ko den. Kiya phir bhi log baatil per eman layen ga? Aur Allah Taalaa ki nematon ki na shukri keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)और वो अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए तुम्हारी हम जिन बीवियां बनाईं और उसी ने उन बीवियों से तुम्हारे बेटे पोते (बेटे और पोते) अता किए और अच्छी अच्छी चीजें तुम्हें खाने को दी। फिर क्या ये लोग (ये सब कुछ देखते हैं और जानते हैं भी) बातिल को मानते हैं, और अल्लाह के एहसान का इंकार करते हैं
عَرَبِيوَيَعبُدونَ مِن دونِ اللَّهِ ما لا يَملِكُ لَهُم رِزقًا مِنَ السَّماواتِ وَالأَرضِ شَيئًا وَلا يَستَطيعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे अल्लाह के सिवा उनकी उपासना करते हैं, जो न उन्हें आकाशों तथा धरती से कुछ भी जीविका देने के मालिक हैं और न वे इसका सामर्थ्य ही रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah ko chodh kar unko poojhte hain jinke haath mein na aasmano se inhein kuch bhi rizq dena hai na zameen se aur na yeh kaam woh kar hi sakte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh Allah Taalaa kay siwa unn ki ibadat kertay hain jo aasmanon aur zamin say unhen kuch bhi to rozi nahi dey saktay aur na kuch qudrat rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह को छोड़ कर उनको पूजते हैं जिनके हाथ में ना आसमान से इन्हें कुछ भी रिज्क देना है ना ज़मीन से और ना ये काम वो कर ही सकते हैं
عَرَبِيفَلا تَضرِبوا لِلَّهِ الأَمثالَ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَعلَمُ وَأَنتُم لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः अल्लाह के लिए उदाहरण (उपमा) न गढ़ो। निःसंदेह अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Pas Allah ke liye misalein na ghado, Allah jaanta hai, tum nahin jaante
Roman Urdu (Junagarhi)Pus Allah Taalaa kay liye misalen mat banao Allah Taalaa khoob janta hai aur tum nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)पास अल्लाह के लिए मिसालें ना घड़ो, अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते
عَرَبِي۞ ضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا عَبدًا مَملوكًا لا يَقدِرُ عَلىٰ شَيءٍ وَمَن رَزَقناهُ مِنّا رِزقًا حَسَنًا فَهُوَ يُنفِقُ مِنهُ سِرًّا وَجَهرًا ۖ هَل يَستَوونَ ۚ الحَمدُ لِلَّهِ ۚ بَل أَكثَرُهُم لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने एक उदाहरण दिया है; एक पराधीन दास है, जो किसी चीज़ का सामर्थ्य नहीं रखता। और एक वह व्यक्ति है, जिसे हमने अपनी ओर से उत्तम जीविका प्रदान की है। तो वह उसमें से गुप्त रूप से और खुल्लम-खुल्ला खर्च करता है। क्या दोनों समान हो सकते हैं? सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है। बल्कि उनमें से अधिकतर लोग (यह बात) नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Allah ek misal deta hai ek to hai gulaam, jo dusre ka mamluq (slave) hai aur khud koi ikhtiyar nahin rakhta. Doosra shaks aisa hai jisey humne apni taraf se accha rizq ata kiya hai aur woh is mein se khule aur chupe khoob kharch karta hai. Batao kya yeh dono barabar hain? Alhamdulillah, magar aksar log (is seedhi baat ko) nahin jaante
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa aik misal biyan farmata hai kay aik ghulam hai doosray ki milkiyat ka jo kissi baat ka ikhtiyar nahi rakhta aur aik aur shaks hai jissay hum ney apney pass say maqool rozi dey rakhi hai. Kiya yeh sab barabar ho saktay hain? Allah Taalaa hi kay liye sab tareef hai bulkay inn mein say aksar nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह एक मिसाल देता है एक तो है गुलाम, जो दूसरे का ममलुक (गुलाम) है और खुद कोई इख्तियार नहीं रखता। दूसरा शक्स ऐसा है जिसे हमने अपनी तरफ से अच्छा रिज्क अता किया है और वो इस में से खुले और छुपे खूब खर्च करता है। बताओ क्या ये दोनों बराबर हैं? अल्हम्दुलिल्लाह, मगर अक्सर लोग (इस सीधी बात को) नहीं जानते
عَرَبِيوَضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا رَجُلَينِ أَحَدُهُما أَبكَمُ لا يَقدِرُ عَلىٰ شَيءٍ وَهُوَ كَلٌّ عَلىٰ مَولاهُ أَينَما يُوَجِّههُ لا يَأتِ بِخَيرٍ ۖ هَل يَستَوي هُوَ وَمَن يَأمُرُ بِالعَدلِ ۙ وَهُوَ عَلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह ने एक (और) उदाहरण दिया है; दो व्यक्ति हैं। जिनमें से एक गूँगा है। वह कुछ करने की योग्यता नहीं रखता और वह अपने मालिक पर बोझ है। वह उसे जहाँ भी भेजता है, कोई भलाई लेकर नहीं आता। तो क्या यह और वह व्यक्ति बराबर हैं, जो न्याय का आदेश देता है और वह (स्वयं) सीधे मार्ग पर है?
Roman Urdu (Maududi)Allah ek aur misal deta hai, do aadmi hain ek gunga behra hai, koi kaam nahin kar sakta, apne aaqa par bojh bana hua hai, jidhar bhi woh usey bheje koi bhala kaam ussey ban na aaye, dusra shaks aisa hai ke insaaf ka hukum deta hai aur khud raah e raast par qayam hai, batao kya yeh dono yaksan hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa aik aur misal biyan farmata hai do shakson ki jin mein say aik to goonga hai aur kissi cheez per ikhtiyar nahi rakhta bulkay woh apney malik per bojh hai kahin bhi ussay bhejay woh koi bhalaee nahi lata kiya yeh aur woh jo adal ka hukum deta hai aur hai bhi seedhi raah per barabar ho saktay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह एक और मिसाल देता है, दो आदमी हैं एक गंगा बहरा है, कोई काम नहीं कर सकता, अपने आका पर बोझ बना हुआ है, जिधर भी वो उसे भेजे कोई भला काम उसे बन ना आए, दूसरा शक्स ऐसा है के इन्साफ का हुकुम देता है और खुद राह ए रस्त पर क़याम है, बताओ क्या ये दोनों यकसन हैं
عَرَبِيوَلِلَّهِ غَيبُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ وَما أَمرُ السّاعَةِ إِلّا كَلَمحِ البَصَرِ أَو هُوَ أَقرَبُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ही के पास आकाशों तथा धरती की छिपी बातों का ज्ञान है। और क़ियामत का मामला तो बस पलक झपकने जैसा है या उससे भी अधिक निकट है। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Aur zameen o aasman ke posheeda haqaiq ka ilm to Allah hi ko hai aur qayamant ke barpa honay ka maamla kuch dair na lega magar bas itni ke jismein aadmi ki palakh jhapak jaye, balke isse bhi kuch kam, haqeeqat yeh hai ke Allah sab kuch kar sakta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmanon aur zamin ka ghaib sirf Allah Taalaa hi ko maloom hai aur qayamat ka amar to aisa hi hai jaisay aankh ka jhapakna bulkay iss say bhi ziyada qarib. Be-shak Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ज़मीन ओ आसमान के पोशीदा हक़ीक़ का इल्म तो अल्लाह ही को है और क़यामंत के बरपा होने का मामला कुछ दिन न लेगा मगर बस इतनी के जिसमें आदमी की पलक झपक जाए, बलके इसमें भी कुछ काम, हकीकत ये है के अल्लाह सब कुछ कर सकता है
عَرَبِيوَاللَّهُ أَخرَجَكُم مِن بُطونِ أُمَّهاتِكُم لا تَعلَمونَ شَيئًا وَجَعَلَ لَكُمُ السَّمعَ وَالأَبصارَ وَالأَفئِدَةَ ۙ لَعَلَّكُم تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ने तुम्हें तुम्हारी माताओं के पेटों से इस हाल में निकाला कि तुम कुछ न जानते थे। और उसने तुम्हारे लिए कान और आँखें और दिल बनाए, ताकि तुम शुक्रिया अदा करो।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne tumko tumhari maaon ke paiton se nikala is halat mein ke tum kuch na jaante thay, usne tumhein kaan diye , aankhein di , aur sochne waley dil diya, is liye ke tum shukar-guzaar bano
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney tumhen tumhari maaon kay peton say nikala hai kay uss waqt tum kuch bhi nahi jantay thay ussi ney tumharay kaan aur aankhen aur dil banaye kay tum shukar guzari kero
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने तुमको तुम्हारी मांओं के पैरों से निकला इस हालत में के तुम कुछ ना जानते थे, उसने तुम्हें कान दिए, आंखें दी, और सोचने वाले दिल दिया, इस लिए तुम शुक्र-गुज़ार बनो
عَرَبِيأَلَم يَرَوا إِلَى الطَّيرِ مُسَخَّراتٍ في جَوِّ السَّماءِ ما يُمسِكُهُنَّ إِلَّا اللَّهُ ۗ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِقَومٍ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने पक्षियों की ओर नहीं देखा कि वे अंतरिक्ष में वशीभूत हैं? उन्हें अल्लाह ही थामता है। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो ईमान लाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya in logon ne kabhi parindon ko nahin dekha ke fiza e aasmani mein kis tarah musakkhar hain? Allah ke siwa kisne inko thaam rakkha hai? Is mein bahut nishaniyan hain un logon ke liye jo iman latey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn logon ney parindon ko nahi dekha jo tabey farman ho ker fiza mein hain jinhen ba-juz Allah Taalaa kay koi aur thamay huye nahi be-shak iss mein eman laney walay logon kay liye bari nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इन लोगों ने कभी परिंदों को नहीं देखा के फ़िज़ा ए आसमानी में किस तरह मुसक्कर हैं? अल्लाह के सिवा किसने इनको थाम रक्खा है? इस में बहुत निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं
عَرَبِيوَاللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِن بُيوتِكُم سَكَنًا وَجَعَلَ لَكُم مِن جُلودِ الأَنعامِ بُيوتًا تَستَخِفّونَها يَومَ ظَعنِكُم وَيَومَ إِقامَتِكُم ۙ وَمِن أَصوافِها وَأَوبارِها وَأَشعارِها أَثاثًا وَمَتاعًا إِلىٰ حينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ने तुम्हारे लिए तुम्हारे घरों को निवास स्थान बनाए। और पशुओं की खालों से तुम्हारे लिए ऐसे घर बनाए, जिन्हें तुम अपनी यात्रा के दिन तथा अपने ठहरने के दिन हल्का-फुल्का पाते हो। और उनके ऊन, उनके रोएँ और उनके बालों से (तुम्हारे लिए) विभिन्न वस्तुएँ और एक निर्धारित समय तक के लिए लाभ के सामान (बनाए)।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne tumhare liye tumhare gharon ko jaaye sukoon banaya, usne jaanwaron ki khaalon (skins) se tumhare liye aisey makan paida kiye jinhein tum safar aur qayaam, dono haalaton mein halka patey ho. Usne jaanwaron ke souf aur oun aur baalon se (soft fur and wool and hair) pehanne aur baratne (use) ki bahut si cheezein paida kardi jo zindagi ki muddat e muqarrara tak tumhare kaam aati hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa ney tumharay liye tumharay gharon mein sakoonat ki jagah bana di hai aur ussi ney tumharay liye chopayon ki khalon kay ghar bana diye hain jinhen tum halka phulka patay ho apney kooch kay din aur apney theharney kay din bhi aur unn ki oon aur roo’on aur baalon say bhi uss ney boht say saman aur aik waqt muqarrara tak kay liye faeeday ki cheezen banaeen
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने तुम्हारे लिए तुम्हारे घरों को जाए सुकून बनाया, उसने जानवरों की खालों से तुम्हारे लिए ऐसा मकान बनाया जिन्होंने तुम सफर और कयाम, दोनों हालात में हल्का पेटे हो. उसने जंवारों के सौफ और ऊन और बालों से (मुलायम फर और ऊन और बाल) पहने और बारातें (उपयोग) की बहुत सी चीजे अदा करदी जो जिंदगी की मुद्दत ए मुकर्ररा तक तुम्हारे काम आती हैं
عَرَبِيوَاللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِمّا خَلَقَ ظِلالًا وَجَعَلَ لَكُم مِنَ الجِبالِ أَكنانًا وَجَعَلَ لَكُم سَرابيلَ تَقيكُمُ الحَرَّ وَسَرابيلَ تَقيكُم بَأسَكُم ۚ كَذٰلِكَ يُتِمُّ نِعمَتَهُ عَلَيكُم لَعَلَّكُم تُسلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ही ने तुम्हारे लिए अपनी पैदा की हुई चीज़ों की छाया बनाई, और तुम्हारे लिए पर्वतों में छिपने के स्थान बनाए, और तुम्हारे लिए ऐसे वस्त्र बनाए, जो तुम्हें गरमी से बचाते हैं, और ऐसे वस्त्र बनाए जो तुम्हें तुम्हारी लड़ाई में बचाते हैं। इसी प्रकार, वह तुमपर अपनी नेमत पूरी करता है, ताकि तुम आज्ञाकारी बनो।
Roman Urdu (Maududi)Usne apni paida ki hui bahut si cheezon se tumhare liye saaye ka intezam kiya, pahadon mein tumhare liye panaah-gaahein (places of refuge) banayi, aur tumhein aisi poshakein (garments) bakshi jo tumhein garmi se bachati hain aur kuch dusri poshakein jo aapas ki jung mein tumhari hifazat karti hain, is tarah woh tumpar apni niyamaton ki takmeel karta hai shayad ke tum farmabardar bano
Roman Urdu (Junagarhi)Allah hi ney tumharay liye apni peda kerda cheezon mein say saye banaye hain aur ussi ney tumharay liye paharon mein ghaar banaye hain aur ussi ney tumharay liye kurtay banaye hain jo tumhen garmi say bachayen aur aisay kuraty bhi jo tumhen laraee kay waqt kaam aayen. Woh issi tarah apni poori poori nematen dey raha hai kay tum hukum bardaar bann jao
Devnagri Urdu (Maududi)उसने अपनी पेडा की हुई बहुत सी चीजो से तुम्हारे लिए साए का इंतेज़ाम किया, पहाड़ों में तुम्हारे लिए पनाह-गाहें (शरण स्थल) बनाईं, और तुम्हें ऐसी पोशाकें (वस्त्र) बख्शी जो तुम्हें गर्मी से बचाती हैं और कुछ दूसरी पोशाकें जो आपस की जंग में तुम्हारी हिफ़ाज़त करती हैं, इस तरह वह तुम्पर अपनी नियामतों की तकमील करता है शायद के तुम फरमाबरदार बानो
عَرَبِيفَإِن تَوَلَّوا فَإِنَّما عَلَيكَ البَلاغُ المُبينُ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि वे मुँह फेरें, तो आपका कार्य केवल स्पष्ट रूप से संदेश पहुँचा देना है।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar yeh log mooh moadte hain to (aey Muhammad) , tumpar saaf saaf paighaam e haqq pahuncha dene ke siwa aur koi zimmedari nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir bhi agar yeh mun moray rahen to aap per sirf khol ker tableegh ker dena hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर ये लोग मुह मोड़ते हैं तो (ऐ मुहम्मद), तुमपर साफ साफ पैग़ाम ए हक़ पाहुंचा देने के सिवा और कोई ज़िम्मेदारी नहीं है
عَرَبِييَعرِفونَ نِعمَتَ اللَّهِ ثُمَّ يُنكِرونَها وَأَكثَرُهُمُ الكافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे अल्लाह की नेमत को पहचानते हैं, फिर उसका इनकार करते हैं और उनमें से अधिकतर लोग अकृतज्ञ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Allah ke ehsan ko pehchante hain, phir iska inkar karte hain aur in mein beshtar aisey hain jo haqq maanne ke liye tayyar nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh Allah ki nematen jantay pehchantay huye bhi unn kay munkie horahey hain bulkay inn mein say aksar na shukray hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये अल्लाह के एहसान को पहचानते हैं, फिर इसका इंकार करते हैं और इसमें बेशतर ऐसे हैं जो हक़ मन के लिए तैयार नहीं हैं
عَرَبِيوَيَومَ نَبعَثُ مِن كُلِّ أُمَّةٍ شَهيدًا ثُمَّ لا يُؤذَنُ لِلَّذينَ كَفَروا وَلا هُم يُستَعتَبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन हम प्रत्येक समुदाय से एक गवाह खड़ा करेंगे, फिर काफ़िरों को अनुमति नहीं दी जाएगी और न उनसे क्षमा की याचना स्वीकार की जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)(Inhein kuch hosh bhi hai ke us roz kya banegi) jabke hum har ummat mein se ek gawaah khada karenge, phir kaafiron ko na hujjatein (excuses) pesh karne ka mauqa diya jayega na unse tawba o istagfar hi ka mutalba kiya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss din hum her ummat mein say gawah khara keren gay phir kafiron ko na ijazat di jaye gi aur na unn say toba kerney ko kaha jayega
Devnagri Urdu (Maududi)(इन्हें कुछ होश भी है कि हम रोज़ क्या बनाएंगे) जबके हम हर उम्मत में से एक गवाह खड़ा करेंगे, फिर काफ़िरों को ना हुज्जतें (बहाना) पेश करने का मौका दिया जाएगा ना उनसे तौबा ओ इस्तग़फ़र ही का मुतलबा किया जाएगा
عَرَبِيوَإِذا رَأَى الَّذينَ ظَلَمُوا العَذابَ فَلا يُخَفَّفُ عَنهُم وَلا هُم يُنظَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब अत्याचारी लोग यातना देख लेंगे, तो न उनकी यातना कुछ कम की जाएगी और न उन्हें अवसर दिया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Zalim log jab ek dafa azaab dekh lenge to iske baad na unke azaab mein koi takhfif (lightened /halka) ki jayegi aur na unhein ek lamha bhar ki mohlat di jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab yeh zalim azab dekh len gay phir na to unn say halka kiya jayega aur na woh dheel diye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)ज़ालिम लोग जब एक दफ़ा अज़ाब देख लेंगे तो इसके बाद ना उनके अज़ाब में कोई तख़्फ़िफ़ (हल्का /हल्का) की जाएगी और ना उन्हें एक लम्हा भर की मोहलत दी जाएगी
عَرَبِيوَإِذا رَأَى الَّذينَ أَشرَكوا شُرَكاءَهُم قالوا رَبَّنا هٰؤُلاءِ شُرَكاؤُنَا الَّذينَ كُنّا نَدعو مِن دونِكَ ۖ فَأَلقَوا إِلَيهِمُ القَولَ إِنَّكُم لَكاذِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब मुश्रिक अपने (ठहराए हुए) साझियों को देखेंगे, तो कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! यही हमारे वे साझी हैं, जिन्हें हम तेरे सिवा पुकारा करते थे। तो वे (साझी) उनकी ओर यह बात फेंक मारेंगे कि निश्चय तुम बिलकुल झूठे हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab woh log jinhon ne duniya mein shirk kiya tha apne thehraye huey shareekon ko dekhenge to kahenge “ aey parwardigar, yahi hain hamare woh shareek jinhein hum tujhey chodh kar pukara karte thay” ispar unke woh mabood unhein saaf jawab denge ke “tum jhootey ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab mushrikeen apney sharikon ko dekh len gay to kahen gay aey humaray perwerdigar! Yehi humaray woh shareek hain jinhen hum tujhay chor ker pukara kertay thay pus woh unhen jawab den gay kay tum bilkul hi jhootay ho
Devnagri Urdu (Maududi)और जब वो लोग जिन्हों ने दुनिया में शिर्क किया था तो अपने रुके हुए शरीकों को देखेंगे तो कहेंगे " ऐ परवरदिगार, यहीं हैं हमारे वो शरीक जिन्हे हम तुझे छोड़ कर पुकारा करते थे" इसपर उनके वो मबूद उन्हें साफ जवाब देंगे के "तुम झूठे हो"
عَرَبِيوَأَلقَوا إِلَى اللَّهِ يَومَئِذٍ السَّلَمَ ۖ وَضَلَّ عَنهُم ما كانوا يَفتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन वे अल्लाह के आगे समर्पण कर देंगे और जो कुछ वे मिथ्यारोपण किया करते थे, वह सब उनसे गुम हो जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt yeh sab Allah ke aagey jhuk jaayenge aur unki woh saari iftara-pardaziyan(forgery) rafu-chakkar (vanish) ho jayengi jo yeh duniya mein karte rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din woh sab (aajiz ho ker) Allah kay samney ita’at ka iqrar paish keren gay aur jo bohtan bazi kiya kertay thay woh sab unn say gumm hojayega
Devnagri Urdu (Maududi)हम वक्त ये सब अल्लाह के आगे झुक जाएंगे और उनकी वो सारी इफ्तारा-पर्दाज़ियां (जालसाजी) रफू-चक्कर (गायब) हो जाएंगी जो ये दुनिया में करते रहेंगे
عَرَبِيالَّذينَ كَفَروا وَصَدّوا عَن سَبيلِ اللَّهِ زِدناهُم عَذابًا فَوقَ العَذابِ بِما كانوا يُفسِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह की राह से रोका, हम उन्हें यातना पर यातना बढ़ाते जाएँगे, उस बिगाड़ के बदले, जो वे पैदा किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne khud kufr ki raah ikhtiyar ki aur dusron ko Allah ki raah se roka unhein hum azaab par azaab denge us fasaad ke badle jo woh duniya mein barpa karte rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Jinhon ney kufur kiya aur Allah ki raah say roka hum unhen azab per azab barhatay jayen gay yeh badla hoga unn ki fitna pardaziyon ka
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने खुद कुफ्र की राह इख्तियार की और दूसरों को अल्लाह की राह से रोका उन्हें हम अज़ाब पर अज़ाब देंगे हमें फसाद के बदले जो वो दुनिया में बरपा करते रहे
عَرَبِيوَيَومَ نَبعَثُ في كُلِّ أُمَّةٍ شَهيدًا عَلَيهِم مِن أَنفُسِهِم ۖ وَجِئنا بِكَ شَهيدًا عَلىٰ هٰؤُلاءِ ۚ وَنَزَّلنا عَلَيكَ الكِتابَ تِبيانًا لِكُلِّ شَيءٍ وَهُدًى وَرَحمَةً وَبُشرىٰ لِلمُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन हम प्रत्येक समुदाय में उनपर उन्हीं में से एक गवाह खड़ा करेंगे। और आपको इन लोगों पर गवाह बनाकर लाएँगे। और हमने आपपर यह पुस्तक (क़ुरआन) अवतरित की, जो प्रत्येक विषय का स्पष्टीकरण और मार्गदर्शन और दया और आज्ञाकारियों के लिए शुभ सूचना है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad, inhein us din se khabardar kardo) jabke hum har ummat mein khud usi ke andar se ek gawaah utha khada karenge jo uske muqable mein shahadat (witness/gawahi) dega. Aur in logon ke muqable mein shahadat dene ke liye hum tumhein layenge aur (yeh usi shadat ki tayyari hai ke) humne yeh kitab tumpar nazil kardi hai jo har cheez ki saaf saaf wazahat karne wali hai aur hidayat o rehmat aur basharat hai un logon ke liye jinhon ne sar-e-tasleem kham kar diya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss din hum her ummat mein unhi mein say unn kay muqablay mein gawah khara keren gay aur tujhay inn sab per gawah bana ker layen gay aur hum ney tujh per yeh kitab nazil farmaee hai jiss mein her cheez ka shafi biyan hai aur hidayat aur rehmat aur khuskhabri say musalmanon kay liye
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद, इन्हें हमारे दिन से खबरदार करदो) जबके हम हर उम्मत में खुद उसी के अंदर से एक गवाह उठा खड़ा करेंगे जो उसका मुकाबला में शहादत (गवाह/गवाही) देगा। और लोगों के मुक़ाबले में शहादत देने के लिए हम तुम्हें लाएंगे और (ये उसी शहादत की तयारी है के) हमने ये किताब तुम्हारी नाज़िल कर दी है जो हर चीज़ की सफ़ वज़ाहत करने वाली है और हिदायत ओ रहमत और बशारत है उन लोगों के लिए जिन्हों ने सर-ए-तस्लीम ख़त्म कर दिया है
عَرَبِي۞ إِنَّ اللَّهَ يَأمُرُ بِالعَدلِ وَالإِحسانِ وَإيتاءِ ذِي القُربىٰ وَيَنهىٰ عَنِ الفَحشاءِ وَالمُنكَرِ وَالبَغيِ ۚ يَعِظُكُم لَعَلَّكُم تَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह न्याय और उपकार और निकटवर्तियों को देने का आदेश देता है और अश्लीलता और बुराई और सरकशी से रोकता है। वह तुम्हें नसीहत करता है, ताकि तुम नसीहत हासिल करो।
Roman Urdu (Maududi)Allah adal (justice) aur ehsaan (generosity) aur sila rehmi ka hukum deta hai aur badhi(wickedness) o behayai aur zulm o zyadati se mana karta hai. Woh tumhein naseehat karta hai taa-ke tum sabaq lo
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa adal ka bhalaee ka aur qarabat daron kay sath salook kerney ka hukum deta hai aur bey hayaee kay kaamon na-shaista herkaton aur zulm-o-ziyadti say rokta hai woh khud tumhen naseehaten ker raha hai kay tum naseehat hasil kero
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह अदल (न्याय) और एहसान (उदारता) और सिला रहमी का हुकुम देता है और बदी (दुष्टता) ओ बेहयाई और ज़ुल्म ओ ज़्यादती से मना करता है। वो तुम्हें हिदायत करता है ता-के तुम सबक लो
عَرَبِيوَأَوفوا بِعَهدِ اللَّهِ إِذا عاهَدتُم وَلا تَنقُضُوا الأَيمانَ بَعدَ تَوكيدِها وَقَد جَعَلتُمُ اللَّهَ عَلَيكُم كَفيلًا ۚ إِنَّ اللَّهَ يَعلَمُ ما تَفعَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह की प्रतिज्ञा को पूरा करो, जब तुम परस्पर प्रतिज्ञा करो। तथा क़समों को उन्हें सुदृढ़ करने के पश्चात् मत तोड़ो, हालाँकि निश्चय तुमने अल्लाह को अपने आपपर ज़ामिन (गवाह) बनाया है। निःसंदेह अल्लाह जानता है, जो कुछ तुम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Allah ke ahad (covenant) ko poora karo jabke tumne ussey koi ahad bandha ho, aur apni kasmein pukhta karne ke baad todh na daalo jabke tum Allah ko apne upar gawah bana chuke ho. Allah tumhare sab afaal se bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah kay ehad ko poora kero jabkay tum aapas mein qol-o-qarar aur qasmon ko unn ki pukhtagi kay baad mat toro halankay tum Allah Taalaa ko apna zaamin thehra chukay ho tum jo kuch kertay ho Allah uss ko bakhoobi jaan raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के अहद (वाचा) को पूरा करो जब तुमने उसे कोई अहद बंदा हो, और अपनी कसमें पुख्ता करने के बाद तोड़ न डालो जबके तुम अल्लाह को अपना ऊपर गवाह बना चुके हो। अल्लाह तुम्हारे सब अफाल से खबर है
عَرَبِيوَلا تَكونوا كَالَّتي نَقَضَت غَزلَها مِن بَعدِ قُوَّةٍ أَنكاثًا تَتَّخِذونَ أَيمانَكُم دَخَلًا بَينَكُم أَن تَكونَ أُمَّةٌ هِيَ أَربىٰ مِن أُمَّةٍ ۚ إِنَّما يَبلوكُمُ اللَّهُ بِهِ ۚ وَلَيُبَيِّنَنَّ لَكُم يَومَ القِيامَةِ ما كُنتُم فيهِ تَختَلِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उस स्त्री की तरह न बन जाओ, जिसने अपना सूत मज़बूत कातने के बाद उधेड़ दिया। तुम अपनी क़समों को परस्पर धोखा देने का माध्यम बनाते हो, ताकि एक समुदाय दूसरे समुदाय से अधिक हो जाए। अल्लाह इसके द्वारा तुम्हारी परीक्षा लेता है। और निश्चय क़ियामत के दिन वह तुम्हारे लिए उसे अवश्य स्पष्ट कर देगा, जिसमें तुम मतभेद किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Tumhari halat us aurat ki si na ho jaye jisne aap hi mehnat se soot kaata (spun yarn) aur phir aap hi usey tukde tukde kar dala. Tum apni kasamo ko aapas ke maamlaat mein makar o fareb ka hathiyar banate ho taa-ke ek qaum dusri qaum se badhkar faiyde hasil karey halaanke Allah is ahad o paimaan ke zariye se tumko aazmaish mein daalta hai. Aur zaroor woh qayamat ke roz tumhare tamaam ikhtilafaat ki haqeeqat tumpar khol dega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss aurat ki tarah na hojao jiss ney apna soot mazboot kaatney kay baad tukray tukray ker kay tor dala kay tum apni qasmon ko aapas kay makar ka baees thehrao iss liye kay aik giroh doosray giroh say barha charha jaye. Baat sirf yehi hai kay iss ehad say Allah tumhen aazma raha hai. Yaqeenan Allah Taalaa tumharay liye qayamt kay din her uss cheez ko khol ker biyan ker dey ga jiss mein tum ikhtilaf ker rahey thay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारी हालत उस औरत की सी न हो जाए जिसने आप ही मेहनत से सूत काता (काता हुआ सूत) और फिर आपने ही उसे इस्तेमाल किया टुकड़े-टुकड़े कर डाला। तुम अपनी कसमों को आपस के मामले में मकार ओ फरेब का हथियार बनाते हो ता-के एक क़ौम दूसरी क़ौम से बढ़कर फ़ायदे हासिल करे हलांके अल्लाह अहद ओ पैमान के ज़रिये से तुमको आजमाइश में डाला जाता है। और जरूर वो कयामत के रोज तुम्हारे तमाम इख्तिलाफात की हकीकत तुमपर खोल देगा
عَرَبِيوَلَو شاءَ اللَّهُ لَجَعَلَكُم أُمَّةً واحِدَةً وَلٰكِن يُضِلُّ مَن يَشاءُ وَيَهدي مَن يَشاءُ ۚ وَلَتُسأَلُنَّ عَمّا كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि अल्लाह चाहता, तो निश्चय तुम्हें एक ही समुदाय बना देता। परंतु वह जिसे चाहता है, राह से भटका देता है और जिसे चाहता है, सीधा रास्ता दिखा देता है। और निश्चय तुमसे उसके बारे में अवश्य पूछा जाएगा, जो तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Agar Allah ki mashiyat yeh hoti (ke tum mein koi ikhtilaf na ho) to woh tum sabko ek hi ummat bana deta, magar woh jisey chahta hai gumraahi mein daalta hai aur jisey chahta hain raah e raast dikha deta hai. Aur zaroor tumse tumhare aamaal ki baaz-purs hokar rahegi
Roman Urdu (Junagarhi)Agar Allah chahata to tum sab ko aik hi giroh bana deta lekin woh jisay chahaye gumrah kerta hai aur jisay chahaye hidayat deta hai yaqeenan tum jo kuch ker rahey ho uss kay baray mein baaz purs ki janey wali hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर अल्लाह की मशियत ये होती (के तुम में कोई इख्तिलाफ ना हो) तो वो तुम सबको एक ही उम्मत बना देता, मगर वो जिसे चाहता है गुमराही में डालता है और जिसे चाहता है राह ए रास्ता दिखाता है। और ज़रूर तुमसे तुम्हारे अमाल की बाज़-पुर्ज़े होकर रहेगी
عَرَبِيوَلا تَتَّخِذوا أَيمانَكُم دَخَلًا بَينَكُم فَتَزِلَّ قَدَمٌ بَعدَ ثُبوتِها وَتَذوقُوا السّوءَ بِما صَدَدتُم عَن سَبيلِ اللَّهِ ۖ وَلَكُم عَذابٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और अपनी क़समों को आपस में धोखे का साधन न बनाओ। कहीं ऐसा न हो कि कोई क़दम जमने के बाद फिसल जाए और तुम्हें अल्लाह के मार्ग से रोकने के कारण बुरा परिणाम चखना पड़े और तुम्हारे लिए (परलोक में) बड़ी यातना हो।
Roman Urdu (Maududi)(aur Aey Musalmaano) tum apni kasamon ko aapas mein ek dusre ko dhoka dene ka zariya na bana lena, kahin aisa na ho ke koi qadam jamne ke baad ukhad jaye aur tum is jurm ki padash mein ke tumne logon ko Allah ki raah se roka, bura nateeja dekho aur sakht saza bhugto
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum apni qasmon ko aapas ki dagha baazi ka bahana na banao. Phir to tumharay qadam apni mazbooti kay baad dagmaga jayen gay aur tumhen sakht saza bardasht kerna paray gi kiyon kay tum ney Allah ki raah say rok diya aur tumhen bara sakht azab hoga
Devnagri Urdu (Maududi)(और ऐ मुसलमानो) तुम अपनी कसमों को आपस में एक दूसरे को धोखा देने का ज़रिया ना बना लेना, कहीं ऐसा ना हो के कोई कदम जमाने के बाद उखड़ जाए और तुम इस जुर्म की पैदाइश में के तुमने लोगों को अल्लाह की राह से रोका, बुरा नतीजा देखो और सच सज़ा भुगतो
عَرَبِيوَلا تَشتَروا بِعَهدِ اللَّهِ ثَمَنًا قَليلًا ۚ إِنَّما عِندَ اللَّهِ هُوَ خَيرٌ لَكُم إِن كُنتُم تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह की प्रतिज्ञा को थोड़ी सी कीमत के लिए न बेचो। निःसंदेह जो अल्लाह के पास है, वही तुम्हारे लिए उत्तम है, यदि तुम जानते हो।
Roman Urdu (Maududi)Allah ke ahad ko thode se faiyde ke badle na bech daalo (sell off/barter away), jo kuch Allah ke paas hai woh tumhare liye zyada behtar hai agar tum jaano
Roman Urdu (Junagarhi)Tum Allah kay ehad ko thoray mol kay badley na bech diya kero. Yaad rakho Allah kay pass ki cheez hi tumharay liye behtar hai ba-shart-e-kay tum mein ilm ho
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के अहद को थोड़े से फ़ायदे के बदले ना बेच डालो, जो कुछ अल्लाह के पास है वो तुम्हारे लिए ज़्यादा बेहतर है अगर तुम जानो
عَرَبِيما عِندَكُم يَنفَدُ ۖ وَما عِندَ اللَّهِ باقٍ ۗ وَلَنَجزِيَنَّ الَّذينَ صَبَروا أَجرَهُم بِأَحسَنِ ما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो तुम्हारे पास है, वह ख़त्म हो जाएगा, और जो अल्लाह के पास है, वह बाकी रहने वाला है। और निश्चय हम धैर्य से काम लेने वालों को उनका बदला उन उत्तम कार्यों के अनुसार प्रदान करेंगे जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jo kuch tumhare paas hai woh kharch ho janey wala hai aur jo kuch Allah ke paas hai wahi baaqi rehne wala hai, aur hum zaroor sabr se kaam lene walon ko unke ajar unke behtareen aamaal ke mutaabiq denge
Roman Urdu (Junagarhi)Tumharay pass jo kuch hai sab faani hai aur Allah Taalaa kay pass jo kuch hai baqi hai. Aur sabar kerney walon ko hum bhalay aemaal ka behtareen badla zaroor ata faramayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जो कुछ तुम्हारे पास है वो ख़र्च हो जाने वाला है और जो कुछ अल्लाह के पास है वही बाकी रहने वाला है, और हम जरूर सब्र से काम लेने वालों को उनके अजर उनके बेहतरी अमल के मुताबिक देंगे
عَرَبِيمَن عَمِلَ صالِحًا مِن ذَكَرٍ أَو أُنثىٰ وَهُوَ مُؤمِنٌ فَلَنُحيِيَنَّهُ حَياةً طَيِّبَةً ۖ وَلَنَجزِيَنَّهُم أَجرَهُم بِأَحسَنِ ما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो भी अच्छा कार्य करे, नर हो अथवा नारी, जबकि वह ईमान वाला हो, तो हम उसे अच्छा जीवन व्यतीत कराएँगे। और निश्चय हम उन्हें उनका बदला उन उत्तम कार्यों के अनुसार प्रदान करेंगे जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jo shaks bhi neik amal karega, khwa woh mard ho ya aurat, bashart ye ke ho woh momin, usey hum duniya mein pakeeza zindagi basar karayenge aur (aakhirat mein) aisey logon ko unke ajar unke behtareen aamaal ke mutabiq bakshenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jo shaks nek amal keray mard ho ya aurat lekin ba-eman ho to hum ussay yaqeenan nihayat behtar zindagi ata farmyen gay. Aur unn kay nek aemaal ka behtareen badla bhi unhen zaroor zaroor den gay
Devnagri Urdu (Maududi)जो शक्स भी नया अमल करेगा, ख्वा वो मर्द हो या औरत, बशारत ये के हो वो मोमिन, उसे हम दुनिया में पाकीजा जिंदगी बसर कराएंगे और (आखिरत में) ऐसे लोगों को उनके अजर उनके बेहतरीन अमाल के मुताबिक बक्शेंगे
عَرَبِيفَإِذا قَرَأتَ القُرآنَ فَاستَعِذ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيطانِ الرَّجيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः जब तुम क़ुरआन पढ़ने लगो, तो धिक्कारे हुए शैतान से अल्लाह की शरण माँग लिया करो।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab tum Quran padhne lago to Shaytan e rajeem (accursed) se khuda ki panaah maang liya karo
Roman Urdu (Junagarhi)Quran parhney kay waqt randay huye shetan say Allah ki panah talab kero
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब तुम कुरान पढ़ने लगो तो शैतान ए राजिम (शापित) से खुदा की पनाह मांग लिया करो
عَرَبِيإِنَّهُ لَيسَ لَهُ سُلطانٌ عَلَى الَّذينَ آمَنوا وَعَلىٰ رَبِّهِم يَتَوَكَّلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तथ्य यह है कि उसका उन लोगों पर कोई प्रभुत्व नहीं, जो ईमान लाए और केवल अपने पालनहार पर भरोसा रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Usey un logon par tasallut (power/authority) hasil nahin hota jo iman latey aur apne Rubb par bharosa karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Eman walon aur apney perwerdigar per bharosa rakhney walon per uss ka zor mutlaqan nahi chalta
Devnagri Urdu (Maududi)उन लोगों पर तसल्लुत (शक्ति/अधिकार) हासिल नहीं होता जो ईमान लाते और अपने रब पर भरोसा करते हैं
عَرَبِيإِنَّما سُلطانُهُ عَلَى الَّذينَ يَتَوَلَّونَهُ وَالَّذينَ هُم بِهِ مُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसका वश तो केवल उन लोगों पर है, जो उससे दोस्ती रखते हैं और जो उसके कारण शिर्क करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Uska zoar to unhi logon par chalta hai jo usko apna sarparast banate aur uske behkane se shirk karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Haan iss ka ghalba unn per to yaqeenan hai jo issi say rafaqat keren aur issay Allah ka shareek thehrayen
Devnagri Urdu (Maududi)उसका ज़ोर तो उन्ही लोगों पर चलता है जो उसको अपना सरपरस्त बनाता है और उसके बहकाने से शिर्क करता है
عَرَبِيوَإِذا بَدَّلنا آيَةً مَكانَ آيَةٍ ۙ وَاللَّهُ أَعلَمُ بِما يُنَزِّلُ قالوا إِنَّما أَنتَ مُفتَرٍ ۚ بَل أَكثَرُهُم لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब हम किसी आयत के स्थान पर कोई आयत बदलकर लाते हैं, और अल्लाह अधिक जानने वाला है, जो वह उतारता है, तो वे कहते हैं : तू तो गढ़कर लाने वाला है, बल्कि उनके अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Jab hum ek ayat ki jagah dusri aayat nazil karte hain Allah behtar jaanta hia ke woh kya nazil karey to yeh log kehte hain ke tum yeh Quran khud ghadte ho. Asal baat yeh hai ke in mein se aksar log haqeeqat se na-waqif hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab hum kissi aayat ki jagah doosri aayat badal detay hain aur jo kuch Allah Taalaa nazil farmata hai ussay woh khoob janta hai to yeh kehtay hain kay tu to bohtan baaz hai. Baat yeh hai kay inn mein say aksar jantay hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)जब हम एक आयत की जगह दूसरी आयत नाज़िल करते हैं अल्लाह बेहतर जानता है के वो क्या नाज़िल करे तो ये लोग कहते हैं कि तुम ये कुरान खुद बिगाड़ते हो। असल बात ये है कि मेरे अंदर से अक्सर लोग हकीकत से ना-वाक़िफ़ हैं
عَرَبِيقُل نَزَّلَهُ روحُ القُدُسِ مِن رَبِّكَ بِالحَقِّ لِيُثَبِّتَ الَّذينَ آمَنوا وَهُدًى وَبُشرىٰ لِلمُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि इसे रूह़ुल क़ुदुस ने आपके पालनहार की ओर से सत्य के साथ थोड़ा-थोड़ा करके उतारा है। ताकि उन लोगों के पाँव जमा दे, जो ईमान लाए। तथा आज्ञाकारियों के लिए मार्गदर्शन और शुभ सूचना हो।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho ke isey to rooh-ul-quddus ne theek theek mere Rubb ki taraf se ba-tadreej nazil kiya hai taa-ke iman laney walon ke iman ko pukhta karey aur farma-bardaron ko zindagi ke maamlaat mein seedhi raah bataye aur unhein falaah o saadat ki khush khabri de
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay issay aap kay rab ki taraf say jibraeel haq kay sath ley ker aaye hain takay eman walon ko Allah Taalaa istaqamat ata farmaye aur musalmanon ki rehnumaee aur bisharat ho jaye
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो के इसे तो रूह-उल-क़ुद्दूस ने ठीक ठीक मेरे रब की तरफ से बा-तदरीज़ नाज़िल किया है ता-के ईमान लाने वालों के ईमान को पुख्ता करे और फरमा-बरदारों को जिंदगी के मामलात में सीधी राह बताई और उन्हें फलाह ओ सआदत की खुश खबरी दे
عَرَبِيوَلَقَد نَعلَمُ أَنَّهُم يَقولونَ إِنَّما يُعَلِّمُهُ بَشَرٌ ۗ لِسانُ الَّذي يُلحِدونَ إِلَيهِ أَعجَمِيٌّ وَهٰذا لِسانٌ عَرَبِيٌّ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हम जानते हैं कि वे (काफ़िर) कहते हैं : इसे तो एक मानव ही सिखाता है। उस व्यक्ति की भाषा जिसकी ओर वे ग़लत निस्बत कर रहे हैं, अजमी (ग़ैर-अरबी) है और यह स्पष्ट अरबी भाषा है।
Roman Urdu (Maududi)Humein maloom hai yeh log tumhare mutaaliq kehte hain ke is shaks ko ek aadmi sikhata padhata hai. Halaanke unka ishara jis aadmi ki taraf hai uski zubaan ajami hai aur yeh saaf arabi zubaan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Humen bakhoobi ilm hai kay yeh kafir kehtay hain kay issay to aik aadmi sikhata hai uss ki zaban jiss ki taraf yeh nisbat ker rahey hain ajami hai aur yeh quran to saaf arabi mein hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमें मालूम है ये लोग तुम्हारे मुतालिक कहते हैं के इस शक्स को एक आदमी सिखाता है। हलानके उनका इशारा जिस आदमी की तरफ है उसकी जुबान अजमी है और ये साफ अरबी जुबान है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِآياتِ اللَّهِ لا يَهديهِمُ اللَّهُ وَلَهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग अल्लाह की आयतों पर ईमान नहीं लाते, अल्लाह उन्हें सीधा रास्ता नहीं दिखाता और उन्हीं के लिए दुःखदायी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke jo log Allah ki aayat ko nahin maante Allah kabhi unko saheeh baat tak pahunchne ki taufeeq nahin deta aur aise logon ke liye dardnaak azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log Allah Taalaa ki aayaton per eman nahi rakhtay unhen Allah ki taraf say bhi rehnumaee nahi hoti aur unn kay liye alam naak azab hain
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के जो लोग अल्लाह की आयत को नहीं मानते अल्लाह कभी उनको सही बात तक पहुंचने की तौफीक नहीं देता और ऐसे लोगों के लिए दर्दनाक अजाब है
عَرَبِيإِنَّما يَفتَرِي الكَذِبَ الَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِآياتِ اللَّهِ ۖ وَأُولٰئِكَ هُمُ الكاذِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)झूठ तो वही लोग गढ़ते हैं, जो अल्लाह की आयतों पर ईमान नहीं रखते और वही लोग झूठे हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Jhooti baatein Nabi nahin ghadta balke) jhoot woh log ghad rahey hain jo Allah ki aayat ko nahin maante, wahi haqeeqat mein jhootey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jhoot iftra to wohi bandhtay hain jinhen Allah Taalaa ki aayaton per eman nahi hota. Yehi log jhootay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(झूठी बातें नबी नहीं घड़ता बलके) झूठ वो लोग घड़ रहे हैं जो अल्लाह की आयत को नहीं मानते, वही हकीकत में झूठे हैं
عَرَبِيمَن كَفَرَ بِاللَّهِ مِن بَعدِ إيمانِهِ إِلّا مَن أُكرِهَ وَقَلبُهُ مُطمَئِنٌّ بِالإيمانِ وَلٰكِن مَن شَرَحَ بِالكُفرِ صَدرًا فَعَلَيهِم غَضَبٌ مِنَ اللَّهِ وَلَهُم عَذابٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसने ईमान लाने के बाद अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, सिवाय उसके जो इसके लिए विवश कर दिया गया हो और उसका दिल ईमान से संतुष्ट हो, लेकिन जिसने अपना सीना कुफ़्र के लिए खोल दिया हो, तो ऐसे लोगों पर अल्लाह का प्रकोप है और उन्हीं के लिए बड़ी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Jo shaks iman laney ke baad kufr karey (woh agar) majboor kiya gaya ho aur dil uska iman par mutmaeen (convinced) ho (tab to khair) magar jisne dil ki raza-mandi se kufr ko qabool karliya uspar Allah ka gazab hai aur aisey sab logon ke liye bada azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo shaks apney eman kay baad Allah say kufur keray ba-juz uss kay jiss per jabar kiya jaye aur uss ka dil eman per bar qarar ho magar jo log khullay dil say kufur keren to unn per Allah ka ghazab hai aur unhi kay liye boht bara azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो शक्स ईमान लाने के बाद कुफ्र करे (वो अगर) मजबूर किया गया हो और दिल उसका ईमान पर मुतमइन (आश्वस्त) हो (तब तो खैर) मगर जिसने दिल की रज़ा-मंदी से कुफ्र को क़बूल करलिया उसपर अल्लाह का ग़ज़ब है और ऐसे सब लोगों के लिए बड़ा अज़ाब है
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّهُمُ استَحَبُّوا الحَياةَ الدُّنيا عَلَى الآخِرَةِ وَأَنَّ اللَّهَ لا يَهدِي القَومَ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह इसलिए कि उन्होंने दुनिया के जीवन को आख़िरत की तुलना में प्रिय रखा। और यह कि अल्लाह काफ़िरों को सीधे मार्ग का सामर्थ्य नहीं देता।
Roman Urdu (Maududi)Yeh isliye ke unhon ne aakhirat ke muqable mein duniya ki zindagi ko pasand karliya, aur Allah ka qaida hai ke woh un logon ko raah e nijaat nahin dikhata jo uski niyamat ka kufraan karein
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss liye kay enhon ney duniya ki zindagi ko aakhirat per ziyada mehboob rakgha. Yaqeenan Allah Taalaa kafir logon ko raah-e-raast nahi dikhata
Devnagri Urdu (Maududi)ये इस तरह के उन्होन ने आखिरी के मुकाबले में दुनिया की जिंदगी को पसंद किया कार्लिया, और अल्लाह का कायदा है कि वो उन लोगों को राह ए निजात नहीं दिखाता जो उसकी नियामत का कुफ़्रान करें
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ طَبَعَ اللَّهُ عَلىٰ قُلوبِهِم وَسَمعِهِم وَأَبصارِهِم ۖ وَأُولٰئِكَ هُمُ الغافِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ये वही लोग हैं, जिनके दिलों और उनके कानों और उनकी आँखों पर अल्लाह ने मुहर लगा दी है तथा यही लोग हैं जो बिल्कुल ग़ाफ़िल हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hain jinke dilon aur kaano aur aankhon par Allah ne mohar (seal) laga di hai yeh gaflat mein doob chuke hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh woh log hain jin kay dilon per aur jin kay kanon per aur jin ki aankhon per Allah ney mohar laga di hai aur yehi log ghafil hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग हैं जिनके दिलों और कानों और आँखों पर अल्लाह ने मोहर (मुहर) लगा दी है ये गफ़लत में डूब चुके हैं
عَرَبِيلا جَرَمَ أَنَّهُم فِي الآخِرَةِ هُمُ الخاسِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)कोई संदेह नहीं कि यही लोग आख़िरत में घाटा उठाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Zaroor hai ke aakhirat mein yahi khasare mein rahein
Roman Urdu (Junagarhi)Kuch shak nahi kay yehi log aakhirat mein sakht nuksan uthaney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ज़रूर है के आख़िरत में यही खसरे में रहें
عَرَبِيثُمَّ إِنَّ رَبَّكَ لِلَّذينَ هاجَروا مِن بَعدِ ما فُتِنوا ثُمَّ جاهَدوا وَصَبَروا إِنَّ رَبَّكَ مِن بَعدِها لَغَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर निःसंदेह आपका पालनहार उन लोगों के लिए जिन्होंने आज़माइशों का सामना करने के बाद हिजरत की, फिर जिहाद किया और धैर्य रखा, निश्चय आपका पालनहार इस (परीक्षा) के बाद बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Ba-khilaf iske jin logon ka haal yeh hai ke jab (iman laney ki wajah se) woh sataye gaye to unhon ne ghar-baar chodh diye, hijrat ki, raah e khuda mein sakhtiyan jheli aur sabr se kaam liya, unke liye yaqeenan tera Rubb gafoor o raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ney fitnon mein dalay janey kay baad hijrat ki phir jihad kiya aur sabar ka saboot diya be-shak tera perwerdigar inn baton kay baad unhen bakhshney wala aur meharbaniyan kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)बा-ख़िलाफ़ इसके जिन लोगों का हाल ये है के जब (ईमान लाने की वजह से) वो सताए गए तो उनको ने घर-बार छोड़ दिए, हिजरत की, राह ए खुदा में ताकतियां झेली और सब्र से काम लिया, उनके लिए यकीनन तेरा रब गफूर ओ रहीम है
عَرَبِي۞ يَومَ تَأتي كُلُّ نَفسٍ تُجادِلُ عَن نَفسِها وَتُوَفّىٰ كُلُّ نَفسٍ ما عَمِلَت وَهُم لا يُظلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन प्रत्येक व्यक्ति अपने ही लिए झगड़ता हुआ आएगा और प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों का पूरा बदला दिया जाएगा और उनपर अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)(In sab ka faisla us din hoga) jabke har mutanaffis apne hi bachao ki fikr mein laga hua hoga aur har ek ko uske kiye ka badla poora poora diya jayega aur kisi par zarra barabar zulm na hone payega
Roman Urdu (Junagarhi)Jis din her shaks apni zaat kay liye larta jhagarta aaye aur her shaks ko uss kay kiye huye aemaal ka poora badla diya jaye ga aur logon per (mutlaqan) zulm na kiya jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)(सब का फैसला उस दिन होगा) जबके हर मुतनफ़िस अपने ही बचाव की फ़िक्र में लगा हुआ होगा और हर एक को उसके लिए बदला पूरा दिया जाएगा और किसी पर ज़रा बराबर ज़ुल्म न होने पाएगा
عَرَبِيوَضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا قَريَةً كانَت آمِنَةً مُطمَئِنَّةً يَأتيها رِزقُها رَغَدًا مِن كُلِّ مَكانٍ فَكَفَرَت بِأَنعُمِ اللَّهِ فَأَذاقَهَا اللَّهُ لِباسَ الجوعِ وَالخَوفِ بِما كانوا يَصنَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने एक बस्ती का उदाहरण दिया है, जो सुरक्षा और शांति वाली थी। उसकी रोज़ी प्रत्येक स्थान से आसानी के साथ पहुँच रही थी। फिर उसने अल्लाह की नेमतों की नाशुक्री की, तो अल्लाह ने उसे भूख और भय का वस्त्र पहना दिया, उसके बदले जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Allah ek basti ki misal deta hai , woh aman o itminaan ki zindagi basar kar rahi thi aur har taraf se usko ba-faragat rizq pahunch raha tha ke usne Allah ki niyamaton ka kufraan shuru kardiya , tab Allah ne uske bashindon ko unke kartooton ka yeh maza chakkhaya ke bhook aur khauf ki museebatein unpar chaa gayi
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa uss basti ki misal biyan farmata hai jo pooray aman-o-itminan say thi uss ki rozi uss kay pass ba faraghat her jagah say chali aarahi thi. Phir uss ney Allah Taalaa ki nematon ka kufur kiya to Allah Taalaa ney ussay bhook aur darr ka maza chakhaya jo badla tha unn kay kartooton ka
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह एक बस्ती की मिसाल देता है, वो अमन ओ इत्मिनान की जिंदगी बसर कर रही थी और हर तरफ से उसको ब-फरागत रिज़क पाहुंच रहा था के उसने अल्लाह की नियामतों का कुफ़्रान शुरू कर दिया, तब अल्लाह ने उसके बाशिंदों को उनके कार्टूनों का ये मजा चखाया के भूख और खौफ की मुसिबतें उनपर छा गई
عَرَبِيوَلَقَد جاءَهُم رَسولٌ مِنهُم فَكَذَّبوهُ فَأَخَذَهُمُ العَذابُ وَهُم ظالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह उनके पास उन्हीं में से एक रसूल आया, तो उन्होंने उसे झुठला दिया। अतः उन्हें यातना ने इस हाल में पकड़ लिया कि वे अत्याचारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Unke paas unki apni qaum mein se ek Rasool aaya magar unhon ne usko jhutla diya, aakhir e kaar azaab ne unko aa liya jabke woh zalim ho chuke thay
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay pass unhin mein say rasool phoncha phir bhi unhon ney ussay jhutlaya pus unhen azab ney aa dabocha aur woh thay hi zalim
Devnagri Urdu (Maududi)उनके पास उनकी अपनी क़ौम में से एक रसूल आया मगर उन्होन ने उसको झुठला दिया, आख़िर ए कार अज़ाब ने उनको आ लिया जबके वो जालिम हो चुके थे
عَرَبِيفَكُلوا مِمّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ حَلالًا طَيِّبًا وَاشكُروا نِعمَتَ اللَّهِ إِن كُنتُم إِيّاهُ تَعبُدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः उस हलाल एवं पवित्र रोज़ी में से खाओ, जो अल्लाह ने तुम्हें प्रदान की है और अल्लाह की नेमत का शुक्रिया अदा करो, यदि तुम उसी की इबादत करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Pas aey logon, Allah ne jo kuch halal aur paak rizq tumko bakhsa hai usey khao aur Allah ke ehsaan ka shukar ada karo agar tum waqayi usi ki bandagi karne waley ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jo kuch halal aur pakeeza rozi Allah ney tumhen dey rakhi hai ussay khao aur Allah ki nemat ka shukar kero agar tum ussi ki ibadat kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)पस ऐ लोगों, अल्लाह ने जो कुछ हलाल और पाक रिज़क तुमको बख्शा है उसे खाओ और अल्लाह के एहसान का शुक्र अदा करो अगर तुम ठीक उसी की बंदगी करने वाले हो
عَرَبِيإِنَّما حَرَّمَ عَلَيكُمُ المَيتَةَ وَالدَّمَ وَلَحمَ الخِنزيرِ وَما أُهِلَّ لِغَيرِ اللَّهِ بِهِ ۖ فَمَنِ اضطُرَّ غَيرَ باغٍ وَلا عادٍ فَإِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने तुमपर जो चीज़ें हराम की हैं, वे यह हैं - मुर्दार, (बहता) रक्त, सूअर का मांस तथा वह वस्तु जिसपर अल्लाह के सिवा किसी और का नाम पुकारा जाए। फिर जो (इन वस्तुओं को खाने पर) विवश हो जाए, जबकि वह न (हराम के उपयोग की) इच्छा रखता हो और न आवश्यकता की सीमा से आगे बढ़ रहा हो, तो उसपर कोई दोष नहीं। अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne jo kuch tumpar haram kiya hai woh hai murdaar aur khoon aur suwar (khinzir/swine) ka gosht aur woh jaanwar jispar Allah ke siwa kisi aur ka naam liya gaya ho. Albatta bhook se majboor hokar agar koi in cheezon ko kha ley, bagair iske ke woh kanoon e ilahi ki khilaf warzi ka khwahish-mand ho, ya hadd e zaroorat se tajawuz ka murtakib ho, to yaqeenan Allah maaf karne aur reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum per sirf murdaar aur khoon aur sooar ka gosht aur jiss cheez per Allah kay siwa doosray ka naam pukara jaye haram hain phir agar koi shaks bey bus ker diya jaye na woh khuwaish mand ho aur na hadd say guzrney wala ho to yaqeenan Allah bakhshney wala reham kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने जो कुछ तुमपर हराम किया है वो है मुर्दार और खून और सुवर (सूअर) का गोश्त और वो जानवर जिसपर अल्लाह के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो। अलबत्ता भूख से मजबूर होकर अगर कोई इन चीजों को खा ले, बिना इसके वो कानून ए इलाही की खिलाफ वारजी का ख्वाहिश-मंद हो, या हद ए जरूरी से तजावुज का मुर्तकिब हो, तो यकीनन अल्लाह माफ करने और रहम फरमाने वाला है
عَرَبِيوَلا تَقولوا لِما تَصِفُ أَلسِنَتُكُمُ الكَذِبَ هٰذا حَلالٌ وَهٰذا حَرامٌ لِتَفتَروا عَلَى اللَّهِ الكَذِبَ ۚ إِنَّ الَّذينَ يَفتَرونَ عَلَى اللَّهِ الكَذِبَ لا يُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसके कारण जो तुम्हारी ज़बानें झूठ कहती हैं, मत कहो कि यह हलाल (वैध) है और यह हराम (निषिद्ध) है, ताकि अल्लाह पर झूठ गढ़ो। निःसंदेह जो लोग अल्लाह पर झूठ गढ़ते हैं, वे (कभी) सफल नहीं होते।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh jo tumhari zubaanein jhoote ehkaam lagaya karti hain ke yeh cheez halal hai aur woh haram, to is tarah ke hukum laga kar Allah par jhoot na baandha karo, jo log Allah par jhoote iftara bandhte (ascribe lies) hain woh hargiz falaah nahin paya karte
Roman Urdu (Junagarhi)Kissi cheez ko apni zaban say jhoot moot na keh diya kero kay yeh halal hai aue yeh haram hai kay Allah per jhoot bohtan bandh lo samjh lo kay Allah Taalaa per bohtan baazi kerney walay kaamyabi say mehroom hi rehtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और ये जो तुम्हारी ज़ुबानें झूठे एहकाम लगाती हैं के ये चीज़ हलाल है और वो हराम है, तो इस तरह के हुकुम लगा कर अल्लाह पर झूठ ना बंद करो, जो लोग अल्लाह पर झूठे इफ्तारा बांधते हैं (झूठ लिखते हैं) हैं वो हरगिज फलाह नहीं पीते हैं
عَرَبِيمَتاعٌ قَليلٌ وَلَهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)बहुत थोड़ा लाभ है और उनके लिए दर्दनाक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Duniya ka aish chandh roza hai aakhir e kaar unke liye dardnaak saza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Enhen boht mamooli faeeda milta hai aur inn kay liye dard naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)दुनिया का ऐश चांद रोजा है आखिर ई कार उनके लिए दर्दनाक सज़ा है
عَرَبِيوَعَلَى الَّذينَ هادوا حَرَّمنا ما قَصَصنا عَلَيكَ مِن قَبلُ ۖ وَما ظَلَمناهُم وَلٰكِن كانوا أَنفُسَهُم يَظلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यहूदियों पर हमने वे चीज़ें हराम कीं, जिनका वर्णन हम इससे पहले आपके सामने कर चुके हैं। और हमने उनपर अत्याचार नहीं किया, परन्तु वे अपने आप ही पर अत्याचार करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Woh cheezein humne khaas taur par yahudiyon (jews) ke liye haram ki thi jinka zikr hum issey pehle tumse kar chuke hain aur yeh unpar hamara zulm na tha balke unka apna hi zulm tha jo woh apne upar kar rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yahudiyon per hum ney jo kuch haram kiya tha ussay hum pehlay hi say aap ko suna chukay hain hum ney unn per zulm nahi kiya bulkay woh khud apni janon per zulm kertay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)वो चीज़ हमने खास तौर पर यहुदियों (यहूदियों) के लिए हराम की थी जिनका ज़िक्र हम इस पहले तुमसे कर चुके हैं और ये अनपर हमारा ज़ुल्म ना था बल्के उनका अपना ही ज़ुल्म था जो वो अपने ऊपर कर रहे थे
عَرَبِيثُمَّ إِنَّ رَبَّكَ لِلَّذينَ عَمِلُوا السّوءَ بِجَهالَةٍ ثُمَّ تابوا مِن بَعدِ ذٰلِكَ وَأَصلَحوا إِنَّ رَبَّكَ مِن بَعدِها لَغَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर निःसंदेह आपका पालनहार उन लोगों के लिए, जो अज्ञानतावश बुराई कर बैठे, फिर उसके बाद तौबा कर ली और अपना सुधार कर लिया, तो निश्चय ही आपका पालनहार इसके बाद अति क्षमाशील, बड़ा दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jin logon ne jahalat ki bina par bura amal kiya aur phir tawba karke apne amal ki islah karli to yaqeenan tawba o islaah ke baad tera Rubb unke liye gafoor aur raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo koi jahalat say buray amal keray phir toba kerley aur islaah bhi kerley to phir aap ka rab bila shak-o-shuba bari bakhsish kerney wala aur nihayat hi meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जिन लोगों ने जहालत की बिना पर बुरा अमल किया और फिर तौबा करके अपने अमल की इस्लाह कार्ली तो यकीनन तौबा ओ इस्लाह के बाद तेरा रब उनके लिए गफूर और रहीम है
عَرَبِيإِنَّ إِبراهيمَ كانَ أُمَّةً قانِتًا لِلَّهِ حَنيفًا وَلَم يَكُ مِنَ المُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह इबराहीम एक समुदाय थे। वह अल्लाह के आज्ञाकारी, उसकी ओर एकाग्र थे। और बहुदेववादियों (मुश्रिकों) में से नहीं थे।
Roman Urdu (Maududi)Waqiya yeh hai ke Ibrahim apni zaat se ek puri ummat tha, Allah ka muti e farman aur yaksu. Woh kabhi mushrik na tha
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak ibrahim paishwa aur Allah Taalaa kay farmanbardaar aur yak tarfa muslim thay. Woh mushriko mein say na thay
Devnagri Urdu (Maududi)वाकिया ये है के इब्राहीम अपनी ज़ात से एक पूरी उम्मत थी, अल्लाह का मुती ए फरमान और यक्सू। वो कभी मुशरिक न था
عَرَبِيشاكِرًا لِأَنعُمِهِ ۚ اجتَباهُ وَهَداهُ إِلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)वह उसके अनुग्रहों के प्रति आभार प्रकट करने वाले थे। उस (अल्लाह) ने उन्हें चुन लिया और सीधे रास्ते की ओर उनका मार्गदर्शन किया।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki niyamaton ka shukar ada karne wala tha. Allah ne usko muntakhab (chose) karliya aur seedha raasta dikhaya
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ki nematon kay shukar guzaar thay Allah ney unhen apna bar gazeedah ker liya tha aur uhen raah-e-raast sujha di thi
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की नियामतों का शुक्र अदा करने वाला था। अल्लाह ने उसको मुंतखब (चुना) करलिया और सीधा रास्ता दिखाया
عَرَبِيوَآتَيناهُ فِي الدُّنيا حَسَنَةً ۖ وَإِنَّهُ فِي الآخِرَةِ لَمِنَ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उन्हें संसार में भलाई प्रदान की और निःसंदेह वह आख़िरत में भी निश्चय सदाचारियों में से हैं।
Roman Urdu (Maududi)Duniya mein usko bhalayi di aur aakhirat mein woh yaqeenan saliheen mein se hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney ussay duniya mein bhi behtri di thi aur be-shak woh aakhirat mein neko kaaron mein say hain
Devnagri Urdu (Maududi)दुनिया में उसको बुलाया दी और आख़िरत में वो यकीनन सालिहें में से होगा
عَرَبِيثُمَّ أَوحَينا إِلَيكَ أَنِ اتَّبِع مِلَّةَ إِبراهيمَ حَنيفًا ۖ وَما كانَ مِنَ المُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने (ऐ नबी!) आपकी ओर वह़्य की कि इबराहीम के धर्म का अनुसरण करें जो (एक अल्लाह की ओर) एकाग्र थे और वह बहुदेववादियों में से न थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir humne tumhari taraf yeh wahee bheji ke yaksu hokar Ibrahim ke tareeqe par chalo aur woh mushrikon mein se na tha
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney aap ki janib wahee bheji kay aap millat-e-ibrahim-e-hanif ki perwi keren jo mushrikon mein say na thay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमने तुम्हारी तरफ ये वही भेजी के यक्सू होकर इब्राहिम के तारीख़े पर चलो और वो मुशरिकों में से ना था
عَرَبِيإِنَّما جُعِلَ السَّبتُ عَلَى الَّذينَ اختَلَفوا فيهِ ۚ وَإِنَّ رَبَّكَ لَيَحكُمُ بَينَهُم يَومَ القِيامَةِ فيما كانوا فيهِ يَختَلِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)सब्त' (शनिवार के दिन का सम्मान) तो केवल उन लोगों पर अनिवार्य किया गया, जिन्होंने उसके विषय में मतभेद किया। और निःसंदेह आपका पालनहार उनके बीच क़ियामत के दिन निश्चय उस विषय में फ़ैसला करेगा, जिसमें वे मतभेद किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Raha sabt (Sabbath/ hafte ka din) to woh humne un logon par musallat kiya tha jinhon ne uske ehkaam mein ikhtilaf kiya, aur yaqeenan tera Rubb qayamat ke roz un sab baaton ka faisla kardega jin mein woh ikhtilaf karte rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Haftay kay din ki azmat to sirf unn logon kay zimmay hi zaroori ki gaee thi jinhon ney uss mein ikhtilaf kiya tha baat yeh hai kay aap ka perwerdigar khud hi unn mein unn kay ikhtilaf ka faisla qayamat kay din keray ga
Devnagri Urdu (Maududi)रहा सब्त (सब्बाथ/हफ्ते का दिन) तो वो हमने उन लोगों पर मुसल्लत किया था जिन्हों ने उसके एहकाम में इख्तिलाफ किया, और यकीनन तेरा रब कयामत के रोज उन सब बातों का फैसला कर देगा जिन में वो इख्तिलाफ करते रहेंगे
عَرَبِيادعُ إِلىٰ سَبيلِ رَبِّكَ بِالحِكمَةِ وَالمَوعِظَةِ الحَسَنَةِ ۖ وَجادِلهُم بِالَّتي هِيَ أَحسَنُ ۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبيلِهِ ۖ وَهُوَ أَعلَمُ بِالمُهتَدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप उन्हें अपने पालनहार के मार्ग (इस्लाम) की ओर हिकमत तथा सदुपदेश के साथ बुलाएँ और उनसे ऐसे ढंग से वाद-विवाद करें, जो सबसे उत्तम है। निःसंदेह आपका पालनहार उसे सबसे अधिक जानने वाला है, जो उसके मार्ग से भटक गया और वही सीधे मार्ग पर चलने वालों को भी अधिक जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), apne Rubb ke raaste ki taraf dawat do hikmat aur umdah naseehat ke saath, aur logon se mubahisa(discuss) karo aise tareeqe par jo behtareen ho. Tumhara Rubb hi zyada behtar jaanta hai ke kaun uski raah se bhatka hua hai aur kaun raah-e-raast par hai
Roman Urdu (Junagarhi)Apney rab ki raah ki taraf logon ko hikmat aur behtareen naseehat kay sath bulaiye aur unn say behtareen teriqay say guftugoo kijiye yaqeenan aap ka rab apni raah say behakney walon ko bhi bakhoobi janta hai aur woh raah yafta logon say bhi poora waqif hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), अपने रब के रास्ते की तरफ दावत दो हिकमत और उम्मीद हिदायत के साथ, और लोगों से मुबाहिसा (चर्चा) करो ऐसे तरीक़े पर जो बेहतरीन हो। तुम्हारा रब ही ज्यादा बेहतर जानता है कि कौन उसकी राह से भटका हुआ है और कौन राह-ए-रास्त पर है
عَرَبِيوَإِن عاقَبتُم فَعاقِبوا بِمِثلِ ما عوقِبتُم بِهِ ۖ وَلَئِن صَبَرتُم لَهُوَ خَيرٌ لِلصّابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम बदला लो, तो उतना ही बदला लो जितना तुम्हें कष्ट पहुँचाया गया है। और निःसंदेह यदि तुम सब्र करो तो निश्चय वह सब्र करने वालों के लिए बेहतर है।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar tum log badla lo to bas usi qadar le lo jis qadar tumpar zyadati ki gayi ho, lekin agar tum sabr karo to yaqeenan yeh sabr karne walon hi ke haqq mein behtar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar badla lo bhi to bilkul utna hi jitna sadma tumhen phonchaya gaya ho aur agar sabar kerlo to be-shak sabiron kay liye yehi behtar hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर तुम लोग बदला लो तो बस उसी कदर ले लो जिस कदर तुमपर ज्यादा की गई हो, लेकिन अगर तुम सब्र करो तो यकीनन ये सब्र करो वालों ही के हक में बेहतर है
عَرَبِيوَاصبِر وَما صَبرُكَ إِلّا بِاللَّهِ ۚ وَلا تَحزَن عَلَيهِم وَلا تَكُ في ضَيقٍ مِمّا يَمكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) आप सब्र करें। और आपका सब्र करना अल्लाह ही की तौफ़ीक़ से है। और उन पर शोक न करें तथा वे जो चालें चल रहे हैं, उनसे आप का दिल तंग न हो।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad) sabr se kaam kiye jao aur tumhara yeh sabr Allah hi ki toufeeq se hai, in logon ki harakat par ranjh na karo aur na inki chaalbaaziyon par dil tangg (distress) ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap sabar keren baghair tofiq-e-elahi kay aap sabar ker hi nahi saktay aur inn kay haal per ranjeeda na hon aur jo makar-o-faraib yeh kertay rahey hain unn say tang dil na hon
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद) सब्र से काम किए जाओ और तुम्हारा ये सब्र अल्लाह ही की तौफीक से है, इन लोगों की हरकत पर रांझ ना करो और ना इनकी चालबाज़ियों पर दिल तंग (संकट) हो
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ مَعَ الَّذينَ اتَّقَوا وَالَّذينَ هُم مُحسِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह उन लोगों के साथ है, जो उससे डरते हैं और जो उत्तम कार्य करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Allah un logon ke saath hai jo taqwa se kaam letay hain aur ehsan par amal karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeen mano kay Allah Taalaa perhezgaron aur nek kaaron kay sath hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह उन लोगों के साथ है जो तकवा से काम लेते हैं और एहसान पर अमल करते हैं
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Surah 16: An-Nahl (The Bee)

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Surah 16: An-Nahl (The Bee)

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Surah 16: An-Nahl (The Bee)

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Surah 16: An-Nahl (The Bee)

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Surah 16: An-Nahl (The Bee)

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Surah 17: Bani Isra'il (The Israelites)

Meccan🕐 Revelation #50📜 111 Verses🕮 Juz 15
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Surah 17: Bani Isra'il (The Israelites)

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Surah 17: Bani Isra'il (The Israelites)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
🕮 Juz 15 begins here
हिन्दी (Al-Omari)पवित्र है वह (अल्लाह) जो अपने बंदे को रातों-रात मस्जिदे-हराम (काबा) से मस्जिदे-अक़सा तक ले गया, जिसके चारों ओर हमने बरकत रखी है। ताकि हम उसे अपनी कुछ निशानियाँ दिखाएँ। निःसंदेह वह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Paak hai woh jo le gaya ek raat apne banday ko masjid e haraam se door ki us masjid tak jiske maahol ko usne barakat di hai, taa-ke usey apni kuch nishaniyon ka mushahida(show) karaye. Haqeeqat mein wahi hai sab kuch sunney aur dekhne wala
Roman Urdu (Junagarhi)Pak hai woh Allah Taalaa jo apney bandey ko raat hi raat mein masjid-e-haram say masjid-e-aqsa tak ley gaya jiss kay aas pass hum ney barkat dey rakhi hai iss liye kay ussay apni qudrat kay baaz namoney deikhayen yaqeenan Allah Taalaa hi khoob sunnay dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)पाक है वो जो ले गया एक रात अपने बंदे को मस्जिद ए हराम से दूर कि उस मस्जिद तक जिसने महल को उसने बरकत दी है, ता-के उसे अपनी कुछ निशानियों का मुशाहिदा(दिखाएँ)कराए। हकीकत में वही है सब कुछ सुनने और देखने वाला
عَرَبِيوَآتَينا موسَى الكِتابَ وَجَعَلناهُ هُدًى لِبَني إِسرائيلَ أَلّا تَتَّخِذوا مِن دوني وَكيلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने मूसा को पुस्तक प्रदान की और उसे बनी इसराईल के लिए मार्गदर्शन का साधन बनाया कि मेरे सिवा किसी को कार्यसाधक न बनाओ।
Roman Urdu (Maududi)Humne issey pehle Moosa ko kitab di thi aur usey bani Israel ke liye zariya e hidayat banaya tha, is takeed ke saath ke mere siwa kisi ko apna wakeel(guardian) na banana
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney musa ko kitab di aur ussay bani israeel kay liye hidayat bana diya kay tum meray siwa kissi ko apna kaarsaaz na banana
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इसे पहले मूसा को किताब दी थी और उसे बानी इजराइल के लिए ज़रिया ए हिदायत बनाया था, इस टेक के साथ के मेरे सिवा किसी को अपना वकील (अभिभावक) न बनाना
عَرَبِيذُرِّيَّةَ مَن حَمَلنا مَعَ نوحٍ ۚ إِنَّهُ كانَ عَبدًا شَكورًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ उनकी संतति जिन्हें हमने नूह़ के साथ (नौका) में सवार किया था! निःसंदेह वह बहुत आभार प्रकट करने वाला बंदा था।
Roman Urdu (Maududi)Tum un logon ki aulad ho jinhein humne Nooh ke saath kashti par sawar kiya tha, aur Nooh ek shukarguzar banda tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aey unn logon ki aulad! Jinhen hum ney nooh kay sath sawar ker diya tha woh humara bara hi shukar guzaar banda tha
Devnagri Urdu (Maududi)तुम उन लोगों की औलाद हो जिनहें हमने नूह के साथ कश्ती पर सवार किया था, और नूह एक शुक्रगुज़ार बंदा था
عَرَبِيوَقَضَينا إِلىٰ بَني إِسرائيلَ فِي الكِتابِ لَتُفسِدُنَّ فِي الأَرضِ مَرَّتَينِ وَلَتَعلُنَّ عُلُوًّا كَبيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने बनी इसराईल को उनकी पुस्तक में सूचित कर दिया था कि तुम इस धरती में दो बार उपद्रव करोगे और बड़ी सरकशी करोगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir humne apni kitab mein bani Israel ko is baat par bhi mutanabbeh (warn) kardiya tha ke tum do martaba zameen mein fasaad e azeem barpa karogey aur badi sarkashi dikhaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney bano islraeel kay liye unn ki kitab mein saaf faisla ker diya tha kay tum zamin mein doobara fasad barpa kero gay aur tum bari zabardast ziyadtiyan kero gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमने अपनी किताब में बानी इसराइल को इस बात पर भी मुतनब्बेह (चेतावनी) करदिया था के तुम दो मरतबा ज़मीन में फ़साद ए अज़ीम बरपा करोगी और बड़ी सरकशी दिखाओगे
عَرَبِيفَإِذا جاءَ وَعدُ أولاهُما بَعَثنا عَلَيكُم عِبادًا لَنا أُولي بَأسٍ شَديدٍ فَجاسوا خِلالَ الدِّيارِ ۚ وَكانَ وَعدًا مَفعولًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो जब उनमें से प्रथम (उपद्रव) का समय आया, तो हमने तुमपर अपने शक्तिशाली बंदों को भेज दिया, जो घरों के अंदर तक फैल गए। और यह वादा तो पूरा होना ही था।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar jab un mein se pehli sarkashi ka mauqa pesh aaya, to aey bani Israel, humne tumhare muqable par apne aise banday uthaye jo nihayat zoarawar thay aur woh tumhare mulk mein ghus kar har taraf phayl gaye. Yeh ek wada tha jisey poora hokar hi rehna tha
Roman Urdu (Junagarhi)Inn dono wadon mein say pehlay kay aatay hi hum ney tumharay muqabley per apney banday bhej diye jo baray hi larakay thay. Pus woh tumharay gharon kay andar tak phel gaye aur Allah ka yeh wada poora hona hi tha
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार जब उन में से पहली सरकशी का मौका पेश आया, तो ऐ बानी इज़राइल, हमने तुम्हारे मुक़ाबले पर अपने ऐसे बंदे उठाए जो निहायत ज़ोरावर थे और वो तुम्हारे मुल्क में घुस कर हर तरफ फ़ैल गए। ये एक वादा था जिसका पूरा होकर ही रहना था
عَرَبِيثُمَّ رَدَدنا لَكُمُ الكَرَّةَ عَلَيهِم وَأَمدَدناكُم بِأَموالٍ وَبَنينَ وَجَعَلناكُم أَكثَرَ نَفيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने तुम्हें पुनः उनपर प्रभुत्व प्रदान किया। तथा धनों और पुत्रों से तुम्हारी सहायता की। और तुम्हारी संख्या बहुत अधिक कर दी।
Roman Urdu (Maududi)Iske baad humne tumhein unpar galabe ka mauqa de diya aur tumhein maal aur aulad se madad di aur tumhari taadaad pehle se badha di
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney unn per tumhara ghalba dey ker tumharay din pheray aur maal aur aulad say tumhari madad ki aur tumehn baray juthay wala bana diya
Devnagri Urdu (Maududi)इसके बाद हमने तुम्हें एक दूसरे गलेबे का मौका दे दिया और तुम्हें माल और औलाद से मदद दी और तुम्हारी तदाद पहले से बढ़ा दी
عَرَبِيإِن أَحسَنتُم أَحسَنتُم لِأَنفُسِكُم ۖ وَإِن أَسَأتُم فَلَها ۚ فَإِذا جاءَ وَعدُ الآخِرَةِ لِيَسوءوا وُجوهَكُم وَلِيَدخُلُوا المَسجِدَ كَما دَخَلوهُ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَلِيُتَبِّروا ما عَلَوا تَتبيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यदि तुम भला करोगे, तो अपने ही लिए भला करोगे, और यदि तुम बुरा करोगे, तो अपने ही लिए (बुरा करोगे)। फिर जब दूसरे (उपद्रव) का समय आया (तो हमने तुम्हारे शत्रुओं को तुमपर हावी कर दिया) ताकि तुम्हें अपमानित करें और मस्जिद (अक़सा) में उसी तरह घुस जाएँ, जैसे प्रथम बार घुसे थे, और ताकि जो भी उनके हाथ आए, उसे पूर्ण रूप से नाश कर दें।
Roman Urdu (Maududi)Dekho! Tumne bhalayi ki to woh tumhare apne hi liye bhalayi thi, aur burayi ki to woh tumhari apni zaat ke liye burayi saabit hui. Phir jab dusre wadey ka waqt aaya to humne dusre dushmano ko tumpar musallat kiya taa-ke woh tumhare chehre bigaad dein aur masjid (bayt ul maqdis) mein usi tarah ghus jayein jis tarah pehle dushman ghuse thay aur jis cheez par unka haath padey usey tabaah karke rakh dein
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum ney achay kaam kiye to khud apney hi faeeday kay liye aur agar tum ney buraiyan kin to bhi apney hi liye phir jab doosray waday ka waqt aaya (to hum ney doosray bandon ko bhej diya takay) woh tumharay chehray bigar den aur pehli dafa ki tarah phir ussi masjid mein ghuss jayen. Aur jiss jiss cheez per qaboo payen tor phor ker jarr say ukhar den
Devnagri Urdu (Maududi)देखो! तुमने भलाई की तो वो तुम्हारी अपनी ही ली थी, और बुराई की तो वो तुम्हारी अपनी ज़ात के लिए बुरी साबित हुई। फिर जब दूसरे वादे का वक्त आया तो हमने दूसरे दुश्मनों को तुमपर मुसल्लत किया ता-के वो तुम्हारे चेहरे बिगाड़ दें और मस्जिद (बैत उल मकदिस) में उसकी तरह घुस जाएं, जिस तरह पहले दुश्मन घुसे थे और जिस चीज पर उनका हाथ पड़े उसे तबाह करके रख दें
عَرَبِيعَسىٰ رَبُّكُم أَن يَرحَمَكُم ۚ وَإِن عُدتُم عُدنا ۘ وَجَعَلنا جَهَنَّمَ لِلكافِرينَ حَصيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)संभव है कि तुम्हारा पालनहार तुमपर दया करे। और यदि तुम दोबारा (उत्पात) करोगे, तो हम भी दोबारा (दंडित) करेंगे। और हमने जहन्नम को काफ़िरों के लिए कारागार बना दिया है।
Roman Urdu (Maududi)Ho sakta hai ke ab tumhara Rubb tumpar reham karey, lekin agar tumne phir apni sabiq rawish(former behaviour) ka iaada kiya to hum bhi phir apni saza ka iaada karenge, aur kaafir e niyamat logon ke liye humne jahannum ko qaid khana bana rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Umeed hai kay tumhara rab tum per reham keray. Haan agar tum phir bhi wohi kerney lagay to hum bhi doobara aisa hi keren gay aur hum ney munkiron kay qaid khana jahannum ko bana rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)हो सकता है कि अब तुम्हारा रब तुमपर रहम करे, लेकिन अगर तुमने फिर अपनी साबिक राविश (पूर्व व्यवहार) का इरादा किया तो हम भी फिर अपनी सजा का इरादा करेंगे, और काफिर ए नियामत लोगों के लिए हमने जहन्नुम को क़ैद खाना बना रखा है
عَرَبِيإِنَّ هٰذَا القُرآنَ يَهدي لِلَّتي هِيَ أَقوَمُ وَيُبَشِّرُ المُؤمِنينَ الَّذينَ يَعمَلونَ الصّالِحاتِ أَنَّ لَهُم أَجرًا كَبيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यह क़ुरआन वह मार्ग दिखाता है, जो सबसे सीधा है और उन ईमान वालों को, जो अच्छे कर्म करते हैं, शुभ सूचना देता है कि उनके लिए बड़ा बदला है।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke yeh Quran woh raah dikhata hai jo bilkul seedhi hai. Jo log isey maan kar bhale kaam karne lagein unhein yeh basharat deta hai ke unke liye bada ajar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan yeh quran woh raasta dikhata hai jo boht hi seedha hai aue eman walon ko jo nek aemaal kertay hain iss baat ki khushkhabri deta hai kay unn kay liye boht bara ajar hai
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है कि ये कुरान वो राह दिखाता है जो बिल्कुल सीधी है। जो लोग इसे मान कर भले काम करने लगें उन्हें ये बशारत देता है के उनके लिए बड़ा अजर है
عَرَبِيوَأَنَّ الَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِالآخِرَةِ أَعتَدنا لَهُم عَذابًا أَليمًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जो लोग आख़िरत (परलोक) पर ईमान नहीं रखते, हमने उनके लिए दुःखदायी यातना तैयार कर रखी है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log aakhirat ko na maanein unhein yeh khabar deta hai ke unke liye humne dardnaak azaab muhaiyya kar rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay jo log aakhirat per yaqeen nahi rakhtay unn kay liye hum ney dardnaak azab tayyar ker rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग आख़िरत को ना माने उन्हें ये खबर देता है के उनके लिए हमने दर्दनक अज़ाब मुहैय्या कर रखा है
عَرَبِيوَيَدعُ الإِنسانُ بِالشَّرِّ دُعاءَهُ بِالخَيرِ ۖ وَكانَ الإِنسانُ عَجولًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और मनुष्य उसी प्रकार बुराई की दुआ माँगता है, जैसे वह भलाई की दुआ माँगता है। और मनुष्य बड़ा ही जल्दबाज़ है।
Roman Urdu (Maududi)Insaan sharr (burai) us tarah maangta hai jis tarah khair maangni chahiye. Insaan bada hi jald baaz waqey hua hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur insan buraee ki duayen mangney lagta hai bilkul iss ki apni bhalaee ki dua ki tarah insan hai hi bara jald baaz
Devnagri Urdu (Maududi)इंसान शरर (बुराई) हमें तरह माँगता है जिस तरह खैर माँगनी चाहिए। इंसान बड़ा ही जल्दी बाज़ वाकये हुआ है
عَرَبِيوَجَعَلنَا اللَّيلَ وَالنَّهارَ آيَتَينِ ۖ فَمَحَونا آيَةَ اللَّيلِ وَجَعَلنا آيَةَ النَّهارِ مُبصِرَةً لِتَبتَغوا فَضلًا مِن رَبِّكُم وَلِتَعلَموا عَدَدَ السِّنينَ وَالحِسابَ ۚ وَكُلَّ شَيءٍ فَصَّلناهُ تَفصيلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने रात तथा दिन को दो निशानियाँ बनाया। फिर हमने रात की निशानी को मिटा दिया (प्रकाशहीन कर दिया) तथा दिन की निशानी को प्रकाशमान बनाया। ताकि तुम अपने पालनहार का अनुग्रह (रोज़ी) तलाश करो और ताकि तुम वर्षों की गणना और हिसाब मालूम कर सको। तथा हमने प्रत्येक चीज़ का विस्तार के साथ वर्णन कर दिया है।
Roman Urdu (Maududi)Dekho, humne raat aur din ko do nishaniyan banaya hai. Raat ki nishani ko humne be-noor banaya, aur din ki nishani ko roshan kardiya, taa-ke tum apne Rubb ka fazal talash kar sako aur maah-o-saal ka hisaab maloom kar sako. Isi tarah humne har cheez ko alag alag mumaiyyaz (manifestly distinct) karke rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney raat aur din ko apni qudrat ki nishaniyan banaee hain raat ki nishani ko to hum ney bey noor ker diya hai aur din ki nishani ko roshan banaya hai takay tum apney rab ka fazal talash ker sako aur iss liye bhi kay barson ka shumar aur hisab maloom ker sako aur her her cheez ko hum ney boht tafseel say biyan farma diya hai
Devnagri Urdu (Maududi)देखो, हमने रात और दिन को दो निशानियां बनाई हैं। रात की निशानी को हमने बे-नूर बनाया, और दिन की निशानी को रोशन कर दिया, ता-के तुम अपने रब का फज़ल तलाश कर सको और माह-ओ-साल का हिसाब मालूम कर सको। इसी तरह हमने हर चीज को अलग-अलग मुमैय्याज (स्पष्ट रूप से अलग) करके रखा है
عَرَبِيوَكُلَّ إِنسانٍ أَلزَمناهُ طائِرَهُ في عُنُقِهِ ۖ وَنُخرِجُ لَهُ يَومَ القِيامَةِ كِتابًا يَلقاهُ مَنشورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने हर इनसान के (अच्छे-बुरे) कार्य को उसके गले से लगा दिया है। और क़ियामत के दिन हम उसके लिए एक किताब (कर्मपत्र) निकालेंगे, जिसे वह अपने सामने खुली हुई पाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Har Insaan ka shagun (fate/ augury) humne uske apne galey mein latka rakkha hai, aur qayamat ke roz hum ek nuishta (book/record/scroll) uske liye nikalenge jisey woh khuli kitab ki tarah payega
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney her insan ki buraee bhalaee ko uss kay galay laga diya hai aur baroz qayamat hum uss kay samney uss ka naam-e-aemaal nikalen gay jissay woh apney upper khulla hua paa ley ga
Devnagri Urdu (Maududi)हर इंसान का शगुन (भाग्य/शगुन) हमने उसे अपनी गली में लटका रखा है, और कयामत के रोज हम एक नुइशता (पुस्तक/रिकॉर्ड/स्क्रॉल) उसके लिए निकालेंगे जिसे वो खुली किताब की तरह पायेगा
عَرَبِياقرَأ كِتابَكَ كَفىٰ بِنَفسِكَ اليَومَ عَلَيكَ حَسيبًا
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हिन्दी (Al-Omari)अपनी किताब (कर्मपत्र) पढ़ ले। आज तू स्वयं अपना हिसाब लेने के लिए काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Padh apna naam-e-aamal, aaj apna hisaab lagane ke liye tu khud hi kafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ley! Khus hi apni kitab aap parh ley. Aaj to tu aap hi apna khud hisab lenay ko kafi hai
Devnagri Urdu (Maududi)पढ़ अपना नाम-ए-आमाल, आज अपना हिसाब लगाने के लिए तू खुद ही काफी है
عَرَبِيمَنِ اهتَدىٰ فَإِنَّما يَهتَدي لِنَفسِهِ ۖ وَمَن ضَلَّ فَإِنَّما يَضِلُّ عَلَيها ۚ وَلا تَزِرُ وازِرَةٌ وِزرَ أُخرىٰ ۗ وَما كُنّا مُعَذِّبينَ حَتّىٰ نَبعَثَ رَسولًا
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हिन्दी (Al-Omari)जो मार्गदर्शन पा गया, तो वह अपने ही लिए मार्गदर्शन पाता है, और जो गुमराह हुआ, तो वह अपने आप ही पर गुमराह होता है। तथा कोई बोझ उठाने वाला दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा। और हम (किसी को) यातना नहीं देते, जब तक कि कोई रसूल न भेज दें।
Roman Urdu (Maududi)Jo koi raah-e-raast ikhtiyar karey uski raast-rawi uske apne hi liye mufeed hai, aur jo gumraah ho uski gumrahi ka wabal usi par hai. Koi bojh uthane wala dusre ka bojh na uthayega aur hum azaab dene waley nahin hain jabtak ke (logon ko haqq-o-baatil ka farq samjhane ke liye) ek paighambar na bhej dein
Roman Urdu (Junagarhi)Jo raah-e-raast hasil kerley woh khud apney hi bhalay kay liye raah yafta hota hai aur jo bhatak jaye uss ka bojh ussi kay upper hai koi bojh wala kissi aur ka bojh apney upper na laaday ga aur humari sunnat nahi kay rasool bhejney say pehlay hi azab kerney lagen
Devnagri Urdu (Maududi)जो कोई राह-ए-रास्त इख्तियार करे उसकी रस्त-रवी उसके अपने ही लिए मुफीद है, और जो गुमराह हो उसकी गुमराही का जवाब usi par hai. कोई बोझ उठाने वाला दूसरे का बोझ ना उठाएगा और हम अजब देने वाले नहीं हैं जबतक के (लोगों को हक-ओ-बातिल का फर्क समझने के लिए) एक पैगम्बर ना भेज दें
عَرَبِيوَإِذا أَرَدنا أَن نُهلِكَ قَريَةً أَمَرنا مُترَفيها فَفَسَقوا فيها فَحَقَّ عَلَيهَا القَولُ فَدَمَّرناها تَدميرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब हम किसी बस्ती को विनष्ट करना चाहते हैं, तो उसके संपन्न लोगों को आदेश देते हैं। फिर वे उसमें अवज्ञा करते हैं। अंततः उसपर यातना की बात सिद्ध हो जाती है। और हम उसका पूरी तरह उन्मूलन कर देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab hum kisi basti ko halaak karne ka irada karte hain to uske khush haal logon ko hukum dete hain aur woh usmein nafarmaaniyan karne lagte hain, tab azaab ka faisla us basti par chaspan ho jata hai aur hum usey barbaad karke rakh dete hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab hum kissi basti ki halakat ka irada ker letay hain to wahan kay khushaal logon ko (kuch) hukum detay hain aur woh uss basti mein khulli na-farmani kerney lagtay hain to unn per (azab) ki baat sabit hojati hai phir hum ussay tabah-o-barbad ker detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब हम किसी बस्ती को हलाक करने का इरादा करते हैं तो उसके खुश हाल लोग को हुकुम देते हैं और वो हमें नफरमानियां करने लगते हैं, तब अज़ाब का फैसला हमें बस्ती पर चस्पां हो जाता है और हम उसे बर्बाद करके रख देते हैं
عَرَبِيوَكَم أَهلَكنا مِنَ القُرونِ مِن بَعدِ نوحٍ ۗ وَكَفىٰ بِرَبِّكَ بِذُنوبِ عِبادِهِ خَبيرًا بَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने नूह़ के पश्चात् बहुत-से समुदायों को विनष्ट कर दिया। और आपका पालनहार अपने बंदों के पापों की ख़बर रखने, देखने के लिए काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Dekhlo, kitni hi nasalein (generations) hain jo Nooh ke baad hamare hukum se halaak huyi, tera Rubb apne bandon ke gunaahon se puri tarah bakhabar hai aur sab kuch dekh raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney nooh kay baad bhi boht si qomen halak kin aur tera rab apney bandon kay gunahon say kafi khabardaar aur khoob dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)देखलो, कितनी ही नसलें (पीढ़ियां) हैं जो नूंह के बाद हमारे हुकुम से हलाक हुई, तेरा रब अपने बंदों के गुनाहों से पूरी तरह से बाख़बर है और सब कुछ देख रहा है
عَرَبِيمَن كانَ يُريدُ العاجِلَةَ عَجَّلنا لَهُ فيها ما نَشاءُ لِمَن نُريدُ ثُمَّ جَعَلنا لَهُ جَهَنَّمَ يَصلاها مَذمومًا مَدحورًا
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हिन्दी (Al-Omari)जो व्यक्ति जल्द प्राप्त होने वाली (दुनिया) चाहता है, तो हम उसे इसी (दुनिया) में जो चाहते हैं, जिसके लिए चाहते हैं जल्द ही दे देते हैं। फिर हमने उसके लिए (आख़िरत में) जहन्नम बना रखी है, जिसमें वह निंदित और धुत्कारा हुआ प्रवेश करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Jo koi aajila (jaldi) ka khwahish-mand ho, usey yahin hum de detay hain jo kuch bhi jisey dena chahein, phir uske maqsoom mein jahannum likh dete hain jisey woh taapega, malamat zada aur rehmat se mehroon hokar
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ka irada sirf iss jaldi wali duniya (fori faeeda) ka hi ho ussay hum yahan jiss qadar jiss kay liye chahayen sirdast detay hain bil aakhir uss kay liye jahannum muqarrar ker detay hain jahan woh burray halon dhutkara hua dakhil hoga
Devnagri Urdu (Maududi)जो कोई जल्दी का ख्वाहिश-मंद हो, उसे यहीं हम दे देते हैं जो कुछ भी देना चाहते हैं, फिर उसके मकसूम में जहन्नुम लिख देते हैं जिसे वो तपेगा, मलामत ज़दा और रहमत से महरून होकर
عَرَبِيوَمَن أَرادَ الآخِرَةَ وَسَعىٰ لَها سَعيَها وَهُوَ مُؤمِنٌ فَأُولٰئِكَ كانَ سَعيُهُم مَشكورًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो व्यक्ति आख़िरत चाहता है और उसके लिए प्रयास करता है, जबकि वह ईमान रखने वाला हो, तो वही लोग हैं, जिनके प्रयास का सम्मान किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo aakhirat ka khwahish-mand ho aur uske liye sayi (strive) karey jaisi ke uske liye sayi (strive) karni chahiye, aur ho woh momin, to aisey har shaks ki sayi mashkur hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss ka irada aakhirat ka ho aur jaisi kosish uss kay liye honi chahaye woh kerta bhi ho aur woh baa eman bhi ho pus yehi log hain jin ki kosish ki Allah kay haan poori qadar daani ki jaye gi
Devnagri Urdu (Maududi)और जो आखिरी का ख्वाहिश-मंद हो और उसके लिए सई (प्रयास) करे जैसी के उसके लिए सई (प्रयास) करनी चाहिए, और हो वो मोमिन, तो ऐसे हर शक्स की सई मशकूर होगी
عَرَبِيكُلًّا نُمِدُّ هٰؤُلاءِ وَهٰؤُلاءِ مِن عَطاءِ رَبِّكَ ۚ وَما كانَ عَطاءُ رَبِّكَ مَحظورًا
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हिन्दी (Al-Omari)हम आपके पालनहार के अनुदान से प्रत्येक को प्रदान करते हैं, इनको भी और उनको भी। और आपके पालनहार का अनुदान किसी से रोका हुआ नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Inko bhi aur unko bhi, dono fareeqon ko hum (duniya mein) saaman-e-zeist diye jaa rahey hain, yeh tere Rubb ka atiya hai, aur tere Rubb ki ata ko rokne wala koi nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Her aik ko hum ba-hum phonchaye jatay hain enhen bhi aur unhen bhi teray perwerdigar kay inamaat mein say. Teray perwerdigar ki bakhsish ruki hui nahi hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनको भी और उनको भी, दोनों फरिकों को हम (दुनिया में) सामान-ए-ज़िस्ट दिए जा रहे हैं, ये तेरे रुब का अतिया है, और तेरे रुब की अता को रोकने वाला कोई नहीं है
عَرَبِيانظُر كَيفَ فَضَّلنا بَعضَهُم عَلىٰ بَعضٍ ۚ وَلَلآخِرَةُ أَكبَرُ دَرَجاتٍ وَأَكبَرُ تَفضيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप विचार करें कि हमने (संसार में) उनमें से कुछ को कुछ पर किस तरह श्रेष्ठता प्रदान की है? और निश्चय ही आख़िरत दर्जों में कहीं बढ़कर और श्रेष्ठता के एतिबार से बहुत बढ़कर है।
Roman Urdu (Maududi)Magar dekhlo, duniya hi mein humne ek giroh ko dusre par kaisi fazilat de rakkhi hai, aur aakhirat mein uske darje aur bhi zyada honge, aur uski fazilat aur bhi zyada badh chadh kar hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Dekhlay kay inn mein aik ko aik per hum ney kiss tarah fazilat dey rakhi hai aur aakhirat to darjon mein aur bhi barh ker hai aur fazilat kay aetbaar say bhi boht bari hai
Devnagri Urdu (Maududi)मगर देखलो, दुनिया ही में हमने एक गिरोह को दूसरे पर कैसी फजीलत दे रखी है, और आखिरी में उसके दर्जे और भी ज्यादा होंगे, और उसकी फजीलत और भी ज्यादा बढ़ चढ़ कर होगी
عَرَبِيلا تَجعَل مَعَ اللَّهِ إِلٰهًا آخَرَ فَتَقعُدَ مَذمومًا مَخذولًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ बंदे!) अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य न बना, अन्यथा तू निंदित और असहाय होकर रह जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Tu Allah ke saath koi dusra mabood na bana, warna malamat zada aur be yaar o madadgaar baitha reh jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Allah kay sath kissi aur ko mabood na thehra kay aakhirish tu buray halon bey kus hoker beht rahey ga
Devnagri Urdu (Maududi)तू अल्लाह के साथ कोई दूसरा मबूद न बना, वरना मलामत ज्यादा और बे यार ओ मददगार बैठा रह जाएगा
عَرَبِي۞ وَقَضىٰ رَبُّكَ أَلّا تَعبُدوا إِلّا إِيّاهُ وَبِالوالِدَينِ إِحسانًا ۚ إِمّا يَبلُغَنَّ عِندَكَ الكِبَرَ أَحَدُهُما أَو كِلاهُما فَلا تَقُل لَهُما أُفٍّ وَلا تَنهَرهُما وَقُل لَهُما قَولًا كَريمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ बंदे) तेरे पालनहार ने आदेश दिया है कि उसके सिवा किसी की इबादत न करो, तथा माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करो। यदि तेरे पास दोनों में से एक या दोनों वृद्धावस्था को पहुँच जाएँ, तो उन्हें 'उफ़' तक न कहो, और न उन्हें झिड़को, और उनसे नरमी से बात करो।
Roman Urdu (Maududi)Tere Rubb ne faisla kardiya hai ke: tumlog kisi ki ibadat na karo, magar sirf uski, walidain (maa-baap) ke saath neik sulook karo.Agar tumhare pas unmein se koi ek, ya dono, boodhey (old) hokar rahein to unhein ‘ uff ’ tak na kaho, na unhein jhidak kar jawab do , balke unsey ehtaram ke saath baat karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tera perwerdigar saaf saaf hukum dey chuka hai kay tum uss kay siwa kissi aur ki ibadat na kerna aur maa baap kay sath ehsan kerna. Agar teri mojoodgi mein inn mein say aik ya yeh dono burhapay ko phonch jayen to unn kay aagay uff tak na kehna na unhen daant dapat kerna bulkay unn kay sath adab-o-ehtram say baat cheet kerna
Devnagri Urdu (Maududi)तेरे रब ने फैसला कर दिया है के: तुम लोग किसी की इबादत न करो, मगर सिर्फ उसकी, वालिदेन (मां-बाप) के साथ नई सुलूक करो। अगर तुम्हारे पास उनके साथ कोई एक, या दोनों, बूढ़े (पुराने) होकर रहें तो उन्हें 'उफ्फ' तक ना कहो, ना उन्हें जिदक कर जवाब दो, बलके उनसे एहतराम के साथ बात करो
عَرَبِيوَاخفِض لَهُما جَناحَ الذُّلِّ مِنَ الرَّحمَةِ وَقُل رَبِّ ارحَمهُما كَما رَبَّياني صَغيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और दयालुता से उनके लिए विनम्रता की बाँहें झुकाए रखो और कहो : ऐ मेरे पालनहार! उन दोनों पर दया कर, जैसे उन्होंने बचपन में मेरा पालन-पोषण किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur narmi o reham ke saath unke saamne jhuk kar raho, aur dua kiya karo ke “parwardigar, inpar reham farma jis tarah inhon ne rehmat o shafaqat ke saath mujhey bachpan mein paala tha”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aajzi aur mohabbat kay sath unn kay samney tawazo ka bazoo pust rakhay rakhna aur dua kertay rehna kay aey meray perwerdigar! Inn per waisa hi reham ker jaisa enhon ney meray bachpan mein meri perwerish ki hai
Devnagri Urdu (Maududi)और नरमी ओ रहम के साथ उनके सामने झुक कर रहो, और दुआ किया करो के "परवरदिगार, इनपर रहम फरमा जिस तरह इन्हों ने रहमत ओ शफाकत के साथ मुझे बचपन में पाला था"
عَرَبِيرَبُّكُم أَعلَمُ بِما في نُفوسِكُم ۚ إِن تَكونوا صالِحينَ فَإِنَّهُ كانَ لِلأَوّابينَ غَفورًا
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारा पालनहार अधिक जानता है, जो कुछ तुम्हारे मन में है। यदि तुम सदाचारी होगे, तो वह (अपनी ओर) लौट आने वालों के लिए अति क्षमावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara Rubb khoob jaanta hai ke tumahre dilon mein kya hai, agar tum saleh bankar raho to woh aisey sab logon ke liye darguzar karne wala hai jo apne kasoor par mutanabbeh ho kar bandagi ke rawaiyye ki taraf palat aayein
Roman Urdu (Junagarhi)Jo kuch tumharay dilon mein hai ussay tumhara rab bakhoobi janta hai agar tum nek ho to woh to tujoo kerney walon ko bakhshney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा रब खूब जानता है के तुम्हारे दिलों में क्या है, अगर तुम साले बनकर रहो तो वो ऐसे सब लोग के लिए दरगुज़ार करने वाला है जो अपने कसूर पर मुतनब्बेह हो कर बंदगी के रवैये की तरफ पलट आएं
عَرَبِيوَآتِ ذَا القُربىٰ حَقَّهُ وَالمِسكينَ وَابنَ السَّبيلِ وَلا تُبَذِّر تَبذيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और रिश्तेदारों को उनका हक़ दो, तथा निर्धन और यात्री को (भी) और अपव्यय न करो।
Roman Urdu (Maududi)Rishtedar ko uska haqq do aur miskeen aur musafir ko uska haqq. Fizool kharchi na karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur rishtay daaron ka aur miskeenon aur musafiron ka haq ada kertay raho aur israaf aur bey jaa kharch say bacho
Devnagri Urdu (Maududi)रिश्तेदार को उसका हक दो और मिस्कीन और मुसाफिर को उसका हक। फ़िज़ूल खर्ची न करो
عَرَبِيإِنَّ المُبَذِّرينَ كانوا إِخوانَ الشَّياطينِ ۖ وَكانَ الشَّيطانُ لِرَبِّهِ كَفورًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अपव्यय करने वाले शैतान के भाई हैं। और शैतान अपने पालनहार का बहुत कृतघ्न है।
Roman Urdu (Maududi)Fizool kharch log shaytan ke bhai hain, aur shaytan apne Rubb ka na-shukra hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bey jaa kharch kerney walay shetano kay bhai hain. Aur shetan apney perwerdigar ka bara hi na shukra hai
Devnagri Urdu (Maududi)फ़िज़ूल खर्च लोग शैतान के भाई हैं, और शैतान अपने रब का ना-शुक्र है
عَرَبِيوَإِمّا تُعرِضَنَّ عَنهُمُ ابتِغاءَ رَحمَةٍ مِن رَبِّكَ تَرجوها فَقُل لَهُم قَولًا مَيسورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम अपने पालनहार की दया की खोज में, जिसकी तुम आशा रखते हो, उनसे मुँह फेरो, तो (भी) उनसे विनम्र बात कहो।
Roman Urdu (Maududi)Agar unse (yani haajat-mand rishtedaaron, miskeeno aur musafiron se) tumhein katrana ho (turn away from them), is bina par ke abhi tum Allah ki us rehmat ko jiske tum umeedwaar ho talash kar rahey ho, to unhein narm jawab de do
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tujhay inn say mun pher lena paray apney rab ki iss rehmat ki justujoo mein jiss ki tu umeed rakhta hai to bhi tujhay chahiye kay umdagi aur narmi say unhen samjha dey
Devnagri Urdu (Maududi)अगर उनसे (यानी हाजत-मंद रिश्तेदारों, मिस्किनो और मुसाफिरों से) तुम्हें कतराना हो (उनसे दूर हो जाओ), क्या बिना पार के अभी तुम अल्लाह की हमें रहमत को जिसकी तुम उम्मीद कर रहे हो, तो उन्हें नर्म जवाब दे दो
عَرَبِيوَلا تَجعَل يَدَكَ مَغلولَةً إِلىٰ عُنُقِكَ وَلا تَبسُطها كُلَّ البَسطِ فَتَقعُدَ مَلومًا مَحسورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और न अपना हाथ अपनी गर्दन से बँधा हुआ रखो, और न उसे पूरा खोल दो कि फिर निंदित, थका हारा (खाली हाथ) होकर बैठ रहो।
Roman Urdu (Maududi)Na to apna haath gardan se bandh rakkho aur na usey bilkul hi khula chodh do ke malamat zada aur aajiz ban kar reh jao
Roman Urdu (Junagarhi)Apna hath apni gardan say bandha hua na rakh aur na ussay bilkul hi khol dey kay phir malamat kiya hua dar manda beth jaye
Devnagri Urdu (Maududi)ना तो अपना हाथ बगीचे से बंद रखो और ना उसे बिल्कुल ही खुला छोड़ दो के मलामत जादा और अजीज बन कर रह जाओ
عَرَبِيإِنَّ رَبَّكَ يَبسُطُ الرِّزقَ لِمَن يَشاءُ وَيَقدِرُ ۚ إِنَّهُ كانَ بِعِبادِهِ خَبيرًا بَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आपका पालनहार जिसके लिए चाहता है, रोज़ी विस्तृत कर देता है, और (जिसके लिए चाहता है) तंग कर देता है। निःसंदेह वह अपने बंदों की पूरी ख़बर रखने वाला, सब कुछ देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Tera Rubb jiske liye chahta hai rizq kushada karta hai aur jiske liye chahta hai tangg kardeta hai, woh apne bandon ke haal se bakhabar hai aur unhein dekh raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tera rab jiss kay liye chahaye rozi kushada ker deta hai aur jiss kay liye chahaye tang. Yaqeenan woh apney bandon say baa khabar aur khoob dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)तेरा रब जिसके लिए चाहता है रिज्क कुशादा करता है और जिसके लिए चाहता है तंग करता है, वो अपने बंदों के हाल से ख़बर है और उन्हें देख रहा है
عَرَبِيوَلا تَقتُلوا أَولادَكُم خَشيَةَ إِملاقٍ ۖ نَحنُ نَرزُقُهُم وَإِيّاكُم ۚ إِنَّ قَتلَهُم كانَ خِطئًا كَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अपनी संतान को गरीबी के भय से क़त्ल न करो। हम ही उन्हें रोज़ी प्रदान करते हैं और तुम्हें भी। निःसंदेह उनका क़त्ल बहुत बड़ा पाप है।
Roman Urdu (Maududi)Apni aulad ko iflas (tangdasti) ke andeshey se qatal na karo, hum unhein bhi rizq denge aur tumhein bhi. Dar haqeeqat unka qatal ek badi khata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur muflisi kay khof say apni aulado ko naa maar dalo unn ko aur tum ko hum rozi detay hain . yaqeenan inn ka qatal kerna kabeera gunah hai
Devnagri Urdu (Maududi)अपनी औलाद को इफ़्लास (तंगदस्ती) के अंदेशे से क़त्ल ना करो, हम उन्हें भी रिज़क़ देंगे और तुम्हें भी। दर हक़ीक़त उनका क़तल एक बड़ी ख़ता है
عَرَبِيوَلا تَقرَبُوا الزِّنا ۖ إِنَّهُ كانَ فاحِشَةً وَساءَ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और व्यभिचार के निकट भी न जाओ। निःसंदेह वह निर्लज्जता (अश्लीलता) तथा बुरी राह है।
Roman Urdu (Maududi)Zina ke qareeb na phatko, wo bahut bura fail (kaam) hai aur bada hi bura raasta
Roman Urdu (Junagarhi)Khabrdaar zinna kay qareeb bhi na phatakna kiyon kay woh bari bey hayaee hai aur boht hi buri raah hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़िना के क़रीब ना फटको, वो बहुत बुरा फेल (काम) है और बड़ा ही बुरा रास्ता
عَرَبِيوَلا تَقتُلُوا النَّفسَ الَّتي حَرَّمَ اللَّهُ إِلّا بِالحَقِّ ۗ وَمَن قُتِلَ مَظلومًا فَقَد جَعَلنا لِوَلِيِّهِ سُلطانًا فَلا يُسرِف فِي القَتلِ ۖ إِنَّهُ كانَ مَنصورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और किसी (ऐसे) प्राणी को क़त्ल न करो, जिसे (क़त्ल करना) अल्लाह ने हराम किया है, परंतु अधिकार के साथ। और जिसे अन्यायपूर्ण रूप से क़त्ल कर दिया जाए, तो हमने उसके उत्तराधिकारी को (बदला लेने का) अधिकार दिया है। अतः वह क़त्ल (बदला लेने) में सीमा से आगे न बढ़े। निश्चय वह मदद किया हुआ है।
Roman Urdu (Maududi)Qatal-e-nafs ka irtiqab na karo jisey Allah ne haraam kiya hai magar haqq ke saath, aur jo shaks mazloomana qatal kiya gaya ho uske wali ko humne qisas (retribution) ke mutalibe ka haqq ata kiya hai. Pas chahiye ke woh qatal mein hadd se na guzre, uski madad ki jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kissi jaan ko jiss ka maarna Allah ney haram ker diya hai hergiz na haq qatal na kerna aur jo shaks mazloom honey ki soorat mein maar dala jaye hum ney uss kay waris ko taqat dey rakhi hai pus ussay chahiye kay maar dalney mein ziyadti na keray be-shak woh madad kiya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)क़त्ल-ए-नफ़्स का इर्तिक़ाब न करो जैसे अल्लाह ने हराम किया है मगर हक़ के साथ, और जो शक्स मज़लूमाना क़तल किया गया हो उसके वाली को हमने क़िस्स (प्रतिशोध) के मुतालिबे का हक़ अता किया है। पास चाहिए के वो क़तल में हद से ना गुज़रे, उसकी मदद की जाएगी
عَرَبِيوَلا تَقرَبوا مالَ اليَتيمِ إِلّا بِالَّتي هِيَ أَحسَنُ حَتّىٰ يَبلُغَ أَشُدَّهُ ۚ وَأَوفوا بِالعَهدِ ۖ إِنَّ العَهدَ كانَ مَسئولًا
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हिन्दी (Al-Omari)और अनाथ के धन के निकट न जाओ, परन्तु उस तरीक़े से जो सबसे उत्तम हो, यहाँ तक कि वह अपनी युवावस्था को पहुँच जाए। तथा प्रतिज्ञा पूरा करो। निःसंदेह प्रतिज्ञा के विषय में प्रश्न किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Maal-e-yateem ke paas na phatko magar ahsan tareeqe se, yahan tak ke woh apne shabaab (jawani) ko pahunch jaye. Ahad ki pabandi karo, beshak ahad ke barey mein tumko jawab-dehi karni hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yateem kay maal kay qareeb bhi na jao ba-juz uss tareeqay kay jo boht hi behtar ho yahan tak kay woh apni balooghat ko phonch jaye aur waday pooray kero kiyon kay qol-o-qarar ki baaz purs honey wali hai
Devnagri Urdu (Maududi)माल-ए-यतीम के पास न फटको मगर अहसान तारीख़े से, यहां तक ​​के वो अपने शबाब (जवानी) को पाहुंच जाए। अहद की पकड़ करो, अहद के बारे में तुमको जवाब-देह करनी होगी
عَرَبِيوَأَوفُوا الكَيلَ إِذا كِلتُم وَزِنوا بِالقِسطاسِ المُستَقيمِ ۚ ذٰلِكَ خَيرٌ وَأَحسَنُ تَأويلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब मापकर दो, तो माप पूरा करो और सीधी तराज़ू से तौलो। यह सर्वोत्तम है और परिणाम की दृष्टि से बहुत बेहतर है।
Roman Urdu (Maududi)Paimane (measure/scales) se do to pura bhar kar do, aur tolo to theek tarazu se tolo. Yeh accha tareeqa hai aur ba-lihaz anjaam bhi yahi behtar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab naapney lago to bharpoor paymaney say naapo aur seedhi tarazoo say tola kero. Yehi behtar hai aur anjam kay lehaz say bhi boht acha hai
Devnagri Urdu (Maududi)पैमाने (माप/तराजू) से दो तो पूरा भर कर दो, और तोलो तो ठीक तराजू से तोलो। ये अच्छा तरीक़ा है और बा-लिहाज़ अंजाम भी यही बेहतर है
عَرَبِيوَلا تَقفُ ما لَيسَ لَكَ بِهِ عِلمٌ ۚ إِنَّ السَّمعَ وَالبَصَرَ وَالفُؤادَ كُلُّ أُولٰئِكَ كانَ عَنهُ مَسئولًا
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हिन्दी (Al-Omari)और ऐसी बात के पीछे न पड़ो, जिसका तुम्हें कोई ज्ञान न हो। निश्चय ही कान तथा आँख और दिल, इनमें से प्रत्येक के बारे में (क़ियामत के दिन) पूछा जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Kisi aisi cheez ke peechey na lago jiska tumhein ilm na ho , yaqeenan aankh, kaan aur dil sab hi ki baaz-purs honi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss baat ki tujhay khabar hi na ho uss kay peechay mat parr. Kiyon kaan aur aankh aur dil inn mein say her aik say pooch gooch ki janey wali hai
Devnagri Urdu (Maududi)किसी ऐसी चीज़ के पीछे ना लगो जिसका तुम्हें इल्म ना हो, यकीनन आंख, कान और दिल सब ही कि बाज़-पुर्स होनी है
عَرَبِيوَلا تَمشِ فِي الأَرضِ مَرَحًا ۖ إِنَّكَ لَن تَخرِقَ الأَرضَ وَلَن تَبلُغَ الجِبالَ طولًا
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हिन्दी (Al-Omari)और धरती पर अकड़कर न चलो। निःसंदेह न तुम धरती को फाड़ सकोगे और न लंबाई में पर्वतों तक पहुँच सकोगे।
Roman Urdu (Maududi)Zameen mein akad kar na chalo, tum na zameen ko phaadh sakte ho na pahadon ki bulandi ko pahunch sakte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur zamin mein akar ker na chal kay na to tu zamin ko phaar sakta hai aur na lambai mein paharon ko phonch sakta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन में अकड़ कर ना चलो, तुम ना ज़मीन को फाड़ सकते हो ना पहाड़ों की बुलंदी को पाहुंच सकते हो
عَرَبِيكُلُّ ذٰلِكَ كانَ سَيِّئُهُ عِندَ رَبِّكَ مَكروهًا
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हिन्दी (Al-Omari)इन सब चीज़ों में से जो बुरी है, वह आपके पालनहार के निकट अप्रिय है।
Roman Urdu (Maududi)In umoor mein se har ek ka bura pehlu tere Rubb ke nazdeek na-pasandida hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn sab kaamon ki buraee teray rab kay nazdeek (sakht) na pasand hai
Devnagri Urdu (Maududi)उमूर में से हर एक का बुरा पहलू तेरे रब के नज़दीक ना-पसंददा है
عَرَبِيذٰلِكَ مِمّا أَوحىٰ إِلَيكَ رَبُّكَ مِنَ الحِكمَةِ ۗ وَلا تَجعَل مَعَ اللَّهِ إِلٰهًا آخَرَ فَتُلقىٰ في جَهَنَّمَ مَلومًا مَدحورًا
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हिन्दी (Al-Omari)ये हिकमत की वे बातें हैं, जिनकी आपके पालनहार ने आपकी ओर वह़्य (प्रकाशना) की है। और अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य न बनाओ। अन्यथा तुम निंदित, धुत्कारे हुए जहन्नम में फेंक दिए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh hikmat ki baatein hain jo tere Rubb ne tujhpar wahee ki hai aur dekh! Allah ke saath koi dusra mabood na bana baith warna tu jahannum mein daal diya jayega malamat zada aur har bhalayi se mehroom hokar
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh bhi munjmila uss wahee kay hai jo teri janib teray rab ney hikmat say utari hai tu Allah kay sath kissi aur ko mabood na banana kay malamat khorda aur raand-e-dargah hoker dozakh mein daal diya jaye
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो हिकमत की बातें हैं जो तेरे रब ने तुझपर वही की है और देख! अल्लाह के साथ कोई दूसरा मबूद न बना बैठा वरना तू जहन्नुम में डाल दिया जाएगा मालामत जादा और हर भलाई से महरूम होकर
عَرَبِيأَفَأَصفاكُم رَبُّكُم بِالبَنينَ وَاتَّخَذَ مِنَ المَلائِكَةِ إِناثًا ۚ إِنَّكُم لَتَقولونَ قَولًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम्हारे पालनहार ने बेटों के लिए तुम्हें चुन लिया है और (अपने लिए) फ़रिश्तों में से बेटियाँ बना ली हैं? निःसंदेह तुम बहुत बड़ी (गंभीर) बात कह रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Kaisi ajeeb baat hai ke tumhare Rubb ne tumhein to beton (sons) se nawaza aur khud apne liye malaika (farishton) ko betiyan bana liya? Badi jhooti baat hai jo tumlog zubaano se nikalte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya beton kay liye to Allah ney tumhen chant liya aur khud apney liye farishton ko larkiyan bana lin? Be-shak tum boht bara bol bol rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)कैसी अजीब बात है के तुम्हारे रब ने तुम्हें तो बेटों (बेटों) से नवाजा और खुद अपने लिए मलिका (फरिश्तों) को बेटियां बना लिया? बड़ी झूठी बात है जो तुमलोग ज़ुबानो से निकलते हो
عَرَبِيوَلَقَد صَرَّفنا في هٰذَا القُرآنِ لِيَذَّكَّروا وَما يَزيدُهُم إِلّا نُفورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने इस क़ुरआन में विभिन्न प्रकार से (तथ्यों का) वर्णन किया है, ताकि लोग शिक्षा ग्रहण करें, परन्तु इससे उनकी घृणा (सत्य से दूरी) ही में वृद्धि होती है।
Roman Urdu (Maududi)Humne is Quran mein tarah tarah se logon ko samjhaya ke hosh mein aayein, magar woh haqq se aur zyada door hi bhaage jaa rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney to iss quran mein her her tarah biyan farma diya kay log samajh jayen lekin iss say enhen to nafrat hi barhti hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने कुरान में तरह तरह से लोगों को समझा के होश में आए, मगर वो हक़ से और ज़्यादा दूर ही भागे जा रहे हैं
عَرَبِيقُل لَو كانَ مَعَهُ آلِهَةٌ كَما يَقولونَ إِذًا لَابتَغَوا إِلىٰ ذِي العَرشِ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि यदि अल्लाह के साथ दूसरे पूज्य (भी) होते, जैसा कि वे (मुश्रिक) कहते हैं, तो वे अर्श (सिंहासन) वाले (अल्लाह) की ओर (पहुँचने की) अवश्य कोई राह खोजते।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), inse kaho ke agar Allah ke saath dusre khuda bhi hotay, jaisa ke yeh log kehte hain, to woh maalik e arsh ke muqaam par pahunchne ki zaroor koshish karte
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! Kay Allah kay siwa aur mabood bhi hotay jaisay kay yeh log kehtay hain to zaroor woh abb tak malik-e-arsh ki janib raah dhoond nikaltay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), इनसे कहो के अगर अल्लाह के साथ दूसरे खुदा भी होते, जैसा के ये लोग कहते हैं, तो वो मालिक ए अर्श के मुकाम पर पहुंचने की जरूर कोशिश करते हैं
عَرَبِيسُبحانَهُ وَتَعالىٰ عَمّا يَقولونَ عُلُوًّا كَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)वह पवित्र है और सर्वोच्च है, उन बातों से, जो वे कहते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Paak hai woh aur bahut baala-o-bartar hai un baaton se jo yeh log keh rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo kuch yeh kehtay hain iss say woh pak aur bala tar boht door aur boht buland hai
Devnagri Urdu (Maududi)पाक है वो और बहुत बाला-ओ-बरतर है उन बातों से जो ये लोग कह रहे हैं
عَرَبِيتُسَبِّحُ لَهُ السَّماواتُ السَّبعُ وَالأَرضُ وَمَن فيهِنَّ ۚ وَإِن مِن شَيءٍ إِلّا يُسَبِّحُ بِحَمدِهِ وَلٰكِن لا تَفقَهونَ تَسبيحَهُم ۗ إِنَّهُ كانَ حَليمًا غَفورًا
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हिन्दी (Al-Omari)सातों आकाश तथा धरती और उनके अंदर मौजूद सभी चीज़ें उसकी पवित्रता का वर्णन करती हैं। और कोई चीज़ ऐसी नहीं है जो उसकी प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का गान न करती हो। लेकिन तुम उनकी तस्बीह (जप) को नहीं समझते। निःसंदेह वह अत्यंत सहनशील, बहुत क्षमा करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Uski paaki to saato (seven) aasman aur zameen aur woh saari cheezein bayan kar rahi hain jo aasman o zameen mein hain. Koi cheez aisi nahin hai jo uski hamd ke saath uski tasbeeh na kar rahi ho, magar tum unki tasbeeh samajhte nahin ho. Haqeeqat yeh hai ke woh bada hi burdbaar (very Forbearing) aur darguzar karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Saton aasman aur zamin aur jo bhi inn mein hai ussi ki tasbeeh ker rahey hain. Aisi koi cheez nahi jo ussay pakeezgi aur tareef kay sath yaad na kerti ho.haan yeh sahih hai kay tum uss ki tasbeeh samajh nahi saktay. Woh bara burbaar aur bakhshney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी पाकी तो सातो (सात) आसमान और ज़मीन और वो सारी चीज़ें बयां कर रही हैं जो आसमान ओ ज़मीन में हैं। कोई चीज़ ऐसी नहीं है जो उसकी हम्द के साथ उसकी तस्बीह ना कर रही हो, मगर तुम उनकी तस्बीह समझते नहीं हो। हकीकत ये है के वो बड़ा ही बोझाबर (बहुत सहनशील) और दरगुज़ार करने वाला है
عَرَبِيوَإِذا قَرَأتَ القُرآنَ جَعَلنا بَينَكَ وَبَينَ الَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِالآخِرَةِ حِجابًا مَستورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब आप क़ुरआन पढ़ते हैं, तो हम आपके बीच और उनके बीच, जो आख़िरत (परलोक) पर ईमान नहीं रखते, एक छिपाने वाले पर्दे की आड़ बना देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab tum Quran padte ho to hum tumhare aur aakhirat par iman na laney walon ke darmiyan ek purda hayal kardete hain
Roman Urdu (Junagarhi)Tu jab quran parhta hai hum teray aur unn logon kay darmiyan jo aakhirat per yaqeen nahi rakhtay aik posheeda hijab daal detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब तुम कुरान पढ़ते हो तो हम तुम्हारे और आख़िरत पर ईमान न लाने वालों के दरमियान एक परदा रखते हैं
عَرَبِيوَجَعَلنا عَلىٰ قُلوبِهِم أَكِنَّةً أَن يَفقَهوهُ وَفي آذانِهِم وَقرًا ۚ وَإِذا ذَكَرتَ رَبَّكَ فِي القُرآنِ وَحدَهُ وَلَّوا عَلىٰ أَدبارِهِم نُفورًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उनके दिलों पर ऐसे खोल चढ़ा दिए हैं कि उसे न समझ सकें तथा उनके कानों में भारीपन (पैदा कर दिए हैं)। और जब आप क़ुरआन में अपने अकेले पालनहार की चर्चा करते हैं, तो वे घृणा से पीठ फेर लेते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur unke dilon par aisa gilaf (invisible curtain) chadha dete hain ke woh kuch nahin samajhte, aur unke kaano mein girani paida kardete hain aur jab tum Quran mein apne ek hi Rubb ka zikr karte ho to woh nafrat se mooh moad letey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kay dilon per hum ney pardey daal diye hain kay woh issay samjhen aur inn kay kano mein bojh aur jab tu sirf Allah hi ka zikar uss ki toheed kay sath iss quran mein kerta hai to woh roo gardani kertay peeth pher ker bhag kharay hotay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और उनके दिलों पर ऐसा गिलाफ़ (अदृश्य पर्दा) चढ़ा देते हैं के वो कुछ नहीं समझते, और उनके कानों में गिरानी अदा करते हैं और जब तुम कुरान में अपने एक ही रब का जिक्र करते हो तो वो नफ़रत से मुह मोड़ लेते हैं
عَرَبِينَحنُ أَعلَمُ بِما يَستَمِعونَ بِهِ إِذ يَستَمِعونَ إِلَيكَ وَإِذ هُم نَجوىٰ إِذ يَقولُ الظّالِمونَ إِن تَتَّبِعونَ إِلّا رَجُلًا مَسحورًا
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हिन्दी (Al-Omari)हम उस उद्देश्य को भली-भाँति जानते हैं जिसके लिए वे इसे सुनते हैं, जब वे आपकी ओर कान लगाते हैं और जब वे आपस में कानाफूसी करते हैं, जब वे अत्याचारी कहते हैं कि तुम लोग तो बस एक जादू किए हुए व्यक्ति के पीछे चल रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Humein maloom hai ke jab woh kaan laga kar tumhari baat sunte hain to dar-asal kya sunte hain, aur jab baith kar baaham sargoshiyan karte hain to kya kehte hain. Yeh zalim aapas mein kehte hain ke yeh ek sehar-zada (bewitched) aadmi hai jiske peechey tumlog jaa rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss gharz say woh log issay suntay hain unn (ki niyaton) say hum khoob aagah hain jab yeh aap ki taraf kaan lagaye huye hotay hain tab bhi aur yeh mashwara kertay hain tab bhi jab kay zalim kehtay hain kay tum uss ki tabeydaari mein lagay huye ho jin per jadoo ker diya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमें मालूम है कि जब वो कान लगा कर तुम्हारी बात सुनते हैं तो दर-असल क्या सुनते हैं, और जब बैठ कर बहस करते हैं तो क्या कहते हैं। ये जालिम आपस में कहते हैं के ये एक सहर-ज़ादा (मोहित) आदमी है जिसके पीछे तुमलोग जा रहे हो
عَرَبِيانظُر كَيفَ ضَرَبوا لَكَ الأَمثالَ فَضَلّوا فَلا يَستَطيعونَ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)देखें तो सही, वे आपके लिए कैसे उदाहरण दे रहे हैं? अतः वे सीधी राह से भटक गए। अब वे सीधी राह नहीं पा सकेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Dekho, kaisi baatein hain jo yeh log tumpar chaante hain, yeh bhatak gaye hain, inhein raasta nahin milta
Roman Urdu (Junagarhi)Dekhen to sahih aap kay liye kiya kiya misalen biyan kertay hain pus woh behak rahey hain. Abb to raah pana inn kay bus mein nahi raha
Devnagri Urdu (Maududi)देखो, कैसी बातें हैं जो ये लोग तुमपर चानते हैं, ये भटक गए हैं, इन्हें रास्ता नहीं मिलता
عَرَبِيوَقالوا أَإِذا كُنّا عِظامًا وَرُفاتًا أَإِنّا لَمَبعوثونَ خَلقًا جَديدًا
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने कहा : क्या जब हम हड्डियाँ और चूर्ण-विचूर्ण हो जाएँगे, तो क्या हम सचमुच नए सिरे से पैदा करके उठाए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh kehte hain “ jab hum sirf haddiyan aur khaak hokar reh jayenge to kya hum naye sirey se paida karke uthaye jayenge?”
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney kaha kay kiya jab hum haddiyan aur (mitti hoker) reza reza hojayen gay to kiya hum azz sir-e-no peda ker kay phir doobara utha kharay kerdiye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)वो कहते हैं “जब हम सिर्फ हड्डियां और खाक होकर रह जाएंगे तो क्या हम नए सिरे से भुगतान करके उठेंगे?”
عَرَبِي۞ قُل كونوا حِجارَةً أَو حَديدًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि तुम पत्थर या लोहा हो जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho “tum patthar ya loha bhi ho jao
Roman Urdu (Junagarhi)Jawab dijiye kay tum pathar bann jao ya loha
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो “तुम पत्थर या लोहा भी हो जाओ
عَرَبِيأَو خَلقًا مِمّا يَكبُرُ في صُدورِكُم ۚ فَسَيَقولونَ مَن يُعيدُنا ۖ قُلِ الَّذي فَطَرَكُم أَوَّلَ مَرَّةٍ ۚ فَسَيُنغِضونَ إِلَيكَ رُءوسَهُم وَيَقولونَ مَتىٰ هُوَ ۖ قُل عَسىٰ أَن يَكونَ قَريبًا
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हिन्दी (Al-Omari)या कोई और रचना (बन जाओ), जो तुम्हारे दिलों में इससे बड़ी मालूम होती हो। फिर वे पूछेंगे : कौन हमें दोबारा पैदा करेगा? आप कह दें : वही जिसने तुम्हें पहली बार पैदा किया। फिर वे आपके आगे अपना सिर हिलाएँगे और कहेंगे : ऐसा कब होगा? आप कह दें : हो सकता है कि वह निकट हो।
Roman Urdu (Maududi)Ya ussey bhi zyada sakht koi cheez jo tumhare zehan mein qabool-e-hayat se baeed tarr ho” (phir bhi tum uth kar rahoge). Woh zaroor poochenge “kaun hai woh jo humein phir zindagi ki taraf palta kar layega?” jawab mein kaho “ wahi jisne pehli baar tumko paida kiya”. Woh sar hila hila kar poochenge “accha , to yeh hoga kab?” tum kaho “ kya ajab , woh waqt qareeb hi aa laga ho
Roman Urdu (Junagarhi)Ya koi aur aisi khulqat jo tumharay dilon mein boht hi sakht maloom ho phir woh yeh poochen kay kaun hai jo doobara humari zindagi lotaye? Aap jawab dey den kay wohi Allah jiss ney tumhen awal martaba peda kiya iss per woh apney sir hila hila ker aap say daryaft keren gay kay acha yeh hai kab? To aap jawab dey den kay kiya ajab kay woh (sa’at) qareeb hi aan lagi ho
Devnagri Urdu (Maududi)या उसे भी ज़्यादा सख्त कोई चीज़ जो तुम्हारे ज़हन में क़बूल-ए-हयात से बाहर हो” (फिर भी तुम उठ कर रहोगे)। वो जरूर पूछेंगे “कौन है वो जो हमें फिर जिंदगी की तरफ पलटा कर लाएगा?” जवाब में कहो "वही जिसने पहली बार तुमको पेदा किया"। तुम कहो " क्या अजब, वो वक्त करीब ही आ लगा हो
عَرَبِييَومَ يَدعوكُم فَتَستَجيبونَ بِحَمدِهِ وَتَظُنّونَ إِن لَبِثتُم إِلّا قَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन वह तुम्हें पुकारेगा, तो तुम उसकी प्रशंसा करते हुए उसकी पुकार का उत्तर दोगे और यह सोचोगे कि तुम (संसार में) थोड़े ही समय रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz woh tumhein pukarega to tum uski hamd karte huey uski pukar ke jawab mein nikal aaogey aur tumhara gumaan us waqt yeh hoga ke hum bas thodi dair hi is halat mein padey rahey hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din woh tumhen bulaye ga tum uss ki tareef kertay huye tameel-e-irshad kero gay aur gumaan kero gay kay tumhara rehna boht hi thora hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज वो तुम्हे पुकारेगा तो तुम उसकी हम्द करते हुए उसकी पुकार के जवाब में निकल आओगे और तुम्हारा गुमान हमारा वक्त ये होगा के हम बस थोड़ी देर ही इस हालत में पड़े रहेंगे हैं”
عَرَبِيوَقُل لِعِبادي يَقولُوا الَّتي هِيَ أَحسَنُ ۚ إِنَّ الشَّيطانَ يَنزَغُ بَينَهُم ۚ إِنَّ الشَّيطانَ كانَ لِلإِنسانِ عَدُوًّا مُبينًا
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हिन्दी (Al-Omari)और आप मेरे बंदों से कह दें कि वह बात कहें जो सबसे उत्तम हो। निःसंदेह शैतान उनके बीच बिगाड़ पैदा करता है। निःसंदेह शैतान इनसान का खुला दुश्मन है।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Muhammad), mere bandon se kehdo ke zubaan se woh baat nikala karein jo behtareen ho. Dar-asal yeh shaytan hai jo Insano ke darmiyan fasaad dalwane ki koshish karta hai. Haqeeqat yeh hai ke shaytan Insaan ka khula dushman hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur meray bandon say keh dijiye kay woh boht hi achi baat mun say nikala keren kiyon kay shetan aapas mein fasad dalwata hai. Be-shak shetan insan ka khulla dushman hai
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ मुहम्मद), मेरे बंदों से कहदो के ज़ुबान से वो बात निकला करें जो बहती हो। दर-असल ये शैतान है जो इंसानों के दरमियान फ़साद डालने की कोशिश करता है। हकीकत ये है के शैतान इंसान का खुला दुश्मन है
عَرَبِيرَبُّكُم أَعلَمُ بِكُم ۖ إِن يَشَأ يَرحَمكُم أَو إِن يَشَأ يُعَذِّبكُم ۚ وَما أَرسَلناكَ عَلَيهِم وَكيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारा पालनहार, तुम्हें बेहतर जानता है। यदि वह चाहे तो तुमपर दया करे या यदि चाहे तो तुम्हें अज़ाब दे। और हमने आपको उनपर ज़िम्मेदार बनाकर नहीं भेजा है।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara Rubb tumhare haal se zyada waqif hai. Woh chahe to tumpar reham karey aur chahe to tumhein azaab de de. Aur (aey Nabi) humne tumko logon par hawaladaar (guardian) banakar nahin bheja hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhara rab tum say ba-nisbat tumharay boht ziyada jannay wala hai woh agar chahaye to tum per reham ker dey ya agar woh chahaye tumhen azab dey. Hum ney aap ko inn ka zaimay daar thehra ker nahi bheja
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा रब तुम्हारे हाल से ज्यादा वाकिफ है। वो चाहे तो तुमपर रहम करे और चाहे तो तुम्हें अज़ाब दे दे। और (ऐ नबी) हमने तुमको लोगों पर हवालादार (अभिभावक) बनाकर नहीं भेजा है
عَرَبِيوَرَبُّكَ أَعلَمُ بِمَن فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۗ وَلَقَد فَضَّلنا بَعضَ النَّبِيّينَ عَلىٰ بَعضٍ ۖ وَآتَينا داوودَ زَبورًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आपका पालनहार उन्हें अधिक जानता है, जो आकाशों तथा धरती में हैं। और हमने कुछ नबियों को कुछ पर श्रेष्ठता प्रदान की और दाऊद को ज़बूर (पुस्तक) प्रदान की।
Roman Urdu (Maududi)Tera Rubb zameen aur aasmano ki makhlooqat ko zyada jaanta hai. Humne baaz paighambaron ko baaz se badh kar martabe diye, aur humne hi Dawood ko zaboor di thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aasamno-o-zamin mein jo bhi hai aap ka rab sab ko bakhoobi janta hai. Hum ney baaz payghumbaron ko baaz per behtari aur bartari di hai aur dawood ko zaboor hum ney ata farmaee hai
Devnagri Urdu (Maududi)तेरा रब ज़मीन और आसमान की मखलूक़त को ज़्यादा जानता है। हमने पैगम्बरों को बाज़ से बर्बाद कर दिया, और हमने ही दाऊद को ज़बूर दी थी
عَرَبِيقُلِ ادعُوا الَّذينَ زَعَمتُم مِن دونِهِ فَلا يَملِكونَ كَشفَ الضُّرِّ عَنكُم وَلا تَحويلًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि उन्हें पुकारो, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा (पूज्य) समझते हो। वे न तो तुमसे कष्ट दूर करने का अधिकार रखते है और न (उसे) बदलने का।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho pukar dekho un maboodon ko jinko tum khuda ke siwa (apna kaarsaaz) samajhte ho, woh kisi takleef ko tumse na hata sakte hain na badal sakte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay Allah kay siwa jinhen tum mabood samajh rahey ho unhen pukaro lekin na to woh tum say kissi takleef ko door ker saktay hain aur na badal saktay hain
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो पुकार देखो उन माबूदों को जिनको तुम खुदा के सिवा (अपना कारसाज़) समझते हो, वो किसी तकलीफ को तुमसे ना हटा सकते हैं ना बदल सकते हैं हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ يَدعونَ يَبتَغونَ إِلىٰ رَبِّهِمُ الوَسيلَةَ أَيُّهُم أَقرَبُ وَيَرجونَ رَحمَتَهُ وَيَخافونَ عَذابَهُ ۚ إِنَّ عَذابَ رَبِّكَ كانَ مَحذورًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिन्हें ये (मुश्रिक) लोग पुकारते हैं, वे स्वयं अपने पालनहार की निकटता का साधन तलाश करते हैं कि उनमें से कौन (अल्लाह से) सबसे अधिक निकट हो जाए, तथा उसकी दया की आशा रखते हैं और उसकी यातना से डरते हैं। निःसंदेह आपके पालनहार की यातना डरने की चीज़ है।
Roman Urdu (Maududi)Jinko yeh log pukarte hain woh to khud apne Rubb ke huzoor rasayi haasil karne ka waseela talash kar rahey hain (seek means of approach) ke kaun ussey qareeb tar ho jaye aur woh uski rehmat ke umeedwar aur uske azaab se khaif (darte) hain. Haqeeqat yeh hai ke tere Rubb ka azaab hai hi darne ke lahiq
Roman Urdu (Junagarhi)Jinhen yeh log pukartay hain khud woh apney rab kay taqarrub ki justujoo mein rehtay hain kay inn mein say kaun ziyada nazdeek hojaye woh khud uss ki rehmat ki umeed rakhtay aur uss kay azab say khifzada rehtay hain (baat bhi yehi hai) kay teray rab ka azab darney ki cheez hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिनको ये लोग पुकारते हैं वो तो खुद अपने रब के हुजूर रसाई हासिल करने का वसीला तलाश कर रहे हैं (दृष्टिकोण के साधन तलाशते हैं) के कौन उसे करीब तार हो जाए और वो उसकी रहमत के उम्मीद और उसके अज़ाब से खैफ (डरते) हैं। हकीकत ये है कि तेरे रब का अज़ाब है हाय डरने के लाहिक
عَرَبِيوَإِن مِن قَريَةٍ إِلّا نَحنُ مُهلِكوها قَبلَ يَومِ القِيامَةِ أَو مُعَذِّبوها عَذابًا شَديدًا ۚ كانَ ذٰلِكَ فِي الكِتابِ مَسطورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और कोई (अत्याचारी) बस्ती ऐसी नहीं है, जिसे हम क़ियामत के दिन से पहले विनष्ट न कर दें या कड़ी यातना न दें। यह बात किताब (लौहे महफ़ूज़) में लिखी हुई है।
Roman Urdu (Maududi)Aur koi basti aisi nahin jisey hum qayamat se pehle halaak na karein ya sakht azaab na dein. Yeh nawishta-e-ilahi (Eternal Record) mein likha hua hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jitni bhi bastiyan hain hum qayamat kay din say pehlay pehlay ya to unhen halak ker denay walay hain ya sakht tar azab denay walay hain. Yeh to kitab mein likha ja chuka hai
Devnagri Urdu (Maududi)और कोई बस्ती ऐसी नहीं जिसे हम कयामत से पहले हलाक न करें या सच अज़ाब न दें। ये नविश्ता-ए-इलाही (अनन्त रिकॉर्ड) में लिखा हुआ है
عَرَبِيوَما مَنَعَنا أَن نُرسِلَ بِالآياتِ إِلّا أَن كَذَّبَ بِهَا الأَوَّلونَ ۚ وَآتَينا ثَمودَ النّاقَةَ مُبصِرَةً فَظَلَموا بِها ۚ وَما نُرسِلُ بِالآياتِ إِلّا تَخويفًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमें निशानियाँ भेजने से केवल इस बात ने रोका कि पिछले लोगों ने उन्हें झुठला दिया। और हमने समूद (समुदाय) को ऊँटनी का स्पष्ट चमत्कार दिया, तो उन्होंने उसपर अत्याचार किया। और हम निशानियाँ (चमत्कार) केवल डराने के लिए भेजते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur humko nishniyan bhejne se nahin roka magar is baat ne ke insey pehle ke log unko jhutla chuke hain. (Chunanche dekhlo) Samood ko humne alaniya ountni (she-camel) laa kar di aur unhon ne uspar zulm kiya. Hum nishaniyan isi liye to bhejte hain ke log unhein dekh kar darein
Roman Urdu (Junagarhi)Humen nishanaat (mojzaat) kay nazil kerney say rok sirf issi ki hai kay aglay log enhen jhutla chuken hain hum ney samoodiyon ko bator baseerat kay oontni di lekin unhon ney uss per zulm kiya hum to logon ko dhamkaney kay liye hi nishaniyan bhejtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और हमको निश्निया भेजने से नहीं रोका मगर इस बात ने के इनसे पहले के लोग उनको झुठला चुके हैं। (चुनांचे देखलो) समूद को हमने एलानिया ऊंटनी (वह-ऊंटनी) ला कर दी और उन्होन ने उसपर जुल्म किया। हम निशानियां इसी के लिए तो भेजते हैं के लोग उन्हें देख कर डरें
عَرَبِيوَإِذ قُلنا لَكَ إِنَّ رَبَّكَ أَحاطَ بِالنّاسِ ۚ وَما جَعَلنَا الرُّؤيَا الَّتي أَرَيناكَ إِلّا فِتنَةً لِلنّاسِ وَالشَّجَرَةَ المَلعونَةَ فِي القُرآنِ ۚ وَنُخَوِّفُهُم فَما يَزيدُهُم إِلّا طُغيانًا كَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी! याद करें) जब हमने आपसे कहा : निःसंदेह आपके पालनहार ने लोगों को घेरे में ले रखा है। और हमने (मेराज की रात) आपको जो कुछ दिखाया, उसे लोगों के लिए एक आज़माइश बना दिया, और उस वृक्ष को भी (आज़माइश बना दिया) जिसे क़ुरआन में शापित ठहराया गया है। और हम उन्हें डराते हैं, किंतु यह (डराना) उनकी बड़ी सरकशी ही को बढ़ाता है।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo (aey Muhammad), humne tumse keh diya tha ke tere Rubb ne in logon ko gher rakkha hai aur yeh jo kuch abhi humne tumhein dikhya hai, isko aur us darakht ko jispar Quran mein laanat ki gayi hai, humne in logon ke liye bas ek fitna banakar rakh diya. Hum inhein tambeeh (warning) par tambeeh (warning) kiye jaa rahey hain, magar har tambeeh inki sarkashi hi mein izafa kiye jati hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaad kero jabkay hum ney aap say farma diya kay aap kay rab ney logon ko gher liya hai. Jo roya (any royat) hum ney aap ko dikhaee thi woh logon kay liye saaf aazmaeesh hi thi aur issi tarah woh darakht bhi jiss say quran mein izhar-e-nafrat kiya gaya hai. Hum unehn dara rahey hain lekin yeh unhen aur bari sirkashi mein barha raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो (ऐ मुहम्मद), हमने तुमसे कह दिया था के तेरे रब ने इन लोगों को घेर रखा है और ये जो कुछ अभी हमने तुम्हें दिखाया है, इसको और हम दरख्त को जिसपर कुरान में लानत की गई है, हमने लोगों के लिए बस एक फ़ितना बनाकर रख दिया। हम उनमें तम्बीह (चेतावनी) बराबर तम्बीह (चेतावनी) किए जा रहे हैं, मगर हर तम्बीह इनकी सरकशी ही में इज़ाफ़ा किए जाती है
عَرَبِيوَإِذ قُلنا لِلمَلائِكَةِ اسجُدوا لِآدَمَ فَسَجَدوا إِلّا إِبليسَ قالَ أَأَسجُدُ لِمَن خَلَقتَ طينًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब हमने फ़रिश्तों से कहा : आदम को सजदा करो, तो इबलीस के सिवा सबने सजदा किया। उसने कहा कि क्या मैं उसे सजदा करूँ, जिसे तूने मिट्टी से पैदा किया है?
Roman Urdu (Maududi)Aur yaad karo jabke humne malaika (farishton) se kaha Adam ko sajda karo, to sab ne sajda kiya, magar Iblees ne na kiya, usne kaha “ kya main usko sajda karoon jisey tu nay mitti se banaya hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab hum ney farishton ko hukum diya kay adam ko sajda kero to iblees kay siwa sab ney kiya uss ney kaha kiya mein ussay sajda keroon jissay tu ney mitti say peda kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)और याद करो जबके हमने मलाइका (फरिश्तों) से कहा आदम को सजदा करो, तो सब ने सजदा किया, मगर इबलीस ने ना किया, उसने कहा “क्या मैं उसको सजदा करूं जैसे तू ने मिट्टी से बनाया है?”
عَرَبِيقالَ أَرَأَيتَكَ هٰذَا الَّذي كَرَّمتَ عَلَيَّ لَئِن أَخَّرتَنِ إِلىٰ يَومِ القِيامَةِ لَأَحتَنِكَنَّ ذُرِّيَّتَهُ إِلّا قَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)(तथा) उसने कहा : क्या तूने इसे देखा, जिसे तूने मेरे ऊपर सम्मानित किया है? यदि तूने मुझे क़ियामत के दिन तक अवसर दिया, तो मैं निश्चित रूप से कुछ को छोड़कर, उसकी संतति को अपने वश में कर लूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh bola “dekh to sahi, kya yeh is qabil tha ke tu ne isey mujhpar fazilat di? Agar tu mujhey qayamat ke din tak mohlat dey to main iski puri nasal ki behakani (uproot) kar daloon. Bas thode hi log mujhse bach sakenge.”
Roman Urdu (Junagarhi)Acha dekh ley issay tu ney mujh per buzrugi to di hai lekin agar mujhay bhi qayamat tak tu ney dheel di to mein iss ki aulad ko ba-juz boht thoray logon kay apney bus mein kerloon ga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो बोला "देख तो सही, क्या ये काबिल था कि तू ने इसे मुझपर फजीलत दी? अगर तू मुझे कयामत के दिन तक मोहलत दे तो मैं इसकी पूरी नाक की बेहकानी (उखाड़) कर डालूं। बस थोड़े ही लोग मुझे बचा सकेंगे।"
عَرَبِيقالَ اذهَب فَمَن تَبِعَكَ مِنهُم فَإِنَّ جَهَنَّمَ جَزاؤُكُم جَزاءً مَوفورًا
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने कहा : जा! उनमें से जो भी तेरी बात मानेगा, तो निःसंदेह तुम सब का भरपूर बदला जहन्नम है।
Roman Urdu (Maududi)Allah taala ne farmaya, “accha to jaa, inmein se jo bhi teri pairwi karein, tujh samaith un sab ke liye jahannum hi bharpur jaza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Irshad hua kay jaa inn mein say jo bhi tera tabeydaar hojayega to tum sab ki saza jahannum hai jo poora poora badla hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ताला ने फरमाया, "अच्छा तो जा, इनमें से जो भी तेरी जोड़ी करें, तुझ समेत उन सब के लिए जहन्नुम ही भरपुर जजा है
عَرَبِيوَاستَفزِز مَنِ استَطَعتَ مِنهُم بِصَوتِكَ وَأَجلِب عَلَيهِم بِخَيلِكَ وَرَجِلِكَ وَشارِكهُم فِي الأَموالِ وَالأَولادِ وَعِدهُم ۚ وَما يَعِدُهُمُ الشَّيطانُ إِلّا غُرورًا
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हिन्दी (Al-Omari)उनमें से जिस पर तेरा बस चल सके, उसे अपनी आवाज़ से बहका ले, और उनपर अपने सवार और प्यादे चढ़ा ला, तथा धन और संतान में उनका साझी बन जा, और उनसे झूठे वादे कर। और शैतान उनसे जो वादा करता है, वह धोखे के सिवा कुछ नहीं होता।
Roman Urdu (Maududi)Tu jis jis ko apni dawat se phisla sakta hai phisla le. Unpar apne sawar (horsemen) aur pyade (footmen) chadha la, maal aur aulad mein unke saath saajha (partner) laga, aur unko wadon ke jaal mein phans, aur shaytan ke wadey ek dhoke ke siwa aur kuch bhi nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein say tu jissay bhi apni aawaz say behka sakay behka ley aur inn per apney sawar aur piyaday charha laa aur inn kay maal aur aulad mein say apna bhi sajha laga aur enhen jhootay waday dey ley. Inn say jitney bhi waday shetan kay hotay hain sab kay sab sirasir fareb hain
Devnagri Urdu (Maududi)तू जिस को अपनी दावत से फिसल सकता है फिसल ले। उन पर अपने सवार (घुड़सवार) और प्यादे (पैदल) चढ़ा ला, माल और औलाद में उनके साथ साझी (साथी) लगा, और उनको वादों के जाल में फंस, और शैतान के वादे एक धोखे के सिवा और कुछ भी नहीं
عَرَبِيإِنَّ عِبادي لَيسَ لَكَ عَلَيهِم سُلطانٌ ۚ وَكَفىٰ بِرَبِّكَ وَكيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मेरे (सच्चे) बंदों पर तेरा कोई वश नहीं चल सकता और आपका पालनहार संरक्षक के रूप में काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan mere bandon par tujhey koi iqtedar haasil na hoga, aur tawakkul (bharose) ke liye tera Rubb kaafi hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Meray sachay bandon per tera koi qaboo aur bus nahi. Tera rab kaarsaazi kerney wala kafi hai
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन मेरे बंदों पर तुझ पर कोई इक्तेदार हासिल न होगा, और तवक्कुल (भरोसे) के लिए तेरा रुब काफी है”
عَرَبِيرَبُّكُمُ الَّذي يُزجي لَكُمُ الفُلكَ فِي البَحرِ لِتَبتَغوا مِن فَضلِهِ ۚ إِنَّهُ كانَ بِكُم رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारा पालनहार वह है, जो तुम्हारे लिए समुद्र में नौका चलाता है, ताकि तुम उसका अनुग्रह (रोज़ी) तलाश करो। निःसंदेह वह तुमपर अत्यंत दयालु है।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara (haqeeqi) Rubb to woh hai jo samandar mein tumhari kashti chalata hai taa-ke tum uska fazal talash karo. Haqeeqat yeh hai ke woh tumhare haal par nihayat meharban hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tera perwerdigar woh hai jo tumharay liye darya mein kashtiyan chalata hai takay tum uss ka fazal talash kero. Won tumharay upper boht hi meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा (हकीकी) रुब तो वो है जो समंदर में तुम्हारी कश्ती चलाता है ता-के तुम उसका फ़ज़ल तलाश करो। हकीकत ये है के वो तुम्हारे हाल पर निहायत मेहरबान है
عَرَبِيوَإِذا مَسَّكُمُ الضُّرُّ فِي البَحرِ ضَلَّ مَن تَدعونَ إِلّا إِيّاهُ ۖ فَلَمّا نَجّاكُم إِلَى البَرِّ أَعرَضتُم ۚ وَكانَ الإِنسانُ كَفورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब समुद्र में तुमपर कोई आपदा आती है, तो अल्लाह के सिवा तुम जिन्हें पुकारते हो, गुम हो जाते हैं, फिर जब वह (अल्लाह) तुम्हें बचाकर थल तक पहुँचा देता है, तो (उससे) मुँह फेर लेते हो। और मनुष्य बहुत ही कृतघ्न है।
Roman Urdu (Maududi)Jab samandar mein tumpar museebat aati hai to us ek ke siwa dusre jin jin ko tum pukara karte ho woh sab ghum ho jatey hain, magar jab woh tumko bacha kar khushki(land) par pahuncha deta hai to tum ussey mooh moad jatey ho.Insan waqai bada nashukra hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur samandaron mein musibat phonchtay hi jinhen tum pukartay thay sab gumm hojatay hain sirf wohi Allah baqi reh jata hai. Phir jab woh tumhen khushki ki taraf bacha laata hai to tum mun pher letay ho aur insan bara hi na shukra hai
Devnagri Urdu (Maududi)जब समंदर में तुम्हारी मुसीबत आती है तो हमें एक के सिवा दूसरे जिन को तुम पुकारते हो वो सब गम हो जाते हैं, मगर जब तुमको बच्चा कर ख़ुशी (जमीन) पर पहूंचा देता है तो तुम उसके मुंह मोड़ जाते हो। इंसान वक्त बड़ा नाशुक्रा है
عَرَبِيأَفَأَمِنتُم أَن يَخسِفَ بِكُم جانِبَ البَرِّ أَو يُرسِلَ عَلَيكُم حاصِبًا ثُمَّ لا تَجِدوا لَكُم وَكيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम इस बात से निश्चिंत हो गए हो कि अल्लाह तुम्हें थल की ओर ले जाकर (धरती में) धँसा दे या तुमपर पत्थरों की बारिश कर दे, फिर तुम अपना कोई संरक्षक न पाओ?
Roman Urdu (Maududi)Accha, to kya tum is baat se bilkul be-khauf ho ke khuda kabhi khushki (land) par hi tumko zameen mein dhansa dey, ya tumpar pathrao karne wali aandhi bhej de aur tum ussey bachane wala koi himayati na pao
Roman Urdu (Junagarhi)To kiya tum iss say bey khof hogaye ho kay tumhen khushki ki taraf (ley jaa ker zamin) mein dhansa dey ya tum per pathron ki aandhi bhej dey. Phir tum apney liye kissi nigehbaan ko na paa sako
Devnagri Urdu (Maududi)अच्छा, तो क्या तुम इस बात से बिल्कुल बे-खौफ हो के खुदा कभी खुश्की (जमीन) पर ही तुमको जमीन में धांसा दे, या तुम पथराओ करने वाली आंधी भेज दे और तुम उसे बचाने वाला कोई हिमायती ना पाओ
عَرَبِيأَم أَمِنتُم أَن يُعيدَكُم فيهِ تارَةً أُخرىٰ فَيُرسِلَ عَلَيكُم قاصِفًا مِنَ الرّيحِ فَيُغرِقَكُم بِما كَفَرتُم ۙ ثُمَّ لا تَجِدوا لَكُم عَلَينا بِهِ تَبيعًا
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हिन्दी (Al-Omari)या तुम इस बात से निश्चिंत हो गए हो कि वह तुम्हें दूसरी बार उस (समुद्र) में लौटा दे, फिर तुमपर तोड़ देने वाली प्रचंड हवा भेज दे, तो वह तुम्हें तुम्हारी कृतघ्नता के कारण डुबो दे। फिर तुम अपने लिए हमारे विरुद्ध इस मामले में कोई हमारा पीछा करने वाला न पाओ?
Roman Urdu (Maududi)Aur kya tumhein iska koi andesha nahin ke khuda phir kisi waqt samandar mein tumko le jaye aur tumhari nashukri ke badle tumpar sakht toofaani hawa bhej kar tumhein garq karde aur tumko aisa koi na miley jo ussey tumhare is anjaam ki pooch-gajj kar sakey
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum iss baat say bey khof hogaye ho kay Allah Taalaa phir tumhen doobara darya kay safar mein ley aaye aur tum per tez-o-tund hawaon kay jhonkay bhej dey aur tumharay kufur kay baees tumhen dobo dey. Phir tum apney liye hum per iss ka dawa (peecha) kerney wala kissi ko na pao
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या तुम्हें इसका कोई अंदेशा नहीं के खुदा फिर कोई वक्त समंदर में तुमको ले जाए और तुम्हारी नाखुशी के बदले तुम्हारे साथ तूफानी हवा भेज कर तुम्हें गुस्सा करदे और तुमको ऐसा कोई ना मिले जो उसे तुम्हारे इस अंजाम की पुछ-गज्ज कर सके
عَرَبِي۞ وَلَقَد كَرَّمنا بَني آدَمَ وَحَمَلناهُم فِي البَرِّ وَالبَحرِ وَرَزَقناهُم مِنَ الطَّيِّباتِ وَفَضَّلناهُم عَلىٰ كَثيرٍ مِمَّن خَلَقنا تَفضيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय ही हमने आदम की संतान को सम्मान प्रदान किया, और उन्हें थल और जल में सवार किया, और उन्हें अच्छी-पाक चीज़ों की रोज़ी दी, तथा हमने अपने पैदा किए हुए बहुत-से प्राणियों पर उन्हें श्रेष्ठता प्रदान की।
Roman Urdu (Maududi)Yeh to hamari inayat hai ke humne bani Adam ko buzurgi (honour) di aur unhein khushki (land) o tari (sea) mein sawariyan ata kiye aur unko pakeeza cheezon se rizq diya aur apni bahut se makhlooqat par numayan fawqiyat (exalt) bakshi
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney aulad-e-adam ko bari izzat di aur unhen khuski aur tari ki sawariyan din aur unhen pakeeza cheezon ki roziyan din aur apni boht si makhlooq per unhen fazilat ata farmaee
Devnagri Urdu (Maududi)ये तो हमारी इनायत है के हमने बानी आदम को बुज़ुर्गी (सम्मान) दी और उन्हें ख़ुशकी (ज़मीन) ओ तारी (समुद्र) में सवारियां अता की और उनको पाकीज़ा चीज़ों से रिज़क दिया और अपनी बहुत से मखलूक़त पर नुमायां फौक़ियात (उत्कृष्ट) बख्शी
عَرَبِييَومَ نَدعو كُلَّ أُناسٍ بِإِمامِهِم ۖ فَمَن أوتِيَ كِتابَهُ بِيَمينِهِ فَأُولٰئِكَ يَقرَءونَ كِتابَهُم وَلا يُظلَمونَ فَتيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन हम लोगों (के प्रत्येक समूह) को उनके इमाम (नायक) के साथ बुलाएँगे, फिर जिसे उसका कर्मपत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया, तो ऐसे लोग अपना कर्मपत्र पढ़ेंगे और उनपर खजूर की गुठली के धागे के बराबर भी अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Phir khayal karo us din ka jabke hum har Insaani giroh ko uske peshwa(leader) ke sath bulayenge, us waqt jin logon ko unka naam-e-aamal seedhay haath mein diya gaya woh apna karnama padhenge aur unpar zarra barabar zulm na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din hum her jamat ko uss kay paishwa samet bulayen gay. Phir jin ka bhi aemaal nama dayen hath mein dey diya gaya woh to shoq say apna naam-e-aemaal parheny lagen gay aur dhagay kay barabar (zarra barabar) bhi zulm na kiye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)फ़िर खयाल करो उस दिन का जबके हम हर इंसान गिरो ​​को उसके पेशवा (नेता) के साथ बुलाएंगे, हमें वक्त जिन लोगों ने उनका नाम-ए-आमाल सीधे हाथ में दिया वो अपना कारनामा पढ़ेंगे और उन्पर जरा बराबर जुल्म न होगा
عَرَبِيوَمَن كانَ في هٰذِهِ أَعمىٰ فَهُوَ فِي الآخِرَةِ أَعمىٰ وَأَضَلُّ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जो इस (संसार) में अंधा बनकर रहा, वह आख़िरत में अधिक अंधा होगा और रास्ते से बहुत ज़्यादा भटका हुआ होगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo is duniya mein andha bankar raha woh aakhirat mein bhi andha hi rahega balke raasta paaney mein andhey se bhi zyada nakaam
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo koi iss jahan mein andha raha woh aakhirat mein bhi andha aur raastay say boht hi bhatka hua rahey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और जो इस दुनिया में अंधा बनकर रहा वो आख़िरत में भी अँधा ही रहेगा बलके रास्ते पाने में अँधे से भी ज़्यादा नाकाम
عَرَبِيوَإِن كادوا لَيَفتِنونَكَ عَنِ الَّذي أَوحَينا إِلَيكَ لِتَفتَرِيَ عَلَينا غَيرَهُ ۖ وَإِذًا لَاتَّخَذوكَ خَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह क़रीब था कि वे (काफ़िर लोग) आपको उस वह़्य से फेर दें, जो हमने आपकी ओर भेजी है, ताकि आप उसके अलावा हमपर कुछ और गढ़ लें। और तब तो वे आपको अवश्य अपना घनिष्ठ मित्र बना लेते।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), in logon ne is koshish mein koi kasar utha nahin rakkhi ke tumhein fitne mein daal kar us Wahee se pher dein jo humne tumhari taraf bheji hai, taa-ke tum hamare naam par apni taraf se koi baat ghado(fabricate). Agar tum aisa karte to woh zaroor tumhein apna dost bana letey
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log aap ko iss wahee say jo hum ney aap per utari hai behkana chahtay hain kay aap iss kay siwa kuch aur hi humaray naam say ghar ghara len tab to aap ko yeh log apna wali dost bana letay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), लोगों ने इस कोशिश में कोई कसार उठाया नहीं राखी के तुम्हें फिटने में डाल कर हमें वही से फेर दें जो हमने तुम्हारी तरफ भेजी है, ता-के तुम हमारे नाम पर अपनी तरफ से कोई बात गढ़ो। अगर तुम ऐसा करते तो वो जरूर तुम्हें अपना दोस्त बना लेते
عَرَبِيوَلَولا أَن ثَبَّتناكَ لَقَد كِدتَ تَركَنُ إِلَيهِم شَيئًا قَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम आपको सुदृढ़ न रखते, तो निःसंदेह निकट था कि आप उनकी ओर कुछ थोड़ा-सा झुक जाते।
Roman Urdu (Maududi)Aur baeed na tha ke agar hum tumhein mazboot na rakhte to tum unki taraf kuch na kuch jhuk jatey
Roman Urdu (Junagarhi)Agar hum aap ko sabit qadam na rakhtay to boht mumkin tha kay inn ki taraf qadray qaleel maeel ho hi jatay
Devnagri Urdu (Maududi)और बुरा ना था के अगर हम तुम्हें मजबूत ना रखते तो तुम उनकी तरफ कुछ ना कुछ झुक जाते
عَرَبِيإِذًا لَأَذَقناكَ ضِعفَ الحَياةِ وَضِعفَ المَماتِ ثُمَّ لا تَجِدُ لَكَ عَلَينا نَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तब हम आपको जीवन में भी दोहरा तथा मरने के बाद भी दोहरा (अज़ाब) चखाते। फिर आप अपने लिए हमारे विरुद्ध कोई सहायक न पाते।
Roman Urdu (Maududi)Lekin agar tum aisa karte to hum tumhein duniya mein bhi dohre (double) azaab ka maza chakkhate aur aakhirat mein bhi dohre azaab ka, phir hamare muqable mein tum koi madadgaar na paatey
Roman Urdu (Junagarhi)Phir to hum bhi aap ko dohra azab duniya ka kertay aur dohra hi maut ka phir aap to apney liye humaray muqablay mein kissi ko madadgar bhi na patay
Devnagri Urdu (Maududi)लेकिन अगर तुम ऐसा करते तो हम तुम्हें दुनिया में भी दोहरे (डबल) अजब का मजा चखाते और आख़िरत में भी दोहरे अज़ाब का, फिर हमारे मुकाबले में तुम कोई मददगार न पाते
عَرَبِيوَإِن كادوا لَيَستَفِزّونَكَ مِنَ الأَرضِ لِيُخرِجوكَ مِنها ۖ وَإِذًا لا يَلبَثونَ خِلافَكَ إِلّا قَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय ही वे क़रीब थे कि आपको इस भूभाग (मक्का) से फिसला दें ताकि आपको यहाँ से बाहर निकाल दें। और तब वे आपके पश्चात् थोड़ा ही ठहर पाते।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh log is baat par bhi tuley rahey hain ke tumhare qadam is sar-zameen se ukhadh (uproot) dein aur tumhein yahan se nikal bahar karein , lekin agar yeh aisa karenge to tumhare baad yeh khud yahan kuch zyada dair na thehar sakenge
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh to aap kay qadam iss sir zamin say ukharaney hi lagay thay kay aap ko iss say nikal den. Phir yeh bhi aap kay baad boht hi kum thehar patay
Devnagri Urdu (Maududi)और ये लोग इस बात पर भी तुले रहे हैं के तुम्हारे कदम इस सर-जमीन से उखाड़ दें (उखाड़ें) दीन और तुम्हें यहां से निकल बाहर करें, लेकिन अगर ये ऐसा करेंगे तो तुम्हारे बाद ये खुद यहां कुछ ज्यादा देर न ठहर सकेंगे
عَرَبِيسُنَّةَ مَن قَد أَرسَلنا قَبلَكَ مِن رُسُلِنا ۖ وَلا تَجِدُ لِسُنَّتِنا تَحويلًا
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हिन्दी (Al-Omari)उन (रसूलों) के नियम के समान जिन्हें हमने आपसे पहले अपने रसूलों में से भेजा। और आप हमारे नियम में कोई परिवर्तन नहीं पाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hamara mustaqil tareeqe-kar hai jo un sab Rasoolon ke maamle mein humne barta hai jinhein tumse pehle humne bheja tha, aur hamare tareeqe-kar mein tum koi tagayyur (change) na paogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aisa hi dastoor unn ka tha jo aap say pehlay rasool hum ney bhejay aur aap humaray dastoor mein kabhi radd-o-badal na payen gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये हमारा मुस्तकिल तारीख-कर है जो उन सब रसूलों के मामले में हमने बारता है जिन्होंने तुमसे पहले हमें भेजा था, और हमारे तारीखे-कार में तुम कोई तगय्यूर (बदलाव) ना पाओगे
عَرَبِيأَقِمِ الصَّلاةَ لِدُلوكِ الشَّمسِ إِلىٰ غَسَقِ اللَّيلِ وَقُرآنَ الفَجرِ ۖ إِنَّ قُرآنَ الفَجرِ كانَ مَشهودًا
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हिन्दी (Al-Omari)सूर्य के ढलने से रात के अँधेरे तक नमाज़ क़ायम करें, तथा फ़ज्र की नमाज़ भी (क़ायम करें)। निःसंदेह फ़ज्र की नमाज़ (फ़रिश्तों की) उपस्थिति का समय है।
Roman Urdu (Maududi)Namaz qayam karo zawal-e-aftaab (declining of the sun) se lekar raat ke andhere tak, aur fajr ke Quran ka bhi intezam karo, kyunke Quran e fajr mashood (witnessed) hota hai
Roman Urdu (Junagarhi)Namaz ko qaeem keren aftab kay dhalney say ley ker raat ki tareeki tak aur fajar ka quran parhna bhi yaqeenan fajar kay waqt ka quran parhna hazir kiya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)नमाज़ क़याम करो ज़वाल-ए-आफ़ताब (सूरज का ढलना) से लेकर रात के अँधेरे तक, और फज्र के कुरान का भी इंतेज़ाम करो, क्योंकि कुरान ए फज्र मशूद (गवाह) होता है
عَرَبِيوَمِنَ اللَّيلِ فَتَهَجَّد بِهِ نافِلَةً لَكَ عَسىٰ أَن يَبعَثَكَ رَبُّكَ مَقامًا مَحمودًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप रात के कुछ समय में उठकर नमाज़ (तहज्जुद) पढ़िए। यह आपके लिए अतिरिक्त है। क़रीब है कि आपका पालनहार आपको "मक़ामे महमूद" पर खड़ा करे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Raat ko tahajjud padho, yeh tumhare liye nafl hai, baeed (door /far) nahin ke tumhara Rubb tumhein maqaam e mehmood par faiz karde
Roman Urdu (Junagarhi)Raat kay kuch hissay mein tahajjud ki namaz mein quran ki tilawat keren yeh ziyadti aap kay liye hai un-qarib aap ka rab aap ko muqam-e-mehmood mein khara keray ga
Devnagri Urdu (Maududi)और रात को तहज्जुद पढ़ो, ये तुम्हारे लिए नफ्ल है, बैद (दूर/दूर) नहीं के तुम्हारा रब तुम्हें मक़ाम ए महमूद पर फैज़ करदे
عَرَبِيوَقُل رَبِّ أَدخِلني مُدخَلَ صِدقٍ وَأَخرِجني مُخرَجَ صِدقٍ وَاجعَل لي مِن لَدُنكَ سُلطانًا نَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और आप प्रार्थना करें : ऐ मेरे पालनहार! मुझे अच्छी तरह प्रवेश दे, और अच्छी तरह निकाल, तथा अपनी ओर से मुझे सहायक प्रमाण प्रदान कर।
Roman Urdu (Maududi)Aur dua karo ke parwardigaar, mujhko jahan bhi tu leja sachchayi ke saath leja aur jahan se bhi nikal sachchayi ke saath nikal aur apni taraf se ek iqtedar (power) ko mera madadgaar bana dey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur dua kiya keren kay aey meray perwerdigar mujhay jahan ley jaa achi tarah ley jaa aur jahan say nikal achi tarah nikal aur meray liye apney pass say ghalba aur imdad muqarrar farma dey
Devnagri Urdu (Maududi)और दुआ करो के परवरदिगार, मुझको जहां भी तू लेजा सच्चाई के साथ लेजा और जहां से भी निकल सच्चाई के साथ निकल और अपनी तरफ से एक इक्तेदार (शक्ति) को मेरा मददगार बना दे
عَرَبِيوَقُل جاءَ الحَقُّ وَزَهَقَ الباطِلُ ۚ إِنَّ الباطِلَ كانَ زَهوقًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा कहिए कि सत्य आ गया और असत्य मिट गया। निःसंदेह असत्य तो मिटने ही वाला था।
Roman Urdu (Maududi)Aur elan kardo ke “ haqq aa gaya aur baatil mitt gaya, baatil to mitne hi wala hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ailaan kerdey kay haq aa chuka aur na haq nabood hogaya. Yaqeenan baatil tha bhi nabood honey wala
Devnagri Urdu (Maududi)और एलान करदो के "हक़ आ गया और बात मिट गया, बात तो मिटने ही वाला है"
عَرَبِيوَنُنَزِّلُ مِنَ القُرآنِ ما هُوَ شِفاءٌ وَرَحمَةٌ لِلمُؤمِنينَ ۙ وَلا يَزيدُ الظّالِمينَ إِلّا خَسارًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हम क़ुरआन में से जो उतारते हैं, वह ईमान वालों के लिए शिफ़ा (आरोग्य) तथा दया है। और वह अत्याचारियों को घाटे ही में बढ़ाता है।
Roman Urdu (Maududi)Hum is Quran ke silsila-e-tanzil (revelation) mein woh kuch nazil kar rahey hain jo maanney walon ke liye to shifa aur rehmat hai, magar zalimon ke liye khasare (nuksan/loss) ke siwa aur kisi cheez mein izafa nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh quran jo hum nazil ker rahey hain momino kay liye to sirasir shifa aur rehmat hai. Haan zalimon kay ba-juz nuksan kay aur koi ziyadti nahi hoti
Devnagri Urdu (Maududi)हम कुरान के सिलसिला-ए-तंज़िल (रहस्योद्घाटन) में वो कुछ नाज़िल कर रहे हैं जो माने वालों के लिए तो शिफ़ा और रहमत है, मगर ज़ालिमों के लिए ख़सारे (नुक्सान/नुकसान) के सिवा और किसी चीज़ में इज़ाफ़ा नहीं करता
عَرَبِيوَإِذا أَنعَمنا عَلَى الإِنسانِ أَعرَضَ وَنَأىٰ بِجانِبِهِ ۖ وَإِذا مَسَّهُ الشَّرُّ كانَ يَئوسًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब हम इनसान पर उपकार करते हैं, तो वह मुँह फेर लेता है और दूर हो जाता है। तथा जब उसे दुःख पहुँचता है, तो निराश हो जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Insaan ka haal yeh hai ke jab hum usko niyamat ata karte hain to woh ainthta (arrogant) aur peeth moad leta hai, aur jab zara museebat se do-char hota hai to mayous honay lagta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur insan per jab hum apna inam kertay hain to mun mor leta hai aur kerwat badal leta hai aur jab issay koi takleef phonchti hai to woh mayus ho jata hai
Devnagri Urdu (Maududi)इंसान का हाल ये है के जब हम उसको नियामत अता करते हैं तो वो अहंकार (अहंकारी) और पीठ मोड़ लेता है, और जब जरा मुसीबत से दो-चार होता है तो मयुस होना लगता है
عَرَبِيقُل كُلٌّ يَعمَلُ عَلىٰ شاكِلَتِهِ فَرَبُّكُم أَعلَمُ بِمَن هُوَ أَهدىٰ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : हर इनसान अपने तरीक़े के अनुसार कार्य करता है। अतः आपका पालनहार सबसे अधिक जानने वाला है कि कौन ज़्यादा सीधे मार्ग पर है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), in logon se kehdo ke “ har ek apne tareeqe par amal kar raha hai, ab yeh tumhara Rubb hi behtar jaanta hai ke seedhi raah par kaun hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! Kay her shaks apney tareeqay per aamil hai jo poori hidayat kay raastay per hain unhen tumhara rab hi bakhoobi jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), लोगों से कहदो के "हर एक अपने तरीके पर अमल कर रहा है, अब ये तुम्हारा रब" हाय बेहतर जानता है के सीधी राह पर कौन है”
عَرَبِيوَيَسأَلونَكَ عَنِ الرّوحِ ۖ قُلِ الرّوحُ مِن أَمرِ رَبّي وَما أوتيتُم مِنَ العِلمِ إِلّا قَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और वे (ऐ नबी!) आपसे 'रूह' (आत्मा) के विषय में पूछते हैं। आप कह दें : 'रूह' मेरे पालनहार के आदेश से है। और तुम्हें बहुत ही थोड़ा ज्ञान दिया गया है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log tumse Rooh (spirit) ke mutaaliq poochte hain. Kaho “yeh rooh mere Rubb ke hukum se aati hai, magar tum logon ne ilm se kum hi behra paya hai”( but you have been given only a little of the Knowledge)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh log aap say rooh ki babat sawal kertay hain aap jawab dey dijiye kay rooh meray rab kay hukum say hai aur tumhen boht hi kum ilm diya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग तुमसे रूह (आत्मा) के मुतालिक पूछते हैं। कहो "ये रूह मेरे रुब के हुकुम से आती है, मगर तुम लोगों ने इल्म से कम ही बेहरा पाया है" (लेकिन आपको केवल थोड़ा सा ज्ञान दिया गया है)
عَرَبِيوَلَئِن شِئنا لَنَذهَبَنَّ بِالَّذي أَوحَينا إِلَيكَ ثُمَّ لا تَجِدُ لَكَ بِهِ عَلَينا وَكيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम चाहें, तो वह सब कुछ (वापस) ले जाएँ, जो हमने आपकी ओर वह़्य भेजी है। फिर आप उसपर हमारे मुक़ाबले में अपना कोई सहायक नहीं पाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Muhammad), hum chahein to woh sab kuch tumse cheen lein jo humne wahee ke zariye se tumko ata kiya hai, phir tum hamare muqable mein koi himayati(helper) na paogey jo isey wapas dila sakey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum chahayen to jo wahee aap ki taraf hum ney utari hai sab salb ker len phir aap ko iss kay liye humaray muqablay mein koi himayati mayassar na aa sakay
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ मुहम्मद), हम चाहें तो वो सब कुछ तुमसे छीन लें जो हमने वहीं के ज़रिये से तुमको अता किया है, फिर तुम हमारे मुक़बले में कोई हिमायती (सहायक) न पाओगे जो इसे वापस दिला सके
عَرَبِيإِلّا رَحمَةً مِن رَبِّكَ ۚ إِنَّ فَضلَهُ كانَ عَلَيكَ كَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु आपके पालनहार की दया से (ऐसा नहीं हुआ)। निःसंदेह आप पर उसका अनुग्रह बहुत बड़ा है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh to jo kuch tumhein mila hai tumhare Rubb ki rehmat se mila hai, haqeeqat yeh hai ke uska fazal tumpar bahut bada hai
Roman Urdu (Junagarhi)Siwaye aap kay rab ki rehmat kay yaqeenan aap per uss ka bara hi fazal hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये तो जो कुछ तुम्हें मिला है तुम्हारे रब की रहमत से मिला है, हकीकत ये है के उसका फज़ल तुमपर बहुत बुरा है
عَرَبِيقُل لَئِنِ اجتَمَعَتِ الإِنسُ وَالجِنُّ عَلىٰ أَن يَأتوا بِمِثلِ هٰذَا القُرآنِ لا يَأتونَ بِمِثلِهِ وَلَو كانَ بَعضُهُم لِبَعضٍ ظَهيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : यदि समस्त मनुष्य तथा जिन्न इस बात पर एकत्रित हो जाएँ कि इस क़ुरआन के समान (कोई पुस्तक) ले आएँ, तो इस जैसी पुस्तक नहीं ला सकेंगे, चाहे वे एक-दूसरे के सहायक ही क्यों न हो जाएँ!
Roman Urdu (Maududi)Kehdo ke agar Insaan aur Jinn sab ke sab milkar is Quran jaisi koi cheez laaney ki koshish karein to na laa sakenge, chahe woh sab ek dusre ke madadgaar hi kyun na hon
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay agar tamam insan aur kul jinnat mill ker iss quran kay misil lana chahayen to inn sab say iss kay misil lana na mumkin hai qo woh (aapas mein) aik doosray kay madadgar bhi bann jayen
Devnagri Urdu (Maududi)कहदो के अगर इंसान और जिन्न सब के सब मिलकर क्या कुरान जैसी कोई चीज लाने की कोशिश करें तो ना ला सकेंगे, चाहे वो सब एक दूसरे के मददगार ही क्यों ना हों
عَرَبِيوَلَقَد صَرَّفنا لِلنّاسِ في هٰذَا القُرآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ فَأَبىٰ أَكثَرُ النّاسِ إِلّا كُفورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने इस क़ुरआन में लोगों के लिए हर उदाहरण को विविध ढंग से बयान किया है। फिर भी अधिकतर लोगों ने इनकार ही का रास्ता अपनाया।
Roman Urdu (Maududi)Humne is Quran mein logon ko tarah tarah se samjhaya magar aksar log inkar hi par jamey rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney to iss quran mein logon kay samjhney kay liye her tarah say tamam misalen biyan ker di hain magar aksat log inkar say baaz nahi aatay
Devnagri Urdu (Maududi)हमने कुरान में लोगों को तरह-तरह से समझा मगर अक्सर लोग इंकार ही पर जमे रहेंगे
عَرَبِيوَقالوا لَن نُؤمِنَ لَكَ حَتّىٰ تَفجُرَ لَنا مِنَ الأَرضِ يَنبوعًا
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने कहा : हम आपपर कदापि ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि आप हमारे लिए धरती से एक चश्मा प्रवाहित कर दें।
Roman Urdu (Maududi)Aur unhon ne kaha “ hum teri baat na maanenge jab tak ke tu hamare liye zameen ko phaadh kar ek chashma (spring) jari na karde
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney kaha hum aap per hergiz eman laney kay nahi ta-waqt-e-kay aap humaray liye zamin say koi chashma jari na ker den
Devnagri Urdu (Maududi)और उन्होंने कहा " हम तेरी बात ना मानेंगे जब तक तू हमारे लिए ज़मीन को फाड़ कर एक चश्मा (वसंत) जारी ना करदे
عَرَبِيأَو تَكونَ لَكَ جَنَّةٌ مِن نَخيلٍ وَعِنَبٍ فَتُفَجِّرَ الأَنهارَ خِلالَها تَفجيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)या आपके लिए खजूरों और अंगूर का एक बाग़ हो और आप उसके बीच नहरें प्रवाहित कर दें।
Roman Urdu (Maududi)Ya tere liye khajooron aur angooron ka ek baagh paida ho aur tu usmein nehrein rawan karde
Roman Urdu (Junagarhi)Ya khud aap kay liye hi koi baagh ho khujooron aur anguron ka aur iss kay darmiyan aap boht si nehren jari ker dikhayen
Devnagri Urdu (Maududi)हां तेरे लिए खजूरों और अंगूरों का एक बाग पैदा हो और तू हमसें नहरें रावन करदे
عَرَبِيأَو تُسقِطَ السَّماءَ كَما زَعَمتَ عَلَينا كِسَفًا أَو تَأتِيَ بِاللَّهِ وَالمَلائِكَةِ قَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)या आकाश को टुकड़े-टुकड़े करके हमपर गिरा दें, जैसा कि आपका दावा है, या अल्लाह और फ़रिश्तों को हमारे सामने ले आएँ।
Roman Urdu (Maududi)Ya tu aasman ko tukde tukde karke hamare upar gira de jaisa ke tera dawaa hai ya khuda aur Farishton ko ru dar ru (face to face )hamare saamne le aaye
Roman Urdu (Junagarhi)Ya aap aasman ko hum per tukray tukray ker kay gira den jaisa kay aap ka guman hai ya aap khud Allah Taalaa ko aur farishton ko humaray samney laa khara keren
Devnagri Urdu (Maududi)हां तू आसमान को टुकड़े-टुकड़े करके हमारे ऊपर गिरा दे जैसा के तेरा दावा है या खुदा और फरिश्तों को रु दार रु (आमने सामने) हमारे सामने ले आए
عَرَبِيأَو يَكونَ لَكَ بَيتٌ مِن زُخرُفٍ أَو تَرقىٰ فِي السَّماءِ وَلَن نُؤمِنَ لِرُقِيِّكَ حَتّىٰ تُنَزِّلَ عَلَينا كِتابًا نَقرَؤُهُ ۗ قُل سُبحانَ رَبّي هَل كُنتُ إِلّا بَشَرًا رَسولًا
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हिन्दी (Al-Omari)या आपके पास सोने का एक घर हो, या आप आकाश में चढ़ जाएँ। और हम आपके चढ़ने का हरगिज़ विश्वास नहीं करेंगे, यहाँ तक कि आप हमारे पास एक पुस्तक उतार लाएँ, जिसे हम पढ़ें। आप कह दें : मेरा पालनहार पवित्र है! मैं तो बस एक इनसान हूँ, जो रसूल बनाकर भेजा गया है।
Roman Urdu (Maududi)Ya tere liye sooney ka ek ghar ban jaye ya tu aasmaan par chadh jaye, aur tere chadne ka bhi hum yaqeen na karenge jab tak ke tu hamare upar ek aisi tehrir (written) na utaar laye jisey hum padhein”. (Aey Muhammad), insey kaho “paak hai mera parwardigar! Kya main ek paighaam laney waley Insaan ke siwa aur bhi kuch hoon?”
Roman Urdu (Junagarhi)Ya aap kay apney liye koi soney ka ghar ho jaye ya aap aasman per charh jayen aur hum to aap kay charh janey ka bhi uss waqt tak hergiz yaqeen nahi keren gay jab tak aap hum per koi kitab na utaar layen jissay hum khud parh len aap jawab dey den kay mera perwerdigar pak hai mein to sirf aik insan hi hun jo rasool banaya gaya hun
Devnagri Urdu (Maududi)हां तेरे लिए सोने का एक घर बन जाए या तू आसमान पर चढ़ जाए, और तेरे पैरों का भी हम यकीन ना करेंगे जब तक कि तू हमारे ऊपर एक ऐसी तहरीर (लिखित) न उतार लाए जिसे हम पढ़ें"। (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो "पाक है मेरा" परवरदिगार! क्या मैं एक पैग़ाम लाने वाले इंसान के सिवा और भी कुछ हूँ?”
عَرَبِيوَما مَنَعَ النّاسَ أَن يُؤمِنوا إِذ جاءَهُمُ الهُدىٰ إِلّا أَن قالوا أَبَعَثَ اللَّهُ بَشَرًا رَسولًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब लोगों के पास मार्गदर्शन आ गया, तो उन्हें केवल इस बात ने ईमान लाने से रोक दिया कि उन्होंने कहा : क्या अल्लाह ने एक मनुष्य को रसूल बनाकर भेजा है?
Roman Urdu (Maududi)Logon ke saamne jab kabhi hidayat aayi to uspar iman laney se unko kisi cheez ne nahin roka magar unke isi qaul ne ke “Kya Allah ne bashar (human being) ko paigambar bana kar bhej diya?”
Roman Urdu (Junagarhi)Logon kay pass hidayat phonch chukney kay baad eman say rokney wali sirf yehi cheez rahi kay unhon ney kaha kiya Allah ney aik insan ko hi rasool bana ker bheja
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों के सामने जब कभी हिदायत आई तो उसपर ईमान लाने से उनको किसी चीज़ ने नहीं रोका मगर उनको इसी क़ौल ने के "क्या अल्लाह ने बशर (इंसान) को पैगम्बर बना कर भेज दिया?"
عَرَبِيقُل لَو كانَ فِي الأَرضِ مَلائِكَةٌ يَمشونَ مُطمَئِنّينَ لَنَزَّلنا عَلَيهِم مِنَ السَّماءِ مَلَكًا رَسولًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें : यदि धरती में फ़रिश्ते (आबाद) होते, जो निश्चिंत होकर चलते-फिरते, तो हम अवश्य उनपर आकाश से कोई फ़रिश्ता ही रसूल बनाकर उतारते।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho agar zameen mein Farishte itminaan se chal phir rahey hotey to hum zaroor aasmaan se kisi Farishte hi ko unke liye paigambar bana kar bhejte
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh den kay agar zamin mein farishtay chaltay phirtay aur rehtay bastay hotay to hum bhi inn kay pass kissi aasmani farishtay ho ko rasool bana ker bhejtay
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो अगर ज़मीन में फ़रिश्ते इतमीनान से चल फिर रहे होते तो हम ज़रूर आसमान से किसी फ़रिश्ते ही को उनके लिए पैगम्बर बना कर भेजते
عَرَبِيقُل كَفىٰ بِاللَّهِ شَهيدًا بَيني وَبَينَكُم ۚ إِنَّهُ كانَ بِعِبادِهِ خَبيرًا بَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि मेरे और तुम्हारे बीच गवाह के रूप में अल्लाह काफ़ी है। निःसंदेह वह अपने बंदों की पूरी ख़बर रखने वाला, सबको देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), insey kehdo ke mere aur tumhare darmiyan bas ek Allah ki gawahi kaafi hai, woh apne bandon ke haal se bakhabar hai aur sab kuch dekh raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay meray aur tumharay darmiyan Allah Taalaa ka gawah hona kafi hai. Woh apney bandon say khoob aagah aur bakhoobi dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), इनसे कहदो के मेरे और तुम्हारे दरमियान बस एक अल्लाह की गवाही काफ़ी है, वो अपने बंदों के हाल से खबर है और सब कुछ देख रहा है
عَرَبِيوَمَن يَهدِ اللَّهُ فَهُوَ المُهتَدِ ۖ وَمَن يُضلِل فَلَن تَجِدَ لَهُم أَولِياءَ مِن دونِهِ ۖ وَنَحشُرُهُم يَومَ القِيامَةِ عَلىٰ وُجوهِهِم عُميًا وَبُكمًا وَصُمًّا ۖ مَأواهُم جَهَنَّمُ ۖ كُلَّما خَبَت زِدناهُم سَعيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जिसे अल्लाह सीधा मार्ग दिखाए, वही मार्ग पाने वाला है और जिन्हें पथभ्रष्ट कर दे, आप उनके लिए अल्लाह के सिवा सहायक नहीं पाएँगे। और हम उन्हें क़ियामत के दिन उनके चेहरों के बल अंधे, गूँगे और बहरे बनाकर उठाएँगे। और उनका ठिकाना जहन्नम है। जब भी उसकी लपट कम होगी, हम उसे और भड़का देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jisko Allah hidayat de wahi hidayat paney wala hai, aur jisey woh gumraahi mein daal de to uske siwa aise logon ke liye tu koi haami o nasir (protector and helper) nahin paa sakta. Un logon ko hum qayamat ke roz aundhe mooh kheench layenge, andhey, gungay aur behre. Unka thikana jahannum hai. Jab kabhi uski aag dheemi honay lagegi hum usey aur bhadka denge
Roman Urdu (Junagarhi)Allah jiss ki rehnumaee keray woh to hidayat yafta hai aur jissay woh raah say bhatka dey na mumkin hai kay tu uss ka madadgar uss kay siwa kissi aur ko paye aisay logon ko hum baroz qayamat ondhay mun hashar keren gay daran halankay woh andhay goongay aur behray hongay unn ka thikana jahannum hoga. Jab kabhi woh bujhney lagay gi hum unn per ussay aur bharka den gay
Devnagri Urdu (Maududi)जिसको अल्लाह हिदायत दे वही हिदायत पाने वाला है, और जिसे वो गुमराही में डाल दे तो उसके सिवा ऐसे लोगों के लिए तू कोई हमी ओ नासिर (रक्षक और मददगार) नहीं पा सकता। उन लोगों को हम क़यामत के रोज़ औंधे मुंह खींच लाएंगे, अंधे, गूँगे और बाहर। उनका ठिकाना जहन्नुम है. जब कभी उसकी आग धीमी होने लगेगी हम उसे और भड़का देंगे
عَرَبِيذٰلِكَ جَزاؤُهُم بِأَنَّهُم كَفَروا بِآياتِنا وَقالوا أَإِذا كُنّا عِظامًا وَرُفاتًا أَإِنّا لَمَبعوثونَ خَلقًا جَديدًا
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हिन्दी (Al-Omari)यही उनका बदला है। क्योंकि उन्होंने हमारी आयतों का इनकार किया और कहा : क्या जब हम हड्डियाँ और चूरा-चूरा हो जाएँगे, तो क्या निश्चय ही हम नए सिरे से पैदा करके उठाए जाने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Yeh badla hai unke is harakat ka ke unhon ne hamari aayat ka inkar kiya aur kaha “kya jab hum sirf haddiyan aur khaak (dust) ho kar reh jayenge to naye sirey se humko paida karke utha khada kiya jayega?”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh sab humari aayaton say kufur kerney aur uss kehney ka badla hai kay kiya jab hum hadiyan aur rezay rezay hojayen gay phir hum naee pedaeesh mein utha kharay kiye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये बदला है उनको इस हरकत का के अनहोन ने हमारी आयत का इंकार किया और कहा "क्या जब हम सिर्फ हदियां और खाक (धूल) हो कर रह जाएंगे तो नए सिरे से हमको पैदा करके उठा खड़ा किया" जाएगा?”
عَرَبِي۞ أَوَلَم يَرَوا أَنَّ اللَّهَ الَّذي خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ قادِرٌ عَلىٰ أَن يَخلُقَ مِثلَهُم وَجَعَلَ لَهُم أَجَلًا لا رَيبَ فيهِ فَأَبَى الظّالِمونَ إِلّا كُفورًا
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हिन्दी (Al-Omari)क्या इन लोगों ने नहीं देखा कि जिस अल्लाह ने आकाशों तथा धरती को पैदा किया, वह इसपर सामर्थ्यवान है कि उन जैसे (फिर) पैदा कर दे? तथा उसने उनके लिए एक समय निर्धारित कर रखा है, जिसमें कोई संदेह नहीं है। फिर भी अत्याचारियों ने कुफ़्र के सिवा (हर चीज़ से) इनकार किया।
Roman Urdu (Maududi)Kya inko yeh na soojha ke jis khuda ne zameen aur aasmano ko paida kiya hai woh in jaison ko paida karne ki zaroor qudrat rakhta hai? Usne inke hashar ke liye ek waqt muqarrar kar rakkha hai jiska aana yakeeni hai, magar zalimon ko israar(persist) hai ke woh iska inkar hi karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya enhon ney iss baat per nazar nahi ki jiss Allah ney aasman-o-zamin ko peda kiya hai woh inn jaison ki pedaeesh per poora qadir hai ussi ney inn kay liye aik aisa waqt muqarrar ker rakha hai jo shak-o-shubay say yaksar khali hai lekin zalim log inkar kiye baghair rehtay hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इनको ये ना सूझा के जिस खुदा ने ज़मीन और आसमान को पेदा किया है वो इस जैसन को पेदा करने की जरूर क़ुदरत रखता है? उसने इनके हश्र के लिए एक वक्त मुकर्रर कर रखा है जिसका आना यकीनी है, मगर ज़ालिमों को इसरार है के वो इसका इंकार ही करेंगे
عَرَبِيقُل لَو أَنتُم تَملِكونَ خَزائِنَ رَحمَةِ رَبّي إِذًا لَأَمسَكتُم خَشيَةَ الإِنفاقِ ۚ وَكانَ الإِنسانُ قَتورًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : यदि तुम मेरे पालनहार की दया के खज़ानों के मालिक होते, तो उस समय तुम (उन्हें) खर्च हो जाने के भय से अवश्य रोक लेते। और इनसान बड़ा ही कंजूस है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad) Insey kaho, agar kahin mere Rubb ki rehmat ke khazane tumhare qabze mein hotay to tum kharh ho janey ke andeshey se zarror unko roak rakhte. Waqai Insaan bada tangg dil (narrow minded) waqey hua hai
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay agar bil farz tum meray rab ki rehmaton kay khazanon kay malik bann jatay to tum uss waqt bhi uss kay kharch ho janey kay khof say uss ko rokay rakhtay aur insan hai hi tang dil
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद) इनसे कहो, अगर कहीं मेरे रब की रहमत के ख़ज़ाने तुम्हारे क़ब्ज़े में होते तो तुम ख़ार हो जाने के अंदेशे से जरूर उनको रोक रखो। वक़ई इंसान बड़ा तंग दिल (संकीर्ण मानसिकता) वक़ई हुआ है
عَرَبِيوَلَقَد آتَينا موسىٰ تِسعَ آياتٍ بَيِّناتٍ ۖ فَاسأَل بَني إِسرائيلَ إِذ جاءَهُم فَقالَ لَهُ فِرعَونُ إِنّي لَأَظُنُّكَ يا موسىٰ مَسحورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय हमने मूसा को नौ स्पष्ट निशानियाँ दीं। अतः आप बनी इसराईल से पूछ लें, जब वह (मूसा) उनके पास आए, तो फ़िरऔन ने उनसे कहा : ऐ मूसा! मैं समझता हूँ कि तुझपर जादू कर दिया गया है।
Roman Urdu (Maududi)Humne Moosa ko to nishaniyan ata ki thi jo sareeh taur par dikhayi de rahi thi (which were quite manifest). Ab yeh tum khud bani Israel se pooch lo ke jab woh saamne aayi to Firoun ne yahi kaha tha na ke “Aey Moosa, main samajhta hoon ke tu zaroor ek sehar-zada (bewitched) aadmi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney musa ko no moajzzay bilkul saaf saaf ata farmaye tu khud hi bani isaeel say pooch ley kay jab woh inn kay pass phonchay to firaon bola kay aey musa! Meray khayal mein to tujh per jadoo ker diya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने मूसा को तो निशानियां अता की थी जो सारे तौर पर दिखाई दे रही थी (जो काफी स्पष्ट थीं)। अब ये तुम खुद बनी इजराइल से पूछ लो के जब वो सामने आई तो फिरौन ने यहीं कहा था ना के "ऐ मूसा, मैं समझता हूं के तू जरूर एक सहर-जादा (मोहित) आदमी है
عَرَبِيقالَ لَقَد عَلِمتَ ما أَنزَلَ هٰؤُلاءِ إِلّا رَبُّ السَّماواتِ وَالأَرضِ بَصائِرَ وَإِنّي لَأَظُنُّكَ يا فِرعَونُ مَثبورًا
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हिन्दी (Al-Omari)मूसा ने उत्तर दिया : निःसंदेह तुम जान चुके हो कि इन (निशानियों) को आकाशों और धरती के पालनहार ही ने (समझाने के लिए) स्पष्ट प्रमाण बनाकर पर उतारा है। और निश्चय ही मैं जानता हूँ कि ऐ फ़िरऔन! तेरा विनाश हुआ।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne uske jawab mein kaha “tu khoob jaanta hai ke yeh baseerat afroz (eye opener) nishaniyan Rabbus samawaati wal ardh (lord of the Heavens and the earth) ke siwa kisi ne nazil nahin ki hain, aur mera khayal yeh hai ke aey Firoun, tu zaroor ek shamat-zada (doomed) aadmi hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa ney jawab diya kay yeh to tujhay ilm ho chuka hai kay aasman-o-zamin kay perwerdigar hi ney yeh moajzzay dikhaney samjhaney ko nazil farmaye hain aey firaon! Mein to samajh raha hun kay tu yaqeenan barbad-o-halak kiya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने उसके जवाब में कहा "तू खूब जानता है के ये बसीरत अफरोज (आंखें खोलने वाला) निशानियाँ रब्बुस समावती वल अर्ध (स्वर्ग और पृथ्वी के स्वामी) के सिवा किसी ने नाज़िल नहीं की है, और मेरा ख्याल ये है के ऐ फिरौन, तू ज़रूर एक शामत-ज़ादा (बर्बाद) आदमी है”
عَرَبِيفَأَرادَ أَن يَستَفِزَّهُم مِنَ الأَرضِ فَأَغرَقناهُ وَمَن مَعَهُ جَميعًا
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हिन्दी (Al-Omari)अंततः उसने उन्हें उस भूभाग से निकाल बाहर करने का इरादा किया, तो हमने उसे और उसके सब साथियों को डुबो दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhr-e-kaar Firoun ne irada kiya ke Moosa aur bani Israel ko zameen se ukhad phenke, magar humne usko aur uske saathiyon ko ikattha garq(drown) kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aakhri firaon ney pukhta irada ker liya kay unhen zamin say hi ukher dey to hum ney khud ussay aur uss kay tamam sathiyon ko gharq ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर-ए-कार फिरौन ने इरादा किया के मूसा और बानी इसराइल को ज़मीन से उखाड़ फेंके, मगर हमने उसको और उसके साथियों को इकत्था गर्क (डूब) करदिया
عَرَبِيوَقُلنا مِن بَعدِهِ لِبَني إِسرائيلَ اسكُنُوا الأَرضَ فَإِذا جاءَ وَعدُ الآخِرَةِ جِئنا بِكُم لَفيفًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसके बाद बनी इसराईल से कहा : तुम इस धरती में बस जाओ। फिर जब आख़िरत का वादा आएगा, तो हम तुम सबको ले आएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur uske baad bani Israel se kaha ke ab tum zameen mein baso, phir jab aakhirat ke wadey ka waqt aan poora hoga to hum tum sab ko ek sath laa haazir karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Iss ka baad hum ney bani isaraeel say farma diya kay iss sir zamin per tum raho saho haan jab aakhirat ka wada aaye ga hum tum sab ko samet aur lapet ker ley aayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और उसके बाद बानी इसराइल से कहा के अब तुम ज़मीन में बसो, फिर जब आख़िरत के वादे का वक़्त आन पूरा होगा तो हम तुम सब को एक साथ ला हाज़िर करेंगे
عَرَبِيوَبِالحَقِّ أَنزَلناهُ وَبِالحَقِّ نَزَلَ ۗ وَما أَرسَلناكَ إِلّا مُبَشِّرًا وَنَذيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने सत्य ही के साथ इस (क़ुरआन) को उतारा है, तथा यह सत्य ही के साथ उतरा है। और हमने आपको केवल शुभ सूचना देने वाला तथा डराने वाला बनाकर भेजा है।
Roman Urdu (Maududi)Is Quran ko humne haqq ke saath nazil kiya hai aur haqq hi ke saath yeh nazil hua hai. Aur (aey Muhammad) tumhein humne iske siwa aur kisi kaam ke liye nahin bheja ke (jo maan le usey) basharat de do aur (ja na maaney usey) mutanabbeh (warn) kardo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney iss quran ko haq kay sath utara aur yeh bhi haq kay sath utra. Hum ney aap ko sirf khushkhabri sunaney wala aur daraney wala bana ker bheja hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या कुरान को हमने हक़ के साथ नाज़िल किया है और हक़ ही के साथ ये नाज़िल हुआ है। और (ऐ मुहम्मद) तुम्हें हमने इसके सिवा और किसी काम के लिए नहीं भेजा के (जो मान ले उसे) बशारत दे दो और (जा ना माने उसे) मुतनब्बेह (चेतावनी) करदो
عَرَبِيوَقُرآنًا فَرَقناهُ لِتَقرَأَهُ عَلَى النّاسِ عَلىٰ مُكثٍ وَنَزَّلناهُ تَنزيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने इस क़ुरआन को अलग-अलग करके उतारा है, ताकि आप इसे लोगों के सामने ठहर-ठहर कर पढ़ें और हमने इसे थोड़ा-थोड़ा करके उतारा है।
Roman Urdu (Maududi)Aur is Quran ko humne thoda thoda karke nazil kiya hai taa-ke tum thehar thehar kar isey logon ko sunao, aur isey humne ( mauqa mauqa se) ba-tadreej utara hai
Roman Urdu (Junagarhi)Quran ko hum ney thora thora ker kay iss liye utara hai kay aap issay ba-mohlat logon ko sunayen aur hum ney khud bhi issay ba-tadreej nazil farmaya
Devnagri Urdu (Maududi)और इस कुरान को हमने थोड़ा थोड़ा करके नाज़िल किया है ता-के तुम ठहर-ठहर कर इसे लोगों को सुनाओ, और इसे हमने (मौका मौका से) बा-तद्रेज उतारा है
عَرَبِيقُل آمِنوا بِهِ أَو لا تُؤمِنوا ۚ إِنَّ الَّذينَ أوتُوا العِلمَ مِن قَبلِهِ إِذا يُتلىٰ عَلَيهِم يَخِرّونَ لِلأَذقانِ سُجَّدًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : तुम इस (क़ुरआन) पर ईमान लाओ या ईमान न लाओ, निःसंदेह जिन लोगों को इससे पहले ज्ञान दिया गया, जब उनके सामने इसे पढ़कर सुनाया जाता है, तो वे ठुड्डियों के बल सजदे में गिर जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), in logon se kehdo ke tum isey maano ya na maano, jin logon ko issey pehle ilm diya gaya hai unhein jab yeh sunaya jata hai to woh mooh ke bal sajde mein gir jatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! Tum iss per eman laao ya na laao jinehn iss say pehlay ilm diya gaya hai unn kay pass to jab bhi iss ki tilawat ki jati hai to woh thoriyon kay bal sajda mein gir partay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), इन लोगों से कहदो के तुम इसे मानो या ना मानो, जिन लोगों को इसे पहले इल्म दिया गया है उन्हें जब ये सुनाया जाता है तो वो मुंह के बाल सजदे में गिर जाते हैं
عَرَبِيوَيَقولونَ سُبحانَ رَبِّنا إِن كانَ وَعدُ رَبِّنا لَمَفعولًا
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हिन्दी (Al-Omari)और कहते हैं : पवित्र है हमारा पालनहार! निःसंदेह हमारे पालनहार का वादा अवश्य पूरा होना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur pukar uthte hain “paak hai hamara Rubb , uska wada to pura hona hi tha”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kehtay hain kay humara rab pak hai humaray rab ka wada bila shak-o-shuba poora ho ker rehney wala hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और पुकार उठते हैं "पाक है हमारा रब, उसका वादा तो पूरा होना ही था"
☉ Sajda
عَرَبِيوَيَخِرّونَ لِلأَذقانِ يَبكونَ وَيَزيدُهُم خُشوعًا ۩
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हिन्दी (Al-Omari)और वे रोते हुए ठुड्डियों के बल गिर जाते हैं और यह (क़ुरआन) उनके विनय को बढ़ा देता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh mooh ke bal rotey rotey huey gir jaate hain aur isey sunkar unka khushu (humility) aur badh jata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh apni thoriyon kay bal rotay huye sajday mein gir partay hain aur yeh quran unn ki aajzi aur khushoo aur khuzoo barha deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वो मुँह के बाल रोते रोते हुए गिर जाते हैं और इसे सुनकर उनका ख़ुश (विनम्रता) और बढ़ जाता है
عَرَبِيقُلِ ادعُوا اللَّهَ أَوِ ادعُوا الرَّحمٰنَ ۖ أَيًّا ما تَدعوا فَلَهُ الأَسماءُ الحُسنىٰ ۚ وَلا تَجهَر بِصَلاتِكَ وَلا تُخافِت بِها وَابتَغِ بَينَ ذٰلِكَ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें : 'अल्लाह' कहकर पुकारो या 'रहमान' कहकर पुकारो। तुम जिस नाम से भी पुकारोगे, उसके सभी नाम अच्छे हैं। और (ऐ नबी!) नमाज़ में आवाज़ न तो ऊँची रखो और न नीची, बल्कि इन दोनों के बीच का मार्ग अपनाओ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), insey kaho, Allah kehkar pukaro ya rehman kehkar, jis naam se bhi pukaro uske liye sab acchey hi naam hain aur apni namaz na bahut zyada buland aawaz se padho aur na bahut past aawaz se, in dono ke darmiyan awsat darje ka lehja ikhtiyar karo
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay Allah ko Allah keh ker pulkaro ya rehman keh ker jiss naam say bhi pukaro tamam achay naam ussi kay hain. Na to tu apni namaz boht buland aawaz say parh aur na bilkul posheeda balkay iss kay darmiyan ka raasta talash kerley
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), इंसे कहो, अल्लाह कह कर पुकारो या रहमान कहकर, जिस नाम से भी पुकारो उसके लिए सब अच्छे ही नाम हैं और अपनी नमाज न बहुत ज्यादा बुलंद आवाज से पढ़ो और न बहुत पुरानी आवाज से, दोनों के दरमियां अव्सत दर्जे का लहजा इख्तियार करो
عَرَبِيوَقُلِ الحَمدُ لِلَّهِ الَّذي لَم يَتَّخِذ وَلَدًا وَلَم يَكُن لَهُ شَريكٌ فِي المُلكِ وَلَم يَكُن لَهُ وَلِيٌّ مِنَ الذُّلِّ ۖ وَكَبِّرهُ تَكبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा कहो : सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने (अपने लिए) कोई संतान नहीं बनाई, और न राज्य में उसका कोई साझी है, और न विवशता (कमज़ोरी) के कारण उसका कोई मददगार है। और आप उसकी पूर्ण महिमा का गान करें।
Roman Urdu (Maududi)Aur kaho “tareef hai us khuda ke liye jisne na kisi ko beta banaya, na koi baadshahi mein uska shareek hai, aur na woh aajiz (helpless) hai ke koi uska pushtbaan (supporter) ho” aur uski badayi bayan karo, kamaal darje ki badayi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh keh dijiye kay tamam tareefen Allah hi kay liye hain jo na aulad rakhta hai na apni badshaat mein kissi ko shareek aur saajhi rakhta hai aur na woh kamzor hai kay ussay kissi himayati ki zaroorat ho aur tu uss ki poori poori baraee biyan kerta reh
Devnagri Urdu (Maududi)और कहो “तारीफ है उसने खुदा के लिए जिसने ना किसी को बेटा बनाया, ना कोई बादशाही में उसका शरीक है, और ना वो अजीज (असहाय) है कि कोई उसका पुश्तबान (समर्थक) हो” और उसकी बदाई बयां करो, कमाल दर्जे की बदाई
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Surah 17: Bani Isra'il (The Israelites)

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Surah 17: Bani Isra'il (The Israelites)

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Surah 17: Bani Isra'il (The Israelites)

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Surah 17: Bani Isra'il (The Israelites)

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Surah 18: Al-Kahf (The Cave)

Meccan🕐 Revelation #69📜 110 Verses🕮 Juz 1–16
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالحَمدُ لِلَّهِ الَّذي أَنزَلَ عَلىٰ عَبدِهِ الكِتابَ وَلَم يَجعَل لَهُ عِوَجًا ۜ
हिन्दी (Al-Omari)सब प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है, जिसने अपने बंदे पर पुस्तक उतारी, और उसमें कोई टेढ़ नहीं रखी।
Roman Urdu (Maududi)Tareef Allah ke liye hai jisne apne banday par yeh kitaab nazil ki aur ismein koi tedh na rakkhi
Roman Urdu (Junagarhi)Tamam tareefen ussi Allah kay liye saza waar hain jiss ney apney bandey per yeh quran utara aur iss mein koi kasar baqi na chori
Devnagri Urdu (Maududi)तारीफ अल्लाह के लिए है जिसने अपने बंदे पर ये किताब नाज़िल की और इसमें कोई टेढ़ ना रखी
عَرَبِيقَيِّمًا لِيُنذِرَ بَأسًا شَديدًا مِن لَدُنهُ وَيُبَشِّرَ المُؤمِنينَ الَّذينَ يَعمَلونَ الصّالِحاتِ أَنَّ لَهُم أَجرًا حَسَنًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(बल्कि उसे) अति सीधा (बनाया)। ताकि वह (अल्लाह) अपनी ओर से आने वाली कठोर यातना से डराए, और उन ईमान वालों को जो अच्छे कार्य करते हैं, शुभ सूचना सुना दे कि उनके लिए अच्छा बदला है।
Roman Urdu (Maududi)Theek theek seedhi baat kehne wali kitaab, taa-ke woh logon ko khuda ke sakht azaab se khabardar karde, aur iman laa kar neik amal karne walon ko khush khabri de de ke unke liye accha ajar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay her tarah say theek thaak rakha takay apney pass ki saza sakht saza say hoshiyar ker dey aur eman laney aur nek amal kerney walon ko khushkhabriyan suna dey kay unn kay liye behtareen badla hai
Devnagri Urdu (Maududi)ठीक ठीक सीधी बात कहने वाली किताब, ता-के वो लोगों को खुदा के सख्त अज़ाब से खबर करदे, और ईमान ला कर नीक अमल करने वालों को खुश खबरी दे दे के उनके लिए अच्छा अजर है
عَرَبِيماكِثينَ فيهِ أَبَدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिसमें वे हमेशा रहने वाले होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jismein woh hamesha rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss mein woh hamesha hamesha rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जिसमें वो हमेशा रहेंगे
عَرَبِيوَيُنذِرَ الَّذينَ قالُوا اتَّخَذَ اللَّهُ وَلَدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उन लोगों को डराए, जिन्होंने कहा कि अल्लाह ने कोई संतान बना रखी है।
Roman Urdu (Maududi)Aur un logon ko dara de jo kehte hain ke Allah ne kisi ko beta banaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn logon ko bhi dara dey jo kehtay hain kay Allah Taalaa aulad rakhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)और उन लोगों को डर दे जो कहते हैं कि अल्लाह ने किसी को बेटा बनाया है
عَرَبِيما لَهُم بِهِ مِن عِلمٍ وَلا لِآبائِهِم ۚ كَبُرَت كَلِمَةً تَخرُجُ مِن أَفواهِهِم ۚ إِن يَقولونَ إِلّا كَذِبًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)न उन्हें इसका कुछ ज्ञान है और न उनके बाप-दादा को। बहुत बड़ी (गंभीर) बात है, जो उनके मुँह से निकल रही है। वे सरासर झूठ बोल रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Is baat ka na unhein koi ilam hai aur na unke baap dada ko tha. Badi baat hai jo unke mooh se nikalti hai, woh mehaz jhoot bakhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Dar-haqeeqat na to khud unhen iss ka ilm hai na unn kay baap dadon ko. Yeh tohmat bari buri hai jo inn kay mun say nikal rahi hai woh nira jhoot bak rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या बात का ना उन्हें कोई इलम है और ना उनके बाप दादा को था। बड़ी बात है जो उनके मुँह से निकलती है, वो महज़ झूठ बोलते हैं
عَرَبِيفَلَعَلَّكَ باخِعٌ نَفسَكَ عَلىٰ آثارِهِم إِن لَم يُؤمِنوا بِهٰذَا الحَديثِ أَسَفًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐसा लगता है कि यदि वे इस 'हदीस' (क़ुरआन) पर ईमान नहीं लाए, तो आप इनके पीछे दुःख से अपना प्राण ही खो देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Accha, to (aey Muhammad), shayad tum inke peechey gham ke marey apni jaan kho dene waley ho agar ye is taleem par iman na laye
Roman Urdu (Junagarhi)Pus agar yeh log iss baat per eman na layen to kiya aap inn kay peechay issi ranj mein apni jaan halak ker dalen gay
Devnagri Urdu (Maududi)अच्छा, तो (ऐ मुहम्मद), शायद तुम इनके पीछे ग़म के मारे अपनी जान खो देने वाले हो अगर ये तालीम पर ईमान ना लाए
عَرَبِيإِنّا جَعَلنا ما عَلَى الأَرضِ زينَةً لَها لِنَبلُوَهُم أَيُّهُم أَحسَنُ عَمَلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो कुछ धरती के ऊपर है, हमने उसे उसकी शोभा बनाया है। ताकि हम उनका परीक्षण करें कि उनमें कौन कर्म की दृष्टि से सबसे अच्छा है?
Roman Urdu (Maududi)Waqiya ye hai ke yeh jo kuch sar-o-samaan bhi zameen par hai isko humne zameen ki zeenat banaya hai taa-ke in logon ko aazmayein inmein kaun behtar amal karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Rooy-e-zamin per jo kuch hai hum ney ussay zamin ki ronaq ka baees banaya hai kay hum enhen aazma len kay inn mein say kaun nek aemaal wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)वाकिया ये है के ये जो कुछ सर-ओ-समान भी ज़मीन पर है इसको हमने ज़मीन की ज़ीनत बनाई है ता-के इन लोगों को आज़माएं इनमें कौन बेहतर अमल करने वाला है
عَرَبِيوَإِنّا لَجاعِلونَ ما عَلَيها صَعيدًا جُرُزًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जो कुछ उस (धरती) के ऊपर है, निःसंदेह हम उसे चटियल मैदान कर देने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar is sab ko hum ek chatiyal maidan bana dene waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Iss per jo kuch hai hum ussay aik humwaar saaf maidan ker dalney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार इस सब को हम एक छतियाल मैदान बना देने वाले हैं
عَرَبِيأَم حَسِبتَ أَنَّ أَصحابَ الكَهفِ وَالرَّقيمِ كانوا مِن آياتِنا عَجَبًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) क्या आपने समझ रखा है कि गुफा तथा शिलालेख वाले, हमारी अद्भुत निशानियों में से थे?
Roman Urdu (Maududi)Kya tum samajhte ho ke ghaar (cave) aur katbe (inscription) waley hamari koi badi ajeeb nisaniyon mein se thay
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tu apney khayal mein ghaar aur katbay walon ko humari nishaniyon mein say koi boht ajeeb nishani samjha raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम समझते हो के घर (गुफा) और कतबे (शिलालेख) वाले हमारी कोई बड़ी अजीब निसानियों में से थे
عَرَبِيإِذ أَوَى الفِتيَةُ إِلَى الكَهفِ فَقالوا رَبَّنا آتِنا مِن لَدُنكَ رَحمَةً وَهَيِّئ لَنا مِن أَمرِنا رَشَدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब उन युवकों ने गुफा में शरण ली, तो उन्होंने कहा : ऐ हमारे पालनहार! हमें अपने पास से दया प्रदान कर और हमारे लिए हमारे मामले में मार्गदर्शन (सीधे रास्ते पर चलने) को आसान कर दे।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh chandh nawjawan ghaar mein panaah guzeen huey aur unhon ne kaha “aey parwardigar, humko apni rehmat e khaas se nawaz aur hamara maamla durust karde”
Roman Urdu (Junagarhi)Unn chand no-jawano ney jab ghaar mein panah li to dua ki kay aey humaray perwerdigar! Humen apney pass say rehmat ata farma aur humaray kaam mein humaray liye raah yabi ko aasan ker dey
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो चांद नवाजवां घर में पनाह गुज़ेन हुए और उन्होन ने कहा “ए परवरदिगार, हमको अपनी रहमत ए खास से नवाज और हमारा मामला दुरुस्त करदे”
عَرَبِيفَضَرَبنا عَلىٰ آذانِهِم فِي الكَهفِ سِنينَ عَدَدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उन्हें गुफा में सुला दिया कई वर्षों तक।
Roman Urdu (Maududi)To humne unhein usi ghaar mein thapak kar saal ha saal ke liye gehri neend sula diya
Roman Urdu (Junagarhi)Pus hum ney unn kay kano per ginti kay kaee saal tak issi ghaar mein pardey daal diye
Devnagri Urdu (Maududi)तो हमने उन्हें उसी घर में थापक कर साल हा साल के लिए गहरी नींद सुला दिया
عَرَبِيثُمَّ بَعَثناهُم لِنَعلَمَ أَيُّ الحِزبَينِ أَحصىٰ لِما لَبِثوا أَمَدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उन्हें (नींद से) उठाया, ताकि हम जान लें कि दोनों समूहों में से कौन उस अवधि को अधिक याद रखने वाला है, जो वे ठहरे?
Roman Urdu (Maududi)Phir humne unhein uthaya taa-ke dekhein unke do girohon mein se kaun apni muddat e qayaam ka theek shumar karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney unehn utha khara kiya kay hum yeh maloom ker len kay dono giroh mein say uss intehaee muddat ko jo unhon ney guzari kiss ney ziyada yaad rakhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमने उन्हें उठाया ता-के देखें उनके दो गिरोहों में से कौन अपनी मुद्दत ए कयाम का ठीक शुरू करता है
عَرَبِينَحنُ نَقُصُّ عَلَيكَ نَبَأَهُم بِالحَقِّ ۚ إِنَّهُم فِتيَةٌ آمَنوا بِرَبِّهِم وَزِدناهُم هُدًى
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हम आपसे उनका हाल ठीक-ठीक बयान करते हैं। निःसंदेह, वे कुछ युवक थे, जो अपने पालनहार पर ईमान लाए और हमने उन्हें हिदायत में अधिक कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Hum unka asal qissa tumhein sunate hain, woh chandh nawjawan thay jo apne Rubb par iman le aaye thay aur humne unko hidayat mein taraqqi bakhsi thi
Roman Urdu (Junagarhi)Hum unn ka sahih waqiya teray samney biyan farma rahey hain. Yeh chand no-jawan apney rab per eman laye thay aur hum ney unn ki hodayat mein taraqqi di thi
Devnagri Urdu (Maududi)हम उनका असल क़िस्सा तुम्हें सुनाते हैं, वो चंद नवाज़वान थे जो अपने रब पर ईमान ले आए थे और हमने उनको हिदायत में तरक्की बख्शी थी
عَرَبِيوَرَبَطنا عَلىٰ قُلوبِهِم إِذ قاموا فَقالوا رَبُّنا رَبُّ السَّماواتِ وَالأَرضِ لَن نَدعُوَ مِن دونِهِ إِلٰهًا ۖ لَقَد قُلنا إِذًا شَطَطًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने उनके दिलों को मज़बूत कर दिया, जब वे खड़े हुए, तो बोले : हमारा पालनहार तो आकाशों और धरती का पालनहार है। हम उसके सिवा किसी पूज्य को हरगिज़ नहीं पुकारेंगे। (यदि ऐसा किया) तो निश्चय ही हमने सत्य से हटी हुई बात कही।
Roman Urdu (Maududi)Humne unke dil us waqt mazboot kardiye jab woh utthey aur unhon ne elaan kardiya ke “ hamara Rubb to bas wahi hai jo aasmano aur zameen ka Rubb hai, hum usey chodh kar kisi dusre mabood ko na pukarenge, agar hum aisa karein to bilkul bejaa (improper) baat karenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney unn kay dil mazboot ker diye thay jabkay yeh uth kharay huye aur kehney lagay kay humara perwerdigar to wohi hai jo aasman-o-zamin ka perwerdigar hai na mumkin hai kay hum uss kay siwa kissi aur mabood ko pukaren agar aisa kiya to hum ney nihayat hi ghalat baat kahi
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उनके दिल को वक़्त मज़बूत कर दिया जब वो उठे और उन्हें हमने एलान किया करदिया के "हमारा रब तो बस वही है जो आसमान और ज़मीन का रब है, हम उसे छोड़ कर किसी दूसरे माबूद को ना पुकारेंगे, अगर हम ऐसा करें तो बिल्कुल बेजा (अनुचित) बात करेंगे"
عَرَبِيهٰؤُلاءِ قَومُنَا اتَّخَذوا مِن دونِهِ آلِهَةً ۖ لَولا يَأتونَ عَلَيهِم بِسُلطانٍ بَيِّنٍ ۖ فَمَن أَظلَمُ مِمَّنِ افتَرىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ये हमारी जाति के लोग हैं। इन्होंने अल्लाह के सिवा अन्य पूज्य बना लिए हैं। ये उन (के पूज्य होने) पर कोई स्पष्ट प्रमाण क्यों नहीं लाते? फिर उससे बड़ा अत्याचारी कौन होगा, जो अल्लाह पर झूठ गढ़े?
Roman Urdu (Maududi)(Phir unhon ne aapas mein ek dusre se kaha) “yeh hamari qaum to Rubb e qayinaat ko chodh kar dusre khuda bana baithi hai, yeh log unke mabood honay par koi wazeh daleel kyun nahin latey? Aakhir us shaks se bada zalim aur kaun ho sakta hai jo Allah par jhoot baandhey
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hai humari qom jiss ney iss kay siwa aur mabood bana rakhen hain. Inn ki khudaee ki yeh koi saaf daleel kiyon paish nahi kertay Allah per jhoot iftra bandhney walay say ziyada zalim kaun hai
Devnagri Urdu (Maududi)(फिर उनहोन ने आपस में एक दूसरे से कहा) "ये हमारी क़ौम रब ई को कायनात को छोड़ कर दूसरे खुदा बना बैठी है, ये लोग उनके माबूद होने पर कोई वाज़े दलील क्यों नहीं लाते? आखिर उस शक्स से बड़ा जालिम और कौन हो सकता है जो अल्लाह पर झूठ बांधे
عَرَبِيوَإِذِ اعتَزَلتُموهُم وَما يَعبُدونَ إِلَّا اللَّهَ فَأووا إِلَى الكَهفِ يَنشُر لَكُم رَبُّكُم مِن رَحمَتِهِ وَيُهَيِّئ لَكُم مِن أَمرِكُم مِرفَقًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब तुमने उनसे तथा अल्लाह के अतिरिक्त उनके पूज्यों से किनारा कर लिया, तो अब गुफा में शरण लो। तुम्हारा पालनहार तुम्हारे लिए अपनी कुछ दया खोल देगा, तथा तुम्हारे लिए तुम्हारे काम में कोई आसानी पैदा कर देगा।
Roman Urdu (Maududi)Ab jabke tum unse aur unke maboodane gair-Allah se be taaluq ho chuke ho to chalo ab falaan ghaar mein chal kar panaah lo.Tumhara Rubb tumpar apni rehmat ka daaman waseeh karega aur tumhare kaam keliye sar-o-saamaan muhaiyya kardega”
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay tum unn say aur Allah kay unn kay maboodon say kinara kash hogaye to abb tum kissi ghaar mein jaa behto tumhara rab tum per apni rehmat phela dey ga aur tumharay liye tumharay kaam mein sahoolat mohiyya ker dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)अब जब तुम उनसे और उनके मबूदाने गैर-अल्लाह से बेताब हो चुके हो तो चलो अब फलां घर में चल कर पनाह लो। तुम्हारा रब तुम अपनी रहमत का दामन वही करेगा और तुम्हारे काम केलिए सर-ओ-सामान मुहैया कर देगा”
عَرَبِي۞ وَتَرَى الشَّمسَ إِذا طَلَعَت تَزاوَرُ عَن كَهفِهِم ذاتَ اليَمينِ وَإِذا غَرَبَت تَقرِضُهُم ذاتَ الشِّمالِ وَهُم في فَجوَةٍ مِنهُ ۚ ذٰلِكَ مِن آياتِ اللَّهِ ۗ مَن يَهدِ اللَّهُ فَهُوَ المُهتَدِ ۖ وَمَن يُضلِل فَلَن تَجِدَ لَهُ وَلِيًّا مُرشِدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तुम सूर्य को देखोगे, जब वह निकलता है, तो उनकी गुफा से दायीं ओर झुक (हट) जाता है और जब डूबता है, तो उनसे बायीं ओर कतरा जाता है और वे उस (गुफा) के एक विस्तृत स्थान में हैं। यह अल्लाह की निशानियों में से है। और जिसे अल्लाह मार्ग दिखा दे, वही मार्ग पाने वाला है और जिसे राह से हटा दे, तो तुम उसके लिए हरगिज़ कोई मार्ग दर्शाने वाला सहायक नहीं पाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Tum unhein ghaar mein dekhte to tumhein yun nazar aata ke Suraj jab nikalta hai to unke ghaar ko chodh kar dayein janib chadh jata hai aur jab guroob hota hai to unse bach kar bayein jaanib utar jata hai aur woh hain ke ghaar ke andar ek waseeh jagah mein padey hain. Yeh Allah ki nishaniyon mein se ek hai. Jisko Allah hidayat de wahi hidayat paney wala hai aur jisey Allah bhatka de uske liye tum koi wali-e-murshid nahin paa saktey
Roman Urdu (Junagarhi)Aap dekhen gay kay aftab ba-waqt tuloo unn kay ghaar say dayne janob ko jhuk jata hai aur ba-waqt-e-ghuroob unn kay bayen janib katra jata hai aur woh iss ghaar ki kushada jaga mein hain. Yeh Allah ki nishaniyon mein say hai. Allah Taalaa jiss ki raahbari farmaye woh raah-e-raast per hai aur jissay woh gumraah ker dey na mumkin hai kay aap uss ka koi kaar saaz aur rehnuma paa saken
Devnagri Urdu (Maududi)तुम उन्हें घर में देखते हो तो तुम्हें यूं नजर आता है कि सूरज जब निकलता है तो उनके घर को छोड़ कर जाएं जानिब चढ़ जाता है और जब गुरुब होता है तो उनसे बच कर जाएं जानिब उतर जाता है और वो हैं के घर के अंदर एक वसीह जगह में पड़े हैं। ये अल्लाह की निशानियों में से एक है. जिसको अल्लाह हिदायत दे वही हिदायत पाने वाला है और जिसे अल्लाह भटका दे उसके लिए तुम कोई वली-ए-मुर्शिद नहीं पा सकते
عَرَبِيوَتَحسَبُهُم أَيقاظًا وَهُم رُقودٌ ۚ وَنُقَلِّبُهُم ذاتَ اليَمينِ وَذاتَ الشِّمالِ ۖ وَكَلبُهُم باسِطٌ ذِراعَيهِ بِالوَصيدِ ۚ لَوِ اطَّلَعتَ عَلَيهِم لَوَلَّيتَ مِنهُم فِرارًا وَلَمُلِئتَ مِنهُم رُعبًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तुम उन्हें समझते कि जाग रहे हैं, जबकि वे सोए हुए थे। और हम उन्हें दायें तथा बायें फेरते रहे। और उनका कुत्ता गुफा की चौखट पर अपनी दोनों बाहें फैलाए हुए था। यदि तुम झाँककर देख लेते, तो पीठ फेरकर भाग जाते और उनसे भयभीत हो जाते।
Roman Urdu (Maududi)Tum unhein dekh kar yeh samajhte ke woh jaag rahey hain, halaanke woh soo rahey thay. Hum unhein dayein bayein karwat dilwate rehte thay aur unka kutta ghaar ke dahane [kinare] (entrance) par haath phailaye baitha tha. Agar tum kahin jhaank kar unhein dekhte to ultey paon bhaag khade hotey aur tumpar unke nazare se dehshat baith jati
Roman Urdu (Junagarhi)Aap khayal kertay hain kay woh beydaar hain halankay woh soye huye thay khud hum hi unhen dayen bayen kerwaten dilaya kertay thay unn ka kutta bhi chokhat per apney hath paon phelaye huye tha. Agar aap jhank ker unhen dekhna chahatay to zaroor ultay paon bhag kharay hotay aur unn kay rob say aap per dehshat chah jati
Devnagri Urdu (Maududi)तुम उन्हें देख कर ये समझ के वो जाग रहे हैं, हलांके वो सो रहे थे। हम उन्हें दिनें करवट दिलवाते रहते थे और उनका कुत्ता घर के दहने [किनारे] (प्रवेश द्वार) पर हाथ फैलाये बैठे थे। अगर तुम कहीं झाँक कर उन्हें देखते तो उलटे पाँव भाग खड़े होते और तुम्पर उनके नज़ारे से अलग बैठ जाती
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ بَعَثناهُم لِيَتَساءَلوا بَينَهُم ۚ قالَ قائِلٌ مِنهُم كَم لَبِثتُم ۖ قالوا لَبِثنا يَومًا أَو بَعضَ يَومٍ ۚ قالوا رَبُّكُم أَعلَمُ بِما لَبِثتُم فَابعَثوا أَحَدَكُم بِوَرِقِكُم هٰذِهِ إِلَى المَدينَةِ فَليَنظُر أَيُّها أَزكىٰ طَعامًا فَليَأتِكُم بِرِزقٍ مِنهُ وَليَتَلَطَّف وَلا يُشعِرَنَّ بِكُم أَحَدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार, हमने उन्हें जगा दिया, ताकि वे आपस में एक-दूसरे से पूछें। उनमें से एक कहने वाले ने कहा : तुम कितना समय ठहरे? उन्होंने कहा : हम एक दिन या दिन का कुछ हिस्सा ठहरे। (फिर) उन्होंने कहा : तुम्हारा पालनहार अधिक जानता है कि तुम कितना (समय) ठहरे। (अब) अपने में से किसी को अपना यह चाँदी का सिक्का देकर नगर की ओर भेजो। फिर वह देखे कि किसके पास अधिक स्वच्छ (पवित्र) भोजन है, तो वह उसमें से तुम्हारे लिए कुछ खाना ले आए, तथा वह नरमी व सावधानी बरते और तुम्हारे बारे में किसी को बिल्कुल ख़बर न होने दे।
Roman Urdu (Maududi)Aur isi ajeeb karishme se humne unhein utha bithaya taa-ke zara aapas mein puch-gajh karein, un mein se ek ne pucha “Kaho kitni deir is haal mein rahey?” Dusron ne kaha “shayad din bhar ya issey kuch kam hongey”. Phir woh bole “Allah hi behtar jaanta hai ke hamara kitna waqt is haalat mein guzara. Chalo ab apne mein se kisi ko chandi ka yeh sikkha dekar shehar bhejein aur woh dekhe ke sabse accha khana kahan milta hai wahan se woh kuch khane ke liye laye aur chahiye ke zara hoshiyari se kaam karey, aisa na ho ke woh kisi ko hamare yahan honay se khabrdaar kar baithey
Roman Urdu (Junagarhi)Issi tarah hum ney unhen jaga ker utha diya kay aapas meinpooch gooch kerlen. Aik kehney walay ney kaha kay kiyon bhaee tum kitney dair thehray rahey? Unhon ney jawab diya kay aik din ya aik din say bhi kum. Kehney lagay kay tumharay thehray rehney ka ilm ba-khoobi Allah Taalaa hi ko hai. Abb to tum apney mein say kissi ko apni yeh chandi dey ker shehar bhejo woh khoob dekh bhaal ley kay shehar ka kaun say khana pakeeza tar hai phir ussi mein say tumharay liye khaney kay liye ley aaye aur boht ehtiyat aur narmi barttay aur kissi ko tumhari khabar na honey dey
Devnagri Urdu (Maududi)और इसी अजीब करिश्मा से हमने उन्हें उठाया बिठाया ता-के जरा आपस में पूछ-गज करें, उन में से एक ने पूछा “कहो कितनी” देर इस हाल में रहे?” दुसरों ने कहा "शायद दिन भर या इस तरह कुछ काम होंगे"। फ़िर वो बोले "अल्लाह हाय बेहतर जानता है के हमारा कितना वक़्त इस हालात में गुज़रा। चलो अब अपने में से किसी को चाँदी का ये सिक्ख देकर शहर भेजें और वो देखे के सबसे अच्छा खाना कहाँ मिलता है वहाँ से वो कुछ खाने के लिए ले और चाहे के ज़रा होशियारी से काम करे, ऐसा ना हो के वो किसी को हमारे यहां होने से खबरदार कर बैठे
عَرَبِيإِنَّهُم إِن يَظهَروا عَلَيكُم يَرجُموكُم أَو يُعيدوكُم في مِلَّتِهِم وَلَن تُفلِحوا إِذًا أَبَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)क्योंकि यदि वे तुम्हें जान जाएँगे, तो तुम्हें पथराव करके मार डालेंगे या तुम्हें अपने धर्म में लौटा लेंगे और उस समय तुम कभी सफल नहीं हो सकोगे।
Roman Urdu (Maududi)Agar kahin un logon ka haath humpar padh gaya to bas sangsar (stone to death) kar daalenge, ya phir zabardasti humein apni millat mein wapas le jayenge, aur aisa hua to hum kabhi falaah na paa sakenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Agar yeh kafir tum per ghalba paa len to tumhen sangsaar ker den gay ya tumhen phir apney deen mein lota len gay aur phir tum kabhi bhi kaamyaab na hosako gay
Devnagri Urdu (Maududi)अगर कहीं उन लोगों का हाथ हमपर पढ़ गया तो बस संगसार (पत्थर से मौत ) कर डालेंगे, या फिर ज़बरदस्ती हमें अपनी मिल्लत में वापस ले जाएंगे, और ऐसा हुआ तो हम कभी फलाह न पा सकेंगे"
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ أَعثَرنا عَلَيهِم لِيَعلَموا أَنَّ وَعدَ اللَّهِ حَقٌّ وَأَنَّ السّاعَةَ لا رَيبَ فيها إِذ يَتَنازَعونَ بَينَهُم أَمرَهُم ۖ فَقالُوا ابنوا عَلَيهِم بُنيانًا ۖ رَبُّهُم أَعلَمُ بِهِم ۚ قالَ الَّذينَ غَلَبوا عَلىٰ أَمرِهِم لَنَتَّخِذَنَّ عَلَيهِم مَسجِدًا
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार, हमने (लोगों को) उनसे अवगत करा दिया, ताकि वे जान लें कि अल्लाह का वादा सत्य है, और क़ियामत (के आने) में कोई संदेह नहीं। (याद करो) जब वे (उनके विषय में) आपस में विवाद करने लगे। कुछ लोगों ने कहा : उनपर कोई भवन निर्माण करा दो, उनका पालनहार उनके बारे में अधिक जानता है। जो लोग उनके मामले में प्रभावी रहे, उन्होंने कहा : हम तो उन (की गुफा के स्थान) पर अवश्य एक मस्जिद बनाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Is tarah humne ehle shehar ko unke haal par muttala kiya taa-ke log jaan lein ke Allah ka wada saccha hai, aur yeh ke qayamat ki ghadi beshak aakar rahegi. (Magar zara khayal karo ke jab sochne ki asal baat yeh thi) us waqt woh aapas mein is baat par jhagad rahey thay ke in (ashab-e-kahaf) ke saath kya kiya jaye. Kuch logon ne kaha “inpar ek deewar chun do, inka Rubb hi inke maamle ko behter jaanta hai” magar jo log unke maamlaat par galib thay unhon ne kaha “hum to inpar ek ibadat gaah banayenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney iss tarah logon ko unn kay haal say aagah ker diya kay woh jaan len kay Allah ka wada bilkul sacha hai aur qayamat mein koi shuba nahi. Jabkay woh apney amar mein aapas mein ikhtilaf ker rahey thay kehney lagay inn kay ghaar per aik emaarat bana lo. Unn ka rab hi unn kay haal ka ziyada aalim hai. Jin logon ney unn kay baray mein ghalba paya woh kehney lagay kay hum to inn kay aas pass masjod bana len gay
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह हमने एहले शहर को उनके हाल पर मुत्तला किया ता-के लोग जान लें के अल्लाह का वादा सच्चा है, और ये के कयामत की घड़ी बशक आकर रहेगी (मगर जरा ख्याल करो के जब सोचने की असल बात ये थी) हमारा वक्त वो आपस में इस बात पर झगड़ा रहे थे के (अशब-ए-कहफ) के साथ क्या। किया जाये. कुछ लोगों ने कहा "इनपार एक दीवार चुन दो, इनका रब ही इनके मामले को बेहतर जानता है" मगर जो लोग उनके मामले पर गालिब थे उन्हें ने कहा "हम तो अंदर एक इबादत गाह बनाएंगे"
عَرَبِيسَيَقولونَ ثَلاثَةٌ رابِعُهُم كَلبُهُم وَيَقولونَ خَمسَةٌ سادِسُهُم كَلبُهُم رَجمًا بِالغَيبِ ۖ وَيَقولونَ سَبعَةٌ وَثامِنُهُم كَلبُهُم ۚ قُل رَبّي أَعلَمُ بِعِدَّتِهِم ما يَعلَمُهُم إِلّا قَليلٌ ۗ فَلا تُمارِ فيهِم إِلّا مِراءً ظاهِرًا وَلا تَستَفتِ فيهِم مِنهُم أَحَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)अब कुछ लोग कहेंगे : वे तीन हैं, उनका चौथा उनका कुत्ता है। और कुछ कहेंगे : वे पाँच हैं, उनका छठा उनका कुत्ता है। ये लोग अँधेरे में तीर चलाते हैं। और (कुछ लोग) कहेंगे : वे सात हैं, उनका आठवाँ उनका कुत्ता है। (ऐ नबी!) आप कह दें : मेरा पालनहार ही उनकी संख्या को भली-भाँति जानता है। उन्हें बहुत थोड़े लोगों के सिवा कोई नहीं जानता। अतः आप उनके संबंध में बहस न करें, सिवाय सरसरी बहस के, और आप उनके विषय में इनमें से किसी से भी न पूछें।
Roman Urdu (Maududi)Kuch log kahenge ke woh teen thay aur chutha (fourth) unka kutta tha aur kuch dusre keh denge ke paanch thay aur chatta(sixth) unka kutta tha. Yeh sab betuki (irrelevant guesses) haankte hain. Kuch aur log kehte hain ke saat (seven) thay aur aathwa (eighth) unka kutta tha. Kaho, mere Rubb hi behtar jaanta hai ke woh kitne thay, kam hi log unki saheeh tadaad jaante hain, pas tum sar-sari baat se badhkar unki tadaad ke maamle mein logon se behas na karo, aur na unke mutaaliq kisi se kuch pucho
Roman Urdu (Junagarhi)Kuch log to kahen gay kay ashaab-e-kahaf teen thay aut chotha unn ka kuta tha. Kuch kahen gay kay panch thay aur chata unn ka kuta tha ghaib ki baton mein atkal (kay teer tukkay) chalatay hain kuch kahen gay woh saat hain aur aathwaa unn ka kuta hai. Aap keh dijiye kay mera perwerdigar unn ki tadaad ko ba-khoobi jannay wala hai unhen boht hi kum log jantay hain. Pus aap inn kay muqadmay mein sirf sirsari guftugoo hi keren aur inn mein say kissi say unn kay baray mein pooch gooch bhi na keren
Devnagri Urdu (Maududi)कुछ लोग कहेंगे के वो तीन थे और चौथा (चौथा) उनका कुत्ता था और कुछ दूसरे कह देंगे के पांच थे और छठा (छठा) उनका कुत्ता था। ये सब बेटुकी (अप्रासंगिक अनुमान) हांकते हैं। कुछ और लोग कहते हैं कि सात (सात) था और आठवां (आठवां) उनका कुत्ता था। कहो, मेरे रब ही बेहतर जानता है के वो कितने थाय, काम ही लोग उनकी सही ताड़द जानते हैं, लेकिन तुम सर-साड़ी बात से बढ़कर उनकी तड़प के मामले में लोगों से बेहस ना करो, और ना उनको मुतालिक किसी से कुछ पूछो
عَرَبِيوَلا تَقولَنَّ لِشَيءٍ إِنّي فاعِلٌ ذٰلِكَ غَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)और किसी चीज़ के बारे में हरगिज़ न कहें : निःसंदेह मैं इसे कल करने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur dekho, kisi cheez ke baarey mein kabhi yeh na kaha karo main kal yeh kaam kardunga
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hergiz hergiz kissi kaam yun na kehna kay mein issay kal keroon ga
Devnagri Urdu (Maududi)और देखो, किसी चीज के बारे में कभी ये ना कहा करो मैं कल ये काम कर दूंगा
عَرَبِيإِلّا أَن يَشاءَ اللَّهُ ۚ وَاذكُر رَبَّكَ إِذا نَسيتَ وَقُل عَسىٰ أَن يَهدِيَنِ رَبّي لِأَقرَبَ مِن هٰذا رَشَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु यह कि अल्लाह चाहे। तथा जब भूल जाएँ तो अपने पालनहार को याद करें और कहें : आशा है कि मेरा पालनहार मुझे हिदायत (भलाई) का इससे निकटतर मार्ग दिखा दे।
Roman Urdu (Maududi)(Tum kuch nahin kar sakte) illa yeh ke Allah chahe, agar bhool se aisi baat zubaan se nikal jaye to fauran apne Rubb ko yaad karo aur kaho “umeed hai ke mera Rubb is maamle mein rushd se qareeb-tar baat ki taraf meri rehnumayi farmadega”
Roman Urdu (Junagarhi)Magar sath hi inshaAllah keh lena. Aur jab bhi bhoolay apney perwerdigar ko yaad ker liya kerna aur kehtay rehna mujhay poosi umeed hai kay mera rab mujhay iss say bhi ziyada hidayat kay qareeb ki baat ki rehbari keray
Devnagri Urdu (Maududi)(तुम कुछ नहीं कर सकते) इल्ला ये के अल्लाह चाहे, अगर भूल से ऐसी बात जुबान से निकल जाए तो तुरंत अपने रब को याद करो और कहो "उम्मीद है के मेरा रब इस मामले में रुशद से करीब-करीब बात की तरफ मेरी रहनुमाई फरमादेगा"
عَرَبِيوَلَبِثوا في كَهفِهِم ثَلاثَ مِائَةٍ سِنينَ وَازدادوا تِسعًا
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हिन्दी (Al-Omari)और वे अपनी गुफा में तीन सौ वर्ष रहे और नौ वर्ष और अधिक रहे।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh apne ghaar(cave) mein teen sau (three hundred) saal rahey, aur (kuch log muddat ke shumar mein) naw (nine) saal aur badh gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh log apney ghaar mein teen so saal tak rahey aur no saal aur ziyada guzaray
Devnagri Urdu (Maududi)और वो अपने घर (गुफा) में तीन सौ (तीन सौ) साल रहे, और (कुछ लोग मुद्दत के शूमर में) नौ (नौ) साल और बढ़ गए हैं
عَرَبِيقُلِ اللَّهُ أَعلَمُ بِما لَبِثوا ۖ لَهُ غَيبُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ أَبصِر بِهِ وَأَسمِع ۚ ما لَهُم مِن دونِهِ مِن وَلِيٍّ وَلا يُشرِكُ في حُكمِهِ أَحَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : अल्लाह ही उनके ठहरे रहने की अवधि को बेहतर जानता है। आकाशों तथा धरती की छिपी हुई बातें उसी के ज्ञान में हैं। वह क्या ही खूब देखने वाला और क्या ही खूब सुनने वाला है। न उसके सिवा उनका कोई सहायक है और न वह अपने शासन में किसी को साझी बनाता है।
Roman Urdu (Maududi)Tum kaho, Allah unke qayaam ki muddat(period of their stay) zyada jaanta hai, aasmano aur zameen ke sab posheeda ahwal usi ko maloom hain. Kya khoob hai woh dekhne wala aur sunne wala! Zameen o aasman ki makhlooqat ka koi khabar-geer uske siwa nahin , aur woh apni hukumat mein kisi ko shareek nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh den Allah hi ko unn kay thehray rehney ki muddat ka ba-khoobi ilm hai aasmanon aur zaminon ka ghaib sirf ussi ko hasil hai woh kiya hi acha dekhney aur sunnay wala hai. Siwaye Allah kay unn ka koi madadgaar nahi Allah Taalaa apney hukum mein kissi ko shareeq nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)तुम कहो, अल्लाह उनके क़याम की मुद्दत (उनके रहने की अवधि) ज़्यादा जानता है, आसमान और ज़मीन के सब पोशीदा अहवाल उसी को मालूम है। क्या ख़ूब है वो देखने वाला और सुनने वाला! ज़मीन ओ आसमान की मख़लूक़त का कोई ख़बर-गीर उसके सिवा नहीं, और वो अपनी हुकूमत में किसी को शरीक नहीं करता
عَرَبِيوَاتلُ ما أوحِيَ إِلَيكَ مِن كِتابِ رَبِّكَ ۖ لا مُبَدِّلَ لِكَلِماتِهِ وَلَن تَجِدَ مِن دونِهِ مُلتَحَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)और आपके पालनहार की किताब में से आपकी ओर जो वह़्य की गई है, उसे पढ़ते रहें। उसकी बातों को कोई बदलने वाला नहीं है। और आप उसके सिवा कोई शरण लेने की जगह हरगिज़ नहीं पाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi! Tumhare Rubb ki kitaab mein se kuch tum par wahee(revelation) kiya gaya hai usye ( jun ka too /exactly) suna do. Koi uske farmudaat ko badal dene ka mijaz nahin hai, ( aur agar tum kisi ki khatir is mein radd o badal karogey to) ussey bachkar bhaagne ke liye koi jaye panaah na paogey
Roman Urdu (Junagarhi)Teri janib jo teray rab ki kitab wahee ki gaee hai ussay parhta reh uss ki baton ko koi badalney wala nahi tu uss kay siwa hergiz hergiz koi panah ki jagah na paye ga
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी! तुम्हारे रब की किताब में से कुछ तुम पर वही (रहस्योद्घाटन) किया गया है उसे (जून का भी/बिल्कुल) सुना दो। कोई उसके फार्मूदात को बदलने का मिजाज नहीं है, (और अगर तुम किसी की खातिर इस में रद्द या बदल करोगे तो) उसे छोड़कर भागने के लिए कोई जाएगा पनाह न पाओगे
عَرَبِيوَاصبِر نَفسَكَ مَعَ الَّذينَ يَدعونَ رَبَّهُم بِالغَداةِ وَالعَشِيِّ يُريدونَ وَجهَهُ ۖ وَلا تَعدُ عَيناكَ عَنهُم تُريدُ زينَةَ الحَياةِ الدُّنيا ۖ وَلا تُطِع مَن أَغفَلنا قَلبَهُ عَن ذِكرِنا وَاتَّبَعَ هَواهُ وَكانَ أَمرُهُ فُرُطًا
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हिन्दी (Al-Omari)और अपने आपको उन लोगों के साथ रोके रखें, जो सुबह-शाम अपने पालनहार को पुकारते हैं। वे उसका चेहरा चाहते हैं। और सांसारिक जीवन की शोभा की चाह में अपनी आँखों को उनसे न फेरें। और उसकी बात न मानें, जिसके दिल को हमने अपनी याद से ग़ाफ़िल कर दिया है, और वह अपनी इच्छा के पीछे लगा हुआ है, और उसका मामला हद से बढ़ा हुआ है।
Roman Urdu (Maududi)Aur apne dil ko un logon ki maiyat par mutmaeen karo jo apne Rubb ki raza ke talabgaar bankar subah o shaam usey pukarte hain, aur unse hargiz nigaah na phero. Kya tum duniya ki zeenat pasand karte ho? Kisi aisey shaks ki itaat na karo jiske dil ko humne apni yaad se gaafil kardiya hai aur jisne apni khwahish e nafs ki pairwi ikhtiyar karli hai aur jiska tareeqe-kar ifraat o tafreet par mabni hai(follows his own lust and goes to extremes in the conduct of his affairs)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney aap ko unhin kay sath rakha ker jo apney perwerdigar ko subha shaam pukartay hain aur ussi kay chehray kay iraday rakhtay hain (raza mandi chahatay hain) khabardaar! Teri nigahen unn say na hatney payen kay dunyawi zindagi kay thaath kay iraday mein lag jaa. Dekh uss ka kehna na manna jiss kay dil ko hum ney apney zikar say ghafil ker diya hai aur jo apni khuwaishon kay peechay para hua hai aur jiss ka kaam hadd say guzar chuka hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अपने दिल को उन लोगों की माया पर मुतमइन करो जो अपने रब की रजा के तलबगार बनकर सुबह ओ शाम उसे पुकारते हैं, और उनसे हरगिज निगाह ना फेरो। क्या तुम दुनिया की जीनत पसंद करते हो? किसी ऐसे शक्स की इत्ता ना करो जिसके दिल को हमने अपनी याद से गाफिल करदिया है और जिसने अपनी ख्वाहिश ए नफ्स की जोड़ी इख्तियार कर ली है और जिसका तारीख-कर इफरात ओ तफ़रीत पर मबनी है (अपनी वासना का अनुसरण करता है और अपने मामलों के संचालन में चरम सीमा तक चला जाता है)
عَرَبِيوَقُلِ الحَقُّ مِن رَبِّكُم ۖ فَمَن شاءَ فَليُؤمِن وَمَن شاءَ فَليَكفُر ۚ إِنّا أَعتَدنا لِلظّالِمينَ نارًا أَحاطَ بِهِم سُرادِقُها ۚ وَإِن يَستَغيثوا يُغاثوا بِماءٍ كَالمُهلِ يَشوِي الوُجوهَ ۚ بِئسَ الشَّرابُ وَساءَت مُرتَفَقًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : यह सत्य तुम्हारे पालनहार की ओर से है। अब जो चाहे, ईमान लाए और जो चाहे कुफ़्र करे। निःसंदेह हमने अत्याचारियों के लिए ऐसी आग तैयार कर रखी है, जिसकी दीवारें उन्हें घेर लेंगी। और यदि वे फ़र्याद करेंगे, तो उन्हें ऐसा जल दिया जाएगा, जो तेल की तलछट जैसा होगा, जो चेहरों को भून डालेगा। वह क्या ही बुरा पेय है और वह क्या ही बुरा विश्राम स्थान है!
Roman Urdu (Maududi)Saaf kehdo ke yeh haqq hai tumhare Rubb ki taraf se, ab jiska jee chahe maan ley aur jiska jee chahe inkar karde. Humne (inkar karne waley) zalimon ke liye ek aag tayyar kar rakkhi hai jiski laptein unhein gheray mein le chuki hain. Wahan agar woh pani maangein ge to aisey pani se unki tawazo ki jayegi jo tail (oil) ke tilchat jaisa hoga aur unka mooh bhoon daalega. Badtareen peene ki cheez aur bahut buri aaraamgaah
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ailaan ker dey kay yeh sirasar bar-haq quran tumharay rab ki taraf say hai. Abb jo chahaye eman laye aur jo chahaye kufur keray. Zalimon kay liye hum ney woh aag tayyar ker rakhi hai jiss ki qanaten unhen gher len gi agar woh faryad rasi chahayen gay to unn ki faryad rasi uss pani say ki jayegi jo tel ki talchat jaisa hoga jo chehray bhoon dey ga bara hi bura pani hai aur bari buri aaram gaah (dozakh) hai
Devnagri Urdu (Maududi)साफ कहदो के ये हक है तुम्हारे रब की तरफ से, अब जिसका जी चाहे मान ले और जिसका जी चाहे इंकार करदे। हमने (इनकार करने वाले) ज़ालिमों के लिए एक आग तैयार कर रखी है जिसकी लपेटें उन्हें घेरे में ले चुकी हैं। वहां अगर वो पानी मांगेगे तो ऐसे पानी से उनकी तवाज़ो की जाएगी जो तेल (तेल) के लिए तिलचट जैसा होगा और उनका मुंह भून डालेगा। बदतरें पीने की चीज़ और बहुत बुरी आरामगाह
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ إِنّا لا نُضيعُ أَجرَ مَن أَحسَنَ عَمَلًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग ईमान लाए तथा अच्छे कार्य किए। निश्चय हम उसका प्रतिफल व्यर्थ नहीं करते, जिसने अच्छे कार्य किए।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jo maan lein aur neik amal karein, to yaqeenan hum neikukar logon ka ajar zaya nahin kiya karte
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan jo log eman layen aur nek aemaal keren to hum kissi nek amal kerney walay ka sawab zaya nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जो मान लें और नीक अमल करें, तो यकीनन हम नीकुकर लोगों का अजर ज़या नहीं किया करते
عَرَبِيأُولٰئِكَ لَهُم جَنّاتُ عَدنٍ تَجري مِن تَحتِهِمُ الأَنهارُ يُحَلَّونَ فيها مِن أَساوِرَ مِن ذَهَبٍ وَيَلبَسونَ ثِيابًا خُضرًا مِن سُندُسٍ وَإِستَبرَقٍ مُتَّكِئينَ فيها عَلَى الأَرائِكِ ۚ نِعمَ الثَّوابُ وَحَسُنَت مُرتَفَقًا
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हिन्दी (Al-Omari)यही लोग हैं, जिनके लिए स्थायी बाग़ हैं, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। वहाँ उन्हें सोने के कंगन पहनाए जाएँगे। तथा वे महीन और गाढ़े रेशम के हरे वस्त्र पहनेंगे। वहाँ तख़्तों पर तकिया लगाए हुए होंगे। यह क्या ही अच्छा बदला है और क्या ही अच्छा विश्राम स्थान है।
Roman Urdu (Maududi)Unke liye sada bahar(evergreen) jannatein hain jinke nichey nehrein beh rahi hongi, wahan woh sonay ke kangano (golden bracelets) se aaraasta kiye jayenge. Bareek resham aur atlas o deba ke sabz kapde pehnenge , aur unhci masnadon par takiye lagakar bathenge, behtareen ajar aur aala darje ki jaaye qayam
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay liye hameshgi wali jannaten hain inn kay neechay nehren jari hongi wahan yeh soney kay kangan pehnayen jayen gay aur sabz rang kay narm-o-bareek aur motay resham kay libas pehnen gay wahan takhton kay upper takiye lagaye huye hongay. Kiya khoob badla hai aur kiss qadar umdah aaram gaah hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनके लिए सदा बहार (सदाबहार) जन्नतें हैं जिनके आला नह्रेन बेह राही होंगी, वहां वो सोने के कंगन (सुनहरे कंगन) से जुड़ेंगे। बारीक रेशम और अतलस ओ देबा के सब्ज़ कपडे पहनेंगे, और उनकी मसनदों पर तकिये लगा कर बैठेंगे, बेहतर अजर और आला दर्जे की जाये क़याम
عَرَبِي۞ وَاضرِب لَهُم مَثَلًا رَجُلَينِ جَعَلنا لِأَحَدِهِما جَنَّتَينِ مِن أَعنابٍ وَحَفَفناهُما بِنَخلٍ وَجَعَلنا بَينَهُما زَرعًا
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) आप उन्हें दो व्यक्तियों का एक उदाहरण दें; जिनमें से एक को हमने अंगूरों के दो बाग़ दिए और हमने दोनों को खजूरों के पेड़ों से घेर दिया और दोनों के बीच कुछ खेती रखी।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad)! Inke saamne ek misaal pesh karo do shaks thay un mein se ek ko humne angoor ke do baagh diye aur unke gird khajoor ke darakhton ki baadh(fence) lagayi aur unke darmiyan kaasht (cultivation) ki zameen rakkhi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur enhen unn do shakson ki misal bhi suna dey jin mein say aik ko hum ney do baagh angooron kay dey rakhay thay aur jinhen khujooron kay darakhton say hum ney gher rakha tha aur dono kay darmiyan kheti laga rakhi thi
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद)! इनके सामने एक मिसाल पेश करो दो शक्स थे उन में से एक को हमने अंगूर के दो बाग दिए और उनके गिर्द खजूर के दरख्तों की बाध (बाड़) लगाई और उनके दरमियान काश्त (खेती) की जमीन राखी
عَرَبِيكِلتَا الجَنَّتَينِ آتَت أُكُلَها وَلَم تَظلِم مِنهُ شَيئًا ۚ وَفَجَّرنا خِلالَهُما نَهَرًا
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हिन्दी (Al-Omari)दोनों बाग़ों ने अपने पूरे फल दिए और उसमें से कुछ कमी नहीं की। और हमने दोनों के बीच एक नहर जारी कर दी।
Roman Urdu (Maududi)Dono baag khoob phaley phooley aur baraawar honay mein unhon ne zara si kasar bhi na chodi, un baaghon ke andar humne ek nehar jari kardi
Roman Urdu (Junagarhi)Dono baagh apna phal khoob laye aur iss mein kissi tarah ki kami na ki aur hum ney inn baaghon kay darmiyan nehar jari ker rakhi thi
Devnagri Urdu (Maududi)डोनो बाग खूब फले फूले और बारावर होने में उनको ने जरा सी कसार भी ना छोड़ी, उन बाघों के अंदर हमने एक नेहर जारी करदी
عَرَبِيوَكانَ لَهُ ثَمَرٌ فَقالَ لِصاحِبِهِ وَهُوَ يُحاوِرُهُ أَنا أَكثَرُ مِنكَ مالًا وَأَعَزُّ نَفَرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और उसके पास बहुत-सा फल था। तो उसने अपने साथी से, जबकि वह उससे बात कर रहा था, कहा : मैं तुझसे धन-दौलत में अधिक हूँ तथा जत्थे में भी बढ़कर हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur usey khoob nafaa haasil hua, yeh kuch paa kar ek din woh apne humsaye (neighbour) se baat karte huey bola ‘main tujhse zyada maaldaar hoon aur tujhse zyada taaqatwar nafri rakhta hoon(mightier men at my service)”
Roman Urdu (Junagarhi)Al-gharz uss kay pass meway thay aik din uss ney baton hi baton mein apney sathi say kaha kay mein tujh say ziyada maaldaar hun aur juthay kay aitbaar say bhi ziyada mazboot hun
Devnagri Urdu (Maududi)और उसे खूब नफा ​​हासिल हुआ, ये कुछ पा कर एक दिन वो अपने हमसाए (पड़ोसी) से बात करते हुए बोला 'मैं तुझसे ज्यादा मालदार हूं और' तुझसे ज़्यादा ताक़तवर नफ़री रखता हूँ (मेरी सेवा में ताकतवर आदमी)"
عَرَبِيوَدَخَلَ جَنَّتَهُ وَهُوَ ظالِمٌ لِنَفسِهِ قالَ ما أَظُنُّ أَن تَبيدَ هٰذِهِ أَبَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)और उसने अपने बाग़ में (इस हाल में) प्रवेश किया कि वह अपने आप पर अत्याचार करने वाला था। उसने कहा : मैं नहीं समझता कि इसका कभी विनाश होगा।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh apni jannat (garden) mein dakhil hua aur apne nafs ke haqq mein zalim bankar kehne laga “main nahin samajhta ke yeh daulat kabhi fanaah ho jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh apney baagh mein gaya aur tha apni jaan per zulm kerney wala. Kehney laga kay mein khayal nahi ker sakta kay kissi waqt bhi yeh barbaad hojaye
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो अपनी जन्नत (बगीचे) में दखल हुआ और अपने नफ़्स के हक़ में ज़ालिम बनकर कहने लगा "मैं नहीं समझता के ये दौलत कभी फ़ना हो जाएगी"
عَرَبِيوَما أَظُنُّ السّاعَةَ قائِمَةً وَلَئِن رُدِدتُ إِلىٰ رَبّي لَأَجِدَنَّ خَيرًا مِنها مُنقَلَبًا
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हिन्दी (Al-Omari)और न मैं यह समझता हूँ कि क़ियामत आने वाली है। और वाक़ई यदि मुझे अपने पालनहार की ओर लौटाया गया, तो निश्चय ही मैं ज़रूर इससे उत्तम लौटने का स्थान पाऊँगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur mujhey tawakku nahin ke qayamat ki ghadi kabhi aayegi, taaham agar kabhi mujhey apne Rubb ke huzoor paltaya bhi gaya to zaroor issey bhi zyada shaandaar jagah paonga”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na mein qayamat ko qaeem honey wali khayal kerta hun aur agar (bil farz) mein apney rab ki taraf lotaya bhi gaya to yaqeenan mein (uss lotney ki jagah) iss say bhi ziyada behtar paon ga
Devnagri Urdu (Maududi)और मुझे तवक्कू नहीं के कयामत की घड़ी कभी आएगी, ताहम अगर कभी मुझे अपने रब के हुजूर पलटया भी गया तो जरूर इसे भी ज्यादा शानदार जगह पाऊंगा”
عَرَبِيقالَ لَهُ صاحِبُهُ وَهُوَ يُحاوِرُهُ أَكَفَرتَ بِالَّذي خَلَقَكَ مِن تُرابٍ ثُمَّ مِن نُطفَةٍ ثُمَّ سَوّاكَ رَجُلًا
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हिन्दी (Al-Omari)उसके साथी ने, जबकि वह उससे बातें कर रहा था, उससे कहा : क्या तूने उसके साथ कुफ़्र किया, जिसने तुझे तुच्छ मिट्टी से पैदा किया, फिर वीर्य से, फिर तुझे ठीक-ठाक एक पुरुष बना दिया?
Roman Urdu (Maududi)Uske humsaye (neighbour/companion) ne guftagu karte huey ussey kaha “kya tu kufr karta hai us zaat se jisne tujhe mitti se aur phir nutfe se paida kiya aur tujhe ek poora aadmi bana khada kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Uss kay sathi ney uss say baten kertay huye kaha kay kiya to uss (mabood) say kufur kerta hai jiss ney tujhay mitti say peda kiya. Phir nutfay say phir tujhay poora aadmi bana diya
Devnagri Urdu (Maududi)उसके हमसये (पड़ोसी/साथी) ने गुफ्तगू करते हुए उसे कहा “क्या तू कुफ्र” करता है हमें जात से जिसने तुझे मिट्टी से और फिर से खिलाया किया और तुझे एक पूरा आदमी बना खड़ा किया
عَرَبِيلٰكِنّا هُوَ اللَّهُ رَبّي وَلا أُشرِكُ بِرَبّي أَحَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)लेकिन मैं, तो वह अल्लाह ही मेरा पालनहार है और मैं अपने पालनहार के साथ किसी को साझी नहीं बनाता।
Roman Urdu (Maududi)Raha main, to mera Rubb to wahi Allah hai aur main uske saath kisi ko shareek nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin mein to aqeedah rakhta hun kay wohi Allah mera perwerdigar hai mein apney rab kay sath kissi ko shareeq na keroon ga
Devnagri Urdu (Maududi)रहा मैं, तो मेरा रब तो वही अल्लाह है और मैं उसके साथ किसी को शरीक नहीं करता
عَرَبِيوَلَولا إِذ دَخَلتَ جَنَّتَكَ قُلتَ ما شاءَ اللَّهُ لا قُوَّةَ إِلّا بِاللَّهِ ۚ إِن تَرَنِ أَنا أَقَلَّ مِنكَ مالًا وَوَلَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब तूने अपने बाग़ में प्रवेश किया, तो क्यों नहीं कहा : ''जो अल्लाह ने चाहा, अल्लाह की मदद के बिना कोई शक्ति नहीं'', यदि तू मुझे देखता है कि मैं धन तथा संतान में तुझसे कमतर हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab tu apni jannat mein dakhil ho raha tha to us waqt teri zubaan se yeh kyun na nikla ke masha Allah, la quwwata illa billa (there is no power except in Allah)? Agar tu mujhe maal aur aulad mein apne se kamtar paa raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tu ney apney baagh mein jatay waqt kiyon na kaha kay Allah ka chaha honey wala hai koi taqat nahi magar Allah ki madad say agar tu mujhay maal-o-aulad mein apney say kam dekh raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जब तू अपनी जन्नत में दखल हो रहा था हमें वक्त तेरी जुबान से ये क्यों न निकला के माशा अल्लाह, ला कुव्वता इल्ला बिल्ला (अल्लाह के अलावा कोई ताकत नहीं)? अगर तू मुझे माल और औलाद में अपने से कमतर पा रहा है
عَرَبِيفَعَسىٰ رَبّي أَن يُؤتِيَنِ خَيرًا مِن جَنَّتِكَ وَيُرسِلَ عَلَيها حُسبانًا مِنَ السَّماءِ فَتُصبِحَ صَعيدًا زَلَقًا
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हिन्दी (Al-Omari)तो आशा है कि मेरा पालनहार मुझे तेरे बाग़ से अच्छा प्रदान कर दे, और इस (बाग़) पर आकाश से कोई आपदा भेज दे, तो यह (चटियल) चिकनी भूमि बन जाए।
Roman Urdu (Maududi)To baeed nahin ke mera Rubb mujhey teri jannat (garden) se behtar ata farmade aur teri jannat (baagh/garden) par aasman se koi aafat bhej de jissey woh saaf maidan bankar reh jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Boht mumkin hai kay mera rab mujhay teray iss baagh say bhi behtar dey aur iss per aasmani azab bhej dey to yeh chatyal aur chikna maidan bann jaye
Devnagri Urdu (Maududi)तो बुरा नहीं के मेरा रब मुझे तेरी जन्नत (बगीचे) से बेहतर अता फरमाड़े और तेरी जन्नत (बाग/बगीचा) पर आसमान से कोई आफत भेज दे जिसमें वो साफ मैदान बनकर रह जाए
عَرَبِيأَو يُصبِحَ ماؤُها غَورًا فَلَن تَستَطيعَ لَهُ طَلَبًا
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हिन्दी (Al-Omari)या उसका पानी गहरा हो जाए, फिर तू उसे कभी तलाश न कर सकेगा।
Roman Urdu (Maududi)Ya iska pani zameen mein utar jaye aur phir tu isey kisi tarah na nikal sakey”
Roman Urdu (Junagarhi)Ya iss ka pani neechay utar jaye aur teray bus mein na rahey kay tu issay dhoond laye
Devnagri Urdu (Maududi)या इसका पानी ज़मीन में उतर जाए और फिर तू इसकी तरह ना निकल सके”
عَرَبِيوَأُحيطَ بِثَمَرِهِ فَأَصبَحَ يُقَلِّبُ كَفَّيهِ عَلىٰ ما أَنفَقَ فيها وَهِيَ خاوِيَةٌ عَلىٰ عُروشِها وَيَقولُ يا لَيتَني لَم أُشرِك بِرَبّي أَحَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)(अंततः) उसका सारा फल मारा गया। फिर वह अपने दोनों हाथ मलता रह गया, उस (धन) पर जो उसमें खर्च किया था। जबकि वह (बाग़) अपने छप्परों सहित गिरा हुआ था और वह कहता था : काश मैं अपने पालनहार के साथ किसी को साझी न बनाता।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir-e-kaar hua yeh ke uska saara samrah maara gaya aur woh apne angooron ke baagh ko tattiyon par ulta pada dekh kar apni lagayi hui laagat par haath malta reh gaya aur kehne laga ke “kaash! Maine apne Rubb ke saath kisi ko shareek na thehraya hota”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss kay (saray) phal gher liye gaye pus woh apney uss kharach per jo uss ney iss mein kiya tha apney hath malney laga aur woh baagh to ondha ulta para tha aur (woh shaks) yeh keh raha tha kay kaash! Mein apney rab kay sath kissi ko bhi shareeq na kerta
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर-ए-कार हुआ ये के उसका सारा सारा ख़त्म हो गया और वो अपने अंगूरों के बागों को टट्टियों पर उल्टा पड़ा देख कर अपनी लगाई हुई लगत पर हाथ माल्टा रह गया और कहने लगा के "काश! मैंने अपने रुब के साथ किसी को शरीक ना ठहरया होता"
عَرَبِيوَلَم تَكُن لَهُ فِئَةٌ يَنصُرونَهُ مِن دونِ اللَّهِ وَما كانَ مُنتَصِرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और नहीं था उसके पास कोई जत्था, जो अल्लाह के मुक़ाबले में उसकी मदद करता और न वह अपनी सहायता आप कर सका।
Roman Urdu (Maududi)Na hua Allah ko chodh kar uske paas koi jattha (jamaat/company) ke uski madad karta, aur na kar saka woh aap hi us aafat ka muqabla
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ki himayat mein koi jamat na uthi kay Allah say uss ka bachao kerti aur na woh khud hi badla lenay wala bann saka
Devnagri Urdu (Maududi)ना हुआ अल्लाह को छोड़ कर उसके पास कोई जत्था (जमात/कंपनी) के उसकी मदद करता, और ना कर सका वो आप ही हमसे आफत का मुकाबला
عَرَبِيهُنالِكَ الوَلايَةُ لِلَّهِ الحَقِّ ۚ هُوَ خَيرٌ ثَوابًا وَخَيرٌ عُقبًا
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हिन्दी (Al-Omari)वहाँ सहायता करना केवल परम सत्य अल्लाह के अधिकार में है। वह प्रतिफल प्रदान करने में सबसे बेहतर तथा परिणाम कि दृष्टि से सबसे अच्छा है।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt maloom hua ke kaarsaazi ka ikhtiyar khuda e barhaqq hi ke liye hai, inaam wahi behtar hai jo woh bakshay aur anjaam wahi ba-khair hai jo woh dikhaye
Roman Urdu (Junagarhi)Yahin say (sabit hai) kay ikhtiyaraat Allah bar-haq kay liye hain woh sawab denay aur anjam kay aitbaar say both hi behtar hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त मालूम हुआ के कारसाज़ी का इख्तियार खुदा ए बरहक़्क़ ही के लिए है, इनाम वही बेहतर है जो वो बक्शे और अंजाम वही बा-खैर है जो वो दिखाए
عَرَبِيوَاضرِب لَهُم مَثَلَ الحَياةِ الدُّنيا كَماءٍ أَنزَلناهُ مِنَ السَّماءِ فَاختَلَطَ بِهِ نَباتُ الأَرضِ فَأَصبَحَ هَشيمًا تَذروهُ الرِّياحُ ۗ وَكانَ اللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ مُقتَدِرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) आप उन्हें सांसारिक जीवन का उदाहरण दें, वह उस पानी के समान है, जिसे हमने आकाश से बरसाया, तो पृथ्वी की वनस्पति (घनी होकर) उसके साथ मिल गई। फिर वह चूरा-चूरा हो गई, जिसे हवाएँ उड़ाए फिरती हैं। और अल्लाह प्रत्येक चीज़ का सामर्थ्य रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Nabi)! Inhein hayaat e duniya ki haqeeqat is misaal se samjhao ke aaj humne aasman se pani barsa diya to zameen ki paud khoob ghani ho gayi, aur kal wahi nabataat bhus bankar rehgayi jisey hawaein udaye liye phirti hain, Allah har cheez par qudrat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay samney duniya ki zindagi ki misal (bhi) biyan kero jaisay pani jisay hum aasman say utartay hain iss say zamin ka sabza mila jula (nikla) hai phir akhir kaar woh choora choora hojata hai jisay hawayen urayen liye phirti hain. Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ नबी)! इनमें हयात ए दुनिया की हकीकत इस मिसाल से समझो कि आज हमने आसमान से पानी बरसा दिया तो जमीन की पौद खूब घनी हो गई, और कल वही नबात भुस बनकर रह गई जैसे हवाएं उड़ाए फिरती हैं, अल्लाह हर चीज पर कुदरत रखता है
عَرَبِيالمالُ وَالبَنونَ زينَةُ الحَياةِ الدُّنيا ۖ وَالباقِياتُ الصّالِحاتُ خَيرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوابًا وَخَيرٌ أَمَلًا
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हिन्दी (Al-Omari)धन और पुत्र सांसारिक जीवन की शोभा हैं। और बाकी रहने वाली नेकियाँ तेरे पालनहार के यहाँ सवाब में बहुत उत्तम और आशा की दृष्टि से भी बहुत बेहतर हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh maal aur yeh aulad mehaz duniyavi zindagi ki ek hungami aaraish (adornment) hai, asal mein to baaqi reh janey wali nekiyan hi tere Rubb ke nazdeek natije ke lihaz se behter hain aur unhi se acchi ummedain wabasta ki jaa sakti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Maal-o-aulad to duniya ki hi zeenat hai aur (haan) albatta baqi rehney wali nekiyan teray rab kay nazdeek azrooy-e-sawab aur (aaeenda ki) achi tawaqqa kay boht behtar hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये माल और ये औलाद मेहज़ दुनियावी जिंदगी की एक हंगामा आराइश (सजावट) है, असल में तो बाकी रह जाने वाली नेकियां ही तेरे रब के नाज़दीक नातिजे के लिहाज़ से बेहतर हैं और उन्हीं से अच्छी उम्मीदे वबस्ता की जा सकती है
عَرَبِيوَيَومَ نُسَيِّرُ الجِبالَ وَتَرَى الأَرضَ بارِزَةً وَحَشَرناهُم فَلَم نُغادِر مِنهُم أَحَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिस दिन हम पर्वतों को चलाएँगे, और तुम धरती को साफ़ मैदान देखोगे, और हम उन्हें एकत्रित करेंगे, तो उनमें से किसी को नहीं छोड़ेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Fikr us din ki honi chahiye jabke hum pahadon ko chalayenge , aur tum zameen ko bilkul barhena (naked) paogey, aur hum tamaam Insaano ko is tarah gher kar jama karenge ke (aglon peechlon mein se) ek bhi na chootega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss din hum paharon ko chalayen gay aur zamin ko tu saaf khuli hui dekhay ga aur tamam logon ko hum ikhatta keren gay inn mein say aik ko bhi baqi na choren gay
Devnagri Urdu (Maududi)फ़िक्र उस दिन की होनी चाहिए जबके हम पहाड़ों को चलाएंगे, और तुम ज़मीन को बिल्कुल बरहेना (नग्न) पाओगे, और हम तमाम इंसानों को इस तरह घेर कर जमा करेंगे के (अगलों पीछेलों में से) एक भी ना छूटेगा
عَرَبِيوَعُرِضوا عَلىٰ رَبِّكَ صَفًّا لَقَد جِئتُمونا كَما خَلَقناكُم أَوَّلَ مَرَّةٍ ۚ بَل زَعَمتُم أَلَّن نَجعَلَ لَكُم مَوعِدًا
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हिन्दी (Al-Omari)और वे आपके पालनहार के समक्ष पंक्तिबद्ध प्रस्तुत किए जाएँगे। (और कहा जाएगा :) निश्चय ही तुम हमारे पास उसी तरह आए हो, जैसे हमने तुम्हें पहली बार पैदा किया था। बल्कि तुम समझते थे कि हम तुम्हारे लिए वादे का कोई समय निर्धारित नहीं करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur sab ke sab tumhare Rubb ke huzoor saff (rows) dar saff (rows) pesh kiye jayenge. Lo dekhlo , aagaye na tum hamare paas usi tarah jaisa humne tumko pehli baar paida kiya tha. Tumne to yeh samjha tha ke humne tumhare liye koi wadey ka waqt muqarrar hi nahin kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur sab kay sab teray rab kay samney saff basta hazir kiye jayen gay. Yaqeenan tum humaray pass ussi tarah aaye jiss tarah hum ney tumhen pehli martaba peda kiya tha lekin tum to issi khayal mein rahey kay hum hergiz tumharay liye koi waday ka waqt muqarrar keren gay bhi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और सब के सब तुम्हारे रब के हुज़ूर सफ़ (पंक्तियाँ) डर सफ़ (पंक्तियाँ) पेश किये जायेंगे। लो देखलो, आगये ना तुम हमारे पास उसी तरह जैसा हमने तुमको पहली बार पेदा किया था। तुमने तो ये समझा था कि हमने तुम्हारे लिए कोई वादे का वक्त मुकर्रर ही नहीं किया
عَرَبِيوَوُضِعَ الكِتابُ فَتَرَى المُجرِمينَ مُشفِقينَ مِمّا فيهِ وَيَقولونَ يا وَيلَتَنا مالِ هٰذَا الكِتابِ لا يُغادِرُ صَغيرَةً وَلا كَبيرَةً إِلّا أَحصاها ۚ وَوَجَدوا ما عَمِلوا حاضِرًا ۗ وَلا يَظلِمُ رَبُّكَ أَحَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)और किताब सामने रख दी जाएगी, तो आप अपराधियों को देखेंगे कि जो कुछ उसमें होगा, उससे डरने वाले होंगे और कहेंगे : हाय हमारा विनाश! यह कैसी किताब है, जो न कोई छोटी बात छोड़ती है न बड़ी, परंतु उसने उसे संरक्षित कर रखा है। तथा उन्होंने जो कर्म किए थे, सब अंकित पाएँगे। और आपका पालनहार किसी पर अत्याचार नहीं करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur naam e aamal saamne rakh diya jayega us waqt tum dekhoge ke mujrim log apni kitaab e zindagi ke indrajaat (records) se darr rahey hongey aur keh rahey hongey ke haye hamari kambakhti, yeh kaisi kitaab hai ke hamari koi choti badi harakat aisi nahin rahi jo ismein darj na ho gayi ho. Jo jo kuch unhon ne kiya tha woh sab apne saamne hazir payenge aur tera Rubb kisi par zara zulm na karega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur naam-e-aemaal samney rakh diye jayen gay. Pus tu dekhay ga kay gunhegar iss ki tehreer say khofzada horahey hongay aur keh rahey hongay haaye humari kharabi yeh kaisi kitab hai jiss ney koi chota bara baghair gheray kay baqi hi nahi chora aur jo kuch enhon ney kiya tha sab mojood payen gay aur tera rab kissi per zulm-o-sitam na keray ga
Devnagri Urdu (Maududi)और नाम ए अमल सामने रख दिया जाएगा हमें वक्त तुम देखोगे के मुजरिम लोग अपनी किताब ए जिंदगी के इंद्रजात (रिकॉर्ड) से डर रहे होंगे और कह रहे हैं होंगी के हाए हमारी चुदाई, ये कैसी किताब है के हमारी कोई छोटी बड़ी हरकत ऐसी नहीं रही जो इसमे दर्ज ना हो गई हो। जो जो कुछ अनहोन ने किया था वो सब अपने सामने हाज़िर पाएंगे और तेरा रब किसी पर ज़रा ज़ुल्म न करेगा
عَرَبِيوَإِذ قُلنا لِلمَلائِكَةِ اسجُدوا لِآدَمَ فَسَجَدوا إِلّا إِبليسَ كانَ مِنَ الجِنِّ فَفَسَقَ عَن أَمرِ رَبِّهِ ۗ أَفَتَتَّخِذونَهُ وَذُرِّيَّتَهُ أَولِياءَ مِن دوني وَهُم لَكُم عَدُوٌّ ۚ بِئسَ لِلظّالِمينَ بَدَلًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद करो) जब हमने फ़रिश्तों से कहा : आदम को सजदा करो। तो इबलीस के सिवा सबने सजदा किया। वह जिन्नों में से था। अतः उसने अपने पालनहार के आदेश का उल्लंघन किया। क्या फिर (भी) तुम उसे और उसकी संतान को मुझे छोड़कर मित्र बनाते हो, जबकि वे तुम्हारे शत्रु हैं? वह (शैतान) अत्याचारियों के लिए क्या ही बुरा बदल (विकल्प) है।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo, jab humne Farishton se kaha ke Adam ko sajda karo to unhon ne sajda kiya magar Iblis ne na kiya, woh Jinno mein se tha is liye apne Rubb ke hukum ki itaat se nikal gaya. Ab kya tum mujhey chodh kar usko aur uski zurriyat ko apna sarparast banate ho halaanke woh tumhare dushman hain? Bada hi bura badal hai jisey zalim log ikhtiyar kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab hum ney farishton ko hukum diya kay tum adam ko sajda kero to iblees kay siwa sab ney sajda kiya yeh jinnon mein say tha uss ney apney perwerdigar ki na-farmani ki kiya phir bhi tum ussay aur uss ki aulad ko mujhay chor ker apna dost bana rahey ho? Halankay woh tum sab ka dushman hai. Aisay zalimon ka kiya hi bura badal hai
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो, जब हमने फरिश्तों से कहा के आदम को सजदा करो तो उनहों ने सजदा किया मगर इब्लीस ने न किया, वो जिन्नो में से था इसके लिए अपने रब्ब के हुकुम की इबादत से निकल गया। अब क्या तुम मुझे छोड़ कर उसे और उसकी ज़िम्मेदारी को अपना सरपरस्त बनाते हो हलांके वो तुम्हारे दुश्मन हैं? बड़ा ही बुरा बादल है जिसमें ज़ालिम लोग इख्तियार कर रहे हैं
عَرَبِي۞ ما أَشهَدتُهُم خَلقَ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَلا خَلقَ أَنفُسِهِم وَما كُنتُ مُتَّخِذَ المُضِلّينَ عَضُدًا
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हिन्दी (Al-Omari)मैंने उन्हें न आकाशों तथा धरती के पैदा करने में उपस्थित किया और न स्वयं उनके पैदा करने में, और न ही मैं पथभ्रष्ट करने वालों को सहायक बनाने वाला था।
Roman Urdu (Maududi)Maine aasman o zameen paida karte waqt unko nahin bulaya tha aur na khud unki apni takhleeq mein unhein shareek kiya tha. Mera yeh kaam nahin ke gumraah karne walon ko apna madadgaar banaya karoon
Roman Urdu (Junagarhi)Mein ney enhen aasmanon-o-zamin ki pedaeesh kay waqt mojood nahi rakha tha aur na khud inn ki apni pedaeesh mein aur mein gumraah kerney walon ko apna madadgaar bananey wala bhi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)मैंने आसमान ओ ज़मीन पैदा करते वक्त उनको नहीं बुलाया था और ना खुद उनकी अपनी तख़लीक में उन्हें शरीक किया था। मेरा ये काम नहीं के गुमराह करने वालों को अपना मददगार बनाया करूं
عَرَبِيوَيَومَ يَقولُ نادوا شُرَكائِيَ الَّذينَ زَعَمتُم فَدَعَوهُم فَلَم يَستَجيبوا لَهُم وَجَعَلنا بَينَهُم مَوبِقًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन वह (अल्लाह) कहेगा : मेरे उन साझियों को पुकारो, जिनका तुम दावा करते थे। तो ये उन्हें पुकारेंगे, पर वे इन्हें कोई उत्तर नहीं देंगे। और हम उनके बीच एक विनाश का स्थान बना देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir kya karenge yeh log us roz jabke inka Rubb inse kahega ke pukaro ab un hastiyon ko jinhein tum mera shareek samajh baithey thay , yeh unko pukarenge, magar woh inki madad ko na aayenge aur hum inke darmiyan ek hi halakat ka ghada mushtarik kar denge(halakat ki jagah bana denge)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss woh farmaye ga kay tumharay khayal mein jo meray shareeq thay unhen pukaro! Yeh pukaren gay lekin unn mein say koi bhi jawab na dey ga hum unn kay darmiyan halakat ka saman ker den gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्या करेंगे ये लोग हमें रोज जबके इनका रब इनसे कहेगा के पुकारो अब उन हस्तियों को जिन्हे तुम मेरा शरीक समझ बैठे थे, ये उनको पुकारेंगे, मगर वो इनकी मदद को ना आएंगे और हम इनके दरमियान एक ही हलाकत का घड़ा मुश्तारिक कर देंगे(हलाकत की जगह बना देंगे)
عَرَبِيوَرَأَى المُجرِمونَ النّارَ فَظَنّوا أَنَّهُم مُواقِعوها وَلَم يَجِدوا عَنها مَصرِفًا
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हिन्दी (Al-Omari)और अपराधी लोग जहन्नम को देखेंगे, तो उन्हें यक़ीन हो जाएगा कि वे उसमें गिरने वाले हैं। और उससे फिरने (बचने) का कोई स्थान नहीं पाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Sarey mujreem us roz aag dekhenge aur samajh lenge ke ab unhein is mein girna hai aur woh issey bachne ke liye koi jaye panaah na payenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur gunehgar jahannum ko dekh ker samajh len gay kay woh issi mein jhonkay janey walay hain lekin uss say bachney ki jagah na payen gay
Devnagri Urdu (Maududi)सारे मुजरिम हमें रोज आग देखेंगे और समझ लेंगे के अब उन्हें इस में गिराना है और वो इसे बचाने के लिए कोई जाए पनाह न पाएंगे
عَرَبِيوَلَقَد صَرَّفنا في هٰذَا القُرآنِ لِلنّاسِ مِن كُلِّ مَثَلٍ ۚ وَكانَ الإِنسانُ أَكثَرَ شَيءٍ جَدَلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने इस क़ुरआन में लोगों (को समझाने) के लिए हर प्रकार के उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। और इनसान सब चीज़ों से अधिक झगड़ालू है।
Roman Urdu (Maududi)Humne is Quran mein logon ko tarah tarah se samjhaya magar Insaan bada hi jhagdalu waqeh hua hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney iss quran mein her her tareeqay say tamam ki tamam misalen logon kay liye biyan ker di hain lekin insan sab say ziyada jhagraloo hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने कुरान में लोगों को तरह तरह से समझा मगर इंसान बड़ा ही झगड़ालू वाकये हुआ है
عَرَبِيوَما مَنَعَ النّاسَ أَن يُؤمِنوا إِذ جاءَهُمُ الهُدىٰ وَيَستَغفِروا رَبَّهُم إِلّا أَن تَأتِيَهُم سُنَّةُ الأَوَّلينَ أَو يَأتِيَهُمُ العَذابُ قُبُلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब लोगों के पास मार्गदर्शन आ गया, तो उन्हें ईमान लाने और अपने पालनहार से क्षमा याचना करने से केवल इस बात ने रोका कि उनको भी पहले लोगों जैसा मामला पेश आ जाए या यातना उनके सामने आ खड़ी हो।
Roman Urdu (Maududi)Unke saamne jab hidayat aayi to usey maanne aur apne Rubb ke huzoor maafi chahne se aakhir unko kis cheez ne rok diya? Iske siwa aur kuch nahin ke woh muntazir hain ke unke saath bhi wahi kuch ho jo pichli qaumon ke saath ho chuka hai, ya yeh ke woh azaab ko saamne aate dekh lein
Roman Urdu (Junagarhi)Logon kay pass hidayat aa chukney ka baad unhen eman laney aur apney rab say isataghfaar kerney say sirf issi cheez ney roka kay aglay logon ka sa moamla unhen bhi paish aaye ye unn kay samney khullam khulla azab aa mojood hojaye
Devnagri Urdu (Maududi)उनके सामने जब हिदायत आई तो उसे मन्ने और अपने रब के हुजूर माफ़ी चाहने से आख़िर उनको किस चीज़ ने रोक दिया? इसके सिवा और कुछ नहीं के वो मुंतज़िर हैं के उनके साथ भी वही कुछ हो जो पिछली क़ौमों के साथ हो चुका है, या ये के वो अज़ाब को सामने आते देख लें
عَرَبِيوَما نُرسِلُ المُرسَلينَ إِلّا مُبَشِّرينَ وَمُنذِرينَ ۚ وَيُجادِلُ الَّذينَ كَفَروا بِالباطِلِ لِيُدحِضوا بِهِ الحَقَّ ۖ وَاتَّخَذوا آياتي وَما أُنذِروا هُزُوًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हम रसूलों को केवल शुभ सूचना देने वाले और डराने वाले बनाकर भेजते हैं। और जो काफ़िर हैं, वे असत्य के सहारे झगड़ा करते हैं, ताकि उसके द्वारा सत्य को विचलित कर दें। और उन्होंने हमारी आयतों को तथा उन चीज़ों को जिनसे उन्हें डराया गया, मज़ाक बना लिया।
Roman Urdu (Maududi)Rasoolon ko hum is kaam ke siwa aur kisi garz keliye nahin bhejte ke woh basharat aur tambeeh(warning) ki khidmat anjaam de dein, magar kafiron ka haal yeh hai ke woh baatil ke hathiyar lekar haqq ko neecha dikhane ki koshish karte hain aur unhon ne meri aayat ko aur un tambihaat (warnings) ko jo unhein ki gayi mazaq bana liya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum to apney rasoolon ko sirf iss liye bhejtay hain kay woh khushkhabriyan suna den aur dara den. Kafir log baatil kay saharay jhagartay hain aur (chahatay hain kay) iss say haq ko larkhara den enhon ney meri aayaton ko aur jis cheez say daraya jaye ussay mazaq bana dala hai
Devnagri Urdu (Maududi)रसूलों को हम इस काम के सिवा और कोई ग़रज़ नहीं भेजते के वो बशारत और तम्बीह (चेतावनी) की खिदमत अंजाम दे दें, मगर काफिरों का हाल ये है कि वो बातिल के हथियार लेकर हक़ को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं और उनको ने मेरी आयत को और उन तम्बीहत (चेतावनी) को जो उनको मज़ाक बना लिया है
عَرَبِيوَمَن أَظلَمُ مِمَّن ذُكِّرَ بِآياتِ رَبِّهِ فَأَعرَضَ عَنها وَنَسِيَ ما قَدَّمَت يَداهُ ۚ إِنّا جَعَلنا عَلىٰ قُلوبِهِم أَكِنَّةً أَن يَفقَهوهُ وَفي آذانِهِم وَقرًا ۖ وَإِن تَدعُهُم إِلَى الهُدىٰ فَلَن يَهتَدوا إِذًا أَبَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)और उससे बड़ा अत्याचारी कौन है, जिसे उसके पालनहार की आयतें सुनाकर समझाया जाए, तो वह उनसे मुँह मोड़ ले और जो कुछ उसके दोनों हाथों ने आगे भेजा हो, उसे भूल जाए? निःसंदेह हमने उनके दिलों पर पर्दे डाल दिए हैं कि उसे समझ न पाएँ और उनके कानों में बोझ डाल दिया है। और यदि आप उन्हें सीधी राह की ओर बुलाएँ, तब (भी) वे कभी सीधी राह पर नहीं आएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur us shaks se badh kar zalim aur kaun hai jisey uske Rubb ki aayat suna kar naseehat ki jaye aur woh unse mooh phere aur us burey anjaam ko bhool jaye jiska sar o samaan usne apne liye khud apne haathon kiya hai? (Jin logon ne yeh rawish ikhtiyar ki hai) unke dilon par humne gilaf (cover) chadha diye hain jo unhein Quran ki baat nahin samajhne detay, aur unke kaano mein humne girani paida kardi hai. Tum unhein hidayat ki taraf kitna hi bulao , woh is halat mein kabhi hidayat na payenge
Roman Urdu (Junagarhi)Uss say barh ker zalim kaun hai? Jissay uss kay rab ki aayaton say naseehat ki jaye woh phir bhi mun moray rahey aur jo kuch uss kay hathon ney aagay bhej rakha hai ussay bhool jaye be-shak hum ney unn kay dilon per parday daal diye hain kay woh issay (na) samajhen aur unn kay kanon mein girani hai go tu unhen hidayat ki taraf bulata rahey lekin yeh kabhi bhi hidayat nahi paney kay
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारे शक्स से बढ़ कर जालिम और कौन है जिसके बारे में रब की आयतें सुना कर हिदायत की जाए और वो उससे मुह फेरे और उस बुरे अंजाम को भूल जाए जिसका सर या सामान उसने अपने लिए खुद अपने हाथों से किया है? (जिन लोगों ने ये रवीश इख्तियार की है) उनके दिलों पर हमने गिलाफ (कवर) चढ़ा दिया है जो उन्हें कुरान की बात नहीं समझ देते, और उनके कानों में हमने गिरानी अदा कर दी है। तुम उन्हें हिदायत की तरफ कितना ही बुलाओ, वो इस हालात में कभी हिदायत न पाएंगे
عَرَبِيوَرَبُّكَ الغَفورُ ذُو الرَّحمَةِ ۖ لَو يُؤاخِذُهُم بِما كَسَبوا لَعَجَّلَ لَهُمُ العَذابَ ۚ بَل لَهُم مَوعِدٌ لَن يَجِدوا مِن دونِهِ مَوئِلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और आपका पालनहार अत्यंत क्षमाशील, दयावान् है। यदि वह उन्हें उसकी वजह से पकड़े, जो उन्होंने कमाया है, तो निश्चय उनपर शीघ्र ही यातना भेज दे। बल्कि उनके लिए वादे का एक समय है, जिससे बचने का उन्हें कदापि कोई स्थान नहीं मिलेगा।
Roman Urdu (Maududi)Tera Rubb bada darguzar karne wala aur raheem hai. Woh inke kartooton par inhein pakadna chahta to jaldi hi azaab bhej deta, magar inke liye wadey ka ek waqt muqarrar hai aur issey bach kar bhaag nikalne ki yeh koi raah na payenge
Roman Urdu (Junagarhi)Tera perwerdigar boht hi baskhsish wala aur meharbani wala hai woh agar inn kay aemaal ki saza mein pakray to be-shak enhen jald hi azab ker dey bulkay inn kay liye aik waday ki ghari muqarrar hai jiss say woh sirakney ki hergiz jagah nahi payen gay
Devnagri Urdu (Maududi)तेरा रब बड़ा दरगुज़र करने वाला और रहीम है। वो इनके कार्टूनों पर इन्हें पकड़ना चाहता था तो जल्दी ही अज़ाब भेज देता, मगर इनके लिए वादे का एक वक्त मुकर्रर है और इससे बच कर भाग निकलेगा कि ये कोई राह न पाएगा
عَرَبِيوَتِلكَ القُرىٰ أَهلَكناهُم لَمّا ظَلَموا وَجَعَلنا لِمَهلِكِهِم مَوعِدًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यही बस्तियाँ हैं, हमने इन (के निवासियों) का विनाश कर दिया, जब उन्होंने अत्याचार किया। और हमने उनके विनाश का एक समय निश्चित कर रखा था।
Roman Urdu (Maududi)Yeh azaab raseeda bastiyan tumhare samne maujood hain, unhon ne jab zulm kiya to humne unhein halaak kardiya, aur unmein se har ek ki halakat ke liye humne waqt muqarrar kar rakkha tha
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hain woh bastiyan jinhen hum ney unn kay mazalim ki bina per ghaarat ker diya aur inn ki tabahi ki bhi hum ney aik miyaad muqarrar ker rakhi thi
Devnagri Urdu (Maududi)ये अज़ाब रसीदें तुम्हारे सामने मौजूद हैं, उनको ने जब ज़ुल्म किया तो हमने उन्हें हलाक कर दिया, और उनमें से हर एक की हलाकत के लिए हमने वक्त मुकर्रर कर रखा था
عَرَبِيوَإِذ قالَ موسىٰ لِفَتاهُ لا أَبرَحُ حَتّىٰ أَبلُغَ مَجمَعَ البَحرَينِ أَو أَمضِيَ حُقُبًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद करो) जब मूसा ने अपने युवक (सेवक) से कहा : मैं बराबर चलता रहूँगा, यहाँ तक कि दो सागरों के संगम पर पहुँच जाऊँ या वर्षों चलता रहूँ।
Roman Urdu (Maududi)(Zara inko woh qissa sunao jo Moosa ko pesh aaya tha) jabke Moosa ne apne khadim se kaha tha ke “ main apna safar khatam na karoonga jabtak ke dono dariyaon ke sangam par na pahunch jaon, warna main ek zamana e daraaz tak chalta hi rahoonga”
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay musa ney apney no-jawan say kaha kay mein to chalta hi rahoon ga yahan tak kay do dariyaon kay sangum per phonchon khua mujhay saal-ha-saal chalne paray
Devnagri Urdu (Maududi)(ज़रा इनको वो क़िस्सा सुनाओ जो मूसा को पेश आया था) जबके मूसा ने अपने खादिम से कहा था के “मैं अपना सफर ख़तम” ना करूंगा जबतक के दोनों दरियाओं के संगम पर ना पहुंच जाऊं, वरना मैं एक जमाना ए दराज़ तक चलता ही रहूंगा”
عَرَبِيفَلَمّا بَلَغا مَجمَعَ بَينِهِما نَسِيا حوتَهُما فَاتَّخَذَ سَبيلَهُ فِي البَحرِ سَرَبًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वे दोनों उन दोनों (सागरों) के मिलने की जगह पर पहुँचे, तो वे दोनों अपनी मछली भूल गए और उसने सागर में अपना रास्ता सुरंग जैसा बना लिया।
Roman Urdu (Maududi)Pas jab woh unke sangam par pahunche to apni machli se gaafil ho gaye aur woh nikal kar is tarah dariya mein chali gayi jaise ke koi surang(tunnel) lagi ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jab woh dono darya kay sangum per phonchay wahan apni machli bhool gaye jiss ney darya mein surang jaisa apna raasta bana liya
Devnagri Urdu (Maududi)पास जब वो उनके संगम पर पहुंचें तो अपनी मछली से गाफिल हो गईं और वो निकल कर इस तरह दरिया में चली गई जैसे के कोई सुरंग (सुरंग) लगी हो
عَرَبِيفَلَمّا جاوَزا قالَ لِفَتاهُ آتِنا غَداءَنا لَقَد لَقينا مِن سَفَرِنا هٰذا نَصَبًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब दोनों आगे बढ़ गए, तो मूसा ने अपने सेवक से कहा कि हमारा खाना लाओ। हम अपनी इस यात्रा से काफ़ी थक गए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aagey jaa kar Moosa ne apne khadim se kaha “ lao hamara nashta, aaj ke safar mein to hum buri tarah thak gaye hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab yeh dono wahan say aagay barhay to musa ney apney no-jawan say kaha laa humara khana dey humen to apney iss safar say sakht takleef uthani pari
Devnagri Urdu (Maududi)आगे जा कर मूसा ने अपने खादिम से कहा “ लाओ हमारा नाश्ता, आज के सफर में तो हम बुरी तरह थक गए हैं”
عَرَبِيقالَ أَرَأَيتَ إِذ أَوَينا إِلَى الصَّخرَةِ فَإِنّي نَسيتُ الحوتَ وَما أَنسانيهُ إِلَّا الشَّيطانُ أَن أَذكُرَهُ ۚ وَاتَّخَذَ سَبيلَهُ فِي البَحرِ عَجَبًا
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : क्या आपने देखा? जब हम चट्टान के पास ठहरे थे तो निःसंदेह मैं मछली भूल गया, और मुझे शैतान ही ने भुलाया कि मैं (आपसे) उसकी चर्चा करूँ, और उसने अनोखे तरीक़े से सागर में अपनी राह बना ली।
Roman Urdu (Maududi)Khadim ne kaha “aapne dekha! Yeh kya hua? Jab hum us chattan (rock) ke paas thehre huey thay us waqt mujhe machli ka khayal na raha aur shaytan ne mujhko aisa gaafil kardiya ke main uska zikr ( aapse karna) bhool gaya. Machli to ajeeb tarah se nikal kar dariya mein chali gayi”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney jawab diya kay kiya aap ney dekha bhi? Jabkay hum pathar say take laga ker aaram ker rahey thay wahin mein machli bhool gaya tha dar-asal shetan ney hi mujhay bhula diya kay mein aap say iss ka zikar keroon. Uss machli ney aik anokhay tor per darya mein apna raasta bana liya
Devnagri Urdu (Maududi)खादिम ने कहा “आपने देखा! ये क्या हुआ? जब हम हमारे पास चट्टान (रॉक) के पास थे तब थे हमारा वक्त मुझे मछली का ख़याल ना रहा और शैतान ने मुझको ऐसा ग़ाफ़िल कर दिया के मैं उसका ज़िक्र (आपसे करना) भूल गया। मछली तो अजीब तरह से निकल कर दरिया में चली गई"
عَرَبِيقالَ ذٰلِكَ ما كُنّا نَبغِ ۚ فَارتَدّا عَلىٰ آثارِهِما قَصَصًا
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हिन्दी (Al-Omari)मूसा ने कहा : यही तो है, जो हम तलाश कर रहे थे। फिर वे दोनों अपने क़दमों के निशान देखते हुए वापस लौटे।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha “usi ki to humein talash thi”. Chunachey wo dono apne naqshe qadam par phir wapas huey
Roman Urdu (Junagarhi)Musa ney kaha yehi tha jiss ki talash mein hum thay chunacha wahin say apney qadmon kay nishan dhoondtay huye wapis lotay
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा "उसकी तो हमें तलाश थी"। चुनाचे वो दोनों अपने नक्शे कदम पर फिर वापस हुए
عَرَبِيفَوَجَدا عَبدًا مِن عِبادِنا آتَيناهُ رَحمَةً مِن عِندِنا وَعَلَّمناهُ مِن لَدُنّا عِلمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन दोनों ने हमारे बंदों में से एक बंदे को पाया, जिसे हमने अपने पास से दया प्रदान की थी और उसे अपने पास से एक ज्ञान सिखाया था।
Roman Urdu (Maududi)Aur wahan unhon ne hamare bandon mein se ek banday ko paya jisey humne apni rehmant se nawaza tha aur apni taraf se ek khaas ilm ata kiya tha
Roman Urdu (Junagarhi)Pus humaray bandon mein say aik banday ko paya jissay hum ney apney pass ki khas rehmat ata farma rakhi thi aur ussay apney pass say khas ilm sikha rakha tha
Devnagri Urdu (Maududi)और वहां उनको ने हमारे बंदों में से एक बंदे को पाया जिसे हमने अपनी रहमंत से नवाजा था और अपनी तरफ से एक खास इल्म अता किया था
عَرَبِيقالَ لَهُ موسىٰ هَل أَتَّبِعُكَ عَلىٰ أَن تُعَلِّمَنِ مِمّا عُلِّمتَ رُشدًا
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हिन्दी (Al-Omari)मूसा ने उनसे कहा : क्या मैं आपका अनुसरण करूँ, इस (शर्त) पर कि मुझे उस मार्गदर्शन की बातों में से कुछ सिखा दें, जो आपको सिखाई गई हैं?
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne ussey kaha “kya main aapke saath reh sakta hoon taa-ke aap mujhey bhi us danish(wisdom) ki taleem dein jo aapko sikhayi gayi hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)Iss say musa ney kaha kay mein aap ki tabeydaari keroon? Kay aap mujhay iss nek ilm ko sikha den jo aap ko sikhaya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने उसे कहा "क्या मैं आपके साथ रह सकता हूं ता-के आप मुझे भी हमें बताएं" दानिश (बुद्धि) की तालीम दीन जो आपको सिखाई गई है?”
عَرَبِيقالَ إِنَّكَ لَن تَستَطيعَ مَعِيَ صَبرًا
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : तुम मेरे साथ हरगिज़ धैर्य न रख सकोगे।
Roman Urdu (Maududi)Usne jawab diya “aap mere saath sabr nahin kar sakte”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney kaha aap meray sath hergiz sabar nahi ker saktay
Devnagri Urdu (Maududi)उसने जवाब दिया "आप मेरे साथ सब्र नहीं कर सकते"
عَرَبِيوَكَيفَ تَصبِرُ عَلىٰ ما لَم تُحِط بِهِ خُبرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम उसपर कैसे धीरज रख सकते हो, जिसका तुम्हें पूरा ज्ञान नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Aur jis cheez ki aapko khabar na ho aakhir aap uspar sabr kar bhi kaise sakte hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss cheez ko aap ney apney ilm mein na liya ho uss per sabar ker bhi kaisay saktay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जिस चीज की आपको खबर न हो आखिर आप उसपर सब्र कर भी कैसे सकते हैं"
عَرَبِيقالَ سَتَجِدُني إِن شاءَ اللَّهُ صابِرًا وَلا أَعصي لَكَ أَمرًا
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : यदि अल्लाह ने चाहा, तो आप मुझे धैर्य रखने वाला पाएँगे और मैं आपके किसी आदेश का उल्लंघन नहीं करूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha “Insha Allah aap mujhey saabir payenge aur main kisi maamle mein aapki nafarmani na karoonga”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa ney jawab diya kay inshaAllah aap mujhay sabar kerney wala payen gay aur kissi baat mein , mein aap ki na-farmani na keroon ga
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा "इंशा अल्लाह आप मुझे साबिर पाएंगे और मैं आपकी खबर में कोई कमी नहीं छोड़ूंगा" नफरमानी ना करूंगा”
عَرَبِيقالَ فَإِنِ اتَّبَعتَني فَلا تَسأَلني عَن شَيءٍ حَتّىٰ أُحدِثَ لَكَ مِنهُ ذِكرًا
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : यदि तुम्हें मेरा अनुसरण करना है, तो मुझसे किसी चीज़ के बारे में प्रश्न न करना, यहाँ तक कि मैं (स्वयं ही) तुमसे उसकी चर्चा शुरू करूँ।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “accha , agar aap mere saath chalte hain to mujhse koi baat na puchenge jab tak ke main khud uska aapse zikr na karoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney kaha acha agar aap meray sath hi chalney per israr kertay hain to yaad rahey kissi cheez ki nisbat mujh say kuch na poochna jabtak kay mein khud uss ki nisbat koi tazkara na keroon
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा “अच्छा, अगर आप मेरे साथ चलते हैं तो मुझसे कोई बात ना पूछेगा जब तक के मैं खुद उसका आपसे जिक्र ना करूं”
عَرَبِيفَانطَلَقا حَتّىٰ إِذا رَكِبا فِي السَّفينَةِ خَرَقَها ۖ قالَ أَخَرَقتَها لِتُغرِقَ أَهلَها لَقَد جِئتَ شَيئًا إِمرًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वे दोनों चले, यहाँ तक कि जब वे नौका पर सवार हुए, तो उस (ख़ज़िर) ने उसे फाड़ दिया। मूसा ने कहा : क्या आपने इसे इसलिए फाड़ दिया है कि इसके सवारों को डुबो दें? निश्चित रूप से आपने एक गंभीर काम कर डाला।
Roman Urdu (Maududi)Ab woh dono rawana huey, yahan tak ke jab woh ek kashti mein sawar ho gaye to us shaks ne kashti mein shigaf (hole) daal diya. Moosa ne kaha “aapne is mein shigaf daal diya taa-ke sab kashti walon ko dubo dein? Yeh to aapne ek sakht harakat kar daali”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir woh dono chalay yahan tak kay aik kashti mein sawar huye to uss ney kashti kay takhtay tor diye musa ney kaha kiya aap issay tor rahey hain takay kashti walon ko dobo den yeh to aap ney bari (khatarnaak) baat ker di
Devnagri Urdu (Maududi)अब वो दोनों रावना हुए, यहां तक ​​के जब वो एक कश्ती में सवार हो गए तो हमें शक्स ने कहा कश्ती मैंने शिगाफ़ (छेद) डाल दिया। मूसा ने कहा "आपने इस में शिगाफ़ डाल दिया, ता-के सब कश्ती वालों को डुबो दें? ये तो आपने एक सख्त हरकत कर डाली"
عَرَبِيقالَ أَلَم أَقُل إِنَّكَ لَن تَستَطيعَ مَعِيَ صَبرًا
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : क्या मैंने नहीं कहा था कि तुम मेरे साथ हरगिज़ धैर्य न रख सकोगे?
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “maine tumse kaha na tha ke tum mere saath sabr nahin kar sakte?”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney jawab diya kay mein ney to pehlay hi tujh say keh diya tha kay tu meray sath hergiz sabar na ker sakay ga
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा "मैंने तुमसे कहा ना था के तुम मेरे साथ सब्र नहीं कर सकते?"
عَرَبِيقالَ لا تُؤاخِذني بِما نَسيتُ وَلا تُرهِقني مِن أَمري عُسرًا
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हिन्दी (Al-Omari)मूसा ने कहा : मुझे मेरी भूल पर न पकड़ें और मेरे मामले में मुझे किसी कठिनाई में न डालें।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha “bhool chuk par mujhe na pakadiye, mere maamle mein aap zara sakhti se kaam na lein.”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa ney jawab diya kay meri bhool per mujhay na pakriye aur mujhay apney kaam mein tangi na daliye
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा "भूल चुक पर मुझे न पकड़िये, मेरे मामले में आप जरा खुद से काम न लें।"
عَرَبِيفَانطَلَقا حَتّىٰ إِذا لَقِيا غُلامًا فَقَتَلَهُ قالَ أَقَتَلتَ نَفسًا زَكِيَّةً بِغَيرِ نَفسٍ لَقَد جِئتَ شَيئًا نُكرًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वे दोनों चल पड़े, यहाँ तक कि जब वे एक बालक से मिले, तो उस (ख़ज़िर) ने उसे क़त्ल कर दिया। उस (मूसा) ने कहा : क्या आपने एक निर्दोष जान को किसी जान के बदले के बिना क़त्ल कर दिया? निःसंदेह आपने बहुत ही बुरा काम किया।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh dono chale, yahan tak ke unko ek ladka mila aur us shaks ne usey qatal kardiya. Moosa ne kaha “aapne ek bay-gunaah ki jaan li halanke usne kisi ka khoon na kiya tha? Yeh kaam to aapne bahut hi bura kiya”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir dono chalay yahan tak kay aik larkay ko paya iss ney ussay maar dala musa ney kaha kay kiya aap ney aik pak jaan ko baghair kissi jaan kay ewaz maar dala? Be-shak aap ney to bari na pasandeedah harkat ki
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो दोनो चले, यहां तक ​​के उनको एक लड़का मिला और उस लड़के ने उसे बर्बाद कर दिया। मूसा ने कहा "आपने एक बे-गुनाह की जान ली हलांके उसने किसी का खून ना किया था? ये काम तो आपने बहुत ही बुरा किया"
🕮 Juz 16 begins here
عَرَبِي۞ قالَ أَلَم أَقُل لَكَ إِنَّكَ لَن تَستَطيعَ مَعِيَ صَبرًا
हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि निश्चय तुम मेरे साथ हरगिज़ धैर्य न रख सकोगे?
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “maine tumse kaha na tha ke tum mere saath sabr nahin kar sakte?”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kehney lagay kay mein ney tum say nahi kaha tha kay tum meray humraah reh ker hergiz sabar nahi ker saktay
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा "मैंने तुमसे कहा ना था के तुम मेरे साथ सब्र नहीं कर सकते?"
عَرَبِيقالَ إِن سَأَلتُكَ عَن شَيءٍ بَعدَها فَلا تُصاحِبني ۖ قَد بَلَغتَ مِن لَدُنّي عُذرًا
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हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : यदि मैं इसके बाद आपसे किसी चीज़ के विषय में प्रश्न करूँ, तो मुझे अपने साथ न रखें। निश्चय आप मेरी ओर से उज़्र को पहुँच चुके।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha “iske baad agar main aap se kuch puchoon to aap mujhey saat na rakhein. Lijiye ab to meri taraf se aapko uzr (excuse) mil gaya”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) ney jawab diya agar abb iss kay baad mein aap say kissi cheez kay baray mein sawal keroon to be-shak aap mujhay apney sath na rakhna yaqeena aap meri taraf say (hadd) uzur ko phonch chukay
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा “इसके बाद अगर मैं आप से कुछ पूछूं तो आप मुझे सात न रखें। लीजिए अब तो मेरी तरफ से आपको उज्र (एक्सक्यूज) मिल गया"
عَرَبِيفَانطَلَقا حَتّىٰ إِذا أَتَيا أَهلَ قَريَةٍ استَطعَما أَهلَها فَأَبَوا أَن يُضَيِّفوهُما فَوَجَدا فيها جِدارًا يُريدُ أَن يَنقَضَّ فَأَقامَهُ ۖ قالَ لَو شِئتَ لَاتَّخَذتَ عَلَيهِ أَجرًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर दोनो चले, यहाँ तक कि जब एक गाँव वालों के पास आए, तो उसके वासियों से भोजन माँगा। परंतु उन्होंने उनका अतिथि सत्कार करने से इनकार कर दिया। फिर वहाँ उन्होंने एक दीवार पाई, जो गिरा चाहती थी। तो उस (खज़िर) ने उसे सीधा कर दिया। (मूसा ने) कहा : यदि आप चाहते, तो इसपर पारिश्रमिक ले लेते।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh aage chale yahan tak ke ek basti mein pahunche aur wahan ke logon se khana maanga magar unhon ne un dono ke ziyafat se inkar kardiya. Wahan unhon ne ek deewaar dekhi jo gira chahti thi(about to fall down). Us shaks ne us deewaar ko phir qayam kardiya. Moosa ne kaha “ agar aap chahte to is kaam ki ujrat le sakte thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir dono chalay aik gaaon walon kay pass aaker unn say khana talab kiya to unhon ney unn ki mehmandaari say saaf inkar ker diya dono ney wahan aik deewar paee jo gira hi chahati thi uss ney ussay theek aur durust ker diya musa (alh-e-salam) kehney lagay agar aap chahatay to iss per ujrat ley letay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो आगे चले यहां तक ​​के एक बस्ती में पहुंचें और वहां के लोगों से खाना मंगा मगर उन्होन ने उन दोनो के जियाफत से इनकार करदिया। वहां उन्होन ने एक दीवार देखी जो गिरा चाहती थी(गिरने वाली थी) नीचे)
عَرَبِيقالَ هٰذا فِراقُ بَيني وَبَينِكَ ۚ سَأُنَبِّئُكَ بِتَأويلِ ما لَم تَستَطِع عَلَيهِ صَبرًا
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : यह मेरे और तुम्हारे बीच जुदाई है। मैं तुम्हें उसकी वास्तविकता बताऊँगा, जिसपर तुम धैर्य नहीं रख सके।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “ bas mera tumhara saath khatam hua. Ab main tumhein un baaton ki haqeeqat batata hoon jinpar tum sabr na kar sakey
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney kaha bus yeh judaee hai meray aur teray darmiyan abb mein tujhay inn baton ki asliyat bhi bata doon ga jiss per tujh say sabar na ho saka
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيأَمَّا السَّفينَةُ فَكانَت لِمَساكينَ يَعمَلونَ فِي البَحرِ فَأَرَدتُ أَن أَعيبَها وَكانَ وَراءَهُم مَلِكٌ يَأخُذُ كُلَّ سَفينَةٍ غَصبًا
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हिन्दी (Al-Omari)रही नाव, तो वह कुछ निर्धनों की थी, जो सागर में काम करते थे। तो मैंने चाहा कि उसे ख़राब कर दूँ और उनके आगे एक राजा था, जो हर (अच्छी) नाव को छीन लेता था।
Roman Urdu (Maududi)Us kashti ka maamla yeh hai ke woh chandh gareeb aadmiyon ki thi jo dariya mein mehnat mazdoori karte thay.Maine chaha ke usey aiebdar (damaged) kardoon, kyunke aagey ek aise baadshah ka ilaqa tha jo har kashti ko zabardasti cheen leta tha
Roman Urdu (Junagarhi)Kashti to chand miskeeno ki thi jo daya mein kaam kaaj kertay thay. Mein ney uss mein kuch tor phor kerney ka irada ker liya kiyon kay unn kay aagay aik badshah tha jo her aik (sahih saalim) kashti ko jabran zabt ler leta tha
Devnagri Urdu (Maududi)उस कश्ती का मामला ये है के वो चंद ग़रीब आदमियों की थी जो दरिया में मेहनत मज़दूरी करते थे।मैने चाहा के उसे अयबदार (क्षतिग्रस्त) कार्डून, क्यूँके आगे एक ऐसे बादशाह का इलाक़ा था जो हर कश्ती को ज़बरदस्ती छीन लेता था
عَرَبِيوَأَمَّا الغُلامُ فَكانَ أَبَواهُ مُؤمِنَينِ فَخَشينا أَن يُرهِقَهُما طُغيانًا وَكُفرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और रहा बालक, तो उसके माता-पिता दोनों ईमान वाले थे। अतः हम डरे कि वह उन दोनों को अवज्ञा और कुफ़्र में फँसा देगा।
Roman Urdu (Maududi)Raha woh ladka, to uske walidain momin thay, humein andesha hua ke yeh ladka apni sarkashi aur kufr se unko tangg karega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss larkay kay maa baap eman walay thay. Humen khof hua kay kahin yeh unhen apni sirkashi aur kufur say aajiz-o-pareshan na kerdey
Devnagri Urdu (Maududi)रहा वो लड़का, तो उसके वालिदैन मोमिन थे, हमें अंदेशा हुआ के ये लड़का अपनी सरकशी और कुफ़्र से उनको तंग करेगा
عَرَبِيفَأَرَدنا أَن يُبدِلَهُما رَبُّهُما خَيرًا مِنهُ زَكاةً وَأَقرَبَ رُحمًا
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हिन्दी (Al-Omari)इसलिए हमने चाहा कि उन दोनों का पालनहार उन्हें बदले में ऐसा बच्चा दे, जो पवित्रता में उससे बेहतर और करुणा में अधिक क़रीब हो।
Roman Urdu (Maududi)Isliye humne chaha ke unka Rubb uske badle unko aisi aur aulad dey jo akhlaq mein bhi ussey behtar ho aur jisse sila rehmi bhi zyada mutawaqqe ho
Roman Urdu (Junagarhi)Iss liye hum ney chaha kay unhen unn ka perwerdigar iss kay badlay iss say behtar pakeezgi wala aur iss say ziyada mohabbat aur piyar wala bacha inayat farmaye
Devnagri Urdu (Maududi)इसलिए हमने चाहा के उनका रब उसके बदले उनको ऐसी और औलाद दे जो अखलाक में भी उससे बेहतर हो और जिसका सिला रहमी भी ज्यादा मुतावक्क हो
عَرَبِيوَأَمَّا الجِدارُ فَكانَ لِغُلامَينِ يَتيمَينِ فِي المَدينَةِ وَكانَ تَحتَهُ كَنزٌ لَهُما وَكانَ أَبوهُما صالِحًا فَأَرادَ رَبُّكَ أَن يَبلُغا أَشُدَّهُما وَيَستَخرِجا كَنزَهُما رَحمَةً مِن رَبِّكَ ۚ وَما فَعَلتُهُ عَن أَمري ۚ ذٰلِكَ تَأويلُ ما لَم تَسطِع عَلَيهِ صَبرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और रही दीवार, तो वह शहर के दो अनाथ लड़कों की थी और उसके नीचे उन दोनों के लिए एक खज़ाना था और उनके पिता नेक थे। तो तेरे पालनहार ने चाहा कि वे दोनों अपनी जवानी को पहुँच जाएँ और अपना खज़ाना निकाल लें, तेरे पालनहार की ओर से दया स्वरूप। और मैंने यह अपनी मर्जी से नहीं किया। यह है उन बातों का असली सच जिनपर तुम धैर्य न रख सके।
Roman Urdu (Maududi)Aur is deewar ka maamla yeh hai ke yeh do yateem ladkon ki hai jo is shehar mein rehte hain. Is deewar ke neechey in bacchon ke liye ek khazana madfoon (buried) hai. Aur inka baap ek neik aadmi tha , isliye tumhare Rubb ne chaha ke yeh dono bacchey baalig (mature) hon aur apna khazana nikal lein. Yeh tumhare Rubb ki rehmat ki bina par kiya gaya hai, maine kuch apne ikhtiyar se nahin kardiya hai. Yeh hai haqeeqat un baaton ki jinpar tum sabr na kar sakey”
Roman Urdu (Junagarhi)Deewar ka qissa yeh hai kay iss shehar mein do yateem bachay hain jin ka khazana inn ki iss deewar kay neechay dafan hai inn ka baap bara nek shaks tha to teray rab ki chahat thi kay yeh dono yateem apni jawani ki umar mein aaker apna yeh khazana teray rab ki meharbani aur rehmat say nikal len mein ney apni raye say koi kaam nahi kiya yeh thi asal haqeeqat unn waqiyaat ki jin per aap say sabar na hosaka
Devnagri Urdu (Maududi)और इस दीवार का मामला ये है के ये दो यतीम लड़कों की है जो इस शहर में रहते हैं। क्या दीवार के नीचे बच्चों के लिए एक खजाना दफन है। और इनका बाप एक नया आदमी था, इसलिए तुम्हारे रब ने चाहा के ये डोनो बच्चे बालिग (परिपक्व) माननीय और अपना खजाना निकाल लें। ये तुम्हारे रब की रहमत की बिना पर किया गया है, मैंने कुछ अपने इख्तियार से नहीं किया है। ये है हकीकत उन बातों की जिनपर तुम सब्र न कर सके”
عَرَبِيوَيَسأَلونَكَ عَن ذِي القَرنَينِ ۖ قُل سَأَتلو عَلَيكُم مِنهُ ذِكرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) वे आपसे ज़ुल-क़रनैन के विषय में प्रश्न करते हैं। आप कह दें : मैं तुम्हें उसका कुछ वृत्तांत पढ़कर सुनाऊँगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Muhammad), yeh log tumse Zul-Qarnain ke barey mein puchte hain, Insey kaho, main iska kuch haal tumko sunata hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aap say zulqarnain ka waqiya yeh log daryaft ker rahey hain aap keh dijiye kay mein unn ka thora sa haal tumhen parh ker sunata hun
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ मुहम्मद), ये लोग तुमसे ज़ुल-क़रनैन के बारे में पूछते हैं, इनसे कहो, मैं इसका कुछ हाल तुमको सुनाता हूँ
عَرَبِيإِنّا مَكَّنّا لَهُ فِي الأَرضِ وَآتَيناهُ مِن كُلِّ شَيءٍ سَبَبًا
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हिन्दी (Al-Omari)हमने उसे धरती में प्रभुत्व प्रदान किया तथा उसे प्रत्येक प्रकार का साधन दिया।
Roman Urdu (Maududi)Humne usko zameen mein iqtedar ata kar rakkha tha aur usey har qisam ke asbaab o wasail bakshe thay
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney ussay zamin mein qooat ata farmaee thi aur ussay her cheez kay saman bhi inayat ker diye thay
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उसको ज़मीन में इक्तेदार अता कर रक्खा था और उसे हर क़िसम के असबाब ओ वसील बख्शे थे
عَرَبِيفَأَتبَعَ سَبَبًا
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हिन्दी (Al-Omari)तो वह कुछ सामान लेकर चला।
Roman Urdu (Maududi)Usne (pehle magrib ki taraf ek mohim ka) sar o samaan kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Woh aik raah kay peechay laga
Devnagri Urdu (Maududi)उसने (पहले मगरिब की तरफ एक मोहिम का) सर ओ समां किया
عَرَبِيحَتّىٰ إِذا بَلَغَ مَغرِبَ الشَّمسِ وَجَدَها تَغرُبُ في عَينٍ حَمِئَةٍ وَوَجَدَ عِندَها قَومًا ۗ قُلنا يا ذَا القَرنَينِ إِمّا أَن تُعَذِّبَ وَإِمّا أَن تَتَّخِذَ فيهِم حُسنًا
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हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि जब वह सूर्यास्त के स्थान तक पहुँचा, तो उसे पाया कि वह एक काले कीचड़ वाले जलस्रोत में डूब रहा है और उसके पास एक जाति को पाया। हमने कहा : ऐ ज़ुल-क़रनैन! या तो तू उन्हें यातना दे और या तो तू उनके साथ अच्छा व्यवहार कर।
Roman Urdu (Maududi)Hatta ke jab woh guroob e aftaab(sunset) ki hadd tak pahunch gaya to usne Suraj ko ek kalay pani mein doobte dekha aur wahan usey ek qaum mili. Humne kaha “aey Zul-Qarnain, tujhey yeh maqdarat (power) bhi haasil hai ke inko takleef pahunchye aur yeh bhi ke inke saath neik rawayya ikhtiyar karey”
Roman Urdu (Junagarhi)Yahan tak kay sooraj doobney ki jagah phonch gaya aur ussay aik daldal kay chashmay mein ghuroob hota hua paya aur iss chashmay kay pass aik qom ko bhi paya hum ney farma diya kay aey zulqarnain! Ya to tu enhen takleef phonchaye ya inn kay baray mein tu koi behtareen ravish ikhtiyar keray
Devnagri Urdu (Maududi)हट्टा के जब वो गुरूब ए आफताब (सूर्यास्त) की हद तक पहुंच गया तो उसने सूरज को एक काले पानी में डूबते देखा और वहां उसे इस्तेमाल किया क़ौम मिली. हमने कहा, "ऐ ज़ुल-क़रनैन, तुझे ये मक़दरत (शक्ति) भी हासिल है के इनको तकलीफ़ पाहुंचे और ये भी के इनके साथ नेक रवैय्या इख्तियार करे"
عَرَبِيقالَ أَمّا مَن ظَلَمَ فَسَوفَ نُعَذِّبُهُ ثُمَّ يُرَدُّ إِلىٰ رَبِّهِ فَيُعَذِّبُهُ عَذابًا نُكرًا
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : जो अत्याचार करेगा, हम उसे शीघ्र दंड देंगे। फिर वह अपने पालनहार की ओर लौटाया जाएगा, तो वह उसे बहुत बुरी यातना देगा।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha, “jo inmein se zulm karega hum usko saza denge, phir woh apne Rubb ki taraf paltaya jayega aur woh usey aur zyada sakht azaab dega
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney kaha jo zulm keray ga ussay to hum bhi abb saza den gay phir woh apney perwerdigar ki taraf lotaya jayega aur woh ussay sakht tar azab dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा, "जो इनमें से ज़ुल्म करेगा हम उसको सजा देंगे, फिर वो अपने रुब की तरफ" पलटया जाएगा और वो उसे और ज्यादा सख्त अजाब देगा
عَرَبِيوَأَمّا مَن آمَنَ وَعَمِلَ صالِحًا فَلَهُ جَزاءً الحُسنىٰ ۖ وَسَنَقولُ لَهُ مِن أَمرِنا يُسرًا
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु जो ईमान लाया और उसने अच्छा कर्म किया, तो उसके लिए बदले में भलाई है और शीघ्र ही हम उसे अपने काम में से सर्वथा सरलता का आदेश देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo inmein se iman layega aur neik amal karega uske liye acchi jaza hai aur hum usko narm ehkam denge”
Roman Urdu (Junagarhi)Haan jo eman laye aur nek aemaal keray uss kay liye to badlay mein bhalaee hai aur hum ussay apney kaam mein bhi aasani hi ka hukum den gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जो इनमें से ईमान लाएगा और नीक अमल करेगा उसके लिए अच्छी जजा है और हम उसको नरम एहकाम देंगे”
عَرَبِيثُمَّ أَتبَعَ سَبَبًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वह कुछ और सामान लेकर चला।
Roman Urdu (Maududi)Phir usne (ek dusri mohim ki) tayyari ki
Roman Urdu (Junagarhi)Phir woh aur raah kay peechay laga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उसने (एक दूसरी मोहिम की) तयारी की
عَرَبِيحَتّىٰ إِذا بَلَغَ مَطلِعَ الشَّمسِ وَجَدَها تَطلُعُ عَلىٰ قَومٍ لَم نَجعَل لَهُم مِن دونِها سِترًا
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हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि जब वह सूरज उगने के स्थान पर पहुँचा, तो उसे ऐसे लोगों पर उगता हुआ पाया, जिनके लिए हमने उसके सामने पर्दा नहीं बनाया था।
Roman Urdu (Maududi)Yahan tak ke tulu e aftaab (sun rise) ki hadd tak ja pahuncha. Wahan usne dekha ke Suraj ek aisi qaum par tulu (rise) ho raha hai jiske liye dhoop se bachne ka koi samaan humne nahin kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yahan tak kay jab sooraj nikalney ki jagah tak phoncha to ussay aik aisi qom per nikalta hua paya kay unn kay liye hum ney uss say aur koi oat nahi banaee
Devnagri Urdu (Maududi)यहां तक के तुलु ए आफताब (सूर्योदय) की हद तक जा पाहुंचा। वहां उसने देखा के सूरज एक ऐसी क़ौम पर तुलू (उदय) हो रहा है जिसके लिए धूप से बचने का कोई सामान हमने नहीं किया है
عَرَبِيكَذٰلِكَ وَقَد أَحَطنا بِما لَدَيهِ خُبرًا
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हिन्दी (Al-Omari)मामला ऐसा ही था और उस (ज़ुल-क़रनैन) के पास जो कुछ था, निश्चित रूप से वह हमारे ज्ञान के घेरे में था।
Roman Urdu (Maududi)Yeh haal tha unka, aur Zul-Qarnain ke paas jo kuch tha usey hum jantey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Waqiya aisa hi hai aur hum ney uss kay pass ki kul khabron ka ehaata ker rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये हाल था उनका, और ज़ुल-क़रनैन के पास जो कुछ था उसे हम जानते थे
عَرَبِيثُمَّ أَتبَعَ سَبَبًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वह कुछ और सामान लेकर चला।
Roman Urdu (Maududi)Phir usne (ek aur mohim ka) samaan kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Woh phir aik safar kay saman mein laga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उसने (एक और मोहिम का) समान किया
عَرَبِيحَتّىٰ إِذا بَلَغَ بَينَ السَّدَّينِ وَجَدَ مِن دونِهِما قَومًا لا يَكادونَ يَفقَهونَ قَولًا
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हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि जब वह दो पर्वतों के बीच पहुँचा, तो उन दोनों की उस ओर एक जाति को पाया, जो क़रीब न थी कि कोई बात समझे।
Roman Urdu (Maududi)Yahan tak ke jab do pahadon ke darmiyan pahuncha to usey unke paas ek qaum mili jo mushkil hi se koi baat samajhti thi
Roman Urdu (Junagarhi)Yahan tak kay jab do deewaron kay darmiyan phoncha unn dono kay paray uss ney aik aisi qom paee jo baat samjhney ka qareeb bhi na thi
Devnagri Urdu (Maududi)यहां तक ​​के जब दो पहाड़ों के दरमियां पाहुंचा तो उसके पास एक क़ौम मिली जो मुश्किल ही से कोई बात समझती थी
عَرَبِيقالوا يا ذَا القَرنَينِ إِنَّ يَأجوجَ وَمَأجوجَ مُفسِدونَ فِي الأَرضِ فَهَل نَجعَلُ لَكَ خَرجًا عَلىٰ أَن تَجعَلَ بَينَنا وَبَينَهُم سَدًّا
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ ज़ुल-क़रनैन! निःसंदेह याजूज और माजूज इस भूभाग में उत्पात मचाने वाले हैं। तो क्या हम आपके लिए कुछ राजस्व तय कर दें, इस शर्त पर कि आप हमारे और उनके बीच एक अवरोध बना दें?
Roman Urdu (Maududi)Un logon ne kaha “aey Zul-Qarnain, yaajuj aur maajuj is sar-zameen mein fasad phailatey hain to kya hum tujhey koi tax (tribute) is kaam ke liye dein ke tu hamare aur inke darmiyan ek bandh (barrier) taamir karde?”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha aey zulqarnain! Yajoob majooj iss mulk mein (baray bhari) fasadi hain to kiya hum aap kay liye kuch kharch ka intizam ker den? (iss shart per kay) aap humaray aur unn kay darmiyan aik deewat bana den
Devnagri Urdu (Maududi)उन लोगों ने कहा “ऐ” ज़ुल-क़रनैन, याजुज और माजूज इस सर-जमीन में फसाद फैलाते हैं तो क्या हम तुझ पर कोई टैक्स (श्रद्धांजलि) इस काम के लिए दीन के तू हमारे और इनके दरमियान एक बंद (बाधा) तामीर करदे?”
عَرَبِيقالَ ما مَكَّنّي فيهِ رَبّي خَيرٌ فَأَعينوني بِقُوَّةٍ أَجعَل بَينَكُم وَبَينَهُم رَدمًا
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : मेरे पालनहार ने जो कुछ मुझे प्रदान किया है, वह उत्तम है। अतः तुम श्रमशक्ति से मेरी सहायता करो, मैं तुम्हारे और उनके बीच एक मोटी (और दृढ़) दीवार बना दूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “jo kuch mere Rubb ne mujhey de rakkha hai woh bahut hai. Tum bas mehnat se meri madad karo, main tumhare aur inke darmiyan bandh(barrier) banaye deta hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney jawab diya kay meray ikhtiyar mein meray perwerdigar ney jo dey rakha hai wohi behtar hai tum sirf qooat taqat say meri madad kero
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा "जो कुछ मेरे रब्ब ने मुझे दे रक्खा है वो बहुत है।" तुम बस मेहनत से मेरी मदद करो, मैं तुम्हारे और इनके दरमियान बंद (बाधा) बना देता हूं
عَرَبِيآتوني زُبَرَ الحَديدِ ۖ حَتّىٰ إِذا ساوىٰ بَينَ الصَّدَفَينِ قالَ انفُخوا ۖ حَتّىٰ إِذا جَعَلَهُ نارًا قالَ آتوني أُفرِغ عَلَيهِ قِطرًا
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हिन्दी (Al-Omari)मुझे लोहे के टुकड़े ला दो, यहाँ तक कि जब दोनों पहाड़ों के बीच का हिस्सा ऊपर तक बराबर कर दिया, तो कहा : अब इसमें आग दहकाओ, यहाँ तक कि जब उसे आग कर दिया, तो कहा : मुझे पिघला हुआ ताँबा ला दो, ताकि मैं इसपर उँड़ेल दूँ।
Roman Urdu (Maududi)Mujhey lohey ki chadarein (sheets) laakar do”. Aakhir jab dono pahadon ke darmiyani khala (space) ko usne paat diya to logon se kaha ke ab aag dehkao. Hatta ke jab [yeh ahani deewaar(iron-wall)] bilkul aag ki tarah surkh(red-hot) ho gayi to usne kaha “ lao, ab main ispar pigla hua taamba (molten brass) undailunga (pour)”
Roman Urdu (Junagarhi)Mein tum mein aur inn mein mazboot hijab bana deta hun. Mujhay lohay ki chadaren laa do. Yahan tak kay jab inn dono paharon kay darmiyan deewar barabar kerdi to hukum diya kay aag tez jalao ta-waqt-e-kay lohay ki inn chadaron ko bilkul aag ker diyato farmaya meray pass laao iss per pighla hua tanbaa daal doon
Devnagri Urdu (Maududi)मुझे लोहे की चादरें (चादरें) लाकर दो"। आखिर जब दोनों पहाड़ों के दरमियानी खाला (अंतरिक्ष) को उसने पाट दिया तो लोगों से कहा के अब आग देहकाओ। हट्टा के जब [ये अहानी दीवार (लोहे की दीवार)] बिल्कुल आग की तरह सुर्ख (लाल-गर्म) हो गई तो उसने कहा " लाओ, अब मैं इसपर पिगला हुआ तांबा (पिघला हुआ पीतल) उंडैलूंगा (डालूंगा)"
عَرَبِيفَمَا اسطاعوا أَن يَظهَروهُ وَمَا استَطاعوا لَهُ نَقبًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उनमें न यह शक्ति रही कि उस पर चढ़ सकें और न वे उसमें कोई छेद कर सके।
Roman Urdu (Maududi)(yeh bandh aisa tha ke) yaajuj o maajuj ispar chadh kar bhi na aa saktey thay aur ismein naqab lagana (scale over it) unke liye aur bhi mushkil tha
Roman Urdu (Junagarhi)Pus to inn mein iss deewar kay upper charhney ki taqat thi aur na iss mein koi soorakh ker saktay thay
Devnagri Urdu (Maududi)(ये बंद ऐसा था के) याजुज ओ माजुज इसपर चढ़ कर भी ना आ सकता था और इसमें नकाब लगाना (इस पर पैमाना) उनके लिए और भी मुश्किल था
عَرَبِيقالَ هٰذا رَحمَةٌ مِن رَبّي ۖ فَإِذا جاءَ وَعدُ رَبّي جَعَلَهُ دَكّاءَ ۖ وَكانَ وَعدُ رَبّي حَقًّا
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हिन्दी (Al-Omari)उस (ज़ुलक़रनैन) ने कहा : यह मेरे पालनहार की ओर से एक दया है। फिर जब मेरे पालनहार का वादा आ जाएगा, तो वह इसे पृथ्वी के बराबर कर देगा, और मेरे पालनहार का वादा हमेशा से सच्चा है।
Roman Urdu (Maududi)Zul-Qarnain ne kaha “yeh mere Rubb ki rehmat hai, magar jab mere Rubb ke wadey ka waqt aayega to woh isko paiwand e khaak kardega, aur mere Rubb ka wada bar-haqq hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Kaha yeh sab meray rab ki meharbani hai haan jab meray rab ka wada aayega to issay zamin boss ker dey ga be-shak meray rab ka wada sacha aur haq hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़ुल-क़रनैन ने कहा "ये मेरे रब की रहमत है, मगर जब मेरे रब के वादे का वक़्त आएगा तो वो इसको पैवंद ए खाक कर देगा, और मेरे रब का वादा बार-हक़्क़ है"
عَرَبِي۞ وَتَرَكنا بَعضَهُم يَومَئِذٍ يَموجُ في بَعضٍ ۖ وَنُفِخَ فِي الصّورِ فَجَمَعناهُم جَمعًا
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हिन्दी (Al-Omari)और उस दिन हम उन्हें इस अवस्था में छोड़ देंगे कि वे एक-दूसरे से मौजों की तरह परस्पर गुत्थम-गुत्था हो जाएँगे और “सूर” फूँक दिया जाएगा, तो हम उन सभी को इकट्ठा करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur us roz hum logon ko chodh denge ke (samandar ki maujon ki tarah) ek dusre se gutham gutha (come close together tumultuously) hon aur sur (trumphet) phoonka jaayega aur hum sab Insaano ko ek saath jamaa karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din hum enhen aapas mein aik doosray mein gudd madd hotay huye chor den gay aur soor phoonk diya jayega pus sab ko ikhatha ker kay hum jama ker len gay
Devnagri Urdu (Maududi)और हम रोज़ हम लोगों को छोड़ देंगे के (समंदर की मौजों की तरह) एक दूसरे से गुत्थम गुत्था (एक साथ करीब आओ) माननीय और सुर (तुरही) फूंका जाएगा और हम सब इंसानों को एक साथ जमा करेंगे
عَرَبِيوَعَرَضنا جَهَنَّمَ يَومَئِذٍ لِلكافِرينَ عَرضًا
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हिन्दी (Al-Omari)और उस दिन हम जहन्नम को काफिरों के ठीक सामने कर देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh din hoga jab hum jahannum ko kafiron ke saamne layenge
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din hum jahannum ko (bhi) kafiron kay samney laa khara keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)और वो दिन होगा जब हम जहन्नुम को काफिरों के सामने लाएंगे
عَرَبِيالَّذينَ كانَت أَعيُنُهُم في غِطاءٍ عَن ذِكري وَكانوا لا يَستَطيعونَ سَمعًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिनकी आँखें मेरी याद से पर्दे में थीं और वे सुन ही नहीं सकते थे।
Roman Urdu (Maududi)Un kafiron ke saamne jo meri naseehat ki taraf se andhey baney huey thay aur kuch sunne keliye tayyar hi na thay
Roman Urdu (Junagarhi)Jin ki aankhen meri yaad say pardey mein thi aur (amar haq) sunn bhi nahi saktay thay
Devnagri Urdu (Maududi)उन काफिरों के सामने जो मेरी हिदायत की तरफ से अंधे बने हुए थे और कुछ सुने केलिए तैयार ही ना थाय
عَرَبِيأَفَحَسِبَ الَّذينَ كَفَروا أَن يَتَّخِذوا عِبادي مِن دوني أَولِياءَ ۚ إِنّا أَعتَدنا جَهَنَّمَ لِلكافِرينَ نُزُلًا
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उन्होंने यह सोचा है कि वे मुझे छोड़कर मेरे बंदों को सहायक बना लेंगे? निःसंदेह हमने जहन्नम को काफिरों के लिए आतिथ्य के रूप में तैयार कर रखा है।
Roman Urdu (Maududi)To kya yeh log, jinhon ne kufr ikhtiyar kiya hai, yeh khayal rakhte hain ke mujhey chodh kar mere bandon ko apna kaarsaaz bana lein? Humne aisey kafiron ki ziyafat ke liye jahannum tayyar kar rakkhi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya kafir yeh khayal kiye bethay hain? Kay meray siwa woh meray bandon ko apna himayati bana len gay? (Suno) hum ney to inn kuffaar ki mehmani kay liye jahannum ko tayyar ker rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)तो क्या ये लोग, जिन्हों ने कुफ्र इख्तियार किया है, ये ख्याल रखते हैं के मुझे छोड़ कर मेरे बंदों को अपना करसाज़ बना लें? हमने ऐसे काफिरों की ज़ियाफ़त के लिए जहन्नुम तय्यार कर रखी है
عَرَبِيقُل هَل نُنَبِّئُكُم بِالأَخسَرينَ أَعمالًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : क्या हम तुम्हें उन लोगों के बारे में बताएँ जो कर्मों में सबसे अधिक घाटा वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), insey kaho, kya hum tumhein batayein ke apne aamaal mein sabse zyada nakaam o na-murad log kaun hain
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay agar (tum kaho to) mein tumhen bata doon kay ba-aetbaar aemaal sab say ziyada khasaray mein kaun hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), इनसे कहो, क्या हम तुम्हें बताएं के अपने अमाल में सबसे ज्यादा नाकाम ओ ना-मुराद लोग कौन हैं
عَرَبِيالَّذينَ ضَلَّ سَعيُهُم فِي الحَياةِ الدُّنيا وَهُم يَحسَبونَ أَنَّهُم يُحسِنونَ صُنعًا
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग जिनका प्रयास संसार के जीवन में व्यर्थ हो गया है और वे सोचते हैं कि निःसंदेह वे एक अच्छा काम कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh ke duniya ki zindagi mein jinki saari saii-o-jahad (endeavours/ efforts) raah e raast se bhatki rahi aur woh samajhte rahey ke woh sab kuch theek kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh hain kay jinki dunyawi zindagi ki tamam tar kosishen bekar hogaeen aur woh issi gumaan mein rahey kay woh boht achay kaam ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो के दुनिया की जिंदगी में जिनकी सारी सई-ओ-जहाद (प्रयास/प्रयास) राह ए रास्ते से भटक रही है और वो समझे रहे के वो सब कुछ ठीक कर रहे हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ كَفَروا بِآياتِ رَبِّهِم وَلِقائِهِ فَحَبِطَت أَعمالُهُم فَلا نُقيمُ لَهُم يَومَ القِيامَةِ وَزنًا
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हिन्दी (Al-Omari)यही वे लोग हैं, जिन्होंने अपने पालनहार की आयतों और उससे मिलन का इनकार किया। तो उनके कर्म बेकार हो गए, अतः हम क़ियामत के दिन उनके लिए कोई वज़न नहीं रखेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hain jinhon ne apne Rubb ki aayat ko maanne se inkar kiya aur uske huzoor pehsi ka yaqeen na kiya. Isliye unke saarey aamal zaaya ho gaye, qayamat ke roz hum unhein koi wazan(weight) na denge
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi woh log hain jinhon ney apney perwerdigar ki aayaton aur uss ki mulaqat say kufur kiya iss liye unn kay aemaal ghaarat hogaye pus qayamat kay din hum unn ka koi wazan qaeem na keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने रब की आयत को मन्ने से इंकार किया और उसके हुजूर पेहसी का यकीन ना किया। इसलिए उनके सारे अमल ज़ाया हो गए, क़यामत के रोज़ हम उन्हें कोई वज़न न देंगे
عَرَبِيذٰلِكَ جَزاؤُهُم جَهَنَّمُ بِما كَفَروا وَاتَّخَذوا آياتي وَرُسُلي هُزُوًا
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हिन्दी (Al-Omari)यह उनका बदला नरक है, इस कारण कि उन्होंने कुफ़्र किया और मेरी आयतों और मेरे रसूलों का मज़ाक उड़ाया।
Roman Urdu (Maududi)Unki jaza jahannum hai us kufr ke badle jo unhon ne kiya aur us mazaaq ki padash mein jo woh meri aayat aur mere Rasoolon ke saath karte rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Haal yeh hai kay inn ka badla jahannum hai kiyon kay enhon nay kufur kiya aur meri aayaton aur meray rasoolon ko mazaq mein uaraya
Devnagri Urdu (Maududi)उनकी जज़ा जहन्नुम है उस कुफ्र के बदले जो उनहों ने किया और उस मज़ाक की याद में जो वो मेरी आयत और मेरे रसूलों के साथ करते रहे
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ كانَت لَهُم جَنّاتُ الفِردَوسِ نُزُلًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, उनके आतिथ्य के लिए फ़िरदौस के बाग़ होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Albattta woh log jo iman laye aur jinhon ne neik amal kiya, unki mezbani ke liye firdous ke baagh hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log eman laye aur unhon ney kaam bhi achay kiye yaqeenan unn kay liye al-firdous kay baaghaat ki mehmani hai
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता वो लोग जो ईमान लाए और जिन्होन ने नीक अमल किया, उनकी मेजबानी के लिए फिरदौस के बाग होंगे
عَرَبِيخالِدينَ فيها لا يَبغونَ عَنها حِوَلًا
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हिन्दी (Al-Omari)उनमें हमेशा रहने वाले होंगे, वे उससे स्थान बदलना नहीं चाहेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jin mein woh hamesha rahenge aur kabhi us jagah se nikal kar kahin janey ko unka jee na chahega
Roman Urdu (Junagarhi)Jahan woh humesha raha keren gay jiss jagah ko badalney ka kabhi bhi unn ka irada hi na hoga
Devnagri Urdu (Maududi)जिन में वो हमेशा रहेंगे और कभी उस जगह से निकल कर कहीं जाने को उनका जी न चाहेगा
عَرَبِيقُل لَو كانَ البَحرُ مِدادًا لِكَلِماتِ رَبّي لَنَفِدَ البَحرُ قَبلَ أَن تَنفَدَ كَلِماتُ رَبّي وَلَو جِئنا بِمِثلِهِ مَدَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें : यदि सागर मेरे पालनहार की बातें लिखने के लिए स्याही बन जाए, तो निश्चय सागर समाप्त हो जाएगा इससे पहले कि मेरे पालनहार की बातें समाप्त हों, यद्यपि हम उसके बराबर और स्याही ले आएँ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), kaho ke agar samandar mere Rubb ki baatein likhne ke liye roshnayi(ink) ban jaye to woh khatam ho jaye magar mere Rubb ki baatein khatam na hon, balke itni hi roshnayi aur le aayein to woh bhi kifayat na karey
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay agar meray perwerdigar ki baton kay likhney kay liye samandar sihaee bann jayen to woh bhi meray rab ki baton kay khatam honey say pehlay hi khatam hojaye ga go hum issi jaisa aur bhi iss ki madad ko ley aayen
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), कहो के अगर समंदर मेरे रब की बातें लिखने के लिए रोशनाई (स्याही) बन जाए तो वो ख़तम हो जाए मगर मेरे रब की बातें ख़त्म ना हो, बलके इतनी ही रोशनी और ले आएं तो वो भी किफ़ायत ना करे
عَرَبِيقُل إِنَّما أَنا بَشَرٌ مِثلُكُم يوحىٰ إِلَيَّ أَنَّما إِلٰهُكُم إِلٰهٌ واحِدٌ ۖ فَمَن كانَ يَرجو لِقاءَ رَبِّهِ فَليَعمَل عَمَلًا صالِحًا وَلا يُشرِك بِعِبادَةِ رَبِّهِ أَحَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दे : मैं तो तुम्हारे जैसा ही एक मनुष्य हूँ, मेरी ओर प्रकाशना (वह़्य) की जाती है कि तुम्हारा पूज्य केवल एक ही पूज्य है। अतः जो कोई अपने पालनहार से मिलने की आशा रखता हो, उसके लिए आवश्यक है कि वह अच्छे कर्म करे और अपने पालनहार की इबादत में किसी को साझी न बनाए।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), kaho ke main to ek Insaan hoon tum hi jaisa, meri taraf wahee ki jaati hai ke tumhara khuda bas ek hi khuda hai, pas jo koi apne Rubb ki mulaqaat ka umeedwar ho usey chahiye ke neik amal karey aur bandagi mein apne Rubb ke saath kisi aur ko shareek na karey
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay mein to tum jaisa hi aik insan hun. (haan) meri janib wahee ki jati hai kay sab ka mabood aik hi mabood hai to jisay bhi apney perwerdigar say milney ki aarzoo ho ussay chahaye kay nek aemaal keray aur apney perwerdigar ki ibadat mein kissi ko bhi shareeq na keray
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), कहो के मैं तो एक इंसान हूं तुम ही जैसा, मेरी तरफ वही की जाती है के तुम्हारा खुदा बस एक ही खुदा है, पास जो अपने रुब की मुलाकात का उम्मीदवर हो उसे चाहिए कि नेक अमल करे और बंदगी में अपने रुब के साथ किसी और को शरीक न करे
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Surah 18: Al-Kahf (The Cave)

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Surah 18: Al-Kahf (The Cave)

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Surah 18: Al-Kahf (The Cave)

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Surah 18: Al-Kahf (The Cave)

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Surah 18: Al-Kahf (The Cave)

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Surah 19: Maryam (Mary)

Meccan🕐 Revelation #44📜 98 Verses🕮 Juz 1
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Surah 19: Maryam (Mary)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيكهيعص
हिन्दी (Al-Omari)काफ़, हा, या, ऐन, स़ाद।
Roman Urdu (Maududi)Kaaf , Haa , yaa, ain , saad
Roman Urdu (Junagarhi)Kaaf haa yaa ain suaad
Devnagri Urdu (Maududi)काफ, हा, हां, ऐन, साद
عَرَبِيذِكرُ رَحمَتِ رَبِّكَ عَبدَهُ زَكَرِيّا
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हिन्दी (Al-Omari)(यह) आपके पालनहार की अपने बंदे ज़करिय्या पर दया की चर्चा है।
Roman Urdu (Maududi)Zikr hai us rehmat ka jo tere Rubb ne apne banday zakariya par ki thi
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hai teray perwerdigar ki uss meharbani ka zikar jo uss ney apney banday zakriya per ki thi
Devnagri Urdu (Maududi)ज़िक्र है उस रहमत का जो तेरे रब ने अपने बंदे ज़कारिया पर की थी
عَرَبِيإِذ نادىٰ رَبَّهُ نِداءً خَفِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)जब उसने अपने पालनहार को गुप्त स्वर में पुकारा।
Roman Urdu (Maududi)Jabke usne apne Rubb ko chupke chupke pukara
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay uss ney apney rab say chupkay chupkay dua ki thi
Devnagri Urdu (Maududi)जबके उसने अपने रब को चुपके-चुपके पुकारा
عَرَبِيقالَ رَبِّ إِنّي وَهَنَ العَظمُ مِنّي وَاشتَعَلَ الرَّأسُ شَيبًا وَلَم أَكُن بِدُعائِكَ رَبِّ شَقِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! निश्चय मेरी हड्डियाँ कमज़ोर हो गईं और सिर बुढ़ापे से सफेद हो गया, तथा ऐ मेरे पालनहार! मैं तुझे पुकारकर कभी असफल नहीं हुआ।
Roman Urdu (Maududi)Usne arz kiya “aey parwardigar, meri haddiyan tak ghul gayi hain aur sar budhape se bhadak utha hai, aey parwardigar, main kabhi tujhse dua maang kar na-murad nahin raha
Roman Urdu (Junagarhi)Kay aey meray perwerdigar! Meri hadiyan kamzor hogaee hain aur sir burhapay ki waja say bharak utha hai lekin mein tujh say dua kerkay kabhi bhi mehroom nahi raha
Devnagri Urdu (Maududi)उसने अर्ज़ किया "ऐ परवरदिगार, मेरी हदियां तक ​​घुल गई हैं और सर बुढ़ापे से भड़क उठा है, ऐ परवरदिगार, मैं कभी तुझसे दुआ मांग कर ना-मुराद नहीं रहा
عَرَبِيوَإِنّي خِفتُ المَوالِيَ مِن وَرائي وَكانَتِ امرَأَتي عاقِرًا فَهَب لي مِن لَدُنكَ وَلِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह मैं अपने पीछे रिश्तेदारों से डरता हूँ, और मेरी पत्नी आरंभ से बाँझ है, अतः मुझे अपनी ओर से एक उत्तराधिकारी प्रदान कर दे।
Roman Urdu (Maududi)Mujhey apne peechey apne bhai bandon ki buraiyon ka khauf hai, aur meri biwi baanjh (barren) hai, tu mujhey apne fazal e khaas se ek waris ata karde
Roman Urdu (Junagarhi)Mujhay apney marney kay baad apney qarabat daron ka darr hai meri biwi bhi baanjh hai pus tu mujhay apney pass say waris ata farma
Devnagri Urdu (Maududi)मुझे अपने पीछे अपने भाई बंदों की बुराइयों का खौफ है, और मेरी बीवी बांझ (बंजर) है, तू मुझे अपने फजल ए खास से एक वारिस अता करदे [19:6]
عَرَبِييَرِثُني وَيَرِثُ مِن آلِ يَعقوبَ ۖ وَاجعَلهُ رَبِّ رَضِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)जो मेरा उत्तराधिकारी हो तथा याक़ूब के वंश का उत्तराधिकारी हो और ऐ मेरे पालनहार! उसे पसंदीदा बना दे।
Roman Urdu (Maududi)Jo mera bhi ho aur aale yaqub ki miras bhi paye, aur aey parwardigar , usko ek pasandeeda Insaan bana”
Roman Urdu (Junagarhi)Jo mera bhi waris ho aur yaqoob (alh-e-salam) kay khandan ka bhi ja-nasheen aur meray rab! Tu ussay maqbool banda bana ley
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِييا زَكَرِيّا إِنّا نُبَشِّرُكَ بِغُلامٍ اسمُهُ يَحيىٰ لَم نَجعَل لَهُ مِن قَبلُ سَمِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ज़करिय्या! निःसंदेह हम तुझे एक बालक की शुभ सूचना देते हैं, जिसका नाम यह़्या है। हमने इससे पहले उसका कोई समनाम नहीं बनाया।
Roman Urdu (Maududi)(Jawab diya gaya) “Aey zakariya, hum tujhe ek ladke ki basharat dete hain jiska naam Yahya hoga, humne is naam ka koi aadmi issey pehle paida nahin kiya”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey zakriya! Hum tujhay aik bachay ki khushkhabri detay hain jiss kay naam yahya hai hum ney iss say pehlay iss ka hum naam bhi kissi ko nahi kiya
Devnagri Urdu (Maududi)(जवाब दिया गया) “ऐ जकारिया, हम तुझे एक लड़के की बशारत देते हैं जिसका नाम यह होगा, हमने इस नाम का कोई आदमी इसे पहले पैदा नहीं किया”
عَرَبِيقالَ رَبِّ أَنّىٰ يَكونُ لي غُلامٌ وَكانَتِ امرَأَتي عاقِرًا وَقَد بَلَغتُ مِنَ الكِبَرِ عِتِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे यहाँ बालक कैसे होगा, जबकि मेरी पत्नी शुरू से बाँझ है और मैं बुढ़ापे की अंतिम सीमा को पहुँच गया हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Arz kiya, “parwardigar, bhala mere haan kaise beta hoga jabke meri biwi baanjh (barren) hai aur main boodha hokar sookh chuka hoon?”
Roman Urdu (Junagarhi)Zakriya (alh-e-salam) kehney lagay aey meray rab! Meray haan larka kaisay hoga jabkay meri biwi baanjh aur mein khud burhapay kay intehaee zoaf ko phonch chuka hun
Devnagri Urdu (Maududi)अर्ज़ किया, “परवरदिगार, भला मेरे हां कैसे बेटा होगा जबके मेरी बीवी बाँझ (बंजर) है और मैं बूढ़ा होकर सुखा चुका हूँ?”
عَرَبِيقالَ كَذٰلِكَ قالَ رَبُّكَ هُوَ عَلَيَّ هَيِّنٌ وَقَد خَلَقتُكَ مِن قَبلُ وَلَم تَكُ شَيئًا
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐसा ही है, तेरे पालनहार ने कहा है : यह मेरे लिए सरल है, और निश्चय मैंने तुझे इससे पहले पैदा किया, जबकि तू कुछ भी नहीं था।
Roman Urdu (Maududi)Jawab mila “aisa hi hoga. Tera Rubb farmata hai ke yeh to mere liye ek zara si baat hai, aakhir issey pehle main tujhey paida kar chuka hoon jabke tu koi cheez na tha”
Roman Urdu (Junagarhi)Irshad hua kay wada issi tarah ho chuka teray rab ney farma diya hai kay mujh per to yeh bilkul aasan hai aur tu khud jabkay kuch na tha mein tujhay peda ker chuka hun
Devnagri Urdu (Maududi)जवाब मिला “ऐसा ही होगा।” तेरा रब्ब फरमाता है के ये तो मेरे लिए एक ज़रा सी बात है, आख़िर इसे पहले मैं तुझ पेदा कर चूका हूँ जबके तू कोई चीज़ ना था”
عَرَبِيقالَ رَبِّ اجعَل لي آيَةً ۚ قالَ آيَتُكَ أَلّا تُكَلِّمَ النّاسَ ثَلاثَ لَيالٍ سَوِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)उस (ज़करिय्या) ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए कोई निशानी निर्धारित कर दे। (अल्लाह ने) फरमाया : तेरी निशानी यह है कि तू स्वस्थ होते हुए लोगों से तीन रातों तक बात नहीं करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Zakariya ne kaha, “parwardigar, mere liye koi nishani muqarrar karde”. Farmaya “tere liye nishani yeh hai ke tu paiham teen din logon se baat na kar sakey”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney lagay meray perwerdigar meray liye koi alamat muqarrar farma dey irshad hua kay teray liye alamat yeh hai kay bawajood bhala changa honey kay tu teen raaton tak kissi shaks say bol na sakay ga
Devnagri Urdu (Maududi)ज़कारिया ने कहा, “परवरदिगार, मेरे लिए कोई निशानी मुकर्रर करदे।” फरमाया “तेरे लिए निशानी ये है के तू” पैहम तीन दिन लोगों से बात न कर सके”
عَرَبِيفَخَرَجَ عَلىٰ قَومِهِ مِنَ المِحرابِ فَأَوحىٰ إِلَيهِم أَن سَبِّحوا بُكرَةً وَعَشِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वह उपासना-गृह से निकलकर अपनी जाति के पास आया और उन्हें संकेत द्वारा आदेश दिया कि सुबह और शाम (अल्लाह की) पवित्रता का वर्णन करो।
Roman Urdu (Maududi)Chunachey woh mehrab se nikal kar apni qaum ke saamne aaya aur usne isharey se unko hidayat ki ke subh-o-shaam tasbeeh karo
Roman Urdu (Junagarhi)Abb zakriya (alh-e-salam) apney hujray say nikal ker apni qom kay pass aaker unhen ishara kertay hain kay tum subha-o-shaam Allah Taalaa ki tasbeeh biyan kero
Devnagri Urdu (Maududi)चुनाचे वो मेहराब से निकल कर अपनी क़ौम के सामने आया और उसने इशारे से उनको हिदायत की के सुबह-ओ-शाम तस्बीह करो
عَرَبِييا يَحيىٰ خُذِ الكِتابَ بِقُوَّةٍ ۖ وَآتَيناهُ الحُكمَ صَبِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ यह़्या! इस पुस्तक (तौरात) को मज़बूती से थाम लो। और हमने उसे बचपन ही में निर्णय-शक्ति प्रदान की।
Roman Urdu (Maududi)Aey Yahya! Kitab e ilahi ko mazboot thaam le, humne usey bachpan hi mein “hukum” se nawaza
Roman Urdu (Junagarhi)“Aey yahya! Meri kitab ko mazbooti say thaam ley” aur hum ney ussay larakpan hi say danaee ata farma di
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ याह्या! किताब ए इलाही को मज़बूत थाम ले, हमने उसे इस्तेमाल किया बचपन ही में "हुकुम" से नवाज़
عَرَبِيوَحَنانًا مِن لَدُنّا وَزَكاةً ۖ وَكانَ تَقِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अपनी ओर से दया तथा पवित्रता (प्रदान की) और वह बड़ा संयमी (परहेज़गार) था।
Roman Urdu (Maududi)Aur apni taraf se usko narm dili aur paakeezgi ata ki aur woh bada parheizgaar
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney pass say shafqat aur pakeezgi bhi woh perhezgar shaks tha
Devnagri Urdu (Maududi)और अपनी तरफ से उसको नरम दिल और पाकीज़गी अता की और वो बड़ा परहेज़गार
عَرَبِيوَبَرًّا بِوالِدَيهِ وَلَم يَكُن جَبّارًا عَصِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अपने माता-पिता के साथ सुशील था। तथा वह क्रूर और अवज्ञाकारी नहीं था।
Roman Urdu (Maududi)Aur apne walidain ka haqq shanaas (dutiful ) tha, woh jabbar(arrogant) na tha aur na nafarman
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney maa baap say nek salook kerney wala tha woh sirkash aur gunehgar na tha
Devnagri Urdu (Maududi)और अपने वालिदैन का हक़ शान (कर्तव्यनिष्ठ) था, वो जब्बार (अहंकारी) न था और न नफ़रमान
عَرَبِيوَسَلامٌ عَلَيهِ يَومَ وُلِدَ وَيَومَ يَموتُ وَيَومَ يُبعَثُ حَيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)और उसपर सलामती हो जिस दिन वह पैदा हुआ और जिस दिन वह मरेगा और जिस दिन वह जीवित करके उठाया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Salaam uspar jis roz ke woh paida hua aur jis din marey aur jis roz woh zinda karke uthaya jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Uss per salam hai jiss din woh peda hua aur jiss din woh maray aur jiss din woh zinda kerkay uthaya jaye
Devnagri Urdu (Maududi)सलाम उसपर जिस रोज़ के वो पैदा हुआ और जिस दिन मरे और जिस रोज़ वो ज़िंदा करके उठया जाए
عَرَبِيوَاذكُر فِي الكِتابِ مَريَمَ إِذِ انتَبَذَت مِن أَهلِها مَكانًا شَرقِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इस किताब में मरयम की चर्चा करें, जब वह अपने घरवालों से एक स्थान पर अलग हो गईं जो (उनसे) पूरब की ओर था।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Muhammad), is kitaab mein Maryam ka haal bayan karo, jabke woh apne logon se alag ho kar sharqi (eastern side) janib gosha nasheen (in seclusion) ho gayi thi
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kitab mein marium ka bhi waqiya biyan ker. Jabkay woh apney ghar kay logon say alehda hoker mashriqi janib aaeen
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ मुहम्मद), इस किताब में मरियम का हाल बयान करो, जबके वो अपने लोगों से अलग हो कर शर्की (पूर्वी तरफ) जानिब गोशा नशीन (एकांत में) हो गई थी
عَرَبِيفَاتَّخَذَت مِن دونِهِم حِجابًا فَأَرسَلنا إِلَيها روحَنا فَتَمَثَّلَ لَها بَشَرًا سَوِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने उनकी ओर से एक परदा बना लिया, तो हमने उसकी ओर अपनी रूह़ (विशेष फ़रिश्ता) को भेजा, तो उसने उसके लिए एक पूरे मनुष्य का रूप धारण कर लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur purda daal kar unse chup (hidden) baithi thi is halat mein humne uske paas apni rooh ko (yani farishte ko) bheja aur woh uske saamne ek puray Insan ki shakal mein namudar ho gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn logon ki taraf say parda ker liya phir hum ney uss kay pass apni rooh (jibraeel alh-e-salam) ko bheja pus woh uss kay samney poora aadmi bann ker zahir hua
Devnagri Urdu (Maududi)और परदा दाल कर उनसे छुप (छिपी हुई) बैठी थी इस हालत में हमने उसके पास अपनी रूह को (यानी फरिश्ते को) भेजा और वो उसके सामने एक पूरा इंसान की शक्ल में नामदार हो गया
عَرَبِيقالَت إِنّي أَعوذُ بِالرَّحمٰنِ مِنكَ إِن كُنتَ تَقِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : निःसंदेह मैं तुझसे रहमान (परम दयावान्) की शरण माँगती हूँ, यदि तू डर रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Maryam yakayak bol uthi ke “agar tu koi khuda tars aadmi hai to main tujhse rehman ki panaah maangti hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kehney lagin mein tujh say rehman ki panah maangti hun agar tu kuch bhi Allah say darney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)मरियम यकायक बोल उठी के "अगर तू कोई खुदा तरस आदमी है तो मैं तुझसे" रहमान की पनाह मांगती हूं"
عَرَبِيقالَ إِنَّما أَنا رَسولُ رَبِّكِ لِأَهَبَ لَكِ غُلامًا زَكِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : मैं तेरे पालनहार का भेजा हुआ हूँ, ताकि तुझे एक पवित्र लड़का प्रदान करूँ।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “main to tere Rubb ka faristada hoon aur isliye bheja gaya hoon ke tujhey ek paakeeza ladka doon”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney jawab diya kay mein to Allah ka bheja hua qasid hun tujhay aik pakeeza larka denay aaya hun
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा "मैं तो तेरे रब का फ़रिश्ता हूं और इसे भेजा गया हूं के तुझसे एक पाकीजा लड़का दूं"
عَرَبِيقالَت أَنّىٰ يَكونُ لي غُلامٌ وَلَم يَمسَسني بَشَرٌ وَلَم أَكُ بَغِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)वह बोली : मुझे लड़का कैसे हो सकता है, जबकि किसी पुरुष ने मुझे छुआ तक नहीं है और न मैं कभी व्यभिचारिणी थी।
Roman Urdu (Maududi)Maryam ne kaha “ mere haan kaise ladka hoga jabke mujhey kisi bashar (Insaan) ne chua tak nahin hai aur main koi badhkaar aurat nahin hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney lagin bhala meray haan bacha kaisay ho sakta hai? Mujhay to kissi insan ka hath tak nahi laga aur na mein badkaar hun
Devnagri Urdu (Maududi)मरियम ने कहा "मेरे हां कैसे लड़का होगा जबके मुझे कोई बशर (इंसान) ने छुआ तक नहीं है और मैं कोई बढ़िया औरत नहीं हूं''
عَرَبِيقالَ كَذٰلِكِ قالَ رَبُّكِ هُوَ عَلَيَّ هَيِّنٌ ۖ وَلِنَجعَلَهُ آيَةً لِلنّاسِ وَرَحمَةً مِنّا ۚ وَكانَ أَمرًا مَقضِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐसा ही है, तेरे पालनहार ने कहा है कि यह मेरे लिए आसान है और ताकि हम इसे लोगों के लिए एक निशानी और अपनी ओर से रहमत बनाएँ और यह एक पूर्वनियत कार्य है।
Roman Urdu (Maududi)Farishte ne kaha “ aisa hi hoga, tera Rubb farmata hai ke aisa karna mere liye bahut aasaan hai aur hum yeh isliye karenge ke us ladke ko logon ke liye ek nishani banayein aur apni taraf se ek rehmat, aur yeh kaam hokar rehna hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney kaha baat to yehi hai lekin teray perwerdigar ka irshad hai kay woh mujh per boht hi aasan hai hum to ussay logon kay liye aik nishani bana den gay aur apni khaas rehmat yeh to aik tey shuda baat hai
Devnagri Urdu (Maududi)फरिश्ते ने कहा '' ऐसा ही होगा, तेरा रब फरमाता है के ऐसा करना मेरे लिए बहुत आसान है और हम ये सिर्फ इसलिए करेंगे क्योंकि हम लड़के को लोगों के लिए एक निशानी बनाएंगे और अपनी तरफ से एक रहमत, और ये काम होकर रहना है"
عَرَبِي۞ فَحَمَلَتهُ فَانتَبَذَت بِهِ مَكانًا قَصِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वह उस (लड़के) के साथ गर्भवती हो गई, तो उसे लेकर एक दूर स्थान पर अलग चली गई।
Roman Urdu (Maududi)Mayam ko us bacchey ka hamal reh gaya aur woh is hamal ko liye huey ek door ke maqaam par chali gayi
Roman Urdu (Junagarhi)Pus woh hamal say hogaeen aur issi waja say woh yaksoo hoker aik door ki jaga chali gaeen
Devnagri Urdu (Maududi)माया को हमारे बच्चे का हमाल रह गया और वो इस हमाल को लिए हुए एक दरवाजे के मकाम पर चली गई
عَرَبِيفَأَجاءَهَا المَخاضُ إِلىٰ جِذعِ النَّخلَةِ قالَت يا لَيتَني مِتُّ قَبلَ هٰذا وَكُنتُ نَسيًا مَنسِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर प्रसव पीड़ा उसे खजूर के एक तने के पास ले लाई, कहने लगी : ऐ काश! मैं इससे पहले मर जाती और भूली-बिसरी होती।
Roman Urdu (Maududi)Phir zachgi (delivery) ki takleef ne usey ek khajoor ke darakht ke nichey pahucha diya. Woh kehne lagi “kaash main issey pehle hi marr jati aur mera naam o nishan na rehta”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir dard-e-zeh ussay aik khajoor kay tanay kay neechay ley aaya boli kaash! Mein iss say pehlay hi marr gaee hoti aur logon ki yaad say bhi bhooli bisri hojati
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जचगी (डिलीवरी) की तकलीफ ने उसे एक खजूर के दरख्त के नीचे पहुंचा दिया। वो कहने लगी "काश मैं इसे पहले ही मर जाती है और मेरा नाम ओ निशान ना रहता है”
عَرَبِيفَناداها مِن تَحتِها أَلّا تَحزَني قَد جَعَلَ رَبُّكِ تَحتَكِ سَرِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तो उसने उसके नीचे से पुकारा कि शोकाकुल न हो, तेरे पालनहार ने तेरे नीचे एक नदी (प्रवाह) कर दी है।
Roman Urdu (Maududi)Farishtey ne paintey (at the foot of her bed) se usko pukar kar kaha “ghum na kar tere Rubb ne tere nichey ek chashma rawan kardiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Itney mein ussay neechay say hi awaz di kay aazardah khatir na ho teray rab ney teray paon talay aik chashma jari ker diya hai
Devnagri Urdu (Maududi)फरिश्ते ने पेंटी (उसके बिस्तर के नीचे) से उसको पुकार कर कहा "गुम ना कर तेरे रब ने तेरे आला एक चश्मा रावन करदिया है
عَرَبِيوَهُزّي إِلَيكِ بِجِذعِ النَّخلَةِ تُساقِط عَلَيكِ رُطَبًا جَنِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)और खजूर के तने को अपनी ओर हिला, वह तुझपर ताज़ा पकी हुई खजूरें गिराएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur tu zara is darakht ke tanay (trunk) ko hila, tere upar tarr-o-taaza khajoorein tapak padengi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss khajoor kay tanay ko apni taraf hila yeh teray samney tar-o-taza pakki khajooren gira dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और तू जरा इस दरख्त के तनय (ट्रंक) को हिला, तेरे ऊपर तार-ओ-ताजा खजूरें तपाक पडेंगी
عَرَبِيفَكُلي وَاشرَبي وَقَرّي عَينًا ۖ فَإِمّا تَرَيِنَّ مِنَ البَشَرِ أَحَدًا فَقولي إِنّي نَذَرتُ لِلرَّحمٰنِ صَومًا فَلَن أُكَلِّمَ اليَومَ إِنسِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)अतः खा और पी और आँख ठंडी कर। फिर यदि तू किसी आदमी को देखे, तो कह दे : मैंने तो रहमान के लिए रोज़े की मन्नत मानी है। अतः आज मैं कदापि किसी मनुष्य से बात नहीं करूँगी।
Roman Urdu (Maududi)Pas tu kha aur pee aur apni aankhein thandi kar phir agar koi aadmi tujhey nazar aaye to ussey kehde ke maine rehman ke liye roze ki nazar maani hai, isliye aaj main kisi se na bolungi”
Roman Urdu (Junagarhi)Abb chain say kha pi aur aankhen thandi rakh agar tujhay koi insan nazar parr jaye to keh dena kay mein ney Allah rehman kay naam ka roza maan rakha hai. Mein aaj kissi shaks say baat na keroon gi
Devnagri Urdu (Maududi)पास तू खा और पेशाब और अपनी आंखें ठंडी कर फिर अगर कोई आदमी तुझे नज़र आए तो उसे कहे के मैंने रहमान के लिए रोज़ की नज़र मानी है, इसलिए आज मैं किसी से ना बोलूंगी”
عَرَبِيفَأَتَت بِهِ قَومَها تَحمِلُهُ ۖ قالوا يا مَريَمُ لَقَد جِئتِ شَيئًا فَرِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वह उसे उठाए हुए अपनी जाति के पास ले आई, उन्होंने कहा : ऐ मरयम! तूने बहुत बुरा काम किया है।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh is bacchey ko liye huey apni qaum mein aayi. Log kehne lagey “aey Maryam, yeh tu nay bada paap kar daala
Roman Urdu (Junagarhi)Abb hazrat essa (alh-e-salam) ko liye huye woh apni qom kay pass aaeen. Sab kehney lagay marium tu ney bari buri harkat ki
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो इस बच्चे को लिए हुए अपनी क़ौम में आई. लोग कहने लगे "ऐ मरियम, ये तू बड़ा पाप कर डाला
عَرَبِييا أُختَ هارونَ ما كانَ أَبوكِ امرَأَ سَوءٍ وَما كانَت أُمُّكِ بَغِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हारून की बहन! न तेरा पिता कोई बुरा व्यक्ति था और न तेरी माँ कोई व्यभिचारिणी थी।
Roman Urdu (Maududi)Aey Haroon ki behan, na tera baap koi bura aadmi tha aur na teri Maa hi koi badhkar aurat thi”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey haroon ki behan! Na to tera baap bura aadmi tha aur na teri maa badkaar thi
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ हारून की बहन, ना तेरा बाप कोई बुरा आदमी था और ना तेरी माँ ही कोई बढ़कर औरत थी"
عَرَبِيفَأَشارَت إِلَيهِ ۖ قالوا كَيفَ نُكَلِّمُ مَن كانَ فِي المَهدِ صَبِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तो उसने उस (शिशु) की ओर संकेत किया। उन्होंने कहा : हम उससे कैसे बात करें, जो अभी तक गोद में बच्चा है?
Roman Urdu (Maududi)Maryam ne bacchey ki taraf ishara kardiya. Logon ne kaha “hum issey kya baat karein jo gehwarey (cradle) mein pada hua ek baccha hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)Marium ney apney bachay ki taraf ishara kiya. Sab kehnay lagay kay lo bhala hum goad kay bachay say baat kaisay keren
Devnagri Urdu (Maududi)मरियम ने बच्चे की तरफ इशारा कर दिया। लोगों ने कहा, "हम इसे क्या बात करें जो गेहवेरे (पालना) में पड़ा हुआ एक बच्चा है?"
عَرَبِيقالَ إِنّي عَبدُ اللَّهِ آتانِيَ الكِتابَ وَجَعَلَني نَبِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)वह (शिशु) बोल पड़ा : निःसंदेह मैं अल्लाह का बंदा हूँ। उसने मुझे पुस्तक (इन्जील) प्रदान की तथा मुझे नबी बनाया है।
Roman Urdu (Maududi)Baccha bol utha “ main Allah ka banda hoon usne mujhey kitab di , aur Nabi banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Bcha bol utha kay mein Allah Taalaa ka banda hun. Uss ney mujhay kitab ata farmaee aur mujhay apna payghumber banaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)बच्चा बोल उठा “मैं अल्लाह का बंदा हूं उसने मुझे किताब दी, और नबी बनाया
عَرَبِيوَجَعَلَني مُبارَكًا أَينَ ما كُنتُ وَأَوصاني بِالصَّلاةِ وَالزَّكاةِ ما دُمتُ حَيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मुझे बरकत वाला बनाया है, जहाँ भी मैं रहूँ और मुझे नमाज़ तथा ज़कात का आदेश दिया है, जब तक मैं जीवित रहूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur babarakat kiya jahan bhi main rahoon, aur namaz aur zakaat ki pabandi ka hukum diya jab tak main zinda rahoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss ney mujhay ba-barkat kiya hai jahan bhi mein hun uss ney mujhay namaz aur zakat ka hukum diya hai jab tak bhi mein zinda rahoon
Devnagri Urdu (Maududi)और बाबरकत किया जहां भी मैं रहूं, और नमाज और जकात की पाबंदियों का हुकुम दिया जब तक मैं जिंदा रहूं
عَرَبِيوَبَرًّا بِوالِدَتي وَلَم يَجعَلني جَبّارًا شَقِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आपनी माँ के साथ अच्छा व्यवहार करने वाला (बनाया) और उसने मुझे क्रूर तथा अभागा नहीं बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur apni walida ka haqq ada karne wala banaya, aur mujhko jabbar (oppressive) aur shaqqi (hard-hearted) nahin banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss ney mujhay apni walida ka khidmat guzaar banaya hai aur mujhay sirkash aur bad-bakht nahi kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और अपनी वालिदा का हक अदा करने वाला बनाया, और मुझको जब्बार (दमनकारी) और शक्की (कठोर दिल वाला) नहीं बनाया
عَرَبِيوَالسَّلامُ عَلَيَّ يَومَ وُلِدتُ وَيَومَ أَموتُ وَيَومَ أُبعَثُ حَيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा सलामती है मुझपर, जिस दिन मैं पैदा हुआ और जिस दिन मैं मरूँगा और जिस दिन मैं जीवित करके उठाया जाऊँगा।
Roman Urdu (Maududi)Salam hai mujhpar jabke main paida hua aur jabke main maroon(die) aur jabke zinda karke uthaya jaoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mujh per meri pedaeesh kay din aur meri maut kay din aur jiss din kay mein doobara zinda khara kiya jaon ga salam hi salam hai
Devnagri Urdu (Maududi)सलाम है मुझपर जबके मैं पैदा हुआ और जबके मैं मरूं (मर जाऊं) और जबके जिंदा करके उठा जाऊं”
عَرَبِيذٰلِكَ عيسَى ابنُ مَريَمَ ۚ قَولَ الحَقِّ الَّذي فيهِ يَمتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह है ईसा बिन मरयम। यही सत्य बात है, जिसमें वे संदेह कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hai Isa ibn Maryam aur yeh hai uske barey mein woh sacchi baat jismein log shakk kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hai sahih waiya essa bin marium (alh-e-salam) ka yehi hai woh haq baat jiss mein log shak-o-shuba mein mubtila hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये है ईसा इब्न मरियम और ये है उसके बारे में वो सच्ची बात जिसमें लोग शक्क कर रहे हैं
عَرَبِيما كانَ لِلَّهِ أَن يَتَّخِذَ مِن وَلَدٍ ۖ سُبحانَهُ ۚ إِذا قَضىٰ أَمرًا فَإِنَّما يَقولُ لَهُ كُن فَيَكونُ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह के योग्य नहीं है कि वह कोई संतान बनाए। वह पवित्र है! जब वह किसी कार्य का निर्णय करता है, तो उससे केवल यह कहता है कि "हो जा", तो वह हो जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ka yeh kaam nahin hai ke woh kisi ko beta banaye. Woh paak zaat hai, woh jab kisi baat ka faisla karta hai to kehta hai ke hoja, aur bas woh ho jati hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa kay liye aulad ka hona laeeq nahi woh to bilkul pak zaat hai woh to jab kissi kaam kay sir anjam denay ka irada kerta hai to ussay keh deta hai kay hoja woh ussi waqt ho jata hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह का ये काम नहीं है कि वो किसी को बेटा बने। वो पाक जात है, वो जब किसी बात का फैसला करता है तो कहता है कि होजा, और बस वो हो जाती है
عَرَبِيوَإِنَّ اللَّهَ رَبّي وَرَبُّكُم فَاعبُدوهُ ۚ هٰذا صِراطٌ مُستَقيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह अल्लाह ही मेरा पालनहार और तुम्हारा पालनहार है, अतः उसी की इबादत करो, यही सीधा रास्ता है।
Roman Urdu (Maududi)(Aur Isa ne kaha tha ke)”Allah mera Rubb bhi hai aur tumhara Rubb bhi, pas tum usi ki bandagi karo, yahi seedhi raah hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Mera aur tum sab ka perwerdigar Allah Taalaa hi hai. Tum sab ussi ki ibadat kero yehi seedhi raah hai
Devnagri Urdu (Maududi)(और ईसा ने कहा था के)"अल्लाह मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी, लेकिन तुम उसी की बंदगी करो, यही सीधी राह है"
عَرَبِيفَاختَلَفَ الأَحزابُ مِن بَينِهِم ۖ فَوَيلٌ لِلَّذينَ كَفَروا مِن مَشهَدِ يَومٍ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर इन गिरोहों ने आपस में मतभेद कर लिया, तो उन लोगों के लिए जिन्होंने कुफ़्र किया, एक बड़े दिन की उपस्थिति के कारण बड़ा विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Magar phir mukhtalif giroh baham ikhtilaf karne lagey. So jin logon ne kufr kiya unke liye woh waqt badi tabahi ka hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Phir yeh firqay aapas mein ikhtilaf kerney lagay pus kafiron kay liye “wail” hai aik baray (sakht) din ki hazri hai
Devnagri Urdu (Maududi)मगर फिर मुख्तलिफ गिरो ​​बहम इख्तिलाफ करने लगे। तो जिन लोगों ने कुफ्र किया उनके लिए वो वक्त बड़ी तबाही का होगा
عَرَبِيأَسمِع بِهِم وَأَبصِر يَومَ يَأتونَنا ۖ لٰكِنِ الظّالِمونَ اليَومَ في ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)वे कितने सुनने वाले होंगे और कितने देखने वाले होंगे! जिस दिन वे हमारे पास आएँगे, किंतु अत्याचारी लोग आज खुली गुमराही में हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jabke woh ek bada din dekhenge, jab woh hamare saamne hazir hongey us roz to unke kaan bhi khoob sun rahey hongey aur unki aankhein bhi khoob dekhti hongi, magar aaj yeh zalim khuli gumraahi mein mubtila hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya khoob dekhney sunnay walay hongay uss din jabkay humaray samney hazir hongay lekin aaj to yeh zalim log sareeh gumrahi mein paray huye hain
Devnagri Urdu (Maududi)जबके वो एक बड़ा दिन देखेंगे, जब वो हमारे सामने होंगे हम रोज तो उनके कान भी खूब सुन रहे होंगे और उनकी आंखें भी खूब देखती होंगी, मगर आज ये जालिम खुली गुमराही में मुब्तिला हैं
عَرَبِيوَأَنذِرهُم يَومَ الحَسرَةِ إِذ قُضِيَ الأَمرُ وَهُم في غَفلَةٍ وَهُم لا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) आप उन्हें पछतावे के दिन से डराएँ, जब हर काम का फैसला कर दिया जाएगा, और वे पूरी तरह से ग़फ़लत में हैं और वे ईमान नहीं लाते।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), is halat mein jabke yeh log gafil hain aur iman nahin la rahey hain, inhein us din se dara do jabke faisla kardiya jayega aur pachtawe ke siwa koi chara-e-kaar na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)To unhen uss ranj-o-afsos kay din ka darr suna dey jabkay kaam anjam ko phoncha diya jayega aur yeh log ghaflat aur bey emani mein hi reh jayengay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), इस हालत में जबके ये लोग गाफिल हैं और ईमान नहीं ला रहे हैं, उनमें हमें दिन से डर दो जबके फैसला करदिया जाएगा और पछतावे के सिवा कोई चारा-ए-कार ना होगा
عَرَبِيإِنّا نَحنُ نَرِثُ الأَرضَ وَمَن عَلَيها وَإِلَينا يُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम ही धरती के उत्तराधिकारी होंगे और उनके भी जो उसपर हैं और वे हमारी ही ओर लौटाए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir-e-kaar hum hi zameen aur uski sari cheezon ke waris hongey aur sab hamari taraf hi paltaye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Khud zamin kay aur tamam zamin walon kay waris hum hi hongay aur sab log humari hi taraf lota ker layen jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर-ए-कार हम हाय ज़मीन और उसकी सारी चीज़ों के वारिस होंगे और सब हमारी तरफ ही पलटेंगे
عَرَبِيوَاذكُر فِي الكِتابِ إِبراهيمَ ۚ إِنَّهُ كانَ صِدّيقًا نَبِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इस किताब में इबराहीम की चर्चा करें, निःसंदेह वह बहुत सच्चा (और) नबी था।
Roman Urdu (Maududi)Aur is kitaab mein Ibrahim ka qissa bayan karo, beshak woh ek raast-baaz Insaan aur ek Nabi tha
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kitab mein ibrahim (alh-e-salam) ka qissa biyan ker be-shak woh baray sachaee walay payghumber thay
Devnagri Urdu (Maududi)और इस किताब में इब्राहीम का क़िस्सा बयान करो, बेशक वो एक रस्त-बाज़ इंसान और एक नबी था
عَرَبِيإِذ قالَ لِأَبيهِ يا أَبَتِ لِمَ تَعبُدُ ما لا يَسمَعُ وَلا يُبصِرُ وَلا يُغني عَنكَ شَيئًا
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हिन्दी (Al-Omari)जब उसने अपने पिता से कहा : ऐ मेरे पिता! आप उस चीज़ को क्यों पूजते हैं, जो न सुनती है और न देखती है और न आपके किसी काम आती है?
Roman Urdu (Maududi)(Inhein zara us mauqe ki yaad dilao) jabke usne apne baap se kaha ke “Abbajaan, aap kyun un cheezon ki ibadat karte hain jo na sunti hain na dekhti hain aur na aap ka koi kaam bana sakti hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay unhon ney apney baap say kaha kay abba jaan! Aap inn ki pooja paat kiyon ker rahey hain jo na sunen na dekhen? Na aap ko kuch bhi faeeda phoncha saken
Devnagri Urdu (Maududi)(इन्हें ज़रा उस मौके की याद दिलाओ) जबके उसने अपने बाप से कह के “अब्बाजान, आप क्यों उन चीज़ों की इबादत करते हैं जो ना सुनती हैं ना देखती हैं और ना आप का कोई काम बना सकती हैं
عَرَبِييا أَبَتِ إِنّي قَد جاءَني مِنَ العِلمِ ما لَم يَأتِكَ فَاتَّبِعني أَهدِكَ صِراطًا سَوِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे पिता! निःसंदेह मेरे पास वह ज्ञान आया है, जो आपके पास नहीं आया, अतः आप मेरा अनुसरण करें, मैं आपको सीधा मार्ग दिखाऊँगा।
Roman Urdu (Maududi)Abbajaan, mere paas ek aisa ilam aaya hai jo aapke paas nahin aaya, aap mere peechey chalein , main aapko seedha raasta bataunga
Roman Urdu (Junagarhi)Meray meharban maa baap! Aap dekhiye meray pass woh ilm aaya hai jo aap kay pass aaya hi nahi to aap meri hi manen mein bilkul seedhi raah ki taraf aap ki rehbari keroon ga
Devnagri Urdu (Maududi)अब्बाजान, मेरे पास एक ऐसा इलम आया है जो आपके पास नहीं आया, आप मेरे पीछे चलें, मैं आपको सीधा रास्ता बताऊंगा
عَرَبِييا أَبَتِ لا تَعبُدِ الشَّيطانَ ۖ إِنَّ الشَّيطانَ كانَ لِلرَّحمٰنِ عَصِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे पिता! शैतान की पूजा न करें। निःसंदेह शैतान हमेशा से रहमान (परम दयालु अल्लाह) का अवज्ञाकारी है।
Roman Urdu (Maududi)Abbajaan!aap shaytan ki bandagi na karein, shaytan to rehman ka nafarman hai
Roman Urdu (Junagarhi)Meray abba jaan aap shetan ki parastish say baaz aajayen shetan to reham-o-karam walay Allah Taalaa ka bara hi na-farman hai
Devnagri Urdu (Maududi)अब्बाजान!आप शैतान की बंदगी ना करें, शैतान तो रहमान का नफरमान है
عَرَبِييا أَبَتِ إِنّي أَخافُ أَن يَمَسَّكَ عَذابٌ مِنَ الرَّحمٰنِ فَتَكونَ لِلشَّيطانِ وَلِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे पिता! वास्तव में, मुझे डर है कि आपको रहमान (परम दयालु) की ओर से कोई यातना आ लगे, फिर आप शैतान के मित्र हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Abbajaan, mujhey darr hai ke kahin aap rehman ke azaab mein mubtila na ho jayein aur shaytan ke saathi ban kar rahein”
Roman Urdu (Junagarhi)Abba jaan! Mujhay khof laga hua hai kay kahin aap per koi azab-e-elahee na aa paray kay aap shetan kay sathi bann jayen
Devnagri Urdu (Maududi)अब्बाजान, मुझे डर है के कहीं आप रहमान के अज़ाब में मुब्तिला न हो जाएं और शैतान के साथी बन कर रहें”
عَرَبِيقالَ أَراغِبٌ أَنتَ عَن آلِهَتي يا إِبراهيمُ ۖ لَئِن لَم تَنتَهِ لَأَرجُمَنَّكَ ۖ وَاهجُرني مَلِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : क्या तू हमारे पूज्यों से विमुख हो रहा है, ऐ इबराहीम!? निश्चय यदि तू बाज़ न आया, तो मैं अवश्य ही तुझे संगसार कर दूँगा और तू लंबे समय के लिए मुझसे अलग हो जा।
Roman Urdu (Maududi)Baap ne kaha “Ibrahim, kya tu mere maboodon se phir gaya hai? Agar tu baaz na aaya to main tujhey sangsar(stone you to death) kardunga. Bas tu hamesha ke liye mujhse alag ho jaa”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney jawab diya kay aey ibrahim! Kiya tu humaray maboodon say roo gardani ker raha hai. Sunn agar tu baaz na aaya to mein tujhay pathron say maar dalon ga jaa aik muddat daraz tak mujh say alag reh
Devnagri Urdu (Maududi)बाप ने कहा “इब्राहिम, क्या तू मेरे मबूदों से फिर गया है? अगर तू बाज़ न आया तो मैं तुझे संगसार (पत्थर मार कर मार डालूँगा) कर दूँगा। बस तू हमेशा के लिए मुझसे अलग हो जा”
عَرَبِيقالَ سَلامٌ عَلَيكَ ۖ سَأَستَغفِرُ لَكَ رَبّي ۖ إِنَّهُ كانَ بي حَفِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)(इबराहीम ने) कहा : आपपर सलाम हो! मैं अपने पालनहार से आपके लिए अवश्य क्षमा की प्रार्थना करूँगा। निःसंदेह वह हमेशा से मुझपर बहुत दयालु है।
Roman Urdu (Maududi)Ibrahim ne kaha “Salaam hai aapko, main apne Rubb se dua karoonga ke aapko maaf karde. Mera Rubb mujhpar bada hi meharban hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kaha acha tum per salam ho mein to apney perwerdigar say tumhari bakhsish ki dua kerta rahon ga woh mujh per hadd darja meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)इब्राहिम ने कहा “सलाम है आपको, मैं अपने रब से दुआ करूंगा के आपको माफ़ करदे। मेरा रब्ब मुझपर बड़ा ही मेहरबान है
عَرَبِيوَأَعتَزِلُكُم وَما تَدعونَ مِن دونِ اللَّهِ وَأَدعو رَبّي عَسىٰ أَلّا أَكونَ بِدُعاءِ رَبّي شَقِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मैं आप लोगों से और उन चीज़ों से जिन्हें आप लोग अल्लाह के सिवा पुकारते हैं, किनारा करता हूँ और अपने पालनहार को पुकारता हूँ। आशा है कि मैं अपने रब को पुकारकर असफल नहीं रहूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Main aap logon ko bhi chodhta hoon aur un hastiyon ko bhi jinhein aap log khuda ko chodh kar pukara karte hain. Main to apne Rubb hi ko pukarunga , umeed hai ke main apne Rubb ko pukar ke na-murad na rahunga”
Roman Urdu (Junagarhi)Mein to tumhen bhi aur jin jin ko tum Allah Taalaa kay siwa pukartay ho unhen bhi sab ko chor raha hun. Sirf apney perwerdigar ko pukarta rahoon ga mujhay yaqeen hai kay mein apney perwerdigar say dua maang ker mehroom na rahoon ga
Devnagri Urdu (Maududi)मैं आप लोगों को भी चोदता हूं और उन हस्तियों को भी जिन्हे आप लोग खुदा को चोद कर पुकारते हैं। मैं तो अपने रुब ही को पुकारूंगा, उम्मीद है कि मैं अपने रुब को पुकार के ना-मुराद ना रहूंगा”
عَرَبِيفَلَمَّا اعتَزَلَهُم وَما يَعبُدونَ مِن دونِ اللَّهِ وَهَبنا لَهُ إِسحاقَ وَيَعقوبَ ۖ وَكُلًّا جَعَلنا نَبِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वह उनसे और उन चीज़ों से जिनकी वे अल्लाह के सिवा पूजा करते थे, अलग हो गया, तो हमने उसे इसहाक़ और याक़ूब प्रदान किए और हर एक को हमने नबी बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Pas jab woh un logon se aur unke maboodane gair Allah se juda ho gaya to humne usko Ishaaq aur Yakub jaisi aulad di aur har ek ko Nabi banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Jab ibrahim (alh-e-salam) unn sab ko aur Allah kay siwa unn kay sab maboodon ko chor chukay to hum ney unhen ishaq (alh-e-salam) –o- yaqoob (alh-e-salam) ata farmaye aur dono ko nabi bana diya
Devnagri Urdu (Maududi)पास जब वो उन लोगों से और उनके माबूदाने गैर अल्लाह से जुदा हो गया तो हमने उसको इशाक और याकूब जैसी औलाद दी और हर एक को नबी बनाया
عَرَبِيوَوَهَبنا لَهُم مِن رَحمَتِنا وَجَعَلنا لَهُم لِسانَ صِدقٍ عَلِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उन्हें अपनी रहमत से हिस्सा दिया और उन्हें बहुत ऊँची, सच्ची ख्याति प्रदान की।
Roman Urdu (Maududi)Aur unko apni rehmat se nawaza aur unko sacchi naamwari ata ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn sab ko hum ney apni boht si rehmaten ata farmaeen aur hum ney inn kay zikar-e-jamil ko buland darjay ka ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)और उनको अपनी रहमत से नवाजा और उनको सच्ची नामवरी अता की
عَرَبِيوَاذكُر فِي الكِتابِ موسىٰ ۚ إِنَّهُ كانَ مُخلَصًا وَكانَ رَسولًا نَبِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)और आप इस पुस्तक में मूसा की चर्चा करें। निश्चय वह चुना हुआ था तथा रसूल एवं नबी था।
Roman Urdu (Maududi)Aur zikr karo is kitaab mein Moosa ka, woh ek cheeda (chosen) shaks tha aur Rasool Nabi tha
Roman Urdu (Junagarhi)Iss quran mein musa (alh-e-salam) ka zikar bhi ker jo chuna hua rasool aur nabi tha
Devnagri Urdu (Maududi)और जिक्र करो इस किताब में मूसा का, वो एक चीदा (चुना हुआ) शक्स था और रसूल नबी था
عَرَبِيوَنادَيناهُ مِن جانِبِ الطّورِ الأَيمَنِ وَقَرَّبناهُ نَجِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसे पहाड़ की दाहिनी ओर से पुकारा तथा सरगोशी करते हुए उसे समीप कर लिया।
Roman Urdu (Maududi)Humne usko Tur ke dahini(right) janib se pukara aur raaz ki guftagu se usko takarrub (honour) ata kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney ussay toor kay dayen janib say nida ki aur raaz goee kertay huye ussay qareeb ker liya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उसको तूर के दहिनी(दाएं) जानिब से पुकारा और राज की गुफ्तगु से उसको तकरूब (सम्मान) अता किया
عَرَبِيوَوَهَبنا لَهُ مِن رَحمَتِنا أَخاهُ هارونَ نَبِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसे अपनी दया से उसके भाई हारून को नबी बनाकर प्रदान किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur apni mehrabani se uske bhai Haroon ko Nabi bana kar usey (madadgaar ke taur par) diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apni khas meharbani say uss kay bhai ko nabi bana ker ata farmaya
Devnagri Urdu (Maududi)और अपनी मेहरबानी से उसके भाई हारून को नबी बना कर उसे (मददगार के तौर पर) दिया
عَرَبِيوَاذكُر فِي الكِتابِ إِسماعيلَ ۚ إِنَّهُ كانَ صادِقَ الوَعدِ وَكانَ رَسولًا نَبِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इस किताब में इसमाईल की चर्चा करें। निश्चय वह वादे का सच्चा तथा रसूल एवं नबी था।
Roman Urdu (Maududi)Aur is kitaab mein Ismail ka zir karo, woh wadey ka saccha tha aur Rasool Nabi tha
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kitab mein ismail (alh-e-salam) ka waqiya bhi biyan ker woh bara hi waday ka sacha tha aur tha bhi rasool aur nabi
Devnagri Urdu (Maududi)और इस किताब में इस्माइल का जिक्र करो, वो वादे का सच्चा था और रसूल नबी था
عَرَبِيوَكانَ يَأمُرُ أَهلَهُ بِالصَّلاةِ وَالزَّكاةِ وَكانَ عِندَ رَبِّهِ مَرضِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)और वह अपने घरवालों को नमाज़ और ज़कात का आदेश देता था और वह अपने पालनहार के निकट पसंदीदा था।
Roman Urdu (Maududi)Woh apne ghar walon ko namaz aur zakat ka hukum deta tha aur apne Rubb ke nazdeek ek pasandeeda Insaan tha
Roman Urdu (Junagarhi)Woh apney ghar walon ko barabar namaz aur zakat ka hukum deta tha aur tha bhi apney perwerdigar ki baargaah mein pasandeedah aur maqbool
Devnagri Urdu (Maududi)वो अपने घर वालों को नमाज और जकात का हुकुम डी एटा था और अपने रब के नजदीक एक पसंददीदा इंसान था
عَرَبِيوَاذكُر فِي الكِتابِ إِدريسَ ۚ إِنَّهُ كانَ صِدّيقًا نَبِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इस किताब में इदरीस की चर्चा करें। निःसंदेह वह बड़ा सत्यवादी और नबी था।
Roman Urdu (Maududi)Aur is kitaab mein Idris ka zikr karo, woh ek raast-baaz (righteous) Insaan aur ek Nabi tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss kitab mein idris (alh-e-salam) ka bhi zikar ker woh bhi nek kirdaar payghumber tha
Devnagri Urdu (Maududi)और इस किताब में इदरीस का जिक्र करो, वो एक रस्त-बाज़ (नेक) इंसान और एक नबी था
عَرَبِيوَرَفَعناهُ مَكانًا عَلِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उसे बहुत ऊँचे स्थान पर उठाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur usey humne buland muqaam par uthaya tha
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney ussay buland muqam per utha liya
Devnagri Urdu (Maududi)और उसे हमने बुलंद मुकाम पर उठाया था
☉ Sajda
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ أَنعَمَ اللَّهُ عَلَيهِم مِنَ النَّبِيّينَ مِن ذُرِّيَّةِ آدَمَ وَمِمَّن حَمَلنا مَعَ نوحٍ وَمِن ذُرِّيَّةِ إِبراهيمَ وَإِسرائيلَ وَمِمَّن هَدَينا وَاجتَبَينا ۚ إِذا تُتلىٰ عَلَيهِم آياتُ الرَّحمٰنِ خَرّوا سُجَّدًا وَبُكِيًّا ۩
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हिन्दी (Al-Omari)ये वे लोग हैं, जिनपर अल्लाह ने अनुग्रह किया नबियों में से, आदम की संतान में से तथा उन लोगों में से जिन्हें हमने नूह़ के साथ सवार किया तथा इबराहीम और इसराईल की संतान में से तथा उन लोगों में से जिन्हें हमने मार्गदर्शन प्रदान किया और चुन लिया। जब उनपर रहमान की आयतें पढ़ी जाती थीं, तो वे सजदा करते और रोते हुए गिर जाते थे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh paigambar hain jinpar Allah ne inaam farmaya Adam ki aulad mein se, aur un logon ki nasal se jinhein humne Nooh ke saath kashti par sawaar kiya tha, aur Ibrahim ki nasal se aur Israel ki nasal se aur yeh un logon mein se thay jinko humne hidayat bakshi aur barguzida kiya.Inka haal yeh tha ke jab rehman ki aayat unko sunayi jati to rotey huey sajde mein gir jatey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi woh anbiya hain jin per Allah Taalaa ney fazal-o-karam kiya jo aulad-e-adam mein say hain aur unn logon ki nasal say hain jinhen hum ney nooh (alh-e-salam) kay sath kashti mein charha liya tha aur aulad ibrahim-o-yaqoob say aur humari taraf say raaha yafta aur humaray pasandeedah logon mein say. Inn kay samney jab Allah rehman ki aayaton ki tilawat ki jati thi yeh sajda kertay aur rotay girgiratay gir partay thay
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो पैगम्बर हैं जिनपर अल्लाह ने इनाम फरमाया आदम की औलाद में से, और उन लोगों की नाक से जिन्होंने हमने नूह के साथ कश्ती पर सवार किया था, और इब्राहिम की नाक से और इस्राइल की नाक से और ये उन लोगों की नाक से थे जिन्हें हमने हिदायत बख्शी और बरगुजिदा किया। इनका हाल ये था के जब रहमान की आयत उनको सुनाई जाती है तो रोते हुए सजदे में गिर जाते थे
عَرَبِي۞ فَخَلَفَ مِن بَعدِهِم خَلفٌ أَضاعُوا الصَّلاةَ وَاتَّبَعُوا الشَّهَواتِ ۖ فَسَوفَ يَلقَونَ غَيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उनके बाद उनके स्थान पर ऐसे अयोग्य उत्तराधिकारी आए, जिन्होंने नमाज़ की उपेक्षा की और अपनी इच्छाओं का पालन किया, तो वे जल्द ही पथभ्रष्टता का सामना करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir inke baad woh nakhalf (degenerate) log inke jaansaheen (sucessors) huey jinhon ne namaz ko zaya kiya aur khwahishat e nafs ki pairwi ki. Pas qareeb hai ke woh gumraahi ke anjaam se do-char hon
Roman Urdu (Junagarhi)Phir inn kay baad aisay na khalaf peda huye kay unhon ney namaz zaya ker di aur nafsani khuwishon kay peechay parr gaye so unn ka nuksan unn kay aagay aayega
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इनके बाद वो नख़लफ़ (पतित) लोग इनके जानशाहीन (उत्तराधिकारी) हुए जिन्होन ने नमाज़ को ज़या किया और ख्वाहिशात ए नफ़्स की जोड़ी की। पास करीब है के वो गुमराही के अंजाम से दो-चार होन
عَرَبِيإِلّا مَن تابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ صالِحًا فَأُولٰئِكَ يَدخُلونَ الجَنَّةَ وَلا يُظلَمونَ شَيئًا
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु जिसने तौबा कर ली और ईमान लाया और अच्छे कर्म किए, तो ये लोग जन्नत में प्रवेश करेंगे और उनपर कुछ भी अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jo tawba karlein aur iman le aayein aur neik amali ikhtiyar karlein woh jannat mein dakhil hongey aur unki zarra barabar haqq talafi na hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-juz unn kay jo toba ker len aur eman layen aur nek amal keren. Aisay log jannat mein jayen gay aur unn ki zara si bhi haq talfi na ki jayegi
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जो तौबा कार्लें और ईमान ले आएं और नेक अमली इख्तियार कार्लें वो जन्नत में दाखिल होंगे और उनकी ज़रा बराबर हक़ तलाफ़ी न होगी
عَرَبِيجَنّاتِ عَدنٍ الَّتي وَعَدَ الرَّحمٰنُ عِبادَهُ بِالغَيبِ ۚ إِنَّهُ كانَ وَعدُهُ مَأتِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)सदा निवास के बाग़ो में, जिनका रहमान ने अपने बंदों से (उनके) बिन देखे वादा किया है। निःसंदेह उसका वादा पूरा होकर रहने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Inke liye hamesha rehne wali jannatein hain jinka rehman ne apne bandon se dar-purda wada kar rakkha hai aur yaqeenan yeh wada poora hokar rehna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Humeshgi wali jannaton mein jin ka ghaeebana wada Allah meharban ney apney bandon say kiya hai. Be-shak uss ka wada poora honey wala hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनके लिए हमेशा रहने वाली जन्नतें हैं जिनका रहमान ने अपने बंदों से डर-पुर्दा वादा कर रखा है और यकीनन ये वादा पूरा होकर रहना है
عَرَبِيلا يَسمَعونَ فيها لَغوًا إِلّا سَلامًا ۖ وَلَهُم رِزقُهُم فيها بُكرَةً وَعَشِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)वे उसमें 'सलाम' के सिवा कोई व्यर्थ बात नहीं सुनेंगे, तथा उनके लिए उसमें सुबह और शाम उनकी जीविका होगी।
Roman Urdu (Maududi)Wahan woh koi behuda baat na sunenge , jo kuch bhi sunenge theek hi sunenge aur unka rizq unhein paiham subh-o-shaam milta rahega
Roman Urdu (Junagarhi)Woh log wahan koi laghaw baat na sunen gay sirf salam hi salam sunen gay unn kay liye wahan subha shaam unn ka rizq hoga
Devnagri Urdu (Maududi)वहां वो कोई बेहुदा बात ना सुनेंगे, जो कुछ भी सुनेंगे ठीक ही सुनेंगे और उनका रिज्क उन्हें पैहम सुबह-ओ-शाम मिलता रहेगा
عَرَبِيتِلكَ الجَنَّةُ الَّتي نورِثُ مِن عِبادِنا مَن كانَ تَقِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)यह है वह जन्नत, जिसका वारिस हम अपने बंदों में से उसे बनाते हैं, जो परहेज़गार हो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hai woh jannat jiska waris hum apne bandon mein se usko banayenge jo parheizgaar raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hai woh jannat jiss ka waris hum apney bandon mein say unhen banatay hain jo muttaqi hon
Devnagri Urdu (Maududi)ये है वो जन्नत जिसका वारिस हम अपने बंदों में से उसको बनायेंगे जो परहेजगार रहा है
عَرَبِيوَما نَتَنَزَّلُ إِلّا بِأَمرِ رَبِّكَ ۖ لَهُ ما بَينَ أَيدينا وَما خَلفَنا وَما بَينَ ذٰلِكَ ۚ وَما كانَ رَبُّكَ نَسِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)और हम नहीं उतरते, परंतु आपके पालनहार के आदेश से, उसी का है जो हमारे आगे है तथा जो हमारे पीछे है और जो इसके बीच है और आपका पालनहार कभी भूलने वाला नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), hum tumhare Rubb ke hukum ke bagair nahin utra karte, jo kuch hamare aage hai aur jo kuch peechey hai aur jo kuch iske darmiyan mein hai har cheez ka maalik wahi hai aur tumhara Rubb bhoolne wala nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum baghair teray rab kay hukum kay utar nahi saktay humaray aagay peechay aur inn kay darmiyan ki kul cheezen ussi ki milkiyat mein hain tera perwerdigar bhoolney wala nahi
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), हम तुम्हारे रब के हुकुम के बिना नहीं उतरते, जो कुछ हमारे आगे है और जो कुछ पीछे है और जो कुछ इसके दरमियान में है हर चीज का मालिक वही है और तुम्हारा रुब भूलने वाला नहीं है
عَرَبِيرَبُّ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَما بَينَهُما فَاعبُدهُ وَاصطَبِر لِعِبادَتِهِ ۚ هَل تَعلَمُ لَهُ سَمِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)जो आकाशों और धरती का और उन दोनों के बीच की चीज़ों का पालनहार है। अतः उसी की इबादत करें तथा उसकी इबादत पर पर दृढ़ रहें। क्या आप उसका समकक्ष किसी को जानते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Woh Rubb hai aasmano ka aur zameen ka aur un saari cheezon ka jo aasman o zameen ke darmiyan hain, pas tum uski bandagi karo aur usi ki bangadi par sabit qadam raho. Kya hai koi hasti tumhare ilm mein iski hum paya (equal in rank to him)
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmano ka zamin ka aur jo kuch inn kay darmiyan hai sab ka rab wohi hai tu ussi ki bandagi ker aur uss ki ibadat per jamm ja. Kiya teray ilm mein uss ka hum naam hum palla koi aur bhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो रुब है आसमान का और ज़मीन का और उन सारी चीज़ों का जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान हैं, लेकिन तुम उसकी बंदगी करो और उसकी बंगदी पर साबित क़दम रहो। क्या है कोई हस्ती तुम्हारे इल्म में इसकी हम पाया (रैंक में उसके बराबर)
عَرَبِيوَيَقولُ الإِنسانُ أَإِذا ما مِتُّ لَسَوفَ أُخرَجُ حَيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मनुष्य कहता है : जब मैं मर गया, तो क्या मैं सचमुच फिर जीवित करके निकाला जाऊँगा?
Roman Urdu (Maududi)Insaan kehta hai kya waqai jab main mar chukunga to phir zinda karke nikal laya jaunga
Roman Urdu (Junagarhi)Insan kehta hai kay jab mein marr jaonga to kiya phir zinda ker kay nikala jaonga
Devnagri Urdu (Maududi)इंसान कहता है क्या वाकाई जब मैं मर जाऊंगा तो फिर जिंदा करके निकल लाया जाऊंगा
عَرَبِيأَوَلا يَذكُرُ الإِنسانُ أَنّا خَلَقناهُ مِن قَبلُ وَلَم يَكُ شَيئًا
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हिन्दी (Al-Omari)और क्या मनुष्य याद नहीं करता कि निःसंदेह हम ही ने उसे इससे पूर्व पैदा किया, जबकि वह कुछ भी नहीं था?
Roman Urdu (Maududi)Kya Insaan ko yaad nahin aata ke hum pehle usko paida kar chuke hain jabke woh kuch bhi na tha
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh insan itna bhi yaad nahi rakhta kay hum ney ussay iss say pehlay peda kiya halankay woh kuch bhi na tha
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इंसान को याद नहीं आता के हम पहले उसको पैदा कर चुके हैं जबके वो कुछ भी ना था
عَرَبِيفَوَرَبِّكَ لَنَحشُرَنَّهُم وَالشَّياطينَ ثُمَّ لَنُحضِرَنَّهُم حَولَ جَهَنَّمَ جِثِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तो क़सम है आपके पालनहार की! निःसंदेह हम उन्हें और शैतानों को ज़रूर इकट्ठा करेंगे, फिर निःसंदेह हम उन्हें जहन्नम के आसपास घुटनों के बल गिरे हुए ज़रूर उपस्थित करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Tere Rubb ki kasam , hum zaroor un sab ko aur unke saath shayateen ko bhi gher layenge, phir jahannum ke gird laa kar inhein ghutno (knees) ke bal gira denge
Roman Urdu (Junagarhi)Teray perwerdigar ki qasam! Hum unhen aur shetano ko jama ker kay zaroor zaroor jahannum kay ird gird ghutno kay bal giray huye hazir ker den gay
Devnagri Urdu (Maududi)तेरे रब की कसम, हम जरूर उन सब को और उनके साथ शयातीन को भी घेर लेंगे, फिर जहन्नुम के गिर्द ला कर इन्हें घुटनों (घुटनों) के बल गिरा देंगे
عَرَبِيثُمَّ لَنَنزِعَنَّ مِن كُلِّ شيعَةٍ أَيُّهُم أَشَدُّ عَلَى الرَّحمٰنِ عِتِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर निश्चय ही हम प्रत्येक गिरोह में से उस व्यक्ति को अवश्य निकालेंगे, जो रहमान (परम दयावान) के प्रति सबसे बढ़कर सरकश है।
Roman Urdu (Maududi)Phir har giroh mein se har us shaks ko chaant lenge (pick out) jo rehman ke muqable mein zyada sarkash bana hua tha
Roman Urdu (Junagarhi)Hum phir her her giroh say unhen alag nikal khara keren gay jo Allah rehman say boht akray akray phirtay thay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हर गिरोह में से हर उस शक्स को चांट लेंगे (बाहर निकालो) जो रहमान के मुकाबले में ज्यादा सरकश बना हुआ था
عَرَبِيثُمَّ لَنَحنُ أَعلَمُ بِالَّذينَ هُم أَولىٰ بِها صِلِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर, निश्चित रूप से, हम उन लोगों को अधिक जानने वाले हैं, जो इसमें झोंके जाने के अधिक योग्य हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir hum yeh jaante hain ke in mein se kaun sabse badhkar jahannum mein jhonke janey ka mustahiq hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum unhen bhi khoob jantay hain jo jahannum kay dakhlay kay ziyada sazawaar hain
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हम ये जानते हैं के में से कौन सबसे बढ़कर जहन्नुम में झोंके जाने का मुस्तहिक है
عَرَبِيوَإِن مِنكُم إِلّا وارِدُها ۚ كانَ عَلىٰ رَبِّكَ حَتمًا مَقضِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)और तुममें से जो भी है, उस पर से गुज़रने वाला है। यह एक पूर्वनिर्धारित निर्णय है जिसे पूरा करना आपके पालनहार के ज़िम्मे है।
Roman Urdu (Maududi)Tum mein se koi nahin hai jo jahannum par warid na ho,yeh to ek tai shuda baat hai jisey pura karna tere Rubb ka zimma hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum say her aik wahan zaroor warid honey wala hai yeh teray perwerdigar kay zimmay qataee faisal shuda amar hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम में से कोई नहीं है जो जहन्नुम पर वारिद ना हो, ये तो एक ताई शुदा बात है जिसे पूरा करना तेरे रब का ज़िम्मा है
عَرَبِيثُمَّ نُنَجِّي الَّذينَ اتَّقَوا وَنَذَرُ الظّالِمينَ فيها جِثِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हम डरने वालों को बचा लेंगे तथा अत्याचारियों को उसमें मुँह के बल गिरे हुए छोड़ देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir hum un logon ko bacha lenge jo (duniya mein ) muttaqi thay aur zalimon ko usi mein gira hua chodh denge
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum perhezgaron ko to bacha len gay aur na-farmano ko ussi mein ghutno kay bal gira hua chor den gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हम उन लोगों को बचा लेंगे जो (दुनिया में) मुत्तक़ी था और जालिमों को उसी में गिरा हुआ छोड़ देंगे
عَرَبِيوَإِذا تُتلىٰ عَلَيهِم آياتُنا بَيِّناتٍ قالَ الَّذينَ كَفَروا لِلَّذينَ آمَنوا أَيُّ الفَريقَينِ خَيرٌ مَقامًا وَأَحسَنُ نَدِيًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब उनके समक्ष हमारी स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती हैं, तो काफ़िर लोग ईमान लाने वालों से कहते हैं कि दोनों गिरोहों में से किसकी स्थिति बेहतर और सभा की दृष्टि से कौन अधिक अच्छा है?
Roman Urdu (Maududi)In logon ko jab hamari khuli khuli aayat sunayi jati hain to inkar karne waley iman laney walon se kehte hain “batao, hum dono girohon mein se kaun behtar halat mein hai aur kiski majlisein zyada shandaar hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab inn kay samney humari roshan aayaten tilwat ki jati hain to kafir musalamano say kehtay hain batao hum tum dono jamaton mein say kiss ka martaba ziyada hai? Aur kiss ki majlis shandaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों को जब हमारी खुली खुली आयत सुनाई जाती है तो इंकार करने वाले ईमान लाने वालों से कहते हैं “बताओ, हम दोनो गिरोहोन में से कौन बेहतर हालात में है और किसकी मजलिसें ज्यादा शानदार है?”
عَرَبِيوَكَم أَهلَكنا قَبلَهُم مِن قَرنٍ هُم أَحسَنُ أَثاثًا وَرِئيًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हम इनसे पहले कितनी ही जातियों को नष्ट कर चुके हैं, जो जीवन-साधन और शक्ल-सूरत (वेशभूषा) में कहीं अधिक अच्छी थीं।
Roman Urdu (Maududi)Halanke insey pehle hum kitni hi aisi qaumo ko halaak kar chuke hain jo insey zyada sar-o-samaan rakhti thin aur zahiri shaan o shaukat mein insey badi hui thi
Roman Urdu (Junagarhi)Hum to inn say pehlay boht si jamaton ko ghaarat ker chukay hain jo saaz-o-saman aur naam-o-numood mein inn say barh charh ker thin
Devnagri Urdu (Maududi)हालंके इनसे पहले हम कितनी ही ऐसी कौमो को हलाक कर चुके हैं जो इनसे ज्यादा सर-ओ-समान रखती पतली और जाहिर शान ओ शौकत में इनसे बड़ी हुई थी
عَرَبِيقُل مَن كانَ فِي الضَّلالَةِ فَليَمدُد لَهُ الرَّحمٰنُ مَدًّا ۚ حَتّىٰ إِذا رَأَوا ما يوعَدونَ إِمَّا العَذابَ وَإِمَّا السّاعَةَ فَسَيَعلَمونَ مَن هُوَ شَرٌّ مَكانًا وَأَضعَفُ جُندًا
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हिन्दी (Al-Omari)(हे नबी!) आप कह दें कि जो व्यक्ति गुमराही में पड़ा हुआ है, तो रहमान उसे एक अवधि तक मोहलत देता है। यहाँ तक कि जब वे उस चीज़ को देख लेंगे जिसका उनसे वादा किया जाता है; या तो यातना और या क़ियामत, तो वे अवश्य जान लेंगे कि कौन स्थिति में अधिक बुरा और जत्थे की दृष्टि से अधिक कमज़ोर है।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho, jo shaks gumraahi mein mubtila hota hai usey Rehman dheel diya karta hai, yahan tak ke jab aisey log woh cheez dekh letay hain jiska unse wada kiya gaya hai khwa woh azaab e ilahi ho ya qayamat ki ghadi tab unhein maloom ho jata hai ke kiska haal kharab hai aur kiska jattha (party) kamzor
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! Jo gumrahi mein hota Allah rehman uss ko khoob lambi mohlat deta hai yehan tak kay woh unn cheezon kay dekh len jin ka wada kiye jatay hain yaani azab ya qayamat ko uss waqt unn ko sahih tor per maloom ho jayega kay kaun buray martabay wala aur kiss ka jutha kamzor hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, जो शक्स गुमराही में मुब्तिला होता है उसे रहमान ढील दिया करता है, यहां तक ​​के जब ऐसे लोग वो चीज देख लेते हैं जिसका उनसे वादा किया गया है ख्वा वो अज़ाब ए इलाही हो या कयामत की घड़ी तब उन्हें मालूम हो जाता है के किसका हाल खराब है और किसका जत्था (पार्टी) कामज़ोर
عَرَبِيوَيَزيدُ اللَّهُ الَّذينَ اهتَدَوا هُدًى ۗ وَالباقِياتُ الصّالِحاتُ خَيرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوابًا وَخَيرٌ مَرَدًّا
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह हिदायत पाने वालों को हिदायत में आधिक कर देता है और शेष रहने वाली नेकियाँ आपके पालनहार के निकट सवाब की दृष्टि से बेहतर तथा परिणाम की दृष्टि से कहीं अच्छी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Iske baraks jo logo raah e raast ikhtiyar karte hain Allah unko raast-rawi mein taraqqi ata farmata hai aur baaqi reh janey wali nekiyan hi tere Rubb ke nazdeek jaza aur anjaam ke aitbaar se behtar hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hidayat yafta logon ko Allah Taalaa hidayat mein barhata hai aur baqi rehney wali nekiyan teray rab kay nazdeek sawab kay lehaz say aur anjam kay lehaz say boht hi behtar hain
Devnagri Urdu (Maududi)इस्के बराक जो लोगो राह ए रास्त इख्तियार करते हैं अल्लाह उनको रस्त-रवी में तरक्की अता फरमाता है और बाकी रह जाने वाली नेकियां ही तेरे रब के नाजदीक जजा और अंजाम के ऐतबार से बेहतर हैं
عَرَبِيأَفَرَأَيتَ الَّذي كَفَرَ بِآياتِنا وَقالَ لَأوتَيَنَّ مالًا وَوَلَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या (ऐ नबी!) आपने उस व्यक्ति को देखा, जिसने हमारी आयतों का इनकार किया और कहा : मैं अवश्य ही धन तथा संतान दिया जाऊँगा?
Roman Urdu (Maududi)Phir tu nay dekha us shaks ko jo hamari aayat ko manney se inkar karta hai aur kehta hai ke main to maal aur aulad se nawaza hi jata rahunga
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tu ney ussay bhi dekha jiss ney humari aayaton say kufur kiya aur kaha kay mujhay to maal-o-aulad zaroor hi di jaye gi
Devnagri Urdu (Maududi)फिर तू नया देखा उस शक्स को जो हमारी आयत को मन्ने से इंकार करता है और कहता है कि मैं तो माल और औलाद से नवाजा ही जाता रहूंगा
عَرَبِيأَطَّلَعَ الغَيبَ أَمِ اتَّخَذَ عِندَ الرَّحمٰنِ عَهدًا
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उसने परोक्ष को झाँककर देख लिया है, या उसने रहमान से कोई वचन ले रखा है?
Roman Urdu (Maududi)Kya usey gaib ka pata chal gaya hai ya usne rehman se koi ahad le rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh ghaib per mutla hai ya Allah ka koi wada ley chuka hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या उसे गैब का पता चल गया है या उसने रहमान से कोई अहद ले रखा है
عَرَبِيكَلّا ۚ سَنَكتُبُ ما يَقولُ وَنَمُدُّ لَهُ مِنَ العَذابِ مَدًّا
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हिन्दी (Al-Omari)कदापि नहीं! हम अवश्य लिखेंगे, जो कुछ वह कहता है और हम उसके लिए यातना में अत्यधिक वृद्धि कर देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin, jo kuch yeh bakhta (boasts of) hai isey hum likh lengey aur iske liye saza mein aur zyada izafa karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Hergiz nahi yeh jo bhi keh raha hai hum ussay zaroor likh len gay aur uss kay liye azab barhaye chalay jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं, जो कुछ ये बख्ता (घमंड) है इसे हम लिख लेंगे और इसके लिए सजा में और ज्यादा इजाफा करेंगे
عَرَبِيوَنَرِثُهُ ما يَقولُ وَيَأتينا فَردًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हम उसके वारिस होंगे उन चीज़ों में जो वह कर रहा है और वह अकेला हमारे पास आएगा।
Roman Urdu (Maududi)Jis sar-o-samaan aur laao lashkar ka yeh zikr kar raha hai woh sab hamare paas reh jayega aur yeh akela hamare saamne hazir hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh jin cheezon ko keh raha hai ussay hum iss kay baad ley len gay. Aur yeh to bilkul akela hi humaray samney hazir hoga
Devnagri Urdu (Maududi)जिस सर-ओ-समान और लाओ लश्कर का ये जिक्र कर रहा है वो सब हमारे पास रह जाएगा और ये अकेला हमारे सामने हाज़िर होगा
عَرَبِيوَاتَّخَذوا مِن دونِ اللَّهِ آلِهَةً لِيَكونوا لَهُم عِزًّا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने अल्लाह के सिवा अन्य पूज्य बना लिए, ताकि वे उनके लिए सम्मान का कारण हों।
Roman Urdu (Maududi)In logon ne Allah ko chodh kar apne kuch khuda bana rakkhey hain taa-ke woh inke pushtebaan (supporters) hon
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney Allah kay siwa doosray mabood bana rakhay hain kay woh inn kay liye baees-e-izzat hon
Devnagri Urdu (Maududi)इन लोगों ने अल्लाह को छोड़ कर अपना कुछ खुदा बना रखा है ता-के वो इनके पुश्तेबान (समर्थक) माननीय
عَرَبِيكَلّا ۚ سَيَكفُرونَ بِعِبادَتِهِم وَيَكونونَ عَلَيهِم ضِدًّا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐसा कभी नहीं होगा, जल्द ही वे उनकी पूजा का इनकार कर देंगे और उनके खिलाफ (विरोधी) हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Koi pushtebaan na hoga, woh sab inki ibadat ka inkar karenge aur ultey inke mukhalif ban jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin aisa hergiz hona nahi. Woh to inn ki pooja say munkir honjayen gay aur ultay inn kay dushman bann jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)कोई पुश्तेबान ना होगा, वो सब इनकी इबादत का इंकार करेंगे और उल्टे इनके मुखालिफ़ बन जायेंगे
عَرَبِيأَلَم تَرَ أَنّا أَرسَلنَا الشَّياطينَ عَلَى الكافِرينَ تَؤُزُّهُم أَزًّا
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने नहीं देखा कि हमने शैतानों को काफ़िरों पर छोड़ रखा है, वे उन्हें ख़ूब उकसाते रहते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya tum dekhte nahin ho ke humne in munkireen e haqq par shayateen chodh rakkhey hain jo inhein khoob khoob (mukhalifat e haqq par) uksa rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tu ney nahi dekha kay hum kafiron kay pass shetano ko bhejtay hain jo enhen khoob uksatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम देखते नहीं हो के हमने मुनकिरीन ए हक़ पर शयातीन छोड़ रक्खे हैं जो इन्हें ख़ूब ख़ूब (मुख़ालिफ़त ए हक़ पर) उसका रहे हैं
عَرَبِيفَلا تَعجَل عَلَيهِم ۖ إِنَّما نَعُدُّ لَهُم عَدًّا
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आपर उनपर जल्दी न करें , हम तो केवल उनके लिए (दिन) गिन रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Accha, to ab inpar nuzul e azaab ke liye betaab na ho, hum inke din gin rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Tu inn kay baray mein jaldi na ker hum to khud hi inn kay liye muddat shumari ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)अच्छा, तो अब इनपर नुज़ुल ए अज़ाब के लिए बेताब ना हो, हम इनके दिन गिन रहे हैं
عَرَبِييَومَ نَحشُرُ المُتَّقينَ إِلَى الرَّحمٰنِ وَفدًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन हम परहेज़गारों को रहमान के पास मेहमान बनाकर इकट्ठा करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh din aane wala hai jab muttaqi logon ko hum mehmaano ki tarah rehman ke huzur pesh karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din hum perhezgaron ko Allah rehman ki taraf bator mehman kay jama keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)वो दिन आने वाला है जब मुत्तक़ी लोगों को हम मेहमानों की तरह रहमान के हुजूर पेश करेंगे
عَرَبِيوَنَسوقُ المُجرِمينَ إِلىٰ جَهَنَّمَ وِردًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अपराधियों को नरक की ओर प्यासे हाँककर ले जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur mujreemon ko pyase jaanwaron ki tarah jahannum ki taraf haank le jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur gunehgaron ko sakht piyas ki halat mein jahannum ki taraf haank ley jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और मुजरेमोन को प्यासे जानवरों की तरह जहन्नुम की तरफ हांक ले जाएंगे
عَرَبِيلا يَملِكونَ الشَّفاعَةَ إِلّا مَنِ اتَّخَذَ عِندَ الرَّحمٰنِ عَهدًا
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हिन्दी (Al-Omari)वे सिफारिश का अधिकार नहीं रखेंगे, सिवाय उसके जिसने रहमान के पास कोई प्रतिज्ञा प्राप्त कर ली हो।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt log koi sifarish laney par qaadir na honge bajuz uske jisne Rehman ke huzur se parwana hasil karliya ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kissi ko shifaat ka ikhtiyar na hoga siwaye unn kay jinhon ney Allah Taalaa ki taraf say koi qol-o-qarar ley liya hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त लोग कोई सिफ़रिश लेन पर कादिर न होंगे बज़ुज़ उसके जिसने रहमान के हुजूर से परवाना हासिल करलिया हो
عَرَبِيوَقالُوا اتَّخَذَ الرَّحمٰنُ وَلَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा कि रहमान ने संतान बना रखी है।
Roman Urdu (Maududi)Woh kehte hain ke rehman ne kisi ko beta bana liya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn ka qol to yeh hai kay Allah rehman ney bhi aulad ikhtiyar ki hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो कहते हैं के रहमान ने किसी को बेटा बना लिया है
عَرَبِيلَقَد جِئتُم شَيئًا إِدًّا
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय ही तुम एक बड़ी भारी बात गढ़कर लाए हो।
Roman Urdu (Maududi)Sakht behuda baat hai jo tum log ghadh laye ho
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tum boht buri aur bhari cheez laye ho
Devnagri Urdu (Maududi)सच बहुत बात है जो तुम लोग गड़बड़ लाए हो
عَرَبِيتَكادُ السَّماواتُ يَتَفَطَّرنَ مِنهُ وَتَنشَقُّ الأَرضُ وَتَخِرُّ الجِبالُ هَدًّا
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हिन्दी (Al-Omari)समीप है कि इस कथन के कारण आकाश फट पड़ें तथा धरती चिर जाए और और पहाड़ ध्वस्त होकर गिर पड़ें।
Roman Urdu (Maududi)Qareeb hai ke aasmaan phatt padein, zameen shaqq ho jaye (split asunder) aur pahad gir jayein
Roman Urdu (Junagarhi)Qareeb hai kay iss qol ki waja say aasman phat jayen aur zamin shaq hojaye aur pahar rezay rezay hojayen
Devnagri Urdu (Maududi)करीब है के आसमां फट पड़े, जमीन शक्क हो जाए (स्प्लिट असंडर) और पहाड़ गिर जाए
عَرَبِيأَن دَعَوا لِلرَّحمٰنِ وَلَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)इस बात पर कि उन्होंने रहमान की संतान होने का दावा किया।
Roman Urdu (Maududi)Is baat par ke logon ne Rehman ke liye aulad honay ka dawa kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Key woh rehman ki aulad sabit kerney bethay
Devnagri Urdu (Maududi)इस बात पर के लोगों ने रहमान के लिए औलाद होने का दावा किया
عَرَبِيوَما يَنبَغي لِلرَّحمٰنِ أَن يَتَّخِذَ وَلَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि, रहमान के योग्य नहीं कि कोई संतान बनाए।
Roman Urdu (Maududi)Rehman ki yeh shaan nahin hai ke woh kisi ko beta banaye
Roman Urdu (Junagarhi)Shaan-e-rehman kay laeeq nahi kay woh aulad rakhay
Devnagri Urdu (Maududi)रहमान की ये शान नहीं है के वो किसी को बेटा बना सके
عَرَبِيإِن كُلُّ مَن فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ إِلّا آتِي الرَّحمٰنِ عَبدًا
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हिन्दी (Al-Omari)आकाशों तथा धरती में जो कोई भी है, वह रहमान के पास दास के रूप में आने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Zameen aur aasmaano ke andar jo bhi hain sab uske huzoor bandon ki haisiyat se pesh honay waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aasman-o-zamin mein jo bhi hain sab kay sab Allah kay ghulam bann ker hi aaney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जमीन और आसमान के अंदर जो भी हैं सब उसके हुजूर बंदों की हैसियत से पेश होने वाले हैं
عَرَبِيلَقَد أَحصاهُم وَعَدَّهُم عَدًّا
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय उसने उन्हें (अपने ज्ञान के साथ) घेर रखा है तथा उन्हें अच्छी तरह गिन रखा है।
Roman Urdu (Maududi)Sab par woh muheet (encircled) hai aur usne unko shumaar kar rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn sab ko uss ney gher rakha hai aur sab ko poori tarah ginn bhi rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)सब पर वो मुहीत (घेरा हुआ) है और उसने उनको शामिल कर रखा है
عَرَبِيوَكُلُّهُم آتيهِ يَومَ القِيامَةِ فَردًا
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हिन्दी (Al-Omari)और उनमें से हर एक क़ियामत के दिन उसके पास अकेला आने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Sab qayamat ke roz fardan fardan (akele akele) uske saamne hazir hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh saray kay saray qayamat kay din akelay uss kay pass hazir honey walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)सब कयामत के रोज़ फरदान फरदान (अकेले अकेले) उसके सामने हाज़िर होंगे
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ سَيَجعَلُ لَهُمُ الرَّحمٰنُ وُدًّا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, शीघ्र ही रहमान उनके लिए प्रेम पैदा करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan jo log iman le aaye hain aur amal e saleh kar rahey hain anqareeb Rehman unke liye dilon mein muhabbat paida kardega
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jo eman laye hain aur jinhon ney shaeesta aemaal kiye hain unn kay liye Allah rehman mohabbat peda ker dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन जो लोग ईमान ले आए हैं और अमल ए सालेह कर रहे हैं अनकारी रहमान उनके लिए दिलों में मुहब्बत अदा कर देगा
عَرَبِيفَإِنَّما يَسَّرناهُ بِلِسانِكَ لِتُبَشِّرَ بِهِ المُتَّقينَ وَتُنذِرَ بِهِ قَومًا لُدًّا
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हिन्दी (Al-Omari)अतः (ऐ नबी!) हमने इसे आपकी भाषा में सरल बना दिया है, ताकि आप इसके द्वारा डर रखने वालों को शुभ सूचना दें तथा इसके द्वारा उन लोगों को डराएँ जो सख़्त झगड़ालू हैं।
Roman Urdu (Maududi)Pas (aey Muhammad) , is kalam ko humne aasaan karke tumhari zubaan mein isi liye nazil kiya hai ke tum parheizgaron ko khush khabri dedo aur hat-dharm (jhagdalu/obdurate) logon ko dara do
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney iss quran ko teri zaban mein boht hi aasan ker diya hai kay tu iss kay zariye say perhezgaron ko khushkhabri dey aur jhagraloo logon ko dara dey
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ मुहम्मद), इस कलाम को हमने आसां करके तुम्हारी जुबान में इसके लिए नाज़िल किया है के तुम परहेज़गरों को ख़ुश ख़बरी देदो और टोपी-धर्म (झगड़ालू/अड़ियल) लोगों को डरा दो
عَرَبِيوَكَم أَهلَكنا قَبلَهُم مِن قَرنٍ هَل تُحِسُّ مِنهُم مِن أَحَدٍ أَو تَسمَعُ لَهُم رِكزًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उनसे पहले कितनी ही जातियों को विनष्ट कर दिया, तो क्या आप उनमें से किसी एक को महसूस करते हैं, या उनकी कोई भनक सुनते हैं?!
Roman Urdu (Maududi)Insey pehle hum kitni hi qaumon ko halaak kar chuke hain, phir aaj kahin tum unka nishaan patey ho, ya unki bhanak bhi kahin sunayi deti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney inn say pehlay boht si jamaten tabah ker di hain kiya inn mein say aik bhi aahat tu pata hai ya unn ki awaz ki bhanak bhi teray kaan mein parti hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पहले हम कितनी नमस्ते क़ौमों को हलाक कर चुके हैं, फिर आज कहीं तुम उनका निशान पाते हो, या उनकी भनक भी कहीं सुनायी देती है
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Surah 19: Maryam (Mary)

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Surah 19: Maryam (Mary)

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Surah 19: Maryam (Mary)

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Surah 19: Maryam (Mary)

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Surah 19: Maryam (Mary)

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Surah 20: Ta Ha (Ta Ha)

Meccan🕐 Revelation #45📜 135 Verses🕮 Juz 1
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Surah 20: Ta Ha (Ta Ha)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيطه
हिन्दी (Al-Omari)ता, हा।
Roman Urdu (Maududi)Ta ha
Roman Urdu (Junagarhi)Taahaa
Devnagri Urdu (Maududi)ता हा
عَرَبِيما أَنزَلنا عَلَيكَ القُرآنَ لِتَشقىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हमने आपपर यह क़ुरआन इसलिए नहीं अवतरित किया कि आप कष्ट में पड़ जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Humne yeh Quran tumpar is liye nazil nahin kiya hai ke tum museebat mein padh jao
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney yeh quran tujh per iss liye nahi utara kay tu mushaqqat mein parr jaye
Devnagri Urdu (Maududi)हमने ये कुरान तुम्हारे लिए नाज़िल नहीं किया है के तुम मुसीबत में पढ़ जाओ
عَرَبِيإِلّا تَذكِرَةً لِمَن يَخشىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)परंतु उसकी याददहानी (नसीहत) के लिए, जो डरता है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh to ek yaad dihani hai har us shaks ke liye jo darey
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay uss ki naseehat kay liye jo Allah say darta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये तो एक याद दिहानी है हर उस शक्स के लिए जो डरे
عَرَبِيتَنزيلًا مِمَّن خَلَقَ الأَرضَ وَالسَّماواتِ العُلَى
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसकी ओर से उतारा हुआ है, जिसने पृथ्वी और ऊँचे आकाशों को बनाया।।
Roman Urdu (Maududi)Nazil kiya gaya hai us zaat ki taraf se jisne paida kiya hai zameen ko aur buland aasmano ko
Roman Urdu (Junagarhi)Iss ka utarna uss ki taraf say hai jiss ney zamin ko aur buland aasmano ko peda kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)नाज़िल किया गया है उस ज़ात की तरफ से जिसने पैदा किया है ज़मीन को और बुलंद आसमान को
عَرَبِيالرَّحمٰنُ عَلَى العَرشِ استَوىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) अर्श (सिंहासन) पर बुलंद हुआ।
Roman Urdu (Maududi)Woh Rehman (qayanaat ke) takht e sultanat par jalwa farma hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo rehman hai arsh per qaeem hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो रहमान (क़ायनात के) तख्त ए सल्तनत पर जलवा फरमा है
عَرَبِيلَهُ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ وَما بَينَهُما وَما تَحتَ الثَّرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसी का है, जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है और जो उन दोनों के बीच है तथा जो गीली मिट्टी के नीचे है।
Roman Urdu (Maududi)Maalik hai un sab cheezon ka jo aasmano aur zameen mein hain aur jo zameen o aasmaan ke darmiyan mein hain aur jo mitti ke nichey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ki milkiyar aasmano aur zamin aur inn dono kay darmiyan aur (kurra-e-khak) kay neechay ki her aik cheez per hai
Devnagri Urdu (Maududi)मालिक हैं उन सब चीज़ों का जो आसमान और ज़मीन में हैं और जो ज़मीन ओ आसमान के दरमियान में हैं और जो मिट्टी के नीचे हैं
عَرَبِيوَإِن تَجهَر بِالقَولِ فَإِنَّهُ يَعلَمُ السِّرَّ وَأَخفَى
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यदि तुम उच्च स्वर में बात करो, तो वह गुप्त और उससे भी अधिक गुप्त बात को जानता है।
Roman Urdu (Maududi)Tum chahe apni baat pukar kar kaho, woh to chupke se kahi hui baat balke issey makhfi-tar (most secret) baat bhi jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tu unchi baat kahey to woh to her aik posheeda bulkay posheeda say posheeda tar cheez ko bhi ba-khoobi janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम चाहे अपनी बात पुकार कर कहो, वो तो चुपके से कहीं हुई बात बल्के इसे मख़फ़ी-तर (सबसे गुप्त) बात भी जानता है
عَرَبِياللَّهُ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۖ لَهُ الأَسماءُ الحُسنىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह वह है जिसके सिवा कोई पूज्य नहीं, सबसे अच्छे नाम उसी के हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hai, uske siwa koi khuda nahin, uske liye behtareen naam hain
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi Allah hai jiss kay siwa koi mabood nahi behtareen naam ussi kay hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं, उसके लिए बेहतरीन नाम हैं
عَرَبِيوَهَل أَتاكَ حَديثُ موسىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और क्या (ऐ नबी!) आपके पास मूसा की ख़बर पहुँची?
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhein kuch Moosa ki khabar bhi pahunchi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tujhay musa (alh-e-salam) ka qissa bhi maloom hai
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हें कुछ मूसा की खबर भी पसंद है
عَرَبِيإِذ رَأىٰ نارًا فَقالَ لِأَهلِهِ امكُثوا إِنّي آنَستُ نارًا لَعَلّي آتيكُم مِنها بِقَبَسٍ أَو أَجِدُ عَلَى النّارِ هُدًى
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब उसने एक आग देखी, तो अपने घरवालों से कहा : ठहरो, निःसंदेह मैंने एक आग देखी है, शायद मैं तुम्हारे पास उससे कोई अंगार लाे आऊँ, अथवा उस आग पर कोई मार्गदर्शन पा लूँ।
Roman Urdu (Maududi)Jabke usne ek aag dekhi aur apne ghar walon se kaha ke “ zara thehro, maine ek aag dekhi hai, shayad ke tumhare liye ek-aad angara le aaon, ya is aag par mujhey (raaste ke mutaalik) koi rehnumayi (guidance) mil jaye”
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay uss ney aag dekh ker apney ghar walon say kaha kay tum zara si dare thehar jao mujhay aag dikhaee di hai. Boht mumkin hai kay mein iss ka koi angara tumharay pass laon yaa aag kay pass say rastay ki itlaa paon
Devnagri Urdu (Maududi)जबके उसने एक आग देखी और अपने घर वालों से कहा के “जरा ठहरो, मैंने एक आग देखी” है, शायद तुम्हारे लिए एक-आद अंगारा ले आऊं, हां इस आग पर मुझे (रास्ते के मुतालिक) कोई रहनुमाई (मार्गदर्शन) मिल जाए”
عَرَبِيفَلَمّا أَتاها نودِيَ يا موسىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वह उसके पास आया तो उसे आवाज़ दी गई : ऐ मूसा!
Roman Urdu (Maududi)Wahan pahuncha to pukara gaya “Aey Moosa
Roman Urdu (Junagarhi)Jab woh wahan phonchay to awaz di gaee aey musa
Devnagri Urdu (Maududi)वहां पहुंच तो पुकारा गया “ऐ मूसा
عَرَبِيإِنّي أَنا رَبُّكَ فَاخلَع نَعلَيكَ ۖ إِنَّكَ بِالوادِ المُقَدَّسِ طُوًى
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मैं ही तेरा पालनहार हूँ, अतः अपने दोनों जूते उतार दे, निःसंदेह तू पवित्र वादी “तुवा” में है।
Roman Urdu (Maududi)Main hi tera Rubb hoon, jutiyan (shoes) utaar de, tu waadi e muqaddas Tuwa mein hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan mein hi tera perwerdigar hun to tu apni jootiyan utar dey kiyon kay tu pak maidan-e-toowa mein hai
Devnagri Urdu (Maududi)मैं हाय तेरा रब हूं, जूतियां (जूते) उतार दे, तू वादी ए मुक़द्दस तुवा में है
عَرَبِيوَأَنَا اختَرتُكَ فَاستَمِع لِما يوحىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और मैंने तुझे चुन लिया है। अतः ध्यान से सुन, जो वह़्य की जा रही है।
Roman Urdu (Maududi)Aur maine tujhko chun liya hai, sun jo kuch wahee kiya jata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mein ney tujhay muntakhib ker liya hai abb jo wahee ki jaye ussay kaan laga ker sunn
Devnagri Urdu (Maududi)और मैंने तुझको चुन लिया है, सुन जो कुछ वही किया जाता है
عَرَبِيإِنَّني أَنَا اللَّهُ لا إِلٰهَ إِلّا أَنا فَاعبُدني وَأَقِمِ الصَّلاةَ لِذِكري
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मैं ही अल्लाह हूँ, मेरे सिवा कोई पूज्य नहीं, तो मेरी ही इबादत कर तथा मेरे स्मरण (याद) के लिए नमाज़ स्थापित कर।
Roman Urdu (Maududi)Main hi Allah hoon, mere siwa koi khuda nahin hai, pas tu meri bandagi kar aur meri yaad ke liye namaz qayam kar
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak mein hi Allah hun meray siwa ibadat kay laeeq aur koi nahi pus tu meri hi ibadat ker aur meri yaad kay liye namaz qaeem rakh
Devnagri Urdu (Maududi)मैं ही अल्लाह हूं, मेरे सिवा कोई खुदा नहीं है, पास तू मेरी बंदगी कर और मेरी याद के लिए नमाज़ क़याम कर
عَرَبِيإِنَّ السّاعَةَ آتِيَةٌ أَكادُ أُخفيها لِتُجزىٰ كُلُّ نَفسٍ بِما تَسعىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय क़ियामत आने वाली है, मैं क़रीब हूँ कि उसे छिपाकर रखूँ। ताकि प्रत्येक प्राणी को उसका बदला दिया जाए, जो वह प्रयास करता है।
Roman Urdu (Maududi)Qayamat ki ghadi zaroor aane wali hai, main uska waqt makhfi rakhna chahta hoon, taa-ke har mutanaffis apni saii(labours/koshish) ke mutabik badla paye
Roman Urdu (Junagarhi)Qayamat yaqeenan aaney wali hai jissay mein posheeda rakhna chahata hun takay her shaks ko woh badla diya jaye jo uss ney kosish ki ho
Devnagri Urdu (Maududi)क़यामत की घड़ी जरूर आने वाली है, मैं उसका वक्त मख्फी रखना चाहता हूं, ता-के हर मुतनफ्फिस अपनी साई (मजदूर/कोशिश) के मुताबिक बदला पाए
عَرَبِيفَلا يَصُدَّنَّكَ عَنها مَن لا يُؤمِنُ بِها وَاتَّبَعَ هَواهُ فَتَردىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः तुझे उससे वह व्यक्ति कहीं रोक न दे, जो उसपर ईमान (विश्वास) नहीं रखता और अपनी इच्छा के पालन में लगा है, अन्यथा तेरा नाश हो जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Pas koi aisa shaks jo uspar iman nahin laata aur apni khwahish e nafs ka banda ban gaya hai tujhko us ghadi ki fikr se na roak de, warna tu halakat mein padh jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Pus abb iss kay yaqeen say tujhay koi aisa shaks rok na dey jo iss per eman na rakhta ho aur apni khuawish kay peechay para ho werna tu halak ho jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)पास कोई ऐसा शक्स जो उसपर ईमान नहीं लाता और अपनी ख्वाहिश ए नफ्स का बंदा बन गया है तुझको उस घड़ी की फ़िक्र से ना रोक दे, वरना तू हलकत में पढ़ जाएगा
عَرَبِيوَما تِلكَ بِيَمينِكَ يا موسىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और ऐ मूसा! यह तेरे दाहिने हाथ में क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Aur aey Moosa, yeh tere haath mein kya hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey musa terau iss dayen hath mein kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐ मूसा, ये तेरे हाथ में क्या है?”
عَرَبِيقالَ هِيَ عَصايَ أَتَوَكَّأُ عَلَيها وَأَهُشُّ بِها عَلىٰ غَنَمي وَلِيَ فيها مَآرِبُ أُخرىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : यह मेरी लाठी है। मैं इसपर टेक लगाता हूँ और इससे अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूँ और मेरे लिए इसमें और भी कई ज़रूरतें हैं।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne jawab diya “yeh meri laathi hai, ispar taik laga kar chalta hoon, issey apni bakriyon ke liye pattey jhadta hoon, aur bhi bahut se kaam hain jo issey leta hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Jawab diya kay yeh meri lathi hai jiss per mein take lagata hun aur jiss say mein apni bakriyon kay liye pattay jhaar liya kerta hun aur bhi iss mein mujhay boht faeeday hain
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने जवाब दिया "ये मेरी लाठी है, इसपर ठीक लगा कर चलता हूं, इसे अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूं, और भी बहुत से काम हैं जो इसे लेता हूं"
عَرَبِيقالَ أَلقِها يا موسىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)फरमाया : इसे फेंक दे, ऐ मूसा!
Roman Urdu (Maududi)Farmaya “phenk de isko Moosa”
Roman Urdu (Junagarhi)Farmaya aey musa! Issay hath say neechay daal dey
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया "फेंक दे इसको मूसा"
عَرَبِيفَأَلقاها فَإِذا هِيَ حَيَّةٌ تَسعىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उसने उसे फेंक दिया और सहसा वह एक साँप था, जो दोड़ रहा था।
Roman Urdu (Maududi)Usne phenk diya aur yakayak woh ek saanp (snake) thi jo daud raha tha
Roman Urdu (Junagarhi)Daltay hi woh saanp bann ker dorney lagi
Devnagri Urdu (Maududi)उसने फेंक दिया और यकीन वो एक सांप (सांप) थी जो दौड़ रहा था
عَرَبِيقالَ خُذها وَلا تَخَف ۖ سَنُعيدُها سيرَتَهَا الأولىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)फरमाया : इसे पकड़ ले और डर मत, जल्द ही हम इसे इसकी प्रथम स्थिति में लौटा देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Farmaya “pakad le isko aur darr nahin, hum isey phir waisa hi kardenge jaisi yeh thi
Roman Urdu (Junagarhi)Farmaya bey khof ho ker issay pakar ley hum issay ussi pehli si surat mein doobara laa den gay
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया “पकड़ ले इसको और डर नहीं, हम इसे फिर वैसा ही कर देंगे जैसी ये थी
عَرَبِيوَاضمُم يَدَكَ إِلىٰ جَناحِكَ تَخرُج بَيضاءَ مِن غَيرِ سوءٍ آيَةً أُخرىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और अपना हाथ अपनी कांख (बग़ल) की ओर लगा दे, वह बिना किसी दोष के सफेद (चमकता हुआ) निकलेगा, जबकि यह एक और निशानी है।
Roman Urdu (Maududi)Aur zara apna haath apni bagal mein daba, chamakta hua niklega bagair kisi takleef ke, yeh dusri nishani hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apna hath apni baghal mein daal ley to woh safaid chamakta hua ho ker niklay ga lekin baghair kisi aib (aur rog) kay yeh doosra moajzza hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जरा अपना हाथ अपने बगल में दबा, चमकता हुआ निकलेगा बिना किसी तकलीफ के, ये दुसरी निशानी है
عَرَبِيلِنُرِيَكَ مِن آياتِنَا الكُبرَى
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि हम तुझे अपनी कुछ बड़ी निशानियाँ दिखाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Is liye ke hum tujhey apni badi nishniyan dikane waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss liye kay hum tujhay apni bari bari nishaniyan dikhana chahatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)इस लिए के हम तुझे अपनी बड़ी निशानियां दिखाने वाले हैं
عَرَبِياذهَب إِلىٰ فِرعَونَ إِنَّهُ طَغىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)फ़िरऔन के पास जा, निश्चय वह सरकश हो गया है।
Roman Urdu (Maududi)Ab tu Firoun ke paas jaa, woh sarkash ho gaya hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Abb tu firaon ki taraf jaa uss ney barri sirkashi macha rakhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)अब तू फिरौं के पास जा, वो व्यंग्य हो गया है”
عَرَبِيقالَ رَبِّ اشرَح لي صَدري
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए मेरा सीना खोल दे।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne arz kiya “ parwardigar, mera seena khol de
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) ney kaha aey meray perwerdigar! Mera seena meray liye khol dey
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने अर्ज़ किया “ परवरदिगार, मेरा सीना खोल दे
عَرَبِيوَيَسِّر لي أَمري
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मेरे लिए मेरा काम सरल कर दे।
Roman Urdu (Maududi)Aur mere kaam ko mere liye aasaan karde
Roman Urdu (Junagarhi)Aur meray kaam ko mujh per aasan ker dey
Devnagri Urdu (Maududi)और मेरे काम को मेरे लिए आसां करदे
عَرَبِيوَاحلُل عُقدَةً مِن لِساني
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हिन्दी (Al-Omari)और मेरी ज़बान की गाँठ खोल दे।
Roman Urdu (Maududi)Aur meri zubaan ki girah suljha de
Roman Urdu (Junagarhi)Aur meri zaban ki girah bhi khol dey
Devnagri Urdu (Maududi)और मेरी जुबान की ग्यारह सुलझा दे
عَرَبِييَفقَهوا قَولي
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि वे मेरी बात समझ लें।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke log meri baat samajh sakein
Roman Urdu (Junagarhi)Takay log meri baat achi tarah samajh saken
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के लोग मेरी बात समझ सकें
عَرَبِيوَاجعَل لي وَزيرًا مِن أَهلي
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मेरे लिए मेरे अपने घरवालों में से एक सहायकबना दे।
Roman Urdu (Maududi)Aur mere liye mere apne kumbe (my own family) se ek wazir muqarrar karde
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mera qazir meray kunbay mein say ker dey
Devnagri Urdu (Maududi)और मेरे लिए मेरे अपने कुंबे (मेरे अपने परिवार) से एक वजीर मुकर्रर करदे
عَرَبِيهارونَ أَخِي
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हिन्दी (Al-Omari)हारून को, जो मेरा भाई है।
Roman Urdu (Maududi)Haroon, jo mera bhai hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yani mera bhai haroon (alh-e-salam) ko
Devnagri Urdu (Maududi)हारून, जो मेरा भाई है
عَرَبِياشدُد بِهِ أَزري
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हिन्दी (Al-Omari)उसके साथ मेरी पीठ मज़बूत़ कर दे।
Roman Urdu (Maududi)Uske zariye se mera haath mazboot kar
Roman Urdu (Junagarhi)Tu iss say meri kamar kuss dey
Devnagri Urdu (Maududi)उसके जरूर से मेरा हाथ मजबूत कर
عَرَبِيوَأَشرِكهُ في أَمري
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हिन्दी (Al-Omari)और उसे मेरे काम में शरीक कर दे।
Roman Urdu (Maududi)Aur usko mere kaam mein shareek karde
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ussay mera shareek kaar ker dey
Devnagri Urdu (Maududi)और उसको मेरे काम में शामिल करदे
عَرَبِيكَي نُسَبِّحَكَ كَثيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि हम तेरी बहुत ज़्यादा पवित्रता बयान करें।
Roman Urdu (Maududi)Hum khoob teri paaki bayan karein
Roman Urdu (Junagarhi)Takay hum dono ba-kasrat teri tasbeeh biyan keren
Devnagri Urdu (Maududi)हम खूब तेरी पाकी बयां करें
عَرَبِيوَنَذكُرَكَ كَثيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हम तुझे बहुत ज़्यादा याद करें।
Roman Urdu (Maududi)Aur khoob tera charcha karein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ba-kasrat teri yaad keren
Devnagri Urdu (Maududi)और खूब तेरा चर्चा करें
عَرَبِيإِنَّكَ كُنتَ بِنا بَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तू हमेशा हमारी स्थिति को भली प्रकार देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Tu hamesha hamare haal par nigraan raha hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak tu humen khoob dekhney bhalney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)तू हमेशा हमारा हाल पर नजर रख रहा है"
عَرَبِيقالَ قَد أوتيتَ سُؤلَكَ يا موسىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)फरमाया : निःसंदेह तुझे दिया गया जो तूने माँगा, ऐ मूसा!
Roman Urdu (Maududi)Farmaya “ diya gaya jo tu nay maanga aey Moosa
Roman Urdu (Junagarhi)Janab baari taalaa ney farmaya musa teray tamam sawalaat poora ker diye gaye
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया " दिया गया जो तू नहीं माँगा ऐ मूसा
عَرَبِيوَلَقَد مَنَنّا عَلَيكَ مَرَّةً أُخرىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय ही हमने तुझपर एक और बार भी उपकार किया।
Roman Urdu (Maududi)Humne phir ek martaba tujhpar ehsan kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney tujh per aik baar aur bhi bara ehsan kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने फिर एक मरतबा तुझपर एहसान किया
عَرَبِيإِذ أَوحَينا إِلىٰ أُمِّكَ ما يوحىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)जब हमने तेरी माँ की ओर वह़्य की, जो वह़्य की जाती थी।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo woh waqt jabke humne teri Maa ko ishara kiya, aisa ishara jo wahee ke zariye kiya jaata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay hum ney teri maa ko woh elhaam kiya jiss ka zikar abb kiya jaa raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो वो वक्त जबके हमने तेरी मां को इशारा किया, ऐसा इशारा जो वही के लिए किया जाता है
عَرَبِيأَنِ اقذِفيهِ فِي التّابوتِ فَاقذِفيهِ فِي اليَمِّ فَليُلقِهِ اليَمُّ بِالسّاحِلِ يَأخُذهُ عَدُوٌّ لي وَعَدُوٌّ لَهُ ۚ وَأَلقَيتُ عَلَيكَ مَحَبَّةً مِنّي وَلِتُصنَعَ عَلىٰ عَيني
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हिन्दी (Al-Omari)यह कि तू इसे ताबूत (संदूक़) में रख दे, फिर उसे नदी में डाल दे, फिर नदी उसे किनारे पर डाल दे, उसे मेरा एक शत्रु और उसका शत्रु उठा लेगा और मैंने तुझपर अपनी ओर से एक प्रेम डाल दिया और ताकि तेरा पालन-पोषण मेरी आँखों के सामने किया जाए।
Roman Urdu (Maududi)Ke is bacchey ko sandook (box) mein rakh de aur sandook ko dariya mein chodh de, dariya isey saahil par phenk dega aur isey mera dushman aur is bacchey ka dushman utha lega. Maine apni taraf se tujhpar mohabbat taari kardi aur aisa intizam kiya ke tu meri nigrani mein paala jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Kay tu ussay sandooq mein band ker kay darya mein chor dey pus darya ussay kinaray laa dalay ga aur mera aur khud uss ka dushman ussay ley ley ga aur mein ney apni taraf ki khaas mohabbat-o-maqbooliyat tujh per daal di. Takay teri perwerish meri aankhon kay samney ki jaye
Devnagri Urdu (Maududi)के इस बच्चे को संदूक (बॉक्स) में रख दे और संदूक को दरिया में छोड़ दे, दरिया इसे सही पर फेंक देगा और इसे मेरा दुश्मन और इस बच्चे का दुश्मन उठा लेगा। मैंने अपनी तरफ से तुझपर मोहब्बत तारी करदी और ऐसा इंतिज़ाम किया के तू मेरी निगरानी में पाला जाए
عَرَبِيإِذ تَمشي أُختُكَ فَتَقولُ هَل أَدُلُّكُم عَلىٰ مَن يَكفُلُهُ ۖ فَرَجَعناكَ إِلىٰ أُمِّكَ كَي تَقَرَّ عَينُها وَلا تَحزَنَ ۚ وَقَتَلتَ نَفسًا فَنَجَّيناكَ مِنَ الغَمِّ وَفَتَنّاكَ فُتونًا ۚ فَلَبِثتَ سِنينَ في أَهلِ مَديَنَ ثُمَّ جِئتَ عَلىٰ قَدَرٍ يا موسىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)जब तेरी बहन चल रही थी और कह रही थी : क्या मैं तुम्हें उसका पता बता दूँ, जो इसका पालन-पोषण करे? फिर हमने तुझे तेरी माँ के पास लौटा दिया, ताकि उसकी आँख ठंडी हो और वह शोक न करे। तथा तूने एक आदमी को मार डाला, तो हमने तुझे दुःखसे बचा लिया और हमने तुम्हारी अच्छी तरह से परीक्षा ली। फिर तू कई वर्ष मदयन वालों के बीच ठहरा रहा, फिर तू एक निश्चित अनुमान पर आया, ऐ मूसा!
Roman Urdu (Maududi)Yaad kar jabke teri behan chal rahi thi, phir jaa kar kehti hai, “main tumhein uska pata doon jo is bacchey ki parwarish acchi tarah karey?” Is tarah humne tujhey phir teri Maa ke paas pahuncha diya taa-ke uski aankh thandi rahey aur woh ranjeeda na ho. Aur (yeh bhi yaad kar ke) tu nay ek shaks ko qatal kardiya tha, humne tujhey is phanday se nikala aur tujhey mukhtalif aazmaaishon se guzara aur tu Madiyan ke logon mein kai saal thehra raha. Phir ab theek apne waqt par tu aa gaya hai aey Moosa
Roman Urdu (Junagarhi)(yaad ker) jabkay teri behan chal rahi thi aur keh rahi thi kay agar tum kaho to mein ussay bata doon jo uss ki nigehbani keray iss tadbeer say hum ney tujhay phir teri maa kay pass phonchaya kay uss ki aankhen thandi rahen aur woh ghumgeen na ho. Aur tu ney aik shaks ko maar dala tha iss per hum ney tujhay ghum say bacha liya gharz hum ney tujhay achi tarah aazma liya. Phir tu kaee saal tak madiyan kay logon mein thehra raha phir taqdeer-e-elahee kay mutabiq aey musa! Tu aaya
Devnagri Urdu (Maududi)याद कर जबके तेरी बहन चल रही थी, फिर जा कर कहती है, "मैं तुम्हें उसका पता दूं जो क्या बच्चे की परवरिश अच्छी तरह करे?" इस तरह हमने तुझे फिर तेरी मां के पास पहुंचा दिया ता-के उसकी आंख ठंडी रहे और वो रंजीदा ना हो। और (ये भी याद कर के) तूने एक शक्स को क़त्ल कर दिया था, हमने तुझसे इस फाँदे से निकला और तुझे मुखतलिफ़ आज़माइशों से गुजारा और तू मदियाँ के लोगों में काई साल रुका रहा। फिर अब ठीक अपने वक्त पर तू आ गया है ऐ मूसा
عَرَبِيوَاصطَنَعتُكَ لِنَفسِي
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हिन्दी (Al-Omari)और मैंने तुझे विशेष रूप से अपने लिए बनाया है।
Roman Urdu (Maududi)Maine tujhey apne kaam ka bana liya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mein ney tujhay khas apni zaat kay liye pasand farma liya
Devnagri Urdu (Maududi)मैंने तुझे अपने काम का बना लिया है
عَرَبِياذهَب أَنتَ وَأَخوكَ بِآياتي وَلا تَنِيا في ذِكرِي
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हिन्दी (Al-Omari)तू और तेरा भाई मेरी निशानियाँ लेकर जाओ और मुझे याद करने में आलस्य न करो।
Roman Urdu (Maududi)Ja, tu aur tera bhai meri nishaniyon ke saath, aur dekho tum meri yaad mein taqseer (susti /negligence) na karna
Roman Urdu (Junagarhi)Abb tu apney bhai samet meri nishaniyan humrah liye huye jaa aur khabdaar meray zikar mein susti na kerna
Devnagri Urdu (Maududi)जा, तू और तेरा भाई मेरी निशानियों के साथ, और देखो तुम मेरी याद में तकसीर (लापरवाही) ना करना
عَرَبِياذهَبا إِلىٰ فِرعَونَ إِنَّهُ طَغىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम दोनों फ़िरऔन के पास जाओ, निःसंदेह वह सरकश हो गया है।
Roman Urdu (Maududi)Jao tum dono Firoun ke paas ke woh sarkash ho gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum dono firaon kay pass jao uss ney bari sirkashi ki hai
Devnagri Urdu (Maududi)जाओ तुम दोनों फ़िरौन के पास के वो व्यंग्य हो गया है
عَرَبِيفَقولا لَهُ قَولًا لَيِّنًا لَعَلَّهُ يَتَذَكَّرُ أَو يَخشىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उससे कोमल बात करो, आशा है कि वह उपदेश ग्रहण करे, या (अल्लाह से) डर जाए।
Roman Urdu (Maududi)Ussey narmi ke saath baat karna, shayad ke woh naseehat qabool karey ya darr jaaye”
Roman Urdu (Junagarhi)Ussay narmi say samjhao kay shayad woh samajh ley ya darr jaye
Devnagri Urdu (Maududi)उसे नरमी के साथ बात करना, शायद के वो हिदायत क़बूल करे या डर जाए”
عَرَبِيقالا رَبَّنا إِنَّنا نَخافُ أَن يَفرُطَ عَلَينا أَو أَن يَطغىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)दोनों ने कहा : ऐ हमारे पालनहार! निश्चय ह डरते हैं कि वह हमपर अत्याचार करेगा, या हद से बढ़ जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Dono ne arz kiya “ parwardigar, humein andesha hai ke woh humpar zyadati karega ya pil padega(treat us cruelly)”
Roman Urdu (Junagarhi)Dono ney kaha aey humaray rab! Humen khof hai kay kahin firaon hum per koi ziyadti na keray ya apni sirkashi mein barh na jaye
Devnagri Urdu (Maududi)डोनो ने अर्ज़ किया “परवरदिगार, हमें अंदेशा है के वो हमपर ज़्यादा करेगा या पिल पड़ेगा।” क्रूरतापूर्वक)”
عَرَبِيقالَ لا تَخافا ۖ إِنَّني مَعَكُما أَسمَعُ وَأَرىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)फरमाया : डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ, सब कुछ सुन रहा हूँ और सब कुछ देख रहा हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Farmaya” daro mat, main tumhare saath hoon, sab kuch sun raha hoon aur dekh raha hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Jawab mila kay tum mutlaqan khof na kero mein tumharay sath hun aur sunta dekhta rahoon ga
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया” डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूं, सब कुछ सुन रहा हूं और देख रहा हूं
عَرَبِيفَأتِياهُ فَقولا إِنّا رَسولا رَبِّكَ فَأَرسِل مَعَنا بَني إِسرائيلَ وَلا تُعَذِّبهُم ۖ قَد جِئناكَ بِآيَةٍ مِن رَبِّكَ ۖ وَالسَّلامُ عَلىٰ مَنِ اتَّبَعَ الهُدىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः तुम दोनों उसके पास जाओ और कहो : हम तेरे पालनहार के रसूल हैं। अतः तू हमारे साथ बनी इसराईल को भेज दे और उन्हें यातना न दे, निश्चय हम तेरे पास तेरे पालनहार की ओर से एक निशानी लेकर आए हैं और सलामती है उसके लिए, जो मार्गदर्शन का अनुसरण करे।
Roman Urdu (Maududi)Jao uske paas aur kaho ke hum tere Rubb ke faristaade (messengers) hain, bani Israel ko hamare saath janey ke liye chodh de aur unko takleef na de. Hum tere paas tere Rubb ki nishani lekar aaye hain aur salamati hai uske liye jo raah-e-raast ki pairwi karey
Roman Urdu (Junagarhi)Tum iss kay pass jaa ker kaho kay hum teray perwerdigar kay payghumber hain tu humaray sath bani israeel ko bhej dey inn ki sazayen moqoof ker. Hum to teray pass teray rab ki taraf say nishani ley ker aaye hain aur salamti ussi kay liye hai jo hidayat ka paband ho jaye
Devnagri Urdu (Maududi)जाओ उसके पास और कहो के हम तेरे रब के फरीस्तादे (संदेशवाहक) हैं, बानी इजराइल को हमारे साथ जाने के लिए छोड़ दे और उनको तकलीफ ना दे। हम तेरे पास तेरे रब की निशानी लेकर आए हैं और सलामती है उसके लिए जो राह-ए-रास्त की जोड़ी बनाए
عَرَبِيإِنّا قَد أوحِيَ إِلَينا أَنَّ العَذابَ عَلىٰ مَن كَذَّبَ وَتَوَلّىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमारी ओर वह़्य (प्रकाशना) की गई है कि निश्चय ही यातना उसके लिए है, जिसने झुठलाया और मुँह फेरा।
Roman Urdu (Maududi)Humko wahee (revelation) se bataya gaya hai ke azaab hai uske liye jo jhutlaye aur mooh moadey.”
Roman Urdu (Junagarhi)Humari taraf wahee ki gaee hai kay jo jhutlaye aur roo gardani keray uss kay liye azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमको वही (रहस्योद्घाटन) से बताया गया है कि अज़ाब है उसके लिए जो झूठलाए और मुंह मोड़े।'
عَرَبِيقالَ فَمَن رَبُّكُما يا موسىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : तुम दोनों का पालनहार कौन है, ऐ मूसा!?
Roman Urdu (Maududi)Firoun ne kaha “accha, to phir tum dono ka Rubb kaun hai aey Moosa?”
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon ney poocha kay aey musa! Tum dono ka rab kaun hai
Devnagri Urdu (Maududi)फ़िरौन ने कहा "अच्छा, तो फिर तुम दोनो का रुब कौन है ऐ मूसा?"
عَرَبِيقالَ رَبُّنَا الَّذي أَعطىٰ كُلَّ شَيءٍ خَلقَهُ ثُمَّ هَدىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : हमारा पालनहार वह है, जिसने हर चीज़ को उसका आकार और रूप दिया, फिर रास्ता दिखाया।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne jawab diya “hamara Rubb woh hai jisne har cheez ko uski saakht bakshi(given distinctive form), phir usko raasta bataya”
Roman Urdu (Junagarhi)Jawab diya kay humara rab woh hai jiss ney her aik ko uss ki khas surat shakal inayat farmaee phir raah sujha di
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने जवाब दिया "हमारा रब वो है जिसने हर चीज को उसकी असली बख्शी (विशिष्ट रूप दिया), फिर उसको रास्ता बताया"
عَرَبِيقالَ فَما بالُ القُرونِ الأولىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : अच्छा, तो पहले ज़माने के लोगों का क्या हाल है?
Roman Urdu (Maududi)Firoun bola “aur pehle jo nasalein (generations) guzar chuki hain unki phir kya halat thi?”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney kaha acha yeh to batao aglay zamaney walon ka haal kiya hona hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौन बोला "और पहले जो नसलें (पीढ़ियां) गुजर चुकी हैं उनकी फिर क्या हालत थी?"
عَرَبِيقالَ عِلمُها عِندَ رَبّي في كِتابٍ ۖ لا يَضِلُّ رَبّي وَلا يَنسَى
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हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : उनका ज्ञान मेरे रब के पास एक किताब में है, मेरा रब न भटकता है और न भूलता है।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha “uska ilam mere Rubb ke paas ek nawishte (record) mein mehfooz hai, mera Rub na chukta hai na bhoolta hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Jawab diya kay inn ka ilm meray rab kay haan kitab mein mojood hai na to mera rab ghalati kerta hai na bhoolta hai
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा "उसका इलम मेरे रब के पास एक नाविश्ते (रिकॉर्ड) में महफूज है, मेरा रब ना छूटता है ना भूलता है"
عَرَبِيالَّذي جَعَلَ لَكُمُ الأَرضَ مَهدًا وَسَلَكَ لَكُم فيها سُبُلًا وَأَنزَلَ مِنَ السَّماءِ ماءً فَأَخرَجنا بِهِ أَزواجًا مِن نَباتٍ شَتّىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन को बिछौना बनाया और उसमें तुम्हारे लिए रास्ते बनाए और आसमान से कुछ पानी उतारा, फिर हमने उसके द्वारा विभिन्न पौधों की कई क़िस्में निकालीं।
Roman Urdu (Maududi)Wahi jisne tumhare liye zameen ka farsh bichaya, aur usmein tumhare chalne ko raaste banaye, aur upar se pani barsaya, phir uske zariye se mukhtalif aqsam ki paidawaar nikali
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney tumharay liye zamin ko farash banaya hai aur iss mein tumharay chalney kay raastay banaye hain aur aasman say paani bhi wohi barsata hai phir iss barasaat ki waja say mukhtalif qisam ki paidawaar bhi hum hi peda kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)वही जिसने तुम्हारे लिए जमीन का फर्श बिछाया, और उसमें तुम्हारे चलने को रास्ते बने, और ऊपर से पानी बरसाया, फिर उसके ज़रिये से मुखतलिफ़ अक्सम की पैदावर निकली
عَرَبِيكُلوا وَارعَوا أَنعامَكُم ۗ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِأُولِي النُّهىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)खाओ और अपने चौपायों को चराओ, निःसंदेह इसमें बुद्धि वाले लोगों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Khao aur apne jaanwaron ko bhi charao, yaqeenan is mein bahut si nishaniyan hain aqal rakhne walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Tum khud khao aur apney chopayon ko bhi charao. Kuch shak nahi kay iss mein aqalmandon kay liye boht si nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)खाओ और अपने जानवरों को भी छोड़ो, यकीनन इस में बहुत सी निशानियाँ हैं अक़ल रखने वालों के लिए
عَرَبِي۞ مِنها خَلَقناكُم وَفيها نُعيدُكُم وَمِنها نُخرِجُكُم تارَةً أُخرىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)इसी से हमने तुम्हें पैदा किया और इसी में हम तुम्हें लौटाएँगे और इसी से हम तुम्हें एक बार फिर निकालेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Isi zameen se humne tumko paida kiya hai, isi mein hum tumhein wapas le jayenge aur isi se tumko dobara nikalenge
Roman Urdu (Junagarhi)Issi zamin mein hum ney tumhen peda kiya aur issi mein phir wapis lotayen gay aur iss say phir doobara tum sab ko nikal khara keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)इसी ज़मीन से हमने तुमको पैदा किया है, इसी में हम तुम्हें वापस ले जायेंगे और इसी से तुमको दोबारा निकलेंगे
عَرَبِيوَلَقَد أَرَيناهُ آياتِنا كُلَّها فَكَذَّبَ وَأَبىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने उसे अपनी सब निशानियाँ दिखाईं, तो उसने झुठलाया और इनकार किया।
Roman Urdu (Maududi)Humne Firoun ko apni sabhi nishaniyan dikayi magar woh jhutlaye chala gaya aur na maana
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney ussay apni sab nishaniyan dikha den lekin phir bhi uss ney jhutalaya aur inkaar ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने फिरौन को अपनी सभी निशानियां बताईं मगर वो झूठलाये चला गया और ना माना
عَرَبِيقالَ أَجِئتَنا لِتُخرِجَنا مِن أَرضِنا بِسِحرِكَ يا موسىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि हमें हमारी धरती से अपने जादू के द्वारा निकाल दे, ऐ मूसा!?
Roman Urdu (Maududi)Kehne laga “aey Moosa, kya tu hamare paas is liye aaya hai ke apne jaadu ke zoar se humko hamare mulk se nikal bahar karey
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney laga aey musa! Kiya tu iss liye aaya hai kay humen apnay jadoo kay zor say humaray mulk say bahir nikal dey
Devnagri Urdu (Maududi)कहने लगा "ऐ मूसा, क्या तू हमारे पास इस के लिए आया है के अपने जादू के जोर से हमको हमारे मुल्क से निकल बाहर करे
عَرَبِيفَلَنَأتِيَنَّكَ بِسِحرٍ مِثلِهِ فَاجعَل بَينَنا وَبَينَكَ مَوعِدًا لا نُخلِفُهُ نَحنُ وَلا أَنتَ مَكانًا سُوًى
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हिन्दी (Al-Omari)तो हम भी अवश्य तेरे पास ऐसा ही जादू लाएँगे, अतः तू हमारे और अपने बीच वादे का एक समय निर्धारित कर दे, कि न हम उसके ख़िलाफ़ हों और न तू, ऐसी जगह जो बराबर हो।
Roman Urdu (Maududi)Accha, hum bhi tere muqable mein waisa hi jaadu latey hain, tai karle kab aur kahan muqaabla karna hai, na hum is qarardaad se phirenge na tu Phiriyo , khule maidan mein saamne aaja”
Roman Urdu (Junagarhi)Acha hum bhi teray muqablay mein issi jaisa jadoo zaroor layen gay pus humaray aur apnay darmiyan aik waday ka waqt muqarrar ker ley kay na hum iss ka khof keren aur na tu saaf maidan mein muqabla ho
Devnagri Urdu (Maududi)अच्छा, हम भी तेरे मुकाबले में वैसा ही जादू लाते हैं, ताई कार्ले कब और कहां मुकाबला करना है, ना हम इस झगड़े से फिरेंगे ना तू फिरियो, खुले मैदान में सामने आजा”
عَرَبِيقالَ مَوعِدُكُم يَومُ الزّينَةِ وَأَن يُحشَرَ النّاسُ ضُحًى
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हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : तुम्हारे वादे का समय उत्सव का दिन है तथा यह कि लोग दिन चढ़े इकट्ठे हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha “jashn ka din tai hua, aur din chadhey log jama hon”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) ney jawab diya kay zeenat aur jashan kay din ka wada hai aur yeh kay log din charhay hi jama ho jayen
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा “जश्न का दिन ताई हुआ, और दिन चढ़े लोग जमा होन”
عَرَبِيفَتَوَلّىٰ فِرعَونُ فَجَمَعَ كَيدَهُ ثُمَّ أَتىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर फ़िरऔन वापस लौटा, उसने अपने सारे हथकंडे जुटाए, फिर आ गया।
Roman Urdu (Maududi)Firoun ne palat kar apne saare hathkande jama kiye aur muqaable mein aa gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Pus firaon lot gaya aur uss ney apnay hath kanday jama kiye phir aagaya
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौं ने पलट कर अपने सारे हथकंडे जमा किये और मुकाबले में आ गया
عَرَبِيقالَ لَهُم موسىٰ وَيلَكُم لا تَفتَروا عَلَى اللَّهِ كَذِبًا فَيُسحِتَكُم بِعَذابٍ ۖ وَقَد خابَ مَنِ افتَرىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)मूसा ने उन (जादूगरों) से कहा : तुम्हारा विनाश हो! अल्लाह पर कोई झूठ मत गढ़ना, नहीं तो वह तुम्हें यातना देकर नष्ट कर देगा और निश्चय विफल हुआ, जिसने झूठ गढ़ा।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne ( ain mauqe par giroh muqabil ko mukhatib karke) kaha “shamat ke maaron, na jhooti tohmatein (invent falsehood) baandho Allah par, warna woh ek sakht azaab se tumhara sattyanaas kardega, jhoot jisne bhi ghada woh na-murad hua”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) ney unn say kaha tumhari shamat aa chuki Allah Taalaa per jhoot aur iftra na bandho kay woh tumhen azabon say maliya mait ker dey yaad rakho woh kabhi kaamyaab na hoga jiss ney jhooti baat ghari
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने (ऐन मौके पर गिरो ​​मुकाबिल को मुखातिब करके) कहा "शामत के मारों, ना झूठी तोहमतें (झूठ का आविष्कार) बांधो अल्लाह पर, वरना वो एक सख्त अजाब से तुम्हारा सत्तियाना कर देगा, झूठ जिसने भी घड़ा वो ना-मुराद हुआ”
عَرَبِيفَتَنازَعوا أَمرَهُم بَينَهُم وَأَسَرُّوا النَّجوىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तो वे अपने मामले में आपस में मतभेद करने लगे और उन्होंने चुपके-चुपके कानाफूसी की।
Roman Urdu (Maududi)Yeh sunkar unke darmiyan ikhtilaf e raai ho gaya aur woh chupke chupke baham mashwarey karne lagey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus yeh log aapas kay mashwaron mein mukhtalif raye ho gaye aur chup ker chupkay chupkay mashwara kerney lagay
Devnagri Urdu (Maududi)ये सुनकर उनको दरमियान इख्तिलाफ ए राय हो गया और वो चुपके चुपके बहाम मशवरे करने लगे
عَرَبِيقالوا إِن هٰذانِ لَساحِرانِ يُريدانِ أَن يُخرِجاكُم مِن أَرضِكُم بِسِحرِهِما وَيَذهَبا بِطَريقَتِكُمُ المُثلىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)(कुछ ने) कहा : निःसंदेह ये दोनों जादूगर हैं, वे अपने जादू द्वारा तुम्हें तुम्हारे भूभाग से निकाल देना चाहते हैं और तुम्हारे सबसे अच्छे रास्ते (आदर्श प्रणाली) को समाप्त कर देना चाहते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir-e-kaar kuch logon ne kaha ke “yeh dono to mehaz jaadugar hain.Inka maqsad yeh hai ke apne jaadu ke zoar se tumko tumhari zameen se be-dakhal kardein aur tumhare misaali (ideal) tareeq-e-zindagi ka khatma kardein
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney lagay yeh dono mehaz jadoogar hain aur inn ka pukhta irada hai kay apney jadoo kay zor say tumhen tumharay mulk say nikal bahir keren aur tumharay behtareen mazhab ko barbaad ker den
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर-ए-कार कुछ लोगों ने कहा के “ये डोनो तो महज़ जादूगर हैं.इंका मक़सद ये है के अपने जादू के ज़ोर से तुमको तुम्हारी ज़मीन से बे-दख़ल करदें और तुम्हारे मिसाल (आदर्श) तारीख़-ए-ज़िंदगी का ख़तम करदें
عَرَبِيفَأَجمِعوا كَيدَكُم ثُمَّ ائتوا صَفًّا ۚ وَقَد أَفلَحَ اليَومَ مَنِ استَعلىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः तुम अपने उपाय को मज़बूत कर लो, फिर पंक्तिबद्ध होकर आ जाओ और निश्चय आज वही सफल होगा, जो हावी रहेगा।
Roman Urdu (Maududi)Apni saari tadberein aaj ikatthi karlo aur eka karke maidan mein aao. Bas yeh samajhlo ke aaj jo gaalib raha wahi jeet gaya.”
Roman Urdu (Junagarhi)To tum bhi apna koi dao utha na rakho phir saff bandi ker kay aao. Jo ghalib aagaya wohi bazi ley gaya
Devnagri Urdu (Maududi)अपनी सारी तदबीरें आज इकाथी करलो और एका करके मैदान में आओ। बस ये समझलो के आज जो गालिब रहा वही जीत गया।”
عَرَبِيقالوا يا موسىٰ إِمّا أَن تُلقِيَ وَإِمّا أَن نَكونَ أَوَّلَ مَن أَلقىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ मूसा! या तो तुम फेंको या यह कि हम पहले फेंकने वाले हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Jaadugar bole “Moosa, tum phenkte ho ya pehle hum phenkein?”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney lagay aey musa! Ya to tu pehlay daal ya hum pehlay dalney walay bann jayen
Devnagri Urdu (Maududi)जादूगर बोले "मूसा, तुम फेंकते हो या पहले हम फेंकते हो?"
عَرَبِيقالَ بَل أَلقوا ۖ فَإِذا حِبالُهُم وَعِصِيُّهُم يُخَيَّلُ إِلَيهِ مِن سِحرِهِم أَنَّها تَسعىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : बल्कि तुम्हीं फेंको। फिर उनकी रस्सियाँ तथा लाठियाँ, उसकी कल्पना में आता था कि उनके जादू के कारण सचमुच दौड़ रही हैं।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha “nahin, tumhi phenko” yakayak unki rassiyan aur unki laathiyan unke jaadu ke zoar se Moosa ko daudti hui mehsoos hone lagi
Roman Urdu (Junagarhi)Jawab diya kay nahi tum hi pehlay dalo. Abb to musa (alh-e-salam) ko yeh khayal guzrney laga kay unn ki rasiyan aur lakriyan unn kay jadoo kay zor say dor bhag rahi hain
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा "नहीं, तुम्हीं फेंको" क्योंकि उनकी रसियां ​​और उनकी लाठियां उनके जादू के ज़ोर से मूसा को दौड़ती हुई महसूस होने लगी
عَرَبِيفَأَوجَسَ في نَفسِهِ خيفَةً موسىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तो मूसा ने अपने मन में एक डर महसूस किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur moosa apne dil mein darr gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Pus musa (alh-e-salam) ney apney dil hi dil mein darr mehsoos kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और मूसा अपने दिल में डर गया
عَرَبِيقُلنا لا تَخَف إِنَّكَ أَنتَ الأَعلىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)हमने कहा : डरो मत, निश्चित रूप से तू ही प्रबल होगा।
Roman Urdu (Maududi)Humne kaha “mat darr, tu hi galib rahega
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney farmay kuch khof na ker yaqeena tu hi ghalib aur bartar rahey ga
Devnagri Urdu (Maududi)हमने कहा "मत डर, तू ही गालिब रहेगा"
عَرَبِيوَأَلقِ ما في يَمينِكَ تَلقَف ما صَنَعوا ۖ إِنَّما صَنَعوا كَيدُ ساحِرٍ ۖ وَلا يُفلِحُ السّاحِرُ حَيثُ أَتىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और फेंक दे, जो तेरे दाहिने हाथ में है, वह निगल जाएगा जो कुछ उन्होंने रचा है। निःसंदेह उन्होंने जो कुछ रचा है, वह जादूगर की चाल है और जादूगर जहाँ भी आए, सफल नहीं होता।
Roman Urdu (Maududi)Phenk jo kuch tere haath mein hai, abhi inki saari banawati cheezon ko ningle (swallow) jata hai, yeh jo kuch bana kar laye hain yeh to jaadugar ka fareb hai, aur jaadugar kabhi kamiyab nahin ho sakta, khwah kisi shaan se woh aaye”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur teray dayen hath mein jo hai ussay daal dey kay unn ki tamam karigari ko woh nigal jaye enhon ney jo kuch banaya hai yeh sirf jadoogaron kay kartab hain aur jadoogar kahin say bhi aaye kaamyab nahi hota
Devnagri Urdu (Maududi)फेंक जो कुछ तेरे हाथ में है, अभी इनकी सारी बनावती चीज़ों को निगल जाता है, ये जो कुछ बना कर लाए हैं ये तो जादूगर का फरेब है, और जादूगर कभी कामयाब नहीं हो सकता, ख़्वाह किसी शान से वो आये”
عَرَبِيفَأُلقِيَ السَّحَرَةُ سُجَّدًا قالوا آمَنّا بِرَبِّ هارونَ وَموسىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जादूगर सजदे में गिर गए, उन्होंने कहा : हम हारून और मूसा के रब पर ईमान लाए।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir ko yahi hua ke saarey jaadugar sajde mein gira diye gaye aur pukar utthey “ maan liya humne Haroon aur Moosa ke Rubb ko”
Roman Urdu (Junagarhi)Abb to tamam jadoogar sajday mein girr paray aur pukar uthay kay hum to haroon (alh-e-salam) aur musa (alh-e-salam) kay rab per eman laye
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर को यहीं हुआ के सारे जादूगर सजदे में गिरा दिए गए और पुकार उठे "मान लिया हमने हारून और मूसा के रब को"
عَرَبِيقالَ آمَنتُم لَهُ قَبلَ أَن آذَنَ لَكُم ۖ إِنَّهُ لَكَبيرُكُمُ الَّذي عَلَّمَكُمُ السِّحرَ ۖ فَلَأُقَطِّعَنَّ أَيدِيَكُم وَأَرجُلَكُم مِن خِلافٍ وَلَأُصَلِّبَنَّكُم في جُذوعِ النَّخلِ وَلَتَعلَمُنَّ أَيُّنا أَشَدُّ عَذابًا وَأَبقىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : तुम उसपर ईमान ले आए इससे पहले कि मैं तुम्हें अनुमति दूँ? निश्चय ही यह तुम्हारा बड़ा है, जिसने तुम्हें जादू सिखाया है। इसलिए निश्चित रूप से मैं तुम्हारे हाथ और तुम्हारे पैर विपरीत दिशा से बुरी तरह काट दूँगा, और अवश्य ही तुम्हें खजूर के तनों पर सूली दूँगा तथा निश्चय ही तुम अवश्य जान लोगे कि हममें से कौन अधिक कठोर एवं स्थायी यातना देने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Firoun ne kaha “tum iman le aaye qabl iske ke main tumhein iski ijazat deta? Maloom ho gaya ke yeh tumhara guru hai jisne tumhein jaadugari sikhayi thi. Accha ab main tumhare haath paon mukhalif simton (alternate sides ) se katwata hoon aur khajoor ke tano(trunks) par tumko sooli deta hoon, phir tumhein pata chal jayega ke hum dono mein se kiska azaab zyada sakht aur dair pa hai” (yani main tumhein zyada sakht saza de sakta hoon ya Moosa)
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon kehnay laga kiya meri ijazat say pehlay hi tum iss per eman ley aaye? Yaqeenan yehi tumhara woh bara buzrug hai jiss ney tum sab ko jadoo sikhaya hai (sunn lo) mein tumharay hath paon ultay seedhay katwa ker tum sab ko khajoor kay tano mein sooli per latakwa doon ga aur tumhen poori tarah maloom hojaye ga kay hum mein say kiss ki maar ziyada sakht aur dairpaa hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौन ने कहा "तुम ईमान ले आए क़ब्ल इसके मैं तुम्हें इसकी इजाज़त देता? मालूम हो गया के ये तुम्हारा गुरु है जिसने तुम्हें" जादूगरी सिखाई थी। अच्छा अब मैं तुम्हारे हाथ पौन मुखालिफ सिमटन (वैकल्पिक पक्ष) से ​​कटवाता हूं और खजूर के तानो (चड्डी) पर तुमको सूली देता हूं, फिर तुम्हें पता चल जाएगा के हम दोनों में से किसका अजब फर्क और देर पर है” (यानी मैं तुम्हें) ज़्यादा सख्त सज़ा दे सकता हूं या मूसा)
عَرَبِيقالوا لَن نُؤثِرَكَ عَلىٰ ما جاءَنا مِنَ البَيِّناتِ وَالَّذي فَطَرَنا ۖ فَاقضِ ما أَنتَ قاضٍ ۖ إِنَّما تَقضي هٰذِهِ الحَياةَ الدُّنيا
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हम तुझे कदापि तरजीह नहीं देंगे उन स्पष्ट तर्कों पर जो हमारे पास आए हैं और उसपर, जिसने हमें पैदा किया है। अतः फैसला कर, जो तू फ़ैसला करने वाला है। तू केवल इस दुनिया के जीवन का फ़ैसला कर सकता है।
Roman Urdu (Maududi)Jaadugaron (magicians) ne jawab diya “qasam hai us zaat ki jisne humein paida kiya hai, yeh hargiz nahin ho sakta ke hum roshan nishaniyan samne aa janey ke baad bhi (sadaqat par) tujhey tarjeeh dein. Tu jo kuch karna chahey karle, tu zyada se zyada bas isi duniya ki zindagi ka faisla kar sakta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney jawab diya kay na-mumkin hai kay hum tujhay tarjeeh den inn daleelon per jo humaray samney aa chukin aur uss Allah per jiss ney humen peda kiya hai abb to jo kuch tu kerney wala hai ker guzar tu jo kuch bhi hukum chala sakta hai wo issi duniyawi zindagi mein hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)जादूगरों (जादूगरों) ने जवाब दिया "कसम है उस जात की जिसने हमने अदा किया है, ये हरगिज नहीं हो सकता के हम रोशन निशानियां सामने आ जाने के बाद भी (सदाकत पर) तुझे तर्जीह दें। तू जो कुछ करना चाहे करले, तू ज्यादा से ज्यादा बस इसी दुनिया की जिंदगी का फैसला कर सकता है
عَرَبِيإِنّا آمَنّا بِرَبِّنا لِيَغفِرَ لَنا خَطايانا وَما أَكرَهتَنا عَلَيهِ مِنَ السِّحرِ ۗ وَاللَّهُ خَيرٌ وَأَبقىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम अपने पालनहार पर ईमान लाए हैं, ताकि वह हमारे लिए हमारे पापों और जादू के उन कामों को क्षमा कर दे, जो तूने हमें करने के लिए मजबूर किया है और अल्लाह सर्वोत्तम और सदा रहने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Hum to apne Rubb par iman le aaye taa-ke woh hamari khatayein maaf karde, aur is jaadugari se jispar tu nay humein majboor kiya tha darguzar farmaye. Allah hi accha hai aur wahi baaqi rehne waala hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Hum (iss umeed say) apney perwerdigar per eman laye kay woh humari khatayen moaf farma dey aur (khaas ker) kadoogari (ka gunah) jiss per tum ney humen majboor kiya hai Allah hi behtar aur hamesha baqi rehney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)हम तो अपने रब पर ईमान ले आए ता-के वो हमारी खातें माफ करदे, और इस जादूगरी से जिसपर तू ने हमें मजबूर किया था दरगुजर फरमाये। अल्लाह ही अच्छा है और वही बाक़ी रहने वाला है”
عَرَبِيإِنَّهُ مَن يَأتِ رَبَّهُ مُجرِمًا فَإِنَّ لَهُ جَهَنَّمَ لا يَموتُ فيها وَلا يَحيىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तथ्य यह है कि जो अपने पालनहार के पास अपराधी बनकर आएगा, तो निश्चित रूप से उसी के लिए नरक है, जिसमें न वह मरेगा और न जिएगा।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke jo mujrin bankar apne Rubb ke huzoor haazir hoga uske liye jahannum hai jismein woh na jiyega na marega
Roman Urdu (Junagarhi)Baat yehi hai kay jo bhi gunehagaar bann ker Allah Taalaa kay haan hazir hoga uss kay liye dozakh hai jahan na maut hogi na zindagi
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के जो मुजरीन बनकर अपने रब के हुज़ूर हाज़िर होगा उसके लिए जहन्नुम है जिसमें वो ना जिएगा ना मरेगा
عَرَبِيوَمَن يَأتِهِ مُؤمِنًا قَد عَمِلَ الصّالِحاتِ فَأُولٰئِكَ لَهُمُ الدَّرَجاتُ العُلىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो उसके पास मोमिन बनकर आएगा कि उसने अच्छे कर्म किए होंगे, तो यही लोग हैं जिनके लिए सर्वोच्च पद हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo uske huzoor momin ki haisiyat se haazir hoga, jisne neik amal kiye hongey, aisey sab logon ke liye buland darje hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo bhi uss kay pass eman ki halat mein hazir hoga aur uss ney aemaal bhi nek kiye hongay uss kay liye buland-o-bala darjay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जो उसके हुज़ूर मोमिन की हकीकत से हाज़िर होगा, जिसने कोई अमल किये होंगे, ऐसे सब लोगों के लिए बुलंद दर्जे हैं
عَرَبِيجَنّاتُ عَدنٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها ۚ وَذٰلِكَ جَزاءُ مَن تَزَكّىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)स्थायी निवास के बाग़, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, उनमें हमेशा के लिए रहने वाले हैं और यह उसका प्रतिफल है, जो पवित्र हुआ।
Roman Urdu (Maududi)Sada bahaar baagh (gardens) hain jinke nichey nehrein beh rahi hongi Un mein woh hamesha rahenge.yeh jaza hai us shaks ki jo pakeezgi ikhtiyar karey
Roman Urdu (Junagarhi)Hameshgi wali jannaten jin kay neechay nehren lehren ley rahi hain jahan woh hamesha (hamesha) rahen gay. Yehi inaam hai her uss shaks ka jo pak hai
Devnagri Urdu (Maududi)सदा बहार बाग़ (बगीचे) हैं जिनके आला नहरें बह रही होंगी उन में वो हमेशा रहेंगे। ये जजा है उस शक्स की जो पकीज़गी इख्तियार करे
عَرَبِيوَلَقَد أَوحَينا إِلىٰ موسىٰ أَن أَسرِ بِعِبادي فَاضرِب لَهُم طَريقًا فِي البَحرِ يَبَسًا لا تَخافُ دَرَكًا وَلا تَخشىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय ही हमने मूसा की ओर वह़्य की कि मेरे बंदो को रातों-रात ले जा, फिर उनके लिए समुद्र में एक सूखा मार्ग बना, न तू पकड़े जाने से भय खाएगा और न डरेगा।
Roman Urdu (Maududi)Humne Moosa par wahee ki ke ab raat-o-raat mere bandon ko lekar chal padh, aur unke liye samandar mein sukhi sadak (dry path) bana le, tujhe kisi ke taaqub ka zara khauf na ho aur na (samandar ke beech se guzarte huey) darr lagey
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney musa (alh-e-salam) ki taraf wahee nazil faramee kay tu raton raat meray bandon ko ley chal aur inn kay liye darya mein khushk raasta bana ley phir na tujhay kissi kay aa pakarney ka khatra hoga na darr
Devnagri Urdu (Maududi)हमने मूसा पर वही की अब रात-ओ-रात मेरे बंदों को लेकर चल पढ़, और उनके लिए समंदर में सुखी सड़क (सूखी राह) बना ले, तुझे किसी के ताक़ुब का ज़रा ख़ौफ़ ना हो और ना (समंदर के बीच से गुज़रते हुए) डर लगे
عَرَبِيفَأَتبَعَهُم فِرعَونُ بِجُنودِهِ فَغَشِيَهُم مِنَ اليَمِّ ما غَشِيَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)फिर फ़िरऔन ने अपनी सेना के साथ उनका पीछा किया, तो उन्हें समुद्र से उस चीज़ ने ढाँप लिया जिसने उन्हें ढाँप लिया।
Roman Urdu (Maududi)Peechey se Frioun apne laskhar lekar pahucha aur phir samandar unpar chaa gaya jaisa ke chaa jaane ka haqq tha
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon ney apney lashkaron samet inn ka taaqqub kiya phir to darya inn sab per chah gaya jaisa kuch chah janey wala tha
Devnagri Urdu (Maududi)पीछे से फ्राईउन अपने लश्कर लेकर पहुँचे और फिर समंदर उन पर छा गया जैसा के चा जाने का हक़ था
عَرَبِيوَأَضَلَّ فِرعَونُ قَومَهُ وَما هَدىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और फ़िरऔन ने अपनी क़ौम को गुमराह किया और उन्हें सीधे रास्ते पर न चलाया।
Roman Urdu (Maududi)Firoun ne apni qaum ko gumraah hi kiya tha, koi saheeh rehnumayi nahin ki thi
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon ney apni qom ko gumrahi mein daal diya aur seedha raasta na dikhaya
Devnagri Urdu (Maududi)फ़िरौन ने अपनी क़ौम को गुमराह ही किया था, कोई सही रहनुमाई नहीं की थी
عَرَبِييا بَني إِسرائيلَ قَد أَنجَيناكُم مِن عَدُوِّكُم وَواعَدناكُم جانِبَ الطّورِ الأَيمَنَ وَنَزَّلنا عَلَيكُمُ المَنَّ وَالسَّلوىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ बनी इसराईल! निःसंदेह हमने तुम्हें तुम्हारे शत्रुओं से छुड़ाया और तुम्हें पर्वत के दाहिनी ओर का वचन दिया और तुमपर 'मन्न' और 'सल्वा' उतारा।
Roman Urdu (Maududi)Aey bani Israel, humne tumko tumhare dushman se najaat di, aur Tur ke dayein jaanib tumhari haazri ke liye waqt muqarrar kiya aur tumpar manna o salwa (quails) utara
Roman Urdu (Junagarhi)Aey bani israeel! Dekho hum ney tumhen tumharay dushman say nijat di aur tum say koh-e-toor ki dayen taraf ka wada kiya aur tum per mann-o-salwa utara
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ बानी इसराइल, हमने तुमको तुम्हारे दुश्मन से नजात दी, और तूर के दिन जानिब तुम्हारी हाज़री के लिए वक़्त मुक़र्रर किया और तुमपर मन्ना ओ सलवा (बटेर) उतारा
عَرَبِيكُلوا مِن طَيِّباتِ ما رَزَقناكُم وَلا تَطغَوا فيهِ فَيَحِلَّ عَلَيكُم غَضَبي ۖ وَمَن يَحلِل عَلَيهِ غَضَبي فَقَد هَوىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)खाओ उन पवित्र चीज़ों में से, जो हमने तुम्हें प्रदान की हैं तथा उनमें हद से न बढ़ो। अन्यथा तुमपर मेरा प्रकोप उतरेगा और जिसपर मेरा प्रकोप उतरा, तो निश्चय उसका सर्वनाश हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Khao hamara diya hua paak rizq aur isey kha kar sarkashi na karo warna tumpar mera gazab toot padega. Aur jispar mera gazab toota woh phir gir kar hi raha
Roman Urdu (Junagarhi)Tum humari di hui pakeeza rozi khao aur iss mein hadd say aagay na barho werna tum per mera ghazab nazil hoga aur jiss per mera ghazab nazil hojaye woh yaqeenan tabah hua
Devnagri Urdu (Maududi)खाओ हमारा दिया हुआ पाक ​​रिज़क और इसे खा कर सरकशी ना करो वरना तुमपर मेरा गजब टूट पड़ेगा। और जिसपर मेरा गजब टूटा वो फिर गिर कर ही रहा
عَرَبِيوَإِنّي لَغَفّارٌ لِمَن تابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ صالِحًا ثُمَّ اهتَدىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह मैं निश्चय उसको बहुत क्षमा करने वाला हूँ, जो तौबा करे और ईमान लाए और अच्छा कर्म करे, फिर सीधे मार्ग पर चले।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jo tawba karle aur iman laye aur neik amal karey, phir seedha chalta rahey, uske liye main bahut darguzar karne wala hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Haan be-shak mein unhen bakhsh denay wala hun jo tauba keren eman layen nek amal keren aur raah-e-raast per bhi rahen
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जो तौबा कार्ले और ईमान लाए और नेक अमल करे, फिर सीधा चलता रहे, उसके लिए मैं बहुत दरगुजर करने वाला हूं
عَرَبِي۞ وَما أَعجَلَكَ عَن قَومِكَ يا موسىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुझे तेरी जाति से जल्दी क्या चीज़ ले आई ऐ मूसा!?
Roman Urdu (Maududi)Aur kya cheez tumhein apni qaum se pehle le aayi Moosa
Roman Urdu (Junagarhi)Aey musa! Tujhay apni qom say (ghafil kerkay) kaun si cheez jaldi ley aaee
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या चीज तुम्हें अपनी कौम से पहले ले आई मूसा
عَرَبِيقالَ هُم أُولاءِ عَلىٰ أَثَري وَعَجِلتُ إِلَيكَ رَبِّ لِتَرضىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : वे मेरे पीछे ही हैं और मैं तेरी ओर जल्दी आ गया, ऐ मेरे पालनहार! ताकि तू प्रसन्न हो जाए।
Roman Urdu (Maududi)Usne arz kiya “woh bas mere peechey aa hi rahey hain. Main jaldi karke tere huzoor aa gaya hoon aey mere Rubb, taa-ke tu mujhse khush ho jaye”
Roman Urdu (Junagarhi)Kaha kay woh log bhi meray peechay hi peechay hain aur mein ney aey rab! Teri taraf jaldi iss liye ki kay tu khush hojaye
Devnagri Urdu (Maududi)उसने अर्ज़ किया “वो बस मेरे पीछे आ ही रहे हैं। मैं जल्दी करके तेरे हुजूर आ गया हूं ऐ मेरे रब, ता-के तू मुझसे खुश हो जाए”
عَرَبِيقالَ فَإِنّا قَد فَتَنّا قَومَكَ مِن بَعدِكَ وَأَضَلَّهُمُ السّامِرِيُّ
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हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) फरमाया : तो निश्चय हमने तेरे पीछे तेरी जाति के लोगों को परीक्षा में डाल दिया है और सामिरी ने उन्हें पथभ्रष्ट कर दिया है।
Roman Urdu (Maududi)Farmaya “accha, to suno, humne tumhare peechey tumhari qaum ko aazmaish mein daal diya aur Saamri ne unhein gumraah kar dala”
Roman Urdu (Junagarhi)Farmaya! Hum ney teri qom ko teray peechay aazmaeesh mein daal diya aur unhen samri ney behka diya
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया “अच्छा, तो सुनो, हमने तुम्हारे पीछे तुम्हारी क़ौम को आजमाइश में डाल दिया और सामरी ने उन्हें गुमराह कर डाला”
عَرَبِيفَرَجَعَ موسىٰ إِلىٰ قَومِهِ غَضبانَ أَسِفًا ۚ قالَ يا قَومِ أَلَم يَعِدكُم رَبُّكُم وَعدًا حَسَنًا ۚ أَفَطالَ عَلَيكُمُ العَهدُ أَم أَرَدتُم أَن يَحِلَّ عَلَيكُم غَضَبٌ مِن رَبِّكُم فَأَخلَفتُم مَوعِدي
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हिन्दी (Al-Omari)फिर मूसा ग़ुस्से से भरा हुआ, खेद में डूबा हुआ अपनी जाति की ओर वापस आया। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या तुम्हारे रब ने तुम्हें अच्छा वादा नहीं दिया था? तो क्या वह अवधि तुम पर लंबी हो गई, या तुमने चाहा कि तुमपर तुम्हारे रब का कोई प्रकोप उतरे? तो तुमने मेरा वादा तोड़ दिया।
Roman Urdu (Maududi)Moosa sakht gussey aur ranjj ki halat mein apni qaum ki taraf palta. Jaakar usne kaha “aey meri qaum ke logon, kya tumhare Rubb ne tumse acchey wadey nahin kiye thay? Kya tumhein din lag gaye hain? Ya tum apne Rubb ka gazab hi apne upar lana chahte thay ke tumne mujhse wada khilafi ki?”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus musa (alh-e-salam) sakht ghazab naak hoker ranj kay sath wapis lotay aur kehnay lagay kay aey meri qom walo! Kiya tum say tumharay perwerdigar ney nek wada nahi kiya tha? Kiya iss ki muddat tumhen lambi maloom hui? Bulkay tumhara irada hi yeh hai kay tum per tumharay perwerdigar ka ghazab nazil ho? Kay tum ney meray waday ka khilaf kiya
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा सच गुस्से और रंज की हालत में अपनी क़ौम की तरफ पलटा। जाकर उसने कहा “ऐ मेरी क़ौम के लोग, क्या तुम्हारे रब ने तुमसे अच्छे वादे नहीं किये थे? क्या तुम्हारे दिन लग गए हैं? या तुम अपने रब का गजब ही अपना ऊपर लाना चाहते थे के तुमने मुझसे वादा खिलाफी की?”
عَرَبِيقالوا ما أَخلَفنا مَوعِدَكَ بِمَلكِنا وَلٰكِنّا حُمِّلنا أَوزارًا مِن زينَةِ القَومِ فَقَذَفناها فَكَذٰلِكَ أَلقَى السّامِرِيُّ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हमने अपने अधिकार से आपके वचन का उल्लंघन नहीं किया, लेकिन लोगों के गहनों का कुछ बोझ हमपर लाद दिया गया था, तो हमने उन्हें फेंक दिया और ऐसे ही सामिरी ने फेंक दिया।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “humne aap se wada khilafi kuch apne ikhtiyar se nahin ki. Maamla yeh hua ke logon ke zewarat ke bojh se hum ladh gaye thay aur humne bas unko phenk diya tha” phir isi tarah Saamri ne bhi kuch dala
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney jawab diya kay hum ney apney ikhtiyar say aap kay sath waday ka khilaf nahi kiya. Bulkay hum per zewraat qom kay bojh laad diye gaye thay unhen hum ney daal diya aur issi tarah samri ney bhi daal diye
Devnagri Urdu (Maududi)उनको ने जवाब दिया “हमने आप से वादा खिलाफी कुछ अपने इख्तियार से नहीं की। मामला ये हुआ के लोगों के ज़ेवरत के बोझ से हम लड़ गए थे और हमने बस उनको फेंक दिया था'' फिर इसी तरह सामरी ने भी कुछ डाला
عَرَبِيفَأَخرَجَ لَهُم عِجلًا جَسَدًا لَهُ خُوارٌ فَقالوا هٰذا إِلٰهُكُم وَإِلٰهُ موسىٰ فَنَسِيَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने उनके लिए एक बछड़ा निकाला, जो मात्र शरीर था, जिसकी गाय की सी आवाज़ थी। तो उन्होंने कहा : यही तुम्हारा पूज्य तथा मूसा का पूज्य है, सो वह भूल गया है।
Roman Urdu (Maududi)Aur unke liye ek bachde (shape of a calf) ki murat banakar nikal laya jissey bail (ox) ki si aawaz nikalti thi. Log pukar utthey “yahi hai tumhara khuda aur Moosa ka khuda, Moosa isey bhool gaya”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir uss ney logon kay liye aik bachra nikal khara kiya yaani bachray ka butt jiss ki gaye ki si awaz bhi thi phir kehney lagay kay yehi tumhara bhi mabood hai aur musa ka bhi lekin musa bhool gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)और उनके लिए एक बच्चे (बछड़े का आकार) की मूरत बनकर निकल लाया जिसकी जमानत (बैल) की सी आवाज निकलती थी। लोग पुकार उठे "यही है तुम्हारा खुदा और मूसा का खुदा, मूसा इसे भूल गया"
عَرَبِيأَفَلا يَرَونَ أَلّا يَرجِعُ إِلَيهِم قَولًا وَلا يَملِكُ لَهُم ضَرًّا وَلا نَفعًا
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वे देखते नहीं कि वह न उनकी किसी बात का उत्तर देता है और न वह उनके किसी नुक़सान का मालिक है और न किसी लाभ का।
Roman Urdu (Maududi)Kya woh dekhte na thay ke na woh unki baat ka jawab deta hai aur na unke nafa o nuksan ka kuch ikhtiyar rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh gumrah log yeh bhi nahi dekhtay kay woh to inn ki baat ka jawab bhi nahi dey sakta aur na inn kay kissi buray bhalay ka ikhtiyar rakhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वो देखते ना थे के ना वो उनकी बात का जवाब देता है और ना उनके नफा ओ नुक्सान का कुछ इख्तियार रखता है।
عَرَبِيوَلَقَد قالَ لَهُم هارونُ مِن قَبلُ يا قَومِ إِنَّما فُتِنتُم بِهِ ۖ وَإِنَّ رَبَّكُمُ الرَّحمٰنُ فَاتَّبِعوني وَأَطيعوا أَمري
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हारून उनसे पहले ही कह चुका था : ऐ मेरी जाति के लोगो! बात यह है कि इसके द्वारा तुम्हारी परीक्षा की गई है और निश्चय तुम्हारा पालनहार रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) ही है। अतः मेरा अनुसरण करो तथा मेरे आदेश का पालन करो।
Roman Urdu (Maududi)Haroon (Moosa ke aane se ) pehle hi unse keh chuka tha ke “Logon, tum iski wajah se fitne (trial) mein padh gaye ho, tumhara Rubb to Rehman hai, pas tum meri pairwi karo aur meri baat maano.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur haroon (alh-e-salam) ney iss say pehlay hi inn say keh diya tha aey meri qom walo! Iss bachray say to sirf tumhari aazmaeesh ki gaee hai tumahra haqeeqi perwerdigar to Allah rehman hi hai pus tum sab meri tabey daari kero. Aur meri baat manray chalay jao
Devnagri Urdu (Maududi)हारून (मूसा के आने से) पहले ही उनसे कह चुका था के "लोगन, तुम इसकी वजह से फिटने (ट्रायल) में पढ़ गए हो, तुम्हारा रब तो रहमान है, पास तुम मेरी जोड़ी करो और मेरी बात मानो।"
عَرَبِيقالوا لَن نَبرَحَ عَلَيهِ عاكِفينَ حَتّىٰ يَرجِعَ إِلَينا موسىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हम इसी पर जमें बैठे रहेंगे, यहाँ तक कि मूसा हमारे पास वापस आ जाए।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne ussey kehdiya ke “hum isi ki parastish karte rahenge jab tak ke Moosa wapas na aa jaaye”
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney jawab diya kay musa (alh-e-salam) ki wapsi tak to hum issi kay mujawar banay bethay rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने उसे कहा के "हम इसी तरह करते रहेंगे जब तक के मूसा वापस न आ जाएं"
عَرَبِيقالَ يا هارونُ ما مَنَعَكَ إِذ رَأَيتَهُم ضَلّوا
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हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : ऐ हारून! तुझे किस बात ने रोका, जब तूने उन्हें देखा कि वे पथभ्रष्ट हो गए हैं?
Roman Urdu (Maududi)Moosa (qaum ko daatne ke baad Haroon ki taraf palta aur ) bola “ Haroon, tumne jab dekha tha ke yeh gumraah ho rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) kehnay lagay aey musa haroon! Enhen gumrah hotay hua dekhtay huye tujhay kiss cheez ney roka tha
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा (कौम को डेटने के बाद हारून की तरफ पलटा और) बोला " हारून, तुमने जब देखा था के ये गुमराह हो रहे हैं
عَرَبِيأَلّا تَتَّبِعَنِ ۖ أَفَعَصَيتَ أَمري
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हिन्दी (Al-Omari)कि तू मेरा अनुसरण न करे? तो क्या तूने मेरे आदेश की अवहेलना की?
Roman Urdu (Maududi)To kis cheez ne tumhara haath pakda tha ke mere tareeqe par amal na karo? Kya tumne mere hukum ki khilaf-warzi ki
Roman Urdu (Junagarhi)Kay tu meray peechay na aaya. Kiya tu bhi meray farmaan ka na-farmaan bann betha
Devnagri Urdu (Maududi)तो किस चीज़ ने तुम्हारा हाथ पकड़ा था के मेरे तरीक़े पर अमल ना करो? क्या तुमने मेरे हुकुम की ख़िलाफ़-वारज़ी की
عَرَبِيقالَ يَا ابنَ أُمَّ لا تَأخُذ بِلِحيَتي وَلا بِرَأسي ۖ إِنّي خَشيتُ أَن تَقولَ فَرَّقتَ بَينَ بَني إِسرائيلَ وَلَم تَرقُب قَولي
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरी माँ के बेटे! न मेरी दाढ़ी पकड़ और न मेरा सिर। मैं तो इससे डरा कि तू कहेगा : तूने बनी इसराईल में फूट डाल दी और मेरी बात की प्रतीक्षा नहीं की।
Roman Urdu (Maududi)Haroon ne jawab diya “ aey meri Maa ke bete , meri daadi (beard) na pakad, na mere sar ke baal khench, mujhey is baat ka darr tha ke tu aa kar kahega tumne bani Israel mein phoot daal di aur meri baat ka paas na kiya”
Roman Urdu (Junagarhi)Haroon (alh-e-salam) ney kaha aey meray maa jaye bhai! Meri darhi na pakar aur sir kay baal na kheench mujhay to sirf yeh khayal daaman geer hua kay kahin aap yeh (na) farmayen kay tu ney bani israeel mein tafarqa daal diya aur meri baar ka intezar na kiya
Devnagri Urdu (Maududi)हारून ने जवाब दिया “ऐ मेरी माँ के बेटे, मेरी दादी (दाढ़ी) ना पकड़, ना मेरे सर के बाल खींच, मुझे इस बात का डर था के” तू आ कर कहेगा तुमने बनी इजराइल में फूट डाल दी और मेरी बात का पास ना किया”
عَرَبِيقالَ فَما خَطبُكَ يا سامِرِيُّ
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हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : तो ऐ सामिरी! तोरा मामला क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha “Aur Saamri, tera kya maamla hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) ney poocha samri tera kiya moamla hai
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा “और सामरी, तेरा क्या मामला है?”
عَرَبِيقالَ بَصُرتُ بِما لَم يَبصُروا بِهِ فَقَبَضتُ قَبضَةً مِن أَثَرِ الرَّسولِ فَنَبَذتُها وَكَذٰلِكَ سَوَّلَت لي نَفسي
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : मैंने वह चीज़ देखी, जो इन लोगों नहीं देखी, तो मैंने रसूल के पदचिह्न से एक मुट्ठी उठाली, फिर मैंने उसे डाल दिया और मेरे दिल ने इसी तरह करना मेरे लिए सुसज्जित कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Usne jawab diya “ maine woh cheez dekhi jo in logon ko nazar na aayi, pas maine Rasool ke nakshe qadam se ek mutthi utha li aur usko daal diya, mere nafs ne mujhey kuch aisa hi sujhaya”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney jawab diya kay mujhay woh cheez dikhaee di jo enhen dikhaee na di to mein ney farstada-e-elahee kay naqsh-e-qadam say aik muthi bhar li ussay iss mein daal diya issi tarah meray dil ney yeh baat meray liye bhali bana di
Devnagri Urdu (Maududi)उसने जवाब दिया "मैंने वो चीज़ देखी जो इन लोगों को नज़र ना आई, लेकिन मैंने रसूल के नक्शे क़दम से एक मुट्ठी उठा ली और उसको डाल दिया, मेरे नफ्स ने मुझे कुछ ऐसा ही सुझाया"
عَرَبِيقالَ فَاذهَب فَإِنَّ لَكَ فِي الحَياةِ أَن تَقولَ لا مِساسَ ۖ وَإِنَّ لَكَ مَوعِدًا لَن تُخلَفَهُ ۖ وَانظُر إِلىٰ إِلٰهِكَ الَّذي ظَلتَ عَلَيهِ عاكِفًا ۖ لَنُحَرِّقَنَّهُ ثُمَّ لَنَنسِفَنَّهُ فِي اليَمِّ نَسفًا
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हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : "बस चला जा, निःसंदेह तेरे लिए जीवन भर यह है कि तू कहता रहे : मुझे स्पर्श न करना। और निःसंदेह तेरे लिए एक और भी वादा है, जो तुझसे कदापि न टलेगा। तथा अपने पूज्य को देख, जिसका तू पुजारी बना रहा, निश्चय हम उसे अवश्य अच्छी तरह जलाएँगे, फिर निश्चय ही उसे समुद्र में अच्छी तरह से उड़ा देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha, “accha to jaa, ab zindagi bhar tujhey yahi pukarte rehna hai ke mujhey na choona aur tere liye baaz-purs ka ek waqt muqarrar hai jo tujhse hargiz na taleyga aur dekh apne is khuda ko jispar tu richa (cherished so much) hua tha, ab hum usey jala daalenge aur reza reza karke dariya mein baha denge
Roman Urdu (Junagarhi)Kaha acha jaa duniya ki zindagi mein teri saza yehi hai kay tu kehta rehey kay mujhay na choona aur aik aur bhi wada teray sath hai jo tujh say hergiz na talay ga aur abb tu apney iss mabood ko bhi dekh lena jiss kay aetikaaf kiye huye tha kay hum issay jala ker darya mein raiza raiza ura den gay
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा, "अच्छा तो जा, अब जिंदगी भर तुझे यहीं पुकारते रहना है के मुझे ना छूना और तेरे लिए बाज़-पुर्स का एक वक्त मुकर्रर है जो तुझसे हरगिज़ ना तलेगा और देख अपना इस खुदा को जिस्पार तू ऋचा (इतना प्यार करता था) हुआ था, अब हम उसे जला डालेंगे और रेजा रेजा करके दरिया में बहाएंगे देंगे
عَرَبِيإِنَّما إِلٰهُكُمُ اللَّهُ الَّذي لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۚ وَسِعَ كُلَّ شَيءٍ عِلمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारा पूज्य तो अल्लाह ही है, जिसके अलावा कोई पूज्य नहीं, उसने हर चीज को ज्ञान से घेर रखा है।
Roman Urdu (Maududi)Logon, tumhara khuda to bas ek hi Allah hai jiske siwa koi aur khuda nahin hai, har cheez par uska ilm haawi hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Asal baat yehi hai kay tum sab ka mabood-e-bar haq sirf Allah hi hai uss kay siwa koi parastish kay qabil nahi. Uss ka ilm tamam cheezon per hawi hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन, तुम्हारा खुदा तो बस एक ही अल्लाह है जिसके सिवा कोई और खुदा नहीं है, हर चीज पर उसका इल्म है”
عَرَبِيكَذٰلِكَ نَقُصُّ عَلَيكَ مِن أَنباءِ ما قَد سَبَقَ ۚ وَقَد آتَيناكَ مِن لَدُنّا ذِكرًا
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हिन्दी (Al-Omari)इसी प्रकार हम आपको कुछ ऐसी ख़बरें सुनाते हैं जो गुज़र चुकी हैं और निःसंदेह हमने आपको अपनी तरफ़ से एक नसीहत प्रदान की है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), is tarah hum pichle guzre huey haalaat ki khabrein tumko sunate hain, aur humne khaas apne haan se tumko ek “zikr” (dars e naseehat) ata kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Issi tarah hum teray samney pehlay ki guzri hui waardaaten biyan farma rahen hain aur yaqeena hum tujhay apney pass say naseehat ata farma chukay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), इस तरह हम पिछले गुजरे हालात की खबरें तुमको सुनाते हैं, और हमने खास अपने हां से तुमको एक "ज़िक्र" (दरस ए हिदायत) अता किया है
عَرَبِيمَن أَعرَضَ عَنهُ فَإِنَّهُ يَحمِلُ يَومَ القِيامَةِ وِزرًا
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हिन्दी (Al-Omari)जो उससे मुँह फेरेगा, तो निश्चय ही वह क़ियामत के दिन एक भारी बोझ उठाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Jo koi issey moah moadega woh qayamat ke din sakht baar e gunaah uthayega
Roman Urdu (Junagarhi)Iss say jo mun pher ley ga woh yaqeenan qayamat kay din apna bhari bojh laday huye hoga
Devnagri Urdu (Maududi)जो कोई इसे मोह लेगा वो क़यामत के दिन साख बार ए गुनाह उठाएगा
عَرَبِيخالِدينَ فيهِ ۖ وَساءَ لَهُم يَومَ القِيامَةِ حِملًا
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हिन्दी (Al-Omari)वे उसमें हमेशा रहने वाले होंगे और क़ियामत के दिन वह उनके लिए बुरा बोझ होगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur aise sab log hamesha iske wabal mein giraftar rahenge, aur qayamat ke din unke liye (is jurm ki zimmedari ka bojh) bada takleef-de bojh hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss mein hamesha hi rahey ga aur inn kay liye qayamat kay din (bara) bojh hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐसे सब लोग हमेशा इसके वबल में गिरफ़्तार रहेंगे, और कयामत के दिन उनके लिए (जुर्म की है) जिम्मेदारी का बोझ) बड़ा तकलीफ-दे बोझ होगा
عَرَبِييَومَ يُنفَخُ فِي الصّورِ ۚ وَنَحشُرُ المُجرِمينَ يَومَئِذٍ زُرقًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन सूर में फूँका जाएगा और हम अपराधियों को उस दिन इस दशा में इकट्ठा करेंगे कि नीली आँखों वाले होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Us din jabke soor (trumphet) phoonka jayega aur hum mujrimo ko is haal mein gher layenge ke unki aankhein (dehshat ke marey) pathrayi hui hongi
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din soor phonka jayega aur gunehgaron ko hum uss din (dehshat ki waja say) neeli peeli aankhon kay sath gher layen gay
Devnagri Urdu (Maududi)उस दिन जबके सूर (तुरही) फूंका जाएगा और हम मुजरिमो को इस हाल में घेर लाएंगे के उनकी आंखें (देहशत के मारे) पथराई हुई होंगी
عَرَبِييَتَخافَتونَ بَينَهُم إِن لَبِثتُم إِلّا عَشرًا
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हिन्दी (Al-Omari)वे आपस में चुपके-चुपके कह रहे होंगे, तुम (संसार में) दस दिन के सिवा नहीं ठहरे।
Roman Urdu (Maududi)Aapas mein chupke chupke kahenge ke duniya mein mushkil hi se tumne koi dus(ten) din guzare honge
Roman Urdu (Junagarhi)Woh aapas mein chupkay chupkay keh rahey hongay kay hum to (duniya mein) sirf dus din hi rahey
Devnagri Urdu (Maududi)आपस में चुपके चुपके कहेंगे के दुनिया में मुश्किल ही से तुमने कोई दस दिन गुजारे होंगे
عَرَبِينَحنُ أَعلَمُ بِما يَقولونَ إِذ يَقولُ أَمثَلُهُم طَريقَةً إِن لَبِثتُم إِلّا يَومًا
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हिन्दी (Al-Omari)हम अधिक जानने वाले हैं जो कुछ वे कह रहे होंगे, जब उनका सबसे समझदार व्यक्ति कह रहा होगा कि तुम केवल एक दिन ठहरे हो।
Roman Urdu (Maududi)Humein khoob maloom hai ke woh kya baatein kar rahey hongey, (hum yeh bhi jaante hain ke) us waqt unmein se jo zyada se zyada mohtaat andaza lagane wala hoga woh kahega ke nahin, tumhari duniya ki zindagi bas ek din ki zindagi thi
Roman Urdu (Junagarhi)Jo kuch woh keh rahey hain uss ki haqeeqat say hum ba-khabar hain inn mein say sab say ziyada acha raah wala keh raha hoga kay tum to sirf aik hi din rahey
Devnagri Urdu (Maududi)हमें खूब मालूम है के वो क्या बातें कर रहे होंगे, (हम ये भी जानते हैं के) हमें वक्त उनके साथ जो ज्यादा से ज्यादा मोहताज अंदाज लगाने वाला होगा वो कहेगा के नहीं, तुम्हारी दुनिया की जिंदगी बस एक दिन की जिंदगी थी
عَرَبِيوَيَسأَلونَكَ عَنِ الجِبالِ فَقُل يَنسِفُها رَبّي نَسفًا
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हिन्दी (Al-Omari)वे आपसे पहाड़ों के विषय में पूछते हैं। आप कह दें कि मेरा पालनहार उन्हें उड़ाकर तितर-बितर कर देगा।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log tumse poochte hain ke aakhir us din yeh pahad kahan chale jayenge? Kaho ke mera Rubb unko dhool banakar uda dega
Roman Urdu (Junagarhi)Woh aap say paharon ki nisbat sawal kertay hain to aap keh den kay enhen mera rab raiza raiza ker kay ura dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग तुमसे पूछते हैं कि आखिर उस दिन ये पहाड़ कहां चले जायेंगे? कहो के मेरा रब उनको धूल बनाकर उड़ा देगा
عَرَبِيفَيَذَرُها قاعًا صَفصَفًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर धरती को एक समतल मैदान बनाकर छोड़ेगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur zameen ko aisa humwar chatiyal maidan bana dega (empty level plain)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur zamin ko bilkul humwaar saaf maidan kerkay chor dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और ज़मीन को ऐसा हमवार चटियाल मैदान बना देगा (खाली स्तर का मैदान)
عَرَبِيلا تَرىٰ فيها عِوَجًا وَلا أَمتًا
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हिन्दी (Al-Omari)तुम उसमें कोई टेढ़ापन और नीच-ऊँच नहीं देखोगे।
Roman Urdu (Maududi)Ke ismein tum koi bal aur salwat (neither curve nor crease) na dekhoge
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss mein to na kahin mor tor dekhay ga na oonch neech
Devnagri Urdu (Maududi)के इसमे तुम कोई बल और सलवात (न कर्व और न ही क्रीज़) ना देखोगे
عَرَبِييَومَئِذٍ يَتَّبِعونَ الدّاعِيَ لا عِوَجَ لَهُ ۖ وَخَشَعَتِ الأَصواتُ لِلرَّحمٰنِ فَلا تَسمَعُ إِلّا هَمسًا
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन वे पुकारने वाले का अनुसरण करेंगे, उसका अनुसरण करने से कोई विमुख नहीं होगा, और सभी आवाजें रहमान के लिए धीमी हो जाएँगी, फिर तुम एक बहुत ही धीमी आवाज के अलावा कुछ भी नहीं सुनोगे।
Roman Urdu (Maududi)Us roz sab log munadi (summoner /pukarne waley) ki pukar par seedhey chaley aayenge, koi zara akad na dikha sakega aur aawazein rehman ke aagey dub jayengi , ek sar-sarahat ke siwa tum kuch na sunoge
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din log pukarney walay kay peechay chalen gay jiss mein koi kuji na hogi aur Allah rehman kay samney tamam aawazen pust hojayen gi siwaye khusur phusur kay tujhay kuch bhi sunaee na dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)हमसे रोज़ सब लोग मुनादी (बुलाने वाले/पुकारने वाले) की पुकार पर सीधे चले आएंगे, कोई जरा अकड़ न दिखा सकेगा और आवाज़ें रहमान के आगे डब जाएंगी, एक सर-सरहत के सिवा तुम कुछ ना सुनोगे
عَرَبِييَومَئِذٍ لا تَنفَعُ الشَّفاعَةُ إِلّا مَن أَذِنَ لَهُ الرَّحمٰنُ وَرَضِيَ لَهُ قَولًا
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन सिफ़ारिश लाभ नहीं देगी, परंतु जिसके लिए रहमान अनुज्ञा दे और जिसके लिए वह बात करना पसंद करे।
Roman Urdu (Maududi)Us roz shafaat (intercession) kaargar na hogi, illa yeh ke kisi ko rehman iski ijazat de aur uski baat sunna pasand karey
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din sifarish kuch kaam na aaye gi magar jisay rehman hukum dey aur uss ki baat ko pasand farmaye
Devnagri Urdu (Maududi)हमसे रोज़ शफ़ात (मध्यस्थता) करगर ना होगी, इल्ला ये के किसी को रहमान इसकी इजाजत दे और उसकी बात सुन्ना पसंद करे
عَرَبِييَعلَمُ ما بَينَ أَيديهِم وَما خَلفَهُم وَلا يُحيطونَ بِهِ عِلمًا
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हिन्दी (Al-Omari)वह जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है और वे उसे अपने ज्ञान के घेरे में नहीं ला सकते।
Roman Urdu (Maududi)Woh logon ka agla pichla sub haal jaanta hai aur dusron ko iska poora ilm nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo kuch inn kay aagay peechay hai ussay Allah hi janta hai makhlooq ka ilm uss per hawi nahi hosakta
Devnagri Urdu (Maududi)वो लोगों का अगला पिछला सब हाल जानता है और दूसरों को इसका पूरा इल्म नहीं है
عَرَبِي۞ وَعَنَتِ الوُجوهُ لِلحَيِّ القَيّومِ ۖ وَقَد خابَ مَن حَمَلَ ظُلمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा सभी चेहरे उस जीवित रहने वाले, क़ायम रखने वाले लिए झुक जाएँगे और निश्चय विफल हो गया, जिसने अत्याचार का बोझ उठाया।
Roman Urdu (Maududi)Logon ke sar us hayyul qayyum (zinda aur qayam) ke aagey jhuk jayenge. Na-murad hoga jo us waqt kisi zulm ka baar (bojh)-e-gunaah uthaye huey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Tamam chehray uss zinda aur qaeem daeem mudabbir Allah kay samney kamal aajzi say jhukay huye hongay yaqeenan woh barbaad hua jiss ney zulm laad liya
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों के सर उस हय्युल कय्यूम (जिंदा और कयाम) के आगे झुक जायेंगे. ना-मुराद होगा जो हमें वक्त किसी ज़ुल्म का बार (बोझ)-ए-गुनाह उठाए हुए हो
عَرَبِيوَمَن يَعمَل مِنَ الصّالِحاتِ وَهُوَ مُؤمِنٌ فَلا يَخافُ ظُلمًا وَلا هَضمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो व्यक्ति नेक काम करे और वह मोमिन हो, तो वह न किसी अत्याचार से डरेगा और न अधिकार हनन से।
Roman Urdu (Maududi)Aur kisi zulm ya haqq talafi ka khatra na hoga us shaks ko jo neik amal karey aur iske saath woh momin bhi ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo nek aemal keray aur eman wala bhi ho to na ussay bey insafi ka khutka hoga na haq talfi ka
Devnagri Urdu (Maududi)और किसी ज़ुल्म या हक़ तलाफ़ी का ख़तरा ना होगा उस शक्स को जो नेक अमल करे और इसके साथ वो मोमिन भी हो
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ أَنزَلناهُ قُرآنًا عَرَبِيًّا وَصَرَّفنا فيهِ مِنَ الوَعيدِ لَعَلَّهُم يَتَّقونَ أَو يُحدِثُ لَهُم ذِكرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार हमने इसे अरबी क़ुरआन बनाकर अवतरित किया तथा इसमें चेतावनी की बातें विभिन्न प्रकार से वर्णन कीं, शायद कि वे डर जाएँ, अथवा यह उनके लिए कोई उपदेश पैदा कर दे।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Muhammad) isi tarah humne isey Quran e arabi bana kar nazil kiya hai aur ismein tarah tarah se tambihaat (warnings) ki hain shayad ke yeh log kajhrawi (perverseness) se bachein ya in mein kuch hosh ke aasaar is ki badaulat paida hon
Roman Urdu (Junagarhi)Issi tarah hum ney tujh per arabi quran nazil farmaya hai aur tarah tarah say iss mein darr ka biyan sunaya hai takay log perhezgaar bann jayen ya inn kay dil mein soch samajh to peda keray
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ मुहम्मद) इसी तरह हमने इसे कुरान ए अरबी बाना कर नाज़िल किया है और इस्में तरह-तरह से तम्बीहत (चेतावनी) की है शायद के ये लोग कजरावी (विकृति) से बचे हैं या इसमें कुछ होश के आसार इस की बदौलत पेदा हैं
عَرَبِيفَتَعالَى اللَّهُ المَلِكُ الحَقُّ ۗ وَلا تَعجَل بِالقُرآنِ مِن قَبلِ أَن يُقضىٰ إِلَيكَ وَحيُهُ ۖ وَقُل رَبِّ زِدني عِلمًا
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हिन्दी (Al-Omari)अतः सर्वोच्च है अल्लाह, जो सच्चा बादशाह है, और क़ुरआन को पढ़ने में जल्दी न करें, इससे पूर्व कि आपकी ओर उसकी वह़्य पूरी की जाए तथा कहें : ऐ मेरे पालनहार! मुझे ज्ञान में बढ़ा दे।
Roman Urdu (Maududi)Pas baala o bartar hai Allah, baadshah e haqiqi. Aur dekho, Quran padhne mein jaldi na kiya karo jabtak ke tumhari taraf uski wahee takmeel ko na pahunch jaye, aur dua karo ke aey parwardigar mujhey mazeed ilm ata kar
Roman Urdu (Junagarhi)Pus Allah aali shaan wala sacha aur haqeeqi badshah hai. Tu quran parhney mein jaldi na ker uss say pehlay kay teri taraf jo wajee ki jati hai woh poori ki jaye haan yeh dua ker kay perwerdigar! Mera ilm barha
Devnagri Urdu (Maududi)पास बाला ओ बरतर है अल्लाह, बादशाह ए हक़ीक़ी। और देखो, कुरान पढ़ने में जल्दी ना किया करो जबतक के तुम्हारी तरफ उसकी वही तकमील को ना पूछ जाए, और दुआ करो के ऐ परवरदिगार मुझे मज़ीद इल्म अता कर
عَرَبِيوَلَقَد عَهِدنا إِلىٰ آدَمَ مِن قَبلُ فَنَسِيَ وَلَم نَجِد لَهُ عَزمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने इससे पहले आदम को ताकीद की, फिर वह भूल गया और हमने उसमें कोई दृढ़ संकल्प नहीं पाया ।
Roman Urdu (Maududi)Humne issey pehle Adam ko ek hukum diya tha, magar woh bhool gaya aur humne us mein azm (determination/firm resolve) na paya
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney adam ko pehlay hi takeedy hukum dey diya tha lekin woh bhool gaya aur hum ney uss mein koi azum nahi paya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इस्से पहले आदम को एक हुकुम दिया था, मगर वो भूल गया और हमने हममें एज़्म (दृढ़ संकल्प/दृढ़ संकल्प) ना पाया
عَرَبِيوَإِذ قُلنا لِلمَلائِكَةِ اسجُدوا لِآدَمَ فَسَجَدوا إِلّا إِبليسَ أَبىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब हमने फ़रिश्तों से कहा : आदम को सजदा करो। तो उन्होंने सजदा किया, सिवाय इबलीस के, उसने इनकार किया।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo woh waqt jabke humne Farishton se kaha tha ke Adam ko sajda karo, woh sab to sajda kar gaye, magar ek iblis tha ke inkar kar baitha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab hum ney farishton say kaha kay adam (alh-e-salam) ko sajjda kero to iblees kay siwa sab ney kiya uss ney saaf inkar ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो वो वक़्त जब हमने फरिश्तों से कहा था के आदम को सजदा करो, वो सब तो सजदा कर गए, मगर एक इब्लीस था के इंकार कर बैठा
عَرَبِيفَقُلنا يا آدَمُ إِنَّ هٰذا عَدُوٌّ لَكَ وَلِزَوجِكَ فَلا يُخرِجَنَّكُما مِنَ الجَنَّةِ فَتَشقىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने कहा : निःसंदेह यह तुम्हारा और तुम्हारी पत्नी का दुश्मन है, इसलिए कहीं तुम दोनों को जन्नत से न निकलवा दे कि तुम मुसीबत में पड़ जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Ispar humne Adam se kaha ke “dekho, yeh tumhara aur tumhari biwi ka dushman hai, aisa na ho ke yeh tumhein jannat se nikalwa de aur tum museebat mein padh jao
Roman Urdu (Junagarhi)To hum ney kaha aey adam! Yeh tera aur teri biwi ka dushman hai (khayal rakhna) aisa na ho kay woh tum dono ko jannat say nikalwa dey key tu musibat mein par jaye
Devnagri Urdu (Maududi)इस्पर हमने आदम से कहा के “देखो, ये तुम्हारा और तुम्हारी” बीवी का दुश्मन है, ऐसा ना हो के ये तुम्हें जन्नत से निकाल दे और तुम मुसीबत में पढ़ जाओ
عَرَبِيإِنَّ لَكَ أَلّا تَجوعَ فيها وَلا تَعرىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुम्हारे लिए यह है कि तुम इसमें न भूखे होगे और न नग्न होगे।
Roman Urdu (Maududi)Yahan to tumhein yeh aasaishein (facilities) hasil hain ke na bhuke nange rehte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Yahan to tujhay yeh aaram hai kay na tu bhooka hota hai na nanga
Devnagri Urdu (Maududi)यहां तो तुम्हें ये सुविधाएं (सुविधाएं) हासिल हैं के ना भूखे नंगे रहते हो
عَرَبِيوَأَنَّكَ لا تَظمَأُ فيها وَلا تَضحىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह कि निश्चय ही तुम इसमें न प्यासे होगे और न धूप खाओगा।
Roman Urdu (Maududi)Na pyas aur dhoop tumhein satati hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na tu yahan piayasa hota hai na dhoop say takleef uthata hai lekin shetan ney ussay waswasa dala kehney laga kay kiya mein tujhay daeemi zindagi ka darakht aur badshaat batlaon kay jo kabhi purani na ho
Devnagri Urdu (Maududi)ना प्यास और धूप तुम्हें सताती है”
عَرَبِيفَوَسوَسَ إِلَيهِ الشَّيطانُ قالَ يا آدَمُ هَل أَدُلُّكَ عَلىٰ شَجَرَةِ الخُلدِ وَمُلكٍ لا يَبلىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तो शैतान ने उसके दिल में विचार डाला, कहने लगा : ऐ आदम! क्या मैं तुम्हें अनंत जीवन का वृक्ष और ऐसा राज्य दिखाऊँ जो कभी पुराना न हो?
Roman Urdu (Maududi)Lekin shaytan ne usko phuslaya, kehne laga “Adam, bataun tumhein woh darakht jissey abadi zindagi aur la-zawal (everlasting) sultanat hasil hoti hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin shetan ney ussay waswasa dala kehney laga kay kiya mein tujhay daeemi zindagi ka darakht aur badshat batlaon kay jo kabhi purani na ho
Devnagri Urdu (Maududi)लेकिन शैतान ने उसको फुसलाया, कहने लगा "आदम, बताऊं तुम्हें वो दरख्त जिसकी आबादी जिंदगी और ला-ज़वाल (सदाबहार) सल्तनत हासिल होती है?"
عَرَبِيفَأَكَلا مِنها فَبَدَت لَهُما سَوآتُهُما وَطَفِقا يَخصِفانِ عَلَيهِما مِن وَرَقِ الجَنَّةِ ۚ وَعَصىٰ آدَمُ رَبَّهُ فَغَوىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)अंततः उन दोनों ने उसमें से खा लिया, तो उन दोनों के लिए उनके गुप्तांग प्रकट हो गए और वे दोनों अपने ऊपर जन्नत के पत्ते चिपकाने लगे और आदम ने अपने रब की अवज्ञा की, तो वह भटक गया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar woh dono (miyan biwi) us darakht ka phal kha gaye, natija ye hua ke fawran hi unke satr (nakedness) ek dusre ke aagey khul gaye aur lagey dono apne aap ko jannat ke patton se dhankne. Adam ne apne Rubb ki nafarmani ki aur raah-e-raast se bhatak gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Chunacha inn dono ney uss darakht say kuch kha liya pus unn kay satar khul gaye aur bahisht kay pattay apney upper taankney lagay. Adam (alh-e-salam) ney apney rab ki na-farmani ki pus behak gaya
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार वो दोनों (मियां बीवी) हमें दरख्त का फल खा गए, नतिजा ये हुआ के मौसम ही उनके सत्र (नग्नता) एक दूसरे के आगे खुल गए और लगे दोनों अपने आप को जन्नत के पत्तों से ढँकने। आदम ने अपने रुब की नफ़रमानी की और राह-ए-रास्त से भटक गया
عَرَبِيثُمَّ اجتَباهُ رَبُّهُ فَتابَ عَلَيهِ وَهَدىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसके रब ने उसे चुन लिया, तो उसकी तौबा क़बूल कर ली और उसे मार्गदर्शन प्रदान किया।
Roman Urdu (Maududi)Phir uske Rubb ne usey barguzida kiya aur uski tawba qabool karli aur usey hidayat bakshi
Roman Urdu (Junagarhi)Phir uss kay rab ney nawaza uss ki toba qabool ki aur uss ki rehnumaee ki
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उसके रुब ने उसे बरगुज़िदा किया और उसकी तौबा क़बूल कार्ली और उसे हिदायत बख्शी
عَرَبِيقالَ اهبِطا مِنها جَميعًا ۖ بَعضُكُم لِبَعضٍ عَدُوٌّ ۖ فَإِمّا يَأتِيَنَّكُم مِنّي هُدًى فَمَنِ اتَّبَعَ هُدايَ فَلا يَضِلُّ وَلا يَشقىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)फरमाया : तुम दोनों यहाँ से एक साथ उतर जाओ, तुम एक-दूसरे के शत्रु हो। फिर अगर कभी मेरी ओर से तुम्हारे पास कोई हिदायत आए, तो जो कोई मेरी हिदायत पर चला, तो न वह भटकेगा और न मुसीबत में पड़ेगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur farmaya “tum dono (fareeq, yaani Insaan aur shaytan) yahan se utar jao, tum ek dusre ke dushman rahogey. Ab agar meri taraf se tumhein koi hidayat pahunche to jo koi meri us hidayat ki pairwi karega woh na bhatkega na badbakhti mein mubtala hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Farmaya tum dono yahan say utar jao tum aapas mein aik doosray kay dushman ho abb tumharay pass jab kabhi meri taraf say hidayat phonchay to jo meri hidayat ki pairwee keray na to woh behkay ga na takleef mein paray ga
Devnagri Urdu (Maududi)और फरमाया “तुम दोनो (फ़ारिक, यानि इंसान और शैतान) यहाँ से उतर जाओ, तुम एक दूसरे के दुश्मन रहोगे। अब अगर मेरी तरफ से तुम कोई हिदायत पाओगे तो जो मेरी हमें हिदायत की जोड़ी बनाएगा वो ना भटकेगा ना बदबख्त में मुब्तला होगा
عَرَبِيوَمَن أَعرَضَ عَن ذِكري فَإِنَّ لَهُ مَعيشَةً ضَنكًا وَنَحشُرُهُ يَومَ القِيامَةِ أَعمىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिसने मेरी नसीहत से मुँह फेरा, तो निःसंदेह उसके लिए तंग जीवन है और हम उसे क़ियामत के दिन अंधा करके उठाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo mere “zikr” (dars e naseehat) se mooh moadega uske liye duniya mein tangg zindagi hogi aur qayamat ke roz hum usey andha utayenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (haan) jo meri yaad say roo gardani keray ga uss ki zindagi tangi mein rahey gi aur hum ussay baroz qayamat andha ker kay uthayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जो मेरे "ज़िक्र" (दरस ए हिदायत) से मुह मोड़ेगा उसके लिए दुनिया मैं तंग हूँ जिंदगी होगी और कयामत के रोज हम उसे अंधा उठाएंगे”
عَرَبِيقالَ رَبِّ لِمَ حَشَرتَني أَعمىٰ وَقَد كُنتُ بَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)वह कहेगा : ऐ मेरे पालनहार! तूने मुझे अंधा करके क्यों उठाया? हालाँकि, मैं तो देखने वाला था।
Roman Urdu (Maududi)Woh kahega “parwardigar, duniya mein to main ankhon wala tha, yahan mujhey andha kyun uthaya?”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kahey ga kay elahee! Mujhay tu ney andha bana ker kiyon uthaya? Halankay mein to dekhta bhalta tha
Devnagri Urdu (Maududi)वो कहेगा "परवरदिगार, दुनिया में तो मैं आँखों वाला था, यहाँ मुझे अंधा क्यों उठाया?"
عَرَبِيقالَ كَذٰلِكَ أَتَتكَ آياتُنا فَنَسيتَها ۖ وَكَذٰلِكَ اليَومَ تُنسىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह) फरमाएगा : इसी प्रकार तेरे पास हमारी आयतें आईं, तो तू उन्हें भूल गया और इसी प्रकार आज तू भुलाया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Allah taala farmayega “haan, isi tarah tu hamari aayat ko, jabke woh tere paas aayi thi, tu nay bhula diya tha usi tarah aaj tu bhulaya jaa raha hai”
Roman Urdu (Junagarhi)(jawab milay ga kay) issi tarah hona chahye tha tu meri aaee hui aayaton ko bhool gaya to aaj tu bhi bhula diya jata hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ताला फरमाएगा "हां, इसी तरह तू हमारी आयत को, जबके वो तेरे पास आई थी, तू ने भुला दिया था उसी तरह आज तू भुलाया जा रहा है"
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ نَجزي مَن أَسرَفَ وَلَم يُؤمِن بِآياتِ رَبِّهِ ۚ وَلَعَذابُ الآخِرَةِ أَشَدُّ وَأَبقىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इसी प्रकार हम उस व्यक्ति को बदला देते हैं, जो हद से बढ़ जाए और अपने पालनहार की आयतों पर ईमान न लाए और निश्चय आख़िरत की यातना अधिक कठोर और अधिक स्थायी है।
Roman Urdu (Maududi)Is tarah hum hadd se guzarne waley aur apne Rubb ki aayat na maanne waley ko (duniya mein ) badla dete hain aur aakhirat ka azaab zyada sakht aur zyada dair pa hai (more lasting)
Roman Urdu (Junagarhi)Hum aisa hi badla her uss shaks ko diya kertay hain jo hadd say guzar jaye aur apney rab ki aayaton per eman na laye aur be-shak aakhirat ka azab nihayat hi sakht aur baqi rehney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह हम हद से गुज़रने वाले और अपने रब की आयत ना माने वाले को (दुनिया में) बदला देते हैं और आख़िरत का अज़ाब ज़्यादा मज़बूत और ज़्यादा देर पर है (अधिक स्थायी)
عَرَبِيأَفَلَم يَهدِ لَهُم كَم أَهلَكنا قَبلَهُم مِنَ القُرونِ يَمشونَ في مَساكِنِهِم ۗ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِأُولِي النُّهىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर क्या इस बात ने उन्हें मार्गदर्शन नहीं दिया कि हमने उनसे पहले कितने ही समुदायों को विनष्ट कर दिया, जिनके घरों में वे चलते-फिरते हैं। निःसंदेह इसमें बुद्धियों वालों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir kya in logon ko (tareekh ke is sabaq se) koi hidayat na mili ke insey pehle kitni hi qaumon ko hum halaak kar chuke hain jinki (barbaad shuda) bastiyon mein aaj yeh chalte phirte hain? Dar haqeeqat ismein bahut si nishaniyan hain un logon ke liye jo aqal e saleem rakhne walay hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn ki rehbari iss baat ney bhi nahi ki kay hum ney inn say pehlay boht si bastiyan halak ker di hain jin kay rehney sehney ki jaga yeh chal phir rahey hain. Yaqeenan iss mein aqal mandon kay liye boht si nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्या इन लोगों को (तारीख के इस सबक से) कोई हिदायत ना मिली के इनसे पहले कितनी ही क़ायमों को हम हलाक कर चुके हैं जिनकी (बरबाद शुदा) बस्तियों में आज ये चलते फिरते हैं? दर हकीकत इसमें बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक़ल ए सलीम रखने वाले हैं
عَرَبِيوَلَولا كَلِمَةٌ سَبَقَت مِن رَبِّكَ لَكانَ لِزامًا وَأَجَلٌ مُسَمًّى
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वह बात न होती जो तुम्हारे पालनहार की ओर से पहले निश्चित हो चुकी और एक नियत समय न होता, तो वही (अगले लोगों का अज़ाब) आवश्यक हो जाता।
Roman Urdu (Maududi)Agar tere Rubb ki taraf se pehle ek baat tai na kardi gayi hoti aur mohlat ki ek muddat muqarrar na ki jaa chuki hoti to zaroor inka bhi faisla chuka diya jata
Roman Urdu (Junagarhi)Agar teray rab ki baat pehlay hi say muqarrar shuda aur waqt moyyen kerda na hota to issi waqt azab aa chimatta
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तेरे रब की तरफ से पहले एक बात ताई ना करदी गई होती और मोहलत की एक मुद्दत मुकर्रर ना कि जा चुकी होती तो जरूर इनका भी फैसला चुका दिया जाता
عَرَبِيفَاصبِر عَلىٰ ما يَقولونَ وَسَبِّح بِحَمدِ رَبِّكَ قَبلَ طُلوعِ الشَّمسِ وَقَبلَ غُروبِها ۖ وَمِن آناءِ اللَّيلِ فَسَبِّح وَأَطرافَ النَّهارِ لَعَلَّكَ تَرضىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः जो कुछ वे कहते हैं, उसपर सब्र करें तथा सूर्य उगने से पहले और उसके डूबने से पहले अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता बयान करें, और रात की कुछ घड़ियों में भी पवित्रता बयान करें, और दिन के किनारों में, ताकि आप प्रसन्न हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Pas (aey Muhammad), jo baatein yeh log banate hain unpar sabr karo, aur apne Rubb ki hamd o sana ke saath uski tasbeeh karo Suraj nikalne se pehle aur guroob honay se pehle, aur raat ke auqat mein bhi tasbeeh karo aur din ke kinaron par bhi, shayad ke tum raazi ho jao
Roman Urdu (Junagarhi)Pus inn ki baton per sabar ker aur apney perwerdigar ki tasbeeh aur tareef biyan kerta reh sooraj nikalney say pehlay aur uss kay dobney say pehlay raat kay mukhtalif waqton mein bhi aur din kay hisson mein bhi tasbeeh kerta reh boht mumkin hai kay tu razi ho jaye
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ मुहम्मद), जो बातें ये लोग बनाते हैं उन पर सब्र करो, और अपने रुब की हम्द ओ सना के साथ उसकी तस्बीह करो सूरज निकलने से पहले, और रात के औकात में भी तस्बीह करो और दिन के किनारों पर भी, शायद के तुम राजी हो जाओ
عَرَبِيوَلا تَمُدَّنَّ عَينَيكَ إِلىٰ ما مَتَّعنا بِهِ أَزواجًا مِنهُم زَهرَةَ الحَياةِ الدُّنيا لِنَفتِنَهُم فيهِ ۚ وَرِزقُ رَبِّكَ خَيرٌ وَأَبقىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और अपनी आँखों को उन चीज़ों की ओर कदापि न उठाएँ जो हमने उनके विभिन्न प्रकार के लोगों को सांसारिक जीवन के लिए आभूषण के रूप में उपयोग करने के लिए दी हैं, ताकि हम उसमें उनकी परीक्षा लें, और आपके पालनहार का दिया हुआ सबसे अच्छा और सबसे अधिक स्थायी है।
Roman Urdu (Maududi)Aur nigah utha kar bhi na dekho duniyavi zindagi ki us shaan o shaukat ko jo humne in mein se mukhtalif kism ke logon ko de rakkhi hai, woh to humne unhein aazmaish mein daalne ke liye di hai, aur tere Rubb ka diya hua rizq e halal hi behtar aur paaindatar (more lasting) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apni nighayen hergiz unn cheezon ki taraf na dorana jo hum ney inn mein say mukhtalif logon ko aaraeesh-e-duniya ki dey rakhi hain takay unhen iss mein aazma ley teray rab ka diya hua hi (boht) behtar aur boht baqi rehney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और निगाह उठा कर भी ना देखो दुनियावी जिंदगी की उस शान ओ शौकत को जो हमने अपने अंदर से मुख्तलिफ किस्मत के लोगों को दे रखा है, वो तो हमने उन्हें आजमाइश में डालने के लिए दी है, और तेरे रब का दिया हुआ रिज़क ए हलाल हाय बेहतर और पैंदातर (अधिक स्थायी) है
عَرَبِيوَأمُر أَهلَكَ بِالصَّلاةِ وَاصطَبِر عَلَيها ۖ لا نَسأَلُكَ رِزقًا ۖ نَحنُ نَرزُقُكَ ۗ وَالعاقِبَةُ لِلتَّقوىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और आप अपने घरवालों को नमाज़ का आदेश दें और स्वयं भी उसपर स्थित रहें, हम आपसे कोई जीविका नहीं माँगते, हम ही आपको जीविका प्रदान करते हैं और अच्छा परिणाम परहेज़गारी का है।
Roman Urdu (Maududi)Apne ehal o ayal (member of your family) ko namaz ki talkeen karo aur khud bhi iske paband raho, hum tumse koi rizq nahin chahte, rizq to hum hi tumhein de rahey hain aur anjaam ki bhalayi taqwa hi ke liye hai
Roman Urdu (Junagarhi)Apney gharaney kay logon per namaz ki takeed rakh aur khud bhi iss per jama reh hum tujh say rozi nahi maangtay bulkay hum khud tujhay rozi detay hain aakhir mein bol bala perhezgari hi ka hai
Devnagri Urdu (Maududi)अपने एहल ओ अयाल (आपके परिवार के सदस्य) को नमाज की बात करो और खुद भी इसके पाबंद रहो, हम तुमसे कोई रिज्क नहीं चाहते, रिज्क तो हम ही तुम्हें दे रहे हैं और अंजाम की भलाई तक्वा हाय के लिए है
عَرَبِيوَقالوا لَولا يَأتينا بِآيَةٍ مِن رَبِّهِ ۚ أَوَلَم تَأتِهِم بَيِّنَةُ ما فِي الصُّحُفِ الأولىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा : यह हमारे पास अपने रब की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं लाता? और क्या उनके पास वह स्पष्ट प्रमाण नहीं आया जो पहली किताबों में है?
Roman Urdu (Maududi)Woh kehte hain ke yeh shaks apne Rubb ki taraf se koi nishani (mojaza) kyun nahin laata? Aur kya inke paas agle saheefon ki tamaam taleemat ka bayan e wazeh nahin aa gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney kaha kay yeh nabi humaray pass apney perwerdigar ki taraf say koi nishani kiyon nahi laya? Kiya inn kay pass agli kitabon ki wazeh daleel nahi phonchi
Devnagri Urdu (Maududi)वो कहते हैं कि ये शक्स अपने रब की तरफ से कोई निशानी (मोजाज़ा) क्यों नहीं लाता? और क्या इनके पास अगले सहीफों की तमाम तालीम का बयान ए वजह नहीं आ गया
عَرَبِيوَلَو أَنّا أَهلَكناهُم بِعَذابٍ مِن قَبلِهِ لَقالوا رَبَّنا لَولا أَرسَلتَ إِلَينا رَسولًا فَنَتَّبِعَ آياتِكَ مِن قَبلِ أَن نَذِلَّ وَنَخزىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम वास्तव में उन्हें इससे पहले किसी अज़ाब से विनष्ट कर देते, तो ये लोग अवश्य कहते : ऐ हमारे रब! तूने हमारी ओर कोई रसूल क्यों नहीं भेजा कि हम तेरी आयतों की पैरवी करते, इससे पहले कि हम ज़लील और रुसवा हों?
Roman Urdu (Maududi)Agar hum uske aane se pehle inko kisi azaab se halaak kardete to phir yahi log kehte ke aey hamare parwardigar, tu nay hamare paas koi Rasool kyun na bheja ke zaleel o ruswa honay se pehle hi hum teri aayat ki pairwi ikhtiyar kar letay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum iss say pehlay hi enehn azab say halak ker detay to yaqeenan yeh keh uthtay kay aey humaray perwerdigar tu ney humaray pass apna rasool kiyon na bheja? Kay hum teri aayaton ki tabeydari kertay iss say pehlay kay hum zaleel-o-ruswa hotay
Devnagri Urdu (Maududi)अगर हम उसके आने से पहले इनको किसी अज़ाब से हलाक कर देते तो फिर यही लोग कहते के ऐ हमारे परवरदिगार, तू नहीं हमारे पास कोई रसूल क्यों ना भेजा के ज़लील ओ रुसवा होने से पहले ही हम तेरी आयत की जोड़ी इख्तियार कर लेते हैं
عَرَبِيقُل كُلٌّ مُتَرَبِّصٌ فَتَرَبَّصوا ۖ فَسَتَعلَمونَ مَن أَصحابُ الصِّراطِ السَّوِيِّ وَمَنِ اهتَدىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : हर एक प्रतीक्षारत है। अतः तुम (भी) प्रतीक्षा करो। फिर शीघ्र ही तुम जान लोगे कि सीधे मार्ग वाले कौन हैं और कौन है जिसे मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad) insey kaho, har ek anjaam e kaar ke intezar mein hai, pas ab muntazir raho, anqareeb tumhein maloom ho jayega ke kaun seedhi raah chalne waley hain aur kaun hidayat-yafta (rightly guided) hain
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay her aik anjam ka muntazir hai pus tum bhi intezar mein raho. Abhi abhi qata’an jaan lo gay kay raah-e-raast walay kaun hain aur kaun raah yafta hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद) इनसे कहो, हर एक अंजाम ए कार के इंतजार में है, पास अब मुंतजिर रहो, अनकरीब तुम्हें मालूम हो जाएगा के कौन सीधी राह चलने वाले हैं और कौन हिदायत-यफ्ता (सही मार्गदर्शन) हैं
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Surah 20: Ta Ha (Ta Ha)

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Surah 20: Ta Ha (Ta Ha)

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Surah 20: Ta Ha (Ta Ha)

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Surah 20: Ta Ha (Ta Ha)

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Surah 21: Al-Anbiya' (The Prophets)

Meccan🕐 Revelation #73📜 112 Verses🕮 Juz 17
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Surah 21: Al-Anbiya' (The Prophets)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
🕮 Juz 17 begins here
हिन्दी (Al-Omari)लोगों के लिए उनका हिसाब बहुत निकट आ गया और वे बड़ी लापरवाही में मुँह फेरने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Qareeb aa gaya hai logon ke hisaab ka waqt, aur woh hain ke gaflat mein mooh moadey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Logon kay hisab ka waqt qareeb aagaya phir bhi woh bey khabri mein mun pheray huye hain
Devnagri Urdu (Maududi)करीब आ गया है लोगों के हिसाब का वक्त, और वो हैं के गफलत में मुंह मोड़े हुए हैं
عَرَبِيما يَأتيهِم مِن ذِكرٍ مِن رَبِّهِم مُحدَثٍ إِلَّا استَمَعوهُ وَهُم يَلعَبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनके पालनहार की ओर से उनके पास कोई नया उपदेश नहीं आता, परंतु वे उसे हँसी-खेल करते हुए बड़ी कठिनाई से सुनते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unke paas jo taaza naseehat bhi unke Rubb ki taraf se aati hai usko be-takalluf sunte hain aur khel mein padey rehte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay pass inn kay rab ki taraf say jo bhi naee naee naseehat aati hai issay woh khel kood mein hi suntay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उनके पास जो ताज़ा हिदायत भी उनके रब की तरफ से आती है उसको बे-तकल्लुफ़ सुनते हैं और खेल में पड़े रहते हैं
عَرَبِيلاهِيَةً قُلوبُهُم ۗ وَأَسَرُّوا النَّجوَى الَّذينَ ظَلَموا هَل هٰذا إِلّا بَشَرٌ مِثلُكُم ۖ أَفَتَأتونَ السِّحرَ وَأَنتُم تُبصِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनके दिल पूरी तरह ग़ाफ़िल होते हैं। और उन लोगों ने चुपके-चुपके कानाफूसी की जिन्होंने अत्याचार किया था, कि यह (नबी) तो तुम्हारे ही जैसा एक इनसान है, तो क्या तुम जादू के पास आते हो, हालाँकि तुम देख रहे हो?
Roman Urdu (Maududi)Dil unke (dusri hi fikron mein) munhamik hain aur zalim aapas mein sargoshiyan(whisper) karte hain ke “yeh shaks aakhir tum jaisa ek bashar (Insaan) hi to hai, phir kya tum aankhon dekhte jaadu ke phanday mein phas jaogey?”
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay dil bilkul ghafil hain aur inn zalimon ney chupkay chupkay sirgoshiyan kin kay woh tum hi jesa insan hai phir kiya waja hai jo tum aankhon dekhtay jadoo mein aajatay ho
Devnagri Urdu (Maududi)दिल उनके (दूसरी ही फिक्रों में) मुहाफिज हैं और जालिम आपस में सरगोशियां (कानाफूसी) करते हैं के "ये शक्स आखिर तुम जैसा एक बशर (इंसान) ही तो है, फिर क्या तुम आंखें देखते जादू के फांदों में फंस जाओगे?"
عَرَبِيقالَ رَبّي يَعلَمُ القَولَ فِي السَّماءِ وَالأَرضِ ۖ وَهُوَ السَّميعُ العَليمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस (रसूल) ने कहा : मेरा पालनहार आकाश और धरती की हर बात को जानता है और वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Rasool ne kaha, mera Rubb har us baat ko jaanta hai jo aasman aur zameen mein ki jaye, woh sami(sunne wala) aur aleem (jaanne wala) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Payghumber ney kaha mera perwerdigar her uss baat ko jo zamin-o-aasman mein hai ba-khoobi janta hai woh boht hi sunnay wala aur jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)रसूल ने कहा, मेरा रब हर उस बात को जानता है जो आसमान और ज़मीन में की जाए, वो सामी (सुनने वाला) और अलीम (जानने वाला) है
عَرَبِيبَل قالوا أَضغاثُ أَحلامٍ بَلِ افتَراهُ بَل هُوَ شاعِرٌ فَليَأتِنا بِآيَةٍ كَما أُرسِلَ الأَوَّلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि उन्होंने (क़ुरआन के बारे में) कहा : यह सपनों की उलझी हुई बातें हैं, बल्कि उसने इसे स्वयं गढ़ लिया है, बल्कि वह कवि है! अतः उसे चाहिए कि हमारे पास कोई निशानी लाए, जैसे पहले के रसूल (निशानियों के साथ) भेजे गए थे।
Roman Urdu (Maududi)Woh kehte hain “balke yeh paraganda (incoherent) khwab hai , balke yeh iski mann-ghadath hai, balke yeh shaks shayar hai warna yeh laye koi nishani jis tarah purane zamane ke Rasool nishaniyon ke saath bheje gaye thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Itna hi nahi bulkay yeh to kehtay hain kay yeh quran peraganda khuwabon ka majmooa hai bulkay iss ney az-khud issay ghar liya hai bulkay yeh shaeer hai werna humaray samney yeh koi aisi nishani latay jesay kay aglay payghumber bhejay gaye thay
Devnagri Urdu (Maududi)वो कहते हैं "बलके ये परागंदा (असंगत) ख्वाब है, बलके ये इसका मन-ग़दथ है, बलके ये शक्स शायर है वरना ये लाए कोई निशानी जिस तरह पुराने जमाने के रसूल निशानियों के साथ भेज गए थे”
عَرَبِيما آمَنَت قَبلَهُم مِن قَريَةٍ أَهلَكناها ۖ أَفَهُم يُؤمِنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)इनसे पहले कोई बस्ती, जिसे हमने विनष्ट किया, ईमान नहीं लाई। तो क्या ये ईमान ले आएँगे?
Roman Urdu (Maududi)Halaanke inse pehle koi basti bhi, jisey humne halaak kiya, iman na layi, ab kya yeh iman layenge
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say pehlay jitni bastiyan hum ney ujarin sab eman say khali thin. To kiya abb yeh eman layen gay
Devnagri Urdu (Maududi)हलांके इनसे पहले कोई बस्ती भी, जिसने हमें हलाक किया, ईमान ना लाई, अब क्या ये ईमान लाएंगे
عَرَبِيوَما أَرسَلنا قَبلَكَ إِلّا رِجالًا نوحي إِلَيهِم ۖ فَاسأَلوا أَهلَ الذِّكرِ إِن كُنتُم لا تَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) हमने आपसे पहले पुरुषों ही को रसूल बनाकर भेजे, जिनकी ओर हम वह़्य (प्रकाशना) करते थे। अतः तुम ज़िक्र (किताब) वालों से पूछ लो, यदि तुम (स्वयं) नहीं जानते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Muhammad), tumse pehle bhi humne Insaano hi ko Rasool bana kar bheja tha jinpar hum wahee (revelation) kiya karte thay, Tum log agar ilm nahin rakhte to ehle kitaab se pooch lo
Roman Urdu (Junagarhi)Tujh say pehlay bhi jitney payghumber hum ney bhejay sabhi mard thay jin ki taraf hum wahee utartay thay pus tum ehal-e-kitab say pooch lo agar khud tumhen ilm na ho
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐय) मुहम्मद), तुमसे पहले भी हमने इंसानो ही को रसूल बना कर भेजा था जिनपर हम वही (रहस्योद्घाटन) किया करते थे, तुम लोग अगर इल्म नहीं रखते तो एहले किताब से पूछ लो
عَرَبِيوَما جَعَلناهُم جَسَدًا لا يَأكُلونَ الطَّعامَ وَما كانوا خالِدينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उन्हें ऐसे शरीर (वाले) नहीं बनाए थे, जो खाना न खाते हों और न वे हमेशा रहने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Un Rasoolon ko humne koi aisa jism nahin diya tha ke woh khate na hon, aur na woh sadaa (hamesha) jeenay waley thay
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney inn kay aisay jism nahi banaye thay kay woh khana na khayen aur na woh hamesha rehney walay thay
Devnagri Urdu (Maududi)उन रसूलों को हमने कोई ऐसा जिस्म नहीं दिया था के वो खाते ना हो, और ना वो सदा (हमेशा) जीने वाले थे
عَرَبِيثُمَّ صَدَقناهُمُ الوَعدَ فَأَنجَيناهُم وَمَن نَشاءُ وَأَهلَكنَا المُسرِفينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उनसे किए हुए वादे को सच कर दिखाया। तो हमने उन्हें बचा लिया और उसे भी जिसे हम चाहते थे। और हमने हद से बढ़ने वालों को नष्ट कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Phir dekhlo ke aakhir e kaar humne unke saath apne wadey poorey kiye, aur unhein aur jis jis ko humne chaha bacha liya, aur hadd se guzar janey walon ko halaak kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney unn say kiye huye sab waday sachay kiye unhen aur jin jin ko hum ney chaha nijat ata farmaee aur hadd say nikal janey walon ko gharat ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर देखलो के आखिर ए कार हमने उनके साथ अपने वादे पूरे किए, और उन्होंने और जिस को हमने चाहा बचा लिया, और हद से गुजर जाने वालों को हलाक कर दिया
عَرَبِيلَقَد أَنزَلنا إِلَيكُم كِتابًا فيهِ ذِكرُكُم ۖ أَفَلا تَعقِلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने तुम्हारी ओर एक किताब (क़ुरआन) उतारी है, जिसमें तुम्हारा सम्मान है। तो क्या तुम नहीं समझते?
Roman Urdu (Maududi)Logon, humne tumhari taraf ek aisi kitaab bheji hai jismein tumhara hi zikr hai, kya tum samajhte nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney tumhari janib kitab nazil farmaee hai jiss mein tumharay liye zikar hai kiya phir bhi tum aqal nahi rakhtay
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन, हमने तुम्हारी तरफ एक ऐसी किताब भेजी है जिसमें तुम्हारा ही ज़िक्र है, क्या तुम समझते नहीं हो
عَرَبِيوَكَم قَصَمنا مِن قَريَةٍ كانَت ظالِمَةً وَأَنشَأنا بَعدَها قَومًا آخَرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने बहुत-सी बस्तियों को तोड़कर रख दिया, जो अत्याचारी थीं और हमने उनके बाद दूसरी जाति को पैदा कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Kitni hi zalim bastiyan hain jinko humne pees kar rakh diya aur unke baad dusri kisi qaum ko uthaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aure boht si bastiyan hum ney tabah ker din jo zalim thin aur unn kay baad hum ney doosri qom ko peda ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)कितनी ही जालिम बस्तियाँ हैं जिनको हमने पीस कर रख दिया और उनके बाद दूसरी किसी क़ौम को उठाया
عَرَبِيفَلَمّا أَحَسّوا بَأسَنا إِذا هُم مِنها يَركُضونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उन्होंने हमारे अज़ाब को देख लिया, तो वे तुरंत वहाँ से भागने लगे।
Roman Urdu (Maududi)Jab unko hamara azaab mehsoos hua to lagey wahan se bhaagne
Roman Urdu (Junagarhi)Jab unhon ney humaray azab ka ehsas ker liya to lagay uss say bhagney
Devnagri Urdu (Maududi)जब उनको हमारा अज़ाब महसूस हुआ तो लागे वहाँ से भागें
عَرَبِيلا تَركُضوا وَارجِعوا إِلىٰ ما أُترِفتُم فيهِ وَمَساكِنِكُم لَعَلَّكُم تُسأَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(तो उनसे उपहास के तौर पर कहा जाएगा :) भागो नहीं, और वापस चलो उन (जगहों) की ओर जिनमें तुम्हें खुशहाली दी गई थी और अपने घरों की ओर, ताकि तुमसे पूछा जाए।
Roman Urdu (Maududi)(kaha gaya) “bhaago nahin, jao apne unhi gharon mein aur aesh ke samaano mein jinke andar tum chain kar rahey thay, shayad ke tumse poocha jaye”
Roman Urdu (Junagarhi)Bhag dor na kero aur jahan tumhen aasoodgi di gaee thi wahin wapis loto aur apney makanaat ki taraf jao takay tum say sawal to ker liya jaye
Devnagri Urdu (Maududi)(कहा गया) "भागो नहीं, जाओ अपने उन्हीं घरों में और ऐश के समानों में जिनके अंदर तुम चैन कर रहे थे, शायद के तुमसे पूछेंगे"
عَرَبِيقالوا يا وَيلَنا إِنّا كُنّا ظالِمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हाय हमारा विनाश! निश्चय हम अत्याचारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Kehne lagey “haye hamari kambakhti, beshak hum khatawaar thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney lagay haaye humari kharabi! Be-shak hum zalim thay
Devnagri Urdu (Maududi)कहने लगे "हाय हमारी कमबख्त, बेशक हम ख़तावर थे"
عَرَبِيفَما زالَت تِلكَ دَعواهُم حَتّىٰ جَعَلناهُم حَصيدًا خامِدينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो उनकी पुकार हमेशा यही रही, यहाँ तक कि हमने उन्हें कटे हुए, बुझे हुए बना दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh yahi pukarte rahey yahan tak ke humne unko khalyan (threshed/field that is reaped) kardiya , zindagi ka ek sharara tak unmein na raha (leaving no spark of life in them)
Roman Urdu (Junagarhi)Phir to unn ka yehi qol raha yahan tak kay hum ney unhen jarr say kati hui kheti aur bujhi pari aag (ki tarah) ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)और वो यहीं पुकारते रहें यहां तक ​​के हमने उनको खलियान (काटा हुआ खेत) करदिया, जिंदगी का एक शरारा तक उनमें ना रहा (जीवन की कोई चिंगारी नहीं छोड़ना)
عَرَبِيوَما خَلَقنَا السَّماءَ وَالأَرضَ وَما بَينَهُما لاعِبينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने आकाश और धरती को और जो कुछ उन दोनों के बीच है, खेलते हुए नहीं बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Humne is aasman aur zameen ko aur jo kuch bhi inmein hai kuch khel ke taur par nahin banaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney aasman-o-zamin aur inn kay darmiyan ki cheezon ko kheltay huye nahi banaya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने आसमान और जमीन को और जो कुछ भी इनमें है कुछ खेल के तौर पर नहीं बनाया है
عَرَبِيلَو أَرَدنا أَن نَتَّخِذَ لَهوًا لَاتَّخَذناهُ مِن لَدُنّا إِن كُنّا فاعِلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यदि हम कोई खेल बनाना चाहते, तो निश्चय उसे अपने पास से बना लेते। (परंतु) हम ऐसा करने वाले नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Agar hum koi khilona banan chahte aur bas yahi kuch humein karna hota to apne hi paas se kar letey
Roman Urdu (Junagarhi)Agar hum yun hi khel tamashay ka irada kertay to to ussay apnay pass say hi bana letay agar hum kerney walay hi hotay
Devnagri Urdu (Maududi)अगर हम कोई खिलोना बनाना चाहते हैं और बस यहीं कुछ हमें करना होता है तो अपने ही पास से कर लेते हैं
عَرَبِيبَل نَقذِفُ بِالحَقِّ عَلَى الباطِلِ فَيَدمَغُهُ فَإِذا هُوَ زاهِقٌ ۚ وَلَكُمُ الوَيلُ مِمّا تَصِفونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि हम सत्य को असत्य पर फेंक मारते हैं, तो वह उसका सिर कुचल देता है, तो एकाएक वह मिटने वाला होता है। और तुम्हारे लिए उसके कारण विनाश है, जो तुम बयान करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Magar hum to baatil par haqq ki chot lagate hain jo uska sar todh deti hai aur woh dekhte dekhte mitt jata hai, aur tumhare liye tabahi hai un baaton ki wajah se jo tum banate ho
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay hum sach ko jhoot per phenk maartay hain pus sach jhoot ka sir tor deta hai aur woh ussi waqt nabood ho jata hai tum jo baten banatay ho woh tumharay liye baees-e-kharabi hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर हम तो बातिल पर हक की चोट लगाते हैं जो उसका सारा तोड़ देती है और वो देखता-देखता मिट जाता है, और तुम्हारे लिए तभी। है उन बातों की वजह से जो तुम बनते हो
عَرَبِيوَلَهُ مَن فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ وَمَن عِندَهُ لا يَستَكبِرونَ عَن عِبادَتِهِ وَلا يَستَحسِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उसी का है, जो कोई आकाशों तथा धरती में है। और जो (फ़रिश्ते) उसके पास हैं, वे न उसकी इबादत से अभिमान करते हैं और न ज़रा भर थकते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Zameen aur aasmano mein jo makhlooq bhi hai Allah ki hai aur jo (Farishtey) uske paas hain woh na apne aap ko bada samajh kar uski bandagi se sartabi karte hain aur na malool (weary /tire) hotey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmano aur zamin mein jo hai ussi Allah ka hai aur jo uss kay pass hain woh uss ki ibadat say na sirkashi kertay hain aur na thaktay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन और आसमान में जो मख़लूक़ भी है अल्लाह की है और जो (फ़रिश्ते) उसके पास हैं वो ना अपने आप को बड़ा समझ कर उसकी बंदगी से सरताबी करते हैं और ना मालूल (थके हुए/थके) होते हैं
عَرَبِييُسَبِّحونَ اللَّيلَ وَالنَّهارَ لا يَفتُرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे रात-दिन (अल्लाह की) पवित्रता का गान करते हैं, दम नहीं लेते।
Roman Urdu (Maududi)Shab-o-roz uski tasbeeh karte rehte hain, dum nahin letey
Roman Urdu (Junagarhi)Woh din raat tasbeeh biyan kertay hain aur zara si bhi susti nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)शब-ओ-रोज़ उसकी तस्बीह करते रहते हैं, दम नहीं लेते
عَرَبِيأَمِ اتَّخَذوا آلِهَةً مِنَ الأَرضِ هُم يُنشِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने धरती से ऐसे पूज्य बना लिए हैं, जो मरे हुए लोगों को ज़िंदा कर सकते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya in logon ke banaye huey arzi khuda aisey hain ke (be-jaan ko jaan baksh kar) utha khada karte hon
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn logon ney zamin (ki makhlooqaat mein) say jinhen mabood bana rakha hai woh zinda ker detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इन लोगों के बने हुए अर्ज़ी खुदा ऐसे हैं के (बे-जान को जान बख्श कर) उठा खड़ा करते हैं
عَرَبِيلَو كانَ فيهِما آلِهَةٌ إِلَّا اللَّهُ لَفَسَدَتا ۚ فَسُبحانَ اللَّهِ رَبِّ العَرشِ عَمّا يَصِفونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अगर उन दोनों में अल्लाह के सिवा कोई और पूज्य होते, तो वे दोनों अवश्य बिगड़ जाते। अतः पवित्र है अल्लाह जो अर्श (सिंहासन) का मालिक है, उन चीज़ों से जो वे बयान करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Agar aasman o zameen mein ek Allah ke siwa dusre khuda bhi hotey to (zameen aur aasman) dono ka nizam bigad jata. Pas paak hai Allah Rabbul arsh un baaton se jo yeh log bana rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Agar aasman-o-zamin mein siwaye Allah Taalaa kay aur bhi mabood hotay to yeh dono darhum barhum ho jatay pus Allah Taalaa arsh ka rab her uss wasf say pak hai jo yeh mushrik biyan kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अगर आसमान ओ ज़मीन में एक अल्लाह के सिवा दूसरे खुदा भी होते तो (ज़मीन और आसमान) दोनों का निज़ाम बिगड़ जाता। पास पाक है अल्लाह रब्बुल अर्श उन बातों से जो ये लोग बना रहे हैं
عَرَبِيلا يُسأَلُ عَمّا يَفعَلُ وَهُم يُسأَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह जो कुछ करता है, उससे (उसके बारे में) नहीं पूछा जाता, और उनसे पूछा जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Woh apne kaamon ke liye (kisi ke aagey) jawab-de nahin hai aur sab jawab-de hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh apney kaamon key liye (kissi kay aagay) jawab deh nahi aur sab (uss kay aagay) jawab deh hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो अपने कामों के लिए (किसी के आगे) जवाब-दे नहीं है और सब जवाब-दे हैं
عَرَبِيأَمِ اتَّخَذوا مِن دونِهِ آلِهَةً ۖ قُل هاتوا بُرهانَكُم ۖ هٰذا ذِكرُ مَن مَعِيَ وَذِكرُ مَن قَبلي ۗ بَل أَكثَرُهُم لا يَعلَمونَ الحَقَّ ۖ فَهُم مُعرِضونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने उसके सिवा और भी पूज्य बना लिए हैं? (ऐ नबी!) आप कह दें कि अपना प्रमाण लाओ। यह मेरे साथ वालों की किताब (क़ुरआन) है, और ये मुझसे पहले के लोगों पर उतरने वाली किताबें हैं, (इनमें तुम्हारे लिए कोई प्रमाण नहीं है)। बल्कि उनमें से अधिकतर लोग सत्य का ज्ञान नहीं रखते। इसी कारण, वे मुँह फेरने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya usey chodh kar inhon ne dusre khuda bana liye hain? (Aey Muhammad) inse kaho ke “lao apni daleel,yeh kitaab bhi maujood hai jismein mere daur ke logon ke liye naseehat hai aur woh kitaabein bhi maujood hain jin mein mujhse pehle logon ke liye naseehat thi” magar un mein se aksar log haqeeqat se bekhabar hain, is liye mooh moadey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn logon ney Allah kay siwa aur mabood bana rakhay hain inn say keh do laao apni daleel paish kero. Yeh hain meray sath walon ki kitab aur mujh say aglon ki daleel. Baat yeh hain kay inn mein kay aksar log haq ko nahi jantay issi waja say mun moray huye hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या उसे छोड़ कर इन्हों ने दूसरे खुदा बना लिए हैं? (ऐ मुहम्मद) इनसे कहो के "लाओ अपनी दलील, ये किताब भी मौजूद है जिसमें मेरे दौर के लोगों के लिए हिदायत है और वो किताबें भी मौजूद हैं जिनमें मुझसे पहले लोगों के लिए हिदायत थी" मगर उन में से अक्सर लोग हकीकत से बेखबर हैं, इस लिए मुहं मोड़े हुए हैं
عَرَبِيوَما أَرسَلنا مِن قَبلِكَ مِن رَسولٍ إِلّا نوحي إِلَيهِ أَنَّهُ لا إِلٰهَ إِلّا أَنا فَاعبُدونِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने आपसे पहले जो भी रसूल भेजा, उसकी ओर यही वह़्य (प्रकाशना) करते थे कि मेरे सिवा कोई पूज्य नहीं है। अतः मेरी ही इबादत करो।
Roman Urdu (Maududi)Humne tumse pehle jo Rasool bhi bheja hai usko yahi wahee ki hai ke mere siwa koi khuda nahin hai, pas tumlog meri hi bandagi karo
Roman Urdu (Junagarhi)Tujh say pehlay bhi jo rasool hum ney bheja uss ki taraf yehi wahee nazil farmaee kay meray siwa koi mabood bar-haq nahi pus tum sab meri hi ibadat kero
Devnagri Urdu (Maududi)हमने तुमसे पहले जो रसूल भी भेजा है उसको यहीं कहा है कि मेरे सिवा कोई खुदा नहीं है, पास तुम लोग मेरी ही बंदगी करो
عَرَبِيوَقالُوا اتَّخَذَ الرَّحمٰنُ وَلَدًا ۗ سُبحانَهُ ۚ بَل عِبادٌ مُكرَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उन (मुश्रिकों) ने कहा कि 'रहमान' (अत्यंत दयावान्) ने कोई संतान बना रखी है। वह (इससे) पवित्र है। बल्कि वे (फ़रिश्ते) सम्मानित बंदे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh kehte hain “rehman aulad rakhta hai” SubhanAllah , woh to banday hain jinhein izzat di gayi hai
Roman Urdu (Junagarhi)(Mushrik log) kehtay hain kay rehman aulad wala hai (ghalat hai) uss ki zaat pak hai bulkay woh sab uss kay ba-izzat banday hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये कहते हैं "रहमान औलाद रखता है" सुभानअल्लाह, वो तो बंदे हैं जिन्हे इज्जत दी गई है
عَرَبِيلا يَسبِقونَهُ بِالقَولِ وَهُم بِأَمرِهِ يَعمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे बात करने में उससे पहल नहीं करते और वे उसके आदेशानुसार ही काम करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Uske huzoor badh kar nahin bolte aur bas uske hukum par amal karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiss baat mein Allah per paish dasti nahi kertay bulkay uss kay farmaan per kaar band hain
Devnagri Urdu (Maududi)उसके हुजूर बढ़ कर नहीं बोलते और बस उसके हुकुम पर अमल करते हैं
عَرَبِييَعلَمُ ما بَينَ أَيديهِم وَما خَلفَهُم وَلا يَشفَعونَ إِلّا لِمَنِ ارتَضىٰ وَهُم مِن خَشيَتِهِ مُشفِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह जानता है, जो उनके सामने है और जो उनके पीछे है। और वे सिफ़ारिश नहीं करते, परंतु उसी के लिए जिसे वह पसंद करे। तथा वे उसी के भय से डरने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo kuch unke saamne hai usey bhi woh jaanta hai aur jo kuch unse ojhal hai ussey bhi woh bakhabar hai, woh kisi ki sifarish nahin karte bajuz uske jiske haqq mein sifarish sunne par Allah raazi ho, aur woh uske khauf se darey rehte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh inn kay aagay peechay kay tamam umoor say waqif hai woh kissi ki bhi sifarish nahi kertay ba-juz unn kay jin say Allah khush ho woh to khud haibat-e-elahee say larzan-o-tarsan hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो कुछ उनके सामने है उसे भी वो जानता है और जो कुछ उनसे ओझल है उसे भी वो खबर है, वो किसी की सिफरिश नहीं करता बाजुज उसके जिसको हक़ में सिफ़रिश सुनने पर अल्लाह रज़ी हो, और वो उसके ख़ौफ़ से डरे रहते हैं
عَرَبِي۞ وَمَن يَقُل مِنهُم إِنّي إِلٰهٌ مِن دونِهِ فَذٰلِكَ نَجزيهِ جَهَنَّمَ ۚ كَذٰلِكَ نَجزِي الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनमें से जो यह कहे कि मैं अल्लाह के सिवा पूज्य हूँ, तो यही है जिसे हम जहन्नम की सज़ा देंगे। ऐसे ही हम ज़ालिमों को सज़ा देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo unmein se koi kehde ke Allah ke siwa main bhi ek khuda hoon, to usey hum jahannum ki saza dein, hamare haan zaalimon ka yahi badla hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein say agar koi bhi keh day kay Allah kay siwa mein laeeq-e-ibadat hun to hum ussay dozakh ki saza den hum zalimon ko issi tarah saza detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जो उनमें से कोई कह दे कि अल्लाह के सिवा मैं भी एक खुदा हूँ, तो उसे हम जहन्नुम की सज़ा दें, हमारे हाँ ज़ालिमों का यही बदला है
عَرَبِيأَوَلَم يَرَ الَّذينَ كَفَروا أَنَّ السَّماواتِ وَالأَرضَ كانَتا رَتقًا فَفَتَقناهُما ۖ وَجَعَلنا مِنَ الماءِ كُلَّ شَيءٍ حَيٍّ ۖ أَفَلا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या जिन लोगों ने कुफ़्र किया यह नहीं देखा कि आकाश और धरती दोनों मिले हुए थे, फिर हमने दोनों को अलग-अलग कर दिया, तथा हमने पानी से हर जीवित चीज़ को बनाया? तो क्या ये लोग ईमान नहीं लाते?
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log jinhon ne (Nabi ki baat maanney se) inkar kardiya hai gaur nahin karte ke yeh sab aasman aur zameen baham miley huey thay, phir humne inhein juda kiya, aur pani se har zinda cheez paida ki, kya woh (hamari is khallaqi ko) nahin maante
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya kafir logon ney yeh nahi dekha kay aasman-o-zamin ba-hum milay julay thay phir hum ney unhen juda kiya aur her zinda cheez ko hum ney pani say peda kiya kiya yeh log phir bhi eman nahi latay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग जिन्हों ने (नबी की बात मन्ने से) इंकार करदिया है गौर नहीं करते के ये सब आसमान और जमीन बहम मिले हुए थे, फिर हमने इन्हें जुदा किया, और पानी से हर जिंदा चीज पैदा की, क्या वो (हमारी इस खल्लकी को) नहीं मानते
عَرَبِيوَجَعَلنا فِي الأَرضِ رَواسِيَ أَن تَميدَ بِهِم وَجَعَلنا فيها فِجاجًا سُبُلًا لَعَلَّهُم يَهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने धरती में पर्वत बना दिए, ताकि वह उनके साथ हिलने-डुलने न लगे और उसमें चौड़े रास्ते बना दिए, ताकि वे मार्ग पाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne zameen mein pahad jamaa diye taa-ke woh unhein lekar dhulak na jaye, aur ismein kushada raahein bana di, shayad ke log apna raasta maloom karlein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney zamin mein pahar bana diye takay woh makhlooq ko hila na sakay aur hum ney iss mein kushada raahen bana den takay woh raasta hasil keren
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने जमीन में पहाड़ जमा दिए ता-के वो उन्हें लेकर ढुलक ना जाए, और इसमें खुशियां रखें बना दी, शायद के लोग अपना रास्ता मालूम करें
عَرَبِيوَجَعَلنَا السَّماءَ سَقفًا مَحفوظًا ۖ وَهُم عَن آياتِها مُعرِضونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने आकाश को एक संरक्षित छत बनाया। और वे उसकी निशानियों से मुँह फेरने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne aasman ko ek mehfooz chatt bana diya, magar ye hain ke iski nishaniyon ki taraf tawajju hi nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Aasman ko mehfooz chat bhi hum ney hi banaya hai. Lekin log iss ki qudrat kay namoono per dehan hi nahi dhartay
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने आसमान को एक महफूज छत बना दिया, मगर ये हैं के इसकी निशानियों की तरफ तवाज्जु ही नहीं करते
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي خَلَقَ اللَّيلَ وَالنَّهارَ وَالشَّمسَ وَالقَمَرَ ۖ كُلٌّ في فَلَكٍ يَسبَحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वही है, जिसने रात और दिन, तथा सूरज और चाँद बनाए। सब एक-एक कक्षा में तैर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh Allah hi hai jisne raat aur din banaye aur Suraj aur Chand ko paida kiya, sab ek ek falak mein tair rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi Allah hai jiss ney raat aur din aur sooraj aur chand ko peda kiya hai. Inn mein say her aik apney apney madaar mein tertay phirtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और वो अल्लाह ही है जिसने रात और दिन बनाए और सूरज और चांद को पैदा किया, सब एक एक फलक में तैर रहे हैं
عَرَبِيوَما جَعَلنا لِبَشَرٍ مِن قَبلِكَ الخُلدَ ۖ أَفَإِن مِتَّ فَهُمُ الخالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) हमने आपसे पहले किसी मनुष्य के लिए अमरता नहीं रखी। फिर क्या अगर आप मर गए, तो ये सदैव रहने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Muhammad), hameshgi(eternity) to humne tumse pehle bhi kisi Insaan ke liye nahin rakkhi hai agar tum mar gaye to kya yeh log hamesha jeetay rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aap say pehlay kissi insan ko bhi hum ney hameshgi nahi di kiya agar aap marr gaye to woh hamesha kay liye reh jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ मुहम्मद), हमेशा (अनंत काल) तो हमने तुमसे पहले भी कोई इंसान के लिए नहीं रखा है अगर तुम मर गए तो क्या ये लोग हमेशा जीतते रहेंगे
عَرَبِيكُلُّ نَفسٍ ذائِقَةُ المَوتِ ۗ وَنَبلوكُم بِالشَّرِّ وَالخَيرِ فِتنَةً ۖ وَإِلَينا تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)हर जीव को मौत का स्वाद चखना है। और हम अच्छी तथा बुरी परिस्थितियों से तुम्हारी परीक्षा करते हैं तथा तुम हमारी ही ओर लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Har jaandaar ko maut ka maza chakhna hai, aur hum acchey aur burey halaat mein daal kar tum sabki aazmaish kar rahey hain, aakhir-e-kaar tumhein hamari hi taraf palatna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Her jaandaar mot ka maza chakhney wala hai. Hum ba-tareeq imtehan tum say her aik ko buraee bhalaee mein mubtila kertay hain aur tum sab humari hi taraf lotaye jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)हर जानदार को मौत का मजा चखना है, और हम अच्छे और बुरे हालात में डाल कर तुम सबकी आजमाइश कर रहे हैं, आखिर-ए-कार तुम्हें हमारी ही तरफ पलटना है
عَرَبِيوَإِذا رَآكَ الَّذينَ كَفَروا إِن يَتَّخِذونَكَ إِلّا هُزُوًا أَهٰذَا الَّذي يَذكُرُ آلِهَتَكُم وَهُم بِذِكرِ الرَّحمٰنِ هُم كافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब काफ़िर आपको देखते हैं, तो आपको उपहास बना लेते हैं। (वे कहते हैं :) क्या यही है, जो तुम्हारे पूज्यों की चर्चा करता है? जबकि वे स्वयं 'रहमान' (अत्यंत दयावान्) के ज़िक्र का इनकार करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh munkireen e haqq jab tumhein dekhte hain to tumhara mazaaq bana letey hain. Kehte hain “kya yeh hai woh shaks jo tumhare khudaon ka zikr kiya karta hai?” aur inka apna haal yeh hai ke rehman ke zikr se munkir hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh munkireen tujhay jab bhi dekhtay hain to tumhara mazaq hi uratay hain kay kiya yehi woh hai jo tumharay maboodon ka zikar buraee say kerta hai aur woh khud hi rehman ki yaad kay bilkul hi munkir hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये मुनकिरीन ए हक जाब तुम्हें देखते हैं तो तुम्हारा मजाक बना लेते हैं। कहते हैं “क्या ये है वो शक्स जो तुम्हारे खुदाओं का ज़िक्र किया करता है?” और इनका अपना हाल ये है के रहमान के ज़िक्र से मुनकिर हैं
عَرَبِيخُلِقَ الإِنسانُ مِن عَجَلٍ ۚ سَأُريكُم آياتي فَلا تَستَعجِلونِ
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हिन्दी (Al-Omari)इनसान जन्मजात जल्दबाज़ है। मैं शीघ्र तुम्हें अपनी निशानियाँ दिखाऊँगा। अतः तुम मुझसे जल्दी की माँग न करो।
Roman Urdu (Maududi)Insaan jald baaz makhlooq hai, abhi main tumko apni nishaniyan dikhaye deta hoon, jaldi na machao
Roman Urdu (Junagarhi)Insan jald baaz makhlooq hai. Mein tumhen apni nishaniyan abhi abhi dikhaoon ga tum mujh say jald baazi na kero
Devnagri Urdu (Maududi)इंसान जल्दी बाज़ मख़लूक है, अभी मैं तुमको अपनी निशानियां दिखाये देता हूं, जल्दी ना मचाओ
عَرَبِيوَيَقولونَ مَتىٰ هٰذَا الوَعدُ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे कहते हैं : यह वादा कब पूरा होगा, यदि तुम सच्चे हो?
Roman Urdu (Maududi)Yeh log kehte hain “aakhir yeh dhamki poori kab hogi agar tum sacchey ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehtay hain kay agar sachay ho to bata do kay yeh wada kab hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग कहते हैं "आखिर ये धमाकेदार पूरी कब होगी अगर तुम सच्चे हो"
عَرَبِيلَو يَعلَمُ الَّذينَ كَفَروا حينَ لا يَكُفّونَ عَن وُجوهِهِمُ النّارَ وَلا عَن ظُهورِهِم وَلا هُم يُنصَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि ये काफ़िर लोग उस समय को जान लें, जब वे न अपने चेहरों से आग को रोक सकेंगे और न अपनी पीठों से और न उनकी सहायता की जाएगी। (तो यातना के लिए जल्दी न मचाएँ)।
Roman Urdu (Maududi)Kaash in kaafiron ko us waqt ka kuch ilam hota jabke yeh na apne mooh aag se bacha sakenge na apni peethein, aur na inko kahin se madad pahunchegi
Roman Urdu (Junagarhi)Kaash! Yeh kafir jantay kay uss waqt na to yeh kafir aag ko apney chehron say hata saken gay aur na apni peethon say aur na unn ki madad ki jayegi
Devnagri Urdu (Maududi)काफिरों को उस वक्त का कुछ इलम होता जब ये ना अपने मुंह आग से बचा सकेंगे ना अपनी पीठ, और ना इनको कहीं से मदद मांगेगी
عَرَبِيبَل تَأتيهِم بَغتَةً فَتَبهَتُهُم فَلا يَستَطيعونَ رَدَّها وَلا هُم يُنظَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि वह उनपर अचानक आएगी, तो उन्हें आश्चर्यचकित कर देगी। फिर वे न उसे फेर सकेंगे और न उन्हें मोहलत दी जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Woh balaa (catastrophe) achanak aayegi aur inhein is tarah yaklakht (suddenly) daboch legi ke yeh na usko dafaa kar sakenge aur na inko lamha bhar mohlat hi mil sakegi
Roman Urdu (Junagarhi)(Haan haan!) waday ki ghari unn kay pass achanak aajayegi aur enhen hakka bakka ker dey gi phir na to yeh log ussay taal saken gay aur na zara si mohlat diye jayengay
Devnagri Urdu (Maududi)वो बला (तबाही) अचानक आएगी और इन्हें इस तरह यक्लाख्त (अचानक) दबोच लेगी के ये ना उसको दफा कर पाएंगे और ना इनको लम्हा भर मोहलत ही मिल जाएगी
عَرَبِيوَلَقَدِ استُهزِئَ بِرُسُلٍ مِن قَبلِكَ فَحاقَ بِالَّذينَ سَخِروا مِنهُم ما كانوا بِهِ يَستَهزِئونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आपसे पहले कई रसूलों का मज़ाक़ उड़ाया गया, तो उनमें से जिन लोगों ने मज़ाक उड़ाया, उन्हें उसी चीज़ ने घेर लिया, जिसका वे मज़ाक़ उड़ाते थे।
Roman Urdu (Maududi)Mazaaq tumse pehle bhi Rasoolon ka udaya jaa chuka hai, magar unka mazaaq udane waley usi cheez ke pher mein aa kar rahey jiska woh mazaaq udatey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tujh say pehlay rasoolon kay sath bhi hansi mazaq kiya gaya pus hansi kerney walon ko hi uss cheez ney gher liya jiss ki woh hansi uratay thay
Devnagri Urdu (Maududi)मजाक तुमसे पहले भी रसूलों का उदय जा चूका है, मगर उनका मजाक उड़ाने वाली उसी चीज़ के फेर में आ कर रहे जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे
عَرَبِيقُل مَن يَكلَؤُكُم بِاللَّيلِ وَالنَّهارِ مِنَ الرَّحمٰنِ ۗ بَل هُم عَن ذِكرِ رَبِّهِم مُعرِضونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप पूछिए कि कौन है जो रात और दिन में 'रहमान' से तुम्हारी रक्षा करता है? बल्कि वे अपने पालनहार की याद से मुँह फेरने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), insey kaho, “kaun hai jo raat ko ya din ko tumhein rehman se bacha sakta ho?” magar yeh apne Rubb ki naseehat se mooh moad rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say poochiye kay rehman say din aur raat tumhari hifazat kaun ker sakta hai? Baat yeh hai kay yeh log apnay rab kay zikar say phiray huye hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), इनसे कहो, "कौन है जो रात को या दिन को तुम्हें रहमान से बचा सकता हो?" मगर ये अपने रब की हिदायत से मुह मोड़ रहे हैं
عَرَبِيأَم لَهُم آلِهَةٌ تَمنَعُهُم مِن دونِنا ۚ لا يَستَطيعونَ نَصرَ أَنفُسِهِم وَلا هُم مِنّا يُصحَبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उनके कुछ पूज्य हैं, जो उन्हें हमारी यातना से बचाते हैं? वे न तो खुद अपनी सहायता कर सकते हैं और न हमारी यातना से उन्हें बचाया जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh kuch aise khuda rakhte hain jo hamare muqable mein inki himayat karein? Woh na to khud apni madad kar sakte hain aur na hamari hi taaeed unko haasil hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya humaray siwa inn kay aur mabood hain jo enhen musibaton say bacha len. Koi bhi khud apni madad ki taqat nahi rakhta aur na koi humari taraf say rafaqat diya jata hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये कुछ ऐसे खुदा रखते हैं जो हमारे मुकाबले में इनकी हिमायत करें? वो ना तो खुद अपनी मदद कर सकते हैं और ना हमारी ही ताइद उनको हासिल है
عَرَبِيبَل مَتَّعنا هٰؤُلاءِ وَآباءَهُم حَتّىٰ طالَ عَلَيهِمُ العُمُرُ ۗ أَفَلا يَرَونَ أَنّا نَأتِي الأَرضَ نَنقُصُها مِن أَطرافِها ۚ أَفَهُمُ الغالِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि हमने इन (काफ़िरों) को और इनके बाप-दादों को जीवन की सुख-सुविधाएँ प्रदान कीं, यहाँ तक कि उनपर लंबा समय बीत गया। तो क्या वे देखते नहीं कि हम धरती को उसके किनारों से कम करते आ रहे हैं? तो क्या वही प्रभावी रहने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Asal baat yeh hai ke in logon ko aur inke aabaa o ajdaad (fore-fathers) ko hum zindagi ka sar o saamaan diye chale gaye yahan tak ke inko din lag gaye (until the period grew too long for them). Magar kya inhein nazar nahin aata ke hum zameen ko mukhtalif simton se ghataye chale aa rahey hain (shrinking its boundaries)? Phir kya yeh gaalib aa jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay hum ney enhen aur inn kay baap dadon ko zindagi kay saro saman diye yahan tak kay unn ki muddat-e-umar guzar gaee. Kiya woh nahi dekhtay kay hum zamin ko iss kay kinaron say ghatatay chalay aarahey hain abb kiya wohi ghalib hain?keh dijiye! Mein to tumhen Allah ki wahee kay zariye aagah ker raha hun magar behray log baat nahi suntay jabkay unhen aagah kiya jaye
Devnagri Urdu (Maududi)असल बात ये है कि लोगों को और इनके आबा ओ अजदाद (पूर्वजों) को हम जिंदगी का सार ओ सामान दिए चले गए यहां तक ​​के इनको दिन लग गए (जब तक कि अवधि बहुत लंबी नहीं हो गई) उन्हें)। मगर क्या इन्हें नज़र नहीं आता के हम ज़मीन को मुख़्तलिफ़ सिम्तों से घटाये चले आ रहे हैं? फिर क्या ये गालिब आ जायेंगे
عَرَبِيقُل إِنَّما أُنذِرُكُم بِالوَحيِ ۚ وَلا يَسمَعُ الصُّمُّ الدُّعاءَ إِذا ما يُنذَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें कि मैं तो तुम्हें केवल वह़्य के साथ डराता हूँ। और बहरे पुकार को नहीं सुनते, जब कभी डराए जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Inse kehdo ke “main to wahee (revelation) ki bina par tumhein mutanabbeh (warn) kar raha hoon”. Magar behre pukaar ko nahin suna karte jabke unhein khabardaar kiya jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! Mein to tumhen Allah ki wahee kay zariye aagah ker raha hun magar behray log baat nahi suntay jabkay unhen aagah kiya jaye
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहदो के "मैं तो वही (रहस्योद्घाटन) कि बिना पर तुम्हें मुतनब्बे (चेतावनी) कर रहा हूँ"। मगर बाहर पुकार को नहीं सुना जाता जबके उन्हें खबरदार किया जाए
عَرَبِيوَلَئِن مَسَّتهُم نَفحَةٌ مِن عَذابِ رَبِّكَ لَيَقولُنَّ يا وَيلَنا إِنّا كُنّا ظالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय यदि उन्हें आपके पालनहार की तनिक यातना भी छू जाए, तो अवश्य पुकार उठेंगे : हाय हमारा विनाश! निश्चय हम ही अत्याचारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar tere Rubb ka azaab zara sa inhein choo jaye to abhi cheekh utthein ke haaye hamari kambakhti, beshak hum khatawaar thay
Roman Urdu (Junagarhi)Agar enhen teray rab kay kissi azab ka jhonka bhi lag jaye to pukar uthen kay haye humari bad-bakhti! Yeqeenan hum gunehgar thay
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर तेरे रब का अजब ज़रा सा इन्हें छू जाए तो अभी गाल उठें के हाए हमारी कम्बख्त, बेशक हम ख़तावर थे
عَرَبِيوَنَضَعُ المَوازينَ القِسطَ لِيَومِ القِيامَةِ فَلا تُظلَمُ نَفسٌ شَيئًا ۖ وَإِن كانَ مِثقالَ حَبَّةٍ مِن خَردَلٍ أَتَينا بِها ۗ وَكَفىٰ بِنا حاسِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हम क़ियामत के दिन न्याय के तराज़ू रखेंगे। फिर किसी पर कुछ भी ज़ुल्म नहीं किया जाएगा। और अगर राई के एक दाने के बराबर (भी किसी का) कर्म होगा, तो हम उसे ले आएँगे। और हम हिसाब लेने वाले काफ़ी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Qayamat ke roz hum theek theek toalne waley tarazu rakh dengey, phir kisi shaks par zarra barabar zulm na hoga. Jiska rai (mustard seed) ke daane ke barabar bhi kuch kiya dhara hoga woh hum saamne le aayenge aur hisaab lagane ke liye hum kafi hain
Roman Urdu (Junagarhi)Qayamat kay din hum darmiyan mein laa rakhen gay theek theek tolney wali tarazoo ko. Phir kissi per kuch bhi zulm na kiya jayega. Aur agar aik raaee kay daney kay barabar bhi amal hoga hum ussay laa hazir keren gay aur hum kafi hain hisab kerney walay
Devnagri Urdu (Maududi)क़यामत के रोज़ हम ठीक ठीक तोलें वे तराजू रख देंगे, फिर किसी शक्स पर ज़रा बराबर ज़ुल्म न होगा। जिसका राई (सरसों) के दाने के बराबर भी कुछ किया धरा होगा वो हम सामने ले आएंगे और हिसाब लगाने के लिए हम काफी हैं
عَرَبِيوَلَقَد آتَينا موسىٰ وَهارونَ الفُرقانَ وَضِياءً وَذِكرًا لِلمُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने मूसा तथा हारून को सत्य एवं असत्य के बीच अंतर करने वाली चीज़, तथा प्रकाश और तक़्वा वालों के लिए उपदेश प्रदान किया।
Roman Urdu (Maududi)Pehle hum Moosa aur Haroon ko furqan(criteria) aur roshni aur “zikr” ata kar chuke hain un muttaqi logon ki bhalayi ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh bilkul sach hai kay hum ney musa-o-haroon ko faislay kerney wali noorani aur perhezgaron kay liye waaz-o-naseehat wali kitab ata farmaee hai
Devnagri Urdu (Maududi)पहले हम मूसा और हारून को फुरकान (मानदंड) और रोशनी और "ज़िक्र" अता कर चुके हैं उन मुत्तक़ी लोगों की भलाई के लिए
عَرَبِيالَّذينَ يَخشَونَ رَبَّهُم بِالغَيبِ وَهُم مِنَ السّاعَةِ مُشفِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो अपने पालनहार से बिन देखे डरते हैं और वे क़ियामत से भयभीत रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo bay-dekhe (bagair dekhe) apne Rubb se darein aur jinko (hisaab ki) us ghadi ka khatka laga hua hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh log jo apney rab say bin dekhay khof khatay hain aur qayamat (kay tasawwur) say kaanptay rehtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो बे-देखे (बिगैर देखे) अपने रब से डरें और जिनका (हिसाब की) हमें घड़ी का खटका लगा हुआ है
عَرَبِيوَهٰذا ذِكرٌ مُبارَكٌ أَنزَلناهُ ۚ أَفَأَنتُم لَهُ مُنكِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह (क़ुरआन) एक बरकत वाला उपदेश है, जिसे हमने उतारा है। तो क्या तुम इसके इनकारी हो?
Roman Urdu (Maududi)Aur ab yeh ba-barakat “zikr” humne (tumhare liye) nazil kiya hai phir kya tum isko qabool karne se inkaari ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh naseehat-o-barkat wala quran bhi humin ney nazil farmaya hai kiya phir bhi tum iss kay munkir ho
Devnagri Urdu (Maududi)और अब ये ब-बरकत "ज़िक्र" हमने (तुम्हारे लिए) नाज़िल किया है फिर क्या तुम इसको क़बूल करने से इनकारी हो
عَرَبِي۞ وَلَقَد آتَينا إِبراهيمَ رُشدَهُ مِن قَبلُ وَكُنّا بِهِ عالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने इससे पहले इबराहीम को उसकी समझ-बूझ प्रदान की थी और हम उससे भली-भाँति अवगत थे।
Roman Urdu (Maududi)Ussey bhi pehle humne Ibrahim ko uski hosh-mandi bakshi thi aur hum usko khoob jantey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney iss say pehlay ibrahim ko iss ki samajh boojh bakhshi thi aur hum iss kay ehwaal say ba-khoobi waqif thay
Devnagri Urdu (Maududi)उसे भी पहले हमने इब्राहिम को उसकी होश-मंदी बख्शी थी और हम उसको खूब जानते थे
عَرَبِيإِذ قالَ لِأَبيهِ وَقَومِهِ ما هٰذِهِ التَّماثيلُ الَّتي أَنتُم لَها عاكِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब उसने अपने बाप तथा अपनी जाति से कहा : ये प्रतिमाएँ (मूर्तियाँ) क्या हैं, जिनकी पूजा में तुम लगे हुए हो?
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo woh mauqa ke usne apne baap aur apni qaum se kaha tha ke “yeh muratein (images) kaisi hain jinke tumlog girwida (devoted) ho rahey ho?”
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay uss ney apney baap say aur pani qom say kaha kay yeh moortiyan jin kay tum mujawar bann bethay ho kiya hain
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो वो मौका के उसने अपने बाप और अपनी क़ौम से कहा था के "ये मूरतें (चित्र) कैसी हैं जिनके तुमलोग गिरविदा (समर्पित) हो" रहे हो?”
عَرَبِيقالوا وَجَدنا آباءَنا لَها عابِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हमने अपने बाप-दादा को इन्हीं की पूजा करने वाला पाया है।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “humne apne baap dada ko inki ibadat karte paya hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Sab ney jawab diya kay hum ney apnay baap dada ko enhi ki ibadat kertay huye paya
Devnagri Urdu (Maududi)उनको ने जवाब दिया "हमने अपने बाप दादा को इनकी इबादत करते पाया है"
عَرَبِيقالَ لَقَد كُنتُم أَنتُم وَآباؤُكُم في ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उस (इबराहीम) ने कहा : निश्चय तुम और तुम्हारे बाप-दादा खुली गुमराही में रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “tum bhi gumraah ho aur tumhare baap dada bhi sareeh gumaraahi mein paday huey thay?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ney farmaya! Phir to tum aur tumharay baap dada sabhi yaqeenan khulli gumrahi mein mubtila rahey
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा "तुम भी गुमराह हो और तुम्हारे बाप दादा भी सारे गुमराह में पड़े हुए थे?"
عَرَبِيقالوا أَجِئتَنا بِالحَقِّ أَم أَنتَ مِنَ اللّاعِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : क्या तुम हमारे पास सत्य लाए हो या (हमसे) दिल-लगी कर रहे हो?
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “kya tu hamare samne apne asli khayalaat pesh kar raha hai ya mazaaq karta hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehnay lagay kiya aap humaray pass sach much haq laye hain ya yun hi mazaq ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने कहा "क्या तू हमारे सामने अपना असली ख्यालात पेश कर रहा है या मज़ाक करता है?"
عَرَبِيقالَ بَل رَبُّكُم رَبُّ السَّماواتِ وَالأَرضِ الَّذي فَطَرَهُنَّ وَأَنا عَلىٰ ذٰلِكُم مِنَ الشّاهِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : बल्कि तुम्हारा पालनहार आकाशों तथा धरती का पालनहार है, जिसने उन्हें पैदा किया है और मैं इसकी गवाही देने वालों में से हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Usne jawab diya “nahin, balke fil waqey tumhara Rubb wahi hai jo zameen aur aasmano ka Rubb aur unka paida karne wala hai, ispar main tumhare samne gawahi deta hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ney farmaya nahi dar-haqeeqat tum sab ka perwerdigar to woh hai jo aasmano aur zamin ka malik hai jiss ney unehn peda kiya hai mein to issi baat ka gawah aur qaeel hun
Devnagri Urdu (Maududi)उसने जवाब दिया "नहीं, बलके फिल वही तुम्हारा रब वही है जो ज़मीन और आसमान का रब और उनका भुगतान करने वाला है, इसपर मैं तुम्हारे सामने गवाही देता हूं
عَرَبِيوَتَاللَّهِ لَأَكيدَنَّ أَصنامَكُم بَعدَ أَن تُوَلّوا مُدبِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह की क़सम! मैं अवश्य ही तुम्हारी मूर्तियों का गुप्त उपाय करूँगा, इसके बाद कि तुम पीठ फेरकर चले जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur khuda ki kasam main tumhari gair maujoodgi mein zaroor tumhare buthon (idols/murtiyon) ki khabar lunga”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah ki qasam mein tumharay inn maboodon kay sath jab tum alehda peeth pher ker chal do gay aik chaal chalon ga
Devnagri Urdu (Maududi)और खुदा की कसम मैं तुम्हारी गैर मौजुदगी में जरूर तुम्हारे बटन (मूर्तियों/मूर्तियों) की खबर लूंगा''
عَرَبِيفَجَعَلَهُم جُذاذًا إِلّا كَبيرًا لَهُم لَعَلَّهُم إِلَيهِ يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने उन्हें टुकड़े-टुकड़े कर दिया, सिवाय उनके एक बड़े के, ताकि वे उसकी ओर लौटें।
Roman Urdu (Maududi)Chunanchey usne unko tukde tukde kardiya aur sirf unke baday ko chodh diya taa-ke shayad woh iski taraf rujoo karein
Roman Urdu (Junagarhi)Pus uss ney unn sab kay tukray tukray ker diye haan sirf baray butt ko chor diya yeh bhi iss liye kay woh sab uss ki taraf hi loten
Devnagri Urdu (Maududi)चुनांचे उसने उनको टुकड़े-टुकड़े कर दिया और सिर्फ उनके बदले को छोड़ दिया ता-के शायद वो इसकी तरफ रूजू करें
عَرَبِيقالوا مَن فَعَلَ هٰذا بِآلِهَتِنا إِنَّهُ لَمِنَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हमारे पूज्यों के साथ यह किसने किया है? निःसंदेह वह निश्चय अत्याचारियों में से है!
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne aakar buthon[idols] ka yeh haal dekha to) kehne lagey “hamare khudaon ka yeh haal kisne kardiya? Bada hi koi zalim tha woh”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney lagay kay humaray khudaon kay sath yeh kiss ney kiya? Aisa shaks to yaqeenan zalimon mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)उन्हें आकार बुथों[मूर्तियों] का ये हाल देखा तो) कहने लगे ''हमारे खुदाओं का'' हाँ हाल किसने करदिया? बड़ा ही कोई जालिम था वो”
عَرَبِيقالوا سَمِعنا فَتًى يَذكُرُهُم يُقالُ لَهُ إِبراهيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)लोगों ने कहा : हमने एक नवयुवक को उनकी चर्चा करते हुए सुना है, जिसे इबराहीम कहा जाता है।
Roman Urdu (Maududi)(baaz log) boley “ humne ek nawjawan ko inka zikr karte suna tha jiska naam Ibrahim hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Bolay hum ney aik no-jawan ko innk a tazkara kertay huye suna tha jissay ibrahim (alh-e-salam) kaha jata hai
Devnagri Urdu (Maududi)(बाज़ लोग) बोले “हमने एक नवाज़वान को इनका जिक्र करते सुना था जिसका नाम इब्राहिम है”
عَرَبِيقالوا فَأتوا بِهِ عَلىٰ أَعيُنِ النّاسِ لَعَلَّهُم يَشهَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : उसे लोगों की आँखों के सामने लाओ, ताकि वे गवाह हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “ to pakad lao usey sabke samne taa-ke log dekh lein (uski kaisi khabar li jati hai)”
Roman Urdu (Junagarhi)Sab ney kaha acha ussay majmay mein logon ki nigahon kay samney lao takay sab dekhen
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने कहा “तो पकड़ लाओ उसे सबके सामने ता-के लोग देख लें (उसकी कैसी खबर ली जाती है)”
عَرَبِيقالوا أَأَنتَ فَعَلتَ هٰذا بِآلِهَتِنا يا إِبراهيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने पूछा : ऐ इबराहीम! क्या तूने ही हमारे पूज्यों के साथ यह किया है?
Roman Urdu (Maududi)(Ibrahim ke aane par) unhon ne pucha “kyun Ibrahim, tu nay hamare khudaon ke saath yeh harakat ki hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kehnay lagay! Aey ibrahim (alh-e-salam) kiya tu ney hi humaray khudaon kay sath yeh harkat ki hai
Devnagri Urdu (Maududi)(इब्राहिम के आने पर) उनहों ने पूछा "क्यूं इब्राहिम, तू नहीं हमारे खुदाओं के साथ ये हरकत की है
عَرَبِيقالَ بَل فَعَلَهُ كَبيرُهُم هٰذا فَاسأَلوهُم إِن كانوا يَنطِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : बल्कि यह उनके इस बड़े ने किया है। अतः उन्हीं से पूछ लो, यदि वे बोलते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Usne jawab diya “balke yeh sab kuch inke is sardar ne kiya hai, inhi se pooch lo agar yeh bolte hon”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ney jawab diya bulkay iss kaam ko inn kay baray ney kiya hai tum apney khudaon say hi pooch lo agar yeh boltay chaltay hon
Devnagri Urdu (Maududi)उसने जवाब दिया "बल्के ये सब कुछ इनके इस सरदार ने किया है, इनसे पूछ लो अगर ये बोलते हो"
عَرَبِيفَرَجَعوا إِلىٰ أَنفُسِهِم فَقالوا إِنَّكُم أَنتُمُ الظّالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उन्होंने अपने मन में विचार किया और कहने लगे : निश्चय तुम खुद ही अत्याचारी हो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh sunkar woh log apne zameer ki taraf palte aur (apne dilon mein) kehne lagey “waqayi tum khud hi zalim ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus yeh log apney dilon mein qaeel hogaye aur kehney lagay waqaee zalim to tum hi ho
Devnagri Urdu (Maududi)ये सुनकर वो लोग अपने जमीर की तरफ पलटे और (अपने दिलों में) कहने लगे "वाकई तुम खुद ही जालिम हो"
عَرَبِيثُمَّ نُكِسوا عَلىٰ رُءوسِهِم لَقَد عَلِمتَ ما هٰؤُلاءِ يَنطِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वे अपने सिरों के बल औंधे कर दिए गए, (और बोले :) निःसंदेह तू जानता है कि ये बोलते नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Magar phir unki math palat gayi(minds became perverse) aur boley “ tu jaanta hai ke yeh bolte nahin hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir apney saron kay bal ondhay hogaye (aur kehnay lagay kay) yeh to tujhay bhi maloom hai kay yeh bolney chaalney walay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)मगर फिर उनकी गणित पलट गई (दिमाग विकृत हो गया) और बोले "तू जानता है के ये बोलते नहीं हैं"
عَرَبِيقالَ أَفَتَعبُدونَ مِن دونِ اللَّهِ ما لا يَنفَعُكُم شَيئًا وَلا يَضُرُّكُم
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हिन्दी (Al-Omari)(इबराहीम ने) कहा : फिर क्या तुम अल्लाह को छोड़ उस चीज़ की इबादत करते हो, जो न तुम्हें कुछ लाभ पहुँचाती है और न तुम्हें हानि पहुँचाती है?
Roman Urdu (Maududi)Ibrahim ne kaha “phir kya tum Allah ko chodh kar un cheezon ko poojh rahey ho jo na tumhein nafaa pahunchane par qadir hain na nuqsan
Roman Urdu (Junagarhi)Allah kay khalil ney ussi waqt farmaya afsos! Kiya tum Allah kay ilawa unn ki ibadat kertay ho jo na tumhen kuch bhi nafa phoncha saken na nuksan
Devnagri Urdu (Maududi)इब्राहिम ने कहा "फिर क्या तुम अल्लाह को छोड़ कर उन चीज़ को पूज रहे हो जो ना तुम्हें नफा पहन कर कादिर हैं ना नुक्सान पर
عَرَبِيأُفٍّ لَكُم وَلِما تَعبُدونَ مِن دونِ اللَّهِ ۖ أَفَلا تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुफ़ है तुमपर और उनपर जिनकी तुम अल्लाह को छोड़कर इबादत करते हो। तो क्या तुम समझते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Tuff (Fie) hai tumpar aur tumhare in maboodon par jinki tum Allah ko chodh kar pooja kar rahey ho, kya tum kuch bhi aqal nahin rakhte?”
Roman Urdu (Junagarhi)Tuff hai tum per aur inn per jin ki tum Allah kay siwa ibadat kertay ho. Kiya tumhen itni si aqal bhi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)टफ (फाई) है तुमपर और तुम्हारे इन माबूदोन पर जिनके तुम अल्लाह को छोड़ कर पूजा कर रहे हो, क्या तुम कुछ भी अक्ल नहीं रखते?”
عَرَبِيقالوا حَرِّقوهُ وَانصُروا آلِهَتَكُم إِن كُنتُم فاعِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : इसे जला दो तथा अपने पूज्यों की सहायता करो, अगर तुम कुछ करने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “jala daalo isko aur himayat karo apne khudaon ki agar tumhein kuch karna hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney lagay issay jala do aur apney khudaon ki madad kero agar tumhen kuch kerna hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने कहा "जला डालो इसको और हिमायत करो अपने खुदाओं की अगर तुम्हें कुछ करना है"
عَرَبِيقُلنا يا نارُ كوني بَردًا وَسَلامًا عَلىٰ إِبراهيمَ
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हिन्दी (Al-Omari)हमने कहा : ऐ आग! तू इबराहीम पर ठंडक और सुरक्षा सुरक्षा बन जा।
Roman Urdu (Maududi)Humne kaha “Aey aag, thandi ho jaa aur salamati ban jaa Ibrahim par”
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney farma diya aey aag! Tu thandi parr jaa aur ibrahim (alh-e-salam) kay liye salamti (aur aaram ki cheez) bann jaa
Devnagri Urdu (Maududi)हमने कहा "ऐ आग, ठंडी हो जा और सलामती बन जा इब्राहिम पर"
عَرَبِيوَأَرادوا بِهِ كَيدًا فَجَعَلناهُمُ الأَخسَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने उसके साथ एक चाल का इरादा किया, तो हमने उन्हीं को अत्यंत घाटे वाला कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Woh chahte thay ke Ibrahim ke saath burayi karein magar humne unko buri tarah nakaam kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Go unhon ney ibrahim (alh-e-salam) ka bura chaha lekin hum ney unhen nakaam bana diya
Devnagri Urdu (Maududi)वो चाहते थे के इब्राहिम के साथ बुराइयां करें मगर हमने उनको बुरी तरह नाकाम करदिया
عَرَبِيوَنَجَّيناهُ وَلوطًا إِلَى الأَرضِ الَّتي بارَكنا فيها لِلعالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हम उसे (इबराहीम को) और लूत को बचाकर उस भूमि की ओर ले गए, जिसमें हमने संसार वालों के लिए बरकत रखी।
Roman Urdu (Maududi)Aur hum usey aur Lut ko bacha kar us sar-zameen ki taraf nikal le gaye jismein humne duniya walon ke liye barkatein rakkhi hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ibrahim aur loot ko bacha ker uss zamin ki taraf ley chalay jiss mein hum ney tamam jahan walon kay liye barkat rakhi thi
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने उसे और लुट को बचा कर सर-जमीन की तरफ निकल ले गए जिसमें हमने दुनिया वालों के लिए बरकतें रखी हैं
عَرَبِيوَوَهَبنا لَهُ إِسحاقَ وَيَعقوبَ نافِلَةً ۖ وَكُلًّا جَعَلنا صالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उन्हें इसहाक़ प्रदान किया और उसके अतिरिक्त याक़ूब भी। और हमने हर एक को नेक बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne usey Ishaq ata kiya aur Yakoob uspar mazeed, aur har ek ko saleh (righteous) banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney ussay ishaq ata farmaya aur yaqoob iss per mazeed. Aur her aik ko hum ney saleh banaya
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने उसे इशाक अता किया और याकूब उसपर मजीद, और हर एक को सालेह (नेक) बनाया
عَرَبِيوَجَعَلناهُم أَئِمَّةً يَهدونَ بِأَمرِنا وَأَوحَينا إِلَيهِم فِعلَ الخَيراتِ وَإِقامَ الصَّلاةِ وَإيتاءَ الزَّكاةِ ۖ وَكانوا لَنا عابِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उन्हें ऐसे अग्रणी (पेशवा) बनाया, जो हमारे आदेशानुसार (लोगों को) सही राह दिखाते थे। और हमने उनकी ओर नेक कार्य करने, नमाज़ क़ायम करने और ज़कात देने की वह़्य (प्रकाशना) की। और वे केवल हमारी इबादत करने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne unko imam bana diya jo hamare hukum se rehnumayi karte thay aur humne unhein wahee (revelation) ke zariye neik kaamon ki aur namaz qayam karne ki aur zakat dene ki hidayat ki, aur woh hamare ibadat guzaar thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unehn paishwa bana diya kay humaray hukum say logon ki rehbari keren aur hum ney unn ki taraf nek kaamon kay kerney aur namazon kay qaeem rakhney aur zakat denay ki wahee (talqeen) ki aur woh sab kay sab humaray ibadat guzaar banday thay
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने उनको इमाम बना दिया जो हमारे हुकुम से रहनुमाई करते थे और हमने उन्हें वही (रहस्योद्घाटन) के ज़रिये नीक कामोन की और नमाज़ क़याम करने की और ज़कात देने की हिदायत की, और वो हमारे इबादत गुज़ार थे
عَرَبِيوَلوطًا آتَيناهُ حُكمًا وَعِلمًا وَنَجَّيناهُ مِنَ القَريَةِ الَّتي كانَت تَعمَلُ الخَبائِثَ ۗ إِنَّهُم كانوا قَومَ سَوءٍ فاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और लूत को हमने निर्णय शक्ति और ज्ञान दिया और उसे उस बस्ती से बचा लिया, जो गंदे काम किया करती थी। निश्चय वे बुरे, अवज्ञा करने वाले लोग थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Lut ko humne hukum aur ilm baksha aur usey us basti se bacha kar nikal diya jo badkariyan karti thi. Dar haqeeqat woh badi hi buri, fasiq qaum thi
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney loot (alh-e-salam) ko bhi hukum aur ilm diya aur ussay uss basti say nijat di jahan kay log ganday kaamon mein mubtila thay. Aur thay bhi woh bad-tareen gunehgaar
Devnagri Urdu (Maududi)और लूट को हमने हुकुम और इल्म बख्शा और हमें बस्ती से बचाकर निकाल दिया जो बदकारियां करती थी। दर हकीकत वो बड़ी ही बुरी, फासीक़ क़ौम थी
عَرَبِيوَأَدخَلناهُ في رَحمَتِنا ۖ إِنَّهُ مِنَ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उन्हें अपनी दया में दाख़िल कर लिया। निःसंदेह वह सदाचारियों में से थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Lut ko humne apni rehmat mein dakhil kiya, woh saleh logon mein se tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney loot (alh-e-salam) ko apni rehmat mein dakhil ker liya bey shak woh neko kaar logon mein say tha
Devnagri Urdu (Maududi)और लुट को हमने अपनी रहमत में दाख़िल किया, वो साले लोगों में से था
عَرَبِيوَنوحًا إِذ نادىٰ مِن قَبلُ فَاستَجَبنا لَهُ فَنَجَّيناهُ وَأَهلَهُ مِنَ الكَربِ العَظيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा नूह को (याद करो) जब उन्होंने इससे पहले (अल्लाह को) पुकारा, तो हमने उनकी दुआ क़बूल कर ली, फिर उन्हें और उनके घर वालों को बड़े कष्ट से बचा लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur yahi niyamat humne Nooh ko di, yaad karo jabke in sab se pehle usne humein pukara tha, humne uski dua qabool ki aur usey aur uske ghar walon ko karb-e-azeem (great calamity) se najaat di
Roman Urdu (Junagarhi)Nooh kay uss waqt ko yaad kijiye jabkay uss ney iss say pehlay dua ki hum ney uss ki dua qabool farmaee aur ussay aur uss kay ghar walon ko baray karb say nijat di
Devnagri Urdu (Maududi)और यही नियामत हमने नूह को दी, याद करो जबके सब से पहले उसने हमें पुकारा था, हमने उसकी दुआ कबूल की और उसके घर वालों को करब-ए-अज़ीम (बड़ी विपत्ति) से नजात दी
عَرَبِيوَنَصَرناهُ مِنَ القَومِ الَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِنا ۚ إِنَّهُم كانوا قَومَ سَوءٍ فَأَغرَقناهُم أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उन लोगों के विरुद्ध उनकी मदद की, जिन्होंने हमारी निशानियों को झुठलाया। निःसंदेह वे बुरे लोग थे। अतः हमने उन सभी को डुबो दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur us qaum ke muqaable mein uski madad ki jisne hamari aayat ko jhutla diya tha. Woh baday burey log thay, pas humne un sabko garq (drown) kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log humari aayaton ko jhutla rahey thay unn kay muqablay mein hum ney uss ki madad ki yaqeenan woh buray log thay pus hum ney unn sab ko dobo diya
Devnagri Urdu (Maududi)और उस क़ौम के मुक़ाबले में उसकी मदद की जिसने हमारी आयत को झूठला दिया था। वो बदे बुरे लोग थे, हमने उन सबको डराया (डूब दिया) करदिया
عَرَبِيوَداوودَ وَسُلَيمانَ إِذ يَحكُمانِ فِي الحَرثِ إِذ نَفَشَت فيهِ غَنَمُ القَومِ وَكُنّا لِحُكمِهِم شاهِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा दाऊद और सुलैमान को (याद करो), जब वे दोनों खेत के विषय में निर्णय कर रहे थे, जब रात के समय उसमें अन्य लोगों की बकरियाँ फैल गईं थीं, और हम उनके निर्णय के समय उपस्थित थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur isi niyamat se humne Dawood aur Suleiman ko sarfaraz kiya. Yaad karo woh mauqa jabke woh dono ek khet (field) ke muqaddame mein faisla kar rahey thay jismein raat ke waqt dusre logon ki bakriyan(goats) phayl gayi thin (strayed at night),aur hum unki adalat khud dekh rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur dawood (alh-e-salam) aur suleman (alh-e-salam) ko yaad kijiye jabkay woh khet kay moamlay mein faisla ker rahey thay kay kuch logon ki bakriyan raat ko iss mein char chug gaee thin aur unn kay faislay mein hum mojood thay
Devnagri Urdu (Maududi)और इसी नियामत से हमने दाऊद और सुलेमान को सरफराज किया। याद करो वो मौका जबके वो दोनो एक खेत (खेत) के मुक़द्दमे में फैसला कर रहे थे जिसमें रात के वक्त दूसरे लोगों की बकरियां (बकरियां) पतली हो गईं (रात को भटक ​​गईं), और हम उनकी अदालत खुद देख रहे थे
عَرَبِيفَفَهَّمناها سُلَيمانَ ۚ وَكُلًّا آتَينا حُكمًا وَعِلمًا ۚ وَسَخَّرنا مَعَ داوودَ الجِبالَ يُسَبِّحنَ وَالطَّيرَ ۚ وَكُنّا فاعِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने वह (निर्णय) सुलैमान को समझा दिया। और हमने हर एक को हुक्म (नुबुव्वत या निर्णय-शक्ति) और ज्ञान प्रदान किया। और हमने पहाड़ों को दाऊद के अधीन कर दिया, जो (अल्लाह की) पवित्रता का गान करते थे, तथा पक्षियों को भी। और हम ही (इस कार्य के) करने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt humne sahih faisla Sulaiman ko samjha diya, halaanke hukum aur ilm humne dono hi ko ata kiya tha. Dawood ke saath humne pahadon aur parindon ko musakkhar kardiya tha jo tasbeeh karte thay, is fail (kaam) ke karne waley hum hi thay
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney iss ka sahih faisla suleman ko samjha diya. Haan her aik ko hum ney hukum-o-ilm dey rakha tha aur dawood kay tabey hum ney pahar ker diye thay jo tasbeeh kertay thay aur parind bhi. Hum kerney walay hi thay
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त हमें सही फ़ैसला सुलेमान को समझा दिया, हलांके हुकुम और इल्म हमें दोनों ने ही अता किया था। दाऊद के साथ हमने पहाड़ों और परिंदों को मुसक्कर कर दिया था जो तस्बीह करते थे, इस फेल (काम) के करने वाले हम ही थे
عَرَبِيوَعَلَّمناهُ صَنعَةَ لَبوسٍ لَكُم لِتُحصِنَكُم مِن بَأسِكُم ۖ فَهَل أَنتُم شاكِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उन्हें (दाऊद को) तुम्हारे लिए कवच बनाना सिखाया, ताकि वह तुम्हारी लड़ाई से तुम्हारी रक्षा करे। तो क्या तुम शुक्रिया अदा करने वाले हो?
Roman Urdu (Maududi)Aur humne usko tumhare faiyde ke liye zira (coats of armor) banane ki sanat (craft) sikha di thi, taa-ke tumko ek dusre ki maar se bachaye, phir kya tum shukar guzar ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney ussay tumharay liye libaas bananey ki kaari gari sikhaee takay laraee kay zarar say tumhara bachao ho. Kiya tum shukar guzar bano gay
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने उसको तुम्हारे फ़ैयदे के लिए ज़ीरा (कवच के कोट) बनाने की सनत (शिल्प) सिखा दी थी, ता-के तुमको एक दूसरा कि मार से बचे, फिर क्या तुम शुक्र गुज़ार हो
عَرَبِيوَلِسُلَيمانَ الرّيحَ عاصِفَةً تَجري بِأَمرِهِ إِلَى الأَرضِ الَّتي بارَكنا فيها ۚ وَكُنّا بِكُلِّ شَيءٍ عالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और तेज़ चलने वाली हवा को सुलैमान के अधीन कर दिया, जो उसके आदेश से उस धरती की ओर चलती थी, जिसमें हमने बरकत रखी और हम हर चीज़ को जानने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Sulaiman ke liye humne teiz hawa ko musakkhar kardiya tha jo uske hukum se us sar-zameen ki taraf chalti thi jismein humne barkatein rakkhi hain. Hum har cheez ka ilm rakhne waley thay
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney tund-o-tez hawa ko suleman (alh-e-salam) kay tabey ker diya jo uss kay farmaan kay mutabiq uss zamin ki taraf chalti thi jahan hum ney barkat dey rakhi thi aur hum her cheez say ba-khabar aur dana hain
Devnagri Urdu (Maududi)और सुलेमान के लिए हमने तेज़ हवा को मुस्कुरा कर दिया था जो उसके हुकुम से उस सर-ज़मीन की तरफ चलती थी जिसमें हमने बरकतें रखी हैं। हम हर चीज़ का इल्म रखने वाले थे
عَرَبِيوَمِنَ الشَّياطينِ مَن يَغوصونَ لَهُ وَيَعمَلونَ عَمَلًا دونَ ذٰلِكَ ۖ وَكُنّا لَهُم حافِظينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और कई शैतान (उनके अधीन कर दिए गए थे), जो उनके लिए ग़ोता लगाते थे तथा इसके अलावा काम (भी) करते थे। और हम ही उनके निरीक्षक थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur shayateen mein se humne aisey bahutson (many) ko uska tabey bana diya tha jo uske liye ghotey (diving) lagate aur iske siwa dusre kaam karte thay, in sab ke nigraan hum hi thay
Roman Urdu (Junagarhi)Issi tarah say boht say shayateen bhi hum ney uss kay tabey kiye thay jo uss kay farmaan say ghotay lagatay thay aur iss kay siwa bhi boht say kaam kiya kertay thay inn kay nigehbaan hum hi thay
Devnagri Urdu (Maududi)और शयातीन में से हमने ऐसे बहुतों (कई) को उसका तबे बना दिया था जो उसके लिए घोटे (गोताखोरी) लगाते थे और इसके सिवा दूसरे काम करते थे, सब के निगरान में हम ही थे
عَرَبِي۞ وَأَيّوبَ إِذ نادىٰ رَبَّهُ أَنّي مَسَّنِيَ الضُّرُّ وَأَنتَ أَرحَمُ الرّاحِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अय्यूब (की कहानी) को (याद करो), जब उन्होंने अपने पालनहार को पुकारा कि निःसंदेह मुझे कष्ट पहुँची है और तू दया करने वालों में सबसे अधिक दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yahi (hosh-mandi aur hukum o ilm ki niyamat) humne Ayub ko di thi. Yaad karo jabke usne apne Rubb ko pukara ke “mujhey bimaari lag gayi hai aur tu arham ur rahimeen (sab se badhkar reham karne wala) hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Ayub (alh-e-salam) ki uss halat ko yaad kero jabkay uss ney apney perwerdigar ko pukara kay mujhay yeh beemari lag gaee hai aur tu reham kerney walon say ziyada reham kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और याही (होश-मंदी और हुकुम ओ इल्म की नियामत) हमने अय्यूब को दी थी। याद करो जबके उसने अपने रुब को पुकारा के "मुझे बीमारी लग गई है और तू अरहम उर रहीमीन (सब से बढ़कर रहम करने वाला) है।"
عَرَبِيفَاستَجَبنا لَهُ فَكَشَفنا ما بِهِ مِن ضُرٍّ ۖ وَآتَيناهُ أَهلَهُ وَمِثلَهُم مَعَهُم رَحمَةً مِن عِندِنا وَذِكرىٰ لِلعابِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उनकी दुआ क़बूल कर ली। चुनाँचे उन्हें जो भी कष्ट था, उसे दूर कर दिया और हमने उन्हें उनके घर वाले तथा उनके साथ उनके समान (और) भी प्रदान किए। अपनी ओर से दया के रूप में और उन लोगों की याद-दहानी के लिए जो इबादत करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Humne uski dua qabool ki aur jo takleef usey thi usko door kardiya, aur sirf uske ehl-o-ayal hi usko nahin diye balke unke saath utne hi aur bhi diye, apni khaas rehmat ke taur par, aur isliye ke yeh ek sabaq ho ibadat guzaaron keliye
Roman Urdu (Junagarhi)To hum ney uss ki sunn li aur jo dukh unhen tha ussay door ker diya aur uss ko ehal-o-ayaal ata farmaye bulkay unn kay sath waisay hi aur apni khaas meharbaani say takay sachay bandon kay liye sabab naseehat ho
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उसकी दुआ क़बूल की और जो तकलीफ इस्तेमाल की थी उसको दूर कर दिया, और सिर्फ उसके एहल-ओ-अयाल ही उसको नहीं दिए बल्कि उसके साथ उतने ही और भी दिए, अपनी खास रहमत के तौर पर, और इस तरह के ये एक सबक हो इबादत गुज़ारों केलिए
عَرَبِيوَإِسماعيلَ وَإِدريسَ وَذَا الكِفلِ ۖ كُلٌّ مِنَ الصّابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इसमाईल, इदरीस और ज़ुल किफ़्ल को (याद करो)। हर एक धैर्यवानों में से था।
Roman Urdu (Maududi)Aur yahi niyamat Ismail aur Idris(Enoch) aur Dhul-Kifl (Isaiah) ko di, ke yeh sab saabir log (practised fortitude) thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ismail (alh-e-salam) aur idris (alh-e-salam) aur zulkifl (alh-e-salam) yeh sab sabir log thay
Devnagri Urdu (Maududi)और यही नियामत इस्माइल और इदरीस (हनोक) और धुल-किफ्ल (इसैया) को दी, के ये सब साबिर लोग (दृढ़ता का अभ्यास) थे
عَرَبِيوَأَدخَلناهُم في رَحمَتِنا ۖ إِنَّهُم مِنَ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उन्हें अपनी दया में दाख़िल कर लिया। निःसंदेह वे सदाचारियों में से थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur unko humne apni rehmat mein dakhil kiya ke woh salihon (righteous people) mein se thay
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney unhen apni rehmat mein dakhil ker liya. Yeh sab log nek thay
Devnagri Urdu (Maududi)और उनको हमने अपनी रहमत में दखल किया के वो सालिहों (धर्मी लोगों) से कहा
عَرَبِيوَذَا النّونِ إِذ ذَهَبَ مُغاضِبًا فَظَنَّ أَن لَن نَقدِرَ عَلَيهِ فَنادىٰ فِي الظُّلُماتِ أَن لا إِلٰهَ إِلّا أَنتَ سُبحانَكَ إِنّي كُنتُ مِنَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मछली वाले (की कहानी याद करो), जब वह ग़ुस्से से भरा हुआ चला गया और उसने सोचा कि हम उसे तंगी में नहीं डालेंगे। अंततः उसने अंधेरों में पुकारा कि (ऐ अल्लाह!) तेरे सिवा कोई पूज्य नहीं, तू पवित्र है। निश्चय मैं ही अत्याचारियों में हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Aur machli waley(yunus) ko bhi humne nawaza, yaad karo jabke woh bigad kar chala gaya tha aur samjha tha ke hum uspar giraft na karenge. Aakhir ko usne tareekiyon(darkness) mein pukara “nahin hai koi khuda magar tu, paak hai teri zaat, beshak maine kasoor kiya”
Roman Urdu (Junagarhi)Machli walay (hazrat younus alh-e-salam) ko yaad kero! Jabkay woh gussay say chal diya aur khayal kiya kay hum ussay na pakar saken gay. Bil-aakhir woh andheron kay andar say pukar utha kay elahee teray siwa koi mabood nahi tu pak hai be-shak mein zalimon mein say tha
Devnagri Urdu (Maududi)और मछली वाले (यूनुस) को भी हमने नवाजा, याद करो जबके वो बिगड कर चला गया था और समझा था के हम उसपर गिरफ़्तार न करेंगे। आख़िर को उसने तारिकियों (अंधेरे) में पुकारा "नहीं है कोई खुदा मगर तू, पाक है तेरी जात, बेशक मैंने कसूर किया"
عَرَبِيفَاستَجَبنا لَهُ وَنَجَّيناهُ مِنَ الغَمِّ ۚ وَكَذٰلِكَ نُنجِي المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उनकी दुआ क़बूल की तथा उन्हें शोक से मुक्त कर दिया। और इसी तरह हम ईमान वालों को बचा लिया करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tab humne uski dua qabool ki aur ghum se usko najaat bakshi, aur isi taraah hum momino ko bacha liya karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)To hum ney uss ki pukar sunn li aur ussay ghum say nijat dey di aur hum eman walon ko issi tarah bacha liya kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)तब हमने उसकी दुआ क़बूल की और ग़म से उसको नजात बख्शी, और इसी तरह हम मोमिनो को बचा लिया करते हैं
عَرَبِيوَزَكَرِيّا إِذ نادىٰ رَبَّهُ رَبِّ لا تَذَرني فَردًا وَأَنتَ خَيرُ الوارِثينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा ज़करिया को (याद करो), जब उन्होंने अपने पालनहार को पुकारा : ऐ मेरे पालनहार! मुझे अकेला मत छोड़ और तू सब वारिसों से बेहतर है।
Roman Urdu (Maududi)Aur zakariya ko, jabke usne apne Rubb ko pukara ke “aey parwardigar, mujhey akela na chodh, aur behtareen waris to tu hi hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur zakariya (alh-e-salam) ko yaad kero jab uss ney apney rab say dua ki aey meray perwerdigar! Mujhay tanah na chor tu sab say behtar waris hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ज़कारिया को, जबके उसने अपने रब को पुकारा के "ऐ परवरदिगार, मुझे अकेला ना छोड़, और बेहतर वारिस तो तू ही है"
عَرَبِيفَاستَجَبنا لَهُ وَوَهَبنا لَهُ يَحيىٰ وَأَصلَحنا لَهُ زَوجَهُ ۚ إِنَّهُم كانوا يُسارِعونَ فِي الخَيراتِ وَيَدعونَنا رَغَبًا وَرَهَبًا ۖ وَكانوا لَنا خاشِعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उनकी दुआ क़बूल की और उन्हें यह़या प्रदान किया, और उनकी पत्नी को उनके लिए ठीक कर दिया। निःसंदेह वे नेकी के कामों में बहुत जल्दी करते थे और हमें आशा तथा भय के साथ पुकारते थे, और वे हमसे दीनतापूर्वक विनती करने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Pas humne uski dua qabool ki aur usey Yahya ata kiya aur uski biwi ko uske liye durust kardiya, yeh log neki ke kaamon mein daud-dhoop karte thay aur humein ragbat (with love) aur khauf ke saath pukarte thay, aur hamare aagey jhuke huey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney uss ki dua ko qabool farma ker ussay yahya (alh-e-salam) ata farmaya aur unn ki biwi ko unn kay liye durust ker diya. Yeh buzrug log nek kaamon ki taraf jaldi kiya kertay thay aur humen lalach tama aur darr khof say pukartay thay. Aur humaray samney aajzi kerney walay thay
Devnagri Urdu (Maududi)पास हमने उसकी दुआ क़बूल की और उसे यहया अता किया और उसकी बीवी को उसके लिए दुरूस्त करदिया, ये लोग नेकी के कामोन में दौड़-धूप करते थे और हमें रगड़ते थे (प्यार से) और खौफ के साथ पुकारते थे, और हमारे आगे झुके हुए थे
عَرَبِيوَالَّتي أَحصَنَت فَرجَها فَنَفَخنا فيها مِن روحِنا وَجَعَلناها وَابنَها آيَةً لِلعالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उस महिला (को याद करो) जिसने अपने सतीत्व की रक्षा की, तो हमने उसमें अपनी रूह से फूँका तथा उसे और उसके पुत्र को संसार वालों के लिए एक बड़ी निशानी बना दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh khaatun jisne apni ismat (chastity) ki hifazat ki thi, humne uske andar apni rooh se phoonka aur usey aur uske bete ko duniya bhar ke liye nishani bana diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh pak daman bibi jis ney apni asmat ki hifazat ki hum ney uss kay andar apni rooh say phoonk di aur khud unhen aur unn kay larkay ko tamam jahan kay liye nishani bana diya
Devnagri Urdu (Maududi)और वह खातून जिसने अपनी इस्मत (शुद्धता) की हिफाजत की थी, हमने उसके अंदर अपनी रूह से फूंका और उसके बेटे को दुनिया भर के लिए निशानी बना दिया
عَرَبِيإِنَّ هٰذِهِ أُمَّتُكُم أُمَّةً واحِدَةً وَأَنا رَبُّكُم فَاعبُدونِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यह है तुम्हारी उम्मत (धर्म) जो एक ही उम्मत (धर्म) है, और मैं ही तुम्हारा पालनहार (पूज्य) हूँ। अतः मेरी इबादत करो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh tumhari ummat haqeeqat mein ek hi ummat hai aur main tumhara Rubb hoon, pas tum meri ibadat karo
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh tumhari ummat hai jo haqeeqat mein aik hi ummat hai aur mein tum sab ka perwerdigar hun pus tum meri hi ibadat kero
Devnagri Urdu (Maududi)ये तुम्हारी उम्मत हकीकत में एक ही उम्मत है और मैं तुम्हारा रब हूं, पास तुम मेरी इबादत करो
عَرَبِيوَتَقَطَّعوا أَمرَهُم بَينَهُم ۖ كُلٌّ إِلَينا راجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे अपने धर्म के मामले में आपस में टुकड़े-टुकड़े हो गए। सब हमारी ही ओर लोटने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar (yeh logon ki karastani hai ke) inhon ne aapas mein deen ko tukde tukde kar dala, sabko hamari taraf palatna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Magar logon ney aapas mein apney deen mein firqa bandiyan ker len sab kay sab humari hi taraf lotney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर (ये लोगों की करस्तानी है के) इन्हों ने आपस में दीन को टुकड़े-टुकड़े कर डाला, सबको हमारी तरफ पलटना है
عَرَبِيفَمَن يَعمَل مِنَ الصّالِحاتِ وَهُوَ مُؤمِنٌ فَلا كُفرانَ لِسَعيِهِ وَإِنّا لَهُ كاتِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः जो व्यक्ति अच्छे काम करे और वह मोमिन हो, तो उसके प्रयास की उपेक्षा नहीं की जाएगी और निश्चय हम उसके लिए लिखने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir jo neik amal karega, is haal mein ke woh momin ho, to uske kaam ki na-qadri na hogi, aur usey hum likh rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jo bhi nek kaam keray aur woh momin (bhi) ho to uss ki kosish ki bey qadri nahi ki jayegi. Hum to iss kay likhney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जो नई अमल करेगा, इस हाल में के वो मोमिन हो, तो उसके काम की ना-कादरी ना होगी, और उसे हम लिख रहे हैं
عَرَبِيوَحَرامٌ عَلىٰ قَريَةٍ أَهلَكناها أَنَّهُم لا يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिस बस्ती को हम विनष्ट कर दें, उसके लिए असंभव है कि वह फिर (संसार में) लौट आए।
Roman Urdu (Maududi)Aur mumkin nahin hai ke jis basti ko humne halaak kardiya ho woh phir palat sakey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jis basti ko hum ney halak ker diya uss per lazim hai kay wahan kay log palat ker nahi aayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और मुमकिन नहीं है कि जिस बस्ती को हमने हलाक कर दिया हो वो फिर पलट सके
عَرَبِيحَتّىٰ إِذا فُتِحَت يَأجوجُ وَمَأجوجُ وَهُم مِن كُلِّ حَدَبٍ يَنسِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि जब याजूज और माजूज खोल दिए जाएँगे और वे प्रत्येक ऊँची जगह से दौड़ते हुए आएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Yahaan tak ke jab yajooj majooj khol diye jayenge aur har bulandi se woh nikal padenge
Roman Urdu (Junagarhi)Yahan tak kay yajooj aur majooj khol diye jayen gay aur woh her bulandi say dortay huye aayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)यहां तक ​​के जब याजूज माजूज खोल दिए जाएंगे और हर बुलंदी से वो निकल पड़ेंगे
عَرَبِيوَاقتَرَبَ الوَعدُ الحَقُّ فَإِذا هِيَ شاخِصَةٌ أَبصارُ الَّذينَ كَفَروا يا وَيلَنا قَد كُنّا في غَفلَةٍ مِن هٰذا بَل كُنّا ظالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और सच्चा वादा क़रीब आ जाएगा, तो अचानक यह होगा कि उन लोगों की आँखें खुली रह जाएँगी, जिन्होंने कुफ़्र किया। (वे कहेंगे :) हाय हमारा विनाश! निःसंदेह हम इससे ग़फ़लत में थे, बल्कि हम अत्याचारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur wada bar haqq ke poora hone ka waqt qareeb aa lagega to yakayak un logon ke deedhey phatey ke phatey reh jayenge (fixedly stare in horror), jinhon ne kufr kiya tha. Kahenge “haaye hamari kambakhti, hum is cheez ki taraf se gaflat mein padey huey thay, balke hum khatakaar thay.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur sacha wada qareeb aa lagay ga uss waqt kafirion ki nigahen phati ki phati reh jayen gi kay haye afsos! Hum iss haal say ghafil thay bulkay fil-waqey hum qusoor waar thay
Devnagri Urdu (Maududi)और वादा बार हक के पूरे होने का वक्त करीब आ लगेगा तो यकायक उन लोगों के दीधे फटे के फटे रह जाएंगे (निश्चित रूप से डरावनी दृष्टि से घूरते रहेंगे), जिन्हों ने कुफ्र किया था। कहेंगे “हाय हमारी चुदाई, हम इस चीज़ की तरफ से गफ़लत में पड़े हुए थे, बलके हम ख़तरा थे।”
عَرَبِيإِنَّكُم وَما تَعبُدونَ مِن دونِ اللَّهِ حَصَبُ جَهَنَّمَ أَنتُم لَها وارِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुम और जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते हो, नरक का ईंधन हैं। तुम उसी में दाखिल होने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Beshak tum aur tumhare woh mabood jinhein tum poojhte ho, jahannum ka indhan (fuel) hain, wahin tumko jana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum aur Allah kay siwa jin jin ki tum ibadat kertay ho sab dozakh ka endhan bano gay tum sab dozakh mein janey walay ho
Devnagri Urdu (Maududi)बेशक तुम और तुम्हारे वो माबूद जिन्हें तुम पूजते हो, जहन्नुम का इंधन (ईंधन) हैं, वहीं तुमको जाना है
عَرَبِيلَو كانَ هٰؤُلاءِ آلِهَةً ما وَرَدوها ۖ وَكُلٌّ فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि ये पूज्य होते, तो उस (नरक) में प्रवेश न करते। और ये सब उसी में सदैव रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Agar yeh waqayi khuda hotey to wahan na jatey, ab sabko hamesha usi mein rehna hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Agar yeh (sachay) mabood hotay to jahannum mein dakhil na hotay aur sab kay sab ussi mein hamesha rehnay walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अगर ये वक्त खुदा होते तो वहां ना जाते, अब सबको हमेशा उसी में रहना है।"
عَرَبِيلَهُم فيها زَفيرٌ وَهُم فيها لا يَسمَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनकी साँस चढ़ी होगी (तेज़ साँसें निकलेंगी) तथा वे उसमें (कुछ) नहीं सुन सकेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Wahaan woh phunkare maarenge (groan/roar) aur haal yeh hoga ke usmein kaan padi aawaaz na sunayi degi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh wahan chilla reahey hongay aur wahan kuch bhi na sunn saken gay
Devnagri Urdu (Maududi)वहां वो फुनकारे मारेंगे (कराहना/दहाड़ना) और हाल ये होगा के उसमें कान पड़ी आवाज ना सुनायी देगी
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ سَبَقَت لَهُم مِنَّا الحُسنىٰ أُولٰئِكَ عَنها مُبعَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वे लोग जिनके लिए हमारी ओर से पहले भलाई का निर्णय हो चुका है, वे उससे दूर रखे गए होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jinke liye hamari taraf se bhalayi ka pehle hi faisla ho chuka hoga, to woh yaqeenan ussey door rakkhey jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Albatta bey-shak jin kay liye humari taraf say neki pehlay hi ther chuki hai. Woh sab jahannum say door hi rakhay jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जिनके लिए हमारी तरफ से भलाई का पहला ही फैसला हो चूका होगा, तो वो यकीनन उसे दूर रखके जाएंगे
عَرَبِيلا يَسمَعونَ حَسيسَها ۖ وَهُم في مَا اشتَهَت أَنفُسُهُم خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे उस (जहन्नम) की आहट भी नहीं सुनेंगे, और वे अपनी मनचाही चीज़ों में सदा रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Uski sarsarahat tak na sunenge aur woh hamesha hamesha apni mann bhati cheezon ke darmiyan rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Woh to dozakh ki aahat tak na sunen gay aur pani mann bhati cheezon mein hamesha rehney walay hongay
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी सरसराहट तक ना सुनेंगे और वो हमेशा हमेशा अपने मन की बाती चीज़ों के दरमियान रहेंगे
عَرَبِيلا يَحزُنُهُمُ الفَزَعُ الأَكبَرُ وَتَتَلَقّاهُمُ المَلائِكَةُ هٰذا يَومُكُمُ الَّذي كُنتُم توعَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्हें सबसे बड़ी घबराहट दुःखित नहीं करेगी, तथा फ़रिश्ते उनका स्वागत करेंगे (और कहेंगे :) यह है तुम्हारा वह दिन, जिसका तुम्हें वचन दिया जाता था।
Roman Urdu (Maududi)Woh intihayi ghabrahat ka waqt unko zara pareshan na karega, aur malaika badh kar unko haathon haath lenge ke “yeh tumhara wahi din hai jiska tumse waada kiya jaata tha”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh bari ghabrahat (bhi) unhen ghumgeen na ker sakay gi aur farishtay unhen hathon haath len gay kay yehi tumhara woh din hai jiss kay tum wada diye jatay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)वो इंतिहाई घबराहट का वक्त उनको जरा परेशान ना करेगा, और मलाइका बढ़ कर उनको हाथ हाथ लेंगे के "ये तुम्हारा वही दिन है" जिसका तुमसे वादा किया जाता था"
عَرَبِييَومَ نَطوِي السَّماءَ كَطَيِّ السِّجِلِّ لِلكُتُبِ ۚ كَما بَدَأنا أَوَّلَ خَلقٍ نُعيدُهُ ۚ وَعدًا عَلَينا ۚ إِنّا كُنّا فاعِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन हम आकाश को पंजिका के पन्नों को लपेटने की तरह लपेट देंगे। जिस तरह हमने प्रथम सृष्टि का आरंभ किया, (उसी तरह) हम उसे लौटाएँगे। यह हमारे ज़िम्मे वादा है। निश्चय हम इसे पूरा करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh din jabke aasman ko hum yun lapeit kar rakh denge jaise tumar mein awraaq lapeit diye jatey hain (leaves of paper are rolled up in a written scroll) jis tarah pehle humne takhleeq ki ibtida ki thi usi tarah hum phir uska iaada (originate) karenge. Yeh ek wada hai hamare zimme, aur yeh kaam humein bahr-haal karna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din hum aasman ko yun lapet len gay jaisay toomaar mein auraaq lapet diye jatay hain jaisay kay hum ney awwal dafa pedaeesh ki thi issi tarah doobara keren gay. Yeh humarayu zimmay wada hai aur hum issay zaroor ker kay (hi) rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)वो दिन जबके आसमान को हम यूं लपेट कर रख देंगे जैसे तुममें आवारा लपेट दिए जाते हैं (कागज के पत्तों को एक लिखित स्क्रॉल में लपेटा जाता है) जिस तरह पहले हमने तकलीक की इब्तिदा की थी उसी तरह हम फिर उसका इरादा (उत्पन्न) करेंगे। येह एक वादा है हमारा ज़िम्मा, और ये काम हमें बाहर-हाल करना है
عَرَبِيوَلَقَد كَتَبنا فِي الزَّبورِ مِن بَعدِ الذِّكرِ أَنَّ الأَرضَ يَرِثُها عِبادِيَ الصّالِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने 'लौहे महफ़ूज़' (में लिखने) के बाद अवतरित पुस्तकों में लिख दिया कि धरती के उत्तराधिकारी मेरे सदाचारी बंदे होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Zaboor mein hum naseehat ke baad yeh likh chuke hain ke zameen ke waris hamare neik banday hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Hum zaboor mein pind-o-naseehat kay baad yeh likh chukay hain kay zamin kay waris meray nek banday (hi) hongay
Devnagri Urdu (Maududi)और ज़बूर में हम हिदायत के बाद ये लिख चुके हैं के ज़मीन के वारिस हमारे नए बंदे होंगे
عَرَبِيإِنَّ في هٰذا لَبَلاغًا لِقَومٍ عابِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह इबादत करने वालों के लिए इसमें एक बड़ा संदेश है।
Roman Urdu (Maududi)Is mein ek badi khabar hai ibadat guzar logon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Ibadat guzaar bandon kay liye to iss mein aik bara payghaam hai
Devnagri Urdu (Maududi)इस में एक बड़ी खबर है इबादत गुजर लोगों के लिए
عَرَبِيوَما أَرسَلناكَ إِلّا رَحمَةً لِلعالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) हमने आपको समस्त संसार के लिए दया बनाकर भेजा है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), humne jo tumko bheja hai to yeh dar-asal duniya walon ke haqq mein hamari rehmat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney aap ko tamam jahan walon kay rehmat bana ker hi bheja hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), हमने जो तुमको भेजा है तो ये दर-असल दुनिया वालों के हक में हमारी रहमत है
عَرَبِيقُل إِنَّما يوحىٰ إِلَيَّ أَنَّما إِلٰهُكُم إِلٰهٌ واحِدٌ ۖ فَهَل أَنتُم مُسلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ रसूल!) आप कह दें कि मेरी ओर केवल यही वह़्य की जाती है कि तुम्हारा पूज्य केवल एक ही पूज्य है। तो क्या तुम आज्ञाकारी बनते हो?
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho, “mere paas jo wahee aati hai woh yeh hai ke tumhara khuda sirf ek khuda hai, phir kya tum sar-e-itaat jhukate ho?”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! Meray pass to pus wahee ki jati hai kay tum sab ka mabood aik hi hai to kiya tum bhi uss ki farmanbardaari kerney walay ho
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, "मेरे पास जो वही आती है वो ये है के तुम्हारा खुदा सिर्फ एक खुदा है, फिर क्या तुम सर-ए-इतात झुकते हो?"
عَرَبِيفَإِن تَوَلَّوا فَقُل آذَنتُكُم عَلىٰ سَواءٍ ۖ وَإِن أَدري أَقَريبٌ أَم بَعيدٌ ما توعَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर अगर वे मुँह फेरें, तो (ऐ रसूल!) आप कह दें कि मैंने तुम्हें इस प्रकार सावधान कर दिया है कि (हम और तुम इसकी जानकारी में) बराबर हैं। और मैं नहीं जानता कि जिस (यातना) का तुम्हें वचन दिया जा रहा है, वह क़रीब है अथवा दूर।
Roman Urdu (Maududi)Agar woh mooh pherein to kehdo “maine alal-ailaan (openly) tumko khabardaar kardiya hai. Ab yeh main nahin jaanta ke woh cheez jiska tumse wada kiya jaa raha hai qareeb hai ya door
Roman Urdu (Junagarhi)Phir agar yeh mun mor len to keh dijiye kay mein ney tumhen yaksan tor per khabardaar ker diya hai. Mujhay ilm nahi kay jiss ka wada tum say kiya jaraha hai woh qareeb hai ya door
Devnagri Urdu (Maududi)अगर वो मुंह फिरें तो कहदो "मैंने अलल-ऐलान (खुले तौर पर) तुमको खबरदार कर दिया है। अब ये मैं नहीं जानता के वो चीज जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है करीब है या दूर
عَرَبِيإِنَّهُ يَعلَمُ الجَهرَ مِنَ القَولِ وَيَعلَمُ ما تَكتُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वह ऊँची आवाज़ से कही हुई बात को जानता है और वह भी जानता है जो तुम छिपाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Allah woh baatein bhi jaanta hai jo ba-awaaz buland kahi jati hain aur woh bhi jo tum chupa kar karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Albatta Allah Taalaa to khulli aur zahir baat ko bhi janta hai aur jo tum chupatay ho ussay bhi janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह वो बातें भी जानता है जो बा-आवाज बुलंद कहती है और वो भी जो तुम छुपा कर करते हो
عَرَبِيوَإِن أَدري لَعَلَّهُ فِتنَةٌ لَكُم وَمَتاعٌ إِلىٰ حينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और मैं नहीं जानता शायद यह तुम्हारे लिए एक परीक्षा हो और एक समय तक कुछ लाभ उठाना हो।
Roman Urdu (Maududi)Main to yeh samajhta hoon ke shayad yeh (dair/delay) tumhare liye ek fitna hai aur tumhein ek waqt e khaas tak ke liye mazay karne ka mauqa diya jaa raha hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Mujhay iss ka bhi ilm nahi mumkin hai yeh tumhari aazmaeesh ho aur aik muqarrara waqt tak ka faeeda (phonchana) hai
Devnagri Urdu (Maududi)मैं तो ये समझता हूं के शायद ये (देर/देरी) तुम्हारे लिए एक फिट है और तुम्हें एक वक्त और खास तक के लिए मजा करने का मौका दिया जा रहा है”
عَرَبِيقالَ رَبِّ احكُم بِالحَقِّ ۗ وَرَبُّنَا الرَّحمٰنُ المُستَعانُ عَلىٰ ما تَصِفونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस (नबी) ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! सत्य के साथ फ़ैसला कर दे। और हमारा पालनहार ही वह अत्यंत दयावान् है, जिससे उन बोतों पर सहायता माँगी जाती है, जो तुम बयान करते हो।
Roman Urdu (Maududi)(aakhi-e-kaar) Rasool ne kaha “aey mere Rubb, haqq ke saath faisla karde, aur logon, tum jo baatein banate ho unke muqable mein hamara Rubb-e-Rehman hi hamare liye madad ka sahara hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Khud nabi ney kaha aey rab! Insaf kay sath faisla farma aur humara rab bara meharbaan hai jiss say madad talab ki jati hai unn baaton per jo tum biyan kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)(आखि-ए-कार) रसूल ने कहा “ऐ मेरे रब, हक के साथ फैसला करदे, और लोग, तुम जो बातें बनाते हो उनके मुकाबले में हमारा रुब-ए-रहमान ही हमारे लिए मदद का सहारा है।”
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Surah 21: Al-Anbiya' (The Prophets)

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Surah 21: Al-Anbiya' (The Prophets)

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Surah 21: Al-Anbiya' (The Prophets)

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Surah 21: Al-Anbiya' (The Prophets)

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Surah 21: Al-Anbiya' (The Prophets)

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Surah 22: Al-Hajj (The Pilgrimage)

Medinan🕐 Revelation #103📜 78 Verses🕮 Juz 1
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Surah 22: Al-Hajj (The Pilgrimage)

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Surah 22: Al-Hajj (The Pilgrimage)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِييا أَيُّهَا النّاسُ اتَّقوا رَبَّكُم ۚ إِنَّ زَلزَلَةَ السّاعَةِ شَيءٌ عَظيمٌ
हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो! अपने पालनहार से डरो। निःसंदेह क़ियामत (प्रलय) का भूकंप बहुत बड़ी चीज़ है।
Roman Urdu (Maududi)Logon, apne Rubb ke gazab se bacho, haqeeqat yeh hai ke qayamat ka zalzala badi (haulnaak) cheez hai
Roman Urdu (Junagarhi)Logo! Apnay perwerdigar say daro! Bilshuba qayamat ka zalzala boht hi bari cheez hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन, अपने रब के गजब से बचो, हकीकत ये है के कयामत का ज़लज़ला बड़ी (हौलनाक) चीज़ है
عَرَبِييَومَ تَرَونَها تَذهَلُ كُلُّ مُرضِعَةٍ عَمّا أَرضَعَت وَتَضَعُ كُلُّ ذاتِ حَملٍ حَملَها وَتَرَى النّاسَ سُكارىٰ وَما هُم بِسُكارىٰ وَلٰكِنَّ عَذابَ اللَّهِ شَديدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन तुम उसे देखोगे, (हाल यह होगा कि) हर दूध पिलाने वाली उससे ग़ाफ़िल हो जाएगी जिसे उसने दूध पिलाया, और हर गर्भवती अपना गर्भ गिरा देगी, और तू लोगों को नशे में देखेगा, हालाँकि वे नशे में नहीं होंगे, लेकिन अल्लाह की यातना बहुत कठोर है।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz tum usey dekhoge, haal yeh hoga ke har doodh pilane wali apne doodh peetay bacchey se gaafil ho jayegi, har haamila (pregnant) ka hamal gir jayega, aur log tumko madhosh nazar aayenge, halanke woh nashey mein na hongey, balke Allah ka azaab hi kuch aisa sakht hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din tum ussay dekh lo gay her doodh pilaney wali apnay doodh peetay bachay ko bhool jayegi aur tamam hamal waliyon kay hamal girr jayen gay aur tu dekhay ga kay log madhosh dikhaee den gay halankay dar-haqeeqat who matwalay na hongay lekin Allah ka azab bara hi sakht hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ तुम उसे देखोगे, हाल ये होगा के हर दूध पिलाने वाली अपने दूध पीते बच्चों से गाफिल हो जाएगी, हर हामिला (गर्भवती) का हमाल गिर जाएगा, और लोग तुमको मदहोश नज़र आएंगे, हालंके वो नशे में ना होंगे, बलके अल्लाह का अज़ाब ही कुछ ऐसा सच होगा
عَرَبِيوَمِنَ النّاسِ مَن يُجادِلُ فِي اللَّهِ بِغَيرِ عِلمٍ وَيَتَّبِعُ كُلَّ شَيطانٍ مَريدٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और लोगों में से कोई वह है, जो अल्लाह के विषय में कुछ जाने बिना झगड़ता है और प्रत्येक सरकश शैतान का अनुसरण करता है।
Roman Urdu (Maududi)Baaz log aisey hain jo ilm ke bagair Allah ke barey mein bahas karte hain aur har shaytaan e sarkash ki pairwi karne lagte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Baaz log Allah kay baray mein batein banatay hain aur woh bhi bey ilmi kay sath aur her sirkash shetan ki pairwee kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)बाज़ लोग ऐसे हैं जो इल्म के बिना अल्लाह के बारे में बहस करते हुए हैं और हर शैतान ए सरकश की जोड़ी बनाने लगते हैं
عَرَبِيكُتِبَ عَلَيهِ أَنَّهُ مَن تَوَلّاهُ فَأَنَّهُ يُضِلُّهُ وَيَهديهِ إِلىٰ عَذابِ السَّعيرِ
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हिन्दी (Al-Omari)उसपर लिख दिया गया है कि जो उसे मित्र बनाएगा, तो वह उसे गुमराह करेगा और उसे भड़कती हुई आग (जहन्नम) की यातना का रास्ता दिखाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Halanke uske to naseeb hi mein yeh likha hai ke jo usko dost banayega usey woh gumraah karke chodega aur azaab e jahannum ka raasta dikhayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss per (qazay-e-elahee) likh di gaee hai kay jo koi uss ki rafaqat keray ga woh ussay gumrah ker dey ga aur ussay aag kay azab ki taraf ley jayeg
Devnagri Urdu (Maududi)हालंके उसके तो नसीब ही में ये लिखा है के जो उसको दोस्त बनाएगा उसे वो गुमराह करके छोड़ेगा और अज़ाब ए जहन्नुम का रास्ता दिखाएगा
عَرَبِييا أَيُّهَا النّاسُ إِن كُنتُم في رَيبٍ مِنَ البَعثِ فَإِنّا خَلَقناكُم مِن تُرابٍ ثُمَّ مِن نُطفَةٍ ثُمَّ مِن عَلَقَةٍ ثُمَّ مِن مُضغَةٍ مُخَلَّقَةٍ وَغَيرِ مُخَلَّقَةٍ لِنُبَيِّنَ لَكُم ۚ وَنُقِرُّ فِي الأَرحامِ ما نَشاءُ إِلىٰ أَجَلٍ مُسَمًّى ثُمَّ نُخرِجُكُم طِفلًا ثُمَّ لِتَبلُغوا أَشُدَّكُم ۖ وَمِنكُم مَن يُتَوَفّىٰ وَمِنكُم مَن يُرَدُّ إِلىٰ أَرذَلِ العُمُرِ لِكَيلا يَعلَمَ مِن بَعدِ عِلمٍ شَيئًا ۚ وَتَرَى الأَرضَ هامِدَةً فَإِذا أَنزَلنا عَلَيهَا الماءَ اهتَزَّت وَرَبَت وَأَنبَتَت مِن كُلِّ زَوجٍ بَهيجٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो! यदि तुम (मरणोपरांत) उठाए जाने के बारे में किसी संदेह में हो, तो निःसंदेह हमने तुम्हें तुच्छ मिट्टी से पैदा किया, फिर वीर्य की एक बूँद से, फिर रक्त के थक्के से, फिर माँस की एक बोटी से, जो चित्रित तथा चित्र विहीन होती है, ताकि हम तुम्हारे लिए (अपनी शक्ति को) स्पष्ट कर दें, और हम जिसे चाहते हैं गर्भाशयों में एक नियत समय तक ठहराए रखते हैं, फिर हम तुम्हें एक शिशु के रूप में निकालते हैं, फिर ताकि तुम अपनी जवानी को पहुँचो, और तुममें से कोई वह है जो उठा लिया जाता है, और तुममें से कोई वह है जो जीर्ण आयु की ओर लौटाया जाता है, ताकि वह जानने के बाद कुछ न जाने। तथा तुम धरती को सूखी (मृत) देखते हो, फिर जब हम उसपर पानी उतारते हैं, तो वह लहलहाती है और उभरती है तथा हर प्रकार की सुदृश्य वनस्पतियाँ उगाती है।
Roman Urdu (Maududi)Logon, agar tumhein zindagi baad e maut ke barey mein kuch shakk hai to tumhein maloom ho ke humne tumko mitti se paida kiya hai, phir nutfe se,phir khoon ke lothdey se, phir gosht ki boti se jo shakal waali bhi hoti hai aur be shakal bhi ( yeh hum isliye bata rahey hain) taa-ke tumpar haqeeqat wazeh kardein, hum jis (nutfe) ko chahte hain ek khaas waqt tak rehemo (wombs) mein thehraye rakhte hain, phir tumko ek bacchey ki surat mein nikal latey hain, (phir tumhein parwarish karte hain) taa-ke tum apni poori jawani ko pahuncho aur tum mein se koi pehle hi wapas bula liya jata hai aur koi badhtareen umar ki taraf pher diya jata hai, taa-ke sab kuch jaanney ke baad phir kuch na janey. Aur tum dekhte ho ke zameen sukhi padi hai, phir jahan humne uspar meh barsaya ke yakayak woh phabak uthi aur phool gayi aur usne har qisam ki khush manzar nabataat(vegetation) ugalni shuri kardi
Roman Urdu (Junagarhi)Logo agar tumhen marney kay baad ji uthney mein shak hai to socho hum ney tumhen mitti say peda kiya phir nutfay say phir khoon basta say phir gosht kay lothray say jo soorat diya gaya tha aur bey naqsha tha. Yeh hum tum per zahir ker detay hain aur hum jissay chahayen aik thehraye huye waqt tak reham-e-madir mein rakhtay hain phir tumhen bachpan ki halat mein duniya mein latay hain phir takay tum apni poori jawani ko phoncho tum mein say baaz to woh hain jo fot ker liye jatay hain aur baaz bey gharz umar ki taraf phir say lota diye jatay hain kay woh aik cheez say ba-khabar honey kay baad phir bey khabar hojaye. Tu dekhta hai kay zamin (banjar aur) khusk hai phir jab hum uss per barishen barsatay hain to woh ubharti hai aur phoolti hai aur her qisam ki ronaq daar nabataat ugati hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन, अगर तुम जिंदगी बाद ए मौत के बारे में कुछ शक है तो तुम्हें मालूम हो के हमने तुमको मिट्टी से पेदा किया है, फिर नुत्फ़े से, फिर खून के कपड़े से, फिर गोश्त की बोतल से जो शकल वाली भी होती है और शकल भी हो (ये हम इस बारे में बता रहे हैं) ता-के तुमपर हकीकत वाज़ेह करदें, हम जिस को चाहते हैं एक खास वक्त तक रेहमो (गर्भ) में रखते हैं, फिर तुमको एक बच्चे की सूरत में निकल लाते हैं, (फिर तुम्हें परवरिश करते हैं) ता-के तुम अपनी पूरी जवानी को पाहुंचो और तुम में से कोई पहले हाय वापस बुला लिया जाता है और कोई बेहतरीन उमर की तरफ फेर दिया जाता है, ता-के सब कुछ जाने के बाद फिर कुछ ना जाने। और तुम देखते हो के ज़मीन सुखी पड़ी है, फिर जहां हमने उसपर मेह बरसाया के यकायक वो फबक उठी और फूल गई और उसने हर क़िसम की ख़ुश मंज़र नबाअत (वनस्पति) उगलनी शुरी करदी
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ هُوَ الحَقُّ وَأَنَّهُ يُحيِي المَوتىٰ وَأَنَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यह इसलिए है कि अल्लाह ही सत्य है और (इसलिए कि) वही मुर्दों को जीवित करेगा और (इसलिए कि) वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Ye sab kuch is wajah se hai ke Allah hi haqq hai, aur woh murdon ko zinda karta hai, aur woh har cheez par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss liye kay Allah hi haq hai aur wohi murdon ko jilata hai aur woh her her cheez per qudrat rakhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये सब कुछ इस वजह से है कि अल्लाह ही हक़ है, और वो मुर्दों को ज़िंदा करता है, और वो हर चीज़ पर कादिर है
عَرَبِيوَأَنَّ السّاعَةَ آتِيَةٌ لا رَيبَ فيها وَأَنَّ اللَّهَ يَبعَثُ مَن فِي القُبورِ
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हिन्दी (Al-Omari)और (इसलिए कि) क़ियामत आने वाली है, उसमें कोई संदेह नहीं और (इसलिए कि) निश्चय अल्लाह उन लोगों को उठाएगा जो क़ब्रों में हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh (is baat ki daleel hai) ke qayamat ki ghadi aakar rahegi, is mein kisi shakk ki gunjaish nahin, aur Allah zaroor un logon ko uthayega jo qabaron mein jaa chuke hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay qayamat qata’an aaney wali hai jiss mein koi shak-o-shuba nahi aur yaqeenan Allah Taalaa qabron walon ko doobara zinda farmaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)और ये (इस बात की दलील है) के क़यामत की घड़ी आकार रहेगी, इस में किसी शक्क की गुंजाईश नहीं, और अल्लाह जरूर उन लोगों को उठाएगा जो कब्रों में जा चुके हैं
عَرَبِيوَمِنَ النّاسِ مَن يُجادِلُ فِي اللَّهِ بِغَيرِ عِلمٍ وَلا هُدًى وَلا كِتابٍ مُنيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा लोगों में कोई वह है, जो अल्लाह के विषय में, बिना किसी ज्ञान, मार्गदर्शन और प्रकाशमान् किताब के झगड़ा करता है।
Roman Urdu (Maududi)Baaz log aisey hain jo kisi ilm aur hidayat aur roshni bakshne wali kitaab ke bagair, gardan akdaye huey
Roman Urdu (Junagarhi)Baaz log Allah kay baray mein baghari ilm kay aur baghair hidayat kay aur baghair roshan kitab kay jhagartay hain
Devnagri Urdu (Maududi)बाज़ लोग ऐसे हैं जो किसी इल्म और हिदायत और रोशनी बख्शने वाली किताब के बिना, गार्डन अकडे हुए
عَرَبِيثانِيَ عِطفِهِ لِيُضِلَّ عَن سَبيلِ اللَّهِ ۖ لَهُ فِي الدُّنيا خِزيٌ ۖ وَنُذيقُهُ يَومَ القِيامَةِ عَذابَ الحَريقِ
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हिन्दी (Al-Omari)अपनी गरदन मोड़ने वाला है, ताकि (लोगों को) अल्लाह के मार्ग से भटका दे। उसके लिए दुनिया में अपमान है और क़ियामत के दिन हम उसे जलाने वाली आग की यातना चखाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Khuda ke barey mein jhagadte hain, taa-ke logon ko raah e khuda se bhatka dein. Aisey shaks ke liye duniya mein ruswayi hai aur qayamat ke roz usko hum aag ke azaab ka maza chakkhayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jo apni pehloo morney wala bann ker iss liye kay Allah ki raah say behka dey ussay duniya mein bhi ruswaee hogi aur qayamat kay din bhi hum ussay jahannum mein jalney ka azab chakhayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)खुदा के बारे में झगड़े हैं, ता-के लोगों को राह ए खुदा से भटका दें। ऐसे शक्स के लिए दुनिया में रुसवाई है और कयामत के रोज़ उसको हम आग के अज़ाब का मजा चखाएंगे
عَرَبِيذٰلِكَ بِما قَدَّمَت يَداكَ وَأَنَّ اللَّهَ لَيسَ بِظَلّامٍ لِلعَبيدِ
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हिन्दी (Al-Omari)यह उसके कारण है जो तेरे दोनों हाथों ने आगे भेजा और निःसंदेह अल्लाह बंदों पर कुछ भी अत्याचार करने वाला नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hai tera woh mustaqbil (future) jo tere apne haathon ne tere liye tayyar kiya hai, warna Allah apne bandon par zulm karne wala nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh unn aemaal ki waja say hai jo teray hathon ney aagay bhej rakhay thay. Yaqeen mano kay Allah Taalaa apnay bando per zulm kerney wala nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ये है तेरा वो मुस्तकबिल (भविष्य) जो तेरे अपने हाथों ने तेरे लिए तैयार किया है, वरना अल्लाह अपने बंदों पर ज़ुल्म करने वाला नहीं है
عَرَبِيوَمِنَ النّاسِ مَن يَعبُدُ اللَّهَ عَلىٰ حَرفٍ ۖ فَإِن أَصابَهُ خَيرٌ اطمَأَنَّ بِهِ ۖ وَإِن أَصابَتهُ فِتنَةٌ انقَلَبَ عَلىٰ وَجهِهِ خَسِرَ الدُّنيا وَالآخِرَةَ ۚ ذٰلِكَ هُوَ الخُسرانُ المُبينُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा लोगों में वह (भी) है, जो अल्लाह की इबादत एक किनारे पर रहकर करता है। फिर यदि उसे कोई भलाई पहुँच जाए, तो वह उससे संतुष्ट हो जाता है, और यदि उसे कोई परीक्षा आ पहुँचे, तो मुँह के बल फिर जाता है। वह दुनिया एवं आख़िरत में घाटे में पड़ गया। यही तो खुला घाटा है।
Roman Urdu (Maududi)Aur logon mein koi aisa hai jo kinare par reh kar Allah ki bandagi karta hai, agar faiyda hua to mutmaeen hogaya aur jo koi museebat aa gayi to ulta phir gaya. Uski duniya bhi gayi aur aakhirat bhi, yeh hai sareeh khasara (loss/nuksaan)
Roman Urdu (Junagarhi)Baaz log aisay bhi hain kay aik kinaray per (kharay) ho ker Allah ki ibadat kertay hain. Agar koi nafa mill gaya to dilchaspi leney lagtay hain aur agar koi aafat aagaee to ussi waqt mun pher letay hain enhon ney dono jahan ka nuksan utha liya. Waqaee yeh khulla nuksan hai
Devnagri Urdu (Maududi)और लोगों में कोई ऐसा है जो किनारे पर रह कर अल्लाह की बंदगी करता है, अगर फ़ैयदा हुआ तो मुतमइन होगया और जो कोई मुसीबत आ गई तो उल्टा फिर गया। उसकी दुनिया भी गई और आखिरी भी, ये है सारा खसरा (नुकसान/नुक्सान)
عَرَبِييَدعو مِن دونِ اللَّهِ ما لا يَضُرُّهُ وَما لا يَنفَعُهُ ۚ ذٰلِكَ هُوَ الضَّلالُ البَعيدُ
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हिन्दी (Al-Omari)वह अल्लाह को छोड़कर उसे पुकारता है, जो न उसे हानि पहुँचाता है और न उसे लाभ पहुँचाता है। यही तो दूर की गुमराही है।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh Allah ko chodh kar unko pukarta hai jo na usko nuqsaan pahuncha sakte hain na faiyda, yeh hai gumrahi ki inteha
Roman Urdu (Junagarhi)Allah kay siwa unhen pukara kertay hain jo na unhen nuksan phoncha saken na nafa. Yehi to door daraz ki gumrahi hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो अल्लाह को छोड़ कर उनको पुकारता है जो ना उसको नुक्सान पहुंचा सकता है ना फ़ायदा, ये है गुमराही की इंतेहा
عَرَبِييَدعو لَمَن ضَرُّهُ أَقرَبُ مِن نَفعِهِ ۚ لَبِئسَ المَولىٰ وَلَبِئسَ العَشيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)वह उसे पुकारता है, जिसका नुक़सान उसके लाभ से अधिक निकट है। निःसंदेह वह बुरा संरक्षक तथा निःसंदेह बुरा साथी है।
Roman Urdu (Maududi)Woh unko pukarta hai jinka nuqsaan unke nafey (faiyda) se qareeb tar hai, badhtareen hai us ka maula (guardian) aur badtareen hai uska rafeeq(companion)
Roman Urdu (Junagarhi)Ussay pukartay hain jiss ka nuksan uss kay nafay say ziyada qareeb hai yaqeenan buray wali hain aur buray sathi
Devnagri Urdu (Maududi)वो उनको पुकारता है जिनका नुक्सान उनके नाफ़े (फ़ैयदा) से करीब तार है, बख्तरीन है हमारा मौला (अभिभावक) और बद्तरीन है उसका रफीक (साथी)
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ يُدخِلُ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَفعَلُ ما يُريدُ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह उन्हें, जो ईमान लाए तथा अच्छे कार्य किए, ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा, जिनके (महलों के) नीचे से नहरें बहती हैं। निःसंदेह अल्लाह जो चहता है, करता है।
Roman Urdu (Maududi)(iske baraks) Allah un logon ko jo iman laye aur jinon ne neik amal kiye, yaqeenan aisi jannaton mein dakhil karega jinke nichey nehrein beh rahi hongi. Allah karta hai jo kuch chahta hai
Roman Urdu (Junagarhi)eman aur nek aemaal walon ko Allah Taalaa lehren leti hui nehron wali jannaton mein ley jaye ga. Allah jo irada keray ussay ker kay rehta hai
Devnagri Urdu (Maududi)(इस्के बराक) अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए और जिन्न ने नेक अमल किया, यकीनन ऐसी जन्नत में दखल करेगा जिनका कोई मतलब नहीं रही होंगी। अल्लाह करता है जो कुछ चाहता है
عَرَبِيمَن كانَ يَظُنُّ أَن لَن يَنصُرَهُ اللَّهُ فِي الدُّنيا وَالآخِرَةِ فَليَمدُد بِسَبَبٍ إِلَى السَّماءِ ثُمَّ ليَقطَع فَليَنظُر هَل يُذهِبَنَّ كَيدُهُ ما يَغيظُ
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हिन्दी (Al-Omari)जो सोचता है कि अल्लाह दुनिया और आख़िरत में कभी उसकी सहायता नहीं करेगा, तो उसे चाहिए कि आकाश की ओर एक रस्सी लटकाए, फिर काट दे। फिर देखे कि क्या उसका (यह) उपाय उसका क्रोध दूर कर देता है?
Roman Urdu (Maududi)Jo shaks yeh gumaan rakhta ho ke Allah duniya aur aakhirat mein uski koi madad na karega usey chahiye ke ek rassi (rope) ke zariye aasmaan tak pahunch kar shigaf lagaye(cut a hole into it), phir dekh le ke aaya uski tadbeer kisi aisi cheez ko radd kar sakti hai jo usko nagawar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ka yeh khayal ho kay Allah Taalaa apnay rasool ki madad dono jahan mein na keray ga woh unchaee per aik rassa bandh ker (apnay halaq mein phanda daal ker apna gala ghont ley) phir dekh ley kay uss ki chalakkiyon say woh baat hat jati hai jo ussay tarpa rahi hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो शक्स ये गुमान रखता हो के अल्लाह दुनिया और आख़िरत में उसकी कोई मदद न करेगा उसे चाहिए के एक रस्सी (रस्सी) के ज़रीए आसमान तक पहुंच कर शिगाफ़ लगाए (इसमें एक छेद कर दो), फिर देख ले के आया उसकी तदबीर किसी ऐसी चीज़ को रद्द कर सकती है जो उसको नागावार है
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ أَنزَلناهُ آياتٍ بَيِّناتٍ وَأَنَّ اللَّهَ يَهدي مَن يُريدُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इसी प्रकार हमने इस (क़ुरआन) को खुली आयतों के रूप में उतारा है और यह कि अल्लाह जिसे चाहता है, सीधा रास्ता दिखाता है।
Roman Urdu (Maududi)Aisi hi khuli khuli baaton ke saath humne is Quran ko nazil kiya hai, aur hidayat Allah jisey chahta hai deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney issi tarah iss quran ko wazeh aayaton mein utara hai. Jissay Allah chahaye hidayat naseeb farmata hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसी ही खुली खुली बातों के साथ हमने कुरान को नाज़िल किया है, और हिदायत अल्लाह जिसे चाहता है देता है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا وَالَّذينَ هادوا وَالصّابِئينَ وَالنَّصارىٰ وَالمَجوسَ وَالَّذينَ أَشرَكوا إِنَّ اللَّهَ يَفصِلُ بَينَهُم يَومَ القِيامَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ شَهيدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग ईमान लाए तथा जो यहूदी हुए, तथा साबी और ईसाई और मजूसी तथा वे लोग जिन्होंने शिर्क किया, निश्चय अल्लाह उन सबके बीच क़ियामत के दिन निर्णय कर देगा। निःसंदेह अल्लाह प्रत्येक वस्तु पर गवाह है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log iman laye, aur jo yahudi huey, aur sabayi (Sabaeans), aur nasara ,aur majoos, aur jin logon ne shirk kiya, un sab ke darmiyan Allah qayamat ke roz faisla kardega. Har cheez Allah ki nazar mein hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak ehal-e-emaan aur yahoodi aur saabi aur nasrani aur majoosi aur mushtikeen inn sab kay darmiyan qayamat kay din khud Allah Taalaa faislay ker dey ga Allah Taalaa her her cheez per gawah hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ईमान लाए, और जो यहुदी हुए, और सबाई (सबाएंस), और नसारा, और माजूस, और जिन लोगों ने शिर्क किया, उन सब के दरमियान अल्लाह कयामत के रोज फैसला करेगा। हर चीज़ अल्लाह की नज़र में है
☉ Sajda
عَرَبِيأَلَم تَرَ أَنَّ اللَّهَ يَسجُدُ لَهُ مَن فِي السَّماواتِ وَمَن فِي الأَرضِ وَالشَّمسُ وَالقَمَرُ وَالنُّجومُ وَالجِبالُ وَالشَّجَرُ وَالدَّوابُّ وَكَثيرٌ مِنَ النّاسِ ۖ وَكَثيرٌ حَقَّ عَلَيهِ العَذابُ ۗ وَمَن يُهِنِ اللَّهُ فَما لَهُ مِن مُكرِمٍ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَفعَلُ ما يَشاءُ ۩
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ रसूल!) क्या आप नहीं जानते कि अल्लाह ही को सजदा करते हैं, जो कोई आकाशों में हैं तथा जो धरती में हैं और सूर्य, चाँद, तारे, पर्वत, वृक्ष, पशु और बहुत-से मनुष्य। और बहुत-से वे हैं, जिनपर यातना सिद्ध हो चुकी है। और जिसे अल्लाह अपमानित कर दे, फिर उसे कोई सम्मान देने वाला नहीं। निःसंदेह अल्लाह जो चाहता है, करता है।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum dekhte nahin ho ke Allah ke aagey sar-ba-sujood hain woh sab jo aasmano mein hain aur jo zameen mein hain, Suraj aur chand aur taarey aur pahad aur darakht aur jaanwar aur bahut se Insaan aur bahut se woh log bhi jo azaab ke mustahiq ho chuke hain? aur jisey Allah zaleel-o-khwar karde usey phir koi izzat dene wala nahin hai. Allah karta hai jo kuch chahta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tu nahi dekh raha kay Allah kay samney sajday mein hain sab aasmano walay aur sab zamino walay aur sooraj aur chand aur sitaray aur pahar aur darakht aur janwar aur boht say insan bhi. Haan boht say woh bhi hain jin per azab ka maqoola sabit ho chuka hai jisay rab zaleel ker dey ussay koi izzat deney wala nahi Allah jo chahata hai kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह के आगे सर-ब-सुजूद है वो सब जो आसमान में हैं और जो ज़मीन में हैं, सूरज और चाँद और तारे और पहाड़ और दरख्त और जानवर और बहुत से इंसान और बहुत से वो लोग भी जो अज़ाब के मुस्तहिक हो चुके हैं? और जिसे अल्लाह ज़लील-ओ-ख़्वार करदे उसे फिर कोई इज़्ज़त देने वाला नहीं है। अल्लाह करता है जो कुछ चाहता है
عَرَبِي۞ هٰذانِ خَصمانِ اختَصَموا في رَبِّهِم ۖ فَالَّذينَ كَفَروا قُطِّعَت لَهُم ثِيابٌ مِن نارٍ يُصَبُّ مِن فَوقِ رُءوسِهِمُ الحَميمُ
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हिन्दी (Al-Omari)ये दो पक्ष हैं, जिन्होंने अपने पालनहार के विषय में झगड़ा किया। तो वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, उनके लिए आग के वस्त्र काटे जा चुके, उनके सिरों के ऊपर से खौलता हुआ पानी डाला जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Yeh do fareeq hain jinke darmiyan apne Rubb ke maamle ka jhagda hai. In mein se woh log jinhon ne kufr kiya hai unke liye aag ke libaas kaatey ja chuke hain, unke saron (heads) par khaulta (boiling) hua pani dala jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh dono apnay rab kay baray mein ikhtilaf kerney walay hain pus kafiron kay liye to aag kay kapray beywant ker katay jayen gay aur unn kay siron kay upper say sakht kholta hua pani bahaya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)ये दो फरीक हैं जिनके दरमियान अपने रब के मामले का झगड़ा है। उनमें से वो लोग जिन्हों ने कुफ्र किया है उनके लिए आग के लिबास काटे जा चुके हैं, उनके सरों (सिरों) पर खौलता (उबलता) हुआ पानी डाला जाएगा
عَرَبِييُصهَرُ بِهِ ما في بُطونِهِم وَالجُلودُ
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हिन्दी (Al-Omari)उसके साथ पिघला दिया जाएगा जो कुछ उनके पेटों में है और चमड़े भी।
Roman Urdu (Maududi)Jissey unki khalein (skins) hi nahin pait ke andar ke hissey tak gal (melt) jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss say unn kay pet ki sab cheezen aur khalen gala di jayen gi
Devnagri Urdu (Maududi)जिसकी उनकी खालें (खालें) ही नहीं पित के अंदर तक गल (पिघल) जाएंगी
عَرَبِيوَلَهُم مَقامِعُ مِن حَديدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्हीं के लिए लोहे के हथौड़े हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur unki khabar lene ke liye lohey (iron) ke gurz (maces) honge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn ki saza kay liye lohay kay hathoray hain
Devnagri Urdu (Maududi)और उनकी खबर लेने के लिए लोहे (लोहे) के गुर्ज़ (गदाएं) होंगे
عَرَبِيكُلَّما أَرادوا أَن يَخرُجوا مِنها مِن غَمٍّ أُعيدوا فيها وَذوقوا عَذابَ الحَريقِ
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हिन्दी (Al-Omari)जब कभी व्याकुल होकर उस (आग) से निकलना चाहेंगे, उसी में लौटा दिए जाएँगे तथा (कहा जाएगा कि) जलने की यातना चखो।
Roman Urdu (Maududi)Jab kabhi woh ghabra kar jahannum se nikalne ki koshish karenge phir usi mein dhakeil diye jayenge ke chakkho ab jalne ki saza ka maza
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh jab bhi wahan kay ghum say nikal bhagney ka irada keren gay wahin lota diye jayen gay aur (kaha jayega) jalney ka azab chakho
Devnagri Urdu (Maududi)जब कभी वो घबरा कर जहन्नुम से निकलेंगे की कोशिश करेंगे फिर उसमें ढकेल दिए जाएंगे के चक्खो अब जलने की सजा का मजा
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ يُدخِلُ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ يُحَلَّونَ فيها مِن أَساوِرَ مِن ذَهَبٍ وَلُؤلُؤًا ۖ وَلِباسُهُم فيها حَريرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह उन लोगों को, जो ईमान लाए तथा उन्होंने अच्छे कार्य किए, ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, उनमें उन्हें सोने के कुछ कंगन पहनाए जाएँगे तथा मोती भी, और उनका वस्त्र उसमें रेशम का होगा।
Roman Urdu (Maududi)(Dusri taraf) jo log iman laaye aur jinhon ne neik amal kiye unko Allah aisi jannaton mein dakhil karega jinke nichey nehrein beh rahi hongi, wahan woh soonay ke kangano aur motiyon se aarasta kiye jayenge aur unke libas resham ke honge
Roman Urdu (Junagarhi)eman walon aur nek kaam walon ko Allah Taalaa inn jannaton mein ley jayega jin kay darakhton talay say nehren lehren ley rahi hain jahan woh soney kay kanggan pehnaye jayen gay aur sachay moti bhi. Wahan unn ka libas khlis resham hoga
Devnagri Urdu (Maududi)(दूसरी तरफ) जो लोग ईमान लाए और जिन्हों नेइक अमल किए उनको अल्लाह ऐसी जन्नत में दखल करेगा जिनके बारे में खास बातें होंगी, वहां वो जल्द ही के साथ रहेंगे और उनके लिबास रेशम के होंगे
عَرَبِيوَهُدوا إِلَى الطَّيِّبِ مِنَ القَولِ وَهُدوا إِلىٰ صِراطِ الحَميدِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्हें पवित्र बात का मार्ग दिखा दिया गया और उन्हें प्रशंसित मार्ग दिखा दिया गया।
Roman Urdu (Maududi)Unko pakeeza baat kabool karne ki hidayat bakshi gayi aur unhein khudaye satuda siffat (All Praiseworthy) ka raasta dikhaya gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Unn ko pakeeza baat ki rehnumaee kerdi gaee aur qabil-e-sadd tareef raah ki rehnumee kerdi gaee
Devnagri Urdu (Maududi)उनको पाकीजा बात कबूल करने की हिदायत बख्शी गई और उन्हें खुदे सतुदा सिफ़्फ़त (सभी प्रशंसनीय) का रास्ता दिखाया गया
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا وَيَصُدّونَ عَن سَبيلِ اللَّهِ وَالمَسجِدِ الحَرامِ الَّذي جَعَلناهُ لِلنّاسِ سَواءً العاكِفُ فيهِ وَالبادِ ۚ وَمَن يُرِد فيهِ بِإِلحادٍ بِظُلمٍ نُذِقهُ مِن عَذابٍ أَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया और वे अल्लाह के मार्ग से और उस मस्जिदे-हराम से रोकते हैं, जिसे हमने सब लोगों के लिए इस तरह बनाया है कि उसमें रहने वाले और बाहर से आने वाले बराबर हैं और जो भी उसमें किसी अत्याचार के साथ सत्य से दूरी का इरादा करेगा, हम उसे दुःखदायी यातना चखाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne kufr kiya aur jo (aaj) Allah ke raaste se rok rahey hain aur us masjid e haram ki ziyarat mein maney hain jisey humne sab logon ke liye banaya hai, jismein muqami bashindon aur bahar se aane walon ke huqooq barabar hain, (unki rawish yaqeenan saza ki mustahiq hai), is (masjid e haram) mein jo bhi raasti se hatkar (deviate from righteousness) zulm ka tareeqa ikhtiyar karega usey hum dardnaak azaab ka maza chakhayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ney kufur kiya aur Allah ki raah rokney lagay aur uss hurmat wali masjid say bhi jissay hum ney tamam logon kay liye masavi ker diya hai wahin kay rehney walay hon ya bahir kay hon jo bhi zulm kay sath wahan ilhaad ka irada keray hum ussay dard-naak azab chakhayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने कुफ़्र किया और जो (आज) अल्लाह के रास्ते से रोक रहे हैं और उस मस्जिद ए हरम की ज़ियारत में माने हैं जिसे हमने सब लोगों के लिए बनाया है, जिसमें मुकामी बशिंदों और बहार से आने वालों के हुकूक बराबर हैं, (उनकी रवीश) यकीनन सज़ा की मुस्तहक़ है), इस (मस्जिद ए हरम) में जो भी रस्ती से हटकर (धार्मिकता से भटकना) ज़ुल्म का तरीक़ा इख्तियार करेगा उसे हम दर्दनक अज़ाब का मजा दिखाएंगे
عَرَبِيوَإِذ بَوَّأنا لِإِبراهيمَ مَكانَ البَيتِ أَن لا تُشرِك بي شَيئًا وَطَهِّر بَيتِيَ لِلطّائِفينَ وَالقائِمينَ وَالرُّكَّعِ السُّجودِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (वह समय याद करो) जब हमने इबराहीम के लिए इस घर का स्थान निर्धारित कर दिया (और उसे आदेश दिया) कि किसी को मेरा साझी न बनाना, तथा मेरे घर का तवाफ़ (परिक्रमा) करने वालों, क़ियाम करने वालों तथा रुकू' और सजदा करने वालों के लिए पवित्र रखना।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo woh waqt jab humne Ibrahim ke liye is ghar (khane Kaaba) ki jagah tajweez ki thi (is hidayat ke saath) ke “mere saath kisi cheez ko shareek na karo, aur mere ghar ko tawaf karne walon aur qayam va ruku va sujood karne walon ke liye paak rakho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jabkay hum ney ibrahim (alh-e-salam) ko kaba kay makan ki jagah muqarrar kerdi iss shart per kay meray sath kissi ko shareek na kerna aur meray ghar ko tawaf qayam rukoo sajda kerney walon kay liye pak saaf rakhna
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो वो वक्त जब हमने इब्राहीम के लिए इस घर (खाने काबा) की जगह तजवीज की थी (इस हिदायत के साथ) के “मेरे साथ किसी चीज़ को शरीक न करो, और मेरे घर को तवाफ़ करने वालों और क़याम वा रुकु व सुजूद करने वालों के लिए पाक रखो
عَرَبِيوَأَذِّن فِي النّاسِ بِالحَجِّ يَأتوكَ رِجالًا وَعَلىٰ كُلِّ ضامِرٍ يَأتينَ مِن كُلِّ فَجٍّ عَميقٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और लोगों में हज्ज का एलान कर दो। वे तेरे पास पैदल तथा प्रत्येक दुबली-पतली सवारियों पर आएँगे, जो हर दूर-दराज़ मार्ग से आएँगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur logon ko hajj ke liye izan e aam (proclamation) de do ke woh tumhare paas har door daraz muqaam se paidal aur ounton(camels) par sawar aayein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur logon mein hajj ki manadi ker dey log teray pass paa piyada bhi aayen gay aur dublay patley oonton per bhi door daraz ki tamam rahon say aayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और लोगों को हज के लिए इज़ान ए आम (उद्घोषणा) दे दो के वो तुम्हारे पास हर दर दराज़ मुकाम से पैदल और ऊंटों (ऊंटों) पर सवार आएं
عَرَبِيلِيَشهَدوا مَنافِعَ لَهُم وَيَذكُرُوا اسمَ اللَّهِ في أَيّامٍ مَعلوماتٍ عَلىٰ ما رَزَقَهُم مِن بَهيمَةِ الأَنعامِ ۖ فَكُلوا مِنها وَأَطعِمُوا البائِسَ الفَقيرَ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि वे अपने बहुत-से लाभों के लिए उपस्थित हों और कुछ ज्ञात दिनों में उन पालतू चौपायों पर अल्लाह का नाम लें, जो उसने उन्हें प्रदान किए हैं। फिर उनमें से स्वयं खाओ तथा तंगहाल निर्धन को खिलाओ।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke woh faiyde dekhein jo yahan unke liye rakkhe gaye hain, aur chandh muqarrar dino mein un jaanwaron par Allah ka naam lein jo usne unhein bakshe hain, khud bhi khayein aur tang-dast mohtaj ko bhi dein
Roman Urdu (Junagarhi)Apnay faeeday hasil kerney ko aajyen aur unn muqarrara dino mein Allah ka naam yaad keren unn chopayon per jo paltoo hain pus tum aap bhi khao aur bhookay faqeeron ko bhi khilao
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के वो फ़ैयदे देखें जो यहां उनके लिए रक्खे गए हैं, और चांद मुकर्रर दिनों में उन जानवरों पर अल्लाह का नाम लें जो उन्होंने उन्हें बख्शे हैं, खुद भी खाएं और तंग-दस्त मोहताज को भी दें
عَرَبِيثُمَّ ليَقضوا تَفَثَهُم وَليوفوا نُذورَهُم وَليَطَّوَّفوا بِالبَيتِ العَتيقِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वे अपना मैल-कुचैल दूर करें तथा अपनी मन्नतें पूरी करें और इस प्राचीन घर का तवाफ़ (परिक्रमा) करें।
Roman Urdu (Maududi)Phir apna mail-kuchel (dirt) door karein aur apni nazrein (vows) poori karein, aur us qadeem (ancient) ghar ka tawaf karein
Roman Urdu (Junagarhi)Phir woh apna mail kuchail door keren aur apni nazren poori keren aur Allah kay qadeem ghar ka tawaf keren
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अपना मेल-कुचेल (गंदगी) दरवाज़े करें और अपनी नज़रें (मन्नतें) पूरी करें, और हमारे क़दीम (प्राचीन) घर का तवाफ़ करें
عَرَبِيذٰلِكَ وَمَن يُعَظِّم حُرُماتِ اللَّهِ فَهُوَ خَيرٌ لَهُ عِندَ رَبِّهِ ۗ وَأُحِلَّت لَكُمُ الأَنعامُ إِلّا ما يُتلىٰ عَلَيكُم ۖ فَاجتَنِبُوا الرِّجسَ مِنَ الأَوثانِ وَاجتَنِبوا قَولَ الزّورِ
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हिन्दी (Al-Omari)ये (हमारे आदेश) हैं। और जो कोई अल्लाह के निषेधों (मर्यादाओं) का सम्मान करे, तो यह उसके लिए, उसके पालनहार के पास बेहतर है। और तुम्हारे लिए चौपाए हलाल (वैध) कर दिए गए हैं, सिवाय उनके जो तुम्हें पढ़कर सुनाए जाते हैं। अतः मूर्तियों की गंदगी से बचो तथा झूठी बात से बचो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh tha (taamir e kaaba ka maqsad) aur jo koi Allah ki qayam karda hurmaton (sanctity) ka ehtamam karey to yeh uske Rubb ke nazdeek khud usi keliye behtar hai. Aur tumhare liye maweshi (cattle) jaanwar halal kiye gaye , ma siwa un cheezon ke jo tumhein batayi jaa chuki hain. Pas buthon(Idols) ki gandagi se bacho, jhooti baaton se parheiz karo
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hai aur jo koi Allah ki hurmaton ki tazeem keray uss kay apnay liye uss kay rab kay pass behtari hai. Aur tumharay liye chopaye janwar halal ker diya gaye ba-juz unn kay jo tumharay samney biyan kiye gaye hain pus tumhen buton ki gandagi say bachtay rehna chahiye aur jhooti baat say bhi perhez kerna chahiye
Devnagri Urdu (Maududi)ये था (तामीर ए काबा का मकसद) और जो कोई अल्लाह की क़याम करदा हुरमतों (पवित्रता) का एहतमाम करे तो ये उसके रब के नाज़दीक खुद उसी के लिए बेहतर है। और तुम्हारे लिए मवेशी (मवेशी) जानवर हलाल किए गए, मा सिवा उन चीज़ों के जो तुम्हें बतायी जा चुकी हैं। मूर्तियों की गंदगी से बचो, झूठी बातों से परहेज़ करो
عَرَبِيحُنَفاءَ لِلَّهِ غَيرَ مُشرِكينَ بِهِ ۚ وَمَن يُشرِك بِاللَّهِ فَكَأَنَّما خَرَّ مِنَ السَّماءِ فَتَخطَفُهُ الطَّيرُ أَو تَهوي بِهِ الرّيحُ في مَكانٍ سَحيقٍ
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हिन्दी (Al-Omari)इस हाल में कि अल्लाह के लिए एकाग्र होने वाले हो, उसके साथ किसी को साझी करने वाले न हो। और जो अल्लाह के साथ साझी ठहराए, तो मानो वह आकाश से गिर पड़ा। फिर उसे पक्षी उचक लेते हैं, अथवा उसे हवा किसी दूर स्थान में गिरा देती है।
Roman Urdu (Maududi)Yaksu hokar Allah ke banday bano, uske saath kisi ko shareek na karo aur jo koi Allah ke saath shirk karey to goya woh aasmaan se gir gaya, ab ya to usey parinday uchak le jayenge ya hawa usko aisi jagah le jaa kar phenk degi jahan uske cheethdey udh (shattered into pieces) jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Allah ki toheed ko mantay huye uss kay sath kissi ko shareek na kertay huye. Suno! Allah kay sath shareek kerney wala goya aasman say gir para abb ya to ussay parinday uchak ley jayen gay ya hawa kissi door daraz ki jagah per phenk dey gi
Devnagri Urdu (Maududi)यकसु होकर अल्लाह के बंदे बनो, उसके साथ किसी को शरीक ना करो और जो कोई अल्लाह के साथ शिर्क करे तो गोया वो आसमां से गिर गया, अब या तो उसे परिंदे उचक ले जाएंगे या हवा उसको ऐसी जगह ले जा कर फेंक देगी जहां उसके चिल्लाए उध (टुकड़ों में बिखर जाएगा) जाएंगे
عَرَبِيذٰلِكَ وَمَن يُعَظِّم شَعائِرَ اللَّهِ فَإِنَّها مِن تَقوَى القُلوبِ
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हिन्दी (Al-Omari)यह (अल्लाह का आदेश है), और जो अल्लाह के प्रतीकों का सम्मान करता है, तो निश्चय यह दिलों के तक़वा की बात है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hai asal maamla (isey samajh lo), aur jo Allah ke muqarrar karda shaair (sanctity) ka ehtaram karey to yeh dilon ke taqwa se hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh sunn liya abb aur suno! Allah ki nishaniyon ki jo izzat-o-hurmat keray uss kay dil ki perhezgari ki waja say yeh hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये है असल मामला (इसे समझ लो), और जो अल्लाह के मुकर्रर करदा शायर (पवित्रता) का एहतराम करे तो ये दिलों के तकवा से है
عَرَبِيلَكُم فيها مَنافِعُ إِلىٰ أَجَلٍ مُسَمًّى ثُمَّ مَحِلُّها إِلَى البَيتِ العَتيقِ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारे लिए उनमें एक निर्धारित समय तक कई लाभ हैं, फिर उनके ज़बह होने की जगह प्राचीन घर के पास है।
Roman Urdu (Maududi)Tumhein ek waqt e muqarrar tak un (hadi ke jaanwaron) se faiyda uthane ka haqq hai phir un (ke qurbaan karne) ki jagah usi qadeem ghar ke paas hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein tumharay liye aik muqarrara waqt tak faeeda hai phir inn kay halal honey ki jagah khan-e-kaaba hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हें एक वक्त ए मुकर्रर तक उन (हादी के जानवरों) से फैयदा उठाने का हक़ है फिर उन (के कुर्बान करने) की जगह उसी क़दीम घर के पास है
عَرَبِيوَلِكُلِّ أُمَّةٍ جَعَلنا مَنسَكًا لِيَذكُرُوا اسمَ اللَّهِ عَلىٰ ما رَزَقَهُم مِن بَهيمَةِ الأَنعامِ ۗ فَإِلٰهُكُم إِلٰهٌ واحِدٌ فَلَهُ أَسلِموا ۗ وَبَشِّرِ المُخبِتينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा प्रत्येक समुदाय के लिए हमने एक क़ुर्बानी निर्धारित की है, ताकि वे उन पालतू चौपायों पर अल्लाह का नाम लें, जो उसने उन्हें प्रदान किए हैं। अतः तुम्हारा पूज्य एक पूज्य है, तो उसी के आज्ञाकारी हो जाओ। और (ऐ नबी!) आप विनम्रता अपनाने वालों को शुभ सूचना सुना दें।
Roman Urdu (Maududi)Har ummat ke liye humne qurbani ka ek qaida muqarrar kardiya hai taa-ke (us ummat ke log) un jaanwaron par Allah ka naam lein jo usne unko bakshey hain (in mukhtalif tareeqon ke andar maqsad ek hi hai). Pas tumhara khuda ek hi khuda hi aur usi ke tum mutii e farmaan bano. Aur aey Nabi, basharat de de aajizana (humble ) rawish ikhtiyar karne walon ko
Roman Urdu (Junagarhi)Aur her ummat kay liye hum ney qurbani kay tareeqay muqarrar farmaye hain takay woh inn chopaye janwaron per Allah ka naam len jo Allah ney unhen dey rakhay hain. Samajh lo kay tum sab ka mabood-e-bar haq sirf aik hi hai tum ussi kay tabey farmaan ho jao aajzi kerney walon ko khuskhabri suna dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)हर उम्मत के लिए हमने कुर्बानी का एक कायदा मुकर्रर करदिया है ता-के (उस उम्मत के लोग) उन जानवरों पर अल्लाह का नाम लें जो हमें बख्शे हैं (मुखतलिफ़ तरीक़ों के अंदर) मकसद एक ही है)। पास तुम्हारा खुदा एक ही खुदा ही है और उसी के तुम मुती ए फरमान बनो। और ऐ नबी, बशारत दे दे अजीजाना (विनम्र) रवीश इख्तियार करने वालों को
عَرَبِيالَّذينَ إِذا ذُكِرَ اللَّهُ وَجِلَت قُلوبُهُم وَالصّابِرينَ عَلىٰ ما أَصابَهُم وَالمُقيمِي الصَّلاةِ وَمِمّا رَزَقناهُم يُنفِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग कि जब अल्लाह का नाम लिया जाता है, तो उनके दिल डर जाते हैं, तथा उनपर जो मुसीबत आए उसपर धैर्य रखने वाले, और नमाज़ क़ायम करने वाले हैं तथा जो कुछ हमने उन्हें दिया है, उसमें से खर्च करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jinka haal yeh hai ke Allah ka zikr sunte hain to unke dil kaanp uthte hain, jo museebat bhi unpar aati hai uspar sabr karte hain, namaz qayam karte hai, aur jo kuch rizq humne unko diya hai us mein se kharch karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Unhen kay jab Allah ka zikar kiya jaye unn kay dil tharra jatay hain unhen jo buraee phonchay uss per sabar kertay hain namaz qaeem kerney walay hain aur jo kuch hum ney unhen dey rakha hai woh uss mein say bhi detay rehtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जिनका हाल ये है कि अल्लाह का जिक्र सुनते हैं तो उनके दिल कानप उठते हैं, जो मुसीबत भी अनपर आती है उसपर सब्र करते हैं, नमाज कायम करते हैं, और जो कुछ रिज्क हमने उनको दिया है उसमें से खर्च करते हैं
عَرَبِيوَالبُدنَ جَعَلناها لَكُم مِن شَعائِرِ اللَّهِ لَكُم فيها خَيرٌ ۖ فَاذكُرُوا اسمَ اللَّهِ عَلَيها صَوافَّ ۖ فَإِذا وَجَبَت جُنوبُها فَكُلوا مِنها وَأَطعِمُوا القانِعَ وَالمُعتَرَّ ۚ كَذٰلِكَ سَخَّرناها لَكُم لَعَلَّكُم تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और क़ुर्बानी के ऊँटों को हमने तुम्हारे लिए अल्लाह की निशानियों में से बनाया है। तुम्हारे लिए उनमें भलाई है। अतः उनपर अल्लाह का नाम लो, इस हाल में कि घुटना बंधे खड़े हों। फिर जब उनके पहलू धरती से आ लगें, तो उनमें से स्वयं खाओ तथा संतोष करने वाले निर्धन और माँगने वाले को भी खिलाओ। इसी प्रकार, हमने उन्हें तुम्हारे वश में कर दिया है, ताकि तुम कृतज्ञ बनो।
Roman Urdu (Maududi)Aur (qurbani ke) ounton (camels) ko humne tumhare liye shaaer-Allah (symbols of Allah) mein shamil kiya hai, tumhare liye un mein bhalayi hai. Pas unhein khada karke unpar Allah ka naam lo, aur jab (qurbani ke baad) unki peethein zameen par tik jayein to unmein se khud bhi khao aur unko bhi khilao jo qanaat kiye baithe hain (contented ones) aur unko bhi jo apni haajat pesh karein. In jaanwaron ko humne is tarah tumhare liye musakkhar kiya hai taa-ke tum shukriya ada karo
Roman Urdu (Junagarhi)Qurbani kay oont hum ney tumharay liye Allah Taalaa ki nishaniyan muqarrar ker di hain inn mein tumhen nafa hai. Pus unhen khara ker kay unn per Allah ka naam lo phir jab unn kay pehloo zamin say lag jayen ussay (khud bhi) khao aur miskeen sawal say rukney walon aur sawal kerney walon ko bhi khilao issi tarah hum ney chopayon ko tumharay ma-tehat ker diya hai kay tum shukar guzari kero
Devnagri Urdu (Maududi)और (कुर्बानी के) ऊंटों (ऊंटों) को हमने तुम्हारे लिए शहर-अल्लाह (अल्लाह के प्रतीक) में शामिल किया है, तुम्हारे लिए उन्हें बुलाया है। पस उन्हें खड़ा करके अनपर अल्लाह का नाम लो, और जब (कुर्बानी के बाद) उनकी पीठ जमीन पर टिक जाए तो उनसे खुद भी खाओ और उनको भी खिलाओ जो कनात किए बैठे हैं (संतुष्ट लोग) और उनको भी जो अपनी हाजत पेश करें। जानवरों को हमने इस तरह तुम्हारे लिए मुस्कुरा दिया है ता-के तुम शुक्रिया अदा करो
عَرَبِيلَن يَنالَ اللَّهَ لُحومُها وَلا دِماؤُها وَلٰكِن يَنالُهُ التَّقوىٰ مِنكُم ۚ كَذٰلِكَ سَخَّرَها لَكُم لِتُكَبِّرُوا اللَّهَ عَلىٰ ما هَداكُم ۗ وَبَشِّرِ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह को उनके मांस और उनके रक्त हरगिज़ नहीं पहुँचेंगे, परंतु उसे तुम्हारा तक़वा पहुँचेगा। इसी प्रकार, उस (अल्लाह) ने उन (पशुओं) को तुम्हारे वश में कर दिया है, ताकि तुम अल्लाह की महिमा का गान करो, उस मार्गदर्शन पर, जो उसने तुम्हें दिया है। और (ऐ रसूल!) आप सत्कर्मियों को शुभ सूचना सुना दें।
Roman Urdu (Maududi)Na unke gosht Allah ko pahunchte hain na khoon, magar usey tumhara taqwa pahunchta hai. Usne unko tumhare liye is tarah musakkhar kiya hai taa-ke uski bakshi hui hidayat par tum uski takbeer karo. Aur (aey Nabi), basharat dedo neikukar logon ko
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ko qurbaniyon kay gosht nahi phonchtay na unn kay khoon bulkay ussay to tumharay dil ki perhezgari phonchti hai. Issi tarah Allah ney inn janwaron ko tumhara mutee ker diya hai kay tum uss ki rehnumaee kay shuriye mein uss ki baraiyan biyan kero aur nek logon ko khuskhabri suna dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)ना उनके गोश्त अल्लाह को पहचानते हैं ना खून, मगर उसे तुम्हारा तक़वा पहचानता है। उसने तुम्हारे लिए इस तरह मुसक्कर किया है ता-के उसकी बख्शी हुई हिदायत पर तुम उसकी तकबीर करो। और (ऐ नबी), बशारत देदो नीकुकर लोगों को
عَرَبِي۞ إِنَّ اللَّهَ يُدافِعُ عَنِ الَّذينَ آمَنوا ۗ إِنَّ اللَّهَ لا يُحِبُّ كُلَّ خَوّانٍ كَفورٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह उन लोगों की ओर से प्रतिरक्षा करता है, जो ईमान लाए। निःसंदेह अल्लाह किसी ऐसे व्यक्ति को पसंद नहीं करता, जो बड़ा विश्वासघाती, बहुत नाशुक्रा हो।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan Allah mudafiyat (defends) karta hai un logon ki taraf se jo iman laye hain. Yaqeenan Allah kisi khain (treacherous) kafir e niyamat ko pasand nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Sunn rakho! Yaqeenan sachay momino kay duhmano ko khud Allah Taalaa hata deta hai. Koi khayanat kerney wala na shukra Allah Taalaa ko hergiz pasand nahi
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन अल्लाह मुदाफ़ियात (बचाव) करता है उन लोगों की तरफ से जो ईमान लाए हैं। यकीनन अल्लाह कोई खैन (विश्वासघाती) काफिर ए नियामत को पसंद नहीं करता
عَرَبِيأُذِنَ لِلَّذينَ يُقاتَلونَ بِأَنَّهُم ظُلِموا ۚ وَإِنَّ اللَّهَ عَلىٰ نَصرِهِم لَقَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों को जिनसे युद्ध किया जाता है, अनुमति दे दी गई है, इसलिए कि उनपर अत्याचार किया गया। और निःसंदेह अल्लाह उनकी सहायता करने में निश्चय पूरी तरह सक्षम है।
Roman Urdu (Maududi)Ijazat de di gayi un logon ko jinke khilaf jung ki jaa rahi hai, kyunke woh mazloom hain, aur Allah yaqeenan unki madad par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jin (musalmano) say (kafir) jang ker rahey hain unhen bhi muqablay ki ijazat di jati hai kiyon kay woh mazloom hain. Be-shak unn ki madad per Allah qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)इजाज़त दे दी गई उन लोगों को जिनके खिलाफ जंग की जा रही है, क्योंकि वो मजलूम हैं, और अल्लाह यकीनन उनकी मदद पर कादिर है
عَرَبِيالَّذينَ أُخرِجوا مِن دِيارِهِم بِغَيرِ حَقٍّ إِلّا أَن يَقولوا رَبُّنَا اللَّهُ ۗ وَلَولا دَفعُ اللَّهِ النّاسَ بَعضَهُم بِبَعضٍ لَهُدِّمَت صَوامِعُ وَبِيَعٌ وَصَلَواتٌ وَمَساجِدُ يُذكَرُ فيهَا اسمُ اللَّهِ كَثيرًا ۗ وَلَيَنصُرَنَّ اللَّهُ مَن يَنصُرُهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَقَوِيٌّ عَزيزٌ
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग जिन्हें उनके घरों से अकारण निकाल दिया गया, केवल इस बात पर कि वे कहते हैं कि हमारा पालनहार अल्लाह है। और यदि अल्लाह कुछ लोगों को, कुछ लोगों द्वारा हटाता न होता, तो अवश्य ध्वस्त कर दिए जाते (ईसाई पुजारियों के) मठ तथा (ईसाइयों के) गिरजे और (यहूदियों के) पूजा स्थल तथा (मुसलमानों की) मस्जिदें, जिनमें अल्लाह का नाम बहुत अधिक लिया जाता है। और निश्चय अल्लाह अवश्य उसकी सहायता करेगा, जो उस (के धर्म) की सहायता करेगा। निःसंदेह अल्लाह निश्चय अत्यंत शक्तिशाली, सब पर प्रभुत्वशाली है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hain jo apne gharon se na-haqq nikal diye gaye sirf is kasoor par ke woh kehte thay “hamara Rubb Allah hai”. Agar Allah logon ko ek dusre ke zariye dafa na karta rahey to khanqahein (monasteries), aur girja (churches) aur mabad (synagogues) aur masjidein, jin mein Allah ka kasrat se naam liye jata hai, sab mismaar (demolished) kar daali jayein. Allah zaroor un logon ki madad karega jo uski madad karenge. Allah bada taaqatwar aur zabardast hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh woh hain jinhen na-haq apnay gharon say nikala gaya sirf unn kay iss qol per ker humara perwerdigar faqat Allah hai. Agar Allah Taalaa logon ko aapas mein aik doosray say na hatata rehta to ibadat khaney aur girjay aur masjiden aur yahoodiyon kay maabad aur woh masjiden bhi dha di jaten jahan Allah ka naam ba-kasrat liya jata hai. Jo Allah ki madad keray ga Allah bhi zaroor uss ki madad keray ga. Be-shak Allah Taalaa bari qooaton wala baray ghalbay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग हैं जो अपने घर से ना-हक़ निकल गए सिर्फ इस कसूर पर के वो कहते थे "हमारा रब अल्लाह है"। अगर अल्लाह लोगों को एक दूसरे के ज़रिये दफा न करता रहे तो खानकाहें (मठ), और गिरजा (चर्च) और मबाद (आराधनालय) और मस्जिदें, जिन में अल्लाह का कसरत से नाम लिया जाता है, सब मिसमार (ध्वस्त) कर डाली जायेंगी। अल्लाह जरूर उन लोगों की मदद करेगा जो उसकी मदद करेंगे। अल्लाह बड़ा ताक़तवार और ज़बरदस्त है
عَرَبِيالَّذينَ إِن مَكَّنّاهُم فِي الأَرضِ أَقامُوا الصَّلاةَ وَآتَوُا الزَّكاةَ وَأَمَروا بِالمَعروفِ وَنَهَوا عَنِ المُنكَرِ ۗ وَلِلَّهِ عاقِبَةُ الأُمورِ
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग कि यदि हम उन्हें धरती में आधिपत्य प्रदान करें, तो वे नमाज़ क़ायम करेंगे और ज़कात देंगे और अच्छे काम का आदेश देंग और बुरे काम से रोकेंगे। और सभी कर्मों का परिणाम अल्लाह ही के अधिकार में है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hain jinhein agar hum zameen mein iqtedar bakshein to woh namaz qayam karenge, zakat denge, maroof (bhalayi) ka hukum denge aur munkar (burayi) se mana karenge aur tamaam maamlaat ka anjaam kaar Allah ke haath mein hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh woh log hain kay agar hum zamin mein inn kay paaon jama den to yeh poori pabandi say namazen qaeem keren aur zakaten den aur achay kaamon ka hukum keren aur burray kaamon say mana keren. Tamam kaamon ka anjam Allah kay ikhtiyar mein hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग हैं जिनमें अगर हम ज़मीन में इक़्तेदार बख्शें तो वो नमाज़ क़याम करेंगे, ज़कात देंगे, मारूफ़ (भलाई) का हुकुम देंगे और मुनकर (बुराई) से मन करेंगे और तमाम मामले का अंजाम अल्लाह के हाथ में है
عَرَبِيوَإِن يُكَذِّبوكَ فَقَد كَذَّبَت قَبلَهُم قَومُ نوحٍ وَعادٌ وَثَمودُ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ रसूल!) यदि वे आपको झुठलाएँ, तो निःसंदेह इनसे पहले नूह की जाति और आद तथा समूद (भी अपने रसूलों को) झुठला चुके हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), agar woh tumhein jhutlate hain to unse pehle qaum e Nooh aur Aad aur Samood
Roman Urdu (Junagarhi)Agar yeh log aap ko jhutlayen (to koi tajjub ki baat nahi) to inn say pehlay nooh (alh-e-salam) ki qom aur aad aur samood
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), अगर वो तुम्हें झुठलाते हैं तो उनसे पहले क़ौम ए नूह और अद और समूद
عَرَبِيوَقَومُ إِبراهيمَ وَقَومُ لوطٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इबराहीम की जाति और लूत की जाति।
Roman Urdu (Maududi)Aur qaum e Ibrahim aur qaum e Lut
Roman Urdu (Junagarhi)Aur qom-e-ibrahim aur qom-e-loot
Devnagri Urdu (Maududi)और क़ौम ए इब्राहीम और क़ौम ए लुट
عَرَبِيوَأَصحابُ مَديَنَ ۖ وَكُذِّبَ موسىٰ فَأَملَيتُ لِلكافِرينَ ثُمَّ أَخَذتُهُم ۖ فَكَيفَ كانَ نَكيرِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मदयन वालों ने। और मूसा (भी) झुठलाए गए, तो मैंने उन काफ़िरों को मोहलत दी, फिर मैंने उन्हें पकड़ लिया। तो मेरा दंड कैसा था?
Roman Urdu (Maududi)Aur ehle madyan bhi jhutla chuke hain aur Moosa bhi jhutlaye jaa chuke hain. Un sab munkireen ko maine pehle mohlat di , phir pakad liya. Ab dekhlo ke meri uqubat(chastisement) kaisi thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur madiyan walay bhi apnay apnay nabiyon ko jhutla chukay hain. Musa (alh-e-salam) bhi jhutlaye ja chukay hain pus mein ney kafiron ko yun hi si mohlat di phir dhar dabaya phir mera azab kaisa hua
Devnagri Urdu (Maududi)और एहले मद्यन भी झुटला चुके हैं और मूसा भी झुटलाये जा चुके है. उन सब मुनकिरेन को मैंने पहले मोहलत दी, फिर पकड़ लिया। अब देखलो के मेरी उकुबत (सजा) कैसी थी
عَرَبِيفَكَأَيِّن مِن قَريَةٍ أَهلَكناها وَهِيَ ظالِمَةٌ فَهِيَ خاوِيَةٌ عَلىٰ عُروشِها وَبِئرٍ مُعَطَّلَةٍ وَقَصرٍ مَشيدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो कितनी ही बस्तियाँ हैं, जिन्हें हमने इस हाल में नष्ट कर दिया कि वे अत्याचारी थीं। अतः वे अपनी छतों पर गिरी हुई हैं। और (कितने ही) बेकार छोड़े हुए कुएँ हैं तथा पक्के ऊँचे भवन हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kitni hi khatakar bastiyan hain jinko humne tabaah kiya hai aur aaj woh apni chathon (roofs) par ulti padi hain, kitne hi kuwein (wells) bekar aur kitne hi qasr (castle) khandar bani huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Boht si bastiyan hain jinhen hum ney teh-o-bala kerdiya iss liye kay woh zalim thay pus woh apni chaton kay bal ondhi hui pari hain aur boht say abad koonwen beykaar paray hain aur boht say pakkay aur buland mehal weeran paray hain
Devnagri Urdu (Maududi)कितनी ही खतरनाक बस्तियां हैं जिनको हमने तबाह किया है और आज वो अपनी छतों (छतों) पर उल्टी पड़ी हैं, कितने ही कुवें (कुएं) बेकार और कितने ही क़सर (महल) खंडार बनी हुए हैं
عَرَبِيأَفَلَم يَسيروا فِي الأَرضِ فَتَكونَ لَهُم قُلوبٌ يَعقِلونَ بِها أَو آذانٌ يَسمَعونَ بِها ۖ فَإِنَّها لا تَعمَى الأَبصارُ وَلٰكِن تَعمَى القُلوبُ الَّتي فِي الصُّدورِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वे धरती में चले-फिरे नहीं कि उनके लिए ऐसे दिल हों, जिनसे वे समझें, या ऐसे कान हों, जिनसे वे सुनें। निःसंदेह आँखें अंधी नहीं होतीं, लेकिन वे दिल अंधे होते हैं, जो सीनों में हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log zameen mein chale phire nahin hain ke inke dil samajhne waley aur inke kaan sunney waley hotey? Haqeeqat yeh hai ke aankhein andhi nahin hoti magar woh dil andhey ho jatey hain jo seeno mein hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya enhon ney zamin mein sair-o-sayyaahat nahi ki jo inn kay dil inn baton kay samajhney walay hotay ya kano say hi inn (waqeeyaat) ko sunn letay baat yeh hai kay sirf aankhen hi andhi nahi hotin bulkay woh dil andhay ho jatay hain jo seeno mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग ज़मीन में चले फिर नहीं हैं के इनके दिल समझने वाले और इनके कान सनी वाले होते? हकीकत ये है के आँखें अँधी नहीं होती मगर वो दिल अँधे हो जाते हैं जो सीने में हैं
عَرَبِيوَيَستَعجِلونَكَ بِالعَذابِ وَلَن يُخلِفَ اللَّهُ وَعدَهُ ۚ وَإِنَّ يَومًا عِندَ رَبِّكَ كَأَلفِ سَنَةٍ مِمّا تَعُدّونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे आपसे यातना के बारे में जल्दी मचा रहे हैं और अल्लाह हरगिज़ अपने वचन के विरुद्ध नहीं करेगा। और निःसंदेह आपके पालनहार के यहाँ एक दिन तुम्हारी गणना के अनुसार हज़ार वर्ष के बराबर है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log azaab ke liye jaldi macha rahey hain. Allah hargiz apne wadey ke khilaf na karega, magar tere Rubb ke haan ka ek din tumhare shumar ke hazaar baras ke barabar hua karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur azab ko aap say jaldi talab ker rahey hain Allah hergiz apna wada nahi talay ga. Haan albata aap kay rab kay nazdeek aik din tumhari ginti kay aitbar say aik hazar saal ka hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग अज़ाब के लिए जल्दी मचा रहे हैं। अल्लाह हरगिज अपने वादे के खिलाफ न करेगा, मगर तेरे रब के हां का एक दिन तुम्हारे शुमार के हजार बरस के बराबर हुआ करता है
عَرَبِيوَكَأَيِّن مِن قَريَةٍ أَملَيتُ لَها وَهِيَ ظالِمَةٌ ثُمَّ أَخَذتُها وَإِلَيَّ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)और कितनी ही बस्तियाँ हैं, जिन्हें हमने अवसर दिया, जबकि वे अत्याचारी थीं। फिर मैंने उन्हें पकड़ लिया और मेरी ही ओर (सबको) लौटकर आना है।
Roman Urdu (Maududi)Kitni hi bastiyan hain jo zalim thi, maine uno pehle mohlat di, phir pakad liya aur sab ko wapas to mere paas hi aana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Boht si zulm kerney wali bastiyon ko mein ney dheel di phir aakhir unhen pakar liya aur meri hi taraf lot ker aana hai
Devnagri Urdu (Maududi)कितनी ही बस्तियां हैं जो जालिम थी, मैंने उनो पहले मोहलत दी, फिर पकड़ लिया और सबको वापस तो मेरे पास ही आना है
عَرَبِيقُل يا أَيُّهَا النّاسُ إِنَّما أَنا لَكُم نَذيرٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें कि ऐ लोगो! मैं तो बस तुम्हें खुला सावधान करने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), kehdo ke “ logon, main to tumhare liye sirf woh shaks hoon jo (bura waqt aane se pehle) saaf saaf khabardar karne wala ho
Roman Urdu (Junagarhi)Ailaan kerdo kay logo! Mein tumhen khullam khulla chokanna kerney wala hi hun
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), कहदो के "लोगन, मैं तो तुम्हारे लिए सिर्फ वो शक्स हूं जो (बुरा वक्त आने से पहले) साफ साफ खबरदार करने वाला हूं
عَرَبِيفَالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ لَهُم مَغفِرَةٌ وَرِزقٌ كَريمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तो वे लोग जो ईमान लाए तथा उन्होंने अच्छे कार्य किए, उनके लिए महान क्षमा और सम्मान की रोज़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Phir jo iman layenge aur neik amal karenge unke liye magfirat hai aur izzat ki rozi
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jo eman laye hain aur jinhon ney nek amal kiye hain unn hi kay liye bakhsish hai aur izzat wali rozi
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जो ईमान लाएंगे और नेक अमल करेंगे उनके लिए मगफिरत है और इज्जत की रोजी
عَرَبِيوَالَّذينَ سَعَوا في آياتِنا مُعاجِزينَ أُولٰئِكَ أَصحابُ الجَحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने हमारी आयतों (को झुठलाने) में दौड़-भाग की, (यह समझकर कि हमें) विवश कर देंगे, तो वही नरकवासी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo hamari aayat ko neecha dikhane ki koshish karenge woh dozakh ke yaar hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log humari nishaniyon ko pust kerney kay darpay rehtay hain wohi dozakhi hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जो हमारी आयत को नीचा दिखाने की कोशिश करेंगे वो दोज़ख के यार हैं
عَرَبِيوَما أَرسَلنا مِن قَبلِكَ مِن رَسولٍ وَلا نَبِيٍّ إِلّا إِذا تَمَنّىٰ أَلقَى الشَّيطانُ في أُمنِيَّتِهِ فَيَنسَخُ اللَّهُ ما يُلقِي الشَّيطانُ ثُمَّ يُحكِمُ اللَّهُ آياتِهِ ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ रसूल!) हमने आपसे पूर्व न कोई रसूल भेजा और न कोई नबी, परंतु जब उसने (अल्लाह की पुस्तक) पढ़ी, तो शैतान ने उसके पढ़ने में संशय डाल दिया। फिर अल्लाह शैतान के संशय को मिटा देता है, फिर अल्लाह अपनी आयतों को सुदृढ़ कर देता है। और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Muhammad) tumse pehle humne na koi Rasool aisa bheja hai na Nabi (jiske saath yeh maamla na pesh aaya ho ke) jab usne tamanna ki, shaytan uski tamanna mein khalal andaz ho gaya. Is tarah jo kuch bhi shaytan khalal andaziyan karta hai Allah unko mita deta hai aur apni aayat ko pukhta (confirm) kardeta hai. Allah aleem hai aur hakeem
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney aap say pehlay jiss rasool aur nabi ko bheja uss kay sath yeh hua kay jab woh apnay dil mein koi aarzoo kerney laga shetan ney uss ki aarzoo mein kuch mila diya pus shetan ki milawat ko Allah Taalaa door ker deta hai phir apni baten pakki ker deta hai. Allah Taalaa dana aur ba-hikmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ मुहम्मद) तुमसे पहले हमने ना कोई रसूल ऐसा भेजा है ना नबी (जिसके साथ ये मामला ना पेश आया हो के) जब उसने तमन्ना की, शैतान उसकी तमन्ना में ख़लाल अंदाज़ हो गया है तारा जो कुछ भी शैतान खलाल अंदाज़ियां करता है अल्लाह उनको मिटा देता है और अपनी आयत को पुख्ता करता है। अल्लाह अलीम है और हकीम
عَرَبِيلِيَجعَلَ ما يُلقِي الشَّيطانُ فِتنَةً لِلَّذينَ في قُلوبِهِم مَرَضٌ وَالقاسِيَةِ قُلوبُهُم ۗ وَإِنَّ الظّالِمينَ لَفي شِقاقٍ بَعيدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि वह (अल्लाह) शैतान के डाले हुए संशय को उनके लिए परीक्षण बना दे, जिनके दिलों में रोग है और जिनके दिल कठोर हैं। और निःसंदेह अत्याचारी लोग विरोध में बहुत दूर चले गए हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Woh is liye aisa honay deta hai) taa-ke shaytan ki daali hui kharabi ko fitna bana de un logon ke liye jinke dilon ko [nifaq ka (hypocrisy)] rog laga hua hai aur jinke dil khotay hain. Haqeeqat yeh hai ke yeh zalim log inaad (enmity) mein bahut door nikal gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss liye kay shetani milawat ko Allah Taalaa unn logon ki aazmaeesh ka zariya bana dey jin kay dilon mein beemari hai aur jin kay dil sakht hain. Be-shak zalim log gehri mukhalifat mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)(वो इस लिए ऐसा होने देता है) ता-के शैतान की डाली हुई ख़राबी को फ़ितना बना दे उन लोगों के लिए जिनके दिलों को [निफ़क़ का (पाखंड)] रोग लगा हुआ है और जिनका दिल खोता है। हकीकत ये है के ये जालिम लोग इनाद (दुश्मनी) में बहुत दूर निकल गए हैं
عَرَبِيوَلِيَعلَمَ الَّذينَ أوتُوا العِلمَ أَنَّهُ الحَقُّ مِن رَبِّكَ فَيُؤمِنوا بِهِ فَتُخبِتَ لَهُ قُلوبُهُم ۗ وَإِنَّ اللَّهَ لَهادِ الَّذينَ آمَنوا إِلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और ताकि उन लोगों को जिन्हें ज्ञान दिया गया है, विश्वास हो जाए कि वही आपके पालनहार की ओर से सत्य है। तो वे उसपर ईमान ले आएँ और उनके दिल उसके लिए झुक जाएँ। और निःसंदेह अल्लाह ईमान लाने वालों को निश्चय सीधा मार्ग दिखाने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur ilam se behramand log jaan lein ke yeh haqq hai tere Rubb ki taraf se aur woh ispar iman le aayein aur unke dil iske aagey jhuk jaayein. Yaqeenan Allah iman laney walon ko hamesha seedha raasta dikha deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss liye bhi kay jinhen ilm ata farmaya gaya hai woh yaqeen kerlen kay yeh aap kay rab hi ki taraf say sirasir haq hi hai phir woh iss per eman layen aur unn kay dil uss ki taraf jhuk jayen. Yaqeenan Allah Taalaa eman daron ko raah-e-raast ki taraf rehbari kerney wala hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और इलम से बेहरमंद लोग जान लें के ये हक है तेरे रब की तरफ से और वो इसपर ईमान ले आएं और उनके दिल इसके आगे झुक जाएं। यकीनन अल्लाह ईमान लाने वालों को हमेशा सीधा रास्ता दिखा देता है
عَرَبِيوَلا يَزالُ الَّذينَ كَفَروا في مِريَةٍ مِنهُ حَتّىٰ تَأتِيَهُمُ السّاعَةُ بَغتَةً أَو يَأتِيَهُم عَذابُ يَومٍ عَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, हमेशा इस (क़ुरआन) के बारे में किसी संदेह में रहेंगे, यहाँ तक कि उनके पास अचानक क़ियामत आ जाए, या उनके पास उस दिन की यातना आ जाए, जो बाँझ (हर भलाई से रहित) है।
Roman Urdu (Maududi)Inkar karne waley to iski taraf se shakk hi mein padey rahenge yaha tak ke ya to unpar qayamat ki ghadi achanak aa jaye, ya ek manhoos din ka azaab nazil ho jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Kafir iss wahee-e-elahee mein hamesha shak-o-shuba hi kertay rahen gay hatta kay achanak unn kay saron per qayamat aajaye ya unn kay pass uss din ka azab aajaye jo manhoos hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनकार करने वाले तो इसकी तरफ से शक्क ही में पड़े रहेंगे यहां तक ​​के या तो उन्पर कयामत की घड़ी अचानक आ जाए, या एक मनहूस दिन का अज़ाब नाज़िल हो जाए
عَرَبِيالمُلكُ يَومَئِذٍ لِلَّهِ يَحكُمُ بَينَهُم ۚ فَالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ في جَنّاتِ النَّعيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन सारा राज्य अल्लाह ही का होगा, वह उनके बीच निर्णय करेगा। फिर वे लोग जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कार्य किए, वे नेमत भरी जन्नतों में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Us roz baadshahi Allah ki hogi aur woh unke darmiyan faisla kardega. Jo iman rakhne waley aur amal e saleh karne waley hongey woh niyamat bhari jannaton mein jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din sirf Allah hi ki badshaat hogi wohi unn mein faislay farmaye ga. eman aur nek amal walay to nematon say bhari jannaton mein hongay
Devnagri Urdu (Maududi)हमें रोज़ बादशाही अल्लाह की होगी और वो उनका दरमियान फ़ैसला कर देगा। जो ईमान रखने वाले और अमल ए सालेह करने वाले होंगे वो नियामत भारी जन्नत में जाएंगे
عَرَبِيوَالَّذينَ كَفَروا وَكَذَّبوا بِآياتِنا فَأُولٰئِكَ لَهُم عَذابٌ مُهينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने कुफ़्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया, तो वही हैं जिनके लिए अपमानकारी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jinhon ne kufr kiya hoga aur hamari aayat ko jhutlaya hoga unke liye ruswakun azaab hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin logon ney kufur kiya aur humari aayaton ko jhutlaya unn kay liye zaleel kerney walay azab hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जिन्होन ने कुफ्र किया होगा और हमारी आयत को झुटलाया होगा उनके लिए रुस्वाकुन अज़ाब होगा
عَرَبِيوَالَّذينَ هاجَروا في سَبيلِ اللَّهِ ثُمَّ قُتِلوا أَو ماتوا لَيَرزُقَنَّهُمُ اللَّهُ رِزقًا حَسَنًا ۚ وَإِنَّ اللَّهَ لَهُوَ خَيرُ الرّازِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने अल्लाह के मार्ग में अपना घरबार छोड़ा। फिर मारे गए या मर गए, निश्चय अल्लाह उन्हें अवश्य उत्तम रोज़ी प्रदान करेगा। और निःसंदेह अल्लाह ही सब रोज़ी देने वालों से बेहतर है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jin logon ne Allah ki raah mein hijrat ki, phir qatal kardiye gaye ya marr gaye, Allah unko accha rizq dega aur yaqeenan Allah hi behtareen raaziq hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin logon ney raah-e-khuda mein tarq-e-watan kiya phir woh shaheed ker diye gaye ya apni maut marr gaye Allah Taalaa unhen behtareen rizq ata farmaye ga. Aur be-shak Allah Taalaa rozi denay walon mein sab say behtar hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जिन लोगों ने अल्लाह की राह में हिजरत की, फिर क़त्ल कर दिए गए या मर गए, अल्लाह उनको अच्छा रिज्क देगा और यकीनन अल्लाह हाय बेहतरीन राज़िक है
عَرَبِيلَيُدخِلَنَّهُم مُدخَلًا يَرضَونَهُ ۗ وَإِنَّ اللَّهَ لَعَليمٌ حَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय वह उन्हें ऐसे स्थान में अवश्य दाख़िल करेगा, जिससे वे प्रसन्न हो जाएँगे। और निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला, अत्यंत सहनशील है।
Roman Urdu (Maududi)Woh unhein aisi jagah pahunchayega jissey woh khush ho jayenge. Beshak Allah aleem (all knowing) aur haleem (Most Forbearing) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unhen Allah Taalaa aisi jagah phonchaye ga kay woh iss say razi ho jayen gay be-shak Allah Taalaa ilm aur burdbari wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो उनहें ऐसी जगह पहचानेगा जिसे वो खुश हो जायेंगे। बेशक अल्लाह अलीम (सभी जानने वाले) और हलीम (सबसे सहनशील) है
عَرَبِي۞ ذٰلِكَ وَمَن عاقَبَ بِمِثلِ ما عوقِبَ بِهِ ثُمَّ بُغِيَ عَلَيهِ لَيَنصُرَنَّهُ اللَّهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَعَفُوٌّ غَفورٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यह तो हुआ। और जो व्यक्ति बदला ले, वैसा ही जैसा उसके साथ किया गया, फिर उसपर अत्याचार किया जाए, तो अल्लाह उसकी अवश्य सहायता करेगा। निःसंदेह अल्लाह बहुत माफ़ करने वाला, अत्यंत क्षमाशील है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh to hai unka haal, aur jo koi badla le, waisa hi jaisa uske saath kiya gaya, aur phir uspar zyadati bhi ki gayi ho, to Allah uski madad zaroor karega. Allah maaf karne wala aur darguzar karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Baat yehi hai aur jiss ney badla liya ussi kay barabar jo uss kay sath kiya gaya tha phir agar uss say ziyadti ki jaye to yaqeenan Allah Taalaa khud uss ki madad farmaye ga. Be-shak Allah darguzar kerney wala bakshney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये तो है उनका हाल, और जो कोई बदला ले, वैसा ही जैसा उसका साथ दिया गया, और फिर उसपर ज़्यादा हो गया, अल्लाह उसकी मदद जरूर करेगा। अल्लाह माफ करें वाला और दरगुज़ार करने वाला है
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ يولِجُ اللَّيلَ فِي النَّهارِ وَيولِجُ النَّهارَ فِي اللَّيلِ وَأَنَّ اللَّهَ سَميعٌ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यह इसलिए कि अल्लाह रात को दिन में दाखिल करता है और दिन को रात में दाखिल करता है। और अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh is liye ke raat se din aur din se raat nikalne wala Allah hi hai aur woh sami (sunney waala/ hears everything) o baseer (dekhne wala /sees everything) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss liye kay Allah raat ko din mein dakhil kerta hai aur din ko raat mein dakhil kerta hai aur be-shak Allah sunnay wala dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये इस लिए के दिन और दिन से रात निकलने वाला अल्लाह ही है और वो सामी (सनी वाला/सबकुछ सुनता है) ओ बेसिर (देखने वाला/सबकुछ देखता है) है
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ هُوَ الحَقُّ وَأَنَّ ما يَدعونَ مِن دونِهِ هُوَ الباطِلُ وَأَنَّ اللَّهَ هُوَ العَلِيُّ الكَبيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)यह इसलिए कि अल्लाह ही सत्य है, और जिसे वे अल्लाह के सिवा पुकारते हैं, वह असत्य है, और अल्लाह ही सबसे ऊँचा, सबसे बड़ा है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh isliye ke Allah hi haqq hai aur woh sab baatil hain jinhein Allah ko chodh kar yeh log pukarte hain. Aur Allah hi baaladast (Supreme) aur buzurg (Exalted One) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh sab iss liye kay Allah hi haq hai aur uss kay siwa jisay bhi yeh pukartay hain woh batil hai aur be-shak Allah hi bulandi wlaa kibriyaee wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये इसलिए के अल्लाह ही हक़ है और वो सब बातिल हैं जिन्हे अल्लाह को छोड़ कर ये लोग पुकारते हैं। और अल्लाह ही बालादस्त (सर्वोच्च) और बुज़ुर्ग (सर्वोच्च) है
عَرَبِيأَلَم تَرَ أَنَّ اللَّهَ أَنزَلَ مِنَ السَّماءِ ماءً فَتُصبِحُ الأَرضُ مُخضَرَّةً ۗ إِنَّ اللَّهَ لَطيفٌ خَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह ने आकाश से कुछ पानी उतारा, तो भूमि हरी-भरी हो जाती है। निःसंदेह अल्लाह अत्यंत दयालु, हर चीज़ की ख़बर रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum dekhte nahin ho ke Allah aasman se pani barsata hai aur uski badaulat zameen sar-sabz ho jaati hai? Haqeeqat yeh hai ke woh lateef o khabeer hai (fully aware of everything)
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney nahi dekha kay Allah Taalaa aasman say pani barsata hai pus zamin sirsabz ho jati hai. Be-shak Allah Taalaa meharban aur ba-khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह आसमान से पानी बरसाता है और उसकी बदौलत ज़मीन सर-सब्ज़ हो जाती है? हकीकत ये है के वो लतीफ़ ओ खबीर है (हर बात से पूरी तरह अवगत)
عَرَبِيلَهُ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۗ وَإِنَّ اللَّهَ لَهُوَ الغَنِيُّ الحَميدُ
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हिन्दी (Al-Omari)उसी का है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है। और निःसंदेह अल्लाह ही बेनियाज़ और प्रशंसनीय है।
Roman Urdu (Maududi)Usi ka hai jo kuch aasmano mein hai aur jo kuch zameen mein hai. Beshak wahi gani (All-Sufficient/ free of all wants) o hameed (praiseworthy) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aasman aur zamin mein jo kuch hai ussi ka hai aur yaqeenan Allah wohi hai bey niaz tareefon wala
Devnagri Urdu (Maududi)उसका है जो कुछ आसमान में है और जो कुछ ज़मीन में है। बेशाक वही गनी (सभी-पर्याप्त/सभी इच्छाओं से मुक्त) ओ हमीद (प्रशंसनीय) है
عَرَبِيأَلَم تَرَ أَنَّ اللَّهَ سَخَّرَ لَكُم ما فِي الأَرضِ وَالفُلكَ تَجري فِي البَحرِ بِأَمرِهِ وَيُمسِكُ السَّماءَ أَن تَقَعَ عَلَى الأَرضِ إِلّا بِإِذنِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ بِالنّاسِ لَرَءوفٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह ने धरती की सारी वस्तुओं को तुम्हारे वश में कर दिया है, तथा नावों को भी, जो सागर में उसके आदेश से चलती हैं और वह आकाश को अपनी अनुमति के बिना धरती पर गिरने से रोकता है? निःसंदेह अल्लाह लोगों के लिए अति करुणामय, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum dekhte nahin ho ke usne woh sab kuch tumhare liye musakkhar kar rakkha hai jo zameen mein hai, aur usi ne kashti ko qaide ka paband banaya hai ke woh uske hukum se samandar mein chalti hai, aur wahi aasmaan ko is tarah thamey huey ke uske izan ke bagair woh zameen par nahin gir sakta? Waqia yeh hai ke Allah logon ke haqq mein bada shafeeq (very Kind) aur raheem (merciful) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney nahi dekha kay Allah hi ney zamin ki tamam cheezen tumharay liye musakkhar ker di hain aur uss kay farmaan say pani mein chalti hui kashtiyan bhi. Wohi aasaman ko thamay huye hai kay zamin per uss ki ijazat kay baghair girr na paray be-shak Allah Taalaa logon per shafqat-o-narmi kerney wala aur meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम देखते नहीं हो के उसने वो सब कुछ तुम्हारे लिए मुस्कुरा कर रखा है जो ज़मीन में है, और उसने कश्ती को क़ैद का पाबंद बनाया है के वो उसके हुकुम से समंदर में चलती है, और वही आसमान को इस तरह थामे हुए के उसके इज़ान के बिना वो ज़मीन पर नहीं गिर सकता? वाक़िया ये है के अल्लाह लोगों के हक में बड़ा शफीक (बहुत दयालु) और रहीम (दयालु) है
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي أَحياكُم ثُمَّ يُميتُكُم ثُمَّ يُحييكُم ۗ إِنَّ الإِنسانَ لَكَفورٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वही है, जिसने तुम्हें जीवन प्रदान किया, फिर तुम्हें मारेगा, फिर तुम्हें जीवित करेगा। निःसंदेह इनसान बड़ा ही नाशुक्रा है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jisne tumhein zindagi bakshi hai, wahi tumko maut deta hai aur whai phir tumko zinda karega, sach yeh hai ke Insaan bada hi munkir e haqq hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney tumhen zindagi bakhshi phir wohi tumhen maar daley ga phir wohi tumhen zinda keray ga be-shak insan albatta na shukra hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिसने तुम्हें जिंदगी बख्शी है, वही तुमको मौत देता है और वहीं फिर तुमको जिंदा करेगा, सच ये है के इंसान बड़ा ही मुन्किर ए हक है
عَرَبِيلِكُلِّ أُمَّةٍ جَعَلنا مَنسَكًا هُم ناسِكوهُ ۖ فَلا يُنازِعُنَّكَ فِي الأَمرِ ۚ وَادعُ إِلىٰ رَبِّكَ ۖ إِنَّكَ لَعَلىٰ هُدًى مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) हमने प्रत्येक समुदाय के लिए इबादत की एक विधि निर्धारित की है, जिसके अनुसार वे इबादत करने वाले हैं। अतः वे आपसे इस मामले में हरगिज़ विवाद न करें। और आप अपने पालनहार की ओर लोगों को बुलाएँ। निःसंदेह आप तो निश्चय सीधी राह पर हैं।
Roman Urdu (Maududi)Har ummat ke liye humne ek tareeq-e-ibadat muqarrar kiya hai jiski woh pairwi karti hai, pas (aey Muhammad), woh is maamle mein tumse jhagda na karein, tum apne Rubb ki taraf dawat do, yaqeenan tum seedhey raaste par ho
Roman Urdu (Junagarhi)Her ummat kay liye hum ney ibadat ka aik tareeqa muqarrar ker diya hai jissay woh baja laney walay hain pus enhen iss amar mein aap say jhagra na kerna chahiye aap apnay perwerdigar ki taraf logon ko buliye. Yaqeenan aap theek hidayat per hi hain
Devnagri Urdu (Maududi)हर उम्मत के लिए हमने एक तारीख-ए-इबादत मुकर्रर किया है जिसकी वो जोड़ी बनाती है, पास (ऐ मुहम्मद), वो इस मामले में तुमसे झगड़ा ना करें, तुम अपने रब की तरफ दावत दो, यकीनन तुम सीधे रास्ते पर हो
عَرَبِيوَإِن جادَلوكَ فَقُلِ اللَّهُ أَعلَمُ بِما تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वे आपसे विवाद करें, तो कह दें कि अल्लाह तुम्हारे कर्मों से भली-भाँति अवगत है।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar woh tumse jhagdein to kehdo ke “jo kuch tum kar rahey ho Allah ko khoob maloom hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir bhi agar yeh log aap say ulajhney lagen to aap keh den kay tumhary aemaal say Allah ba-khoobi waqif hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर वो तुमसे झगड़े तो कहदो के "जो कुछ तुम कर रहे हो अल्लाह को ख़ूब मालूम है
عَرَبِياللَّهُ يَحكُمُ بَينَكُم يَومَ القِيامَةِ فيما كُنتُم فيهِ تَختَلِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह क़ियामत के दिन तुम्हारे बीच उस मामले में निर्णय करेगा, जिसमें तुम मतभेद किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Allah qayamat ke roz tumhare darmiyan un sab baaton ka faisla kardega jin mein tum ikhtilaf karte rahey ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak tumharay sab kay ikhtilaf ka faisla qayamat walay din Allah Taalaa aap keray ga
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह क़यामत के रोज़ तुम्हारे दरमियान उन सब बातों का फैसला कर देगा जिन में तुम इख्तिलाफ करते रहोगे"
عَرَبِيأَلَم تَعلَم أَنَّ اللَّهَ يَعلَمُ ما فِي السَّماءِ وَالأَرضِ ۗ إِنَّ ذٰلِكَ في كِتابٍ ۚ إِنَّ ذٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ रसूल!) क्या आप नहीं जानते कि अल्लाह जानता है, जो आकाश तथा धरती में है? निःसंदेह यह एक किताब में (अंकित) है। निःसंदेह यह अल्लाह के लिए अति सरल है।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum nahin jaante ke aasman o zameen ki har cheez Allah ke ilam mein hai? Sab kuch ek kitaab mein darj hai. Allah keliye yeh kuch bhi mushkil nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney nahi jana kay aasman-o-zamin ki her cheez Allah kay ilm mein hai. Yeh sab likhi hui kitab mein mehfooz hai. Allah Taalaa per to yeh amar bilkul aasan hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम नहीं जानते कि आसमां ओ ज़मीन की हर चीज़ अल्लाह के इलम में है? सब कुछ एक किताब में दर्ज है। अल्लाह केलिए ये कुछ भी मुश्किल नहीं है
عَرَبِيوَيَعبُدونَ مِن دونِ اللَّهِ ما لَم يُنَزِّل بِهِ سُلطانًا وَما لَيسَ لَهُم بِهِ عِلمٌ ۗ وَما لِلظّالِمينَ مِن نَصيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे अल्लाह के सिवा उसकी इबादत करते हैं, जिसका उसने कोई प्रमाण नहीं उतारा, और न उनके पास उसकी कोई जानकारी है। और अत्याचारियों का कोई सहायक नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log Allah ko chodh kar unki ibadat kar rahey hain jinke liye na to usne koi sanad(authority) nazil ki hai aur na yeh khud unke barey mein koi ilam rakhte hain. In zalimon ke liye koi madadgaar nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh Allah kay siwa unn ki ibadat ker rahey hain jiss ki koi khudaee daleel nazil nahi hui na woh khud hi iss ka koi ilm rakhtay hain. Zalimon ka koi madadgar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग अल्लाह को छोड़ कर उनकी इबादत कर रहे हैं जिनके लिए ना तो उसने कोई सनद (अधिकार) नाज़िल की है और ना ये खुद उनके बारे में कोई इलम रखते हैं। जालिमों के लिए कोई मददगार नहीं है
عَرَبِيوَإِذا تُتلىٰ عَلَيهِم آياتُنا بَيِّناتٍ تَعرِفُ في وُجوهِ الَّذينَ كَفَرُوا المُنكَرَ ۖ يَكادونَ يَسطونَ بِالَّذينَ يَتلونَ عَلَيهِم آياتِنا ۗ قُل أَفَأُنَبِّئُكُم بِشَرٍّ مِن ذٰلِكُمُ ۗ النّارُ وَعَدَهَا اللَّهُ الَّذينَ كَفَروا ۖ وَبِئسَ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उन्हें हमारी स्पष्ट आयतें सुनाई जाती हैं, तो आप काफ़िरों के चेहरों में अस्वीकृति पहचान लेंगे। क़रीब होंगे कि वे उनपर आक्रमण कर दें, जो उन्हें हमारी आयतें पढ़कर सुनाते हैं। आप कह दें : तो क्या मैं तुम्हें इससे बुरी चीज़ बता दूँ? वह आग है, जिसका अल्लाह ने उन लोगों से वादा किया है, जिन्होंने कुफ़्र किया और वह बहुत ही बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab inko hamari saaf saaf aayat sunayi jati hain to tum dekhte ho ke munkireen e haqq ke chehre bigadne lagte hain aur aisa mehsoos hota hai ke abhi woh un logon par toot padenge jo unhein hamari aayat sunate hain. Inse kaho “ main bataoon tumhein ke issey badhtar cheez kya hai? Aag, Allah ne usi ka wada un logon ke haqq mein kar rakkha hai jo qabool e haqq se inkar karein, aur woh bahut hi bura thikana hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab inn kay samney humaray kalaam ki khulli hui aayaton ki tilawat ki jati hai to aap kafiron kay chehron per na khushi kay saaf aasaar pehchan letay hain. Woh to qareeb hotay hain kay humari aayaten sunaney walon per hamla ker bethen keh dijiye kay kiya mein tumhen iss say bhi ziyada bad tar khabar doon. Woh aag hai jiss ka wada Allah ney kafiron say ker rakha hai aur woh boht hi buri jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जब इनको हमारी साफ आयतें सुनायी जाती हैं तो तुम देखते हो के मुनकिरेन ए हक के चेहरे बिगाड़ने लगते हैं और ऐसा महसूस होता है के अभी वो उन लोगों पर टूट पड़ेंगे जो उन्हें हमारी आयतें सुनाते हैं। इनसे कहो "मैं बताऊँ तुम्हें के लिए ऐसी बढ़िया चीज़ क्या है? आग, अल्लाह ने उसका वादा उन लोगों के हक़ में कर रखा है जो क़बूल ए हक़ से इंकार करें, और वो बहुत ही बुरा ठिकाना है"
عَرَبِييا أَيُّهَا النّاسُ ضُرِبَ مَثَلٌ فَاستَمِعوا لَهُ ۚ إِنَّ الَّذينَ تَدعونَ مِن دونِ اللَّهِ لَن يَخلُقوا ذُبابًا وَلَوِ اجتَمَعوا لَهُ ۖ وَإِن يَسلُبهُمُ الذُّبابُ شَيئًا لا يَستَنقِذوهُ مِنهُ ۚ ضَعُفَ الطّالِبُ وَالمَطلوبُ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो! एक उदाहरण दिया गया है। इसे ध्यान से सुनो। निःसंदेह वे लोग जिन्हें तुम अल्लाह के अतिरिक्त पुकारते हो, कभी एक मक्खी भी पैदा नहीं करेंगे, यद्यपि वे इसके लिए इकट्ठे हो जाएँ। और यदि मक्खी उनसे कोई चीज़ छीन ले, वे उसे उससे छुड़ा नहीं पाएँगे। कमज़ोर है माँगने वाला और वह भी जिससे माँगा गया।
Roman Urdu (Maududi)Logon, ek misaal di jaati hai, gaur se suno, jin maboodon ko tum khuda ko chodh kar pukarte ho woh sab milkar ek makkhi (fly) bhi paida karna chahein to nahin kar sakte, balke agar makkhi unse koi cheez cheen le jaaye to woh usey chuda bhi nahin sakte. Madad chahne waley bhi kamzoar aur jinse madad chahi jati hai woh bhi kamzoar
Roman Urdu (Junagarhi)Logo! Aik misal biyan ki jarahi hai zara kaan laga ker suno! Allah kay siwa jin jin ko tum pukartay ho woh aik makkhi bhi to peda nahi ker saktay go saray kay saray hi jama ho jayen bulkay agar makkhi unn say koi cheez ley bhagay to yeh to ussay bhi uss say cheen nahi saktay bara boda hai talab kerney wala aur bara boda hai woh jiss say talab kiya jaraha hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन, एक मिसाल दी जाती है, गौर से सुनो, जिन माबूदों को तुम खुदा को चोद कर पुकारते हो वो सब मिलकर एक मक्खी (उड़ना) भी चुकाना चाहते हैं तो नहीं कर सकते, अगर मक्खी उनसे कोई चीज छीन ले जाए तो वो उन्हें चूड़ा भी नहीं दे सकते। मदद चाहने वाले भी कमज़ार और जिनसे मदद चाही जाती है वो भी कमज़ार
عَرَبِيما قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدرِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَقَوِيٌّ عَزيزٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने अल्लाह का वैसे आदर नहीं किया, जैसे उसका आदर करना चाहिए! निःसंदेह अल्लाह अत्यंत शक्तिशाली, सब पर प्रभुत्वशाली है।
Roman Urdu (Maududi)In logon ne Allah ki qadar hi na pehchani jaisa ke uske pehchanne ka haqq hai , waqia yeh hai ke quwwat aur izzat wala to Allah hi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney Allah kay martabay kay mutabiq uss ki qadar jani hi nahi Allah Taalaa bara hi zor-o-qooat wala aur ghalib-o-zabardast hai
Devnagri Urdu (Maududi)इन लोगों ने अल्लाह की कदर ही ना पहचानी जैसा के उसकी पहचान का हक़ है, वक़िया ये है के कुव्वत और इज़्ज़त वाला तो अल्लाह ही है
عَرَبِياللَّهُ يَصطَفي مِنَ المَلائِكَةِ رُسُلًا وَمِنَ النّاسِ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَميعٌ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह फ़रिश्तों में से संदेश पहुँचाने वालों को चुनता है तथा मनुष्यों में से भी। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke Allah [apne faramin ki tarsil ke liye(to convey His decrees)] malaika (Farishtey) mein se bhi paigham rasaan muntakhab (choose) karta hai aur Insaano mein se bhi. Woh Sami (sunney waala) aur baseer (dekhne waala) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Farishton mein say aur insano mein say payghaam phonchney walon ko Allah hi chaant leta hai be-shak Allah Taalaa sunnay wala dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के अल्लाह [अपने फरामिन की तरसिल के लिए (अपने फरमानों को बताने के लिए)] मलिका (फरिश्ते) में से भी पैगाम रसन मुंतखब (चुनें) करता है और इंसानों में भी। वो सामी (सनी वाला) और बेसिर (देखने वाला) है
عَرَبِييَعلَمُ ما بَينَ أَيديهِم وَما خَلفَهُم ۗ وَإِلَى اللَّهِ تُرجَعُ الأُمورُ
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हिन्दी (Al-Omari)वह जानता है, जो कुछ उनके सामने है और जो कुछ उनके पीछे है। और अल्लाह ही की ओर सब काम लौटाए जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo kuch unke saamne hai usey bhi woh jaanta hai aur jo kuch unse ojhal (hidden/behind) hai ussey bhi woh waqif hai, aur saarey maamlaat usi ki taraf rujoo hotey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh ba-khoobi janta hai jo kuch inn kay aagay hai aur jo kuch inn kay peechay hai aur Allah hi ki taraf sab kaam lotaye jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो कुछ उनके सामने है उसे भी वो जानता है और जो कुछ उनसे ओझल (छिपा/पीछे) है उसे भी वो वाकिफ है, और सारे मामले उसकी तरफ रूजू होते हैं
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا اركَعوا وَاسجُدوا وَاعبُدوا رَبَّكُم وَافعَلُوا الخَيرَ لَعَلَّكُم تُفلِحونَ ۩
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! रुकू करो तथा सजदा करो और अपने पालनहार की इबादत करो और नेकी करो, ताकि तुम सफल हो जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, ruku aur sajda karo, apne Rubb ki bandagi karo, aur neik kaam karo, shayad ke tumko falaah naseeb ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Rukoo sajda ketay raho aur apnay perwerdigar ki ibadat mein lagay raho aur nek kaam kertay raho takay tum kaamyaab hojao
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, रुकू और सजदा करो, अपने रब की बंदगी करो, और कोई काम करो, शायद के तुमको फलाह नसीब हो
عَرَبِيوَجاهِدوا فِي اللَّهِ حَقَّ جِهادِهِ ۚ هُوَ اجتَباكُم وَما جَعَلَ عَلَيكُم فِي الدّينِ مِن حَرَجٍ ۚ مِلَّةَ أَبيكُم إِبراهيمَ ۚ هُوَ سَمّاكُمُ المُسلِمينَ مِن قَبلُ وَفي هٰذا لِيَكونَ الرَّسولُ شَهيدًا عَلَيكُم وَتَكونوا شُهَداءَ عَلَى النّاسِ ۚ فَأَقيمُوا الصَّلاةَ وَآتُوا الزَّكاةَ وَاعتَصِموا بِاللَّهِ هُوَ مَولاكُم ۖ فَنِعمَ المَولىٰ وَنِعمَ النَّصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह के मार्ग में जिहाद करो, जैसा कि उसके जिहाद का हक़ है। उसी ने तुम्हें चुना है। और धर्म के मामले में तुमपर कोई तंगी नहीं रखी। यह तुम्हारे पिता इबराहीम का धर्म है। उसी ने इस (क़ुरआन) से पहले तथा इसमें भी तुम्हारा नाम मुसलमान रखा है। ताकि रसूल तुमपर गवाह हों और तुम सब लोगों पर गवाह बनो। अतः नमाज़ क़ायम करो तथा ज़कात दो और अल्लाह को मज़बूती से पकड़ लो। वही तुम्हारा संरक्षक है। तो वह क्या ही अच्छा संरक्षक तथा क्या ही अच्छा सहायक है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki raah mein jihad karo jaisa ke jihad karne ka haqq hai, usne tumhein apne kaam ke liye chun liya hai aur deen mein tumpar koi tanggi nahin rakkhi. Qayam ho jao apne baap Ibrahim ki millat par. Allah ne pehle bhi tumhara naam “Muslim” rakkha tha aur is (Quran) mein bhi (tumhara yahi naam hai) taa-ke Rasool tumpar gawah ho aur tum logon par gawah. Pas namaz qayam karo, zakaat do aur Allah se wabista ho jao (hold fast to Allah), woh hai tumhara maula (guardian), bahut hi accha hai woh maula aur bahut hi accha hai woh madadgaar
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah ki raah mein wesa hi jihad kero jesay jihad ka haq hai ussi ney tumhen bargazeedah banaya hai aur tum per deen kay baray mein koi tangi nahi daali deen apnay baap ibrahim (alh-e-salam) ka qaeem rakho ussi Allah ney tumhara naam musalman rakha hai iss quran say pehlay aur iss mein bhi takay payghumbar tum per gawah hojaye aur tum tamam logon kay gawah bann jao. Pus tumhen chahiye kay namazen qaeen rakho aur zakat ada kertay raho aur Allah ko mazboor thaam lo wohi tumhara wali aur malik hai. Pus kiya hi acha malik hai aur kitna hi behtar madadgar hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की राह में जिहाद करो जैसा के जिहाद करने का हक है, उसने तुम्हें अपने काम के लिए चुन लिया है और दीन में तुमको कोई तंगगी नहीं रक्खी। क़याम हो जाओ अपने बाप इब्राहीम की मिल्लत पर। अल्लाह ने पहले भी तुम्हारा नाम "मुस्लिम" रखा था और वह (कुरान) में भी (तुम्हारा यही नाम है) ता-के रसूल तुमपर गवाह हो और तुम लोग गवाह हो। पस नमाज़ क़याम करो, ज़कात दो और अल्लाह से वाबिस्ता हो जाओ (अल्लाह को मजबूती से पकड़ो), वह तुम्हारा मौला (अभिभावक), बहुत ही अच्छा है वह मौला और बहुत ही अच्छा है वह मददगार
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Surah 22: Al-Hajj (The Pilgrimage)

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Surah 22: Al-Hajj (The Pilgrimage)

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Surah 22: Al-Hajj (The Pilgrimage)

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Surah 22: Al-Hajj (The Pilgrimage)

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Surah 22: Al-Hajj (The Pilgrimage)

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Surah 23: Al-Mu'minun (The Believers)

Meccan🕐 Revelation #74📜 118 Verses🕮 Juz 18
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🕮 Juz 18 begins here
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय सफल हो गए ईमान वाले।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan falaah payi hai iman laney walon ne jo
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan eman walon ney falah hasil kerli
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन फलाह पाई है ईमान लानी वालों ने जो
عَرَبِيالَّذينَ هُم في صَلاتِهِم خاشِعونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो अपनी नमाज़ में विनम्रता अपनाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Apni namaz mein khushu ikhtiyar karte hain (Salat with humility)
Roman Urdu (Junagarhi)Jo aoni namaz mein khusoo kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अपनी नमाज़ में ख़ुश इख़्तियार करते हैं (विनम्रता के साथ सलात)
عَرَبِيوَالَّذينَ هُم عَنِ اللَّغوِ مُعرِضونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जो व्यर्थ चीज़ों से मुँह मोड़ने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Laghviyat (vain things) se door rehte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo laghwiyaat say mun mor letay hain
Devnagri Urdu (Maududi)लग्वियत (व्यर्थ चीज़ें) से दूर रहते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ هُم لِلزَّكاةِ فاعِلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जो ज़कात अदा करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Zakaat ke tareeqe par aamil hotey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo zakat ada kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ज़कात के तारिके पर आमिल होते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ هُم لِفُروجِهِم حافِظونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Apni sharmgaahon ki hifazat karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo apni sharamghaon ki hifazat kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अपनी शर्मगाहों की हिफ़ाज़त करते हैं
عَرَبِيإِلّا عَلىٰ أَزواجِهِم أَو ما مَلَكَت أَيمانُهُم فَإِنَّهُم غَيرُ مَلومينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सिवाय अपनी पत्नियों या उन महिलाओं के जो उनके स्वामित्व में हैं, तो निःसंदेह वे निंदित नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Siwaye apni biwiyon ke aur un auraton ke jo unki milk e yameen mein hon (right hand posseses) ke unpar (mehfooz na rakhne mein) woh qabil e malamat nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-juz apni biwiyon aur milkiyat ki londiyon kay yaqeenan yeh mala matiyon mein say nahi hain
Devnagri Urdu (Maududi)सिवाए अपनी बिवियों के और उन औरतों के जो उनका दूध ए यमीन में होन (दाहिना हाथ रखता है) के अनपार (महफूज ना रखने में) वो काबिल ए मालामत नहीं हैं
عَرَبِيفَمَنِ ابتَغىٰ وَراءَ ذٰلِكَ فَأُولٰئِكَ هُمُ العادونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर जो इसके अलावा तलाश करे, तो वही लोग सीमा का उल्लंघन करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jo uske alawa kuch aur chahein wahi zyadati karne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo iss kay siwa kuch aur chahayen wohi hadd say tajawuz ker janey walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जो उसके अलावा कुछ और चाहे वही ज्यादती करने वाले हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ هُم لِأَماناتِهِم وَعَهدِهِم راعونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जो अपनी अमानतों तथा अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रखने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Apni amanaton (trusts) aur apne ahad o paiman (promises) ka paas rakhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo apni amanaton aur waday ki hifazat kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अपनी अमानतन (भरोसे) और अपने अहद ओ पैमान (वादे) का पास रखते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ هُم عَلىٰ صَلَواتِهِم يُحافِظونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जो अपनी नमाज़ों की रक्षा करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur apni namazon ki muhafizat (hifazat) karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo apni namazon ki nigehbani kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और अपनी नमाज़ की मुहाफ़िज़त (हिफ़ाज़त) करते हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ هُمُ الوارِثونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यही लोग हैं, जो वारिस (उत्तराधिकारी) हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yahi log woh waris hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi waris hain
Devnagri Urdu (Maududi)यहीं लोग वो वारिस हैं
عَرَبِيالَّذينَ يَرِثونَ الفِردَوسَ هُم فيها خالِدونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो फ़िरदौस के वारिस होंगे, वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo miraas mein firdous payenge aur usmein hamesha rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jo firdous kay waris hongay jahan woh hamesha rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जो मीरास में फिरदौस पाएंगे और उसमें हमेशा रहेंगे
عَرَبِيوَلَقَد خَلَقنَا الإِنسانَ مِن سُلالَةٍ مِن طينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने मनुष्य को तुच्छ मिट्टी के एक सार से पैदा किया।
Roman Urdu (Maududi)Humne Insaan ko mitti ke saatt (essence of clay) se banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney insan ko mitti kay johar say peda kiya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इंसान को मिट्टी के सात कहा मिट्टी) से बनाया
عَرَبِيثُمَّ جَعَلناهُ نُطفَةً في قَرارٍ مَكينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उसे वीर्य बनाकर एक सुरक्षित स्थान में रखा।
Roman Urdu (Maududi)Phir usey ek mehfooz jaga tapki hui boondh mein tabdeel kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir ussay nutfa bana ker mehfooz jagah mein qarar dey diya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उसे एक महफूज जगा टपकी हुई बूंद में तबदील किया
عَرَبِيثُمَّ خَلَقنَا النُّطفَةَ عَلَقَةً فَخَلَقنَا العَلَقَةَ مُضغَةً فَخَلَقنَا المُضغَةَ عِظامًا فَكَسَونَا العِظامَ لَحمًا ثُمَّ أَنشَأناهُ خَلقًا آخَرَ ۚ فَتَبارَكَ اللَّهُ أَحسَنُ الخالِقينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उस वीर्य को एक जमा हुआ रक्त बनाया, फिर हमने उस जमे हुए रक्त को एक बोटी बनाया, फिर हमने उस बोटी को हड्डियाँ बनाया, फिर हमने उन हड्डियों को कुछ माँस पहनाया, फिर हमने उसे एक अन्य रूप में पैदा कर दिया। तो बहुत बरकत वाला है अल्लाह, जो बनाने वालों में सबसे अच्छा है।
Roman Urdu (Maududi)Phir us boondh ko lothday ki shakal di, phir lothday ko boti bana diya, phir boti ki haddiyan (bones) banayin, phir haddiyon par gosht chadhaya. Phir usey ek dusri hi makhlooq bana khada kiya. Pas bada hi ba-barakat hai Allah, sab karigaron se accha kaarigar(creator)
Roman Urdu (Junagarhi)Phir nutfay ko hum ney jama hua khoon bana diya phir uss khoon kay lothray ko gosht ka tukra ker diya. Phir gosht kay tukray ko haddiyan bana den phir haddiyon ko hum ney gosht pehna diya phir doosri banawat mein uss ko peda ker diya. Barkaton wala hai woh Allah jo sab say behtareen peda kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमें बूंद को लोठडे की शक्ल दी, फिर लोठडे को बोटी बना दिया, फिर बोटी की हड्डियां (हड्डियां) बनाईं, फिर हददियों पर गोश्त चढ़ाया। फिर उसे एक दूसरा ही मख़लूक़ बना खड़ा किया। पास बड़ा ही बा-बरकत है अल्लाह, सब कारीगरों से अच्छा कारीगर
عَرَبِيثُمَّ إِنَّكُم بَعدَ ذٰلِكَ لَمَيِّتونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर निःसंदेह तुम इसके पश्चात् अवश्य मरने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Phir iske baad tumko zaroor marna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kay baad phir tum sab yaqeenan marr janey walay ho
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इसके बाद तुमको जरूर मरना है
عَرَبِيثُمَّ إِنَّكُم يَومَ القِيامَةِ تُبعَثونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर निःसंदेह तुम क़ियामत के दिन उठाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir qayamat ke roz yaqeenan tum uthaye jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Phir qayamat kay din bila shuba tum sab uthaye jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर कयामत के रोज यकीनन तुम उठोगे
عَرَبِيوَلَقَد خَلَقنا فَوقَكُم سَبعَ طَرائِقَ وَما كُنّا عَنِ الخَلقِ غافِلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने तुम्हारे ऊपर सात आकाश बनाए और हम कभी सृष्टि से ग़ाफ़िल नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhare upar humne saat (seven) raastey banaye, takhleeq ke kaam se hum kuch na-balad na thay (We are never unmindful of (our) Creation
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney tumharay upper saat aasman banaye hain aur hum makhlooqaat say ghafil nahi hain
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हारे ऊपर हमने सात (सात) रास्ते बनाए, तख़लीक के काम से हम कुछ ना-बलाद ना थे (हम (अपनी) रचना से कभी भी बेपरवाह नहीं होते हैं
عَرَبِيوَأَنزَلنا مِنَ السَّماءِ ماءً بِقَدَرٍ فَأَسكَنّاهُ فِي الأَرضِ ۖ وَإِنّا عَلىٰ ذَهابٍ بِهِ لَقادِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने आकाश से एक अंदाज़े के साथ कुछ पानी उतारा, फिर उसे धरती में ठहराया और निश्चय हम उसे किसी भी तरह से ले जाने पर सामर्थ्यवान हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur aasmaan se humne theek hisaab ke mutabiq ek khaas miqdar mein pani utara aur usko zameen mein thehara diya. Hum usey jis tarah chahein gayab kar sakte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum aik sahih andaz say aasman say paani barsatay hain phir ussay zamin mein thehra detay hain aur hum uss kay ley janey per yaqeena qadir hain
Devnagri Urdu (Maududi)और आसमान से हमने ठीक हिसाब के मुताबिक़ एक खास मुक़द्दर में पानी उतारा और उसको ज़मीन में ठहरा दिया। हम उसे जिस तरह चाहें गायब कर सकते हैं
عَرَبِيفَأَنشَأنا لَكُم بِهِ جَنّاتٍ مِن نَخيلٍ وَأَعنابٍ لَكُم فيها فَواكِهُ كَثيرَةٌ وَمِنها تَأكُلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने तुम्हारे लिए उस (पानी) के द्वारा खजूरों तथा अंगूरों के बाग़ पैदा किए। तुम्हारे लिए उनमें बहुत-से फल हैं और तुम उन्ही में से खाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Phir is pani ke zariye se humne tumhare liye khajoor aur angoor ke baagh paida kardiye, tumhare liye in baaghon mein bahut se lazeez phal hain aur unsey tum rozi haasil karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Issi pani kay zariyey say hum tumharay liye khajooron aur angooron kay baghaat peda ker detay hain kay tumharay liye inn mein boht say meway hotay hain enhi mein say tum khatay bhi ho
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इस पानी के ज़रिये से हमने तुम्हारे लिए खजूर और अंगूर के बाग़ पैदा कर दिये, तुम्हारे लिए बाग़ों में बहुत से लज़ीज़ फल हैं और उनसे तुम रोज़ी हासिल करते हो
عَرَبِيوَشَجَرَةً تَخرُجُ مِن طورِ سَيناءَ تَنبُتُ بِالدُّهنِ وَصِبغٍ لِلآكِلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा वह वृक्ष भी जो 'तूर सैना' (पर्वत) से निकलता है, जो तेल लेकर उगता है तथा खाने वालों के लिए एक तरह का सालन भी।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh darakht bhi humne paida kiya jo Tur-e-seena (mount sinai) se nikalta hai, teil (oil) bhi liye huey ugta hai aur khane walon ke liye saalan bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Aru woh darakht jo toor-e-seena pahar say nikalta hai jo tel nikalta hai aur khaney walay kay liye salan hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वो दरख्त भी हमने खरीदा जो तूर-ए-सीना (माउंट सिनाई) से निकलता है, तेल (तेल) भी लिए हुए उगता है और खाने वालों के लिए सालान भी
عَرَبِيوَإِنَّ لَكُم فِي الأَنعامِ لَعِبرَةً ۖ نُسقيكُم مِمّا في بُطونِها وَلَكُم فيها مَنافِعُ كَثيرَةٌ وَمِنها تَأكُلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह तुम्हारे लिए चौपायों में निश्चय बड़ी शिक्षा है। हम तुम्हें उसमें से जो उनके पेटों में है, पिलाते हैं। तथा तुम्हारे लिए उनके अंदर बहुत-से लाभ हैं और उनमें से कुछ को तुम खाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur haqeeqat yeh hai ke tumhare liye maweshiyon mein bhi ek sabaq hai unke paithon (bellies) mein jo kuch hai usi mein se ek cheez hum tumhein pilatey hain, aur tumhare liye unmein bahut se dusre faiyde bhi hain
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhray liye chopayon mein bhi boht bari bhari ibrat hai. inn kay peton mein say hum doodh pilatay hain aur bhi boht say nafay tumharay liye inn mein hain inn mein say baaz baaz ko tum khatay bhi ho
Devnagri Urdu (Maududi)और हकीकत ये है के तुम्हारे लिए मवेशियों में भी एक सबक है उनके पैठों (पेट) में जो कुछ है उसी में से एक चीज हम तुममें पिलाते हैं, और तुम्हारे लिए उनमें बहुत से दूसरे फायदे भी हैं
عَرَبِيوَعَلَيها وَعَلَى الفُلكِ تُحمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उनपर और नावों पर तुम सवार किए जाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Unko tum khate ho aur unpar aur kashtiyon par sawaar bhi kiye jatey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn per aur kashtiyon per tum sawar keraye jatay ho
Devnagri Urdu (Maududi)उनको तुम खाते हो और उन्पार और कश्तियों पर सवार भी हो जाते हो
عَرَبِيوَلَقَد أَرسَلنا نوحًا إِلىٰ قَومِهِ فَقالَ يا قَومِ اعبُدُوا اللَّهَ ما لَكُم مِن إِلٰهٍ غَيرُهُ ۖ أَفَلا تَتَّقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने नूह़ को उसकी जाति की ओर भेजा। तो उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तो क्या तुम डरते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Humne Nooh ko uski qaum ki taraf bheja, usne kaha “ aey meri qaum ke logon, Allah ki bandagi karo, uske siwa tumhare liye koi aur mabood nahin hai, kya tum darte nahin ho?”
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney nooh (alh-e-salam) ko uss ki qom ki taraf rasool bana ker bheja uss ney kaha aey meri qom kay logo! Allah ki ibadat kero aur uss kay siwa tumhara koi mabood nahi kiya tum (uss say) nahi dartay
Devnagri Urdu (Maududi)हमने नूह को उसकी क़ौम की तरफ भेजा, उसने कहा “ ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारे लिए कोई और माबूद नहीं है, क्या तुम डरते नहीं हो?”
عَرَبِيفَقالَ المَلَأُ الَّذينَ كَفَروا مِن قَومِهِ ما هٰذا إِلّا بَشَرٌ مِثلُكُم يُريدُ أَن يَتَفَضَّلَ عَلَيكُم وَلَو شاءَ اللَّهُ لَأَنزَلَ مَلائِكَةً ما سَمِعنا بِهٰذا في آبائِنَا الأَوَّلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो उनकी जाति के उन प्रमुखों ने कहा, जिन्होंने कुफ़्र किया : यह तो तुम्हारे ही जैसा एक मनुष्य है। जो चाहता है कि तुमपर वरीयता प्राप्त कर ले। और यदि अल्लाह चाहता, तो अवश्य कोई फ़रिश्ते उतार देता। हमने यह अपने पहले बाप-दादा में नहीं सुना।
Roman Urdu (Maududi)Uski qaum ke jin sardaaron ne maanne se inkar kiya woh kehne lagey ke “yeh shaks kuch nahin hai magar ek bashar(Insaan) tum hi jaisa. Iski garz yeh hai ke tumpar bartari (superiority) haasil karey. Allah ko agar bhejna hota to farishtey bhejta.Yeh baat to humne kabhi apne baap dada ke waqton mein suni hi nahin ( ke bashar Rasool bankar aaye)
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ki qom kay kafir sardaron ney saaf keh diya kay yeh to tum jesa hi insan hai yeh tum per fazeelat aur baraee hasil kerna chahata hai. Agar Allah hi ko manzoor hota to kissi farishtay ko utarta hum ney to issay apnay aglay baap dadon kay zamaney mein suna hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी क़ौम के जिन सरदारों ने मन्ने से इंकार किया वो कहने लगे के "ये शक्स कुछ नहीं है मगर एक बशर (इंसान) तुम ही जैसा। इसकी गरज़ ये है के तुमपर बरतारी (श्रेष्ठता) हासिल करे। अल्लाह को अगर भेजा होगा तो फरिश्ते भेजता.ये बात तो हमने कभी अपने बाप दादा के वक़्त में सुनी ही नहीं (के बशर रसूल बनकर आए)
عَرَبِيإِن هُوَ إِلّا رَجُلٌ بِهِ جِنَّةٌ فَتَرَبَّصوا بِهِ حَتّىٰ حينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह तो बस एक उन्मादग्रस्त व्यक्ति है। अतः एक समय तक इसके बारे में प्रतीक्षा करो।
Roman Urdu (Maududi)Kuch nahin , bas is aadmi ko zara junoon lahaq(possessed) ho gaya hai, kuch muddat aur dekhlo [ ( shayad ifaqa ho jaaye)( may be he is cured)]”
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan iss shaks ko junoon hai pus tum issay aik waqt-e-muqarrara tak dheel do
Devnagri Urdu (Maududi)कुछ नहीं, बस इस आदमी को ज़रा जुनून लहक हो गया है, कुछ मुद्दत और देखलो [( शायद इफ़ाक़ा हो जाए)(हो सकता है वह ठीक हो गया हो)]"
عَرَبِيقالَ رَبِّ انصُرني بِما كَذَّبونِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरी मदद कर, इसलिए कि इन्होंने मुझे झुठलाया है।
Roman Urdu (Maududi)Nooh ne kaha “parwardigar, in logon ne jo meri takzeeb ki hai ispar ab tu hi meri nusrat farma.”
Roman Urdu (Junagarhi)Nooh (alh-e-salam) ney dua ki aey meray rab! Inn kay jhutlaney per tu meri madad farma
Devnagri Urdu (Maududi)नहीं ने कहा "परवरदिगार, इन लोगों ने जो मेरी तकज़ीब की है इसपर अब तू ही मेरी नुसरत फरमा।"
عَرَبِيفَأَوحَينا إِلَيهِ أَنِ اصنَعِ الفُلكَ بِأَعيُنِنا وَوَحيِنا فَإِذا جاءَ أَمرُنا وَفارَ التَّنّورُ ۙ فَاسلُك فيها مِن كُلٍّ زَوجَينِ اثنَينِ وَأَهلَكَ إِلّا مَن سَبَقَ عَلَيهِ القَولُ مِنهُم ۖ وَلا تُخاطِبني فِي الَّذينَ ظَلَموا ۖ إِنَّهُم مُغرَقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उसकी ओर वह़्य (प्रकाशना) की कि हमारी आँखों के सामने और हमारी वह़्य के अनुसार नौका बना। फिर जब हमारा आदेश आ जाए तथा तन्नूर उबल पड़े, तो प्रत्येक जीव का जोड़ा नर और मादा तथा अपने परिवार वालों को उसमें सवार कर ले, उनमें से उसके सिवाय जिसके बारे में पहले निर्णय हो चुका है। और मुझसे उनके बारे में बात न करना, जिन्होंने अत्याचार किया है। निश्चय वे डुबोए जाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Humne uspar wahee ki ke “hamari nigrani mein aur hamari wahee ke mutabiq kashti (ark) tayyar kar. Phir jab hamara hukum aa jaye aur tannur ubal paday to har qisam ke jaanwaron mein se ek ek joda lekar usmein sawaar ho ja, aur apne ehal o ayaal ko bhi saath le, siwai unke jinke khilaf pehle faisla ho chuka hai, aur zaalimon ke maamle mein mujhse kuch na kehna, yeh ab garq (doob/ drown) honay waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)To hum ney unn ki taraf wahee bheji kay tu humari aankhon kay samney humari wahee kay mutabiq aik kashti bana. Jab humara hukum aajaye aur tanoor ubal paray to tu her qisam ka aik aik jora iss mein rakh ley aur apnay ehal ko bhi magar inn mein say jin ki babat humari baat pehaly guzar chuki hai. Khabardar jin logon ney zulm kiya hai unn kay baray mein mujh say kuch kalaam na kerna woh to sab doboye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उसपर वही की के "हमारी निगरानी में और हमारी वही के मुताबिक कश्ती (सन्दूक) तैयार कर। फिर जब हमारा हुकुम आ जाए और तन्नूर उबल पड़ा तो हर क़िस्म के जानवरों में से एक एक जोड़ा लेकर उसमें सवार हो जा, और अपने एहल ओ अयाल" को भी साथ ले, सिवाय उनके जिनके खिलाफ पहला फैसला हो चुका है, और जालिमों के मामले में मुझसे कुछ ना कहना, ये अब गरक (डूब/डूबना) होने वाले हैं
عَرَبِيفَإِذَا استَوَيتَ أَنتَ وَمَن مَعَكَ عَلَى الفُلكِ فَقُلِ الحَمدُ لِلَّهِ الَّذي نَجّانا مِنَ القَومِ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब तू और जो तेरे साथ हैं, नाव पर बैठ जाओ, तो कह : सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमें अत्याचारी लोगों से छुटकारा दिया।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab tu apne saathiyon sameth kashti par sawar ho jaye to keh, shukar hai us khuda ka jisne humein zaalim logon se nijaat di
Roman Urdu (Junagarhi)Jab tu aur teray sathi kashti per ba-itminaan betha jao to kehna sab tareef Allah kay liye hi hai jiss ney humen zalim logon say nijat ata farmaee
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब तू अपने साथियों के साथ कश्ती पर सवार हो जाए तो कह, शुक्र है हमें खुदा का जिसने हमें ज़ालिम लोगों से निजात दी
عَرَبِيوَقُل رَبِّ أَنزِلني مُنزَلًا مُبارَكًا وَأَنتَ خَيرُ المُنزِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तू कह : ऐ मेरे पालनहार! मुझे बरकत वाली जगह उतार और तू सब उतारने वालों से उत्तम है।
Roman Urdu (Maududi)Aur keh, parwardigar, mujhko barakat wali jagah utaar aur tu behtareen jagah dene wala hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kehna kay aey meray rab! Mujhay ba-barkat utarna utaar aur tu hi behtar hai utarney walon mein
Devnagri Urdu (Maududi)और कह, परवरदिगार, मुझको बरकत वाली जगह उतार और तू बेहतरीन जगह देने वाला है।”
عَرَبِيإِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ وَإِن كُنّا لَمُبتَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह इसमें निश्चय कई निशानियाँ हैं तथा निःसंदेह हम निश्चय परीक्षा लेने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Is qissey mein badi nishaniyan hain aur aazmaish to hum karke hi rehte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan iss mein bari bari nishaniyan hain aur hum be-shak aazmaeesh kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)इस क़िस्से में बड़ी निशानियां हैं और आजमाइश तो हम करके ही रहते हैं
عَرَبِيثُمَّ أَنشَأنا مِن بَعدِهِم قَرنًا آخَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उनके पश्चात् दूसरे समुदाय को पैदा किया।
Roman Urdu (Maududi)Inke baad humne ek dusre daur ki qaum uthayi
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay baad hum ney aur bhi ummat peda ki
Devnagri Urdu (Maududi)इनके बाद हमने एक दूसरे दौर की क़ौम उठाई
عَرَبِيفَأَرسَلنا فيهِم رَسولًا مِنهُم أَنِ اعبُدُوا اللَّهَ ما لَكُم مِن إِلٰهٍ غَيرُهُ ۖ أَفَلا تَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उनके अंदर उन्हीं में से एक रसूल भेजा कि अल्लाह की इबादत करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तो क्या तुम डरते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Phir un mein khud unhi ki qaum ka ek Rasool bheja ( jisne unhein dawat di) ke Allah ki bandagi karo, tumhare liye uske siwa koi aur maabood nahin hai, kya tum darte nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Phir unn mein khud unn mein say (hi) rasool bhi bheja kay tum sab Allah ki ibadat kero aur uss kay siwa tumhara koi mabood nahi tum kiyon nahi dartay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उनमें खुद उनकी क़ौम का एक रसूल भेजा (जिसने उन्हें दावत दी) के अल्लाह की बंदगी करो, तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई और माबूद नहीं है, क्या तुम डरते नहीं हो
عَرَبِيوَقالَ المَلَأُ مِن قَومِهِ الَّذينَ كَفَروا وَكَذَّبوا بِلِقاءِ الآخِرَةِ وَأَترَفناهُم فِي الحَياةِ الدُّنيا ما هٰذا إِلّا بَشَرٌ مِثلُكُم يَأكُلُ مِمّا تَأكُلونَ مِنهُ وَيَشرَبُ مِمّا تَشرَبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसकी जाति के उन प्रमुखों ने, जिन्होंने कुफ़्र किया और आख़िरत की भेंट को झुठलाया, तथा हमने उन्हें सांसारिक जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान कर रखी थी, कहा : यह तो बस तुम्हारे ही जैसा एक इनसान है। जो उसमें से खाता है, जिसमें से तुम खाते हो और उसमें से पीता है, जो तुम पीते हो।
Roman Urdu (Maududi)Uski qaum ke jin sardaron ne maanne se inkar kiya aur aakhirat ki peshi ko jhutlaya, jinko humne duniya ki zindagi mein aasuda kar rakkha tha, woh kehne lagey “ye shaks kuch nahin hai magar ek bashar tum hi jaisa, jo kuch tum khate ho wahi yeh khata hai aur jo kuch tum peete ho wahi yeh peeta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur sardaraan-e-qom ney jawab diya jo kufur kertay thay aur aakhirat ki mulaqat ko jhutlatay thay aur hum ney unhen dunyawi zindagi mein khushal ker rakha tha kay yeh to tum jesa hi insan hai tumhari hi khooraq yeh bhi khata hai aur tumharay peenay ka pani hi yeh bhi peeta hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी क़ौम के जिन सरदारों ने मन्ने से इनकार किया और आख़िरत की पेशी को झुटलाया, जिनको हमने दुनिया की ज़िंदगी में आसुदा कर रखा था, वो कहने लगे “ये शक्स कुछ नहीं है मगर एक बशर तुम ही जैसा, जो कुछ तुम खाते हो वही ये खाता है और जो कुछ तुम पीते हो वही ये पीटा है
عَرَبِيوَلَئِن أَطَعتُم بَشَرًا مِثلَكُم إِنَّكُم إِذًا لَخاسِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह यदि तुमने अपने ही जैसे एक मनुष्य का कहना मान लिया, तो निश्चय तुम उस समय अवश्य घाटा उठाने वाले होगे।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar tumne apne hi jaise ek bashar ki itaat qabool karli to tum ghatay hi mein rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum ney apnay jesay hi insan ki tabeydari kerli to be-shak tum sakht khasaray walay ho
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर तुमने अपने ही जैसा एक बशर की इताअत क़बूल कर ली तो तुम घाटे ही में रहोगे
عَرَبِيأَيَعِدُكُم أَنَّكُم إِذا مِتُّم وَكُنتُم تُرابًا وَعِظامًا أَنَّكُم مُخرَجونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या यह तुमसे वादा करता है कि जब तुम मर गए और धूल तथा हड्डियाँ बन गए, तो तुम निकाले जाने वाले हो?
Roman Urdu (Maududi)Yeh tumhein ittila deta hai ke jab tum mar kar mitti ho jaogey aur haddiyon ka panjar reh jaogey us waqt tum (qabaron se) nikale jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh tumhen iss baat ka wada kerta hai kay jab tum marr ker sirf khak aur haddi reh jaogay to tum phir zinda kiye jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)ये तुम्हें इत्तिला देता है के जब तुम मर कर मिटटी हो जाओगे और हदियों का पंजर रह जाओगे हमें वक्त तुम (कबरों से) निकल जाओगे
عَرَبِي۞ هَيهاتَ هَيهاتَ لِما توعَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)दूरी है, दूरी है उसके लिए जिसका तुमसे वादा किया जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Baeed (far/Impossible), bilkul baeed(Impossible) hai yeh wada jo tumse kiya jaa raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Nahi nahi door aur boht door hai woh jiss ka tum wada diye jatay ho
Devnagri Urdu (Maududi)बैद (दूर/असंभव), बिल्कुल बैद (असंभव) है ये वादा जो तुमसे किया जा रहा है
عَرَبِيإِن هِيَ إِلّا حَياتُنَا الدُّنيا نَموتُ وَنَحيا وَما نَحنُ بِمَبعوثينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह (जीवन) तो बस हमारा सांसारिक जीवन है। हम (यहीं) मरते और जीते हैं। और हम कभी उठाए जाने वाले नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Zindagi kuch nahin hai magar bas yahi duniya ki zindagi. Yahin humko marna aur jeena hai aur hum hargiz uthaye janey waley nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)(zindagi) to sirf duniya ki zindagi hai hum martay jeetay rehtay hain aur yeh nahi kay hum phir uthaye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जिंदगी कुछ नहीं है मगर बस यहीं दुनिया की जिंदगी। यहीं हमको मरना और जीना है और हम हरगिज उठाए जाने वाले नहीं हैं
عَرَبِيإِن هُوَ إِلّا رَجُلٌ افتَرىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا وَما نَحنُ لَهُ بِمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह तो बस एक व्यक्ति है, जिसने अल्लाह पर एक झूठ गढ़ लिया है और हम कदापि उसे मानने वाले नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh shaks khuda ke naam par mehaz jhoot ghadh raha hai aur hum kabhi iske maanne waley nahin hain.”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh to bus aisa shaks hai jiss ney Allah per jhoot (bohtaan) bandh liya hai hum to iss per eman laney walay nahi hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये शक्स खुदा के नाम पर महज़ झूठ गड़बड़ रहा है और हम कभी इसके मन्ने वाले नहीं हैं।
عَرَبِيقالَ رَبِّ انصُرني بِما كَذَّبونِ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरी मदद कर, इसलिए कि इन्होंने मुझे झुठलाया है।
Roman Urdu (Maududi)Rasool ne kaha “parwardigar , in logon ne jo meri takzeeb ki hai, ispar ab tu hi meri nusrat farma”
Roman Urdu (Junagarhi)Nabi ney dua ki kay perwerdigar! Inn kay jhutlaney per tu meri madad ker
Devnagri Urdu (Maududi)रसूल ने कहा "परवरदिगार, इन लोगों ने जो मेरी तकज़ीब की है, इसपर अब तू ही मेरी नुसरत फरमा"
عَرَبِيقالَ عَمّا قَليلٍ لَيُصبِحُنَّ نادِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) कहा : बहुत ही कम समय में ये अवश्य पछताएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Jawab mein irshad hua “qareeb hai woh waqt jab yeh apne kiye par pachtayenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Jawab mila kay yeh to boht hi jald apnay kiye per pachtaney lagen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जवाब में इरशाद हुआ "करीब है वो वक्त जब ये अपने किये पर पछताएंगे"
عَرَبِيفَأَخَذَتهُمُ الصَّيحَةُ بِالحَقِّ فَجَعَلناهُم غُثاءً ۚ فَبُعدًا لِلقَومِ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अन्ततः उन्हें चीख़ ने सत्य के साथ आ पकड़ा। तो हमने उन्हें कूड़ा-कर्कट बना दिया। तो दूरी हो अत्याचारियों के लिए।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar theek theek haqq ke mutabiq ek hungama e azeem ne unko aa liya aur humne inko kachra bana kar phenk diya. Door ho zaalim qaum
Roman Urdu (Junagarhi)Bil-aakhir adal kay taqazay kay mutabiq cheekh ney pakar liya aur hum ney unhen koora karkat ker dala pus zalimon kay liye doori ho
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार ठीक ठीक हक के मुताबिक़ एक हंगामा ए अज़ीम ने उनको आ लिया और हमने इनको कचरा बना कर फेंक दिया। दूर हो जालिम क़ौम
عَرَبِيثُمَّ أَنشَأنا مِن بَعدِهِم قُرونًا آخَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उनके पश्चात् कई और युग के लोगों को पैदा किया।
Roman Urdu (Maududi)Phir humne unke baad dusri qaumein uthayi
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay baad hum ney aur bhi boht si ummaten peda kin
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमने उनके बाद दूसरी क़ौम उठाई
عَرَبِيما تَسبِقُ مِن أُمَّةٍ أَجَلَها وَما يَستَأخِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)कोई समुदाय अपने निश्चित समय से न आगे बढ़ता है और न वे पीछे रहते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Koi qaum na apne waqt se pehle khatam hui aur na uske baad thehar saki
Roman Urdu (Junagarhi)Na to koi ummat apnay waqt-e-muqarrara say aagey barhi aur na peechay rahi
Devnagri Urdu (Maududi)कोई क़ौम ना अपने वक़्त से पहले ख़त्म हुई और ना उसके बाद ठहर साकी
عَرَبِيثُمَّ أَرسَلنا رُسُلَنا تَترىٰ ۖ كُلَّ ما جاءَ أُمَّةً رَسولُها كَذَّبوهُ ۚ فَأَتبَعنا بَعضَهُم بَعضًا وَجَعَلناهُم أَحاديثَ ۚ فَبُعدًا لِقَومٍ لا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने अपने रसूल निरंतर भेजे। जब कभी किसी समुदाय के पास उसका रसूल आया, तो उसके लोगों ने उसे झुठला दिया। तो हमने उनमें से कुछ को कुछ के पीछे चलता किया और उन्हें कहानियाँ बना दिया। तो दूरी हो उन लोगों के लिए, जो ईमान नहीं लाते।
Roman Urdu (Maududi)Phir humne pai dar pai apne Rasool bheje. Jis qaum ke paas bhi uska Rasool aaya, usne usey jhutlaya, aur hum ek ke baad ek qaum ko halaak karte chale gaye hatta ke unko bas afsana hi bana kar choda, phitkar un logon par jo iman nahin laatey
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney lagataar rasool bhejay jab jab jiss ummat kay pass uss ka rasool aaya uss ney jhutlaya pus hum ney aik ko doosray kay peechay laga diya aur unhen afsana bana diya. Unn logon ko doori ho jo eman qabool nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमने पै डर पै अपने रसूल भेजे। जिस कौम के पास भी उसका रसूल आया, उसने उसे झुठलाया, और हम एक के बाद एक कौम को हलाक करते चले गए हटा के उनको बस अफसाना ही बना कर चोदा, फिटकर उन लोगों पर जो ईमान नहीं लाते
عَرَبِيثُمَّ أَرسَلنا موسىٰ وَأَخاهُ هارونَ بِآياتِنا وَسُلطانٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने मूसा तथा उसके भाई हारून को अपनी निशानियों तथा स्पष्ट तर्क के साथ भेजा।
Roman Urdu (Maududi)Phir humne Moosa aur uske bhai Haroon ko apni nishaniyon aur khuli sanad ke saath Firoun aur uske ayaan sultanat ki taraf bheja
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney musa (alh-e-salam) ko aur uss kay bhai haroon (alh-e-salam) ko apni aayaton aur khulli daleel kay sath bheja
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमने मूसा और उसके भाई हारून को अपनी निशानियां और खुली सनद के साथ फिरौन और उसके अयान सल्तनत की तरफ भेजा
عَرَبِيإِلىٰ فِرعَونَ وَمَلَئِهِ فَاستَكبَروا وَكانوا قَومًا عالينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फ़िरऔन और उसके सरदारों की ओर। तो उन्होंने घमंड किया और वे सरकश लोग थे।
Roman Urdu (Maududi)Magar unhon ne takabbur (arrogance) kiya aur badi dunki li
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon aur uss kay lashkaron ki taraf pus unhon ney takabbur kiya aur thay hi woh sirkash log
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उनहों ने तकब्बुर (अहंकार) किया और बड़ी डंकी ली
عَرَبِيفَقالوا أَنُؤمِنُ لِبَشَرَينِ مِثلِنا وَقَومُهُما لَنا عابِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : क्या हम अपने जैसे दो व्यक्तियों पर ईमान ले आएँ , जबकि उनके लोग हमारे दास हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kehne lage “Kya hum apne hi jaise do aadmiyon par iman le aayein? Aur aadmi bhi woh jinki qaum hamari bandi (ghulam) hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney lagay kay kiya hum apnay jesay do shakhson per eman aayen? Halankay khud unn ki qom (bhi) humaray ma-tehat hai
Devnagri Urdu (Maududi)कहने लगे "क्या हम अपने ही जैसे दो आदमियों पर ईमान ले आयें? और आदमी भी वो जिनकी क़ौम हमारी बन्दी (ग़ुलाम) है”
عَرَبِيفَكَذَّبوهُما فَكانوا مِنَ المُهلَكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्होंने दोनों को झुठला दिया, तो वे विनष्ट किए गए लोगों में से हो गए।
Roman Urdu (Maududi)Pas unhon ne dono ko jhutla diya aur halaak honay walon mein jaa miley
Roman Urdu (Junagarhi)Pus unhon ney unn dono ko jhutlaya aakhir woh bhi halak shuda logon mein mill gaye
Devnagri Urdu (Maududi)पास उन्होन ने दोनों को झुटला दिया और हलाक होने वालों में जा मिले
عَرَبِيوَلَقَد آتَينا موسَى الكِتابَ لَعَلَّهُم يَهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने मूसा को पुस्तक प्रदान की, ताकि वे (लोग) मार्गदर्शन पा जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur Moosa ko humne kitaab ata farmayi taa-ke log ussey rehnumayi haasil karein
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney to musa (alh-e-salam) ko kitab (bhi) di kay log raah-e-raast per aajyen
Devnagri Urdu (Maududi)और मूसा को हमने किताब अता फरमायी ता-के लोग उसे रहनुमायी हासिल करें
عَرَبِيوَجَعَلنَا ابنَ مَريَمَ وَأُمَّهُ آيَةً وَآوَيناهُما إِلىٰ رَبوَةٍ ذاتِ قَرارٍ وَمَعينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने मरयम के पुत्र (ईसा) तथा उसकी माँ को महान निशानी बनाया तथा दोनों को एक ऊँची भूमि पर ठिकाना दिया, जो रहने के योग्य तथा प्रवाहित पानी वाली थी।
Roman Urdu (Maududi)Aur Ibne Maryam aur uski maa ko humne ek nishani banaya aur unko ek sateh murtafa (shelter on a plateau) par rakkha jo itminaan ki jagah thi aur chashme usmein jaari thay
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney ibn-e-marium aur uss ki walida ko aik nishani banaya aur unn dono ko buland saaf qarar wali aur jari pani wali jagah mein panah di
Devnagri Urdu (Maududi)और इब्ने मरियम और उसकी मां को हमने एक निशानी बनाया और उनको एक साथ मुर्तफा (पठार पर आश्रय) पर रक्खा जो इत्मिनान की जगह थी और चश्मे उसमें जारी थे
عَرَبِييا أَيُّهَا الرُّسُلُ كُلوا مِنَ الطَّيِّباتِ وَاعمَلوا صالِحًا ۖ إِنّي بِما تَعمَلونَ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ रसूलो! पाक चीज़ों में से खाओ तथा अच्छे कर्म करो। निश्चय मैं उससे भली-भाँति अवगत हूँ, जो तुम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey paigambaron, khao paak cheezein aur amal karo saleh, tum jo kuch bhi karte ho, main usko khoob jaanta hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aey payghumbaron! Halal cheez khao aur nek amal kero tum jo kuch ker rahey ho uss say mein ba-khoobi waqif hun
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ पैगंबर, खाओ पाक चीज और अमल करो सालेह, तुम जो कुछ भी करते हो, मैं उसको ख़ूब जानता हूँ
عَرَبِيوَإِنَّ هٰذِهِ أُمَّتُكُم أُمَّةً واحِدَةً وَأَنا رَبُّكُم فَاتَّقونِ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह यह तुम्हारा समुदाय (धर्म) एक ही समुदाय (धर्म) है और मैं तुम सबका पालनहार (पूज्य) हूँ। अतः मुझसे डरो।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh tumhari yeh ummat ek hi ummat hai aur main tumhara Rubb hoon, pas mujhi se tum daro
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tumhara yeh deen aik hi deen hai aur mein hi tum sab ka rab hun pus tum mujh say dartay raho
Devnagri Urdu (Maududi)और ये तुम्हारी ये उम्मत एक ही उम्मत है और मैं तुम्हारा रब हूं, पास मुझ से तुम डरो
عَرَبِيفَتَقَطَّعوا أَمرَهُم بَينَهُم زُبُرًا ۖ كُلُّ حِزبٍ بِما لَدَيهِم فَرِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वे अपने मामले (धर्म) में परस्पर कई समूहों में विभाजित होकर टुकड़े-टुकड़े हो गए। प्रत्येक समूह के लोग उसी पर खुश हैं, जो उनके पास है।
Roman Urdu (Maududi)Magar baad mein logon ne apne deen (religion) ko aapas mein tukde tukde karliya, har giroh ke paas jo kuch hai usi mein woh magan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir unhon ney khud (hi) apnay amar (deen) kay aapas mein tukray tukray ker liye her giroh jo kuch uss kay pass hai ussi per itra raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)मगर बाद में लोगों ने अपने दीन (धर्म) को आपस में टुकड़े-टुकड़े कर लिया, हर गिरह के पास जो कुछ है उसमें वो मगन है
عَرَبِيفَذَرهُم في غَمرَتِهِم حَتّىٰ حينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः (ऐ नबी!) आप उन्हें एक समय तक उनकी अचेतना में छोड़ दें।
Roman Urdu (Maududi)Accha, to chodo inhein, doobey rahein apni gaflat mein ek waqt e khaas tak
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap (bhi) enhen unn ki ghaflat mein hi kuch muddat para rehney den
Devnagri Urdu (Maududi)अच्छा, तो छोड़ो इन्हें, डूब रहे हैं अपनी गफलत में एक वक्त ए खास तक
عَرَبِيأَيَحسَبونَ أَنَّما نُمِدُّهُم بِهِ مِن مالٍ وَبَنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या वे समझते हैं कि हम धन और संतान में से जिन चीज़ों के साथ उनकी सहायता कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh samajhte hain ke hum jo inhein maal o aulad se madad diye jaa rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh (yun) samajh bethay hain? Kay hum jo bhi inn kay maal-o-aulad barha rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये समझते हैं के हम जो इन्हें माल ओ औलाद से मदद दिए जा रहे हैं
عَرَبِينُسارِعُ لَهُم فِي الخَيراتِ ۚ بَل لا يَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)हम उन्हें भलाइयाँ देने में जल्दी कर रहे हैं? बल्कि वे नहीं समझते।
Roman Urdu (Maududi)To goya inhein bhalaiyan dene mein sargarm hain? Nahin, asal maamle ka inhein shaour nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh inn kay liye bhalayion mein jaldi ker rahey hain (nahi nahi) bulkay yeh samajhtay hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)तो गोया इन्हें भलइयां देने में सरगर्म हैं? नहीं, असल मामले का इन्हें शौर नहीं है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ هُم مِن خَشيَةِ رَبِّهِم مُشفِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वे लोग जो अपने पालनहार के भय से डरने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo apne Rubb ke khauf se darey rehte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan jo log apnay rab ki haibat say dartay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो अपने रब के खौफ से डरे रहते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ هُم بِآياتِ رَبِّهِم يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे जो अपने पालनहार की आयतों पर ईमान रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo Rubb ki aayat par iman latey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo apnay rab ki aayaton per eman rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो रुब की आयत पर ईमान लाते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ هُم بِرَبِّهِم لا يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे जो अपने पालनहार का साझी नहीं बनाते।
Roman Urdu (Maududi)Jo apne Rubb ke saath kisi ko shareek nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo apnay rab kay sath kissi ko shareek nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)जो अपने रुब के साथ किसी को शरीक नहीं करते
عَرَبِيوَالَّذينَ يُؤتونَ ما آتَوا وَقُلوبُهُم وَجِلَةٌ أَنَّهُم إِلىٰ رَبِّهِم راجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे लोग कि जो कुछ भी दें, इस हाल में देते हैं कि उनके दिल डरने वाले होते हैं कि वे अपने पालनहार ही की ओर लौटने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jinka haal yeh hai ke detay hain jo kuch bhi detay hain aur dil unke is khayal se kaampte rehte hain ke humein apne Rubb ki taraf palatna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log detay hain jo kuch detay hain aur unn kay dil kapkapatay hain kay woh apnay rab ki taraf lotney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जिनका हाल ये है के देते हैं जो कुछ भी देते हैं और दिल उनके इस ख्याल से कांपते रहते हैं के हमें अपने रुब की तरफ पलटना है
عَرَبِيأُولٰئِكَ يُسارِعونَ فِي الخَيراتِ وَهُم لَها سابِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही लोग हैं, जो भलाइयों में जल्दी करते हैं और यही लोग उनकी तरफ़ आगे बढ़ने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Bhalaiyon ki taraf daudne waley aur sabaqat karke unhein paa lene waley to dar-haqeeqat woh log hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi hain jo jaldi jaldi bhalaiyan hasil ker rahey hain aur yehi hain jo inn ki taraf dor janey walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)भलाईयों की तरफ दौड़ने वाले और सबाकत करके उनको पा लेने वाले तो डर-हकीकत वो लोग हैं
عَرَبِيوَلا نُكَلِّفُ نَفسًا إِلّا وُسعَها ۖ وَلَدَينا كِتابٌ يَنطِقُ بِالحَقِّ ۚ وَهُم لا يُظلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हम किसी प्राणी पर उसकी क्षमता से अधिक बोझ नहीं डालते। तथा हमारे पास एक पुस्तक है, जो सत्य के साथ बोलती है। और उनपर अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Hum kisi shaks ko uski maqdart (taaqat) se zyada ki takleef nahin detay aur humare paas ek kitaab hai jo (har ek ka haal) theek theek bata dene wali hai, aur logon par zulm bahr-haal nahin kiya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Hum kissi nafs ko uss ki taqat say ziyada takleef nahi detay aur humaray pass aisi kitab hai jo haq kay sath bolti hai inn kay upper kuch bhi zulm na kiya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)हम किसी शक्स को उसकी मक़दर (ताकत) से ज़्यादा की तकलीफ़ नहीं देते और हमारे पास एक किताब है जो (हर एक का हाल) ठीक ठीक बता देने वाली है, और लोगों पर ज़ुल्म बाहर-हाल नहीं किया जाएगा
عَرَبِيبَل قُلوبُهُم في غَمرَةٍ مِن هٰذا وَلَهُم أَعمالٌ مِن دونِ ذٰلِكَ هُم لَها عامِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि उनके दिल इससे अचेत हैं तथा इसके सिवा भी उनके कई काम हैं। वे उन्हीं को करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar yeh log is maamle se be-khabar hain aur inke aamal bhi is tareeqe se ( jiska upar zikr kiya gaya hai) mukhtalif hain. Woh apne yeh karoot kiye chale jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay inn kay dil iss taraf say ghaflat mein hain aur inn kay liye iss kay siwa bhi boht say aemaal hain jinehn woh kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर ये लोग इस मामले से बे-ख़बर हैं और इनके अमल भी इस तरीक़े से (जिसका ऊपर ज़िक्र किया गया है) मुख़्तलिफ़ हैं। वो अपने ये करूट किये चले जायेंगे
عَرَبِيحَتّىٰ إِذا أَخَذنا مُترَفيهِم بِالعَذابِ إِذا هُم يَجأَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि जब हम उनके सुखी लोगों को यातना में पकड़ेंगे, तो वे बिलबिलाने लगेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Yahan tak ke jab hum unke ayyashon (affluent ones /aasuda haal) ko azaab mein pakad lenge to phir woh dakrana shuru kar denge (begin to bellow /cry)
Roman Urdu (Junagarhi)Yahan tak kay jab hum ney inn kay asooda haal logon ko azab mein pakar liya to woh bilbilaney lagay
Devnagri Urdu (Maududi)यहां तक ​​के जब हम उनके अय्याशों (समृद्ध लोगों/आसुदा हाल) को अज़ाब में पकड़ लेंगे तो फिर वो डकराना शुरू कर देंगे (चिल्लाना/रोना शुरू कर देंगे)
عَرَبِيلا تَجأَرُوا اليَومَ ۖ إِنَّكُم مِنّا لا تُنصَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आज मत बिलबिलाओ। निःसंदेह तुम्हें हमारी ओर से कोई सहायता नहीं मिलेगी।
Roman Urdu (Maududi)Ab bandh karo apni fariyad o fugaan, hamari taraf se ab koi madad tumhein nahin milni
Roman Urdu (Junagarhi)Aaj mat bilbilao yaqeenan tum humaray muqabley per madad na kiye jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)अब बंद करो अपनी फरियाद ओ फुगां, हमारी तरफ से अब कोई मदद तुम्हें नहीं मिलनी
عَرَبِيقَد كانَت آياتي تُتلىٰ عَلَيكُم فَكُنتُم عَلىٰ أَعقابِكُم تَنكِصونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मेरी आयतें तुम्हें सुनाई जाती थीं, तो तुम अपनी एड़ियों के बल फिर जाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Meri aayat sunayi jati thi to tum (Rasool ki aawaz sunte hi) ultay paon bhaag nikalte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Meri aayaten tumharay samney parhi jati thin phir tum apni airhiyon kay bal ultay bhagtay thay
Devnagri Urdu (Maududi)मेरी आयतें सुनाई जाती थीं तो तुम (रसूल की आवाज सुनते ही) उलटे पांव भाग निकलते थे
عَرَبِيمُستَكبِرينَ بِهِ سامِرًا تَهجُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अभिमान करते हुए, रात को बातें करते हुए उसके बारे में अनर्थ बकते थे।
Roman Urdu (Maududi)Apne ghamand mein usko khatir hi mein na latey thay,apne chaoupalon (meeting places) mein unpar baatein chaant-te (ridiculed him) aur bakwas kiya karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Akartay eenthtay afsana goi kertay issay chor detay thay
Devnagri Urdu (Maududi)अपने घमंड में उसको खातिर ही में ना लाते थे, अपने चौपालों (बैठक स्थलों) में अनपार बातें चांट-ते (उपहास किया गया उसे) और बकवास किया करते थे
عَرَبِيأَفَلَم يَدَّبَّرُوا القَولَ أَم جاءَهُم ما لَم يَأتِ آباءَهُمُ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या उन्होंने इस वाणी (क़ुरआन) पर विचार नहीं किया, अथवा उनके पास वह चीज़ आई है, जो उनके पहले बाप-दादा के पास नहीं आई?
Roman Urdu (Maududi)To kya in logon ne kabhi is kalaam par gaur nahin kiya? Ya woh koi aisi baat laya hai jo kabhi inke aslaaf (forefathers) ke paas na aayi thi
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya enhon ney iss baat mein ghor-o-fiker hi nahi kiya? Bulkay inn kay pass woh aaya jo inn kay aglay baap dadon kay pass nahi aaya tha
Devnagri Urdu (Maududi)तो क्या इन लोगों ने कभी इस कलाम पर गौर नहीं किया? हां वो कोई ऐसी बात लाया है जो कभी इनके असलफ (पूर्वजों) के पास ना आई थी
عَرَبِيأَم لَم يَعرِفوا رَسولَهُم فَهُم لَهُ مُنكِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या उन्होंने अपने रसूल को नहीं पहचाना, इस कारण वे उसका इनकार कर रहे हैं?
Roman Urdu (Maududi)Ya yeh apne Rasool se kabhi ke waqif na thay ke (anjaana aadmi honay ke baais) ussey bidakte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Ya enhon ney apnay payghubar ko pehchana nahi kay iss kay munkir ho rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)हां ये अपने रसूल से कभी के वाकिफ ना थे के (अंजाना आदमी होने के लिए) उससे कहते हैं
عَرَبِيأَم يَقولونَ بِهِ جِنَّةٌ ۚ بَل جاءَهُم بِالحَقِّ وَأَكثَرُهُم لِلحَقِّ كارِهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या वे कहते हैं कि उसे कोई पागलपन हैं। बल्कि वह तो उनके पास सत्य लेकर आए हैं और उनमें से अधिकांश लोग सत्य को बुरा जानने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ya ye is baat ke qayal hain ke woh majnoon [possessed (by a jinn)] hai? Nahin, balke woh haqq laya hai aur haqq hi inki aksariyat (most) ko nagawar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ya yeh kehtay hain issay junoon hai? Bulkey woh to inn kay pass haq laya hai. Haan inn mein aksar haq say chirney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हां ये बात के कयाल हैं के वो मजनूं [(जिन्न द्वारा)] है? नहीं, बल्के वो हक़ लाया है और हक़ ही इनकी अक्सरियत (सबसे) को नगावर है
عَرَبِيوَلَوِ اتَّبَعَ الحَقُّ أَهواءَهُم لَفَسَدَتِ السَّماواتُ وَالأَرضُ وَمَن فيهِنَّ ۚ بَل أَتَيناهُم بِذِكرِهِم فَهُم عَن ذِكرِهِم مُعرِضونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि सत्य उनकी इच्छाओं के पीछे चले, तो निश्चय सब आकाश और धरती और जो कोई उनमें है, सब बिगड़ जाएँ। बल्कि हम उनके पास उनकी नसीह़त लेकर आए हैं। ते वे अपनी नसीह़त से मुँह मोड़ने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur haqq agar kahin inki khwaishaat ke peechey chalta to zameen aur aasman aur inki saari aabaadi ka nizam darham barham ho jata. Nahin, balke hum unka apna hi zikar unke paas laaye hain aur woh apne zikr se mooh moad rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Agar haq hi inn ki khuwaishon ka pairo ho jaye to zamin-o-aasman aur inn kay darmiyan ki her cheez darhum barhum hojaye. Haq to yeh hai kay hum ney enhen unn ki naseehat phoncha di hai lekin woh apni naseehat say mun morney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और हक़ अगर कहीं इनकी ख्वाहिश के पीछे चलता तो ज़मीन और आसमान और इनकी सारी आबादी का निज़ाम दरहम बरहम हो जाता। नहीं, बलके हम उनका अपना ही जिक्र उनके पास लाए हैं और वो अपने जिक्र से मुंह मोड़ रहे हैं
عَرَبِيأَم تَسأَلُهُم خَرجًا فَخَراجُ رَبِّكَ خَيرٌ ۖ وَهُوَ خَيرُ الرّازِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) क्या आप उनसे कोई पारिश्रमिक माँग रहे हैं? तो आपके पालनहार का पारिश्रमिक उत्तम है और वह सब रोज़ी देने वालों से उत्तम है।
Roman Urdu (Maududi)Kya tu insey kuch maang raha hai? Tere liye tere Rubb ka diya hi behtar hai aur woh behtareen raziq hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap inn say koi ujrat chahatay hain? Yaad rakhiye kay aap kay rab ki ujrat boht hi behtar hai aur woh sab say behtar rozi rasan hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तू इनसे कुछ मांग रहा है? तेरे लिए तेरे रब का दीया ही बेहतर है और वो बेहतरीन राज़िक है
عَرَبِيوَإِنَّكَ لَتَدعوهُم إِلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आप तो उन्हें सीधे रास्ते की ओर बुलाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tu to unko seedhey raaste ki taraf bula raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan aap to enhen raah-e-raast ki taraf bula rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)तू तो उनको सीधे रास्ते की तरफ बुला रहा है
عَرَبِيوَإِنَّ الَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِالآخِرَةِ عَنِ الصِّراطِ لَناكِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, निश्चय वे सीधे रास्ते से हटने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar jo log aakhirat ko nahin maante woh raah e raast se hat kar chalna chahte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jo log aakhirat per yaqeen nahi rakhtay who seedhay rastay say murr janey walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जो लोग आख़िरत को नहीं मानते वो राह ए रास्ते से हटना चाहते हैं
عَرَبِي۞ وَلَو رَحِمناهُم وَكَشَفنا ما بِهِم مِن ضُرٍّ لَلَجّوا في طُغيانِهِم يَعمَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम उनपर दया करें और जिस कष्ट से वे पीड़ित हैं, उसे दूर कर दें, तो भी वे निश्चय अपनी सरकशी में दृढ़ता से बने रहेंगे इस हाल में कि भटक रहे होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Agar hum inpar reham karein aur woh takleef jis mein aaj kal yeh mubtila hain door kardein to yeh apni sarkashi mein bilkul hi behak jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum inn per raham farmayen aur inn ki takleef door ker den to yeh to apni apni sirkashi mein jamm ker aur behakney lagen
Devnagri Urdu (Maududi)अगर हम इनपर रहम करें और वो तकलीफ जिस में आज कल ये मुब्तिला हैं दूर करदें तो ये अपनी सरकशी में बिल्कुल ही बहक जाएंगे
عَرَبِيوَلَقَد أَخَذناهُم بِالعَذابِ فَمَا استَكانوا لِرَبِّهِم وَما يَتَضَرَّعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने उन्हें यातना में (भी) पकड़ा। फिर भी वे न अपने पालनहार के आगे झुके और न गिड़गिड़ाते थे।
Roman Urdu (Maududi)Inka haal to yeh hai ke humne unhein takleef mein mubtila kiya, phir bhi yeh apne Rubb ke aagey na jhuke aur na aajizi (humble)ikhtiyar karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney enhen azab mein bhi pakra ta-hum yeh log na to apnay perwerdigar kay samney jhukay aur na hi aajzi ikhtiyar ki
Devnagri Urdu (Maududi)इनका हाल तो ये है के हमने उन्हें तकलीफ में मुब्तिला किया, फिर भी ये अपने रुब के आगे ना झुके और ना अजीजी (विनम्र) इख्तियार करते हैं
عَرَبِيحَتّىٰ إِذا فَتَحنا عَلَيهِم بابًا ذا عَذابٍ شَديدٍ إِذا هُم فيهِ مُبلِسونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि जब हमने उनपर कोई कठोर यातना वाला द्वार खोल दिया, तो तुरंत वे उसमें निराश हो गए।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jab naubat yahan tak pahunch jayegi ke hum inpar sakht azaab ka darwaza khol denge to yakayak tum dekhoge ke us halat mein ye har khair se mayous hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yahan tak kay jab hum ney inn per sakht azab ka darwaza khol diya to ussi waqt foran mayyus hogaye
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जब नौबत यहां तक ​​पहुंच जाएगी के हम इनपर सख्त अजाब का दरवाजा खोल देंगे तो यकीन तुम देखोगे के उस हालात में ये हर खैर से मयौस हैं
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي أَنشَأَ لَكُمُ السَّمعَ وَالأَبصارَ وَالأَفئِدَةَ ۚ قَليلًا ما تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वही है, जिसने तुम्हारे लिए कान तथा आँखें और दिल बनाए। तुम बहुत कम आभार प्रकट करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi to hai jisne tumhein sunney aur dekhne ki quwwatein di aur sochne ko dil diye , magar tum log kam hi shukarguzar hotey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Woh Allah hai jiss ney tumharay liye kaan aur aankhen aur dil pehda kiye magar tum boht (hi) kum shukar kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)वाह अल्लाह हाय तो है जिसने तुम्हें सनी और देखने की कुव्वतें दी और सोचने को दिल दिए, मगर तुम लोग कम ही शुक्रगुज़ार होते हो
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي ذَرَأَكُم فِي الأَرضِ وَإِلَيهِ تُحشَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वही है, जिसने तुम्हें धरती में फैलाया और उसी की ओर तुम एकत्र किए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jisne tumhein zameen mein phaylaya, aur usi ki taraf tum sametay jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wohi hai jiss ney tumhen peda ker kay zamin mein phela diya aur ussi ki taraf tum jama kiye jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिसने तुम्हें ज़मीन में फैलाया, और उसकी तरफ तुम समेट जाओगे
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي يُحيي وَيُميتُ وَلَهُ اختِلافُ اللَّيلِ وَالنَّهارِ ۚ أَفَلا تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वही है, जो जीवित करता और मारता है और उसी के अधिकार में रात और दिन का बदलना है। तो क्या तुम नहीं समझते?
Roman Urdu (Maududi)Wahi zindagi bakashta hai aur wahi maut deta hai, gardish e layl (raat) o nahar (din) usi ke qabze qudrat mein hai. Kya tumhari samajh mein yeh baat nahin aati
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wohi hai jo jilata aur maarta hai aur raat din kay rad-o-badal ka mukhtar bhi wohi hai. Kiya tum ko samajh boojh nahi
Devnagri Urdu (Maududi)वही जिंदगी बक्शता है और वही मौत देता है, गर्दिश ए लयल (रात) ओ नहर (दीन) उसी के क़ब्ज़े क़ुदरत में है। क्या तुम्हारी समझ में ये बात नहीं आती
عَرَبِيبَل قالوا مِثلَ ما قالَ الأَوَّلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि उन्होंने वही बात कही, जो अगलों ने कही थी।
Roman Urdu (Maududi)Magar yeh log wahi kuch kehte hain jo unke peshraw (forefathers) keh chuke hain
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay inn logon ney bhi wesi hi baat kahi jo aglay kehtay chalay aaye
Devnagri Urdu (Maududi)मगर ये लोग वही कुछ कहते हैं जो उनके पेशवा (पूर्वज) कह चुके हैं
عَرَبِيقالوا أَإِذا مِتنا وَكُنّا تُرابًا وَعِظامًا أَإِنّا لَمَبعوثونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी तथा हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या सचमुच हम अवश्य उठाए जाने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Yeh kehte hain “kya jab hum marr kar mitti ho jayenge aur haddiyon ka panjar ban kar reh jayenge to humko phir zinda karke uthaya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Kay kiya jab hum marr ker mitti aur haddi hojayen gay kiya phir bhi hum zaroor uthaye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये कहते हैं "क्या जब हम मर कर मिट्टी हो जाएंगे और हड्डियों का पंजर बन कर रह जाएंगे तो हमको फिर जिंदा" करके उठाया जाएगा
عَرَبِيلَقَد وُعِدنا نَحنُ وَآباؤُنا هٰذا مِن قَبلُ إِن هٰذا إِلّا أَساطيرُ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यही वादा हमसे और इससे पहले हमारे बाप-दादा से किया गया। यह तो पहले लोगों की कहानियों के सिवा कुछ नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Humne bhi yeh wadey bahut sunay hain aur humse pehle hamare baap dada bhi suntey rahey hain. Yeh mehaz afasana haye pareena hain(ancient tales)”
Roman Urdu (Junagarhi)Hum say aur humaray baap dadon say pehlay hi say yeh wada hota chala aaya hai kuch nahi yeh to sirf aglay logon kay afsaney hain
Devnagri Urdu (Maududi)हमने भी ये वादे बहुत सुनाए हैं और हमसे पहले हमारे बाप दादा भी सुनते रहे हैं।''
عَرَبِيقُل لِمَنِ الأَرضُ وَمَن فيها إِن كُنتُم تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) उनसे कह दें : यह धरती और इसमें जो कोई भी है किसका है, यदि तुम जानते हो?
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho, batao agar tum jaante ho, ke yeh zameen aur iski saari aabaadi kiski hai
Roman Urdu (Junagarhi)Poochiye to sahih kay zamin aur iss ki kul cheezen kiss ki hain? Batlao agar tum jantay ho
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, बताओ अगर तुम जानते हो, के ये ज़मीन और इसकी। सारी आबादी किसकी है
عَرَبِيسَيَقولونَ لِلَّهِ ۚ قُل أَفَلا تَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे कहेंगे : अल्लाह का है। आप कह दें : फिर क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते?
Roman Urdu (Maududi)Yeh zaroor kahenge ke Allah ki, kaho phir tum hosh mein kyun nahin aatey
Roman Urdu (Junagarhi)Foran jawab den gay kay Allah ki keh dijiye kay phir tum naseehat kiyon nahi hasil kertay
Devnagri Urdu (Maududi)ये जरूर कहेंगे अल्लाह की, कहो फिर तुम होश में क्यों नहीं आते
عَرَبِيقُل مَن رَبُّ السَّماواتِ السَّبعِ وَرَبُّ العَرشِ العَظيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)आप पूछिए : सातों आकाशों का स्वामी तथा महान सिंहासन (अर्श) का स्वामी कौन है?
Roman Urdu (Maududi)Insey pucho, saato (seven) aasmaano aur arsh-e-azeem ka maalik kaun hai
Roman Urdu (Junagarhi)Daryaft kijiye kay saaton aasmano ka aur boht ba-azmat arsh ka rab kaun hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पूछो, सातो (सात) आसमानो और अर्श-ए-अजीम का मालिक कौन है
عَرَبِيسَيَقولونَ لِلَّهِ ۚ قُل أَفَلا تَتَّقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे कहेंगे : अल्लाह ही के लिए है। आप कह दें : फिर क्या तुम डरते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Yeh zaroor kahenge Allah, kaho phir tum darte kyun nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Woh log jawab den gay kay Allah hi hai. Keh dijiye! kay phir tum kiyon nahi dartay
Devnagri Urdu (Maududi)ये जरूर कहेंगे अल्लाह, कहो फिर तुम डरते क्यों नहीं
عَرَبِيقُل مَن بِيَدِهِ مَلَكوتُ كُلِّ شَيءٍ وَهُوَ يُجيرُ وَلا يُجارُ عَلَيهِ إِن كُنتُم تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप उनसे कहिए : कौन है जिसके हाथ में हर चीज़ का अधिकार और वह शरण देता है और उसके मुक़ाबले में शरण नहीं दी जाती, यदि तुम जानते हो (तो बताओ)?
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho, batao agar tum jaante ho ke har cheez par iqtedaar kiska hai? Aur kaun hai woh jo panaah deta hai aur uske muqable mein koi panaah nahin de sakta
Roman Urdu (Junagarhi)Poochiye kay tamam cheezon ka ikhtiyar kiss kay hath mein hai? Jo panah deta hai aur jiss kay muqablay mein koi panah nahi diya jata agar tum jantay ho to batla do
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, बताओ अगर तुम जानते हो के हर चीज़ पर इक्तेदार किसका है? और कौन है वो जो पनाह देता है और उसके मुकाबले में कोई पनाह नहीं दे सकता
عَرَبِيسَيَقولونَ لِلَّهِ ۚ قُل فَأَنّىٰ تُسحَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे बोल पड़ेंगे : अल्लाह के लिए है। आप कहिए : फिर तुम कहाँ से जादू किए जाते हो?
Roman Urdu (Maududi)Yeh zaroor kahenge ke yeh baat to Allah hi keliye hai. Kaho, phir kahan se tumko dhoka lagta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi jawab den gay kay Allah hi hai. Keh dijiye phir tum kidhar say jadoo ker diye jatay ho
Devnagri Urdu (Maududi)ये जरूर कहेंगे के ये बात अल्लाह ही के लिए है। कहो, फिर कहां से तुमको धोखा लगता है
عَرَبِيبَل أَتَيناهُم بِالحَقِّ وَإِنَّهُم لَكاذِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि हम उनके पास पूर्ण सत्य लाए हैं और निःसंदेह वे निश्चय झूठे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo amr e haqq hai woh hum inke saamne le aaye hain, aur koi shakk nahin ke yeh log jhotey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Haq yeh hai kay hum ney unhen haq phoncha diya hai aur yeh be-shak jhootay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो अमर ए हक है वो हम इनके सामने ले आए हैं, और कोई शक्क नहीं के ये लोग झूठे हैं
عَرَبِيمَا اتَّخَذَ اللَّهُ مِن وَلَدٍ وَما كانَ مَعَهُ مِن إِلٰهٍ ۚ إِذًا لَذَهَبَ كُلُّ إِلٰهٍ بِما خَلَقَ وَلَعَلا بَعضُهُم عَلىٰ بَعضٍ ۚ سُبحانَ اللَّهِ عَمّا يَصِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने न कोई संतान बनाई और न कभी उसके साथ कोई पूज्य था। उस समय अवश्य प्रत्येक पूज्य, जो कुछ उसने पैदा किया था, उसे लेकर चल देता और निश्चय उनमें से एक, दूसरे पर चढ़ाई कर देता। पवित्र है अल्लाह उससे, जो वे बयान करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne kisi ko apni aulaad nahin banaya hai aur koi dusra khuda uske saath nahin hai. Agar aisa hota to har khuda apni khalq ko lekar alag ho jaata, aur phir woh ek dusre par chadh daudte.Paak hai Allah un baaton se jo yeh log banate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Na to Allah ney kissi ko beta banaya aur na uss kay sath aur koi mabood hai werna her mabood apni makhlooq ko liye liye phirta aur her aik doosray per charh dorta. Jo osaaf yeh batlatay hain unn say Allah pak (aur bey-niaz) hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने किसी को अपना औलाद नहीं बनाया है और कोई दूसरा खुदा उसके साथ नहीं है। अगर ऐसा होता तो हर खुदा अपने ख़ल्क़ को लेकर अलग हो जाता, और फिर वो एक दूसरे पर चढ़ते। पाक है अल्लाह उन बातों से जो ये लोग बनाते हैं
عَرَبِيعالِمِ الغَيبِ وَالشَّهادَةِ فَتَعالىٰ عَمّا يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह परोक्ष (छिपे) तथा प्रत्यक्ष (खुले) को जानने वाला है। सो वह बहुत ऊँचा है उससे, जो वे साझी बनाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Khule aur chupe ka jaanne wala, woh baalatar hai us shirk se jo yeh log tajweez kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh ghaeeb hazir ka jannay wala hai aur jo shirk yeh kertay hain uss say bala tar hai
Devnagri Urdu (Maududi)खुले और छुपे का जाने वाला, वो बोलता है हमसे शिर्क से जो ये लोग तजवीज़ कर रहे हैं
عَرَبِيقُل رَبِّ إِمّا تُرِيَنّي ما يوعَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप दुआ करें : ऐ मेरे पालनहार! यदि तू कभी मुझे अवश्य ही वह (यातना) दिखाए, जिसका उनसे वादा किया जा रहा है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad) dua karo ke “parwardigar, jis azaab ki inko dhamki di jaa rahi hai woh agar meri maujoodgi mein tu laye
Roman Urdu (Junagarhi)Aap dua keren kay aey meray perwerdigar! Agar tu mujhay woh dikhaye jiss ka wada enhen diya jaraha hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद) दुआ करो के "परवरदिगार, जिस अज़ाब की इनको धमकी दी जा रही है वो अगर मेरी मौजुदगी में तू लाए
عَرَبِيرَبِّ فَلا تَجعَلني فِي القَومِ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो ऐ मेरे पालनहार! मुझे उन अत्याचारी लोगों में शामिल न करना।
Roman Urdu (Maududi)To aey mere Rubb, mujhey in zaalim logon mein shamil na kijiyo”
Roman Urdu (Junagarhi)To aey rab! Tu mujhay inn zlimon kay giroh mein na kerna
Devnagri Urdu (Maududi)तो ऐ मेरे रब, मुझे जालिम लोगों में शामिल न करो"
عَرَبِيوَإِنّا عَلىٰ أَن نُرِيَكَ ما نَعِدُهُم لَقادِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हम आपको वह (यातना) दिखाने में, जिसका हम उनसे वादा करते हैं, अवश्य सक्षम हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur haqeeqat yeh hai ke hum tumhari aankhon ke saamne hi woh cheez le aane ki poori qudrat rakhte hain jiski dhamki hum unhein de rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum jo kuch waday enhen dey rahey hain sab aap ko dikha denay per yaqeenan qadir hain
Devnagri Urdu (Maududi)और हकीकत ये है के हम तुम्हारी आंखें के सामने ही वो चीज ले आने की पूरी कुदरत रखते हैं जिसकी धमकी हम उन्हें दे रहे हैं
عَرَبِيادفَع بِالَّتي هِيَ أَحسَنُ السَّيِّئَةَ ۚ نَحنُ أَعلَمُ بِما يَصِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(हे नबी!) आप बुराई को उस ढंग से दूर करें, जो सबसे उत्तम हो। हम अधिक जानने वाले हैं, जो कुछ वे बयान करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), burayi ko is tareeqe se dafa karo jo behtareen ho jo kuch baatein woh tumpar banate hain woh humein khoob maloom hai
Roman Urdu (Junagarhi)Buraee ko iss tareeqay say door keren jo sirasir bhalaee wala ho jo kuch yeh biyan kertay hain hum ba-khoobi waqif hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), बुरे को इस तरह से दफा करो जो बेहतरीन हो जो कुछ बातें वो तुमपर बनाते हैं वो हमें खूब मालूम है
عَرَبِيوَقُل رَبِّ أَعوذُ بِكَ مِن هَمَزاتِ الشَّياطينِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप दुआ करें : ऐ मेरे पालनहार! मैं शैतानों की उकसाहटों से तेरी शरण चाहता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur dua karo ke “parwardigar, main shayateen ki uksahaton(waswason) se teri panaah maangta hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur dua keren kay aey meray perwerdigar! Mein shetano kay waswason say teri panah chahata hun
Devnagri Urdu (Maududi)और दुआ करो के "परवरदिगार, मैं शयातीन की उम्मीदों (वासवासों) से तेरी पनाह मांगता हूं
عَرَبِيوَأَعوذُ بِكَ رَبِّ أَن يَحضُرونِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा ऐ मेरे पालनहार! मैं इस बात से भी तेरी शरण माँगता हूँ कि वे मेरे पास आएँ।
Roman Urdu (Maududi)Balke aey mere Rubb, main to issey bhi teri panaah maanga hoon ke woh mere paas aayein”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aey rab! Mein teri panah chahata hun kay woh meray pass aajayen
Devnagri Urdu (Maududi)बल्के ऐ मेरे रब, मैं तो इसे भी तेरी पनाह मांगता हूं के वो मेरे पास आएं"
عَرَبِيحَتّىٰ إِذا جاءَ أَحَدَهُمُ المَوتُ قالَ رَبِّ ارجِعونِ
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हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि जब उनमें से किसी के पास मौत आती है, तो कहता है : ऐ मेरे पालनहार! मुझे (संसार में) वापस भेजो।
Roman Urdu (Maududi)(yeh log apni karni se baaz na aayenge) yahan tak ke jab in mein se kisi ko maut aa jayegi to kehna shuru kardega ke “Aey mere Rubb, mujhey usi duniya mein wapas bhej dijiye jisey main chodh aaya hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Yahan tak kay jab inn mein say kissi ko maut aaney lagti hai to kehta hai aey meray perwerdigar! Mujhay wapis lota dey
Devnagri Urdu (Maududi)(ये लोग अपनी करनी से बाज़ ना आएंगे) यहां तक ​​कि जब मेरे अंदर से किसी को मौत आ जाएगी तो कहना शुरू कर देगा के "ऐ मेरे रब, मुझे उसकी दुनिया में वापस भेज दीजिए जिसे मैं छोड़ आया हूं
عَرَبِيلَعَلّي أَعمَلُ صالِحًا فيما تَرَكتُ ۚ كَلّا ۚ إِنَّها كَلِمَةٌ هُوَ قائِلُها ۖ وَمِن وَرائِهِم بَرزَخٌ إِلىٰ يَومِ يُبعَثونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि मैं जो कुछ छोड़ आया हूँ, उसमें कोई नेक कार्य कर लूँ। हरगिज़ नहीं, यह तो मात्र एक बात है, जिसे वह कहने वाला है और उनके पीछे उस दिन तक जब वे (पुनः) उठाए जाएँगे, एक ओट है।
Roman Urdu (Maududi)Umeed hai ke ab main neik amal karunga”. Hargiz nahin, yeh to bas ek baat hai jo woh bakk raha hai. Ab in sab (marne waalon) ke peechey ek barzakh (barrier) hayal hai dusri zindagi ke din tak
Roman Urdu (Junagarhi)Kay apni chori hui duniya mein jaa ker nek aemaal ker loon hergiz aisa nahi hoga yeh to sirf aik qol hai jiss ka yeh qaeel hai inn kay pas-e-pusht to aik hijab hai inn kay doobara ji uthney kay din tak
Devnagri Urdu (Maududi)उम्मीद है के अब मैं जल्द अमल करूंगा"। हरगिज़ नहीं, ये तो बस एक बात है जो वो बक रहा है। अब इन सब (मरने वालों) के पीछे एक बरज़ख (बाधा) हैयाल है दूसरी जिंदगी के दिन तक
عَرَبِيفَإِذا نُفِخَ فِي الصّورِ فَلا أَنسابَ بَينَهُم يَومَئِذٍ وَلا يَتَساءَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब सूर (नरसिंघा) में फूँक मारी जाएगी, तो उस दिन उनके बीच न कोई रिश्ते-नाते होंगे और न वे एक-दूसरे को पूछेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir junhi ke Sur (trumphet) phoonk diya gaya, unke darmiyan phir koi rishta na rahega aur na woh ek dusre ko puchenge
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab kay soor phoonk diya jayega uss din na to aapas kay rishtay hi rahen gay na aapas ki pooch gooch
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जून्ही के सुर (तुरही) फूंक दिया गया, उनके दरमियान फिर कोई रिश्ता ना रहेगा और ना वो एक दूसरे को पूछेंगे
عَرَبِيفَمَن ثَقُلَت مَوازينُهُ فَأُولٰئِكَ هُمُ المُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जिसके पलड़े भारी हो गए, वही लोग सफल हैं।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt jinke padle (scales) bhari hongey wahi falaah payenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jin ki tarazoo ka palla bhari hogaya woh to nijat walay hogaye
Devnagri Urdu (Maududi)हमारा वक्त जिनके पैडल (तराजू) भारी होंगे वही फलाह पाएंगे
عَرَبِيوَمَن خَفَّت مَوازينُهُ فَأُولٰئِكَ الَّذينَ خَسِروا أَنفُسَهُم في جَهَنَّمَ خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिसके पलड़े हलके हो गए, तो वही लोग हैं, जिन्होंने अपने आपको घाटे में डाला। जहन्नम ही में सदावासी होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jinke padle (scales) halke honge wahi log hongey jinhon ne apne aap ko ghatay mein daal liya. Woh jahannum mein hamesha rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin kay tarazoo ka palla halka hogaya yeh hain woh jinhon ney apna nuksan aap ker liya jo hamesha kay liye jahannum wasil huye
Devnagri Urdu (Maududi)और जिनके पैडले (स्केल) हल्के होंगे वही लोग होंगे जिन्हों ने अपने आप को घाटे में डाल लिया। वो जहन्नुम में हमेशा रहेंगे
عَرَبِيتَلفَحُ وُجوهَهُمُ النّارُ وَهُم فيها كالِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनके चेहरों को आग झुलसाएगी तथा उसमें उनके जबड़े (झुलसकर) बाहर निकले होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aag unke chehron ki khaal chaat jayegi aur unke jabde (jaws) bahar nikal aayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay chehron ko aag jhulasti rahey gi aur woh wahan bad-shakal banay huye hongay
Devnagri Urdu (Maududi)आग उनके चेहरों की खाल चट जाएगी और उनके जबड़े बाहर निकल आएंगे
عَرَبِيأَلَم تَكُن آياتي تُتلىٰ عَلَيكُم فَكُنتُم بِها تُكَذِّبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या मेरी आयतें तुमपर पढ़ी न जाती थीं, तो तुम उन्हें झुठलाया करते थे?
Roman Urdu (Maududi)“kya tum wahi log nahin ho ke meri aayat tumhein sunayi jati thi to tum unhein jhutlate thay?”
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya meri aayaten tumharay samney tilawat nahi ki jati thin? Phir bhi tum enhen jhutlatay thay
Devnagri Urdu (Maududi)"क्या तुम वही लोग नहीं हो के मेरी आयत तुम्हें सुनायी जाती थी तो तुम उन्हें झुलाते थे?"
عَرَبِيقالوا رَبَّنا غَلَبَت عَلَينا شِقوَتُنا وَكُنّا قَومًا ضالّينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! हमारा दुर्भाग्य हमपर प्रभावी हो गया और हम गुमराह लोग थे।
Roman Urdu (Maududi)Woh kahenge “aey hamare Rubb, hamari badbakhti hum par chaa gayi thi, hum waqayi gumraah log thay
Roman Urdu (Junagarhi)Kahen gay kay aey perwerdigar! Humari bad-bakhti hum per ghalib aagaee (waqaee) hum thay hi gumrah
Devnagri Urdu (Maududi)वो कहेंगे "ऐ हमारे रब, हमारी बदबख्ती हम पर छा गई थी, हम वक्त गुमराह लोग थे
عَرَبِيرَبَّنا أَخرِجنا مِنها فَإِن عُدنا فَإِنّا ظالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारे पालनहार! हमें इससे निकाल ले। फिर यदि हम दोबारा ऐसा करें, तो निश्चय हम अत्याचारी होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aey parwardigar, ab humein yahan se nikaal de phir hum aisa kasoor karein to zaalim hongey”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey humaray perwerdigar! Humen yahan say nijat dey agar abb hi hum aisa hi keren to be-shak hum zalim hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ परवरदिगार, अब हमें यहां से निकल दे फिर हम ऐसा कसूर करें तो जालिम होंगे"
عَرَبِيقالَ اخسَئوا فيها وَلا تُكَلِّمونِ
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हिन्दी (Al-Omari)वह (अल्लाह) कहेगा : इसी में अपमानित होकर पड़े रहो और मुझसे बात न करो।
Roman Urdu (Maududi)Allah taala jawab dega “ door ho mere saamne se, padey raho isi mein aur mujhse baat na karo
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa farmaye ga phitkaray huye yahin paray raho aur mujh say kalaam na kero
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ताला जवाब देगा "दूर हो मेरे" सामने से, पड़े रहो इसी में और मुझसे बात ना करो
عَرَبِيإِنَّهُ كانَ فَريقٌ مِن عِبادي يَقولونَ رَبَّنا آمَنّا فَاغفِر لَنا وَارحَمنا وَأَنتَ خَيرُ الرّاحِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मेरे बंदों में से कुछ लोग थे, जो कहते थे : ऐ हमारे पालनहार! हम ईमान ले आए। अतः तू हमें क्षमा कर दे और हमपर दया कर। और तू सब दया करने वालों से बेहतर है।
Roman Urdu (Maududi)Tum wahi log to ho ke mere kuch banday jab kehte thay ke aye hamare parwardigar, hum iman laye, humein maaf karde, humpar reham kar, tu sab raheemon se accha raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Meray bando ki aik jamat thi jo barbar yehi kehti rahi kay aey humaray perwerdigar! Hum eman laa chukay hain tum humen bakhsh aur hum per reham farma to sab meharbano say ziyada meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम वही लोग तो हो के मेरे कुछ बंदे जब कहते थे के ऐ हमारे परवरदिगार, हम ईमान लाए, हमें माफ करदे, हमपर रहम कर, तू सब रहिमों से अच्छा रहीम है
عَرَبِيفَاتَّخَذتُموهُم سِخرِيًّا حَتّىٰ أَنسَوكُم ذِكري وَكُنتُم مِنهُم تَضحَكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुमने उन्हें मज़ाक़ बना लिया, यहाँ तक कि उन्होंने तुम्हें मेरी याद भुला दी और तुम उनसे हँसी किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)To tumne unka mazaaq bana liye, yahan tak ke unki zidd ne tumhein yeh bhi bhula diya ke main bhi koi hoon, aur tum unpar haste rahey
Roman Urdu (Junagarhi)(lekin) tum enhen mazaq mein hi uratay rahey yahan tak kay (iss mashghalay ney) tum ko meri yaad (bhi) bhula di aur tum inn say mazaq hi kertay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)तो तुमने उनका मजाक बना लीजिए, यहां तक ​​के उनकी जिद ने तुम्हें ये भी भुला दिया के मैं भी कोई हूं, और तुम उन पर हंसते रहोगे
عَرَبِيإِنّي جَزَيتُهُمُ اليَومَ بِما صَبَروا أَنَّهُم هُمُ الفائِزونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आज मैंने उन्हें उनके धैर्य का यह बदला दिया है कि वही सफल हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aaj unke us sabr ka maine yeh phal diya hai ke wahi kamiyaab hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Mein ney aaj enhen inn kay uss sabar ka badla dey diya hai kay woh khatir khua apni murad ko phonch chukay hain
Devnagri Urdu (Maududi)आज उनके उस सब्र का मैंने ये फल दिया है के वही कामयाब है”
عَرَبِيقالَ كَم لَبِثتُم فِي الأَرضِ عَدَدَ سِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह (अल्लाह) कहेगा : तुम धरती पर कितने वर्षों तक रहे?
Roman Urdu (Maududi)Phir Allah taala unse puchega “batao,zameen mein tum kitne saal rahey?”
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa daryaft farmaye ga kay tum zamin mein ba-aitbar barson ki ginti kiss qadar rahey
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अल्लाह ताला उनसे पूछेगा “बताओ, ज़मीन में तुम कितने साल रहेंगे?”
عَرَبِيقالوا لَبِثنا يَومًا أَو بَعضَ يَومٍ فَاسأَلِ العادّينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे कहेंगे : हम एक दिन या दिन का कुछ भाग रहे। आप गणना करने वालों से पूछ लें।
Roman Urdu (Maududi)Woh kahenge “ ek din ya din ka bhi kuch hissa hum wahan thehre hain, shumaar karne walon se pooch lijiye”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kahen gay aik din ya aik din say bhi kum ginti ginnay walon say bhi pooch lijiye
Devnagri Urdu (Maududi)वो कहेंगे " एक दिन या दिन का भी कुछ हिस्सा हम वहां ठहरे हैं, शुरू करने वालों से पूछ लीजिये"
عَرَبِيقالَ إِن لَبِثتُم إِلّا قَليلًا ۖ لَو أَنَّكُم كُنتُم تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह (अल्लाह) कहेगा : तुम नहीं रहे परंतु थोड़ा ही। काश कि तुमने जानते होते।
Roman Urdu (Maududi)Irshad hoga “ thodi hi dair thehre ho na, kaash tumne yeh us waqt jana hota
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa farmaye ga fil-waqey tum wahan boht hi kum rahey ho aey kaash! Tum issay pehaly hi say jaan letay
Devnagri Urdu (Maududi)इरशाद होगा "थोड़ी ही देर ठहरे हो ना, काश तुमने ये हमें वक्त जाना होता
عَرَبِيأَفَحَسِبتُم أَنَّما خَلَقناكُم عَبَثًا وَأَنَّكُم إِلَينا لا تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या तुमने समझ रखा था कि हमने तुम्हें उद्देश्यहीन पैदा किया है और यह कि तुम हमारी ओर नहीं लौटाए जाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Kya tumne yeh samajh rakkha tha ke humne tumhein fizul(bekar) hi paida kiya hai aur tumhein hamari taraf kabhi palatna hi nahin hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum yeh gumaan kiye huye ho kay hum ney tumhen yunhi beykaar peda kiya hai aur yeh kay tum humari taraf lotaye hi na jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुमने ये समझ रक्खा था के हमने तुम्हें फिजूल (बेकर) ही पेदा किया है और तुम्हें हमारी तरफ कभी पलटना ही नहीं है?”
عَرَبِيفَتَعالَى اللَّهُ المَلِكُ الحَقُّ ۖ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ رَبُّ العَرشِ الكَريمِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो बहुत ऊँचा है अल्लाह, जो सच्चा बादशाह है। उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, सम्मान वाले अर्श (सिंहासन) का रब है।
Roman Urdu (Maududi)Pas baala o bartar hai Allah , baadshah e haqiqi, koi khuda uske siwa nahin, maalik hai arsh e buzurg ka
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa sacha badshah hai woh bari bulandi wala hai uss ka siwa koi mabood nahi wohi buzurg arsh ka malik hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास बाला ओ बरतर है अल्लाह, बादशाह ए हकीकी, कोई खुदा उसके सिवा नहीं, मालिक है अर्श ए बुजुर्ग का
عَرَبِيوَمَن يَدعُ مَعَ اللَّهِ إِلٰهًا آخَرَ لا بُرهانَ لَهُ بِهِ فَإِنَّما حِسابُهُ عِندَ رَبِّهِ ۚ إِنَّهُ لا يُفلِحُ الكافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो (भी) अल्लाह के साथ किसी अन्य पूज्य को पुकारे, जिसका उसके पास कोई प्रमाण नहीं, तो उसका हिसाब केवल उसके पालनहार के पास है। निःसंदेह काफ़िर लोग सफल नहीं होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo koi Allah ke saath kisi aur maabood ko pukare, jiske liye uske paas koi daleel nahin, to uska hisaab uske Rubb ke paas hai. Aisey kafir kabhi falaah nahin paa sakte
Roman Urdu (Junagarhi)Jo shaks Allah kay sath kissi doosray mabood ko pukaray jiss ki koi daleel uss kay pass nahi pus uss ka hisab to uss kay rab kay upper hi hai. Be-shak kafir log nijat say mehroom hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जो कोई अल्लाह के साथ किसी और माबूद को पुकारे, जिसके लिए उसके पास कोई दलील नहीं, तो उसका हिसाब उसके रब के पास है। ऐसे काफिर कभी फलाह नहीं पा सकते
عَرَبِيوَقُل رَبِّ اغفِر وَارحَم وَأَنتَ خَيرُ الرّاحِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप प्रार्थना करें : ऐ मेरे पालनहार! क्षमा कर दे और दया कर, और तू सब दया करने वालों में सबसे अधिक दया करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad) kaho, “Mere Rubb darguzar farma, aur reham kar, aur tu sab raheemon se accha raheem hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kaho kay aey meray rab! Tu bakhsh aur reham ker aur tu sab meharbano say behtar meharbani kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद) कहो, "मेरे रब दरगुज़र फ़रमा, और रहम कर, और तू सब रहिमों से अच्छा रहीम है"
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Surah 23: Al-Mu'minun (The Believers)

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Surah 23: Al-Mu'minun (The Believers)

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Surah 23: Al-Mu'minun (The Believers)

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Surah 23: Al-Mu'minun (The Believers)

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Surah 23: Al-Mu'minun (The Believers)

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Surah 24: An-Nur (The Light)

Medinan🕐 Revelation #102📜 64 Verses🕮 Juz 1
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيسورَةٌ أَنزَلناها وَفَرَضناها وَأَنزَلنا فيها آياتٍ بَيِّناتٍ لَعَلَّكُم تَذَكَّرونَ
हिन्दी (Al-Omari)यह एक महान सूरत है, हमने इसे उतारा तथा हमने इसे अनिवार्य किया और हमने इसमें स्पष्ट आयतें उतारीं हैं; ताकि तुम शिक्षा ग्रहण करो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ek surat hai jisko humne nazil kiya hai, aur isey humne farz kiya hai, aur is mein humne saaf saaf hidayaat nazil ki hain, shayad ke tum sabaq lo
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hai woh surat jo hum ney nazil farmaee hai aur muqarrar ker di hai aur jiss mein hum ney khulli aayaten (ehkaam) utaray hain takay tum yaad rakho
Devnagri Urdu (Maududi)ये एक सूरत है जिसको हमने नाज़िल किया है, और इसने हमने फ़र्ज़ किया है, और इस में हमने साफ़ साफ़ हिदायत नाज़िल की है, शायद के तुम सबक लो
عَرَبِيالزّانِيَةُ وَالزّاني فَاجلِدوا كُلَّ واحِدٍ مِنهُما مِائَةَ جَلدَةٍ ۖ وَلا تَأخُذكُم بِهِما رَأفَةٌ في دينِ اللَّهِ إِن كُنتُم تُؤمِنونَ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ ۖ وَليَشهَد عَذابَهُما طائِفَةٌ مِنَ المُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो व्यभिचार करने वाली महिला है और जो व्यभिचार करने वाला पुरुष है, दोनों में से प्रत्येक को सौ कोड़े मारो। और तुम्हें अल्लाह के धर्म के विषय में उन दोनों पर कोई तरस न आए, यदि तुम अल्लाह तथा अंतिम दिन पर ईमान रखते हो। और आवश्यक है कि उनके दंड के समय ईमानवालों का एक समूह उपस्थित हो।
Roman Urdu (Maududi)Zaniya (adulterous) aurat zaani mard, dono mein se har ek ko sau (hundred) kodey (lashes) maaro aur inpar tars khane ka jazba Allah ke deen ke maamle mein tumko daamangeer (pity) na ho agar tum Allah taala aur roz-e-aakhir par iman rakhte ho, aur inko saza detay waqt ehle iman ka ek giroh moujood rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Zina kaar aurat-o-mard mein say her aik ko so koray lagao. Inn per Allah ki shareeat ki hadd jari kertay huye tumhen hergiz tars na khana chahaye agar tumhen Allah per aur qayamat kay din per eman ho. Inn ki saza kay waqt musalmano ki aik jamatmojood honi chahaye
Devnagri Urdu (Maududi)जानिया (व्यभिचारी) औरत ज़ानी मर्द, दोनों में से हर एक को सौ (सौ) कोड़े (लैश) मारो और इनपर तरस खाने का जज़्बा अल्लाह के दीन के मामले में तुमको दामनगीर (दया) ना हो अगर तुम अल्लाह ताला और रोज-ए-आखिर पर ईमान रखते हो, और इनको सज़ा देते वक्त एहले ईमान का एक गिरोह मौजुद रहे
عَرَبِيالزّاني لا يَنكِحُ إِلّا زانِيَةً أَو مُشرِكَةً وَالزّانِيَةُ لا يَنكِحُها إِلّا زانٍ أَو مُشرِكٌ ۚ وَحُرِّمَ ذٰلِكَ عَلَى المُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)व्यभिचारी नहीं विवाह करेगा, परंतु किसी व्यभिचारिणी अथवा बहुदेववादी स्त्री से, तथा व्यभिचारिणी से नहीं विवाह करेगा, परंतु कोई व्यभिचारी अथवा बहुदेववादी। और यह ईमान वालों पर हराम (निषिद्ध) कर दिया गया है।
Roman Urdu (Maududi)Zaani (man guilty of adultery) nikah na karey magar zaniya ke saath ya mushrika ke saath, aur zaniya ke saath nikah na karey magar zaani ya mushrik. Aur yeh haraam kardiya gaya hai ehle iman par
Roman Urdu (Junagarhi)Zaani mard ba-juz zaaniya ya mushrika aurat kay aur say nikah nahi kerta aur zina kaar aurat bhi bajuz zaani ya mushrik mard kay aur nikah nahi kerti aur eman walon per yeh haram ker diya gaya
Devnagri Urdu (Maududi)ज़ानी (व्यभिचार का दोषी व्यक्ति) निकाह ना कैरी मगर जानिया के साथ या मुशरिक के साथ, और जानिया के साथ निकाह ना करे मगर जानी या मुशरिक। और ये हराम करदिया गया है एहले ईमान पर
عَرَبِيوَالَّذينَ يَرمونَ المُحصَناتِ ثُمَّ لَم يَأتوا بِأَربَعَةِ شُهَداءَ فَاجلِدوهُم ثَمانينَ جَلدَةً وَلا تَقبَلوا لَهُم شَهادَةً أَبَدًا ۚ وَأُولٰئِكَ هُمُ الفاسِقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग सच्चरित्रा स्त्रियों पर व्यभिचार का आरोप लगाएँ, फिर चार गवाह न लाएँ, तो उन्हें अस्सी कोड़े मारो और उनकी कोई गवाही कभी स्वीकार न करो और वही अवज्ञाकारी लोग हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log paak daaman auraton par tohmat (ilzam /bohtan/slander) lagayein, phir char (four) gawaah lekar na aayein, unko assi (eighty) kodey (lashes) maaro , aur unki shahadat kabhi qabool na karo. Aur woh khud hi faasiq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log pak daman aurton per zina ki tohmat lagayen phir char gawah na paish ker saken to unhen assi koray lagao aur kabhi bhi unn ki gawahee qabool na kero. Yeh fasiq log hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग पाक दामन औरतों पर तोहमत (इल्ज़म/बोहतन/बदनामी) लगायें, फिर चार (चार) गवाह लेकर ना आयें, उनको अस्सी (अस्सी) कोड़े (कोड़े) मारो, और उनकी शहादत कभी कबूल ना करो। और वो खुद ही फासीक हैं
عَرَبِيإِلَّا الَّذينَ تابوا مِن بَعدِ ذٰلِكَ وَأَصلَحوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)परंतु जो लोग इसके बाद तौबा करें तथा सुधार कर लें, तो निश्चय अल्लाह अत्यंत क्षमाशील, असीम दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Siwaye un logon ke jo is harakat ke baad taaib (repent) ho jayein aur islaah karlein ke Allah zaroor (unke haqq mein) gafoor o raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Haan jo log iss kay baad toba aur islah ker len to Allah Taalaa bakshney wala aur meharbani kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)सिवाय उन लोगों के जो इस हरकत के बाद ताइब (पश्चाताप) हो जाएं और इस्लाह कार्लें के अल्लाह जरूर (उनके हक में) गफूर ओ रहीम है
عَرَبِيوَالَّذينَ يَرمونَ أَزواجَهُم وَلَم يَكُن لَهُم شُهَداءُ إِلّا أَنفُسُهُم فَشَهادَةُ أَحَدِهِم أَربَعُ شَهاداتٍ بِاللَّهِ ۙ إِنَّهُ لَمِنَ الصّادِقينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जो लोग अपनी पत्नियों पर व्यभिचार का आरोप लगाएँ और उनके पास स्वयं के अलावा कोई गवाह न हों, तो उनमें से हर एक की गवाही यह है कि अल्लाह की क़सम खाकर चार बार यह गवाही दे कि निःसंदेह वह सच्चों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log apni biwiyon par ilzam lagayein aur unke paas khud unke apne siwa doosre koi gawaah na hon to unmein se ek shaks ki shahadat(yeh hai ke woh) char martaba Allah ki kasam kha kar gawahi dey ke woh (apne ilzam mein) saccha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log apni biwiyon per bad-kaari ki tohmat lagayen aur unn ka koi gawah ba-juz khud unn ki zaat kay na ho to aisay logon mein say her aik ka saboot yeh hai kay char martaba Allah ki qasam kha ker kahen kay woh sachon mein say hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग अपनी बीवी पर इल्जाम लगाएं और उनके पास खुद उनके अपने सिवा दूसरे कोई गवाह न हो तो उनमें से एक शक्स की शहादत (ये है के वो) चार मरतबा अल्लाह की कसम खा कर गवाही दे के वो (अपने इल्ज़म में) सच्चा है
عَرَبِيوَالخامِسَةُ أَنَّ لَعنَتَ اللَّهِ عَلَيهِ إِن كانَ مِنَ الكاذِبينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और पाँचवीं बार यह (कहे) कि उसपर अल्लाह की धिक्कार हो, यदि वह झूठों में से हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur panchwi (fifth) baar kahey ke uspar Allah ki lanat ho agar woh (apne ilzaam mein) jhoota ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur paanchwen martaba kahey kay uss per Allah ki lanat ho agar woh jhooton mein say ho
Devnagri Urdu (Maududi)और पंचवी (पांचवीं) बार कहे के उसपर अल्लाह की लानत हो अगर वो (अपने) इल्ज़ाम में) झूठा हो
عَرَبِيوَيَدرَأُ عَنهَا العَذابَ أَن تَشهَدَ أَربَعَ شَهاداتٍ بِاللَّهِ ۙ إِنَّهُ لَمِنَ الكاذِبينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उस (स्त्री) से दंड को यह बात हटाएगी कि वह अल्लाह की क़सम खाकर चार बार गवाही दे कि निःसंदेह वह (व्यक्ति) झूठों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Aur aurat se saza is tarah tal sakti hai ke woh char martaba Allah ki kasam kha kar shahadat dey ke yeh shaks (apne ilzam mein) jhoota hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss aurat say saza iss tarah door hosakti hai kay woh char martaba Allah ki qasam kha ker kahey kay yaqeenan iss ka mard jhoot bolney walon mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)और औरत से सज़ा इस तरह तल सकती है के वो चार मरतबा अल्लाह की कसम खा कर शहादत दे के ये शक्स (अपने इल्ज़ाम में) झूठा है
عَرَبِيوَالخامِسَةَ أَنَّ غَضَبَ اللَّهِ عَلَيها إِن كانَ مِنَ الصّادِقينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और पाँचवीं बार यह (कहे) कि उसपर अल्लाह का प्रकोप हो, यदि वह (व्यक्ति) सच्चों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Aur panchwi martaba kahey ke us bandi par Allah ka gazab totay agar woh (apne ilzam mein) saccha ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur paanchwen dafa kahey kay uss per Allah Taalaa ka azab ho agar uss ka khawind sachon mein say ho
Devnagri Urdu (Maududi)और पांचवी मरतबा कहे के हमें बंदी पर अल्लाह का गजब तोते अगर वो (अपने) इल्ज़म में) सच्चा हो
عَرَبِيوَلَولا فَضلُ اللَّهِ عَلَيكُم وَرَحمَتُهُ وَأَنَّ اللَّهَ تَوّابٌ حَكيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुमपर अल्लाह का अनुग्रह और उसकी दया न होती और यह कि अल्लाह बहुत तौबा स्वीकार करने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है (तो झूठे को दुनिया ही में सज़ा मिल जाती)।
Roman Urdu (Maududi)Tum logon par Allah ka fazl aur uska reham na hota aur yeh baat na hoti ke Allah bada iltifaat (most forgiving) farmane wala aur hakeem hai, to (biwiyon par ilzam ka maamla tumhein badi pechidgi mein daal deta)
Roman Urdu (Junagarhi)Agar Allah Taalaa ka fazal-o-karam tum per na hota (to tum per mushaqqat utarti) aur Allah Taalaa toba qabool kerney wala ba-hikmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम लोगों पर अल्लाह का फ़ज़ल और उसका रहम न होता और ये बात न होती के अल्लाह बड़ा इल्तिफ़ात (सबसे क्षमा करने वाला) फ़रमाने वाला और हकीम है, तो (बीवियों पर इल्ज़म का मामला तुम्हें बड़ी मुश्किल में डाल देता)
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ جاءوا بِالإِفكِ عُصبَةٌ مِنكُم ۚ لا تَحسَبوهُ شَرًّا لَكُم ۖ بَل هُوَ خَيرٌ لَكُم ۚ لِكُلِّ امرِئٍ مِنهُم مَا اكتَسَبَ مِنَ الإِثمِ ۚ وَالَّذي تَوَلّىٰ كِبرَهُ مِنهُم لَهُ عَذابٌ عَظيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग झूठ गढ़ लाए हैं, वे तुम्हारे ही भीतर के एक समूह हैं। तुम उसे अपने लिए बुरा मत समझो, बल्कि वह तुम्हारे लिए बेहतर है। उनमें से प्रत्येक आदमी के लिए गुनाह में से उतना ही भाग है, जितना उसने कमाया। और उनमें से जो उसके बड़े भाग का ज़िम्मेदार बना, उसके लिए बहुत बड़ी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log yeh bohtan (slander) ghadh laye hain woh tumhare hi andar ka ek tola hain. Is waqiye ko apne haqq mein sharr na samajho balke yeh bhi tumhare liye khair hi hai. Jisne is mein jitna hissa liya usne utna hi gunaah sametha aur jis shaks ne iski zimmedari ka bada hissa apne sar liya uske liye to azaab e azeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log yeh boht bara bohtan bandh laye hain yeh bhi tum mein say hi aik giroh hai. Tum issay apnay liye bura na samjho bulkay yeh to tumharay haq mein behtar hai. Haan inn mein say her aik shaks per itna gunah hai jitna uss ney kamaya hai aur inn mein say jiss ney iss kay boht baray hissay ko sir anjam diya hai uss kay liye azab bhi boht hi bara hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ये बोहतान (निंदा) गड़बड़ लाए हैं वो तुम्हारे ही अंदर का एक तोला है। क्या वक़िये को अपने हक में शरर ना समझो बल्के ये भी तुम्हारे लिए खैर ही है। जिसने इस में जितना हिसा लिया, उसने उतना ही गुनाह समथा और जिस शक्स ने इसकी जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा अपने सारा लिया उसके लिए तो अज़ाब ए अज़ीम है
عَرَبِيلَولا إِذ سَمِعتُموهُ ظَنَّ المُؤمِنونَ وَالمُؤمِناتُ بِأَنفُسِهِم خَيرًا وَقالوا هٰذا إِفكٌ مُبينٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्यों न जब तुमने उसे सुना, तो ईमान वाले पुरुषों तथा ईमान वाली स्त्रियों ने अपने बारे में अच्छा गुमान किया और कहा कि यह स्पष्ट मिथ्यारोपण है?
Roman Urdu (Maududi)Jis waqt tum logon ne isey suna tha usi waqt kyun na momin mardon aur momin auraton ne apne aap se neik gumaan kiya aur kyun na kehdiya ke yeh sareeh bohtan (slander) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Issay suntay hi momin mard-o-aurton ney apnay haq mein nek gumani kiyon na ki aur kiyon na keh diya kay yeh to khullam khulla sareeh bohtan hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिस वक्त तुम लोगों ने इसे सुना था उसका वक्त क्यों ना मोमिन मर्दन और मोमिन औरतों ने अपने आप से नीक गुमान किया और क्यों ना केहदिया के ये सारी बोहतन (बदनामी) है
عَرَبِيلَولا جاءوا عَلَيهِ بِأَربَعَةِ شُهَداءَ ۚ فَإِذ لَم يَأتوا بِالشُّهَداءِ فَأُولٰئِكَ عِندَ اللَّهِ هُمُ الكاذِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे इसपर चार गवाह क्यों न लाए? फिर जब वे गवाह नहीं लाए, तो निःसंदेह अल्लाह के निकट वही झूठे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh log (apne ilzam ke saboot mein) char gawah kyun na laye? Ab ke woh gawah nahin laye hain, Allah ke nazdeek wahi jhootey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh iss per char gawah kiyon na laye? Aur jab gawah nahi laye to yeh bohtan baaz log yaqeenan Allah kay nazdeek mehaz jhootay hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो लोग (अपने इल्ज़म के सबूत में) चार गवाह क्यों ना लाए? अब के वो गवाह नहीं लाए हैं, अल्लाह के नज़रिए वही झूठे हैं
عَرَبِيوَلَولا فَضلُ اللَّهِ عَلَيكُم وَرَحمَتُهُ فِي الدُّنيا وَالآخِرَةِ لَمَسَّكُم في ما أَفَضتُم فيهِ عَذابٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुमपर दुनिया एवं आख़िरत में अल्लाह का अनुग्रह और उसकी दया न होती, तो निश्चय उस बात के कारण जिसमें तुम पड़ गए, तुमपर बहुत बड़ी यातना आ जाती।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum logon par duniya aur aakhirat mein Allah ka fazal aur reham o karam na hota to jin baaton mein tum padh gaye thay unki padash mein bada azaab tumhein aa leta
Roman Urdu (Junagarhi)Agar Allah Taalaa ka fazal-o-karam tum per duniya aur aakhirat mein na hota to yaqeenan tum ney jiss baat kay charchay shuroo ker rakhay thay iss baray mein tumhen boht bara azab phonchta
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम लोगों पर दुनिया और आख़िरत में अल्लाह का फ़ज़ल और रहम ओ करम न होता तो जिन बातों में तुम पढ़ गए थे उनकी याद में बड़ा अज़ाब तुम्हें आ लेता
عَرَبِيإِذ تَلَقَّونَهُ بِأَلسِنَتِكُم وَتَقولونَ بِأَفواهِكُم ما لَيسَ لَكُم بِهِ عِلمٌ وَتَحسَبونَهُ هَيِّنًا وَهُوَ عِندَ اللَّهِ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जब तुम इसे एक-दूसरे से अपनी ज़बानों के साथ ले रहे थे और अपने मुँहों से वह बात कह रहे थे, जिसका तुम्हें कोई ज्ञान नहीं तथा तुम इसे साधारण समझते थे, हालाँकि वह अल्लाह के निकट बहुत बड़ी थी।
Roman Urdu (Maududi)(Zara gaur to karo, us waqt tum kaisi sakht galati kar rahey thay) jabke tumhari ek zubaan se dusri zubaan is jhoot ko leti chali jaa rahi thi aur tum apne mooh se woh kuch kahey jaa rahey thay jiske mutaalik tumhein koi ilm na tha. Tum isey ek mamuli baat samajh rahey thay, halanke Allah ke nazdeek yeh badi baat thi
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay tum issay apni zabano say naqal dar naqal kerney lagay aur apnay mun say woh baat nikalney lagay jiss ki tumhen mutlaq khabar na thi go tum issay halki baat samajhtay rahey lekin Allah Taalaa kay nazdeek woh boht bari baat thi
Devnagri Urdu (Maududi)(जरा गौर तो करो, हमें वक्त तुम कैसी गलती कर रहे थे) जबके तुम्हारी एक जुबान से दूसरी जुबान इस झूठ को लेती चली जा रही थी और तुम अपने मुंह से वो कुछ कह जा रहे थे, जिसका मुतालिक तुम्हें कोई इल्म था ना था. तुम इसे एक मामुली बात समझ रहे थे, हालंके अल्लाह के नज़दीक ये बड़ी बात थी
عَرَبِيوَلَولا إِذ سَمِعتُموهُ قُلتُم ما يَكونُ لَنا أَن نَتَكَلَّمَ بِهٰذا سُبحانَكَ هٰذا بُهتانٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब तुमने इसे सुना, तो क्यों नहीं कहा : हमारे लिए उचित नहीं है कि हम यह बात बोलें? (ऐ अल्लाह!) तू पवित्र है! यह तो बहुत बड़ा आरोप है।
Roman Urdu (Maududi)Kyun na usey sunte hi tumne kehdiya “humein aisi baat zubaan se nikalna zeib nahin deta, Subhan Allah , yeh to ek bohtan e azeem hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Tum ney aisi baat ko suntay hi kiyon na keh diya kay humen aisi baat mun say nikalni bhi laeeq nahi. Ya-Allah! Tu pak hai yeh to boht bara bohtan hai aur tohmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्यों ना उसे सुनते ही तुमने कहादिया "हमें ऐसी बात ज़ुबान से निकलना ज़ीब नहीं देता, सुभान अल्लाह, ये तो एक बोहतन ए अज़ीम है"
عَرَبِييَعِظُكُمُ اللَّهُ أَن تَعودوا لِمِثلِهِ أَبَدًا إِن كُنتُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह तुम्हें नसीहत करता है कि पुनः कभी ऐसा न करना, यदि तुम ईमान वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Allah tumko naseehat karta hai ke aainda kabhi aisi harakat na karna agar tum momin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa tumhen naseehat kerta hai kay phir kabhi bhi aisa kaam na kerna agar tum sachay momin ho
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह तुमको हिदायत करता है कि आंदा कभी ऐसी हरकत न करना अगर तुम मोमिन हो
عَرَبِيوَيُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الآياتِ ۚ وَاللَّهُ عَليمٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह तुम्हारे लिए आयतें खोलकर बयान करता है तथा अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah tumhein saaf saaf hidayaat deta hai aur woh aleem o hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa tumharay samney apni aayaten biyan farma raha hai aur Allah Taalaa ilm-o-hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह तुम्हें साफ साफ हिदायत देता है और वह आलिम ओ हकीम है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يُحِبّونَ أَن تَشيعَ الفاحِشَةُ فِي الَّذينَ آمَنوا لَهُم عَذابٌ أَليمٌ فِي الدُّنيا وَالآخِرَةِ ۚ وَاللَّهُ يَعلَمُ وَأَنتُم لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग चाहते हैं कि ईमान वालों के अंदर अश्लीलता फैले, उनके लिए दुनिया एवं आख़िरत में दुःखदायी यातना है, तथा अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Jo log chahte hain ke iman laney walon ke giroh mein fahash (indecency) phayle woh duniya aur aakhirat mein dardnaak saza ke musthaq hain. Allah jaanta hai aur tum nahin jaante
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log musalmano mein bay hayaee phelaney kay aarzoo mand rehtay hain unn kay liye duniya aur aakhirat mein dard-naak azab hain Allah sab kuch janta hai aur tum kuch bhi nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग चाहते हैं के ईमान लाने वालों के गिरोह में फ़हाश (अभद्रता) फ़ैले वो दुनिया और आख़िरत मैं दर्दनाक सज़ा के मुस्तक हूँ। अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते
عَرَبِيوَلَولا فَضلُ اللَّهِ عَلَيكُم وَرَحمَتُهُ وَأَنَّ اللَّهَ رَءوفٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुमपर अल्लाह का अनुग्रह तथा उसकी दया न होती, और यह कि अल्लाह अत्यंत करुणामय, असीम दयावान् है (तो आरोप लगाने वालों पर तुरंत यातना आ जाती)
Roman Urdu (Maududi)Agar Allah ka fazal aur uska reham o karam tumpar na hota aur yeh baat na hoti ke Allah bada shafeeq o raheem hai (to yeh cheez jo abhi tumhare andar phailayi gayi thi badtareen nataij dikha deti)
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum per Allah Taalaa ka fazal aur uss ki rehmat na hoti aur yeh bhi kay Allah Taalaa bari shafqat rakhney wala meharban hai. (to tum per azab utar jata)
Devnagri Urdu (Maududi)अगर अल्लाह का फज़ल और उसका रहम ओ करम तुमपर न होता और ये बात न होती के अल्लाह बड़ा शफीक ओ रहीम है (तो ये चीज जो अभी तुम्हारे अंदर फैल गई थी बद्तरीन नताइज दिखा देती)
عَرَبِي۞ يا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَتَّبِعوا خُطُواتِ الشَّيطانِ ۚ وَمَن يَتَّبِع خُطُواتِ الشَّيطانِ فَإِنَّهُ يَأمُرُ بِالفَحشاءِ وَالمُنكَرِ ۚ وَلَولا فَضلُ اللَّهِ عَلَيكُم وَرَحمَتُهُ ما زَكىٰ مِنكُم مِن أَحَدٍ أَبَدًا وَلٰكِنَّ اللَّهَ يُزَكّي مَن يَشاءُ ۗ وَاللَّهُ سَميعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! शैतान के पदचिह्नों पर न चलो और जो शैतान के पदचिह्नों पर चले, तो वह तो अश्लीलता तथा बुराई का आदेश देता है। और यदि तुमपर अल्लाह का अनुग्रह और उसकी दया न होती, तो तुममें से कोई भी कभी पवित्र न होता। परंतु अल्लाह जिसे चाहता है, पवित्र करता है, और अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, shaytan ke nakshe qadam par na chalo, uski pairwi (jo) koi karega to woh usey fahash (indecency) aur badi (wickedness) hi ka hukum dega.Agar Allah ka fazal aur uska reham o karam tumpar na hota to tum mein se koi shaks paak na ho sakta, magar Allah hi jisey chahta hai paak kardeta hai, aur Allah sunnay wala aur jaanney wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)eman walo! Shetan kay qadam-ba-qadam na chalo. Jo shaks shetani qadmon ki pairwee keray to woh to bey hayaee aur buray kaamon ka hi hukum keray ga. Aur agar Allah Taalaa ka fazal-o-karam tum per na hota to tum mein say koi bhi kabhi bhi pak saaf na hota. Lekin Allah Taalaa jissay pak kerna chahaye ker deta hai aur Allah sab sunnay wala sab jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, शैतान के नक्शे कदम पर ना चलो, उसकी जोड़ी (जो) कोई करेगा तो वो उसे फहाश (अभद्रता) और बदी (दुष्टता) हाय का हुकुम देगा। अगर अल्लाह का फजल और उसका रहम ओ करम तुमपर ना होता तो तुम में से कोई शक पाक ना हो सकता, मगर अल्लाह हाय जिसे चाहता है पाक करता है है, और अल्लाह सुन्ने वाला और जाने वाला है
عَرَبِيوَلا يَأتَلِ أُولُو الفَضلِ مِنكُم وَالسَّعَةِ أَن يُؤتوا أُولِي القُربىٰ وَالمَساكينَ وَالمُهاجِرينَ في سَبيلِ اللَّهِ ۖ وَليَعفوا وَليَصفَحوا ۗ أَلا تُحِبّونَ أَن يَغفِرَ اللَّهُ لَكُم ۗ وَاللَّهُ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुममें से प्रतिष्ठा और विस्तार वाले (धनी) लोग, नातेदारों और निर्धनों और अल्लाह की राह में हिजरत करने वालों को देने से क़सम न खा लें। और उन्हें चाहिए कि क्षमा कर दें तथा जाने दें! क्या तुम पसंद नहीं करते कि अल्लाह तुम्हें क्षमा कर दे?! और अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Tum mein se jo log saahib e fazal (bountiful) aur saahib e maqdarat (means) hain woh is baat ki kasam na kha baithein ke apne rishtedar, miskeen aur muhajir-fi-sabeelillah (who have left their homes for the cause of Allah) logon ki madad na karenge. Unhein maaf kardena chahiye aur darguazar karna chahiye. Kya tum nahin chahte ke Allah tumhein maaf karey? Aur Allah ki siffat yeh hai ke woh gafoor aur raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum mein say jo buzurgi aur kushadgi walay hain unhen apnay qarabat daron aur miskeeno aur mohajiron ko fi sabeelillah denay say qasam na kha leni chahaye bulkay moaf ker dena aur dar-guzar ker lena chahaye. Kiya tum nahi chahtay kay Allah Taalaa tumharay qasoor moaf farma dey? Allah qasooron ko moaf farmaney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम में से जो लोग साहब ए फज़ल (भरपूर) और साहिब ए मक़दरत (मतलब) हैं वो इस बात की कसम न खा बैठें के अपने रिश्तेदार, मिस्कीन और मुहाजिर-फि-सबीलिल्लाह (जिन्होंने अल्लाह की राह के लिए अपने घर छोड़ दिए हैं) लोगों की मदद ना करेंगे. उन्हें माफ करना चाहिए और अपराध करना चाहिए। क्या तुम नहीं चाहते कि अल्लाह तुम्हें माफ करे? और अल्लाह की सिफत ये है के वो गफूर और रहीम है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يَرمونَ المُحصَناتِ الغافِلاتِ المُؤمِناتِ لُعِنوا فِي الدُّنيا وَالآخِرَةِ وَلَهُم عَذابٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग सच्चरित्रा, भोली-भाली ईमान वाली स्त्रियों पर आरोप लगाते हैं, वे दुनिया एवं आख़िरत में धिक्कार दिए गए और उनके लिए बड़ी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log paak daaman, be-khabar, momin auraton par tohmatein (slandering) lagate hain unpar duniya aur aakhirat mein laanat ki gayi aur unke liye bada azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log pak daman bholi bhali ba-emaan aurton per tohmat lagatay hain woh duniya-o-aakhirat mein malaoon hain aur unn kay liye bara bhari azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग पाक दामन, बे-खबर, मोमिन औरतों पर तोहमतें (बदनामी) लगाते हैं अनपार दुनिया और आख़िरत में लानत की गई और उनके लिए बड़ा अज़ाब है
عَرَبِييَومَ تَشهَدُ عَلَيهِم أَلسِنَتُهُم وَأَيديهِم وَأَرجُلُهُم بِما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन उनकी ज़बानें, उनके हाथ और उनके पैर, उनके विरुद्ध उसकी गवाही देंगे, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Woh us din ko bhool na jayein jabke unki apni zubaanein aur unke apne haath paon unke kartooton ki gawahi dengey
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay unn kay muqablay mein unn ki zabaney aur unn kay hath paon unn kay aemaal ki gawahee den gay
Devnagri Urdu (Maududi)वो उस दिन को भूल ना जाएं जबके उनकी अपनी जुबानें और उनके अपने हाथ पांव उनके कार्टूनों की गवाही देंगे
عَرَبِييَومَئِذٍ يُوَفّيهِمُ اللَّهُ دينَهُمُ الحَقَّ وَيَعلَمونَ أَنَّ اللَّهَ هُوَ الحَقُّ المُبينُ
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन अल्लाह उन्हें उनका न्यायपूर्ण बदला पूरा-पूरा देगा तथा वे जान लेंगे कि अल्लाह ही सत्य, (तथा सच को) उजागर करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Us din Allah woh badla unhein bharpur de dega jiske woh mustahiq hain aur unhein maloom ho jayega ke Allah hi haqq hai. Sach ko sach kar dikhane wala
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din Allah Taalaa unhen poora poora badla haq-o-insaf kay sath dey ga aur woh jaan len gay kay Allah Taalaa hi haq hai (aur wohi) zahir kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)उस दिन अल्लाह वो बदला उन्हें भरपुर दे देगा जिसका वो मुस्तहिक हैं और उन्हें मालूम हो जाएगा के अल्लाह ही हक है। सच को सच कर दिखाने वाला
عَرَبِيالخَبيثاتُ لِلخَبيثينَ وَالخَبيثونَ لِلخَبيثاتِ ۖ وَالطَّيِّباتُ لِلطَّيِّبينَ وَالطَّيِّبونَ لِلطَّيِّباتِ ۚ أُولٰئِكَ مُبَرَّءونَ مِمّا يَقولونَ ۖ لَهُم مَغفِرَةٌ وَرِزقٌ كَريمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अपवित्र स्त्रियाँ, अपवित्र पुरुषों के लिए हैं तथा अपवित्र पुरुष, अपवित्र स्त्रियों के लिए हैं। और पवित्र स्त्रियाँ, पवित्र पुरुषों के लिए हैं तथा पवित्र पुरुष, पवित्र स्त्रियों के लिए हैं। ये लोग उससे बरी किए हुए हैं, जो वे कहते हैं। इनके लिए बड़ी क्षमा तथा सम्मान वाली जीविका है।
Roman Urdu (Maududi)Khabees (Impure) auratein khabees mardon ke liye hain aur khabees (Impure) mard khabees (Impure) auraton ke liye. Paakeeza auratein pakeeza mardon ke liya hain aur pakeeza mard pakeeza auraton ke liye. Unka daaman paak hai un baaton se jo banane waley banate hain. Unke liye magfirat hai aur rizq e kareem
Roman Urdu (Junagarhi)Khabees aurten khabees mardon kay laeeq hain aur khabees mard khabees aurton kay laeeq hain aur pak aurten pak mardon kay laqeeq hain aur pak mard pak aurton kay laeeq hain. Aisay pak logon kay mutalliq jo kuch bakwas (bohtan baaz) ker rahey hain woh inn say bilkul bari hain inn kay liye bakhsish hai aur izzat wali rozi
Devnagri Urdu (Maududi)खबीस (अशुद्ध) औरतें खबीस मर्दों के लिए हैं और खबीस (अशुद्ध) मर्द खबीस (अशुद्ध) औरतों के लिए। पाकीज़ा औरतें पाकीज़ा मर्दों के लिए हैं और पाकीज़ा मर्द पाकीज़ा मर्दों के लिए। उनका दामन पाक है उन बातों से जो बनने वाले बनते हैं। उनके लिए मगफिरत है और रिज़क ए करीम
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَدخُلوا بُيوتًا غَيرَ بُيوتِكُم حَتّىٰ تَستَأنِسوا وَتُسَلِّموا عَلىٰ أَهلِها ۚ ذٰلِكُم خَيرٌ لَكُم لَعَلَّكُم تَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अपने घरों के सिवा अन्य घरों में प्रवेश न करो, यहाँ तक कि अनुमति ले लो और उनके रहने वालों को सलाम कर लो। यह तुम्हारे लिए उत्तम है, ताकि तुम याद रखो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, apne gharon ke siwa dusre gharon mein daakhil na hua karo jab tak ke ghar walon ki raza (ijazat) na lelo aur ghar walon par salaam na bhej lo. Yeh tareeqa tumhare liye behtar hai, tawakku hai ke tum iska khayal rakkhoge
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Apnay gharon kay siwa aur gharon mein na jao jab tak kay ijazat na ley lo aur wahan kay rehney walon ko salam na kerlo yehi tumharay liye sara sir behtar hai takay tum naseehat hasil kero
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपने घरों के सिवा दूसरे घरों में दाखिल ना हुआ करो जब तक के घर वालों की रजा (इजाजत) ना लेलो और घर वालों पर सलाम ना भेज लो। ये तरीक़ा तुम्हारे लिए बेहतर है, तवक्कू है के तुम इसका ख्याल रखोगे
عَرَبِيفَإِن لَم تَجِدوا فيها أَحَدًا فَلا تَدخُلوها حَتّىٰ يُؤذَنَ لَكُم ۖ وَإِن قيلَ لَكُمُ ارجِعوا فَارجِعوا ۖ هُوَ أَزكىٰ لَكُم ۚ وَاللَّهُ بِما تَعمَلونَ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि तुम उनमें किसी को न पाओ, तो उनमें प्रवेश न करो, यहाँ तक कि तुम्हें अनुमति दे दी जाए। और यदि तुमसे कहा जाए कि वापस हो जाओ, तो वापस हो जाओ। यह तुम्हारे लिए अधिक पवित्र है। तथा अल्लाह जो कुछ तुम करते हो, उसे भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Phir agar wahan kisi ko na pao to daakhil na ho jabtak ke tumko ijazat na de di jaye, aur agar tumse kaha jaye ke wapas chale jao to wapas ho jao. Yeh tumhare liye zyada paakeeza tareeqa hai, aur jo kuch tum karte ho Allah usey khoob jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar wahan tumhen koi bhi na mill sakay to phir ijazat milay baghair andar na jao. Aur agar tum say lot janey ko kaha jaye to tum lot hi jao yehi baat tumharay liye pakeeza hai jo kuch tum ker rahey ho Allah Taalaa khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अगर वहां किसी को ना पाओ तो दाख़िल ना हो जबतक के तुमको इजाज़त ना दे दी जाए, और अगर तुमसे कहा जाए के वापस चले जाओ तो वापस हो जाओ। ये तुम्हारे लिए ज़्यादा पाकीज़ा तरीक़ा है, और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे खूब जानता है
عَرَبِيلَيسَ عَلَيكُم جُناحٌ أَن تَدخُلوا بُيوتًا غَيرَ مَسكونَةٍ فيها مَتاعٌ لَكُم ۚ وَاللَّهُ يَعلَمُ ما تُبدونَ وَما تَكتُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुमपर कोई दोष नहीं कि उन घरों में प्रवेश करो, जिनमें कोई न रहता हो, जिनमें तुम्हारे लाभ की कोई चीज़ हो। और अल्लाह जानता है, जो तुम प्रकट करते हो और जो तुम छिपाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Albatta tumhare liye ismein koi muzahiqa (harm) nahin hai ke aisey gharon mein dakhil ho jao jo kisi ke rehne ki jagah na hon, aur jinmein tumhare faiyde (ya kaam) ki koi cheez ho, tum jo kuch zaahir karte ho aur jo kuch chupate ho sab ki Allah ko khabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Haan ghair abad gharon mein jahan tumhara koi faeeda ya asbaab ho janey mein tum per koi gunah nahi. Tum jo kuch bhi zahir kertay ho aur jo chupatay ho Allah Taalaa sab kuch janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता तुम्हारे लिए इसमें कोई मुज़ाहिक़ा (नुकसान) नहीं है के ऐसे घरों में दखल हो जाओ जो किसी के रहने की जगह न हो, और जिनमें तुम्हारे फ़ैयदे (या काम) की कोई चीज़ हो, तुम जो कुछ ज़ाहिर करते हो और जो कुछ छुपाते हो सब कि अल्लाह को खबर है
عَرَبِيقُل لِلمُؤمِنينَ يَغُضّوا مِن أَبصارِهِم وَيَحفَظوا فُروجَهُم ۚ ذٰلِكَ أَزكىٰ لَهُم ۗ إِنَّ اللَّهَ خَبيرٌ بِما يَصنَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप ईमान वाले पुरुषों से कह दें कि अपनी निगाहें नीची रखें और अपने गुप्तांगों की रक्षा करें। यह उनके लिए अधिक पवित्र है। निःसंदेह अल्लाह उससे पूरी तरह अवगत है, जो वे करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, momin mardon se kaho ke apni nazarein bacha kar rakkhein aur apni sharm-gaahon ki hifazat karein, yeh unke liye zyada paakeeza tareeqa hai. Jo kuch woh karte hain Allah ussey bakhabar rehta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Musalman mardon say kaho apni nigahen neechi rakhen aur apni sharam gahon ki hifazat rakhen. Yeh hi unn kay liye pakeezgi hai log jo kuch keren Allah Taalaa sab say khabra daar hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, मोमिन मर्दों से कहो के अपनी नज़रें बचा कर रखें और अपनी शर्म-गाहों की हिफ़ाज़त करें, ये उनके लिए ज़्यादा paakeeza tareeqa hai. जो कुछ वो करते हैं अल्लाह उसे बाख़बर रहता है
عَرَبِيوَقُل لِلمُؤمِناتِ يَغضُضنَ مِن أَبصارِهِنَّ وَيَحفَظنَ فُروجَهُنَّ وَلا يُبدينَ زينَتَهُنَّ إِلّا ما ظَهَرَ مِنها ۖ وَليَضرِبنَ بِخُمُرِهِنَّ عَلىٰ جُيوبِهِنَّ ۖ وَلا يُبدينَ زينَتَهُنَّ إِلّا لِبُعولَتِهِنَّ أَو آبائِهِنَّ أَو آباءِ بُعولَتِهِنَّ أَو أَبنائِهِنَّ أَو أَبناءِ بُعولَتِهِنَّ أَو إِخوانِهِنَّ أَو بَني إِخوانِهِنَّ أَو بَني أَخَواتِهِنَّ أَو نِسائِهِنَّ أَو ما مَلَكَت أَيمانُهُنَّ أَوِ التّابِعينَ غَيرِ أُولِي الإِربَةِ مِنَ الرِّجالِ أَوِ الطِّفلِ الَّذينَ لَم يَظهَروا عَلىٰ عَوراتِ النِّساءِ ۖ وَلا يَضرِبنَ بِأَرجُلِهِنَّ لِيُعلَمَ ما يُخفينَ مِن زينَتِهِنَّ ۚ وَتوبوا إِلَى اللَّهِ جَميعًا أَيُّهَ المُؤمِنونَ لَعَلَّكُم تُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और ईमान वाली स्त्रियों से कह दें कि अपनी निगाहें नीची रखें और अपने गुप्तांगों की रक्षा करें। और अपने श्रृंगार का प्रदर्शन न करें, सिवाय उसके जो उसमें से प्रकट हो जाए। तथा अपनी ओढ़नियाँ अपने सीनों पर डाले रहें। और अपने श्रृंगार को ज़ाहिर न करें, परंतु अपने पतियों के लिए, या अपने पिताओं, या अपने पतियों के पिताओं, या अपने बेटों, या अपने पतियों के बेटों, या अपने भाइयों, या अपने भतीजों, या अपने भाँजों, या अपनी स्त्रियों, या अपने दास-दासियों, या अधीन रहने वाले पुरुषों के लिए जो कामवासना वाले नहीं, या उन लड़कों के लिए जो स्त्रियों की पर्दे की बातों से परिचित नहीं हुए। तथा अपने पैर (धरती पर) न मारें, ताकि उनका वह श्रृंगार मालूम हो जाए, जो वह छिपाती हैं। और ऐ ईमान वालो! तुम सब अल्लाह से तौबा करो, ताकि तुम सफल हो जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Nabi),momin auraton se kehdo ke apni nazrein bacha kar rakkhein, aur apni sharmgaahon ki hifazat karein, aur apna banao singhaar na dikhayein bajuz uske jo khud zaahir ho jaaye, aur apne seeno par apni oadniyon ke aanchal daale rahein, woh apna banaao singhar na zaahir karein magar in logon ke saamne: shohar ,baap, shoharon ke baap , apne betay, shoharon ke betay, bhai,bhaiyon ke betay, behno ke betay,apne mail-jhol ki auratein, apne mamluk(those in their possession), woh zeir-dast mard jo kisi aur qisam ki garz na rakhte hon, aur woh bacchey jo auraton ki posheeda baaton se abhi waqif na huey hon. Woh apne paon zameen par maarti hui na chala karein ke apni jo zeenat unhon ne chupa rakkhi ho uska logon ko ilm ho jaye. Aey momino, tum sab milkar Allah se toubah karo, tawaqqu hai ke falaah paogey
Roman Urdu (Junagarhi)Musalman aurton say kaho kay woh bhi apni nigahen neechi rakhen aur apni ismat mein farq na aaney den aur apni zeenat ko zahir na keren siwaye uss kay hi zahir hai aur apnay girbano per apni orhniyan dalay rahen aur apni aaraeesh ko kissi kay samney zahir na kerensiwaye apnay khawindo kay ya apnay walid kay ya apnay khusar kay ya apnay larkon kay ya apnay khawind kay larkon kay ya apnay bhaiyon kay ya apnay bhatijon kay ya apnay bhanjon kay ya apnay mail jol ki aurton kay ya ghulamon kay ya aisay naukar chaakar mardon kay jo shewat walay na hon ya aisay bachon kay jo aurton kay parday ki baaton kay baray mein mutlaa nahi.aur iss tarah zor zor say paon maar ker na chalen kay unn ki posheeda zeenat maloom ho jaye aey musalmano! Tum sab kay sab Allah ki janab mein toba kero takay tum nijat pao
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ नबी), मोमिन औरतों से कहदो के अपनी नजरें बचा कर रखें, और अपनी शर्मगाहों की हिफाजत करें, और अपना बनाओ सिंघार ना दिखायें बाजुज उसे जो खुद जाहिर हो जाए, और अपने सीनो पर अपनी ओढ़नियों के आंचल डाले रहें, वो अपना बनाओ सिंघार न जाहिर करें मगर लोगों के सामने: शोहर, बाप, शोहरों के बाप, अपने बेटे, शोहरों के बेटे, भाई, भाइयों के बेटे, बहनों के बेटे, अपने मेल-झोल की औरतें, अपने ममलुक (जो उनके कब्जे में हैं), वो ज़िर-दस्त मर्द जो किसी और क़िस्म की ग़रज़ ना रखते हों, और वो बचे जो औरतों की पोशीदा बातों से अभी वाकिफ़ ना हुए हों। वो अपने पांव ज़मीन पर मरती हुई ना चला करें के अपनी जो ज़ीनत उनहों ने छुपा रखी है उसका लोगों को इल्म हो जाए। ऐ मोमिनो, तुम सब मिलकर अल्लाह से तौबा करो, तवक्कु है के फलाह पाओगे
عَرَبِيوَأَنكِحُوا الأَيامىٰ مِنكُم وَالصّالِحينَ مِن عِبادِكُم وَإِمائِكُم ۚ إِن يَكونوا فُقَراءَ يُغنِهِمُ اللَّهُ مِن فَضلِهِ ۗ وَاللَّهُ واسِعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम अपने में से अविवाहित पुरुषों तथा स्त्रियों का निकाह कर दो, और अपने दासों और अपनी दासियों में से जो सदाचारी हैं उनका भी (विवाह कर दो)। यदि वे निर्धन होंगे, तो अल्लाह उन्हें अपने अनुग्रह से धनी बना देगा। और अल्लाह विस्तार वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Tum mein se jo log mujarrad (single) hon aur tumhare laundi ghulamon mein se jo saaleh hon, unke nikah kardo. Agar woh gareeb hon to Allah apne fazal se unko gani kardega. Allah badi wusat (boundless resources) wala aur aleem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum mein say jo mard-o-aurat bey nikah kay hon unn ka nikah ker do aur apnay nek bakht ghulamon aur londiyon ka bhi agar woh muflis bhi hongay to Allah Taalaa unhen apnay fazal say ghani ker bana dey ga. Allah Taalaa kushadgi wala aur ilm wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम में से जो लोग मुजर्रद (सिंगल) हो और तुम्हारी लौंडी गुलामों में से जो साले होन, उनका निकाह करदो। अगर वो गरीब है तो अल्लाह अपने फजल से उनको गनी कर देगा। अल्लाह बदी वुसत (असीमित संसाधन) वाला और अलीम है
عَرَبِيوَليَستَعفِفِ الَّذينَ لا يَجِدونَ نِكاحًا حَتّىٰ يُغنِيَهُمُ اللَّهُ مِن فَضلِهِ ۗ وَالَّذينَ يَبتَغونَ الكِتابَ مِمّا مَلَكَت أَيمانُكُم فَكاتِبوهُم إِن عَلِمتُم فيهِم خَيرًا ۖ وَآتوهُم مِن مالِ اللَّهِ الَّذي آتاكُم ۚ وَلا تُكرِهوا فَتَياتِكُم عَلَى البِغاءِ إِن أَرَدنَ تَحَصُّنًا لِتَبتَغوا عَرَضَ الحَياةِ الدُّنيا ۚ وَمَن يُكرِههُنَّ فَإِنَّ اللَّهَ مِن بَعدِ إِكراهِهِنَّ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन लोगों को (बहुत) पवित्र रहना चाहिए, जो विवाह का सामर्थ्य नहीं रखते, यहाँ तक कि अल्लाह उन्हें अपने अनुग्रह से समृद्ध कर दे। तथा तुम्हारे दास-दासियों में से जो लोग मुक्ति के लिए लेख की माँग करें, तो तुम उन्हें लिख दो, यदि तुम उनमें कुछ भलाई जानो। और उन्हें अल्लाह के उस माल में से दो, जो उसने तुम्हें प्रदान किया है। तथा अपनी दासियों को वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर न करो, यदि वे पवित्र रहना चाहें, ताकि तुम सांसारिक जीवन का सामान प्राप्त करो। और जो उन्हें मजबूर करेगा, तो निश्चय अल्लाह उनके मजबूर किए जाने के बाद, अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo nikah ka mauqa na paayein unhein chahiye ke iffat-maabi (continence/paak daamani) ikhtiyar karein, yahan tak ke Allah apne fazal se unko gani karde aur tumhare mamlukon mein (in your possession) se jo makatibat(emancipation) ki darkhwast karein unse makatibat karlo, agar tumhein maloom ho ke unke andar bhalayi hai, aur unko us maal mein se do jo Allah ne tumhein diya hai. Aur apni laundiyon (slave-girls ) ko apne duniyavi faiydon ki khatir qahba-gari (prostitution) par majboor na karo jabke woh khud paak daaman rehna chahti hon. Aur jo koi unko majboor karey to is jabr ke baad Allah unke liye gafoor o raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn logon ko pak daman rehna chahaye jo apna nikah kerney ka maqdoor nahi rakhtay yahan tak kay Allah Taalaa unhen apnay fazal say maal daar bana dey tumharay ghulamon mein say jo koi kuch tumhen dey ker azadi ki tehreer kerani chahaye to tum aisi tehreer unhen ker diya kero agar tum ko inn mein koi bhalaee nazar aati ho aur Allah ney jo maal tumhen dey rakha hai uss mein sya unhen bhi do tumhari jo londiyan pak daman rehna chahati hain unhen duniya ki zindagi kay faeeday ki gharaz say bad-kaari per majboor na kero aur jo unhen majboor ker dey to Allah Taalaa unn per jabar kay baad bakhsish denay wala aur meharbaani kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जो निकाह का मौका न पाए उन्हें चाहिए के इफ्फत-माबी (निरंतरता/पाक दामनी) इख्तियार करें, यहां तक ​​के अल्लाह अपने फजल से उनको गनी करदे और तुम्हारे ममलुकों में (तुम्हारे कब्जे में) से जो मकातिबात (मुक्ति) की अंधेरे में रहें उन्हें मकातिबात करलो, अगर तुम्हें मालूम हो कि उनको अंदर बुलाया है, और उनको हमारे माल में से दो जो अल्लाह ने तुम्हें दिया है। और अपनी लौंडियों (गुलाम-लड़कियों) को अपनी दुनिया फ़ायदों की खातिर क़हबा-गारी (वेश्यावृत्ति) पर मजबूर न करो जबके वो खुद पाक दामन रहना चाहती है। और जो कोई उनको मजबूर करे तो इस जब्र के बाद अल्लाह उनके लिए गफूर ओ रहीम है
عَرَبِيوَلَقَد أَنزَلنا إِلَيكُم آياتٍ مُبَيِّناتٍ وَمَثَلًا مِنَ الَّذينَ خَلَوا مِن قَبلِكُم وَمَوعِظَةً لِلمُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने तुम्हारी ओर स्पष्ट आयतें और तुमसे पहले गुज़रे हुए लोगों का उदाहरण और डरने वालों के लिए शिक्षा उतारी है।
Roman Urdu (Maududi)Humne saaf saaf hidayat dene wali aayat tumhare paas bhej di hain, aur un qaumon ki ibratnaak misalein bhi hum tumhare saamne pesh kar chuke hain jo tumse pehle ho guzri hain. Aur woh naseehatein humne kardi hain jo darne walon ke liye hoti hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney tumhari taraf khulli aur roshan aayaten utar di hain aur unn logon ki kahwaten jo tum say pehlay guzar chukay hain aur perhezgaron kay liye naseehat
Devnagri Urdu (Maududi)हमने साफ साफ हिदायत देने वाली आयतें तुम्हारे पास भेज दी हैं, और उन क़ौमों की इब्रातनाक मिसालें भी हम तुम्हारे सामने पेश कर चुके हैं जो तुमसे पहले हो गुज़रे हैं। और वो हिदायतें हमने कर दी हैं जो डरने वालों के लिए होती हैं
عَرَبِي۞ اللَّهُ نورُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ مَثَلُ نورِهِ كَمِشكاةٍ فيها مِصباحٌ ۖ المِصباحُ في زُجاجَةٍ ۖ الزُّجاجَةُ كَأَنَّها كَوكَبٌ دُرِّيٌّ يوقَدُ مِن شَجَرَةٍ مُبارَكَةٍ زَيتونَةٍ لا شَرقِيَّةٍ وَلا غَربِيَّةٍ يَكادُ زَيتُها يُضيءُ وَلَو لَم تَمسَسهُ نارٌ ۚ نورٌ عَلىٰ نورٍ ۗ يَهدِي اللَّهُ لِنورِهِ مَن يَشاءُ ۚ وَيَضرِبُ اللَّهُ الأَمثالَ لِلنّاسِ ۗ وَاللَّهُ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह आकाशों तथा धरती का प्रकाश है। उसके प्रकाश की मिसाल एक ताक़ की तरह है, जिसमें एक दीप है। वह दीप (काँच के) एक फानूस में है। वह फानूस गोया चमकता हुआ तारा है। वह (दीप) एक बरकत वाले वृक्ष 'ज़ैतून' (के तेल) से जलाया जाता है, जो न पूर्वी है और न पश्चिमी। उसका तेल निकट है कि (स्वयं) प्रकाश देने लगे, यद्यपि उसे आग ने न छुआ हो। प्रकाश पर प्रकाश है। अल्लाह अपने प्रकाश की ओर जिसका चाहता है, मार्गदर्शन करता है। और अल्लाह लोगों के लिए मिसालें प्रस्तुत करता है। और अल्लाह प्रत्येक चीज़ को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah aasmano aur zameen ka noor hai ( kayinaat mein) uske noor ki misaal aisi hai jaise ek taaq mein chiraag rakha hua ho,chiraag ek fanoos mein ho(in a glass shade), fanoos (glass shade) ka haal yeh ho ke jaise moti ki tarah chamakta hua taara, aur woh chiraag zaitoon ke ek aise mubarak darakht ke tail(oil) se roshan kiya jata ho jo na sharqi (eastern) ho na garabi (western), jiska tail (oil) aap hi aap bhadka padta ho chahey aag usko na lagey, ( is taraah) roshni par roshni (badhne ke tamaam asbaab jamaa ho gaye hon). Allah apne noor ki taraf jiski chahta hai rehnumayi farmata hai. Woh logon ko misaalon se baat samjhata hai, woh har cheez se khoob waqif hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah noor hai aasmanon ka aur zamin ka uss kay noor ki misal misil aik taaq kay hai jiss mein chiragh ho aur chiragh seeshay ki qandeel mein ho aur seesha misil chamaktay huye roshan sitaray kay ho woh chiragh aik ba-barkat darakht zaitoon kay tel say jalaya jata ho jo darakht na mashriqi hai na maghribi khud woh tel qareeb hai kay aap hi roshni denay lagay agarcheh ussay aag na bhi chuye noor per noor hai Allah Taalaa apnay noor ki taraf rehnumaee kerta hai jissay chahaye logon (kay samjhaney) ko yeh misalen Allah Taalaa biyan farma raha hai aur Allah Taalaa her cheez kay haal say bakhoobi waqif hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह आसमान और ज़मीन का नूर है (कायनात में) उसके नूर की मिसाल ऐसी है जैसे एक ताक़ में चिराग रखा हुआ हो,चिराग एक फ़ानूस में हो(कांच के शेड में), फ़ानूस (कांच के शेड) का हाल ये हो के जैसे मोती की तरह चमकता हुआ तारा, और वो चिराग़ ज़ैतून के एक ऐसे मुबारक दरख्त के टेल (तेल) से रोशन किया जाता हो जो ना शर्की (पूर्वी) हो ना गराबी (पश्चिमी), जिसका टेल (तेल) आप ही आप भड़का पड़ता हो चाहे आग उसको ना लगे, (इस तरह) रोशनी बराबर रोशनी (बढ़ने के तमाम असबाब जमा हो गए)। अल्लाह अपने नूर की तरफ जिसका चाहता है रहनुमायी फरमाता है। वो लोगों को मिसालों से बात समझता है, वो हर चीज़ से ख़ूब वाकिफ़ है
عَرَبِيفي بُيوتٍ أَذِنَ اللَّهُ أَن تُرفَعَ وَيُذكَرَ فيهَا اسمُهُ يُسَبِّحُ لَهُ فيها بِالغُدُوِّ وَالآصالِ
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हिन्दी (Al-Omari)(यह चिराग़) उन महान घरों में (जलाया जाता है), जिनके बारे में अल्लाह ने आदेश दिया है कि वे ऊँचे किए जाएँ और उनमें उसका नाम याद किया जाए। उनमें सुबह और शाम उसकी महिमा का गान करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Uske noor ki taraf hidayat paney waley) un gharon mein paye jatey hain jinhein buland karne ka aur jin mein apne naam ki yaad ka Allah ne izan (ijazat) diya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unn gharon mein jin kay buland kerney aur jin mein apnay naam ki yaad ka Allah Taalaa ney hukum diya hai wahan subha-o-shaam Allah Taalaa ki tasbeeh biyan kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(उसके नूर की तरफ हिदायत पाने वाले) उन घरों में पाए जाते हैं जिनमें बुलंद करने का और जिन में अपने नाम की याद का अल्लाह ने इज़ान (इजाज़त) दिया है
عَرَبِيرِجالٌ لا تُلهيهِم تِجارَةٌ وَلا بَيعٌ عَن ذِكرِ اللَّهِ وَإِقامِ الصَّلاةِ وَإيتاءِ الزَّكاةِ ۙ يَخافونَ يَومًا تَتَقَلَّبُ فيهِ القُلوبُ وَالأَبصارُ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐसे लोग, जिन्हें व्यापार तथा क्रय-विक्रय अल्लाह के स्मरण, नमाज़ क़ायम करने और ज़कात देने से ग़ाफ़िल नहीं करता। वे उस दिन से डरते हैं, जिसमें दिल तथा आँखें उलट जाएँगी।
Roman Urdu (Maududi)Un mein aisey log subah o shaam uski tasbeeh karte hain jinhein tijarat aur khareed o farokht Allah ki yaad se aur iqamat e namaaz o adaaye zakaat se gaafil nahin kardeti. Woh us din se darte rehte hain jismein dil ulatne aur deedhey pathra janey ki (eyes will become petrified) naubat aa jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aisay log jinhen tijarat aur khareed-o-farokht Allah kay zikar say aur namaz kay qaeem kerney aur zakat ada kerney say ghafil nahi kerti uss din say dartay hain jiss din boht say dil aur boht si aankhen ulat pulat hojyen gi
Devnagri Urdu (Maududi)उन में ऐसे लोग सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते हैं जिन्हें तिजारत और खत्म ओ फारोखत अल्लाह की याद से और इकामत ए नमाज ओ अदाये जकात से गाफिल नहीं करते। वो उस दिन से डरते रहते हैं जिसमें दिल उलटने और दीधे पथरा जाने की (आंखें पथरा जाएंगी) नौबत आ जाएगी
عَرَبِيلِيَجزِيَهُمُ اللَّهُ أَحسَنَ ما عَمِلوا وَيَزيدَهُم مِن فَضلِهِ ۗ وَاللَّهُ يَرزُقُ مَن يَشاءُ بِغَيرِ حِسابٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि अल्लाह उन्हें उसका सर्वश्रेष्ठ बदला दे जो उन्होंने किया, और उन्हें अपने अनुग्रह से अधिक प्रदान करे और अल्लाह जिसे चाहता है, बेहिसाब जीविका देता है।
Roman Urdu (Maududi)(Aur woh yeh sabkuch isliye karte hain) taa-ke Allah unke behtareen aamaal ki jaza unko de aur mazeed apne fazal se nawaze. Allah jisey chahta hai be-hisaab deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Iss iraday say kay Allah unhen unn kay aemaal ka behtareen badla dey bulkay apnay fazal say aur kuch ziyadti ata faramye. Allah Taalaa jissay chahaye bey shumaar roziyan deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)(और वो ये सब कुछ करते हैं) ता-के अल्लाह उनको बेहतरीन अमाल की जजा उनको दे और मजीद अपने फजल से नवाजे। अल्लाह जिसे चाहता है बे-हिसाब देता है
عَرَبِيوَالَّذينَ كَفَروا أَعمالُهُم كَسَرابٍ بِقيعَةٍ يَحسَبُهُ الظَّمآنُ ماءً حَتّىٰ إِذا جاءَهُ لَم يَجِدهُ شَيئًا وَوَجَدَ اللَّهَ عِندَهُ فَوَفّاهُ حِسابَهُ ۗ وَاللَّهُ سَريعُ الحِسابِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उनके कर्म किसी चटियल मैदान में एक सराब (मरीचिका) की तरह हैं, जिसे सख़्त प्यासा आदमी पानी समझता है। यहाँ तक कि जब उसके पास आता है, तो उसे कुछ भी नहीं पाता और अल्लाह को अपने पास पाता है, तो वह उसे उसका हिसाब पूरा चुका देता है। और अल्लाह बहुत जल्द हिसाब करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Iske baraks) jinhon ne kufr kiya unke aamal ki misaal aisi hai jaise dasht e bay-aab mein saraab ka pyasa (likened to a mirage in a waterless desert ) usko pani samajhe huey tha, magar jab wahan pahuncha to kuch na paya, balke wahan usne Allah ko maujood paya, jisne uska poora poora hisaab chuka diya. Aur Allah ko hisaab letay dair nahin lagti
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kafiron kay aemaal misil uss chamakti hui rait kay hain jo chatyal maidan mein ho jissay piyasa shaks door say pani samjhta hai lekin jab uss kay pass phonchta hai to ussay kuch bhi nahi pata haan Allah ko apnay pass pata hai jo uss ka hisab poora poora chuka deta hai. Allah boht jald hisab ker denay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(इस्के बराक्स) जिन्हों ने कुफ्र किया उनके अमल की मिसाल ऐसी है जैसे दश्त ए बे-आब में सराब का प्यासा (पानी रहित रेगिस्तान में मृगतृष्णा की तुलना) उसको पानी समझ हुए थे, मगर जब वहां पहुंचा तो कुछ न पाया, बलके वहां उसने अल्लाह को मौजुद पाया, जिसने उसका पूरा, पूरा हिसाब चुका दिया। और अल्लाह को हिसाब लेते देर नहीं लगती
عَرَبِيأَو كَظُلُماتٍ في بَحرٍ لُجِّيٍّ يَغشاهُ مَوجٌ مِن فَوقِهِ مَوجٌ مِن فَوقِهِ سَحابٌ ۚ ظُلُماتٌ بَعضُها فَوقَ بَعضٍ إِذا أَخرَجَ يَدَهُ لَم يَكَد يَراها ۗ وَمَن لَم يَجعَلِ اللَّهُ لَهُ نورًا فَما لَهُ مِن نورٍ
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हिन्दी (Al-Omari)अथवा (उनके कर्म) उन अँधेरों के समान हैं, जो अत्यंत गहरे सागर में हों, जिसे एक लहर ढाँप रही हो, जिसके ऊपर एक और लहर हो, जिसके ऊपर एक बादल हो, कई अँधेरे हों, जिनमें से कुछ, कुछ के ऊपर हों। जब (इन अँधेरों में फँसा हुआ व्यक्ति) अपना हाथ निकाले, तो क़रीब नहीं कि उसे देख पाए। और वह व्यक्ति जिसके लिए अल्लाह प्रकाश न बनाए, तो उसके लिए कोई भी प्रकाश नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Ya phir uski misaal aisi hai jaise ek gehre samandar mein andhera , ke upar ek mauj chayi hui hai, uspar ek aur mauj, aur uske upar baadal,tareeki(andhera) par tareeki (darkness) musallat hai, aadmi apna haath nikale to usey bhi na dekhne paye. Jisey Allah noor na bakshay uske liye phir koi noor nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Ya misil unn andheron kay hai jo nihayat gehray samandar ki teh mein hon jissay upper talay ki mojon ney dhaanp rakha ho phir upper say badal chaye huye hon. Al-gharz andheriyan hain jo upper talay pay dar pay hain. Jab apna hath nikalay to ussay bhi qareeb hai kay na dekh sakay aur (baat yeh hai kay) jissay Allah Taalaa hi noor na dey uss kay pass koi roshni nahi hoti
Devnagri Urdu (Maududi)या फिर उसकी मिसाल ऐसी है जैसे एक गहरे समंदर में अँधेरा, के ऊपर एक मौज छायी हुई है, उसपर एक और मौज, और उसके ऊपर बादल, तारीकी(अंधेरा) पर तारीकी (अंधेरा) मुसल्लत है, आदमी अपना हाथ निकले तो उसे भी ना देखे. जिसे अल्लाह नूर न बख्शे उसके लिए फिर कोई नूर नहीं
عَرَبِيأَلَم تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُسَبِّحُ لَهُ مَن فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ وَالطَّيرُ صافّاتٍ ۖ كُلٌّ قَد عَلِمَ صَلاتَهُ وَتَسبيحَهُ ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ بِما يَفعَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह ही की पवित्रता का गान करते हैं, जो आकाशों तथा धरती में हैं तथा पंख फैलाए हुए पक्षी (भी)? प्रत्येक ने निश्चय अपनी नमाज़ और पवित्रता गान को जान लिया है। और अल्लाह उसे भली-भाँति जानने वाला है, जो वे करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum dekhte nahin ho ke Allah ki tasbeeh kar rahey hain woh sab jo aasmano aur zameen mein hain aur woh parinde jo parr phaylaye udd rahe hain? Har ek apni namaz aur tasbeeh ka tareeqa jaanta hai, aur ye sab jo kuch karte hain Allah ussey baa-khabar rehta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney nahi dekha kay aasmano aur zamin ki kul makhlooq aur par phelaye urney walay kul parind Allah ki tasbeeh mein masghool hain. Her aik ki namaz aur tasbeeh ussay maloom hai log jo kuch keren uss say Allah bakhoobi waqif hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह की तस्बीह कर रहे हैं वो सब जो आसमान और ज़मीन में हैं और वो परिंदे जो पर्र फैलाये उड़ रहे हैं? हर एक अपनी नमाज और तस्बीह का तरीक़ा जानता है, और ये सब जो कुछ करते हैं अल्लाह उसे बा-ख़बर रखता है
عَرَبِيوَلِلَّهِ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ وَإِلَى اللَّهِ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ही के लिए आकाशों तथा धरती का राज्य है और अल्लाह ही की ओर लौटकर जाना है।
Roman Urdu (Maududi)Aasmaano aur zameen ki baadshahi Allah hi ke liye hai aur usi ki taraf sabko palatna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Zamin-o-aasman ki badshaat Allah hi ki hai aur Allah Taalaa hi ki taraf lotna hai
Devnagri Urdu (Maududi)आसमान और ज़मीन की बादशाही अल्लाह ही के लिए है और उसकी तरफ सबको पलटना है
عَرَبِيأَلَم تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُزجي سَحابًا ثُمَّ يُؤَلِّفُ بَينَهُ ثُمَّ يَجعَلُهُ رُكامًا فَتَرَى الوَدقَ يَخرُجُ مِن خِلالِهِ وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّماءِ مِن جِبالٍ فيها مِن بَرَدٍ فَيُصيبُ بِهِ مَن يَشاءُ وَيَصرِفُهُ عَن مَن يَشاءُ ۖ يَكادُ سَنا بَرقِهِ يَذهَبُ بِالأَبصارِ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह बादल को चलाता है। फिर उसे परस्पर मिलाता है। फिर उसे तह-ब-तह कर देता है। फिर आप बारिश को देखते हैं कि उसके बीच से निकल रही है। और वह आकाश से उसमें (मौजूद) पर्वतों जैसे बादलों से ओले बरसाता है। फिर जिसपर चाहता है, उन्हें गिराता है और जिससे चाहता है, उन्हें फेर देता है। निकट है कि उसकी बिजली की चमक आँखों को ले जाए।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum dekhte nahin ho ke Allah baadal ko aahista aahista chalata hai, phir uske tukdon ko baaham jodta hai, phir usey sameit kar ek kaseef abr (mass of thick cloud) bana deta hai. Phir tum dekhte ho ke uske khaul mein se baarish ke qatre tapakte chale jatey hain aur woh aasman se , un pahadon ki badaulat jo usmein buland hain, aulay (hail / ice) barsata hai, phir jisey chahta hai unka nuqsaan pahuchata hai aur jisey chahta hai unse bacha leta hai, uski bijli ki chamak nigaahon ko kheira (dazzles the eyes) kiye deti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney nahi dekha kay Allah Taalaa badlon ko chalata hai phir unhen milata hai phir unhen teh ba teh ker deta hai phir aap dekhtay hain kay unn kay darmiyan mein say meenh barasta hai. Wohi aasman ki janib say olon kay pahar mein say olay barsata hai phir jinhen chahaye unn kay pass unhen barsaye aur jin say chahaye unn say enhen hata dey.Badal hi say nikalney wali bijli ki chamak aisi hoti hai kay goya abb aankhon ki roshni ley chali
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम देखते नहीं हो कि अल्लाह बदल को आहिस्ता आहिस्ता चलाता है, फिर उसके टुकड़ों को बहाम जोड़ता है, फिर उसे समित कर एक कसीफ अब्र (घने बादलों का समूह) बना देता है। फिर तुम देखते हो के उसके ख़ौल में से बारिश के कतरे तपकते हैं और वो आसमान से, उन पहाड़ों की बदौलत जो उसमें बुलंद हैं, औले (ओले/बर्फ) बरसात है, फिर जिसे चाहता है उनका नुक्सान पहनता है और जिसे चाहता है उनसे बचा लेता है, उसकी बिजली की चमक निगाहों को ख़ैर (आँखें चकाचौंध कर देती है) कि देती है
عَرَبِييُقَلِّبُ اللَّهُ اللَّيلَ وَالنَّهارَ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَعِبرَةً لِأُولِي الأَبصارِ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही रात और दिन को बदलता रहता है। बेशक इसमें समझ-बूझ वालों के लिए निश्चय बड़ी शिक्षा है।
Roman Urdu (Maududi)Raat aur din ka ulat pher wahi kar raha hai. Ismein ek sabaq hai aankhon walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa hi din aur raat ko rad-o-badal kerta rehta hai aankhon walon kay liye to iss mein yaqeenan bari bari ibraten hain
Devnagri Urdu (Maududi)रात और दिन का उलट फेर वही कर रहा है। इसमें एक सबक है आंखों वालों के लिए
عَرَبِيوَاللَّهُ خَلَقَ كُلَّ دابَّةٍ مِن ماءٍ ۖ فَمِنهُم مَن يَمشي عَلىٰ بَطنِهِ وَمِنهُم مَن يَمشي عَلىٰ رِجلَينِ وَمِنهُم مَن يَمشي عَلىٰ أَربَعٍ ۚ يَخلُقُ اللَّهُ ما يَشاءُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही ने प्रत्येक जीवधारी को पानी से पैदा किया। तो उनमें से कुछ अपने पेट के बल चलते हैं और उनमें से कुछ दो पैरों पर चलते हैं तथा उनमें से कुछ चार (पैरों) पर चलते हैं। अल्लाह जो चाहता है, पैदा करता है। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah ne har jaandaar ek tarah ke pani se paida kiya, koi pait ke bal chal raha hai to koi do taangon (two legs) par aur koi chaar taangon par. Jo kuch woh chahta hai paida karta hai, woh har cheez par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tamam kay tamam chalney phirney walay jaandaaron ko Allah Taalaa hi ney pani say peda kiya hai inn mein say baaz to apnay pet kay bal chaltay hain baaz do paon per chaltay hain. Baaz char paon per chaltay hain Allah Taalaa jo chahata hai peda kerta hai. Be-shak Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह ने हर जानदार एक तरह के पानी से भुगतान किया, कोई पेट के बाल चल रहा है तो कोई दो टांगों पर और कोई चार टांगों पर। जो कुछ वह चाहता है पैदा करता है, वह हर चीज पर कादिर है
عَرَبِيلَقَد أَنزَلنا آياتٍ مُبَيِّناتٍ ۚ وَاللَّهُ يَهدي مَن يَشاءُ إِلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने स्पष्ट आयतें (क़ुरआन) अवतरित कर दी हैं और अल्लाह जिसे चाहता है, सीधा मार्ग दिखा देता है।
Roman Urdu (Maududi)Humne saaf saaf haqeeqat batane wali aayat nazil kardi hai, aagey siraate mustaqeem ki taraf hidayat Allah hi jisey chahta hai deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bila shak-o-shuba hum ney roshan aur wazeh aayaten utar di hain Allah Taalaa jissay chahaye seedhi raah dikha deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने साफ साफ हकीकत बताने वाली आयत नाजिल कर दी है, आगे सिराते मुस्तकीम की तरफ हिदायत अल्लाह ही जिसे चाहता है देता है
عَرَبِيوَيَقولونَ آمَنّا بِاللَّهِ وَبِالرَّسولِ وَأَطَعنا ثُمَّ يَتَوَلّىٰ فَريقٌ مِنهُم مِن بَعدِ ذٰلِكَ ۚ وَما أُولٰئِكَ بِالمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे कहते हैं कि हम अल्लाह पर तथा रसूल पर ईमान लाए और हमने आज्ञापालन किया। फिर इसके बाद उनमें से एक गिरोह मुँह फेर लेता है। और ये लोग ईमान वाले नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log kehte hain ke hum iman laye Allah aur Rasool par aur humne itaat qabool ki, magar iske baad inmein se ek giroh (itaat se) mooh moad jaata hai, aisey log hargiz momin nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kehtay hain kay hum Allah Taalaa aur rasool per eman laye aur faman bardaar huye phir unn mein say aik firqa iss kay baad bhi phir jata hai. Yeh eman walay hain (hi) nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग कहते हैं कि हम ईमान लाए अल्लाह और रसूल पर और हमने इताअत कबूल की, मगर इसके बाद इनमें से एक गिरोह (इताअत से) मुंह मोड़ जाता है, ऐसे लोग हरगिज मोमिन नहीं हैं
عَرَبِيوَإِذا دُعوا إِلَى اللَّهِ وَرَسولِهِ لِيَحكُمَ بَينَهُم إِذا فَريقٌ مِنهُم مُعرِضونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब वे अल्लाह तथा उसके रसूल की ओर बुलाए जाते हैं, ताकि वह (रसूल) उनके बीच (विवाद का) निर्णय करें, तो अचानक उनमें से एक गिरोह मुँह फेरने वाला होता है।
Roman Urdu (Maududi)Jab inko bulaya jata hai Allah aur Rasool ki taraf, taa-ke Rasool inke aapas ke muqaddame ka faisla karey to inmein se ek fareeq katra jata (turns away) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jab yeh iss baat ki taraf bulaye jatay hain kay Allah aur iss ka rasool unn kay jharay chuka dey to bhi inn ki aik jamat mun morney wali bann jati hai
Devnagri Urdu (Maududi)जब इनको बुलाया जाता है अल्लाह और रसूल की तरफ, ता-के रसूल इनके आपस के मुकद्दमे का फैसला करे तो इनमें से एक फरीक कतरा जाता है
عَرَبِيوَإِن يَكُن لَهُمُ الحَقُّ يَأتوا إِلَيهِ مُذعِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि उन्हीं के लिए अधिकार हो, तो आज्ञाकारी बनकर आपके पास चले आते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Albatta agar haqq unki muafiqat (on their side) mein ho to Rasool ke paas baday itaat-kish (obedience) ban kar aa jatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Haan agar inhi ko haq phonchta ho to mutee-o-farma bardaar ho ker iss ki taraf chalay aatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता अगर हक उनकी मुआफिकत (उनकी तरफ) में हो तो रसूल के पास बदाय इताअत-किश (आज्ञाकारिता) पर प्रतिबंध कर आ जाता है
عَرَبِيأَفي قُلوبِهِم مَرَضٌ أَمِ ارتابوا أَم يَخافونَ أَن يَحيفَ اللَّهُ عَلَيهِم وَرَسولُهُ ۚ بَل أُولٰئِكَ هُمُ الظّالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उनके दिलों में कोई रोग है, अथवा वे संदेह में पड़े हुए हैं, अथवा वे डर रहे हैं कि उनपर अल्लाह और उसका रसूल अत्याचार करेंगे? बल्कि वे लोग स्वयं ही अत्याचारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya unke dilon ko (munafiqat ka) rog laga hua hai? Ya yeh shakk mein padey huey hain? Ya inko yeh khauf hai ke Allah aur uska Rasool inpar zulm karega? Asal baat yeh hai ke zaalim to yeh log khud hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn kay dilon mein beemari hai? Ya yeh shak-o-shuba mein paray huye hain? Ya enhen iss baat ka darr hai kay Allah Taalaa aur uss ka rasool inn ki haq talfi na keren? Baat yeh hai kay yeh log khud hi baray zalim hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या उनके दिलों को (मुनाफिकत का) रोग लगा हुआ है? हां ये शक्क में पड़े हुए हैं? या इनको ये खौफ है कि अल्लाह और उसका रसूल इन्पर जुल्म करेगा? असल बात ये है के जालिम तो ये लोग खुद हैं
عَرَبِيإِنَّما كانَ قَولَ المُؤمِنينَ إِذا دُعوا إِلَى اللَّهِ وَرَسولِهِ لِيَحكُمَ بَينَهُم أَن يَقولوا سَمِعنا وَأَطَعنا ۚ وَأُولٰئِكَ هُمُ المُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ईमान वालों का कथन तो यह होता है कि जब अल्लाह और उसके रसूल की ओर बुलाए जाएँ, ताकि आप उनके बीच निर्णय कर दें, तो कहें कि हमने सुन लिया तथा मान लिया। और वही सफल होने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Iman laney walon ka kaam to yeh hai ke jab woh Allah aur Rasool ki taraf bulaye jayein taa-ke Rasool unke muqaddame ka faisla karey to woh kahein ke humne suna aur itaat ki, aisey hi log falaah paaney waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)eman walon ka qol to yeh hai kay jab unhen iss liye bulaya jata hai kay Allah aur iss ka rasool inn mein faisal ker dey to woh kehtay hain kay hum ney suna aur maan liya. Yehi log kaamyaab honey walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ईमान लाने वालों का काम तो ये है के जब वो अल्लाह और रसूल की तरफ बुलाए जाएं ता-के रसूल उनके मुकद्दमे का फैसला करें तो वो कहें के हमने सुना और इताअत की, ऐसे ही लोग फलाह पाने वाले हैं
عَرَبِيوَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَرَسولَهُ وَيَخشَ اللَّهَ وَيَتَّقهِ فَأُولٰئِكَ هُمُ الفائِزونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करे और अल्लाह का भय रखे और उसकी (यातना से) डरे, तो यही लोग सफल होने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur kamiyab wahi hain jo Allah aur Rasool ki farma bardari karein aur Allah se darein aur uski nafarmani se bachein
Roman Urdu (Junagarhi)Jo bhi Allah Taalaa ki uss kay rasool ki farman bardaari keren khof-e-elahee rakhen aur uss kay azabon say dartay rahen wohi nijat paney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और कामियाब वही हैं जो अल्लाह और रसूल की फरमा बरदारी करें और अल्लाह से डरें और उसकी नफ़रमानी से बचें
عَرَبِي۞ وَأَقسَموا بِاللَّهِ جَهدَ أَيمانِهِم لَئِن أَمَرتَهُم لَيَخرُجُنَّ ۖ قُل لا تُقسِموا ۖ طاعَةٌ مَعروفَةٌ ۚ إِنَّ اللَّهَ خَبيرٌ بِما تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन (मुनाफ़िक़ों) ने अल्लाह की मज़बूत क़समें खाईं कि यदि आप उन्हें आदेश दें, तो वे अवश्य (जिहाद के लिए) निकलेंगे। आप उनसे कह दें : क़समें न खाओ। तुम्हारे आज्ञापालन की दशा जानी-पहचानी है। निःसंदेह अल्लाह तुम्हारे कर्मों से भली-भाँति अवगत है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh (munafiq) Allah ke naam se kadi kadi kasmein kha kar kehte hain ke “ aap hukum dein to hum gharon se nikal khade hon” . Insey kaho “kasamein na khao , tumhari itaat ka haal maloom hai, tumhare kartooton se Allah be-khabar nahin hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Bari pukhtagi kay sath Allah Taalaa ki qasmen kha kha ker kehtay hain kay aap ka hukum hotay hi nikal kharay hongay. Keh dijiy kay bus qasmen na khao (tumhari) ita’at ki haqeeqat maloom hai. Jo kuch tum ker rahey ho Allah Taalaa uss say ba-khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये (मुनाफिक) अल्लाह के नाम से कड़ी कसमें खा कर कहते हैं "आप हुकुम दें तो हम घरों से निकल खड़े हों"। इनसे कहो "कसमें न खाओ, तुम्हारी इबादत का हाल मालूम है, तुम्हारे कार्टूनों से अल्लाह बे-खबर नहीं है"
عَرَبِيقُل أَطيعُوا اللَّهَ وَأَطيعُوا الرَّسولَ ۖ فَإِن تَوَلَّوا فَإِنَّما عَلَيهِ ما حُمِّلَ وَعَلَيكُم ما حُمِّلتُم ۖ وَإِن تُطيعوهُ تَهتَدوا ۚ وَما عَلَى الرَّسولِ إِلَّا البَلاغُ المُبينُ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें कि अल्लाह की आज्ञा का पालन करो तथा रसूल की आज्ञा का पालन करो, और यदि तुम विमुख हो जाओ, तो उस (रसूल) का कर्तव्य केवल वही है, जिसका उसपर भार डाला गया है, और तुम्हारे ज़िम्मे वह है, जिसका भार तुमपर डाला गया है, और यदि तुम उसका आज्ञापालन करोगे, तो मार्गदर्शन पा जाओगे। और रसूल का दायित्व केवल स्पष्ट रूप से पहुँचा देना है।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, “Allah ke mutii bano (obey Allah) aur Rasool ke tabey farmaan bankar raho , lekin agar tum mooh pherte ho to khoob samajh lo ke Rasool par jis farz ka baar rakkha gaya hai uska zimmedar woh hai aur tumpar jis farz ka baar dala gaya hai uske zimmedar tum ho. Uski itaat karoge to khud hi hidayat paogey warna Rasool ki zimmedari issey zyada kuch nahin hai ke saaf saaf hukum pahuncha de”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay Allah Taalaa ka hukum mano rasoolullah ki ita’at kero phir bhi agar tum ney roo gardani ki to rasool kay zimmay to sirf wohi hai jo iss per lazim ker diya gaya hai aur tum per iss ki jawab dahee hai jo tum per rakha gaya hai hidayat to tumhen ussi waqt milay gi jab rasool ki ma-tehati kero. Suno rasool kay zimmay to sirf saaf tor per phoncha dena hai
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, "अल्लाह के मुती बनो (अल्लाह की आज्ञा मानो) और रसूल के तबे फरमान बनकर रहो, लेकिन अगर तुम मुंह फेरते हो तो खूब समझ लो के रसूल पर जिस फर्ज का बार रक्खा गया है उसका ज़िम्मेदार वो है और तुम जिस फ़र्ज़ का बार डाला है उसके ज़िम्मेदार तुम हो तो खुद ही हिदायत पाओगे वरना रसूल की ज़िम्मेदारी इससे ज़्यादा कुछ नहीं है के सफ़ सफ़ हुकुम पाहुंचा दे”
عَرَبِيوَعَدَ اللَّهُ الَّذينَ آمَنوا مِنكُم وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ لَيَستَخلِفَنَّهُم فِي الأَرضِ كَمَا استَخلَفَ الَّذينَ مِن قَبلِهِم وَلَيُمَكِّنَنَّ لَهُم دينَهُمُ الَّذِي ارتَضىٰ لَهُم وَلَيُبَدِّلَنَّهُم مِن بَعدِ خَوفِهِم أَمنًا ۚ يَعبُدونَني لا يُشرِكونَ بي شَيئًا ۚ وَمَن كَفَرَ بَعدَ ذٰلِكَ فَأُولٰئِكَ هُمُ الفاسِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने उन लोगों से, जो तुममें से ईमान लाए तथा उन्होंने सुकर्म किए, वादा किया है कि वह उन्हें धरती में अवश्य ही अधिकार प्रदान करेगा, जिस तरह उन लोगों को अधिकार प्रदान किया, जो उनसे पहले थे, तथा उनके लिए उनके उस धर्म को अवश्य ही प्रभुत्व प्रदान करेगा, जिसे उसने उनके लिए पसंद किया है, तथा उन (की दशा) को उनके भय के पश्चात् शांति में बदल देगा। वे मेरी इबादत करेंगे, मेरे साथ किसी चीज़ को साझी नहीं बनाएँगे। और जिसने इसके बाद कुफ़्र किया, तो वही लोग अवज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne wada farmaya hai tum mein se un logon ke saath jo iman layein aur neik amal karein ke woh unko usi tarah zameen mein khalifa banayega jis tarah unse pehle guzre huey logon ko bana chuka hai , unke liye unke us deen (religion) ko mazboot buniyadon par qayam kardega jisey Allah taala ne unke haqq mein pasand kiya hai, aur unki (maujooda) halat e khauf ko aman se badal dega, bas woh meri bandagi karein aur mere saath kisi ko shareek na karein, aur jo iske baad kufr karey to aise hi log faasiq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Tum mein say unn logon say jo eman laye hain aur nek aemaal kiye hain Allah Taalaa wada farma chuka hai kay unhen zaroor zamin mein khalifa banaye ga jaisay kay unn logon ko khalifa banaya tha jo inn say pehlay thay aur yaqeenan inn kay liye inn kay iss deen ko mazbooti kay sath mohkum ker kay jama dey ga jissay unn kay liye woh pasand farma chuka hai aur inn kay iss khof-o-khatar ko woh aman-o-amaan mein badal dey ga woh meri ibadat keren gay meray sath kissi ko bhi shareek na therayen gay. Iss kay baad bhi jo log na-shukri aur kufur keren yaqeenan fasiq hain
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने वादा फरमाया है तुम में से उन लोगों के साथ जो ईमान लाए और नेक अमल करें के वो उनको उसी तरह जमीन में खलीफा बनाएगा जिस तरह उनसे पहले गुजरे हुए लोगों को बना चुका है, उनके लिए उनके लिए दीन (धर्म) को मजबूत बुनियादों पर कायम कर देगा जिसे अल्लाह ताला ने उनके हक में पसंद किया है, और उनकी (मौजूदा) हालत ए खौफ को अमन से बदल देगा, बस वो मेरी बंदगी करें और मेरे साथ किसी को शरीक न करें, और जो इसके बाद कुफ्र करें तो ऐसे ही लोग फासीक हैं
عَرَبِيوَأَقيمُوا الصَّلاةَ وَآتُوا الزَّكاةَ وَأَطيعُوا الرَّسولَ لَعَلَّكُم تُرحَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो तथा रसूल की आज्ञा का पालन करो, ताकि तुमपर दया की जाए।
Roman Urdu (Maududi)Namaz qayam karo, zakat do, aur Rasool ki itaat karo, umeed hai ke tumpar reham kiya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Namaz ki pabandi kero zakat ada kero aur Allah Taalaa kay rasool ki farman bardaari mein lagay raho takay tum per reham kiya jaye
Devnagri Urdu (Maududi)नमाज कायम करो, जकात दो, और रसूल की इताअत करो, उम्मीद है के तुमपर रहम किया जाएगा
عَرَبِيلا تَحسَبَنَّ الَّذينَ كَفَروا مُعجِزينَ فِي الأَرضِ ۚ وَمَأواهُمُ النّارُ ۖ وَلَبِئسَ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) आप उन लोगों को जिन्होंने कुफ़्र किया, कदापि न समझें कि वे (अल्लाह को) धरती में विवश कर देने वाले हैं। और उनका ठिकाना आग (जहन्नम) है और निःसंदेह वह बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log kufr kar rahey hain unke mautaaliq is galat fahmi mein na raho ke woh zameen mein Allah ko aajiz(frustrate) kardenge, unka thikana dozakh hai aur woh bada hi bura thikana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh khayal kabhi bhi na kerna kay munkir log zamin mein (idhar udhar bhaag ker) humen hara denay walay hain inn ka asli thikana to jahannum hai jo yaqeenan boht hi bura thikana hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग कुफ्र कर रहे हैं उनके मुतालिक इस गलत फहमी में ना रहो के वो ज़मीन में अल्लाह को अजीज (निराश) कर देंगे, उनका ठिकाना दोज़ख है और वो बड़ा ही बुरा ठिकाना है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لِيَستَأذِنكُمُ الَّذينَ مَلَكَت أَيمانُكُم وَالَّذينَ لَم يَبلُغُوا الحُلُمَ مِنكُم ثَلاثَ مَرّاتٍ ۚ مِن قَبلِ صَلاةِ الفَجرِ وَحينَ تَضَعونَ ثِيابَكُم مِنَ الظَّهيرَةِ وَمِن بَعدِ صَلاةِ العِشاءِ ۚ ثَلاثُ عَوراتٍ لَكُم ۚ لَيسَ عَلَيكُم وَلا عَلَيهِم جُناحٌ بَعدَهُنَّ ۚ طَوّافونَ عَلَيكُم بَعضُكُم عَلىٰ بَعضٍ ۚ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الآياتِ ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! जो (दास-दासी) तुम्हारे स्वामित्व में हों, और तुममें से जो अभी युवावस्था को न पहुँचे हों, उन्हें चाहिए कि तीन समयों में (तुम्हारे पास आने के लिए) तुमसे अनुमति लें; फ़ज्र की नमाज़ से पहले, और जिस समय तुम दोपहर को अपने कपड़े उतार देते हो और इशा की नमाज़ के बाद। तुम्हारे लिए ये तीन पर्दे (के समय) हैं। इनके पश्चात न तो तुमपर कोई गुनाह है और न उनपर। तुम अकसर एक-दूसरे के पास आने-जाने वाले हो। इसी प्रकार, अल्लाह तुम्हारे लिए आयतों को स्पष्ट करता है। और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laaye ho, lazim hai ke tumhare mamluk (your slaves) aur tumhare woh bacchey jo abhi aqal ki hadd ko (sex conscious /puberty) nahin pahunchey hain, teen auqat mein ijazat lekar tumhare paas aaya karein: subah ki namaz se pehle, aur dopahar ko jabke tum kapde utar kar rakh detey ho, aur ishaa ki namaz ke baad. Yeh teen waqt tumhare liye purdey ke waqt hain. Inke baad woh bila ijazat aayein to na tumpar koi gunaah hai na unpar, tumhein ek dusre ke paas baar baar aana hi hota hai. Is tarah Allah tumhare liye apne irshadaat ki tawzeeh (wazeh) karta hai, aur woh aleem o hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)eman walo! Tum say tumhari milkiyat kay ghulamon ko aur unhen bhi jo tum mein say balooghat ko na phonchay hon (apnay aaney ki) teen waqton mein ijazat hasil kerni zaroori hai. Namaz-e-fajar say pehlay aur zohar kay waqt jab kay tum apnay kapray utar rakhtay ho aur isha ki namaz kay baad yeh teeno waqt tumhari (khilwat) aur parday kay hain. Inn waqton kay ma-siwa na to tum per koi gunah hai na unn per. Tum sab aapas mein aik doosray kay pass ba-kasrat aaney janey walay ho (hi) Allah iss tarah khol khol ker apnay ehkaam tum say biyan farma raha hai. Allah Taalaa pooray ilm aur kamil hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, लाज़िम है के तुम्हारे ममलुक (तुम्हारे गुलाम) और तुम्हारे वो बच्चे जो अभी अक्ल की हद को (सेक्स कॉन्शस/यौवन) नहीं पहचाने हैं, तीन औकात में इजाज़त लेकर तुम्हारे पास आया करें: सुबह की नमाज़ से पहले, और दोपहर को जबके तुम कपड़े उतार कर रख देते हो, और ईशा की नमाज के बाद। ये तीन वक्त तुम्हारे लिए पर्दे के वक्त हैं। इनके बाद वो बिला इजाज़त आएं तो ना तुमपर कोई गुनाह है ना अनपर, तुम्हें एक दूसरे के पास बार-बार आना ही होता है। इस तरह अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी इरशादत की तौज़ीह (वज़ेह) करता है, और वह अलीम ओ हकीम है
عَرَبِيوَإِذا بَلَغَ الأَطفالُ مِنكُمُ الحُلُمَ فَليَستَأذِنوا كَمَا استَأذَنَ الَّذينَ مِن قَبلِهِم ۚ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُم آياتِهِ ۗ وَاللَّهُ عَليمٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब तुममें से बच्चे युवावस्था को पहुँच जाएँ, तो वे उसी तरह अनुमति लें, जिस तरह उनसे पहले के लोग अनुमति लेते रहे हैं। इसी प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी आयतों को स्पष्ट करता है। तथा अल्लाह भली-भाँति जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab tumhare bacchey aqal ki hadd (sex conscious /puberty) ko pahunch jayein to chahiye ke usi tarah ijazat lekar aaya karein jis tarah unke baday (elders) ijazat lete rahey hain. Is tarah Allah apni aayat tumhare saamne kholta hai, aur woh aleem o hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tumharay bachay (bhi) jab balooghat ko phonch jayen to jiss tarah unn kay aglay log ijazat mangtay hain unhen bhi ijazat maang ker aana chahaye Allah Taalaa tum say issi tarah apni aayaten biyan farmata hai. Allah Taalaa hi ilm-o-hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जब तुम्हारे बच्चे अक़ल की हद (सेक्स कॉन्शियस / यौवन) को पाहुंच जायें तो चाहिए के उसी तरह इजाज़त लेकर आया करें जिस तरह उनके बदे (बुजुर्ग) इजाज़त लेते रहे हैं. इस तरह अल्लाह अपनी आयत तुम्हारे सामने खुलता है, और वह अलीम ओ हकीम है
عَرَبِيوَالقَواعِدُ مِنَ النِّساءِ اللّاتي لا يَرجونَ نِكاحًا فَلَيسَ عَلَيهِنَّ جُناحٌ أَن يَضَعنَ ثِيابَهُنَّ غَيرَ مُتَبَرِّجاتٍ بِزينَةٍ ۖ وَأَن يَستَعفِفنَ خَيرٌ لَهُنَّ ۗ وَاللَّهُ سَميعٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो बूढ़ी स्त्रियाँ विवाह की आशा न रखती हों, उनपर कोई दोष नहीं कि अपनी (पर्दे की) चादरें उतारकर रख दें, प्रतिबंध यह है कि किसी प्रकार की शोभा का प्रदर्शन करने वाली न हों। और यदि (इससे भी) बचें तो उनके लिए अधिक अच्छा है। और अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo auratein jawani se guzri baithi hon, nikah ki umeedwaar na hon, woh agar apni chadarein (outer graments) utaar kar rakh dein to unpar koi gunaah nahin, bashart ke zeenat ki numaish karne wali na hon. Taham (nevertheless) woh bhi haya-daari hi baratein (behave modestly) to unke haqq mein accha hai, aur Allah sab kuch sunta aur jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bari boorhi aurten jinhen nikah ki umeed (aur khuwaish hi) na rahi ho woh apnay agar apnay kapray utar rakhen to unn per koi gunah nahi ba-shart-e-kay woh apna banao singhaar zahir kerney waliyan na hon tahum inn say bhi ehtiyaat rakhen to inn kay liye boht afzal hai aur Allah Taalaa sunta janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जो औरतें जवानी से गुज़री बैठी हो, निकाह की उम्मीद न हो, वो अगर अपनी चादरें (बाहरी ग्रामेंट्स) उतार कर रख दें तो उनपर कोई गुनाह नहीं, बशारत के ज़ीनत की नुमाइश करने वाली ना हो। तहम (फिर भी) वो भी हया-दारी ही बारातें (संयम से व्यवहार करें) तो उनके हक़ में अच्छा है, और अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है
عَرَبِيلَيسَ عَلَى الأَعمىٰ حَرَجٌ وَلا عَلَى الأَعرَجِ حَرَجٌ وَلا عَلَى المَريضِ حَرَجٌ وَلا عَلىٰ أَنفُسِكُم أَن تَأكُلوا مِن بُيوتِكُم أَو بُيوتِ آبائِكُم أَو بُيوتِ أُمَّهاتِكُم أَو بُيوتِ إِخوانِكُم أَو بُيوتِ أَخَواتِكُم أَو بُيوتِ أَعمامِكُم أَو بُيوتِ عَمّاتِكُم أَو بُيوتِ أَخوالِكُم أَو بُيوتِ خالاتِكُم أَو ما مَلَكتُم مَفاتِحَهُ أَو صَديقِكُم ۚ لَيسَ عَلَيكُم جُناحٌ أَن تَأكُلوا جَميعًا أَو أَشتاتًا ۚ فَإِذا دَخَلتُم بُيوتًا فَسَلِّموا عَلىٰ أَنفُسِكُم تَحِيَّةً مِن عِندِ اللَّهِ مُبارَكَةً طَيِّبَةً ۚ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الآياتِ لَعَلَّكُم تَعقِلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अंधे पर कोई दोष नहीं है, न लंगड़े पर कोई दोष है, न रोगी पर कोई दोष है और न स्वयं तुमपर कोई दोष है कि तुम अपने घरों से खाओ, या अपने बापों के घरों से, या अपनी माँओं के घरों से, या अपने भाइयों के घरों से, या अपनी बहनों के घरों से, या अपने चाचाओं के घरों से, या अपनी फूफियों के घरों से, या अपने मामाओं के घरों से, या अपनी मौसियों के घरों से, या (उस घर से) जिसकी चाबियों के तुम स्वामी हो, या अपने मित्र (के घर) से। तुमपर कोई दोष नहीं कि एक साथ खाओ या अलग-अलग। फिर जब तुम घरों में प्रवेश करो, तो अपनों को सलाम करो। अल्लाह की ओर से निर्धारित की हुई सुरक्षा एवं शांति की दुआ, जो बरकत वाली, पवित्र है। इसी प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए आयतों को खोलकर बयान करता है, ताकि तुम समझ जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Koi haraj nahin agar koi andha, ya langda, ya mareez (kisi ke ghar se kha le) aur na tumhare upar is mein koi muzahiqa (harm/jarj) hai ke apne gharon se khao ya apne baap dada ke gharon se, ya apni maa, nani ke gharon se , ya apne bhaiyon ke gharon se, ya apni behno ke gharon se, ya apne chachaon ke gharon se , ya apni phoopiyon ke gharon se, ya apne mamuon ke gharon se, ya apni khalaon ke gharon se, ya un gharon se jinki kunjiyan (keys) tumhari supurdagi (possession) mein hon, ya apne doston ke gharon se. Is mein bhi koi haraj nahin ke tumlog milkar khao ya alag alag, albatta jab gharon mein dakhil hua karo to apne logon ko salaam kiya karo, dua e khair, Allah ki taraf se muqarrar farmayi hui, badi babarakat aur pakeeza. Is tarah Allah taala tumhare saamne aayat bayaan karta hai, tawaqqu hai ke tum samajh bujh se kaam logey
Roman Urdu (Junagarhi)Andhay per langray per beemar per aur khud tum per (mutlaqan) koi harj nahi kay tum apnay gharon say khalo ya apnay bapon kay gharon say ya apni maaon kay gharon say ya apnay bhiyon kay gharon say ya apni behno kay gharon say ya apnay chachaon kay gharon say ya apni phoophiyon kay gharon say ya apnay mamoo’on kay gharon say ya apni khalaon kay gharon say ya unn kay gharon say jin ki kunjiyon kay tum malik ho ya apnay doston kay gharon say. Tum per iss mein bhi koi gunah nahi kay tum sab sath beht ker khana khao ya alag alag. Pus jab tum gharon mein janey lago to apnay ghar walon ko salam ker liya kero duya-e-khair hai jo ba-barkat aur pakeeza hai Allah Taalaa ki taraf say nazil shuda yun hi Allah Taalaa khol khol ker tum say apnay ehkaam biyan farma raha hai takay tum samajh lo
Devnagri Urdu (Maududi)कोई हराज़ नहीं अगर कोई अंधा, या लंगड़ा, या मारीज़ (किसी के घर से खा ले) और ना तुम्हारे ऊपर इस में कोई मुज़हिक़ा (नुकसान/जर्ज) है के अपने घरों से खाओ या अपने बाप दादा के घरों से, या अपनी माँ, नानी के घरों से, या अपने भाइयों के घरों से, या अपनी बहनों के घरों से, या अपने चाचाओं के घरों से, या अपनी बहनों के घरों से, या अपने मामूओं के घरों से, या अपने दोस्तों के घरों से, या उन घरों से जिनकी कुंजियाँ (चाबियाँ) तुम्हारी सुपुर्दगी (कब्जा) में हो, या अपने दोस्तों के घरों से। इस में भी कोई हराज नहीं के तुमलोग मिलकर खाओ या अलग-अलग, अलबत्ता जब घरों में दखल हुआ करो तो अपने लोगों को सलाम किया करो, दुआ ए खैर, अल्लाह की तरफ से मुकर्रर फरमायी हुई, बड़ी बाबरकत और पाकीजा। इस तरह अल्लाह ताला तुम्हारे सामने आयत बयान करता है, तवक्कू है के तुम समझ बुझ से काम लोगे
عَرَبِيإِنَّمَا المُؤمِنونَ الَّذينَ آمَنوا بِاللَّهِ وَرَسولِهِ وَإِذا كانوا مَعَهُ عَلىٰ أَمرٍ جامِعٍ لَم يَذهَبوا حَتّىٰ يَستَأذِنوهُ ۚ إِنَّ الَّذينَ يَستَأذِنونَكَ أُولٰئِكَ الَّذينَ يُؤمِنونَ بِاللَّهِ وَرَسولِهِ ۚ فَإِذَا استَأذَنوكَ لِبَعضِ شَأنِهِم فَأذَن لِمَن شِئتَ مِنهُم وَاستَغفِر لَهُمُ اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ईमान वाले तो केवल वे लोग हैं, जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए और जब वे उसके साथ किसी सामूहिक कार्य पर होते हैं, तो उस समय तक नहीं जाते, जब तक उससे अनुमति न ले लें। निःसंदेह जो लोग आपसे अनुमति माँगते हैं, वही लोग अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रखते हैं। अतः जब वे आपसे अपने किसी कार्य के लिए अनुमति माँगें, तो आप उनमें से जिसे चाहें, अनुमति प्रदान कर दें और उनके लिए अल्लाह से क्षमा की प्रार्थना करें। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है|
Roman Urdu (Maududi)Momin to asal mein wahi hain jo Allah aur uske Rasool ko dilse maane aur jab kisi ijtimaii kaam ke mauqe par Rasool ke saath hon to ussey ijazat liye bagair na jayein, Jo log tumse ijazat maangte hain wahi Allah aur Rasool ke maannay walay hain. Pas jab woh apne kisi kaam se ijazat maangein to jisey tum chaho ijazat de diya karo aur aise logon ke haqq mein Allah se dua e magfirat kiya karo. Allah yaqeenan gafoor o raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-emaan log to wohi hain jo Allah Taalaa per aur uss kay rasool per yaqeen rakhtay hain aur jab aisay moamlay mein jiss mein logon kay jama honey ki zaroorat hoti hai nabi kay sath hotay hain to jab tak aap say ijazt na len kahin nahi jatay. Jo log aisay moqay per aap say ijazat ley letay hain haqeeqat mein yehi hain jo Allah Taalaa per aur uss kay rasool per eman laa chukay hain.pus jab aisay log aap say apnay kissi kaam kay liye ijazat talab keren to aap inn mein say jissay chahayen ijazat dey den aur inn kay liye Allah Taalaa say baksish ki dua mangen be-shak Allah bakshney wala meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)मोमिन तो असल में वही हैं जो अल्लाह और उसके रसूल को दिल से माने और जब किसी इज्तिमाई काम के मौके पर रसूल के साथ हों तो उसे इज्जत के लिए बगैर न जाएं, जो लोग तुमसे इज्जत मांगते हैं वही अल्लाह और रसूल के मानने वाले हैं। जब वो अपने किसी काम से इजाज़त मांगे तो जैसे तुम चाहो इजाज़त दे दिया करो और ऐसे लोगों के हक़ में अल्लाह से दुआ ए मगफिरत किया करो। अल्लाह यकीनन गफूर ओ रहीम है
عَرَبِيلا تَجعَلوا دُعاءَ الرَّسولِ بَينَكُم كَدُعاءِ بَعضِكُم بَعضًا ۚ قَد يَعلَمُ اللَّهُ الَّذينَ يَتَسَلَّلونَ مِنكُم لِواذًا ۚ فَليَحذَرِ الَّذينَ يُخالِفونَ عَن أَمرِهِ أَن تُصيبَهُم فِتنَةٌ أَو يُصيبَهُم عَذابٌ أَليمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तुम रसूल के बुलाने को, परस्पर एक-दूसरे को बुलाने जैसा न बना लो। निःसंदेह अल्लाह उन लोगों को जानता है, जो तुममें से एक-दूसरे की आड़ लेते हुए (चुपके से) खिसक जाते हैं। अतः उन लोगों को डरना चाहिए, जो आपके आदेश का विरोध करते हैं कि उनपर कोई आपदा आ पड़े अथवा उनपर कोई दुःखदायी यातना आ जाए।
Roman Urdu (Maududi)Musalmano, apne darmiyan Rasool ke bulane ko aapas mein ek dusre ka sa bulana na samajh baitho. Allah un logon ko khoob jaanta hai jo tum mein aisey hain ke ek dusre ki aadd letay huey chupke se satak jatey hain. Rasool ke hukum ki khilaf warzi karne walon ko darna chahiye ke woh kisi fitne mein giraftar na ho jayein, ya unpar dardnaak azaab na aa jaaye
Roman Urdu (Junagarhi)Tum Allah Taalaa kay nabi kay bulney ko aisa bulawa na kerlo jaisa kay aapas mein aik doosray ko hota hai. Tum mein say unhen Allah khoob janta hai jo nazar bacha ker chupkay say sirak jatay hain suno jo log hukum-e-rasool ki mukhlifat kertay hain unhen dartay rehna chahaye kay kahin unn per koi zabardast aafat na aa paray ya unhen dard-naak azab na phonchay
Devnagri Urdu (Maududi)मुसलमानो, अपने दरमियान रसूल के बुलाने को आपस में एक दूसरे का सा बुलाना न समझ बैठो। अल्लाह उन लोगों को खूब जानता है जो तुम में ऐसे हैं कि एक दूसरे की मदद लेते हुए चुपके से चौंक जाते हैं। रसूल के हुकुम की खिलाफत वारज़ी करने वालों को डरना चाहिए कि वो किसी फ़िटने में गिरफ़्तार न हो जाए, या उन पर दर्दनक अज़ाब न आ जाए
عَرَبِيأَلا إِنَّ لِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ قَد يَعلَمُ ما أَنتُم عَلَيهِ وَيَومَ يُرجَعونَ إِلَيهِ فَيُنَبِّئُهُم بِما عَمِلوا ۗ وَاللَّهُ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सावधान! अल्लाह ही का है, जो कुछ आकाशों तथा धरती में है। निश्चय वह जानता है जिस (दशा) पर तुम हो। और जिस दिन वे उसकी ओर लौटाए जाएँगे, तो वह उन्हें बताएगा, जो कुछ उन्होंने किया और अल्लाह प्रत्येक चीज़ को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Khabardaar raho, aasmaan o zameen mein jo kuch hai Allah ka hai. Tum jis rawish par bhi ho Allah usko jaanta hai. Jis roz log uski taraf paltenge woh unhein bata dega ke woh kya kuch karke aaye hain. Woh har cheez ka ilam rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aagah hojao kay aasma-o-zamin mein jo kuch hai sab Allah Taalaa hi ka hai. Jiss ravish per tum ho woh issay bakhoobi janta hai aur jiss din yeh sab uss ki taraf lotaye jayen gay uss din inn ko inn kay kiye say woh khabardaar ker dey ga. Allah Taalaa sab kuch jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ख़बरदार रहो, आसमान ओ ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह का है। तुम जिस रवीश पर भी हो अल्लाह उसको जानता है। जिस रोज़ लोग उसकी तरफ पलटेंगे वो उन्हें बता देगा के वो क्या करके आये हैं। वो हर चीज़ का इलम रखता है
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Surah 24: An-Nur (The Light)

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Surah 24: An-Nur (The Light)

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Surah 24: An-Nur (The Light)

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Surah 24: An-Nur (The Light)

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Surah 24: An-Nur (The Light)

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Surah 25: Al-Furqan (The Discrimination)

Meccan🕐 Revelation #42📜 77 Verses🕮 Juz 1–19
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Surah 25: Al-Furqan (The Discrimination)

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Surah 25: Al-Furqan (The Discrimination)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيتَبارَكَ الَّذي نَزَّلَ الفُرقانَ عَلىٰ عَبدِهِ لِيَكونَ لِلعالَمينَ نَذيرًا
हिन्दी (Al-Omari)बहुत बरकत वाला है वह (अल्लाह), जिसने अपने बंदे पर फ़ुरक़ान उतारा, ताकि वह समस्त संसार-वासियों को सावधान करने वाला हो।
Roman Urdu (Maududi)Nihayat mutabarrak(ba-barakat) hai woh jisne yeh Furqan apne banday par nazil kiya taa-ke saarey jahan waalon ke liye nazeer(darr sunane wali/warner) ho
Roman Urdu (Junagarhi)Bohat ba-barkat hai woh Allah Taalaa jiss ney apnay banday per furqan utara takay woh tamam logon kay liye aagah kerney wala bann jaye
Devnagri Urdu (Maududi)निहायत मुतबर्रक(बा-बरकत) है वो जिसने ये फुरकान अपने बंदे पर नाज़िल किया ता-के सारे जहां वालों के लिए नज़ीर(डर सुनाने वाली/वार्नर) हो
عَرَبِيالَّذي لَهُ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَلَم يَتَّخِذ وَلَدًا وَلَم يَكُن لَهُ شَريكٌ فِي المُلكِ وَخَلَقَ كُلَّ شَيءٍ فَقَدَّرَهُ تَقديرًا
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हिन्दी (Al-Omari)(वह अस्तित्व) जिसके लिए आकाशों तथा धरती का राज्य है, तथा उसने (अपने लिए) कोई संतान नहीं बनाई, और न कभी राज्य में उसका कोई साझी रहा है। तथा उसने प्रत्येक वस्तु की उत्पत्ति की, फिर उसका उचित अंदाज़ा निर्धारित किया।
Roman Urdu (Maududi)Woh jo zameen aur aasmaano ki baadshahi ka malik hai, jisne kisi ko beta nahin banaya hai, jiske saath baadshahi mein koi shareek nahin hai, jisne har cheez ko paida kiya phir uski ek taqdeer muqarrar ki
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi Allah ki saltanat hai aasmano aur zamin ki aur woh koi aulad nahi rakhta na uss ki saltanat mein koi uss ka sajhi hai aur her cheez ko uss ney peda ker kay aik munasib andaza thera diya hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो जो ज़मीन और आसमानों की बादशाही का मालिक है, जिसने किसी को बेटा नहीं बनाया है, जिसके साथ बादशाही में कोई शरीक नहीं है, जिसने हर चीज़ को पैदा किया फिर उसकी एक तकदीर मुकर्रर की
عَرَبِيوَاتَّخَذوا مِن دونِهِ آلِهَةً لا يَخلُقونَ شَيئًا وَهُم يُخلَقونَ وَلا يَملِكونَ لِأَنفُسِهِم ضَرًّا وَلا نَفعًا وَلا يَملِكونَ مَوتًا وَلا حَياةً وَلا نُشورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने उसके अतिरिक्त अनेक पूज्य बना लिए, जो किसी चीज़ को पैदा नहीं करते और वे स्वयं पैदा किए जाते हैं और न वे अधिकार रखते हैं अपने लिए किसी हानि का और न किसी लाभ का, तथा न अधिकार रखते हैं मरण का और न जीवन का और न पुनः जीवित करने का।
Roman Urdu (Maududi)Logon ne usey chodh kar aisey mabood bana liye jo kisi cheez ko paida nahin karte balke khud paida kiye jatey hain, jo khud apne liye bhi kisi nafey (faidey) ya nuqsaan ka ikhtiyar nahin rakhte, jo na maar sakte hain na jila sakte hain, na marey (dead) huey ko phir utha sakte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Inn logon ney Allah kay siwa jinhen apnay mabood thera rakhay hain woh kissi cheez ko peda nahi ker saktay bulkay woh khud peda kiye jatay hain yeh to apni jaan kay nuksan nafay ka bhi ikhtiyar nahi rakhtay aur na maut-o-hayat kay aur na doobara ji uthney kay woh malik hain
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों ने उसे छोड़ कर ऐसा माबूद बना लिया जो किसी चीज़ को पेदा नहीं करते बलके खुद पेदा किये जाते हैं, जो खुद अपने लिए भी किसी नफ़े (फ़ायदे) या नुक्सान का इख्तियार नहीं रखते, जो ना मार सकते हैं ना जिला सकते हैं, ना मारे (मृत) हुए को फिर उठा सकते हैं
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ كَفَروا إِن هٰذا إِلّا إِفكٌ افتَراهُ وَأَعانَهُ عَلَيهِ قَومٌ آخَرونَ ۖ فَقَد جاءوا ظُلمًا وَزورًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा काफ़िरों ने कहा : यह तो बस एक झूठ है, जिसे इसने स्वयं गढ़ लिया है और इसपर अन्य लोगों ने उसकी सहायता की है। तो निःसंदेह वे घोर अन्याय और झूठ पर उतर आए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne Nabi ki baat maanne se inkaar kariya hai woh kehte hain ke yeh furqan ek mann ghadat cheez hai jisey is shaks ne aap hi ghadd liye hai aur kuch dusre logon ne is kaam mein iski madad ki hai.Bada zulm aur sakht jhoot hai jispar yeh log utar aaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kafiron ney kaha yeh to bus khud issi ka ghara gharaya jhoot hai jiss per aur logon ney bhi iss ki madad ki hai dar-asal yeh kafir baray hi zulm aur sir-ta-sir jhoot kay murtakib huye hain
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने नबी की बात मन से इंकार किया है वो कहते हैं के ये फुरकान एक मन गड़बड़ चीज है जैसे इस शक्स ने आप ही गड़बड़ ली है और कुछ दूसरे लोगों ने इस काम में इसकी मदद की है। बड़ा जुल्म और सख्त झूठ है जिसपर ये लोग उतर आए हैं
عَرَبِيوَقالوا أَساطيرُ الأَوَّلينَ اكتَتَبَها فَهِيَ تُملىٰ عَلَيهِ بُكرَةً وَأَصيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने कहा कि ये पहले लोगों की कहानियाँ हैं, जिन्हें उसने लिखवा लिया है। तो वही उसके सामने सुबह और शाम पढ़ी जाती हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kehte hain yeh purane logon ki likhi hui cheezein hain jinhein yeh shaks naqal (copy) karta hai aur woh isey subah o shaam sunayi jaati hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh bhi kaha kay yeh to aglon kay afsaney hain jo iss ney likha rakhay hain bus wohi subha-o-shaam iss kay samney parhay jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)कहते हैं ये पुराने लोगों की लिखी हुई चीज़ें हैं जिन्हें ये शक्स नक़ल (कॉपी) करता है और वो इसे सुबह ओ शाम सुनायी जाती हैं
عَرَبِيقُل أَنزَلَهُ الَّذي يَعلَمُ السِّرَّ فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ إِنَّهُ كانَ غَفورًا رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : इसे उसने उतारा है, जो आकाशों तथा धरती के भेद जानता है। निःसंदेह वह हमेशा से अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad) Insey kaho ke “isey nazil kiya hai usne jo zameen aur aasmano ka bhed (secrets) jaanta hai”. Haqeeqat yeh hai ke woh bada gafoor ur raheem(Forgiving and Merciful) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay issay to uss Allah ney utara hai jo aasman-o-zamin ki tamam posheeda baaton ko janta hai. Be-shak woh bara hi bakhshney wala meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद) इनसे कहो के “इसे नाज़िल किया है उसने जो ज़मीन और आसमान का भे डी (रहस्य) जानता है”। हकीकत ये है कि वो बड़ा गफूर उर रहीम (क्षमाशील और दयालु) है
عَرَبِيوَقالوا مالِ هٰذَا الرَّسولِ يَأكُلُ الطَّعامَ وَيَمشي فِي الأَسواقِ ۙ لَولا أُنزِلَ إِلَيهِ مَلَكٌ فَيَكونَ مَعَهُ نَذيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा : इस रसूल को क्या है कि यह खाना खाता है और बाज़ारों में चलता-फिरता है? इसकी ओर कोई फ़रिश्ता क्यों नहीं उतारा गया कि वह इसके साथ सावधान करने वाला होता?
Roman Urdu (Maududi)Kehte hain “yeh kaisa Rasool hai jo khana khata hai aur bazaaron mein chalta phirta hai? Kyun na iske paas koi Farishata bheja gaya jo iske saath rehta aur (na maannay walon ko) dhamkata
Roman Urdu (Junagarhi)Aur enhon ney kaha yeh kaisa rasool hai kay khana khata hai aur bazaron mein chlta phirta hai iss kay pass koi farishta kiyon nahi bheja jata? Kay woh bhi iss kay sath ho ker daraney wala bann jata
Devnagri Urdu (Maududi)कहते हैं "ये कैसा रसूल है जो खाना खाता है और बाज़ारों में चलता फिरता है? क्यों ना इसके पास कोई फरिश्ता भेजा गया जो इसके साथ रहता है और (ना मनने वालों को) धमाका
عَرَبِيأَو يُلقىٰ إِلَيهِ كَنزٌ أَو تَكونُ لَهُ جَنَّةٌ يَأكُلُ مِنها ۚ وَقالَ الظّالِمونَ إِن تَتَّبِعونَ إِلّا رَجُلًا مَسحورًا
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हिन्दी (Al-Omari)अथवा उसकी ओर कोई खज़ाना उतार दिया जाता अथवा उसका कोई बाग़ होता, जिसमें से वह खाता? तथा अत्याचारियों ने कहा : तुम तो बस एक जादू किए हुए व्यक्ति का अनुसरण कर रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Ya aur kuch nahin to iske liye koi khazana hi utaar diya jata, ya iske paas koi baagh (garden) hi hota jissey yeh (itminaan ki) rozi haasil karta”. Aur zaalim kehte hain “ tum log to ek sehar zadah (bewitched) aadmi ke peechey lag gaye ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Ya iss kay pass koi khazana hi daal diya jata ya iss ka koi baagh hi hota jiss mein say yeh khata. Aur inn zalimon ney kaha kay tum aisay aadmi kay peechay ho liye ho jiss per jadoo ker diya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)हां और कुछ नहीं तो इसके लिए कोई खजाना ही उतार दिया जाता, या इसके पास कोई बाग (बगीचा) ही होता जैसा ये (इत्मिनान की) रोजी हासिल करता।'' और जालिम कहते हैं '' तुम लोग तो एक सहर जदा (मोहित) आदमी के पीछे लग गए हो''
عَرَبِيانظُر كَيفَ ضَرَبوا لَكَ الأَمثالَ فَضَلّوا فَلا يَستَطيعونَ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)देखिए कि उन्होंने आपके लिए कैसे उदाहरण दिए हैं? अतः वे गुमराह हो गए। (अब) वे कोई रास्ता नहीं पा सकते।
Roman Urdu (Maududi)Dekho, kaisi kaisi ajeeb hujjatein (arguments) yeh log tumhare aagey pesh kar rahey hain, aisey behke hain ke koi thikane ki baat inko nahin soojhti
Roman Urdu (Junagarhi)Khayal to kijiye! Kay yeh log aap ki nisbat kaisi kaisi baaten banatay hain. Pus jiss say khud hi behak rahey hain aur kissi tarah raah per nahi aa saktay
Devnagri Urdu (Maududi)देखो, कैसी कैसी अजीब हुज्जतें (तर्क) ये लोग तुम्हारे आगे पेश कर रहे हैं, ऐसे बहके हैं के कोई ठिकाने की बात इनको नहीं समझती
عَرَبِيتَبارَكَ الَّذي إِن شاءَ جَعَلَ لَكَ خَيرًا مِن ذٰلِكَ جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ وَيَجعَل لَكَ قُصورًا
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हिन्दी (Al-Omari)बहुत बरकत वाला है वह (अल्लाह) कि यदि चाहे, तो आपके लिए इससे उत्तम ऐसे बाग़ बना दे, जिनके नीचे से नहरें प्रवाहित हों और आपके लिए कई भवन बना दे।
Roman Urdu (Maududi)Bada ba-barakat hai woh jo agar chahe to inki tajweej-karda cheezon se bhi zyada badh chadh kar tumko de sakta hai, (ek nahin) bahut sarey baagh (gardens) jinke nichey nehrein behti hon, aur baday baday mahal
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa to aisa ba-barkat hai kay agar chahaye to aap ko boht say aisay baghaat inayat farma dey jo inn kay kahey huye bagh say boht hi behar hon jin kay neechay nehren lehren ley rahi hon aur aap ko boht (pukhta) mehal bhi dey dey
Devnagri Urdu (Maududi)बड़ा बराकात है वो जो अगर चाहे तो इनकी तजवीज-करदा चीज़ों से भी ज़्यादा बढ़ चढ़ कर तुमको दे सकता है, (एक नहीं) बहुत सारे बाग (बगीचे) जिनके नीचे नहरेन बहती हैं, और बड़े-बड़े महल
عَرَبِيبَل كَذَّبوا بِالسّاعَةِ ۖ وَأَعتَدنا لِمَن كَذَّبَ بِالسّاعَةِ سَعيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि उन्होंने क़ियामत को झुठला दिया और हमने उसके लिए, जो क़ियामत को झुठलाए, एक भड़कती हुई आग तैयार कर रखी है।
Roman Urdu (Maududi)Asal baat yeh hai ke yeh log “Us ghadi” ko jhutla chuke hain aur jo us ghadi ko jhutlaye uske liye humne bhadakti hui aag muhaiyya kar rakkhi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Baat yeh hai kay yeh log qayamat ko jhoot samajhtay hain aur qayamat kay jhutlaney walon kay liye hum ney bharakti hui aag tayyar ker rakhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)असल बात ये है कि ये लोग "उस घड़ी" को झुटला चुके हैं और जो हमें घड़ी को झुटलाये उसके लिए हम भटकते हैं हुई आग मुहैय्या कर राखी है
عَرَبِيإِذا رَأَتهُم مِن مَكانٍ بَعيدٍ سَمِعوا لَها تَغَيُّظًا وَزَفيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)जब वह (जहन्नम) उन्हें दूर स्थान से देखेगी, तो वे (क़ियामत को झुठलाने वाले) उसके रोष और गर्जन को सुनेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh jab dur se inko dekhegi to yeh uske gazab aur josh ki aawaazein sun lenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jab woh enhen door say dekhay gi to yeh uss ka gussay say bipharna aur dharna sunen gay
Devnagri Urdu (Maududi)वो जब डर से इनको देखेगी तो ये उसके गजब और जोश की आवाजें सुन लेंगे
عَرَبِيوَإِذا أُلقوا مِنها مَكانًا ضَيِّقًا مُقَرَّنينَ دَعَوا هُنالِكَ ثُبورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब वे उसके किसी तंग स्थान में जकड़े हुए फेंक दिए जाएँगे, (तो) वहाँ विनाश को पुकारेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab yeh dast o pa-basta (zanjeeron mein jakde) usmein ek tangg jagah thoonse jayenge to apni maut ko pukarne lagenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab yeh jahannum ki kissi tang jagah mein mashken kus ker phenk diye jayengay to wahan apnay liye maut hi maut pukaren gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जब ये दस्त ओ पा-बस्ता (जंजीरों में जकड़े) उसमें एक तंग जगह थूंसे जाएंगे तो अपनी मौत को पुकारने लगेंगे
عَرَبِيلا تَدعُوا اليَومَ ثُبورًا واحِدًا وَادعوا ثُبورًا كَثيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)(उनसे कहा जाएगा :) आज एक विनाश को मत पुकारो, बल्कि बहुत-से विनाशों को पुकारो।
Roman Urdu (Maududi)(us waqt insey kaha jayega ke) aaj ek maut ko nahin bahut si mauton ko pukaro
Roman Urdu (Junagarhi)(inn say kaha jayega) aaj aik hi maut ko na pukaro bulkay boht si ammwaat ko pukaro
Devnagri Urdu (Maududi)(हमारा वक्त इनसे कहा जाएगा के) आज एक मौत को नहीं बहुत सी मौत को पुकारो
عَرَبِيقُل أَذٰلِكَ خَيرٌ أَم جَنَّةُ الخُلدِ الَّتي وُعِدَ المُتَّقونَ ۚ كانَت لَهُم جَزاءً وَمَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप (उनसे) कह दें : क्या यह बेहतर है या स्थायी जन्नत, जिसका अल्लाह से डरने वालों से वादा किया गया है? वह उनके लिए बदला तथा ठिकाना होगी।
Roman Urdu (Maududi)Insey pucho, yeh anjaam accha hai ya woh abadi jannat jiska wada khuda-tars parhezgaaron se kiya gaya hai? Jo unke aamal ki jaza aur unke safar ki aakhri mazil hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay kiya yeh behtar hai ya woh hameshgi wali jannat jiss ka wada perhezgaron say kiya gaya hai jo inn ka badla hai aur inn kay lotney ki asli jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पूछो, ये अंजाम अच्छा है या वो आबादी जन्नत जिसका वादा खुदा-तरस पहरेजगारों से किया गया है? जो उनके अमल की जजा और उनके सफर की आखिरी मंजिल होगी
عَرَبِيلَهُم فيها ما يَشاءونَ خالِدينَ ۚ كانَ عَلىٰ رَبِّكَ وَعدًا مَسئولًا
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हिन्दी (Al-Omari)उनके लिए उसमें वह सब होगा, जो वे चाहेंगे। वे उसमें हमेशा रहेंगे। यह आपके पालनहार के ज़िम्मे ऐसा वादा है, जो अनुरोध के योग्य है।
Roman Urdu (Maududi)Jis mein unki har khwahish poori hogi, jismein woh hamesha hamesha rahenge, jiska ataa karna tumhare Rubb ke zimme ek wajib ul ada wada hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh jo chahayen gay unn kay liye wahan mojood hoga hamesha rehney walay. Yeh to aap kay rab kay zimmay wada hai jo qabil-e-talab hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिस में उनकी हर ख्वाहिश पूरी होगी, जिसमें वो हमेशा हमेशा रहेंगे, जिसका अता करना तुम्हारे रब के ज़िम्मे एक वाजिब उल अदा वादा है
عَرَبِيوَيَومَ يَحشُرُهُم وَما يَعبُدونَ مِن دونِ اللَّهِ فَيَقولُ أَأَنتُم أَضلَلتُم عِبادي هٰؤُلاءِ أَم هُم ضَلُّوا السَّبيلَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिस दिन वह उन्हें और जिनको वे अल्लाह के सिवा पूजते थे, एकत्र करेगा। फिर कहेगा : क्या तुमने मेरे इन बंदों को पथभ्रष्ट किया था, अथवा वे स्वयं मार्ग से भटक गए थे?
Roman Urdu (Maududi)Aur woh wahi din hoga jabke (tumhara Rubb) in logon ko bhi ghair layega aur inke un maboodon ko bhi bula lega jinhein aaj yeh Allah ko chodh kar poojh rahey hain. Phir woh unse puchega “kya tumne mere in bandon ko gumraah kiya tha? Ya yeh khud raah-e-raast se bhatak gaye thay?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss din Allah Taalaa enhen aur siwaye Allah kay jinhen yeh poojtay rahey unhen jama keray ga kay kiya meray inn bandon ko tum ney gumrah kiya ya yeh khud hi raah say gumm hogaye
Devnagri Urdu (Maududi)और वो वही दिन होगा जबके (तुम्हारा रब) लोगों को भी घेर लेगा और इनके उन माबूदों को भी बुला लेगा जिन्हे आज ये अल्लाह को चोद कर पूछ रहे हैं। फिर वो उनसे पूछेगा "क्या तुमने मेरे साथ बंदों को गुमराह किया था? या ये खुद राह-ए-रास्त से भटक गए थे?"
عَرَبِيقالوا سُبحانَكَ ما كانَ يَنبَغي لَنا أَن نَتَّخِذَ مِن دونِكَ مِن أَولِياءَ وَلٰكِن مَتَّعتَهُم وَآباءَهُم حَتّىٰ نَسُوا الذِّكرَ وَكانوا قَومًا بورًا
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हिन्दी (Al-Omari)वे कहेंगे : तू पवित्र है! हमारे योग्य नहीं था कि हम तेरे सिवा किसी तरह के संरक्षक बनाते। परंतु तूने उन्हें और उनके बाप-दादों को समृद्धि प्रदान की, यहाँ तक कि वे तेरी याद को भूल गए और वे विनष्ट होने वाले लोग थे।
Roman Urdu (Maududi)Woh arz karenge ke “ paak hai aap ki zaat, hamari to yeh bhi majaal na thi ke aap ke siwa kisi ko apna maula banayein, magar aap ne inko aur inke baap dada ko khoob saaman e zindagi diya hatta ke yeh sabaq bhool gaye aur shamat zadah hokar rahey”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh jawab den gay kay tu pak zaat hai khud humen hi yeh zaiba na tha kay teray siwa auron ko apna kaar saaz banatay baat yeh hai kay tu ney enhen aur inn kay baap dadon ko aasoodgiyan ata farmaeen yahan tak kay woh naseehat bhula bethay yeh log thay hi halak honey walay
Devnagri Urdu (Maududi)वो अर्ज करेंगे के "पाक है आप की जात, हमारी तो ये भी मजाल न थी के आप के सिवा किसी को अपना मौला बनाएं, मगर आप ने इनको और इनके बाप को खूब सामान ए जिंदगी दिया हट्टा के ये सबक भूल गए और शामत ज्यादा होकर" रहे”
عَرَبِيفَقَد كَذَّبوكُم بِما تَقولونَ فَما تَستَطيعونَ صَرفًا وَلا نَصرًا ۚ وَمَن يَظلِم مِنكُم نُذِقهُ عَذابًا كَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्होंने तुम्हें उस बात में झुठला दिया, जो तुम कहते हो। अतः तुम न किसी तरह (यातना) हटाने की शक्ति रखते हो और न किसी मदद की। और तुममें से जो अत्याचार करेगा, हम उसे बहुत बड़ी यातना चखाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Yun jhutla denge woh (tumhare mabood) tumhari un baaton ko jo aaj tum keh rahey ho, phir tum na apni shamat (punishment) taal sakoge na kahin se madad paa sakoge. Aur jo bhi tum mein se zulm karey usey hum sakht azaab ka maza chakhayenge
Roman Urdu (Junagarhi)To enhon ney to tumhen tumhari tamam baton mein jhutlaya abb na to tum mein azabon kay pherney ki taqat hai na madad kerney ki tum say jiss jiss ney zulm kiya hai hum ussay bara azab chakhayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)यूं झूठला देंगे वो (तुम्हारे मजबूर) तुम्हारी उन बातों को जो आज तुम कह रहे हो, फिर तुम ना अपनी शामत (सजा) ताल सकोगे ना कहीं से मदद पा सकोगे। और जो भी तुम में से ज़ुल्म करे उसे हम असल अज़ाब का मजा दिखाएंगे
عَرَبِيوَما أَرسَلنا قَبلَكَ مِنَ المُرسَلينَ إِلّا إِنَّهُم لَيَأكُلونَ الطَّعامَ وَيَمشونَ فِي الأَسواقِ ۗ وَجَعَلنا بَعضَكُم لِبَعضٍ فِتنَةً أَتَصبِرونَ ۗ وَكانَ رَبُّكَ بَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने आपसे पहले कोई रसूल नहीं भेजे, परंतु निश्चय वे खाना खाते थे और बाज़ारों में चलते-फिरते थे। तथा हमने तुममें से एक को दूसरे के लिए एक परीक्षण बनाया है। क्या तुम धैर्य रखोगे? तथा आपका पालनहार हमेशा से सब कुछ देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), tumse pehle jo Rasool bhi humne bheje thay woh sab bhi khana khane waley aur bazaaron mein chalne phirne waley log hi thay. Darasal humne tum logon ko ek dusre ke liye aazmaish ka zariya bana diya hai, kya tum sabar karte ho? Tumhara Rubb sab kuch dekhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney aap say pehlay jitnay rasool bhejay sab kay sab khana bhi khatay thay aur bazaron mein bhi chaltay phirtay thay aur hum ney tum say her aik ko doosray ki aazmaeesh ka zariya bana diya. Kiya tum sabar kero gay? Tera rab sab kuch dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), तुमसे पहले जो रसूल भी हमने भेजा था वो सब भी खाना खाने वाले और बाज़ारों में चलने फिरने वाले लोग ही थे। दरसल हमने तुम लोगों को एक दूसरे के लिए आज़माइश का ज़रिया बना दिया है, क्या तुम सब्र करते हो? तुम्हारा रब सब कुछ देखता है
🕮 Juz 19 begins here
عَرَبِي۞ وَقالَ الَّذينَ لا يَرجونَ لِقاءَنا لَولا أُنزِلَ عَلَينَا المَلائِكَةُ أَو نَرىٰ رَبَّنا ۗ لَقَدِ استَكبَروا في أَنفُسِهِم وَعَتَوا عُتُوًّا كَبيرًا
हिन्दी (Al-Omari)तथा उन लोगों ने कहा जो हमसे मिलने की आशा नहीं रखते : हमपर फ़रिश्ते क्यों न उतारे गए, या हम अपने रब को देखते? नि:संदेह वे अपने दिलों में बहुत बड़े बन गए तथा बड़ी सरकशी पर उतर आए।
Roman Urdu (Maududi)Jo log hamare huzoor pesh honay ka andesha nahin rakhte woh kehte hain “kyun na Farishte hamare paas bheje jayein? Ya phir hum apne Rubb ko dekhein? Bada ghamand le baithey yeh apne nafs mein aur hadd se guzar gaye yeh apni sarkashi mein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jinhen humari mulaqat ki tawaqqa nahi unhon ney kaha kay hum per farishtay kiyon nahi utaray jatay? Ya hum apni aankhon say apnay rab ko dekh letay? Inn logon ney apnay aap ko ho boht bara samajh rakha hai aur sakht sirkashi ker li hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग हमारे हुज़ूर पेश होने का अंदेशा नहीं रखते वो कहते हैं "क्यों ना फ़रिश्ते हमारे पास भेजे जाएँ? या फिर हम अपने रुब को देखेंगे? बड़ा घमंड ले बैठे ये अपने नफ़्स में और हद से गुज़र गए ये अपनी सरकशी में
عَرَبِييَومَ يَرَونَ المَلائِكَةَ لا بُشرىٰ يَومَئِذٍ لِلمُجرِمينَ وَيَقولونَ حِجرًا مَحجورًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन वे फ़रिश्तों को देखेंगे, उस दिन अपराधियों के लिए कोई शुभ सूचना नहीं होगी और वे कहेंगे (काश! हमारे और उनके बीच) एक मज़बूत ओट होती।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz yeh Farishton ko dekhenge woh mujreemo ke liye kisi basharat (khush khabri) ka din na hoga, cheekh uthenge ke panaah-ba-khuda
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din yeh farishton ko dekh len gay uss din inn gunehgaron ko koi khushi na hogi aur kahen gay yeh mehroom hi mehroom kiye gaye
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ ये फरिश्तों को देखेंगे वो मुजरेमो के लिए किसी बशारत (खुश खबरी) का दिन न होगा, गाल उठेंगे के पनाह-ब-खुदा
عَرَبِيوَقَدِمنا إِلىٰ ما عَمِلوا مِن عَمَلٍ فَجَعَلناهُ هَباءً مَنثورًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हम उसकी ओर आएँगे जो उन्होंने कोई भी कर्म किया होगा, तो उसे बिखरी हुई धूल बना देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo kuch bhi inka kiya dhara hai usey lekar hum gubaar(dust) ki tarah uda dengey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur enhon ney jo amal kiye thay hum ney unn ki taraf barh ker enhen paraganda zarron ki tarah ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)और जो कुछ भी इनका किया धरा है उसे लेकर हम गुबार (धूल) की तरह उड़ा देंगे
عَرَبِيأَصحابُ الجَنَّةِ يَومَئِذٍ خَيرٌ مُستَقَرًّا وَأَحسَنُ مَقيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन जन्नत वाले ठिकाने के लिहाज़ से बेहतर और आरामगाह के लिहाज़ से कहीं अच्छे होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Bas wahi log jo jannat ke mustahiq hain us din acchi jagaah thehrenge aur dopahar (mid-day) guzarne ko umdah muqaam payenge
Roman Urdu (Junagarhi)Albatta uss din jannatiyon ka thikana behtar hoga aur khuwab gaah bhi umdah hogi
Devnagri Urdu (Maududi)बस वही लोग जो जन्नत के मुस्तहिक हैं उस दिन अच्छी जगह ठहरेंगे और दोपहर (मिड-डे) गुजारने को उम्मीद मुकाम पाएंगे
عَرَبِيوَيَومَ تَشَقَّقُ السَّماءُ بِالغَمامِ وَنُزِّلَ المَلائِكَةُ تَنزيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन आकाश बादल के साथ फट जाएगा और फ़रिश्ते निरंतर उतारे जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aasmaan ko cheerta hua ek baadal us roz namudaar hoga aur Farishton ke parey ke parey (rank after rank) utaar diye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss din aasman badal samet phat jayega aur farishtay laga taar utaray jayengay
Devnagri Urdu (Maududi)आसमान को चीरता हुआ एक बादल हमें रोज नामदार होगा और फरिश्तों के परे के परे (रैंक के बाद रैंक) उतार दिए जाएंगे
عَرَبِيالمُلكُ يَومَئِذٍ الحَقُّ لِلرَّحمٰنِ ۚ وَكانَ يَومًا عَلَى الكافِرينَ عَسيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन, वास्तविक राज्य 'रहमान' (अति दयावान्) का होगा और वह काफ़िरों के लिए बहुत मुश्किल दिन होगा।
Roman Urdu (Maududi)Us roz haqeeqi baadshahi sirf rehman ki hogi aur woh munkireen ke liye bada sakht din hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din sahih tor per mulk sirf rehman ka hi hoga aur yeh din kafiron per bara bhari hoga
Devnagri Urdu (Maududi)हमें रोज़ हक़ीक़ी बादशाही सिर्फ़ रहमान की होगी और वो मुनकिरीन के लिए बड़ा सख्त दिन होगा
عَرَبِيوَيَومَ يَعَضُّ الظّالِمُ عَلىٰ يَدَيهِ يَقولُ يا لَيتَنِي اتَّخَذتُ مَعَ الرَّسولِ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन अत्याचारी अपने दोनों हाथ चबाएगा। कहेगा : ऐ काश! मैंने रसूल के साथ मार्ग अपनाया होता।
Roman Urdu (Maududi)Zaalim Insaan apna haath chabayega aur kahega “kaash maine Rasool ka saath diya hota
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss din zalim shaks apnay hathon ko chaba chaba ker kahey ga haye kaash kaye mein ney rasool (PBUH) ki raah ikhtiyar ki hoti
Devnagri Urdu (Maududi)ज़ालिम इंसान अपना हाथ चबाएगा और कहेगा "काश मैंने रसूल का साथ दिया होगा
عَرَبِييا وَيلَتىٰ لَيتَني لَم أَتَّخِذ فُلانًا خَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)हाय मेरा विनाश! काश मैंने अमुक व्यक्ति को मित्र न बनाया होता।
Roman Urdu (Maududi)Haaye meri kambakhti, kaash maine falaan shaks ko dost na banaya hota
Roman Urdu (Junagarhi)Haye afsos kaash kay mein ney falan ko dost na banaya hota
Devnagri Urdu (Maududi)हाय मेरी कम्बख्त, काश मैंने फलां शक्स को दोस्त ना बनाया होता
عَرَبِيلَقَد أَضَلَّني عَنِ الذِّكرِ بَعدَ إِذ جاءَني ۗ وَكانَ الشَّيطانُ لِلإِنسانِ خَذولًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह उसने मुझे उपदेश (क़ुरआन) से बहका दिया, जबकि वह मेरे पास आ चुका था। और शैतान हमेशा मनुष्य को छोड़ जाने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Uske behkaye mein aakar maine woh naseehat na maani jo mere paas aayi thi. Shaytaan insaan ke haqq mein bada hi bewafa nikla”
Roman Urdu (Junagarhi)Iss ney to mujhay iss kay baad gumrah ker diya kay naseehat meray pass aa phonci thi aur shetan to insan ko (waqt per) dagha denay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसके बहकाए में आकर मैंने वो हिदायत ना मानी जो मेरे पास आई थी। शैतान इंसान के हक में बड़ा ही बेवफा निकला”
عَرَبِيوَقالَ الرَّسولُ يا رَبِّ إِنَّ قَومِي اتَّخَذوا هٰذَا القُرآنَ مَهجورًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा रसूल कहेगा : ऐ मेरे पालनहार! निःसंदेह मेरी क़ौम ने इस क़ुरआन को छोड़ दिया था।
Roman Urdu (Maududi)Aur Rasool kahega ke “Aey mere Rubb, meri qaum ke logon ne is Quran ko nishana tadheek bana liya tha (the object of their ridicule)”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur rasool kahey ga kay aey meray perwerdigar! Be-shak meri ummat ney iss quran ko chor rakha tha
Devnagri Urdu (Maududi)और रसूल कहेगा के “ऐ मेरे रब, मेरी क़ौम के लोगों ने इस कुरान को निशाना बनाकर बना लिया था।” उपहास)''
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ جَعَلنا لِكُلِّ نَبِيٍّ عَدُوًّا مِنَ المُجرِمينَ ۗ وَكَفىٰ بِرَبِّكَ هادِيًا وَنَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी तरह हमने हर नबी के लिए अपराधियों में से कोई न कोई शत्रु बना दिया और आपका पालनहार मार्गदर्शन प्रदान करने वाला तथा सहायता करने वाला काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), humne to isi taraah mujreemo ko har Nabi ka dushman banaya hai , aur tumhare liye tumhara Rubb hi rehnumayi aur madad ko kaafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss tarah hum ney her nabi kay dushman baaz gunehgaron ko bana diya hai. Aur tera rab hi hidayat kerney wala aur madad kerney wala kafi hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), हमने तो इसी तरह मुजरेमो को हर नबी का दुश्मन बनाया है, और तुम्हारे लिए तुम्हारा रब हाय रहनुमाई और मदद को काफी है
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ كَفَروا لَولا نُزِّلَ عَلَيهِ القُرآنُ جُملَةً واحِدَةً ۚ كَذٰلِكَ لِنُثَبِّتَ بِهِ فُؤادَكَ ۖ وَرَتَّلناهُ تَرتيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा कुफ़्र करने वालों ने कहा : यह क़ुरआन उसपर एक ही बार क्यों नहीं उतार दिया गया? इसी प्रकार (हमने उतारा) ताकि हम इसके साथ आपके दिल को मज़बूत करें और हमने इसे ख़ूब ठहर-ठहर कर पढ़कर सुनाया है।
Roman Urdu (Maududi)Munkireen kehte hain “is shaks par saara Quran ek hi waqt mein kyun na utaar diya gaya? Haan, aisa is liye kiya gaya hai ke isko achhi tarah hum tumhare zehan nasheen karte rahein aur (isi garaz ke liye) humne isko ek khaas tarteeb ke saath alag alag ajzaa ki shakal di hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kafiron ney kaha kay iss per quran sara ka sara aik sath hi kiyon na utara gaya issi tarah hum ney (thora thora ker kay) utara takay iss say hum aap ka dil qavi rakhen hum ney issay thehar thehar ker hi parh sunaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)मुनकिरीन कहते हैं ''इस शक्स पर सारा कुरान एक ही वक्त में क्यों न उतार दिया गया? हां, ऐसा इस लिए किया गया है के इसको अच्छी तरह हम तुम्हारे जेहन नशीं करते रहे और (इसी गरज के लिए) हमने इसको एक खास तरतीब के साथ अलग अलग अजजा की शक्ल दी है
عَرَبِيوَلا يَأتونَكَ بِمَثَلٍ إِلّا جِئناكَ بِالحَقِّ وَأَحسَنَ تَفسيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ रसूल!) जब भी वे आपके पास कोई उदाहरण लाते हैं, तो हम आपके पास सत्य और उत्तम व्याख्या ले आते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur (ismein yeh maslihat bhi hai) ke jab kabhi woh tumhare samne koi nirali baat (ya ajeeb sawal) lekar aaye, uska theek jawaab bar waqt humne tumhein de diya aur behtareen tareeqe se baat khol di
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh aap kay pass jo koi misal layen gay hum uss ka sacha jawab aur umdah tojeeh aap ko bata den gay
Devnagri Urdu (Maududi)और (इसमें ये मसलाहत भी है) के जब कभी वो तुम्हारे सामने कोई निराली बात (या अजीब सवाल) लेकर आए, उसका ठीक जवाब बार वक्त हमें तुम्हें दे दिया और बेहतरी तरीक़े से बात खोल दी
عَرَبِيالَّذينَ يُحشَرونَ عَلىٰ وُجوهِهِم إِلىٰ جَهَنَّمَ أُولٰئِكَ شَرٌّ مَكانًا وَأَضَلُّ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग जो अपने चेहरों के बल जहन्नम की ओर इकट्ठे किए जाएँगे, वही ठिकाने में सबसे बुरे और मार्ग में सबसे अधिक भटके हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo log aundhey mooh jahannum ki taraf dhakele janey waley hain unka mauquf bahut bura (most erroneous) aur unki raah hadd darjah galat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log apnay mun kay bal jahannum ki taraf jama kiye jayengay. Wohi bad-tar makaan walay aur gumrah tar raastay walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग औंधे मुँह जहन्नुम की तरफ ढकेले जाने वाले हैं उनका मौक़ुफ़ बहुत बुरा (सबसे ज्यादा) ग़लत) और उनकी राह हद दर्ज़ ग़लत है
عَرَبِيوَلَقَد آتَينا موسَى الكِتابَ وَجَعَلنا مَعَهُ أَخاهُ هارونَ وَزيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने मूसा को किताब दी और उसके साथ उसके भाई हारून को उसका सहायक बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Humne Moosa ko kitaab di aur uske saath uske bhai Haroon ko madadgaar ke taur par lagaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bila shuba hum ney musa ko kitab di aur unn kay humrah unn kay bhai haroon ko unn ka wazir bana diya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने मूसा को किताब दी और उसके साथ उसके भाई हारून को मददगार के तौर पर लगाया
عَرَبِيفَقُلنَا اذهَبا إِلَى القَومِ الَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِنا فَدَمَّرناهُم تَدميرًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने कहा : तुम दोनों उन लोगों की ओर जाओ, जिन्होंने हमारी आयतों (निशानियों) को झुठला दिया। तो हमने उन्हें बुरी तरह नष्ट कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur unse kaha ke jao us qaum ki taraf jisne hamari aayat ko jhutla diya hai. Aakhir e kaar un logon ko humne tabaah karke rakh diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur keh diya kay tum dono unn logon ki taraf jao jo humari aayaton ko jhutla rahey hain. Phir hum ney unhen bilkul hi paamaal ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)और उनसे कहा के जाओ उस क़ौम की तरफ जिसने हमारी आयत को झुटला दिया है। आख़िर ई कर उन लोगों को हमने तबाह करके रख दिया
عَرَبِيوَقَومَ نوحٍ لَمّا كَذَّبُوا الرُّسُلَ أَغرَقناهُم وَجَعَلناهُم لِلنّاسِ آيَةً ۖ وَأَعتَدنا لِلظّالِمينَ عَذابًا أَليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और नूह़ के समुदाय को भी जब उन्होंने रसूलों को झुठलाया, तो हमने उन्हें डुबो दिया और उन्हें लोगों के लिए एक निशानी बना दिया। तथा हमने अत्याचारियों के लिए एक दुःखदायी यातना तैयार कर रखी है।
Roman Urdu (Maududi)Yahi haal qaum e Nooh ka hua jab unhon ne Rasoolon ki takzeeb ki, humne unko garq (drown/duba) kardiya aur duniya bhar ke logon ke liye ek nishaan e ibrat bana diya, aur in zaalimon ke liye ek dardnaak azaab humne muhaiyya kar rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur qom-e-nooh ney bhi jab rasoolon ko jhoota kaha to hum ney unhen gharaq ker diya aur logon kay liye unhen nishan-e-ibrat bana diya. Aur hum ney zalimon kay liye dard-naak azab mohiyya ker rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)यही हाल क़ौम ए नूह का हुआ जब उन्होन ने रसूलों की तकज़ीब की, हमने उनको गर्क (डूब/डूबा) करदिया और दुनिया भर के लोगों के लिए एक निशान ए इबरत बना दिया, और इन ज़ालिमों के लिए एक दर्दनाक अज़ाब हमने मुहैय्या कर रक्खा है
عَرَبِيوَعادًا وَثَمودَ وَأَصحابَ الرَّسِّ وَقُرونًا بَينَ ذٰلِكَ كَثيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आद और समूद और कुएँ वालों को तथा इनके बीच बहुत-से समुदायों को भी (विनष्ट कर दिया)।
Roman Urdu (Maududi)Isi tarah Aad aur Samood aur ashaab e Rass aur beech ki sadiyon ke bahut se log tabaah kiye gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aadiyon aur samoodiyon aur koonwen walon ko aur unn kay darmiyan ki boht si ummaton ko (halak ker diya)
Devnagri Urdu (Maududi)इसी तरह अद और समूद और असहाब ए रस और बीच की सदियों के बहुत से लोग तबाह हो गए
عَرَبِيوَكُلًّا ضَرَبنا لَهُ الأَمثالَ ۖ وَكُلًّا تَبَّرنا تَتبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और प्रत्येक के लिए हमने उदाहरण पेश किए और प्रत्येक को हमने बुरी तरह नष्ट कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur un mein se har ek ko humne ( pehle tabaah honay walon ki) misalein dey dey kar samjhaya, aur aakhir e kaar har ek ko gaarat (destroy) kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unn kay samney misalen biyan ken phir her aik bilkul tabah-o-barbaad ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)और उन में से हर एक को हमने (पहले तबाह होने वालों की) मिसालें दे-दे कर समझा, और आखिर ए कार हर एक को नष्ट कर दिया
عَرَبِيوَلَقَد أَتَوا عَلَى القَريَةِ الَّتي أُمطِرَت مَطَرَ السَّوءِ ۚ أَفَلَم يَكونوا يَرَونَها ۚ بَل كانوا لا يَرجونَ نُشورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय ही ये लोग उस बस्ती पर आ चुके हैं, जिसपर बुरी वर्षा की गई। तो क्या ये लोग उसे देखा नहीं करते थे? बल्कि ये लोग पुनः जीवित करके उठाए जाने की आशा नहीं रखते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur us basti par to inka guzar ho chuka hai jispar badhtareen baarish barsayi gayi thi.Kya inhon ne uska haal dekha na hoga? Magar yeh maut ke baad dusri zindagi ki tawakku hi nahin rakhte
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log uss basti kay pass say bhi aatay jatay hain jin per buri tarah ki barish barsaee gaee kiya yeh phir bhi issay dekhtay nahi? Haqeeqat yeh hai kay enhen marr ker ji uthney ki umeed hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और उस बस्ती पर तो इनका गुजर हो चुका है, जिसपर बढ़तीं बारिश बरस गई थी। क्या इन्होन ने उसका हाल देखा ना होगा? मगर ये मौत के बाद दूसरी जिंदगी की तवक्कू ही नहीं रखते
عَرَبِيوَإِذا رَأَوكَ إِن يَتَّخِذونَكَ إِلّا هُزُوًا أَهٰذَا الَّذي بَعَثَ اللَّهُ رَسولًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब वे आपको देखते हैं, तो आपका मज़ाक़ बना लेते हैं (और कहते हैं :) क्या यही है, जिसे अल्लाह ने रसूल बनाकर भेजा है?!
Roman Urdu (Maududi)Yeh log jab tumhein dekhte hain to tumhara mazaaq bana lete hain, (Kehte hain) “kya yeh shaks hai jisey khuda ne Rasool bana kar bheja hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tumhen jab kabhi dekhtay hain to tum say maskhara pann kerney lagtay hain. Kay kiya yehi woh shaks hain jinehn Allah Taalaa ney rasool bana ker bheja hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग जब तुम्हें देखते हैं तो तुम्हारा मज़ाक बना लेते हैं, (कहते हैं) “क्या ये शक्स है जिसे खुदा ने रसूल बना कर भेजा है
عَرَبِيإِن كادَ لَيُضِلُّنا عَن آلِهَتِنا لَولا أَن صَبَرنا عَلَيها ۚ وَسَوفَ يَعلَمونَ حينَ يَرَونَ العَذابَ مَن أَضَلُّ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यह तो क़रीब था कि हमें हमारे पूज्यों से भटका ही देता, यदि हम उनपर अडिग न रहते। और शीघ्र ही वे जान लेंगे, जब वे यातना देखेंगे, कि मार्ग से अधिक पथभ्रष्ट कौन है?
Roman Urdu (Maududi)Isne to humein gumraah karke apne maboodon se bargashta(astray/behka/gumrah) hi kardiya hota agar hum unki aqeedat par jam na gaye hotey”. Accha, woh waqt door nahin hai jab azaab dekh kar inhein khud maloom ho jayega ke kaun gumraahi mein door nikal gaya tha
Roman Urdu (Junagarhi)(woh to kahiye) kay hum iss per jama rahey werna enhon ney to humen humaray maboodon say behka denay mein koi kasar nahi chori thi. Aur yeh jab azabon ko dekhen gay to enhen saaf maloom hojaye ga kay poori tarah raah say bhatka hua kaun tha
Devnagri Urdu (Maududi)इसने तो हमें गुमराह करके अपने मबूदों से बरगश्ता(आवारा/बेहका/गुमराह) हाय करदिया होता अगर हम उनकी अकीदत पर जाम ना गए होते”। अच्छा, वो वक्त दूर नहीं है जब अजब देख कर इन्हें खुद मालूम हो जाएगा कि कौन गुमराही में दूर निकल गया था
عَرَبِيأَرَأَيتَ مَنِ اتَّخَذَ إِلٰهَهُ هَواهُ أَفَأَنتَ تَكونُ عَلَيهِ وَكيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने उस व्यक्ति को देखा, जिसने अपनी इच्छा को अपना पूज्य बना लिया, तो क्या आप उसके संरक्षक होंगे?
Roman Urdu (Maududi)Kabhi tumne us shaks ke haal par gaur kiya hai jisne apni khwahish e nafs ko apna khuda bana liya ho? Kya tum aisey shaks ko raah e raast par laney ka zimma le sakte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney ussay bhi dekha jo apni khwais-e-nafs ko apna mabood banaye huye hai kiya aap uss kay zimay daar ho saktay hain
Devnagri Urdu (Maududi)कभी तुमने उस लड़के के हाल पर गौर किया है जिसने अपनी ख्वाहिश ए नफ्स को अपना खुदा बना लिया हो? क्या तुम ऐसे शक्स को राह ए रास्ते पर लाने का ज़िम्मा ले सकते हो
عَرَبِيأَم تَحسَبُ أَنَّ أَكثَرَهُم يَسمَعونَ أَو يَعقِلونَ ۚ إِن هُم إِلّا كَالأَنعامِ ۖ بَل هُم أَضَلُّ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आप समझते हैं कि उनमें से अधिकांश वास्तव में सुनते हैं या समझते हैं? वे तो चौपायों के समान हैं, बल्कि उनसे भी अधिक पथभ्रष्ट हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum samajhte ho ke inmein se aksar log sunte aur samajhte hain? Yeh to jaanwaron ki tarah hain, balke unse bhi gaye guzre
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap issi khayal mein hain kay inn mein say aksar suntay ya samajhtay hain. Woh to niray chopayon jaisay hain bulkay inn say bhi ziyada bhatkay huye
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम समझते हो के अंदर से अक्सर लोग सुनते और समझते हो? ये तो जानवरों की तरह हैं, बलके उनसे भी गए गुज़रे
عَرَبِيأَلَم تَرَ إِلىٰ رَبِّكَ كَيفَ مَدَّ الظِّلَّ وَلَو شاءَ لَجَعَلَهُ ساكِنًا ثُمَّ جَعَلنَا الشَّمسَ عَلَيهِ دَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने अपने रब को नहीं देखा कि उसने किस तरह छाया को फैला दिया? और यदि वह चाहता, तो उसे अवश्य स्थिर कर देता। फिर हमने सूर्य को उसका पता बताने वाला बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Tumne dekha nahin ke tumhara Rubb kis tarah saaya phayla deta hai? Agar woh chahta to usey daimi (constant) bana deta. Humne Suraj ko uspar daleel (sun its pilot) banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney nahi dekha kay aap kay rab ney saye ko kiss tarah phela diya hai? Agar chahata to issay thehra hua hi ker deta. Phir hum ney aftab ko issi per daleel banaya
Devnagri Urdu (Maududi)तुमने देखा नहीं के तुम्हारा रब किस तरह साया फैला देता है? अगर वो चाहता तो उसे डेमी (स्थिर) बना देता। हमने सूरज को तैयार किया (सूरज इसका पायलट) बनाया
عَرَبِيثُمَّ قَبَضناهُ إِلَينا قَبضًا يَسيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हम उस (छाया) को अपनी ओर धीरे-धीरे समेट लेते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir (jaisey jaisey Suraj utha jaata hai) hum is saaye ko rafta rafta apni taraf sameit-te chale jatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney ussay aahista aahista apni taraf khench liya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर (जैसा जैसा सूरज उठा जाता है) हम इस साए को रफ्ता रफ्ता अपनी तरफ समित-ते चले जाते हैं
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي جَعَلَ لَكُمُ اللَّيلَ لِباسًا وَالنَّومَ سُباتًا وَجَعَلَ النَّهارَ نُشورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और वही है, जिसने तुम्हारे लिए रात्रि को वस्त्र बनाया तथा नींद को विश्राम तथा दिन को उठ खड़े होने का समय बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh Allah hi hai jisne raat ko tumhare liye libaas, aur neend ko sukoon e maut, aur din ko jee uthne ka waqt banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wohi hai jiss ney raat ko tumharay liye parda banaya aur neend ko rahat banaee aur din ko uth kharay honey ka waqt
Devnagri Urdu (Maududi)और वो अल्लाह ही है जिसने रात को तुम्हारे लिए लिबास, और नींद को सुकून ए मौत, और दिन को जी उठने का वक्त बनाया
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي أَرسَلَ الرِّياحَ بُشرًا بَينَ يَدَي رَحمَتِهِ ۚ وَأَنزَلنا مِنَ السَّماءِ ماءً طَهورًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वही है जिसने हवाओं को अपनी रहमत से पहले शुभ सूचना बनाकर भेजा। और हमने आसमान से पाक करने वाला पानी उतारा।
Roman Urdu (Maududi)Aur wahi hai jo apni rehmat ke aagey aagey hawaon ko basharat bana kar bhejta hai phir aasmaan se paak pani nazil karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wohi hai jo baaraan-e-rehmat say pehlay khush khabri denay wali hawaon ko bhejta hai aur hum aasman say pak pani barsatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और वही है जो अपनी रहमत के आगे, आगे हवाओं को बशारत बना कर भेजता है फिर आसमां से पाक पानी नाज़िल करता है
عَرَبِيلِنُحيِيَ بِهِ بَلدَةً مَيتًا وَنُسقِيَهُ مِمّا خَلَقنا أَنعامًا وَأَناسِيَّ كَثيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि उसके द्वारा मृत भू-भाग को जीवन प्रदान करें तथा उसे अपनी पैदा की हुई चीज़ों में से बहुत से जानवरों और मनुष्यों के पीने के लिए उपलब्ध कराएँ।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke ek murda ilake ko iske zariye zindagi bakshe aur apni makhlooq mein se bahut se jaanwaron aur Insano ko sairaab (quench thirst) karey
Roman Urdu (Junagarhi)Takay iss kay zariye say murda shehar ko zinda ker den aur issay hum apni makhlooqaat mein say boht say chopayon aur insano ko pilatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के एक मुर्दा इलके को इसकी ज़रिये जिंदगी बक्शे और अपनी मख़लूक में से बहुत से जानवर और इंसानों को प्यास बुझाएं
عَرَبِيوَلَقَد صَرَّفناهُ بَينَهُم لِيَذَّكَّروا فَأَبىٰ أَكثَرُ النّاسِ إِلّا كُفورًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने उसे उनके दरमियान विभिन्न ढंग से वर्णन किया, ताकि वे उपदेश ग्रहण करें। परंतु अधिकतर लोगों ने इनकार और नाशुक्री ही की नीति अपनाई।
Roman Urdu (Maududi)Is karishme ko hum baar baar inke saamne latey hain taa-ke woh kuch sabaq lein. Magar aksar log kufr aur nashukri ke siwa koi dusra rawaiyya ikhtiyar karne se inkar kardete hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur be-shak hum ney issay unn kay darmiyan tarah tarah say biyan kiya takay woh naseehat hasil keren magar phir bhi aksar logon ney siwaye na-shukri kay mana nahi
Devnagri Urdu (Maududi)क्या करिश्मा को हम बार-बार इनके सामने लाते हैं ता-के वो कुछ सबक लें। मगर अक्सर लोग कुफ्र और नाशुक्र के सिवा कोई दूसरा रवैय्या इख्तियार करने से इंकार करते हैं
عَرَبِيوَلَو شِئنا لَبَعَثنا في كُلِّ قَريَةٍ نَذيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम चाहते, तो अवश्य प्रत्येक बस्ती में एक डराने वाला भेज देते।
Roman Urdu (Maududi)Agar hum chahte to ek ek basti mein ek ek nazeer (darr sunane waala) utha khada karte
Roman Urdu (Junagarhi)Agar hum chahatay to her her basti mein darney wala bhej detay
Devnagri Urdu (Maududi)अगर हम चाहते तो एक एक बस्ती में एक एक नजीर (डर सुनाने वाला) उठा खड़ा करते
عَرَبِيفَلا تُطِعِ الكافِرينَ وَجاهِدهُم بِهِ جِهادًا كَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप काफ़िरों की बात न मानें और इस (क़ुरआन) के द्वारा उनसे बड़ा जिहाद करें।
Roman Urdu (Maududi)Pas (aey Nabi) , ka firon ki baat hargiz na maano aur is Quran ko lekar inke saath jihad-e-kabeer karo
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap kafiron ka kehna na manen aur quran kay zariye inn say poori taqat say bara jihad keren
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ नबी), का फिरों की बात हरगिज़ ना मानो और इस कुरान को लेकर इनके साथ जिहाद-ए-कबीर करो
عَرَبِي۞ وَهُوَ الَّذي مَرَجَ البَحرَينِ هٰذا عَذبٌ فُراتٌ وَهٰذا مِلحٌ أُجاجٌ وَجَعَلَ بَينَهُما بَرزَخًا وَحِجرًا مَحجورًا
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हिन्दी (Al-Omari)वही है जिसने दो सागरों को मिला दिया। यह मीठा, प्यास बुझाने वाला है और यह खारा, कड़वा है। और उसने उन दोनों के बीच एक परदा और मज़बूत आड़ बना दी।
Roman Urdu (Maududi)Aur wahi hai jisne do samandaron ko mila rakkha hai, ek lazeez o shereen(sweet) , dusra talkh o shur (bitter and saltish), aur dono ke darmiyan ek purda hayal hai, ek rukawat hai(insurmountable barrier) jo unhein gud-mud honay se roakey huey hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wohi hai jiss ney do samandar aapas mein mila rakhay hain yeh hai meetha aur mazedaar aur yeh hai khaari kerwa aur inn dono kay darmiyan aik hijab aur mazboot oot kerdi
Devnagri Urdu (Maududi)और वही है जिसने दो समंदरों को मिला रक्खा है, एक लज़ीज़ ओ शीरीन (मीठा), दूसरा तल्ख ओ शूर (कड़वा और नमकीन), और दोनों के दरमियान एक पर्दा हयाल है, एक रुकावत है (दुर्गम) बैरियर) जो उन्हें गुड़-मुद होने से रोके हुए हैं
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي خَلَقَ مِنَ الماءِ بَشَرًا فَجَعَلَهُ نَسَبًا وَصِهرًا ۗ وَكانَ رَبُّكَ قَديرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वही है, जिसने पानी (वीर्य) से एक मनुष्य को पैदा किया। फिर उसके ख़ानदानी तथा ससुरालाी संबंध बना दिए। और आपका पालनहार बड़ा ही सामर्थ्यवान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur wahi hai jisne pani se ek bashar (Insaan) paida kiya, phir ussey nasab aur susraal (by blood and by marriage) ke do alag silsile chalaye .Tera Rubb bada hi qudrat wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh hai jiss ney pani say insan ko peda kiya phir issay nasab wala aur susrali rishton wala ker diya. Bila shuba aap ka perwerdigar (her cheez per) qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वही है जिसने पानी से एक बशर (इंसान) पैदा किया, फिर उसे नसब और सुसराल (खून से और शादी से) के दो अलग सिलसिले चलाये। तेरा रब बड़ा ही क़ुदरत वाला है
عَرَبِيوَيَعبُدونَ مِن دونِ اللَّهِ ما لا يَنفَعُهُم وَلا يَضُرُّهُم ۗ وَكانَ الكافِرُ عَلىٰ رَبِّهِ ظَهيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और वे अल्लाह के सिवा उस चीज़ की इबादत करते हैं, जो न उन्हें फ़ायदा पहुँचाती है और न नुक़सान पहुँचाती है और काफ़िर हमेशा अपने पालनहार के विरुद्ध मदद करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Is khuda ko chodh kar log unko poojh rahey hain jo na inko nafaa pahuncha sakte hain na nuqsaan, aur upar se mazeed yeh ke kafir apne Rubb ke muqablay mein har baagi ka madadgaar bana hua hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh Allah ko chor ker unn ki ibadat kertay hain jo na to enhen koi nafa dey saken na koi nuksan phonca saken aur kafir to hay hi apna rab kay khilaf (shetan ki) madad kerney wala
Devnagri Urdu (Maududi)क्या खुदा को छोड़ दिया गया है कर लोग उनको पूज रहे हैं जो ना इनको नाफा पाहुंचा सकते हैं ना नुक्सान, और ऊपर से मजीद ये के काफिर अपने रब के मुकाबले में हर बागी का मददगार बना हुआ है
عَرَبِيوَما أَرسَلناكَ إِلّا مُبَشِّرًا وَنَذيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने आपको केवल शुभ-सूचना देने वाला और सावधान करने वाला बनाकर भेजा है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), tumko to humne bas ek mubashir (khush khabri dene waala) aur nazeer (darr sunane wala) bana kar bheja hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney to aap ko khush khabri aur darr sunaney wala (nabi) bana ker bheja hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), तुमको तो हमने बस एक मुबाशीर (खुश खबरी देने वाला) और नज़ीर (डर सुनाने वाला) बना कर भेजा है
عَرَبِيقُل ما أَسأَلُكُم عَلَيهِ مِن أَجرٍ إِلّا مَن شاءَ أَن يَتَّخِذَ إِلىٰ رَبِّهِ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : मैं तुमसे इसपर कोई बदला नहीं माँगता, सिवाय इसके कि जो चाहे अपने पालनहार की ओर मार्ग अपना ले।
Roman Urdu (Maududi)Insey kehdo ke “ main is kaam par tumse koi ujrat (recompense) nahin maangta, meri ujrat bas yahi hai ke jiska jee chahe woh apne Rubb ka raasta ikhtiyar karle”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay mein quran kay phonchaney per tum say koi badla nahi chahata magar jo shaks apnay rab ki taraf raah pakarna chahye
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहदो के “मैं इस काम पर तुमसे कोई उजरत (इज़ाजा) नहीं मांगता, मेरी उजरत बस यही है कि जिसका जी चाहे” वो अपने रब का रास्ता इख्तियार करले”
عَرَبِيوَتَوَكَّل عَلَى الحَيِّ الَّذي لا يَموتُ وَسَبِّح بِحَمدِهِ ۚ وَكَفىٰ بِهِ بِذُنوبِ عِبادِهِ خَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उस सदा जीवंत पर भरोसा कीजिए, जो कभी नहीं मरेगा। और उसकी प्रशंसा के साथ पवित्रता का गान कीजिए। और वह अपने बंदों के गुनाहों की पूरी ख़बर रखने वाला काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Muhammad) us khuda par bharosa rakkho jo zinda hai aur kabhi marne waala nahin, uski hamd ke saath uski tasbeeh karo,apne bandon ke gunaahon se bas usi ka ba-khabar hona kaafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Uss hamesha zinda rehnay walay Allah Taalaa per tawakkal keren jissay kabhi maut nahi aur uss ki tareef kay sath pakeezgi biyan kertay rahen woh apnay gunahon say kafi khabardaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ मुहम्मद) हमें खुदा पर भरोसा रक्खो जो जिंदा है और कभी मरने वाला नहीं, उसकी हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो, अपने बंदों के गुनाहों से बस उसकी बा-खबर होना काफी है
عَرَبِيالَّذي خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ وَما بَينَهُما في سِتَّةِ أَيّامٍ ثُمَّ استَوىٰ عَلَى العَرشِ ۚ الرَّحمٰنُ فَاسأَل بِهِ خَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिसने आकाशों तथा धरती को और जो कुछ उनके बीच है, छह दिनों में पैदा किया, फिर अर्श (सिंहासन) पर बुलंद हुआ। (वह) बहुत दयालु है। अतः उसके बारे में किसी पूर्ण जानकार से पूछिए।
Roman Urdu (Maududi)Woh jisne chey (six) dino mein zameen aur aasmaano ko aur un saari cheezon ko bana kar rakh diya jo aasmaan o zameen ke darmiyaan hain, phir aap hi (qayinaat ke takht e sultanat) ‘Arsh’ par jalwa farma hua. Rehman, uski shaan bas kisi jaanne waley se pucho
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi hai jiss aasmano aur zamin aur inn kay darmiyan ki sab cheezon ko cheh din mein peda ker diya hai phir arsh per mustawi hua woh rehman hai aap iss ka baray mein kissi khabar daar say pooch len
Devnagri Urdu (Maududi)वो जिसने ची (छह) दीनों में ज़मीन और आसमान को और उन सारी चीज़ों को बना कर रख दिया जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान हैं, फिर आप ही (क़ायनात के तख्त ए सल्तनत) 'अर्श' पर जलवा फरमा हुआ। रहमान, उसकी शान बस किसी जाने वाले से पूछो
☉ Sajda
عَرَبِيوَإِذا قيلَ لَهُمُ اسجُدوا لِلرَّحمٰنِ قالوا وَمَا الرَّحمٰنُ أَنَسجُدُ لِما تَأمُرُنا وَزادَهُم نُفورًا ۩
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनसे कहा जाता है कि 'रह़मान' (अत्यंत दयावान्) को सजदा करो, तो कहते हैं कि 'रह़मान' क्या है? क्या हम उसे सजदा करें, जिसके लिए तू हमें आदेश देता है? और यह बात उन्हें बिदकने में और बढ़ा देती है।
Roman Urdu (Maududi)In logon se jab kaha jata hai ke is Rehman ko sajda karo to kehte hain “Rehman kya hota hai? Kya bas jisey tu kehde usi ko hum sajda karte phirein?” yeh dawat inki nafrat mein ulta aur izafa kardeti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say jabb bhi kaha jata hai kay rehman ko sajda kero to jawab detay hain rehman hai kiya? Kiya hum ussay sajda keren jiss ka tu humen hukum dey raha hai aur iss (tableegh) ney unn ki nafrat mein mazeed izafa ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों से जब कहा जाता है कि इस रहमान को सजदा करो तो कहते हैं "रहमान क्या होता है? क्या बस जिसे तू कहता है उसे हम सजदा करते फिरें?" ये दावत इनकी नफ़रत में उल्टा और इज़ाफा करती है
عَرَبِيتَبارَكَ الَّذي جَعَلَ فِي السَّماءِ بُروجًا وَجَعَلَ فيها سِراجًا وَقَمَرًا مُنيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)बहुत बरकत वाला है वह, जिसने आकाश में बुर्ज (नक्षत्र) बनाए तथा उसमें एक चिराग़ (सूर्य) और एक रोशनी देने वाला चाँद बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Bada mutabarrak(ba-barakat) hai woh jisne aasmaan mein burj (fortified spheres) banaye aur us mein ek chiraag aur ek chamakta Chand roshan kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-barkat hai woh jiss ney aasman mein burj banaye aur iss mein aftab banaya aur munawar mahtab bhi
Devnagri Urdu (Maududi)बड़ा मुतबर्रक (बा-बरकत) है वो जिसने आसमान में बुर्ज (किलेबंद गोले) बनाए और उसमें एक चिराग और एक चमकता चांद रोशन किया
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي جَعَلَ اللَّيلَ وَالنَّهارَ خِلفَةً لِمَن أَرادَ أَن يَذَّكَّرَ أَو أَرادَ شُكورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और वही है जिसने रात तथा दिन को एक-दूसरे के पीछे आने वाला बनाया, उसके लिए जो उपदेश ग्रहण करना चाहे, या शुक्र करना चाहे।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jisne raat aur din ko ek dusre ka jaanasheen banaya, har us shaks ke liye jo sabaq lena chahe, ya shukar guzaar hona chahe
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ussi ney raat aur din ko aik doosray kay peechay aaney janey wala banaya uss shaks ki naseehat kay liye jo naseehat hasil kerney ya shukar guzari kerney ka irada rakhta ho
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिसने रात और दिन को एक दूसरे का जानशीन बनाया, हर उस शक्स के लिए जो सबक लेना चाहे, या शुक्र गुज़ार होना चाहे
عَرَبِيوَعِبادُ الرَّحمٰنِ الَّذينَ يَمشونَ عَلَى الأَرضِ هَونًا وَإِذا خاطَبَهُمُ الجاهِلونَ قالوا سَلامًا
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हिन्दी (Al-Omari)और 'रह़मान' के बंदे वे हैं, जो धरती पर विनम्रता से चलते हैं और जब जाहिल (अक्खड़) लोग उनसे बात करते हैं, तो कहते हैं सलाम है।
Roman Urdu (Maududi)Rehman ke (asli) banday woh hai jo zameen par narm chaal chalte hain aur jaahil unke mooh ko aayein to keh detay hain ke tumko salaam
Roman Urdu (Junagarhi)Rehman kay (sachay) banday woh hain jo zamin per farotni kay sath chaltay hain aur jab bey ilm log inn say baten kerney lagtay hain to woh keh detay hain kay salam hai
Devnagri Urdu (Maududi)रहमान के (असली) बंदे वो है जो ज़मीन पर नरम चल चलते हैं और जाहिल उनके मुंह को आएं तो कह देते हैं कि तुमको सलाम
عَرَبِيوَالَّذينَ يَبيتونَ لِرَبِّهِم سُجَّدًا وَقِيامًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जो अपने पालनहार के लिए सजदा करते हुए तथा खड़े होकर रात गुज़ारते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo apne Rubb ke huzur sajde aur qayaam mein raatein guzarte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo apnay rab kay samney sajday aur qayam kertay huye raten guzar detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो अपने रब के हुजूर सजदे और कयाम में रातें गुज़ारते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ يَقولونَ رَبَّنَا اصرِف عَنّا عَذابَ جَهَنَّمَ ۖ إِنَّ عَذابَها كانَ غَرامًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो कहते हैं कि ऐ हमारे पालनहार! हमसे जहन्नम की यातना को हटा दे। निःसंदेह उसकी यातना चिमट जाने वाली है।
Roman Urdu (Maududi)Jo duaein karte hain ke “Aey hamare Rubb, jahannum ke azaab se humko bacha le, uska azaab to jaan ka laagu hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo yeh dua kertay hain kay aey humaray perwerdigar! Hum say dozakh ka azab paray hi paray rakh kiyon kay iss ka azab chimat janey wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो दुआएं करते हैं के "ऐ हमारे रब, जहन्नुम के अज़ाब से हमको बचा ले, उसका अज़ाब तो जान का लागू है
عَرَبِيإِنَّها ساءَت مُستَقَرًّا وَمُقامًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वह बुरी ठहरने की जगह और निवास की जगह है।
Roman Urdu (Maududi)Woh to bada hi mustaqar(evil abode) aur muqaam hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak woh therney aur rehney kay lehaz say bad-tareen jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो तो बड़ा ही मुस्तकर (बुरा ठिकाना) और मुकाम है"
عَرَبِيوَالَّذينَ إِذا أَنفَقوا لَم يُسرِفوا وَلَم يَقتُروا وَكانَ بَينَ ذٰلِكَ قَوامًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे लोग कि जब खर्च करते हैं, तो न फ़िज़ूल-खर्ची करते है और न ख़र्च करने में तंगी करते हैं, और (उनका ख़र्च) इसके बीच में मध्यम होता है।
Roman Urdu (Maududi)Jo kharch karte hain to na fizool kharchi karte hain na bukhl, balke unka kharch dono intehaaon (extremes) ke darmiyan aitadaal par qayam rehta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo kharach kertay waqt bhi na to israaf kertay hain na bakheeli bulkay inn dono kay darmiyan motadil tareeqay per kharach kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो खर्च करते हैं तो ना फ़िज़ूल खर्च करते हैं ना बुख़्ल, बलके उनका खर्च दोनों इन्तेहाओं (चरम) के दरमियान ऐतदाल पर क़याम रहता है
عَرَبِيوَالَّذينَ لا يَدعونَ مَعَ اللَّهِ إِلٰهًا آخَرَ وَلا يَقتُلونَ النَّفسَ الَّتي حَرَّمَ اللَّهُ إِلّا بِالحَقِّ وَلا يَزنونَ ۚ وَمَن يَفعَل ذٰلِكَ يَلقَ أَثامًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जो अल्लाह के साथ किसी दूसरे पूज्य को नहीं पुकारते, और न उस प्राण को क़त्ल करते हैं, जिसे अल्लाह ने ह़राम ठहराया है परंतु हक़ के साथ और न व्यभिचार करते हैं। और जो ऐसा करेगा, वह पाप का भागी बनेगा।
Roman Urdu (Maududi)Jo Allah ke siwa kisi aur mabood ko nahin pukarte, Allah ki haraam ki hui kisi jaan ko na-haqq halaak nahin karte, aur na zina (adultery) ke murtakib hotay hain. Yeh kaam jo koi karey woh apne gunaah ka badla payega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah kay sath kissi doosray ko mabood nahi pukartay aur kissi aisay shaks ko jissay qatal kerna Allah Taalaa ney mana ker diya ho woh ba-juz haq kay qatal nahi kertay na woh zinah kay muratkib hotay hain aur jo koi yeh kaam keray woh apnay upper sakht wabaal laye ga
Devnagri Urdu (Maududi)जो अल्लाह के सिवा किसी और माबूद को नहीं पुकारते, अल्लाह की हराम की हुई किसी जान को ना-हक़्क़ हलाक नहीं करते, और ना ज़िना (व्यभिचार) के मुर्तकीब होते हैं। ये काम जो कोई करेगा वो अपने गुनाह का बदला पाएगा
عَرَبِييُضاعَف لَهُ العَذابُ يَومَ القِيامَةِ وَيَخلُد فيهِ مُهانًا
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हिन्दी (Al-Omari)क़ियामत के दिन उसकी यातना दुगुनी कर दी जाएगी और वह अपमानित होकर उसमें हमेशा रहेगा।
Roman Urdu (Maududi)Qayamat ke roz usko mukarrar azaab diya jayega aur isi mein woh hamesha zillat ke saath pada rahega
Roman Urdu (Junagarhi)Issay qayamat kay din dogra azab kiya jayega aur woh zillat-o-khuwari kay sath hamesha ussi mein rahey ga
Devnagri Urdu (Maududi)कयामत के रोज़ उसको मुकर्रर अज़ाब दिया जाएगा और इसमें वो हमेशा ज़िल्लत के साथ पड़ा रहेगा
عَرَبِيإِلّا مَن تابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ عَمَلًا صالِحًا فَأُولٰئِكَ يُبَدِّلُ اللَّهُ سَيِّئَاتِهِم حَسَناتٍ ۗ وَكانَ اللَّهُ غَفورًا رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु जिसने तौबा कर ली और ईमान ले आया और अच्छे काम किए, तो ये लोग हैं जिनके बुरे कामों को अल्लाह नेकियों में बदल देगा और अल्लाह हमेशा बहुत बख़्शने वाला, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Illa yeh ke koi (in gunaahon ke baad) toubah kar chuka ho aur iman laa kar amal e saleeh karne laga ho, aisey logon ki buraiyon ko Allah bhalaiyon se badal dega aur woh bada gafoor o raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Siwaye unn logon kay jo tauba keren aur eman layen aur nek kaam keren aisay logon kay gunahon ko Allah Taalaa nekiyon say badal deta hai Allah bakhshney wala meharbaani kernay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)इल्ला ये के कोई (गुनाहों के बाद में) तौबा कर चुका हो और ईमान ला कर अमल ए सलीह करने लगा हो, ऐसे लोगों की बुराइयों को अल्लाह भलाइयों से बदल देगा और वो बड़ा गफूर ओ रहीम है
عَرَبِيوَمَن تابَ وَعَمِلَ صالِحًا فَإِنَّهُ يَتوبُ إِلَى اللَّهِ مَتابًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जो तौबा कर ले और नेक काम करे, तो निश्चय ही वह अल्लाह की ओर सच्चे तौर पर पलटता है।
Roman Urdu (Maududi)Jo shaks toubah karke neik amali ikhtiyar karta hai woh to Allah ki taraf palat aata hai jaisa ke palatne ka haqq hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo shaks toba keray aur nek amal keray woh to (haqeeqatan) Allah Taalaa ki taraf sacha rujoo kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो शक्स तौबा करके नीक अमली इख्तियार करता है वो तो अल्लाह की तरफ पलट आता है जैसा के पलटने का हक़ है
عَرَبِيوَالَّذينَ لا يَشهَدونَ الزّورَ وَإِذا مَرّوا بِاللَّغوِ مَرّوا كِرامًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो झूठ में भाग नहीं लेते और जब व्यर्थ के काम के पास से गुज़रते हैं, तो सज्जन बनकर गुज़र जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aur Rehman ke bandey woh hain) jo jhoot ke gawaah nahin bante aur kisi lagv (fizul/vain) cheez par unka guzar ho jaye to shareef aadmiyon ki tarah guzar jatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log jhooti gawahee nahi detay aur jab kissi laghaw cheez per unn ka guzar hota hai to sharafat say guzar jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(और रहमान के बंदे वो हैं) जो झूठ के गवाह नहीं बनते और किसी चीज़ पर उनका गुज़र हो जाता है तो शरीफ़ आदमियों की तरह गुज़र जाते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ إِذا ذُكِّروا بِآياتِ رَبِّهِم لَم يَخِرّوا عَلَيها صُمًّا وَعُميانًا
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हिन्दी (Al-Omari)और वे लोग कि जब उन्हें उनके पालनहार की आयतों के साथ नसीहत की जाए, तो उनपर बहरे तथा अंधे होकर नहीं गिरते।
Roman Urdu (Maududi)Jinhein agar unke Rubb ki aayat suna kar naseehat ki jati hai to woh uspar andhey aur behre bankar nahin reh jatey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab enhen unn kay rab kay kalam ki aayaten sunaee jati hain to woh andhay behray ho ker inn per nahi girtay
Devnagri Urdu (Maududi)जिन्हें अगर उनके रब की आयतें सुना कर हिदायत की जाती है तो वो उसपर अंधे और बाहर बनकर नहीं रह जाते
عَرَبِيوَالَّذينَ يَقولونَ رَبَّنا هَب لَنا مِن أَزواجِنا وَذُرِّيّاتِنا قُرَّةَ أَعيُنٍ وَاجعَلنا لِلمُتَّقينَ إِمامًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो कहते हैं : ऐ हमारे पालनहार! हमें हमारी पत्नियों तथा संतानों से आँखों की ठंडक प्रदान कर और हमें परहेज़गारों का 'इमाम' बना दे।
Roman Urdu (Maududi)Jo duaein maanga karte hain ke, “Aey hamare Rubb, humein apni biwiyon aur apni aulaad se aankhon ki thandak de, aur humko parheizgaaron ka imam bana.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh dua kertay hain kay aey humaray perwerdigar! Tu humen humari biwiyon aur aulad say aankhon ki thandak ata farma aur humen perhezgaron ka paishwa bana
Devnagri Urdu (Maududi)जो दुआएं मांगते हैं के, "ऐ हमारे रब, हमें अपनी बीवीयों और अपनी औलाद से आंखों की ठंडक दे, और हमको परहेज़गारों का इमाम बाना।”
عَرَبِيأُولٰئِكَ يُجزَونَ الغُرفَةَ بِما صَبَروا وَيُلَقَّونَ فيها تَحِيَّةً وَسَلامًا
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हिन्दी (Al-Omari)यही वे लोग हैं, जिन्हें उनके धैर्य के बदले में उच्च भवन दिया जाएगा और उसमें जीवन की प्रार्थना और अभिवादन के साथ उनका स्वागत किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hain woh log jo apne sabr ka phal manzil-e-buland ki shakal mein payenge, aadaab o tasleemaat se unka istaqbaal hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi woh log hain jinhen unn kay sabar kay badlay jannat kay buland-o-bala khaney diye jayen gay jahan unhen dua salam phonchaya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)ये हैं वो लोग जो अपने सब्र का फल मंजिल-ए-बुलंद की शक्ल में पाएंगे, आदाब ओ तस्लीमात से उनका इस्तकबाल होगा
عَرَبِيخالِدينَ فيها ۚ حَسُنَت مُستَقَرًّا وَمُقامًا
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हिन्दी (Al-Omari)वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं। वह ठहरने और रहने का अच्छा स्थान है!
Roman Urdu (Maududi)Woh hamesha hamesha wahan rahenge. Kya hi accha hai woh mustaqar (excellent abode) aur woh muqaam
Roman Urdu (Junagarhi)Uss mein yeh hamesha rahen gay woh boht hi achi jagah aur umdah moqam hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो हमेशा हमेशा वहां रहेंगे। क्या ही अच्छा है वो मुस्तकर (उत्कृष्ट निवास) और वो मुक़ाम
عَرَبِيقُل ما يَعبَأُ بِكُم رَبّي لَولا دُعاؤُكُم ۖ فَقَد كَذَّبتُم فَسَوفَ يَكونُ لِزامًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दें : मेरे पालनहार को तुम्हारी कोई परवाह नहीं, यदि तुम (उसे) न पुकारो। क्योंकि निश्चय ही तुमने झुठलाया है, तो शीघ्र (उसका परिणाम) आ जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), logon se kaho, “mere Rubb ko tumhari kya haajat padi hai agar tum usko na pukaro. Ab ke tumne jhutla diya hai, anqareeb woh saza paogey ke jaan chudhani muhaal (never be able to avoid) hogi”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! agar tumhari dua iltija (pukarna) na hoti to mera rab tumhari mutlaq perwa na kerta tum to jhutla chukay abb un-qareeb iss ki saza tumhen chimat janey wali hogi
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), लोगों से कहो, "मेरे रब को तुम्हारी क्या हाजात पड़ी है अगर तुम उसको न पुकारो। अब के तुमने झूठला दिया है, अंकरीब वो सजा पाओगे के जान छुड़ानी मुहाल होगी"
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Surah 25: Al-Furqan (The Discrimination)

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Surah 25: Al-Furqan (The Discrimination)

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Surah 25: Al-Furqan (The Discrimination)

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Surah 25: Al-Furqan (The Discrimination)

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Surah 26: Ash-Shu'ara' (The Poets)

Meccan🕐 Revelation #47📜 227 Verses🕮 Juz 1
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيطسم
हिन्दी (Al-Omari)ता, सीन, मीम।
Roman Urdu (Maududi)Taa seen Meem
Roman Urdu (Junagarhi)Tuaa-seen-meem
Devnagri Urdu (Maududi)ता सीन मीम
عَرَبِيتِلكَ آياتُ الكِتابِ المُبينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ये स्पष्ट किताब की आयतें हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh kitaab e Mubeen ki aayat hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh aayaten roshan kitab ki hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये किताब ए मुबीन की आयत हैं
عَرَبِيلَعَلَّكَ باخِعٌ نَفسَكَ أَلّا يَكونوا مُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)शायद (ऐ रसूल!) आप अपने आपको हलाक करने वाले हैं, इसलिए कि वे ईमान नहीं लाते।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad), shayad tum is gham (grief) mein apni jaan kho dogey ke yeh log iman nahin latey
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay eman na laaney per shayad aap to apni jaan kho den gay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद), शायद तुम इस ग़म (दुःख) में अपनी जान खो दोगे के ये लोग ईमान नहीं लाते
عَرَبِيإِن نَشَأ نُنَزِّل عَلَيهِم مِنَ السَّماءِ آيَةً فَظَلَّت أَعناقُهُم لَها خاضِعينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यदि हम चाहें, तो उनपर आकाश से कोई निशानी उतार दें, फिर उसके सामने उनकी गर्दनें झुकी रह जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Hum chahein to aasmaan se aisi nishani nazil kar sakte hain ke inki gardanein iske aagey jhuk jayein
Roman Urdu (Junagarhi)Agar hum chahatay to inn per aasman say koi aisi nishani utartay kay jiss kay samney inn ki gardaney khum ho jatin
Devnagri Urdu (Maududi)हम चाहें तो आसमां से ऐसी निशानी नाज़िल कर सकते हैं के इनकी गर्दनें इसके आगे झुक जाएँ
عَرَبِيوَما يَأتيهِم مِن ذِكرٍ مِنَ الرَّحمٰنِ مُحدَثٍ إِلّا كانوا عَنهُ مُعرِضينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब भी 'रह़मान' (अति दयावान्) की ओर से उनके पास कोई नई नसीहत आती है, तो वे उससे मुँह फेरने वाले होते हैं।
Roman Urdu (Maududi)In logon ke paas rehman ki taraf se jo nayi naseehat bhi aati hai yeh ussey mooh moad letey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kay pass rehman ki taraf say jo bhi naee naseehat aaee yeh uss say roo-gardani kerney walay bann gaye
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों के पास रहमान की तरफ से जो नई हिदायत भी आती है ये उसे मुँह मोड़ लेते हैं
عَرَبِيفَقَد كَذَّبوا فَسَيَأتيهِم أَنباءُ ما كانوا بِهِ يَستَهزِئونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः निःसंदेह उन्होंने झुठला दिया, तो शीघ्र ही उनके पास उस चीज़ की खबरें आ जाएँगी, जिसका वे उपहास उड़ाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Ab ke yeh jhutla chuke hain, ankareeb inko is cheez ki haqeeqat (mukhtalif tareeqon se) maloom ho jayegi jiska yeh mazaak udatay rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Inn logon ney jhutlaya hai abb inn kay pass jaldi say iss ki khabren aajyen gi jiss kay sath woh maskhara pann ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)अब के ये झूठला चुके हैं, आख़िर इन्हें इस चीज़ की हकीकत (मुखतलिफ़) कहा जाता है तरीक़ों से) मालूम हो जाएगी जिसका ये मज़ाक उड़ाते रहे हैं
عَرَبِيأَوَلَم يَرَوا إِلَى الأَرضِ كَم أَنبَتنا فيها مِن كُلِّ زَوجٍ كَريمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और क्या उन्होंने धरती की ओर नहीं देखा कि हमने उसमें हर उत्तम प्रकार के कितने पौधे उगाए हैं?
Roman Urdu (Maududi)Aur kya inhon ne kabhi zameen par nigaah nahin daali ke humne kitni kaseer miqdaar mein har tarah ki umdah nabataat(vegetation) ismein paida ki hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya enhon ney zamin per nazaren nahi daalen? Kay hum ney iss mein her tarah kay nafees joray kiss qadar ugaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या इन्होन ने कभी ज़मीन पर निगाह नहीं डाली के हमने कितनी कसीर मिकदार में हर तरह की उम्मीद नबातात (वनस्पति) इस्मेन पैदा की है
عَرَبِيإِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَما كانَ أَكثَرُهُم مُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदे इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। (परंतु) उनमें से अधिकतर ईमान लाने वाले नहीं थे।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenen ismein ek nishani hai, magar in mein se aksar maanne waley nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak iss mein yaqeenan nishani hai aur inn mein kay aksar log momin nahi hain
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन इसमें एक निशानी है, मगर मुझमें अक्सर माने वाले नहीं
عَرَبِيوَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ العَزيزُ الرَّحيمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur haqeeqat yeh hai ke tera Rubb zabardast bhi hai aur raheem bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tera rab yaqeenan wohi ghalib aur meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी
عَرَبِيوَإِذ نادىٰ رَبُّكَ موسىٰ أَنِ ائتِ القَومَ الظّالِمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब आपके पालनहार ने मूसा को पुकारा कि उन ज़ालिम लोगों के पास जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Inhein us waqt ka qissa sunao jabke tumhare Rubb ne Moosa ko pukara “ zaalim qaum ke paas jaa
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jabb aap kay rab ney musa (alh-e-salam) ko aawaz di kay tu zalim qom kay pass jaa
Devnagri Urdu (Maududi)इन्हें वक़्त का क़िस्सा सुनाओ जबके तुम्हारे रब ने मूसा को पुकारा “ज़ालिम क़ौम के पास जा
عَرَبِيقَومَ فِرعَونَ ۚ أَلا يَتَّقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फ़िरऔन की जाति के पास। क्या वे डरते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Firoun ki qaum ke paas, kya woh nahin darte?”
Roman Urdu (Junagarhi)Qom-e-firaon kay pass kiya woh perhezgari na keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)फ़िरौन की क़ौम के पास, क्या वो नहीं डरते?”
عَرَبِيقالَ رَبِّ إِنّي أَخافُ أَن يُكَذِّبونِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! निःसंदेह मुझे डर है कि वे मुझे झुठला देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Usne arz kiya “aey Rubb, mujhey khauf hai ke woh mujhey jhutla dengey
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) ney kaha meray perwerdigar! Mujhay to khof hai kay kahin woh mujhay jhutla (na) den
Devnagri Urdu (Maududi)उसने अर्ज़ किया "ऐ रब, मुझे ख़ौफ़ है के वो मुझे झुतला देंगे
عَرَبِيوَيَضيقُ صَدري وَلا يَنطَلِقُ لِساني فَأَرسِل إِلىٰ هارونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और मेरा सीना घुटता है और मेरी ज़बान नहीं चलती, अतः हारून की ओर संदेश भेज।
Roman Urdu (Maududi)Mera seena ghutt-ta hai aur meri zubaan nahin chalti, aap Haroon ki taraf risalat bhejein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mera seena tang horaha hai meri zaban chal nahi rahi pus tu haroon ki taraf bhi (wahee) bhej
Devnagri Urdu (Maududi)मेरा सीना घुट-ता है और मेरी ज़ुबान नहीं चलती, आप हारून की तरफ़ रिसालत भेजें
عَرَبِيوَلَهُم عَلَيَّ ذَنبٌ فَأَخافُ أَن يَقتُلونِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उनका मुझपर एक अपराध का आरोप है। अतः मैं डरता हूँ कि वे मुझे मार डालेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur mujhpar unke haan ek jurm ka ilzam bhi hai, is liye main darta hoon ke woh mujhey qatal kar dengey”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn ka meray aik qasoor ka (dawa) bhi hai mujhay darr hai kay kahin woh mujhay maar na dalen
Devnagri Urdu (Maududi)और मुझपर उनके हाँ एक जुर्म का इल्ज़ाम भी है, इसके लिए मैं डरता हूं के वो मुझे कत्ल कर देंगे”
عَرَبِيقالَ كَلّا ۖ فَاذهَبا بِآياتِنا ۖ إِنّا مَعَكُم مُستَمِعونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) फरमाया : ऐसा कभी नहीं होगा, अतः तुम दोनों हमारी निशानियों के साथ जाओ। निःसंदेह हम तुम्हारे साथ ख़ूब सुनने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Farmaya “hargiz nahin, tum dono jao hamari nishaniyan lekar, hum tumhare saath sab kuch suntey rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Janab-e-baari ney farmaya! Hergiz aisa na hoga tum dono humari nishaniyan ley ker jao hum khud sunnay walay tumharay sath hain
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया “हरगिज नहीं, तुम दोनों जाओ हमारी निशानियां लेकर, हम तुम्हारे साथ सब कुछ सुनते रहेंगे
عَرَبِيفَأتِيا فِرعَونَ فَقولا إِنّا رَسولُ رَبِّ العالَمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों फ़िरऔन के पास जाओ और कहो कि निःसंदेह हम सारे संसारों के पालनहार के संदेशवाहक हैं।
Roman Urdu (Maududi)Firoun ke paas jao aur ussey kaho, humko Rubb ul aalameen ne isliye bheja hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum dono firaon kay pass ja ker kaho kay bila shuba hum rab-ul-aalamaeen kay bhejay huye hain
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौन के पास जाओ और उसे कहो, हमको रब उल आलमीन ने इसलिए भेजा है
عَرَبِيأَن أَرسِل مَعَنا بَني إِسرائيلَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कि तू बनी इसराईल को हमारे साथ भेज दे।
Roman Urdu (Maududi)Ke tu bani Israel ko hamare saath janey de”
Roman Urdu (Junagarhi)Kay tu humaray sath bani israeel ko rawana ker dey
Devnagri Urdu (Maududi)के तू बनी इजराइल को हमारे साथ जाने दे”
عَرَبِيقالَ أَلَم نُرَبِّكَ فينا وَليدًا وَلَبِثتَ فينا مِن عُمُرِكَ سِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(फ़िरऔन ने) कहा : क्या हमने तुझे अपने यहाँ इस हाल में नहीं पाला कि तू बच्चा था और तू हमारे बीच अपनी आयु के कई वर्ष रहा?
Roman Urdu (Maududi)Firoun ne kaha “kya humne tujhko apne haan baccha sa nahin paala tha? Tu nay apni umar ke kai saal hamare haan guzare
Roman Urdu (Junagarhi)Fairaon ney kaha kiya hum ney tujhay teray bachpan kay zamaney mein apnay haan nahi pala tha? Aur tu ney apni umar kay boht say saal hum mein nahi guzaray
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौन ने कहा “क्या हमने तुझको अपना हां बच्चा सा नहीं पाला था? तू नहीं अपने उमर के काई साल हमारे हां गुजारे
عَرَبِيوَفَعَلتَ فَعلَتَكَ الَّتي فَعَلتَ وَأَنتَ مِنَ الكافِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तूने अपना वह काम किया, जो तूने किया। और तू अकृतज्ञों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Aur iske baad kar gaya jo kuch ke kar gaya, tu bada ehsan faramosh aadmi hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir tu apna woh kaam ker gaya jo ker gaya aur tu na shukro mein hai
Devnagri Urdu (Maududi)और इसके बाद कर गया जो कुछ कर गया, तू बड़ा एहसान फरामोश आदमी है”
عَرَبِيقالَ فَعَلتُها إِذًا وَأَنا مِنَ الضّالّينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : मैंने उस समय वह काम इस हाल में किया कि मैं अनजानों में से था।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne jawab diya “us waqt woh kaam maine nadanishtagi (inadvertently) mein kardiya tha
Roman Urdu (Junagarhi)(hazrat) musa (alh-e-salam) ney jawab diya kay mein ney uss kaam ko uss waqt kiya tha jabkay mein raah bhoolay huye logon mein say tha
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने जवाब दिया “उस वक्त वो काम मैंने (अनजाने में) कर दिया था
عَرَبِيفَفَرَرتُ مِنكُم لَمّا خِفتُكُم فَوَهَبَ لي رَبّي حُكمًا وَجَعَلَني مِنَ المُرسَلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर मैं तुम्हारे पास से भाग गया, जब मैं तुमसे डरा, तो मेरे पालनहार ने मुझे हुक्म (नुबुव्वत एवं ज्ञान) प्रदान किया और मुझे रसूलों में से बना दिया।
Roman Urdu (Maududi)Phir main tumhare khauf se bhaag gaya. Iske baad mere Rubb ne mujhko hukum ata kiya aur mujhey Rasoolon mein shamil farma liya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir tum say khof kha ker mein tum mein say bhaag gaya phir mujhay meray rab ney hukum-o-ilm ata farmaya aur mujhay apnay payghumbaron mein say ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर मैं तुम्हारा खौफ से भाग गया। इसके बाद मेरे रब ने मुझको हुकुम अता किया और मुझे रसूलन में शामिल फरमा लिया
عَرَبِيوَتِلكَ نِعمَةٌ تَمُنُّها عَلَيَّ أَن عَبَّدتَ بَني إِسرائيلَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यह कोई उपकार है, जो तू मुझपर जता रहा है कि तूने बनी इसराईल काे ग़ुलाम बना रखा है।
Roman Urdu (Maududi)Raha tera ehsan jo tu nay mujhpar jataya hai to iski haqeeqat yeh hai ke tu nay bani Israel ko ghulaam bana liya tha”
Roman Urdu (Junagarhi)Mujh per tera kiya yehi woh ehsan hai? Jissay tu jata raha hai kay tu ney bani israeel ko ghulam bana rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)रहा तेरा एहसान जो तू नई मुझपर जानता है तो इसकी हकीकत ये है के तू नई बनी इसराइल को गुलाम बना लिया था”
عَرَبِيقالَ فِرعَونُ وَما رَبُّ العالَمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फ़िरऔन ने कहा : और 'रब्बुल-आलमीन' (सारे संसारों का पालनहार) क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Firoun ne kaha “aur yeh Rubb-ul-Aalameen kya hota hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon ney kaha rab-ul-aalameen kiya cheez hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौन ने कहा “और ये” रब-उल-आलमीन क्या होता है?”
عَرَبِيقالَ رَبُّ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَما بَينَهُما ۖ إِن كُنتُم موقِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : जो आकाशों और धरती का रब है और जो उनके बीच है उसका भी, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne jawab diya “Aasmano aur zameen ka Rubb, aur un sab cheezon ka Rubb jo aasmaan o zameen ke darmiyan hain, agar tum yaqeen laney waley ho.”
Roman Urdu (Junagarhi)(hazrat) musa (alh-e-salam) ney farmaya woh aasamano aur zamin aur inn kay darmiyan ki tamam cheezon ka rab hai agar tum yaqeen rakhney walay ho
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने जवाब दिया "आसमानो और ज़मीन का रब, और उन सब चीज़ों का रब जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान हैं, अगर तुम यक़ीन लाने वाले हो।"
عَرَبِيقالَ لِمَن حَولَهُ أَلا تَستَمِعونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने अपने आस-पास के लोगों से कहा : क्या तुम सुनते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Firoun ne apne gird o pesh ke logon se kaha ‘Sunte ho?”
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon ney apney ird-gird walon say kaha kay kiya tum sunn nahi rahey
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौं ने अपने गिर्द ओ पेश के लोगों से कहा 'सुनते हो?'
عَرَبِيقالَ رَبُّكُم وَرَبُّ آبائِكُمُ الأَوَّلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : जो तुम्हारा पालनहार तथा तुम्हारे पहले बाप-दादा का पालनहार है।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha, “tumhara Rubb bhi aur tumhare un aabaa o ajdaad ka Rubb bhi jo guzar chuke hain”
Roman Urdu (Junagarhi)(hazrat) musa (alh-e-salam) ney farmaya woh tumhara aur tumharay aglay baap dadon ka perwerdigar hai
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा, "तुम्हारा रब भी और तुम्हारे उन आबा ओ अजदाद का रुब भी जो गुजर चुके हैं"
عَرَبِيقالَ إِنَّ رَسولَكُمُ الَّذي أُرسِلَ إِلَيكُم لَمَجنونٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(फ़िरऔन ने) कहा : निश्चय तुम्हारा यह रसूल, जो तुम्हारी ओर भेजा गया है, अवश्य पागल है।
Roman Urdu (Maududi)Firoun ne ( haazirin se) kaha “ tumhare yeh Rasool sahib jo tumhari taraf bhejey gaye hain, bilkul hi pagal maloom hotay hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon ney kaha (logo!) tumhara yeh rasool jo tumhari taraf bheja gaya hai yeh to yaqeenan deewana hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौन ने (हाज़िरिन से) कहा "तुम्हारे ये रसूल साहब जो तुम्हारी तरफ भेजे गए हैं, बिल्कुल ही पागल मालूम होते हैं"
عَرَبِيقالَ رَبُّ المَشرِقِ وَالمَغرِبِ وَما بَينَهُما ۖ إِن كُنتُم تَعقِلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : जो पूर्व तथा पश्चिम रब है और उसका भी जो उन दोनों के बीच है, अगर तुम समझते हो।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha “mashriq o magrib aur jo kuch inke darmiyan hai sabka Rubb, agar aap log kuch aqal rakhte hain”
Roman Urdu (Junagarhi)(hazrat) musa (alh-e-salam) ney farmaya! Wohi mashriq-o-maghrib ka aur inn kay darmiyan ki tamam cheezon ka rab hai agar tum aqal rakhtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा "मशरिक़ ओ मगरिब और जो कुछ इनके दरमियान है सबका रब, अगर आप लोग कुछ अक़ल रखते हैं"
عَرَبِيقالَ لَئِنِ اتَّخَذتَ إِلٰهًا غَيري لَأَجعَلَنَّكَ مِنَ المَسجونينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(फ़िरऔन ने) कहा : निश्चय यदि तूने मेरे अलावा किसी और को पूज्य बनाया, तो मैं तुझे अवश्य ही बंदी बनाए हुए लोगों में शामिल कर दूँगा।‌
Roman Urdu (Maududi)Firoun ne kaha “ agar tu nay mere siwa kisi aur ko mabood maana to tujhey main un logon mein shamil kardunga jo qaid khano mein paday saddh(rotting) rahey hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon kehney laga sunn ley! Agar tu ney meray siwa kissi aur ko mabood banaya tu mein tujhay qaidiyon mein daal doon ga
Devnagri Urdu (Maududi)फ़िरौन ने कहा "अगर तू नहीं मेरे सिवा किसी और को मबूद माना तो तुझे मैं उन लोगों में शामिल कर दूँगा जो क़ैद खानो में पड़े सध (सड़) रहे हैं”
عَرَبِيقالَ أَوَلَو جِئتُكَ بِشَيءٍ مُبينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : क्या भले ही मैं तेरे पास कोई स्पष्ट चीज़ ले आऊँ?
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha “Agarche main le aaon tere saamne ek sareeh cheez bhi?”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) ney kaha agar cheh mein teray pass koi khulli cheez ley aaon
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा “अगरचे मैं ले आऊं तेरे सामने एक सारी चीज़ भी?”
عَرَبِيقالَ فَأتِ بِهِ إِن كُنتَ مِنَ الصّادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : तू उसे ले आ, यदि तू सच्चे लोगों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Firoun ne kaha “Accha to le aa agar tu saccha hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon ney kaha agar tum sachon mein say hai to issay paish ker
Devnagri Urdu (Maududi)फ़िरौन ने कहा "अच्छा तो ले आ अगर तू सच्चा है"
عَرَبِيفَأَلقىٰ عَصاهُ فَإِذا هِيَ ثُعبانٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने अपनी लाठी फेंक दी, तो अचानक वह एक प्रत्यक्ष अजगर बन गई।
Roman Urdu (Maududi)(Uski zubaan se yeh baat nikalte hi) Moosa ne apna asa (staff) phenka aur yakayak woh ek sareeh azdha (serpant/snake) tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ney (ussi waqt) apni laathi daal di jo achanak khullam khulla (zabardast) azdaha bann gaee
Devnagri Urdu (Maududi)(उसकी ज़ुबान से ये बात निकलते ही) मूसा ने अपना आसा (कर्मचारी) फेंक और यकायक वो एक सरेह अज़धा (सांप/साँप) था
عَرَبِيوَنَزَعَ يَدَهُ فَإِذا هِيَ بَيضاءُ لِلنّاظِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसने अपना हाथ निकाला, तो एकाएक वह देखने वालों के लिए सफेद (चमकदार) था।
Roman Urdu (Maududi)Phir usne apna hath (bagal se) khincha aur wo sab dekne walon ke saamne chamak raha tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apna hath khench nikala to woh bhi ussi waqt her dekhney walay ko safaid chamkeela nazar aaney laga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उसने अपना हाथ (बगल) से) खिंचा और वो सब देखने वालों के सामने चमक रहा था
عَرَبِيقالَ لِلمَلَإِ حَولَهُ إِنَّ هٰذا لَساحِرٌ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने अपने आस-पास के प्रमुखों से कहा : निश्चय यह तो एक बड़ा कुशल जादूगर है।
Roman Urdu (Maududi)Firoun apne gird o pesh ke sardaron se bola “yeh shaks yaqeenan ek maahir jaadugar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon apnay aas pass kay sardaron say kehney laga bhaee yeh to koi bara dana jadoogar hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौन अपने गिर्द ओ पेश के सरदारों से बोला “ये शक्स यकीनन एक माहिर जादूगर है
عَرَبِييُريدُ أَن يُخرِجَكُم مِن أَرضِكُم بِسِحرِهِ فَماذا تَأمُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो चाहता है कि अपने जादू के साथ तुम्हें तुम्हारी धरती से निकाल दे। तो तुम क्या आदेश देते हो?
Roman Urdu (Maududi)Chahta hai ke apne jaadu ke zoar se tumko tumhare mulk se nikal de, ab tum batao tum kya hukum dete ho?”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh to chahata hai kay apnay jadoo kay zor say tumhen tumhari sirzameen say nikal dey batao abb tum kiya hukum detay ho
Devnagri Urdu (Maududi)चाहता है के अपने जादू के ज़ोर से तुमको तुम्हारे मुल्क से निकल दे, अब तुम बताओ तुम क्या हुकुम देते हो?”
عَرَبِيقالوا أَرجِه وَأَخاهُ وَابعَث فِي المَدائِنِ حاشِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : इसके तथा इसके भाई को मोहलत दें और नगरों में (लोगों को) जमा करने वालों को भेज दें।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “ isey aur iske bhai ko rok lijiye aur shehron mein harkare (heralds) bhej dijiye
Roman Urdu (Junagarhi)Unn sab ney kaha aap issay aur iss kay bhai ko mohlat dijiye aur tamam shehron mein harkaaray bhej dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने कहा " इसे और इसके भाई को रोक लीजिए और शहर में हरकारे (हेराल्ड्स) भेज दीजिए
عَرَبِييَأتوكَ بِكُلِّ سَحّارٍ عَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)कि वे तेरे पास हर बड़ा जादूगर ले आएँ, जो जादू में बहुत कुशल हो।
Roman Urdu (Maududi)Ke har siyane jaadugar ko aapke paas le aayein”
Roman Urdu (Junagarhi)Jo aap kay pass zee ilm jadoogaron ko ley aayen
Devnagri Urdu (Maududi)के हर सियाने जादूगर को आपके पास ले आइए"
عَرَبِيفَجُمِعَ السَّحَرَةُ لِميقاتِ يَومٍ مَعلومٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो जादूगर एक निश्चित दिन के नियत समय पर इकट्ठा कर लिए गए।
Roman Urdu (Maududi)Chunanchey ek roz muqarrar waqt par jaadugar ikatthey karliye gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Phir aik muqarrara din kay waday per tamam jadoogar jama kiye gaye
Devnagri Urdu (Maududi)चुनांचे एक रोज़ मुक़र्रर वक़्त पर जादूगर इकठ्ठे करलिये गए
عَرَبِيوَقيلَ لِلنّاسِ هَل أَنتُم مُجتَمِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा लोगों से कहा गया : क्या तुम एकत्र होने वाले हो?
Roman Urdu (Maududi)Aur logon se kaha gaya “tum ijtima mein chaloge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aam logon say bhi keh diya gaya kay tum bhi majmay mein hazir hojao gay
Devnagri Urdu (Maududi)और लोगों से कहा गया “तुम इज्तिमा में चलोगे
عَرَبِيلَعَلَّنا نَتَّبِعُ السَّحَرَةَ إِن كانوا هُمُ الغالِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)शायद हम इन जादूगरों के अनुयायी बन जाएँ, यदि वही विजयी हों।
Roman Urdu (Maududi)Shayad ke hum jaadugaron ke deen hi par reh jayein agar woh gaalib rahey”
Roman Urdu (Junagarhi)Takay agar jadoogar ghalib aajayen to hum unhi ki pairwee keren
Devnagri Urdu (Maududi)शायद के हम जादूगरों के दीन ही पर रह जाएंगे अगर वो गालिब रहे”
عَرَبِيفَلَمّا جاءَ السَّحَرَةُ قالوا لِفِرعَونَ أَئِنَّ لَنا لَأَجرًا إِن كُنّا نَحنُ الغالِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब जादूगर आ गए, तो उन्होंने फ़िरऔन से कहा : क्या सचमुच हमें कुछ पुरस्कार मिलेगा, यदि हम ही प्रभावी रहे?
Roman Urdu (Maududi)Jab jaadugar maidan mein aa gaye to unhon ne Firoun se kaha “humein inaam to milega agar hum gaalib rahey?”
Roman Urdu (Junagarhi)Jadoogar agar firaon say kehney lagay kay agar hum jeet gaye to humen kuch inam bhi milay ga
Devnagri Urdu (Maududi)जब जादूगर मैदान में आ गए तो उनको ने फिरौन से कहा “हमें इनाम तो मिलेगा अगर हम गालिब” रहे?”
عَرَبِيقالَ نَعَم وَإِنَّكُم إِذًا لَمِنَ المُقَرَّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : हाँ! और निश्चय तुम उस समय निकटवर्तियों में से हो जाओगे ।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “ haan, aur tum to us waqt muqarrabeen (nearest to me) mein shamil ho jaogey”
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon ney kaha haan! (bari khushi say) bulkay aisi soorat mein tum meray khas darbari bann jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा "हां, और तुम तो हमें वक्त मुकर्रबीन (मेरे सबसे करीब) में शामिल हो जाओगे"
عَرَبِيقالَ لَهُم موسىٰ أَلقوا ما أَنتُم مُلقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)मूसा ने उनसे कहा : फेंको, जो कुछ तुम फेंकने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha “ phenko jo tumhein phenkna hai”
Roman Urdu (Junagarhi)(hazrat) musa (alh-e-salam) ney jadoogaron say farmaya jo kuch tumhen dalna hai daal do
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा "फेंको जो तुम्हें फेंकना है"
عَرَبِيفَأَلقَوا حِبالَهُم وَعِصِيَّهُم وَقالوا بِعِزَّةِ فِرعَونَ إِنّا لَنَحنُ الغالِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्होंने अपनी रस्सियाँ और लाठियाँ फेंकीं और कहा : फ़िरऔन के प्रभुत्व की सौगंध! निःसंदेह हम, निश्चय हम ही विजयी रहेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne fawran apni rassiyan aur laathiyan phenk di aur bole “ Firoun ke iqbal se hum hi gaalib rahenge.”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney apni rassiyan aur laathiyan daal den aur kehney lagay izzat firaon ki qasam! Hum yaqeenan ghalib hi rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने फवारां अपनी रसियां ​​और लाठियां फेंक दी और बोले "फिरौं के इकबाल से हम ही गालिब रहेंगे।”
عَرَبِيفَأَلقىٰ موسىٰ عَصاهُ فَإِذا هِيَ تَلقَفُ ما يَأفِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर मूसा ने अपनी लाठी फेंकी, तो एकाएक वह उन चीज़ों को निगल रही थी, जो वे झूठ बना रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir Moosa ne apna asa (staff) phenka to yakayak woh unke jhootey karishmon ko hadap karta chala ja raha tha
Roman Urdu (Junagarhi)Abb (hazrat) musa (alh-e-salam) ney bhi apni laathi maidan mein daal di jiss ney ussi waqt unn kay jhoot moot kay kartab ko nigalna shuroo ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर मूसा ने अपना आसा (कर्मचारी) फेंक दिया तो यकायक वो उनके झूठे करिश्माओं को हड़प कर्ता चला जा रहा था
عَرَبِيفَأُلقِيَ السَّحَرَةُ ساجِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)इसपर जादूगर सजदा करते हुए गिर गए।
Roman Urdu (Maududi)Ispar sarey jaadugar be-ikhtiyar sajde mein gir paday
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh dekhtay hi jadoogar bay ikhtiyar sajday mein gir gaye
Devnagri Urdu (Maududi)इसपर सारे जादूगर बे-इख्तियार सजदे में गिर पड़े
عَرَبِيقالوا آمَنّا بِرَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हम सारे संसारों के पालनहार पर ईमान ले आए।
Roman Urdu (Maududi)Aur bol uthey ke “ maan gaye hum Rubb-ul-Aalameen ko
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unhon ney saaf keh diya kay hum to Allah rab-ul-aalameen per eman laye
Devnagri Urdu (Maududi)और बोल उठे के " मान गए हम रब-उल-आलमीन को
عَرَبِيرَبِّ موسىٰ وَهارونَ
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हिन्दी (Al-Omari)मूसा तथा हारून के पालनहार पर।
Roman Urdu (Maududi)Moosa aur Haroon ke Rubb ko”
Roman Urdu (Junagarhi)Yani musa (alh-e-salam) aur haroon kay rab per
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा और हारून के रब को”
عَرَبِيقالَ آمَنتُم لَهُ قَبلَ أَن آذَنَ لَكُم ۖ إِنَّهُ لَكَبيرُكُمُ الَّذي عَلَّمَكُمُ السِّحرَ فَلَسَوفَ تَعلَمونَ ۚ لَأُقَطِّعَنَّ أَيدِيَكُم وَأَرجُلَكُم مِن خِلافٍ وَلَأُصَلِّبَنَّكُم أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(फ़िरऔन ने) कहा : तुम उसपर ईमान ले आए, इससे पहले कि मैं तुम्हें अनुमति दूँ? निःसंदेह यह अवश्य तुम्हारा बड़ा (गुरू) है, जिसने तुम्हें जादू सिखाया है। अतः निश्चय तुम जल्दी जान लोगे। मैं अवश्य तुम्हारे हाथ और तुम्हारे पाँव विपरीत दिशा से काट दूँगा तथा निश्चय तुम सभी को अवश्य बुरी तरह सूली पर चढ़ा दूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Firoun ne kaha “tum Moosa ki baat maan gaye qabl iske ke main tumhein ijazat deta! Zaroor yeh tumhara bada hai jisne tumhein jaadu sikhaya hai. Accha, abhi tumhein maloom hua jaata hai, main tumhare haath paon mukhalif simton (opposite sides) mein katwaunga aur tum sabko sooli (crucify) chadha dunga”
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon ney kaha kay meri ijazat say pehlay tum iss per eman ley aaye? Yaqeenan yehi tumhara woh bara (sardar) hai jiss ney tum sab ko jadoo sikhaya hai so tumhen abhi abhi maloom ho jaye ga qasam hai mein abhi tumharay haath paon ultay tor per kaat doon ga aur tum sab ko sooli per latka doon ga
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौन ने कहा “तुम मूसा की बात मान गए क़ब्ल इसके के मैं तुम्हें इजाज़त देता! जरूर ये तुम्हारा बड़ा है जिसने तुम्हें जादू सिखाया है। अच्छा, अभी तुम्हें मालूम हुआ जाता है, मैं तुम्हारे हाथ पांव मुखालिफ़ सिम्तन (विपरीत पक्ष) में काटवाऊंगा और तुम सबको सूली पर चढ़ा दूंगा"
عَرَبِيقالوا لا ضَيرَ ۖ إِنّا إِلىٰ رَبِّنا مُنقَلِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : कोई नुक़सान नहीं, निश्चित रूप से हम अपने पालनहार की ओर पलटने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “kuch parwah nahin, hum apne Rubb ke huzur pahunch jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha koi haraj nahi hum to apnay rab ki taraf lotney walay hain hi
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने जवाब दिया "कुछ परवा नहीं, हम अपने रुब के हुजूर पहन जायेंगे
عَرَبِيإِنّا نَطمَعُ أَن يَغفِرَ لَنا رَبُّنا خَطايانا أَن كُنّا أَوَّلَ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)हम आशा रखते हैं कि हमारा पालनहार हमारे लिए, हमारे पापों को क्षमा कर देगा, इस कारण कि हम सबसे पहले ईमान लाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur humein tawaqqu hai ke hamara Rubb hamare gunaah maaf kardega kyunke sabse pehle hum iman laye hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Iss bina per kay hum sab say pehlay eman walay banay hain humen umeed parti hai kay humara rab humari sab khatayen moaaf farma dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और हमें तवक्कू है के हमारा रब हमारे गुनाह माफ कर देगा क्योंकि सबसे पहले हम ईमान लाए हैं"
عَرَبِي۞ وَأَوحَينا إِلىٰ موسىٰ أَن أَسرِ بِعِبادي إِنَّكُم مُتَّبَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने मूसा की ओर वह़्य की कि मेरे बंदों को लेकर रातों-रात निकल जा। निश्चय ही तुम्हारा पीछा किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Humne Moosa ko wahee (revelation) bhejhi ke “raat o raat mere bandon ko lekar nikal jao, tumhara peecha kiya jayega”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney musa ko wahee ki kay raaton raat meray bandon ko nikal ley chal tum sab peecha kiye jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)हमने मूसा को वही (रहस्योद्घाटन) भेजी के "रात ओ रात मेरे बंदों को लेकर निकल जाओ, तुम्हारा पीछा किया जाएगा"
عَرَبِيفَأَرسَلَ فِرعَونُ فِي المَدائِنِ حاشِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो फ़िरऔन ने नगरों में (सेना) एकत्र करने वालों को भेज दिया।
Roman Urdu (Maududi)Ispar Firoun ne (Faujein jama karne ke liye) shehron mein naqeeb (heralds) bhej diye
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon ney shehron mein harkaaron ko bhej diya
Devnagri Urdu (Maududi)इसपर फिरौन ने (फौजीन) जमा करने के लिए) शहर में नकीब (हेराल्ड्स) भेज दिए
عَرَبِيإِنَّ هٰؤُلاءِ لَشِرذِمَةٌ قَليلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)कि निःसंदेह ये लोग एक छोटा-सा समूह हैं।
Roman Urdu (Maududi)(aur kehla bheja) ke “yeh kuch mutthi bhar log hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kay yaqeenan yeh giroh boht hi kum tadaad mein hai
Devnagri Urdu (Maududi)(और केहला भेजा) के “ये कुछ मुट्ठी भर लोग हैं
عَرَبِيوَإِنَّهُم لَنا لَغائِظونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह ये हमें निश्चित रूप से गुस्सा दिलाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur inhon ne humko bahut naraaz kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss per yeh humen sakht gazab-naak ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)और इन्होन ने हमको बहुत नाराज किया है
عَرَبِيوَإِنّا لَجَميعٌ حاذِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय ही हम सब चौकन्ना रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur hum ek aisi jamaat hain jiska shewa har waqt chokanna rehna hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqeenan hum bari jamaat hain inn say chokanna rehnay walay
Devnagri Urdu (Maududi)और हम एक ऐसी जमात हैं जिसका शेवा हर वक्त चौकन्ना रहना है है"
عَرَبِيفَأَخرَجناهُم مِن جَنّاتٍ وَعُيونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)इस तरह हमने उन्हें बाग़ों और सोतों से निकाल दिया।
Roman Urdu (Maududi)Is tarah hum unhein unke baaghon aur chashmon (water –springs)
Roman Urdu (Junagarhi)Bil-aakhir hum ney enhen baghaat say aur chashmon say
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह हम उन्हें उनके बाघों और चश्में (पानी के झरने)
عَرَبِيوَكُنوزٍ وَمَقامٍ كَريمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा ख़ज़ानों और उत्तम आवासों से।
Roman Urdu (Maududi)Aur khazano aur unki behtareen qayam-gaahon se nikal laaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur khazano say. Aur achay achay muqamaat say nikal bahir kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और खजानो और उनकी बहतरीन कयाम-गाहों से निकल लाए
عَرَبِيكَذٰلِكَ وَأَورَثناها بَني إِسرائيلَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐसा ही हुआ और हमने उनका वारिस बनी इसराईल को बना दिया।
Roman Urdu (Maududi)Yeh to hua unke saath aur (dusri taraf) bani Israel ko humne in sab cheezon ka waris kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Issi tarah hua aur hum ney unn (tamam) cheezon ka waris bani israeel ko bana diya
Devnagri Urdu (Maududi)ये तो हुआ उनके साथ और (दूसरी तरफ) बानी इजराइल को हमने इन सब चीज़ों का वारिस करदिया
عَرَبِيفَأَتبَعوهُم مُشرِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्होंने सूर्योदय के समय उनका पीछा किया।
Roman Urdu (Maududi)Subah hotey hi yeh log unke taaqub (pursuit) mein chal paday
Roman Urdu (Junagarhi)Pus fiaroni sooraj nikaltay hi unn kay taaqqub mein niklay
Devnagri Urdu (Maududi)सुबह होते ही ये लोग उनके ताक़ुब (पीछा) में चल पड़े
عَرَبِيفَلَمّا تَراءَى الجَمعانِ قالَ أَصحابُ موسىٰ إِنّا لَمُدرَكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब दोनों गिरोहों ने एक-दूसरे को देखा, तो मूसा के साथियों ने कहा : निःसंदेह हम निश्चय ही पकड़े जाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab dono girohon ka aamna saamna hua to Moosa ke saathi cheekh utthey ke “ hum to pakde gaye”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab dono ney aik doosray ko dekh liya to musa kay saathiyon ney kaha hum to yaqeenan pakar liye gaye
Devnagri Urdu (Maududi)जब दोनों गिरोहों का आमना सामना हुआ तो मूसा के साथी गाल उठे के "हम तो पकड़े गए"
عَرَبِيقالَ كَلّا ۖ إِنَّ مَعِيَ رَبّي سَيَهدينِ
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हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : हरगिज़ नहीं! निश्चय मेरे साथ मेरा पालनहार है। वह अवश्य मेरा मार्गदर्शन करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha “ hargiz nahin mere saath mera Rubb hai, woh zaroor meri rehnumayi farmayega”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa ney kaha hergiz nahi. Yaqeen mano mera rab meray sath hai jo zaroor mujhay raah dikhaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा "हरगिज़ नहीं मेरे साथ मेरा रब है, वो ज़रूर मेरी रहनुमायी फरमायेगा”
عَرَبِيفَأَوحَينا إِلىٰ موسىٰ أَنِ اضرِب بِعَصاكَ البَحرَ ۖ فَانفَلَقَ فَكانَ كُلُّ فِرقٍ كَالطَّودِ العَظيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने मूसा की ओर वह़्य की कि अपनी लाठी को सागर पर मारो। (उसने लाठी मारी) तो वह फट गया और हर टुकड़ा बड़े पहाड़ की तरह हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Humne Moosa ko wahee ke zariye se hukum diya ke “maar apna asa (staff) samandar par” yakayak samandar pahtt gaya aur uska har tukda ek azeem o shaan pahad ki tarah ho gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney musa ki taraf wahee bheji kay darya per apni laathi maar pus ussi waqt darya phat gaya aur her aik hissa paani ka misil baray pahar kay hogaya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने मूसा को वही के ज़रिये से हुकुम दिया के “मार अपना आसा (कर्मचारी) समंदर पार” क्योंकि समंदर पहँट गया और उसका हर टुकड़ा एक अज़ीम ओ शान पहाड़ की तरह हो गया
عَرَبِيوَأَزلَفنا ثَمَّ الآخَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वहीं हम दूसरों को निकट ले आए।
Roman Urdu (Maududi)Usi jagah hum dusre giroh ko bhi kareeb le aaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney ussi jagah doosron ko nazdeek laa khara ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)उसी जगह हम दूसरे गिरो ​​को भी करीब ले आओ
عَرَبِيوَأَنجَينا موسىٰ وَمَن مَعَهُ أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने मूसा को और जो उसके साथ थे, सबको बचा लिया।
Roman Urdu (Maududi)Moosa aur un sab logon ko jo uske saath thay humne bacha liya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur musa (alh-e-salam) ko aur uss kay tamam saathiyon ko nijat dey di
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा और उन सब लोगों को जो उसके साथ थे हमने बचा लिया
عَرَبِيثُمَّ أَغرَقنَا الآخَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने दूसरों को डुबो दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur dusron ko garq (duba/drown) kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir aur sab doosron ko dobo diya
Devnagri Urdu (Maududi)और दूसरों को गर्क (डूबा/डूब) करदिया
عَرَبِيإِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَما كانَ أَكثَرُهُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे।
Roman Urdu (Maududi)Is waqiye mein ek nishani hai, magar in logon mein se aksar manney waley nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan iss mein bari ibrat hai aur inn mein kay aksar log eman walay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वक्त में एक निशानी है, मगर इन लोगों में से अक्सर मन्ने वाले नहीं हैं
عَرَبِيوَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ العَزيزُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् हैl
Roman Urdu (Maududi)Aur haqeeqat yeh hai ke tera Rubb zabardast bhi hai aur raheem bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur be-shak aap ka rab bara hi ghalib aur meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हकीकत ये है के तेरा रब्ब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी
عَرَبِيوَاتلُ عَلَيهِم نَبَأَ إِبراهيمَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप उन्हें इबराहीम का समाचार सुनाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur inhein Ibrahim ka qissa sunao
Roman Urdu (Junagarhi)Enhen ibrahim (alh-e-salam) ka waqiya bhi suna do
Devnagri Urdu (Maududi)और यहीं इब्राहीम का क़िस्सा सुनाओ
عَرَبِيإِذ قالَ لِأَبيهِ وَقَومِهِ ما تَعبُدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब उसने अपने बाप तथा अपनी जाति से कहा : तुम किसकी पूजा करते हो?
Roman Urdu (Maududi)Jabke usne apne baap aur apni qaum se pucha tha ke “yeh kya cheezein hain jinko tum poojhte ho?”
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay unhon ney apnay baap aur pani qom say farmaya kay tum kiss ki ibadat kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)जबके उसने अपने बाप और अपनी क़ौम से पूछा था के "ये क्या चीज़ हैं जिनको तुम पूजते हो?"
عَرَبِيقالوا نَعبُدُ أَصنامًا فَنَظَلُّ لَها عاكِفينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हम कुछ मूर्तियों की पूजा करते हैं, इसलिए उन्हीं की सेवा में लगे रहते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “ kuch buth (idols/murtiyan) hain jinki hum pooja karte hain aur inhi ki sewa mein hum lagey rehte hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney jawab diya kay ibadat kertay hain buton ki hum to barbar inn kay mujawar bann bethay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उनको ने जवाब दिया “कुछ बुथ (मूर्तियां/मूर्तियां) हैं जिनकी हम पूजा करते हैं और इनकी सेवा में हम लगे रहते हैं”
عَرَبِيقالَ هَل يَسمَعونَكُم إِذ تَدعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : क्या वे तुम्हें सुनते हैं, जब तुम (उन्हें) पुकारते हो?
Roman Urdu (Maududi)Usne pucha “kya yeh tumhari sunte hain jab tum inhein pukarte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ney farmaya jab tum enhen pukartay ho to kiya woh suntay bhi hain
Devnagri Urdu (Maududi)उसने पूछा “क्या ये तुम्हारी सुनते हैं जब तुम इन्हें पुकारते हो
عَرَبِيأَو يَنفَعونَكُم أَو يَضُرّونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)या तुम्हें लाभ देते हैं, या हानि पहुँचाते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Ya yeh tumhein kuch nafaa ya nuqsaan pahunchate hain?”
Roman Urdu (Junagarhi)Ya tumhen nafa nuksan bhi phoncha saktay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हां ये तुम्हें कुछ नफ़ा या नुक्सान पहुंचते हैं?”
عَرَبِيقالوا بَل وَجَدنا آباءَنا كَذٰلِكَ يَفعَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : बल्कि हमने अपने बाप-दादा को पाया कि वे ऐसा ही करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “ nahin , balke humne apne baap dada ko aisa hi karte paya hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha yeh (hum kuch nahi jantay) hum ney to apnay baap dadon ko issi tarah kertay paya
Devnagri Urdu (Maududi)उनको ने जवाब दिया " नहीं, बल्कि हमने अपने बाप दादा को ऐसा ही किया पाया है"
عَرَبِيقالَ أَفَرَأَيتُم ما كُنتُم تَعبُدونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : तो क्या तुमने देखा कि जिनको तुम पूजते रहे।
Roman Urdu (Maududi)Ispar Ibrahim ne kaha “ kabhi tumne (aankhein khol kar) un cheezon ko dekha bhi jinki bandagi tum
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ney farmaya kuch khabar bhi hai jinhen tum pooj rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)इसपर इब्राहिम ने कहा " कभी तुमने (आंखें खोल कर) उन चीज़ों को देखा भी जिनकी बंदगी तुम
عَرَبِيأَنتُم وَآباؤُكُمُ الأَقدَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम तथा तुम्हारे पहले बाप-दादा?
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhare pichle baap dada baja latey rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Tum aur tumharay aglay baap dada woh sab meray dushman hain
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हारे पिछले बाप दादा बजा लाते रहे
عَرَبِيفَإِنَّهُم عَدُوٌّ لي إِلّا رَبَّ العالَمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सो निःसंदेह वे मेरे शत्रु हैं, सिवाय सारे संसारों के पालनहार के।
Roman Urdu (Maududi)Mere to yeh sab dushman hain, bajuz ek Rubb ul aalameen ke
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-juz sachay Allah Taalaa kay jo tamam jahaan ka palanhaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)मेरे तो ये सब दुश्मन हैं, बाजुज़ एक रब उल आलमीन के
عَرَبِيالَّذي خَلَقَني فَهُوَ يَهدينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह जिसने मुझे पैदा किया, फिर वही मेरा मार्गदर्शन करता है।
Roman Urdu (Maududi)Jisne mujhey paida kiya, phir wahi meri rehnumayi farmata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ney mujhay peda kiya hai aur wohi meri rehbari farmata hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने मुझे भुगतान किया, फिर वही मेरी रहनुमाई फरमाता है
عَرَبِيوَالَّذي هُوَ يُطعِمُني وَيَسقينِ
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हिन्दी (Al-Omari)और वही जो मुझे खिलाता है और मुझे पिलाता है।
Roman Urdu (Maududi)Jo mujhey khilata aur pilata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi hai jo mujhay khilata pilata hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो मुझे खिलाता और पिलाता है
عَرَبِيوَإِذا مَرِضتُ فَهُوَ يَشفينِ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब मैं बीमार होता हूँ, तो वही मुझे अच्छा करता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab main bimar ho jaata hoon to wahi mujhey shifa deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab mein beemar par jaon to mujhay shifa ata farmata hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जब मैं बीमार हो जाता हूं तो वही मुझे शिफा देता है
عَرَبِيوَالَّذي يُميتُني ثُمَّ يُحيينِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वह जो मुझे मारेगा, फिर मुझे जीवित करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Jo mujhey maut dega aur phir dobara mujhko zindagi bakshega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wohi mujhay maar dalay ga phir zinda ker dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)जो मुझे मौत देगा और फिर दोबारा मुझको जिंदगी बक्शेगा
عَرَبِيوَالَّذي أَطمَعُ أَن يَغفِرَ لي خَطيئَتي يَومَ الدّينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा वह, जिससे मैं आशा रखता हूँ कि वह बदले के दिन मेरे पाप क्षमा कर देगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur jissey main umeed rakhta hoon ke roz e jaza mein woh meri khata maaf farmadega”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss say umeed bandhi hui hai kay woh roz-e-jaza mein meray gunahon ko bakhsh dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और जिसकी मैं उम्मीद रखता हूं के रोज ए जजा में वो मेरी खाता माफ फरमादेगा”
عَرَبِيرَبِّ هَب لي حُكمًا وَأَلحِقني بِالصّالِحينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे पालनहार! मुझे हुक्म (धर्म का ज्ञान) प्रदान कर और मुझे नेक लोगों के साथ मिला।
Roman Urdu (Maududi)(iske baad Ibrahim ne dua ki) “Aey mere Rubb, mujhey hukum ata kar aur mujhko salihon (neik logon) ke saath mila
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meray rab! Mujhay qooat-e-faisla ata farma aur mujhay nek logon mein mila dey
Devnagri Urdu (Maududi)(इस्के बाद इब्राहिम ने दुआ की) “ऐ मेरे रब, मुझे हुकुम अता कर और मुझको सालिहों (नए लोगों) के साथ मिला
عَرَبِيوَاجعَل لي لِسانَ صِدقٍ فِي الآخِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और बाद में आने वालों में मुझे सच्ची ख्याति प्रदान कर।
Roman Urdu (Maududi)Aur baad ke aane walon mein mujhko sacchi naamwari ata kar
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mera ziker-e-khair pichlay logon mein bhi baqi rakh
Devnagri Urdu (Maududi)और बाद के आने वालों में मुझको सच्ची नामवारी आता कर
عَرَبِيوَاجعَلني مِن وَرَثَةِ جَنَّةِ النَّعيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और मुझे नेमतों वाली जन्नत के वारिसों में से बना दे।
Roman Urdu (Maududi)Aur mujhey jannat e naeem ke warison (inheritors) mein shamil farma
Roman Urdu (Junagarhi)Mujhay nematon wali jannat kay warison mein say bana dey
Devnagri Urdu (Maududi)और मुझे जन्नत ए नईम के वारिसों (उत्तराधिकारी) में शामिल फरमा
عَرَبِيوَاغفِر لِأَبي إِنَّهُ كانَ مِنَ الضّالّينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मेरे बाप को क्षमा कर दे। निश्चय वह गुमराहों में से था।
Roman Urdu (Maududi)Aur mere baap ko maaf karde ke beshak woh gumraah logon mein se hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur meray baap ko bakhsh dey yaqeenan woh gumrahon mein say tha
Devnagri Urdu (Maududi)और मेरे बाप को माफ़ करदे के बहकावे वो गुमराह लोगों में से हैं
عَرَبِيوَلا تُخزِني يَومَ يُبعَثونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मुझे रुसवा न कर, जिस दिन लोग उठाए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur mujhey us din ruswa na kar jabke sab log zinda karke uthaye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss sin kay log doobara jilaye jayen mujhay ruswa na ker
Devnagri Urdu (Maududi)और मुझे उस दिन रुसवा ना कर जबके सब लोग ज़िंदा करके उठेंगे
عَرَبِييَومَ لا يَنفَعُ مالٌ وَلا بَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन न कोई धन लाभ देगा और न बेटे।
Roman Urdu (Maududi)Jabke na maal koi faiyda dega na Aulad
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din kay maal aur aulad kuch kaam na aaye gi
Devnagri Urdu (Maududi)जबके ना माल कोई फ़ायदा देगा ना औलाद
عَرَبِيإِلّا مَن أَتَى اللَّهَ بِقَلبٍ سَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु जो अल्लाह के पास पाक-साफ़ दिल लेकर आया।
Roman Urdu (Maududi)Bajuz iske ke koi shaks qalb-e-saleem (sound heart) liye huey Allah ke huzur haazir ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin faeeday wala wohi hoga jo Allah Taalaa kay samney bay aib dil ley ker jaye
Devnagri Urdu (Maududi)बज़ुज़ इसके के कोई शक्स क़ल्ब-ए-सलीम (स्वस्थ हृदय) लिए हुए अल्लाह के हुजूर हाज़िर हो”
عَرَبِيوَأُزلِفَتِ الجَنَّةُ لِلمُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और (अपने रब से) डरने वालों के लिए जन्नत निकट लाई जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)(Us roz) jannat parheizgaaron ke qareeb le aayi jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur perhezgaron kay liye jannat bilkul nazdeek laa di jaye gi
Devnagri Urdu (Maududi)(उस रोज़) जन्नत परहेज़गारों के करीब ले आएगी
عَرَبِيوَبُرِّزَتِ الجَحيمُ لِلغاوينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा पथभ्रष्ट लोगों के लिए भड़कती आग प्रकट कर दी जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur dozakh behke huey logon ke saamne khol di jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur gumrah logon kay liye jahannum zahir ker di jaye gi
Devnagri Urdu (Maududi)और दोज़ख बहके हुए लोगों के सामने खुल जाएगी
عَرَبِيوَقيلَ لَهُم أَينَ ما كُنتُم تَعبُدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनसे कहा जाएगा : कहाँ हैं वे, जिन्हें तुम पूजते थे?
Roman Urdu (Maududi)Aur unsey pucha jayega ke “ab kahan hai woh jinki tum khuda ko chodh kar ibadat karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn say poocha jayega kay jin ki tum pooja kertay rahey woh kahan hain
Devnagri Urdu (Maududi)और उनसे पूछा जाएगा के “अब कहाँ है” वो जिनकी तुम खुदा को छोड़ कर इबादत करते थे
عَرَبِيمِن دونِ اللَّهِ هَل يَنصُرونَكُم أَو يَنتَصِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह के सिवा। क्या वे तुम्हारी मदद करते हैं, या अपनी रक्षा करते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya woh tumhari kuch madad kar rahey hain ya khud apna bachao kar sakte hain?”
Roman Urdu (Junagarhi)Jo Allah Taalaa kay siwa thay kiya woh tumhari madad kertay hain? Ya koi badla ley saktay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वो तुम्हारी कुछ मदद कर रहे हैं या खुद अपना बचाव कर सकते हैं?”
عَرَبِيفَكُبكِبوا فيها هُم وَالغاوونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर वे और सब पथभ्रष्ट लोग उसमें औंधे मुँह फेंक दिए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh mabood aur yeh behke huey log
Roman Urdu (Junagarhi)Pus woh sab aur kul gumrah log jahannum mein ondhay mun daal diye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो माबूद और ये बहके हुए लोग
عَرَبِيوَجُنودُ إِبليسَ أَجمَعونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और इबलीस की समस्त सेनाएँ भी।
Roman Urdu (Maududi)Aur Iblis ke lashkar sabke sab ismein upar taley dhakeil diye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iblees kay tamam kay tamam lashkar bhi wahan
Devnagri Urdu (Maududi)और इबलीस के लश्कर सबके सब इसमें ऊपर तले ढकेल दिए जाएंगे
عَرَبِيقالوا وَهُم فيها يَختَصِمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे उसमें आपस में झगड़ते हुए कहेंगे :
Roman Urdu (Maududi)Wahan yeh sab aapas mein jhagdenge aur yeh behke huey log (apne maboodon se) kahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aapas mein lartay jhagartay huye kahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)वहां ये सब आपस में झगड़ेंगे और ये बहके हुए लोग (अपने माबूदों से) कहेंगे
عَرَبِيتَاللَّهِ إِن كُنّا لَفي ضَلالٍ مُبينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह की क़सम! निःसंदेह हम निश्चय खुली गुमराही में थे।
Roman Urdu (Maududi)Ke “khuda ki kasam , hum to sareeh gumraahi mein mubtala thay
Roman Urdu (Junagarhi)Kay qasam Allah ki! Yaqeenan hum to khulli ghalati per thay
Devnagri Urdu (Maududi)के “खुदा की कसम, हम तो सारी गुमराही में मुबतला थे
عَرَبِيإِذ نُسَوّيكُم بِرَبِّ العالَمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब हम तुम्हें सारे संसारों के पालनहार के बराबर ठहराते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jabke tumko Rubb ul Aalameen ki barabari ka darja de rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay tumhen rab-ul-aalameen kay barabar samajh bethay thay
Devnagri Urdu (Maududi)जबके तुमको रब उल आलमीन की बाराबरी का दरजा दे रहे थे
عَرَبِيوَما أَضَلَّنا إِلَّا المُجرِمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमें तो सिर्फ़ इन अपराधियों ने गुमराह किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh mujrim log hi thay jinhon ne humko is gumraahi mein dala
Roman Urdu (Junagarhi)Aur humen to siwa inn badkaaron kay kissi aur ney gumrah nahi kiya tha
Devnagri Urdu (Maududi)और वो मुजरिम लोग ही थे जिन्होन ने हमको इस गुमराही में डाला
عَرَبِيفَما لَنا مِن شافِعينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अब न हमारे लिए कोई सिफारिश करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ab na hamara koi sifarishi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Abb to humara koi sifarshi bhi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)अब ना हमारा कोई सिफ़रीशी है
عَرَبِيوَلا صَديقٍ حَميمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और न कोई घनिष्ट मित्र।
Roman Urdu (Maududi)Aur na koi jigri dost
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na koi (sacha) ghum khuwar dost
Devnagri Urdu (Maududi)और ना कोई जिगरी दोस्त
عَرَبِيفَلَو أَنَّ لَنا كَرَّةً فَنَكونَ مِنَ المُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो यदि वास्तव में हमारे लिए वापस जाने का अवसर होता, तो हम ईमानवालों में से हो जाते।
Roman Urdu (Maududi)Kaash humein ek dafa phir palatne ka mauqa mil jaye to hum momin hon”
Roman Urdu (Junagarhi)Agar kaash kay humen aik martaba phir jana milta to hum pakkay sachay momin bann jatay
Devnagri Urdu (Maududi)काश हमें एक दफा फिर पलटने का मौका मिल जाए तो हम मोमिन हों”
عَرَبِيإِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَما كانَ أَكثَرُهُم مُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan is mein ek badi nishani hai, magar in mein se aksar log iman laney waley nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh majra yaqeena aik bari zabardast nishani hai inn mein say aksar log eman laney walay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन इस में एक बड़ी निशानी है, मगर मेरे अंदर से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं
عَرَبِيوَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ العَزيزُ الرَّحيمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् हैl
Roman Urdu (Maududi)Aur haqeeqat yeh hai ke tera Rubb zabardast bhi hai aur raheem bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan aap ka perwerdigar hi ghalib meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हकीकत ये है के तेरा रुब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी
عَرَبِيكَذَّبَت قَومُ نوحٍ المُرسَلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)नूह़ की जाति ने रसूलों को झुठलाया।
Roman Urdu (Maududi)Qaum e Nooh ne Rasoolon ko jhutlaya
Roman Urdu (Junagarhi)Qom-e-nooh ney bhi nabiyon ko jhutlaya
Devnagri Urdu (Maududi)क़ौम ए नूह ने रसूलों को झुटलाया
عَرَبِيإِذ قالَ لَهُم أَخوهُم نوحٌ أَلا تَتَّقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब उनसे उनके भाई नूह़ ने कहा : क्या तुम डरते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jabke unke bhai Nooh ne unsey kaha tha “kya tum darte nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay unn kay bhai nooh (alh-e-salam) ney kaha kay kiya tumhen Allah ka khof nahi
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जबके उनके भाई नूह ने उनसे कहा था "क्या तुम डरते नहीं हो
عَرَبِيإِنّي لَكُم رَسولٌ أَمينٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Main tumhare liye ek amaanat daar Rasool hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Suno! Mein tumhari taraf Allah ka amanat daar rasool hun
Devnagri Urdu (Maududi)मैं तुम्हारे लिए एक अमानत दार रसूल हूं
عَرَبِيفَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطيعونِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza tum Allah se daro aur meri itaat karo
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tumhen Allah say darna chahaye aur meri baat manni chahaye
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाज़ा तुम अल्लाह से डरो और
عَرَبِيوَما أَسأَلُكُم عَلَيهِ مِن أَجرٍ ۖ إِن أَجرِيَ إِلّا عَلىٰ رَبِّ العالَمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)मैं इस (कार्य) पर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता। मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।
Roman Urdu (Maududi)Main is kaam par tumse kisi ajar ka talib nahin hoon, mera ajar to Rabbul Aalameen ke zimme hai
Roman Urdu (Junagarhi)Mein tum say iss per koi ajar nahi chahata mera badla to sirf rab-ul-aalameen kay haan hai
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيفَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطيعونِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।
Roman Urdu (Maududi)Pas tum Allah se daro aur ( be khatke) meri itaat karo”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum Allah ka khof rakho aur meri farmanbardari kero
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِي۞ قالوا أَنُؤمِنُ لَكَ وَاتَّبَعَكَ الأَرذَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : क्या हम तुझपर ईमान ले आएँ, जबकि तेरे पीछे चलने वाले अत्यंत नीच लोग हैं?
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “kya hum tujhey maan lein halaanke teri pairwi razil-tareen (lowest/meanest) logon ne ikhtiyar ki hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)Qom ney jawab diya kay kiya hum tujh per eman layen! Teri tabey daari to razeel logon ney ki hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने जवाब दिया "क्या हम तुझे मान लें हलांके तेरी जोड़ी रज़िल-तरीन (सबसे नीच/नीच) लोगों ने इख्तियार की है?"
عَرَبِيقالَ وَما عِلمي بِما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(नूह़ ने) कहा : मूझे क्या मालूम कि वे क्या कर्म करते रहे हैं?
Roman Urdu (Maududi)Nooh ne kaha “main kya jaanu ke unke amal kaise hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ney farmaya! Mujhay kiya khabar kay woh pehlay kiya kertay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)नूह ने कहा “मैं क्या जानू के उनके अमल कैसे हैं
عَرَبِيإِن حِسابُهُم إِلّا عَلىٰ رَبّي ۖ لَو تَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनका ह़िसाब तो मेरे पालनहार ही के ज़िम्मे है, यदि तुम समझो।
Roman Urdu (Maududi)Unka hisaab to mere Rubb ke zimme hai, kaash tum kuch shaoor se kaam lo
Roman Urdu (Junagarhi)Unn ka hisab to meray rab kay zimmay hai agar tumhen shaoor ho to
Devnagri Urdu (Maududi)उनका हिसाब तो मेरे रब के ज़िम्मे है, काश तुम कुछ शूर से काम लो
عَرَبِيوَما أَنا بِطارِدِ المُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और मैं ईमान वालों को धुतकारने वाला नहीं हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Mera yeh kaam nahin hai ke jo iman layein unko main dhutkaar doon
Roman Urdu (Junagarhi)Mein eman walon ko dhakkay denay wala nahi
Devnagri Urdu (Maududi)मेरा ये काम नहीं है के जो ईमान लायें उनको मैं धुतकार दूं
عَرَبِيإِن أَنا إِلّا نَذيرٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)मैं तो बस एक खुला डराने वाला हूँ
Roman Urdu (Maududi)Main to bas ek saaf saaf mutanabbeh (warn) kardene wala aadmi hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Mein to saaf tor per dara denay wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)मैं तो बस एक साफ साफ मुतनब्बे (चेतावनी) करने वाला आदमी हूं"
عَرَبِيقالوا لَئِن لَم تَنتَهِ يا نوحُ لَتَكونَنَّ مِنَ المَرجومينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ नूह़! यदि तू बाज़ नहीं आया, तो अवश्य संगसार किए गए लोगों में से हो जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “Aey Nooh , agar tu baaz na aaya to phitkarey huey logon mein shamil hokar rahega”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha aey nooh! Agar tu baaz na aaya to yaqeenan tujhay sangsaar ker diya jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने कहा "ऐ नूह, अगर तू बाज़ ना आया तो फिटकरे हुए लोगों में शामिल होकर रहेगा"
عَرَبِيقالَ رَبِّ إِنَّ قَومي كَذَّبونِ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! निःसंदेह मेरी जाति ने मुझे झुठला दिया!
Roman Urdu (Maududi)Nooh ne dua ki “Aey mere Rubb, meri qaum ne mujhey jhutla diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ney kaha aey meray perwerdigar! Meri qom ney mujhay jhutla diya
Devnagri Urdu (Maududi)नूह ने दुआ की "ऐ मेरे रब, मेरी क़ौम ने मुझे झुटला दिया
عَرَبِيفَافتَح بَيني وَبَينَهُم فَتحًا وَنَجِّني وَمَن مَعِيَ مِنَ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः तू मेरे और उनके बीच दो-टूक निर्णय कर दे, तथा मुझे और जो ईमानवाले मेरे साथ हैं, उन्हें बचा ले।
Roman Urdu (Maududi)Ab mere aur unke darmiyan do-toak faisla karde aur mujhey aur jo momin mere saath hain inko nijaat de”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tu mujh mein aur inn mein koi qataee faisla ker dey aur mujha aur meray ba-emaan saathiyon ko nijat dey
Devnagri Urdu (Maududi)अब मेरे और उनके दरमियान दो-टूक फैसला करदे और मुझे और जो मोमिन मेरे साथ हैं इनको निजात दे”
عَرَبِيفَأَنجَيناهُ وَمَن مَعَهُ فِي الفُلكِ المَشحونِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उसे और उन लोगों को जो उसके साथ भरी हुई नाव में थे, बचा लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar humne usko aur uske saathiyon ko ek bhaari hui kashti mein bacha liya
Roman Urdu (Junagarhi)Chunacha hum ney ussay aur uss kay saathiyon ko bhari hui kashti mein (sawar kera ker) nijat dey di
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार हमने उसको और उसके साथियों को एक भारी हुई कश्ती में बचा लिया
عَرَبِيثُمَّ أَغرَقنا بَعدُ الباقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसके बाद शेष लोगों को डुबो दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur uske baad baaqi logon ko garq (drown) kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Bad-e-azan baqi kay tamam logon ko hum ney dobo diya
Devnagri Urdu (Maududi)और उसके बाद बाकी लोगों को गर्क (डूब) कर दिया
عَرَبِيإِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَما كانَ أَكثَرُهُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan ismein ek nishani hai, magar inmein se aksar log maanne waley nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan iss mein boht bari ibrat hai. Unn mein say aksar log eman laney walay thay bhi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर लोग माने वाले नहीं
عَرَبِيوَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ العَزيزُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur haqeeqat yeh hai ke tera Rubb zabardast bhi hai aur raheem bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur be-shak aap ka perwerdigar albatta wohi hai zabardast reham kerney wala
Devnagri Urdu (Maududi)और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी
عَرَبِيكَذَّبَت عادٌ المُرسَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आद ने रसूलों को झुठलाया।
Roman Urdu (Maududi)Aad ne Rasoolon ko jhutlaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aadiyon ney bhi rasoolon ko jhutlaya
Devnagri Urdu (Maududi)आद ने रसूलों को झुटलाया
عَرَبِيإِذ قالَ لَهُم أَخوهُم هودٌ أَلا تَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब उनसे उनके भाई हूद ने कहा : क्या तुम डरते नहीं हो?
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jabke unke bhai Hood ne unse kaha tha “kya tum darte nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay unn say unn kay bhai hood ney kaha kay kiya tum dartay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जबके उनके भाई हुड ने उनसे कहा था "क्या तुम डरते नहीं
عَرَبِيإِنّي لَكُم رَسولٌ أَمينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Main tumhare liye ek amaanat-daar Rasool hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Mein tumhara amanatdaar payghumbar hun
Devnagri Urdu (Maududi)मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं
عَرَبِيفَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطيعونِ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza tum Allah se daro aur meri itaat karo
Roman Urdu (Junagarhi)Pus Allah say daro aur mera kaha mano
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाजा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो
عَرَبِيوَما أَسأَلُكُم عَلَيهِ مِن أَجرٍ ۖ إِن أَجرِيَ إِلّا عَلىٰ رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)मैं इस (कार्य) पर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता, मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।
Roman Urdu (Maududi)Main is kaam par tumse kisi ajar ka talib nahin hoon, mera ajar to Rabbul Aalameen ke zimme hai
Roman Urdu (Junagarhi)Mein iss per tum say koi ujrat talab nahi kerta mera sawab to tamam jahaan kay perwerdigar kay pass hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है
عَرَبِيأَتَبنونَ بِكُلِّ ريعٍ آيَةً تَعبَثونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम हर ऊँचे स्थान पर एक स्मारक बनाते हो? इस स्थिति में कि व्यर्थ कार्य करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh tumhara kya haal hai ke har unchey maqaam par la haasil ek yaadgaar imarat bana daalte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum aik aik teelay per bator khel tamasha yaadgar (emaarat) bana rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)ये तुम्हारा क्या हाल है के हर ऊंचे मक़ाम पर ला हासिल एक यादगार इमारत बना डालते हो
عَرَبِيوَتَتَّخِذونَ مَصانِعَ لَعَلَّكُم تَخلُدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा बड़े-बड़े भवन बनाते हो, शायद कि तुम सदा जीवित रहोगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur baday baday qasar (huge castles) taamir karte ho goya tumhein hamesha rehna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bari san’at walay (mazboot mehal tameer) ker rahey ho goya kay tum hamesha yahin raho gay
Devnagri Urdu (Maududi)और बड़े-बड़े क़सर (विशाल महल) तामीर करते हो गोया तुम्हें हमेशा रहना है
عَرَبِيوَإِذا بَطَشتُم بَطَشتُم جَبّارينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब तुम पकड़ते हो, तो बड़ी निर्दयता से पकड़ते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab kisi par haath daalte ho jabbar ban kar daalte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab kissi per hath daaltay ho to sakhti aur zulm say pakartay ho
Devnagri Urdu (Maududi)और जब किसी पर हाथ डालते हो जब्बार बन कर डालते हो
عَرَبِيفَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطيعونِ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः अल्लाह से डरो और जो मैं कहता हूँ, उसे मानो।
Roman Urdu (Maududi)Pas tum log Allah se daro aur meri itaat karo
Roman Urdu (Junagarhi)Allah say daro aur meri pairwee kero
Devnagri Urdu (Maududi)पास तुम लोग अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो
عَرَبِيوَاتَّقُوا الَّذي أَمَدَّكُم بِما تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उससे डरो जिसने उन चीज़ों से तुम्हारी मदद की, जिन्हें तुम जानते हो।
Roman Urdu (Maududi)Daro ussey jisne woh kuch tumhein diya hai jo tum jaante ho
Roman Urdu (Junagarhi)Uss say daro jiss ney unn cheezon say tumhari imdad ki jinhen tum jantay ho
Devnagri Urdu (Maududi)डरो उसे जिसने वो कुछ तुम्हें दिया है जो तुम जानते हो
عَرَبِيأَمَدَّكُم بِأَنعامٍ وَبَنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने चौपायों और बेटों से तुम्हारी मदद की।
Roman Urdu (Maududi)Tumhein jaanwar diye, auladein di
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney tumahri madad ki maal say aur aulad say
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हें जानवर दिए, औलादें दी
عَرَبِيوَجَنّاتٍ وَعُيونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा बाग़ों और जल स्रोताें से।
Roman Urdu (Maududi)Baagh diye aur chashme(water-springs) diye
Roman Urdu (Junagarhi)Baghaat say aur chashmon say
Devnagri Urdu (Maududi)बाग दिए और चश्मे (पानी के झरने) दिए
عَرَبِيإِنّي أَخافُ عَلَيكُم عَذابَ يَومٍ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय ही मैं तुमपर एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Mujhey tumhare haqq mein ek baday din ke azaab ka darr hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Mujhay to tumhari nisbat baray din kay azab ka andesha hai
Devnagri Urdu (Maududi)मुझे तुम्हारे हक में एक बड़े दिन के अज़ाब का डर है"
عَرَبِيقالوا سَواءٌ عَلَينا أَوَعَظتَ أَم لَم تَكُن مِنَ الواعِظينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हमारे लिए बराबर है कि तू नसीहत करे, या नसीहत करने वालों में से हो।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawaab diya “ tu naseehat kar ya na kar, hamare liye yaksan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha kay aap waaz kehn ya waaz kehney walon mein na hon hum per yaksan hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनको ने जवाब दिया " तू हिदायत कर या ना कर, हमारे लिए यकसन है
عَرَبِيإِن هٰذا إِلّا خُلُقُ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह तो केवल पहले लोगों की आदत है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh baatein to yunhi hoti chali aayi hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh to bus puraney logon ki aadat hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये बातें तो यूं ही होती चली आई हैं
عَرَبِيوَما نَحنُ بِمُعَذَّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हम निश्चित रूप से दंडित नहीं होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur hum azaab mein mubtala honay walay nahin hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum hergiz azab nahi diye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और हम अज़ाब में मुब्ताला होने वाले नहीं हैं"
عَرَبِيفَكَذَّبوهُ فَأَهلَكناهُم ۗ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَما كانَ أَكثَرُهُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्होंने उसे झुठला दिया, तो हमने उन्हें विनष्ट कर दिया। निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर लोग ईमानवाले नहीं थे।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar unhon ne usey jhutla diya aur humne unko halaak kardiya. Yaqeenan ismein ek nishani hai, magar inmein se aksar log maanne waley nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Chunkay aadiyon ney hazrat hood ko jhutlaya iss liye hum ney unhen tabah ker diya yaqeenan iss mein nishani hai aur inn mein say aksar bey eman thay
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार उनहों ने उसे झुतला दिया और हमने उनको हलाक कर दिया। यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर लोग मन्ने वाले नहीं हैं
عَرَبِيوَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ العَزيزُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur haqeeqat yeh hai ke tera Rubb zabardast bhi hai aur raheem bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak aap ka rab wohi hai ghalib meharbaan
Devnagri Urdu (Maududi)और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बर्दस्त भी है और रहीम भी
عَرَبِيكَذَّبَت ثَمودُ المُرسَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)समूद ने रसूलों को झुठलाया।
Roman Urdu (Maududi)Samood ne Rasoolon ko jhutlaya
Roman Urdu (Junagarhi)Samoodiyon ney bhi payghumbaron ko jhutlaya
Devnagri Urdu (Maududi)समूद ने रसूलों को झुटलाया
عَرَبِيإِذ قالَ لَهُم أَخوهُم صالِحٌ أَلا تَتَّقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब उनसे उनके भाई सालेह़ ने कहा : क्या तुम डरते नहीं हो?
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jabke unke bhai Saleh ne unse kaha “kya tum darte nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay bhai saleh ney unn say farmaya kay kiya tum Allah say nahi dartay
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जबके उनके भाई सालेह ने उनसे कहा "क्या तुम डरते नहीं
عَرَبِيإِنّي لَكُم رَسولٌ أَمينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Main tumhare liye ek amaanat-daar Rasool hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Mein tumhari taraf Allah ka amanatdaar payghumbar hun
Devnagri Urdu (Maududi)मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं
عَرَبِيفَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطيعونِ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः अल्लाह से डरो और जो मैं कहता हूँ, उसका पालन करो।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza tum Allah se daro aur meri itaat karo
Roman Urdu (Junagarhi)To tum Allah say daro aur mera kaha mano
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाज़ा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो
عَرَبِيوَما أَسأَلُكُم عَلَيهِ مِن أَجرٍ ۖ إِن أَجرِيَ إِلّا عَلىٰ رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)मैं इसपर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता। मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।
Roman Urdu (Maududi)Main is kaam par tumse kisi ajar ka talib nahin hoon, mera ajar to Rabbul aalameen ke zimme hai
Roman Urdu (Junagarhi)Mein iss per tum say koi ujrat nahi mangta meri ujrat to bus perwerdigar-e-aalam per hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है
عَرَبِيأَتُترَكونَ في ما هاهُنا آمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम उन चीज़ों में जो यहाँ हैं, निश्चिंत छोड़ दिए जाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Kya tum un sab cheezon ke darmiyan, jo yahan hain, bas yunhi itminaan se rehne diye jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn cheezon mein jo yahan hain tum aman kay sath chor diye jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम उन सब चीजों के दरमियान, जो यहां हैं, बस यूंही इत्मिनान से रहना दिए जाओगे
عَرَبِيفي جَنّاتٍ وَعُيونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)बाग़ों तथा स्रोतों में।
Roman Urdu (Maududi)In baaghon (gardens) aur chasmon mein
Roman Urdu (Junagarhi)Yaani inn baghon aur inn chashmon
Devnagri Urdu (Maududi)बागों (बगीचों) और चैसमन में
عَرَبِيوَزُروعٍ وَنَخلٍ طَلعُها هَضيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा खेतों और खजूर के पेड़ों में, जिनके फल मुलायम और पके हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)In kheton aur nakhlistano (date-groves) mein jinke khosey rass bharey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kheton aur inn khajooron kay baghon mein jin kay shagoofay naram-o-nazuk hain
Devnagri Urdu (Maududi)खेतों और नखलिस्तानो (खजूर-कुंजों) में जिनके खोसे रस भरे हैं
عَرَبِيوَتَنحِتونَ مِنَ الجِبالِ بُيوتًا فارِهينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम पर्वतों को काटकर बड़ी निपुणता के साथ घर बनाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Tum pahad khodh khodh kar fakhariya (proudly) un mein imaratein banate ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum paharon ko taraash taraash ker pur takalluf makannat bana rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)तुम पहाड़ खोद खोद कर फखरिया (गर्व से) उन में इमरतें बनाते हो
عَرَبِيفَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطيعونِ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः अल्लाह से डरो और मेरा आज्ञापालन करो।
Roman Urdu (Maududi)Allah se daro aur meri itaat karo
Roman Urdu (Junagarhi)Pus Allah say daro aur meri ita’at kero
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो
عَرَبِيوَلا تُطيعوا أَمرَ المُسرِفينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हद से आगे बढ़ने वालों का हुक्म न मानो।
Roman Urdu (Maududi)Un bay-lagaam logon ki itaat na karo
Roman Urdu (Junagarhi)Bey baak hadd say guzar janey walon ki ita’at say baaz aajao
Devnagri Urdu (Maududi)उन बे-लगाम लोगों की इताअत ना करो
عَرَبِيالَّذينَ يُفسِدونَ فِي الأَرضِ وَلا يُصلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो धरती में बिगाड़ पैदा करते हैं और सुधार नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Jo zameen mein fasaad barpa karte hain aur koi islaah nahin karte”
Roman Urdu (Junagarhi)Jo mulk mein fasad phela rahey hain aur islah nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)जो ज़मीन में फसाद बरपा करते हैं और कोई इस्लाह नहीं करते”
عَرَبِيقالوا إِنَّما أَنتَ مِنَ المُسَحَّرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : निःसंदेह तू उन लोगों में से है जिनपर प्रबल जादू किया गया है।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “tu mehaz ek sehar-zadah (affected by magic) aadmi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh bolay kay bus tu unn mein say hai jin per jadoo ker diya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)उन्हें ने जवाब दिया “तू महज़ एक सहर-ज़ादा (जादू से प्रभावित) आदमी है
عَرَبِيما أَنتَ إِلّا بَشَرٌ مِثلُنا فَأتِ بِآيَةٍ إِن كُنتَ مِنَ الصّادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तू तो बस हमारे ही जैसा एक मनुष्य है। अतः कोई निशानी ले आ, यदि तू सच्चों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Tu hum jaise ek Insaan ke siwa aur kya hai, laa koi nishani agar tu saccha hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Tu to hum jaisa insan hai. Agar tu sachon say hai to koi moajza ley aa
Devnagri Urdu (Maududi)तू हम जैसा एक इंसान के सिवा और क्या है, ला कोई निशानी अगर तू सच्चा है”
عَرَبِيقالَ هٰذِهِ ناقَةٌ لَها شِربٌ وَلَكُم شِربُ يَومٍ مَعلومٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : यह एक ऊँटनी है। इसके लिए पानी पीने की एक बारी है और तुम्हारे लिए एक निश्चित दिन पानी पीने की बारी है।
Roman Urdu (Maududi)Saleh ne kaha “yeh ountni (she-camel) hai ek din iske peene ka hai aur ek din tum sab ke pani lenay ka
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ney farmaya yeh hai oontni pani peenay ki aik bari iss ki aur aik muqarrar din ki bari pani peenay ki tumhari
Devnagri Urdu (Maududi)सालेह ने कहा “ये ऊंटनी (वह-ऊंटनी) है एक दिन इसके पीने का है और एक दिन तुम सब के पानी लेने का
عَرَبِيوَلا تَمَسّوها بِسوءٍ فَيَأخُذَكُم عَذابُ يَومٍ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसे किसी बुराई से हाथ न लगाना, अन्यथा तुम्हें एक बड़े दिन की यातना पकड़ लेगी।
Roman Urdu (Maududi)Isko hargiz na chedhna(molest) warna ek baday din ka azaab tumko aa lega”
Roman Urdu (Junagarhi)(khabardar!) issay buraee say hath na lagana werna aik baray bhari din ka azab tumhari girift ker ley ga
Devnagri Urdu (Maududi)इसको हरगिज़ न छेड़ना (छेड़छाड़) वरना एक बुरे दिन का अज़ाब तुमको आ लेगा”
عَرَبِيفَعَقَروها فَأَصبَحوا نادِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्होंने उसकी कूँचें काट दीं, फिर पछताने वाले हो गए।
Roman Urdu (Maududi)Magar unhon ne iski kunchein kaat di (hamstrung her) aur aakhir-e-kaar pachtate reh gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Phir bhi enhon ney uss ki koonchen kaat daalen bus woh pasheymaan hogaye
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उन्हें ने इसकी कुंचे काट दी (उसे चोट लगी) और आख़िर-ए-कार पछताते रह गए
عَرَبِيفَأَخَذَهُمُ العَذابُ ۗ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَما كانَ أَكثَرُهُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्हें यातना ने पकड़ लिया। निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।
Roman Urdu (Maududi)Azaab ne unhein aa liya, yaqeenan ismein ek nishani hai, magar in mein se aksar maanne waley nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Aur azab ney unhen aa dabocha. Be-shak iss mein ibrat hai. Aur inn mein say aksar log momin na thay
Devnagri Urdu (Maududi)अज़ाब ने उन्हें आ लिया, यकीनन इस्मे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर मन्ने वाले नहीं
عَرَبِيوَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ العَزيزُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur haqeeqat yeh hai ke tera Rubb zabardast bhi hai aur raheem bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur be-shak aap ka rab bara zabardast aur meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हकीकत ये है के तेरा रब्ब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी
عَرَبِيكَذَّبَت قَومُ لوطٍ المُرسَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)लूत की जाति ने रसूलों को झुठलाया।
Roman Urdu (Maududi)Lut ki qaum ne Rasoolon ko jhutlaya
Roman Urdu (Junagarhi)Qom-e-loot ney bhi nabiyon ko jhutlaya
Devnagri Urdu (Maududi)लूट की क़ौम ने रसूलों को झुटलाया
عَرَبِيإِذ قالَ لَهُم أَخوهُم لوطٌ أَلا تَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब उनके भाई लूत ने उनसे कहा : क्या तुम डरते नहीं हो?
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jabke unke bhai Lut ne unsey kaha tha “kya tum darte nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Unn say unn kay bhai loot (alh-e-salam) ney kaha kiya tum Allah ka khof nahi rakhtay
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जबके उनके भाई लुट ने उनसे कहा था "क्या तुम डरते नहीं
عَرَبِيإِنّي لَكُم رَسولٌ أَمينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Main tumhare liye ek amanat-daar Rasool hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Mein tumhari taraf amanatdaar rasool hun
Devnagri Urdu (Maududi)मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूँ
عَرَبِيفَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطيعونِ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza tum Allah se daro aur meri itaat karo
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum Allah Taalaa say daro aur meri ita’at kero
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाज़ा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो
عَرَبِيوَما أَسأَلُكُم عَلَيهِ مِن أَجرٍ ۖ إِن أَجرِيَ إِلّا عَلىٰ رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)मैं इस (कार्य) पर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता, मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।
Roman Urdu (Maududi)Main is kaam par tumse kisi ajar ka talib nahin hoon, mera ajar to Rabbul aalameen ke zimme hai
Roman Urdu (Junagarhi)Mein tum say iss per koi badla nahi maangta mera ajar to sirf Allah Taalaa per hai jo tamam jahaan ka rab hai
Devnagri Urdu (Maududi)मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है
عَرَبِيأَتَأتونَ الذُّكرانَ مِنَ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या सभी संसारों में से तुम पुरुषों के पास आते हो।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum duniya ki makhlooq mein se Mardon ke paas jatey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tamam jahaan walon mein say mardon kay sath shehwat raani kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम दुनिया की मखलूक में से मर्दों के पास जाते हो
عَرَبِيوَتَذَرونَ ما خَلَقَ لَكُم رَبُّكُم مِن أَزواجِكُم ۚ بَل أَنتُم قَومٌ عادونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्हें छोड़ देते हो, जो तुम्हारे पालनहार ने तुम्हारे लिए तुम्हारी पत्नियाँ पैदा की हैं। बल्कि तुम हद से आगे बढ़ने वाले लोग हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhari biwiyon mein tumhare Rubb ne tumhare liye jo kuch paida kiya hai usey chodh detey ho? Balke tum log to hadd se hi guzar gaye ho.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tumahri jin aurton ko Allah Taalaa ney tumhara jora banaya hai unn ko chor detay ho bulkay tum ho hi hadd say guzar janey walay
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हारी बीवीयों में तुम्हारे रब ने तुम्हारे लिए जो कुछ पेदा किया है उसे छोड़ देते हो? बल्के तुम लोग तो हद से ही गुजर गए हो।”
عَرَبِيقالوا لَئِن لَم تَنتَهِ يا لوطُ لَتَكونَنَّ مِنَ المُخرَجينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ लूत! निःसंदेह यदि तू नहीं रुका, तो निश्चित रूप से तू अवश्य निष्कासित लोगों में से हो जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “ aey Lut” agar tu in baaton se baaz na aaya to jo log hamari bastiyon se nikale gaye hain unmein tu bhi shamil ho kar rahega”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney jawab diya kay aey loot! Agar tu baaz na aaya to yaqeenan nikal diya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने कहा "ऐ लुट" अगर तू इन बातों से बाज़ ना आया तो जो लोग हमारी बस्तियों से निकल गए हैं उनमें तू भी शामिल हो कर रहेगा"
عَرَبِيقالَ إِنّي لِعَمَلِكُم مِنَ القالينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : निःसंदेह मैं तुम्हारे काम से सख़्त घृणा करने वालों में से हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “tumhare kartooton par jo log kudd (abhor/detest) rahey hain main un mein shamil hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ney farmaya mein tumharay kaam say sakht na khush hun
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा "तुम्हारे कार्टून पर जो लोग कुद्द (घृणा/घृणा) कर रहे हैं मैं उन में शामिल हूं
عَرَبِيرَبِّ نَجِّني وَأَهلي مِمّا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे पालनहार! मुझे तथा मेरे घर वालों को उससे बचा ले, जो ये करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aey parwardigar, mujhey aur mere ehal-o-ayaal (me and my people/ my family) ko inki badkirdariyon se nijaat de”
Roman Urdu (Junagarhi)Meray perwerdigar! Mujhay aur meray gharaney ko iss (wabal) say bacha ley jo yeh kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ परवरदिगार, मुझे और मेरे एहल-ओ-अयाल (मैं और मेरे लोग/मेरा परिवार) को इनकी बदकिरदारियों से निजात दे”
عَرَبِيفَنَجَّيناهُ وَأَهلَهُ أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उसे और उसके सभी घर वालों को बचा लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar humne usey aur uske sab ehal-o-ayaal ko bacha liya
Roman Urdu (Junagarhi)Pus hum ney ussay aur uss kay mutalaqqeen ko sab ko bacha liya
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार हमने उसे और उसके सब एहाल-ओ-अयाल को बचा लिया
عَرَبِيإِلّا عَجوزًا فِي الغابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)सिवाय एक बुढ़िया के, जो पीछे रहने वालों में से थी।
Roman Urdu (Maududi)Bajuz ek budiya ke jo peechey reh janey walon mein se thi
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-juz aik burhiya kay kay woh peechay reh jaaney walon mein ho gaee
Devnagri Urdu (Maududi)बज़ुज़ एक बुदिया के जो पीछे रह जाने वालों में से थी
عَرَبِيثُمَّ دَمَّرنَا الآخَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने दूसरों को विनष्ट कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Phir baaqi maanda(rest) logon ko humne tabaah kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney baqi aur sab ko halak ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर बाकी मांदा(बाकी) लोगों को हमने तबाह कर दिया
عَرَبِيوَأَمطَرنا عَلَيهِم مَطَرًا ۖ فَساءَ مَطَرُ المُنذَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उनपर ज़ोरदार बारिश बरसाई। तो उन लोगों की बारिश बहुत बुरी थी, जिन्हें डराया गया था।
Roman Urdu (Maududi)Aur unpar barsayi ek barsaat, badi hi buri baarish thi jo un daraye janey walon par nazil hui
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unn per aik khas qisam ka meenh barsaya pus boht hi bura meenh tha jo daraye gaye logon per barsa
Devnagri Urdu (Maududi)और उन पर बरसात एक बरसात, बड़ी ही बुरी बारिश थी जो उन डराए जाने वालों पर नाज़िल हुई
عَرَبِيإِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَما كانَ أَكثَرُهُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan ismein ek nishani hai, magar inmein se aksar maanne waley nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh majra bhi sirasir ibrat hai. Inn mein say bhi aksat musalman na thay
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर माने वाले नहीं
عَرَبِيوَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ العَزيزُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur haqeeqat yeh hai ke tera Rubb zabardast bhi hai aur raheem bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak tera perwerdigar wohi hai ghalbay wala meharbaani wala
Devnagri Urdu (Maududi)और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी
عَرَبِيكَذَّبَ أَصحابُ الأَيكَةِ المُرسَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐका वालों ने रसूलों को झुठलाया।
Roman Urdu (Maududi)Ashaab-ul-Aiyqah ne Rasoolon ko jhutlaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aeeka walon ney bhi rasoolon ko jhutlaya
Devnagri Urdu (Maududi)असहाब-उल-अइक़ा ने रसूलों को झुटलाया
عَرَبِيإِذ قالَ لَهُم شُعَيبٌ أَلا تَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब उनसे शुऐब ने कहा : क्या तुम डरते नहीं हो?
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jabke Shoaib ne unse kaha tha “kya tum darte nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay inn say shoaib (alh-e-salam) ney kaha kay kiya tumhen darr khof nahi
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जबके शोएब ने उनसे कहा था "क्या तुम डरते नहीं
عَرَبِيإِنّي لَكُم رَسولٌ أَمينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Main tumhare liye ek amanat-daar Rasool hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Mein tumhari tarah amanatdaar rasool hun
Devnagri Urdu (Maududi)मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं
عَرَبِيفَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطيعونِ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza tum Allah se daro aur meri itaat karo
Roman Urdu (Junagarhi)Allah ka khof khao aur meri farmanbardari kero
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाजा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो
عَرَبِيوَما أَسأَلُكُم عَلَيهِ مِن أَجرٍ ۖ إِن أَجرِيَ إِلّا عَلىٰ رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)मैं इस (कार्य) पर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता, मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।
Roman Urdu (Maududi)Main is kaam par tumse kisi ajar ka talib nahin hoon, mera ajar to Rabbul aalameen ke zimme hai
Roman Urdu (Junagarhi)Mein iss per tum say koi ujrat nahi chahata mera ajar tamam jahaano kay paalney walay kay pass hai
Devnagri Urdu (Maududi)मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है
عَرَبِي۞ أَوفُوا الكَيلَ وَلا تَكونوا مِنَ المُخسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)नाप पूरा दो और कम देने वालों में से न बनो।
Roman Urdu (Maududi)Paimane theek bharo (Give full measure) aur kisi ko ghaata (less) na do
Roman Urdu (Junagarhi)Naap poora bhara kero kum denay walon mein shamooliyat na kero
Devnagri Urdu (Maududi)पैमाने ठीक भरो (पूरा माप दो) और किसी को घाटा (कम) ना दो
عَرَبِيوَزِنوا بِالقِسطاسِ المُستَقيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)और सीधे तराज़ू से तोलो।
Roman Urdu (Maududi)Saheeh tarazu se tolo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur seedhi sahih tarazoo say tola kero
Devnagri Urdu (Maududi)सही तराजू से तोलो
عَرَبِيوَلا تَبخَسُوا النّاسَ أَشياءَهُم وَلا تَعثَوا فِي الأَرضِ مُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और लाेगों को उनका सामान कम न दो। और धरती में उपद्रव फैलाते मत फिरो।
Roman Urdu (Maududi)Aur logon ko unki cheezein kam na do, zameen mein fasaad na phaylate phiro
Roman Urdu (Junagarhi)Logon ko unn ki cheezen kami say na do bey baki kay sath zamin mein fasad machatay na phiro
Devnagri Urdu (Maududi)और लोगों को उनकी चीजे कम ना दो, जमीन में फसाद ना फैलाओ फिरो
عَرَبِيوَاتَّقُوا الَّذي خَلَقَكُم وَالجِبِلَّةَ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उससे डरो, जिसने तुम्हें तथा पहले लोगों को पैदा किया है।
Roman Urdu (Maududi)Aur us zaat ka khauff karo jisne tumhein aur guzishta nasalon ko paida kiya hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss Allah ka khof rakho jiss ney khud tumhen aur agli makhlooq ko peda kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हमें जात का खौफ करो जिसने तुम्हें और गुज़िश्ता नसलों को भुगतान किया है।”
عَرَبِيقالوا إِنَّما أَنتَ مِنَ المُسَحَّرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : निःसंदेह तू तो उन लोगों में से है जिनपर ताक़तवर जादू किया गया है।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “tu mehaz ek sehar zadah(affected by magic) aadmi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha tu to unn mein say hai jin per jadoo ker diya jata hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने कहा "तू महज एक सहर जादा (जादू से प्रभावित) आदमी है
عَرَبِيوَما أَنتَ إِلّا بَشَرٌ مِثلُنا وَإِن نَظُنُّكَ لَمِنَ الكاذِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और तू तो बस हमारे ही जैसा एक मनुष्य है और निःसंदेह हम तो तुझे झूठों में से समझते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur tu kuch nahin magar ek Insaan hum hi jaisa, aur hum to tujhey bilkul jhoota samajhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tu to hum hi jaisa aik insan hai aur hum to tujhay jhoot bolney walon mein say hi samajhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और तू कुछ नहीं मगर एक इंसान हम ही जैसा, और हम तो तुझे बिल्कुल झूठा समझते हैं
عَرَبِيفَأَسقِط عَلَينا كِسَفًا مِنَ السَّماءِ إِن كُنتَ مِنَ الصّادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हम पर आसमान से कुछ टुकड़े गिरा दे, यदि तू सच्चों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Agar tu saccha hai to humpar aasmaan ka koi tukda gira de”
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum sachay logon mein say hai to hum per aasaman kay tukray gira dey
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तू सच्चा है तो हमपर आसमान का कोई टुकड़ा गिरा दे"
عَرَبِيقالَ رَبّي أَعلَمُ بِما تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : मेरा पालनहार अधिक जानने वाला है जो कुछ तुम कर रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Shoaib ne kaha “ mera Rubb jaanta hai jo kuch tum kar rahey ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Kaha kay mera rab khoob jannay wala hai jo kuch tum ker rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)शोएब ने कहा "मेरा रब जानता है जो कुछ तुम कर रहे हो"
عَرَبِيفَكَذَّبوهُ فَأَخَذَهُم عَذابُ يَومِ الظُّلَّةِ ۚ إِنَّهُ كانَ عَذابَ يَومٍ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)चुनाँचे उन्होंने उसे झुठला दिया। तो उन्हें छाया के दिन की यातना ने पकड़ लिया। निश्चय वह एक बड़े दिन की यातना थी।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne usey jhutla diya, aakhir-e-kaar chatri waley din (Day of Canopy) ka azaab unpar aa gaya, aur woh baday hi khauf-naak din ka azaab tha
Roman Urdu (Junagarhi)Chunkay unhon nay issay jhutlaya to unhen saaibaan walay din kay azab ney pakar liya. Woh baray bhari din ka azab tha
Devnagri Urdu (Maududi)उन्होन ने उसे झुटला दिया, आखिर-ए-कार छतरी वाले दिन (कैनोपी का दिन) का अज़ाब अनपर आ गया, और वो बदे ही खौफ़-नाक दिन का अज़ाब था
عَرَبِيإِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَما كانَ أَكثَرُهُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan ismein ek nishani hai, magar in mein se aksar log maanne waley nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeena iss mein bari nishani hai aur inn mein kay aksar musalman na thay
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर मेरे अंदर से अक्सर लोग माने वाले नहीं
عَرَبِيوَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ العَزيزُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur haqeeqat yeh hai ke tera Rubb zabardast bhi hai aur raheem bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqeenan tera perwerdigar albatta wohi hai ghalbay wala merharbani wala
Devnagri Urdu (Maududi)और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी
عَرَبِيوَإِنَّهُ لَتَنزيلُ رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह, यह (क़ुरआन) निश्चय सारे संसारों के पालनहार का उतारा हुआ है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Rabbul Aalameen ki nazil karda cheez hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur be-shak-o-shuba yeh (quran) rab-ul-aalameen ka nazil farmaya hua hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये रब्बुल आलमीन की नाज़िल करदा चीज़ है
عَرَبِينَزَلَ بِهِ الرّوحُ الأَمينُ
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हिन्दी (Al-Omari)इसे रूह़ुल-अमीन (अत्यंत विश्वसनीय फ़रिश्ता) लेकर उतरा है।
Roman Urdu (Maududi)Isey lekar tere dil par amanat-daar rooh utri hai
Roman Urdu (Junagarhi)Issay amanatdaar farishta ley ker aaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)इसे लेकर तेरे दिल पर अमानत-दार रूह उतरी है
عَرَبِيعَلىٰ قَلبِكَ لِتَكونَ مِنَ المُنذِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आपके दिल पर, ताकि आप सावधान करने वालों में से हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke tu un logon mein shamil ho jo (khuda ki taraf se khalq-e-khuda ko) mutanabbeh (warn) karne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kay dil per utra hai kay aap aagah ker denay walon mein say ho jayen
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के तू उन लोगों में शामिल हो जो (खुदा की तरफ से ख़ल्क़-ए-ख़ुदा को) मुतनब्बेह (चेतावनी) देने वाले हैं
عَرَبِيبِلِسانٍ عَرَبِيٍّ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)स्पष्ट अरबी भाषा में।
Roman Urdu (Maududi)Saaf saaf arabi zubaan mein
Roman Urdu (Junagarhi)Saaf arabi zaban mein
Devnagri Urdu (Maududi)साफ़ साफ़ अरबी ज़ुबान में
عَرَبِيوَإِنَّهُ لَفي زُبُرِ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह यह निश्चित रूप से पहले लोगों की पुस्तकों में मौजूद है।
Roman Urdu (Maududi)Aur agley logo ki kitaabon mein bhi yeh maujood hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aglay nabiyon ki kitabon mein bhi iss quran ka tazkarah hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अगले लोगों की किताबों में भी ये मौजूद है
عَرَبِيأَوَلَم يَكُن لَهُم آيَةً أَن يَعلَمَهُ عُلَماءُ بَني إِسرائيلَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उनके लिए यह एक निशानी न थी है कि इसे बनी इसराईल के विद्वान जानते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya in (ehle Makkah) ke liye yeh koi nishani nahin hai ke isey ulema-e-bani Israel jaante hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya enhen yeh nishani kafi nahi kay haqqaniyat quran ko to bani-israeel kay ulamaa bhi jantay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इन (एहले मक्का) के लिए ये कोई निशानी नहीं है के इसे उलेमा-ए-बानी इस्राइल जानते हैं
عَرَبِيوَلَو نَزَّلناهُ عَلىٰ بَعضِ الأَعجَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम इसे ग़ैर-अरब लोगों में से किसी पर उतार देते।
Roman Urdu (Maududi)(Lekin inki hatdarmi ka haal yeh hai ke) agar hum isey kisi ajami (non-arab) par bhi nazil kar detey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum issay kissi ajami shaks per nazil farmatay
Devnagri Urdu (Maududi)(लेकिन इनकी टोपीदारमी का हाल ये है के) अगर हम इसे किसी अजमी (गैर-अरब) पर भी नाज़िल कर देते हैं
عَرَبِيفَقَرَأَهُ عَلَيهِم ما كانوا بِهِ مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वह इसे उनके सामने पढ़ता, तो भी वे उसपर ईमान लाने वाले न होते।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh (faseeh arabi kalaam) woh inko padh kar sunata tab bhi yeh maan kar na detey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus woh inn kay samney iss ki tilawat kerta to yeh issay bawar kerney walay na hotay
Devnagri Urdu (Maududi)और ये (फसीह अरबी कलाम) वो इनको पढ़ कर सुनाता तब भी ये मान कर ना देते
عَرَبِيكَذٰلِكَ سَلَكناهُ في قُلوبِ المُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)इसी प्रकार हमने इसे अपराधियों के हृदयों में प्रवेश कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Isi tarah humne is (zikr) ko mujrimon ke dilon mein guzara hai
Roman Urdu (Junagarhi)Issi tarah hum ney gunehgaron kay dilon mein iss inkar ko dakhil ker diya hai
Devnagri Urdu (Maududi)इसी तरह हमने इस (ज़िक्र) को मुजरिमों के दिलों में गुज़ारा है
عَرَبِيلا يُؤمِنونَ بِهِ حَتّىٰ يَرَوُا العَذابَ الأَليمَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे उसपर ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि वे दर्दनाक यातना देख लें।
Roman Urdu (Maududi)Woh ispar iman nahin latey jab tak azaab e aleem na dekh lein
Roman Urdu (Junagarhi)Woh jab tak dard-naal azabon ko mulahiza na kerlen eman na layen gay
Devnagri Urdu (Maududi)वो इसपर ईमान नहीं लाते जब तक अज़ाब ए अलीम ना देख लें
عَرَبِيفَيَأتِيَهُم بَغتَةً وَهُم لا يَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो वह उनपर अचानक आ पड़े और वे सोचते भी न हों।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab woh be-khabari mein unpar aa padta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus woh azab unn ko na gahan aajaye ga unhen iss ka shaoor bhi na hoga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब वो बे-ख़बरी में अनपर आ पड़ता है
عَرَبِيفَيَقولوا هَل نَحنُ مُنظَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वे कहें : क्या हम मोहलत दिए जाने वाले हैं
Roman Urdu (Maududi)Us waqt kehte hain “ke kya ab humein kuch mohalat mil sakti hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss waqt kahen gay kiya humen kuch mohlat di jayegi
Devnagri Urdu (Maududi)हम वक़्त कहते हैं "के क्या अब हमें कुछ मोहलत मिल सकती है?"
عَرَبِيأَفَبِعَذابِنا يَستَعجِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वे हमारी यातना के लिए जल्दी मचा रहे हैं?
Roman Urdu (Maududi)To kya yeh log hamare azab ke liye jaldi macha rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Pus kiya yeh humaray azab ki jaldi macha rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)तो क्या ये लोग हमारे अजब के लिए जल्दी मचा रहे हैं
عَرَبِيأَفَرَأَيتَ إِن مَتَّعناهُم سِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या आपने विचार किया यदि हम इन्हें कुछ वर्षों तक लाभ दें।
Roman Urdu (Maududi)Tumne kuch gaur kiya , agar hum inhein barason tak aish karne ki mohalat bhi de dein
Roman Urdu (Junagarhi)Acha yeh bhi batao kay agar hum ney enhen kaee saal bhi faeeda uthaney diya
Devnagri Urdu (Maududi)तुमने कुछ गौर किया, अगर हम उन्हें बरसों तक ऐश करने की मोहलत भी दे दें
عَرَبِيثُمَّ جاءَهُم ما كانوا يوعَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उनपर वह (यातना) आ जाए, जिसका उनसे वादा किया जाता था।
Roman Urdu (Maududi)Aur phir wahi cheez unpar aa jaye jissey inhein daraya jaa raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir enhen woh azab aa laga jin say yeh dhamkaye jatay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और फिर वही चीज उन्पर आ जाए जिसमें इन्हें डराया जा रहा है
عَرَبِيما أَغنىٰ عَنهُم ما كانوا يُمَتَّعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्हें जो लाभ दिया जाता था, वह उनके किस काम आएगा?
Roman Urdu (Maududi)To woh saamaan-e-zeist (provisions of life) jo unko mila hua hai inke kis kaam aayega
Roman Urdu (Junagarhi)To jo kuch bhi yeh barattay rahey iss mein say kuch bhi faeeda na phoncha sakay ga
Devnagri Urdu (Maududi)तो वो सामान-ए-ज़िस्ट (जीवन के प्रावधान) जो उनको मिला हुआ है इनका किस काम आएगा
عَرَبِيوَما أَهلَكنا مِن قَريَةٍ إِلّا لَها مُنذِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने किसी बस्ती को विनष्ट नहीं किया, परंतु उसके लिए कई सावधान करने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)(Dekho) humne kabhi kisi basti ko iske bagair halaak nahin kiya ke uske liye khabardar karne waley haqq e naseehat ada karne ko maujood thay
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney kissi basti ko halak nahi kiya hai magar issi haal mein kay uss kay liye daraney walay thay
Devnagri Urdu (Maududi)(देखो) हमने कभी किसी बस्ती को इसके बिना हलाक नहीं किया के उसके लिए खबरदार करने वाले हक़ ए हिदायत अदा करने को मौजूद थाय
عَرَبِيذِكرىٰ وَما كُنّا ظالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)याद दिलाने के लिए। और हम अत्याचारी नहीं थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur hum zaalim na thay
Roman Urdu (Junagarhi)Naseehat kay tor per aur hum zulm kerney walay nahi hain
Devnagri Urdu (Maududi)और हम जालिम ना थे
عَرَبِيوَما تَنَزَّلَت بِهِ الشَّياطينُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इस (क़ुरआन) को लेकर शैतान नहीं उतरे।
Roman Urdu (Maududi)Is (kitaab e mubeen) ko shayateen lekar nahin utray hain
Roman Urdu (Junagarhi)Iss quran ko shetan nahi laye
Devnagri Urdu (Maududi)इस (किताब ए मुबीन) को शयातीन लेकर नहीं उतरे हैं
عَرَبِيوَما يَنبَغي لَهُم وَما يَستَطيعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और न यह उनके योग्य है, और न वे ऐसा कर सकते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Na yeh kaam unko sajta hai, aur na woh aisa kar hi sakte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na woh iss qabil hain na unhen iss ki taqat hai
Devnagri Urdu (Maududi)ना ये काम उनको सजता है, और ना वो ऐसा कर ही सकते हैं
عَرَبِيإِنَّهُم عَنِ السَّمعِ لَمَعزولونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वे तो (इसके) सुनने ही से अलग कर दिए गए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh to iski samaat (hearing) tak se door rakkhey gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay woh to sunnay say bhi mehroon ker diye gaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो तो इसकी समात (सुनवाई) तक से दूर रक्खे गए हैं
عَرَبِيفَلا تَدعُ مَعَ اللَّهِ إِلٰهًا آخَرَ فَتَكونَ مِنَ المُعَذَّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप अल्लाह के साथ किसी अन्य पूज्य को न पुकारें, अन्यथा आप दंड पाने वालों में हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Pas (aey Muhammad), Allah ke saath kisi dusre mabood ko na pukaro, warna tum bhi saza paaney walon mein shamil ho jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tu Allah kay sath kissi aur mabood ko na pukar kay tu bhi saza paney walon mein say ho jaye
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ मुहम्मद), अल्लाह के साथ किसी दूसरे माबूद को न पुकारो, वरना तुम भी सजा पाने वालों में शामिल हो जाओगे
عَرَبِيوَأَنذِر عَشيرَتَكَ الأَقرَبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आप अपने निकटतम रिश्तेदारों को डराएँ।
Roman Urdu (Maududi)Apne qareeb-tareen rishtedaaron ko darao
Roman Urdu (Junagarhi)Apnay qareebi rishtay walon ko dara dey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने करीब-तरीन रिश्तेदारों को डराओ
عَرَبِيوَاخفِض جَناحَكَ لِمَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ المُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और ईमान वालों में से जो आपका अनुसरण करे, उसके लिए अपना बाज़ू झुका दें।
Roman Urdu (Maududi)Aur iman laney walon mein se jo log tumhari pairwi ikhtiyar karein unke saath tawazo (humble/kindness) se pesh aao
Roman Urdu (Junagarhi)Uss kay sath farotni say paisa aa jo bhi eman laaney wala ho ker teri tabey daari keray
Devnagri Urdu (Maududi)और ईमान लाने वालों में से जो लोग तुम्हारी जोड़ी इख्तियार करें उनके साथ तवाज़ो (विनम्रता/दया) से पेश आओ
عَرَبِيفَإِن عَصَوكَ فَقُل إِنّي بَريءٌ مِمّا تَعمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फि यदि वे आपकी अवज्ञा करें, तो आप कह दें कि तुम जो कुछ कर रहे हो उसकी ज़िम्मेदारी से मैं बरी हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Lekin agar woh tumhari nafarmaani karein to unsey kehdo ke jo kuch tum karte ho ussey main bari-uz-zimma (not responsible) hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Agar yeh log teri na farmani keren to tu elaan ker dey kay mein inn kamon say beyzaar hun jo tum ker rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)लेकिन अगर वो तुम्हारी नफ़रमानी करें तो उनसे कहदो के जो कुछ तुम करते हो उसे मैं बारी-उज़-ज़िम्मा (जिम्मेदार नहीं) हूं
عَرَبِيوَتَوَكَّل عَلَى العَزيزِ الرَّحيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उस सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् पर भरोसा करें।
Roman Urdu (Maududi)Aur us zabardast aur raheem par tawakkul(bharosa) karo
Roman Urdu (Junagarhi)Apna poora bharosa ghalib meharbaan Allah per rakh
Devnagri Urdu (Maududi)और हम ज़बरदस्त और रहीम पर तवक्कुल (भरोसा) करो
عَرَبِيالَّذي يَراكَ حينَ تَقومُ
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हिन्दी (Al-Omari)जो आपको देखता है, जब आप खड़े होते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo tumhein us waqt dekh raha hota hai jab tum uthte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jo tujhay dekhta rehta hai jabkay tu khara hota hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो तुम्हीं हमें वक्त देख रहा है जब तुम उठते हो
عَرَبِيوَتَقَلُّبَكَ فِي السّاجِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और सजदा करने वालों में आपके फिरने को भी।
Roman Urdu (Maududi)Aur sajda guzaar logon mein tumhari naqal o harakat par nigaah rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur sajda kerney walon kay darmiyan tera ghoomna phirna bhi
Devnagri Urdu (Maududi)और सजदा गुजर लोगों में तुम्हारी नक़ल ओ हरकत पर निगाह रखता है
عَرَبِيإِنَّهُ هُوَ السَّميعُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Woh sab kuch sunnay aur jaanne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh bara hi sunnay wala aur khoob jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो सब कुछ सुनने और जाने वाला है
عَرَبِيهَل أُنَبِّئُكُم عَلىٰ مَن تَنَزَّلُ الشَّياطينُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या मैं आपको बताऊँ कि शैतान किस पर उतरते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Logon, kya main tumhein bataon ke shayateen kis par utra karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya mein tumhen bataon kay shetan kiss per utartay hain
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन, क्या मैं तुम्हें बातों के शयातें किस पर उतर करते हैं
عَرَبِيتَنَزَّلُ عَلىٰ كُلِّ أَفّاكٍ أَثيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)वे हर बड़े झूठे और बड़े पापी पर उतरते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh har chaal saaz, badhkaar par utra karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh her aik jhootay gunehgaar per utartay hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो हर चाल साज़, बढ़कर पर उतर करते हैं
عَرَبِييُلقونَ السَّمعَ وَأَكثَرُهُم كاذِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे सुनी हुई बात को (काहिनों तक) पहुँचा देते हैं, और उनमें से अधिकतर झूठे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Suni sunayi baatein kaano mein phoonkte hain, aur unmein se aksar jhootey hotay hain
Roman Urdu (Junagarhi)(uchat’ti) hui suni sunaee phoncha detay hain aur inn mein say aksar jhootay hain
Devnagri Urdu (Maududi)सुनी सुनाई बातें कानों में फूंकते हैं, और उनमें से अक्सर झूठे होते हैं
عَرَبِيوَالشُّعَراءُ يَتَّبِعُهُمُ الغاوونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और कवि लोग, उनके पीछे भटके हुए लोग ही चलते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Rahey shuaraa (poets), to unke peechey behke huey log chala karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Shaeeron ki pairwee woh kertay hain jo behkay huye hon
Devnagri Urdu (Maududi)रहे शूरा (कवि), तो उनके पीछे बहके हुए लोग चलते हैं है
عَرَبِيأَلَم تَرَ أَنَّهُم في كُلِّ وادٍ يَهيمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने नहीं देखा कि वे प्रत्येक वादी में भटकते फिरते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum dekhte nahin ho ke woh har waadi (valley) mein bhatakte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney nahi dekha kay shaeer aik aik bayabaan mein sir takratay phirtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम देखते नहीं हो के वो हर वादी (घाटी) में भटकते हैं
عَرَبِيوَأَنَّهُم يَقولونَ ما لا يَفعَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यह कि निःसंदेह ऐसी बात कहते हैं, जो करते नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Aur aisi baatein kehte hain jo karte nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh kehtay hain jo kertay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐसी बातें कहते हैं जो करते नहीं हैं
عَرَبِيإِلَّا الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ وَذَكَرُوا اللَّهَ كَثيرًا وَانتَصَروا مِن بَعدِ ما ظُلِموا ۗ وَسَيَعلَمُ الَّذينَ ظَلَموا أَيَّ مُنقَلَبٍ يَنقَلِبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सिवाय उन (कवियों) के, जो ईमान लाए, और अच्छे कर्म किए और अल्लाह को बहुत याद किया तथा बदला लिया, इसके बाद कि उनके ऊपर ज़ुल्म किया गया। तथा वे लोग, जिन्होंने अत्याचार किया, शीघ्र ही जान लेंगे कि वे किस जगह लौटकर जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Bajuz un logon ke jo iman laye aur jinhon ne neik amal kiye aur Allah ko kasrat se yaad kiya aur jab unpar zulm kiya gaya to sirf badla le liye, aur zulm karne walon ko anqareeb maloom ho jayega ke woh kis anjaam se do-chaar hotay hain
Roman Urdu (Junagarhi)Siwaye unn kay jo eman laye aur nek amal kiye aur ba-kasrat Allah Taalaa ka ziker kiya aur apni mazloomi kay baad intiqam liya jinhon ney zulm kiya hai woh bhi abhi jaan len gay kay kiss kerwat ulat’tay hain
Devnagri Urdu (Maududi)बज़ुज उन लोगों के जो ईमान लाए और जिन्होन ने नेक अमल किए और अल्लाह को कसरत से याद किया और जब अनपर ज़ुल्म किया गया तो सिर्फ बदला ले लिया, और ज़ुल्म करने वालों को अंकाराब मालूम हो जाएगा के वो किस अंजाम से दो-चार होते हैं
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Surah 26: Ash-Shu'ara' (The Poets)

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Surah 26: Ash-Shu'ara' (The Poets)

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Surah 26: Ash-Shu'ara' (The Poets)

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Surah 26: Ash-Shu'ara' (The Poets)

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Surah 26: Ash-Shu'ara' (The Poets)

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Surah 27: An-Naml (The Naml)

Meccan🕐 Revelation #48📜 93 Verses🕮 Juz 1–20
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Surah 27: An-Naml (The Naml)

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Surah 27: An-Naml (The Naml)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيطس ۚ تِلكَ آياتُ القُرآنِ وَكِتابٍ مُبينٍ
हिन्दी (Al-Omari)ता, सीन। ये क़ुरआन तथा स्पष्ट पुस्तक की आयतें हैं।
Roman Urdu (Maududi)Taa Seen. yeh aayat hain Quran aur kitaab e mubeen ki
Roman Urdu (Junagarhi)Tua-Seen yeh aayaten hain quran ki (yani wazeh) aur roshan kitab ki
Devnagri Urdu (Maududi)ता सीन। ये आयत हैं कुरान और किताब ए मुबीन की
عَرَبِيهُدًى وَبُشرىٰ لِلمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ईमानवालों के लिए मार्गदर्शन तथा शुभ-सूचना हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hidayat aur basharat un iman laney walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Hidayat aur khushkhabri eman walon kay liye
Devnagri Urdu (Maududi)हिदायत और बशारत उन ईमान लाने वालों के लिए
عَرَبِيالَّذينَ يُقيمونَ الصَّلاةَ وَيُؤتونَ الزَّكاةَ وَهُم بِالآخِرَةِ هُم يوقِنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो नमाज़ स्थापित करते तथा ज़कात देते हैं और वही हैं, जो आख़िरत (परलोक) पर विश्वास रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo namaz qayam karte aur zakat detey hain, aur phir woh aisey log hain jo aakhirat par poora yaqeen rakhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo namaz qaeem kertay hain aur zakat ada kertay hain aur aakhirat per yaqeen rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो नमाज कायम करते हैं और जकात देते हैं, और फिर वो ऐसे लोग हैं जो आखिरी पर पूरा यकीन रखते हैं
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِالآخِرَةِ زَيَّنّا لَهُم أَعمالَهُم فَهُم يَعمَهونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, हमने उनके कर्मों को उनके लिए सुंदर बना दिया है। अतः वे भटकते फिरते है।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke jo log aakhirat ko nahin maante unke liye humne unke kartooton ko khushnuma bana diya hai, isliye woh bhatakte phir rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log qayamat per eman nahi latay hum ney unhen unn kay kartoot zeenat daar ker dikhaye hain pus woh bhataktay phirtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के जो लोग आख़िरत को नहीं मानते उनके लिए हमने उनके कार्टूनों को ख़ुशनुमा बना दिया है, इसलिए वो भटकते फिर रहे हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ لَهُم سوءُ العَذابِ وَهُم فِي الآخِرَةِ هُمُ الأَخسَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही लोग हैं, जिनके लिए बुरी यातना है तथा आख़िरत में यही सबसे अधिक घाटा उठाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hain jinke liye buri saza hai aur aakhirat mein yahi sabse zyada khasare (nuksaan) mein rehne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi log hain jin kay liye bura azab hai aur aakhirat mein bhi woh sakht nuksan yaafta hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग हैं जिनके लिए बुरी सज़ा है और आख़िरत में यही सबसे ज़्यादा ख़ासारे (नुक्सान) में रहने वाले हैं
عَرَبِيوَإِنَّكَ لَتُلَقَّى القُرآنَ مِن لَدُن حَكيمٍ عَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह आपको क़ुरर्आन एक पूर्ण हिकमत वाले, सब कुछ जानने वाले की ओर से दिया जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Muhammad) bila shubah tum yeh Quran ek hakeem o aleem (All-wise and All-knowing) hasti ki taraf se paa rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak aap ko Allah hakeem-o-aleem ki taraf say quran sikhaya ja raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ मुहम्मद) बिला शुभा तुम ये कुरान एक हकीम ओ आलिम (सर्वज्ञ और सर्वज्ञ) हस्ती की तरफ से पा रहे हो
عَرَبِيإِذ قالَ موسىٰ لِأَهلِهِ إِنّي آنَستُ نارًا سَآتيكُم مِنها بِخَبَرٍ أَو آتيكُم بِشِهابٍ قَبَسٍ لَعَلَّكُم تَصطَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब मूसा ने अपने घर वालों से कहा : निःसंदेह मैंने एक आग देखी है। मैं शीघ्र तुम्हारे पास उससे कोई समाचार लाऊँगा या तुम्हारे पास उससे सुलगाया हुआ अंगारा लेकर आऊँगा, ताकि तुम तापो।
Roman Urdu (Maududi)(Inhein us waqt ka qissa sunao) jab Moosa ne apne ghar walon se kaha ke “mujhey ek aag si nazar aayi hai, main abhi ya to wahan se koi khabar lekar aata hoon ya koi angara chun laata hoon taa-ke tum log garam ho sako”
Roman Urdu (Junagarhi)(yaad hoga) jab musa (alh-e-salam) ney apnay ghar walon say kaha mein ney aag dekhi hai mein wahan say ya to koi khabar ley ker ya aag ka koi sulagta hua angara ley ker abhi tumharay pass aajaonga takay tum seenk taap kerlo
Devnagri Urdu (Maududi)(इन्हें वक्त का क़िस्सा सुनाओ) जब मूसा ने अपने घर वालों से कहा के "मुझे एक आग सी नज़र आई है, मैं अभी तो वहां से कोई खबर लेकर आता हूं या कोई अंगारा चुन लाता हूं ता-के तुम लोग गरम हो सको"
عَرَبِيفَلَمّا جاءَها نودِيَ أَن بورِكَ مَن فِي النّارِ وَمَن حَولَها وَسُبحانَ اللَّهِ رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वह उसके पास आया, तो उसे आवाज़ दी गई : बरकत वाला है, वह जो इस आग में है तथा जो इसके आस-पास है। और अल्लाह पवित्र है, जाे सारे संसारों का पालनहार है।
Roman Urdu (Maududi)Wahan jo pahuncha to nidaa (awaaz/pukaar) aayi ke “mubarak hai woh jo is aag mein hai aur jo iske maahol mein hai, paak hai Allah sab jahanon ka parwardigar
Roman Urdu (Junagarhi)Jab wahan phonchay to aawaz di gaee kay ba-barkat hai woh jo iss aag mein hai aur barkat diya gaya hai woh jo uss kay aas pass hai aur pak hai Allah jo tamam jahano ka palney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)वहां जो पहनूं तो निदा (आवाज़/पुकार) आई के "मुबारक है वो जो इस आग में है और जो इसके महोल में है, पाक है अल्लाह सब जहांओं का परवरदिगार
عَرَبِييا موسىٰ إِنَّهُ أَنَا اللَّهُ العَزيزُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मूसा! निःसंदेह तथ्य यह है कि मैं ही अल्लाह हूँ। जो सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Moosa, yeh main hoon Allah, zabardast aur daana(All-Wise)
Roman Urdu (Junagarhi)Musa! Sunn baat yeh hai kay mein hi Allah hun ghalib ba-hikmat
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ मूसा, ये मैं हूं अल्लाह, ज़बरदस्त और दाना (सर्व-बुद्धिमान)
عَرَبِيوَأَلقِ عَصاكَ ۚ فَلَمّا رَآها تَهتَزُّ كَأَنَّها جانٌّ وَلّىٰ مُدبِرًا وَلَم يُعَقِّب ۚ يا موسىٰ لا تَخَف إِنّي لا يَخافُ لَدَيَّ المُرسَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अपनी लाठी फेंक दे । फिर जब उसने उसे देखा कि हिल रही है, जैसे वह कोई साँप हो, तो पीठ फेरकर भागा और पीछे न मुड़ा। ऐ मूसा! डरो मत, निःसंदेह मेरे पास रसूल नहीं डरते।
Roman Urdu (Maududi)Aur phenk tu zara apni laathi.” Junhi ke Moosa ne dekha laathi saanp(snake) ki tarah bal kha rahi hai to peeth phair kar bhaaga aur peechey mudh kar bhi na dekha. “Aey Moosa, daro nahin, mere huzur Rasool dara nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Tu apni laathi daal dey musa ney jab ussay hilta julta dekha iss tarah kay goya woh aik saanp hai to mun moray huye peeth pher ker bhagay aur palat ker bhi na dekha aey musa! Khof na kha meray huzoor mein payghumber dara nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)और फेंक तू ज़रा अपनी लाठी।" जुनही के मूसा ने लाठी सांप (सांप) को देखा कि तरह बल खा रही है तो पीठ फिर कर भागा और पीछे मुड़ कर भी ना देखा। "ऐ मूसा, डरो नहीं, मेरे हुजूर रसूल दारा नहीं करते
عَرَبِيإِلّا مَن ظَلَمَ ثُمَّ بَدَّلَ حُسنًا بَعدَ سوءٍ فَإِنّي غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु जिसने अत्याचार किया, फिर बुराई के बाद उसे भलाई से बदल दिया, तो निःसंदेह मैं बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान् हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Illa yeh ke kisi ne kasoor kiya ho. Phir agar burayi ke baad usne bhalayi se apne fail (amal) ko badal liya to main maaf karne wala meharbaan hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin jo log zulm keren phir uss kay ewaz neki keren uss buraee kay peechay to mein bhi bakshney wala meharbaan hun
Devnagri Urdu (Maududi)इल्ला ये के किसी ने कसूर किया हो। फिर अगर बुराई के बाद उसने अपनी गलती से अपने फेल (अमल) को बदल लिया तो मैं माफ करने वाला मेहरबान हूं
عَرَبِيوَأَدخِل يَدَكَ في جَيبِكَ تَخرُج بَيضاءَ مِن غَيرِ سوءٍ ۖ في تِسعِ آياتٍ إِلىٰ فِرعَونَ وَقَومِهِ ۚ إِنَّهُم كانوا قَومًا فاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और अपना हाथ अपने गरीबान में डाल। वह बिना किसी दोष के (चमकता हुआ) सफ़ेद निकलेगा; नौ निशानियों में से एक, फ़िरऔन तथा उसकी जाति की ओर। निःसंदेह वे अवज्ञाकारी लोग थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur zara apna haath apne girebaan mein to daalo chamakta hua niklega bagair kisi takleef ke, yeh (dono nishaniyan) naw (nine) nishaniyon mein se hain Firoun aur uske qaum ki taraf (le janey ke liye), woh baday badh-kirdaar(wicked) log hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apna hath apney girbaan mein daal woh safaid chamkeela hoker niklay ga baghair kissi aib kay tu no nishaniyan ley ker firaon aur uss ki qom ki taraf jaa yaqeenan woh bad-kaaron ka giroh hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जरा अपना हाथ अपने गिरेबान मैं तो डालो चमकता हुआ निकलेगा बिना किसी परेशानी के, ये (दोनो निशानियां) नौ (नौ) निशानियों में से हैं फिरौन और उसके क़ौम की तरफ (ले जाने के लिए), वो बदे-किरदार (दुष्ट) लोग हैं”
عَرَبِيفَلَمّا جاءَتهُم آياتُنا مُبصِرَةً قالوا هٰذا سِحرٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब हमारी निशानियाँ उनके पास आईं जो आँखें खोलने वाली थीं, तो उन्होंने कहा : यह खुला जादू है।
Roman Urdu (Maududi)Magar jab hamari khuli khuli nihsaniyan un logon ke samney aayi to unhon ne kaha yeh to khula jaadu hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab unn kay pass aankhen khol denay walay humaray moajzzay phonchay to woh kehney lagay yeh to sareeh jadoo hai
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जब हमारी खुली खुली निहसानियां उन लोगों के सामने आईं तो उनहों ने कहा ये तो खुला जादू है
عَرَبِيوَجَحَدوا بِها وَاستَيقَنَتها أَنفُسُهُم ظُلمًا وَعُلُوًّا ۚ فَانظُر كَيفَ كانَ عاقِبَةُ المُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने अत्याचार एवं अभिमान के कारण उनका इनकार कर दिया। हालाँकि उनके दिलों को उनका विश्वास हो चुका था। तो देखो कि बिगाड़ पैदा करने वालों का परिणाम कैसा हुआ?
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne sara-sar zulm aur guroor ki raah se in nishaniyon ka inkar kiya, halaanke dil unke qayel (convinced) ho chuke thay. Ab dekhlo ke un mufsidon ka anjaam kaisa hua
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney inkar ker diya halankay unn kay dil yaqeen ker chukay thay sirf zulm aur takabbur ki bina per. Pus dekh lijiye kay inn fitna perdaaz logon ka anjam kaisa kuch hua
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने सारा-सर जुल्म और गुरु की राह से इन निशानियों का इंकार किया, हलांके दिल उनके कायल (आश्वस्त) हो चुके थे। अब देखलो के उन मुफसीदों का अंजाम कैसा हुआ
عَرَبِيوَلَقَد آتَينا داوودَ وَسُلَيمانَ عِلمًا ۖ وَقالَا الحَمدُ لِلَّهِ الَّذي فَضَّلَنا عَلىٰ كَثيرٍ مِن عِبادِهِ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने दाऊद तथा सुलैमान को ज्ञान प्रदान किया और उन दोनों ने कहा : सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमें अपने बहुत-से ईमानवाले बंदों पर श्रेष्ठता प्रदान की।
Roman Urdu (Maududi)(Dusri taraf) humne Dawood o Sulaiman ko ilm ata kiya aur unhon ne kaha ke shukar hai us khuda ka jisne humko apne bahut se momin bandon par fazilat ata ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney yaqeenan dawood aur suleman ko ilm dey rakha thaaur dono ney kaha tareef uss Allah kay liye hai jiss ney humen apnay boht say eman daar bandon per fazeelat ata farmaee hai
Devnagri Urdu (Maududi)(दूसरी तरफ) हमने दाऊद ओ सुलेमान को इल्म अता किया और उन्होंने कहा कि शुक्र है हमें खुदा का जिसने हमको अपने बहुत से मोमिन बंदों पर फजीलत अता की
عَرَبِيوَوَرِثَ سُلَيمانُ داوودَ ۖ وَقالَ يا أَيُّهَا النّاسُ عُلِّمنا مَنطِقَ الطَّيرِ وَأوتينا مِن كُلِّ شَيءٍ ۖ إِنَّ هٰذا لَهُوَ الفَضلُ المُبينُ
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हिन्दी (Al-Omari)और सुलैमान दाऊद का उत्तराधिकारी हुआ तथा उसने कहा : ऐ लोगो! हमें पक्षियों की बोली सिखाई गई तथा हमें हर चीज़ में से हिस्सा प्रदान किया गया है। निःसंदेह यह निश्चित रूप से स्पष्ट अनुग्रह है।
Roman Urdu (Maududi)Aur Dawood ka waris sulaiman hua aur usne kaha “logon, humein parindon (birds) ki boliyan sikhayi gayi hain aur humein har tarah ki cheezein di gayi hain, beshak yeh (Allah ka) numaya fazl hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur dawood kay waris suleman huye aur kehney lagay logo! Humen perindon ki boli sikhaee gaee hai aur hum sab kuch mein say diye gaye hain. Be-shak yeh bilkul khula hua fazal-e-elahee hai
Devnagri Urdu (Maududi)और दाऊद का वारिस सुलेमान हुआ और उसने कहा “लोगन, हमें परिन्दों (पक्षियों) की बोलियाँ सिखाई गई हैं और हमें हर तरह की चीज़ें दी गई हैं, बेशक ये (अल्लाह का) नुमाया फ़ज़ल है।”
عَرَبِيوَحُشِرَ لِسُلَيمانَ جُنودُهُ مِنَ الجِنِّ وَالإِنسِ وَالطَّيرِ فَهُم يوزَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा सुलैमान के लिए जिन्नों तथा इनसानों और पक्षियों में से उसकी सेनाएँ इकट्ठी की गईं, फिर उन्हें अलग-अलग बांटा जाता था।
Roman Urdu (Maududi)Sulaiman ke liye Jinn aur Insano aur parindon ke lashkar jama kiye gaye thay aur woh puray zabt (strict discipline) mein rakkhey jatey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Suleman kay samney unn kay tamam lashkar jinnaat aur insan aur perind mein say jama kiye gaye (her her qisam ki) alag alag darja bandi kerdi gaee
Devnagri Urdu (Maududi)सुलेमान के लिए जिन और इंसानों और परिंदों के लश्कर जमा किए गए थे और वो पूरे ज़ब्त (सख्त अनुशासन) में रक्खे जाते थे
عَرَبِيحَتّىٰ إِذا أَتَوا عَلىٰ وادِ النَّملِ قالَت نَملَةٌ يا أَيُّهَا النَّملُ ادخُلوا مَساكِنَكُم لا يَحطِمَنَّكُم سُلَيمانُ وَجُنودُهُ وَهُم لا يَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि जब वे चींटियों की घाटी में पहुँचे, तो एक चींटी ने कहा : ऐ चींटियो! अपने घरों में प्रवेश कर जाओ। कहीं सुलैमान और उसकी सेनाएँ तुम्हें कुचल न डालें और वे अनजान हों।
Roman Urdu (Maududi)Ek martaba woh unke saath kooch (marching) kar raha tha) yahan tak ke jab yeh sab chuntiyon (ants) ki waadi(valley) mein pahunchey to ek chunti (ant) ne kaha “ Aey chunityon , Apne bilon (holes) mein ghuss jao, kahin aisa na ho ke Sulaiman aur uske lashkar tumhein kuchal daalein aur unhein khabar bhi na ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab woh chewuntiyon kay maidan mein phonchay to aik chewunti ney kaha aey chewuntiyon! Apnay apnay gharon mein ghus jao aisa na ho kay bey khabri mein suleman aur uss ka lashkar tumhen rond dalay
Devnagri Urdu (Maududi)एक मरतबा वो उनके साथ कूच (मार्च) कर रहा था) यहां तक ​​के जब ये सब चुनौतियां (चींटियों) की वादी (घाटी) में पहुंचे तो एक चुनती (चींटी) ने कहा "ऐ चुनिटों, अपने बिलों (छेद) में घुस जाओ, कहीं ऐसा ना हो के सुलेमान और उसके लश्कर तुम्हें कुचलें और उन्हें खबर भी ना हो"
عَرَبِيفَتَبَسَّمَ ضاحِكًا مِن قَولِها وَقالَ رَبِّ أَوزِعني أَن أَشكُرَ نِعمَتَكَ الَّتي أَنعَمتَ عَلَيَّ وَعَلىٰ والِدَيَّ وَأَن أَعمَلَ صالِحًا تَرضاهُ وَأَدخِلني بِرَحمَتِكَ في عِبادِكَ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो वह (सुलैमान) उसकी बात से हँसता हुआ मुसकुराया और उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मुझे सामर्थ्य प्रदान कर कि मैं तेरी उस ने'मत का शुक्र अदा करूँ, जो तूने मुझे तथा मेरे माता-पिता को प्रदान की है, और यह कि मैं अच्छा कार्य करूँ, जिसे तू पसंद करे और मुझे अपनी दया से अपने सदाचारी बंदों में शामिल कर ले।
Roman Urdu (Maududi)Sulaiman uski baat par muskurate huey hass pada aur bola “aey mere Rubb mujhey qaabu mein rakh ke main tere us ehsan ka shukar ada karta rahoon jo tu-nay mujhpar aur mere walidain par kiya hai aur aisa amal e saleh karoon jo tujhey pasand aaye, aur apni rehmat se mujhko apne saleh bandon mein daakhil kar.”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ki iss baat per suleman muskura ker hans diye aur dua kerney lagay kay aey perwerdigaar! Tu mujhay tofiq dey kay mein teri inn nematon ka shukar baja laaon jo tu ney mujh per inam ki hain aur meray maa baap per aur mein aisay nek amal kerta rahon jin say tu khush rahey mujhay apni rehmat say nek bandon mein shamil kerlay
Devnagri Urdu (Maududi)सुलेमान उसकी बात पर मुस्कुराए हुए हंस पड़ा और बोला "ऐ मेरे रब मुझे काबू में रख के मैं तेरे उस एहसान का शुक्र अदा करता रहूं जो तू-नए मुझपर और मेरे वालिदैन पर किया है और ऐसा अमल ए सालेह करूं जो तुझे पसंद आए, और अपनी रहमत से मुझको अपने साल बंदों में दाखिल कर।"
عَرَبِيوَتَفَقَّدَ الطَّيرَ فَقالَ ما لِيَ لا أَرَى الهُدهُدَ أَم كانَ مِنَ الغائِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसने पक्षियों का निरीक्षण किया, तो कहा : मुझे क्या है कि मैं हुदहुद को नहीं देख रहा, या वह अनुपस्थि रहने वालों में से है?
Roman Urdu (Maududi)(Ek aur mauqe par) Sulaiman ne parindon ka jaiza liya aur kaha “ kya baat hai ke main falaan hud-hud (hoopoe bird) ko nahin dekh raha hoon. Kya woh kahin gayab ho gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ney paerindon ka jaeeza liya aur farmaney lagay yeh kiya baat hai kay mein hud hud ko nahi dekhta? Kiya waqaee woh ghair hazir hai
Devnagri Urdu (Maududi)(एक और मौक़े पर) सुलेमान ने परिन्दों का जायज़ा लिया और कहा "क्या बात है के मैं फलां हुड़-हुद (हूपो पक्षी) को नहीं देख रहा हूँ। क्या वो कहीं गायब हो गया है
عَرَبِيلَأُعَذِّبَنَّهُ عَذابًا شَديدًا أَو لَأَذبَحَنَّهُ أَو لَيَأتِيَنّي بِسُلطانٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय ही मैं उसे बहुत कठोर दंड दूँगा, या मैं अवश्य ही उसे ज़बह कर डालूँगा, या वह अवश्य ही मेरे पास कोई स्पष्ट तर्क लेकर आएगा।
Roman Urdu (Maududi)Main usey sakht saza dunga, ya zubaa kardunga, warna usey mere saamne maaqool wajah pesh karni hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan mein ussay sakht saza doon ga ya ussay zibah ker daloon ga ya meray samney koi sareeh daleel biyan keray
Devnagri Urdu (Maududi)मैं उसे सख्त सजा दूंगा, या जुबा कर दूंगा, वरना उसे मेरे सामने मकूल वजह पेश करनी होगी
عَرَبِيفَمَكَثَ غَيرَ بَعيدٍ فَقالَ أَحَطتُ بِما لَم تُحِط بِهِ وَجِئتُكَ مِن سَبَإٍ بِنَبَإٍ يَقينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर कुछ अधिक देर नहीं ठहरा कि उसने (आकर) कहा : मैं ऐसी बात से अवगत हुआ हूँ, जिससे आप अवगत नहीं हुए और मैं आपके पास 'सबा' से एक पक्की ख़बर लाया हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Kuch zyada dair na guzri thi ke usne aakar kaha “maine woh maalumaat haasil ki hai jo aapke ilam mein nahin hain. Main Saba ke mutaalik yaqeeni ittila lekar aaya hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Kuch ziyada dare na guzri thi kay aaker uss ney kaha mein aik aisi cheez ki khabar laya hun kay tujhay uss ki khabar hi nahi mein saba ki aik sachi khabar teray pass laya hun
Devnagri Urdu (Maududi)कुछ ज्यादा दिन न गुजरी थी के उसने आकर कहा "मैंने वो मालूमात हासिल की है जो आपके इलम में नहीं हैं। मैं सबा के मुतालिक यकीनी इत्तिला लेकर आया हूं
عَرَبِيإِنّي وَجَدتُ امرَأَةً تَملِكُهُم وَأوتِيَت مِن كُلِّ شَيءٍ وَلَها عَرشٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मैंने एक महिला को पाया, जो उनपर शासन कर रही है तथा उसे हर चीज़ का हिस्सा दिया गया है और उसके पास एक बड़ा सिंहासन है।
Roman Urdu (Maududi)Maine wahan ek aurat dekhi jo us qaum ki hukmaran hai. Usko har tarah ka saaz o samaan baksha gaya hai aur uska takht (throne) bada azeem o shaan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Mein ney dekha kay unn ki badshaat aik aurat ker rahi hai jissay her qisam ki cheez say kuch na kuch diya gaya hai aur uss ka takht bhi bari azmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)मैंने वहां एक औरत देखी जो हमें क़ौम की हुक्मरान है
عَرَبِيوَجَدتُها وَقَومَها يَسجُدونَ لِلشَّمسِ مِن دونِ اللَّهِ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيطانُ أَعمالَهُم فَصَدَّهُم عَنِ السَّبيلِ فَهُم لا يَهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)मैंने उसे तथा उसकी जाति को अल्लाह के सिवा सूर्य को सजदा करते हुए पाया और शैतान ने उनके कामों को उनके लिए शोभित कर दिया है। चुनाँचे उन्हें सुपथ से रोक दिया है। अतः वे मार्गदर्शन नहीं पाते।
Roman Urdu (Maududi)Maine dekha hai ke woh aur uski qaum Allah ke bajaye Suraj ke aagey sajda karti hai” Shaytaan ne unke aamaal unke liye khushnuma bana diye aur unhein shahraah se rok diya, is waja se woh yeh seedha raasta nahin paatey
Roman Urdu (Junagarhi)Mein ney ussay aur uss ki qom ko Allah Taalaa ko chor ker sorraj ko sajda kertay huye paya shetan ney unn kay kaam unhen bhalay ker kay dikhla ker sahih raah say rok diya hai pus woh hidayat per nahi aatay
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيأَلّا يَسجُدوا لِلَّهِ الَّذي يُخرِجُ الخَبءَ فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ وَيَعلَمُ ما تُخفونَ وَما تُعلِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(शैतान ने उनके कामों को उनके लिए शोभित कर दिया है) ताकि वे उस अल्लाह को सजदा न करें, जो आकाशों तथा धरती में छिपी चीज़ों को निकालता है तथा वह जानता है जो तुम छिपाते हो और जो प्रकट करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Ke us khuda ko sajda karein jo aasmano aur zameen ki posheeda(hidden) cheezein nikalta hai aur woh sab kuch jaanta hai jisey tum log chupate ho aur zaahir karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kay ussi Allah kay liye sajday keren jo aasmano aur zaminon ki posheeda cheezon ko bahir nikalata hai aur jo kuch tum chupatay ho aur zahir kertay ho woh sab kuch janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)के हमें खुदा को सजदा करें जो आसमानो और ज़मीन की पोशीदा (छिपी हुई) चीज़ निकलता है और वो सब कुछ जानता है जिसे तुम लोग छुपाते हो और जाहिर करते हो
☉ Sajda
عَرَبِياللَّهُ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ رَبُّ العَرشِ العَظيمِ ۩
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह वह है जिसके सिवा कोई पूज्य नहीं, जो महान सिंहासन का रब है।
Roman Urdu (Maududi)Allah, ke jiske siwa koi mustahiq e Ibadat(worthy of worship) nahin, jo arsh e azeem ka maalik hai
Roman Urdu (Junagarhi)Uss kay siwa koi mabood bar-haq nahi wohi azmat walay arsh ka malik hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह, जिसके सिवा कोई मुस्तहिक ए इबादत (पूजा के योग्य) नहीं, जो अर्श ए अजीम का मालिक है
عَرَبِي۞ قالَ سَنَنظُرُ أَصَدَقتَ أَم كُنتَ مِنَ الكاذِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(सुलैमान ने) कहा : हम देखेंगे कि तूने सच कहा, या तू झूठों में से था।
Roman Urdu (Maududi)Sulaiman ne kaha “abhi hum dekhe letay hain ke tu nay sach kaha hai ye tu jhoot bolne walon mein se hai
Roman Urdu (Junagarhi)Suleman ney kaha abb hum dekhen gay kay tu ney sach kaha hai ya tu jhoota hai
Devnagri Urdu (Maududi)सुलेमान ने कहा "अभी हम देखते लेते हैं के तू सच नहीं कहता" है ये तू झूठ बोलने वालों में से है
عَرَبِياذهَب بِكِتابي هٰذا فَأَلقِه إِلَيهِم ثُمَّ تَوَلَّ عَنهُم فَانظُر ماذا يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)मेरा यह पत्र लेकर जा और इसे उनकी ओर डाल दे। फिर उनसे अलग हटकर देख कि वे क्या जवाब देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Mera yeh khat (letter) le ja aur usey un logon ki taraf daal de, phir alag hatt kar dekh ke woh kya radd-e-amal zaahir karte hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Meray iss khat ko ley ja ker unhen dey dey phir unn kay pass say hut aa aur dekh kay woh kiya jawab detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मेरा ये खत (पत्र) ले जा और उसे उन लोगों की तरफ डाल दे, फिर अलग हट कर देख के वो क्या रद्द-ए-अमल जाहिर करते हैं”
عَرَبِيقالَت يا أَيُّهَا المَلَأُ إِنّي أُلقِيَ إِلَيَّ كِتابٌ كَريمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उस (रानी) ने कहा : ऐ सरदारो! निःसंदेह मेरी ओर एक प्रतिष्ठित पत्र फेंका गया है।
Roman Urdu (Maududi)Malika boli “aey ehle darbaar, meri taraf ek bada eham khat phenka gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kehney lagi aey sardaro! Meri taraf aik ba-wuqa’at khat daala gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)मलिका बोली “ऐ एहले दरबार, मेरी तरफ एक बड़ा एहम ख़त फेंक गया है
عَرَبِيإِنَّهُ مِن سُلَيمانَ وَإِنَّهُ بِسمِ اللَّهِ الرَّحمٰنِ الرَّحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वह सुलैमान की ओर से है और निःसंदेह वह अल्लाह के नाम से है, जो अत्यंत कृपाशील, असीम दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Woh Sulaiman ki janib se hai aur Allah rehman o raheem ke naam se shuru kiya gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo suleman ki taraf say hai aur jo bakhsish kerney walay meharbaan Allah kay naam say shuroo hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो सुलेमान की जानिब से है और अल्लाह रहमान ओ रहीम के नाम से शुरू किया गया है
عَرَبِيأَلّا تَعلوا عَلَيَّ وَأتوني مُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह कि मेरे मुक़ाबले में सरकशी न करो तथा आज्ञाकारी होकर मेरे पास आ जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Mazmoon yeh hai ke “ mere muqable mein sarkashi na karo aur muslim ho kar mere paas haazir ho jao”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kay tum meray samney sirkashi na kero aur musalman bann ker meray pass aajao
Devnagri Urdu (Maududi)मज़मून ये है के "मेरे मुकाबले में सरकशी न करो और मुस्लिम हो कर मेरे पास हाज़िर हो जाओ"
عَرَبِيقالَت يا أَيُّهَا المَلَأُ أَفتوني في أَمري ما كُنتُ قاطِعَةً أَمرًا حَتّىٰ تَشهَدونِ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ प्रमुखो! मुझे मेरे मामले में सही हल बताओ। मैं किसी मामले का फ़ैसला करने वाली नहीं, यहाँ तक तुम मेरे पास उपस्थित हो।
Roman Urdu (Maududi)(khat sunakar) Malika ne kaha “aey sardaran e qaum mere is maamle mein mujhey mashwara do. Main kisi maamle ka faisla tumhare bagair nahin karti hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney kaha aey meray sardaro! Tum meray iss moamlay mein mujhay mashwara do. Mein kissi amar ka qataee faisla jab tak tumhari mojoodgi aur raye na ho nahi kiya kerti
Devnagri Urdu (Maududi)(खत सुनाकर) मलिका ने कहा “ऐ सरदारन ए क़ौम मेरे इस मामले में मुझे मशवरा दो। मैं किसी मामले का फैसला तुम्हारे बिना नहीं करती हूं"
عَرَبِيقالوا نَحنُ أُولو قُوَّةٍ وَأُولو بَأسٍ شَديدٍ وَالأَمرُ إِلَيكِ فَانظُري ماذا تَأمُرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हम बड़े पराक्रमी और प्रखर योद्धा हैं और मामला आपके हवाले है, सो देखे लें आप क्या आदेश देती हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jawab diya “hum taqatwar aur ladne waley log hain, aagey faisla aap ke haath mein hai, aap khud dekh lein ke aapko kya hukum dena hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Inn sab ney jawab diya kay hum taqat aur qooat walay sakht bhirney walay hain. Aagay aap ko ikhtiyar hai aap khud hi soch lijiye kay humen aap kiya kuch hukum farmati hain
Devnagri Urdu (Maududi)उन्हें ने जवाब दिया "हम ताकतवार और लड़ने वाले लोग हैं, अगला फैसला आपके हाथ में है, आप खुद देख लें के आपको क्या हुकुम देना है"
عَرَبِيقالَت إِنَّ المُلوكَ إِذا دَخَلوا قَريَةً أَفسَدوها وَجَعَلوا أَعِزَّةَ أَهلِها أَذِلَّةً ۖ وَكَذٰلِكَ يَفعَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : निःसंदेह राजा जब किसी बस्ती में प्रवेश करते हैं, तो उसे ख़राब कर देते हैं और उसके वासियों में से प्रतिष्ठित लोगों को अपमानित कर देते हैं। और इसी तरह ये करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Malika ne kaha ke “Baadshah jab kisi mulk mein ghus aate hain to usey kharab aur uske izzat walon ko zaleel kar detay hain, yahi kuch woh kiya karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney kaha badshah jab kissi basti mein ghustay hain to ussay ujaar detay hain aur wahan kay ba-izzat logon ko zaleel ker detay hain. Aur yeh log bhi aisa hi keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)मलिका ने कहा के "बादशाह जब किसी मुल्क में घुस आते हैं तो उसे ख़राब और उसके इज्जत वालों को ज़लालत कर देते हैं, यहीं कुछ वो किया करते हैं
عَرَبِيوَإِنّي مُرسِلَةٌ إِلَيهِم بِهَدِيَّةٍ فَناظِرَةٌ بِمَ يَرجِعُ المُرسَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह मैं उनकी ओर एक उपहार भेजने वाली हूँ। फिर देखती हूँ कि दूत क्या उत्तर लेकर आते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Main in logon ki taraf ek hadiya(gift) bhejti hoon, phir dekhti hoon ke mere elchi (envoy) kya jawaab lekar palat-te hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Mein unhen aik hadiya bhejney wali hun phir dekh loon gi kay qasid kiya jawab ley ker lot’tay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मैं लोगों की तरफ एक हदिया (उपहार) भेजती हूं, फिर देखती हूं के मेरे एलची (दूत) क्या जवाब लेकर पलट-ते हैं”
عَرَبِيفَلَمّا جاءَ سُلَيمانَ قالَ أَتُمِدّونَنِ بِمالٍ فَما آتانِيَ اللَّهُ خَيرٌ مِمّا آتاكُم بَل أَنتُم بِهَدِيَّتِكُم تَفرَحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो जब वह (दूत) सुलैमान के पास आया, तो उसने कहा : क्या तुम धन से मेरी सहायता करते हो? तो जो कुछ अल्लाह ने मुझे दिया है, वह उससे बेहतर है जो उसने तुम्हें दिया है, बल्कि तुम ही लोग अपने उपहारों पर खुश होते हो।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh [Malika ka safeer(envoy)] Sulaiman ke haan pahuncha to usne kaha, “ kya tum log maal se meri madad karna chahte ho? Jo kuch khuda ne mujhey de rakkha hai woh issey bahut zyada hai jo tumhein diya hai. Tumhara hadiya (gifts) tumhi ko mubarak rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab qasid hazrat suleman kay pass phoncha to aap ney farmaya kiya tum maal say mujhay madad lena chahatay ho? Mujhay to meray rab ney iss say boht behtar dey rakha hai jo uss ney tumhen diya hai pus tum hi apnay tohfay say khush raho
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो [मलिका का सुरक्षित (दूत)] सुलेमान के हां पहुंचा तो उसने कहा, "क्या तुम लोग माल से मेरी मदद करना चाहते हो? जो कुछ खुदा ने मुझे दे रखा है वो इससे बहुत ज्यादा है जो तुमने दिया है। तुम्हारी हादिया (उपहार) तुम्हें मुबारक रहे
عَرَبِيارجِع إِلَيهِم فَلَنَأتِيَنَّهُم بِجُنودٍ لا قِبَلَ لَهُم بِها وَلَنُخرِجَنَّهُم مِنها أَذِلَّةً وَهُم صاغِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनके पास वापस जाओ, अब हम अवश्य उनके पास ऐसी सेनाएँ लेकर आएँगे, जिनका वे सामना नहीं कर सकेंगे और हम अवश्य उन्हें उस (बस्ती) से इस तरह अपमानित करके निकाल देंगे कि वे तुच्छ होंगे।
Roman Urdu (Maududi)aey safeer (envoy)]wapas jaa apne bhejne walon ki taraf, hum unpar aisey lashkar lekar aayenge jinka muqabla woh na kar sakenge, aur hum unhein aisi zillat ke saath wahan se nikalenge ke woh khwar hokar reh jayenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Jaa unn ki taraf wapis lot jaa hum unn (kay muqablay) per woh lashkar layen gay jin kay samney parney ki unn mein taqat nahi aur hum unhen zaleel-o-pust ker kay wahan say nikal bahir keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ सुरक्षित (दूत)]वापस जा अपने भेजने वालों की तरफ, हम उन पर ऐसे लश्कर लेकर आएंगे जिनका मुकाबला वो ना कर पाएंगे, और हम उन्हें ऐसी ज़िल्लत के साथ, वहां से निकालेंगे के वो ख़्वार होकर रह जायेंगे”
عَرَبِيقالَ يا أَيُّهَا المَلَأُ أَيُّكُم يَأتيني بِعَرشِها قَبلَ أَن يَأتوني مُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(सुलैमान ने) कहा : ऐ प्रमुखो! तुममें से कौन उसका सिंहासन मेरे पास लेकर आएगा, इससे पहले कि वे आज्ञाकारी होकर मेरे पास आएँ।
Roman Urdu (Maududi)Sulaiman ne kaha “aey ehle darbaar, tum mein se kaun uska takht (throne) mere paas laata hai qabl iske ke woh log mutii (farmabardaar) hokar mere paas haazir hoon?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ney farmaya aey sardaro! Tum mein koi hai jo unn kay musalman ho ker phonchney say pehlay hi uss ka takht mujhay laa dey
Devnagri Urdu (Maududi)सुलेमान ने कहा “ऐ एहले दरबार, तुम में से कौन उसका तख्त (सिंहासन) मेरे पास लाता है कबूल इसके के वो लोग मुती (फरमाबरदार) होकर मेरे पास हाजिर हूं?”
عَرَبِيقالَ عِفريتٌ مِنَ الجِنِّ أَنا آتيكَ بِهِ قَبلَ أَن تَقومَ مِن مَقامِكَ ۖ وَإِنّي عَلَيهِ لَقَوِيٌّ أَمينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन्नों में से एक शक्तिशाली शरारती कहने लगा : मैं उसे आपके पास ले आऊँगा, इससे पूर्व कि आप अपने स्थान से उठें और निःसंदेह मैं इसकी निश्चय पूरी शक्ति रखने वाला, अमानतदार हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Jinno mein se ek qawi (mighty) haykal ne arz kiya “ main usey haazir kardunga qabl iske ke aap apni jagah se utthein. Main iski taaqat rakhta hoon aur amaanatdaar hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Aik qavi hekal jinn kehney laga aap apni majlis say uthen uss say pehlay mein ussay aap kay pass laa deta hun yaqeen maniye kay mein iss per qadir hun aur hun bhi amanat daar
Devnagri Urdu (Maududi)जिन्नो में से एक कवी (शक्तिशाली) हयाल ने अर्ज़ किया "मैं उसे हाजिर कर दूंगा क़बल इसके के आप अपनी जगह से उठें। मैं इसकी ताक़त रखता हूं और अमानतदार हूं"
عَرَبِيقالَ الَّذي عِندَهُ عِلمٌ مِنَ الكِتابِ أَنا آتيكَ بِهِ قَبلَ أَن يَرتَدَّ إِلَيكَ طَرفُكَ ۚ فَلَمّا رَآهُ مُستَقِرًّا عِندَهُ قالَ هٰذا مِن فَضلِ رَبّي لِيَبلُوَني أَأَشكُرُ أَم أَكفُرُ ۖ وَمَن شَكَرَ فَإِنَّما يَشكُرُ لِنَفسِهِ ۖ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ رَبّي غَنِيٌّ كَريمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसके पास पुस्तक का ज्ञान था, उसने कहा : मैं उसे आपके पास इससे पहले ले आता हूँ कि आपकी पलक झपके। और जब उसने उसे अपने पास रखा हुआ देखा, तो कहा : यह मेरे पालनहार का अनुग्रह है, ताकि मेरी परीक्षा ले कि मैं शुक्र अदा करता हूँ या नाशुक्री करता हूँ। और जिसने शुक्र किया, तो वह अपने ही लिए शुक्र करता है तथा जिसने नाशुक्री की, तो निश्चय मेरा पालनहार बहुत बेनियाज़, अत्यंत उदार है।
Roman Urdu (Maududi)Jis shaks ke paas kitaab ka ilam tha woh bola “main aapki palakh jhapakne se pehle usey laye deta hoon”. Junhi ke Sulaiman ne woh takht apne paas rakkha hua dekha, woh pukar uttha “Yeh mere Rub ka fazal hai taa-ke woh mujhey aazmaaye ke main shukar karta hoon ya kaafir e niyamat karta hoon. Aur jo koi shukar karta hai uska shukar uske apne hi liye mufeed hai, warna koi nashukari karey to mera Rubb be-niyaz aur apni zaat mein aap buzurg hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss kay pass kitab ka ilm tha woh bol utha kay aap palak jhapkayen uss say bhi pehlay mein ussay aap kay pass phoncha sakta hun. Jab aap ney ussay apnay pass mojood paya to farmaney lagay yehi meray rab ka fazal hai takay woh mujhay aazmaye kay mein shukar guzari kerta hun aur jo na shukri keray to mera perwerdigar (bay perwa aur buzurg) ghani aur kareem hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिस शक्स के पास किताब का इलम था वो बोला "मैं आपकी" पलख झपकने से पहले उसे लाए देता हूं”। जुनही के सुलेमान ने वो तख्त अपने पास रक्खा हुआ देखा, वो पुकार उठा "ये मेरे रब का फज़ल है ता-के वो मुझे आजमाए के मैं शुक्र करता हूं या काफिर ए नियामत करता हूं। और जो कोई शुक्र करता है उसका शुक्र उसे अपने ही लिए मुफीद है, वरना कोई नाशुकारी करे तो मेरा रब बे-नियाज़ और अपनी ज़ात में आप बुज़ुर्ग है।”
عَرَبِيقالَ نَكِّروا لَها عَرشَها نَنظُر أَتَهتَدي أَم تَكونُ مِنَ الَّذينَ لا يَهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(सुलैमान ने) कहा : उसके लिए उसके सिंहासन का रंग-रूप बदल दो। ताकि हम देखें क्या वह राह पा लेती है या उनमें से होती है, जो राह नहीं पाते।
Roman Urdu (Maududi)Sulaiman ne kaha “anjaan tareeqe se uska takht uske saamne rakh do, dekhein woh saheeh baat tak pahunchti hai ya un logon mein se hai jo raah e raast nahin paatey.”
Roman Urdu (Junagarhi)Hukum diya kay iss kay takht mein kuch pher badal kerdo takay maloom hojaye kay yeh raah paa leti hai ya unn mein say hoti hai jo raah nahi patay
Devnagri Urdu (Maududi)सुलेमान ने कहा, "अंजान तारीख़ से उसका तख्त उसके सामने रख दो, देखें वो सही बात तक पहुंच जाती है या उन लोगों में से है जो राह ए रास्ता नहीं पाते।"
عَرَبِيفَلَمّا جاءَت قيلَ أَهٰكَذا عَرشُكِ ۖ قالَت كَأَنَّهُ هُوَ ۚ وَأوتينَا العِلمَ مِن قَبلِها وَكُنّا مُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वह आई, तो उससे कहा गया : क्या तेरा सिंहासन ऐसा ही है? उसने कहा : यह तो मानो वही है, और हमें इससे पहले ज्ञान दिया गया था, और हम आज्ञाकारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Malika jab haazir hui to ussey kaha gaya, kya tera takht (throne) aisa hi hai? Woh kehne lagi “yeh to goya wahi hai , hum to pehle hi jaan gaye thay aur humne sar-e-itaat jhuka diya tha (ya hum muslim ho chuke thay)”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab woh aagaee to uss say kaha (daryaft kiya) gaya kay aisa hi tera (bhi) takht hai? Uss ney jawab diya kay yeh goya wohi hai humen iss say pehlay hi ilm diya gaya tha aur hum musalman thay
Devnagri Urdu (Maududi)मलिका जब हाजिर हुई तो उसे कहा गया, क्या तेरा तख्त (सिंहासन) ऐसा ही है? वो कहने लगी "ये तो गया वही है, हम तो पहले ही जान गए थे और हमने सर-ए-इतात झुका दिया था (या हम मुस्लिम हो चुके थे)"
عَرَبِيوَصَدَّها ما كانَت تَعبُدُ مِن دونِ اللَّهِ ۖ إِنَّها كانَت مِن قَومٍ كافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसे (ईमान से) उस चीज़ ने रोक रखा था, जिसकी वह अल्लाह के सिवा इबादत कर रही थी। निःसंदेह वह काफ़िर लोगों में से थी।
Roman Urdu (Maududi)Usko (iman laney se) jis cheez ne rok rakkha tha woh un maboodon ki ibadat thi jinhein woh Allah ke siwa poojhti thi, kyunke woh ek kafir qaum se thi
Roman Urdu (Junagarhi)Ussay unhon ney rok rakha tha jin ki woh Allah kay siwa perastish kerti rahi thi yaqeenan woh kafir logon mein say thi
Devnagri Urdu (Maududi)उसको (इमान लेन से) जिस चीज ने रोक रखा था वो उन मबूदों की इबादत थी जिन्होन अल्लाह के सिवा पूजती थी, क्योंकि वो एक काफिर क़ौम से थी
عَرَبِيقيلَ لَهَا ادخُلِي الصَّرحَ ۖ فَلَمّا رَأَتهُ حَسِبَتهُ لُجَّةً وَكَشَفَت عَن ساقَيها ۚ قالَ إِنَّهُ صَرحٌ مُمَرَّدٌ مِن قَواريرَ ۗ قالَت رَبِّ إِنّي ظَلَمتُ نَفسي وَأَسلَمتُ مَعَ سُلَيمانَ لِلَّهِ رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उससे कहा गया : इस महल में प्रवेश कर जाओ। तो जब उसने उसे देखा, तो उसे गहरा पानी समझा और अपनी दोनों पिंडलियाँ से कपड़ा उठा लिया। (सुलैमान ने) कहा : यह तो शीशे से मढ़ा हुआ चिकना महल है। उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! निःसंदेह मैंने अपने प्राण पर अत्याचार किया है और (अब) मैं सुलैमान के साथ सारे संसारों के पालनहार अल्लाह के लिए आज्ञाकारिणी हो गई।
Roman Urdu (Maududi)Ussey kaha gaya ke mahal mein daakhil ho, usne jo dekha to samjhi ke pani ka hauz hai aur utarne ke liye usne apne painchey utha liye (tucked up her skirt) , Sulaiman ne kaha yeh sheeshey (glass) ka chikna farsh hai ispar woh pukar utthi “Aey mere Rubb, (aaj tak) main apne nafs par bada zulm karti rahi, aur ab maine Sulaiman ke saath Allah Rabbul aalameen ki itaat qabool karli”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss say kaha gaya kay mehal mein chali jao jissay dekh ker yeh samajh ker kay yeh hoz hai uss ney apni pindliyan khol din farmay yeh to seeshay say mundhi hui emaarat hai kehnay lagi aey meray perwerdigar! Mein ney apnay aap per zulm kiya. Abb mein suleman kay sath Allah rab-ul-aalameen ki mootiy aur farmanbardaar banti hun
Devnagri Urdu (Maududi)उसे कहा गया के महल में दाख़िल हो, उसने जो देखा तो समझ के पानी का हौज़ है और उतरने के लिए उसने अपने दर्द उठा लिए, सुलेमान ने कहा ये शीशे (कांच) का चिकना फ़र्श है इसपर वो पुकार उठी "ऐ मेरे रब, (आज तक) मैं अपने नफ़्स पर बड़ा ज़ुल्म करती रही, और अब मैंने सुलेमान के साथ अल्लाह रब्बुल आलमीन की इताअत क़बूल करली"
عَرَبِيوَلَقَد أَرسَلنا إِلىٰ ثَمودَ أَخاهُم صالِحًا أَنِ اعبُدُوا اللَّهَ فَإِذا هُم فَريقانِ يَختَصِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने समूद की ओर उनके भाई सालेह़ को भेजा कि तुम सब अल्लाह की इबादत करो, तो अचानक वे दो समूहों में बंटकर झगड़ने लगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Samood ki taraf humne unke bhai Saleh ko (yeh paigaam de kar) bheja ke Allah ki bandagi karo, to yakayak woh do mutakhasim fareeq (two wrangling) ban gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney samood ki taraf unn kay bhai saleh ko bheja kay tum sab Allah ki ibadat kero phir bhi woh do fareeq bann ker aapas mein larney jhagarney lagay
Devnagri Urdu (Maududi)और समूद की तरफ हमने उनके भाई सालेह को (ये पैगाम दे कर) भेजा के अल्लाह की बंदगी करो, तो यकायक वो दो मुतखसिम फरीक (दो तकरार) बन गए
عَرَبِيقالَ يا قَومِ لِمَ تَستَعجِلونَ بِالسَّيِّئَةِ قَبلَ الحَسَنَةِ ۖ لَولا تَستَغفِرونَ اللَّهَ لَعَلَّكُم تُرحَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(सालेह ने) कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम भलाई से पहले बुराई क्यों जल्दी माँगते हो? तुम अल्लाह से क्षमा क्यों नहीं माँगते, ताकि तुम पर दया की जाए?
Roman Urdu (Maududi)Saleh ne kaha “aey meri qaum ke logon, bhalayi se pehle burayi ke liye kyun jaldi machate ho? Kyun nahin Allah se magfirat talab karte? Shayad ke tumpar reham farmaya jaye?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ney farmaya aey meri qom kay logo! Tum neki say pehlay buraee ki jaldi kiyon macha rahey ho? Tum Allah Taalaa say istaghfaar kiyon nahi kertay takay tum per reham kiya jaye
Devnagri Urdu (Maududi)सालेह ने कहा "ऐ मेरी कौम के लोगों, भलाई से पहले बुराई के लिए क्यों जल्दी मचाते हो? क्यों नहीं अल्लाह से मगफिरत तालाब करते? शायद के तुमपर रहम फरमाया जय?”
عَرَبِيقالُوا اطَّيَّرنا بِكَ وَبِمَن مَعَكَ ۚ قالَ طائِرُكُم عِندَ اللَّهِ ۖ بَل أَنتُم قَومٌ تُفتَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हमने तुमपर तथा तुम्हारे साथियों पर अपशकुन पाया है। (सालेह़ ने) कहा : तुम्हारा अपशकुन अल्लाह के पास है, बल्कि तुम ऐसे लोग हो जिनकी परीक्षा ली जा रही है।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “humne to tumko aur tumhare sathiyon ko badd-shaguni ka nishaan paya hai”. Saleh ne jawab diya “tumhare neik o badd shagun ka sar rishta (good and bad omens issue) Allah ke paas hai. Asal baat yeh hai ke tum logon ki aazmaish ho rahi hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kehnay lagay hum to teri aur teray sathiyon ki bad-shagooni ley rahey hain? Aap ney farmaya tumhari bad-shagooni Allah kay haan hai bulkay tum fitney mein paray huye log ho
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने कहा "हमने तो तुमको और तुम्हारे साथियों को बद-शगुनी का निशान पाया है"। सालेह ने जवाब दिया "तुम्हारे नीक ओ बद शगुन का सारा रिश्ता (अच्छे और बुरे शगुन का मुद्दा) अल्लाह के पास है। असल बात ये है कि तुम लोगों की आजमाइश हो रही है"
عَرَبِيوَكانَ فِي المَدينَةِ تِسعَةُ رَهطٍ يُفسِدونَ فِي الأَرضِ وَلا يُصلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उस नगर में नौ (9) लोग थे, जो धरती में उत्पात मचाते थे और सुधार नहीं करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Us shehar mein naw (nine) jatthey-daar (ring-leaders) thay jo mulk mein fasaad phaylatey aur koi islaah ka kaam na karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Uss shehar mein no sardar thay jo zamin mein fasad phelatay rehtay thay aur islaah nahi kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)हमारे शहर में नौ (नौ) जत्थे-दार (रिंग-लीडर) थे जो मुल्क में फसाद फैलाते और कोई इस्लाह का काम ना करते थे
عَرَبِيقالوا تَقاسَموا بِاللَّهِ لَنُبَيِّتَنَّهُ وَأَهلَهُ ثُمَّ لَنَقولَنَّ لِوَلِيِّهِ ما شَهِدنا مَهلِكَ أَهلِهِ وَإِنّا لَصادِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : आपस में अल्लाह की क़सम खाओ कि हम अवश्य ही उसपर और उसके परिवार पर रात में हमला करेंगे, फिर हम अवश्य ही उसके वारिस (उत्तराधिकारी) से कह देंगे : हम उसके परिवार की मृत्यु के समय मौजूद नहीं थे। और निःसंदेह हम अवश्य सच्चे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne aapas mein kaha “ khuda ki kasam kha kar ahad karlo ke hum Saleh aur uske ghar walon par shabkhun (secret night attack) marenge aur phir uske wali(guardian) se keh denge ke hum us khandaan ki halakat ke mauqe par maujood na thay, hum bilkul sach kehte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney aapas mein bari qasmen kha kha ker ehad kiya kay raat hi ko saleh aur uss kay ghar walon per hum chapa maaren gay aur uss kay warison say saaf keh den gay kay hum uss kay ehal ki halakat kay waqt mojood na thay aur hum bilkul sachay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उन्होन ने आपस में कहा “खुदा की कसम खा कर अहद करलो के हम सालेह और उसके घर वालों पर शब्खुन (गुप्त रात का हमला) मारेंगे और फिर उसके वाली (अभिभावक) से कह देंगे के हम उस खानदान की हलाकत के मौके पर मौजुद ना थाय, हम बिल्कुल सच कहते हैं
عَرَبِيوَمَكَروا مَكرًا وَمَكَرنا مَكرًا وَهُم لا يَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने एक चाल चली और हमने भी एक चाल चली और वे सोचते तक न थे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh chaal to woh chale aur phir ek chaal humne chali jiski unhein khabar na thi
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney makar (khufiya tadbeer) aur hum ney bhi aur woh issay samajhtay hi na thay
Devnagri Urdu (Maududi)ये चल तो वो चले और फिर एक चाल हमने चली जिसकी उन्हें खबर ना थी
عَرَبِيفَانظُر كَيفَ كانَ عاقِبَةُ مَكرِهِم أَنّا دَمَّرناهُم وَقَومَهُم أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो देखो उनकी चाल का परिणाम कैसा हुआ कि निःसंदेह हमने उन्हें और उनकी क़ौम, सबको विनष्ट कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Ab dekhlo ke unki chaal ka anjaam kya hua. Humne tabaah karke rakh diya unko aur unki poori qaum ko
Roman Urdu (Junagarhi)(abb) dekh ley unn kay makar ka anjam kaisa kuch hua Kay hum ney unn ko aur unn ki qom ko sab ko ghaarat ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)अब देखलो के उनकी चाल का अंजाम क्या हुआ। हमने तबाह करके रख दिया उनको और उनकी पूरी कौम को
عَرَبِيفَتِلكَ بُيوتُهُم خاوِيَةً بِما ظَلَموا ۗ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً لِقَومٍ يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो ये हैं उनके घर, उनके ज़ुल्म के कारण गिर हुए। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए निश्चय एक निशानी है, जो ज्ञान रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh unke ghar khali padey hain us zulm ki padash mein jo woh karte thay, Is mein ek nishaan e ibrat hai un logon ke liye jo ilm rakhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hain unn kay makanaat jo unn kay zulm ki waja say ujray paray hain jo log ilm rakhtay hain unn kay liye iss mein bari nishani hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो उनके घर खाली पड़े हैं उस जुल्म की पैदाइश में जो वो करते थे, इस में एक निशान ए इब्रत है उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं
عَرَبِيوَأَنجَينَا الَّذينَ آمَنوا وَكانوا يَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उन लोगों को बचा लिया, जो ईमान लाए और डरते रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur bacha liya humne un logon ko jo iman laye thay aur nafarmani se parheiz karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney unn ko jo eman laye thay aur perhezgaar thay baal baal bacha liya
Devnagri Urdu (Maududi)और बच्चा लिया हमने उन लोगों को जो ईमान लाए थे और नफ़रमानी से परहेज़ करते थे
عَرَبِيوَلوطًا إِذ قالَ لِقَومِهِ أَتَأتونَ الفاحِشَةَ وَأَنتُم تُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (हमने) लूत को (भेजा), जब उसने अपनी जाति के लोगों से कहा : क्या तुम अश्लील काम करते हो, जबकि तुम देखते हो?
Roman Urdu (Maududi)Aur Lut ko humne bheja. Yaad karo woh waqt jab usne apni qaum se kaha “kya tum aankhon dekhte badhkari karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur loot ka (zikar ker) jabkay uss ney apni qom say kaha kay kiya bawajood dekhney bhalney kay phir bhi tum bad-kaari ker rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)और लुट को हमने भेजा। याद करो वो वक़्त जब उसने अपनी क़ौम से कहा "क्या तुम आँखें देखते हो ख़राबी करते हो
عَرَبِيأَئِنَّكُم لَتَأتونَ الرِّجالَ شَهوَةً مِن دونِ النِّساءِ ۚ بَل أَنتُم قَومٌ تَجهَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम सचमुच स्त्रियों को छोड़कर वासनावश पुरुषों के पास आते हो? बल्कि तुम बड़े ही नासमझ लोग हो।
Roman Urdu (Maududi)Kya tumhara yahi chalan hai ke auraton ko chodh kar mardon ke paas shehwat-rani (sexual desire) ke liye jatey ho? Haqeeqat yeh hai ke tumlog sakht jahalat(ignorance) ka kaam karte ho.”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kiya baat hai kay tum aurton ko chor ker mardon kay pass shewat say aatay ho? Haq yeh hai kay tum bari hi nadani ker rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम्हारा यही चलन है के औरतों को छोड़ कर मर्दों के पास शेहवत-रानी (यौन इच्छा) के लिए जाते हो? हकीकत ये है के तुमलोग सच कहते हो (अज्ञान) का काम करते हो।”
🕮 Juz 20 begins here
عَرَبِي۞ فَما كانَ جَوابَ قَومِهِ إِلّا أَن قالوا أَخرِجوا آلَ لوطٍ مِن قَريَتِكُم ۖ إِنَّهُم أُناسٌ يَتَطَهَّرونَ
हिन्दी (Al-Omari)तो उसकी जाति के लोगों का उत्तर इसके सिवा कुछ न था कि उन्होंने कहा : लूत के घरवालों को अपनी बस्ती से निकाल दो। निःसंदेह ये ऐसे लोग हैं जो बड़े पाक-साफ़ बनते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar uski qaum ka jawab iske siwa kuch na tha ke unhon ne kaha “ nikaal do Lut ke ghar walon ko apni basti se, yeh baday paakbaaz bante hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Qom ka jawab ba-juz iss kehnay kay aur kuch na tha kay aal-e-loot ko apnay shehar say shahar badar kerdo yeh to baray pak baaz bann rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उसकी क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ ना था के अनहोन ने कहा "निकल दो लुट के घर वालों को अपनी बस्ती से, ये बड़े पाकबाज़ बनते हैं"
عَرَبِيفَأَنجَيناهُ وَأَهلَهُ إِلَّا امرَأَتَهُ قَدَّرناها مِنَ الغابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उसे तथा उसके घरवालों को बचा लिया, सिवाय उसकी बीवी के। हमने उसे पीछे रह जाने वालों में तय कर दिया था।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar humne bacha liya usko aur uske ghar walon ko, bajuz uski biwi ke jiska peechey reh jana humne tai kardiya tha
Roman Urdu (Junagarhi)Pus hum ney ussay aur uss kay ehal ko ba-juz uss ki biwi kay sab ko bacha liya uss ka andaza to baqi reh janey walon mein hum laga hi chukay thay
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार हमने बचा लिया उसको और उसके घर वालों को, बाज़ उसकी बीवी के जिसका पीछे रह जाना हमने तै करदिया था
عَرَبِيوَأَمطَرنا عَلَيهِم مَطَرًا ۖ فَساءَ مَطَرُ المُنذَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उनपर भारी वर्षा बरसाई। तो बुरी बारिश थी उन लोगों के लिए जो डराए गए थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur barsayi un logon par ek barsaat, bahut hi buri barsaat thi wo un logon ke haqq mein jo mutanabbeh kiye jaa chuke thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn per aik (khas qisam ki) barish barsa di pus unn dhamkaye huye logon per buri barish hui
Devnagri Urdu (Maududi)और बरसै उन लोगों पर एक बरसात, बहुत ही बुरी बरसात थी वो उन लोगों के हक़ में जो मुतनब्बह किये जा चुके थे
عَرَبِيقُلِ الحَمدُ لِلَّهِ وَسَلامٌ عَلىٰ عِبادِهِ الَّذينَ اصطَفىٰ ۗ آللَّهُ خَيرٌ أَمّا يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें: सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है और सलाम है उसके उन बंदों पर, जिन्हें उसने चुन लिया। क्या अल्लाह बेहतर है, या वे जिन्हें ये साझी ठहराते हैं?
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) kaho, hamd hai Allah ke liye aur salaam uske un bandon par jinhein usne barguzida kiya. (Insey pucho) Allah behtar hai ya woh mabood jinhein yeh log iska shareek bana rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Tu keh dey kay tamam tareef Allah hi kay liye hai aur uss kay bar-gazeeda bandon per salam hai. Kiya Allah Taalaa behtar hai ya woh jinhen yeh log shareek thera rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) कहो, हम्द है अल्लाह के लिए और सलाम उसे उन बंदों पर जिन्होंने हमें बरगुज़िदा किया. (इंसे पूछो) अल्लाह बेहतर है या वो मबूद जिनहें ये लोग इसका शरीक बना रहे हैं
عَرَبِيأَمَّن خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ وَأَنزَلَ لَكُم مِنَ السَّماءِ ماءً فَأَنبَتنا بِهِ حَدائِقَ ذاتَ بَهجَةٍ ما كانَ لَكُم أَن تُنبِتوا شَجَرَها ۗ أَإِلٰهٌ مَعَ اللَّهِ ۚ بَل هُم قَومٌ يَعدِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(क्या वे साझीदार बेहतर हैं) या वह जिसने आकाशों और धरती को पैदा किया और आकाश से तुम्हारे लिए पानी उतारा, फिर हमने उसके साथ शानदार बाग़ लगाए। तुम्हारे बस में नहीं था कि उनके वृक्ष उगाते। क्या अल्लाह के साथ कोई (अन्य) पूज्य है? बल्कि ये ऐसे लोग हैं जो रास्ते से हट रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Bhala woh kaun hai jisne aasmano aur zameen ko paida kiya, aur tumhare liye aasmaan se pani barsaya, phir uske zariye se woh khusnuma baagh ugaye jinke darakhton ka ugana tumhare bas mein na tha? Kya Allah ke saath koi dusra khuda bhi (in kaamon mein shareek) hai? (Nahin), balke yahi log raah e raast se hatkar chale jaa rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Bhala batao to? Kay aasamano ko aur zamin ko kiss ney peda kiya? Kiss ney aasman say barish barsaee? Phir uss say haray bharay ba-ronaq baghaat uga diye? Unn baghon kay darakhton ko tum hergiz na uga saktay kiya Allah kay sath aur koi mabood bhi hai? Bulkay yeh log hut jatay hain (seedhi raah say)
Devnagri Urdu (Maududi)भला वो कौन है जिसने आसमान और ज़मीन को पेदा किया, और तुम्हारे लिए आसमान से पानी बरसाया, फिर उसके ज़रिये से वो खुसनुमा बाग उगे जिनके दरख्तों का उगना तुम्हारे बस में ना था? क्या अल्लाह के साथ कोई दूसरा खुदा भी है? (नहीं), बलके यहीं लोग राह ए रास्ते से हटकर चले जा रहे हैं
عَرَبِيأَمَّن جَعَلَ الأَرضَ قَرارًا وَجَعَلَ خِلالَها أَنهارًا وَجَعَلَ لَها رَواسِيَ وَجَعَلَ بَينَ البَحرَينِ حاجِزًا ۗ أَإِلٰهٌ مَعَ اللَّهِ ۚ بَل أَكثَرُهُم لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(क्या वे साझीदार बेहतर हैं) या वह जिसने धरती को ठहरने का स्थान बनाया और उसके बीच नहरें बनाईं और उसके लिए पहाड़ बनाए और दो समुद्रों के बीच अवरोध बनाया? क्या अल्लाह के साथ कोई (अन्य) पूज्य है ? बल्कि उनमें से अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh kaun hai jisne zameen ko jaye qaraar banaya aur uske andar dariya rawan kiye, aur usmein (pahadon ki) mekhein gaadh di aur pani ke do zakhiron(two bodies) ke darmiyan purda hayal kardiye? Kya Allah ke saath koi aur khuda bhi (in kaamon mein shareek) hai? Nahin, balke in mein se aksar log nadaan hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh jiss ney zamin ko qarar gaah banaya aur uss kay darmiyan nehren jari kerdin aur uss kay liye pahar banaye aur do samandaron kay darmiyan rok bana di kiya Allah kay sath koi aur mabood bhi hai? Bulkay inn mein say aksar kuch jantay hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और वो कौन है जिसने ज़मीन को जाए क़रार बनाया और उसके अंदर दरिया रावन किए, और उसमें (पहाड़ों की) मेखें गाध दी और पानी के दो ज़ख़िरों (दो शरीर) के दरमियान पर्दा हयाल कार्डिए? क्या अल्लाह के साथ कोई और खुदा भी शरीक में है? नहीं, बल्कि मेरे से अक्सर लोग नादान हैं
عَرَبِيأَمَّن يُجيبُ المُضطَرَّ إِذا دَعاهُ وَيَكشِفُ السّوءَ وَيَجعَلُكُم خُلَفاءَ الأَرضِ ۗ أَإِلٰهٌ مَعَ اللَّهِ ۚ قَليلًا ما تَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या वह जो व्याकुल की प्रार्थना स्वीकार करता है, जब वह उसे पुकारता है और दुखों को दूर करता है और तुम्हें धरती का उत्तराधिकारी बनाता है? क्या अल्लाह के साथ कोई (अन्य) पूज्य है? तुम बहुत कम उपदेश ग्रहण करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Kaun hai jo bekarar ki dua sunta hai jabke woh usey pukare aur kaun uski takleef rafaa karta hai? Aur (kaun hai jo) tumhein zameen ka khalifa banata hai? Kya Allah ke saath koi aur khuda bhi (yeh kaam karne wala) hai? Tum log kam hi sochte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Bay kus ki pukar ko jab kay woh pukaray kaun qabool ker kay sakhti ko door ker deta hai? Aur tumhen zamin ka khalfa banata hai kiya Allah Taalaa kay sath koi aur mabood hai? Tum boht kum naseehat-o-ibrat hasil kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)कौन है जो बेकरार की दुआ सुनता है जबके वो उसे पुकारे और कौन उसकी तकलीफ रफा-दफा करता है? और (कौन है जो) तुम्हें ज़मीन का खलीफा बनाता है? क्या अल्लाह के साथ कोई और खुदा भी (ये काम करने वाला) है? तुम लोग कम ही सोचते हो
عَرَبِيأَمَّن يَهديكُم في ظُلُماتِ البَرِّ وَالبَحرِ وَمَن يُرسِلُ الرِّياحَ بُشرًا بَينَ يَدَي رَحمَتِهِ ۗ أَإِلٰهٌ مَعَ اللَّهِ ۚ تَعالَى اللَّهُ عَمّا يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या वह जो थल और समुद्र के अँधेरों में तुम्हारा मार्गदर्शन करता है तथा वह जो हवाओं को अपनी दया (वर्षा) से पहले शुभ-सूचना देने के लिए भेजता है? क्या अल्लाह के साथ कोई (और) पूज्य है? बहुत उच्च है अल्लाह उससे जो वे साझी ठहराते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh kaun hai jo khushki aur samandar ki tareekiyon (darkness) mein tumko raasta dikhata hai aur kaun apni rehmat ke aagey hawaon ko khush khabri lekar bhejhta hai? Kya Allah ke saath koi dusra khuda bhi (yeh kaam karta) hai? Bahut baala o bartar hai Allah us shirk se jo yeh log karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh jo tumhen khushki aur tari ki tareekiyon mein raah dikhata hai aur jo apni rehmat say pehlay hi khushkhabriyan denay wali hawayen chalata hai kiya Allah kay sath koi aur mabood bhi hai jinhen yeh shareek kertay hain unn sab say Allah buland-o-bala-tar hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वो कौन है जो खुशियों और समंदर की तरीकियों में तुमको रास्ता दिखता है और कौन अपनी रहमत के आगे हवाओं को खुश खबरी लेकर भेजता है? क्या अल्लाह के साथ कोई दूसरा खुदा भी (ये काम करता) है? बहुत बाला ओ बरतर है अल्लाह हमसे शिर्क से जो ये लोग करते हैं
عَرَبِيأَمَّن يَبدَأُ الخَلقَ ثُمَّ يُعيدُهُ وَمَن يَرزُقُكُم مِنَ السَّماءِ وَالأَرضِ ۗ أَإِلٰهٌ مَعَ اللَّهِ ۚ قُل هاتوا بُرهانَكُم إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)या वह जो सृष्टि का आरंभ करता है, फिर उसे दोहराता है, और जो तुम्हें आकाश और धरती से जीविका देता है? क्या अल्लाह के साथ कोई (और) पूज्य है? कह दीजिए : लाओ अपना प्रमाण, यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh kaun hai jo khalq (creation) ki ibtida (orignate) karta aur phir uska iaada (reproduce) karta hai. Aur kaun tumko aasmaan aur zameen se rizq deta hai? Kya Allah ke saath koi aur khuda bhi (in kaamon mein hissedar) hai? Kaho ke laao apni daleel agar tum sachhey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh jo makhlooq ki awwal dafa pedaeesh kerta hai phir ussay lotaye ga aur jo tumhen aasman aur zamin say roziyan dey raha hai kiya Allah kay sath koi aur mabood hai keh dijiye kay agar sachay hoto apni daleel lao
Devnagri Urdu (Maududi)और वो कौन है जो ख़ल्क़ (सृष्टि) की इब्तिदा (उत्पत्ति) करता है और फिर उसका इयादा (पुनः प्रस्तुत) करता है। और कौन तुमको आसमान और ज़मीन से रिज़क देता है? क्या अल्लाह के साथ कोई और खुदा भी है? कहो के लाओ अपनी दलील अगर तुम सच्चे हो
عَرَبِيقُل لا يَعلَمُ مَن فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ الغَيبَ إِلَّا اللَّهُ ۚ وَما يَشعُرونَ أَيّانَ يُبعَثونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : अल्लाह के सिवा, आकाशों और धरती में जो भी है, ग़ैब (परोक्ष की बात) नहीं जानता और वे नहीं जानते कि वे कब उठाये जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Inse kaho, Allah ke siwa aasmano aur zameen mein koi gaib ka ilam nahin rakhta, aur woh nahin jaante ke kab woh uthaye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay aasmano walon mein say zamin walon mein say siwaye Allah kay koi ghaib nahi janta unhen to yeh bhi nahi maloom kay kab utha kharay kiye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, अल्लाह के सिवा आसमान और ज़मीन में कोई गैब का इलम नहीं रखता, और वो नहीं जानता के कब वो उठेगा
عَرَبِيبَلِ ادّارَكَ عِلمُهُم فِي الآخِرَةِ ۚ بَل هُم في شَكٍّ مِنها ۖ بَل هُم مِنها عَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि आख़िरत (परलोक) के विषय में उनका ज्ञान समाप्त हो गया है। बल्कि वे उसके बारे में संदेह में हैं। बल्कि वे उससे अंधे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Balke aakhirat ka to ilam hi in logon se ghum ho gaya hai, balke yeh uski taraf se shakk mein hain, balke yeh ussey andhey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay aakhirat kay baray mein unn ka ilm khatam ho chuka hai bulkay yeh iss ki taraf say shak mein hain. Bulkay yeh iss say andhay hain
Devnagri Urdu (Maududi)बलके आख़िरत का तो इलम ही इन लोगों से ग़म हो गया है, बलके ये उसकी तरफ से शक्क में हैं, बलके ये उसे अंधे हैं
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ كَفَروا أَإِذا كُنّا تُرابًا وَآباؤُنا أَئِنّا لَمُخرَجونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन लोगों ने कहा जिन्होंने कुफ़्र किया : क्या जब हम मिट्टी हो जाएँगे और हमारे बाप-दादा भी, तो क्या सचमुच हम अवश्य निकाले जाने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Yeh munkireen kehte hain “kya jab hum aur hamare baap dada mitti ho chuke honge to humein waqayi qabaron se nikala jayega?”
Roman Urdu (Junagarhi)Kafiron ney kaha kay kiya jab hum mitti ho jayen gay aur humaray baap dada bhi kiya hum phir nikalay jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये मुन्किरें कहते हैं "क्या जब हम और हमारे बाप दादा मिट्टी हो चुके होंगे तो हमें वक़्ती क़बरों से निकला जायेगा?”
عَرَبِيلَقَد وُعِدنا هٰذا نَحنُ وَآباؤُنا مِن قَبلُ إِن هٰذا إِلّا أَساطيرُ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय इससे पहले हमसे यह वादा किया गया और हमारे बाप-दादा से भी, ये तो बस पहले लोगों की काल्पनिक कहानियाँ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh khabrein humko bhi bahut di gayi hain aur pehle hamare aabaa o ajdaad ko bhi di jaati rahi hain, magar yeh bas afsane hi afsane hain jo agle waqton se sunte chale aa rahey hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Hum aur humaray baap dadon ko boht pehlay say yeh waday diye jatay rahey. Kuch nahi yeh to sirf aglon kay afsaney hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये खबरें हमको भी बहुत दी हैं और पहले हमारे आबा ओ अजदाद को भी दी जाती रही हैं, मगर ये बस अफसाने ही अफसाने हैं जो अगले वक्त से सुनते चले आ रहे हैं”
عَرَبِيقُل سيروا فِي الأَرضِ فَانظُروا كَيفَ كانَ عاقِبَةُ المُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)कह दीजिए : धरती में चलो-फिरो, फिर देखो अपराधियों का परिणाम कैसा हुआ!
Roman Urdu (Maududi)Kaho, zara zameen mein chal phir kar dekho ke mujreemo ka kya anjaam ho chuka hai
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay zamin mein chal phir ker zara dekho to sahi kay gunehgaron ka kaisa anjam hua
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, जरा जमीन में चल फिर कर देखो के मुजरेमो का क्या अंजाम हो चुका है
عَرَبِيوَلا تَحزَن عَلَيهِم وَلا تَكُن في ضَيقٍ مِمّا يَمكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आप उनपर शोक न करें और न उससे किसी संकीर्णता में हों, जो वे चाल चलते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), inke haal par ranjh na karo aur na inki chaalon par dil tangg ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap inn kay baray mein ghum na keren aur inn kay dao ghaat say tang dil na hon
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), इनके हाल पर रांझ ना करो और ना इनकी चालों पर दिल तंग हो
عَرَبِيوَيَقولونَ مَتىٰ هٰذَا الوَعدُ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे कहते हैं : कब पूरा होगा यह वादा, यदि तुम सच्चे हो?
Roman Urdu (Maududi)Woh kehte hain ke “yeh dhamki kab poori hogi agar tum sacchey ho?”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehtay hain kay yeh wada kab hai agar sachay ho to batla do
Devnagri Urdu (Maududi)वो कहते हैं के "ये धमकी कब पूरी होगी अगर तुम सच्चे हो?"
عَرَبِيقُل عَسىٰ أَن يَكونَ رَدِفَ لَكُم بَعضُ الَّذي تَستَعجِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : क़रीब है कि उसका कुछ भाग तुम्हारे पीछे आ पहुँचा हो, जो तुम जल्दी माँग रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, kya ajab ke jis azaab ke liye tum jaldi macha rahey ho uska ek hissa tumhare qareeb hi aa laga ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jawab dijiye! kay shayad baaz woh cheezen jin ki tum jaldi macha rahey ho tum say boht hi qareen hogaee hon
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, क्या अजब के लिए तुम जल्दी मचा रहे हो उसका एक हिसा तुम्हारे करीब ही आ लगा हो
عَرَبِيوَإِنَّ رَبَّكَ لَذو فَضلٍ عَلَى النّاسِ وَلٰكِنَّ أَكثَرَهُم لا يَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह आपका पालनहार निश्चय लोगों पर बड़ा अनुग्रह करने वाला है। किंतु उनमें से अधिकतर लोग शुक्र नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke tera Rubb to logon par bada fazal farmane wala hai, magar aksar log shukar nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan aap ka perwerdigar tamam logon per baray hi fazal wala hai lekin aksar log na-shukri kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के तेरा रब तो लोगों पर बड़ा फजल फरमाने वाला है, मगर अक्सर लोग शुक्र नहीं करते
عَرَبِيوَإِنَّ رَبَّكَ لَيَعلَمُ ما تُكِنُّ صُدورُهُم وَما يُعلِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह आपका पालनहार निश्चय जानता है जो कुछ उनके सीने छिपाते हैं और जो कुछ वे प्रकट करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Bila shubha tera Rubb khoob jaanta hai jo kuch unke seenay apne andar chupaye huey hain aur jo kuch woh zaahir karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak aap ka rab unn cheezon ko bhi janta hai jinhen unn kay seenay chupa rahey hain aur jinhen zahir ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)बिला शुभा तेरा रुब खूब जानता है जो कुछ उनके सीने अपने अंदर छिपाए हुए हैं और जो कुछ वो जाहिर करते हैं
عَرَبِيوَما مِن غائِبَةٍ فِي السَّماءِ وَالأَرضِ إِلّا في كِتابٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और आकाश तथा धरती में कोई छिपी चीज़ नहीं, परंतु वह एक स्पष्ट किताब में मौजूद है।
Roman Urdu (Maududi)Aasmaan o zameen ki koi posheeda cheez aisi nahin hai jo ek wazeh kitaab mein likhi hui maujood na ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aasman-o-zamin ki koi posheeda cheez bhi aisi nahi jo roshan aur khulli kitab mein na ho
Devnagri Urdu (Maududi)आसमान ओ ज़मीन की कोई पोशीदा चीज़ ऐसी नहीं है जो एक वाज़ेह किताब में लिखी हुई मौजुद ना हो
عَرَبِيإِنَّ هٰذَا القُرآنَ يَقُصُّ عَلىٰ بَني إِسرائيلَ أَكثَرَ الَّذي هُم فيهِ يَختَلِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यह क़ुरआन इसराईल की संतान के सामने अधिकतर वे बातें वर्णन करता है, जिनमें वे मतभेद करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh waqia hai ke yeh Quraan bani Israel ko aksar un baaton ki haqeeqat batata hai jin mein woh ikhtilaf rakhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeena yeh quran bani israeel kay samney unn aksar cheezon ka biyan ker raha hai jin mein yeh ikhtilaf kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये वाक़िया है के ये कुरान बानी इजराइल को अक्सर उन बातों की हकीकत बताता है जिनमें वो इख्तिलाफ रखते हैं
عَرَبِيوَإِنَّهُ لَهُدًى وَرَحمَةٌ لِلمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह वह निश्चय ईमान वालों के लिए सर्वथा मार्गदर्शन तथा दया है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh hidayat aur rehmat hai iman laney walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh quran eman walon kay liye yaqeenan hidayat aur rehmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये हिदायत और रहमत है ईमान लाने वालों के लिए
عَرَبِيإِنَّ رَبَّكَ يَقضي بَينَهُم بِحُكمِهِ ۚ وَهُوَ العَزيزُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आपका पालनहार उनके बीच अपने आदेश से निर्णय कर देगा तथा वही सब पर प्रभुत्वशाली, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan (isi tarah) tera Rubb in logon ke darmiyan bhi apne hukum se faisla kardega. Aur woh zabardast aur sab kuch jaan-nay wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ka rab unn kay darmiyan apnay hukum say sab faislay ker dey ga woh bara hi ghalib aur dana hai
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन (इसी तरह) तेरा रब इन लोगों के दरमियान भी अपने हुकुम से फैसला करडेगा. और वो ज़बरदस्त और सब कुछ जान-नय वाला है
عَرَبِيفَتَوَكَّل عَلَى اللَّهِ ۖ إِنَّكَ عَلَى الحَقِّ المُبينِ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप अल्लाह पर भरोसा करें। निश्चय आप स्पष्ट सत्य पर हैं।
Roman Urdu (Maududi)Pas aey Nabi, Allah par bharosa rakkho, yaqeenan tum sareeh haqq par ho
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap yaqeenan Allah hi per bharosa rakhiye yaqeenan aap sachay aur khullay deen per hain
Devnagri Urdu (Maududi)पास ऐ नबी, अल्लाह पर भरोसा रखो, यकीनन तुम सारे हक़ पर हो
عَرَبِيإِنَّكَ لا تُسمِعُ المَوتىٰ وَلا تُسمِعُ الصُّمَّ الدُّعاءَ إِذا وَلَّوا مُدبِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आप मुर्दों को नहीं सुना सकते और न बहरों को अपनी पुकार सुना सकते, जब वे पीठ फेरकर पलट जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Tum murdon ko nahin suna sakte, na un behron tak apni pukar pahuncha sakte ho jo peeth phair kar bhaagey ja rahey hon
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak aap murdon ko nahi suna saktay hain aur na behron ko apni pukar suna saktay hain jabkay woh peeth pheray roo gardaan ja rahey hon
Devnagri Urdu (Maududi)तुम मुर्दों को नहीं सुना सकते, ना उन दिलों तक अपनी पुकार रख सकते हो जो पीठ फेर कर भागे जा रहे होन
عَرَبِيوَما أَنتَ بِهادِي العُميِ عَن ضَلالَتِهِم ۖ إِن تُسمِعُ إِلّا مَن يُؤمِنُ بِآياتِنا فَهُم مُسلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा न आप कभी अंधों को उनकी गुमारही से हटाकर सीधे मार्ग पर लाने वाले हैं। आप तो बस उन्हीं को सुना सकते हैं, जो हमारी आयतों पर ईमान रखते हैं। सो वही आज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur na andhon ko raasta bata kar bhatakne se bacha sakte ho. Tum to apni baat unhi logon ko suna sakte ho jo hamari aayat par iman latey hain aur phir farmabardaar ban jatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na aap andhon ko unn ki gumrahee say hata ker rehnumaee ker saktay hain aap to sirf unhen suna saktay hain jo humari aayaton per eman laye hain phir woh farmanbardaar ho jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और ना अंधों को रास्ता बता कर भटकने से बच सकते हैं। तुम तो अपनी बात उन्ही लोगों को सुना सकते हो जो हमारी आयत पर ईमान लाते हैं और फिर फरमाबरदार बन जाते हैं
عَرَبِي۞ وَإِذا وَقَعَ القَولُ عَلَيهِم أَخرَجنا لَهُم دابَّةً مِنَ الأَرضِ تُكَلِّمُهُم أَنَّ النّاسَ كانوا بِآياتِنا لا يوقِنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब उनपर बात पूरी हो जाएगी, तो हम उनके लिए धरती से एक पशु निकालेंगे, जो उनसे बात करेगा कि निश्चय लोग हमारी आयतों पर विश्वास नहीं करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab hamari baat poori hone ka waqt unpar aa pahunchega to hum unke liye ek jaanwar zameen se nikalenge jo unse kalaam karega ke log hamari aayat par yaqeen nahin karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Jab unn kay upper azab ka wada sabit hojaye ga hum zamin say unn kay liye aik janwar nikalen gay jo unn say batein kerta hoga kay log humari aayaton per yaqeen nahi kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और जब हमारी बात पूरी होने का वक्त सामने आ जाएगा तो हम उनके लिए एक जानवर जमीन से निकालेंगे जो उनसे कलाम करेगा के लोग हमारी आयत पर यकीन नहीं करते थे
عَرَبِيوَيَومَ نَحشُرُ مِن كُلِّ أُمَّةٍ فَوجًا مِمَّن يُكَذِّبُ بِآياتِنا فَهُم يوزَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिस दिन हम प्रत्येक समुदाय में से उन लोगों का एक गिरोह एकत्र करेंगे, जो हमारी आयतों को झुठलाया करते थे, फिर उन्हें श्रेणियों में बांटा जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur zara tasavvur karo us din ka jab hum har ummat mein se ek fauj ki fauj un logon ki gher layenge jo hamari aayat ko jhutlaya karte thay, phir unko (unki aqsaam (classification and merit) ke lihaz se darja ba darja) murattab (arrange) kiya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss din her ummat mein say unn logon kay giroh ko jo humari aayaton ko jhutlatay thay gher ghaar ker layen gay phir woh sab kay sab alaga ker diye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जरा तसव्वुर करो उस दिन का जब हम हर उम्मत में से एक फौज की फौज उन लोगों की घेर लाएंगे जो हमारी आयत को झुटलाया करते हैं था, फिर उनको (उनकी अक्साम (वर्गीकरण और योग्यता) के लिहाज़ से दर्जा बा दर्जा) मुरत्तब (व्यवस्थित) किया जाएगा
عَرَبِيحَتّىٰ إِذا جاءوا قالَ أَكَذَّبتُم بِآياتي وَلَم تُحيطوا بِها عِلمًا أَمّاذا كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि जब वे आ जाएँगे, तो (अल्लाह) फरमाएगा : क्या तुमने मेरी आयतों को झुठला दिया, हालाँकि तुमने उनका पूर्ण ज्ञान प्राप्त नहीं किया था, या क्या था जो तुम किया करते थे?
Roman Urdu (Maududi)Yahan tak ke jab sab aa jayenge to (unka Rubb unse) puchega ke “tumne meri aayat ko jhutla diya halaanke tumne unka ilmi ihata (comprehend) na kiya tha? Agar yeh nahin to aur tum kya kar rahey thay?”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab sab kay sab aa phonchen gay to Allah Taalaa farmaye ga kay tum ney meri aayaton ko bawajood yeh kay tumhen unn ka poora ilm na tha kiyon jhutlaya? Aur yeh bhi batlao kay tum kiya kuch kertay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)यहां तक ​​के जब सब आ जाएंगे तो (उनका रब उनसे) पूछेगा के “तुमने मेरी आयत को झूठला दिया हलांके तुमने उनका इल्मी इहाता (समझे) ना किया था? अगर ये नहीं तो तुम क्या कर रहे थे?”
عَرَبِيوَوَقَعَ القَولُ عَلَيهِم بِما ظَلَموا فَهُم لا يَنطِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनपर (यातना की) बात सिद्ध हो जाएगी, उसके बदले जो उन्होंने अत्याचार किया, सो वे बोल न सकेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur unke zulm ki wajah se azaab ka wada unpar poora ho jayega, tab woh kuch bhi na bol sakenge
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-sabab iss kay kay unhon ney zulm kiya tha unn per baat jum jayegi aur woh kuch na bol saken gay
Devnagri Urdu (Maududi)और उनके ज़ुल्म की वजह से अज़ाब का वादा उन पर पूरा हो जाएगा, तब वो कुछ भी ना बोल पाएंगे
عَرَبِيأَلَم يَرَوا أَنّا جَعَلنَا اللَّيلَ لِيَسكُنوا فيهِ وَالنَّهارَ مُبصِرًا ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِقَومٍ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने रात बनाई, ताकि वे उसमें आराम करें तथा दिन को प्रकाशमान (बनाया)। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो ईमान लाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya unko soojhayi na deta tha ke humne raat unke liye sukoon haasil karne ko banayi thi aur din ko roshan kiya tha? Isi mein bahut nishaniyan thi un logon ke liye jo iman latey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh dekh nahi rahey hain kay hum ney raat ko iss liye banaya hai kay woh iss mein aaram hasil kerlen aur din ko hum ney dikhlaney wala banaya hai yaqeenan iss mein unn logon kay liye nishaniyan hain jo emaan-o-yaqeen rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या उनको समझ में नहीं आता था कि हमने रात उनके लिए सुकून हासिल करने को बनाई थी और दिन को रोशन किया था? इसी में बहुत निशानियां थी उन लोगों के लिए जो ईमान लाते थे
عَرَبِيوَيَومَ يُنفَخُ فِي الصّورِ فَفَزِعَ مَن فِي السَّماواتِ وَمَن فِي الأَرضِ إِلّا مَن شاءَ اللَّهُ ۚ وَكُلٌّ أَتَوهُ داخِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन सूर (नरसिंघा) में फूँका जाएगा, तो जो भी आकाशों में है और जो भी धरती में है, घबरा जाएगा, सिवाय उसके जिसे अल्लाह चाहे। तथा वे सब उसके पास अपमानित होकर आएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur kya guzregi us roz jabke sur/soor (trumphet) phunka jaayega aur haul(terror) kha jayenge woh sab jo aasmaano aur zameen mein hain, siwaye un logon ke jinhein Allah is haul(terror) se bachana chahega. Aur sab kaan dabaye uske huzoor hazir ho jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din soor phooka jayega tum sab kay sab aasmanon walay aur zmain walay ghabra uthen gay magar jissay Allah Taalaa chahaye aur saray kay saray aajiz-o-pust ho ker uss kay samney hazir hongay
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या गुजरेगी हमें रोज जबके सुर/सूर (तुरही) फुनका जाएगा और आतंक खा जाएंगे वो सब जो आसमान और जमीन में हैं, सिवाय उन लोगों के जिनमें अल्लाह है हौल (आतंकवाद) से बचना चाहेगा। और सब कान दबाये उसके हुज़ूर हाज़िर हो जायेंगे
عَرَبِيوَتَرَى الجِبالَ تَحسَبُها جامِدَةً وَهِيَ تَمُرُّ مَرَّ السَّحابِ ۚ صُنعَ اللَّهِ الَّذي أَتقَنَ كُلَّ شَيءٍ ۚ إِنَّهُ خَبيرٌ بِما تَفعَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम पर्वतों को देखोगे, उन्हें समझोगे कि वे जमे हुए हैं, हालाँकि वे बादलों के चलने की तरह चल रहे होंगे, उस अल्लाह की कारीगरी से जिसने हर चीज़ को मज़बूत बनाया। निःसंदेह वह उससे भली-भाँति सूचित है जो तुम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aaj tu pahadon ko dekhta hai aur samajhta hai ke khoob jamey huey hain, magar us waqt yeh baadalon ki tarah udh rahey honge, yeh Allah ki qudrat ka karishma hoga jisne har cheez ko hikmat ke saath ustwar (ordered with wisdom) kiya hai. Woh khoob jaanta hai ke tumlog kya karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aap paharon ko dekh ker apni jagah jamay huye khayal kertay hain lekin woh bhi badal ki tarah urtay phiren gay yeh hai san’at Allah ki jiss ney her cheez ko mazboot banaya hai jo kuch tum kertay ho uss say woh ba-khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)आज तू पहाड़ों को देखता है और समझता है कि खूब जमे हुए हैं, मगर हमें वक़्त ये बादलों की तरह उड़ रहे होंगे, ये अल्लाह की क़ुदरत का करिश्मा होगा जिसने हर चीज़ को हिकमत के साथ उस्तवार (के साथ आदेश दिया) बुद्धि) किया है. वो खूब जानता है के तुमलोग क्या करते हो
عَرَبِيمَن جاءَ بِالحَسَنَةِ فَلَهُ خَيرٌ مِنها وَهُم مِن فَزَعٍ يَومَئِذٍ آمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो व्यक्ति नेकी लेकर आएगा, तो उसके लिए उससे उत्तम प्रतिफल है और ये लोग उस दिन के भय से सुरक्षित होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jo shaks bhalayi lekar aayega usey ussey zyada behtar sila milega aur aisey log us din ke haul (terror/dehshat) se mehfooz hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log nek amal layen gay unhen uss say behtar badla milay ga aur woh uss din ki ghabrahat say bey khof hongay
Devnagri Urdu (Maududi)जो शक्स भलाई लेकर आएगा उसे ज्यादा बेहतर सिला मिलेगा और ऐसे लोग उस दिन के हॉल (आतंक/देहशत) से महफूज होंगे
عَرَبِيوَمَن جاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَكُبَّت وُجوهُهُم فِي النّارِ هَل تُجزَونَ إِلّا ما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो बुराई लेकर आएगा, तो उनके चेहरे आग में औंधे डाले जाएँगे। तुम उसी का बदला दिए जाओगे, जो तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo burayi liye huey aayega, aisey sab log aundhey mooh aag mein phenke jayenge. Kya tumlog iske siwa koi aur jaza paa sakte ho ke jaisa karo waisa bharo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo buraee ley ker aayen gay woh ondhay mun aag mein jhonk diye jayen gay. Sirf wohi badla diye jao gay jo tum kertay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)और जो बुराई के लिए हुए आएंगे, ऐसे सब लोग औंधे मुंह आग में फेंक जायेंगे. क्या तुमलोग इसके सिवा कोई और जजा पा सकते हो जैसा करो वैसा भरो
عَرَبِيإِنَّما أُمِرتُ أَن أَعبُدَ رَبَّ هٰذِهِ البَلدَةِ الَّذي حَرَّمَها وَلَهُ كُلُّ شَيءٍ ۖ وَأُمِرتُ أَن أَكونَ مِنَ المُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)मुझे तो बस यही आदेश दिया गया है कि मैं इस नगर (मक्का) के पालनहार की इबादत करूँ, जिसने इसे पवित्र (सम्मानित) बनाया है तथा उसी के लिए हर चीज़ है और मुझे आदेश दिया गया है कि मैं आज्ञाकारियों में से हो जाऊँ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad, Insey kaho) “Mujhey to yahi hukum diya gaya hai ke is shehar ke Rubb ki bandagi karoon jisne isey haram (sacred) banaya hai, aur jo har cheez ka maalik hai. Mujhey hukum diya gaya hai ke main Muslim ban kar rahoon
Roman Urdu (Junagarhi)Mujhay to bus yehi hukum diya gaya hai kay mein iss shehar kay perwerdigar ki ibadat kerta rahon jiss ney issay hurmat wala banaya hai jiss ki milkiyat her cheez hai aur mujhay yeh bhi farmaya gaya hai kay mein farmanbardaron mein say ho jaon
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद, इनसे कहो) "मुझे तो यहीं हुकुम दिया है के इस शहर के रब की बंदगी करूं जिसने इसे हराम (पवित्र) बनाया है, और जो हर चीज का मालिक है। मुझे।" हुकुम दिया गया है के मैं मुस्लिम बन कर रहूं
عَرَبِيوَأَن أَتلُوَ القُرآنَ ۖ فَمَنِ اهتَدىٰ فَإِنَّما يَهتَدي لِنَفسِهِ ۖ وَمَن ضَلَّ فَقُل إِنَّما أَنا مِنَ المُنذِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यह कि मैं क़ुरआन पढ़कर सुनाऊँ। फिर जो सीधी राह पर आया, वह अपने ही लिए राह पर आता है और जो गुमराह हुआ, तो आप कह दें कि मैं तो बस डराने वालों में से हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh Quran padh kar sunaoon” ab jo hidayat ikhtiyar karega woh apne hi bhale ke liye hidayat ikhtiyar karega, aur jo gumraah ho ussey kehdo main to bas khabardaar kardene wala hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mein quran ki tilawat kerta rahon jo raah-e-raast per aajaye woh apnay nafay kay liye raah-e-raast per aayega. Aur jo behak jaye to keh dijiye! kay mein to sirf hoshiyaar kerney walon mein say hun
Devnagri Urdu (Maududi)और ये कुरान पढ़ कर सुनाऊं” अब जो हिदायत इख्तियार करेगा वो अपने ही भले के लिए हिदायत इख्तियार करेगा, और जो गुमराह हो उसे कहदो मैं तो बस खबरदार करने वाला हूं
عَرَبِيوَقُلِ الحَمدُ لِلَّهِ سَيُريكُم آياتِهِ فَتَعرِفونَها ۚ وَما رَبُّكَ بِغافِلٍ عَمّا تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप कह दें : सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है। वह जल्द ही तुम्हें अपनी निशानियाँ दिखाएगा, तो तुम उन्हें पहचान लोगे और तुम्हारा पालनहार उससे बेखबर नहीं है, जो कुछ तुम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho, tareef Allah hi ke liye hai, ankareeb woh tumhein apni nishaniyan dikha dega aur tum unhein pehchan logey, aur tera Rubb bay-khabar nahin hai un aamal se jo tum log karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! kay tamam tareefen Allah hi ko saza waar hain woh un-qareeb apni nishaniyan dikhaye ga jinhen tum (khud) pehchan lo gay aur jo kuch tum kertay ho uss say aap ka rab ghafil nahi
Devnagri Urdu (Maududi)इंसे कहो, तारीफ अल्लाह ही के लिए है, अनकरीब वो तुम्हें अपनी निशानियां दिखा देगा और तुम उन्हें पहचान लोगे, और तेरा रब बे-खबर नहीं है उन अमल से जो तुम लोग करते हो
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Surah 27: An-Naml (The Naml)

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Surah 27: An-Naml (The Naml)

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Surah 27: An-Naml (The Naml)

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Surah 27: An-Naml (The Naml)

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Surah 27: An-Naml (The Naml)

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Surah 28: Al-Qasas (The Narrative)

Meccan🕐 Revelation #49📜 88 Verses🕮 Juz 1
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Surah 28: Al-Qasas (The Narrative)

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Surah 28: Al-Qasas (The Narrative)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيطسم
हिन्दी (Al-Omari)ता, सीन, मीम।
Roman Urdu (Maududi)Taa seen Meem
Roman Urdu (Junagarhi)Tuaa-Seen-Meem
Devnagri Urdu (Maududi)ता सीन मीम
عَرَبِيتِلكَ آياتُ الكِتابِ المُبينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ये स्पष्ट किताब की आयतें हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh kitaab e mubeen(clear book) ki aayat hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh aayaten hain roshan kitab ki
Devnagri Urdu (Maududi)ये किताब ए मुबीन (साफ़ किताब) की आयत हैं
عَرَبِينَتلو عَلَيكَ مِن نَبَإِ موسىٰ وَفِرعَونَ بِالحَقِّ لِقَومٍ يُؤمِنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हम आपको मूसा तथा फ़िरऔन के कुछ समाचार सच्चाई के साथ सुनाते हैं, उन लोगों के लिए जो ईमान रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hum Moosa aur Firoun ka kuch haal theek theek tumhein sunate hain aisey logon ke faiyde ke liye jo iman layein
Roman Urdu (Junagarhi)Hum aap kay samney musa aur firaon ka sahih waqiya biyan kertay hain unn logon kay liye jo eman rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हम मूसा और फिरौन का कुछ हाल ठीक ठीक तुम्हें सुनाते हैं ऐसे लोगों के फ़ायदे के लिए जो ईमान लायें
عَرَبِيإِنَّ فِرعَونَ عَلا فِي الأَرضِ وَجَعَلَ أَهلَها شِيَعًا يَستَضعِفُ طائِفَةً مِنهُم يُذَبِّحُ أَبناءَهُم وَيَستَحيي نِساءَهُم ۚ إِنَّهُ كانَ مِنَ المُفسِدينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह फ़िरऔन ने धरती में सरकशी की और उसके वासियों को कई समूहों में विभाजित कर दिया। जिनमें से एक समूह को वह बहुत कमज़ोर कर रहा था, उनके बेटों का बुरी तरह से वध कर देता और उनकी महिलाओं को जीवित रहने देता था। निःसंदेह वह बिगाड़ पैदा करने वालों में से था।
Roman Urdu (Maududi)Waqia yeh hai ke Firoun ne zameen mein sarkashi ki aur uske bashindon ko girohon mein taseem kardiya, un mein se ek giroh ko woh zaleel karta tha, iske ladkon ko qatal karta aur uski ladkiyon ko jeeta (zinda) rehne deta tha. Fil waqai woh mufsid (mischief-makers) logon mein se tha
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan firaon ney zamin mein sirkashi ker rakhi thi aur wahan kay logon ko giroh giroh bana rakha tha aur unn mein say aik firqay ko kamzor ker rakha tha aur unn kay larkon ko to zibah ker dalta tha aur unn ki larkiyon ko zinda chor deta tha. Be-shak-o-shuba woh tha hi mufisdon mein say
Devnagri Urdu (Maududi)वक़िया ये है के फिरौन ने ज़मीन में सरकशी की और उसके बाशिन्दों को गिरोहों में तस्सीम करदिया, उन मेरे से एक गिरोह को वो ज़लील करता था, इसके लड़कों को क़त्ल करता था और उसकी लड़कियों को जीता (जिंदा) रहने देता था। फिल वकै वो मुफसिद (शरारत करने वाले) लोगों में से थे
عَرَبِيوَنُريدُ أَن نَمُنَّ عَلَى الَّذينَ استُضعِفوا فِي الأَرضِ وَنَجعَلَهُم أَئِمَّةً وَنَجعَلَهُمُ الوارِثينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा हम चाहते थे कि हम उन लोगों पर उपकार करें, जिन्हें धरती में बहुत कमज़ोर कर दिया गया तथा उन्हें अगुआ बनाएँ और उन्हीं को वारिस बनाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur hum yeh irada rakhte thay ke meharbani karein un logon par jo zameen mein zaleel karke rakkhey gaye thay, aur unhein peshwa(leaders) bana dein, aur unhi ko waris banayein
Roman Urdu (Junagarhi)Phir humari chahat hui kay hum unn per karam farmayen jinhen zamin mein bey hadd kamzor ker diya gaya tha aur hum unhin ko paishwa aur (zamin) ka waris banayen
Devnagri Urdu (Maududi)और हम ये इरादा रखते थे के मेहरबानी करें उन लोगों पर जो जमीन में जलील करके रख दिए गए थे, और उन्हें पेशवा (नेता) बना दें, और उन्हें वारिस बनाएं
عَرَبِيوَنُمَكِّنَ لَهُم فِي الأَرضِ وَنُرِيَ فِرعَونَ وَهامانَ وَجُنودَهُما مِنهُم ما كانوا يَحذَرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्हें धरती में सत्ता प्रदान कर दें और फ़िरऔन तथा हामान और उनकी सेनाओं को उनकी ओर से वह सब दिखाएँ जिससे वे डरते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur zameen mein unko iqtedar(power) bakshein, aur unse Firoun o Hamaan aur unke lashkaron ko wahi kuch dikhla dein jiska unhein darr tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh bhi kay hum unhen zamin mein qudrat-o-ikhtiyar den aur firaon aur haamaan aur unn kay lashkeron ko woh dikhayen jiss say woh darr rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)और ज़मीन में उनको इक्तेदार (शक्ति) बख्शें, और उनसे फिरौन ओ हमान और उनके लश्करों को वही कुछ दिखला दे जिसका उन्हें डर था
عَرَبِيوَأَوحَينا إِلىٰ أُمِّ موسىٰ أَن أَرضِعيهِ ۖ فَإِذا خِفتِ عَلَيهِ فَأَلقيهِ فِي اليَمِّ وَلا تَخافي وَلا تَحزَني ۖ إِنّا رادّوهُ إِلَيكِ وَجاعِلوهُ مِنَ المُرسَلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने मूसा की माँ की ओर वह़्य की कि उसे दूध पिला, फिर जब तुझे उसके बारे में भय हो, तो उसे दरिया में डाल दे और न डर और न शोक कर। निःसंदेह हम उसे तेरी ओर वापस लाने वाले हैं और उसे रसूलों में से बनाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Humne Moosa ki Maa ko ishara kiya ke “Isko doodh pila, phir jab tujhey uski jaan ka khatra ho to isey dariya mein daal de aur kuch khauf aur gham na kar, hum isey terey hi paas wapas le aayenge, aur isko paighambaron mein shamil karenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney musa (alh-e-salam) ki maa ko wahee ki kay issay doodh pilati reh aur jab tujhay iss ki nisbat koi khof maloom hoto issay darya mein baha dena aur koi darr khof ya ranj ghum na kerna hum yaqeenan issay tumhari taraf lotaney walay hain aur issay apnay payghumbaron mein bananey walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हमने मूसा की मां को इशारा किया के "इसको दूध पिला, फिर जब तुझे उसकी जान का खतरा हो तो इसे दरिया में डाल दे और कुछ खौफ और गम ना कर, हम इसे तेरे ही पास वापस ले आएंगे, और इसको पैगम्बरों में शामिल करेंगे"
عَرَبِيفَالتَقَطَهُ آلُ فِرعَونَ لِيَكونَ لَهُم عَدُوًّا وَحَزَنًا ۗ إِنَّ فِرعَونَ وَهامانَ وَجُنودَهُما كانوا خاطِئينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो फ़िरऔन के घर वालों ने उसे उठा लिया, ताकि अंत में वह उनका शत्रु और शोक का कारण ठहरे। निःसंदेह फ़िरऔन तथा हामान और उनकी सेनाएँ पापी थीं।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar Firoun ke ghar walon ne usey (dariya se) nikal liya taa-ke woh unka dushman aur unke liye sabab e ranj baney. Waqayi Firoun aur Hamaan aur uske lashkar (apni tadbeer mein ) baday galat-kaar thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aakhir firaon kay logon ney iss bachay ko utha liya kay aakhir kaar yehi bacha inn ka dushman hua aur inn kay ranj ka baees bana kuch shak nahi kay firaon aur haamaan aur unn kay lashkar thay hi khata kaar
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार फ़िरौन के घर वालों ने उसे (दरिया से) निकाल लिया ता-के वो उनका दुश्मन और उनके लिए सबाब ए रंज बने। वक़ाई फिरौन और हमान और उसके लश्कर (अपनी तदबीर में) बदाए गलत-कार थे
عَرَبِيوَقالَتِ امرَأَتُ فِرعَونَ قُرَّتُ عَينٍ لي وَلَكَ ۖ لا تَقتُلوهُ عَسىٰ أَن يَنفَعَنا أَو نَتَّخِذَهُ وَلَدًا وَهُم لا يَشعُرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और फ़िरऔन की पत्नी ने कहा : यह मेरी तथा तेरी आँखों की ठंडक है। इसे क़त्ल न करो। आशा है कि वह हमें लाभ पहुँचाए, या हम उसे पुत्र बना लें और वे समझते न थे।
Roman Urdu (Maududi)Firoun ki biwi ne (ussey) kaha “yeh mere aur tere liye aankhon ki thandak hai, isey qatal na karo, kya ajab ke yeh hamare liye mufeed saabit ho, ya hum isey beta hi bana lein.” Aur woh (anjaam se) bekhabar thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur firaon ki biwi ney kaha kay yeh to teri aur meri aankhon ki thandak hai issay qatal na kero boht mumkin hai kay yeh humen koi faeeda phonchaye ya hum issay apna hi beta bana len aur yeh log shaoor hi na rakhtay thay
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौन की बीवी ने (उससे) कहा "ये मेरे और तेरे लिए आँखों की ठंडक है, इसे क़त्ल न करो, क्या अजब के ये हमारे लिए मुफीद साबित हो, या हम इसे बेटा ही बना लें।” और वो (अंजाम से) बेखबर थाय
عَرَبِيوَأَصبَحَ فُؤادُ أُمِّ موسىٰ فارِغًا ۖ إِن كادَت لَتُبدي بِهِ لَولا أَن رَبَطنا عَلىٰ قَلبِها لِتَكونَ مِنَ المُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और मूसा की माता का दिल (मूसा की याद के सिवा हर चीज़ से) खाली हो गया। निश्चय वह क़रीब थी कि उसे प्रकट कर देती, यदि हम उसके दिल को मज़बूत कर उसका ढारस न बँधा देते, ताकि वह ईमानवालों में से हो जाए।
Roman Urdu (Maududi)Udhar Moosa ki Maa ka dil uda jaa raha tha, woh is raaz ko faash kar baithti agar hum uski dharas(strengthened her heart ) na bandha detey taa-ke woh ( hamare wadey par) iman laney walon mein se ho
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) ki walida ka dil bey qarar hogaya qareeb thin kay iss waqiyey ko zahir ker detin agar hum unn kay dil ko dharas na dey detay yeh iss liey kay woh yaqeen kerney walon mein rahey
Devnagri Urdu (Maududi)उधर मूसा की मां का दिल उड़ा जा रहा था, वो इस राज को फाश कर बैठती अगर हम उसकी धरस (दिल को मजबूत करते) ना बांध देते ता-के वो (हमारे वादे पर) ईमान लाने वालों में से हो
عَرَبِيوَقالَت لِأُختِهِ قُصّيهِ ۖ فَبَصُرَت بِهِ عَن جُنُبٍ وَهُم لا يَشعُرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा (मूसा की माँ ने) उसकी बहन से कहा : इसके पीछे-पीछे जा। तो वह उसे दूर ही दूर से देखती रही और उन्हें (इसका) आभास नहीं होता था।
Roman Urdu (Maududi)Usne bachhey ki behan se kaha iske peechey peechey ja, chunanchey woh alag se usko is tarah dekhti rahi ke (dushmano ko) uska pata na chala
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) ki walida ney uss ki behan say kaha kay tu iss kay peechay peechay ja to woh ussay door hi door say dekhti rahi aur firaoniyon ko iss ka ilm bhi na hua
Devnagri Urdu (Maududi)उसने बच्चों की बहन से कहा इसके पीछे पीछे जा, चुनांचे वो अलग से उसको इस तरह देखती रही के (दुश्मनों को) उसका पता ना चला
عَرَبِي۞ وَحَرَّمنا عَلَيهِ المَراضِعَ مِن قَبلُ فَقالَت هَل أَدُلُّكُم عَلىٰ أَهلِ بَيتٍ يَكفُلونَهُ لَكُم وَهُم لَهُ ناصِحونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसपर पहले से सभी दूध हराम कर दिए। तो उस (की बहन) ने कहा : क्या मैं तुम्हें एक घर वाले बताऊँ, जो तुम्हारे लिए इसका पालन-पोषण करें और वे इसके शुभचिंतक हों?
Roman Urdu (Maududi)Aur humne bacchey par pehle hi doodh pilane waliyon ki chatiyan (breasts) haraam kar rakkhi thi. (Yeh halat dekh kar) us ladki ne unsey kaha “main tumhein aisey ghar ka pata bataon jiske log iski parwarish ka zimma lein aur khair khwahi ke saath isey rakkhein?”
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay phonchney say pehlay hum ney musa (alh-e-salam) per daeeiyon ka doodh haram ker diya tha. Yeh kehnay lagi kay kiya mein tumhen aisa gharana bataon jo iss bachay ki tumharay liye perwerish keray aur hon bhi woh iss bachay kay khair khuwa
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने बच्चों पर पहले ही दूध पिलाने वालियों की चटियां (स्तन) हराम कर रखी थी। (ये हालात देख कर) उस लड़की ने उनसे कहा, "मैं तुम्हें ऐसे घर का पता बताऊं जिसके लोग इसकी परवरिश का ज़िम्मा लें और खैर ख्वाही के साथ इसे रखें?"
عَرَبِيفَرَدَدناهُ إِلىٰ أُمِّهِ كَي تَقَرَّ عَينُها وَلا تَحزَنَ وَلِتَعلَمَ أَنَّ وَعدَ اللَّهِ حَقٌّ وَلٰكِنَّ أَكثَرَهُم لا يَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो हम उसे उसकी माँ के पास वापस ले आए, ताकि उसकी आँख ठंडी हो और वह शोक न करे, और ताकि वह जान ले कि निश्चय अल्लाह का वादा सच्चा है, लेकिन उनमें से ज्यादातर नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Is tarah hum Moosa ko uski Maa ke paas palta laaye taa-ke uski aankhein thandi hon aur woh ghamgheen na ho. Aur jaan le ke Allah ka wada saccha tha, magar aksar log is baat ko nahin jaantey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus hum ney ussay uss ki maa ki taraf wapis phonchaya takay uss ki aankhen thandi rahen aur aazardah khatir na ho aur jaan ley kay Allah Taalaa ka wada sacha hai lekin aksar log nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह हम मूसा को उसकी मां के पास पलटा लाए ता-के उसकी आंखें ठंडी हों और वह घमघिन ना हो। और जान ले के अल्लाह का वादा सच्चा था, मगर अक्सर लोग इस बात को नहीं जानते
عَرَبِيوَلَمّا بَلَغَ أَشُدَّهُ وَاستَوىٰ آتَيناهُ حُكمًا وَعِلمًا ۚ وَكَذٰلِكَ نَجزِي المُحسِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब वह अपनी जवानी को पहुँचा और पूरा बलवान हो गया, तो हमने उसे निर्णय-शक्ति और ज्ञान प्रदान किया और इसी प्रकार हम भलाई करने वालों को बदला देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab Moosa apni poori jawani ko pahunch gaya aur uska nasho-numa mukammal ho gaya to humne usey hukum aur ilm ata kiya. Hum neik logon ko aisi hi jazaa detey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab musa (alh-e-salam) apni jawani ko phonch gaye aur pooray tawana hogaye hum ney unhen hikmat-o-ilm ata farmaya neki kerney walon ko hum issi tarah badla diya kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब मूसा अपनी पूरी जवानी को पाहुंच गया और उसका नाशो-नुमा मुकम्मल हो गया तो हमने उसका हुकुम और इल्म अता किया। हम नए लोगों को ऐसी ही जजा देते हैं
عَرَبِيوَدَخَلَ المَدينَةَ عَلىٰ حينِ غَفلَةٍ مِن أَهلِها فَوَجَدَ فيها رَجُلَينِ يَقتَتِلانِ هٰذا مِن شيعَتِهِ وَهٰذا مِن عَدُوِّهِ ۖ فَاستَغاثَهُ الَّذي مِن شيعَتِهِ عَلَى الَّذي مِن عَدُوِّهِ فَوَكَزَهُ موسىٰ فَقَضىٰ عَلَيهِ ۖ قالَ هٰذا مِن عَمَلِ الشَّيطانِ ۖ إِنَّهُ عَدُوٌّ مُضِلٌّ مُبينٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वह नगर में उसके लोगों की कुछ असावधानी के समय में प्रवेश किया, तो उसमें दो व्यक्तियों को लड़ते हुए पाया। यह उसके गिरोह में से है और यह उसके शत्रुओं में से। तो जो उसके गिरोह में से था, उसने उसके विरुद्ध उससे मदद माँगी, जो उसके शत्रुओं में से था। तो मूसा ने उसे घूँसा मारा तो उसका काम तमाम कर दिया। (मूसा ने) कहा : यह शैतान के काम से है, निश्चित रूप से वह खुले तौर पर गुमराह करने वाला दुश्मन है।
Roman Urdu (Maududi)(Ek roz) woh shehar mein aisey waqt mein dakhil hua jabke ehle shehar gaflat mein thay. Wahan usne dekha ke do aadmi laddh rahey hain, ek uski apni qaum ka tha aur dusra uski dushman qaum se taaluq rakhta tha.Uski qaum ke aadmi ne dushman qaum waley ke khilaf usey madad ke liye pukara. Moosa ne usko ek ghoosa (fist) maara aur uska kaam tamaam kardiya. (Yeh harakat sarzad hotey hi)Moosa ne kaha “yeh Shaytaan ki kaar farmayi hai, woh sakht dushman aur khula gumraah kun hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur musa (alh-e-salam) aik aisay waqt shehar mein aaye jabkay shehar kay log ghaflat mein thay. Yahan do shakson ko lartay huyey paya yeh aik to uss kay rafiqon mein say tha aur yeh doosra uss kay dushmanon mein say uss ki qom walay ney uss kay khilaf jo uss kay dushmanon mein say tha uss say faryad ki jiss per musa (alh-e-salam) ney uss kay mukka mara jiss say woh marr gaya musa (alh-e-salam) kehnay lagay yeh to shetani kaam hai yaqeenan shetan dushman aur khullay tor per behkaney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(एक रोज़) वो शहर में ऐसे वक़्त में दखल हुआ जबके एहले शहर गफ़लत में थे। वहां उसने देखा के दो आदमी लड़ रहे हैं, एक उसकी अपनी कौम का था और दूसरा उसकी दुश्मन कौम से तालुक रखता था। उसकी कौम के आदमी ने दुश्मन कौम वाले के खिलाफ उसे मदद के लिए पुकारा। मूसा ने उसको एक घुसा (मुट्ठी) मारा और उसका काम तमाम कर दिया। (ये हरकत सरज़ाद होते हाय) मूसा ने कहा "ये शैतान की करतूत है, वो सख्त दुश्मन और खुला गुमराह कुन है"
عَرَبِيقالَ رَبِّ إِنّي ظَلَمتُ نَفسي فَاغفِر لي فَغَفَرَ لَهُ ۚ إِنَّهُ هُوَ الغَفورُ الرَّحيمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! निश्चय ही मैंने अपने ऊपर अत्याचार किया है, अतः मुझे क्षमा कर दे। तो उसने उसे क्षमा कर दिया, निःसंदेह वही बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान है।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh kehne laga “Aey mere Rubb, maine apne nafs par bada zulm kar daala, meri magfirat farma de.”Chunanchey Allah ne uski magfirat farma di, woh gafoor o raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir dua kerney lagay aey perwerdigar! Mein ney khud apnay upper zulm kiya tu mujhay moaf farma dey Allah Taalaa ney ussay bakhsh diya woh bakhsish aur boht meharbani kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो कहने लगा "ऐ मेरे रब, मैंने अपने नफ्स पर बड़ा जुल्म कर डाला, मेरी मगफिरत फरमा दे।" चुनांचे अल्लाह ने उसकी मगफिरत फरमा दी, वो गफूर ओ रहीम है
عَرَبِيقالَ رَبِّ بِما أَنعَمتَ عَلَيَّ فَلَن أَكونَ ظَهيرًا لِلمُجرِمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! इस कारण कि तूने मुझपर उपकार किया है, मैं कभी भी अपराधियों का सहायक नहीं बनूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Mossa ne ahad kiya ke “Aey mere Rubb, yeh ehsan jo tu nay mujhpar kiya hai iske baad ab main kabhi mujrimon ka madadgaar na banunga”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehnay lagay aey meray rab! Jesay tu ney mujh per yeh karam farmaya mein bhi abb hergiz kissi gunehgar ka madadgar na bano ga
Devnagri Urdu (Maududi)मोसा ने अहद किया के "ऐ मेरे रब, ये एहसान जो तू ने मुझपर किया है इसके बाद अब मैं कभी मुजरिमों का मददगार ना बनूंगा"
عَرَبِيفَأَصبَحَ فِي المَدينَةِ خائِفًا يَتَرَقَّبُ فَإِذَا الَّذِي استَنصَرَهُ بِالأَمسِ يَستَصرِخُهُ ۚ قالَ لَهُ موسىٰ إِنَّكَ لَغَوِيٌّ مُبينٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने नगर में डरते हुए सुबह की, इंतज़ार करता था (कि अब क्या होगा)। तो अचानक वही व्यक्ति जिसने कल उससे सहायता माँगी थी, उसे गुहार रहा था। मूसा ने उससे कहा : निश्चय ही तू अवश्य खुला गुमराह है।
Roman Urdu (Maududi)Dusre roz woh subah saware darta aur har taraf se khatra bhampta hua shehar mein jaa raha tha ke yakayak kya dekhta hai ke wahi shaks jisne kal usey madad ke liye pukara tha aaj phir usey pukar raha hai. Mossa ne kaha “tu to bada hi behka hua aadmi hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Subah hi subah dartay andesha ki halat mein khabren lenay ko shehar mein gaye kay achanak wohi shaks jiss ney kal unn say madad talab ki thi unn say faryad ker raha hai. Musa (alh-e-salam) ney uss say kaha iss mein shak nahi tu to sareeh bey raah hai
Devnagri Urdu (Maududi)दूसरे रोज वो सुबह सवारे डरता और हर तरफ से खतरा पैदा हुआ शेहर मैं जा रहा था कि यकायक क्या देखता है कि वही शक्स जिसने कल उसे मदद के लिए पुकारा था आज फिर उसे पुकार रहा है। मोसा ने कहा "तू तो बड़ा ही बेकार हुआ आदमी है"
عَرَبِيفَلَمّا أَن أَرادَ أَن يَبطِشَ بِالَّذي هُوَ عَدُوٌّ لَهُما قالَ يا موسىٰ أَتُريدُ أَن تَقتُلَني كَما قَتَلتَ نَفسًا بِالأَمسِ ۖ إِن تُريدُ إِلّا أَن تَكونَ جَبّارًا فِي الأَرضِ وَما تُريدُ أَن تَكونَ مِنَ المُصلِحينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उस (मूसा) ने उसे पकड़ना चाहा, जो उन दोनों का शत्रु था, तो उस (इसराईली) ने कहा : ऐ मूसा! क्या तू मुझे मारना चाहता है, जैसे तूने कल एक व्यक्ति को मार डाला था? तू केवल यही चाहता है कि धरती में शक्तिशाली बन जाए और तू नहीं चाहता कि सुधार करने वालों में से हो।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab Moosa ne irada kiya ke dushman qaum ke aadmi par hamla karey to woh pukar uttha “Aey Moosa , kya aaj tu mujhey usi tarah qatal karne laga hai jis tarah kal ek shaks ko qatal kar chuka hai, tu is mulk mein jabbar ban kar rehna chahta hai, Islaah nahin karna chahta”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab uss kay aur apnay dushman ko pakarna chaha woh faryadi kehnay laga kay musa (alh-e-salam) kiya jissa tarah tu ney kal aik shaks ko qatal kiya hai mujhay bhi maar dalna chahata hai tu to mulk mein zalim-o-sirkash hona hi chahata hai aur tera yeh irada hi nahi kay milap kerney walon mein say ho
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब मूसा ने इरादा किया के दुश्मन कौम के आदमी पर हमला किया तो वो पुकार उठा "ऐ मूसा, क्या आज तू मुझे उसकी तरह कत्ल करने लगा है, जिस तरह कल एक शक्स को कत्ल कर चुका है, तू इस मुल्क में जब्बार बन कर रहना चाहता है, इस्लाह नहीं करना चाहता”
عَرَبِيوَجاءَ رَجُلٌ مِن أَقصَى المَدينَةِ يَسعىٰ قالَ يا موسىٰ إِنَّ المَلَأَ يَأتَمِرونَ بِكَ لِيَقتُلوكَ فَاخرُج إِنّي لَكَ مِنَ النّاصِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और एक व्यक्ति नगर के सबसे दूर छोर से दौड़ता हुआ आया। उसने कहा : ऐ मूसा! निःसंदेह प्रमुख लोग तेरे विषय में परामर्श कर रहे हैं कि तुझे मार डालें। अतः तू (यहाँ से) निकल जा। निश्चय मैं तेरा शुभचिंतक हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Iske baad ek aadmi shehar ke parle sirey (other end of the city) se daudta hua aaya aur bola “Moosa , sardaron mein tere qatal ke mashwarey ho rahey hain, yahan se nikal jaa, main tera khair khwa(wellwisher) hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Shehar kay parlay kinaray say aik shaks dorta hua aaya aur kehnay laga aey musa! Yahan kay sardar teray qatal ka mashwara ker rahey hain pus tu boht jald chala ja mujhay apna khair khuwa maan
Devnagri Urdu (Maududi)इसके बाद एक आदमी शहर के पारले सिरे (शहर का दूसरा छोर) से दौड़ता हुआ आया और बोला “मूसा, सरदारों में तेरे क़त्ल के मशवरे हो रहे हैं, यहां से निकल जा, मैं तेरा ख़ैर ख़्वा (शुभचिंतक) हूं”
عَرَبِيفَخَرَجَ مِنها خائِفًا يَتَرَقَّبُ ۖ قالَ رَبِّ نَجِّني مِنَ القَومِ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो वह डरता हुआ उस (शहर) से निकल पड़ा, इंतज़ार करता था (कि अब क्या होगा), उसने प्रार्थना की : ऐ मेरे पालनहार! मुझे इन ज़ालिम लोगों से बचा ले।
Roman Urdu (Maududi)Yeh khabar sunte hi Moosa darta aur sehamta nikal khada hua aur usne dua ki ke “Aey mere Rubb, mujhey zaalimon se bacha”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus musa (alh-e-salam) wahan say khofzada ho ker dekhtay bhaltay nikal kharay huyey kehnay lagay aey perwerdigar! Mujhay zlimon kay giroh say bacha ley
Devnagri Urdu (Maududi)ये खबर सुनते ही मूसा डरता और सहमत निकल खड़ा हुआ और उसने दुआ की कि "ऐ मेरे रब, मुझे जालिमों से बचा"
عَرَبِيوَلَمّا تَوَجَّهَ تِلقاءَ مَديَنَ قالَ عَسىٰ رَبّي أَن يَهدِيَني سَواءَ السَّبيلِ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उसने मदयन की ओर रुख़ किया, तो कहा : आशा है कि मेरा पालनहार मुझे सीधे मार्ग पर ले जाए।
Roman Urdu (Maududi)(Misr se nikal kar) jab Moosa ne Madiyan ka rukh kiya to usne kaha “ Umeed hai ke mera Rubb mujhey theek raaste par daal dega”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab madiyan ki taraf mutawajja huyey to kehnay lagay mujhay umeed hai kay mera rab mujhay seedhi raah ley chalay ga
Devnagri Urdu (Maududi)(मिस्र से निकल कर) जब मूसा ने मदियां का रुख किया तो उसने कहा "उम्मीद है के मेरा रब मुझे ठीक रास्ते पर डाल देगा"
عَرَبِيوَلَمّا وَرَدَ ماءَ مَديَنَ وَجَدَ عَلَيهِ أُمَّةً مِنَ النّاسِ يَسقونَ وَوَجَدَ مِن دونِهِمُ امرَأَتَينِ تَذودانِ ۖ قالَ ما خَطبُكُما ۖ قالَتا لا نَسقي حَتّىٰ يُصدِرَ الرِّعاءُ ۖ وَأَبونا شَيخٌ كَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब वह मदयन के पानी पर पहुँचा, तो उसपर लागों का एक समूह पाया, जो (अपने पशुओं को) पानी पिला रहा था। तथा उनके एक तरफ दो महिलाओं को पाया जो (अपने पशुओं को) रोक रही थीं। उसने कहा : तुम्हारा क्या मामला है? उन दोनों ने कहा : हम पानी नहीं पिलाते यहाँ तक कि चरवाहे (अपने जानवरों को) पिलाकर वापस ले जाएँ और हमारे पिता बहुत बूढ़े हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab woh Madiyan ke kunwein (well) par pahuncha to usne dekha ke bahut se log apne jaanwaron ko pani pila rahey hain, aur unsey alag ek taraf do auratein apne jaanwaron ko rok rahi hain. Moosa ne in auraton se pucha “tumhein kya pareshani hai?” unhon ne kaha “Hum apne jaanwaron ko pani nahin pila sakti jab tak yeh charwahe apne jaanwar nikal kar na le jayein, aur hamare waalid ek bahut boodey aadmi hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Madiyan kay pani per jab aap phonchay to dekha kay logon ki aik jamat wahan pani pila rahi hai aur do aurten alag khari apnay (janwaron ko) rokti hui dikhaee den poocha kay tumhara kiya haal hai woh boleen kay jab tak yeh charwahey wapis na lot jayen hum pani nahi pilatin aur humaray walid boht bari umar kay boorhay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जब वो मदियां के कुनवें (ठीक है) पर पाहुंचा तो उसने देखा के बहुत से लोग अपने जानवरों को पानी पिला रहे हैं, और उन्हें अलग एक तरफ दो औरतें अपने जानवरों को रोक रही हैं। मूसा ने औरतों से पूछा “तुम्हें क्या परेशानी है?” उनहोंने कहा "हम अपने जानवरों को पानी नहीं पिला सकते जब तक ये चारवाहे अपने जानवर निकल कर न ले जाएं, और हमारे वालिद एक बहुत बूढ़े आदमी हैं"
عَرَبِيفَسَقىٰ لَهُما ثُمَّ تَوَلّىٰ إِلَى الظِّلِّ فَقالَ رَبِّ إِنّي لِما أَنزَلتَ إِلَيَّ مِن خَيرٍ فَقيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उसने उनके लिए पानी पिला दिया। फिर पलट कर छाया की ओर आ गया और कहा : ऐ मेरे पालनहार! निःसंदेह मैं, जो भलाई भी तू मुझपर उतार दे, मैं उसका मोहताज हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Yeh sunkar Moosa ne unke jaanwaron ko pani pila diya, phir ek saaye ki jagah jaa baitha aur bola “parwardigar, jo khair bhi tu mujhpar nazil karde main uska mohtaj hoon.”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap ney khud inn janwaron ko pani pila diya phir saye ki taraf hut aaye aur kehnay lagay aey perwerdigar! Tu jo kuch bhalaee meri taraf utaray mein uss ka mohtaj hun
Devnagri Urdu (Maududi)ये सुनकर मूसा ने उनके जानवरों को पानी पिला दिया, फिर एक जगह की जगह जा बैठा और बोला "परवरदिगार, जो खैर भी तू मुझपर नाज़िल करदे मैं उसका मोहताज हूं।"
عَرَبِيفَجاءَتهُ إِحداهُما تَمشي عَلَى استِحياءٍ قالَت إِنَّ أَبي يَدعوكَ لِيَجزِيَكَ أَجرَ ما سَقَيتَ لَنا ۚ فَلَمّا جاءَهُ وَقَصَّ عَلَيهِ القَصَصَ قالَ لا تَخَف ۖ نَجَوتَ مِنَ القَومِ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर दोनों में से एक बहुत लज्जा के साथ चलती हुई उसके पास आई। उसने कहा : निःसंदेह मेरे पिता आपको बुला रहे हैं। ताकि आपको उसका बदला दें जो आपने हमारे लिए (जानवरों को) पानी पिलाया है। तो जब वह (मूसा) उसके पास आया और उसे पूरी स्थिति बताई, तो उसने कहा : डरो मत, तुम उन ज़ालिम लोगों से बच निकले हो।
Roman Urdu (Maududi)(Kuch dair na guzri thi ke) un dono auraton mein se ek sharam o haya se chalti hui uske paas aayi aur kehne lagi “Mere waalid aap ko bula rahey hain taa-ke aapne hamare jaanwaron ko pani jo pilaya hai uska ajar aapko dein.” Moosa jab uske paas pahuncha aur apna saara qissa usey sunaya to usne kaha “kuch khauf na karo, ab tum zaalimon se bach nikle ho.”
Roman Urdu (Junagarhi)Itnay mein dono aurton mein say aik unn ki taraf sharam-o-haya say chalti hui aaee kehnay lagi kay meray baap aap ko bula rahey hain takay aap ney humaray (janwaron) ko jo pani pilaya hai uss ki ujrat den jab hazrat musa (alh-e-salam) unn kay pass phonchay aur unn say apna sara haal biyan kiya to woh kehnay lagay abb na darr tu ney zalim qom say nijat paee
Devnagri Urdu (Maududi)(कुछ दिन ना गुजरी थी के) उन दोनो औरतों में से एक शरम ओ हया से चलती हुई उसके पास आई और कहने लगी "मेरे वालिद आप को बुला रहे हैं ता-के आपने हमारे जानवरों को पानी जो पिलाया है उसका अजर आपको दें।" मूसा जब उसके पास पहुंचा और अपना सारा क़िस्सा उसे सुनाया तो उसने कहा "कुछ खौफ ना करो, अब तुम ज़ालिमों से बच निकले हो।"
عَرَبِيقالَت إِحداهُما يا أَبَتِ استَأجِرهُ ۖ إِنَّ خَيرَ مَنِ استَأجَرتَ القَوِيُّ الأَمينُ
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हिन्दी (Al-Omari)उन दोनों स्त्रियों में से एक ने कहा : ऐ मेरे पिता! इसे मज़दूरी पर रख लें, क्योंकि सबसे अच्छा व्यक्ति जिसे आप मज़दूरी पर रखें वही है जो शक्तिशाली, अमानतदार हो।
Roman Urdu (Maududi)In dono auraton mein se ek ne apne baap se kaha “abbajaan is shaks ko naukar rakh lijiye, behtareen aadmi jisey aap mulazim rakhein wahi ho sakta hai jo mazboot aur amaanat-daar ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Unn dono mein say aik ney kaha abba ji! Aap enhen mazdoori per rakh lijiyey kiyon kay jinhen aap ujrat per rakhen unn mein say sab say behtar woh hai jo mazboot aur amanat daar ho
Devnagri Urdu (Maududi)दोनों औरतों में से एक ने अपने बाप से कहा "अब्बाजान इस शक्स को नौकर रख लीजिये, बेहतरीन आदमी जिसे आप मुलाजिम रखें वही हो सकता है जो मजबूत और अमानत-दार हो"
عَرَبِيقالَ إِنّي أُريدُ أَن أُنكِحَكَ إِحدَى ابنَتَيَّ هاتَينِ عَلىٰ أَن تَأجُرَني ثَمانِيَ حِجَجٍ ۖ فَإِن أَتمَمتَ عَشرًا فَمِن عِندِكَ ۖ وَما أُريدُ أَن أَشُقَّ عَلَيكَ ۚ سَتَجِدُني إِن شاءَ اللَّهُ مِنَ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : निःसंदेह मैं चाहता हूँ कि अपनी इन दो बेटियों में से एक का विवाह तुमसे कर दूँ, इस (शर्त) पर कि तुम आठ वर्ष मेरी मज़दूरी करोगे। फिर यदि तुम दस (वर्ष) पूरे कर दो, तो वह तुम्हारी ओर से है और मैं नहीं चाहता कि तुमपर बोझ डालूँ। यदि अल्लाह ने चाहा, तो तुम मुझे सदाचारियों में से पाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Uske baap ne (Moosa se) kaha “main chahta hoon ke apni in do betiyon mein se ek ka nikah tumhare saath kardoon bashart yeh ke tum aath(eight) saal tak mere haan mulazimat karo, aur agar dus saal purey kardo to yeh tumhari marzi hai. Main tumpar sakhti nahin karna chahta, tum insha Allah mujhey neik aadmi paogey”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss buzrug ney kaha mein apni inn dono larkiyon mein say aik ko aap kay nikkah mein dena chahata hun iss (mehar per) kay aap aath saal tak mera kaam kaaj keren. Haan agar aap dus saal pooray keren to yeh aap ki taraf say bator ehsan kay hai mein yeh hergiz nahi chahata kay aap ko kissi mushaqqat mein dalon Allah ko manzoor hai to aagay chal ker aap mujhay bhala aadmi payen gay
Devnagri Urdu (Maududi)उसके बाप ने (मूसा से) कहा "मैं चाहता हूं के" अपनी दो बेटियों में से एक का निकाह तुम्हारे साथ कर्दों बशारत ये के तुम आठ साल तक मेरे साथ मुलाकात करो, और अगर दस साल पूरे करदो तो ये तुम्हारी मर्जी है, तुम इंशा अल्लाह मुझे नहीं चाहते।
عَرَبِيقالَ ذٰلِكَ بَيني وَبَينَكَ ۖ أَيَّمَا الأَجَلَينِ قَضَيتُ فَلا عُدوانَ عَلَيَّ ۖ وَاللَّهُ عَلىٰ ما نَقولُ وَكيلٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(मूसा ने) कहा : यह मेरे और आपके बीच (निश्चित) है। इन दोनों में से जो अवधि मैं पूरी कर दूँ, तो मुझपर कोई अति न होगी। और हम जो कुछ कह रहे हैं उसपर अल्लाह गवाह है।
Roman Urdu (Maududi)Mossa ne jawab diya “yeh baat mere aur aapke darmiyan tai ho gayi.In dono muddaton mein se jo bhi main poori kardoon uske baad phir koi zyadati mujhpar na ho, aur jo kuch qaul o qaraar hum kar rahey hain Allah uspar nigehbaan hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (lah-e-salam) ney kaha khair to yeh baat meray aur aap kay darmiyan pukhta hogaee mein inn dono muddaton mein say jissay poora keron mujh per koi ziyadti na ho hum yeh jo kuch ker rahey hain iss per Allah (gawah aur) kaar saaz hai
Devnagri Urdu (Maududi)मोसा ने जवाब दिया "ये बात मेरे और आपके दरमियान ताई हो गई। दोनों मुद्दतों में से जो भी मैं पूरी तरह से उसके बाद फिर कोई ज्यादा मुझपर ना हो, और जो कुछ क़ौल ओ क़रार हम कर रहे हैं अल्लाह उसपर निगहबान है।"
عَرَبِي۞ فَلَمّا قَضىٰ موسَى الأَجَلَ وَسارَ بِأَهلِهِ آنَسَ مِن جانِبِ الطّورِ نارًا قالَ لِأَهلِهِ امكُثوا إِنّي آنَستُ نارًا لَعَلّي آتيكُم مِنها بِخَبَرٍ أَو جَذوَةٍ مِنَ النّارِ لَعَلَّكُم تَصطَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब मूसा ने वह अवधि पूरी कर दी और अपने परिवार को लेकर चला, तो उसने तूर (पर्वत) की ओर से एक आग देखी। उसने अपने परिवार से कहा : ठहरो, मैंने एक आग देखी है, संभव है कि मैं तुम्हारे लिए उससे कोई समाचार ले आऊँ, या आग का कोई अंगारा, ताकि तुम ताप लो।
Roman Urdu (Maududi)Jab Moosa ne muddat poori kardi aur woh apne ehal-o-aayal(family) ko lekar chala to Toor ki jaanib usko ek aag nazar aayi.Usne apne ghar walon se kaha “thehro, maine ek aag dekhi hai, shayad main wahan se koi khabar le aaoon ya is aag se koi angara hi utha laaon jissey tum taap sako.”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab hazrat musa (alh-e-salam) ney muddat poori ker liaur apnay ghar walon ko ley ker chalay to koh-e-toor ki taraf aag dekhi. Apni biwi say kehnay lagay thero! Mein ney aag dekhi hai boht mumkin hai kay mein wahan say koi khabar laaon ya aag ka koi angara laon takay tum seenk lo
Devnagri Urdu (Maududi)जब मूसा ने मुद्दत पूरी कर दी और वो अपने एहल-ओ-अयाल (परिवार) को लेकर चला तो तूर की जानिब उसको एक आग नजर आई। उसने अपने घर वालों से कहा "ठहरो, मैंने एक आग देखी है, शायद मैं वहां से कोई खबर ले आऊं हां इस आग से कोई अंगारा ही उठा लाओ जैसे तुम ताप सको।”
عَرَبِيفَلَمّا أَتاها نودِيَ مِن شاطِئِ الوادِ الأَيمَنِ فِي البُقعَةِ المُبارَكَةِ مِنَ الشَّجَرَةِ أَن يا موسىٰ إِنّي أَنَا اللَّهُ رَبُّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वह उसके पास आया, तो उस बरकत वाली जगह में घाटी के दाहिनी ओर से एक वृक्ष से आवाज़ दी गई : ऐ मूसा! निःसंदेह मैं ही अल्लाह हूँ, जो सारे संसारों का पालनहार है।
Roman Urdu (Maududi)Wahan pahuncha to wadi ke dahine kinarey par mubarak khittey mein ek darakht se pukara gaya ke “Aey Moosa, main hi Allah hoon, sarey jahaan walon ka maalik”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab wahan phonchay to uss ba-barkat zamin kay maidan kay dayen kinaray kay darakht mein say awaz diyey gaye kay aey musa! Yaqeenan mein hi Allah hun saray jahano ka perwerdigar
Devnagri Urdu (Maududi)वहां पाहुंचा तो वाड़ी के दहिने किनारे पर मुबारक खित्ते में एक दरख्त से पुकारा गया के "ऐ मूसा, मैं ही अल्लाह हूं, सारे जहां वालों का मालिक"
عَرَبِيوَأَن أَلقِ عَصاكَ ۖ فَلَمّا رَآها تَهتَزُّ كَأَنَّها جانٌّ وَلّىٰ مُدبِرًا وَلَم يُعَقِّب ۚ يا موسىٰ أَقبِل وَلا تَخَف ۖ إِنَّكَ مِنَ الآمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह कि अपनी लाठी फेंक दो। फिर जब उसने उसे देखा कि रेंग रही है, मानो वह एक साँप है, तो पीठ फेरकर चल दिया और पीछे नहीं मुड़ा। ऐ मूसा! आगे बढ़ो और डरो मत, निश्चित रूप से तुम सुरक्षित रहने वालों में से हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur (hukum diya gaya ke) “phenk de apni laathi.”Junhi ke Moosa ne dekha ke woh laathi saanp (snake) ki tarah bal kha rahi hai to woh peeth pher kar bhaaga aur unse mudh kar bhi na dekha. (Irshad hua) “Moosa, palat aa aur khauf na kar, tu bilkul mehfuz hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh (bhi awaz aaee) kay apni laathi daal dey. Phir jab ussay dekha kay woh saanp ki tarah phan phana rahi hai to peeth pher ker wapis hogaye aur murr ker rukh bhi na kiya hum ney kaha aey musa! Aagay aa darr mat yaqeenan tu her tarah aman wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और (हुकुम दिया गया के) "फेंक दे अपनी लाठी।" जूनी के मूसा ने देखा के वो लाठी सांप (साँप) की तरह बाल खा रही है तो वो पीठ फेर कर भागा और उसने मुड़ कर भी ना देखा। (इरशाद हुआ) "मूसा, पलट आ और खौफ ना कर, तू बिल्कुल महफूज है
عَرَبِياسلُك يَدَكَ في جَيبِكَ تَخرُج بَيضاءَ مِن غَيرِ سوءٍ وَاضمُم إِلَيكَ جَناحَكَ مِنَ الرَّهبِ ۖ فَذانِكَ بُرهانانِ مِن رَبِّكَ إِلىٰ فِرعَونَ وَمَلَئِهِ ۚ إِنَّهُم كانوا قَومًا فاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अपना हाथ अपने गरीबान में डाल। वह बिना किसी दोष के सफेद (चमकदार) निकलेगा। और भय से (बचने के लिए) अपनी भुजा को अपनी ओर चिमटा ले। तो ये दोनों तेरे पालनहार की ओर से फ़िरऔन तथा उसके प्रमुखों के लिए दो प्रमाण हैं। निःसंदेह वे हमेशा से अवज्ञाकारी लोग हैं।
Roman Urdu (Maududi)Apna haath girehban mein daal, chamakta hua niklega bagair kisi takleef ke aur khauf se bachne ke liye apna baazu bhench le(fold back). Yeh do roshan nishaniyan hain tere Rubb ki taraf se Firoun aur uske darbariyon ke saamne pesh karne ke liye, woh badey hi nafarmaan log hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Apnay hath ko apnay girbaan mein daal woh baghair kisi qisam kay rog kay chamakta hua niklay ga bilkul safaid aur khof say (bachney kay liye) apnay bazoo apni taraf mila ley pus yeh dono moajzzay teray liye teray rab ki taraf say hain firaon aur uss ki jamat ki taraf yaqeenan woh sab kay sab bey hukum aur na farman log hain
Devnagri Urdu (Maududi)अपना हाथ गिरेबान में डाल, चमकता हुआ निकलेगा बिना किसी तकलीफ के और खौफ से बचने के लिए अपना बाजू बेंच ले। ये दो रोशन निशानियां हैं तेरे रुब की।" तरफ से फिरौन और उसके दरबारियों के सामने पेश करने के लिए, वो बड़े ही नफ़रमान लोग हैं”
عَرَبِيقالَ رَبِّ إِنّي قَتَلتُ مِنهُم نَفسًا فَأَخافُ أَن يَقتُلونِ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मैंने उनमें से एक व्यक्ति को क़त्ल किया है। इसलिए मैं डरता हूँ कि वे मुझे मार देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne arz kiya “Mere aaqa, main to unka ek aadmi qatal kar chuka hoon, darta hoon ke woh mujhey maar daalenge
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) ney kaha perwerdigar! Mein ney unn ka aik aadmi qatal ker diya tha. Abb mujhay andesha hai kay woh mujhay bhi qatal ker daalen
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने अर्ज़ किया “मेरे आका, मैं तो उनका एक आदमी क़त्ल कर चूका हूँ, डरता हूँ के वो मुझे मार डालेंगे
عَرَبِيوَأَخي هارونُ هُوَ أَفصَحُ مِنّي لِسانًا فَأَرسِلهُ مَعِيَ رِدءًا يُصَدِّقُني ۖ إِنّي أَخافُ أَن يُكَذِّبونِ
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हिन्दी (Al-Omari)और मेरा भाई हारून, वह ज़बान में मुझसे अधिक वाक्पटु है। अतः उसे मेरे साथ सहायक बनाकर भेज कि वह मेरी तसदीक़ करे। निःसंदेह मैं डरता हूँ कि वे मुझे झुठला देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur mera bhai Haroon mujhse zyada zubaan awar (eloquent of tongue) hai, usey mere saath madadgaar ke taur par bhej taa-ke woh meri taaeed (support) karey, mujhey andesha hai ke woh log mujhey jhutlayenge.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mer bhai haroon (alh-e-salam) mujh say boht ziyada faseeh zaban wala hai tu ussay bhi mera madadgar bana ker meray sath bhej kay woh mujhay sacha manay mujhay to khof hai kay woh sab mujhay jhutla den gay
Devnagri Urdu (Maududi)और मेरा भाई हारून मुझसे ज़्यादा ज़ुबान अवार (जीभ की वाकपटुता) है, उसे मेरे साथ मददगार के तौर पर भेज ता-के वो मेरी तायद (समर्थन) करे, मुझे अंदेशा है के वो लोग मुझे झुठलाएँगे।”
عَرَبِيقالَ سَنَشُدُّ عَضُدَكَ بِأَخيكَ وَنَجعَلُ لَكُما سُلطانًا فَلا يَصِلونَ إِلَيكُما ۚ بِآياتِنا أَنتُما وَمَنِ اتَّبَعَكُمَا الغالِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फरमाया : हम तेरे भाई के साथ तेरा हाथ अवश्य मज़बूत करेंगे और तुम दोनों को प्रभुता प्रदान करेंगे। अतः वे तुम दोनों तक नहीं पहुँच सकेंगे। हमारी निशानियों के कारण तुम दोनों और जिन्होंने तुम्हारा अनुसरण किया, प्रभावी रहने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Farmaya “hum tere bhai ke zariye se tera haath mazboot karenge aur tum dono ko aisi sitwat(authority) bakshenge ke woh tumhara kuch na bigaad sakenge.Hamari nishaniyon ke zoar se galaba (triumph) tumhare aur tumhare pairawon ka hi hoga”
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney farmaya kay hum teray bhai kay sath tera bazoo mazboot ker den gay aur tum dono ko ghalba den gay firaoni tum tak phonch hi na saken gay ba-sabab humari nishaniyon kay tum dono aur tumhari tabey daari kerney walay hi ghalib rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया "हम तेरे भाई के जरूर से तेरा हाथ मजबूत करेंगे और तुम दोनो को ऐसी सत्ता बक्शेंगे के वो तुम्हारा कुछ न बिगाड़ सकेगे। हमारी निशानियों के जोर से गलाबा (विजय) तुम्हारे और तुम्हारे जोड़े का ही होगा"
عَرَبِيفَلَمّا جاءَهُم موسىٰ بِآياتِنا بَيِّناتٍ قالوا ما هٰذا إِلّا سِحرٌ مُفتَرًى وَما سَمِعنا بِهٰذا في آبائِنَا الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब मूसा उनके पास हमारी खुली निशानियाँ लेकर आए, तो उन्होंने कहा : यह तो बस एक मनगढ़ंत जादू है और हमने इसे अपने पहले बाप-दादों में नहीं सुना।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab Moosa un logon ke paas hamari khuli khuli nishaniyan lekar pahuncha to unhon ne kaha ke yeh kuch nahin hai magar banawati jaadu aur yeh baatein to humne apne baap dada ke zamane mein kabhi suni hi nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab unn kay pass musa (alh-e-salam) humaray diyey huyey khullay moajzzay ley ker phonchay to woh kehnay lagay yeh to sirf ghara gharaya jadoo hai hum ney apnay aglay baap dadon kay zamaney mein kabhi yeh nahi suna
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब मूसा उन लोगों के पास हमारी खुली-खुली निशानियां लेकर पहुंच गया तो उनको ने कहा के ये कुछ नहीं है मगर बनवाती जादू और ये बातें तो हमने अपने बाप दादा के जमाने में कभी सुनी ही नहीं
عَرَبِيوَقالَ موسىٰ رَبّي أَعلَمُ بِمَن جاءَ بِالهُدىٰ مِن عِندِهِ وَمَن تَكونُ لَهُ عاقِبَةُ الدّارِ ۖ إِنَّهُ لا يُفلِحُ الظّالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मूसा ने कहा : मेरा पालनहार उसे अधिक जानने वाला है जो उसके पास से मार्गदर्शन लेकर आया और उसको भी जिसके लिए (आख़िरत के) घर का परिणाम अच्छा होगा। निःसंदेह सत्य यह है कि अत्याचारी सफल नहीं होते।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne jawab diya “Mera Rubb us shaks ke haal se khoob waqif hai jo uski taraf se hidayat lekar aaya hai aur wahi behtar jaanta hai ke aakhri anjaam kiska accha hona hai, haqq yeh hai ke zaalim kabhi falah nahin paatey.”
Roman Urdu (Junagarhi)Hazrat musa (alh-e-salam) kehnay lagay mera rab taalaa issay khoob janta hai jo uss kay pass ki hidayat ley ker aata hai aur jiss kay liye aakhirat ka (acha) anjam hota hai yaqeenan bey insafon ka bhala na hoga
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने जवाब दिया "मेरा रब उस लड़के के हाल से खूब वाकिफ" है जो उसकी तरफ से हिदायत लेकर आया है और वही बेहतर जानता है के आखिरी अंजाम किसका अच्छा होना है, हक ये है के जालिम कभी फलाह नहीं पाते।”
عَرَبِيوَقالَ فِرعَونُ يا أَيُّهَا المَلَأُ ما عَلِمتُ لَكُم مِن إِلٰهٍ غَيري فَأَوقِد لي يا هامانُ عَلَى الطّينِ فَاجعَل لي صَرحًا لَعَلّي أَطَّلِعُ إِلىٰ إِلٰهِ موسىٰ وَإِنّي لَأَظُنُّهُ مِنَ الكاذِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा फ़िरऔन ने कहा : ऐ प्रमुखो! मैंने अपने सिवा तुम्हारे लिए कोई पूज्य नहीं जाना। तो ऐ हामान! मेरे लिए मिट्टी पर आग जला, फिर मेरे लिए एक ऊँचा भवन बना, ताकि मैं मूसा के पूज्य को झाँककर देखूँ। और निःसंदेह मैं निश्चय उसे झूठों में से समझता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur Firoun ne kaha “Aey ehle darbaar main to apne siwa tumhare kisi khuda ko nahin jaanta. Hamaan, zara eatain (bricks) pakwa kar mere liye ek unchi imarat to banwa, shayad ke uspar chadh kar main Moosa ke khuda ko dekh sakoon, main to isey jhoota hi samajhta hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon kehney laga aey darbariyo! Mein to apnay siwa kissi ko tumhara mabood nahi janta. Sunn aey haamaan! Tu meray liye mitti ko aag say pakwa phir meray liye aik mehal tameer ker to mein musa kay mabood ko jhank loon ussay mein to jhooton mein say hi gumaan ker raha hun
Devnagri Urdu (Maududi)और फिरौन ने कहा "ऐ एहले दरबार मैं तो अपने सिवा तुम्हारे किसी खुदा को नहीं जानता। हमन, ज़रा ईंटें (ईंटें) पकावा कर मेरे लिए एक ऊंची इमारत तो बनवा, शायद के उसपर चढ़ कर मैं मूसा के खुदा को देख सकता हूं, मैं तो इसे झूठा हाय" समझता हूं"
عَرَبِيوَاستَكبَرَ هُوَ وَجُنودُهُ فِي الأَرضِ بِغَيرِ الحَقِّ وَظَنّوا أَنَّهُم إِلَينا لا يُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वह और उसकी सेना बिना किसी अधिकार के देश में बड़े बन बैठे और उन्होंने सोचा कि निश्चित रूप से वे हमारे पास वापस नहीं लाए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Usne aur uske lashkaron ne zameen mein bagair kisi haqq ke apni badayi ka ghamand kiya aur samjhe ke unhein kabhi hamari taraf palatna nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney aur uss kay lashkar ney na-haq tareeqay per mulk mein takabbur kiya aur samajh liya kay woh humari janib lotaye hi na jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)उसने और उसके लश्करों ने जमीन में बिना किसी हक के अपनी बदनामी का घमंड किया और समझ के उन्हें कभी हमारी तरफ पलटना नहीं है
عَرَبِيفَأَخَذناهُ وَجُنودَهُ فَنَبَذناهُم فِي اليَمِّ ۖ فَانظُر كَيفَ كانَ عاقِبَةُ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उसे और उसकी सेनाओं को पकड़ लिया, फिर उन्हें समुद्र में फेंक दिया। तो देखो कि अत्याचारियों का अंत (परिणाम) कैसा था।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir-e-kaar humne usey aur uske lashkaron ko pakda aur samandar mein phenk diya, ab dekhlo ke un zaalimon ka kaisa anjaam hua
Roman Urdu (Junagarhi)Bil-aakhir hum ney ussay aur uss kay lashkaron ko pakar liya aur darya burd ker diya abb dekh ley kay unn gunehgaaron ka anjam kaisa kuch hua
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर-ए-कार हमने उसे और उसके लश्करों को पकड़ा और समंदर में फेंक दिया, अब देखलो के उन जालिमों का कैसा अंजाम हुआ
عَرَبِيوَجَعَلناهُم أَئِمَّةً يَدعونَ إِلَى النّارِ ۖ وَيَومَ القِيامَةِ لا يُنصَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उन्हें ऐसे अगवा बनाया, जो आग की ओर बुलाते थे और क़ियामत के दिन उनकी मदद नहीं की जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Humne unhein jahannum ki taraf dawat dene waley pesh-ro bana diya aur qayamat ke roz woh kahin se koi madad na paa sakenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unhen aisay imam bana diyey kay logon ko jahannum ki taraf bulayen aur roz-e-qayamat mutlaq madad na kiye jayen
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उन्हें जहन्नुम की तरफ दावत देने वाले पेश-रो बना दिया और कयामत के रोज वो कहीं से कोई मदद न पा सकेंगे
عَرَبِيوَأَتبَعناهُم في هٰذِهِ الدُّنيا لَعنَةً ۖ وَيَومَ القِيامَةِ هُم مِنَ المَقبوحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने इस संसार में उनके पीछे धिक्कार लगा दी और क़ियामत के दिन वे ठुकराए गए लोगों में से होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Humne is duniya mein unke pichey laanat laga di aur qayamat ke roz woh badi qabahat (awkward predicament) mein mubtila hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney iss duniya mein bhi unn kay peechay apni laanat laga di aur qayamat kay din bhi woh bad-haal logon mein say hongay
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इस दुनिया में उनके पीछे लानत लगा दी और कयामत के रोज वो बड़ी क़बाहत (अजीब दुविधा) में मुब्तिला होंगी
عَرَبِيوَلَقَد آتَينا موسَى الكِتابَ مِن بَعدِ ما أَهلَكنَا القُرونَ الأولىٰ بَصائِرَ لِلنّاسِ وَهُدًى وَرَحمَةً لَعَلَّهُم يَتَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने मूसा को पुस्तक प्रदान की, इसके पश्चात् कि हमने पहली नस्लों को विनष्ट कर दिया, जो लोगों के लिए अंतर्दृष्टिपूर्ण तर्क तथा मार्गदर्शन और दया थी, ताकि वे नसीहत ग्रहण करें।
Roman Urdu (Maududi)Pichli nasalon ko halaak karne ke baad humne Moosa ko kitaab ata ki, logon ke liye baseeraton ka samaan(means of enlightenment) bana kar, hidayat aur rehmat bana kar, taa-ke shayad log sabaq haasil karein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn aglay zamaney walon ko halak kerney kay baad hum ney musa (alh-e-salam) ko aisi kitab inayat farmaee jo logon kay liye daleel aur hidayat-o-rehmat ho ker aaee thi takay woh naseehat hasil ker len
Devnagri Urdu (Maududi)पिछली नसलों को हलाक करने के बाद हमने मूसा को किताब अता की, लोगों के लिए बसेरातों का सामान (ज्ञान का साधन) बना कर, हिदायत और रहमत बना कर, ता-के शायद लोग सबक हासिल करें
عَرَبِيوَما كُنتَ بِجانِبِ الغَربِيِّ إِذ قَضَينا إِلىٰ موسَى الأَمرَ وَما كُنتَ مِنَ الشّاهِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उस समय आप पश्चिमी किनारे पर नहीं थे, जब हमने मूसा की ओर आदेश पहुँचाया और न ही आप उपस्थित लोगों में से थे।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad) tum us waqt magrabi goshey(western side) mein maujood na thay jab humne Moosa ko yeh farmaan e shariyat ata kiya aur na tum shahideen (witnesses) mein shamil thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur toot kay maghribi janib jab kay hum ney musa (alh-e-salam) ko hukum ehkaam ki wahee phonchaee thi na to tu mojood tha aur na tu dekhney walon mein say tha
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद) तुम हमें वक्त मगरबी गोशे (पश्चिमी तरफ) में मौजुद ना था जब हमने मूसा को ये फरमान ए शरीयत अता किया और ना तुम शहीदों (गवाहों) में शामिल थे
عَرَبِيوَلٰكِنّا أَنشَأنا قُرونًا فَتَطاوَلَ عَلَيهِمُ العُمُرُ ۚ وَما كُنتَ ثاوِيًا في أَهلِ مَديَنَ تَتلو عَلَيهِم آياتِنا وَلٰكِنّا كُنّا مُرسِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु हमने (मूसा के बाद) बहुत-सी नस्लें पैदा कीं, फिर उनपर लंबा समय बीत गया तथा न आप मदयन वालों के बीच रहने वाले थे कि उन्हें हमारी आयतें पढ़कर सुनाते हों, परंतु हम ही (रसूल) भेजने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Balke iske baad (tumhare zamane tak) hum bahut se nasalein (generations) utha chuke hain aur unpar bahut zamana guzar chuka hai. Tum ehle Madiyan ke darmiyaan bhi maujood na thay ke unko hamari aayat suna rahey hotey, Magar (us waqt ki yeh khabrein) bhejne waley hum hain
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin hum ney boht si naslen peda kin jin per lambi muddaten guzar gayen aur na tu madiyan kay rehney walon mein say tha kay unn kay samney humari aayaton ki tilawat kerta bulkay hum hi rasoolon kay bhejney walay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)बल्के इसके बाद (तुम्हारे जमाने तक) हम बहुत से नासलें (पीढ़ियां) उठा चुके हैं और बहुत सारा जमाना गुजर चूका है। तुम एहले मदियां के दरमियान भी मौजूद ना थे के उनको हमारी आयतें सुना रहे हो, मगर (उस वक्त की ये खबरें) भेजने वाले हम हैं
عَرَبِيوَما كُنتَ بِجانِبِ الطّورِ إِذ نادَينا وَلٰكِن رَحمَةً مِن رَبِّكَ لِتُنذِرَ قَومًا ما أَتاهُم مِن نَذيرٍ مِن قَبلِكَ لَعَلَّهُم يَتَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा न (ही) आप तूर (पर्वत) के किनारे पर थे, जब हमने (मूसा को) पुकारा। परंतु आपके पालनहार की ओर से दया है, ताकि आप उन लोगों को डराएँ, जिनके पास आपसे पहले कोई डराने वाला नहीं आया, ताकि वे नसीहत ग्रहण करें।
Roman Urdu (Maududi)Aur tum Toor ke daaman mein bhi us waqt maujood na they jab humne (Moosa ko pehli martaba) pukara tha, magar yeh tumhare Rubb ki rehmat hai (ke tumko yeh malumaat di jaa rahi hain) taa-ke tum un logon ko mutanabbeh (warn) kardo jinke paas tumse pehle koi mutanabbeh (warn) karne wala nahin aaya, shayad ke woh hosh mein aayein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na tu toor ki taraf tha jab kay hum ney aawaz di bulkay yeh teray perwerdigar ki taraf say aik rehmat hai iss liye kay tu unn logon ko hoshiyaar ker dey jin kay pass tujh say pehlay koi daraney wala nahi phoncha kiya ajab kay woh naseehat hasil ker len
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम तूर के दामन में भी उस वक्त मौजूद ना थे जब हमने (मूसा को पहली मरतबा) पुकारा था, मगर ये तुम्हारे रब की रहमत है (के तुमको ये मालूमात दी जा रही है) ता-के तुम उन लोगों को मुतनब्बेह (चेतावनी) करदो जिनके पास तुमसे पहले कोई मुतनब्बेह (चेतावनी) करने वाला नहीं आया, शायद के वो होश में आएं
عَرَبِيوَلَولا أَن تُصيبَهُم مُصيبَةٌ بِما قَدَّمَت أَيديهِم فَيَقولوا رَبَّنا لَولا أَرسَلتَ إِلَينا رَسولًا فَنَتَّبِعَ آياتِكَ وَنَكونَ مِنَ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यदि ऐसा न होता कि उन्हें उसके कारण कोई विपत्ति पहुँचेगी जो उनके हाथों ने आगे भेजा, तो वे कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! तूने हमारी ओर कोई रसूल क्यों न भेजा कि हम तेरी आयतों का अनुसरण करते और ईमान वालों में से हो जाते।
Roman Urdu (Maududi)(Aur yeh humne isliye kiya ke) kahin aisa na ho ke unke apne kiye kartooton ki badaulat koi museebat jab unpar aaye to woh kahein “aey parwardigar, tu-nay kyun na hamari taraf koi Rasool bheja ke hum teri aayaat ki pairawi karte aur ehle iman mein se hotey.”
Roman Urdu (Junagarhi)Agar yeh baat na hoti kay enhen unn kay apnay hathon aagay bhejay huyey aemaal ki waja say koi naseehat phonchti to yeh keh uthtay kay aey humaray rab! Tu ney humari taraf koi rasool kiyon na bheja? Kay hum teri aayaton ki tabeydaari kertay aur eman walon mein say ho jatay
Devnagri Urdu (Maududi)(और ये हमने इसलिए किया के) कहीं ऐसा ना हो के उनके अपने किए कार्टूनों की बदौलत कोई मुसीबत जब उन पर आए तो वो कहें "ऐ परवरदिगार, तू-ने क्यों ना हमारी तरफ कोई रसूल भेजा के हम तेरी आयत की जोड़ी बनाते और एहले ईमान में से होते।"
عَرَبِيفَلَمّا جاءَهُمُ الحَقُّ مِن عِندِنا قالوا لَولا أوتِيَ مِثلَ ما أوتِيَ موسىٰ ۚ أَوَلَم يَكفُروا بِما أوتِيَ موسىٰ مِن قَبلُ ۖ قالوا سِحرانِ تَظاهَرا وَقالوا إِنّا بِكُلٍّ كافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उनके पास हमारी ओर से सत्य आ गया, तो उन्होंने कहा : उसे उस जैसी चीज़ें क्यों न दी गईं, जो मूसा को दी गईं? तो क्या उन्होंने इससे पहले उन चीज़ों का इनकार नहीं किया जो मूसा को दी गई थीं? उन्होंने कहा : ये दोनों (सर्वथा) जादू हैं, जो एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं, और कहने लगे : हम तो इन सब का इनकार करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar jab hamare haan se haqq unke paas aa gaya to woh kehne lagey ‘kyun na diya gaya isko wahi kuch jo Moosa ko diya gaya tha?” Kya yeh log uska inkar nahin kar chuke hain jo issey pehle Moosa ko diya gaya tha? Unhon ne kaha “dono jaadu hain jo ek dusre ki madad karte hain” aur kaha “hum kisi ko nahin maante.”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab unn kay pass humari taraf say haq aa phoncha to kehtay hain kay yeh woh kiyon nahi diya gaya jesay diyey gaye thay musa (alh-e-salam) acha to kiya musa (alh-e-salam) ko jo kuch diya gaya tha uss kay sath logon ney kufur nahi kiya tha saaf kaha tha kay yeh dono jadoogar hain jo aik doosray kay madadgaar hain aur hum to inn sab kay munkir hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जब हमारे हां से हक उनके पास आ गया तो वो कहने लगे 'क्यूं ना दिया गया इसको वही कुछ जो मूसा को दिया गया था?' क्या ये लोग उसका इंकार नहीं कर चुके हैं जो इस पहले मूसा को दिया गया था? उनहों ने कहा "दोनों जादू हैं जो एक दूसरे की मदद करते हैं" और कहा "हम किसी को नहीं मानते।"
عَرَبِيقُل فَأتوا بِكِتابٍ مِن عِندِ اللَّهِ هُوَ أَهدىٰ مِنهُما أَتَّبِعهُ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें : फिर तुम अल्लाह की ओर से कोई पुस्तक ले आओ, जो इन दोनों से अधिक मार्गदर्शन वाली हो, ताकि मैं उसका अनुसरण करूँ, यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) insey kaho “accha to laao Allah ki taraf se koi kitaab jo in dono se zyada hidayat bakshne wali ho agar tum sacchey ho, main usi ki pairwi ikhtiyar karunga.”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehdey agar sachay hoto tum bhi Allah kay pass say aisi kitab ley aao jo inn dono say ziyada hidayat wali ho mein ussi ki pairwee keroon ga
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) इनसे कहो "अच्छा तो लाओ अल्लाह की तरफ से कोई किताब जो इन दोनों से ज्यादा हिदायत बक्शने वाली हो अगर तुम सच्चे हो, मैं उसकी जोड़ी इख्तियार करूंगा।"
عَرَبِيفَإِن لَم يَستَجيبوا لَكَ فَاعلَم أَنَّما يَتَّبِعونَ أَهواءَهُم ۚ وَمَن أَضَلُّ مِمَّنِ اتَّبَعَ هَواهُ بِغَيرِ هُدًى مِنَ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ لا يَهدِي القَومَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि वे आपकी माँग पूरी न करें, तो आप जान लें कि वे केवल अपनी इच्छाओं का पालन कर रहे हैं, और उससे बढ़कर पथभ्रष्ट कौन है, जो अल्लाह की ओर से किसी मार्गदर्शन के बिना अपनी इच्छा का पालन करे? निःसंदेह अल्लाह अत्याचार करने वाले लोगों को मार्ग नहीं दिखाता।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar woh tumhara yeh mutalaba poora nahin karte to samajh lo ke dar asal yeh apni khwahishat ke pairo hain, aur us shaks se badh kar kaun gumraah hoga jo khudayi hidayat ke bagair bas apni khwahishat ki pairwi karey? Allah aise zaalimon ko hargiz hidayat nahin bakshta
Roman Urdu (Junagarhi)Phir agar yeh teri na maney to tu yaqeen ker lay kay yeh sirf apni khuwaish ki pairwee ker rahey hain. Aur uss say barh ker behka hua kaun hai? Jo apni khuwaish kay peechay para hua ho baghair Allah ki rehnumaee kay be-shak Allah Taalaa zalim logon ko hidayat nahi deta
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर वो तुम्हारा ये मुतलबा पूरा नहीं करता तो समझ लो के दर असल ये अपनी ख्वाहिशत के जोड़े हैं, और हमारे शक्स से बढ़कर कौन गुमराह होगा जो खुदाई हिदायत के बिना बस अपनी ख्वाहिश की जोड़ी बनाए? अल्लाह ऐसे ज़ालिमों को हरगिज़ हिदायत नहीं बख्शता
عَرَبِي۞ وَلَقَد وَصَّلنا لَهُمُ القَولَ لَعَلَّهُم يَتَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने उनकी ओर निरंतर संदेश पहुँचाया, ताकि वे नसीहत ग्रहण करें।
Roman Urdu (Maududi)Aur (naseehat ki ) baat pai dar pai hum unhein pahuncha chuke hain taa-ke woh gaflat se bedaar hon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum barabar pay dar pay logon kay liye apna kalaam bhejtay rahey takay woh naseehat hasil kerlen
Devnagri Urdu (Maududi)और (नसीहत की) बात पै डर पै हम उन्हें पाहुंचा चुके हैं ता-के वो गफ़लत से बेदार हैं
عَرَبِيالَّذينَ آتَيناهُمُ الكِتابَ مِن قَبلِهِ هُم بِهِ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन लोगों को हमने इससे पहले किताब दी थी, वे इसपर ईमान लाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ko issey pehle humne kitaab di thi woh is (Quran) par iman latey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ko hum ney iss say pehlay kitab inayat farmaee woh to uss per bhi eman rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों को इस पहले हमने किताब दी थी वो इस (कुरान) पर ईमान लाते हैं
عَرَبِيوَإِذا يُتلىٰ عَلَيهِم قالوا آمَنّا بِهِ إِنَّهُ الحَقُّ مِن رَبِّنا إِنّا كُنّا مِن قَبلِهِ مُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब यह उनके सामने पढ़ा जाता है, तो वे कहते हैं : हम इसपर ईमान लाए। निश्चय यही हमारे रब की ओर से सत्य है। निःसंदेह हम इससे पहले मुसलमान (आज्ञाकारी) थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab yeh unko sunaya jata hai to woh kehte hain ke “ hum ispar iman laye, yeh waqayi haqq hai hamare Rubb ki taraf se, hum to pehle hi se Muslim hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab uss ki aayaten unn kay pass parhi jati hain to woh keh detay hain kay iss kay humaray rab ki taraf say haq honey per humara eman hai hum to iss say pehlay hi musalman hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जब ये उनको सुनाया जाता है है तो वो कहते हैं के "हम इसपर ईमान लाए, ये वाकाई हक़ है हमारे रब की तरफ से, हम तो पहले ही से मुस्लिम हैं"
عَرَبِيأُولٰئِكَ يُؤتَونَ أَجرَهُم مَرَّتَينِ بِما صَبَروا وَيَدرَءونَ بِالحَسَنَةِ السَّيِّئَةَ وَمِمّا رَزَقناهُم يُنفِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ये वे लोग हैं जिन्हें उनका प्रतिफल दोहरा दिया जाएगा, इसके बदले कि उन्होंने सब्र किया और वे भलाई के साथ बुराई को दूर करते हैं और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से खर्च करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hain jinhein unka ajar do baar diya jayega us saabit qadami ke badle jo unhon ne dikhayi. Woh burayi ko bhalayi se dafa karte hain aur jo kuch rizq humne unhein diya hai usmein se kharch karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh apnay kiye huyey sabar kay badley dohra dohra ajar diye jayen gay. Yeh neki say badi ko taal detay hain aur hum ney enhen jo dey rakha hai iss mein say detay rehtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग हैं जिनका अजर दो बार दिया जाएगा हमें साबित क़दामी के बदले जो उन्होन ने दिखाया। वो बुराइयों को भलाइ से दफा करते हैं और जो कुछ रिज्क हमने उन्हें दिया है उसमें से खर्च करते हैं
عَرَبِيوَإِذا سَمِعُوا اللَّغوَ أَعرَضوا عَنهُ وَقالوا لَنا أَعمالُنا وَلَكُم أَعمالُكُم سَلامٌ عَلَيكُم لا نَبتَغِي الجاهِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब वे व्यर्थ बात सुनते हैं, तो उससे किनारा करते हैं, तथा कहते हैं : हमारे लिए हमारे कर्म हैं और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म। सलाम है तुमपर, हम जाहिलों को नहीं चाहते।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab unhon ne behuda baat suni to yeh keh kar ussey kinara kash ho gaye ke “hamare aamal hamare liye aur tumhare aamal tumhare liye, tumko salaam hai, hum jaahilon ka sa tareeqa ikhtiyar karna nahin chahte.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab bey huda baat kaan mein parti hai to uss say kinara ker letay hain aur keh detay hain kay humaray amal humaray liye aur tumharay amal tumharay liye tum per salam ho hum jahilon say (ulajhna) nahi chahatay
Devnagri Urdu (Maududi)और जब उन्होन ने बेहुदा बात सुनी तो ये कह कर उसे किनारा कश हो गए के "हमारे अमल हमारे लिए और तुम्हारे अमल तुम्हारे लिए, तुमको सलाम है, हम जाहिलों का सा तरीक़ा इख़्तियार करना नहीं चाहिए।”
عَرَبِيإِنَّكَ لا تَهدي مَن أَحبَبتَ وَلٰكِنَّ اللَّهَ يَهدي مَن يَشاءُ ۚ وَهُوَ أَعلَمُ بِالمُهتَدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आप उसे हिदायत नहीं दे सकते जिसे आप चाहें, परंतु अल्लाह हिदायत देता है जिसे चाहता है और वह हिदायत पाने वालों को अधिक जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)“Aey Nabi, tum jisey chaho usey hidayat nahin de sakte, magar Allah jisey chahta hai hidayat deta hai aur woh un logon ko khoob jaanta hai jo hidayat qabool karne waley hain.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap jissay chahayen hidayat nahi ker saktay bulkay Allah Taalaa hi jissay chahaye hidayat kerta hai. Hidayat walon say wohi khoob aagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)"ऐ नबी, तुम जिसे चाहो उसे हिदायत नहीं दे सकते, मगर अल्लाह जिसे चाहता है हिदायत देता है और वो उन लोगों को खूब जानता है जो हिदायत कबूल करने वाले हैं।"
عَرَبِيوَقالوا إِن نَتَّبِعِ الهُدىٰ مَعَكَ نُتَخَطَّف مِن أَرضِنا ۚ أَوَلَم نُمَكِّن لَهُم حَرَمًا آمِنًا يُجبىٰ إِلَيهِ ثَمَراتُ كُلِّ شَيءٍ رِزقًا مِن لَدُنّا وَلٰكِنَّ أَكثَرَهُم لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा : यदि हम आपके साथ इस मार्गदर्शन का अनुसरण करें, तो हम अपनी धरती से उचक लिए जाएँगे। और क्या हमने उन्हें एक शांतिपूर्ण (सुरक्षित) हरम में जगह नहीं दी? जिसकी ओर, हमारे पास से रोज़ी के तौर पर, सब वस्तुओं के फल खींचकर लाए जाते हैं। परंतु उनमें से अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Woh kehte hain “agar hum tumhare saath is hidayat ki pairwi ikhtiyar karlein to apni zameen se uchak liye jaayenge.” Kya yeh waqia nahin hai ke humne ek pur-aman haram(makkah) ko inke liye jaaye qiyam bana diya jiski taraf har tarah ke samaraat(provision) khinchey chaley aate hain, hamari taraf se rizq ke taur par? Magar inmein se aksar log jaante nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney lagay kay agar hum aap kay sath hoker hidayat kay tabey daar bann jayen to hum to apnay mulk say uchak liye jayen kiya hum ney unehn aman-o-amaan aur hurmat walay haram mein jagah nahi di? Jahan tamam cheezon kay phal khinchay chalay aatay hain jo humaray pass bator rizk kay hain lekin inn mein say aksar kuch nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)वो कहते हैं "अगर हम तुम्हारे साथ इस हिदायत की जोड़ी इख्तियार कर लें तो अपनी ज़मीन से उचक ले जायेंगे।" क्या ये वक़िया नहीं है कि हमने एक पुर-अमन हरम (मक्का) को इनके लिए जाये क़ियाम बना दिया जिसकी तरफ हर तरह के समारात (प्रावधान) खिंचे चले आते हैं, हमारी तरफ से रिज़क के तौर पर? मगर इनमें से अक्सर लोग जानते नहीं हैं
عَرَبِيوَكَم أَهلَكنا مِن قَريَةٍ بَطِرَت مَعيشَتَها ۖ فَتِلكَ مَساكِنُهُم لَم تُسكَن مِن بَعدِهِم إِلّا قَليلًا ۖ وَكُنّا نَحنُ الوارِثينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने कितनी ही बस्तियों को विनष्ट कर दिया, जो अपनी गुज़र-बसर के संसाधनों पर इतराने लगी थीं। तो ये हैं उनके घर, जो उनके बाद आबाद नहीं किए गए, परंतु बहुत कम। और हम ही हमेशा उत्तराधिकारी बनने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur kitni hi aisi bastiyan hum tabaah kar chuke hain jinke log apni maishat (economy) par itra gaye thay so dekhlo, woh unke maskan padey huey hain jin mein unke baad kam hi koi basa hai. Aakhir e kaar hum hi waris ho kar rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney boht si woh bastiyan tabah kerdin jo apnay aish-o-ishrat mein itraney lagi thin yeh hain unn ki rehaeesh ki jaghen jo unn kay baad boht kum hi abad ki gaeen aur hum hi hain aakhir sab kuch kay waris
Devnagri Urdu (Maududi)और कितनी ही ऐसी बस्तियां हम तबाह कर चुके हैं जिनके लोग अपनी अर्थव्यवस्था (अर्थव्यवस्था) पर इत्र गए थे सो देखलो, वो उनके मास्कन पड़े हुए हैं जिन में उनके बाद काम ही कोई बसा है। आख़िर ए कार हम ही वारिस हो कर रहे
عَرَبِيوَما كانَ رَبُّكَ مُهلِكَ القُرىٰ حَتّىٰ يَبعَثَ في أُمِّها رَسولًا يَتلو عَلَيهِم آياتِنا ۚ وَما كُنّا مُهلِكِي القُرىٰ إِلّا وَأَهلُها ظالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आपका पालनहार कभी बस्तियों को विनष्ट करने वाला नहीं, यहाँ तक कि उनके केंद्र में एक रसूल भेजे जो उनके सामने हमारी आयतें पढ़े। तथा हम कभी बस्तियों को विनष्ट करने वाले नहीं, परंतु जबकि उसके निवासी अत्याचारी हों।
Roman Urdu (Maududi)Aur tera Rubb bastiyon ko halaak karne wala na tha jab tak ke unke markaz mein ek Rasool na bhejh deta jo unko hamari aayat sunata, aur hum bastiyon ko halaak karne waley na they jab tak ke unke rehne waley zaalim na ho jatey
Roman Urdu (Junagarhi)Tera rab kissi aik basti ko bhi uss waqt tak halak nahi kerta jab tak kay unn ki kissi bari basti mein apna koi payghumbar nahi bhej dey jo unehn humari aayaten parh ker suna deyaur hum bastiyon ko ussi waqt halak kertay hain jabkay wahan walay zulm-o-sitam per kamar kass len
Devnagri Urdu (Maududi)और तेरा रब बस्तियों को हलाक करने वाला ना था जब तक उनके मरकज में एक रसूल ना भेज देता जो उनको हमारी आयतें सुनाता, और हम बस्तियों को हलाक करने वाले ना वे जब तक के उनके रहने वाले जालिम ना हो जाते हैं
عَرَبِيوَما أوتيتُم مِن شَيءٍ فَمَتاعُ الحَياةِ الدُّنيا وَزينَتُها ۚ وَما عِندَ اللَّهِ خَيرٌ وَأَبقىٰ ۚ أَفَلا تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो कुछ भी तुम दिए गए हो, वह सांसारिक जीवन का सामान और उसकी शोभा है। और जो अल्लाह के पास है, वह उससे उत्तम और अधिक बाक़ी रहने वाला है, तो क्या तुम नहीं समझते?
Roman Urdu (Maududi)Tum logon ko jo kuch bhi diya gaya hai woh mehaz duniya ki zindagi ka samaan aur uski zeenat(adornment) hai, aur jo kuch Allah ke paas hai woh issey behtar aur baaqi tar hai. Kya tum log aqal se kaam nahin letay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tumhen jo kuch diya gaya hai woh sirf zindag-e-duniya ka samaan aur ussi ki ronaq hai haan Allah kay pass jo hai woh boht hi behtar aur dairpaa hai. Kiya tum nahi samajhtay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम लोगों को जो कुछ भी दिया है वो मेहज़ दुनिया की जिंदगी का सामान और उसकी ज़ीनत (श्रृंगार) है, और जो कुछ अल्लाह के पास है वो इसके लिए बेहतर और बाकी रास्ता है। क्या तुम लोग अक्ल से काम नहीं लेते
عَرَبِيأَفَمَن وَعَدناهُ وَعدًا حَسَنًا فَهُوَ لاقيهِ كَمَن مَتَّعناهُ مَتاعَ الحَياةِ الدُّنيا ثُمَّ هُوَ يَومَ القِيامَةِ مِنَ المُحضَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वह व्यक्ति जिसे हमने एक अच्छा वादा दिया, फिर वह उसे प्राप्त करने वाला है, उस व्यक्ति की तरह है, जिसे हमने सांसारिक जीवन का सामान दिया, फिर वह क़ियामत के दिन उपस्थित किए जाने वालों में से होगा?
Roman Urdu (Maududi)Bhala woh shaks jissey humne accha wada kiya ho, aur woh usey panay wala ho kabhi us shaks ki tarah ho sakta hai jisey humne sirf hayat-e-duniya ka sar-o-samaan de diya ho, aur phir woh qayamat ke roz saza ke liye pesh kiya janey wala ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh shaks jiss say hum ney nek wada kiya hai jissay woh qata’an paney wala hai misil uss shaks kay ho sakta hai? Jissay hum ney zindaganiy-e-duniya ki kuch yun hi si manfa’at dey di phir bil-aakhir woh qayamat kay roz pakra baandha hazir kiya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)भला वो शक्स जिसने अच्छा वादा किया हो, और वो उसे पाने वाला हो कभी उस शक्स की तरह हो सकता है जिसे हमने सिर्फ हयात-ए-दुनिया का सर-ओ-समान दे दिया हो, और फिर वो कयामत के रोज़ सज़ा के लिए पेश किया जाने वाला हो
عَرَبِيوَيَومَ يُناديهِم فَيَقولُ أَينَ شُرَكائِيَ الَّذينَ كُنتُم تَزعُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन वह उन्हें पुकारेगा, तो कहेगा : कहाँ हैं मेरे वे साझी, जो तुम दावा करते थे?
Roman Urdu (Maududi)Aur (bhool na jayein yeh log) us din ko jabke woh inko pukarega aur puchega “kahan hai mere woh shareek jinka tum gumaan rakhte thay?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss din Allah Taalaa unhen pukar ker farmaye ga kay tum jinehn apnay gumaan mein mera shareek thera rahey thay kahan hain
Devnagri Urdu (Maududi)और (भूल ना जाएं ये लोग) उस दिन को जबके वो इनको पुकारेगा और पूछेगा "कहां है मेरे वो शरीक जिनका तुम गुमान रखते थे?"
عَرَبِيقالَ الَّذينَ حَقَّ عَلَيهِمُ القَولُ رَبَّنا هٰؤُلاءِ الَّذينَ أَغوَينا أَغوَيناهُم كَما غَوَينا ۖ تَبَرَّأنا إِلَيكَ ۖ ما كانوا إِيّانا يَعبُدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग कहेंगे जिनपर बात सिद्ध हो चुकी : ऐ हमारे पालनहार! ये वे लोग हैं जिन्हें हमने गुमराह किया, हमने उन्हें उसी तरह गुमराह किया जैसे हम गुमराह हुए। हम तेरे सामने (इनसे) अलग होने की घोषणा करते हैं। ये हमारी तो पूजा नहीं करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh qaul jinpar chaspan hoga woh kahenge “Aey hamare Rubb, beshak yahi log hain jinko humne gumraah kiya tha, inhein humne usi tarah gumraah kiya jaise hum khud gumraah huey. Hum aap ke saamne baraat(disassociation) ka izhar karte hain. Yeh hamari to bandagi nahin karte thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Jin per baat aa chuki woh jawab den gay kay aey humaray perwerdigar! Yehi woh hain jinhen hum ney behka rakha tha hum ney enhen issi tarah behkaya jiss tarah hum behkay thay hum teri sarkar mein apni dast darazi kertay hain yeh humari ibadat nahi kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)ये क़ौल जिनपर चस्पां होगा वो कहेंगे "ऐ हमारे रब, बहकावे यही लोग हैं जिनको हमने गुमराह किया था, उन्होंने हमें उसी तरह गुमराह किया जैसे हम खुद गुमराह हुए। हम आप के सामने बारात (अलगाव) का इज़हार करते हैं। ये हमारी तो बंदगी नहीं करते थे”
عَرَبِيوَقيلَ ادعوا شُرَكاءَكُم فَدَعَوهُم فَلَم يَستَجيبوا لَهُم وَرَأَوُا العَذابَ ۚ لَو أَنَّهُم كانوا يَهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा कहा जाएगा : अपने साझियों को पुकारो। तो वे उन्हें पुकारेंगे, परंतु वे उन्हें उत्तर न देंगे। तथा वे यातना को देखेंगे, (तो कामना करेंगे) काश कि उन्होंने मार्गदर्शन स्वीकार किया होता।
Roman Urdu (Maududi)Phir insey kaha jayega ke pukaro ab apne thehraye huey shareekon ko. Yeh unhein pukarenge magar woh inko koi jawab na dengey aur yeh log azaab dekh lenge. Kaash yeh hidayat ikhtiyar karne waley hotey
Roman Urdu (Junagarhi)Kaha jayega apnay shareekon ko bulao woh bulayen gay lekin woh jawab tak na den gay aur sab azab dekh len gay kaash yeh log hidayat paa letay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इनसे कहा जाएगा के पुकारो अब अपने ठहरे हुए शेयरों को। ये उन्हें पुकारेंगे मगर वो इनको कोई जवाब ना देंगे और ये लोग अजब देख लेंगे। काश ये हिदायत इख्तियार करने वाले होते
عَرَبِيوَيَومَ يُناديهِم فَيَقولُ ماذا أَجَبتُمُ المُرسَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन वह (अल्लाह) उन्हें पुकारेगा, फिर कहेगा : तुमने रसूलों को क्या उत्तर दिया?
Roman Urdu (Maududi)Aur (faramosh na karein yeh log) woh din jabke woh inko pukarega aur puchega ke “Jo Rasool bheje gaye thay unhein tumne kya jawab diya tha?”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din unn ko bula ker poochay ga kay tum ney nabiyon ko kiya jawab diya
Devnagri Urdu (Maududi)और (फरामोश ना करें ये लोग) वो दिन जबके वो इनको पुकारेगा और पूछेगा के "जो रसूल भेजे गए थे उन्होंने तुमने क्या जवाब दिया था?"
عَرَبِيفَعَمِيَت عَلَيهِمُ الأَنباءُ يَومَئِذٍ فَهُم لا يَتَساءَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उस दिन उनसे सब बातें लुप्त हो जाएँगी, इसलिए वे एक-दूसरे से (भी) नहीं पूछेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt koi jawab inko na soojhega aur na yeh aapas mein ek dusre se puch hi sakenge
Roman Urdu (Junagarhi)Phir uss din unn ki tamam daleelen gumm hojayen gi aur aik doosray say sawal tak na keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त कोई जवाब इनको न समझ आएगा और न ये आपस में एक दूसरे से पूछ ही पाएंगे
عَرَبِيفَأَمّا مَن تابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ صالِحًا فَعَسىٰ أَن يَكونَ مِنَ المُفلِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जिसने क्षमा माँग ली तथा ईमान ले आया और अच्छा कर्म किया, तो आशा है कि वह सफल होने वालों में से होगा।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jisne aaj toubah karli aur iman le aaya aur neik amal kiye wahi yeh tawakko(expect) kar sakta hai ke wahan falaah paaney walon mein se hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Haan jo shaks tauba ker ley eman ley aaye aur nek kaam keray yaqeen hai kay woh nijat paaney walon mein say hojaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जिसने आज तौबाह कार्ली और ईमान ले आया और नेक अमल किया वही ये तवक्को (उम्मीद) कर सकता है के वहां फलाह पाने वालों मुझसे होगा
عَرَبِيوَرَبُّكَ يَخلُقُ ما يَشاءُ وَيَختارُ ۗ ما كانَ لَهُمُ الخِيَرَةُ ۚ سُبحانَ اللَّهِ وَتَعالىٰ عَمّا يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आपका पालनहार जो चाहता है पैदा करता है और चुन लेता है, उनके लिए कभी भी अधिकार नहीं। अल्लाह पवित्र है तथा बहुत उच्च है, उससे जो वे साझी बनाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tera Rubb paida karta hai jo kuch chahta hai. Aur (woh khud hi apne kaam ke liye jisey chahta hai) muntakhab(choose) kar leta hai. Yeh intekhab in logon ke karne ka kaam nahin hai, Allah paak hai aur bahut baala-tarr hai us shirk se jo yeh log karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aap ka rab jo chahata hai peda kerta hai aur jisay chahata hai chun leta hai inn mein say kissi ko koi ikhtiyar nahi Allah hi kay liye paki hai woh buland tar hai her uss cheez say kay log shareek kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)तेरा रब अदा करता है जो कुछ चाहता है। और (वो खुद ही अपने काम के लिए जिसे चाहता है) मुंतखब (चुनें) कर लेता है। ये इंतेखाब इन लोगों के करने का काम नहीं है, अल्लाह पाक है और बहुत बाला-तरर है हमसे शिर्क से जो ये लोग करते हैं
عَرَبِيوَرَبُّكَ يَعلَمُ ما تُكِنُّ صُدورُهُم وَما يُعلِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आपका पालनहार जानता है, जो कुछ उनके सीने छिपाते हैं और जो कुछ वे ज़ाहिर करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tera Rubb jaanta hai jo kuch yeh dilon mein chupaye huey hain aur jo kuch yeh zaahir karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay seenay jo kuch chupatay aur jo kuch zahir kertay hain aap ka rab sab kuch janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)तेरा रब जानता है जो कुछ ये दिलों में छुपे हुए हैं और जो कुछ ये जाहिर करते हैं
عَرَبِيوَهُوَ اللَّهُ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۖ لَهُ الحَمدُ فِي الأولىٰ وَالآخِرَةِ ۖ وَلَهُ الحُكمُ وَإِلَيهِ تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वही अल्लाह है, जिसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं। उसी के लिए दुनिया और आख़िरत में सब प्रशंसा है। तथा उसी का हुक्म (चलता) है और उसी की ओर तुम लौटाए जाओगो।
Roman Urdu (Maududi)Wahi ek Allah hai jiske siwa koi ibadat ka mustahiq nahin. Usi ke liye hamd hai duniya mein bhi aur aakhirat mein bhi, Farma rawayi usi ki hai aur usi ki taraf tum sab palataye janey waley ho
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi Allah hai uss kay siwa koi laeeq-e-ibadat nahi duniya aur aakhirat mein ussi ki tareef hai. Ussi kay liye farman rawaqee hai aur ussi ki taraf tum sab pheray jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)वही एक अल्लाह है जिसके सिवा कोई इबादत का मुस्तहिक नहीं। उसके लिए हम्द है दुनिया में भी और आखिरी में भी, फरमा रवाई उसी की है और उसकी तरफ तुम सब पलटाये जाने वाले हो
عَرَبِيقُل أَرَأَيتُم إِن جَعَلَ اللَّهُ عَلَيكُمُ اللَّيلَ سَرمَدًا إِلىٰ يَومِ القِيامَةِ مَن إِلٰهٌ غَيرُ اللَّهِ يَأتيكُم بِضِياءٍ ۖ أَفَلا تَسمَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें : क्या तुमने देखा कि यदि अल्लाह क़ियामत के दिन तक तुमपर हमेशा के लिए रात कर दे, तो अल्लाह के सिवा कौन पूज्य है जो तुम्हारे लिए प्रकाश ला सके? तो क्या तुम नहीं सुनते?
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, insey kaho kabhi tum logon ne gaur kiya ke agar Allah qayamat tak tumpar hamesha ke liye raat taari karde to Allah ke siwa woh kaunsa mabood hai jo tumhein roshni laa dey? Kya tum sunte nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! kay dekho to sahi agar Allah Taalaa tum per raat hi raat qayamat tak barabar ker dey to siwaye Allah kay kaun mabood hai jo tumharay pass din ki roshni laye? Kiya tum suntay nahi ho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, इनसे कहो कभी तुम लोगों ने गौर किया के अगर अल्लाह कयामत तक तुम हमेशा के लिए रात तारी करदे अल्लाह के सिवा वो कौन सा माबूद है जो तुम्हें रोशनी ला दे? क्या तुम सुनते नहीं हो
عَرَبِيقُل أَرَأَيتُم إِن جَعَلَ اللَّهُ عَلَيكُمُ النَّهارَ سَرمَدًا إِلىٰ يَومِ القِيامَةِ مَن إِلٰهٌ غَيرُ اللَّهِ يَأتيكُم بِلَيلٍ تَسكُنونَ فيهِ ۖ أَفَلا تُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : क्या तुमने देखा कि यदि अल्लाह क़ियामत के दिन तक तुमपर हमेशा के लिए दिन कर दे, तो अल्लाह के सिवा कौन पूज्य है जो तुम्हारे लिए रात ले आए, जिसमें तुम विश्राम कर सको? तो क्या तुम नहीं देखते?
Roman Urdu (Maududi)Insey pucho, kabhi tumne socha ke agar Allah qayamat tak tumpar hamesha ke liye din taari karde to Allah ke siwa woh kaunsa maabood hai jo tumhein raat laa dey taa-ke tum usmein sukoon haasil kar sako? Kya tumko soojhta nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Poochiye! Kay yeh bhi batado kay agar Allah Taalaa tum per hamesha qayamat tak din hi din rakhay to bhi siwaye Allah Taalaa kay koi mabood hai jo tumharay pass raat ley aaye? Jiss mein tum aaraam hasil kero kiya tum dekh nahi rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पूछो, कभी तुमने सोचा के अगर अल्लाह कयामत तक तुम हमेशा के लिए दिन तारी करदे तो अल्लाह के सिवा वो कौन सा माबूद है जो तुम्हें रात ला दे ता-के तुम हमें सुकून हासिल कर सको? क्या तुमको सूझता नहीं
عَرَبِيوَمِن رَحمَتِهِ جَعَلَ لَكُمُ اللَّيلَ وَالنَّهارَ لِتَسكُنوا فيهِ وَلِتَبتَغوا مِن فَضلِهِ وَلَعَلَّكُم تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसने अपनी दया ही से तुम्हारे लिए रात और दिन बनाए हैं। ताकि तुम उस (रात) में आराम करो और ताकि उसका कुछ अनुग्रह तलाश करो और ताकि तुम उसके कृतज्ञ बनो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh usi ki rehmat hai ke usne tumhare liye raat aur din banaye taa-ke tum (raat mein) sukoon haasil karo aur (din ko) apne Rubb ka fazal talash karo. Shayad ke tum shukar guzar bano
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney tumharay liye apnay fazal-o-karam say din raat muqarrar ker diye hain kay tum raat mein aaraam kero aur din mein uss ki bheji hui rozi talash kero yeh iss liye kay tum shukar ada kero
Devnagri Urdu (Maududi)ये उसी की रहमत है कि उसने तुम्हारे लिए रात और दिन बनाई ता-के तुम (रात में) सुकून हासिल करो और (दिन को) अपने रब का फज़ल तलाश करो। शायद के तुम शुक्र गुज़ार बनो
عَرَبِيوَيَومَ يُناديهِم فَيَقولُ أَينَ شُرَكائِيَ الَّذينَ كُنتُم تَزعُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन वह उन्हें पुकारेगा, तो कहेगा : कहाँ हैं मेरे वे साझी, जो तुम दावा करते थे?
Roman Urdu (Maududi)(Yaad rakhein yeh log) woh din jabke woh inhein pukarega phir puchega “kahan hai mere woh shareek jinka tum gumaan rakhte thay?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss din unhen pukar ker Allah Taalaa farmaye ga jinhen tum meray shareek khayal kertay thay woh kahan hain
Devnagri Urdu (Maududi)(याद रखें ये लोग) वो दिन जबके वो इन्हें पुकारेगा फिर पूछेगा "कहाँ है मेरे वो शरीक जिनका तुम गुमान रखते थे?"
عَرَبِيوَنَزَعنا مِن كُلِّ أُمَّةٍ شَهيدًا فَقُلنا هاتوا بُرهانَكُم فَعَلِموا أَنَّ الحَقَّ لِلَّهِ وَضَلَّ عَنهُم ما كانوا يَفتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हम प्रत्येक समुदाय से एक गवाह निकालेंगे, फिर हम कहेंगे : लाओ अपने प्रमाण। तो वे जान लेंगे कि निःसंदेह सत्य बात अल्लाह की है, और जो कुछ वे गढ़ते थे, वह उनसे गुम हो जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur hum har ummat mein se ek gawah nikal layenge phir kahenge ke “lao ab apni daleel”. Us waqt inhein maloom ho jayega ke haqq Allah ki taraf hai, aur gum (vanish) ho jayenge inke woh saarey jhoot jo inhon ne ghadh rakkhe thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum her ummat mein say aik gawah alag ker len gay kay apni daleelen paish kero pus uss waqt jaan len gay kay haq Allah Taalaa ki taraf hai aur jo kuch iftra woh jortay thay sab unn kay pass say kho jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)और हम हर उम्मत में से एक गवाह निकाल लेंगे फिर कहेंगे के "लाओ अब अपनी दलील"। हमें वक़्त मालूम हो जाएगा के हक़ अल्लाह की तरफ है, और गम (गायब) हो जाएंगे इनके वो सारे झूठ जो इन्हों ने ग़ध रक्खे थे
عَرَبِي۞ إِنَّ قارونَ كانَ مِن قَومِ موسىٰ فَبَغىٰ عَلَيهِم ۖ وَآتَيناهُ مِنَ الكُنوزِ ما إِنَّ مَفاتِحَهُ لَتَنوءُ بِالعُصبَةِ أُولِي القُوَّةِ إِذ قالَ لَهُ قَومُهُ لا تَفرَح ۖ إِنَّ اللَّهَ لا يُحِبُّ الفَرِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह क़ारून मूसा की जाति में से था। फिर उसने उनपर सरकशी की और हमने उसे इतने ख़ज़ाने दिए कि निःसंदेह उनकी कुंजियाँ एक बलशाली गिरोह पर भारी पड़ती थीं। जब उसकी जाति ने उससे कहा : मत इतरा। निःसंदेह अल्लाह इतराने वालों से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ek waqia hai ke Qaroon Moosa ki qaum ka ek shaks tha, phir woh apni qaum ke khilaf sarkash ho gaya aur humne usko itney khazane (treasures) de rakkhe thay ke unki kunjiyan (keys) taqatwar aadmiyon ki ek jamaat mushkil se utha sakti thi. Ek dafa jab uski qaum ke logon ne ussey kaha “ phoolna (itrana /exult) jaa, Allah phoolne(itrane) walon ko pasand nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Qaroon tha to qom-e-musa say lekin unn per zulm kerney laga tha hum ney ussay (iss qadar) khazaney dey rakhay thay kay kaee kaee taqatwar log ba mushkil uss ki kunjiyan utha saktay thay aik baar uss ki qom ney uss say kaha kay itra mat! Allah Taalaa itraney walon say mohabbat nahi rakhta
Devnagri Urdu (Maududi)ये एक वक़िया है के क़ारून मूसा की क़ौम का एक शक्स था, फिर वो अपनी क़ौम के ख़िलाफ़ व्यंग्य हो गया और हमने उसको इतने खज़ाने (खजाने) दे रखे थे कि उनकी कुंजियाँ (चाबियाँ) ताकतवार आदमियों की एक जमात मुश्किल से उठ सकती थी। एक दफ़ा जब उसकी क़ौम के लोगों ने उसे कहा " फूलना (इतराना/खुशी) जा, अल्लाह फूलने (इतराने) वालों को पसंद नहीं करता
عَرَبِيوَابتَغِ فيما آتاكَ اللَّهُ الدّارَ الآخِرَةَ ۖ وَلا تَنسَ نَصيبَكَ مِنَ الدُّنيا ۖ وَأَحسِن كَما أَحسَنَ اللَّهُ إِلَيكَ ۖ وَلا تَبغِ الفَسادَ فِي الأَرضِ ۖ إِنَّ اللَّهَ لا يُحِبُّ المُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो कुछ अल्लाह ने तुझे दिया है, उसमें आख़िरत का घर तलाश कर, और दुनिया से अपना हिस्सा मत भूल और उपकार कर, जैसे अल्लाह ने तुझपर उपकार किया है, तथा धरती में बिगाड़ की तलाश मत कर। निःसंदेह अल्लाह बिगाड़ पैदा करने वालों से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Jo maal Allah ne tujhey diya hai ussey aakhirat ka ghar banane ki fikar kar, aur duniya mein se bhi apna hissa faramosh na kar. Ehsan kar jis tarah Allah ne tere saath ehsan kiya hai, aur zameen mein fasaad barpa karne ki koshish na kar, Allah mufsidon (fasaad karne waalon) ko pasand nahin karta.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo kuch Allah Taalaa ney tujhay dey rakha hai uss mein say aakhirat kay ghar ki talash bhi rakh aur apnay dunyawi hissay ko bhi na bhool aur jesay Allah ney teray sath ehsan kiya hai tu bhi acha salook ker aur mulk mein fasad ka khuwan na ho yaqeen maan kay Allah mufsidon ko na pasand rakhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो माल अल्लाह ने तुझे दिया है उसे आख़िरत का घर बनाने की फ़िक्र कर, और दुनिया में से भी अपना हिसा फ़रामोश न कर। एहसान कर जिस तरह अल्लाह ने तेरे साथ एहसान किया है, और ज़मीन में फ़साद बरपा करने की कोशिश ना कर, अल्लाह मुफ़्सिदों (फ़साद करने वालों) को पसंद नहीं करता।''
عَرَبِيقالَ إِنَّما أوتيتُهُ عَلىٰ عِلمٍ عِندي ۚ أَوَلَم يَعلَم أَنَّ اللَّهَ قَد أَهلَكَ مِن قَبلِهِ مِنَ القُرونِ مَن هُوَ أَشَدُّ مِنهُ قُوَّةً وَأَكثَرُ جَمعًا ۚ وَلا يُسأَلُ عَن ذُنوبِهِمُ المُجرِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ''मुझे तो यह उस ज्ञान के कारण दिया गया है जो मेरे पास है।'' और क्या उसने नहीं जाना कि निःसंदेह अल्लाह उससे पहले कई समुदायों को विनष्ट कर चुका है, जो शक्ति में उससे बढ़कर और धन-दौलत में उससे अधिक थे। और अपराधियों से उनके पापों के बारे में पूछा नहीं जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)To usne kaha “Yeh sab kuch to mujhey us ilm ki bina par diya gaya hai jo mujhko haasil hai”. Kya usko yeh ilm na tha ke Allah ussey pehle bahut se aisey logon ko halaak kar chuka hai jo ussey zyada quwwat aur jamiyat rakhte thay? Mujrim se to unke gunaah nahin puchey jatey
Roman Urdu (Junagarhi)Qaroon ney kaha yeh sab kuch mujhay meri apni samajh ki bina per hi diya gaya hai kiya issay abb tak yeh nahi maloom kay Allah Taalaa ney uss say pehlay boht si basti walon ko ghaarat ker diya jo uss say boht ziyada qooat walay aur boht bari jama poonji walay thay. Aur gunehgaaron say unn kay gunahon ki baaz purs aisay waqt nahi ki jati
Devnagri Urdu (Maududi)तो उसने कहा "ये सब कुछ तो मुझे उस इल्म की बिना पर दिया गया है जो मुझको हासिल है"। क्या उसको ये इल्म ना था कि अल्लाह उसे पहले बहुत से ऐसे लोगों को हलाक कर चुका है जो उसे ज्यादा कुव्वत और जमीयत रखता था? मुजरिम से तो उनके गुनाह नहीं पूछे जाते
عَرَبِيفَخَرَجَ عَلىٰ قَومِهِ في زينَتِهِ ۖ قالَ الَّذينَ يُريدونَ الحَياةَ الدُّنيا يا لَيتَ لَنا مِثلَ ما أوتِيَ قارونُ إِنَّهُ لَذو حَظٍّ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वह अपनी जाति के सामने अपनी शोभा में निकला। उन लोगों ने कहा जो दुनिया का जीवन चाहते थे : ऐ काश! हमारे लिए ऐसा ही होता जो क़ारून को दिया गया है, निःसंदेह वह निश्चय बड़ा नसीब वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Ek roz woh apni qaum ke saamne apne puray thaat mein nikla. Jo log hayat e duniya ke taalib thay woh usey dekh kar kehne lagey “kaash humein bhi wahi kuch milta jo Qaroon ko diya gaya hai, yeh to bada naseebe wala hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus qaroon poori aaraeesh kay sath apni qom kay majmay mein nikla to dunyawi zindagi kay matwalay kehney lagay kaash kay humen bhi kissi tarah woh mill jata jo qaroon ko diya gaya hai. Yeh to bara hi qismat ka dhani hai
Devnagri Urdu (Maududi)एक रोज़ वो अपनी क़ौम के सामने अपने पूरे थेट में निकला। जो लोग हयात ए दुनिया के तालिब थे वो उसे देख कर कहने लगे "काश हमें भी वही कुछ मिलता जो क़ारून को दिया गया है, ये तो बड़ा नसीबे वाला है।"
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ أوتُوا العِلمَ وَيلَكُم ثَوابُ اللَّهِ خَيرٌ لِمَن آمَنَ وَعَمِلَ صالِحًا وَلا يُلَقّاها إِلَّا الصّابِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन लोगों ने कहा, जिनको ज्ञान दिया गया था : हाय तुम पर! अल्लाह का बदला उस व्यक्ति के लिए कहीं उत्तम है, जो ईमान लाया तथा उसने अच्छा कर्म किया। और इसका सामर्थ्य केवल उन्हीं को दिया जाता है जो सब्र करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar jo log ilm rakhne waley thay woh kehne lagey “Afsos tumhare haal par, Allah ka sawaab behtar hai us shaks ke liye jo iman laye aur neik amal karey, aur yeh daulat nahin milti magar sabr karne waalon ko.”
Roman Urdu (Junagarhi)Zee ilm log unhen samjhaney lagay kay afsos! Behtar cheez to woh hai jo bator sawab unhen milay gi jo Allah per eman layen aur nek amal keren yeh baat unhi kay dil mein dali jati hai jo sabar-o-sahaar walay hon
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जो लोग इल्म रखने वाले थे वो कहने लगे "अफसोस तुम्हारे हाल पर, अल्लाह का सवाब बेहतर है हमारे शक्स के लिए जो ईमान लाए और नेक अमल करे, और ये दौलत नहीं मिलती मगर सब्र करने वालों को।"
عَرَبِيفَخَسَفنا بِهِ وَبِدارِهِ الأَرضَ فَما كانَ لَهُ مِن فِئَةٍ يَنصُرونَهُ مِن دونِ اللَّهِ وَما كانَ مِنَ المُنتَصِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उसे और उसके घर को ज़मीन में धँसा दिया, फिर न उसके लिए कोई गिरोह था जो अल्लाह के मुक़ाबले में उसकी मदद करता और न वह अपनी रक्षा करने वालों में से था।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir-e-kaar humne usey aur uske ghar ko zameen mein dhansa diya, phir koi uske haamiyon(supporters) ka giroh na tha jo Allah ke muqabley mein uski madad ko aata, aur na woh khud apni madad aap kar saka
Roman Urdu (Junagarhi)(aakhir kaar) hum ney ussay uss kay mehal samet zamin mein dhansa diya aur Allah kay siwa koi jamaat uss ki madad kay liye tayyar na hui na woh khud apnay bachaney walon mein say ho saka
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर-ए-कार हमने उसे और उसके घर को ज़मीन पर धांसा दिया, फिर कोई उसके हामियों (समर्थकों) का गिरो ​​ना था जो अल्लाह के मुक़ाबले में उसकी मदद को आता, और ना वो खुद अपनी मदद आप कर सका
عَرَبِيوَأَصبَحَ الَّذينَ تَمَنَّوا مَكانَهُ بِالأَمسِ يَقولونَ وَيكَأَنَّ اللَّهَ يَبسُطُ الرِّزقَ لِمَن يَشاءُ مِن عِبادِهِ وَيَقدِرُ ۖ لَولا أَن مَنَّ اللَّهُ عَلَينا لَخَسَفَ بِنا ۖ وَيكَأَنَّهُ لا يُفلِحُ الكافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने कल उसके स्थान की कामना की थी, कहने लगे : अफ़सोस! क्या हमने नहीं जाना कि अल्लाह अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है, रोज़ी विस्तृत कर देता है और तंग करता है। यदि यह न होता कि अल्लाह ने हमपर उपकार किया, तो वह अवश्य हमें धँसा देता। अफ़सोस! ऐसा प्रतीत होता है कि सच्चाई यह है कि काफ़िर सफल नहीं होते।
Roman Urdu (Maududi)Ab wahi log jo kal uski manzilat ki tamanna kar rahey thay kehne lagey “afsos, hum bhool gaye thay ke Allah apne bandon mein se jiska rizq chahta hai kushada karta hai aur jisey chahta hai napa-tula deta hai.Agar Allah ne humpar ehsan na kiya hota to humein bhi zameen mein dhansa deta. Afsos humko yaad na raha ke kafir falaah nahin paya karte.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log kal uss kay martabay per phonchney ki aarzoo mandiyan ker rahey thay woh aaj kehney lagay kay kiya tum nahi dekhtay kay Allah Taalaa hi apnay bandon mein say jiss kay liye chahaye rozi kushada ker deta hai aur tang bhi? Agar Allah Taalaa hum per fazal na kerta to humen bhi dhansa deta kiya dekhtay nahi ho kay na-shukron ko kabhi kaamyabi nahi hoti
Devnagri Urdu (Maududi)अब वही लोग जो कल उसकी मंजिल की तमन्ना कर रहे थे कहने लगे "अफ़सोस, हम भूल गए थे के अल्लाह अपने बंदों में से जिसका रिज़क चाहता है कुशादा करता है और जिसे चाहता है नपा-तुला देता है। अगर अल्लाह ने हमपर एहसान न किया होता तो हमें भी ज़मीन मैं धोखा देता हूं। अफ़सोस हमको याद ना रहा के काफिर फलाह नहीं पाया करते।”
عَرَبِيتِلكَ الدّارُ الآخِرَةُ نَجعَلُها لِلَّذينَ لا يُريدونَ عُلُوًّا فِي الأَرضِ وَلا فَسادًا ۚ وَالعاقِبَةُ لِلمُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह आख़िरत का घर, हम इसे उन लोगों के लिए बनाते हैं, जो न ज़मीन में किसी तरह ऊँचे होने का इरादा रखते हैं और न ही किसी बिगाड़ का, और अच्छा अंजाम परहेज़गारों के लिए है।
Roman Urdu (Maududi)Woh aakhirat ka ghar to hum un logon ke liye makhsoos kar dengey jo zameen mein apni badayi nahin chahte aur na fasaad karna chahte hain. Aur anjaam ki bhalayi muttaqin hi ke liye hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aakhirat ka yeh bhala ghar hum unn hi kay liye muqarrar ker detay hain jo zamin mein unchaee baraee aur fakhar nahi kertay na fasad ki chahat rakhtay hain. Perhezgaron kay liye nihayat hi umdaa anjam hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो आख़िरत का घर तो हम उन लोगों के लिए मखसूस कर देंगे जो ज़मीन में अपनी बदाई नहीं चाहते और ना फ़साद करना चाहते हैं। और अंजाम की भलाई मुत्तक़िन ही के लिए है
عَرَبِيمَن جاءَ بِالحَسَنَةِ فَلَهُ خَيرٌ مِنها ۖ وَمَن جاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَلا يُجزَى الَّذينَ عَمِلُوا السَّيِّئَاتِ إِلّا ما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो व्यक्ति नेकी लेकर आएगा, उसके लिए उससे उत्तम (बदला) है और जो बुराई लेकर आएगा, तो जिन लोगों ने बुरे काम किए वे बदला नहीं दिए जाएँगे परंतु उसी का जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jo koi bhalayi lekar aayega uske liye ussey behtar bhalayi hai, aur jo burayi lekar aaye to buraiyan karne walon ko waisa hi badla milega jaise amal woh karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Jo shaks neki laye ga uss uss say behtar milay ga aur jo buraee ley ker aaye ga to aisay bad-aemaali kernay walon ko unn kay unhi aemaal ka badla diya jaye ga jo woh kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)जो कोई भलाई लेकर आएगा उसके लिए उसे बेहतर भलाई है, और जो बुराई लेकर आए तो बुराइयां करने वालों को वैसा ही बदला मिलेगा जैसा अमल वो करता था
عَرَبِيإِنَّ الَّذي فَرَضَ عَلَيكَ القُرآنَ لَرادُّكَ إِلىٰ مَعادٍ ۚ قُل رَبّي أَعلَمُ مَن جاءَ بِالهُدىٰ وَمَن هُوَ في ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिसने आपपर इस क़ुरआन को अनिवार्य किया है, वह अवश्य आपको एक (महान) लौटने के स्थान की ओर वापस लाने वाला है। आप कह दें कि मेरा पालनहार उसे अधिक जानने वाला है, जो मार्गदर्शन लेकर आया और उसे भी जो खुली गुमराही में है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, yaqeen jaano ke jisne yeh Quran tumpar farz kiya hai woh tumhein ek behtareen anjaam ko pahunchane wala hai. In logon se kehdo ke “Mera Rubb khoob jaanta hai ke hidayat lekar kaun aaya aur khuli gumraahi mein kaun mubtala hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss Allah ney aap per quran nazil farmaya hai woh doobara aap ko pehli jagah laaney wala hai keh dijiye! kay mera rab ussay bhi ba-khoobi janta hai jo hidayat laya hai aur uss bhi jo khulli gumrahee mein hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, यकीन जानो के जिसने ये कुरान तुमपर फ़र्ज़ किया है वो तुम्हें एक बेहतर अंजाम देने वाला है। लोगों से कहदो के "मेरा रब खूब जानता है के हिदायत लेकर कौन आया और खुली गुमराही में कौन मुबतला है।"
عَرَبِيوَما كُنتَ تَرجو أَن يُلقىٰ إِلَيكَ الكِتابُ إِلّا رَحمَةً مِن رَبِّكَ ۖ فَلا تَكونَنَّ ظَهيرًا لِلكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आप आशा नहीं करते थे कि आपकी ओर किताब उतारी जाएगी। परंतु आपके पालनहार की दया से (वह अवतरित हुई)। अतः आप कदापि काफ़िरों के सहायक न बनें।
Roman Urdu (Maududi)Tum is baat ke hargiz umeedwar na thay ke tumpar kitaab nazil ki jayegi. Yeh to mehaz tumhare Rubb ki meharbani se (tumpar nazil hui hai), pas tum kafiron ke madadgaar na bano
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ko kabhi iss ka khayal bhi na guzra tha kay aap ki taraf kitab nazil farmaee jaye gi lekin yeh aap kay rab i meharbaani say utra. Abb aap ko hergiz kafiron ka madadgaar na hona chahaye
Devnagri Urdu (Maududi)तुम इस बात के हरगिज उम्मीद न थे के तुमपर किताब नाज़िल की जाएगी। ये तो महज़ तुम्हारे रब की मेहरबानी से (तुम्हारे नाज़िल हुई है), पास तुम काफिरों के मददगार ना बनो
عَرَبِيوَلا يَصُدُّنَّكَ عَن آياتِ اللَّهِ بَعدَ إِذ أُنزِلَت إِلَيكَ ۖ وَادعُ إِلىٰ رَبِّكَ ۖ وَلا تَكونَنَّ مِنَ المُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और ये लोग आपको अल्लाह की आयतों से हरगिज़ रोकने न पाएँ, इसके पश्चात कि वे आपकी ओर उतारी जा चुकी हैं। और आप अपने पालनहार की ओर बुलाएँ और कदापि मुश्रिकों में से न हों।
Roman Urdu (Maududi)Aur aisa kabhi na honay paye ke Allah ki aayat jab tumpar nazil hoon to kuffar tumhein unsey baaz rakhein. Apne Rubb ki taraf dawat do aur hargiz mushrikon mein shamil na ho
Roman Urdu (Junagarhi)Khayal rakhiye kay yeh kufaar aap ko Allah Taalaa ki aayaton ki tableegh say rok na den iss kay baad kay yeh aap ki janib utari gaeen to apnay rab ki taraf bulatay rahen aur shirk kerney walon mein say na hon
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐसा कभी ना होने पाए के ए लल्लाह की आयत जब तुम नाज़िल हूं तो कुफ्फार तुम्हें उनसे बाज़ रखेंगे। अपने रब की तरफ़ दावत दो और हरगिज़ मुशरिकों में शामिल ना हो
عَرَبِيوَلا تَدعُ مَعَ اللَّهِ إِلٰهًا آخَرَ ۘ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۚ كُلُّ شَيءٍ هالِكٌ إِلّا وَجهَهُ ۚ لَهُ الحُكمُ وَإِلَيهِ تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आप अल्लाह के साथ किसी अन्य पूज्य को न पुकारें। उसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं। सब कुछ नाश होने वाला है सिवाए उसके चेहरे के, उसी का हुक्म (चलता) है और उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah ke saath kisi dusre mabood ko na pukaro. Uske siwa koi mabood nahin hai. Har cheez halaak honay wali hai siwaye uski zaat ke. Farman rawayi usi ki hai aur usi ki taraf tum sab paltaye janey waley ho
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa kay sath kissi aur mabood ko na pukarna ba-juz Allah Taalaa kay koi aur mabood nahi her cheez fana honey wali hai magar ussi ka mun. (aur zaat ) ussi kay liye farmanrawaee hai aur tum ussi ki taraf lotaye jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह के साथ किसी दूसरे माबूद को ना पुकारो। उसके सिवा कोई माबूद नहीं है। हर चीज़ हलाक होने वाली है सिवाए उसकी जात के। फ़रमान रवाई उसी की है और उसकी तरफ तुम सब पलटे जाने वाले हो
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Surah 28: Al-Qasas (The Narrative)

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Surah 28: Al-Qasas (The Narrative)

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Surah 28: Al-Qasas (The Narrative)

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Surah 28: Al-Qasas (The Narrative)

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Surah 28: Al-Qasas (The Narrative)

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Surah 29: Al-'Ankabut (The Spider)

Meccan🕐 Revelation #85📜 69 Verses🕮 Juz 1–21
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Surah 29: Al-'Ankabut (The Spider)

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عَرَبِيالم
हिन्दी (Al-Omari)अलिफ़, लाम, मीम।
Roman Urdu (Maududi)Alif Laam Meem
Roman Urdu (Junagarhi)Alif-Laam-Meem
Devnagri Urdu (Maududi)अलिफ़ लाम मीम
عَرَبِيأَحَسِبَ النّاسُ أَن يُترَكوا أَن يَقولوا آمَنّا وَهُم لا يُفتَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या लोगों ने यह समझ लिया है कि वे केवल यह कहने पर छोड़ दिए जाएँगे कि "हम ईमान लाए" और उनकी परीक्षा न ली जाएगी?
Roman Urdu (Maududi)Kya logon ne yeh samajh rakkha hai ke woh bas itna kehne par chodh diye jayenge ke “hum iman laaye” aur unko aazmaya na jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya logon ney yeh guman ker rakha hai kay unn kay sirf iss daway per kay hum eman laye hain hum unhen baghair aazmaye huyey hi chor den gay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या लोगों ने ये समझ रखा है के वो बस इतना कहने पर छोड़ दिए जाएंगे के "हम ईमान लाए" और उनको आज़माया ना जाएगा
عَرَبِيوَلَقَد فَتَنَّا الَّذينَ مِن قَبلِهِم ۖ فَلَيَعلَمَنَّ اللَّهُ الَّذينَ صَدَقوا وَلَيَعلَمَنَّ الكاذِبينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि निःसंदेह हमने उन लोगों की परीक्षा ली जो इनसे पहले थे। अतः अल्लाह उन लोगों को अवश्य जान लेगा जिन्होंने सच कहा, तथा वह उन लोगों को (भी) अवश्य जान लेगा जो झूठे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke hum un sab logon ki aazmaish kar chuke hain jo insey pehle guzre hain. Allah ko to zaroor yeh dekhna hai ke sacchey kaun hain aur jhootey kaun
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say aglon ko bhi hum ney khoob jancha. Yeqeenan Allah Taalaa unhen bhi jan ley ga jo sach kehtay hain aur unhen bhi maloom ker ley ga jo jhootay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हलांके हम उन सब लोगों की आज़माइश कर चुके हैं जो इनसे पहले गुज़रे हैं। अल्लाह को तो जरूर ये देखना है कि सच्चे कौन हैं और झूठे कौन
عَرَبِيأَم حَسِبَ الَّذينَ يَعمَلونَ السَّيِّئَاتِ أَن يَسبِقونا ۚ ساءَ ما يَحكُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या उन लोगों ने जो बुरे काम करते हैं, यह समझ लिया है कि वे हमसे बचकर निकल जाएँगे? बुरा है जो वे निर्णय कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur kya woh log jo buri harkatein kar rahey hain yeh samajh baithey hain ke woh humse baazi le jayenge? Bada galat hukum hai jo woh laga rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya jo log burayiyan ker rahey hain unhon ney yeh samajh rakha hai kay woh humaray qaboo say bahir ho jayen gay yeh log kaisi buri tajweezen ker rahen hain
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या वो लोग जो बुरी हरकतें कर रहे हैं ये समझ बैठे हैं के वो हमसे बाजी ले जाएंगे? बड़ा गलत हुकुम है जो वो लगा रहे हैं
عَرَبِيمَن كانَ يَرجو لِقاءَ اللَّهِ فَإِنَّ أَجَلَ اللَّهِ لَآتٍ ۚ وَهُوَ السَّميعُ العَليمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो अल्लाह से मिलने की आशा रखता हो, तो निःसंदेह अल्लाह का नियत समय अवश्य आने वाला है। और वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jo koi Allah se milne ki tawakku (umeed) rakhta ho (usey maloom hona chahiye ke) Allah ka muqarrar kiya hua waqt aane hi wala hai. Aur Allah sab kuch sunta aur jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jisay Allah ki mulaqat ki umeed ho pus Allah ka theraya hua waqt yaqeenan aaney wala hai woh sab kuch sunnay wala sab kuch jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो कोई अल्लाह से मिलने की तवक्कू (उम्मीद) रखता है (उसे मालूम होना चाहिए के) अल्लाह का मुकर्रर किया हुआ वक्त आने ही वाला है। और अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है
عَرَبِيوَمَن جاهَدَ فَإِنَّما يُجاهِدُ لِنَفسِهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَغَنِيٌّ عَنِ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो व्यक्ति संघर्ष करता है, तो वह अपने ही लिए संघर्ष करता है। निश्चय अल्लाह सारे संसार से बड़ा बेपरवाह है।
Roman Urdu (Maududi)Jo shaks bhi mujahida (struggle) karega apne hi bhale ke liye karega. Allah yaqeenan duniya jahan walon se be-niyaz(free of want) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur her aik kosish kerney wala apnay hi bhalay ki kosish kerta hai. Wesay to Allah Taalaa tamam jahaan walon say bey niyaz hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो शक्स भी मुजाहिदा (संघर्ष) करेगा अपने ही भले के लिए करेगा। अल्लाह यकीनन दुनिया जहां वालों से बे-नियाज़ (इच्छाओं से मुक्त) है
عَرَبِيوَالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ لَنُكَفِّرَنَّ عَنهُم سَيِّئَاتِهِم وَلَنَجزِيَنَّهُم أَحسَنَ الَّذي كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, निश्चय हम उनसे उनकी बुराइयाँ अवश्य दूर कर देंगे तथा निश्चय उन्हें उस कार्य का उत्तम बदला अवश्य देंगे जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log iman layenge aur neik aamal karenge unki buraiyan hum unse door kardenge aur unhein unke behtareen aamal ki jaza denge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log eman laye aur unhon ney mutabiq-e-sunnat kaam kiye hum unn kay tamam gunahon ko unn say door ker den gay aur unhen unn kay nek aemaal kay behtareen badlay den gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग ईमान लाएंगे और नेक अमल करेंगे उनकी बुराइयां हम उनसे दूर कर देंगे और उन्हें उनके बेहतरी अमल की जजा देंगे
عَرَبِيوَوَصَّينَا الإِنسانَ بِوالِدَيهِ حُسنًا ۖ وَإِن جاهَداكَ لِتُشرِكَ بي ما لَيسَ لَكَ بِهِ عِلمٌ فَلا تُطِعهُما ۚ إِلَيَّ مَرجِعُكُم فَأُنَبِّئُكُم بِما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने मनुष्य को अपने माँ-बाप के साथ भलाई करने की ताकीद की है और यदि वे तुझपर ज़ोर डालें कि तू मेरे साथ उस चीज़ को साझी ठहराए, जिसका तुझको कोई ज्ञान नहीं, तो उनकी बात न मान। तुम्हें मेरी ओर ही लौटकर आना है। फिर मैं तुम्हें बताऊँगा जो तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Humne Insaan ko hidayat ki hai ke apne waldain(parents) ke saath neik sulook karey lekin agar woh tujh par zoar dalein ke tu mere saath kisi aisey (mabood) ko shareek thehraye jisey tu ( mere shareek ki haisiyat se) nahin jaanta to unki itaat na kar. Meri hi taraf tum sabko palat kar aana hai. Phir main tumko bata dunga ke tum kya karte rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney her insan ko apnay maa baap kay sath acha salook kerney ki naseehat ki hai haan agar woh yeh kosish keren kay aap meray sath ussay shareek ker len jiss ka aap ko ilm nahi to unn ka kehna na maniyey tum sab ka lotna meri hi taraf hai phir mein her uss cheez say jo tum kertay thay tumhen khabar doon ga
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इंसान को हिदायत दी है कि अपने वाल्दैन (माता-पिता) के साथ नेक सुलूक करें, लेकिन अगर वो तुझ पर जोर दें के तू मेरे साथ किसी ऐसे (माबूद) को शरीक ठहरे जैसे तू (मेरे शरीक की हकीकत से) नहीं जानता तो उनकी इताअत ना कर। मेरी ही तरफ तुम सबको पलट कर आना है। फिर मैं तुम्हें बता दूंगा के तुम क्या करते रहेंगे हो
عَرَبِيوَالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ لَنُدخِلَنَّهُم فِي الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो लोग ईमान लाए तथा अच्छे कर्म किए, हम उन्हें अवश्य सदाचारियों में सम्मिलित करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log iman laye hongey aur jinhon ne neik aamal kiye hongey unko hum zaroor saliheen mein dakhil karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin logon ney eman qabool kiya aur nek kaam kiye unhen mein apnay nek bandon mein shumar ker loon ga
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग ईमान लाए होंगे और जिन्होन ने कोई अमल नहीं किया होगा उनको हम जरूर सालिहें में दखल करेंगे
عَرَبِيوَمِنَ النّاسِ مَن يَقولُ آمَنّا بِاللَّهِ فَإِذا أوذِيَ فِي اللَّهِ جَعَلَ فِتنَةَ النّاسِ كَعَذابِ اللَّهِ وَلَئِن جاءَ نَصرٌ مِن رَبِّكَ لَيَقولُنَّ إِنّا كُنّا مَعَكُم ۚ أَوَلَيسَ اللَّهُ بِأَعلَمَ بِما في صُدورِ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और लोगों में से कुछ ऐसे हैं, जो कहते हैं : हम अल्लाह पर ईमान लाए। फिर जब अल्लाह के मामले में उसे सताया जए, तो लोगों के सताने को अल्लाह की यातना के समान समझ लेता है। और निश्चय यदि आपके पालनहार की ओर से कोई सहायता आ जाए, तो निश्चय ज़रूर कहेंगे : हम तो तुम्हारे साथ थे। और क्या अल्लाह उसे अधिक जानने वाला नहीं, जो सारे संसार के दिलों में है?
Roman Urdu (Maududi)Logon mein se koi aisa hai jo kehta hai ke hum iman laye Allah par, magar jab woh Allah ke maamle mein sataya gaya to usne logon ki daali hui aazmaish ko Allah ke azaab ki tarah samajh liya. Ab agar tere Rubb ki taraf se fatah-o-nusrat aa gayi to yahi shaks kahega “hum to tumhare saath thay”. kya duniya walon ke dilon ka haal Allah ko ba-khoobi maloom nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur baaz log aisay bhi hain jo zabani kehtay hain kay hum eman laye hain lekin jab Allah ki raah mein koi mushkil aan parti hai to logon ko ezza dahi ko Allah Taalaa kay azab ki tarah bana letay hain haan haan agar Allah ki madad aajaye to pukar uthtay hain kay hum to tumharay sathi hi hain kiya duniya jahaan kay seeno mein jo kuch hai usay Allah Taalaa janta nahi hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों में से कोई ऐसा है जो कहता है के हम ईमान लाए होंगे अल्लाह पर, मगर जब वो अल्लाह के मामले मैं सताया गया तो उसने लोगों की डाली हुई आजमाइश को अल्लाह के अज़ाब की तरह समझ लिया। अब अगर तेरे रब की तरफ से फतह-ओ-नुसरत आ गई तो यही शक्स कहेगा "हम तो तुम्हारे साथ थे"। क्या दुनिया वालों के दिलों का हाल अल्लाह को बा-खूबी मालूम नहीं है
عَرَبِيوَلَيَعلَمَنَّ اللَّهُ الَّذينَ آمَنوا وَلَيَعلَمَنَّ المُنافِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय अल्लाह उन लोगों को अवश्य जान लेगा, जो ईमान लाए तथा निश्चय उन्हें भी अवश्य जान लेगा, जो मुनाफ़िक़ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah ko to zaroor yeh dekhna hi hai ke iman laney waley kaun hain aur munafiq kaun
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log eman laye Allah unhen bhi zahir ker kay rahey ga aur munafiqon ko bhi zahir ker kay rahey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह को तो जरूर ये देखना ही है कि ईमान लाने वाले कौन हैं और मुनाफिक कौन
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ كَفَروا لِلَّذينَ آمَنُوا اتَّبِعوا سَبيلَنا وَلنَحمِل خَطاياكُم وَما هُم بِحامِلينَ مِن خَطاياهُم مِن شَيءٍ ۖ إِنَّهُم لَكاذِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और काफ़िरों ने उन लोगों से कहा जो ईमान लाए कि तुम हमारे पथ पर चलो और हम तुम्हारे पापों का बोझ उठा लेंगे। हालाँकि वे कदापि उनके पापों में से कुछ भी उठाने वाले नहीं हैं। बेशक वे निश्चय झूठे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh kaafir log iman laney walon se kehte hain ke tum hamare tareeqe ki pairwi karo aur tumhari khataon (sins) ko hum apne upar le lenge. Halaanke unki khataon mein se kuch bhi woh apne upar lene waley nahin hai, woh qat-an jhoot kehte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kafiron ney eman walon say kaha kay tum humari raah ki taby daari kero tumharay gunah hum utha len gay halankay woh inn kay gunahon mein say kuch bhi nahi uthaney walay yeh to mehaz jhootay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये काफिर लोग ईमान लाने वालों से कहते हैं कि तुम हमारे तरीक़े की जोड़ी करो और तुम्हारी खतों (पापों) को हम अपने ऊपर ले लेंगे। हलांके उनकी खतों में से कुछ भी वो अपने ऊपर लेने वाले नहीं हैं, वो क़त-एन झूठ कहते हैं
عَرَبِيوَلَيَحمِلُنَّ أَثقالَهُم وَأَثقالًا مَعَ أَثقالِهِم ۖ وَلَيُسأَلُنَّ يَومَ القِيامَةِ عَمّا كانوا يَفتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय वे अवश्य अपने बोझ उठाएँगे और अपने बोझों के साथ कई और बोझ भी। और निश्चय वे क़ियामत के दिन उसके बारे में अवश्य पूछे जाएँगे, जो वे झूठ गढ़ा करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Haan zaroor woh apne bojh bhi uthayenge aur apne bojhon ke saath bahut se dusre bojh bhi. Aur qayamat ke roz yaqeenan unsey in iftara pardaziyon (bohtaan/ fabrication) ki baaz-purs hogi jo woh karte rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Albatta yeh apnay bojh dho len gay aur apnay bojhon kay sath hi aur bojh bhi. Aur jo kuch iftra perdaziyan ker rahey hain unn sab ki babat unn say baaz purs ki jaye gi
Devnagri Urdu (Maududi)हां ज़रूर वो अपने बोझ भी उठाएंगे और अपने बोझ के साथ बहुत से दूसरे बोझ भी। और कयामत के रोज़ यक़ीनन उनसे इफ्तारा परदाज़ियों (बोहतान/फैब्रिकेशन) में कि बाज़-पुर्स होगी जो वो करते रहे हैं
عَرَبِيوَلَقَد أَرسَلنا نوحًا إِلىٰ قَومِهِ فَلَبِثَ فيهِم أَلفَ سَنَةٍ إِلّا خَمسينَ عامًا فَأَخَذَهُمُ الطّوفانُ وَهُم ظالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने नूह़ को उसकी जाति की ओर भेजा, तो वह उनके बीच पचास वर्ष कम हज़ार वर्ष रहा। फिर उन्हें तूफ़ान ने पकड़ लिया इस स्थिति में कि वे अत्याचारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Humne Nooh ko uski qaum ki taraf bheja aur woh pachhas (fifty) kam ek hazaar baras (950 years) unke darmiyan raha. Aakhir e kaar un logon ko toofaan ne aa ghera is haal mein ke woh zaalim thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney nooh (alh-e-salam) ko unn ki qom ki taraf bheja woh unn mein sarhay no so saal tak rahey phir to unhen toofan ney dhar pakra aur woh thay bhi zalim
Devnagri Urdu (Maududi)हमने नूह को उसकी क़ौम की तरफ़ भेजा और वो पचास (पचास) कम एक हज़ार बरस (950 साल) उनके दरमियान रहा। आख़िर ए कार उन लोगों को तूफ़ान ने आ घेरा इस हाल में के वो ज़ालिम थे
عَرَبِيفَأَنجَيناهُ وَأَصحابَ السَّفينَةِ وَجَعَلناها آيَةً لِلعالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उसे और नाव वालों को बचा लिया और उस (नाव) को सारे संसार के लिए एक निशानी बना दिया।
Roman Urdu (Maududi)Phir Nooh ko aur kashti walon ko humne bacha liya aur usey duniya walon ke liye ek nishaan e ibrat (lesson) banakar rakh diya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney unhen aur kashti walon ko nijat di aur iss waqey ko hum ney tamam jahaan kay liye ibrat ka nishan bana diya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर नूंह को और कश्ती वालों को हमने बचाया लिया और उसे दुनिया वालों के लिए एक निशान ए इब्रत (पाठ) बनाकर रख दिया
عَرَبِيوَإِبراهيمَ إِذ قالَ لِقَومِهِ اعبُدُوا اللَّهَ وَاتَّقوهُ ۖ ذٰلِكُم خَيرٌ لَكُم إِن كُنتُم تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इबराहीम को (याद करो) जब उसने अपनी जाति से कहा : अल्लाह की इबादत करो तथा उससे डरो। यह तुम्हारे लिए उत्तम है, यदि तुम जानते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur Ibrahim ko bheja jabke usne apni qaum se kaha “Allah ki bandagi karo aur ussey daro, yeh tumhare liye behtar hai agar tum jano
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ibrahim (alh-e-salam) ney bhi apni qom say farmaya kay Allah Taalaa ki ibadat kero aur uss say dartay raho agar tum mein daanaaee hai to yehi tumharay liye behtar hai
Devnagri Urdu (Maududi)और इब्राहिम को भेजा जबके उसने अपनी क़ौम से कहा "अल्लाह की बंदगी करो और उससे डरो, ये तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम जानो
عَرَبِيإِنَّما تَعبُدونَ مِن دونِ اللَّهِ أَوثانًا وَتَخلُقونَ إِفكًا ۚ إِنَّ الَّذينَ تَعبُدونَ مِن دونِ اللَّهِ لا يَملِكونَ لَكُم رِزقًا فَابتَغوا عِندَ اللَّهِ الرِّزقَ وَاعبُدوهُ وَاشكُروا لَهُ ۖ إِلَيهِ تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम अल्लाह के सिवा कुछ मूर्तियों ही की तो पूजा करते हो और तुम घोर झूठ गढ़ते हो। निःसंदेह अल्लाह के सिवा जिनकी तुम पूजा करते हो, वे तुम्हारे लिए किसी रोज़ी के मालिक नहीं हैं। अतः तुम अल्लाह के पास ही रोज़ी तलाश करो और उसकी इबादत करो और उसका शुक्र करो। तुम उसी की तरफ़ लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Tum Allah ko chodh kar jinhein poojh rahey ho woh to mehaz buth (idols/statue/murtiyan) hain aur tum ek jhoot ghadh rahey ho. Dar haqeeqat Allah ke siwa jinki tum parastish karte ho woh tumhein koi rizq bhi dene ka ikhtiyar nahin rakhte. Allah se rizq maango aur usi ki bandagi karo aur uska shukar ada karo. Usi ki taraf tum paltaye janey waley ho
Roman Urdu (Junagarhi)Tum to Allah Taalaa kay siwa buton ki pooja paat ker rahey ho aur jhooti baatein dil say gharh letay ho. Suno! Jin jin ki tum Allah Taalaa kay siwa pooja paat ker rahey ho woh to tumhari rozi kay malik nahi pus tumhen chahayey kay tum Allah Taalaa hi say roziyan talab kero aur ussi ki ibadat kero aur ussi ki shukar guzari kero aur ussi ki taraf tum lotaye jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम अल्लाह को छोड़ कर जिनकी पूजा कर रहे हो वो तो महज़ बुथ (मूर्तियां/मूर्तियां) हैं और तुम एक झूठ गढ़ रहे हो। दर हकीकत अल्लाह के सिवाय जिनके तुम प्यार करते हो वो तुम्हें कोई रिज़क भी देने का इख्तियार नहीं रखते। अल्लाह से रिज़्क मांगो और उसकी बंदगी करो और उसका शुक्र अदा करो। उसकी तरफ तुम पलटाये जाने वाले हो
عَرَبِيوَإِن تُكَذِّبوا فَقَد كَذَّبَ أُمَمٌ مِن قَبلِكُم ۖ وَما عَلَى الرَّسولِ إِلَّا البَلاغُ المُبينُ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम झुठलाते हो, तो तुमसे पहले (भी) बहुत-से समुदायों ने झुठलाया है और रसूल का दायित्व स्पष्ट रूप से पहुँचा देने के सिवा कुछ नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar tum jhutlate ho to tumse pehle bahut si qaumein jhutla chuki hain. Aur Rasool par saaf saaf paighaam pahuncha dene ke siwa koi zimmedari nahin hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tum jhutlao to tum say pehlay ki ummaton ney bhi jhutlaya hai rasool kay zimmay to sirf saaf tor per phoncha dena hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर तुम झुटलाते हो तो तुमसे पहले बहुत सी कौमें झुटला चुकी हैं। और रसूल पर सफ़ सफ़ पैग़ाम पाहुंचा देने के सिवा कोई ज़िम्मेदारी नहीं है।”
عَرَبِيأَوَلَم يَرَوا كَيفَ يُبدِئُ اللَّهُ الخَلقَ ثُمَّ يُعيدُهُ ۚ إِنَّ ذٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने नहीं देखा कि अल्लाह किस प्रकार सृष्टि का आरंभ करता है, फिर उसे दोहराएगा? निश्चय ही यह अल्लाह के लिए अत्यंत सरल है।
Roman Urdu (Maududi)Kya in logon ne kabhi dekha hi nahin hai ke Allah kis tarah khalq ki ibtida karta hai, phir uska iaada (repeat) karta hai? Yaqeenan yeh [iaada to (to repeat the creation of a thing) ]Allah ke liye aasaan tarr hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya enhon ney nahi dekha kay makhlooq ki ibtida kissa tarah Allah ney ki phir Allah iss ka aey-aada keray ga yeh to Allah Taalaa per boht hi aasan hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इन लोगों ने कभी देखा ही नहीं है कि अल्लाह किस तरह ख़ल्क़ की इब्तिदा करता है, फिर उसका इरादा (दोहराना) करता है? यकीनन ये [इआदा तो (किसी चीज़ की रचना को दोहराना)] अल्लाह के लिए आसां तरर है
عَرَبِيقُل سيروا فِي الأَرضِ فَانظُروا كَيفَ بَدَأَ الخَلقَ ۚ ثُمَّ اللَّهُ يُنشِئُ النَّشأَةَ الآخِرَةَ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)कह दें : धरती में चलो-फिरो, फिर देखो कि उसने किस प्रकार सृष्टि का आरंभ किया? फिर अल्लाह ही दूसरी बार पैदा करेगा। निःसंदेह अल्लाह प्रत्येक वस्तु पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho ke zameen mein chalo phiro aur dekho ke usney kis tarah khalq ki ibtida ki hai. Phir Allah baar-e-digar bhi zindagi bakshega (recreate life). Yaqeenan Allah har cheez par qaadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! kay zamin mein chal phir ker dekho to sahi kay kiss tarah Allah Taalaa ney ibtida’an pedaeesh ki. Phir Allah Taalaa hi doosri naee pedaeesh keray ga Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो के ज़मीन में चलो फिरो और देखो के हमें किस तरह ख़ल्क़ की इब्तिदा की है। फिर अल्लाह बार-ए-दिगार भी जिंदगी बक्शेगा। यकीनन अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है
عَرَبِييُعَذِّبُ مَن يَشاءُ وَيَرحَمُ مَن يَشاءُ ۖ وَإِلَيهِ تُقلَبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह जिसे चाहता है, दंड देता है और जिसपर चाहता है दया करता है, और तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Jisey chahe saza de aur jispar chahe reham farmaye. Usi ki taraf tum phere janey waley ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jissay chahaye azab keray jiss per chahaye reham keray sab ussi ki taraf lotaye jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)जिसे चाहे सजा दे और जिसपर चाहे रहम फरमाये। उसकी तरफ तुम फेरे जाने वाले हो
عَرَبِيوَما أَنتُم بِمُعجِزينَ فِي الأَرضِ وَلا فِي السَّماءِ ۖ وَما لَكُم مِن دونِ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلا نَصيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और न तुम किसी भी तरह धरती में विवश करने वाले हो और न आकाश में, और न अल्लाह के अलावा तुम्हारा कोई दोस्त है और न कोई मददगार।
Roman Urdu (Maududi)Tum zameen mein aajiz (overpower) karne waley ho na aasmaan mein. Aur Allah se bachane waala koi sarparast aur madadgaar tumhare liye nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum na to zamin mein Allah Taalaa ko aajiz ker saktay ho na aasman mein Allah Taalaa kay siwa tumhara koi waali hai na madadgaar
Devnagri Urdu (Maududi)तुम ज़मीन में अजीज (सख्ती) करने वाले हो ना आसमान में। और अल्लाह से बचाने वाला कोई सरपरस्त और मददगार तुम्हारे लिए नहीं है
عَرَبِيوَالَّذينَ كَفَروا بِآياتِ اللَّهِ وَلِقائِهِ أُولٰئِكَ يَئِسوا مِن رَحمَتي وَأُولٰئِكَ لَهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों और उससे मिलने का इनकार किया, वे मेरी दया से निराश हो गए हैं और वही लोग हैं जिनके लिए दर्दनाक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne Allah ki aayaat ka aur ussey mulaqaat ka inkar kiya hai woh meri rehmat se mayous ho chuke hain, aur unke liye dardnaak saza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log Allah Taalaa ki aayaton aur uss ki mulaqat ko bhulatay hain woh meri rehmat say na umeed ho jayen aur unn kay liye dard naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने अल्लाह की आयत का और उससे मुलाकात का इंकार किया है वो मेरी रहमत से मयुस हो चुके हैं, और उनके लिए दर्दनक सजा है
عَرَبِيفَما كانَ جَوابَ قَومِهِ إِلّا أَن قالُوا اقتُلوهُ أَو حَرِّقوهُ فَأَنجاهُ اللَّهُ مِنَ النّارِ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِقَومٍ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उस (इबराहीम) की जाति का उत्तर बस यही था कि उन्होंने कहा कि इसे क़त्ल कर दो, या इसे जला दो। तो अल्लाह ने उसे आग से बचा लिया। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं जो ईमान रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir uski qaum ka jawab iske siwa kuch na tha ke unhone kaha “qatal kardo isey ya jalaa daalo isko”. Aakhir e kar Allah ne usey aag se bacha liya. Yaqeenan is mein nishaniyan hain un logon ke liye jo iman laney waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Unn ki qom ka jawab ba-juz iss kay kuch na tha kay kehney lagay kay issay maar dalo ya issay jala do. Aakhirish Allah ney unhen aag say bacha liya iss mein eman walay logon kay liye boht si nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उसकी क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ ना था के उन्हें कहा “कत्ल करदो इसे या जला डालो इसको”। आख़िर ए कर अल्लाह ने उसे आग से बचा लिया। यकीनन इस में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाने वाले हैं
عَرَبِيوَقالَ إِنَّمَا اتَّخَذتُم مِن دونِ اللَّهِ أَوثانًا مَوَدَّةَ بَينِكُم فِي الحَياةِ الدُّنيا ۖ ثُمَّ يَومَ القِيامَةِ يَكفُرُ بَعضُكُم بِبَعضٍ وَيَلعَنُ بَعضُكُم بَعضًا وَمَأواكُمُ النّارُ وَما لَكُم مِن ناصِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसने कहा : बात यही है कि तुमने अल्लाह के सिवा मूर्तियाँ बना रखी हैं, दुनिया के जीवन में पारस्परिक दोस्ती के कारण। फिर क़ियामत के दिन तुम एक-दूसरे का इनकार करोगे तथा तुम एक-दूसरे पर ला'नत करोगे। और तुम्हारा ठिकाना आग ही है और तुम्हारे लिए कोई मदद करने वाले नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Aur usne kaha “ tumne duniya ki zindagi mein to Allah ko chodh kar buthon (idols) ko apne darmiyan muhabbat ka zariya bana liya hai magar qayamat ke roz tum ek dusre ka inkar aur ek dusre par laanat karoge. Aur aag tumhara thikana hogi, aur koi tumhara madadgaar na hoga.”
Roman Urdu (Junagarhi)(hazrat ibrahim alh-e-salam ney) kaha kay tum ney jin buton ki parastish Allah kay siwa ki hai unhen tum ney apni aapas ki duniyawi dosti ki bina thera li hai tum sab qayamat kay din aik doosray say kufur kerney lago gay aur aik doosray per lanat kerney lago gay. Aur tumhara sab ka thikana dozakh hoga aur tumhara koi madadgaar na hoga
Devnagri Urdu (Maududi)और उसने कहा "तुमने दुनिया की जिंदगी में अल्लाह को छोड़ कर बुथों (मूर्तियों) को अपने दरमियान मुहब्बत का जरिया बना लिया है मगर कयामत के रोज तुम एक दूसरे का इंकार और एक दूसरा पर लानत करोगे और आग तुम्हारा ठिकाना होगी, और कोई तुम्हारा मददगार ना होगा।”
عَرَبِي۞ فَآمَنَ لَهُ لوطٌ ۘ وَقالَ إِنّي مُهاجِرٌ إِلىٰ رَبّي ۖ إِنَّهُ هُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)तो लूत उसपर ईमान ले आया। और उस (इबराहीम) ने कहा : निःसंदेह मैं अपने रब की ओर हिजरत करने वाला हूँ। निश्चय वही सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt Lut ne usko maana(believed) aur Ibrahim ne kaha main apne Rubb ki taraf hijrat(migrate) karta hoon. Woh zabardast hai aur hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus hazrat ibrahim (alh-e-salam) per hazrat loot (alh-e-salam) eman laye aur kehnay lagay kay mein apnay rab ki taraf hijrat kerney wala hun. Woh bara hi ghalib aur hakeem hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त लुट ने उसको माना और इब्राहिम ने कहा मैं अपने रब की तरफ हिजरत (पलायन) करता हूं। वो ज़बरदस्त है और हकीम है
عَرَبِيوَوَهَبنا لَهُ إِسحاقَ وَيَعقوبَ وَجَعَلنا في ذُرِّيَّتِهِ النُّبُوَّةَ وَالكِتابَ وَآتَيناهُ أَجرَهُ فِي الدُّنيا ۖ وَإِنَّهُ فِي الآخِرَةِ لَمِنَ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसे इसह़ाक़ तथा याक़ूब प्रदान किया। तथा हमने उसकी संतान में नुबुव्वत तथा किताब रख दी। और हमने उसे दुनिया में उसका बदला दिया और निःसंदेह वह आख़िरत में निश्चय नेक लोगों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne usey Ishaaq (Issac) aur yakub (Jacob) (jaisi aulad) inayat farmayi aur uski nasal mein nubuwat aur kitaab rakh di, aur usey duniya mein uska ajar ata kiya aur aakhirat mein woh yaqeenan saaliheen mein se hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unhen (ibrahim ko) ishaq-o-yaqoob (alheem-us-salam) ata kiye aur hum ney naboowat aur kitab unn ki aulad mein hi kerdi aur hum ney duniya mein bhi ussay sawab diya aur aakhirat mein to woh saleh logon mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने उसे इशाक (इसहाक) और याकूब (जैकब) (जैसी औलाद) इनायत फरमायी और उसकी नाक में नुबुवत और किताब रख दी, और उसे दुनिया में उसका अजर अता किया और आख़िरत में वो यकीनन सालिहें मुझसे होगा
عَرَبِيوَلوطًا إِذ قالَ لِقَومِهِ إِنَّكُم لَتَأتونَ الفاحِشَةَ ما سَبَقَكُم بِها مِن أَحَدٍ مِنَ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा लूत को (याद करो) जब उसने अपनी जाति से कहा : तुम तो वह निर्लज्जता का कार्य करते हो, जो तुमसे पहले दुनिया वालों में से किसी ने नहीं किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne Lut ko bheja jabke usne apni qaum se kaha “Tum to woh fahash kaam karte ho jo tumse pehle duniya walon mein se kisi ne nahin kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hazrat loot (alh-e-salam) ka bhi ziker kero jabkay unhon ney apni qom say farmaya kay tum to iss bad-kaari per utar aaye ho jissay tum say pehlay duniya bhar mein say kissi ney nahi kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने लुट को भेजा जबके उसने अपनी क़ौम से कहा "तुम तो वो फहाश काम करते हो जो तुमसे पहले दुनिया वालों में से किसी ने नहीं किया है
عَرَبِيأَئِنَّكُم لَتَأتونَ الرِّجالَ وَتَقطَعونَ السَّبيلَ وَتَأتونَ في ناديكُمُ المُنكَرَ ۖ فَما كانَ جَوابَ قَومِهِ إِلّا أَن قالُوا ائتِنا بِعَذابِ اللَّهِ إِن كُنتَ مِنَ الصّادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम सचमुच पुरुषों के पास जाते हो और (यात्रियों का) रास्ता काटते हो तथा अपनी सभा में बुरे काम करते हो? तो उसकी जाति का उत्तर इसके सिवा कुछ न था कि उन्होंने कहा : हम पर अल्लाह की यातना ले आ, यदि तू सच्चा है।
Roman Urdu (Maududi)Kya tumhara haal yeh hai ke mardon ke paas jatey ho (to satisfy your lust) , aur raahzani (highway robbery) karte ho, aur apni majlison mein burey kaam karte ho?” Phir koi jawab uski qaum ke paas iske siwa na tha ke unhon ne kaha “ le aa Allah ka azaab agar tu saccha hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum mardon kay pass bad faylee kay liye aatay ho aur raastay band kertay ho aur apni aam majlison mein bey hayaeeyon ka kaam kertay ho? Iss kay jawab mein uss ki qom ney ba-juz iss kay aur kuch nahi kaha kay bus jaa agar sacha hai to humaray pass Allah ka azab ley aa
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम्हारा हाल ये है के मर्दों के पास जाते हो (अपनी वासना को संतुष्ट करने के लिए), और Raahzani (हाईवे डकैती) करते हो, और अपनी मजलिसों में बुरे काम करते हो?” फिर कोई जवाब उसकी क़ौम के पास इसके सिवा ना था के अनहोन ने कहा "ले आ अल्लाह का अज़ाब अगर तू सच्चा है"
عَرَبِيقالَ رَبِّ انصُرني عَلَى القَومِ المُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! इन बिगाड़ पैदा करने वाले लोगों के विरुद्ध मेरी सहायता कर।
Roman Urdu (Maududi)Lut ne kaha “Aey mere Rubb, in mufsid (mischievous) logon ke muqable mein meri madad farma”
Roman Urdu (Junagarhi)Hazrat loot (alh-e-salam) ney dua ki kay perwerdigar! Iss mufsid qom per meri madad farma
Devnagri Urdu (Maududi)लूट ने कहा "ऐ मेरे रब, इन मुफसिद (शरारती) लोगों के मुक़ाबले में मेरी मदद फरमा"
عَرَبِيوَلَمّا جاءَت رُسُلُنا إِبراهيمَ بِالبُشرىٰ قالوا إِنّا مُهلِكو أَهلِ هٰذِهِ القَريَةِ ۖ إِنَّ أَهلَها كانوا ظالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब हमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते) इबराहीम के पास शुभ-सूचना लेकर आए, तो उन्होंने कहा : निश्चय हम इस बस्ती के वासियों को विनष्ट करने वाले हैं। निःसंदेह इसके निवासी अत्याचारी रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab hamare faristade (emissaries/messengers) Ibrahim ke paas basharat (khushkhabri) lekar pahunchey to unhon ne ussey kaha “hum is basti ke logon ko halaak karne waley hain, iske log sakht zaalim ho chuke hain.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab humaray bhejay huyey farishtay hazrat ibrahim (alh-e-salam) kay pass bisharat ley ker phonchay kehnay lagay kay iss basti walon ko hum halak kerney walay hain yaqeenan yahan kay rehney walay gunehgaar hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जब हमारे फरिश्ते (दूत/संदेशवाहक) इब्राहीम के पास बशारत (खुशखबरी) लेकर पहुंचे तो उन्हें ने उसे कहा, "हम इस बस्ती के लोगों को हलाक करने वाले हैं, इसके लोग सख्त जालिम हो चुके हैं।"
عَرَبِيقالَ إِنَّ فيها لوطًا ۚ قالوا نَحنُ أَعلَمُ بِمَن فيها ۖ لَنُنَجِّيَنَّهُ وَأَهلَهُ إِلَّا امرَأَتَهُ كانَت مِنَ الغابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : उसमें तो लूत है। उन्होंने कहा : हम उसे अधिक जानने वाले हैं, जो उसमें है। निश्चय हम उसे और उसके घर वालों को अवश्य बचा लेंगे, सिवाय उसकी पत्नी के। वह पीछे रहने वालों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Ibrahim ne kaha “wahan to Lut maujood hai”. Unhon ne kaha: “Hum khoob jantey hain ke wahan kaun kaun hai. Hum usey aur uski biwi ke siwa uske baaqi ghar waalon ko bacha lenge”. Uski biwi peechey reh janey walon mein se thi
Roman Urdu (Junagarhi)(hazrat ibrahim alh-e-salam ney) kaha iss mein to loot (alh-e-salam) hain farishton ney kaha yahan jo hain hum unhen ba-khoobi jantay hain. Loot (alh-e-salam) ko aur uss kay khandan ko siwaye uss ki biwi kay hum bacha len gay albatta woh aurat peechay reh janey walon mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)इब्राहीम ने कहा "वहां तो लूट मौजूद है"। अनहोन ने कहा: "हम खूब जानते हैं कि वहां कौन कौन है। हम उसे और उसकी बीवी के सिवा उसके बाकी घर वालों को बचा लेंगे"। उसकी बीवी पीछे रह जाने वालों में से थी
عَرَبِيوَلَمّا أَن جاءَت رُسُلُنا لوطًا سيءَ بِهِم وَضاقَ بِهِم ذَرعًا وَقالوا لا تَخَف وَلا تَحزَن ۖ إِنّا مُنَجّوكَ وَأَهلَكَ إِلَّا امرَأَتَكَ كانَت مِنَ الغابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब हमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते) लूत के पास आए, तो वह उनके आने से उदास हुआ और उनके कारण उसका मन व्याकुल हो गया। और उन्होंने कहा : न डरो और न शोक करो। निःसंदेह हम तुम्हें और तुम्हारे घर वालों को बचाने वाले हैं, सिवाय तुम्हारी पत्नी के, वह पीछो रह जाने वालों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab hamare faristade (emissaries/messengers) Lut ke paas pahunchey to unki aamad par woh sakht pareshan aur dil tangg hua. Unhon ne kaha “ na daro aur na ranjh karo, hum tumhein aur tumhare ghar walon ko bacha lenge, siwaye tumhari biwi ke jo peechey reh janey walon mein se hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab humaray qasid loot (alh-e-salam) kay pass phonchay to woh inn ki waja say ghumgeen huyey aur dil hi dil mein ranj kerney lagay. Qasidon ney kaha aap na khof khayiey na aazarda hon hum aap ko maa aap kay mutallaqeen kay bacha len gay magar aap ki biwi kay woh azab kay liye baqi reh janey walon mein say hogi
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब हमारे फरिश्ते (दूत/संदेशवाहक) लूट के पास पहुंचें तो उनकी आमद पर वो सख्त परेशान और दिल तंग हुआ। उनहों ने कहा “ ना डरो और ना रांझ करो, हम तुम्हें और तुम्हारे घर वालों को बचा लेंगे, सिवाय तुम्हारी बीवी के जो पीछे रह जाने वालों में से है
عَرَبِيإِنّا مُنزِلونَ عَلىٰ أَهلِ هٰذِهِ القَريَةِ رِجزًا مِنَ السَّماءِ بِما كانوا يَفسُقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम इस बस्ती वालों पर आकाश से एक यातना उतारने वाले हैं, इस कारण कि वे अवज्ञा किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Hum is basti ke logon par aasmaan se azaab nazil karne waley hain us fisq (evildoing) ke badaulat jo yeh karte rahey hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Hum iss basti walon per aasmani azab nazil kerney walay hain iss waja say kay yeh bey hukum ho rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)हम इस बस्ती के लोगों पर आसमान से अजब नाज़िल करने वाले हैं हमें फ़िस्क (बुराई) के बदौलत जो ये करते रहते हैं”
عَرَبِيوَلَقَد تَرَكنا مِنها آيَةً بَيِّنَةً لِقَومٍ يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने उससे उन लोगों के लिए एक स्पष्ट निशानी छोड़ दी, जो समझ-बूझ रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne us basti ki ek khuli nishani chodh di hai un logon ke liye jo aqal se kaam letey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Albatta hum ney uss basti ko sareeh ibrat ki nishani bana diya unn logon kay liye jo aqal rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने हमें बस्ती की एक खुली निशानी छोड़ दी है उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं
عَرَبِيوَإِلىٰ مَديَنَ أَخاهُم شُعَيبًا فَقالَ يا قَومِ اعبُدُوا اللَّهَ وَارجُوا اليَومَ الآخِرَ وَلا تَعثَوا فِي الأَرضِ مُفسِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मदयन की ओर उनके भाई शुऐब को (भेजा), तो उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत करो तथा आख़िरत के दिन की आशा रखो और धरती में बिगाड़ पैदा करने वाले बनकर उपद्रव न मचाओ।
Roman Urdu (Maududi)Aur Madyan ki taraf humne unke bhai Shoaib ko bheja.Usne kaha “Aey meri qaum ke logon, Allah ki bandagi karo aur roz e aakhir ke umeed-waar raho aur zameen mein mufsid ban kar zyadatiyan (mischief) na karte phiro”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur madiyan ki taraf hum ney unn kay bhai shoaib (alh-e-salam) ko bheja unhon ney kaha aey meri qom kay logo! Allah ki ibadat kero qayamat kay din ki tawaqqa rakho aur zamin mein fasad na kertay phiro
Devnagri Urdu (Maududi)और मदयां की तरफ हमने उनके भाई शोएब को भेजा।उसने कहा "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो और रोज़ ए आख़िर के उम्मीद-वार रहो और ज़मीन में मुफ़सीद बन कर ज़्यादतिया (शरारत) ना करते फिरो"
عَرَبِيفَكَذَّبوهُ فَأَخَذَتهُمُ الرَّجفَةُ فَأَصبَحوا في دارِهِم جاثِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्होंने उसे झुठला दिया। अंततः उन्हें भूकंप ने पकड़ लिया, फिर वे अपने घरों में औंधे मुँह पड़े रह गए।
Roman Urdu (Maududi)Magar unhon ne usey jhutla diya. Aakhir e kaar ek sakht zalzaley ne unhein aa liya aur woh apne gharon mein padey ke padey reh gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Phir bhi unhon ney unhen jhutlaya aakhirish unhen zalzalay ney pakar liya aur woh apnay gharon mein bethay kay bethay murda ho ker reh gaye
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उन्होन ने उसे झुटला दिया. आख़िर ए कार एक सच ज़लज़ले ने उन्हें आ लिया और वो अपने घरों में पड़े के पड़े रह गए
عَرَبِيوَعادًا وَثَمودَ وَقَد تَبَيَّنَ لَكُم مِن مَساكِنِهِم ۖ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيطانُ أَعمالَهُم فَصَدَّهُم عَنِ السَّبيلِ وَكانوا مُستَبصِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने आद और समूद को भी विनष्ट कर दिया और उनके आवासों से तुम्हारे लिए (उनका विनाश) स्पष्ट हो चुका है। और शैतान ने उनके लिए उनके कर्मों को शोभनीय बना दिया था। अतः उसने उन्हें सीधे रास्ते से रोक दिया था, हालाँकि वे बहुत समझ-बूझ वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Aad o Samood ko humne halaak kiya, tum woh maqamaat dekh chuke ho jahan woh rehte thay. Unke aamal ko shaytaan ne unke liye khushnuma bana diya aur unhein raah e raast se bargashta kardiya, halanke woh hosh-gosh rakhte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney aadiyon aur samoodiyon ko bhi gharat kiya jin kay baad makanaat tumharay samney zahir hain aur shetan ney unhen unn ki bad aemaaliyan aaraasta ker dikhaee thin aur unhen raah say rok diya tha bawajood yeh kay yeh aankhon walay aur hoshiyaar thay
Devnagri Urdu (Maududi)और आद ओ समूद को हमने हलाक किया, तुम वो मक़ामत देख चुके हो जहां वो रहते थे। उनके आमाल को शैतान ने उनके लिए ख़ुशनुमा बना दिया और उन्हें राह ए रास्ते से बरगश्ता करदिया, हलांके वो होश-गोश रखते थे
عَرَبِيوَقارونَ وَفِرعَونَ وَهامانَ ۖ وَلَقَد جاءَهُم موسىٰ بِالبَيِّناتِ فَاستَكبَروا فِي الأَرضِ وَما كانوا سابِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा क़ारून और फ़िरऔन और हामान को (विनष्ट किया) और निःसंदेह उनके पास मूसा खुली निशानियाँ लेकर आए, तो उन्होंने धरती में अभिमान किया और वे बच निकलने वाले न थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Qaroon o Firoun o Hamaan ko humne halaak kiya. Moosa unke paas bayyinaat (khuli nishaniyan) lekar aaya magar unhon ne zameen mein apni badayi ka zaam kiya halanke woh sabaqat le janey (qaabu se nikal janey) waley na thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur qaroon aur firaon aur haamaan ko bhi unn kay pass hazrat musa (alh-e-salam) khulay khulay moajzzay ley ker aaye thay phir bhi unhon ney zamin mein takabbur kiya lekin hum say aagay barhney walay na ho sakay
Devnagri Urdu (Maududi)और क़ारून ओ फिरौन ओ हमान को हमने हलाक किया। मूसा उनके पास बैयिनत (खुली निशानियां) लेकर आया मगर उनहोन ने जमीन में अपनी बदाई का ज़म किया हलंके वो सबकत ले जाने (क़ाबू से निकल जाने) वाले ना थे
عَرَبِيفَكُلًّا أَخَذنا بِذَنبِهِ ۖ فَمِنهُم مَن أَرسَلنا عَلَيهِ حاصِبًا وَمِنهُم مَن أَخَذَتهُ الصَّيحَةُ وَمِنهُم مَن خَسَفنا بِهِ الأَرضَ وَمِنهُم مَن أَغرَقنا ۚ وَما كانَ اللَّهُ لِيَظلِمَهُم وَلٰكِن كانوا أَنفُسَهُم يَظلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने हर एक को उसके पाप के कारण पकड़ लिया। फिर उनमें से कुछ पर हमने पथराव करने वाली हवा भेजी, और उनमें से कुछ को चीख ने पकड़ लिया, और उनमें से कुछ को हमने धरती में धँसा दिया और उनमें से कुछ को हमने डुबो दिया। तथा अल्लाह ऐसा नहीं था कि उनपर अत्याचार करे, परंतु वे स्वयं अपने आपपर अत्याचार करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar har ek ko humne unke gunaah mein pakda. Phir unmein se kisi par humne pathrao (showers of stones) karne wali hawa bheji, aur kisi ko ek zabardast dhamake ne aa liya, aur kisi ko humne zameen mein dhasa diya, aur kisi ko garq (drown) kardiya. Allah unpar zulm karne wala na tha, magar woh khud hi apne upar zulm kar rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Phir to her aik ko hum ney uss kay gunah ka wabaal mein giriftar ker liya inn mein say baaz per hum ney pathron ka menh barsaya aur inn mein say baaz ko zor daar awaz sakht awaz ney daboch liya aur inn mein say baaz ko hum ney zamin mein dhansa diya aur inn mein say baaz ko hum ney dobo diya Allah Taalaa aisa nahi kay unn per zulm keray bulkay yehi log apni jano per zulm kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ई कर हर एक को हमने उनके गुनाह में पकड़ा। फिर उनमें से किसी पर हमने पथराव (पत्थरों की बौछार) करने वाली हवा भेजी, और किसी को एक ज़बरदस्त धमाके ने आ लिया, और किसी को हमने ज़मीन में ढसा दिया, और किसी को डर (डूब) दिया। अल्लाह अनपर ज़ुल्म करने वाला ना था, मगर वो खुद ही अपना ऊपर ज़ुल्म कर रहे थे
عَرَبِيمَثَلُ الَّذينَ اتَّخَذوا مِن دونِ اللَّهِ أَولِياءَ كَمَثَلِ العَنكَبوتِ اتَّخَذَت بَيتًا ۖ وَإِنَّ أَوهَنَ البُيوتِ لَبَيتُ العَنكَبوتِ ۖ لَو كانوا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों का उदाहरण जिन्होंने अल्लाह के सिवा अन्य संरक्षक बना रखे हैं, मकड़ी के उदाहरण जैसा है, जिसने एक घर बनाया। हालाँकि, निःसंदेह सब घरों से कमज़ोर तो मकड़ी का घर है, अगर वे जानते होते।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne Allah ko chodh kar dusre sarparast (protectors) bana liye hain unki misaal makhdi (spider) jaisi hai jo apna ek ghar banati hai, aur sab gharon se zyada kamzoor ghar makhdi (spider) ka ghar hi hota hai, Kaash yeh log ilam rakhte
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ney Allah Taalaa kay siwa aur kaar saaz muqarrar ker rakhay hain unn ki misaal makri ki si hai kay woh bhi aik ghar bana leti hai halankay tamam gharon say ziyada boda ghar makri ka ghar hi hai kaash! Woh jaan letay
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने अल्लाह को छोड़ कर दूसरे सरपरस्त (रक्षक) बना लिए हैं उनकी मिसाल मख़दी (मकड़ी) जैसी है जो अपना एक घर बनाती है, और सब घरों से ज़्यादा कमज़ूर घर मख़दी (मकड़ी) का घर ही होता है, काश ये लोग इलम रखते हैं
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ يَعلَمُ ما يَدعونَ مِن دونِهِ مِن شَيءٍ ۚ وَهُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय ही अल्लाह जानता है जिसे वे उसे छोड़कर पुकारते हैं कोई भी चीज़ हो, और वही सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log Allah ko chodh kar jis cheez ko bhi pukarte hain Allah usey khoob jaanta hai aur wahi zabardast aur hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa unn tamam cheezon ko janta hai jinhen woh uss kay siwa pukar rahey hain woh zabardast aur zee hikmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग अल्लाह को छोड़ कर जिस चीज़ को भी पुकारते हैं अल्लाह उसे ख़ूब जानता है और वही ज़बरदस्त और हकीम है
عَرَبِيوَتِلكَ الأَمثالُ نَضرِبُها لِلنّاسِ ۖ وَما يَعقِلُها إِلَّا العالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और ये उदाहरण हैं, जो हम लोगों के लिए प्रस्तुत करते हैं और इन्हें केवल जानने वाले ही समझते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh misalein (examples) hum logon ki fehmaish (understanding) ke liye dete hain, magar unko wahi log samajhte hain jo ilam rakhte waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum inn misalon ko logon kay liye biyan farma rahey hain enhen sirf ilm walay hi samajhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये मिसालें (उदाहरण) हम लोगों की फहमिश (समझ) के लिए देते हैं, मगर उनको वही लोग समझते हैं जो इलम रखने वाले हैं
عَرَبِيخَلَقَ اللَّهُ السَّماواتِ وَالأَرضَ بِالحَقِّ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً لِلمُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने आकाशों तथा धरती को सत्य के साथ पैदा किया। निःसंदेह इसमें ईमान वालों के लिए निश्चय बड़ी निशानी है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne aasmaano aur zameen ko barhaqq paida kiya hai, dar haqeeqat is mein ek nishani hai ehle iman ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney aasmano aur zamin ko masleyhat aur haq kay sath peda kiya hai eman walon kay liye to iss mein bari bhari daleel hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने आसमान और ज़मीन को बरहक़ अदा किया है, दर हकीकत इस में एक निशानी है एहले ईमान के लिए
عَرَبِياتلُ ما أوحِيَ إِلَيكَ مِنَ الكِتابِ وَأَقِمِ الصَّلاةَ ۖ إِنَّ الصَّلاةَ تَنهىٰ عَنِ الفَحشاءِ وَالمُنكَرِ ۗ وَلَذِكرُ اللَّهِ أَكبَرُ ۗ وَاللَّهُ يَعلَمُ ما تَصنَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप उस पुस्तक को पढ़ें, जो आपकी ओर वह़्य (प्रकाशना) की गई है तथा नमाज़ क़ायम करें। निःसंदेह नमाज़ निर्लज्जता और बुराई से रोकती है। और निश्चय अल्लाह का स्मरण सबसे बड़ा है और अल्लाह जानता है, जो कुछ तुम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) Tilawat karo is kitaab ki jo tumhari taraf wahee ke zairye se bheji gayi hai. Aur namaz qayam karo, yaqeenan namaz fahash (behayayi) aur burey kaamon se rokti hai. Aur Allah ka zikr issey bhi zyada badi cheez hai. Allah jaanta hai jo kuch tumlog karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jo kitab aap ki taraf wahee ki gaee hai ussay parhiyey aur namaz qaeem keren yaqeenan namaz bey hayaee aur buraee say rokti hai be-shak Allah ka ziker boht bari cheez hai tum jo kuch ker rahey ho uss say Allah khabardaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) तिलावत करो इस किताब की जो तुम्हारी तरफ वही के ज़ैरे से भेज दी गई है। और नमाज़ क़याम करो, यकीनन नमाज़ फ़हाश (बेहयायी) और बुरे कामों से रुकती है। और अल्लाह का ज़िक्र इस से भी ज़्यादा बड़ी चीज़ है। अल्लाह जानता है जो कुछ तुमलोग करते हो
🕮 Juz 21 begins here
عَرَبِي۞ وَلا تُجادِلوا أَهلَ الكِتابِ إِلّا بِالَّتي هِيَ أَحسَنُ إِلَّا الَّذينَ ظَلَموا مِنهُم ۖ وَقولوا آمَنّا بِالَّذي أُنزِلَ إِلَينا وَأُنزِلَ إِلَيكُم وَإِلٰهُنا وَإِلٰهُكُم واحِدٌ وَنَحنُ لَهُ مُسلِمونَ
हिन्दी (Al-Omari)और तुम किताब वालों से केवल ऐसे तरीक़े से वाद-विवाद करो, जो सबसे उत्तम हो, सिवाय उन लोगों के जिन्होंने उनमें से ज़ुल्म किया। तथा तुम कहो : हम ईमान लाए उसपर, जो हमारी ओर उतारा गया और तुम्हारी ओर उतारा गया, तथा हमारा पूज्य और तुम्हारा पूज्य एक ही है और हम उसी के आज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur ehle kitaab se behas na karo magar umdah tareeqe se, siwaye un logon ke jo un mein se zaalim hon. Aur unsey kaho ke “hum iman laye hain us cheez par bhi jo hamari taraf bheji gayi hai aur us cheez par bhi jo tumhari taraf bheji gayi thi. Hamara khuda aur tumhara khuda ek hi hai aur hum usi ke muslim (farma bardaar) hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ehal-kitab kay sath behas-o-mubahisa na kero magar iss tareeqay per jo umdah ho magar unn kay sath jo unn mein zalim hain aur saaf aeylaan kerdo kay humara to iss kitab per bhi eman hai jo hum per utari gaee hai aur iss per bhi jo tum per utari gaee hai humara tumhara mabood aik hi hai. Hum sab ussi kay hukum bardaar hain
Devnagri Urdu (Maududi)और एहले किताब से बेहस न करो मगर उम्र तरीक़े से, सिवाए उन लोगों के जो उन में से ज़ालिम हों। और उनसे कहो के "हम ईमान लाए हैं उस चीज पर भी जो हमारी तरफ भेज गई है और उस चीज पर भी जो तुम्हारी तरफ भेज गई थी। हमारा खुदा और तुम्हारा खुदा एक ही है और हम उसके मुसलमान (फरमा बरदार) हैं"
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ أَنزَلنا إِلَيكَ الكِتابَ ۚ فَالَّذينَ آتَيناهُمُ الكِتابَ يُؤمِنونَ بِهِ ۖ وَمِن هٰؤُلاءِ مَن يُؤمِنُ بِهِ ۚ وَما يَجحَدُ بِآياتِنا إِلَّا الكافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार, हमने आपकी ओर यह पुस्तक उतारी है। तो जिन लोगों को हमने (आपसे पहले) पुस्तक प्रदान की है, वे इसपर ईमान लाते हैं। और इन (मुश्रिकों) में से भी कुछ ऐसे हैं, जो इस (क़ुरआन) पर ईमान लाते हैं। और हमारी आयतों का इनकार वही लोग करते हैं, जो काफ़िर हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) humne isi tarah tumhari taraf kitaab nazil ki hai. Is liye woh log jinko humne pehle kitaab di thi woh ispar iman latey hain, aur in logon mein se bhi bahut se ispar iman laa rahey hain. Aur hamari aayat ka inkar sirf kaafir hi karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney issi tarah aap ki taraf apni kitab nazil farmaee hai pus jinhen hum ney kitab di hai woh iss per eman latay hain aur inn (mushrikeen) mein say baaz iss per eman rakhtay hain aur humari aayaton ka inkar sirf kafir hi kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) हमने इसी तरह तुम्हारी तरफ किताब नाज़िल की है। इस लिए वो लोग जिनको हमने पहली किताब दी थी वो इसपर ईमान लाते हैं, और इन लोगों में से भी बहुत से इसपर ईमान ला रहे हैं। और हमारी आयत का इंकार सिर्फ काफिर ही करते हैं
عَرَبِيوَما كُنتَ تَتلو مِن قَبلِهِ مِن كِتابٍ وَلا تَخُطُّهُ بِيَمينِكَ ۖ إِذًا لَارتابَ المُبطِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आप इससे पहले न कोई पुस्तक पढ़ते थे और न उसे अपने दाहिने हाथ से लिखते थे। (यदि ऐसा होता) तो असत्यवादी अवश्य संदेह करते।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) tum issey pehle koi kitaab nahin padte thay aur na apne haath se likhte thay, agar aisa hota to baatil parast log (votaries of falsehood ) shakk mein padh sakte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Iss say pehlay to aap koi kitab parhtay na thay aur na kissi kitab ko apnay hath say likhtay thay kay batil parast log shak-o-shuba mein partay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) तुम इसे पहले कोई किताब नहीं पढ़ते थे और ना अपने हाथ से लिखते थे, अगर ऐसा होता तो बातिल परस्त लोग (झूठ के समर्थक) शक में पढ़ सकते थे
عَرَبِيبَل هُوَ آياتٌ بَيِّناتٌ في صُدورِ الَّذينَ أوتُوا العِلمَ ۚ وَما يَجحَدُ بِآياتِنا إِلَّا الظّالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि यह (क़ुरआन) स्पष्ट आयतें हैं, उन लोगों के सीनों में जिन्हें ज्ञान दिया गया है तथा हमारी आयतों का इनकार वही लोग करते हैं, जो अत्याचारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Dar-asal yeh roshan nishaniyan hain un logon ke dilon mein jinhein ilm baksha gaya hai. Aur hamari aayaat ka inkar nahin karte magar woh jo zaalim hain
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay yeh (quran) to roshan aayaten hain jo ehal-e-ilm kay seeno mein mehfooz hain humari aayaton ka munkir ba-juz zalimon kay aur koi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)दर-असल ये रोशन निशानियां हैं उन लोगों के दिलों में जिन्हें इल्म बख्शा गया है। और हमारी आयत का इंकार नहीं करते मगर वो जो जालिम हैं
عَرَبِيوَقالوا لَولا أُنزِلَ عَلَيهِ آياتٌ مِن رَبِّهِ ۖ قُل إِنَّمَا الآياتُ عِندَ اللَّهِ وَإِنَّما أَنا نَذيرٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा : उसपर उसके पालनहार की ओर से निशानियाँ क्यों नहीं उतारी गईं? आप कह दें : निशानियाँ तो अल्लाह ही के पास हैं और मैं तो केवल स्पष्ट रूप से सावधान करने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log kehte hain ke “kyun na utari gayi is shaks par nishaniyan iske Rubb ki taraf se?” kaho “Nishaniyan to Allah ke paas hain aur main sirf khabardar karne wala hoon khol khol kar”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha iss per kuch nishaniyan (moajzzaat) iss kay rab ki taraf say kiyon nahi utaray gaye. Aap keh dijiye kay nishaniyan to sab Allah Taalaa kay pass hain mein to sifr khullam khulla aagah ker denay wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग कहते हैं के "क्यों ना उतारी गई इस शक्स पर निशानियां इसके रब की तरफ से?" कहो "निशानियां तो अल्लाह के पास हैं और मैं सिर्फ खबरदार करने वाला हूं खोल खोल कर"
عَرَبِيأَوَلَم يَكفِهِم أَنّا أَنزَلنا عَلَيكَ الكِتابَ يُتلىٰ عَلَيهِم ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَرَحمَةً وَذِكرىٰ لِقَومٍ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उनके लिए यह पर्याप्त नहीं है कि हमने आपपर यह पुस्तक (क़ुरआन) उतारी, जो उनके सामने पढ़ी जाती है। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बड़ी दया और उपदेश है, जो ईमान रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur kya in logon ke liye yeh (nishani) kaafi nahin hai ke humne tumpar kitaab nazil ki jo inhein padh kar sunayi jaati hai? Dar haqeeqat is mein rehmat hai aur naseehat hai un logon ke liye jo iman latey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya enhen yeh kafi nahi? Kay hum ney aap per kitab nazil farma di jo inn per parhi ja rahi hai iss mein rehmat (bhi) hai aur naseehat (bhi) hai unn logon kay liye jo eman latay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और लोगों के लिए ये (निशानी) काफी नहीं है के हमने तुमपर किताब नाज़िल की जो इन्हें पढ़ कर सुनायी जाती है? दर हक़ीक़त इस में रहमत है और हिदायत है उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं
عَرَبِيقُل كَفىٰ بِاللَّهِ بَيني وَبَينَكُم شَهيدًا ۖ يَعلَمُ ما فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۗ وَالَّذينَ آمَنوا بِالباطِلِ وَكَفَروا بِاللَّهِ أُولٰئِكَ هُمُ الخاسِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : अल्लाह मेरे और तुम्हारे बीच गवाह के रूप में काफ़ी है। वह जानता है, जो कुछ आकाशों और धरती में है। तथा जो लोग असत्य पर ईमान लाए और उन्होंने अल्लाह का इनकार किया, वही घाटा उठाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) kaho ke “mere aur tumhare darmiyan Allah gawaahi ke liye kaafi hai. Woh aasmaano aur zameen mein sab kuch jaanta hai. Jo log baatil ko maante hain aur Allah se kufr karte hain wahi khasare(nuksan) mein rehne waley hain.”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay mujh mein aur tum mein Allah Taalaa gawah hona kafi hai woh aasman-o-zamin ki her cheez ka aalim hai jo log batil kay mannay walay aur Allah Taalaa say kufur kerney walay hain woh zabardast nuksan aur ghatay mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) कहो के "मेरे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह गवाही के लिए काफ़ी है। वो आसमान और ज़मीन में सब कुछ जानता है। जो लोग बातिल को मानते हैं और अल्लाह से कुफ्र करते हैं वही खसरे (नुक्सान) में रहने वाले हैं।”
عَرَبِيوَيَستَعجِلونَكَ بِالعَذابِ ۚ وَلَولا أَجَلٌ مُسَمًّى لَجاءَهُمُ العَذابُ وَلَيَأتِيَنَّهُم بَغتَةً وَهُم لا يَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे आपसे यातना के लिए जल्दी मचा रहे हैं। और यदि (उसका) एक नियत समय न होता, तो उनपर यातना अवश्य आ जाती। और निश्चय वह उनपर अचानक आएगी और उन्हें ख़बर तक न होगी।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log tumse azaab jaldi laney ka mutalaba karte hain. Agar ek waqt e muqarrar na kardiya gaya hota to inpar azaab aa chuka hota, aur yaqeenan (apne waqt par) woh aa kar rahega achanak, is haal mein ke inhein khabar bhi na hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log aap say azab ki jaldi ker rahey hain. Agar meri taraf say muqarrar kiya hua waqt na hota to abhi tak inn kay pass azab aa chuka hota yeh yaqeeni baat hai kay achanak inn ki bey khabri mein inn kay pass azab aa phonchay ga
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग तुमसे अज़ाब जल्दी लेन का मुतालबा करते हैं। अगर एक वक्त ए मुकर्रर ना करदिया गया होता तो इनपर अज़ाब आ चूका होता, और यकीनन (अपने वक्त पर) वो आ कर रहेगा अचानक, इस हाल में के इन्हें खबर भी ना होगी
عَرَبِييَستَعجِلونَكَ بِالعَذابِ وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحيطَةٌ بِالكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे आपसे यातना के लिए जल्दी मचा रहे है, हालाँकि निःसंदेह जहन्नम निश्चय काफ़िरों को घेरने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh tumse azaab jaldi laney ka mutalaba karte hain, halaanke jahannum in kafiron ko ghere mein le chuki hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh azab ki jaldi macha rahey hain aur (tasalli rakhen) jahannum kafiron ko gher lenay wali hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये तुमसे अज़ाब जल्दी लेन का मुतलबा करते हैं, हलाँके जहन्नुम इन काफिरों को घेरे में ले चुकी है
عَرَبِييَومَ يَغشاهُمُ العَذابُ مِن فَوقِهِم وَمِن تَحتِ أَرجُلِهِم وَيَقولُ ذوقوا ما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन यातना उन्हें उनके ऊपर से और उनके पाँव के नीचे से ढाँप लेगी और अल्लाह कहेगा : चखो उसका मज़ा जो तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)(Aur inhein pata chalega) us roz jabke azaab inhein upar se bhi dhank lega aur paon ke nichey se bhi aur kahega ke ab chakkho mazaa un kartooton ka jo tum karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din unn kay upper talay say unhen azab dhaanp raha hoga aur Allah Taalaa farmaye ga kay abb apnay ( bad) aemaal ka maza chakho
Devnagri Urdu (Maududi)(और इन्हें पता चलेगा) हमें रोज जबके अजब इन्हें ऊपर से भी ढांक लेगा और पांव के नीचे से भी और कहेगा के अब चक्खो मजा उन कार्टूनों का जो तुम करते थे
عَرَبِييا عِبادِيَ الَّذينَ آمَنوا إِنَّ أَرضي واسِعَةٌ فَإِيّايَ فَاعبُدونِ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे बंदो जो ईमान लाए हो! निःसंदेह मेरी धरती विशाल है। अतः तुम मेरी ही इबादत करो।
Roman Urdu (Maududi)Aey mere bandon jo iman laye ho, meri zameen waseeh hai, pas tum meri hi bandagi baja lao
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meray eman walay bando! Meri zamin boht kushada hai so tum meri hi ibadat kero
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ मेरे बंदन जो ईमान लाए हो, मेरी ज़मीन वसीह है, पास तुम मेरी ही बंदगी बजा लाओ
عَرَبِيكُلُّ نَفسٍ ذائِقَةُ المَوتِ ۖ ثُمَّ إِلَينا تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)प्रत्येक प्राणी मौत का स्वाद चखने वाला है, फिर तुम हमारी ही ओर लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Har mutanaffis ko maut ka maza chakhna hai, phir tum sab hamari hi taraf palta kar laye jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)her jaandaar maut ka maza chakhney wala hai aur tum sab humari hi taraf lotaye jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)हर मुतनफ्फिस को मौत का मजा चखना है, फिर तुम सब हमारी ही तरफ पलटा कर ले जाओगे
عَرَبِيوَالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ لَنُبَوِّئَنَّهُم مِنَ الجَنَّةِ غُرَفًا تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها ۚ نِعمَ أَجرُ العامِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कार्य किए, हम उन्हें अवश्य ही जन्नत के ऊँचे भवनों में जगह देंगे, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, वे उनमें सदावासी होंगे। यह उन कर्म करने वालों का क्या ही अच्छा बदला है!
Roman Urdu (Maududi)Jo log iman laye hain aur jinhon ne neik amal kiye hain unko hum jannat ki buland o baala imaraton (buildings/palaces) mein rakhenge jinke nichey nehrein behti hongi, wahan woh hamesha rahenge. Kya hi umdah ajar hai amal karne walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log eman laye aur nek kaam kiye unhen hum yaqeenan jannat kay unn bala khano mein jaga den gay jin kay neechay chashmen beh rahey hain jahan woh hamesha rahen gay kaam kerney walon ka kiya hi acha ajar hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्हों ने नीक अमल किए हैं उनको हम जन्नत की बुलंद ओ बाला इमरतों (इमारतें/महल) में रखेंगे जिनके आला में नेह्रेन बहती होंगी, वहां वो हमेशा रहेंगे। क्या है उम्मीद अजर है अमल करने वालों के लिए
عَرَبِيالَّذينَ صَبَروا وَعَلىٰ رَبِّهِم يَتَوَكَّلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन्होंने धैर्य से काम लिया तथा अपने पालनहार ही पर भरोसा रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Un logon ke liye jinhon ne sabr kiya hai aur jo apne Rubb par bharosa karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh jinhon ney sabar kiya aur apnay rab taalaa per bharosa rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उन लोगों के लिए जिन्हों ने सब्र किया है और जो अपने रब पर भरोसा करते हैं
عَرَبِيوَكَأَيِّن مِن دابَّةٍ لا تَحمِلُ رِزقَهَا اللَّهُ يَرزُقُها وَإِيّاكُم ۚ وَهُوَ السَّميعُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)कितने ही जीव हैं, जो अपनी रोज़ी नहीं उठा सकते। अल्लाह ही उन्हें रोज़ी देता है और तुम्हें भी! और वह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Kitne hi jaanwar hain jo apna rizq uthaye nahin phirte, Allah unko rizq deta hai aur tumhara raaziq bhi wahi hai. Woh sab kuch sunnta aur jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur boht say janwar hain jo apni rozi uthaye nahi phirtay unn sab ko aur tumhen bhi Allah Taalaa hi rozi deta hai woh bara hi sunnay jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)कितने ही जानवर हैं जो अपना रिज्क उठाये नहीं फिरते, अल्लाह उनको रिज्क देता है और तुम्हारा राजिक भी वही है. वो सब कुछ सुनता और जानता है
عَرَبِيوَلَئِن سَأَلتَهُم مَن خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ وَسَخَّرَ الشَّمسَ وَالقَمَرَ لَيَقولُنَّ اللَّهُ ۖ فَأَنّىٰ يُؤفَكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय यदि आप उनसे पूछें कि आकाशों और धरती को किसने पैदा किया और (किसने) सूर्य और चाँद को वशीभूत किया? तो वे अवश्य कहेंगे कि अल्लाह ने। तो फिर वे कहाँ बहकाए जा रहे हैं?
Roman Urdu (Maududi)Agar tum in logon se pucho ke zameen aur aasmaano ko kisne paida kiya hai aur Chand aur Suraj ko kisne musakkhar kar rakkha hai, to zaroor kahenge ke Allah ne, phir yeh kidhar se dhoka kha rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar aap inn say daryaft keren kay zamin-o-aasman ka khaliq aur sooraj chand ko kaam mein laganey wala kaun hai? To inn ka jawab yehi hoga kay Allah Taalaa phir kidhar ultay jarahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम लोगों से पूछो के ज़मीन और आसमान को किसने पेदा किया है और चांद और सूरज को किसने मुस्कुरा कर रखा है, तो जरूर कहेंगे के अल्लाह ने, फिर ये किदर से धोखा खा रहे हैं
عَرَبِياللَّهُ يَبسُطُ الرِّزقَ لِمَن يَشاءُ مِن عِبادِهِ وَيَقدِرُ لَهُ ۚ إِنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है जीविका विस्तृत कर देता है और जिसके लिए चाहता है तंग कर देता है। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ को अच्छी तरह जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah hi hai jo apne bandon mein se jiska chahta hai rizq kushada (enlarge) karta hai aur jiska chahta hai tangg karta hai. Yaqeenan Allah har cheez ka jaanne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa apnay bandon mein say jissay chahaye farakh rozi deta hai aur jissay chahaye tang. Yaqeenan Allah Taalaa her cheez ka jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह हाय है जो अपने बंदों में से जिसका चाहता है रिज़्क कुशादा (बड़ा करना) करता है और जिसका चाहता है तंग करता है। यकीनन अल्लाह हर चीज़ का जाने वाला है
عَرَبِيوَلَئِن سَأَلتَهُم مَن نَزَّلَ مِنَ السَّماءِ ماءً فَأَحيا بِهِ الأَرضَ مِن بَعدِ مَوتِها لَيَقولُنَّ اللَّهُ ۚ قُلِ الحَمدُ لِلَّهِ ۚ بَل أَكثَرُهُم لا يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय यदि आप उनसे पूछें कि किसने आकाश से पानी उतारा, फिर उसके द्वारा धरती को, उसके मुर्दा हो जाने के बाद जीवित किया? तो वे अवश्य कहेंगे कि अल्लाह ने। आप कह दें कि सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है। बल्कि उनमें से अधिकतर लोग नहीं समझते।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar tum insey pucho, kisne aasmaan se pani barsaya aur iske zariye se murda padi hui zameen ko jila uthaya to woh zaroor kahenge Allah ne. Kaho, Alhamdulillah, magar aksar log samajhte nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar aap inn say sawal keren kay aasman say pani utaar ker zamin ko uss ki maut kay baad zinda kiss ney kiya? To yaqeenan inn ka jawab yehi hoga Allah Taalaa ney. Aap keh den kay her tareef Allah hi kay liye saza waar hai bulkay inn mein say aksar bey aqal hain
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर तुम इनसे पूछो, किसने आसमान से पानी बरसाया और इसके जरूर से मुर्दा पड़ी हुई जमीन को जिला उठाया तो वो जरूर कहेंगे अल्लाह ने। कहो, अल्हम्दुलिल्लाह, मगर अक्सर लोग समझते नहीं हैं
عَرَبِيوَما هٰذِهِ الحَياةُ الدُّنيا إِلّا لَهوٌ وَلَعِبٌ ۚ وَإِنَّ الدّارَ الآخِرَةَ لَهِيَ الحَيَوانُ ۚ لَو كانوا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और दुनिया का यह जीवन केवल मनोरंजन और खेल है। और निःसंदेह आखिरत का घर ही निश्चय वास्तविक जीवन है, यदि वे जानते होते।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh duniya ki zindagi kuch nahin hai magar ek khel aur dil ka behlawa. Asal zindagi ka ghar to daar e aakhirat(hereafter) hai, kaash yeh log jaantey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur duniya ki yeh zindagani to mehaz khel tamasha hai albatta aakhirat kay ghar ki zindagi hi haqeeqi zindagi hai kaash! Yeh jantay hotay
Devnagri Urdu (Maududi)और ये दुनिया की जिंदगी में कुछ नहीं है मगर एक खेल और दिल का बहलावा। असल जिंदगी का घर तो डर ए आख़िरत (इसके बाद) है, काश ये लोग जानते हैं
عَرَبِيفَإِذا رَكِبوا فِي الفُلكِ دَعَوُا اللَّهَ مُخلِصينَ لَهُ الدّينَ فَلَمّا نَجّاهُم إِلَى البَرِّ إِذا هُم يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वे नाव पर सवार होते हैं, तो अल्लाह को, उसके लिए धर्म को विशुद्ध करते हुए, पुकारते हैं। फिर जब वह उन्हें बचाकर थल तक ले आता है, तो शिर्क करने लगते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab yeh log kashti par sawaar hotay hain to apne deen ko Allah ke liye khaalis karke ussey dua maangte hain. Phir jab woh unhein bacha kar khushki par le aata hai to yakayak yeh shirk karne lagtey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Pus yeh log jab kashti mein sawar hotay hain to Allah Taalaa hi ko pukartay hain uss kay liye ibadat ko khalis ker kay phir jab woh enhen khuski ki taraf bacha laata hai to ussi waqt shirk kerney lagtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब ये लोग कश्ती पर सवार होते हैं तो अपने दीन को अल्लाह के लिए खालिस करके उससे दुआ मांगते हैं। फिर जब वो उन्हें बचा कर ख़ुशी पर ले आता है तो यकीनन ये शिर्क करने लगते हैं
عَرَبِيلِيَكفُروا بِما آتَيناهُم وَلِيَتَمَتَّعوا ۖ فَسَوفَ يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि जो कुछ हमने उन्हें प्रदान किया है, उसकी नाशुक्री करें, और ताकि वे (जीवन का) लाभ उठाएँ। तो शीघ्र ही उन्हें पता चल जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke Allah ki di hui nijaat par uska kufraan e niyamat karein aur (hayat e duniya ke) mazey lootein. Accha, anqareeb inhein maloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Takay humari di hui nematon say mukartay rahen aur barattay rahen. Abhi abhi pata chal jayega
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के अल्लाह की दी हुई निजात पर उसका कुफ़्रान ए नियामत करें और (हयात ए दुनिया के) मजे लूटें। अच्छा, अनक़रीब इन्हें मालूम हो जाएगा
عَرَبِيأَوَلَم يَرَوا أَنّا جَعَلنا حَرَمًا آمِنًا وَيُتَخَطَّفُ النّاسُ مِن حَولِهِم ۚ أَفَبِالباطِلِ يُؤمِنونَ وَبِنِعمَةِ اللَّهِ يَكفُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने (उनके लिए) एक सुरक्षित व शांतिमय हरम बनाया है, जबकि उनके आस-पास से लोग उचक लिए जाते हैं? तो क्या वे असत्य पर ईमान लाते हैं और अल्लाह की नेमत की नाशुक्री करते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh dekhte nahin hain ke humne ek pur-aman haram (sanctuary of safety) bana diya hai, halaanke inke gird-o-pesh log uchak liye jatey hain? Kya phir bhi yeh log baatil ko maante hain aur Allah ki niyamat ka kufraan karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh nahi dekhtay kay hum ney haram ko baa-aman bana diya hai halankay inn kay ird-gird say log uchak liye jatay hain kiya yeh batil per to yaqeen rakhtay hain aur Allah Taalaa ki nematon per na-shukri kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये देखते नहीं हैं कि हमने एक पुर-अमन हरम (सुरक्षा का अभयारण्य) बना दिया है, हलांके इनके गिर्द-ओ-पेश लोग उचक लिए जाते हैं? क्या फिर भी ये लोग बातिल को मानते हैं और अल्लाह की नियामत का कुफ़्रान करते हैं
عَرَبِيوَمَن أَظلَمُ مِمَّنِ افتَرىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَو كَذَّبَ بِالحَقِّ لَمّا جاءَهُ ۚ أَلَيسَ في جَهَنَّمَ مَثوًى لِلكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उससे अधिक अत्याचारी कौन है, जो अल्लाह पर झूठ गढ़े या जब सच उसके पास आ जाए, तो उसे झुठला दे? क्या (ऐसे) काफ़िरों का ठिकाना जहन्नम में नहीं है?
Roman Urdu (Maududi)Us shaks se bada zaalim kaun hoga jo Allah par jhoot baandhey ya haqq ko jhutlaye jabke woh uske saamne aa chuka ho? Kya aisey kaafiron ka thikana jahannum hi nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss say bara zalim kaun hoga? Jo Allah Taalaa per jhoot bandhay ya jab haq uss kay pass aajaye woh ussay jhutlaye kiya aisay kafiron ka thikana jahannum mein na hoga
Devnagri Urdu (Maududi)हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ बांधे या हक़ को झूठलाए जबके वो उसके सामने आ चुका हो? क्या ऐसे काफिरों का ठिकाना जहन्नुम ही नहीं है
عَرَبِيوَالَّذينَ جاهَدوا فينا لَنَهدِيَنَّهُم سُبُلَنا ۚ وَإِنَّ اللَّهَ لَمَعَ المُحسِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने हमारी ख़ातिर भरपूर प्रयास किया, हम अवश्य ही उन्हें अपने मार्ग दिखा देंगे और निःसंदेह अल्लाह सदाचारियों के साथ है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log hamari khatir mujahida(strive) karenge unhein hum apne raaste dikhayenge, aur yaqeenan Allah neikukaron(who do good) hi ke saath hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log humari raah mein mushaqqaten bardasht kertay hain hum unhen apni rahen zaroor dikha den gay. Yaqeenan Allah Taalaa neko kaaron ka sathi hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग हमारी खातिर मुजाहिदा (प्रयास) करेंगे उन्हें हम अपने रास्ते दिखाएंगे, और यकीनन अल्लाह नीकुकरों (जो अच्छा करते हैं) ही के साथ हैं
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Surah 29: Al-'Ankabut (The Spider)

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Surah 29: Al-'Ankabut (The Spider)

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Surah 29: Al-'Ankabut (The Spider)

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Surah 29: Al-'Ankabut (The Spider)

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Surah 29: Al-'Ankabut (The Spider)

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Surah 30: Ar-Rum (The Romans)

Meccan🕐 Revelation #84📜 60 Verses🕮 Juz 1
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Surah 30: Ar-Rum (The Romans)

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Surah 30: Ar-Rum (The Romans)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالم
हिन्दी (Al-Omari)अलिफ़, लाम, मीम।
Roman Urdu (Maududi)Alif Laam Meem
Roman Urdu (Junagarhi)Alif-Laam-Meem
Devnagri Urdu (Maududi)अलिफ लाम मीम
عَرَبِيغُلِبَتِ الرّومُ
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हिन्दी (Al-Omari)रूमी पराजित हो गए।
Roman Urdu (Maududi)Rumi (romans) qareeb ki sar-zameen mein magloob (defeat/overcome) ho gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Roomi maghloob hogaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)रूमी (रोमन) करीब की सर-जमीन में मगलूब (हार/पराजित) हो गए हैं
عَرَبِيفي أَدنَى الأَرضِ وَهُم مِن بَعدِ غَلَبِهِم سَيَغلِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निकटतम क्षेत्र में। और वे अपनी पराजय के बाद जल्द ही विजयी हो जाएँगे!
Roman Urdu (Maududi)Aur apni is magloobiyat (defeat) ke baad chandh saal ke andar woh gaalib (victorious/dominant) ho jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Nazdeek ki zamin per aur woh maghloon honey kay baad un-qareeb ghalib aajayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और अपनी इस मगलूबियत (हार) के बाद चंद साल के अंदर वो गालिब (विजयी/प्रमुख) हो जाएंगे
عَرَبِيفي بِضعِ سِنينَ ۗ لِلَّهِ الأَمرُ مِن قَبلُ وَمِن بَعدُ ۚ وَيَومَئِذٍ يَفرَحُ المُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)कुछ वर्षों में। सारा मामला अल्लाह के अधिकार में है, पहले भी और बाद में भी। और उस दिन ईमान वाले प्रसन्न होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Allah hi ka ikhtiyar hai pehle bhi aur baad mein bhi. Aur woh din woh hoga jabke Allah ki bakshi hui fatah par musalmaan khushiyan manayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Chand saal mein hi. Iss say pehlay aur iss kay baad bhi ikhtiyar Allah Taalaa hi ka hai. Uss roz musalman shaadmaan hongay
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ही का इख्तियार है पहले भी और बाद में भी. और वो दिन वो होगा जबके अल्लाह की बख्शी हुई फतह पर मुसलमान खुशियां मनाएंगे
عَرَبِيبِنَصرِ اللَّهِ ۚ يَنصُرُ مَن يَشاءُ ۖ وَهُوَ العَزيزُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह की सहायता से। वह जिसकी चाहता है, सहायता करता है। वह सब पर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान है।
Roman Urdu (Maududi)Allah nusrat (victory) ata farmata hai jisey chahta hai, Aur woh zabardast aur raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah ki madad say woh jiss ki chahata hai madad kerta hai. Asal ghalin aur meharbaan wohi hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह नुसरत (जीत) अता फरमाता है जिसे चाहता है, और वो जबरदस्त और रहीम है
عَرَبِيوَعدَ اللَّهِ ۖ لا يُخلِفُ اللَّهُ وَعدَهُ وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह अल्लाह का वादा है। अल्लाह अपने वादे के विरुद्ध नहीं करता। परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Yeh wada Allah ne kiya hai, Allah kabhi apne wade ki khilaf warzi nahin karta. Magar aksar log nahin jaante hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah ka wada hai Allah Taalaa apnay waday kay khilaf nahi kerta lekin aksar log nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)ये वादा अल्लाह ने किया है, अल्लाह कभी अपने वादे की खिलाफत वारजी नहीं करता। मगर अक्सर लोग नहीं जानते हैं
عَرَبِييَعلَمونَ ظاهِرًا مِنَ الحَياةِ الدُّنيا وَهُم عَنِ الآخِرَةِ هُم غافِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे केवल दुनिया के जीवन के कुछ बाहरी स्वरूप को जानते हैं, और वे आख़िरत से बिलकुल गाफ़िल हैं।
Roman Urdu (Maududi)Log duniya ki zindagi ka bas zaahiri pehlu (outward aspect) jaante hain aur aakhirat se woh khud hi gaafil hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh to (sirf) duniyawi zindagi kay zahir ko (hi) jantay hain aur aakhirat say to bilkul hi bay khabar hain
Devnagri Urdu (Maududi)लोग दुनिया की जिंदगी का बस जाहिर पहलू (बाहरी पहलू) जानते हैं और आखिरी से वो खुद ही गाफिल हैं
عَرَبِيأَوَلَم يَتَفَكَّروا في أَنفُسِهِم ۗ ما خَلَقَ اللَّهُ السَّماواتِ وَالأَرضَ وَما بَينَهُما إِلّا بِالحَقِّ وَأَجَلٍ مُسَمًّى ۗ وَإِنَّ كَثيرًا مِنَ النّاسِ بِلِقاءِ رَبِّهِم لَكافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन लोगों ने अपने दिलों में विचार नहीं किया कि अल्लाह ने आकाशों और धरती को और उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों को सत्य के साथ और एक निश्चित अवधि के लिए ही पैदा किया है?! और निःसंदेह बहुत-से लोग अपने पालनहार से मिलने का इनकार करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya unhon ne kabhi apne aap mein gaur-o-fikr nahin kiya? Allah ne zameen aur aasmaano ko aur un saari cheezon ko jo unke darmiyan hain barhaqq aur ek muqarrar muddat hi ke liye paida kiya hai. Magar bahut se log apne Rubb ki mulaqat ke munkir hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn logon ney apnay dil mein yeh ghor nahi kiya? Kay Allah Taalaa ney aasmano ko aur zamin aur inn kay darmiyan jo kuch hai sab ko behtareen qareeney say muqarrar waqt tak kay liye hi (peda) kiya hai haan aksar log yaqeenan apnay rab ki mulaqat kay munkir hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या उनहों ने कभी अपने आप में गौर-ओ-फिक्र नहीं किया? अल्लाह ने ज़मीन और आसमानों को और उन सारी चीज़ों को जो उनके दरमियान हैं बरहक़ और एक मुकर्रर मुद्दत ही के लिए अदा किया है। मगर बहुत से लोग अपने रब की मुलाक़ात के लिए तैयार हैं
عَرَبِيأَوَلَم يَسيروا فِي الأَرضِ فَيَنظُروا كَيفَ كانَ عاقِبَةُ الَّذينَ مِن قَبلِهِم ۚ كانوا أَشَدَّ مِنهُم قُوَّةً وَأَثارُوا الأَرضَ وَعَمَروها أَكثَرَ مِمّا عَمَروها وَجاءَتهُم رُسُلُهُم بِالبَيِّناتِ ۖ فَما كانَ اللَّهُ لِيَظلِمَهُم وَلٰكِن كانوا أَنفُسَهُم يَظلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और क्या वे धरती में चले-फिरे नहीं कि देखते उन लोगों का परिणाम कैसा हुआ, जो उनसे पहले थे? वे उनसे अधिक शक्तिशाली थे और उन्होंने धरती को जोता-बोया और उसे आबाद किया उससे अधिक जितना उन्होंने उसे आबाद किया था, और उनके पास उनके रसूल खुली निशानियाँ लेकर आए। तो अल्लाह ऐसा न था कि उनपर अत्याचार करे, लेकिन वे स्वयं अपने ऊपर अत्याचार करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur kya yeh log kabhi zameen mein chaley phirey nahin hain ke inhein un logon ka anjaam nazar aata jo insey pehle guzar chuke hain? Woh insey zyada taaqat rakhte thay. Unhon ne zameen ko khoob udheda(Tilled/prepare and cultivate (land) for crops) tha aur usey itna aabaad kiya tha jitna inhon ne nahin kiya hai. Unke paas unke Rasool roshan nishaniyan lekar aaye. Phir Allah unpar zulm karne wala na tha, magar woh khud hi apne upar zulm kar rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya enhon ney zamin mein chal phir ker yeh nahi dekha kay inn say pehlay logon ka anjam kaisa (bura) hua? Woh inn say boht zada tawana (aur taqatwar) thay aur unhon ney (bhi) zamin boee joti thi aur inn say ziyada abad ki thi aur unn kay pass unkay rasool roshan dalaeel ley ker aaye thay. Yeh to na mumkin tha kayAllah Taalaa unn per zulm kerta lekin (dar asal) woh khud apni jano per zulm kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या ये लोग कभी ज़मीन में चले फिर नहीं हैं कि उन लोगों का अंजाम नज़र आता है जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं? वो इनसे ज़्यादा ताक़त रखते थे। उनको ने जमीन को खूब उधेड़ा (फसल के लिए जमीन जोतना/तैयार करना और खेती करना) था और उसे इतना आबाद किया था जितना इन्हों ने नहीं किया है। उनके पास उनके रसूल रोशन निशानियां लेकर आये। फिर अल्लाह अनपर ज़ुल्म करने वाला ना था, मगर वो खुद ही अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे थे
عَرَبِيثُمَّ كانَ عاقِبَةَ الَّذينَ أَساءُوا السّوأىٰ أَن كَذَّبوا بِآياتِ اللَّهِ وَكانوا بِها يَستَهزِئونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जिन लोगों ने बुराई की, उनका बहुत ही बुरा अंत हुआ, इसलिए कि उन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया और वे उनका उपहास करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aakir e kaar jin logon ne buraiyan ki thi unka anjaam bahut bura hua. Isliye ke unhon ne Allah ki aayat ko jhutlaya tha aur woh unka mazaq udate thay
Roman Urdu (Junagarhi)Phir aakhrish bura kerney walon ka boht hi bura anjam hua iss liye kay woh Allah Taalaa ki aayaton ko jhutlatay thay aur inn ki hansi uratay thay
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार जिन लोगों ने बुराइयां की थी उनका अंजाम बहुत बुरा हुआ। इस्ली के अनहोन ने अल्लाह की आयत को झुटलाया था और वो उनका मज़ाक उड़ाते थे
عَرَبِياللَّهُ يَبدَأُ الخَلقَ ثُمَّ يُعيدُهُ ثُمَّ إِلَيهِ تُرجَعونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही सृष्टि का आरंभ करता है। फिर वही उसे दोबारा पैदा करेगा। फिर तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Allah hi khalq ki ibtida(originates creation) karta hai, phir wahi iska iaada (phir paida/repeat) karega. Phir usi ki taraf tum paltaye jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa hi makhlooq ki ibtida kerta hai phir wohi ussay doobara peda keray ga phir tum sab ussi ki taraf lotaye jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ही ख़ल्क की इब्तिदा (सृष्टि की उत्पत्ति) करता है, फिर वही इसका इयादा (फिर से भुगतान/दोहराना) करेगा। फिर उसकी तरफ तुम पलट जाओगे
عَرَبِيوَيَومَ تَقومُ السّاعَةُ يُبلِسُ المُجرِمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी, अपराधी निराश हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab woh sa-aat (hour/ghadi) barpa hogi us din mujrim hak-dak (dumbfounded) reh jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss din qayamat qaeem hogi to gunehgaar heyrat zada reh jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जब वो सा-आट (घंटा/घड़ी) बरपा होगी उस दिन मुजरिम हक-दक (बेवकूफ) रह जाएंगे
عَرَبِيوَلَم يَكُن لَهُم مِن شُرَكائِهِم شُفَعاءُ وَكانوا بِشُرَكائِهِم كافِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उनके लिए उनके साझियों में से कोई सिफ़ारिश करने वाले नहीं होंगे और वे अपने साझियों का इनकार करने वाले होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Unke tehraye huey shareekon mein koi unka sifarishi (intercessor) na hoga, aur woh apne shareekon ke munkir ho jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kay tamam tar shareekon mein say aik bhi inn ka sifarshi na hoga aur (khud yeh bhi) apnay shareekon kay munkir ho jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)उनके तहरे हुए शरीकोन में कोई उनका सिफारिशी (मध्यस्थ) ना होगा, और वो अपने शरीकों के मुनकिर हो जाएंगे
عَرَبِيوَيَومَ تَقومُ السّاعَةُ يَومَئِذٍ يَتَفَرَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी, उस दिन वे अलग-अलग हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz woh sa-aat (hour/ghadi/qayamat) barpa hogi, us din (sab Insaan) alag girohon mein batt(split ) jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss din qayamat qaeem hogi uss din (jamaten) alag alag hojayen gi
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज वो सा-आत (घंटा/घड़ी/कयामत) बरपा होगी, उस दिन (सब इंसान) अलग गिरोहों में बत्त (विभाजित) जाएंगे
عَرَبِيفَأَمَّا الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ فَهُم في رَوضَةٍ يُحبَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कार्य किए, वे जन्नत में प्रसन्नमय रखे जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Jo log iman laye hain aur jinhon ne neik amal kiye hain woh ek baagh mein shadaan-o-farhaan (khush haal) rakkhey jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jo eman laa ker nek aemaal kertay rahey woh to jannat mein khush-o-khurram ker diyey jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्होन ने नीक अमल किए हैं वो एक बाग में शादां-ओ-फरहान (खुश) हाल) रक्खे जायेंगे
عَرَبِيوَأَمَّا الَّذينَ كَفَروا وَكَذَّبوا بِآياتِنا وَلِقاءِ الآخِرَةِ فَأُولٰئِكَ فِي العَذابِ مُحضَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने कुफ़्र किया और हमारी आयतों और आख़िरत की मुलाक़ात को झुठलाया, वे यातना में उपस्थित किए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jinhon ne kufr kiya hai aur hamari aayat ko aur aakhirat ki mulaqaat ko jhutlaya woh azaab mein haazir rakkhey jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jinhon ney kufur kiya tha aur humari aayaton ko aur aakhirat ki mulaqat ko jhoota theraya tha woh sab azab mein pakar ker hazir rakhay jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जिन्होन ने कुफ्र किया है और हमारी आयत को और आख़िरत की मुलाकात को झुटलाया वो अज़ाब में हाज़िर रक्खे जायेंगे
عَرَبِيفَسُبحانَ اللَّهِ حينَ تُمسونَ وَحينَ تُصبِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः तुम अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करो,जब तुम शाम करते हो और जब सुबह करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Pas tasbeeh karo Allah ki jabke tum shaam karte ho aur jab subah karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Pus Allah Taalaa ki tasbeeh parha kero jab kay tum shaam kero aur jab subah kero
Devnagri Urdu (Maududi)पस तस्बीह करो अल्लाह की जबके तुम शाम करते हो और जब सुबह करते हो
عَرَبِيوَلَهُ الحَمدُ فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ وَعَشِيًّا وَحينَ تُظهِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसी के लिए सब प्रशंसा है आकाशों एवं धरती में, और तीसरे पहर तथा जब तुम ज़ुहर के समय में प्रवेश करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aasmaano aur zameen mein usi ke liye hamd(praise) hai aur (tasbeeh karo uski) teesre pehar aur jabke tumpar zohar ka waqt aata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tamam tareefon kay laeeq aasman-o-zamin mein sirf wohi hai teesray pehar bhi aur zohar kay waqt bhi (uss ki pakeezgi biyan kero)
Devnagri Urdu (Maududi)आसमानो और ज़मीन मैं उसके लिए हम्द (प्रशंसा) है और (तस्बीह करो उसकी) तीसरे पहर और जबके तुम्हारे जोहर का वक्त आता है
عَرَبِييُخرِجُ الحَيَّ مِنَ المَيِّتِ وَيُخرِجُ المَيِّتَ مِنَ الحَيِّ وَيُحيِي الأَرضَ بَعدَ مَوتِها ۚ وَكَذٰلِكَ تُخرَجونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह जीवित को मृत से निकालता है तथा मृत को जीवित से निकालता है और धरती को उसके मृत हो जाने के बाद जीवित करता है। और इसी प्रकार, तुम (भी) निकाले जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh zinda mein se murde ko nikalta hai aur murde mein se zinda ko nikal laata hai aur zameen ko uski maut ke baat zindagi bakashta hai.Isi tarah tumlog bhi (haalat e maut se) nikaal liye jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)(wohi) zinda ko murda say aur murda ko zinda say nikalta hai. Aur wohi zamin ko uss ki maut kay baad zinda kerta hai issi tarah tum (bhi) nikalay jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)वो जिंदा में से मुर्दे को निकलता है और मुर्दे में से जिंदा को निकल लाता है और जमीन को उसकी मौत के बारे में बात करता है है।इसी तरह तुमलोग भी (हालत ए मौत से) निकल लिए जाओगे
عَرَبِيوَمِن آياتِهِ أَن خَلَقَكُم مِن تُرابٍ ثُمَّ إِذا أَنتُم بَشَرٌ تَنتَشِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसकी निशानियों में से है कि उसने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया, फिर एकाएक तुम मनुष्य हो, जो फैल रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Uski nishaniyon mein se yeh hai ke usne tumko mitti se paida kiya phir yakayak tum bashar (Insaan) ho ke (zameen mein) phaylte chaley ja rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Allah ki nishaniyon mein say hai kay uss ney tum ko mitti say peda kiya phir abb insan bann ker (chaltay phirtay) phel rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)उसके निशानियों में से ये है के उसने तुमको मिट्टी से पैदा किया फिर यकीन तुम बशर (इंसान) हो के (जमीन में) फैलते चले जा रहे हो
عَرَبِيوَمِن آياتِهِ أَن خَلَقَ لَكُم مِن أَنفُسِكُم أَزواجًا لِتَسكُنوا إِلَيها وَجَعَلَ بَينَكُم مَوَدَّةً وَرَحمَةً ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِقَومٍ يَتَفَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसकी निशानियों में से है कि उसने तुम्हारे लिए तुम्ही में से जोड़े पैदा किए, ताकि तुम उनके पास शांति प्राप्त करो। तथा उसने तुम्हारे बीच प्रेम और दया रख दी। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशाननियाँ हैं, जो सोच-विचार करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur uski nishaniyon mein se yeh hai ke unse tumhare liye tumhari jins se biwiyan banayi taa-ke tum unke paas sukoon hasil karo aur tumhare darmiyan mohabbat aur rehmat paida kardi. Yaqeenan is mein bahut si nishaniyan hain un logon ke liye jo gaur o fikr karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss ki nishaniyon mein say hai kay tumhari hi jins say biwiyan peda ki takay tum inn say aaram pao uss ney tumharay darmiyan mohabbat aur humdardi qaeem kerdi yaqeenan ghor-o-fiker kerney walon kay liye iss mein boht si nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)और उसकी निशानियों में से ये है कि तुम्हारे लिए तुम्हारी जिंदगी से बीवियां बनाईं ता-के तुम उनके पास सुकून हासिल करो और तुम्हारे दरमियान मोहब्बत और रहमत अदा करदी। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फिक्र करते हैं
عَرَبِيوَمِن آياتِهِ خَلقُ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَاختِلافُ أَلسِنَتِكُم وَأَلوانِكُم ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِلعالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसकी निशानियों में से आकाशों और धरती को पैदा करना तथा तुम्हारी भाषाओं और तुम्हारे रंगों का अलग-अलग होना है। निःसंदेह इसमें ज्ञान रखने वालों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ है।
Roman Urdu (Maududi)Aur uski nishaniyon mein se aasmaano aur zameen ki paidaish, aur tumhari zubaano aur tumhare rangon (colors) ka ikhtilaf hai. Yaqeenan is mein bahut si nishaniyan hain daanishmand (wise) logon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Uss (ki qudrat) ki nishaniyon mein say aasmano aur zamin ki pedaeesh aur tumhari zabano aur rangaton ka ikhtilaf (bhi) hai danish mando kay liye iss mein yaqeenan bari nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)और उसकी निशानियों में से आसमान और जमीन की अदाएं, और तुम्हारी जुबान और तुम्हारे रंग (रंग) का इख्तिलाफ है। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं दानिशमंद (बुद्धिमान) लोगों के लिए
عَرَبِيوَمِن آياتِهِ مَنامُكُم بِاللَّيلِ وَالنَّهارِ وَابتِغاؤُكُم مِن فَضلِهِ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِقَومٍ يَسمَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसकी निशानियों में से तुम्हारा रात और दिन को सोना और तुम्हारा उसके अनुग्रह को तलाश करना है। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो सुनते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur uski nishaniyon mein se tumhara raat aur din ko sona aur tumhara uske fazal ko talash karna hai. Yaqeenan is mein bahut si nishaniyan hain un logon ke liye jo (gaur se) suntay hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (bhi) uss ki (qudrat ki) nishani tumhari raton aur din ki neend mein hai aur uss kay fazal (yani rozi) ko tumhara talash kerna bhi hai. Jo log (kaan laga ker) sunnay kay aadi hain unn kay liye iss mein boht si nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)और उसकी निशानियों में से तुम्हारी रात और दिन को सोना और तुम्हारे उसके फज़ल को तलाश करना है। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो (गौर से) सुनते हैं
عَرَبِيوَمِن آياتِهِ يُريكُمُ البَرقَ خَوفًا وَطَمَعًا وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّماءِ ماءً فَيُحيي بِهِ الأَرضَ بَعدَ مَوتِها ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِقَومٍ يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसकी निशानियों में से (यह भी) है कि वह तुम्हें भय और आशा के लिए बिजली दिखाता है और आकाश से पानी उतारता है, फिर उसके द्वारा धरती को उसके मृत हो जाने के बाद जीवित कर देता है। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो समझते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur uski nishaniyon mein se yeh hai ke woh tumhein bijli ki chamak dikhata hai khauf ke saath bhi aur tamah (umeed) ke saath bhi. Aur aasmaan se pani barsata hai, Phir iske zariye se zameen ko uski maut ke baad zindagi bakshta hai. Yaqeenan is mein bahut si nishaniyan hain un logon ke liye jo aqal se kaam letay hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss ki nishaniyon mein say aik yeh (bhi) hai kay woh tumhen daraney aur umeedwaar bananay kay liye bijliyan dikhata hai aur aasman say barish barsata hai aur iss say murda zamin ko zinda ker deta hai iss mein (bhi) aqal mando kay liye boht si nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)और उसकी निशानियों में से ये है कि वो तुम्हें बिजली की चमक दिखाता है खौफ के साथ भी और तम (उम्मीद) के साथ भी। और आसमां से पानी बरसता है, फिर इसके ज़रीये से ज़मीन को उसकी मौत के बाद जिंदगी बक्शता है। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं
عَرَبِيوَمِن آياتِهِ أَن تَقومَ السَّماءُ وَالأَرضُ بِأَمرِهِ ۚ ثُمَّ إِذا دَعاكُم دَعوَةً مِنَ الأَرضِ إِذا أَنتُم تَخرُجونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसकी निशानियों में से है कि आकाश तथा धरती उसके आदेश से स्थापित हैं। फिर जब वह तुम्हें धरती में से एक ही बार पुकारेगा, तो सहसा तुम (बाहर) निकल आओगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur uski nishaniyon mein se yeh hai ke aasmaan aur zameen uske hukum se qayam hain, phir junhi ke usne tumhein zameen se pukara, bas ek hi pukar mein achanak tum nikal aaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ki aik nishani yeh bhi hai kay aasman-o-zamin ussi kay hukum say qaeem hain phir jab woh tumhen awaz dey ga sirf aik baar ki awaz kay sath hi tum sab zamin say nikal aao gay
Devnagri Urdu (Maududi)और उसकी निशानियों में से ये है के आसमां और जमीन उसके हुकुम से कायम हैं, फिर जून्ही के उसने तुम्हें जमीन से पुकारा, बस एक ही पुकार में अचानक तुम निकल आओगे
عَرَبِيوَلَهُ مَن فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ كُلٌّ لَهُ قانِتونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आकाशों और धरती में जो भी है, उसी का है। सब उसी के आज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aasmaano aur zameen mein jo bhi hain uske bandey hain. Sab ke sab usi ke taabe-farmaan(obedient) hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aasman-o-zamin ki her her cheez ussi ki milkiyat hai aur her aik ussi kay farman kay ma-tehat hai
Devnagri Urdu (Maududi)आसमान और ज़मीन में जो भी हैं उसके बंदे हैं। सब के सब उसके लिए ताबे-फ़रमान (आज्ञाकारी) हैं
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي يَبدَأُ الخَلقَ ثُمَّ يُعيدُهُ وَهُوَ أَهوَنُ عَلَيهِ ۚ وَلَهُ المَثَلُ الأَعلىٰ فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ وَهُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वही है, जो उत्पत्ति का आरंभ करता है। फिर वही उसे पुनः पैदा करेगा। और यह उसके लिए अधिक सरल है। तथा आकाशों और धरती में सर्वोच्च गुण उसी का है। और वही प्रभुत्वशाली, हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jo takhleeq ki ibtida karta hai, phir wahi uska iaada (phir paida/repeat) karega aur yeh uske liye aasaan tarr hai.Aasmaano aur zameen mein uski sifat (attribute) sabse bartar hai aur woh zabardast aur hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi hai jo awwal baar makhlooq ko peda kerta hai phir ussay doobara peda keray ga aur yeh to uss per boht aasaan hai. Ussi ki behtareen aur aalaa sift hai aasmano aur zamin mein bhi aur wohi ghalbay wala hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जो तख़लीक की इब्तिदा करता है, फिर वही उसका इआदा (फिर से भुगतान/दोहराना) करेगा और ये उसके लिए आसमां तार्र है।आस्मानो और ज़मीन में उसकी सिफत (विशेषता) सबसे बारतार है और वो ज़बरदस्त और हकीम है
عَرَبِيضَرَبَ لَكُم مَثَلًا مِن أَنفُسِكُم ۖ هَل لَكُم مِن ما مَلَكَت أَيمانُكُم مِن شُرَكاءَ في ما رَزَقناكُم فَأَنتُم فيهِ سَواءٌ تَخافونَهُم كَخيفَتِكُم أَنفُسَكُم ۚ كَذٰلِكَ نُفَصِّلُ الآياتِ لِقَومٍ يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने तुम्हारे लिए स्वयं तुम्हीं में से एक उदाहरण पेश किया है। हमने जो रोज़ी तुम्हें प्रदान की है, क्या उसमें तुम्हारे दासों में से तुम्हारा कोई साझी है कि तुम उसमें समान हो, उनसे वैसे ही डरते हो, जैसे एक-दूसरे से डरते हो? इसी प्रकार हम उन लोगों के लिए आयतें खोल-खोलकर वर्णन करते हैं, जो समझ रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh tumhein khud tumhari apni hi zaat se ek misal deta hai. Kya tumhare un ghulaamo mein se jo tumhari milkiyat mein hain kuch ghulam aisey bhi hain jo hamare diye huey maal o daulat mein tumhare saath barabar ke shareek hon aur tum unsey us tarah darte ho jis tarah aapas mein apne humsaron (each other)se darte ho? Is tarah hum aayaat khol kar pesh karte hain un logon ke liye jo aqal se kaam letay hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney tumharay liye aik misaal khud tumhari hi biyan farmaee jo kuch hum ney tumhen dey rakha hai kiya uss mein tumharay ghulamon mein say bhi koi tumhara shareek hai? Kiya tum aur woh iss mein barabar darjay kay ho? Aur tum inn ka aisa khatra rakhtay ho jaisa khud apno ka hum aqal rakhney walon kay liye issi tarah khol khol ker aayaten biyan ker detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो तुम्हें खुद तुम्हारी अपनी ही ज़ात से एक मिसाल देता है। क्या तुम्हारे उन गुलामों में से जो तुम्हारी मिल्कियत में हैं, कुछ गुलाम ऐसे भी हैं जो हमारे दिए हुए माल ओ दौलत में तुम्हारे साथ बराबर के शरीके हैं और तुम उनसे जुड़े हुए हो, जिस तरह आपस में अपने हमसरों से डरते हो? इस तरह हम आयत खोल कर पेश करते हैं उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं
عَرَبِيبَلِ اتَّبَعَ الَّذينَ ظَلَموا أَهواءَهُم بِغَيرِ عِلمٍ ۖ فَمَن يَهدي مَن أَضَلَّ اللَّهُ ۖ وَما لَهُم مِن ناصِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि वे लोग जिन्होंने अत्याचार किया बिना किसी ज्ञान के अपनी इच्छाओं के पीछे चल पड़े।फिर उसे कौन मार्ग पर लाए, जिसे अल्लाह ने गुमराह कर दिया हो। और उनके लिए कोई सहायक नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Magar yeh zaalim bay-samjhey boojhey apne takhailaat (desires) ke peechey chal padey hain. Ab kaun us shaks ko raasta dikha sakta hai jisey Allah ne bhatka diya ho. Aisey logon ka to koi madadgaar nahin ho sakta
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay baat yeh hai kay yeh zalim to baghair ilm kay khuwaish parasti ker rahey hain ussay kaun raah dikhaye jissay Allah Taalaa raah say hata dey unn ka aik bhi madadgaar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)मगर ये जालिम बे-समझे बूझे अपनी तखाइलात (इच्छाएं) के पीछे चल पड़े हैं। अब कौन हमारे शक्स को रास्ता दिखा सकता है जिसे अल्लाह ने भटका दिया हो। ऐसे लोगों का तो कोई मददगार नहीं हो सकता
عَرَبِيفَأَقِم وَجهَكَ لِلدّينِ حَنيفًا ۚ فِطرَتَ اللَّهِ الَّتي فَطَرَ النّاسَ عَلَيها ۚ لا تَبديلَ لِخَلقِ اللَّهِ ۚ ذٰلِكَ الدّينُ القَيِّمُ وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो (ऐ नबी!) आप एकाग्र होकर अपने चेहरे को इस धर्म की ओर स्थापित करें। उस फ़ितरत पर जमे रहें, जिसपर अल्लाह ने लोगों को पैदा किया है। अल्लाह की रचना में कोई बदलाव नहीं हो सकता। यही सीधा धर्म है, लेकिन अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Pas (Aey Nabi, aur Nabi ke pairawon) yaksu hokar apna rukh is deen ki simth mein jamaa do. Qayam ho jao us fitrat par jispar Allah taala ne Insano ko paida kiya hai. Allah ki banayi hui saakht badli nahin jaa sakti. Yahi bilkul raast aur durust deen hai, magar aksar log jaante nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap yeksoo hoker apna mun deen ki taraf mutawajja ker den. Allah Taalaa ki woh fitrat jiss per uss ney logon ko peda kiya hai Allah Taalaa kay banaye ko badlna nahi yehi seedah deen hai lekin aksar log nahi samajhtay
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ नबी, और नबी के जोड़े) यक्सू होकर अपना रुख इस दीन की सिम्थ में जमा दो। क़याम हो जाओ उस फ़ितरत पर जिसपर अल्लाह ताला ने इंसानों को पेदा किया है। अल्लाह की बनाई हुई सच बदली नहीं जा सकती। यह बिल्कुल रस्त और दुरुस्त दीन है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं
عَرَبِي۞ مُنيبينَ إِلَيهِ وَاتَّقوهُ وَأَقيمُوا الصَّلاةَ وَلا تَكونوا مِنَ المُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसी (अल्लाह) की ओर पलटते हुए, और उससे डरो तथा नमाज़ क़ायम करो और मुश्रिकों में से न हो जाओ।
Roman Urdu (Maududi)(Qayam ho jao is baat par)Allah ki taraf rujoo karte huey, aur daro ussey, aur namaz qayam karo , aur na ho jao un mushrikeen mein se
Roman Urdu (Junagarhi)(logo!) Allah Taalaa ki taraf rujoo ho ker uss say dartay raho aur namaz ko qaeem rakho aur mushrikeen mein say na ho jao
Devnagri Urdu (Maududi)(क़याम हो जाओ इस बात पर)अल्लाह की तरफ़ रूजू करते हुए, और डरो उसे, और नमाज़ क़याम करो, और न हो जाओ उन मुशरिकेन में से
عَرَبِيمِنَ الَّذينَ فَرَّقوا دينَهُم وَكانوا شِيَعًا ۖ كُلُّ حِزبٍ بِما لَدَيهِم فَرِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों में से जिन्होंने अपने धर्म को टुकड़े-टुकड़े कर दिया, और कई गिरोह हो गए। प्रत्येक गिरोह उसी पर खुश है, जो उसके पास है।
Roman Urdu (Maududi)Jinhon ne apna apna deen alag bana liya hai aur girohon (firkon) mein batt gaye hain. Har ek giroh ke paas jo kuch hai usi mein woh magan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unn logon mein say jinhon ney apnay deen ko tukray tukray ker diya aur khud bhi giroh giroh hogaye her giroh uss cheez per jo uss kay pass hai magan hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन्होन ने अपना अपना दीन अलग बना लिया है और गिरोहों (फिरकों) में बात हो गई है। हर एक गिरोह के पास जो कुछ है उसमें वो मगन है
عَرَبِيوَإِذا مَسَّ النّاسَ ضُرٌّ دَعَوا رَبَّهُم مُنيبينَ إِلَيهِ ثُمَّ إِذا أَذاقَهُم مِنهُ رَحمَةً إِذا فَريقٌ مِنهُم بِرَبِّهِم يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब लोगों को कोई कष्ट पहुँचता है, तो वे अपने पालनहार को, उसकी ओर लौटते हुए पुकारते हैं। फिर जब वह उन्हें अपनी ओर से कोई दया चखाता है, तो सहसा उनमें से एक समूह अपने पालनहार के साथ शिर्क करने लगता है।
Roman Urdu (Maududi)Logon ka haal yeh hai ke jab unhein koi takleef pahunchi hai to apne Rubb ki taraf rujoo karke usey pukarte hain, phir jab woh kuch apne rehmat ka zaika (taste) unhein chakha deta hai to yakayak un mein se kuch log shirk karne lagte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Logon ko jab kabhi koi museebat phonchti hai to apnay rab ki taraf (poori tarah) rujoo ho ker duyayen kertay hain phir jab woh apni taraf say rehmat ka maza chakhata hai to unn mein say aik jamat apnay rab kay sath shirk kerney lagti hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों का हाल ये है के जब उन्हें कोई तकलीफ पहुंची है तो अपने रब की तरफ रूजू करके उसे पुकारते हैं, फिर जब वो कुछ अपने रहमत का जायका (स्वाद) उन्हें चकमा देता है तो यकीनन उन मुझमें से कुछ लोग शिर्क करने लगते हैं
عَرَبِيلِيَكفُروا بِما آتَيناهُم ۚ فَتَمَتَّعوا فَسَوفَ تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि वे उसके प्रति कृतघ्नता दिखाएँ, जो हमने उन्हें प्रदान किया है। तो तुम लाभ उठा लो, शीघ्र ही तुम्हें पता चल जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke hamare kiye huey ehsan ki nashukri karein. Accha, mazey karlo, anqareeb tumhein maaloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Takay woh uss cheez ki na-shukri keren jo hum ney unhen di hai acha tum faeeda utha lo abhi abhi tumhen maloom hojaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के हमारे किये हुए एहसान की नाशुक्री करें। अच्छा, मजा करो, अंकारीब तुम्हें मालूम हो जाएगा
عَرَبِيأَم أَنزَلنا عَلَيهِم سُلطانًا فَهُوَ يَتَكَلَّمُ بِما كانوا بِهِ يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या हमने उनपर कोई प्रमाण उतारा है कि वह उस चीज़ को (उचित) बताता है, जिसे वे अल्लाह के साथ साझी ठहराया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Kya humne koi sanad aur daleel unpar nazil ki hai jo shahadat deti ho us shirk ki sadaqat par jo yeh kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya hum ney unn per koi daleel nazil ki hai jo ussay biyan kerti hai jissay yeh Allah kay sath shareek ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हमने कोई सनद और दलील उन पार नाज़िल की है जो शहादत देती हो हमें शिर्क की सदाकत पर जो ये कर रहे हैं
عَرَبِيوَإِذا أَذَقنَا النّاسَ رَحمَةً فَرِحوا بِها ۖ وَإِن تُصِبهُم سَيِّئَةٌ بِما قَدَّمَت أَيديهِم إِذا هُم يَقنَطونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब हम लोगों को कोई दया चखाते हैं, तो वे उससे प्रसन्न हो जाते हैं, और अगर उन्हें उनकी करतूतों के कारण कोई विपत्ति पहुँचती है, तो वे सहसा निराश हो जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab hum logon ko rehmat ka zaika chakhate hain to woh uspar phool jatey hain, aur jab unke apne kiya kartooton se unpar koi museebat aati hai to yakayak woh mayous honay lagte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab hum logon ko rehmat ka maza chakhatay hain to woh khoob khush ho jatay hain aur agar unhen unn kay hathon kay kertoot ki waja say koi buraee phonchay to aik dum woh mehaz na-umeed ho jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब हम लोगों को रहमत का ज़ायका दिखाते हैं तो वो उसपर फूल जाते हैं हैं, और जब उनके अपने किया कार्टून से ऊपर कोई मुसीबत आती है तो यकीनन वो बहुत अच्छे लगते हैं
عَرَبِيأَوَلَم يَرَوا أَنَّ اللَّهَ يَبسُطُ الرِّزقَ لِمَن يَشاءُ وَيَقدِرُ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِقَومٍ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने नहीं देखा कि अल्लाह जिसके लिए चाहता है, रोज़ी विस्तृत कर देता है, और जिसके लिए चाहता है, तंग कर देता है? निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो ईमान रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log dekhte nahin hain ke Allah hi rizq kushada karta hai jiska chahta hai aur tangg karta hai (jiska chahta hai)? Yaqeenan is mein bahut si nishaniyan hain un logon ke liye jo iman latey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya enhon ney yeh nahi dekha kay Allah Taalaa jissay chahaye kushada rozi deta hai aur jissay chahaye tang iss mein bhi unn logon kay liye jo eman latay hain nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग देखते नहीं हैं कि अल्लाह ही रिज़्क कुशादा करता है जिसका चाहता है और तंग करता है? यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं
عَرَبِيفَآتِ ذَا القُربىٰ حَقَّهُ وَالمِسكينَ وَابنَ السَّبيلِ ۚ ذٰلِكَ خَيرٌ لِلَّذينَ يُريدونَ وَجهَ اللَّهِ ۖ وَأُولٰئِكَ هُمُ المُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः रिश्तेदार को उसका हक़ दो, तथा निर्धन और यात्री को (भी)। यह उन लोगों के लिए बेहतर है, जो अल्लाह का चेहरा चाहते हैं और वही सफल होने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Pas (aey momin) rishtedar ko uska haqq de aur miskeen o musafir ko (uska haqq). Yeh tareeqa behtar hai un logon ke liye jo Allah ki khushnudi chahte hon, aur wahi falaah paney waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Pus qarabat daar ko miskeen ko musafir ko her aik ko uss ka haq dijiye yeh unn kay liye behtar hai jo Allah Taalaa ka mun dekhna chahatay hon aisay hi log nijat paney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ मोमिन) रिश्तेदार को उसका हक़ दे और मिस्कीन ओ मुसाफिर को (उसका हक़)। ये तरीक़ा बेहतर है उन लोगों के लिए जो अल्लाह की ख़ुशनुदी चाहते हों, और वही फ़लाह पाने वाले हैं
عَرَبِيوَما آتَيتُم مِن رِبًا لِيَربُوَ في أَموالِ النّاسِ فَلا يَربو عِندَ اللَّهِ ۖ وَما آتَيتُم مِن زَكاةٍ تُريدونَ وَجهَ اللَّهِ فَأُولٰئِكَ هُمُ المُضعِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम ब्याज पर जो (उधार) देते हो, ताकि वह लोगों के धनों में मिलकर अधिक हो जाए, तो वह अल्लाह के यहाँ अधिक नहीं होता। तथा तुम अल्लाह का चेहरा चाहते हुए जो कुछ ज़कात से देते हो, तो वही लोग कई गुना बढ़ाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo sood (riba /usury /interest) tum detay ho taa-ke logon ke amwal mein shamil hokar woh badh (increase) jaye, Allah ke nazdeek woh nahin badhta (increase), aur jo zakaat tum Allah ki khushnudi haasil karne ke iradey se detey ho, usi ke dene waley dar haqeeqat apne maal badhate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Tum jo sood per detay ho kay logon kay maal mein barhta rahey woh Allah Taalaa kay haan nahi barhta. Aur jo kuch sadqa zakat tum Allah Taalaa ka mun dekhney (aur khushnoodi kay liye) do to aisay log hi hain apna do chand kerney walay
Devnagri Urdu (Maududi)जो सूद (रिबा/सूद/ब्याज) तुम देते हो ता-के लोगों के अमल में शामिल होकर वो बढ़ (बढ़े) जाए, अल्लाह के नाज़दीक वो नहीं बढ़ता (बढ़े), और जो जकात तुम अल्लाह की खुशनुदी हासिल करने के इरादे से देते हो, उसी के देने वाले दर हकीकत अपने माल बढ़ाते हैं
عَرَبِياللَّهُ الَّذي خَلَقَكُم ثُمَّ رَزَقَكُم ثُمَّ يُميتُكُم ثُمَّ يُحييكُم ۖ هَل مِن شُرَكائِكُم مَن يَفعَلُ مِن ذٰلِكُم مِن شَيءٍ ۚ سُبحانَهُ وَتَعالىٰ عَمّا يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह वह (अस्तित्व) है, जिसने तुम्हें पैदा किया, फिर तुम्हें जीविका प्रदान की, फिर तुम्हें मृत्यु देगा, फिर तुम्हें जीवित करेगा। क्या तुम्हारे साझियों में से कोई है, जो इन कामों में से कुछ भी कर सके? वह पवित्र है और सर्वोच्च है, उनके साझी बनाने से।
Roman Urdu (Maududi)Allah hi hai jisne tumko paida kiya, phir tumhein rizq diya, phir woh tumhein maut deta hai, phir woh tumhein zinda karega. Kya tumhare thehraye huey shareekon mein koi aisa hai jo in mein se koi kaam bhi karta ho? Paak hai woh aur bahut baala-o-bartar hai us shirk se jo yeh log karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa woh hai jiss ney tumhen peda kiya phir rozi di phir maar dalay ga phir zinda ker dey ga batao tumharay shareeko mein say koi bhi aisa hai jo inn say kuch bhi ker sakta ho. Allah Taalaa kay liye paki aur bar tari hai her uss sharik say jo yeh log muqarrar kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ही है जिसने तुमको अदा किया, फिर तुम्हें रिज़क दिया, फिर वो तुम्हें मौत देता है, फिर वो तुम्हें जिंदा करेगा. क्या तुम्हारे रुके हुए शेयरों में कोई ऐसा है जो मेरे साथ कोई काम भी करता हो? पाक है वो और बहुत बाला-ओ-बरतर है उस शिर्क से जो ये लोग करते हैं
عَرَبِيظَهَرَ الفَسادُ فِي البَرِّ وَالبَحرِ بِما كَسَبَت أَيدِي النّاسِ لِيُذيقَهُم بَعضَ الَّذي عَمِلوا لَعَلَّهُم يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जल और थल में लोगों के हाथों की कमाई के कारण बिगाड़ फैल गया है, ताकि वह (अल्लाह) उन्हें उनके कुछ कर्मों का मज़ा चखाए, ताकि वे बाज़ आ जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Khushki (land) aur tarii (sea) mein fasaad barpa ho gaya hai logon ke apne haathon ki kamayi se, taa-ke maza chakkhaye unko unke baaz aamal ka, shayad ke woh baaz aayein
Roman Urdu (Junagarhi)Khushki aur tari mein logon ki bad aemaaliyon kay baees fasad phel gaya. Iss liye kay unhen unn kay baaz kertooton ka phal Allah Taalaa chakha dey (boht) mumkin hai kay woh baaz aajayen
Devnagri Urdu (Maududi)खुश्की (जमीन) और तारी (समुद्र) में फसाद बरपा हो गया है लोगों के अपने हाथों की कमाई से, ता-के मजा चखाये उनको उनके बाज़ अमल का, शायद के वो बाज़ आयें
عَرَبِيقُل سيروا فِي الأَرضِ فَانظُروا كَيفَ كانَ عاقِبَةُ الَّذينَ مِن قَبلُ ۚ كانَ أَكثَرُهُم مُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि धरती में चलो-फिरो, फिर देखो कि उन लोगों का अंत कैसा रहा, जो इनसे पहले थे। उनमें अधिकतर मुश्रिक थे।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) insey kaho ke zameen mein chal phir kar dekho pehle guzre huey logon ka kya anjaam ho chuka hai. Un mein se aksar mushrik hi thay
Roman Urdu (Junagarhi)Zamin mein chal phir ker dekho to sahi kay aglon ka anjam kiya hua. Jin mein aksar log mushrik thay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) इनसे कहो के ज़मीन में चल फिर कर देखो पहले गुज़रे हुए लोगों का क्या अंजाम हो चुका है। उन में से अक्सर मुशरिक ही थाय
عَرَبِيفَأَقِم وَجهَكَ لِلدّينِ القَيِّمِ مِن قَبلِ أَن يَأتِيَ يَومٌ لا مَرَدَّ لَهُ مِنَ اللَّهِ ۖ يَومَئِذٍ يَصَّدَّعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप अपना चेहरा सीधे धर्म पर स्थापित रखें, इससे पहले कि वह दिन आ जाए, जिसे अल्लाह की ओर से टलना नहीं है। उस दिन लोग अलग-अलग हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Pas (Aey Nabi) apna rukh mazbooti ke saath jamaa do is deen-e-raast ki simth mein qabl iske ke woh din aaye jiske tal janey ki koi surat Allah ki taraf se nahin hai.Us din log phatt kar ek dusre se alag ho jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap apna rukh uss sachay aur seedhay deen ki taraf hi rakhen qabal iss kay kay woh din aajaye jiss ka tal jana Allah Taalaa ki taraf say hai hi nahi uss din sab mutafarriq ho jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ नबी) अपना रुख मज़बूती के साथ जमा दो इस दीन-ए-रास्त की सिम्थ में कबूल इसके के वो दिन आए जिसकी ताल जाने की कोई सूरत अल्लाह की तरफ से नहीं है। उस दिन लोग फट कर एक दूसरे से अलग हो जाएंगे
عَرَبِيمَن كَفَرَ فَعَلَيهِ كُفرُهُ ۖ وَمَن عَمِلَ صالِحًا فَلِأَنفُسِهِم يَمهَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसने कुफ़्र किया, उसके कुफ़्र का नुकसान उसी पर है, और जिसने सत्कर्म किया, तो वे अपने ही लिए (आराम का) साधन जुटा रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jisne kufr kiya hai uske kufr ka wabal usi par hai, aur jin logon ne neik amal kiya hai woh apne hi liye falaah ka raasta saaf kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kufur kerney walon per unn kay kufur ka wabaal hoga aur nek kaam kerney walay apni hi aaram gaah sanwaar rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने कुफ्र किया है उसके कुफ्र का जवाब उसी पर है, और जिन लोगों ने नेक अमल किया है वो अपने ही लिए फलाह का रास्ता साफ कर रहे हैं
عَرَبِيلِيَجزِيَ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ مِن فَضلِهِ ۚ إِنَّهُ لا يُحِبُّ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि वह (अल्लाह) अपने अनुग्रह से उन लोगों को बदला दे, जो ईमान लाए और उन्होंने सत्कर्म किए। निःसंदेह वह काफ़िरों से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke Allah imaan laney walon aur amal-e-saleh karne walon ko apne fazal se jaza de. Yaqeenan woh kaafiron ko pasand nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Takay Allah Taalaa unhen apnay fazal say jaza dey jo eman laye aur nek aemaal kiyey woh kafiron ko dost nahi rakhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के अल्लाह ईमान लाने वालों और अमल-ए-सालेह करने वालों को अपने फजल से जजा डे. यकीनन वो काफिरों को पसंद नहीं करता
عَرَبِيوَمِن آياتِهِ أَن يُرسِلَ الرِّياحَ مُبَشِّراتٍ وَلِيُذيقَكُم مِن رَحمَتِهِ وَلِتَجرِيَ الفُلكُ بِأَمرِهِ وَلِتَبتَغوا مِن فَضلِهِ وَلَعَلَّكُم تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसकी निशानियों में से है कि वह शुभ सूचना देने वाली हवाएँ भेजता है, और ताकि तुम्हें अपनी दया (वर्षा) चखाए, और ताकि उसके आदेश से नावें चलें, और ताकि तुम उसका अनुग्रह (रोज़ी) तलाश करो, और ताकि तुम आभार प्रकट करो।
Roman Urdu (Maududi)Uski nishaniyon mein se yeh hai ke woh hawaein bhejhta hai basharat ke liye aur tumhein apni rehmat se behramand karne ke liye. Aur is garz ke liye ke kashtiyan uske hukum se chalein aur tum uska fazal talash karo aur uske shukar guzar banoo
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ki nishaniyon mein say khushkhabriyan denay wali hawaon ko chalana bhi hai iss liye kay tumhen apni rehmat say lutf andoz keray aur iss liye kay uss kay hukum say kashtiyan chalen aur iss liye kay uss kay fazal ko tum dhondo aur iss liye kay tum shukar guzari kero
Devnagri Urdu (Maududi)उसके निशानियों में से ये है के वो हवाएं भेजता है बशारत के लिए और तुम अपनी रहमत से बेहरामन्द करने के लिए। और इस ग़रज़ के लिए के कश्तियां उसके हुकुम से चलें और तुम उसका फ़ज़ल तलाश करो और उसकी शुकर गुजर बनो
عَرَبِيوَلَقَد أَرسَلنا مِن قَبلِكَ رُسُلًا إِلىٰ قَومِهِم فَجاءوهُم بِالبَيِّناتِ فَانتَقَمنا مِنَ الَّذينَ أَجرَموا ۖ وَكانَ حَقًّا عَلَينا نَصرُ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय हमने आपसे पहले कई रसूल उनकी जातियों की ओर भेजे। तो वे उनके पास खुली निशानियाँ लेकर आए। फिर हमने उन लोगों से बदला लिया, जिन्होंने अपराध किया। और हमपर ईमान वालों की सहायता करना अनिवार्य था।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne tumse pehle Rasoolon ko unki qaum ki taraf bheja aur woh unke paas roshan nishaniyan lekar aaye. Phir jinhon ne jurm kiya unsey humne inteqaam liya aur humpar yeh haqq tha ke hum momino ki madad karein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney aap say pehlay bhi apnay rasoolon ko unn ki qom ki taraf bheja woh unn kay pass deleelen laye. Phir hum ney gunehgaaron say intiqam liya. Hum per momino ki madad kerna lazim hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने तुमसे पहले रसूलों को उनकी क़ौम की तरफ भेजा और वो उनके पास रोशन निशानियां लेकर आए। फिर जिन्हों ने जुर्म किया उनसे हमने इन्तेक़ाम लिया और हमपर ये हक़ था के हम मोमिनो की मदद करें
عَرَبِياللَّهُ الَّذي يُرسِلُ الرِّياحَ فَتُثيرُ سَحابًا فَيَبسُطُهُ فِي السَّماءِ كَيفَ يَشاءُ وَيَجعَلُهُ كِسَفًا فَتَرَى الوَدقَ يَخرُجُ مِن خِلالِهِ ۖ فَإِذا أَصابَ بِهِ مَن يَشاءُ مِن عِبادِهِ إِذا هُم يَستَبشِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही है, जो हवाओं को भेजता है। तो वे बादल उठाती हैं। फिर वह उसे जैसे चाहता है, आकाश में फैला देता है, और उसे टुकड़े-टुकड़े कर देता है। तो तुम वर्षा की बूँदों को उसके बीच से निकलते देखते हो। फिर जब वह उसे अपने बंदों में से जिसपर चाहता है, बरसाता है, तो सहसा वे बहुत खुश हो जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Allah hi hai jo hawaon ko bhejta hai aur woh baadal uthati hain. Phir woh in baadalon ko aasmaan mein phaila deta hai jis tarah chahta hai, aur unhein tukdiyon mein takseem karta hai, phir tu dekhta hai ke baarish ke qatray baadal se tapke chale aate hain. Yeh baarish jab woh apne bandon mein se jinpar chahta hai barsata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa hawayen chalata hai woh abar ko uthati hain phir Allah Taalaa apni mansha kay mutabiq ussay aasman mein phela deta hai aur uss kay tukray tukray ker deta hai phir aap dekhtay hain kay uss kay andar say qatray nikaltay hain aur jinhen Allah chahata hai unn bandon per qoh pani barsata hai to woh khush khush ho jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह हाय है जो हवाओं को भेजता है और वो बादल उठाती हैं। फिर वो बादलों को आसमान में फैला देता है जिस तरह चाहता है, और वो टुकड़ों में तकसीम करता है, फिर तू देखता है कि बारिश के मौसम में बादल से टपकते हैं। ये बारिश जब वो अपने बंदों में से पहले चाहता है बरसात है
عَرَبِيوَإِن كانوا مِن قَبلِ أَن يُنَزَّلَ عَلَيهِم مِن قَبلِهِ لَمُبلِسينَ
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हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि निश्चय वे इससे पहले, उसके उनपर बरसाए जाने से पहले बहुत निराश थे।
Roman Urdu (Maududi)To yakayak woh khush o khurram ho jatey hain , halaanke iske nuzul se pehle woh mayous ho rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeen manna kay barish unn per barasney say pehlay pehlay to woh na umeed ho rahey thay
Devnagri Urdu (Maududi)तो यकीनन वो खुश ओ खुर्रम हो जाते हैं, हलांके इसके नुज़ुल से पहले वो मयौस हो रहे थे
عَرَبِيفَانظُر إِلىٰ آثارِ رَحمَتِ اللَّهِ كَيفَ يُحيِي الأَرضَ بَعدَ مَوتِها ۚ إِنَّ ذٰلِكَ لَمُحيِي المَوتىٰ ۖ وَهُوَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तो आप अल्लाह की दया के संकेतों को देखें कि वह किस तरह धरती को उसके मृत हो जाने के पश्चात् जीवित करता है! निःसंदेह वही निश्चय मुर्दों को जीवित करने वाला है और वह हर चीज़ में पूरी तरह सक्षम है।
Roman Urdu (Maududi)Dekho Allah ki rehmat ke asraat , ke murda padi hui zameen ko woh kis taraah jila uthata hai, yaqeenan woh murdon ko zindagi bakshne wala hai aur woh har cheez par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap rehmat-e-elahee kay aasaar dekhen kay zamin ki maut kay baad kiss tarah Allah Taalaa ussay zinda ker deta hai? Kuch shak nahi kay wohi murdon ko zinda kerney wala hai aur woh her her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)देखो अल्लाह की रहमत के असर, के मुर्दा पड़ी हुई जमीन को वो किस तरह जिला उठाता है, यकीनन वो मुर्दों को जिंदगी बक्शने वाला है और वो हर चीज पर कादिर है
عَرَبِيوَلَئِن أَرسَلنا ريحًا فَرَأَوهُ مُصفَرًّا لَظَلّوا مِن بَعدِهِ يَكفُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय अगर हम कोई वायु भेजे, फिर वे उस (खेती) को पीली पड़ी हुई देखें, तो वे इसके बाद अवश्य नाशुक्री करने लगेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar hum ek aisi hawa bhej dein jiske asar se woh apni kheti ko zard paayein to woh kufr karte reh jaate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum baad-e-tund chala den aur yeh log inhi kheton ko (mujahee hui) zard pari hui dekh len to phir iss kay baad na shukri kerney lagen
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर हम एक ऐसी हवा भेज दें जिसके असर से वो अपनी खेती को जर्द पाएं तो वो कुफ्र करते रह जाते हैं
عَرَبِيفَإِنَّكَ لا تُسمِعُ المَوتىٰ وَلا تُسمِعُ الصُّمَّ الدُّعاءَ إِذا وَلَّوا مُدبِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आप मुर्दों को नहीं सुना सकते और न बहरों को (अपनी) पुकार सुना सकते हैं, जब वे पीठ फेरकर लौट जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) Tum murdon ko nahin suna sakte, na unn behron ko apni pukar suna sakte ho jo peeth pherey bhaagay chaley jaa rahe hon
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak aap murdon ko nahi suna saktay aur na behron ko (apni) awaz suna saktay hain jab kay woh peeth pher ker murr gaye hon
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) तुम मुर्दों को नहीं सुना सकते, ना उन बेटों को अपनी पुकार सुना सकते हो जो पीठ फेरे भागे चले जा रहे हो
عَرَبِيوَما أَنتَ بِهادِ العُميِ عَن ضَلالَتِهِم ۖ إِن تُسمِعُ إِلّا مَن يُؤمِنُ بِآياتِنا فَهُم مُسلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप अंधों को उनकी गुमारही से हटाकर सीधे मार्ग पर नहीं ला सकते। आप तो केवल उन्हीं को सुना सकते हैं, जो हमारी आयतों पर ईमान रखते हैं। तो वही आज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur na tum andhon ko unki gumrahi se nikaal kar raah e raast dikha sakte ho, tum to sirf unhi ko suna sakte ho jo hamari aayat par iman latey aur sar-e-tasleem kham kar detey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na aap andhon ko unn ki gumrahee say hidayat kerney walay hain aap to sirf unhi logon ko sunatay hain jo humari aayaton per eman rakhtay hain pus wohi itaat kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और ना तुम अंधों को उनकी गुमराही से निकल कर राह ए रस्त दिखा सकते हो, तुम तो सिर्फ उन्हें सुना सकते हो जो हमारी आयत पर ईमान लाते और सर-ए-तस्लीम खत्म कर देते हैं
عَرَبِي۞ اللَّهُ الَّذي خَلَقَكُم مِن ضَعفٍ ثُمَّ جَعَلَ مِن بَعدِ ضَعفٍ قُوَّةً ثُمَّ جَعَلَ مِن بَعدِ قُوَّةٍ ضَعفًا وَشَيبَةً ۚ يَخلُقُ ما يَشاءُ ۖ وَهُوَ العَليمُ القَديرُ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह वह है, जिसने तुम्हें कमज़ोरी (की स्थिति) से पैदा, फिर (बचपन की) कमज़ोरी के बाद शक्ति प्रदान की, फिर शक्ति के बाद कमज़ोरी और बुढ़ापा बना दिया। वह जो चाहता है, पैदा करता है। और वही सब कुछ जानने वाला, हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Allah hi to hai jisne zoaf (kamzori) ki haalat mein tumhari paidaish ki ibtida ki, phir is zoaf (kamzori) ke baad tumhein quwwat bakshi, phir is quwwat ke baad tumhein zaeef aur buda (old) kardiya. Woh jo kuch chahta hai paida karta hai, aur woh sabkuch janne wala, har cheez par qudrat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa wohi hai jiss ney tumhen kamzori ki halat mein peda kiya phir uss kamzori kay baad tawanaee di phir uss tawanaee kay baad kamzori aur burhapa diya jo chahata hai peda kerta hai woh sab say poora waqif aur sab per poora qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ही तो है जिसने ज़ोफ़ (कामज़ोरी) की हालत में तुम्हारी अदायश की इब्तिदा की, फिर ज़ोफ़ है (कमज़ोरी) के बाद तुम्हें कुव्वत बख्शी, फिर इस कुव्वत के बाद तुम्हें ज़ीफ़ और बूड़ा (पुराना) करदिया। वो जो कुछ चाहता है चुकाता है, और वो सब कुछ जानने वाला, हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है
عَرَبِيوَيَومَ تَقومُ السّاعَةُ يُقسِمُ المُجرِمونَ ما لَبِثوا غَيرَ ساعَةٍ ۚ كَذٰلِكَ كانوا يُؤفَكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी, अपराधी क़समें खाएँगें कि वे घड़ी भर से अधिक नहीं ठहरे। इसी तरह वे बहकाए जाते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab woh sa-aat (hour) barpa hogi to mujrim kasmein kha kha kar kahenge ke hum ek ghadi bhar se zyada nahin thehre hain.Isi taraah woh duniya ki zindagi mein dhoka khaya karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss din qayamat barpa ho jayegi gunehgaar log qasmen khayen gay kay (duniya mein) aik ghari kay siwa nahi theray issi tarah yeh behkay huyey hi rahey
Devnagri Urdu (Maududi)और जब वो सा-आट (घंटा) बरपा होगी तो मुजरिम कसमें खा खा कर कहेंगे के हम एक घड़ी भर से ज़्यादा नहीं ठहरते हैं। इसी तरह वो दुनिया की जिंदगी में धोखा खाया करते थे
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ أوتُوا العِلمَ وَالإيمانَ لَقَد لَبِثتُم في كِتابِ اللَّهِ إِلىٰ يَومِ البَعثِ ۖ فَهٰذا يَومُ البَعثِ وَلٰكِنَّكُم كُنتُم لا تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों को ज्ञान और ईमान दिया गया, वे कहेंगे कि तुम अल्लाह के लेख के अनुसार उठाए जाने के दिन तक ठहरे रहे। तो यह उठाए जाने का दिन है। लेकिन तुम नहीं जानते थे।
Roman Urdu (Maududi)Magar jo ilm aur iman se behramand (endowed) kiye gaye thay woh kahenge ke khuda ke nawishte (record) mein to tum roz-e-hashar tak paday rahey ho. So yeh wahi roz-e-hashar hai, lekin tum jante na thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin logon ko ilm aur eman diya gaya woh jawab den gay kay tum to jaisa kitab-ul-llah mein hai yom-e-qayamat tak theray rahey. Aaj ka yeh din qayamat hi ka din hai lekin tum to yaqeen hi nahi mantay thay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जो इल्म और ईमान से बेहरमंद (संपन्न) किए गए थे वो वो कहेंगे के खुदा के नविस्ते (रिकॉर्ड) में तो तुम रोज-ए-हशर तक पैदा कर रहे हो। तो ये वही रोज़-ए-हशर है, लेकिन तुम जानते न थे
عَرَبِيفَيَومَئِذٍ لا يَنفَعُ الَّذينَ ظَلَموا مَعذِرَتُهُم وَلا هُم يُستَعتَبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उस दिन, अत्याचारियों को उनका बहाना लाभ न देगा और न उनसे अल्लाह को खुश करने के लिए कहा जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Pas woh din hoga jismein zaalimon ko unki maazrat koi nafa (faida) na degi aur na unsey maafi maangne ke liye kaha jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Pus uss din zalimo ko unn ka uzur bahana kuch kaam na aaye ga aur na unn say toba aur amal talab kiya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)पास वो दिन होगा जिसमें ज़ालिमों को उनकी मज़रत कोई नफ़ा (फ़ैदा) न देगी और न उनसे माफ़ी माँगने के लिए कहा जाएगा
عَرَبِيوَلَقَد ضَرَبنا لِلنّاسِ في هٰذَا القُرآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ ۚ وَلَئِن جِئتَهُم بِآيَةٍ لَيَقولَنَّ الَّذينَ كَفَروا إِن أَنتُم إِلّا مُبطِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने इस क़ुरआन में लोगों के लिए हर तरह के उदाहरण बयान किए हैं और यदि आप उनके पास कोई निशानी लाएँ, तो निश्चय कुफ़्र करने वाले अवश्य कहेंगे कि तुम तो केवल मिथ्यावादी हो।
Roman Urdu (Maududi)Humne is Quran mein logon ko tarah tarah se samjhaya hai, tum khwah koi nishani le aao, jin logon ne maanne se inkar kardiya hai wo yahi kahenge ke tum baatil(falsehood) par ho
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak hum ney iss quran mein logon kay samney kul misaalen biyan ker di hain. Aap inn kay pass koi bhi nishani laayen yeh kafir to yehi kahen gay kay tum (be-huda go) bilkul jhootay ho
Devnagri Urdu (Maududi)हमने कुरान में लोगों को तरह तरह से समझा है, तुम ख्वाह कोई निशानी ले आओ, जिन लोगों ने मन्ने से इंकार कर दिया है वो यहीं कहेंगे के तुम बातिल (झूठ) पर हो
عَرَبِيكَذٰلِكَ يَطبَعُ اللَّهُ عَلىٰ قُلوبِ الَّذينَ لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)इसी प्रकार, अल्लाह उन लोगों के दिलों पर मुहर लगा देता है, जो नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Is tarah thappa (seal) laga deta hai Allah un logon ke dilon par jo be-ilm hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa unn logon kay dilo per jo samajh nahi rakhtay yun hi mohar ker deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह थप्पा (मुहर) लगा देता है अल्लाह उन लोगों के दिलों पर जो बे-इल्म है
عَرَبِيفَاصبِر إِنَّ وَعدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ وَلا يَستَخِفَّنَّكَ الَّذينَ لا يوقِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो आप धैर्य से काम लें। निःसंदेह अल्लाह का वचन सत्य है और वे लोग आपको कदापि हल्का (अधीर) न कर दें, जो यक़ीन नहीं रखते।
Roman Urdu (Maududi)Pas (Aey Nabi) sabr karo, yaqeenan Allah ka wada sachha hai. Aur hargiz halka na payein tumko woh log jo yaqeen nahin laatey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap sabar keren yaqeenan Allah ka wada sacha hai. Aap ko woh log halka (bey sabra) na keren jo yaqeen nahi rakhtay
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ नबी) सब्र करो, यकीनन अल्लाह का वादा सच्चा है. और हरगिज हल्का न पाएं तुमको वो लोग जो यकीन नहीं लाते
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Surah 30: Ar-Rum (The Romans)

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Surah 30: Ar-Rum (The Romans)

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Surah 30: Ar-Rum (The Romans)

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Surah 30: Ar-Rum (The Romans)

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Surah 30: Ar-Rum (The Romans)

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Surah 31: Luqman (Luqman)

Meccan🕐 Revelation #57📜 34 Verses🕮 Juz 1
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Surah 31: Luqman (Luqman)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالم
हिन्दी (Al-Omari)अलिफ़, लाम, मीम।
Roman Urdu (Maududi)Alif Laam Meem
Roman Urdu (Junagarhi)Alif-laam-meem
Devnagri Urdu (Maududi)अलिफ लाम मीम
عَرَبِيتِلكَ آياتُ الكِتابِ الحَكيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)ये हिकमत वाली किताब की आयतें हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh kitab-e-hakeem(book of wisdon) ki aayat hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hikmat wali kitab ki aayaten hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये किताब-ए-हकीम (बुद्धि की किताब) की आयत हैं
عَرَبِيهُدًى وَرَحمَةً لِلمُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)नेकी करने वालों के लिए मार्गदर्शन तथा दया है।
Roman Urdu (Maududi)Hidayat aur rehmat neikukar logon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Jo neko karon kay liye rehbar aur (sirasir) rehmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)हिदायत और रहमत नीकुकर लोगों के लिए
عَرَبِيالَّذينَ يُقيمونَ الصَّلاةَ وَيُؤتونَ الزَّكاةَ وَهُم بِالآخِرَةِ هُم يوقِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो नमाज़ क़ायम करते तथा ज़कात देते हैं और वही हैं, जो आख़िरत (परलोक) पर विश्वास रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo namaz qayam karte hai, zakaat detey hain aur aakhirat par yaqeen rakhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log namaz qaeem kertay hain aur zakat ada kertay hain aur aakhirat per (kamil) yaqeen rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो नमाज कायम करते हैं, जकात देते हैं और आखिरी पर यकीन रखते हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ عَلىٰ هُدًى مِن رَبِّهِم ۖ وَأُولٰئِكَ هُمُ المُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही लोग अपने पालनहार की ओर से मार्गदर्शन पर हैं तथा यही लोग सफल होने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yahi log apne Rubb ki taraf se raah-e-raast par hain aur yahi falaah paney waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi log hain jo apnay rab ki taraf say hidayat per hain aur yehi log nijat paney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)यहीं लोग अपने रब की तरफ से राह-ए-रास्त पर हैं और यहीं फलाह पाने वाले हैं
عَرَبِيوَمِنَ النّاسِ مَن يَشتَري لَهوَ الحَديثِ لِيُضِلَّ عَن سَبيلِ اللَّهِ بِغَيرِ عِلمٍ وَيَتَّخِذَها هُزُوًا ۚ أُولٰئِكَ لَهُم عَذابٌ مُهينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा लोगों में कोई ऐसा (भी) है, जो असावधान करने वाली बात खरीदता है, ताकि बिना ज्ञान के (लोगों को) अल्लाह के मार्ग (इस्लाम) से गुमराह करे और अल्लाह की आयतों का उपहास करे। यही लोग हैं, जिनके लिए अपमानकारी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur Insano hi mein se koi aisa bhi hai jo kalaam-e-dil fareb [lagv baaton ko/idle talks (i.e.music, singing, etc)] khareed kar laata hai taa-ke logon ko Allah ke raaste se ilm ke bagair bhatka dey aur is raaste ki dawat ko mazaaq mein udaday. Aise logon ke liye sakht zaleel karne wala azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur baaz log aisay bhi hain jo laghaw baaton ko mol letay hain kay bey-ilmi kay sath logon ko Allah ki raah say behkayen aur ussay hansi banayen yehi woh log hain jin kay liye ruswa kerney wala azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)और इंसान ही में से कोई ऐसा भी है जो कलाम-ए-दिल फरेब [लगव बातों को/बेकार की बातें (आइम्यूजिक, गायन, आदि)] खत्म कर लाता है ता-के लोगों को अल्लाह के रास्ते से इल्म के बिना भटका दे और इस रास्ते की दावत को मज़ाक में उड़ा दें। ऐसे लोगों के लिए सख्त ज़लील करने वाला अज़ाब है
عَرَبِيوَإِذا تُتلىٰ عَلَيهِ آياتُنا وَلّىٰ مُستَكبِرًا كَأَن لَم يَسمَعها كَأَنَّ في أُذُنَيهِ وَقرًا ۖ فَبَشِّرهُ بِعَذابٍ أَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उसके समक्ष हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं, तो घमंड करते हुए मुँह फेर लेता है, जैसे उसने उन्हें सुना ही नहीं, मानो उसके दोनों कानों में बहरापन है। तो आप उसे दुःखदायी यातना की शुभसूचना दे दें।
Roman Urdu (Maududi)Usey jab hamari aayat sunayi jati hain to woh badey ghamand ke saath is tarah rukh pher leta hai goya ke usne unhein suna hi nahin, goya ke uske kaan behre hain.Accha mushda (tidings) suna do usey ek dardnaak azaab ka
Roman Urdu (Junagarhi)Jab iss kay samney humari aayaten tilawat ki jati hain to takabbur kerta hua iss tarah say mun pher leta hai goya uss ney suna hi nahi goya kay uss kay dono kano mein daat lagay huyey hain aap issay dardnaak azab ki khabar suna dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)उसे जब हमारी आयतें सुनाई जाती हैं तो वो बड़े घमंड के साथ इस तरह रुख फेर लेता है गोया के उसने उन्हें सुना ही नहीं, गोया के उसके कान बाहर हैं। अच्छा मुशदा (खबर) सुना दो उसे एक दर्दनाक अज़ाब का
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ لَهُم جَنّاتُ النَّعيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग ईमान लाए तथा उन्होंने अच्छे कर्म किए, उनके लिए नेमत के बाग़ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jo log iman le aayein aur neik amal karein, unke liye niyamat bhari jannatein hain
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jin logon ney eman qabool kiya aur kaam bhi nek (mutabiq sunnat) kiyey unn kay liye nematon wali jannaten hain
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जो लोग ईमान ले आएं और नीक अमल करें, उनके लिए नियामत भारी जन्नतें हैं
عَرَبِيخالِدينَ فيها ۖ وَعدَ اللَّهِ حَقًّا ۚ وَهُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)वे उनमें सदैव रहेंगे। यह अल्लाह का सच्चा वादा है। और वह अत्यंत प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jinmein woh hamesha rahenge. Yeh Allah ka pukhta wada hai, aur woh zabardast aur hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jahan woh humesha rahen gay. Allah ka sacha wada hai woh boht bari izzat-o-ghalbay wala aur kamil hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिनमें वो हमेशा रहेंगे। ये अल्लाह का पुख्ता वादा है, और वो ज़बरदस्त और हकीम है
عَرَبِيخَلَقَ السَّماواتِ بِغَيرِ عَمَدٍ تَرَونَها ۖ وَأَلقىٰ فِي الأَرضِ رَواسِيَ أَن تَميدَ بِكُم وَبَثَّ فيها مِن كُلِّ دابَّةٍ ۚ وَأَنزَلنا مِنَ السَّماءِ ماءً فَأَنبَتنا فيها مِن كُلِّ زَوجٍ كَريمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने आकाशों को बिना स्तंभों के पैदा किया, जिन्हें तुम देखते हो। और धरती में पर्वत डाल दिए, ताकि वह तुम्हें लेकर हिलने-डुलने न लगे। और उसके ऊपर हर प्रकार के जीव फैला दिए। तथा हमने आकाश से पानी उतारा, फिर उसमें हर तरह की अच्छी क़िस्म उगाई।
Roman Urdu (Maududi)Usne aasmaano ko paida kiya bagair sutuno (pillars) ke jo tumko nazar aayein .Usne zameen mein pahadh jamaa diye taa-ke woh tumhein lekar dhulak (turn /shake) na jaye. Usne har tarah ke jaanwar zameen mein phayla diye aur aasmaan se pani barsaya aur zameen mein qisam qisam ke umda cheezein uga di
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney aasmano ko baghair sutoon kay peda kiya hai tum enhen dekh rahey ho aur iss ney zamin mein paharon ko daal diya takay woh tumhen junbish na dey sakay aur her tarah kay jandaar zamin mein phela diyey. Aur hum ney aasman say pani barsa ker zamin mein her qisam kay nafees joray uga diyey
Devnagri Urdu (Maududi)उसने आसमान को पैदा किया बिना सुतुनो (खंभे) के जो तुमको नज़र आए। उसने ज़मीन में पहाड़ जमा दिए ता-के वो तुम्हें लेकर धुलक (टर्न/शेक) ना जाए। उसने हर तरह के जानवर ज़मीन में फैला दिए और आसमां से पानी बरसाया और ज़मीन में क़िसम क़िसम के उम्दा चीज़ उगा दी
عَرَبِيهٰذا خَلقُ اللَّهِ فَأَروني ماذا خَلَقَ الَّذينَ مِن دونِهِ ۚ بَلِ الظّالِمونَ في ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)यह अल्लाह की उत्पत्ति है। तो तुम मुझे दिखाओ कि उन लोगों ने जो उसके अतिरिक्त हैं, क्या पैदा किया है? बल्कि अत्याचारी लोग खुली गुमराही में हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh to hai Allah ki takhleeq, ab zara mujhey dikhao, in dusron ne kya paida kiya hai? Asal baat yeh hai ke yeh zaalim log sareeh gumraahi mein padey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hai Allah ki makhlooq abb tum mujhay iss kay siwa doosray kisi ki makhlooq to dikhao (kuch nahi) bulkay yeh zalim khulli gumarhee mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये तो है अल्लाह की तख़लीक, अब ज़रा मुझे दिखाओ, दुसरों ने क्या पैदा किया है? असल बात ये है कि ये जालिम लोग सारे गुमराही में पड़े हैं
عَرَبِيوَلَقَد آتَينا لُقمانَ الحِكمَةَ أَنِ اشكُر لِلَّهِ ۚ وَمَن يَشكُر فَإِنَّما يَشكُرُ لِنَفسِهِ ۖ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ اللَّهَ غَنِيٌّ حَميدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने लुक़मान को प्रबोध (हिकमत) प्रदान किया था कि अल्लाह के प्रति आभार प्रकट करो, तथा जो आभार प्रकट करता है, वह अपने ही (लाभ के) लिए आभार प्रकट करता है, और जो कृतघ्नता दिखाए, तो निश्चय अल्लाह बेनियाज़, सराहनीय है।
Roman Urdu (Maududi)Humne Luqman ko hikmat ata ki thi ke Allah ka shukar guzar ho. Jo koi shukar karey uska shukar uske apne hi liye mufeed(faiydamand) hai aur jo koi kufr karey to haqeeqat mein Allah be-niyaz aur aap se aap mehmood (Immensely Praiseworthy) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney yaqeenan luqman ko hikmat di thi kay tu Allah Taalaa ka shukar ker her shukar kerney wala apnay hi nafay kay liye shukar kerta hai jo bhi na shukri keray woh jaan ley kay Allah Taalaa bey niyaz aur tareefon wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने लुकमान को हिकमत अता की थी के अल्लाह का शुक्र गुज़ार हो। जो कोई शुकर करे उसका शुकर उसके अपने लिए ही मुफीद (फैयदमंद) है और जो कोई कुफ्र करे तो हकीकत में अल्लाह बे-नियाज और आप से आप महमूद (अत्यंत प्रशंसनीय) हैं
عَرَبِيوَإِذ قالَ لُقمانُ لِابنِهِ وَهُوَ يَعِظُهُ يا بُنَيَّ لا تُشرِك بِاللَّهِ ۖ إِنَّ الشِّركَ لَظُلمٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद करो) जब लुक़मान ने अपने बेटे से कहा, जबकि वह उसे समझा रहा था : ऐ मेरे बेटे! अल्लाह के साथ किसी को साझी न ठहराना। निःसंदेह शिर्क महा अत्याचार है।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jab Luqman apne bete ko naseehat kar raha tha to usne kaha “beta! Khuda ke saath kisi ko shareek na karna, haqq yeh hai ke shirk bahut bada zulm hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab kay luqman ney waaz kehtay huyey apnay larkay say farmaya kay meray piyaray bachay! Allah kay sath shareek na kerna be-shak shirk bara bhaari zulm hai
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जब लुकमान अपने बेटे को हिदायत कर रहा था तो उसने कहा "बेटा! खुदा के साथ किसी को शरीक न करना, हक़ ये है के शिर्क बहुत बड़ा ज़ुल्म है"
عَرَبِيوَوَصَّينَا الإِنسانَ بِوالِدَيهِ حَمَلَتهُ أُمُّهُ وَهنًا عَلىٰ وَهنٍ وَفِصالُهُ في عامَينِ أَنِ اشكُر لي وَلِوالِدَيكَ إِلَيَّ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने इनसान को उसके माता-पिता के संबंध में ताकीद की है, उसकी माँ ने उसे कमज़ोरी पर कमज़ोरी के बावजूद उठाए रखा और उसका दूध छुड़ाना दो वर्ष में है, कि मेरा आभार प्रकट कर और अपने माता-पिता का। मेरी ही ओर लौटकर आना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh haqeeqat yeh hai ke humne Insaan ko apne walidain (parents) ka haqq pehchanne ki khud taakeed ki hai. Uski Maa ne zoaf par zoaf(weakness upon weakness) utha kar usey apne pait mein rakkha aur do saal uska doodh chootne mein lagey. (Isi liye humne usko naseehat ki ke) mera shukar kar aur apne walidain ka shukar baja la. Meri hi taraf tujhey palatna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney insan ko uss kay maa baap kay mutalliq naseehat ki hai uss ki maa ney dukh per dukh utha ker ussay hamal mein rakha aur uss ki doodh chraee do baras mein hai kay tu meri aur apnay maa baap ki shukar guzari ker (tum sab ko) meri hi taraf lot ker aana hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये हकीकत ये है कि हमने इंसान को अपने वलीदीन (माता-पिता) का हक़ पहचान की खुद ताकीद की है। उसकी माँ ने ज़ोफ़ पर ज़ोफ़ (कमजोरी पर कमजोरी) उठा कर उसे अपने पेट में रखा और दो साल उसका दूध छूने में लगे। (इसी के लिए हमने उसको हिदायत की के) मेरा शुक्र कर और अपने वालिदैन का शुक्र बजा ला। मेरी ही तरफ तुझे पलटना है
عَرَبِيوَإِن جاهَداكَ عَلىٰ أَن تُشرِكَ بي ما لَيسَ لَكَ بِهِ عِلمٌ فَلا تُطِعهُما ۖ وَصاحِبهُما فِي الدُّنيا مَعروفًا ۖ وَاتَّبِع سَبيلَ مَن أَنابَ إِلَيَّ ۚ ثُمَّ إِلَيَّ مَرجِعُكُم فَأُنَبِّئُكُم بِما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वे दोनों तुझपर दबाव डालें कि तू मेरे साथ उस चीज़ को साझी ठहराए, जिसका तुझे कोई ज्ञान नहीं, तो उन दोनों की बात मत मान और दुनिया में उनके साथ सुचारु रूप से रह, तथा उसके मार्ग पर चल, जो मेरी ओर पलटता है। फिर मेरी ही ओर तुम्हें लौटकर आना है। तो मैं तुम्हें बताऊँगा, जो कुछ तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Lekin agar woh tujhpar dabao dalein ke mere saath tu kisi aisey ko shareek karey jisey tu nahin jaanta to unki baat hargiz na maan. Duniya mein unke saath neik bartao karta reh, magar pairvi(follow) us shaks ke raaste ki kar jisne meri taraf rujoo kiya hai. Phir tum sabko palatna meri hi taraf hai, us waqt main tumhein bata dunga ke tum kaise amal karte rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar woh dono tujh per iss baat ka dabao daalen kay tu meray sath shareek keray jiss ka tujhay ilm na ho to tu unn ka kehna na manna haan duniya mein unn kay sath achi tarah basar kerna aur uss ki raah chalna jo meri taraf jhuka hua ho tumhara sab ka lotna meri hi taraf hai tum jo kuch kertay ho iss say phir mein tumhen khabardaar ker doon ga
Devnagri Urdu (Maududi)लेकिन अगर वो तुझपर दबाओ डालें के मेरे साथ तू किसी ऐसे को शरीक करे जिसे तू नहीं जानता तो उसकी बात हरगिज़ ना मान। दुनिया में उनके साथ नई बातें करता रह, मगर जोड़ी (फॉलो) हमें शक्स के रास्ते की कर जिसने मेरी तरफ रूजू किया है। फिर तुम सबको पलटना मेरी ही तरफ है, हमें वक्त मैं तुम्हें बता दूंगा के तुम कैसे अमल करते रहे हो
عَرَبِييا بُنَيَّ إِنَّها إِن تَكُ مِثقالَ حَبَّةٍ مِن خَردَلٍ فَتَكُن في صَخرَةٍ أَو فِي السَّماواتِ أَو فِي الأَرضِ يَأتِ بِهَا اللَّهُ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَطيفٌ خَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे बेटे! निःसंदेह यदि वह (कार्य) राई के दाने के बराबर हो, फिर वह किसी पत्थर के भीतर, या आकाशों में, या धरती में हो, तो अल्लाह उसे ले आएगा। निःसंदेह अल्लाह अत्यंत सूक्ष्मदर्शी, पूरी ख़बर रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Aur Luqman ne kaha tha ke) “Beta, koi cheez rai ke dana (mustard seed) barabar bhi ho aur kisi chattan (rock) mein ya aasmaano ya zameen mein kahin chupi hui ho, Allah usey nikal layega. Woh bareek been aur bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Piayaray betay agar koi cheez raaee kay danay kay barabar ho phir woh (bhi) khua kissi chattaan mein ho ya aasmano mein ho ya zamin mein ho ussay Allah Taalaa zaroor laye ga Allah Taalaa boht bareek been aur khabrdaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)(और लुकमान ने कहा था के) "बेटा, कोई चीज राय के दाना (सरसों) बराबर भी हो और किसी चट्टन (रॉक) में या आसमानो या जमीन मैं कहीं छुपी हुई हूं, अल्लाह उसे निकल
عَرَبِييا بُنَيَّ أَقِمِ الصَّلاةَ وَأمُر بِالمَعروفِ وَانهَ عَنِ المُنكَرِ وَاصبِر عَلىٰ ما أَصابَكَ ۖ إِنَّ ذٰلِكَ مِن عَزمِ الأُمورِ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे बेटे! नमाज़ क़ायम कर, भलाई का आदेश दे और बुराई से रोक, तथा जो कष्ट तुझे पहुँचे, उसपर धैर्य से काम ले। निश्चय यह अनिवार्य कामों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Beta, namaz qayam kar, neki ka hukum de, badee (burai) se manah kar, aur jo museebat bhi padey uspar sabr kar, yeh woh baatein hain jinki badi takeed ki gayi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meray piyaray betay! Tu namaz qaeem rakhna achay kaamo ki naseehat kertay rehna buray kamon say mana kiya kerna aur jo museebat tum per aajaye sabar kerna (yaqeen maan) kay yeh baray takeedi kaamo mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيوَلا تُصَعِّر خَدَّكَ لِلنّاسِ وَلا تَمشِ فِي الأَرضِ مَرَحًا ۖ إِنَّ اللَّهَ لا يُحِبُّ كُلَّ مُختالٍ فَخورٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और (घमंड के कारण) लोगों से अपना मुँह न फेर और धरती में अकड़कर न चल। निःसंदेह अल्लाह किसी अकड़ने वाले, गर्व करने वाले से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Aur logon se mooh pher kar baat na kar, na zameen mein akad kar chal. Allah kisi khud-pasand aur faqar jataney waley shaks ko pasand nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Logon kay samney apnay gaal na phula aur zamin per itra ker na chal. Kissi takabbur kerney walay shekhi khoray ko Allah Taalaa pasand nahi farmata
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيوَاقصِد في مَشيِكَ وَاغضُض مِن صَوتِكَ ۚ إِنَّ أَنكَرَ الأَصواتِ لَصَوتُ الحَميرِ
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हिन्दी (Al-Omari)और अपनी चाल में मध्यमता रख तथा अपनी आवाज़ धीमी रख। निःसंदेह आवाज़ों में सबसे बुरी आवाज़ निश्चय गधे की आवाज़ है।
Roman Urdu (Maududi)Apni chaal mein aitadal (moderate) ikhtiyar kar, aur apni aawaz zara past rakh, sab aawazon se zyada buri aawaz gadhon ki aawaz hoti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Apni raftar mein miyana rawi ikhtiyar ker aur pani awaz past ker yaqeenan awazon mein sab say badtar awaz gadhon ki awaz hai
Devnagri Urdu (Maududi)अपनी चाल में ऐतदाल (मध्यम) इख्तियार कर, और अपनी आवाज जरा पिछली रख, सब आवाजों से ज्यादा बुरी आवाज गढ़ों की आवाज होती है
عَرَبِيأَلَم تَرَوا أَنَّ اللَّهَ سَخَّرَ لَكُم ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ وَأَسبَغَ عَلَيكُم نِعَمَهُ ظاهِرَةً وَباطِنَةً ۗ وَمِنَ النّاسِ مَن يُجادِلُ فِي اللَّهِ بِغَيرِ عِلمٍ وَلا هُدًى وَلا كِتابٍ مُنيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने, जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, सबको तुम्हारे लिए वशीभूत कर दिया है, तथा तुमपर अपनी खुली तथा छिपी नेमतें पूर्ण कर दी हैं?! और कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अल्लाह के विषय में बिना किसी ज्ञान, बिना किसी मार्गदर्शन और बिना किसी रोशन पुस्तक के विवाद करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya tumlog nahin dekhte ke Allah ne zameen aur aasmaano ki saari cheezein tumhare liye musakkhar kar rakkhi hai aur apni khuli aur chupi niyamatein tumpar tamaam kardi hain? Ispar haal yeh hai ke Insano mein se kuch log hain jo Allah ke barey mein jhagadte hain bagair iske ke unke paas koi ilm ho, ya hidayat, ya koi roshni dikhane wali kitaab
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum nahi dekhtay kay Allah Taalaa ney zamin-o-aasman ki her cheez ko tumharay kaam mein laga rakha hai aur tumhen apni zahiri-o-baatni nematen bharpoor dey rakhi hain baaz log Allah kay baray mein baghair ilm kay aur baghair hidayat kay aur baghair roshan kitab kay jhagra kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम लोग नहीं देखते कि अल्लाह ने ज़मीन और आसमान की सारी चीज़ें तुम्हारे लिए मुस्कुराकर रखी हैं और अपनी खुली और छुपी नियामतें तुमपर तमाम करदी हैं? इसपर हाल ये है कि इंसानों में से कुछ लोग हैं जो अल्लाह के बारे में झगड़ा करते हैं बिना इसके कि उनके पास कोई इल्म हो, या हिदायत, या कोई रोशनी दिखाने वाली किताब
عَرَبِيوَإِذا قيلَ لَهُمُ اتَّبِعوا ما أَنزَلَ اللَّهُ قالوا بَل نَتَّبِعُ ما وَجَدنا عَلَيهِ آباءَنا ۚ أَوَلَو كانَ الشَّيطانُ يَدعوهُم إِلىٰ عَذابِ السَّعيرِ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनसे कहा जाता है कि अल्लाह ने जो (क़ुरआन) उतारा है, उसका अनुसरण करो, तो कहते हैं कि हम तो उसी रास्ते पर चलेंगे, जिसपर अपने पूर्वजों को पाया है। क्या अगरचे शैतान उन्हें धधकती आग की यातना की ओर बुला रहा हो तो भी?
Roman Urdu (Maududi)Aur jab unsey kaha jaata hai ke pairwi karo us cheez ki jo Allah ne nazil ki hai to kehte hain ke hum to us cheez ki pairwi karenge jispar humne apne baap dada ko paya hai. Kya yeh unhi ki pairvi karenge khwah shaytan unko bhadakti hui aag hi ki taraf kyun na bulata raha ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab unn say kaha jata hai kay Allah ki utari hui wahee ki tabey daari kero to kehtay hain kay hum ney to jiss tareeq per apnay baap dadon ko paya hai ussi ki tabey daari keren gay agar cheh shetan inn kay baron ko dozakh kay azab ki taraf bulata ho
Devnagri Urdu (Maududi)और जब उनसे कहा जाता है कि जोड़ी बनाओ हमें चीज की जो अल्लाह ने नाज़िल की है तो कहते हैं हम तो उस चीज़ की पेयरवी करेंगे जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है। क्या ये उनकी जोड़ी करेगी ख्वाह शैतान उनको भड़काती हुई आग ही की तरफ क्यों ना बुलाता रहा हो
عَرَبِي۞ وَمَن يُسلِم وَجهَهُ إِلَى اللَّهِ وَهُوَ مُحسِنٌ فَقَدِ استَمسَكَ بِالعُروَةِ الوُثقىٰ ۗ وَإِلَى اللَّهِ عاقِبَةُ الأُمورِ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो व्यक्ति अपना चेहरा अल्लाह की ओर झुका दे (समर्पित कर दे) और वह सत्कर्मी भी हो, तो उसने मज़बूत कड़ा थाम लिया। और समस्त कार्यों का परिणम अल्लाह ही की ओर है।
Roman Urdu (Maududi)Jo shaks apne aap ko Allah ke hawale karde aur amalan woh neik ho, usne fil-waqayi ek bharose ke qabil sahara thaam liya, aur saarey maamlaat ka aakhri faisla Allah hi ke haath hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo (shaks) apnay aap ko Allah kay tabey ker dey aur ho bhi woh neko kaar yaqeenan uss ney mazboot kara thaam liya tamam kaamo ka anjam Allah ki taraf hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो शक्स अपने आप को अल्लाह के हवाले कर दे और अमलन वो नीक हो, उसने फिल-वाकई एक भरोसे के काबिल सहारा थाम लिया, और सारे मामले का आखिरी फैसला अल्लाह ही के हाथ है
عَرَبِيوَمَن كَفَرَ فَلا يَحزُنكَ كُفرُهُ ۚ إِلَينا مَرجِعُهُم فَنُنَبِّئُهُم بِما عَمِلوا ۚ إِنَّ اللَّهَ عَليمٌ بِذاتِ الصُّدورِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिसने कुफ़्र किया, उसका कुफ़्र आपको शोकाकुल न करे। हमारी ही ओर उन्हें लौटकर आना है, फिर हम उन्हें बताएँगे, जो कुछ उन्होंने किया। निःसंदेह अल्लाह दिलों के भेदों को ख़ूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Ab jo kufr karta hai uska kufr tumhein gham mein mubtala na karey. Unhein palat kar aana to hamari hi taraf hai, phir hum unhein bata denge ke woh kya kuch karke aaye hain. Yaqeenan Allah seeno(chest) ke chupe huey raaz tak jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kafiron kay kufur say aap ranjeedah na hon aakhir inn sab ka lotna humari janib hi hai phir hum inn ko batayen gay jo enhon ney kiya hai be-shak Allah seeno kay bhedon tak say waqif hai
Devnagri Urdu (Maududi)अब जो कुफ्र करता है उसका कुफ्र तुम्हें गम में मुबतला ना करे। उनको लाट कर आना तो हमारी ही तरफ है, फिर हम उन्हें बता देंगे के वो क्या कुछ करके आये हैं। यकीनन अल्लाह सीनो (छाती) के छुपे हुए राज़ तक जानता है
عَرَبِينُمَتِّعُهُم قَليلًا ثُمَّ نَضطَرُّهُم إِلىٰ عَذابٍ غَليظٍ
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हिन्दी (Al-Omari)हम उन्हें थोड़े समय के लिए आनंद देंगे, फिर हम उन्हें कठोर यातना के लिए बाध्य करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Hum thodi muddat unhein duniya mein mazey karne ka mauqa de rahey hain, phir unko bebas karke ek sakht azaab ki taraf kheench le jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Hum enhen go kuch yun hi sa faeedah dey den lekin (bil-aakhir) hum enhen nihayat bey chaargi ki halat mein sakht azab ki taraf hanka ley jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)हम थोड़ी मुद्दत उन्हें दुनिया में मजे करने का मौका दे रहे हैं, फिर उनको बेबस करके एक साख अज़ाब की तरफ खींच ले जायेंगे
عَرَبِيوَلَئِن سَأَلتَهُم مَن خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ لَيَقولُنَّ اللَّهُ ۚ قُلِ الحَمدُ لِلَّهِ ۚ بَل أَكثَرُهُم لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि आप उनसे प्रश्न करें कि आकाशों और धरती को किसने पैदा किया? तो वे अवश्य कहेंगे कि अल्लाह ने। आप कह दें कि सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, बल्कि उनमें अधिकतर नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum insey pucho ke zameen aur aasmaano ko kisne paida kya hai, to yeh zaroor kahenge ke Allah ne. Kaho alhamdulillah, magar inmein se aksar log jaante nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Agar aap inn say daryaft keren kay aasman-o-zamin ka khaliq kaun hai? To yeh zaroor jawab den gay kay Allah to keh dijiye kay sab tareef kay laeeq Allah hi hai lekin inn mein kay aksar bey ilm hain
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम इनसे पूछो के ज़मीन और आसमानों को किसने पाया है, तो ये जरूर कहेंगे के अल्लाह ने। कहो अल्हम्दुलिल्लाह, मगर इनमें से अक्सर लोग जानते नहीं हैं
عَرَبِيلِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ إِنَّ اللَّهَ هُوَ الغَنِيُّ الحَميدُ
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हिन्दी (Al-Omari)आकाशों और धरती में जो कुछ है, अल्लाह ही का है। निःसंदेह अल्लाह सबसे बेनियाज़, सभी प्रशंसा के योग्य है।
Roman Urdu (Maududi)Aasmaano aur zameen mein jo kuch hai Allah hi ka hai. Beshak Allah be-niyaz (free of need) aur aap se aap mehmood (praiseworthy) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmano mein aur zamin mein jo kuch hai woh sab Allah hi ka hai yaqeenan Allah Taalaa boht bara bey niyaz aur saza waar hamd-o-sana hai
Devnagri Urdu (Maududi)आसमान और ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह ही का है। बेशक अल्लाह बे-नियाज़ (ज़रूरत से मुक्त) और आप से आप महमूद (प्रशंसनीय) हैं
عَرَبِيوَلَو أَنَّما فِي الأَرضِ مِن شَجَرَةٍ أَقلامٌ وَالبَحرُ يَمُدُّهُ مِن بَعدِهِ سَبعَةُ أَبحُرٍ ما نَفِدَت كَلِماتُ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزيزٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि धरती में जितने वृक्ष हैं, सब क़लम बन जाएँ तथा समुद्र उसकी स्याही हो जाए, जिसके बाद सात समुद्र और हों, तो भी अल्लाह के शब्द समाप्त नहीं होंगे। निःसंदेह अल्लाह अत्यंत प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Zameen mein jitne darakht hain agar woh sab ke sab qalam ban jayein aur samandar (dwaat (ink) ban jaaye) jisey saat (seven) mazeed samandar roshnayi(ink) muhayya karein tab bhi Allah ki baatein (likhne se) khatam na hongi. Beshak Allah zabardast aur hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Roy-e-zamin kay (tamam) darkhton ki agar qalamen hojayen aur tamam samandaron ki seehaee ho aur inn kay baad sath samnadar aur hon tahum Allah kay kalmaat khatam nahi ho saktay be-shak Allah Taalaa ghalib aur ba-hikmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन में जितने दरख़्त हैं अगर वो सब के सब क़लम बन जाएँ और समंदर (दवात (स्याही) बन जाएँ) जैसे सात (सात) मज़ीद समंदर रोशनाई (स्याही) मुहय्या करें तब भी अल्लाह की बातें (लिखने से) ख़तम न होंगी। बेशक अल्लाह ज़बरदस्त और हकीम है
عَرَبِيما خَلقُكُم وَلا بَعثُكُم إِلّا كَنَفسٍ واحِدَةٍ ۗ إِنَّ اللَّهَ سَميعٌ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हें पैदा करना और पुनः जीवित करके उठाना केवल एक प्राण के समान है। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Tum sarey Insano ko paida karna aur phir dobara jila uthana (zinda karna) to (uske liye) bas aisa hai jaise ek mutanaffis (single person) ko (paida karna aur jila uthana). Haqeeqat yeh hai ke Allah sabkuch sunne aur dekhne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum sab ki pedaeesh aur marney kay baad jilana aisa hi hai jesay aik ji ka be-shak Allah Taalaa sunnay wala dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम सारे इंसानों को भुगतान करना और फिर दोबारा जिला उठाना (जिंदा करना) तो (उसके लिए) बस ऐसा है जैसे एक मुतनफ़िस (अकेले व्यक्ति) को (पैदा करना और जिला उठाना)। हकीकत ये है के अल्लाह सब कुछ सुनने और देखने वाला है
عَرَبِيأَلَم تَرَ أَنَّ اللَّهَ يولِجُ اللَّيلَ فِي النَّهارِ وَيولِجُ النَّهارَ فِي اللَّيلِ وَسَخَّرَ الشَّمسَ وَالقَمَرَ كُلٌّ يَجري إِلىٰ أَجَلٍ مُسَمًّى وَأَنَّ اللَّهَ بِما تَعمَلونَ خَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह रात को दिन में दाखिल करता है और दिन को रात में दाखिल करता है, तथा सूर्य और चाँद को वशीभूत कर दिया है, हर एक एक निर्धारित समय तक चल रहा है। और तुम जो कुछ कर रहे हो, अल्लाह उससे भली-भाँति अवगत है।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum dekhte nahin ho ke Allah raat ko din mein pirota hua le aata hai aur din ko raat mein? Usne Suraj aur chand ko musakkhar (subjected) kar rakkha hai. Sab ek waqt e muqarrar tak chale jaa rahey hain. Aur (kya tum nahin jantey) ke jo kuch bhi tum karte ho Allah ussey ba-kharbar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap nahi dektay kay Allah Taalaa raat ko din mein aur din ko raat mein khapa deta hai sooraj chand ko ussi ney farma bardar ker rakha hai kay her aik muqarrara waqt tak chalta rahey Allah Taalaa her uss cheez say jo tum kertay ho khabardaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह रात को दिन में पिरोता हुआ ले आता है और दिन को रात में? उसने सूरज और चाँद को मुसक्कर कर रखा है। सब एक वक्त ए मुकर्रर तक चले जा रहे हैं। और (क्या तुम नहीं जानते) के जो कुछ भी तुम करते हो अल्लाह उसे ब-ख़बर है
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ هُوَ الحَقُّ وَأَنَّ ما يَدعونَ مِن دونِهِ الباطِلُ وَأَنَّ اللَّهَ هُوَ العَلِيُّ الكَبيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)यह इसलिए है कि अल्लाह ही सत्य है, और यह कि उसके सिवा जिसे वेे पुकारते हैं, वह असत्य है, और यह कि अल्लाह ही सर्वोच्च, सबसे महान है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh sabkuch is wajah se hai ke Allah hi haqq hai aur usey chodh kar jin dusri cheezon ko yeh log pukarte hain woh sab baatil hain.Aur (is wajah se ke) Allah hi buzurg o bartar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh sab (intizamaat) iss waja say hain kay Allah Taalaa haq hai aur uss kay siwa jin jin ko log pukartay hain sab batil hain aur yaqeenan Allah Taalaa boht bulandiyon wala aur bati shaan wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये सब कुछ इस वजह से है के अल्लाह ही हक़ है और उसे छोड़ कर दूसरी चीज़ को ये लोग पुकारते हैं वो सब बातिल हैं।और (इस वजह से के) अल्लाह ही बुज़ुर्ग हे बारतार है
عَرَبِيأَلَم تَرَ أَنَّ الفُلكَ تَجري فِي البَحرِ بِنِعمَتِ اللَّهِ لِيُرِيَكُم مِن آياتِهِ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِكُلِّ صَبّارٍ شَكورٍ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुमने नहीं देखा कि नाव समुद्र में अल्लाह के अनुग्रह से चलती है, ताकि वह (अल्लाह) तुम्हें अपनी निशानियाँ दिखाए। निःसंदेह इसमें हर बड़े धैर्यवान, बड़े कृतज्ञ के लिए कई निशानियाँ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum dekhte nahin ho ke kashti samandar mein Allah ke fazal se chalti hai taa-ke woh tumhein apni kuch nishaniyan dikhaye? Dar haqeeqat is mein bahut si nishaniyan hain har us shaks ke liye jo sabr aur shukar karne wala ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum iss per ghor nahi kertay kay dariya mein kashtiyan Allah kay fazal say chal rahi hain iss liye kay woh tumhen apni nishaniyan dikhaway yaqeenan iss mein her aik sabar shukar kerney walay kay liye boht si nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम देखते नहीं हो कि कश्ती समंदर में अल्लाह के फजल से चलती है ता-के वो तुम्हें अपनी कुछ निशानियां दिखाएंगे? दर हकीकत इस में बहुत सी निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो सब्र और शुक्र करने वाला हो
عَرَبِيوَإِذا غَشِيَهُم مَوجٌ كَالظُّلَلِ دَعَوُا اللَّهَ مُخلِصينَ لَهُ الدّينَ فَلَمّا نَجّاهُم إِلَى البَرِّ فَمِنهُم مُقتَصِدٌ ۚ وَما يَجحَدُ بِآياتِنا إِلّا كُلُّ خَتّارٍ كَفورٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनपर छत्रों के समान कोई लहर छा जाती है, तो वे अल्लाह को इस हाल में पुकारते हैं कि धर्म को उसी के लिए विशुद्ध करने वाले होते हैं। फिर जब वह उन्हें सुरक्षित थल तक पहुँचा देता है, तो उनमें से कुछ ही मध्यम-मार्ग पर क़ायम रहने वाले होते हैं। और हमारी निशानियों का इनकार केवल वही व्यक्ति करता है, जो अत्यंत विश्वासघाती, अति कृतघ्न है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab (samandar mein ) in logon par ek mauj saayebaano(like canopies) ki tarah chaaa jaati hai to yeh Allah ko pukarte hain apne deen ko bilkul usi ke liye khaalis karke. Phir jab woh bacha kar inhein khushki (land) tak pahuncha deta hai to inmein se koi iqtesad baratta (lukewarm) hai.Aur hamari nishaniyon ka inkar nahin karta magar har woh shaks jo gaddaar aur nashukra hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab unn per mojen saeebanon ki tarah chah jati hain to woh (nihayat) khuloos kay sath aeytiqaad kerkay Allah Taalaa hi ko pukartay hain. Phir jab woh (bari taalaa) unhen nijat dey ker khushki ki taraf phonchata hai to kuch inn mein say aeytidaal per rehtay hain aur humari aayaton ka inkar sirf wohi kertay hain jo bad-ehad aur na shukray hon
Devnagri Urdu (Maududi)और जब (समंदर में) लोगों पर एक मौज साएबानो (छतरियों की तरह) की तरह छा जाती है तो ये अल्लाह को पुकारते हैं अपने दीन को बिल्कुल उसी के लिए खाली करके। फिर जब वो बच्चा कर इन्हें खुश्की (जमीन) तक पहुंचा देता है तो इनमें से कोई इक्तेसाद बरता (गुनगुना) है। और हमारी निशानियों का इनकार नहीं करता मगर हर वो शक्स जो गद्दार और नाशुक्र है
عَرَبِييا أَيُّهَا النّاسُ اتَّقوا رَبَّكُم وَاخشَوا يَومًا لا يَجزي والِدٌ عَن وَلَدِهِ وَلا مَولودٌ هُوَ جازٍ عَن والِدِهِ شَيئًا ۚ إِنَّ وَعدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ فَلا تَغُرَّنَّكُمُ الحَياةُ الدُّنيا وَلا يَغُرَّنَّكُم بِاللَّهِ الغَرورُ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो! अपने पालनहार से डरो तथा उस दिन से डरो, जिस दिन कोई पिता अपनी संतान के काम नहीं आएगा और न कोई पुत्र अपने पिता के कुछ काम आ सकेगा। निःसंदेह अल्लाह का वादा सच्चा है। अतः सांसारिक जीवन तुम्हें कदापि धोखे में न रखे और न धोखेबाज़ (शैतान) तुम्हें अल्लाह के बारे में धोखा देने पाए।
Roman Urdu (Maududi)Logon, bacho apne Rubb ke gazab se aur daro us din se jabke koi baap apne bete ki taraf se badla na dega aur na koi beta hi apne baap ki taraf se kuch badla dene wala hoga. Filwaqeh Allah ka wada sachha hai. Pas yeh duniya ki zindagi tumhein dhoke mein na daale, aur na dhoke-baaz tumko Allah ke maamle mein dhoka dene paye
Roman Urdu (Junagarhi)Logo! Apnay rab say daro aur uss din ka khof kero jiss din baapo apnay betay ko koi nafa na phoncha sakay ga aur na beta apnay baap ka zara sa bhi nafa kerney wala hoga (yaad rakho) Allah ka wada sacha hai (dekho) tumehn duniya ki zindagi dhokay mein na dalay aur na dhokay baaz (shetan) tumehn dhokay mein daal dey
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन, बचो अपने रब के गजब से और डरो उस दिन से जबके कोई बाप अपने बेटे की तरफ से बदला ना देगा और ना कोई बेटा ही अपने बाप की तरफ से कुछ बदला देने वाला होगा। फिल्वाक़े अल्लाह का वादा सच्चा है। पास ये दुनिया की जिंदगी तुम्हें धोखे में ना डाले, और ना धोखे-बाज तुमको अल्लाह के मामले में धोखा दे दे
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ عِندَهُ عِلمُ السّاعَةِ وَيُنَزِّلُ الغَيثَ وَيَعلَمُ ما فِي الأَرحامِ ۖ وَما تَدري نَفسٌ ماذا تَكسِبُ غَدًا ۖ وَما تَدري نَفسٌ بِأَيِّ أَرضٍ تَموتُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَليمٌ خَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ही के पास क़ियामत का ज्ञान है और वही वर्षा उतारता है, और वह जानता है जो कुछ गर्भाशयों में है, और कोई प्राणी नहीं जानता कि वह कल क्या कमाएगा, और कोई प्राणी नहीं जानता कि वह किस धरती में मरेगा। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला, हर चीज़ की ख़बर रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Us ghadi ka ilm Allah hi ke paas hai, wahi baarish barsata hai, wahi jaanta hai ke maaon ke paithon mein kya parwarish paa raha hai, koi mutanaffis nahin jaanta ke kal woh kya kamayi karne wala hai aur na kisi shaks ko yeh khabar hai ke kis sar-zameen mein usko maut aani hai. Allah hi sabkuch jaanney wala aur bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak Allah Taalaa hi kay pass qayamat ka ilm hai wohi barish nazil farmata hai aur maa kay pet mein jo hai ussay janta hai. Koi (bhi) nahi janta kay kal kiya (kuch) keray ga? Na kissi ko yeh maloom hai kay kiss zamin mein maray ga (yaad rakho) Allah Taalaa ho pooray ilm wala aur sahih khabron wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)उस घड़ी का इल्म अल्लाह ही के पास है, वही बारिश बरसात है, वही जानता है के मांओं के पैठों में क्या परवरिश पा रहा है, कोई मुतानफ़िस नहीं जानता के कल वो क्या कमाई करने वाला है और ना किसी शक्स को ये खबर है कि किस सर-ज़मीन में उसको मौत आनी है। अल्लाह ही सब कुछ जानने वाला और बाख़बर है
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Surah 31: Luqman (Luqman)

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Surah 31: Luqman (Luqman)

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Surah 31: Luqman (Luqman)

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Surah 31: Luqman (Luqman)

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Surah 31: Luqman (Luqman)

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Surah 32: As-Sajdah (The Adoration)

Meccan🕐 Revelation #75📜 30 Verses🕮 Juz 1
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Surah 32: As-Sajdah (The Adoration)

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Surah 32: As-Sajdah (The Adoration)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالم
हिन्दी (Al-Omari)अलिफ़, लाम, मीम।
Roman Urdu (Maududi)Alif Laam Meem
Roman Urdu (Junagarhi)Alif-laam-meem
Devnagri Urdu (Maududi)अलिफ़ लाम मीम
عَرَبِيتَنزيلُ الكِتابِ لا رَيبَ فيهِ مِن رَبِّ العالَمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)इस पुस्तक का अवतरण, जिसमें कोई संदेह नहीं, पूरे संसार के पालनहार की ओर से है।
Roman Urdu (Maududi)Is kitaab ki tanzil (nuzul/revelation) bila shubha Rubb ul aalameen ki taraf se hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bila shuba iss kitab ka utarna tamam jahano kay perwerdigar ki taraf say hai
Devnagri Urdu (Maududi)इस किताब की तंज़ील (नुज़ुल/रहस्योद्घाटन) बिला शुभा रब उल आलमीन की तरफ से है
عَرَبِيأَم يَقولونَ افتَراهُ ۚ بَل هُوَ الحَقُّ مِن رَبِّكَ لِتُنذِرَ قَومًا ما أَتاهُم مِن نَذيرٍ مِن قَبلِكَ لَعَلَّهُم يَهتَدونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या वे कहते हैं कि उसने इसे स्वयं गढ़ लिया है? बल्कि वही आपके पालनहार की ओर से सत्य है, ताकि आप उन लोगों को सावधान करें, जिनके पास आपसे पहले कोई सावधान करने वाला नहीं आया। ताकि वे सीधी राह पर आ जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log kehte hain ke is shaks ne isey khud ghadh liya hai? Nahin, balke yeh haqq hai tere Rubb ki taraf se taa-ke tu mutanabbeh (warn) karey ek aisi qaum ko jiske paas tujhse pehle koi mutanabbeh (warn) karne nahin aaya. Shayad ke woh hidayat paa jayein
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh kehtay hain kay iss ney issay gharh liya hai. ( nahi nahi) bulkay yeh teray rab Taalaa ki taraf say haq hai takay aap unhen darayen jin kay pass aap say pehlay koi daraney wala nahi aaya takay woh raah-e-raast per aajyen
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग कहते हैं के इस शक्स ने इसे खुद गड़बड़ लिया है? नहीं, बल्कि ये हक है तेरे रब की तरफ से ता-के तू मुतनब्बेह (चेतावनी) करे एक ऐसी क़ौम को जिसके पास तुझसे पहले कोई मुतनब्बेह (चेतावनी) करने नहीं आया। शायद के वो हिदायत पा जाएं
عَرَبِياللَّهُ الَّذي خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ وَما بَينَهُما في سِتَّةِ أَيّامٍ ثُمَّ استَوىٰ عَلَى العَرشِ ۖ ما لَكُم مِن دونِهِ مِن وَلِيٍّ وَلا شَفيعٍ ۚ أَفَلا تَتَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह वह है, जिसने आकाशों तथा धरती तथा उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों को छः दिनों में पैदा किया। फिर वह अर्श पर मुस्तवी (बुलंद) हुआ। उसके सिवा तुम्हारा न कोई संरक्षक है और न कोई सिफ़ारिश करने वाला। तो क्या तुम उपदेश ग्रहण नहीं करते?
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi hai jisne aasmaano aur zameen ko aur un saari cheezon ko jo inke darmiyan hain chey (six) dino mein paida kiya aur iske baad arsh par jalwa farma hua. Uske siwa na tumhara koi haami o madadgar hai aur na koi uske aagey sifarish karne wala. Phir kya tum hosh mein na aaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa woh hai jiss ney aasmano-o- zamin ko aur jo kuch inn kay darmiyan hai sab ko cheh din mein pedah ker diya phir arsh per qaeem hua tumharay liye uss kay siwa koi madadgar aur sifarishi nahi. Kiya phir bhi tum naseehat hasil nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह हाय है जिसने आसमानों और ज़मीन को और उन सारी चीज़ों को जो इनके दरमियान हैं छे (छह) दिनों में पेदा किया और इसके बाद अर्श पर जलवा फरमा हुआ। उसके सिवा ना तुम्हारा कोई हमी ओ मददगार है और ना कोई उसके आगे सिफ़ारिश करने वाला। फिर क्या तुम होश में ना आओगे
عَرَبِييُدَبِّرُ الأَمرَ مِنَ السَّماءِ إِلَى الأَرضِ ثُمَّ يَعرُجُ إِلَيهِ في يَومٍ كانَ مِقدارُهُ أَلفَ سَنَةٍ مِمّا تَعُدّونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह आकाश से धरती तक (प्रत्येक) कार्य का प्रबंध करता है। फिर वह (कार्य) उसकी ओर एक ऐसे दिन में ऊपर जाता है, जिसकी मात्रा तुम्हारे हिसाब के अनुसार एक हज़ार वर्ष है।
Roman Urdu (Maududi)Woh aasmaan se zameen tak duniya ke maamlaat ki tadbeer (planning) karta hai aur is tadbeer ki rudad (record) upar uske huzur jaati hai ek aisey din mein jiski miqdaar tumhare shumar se ek hazar saal hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh aasman say ley ker zamin tak (her) kaam ki tadbeer kerta hai phir (woh kaam) aik aisay din mein uss ki taraf charh jata hai jiss ka andaza tumhari ginti kay aik hazar saal kay barbar hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो आसमान से ज़मीन तक दुनिया के मामले की तदबीर (योजना) करता है और इस तदबीर की रुदाद (रिकॉर्ड) ऊपर उसके हुजूर जाती है एक ऐसे दिन में जिसका मिक़दार तुम्हारे साथ एक हज़ार साल है
عَرَبِيذٰلِكَ عالِمُ الغَيبِ وَالشَّهادَةِ العَزيزُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)वही परोक्ष और प्रत्यक्ष का जानने वाला, अत्यंत प्रभुत्वशाली, अति दयावान है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai har posheeda (chupi hui) aur zaahir ka janne wala. Zabardast, aur raheem
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi hai chupay khullay ka jannay wala zabardast ghalib boht hi meharban
Devnagri Urdu (Maududi)वही है हर पोशीदा (चुपी हुई) और जाहिर का जाने वाला। ज़बरदस्त, और रहीम
عَرَبِيالَّذي أَحسَنَ كُلَّ شَيءٍ خَلَقَهُ ۖ وَبَدَأَ خَلقَ الإِنسانِ مِن طينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसने अच्छा बनाया हर चीज़ को जो उसने पैदा की और उसने मनुष्य की रचना मिट्टी से शुरू की।
Roman Urdu (Maududi)Jo cheez bhi usney banayi khoob hi (acchi tarah) banayi. Usne Insaan ki takhleeq ki ibtida gaarey (mitti /clay) se ki
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ney khoob banaee jo cheez bhi banaee aur insan ki banawat mitti say shuroo ki
Devnagri Urdu (Maududi)जो चीज़ भी उसने बनाई ख़ूब ही (अच्छी तरह) बनाई। उसने इंसान की तख़लीक की इब्तिदा गारे (मिट्टी/मिट्टी) से की
عَرَبِيثُمَّ جَعَلَ نَسلَهُ مِن سُلالَةٍ مِن ماءٍ مَهينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसके वंश को एक तुच्छ पानी के निचोड़ (वीर्य) से बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Phir uski nasal ek aisi saat se chalayi jo hakeer pani (fluid despised) ki tarah ka hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir uss ki nasal aik bey wuqat paani kay nichor say chalaee
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उसकी नाक एक ऐसी सात से चलाई जो हकीर पानी (तरल पदार्थ) की तरह का है
عَرَبِيثُمَّ سَوّاهُ وَنَفَخَ فيهِ مِن روحِهِ ۖ وَجَعَلَ لَكُمُ السَّمعَ وَالأَبصارَ وَالأَفئِدَةَ ۚ قَليلًا ما تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसे ठीक-ठाक किया, और उसमें अपनी एक आत्मा (प्राण) फूँकी, तथा तुम्हारे लिए कान और आँखें तथा दिल बनाए। तुम बहुत कम ही शुक्र करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Phir usko nik-suk se durust kiya aur uske andar apni rooh phoonk di. Aur tumko kaan diye, aankhein di aur dil diye. Tum log kam hi shukar guazar hotey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jissay theek thaak ker kay apni rooh phonki ussi ney tumharay kaan aankhen aur dil banaye (iss per bhi) tum boht hi thora ehsan mantay ho
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उसको निक-सुक से दुरुस्त किया और उसके अंदर अपनी रूह फूंक दी। और तुमको कान दिये, आँखें दी और दिल दिये। तुम लोग कम ही शुक्र गुज़ार होते हो
عَرَبِيوَقالوا أَإِذا ضَلَلنا فِي الأَرضِ أَإِنّا لَفي خَلقٍ جَديدٍ ۚ بَل هُم بِلِقاءِ رَبِّهِم كافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा : क्या जब हम धरती में खो जाएँगे, तो क्या हम वास्तव में नए सिरे से पैदा किए जाएँगे? बल्कि वे अपने पालनहार से मिलने का इनकार करने वाले लोग हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh log kehte hain: “jab hum mitti mein ral-mil chuke honge to kya hum phir naye sirey se paida kiye jayenge?” Asal baat yeh hai ke yeh apne Rubb ki mulaqaat ke munkir hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur enhon ney kaha kiya jab hum zamin mein rul mill jayen gay kiya phir naee pedaeesh mein aajeyn gay? Bulkay (baat yeh hai) kay woh log apnay perwerdigar ki mulaqat kay munkir hain
Devnagri Urdu (Maududi)और ये लोग कहते हैं: "जब हम मिट्टी में राल-मिल चुके होंगे तो क्या हम फिर नये सिरे से पैदा किये जायेंगे?" असल बात ये है के ये अपने रब की मुलाक़ात के मुनीर हैं
عَرَبِي۞ قُل يَتَوَفّاكُم مَلَكُ المَوتِ الَّذي وُكِّلَ بِكُم ثُمَّ إِلىٰ رَبِّكُم تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि मौत का फ़रिश्ता तुम्हारे प्राण निकाल लेगा, जो तुमपर नियुक्त किया गया है, फिर तुम अपने पालनहार ही की ओर लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho “Maut ka woh farishta jo tumpar muqarrar kiya gaya hai tumko poora ka poora apne qabze mein le lega aur phir tum apne Rubb ki taraf palta laye jaoge”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! kay tumhen maut ka farishta fot keray ga jo tum per muqarrar kiya gaya hai phir tum sab apnay perwerdigar ki taraf lotaye jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो "मौत का वो फ़रिश्ता जो तुम्पर मुकर्रर किया गया है तुमको पूरा का पूरा अपने क़ब्ज़ में ले लेगा और फिर तुम अपने रब की तरफ पलटा लाये जाओगे"
عَرَبِيوَلَو تَرىٰ إِذِ المُجرِمونَ ناكِسو رُءوسِهِم عِندَ رَبِّهِم رَبَّنا أَبصَرنا وَسَمِعنا فَارجِعنا نَعمَل صالِحًا إِنّا موقِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि आप देखें, जब अपराधी लोग अपने पालनहार के सामने अपने सिर झुकाए (खड़े) होंगे। (वे कहेंगे :) ऐ हमारे पालनहार! हमने देख लिया और सुन लिया। अतः हमें (दुनिया में) वापस भेज दे कि हम अच्छे कार्य करें। निःसंदेह हम विश्वास करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kaash tum dekho woh waqt jab yeh mujrim sar jhukaye apne Rubb ke huzur khade hongey. (Us waqt yeh keh rahe hongey) “ Aey hamare Rubb, humne khoob dekh liya aur sun liya , ab humein wapas bhej de taa-ke hum neik amal karein. Humein ab yaqeen aa gaya hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Kaash kay aap dekhtay jab kay gunehgar log apnay rab Taalaa kay samney sir jhukaye huyey hongay kahen gay aey humaray rab! Hum ney dekh liya aur sunn liya abb tu humen wapis lota dey hum nek aemaal keren gay hum yaqeen kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)काश तुम देखो वो वक़्त जब ये मुजरिम सर झुकाए अपने रुब के हुजूर खड़े होंगे. (हम वक्त ये कह रहे होंगे) "ऐ हमारे रब, हमने खूब देख लिया और सुन लिया, अब हमें वापस भेज दे ता-के हम नई अमल करें। हमें अब यकीन आ गया है।"
عَرَبِيوَلَو شِئنا لَآتَينا كُلَّ نَفسٍ هُداها وَلٰكِن حَقَّ القَولُ مِنّي لَأَملَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنَ الجِنَّةِ وَالنّاسِ أَجمَعينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम चाहते, तो प्रत्येक प्राणी को उसका मार्गदर्शन प्रदान कर देते। लेकिन मेरी ओर से बात प्रमाणित (निश्चित) हो चुकी कि मैं जहन्नम को जिन्नों तथा इनसानों, सबसे से ज़रूर भरूँगा।
Roman Urdu (Maududi)(Jawab mein irshad hoga) “Agar hum chahte to pehle hi har nafs ko iski hidayat de detay, magar meri woh baat poori ho gayi jo maine kahi thi ke main jahannum ko Jinno aur Insano sab se bhar dunga
Roman Urdu (Junagarhi)Agar hum chahtay to her shaks ko hidayat naseeb farma detay lekin meri yeh baat bilkul haq ho chuki hai kay mein zaroor zaroor jahannum ko insano aur jinno say pur kerdoon ga
Devnagri Urdu (Maududi)(जवाब में इरशाद होगा) “अगर हम चाहते तो पहले ही हर नफ्स को इसकी हिदायत दे देते, मगर मेरी वो बात पूरी हो गई जो मैंने कहीं थी के मैं जहन्नुम को जिन्नो और इंसानों से भर दूंगा
عَرَبِيفَذوقوا بِما نَسيتُم لِقاءَ يَومِكُم هٰذا إِنّا نَسيناكُم ۖ وَذوقوا عَذابَ الخُلدِ بِما كُنتُم تَعمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो (अब यातना) चखो, इस कारण कि तुमने अपने इस दिन के मिलने को भुला दिया। निःसंदेह हमने तुम्हें भुला दिया। और जो तुम किया करते थे उसके कारण शाश्वत यातना का मज़ा चखो।
Roman Urdu (Maududi)Pas ab chakkho maza apni is harakat ka ke tumne is din ki mulaqat ko faramosh kardiya. Humne bhi ab tumhein faramosh kardiya hai. Chakkho hameshgi ke azaab ka maza apne kartooton ki padash mein”
Roman Urdu (Junagarhi)Abb tum apnay iss din ki mulaqat kay faramosh ker denay ka maza chakho hum ney bhi tumhen bhula diya aur apney kiye huye aemaal (ki shamat) say abdi azab ka maza chakho
Devnagri Urdu (Maududi)पास अब चक्खो मजा अपनी इस हरकत का के तुमने इस दिन की मुलाक़ात को फ़रामोश कर दिया। हमने भी अब तुम्हें फ़रामोश कर दिया
☉ Sajda
عَرَبِيإِنَّما يُؤمِنُ بِآياتِنَا الَّذينَ إِذا ذُكِّروا بِها خَرّوا سُجَّدًا وَسَبَّحوا بِحَمدِ رَبِّهِم وَهُم لا يَستَكبِرونَ ۩
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हिन्दी (Al-Omari)हमारी आयतों पर तो केवल वही लोग ईमान लाते हैं कि जब उन्हें उन (आयतों) के साथ नसीहत की जाती है, तो वे सजदा करते हुए गिर जाते हैं, और अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का गान करते हैं, और वे अभिमान नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Hamari aayat par to woh log iman laatey hain jinhein yeh aayat suna kar jab naseehat ki jaati hai to sajde mein gir padte hain aur apne Rubb ki hamd ke saath uski tasbeeh karte hain aur takabbur nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Humari aayaton per wohi eman latay hain jinhen jab kabhi inn say naseehat ki jati hai to woh sajday mein gir partay hain aur apnay rab ki hamd kay sath uss ki tasbeeh parhtay hain aur takabbur nahi kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيتَتَجافىٰ جُنوبُهُم عَنِ المَضاجِعِ يَدعونَ رَبَّهُم خَوفًا وَطَمَعًا وَمِمّا رَزَقناهُم يُنفِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनके पहलू बिस्तरों से अलग रहते हैं। वे अपने पालनहार को भय तथा आशा के साथ पुकारते हैं। तथा हमने जो कुछ उन्हें प्रदान किया है, उसमें से खर्च करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unki peethein (backs) bistaron se alag rehti hain, apne Rubb ko khauf aur tamaa (umeed) ke saath pukarte hain. Aur jo kuch rizq humne unhein diya hai usmein se kharch karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Inn ki kerwaten apnay bistaron say alag rehti hain apnay rab ko khof aur umeed kay sath pukartay hain aur jo kuch hum ney enhen dey rakha hai woh kharach kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उनकी पीठें बिस्तरों से अलग रहती हैं, अपने रब को खौफ और तमा (उम्मीद) के साथ पुकारते हैं। और जो कुछ रिज्क हमने उन्हें दिया है उसमें से खर्च करते हैं
عَرَبِيفَلا تَعلَمُ نَفسٌ ما أُخفِيَ لَهُم مِن قُرَّةِ أَعيُنٍ جَزاءً بِما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो कोई प्राणी नहीं जानता कि उनके लिए आँखों की ठंढक में से क्या कुछ छिपाकर रखा गया है, उसके बदले के तौर पर, जो वे (दुनिया में) किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir jaisa kuch aankhon ki thandak ka saamaan unke aamaal ki jaza mein unke liye chupa kar rakkha gaya hai uski kisi mutanaffis (person/soul) ko khabar nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Koi nafs nahi janta jo kuch hum ney unn ki aankhon ki thandak unn kay liye posheeda ker rakhi hai jo kuch kertay thay yeh uss ka badla hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जैसा कुछ आंखों की ठंडक का सामान उनके अमाल की जजा में उनके लिए छुपा कर रखा गया है उसकी किसी मुतनफ्फिस (व्यक्ति/आत्मा) को खबर नहीं है
عَرَبِيأَفَمَن كانَ مُؤمِنًا كَمَن كانَ فاسِقًا ۚ لا يَستَوونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वह व्यक्ति जो ईमान वाला हो, वह उसके समान है, जो अवज्ञाकारी हो? वे समान नहीं हो सकते।
Roman Urdu (Maududi)Bhala kahin yeh ho sakta hai ke jo shaks momin ho woh us shaks ki tarah ho jaye jo faasiq (nafarman/evil doer) ho? Yeh dono barabar nahin ho saktey
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh jo momin ho misil uss kay hai jo fasiq ho? Yeh barbar nahi ho saktay
Devnagri Urdu (Maududi)भला कहीं ये हो हो सकता है कि जो शक्स मोमिन हो वो हम शक्स की तरह हो जाए जो फासीक (नफ़रमान/बुराई करने वाला) हो? ये डोनो बराबर नहीं हो सकते
عَرَبِيأَمَّا الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ فَلَهُم جَنّاتُ المَأوىٰ نُزُلًا بِما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)लेकिन जो लोग ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए, तो उनके लिए रहने के बाग़ हैं, उन कार्यों के बदले में आतिथ्य स्वरूप, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jo log iman laye hain aur jinhon ne neik amal kiye hain unke liye to jannaton ki qayam-gahein (hospitable homes) hain. Ziyafat ke taur par unke aamal ke badle mein
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ney eman qabool kiya aur nek aemaal bhi kiye unn kay liye humeshgi wali jannaten hain mehmandari hai unn kay aemaal kay badlay jo woh kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्होन ने नीक अमल किए हैं उनके लिए तो जन्नतन की क़याम-गहेन (मेहमाननवाज घर) हैं। ज़ियाफ़त के तौर पर उनके अमल के बदले में
عَرَبِيوَأَمَّا الَّذينَ فَسَقوا فَمَأواهُمُ النّارُ ۖ كُلَّما أَرادوا أَن يَخرُجوا مِنها أُعيدوا فيها وَقيلَ لَهُم ذوقوا عَذابَ النّارِ الَّذي كُنتُم بِهِ تُكَذِّبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और रहे वे लोग, जिन्होंने अवज्ञा की, तो उनका ठिकाना आग है। जब भी वे उससे निकलना चाहेंगे, उसी में लौटा दिए जाएँगे, तथा उनसे कहा जाएगा कि उस आग की यातना चखो, जिसे तुम झुठलाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jinhon ne fisq (na-farmani) ikhtiyar kiya hai unka thikana dozakh hai.Jab kabhi woh ussey nikalna chahenge usi mein dhakail diye jayenge aur unsey kaha jayega ke chakkho ab usi aag ke azaab ka maza jisko tum jhutlaya karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin jin logon ney hukum adooli ki unn ka thikana dozakh hai. Jab kabhi iss say bahir nikalna chahyen gay issi mein lota diyey jayen gay. Aur kah diya jayega kay apnay jhutlaney kay badlay aag ka azab chakho
Devnagri Urdu (Maududi)और जिन्हों ने फिस्क (ना-फरमानी) इख्तियार किया है उनका ठिकाना दोज़ख है। जब कभी वो उसे निकालना चाहेंगे उसमें ढकैल दिए जाएंगे और उन्हें कहा जाएगा के चक्खो अब उसी आग के अज़ाब का मजा जिसको तुम झूठलाया करते थे
عَرَبِيوَلَنُذيقَنَّهُم مِنَ العَذابِ الأَدنىٰ دونَ العَذابِ الأَكبَرِ لَعَلَّهُم يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय हम उन्हें (आख़िरत की) सबसे बड़ी यातना से पहले (दुनिया की) निकटतम यातना अवश्य चखाएँगे, ताकि वे पलट आएँ।
Roman Urdu (Maududi)Us baday azaab se pehle hum isi duniya mein (kisi na kisi chote) azaab ka maza inhein chakhate rahenge. Shayad ke yeh (apne baagiyana [transgression] rawish se) baaz aa jayein
Roman Urdu (Junagarhi)Bil-yaqeen hum enhen qareeb kay chotay say baaz azab iss baray azab kay siwa chakhayen gay takay woh lot aayen
Devnagri Urdu (Maududi)हमसे बड़े अज़ाब से पहले हम इसी दुनिया में (किसी न किसी छोटे) अज़ाब का मजा इन्हें चकते रहेंगे। शायद के ये (अपने बगियाना [अपराध] रवीश से) बाज़ आ जाएं
عَرَبِيوَمَن أَظلَمُ مِمَّن ذُكِّرَ بِآياتِ رَبِّهِ ثُمَّ أَعرَضَ عَنها ۚ إِنّا مِنَ المُجرِمينَ مُنتَقِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उससे बड़ा अत्याचारी कौन है, जिसे उसके पालनहार की आयतों द्वारा नसीहत की गई, फिर वह उनसे विमुख हो गया। निश्चय ही हम अपराधियों से बदला लेने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur ussey bada zaalim kaun hoga jisey uske Rubb ki aayat ke zariye se naseehat ki jaye aur phir woh inse mooh pher ley.Aisey mujreemo se to hum inteqam lekar rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Uss say barh ker zalim kaun hai jissay Allah Taalaa ki aayaton say waaz kiya gaya phir bhi uss ney unn say mun pher liya (yaqeen mano) kay hum bhi gunehgaron say intiqam leney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और उसे बड़ा ज़ालिम कौन होगा जिसमें उसके रब की आयत के ज़रिये से हिदायत की जाए और फिर वो इनसे मुह फेर ले। ऐसे मुजरेमो से तो हम इंतेक़ाम लेकर रहेंगे
عَرَبِيوَلَقَد آتَينا موسَى الكِتابَ فَلا تَكُن في مِريَةٍ مِن لِقائِهِ ۖ وَجَعَلناهُ هُدًى لِبَني إِسرائيلَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने मूसा को पुस्तक प्रदान की। तो आप उससे मिलने के बारे में किसी संदेह में न रहें। तथा हमने उस (तौरात) को इसराईल की संतान के लिए मार्गदर्शन बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Issey pehle hum Moosa ko kitaab de chuke hain. Lihaza usi cheez ke milne par tumhein koi shakk na hona chahiye. Us kitab ko humne bani Israel ke liye hidayat banaya tha
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak hum ney musa ko kitab di pus aap ko hergiz uss ki mulaqat mein shak na kerna chahyey aur hum ney ussay bani israeel ki hidayat ka zariya banaya
Devnagri Urdu (Maududi)इस्से पहले हम मूसा को किताब दे चुके हैं। लिहाज़ा उसी चीज़ के मिलने पर तुम्हें कोई शक्क न होना चाहिए। हमें किताब को हमने बानी इसराइल के लिए हिदायत बनाई थी
عَرَبِيوَجَعَلنا مِنهُم أَئِمَّةً يَهدونَ بِأَمرِنا لَمّا صَبَروا ۖ وَكانوا بِآياتِنا يوقِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उनमें से कई अगुवे (इमाम) बनाए, जो हमारे आदेश से मार्गदर्शन करते थे, जब उन्होंने धैर्य से काम लिया, तथा वे हमारी आयतों पर विश्वास करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab unhon ne sabr kiya aur hamari aayaat par yaqeen latey rahey to unke andar humne aise peshwa paida kiye jo hamare hukum se rehnumayi (hidayat/guidance) karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab unn logon ney sabar kiya to hum ney unn mein say aisay paishwa banaye jo humaray hukum say logon ko hidayat kertay thay aur woh humari aayaton per yaqeen rakhtay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और जब उन्होन ने सब्र किया और हमारी आयत पर यकीन लाते रहे तो उनके अंदर हमने ऐसे पेशवा पेदा किये जो हमारे हुकुम से रहनुमायी (हिदायत/मार्गदर्शन) करते थे
عَرَبِيإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَفصِلُ بَينَهُم يَومَ القِيامَةِ فيما كانوا فيهِ يَختَلِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आपका पालनहार ही क़ियामत के दिन उनके बीच उस बारे में निर्णय करेगा, जिसमें वे मतभेद किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan tera Rubb hi qayamat ke roz un baaton ka faisla karega jinmein (bani Israel) baaham(aapas mein) ikhtilaf karte rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ka rab inn (sab) kay darmiyan unn inn (tamam) baaton ka faisla qayamat kay din keray ga jin mein woh ikhtilaf ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन तेरा रब ही कयामत के रोज़ उन बातों का फैसला करेगा जिनमें (बानी इसराइल) बहाम (आपस में) इख्तिलाफ करते रहे हैं
عَرَبِيأَوَلَم يَهدِ لَهُم كَم أَهلَكنا مِن قَبلِهِم مِنَ القُرونِ يَمشونَ في مَساكِنِهِم ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ ۖ أَفَلا يَسمَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और क्या उनके लिए यह स्पष्ट नहीं हुआ कि हमने उनसे पहले कितने ही समुदायों को विनष्ट कर दिया, जिनके रहने-सहने की जगहों में वे चलते-फिरते हैं? निश्चय इसमें बहुत-सी निशानियाँ (शिक्षाएँ) हैं। तो क्या वे सुनते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Aur kya in logon ko (in tareekhi (historical) waqiyat mein) koi hidayat nahin mili ke unse pehle kitni qaumon ko hum halaak kar chuke hain jinke rehne ki jaghon mein aaj yeh chalte phirte hain? Ismein badi nishaniyan hain. Kya yeh sunte nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya iss baat ney bhi enhen hidayat nahi di kay hum ney inn say pehlay boht si ummaton ko halak ker diya jin kay makano mein yeh chal phir rahey hain. Iss mein to (bari) bari nishaniyan hain. Kiya phir bhi yeh nahi sunntay
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या इन लोगों को (तारीख़ी (ऐतिहासिक) वाकियात में) कोई हिदायत नहीं मिली के उनसे पहले कितनी कौमों को हम हलाक कर चुके हैं जिनके रहने की जगह में आज ये चलते फिरते हैं? इसमें बड़ी निशानियां हैं. क्या ये सुनते नहीं हैं
عَرَبِيأَوَلَم يَرَوا أَنّا نَسوقُ الماءَ إِلَى الأَرضِ الجُرُزِ فَنُخرِجُ بِهِ زَرعًا تَأكُلُ مِنهُ أَنعامُهُم وَأَنفُسُهُم ۖ أَفَلا يُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और क्या उन्होंने नहीं देखा कि हम पानी को सूखी (बंजर) भूमि की ओर बहा ले जाते हैं, फिर हम उसके द्वारा खेती निकालते हैं, जिसमें से उनके चौपाये तथा वे स्वयं भी खाते हैं। तो क्या वे देखते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Aur kya in logon ne yeh manzar kabhi nahin dekha ke hum ek bay-aab o gayah (banjar) zameen ki taraf pani baha latey hain, aur phir usi zameen se woh fasal ugati hai jissey unke jaanwaron ko bhi chara milta hai aur yeh khud bhi khate hain? To kya inhein kuch nahin soojhta
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh nahi dekhtay kay hum pani ko banjar (ghair abad) zamin ki taraf baha ker ley jatay hain phir iss say hum khetiyan nikaltay hain jissay inn kay chopaye aur yeh khud khatay hain kiya phir bhi yeh nahi dekhtay
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या लोगों ने ये मंज़र कभी नहीं देखा के हम एक बे-आब ओ गया (बंजर) ज़मीन की तरफ पानी बहा लाते हैं, और फिर उसी ज़मीन से वो फसल उगती है जिसमें उनके जानवरों को भी चारा मिलता है और ये खुद भी खाते हैं? तो क्या इन्हें कुछ नहीं सूझता
عَرَبِيوَيَقولونَ مَتىٰ هٰذَا الفَتحُ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे कहते हैं : यह निर्णय कब होगा, यदि तुम सच्चे हो?
Roman Urdu (Maududi)Yeh log kehte hain ke “yeh faisla kab hoga agar tum sachhey ho?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kehtay hain kay yeh faisla kab hoga? Agar tum sachay ho (to batlao)
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग कहते हैं "ये फैसला कब होगा अगर तुम सच्चे हो?"
عَرَبِيقُل يَومَ الفَتحِ لا يَنفَعُ الَّذينَ كَفَروا إيمانُهُم وَلا هُم يُنظَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : निर्णय के दिन काफ़िरों को उनका ईमान लाना लाभ नहीं देगा और न उन्हें मोहलत दी जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho “faisle ke din iman laana un logon ke liye kuch bhi nafeh (faidemand) na hoga jinhon ne kufr kiya hai aur phir unko koi mohlat na milegi.”
Roman Urdu (Junagarhi)Jawab dey do kay faislay walay din eman lana bey emaanon ko kuch kaam na aaye ga aur na unhen dheel di jayegi
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो "फैसले के दिन ईमान लाना उन लोगों के लिए कुछ भी नफेह (फैडेमांड) न होगा जिन्हों ने कुफ्र किया है और फिर उनको कोई मोहलत न मिलेगी।"
عَرَبِيفَأَعرِض عَنهُم وَانتَظِر إِنَّهُم مُنتَظِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप उनसे मुँह फेर लें तथा प्रतीक्षा करें। निश्चय वे (भी) प्रतीक्षा करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Accha, inhein inke haal par chodh do aur intezar karo, yeh bhi muntazir (intezar kar rahe) hain
Roman Urdu (Junagarhi)Abb aap inn ka khayal chor den aur muntazir rahen yeh bhi muntazir hain
Devnagri Urdu (Maududi)अच्छा, इनके हाल पर छोड़ दो और इंतज़ार करो, ये भी मुंतज़िर (इंतज़ार कर रहे) हैं
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Surah 32: As-Sajdah (The Adoration)

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Surah 32: As-Sajdah (The Adoration)

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Surah 32: As-Sajdah (The Adoration)

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Surah 32: As-Sajdah (The Adoration)

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Surah 32: As-Sajdah (The Adoration)

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Surah 33: Al-Ahzab (The Allies)

Medinan🕐 Revelation #90📜 73 Verses🕮 Juz 1–22
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Surah 33: Al-Ahzab (The Allies)

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Surah 33: Al-Ahzab (The Allies)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِييا أَيُّهَا النَّبِيُّ اتَّقِ اللَّهَ وَلا تُطِعِ الكافِرينَ وَالمُنافِقينَ ۗ إِنَّ اللَّهَ كانَ عَليمًا حَكيمًا
हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी! अल्लाह से डरें, और काफ़िरों तथा मुनाफ़िक़ों का कहना न मानें। निश्चय अल्लाह सब कुछ जानने वाला, बड़ी हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi! Allah se daro aur kuffar o munafiqeen ki itaat (obey) na karo, haqeeqat mein Aleem(all knowing) aur Hakeem to Allah hi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi Allah Taalaa say dartay rehna aur kafiron aur munafiqon ki baaton mein na aajana Allah Taalaa baray ilm wala aur bari hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी! अल्लाह से डरो और कुफ्फार ओ मुनाफिकीन की इताअत (आज्ञा) न करो, हकीकत में अलीम (सभी जानने वाले) और हकीम अल्लाह ही है
عَرَبِيوَاتَّبِع ما يوحىٰ إِلَيكَ مِن رَبِّكَ ۚ إِنَّ اللَّهَ كانَ بِما تَعمَلونَ خَبيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उसका अनुसरण करें, जो आपके पालनहार की तरफ से आपकी ओर वह़्य की जा रही है। निश्चय अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखने वाला है, जो तुम कर रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Pairvi karo us baat ki jiska ishara tumhare Rubb ki taraf se tumhein kiya ja raha hai. Allah har us baat se bakhabar hai jo tumlog karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jo kuch aap ki janib aap kay rab ki taraf say wahee ki jati hai uss ki tabey daari keren (yaqeen mano) kay Allah tumharay her aik amal say ba-khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)पैरवी करो हमसे बात की जिसका इशारा तुम्हारे रब की तरफ से तुम किया जा रहा है। अल्लाह हर हमसे बात करता है जो तुमलोग करते हो
عَرَبِيوَتَوَكَّل عَلَى اللَّهِ ۚ وَكَفىٰ بِاللَّهِ وَكيلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह पर भरोसा रखें तथा अल्लाह संरक्षक के रूप में काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Allah par tawakkul (bharosa) karo, Allah hi wakeel honay ke liye kafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap Allah hi per tawakkal rakhen woh kaar saazi kay liye kafi hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह पर तवक्कुल (भरोसा) करो, अल्लाह ही वकील होने के लिए काफी है
عَرَبِيما جَعَلَ اللَّهُ لِرَجُلٍ مِن قَلبَينِ في جَوفِهِ ۚ وَما جَعَلَ أَزواجَكُمُ اللّائي تُظاهِرونَ مِنهُنَّ أُمَّهاتِكُم ۚ وَما جَعَلَ أَدعِياءَكُم أَبناءَكُم ۚ ذٰلِكُم قَولُكُم بِأَفواهِكُم ۖ وَاللَّهُ يَقولُ الحَقَّ وَهُوَ يَهدِي السَّبيلَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने किसी व्यक्ति के लिए उसके सीने में दो दिल नहीं बनाए, और न उसने तुम्हारी उन पत्नियों को जिनसे तुम ज़िहार करते हो, तुम्हारी माएँ बनाया है, और न तुम्हारे मुँह बोले बेटों को तुम्हारे बेटे बनाया है। यह तो तुम्हारा अपने मुँह से कहना है और अल्लाह सच कहता है तथा वही सीधी राह दिखाता है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne kisi shaks (Mard) ke dhadh (jism/body) mein do dil nahin rakkhey hain, na usne tum logon ki un biwiyon ko jinse tum zihaar [whom you compare to your mothers’ backs (to divorce them)] karte ho tumhari Maa bana diya hai, aur na usne tumhare mooh bole beton ko tumhara haqiqi beta banaya hai. Yeh to woh baatein hain jo tumlog apne mooh se nikal dete ho, magar Allah woh baat kehta hai jo mabni bar haqeeqat hai. Aur wahi saheeh tareeqe ki taraf rehnumayi karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kissi aadmi kay seenay mein Allah Taalaa ney do dil nahi rakhay aur apni jin biwiyon ko tum maa keh bethtay ho unhen Allah ney tumhari (sach much ki) maayen nahi banaya aur na tumharay ley paalak larkon ko (waqaee) tumharay betay banaya hai yeh to tumharay apnay mun ki baaten hain Allah Taalaa haq baat farmata hai aur woh (seedhi) raah sujhata hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने किसी शक्स (मर्द) के धड़ (जिस्म/शरीर) में दो दिल नहीं रखे हैं, ना उसने तुम लोगों की उन बीवीयों को जिनसे तुम जिहार [आप किसकी तुलना अपनी मां की पीठ से करते हैं (उन्हें तलाक देने के लिए)] करते हो तुम्हारी मां बना दिया है, और ना उसने तुम्हारे मुंह बोले बेटों को तुम्हारा हक़ीक़ी बेटा बनाया है। ये तो वो बातें हैं जो तुमलोग अपने मुँह से निकल देते हो, मगर अल्लाह वो बात कहता है जो मबनी बार हकीकत है। और वही सही तारीख़ की तरफ़ रहनुमाई करता है
عَرَبِيادعوهُم لِآبائِهِم هُوَ أَقسَطُ عِندَ اللَّهِ ۚ فَإِن لَم تَعلَموا آباءَهُم فَإِخوانُكُم فِي الدّينِ وَمَواليكُم ۚ وَلَيسَ عَلَيكُم جُناحٌ فيما أَخطَأتُم بِهِ وَلٰكِن ما تَعَمَّدَت قُلوبُكُم ۚ وَكانَ اللَّهُ غَفورًا رَحيمًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन्हें उनके बापों की ओर मनसूब करके पुकारो। यह अल्लाह के निकट अधिक न्याय की बात है और यदि तुम उनके बापों को न जानो, तो वे तुम्हारे धार्मिक भाई तथा तुम्हारे मित्र हैं। और तुमपर उसमें कोई दोष नहीं है, जो ग़लती से हो जाए, लेकिन (उसमें दोष है) जो दिल के इरादे से करो। तथा अल्लाह अत्यंत क्षमाशील, अति दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Mooh bole beton(adopted sons) ko unke baapon (fathers) ki nisbat se pukaro, yeh Allah ke nazdeek zyada munsifana (equitable) baat hai. Aur agar tumhein maloom na ho ke unke baap kaun hain to woh tumhare deeni bhai aur rafeeq hain. Na danishta jo baat tum kaho iske liye tumpar koi giraft(pakad) nahin hai, lekin us baat par zaroor giraft hai jiska tum dil se irada karo. Allah darguzar karne wala aur raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Lay palakon ko unn kay (haqeeqi) baapon ki taraf nisbat kerkay bulao Allah kay nazdeek poora insaf yeh hi hai. Phir agar tumhen unn kay (haqeeqi) baapon ka ilm hi na ho to woh tumharay deeni bhai aur dost hain tum say bhool chook mein jo kuch hojaye uss mein tum per koi gunah nahi albata gunah woh hai jiss ka tum irada dil say kero. Allah Taalaa bara hi bakhshney wala meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)मुँह बोले बेटों (दत्तक पुत्रों) को उनके बापों (पिता) की निस्बत से पुकारो, ये अल्लाह के नज़दीक ज़्यादा मुंसिफाना (न्यायसंगत) बात है। और अगर तुम मालूम ना हो के उनके बाप कौन हैं तो वो तुम्हारे दीनी भाई और रफीक हैं। ना दानिशता जो बात तुम कहो इसके लिए तुमपर कोई पकड़ा नहीं है, लेकिन उस बात पर जरूर गिराफ्त है जिसका तुम दिल से इरादा करो। अल्लाह दरगुज़र करने वाला और रहीम है
عَرَبِيالنَّبِيُّ أَولىٰ بِالمُؤمِنينَ مِن أَنفُسِهِم ۖ وَأَزواجُهُ أُمَّهاتُهُم ۗ وَأُولُو الأَرحامِ بَعضُهُم أَولىٰ بِبَعضٍ في كِتابِ اللَّهِ مِنَ المُؤمِنينَ وَالمُهاجِرينَ إِلّا أَن تَفعَلوا إِلىٰ أَولِيائِكُم مَعروفًا ۚ كانَ ذٰلِكَ فِي الكِتابِ مَسطورًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह नबी ईमान वालों पर उनके अपने प्राणों से अधिक हक़ रखने वाले हैं। और नबी की पत्नियाँ उनकी माताएँ हैं। और रिश्तेदार, अल्लाह की किताब के अनुसार, (अन्य) ईमान वालों और मुहाजिरों से एक-दूसरे के अधिक हक़दार हैं। सिवाय इसके कि तुम अपने मित्रों के साथ कोई भलाई करो। यह पुस्तक में लिखा हुआ है।
Roman Urdu (Maududi)Bila shubah Nabi to ehle iman ke liye unki apni zaat par muqaddam hai, aur Nabi ki biwiyan unki maaein (mothers) hain. Magar kitabullah ki rooh se aam momineen aur muhajireen ki ba-nisbat rishtedar ek dusre ke zyada haqdar hain. Albatta apne rafiqon ke saath tum koi bhalayi (karna chaho to) kar sakte ho. Yeh hukum kitab e ilahi mein likha hua hai
Roman Urdu (Junagarhi)Payghumber momino per khud unn say bhi ziyada haq rakhney walay hain aur payghumber ki biwiyan momino ki maayen hain aur rishtay daar kitabullah ki roo say ba-nisbat doosray momino aur mohajiron kay aapas mein ziyada haq daar hain (haan) magar yeh kay tum apnay doston kay sath husn-e-salook kerna chahao. Yeh hukum kitab (elahee) mein likha hua hai
Devnagri Urdu (Maududi)बिला शुबा नबी तो एहले ईमान के लिए उनकी अपनी ज़ात पर मुक़द्दम है, और नबी की बीवियाँ उनकी माँ (माँ) हैं। मगर किताबुल्लाह की रूह से आम मोमिनीन और मुहाजिरीन की बा-निस्बत रिश्तेदार एक दूसरे के ज़्यादा हक़दार हैं। अलबत्ता अपने रफ़ीक़ों के साथ तुम कोई भलाई (करना चाहो तो) कर सकते हो। ये हुकुम किताब ए इलाही में लिखा हुआ है
عَرَبِيوَإِذ أَخَذنا مِنَ النَّبِيّينَ ميثاقَهُم وَمِنكَ وَمِن نوحٍ وَإِبراهيمَ وَموسىٰ وَعيسَى ابنِ مَريَمَ ۖ وَأَخَذنا مِنهُم ميثاقًا غَليظًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद करो) जब हमने नबियों से उनका वचन लिया। तथा (विशेष रूप से) आपसे और नूह और इबराहीम और मूसा और मरयम के पुत्र ईसा से। और हमने उनसे दृढ़ वचन लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Nabi) yaad rakkho us ahad-o-paiman (covenant) ko jo humne sab paighambaron se liya hai, tumse bhi aur Nooh aur Ibrahim aur Moosa aur Isa ibne Maryam se bhi.Sabse pukhta ahad le chuke hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay hum ney tamam nabiyon say ehad liya aur (bil-khusoos) aap say aur nooh say aur ibrahim say aur musa say aur mariyam kay betay essa say aur hum ney unn say (pakka aur) pukhta ehad liya
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ नबी) याद रखो हमें अहद-ओ-पैमान (संविदा) को जो हमने सब पैगम्बरों से लिया है, तुमसे भी और नूह और इब्राहीम और मूसा और ईसा इब्ने मरियम से भी। सबसे पुख्ता अहद ले चुके हैं
عَرَبِيلِيَسأَلَ الصّادِقينَ عَن صِدقِهِم ۚ وَأَعَدَّ لِلكافِرينَ عَذابًا أَليمًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ताकि वह सच्चे लोगों से उनकी सच्चाई के बारे में पूछे तथा उसने काफ़िरों के लिए दर्दनाक यातना तैयार कर रखी है।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke sacchey logon se (unka Rubb) unki sachhayi ke barey mein sawal karey, aur kaafiron ke liye to usne dardnaak azaab muhaiyya kar hi rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Takay Allah Taalaa sachon say unn ki sachaee kay baray mein daryaft farmaye aur kafiron kay liye hum ney alamnaak azab tayyar ker rakhay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के सच्चे लोगों से (उनका रब) उनकी सच्चाई के बारे में सवाल करें, और काफिरों के लिए तो उसने दर्दनक अजब मुहैय्या कर ही रखा है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا اذكُروا نِعمَةَ اللَّهِ عَلَيكُم إِذ جاءَتكُم جُنودٌ فَأَرسَلنا عَلَيهِم ريحًا وَجُنودًا لَم تَرَوها ۚ وَكانَ اللَّهُ بِما تَعمَلونَ بَصيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अपने ऊपर अल्लाह के उपकार को याद करो, जब सेनाएँ तुमपर चढ़ आईं, तो हमने उनपर आँधी भेज दी और ऐसी सेनाएँ, जिन्हें तुमने नहीं देखा। और जो कुछ तुम कर रहे थे, अल्लाह उसे खूब देखने वाला था।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon, jo iman laye ho, yaad karo Allah ke ehsan ko jo (abhi abhi) usne tumpar kiya hai jab lashkar tumpar chadh aaye to humne unpar ek sakht aandhi (wind) bhej di aur aisi faujein rawana ki jo tumko nazar na aati thi .Allah woh sab kuch dekh raha tha jo tumlog us waqt kar rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Allah Taalaa ney jo ehsan tum per kiya ussay yaad kero jabkay tumharay muqablay ko fojon per fojen aaen phir hum ney unn per tez-o-tund aandhi aur aisay lashker bhejay jinhen tum ney dekha hi nahi aur jo kuch tum kertay ho Allah Taalaa sab kuch dekhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों, जो ईमान लाए हो, याद करो अल्लाह के एहसान को जो (अभी अभी) उसने तुमपर किया है जब लश्कर तुमपर चढ़ आए तो हमने उनपर एक ताकत आंधी (हवा) भेज दी और ऐसी फौजें रावण की जो तुमको नज़र ना आती थी। अल्लाह वो सब कुछ देख रहा था जो तुमलोग हमें वक्त कर रहे थे
عَرَبِيإِذ جاءوكُم مِن فَوقِكُم وَمِن أَسفَلَ مِنكُم وَإِذ زاغَتِ الأَبصارُ وَبَلَغَتِ القُلوبُ الحَناجِرَ وَتَظُنّونَ بِاللَّهِ الظُّنونا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब वे तुमपर, तुम्हारे ऊपर से तथा तुम्हारे नीचे से चढ़ आए, तथा जब आँखें फिर गईं, और दिल गले तक पहुँच गए, तथा तुम अल्लाह के बारे में तरह-तरह के गुमान करने लगे।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh upar se aur nichey se tumpar chadh aaye, jab khauf ke marey aankhein pathra gayi, kaleejey mooh ko aa gaye, aur tumlog Allah ke barey mein tarah tarah ke gumaan karne lagey
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay (dushman) tumharay pass uper say aur neechay say charh aaye aur jabkay aankhen pathra gaen aur kalejay mun ko aagaye aur tum Allah Taalaa ki nisbat tarah tarah kay gumaan kerney lagay
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो ऊपर से और नीचे से तुमपर चढ़ आए, जब खौफ के मारे आंखें पथरा गई, कालीजे मुह को आ गए, और तुमलोग अल्लाह के बारे में तरह तरह के गुमान करने लगे
عَرَبِيهُنالِكَ ابتُلِيَ المُؤمِنونَ وَزُلزِلوا زِلزالًا شَديدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)इस जगह ईमान वाले आज़माए गए और वे पूर्ण रूप से झंझोड़ दिए गए।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt iman laney waley khoob aazmaaye (tested) gaye aur buri tarah hila marey gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi momin aazmaye gaye aur poori tarag woh jhanjhor diyey gaye
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त ईमान लाने वाले खूब आजमाए (परीक्षित) गए और बुरी तरह हिला मारे गए
عَرَبِيوَإِذ يَقولُ المُنافِقونَ وَالَّذينَ في قُلوبِهِم مَرَضٌ ما وَعَدَنَا اللَّهُ وَرَسولُهُ إِلّا غُرورًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब मुनाफ़िक़ और वे लोग जिनके दिलों में रोग है, कह रहे थे : अल्लाह और उसके रसूल ने हमसे जो वादा किया था, वह मात्र धोखा था।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo woh waqt jab munafiqeen aur woh sab log jinke dilon mein rog tha saaf saaf keh rahey they ke Allah aur uske Rasool ne jo wadey humse kiye thay woh fareb ke siwa kuch na thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss waqt munafiq aur woh log jin kay dilon mein (shak ka) rog tha kehney lagay Allah Taalaa aur uss kay rasool ney hum say mehaz dhoka faraib ka hi wada kiya tha
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो वो वक्त जब मुनाफिकीन और वो सब लोग जिनके दिलों में रोग थे साफ़ साफ़ कह रहे वे के अल्लाह और उसके रसूल ने जो वादे हमसे किए थे वो फरेब के सिवा कुछ ना थाय
عَرَبِيوَإِذ قالَت طائِفَةٌ مِنهُم يا أَهلَ يَثرِبَ لا مُقامَ لَكُم فَارجِعوا ۚ وَيَستَأذِنُ فَريقٌ مِنهُمُ النَّبِيَّ يَقولونَ إِنَّ بُيوتَنا عَورَةٌ وَما هِيَ بِعَورَةٍ ۖ إِن يُريدونَ إِلّا فِرارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब उनके एक गिरोह ने कहा : ऐ यसरिब वालो! तुम्हारे लिए ठहरने का कोई अवसर नहीं है। अतः लौट चलो। तथा उनमें से एक गिरोह नबी से (वापसी की) अनुमति माँगता था। वे कहते थे : हमारे घर असुरक्षित हैं। हालाँकि वे असुरक्षित नहीं हैं। वे तो केवल भागना चाहते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab un mein se ek giroh ne kaha ke “ aey yathrib ke logon, tumhare liye ab theharne ka koi mauqa nahin hai, palat chalo” jab unka ek fareeq yeh keh kar Nabi se rukhsat talab kar raha tha ke “hamare ghar khatrey mein hain,” halanke woh khatrey mein na thay. Dar-asal woh (muhaz e jung se[from the battle-front]) bhagna chahte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Inn hi ki aik jamaat ney haank lagaee kay aey madina walon! Tumharay liye thikana nahi chalo lot chalo aur inn ki aik aur jamaat yeh keh ker nabi say ijazat maangney lagi kay humaray ghar ghair mehfooz hain halankay woh (khullat huyey aur) ghair mehfooz na thay (lekin) unn ka pukhta iradah bhaag kharay honey ka tha
Devnagri Urdu (Maududi)जब उन में से एक गिरो ​​​​ने कहा के "ऐ यत्रिब के लोगों, तुम्हारे लिए अब रुकने का कोई मौका नहीं है, पलट चलो" जब उनका एक फर्क ये कह कर नबी से रुखसत तलब कर रहा था के "हमारे घर खतरों में हैं," हलांके वो खतरे में ना थे। दर-असल वो (मुहाज़ ए जंग से [युद्ध-मोर्चे से]) भागना चाहते थे
عَرَبِيوَلَو دُخِلَت عَلَيهِم مِن أَقطارِها ثُمَّ سُئِلُوا الفِتنَةَ لَآتَوها وَما تَلَبَّثوا بِها إِلّا يَسيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि उनपर उस (मदीने) की चारों ओर से सेनाएँ दाखिल की जातीं, फिर उनसे फितने का अह्वान किया जाता, तो वे निश्चित रूप से ऐसा कर डालते और उसमें केवल थोड़ा ही संकोच करते।
Roman Urdu (Maududi)Agar shehar ke atraaf se dushman ghus aaye hotay aur us waqt unhein fitne ki taraf dawat di jaati to yeh usmein ja padte aur mushkil hi se unhein shareek e fitna honay mein koi taamul (reluctance) hota
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar madiney kay aitraaf say unn per (lashker) dakhil kiye jatay phir unn say fitna talab kiya jata to yeh zaroor issay barpa ker detay aur na lartay magar thori muddat
Devnagri Urdu (Maududi)अगर शहर के अतराफ से दुश्मन घुस आए होतय और हमें वक्त उन्हें फिटने की तरफ दावत दी जाती तो ये उसमें जा पढ़ते और मुश्किल ही से उन्हें शरीक ए फिटना होने में कोई तामुल (अनिच्छा) होता है
عَرَبِيوَلَقَد كانوا عاهَدُوا اللَّهَ مِن قَبلُ لا يُوَلّونَ الأَدبارَ ۚ وَكانَ عَهدُ اللَّهِ مَسئولًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जबकि उन्होंने इससे पूर्व अल्लाह से प्रतिज्ञा की थी कि वे पीठ नहीं फेरेंगे। और अल्लाह से की गई प्रतिज्ञा के बारे में तो पूछा ही जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)In logon ne issey pehle Allah se ahad kiya tha ke yeh peeth na pherenge. Aur Allah se kiye huey ahad ki baaz- purs (questioning) to honi hi thi
Roman Urdu (Junagarhi)Iss say pehlay to enhon ney Allah say ehad kiya tha kay peeth na pheren gay aur Allah Taalaa say kiye huyey waday ki baaz purs zaroor hogi
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों ने इसे पहले अल्लाह से अहद किया था के ये पीठ ना फेरेंगे। और अल्लाह से किए हुए अहद की बाज़-पुर्स (सवाल करते हुए) तो होनी ही थी
عَرَبِيقُل لَن يَنفَعَكُمُ الفِرارُ إِن فَرَرتُم مِنَ المَوتِ أَوِ القَتلِ وَإِذًا لا تُمَتَّعونَ إِلّا قَليلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : यदि तुम मौत से या क़त्ल होने से भागते हो, तो भागना तुम्हें कदापि लाभ नहीं देगा। और उस समय तुम्हें (जीवन का) बहुत थोड़ा लाभ दिया जाएगा ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi!) Insey kaho, agar tum maut ya qatal se bhago to yeh bhagna tumhare liye kuch bhi nafa-baksh na hoga, Iske baad zindagi ke mazey lootne ka thoda hi mauqa tumhein mil sakega
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay go tum maut say ya khof-e-qatal say bhago to yeh bhagna tumhen kuch bhi kaam na aaye ga aur uss waqt tum boht hi kum faeedah uthao gay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी!) इनसे कहो, अगर तुम मौत या कत्ल से भागो तो ये भगना तुम्हारे लिए कुछ भी नफा-बख्श ना होगा, इसके बाद जिंदगी के मजे लूटने का थोड़ा ही मौका तुम्हें मिल सकेगा
عَرَبِيقُل مَن ذَا الَّذي يَعصِمُكُم مِنَ اللَّهِ إِن أَرادَ بِكُم سوءًا أَو أَرادَ بِكُم رَحمَةً ۚ وَلا يَجِدونَ لَهُم مِن دونِ اللَّهِ وَلِيًّا وَلا نَصيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आप कह दीजिए : वह कौन है, जो तुम्हें अल्लाह से बचाएगा, यदि वह तुम्हारे साथ कोई बुराई चाहे अथवा तुम पर कोई दया करना चाहे? और वे अपने लिए अल्लाह के सिवा न कोई संरक्षक पाएँगे और न कोई सहायक।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho, kaun hai jo tumhein Allah se bacha sakata ho agar woh tumhein nuqsan pahunchana chahey? Aur kaun uski rehmat ko roak sakta hai agar woh tumpar meharbani karna chahey? Allah ke muqabley mein to yeh log koi haami o madadgar (protector or helper) nahin paa saktey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Poochiye! To kay agar Allah Taalaa tumhen koi buraee phonchana chahaye ye tum per koi fazal kerna chahaye to kaun hai jo tumhen bacha sakay (ya tum say rok sakay?) apnay liye b-juz Allah Taalaa kay na koi humayati payen gay na madadgar
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, कौन है जो तुम्हें अल्लाह से बचा सकता है अगर वो तुम्हें नुक्सान पहुंचाना चाहे? और कौन उसकी रहमत को रोक सकता है अगर वो तुमपर मेहरबानी करना चाहे? अल्लाह के मुक़ाबले में तो ये लोग कोई हामी ओ मददगार (रक्षक या मददगार) नहीं पा सकते हैं
عَرَبِي۞ قَد يَعلَمُ اللَّهُ المُعَوِّقينَ مِنكُم وَالقائِلينَ لِإِخوانِهِم هَلُمَّ إِلَينا ۖ وَلا يَأتونَ البَأسَ إِلّا قَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय अल्लाह तुम में से उन लोगों को भली-भाँति जानता है, जो (जिहाद से) रोकने वाले हैं और जो अपने भाइयों से कहते हैं कि हमारे पास चले आओ और वे युद्ध में बहुत कम आते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Allah tum mein se un logon ko khoob jaanta hai jo (jung ke kaam mein) rukawatein daalne waley hain, jo apne bhaiyon se kehte hain ke “aao hamari taraf.” Jo ladayi mein hissa lete bhi hain to bas naam ginane ko
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa tum mein say unhen (ba-khoobi) janta hai jo doosron ko roktay hain aur apnay bhai bando say kehtay hain kay humaray pass chalay aao. Au kabhi kabhi hi laraee mein aajatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह तुम में से उन लोगों को खूब जानता है जो (जंग के काम में) रुकावतें डालने वाले हैं, जो अपने भाइयों से कहते हैं "आओ हमारी तरफ।" जो लड़ाई में हिसा लेते भी हैं तो बस नाम गिनाने को
عَرَبِيأَشِحَّةً عَلَيكُم ۖ فَإِذا جاءَ الخَوفُ رَأَيتَهُم يَنظُرونَ إِلَيكَ تَدورُ أَعيُنُهُم كَالَّذي يُغشىٰ عَلَيهِ مِنَ المَوتِ ۖ فَإِذا ذَهَبَ الخَوفُ سَلَقوكُم بِأَلسِنَةٍ حِدادٍ أَشِحَّةً عَلَى الخَيرِ ۚ أُولٰئِكَ لَم يُؤمِنوا فَأَحبَطَ اللَّهُ أَعمالَهُم ۚ وَكانَ ذٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)वे तुम्हारे बारे में बड़े कंजूस हैं। फिर जब भय का समय आ जाए, तो आप उन्हें देखेंगे कि वे आपकी ओर ऐसे देखते हैं कि उनकी आँखें उस व्यक्ति की तरह घूमती हैं, जिसपर मौत की बेहोशी छा रही हो। फिर जब भय दूर हो जाए, तो तुम्हें तेज़ ज़बानों के साथ कष्ट पहुँचाएँगे, इस हाल में कि धन के बहुत लोभी हैं। ये लोग ईमान लाए ही नहीं हैं। इसलिए अल्लाह ने उनके कार्यों को व्यर्थ कर दिया। तथा यह अल्लाह पर अति सरल है।
Roman Urdu (Maududi)Jo tumhara saath dene mein sakht bakheel hain. Khatre ka waqt aa jaye to is tarah deedhey phira phira kar tumhari taraf dekhte hain jaise kisi marne wale par gashi taari ho rahi ho. Magar jab khatra guzar jata hai to yahi log faiydon ke harees bankar kainchi ki tarah (scissor-like) chalti hui zubaane liye tumhare isteqbal ko aa jatey hain. Yeh log hargiz iman nahin laye, isi liye Allah ne inke sarey aamal zaya kardiye. Aur aisa karna Allah ke liye bahut asaan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhari madad mein (pooray) bakheel hain phir jab khof-o-dehshat ka moqa aajaye to aap enhen dekhen gay kay aap ki taraf nazar jama detay hain aur inn ki aankhen iss tarah ghoomti hain jaisay uss shaks ki jiss per maut ki ghashi taari ho. Phir jab khof jata rehta hai to tum per apni tez zabano say bari baaten banatay hain maal kay baray hi harees hain yeh eman laye hi nahi hain Allah Taalaa ney inn kay tamam aemaal nabood ker diye hain aur Allah Taalaa per yeh boht hi aasan hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो तुम्हारा साथ देने में सक्षम है। ख़तरे का वक़्त आ जाए तो इस तरह दिधे फिरा-फिरा कर तुम्हारी तरफ देखते हैं जैसे किसी को मरने वाले पर गशी तारी हो रही हो। मगर जब ख़तरा गुज़र जाता है तो यही लोग फ़ायदों के हरिस बनकर कैंची की तरह (कैंची की तरह) चलती है ज़ुबान के लिए तुम्हारे इस्तेकबाल को आ जाते हैं। ये लोग हरगिज़ ईमान नहीं लाए, इसी के लिए अल्लाह ने इनके सारे अमल ज़या कर दिए। और ऐसा करना अल्लाह के लिए बहुत आसान है
عَرَبِييَحسَبونَ الأَحزابَ لَم يَذهَبوا ۖ وَإِن يَأتِ الأَحزابُ يَوَدّوا لَو أَنَّهُم بادونَ فِي الأَعرابِ يَسأَلونَ عَن أَنبائِكُم ۖ وَلَو كانوا فيكُم ما قاتَلوا إِلّا قَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)वे समझते हैं कि सैन्य दल (अभी) नहीं गए हैं। और यदि सेनाएँ (दोबारा) आ जाएँ, तो वे चाहेंगे कि काश! वे देहातियों के साथ देहातों में चले जाते और (वहीं से) तुम्हारे समाचार मालूम करते रहते। और अगर वे तुम्हारे साथ होते भी, तो युद्ध में कम ही भाग लेते।
Roman Urdu (Maududi)Yeh samajh rahey hain ke hamla-aawar giroh abhi gaye nahin hain aur agar woh phir hamla awar ho jayein to inka ji chahta hai ke us mauqe par yeh kahin sehra (desert) mein badduon (bedouin) ke darmiyan ja baithein aur wahin se tumhare halaat puchte rahein.Taaham agar yeh tumhare darmiyan rahey bhi to ladayi mein kam hi hissa lengey
Roman Urdu (Junagarhi)Samjhtay hain kay abb tak lashkar chalay aur agar fojen aajayen to tamannayen kertay hain kay kaash! Woh sehra mein badiya nashiniyon kay sath hotay kay tumhari khabren daryaft kiya kertay agar woh tum mein mojood hotay (to bhi kiya?) na lartay magar baraye naam
Devnagri Urdu (Maududi)ये समझ रहे हैं कि हमला-आवर गिरोह अभी गए नहीं हैं और अगर वो फिर हमला हो जाए तो इनका जी चाहता है कि हमें मौका पर ये कहीं सेहरा (रेगिस्तान) में बद्दुओं (बेडौइन) के दरमियान जा बैठें और वहीं से तुम्हारे हालात पूछते रहते हैं। अगर ये तुम्हारे दरमियान रहेंगे भी तो लड़ाई में कम ही हिसा लेंगे
عَرَبِيلَقَد كانَ لَكُم في رَسولِ اللَّهِ أُسوَةٌ حَسَنَةٌ لِمَن كانَ يَرجُو اللَّهَ وَاليَومَ الآخِرَ وَذَكَرَ اللَّهَ كَثيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुम्हारे लिए अल्लाह के रसूल में उत्तम आदर्श है। उसके लिए, जो अल्लाह और अंतिम दिन की आशा रखता हो, तथा अल्लाह को अत्यधिक याद करता हो।
Roman Urdu (Maududi)Dar haqeeqat tum logon ke liye Allah ke Rasoool mein ek behtareen namuna tha, har us shaks ke liye jo Allah aur yaum e aakhir ka umeedwar ho aur kasrat se Allah ko yaad karey
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tumharay liye rasool Allah mein umdah namoona (mojood) hai her uss shaks kay liye jo Allah Taalaa ki aur qayamat kay din ki tawakka rakhta hai aur ba-kasrat Allah Taalaa ki yaad kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)दर हकीकत तुम लोगों के लिए अल्लाह के रसूल में एक बहतरीन नामुना था, हर उस शक्स के लिए जो अल्लाह और यौम ए आखिर का उम्मीदवर हो और कसरत से अल्लाह को याद करे
عَرَبِيوَلَمّا رَأَى المُؤمِنونَ الأَحزابَ قالوا هٰذا ما وَعَدَنَا اللَّهُ وَرَسولُهُ وَصَدَقَ اللَّهُ وَرَسولُهُ ۚ وَما زادَهُم إِلّا إيمانًا وَتَسليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जब ईमान वालों ने सेनाएँ देखीं, तो पुकार उठे : यह वही चीज़ है, जिसका अल्लाह और उसके रसूल ने हमसे वादा किया था और अल्लाह और उसके रसूल ने सच कहा। और इस चीज़ ने उनके ईमान तथा आज्ञापालन को और बढ़ा दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur sacchey momino (ka haal us waqt yeh tha ke) jab unhon ne hamla-awar lashkaron ko dekha to pukar utthey ke “ yeh wahi cheez hai jiska Allah aur uske Rasool ne humse wada kiya tha. Allah aur uske Rasool ki baat bilkul sacchi thi.” Is waqiye ne unke imaan aur unki supurdagi (submission) ko aur zyada badha diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur eman daron ney jab (kuffar kay) lashkaron ko dekha (bay saakhta) keh uthay! Kay enhin ka wada humen Allah Taalaa ney aur uss kay rasool ney diya tha aur Allah Taalaa aur uss kay rasool ney sach farmaya aur iss (cheez) ney unn kay eman mein aur shewa-e-faman bardari mein aur izafa ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)और सच्चे मोमिनो (का हाल हमें वक्त ये था के) जब उन्होन ने हमला-आवर लश्करों को देखा तो पुकार उठे के "ये वही चीज है जिसका अल्लाह और उसके रसूल ने हमसे वादा किया था। अल्लाह और उसके रसूल की बात बिलकुल सच्ची थी।” इस वक़िये ने उनके ईमान और उनकी सुपुर्दगी (सबमिशन) को और ज़्यादा बढ़ा दिया
عَرَبِيمِنَ المُؤمِنينَ رِجالٌ صَدَقوا ما عاهَدُوا اللَّهَ عَلَيهِ ۖ فَمِنهُم مَن قَضىٰ نَحبَهُ وَمِنهُم مَن يَنتَظِرُ ۖ وَما بَدَّلوا تَبديلًا
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हिन्दी (Al-Omari)ईमान वालों में से कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अल्लाह से जो प्रतिज्ञा की थी, उसे सच कर दिखाया। फिर उनमें से कुछ तो अपना प्रण पूरा कर चुके, और उनमें से कुछ लोग (अभी) प्रतीक्षा कर रहे हैं। और उन्होंने (अपनी प्रतिज्ञा में) तनिक भी परिवर्तन नहीं किया।
Roman Urdu (Maududi)Iman laney walon mein aisey log maujood hain jinhon ne Allah se kiye huey ahad ko saccha kar dikhaya hai. In mein se koi apni nazar puri kar chuka aur koi waqt aane ka muntazir hai. Inhon ne apne rawaiyye mein koi tabdili nahin ki
Roman Urdu (Junagarhi)Momino mein (aisay) log bhi hain jinhon ney jo ehad Allah Taalaa say kiya tha unhen sacha ker dikhaya baaz ney to apna ehad poora ker diya aur baaz ( moqay kay) muntazir hain aur unhon ney koi tabdeeli nahi ki
Devnagri Urdu (Maududi)ईमान लाने वालों में ऐसे लोग मौजूद हैं जिन्हों ने अल्लाह से किये हुए अहद को सच्चा कर दिखाया है। इनमें से कोई अपनी नज़र पूरी कर चुका है और कोई वक़्त आने का मुंतज़िर है। इन्हों ने अपने रवैय्ये में कोई तबदीली नहीं की
عَرَبِيلِيَجزِيَ اللَّهُ الصّادِقينَ بِصِدقِهِم وَيُعَذِّبَ المُنافِقينَ إِن شاءَ أَو يَتوبَ عَلَيهِم ۚ إِنَّ اللَّهَ كانَ غَفورًا رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि अल्लाह सच्चे लोगों को उनके सच का बदला प्रदान करे, और मुनाफ़िक़ों को, यदि चाहे तो यातना दे या उनकी तौबा क़बूल कर ले। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)(Yeh sabkuch is liye hua) taa-ke Allah sacchon ko unki sacchayi ki jaza de aur munafiqon ko chahe to saza de aur chahe to unki tawbah qabool karle. Beshak Allah gafoor o raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Takay Allah Taalaa sahon ko unn ki sachaee ka badla dey aur agar chahaye to munafiqon ko saza dey ya unn ki toba qabool farmaye Allah Taalaa bara hi bakhshney wala boht hi meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ये सब कुछ के लिए हुआ) ता-के अल्लाह सचाई की जजा दे और मुनाफिकों को चाहे तो सजा दे और चाहे तो उनकी तौबा कबूल करले। बेशाक़ अल्लाह गफूर ओ रहीम है
عَرَبِيوَرَدَّ اللَّهُ الَّذينَ كَفَروا بِغَيظِهِم لَم يَنالوا خَيرًا ۚ وَكَفَى اللَّهُ المُؤمِنينَ القِتالَ ۚ وَكانَ اللَّهُ قَوِيًّا عَزيزًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह ने काफ़िरों को (मदीना से) उनके क्रोध सहित लौटा दिया, उन्होंने कोई भलाई प्राप्त न की। और अल्लाह ईमान वालों को लड़ाई से काफी हो गया। और अल्लाह बड़ा शक्तिशाली, अत्यंत प्रभुत्वशाली है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne kuffar ka mooh pher diya, woh koi faiyda haasil kiye bagair apne dil ki jalan liye yunhi palat gaye, aur momineen ki taraf se Allah hi ladne ke liye kaafi ho gaya. Allah badi quwwat wala aur zabardast hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa ney kafiron ko gussay mein bharay huyey hi (na murad) lota diya unhon ney koi faeeda nahi paya aur uss jang mein Allah Taalaa khud hi momino ko kafi hogaya Allah Taalaa bara hi qooaton wala aur ghalib hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने कुफ्फार का मुँह फेर दिया, वो कोई फ़ायदा हासिल किए बिना अपने दिल की जलन के लिए यूं ही पलट गए, और मोमिनीन की तरफ़ से अल्लाह ही लड़ने के लिए काफी हो गया। अल्लाह बड़ी कुव्वत वाला और ज़बरदस्त है
عَرَبِيوَأَنزَلَ الَّذينَ ظاهَروهُم مِن أَهلِ الكِتابِ مِن صَياصيهِم وَقَذَفَ في قُلوبِهِمُ الرُّعبَ فَريقًا تَقتُلونَ وَتَأسِرونَ فَريقًا
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ने उन किताब वालों को, जिन्होंने उन (काफ़िरों) की सहायता की थी, उनके क़िलों से उतार दिया तथा उनके दिलों में भय डाल दिया। तुम उनके एक समूह को क़त्ल करते थे और एक समूह को बंदी बनाते थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir ehle kitaab mein se jin logon ne in hamla-awaron ka saath diya tha, Allah unki gadiyon(fortresses) se unhein utar laya aur unke dilon mein usne aisa roab (terror) daal diya ke aaj unmein se ek giroh ko tum qatal kar rahey ho aur dusre giroh ko qaid kar rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin ehal-e-kitab ney unn say saaz baaz kerli thi unhen (bhi) Allah Taalaa ney unn qilon say nikal diya aur unn kay dilo mein (bhi) rob bhar diya kay tum unn kay aik girho ko qatal ker rahey ho aur aik giroh ko qaidi bana rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)फिर एहले किताब में से जिन लोगों ने हमला-अवरों का साथ दिया था, अल्लाह उनकी गढ़ियों (किलों) से उन्हें उतार लाया और उनके दिलों में उसने ऐसा रोब (आतंक) डाल दिया के आज उनमे से एक गिरोह को तुम क़त्ल कर रहे हो और दूसरे गिरो ​​को क़ैद कर रहे हो
عَرَبِيوَأَورَثَكُم أَرضَهُم وَدِيارَهُم وَأَموالَهُم وَأَرضًا لَم تَطَئوها ۚ وَكانَ اللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम्हें उनकी भूमि तथा उनके घरों और उनके धनों का वारिस बना दिया और उस भूमि का भी जिसपर तुमने क़दम नहीं रखा। और अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Usne tumko unki zameen mein aur unke gharon aur unke amwal (maal) ka waris bana diya aur woh ilaka tumhein diya jisey tumne kabhi pamaal (tread) na kiya tha. Allah har cheez par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss ney tumhen unn ki zamino ka aur unn kay gharbaar ka aur unn kay maal ka waris bana ker diya aur uss zamin ka bhi jiss ko tumharay qadmon ney ronda nahi Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसने तुमको उनकी ज़मीन में और उनके घरों और उनके अमवाल (माल) का वारिस बना दिया और वो इलाक़ा तुम्हें दिया जिसे तुमने कभी पामाल न किया था। अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है
عَرَبِييا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِأَزواجِكَ إِن كُنتُنَّ تُرِدنَ الحَياةَ الدُّنيا وَزينَتَها فَتَعالَينَ أُمَتِّعكُنَّ وَأُسَرِّحكُنَّ سَراحًا جَميلًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी! आप अपनी पत्नियों से कह दें कि यदि तुम सांसारिक जीवन और उसकी शोभा चाहती हो, तो आओ, मैं तुम्हें कुछ सामान दे दूँ और अच्छे तरीक़े से रुख़्सत कर दूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi! Apni biwiyon se kaho, agar tum duniya aur uski zeenat chahti ho to aao, main tumhein kuch de dila kar bhale tareeqe se rukhsat kardoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi! Apni biwiyon say keh do kay agar tum zindaganiy-e-duniya aur zeenat-e-duniya chahati ho to aao mein tumhen kuch dey dila doon aur tumhen achaee kay sath tukhsat ker doon
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी! अपनी बीवीयों से कहो, अगर तुम दुनिया और उसकी जीनत चाहती हो तो आओ, मैं तुम्हें कुछ दे दिला कर भले तरीक़े से रुखसत कर दूं
عَرَبِيوَإِن كُنتُنَّ تُرِدنَ اللَّهَ وَرَسولَهُ وَالدّارَ الآخِرَةَ فَإِنَّ اللَّهَ أَعَدَّ لِلمُحسِناتِ مِنكُنَّ أَجرًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम अल्लाह और उसके रसूल तथा आख़िरत के घर को चाहती हो, तो अल्लाह ने तुममें से अच्छे कार्य करने वालियों के लिए बहुत बड़ा बदला तैयार कर रखा है।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar tum Allah aur uske Rasool aur daar-e-aakhirat ki talib ho to jaan lo ke tum mein se jo neiko-kar hain Allah ne unke liye bada ajar muhaiyya kar rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tumhari murad Allah aur uss ka rasool aur aakhirat ka ghar hai to (yaqeen mano kay) tum mein say nek kaam kerney waliyon kay liye Allah Taalaa ney boht zabardast ajar rakh choray hain
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर तुम अल्लाह और उसके रसूल और दार-ए-आखिरत की तालिब हो तो जान लो के तुम में से जो नीको-कर हैं अल्लाह ने उनको लिए बड़ा अजर मुहैया कर रखा है
عَرَبِييا نِساءَ النَّبِيِّ مَن يَأتِ مِنكُنَّ بِفاحِشَةٍ مُبَيِّنَةٍ يُضاعَف لَهَا العَذابُ ضِعفَينِ ۚ وَكانَ ذٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी की पत्नियो! तुममें से जो खुला दुराचार करेगी, उसे दुगनी यातना दी जाएगी। और यह अल्लाह पर अति सरल है।
Roman Urdu (Maududi)Nabi ki biwiyon, tum mein se Jo kisi sareeh fahash harkat ka irtiqab karegi usey dohra (double) azaab diya jayega. Allah ke liye yeh bahut aasaan kaam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi ki biwiyo! Tum mein say jo bhi khulli bey hayaee (ka irtikab) keray gi ussay dohra dohra azab diya jayega aur Allah Taalaa key nazdeek yeh boht hi sehal (si baat) hai
Devnagri Urdu (Maududi)नबी की बीवियां, तुम में से जो किसी सरीह फहाश हरकत का इर्तिक़ाब करेगी उसे दोहरा (डबल) अज़ाब दिया जाएगा। अल्लाह के लिए ये बहुत आसान काम है
🕮 Juz 22 begins here
عَرَبِي۞ وَمَن يَقنُت مِنكُنَّ لِلَّهِ وَرَسولِهِ وَتَعمَل صالِحًا نُؤتِها أَجرَها مَرَّتَينِ وَأَعتَدنا لَها رِزقًا كَريمًا
हिन्दी (Al-Omari)तथा तुममें से जो अल्लाह और उसके रसूल का आज्ञापालन करेगी और सत्कर्म करेगी, हम उसे उसका दोहरा प्रतिफल प्रदान करेंगे, और हमने उसके लिए सम्मानजनक जीविका तैयार कर रखी है।
Roman Urdu (Maududi)Aur tum mein se jo Allah aur uske Rasool ki itaat karegi aur neik amal karegi, usko hum dohra ajar dengey. Aur humne uske liye rizq e kareem muhaiyya kar rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum mein say jo koi Allah ki aur uss kay rasool ki farman bardaari keray gi aur nek kaam keray gi hum ussay ajar (bhi) dohra den gay aur uss kay liye hum ney behtareen rozi tayyar ker rakhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम में से जो अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करेगी और नेक अमल करेगी, उसको हम दोहरा अजर देंगे। और हमने उसके लिए रिज़क ए करीम मुहैय्या कर रक्खा है
عَرَبِييا نِساءَ النَّبِيِّ لَستُنَّ كَأَحَدٍ مِنَ النِّساءِ ۚ إِنِ اتَّقَيتُنَّ فَلا تَخضَعنَ بِالقَولِ فَيَطمَعَ الَّذي في قَلبِهِ مَرَضٌ وَقُلنَ قَولًا مَعروفًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी की पत्नियो! तुम अन्य स्त्रियों के समान नहीं हो। यदि तुम अल्लाह से डरती हो, तो कोमल भाव से बात न करो कि वह व्यक्ति लोभ करने लगे, जिसके दिल में रोग हो। और सभ्य बात बोलो।
Roman Urdu (Maududi)Nabi ki biwiyon, tum aam auraton ki tarah nahin ho. Agar tum Allah se darne wali ho to dabi zubaan se baat na kiya karo ke dil ki kharabi ka mubtala koi shaks lalach mein padh jaye, balke saaf seedhi baat karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi ki biwiyo! Tum aam aurton ki tarah nahi ho agar tum perhezgari ikhtiyar kero to naram lehjay say baat na kero kay jiss kay dil mein rog ho woh koi bura khayal keray aur haan qaeeday kay mutabiq kalam kero
Devnagri Urdu (Maududi)नबी की बीवी, तुम आम औरतों की तरह नहीं हो। अगर तुम अल्लाह से डरने वाली हो तो दबी ज़ुबान से बात ना किया करो के दिल की ख़राबी का मुबतला कोई शक्स लालच में पड़ जाए, बलके साफ सीधी बात करो
عَرَبِيوَقَرنَ في بُيوتِكُنَّ وَلا تَبَرَّجنَ تَبَرُّجَ الجاهِلِيَّةِ الأولىٰ ۖ وَأَقِمنَ الصَّلاةَ وَآتينَ الزَّكاةَ وَأَطِعنَ اللَّهَ وَرَسولَهُ ۚ إِنَّما يُريدُ اللَّهُ لِيُذهِبَ عَنكُمُ الرِّجسَ أَهلَ البَيتِ وَيُطَهِّرَكُم تَطهيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और अपने घरों में ठहरी रहो, और विगत अज्ञानता के युग की तरह श्रृंगार का प्रदर्शन न करो, तथा नमाज़ क़ायम करो, ज़कात दो तथा अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो। ऐ नबी की घर वालियो! अल्लाह चाहता है कि तुमसे मलिनता को दूर कर दे और तुम्हें पूर्ण रूप से पवित्र कर दे।
Roman Urdu (Maududi)Apne gharon mein tik kar raho aur sabiq daur e jahiliyat ki si sajh-dhaj na dikhati phiro. Namaz qayam karo, zakaat do aur Allah aur uske Rasool ki itaat karo. Allah to yeh chahta hai ke ehle bayt e Nabi se gandagi ko dur karey aur tumhein puri tarah paak karde
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apnay gharon mein qarar say raho aur qadeem jahiliyat kay zamaney ki tarah apna banao ka izhar na kero aur namaz ada kerti raho aur zakat deti raho aur Allah aur uss kay rasool ki itaat guzari kero. Allah Taalaa yehi chahta hai kay aey nabi ki ghar waliyon! Tum say woh ( her qisam ki) gandagi ko door kerday aur tumhen khoob pak ker day
Devnagri Urdu (Maududi)अपने घरों में टिक कर रहो और साबिक दौर ए जाहिलियत की सी समझ-धज ना दिखती फिरो। नमाज़ क़याम करो, ज़कात करो और अल्लाह और उसके रसूल की इत्ता करो। अल्लाह तो ये चाहता है के एहले बैत ए नबी से गंदगी को डर करे और तुम्हें पूरी तरह से पाक करदे
عَرَبِيوَاذكُرنَ ما يُتلىٰ في بُيوتِكُنَّ مِن آياتِ اللَّهِ وَالحِكمَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ كانَ لَطيفًا خَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम्हारे घरों में जो अल्लाह की आयतें और हिकमत पढ़ी जाती हैं, उन्हें याद रखो। निःसंदेह अल्लाह सूक्ष्मदर्शी, हर चीज़ की खबर रखनेवाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yaad rakkho Allah ki aayat aur hikmat ki un baaton ko jo tumhare gharon mein sunayi jati hain. Beshak Allah lateef (Subtle/gentle) aur ba-khabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tumharay gharon mein Allah ki jo aayaten aur rasool ki jo aahdees parhi jati hain unn ka zikar kerti raho yaqeenan Allah Taalaa lutf kerney wala khabar daar hai
Devnagri Urdu (Maududi)याद रखो अल्लाह की आयत और हिकमत की उन बातों को जो तुम्हारे घरों में सुनायी जाती है। बेशाक़ अल्लाह लतीफ़ (सूक्ष्म/कोमल) और बा-ख़बर है
عَرَبِيإِنَّ المُسلِمينَ وَالمُسلِماتِ وَالمُؤمِنينَ وَالمُؤمِناتِ وَالقانِتينَ وَالقانِتاتِ وَالصّادِقينَ وَالصّادِقاتِ وَالصّابِرينَ وَالصّابِراتِ وَالخاشِعينَ وَالخاشِعاتِ وَالمُتَصَدِّقينَ وَالمُتَصَدِّقاتِ وَالصّائِمينَ وَالصّائِماتِ وَالحافِظينَ فُروجَهُم وَالحافِظاتِ وَالذّاكِرينَ اللَّهَ كَثيرًا وَالذّاكِراتِ أَعَدَّ اللَّهُ لَهُم مَغفِرَةً وَأَجرًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मुसलमान पुरुष और मुसलमान स्त्रियाँ, ईमान वाले पुरुष और ईमान वाली स्त्रियाँ, आज्ञाकारी पुरुष और आज्ञाकारिणी स्त्रियाँ, सच्चे पुरुष और सच्ची स्त्रियाँ, धैर्यवान पुरुष और धैर्यवान स्त्रियाँ, विनम्रता दिखाने वाले पुरुष और विनम्रता दिखाने वाली स्त्रियाँ, सदक़ा (दान) देने वाले पुरुष और सदक़ा देने वाली स्त्रियाँ, रोज़ा रखने वाले पुरुष और रोज़ा रखने वाली स्त्रियाँ, अपने गुप्तांगों की रक्षा करने वाले पुरुष और रक्षा करने वाली स्त्रियाँ तथा अल्लाह को अत्यधिक याद करने वाले पुरुष और याद करने वाली स्त्रियाँ, अल्लाह ने इनके लिए क्षमा तथा महान प्रतिफल तैयार कर रखा है।
Roman Urdu (Maududi)Bil yaqeen jo mard aur jo auratein muslim hain, momin hain, mutii-e-farmaan hain, raast baaz hain, saabir hain, Allah ke aagey jhukne waley hain, sadaqa denay waley hain, roza rakhne waley hain, apni sharamgaahon ki hifazat karne waley hain, aur Allah ko kasrat se yaad karne waley hain, Allah ne unke liye magfirat aur bada ajar muhaiyya kar rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bey shak musalman mard aur musalman aurten momin mard aur momin aurten farman bardaari kerney walay mard aur farman bardar aurten raast baaz mard aur raast baaz aurten aajzi kerney walay mard aur aajzi kerney wali aurten kheyraat kerney walay mard aur kheyraat kerney wali aurten rozay rakhney walay mard aur roza rakhney wali aurten apni sharamgah ki hifazat kerney walay mard aur hifazat kerney waliyan ba-kasrat Allah ka ziker kerney walay aur zikar kerney waliyan inn (sab kay) liye Allah Taalaa ney (wasee) maghfirat aur bara sawab tayyar ker rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)बिल यकीन जो मर्द और जो औरतें मुस्लिम हैं, मोमिन हैं, मुती-ए-फ़रमान हैं, रस्त बाज़ हैं, साबिर हैं, अल्लाह के आगे झुकने वाले हैं, सदक़ा देने वाले हैं, रोज़ा रखने वाले हैं हैं, अपनी शर्मगाहों की हिफाज़त करने वाले हैं, और अल्लाह को कसरत से याद करने वाले हैं, अल्लाह ने उनके लिए मगफिरत और बड़ा अजर मुहैय्या कर रखा है
عَرَبِيوَما كانَ لِمُؤمِنٍ وَلا مُؤمِنَةٍ إِذا قَضَى اللَّهُ وَرَسولُهُ أَمرًا أَن يَكونَ لَهُمُ الخِيَرَةُ مِن أَمرِهِم ۗ وَمَن يَعصِ اللَّهَ وَرَسولَهُ فَقَد ضَلَّ ضَلالًا مُبينًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा किसी ईमान वाले पुरुष और ईमान वाली स्त्री को यह अधिकार नहीं कि जब अल्लाह और उसका रसूल किसी मामले का निर्णय कर दें, तो उनके लिए अपने मामले में कोई अख़्तियार बाक़ी रहे। और जो अल्लाह और उसके रसूल की अवज्ञा करे, वह खुली गुमराही में पड़ गया।
Roman Urdu (Maududi)Kisi momin mard aur kisi momin aurat ko yeh haqq nahin hai ke jab Allah aur uska Rasool kisi maamle ka faisla karde to phir usey apne us maamle mein khud faisla karne ka ikhtiyar hasil rahey. Aur jo koi Allah aur uske Rasool ki na-farmani karey to woh sareeh gumrahi mein padh gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (dekho) kissi momin mard-o-aurat ko Allah aur uss kay rasool kay faislay kay baad apnay kissi amar ka koi ikhtiyar baqi nahi rehta (yaad rakho) Allah Taalaa aur uss kay rasool ki jo bhi na farmani keray ga woh sareeh gumrahee mein paray ga
Devnagri Urdu (Maududi)किसी मोमिन मर्द और किसी मोमिन औरत को ये हक़ नहीं है के जब अल्लाह और उसका रसूल किसी मामले का फैसला करदे तो फिर उसे अपने मामले में खुद फैसला करने का इख्तियार हासिल रहे। और जो कोई अल्लाह और उसके रसूल की ना-फरमानी करे तो वो सारे गुमराह में पढ़ गया
عَرَبِيوَإِذ تَقولُ لِلَّذي أَنعَمَ اللَّهُ عَلَيهِ وَأَنعَمتَ عَلَيهِ أَمسِك عَلَيكَ زَوجَكَ وَاتَّقِ اللَّهَ وَتُخفي في نَفسِكَ مَا اللَّهُ مُبديهِ وَتَخشَى النّاسَ وَاللَّهُ أَحَقُّ أَن تَخشاهُ ۖ فَلَمّا قَضىٰ زَيدٌ مِنها وَطَرًا زَوَّجناكَها لِكَي لا يَكونَ عَلَى المُؤمِنينَ حَرَجٌ في أَزواجِ أَدعِيائِهِم إِذا قَضَوا مِنهُنَّ وَطَرًا ۚ وَكانَ أَمرُ اللَّهِ مَفعولًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ नबी!) आप (वह समय याद करें) जब आप उस व्यक्ति से, जिसपर अल्लाह ने उपकार किया तथा जिसपर आपने (भी) उपकार किया था, कह रहे थे : अपनी पत्नी को अपने पास रोके रखो तथा अल्लाह से डरो। और आप अपने मन में वह बात छिपा रहे थे, जिसे अल्लाह प्रकट करने वाला था। तथा आप लोगों से डर रहे थे, हालाँकि अल्लाह अधिक योग्य है कि आप उससे डरें। फिर जब ज़ैद ने उस (स्त्री) से अपनी आवश्यकता पूरी कर ली, तो हमने आपसे उसका विवाह कर दिया, ताकि ईमान वालों पर अपने मुँह बोले (लेपालक) बेटों की पत्नियों के विषय में कोई तंगी न रहे, जब वे उनसे अपनी आवश्यकता पूरी कर लें। तथा अल्लाह का आदेश तो पूरा होकर ही रहता है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), yaad karo woh mauqa jab tum us shaks se keh rahey thay jispar Allah ne aur tumne ehsan kiya tha ke “Apni biwi ko na chodh aur Allah se darr” us waqt tum apne dil mein woh baat chupaye huey thay jisey Allah kholna chahta tha. Tum logon se darr rahey thay, halaanke Allah iska zyada haqdar hai ke tum ussey daro. Phir jab zaid ussey apni haajat puri kar chuka to humne us (mutallaqa khatun) ka tumse nikah kardiya, taa-ke momino par apne mooh boley beton(sons) ki biwiyon ke maamle mein koi tanggi na rahey jabke woh unse apni haajat puri kar chuke hon. Aur Allah ka hukum to amal mein aana hi chahiye tha
Roman Urdu (Junagarhi)(yaad rakho) jab kay tu uss shaks say keh raha tha jiss per Allah ney bhi inam kiya aur tu ney bhi kay tu apni biwi ko apnay pass rakh aur Allah say darr aur tu apnay dil mein woh baat chupaye huyey tha jissay Allah zahir kerney wala tha aur tu logo say khof khata tha halankay Allah Taalaa iss ka ziyada haq daar tha kay tu uss say daray pus jab kay zaid ney uss aurat say apni gharaz poori kerli hum ney ussay teray nikkah mein dey diya takay musalmano per apnay ley palakon ki biwiyon kay baray mein kissi tarah ki tangi na rahey jab kay woh apni gharaz unn say poori na ker len Allah ka (yeh) hukum to hoker hi rehney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), याद करो वो मौका जब तुम हमें शक्स से कह रहे थे, जिसपर अल्लाह ने और तुमने एहसान किया था के "अपनी बीवी को ना छोड़ और अल्लाह से डर" हमें वक्त तुम अपने दिल में वो बात छुपाये हुए थे जिसे अल्लाह खोलना चाहता था। तुम लोगों से डर रहे थे, हलांके अल्लाह इसका ज़्यादा हक़दार है के तुम उससे डरो। फिर जब ज़ैद उसे अपनी हाजत पूरी कर चुका तो हमने उससे (मुतल्लका खातून) का तुमसे निकाह करदिया, ता-के मोमिनो पर अपने मुंह बोले बेटों (बेटों) की बीवीयों के मामले में कोई तंगगी ना रहे जबके वो उनसे अपनी हाजत पूरी कर चुके हों। और अल्लाह का हुकुम तो अमल में आना ही चाहिए था
عَرَبِيما كانَ عَلَى النَّبِيِّ مِن حَرَجٍ فيما فَرَضَ اللَّهُ لَهُ ۖ سُنَّةَ اللَّهِ فِي الَّذينَ خَلَوا مِن قَبلُ ۚ وَكانَ أَمرُ اللَّهِ قَدَرًا مَقدورًا
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हिन्दी (Al-Omari)नबी पर उस कार्य में कोई तंगी (पाप) नहीं है, जो अल्लाह ने उसके लिए निर्धारित किया है। अल्लाह का यही नियम रहा है उन लोगों के बारे में भी जो पहले गुज़र चुके हैं। तथा अल्लाह का आदेश एक निश्चित निर्णय होता है।
Roman Urdu (Maududi)Nabi par kisi aisey kaam mein koi rukawat nahin hai jo Allah ne uske liye muqarrar kardiya ho. Yahi Allah ki sunnat un sab ambiya (prophets) ke maamle mein rahi hai jo pehle guzar chuke hain aur Allah ka hukum ek qataii tai-shuda faisla hota hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo cheezen Allah Taalaa ney apnay nabi kay liye muqarrar ki hain unn mein nabi per koi haraj nahi (yehi) Allah ka dastoor unn mein bhi raha jo pehlay huyey aur Allah Taalaa kay kaam andazay per muqarrar kiye huyey hain
Devnagri Urdu (Maududi)नबी पर किसी ऐसे काम में कोई रुकावत नहीं है जो अल्लाह ने उसके लिए मुकर्रर कर दिया हो। याही अल्लाह की सुन्नत उन सब अंबिया (पैगंबरों) के मामले में रह रही है जो पहले गुजर चुके हैं और अल्लाह का हुकुम एक कताई ताई-शुदा फैसला होता है
عَرَبِيالَّذينَ يُبَلِّغونَ رِسالاتِ اللَّهِ وَيَخشَونَهُ وَلا يَخشَونَ أَحَدًا إِلَّا اللَّهَ ۗ وَكَفىٰ بِاللَّهِ حَسيبًا
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हिन्दी (Al-Omari)जो अल्लाह के संदेश पहुँचाते हैं तथा उससे डरते हैं और अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरते, और अल्लाह हिसाब लेने के लिए काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)(Yeh Allah ki sunnat hai un logon ke liye) jo Allah ke paighaamat pahunchate hain aur usi sey darte hain aur ek khuda ke siwa kisi se nahin darte, aur muhasibe (accountability) ke liye bas Allah hi kaafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh sab aisay thay kay Allah Taalaa key ehkaam phonchaya kertay thay aur Allah hi say dartay thay aur Allah kay siwa kissi say nahi dartay thay aur Allah Taalaa hisab leney kay liye kafi hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ये अल्लाह की सुन्नत है उन सब अंबिया (पैगंबर) के मामले में) जो अल्लाह के पैगामात मांगते हैं और उसी से डरते हैं और एक खुदा के सिवा किसी से नहीं डरते, और मुहासिबे (जवाबदेही) के लिए बस अल्लाह ही काफी है
عَرَبِيما كانَ مُحَمَّدٌ أَبا أَحَدٍ مِن رِجالِكُم وَلٰكِن رَسولَ اللَّهِ وَخاتَمَ النَّبِيّينَ ۗ وَكانَ اللَّهُ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)मुहम्मद तुम्हारे पुरुषों में से किसी के पिता नहीं हैं। बल्कि वह अल्लाह के रसूल और नबियों के समापक हैं। और अल्लाह प्रत्येक वस्तु को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Logon) Muhammad tumhare mardon mein se kisi ke baap nahin hain, magar woh Allah ke Rasool aur khatim-un-Nabiyeen hain, Aur Allah har cheez ka ilm rakhne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)(logo) tumharay mardo mein say kissi kay baap Muhammad (PBUH) nahi lekin aap Allah Taalaa kay rasool hain aur tamam nabiyon kay khatam kerney walay aur Allah Taalaa her cheez ka (ba-khoobi) jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(लोगन) मुहम्मद तुम्हारे मर्दों में से किसी के बाप नहीं हैं, मगर वो अल्लाह के रसूल और ख़तीम-उन-नबियिन हैं, और अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखने वाला है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا اذكُرُوا اللَّهَ ذِكرًا كَثيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अल्लाह को बहुलता से याद करो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon! jo imaan laaye ho, Allah ko kasrat se yaad karo
Roman Urdu (Junagarhi)Musalmano! Allah Taalaa ka zikar boht ziyada kero
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों! जो ईमान लाए हो, अल्लाह को कसरत से याद करो
عَرَبِيوَسَبِّحوهُ بُكرَةً وَأَصيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा सुबह व शाम उसकी पवित्रता बयान करो।
Roman Urdu (Maududi)Aur subah o shaam uski tasbeeh karte raho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur subha-o-shaam uss ki pakeezgi biyan kero
Devnagri Urdu (Maududi)और सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते रहो
عَرَبِيهُوَ الَّذي يُصَلّي عَلَيكُم وَمَلائِكَتُهُ لِيُخرِجَكُم مِنَ الظُّلُماتِ إِلَى النّورِ ۚ وَكانَ بِالمُؤمِنينَ رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)वही है, जो तुमपर दया अवतरित करता है और उसके फ़रिश्ते भी (तुम्हारे लिए प्रार्थना करते हैं), ताकि वह तुम्हें अँधेरों से निकाल कर प्रकाश की ओर लाए। तथा वह ईमान वालों पर बहुत दयालु है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jo tumpar rehmat farmata hai aur uske malaika tumhare liye dua e rehmat karte hain taa-ke woh tumhein tareekiyon (andhere) se roshni mein nikal laye. Woh momino par bahut meharbaan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi hai jo tum per apni rehmaten bhejta hai aur uss kay farishtay (tumahray liye dua-e-rehmat kertay hain) takay woh tumhen andheron say ujalay ki taraf ley jaye aur Allah Taalaa momino per boht hi meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जो तुम्हारे लिए रहमत फरमाता है और उसके मलिका तुम्हारे लिए दुआ ए रहमत करते हैं ता-के वो तुम्हें तरीकियों (अंधेरे) से रोशनी में निकल लाये. वो मोमिनो पर बहुत मेहरबान है
عَرَبِيتَحِيَّتُهُم يَومَ يَلقَونَهُ سَلامٌ ۚ وَأَعَدَّ لَهُم أَجرًا كَريمًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन वे अपने पालनहार से मिलेंगे, उनका अभिवादन सलाम होगा। और उसने उनके लिए सम्मानजनका प्रतिफल तैयार कर रखा है।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz woh ussey milenge unka isteqbal salaam se hoga aur unke liye Allah ne bada baa-izzat ajar faraham kar rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din yeh (Allah say) mulaqat keren gay inn ka tohfa salam hoga inn kay liye Allah Taalaa ney ba-izzat ajar tayyar ker rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज वो उसे मिलेंगे उनका इस्तेकबाल सलाम से होगा और उनके लिए अल्लाह ने बड़ा बा-इज्जत अजर फरहम कर रखा है
عَرَبِييا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِنّا أَرسَلناكَ شاهِدًا وَمُبَشِّرًا وَنَذيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी! हमने आपको गवाही देने वाला, शुभ सूचना देने वाला और डराने वाला बनाकर भेजा है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, humne tumhein bheja hai gawah bana kar, basharat (khush khabri) dene wala aur darane wala bana kar
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi! Yaqeenan hum ney hi aap ko (rasool bana ker) gawahiyan denay wala khuskhabriyan sunanay wala aagah kerney wala bheja hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, हमने तुम्हें भेजा है गवाह बना कर, बशारत (खुश खबरी) देने वाला और डराने वाला बना कर
عَرَبِيوَداعِيًا إِلَى اللَّهِ بِإِذنِهِ وَسِراجًا مُنيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह की अनुमति से उसकी ओर बुलाने वाला और एक प्रकाशमान दीप (बनाकर भेजा है)।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki ijazat se uski taraf dawat dene wala bana kar aur roshan chiraag bana kar
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah kay hukum say uss ki taraf bulaney wala aur roshan chiragh
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की इजाज़त से उसकी तरफ दावत देने वाला बना कर और रोशन चिराग बना कर
عَرَبِيوَبَشِّرِ المُؤمِنينَ بِأَنَّ لَهُم مِنَ اللَّهِ فَضلًا كَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप ईमान वालों को शुभ सूचना दे दें कि उनके लिए अल्लाह की ओर से बड़ा अनुग्रह है।
Roman Urdu (Maududi)Basharat dedo un logon ko jo (tumpar) iman laye hain ke unke liye Allah ki taraf se bada fazal hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap momino ko khushkhabri suna dijiyey! Kay unn kay liye Allah ki taraf say boht bara fazal hai
Devnagri Urdu (Maududi)बशारत देदो उन लोगों को जो (तुम्हारा) ईमान लाए हैं के उनके लिए अल्लाह की तरफ से बड़ा फजल है
عَرَبِيوَلا تُطِعِ الكافِرينَ وَالمُنافِقينَ وَدَع أَذاهُم وَتَوَكَّل عَلَى اللَّهِ ۚ وَكَفىٰ بِاللَّهِ وَكيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप काफ़िरों और मुनाफ़िकों की बात न मानें, तथा उनके कष्ट पहुँचाने की परवाह न करें, और अल्लाह ही पर भरोसा रखें, तथा अल्लाह काम बनाने के लिए काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Aur hargiz na daboo kuffar-o-munafiqeen se, koi parwah na karo unki aziyat rasani (taklif/ hurt) ki aur bharosa karlo Allah par. Allah hi iske liye kafi hai ke aadmi apne maamlaaat uske supurd karde
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kafiron aur munafiqon ka kehna na maniyey! Aur jo eeza (inn ki taraf say phonchay) uss ka khayal na kijiyey Allah per bharosa kiyey rahen aur kafi hai Allah Taalaa kaam bananay wala
Devnagri Urdu (Maududi)और हरगिज़ ना दब्बू कुफ़्फ़ार-ओ-मुनाफ़ीक़ीन से, कोई परवा न करो उनकी अज़ियात रसानी (तकलीफ़/चोट) की और भरोसा करलो अल्लाह पर। अल्लाह ही इसके लिए काफी है के आदमी अपनी गलती उसके सुपुर्द करदे
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِذا نَكَحتُمُ المُؤمِناتِ ثُمَّ طَلَّقتُموهُنَّ مِن قَبلِ أَن تَمَسّوهُنَّ فَما لَكُم عَلَيهِنَّ مِن عِدَّةٍ تَعتَدّونَها ۖ فَمَتِّعوهُنَّ وَسَرِّحوهُنَّ سَراحًا جَميلًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! जब तुम ईमान वाली स्त्रियों से विवाह करो, फिर उन्हें हाथ लगाने से पहले ही तलाक़ दे दो, तो तुम्हारे लिए उनपर कोई इद्दत नहीं, जिसकी तुम गिनती करो। अतः तुम उन्हें कुछ सामान दे दो और उन्हें भलाई के साथ विदा कर दो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, jab tum momin auraton se nikah karo aur phir unhein haath lagane se pehle talaq de do to tumhari taraf se unpar koi iddat (waiting period) lazim nahin hai jiske pooray honay ka tum mutalba kar sako. Lihaza unhein kuch maal do aur bhale tareeqe se rukhsat kardo
Roman Urdu (Junagarhi)Aey momin! Jab tum momin auraton say nikkah kero phir hath laganey say pehlay (hi) tallaq dey do to unn per tumahra koi haq iddat ka nahi jissay tum shumaar kero pus tum kuch na kuch enhen dey do aur bhalay tareeq per unhen rukhsat kerdo
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम मोमिन औरतों से निकाह करो और फिर उन्हें हाथ लगाने से पहले तलाक दे दो तो तुम्हारी तरफ से अनपार कोई इद्दत (प्रतीक्षा अवधि) लाज़िम नहीं है जिसका पूरा होना का तुम मुतलबा कर सको. लिहाज़ा उन्हें कुछ माल दो और भले तरीक़े से रुखसत करदो
عَرَبِييا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِنّا أَحلَلنا لَكَ أَزواجَكَ اللّاتي آتَيتَ أُجورَهُنَّ وَما مَلَكَت يَمينُكَ مِمّا أَفاءَ اللَّهُ عَلَيكَ وَبَناتِ عَمِّكَ وَبَناتِ عَمّاتِكَ وَبَناتِ خالِكَ وَبَناتِ خالاتِكَ اللّاتي هاجَرنَ مَعَكَ وَامرَأَةً مُؤمِنَةً إِن وَهَبَت نَفسَها لِلنَّبِيِّ إِن أَرادَ النَّبِيُّ أَن يَستَنكِحَها خالِصَةً لَكَ مِن دونِ المُؤمِنينَ ۗ قَد عَلِمنا ما فَرَضنا عَلَيهِم في أَزواجِهِم وَما مَلَكَت أَيمانُهُم لِكَيلا يَكونَ عَلَيكَ حَرَجٌ ۗ وَكانَ اللَّهُ غَفورًا رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी! निःसंदेह हमने आपके लिए आपकी वे पत्नियाँ हलाल (वैध) कर दी हैं, जिन्हें आपने उनका महर चुका दिया है, तथा वे लौंडियाँ (भी) जो आपके स्वामित्व में हैं, उन लौंडियों में से जो अल्लाह ने ग़नीमत के धन से आपको प्रदान की हैं। तथा आपके चाचा की बेटियाँ, आपकी फूफियों की बेटियाँ, आपके मामा की बेटियाँ और आपकी मौसियों की बेटियाँ, जिन्होंने आपके साथ हिजरत की है। तथा वह ईमान वाली महिला भी, जो स्वयं को नबी के लिए दान कर दे, यदि नबी उससे विवाह करना चाहे। यह विशेष रूप से आपके लिए है, अन्य ईमान वालों के लिए नहीं। निश्चय ही हम जानते हैं जो कुछ हमने उनपर उनकी पत्नियों तथा उनके स्वामित्व में आई हुई दासियों के संबंध में फ़र्ज़ किया है; ताकि तुमपर कोई तंगी न रहे। और अल्लाह बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत दयालु है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, humne tumhare liye halal kardi tumhari woh biwiyan jinke mehar tumne ada kiye hain, aur woh auratein jo Allah ki ata karda laundiyan (slave-girls) mein se tumhari milkiyat mein aayein.Aur tumhari woh chacha-zaad aur phupi-zaad aur mamu-zaad aur khala-zaad behnein jinhon ne tumhare saath hijrat ki hai. Aur woh momin aurat jisne apne aap ko Nabi ke liye heba kiya ho agar Nabi usey nikah mein lena chahe. Yeh riayat (priviledge) khaalisatan tumhare liye hai, dusre momino ke liye nahin hai. Humko maloom hai ke aam momino par unki biwiyon aur laundiyon (slave-girls) ke barey mein humne kya hudood (restrictions) aayad kiye hain. (Tumhein in hudood se humne is liye mustsna (exempted) kiya hai) taa-ke tumhare upar koi tanggi na rahey. Aur Allah gafoor o raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi hum ney teray liye teri woh biwiyan halal kerdi hain jinehn tum unn kay mehar day chuka hai aur woh londiyan bhi jo Allah Taalaa ney ghanimat mein tujhay di hain aur teray chacha ki larkiyan aur phophiyon ki betiyan aur teray mamo ki betiyan aur teri khalaon ki betiyan bhi jinhon ney teray sath hijrat ki hai aur woh ba-emaan aurat jo apna nafs nabi ko hiba ker day yeh uss soorat mein kay khud nabi bhi uss say nikkah kerna chahaye yeh khas tor per sirf teray liye hi hai aur momino kay liye hum issay ba-khoobi jantay hain jo hum ney inn per aur inn ki biwiyon aur londiyon kay baray mein (ehkaam) muqarrar ker rakhay hain yeh iss liye kay tujh per haraj waqey na ho Allah Taalaa boht bakhshney aur baray reham wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, हमने तुम्हारे लिए हलाल कर दी तुम्हारी वो बीवीयां जिनके मेहर तुमने अदा की हैं, और वो औरतें जो अल्लाह की अता करदा लौंडियां (गुलाम-लड़कियां) में से तुम्हारी मिल्कियत में आइए.और तुम्हारी वो चाचा-ज़ाद और फुपी-ज़ाद और मामू-ज़ाद और खाला-ज़ाद बहनें जिन्हों ने तुम्हारे साथ हिजरत की है। और वो मोमिन औरत जिसने अपने आप को नबी के लिए हेबा किया हो अगर नबी उसे निकाह में लेना चाहे। ये रियात (विशेषाधिकार) खालीसतन तुम्हारे लिए है, दूसरे मोमिनो के लिए नहीं है। हमको मालूम है कि आम मोमिनो पर उनकी बीवीयां और लौंडियां (गुलाम लड़कियां) के बारे में हमने क्या हुदूद (प्रतिबंध) आयद किये हैं। (तुम्हें हुडदंग से हमने इस लिए मुस्तस्ना (छूट) किया है) ता-के तुम्हारे ऊपर कोई तंगगी ना रहे। और अल्लाह गफूर ओ रहीम है
عَرَبِي۞ تُرجي مَن تَشاءُ مِنهُنَّ وَتُؤوي إِلَيكَ مَن تَشاءُ ۖ وَمَنِ ابتَغَيتَ مِمَّن عَزَلتَ فَلا جُناحَ عَلَيكَ ۚ ذٰلِكَ أَدنىٰ أَن تَقَرَّ أَعيُنُهُنَّ وَلا يَحزَنَّ وَيَرضَينَ بِما آتَيتَهُنَّ كُلُّهُنَّ ۚ وَاللَّهُ يَعلَمُ ما في قُلوبِكُم ۚ وَكانَ اللَّهُ عَليمًا حَليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप अपनी पत्नियों में से जिसे चाहें (उसकी बारी) स्थगित कर दें, और जिसे चाहें अपने साथ रखें, और जिन्हें आपने अलग रखा है, उनमें से जिसकी भी आप (अपने पास रखने की) इच्छा करें, तो इसमें आपपर कोई दोष नहीं है। यह इस बात के अधिक निकट है कि उनकी आँखें ठंडी रहें और वे शोकाकुल न हों, तथा जो कुछ आप उन्हें दें, उससे वे सब संतुष्ट रहें। और जो कुछ तुम्हारे दिलों में है, अल्लाह उससे अवगत है। और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, बहुत सहनशील है।
Roman Urdu (Maududi)Tumko ikhtiyar diya jata hai ke apni biwiyon mein se jisko chaho apne se alag rakkho, jisey chaho apne saath rakkho aur jisey chaho alag rakhne ke baad apne paas bula lo. Is maamle mein tumpar koi muzaiqa (blame) nahin hai. Is tarah zyada mutawaqqe (likely) hai ke unki aankhein thandi rahengi aur woh ranjeeda (grieve) na hongi. Aur jo kuch bhi tum unko dogey uspar woh sab raazi rahengi. Allah jaanta hai jo kuch tum logon ke dilon mein hai, aur Allah aleem o haleem(All-Forbearing) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein say jissay tu chahaye door rakh day aur jissay chahaye apnay pass rakh ley aur agar tu unn mein say bhi kissi ko apnay pass bula ley jinhen tu ney alag ker rakha tha to tujh per koi gunah nahi iss mein iss baat ki ziyada tawakka hai kay inn aurton ki aankhen thandi rahen aur woh ranjeedah na hon aur jo kuch bhi tu enhen dey dey iss per sab ki sab razi rahen tumahray dilon mein jo kuch hai ussay Allah (khoob) janta hai. Allah Taalaa bara hi ilm aur hilm wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुमको इख्तियार दिया जाता है कि अपनी बीवीयों में से जिसको चाहो अपने से अलग रख लो, जिसे चाहो अपने साथ रख लो और जिसे चाहो अलग रखने के बाद अपने पास बुला लो। क्या मामले में तुमपर कोई मुज़ाइक़ा (दोष) नहीं है। क्या इस तरह मुतवक्कि (संभावना) है कि उनकी आंखें ठंडी रहेंगी और वो रंजीदा (शोक) न होंगी। और जो कुछ भी तुम उनको दोगे उसपर वो सब राजी रहेगी। अल्लाह जानता है जो कुछ तुम लोगों के दिलों में है, और अल्लाह आलिम ओ हलीम है
عَرَبِيلا يَحِلُّ لَكَ النِّساءُ مِن بَعدُ وَلا أَن تَبَدَّلَ بِهِنَّ مِن أَزواجٍ وَلَو أَعجَبَكَ حُسنُهُنَّ إِلّا ما مَلَكَت يَمينُكَ ۗ وَكانَ اللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ رَقيبًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) इसके पश्चात् आपके लिए अन्य स्त्रियाँ हलाल (वैध) नहीं हैं, और न यह कि आप उन्हें दूसरी पत्नियों से बदलें, यद्यपि उनका सौंदर्य आपको भा जाए, सिवाय उन दासियों के जो आपके स्वामित्व में आ जाएँ। तथा अल्लाह प्रत्येक वस्तु का निरीक्षक है।
Roman Urdu (Maududi)Iske baad tumhare liye dusri auratein halal nahin hain. Aur na iski ijazat hai ke unki jagah aur biwiyan le aao khwah unka husn (beauty) tumhein kitna hi pasand ho.Albatta laundiyon ki tumhein ijazat hai. Allah har cheez par nigran hai
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kay baad aurten aap kay liye halal nahi aur na yeh (durust hai) kay inn kay badlay aur aurton say (nikkah keray) agarcheh unn ki soorat achi bhi lagti ho magar jo teri mamlooka hon. Aur Allah Taalaa her cheez ka (poora) nigehban hai
Devnagri Urdu (Maududi)इसके बाद तुम्हारे लिए दूसरी औरतें हलाल नहीं हैं। और ना इसकी इजाज़त है के उनकी जगह और बीवीयां ले आओ ख़्वाह उनका हुस्न (खूबसूरती) तुम्हें कितना ही पसंद हो। अलबत्ता लौंडियों की तुम्हें इजाज़त है। अल्लाह हर चीज़ पर निगरानी है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَدخُلوا بُيوتَ النَّبِيِّ إِلّا أَن يُؤذَنَ لَكُم إِلىٰ طَعامٍ غَيرَ ناظِرينَ إِناهُ وَلٰكِن إِذا دُعيتُم فَادخُلوا فَإِذا طَعِمتُم فَانتَشِروا وَلا مُستَأنِسينَ لِحَديثٍ ۚ إِنَّ ذٰلِكُم كانَ يُؤذِي النَّبِيَّ فَيَستَحيي مِنكُم ۖ وَاللَّهُ لا يَستَحيي مِنَ الحَقِّ ۚ وَإِذا سَأَلتُموهُنَّ مَتاعًا فَاسأَلوهُنَّ مِن وَراءِ حِجابٍ ۚ ذٰلِكُم أَطهَرُ لِقُلوبِكُم وَقُلوبِهِنَّ ۚ وَما كانَ لَكُم أَن تُؤذوا رَسولَ اللَّهِ وَلا أَن تَنكِحوا أَزواجَهُ مِن بَعدِهِ أَبَدًا ۚ إِنَّ ذٰلِكُم كانَ عِندَ اللَّهِ عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! नबी के घरों में प्रवेश न करो, सिवाय इसके कि तुम्हें भोजन के लिए अनुमति दी जाए। परंतु भोजन पकने की प्रतीक्षा में (देर तक बैठे) न रहो। बल्कि जब बुलाए जाओ, तो प्रवेश करो। फिर जब भोजन कर लो, तो निकल जाओ। बातों में न लगे रहो। निश्चय ही इससे नबी को कष्ट पहुँचता है। लेकिन उन्हें तुमसे (बाहर जाने को कहने में) शर्म आती है। किंतु अल्लाह सत्य बात से नहीं शरमाता। तथा जब तुम नबी की पत्नियों से कुछ माँगो, तो पर्दे के पीछे से माँगो। यह तुम्हारे दिलों तथा उनके दिलों के लिए अधिक पवित्रता का कारण है। और तुम्हारे लिए यह उचित नहीं है कि तुम अल्लाह के रसूल को कष्ट पहुँचाओ, और न यह कि तुम उनके पश्चात् कभी उनकी पत्नियों से विवाह करो। निःसंदेह यह अल्लाह के निकट बहुत बड़ा (पाप) है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo imaa laye ho, Nabi ke gharon mein bila ijazat na chale aaya karo, na khane ka waqt taakte raho. Haan agar tumhein khane par bulaya jaye to zaroor aao, magar jab khana khalo to muntashir (disperse) ho jaao, baatein karne mein na lagey raho. Tumhari yeh harakatein Nabi ko takleef deti hain, magar woh sharam ki wajah se kuch nahin kehte aur Allah haqq baat kehne mein nahin sharmata. Nabi ki biwiyon se agar tumhein kuch maangna ho to purday ke peechey se maanga karo. Yeh tumhare aur unke dilon ki paakeezgi ke liye zyada munasib tareeqa hai. Tumhare liye yeh hargiz jayiz nahin ke Allah ke Rasool ko takleef do, aur na yeh jayiz hai ke unke baad unki biwiyon se nikah karo.Yeh Allah ke nazdeek bahut bada gunaah hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Jab tak tumhen ijazat na di jaye tum nabi kay gharon mein na jaya kero khaney kay liye aisay waqt mein kay uss kay pakney ka intizar kertay raho bulkay jab bulaya jaye jao aur jab kha chuko nikal kharay ho wahin baaton mein mashghool na hojaya kero. Nabi ko tumhari iss baat say takleef hoti hai. To woh lehaaz ker jatay hain aur Allah Taalaa (biyan-e-) haq mein kissi ka lehaaz nahi kerta jab tum nabi ki biwiyon say koi cheez talab kero to parday kay peechay say talab kero tumahray aur unn kay dilon kay liye kamil pakeezgi yehi hai na tumhen yeh jaeez hai kay tum rasool Allah ko takleef do aur na tumhen yeh halal hai kay aap kay baad kisi waqt bhi aap ki biwiyon say nikkah kero. (yaad rakho) Allah ka nazdeek yeh boht bara (gunah) hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो इमा लाए हो, नबी के घरों में बिला इजाज़त न चले आया करो, न खाने का वक़्त निकलता रहो। हां अगर तुम्हें खाने पर बुलाया जाए तो जरूर आओ, मगर जब खाना खालो तो मुंतशिर (फैलाओ) हो जाओ, बातें करने में ना लगे रहो। तुम्हारी ये हरकतें नबी को तकलीफ़ देती हैं, मगर वो शरम की वजह से कुछ नहीं कहते और अल्लाह हक़ बात कहने में शरमाता नहीं। नबी की बीवीयों से अगर तुम्हें कुछ माँगना हो तो पूरे दिन के पीछे से माँगा करो। ये तुम्हारे और उनके दिलों की पाकीज़गी के लिए ज़्यादा मुनासिब तरीक़ा है। तुम्हारे लिए ये हरगिज जायज नहीं के अल्लाह के रसूल को तकलीफ दो, और ना ये जायज है कि उनके बाद उनकी बीवीयों से निकाह करो। ये अल्लाह के नजरिए बहुत बड़ा गुनाह है
عَرَبِيإِن تُبدوا شَيئًا أَو تُخفوهُ فَإِنَّ اللَّهَ كانَ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)यदि तुम किसी चीज़ को प्रकट करो अथवा उसे गुप्त रखो, अल्लाह प्रत्येक वस्तु को अच्छी तरह जानता है।
Roman Urdu (Maududi)Tum khwah koi baat zahir karo ya chupao, har baat ka ilm hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum kissi cheez ko zahir kero ya makhfi rakho Allah to her her cheez ka ba-khoobi ilm rakhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम ख्वाह कोई बात जाहिर करो या छुपाओ, हर बात का इल्म है
عَرَبِيلا جُناحَ عَلَيهِنَّ في آبائِهِنَّ وَلا أَبنائِهِنَّ وَلا إِخوانِهِنَّ وَلا أَبناءِ إِخوانِهِنَّ وَلا أَبناءِ أَخَواتِهِنَّ وَلا نِسائِهِنَّ وَلا ما مَلَكَت أَيمانُهُنَّ ۗ وَاتَّقينَ اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ كانَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ شَهيدًا
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हिन्दी (Al-Omari)स्त्रियों पर अपने पिताओं, अपने बेटों, अपने भाइयों, अपने भाइयों के बेटों (भतीजों), अपनी बहनों के बेटों (भांजों), अपनी (मेल-जोल की) स्त्रियों और उन (दासों एवं दासियों) से, जो उनके स्वामित्व में हैं, पर्दा न करने में कोई पाप नहीं है। और (ऐ स्त्रियो) तुम अल्लाह से डरती रहो। निःसंदेह अल्लाह प्रत्येक चीज़ का साक्षी है।
Roman Urdu (Maududi)Azwaj (wives) Nabi ke liye ismein koi muzahiqa (blameworthy) nahin hai ke unke baap, unke betey, unke bhai, unke bhatije, unke bhanje, unke mail-jol ki auratein aur unke mamluk gharon mein aayein. (Aey auraton) tumhein Allah ki nafarmani se parheiz karna chahiye. Allah har cheez par nigaah rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unn aurton per koi gunah nahi kay woh apnay bapon aur apnay beton aur bhaiyon aur bhatijon aur bhanjon aur apni (mail jol ki) aurton aur milkiyat kay matehaton (londi, ghulam) kay samney hon. (aurton!) Allah say darti raho. Allah Taalaa yaqeenan her cheez per shahid hai
Devnagri Urdu (Maududi)अज़वाज़ (पत्नियाँ) नबी के लिए इसमें कोई मुज़हिक़ा (दोषपूर्ण) नहीं है कि उनके बाप, उनके बेटे, उनके भाई, उनके भतीजे, उनके भांजे, उनके मेल-जोल की औरतें और उनके ममलुक घरों में आएं। (ऐ औरतें) तुम्हें अल्लाह की नफ़रमानी से बचना चाहिए। अल्लाह हर चीज़ पर निगाह रखता है
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ وَمَلائِكَتَهُ يُصَلّونَ عَلَى النَّبِيِّ ۚ يا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا صَلّوا عَلَيهِ وَسَلِّموا تَسليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह तथा उसके फ़रिश्ते नबी पर दुरूद भेजते हैं। ऐ ईमान वालो! तुम (भी) उनपर दुरूद तथा बहुत सलाम भेजा करो।
Roman Urdu (Maududi)Allah aur uske malaika (farishtey) Nabi par darood bhejte hain, Aey logon jo iman laye ho, tum bhi unpar darood o salaam bhejo
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa aur iss kay farishtay iss nabi per rehmat bhejtay hain. Aey eman walon! Tum (bhi) inn per durood bhejo aur khoob salam (bhi) bhejtay raha kero
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह और उसके मलिका (फ़रिश्ते) नबी पर दरूद भेजते हैं, ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम भी उन्पर दरूद ओ सलाम भेजो
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يُؤذونَ اللَّهَ وَرَسولَهُ لَعَنَهُمُ اللَّهُ فِي الدُّنيا وَالآخِرَةِ وَأَعَدَّ لَهُم عَذابًا مُهينًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग अल्लाह तथा उसके रसूल को कष्ट पहुँचाते हैं, अल्लाह ने उन्हें दुनिया एवं आखिरत में धिक्कार दिया है और उनके लिए अपमानकारी यातना तैयार की है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log Allah aur uske Rasool ko aziyat(annoyance ) detay hain unpar duniya aur aakhirat mein Allah ne laanat farmayi hai aur unke liye ruswa-kun azaab muhaiyya kardiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log Allah aur uss kay rasool ko ezza detay hain unn per duniya aur aakhirat mein Allah ki phitkaar hai aur unn kay liye nihayat ruswa kun azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग अल्लाह और उसके रसूल को अज़ियात (झुंझलाहट) देते हैं दुनिया और आख़िरत में अल्लाह ने लानत फरमायी है और उनके लिए रुसवा-कुन अज़ाब मुहैय्या करदिया है
عَرَبِيوَالَّذينَ يُؤذونَ المُؤمِنينَ وَالمُؤمِناتِ بِغَيرِ مَا اكتَسَبوا فَقَدِ احتَمَلوا بُهتانًا وَإِثمًا مُبينًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जो लोग ईमान वाले पुरुषों तथा ईमान वाली स्त्रियों को कष्ट पहुँचाते हैं, बिना इसके कि उन्होंने कुछ (अपराध) किया हो, तो उन्होंने मिथ्यारोपण और स्पष्ट पाप का बोझ उठाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log momin mardon aur auraton ko be-kasoor aziyat (hurt) dete hain unhon ne ek badey bohtan (slander/calumny) aur sareeh gunaah ka wabal apne sar le liya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log momin mardon aur momin aurton ko ezza den baghair kissi jurum kay jo unn say sirzad hua ho woh (baray hi) bohtan aur sareeh gunah ka bojh uthatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग मोमिन मर्दन और औरतों को बे-कसूर अज़ियात (चोट) देते हैं उन्हें ने एक बदे बोहतन (बदनामी/निंदा) और सारी गुनाह का जवाब अपने सर ले लिया है
عَرَبِييا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِأَزواجِكَ وَبَناتِكَ وَنِساءِ المُؤمِنينَ يُدنينَ عَلَيهِنَّ مِن جَلابيبِهِنَّ ۚ ذٰلِكَ أَدنىٰ أَن يُعرَفنَ فَلا يُؤذَينَ ۗ وَكانَ اللَّهُ غَفورًا رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी! अपनी पत्नियों, अपनी बेटियों और ईमान वाले लोगों की स्त्रियों से कह दें कि वे अपने ऊपर अपनी चादरें डाल लिया करें। यह इसके अधिक निकट है कि वे पहचान ली जाएँ, फिर उन्हें कष्ट न पहुँचाया जाए। और अल्लाह बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, apni biwiyon aur betiyon aur ehle iman ki auraton se kehdo ke apne upar apni chadaron ke pallu latka liya karein. Yeh zyada munasib tareeqa hai taa-ke woh pehchan li jayein aur na satayi jayein. Allah taala gafoor o raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi! Apni biwiyon say aur apni shabzadiyon say aur musalmano ki aurton say keh do kay woh apnay upper apni chadaren latka liya keren iss say boht jald unn ki shanakht hojaya keray gi phir na sataee jayen gi aur Allah Taalaa bakhshney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, अपनी बीवीयां और बेटियां और एहले ईमान की औरतों से कहदो के अपने ऊपर अपनी चादरों के पल्लू लटका लें। ये ज़्यादा मुनासिब तरीक़ा है ता-के वो पहचान ली जाये और न सतायी जाये। अल्लाह ताला गफ़ूर ओ रहीम है
عَرَبِي۞ لَئِن لَم يَنتَهِ المُنافِقونَ وَالَّذينَ في قُلوبِهِم مَرَضٌ وَالمُرجِفونَ فِي المَدينَةِ لَنُغرِيَنَّكَ بِهِم ثُمَّ لا يُجاوِرونَكَ فيها إِلّا قَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)यदि मुनाफ़िक़ तथा वे लोग जिनके दिलों में रोग है और मदीना में अफ़वाह फैलाने वाले बाज़ नहीं आए, तो हम आपको उनके पीछे लगा देंगे। फिर वे आपके साथ उसमें थोड़े ही समय के लिए रह सकेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Agar munafiqeen, aur woh log jinke dilon mein kharabi hai, aur woh jo Medina mein hijaan angez afwahein(scandal mongers phaylane waley hain, apni harakaton se baaz na aayein to hum unke khilaf karawai karne ke liye tumhein utha khada karenge. Phir woh is shehar mein mushkil hi se tumhare saath reh sakenge)
Roman Urdu (Junagarhi)Agar (abb bhi) yeh munafiq aur woh jin kay dilon mein beemari hai aur woh log jo madiney mein ghalat afwahen uraney walay hain baaz na aayen to hum aap ko unn (ki tabahee) per musallat ker den gay phir to woh chand din hi aap kay sath iss (shehar) mein reh saken gay
Devnagri Urdu (Maududi)अगर मुनाफ़ीक़ीन, और वो लोग जिनके दिलों में ख़राबी है, और वो जो मदीना में हिजान अंगेज अफ़वाहें तुम्हें उठा खड़ा करेंगे। फिर वो इस शहर में मुश्किल ही से तुम्हारे साथ रह सकेंगे)
عَرَبِيمَلعونينَ ۖ أَينَما ثُقِفوا أُخِذوا وَقُتِّلوا تَقتيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)वे धिक्कारे हुए हैं। जहाँ भी वे पाए जाएँ, पकड़ लिए जाएँगे तथा बुरी तरह वध कर दिए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Unpar har taraf se laanat ki bochar hogi, jahan kahin paye jayenge pakde jayenge aur buri tarah marey jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Inn per phitkaar barsaee gaee jahan bhi mill jayen pakray jayen aur khoob tukray tukray ker diyey jayen
Devnagri Urdu (Maududi)उनपर हर तरफ से लानत की उम्मीद होगी, जहां कहीं पाए जाएंगे पकड़े जाएंगे और बुरी तरह मारे जाएंगे
عَرَبِيسُنَّةَ اللَّهِ فِي الَّذينَ خَلَوا مِن قَبلُ ۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّةِ اللَّهِ تَبديلًا
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हिन्दी (Al-Omari)यही अल्लाह का नियम रहा है उन लोगों के विषय में, जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं, तथा आप अल्लाह के नियम में कदापि कोई परिवर्तन नहीं पाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Allah ki sunnat hai jo aisey logon ke maamle mein pehle se chali aa rahi hai, aur tum Allah ki sunnat mein koi tabdili na paogey
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say aglon mein bhi Allah ka yehi dastoor jari raha. Aur tu Allah kay dastoor mein hergiz radd-o-badal na paye ga
Devnagri Urdu (Maududi)ये अल्लाह की सुन्नत है जो ऐसे लोगों के मामले में पहले से चली आ रही है, और तुम अल्लाह की सुन्नत में कोई तबदीली न पाओगे
عَرَبِييَسأَلُكَ النّاسُ عَنِ السّاعَةِ ۖ قُل إِنَّما عِلمُها عِندَ اللَّهِ ۚ وَما يُدريكَ لَعَلَّ السّاعَةَ تَكونُ قَريبًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ रसूल!) लोग आपसे क़ियामत के विषय में पूछते हैं। आप कह दें कि उसका ज्ञान तो मात्र अल्लाह ही के पास है। और आपको क्या मालूम शायद क़ियामत निकट ही हो?
Roman Urdu (Maududi)Log tumse puchte hain ke qayamat ki ghadi kab aayegi. Kaho uska ilm to Allah hi ko hai , tumhein kya khabar?shayad ke woh qareeb hi aa lagi ho
Roman Urdu (Junagarhi)Log aap say qayamat kay baray mein sawal kertay hain. Aap keh dijiye! kay iss ka ilm to Allah hi ko hai aap ko kiya khabar boht mimkin hai qayamat bilkul hi qareeb ho
Devnagri Urdu (Maududi)लोग तुमसे पूछते हैं के कयामत की घड़ी कब आएगी। कहो उसका इल्म तो अल्लाह ही को है, तुम्हें क्या खबर?शायद के वो करीब ही आ लगी हो
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ لَعَنَ الكافِرينَ وَأَعَدَّ لَهُم سَعيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ने काफ़िरों को धिक्कार दिया है और उनके लिए भड़कती हुई आग तैयार कर रखी है।
Roman Urdu (Maududi)Bahr-e-haal yeh yaqeeni amar hai ke Allah ne kaafiron par laanat ki hai aur unke liye bhadakti hui aag muhaiyya kardi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney kafiron per laanat ki hai aur unn kay liye bharakti hui aag tayyar ker rakhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)बहार-ए-हाल ये यकीनी अमर है के अल्लाह ने काफिरों पर लानत की है और उनके लिए भड़कती हुई आग मुहइया कर दी है
عَرَبِيخالِدينَ فيها أَبَدًا ۖ لا يَجِدونَ وَلِيًّا وَلا نَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)वे उसमें सदैव रहेंगे। वे न कोई दोस्त पाएँगे और न कोई सहायक।
Roman Urdu (Maududi)Jismein woh hamesha rahenge. Koi haami o madadgar na paa sakenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss mein woh humesha humesh rahen gay. Woh koi haami aur madadgar na payen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जिसमें वो हमेशा रहेंगे। कोई हमी ओ मददगार न पा सकेंग
عَرَبِييَومَ تُقَلَّبُ وُجوهُهُم فِي النّارِ يَقولونَ يا لَيتَنا أَطَعنَا اللَّهَ وَأَطَعنَا الرَّسولا
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन उनके चेहरे आग में उलटे-पलटे जाएँगे, तो वे कहेंगे : ऐ काश, हमने अल्लाह का आज्ञापालन किया होता और हमने रसूल का आज्ञापालन किया होता।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz unke chehre aag par ulat palat kiye jayenge us waqt woh kahenge ke “ kaash humne Allah aur Rasool ki itaat ki hoti”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din unn kay chehray aag mein ulat pulat kiye jayen gay (hasrat-o-afsos say) kahen gay kay kaash hum Allah Taalaa aur rasool ki itaat kertay
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ उनके चेहरे आग पर उलट पलट किये जायेंगे हमें वक्त वो कहेंगे के “काश हमें अल्लाह और रसूल की इबादत की होती”
عَرَبِيوَقالوا رَبَّنا إِنّا أَطَعنا سادَتَنا وَكُبَراءَنا فَأَضَلّونَا السَّبيلا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! हमने अपने सरदारों और बड़े लोगों का कहा माना, तो उन्होंने हमें सीधे रास्ते से भटका दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur kahenge “Aey Rubb hamare, humne apne sardaron aur apne badon (great ones) ki itaat ki aur unhon ne humein raah-e-raast se bay-raah kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kahen gay aey humaray rab! Hum ney apnay sardaron aur apnay baron ki mani jinhon ney humen raah-e-raast say bhatka diya
Devnagri Urdu (Maududi)और कहेंगे “ऐ रब हमारे, हमने अपने सरदारों और अपने बड़ों (महानों) की इताअत” कि और उनहों ने हमें राह-ए-रास्त से बे-राह करदिया
عَرَبِيرَبَّنا آتِهِم ضِعفَينِ مِنَ العَذابِ وَالعَنهُم لَعنًا كَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारे पालनहार! उन्हें दोहरी यातना दे और उनपर बड़ी धिक्कार कर।
Roman Urdu (Maududi)Aey Rubb, unko dohra(double) azaab dey aur unpar sakht laanat kar”
Roman Urdu (Junagarhi)Perwerdigar tu enhen dugna azab dey aur inn per boht bari laanat nazil farma
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ रब, उनको दोहरा(डबल) अज़ाब दे और उन्पर सख्त लानत कर”
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَكونوا كَالَّذينَ آذَوا موسىٰ فَبَرَّأَهُ اللَّهُ مِمّا قالوا ۚ وَكانَ عِندَ اللَّهِ وَجيهًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! उन लोगों के समान न हो जाओ, जिन्होंने मूसा को कष्ट पहुँचाया, तो अल्लाह ने उन्हें उनकी कही हुई बातों से बरी कर दिया, और वह अल्लाह के यहाँ प्रतिष्ठावान थे।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, un logon ki tarah na ban jao jinhon ne Moosa ko aziyatein (ranj pahuncha) di thin, phir Allah ne unki banayi hui baaton se uski baraat farmayi(cleared him) aur woh Allah ke nazdeek ba-izzat tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Unn logon jaisay na bann jao jinhon ney musa ko takleef di pus jo baat unhon ney kahi thi Allah ney unhen uss say buri farma diya aur woh Allah ka nazdeek ba-izzat thay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, उन लोगों की तरह न बन जाओ जिन्होन ने मूसा को अज़ियातें (रंज पाहुंचा) दी पतली, फिर अल्लाह ने उनकी बनाई हुई बातों से उसकी बारात फरमायी (उसे साफ कर दिया) और वो अल्लाह के नाजदीक ब-इज्जत था
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَقولوا قَولًا سَديدًا
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अल्लाह से डरो तथा सही और सच्ची बात कहो।
Roman Urdu (Maududi)Aey iman laney walon, Allah se daro aur theek baat kiya karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walon! Allah Taala say daro aur seedhi seedhi (sachi) baaten kiya kero
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ ईमान लाने वालों, अल्लाह से डरो और ठीक बात किया करो
عَرَبِييُصلِح لَكُم أَعمالَكُم وَيَغفِر لَكُم ذُنوبَكُم ۗ وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَرَسولَهُ فَقَد فازَ فَوزًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)वह तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्मों को सुधार देगा, तथा तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा और जो अल्लाह तथा उसके रसूल का आज्ञापालन करे, उसने बड़ी सफलता प्राप्त कर ली।
Roman Urdu (Maududi)Allah tumhare aamal durust kardega aur tumhare kasooron se darguzar famayega. Jo shaks Allah aur uske Rasool ki itaat karey usne badi kamiyabi haasil ki
Roman Urdu (Junagarhi)Takay Allah Taalaa tumharay kaam sanwaar day aur tumharay gunah moaaf farma dey aur jo bhi Allah aur uss kay rasool ki farma bardari keray ga uss ney bari murad paali
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह तुम्हारे अमल दुरुस्त कर देगा और तुम्हारे कसूरों से दरगुजर पैदा होगा। जो शक्स अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करे उसने बड़ी कामयाब की
عَرَبِيإِنّا عَرَضنَا الأَمانَةَ عَلَى السَّماواتِ وَالأَرضِ وَالجِبالِ فَأَبَينَ أَن يَحمِلنَها وَأَشفَقنَ مِنها وَحَمَلَهَا الإِنسانُ ۖ إِنَّهُ كانَ ظَلومًا جَهولًا
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हिन्दी (Al-Omari)हमने अमानत को आकाशों और धरती तथा पर्वतों के समक्ष प्रस्तुत किया, लेकिन उन सबने उसका भार उठाने से इनकार कर दिया और वे उससे डर गए। परंतु इनसान ने उसे उठा लिया। निःसंदेह वह बड़ा ही अत्याचारी औ बहुत अज्ञानी है।
Roman Urdu (Maududi)Humne is amanat ko aasmano aur zameen aur pahadon ke saamne pesh kiya to woh usey uthane ke liye tayyar na huey, aur issey darr gaye. Magar Insaan ne isey utha liya, beshak woh bada zaalim aur jahil (ignorant) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney apni amanat ko aasmano per zamin per aur paharon per paish kiya pus sab ney iss ko uthaney say inkar ker diya aur iss say darr gaye (magar) insan ney issay utha liya woh bara hi zalim jahil hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इस अमानत को आसमान और ज़मीन और पहाड़ों के सामने पेश किया तो वो उसे उठाने के लिए तैयार न हुए, और इससे डर गए। मगर इंसान ने इसे उठाया लिया, बशक वो बड़ा जालिम और जाहिल (अज्ञानी) है
عَرَبِيلِيُعَذِّبَ اللَّهُ المُنافِقينَ وَالمُنافِقاتِ وَالمُشرِكينَ وَالمُشرِكاتِ وَيَتوبَ اللَّهُ عَلَى المُؤمِنينَ وَالمُؤمِناتِ ۗ وَكانَ اللَّهُ غَفورًا رَحيمًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ताकि अल्लाह मुनाफ़िक़ पुरुषों तथा मुनाफ़िक़ स्त्रियों और मुश्रिक पुरुषों तथा मुश्रिक स्त्रियों को यातना दे, तथा अल्लाह ईमान वाले पुरुषों तथा ईमान वाली स्त्रियों की तौबा क़बूल करे। और अल्लाह अति क्षमाशील, बड़ा दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Is baar-e-amanat ko uthane ka laazmi nateeja yeh hai ke Allah munafiq mardon aur auraton, aur mushrik mardon aur auraton ko saza dey aur momin mardon aur auraton ki towbah qabool karey.Allah darguzar farmane wala aur raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)(yeh iss liye) kay Allah Taalaa munafiq mardon aurton aur mushrik mardon aurton ko saza dey aur momin mardon aurton ki toba qabool farmaye aur Allah Taalaa bara hi bakhsney wala aur meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)इस बार-ए-अमानत को उठने का लाज़मी नतीजा ये है के अल्लाह मुनाफिक मर्दन और औरतों, और मुशरिक मर्दन और औरतों को सज़ा दे और मोमिन मर्दन और औरतों की तौबा क़बूल करे.अल्लाह दरगुज़र फ़रमाने वाला और रहीम है
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Surah 33: Al-Ahzab (The Allies)

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Surah 33: Al-Ahzab (The Allies)

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Surah 33: Al-Ahzab (The Allies)

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Surah 33: Al-Ahzab (The Allies)

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Surah 33: Al-Ahzab (The Allies)

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Surah 34: Al-Saba' (The Saba')

Meccan🕐 Revelation #58📜 54 Verses🕮 Juz 1
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالحَمدُ لِلَّهِ الَّذي لَهُ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ وَلَهُ الحَمدُ فِي الآخِرَةِ ۚ وَهُوَ الحَكيمُ الخَبيرُ
हिन्दी (Al-Omari)हर प्रकार की प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जिसके अधिकार में वह सब कुछ है जो आकाशों में है और जो धरती में है। और आख़िरत (परलोक) में भी उसी के लिए प्रशंसा है और वह पूर्ण हिकमत वाला, सबकी खबर रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Hamd (tareef) us khuda ke liye hai jo aasmaano aur zameen ki har cheez ka maalik hai aur aakhirat mein bhi usi ke liye hamd hai. Woh dana (hikmat wala) aur bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tamam tareefen uss Allah kay liye sazawaar hain jiss ki milkiyat mein woh sab kuch hai jo aasmano aur zamin mein hai aakhirat mein bhi tareef ussi kay liye hai woh (bari) hikmaton wala aur (poora) khabardaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)हम्द (तारीफ़) हमारे लिए खुदा के लिए है जो आसमान और ज़मीन की हर चीज़ का मालिक है और आख़िरत में भी उसी के लिए हम्द है। वो दाना (हिकमत वाला) और बाख़बर है
عَرَبِييَعلَمُ ما يَلِجُ فِي الأَرضِ وَما يَخرُجُ مِنها وَما يَنزِلُ مِنَ السَّماءِ وَما يَعرُجُ فيها ۚ وَهُوَ الرَّحيمُ الغَفورُ
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हिन्दी (Al-Omari)वह जानता है जो कुछ धरती के भीतर प्रवेश होता है और जो कुछ उससे निकलता है, तथा जो कुछ आकाश से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है। तथा वह अत्यंत दयावान्, अति क्षमाशील है।
Roman Urdu (Maududi)Jo kuch zameen mein jata aur jo kuch ussey nikalta hai aur jo kuch aasmaan se utarta hai aur jo kuch usmein chadhta hai, har cheez ko woh jaanta hai.Woh raheem aur gafoor hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo zamin mein jaye aur jo iss say niklay woh aasman say utray aur jo charh ker uss mein jaye woh sab say ba-khabar hai. Aur woh meharbaan nihayat bakhsish wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो कुछ ज़मीन में जाता है और जो कुछ उससे निकलता है और जो कुछ आसमान से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है, हर चीज़ को वो जानता है।वो रहीम और गफूर है
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ كَفَروا لا تَأتينَا السّاعَةُ ۖ قُل بَلىٰ وَرَبّي لَتَأتِيَنَّكُم عالِمِ الغَيبِ ۖ لا يَعزُبُ عَنهُ مِثقالُ ذَرَّةٍ فِي السَّماواتِ وَلا فِي الأَرضِ وَلا أَصغَرُ مِن ذٰلِكَ وَلا أَكبَرُ إِلّا في كِتابٍ مُبينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा काफ़िरों ने कहा कि हमपर क़ियामत नहीं आएगी। आप कह दें : क्यों नहीं? मेरे पालनहार की क़सम! जो परोक्ष का जानने वाला है, वह तुमपर अवश्य आएगी। उससे एक कण के बराबर भी कोई चीज़ ओझल नहीं रहती न आकाशों में और न धरती में, तथा न उससे छोटी कोई चीज़ है और न बड़ी, परंतु वह एक स्पष्ट पुस्तक में (अंकित) है।
Roman Urdu (Maududi)Mukireen kehte hain ke kya baat hai ke qayamat humpar nahin aa rahi hai! Kaho kasam hai mere aalim-ul-gaib parwardigar ki, woh tumpar aa kar raheygi. Ussey zarra barabar (atoms weight/smallest particle) koi cheez na aasmaano mein chupi hui hai na zameen mein na zarre se badi aur na ussey choti, sab kuch ek numaya daftar mein darj hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kuffaar kehtay hain hum per qayamat nahi aaye gi. Aap keh dijiyey! Kay mujhay meray rab ki qasam! Jo aalim-ul-ghaib hai kay woh yaqeenan tum per aaye gi Allah Taalaa say aik zarray kay barabar ki cheez bhi posheedah nahi na aasmano mein aur na zamin mein bulkay iss say bhi choti aur bari her cheez khuli kitab mein mojood hai
Devnagri Urdu (Maududi)मुकीरीन कहते हैं के क्या बात है के कयामत हमपर नहीं आ रही है! कहो कसम है मेरे आलिम-उल-गैब परवरदिगार की, वो तुमपर आ कर रहेगी। उसे ज़र्रा बराबर (परमाणुओं का वजन/सबसे छोटा कण) कोई चीज़ न आसमानों में छुपी हुई है न ज़मीन में न जर्रे से बड़ी और न उससे छोटी, सब कुछ एक नुमाया दफ़्तर में दर्ज है
عَرَبِيلِيَجزِيَ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ ۚ أُولٰئِكَ لَهُم مَغفِرَةٌ وَرِزقٌ كَريمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि वह उन लोगों को बदला दे, जो ईमान लाए तथा अच्छे कर्म करते रहे। यही लोग हैं जिनके लिए क्षमा तथा सम्मानित जीविका है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh qayamat isliye aayegi ke jaza de Allah un logon ko jo imaan laye hain aur neik amal karte rahey hain. Unke liye magfirat hai aur rizq-e-kareem
Roman Urdu (Junagarhi)Takay woh eman walon aur neko kaaron ko bhala badla ata farmaye yehi log hain jin kay liye maghfirat aur izzat ki rozi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये कयामत इस्लिये के जजा दे अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए हैं और नीक अमल करते रहे हैं। उनके लिए मगफिरत है और रिज़क-ए-करीम
عَرَبِيوَالَّذينَ سَعَوا في آياتِنا مُعاجِزينَ أُولٰئِكَ لَهُم عَذابٌ مِن رِجزٍ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने हमारी आयतों को नीचा दिखाने का प्रयास किया, उन लोगों के लिए कठोर दुःखदायी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jin logon ne hamari aayat ko nicha dikhane ke liye zoar lagaya hai, unke liye badhtareen qisam ka dardnaak azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur humari aayaton ko neecha dikhaney ki jinhon ney kosish ki hai yeh woh log hain jin kay liye bad-tareen qisam ka dardnaak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जिन लोगों ने हमारी आयतों को नीचा दिखाने के लिए ज़ोर लगाया है, उनके लिए बदतरीन क़िस्म का दर्दनाक अज़ाब है
عَرَبِيوَيَرَى الَّذينَ أوتُوا العِلمَ الَّذي أُنزِلَ إِلَيكَ مِن رَبِّكَ هُوَ الحَقَّ وَيَهدي إِلىٰ صِراطِ العَزيزِ الحَميدِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों को ज्ञान दिया गया है, वे जानते हैं कि जो कुछ आपपर आपके पालनहार की ओर से उतारा गया है, वही सत्य है, तथा वह सर्व प्रभुत्वशाली, सर्वप्रशंसित (अल्लाह) के मार्ग की ओर ले जाता है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), ilm rakhne waley khoob jaante hain ke jo kuch tumhare Rubb ki taraf se tumpar nazil kiya gaya hai woh sarasar haqq hai aur khuda-e-azeez o hameed ka raasta dikhata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jinhen ilm hai woh dekh len gay jo kuch aap ki janib aap kay rab ki taraf say nazil hua hai woh (sarasir) haq hai aur Allah ghalib khoobiyon walay ki raah ki rehbari kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), इल्म रखने वाले खूब जानते हैं के जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है वो सरसर हक़ है और खुदा-ए-अज़ीज़ ओ हमीद का रास्ता दिखता है
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ كَفَروا هَل نَدُلُّكُم عَلىٰ رَجُلٍ يُنَبِّئُكُم إِذا مُزِّقتُم كُلَّ مُمَزَّقٍ إِنَّكُم لَفي خَلقٍ جَديدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने इनकार किया, वे कहते हैं कि क्या हम तुम्हें एक ऐसा आदमी बताएँ, जो तुम्हें सूचना देता है कि जब तुम पूर्णतया चूर-चूर कर दिए जाओगे, तो तुम अवश्य एक नई रचना में आओगे?
Roman Urdu (Maududi)Munkireen logon se kehte hain “hum batayein tumhein aisa shaks jo khabar deta hai ke jab tumhare jism ka zarra zarra muntashir (bikhara) ho chuka hoga us waqt tum naye sirey se paida kardiye jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kafiron ney kaha (aao) hum tumhen aik aisa shaks batlayen jo tumhen yeh khabar phoncha raha hai kay jab tum bilkul hi reza reza hojao gay to phir say aik naee pedaeesh mein aao gay
Devnagri Urdu (Maududi)मुनकिरीन लोगों से कहते हैं "हम बताते हैं तुम्हें ऐसा शक्स जो खबर देता है कि जब तुम्हारे जिस्म का ज़र्रा ज़र्रा मुंतशिर (बिखरा) हो चूका होगा उस वक्त तुम नए सिरे से अदा कर दिए जाओगे
عَرَبِيأَفتَرىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَم بِهِ جِنَّةٌ ۗ بَلِ الَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِالآخِرَةِ فِي العَذابِ وَالضَّلالِ البَعيدِ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उसने अल्लाह पर झूठ गढ़ा है या उसमें पागलपन है? बल्कि जो लोग आख़िरत पर विश्वास (ईमान) नहीं रखते, वे यातना तथा दूर की गुमराही में हैं।
Roman Urdu (Maududi)Na maloom yeh shaks Allah ke naam se jhoot ghadta hai ya isey junoon (deewana pan) lahiq hai.” Nahin, balke jo log aakhirat ko nahin maante woh azaab mein mubtala honay waley hain aur wahi buri tarah behke huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)(hum nahi keh saktay) kay khud uss ney (hi) Allah per jhoot bandh liya hai ya ussay deewangi hai bulkay (haqeeqat yeh hai) kay aakhirat per yaqeen na rakhney walay hi azab mein aur door ki gumrahi mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)ना मालूम ये शक्स अल्लाह के नाम से झूठ गड़बड़ है या इसे जुनून (दीवाना पान) लाहिक है।” नहीं, बलके जो लोग आख़िरत को नहीं मानते वो अज़ाब में मुबतला होने वाले हैं और वही बुरी तरह बहके हुए हैं
عَرَبِيأَفَلَم يَرَوا إِلىٰ ما بَينَ أَيديهِم وَما خَلفَهُم مِنَ السَّماءِ وَالأَرضِ ۚ إِن نَشَأ نَخسِف بِهِمُ الأَرضَ أَو نُسقِط عَلَيهِم كِسَفًا مِنَ السَّماءِ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآيَةً لِكُلِّ عَبدٍ مُنيبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने अपने आगे और पीछे आकाश और धरती को नहीं देखा? यदि हम चाहें तो उन्हें धरती में धँसा दें या उनपर आकाश के टुकड़े गिरा दें। निःसंदेह इसमें हर उस बंदे के लिए अवश्य एक निशानी है, जो अल्लाह की ओर लौटने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Kya inhon ne kabhi us aasmaan o zameen ko nahin dekha jo inhein aagey aur peechey se gheray huey hai? Hum chahein to inhein zameen mein dhansa dein, ya aasmaan ke kuch tukde inpar gira dein. Dar haqeeqat is mein ek naishani hai har us banday ke liye jo khuda ki taraf rujoo karne wala ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya pus woh apnay aagay peechay aasman-o-zamin ko nahi dekh rahey? Agar hum chahayen to enhen zamin mein dhansa den ya inn per aasman kay tukray gira den yaqeenan iss mein poori daleel hai her uss banday kay liye jo (dil say) mutawajja ho
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इन्होन ने कभी उस आसमान ओ ज़मीन को नहीं देखा जो इन्हें आगे और पीछे से घेरे हुए हैं? हम चाहें तो इन्हें ज़मीन में ढांसा दें, या आसमान के कुछ टुकड़े अंदर गिरा दें। दर हकीकत इस में एक निशानी है हर उस बंदे के लिए जो खुदा की तरफ रूजू करने वाला हो
عَرَبِي۞ وَلَقَد آتَينا داوودَ مِنّا فَضلًا ۖ يا جِبالُ أَوِّبي مَعَهُ وَالطَّيرَ ۖ وَأَلَنّا لَهُ الحَديدَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने दाऊद को अपना अनुग्रह प्रदान किया। ऐ पर्वतो! उसके साथ अल्लाह की पवित्रता बयान करो तथा पक्षियों को भी (यही आदेश दिया) तथा हमने उसके लिए लोहा को नरम कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Humne Dawood ko apne haan se bada fazal ata kiya tha.(Humne hukum diya ke) aey pahadon (mountains), iske saath hum ahangi karo (unke saath tasbeeh karo) (aur yahi hukum humne) parindon ko diya. Humne lohay (Iron) ko uske liye narm kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney dawood per apna fazal kiya aey paharo! Iss kay sath raghbat say tasbeeh parha kero aur parindon ko bhi (yehi hukum hai) aur hum ney iss kay liye loha naram ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने दाऊद को अपने हां से बड़ा फजल अता किया था। यहीं हुकुम हमने) परिन्दों को दिया। हमने लोहे को उसके लिए नरम कर दिया
عَرَبِيأَنِ اعمَل سابِغاتٍ وَقَدِّر فِي السَّردِ ۖ وَاعمَلوا صالِحًا ۖ إِنّي بِما تَعمَلونَ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)कि विस्तृत कवचें बनाओ तथा कड़ियाँ जोड़ने में उचित अनुमान लगाओ, और अच्छे कार्य करते रहो। जो कुछ तुम कर रहे हो, निःसंदेह मैं उसे देख रहा हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Is hidayat ke saath ke zirein (full coats of mail) bana aur unke halqe theek andaze par rakh. (Aey aale Dawood) neik amal karo. Jo kuch tum karte ho usko main dekh raha hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Kay tu poori poori zirhen bana aur joron mein andaza rakh tum sab nek kaam kiya kero. (yaqeen mano) kay mein tumharay aemaal dekh raha hun
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हिदायत के साथ के ज़रीन (मेल के पूरे कोट) बना और उनके हल्के ठीक अंदाज़ पर रख। (ऐ आले दाऊद) नीक अमल करो। जो कुछ तुम करते हो उसको मैं देख रहा हूं
عَرَبِيوَلِسُلَيمانَ الرّيحَ غُدُوُّها شَهرٌ وَرَواحُها شَهرٌ ۖ وَأَسَلنا لَهُ عَينَ القِطرِ ۖ وَمِنَ الجِنِّ مَن يَعمَلُ بَينَ يَدَيهِ بِإِذنِ رَبِّهِ ۖ وَمَن يَزِغ مِنهُم عَن أَمرِنا نُذِقهُ مِن عَذابِ السَّعيرِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (हमने) सुलैमान के लिए हवा को (वशीभूत कर दिया)। उसका सुबह का चलना एक महीने का तथा शाम का चलना एक महीने का होता था। तथा हमने उसके लिए तांबे का स्रोत बहा दिया। तथा कुछ जिन्नों को भी (उसके वश में कर दिया), जो उसके सामने उसके पालनहार की अनुमति से काम करते थे। तथा उनमें से जो भी हमारे आदेश से फिरेगा, हम उसे भड़कती आग की यातना चखाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Sulaiman ke liye humne hawa ko musakkhar kardiya, subah ke waqt uska chalna ek mahine ki raah tak aur shaam ke waqt uska chalna ek mahine ki raah tak. Humne uske liye pigley huey tambey(molten brass) ka chashma (spring) baha diya aur aisey Jinn uske taabey kardiye jo apne Rubb ke hukum se uske aagey kaam karte thay. Unmein se jo hamare hukum se sartabi (deviate /swerved) karta usko hum bhadakti hui aag ka maza chakhate
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney suleman kay liye hawa ko musakkhar ker diya kay subah ki manzil uss ki maheena bhar ki hoti thi aur shaam ki manzil bhi aur hum ney unn kay liye taanbay ka chashma baha diya. Aur uss kay rab kay hukum say baaz jinnat uss ki ma-tehati mein uss kay samney kaam kertay thay aur inn mein say jo bhi humaray hukum say sirtabi keray hum ussay bharakti hui aag kay azab ka maza chakhayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और सुलेमान के लिए हमने हवा को मुस्कुरा कर दिया, सुबह के वक्त उसका चलना एक महीने की राह तक और शाम के वक्त उसका चलना एक महीने की राह तक। हमने उसके लिए पिगले हुए तांबे (पिघला हुआ पीतल) का चश्मा (वसंत) बहा दिया और ऐसे जिन्न उसके ताबे करदिये जो अपने रब के हुकुम से उसके आगे काम करते थे। उनमें से जो हमारे हुकुम से सरताबी (विचलित/घुमावदार) करता है उसको हम भड़कती हुई आग का मजा चखते हैं
عَرَبِييَعمَلونَ لَهُ ما يَشاءُ مِن مَحاريبَ وَتَماثيلَ وَجِفانٍ كَالجَوابِ وَقُدورٍ راسِياتٍ ۚ اعمَلوا آلَ داوودَ شُكرًا ۚ وَقَليلٌ مِن عِبادِيَ الشَّكورُ
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हिन्दी (Al-Omari)वे उसके लिए बनाते थे, जो वह चाहता था; भवन (मस्जिदें), प्रतिमाएँ, हौज़ों के जैसे बड़े-बड़े लगन तथा एक ही जगह जमी हुई देगें। ऐ दाऊद के परिजनो! कृतज्ञता के तौर पर सत्कर्म करो। और मेरे बंदों में थोड़े ही लोग कृतज्ञ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh uske liye banate thay jo kuch woh chahta, unchi imaratein, tasvirein, baday baday hauz jaisey lagan (bowls like reservoirs) aur apni jagah se na hatne wali bhari degein. Aey aale Dawood, amal karo shukar ke tareeqe par. Mere bandon mein kam hi shukar guzar hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo kuch suleman chahatay woh jinnat tayyar ker detay maslan qilay aur mujassmay aur hozon kay barabar lagan aur choolhon per jami hui mazboot deygen aey aal-e-dawood iss kay shukriya mein nek amal kero meray bandon mein say shukar guzar banday kum hi hotay hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो उसके लिए बनाते थे जो कुछ वो चाहता, ऊंची इमारतें, तसवीरें, बदे बदे हौज जैसी लगन (जलाशय जैसे कटोरे) और अपनी जगह से ना हटें वली भारी देगें. ऐ आले दाऊद, अमल करो शुकर के तरीक़े पर। मेरे बंदों में कम ही शुक्र गुजर हैं
عَرَبِيفَلَمّا قَضَينا عَلَيهِ المَوتَ ما دَلَّهُم عَلىٰ مَوتِهِ إِلّا دابَّةُ الأَرضِ تَأكُلُ مِنسَأَتَهُ ۖ فَلَمّا خَرَّ تَبَيَّنَتِ الجِنُّ أَن لَو كانوا يَعلَمونَ الغَيبَ ما لَبِثوا فِي العَذابِ المُهينِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब हमने सुलैमान की मौत का निर्णय कर दिया, तो जिन्नों को उसकी मौत का पता एक घुन के सिवा किसी ने नहीं दिया, जो उसकी लाठी को खा रहा था। फिर जब वह गिर गया, तो जिन्नों पर यह बात खुली कि यदि वे परोक्ष का ज्ञान रखते, तो इस अपमानकारी यातना में पड़े न रहते।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab Sulaiman par humne maut ka faisla nafiz kiya to Jinno ko uski maut ka pata dene wali koi cheez us ghun (worm) ke siwa na thi jo uske asa (staff) ko kha raha tha. Is tarah jab Sualiman gir pada to Jinno par yeh baat khul gayi ke agar woh gaib ke janne waley hotey to is zillat ke azaab mein mubtala na rehte
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab hum ney unn per maut ka hukum bhej diya to unn ki khabar jinnat ko kissi ney na di siwaye ghunn kay keeray kay jo unn kay asa ko kha raha tha. Pus jab (suleman) gir paray uss waqt jinno ney jaan liya kay agar woh ghaib daan hotay to iss zillat kay azab mein mubtila na rehtay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब सुलेमान पर हमने मौत का फैसला नफीज किया तो जिन्नो को उसकी मौत का पता देने वाली कोई चीज उस घुन (कीड़ा) के सिवा न थी जो उसके आसा (कर्मचारी) को खा रहा था। इस तरह जब सुअलीमान गिर पड़ा तो जिन्नो पर ये बात खुल गई के अगर वो गैब के जाने वाले होते तो इस ज़िल्लत के अज़ाब में मुबतला ना रहते
عَرَبِيلَقَد كانَ لِسَبَإٍ في مَسكَنِهِم آيَةٌ ۖ جَنَّتانِ عَن يَمينٍ وَشِمالٍ ۖ كُلوا مِن رِزقِ رَبِّكُم وَاشكُروا لَهُ ۚ بَلدَةٌ طَيِّبَةٌ وَرَبٌّ غَفورٌ
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हिन्दी (Al-Omari)सबा जाति के लिए उनके निवास-स्थान में एक निशानी थी। (उसके) दाएँ और बाएँ दो बाग़ थे। (हमने कहा था :) अपने पालनहार की दी हुई रोज़ी से खाओ और उसके प्रति आभार प्रकट करो। (यह) एक अच्छा शहर है तथा अति क्षमाशील पालनहार है।
Roman Urdu (Maududi)Saba (Sheba) ke liye unke apne maskan (home-land) hi mein ek nishani maujood thi, do baag dayein(right) aur bayein(left). Khao apne Rubb ka diya hua rizq aur shukar baja lao uska, Mulk hai umda o pakeeza aur parwardigar hai bakshish farmane waala
Roman Urdu (Junagarhi)Qom-e-saba kay liye apni bastiyon mein (qudrat-e-elahee ki) nishani thi unn kay dayen bayen do baagh thay (hum ney unn ko hukum diya tha kay) apnay rab ki di hui rozi khao aur uss ka shukar ada kero yeh umdah shehar aur woh bakhshney wala rab hai
Devnagri Urdu (Maududi)सबा (शीबा) के लिए उनके अपने मसकन (घर-जमीन) ही में एक निशानी मौजूद थी, दो बाग दयेन(दाएं) और बायें(बाएं)। खाओ अपने रुब का दिया हुआ रिज़क और शुकर बजा लाओ उसका, मुल्क है उम्मीद ओ पाकीज़ा और परवरदिगार है बख्शीश फ़रमाने वाला
عَرَبِيفَأَعرَضوا فَأَرسَلنا عَلَيهِم سَيلَ العَرِمِ وَبَدَّلناهُم بِجَنَّتَيهِم جَنَّتَينِ ذَواتَي أُكُلٍ خَمطٍ وَأَثلٍ وَشَيءٍ مِن سِدرٍ قَليلٍ
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हिन्दी (Al-Omari)लेकिन उन्होंने मुँह फेर लिया, तो हमने उनपर भयंकर (बाँध तोड़) बाढ़ भेज दी, तथा उनके दोनों बाग़ों को दो ऐसे बाग़ों से बदल दिए, जिनमें कड़वे-कसैले फल, झाऊ के वृक्ष तथा कुछ थोड़े-से बेर थे।
Roman Urdu (Maududi)Magar woh mooh moad gaye. Aakhir e kaar humne unpar bandh (dam) todh sailaab (flood) bhej diya aur unke pichle do baaghon (gardens) ke jagah do aur baagh unhein diye jinmein kadwe (bitter) kasaile (tamarisk) phal aur jhaao ke darakht thay aur kuch thodi si beriyan (lote trees)
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin unhon ney roo-gardani ki to hum ney unn per zor kay selab (ka paani) bhej diya aur hum ney unn kay (haray bharay) baaghon kay badlay do (aisay) baagh diye jo bad-maza mewon walay aur (ba-kasrat) jhao aur kuch bairi kay darakhton walay thay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर वो मुँह मोड़ गये। आख़िर ए कार हमने उनपार बंद (बांध) तोड़ सैलाब (बाढ़) भेज दिया और उनके पिछले दो बाघों (बगीचों) के जगह दो और बाघ उन्हें दिए जिनमें कड़वे (कड़वे) कसैले (इमली) फल और झाओ के दरख्त थे और कुछ थोड़ी सी बेरियां (लोटे के पेड़)
عَرَبِيذٰلِكَ جَزَيناهُم بِما كَفَروا ۖ وَهَل نُجازي إِلَّا الكَفورَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह बदला हमने उन्हें उनके कृतघ्नता दिखाने के कारण दिया, तथा ऐसा बदला हम उसी को देते हैं जो बहुत कृतघ्न हो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh tha unke kufr ka badla jo humne unko diya. Aur nashukre Insan ke siwa aisa badla hum aur kisi ko nahin detey
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney unn ki na-shukri ka yeh badla unhen diya. Hum (aisi) sakht saza baray baray na-shukron hi ko detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये था उनके कुफ्र का बदला जो हमने उनको दिया। और नाशुक्रे इंसान के सिवा ऐसा बदला हम और किसी को नहीं देते
عَرَبِيوَجَعَلنا بَينَهُم وَبَينَ القُرَى الَّتي بارَكنا فيها قُرًى ظاهِرَةً وَقَدَّرنا فيهَا السَّيرَ ۖ سيروا فيها لَيالِيَ وَأَيّامًا آمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उनके बीच तथा उन बस्तियों के बीच, जिनमें हमने बरकत रखी थी, एक-दूसरे से दिखाई देने वाली बस्तियाँ बना दी थीं, तथा हमने उनमें यात्रा के पड़ाव निर्धारित कर दिए थे (और कह दिया था :) तुम उनमें रात-दिन निश्चिंत होकर चलो फिरो।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne unke aur un bastiyon ke darmiyaan, jinko humne barakat ata ki thi, numayan bastiyan basa di thin, aur unmein safar ki musaftein ek andaze par rakh di thin.chalo phiro in raaston mein raat din purey aman ke saath
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unn kay aur unn bastiyon kay darmiyan jin mein hum ney barkat dey rakhi thi chand bastiyan aur (abad) rakhi thin jo bar sir-e-raah zahir thin aur inn mein chalney ki manzilen muqarrar kerdi thin inn mein raton aur dino ko ba-aman-o-amaan chaltay phirtay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने उनके और उन बस्तियों के दरमियान, जिनको हमने बरकत अता की थी, नुमायां बस्तियां बसा दी पतली, और उनके सफर की मुसाफ़्तें एक अंदाज़े पर रख दी पतली। चलो फिरो रातों में रात दिन पूरे अमन के साथ
عَرَبِيفَقالوا رَبَّنا باعِد بَينَ أَسفارِنا وَظَلَموا أَنفُسَهُم فَجَعَلناهُم أَحاديثَ وَمَزَّقناهُم كُلَّ مُمَزَّقٍ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِكُلِّ صَبّارٍ شَكورٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्होंने कहा : ऐ हमारे पालनहार! हमारी यात्राओं के बीच दूरी बना दे! तथा उन्होंने अपने ऊपर ज़ुल्म किया। अंततः हमने उन्हें कहानियाँ बना दिया और उन्हें पूरी तरह तित्तर-बित्तर कर दिया। निःसंदेह इसमें हर बड़े धैर्यवान् और बहुत शुक्र करने वाले के लिए कई निशानियाँ (शिक्षाएँ) हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar unhon ne kaha “Aey hamare Rubb, hamare safar ki musafatein lambi karde.” Unhon ne apne upar aap zulm kiya, aakhir e kaar humne unhein afsana bana kar rakh diya aur unhein bilkul tittar bittar kar daala. Yaqeenan ismein nishaniyan hain har us shaks ke liye jo bada saabir(steadfast) o shakir (thankful) ho
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin unhon ney phir kaha kay aey humaray perwerdigar! Humaray safar door daraz ker day chunkay khud unhon ney apnay hathon apna bura kiya iss liye hum ney unhen (guzishta) fasano ki soorat mein ker diya aur unn kay tukray tukray ura diye bila shuba her aik sabar-o-shukar kerney walay kay liye iss (maajray) mein boht si ibraten hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उनहों ने कहा “ऐ हमारे रब, हमारे सफ़र की मुसाफ़तें लम्बी करदे।” उनहों ने अपने ऊपर आप जुल्म किया, आखिर ए कार हमने उन्हें अफसाना बना कर रख दिया और उन्हें बिल्कुल तित्तर बिटर कर डाला। यकीनन इसमे निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो बड़ा साबिर (दृढ़) ओ शाकिर (आभारी) हो
عَرَبِيوَلَقَد صَدَّقَ عَلَيهِم إِبليسُ ظَنَّهُ فَاتَّبَعوهُ إِلّا فَريقًا مِنَ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इबलीस ने उनपर अपना गुमान सच कर दिखाया। चुनाँचे ईमान वालों के एक समूह को छोड़कर सब ने उसका अनुसरण किया।
Roman Urdu (Maududi)Unke maamle mein Iblis ne apna gumaan saheeh paya aur unhon ne usi ki pairwi ki, bajuz ek thode se giroh ke jo momin tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur shetan ney unn kay baray mein apna guman sach ker dikhaya yeh log sab kay sab uss kay tabeydaar bann gaye siwaye momino ki aik jamaat kay
Devnagri Urdu (Maududi)उनके मामले में इब्लीस ने अपना गुमान सही पाया और उन्होन ने उसकी जोड़ी बनाई, बजुज़ एक थोड़े से गिरो ​​के जो मोमिन था
عَرَبِيوَما كانَ لَهُ عَلَيهِم مِن سُلطانٍ إِلّا لِنَعلَمَ مَن يُؤمِنُ بِالآخِرَةِ مِمَّن هُوَ مِنها في شَكٍّ ۗ وَرَبُّكَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ حَفيظٌ
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हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि उसका उनपर कोई ज़ोर (दबाव) नहीं था। लेकिन ऐसा इसलिए हुआ ताकि हम जान लें कि कौन आख़िरत पर ईमान लाता है और कौन उसके बारे में संदेह में पड़ा हुआ है। तथा आपका पालनहार प्रत्येक चीज़ का संरक्षक है।
Roman Urdu (Maududi)Iblis ko unpar koi iqtedar (authority) haasil na tha magar jo kuch hua woh isliye hua ke hum yeh dekhna chahte thay ke kaun aakhirat ka maanne wala hai aur kaun uski taraf se shakk mein pada hua hai. Tera Rubb har cheez par nigraan (watchful) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Shetan ka unn per koi zor (aur dabao) na tha magar iss liye kay hum inn logon ko jo aakhirat per eman rakhtay hain zahir ker dein unn logon mein say jo iss say shak mein hain.aur aap ka rab (her) her cheez per nigehbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)इब्लीस को अनपर कोई इक्तेदार (अधिकारी) हासिल न था मगर जो कुछ हुआ वो इस तरह हुआ के हम ये देखना चाहते थे के कौन आख़िरत का मनने वाला है और कौन उसकी तरफ से शक्क में पड़ा हुआ है। तेरा रब्ब हर चीज़ पर निगरान (सतर्क) है
عَرَبِيقُلِ ادعُوا الَّذينَ زَعَمتُم مِن دونِ اللَّهِ ۖ لا يَملِكونَ مِثقالَ ذَرَّةٍ فِي السَّماواتِ وَلا فِي الأَرضِ وَما لَهُم فيهِما مِن شِركٍ وَما لَهُ مِنهُم مِن ظَهيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी) आप कह दें : उन्हें पुकार कर देखो, जिन्हें तुमने अल्लाह के सिवा (पूज्य) समझ रखा है। वे आकाशों और धरती में कणभर भी अधिकार नहीं रखते, और न उन दोनों में उनकी कोई साझेदारी है और न उनमें से कोई उस (अल्लाह) का सहायक ही है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi, in mushrikeen se) kaho ke pukar dekho apne un maboodon ko jinhein tum Allah ke siwa apna mabood samajhey baithey ho. Woh na aasmaano mein kisi zarra barabar cheez ke maalik hain na zameen mein. Woh aasmaan o zameen ki milkiyat mein shareek bhi nahin hain.Unmein se koi Allah ka madadgaar bhi nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiyey! Kay Allah ka siwa jin jin ka tumhen gumaan hai (sab) ko pukar lo na unn mein say kissi ko aasmano aur zamino mein say aik zarray kay ikhtiyar hai na unn ka inn mein koi hissa hai na unn mein say koi Allah ka madadgar hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी, मुशरिकेन से) कहो के पुकार देखो अपने उन माबूदों को जिनमें तुम अल्लाह के सिवा अपना माबूद समझे बैठे हो। वो ना आसमानों में कोई ज़रा बराबर चीज़ के मालिक हैं ना ज़मीन में। वो आसमां ओ ज़मीन की मिलकियत में शरीक भी नहीं है। उनमें से कोई अल्लाह का मददगार भी नहीं है
عَرَبِيوَلا تَنفَعُ الشَّفاعَةُ عِندَهُ إِلّا لِمَن أَذِنَ لَهُ ۚ حَتّىٰ إِذا فُزِّعَ عَن قُلوبِهِم قالوا ماذا قالَ رَبُّكُم ۖ قالُوا الحَقَّ ۖ وَهُوَ العَلِيُّ الكَبيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसके यहाँ केवल उस व्यक्ति की सिफ़ारिश लाभ देगी, जिसे अल्लाह अनुमति देगा। यहाँ तक कि जब उनके दिलों से घबराहट दूर कर दी जाती है, तो वे (फ़रिश्ते) कहते हैं : तुम्हारे पालनहार ने क्या कहा? वे कहते हैं : सत्य (कहा) तथा वह सर्वोच्च, बहुत महान है।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah ke huzur koi shafaat bhi kisi ke liye nafeh (faida-mand) nahin ho sakti bajuz us shaks ke jiske liye Allah ne sifarish ki ijazat di ho. Hatta ke jab logon ke dilon se ghabrahat door hogi to woh (sifarish karne walon se) puchenge ke tumhare Rubb ne kya jawab diya, woh kahenge ke theek jawab mila hai aur woh buzurg o bartar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Shifaat (sifarish) bhi uss kay pass kuch nafa nahi deti ba-juz unn kay jin kay liye ijazat hojaye. Yahan tak kay jab inn kay dilo say ghabrahat door ker di jati hai to poochtay hain tumharay perwerdigar ney kiya farmaya jawab detay hain kay haq farmaya aur woh buland-o-bala aur boht bara hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह के हुज़ूर कोई शफ़ात भी किसी के लिए नफ़ेह (फ़ैदा-मंद) नहीं हो सकता हमें शक्स के जिसके लिए अल्लाह ने सिफ़ारिश की इजाज़त दी हो। हट्टा के जब लोगों के दिलों से घबराहट दूर होगी तो वो (सिफ़रिश करने वालों से) पूछेंगे के तुम्हारे रब ने क्या जवाब दिया, वो कहेंगे के ठीक जवाब मिला है और वो बुज़ुर्ग ओ बारतार है
عَرَبِي۞ قُل مَن يَرزُقُكُم مِنَ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ قُلِ اللَّهُ ۖ وَإِنّا أَو إِيّاكُم لَعَلىٰ هُدًى أَو في ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)आप (मुश्रिकों से) प्रश्न करें : तुम्हें आकाशों तथा धरती से कौन जीविका प्रदान करता है? आप कह दें : अल्लाह। तथा निःसंदेह हम या तुम अवश्य सन्मार्ग पर हैं अथवा खुली गुमराही में हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) insey pucho, “kaun tumko aasmaano aur zameen se rizq deta hai?” kaho “Allah. Ab la muhala (inevitably) hum mein aur tum mein se koi ek hi hidayat par hai ya khuli gumraahi mein pada hua hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Poochiye kay tumhen aasmano aur zamin say rozi kaun phonchata hai? (khud) jawab dijiye! Kay Allah Taalaa. (suno) hum ya tum. Ya to yaqeenan hodayat per hain ya khulli gumrahi mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) इनसे पूछो, "कौन तुमको आसमान और ज़मीन से रिज़्क देता है?” कहो "अल्लाह। अब ला मुहाल (अनिवार्य रूप से) हम में और तुम में से कोई एक ही हिदायत पर है या खुली गुमराही में पड़ा हुआ है।"
عَرَبِيقُل لا تُسأَلونَ عَمّا أَجرَمنا وَلا نُسأَلُ عَمّا تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : न तुमसे हमारे अपराधों के बारे में प्रश्न किया जाएगा और न हमसे तुम्हारे कर्मों के संबंध में प्रश्न किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho, “jo kasoor humne kiya ho uski koi baaz-purs tumse na hogi, aur jo kuch tum kar rahey ho uski koi jawab talabi humse nahin ki jayegi.”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! Kay humaray kiye huye gunahon ki babat tum say koi sawal na kiya jayega na tumharay aemaal ki baaz purs hum say ki jayegi
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, "जो कसूर हमने किया हो उसकी कोई बाज-पर्स तुमसे ना होगी, और जो कुछ तुम कर रहे हो उसकी कोई जवाब तलबी हमसे नहीं की जाएगी।"
عَرَبِيقُل يَجمَعُ بَينَنا رَبُّنا ثُمَّ يَفتَحُ بَينَنا بِالحَقِّ وَهُوَ الفَتّاحُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि हमारा पालनहार हमें एकत्रित करेगा। फिर हमारे बीच सत्य के साथ निर्णय करेगा तथा वही अति निर्णयकारी, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Kaho “hamara Rubb humko jamaa karega, phir hamare darmiyan theek theek faisla kardega. Woh aisa zabardast hakim (Great Judge) hai jo sab kuch jaanta hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Enhen khabar dey dijiye kay hum sab ko humara rab jama kerkay phir hum mein sachay faislay kerdey ga. Woh faislay chukaney wala hai aur dana
Devnagri Urdu (Maududi)कहो "हमारा रब्ब हमको जमा करेगा, फिर हमारे दरमियान ठीक ठीक फैसला कर देगा। वो ऐसा जबरदस्त हकीम (महान न्यायाधीश) है जो सब कुछ जानता है।"
عَرَبِيقُل أَرونِيَ الَّذينَ أَلحَقتُم بِهِ شُرَكاءَ ۖ كَلّا ۚ بَل هُوَ اللَّهُ العَزيزُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : तुम मुझे वो लोग दिखाओ, जिन्हें तुमने साझी ठहराकर अल्लाह के साथ मिला दिया है? ऐसा कदापि नहीं है। बल्कि वही अल्लाह अत्यंत प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho, “zara mujhey dekhao to saheeh woh kaun hastiyan hain jinhein tumne uske saath shareek laga rakkha hai.” Hargiz nahin, zabardast aur dana to bas woh Allah hi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! Kay acha mujhay bhi to unhen dikha do jinhen tum Allah ka shareek thera ker uss kay sath mila rahey ho aisa hergiz nahi bulkay wohi Allah hai ghalib ba-hikmat
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, "जरा मुझे देखो तो सही वो कौन हस्तियां हैं जिन्होंने तुमने उसके साथ शरीक लगा रखा है।" हरगिज़ नहीं, ज़बरदस्त और दाना तो बस वो अल्लाह ही है
عَرَبِيوَما أَرسَلناكَ إِلّا كافَّةً لِلنّاسِ بَشيرًا وَنَذيرًا وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने आपको समस्त मनुष्यों के लिए शुभ सूचना देने वाला और डराने वाला ही बनाकर भेजा है। किन्तु अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Aur (Aey Nabi) humne tumko tamaam hi insaano ke liye basheer (khush kabhri dene wala) o nazeer (darr sunane wala) bana kar bheja hai, magar aksar log jaante nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney aap ko tamam logon kay liye khushkhabriyan sunaney wala aur aur daraney wala bana ker bheja hai haan magar (yeh sahih hai) kay logon ki aksariyat bey ilm hai
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ नबी) हमने तुमको तमाम ही इंसानों के लिए बशीर (खुश कब्री देने वाला) ओ नज़ीर (डर सुनाने वाला) बना कर भेजा है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं
عَرَبِيوَيَقولونَ مَتىٰ هٰذَا الوَعدُ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे कहते हैं : (क़ियामत का) यह वादा कब पूरा होगा, यदि तुम सच्चे हो?
Roman Urdu (Maududi)Yeh log tumse kehte hain ke woh (qayamat ka) wada kab poora hoga agar tum sacchey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Poochtay hain kay woh wada hai kab? Sachay hoto bata do
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग तुमसे कहते हैं के वो (कयामत का) वादा कब पूरा होगा अगर तुम सच्चे हो
عَرَبِيقُل لَكُم ميعادُ يَومٍ لا تَستَأخِرونَ عَنهُ ساعَةً وَلا تَستَقدِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप (उनसे) कह दें कि तुम्हारे लिए एक ऐसे दिन का वादा है कि न तुम उससे एक घड़ी पीछे रह सकोगे और न आगे बढ़ सकोगे।
Roman Urdu (Maududi)Kaho tumhare liye ek aisey din ki miyad muqarrar hai jiske aane mein na ek ghadi bhar ki taakhir (delay) tum kar sakte ho aur na ek ghadi bhar pehle isey laa sakte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jawab dijiye kay waday ka din theek moyyan hai jiss say aik sa’at na tum peechay hut saktay ho na aagay barh saktay ho
Devnagri Urdu (Maududi)कहो तुम्हारे लिए एक ऐसे दिन की मियाद मुकर्रर है जिसके आने में ना एक घड़ी भर की आखिरी (देरी) तुम कर सकते हो और ना एक घड़ी भर पहले इसे ला सकते हो हो
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ كَفَروا لَن نُؤمِنَ بِهٰذَا القُرآنِ وَلا بِالَّذي بَينَ يَدَيهِ ۗ وَلَو تَرىٰ إِذِ الظّالِمونَ مَوقوفونَ عِندَ رَبِّهِم يَرجِعُ بَعضُهُم إِلىٰ بَعضٍ القَولَ يَقولُ الَّذينَ استُضعِفوا لِلَّذينَ استَكبَروا لَولا أَنتُم لَكُنّا مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा काफ़िरों ने कहा कि हम कदापि इस क़ुरआन पर और इससे पहले की पुस्तक पर ईमान नहीं लाएँगे। और यदि आप देखें जब अत्याचारी लोग (क़ियामत के दिन) अपने पालनहार के समक्ष खड़े किए जाएँगे, जबकि वे एक-दूसरे की बात का खंडन कर रहे होंगे। जो लोग (दुनिया में) कमज़ोर समझे जाते थे, वे उन लोगों से कहेंगे, जो बड़े बनते थे : यदि तुम न होते, तो अवश्य ही हम ईमान वाले होते।
Roman Urdu (Maududi)Yeh kaafir kehte hain ke “hum hargiz is Quran ko na maanenge aur na issey pehle aayi hui kisi kitaab ko tasleem karenge”. Kaash tum dekho inka haal us waqt jab yeh zaalim apne Rubb ke huzur khaday hongey us waqt yeh ek dusre par ilzam dharenge. Jo log duniya mein daba kar rakkhe gaye thay woh baday bannay walon se kahenge ke “agar tum na hotay to hum momin hotay.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kafiro ney kaha kay hum hergiz na to iss quran ko manay na iss say pehlay ki kitabon ko! Aey dekhney walay kaash kay tu inn zalimon ko uss waqt dekhta jab kay yeh apnay rab kay samney kharay huyey aik doosray ko ilzam dey rahey hongay kamzor log baray logon say kahen gay agar tum na hotay to hum to momin hotay
Devnagri Urdu (Maududi)ये काफ़िर कहते हैं के "हम हरगिज़ इस कुरान को ना मानेंगे और ना इसके पहले आई हुई किसी किताब को तसलीम करेंगे"। काश तुम देखो इनका हाल हम वक्त जब ये जालिम अपने रब के हुजूर खड़े होंगे हमें वक्त ये एक दूसरे पर इल्जाम धरेंगे। जो लोग दुनिया में दबा कर रखे गए थे वो बड़े बनने वालों से कहेंगे के "अगर तुम ना होते तो हम मोमिन होते।"
عَرَبِيقالَ الَّذينَ استَكبَروا لِلَّذينَ استُضعِفوا أَنَحنُ صَدَدناكُم عَنِ الهُدىٰ بَعدَ إِذ جاءَكُم ۖ بَل كُنتُم مُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग जो घमंड करते (बड़े बनते) थे, उन लोगों से जो कमज़ोर समझे जाते थे, कहेंगे : क्या हमने तुम्हें मार्गदर्शन से रोका था, जब वह तुम्हारे पास आ गया था? बल्कि तुम (स्वयं ही) अपराधी थे।
Roman Urdu (Maududi)Woh baday bannay walay in dabay huey logon ko jawab denge “kya humne tumhein us hidayat se roka tha jo tumhare paas aayi thi? Nahin, balke tum khud mujrim thay.”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh baray log inn kamzoron ko jawab den gay kay kiya tumharay pass hidayat aa chukney kay baad hum ney tumhen iss say roka tha? (nahi) bulkay tum (khud) hi mujrim thay
Devnagri Urdu (Maududi)वो बदे बनने वाले दबाए हुए लोगों को जवाब देंगे "क्या हमने तुम्हें हमें हिदायत से रोका था जो तुम्हारे पास आई थी? नहीं, बल्कि तुम खुद मुजरिम थे।"
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ استُضعِفوا لِلَّذينَ استَكبَروا بَل مَكرُ اللَّيلِ وَالنَّهارِ إِذ تَأمُرونَنا أَن نَكفُرَ بِاللَّهِ وَنَجعَلَ لَهُ أَندادًا ۚ وَأَسَرُّوا النَّدامَةَ لَمّا رَأَوُا العَذابَ وَجَعَلنَا الأَغلالَ في أَعناقِ الَّذينَ كَفَروا ۚ هَل يُجزَونَ إِلّا ما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे लोग जो कमज़ोर समझे जाते थे, उन लोगों से कहेंगे, जो अहंकार करते थे : बल्कि (तुम्हारी) रात और दिन की चालों ही ने (हमें रोका था) जब तुम हमें आदेश देते थे कि हम अल्लाह के साथ कुफ़्र करें तथा उसके लिए साझी ठहराएँ। तथा जब वे यातना को देखेंगे तो (अपने दिल में) पछतावा को छिपाएँगे। और हम उन लोगों की गरदनों में तौक़ डाल देंगे, जिन्होंने कुफ़्र किया। उन्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Woh dabay huey log un baday banne walon se kahenge, ‘Nahin, balke shab-o-roz ki makkari thi jab tum humse kehte thay ke hum Allah se kufr karein aur dusron ko uska humsar thehrayein.” Aakhir e kaar jab yeh log azaab dekhenge to apne dilon mein pachtayenge aur hum in munkireen ke galon mein tauq (bedi/fetters) daal denge. Kya logon ko iske siwa aur koi badla diya ja sakta hai ke jaise aamal unke thay waisi hi jaza woh payein
Roman Urdu (Junagarhi)(Iss kay jawab mein) yeh kamzor log inn mutakabbiron say kahen gay (nahi nahi) bulkay din raat makar-o-faraib say humen Allah kay sath kufur kerney aur uss kay shareek muqarrar kerney ka tumhara hukum dena humari bey emaani ka baees hua aur azab ko dekhtay hi sab ka sab dil mein pashemaan ho rahey hongay aur kafiron ki gardano mein hum toq daal den gay unhen sirf unn kay kiyey keraye aemaal ka badla diya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)वो दबाए हुए लोग उन बदाए बनने वालों से कहेंगे, 'नहीं, बलके शब-ओ-रोज़ की मक्कारी थी जब तुम हमसे कहते थे के हम अल्लाह से कुफ्र करें और दूसरों को उसका हमसर ठहरें।' आख़िर ए कार जब ये लोग अज़ाब देखेंगे तो अपने दिलों में पछताएंगे और हम मुनकिरीन के गैलन में तौक (बेदी/बेड़ी) डाल देंगे। क्या लोगों को इसके सिवा और कोई बदला दिया जा सकता है के जैसा अमल उनके थे वैसी ही जजा वो पायें
عَرَبِيوَما أَرسَلنا في قَريَةٍ مِن نَذيرٍ إِلّا قالَ مُترَفوها إِنّا بِما أُرسِلتُم بِهِ كافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने जिस बस्ती में भी कोई डराने वाला भेजा, तो उसके संपन्न लोगों ने यही कहा : निःसंदेह हम उस चीज़ का, जिसके साथ तुम भेजे गए हो, इनकार करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kabhi aisa nahin hua ke humne kisi basti mein ek khabardar karne wala bheja ho aur us basti ke khatey peetay logon ne yeh na kaha ho ke jo paigham tum lekar aaye ho usko hum nahin maante
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney to jiss basti mein jo bhi aagah kerney wala bheja wahan kay khushaal logon ney yehi kaha kay jiss cheez kay sath tum bhejay gaye ho hum uss kay sath kufur kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)कभी ऐसा नहीं हुआ के हमने किसी बस्ती में एक खबरदार करने वाला भेजा हो और उस बस्ती के खाते पीते लोगों ने ये ना कहा हो के जो पैग़ाम तुम लेकर आए हो उसको हम नहीं मानते
عَرَبِيوَقالوا نَحنُ أَكثَرُ أَموالًا وَأَولادًا وَما نَحنُ بِمُعَذَّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा : हम धन और संतान में तुमसे बढ़कर हैं तथा हमें यातना नहीं दी जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne hamesha yahi kaha ke hum tumse zyada maal aulad rakhte hain aur hum hargiz saza paaney walay nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kaha hum maal-o-aulad mein boht barhay huyey hain yeh nahi hosakta kay hum azab diye jayen
Devnagri Urdu (Maududi)उनको ने हमेशा यहीं कहा के हम तुमसे ज्यादा माल औलाद रखते हैं और हम हरगिज सजा पाने वाले नहीं हैं
عَرَبِيقُل إِنَّ رَبّي يَبسُطُ الرِّزقَ لِمَن يَشاءُ وَيَقدِرُ وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : निःसंदेह मेरा पालनहार जिसके लिए चाहता है, जीविका विस्तृत कर देता है, और (जिसके लिए चाहे) तंग कर देता है। लेकिन अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)(Aye Nabi), Insey kaho mera Rubb jisey chahta hai kushada (abundant) rizq deta hai aur jisey chahta hai napa tula ata karta hai, magar aksar log iski haqeeqat nahin jaante
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! kay mera rab jiss kay liye chahaye rozi kushada ker deta hai aur tang bhi ker deta hai lekin aksar log nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), इनसे कहो मेरा रब जैसा चाहता है कुशादा (प्रचुर मात्रा में) रिज्क देता है और जिसे चाहता है नापा तुला अता करता है, मगर अक्सर लोग इसकी हकीकत नहीं जानते
عَرَبِيوَما أَموالُكُم وَلا أَولادُكُم بِالَّتي تُقَرِّبُكُم عِندَنا زُلفىٰ إِلّا مَن آمَنَ وَعَمِلَ صالِحًا فَأُولٰئِكَ لَهُم جَزاءُ الضِّعفِ بِما عَمِلوا وَهُم فِي الغُرُفاتِ آمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम्हारे धन और तुम्हारी संतान ऐसी नहीं हैं जो तुम्हें पद में हमारे निकट कर दें। परंतु जो ईमान लाया और उसने अच्छे कार्य किए, तो यही लोग हैं, जिनके लिए उनके कार्यों का दोहरा प्रतिफल है और वे ऊँचे भवनों में निश्चिंत होकर रहेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh tumahri daulat aur tumhari aulad nahin hai jo tumhein humse kareeb karti ho. Haan magar jo iman laye aur neik amal karey, yahi log hain jinke liye unke amal ki dohri (double) jaza hai, aur woh baland o baala imaraton mein itminaan se rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tumharay maal aur aulad aisay nahi kay tumhen humaray pass (martabon say) qareeb ker den haan jo eman layen aur nek amal keren unn kay liye unn kay aemaal ka dohra ajar hai aur woh nidar-o-bey-khof ho ker bala khano mein rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये तुम्हारी दौलत और तुम्हारी औलाद नहीं है जो तुम्हें हमसे करीब करती हो। हां मगर जो ईमान लाए और नेक अमल करे, यहीं लोग हैं जिनके लिए उनके अमल की दोहरी (डबल) जजा है, और वो बालंद ओ बाला इमरतन में इत्मिनान से रहेंगे
عَرَبِيوَالَّذينَ يَسعَونَ في آياتِنا مُعاجِزينَ أُولٰئِكَ فِي العَذابِ مُحضَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग हमारी आयतों को असत्य सिद्ध करने के प्रयास में लगे रहते हैं, वे लाकर यातना में डाले जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jo hamari aayat ko nicha dikhane ke liye daud-dhoop karte hain, to woh azaab mein mubtala hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log humari aayaton kay muqablay ki tag-o-do mein lagay rehtay hain yehi hain jo azab mein pakar ker hazir rakhay jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जो हमारी आयत को नीचा दिखाएंगे के लिए दौड़-धूप करते हैं, तो वो अज़ाब में मुबतला होंगे
عَرَبِيقُل إِنَّ رَبّي يَبسُطُ الرِّزقَ لِمَن يَشاءُ مِن عِبادِهِ وَيَقدِرُ لَهُ ۚ وَما أَنفَقتُم مِن شَيءٍ فَهُوَ يُخلِفُهُ ۖ وَهُوَ خَيرُ الرّازِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : निःसंदेह मेरा पालनहार अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है, जीविका विस्तृत कर देता है, और (जिसके लिए चाहता है) तंग कर देता है। और तुम जो चीज़ भी खर्च करते हो, तो वह उसकी जगह और देता है। और वह सबसे उत्तम जीविका देने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), Insey kaho, “mera Rubb apne bandon mein se jisey chahta hai khula rizq deta hai aur jisey chahta hai napa tula deta hai. Jo kuch tum kharch kar detey ho uski jagah whai tumko aur deta hai. Woh sab raziqon(providers) se behtar raziq(provider) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! kay mera rab apnay bandon mein jiss kay liye chahaye rozi kushada kerta hai aur jiss kay liye chahata hai tang ker deta hai tum jo kuch bhi Allah ki raah mein kharach kero gay Allah uss ka (poora poora) badla dey ga aur woh sab say behtar rozi denay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), इनसे कहो, "मेरा रब अपने बंदों में से जैसा चाहता है खुला रिज़क देता है और जिसे चाहता है नपा तुला देता है। जो कुछ तुम खर्च कर देते हो उसकी जगह वही तुमको और देता है। वो सब रज़िकॉन (प्रदाता) से बेहतर रज़िक़ (प्रदाता) है
عَرَبِيوَيَومَ يَحشُرُهُم جَميعًا ثُمَّ يَقولُ لِلمَلائِكَةِ أَهٰؤُلاءِ إِيّاكُم كانوا يَعبُدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन वह (अल्लाह) उन सब को एकत्रित करेगा, फिर फ़रिश्तों से कहेगा : क्या यही लोग तुम्हारी इबादत (पूजा) किया करते थे?
Roman Urdu (Maududi)Aur jis din woh tamaam Insano ko jamaa karega phir Farishton se poochega “kya yeh log tumhari hi ibadat kiya karte thay?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn sab ko Allah uss din jama kerkay farishton say daryaft farmaye ga kay kiya yeh log tumhari ibadat kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और जिस दिन वो तमाम इंसानों को जमा करेगा फिर फ़रिश्तों से पूछेगा "क्या ये लोग तुम्हारी ही इबादत करते थे?"
عَرَبِيقالوا سُبحانَكَ أَنتَ وَلِيُّنا مِن دونِهِم ۖ بَل كانوا يَعبُدونَ الجِنَّ ۖ أَكثَرُهُم بِهِم مُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे (फ़रिश्ते) कहेंगे : तू पवित्र है! तू ही उनके सिवा हमारा संरक्षक है। बल्कि वे तो जिन्नों की इबादत करते थे। उनमें से अधिकतर लोग उन्हीं पर ईमान रखने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)To woh jawab denge ke “paak hai aap ki zaat, hamara taaluq to aapse hai na ke in logon se. Dar-asal yeh hamari nahin balke Jinno ki ibadat karte thay, in mein se aksar unhi par iman laye huey thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kahen gay teri zaat pak hai aur humara wali to tu hai na kay yeh bulkay yeh log jinno ki ibadat kiya kertay thay inn mein kay aksar ka unhi per eman tha
Devnagri Urdu (Maududi)तो वो जवाब देंगे के "पाक है आप की जात, हमारा तालुक़ तो आपस में है ना के इन लोगों से। दर-असल ये हमारी नहीं बलके जिन्नो की इबादत करते थे, मेरे अंदर से अक्सर उन्ही पर ईमान लाए हुए थे"
عَرَبِيفَاليَومَ لا يَملِكُ بَعضُكُم لِبَعضٍ نَفعًا وَلا ضَرًّا وَنَقولُ لِلَّذينَ ظَلَموا ذوقوا عَذابَ النّارِ الَّتي كُنتُم بِها تُكَذِّبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)सो आज तुम एक-दूसरे के लाभ और हानि के मालिक नहीं हो। तथा हम उन अत्याचारियों से कहेंगे : उस आग की यातना चखो, जिसे तुम झुठलाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)(Us waqt hum kahenge ke) aaj tum mein se koi na kisi ko faida pahuncha sakta hai na nuksan. Aur zaalimon se hum kehdenge ke ab chakkho us azaab e jahannum ka maza jisey tum jhutlaya karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aaj tum mein say koi (bhi) kiss kay liye (bhi kissi qisam kay) nafa nuksan ka malik na hoga. Aur hum zalimo say keh den gay kay iss aag ka maza chakho jissay tum jhutlatay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)(उस वक्त हम कहेंगे के) आज तुम मेरे से कोई ना किसी को फ़ायदा पाहुंचा सकता है ना नुक्सान। और ज़ालिमों से हम कह देंगे के अब चक्खो उस अज़ाब ए जहन्नुम का मजा जैसे तुम झूठलाया करते थे
عَرَبِيوَإِذا تُتلىٰ عَلَيهِم آياتُنا بَيِّناتٍ قالوا ما هٰذا إِلّا رَجُلٌ يُريدُ أَن يَصُدَّكُم عَمّا كانَ يَعبُدُ آباؤُكُم وَقالوا ما هٰذا إِلّا إِفكٌ مُفتَرًى ۚ وَقالَ الَّذينَ كَفَروا لِلحَقِّ لَمّا جاءَهُم إِن هٰذا إِلّا سِحرٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनके समक्ष हमारी खुली आयतें पढ़ी जाती हैं, तो कहते हैं : यह तो एक ऐसा व्यक्ति है, जो चाहता है कि तुम्हें उन (पूज्यों) से रोक दे, जिनकी तुम्हारे बाप-दादा इबादत किया करते थे। तथा उन्होंने कहा : यह तो मात्र एक गढ़ा हुआ झूठ है। तथा जब उन काफ़िरों के पास सत्य आ गया, तो उन्होंने उसके बारे में कहा : यह तो मात्र एक खुला जादू है।
Roman Urdu (Maududi)In logon ko jab hamari saaf saaf aayat sunayi jaati hain to yeh kahte hain ke “yeh shaks to bas yeh chahta hai ke tumko un maboodon se bargashta (turn away) karde jinki ibadat tumhare baap dada karte aaye hain.” aur kehte hain ke “yeh (Quran) mehaz ek jhoot hai ghada hua.” In kafiron ke saamne jab haqq aaya to unhon ne kehdiya ke “ yeh to sareeh jaadu hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab unn kay samney humari saaf saaf aayaten parhi jati hain to kehtay hain yeh aisa shaks hai jo tumehn tumharay baap dada kay maboodon say rok dena chahata hai (iss kay siwa koi baat nahi) aur kehtay hain kay yeh to ghara hua jhoot hai aur haq inn kay pass aa chuka phir bhi kafir yehi kehtay rahey kay yeh to khula hua jadoo hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों को जब हमारी सफ़ आयत सुनाई जाती है तो ये कहते हैं के "ये शक्स तो बस ये चाहता है के तुमको उन माबूदों से बरगश्ता (मुड़ जाना) करदे जिनकी इबादत तुम्हारे बाप दादा करते आये हैं।" और कहते हैं "ये (कुरान) महज़ एक झूठ है घड़ा हुआ।" इन काफ़िरों के सामने जब हक़ आया तो उनको ने कहा के "ये तो सारे जादू है"
عَرَبِيوَما آتَيناهُم مِن كُتُبٍ يَدرُسونَها ۖ وَما أَرسَلنا إِلَيهِم قَبلَكَ مِن نَذيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जबकि हमने उन (मक्का वासियों) को किताबें नहीं दी थीं, जिनको वे पढ़ते हों तथा हमने आपसे पहले उनकी ओर कोई डराने वाला भी नहीं भेजा।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke na humne in logon ko pehle koi kitaab di thi ke yeh usey padhte hon, aur na tumse pehle inki taraf koi mutanabbeh karne wala bheja tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn (makkah walon) ko na to hum ney kitaben dey rakhi hain jinhen yeh parhtay hon na inn kay pass aap say pehlay koi aagah kerney wala aaya
Devnagri Urdu (Maududi)हलांके ना हमने इन लोगों को पहले कोई किताब दी थी के ये उसे पढ़ते थे, और ना तुमसे पहले इनकी तरफ कोई मुतनब्बेह करने वाला भेजा था
عَرَبِيوَكَذَّبَ الَّذينَ مِن قَبلِهِم وَما بَلَغوا مِعشارَ ما آتَيناهُم فَكَذَّبوا رُسُلي ۖ فَكَيفَ كانَ نَكيرِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इनसे पूर्व के लोगों ने भी झुठलाया था, और जो कुछ हमने उन्हें प्रदान किया था, ये तो उसके दसवें भाग को भी नहीं पहुँचे हैं। चुनाँचे उन्होंने मेरे रसूलों को झुठलाया, तो देख लो मेरी यातना कैसी थी?
Roman Urdu (Maududi)Insey pehle guzre huey log jhutla chuke hain. Jo kuch humne unhein diya tha uske usrey-asheer (even a tenth/ daswe hissey) ko bhi yeh nahin pahunche hain. Magar jab unhon ne mere Rasoolon ko jhutlaya to dekhlo ke meri saza kaisi sakht thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn say pehlay kay logon ney bhi humari baaton ko jhutlaya tha aur unhen jo hum ney dey rakha tha yeh to uss kay daswen hissay ko bhi nahi phonchay pus unhon ney meray rasoolon ko jhutlaya (phir dekh kay) mera azab kaisa (sakht) tha
Devnagri Urdu (Maududi)इंसे पहले गुज़रे हुए लोग झूठला चुके हैं। जो कुछ हमने उन्हें दिया था उसके उसरे-अशीर (यहां तक ​​कि दसवें/दसवे हिस्से) को भी ये नहीं पहुंचे हैं। मगर जब उन्हें ने मेरे रसूलों को झुटलाया तो देखलो के मेरी सजा कैसी थी
عَرَبِي۞ قُل إِنَّما أَعِظُكُم بِواحِدَةٍ ۖ أَن تَقوموا لِلَّهِ مَثنىٰ وَفُرادىٰ ثُمَّ تَتَفَكَّروا ۚ ما بِصاحِبِكُم مِن جِنَّةٍ ۚ إِن هُوَ إِلّا نَذيرٌ لَكُم بَينَ يَدَي عَذابٍ شَديدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : मैं बस तुम्हें एक बात की नसीहत करता हूँ कि तुम अल्लाह के लिए दो-दो तथा अकेले-अकेले खड़े हो जाओ। फिर सोचो। तुम्हारे साथी में कोई पागलपन नहीं है। वह तो केवल तुम्हें एक कठोर यातना के आने से पहले डराने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), Insey kaho “main tumhein bas ek baat ki naseehat karta hoon, khuda ke liye tum akele akele aur do do mil kar apna dimaag ladaoo aur socho, tumhare saahib[companion(Muhammad)] mein aakhir aisi kaunsi baat hai jo junoon(madness) ki ho? Woh to ek sakht azaab ki aamad (aaney) se pehle tumko mutanabbeh karne wala hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! kay mein tumhen sirf aik hi baat ki naseehat kerta hun kay tum Allah kay wastay (zidd chor ker) do do mill ker ya tanha kharay hoker socho to sahi tumharay iss rafiq ko koi janoon nahi woh to tumhen aik baray (sakht) azab kay aaney say pehlay daraney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), इनसे कहो "मैं तुम्हें बस एक बात की हिदायत करता हूं, खुदा के लिए तुम अकेले अकेले और दो दो मिल कर अपना दिमाग लड़ाओ और सोचो, तुम्हारे साहब [साथी (मुहम्मद)] में आख़िर ऐसी कौन सी बात है जो जुनून (पागलपन) की हो? वो तो एक सख्त अज़ाब की आमद (आने) से पहले तुमको मुतनब्बेह करने वाला है”
عَرَبِيقُل ما سَأَلتُكُم مِن أَجرٍ فَهُوَ لَكُم ۖ إِن أَجرِيَ إِلّا عَلَى اللَّهِ ۖ وَهُوَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ شَهيدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : मैंने तुमसे कोई बदला माँगा है, तो वह तुम्हारे ही लिए है। मेरा बदला तो बस अल्लाह पर है और वह प्रत्येक वस्तु पर गवाह है।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho “agar maine tumse koi ajar maanga hai to woh tum hi ko mubarak rahey. Mera ajar to Allah ke zimmey hai aur woh har cheez par gawah hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! kay jo badla mein tum say maangon woh tumharay liye hai mera badla to Allah Taalaa hi kay zimmay hai. Woh her cheez say ba-khabar (aur mutlaa) hai
Devnagri Urdu (Maududi)इंसे कहो “अगर मैंने तुमसे कोई अजर मांगा है तो वो तुम ही को मुबारक” रहे. मेरा अजर तो अल्लाह के ज़िम्मे है और वो हर चीज़ पर गवाह है।”
عَرَبِيقُل إِنَّ رَبّي يَقذِفُ بِالحَقِّ عَلّامُ الغُيوبِ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : मेरा पालनहार सत्य द्वारा (असत्य पर) चोट करता है। वह परोक्ष (ग़ैब) की बातों का खूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho “mera Rubb (mujhpar) haqq ka ilqa (inspiration/hurls down) karta hai aur woh tamaam posheeda(chupi hui) haqeeqaton ko jaane wala hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! kay mera rab haq (sachi wahee) nazil farmata hai woh her ghaib ka jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो "मेरा रब (मुझपर) हक़ का इल्का (प्रेरणा/हल्स डाउन) करता है और वो तमाम पोशीदा (छुपी हुई) हक़ीक़त को जाने वाला है"
عَرَبِيقُل جاءَ الحَقُّ وَما يُبدِئُ الباطِلُ وَما يُعيدُ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि सत्य आ गया और असत्य न तो पहली बार उभरा और न दोबारा उभर सकेगा।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, “haqq aa gaya aur ab baatil ke kiye kuch nahin ho sakta”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! kay haq aa chuka batil na to pehlay kuch ker saka hai aur na ker sakay ga
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, "हक़ आ गया और अब बातिल के लिए कुछ नहीं हो सकता"
عَرَبِيقُل إِن ضَلَلتُ فَإِنَّما أَضِلُّ عَلىٰ نَفسي ۖ وَإِنِ اهتَدَيتُ فَبِما يوحي إِلَيَّ رَبّي ۚ إِنَّهُ سَميعٌ قَريبٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : यदि मैं राह से हट गया, तो मेरे राह से हटने का गुनाह मुझपर ही है और यदि मैं सही मार्ग पर हूँ, तो यह उस कारण है जो मेरा पालनहार मेरी ओर वह़्य भेजता है। निःसंदेह वह सब कुछ सुनने वाला, निकट है।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, “Agar main gumraah ho gaya hoon to meri gumraahi ka wabal mujhpar hai, aur agar main hidayat par hoon to us wahee (revelation) ki bina par hoon jo mera Rubb mere upar nazil karta hai.Woh sabkuch sunta hai aur qareeb hi hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! kay agar mein behak jaon to meray behakney (ka wabaal) mujh per hi hai aur agar mein raahe-hidayat per hun to ba-sabab iss wahee kay jo mera perwerdigar mujhay kerta hai woh bara hu sunnay wala aur boht hi qareeb hai
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, "अगर मैं गुमराह हो गया हूं तो मेरी गुमराही का जवाब मुझपर है, और अगर मैं हिदायत पर हूं तो वही (रहस्योद्घाटन) की बिना पर हूं जो मेरा रब मेरे ऊपर नाज़िल करता है। वो सब कुछ सुनता है और करीब ही है।"
عَرَبِيوَلَو تَرىٰ إِذ فَزِعوا فَلا فَوتَ وَأُخِذوا مِن مَكانٍ قَريبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ रसूल!) अगर आप देखें, जब ये लोग घबराए हुए होंगे, तो उनके लिए बचने का कोई रास्ता न होगा, तथा वे निकट स्थान ही से पकड़ लिए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Kaash tum dekho inhein us waqt jab yeh log ghabraye phir rahey hongey aur kahin bach kar na ja sakengey, balke qareeb hi se pakad liye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar aap (woh waqt) mulahiza keren jabkay yeh kuffaar ghabraye phiren gay phir nikal bhagney ki koi soorat na hogi aur qareeb ki jaga say giriftar ker liye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)काश तुम देखो उन्हें वक्त जब ये लोग घबराएं फिर रहेंगे होंगे और कहीं बच कर ना जा सकेंगे, बलके करीब ही से पकड़ लिए जाएंगे
عَرَبِيوَقالوا آمَنّا بِهِ وَأَنّىٰ لَهُمُ التَّناوُشُ مِن مَكانٍ بَعيدٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वे पुकार उठेंगे : हम (अब) उसपर ईमान ले आए। लेकिन इतनी दूर जगह से उनके लिए ईमान की प्राप्ति कहाँ से संभव है?
Roman Urdu (Maududi)Us waqt yeh kahenge ke hum uspar iman le aaye, halanke ab dur nikli hui cheez kahan haath aa sakti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Uss waqt kahen gay kay hum iss quran per eman laye lekin iss qadar door jaga say (matlooba cheez) kaisay hath aa sakti hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त ये कहेंगे के हम उसपर ईमान ले आए, हालंके अब दूर निकली हुई चीज कहां हाथ आ सकती है
عَرَبِيوَقَد كَفَروا بِهِ مِن قَبلُ ۖ وَيَقذِفونَ بِالغَيبِ مِن مَكانٍ بَعيدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि इससे पहले (दुनिया में) उन्होंने उसका इनकार किया था और वे दूर की जगह से बिन देखे तीर चलाते रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Issey pehle yeh kufr kar chuke thay aur bila tehqeeq dur dur ki kodiyan (conjectures) laya karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Iss say pehlay to enhon ney iss say kufur kiya tha aur door daraz say binn dekhay hi phenktay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)इसे पहले ये कुफ्र कर चुके थे और बिला तहकीक दूर की कोड़ियां (अनुमान) लाया करते थे
عَرَبِيوَحيلَ بَينَهُم وَبَينَ ما يَشتَهونَ كَما فُعِلَ بِأَشياعِهِم مِن قَبلُ ۚ إِنَّهُم كانوا في شَكٍّ مُريبٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके और उन चीज़ों के बीच जिनकी वे इच्छा करेंगे, आड़ बना दी जाएगी, जैसा कि इनके जैसों के साथ इससे पहले किया जा चुका है। निःसंदेह वे असमंजस में डालने वाले संदेह में पड़े हुए थे।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt jis cheez ki yeh tamanna kar rahey hongey ussey mehroom kardiye jayenge jis tarh inke pesh-ro hum mashrab (likes of them before) mehroom ho chuke hongey. Yeh baday gumraah-kun shakk mein paday huey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Inn ki chahaton aur inn kay darmiyan pardah haael ker diya gaya jaisa kay iss say pehlay bhi inn jaison kay sath kiya gaya woh bhi (inhi ki tarah) shak-o-taraddud mein (paray huyey) thay
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त जिस चीज की ये तमन्ना कर रहे होंगे हमें उसी तरह महरूम करदिये जाएंगे जिस तरह इनके पेश-रो हम मशरब (उनमें से पहले की तरह) महरूम हो चुके होंगे। ये बदाए गुमराह-कुन शक्क में पड़े हुए थे
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Surah 34: Al-Saba' (The Saba')

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Surah 34: Al-Saba' (The Saba')

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Surah 34: Al-Saba' (The Saba')

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Surah 34: Al-Saba' (The Saba')

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Surah 34: Al-Saba' (The Saba')

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Surah 35: Al-Fatir (The Originator)

Meccan🕐 Revelation #43📜 45 Verses🕮 Juz 1
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Surah 35: Al-Fatir (The Originator)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالحَمدُ لِلَّهِ فاطِرِ السَّماواتِ وَالأَرضِ جاعِلِ المَلائِكَةِ رُسُلًا أُولي أَجنِحَةٍ مَثنىٰ وَثُلاثَ وَرُباعَ ۚ يَزيدُ فِي الخَلقِ ما يَشاءُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
हिन्दी (Al-Omari)सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो आकाशों तथा धरती का पैदा करने वाला है, (और) दो-दो, तीन-तीन, चार-चार परों वाले फ़रिश्तों को संदेशवाहक बनाने वाला है। वह संरचना में जैसी चाहता है अभिवृद्धि करता है। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
Roman Urdu (Maududi)Tareef Allah hi ke liye hai jo aasmaano aur zameen ka banane wala aur Farishton ko paigham rasaan muqarrar karne wala hai. (Aisey Farishtey) jinke do do aur teen teen aur chaar chaar baazu (wings) hain. Woh apni makhooq ki saakht mein jaisa chahta hai izafa karta hai. Yaqeenan Allah har cheez par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Uss Allah kay liye tamam tareefen sazawaar hain jo (ibtida’an) aasmano aur zamin ka peda kerney wala aur do do teen teen char char paron walay farsihton ko apna payghumber (qasid) bananey wala hai makhlooq mein jo chahaye ziyadti kerta hai Allah Taalaa yaqeenan her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)तारीफ अल्लाह ही के लिए है जो आसमानो और ज़मीन का बनाने वाला और फ़रिश्तों को पैगाम रसान मुकर्रर करने वाला है। (ऐसी फ़रिश्ते) जिनके दो दो और तीन तीन और चार चार बाज़ू (पंख) हैं। वो अपने मख़ूक की सच्चाई में जैसा चाहता है इज़ाफ़ा करता है। यकीनन अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है
عَرَبِيما يَفتَحِ اللَّهُ لِلنّاسِ مِن رَحمَةٍ فَلا مُمسِكَ لَها ۖ وَما يُمسِك فَلا مُرسِلَ لَهُ مِن بَعدِهِ ۚ وَهُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह लोगों के लिए जो दया खोल दे, उसे कोई रोकने वाला नहीं। तथा जिसे रोक ले, तो उसके बाद, उसे कोई भेजने (खोलने) वाला नहीं। तथा वही सब पर प्रभुत्ववशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah jis rehmat ka darwaza bhi logon ke liye khol de usey koi roakne wala nahin, aur jisey woh bandh karde usey Allah ke baad phir koi dusra kholne wala nahin. Woh zabardast aur hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa jo rehmat logon kay liye khol day so uss ka koi band kerney wala nahi aur jiss ko band kerday so uss kay baad iss ka koi jaari kerney wala nahi aur wohi ghalib hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह जिस रहमत का दरवाज़ा भी लोगों के लिए खोल दे उसे कोई रोकने वाला नहीं, और जिसे वह बंद करदे उसे अल्लाह के बाद फिर कोई दूसरा खोलने वाला नहीं। वो ज़बरदस्त और हकीम है
عَرَبِييا أَيُّهَا النّاسُ اذكُروا نِعمَتَ اللَّهِ عَلَيكُم ۚ هَل مِن خالِقٍ غَيرُ اللَّهِ يَرزُقُكُم مِنَ السَّماءِ وَالأَرضِ ۚ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۖ فَأَنّىٰ تُؤفَكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो! अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करो। क्या अल्लाह के सिवा कोई और उत्पत्तिकर्ता है, जो तुम्हें आकाश तथा धरती से जीविका प्रदान करे? उसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं। फिर तुम कहाँ बहकाए जाते हो?
Roman Urdu (Maududi)Logon, tumpar Allah ke jo ehsanaat hain unhein yaad rakkho, kya Allah ke siwa koi aur khaliq bhi hai jo tumhein aasmaan aur zameen se rizq deta ho? Koi mabood uske siwa nahin, Aakhir tum kahan se dhoka kha rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Logo! Tum per jo inam Allah Taalaa ney kiye hain unhen yaad kero. Kiya Allah kay siwa aur koi bhi khaliq hai jo tumhen aasman aur zamin say rozi phonchaye? Uss ka siwa koi mabood nahi. Pus tum kahan ultay jatay ho
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन, तुम्हारे अल्लाह के जो एहसानात हैं उन्हें याद रक्खो, क्या अल्लाह के सिवा कोई और खालिक भी है जो तुम्हें आसमान और ज़मीन से रिज़क देता हो? कोई माबूद उसके सिवा नहीं, आखिर तुम कहां से धोखा खा रहे हो
عَرَبِيوَإِن يُكَذِّبوكَ فَقَد كُذِّبَت رُسُلٌ مِن قَبلِكَ ۚ وَإِلَى اللَّهِ تُرجَعُ الأُمورُ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वे आपको झुठलाते हैं, तो निश्चय ही आपसे पहले भी रसूलों को झुठलाया जा चुका है। और सभी मामले अल्लाह ही की ओर लौटाए जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar (aey Nabi) yeh log tumhein jhutlate hain (to yeh koi nayi baat nahin), tumse pehle bhi bahut se Rasool jhutlaye ja chuke hain, aur sarey maamlaat aakhir e kaar Allah hi ki taraf rujoo honay waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur gar yeh aap ko jhutlayen to aap say pehlay kay tamam rasool bhi jhutlaye ja chukay hain. Tamam kaam Allah hi ki taraf lotaye jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर (ऐ नबी) ये लोग तुम्हें झुठलाते हैं (तो ये कोई नई बात नहीं), तुमसे पहले भी बहुत से रसूल झुटलाए जा चुके हैं, और सारे मामले आखिर ए कार अल्लाह हाय की तरफ रूजू होने वाले हैं
عَرَبِييا أَيُّهَا النّاسُ إِنَّ وَعدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ فَلا تَغُرَّنَّكُمُ الحَياةُ الدُّنيا ۖ وَلا يَغُرَّنَّكُم بِاللَّهِ الغَرورُ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो! निश्चय ही अल्लाह का वादा सच्चा है। अतः सांसारिक जीवन तुम्हें धोखे में न डाले और न वह धोखेबाज़ (शैतान) तुम्हें अल्लाह के विषय में धोखा देने पाए।
Roman Urdu (Maududi)Logon, Allah ka waada yaqeenan barhaqq (saccha) hai, lihaza duniya ki zindagi tumhein dhoke mein na daley aur na woh bada dhokebaaz tumhein Allah ke barey mein dhoka dene paye
Roman Urdu (Junagarhi)Logo! Allah Taalaa ka wada sacha hai tumhen zindaganiy-e-duniya dhokay mein na daal day aur na dhokay baaz shetan tumhen ghaflat mein daal day
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन, अल्लाह का वादा यकीनन बरहक्क (सच्चा) है, लिहाजा दुनिया की जिंदगी तुम्हें धोखे में ना डाले और ना वो बड़ा धोखेबाज़ तुम्हें अल्लाह के बारे में धोखा देने वाले हैं
عَرَبِيإِنَّ الشَّيطانَ لَكُم عَدُوٌّ فَاتَّخِذوهُ عَدُوًّا ۚ إِنَّما يَدعو حِزبَهُ لِيَكونوا مِن أَصحابِ السَّعيرِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह शैतान तुम्हारा शत्रु है। अतः तुम उसे अपना शत्रु ही समझो। वह तो अपने समूह को केवल इसलिए बुलाता है कि वे नरक वालों में से हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Dar haqeeqat shaytan tumhara dushman hai is liye tum bhi usey apna dushman hi samjho, woh to apne pairawon ko apni raah par is liye bula raha hai ke woh dozakhiyon mein shamil ho jayein
Roman Urdu (Junagarhi)Yaad rakho! Shetan tumhara dushman hai tum ussay dushman jano woh to apnay giroh ko sirf iss liye hi bulata hai kay woh sab jahannum wasil hojayen
Devnagri Urdu (Maududi)दर हकीकत शैतान तुम्हारा दुश्मन है आपके लिए भी उसे अपना दुश्मन ही समझो, वो तो अपने जोड़े को अपनी राह पर इस लिए बुला रहा है कि वो दोज़खियों में शामिल हो जाए
عَرَبِيالَّذينَ كَفَروا لَهُم عَذابٌ شَديدٌ ۖ وَالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ لَهُم مَغفِرَةٌ وَأَجرٌ كَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उनके लिए कठोर यातना है, तथा जो लोग ईमान लाए और सत्कर्म किए, उनके लिए क्षमा तथा बड़ा प्रतिफल है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log kufr karenge unke liye sakht azaab hai aur jo iman layenge aur neik amal karenge unke liye magfirat aur bada ajar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log kafir huyey unn kay liye sakht saza hai aur jo log eman laye aur nek aemaal kiye unn kay liye baksshish hai aur (boht) bara ajar hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग कुफ्र करेंगे उनके लिए साख अज़ाब है और जो ईमान लाएंगे और नेक अमल करेंगे उनके लिए मगफिरत और बड़ा अजर है
عَرَبِيأَفَمَن زُيِّنَ لَهُ سوءُ عَمَلِهِ فَرَآهُ حَسَنًا ۖ فَإِنَّ اللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشاءُ وَيَهدي مَن يَشاءُ ۖ فَلا تَذهَب نَفسُكَ عَلَيهِم حَسَراتٍ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَليمٌ بِما يَصنَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वह व्यक्ति जिसके लिए उसके कुकर्म को सुंदर बना दिया गया हो, तो वह उसे अच्छा समझता हो, (उसके समान है जो मार्गदर्शन पर है?) निःसंदेह अल्लाह जिसे चाहता है, गुमराह कर देता है और जिसे चाहता है, मार्गदर्शन प्रदान करता है। अतः आप उनपर अफ़सोस के कारण अपने आपको व्यथित न करें। निःसंदेह अल्लाह उसे भली-भाँति जानने वाला है जो कुछ वे कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Bhala kuch thikana hai us shaks ki gumraahi ka) jiske liye uska bura amal khushnuma bana diya gaya ho aur woh usey accha samajh raha ho? Haqeeqat yeh hai ke Allah jisey chahta hai gumrahi mein daal deta hai aur jisey chahta hai raah e raast dikha deta hai.Pas (aey Nabi) kha-ma-kha tumhari jaan in logon ki khatir gham-o-afsos mein na ghulay. Jo kuch yeh kar rahey hain Allah usko khoob jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya pus woh shaks jiss kay liye uss kay burray aemaal muzayyan ker diye gaye hain pus woh unhen acha samajhta hai (kiya woh hidayat yaafta shaks jaisa hai) (yaqeen mano) kay Allah jissay chahaye gumraah kerta hai aur jissay chahaye raah-e-raast dikhata hai pus aap ko inn per ghum kha kha ker apni jaan halak mein na daalni chahayey yeh jo kuch ker rahey hain uss say yaqeenan Allah Taalaa ba-khoobi waqif hai
Devnagri Urdu (Maududi)(भला कुछ ठिकाना है उस लड़के की गुमराही का) जिसके लिए उसका बुरा अमल खुशनुमा बना दिया गया हो और वह उसे अच्छा समझ रहा हो? हकीकत ये है के अल्लाह जिसे चाहता है गुमराही में डाल देता है और जिसे चाहता है राह ए रस्त दिखा देता है। पास (ऐ नबी) खा-मा-खा तुम्हारी जान लोगों की खातिर ग़म-ओ-अफसोस में ना घुले। जो कुछ ये कर रहे हैं अल्लाह उसको खूब जानता है
عَرَبِيوَاللَّهُ الَّذي أَرسَلَ الرِّياحَ فَتُثيرُ سَحابًا فَسُقناهُ إِلىٰ بَلَدٍ مَيِّتٍ فَأَحيَينا بِهِ الأَرضَ بَعدَ مَوتِها ۚ كَذٰلِكَ النُّشورُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह ही है जो हवाओं को भेजता है, तो वे बादल उठाती हैं। फिर हम उसे मृत नगर की ओर हाँक ले जाते हैं। फिर हम उसके द्वारा धरती को उसके मृत हो जाने के बाद जीवित कर देते हैं। इसी प्रकार (क़ियामत के दिन) जीवित होकर उठना है।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi to hai jo hawaon ko bhejta hai, phir woh baadal uthati hain, phir hum usey ek ujadh (banjar) ilakey ki taraf le jatey hain aur usi zameen ko jila uthate hain jo mari padi thi. Marey huey Insano ka jee uthna bhi isi tarah hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah hi hawayen chalata hai jo badlon ko uthati hain phir hum badlon ko khusk zamin ki taraf ley jatay hain aur iss say uss zamin ko uss ki maut kay baad zindah ker detay hain. Issi tarah soobara ji uthna (bhi) hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह ही तो है जो हवाओं को भेजता है, फिर वो बादल उठाती हैं, फिर हम उसे एक उजाद (बंजर) इलाके की तरफ ले जाते हैं और उसी जमीन को जिला उठाते हैं जो मेरी पड़ी थी। मारे हुए इंसान का जी उठना भी इसी तरह होगा
عَرَبِيمَن كانَ يُريدُ العِزَّةَ فَلِلَّهِ العِزَّةُ جَميعًا ۚ إِلَيهِ يَصعَدُ الكَلِمُ الطَّيِّبُ وَالعَمَلُ الصّالِحُ يَرفَعُهُ ۚ وَالَّذينَ يَمكُرونَ السَّيِّئَاتِ لَهُم عَذابٌ شَديدٌ ۖ وَمَكرُ أُولٰئِكَ هُوَ يَبورُ
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हिन्दी (Al-Omari)जो व्यक्ति सम्मान (इज़्ज़त) चाहता है, तो सब सम्मान अल्लाह ही के लिए है। पवित्र वाक्य उसी की ओर चढ़ते हैं और सत्कर्म उन्हें ऊपर उठाता है। तथा जो लोग बुरी चालें चलते हैं, उनके लिए कठोर यातना है और उनकी चाल ही मटियामेट होकर रहेगी।
Roman Urdu (Maududi)Jo koi izzat chahta ho usey maloom hona chahiye ke izzat saari ki saari Allah ki hai. Uske haan jo cheez upar chadhti hai woh sirf pakeezah qaul(baat/words) hai, aur amal e saleh usko upar chadhata hai. Rahey woh log jo behuda chaal baaziyan karte hain, unke liye sakht azaab hai aur unka makar (plotting) khud hi gaarat honay wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo shaks izzat hasil kerna chahata ho to Allah Taalaa hi ki sari izzat hai tamam tar suthray kalmaat ussi ki taraf charhtay hain aur nek aemaal unn ko buland kerta hai jo log buraeeyon kay dao ghaat mein lagay rehtay hain unn kay liye sakht tar azab hai aur unn ka yeh makar barbaad hojayega
Devnagri Urdu (Maududi)जो कोई इज्जत चाहता हो उसे मालूम होना चाहिए कि इज्जत सारी की सारी अल्लाह की है। उसके हाँ जो चीज़ ऊपर चढ़ती है वो सिर्फ पाकीज़ा क़ौल (बात/शब्द) है, और अमल ए साले उसको ऊपर चढ़ता है। रहे वो लोग जो बेहुदा चाल बाजियां करते हैं, उनके लिए कुछ अजीब है और उनका मकर (प्लॉटिंग) खुद ही गैरत होने वाला है
عَرَبِيوَاللَّهُ خَلَقَكُم مِن تُرابٍ ثُمَّ مِن نُطفَةٍ ثُمَّ جَعَلَكُم أَزواجًا ۚ وَما تَحمِلُ مِن أُنثىٰ وَلا تَضَعُ إِلّا بِعِلمِهِ ۚ وَما يُعَمَّرُ مِن مُعَمَّرٍ وَلا يُنقَصُ مِن عُمُرِهِ إِلّا في كِتابٍ ۚ إِنَّ ذٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही ने तुम्हें मिट्टी से, फिर वीर्य से पैदा किया, फिर तुम्हें जोड़े-जोड़े बनाया। जो भी मादा गर्भ धारण करती है और बच्चा जनती है, तो अल्लाह को उसका ज्ञान होता है। तथा किसी आयु वाले की आयु बढ़ाई जाती है या उसकी आयु कम की जाती है, तो यह सब कुछ एक किताब में (लिखा हुआ) है। निःसंदेह यह सब अल्लाह पर अति सरल है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne tumko mitti se paida kiya, phir nutfey(drop of sperm) se, phir tumhare joday bana diye (yani mard aur aurat). Koi aurat hamila (conceive) nahin hoti aur na baccha janti hai magar yeh sab kuch Allah ke ilm mein hota hai. Koi umar paney wala umar nahin paata aur na kisi ki umar mein kuch kami hoti hai magar yeh sab kuch ek kitaab mein likha hota hai. Allah ke liye yeh bahut aasaan kaam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Logo! Allah Taalaa ney tumhen mitti say phir nutfa peda kiya hai phir tumhen joray joray (mard-o-aurat) banadiya hai aurton ka hamila hona aur bachon ka tawallud hona sab uss kay ilm say hi hai aur jo bari umar wala umar diya jaye aur jiss kissi ki umar ghatay woh sab kitab mein likha hua hai. Allah Taalaa per yeh baat bilkul aasan hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने तुमको मिट्टी से पेदा किया, फिर से शुक्राणु (शुक्राणु की बूंद) से, फिर तुम्हारे जोडे बना दिए (यानी मर्द और औरत)। कोई औरत हमीला नहीं होती और ना बच्चा जानती है मगर ये सब कुछ अल्लाह के इल्म में होता है। कोई उमर पाने वाला उमर नहीं पाता और ना किसी की उमर में कुछ कमी होती है मगर ये सब कुछ एक किताब में लिखा होता है। अल्लाह के लिए ये बहुत आसान काम है
عَرَبِيوَما يَستَوِي البَحرانِ هٰذا عَذبٌ فُراتٌ سائِغٌ شَرابُهُ وَهٰذا مِلحٌ أُجاجٌ ۖ وَمِن كُلٍّ تَأكُلونَ لَحمًا طَرِيًّا وَتَستَخرِجونَ حِليَةً تَلبَسونَها ۖ وَتَرَى الفُلكَ فيهِ مَواخِرَ لِتَبتَغوا مِن فَضلِهِ وَلَعَلَّكُم تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा दो सागर बारबर नहीं हैं। यह (एक) मीठा, प्यास बुझाने वाला, पीने में रुचिकर है, और यह (दूसरा) खारा-कड़वा है। तथा प्रत्येक में से तुम ताज़ा माँस खाते हो तथा आभूषण निकालते हो, जिसे तुम पहनते हो। और तुम उसमें नावों को देखते हो कि पानी को चीरती हुई चलती हैं, ताकि तुम अल्लाह का अनुग्रह तलाश करो और ताकि तुम कृतज्ञ बनो।
Roman Urdu (Maududi)Aur pani ke dono zakheere yaksan nahin hain. Ek meetha aur pyaas bujhane wala hai, peene mein khushgawar, aur dusra sakht khari (salty) ke halaq sheel de(bitter on the tongue), magar dono se tum tar-o-taaza gosht haasil karte ho. Pehanne ke liye zeenat ka samaan nikalte ho, aur isi pani mein tum dekhte ho ke kashtiyan uska seena cheerti chali jaa rahi hain taa-ke tum Allah ka fazal talash karo aur uske shukar guzar bano
Roman Urdu (Junagarhi)Aur barabar nahi do darya yeh meetha hai piyas bujhata peenay mein khusgawar aur yeh doosra khaari hai kerwa tum inn dono mein say taza gosht khatay ho aur woh zewraat nikaltay ho jinhen tum pehantay ho. Aur aap dekhtay hian kay bari bari kashtiyan pani ko cheerney pharney wali inn daryayon mein hain takay tum uss ka fazal dhondo aur takay tum uss ka shukar kero
Devnagri Urdu (Maududi)और पानी के दोनो जख़ीरे यक्सन नहीं हैं। एक मीठा और प्यास बुझाने वाला है, पीने में खुशगवार, और दूसरा साख खरी (नमकीन) के हलक शील दे (जुबान पर कड़वा), मगर दोनों से तुम तर-ओ-ताजा गोश्त हासिल करते हो। पहनने के लिए ज़ीनत का सामान निकलते हो, और इसी पानी में तुम देखते हो के कश्तियां उसका सीना चीयरती चली जा रही हैं ता-के तुम अल्लाह का फ़ज़ल तलाश करो और उसकी शुकर गुजर बानो
عَرَبِييولِجُ اللَّيلَ فِي النَّهارِ وَيولِجُ النَّهارَ فِي اللَّيلِ وَسَخَّرَ الشَّمسَ وَالقَمَرَ كُلٌّ يَجري لِأَجَلٍ مُسَمًّى ۚ ذٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُم لَهُ المُلكُ ۚ وَالَّذينَ تَدعونَ مِن دونِهِ ما يَملِكونَ مِن قِطميرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)वह रात को दिन में दाखिल करता है, तथा दिन को रात में दाखिल करता है, तथा सूर्य एवं चाँद को काम में लगा रखा है। उनमें से प्रत्येक एक निश्चित समय तक चल रहा है।वही अल्लाह तुम्हारा पालनहार है। उसी का राज्य है। तथा जिन्हें तुम उसके सिवा पुकारते हो, वे खजूर की गुठली के छिलके के भी मालिक नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh din ke andar raat ko aur raat ke andar din ko pirota hua le aata hai.Chand aur Suraj ko usne musakkhar kar rakkha hai. Yeh sab kuch ek waqt-e-muqarrar tak chale jaa raha hain. Wahi Allah (jiske yeh sarey kaam hai) tumhara Rubb hai, baadshahi usi ki hai usey chodh kar jin dusron ko tum pukarte ho woh ek parekaah (skin of a date-stone) ke maalik bhi nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh raat ko din mein aur din ko raat mein dakhil kerta hai aur aftab aur mahtab ko ussi ney kaam mein laga diya hai. Her aik miyaad-e-moyyan per chal raha hai. Yehi hai Allah tum sab ka palney wala ussi ki saltanat hai. Jinhen tum iss kay siwa pukar rahey ho woh to khajoor ki guthli kay chilkay kay bhi malik nahi
Devnagri Urdu (Maududi)वो दिन के अंदर रात को और रात के अंदर दिन को पिरोता हुआ ले आता है.चांद और सूरज को उसने मुस्कुरा कर रखा है. ये सब कुछ एक वक्त-ए-मुकर्रर तक चले जा रहा है। वही अल्लाह (जिसके ये सारे काम हैं) तुम्हारा रब है, बादशाही उसी की है उसे छोड़ कर जिन दूसरे को तुम पुकारते हो वो एक परीका (खजूर की खाल) के मालिक भी नहीं है
عَرَبِيإِن تَدعوهُم لا يَسمَعوا دُعاءَكُم وَلَو سَمِعوا مَا استَجابوا لَكُم ۖ وَيَومَ القِيامَةِ يَكفُرونَ بِشِركِكُم ۚ وَلا يُنَبِّئُكَ مِثلُ خَبيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि तुम उन्हें पुकारो, तो वे तुम्हारी पुकार नहीं सुन सकते। और यदि सुन भी लें, तो तुम्हें उत्तर नहीं दे सकते। और वे क़ियामत के दिन तुम्हारे शिर्क का इनकार कर देंगे। और (ऐ रसूल!) आपको एक सर्वज्ञाता (अल्लाह) की तरह कोई सूचना नहीं देगा।
Roman Urdu (Maududi)Inhein pukaro to woh tumhari duaein sun nahin sakte.Aur sun lein to unka tumhein koi jawab nahin de sakte.Aur qayamat ke roz woh tumhare shirk ka inkar kardenge. Haqeeqat e haal ki aisi saheeh khabar tumhein ek khabardar ke siwa koi nahin de sakta
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum enhen pukaro to woh tumhari pukar suntay hi nahi aur agar (bil-farz) sunn bhi len to faryad rasi nahi keren gay bulkay qayamat kay din tumharay iss shirk ka saaf inkar ker jayen gay. Aap ko koi bhi haq-taalaa jaisa khabardaar khabren na deyga
Devnagri Urdu (Maududi)इन्हें पुकारो तो वो तुम्हारी दुआएं सुन नहीं सकते।और सुनो तो उनका तुम्हें कोई जवाब नहीं दे सकता। और कयामत के रोज़ वो तुम्हारे शिर्क का इंकार कर देंगे। हकीकत ए हाल की ऐसी सही खबर तुम्हें एक खबरदार के सिवा कोई नहीं दे सकता
عَرَبِي۞ يا أَيُّهَا النّاسُ أَنتُمُ الفُقَراءُ إِلَى اللَّهِ ۖ وَاللَّهُ هُوَ الغَنِيُّ الحَميدُ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो! तुम सब अल्लाह के मुहताज हो और अल्लाह बेनियाज़, प्रशंसित है।
Roman Urdu (Maududi)Logon, Tum hi Allah ke mohtaj ho aur Allah to Gani(Self-Sufficient) o Hameed (Immensely Praiseworthy) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey logo! Tum Allah kay mohtaj ho aur Allah bey niyaz khoobiyon wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन, तुम ही अल्लाह के मोहताज हो और अल्लाह तो गनी (आत्मनिर्भर) ओ हमीद (बेहद प्रशंसनीय) है
عَرَبِيإِن يَشَأ يُذهِبكُم وَيَأتِ بِخَلقٍ جَديدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि वह चाहे, तो तुम्हें ले जाए और (तुम्हारी जगह) एक नई मख़लूक़ ले आए।
Roman Urdu (Maududi)Woh chahey to tumhein hata kar koi nayi khalqat (creation) tumhari jagah le aaye
Roman Urdu (Junagarhi)Agar woh chahaye to tum ko fana ker dey aur aik naee makhlooq peda ker day
Devnagri Urdu (Maududi)वो चाहे तो तुम्हें हटा कर कोई नई ख़लक़त (सृजन) तुम्हारी जगह ले आये
عَرَبِيوَما ذٰلِكَ عَلَى اللَّهِ بِعَزيزٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह अल्लाह के लिए कुछ भी कठिन नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Aisa karna Allah ke liye kuch bhi dushwar nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh baat Allah ko kuch mushkil nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसा करना अल्लाह के लिए कुछ भी दुश्वार नहीं
عَرَبِيوَلا تَزِرُ وازِرَةٌ وِزرَ أُخرىٰ ۚ وَإِن تَدعُ مُثقَلَةٌ إِلىٰ حِملِها لا يُحمَل مِنهُ شَيءٌ وَلَو كانَ ذا قُربىٰ ۗ إِنَّما تُنذِرُ الَّذينَ يَخشَونَ رَبَّهُم بِالغَيبِ وَأَقامُوا الصَّلاةَ ۚ وَمَن تَزَكّىٰ فَإِنَّما يَتَزَكّىٰ لِنَفسِهِ ۚ وَإِلَى اللَّهِ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)और कोई बोझ उठाने वाला दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा। और अगर कोई बोझ से दबा हुआ व्यक्ति (किसी को) बोझ उठाने के लिए पुकारेगा, तो उसका तनिक भी बोझ नहीं उठाया जाएगा, यद्यपि वह निकट का संबंधी ही क्यों न हो। आप तो केवल उन्हीं लोगों को सचेत करते हैं, जो अपने पालनहार से बिन देखे डरते हैं और नमाज़ क़ायम करते हैं। तथा जो पवित्र हुआ, वह अपने ही लाभ के लिए पवित्र होता है। और (सबको) अल्लाह ही की ओर लौटकर जाना है।
Roman Urdu (Maududi)Koi bojh uthane wala kisi dusre ka bojh na uthayega.Aur agar koi lada hua (heavily laden) nafs apna bojh uthane ke liye pukarega to uske baar ka ek adna (chota) hissa bhi batane ke liye koi na aayega chahe woh kareeb-tareen rishtedar hi kyun na ho. (Aey Nabi) tum sirf unhi logon ko mutanabbeh (warn) kar sakte ho jo bay-dekhe apne Rubb se darte hain aur namaz qayam karte hain. Jo shaks bhi pakeezgi ikhtiyar karta hai apne hi bhalayi ke liye karta hai aur palatna sabko Allah hi ki taraf hai
Roman Urdu (Junagarhi)Koi bhi bojh uthaney wala doosray ka bojh nahi uthaye ga agar koi giran baar doosray ko apna bojh uthaney kay liye bulaye ga to woh uss mein say kuch bhi na uthaye ga go qarabat daar hi ho. Tu sirf unhi ko aagah ker sakta hai jo ghaeebana tor per apnay rab say dartay hain aur namazon ki pabandi kertay hain aur jo bhi pak hojaye woh apnay hi nafay kay liye pak hoga. Lotna Allah hi ki taraf hai
Devnagri Urdu (Maududi)कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ ना उठाएगा।और अगर कोई लड़ा हुआ (भारी लादा हुआ) नफ़्स अपना बोझ उठाने के लिए उसे पुकारेगा बार का एक अदना (छोटा) हिसा भी बताने के लिए कोई ना आएगा चाहे वो करीब-तरीन रिश्तेदार ही क्यों ना हो। (ऐ नबी) तुम सिर्फ उन लोगों को मुतनब्बे (चेतावनी) दे सकते हो जो बे-देखे अपने रब से डरते हैं और नमाज़ क़याम करते हैं। जो शक्स भी पाकीज़गी इख्तियार करता है अपने ही भलाई के लिए करता है और पलटना सबको अल्लाह ही की तरफ करता है
عَرَبِيوَما يَستَوِي الأَعمىٰ وَالبَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)और अंधा तथा देखने वाला समान नहीं हो सकते।
Roman Urdu (Maududi)Andha aur aankhon wala barabar nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur andha aur aankhon wala barabar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)अंधा और आँखों वाला बराबर नहीं है
عَرَبِيوَلَا الظُّلُماتُ وَلَا النّورُ
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हिन्दी (Al-Omari)और न अंधकार तथा प्रकाश।
Roman Urdu (Maududi)Na tareekiyan (darkness) aur roshni yaksan hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na tareeki aur roshni
Devnagri Urdu (Maududi)ना तारीकियाँ (अंधेरा) और रोशनी यकसन हैं
عَرَبِيوَلَا الظِّلُّ وَلَا الحَرورُ
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हिन्दी (Al-Omari)और न छाया तथा गर्म हवा।
Roman Urdu (Maududi)Na thandi chaaon aur dhoop ki tapish ek jaisi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na chaaon aur na dhoop
Devnagri Urdu (Maududi)ना ठंडी छाँव और धूप की तपिश एक जैसी है
عَرَبِيوَما يَستَوِي الأَحياءُ وَلَا الأَمواتُ ۚ إِنَّ اللَّهَ يُسمِعُ مَن يَشاءُ ۖ وَما أَنتَ بِمُسمِعٍ مَن فِي القُبورِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जीवित एवं मृत समान नहीं हो सकते। निःसंदेह अल्लाह जिसे चाहता है, सुना देता है और आप उन्हें नहीं सुना सकते, जो क़ब्रों में हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur na zinde aur murde musavi (barabar) hain. Allah jisey chahta hai sunwata (hear) hai, magar (aey Nabi) tum un logon ko nahin suna sakte ho qabaron mein madfoon hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur zinday aur murday barabar nahi hosaktay Allah Taalaa jiss ko chahata hai suna deta hai aur aap unn logo ko nahi suna saktay jo qabron mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)और ना ज़िंदे और मुर्दे मुसावी (बराबर) हैं। अल्लाह जिसे चाहता है सुनता (सुन) है, मगर (ऐ नबी) तुम उन लोगों को नहीं सुना सकते हो कब्रों में पागल हो
عَرَبِيإِن أَنتَ إِلّا نَذيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)आप तो मात्र एक डराने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tum to bas ek khabardar karne waley ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap to sirf daraney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)तुम तो बस एक खबरदार करने वाले हो
عَرَبِيإِنّا أَرسَلناكَ بِالحَقِّ بَشيرًا وَنَذيرًا ۚ وَإِن مِن أُمَّةٍ إِلّا خَلا فيها نَذيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने आपको सत्य के साथ शुभ सूचना देने वाला तथा डराने वाला बनाकर भेजा है। और कोई समुदाय ऐसा नहीं, जिसमें कोई डराने वाला न आया हो।
Roman Urdu (Maududi)Humne tumko haqq ke saath bheja hai. Basharat (khush khabri) dene wala aur darane wala banakar. Aur koi ummat aisi nahin guzri hai jismein koi mutanabbeh (warn) karne wala na aaya ho
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney hi aap ko haq day ker khushkhabri sunaney wala aur darr sunaney wala bana ker bheja hai aur koi ummat aisi nahi hui jiss mein koi darr sunaney wala na guzra ho
Devnagri Urdu (Maududi)हमने तुमको हक़ के साथ भेजा है। बशारत (ख़ुश ख़बरी) देने वाला और डरने वाला बनकर। और कोई उम्मत ऐसी नहीं गुजरी है जिसमें कोई मुतनब्बेह (चेतावनी) करने वाला ना आया हो
عَرَبِيوَإِن يُكَذِّبوكَ فَقَد كَذَّبَ الَّذينَ مِن قَبلِهِم جاءَتهُم رُسُلُهُم بِالبَيِّناتِ وَبِالزُّبُرِ وَبِالكِتابِ المُنيرِ
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हिन्दी (Al-Omari)और अगर ये लोग आपको झुठलाते हैं, तो इनसे पूर्व के लोगों ने भी (रसूलों को) झुठलाया है, जिनके पास हमारे रसूल खुले प्रमाण, ग्रंथ और ज्योतिमान करने वाली पुस्तक लेकर आए।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar yeh log tumhein jhutlate hain to insey pehle guzre huey log bhi jhutla chuke hain. Unke paas unke Rasool khule dalail (proofs) aur saheefay (scriptures) aur roshan hidayaat (guidance) dene wali kitaab lekar aaye thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar yeh log aap ko jhutla den to jo log inn say pehlay ho guzray hain unhon ney bhi jhutlaya tha unn kay pass bhi unn kay payghumber moajjzay aur saheefay aur roshan kitaben ley ker aaye thay
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर ये लोग तुम्हें झुठलाते हैं तो इनसे पहले गुजरे हुए लोग भी झुटला चुके हैं। उनके पास उनके रसूल खुले दलैल (प्रमाण) और सहीफे (ग्रंथ) और रोशन हिदायत (मार्गदर्शन) देने वाली किताब लेकर आये थे
عَرَبِيثُمَّ أَخَذتُ الَّذينَ كَفَروا ۖ فَكَيفَ كانَ نَكيرِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर मैंने उन लोगों को पकड़ लिया, जिन्होंने इनकार किया। तो मेरी पकड़ कैसी रही?
Roman Urdu (Maududi)Phir jin logon ne na maana unko maine pakad liya aur dekhlo ke meri saza kaisi sakht thi
Roman Urdu (Junagarhi)Phir mein ney unn kafiron ko pakar liya so mera azab kaisa hua
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जिन लोगों ने ना माना उनको मैंने पकड़ लिया और देखलो के मेरी सजा कैसी सच थी
عَرَبِيأَلَم تَرَ أَنَّ اللَّهَ أَنزَلَ مِنَ السَّماءِ ماءً فَأَخرَجنا بِهِ ثَمَراتٍ مُختَلِفًا أَلوانُها ۚ وَمِنَ الجِبالِ جُدَدٌ بيضٌ وَحُمرٌ مُختَلِفٌ أَلوانُها وَغَرابيبُ سودٌ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह ने आकाश से पानी उतारा, फिर हमने उसके द्वारा विभिन्न रंगों के बहुत-से फल निकाल दिए। तथा पर्वतों में विभिन्न रंगों की सफेद और लाल धारियाँ (और टुकड़े) हैं, तथा कुछ गहरी काली धारियाँ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum dekhte nahin ho ke Allah aasmaan se pani barsata hai aur phir iske zariye se hum tarah tarah ke phal nikal latey hain jinke rang mukhtalif hotey hain. Pahadon mein bhi safed (white), surkh (red) aur gehri siyah(pitchy black) dhariyan payi jaati hain jinke rang mukhtalif hotay hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney iss baat per nazar nahi ki kay Allah Taalaa ney aasman say pani utara phir hum ney iss kay zariyey say mukhtalif rangaton kay phal nikalay aur paharon kay mukhtalif hissay hain safaid aur surukh kay inn ki bhi rangaten mukhtalif hain aur boht gehray siyah
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह आसमान से पानी बरसाता है और फिर इसके ज़रिये से हम तरह तरह के फल निकल लाते हैं जिनका रंग मुख़्तलिफ़ होते हैं। पहाड़ों में भी सफ़ेद (सफ़ेद), सुर्ख (लाल) और गहरी सियाह (गहरा काला) धारियां पाई जाती हैं जिनके रंग मुख़्तलिफ़ होते हैं
عَرَبِيوَمِنَ النّاسِ وَالدَّوابِّ وَالأَنعامِ مُختَلِفٌ أَلوانُهُ كَذٰلِكَ ۗ إِنَّما يَخشَى اللَّهَ مِن عِبادِهِ العُلَماءُ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزيزٌ غَفورٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इसी प्रकार मनुष्यों, जानवरों और चौपायों में से भी ऐसे हैं जिनके रंग विभिन्न हैं। वास्तविकता यह है कि अल्लाह से उसके वही बंदे डरते हैं, जो ज्ञानी हैं। निःसंदेह अल्लाह अति प्रभुत्वशाली, बेहद क्षमाशील है।
Roman Urdu (Maududi)Aur isi tarah Insano aur jaanwaron aur maweshiyon ke rang bhi mukhtalif hain. Haqeeqat yeh hai ke Allah ke bandon mein se sirf ilm rakhne wale log hi ussey darte hain. Beshak Allah zabardast aur darguzar farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur issi tarah aadmiyon aur janwaron aur chopayon mein bhi baaz aisay hain kay unn ki rangaten mukhtalif hain Allah say uss kay wohi banday dartay hain jo ilm rakhtay hain waqaee Allah Taalaa zabardast bara bakhsney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और इसी तरह इंसानों और जानवरों और मुसलमानों के रंग भी मुख़्तलिफ़ हैं। हकीकत ये है कि अल्लाह के बंदों में से सिर्फ इल्म रखने वाले लोग ही उससे डरते हैं। बेशाक़ अल्लाह ज़बरदस्त और दरगुज़र फ़रमाने वाला है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يَتلونَ كِتابَ اللَّهِ وَأَقامُوا الصَّلاةَ وَأَنفَقوا مِمّا رَزَقناهُم سِرًّا وَعَلانِيَةً يَرجونَ تِجارَةً لَن تَبورَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग अल्लाह की पुस्तक (क़ुरआन) पढ़ते हैं, और नमाज़ क़ायम करते हैं और जो कुछ हमने उन्हें दिया है, उसमें से छिपे और खुले खर्च करते हैं, वे ऐसे व्यापार की आशा रखते हैं, जिसमें कभी घाटा नहीं होगा।
Roman Urdu (Maududi)Jo log kitaabullah ki tilawat karte hain aur namaz qayam karte hain, aur jo kuch humne unhein rizq diya hai usmein se khule aur chupey kharch karte hain, yaqeenan woh ek aisi tijarat ke mutawaqqeh (umeedwaar) hain jismein hargiz khasara(nuksan) na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log kitabullah ki tilawat kertay hain aur namaz ki pabandi rakhtay hain aur jo kuch hum ney unn ko ata farmaya hai uss mein say posheedah aur ailaniya kharach kertay hain woh aisi tijarat kay umeedwaar hain jo kabhi khasaray mein na hogi
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग किताबुल्लाह की तिलावत करते हैं और नमाज़ क़याम करते हैं, और जो कुछ हमने उन्हें रिज़क़ दिया है उसमें से खुले और छुपे ख़र्च करते हैं, यक़ीनन वो एक ऐसी तिजारत के मुतवक्किह (उम्मीदवार) हैं जिसका हरगिज खसरा (नुक्सन) न होगा
عَرَبِيلِيُوَفِّيَهُم أُجورَهُم وَيَزيدَهُم مِن فَضلِهِ ۚ إِنَّهُ غَفورٌ شَكورٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि अल्लाह उन्हें उनका पूरा-पूरा बदला दे और उन्हें अपनी कृपा से और अधिक प्रदान करे। निःसंदेह वह बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत गुणग्राही है।
Roman Urdu (Maududi)(Is tijarat mein unhon ne apna sabkuch is liye khapaya hai) taa-ke Allah unke ajar pooray ke pooray unko de aur mazeed apne fazal se unko ata farmaye. Beshak Allah bakshne wala aur qadardaan (appreciative) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Takay unn ko unki ujraten poori day aur unn ko apnay fazal say aur ziyadah day be-shak woh bara bakhsney wala qadardaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)(इस तिजारत में उन लोगों ने अपना सब कुछ खा लिया है) ता-के अल्लाह उनको अजर पूरय के पूर उनको दे और मजीद अपने फजल से उनको अता फरमाये। बेशाक़ अल्लाह बख्शने वाला और क़दरदान (प्रशंसनीय) है
عَرَبِيوَالَّذي أَوحَينا إِلَيكَ مِنَ الكِتابِ هُوَ الحَقُّ مُصَدِّقًا لِما بَينَ يَدَيهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ بِعِبادِهِ لَخَبيرٌ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने आपकी ओर जिस किताब की वह़्य (प्रकाशना) की है, वही सर्वथा सच है और अपने से पहले की पुस्तकों की पुष्टि करने वाली है। निःसंदेह अल्लाह अपने बंदों की पूरी खबर रखने वाला, सब कुछ देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) jo kitaab humne tumhari taraf wahee ke zariye se bheji hai wahi haqq hai, tasdeeq (confirm) karti hui aayi hai un kitaabon ki jo issey pehle aayi thin. Beshak Allah apne bandon ke haal se bakhabar hai, aur har cheez par nigaah rakhne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kitab jo hum ney aap kay pass wahee kay tor per bheji hai yeh bilkul theek hai jo kay apnay say pehli kitabon ki bhi tasdeeq kerti hai. Allah Taalaa apnay bandon ki poori khabar rakhney wala khoob dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) जो किताब हमने तुम्हारी तरफ वही के ज़रिया से भेजी है वही हक है, तस्दीक (पुष्टि करें) करती हुई आई है उन किताबों की जो इसे पहले आई थी। बेशक अल्लाह अपने बंदों के हाल से खबर है, और हर चीज पर निगाह रखने वाला है
عَرَبِيثُمَّ أَورَثنَا الكِتابَ الَّذينَ اصطَفَينا مِن عِبادِنا ۖ فَمِنهُم ظالِمٌ لِنَفسِهِ وَمِنهُم مُقتَصِدٌ وَمِنهُم سابِقٌ بِالخَيراتِ بِإِذنِ اللَّهِ ۚ ذٰلِكَ هُوَ الفَضلُ الكَبيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने इस पुस्तक का उत्तराधिकारी उन लोगों को बनाया, जिन्हें हमने अपने बंदों में से चुन लिया। तो उनमें से कुछ लोग अपने ऊपर अत्याचार करने वाले हैं, और उनमें से कुछ लोग मध्यमार्गी हैं, और उनमें से कुछ लोग अल्लाह की अनुमति से भलाई के कामों में आगे निकल जाने वाले हैं। यही महान अनुग्रह है।
Roman Urdu (Maududi)Phir humne is kitaab ka waris bana diya un logon ko jinhein humne (is virasat ke liye) apne bandon mein se chun liya. Ab koi to inmein se apne nafs par zulm karne wala hai, aur koi beach ki raas hai (medium course), aur koi Allah ke izan se nekiyon mein sabaqat karne wala (aagey badne wala) hai, yahi bahut bada fazal hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney unn logon ko (iss) kitab ka waris banaya jin ko hum ney apnay bandon mein say pasand farmaya. Phir baazay to inn mein apni jano per zulm kerney walay hain aur baazay inn mein mutawassit darjay kay hain aur baazay inn mein Allah ki tofiq say nekiyon mein taraqqi kiye chalay jatay hain. Yeh bara fazal hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमने इस किताब का वारिस बना दिया उन लोगों को जिन्होंने (इस विरासत के लिए) अपने बंदों में से चुन लिया। अब कोई तो इनमें से अपने नफ़्स पर ज़ुल्म करने वाला है, और कोई बीच की रास है (मध्यम कोर्स), और कोई अल्लाह के इज़ान से नेकियों में सबक करने वाला (आगे बढ़ने वाला) है, यहीं बहुत बड़ा फ़ज़ल है
عَرَبِيجَنّاتُ عَدنٍ يَدخُلونَها يُحَلَّونَ فيها مِن أَساوِرَ مِن ذَهَبٍ وَلُؤلُؤًا ۖ وَلِباسُهُم فيها حَريرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)सदा रहने के बाग़ हैं, जिनमें वे प्रवेश करेंगे। उनमें वे सोने के कंगन और मोती पहनाए जाएँगे और उनमें उनके वस्त्र रेशम के होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Hamesha rehne wali jannatein hain jinmein yeh log dakhil hongey, wahan inhein soonay (gold) ke kangano (bracelets) aur motiyon (pearls) se aarasta (adorn) kiya jayega, wahan inka libas resham hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Woh baghaat mein humesha rehney kay jin mein yeh log dakhil hongay sonay kay kanggan aur moti pehnaye jawen gay. Aur poshak unn ki wahan resham ki ki hogi
Devnagri Urdu (Maududi)हमेशा रहने वाली जन्नतें हैं जिनमें ये लोग दाखिल होंगे, वहां इन्हें सोने (सोना) के कंगन (कंगन) और मोतियों (मोती) से सजाया जाएगा, वहां इनका लिबास रेशम होगा
عَرَبِيوَقالُوا الحَمدُ لِلَّهِ الَّذي أَذهَبَ عَنَّا الحَزَنَ ۖ إِنَّ رَبَّنا لَغَفورٌ شَكورٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे कहेंगे : सब प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जिसने हमसे ग़म दूर कर दिया। निःसंदेह हमारा पालनहार अत्यंत क्षमाशील, बड़ा गुणग्राही है।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh kahenge ke shukar hai us khuda ka jisne humse gham door kardiya, yaqeenan hamara Rubb maaf karne wala aur qadar farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kahen gay Allah ka lakh lakh shukar hai jiss ney hum say ghum door kiya. Be-shak humara parwerdigar bara bakhsney wala bara qadardaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वो कहेंगे के शुक्र है उस खुदा का जिसने हमसे गम दूर कर दिया, यकीनन हमारा रब माफ करने वाला और क़दर फ़रमाने वाला है
عَرَبِيالَّذي أَحَلَّنا دارَ المُقامَةِ مِن فَضلِهِ لا يَمَسُّنا فيها نَصَبٌ وَلا يَمَسُّنا فيها لُغوبٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसने हमें अपनी कृपा से स्थायी घर में उतारा। न इसमें हमें कोई कष्ट उठाना पड़ता है और न इसमें हमें कोई थकान पहुँचती है।
Roman Urdu (Maududi)Jisne humein apne fazal se abadi (hamesha ke) qayam ki jagah thehra diya, ab yahan na humein koi mushaqqat pesh aati hai aur na thakaan lahiq hoti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ney hum ko apnay fazal say humesha rehney kay muqam mein la utara jahan na hum ko koi takleef phonchay gi aur na hum ko koi khastagi phonchay gi
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने हमें अपने फ़ज़ल से आबादी (हमेशा के) क़याम की जगह ठहर दिया, अब यहां ना हमें कोई मुशक्कत पेश आती है और ना थकान लाहिक होती है
عَرَبِيوَالَّذينَ كَفَروا لَهُم نارُ جَهَنَّمَ لا يُقضىٰ عَلَيهِم فَيَموتوا وَلا يُخَفَّفُ عَنهُم مِن عَذابِها ۚ كَذٰلِكَ نَجزي كُلَّ كَفورٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उनके लिए जहन्नम की आग है। न उनपर (मृत्यु का) फैसला किया जाएगा कि वे मर जाएँ, और न उनसे उसकी यातना ही कुछ हल्की की जाएगी। हम प्रत्येक अकृतज्ञ को इसी तरह बदला दिया करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jin logon ne kufr kiya hai unke liye jahannum ki aag hai, na unka qissa paak kardiya jayega ke marr jayein aur na unke liye jahannum ke azaab mein koi kami ki jayegi. Is tarah hum badla detey hain har us shaks ko jo kufr karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log kafir hain unn kay liye dozakh ki aag hai na to unn ki qaza hi aaye gi kay marr hi jayen aur na dozakh ki azab hi unn say halka kiya jayega. Hum her kafir ko aisi hi saza detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जिन लोगों ने कुफ्र किया है उनके लिए जहन्नुम की आग है, ना उनका क़िस्सा पक कर दिया जायेगा के मर जायेंगे और ना उनके लिए जहन्नुम के अज़ाब में कोई कमी आ जायेगी। इस तरह हम बदला देते हैं हर उस शक्स को जो कुफ्र करने वाला है
عَرَبِيوَهُم يَصطَرِخونَ فيها رَبَّنا أَخرِجنا نَعمَل صالِحًا غَيرَ الَّذي كُنّا نَعمَلُ ۚ أَوَلَم نُعَمِّركُم ما يَتَذَكَّرُ فيهِ مَن تَذَكَّرَ وَجاءَكُمُ النَّذيرُ ۖ فَذوقوا فَما لِلظّالِمينَ مِن نَصيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे उसमें चिल्लाएँगे : ऐ हमारे पालनहार! हमें (जहन्नम से) निकाल ले। हम जो कुछ किया करते थे, उसके अलावा नेकी के काम करेंग। क्या हमने तुम्हें इतनी आयु नहीं दी थी कि उसमें जो शिक्षा ग्रहण करना चाहता, वह शिक्षा ग्रहण कर लेता, हालाँकि तुम्हारे पास डराने वाला (नबी) भी तो आया था? अतः, तुम (यातना) चखो। अत्याचारियों का कोई सहायक नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Woh wahan cheekh cheekh kar kahenge ke “Aey hamare Rubb humein yahan se nikal le taa-ke hum neik amal karein, un aamaal se mukhtalif jo pehle karte rahey thay.” (unhein jawab diya jayega) “Kya humne tumko itni umar na di thi ji mein koi sabaq lena chahta to sabaq le sakta tha? Aur tumhare paas mutanabbeh (warn) karne wala bhi aa chuka tha. Ab maza chakkho. Zaalimon ka yahan koi madadgaar nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh log iss mein chillayen gay aey humaray parwerdigar! Hum ko nikal ley hum achay kaam keren gay bar-khilaf unn kaamon kay jo kiya kertay thay (Allah kahey ga) kiya hum ney tum ko itni umar na di thi kay jiss ko samjhna hota woh samjh sakta aur tumharay pass daraney wala bhi phoncha tha so maza chakho kay (aisay) zalimon ka koi madadgaar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)वो वहां चीख-चीख कर कहेंगे के "ऐ हमारे रब हमें यहां से निकल ले ता-के हम नई अमल करें, उन अमाल से मुख्तलिफ जो पहले करते रहे थे।" (उन्हें जवाब दिया जाएगा) "क्या हमने तुमको इतनी उमर न दी थी कि मैं कोई सबक लेना चाहता था तो सबक ले सकता था? और तुम्हारे पास मुतनब्बे (चेतावनी) करने वाला भी आ चूका था। अब मजा चक्खो। जालिमों का यहां कोई मददगार नहीं है
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ عالِمُ غَيبِ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ إِنَّهُ عَليمٌ بِذاتِ الصُّدورِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह आकाशों और धरती के परोक्ष (गुप्त चीज़ों) को जानने वाला है। निःसंदेह वही सीनों की बातों को भली-भाँति जानता है।
Roman Urdu (Maududi)Beshak Allah aasmaano aur zameen ki har posheeda (chupi) cheez se waqif hai.Woh to seeno ke chupey huey raaz tak jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak Allah Taalaa jannay wala hai aasmano aur zamin ki posheedah cheezon ka be-shak wohi jannay wala hai seenon ki baaton ka
Devnagri Urdu (Maududi)बहस अल्लाह आसमानो और ज़मीन की हर पोशीदा (चुपी) चीज़ से वाकिफ है। वो तो सीने के छुपे हुए राज़ तक जानता है
عَرَبِيهُوَ الَّذي جَعَلَكُم خَلائِفَ فِي الأَرضِ ۚ فَمَن كَفَرَ فَعَلَيهِ كُفرُهُ ۖ وَلا يَزيدُ الكافِرينَ كُفرُهُم عِندَ رَبِّهِم إِلّا مَقتًا ۖ وَلا يَزيدُ الكافِرينَ كُفرُهُم إِلّا خَسارًا
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हिन्दी (Al-Omari)वही है जिसने तुम्हें धरती पर उत्तराधिकारी बनाया। फिर जिसने कुफ़्र किया, तो उसके कुफ़्र का दुष्परिणाम उसी पर होगा। और काफ़िरों को उनका कुफ़्र उनके पालनहार के यहाँ क्रोध ही में बढ़ाता है। और काफ़िरों को उनका कुफ़्र उनके घाटे ही में वृद्धि करता है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi to hai jisne tumko zameen mein khalifa banaya hai. Ab jo koi kufr karta hai uske kufr ka wabal (burden) usi par hai, aur kaafiron ko unka kufr iske siwa koi taraqqi nahin deta ke unke Rubb ka gazab unpar zyada se zyada bhadakta chala jaata hai. Kaafiron ke liye khasare (nuksan) mein izafey ke siwa koi taraqqi nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi aisa hai jiss ney tum ko zamin mein aabad kiya so jo shaks kufur keray ga uss kay kufur ka wabaal ussi per paray ga. Aur kafiron kay liye unn ka kufur unn kay perwerdigar kay nazdeek narazi hi barhaney ka baees hota hai aur kafiron kay liye unn ka kufur khasarah hi barhney ka baees hota hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही तो है जिसने तुमको ज़मीन में खलीफा बनाया है। अब जो कोई कुफ्र करता है उसका कुफ्र (बोझ) उसी पर है, और काफिरों को उनका कुफ्र इसके सिवा कोई तरक्की नहीं देता के उनके रब का गजब उन पर ज्यादा से ज्यादा भड़का चला जाता है। काफ़िरों के लिए खसरे (नुक्सान) में इज़ाफ़े के सिवा कोई तरक़्की नहीं
عَرَبِيقُل أَرَأَيتُم شُرَكاءَكُمُ الَّذينَ تَدعونَ مِن دونِ اللَّهِ أَروني ماذا خَلَقوا مِنَ الأَرضِ أَم لَهُم شِركٌ فِي السَّماواتِ أَم آتَيناهُم كِتابًا فَهُم عَلىٰ بَيِّنَتٍ مِنهُ ۚ بَل إِن يَعِدُ الظّالِمونَ بَعضُهُم بَعضًا إِلّا غُرورًا
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) उनसे कह दें : क्या तुमने अपने उन साझियों को देखा, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो? मुझे दिखाओ कि उन्होंने धरती का कौन-सा भाग पैदा किया है? या उनकी आकाशों (की रचना) में कुछ साझेदारी है? या हमने उन्हें कोई पुस्तक प्रदान की है कि वे उसके किसी स्पष्ट प्रमाण पर (क़ायम) हैं? बल्कि (वास्तविकता यह है कि) अत्याचारी लोग एक-दूसरे को केवल धोखे का वादा करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) insey kaho, “kabhi tumne dekha bhi hai apne un shareekon ko jinhein tum khuda ko chodh kar pukara karte ho? Mujhey batao, unhon ne zameen mein kya paida kiya hai? Ya aasmaano mein unki kya shirkat hai?” (Agar yeh nahin bata sakte to insey pucho) kya humne inhein koi tehrir (written) likh kar di hai jiski bina par yeh (apne is shareek ke liye) koi saaf sanad rakhte hon? Nahin, balke yeh zaalim ek dusre ko mehaz fareb ke jhanse diye jaa rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kahiye! Kay tum apnay qarardaad shareekon ka haal to batlao jin ko tum Allah kay siwa pooja kerta ho. Yani mujh ko yeh batlao kay unhon ney zamin mein say konsa (juzzv) banaya hai ya unn ka aasmano mein kuch saajha hai ya hum ney unn ko koi kitab di hai kay yeh uss ki daleel per qaeem hon bulkay yeh zalim aik doosray say niray dhokay ki baaton ka wada kertay aatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) इनसे कहो, "कभी तुमने देखा भी है अपने उन शरीकों को जिन्हें तुम खुदा को छोड़ कर पुकारा करते हो? मुझे बताओ, उन्हें ने ज़मीन में क्या पेदा किया है? हां आसमानों में उनकी क्या शिरकत है?” (अगर ये नहीं बता सकता तो इनसे पूछो) क्या हमने इन्हें कोई तहरीर (लिखित) लिख कर दी है जिसका बिना पर ये (अपने इस शरीक के लिए) कोई साफ सनद रखते हो? नहीं, बलके ये जालिम एक दूसरे को महज़ फरेब के झाँसे दिए जा रहे हैं
عَرَبِي۞ إِنَّ اللَّهَ يُمسِكُ السَّماواتِ وَالأَرضَ أَن تَزولا ۚ وَلَئِن زالَتا إِن أَمسَكَهُما مِن أَحَدٍ مِن بَعدِهِ ۚ إِنَّهُ كانَ حَليمًا غَفورًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ही आकाशों और धरती को थामे (रोके) हुए है कि (कहीं) वे दोनों (अपनी जगह से) हट (टल) न जाएँ। और वास्तव में यदि वे दोनों हट (टल) जाएँ, तो उसके बाद कोई भी उन्हें थाम (रोक) नहीं सकेगा। निःसंदेह वह अत्यंत सहनशील, बहुत क्षमा करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke Allah hi hai jo aasmaano aur zameen ko tal (displace) janey se roke huey hai, aur agar woh tal (displace) jayein to Allah ke baad koi dusra inhein thamnay (hold) wala nahin hai. Beshak Allah bada haleem (Forbearing) aur darguzar farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeeni baat hai kay Allah Taalaa aasmano aur zamin ko thamay huyey hai kay woh tal na jayen aur agar woh tal jayen to phir Allah kay siwa aur koi inn ko thaam bhi nahi sakta. Woh haleem ghafoor hai
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के अल्लाह ही है जो आसमानों और ज़मीन को टाल (विस्थापित) जाने से रोके हुए हैं, और अगर वो ताल (विस्थापित) जाएँ तो अल्लाह के बाद कोई दूसरा इन्हें थमने (पकड़ने) वाला नहीं है। बेशक अल्लाह बड़ा हलीम (सहनशील) और दरगुज़र फ़रमाने वाला है
عَرَبِيوَأَقسَموا بِاللَّهِ جَهدَ أَيمانِهِم لَئِن جاءَهُم نَذيرٌ لَيَكونُنَّ أَهدىٰ مِن إِحدَى الأُمَمِ ۖ فَلَمّا جاءَهُم نَذيرٌ ما زادَهُم إِلّا نُفورًا
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हिन्दी (Al-Omari)और उन (काफ़िरों) ने अल्लाह की पक्की क़समें खाई थीं कि यदि उनके पास कोई डराने वाला (नबी) आया, तो वे अवश्य किसी भी अन्य समुदाय से अधिक सीधे रास्ते पर चलने वाले हो जाएँगे। फिर जब उनके पास एक डराने वाला आ गया, तो इससे उनके (सत्य से) दूर भागने ही में वृद्धि हुई।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log kadi kadi qasmein kha kar kaha karte thay ke agar koi khabardar karne wala unke haan aa gaya hota to yeh duniya ki har dusri qaum se badh kar raast-ro(better-guided ) hotay. Magar jab khabardar karne wala inke paas aa gaya to uski aamad (coming) ne inke andar haqq se farar ke siwa kisi cheez mein izafa na kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kufaar ney bari zor daar qasam khaee thi kay inn kay pass agar koi daraney wala aaye to woh her aik ummat say ziyada hidayat qabool kerney walay hon. Phir jab inn kay pass aik payghumbar aa phonchay to bus inn ki nafrat hi mein izafa hua
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग कड़ी क़िस्में खा कर कहते थे कि अगर कोई ख़बरदार करने वाला उनके हाँ आ गया होता तो ये दुनिया की हर दूसरी क़ौम से बढ़ कर रास्ता-रो (बेहतर निर्देशित) होटे. मगर जब ख़बरदार करने वाला इनके पास आ गया तो उसकी आमद (आ रही है) ने इनके अंदर हक़ से फ़रार के सिवा किसी चीज़ में इज़ाफ़ा ना किया
عَرَبِياستِكبارًا فِي الأَرضِ وَمَكرَ السَّيِّئِ ۚ وَلا يَحيقُ المَكرُ السَّيِّئُ إِلّا بِأَهلِهِ ۚ فَهَل يَنظُرونَ إِلّا سُنَّتَ الأَوَّلينَ ۚ فَلَن تَجِدَ لِسُنَّتِ اللَّهِ تَبديلًا ۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّتِ اللَّهِ تَحويلًا
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हिन्दी (Al-Omari)धरती में अभिमान करने और बुरी चाल के कारण। और बुरी चाल उसके चलने वाले ही को घेरती है। तो क्या वे पहले लोगों (के बारे में अल्लाह) की रीति की प्रतीक्षा कर रहे हैं? तो आप अल्लाह की रीति में हरगिज़ कोई बदलाव नहीं पाएँगे, तथा आप अल्लाह की रीति में कभी कोई परिवर्तन नहीं पाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh zameen mein aur zyada istakbaar (guroor) karne lagay aur buri buri chaalein chalne lagey, halanke buri chaalein chalne walon hi ko lay baithti hai. Ab kya yeh log iska intezar kar rahey hain ke pichli qaumon ke saath Allah ka jo tareeqa raha hai wahi inke saath bhi barta jaaye? Yahi baat hai to tum Allah ke tareeqe mein hargiz koi tabdili na paogey aur tum kabhi na dekhoge ke Allah ki sunnat ko uske muqarrar raaste se koi taaqat pher sakti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Duniya mein apnay ko bara samjhney ki waja say aur inn ki buri tadberon ki waja say aur buri tadbeeron ka wabaal inn tadbeer walon per hi parta hai so kiya yeh uss dastoor kay muntazir hain jo aglay logon kay sath hota raha hai. So aap Allah kay dastoor ko kabhi badalta hua na payen gay aur aap Allah kay dastoor ko kabhi muntaqil hota hua na payen gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये ज़मीन में और ज़्यादा इस्तकबार (गुरूर) करने लगे और बुरी बुरी चालें चलने लगें, हालंके बुरी चालें चलने वालो ही को ले बैठती है। अब क्या ये लोग इसका इंतज़ार कर रहे हैं कि पिछली क़ौमों के साथ अल्लाह का जो तरीक़ा रहा है वही इनके साथ भी बढ़ता जाए? यही बात है तो तुम अल्लाह के तरीक़े में हरगिज़ कोई तबदीली न पाओगे और तुम कभी न देखोगे के अल्लाह की सुन्नत को उसके मुकर्रर रास्ते से कोई ताक़त फेर सकती है
عَرَبِيأَوَلَم يَسيروا فِي الأَرضِ فَيَنظُروا كَيفَ كانَ عاقِبَةُ الَّذينَ مِن قَبلِهِم وَكانوا أَشَدَّ مِنهُم قُوَّةً ۚ وَما كانَ اللَّهُ لِيُعجِزَهُ مِن شَيءٍ فِي السَّماواتِ وَلا فِي الأَرضِ ۚ إِنَّهُ كانَ عَليمًا قَديرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और क्या वे धरती में नहीं चले-फिरे कि देखते कि उन लोगों का परिणाम कैसा रहा, जो इनसे पहले थे, हालाँकि वे शक्ति में इनसे बढ़े हुए थे? तथा अल्लाह ऐसा नहीं है कि आकाशों और धरती में कोई चीज़ उसे विवश कर सके। निःसंदेह वह सब कुछ जानने वाला, हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log zameen mein kabhi chaley phirey nahin hain ke inhein un logon ka anjaam nazar aata jo insey pehle guzar chuke hain, aur insey bahut zyada taaqatwar thay? Allah ko koi cheez aajiz (frustrate) karne wali nahin hai, na aasmaano mein aur na zameen mein. Woh sab kuch jaanta hai aur har cheez par qudrat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kiya yeh log zamin mein chalay phiray nahi jiss mein dekhtay bhaaltay kay jo log inn say pehlay ho guzray hain unn ka anjam kiya hua? Halankay woh qooat mein inn say barhay huyey thay aur Allah aisa nahi hai kay koi cheez uss ko hara day na aasmano mein aur na zamin mein woh baray ilm wala bari qudrat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग ज़मीन में कभी चले फिर नहीं हैं के इनहे उन लोगों का अंजाम नज़र आता है जो इनसे पहले गुजर चुके हैं, और इनसे बहुत ज्यादा ताकत थी? अल्लाह को कोई चीज़ अजीज (निराश) करने वाली नहीं है, न आसमानों में और न ज़मीन में। वो सब कुछ जानता है और हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है
عَرَبِيوَلَو يُؤاخِذُ اللَّهُ النّاسَ بِما كَسَبوا ما تَرَكَ عَلىٰ ظَهرِها مِن دابَّةٍ وَلٰكِن يُؤَخِّرُهُم إِلىٰ أَجَلٍ مُسَمًّى ۖ فَإِذا جاءَ أَجَلُهُم فَإِنَّ اللَّهَ كانَ بِعِبادِهِ بَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि अल्लाह लोगों की उनके कार्यों के कारण पकड़ करने लगे, तो धरती के ऊपर किसी चलने वाले को न छोड़े। परंतु वह उन्हें एक निर्धारित अवधि तक मोहलत देता है। फिर जब उनका निर्धारित समय आ जाएगा, तो अल्लाह अपने बंदों को भली-भाँति देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Agar kahin woh logon ko unke kiye kartooton par pakadta to zameen par kisi mutanaffis (living creature) ko jeeta (zinda) na chodhta. Magar woh unhein ek muqarrar waqt tak ke liye mohlat de raha hai, phir jab unka waqt aan poora hoga to Allah apne bandon ko dekh lega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar Allah Taalaa logon per unn kay aemaal kay sabab darogeer farmaney lagta to roy-e-zamin per aik jaandaar ko na chorta lekin Allah Taalaa inn ko aik miyad-e-moyyan tak mohlat dey raha hai so jab inn ki woh miyad aa phonchay gi Allah Taalaa apnay bandon ko aap dekh ley ga
Devnagri Urdu (Maududi)अगर कहीं वो लोगों को उनके किये कार्टून पर पकड़ा तो ज़मीन पर किसी मुतनफ़्फ़िस (जीवित प्राणी) को जीता (ज़िंदा) ना छोड़ता। मगर वो उनको एक मुकर्रर वक्त तक के लिए मोहलत दे रहा है, फिर जब उनका वक्त आन पूरा होगा अल्लाह के पास अपने बंदों को देख लेगा
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Surah 35: Al-Fatir (The Originator)

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Surah 35: Al-Fatir (The Originator)

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Surah 35: Al-Fatir (The Originator)

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Surah 35: Al-Fatir (The Originator)

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Surah 35: Al-Fatir (The Originator)

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Surah 36: Ya Sin (Ya Sin)

Meccan🕐 Revelation #41📜 83 Verses🕮 Juz 1–23
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Surah 36: Ya Sin (Ya Sin)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِييس
हिन्दी (Al-Omari)या, सीन।
Roman Urdu (Maududi)Yasin
Roman Urdu (Junagarhi)Yaseen
Devnagri Urdu (Maududi)यासीन
عَرَبِيوَالقُرآنِ الحَكيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क़सम है हिकमत वाले क़ुरआन की!
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai Quran e Hakeem ki
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai quran ba-hikmat ki
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है कुरान ए हकीम की
عَرَبِيإِنَّكَ لَمِنَ المُرسَلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आप रसूलों में से हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ke tum yaqeenan Rasoolon mein se ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kay be-shak aap payghumbaron mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)के तुम यकीनन रसूलन मैं से हो
عَرَبِيعَلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सीधे रास्ते पर हैं।
Roman Urdu (Maududi)Seedhey raastey par ho
Roman Urdu (Junagarhi)Seedhay rastay per hain
Devnagri Urdu (Maududi)सीधे रास्ते पर हो
عَرَبِيتَنزيلَ العَزيزِ الرَّحيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(यह) प्रभुत्वशाली, अति दयावान् (अल्लाह) का उतारा हुआ है।
Roman Urdu (Maududi)(Aur yeh Quran) gaalib aur Raheem hasti ka nazil karda hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh quran Allah zabardast meharban ki taraf say nazil kiya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)(और ये कुरान) गालिब और रहीम हस्ती का नाज़िल करदा है
عَرَبِيلِتُنذِرَ قَومًا ما أُنذِرَ آباؤُهُم فَهُم غافِلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ताकि आप उस जाति को डराएँ, जिनके बााप-दादा नहीं डराए गए थे। इसलिए वे ग़ाफ़िल हैं।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke tum khabardar karo ek aisi qaum ko jiske baap dada khabardar na kiye gaye thay aur is wajah se woh gaflat mein padey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Takay aap aisay logon ko darayen jin kay baap daday nahi daraye gaye thay so (issi waja say) yeh ghafil hain
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के तुम खबरदार करो एक ऐसी क़ौम को जिसके बाप दादा खबरदार ना किये गए थे और इस वजह से वो गफ़लत में पड़े हुए हैं
عَرَبِيلَقَد حَقَّ القَولُ عَلىٰ أَكثَرِهِم فَهُم لا يُؤمِنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनमें से अधिकतर लोगों पर बात सिद्ध हो चुकी है। अतः वे ईमान नहीं लाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Inmein se aksar log faisla-e-azaab ke mustahiq ho chuke hain, isi liye woh iman nahin latey
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein say aksar logon per baat sabit hochuki hai so yeh log eman na layen gay
Devnagri Urdu (Maududi)इनमें से अक्सर लोग फ़ैसला-ए-अज़ाब के मुस्तहिक हो चुके हैं, इसके लिए वो ईमान नहीं लाते हैं
عَرَبِيإِنّا جَعَلنا في أَعناقِهِم أَغلالًا فَهِيَ إِلَى الأَذقانِ فَهُم مُقمَحونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उनकी गर्दनों में तौक़ डाल दिए हैं, जो ठुड्डियों से लगे हैं। इसलिए वे सिर ऊपर किए हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Humne unki gardano mein tauq (bedi /fetters) daal diye hain jinse woh thodiyon (chins) tak jakade gaye hain, isliye woh sar uthaye khade hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney unn ki gardano mein toq daal diyey hain phir woh thoriyon tak hain jiss say unn kay sir uper ko ulat gaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उनकी गर्दनों में तौक (बेदी/बेड़ी) डाल दिए हैं जिनसे वो थोड़ीयों (चिन) तक जकड़े गए हैं, इसलिए वो सर उठाए खड़े हैं
عَرَبِيوَجَعَلنا مِن بَينِ أَيديهِم سَدًّا وَمِن خَلفِهِم سَدًّا فَأَغشَيناهُم فَهُم لا يُبصِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उनके आगे एक आड़ बना दी है और उनके पीछे एक आड़। फिर हमने उनको ढाँक दिया है। अतः वे देख ही नहीं पाते।
Roman Urdu (Maududi)Humne ek deewar unke aagey khadi kardi hai aur ek deewar unke peechey, humne unhein dhaank diya hai, unhein ab kuch nahin soojhta
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney aik aarh unn kay samney ker di aur aik aarh unn kay peechay kerdi jiss say hum ney unn ko dhank diya so woh nahi dekh saktay
Devnagri Urdu (Maududi)हमने एक दीवार उनके आगे खादी करदी है और एक दीवार उनके पीछे, हमने उन्हें ढांक दिया है, उन्हें अब कुछ नहीं सूझता
عَرَبِيوَسَواءٌ عَلَيهِم أَأَنذَرتَهُم أَم لَم تُنذِرهُم لا يُؤمِنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उनके लिए बराबर है, चाहे आप उन्हें डराएँ या न डराएँ, वे ईमान नहीं लाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Unke liye yaksan hai, tum unhein khabardar karo ya na karo, yeh na maanengey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aap inn ko darayen ya na darayen dono barabar hain yeh eman nahi layen gay
Devnagri Urdu (Maududi)उनके लिए यकसन है, तुम उन्हें खबरदार करो या ना करो, ये ना मानेंगे
عَرَبِيإِنَّما تُنذِرُ مَنِ اتَّبَعَ الذِّكرَ وَخَشِيَ الرَّحمٰنَ بِالغَيبِ ۖ فَبَشِّرهُ بِمَغفِرَةٍ وَأَجرٍ كَريمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आप तो केवल उस व्यक्ति को डरा सकते हैं, जो इस ज़िक्र (क़ुरआन) का पालन करे, तथा बिन देखे रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) से डरे। तो आप उसे क्षमा तथा सम्मानजनक बदले की शुभ सूचना दे दें।
Roman Urdu (Maududi)Tum to usi shaks ko khabardar kar sakte ho jo naseehat ki pairvi karey aur bay-dekhe khuda e rehman se darey, usey magfirat aur ajr-e-karim ki basharat (khush khabri) de do
Roman Urdu (Junagarhi)Bus aap to sirf aisay shaks ko dara saktay hain jo naseehat per chalay aur rehman say bey dekhay daray so aap uss ko maghfirat aur baq-waqar ajar ki khushkhabriyan suna dijiyey
Devnagri Urdu (Maududi)तुम तो उसी खबर को खबरदार बना सकते हो जो हिदायत की जोड़ी। करे और बे-देखे खुदा ए रहमान से डरे, उसे मगफिरत और अज्र-ए-करीम की बशारत (खुश खबरी) दे दो
عَرَبِيإِنّا نَحنُ نُحيِي المَوتىٰ وَنَكتُبُ ما قَدَّموا وَآثارَهُم ۚ وَكُلَّ شَيءٍ أَحصَيناهُ في إِمامٍ مُبينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम ही मुर्दों को जीवित करेंगे। तथा हम उनके कर्मों और उनके पद्चिह्नों को लिख रहे हैं। तथा प्रत्येक वस्तु को हमने स्पष्ट पुस्तक में दर्ज कर रखा है।
Roman Urdu (Maududi)Hum yaqeenan ek roz murdon ko zinda karne waley hain jo kuch afaal (aamal) unhon ne kiye hain woh sab hum likhte rahey hain, aur jo kuch aasaar unhon ne peechey chodhey hain woh bhi hum sabt (likh) rahey hain. Har cheez ko humne ek khuli kitaab mein darj kar rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak hum murdon ko zindah keren gay aur hum likhtay jatay hain woh aemaal bhi jin ko log aagay bhejtay hain aur unn kay woh aemaal bhi jin ko peechay chor jatay hain aur hum ney her cheez ko aik wazeh kitab mein zabt ker rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)हम यकीनन एक रोज़ मुर्दों को जिंदा करने वाले हैं जो कुछ अफाल (आमाल) उन्होन ने किये हैं वो सब हम लिखते रहे हैं, और जो कुछ आसर उनहों ने पीछे छोड़े हैं वो भी हम सब (लिख) रहे हैं। हर चीज को हमने एक खुली किताब में दर्ज कर रखा है
عَرَبِيوَاضرِب لَهُم مَثَلًا أَصحابَ القَريَةِ إِذ جاءَهَا المُرسَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा आप उन्हें बस्ती वालों का एक उदाहरण दीजिए। जब वहाँ (अल्लाह के) भेजे हुए रसूल आए।
Roman Urdu (Maududi)Inhein misaal ke taur par us basti walon ka qissa sunao jabke usmein Rasool aaye thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aap inn kay samney aik misal (yani aik) basti walon ki misal (uss waqt ka) biyan kijiyey jabkay uss basti mein (kaee) rasool aaye
Devnagri Urdu (Maududi)इन्हें मिसाल के तौर पर उस बस्ती वालों का क़िस्सा सुनाओ जबके उसमें रसूल आए थे
عَرَبِيإِذ أَرسَلنا إِلَيهِمُ اثنَينِ فَكَذَّبوهُما فَعَزَّزنا بِثالِثٍ فَقالوا إِنّا إِلَيكُم مُرسَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब हमने उनकी ओर दो (रसूलों को) भेजा। तो उन्होंने उन दोनों को झुठला दिया। तब हमने तीसरे के द्वारा शक्ति पहुँचाई। तो तीनों ने कहा : निःसंदेह हम तुम्हारी ओर भेजे गए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Humne unki taraf do Rasool bheje aur unhon ne dono ko jhutla diya phir humne teesra madad ke liye bheja aur unsab ne kaha “Hum tumhari taraf Rasool ki haisiyat se bheje gaye hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Jab hum ney unn kay pass do ko bheja so unn logon ney (awwal) dono ko jhutlaya phir hum ney teesray say taeed ki so unn teeno ney kaha hum tumharay pass bhejay gaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उनकी तरफ दो रसूल भेजे और उन्होन ने दोनों को झुटला दिया फिर हमने तीसरा मदद के लिए भेजा और उनसब ने कहा "हम तुम्हारी तरफ रसूल की हकीकत से भेज गए हैं"
عَرَبِيقالوا ما أَنتُم إِلّا بَشَرٌ مِثلُنا وَما أَنزَلَ الرَّحمٰنُ مِن شَيءٍ إِن أَنتُم إِلّا تَكذِبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : तुम सब तो हमारे ही जैसे मनुष्य हो, और अत्यंत दयावान् (अल्लाह) ने कुछ भी नहीं उतारा है। तुम तो बस झूठ बोल रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Basti walon ne kaha “ tum kuch nahin ho magar hum jaise chandh Insaan, aur khuda e rehman ne hargiz koi cheez nazil nahin ki hai, tum mehaz jhoot boltey ho.”
Roman Urdu (Junagarhi)Unn logon ney kaha kay tum to humari tarah mamooli aadmi ho aur rehman ney koi cheez nazil nahi ki. Tum nira jhoot boltay ho
Devnagri Urdu (Maududi)बस्ती वालों ने कहा "तुम कुछ नहीं हो मगर हम जैसे चांद इंसान, और खुदा ए रहमान ने हरगिज कोई चीज नाज़िल नहीं की है, तुम महज़ झूठ बोलते हो।"
عَرَبِيقالوا رَبُّنا يَعلَمُ إِنّا إِلَيكُم لَمُرسَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन रसूलों ने कहा : हमारा पालनहार जानता है कि हम निश्चय ही तुम्हारी ओर रसूल बनाकर भेजे गए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Rasoolon ne kaha “ hamara Rubb jaanta hai ke hum zarooor tumhari taraf Rasool bana kar bheje gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Unn (rasoolon) ney kaha humara perwerdigar janta hai kay be-shak hum tumharay pass bhejen gaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)रसूलों ने कहा "हमारा रब जानता है के हम जरूर तुम्हारी तरफ रसूल बना कर भेज गए हैं
عَرَبِيوَما عَلَينا إِلَّا البَلاغُ المُبينُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमारा दायित्व खुले तौर पर संदेश पहुँचा देने के सिवा और कुछ नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Aur humpar saaf saaf paigham pahuncha dene ke siwa koi zimmedari nahin hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur humaray zimmay to sirf wazeh tor per phoncha dena hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हमपर साफ साफ पैगाम पाहुंचा देने के सिवा कोई जिम्मेदारी नहीं है"
عَرَبِيقالوا إِنّا تَطَيَّرنا بِكُم ۖ لَئِن لَم تَنتَهوا لَنَرجُمَنَّكُم وَلَيَمَسَّنَّكُم مِنّا عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों ने कहा : हम तुम्हें अशुभ (मनहूस) समझते हैं। यदि तुम बाज़ नहीं आए, तो हम तुम्हें निश्चित रूप से पथराव करके मार डालेंगे और तुम्हें अवश्य ही हमारी ओर से दुःखदायी यातना पहुँचेगी।
Roman Urdu (Maududi)Basti waley kehne lagey “hum to tumhein apne liye faal-e-badd (manhoos) samajhte hain , agar tum baaz na aaye to hum tumko sangsaar(stoning) kar dengey aur humse tum badi dardnaak saza paogey”
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha kay hum to tum ko manhoos samajhtay hain. Agar tum baaz na aaye to hum pathron say tumhara kaam tamam ker den gay aur tum ko humari taraf say sakht takleef phonchay gi
Devnagri Urdu (Maududi)बस्ती वाले कहने लगे "हम तो तुम्हारे लिए फ़ल-ए-बद्द (मनहूस) समझते हैं, अगर तुम बाज़ ना आए तो हम तुमको संगसार (पत्थरबाजी) कर देंगे और हमसे तुम बड़ी दर्दनाक साज़ा पाओगे"
عَرَبِيقالوا طائِرُكُم مَعَكُم ۚ أَئِن ذُكِّرتُم ۚ بَل أَنتُم قَومٌ مُسرِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों ने कहा : तुम्हारा अपशकुन तुम्हारे ही साथ है। क्या इसलिए कि तुम्हें उपदेश दिया गया? बल्कि तुम उल्लंघनकारी लोग हो।
Roman Urdu (Maududi)Rasoolon ne jawab diya “tumhari faal-e-badd (nahusat) to tumhare apne saath lagi hui hai , kya yeh baatein tum isliye karte ho ke tumhein naseehat ki gayi? Asal baat yeh hai ke tum hadd se guzre huey log ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Unn rasoolon ney kaha tumhari nahoosat tumharay sath hi lagi hui hai kiya iss ko nahoosat samajhtay ho kay tum ko naseehat ki jaye bulkay tum hadd say nikal janey walay log ho
Devnagri Urdu (Maududi)रसूलों ने जवाब दिया "तुम्हारी फ़ल-ए-बद्द (नहुसत) तो तुम्हारे अपने साथ लगी हुई है, क्या ये बातें तुम इसलिए करते हो कि तुम्हें हिदायत की गई है? असल बात ये है के तुम हद से गुज़रे हुए लोग हो”
عَرَبِيوَجاءَ مِن أَقصَى المَدينَةِ رَجُلٌ يَسعىٰ قالَ يا قَومِ اتَّبِعُوا المُرسَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा नगर के अंतिम किनारे से एक व्यक्ति दौड़ता हुआ आया। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! रसूलों का कहा मानो।
Roman Urdu (Maududi)Itne mein shehar ke door daraaz goshey se ek shaks daudta hua aaya aur bola “Aey meri qaum ke logon, Rasoolon ki pairwi ikhtiyar karlo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aik shaks (uss) shehar kay aakhri hissay say dorta hua aaya kehney laga kay aey meri qom! Inn rasoolon ki raah per chalo
Devnagri Urdu (Maududi)इतने में शहर के दरवाज़े से एक शक्स दौड़ता हुआ आया और बोला “ऐ मेरी क़ौम के लोगों, रसूलों की जोड़ी इख्तियार करलो
عَرَبِياتَّبِعوا مَن لا يَسأَلُكُم أَجرًا وَهُم مُهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम उनका अनुसरण करो, जो तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगते तथा वे सीधे मार्ग पर हैं।
Roman Urdu (Maududi)Pairwi karo un logon ki jo tumse koi ajar nahin chahte aur theek raaste par hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aisay logon ki raah per chalo jo tum say koi mawaza nahi mangtay aur woh raah-e-raast per hain
Devnagri Urdu (Maududi)जोड़ी करो उन लोगों की जो तुमसे कोई अजर नहीं चाहते और ठीक रास्ते पर हैं
عَرَبِيوَما لِيَ لا أَعبُدُ الَّذي فَطَرَني وَإِلَيهِ تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मुझे क्या हुआ है कि मैं उसकी इबादत न करूँ, जिसने मुझे पैदा किया है और तुम (सब) उसी की ओर लौटाए जाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Aakhir kyun na main us hasti ki bandagi karoon jisne mujhey paida kiya hai aur jiski taraf tum sabko palat kar jana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mujhay kiya hogaya hai kay mein uss ki ibadat na keroo jiss ney mujhay peda kiya aur tum sab ussi ki taraf lotaye jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर क्यों ना मैं उस हस्ती की बंदगी करूं जिसने मुझे भुगतान किया है और जिसकी तरफ तुम सबको पलट कर जाना है
عَرَبِيأَأَتَّخِذُ مِن دونِهِ آلِهَةً إِن يُرِدنِ الرَّحمٰنُ بِضُرٍّ لا تُغنِ عَنّي شَفاعَتُهُم شَيئًا وَلا يُنقِذونِ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या मैं उसे छोड़कर दूसरे पूज्य बना लूँ? यदि रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) मुझे कोई हानि पहुँचाना चाहे, तो उनकी सिफ़ारिश मुझे कुछ लाभ नहीं पहुँचा सकेगी और न वे मुझे बचा सकेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Kya main usey chodh kar dusre ko mabood bana loon? Halaanke agar khuda e Rehman mujhey koi nuksaan pahunchana chahe to na unki shafaat mere kisi kaam aa sakti hai aur na woh mujhey chuda hi sakte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya mein ussay chor ker aison ko mabood banaoon kay agar (Allah) rehman mujhay koi nuksan phonchana chahaye to unn ki sifarish mujhay kuch bhi nafa na phoncha sakay aur na woh mujhay bacha saken
Devnagri Urdu (Maududi)क्या मैं उसे चोद कर दूसरे को माबूद बना लूं? हलांके अगर खुदा ए रहमान मुझे कोई नुक्सान पहुंचाना चाहे तो ना उनकी शफाअत मेरे लिए कोई काम आ सकती है और ना वो मुझे छुड़ा ही सकते हैं
عَرَبِيإِنّي إِذًا لَفي ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मैं उस समय खुली गुमराही में हूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Agar main aisa karoon to main sareeh gumraahi mein mubtala ho jaunga
Roman Urdu (Junagarhi)Phir to mein yaqeenan khilli gumrahee mein hun
Devnagri Urdu (Maududi)अगर मैं ऐसा करूं तो मैं सारी गुमराही में मुबतला हो जाऊंगा
عَرَبِيإِنّي آمَنتُ بِرَبِّكُم فَاسمَعونِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मैं तुम्हारे पालनहार पर ईमान ले आया। अतः मेरी बात सुनो।
Roman Urdu (Maududi)Main to tumhare Rubb par iman le aaya, tum bhi meri baat maan lo.”
Roman Urdu (Junagarhi)Meri suno! Mein to (sachay dil say) tum sab kay rab per eman laa chuka
Devnagri Urdu (Maududi)मैं तो तुम्हारे रब पर ईमान ले जाऊंगा आया, तुम भी मेरी बात मान लो।”
عَرَبِيقيلَ ادخُلِ الجَنَّةَ ۖ قالَ يا لَيتَ قَومي يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(उससे) कहा गया : जन्नत में प्रवेश कर जा। उसने कहा : काश मेरी जाति भी जान लेती!
Roman Urdu (Maududi)(aakhir e kaar un logon ne usey qatal kardiya aur) us shaks se kehdiya gaya ke “daakhil ho ja jannat mein” usne kaha “kaash meri qaum ko maaloom hota
Roman Urdu (Junagarhi)(uss say) kaha gaya kay jannat mein chala jaa kehney laga kaash! Meri qom ko bhi ilm hojata
Devnagri Urdu (Maududi)(आखिर ए कार उन लोगों ने उसे क़त्ल कर दिया और) उस शक्स से कहदिया गया के "दाखिल हो जा जन्नत में" उसने कहा "काश मेरी क़ौम को मालूम होता है
عَرَبِيبِما غَفَرَ لي رَبّي وَجَعَلَني مِنَ المُكرَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)कि मेरे पालनहार ने मुझे क्षमा कर दिया और मुझे सम्मानित लोगों में शामिल कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Ke mere Rubb ne kis cheez ki badaulat meri magfirat farma di aur mujhey ba-izzat logon mein daakhil farmaya”
Roman Urdu (Junagarhi)Kay mujhay meray rab ney bakhsh diya aur mujhay ba-izzat logon mein sy ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)के मेरे रब ने किस चीज़ की बदौलत मेरी मगफिरत फ़रमा दी और मुझे ब-इज्जत लोगों में दाख़िल फरमाया”
🕮 Juz 23 begins here
عَرَبِي۞ وَما أَنزَلنا عَلىٰ قَومِهِ مِن بَعدِهِ مِن جُندٍ مِنَ السَّماءِ وَما كُنّا مُنزِلينَ
हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उसके पश्चात् उसकी जाति पर आकाश से कोई सेना नहीं उतारी और न हम उतारने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Iske baad uski qaum par humne aasmaan se koi lashkar nahin utara , humein lashkar bhejne ki koi haajat na thi
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kay baad hum ney uss qom per aasman say koi lashkar na utara aur na iss tarah hum utara kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)इसके बाद उसकी कौम पर हमने आसमान से कोई लश्कर नहीं उतारा, हमने लश्कर भेजा कि कोई हाजात ना थी
عَرَبِيإِن كانَت إِلّا صَيحَةً واحِدَةً فَإِذا هُم خامِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह तो मात्र एक तेज़ आवाज़ (चिंघाड़) थी। फिर एकाएक वे बुझे हुए थे।
Roman Urdu (Maududi)Bas ek dhamaka hua aur yakayak woh sab bujh kar reh gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Woh to sirf aik zor ki cheekh thi kay yakayak woh sab kay sab bujh bujha gaye
Devnagri Urdu (Maududi)बस एक धमाका हुआ और यकीन वो सब बुझ कर रह गए
عَرَبِييا حَسرَةً عَلَى العِبادِ ۚ ما يَأتيهِم مِن رَسولٍ إِلّا كانوا بِهِ يَستَهزِئونَ
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हिन्दी (Al-Omari)हाय अफसोस है बंदों पर! उनके पास जो भी रसूल आता, वे उसका उपहास किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Afsos bandon ke haal par, jo Rasool bhi unke paas aaya uska woh mazaaq hi udatey rahey
Roman Urdu (Junagarhi)(aisay) bando per afsos! Kabhi bhi koi rasool unn kay pass nahi aaya jiss ki hansi unhon ney na uraee ho
Devnagri Urdu (Maududi)अफसोस बंदों के हाल पर, जो रसूल भी उनके पास आया उसका वो मज़ाक ही उड़ाते रहे
عَرَبِيأَلَم يَرَوا كَم أَهلَكنا قَبلَهُم مِنَ القُرونِ أَنَّهُم إِلَيهِم لا يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने उनसे पहले कितने ही समुदायों को विनष्ट कर दिया कि वे उनकी ओर लौटकर नहीं आएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Kya unhon ne dekha nahin ke unsey pehle kitni hi qaumon ko hum halaak kar chuke hain aur iske baad woh phir kabhi unki taraf palat kar na aaye
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya unhon ney nahi dekha kay inn kay pehlay boht si qomon ko hum ney gharat ker diya kay woh unn ki taraf lot ker nahi aayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या उन्हें ने देखा नहीं के उनसे पहले कितनी ही हाय क़ौमों को हम हलाक कर चुके हैं और उसके बाद वो फिर कभी उनकी तरफ पलट कर ना आये
عَرَبِيوَإِن كُلٌّ لَمّا جَميعٌ لَدَينا مُحضَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे जितने भी हैं सबके सब हमारे सामने उपस्थित किए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Un sab ko ek roz hamare saamne haazir kiya jaana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur nahi hai koi jamaat magar yeh kay woh jama hoker humaray samney hazir ki jayegi
Devnagri Urdu (Maududi)उन सबको एक रोज़ हमारे सामने हाज़िर किया जाना है
عَرَبِيوَآيَةٌ لَهُمُ الأَرضُ المَيتَةُ أَحيَيناها وَأَخرَجنا مِنها حَبًّا فَمِنهُ يَأكُلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके लिए एक बड़ी निशानी मृत भूमि है। हमने उसे जीवित किया और उससे अन्न निकाला। तो वे उसी में से खाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)In logon ke liye be-jaan zameen ek nishani hai, humne isko zindagi bakshi aur issey galla (anaaj / grain) nikala jisey yeh khaate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kay liye aik nishani (khusk) zamin hai jiss ko hum ney zindah ker diya aur iss say ghalla nikala jiss mein say woh kahatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों के लिए बे-जान ज़मीन एक निशानी है, हमने इसको जिंदगी बख्शी और इस गल्ला (अनाज/अनाज) निकाला जिसे ये खाते हैं
عَرَبِيوَجَعَلنا فيها جَنّاتٍ مِن نَخيلٍ وَأَعنابٍ وَفَجَّرنا فيها مِنَ العُيونِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उसमें खजूरों और अंगूरों के कई बाग बनाए और उनमें कई जल स्रोत प्रवाहित कर दिए।
Roman Urdu (Maududi)Humne ismein khajuron aur angooron ke baagh paida kiye aur uske andar chashme (springs) phodh nikale
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney iss mein khajooron kay aur angooron kay baghaat peda kerdiye aur jin mein hum ney chashmay bhi jari ker diye hain
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इसमे खजूरों और अंगूरों के बाग पैदा किये और उसके अंदर चश्मे (स्प्रिंग्स) फोढ़ निकले
عَرَبِيلِيَأكُلوا مِن ثَمَرِهِ وَما عَمِلَتهُ أَيديهِم ۖ أَفَلا يَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि वे उसके फल खाएँ, हालाँकि उसे उनके हाथों ने नहीं बनाया है। तो क्या वे आभार प्रकट नहीं करते?
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke yeh uske phal khayein, yeh sab kuch inke apne haathon ka paida kiya hua nahin hai phir kya yeh shukar ada nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Takay (log) uss kay phal khayen aur iss ki inn kay hathon ney nahi banaya. Phir kiyon shukar guzari nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के ये उसके फल खायें, ये सब कुछ इनके अपने हाथों का भुगतान किया हुआ नहीं है फिर क्या ये शुक्र अदा नहीं करते
عَرَبِيسُبحانَ الَّذي خَلَقَ الأَزواجَ كُلَّها مِمّا تُنبِتُ الأَرضُ وَمِن أَنفُسِهِم وَمِمّا لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)पवित्र है वह अस्तित्व जिसने सभी जोड़े पैदा किए, उन चीज़ों के भी जिन्हें धरती उगाती है, और स्वयं उन (मनुष्यों) के अपने भी, और उनके भी जिन्हें वे नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Paak hai woh zaat jisne jumla aqsaam ke joday paida kiye khwah woh zameen ki nabataat mein se hon ya khud inki apni jins (yani naw-e-Insani) mein se ya un ashyah mein se jinko yeh jaante tak nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh pak zaat hai jiss ney her cheez kay joray peda kiye khua woh zamin ki ugaee hui cheezen hon khua khud unkay nafoos hon khua woh (cheezen) hon jinhen yeh jantay bhi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)पाक है वो जात जिसने जुमला अक्साम के जोड़े पैदा किये ख्वाह वो ज़मीन की नबात में से होन या खुद इनके अपने जिन्स (यानी नाव-ए-इंसानी) में से या उन आशियानों में से जिनको ये जानते तक नहीं हैं
عَرَبِيوَآيَةٌ لَهُمُ اللَّيلُ نَسلَخُ مِنهُ النَّهارَ فَإِذا هُم مُظلِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा एक निशानी उनके लिए रात है। जिससे हम दिन को खींच लेते हैं, तो एकाएक वे अंधेरे में हो जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Inke liye ek aur nishani raat hai, hum uske upar se din hata dete hain to inpar andhera chaa jata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kay liye aik nishani raat hai jiss say hum din ko kheench latay detay hain to yakayak andheray mein reh jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)इनके लिए एक और निशानी रात है, हम उसके ऊपर से दिन हटा देते हैं तो अंदर अंधेरा छा जाता है
عَرَبِيوَالشَّمسُ تَجري لِمُستَقَرٍّ لَها ۚ ذٰلِكَ تَقديرُ العَزيزِ العَليمِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा सूर्य अपने नियत ठिकाने की ओर चला जा रहा है। यह प्रभुत्वशाली, सब कुछ जानने वाले (अल्लाह) का निर्धारित किया हुआ है।
Roman Urdu (Maududi)Aur Suraj, woh apne thikane ki taraf chala ja raha hai, yeh zabardat aleem(All-Knowing) hasti ka bandha hua hisaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur sooraj kay liye jo muqarrara raah hai woh ussi per chalta hai yeh hai muqarrar kerdah ghalib ba-ilm Allah Taalaa ka
Devnagri Urdu (Maududi)और सूरज, वो अपने ठिकाने की तरफ चल जा रहा है, ये ज़बरदत आलिम (सर्वज्ञ) हस्ती का बंदा हुआ हिसाब है
عَرَبِيوَالقَمَرَ قَدَّرناهُ مَنازِلَ حَتّىٰ عادَ كَالعُرجونِ القَديمِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा चाँद की हमने मंज़िलें निर्धारित कर दी हैं। यहाँ तक कि वह फिर खजूर की पुरानी सूखी टेढ़ी टहनी के समान हो जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur chand, uske liye humne manzilein muqarrar kardi hain yahan tak ke insey guzarta hua woh phir khajur ki sukhi shaakh (dry old branch) ke manind reh jata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur chand ki hum ney manzilen muqarrar ker rahkhi hain yahan tak kay woh lot ker purani tehni ki tarah hojata hai
Devnagri Urdu (Maududi)और चाँद, उसके लिए हमने मंज़िलें मुक़र्रर कर दी हैं यहाँ तक के इनसे गुज़रता हुआ वो फिर खजूर की सूखी शाखा (सूखी पुरानी शाखा) के मनिंद रह जाता है
عَرَبِيلَا الشَّمسُ يَنبَغي لَها أَن تُدرِكَ القَمَرَ وَلَا اللَّيلُ سابِقُ النَّهارِ ۚ وَكُلٌّ في فَلَكٍ يَسبَحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)न तो सूर्य ही से हो सकता है कि चाँद को जा पकड़े और न रात ही दिन से पहले आने वाली है। और सब एक-एक कक्षा में तैर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Na Suraj ke bas mein yeh hai ke woh chand ko ja pakde aur na raat din par sabqat le ja sakti hai. Sab ek ek falak mein tair rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Na aftab ki yeh majal hai kay chand ko pakray aur na raat din per aagay barh janey wali hai aur sab kay sab aasman mein tertay phirtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ना सूरज के बस में ये है कि वो चांद को जा पकड़े और ना रात दिन पर सबक ले जा सकती है। सब एक एक फलक में तैर रहे हैं
عَرَبِيوَآيَةٌ لَهُم أَنّا حَمَلنا ذُرِّيَّتَهُم فِي الفُلكِ المَشحونِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके लिए एक निशानी (यह भी) है कि हमने उनकी नस्ल को भरी हुई नाव में सवार किया।
Roman Urdu (Maududi)Inke liye yeh bhi ek nishani hai ke humne inki nasal ko bhari hui kashti mein sawaar kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kay liye aik nishani (yeh bhi) hai kay hum ney inn ki nasal ko bhari hui kashti mein sawar kiya
Devnagri Urdu (Maududi)इनके लिए ये भी एक निशानी है के हमने इनकी नाक को भरी हुई कश्ती में सवार करदिया
عَرَبِيوَخَلَقنا لَهُم مِن مِثلِهِ ما يَركَبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उनके लिए उस (नाव) जैसी कई और चीज़ें बनाईं, जिनपर वे सवार होते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur phir inke liye waisi hi kashtiyan aur paida ki jinpar yeh sawaar hotay hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kay liye issi jaisi aur cheezen peda ken jin per yeh sawar hotay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और फिर इनके लिए वैसी ही कश्तियां और पैदा कि जिनपर ये सवार होते हैं
عَرَبِيوَإِن نَشَأ نُغرِقهُم فَلا صَريخَ لَهُم وَلا هُم يُنقَذونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम चाहें, तो उन्हें डुबो दें। फिर न कोई उनकी फ़र्याद को पहुँचने वाला हो और न वे बचाए जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Hum chahein to inko garq kardein, koi inki fariyad sunne wala na ho aur kisi tarah yeh na bachaye jaa sakein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum chahatay to enhen dobo detay. Phir na to koi unn ka faryad rass hota na woh bachaye jayen
Devnagri Urdu (Maududi)हम चाहें तो इनको गरक करदें, कोई इनकी फरियाद सुनने वाला ना हो और किसी तरह ये ना बचाए जा सकें
عَرَبِيإِلّا رَحمَةً مِنّا وَمَتاعًا إِلىٰ حينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु हमारी ओर से दया और एक समय तक लाभ पहुँचाने की वजह से।
Roman Urdu (Maududi)Bas hamari rehmat hi hai jo inhein paar lagati aur ek waqt e khaas tak zindagi se mutamatta (enjoyment) honay ka mauqa deti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin hum apni taraf say rehmat kertay hain aur aik muddat tak kay liye unhen faeeday day rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)बस हमारी रहमत ही है जो इन्हें पार लगाती और एक वक्त और खास तक जिंदगी से मिलता जुलता (आनंद) होने का मौका देती है
عَرَبِيوَإِذا قيلَ لَهُمُ اتَّقوا ما بَينَ أَيديكُم وَما خَلفَكُم لَعَلَّكُم تُرحَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनसे कहा जाता है कि उस (यातना) से डरो, जो तुम्हारे आगे है और जो तुम्हारे पीछे है, ताकि तुमपर दया की जाए।
Roman Urdu (Maududi)In logon se jab kaha jaata hai ke bacho us anjaam se jo tumhare aagey aa raha hai aur tumhare peechey guzar chukka hai, shayad ke tumpar reham kiya jaye (to yeh suni an suni kar jatey hain)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn say jab (kabhi) kaha jata hai kay aglay pichlay (gunahon) say bacho takay tum per reham kiya jaye
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों से जब कहा जाता है के बच्चों उस अंजाम से जो तुम्हारे आगे आ रहा है और तुम्हारे पीछे गुजर चुका है, शायद के तुमपर रहम किया जाए (तो ये सुनी अन सुनी कर जाते हैं)
عَرَبِيوَما تَأتيهِم مِن آيَةٍ مِن آياتِ رَبِّهِم إِلّا كانوا عَنها مُعرِضينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनके पास उनके पालनहार की निशानियों में से कोई निशानी नहीं आती परंतु वे उससे मुँह फेरने वाले होते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Inke saamne inke Rubb ki aayat(nishani) mein se jo aayat(nishani) bhi aati hai yeh iski taraf iltifaat nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kay pass to inn kay rab ki nishaniyon mein say koi nishani aisi nahi aati jiss say yeh bey rukhi na barattay hon
Devnagri Urdu (Maududi)इनके सामने इनके रब की आयत (निशानी) में से जो आयत (निशानी) भी आती है ये इसकी तरफ इल्तिफ़ात नहीं करते
عَرَبِيوَإِذا قيلَ لَهُم أَنفِقوا مِمّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ قالَ الَّذينَ كَفَروا لِلَّذينَ آمَنوا أَنُطعِمُ مَن لَو يَشاءُ اللَّهُ أَطعَمَهُ إِن أَنتُم إِلّا في ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब उनसे कहा जाता है कि उस धन में से खर्च करो, जो अल्लाह ने तुम्हें प्रदान किया है, तो काफ़िर लोग ईमान वालों से कहते हैं : क्या हम उसे खाना खिलाएँ, जिसे यदि अल्लाह चाहता, तो खिला देता? तुम तो खुली गुमराही में हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab insey kaha jaata hai ke Allah ne jo rizq tumhein ata kiya hai usmein se kuch Allah ki raah mein bhi kharch karo to yeh log jinhon ne kufr kiya hai iman laney walon ko jawab dete hain “ kya hum unko khilayein jinhein agar Allah chahta to khud khila deta? Tum to bilkul hi behak gaye ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn say jab kaha jata hai kay Allah Taalaa kay diye huyey mein say kuch kharach kero to yeh kuffar eman walon ko jawab detay hain kay hum enhen kiyon khilayen? Jinhen agar Allah Taalaa chahata to khud khila pila deta tum to ho hi khulli gumrahi mein
Devnagri Urdu (Maududi)और जब इनसे कहा जाता है कि अल्लाह ने जो रिज़क तुम्हें अता किया है उसमें से कुछ अल्लाह की राह में भी खर्च करो तो ये लोग जिन्होन ने कुफ्र किया है ईमान लाने वालों को जवाब देते हैं " क्या हम उनको खिलाएं जिन्हें अगर अल्लाह चाहता तो खुद खिला देता? तुम तो बिलकुल ही बहक गए हो”
عَرَبِيوَيَقولونَ مَتىٰ هٰذَا الوَعدُ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे कहते हैं : यह (क़ियामत का) वादा कब पूरा होगा, यदि तुम सच्चे हो?
Roman Urdu (Maududi)Yeh log kehte hain ke “yeh qayamat ki dhamki aakhir kab poori hogi? Batao agar tum sacche ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kehtay hain kay yeh wada kab hoga sachay ho to batlao
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग कहते हैं के “ये कयामत की धमकी आख़िर कब पूरी होगी? बताओ अगर तुम सच्चे हो”
عَرَبِيما يَنظُرونَ إِلّا صَيحَةً واحِدَةً تَأخُذُهُم وَهُم يَخِصِّمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे केवल एक चिंघाड़ की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो उन्हें आ पकड़ेगी, जबकि वे (आपस में) झगड़ रहे होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Dar-asal yeh jis cheez ki raah takk rahey hain woh bas ek dhamaka hai jo yakayak inhein ain us halat mein dhar lega jab yeh (apne dunyavi maamlaat mein) jhagad rahey hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Enhen sirf aik sakht cheekh ka intezar hai jo enhen aa pakray gi aur yeh bahum laraee jhagray mein hi hongay
Devnagri Urdu (Maududi)दर-असल ये जिस चीज की राह तक रहे हैं वो बस एक धमाका है जो यकीन है कि ऐन उस हालात में धर लेगा जब ये (अपनी दुनिया मामलात में) झगड़ा कर रहे होंगे
عَرَبِيفَلا يَستَطيعونَ تَوصِيَةً وَلا إِلىٰ أَهلِهِم يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वे न कोई वसीयत कर सकेंगे और न अपने परिजनों की ओर वापस आ सकेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur us waqt yeh wasiyat tak na kar sakenge, na apne gharon ko palat sakenge
Roman Urdu (Junagarhi)Uss waqt na to yeh waseeyat ker saken gay aur na apnay ehal ki taraf lot saken gay
Devnagri Urdu (Maududi)और हम वक्त ये वसीयत तक ना कर पाएंगे, ना अपने घरों को पलट पाएंगे
عَرَبِيوَنُفِخَ فِي الصّورِ فَإِذا هُم مِنَ الأَجداثِ إِلىٰ رَبِّهِم يَنسِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा सूर (नरसिंघा) में फूँक मारी जाएगी, तो एकाएक वे क़ब्रों से (निकलकर) अपने पालनहार की ओर दौड़ रहे होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir ek soor (trumpet) phoonka jayega aur yakayak ye apne Rubb ke huzur pesh honay ke liye apni qabaron se nikal padenge
Roman Urdu (Junagarhi)To soor kay phoonkay jatay hi sab kay sab apni qabron say apnay perwerdigar ki taraf (tez tez) chalney lagen gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर एक सुर (तुरही) फूँका जाएगा और यकीन ये अपने रब के हुजूर पेश होने के लिए अपनी कब्रों से निकल पड़ेंगे
عَرَبِيقالوا يا وَيلَنا مَن بَعَثَنا مِن مَرقَدِنا ۜ ۗ هٰذا ما وَعَدَ الرَّحمٰنُ وَصَدَقَ المُرسَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे कहेंगे : हाय हमारा विनाश! किसने हमें हमारी क़ब्रों से उठा दिया? यही है जो रहमान ने वादा किया था और रसूलों ने सच कहा था।
Roman Urdu (Maududi)Ghabra kar kahenge : “Arey, yeh kisne humein hamari khwab-gaah se utha khada kiya?” Yeh wahi cheez hai jiska khuda e rehman ne wada kiya tha aur Rasoolon ki baat sacchi thi”
Roman Urdu (Junagarhi)Kahen gay haye haye! Humen humari khuwab gahaon say kiss ney utha diya. Yehi hai jiss ka wada rehman ney diya tha aur rasoolon ney sach sach keh diya tha
Devnagri Urdu (Maududi)घबरा कर कहेंगे: "अरे, ये किसने हमने हमारी ख्वाब-गाह से उठाया खड़ा किया?" ये वही चीज़ है जिसका खुदा ए रहमान ने वादा किया था और रसूलों की बात सच्ची थी”
عَرَبِيإِن كانَت إِلّا صَيحَةً واحِدَةً فَإِذا هُم جَميعٌ لَدَينا مُحضَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह तो बस एक चिंघाड़ होगी, तो अचानक वे सब हमारे पास उपस्थित किए हुए होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Ek hi zoar ki aawaz hogi aur sab ke sab hamare saamne haazir kardiye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh nahi hai magar aik cheekh kay yakayak saray kay saray humaray samney hazir ker diyey jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)एक ही ज़ोर की आवाज़ होगी और सब के सब हमारे सामने हाज़िर हो जायेंगे
عَرَبِيفَاليَومَ لا تُظلَمُ نَفسٌ شَيئًا وَلا تُجزَونَ إِلّا ما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो आज किसी प्राणी पर कुछ भी अत्याचार नहीं किया जाएगा और तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aaj kisi par zarra barabar zulm na kiya jayega aur tumhein waisa hi badla diya jayega jaise amal tum karte rahe thay
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aaj kissi shaks per kuch bhi zulm na kiya jayega aur tumhen nahi badla diya jayega magar sirf unhi kamon ka jo tum kiya kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)आज किसी पर ज़रा बराबर ज़ुल्म ना किया जायेगा और तुम्हें वैसा ही बदला दिया जाएगा जैसे अमल तुम करते रहे थे
عَرَبِيإِنَّ أَصحابَ الجَنَّةِ اليَومَ في شُغُلٍ فاكِهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जन्नती लोग आज (नेमतों) का आनंद लेने में व्यस्त हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aaj jannati log mazey karne mein mashgul hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jannati log aaj kay din apnay (dilchasp)mashghalon mein hashash bashash hain
Devnagri Urdu (Maududi)आज जन्नती लोग मजे करने में मशगुल हैं
عَرَبِيهُم وَأَزواجُهُم في ظِلالٍ عَلَى الأَرائِكِ مُتَّكِئونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे तथा उनकी पत्नियाँ छायों में मस्नदों पर तकिया लगाए हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh aur unki biwiyan ghanay saayon (shades) mein hain masnadon par takiye lagaye huey
Roman Urdu (Junagarhi)Woh aur unn ki biwiyan sayon mein masheriyon per takiya lagaye bethay hongay
Devnagri Urdu (Maududi)वो और उनकी बिवियां घने साइयों (शेड्स) में हैं मसनदों पर ताकि लगे हुए
عَرَبِيلَهُم فيها فاكِهَةٌ وَلَهُم ما يَدَّعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनके लिए उसमें बहुत सारा फल है तथा उनके लिए वह कुछ है, जो वे माँग करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Har qisam ki lazeez cheezein khane peene ko unke liye wahan maujood hain, jo kuch woh talab karein unke liye haazir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay liye jannat mein her qisam kay meway hongay aur bhi jo kuch woh talab keren
Devnagri Urdu (Maududi)हर क़िस्म की लज़ीज़ चीज़ें खने पीने को उनके लिए वहां मौजूद हैं, जो कुछ वो तालाब करें उनके लिए हाज़िर है
عَرَبِيسَلامٌ قَولًا مِن رَبٍّ رَحيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)सलाम हो। उस पालनहार की ओर से कहा जाएगा, जो अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Rubb e Raheem ki taraf se unko salaam kaha gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Meharbaan perwerdigar ki taraf say unhen salam kaha jayega
Devnagri Urdu (Maududi)रब ए रहीम की तरफ से उनको सलाम कहा गया है
عَرَبِيوَامتازُوا اليَومَ أَيُّهَا المُجرِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा ऐ अपराधियो! आज तुम अलग हो जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Aur aey mujrimon, aaj tum chatt kar alag ho jao
Roman Urdu (Junagarhi)Aey gunehgaron! Aaj tum alag hojao
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐ मुजरिमोन, आज तुम चैट कर अलग हो जाओ
عَرَبِي۞ أَلَم أَعهَد إِلَيكُم يا بَني آدَمَ أَن لا تَعبُدُوا الشَّيطانَ ۖ إِنَّهُ لَكُم عَدُوٌّ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ आदम की संतान! क्या मैंने तुम्हें ताकीद नहीं की थी कि शैतान की उपासना न करना? निश्चय वह तुम्हारा खुला शत्रु है।
Roman Urdu (Maududi)Adam ke bacchon, kya maine tumko hidayat na ki thai ke shaytaan ki bandagi na karo, woh tumhara khula dushman hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey aulad-e-adam! Kiya mein ney tum say qol-o-qarar nahi liya tha kay tum shetan ki ibadat na kerna woh to tumhara khulla dushman hai
Devnagri Urdu (Maududi)आदम के बच्चों, क्या मैंने तुमको हिदायत ना की थाई के शैतान की बंदगी ना करो, वो तुम्हारा खुला दुश्मन है
عَرَبِيوَأَنِ اعبُدوني ۚ هٰذا صِراطٌ مُستَقيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यह कि तुम मेरी ही इबादत करो। यही सीधा मार्ग है।
Roman Urdu (Maududi)Aur meri hi bandagi karo, yeh seedha raasta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur meri hi ibadat kerna. Seedhi raah yehi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और मेरी ही बंदगी करो, ये सीधा रास्ता है
عَرَبِيوَلَقَد أَضَلَّ مِنكُم جِبِلًّا كَثيرًا ۖ أَفَلَم تَكونوا تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसने तुममें से बहुत-से लोगों को पथभ्रष्ट कर दिया। तो क्या तुम समझते नहीं थे?
Roman Urdu (Maududi)Magar iske bawajood usne tum mein se ek giroh-e-kaseer (great multitude of you) ko gumraah kardiya, kya tum aqal nahin rakhte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Shetan ney to tum mein say boht sari makhlooq ko behka diya. Kiya tum aqal nahi raktay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर इसके बावज़ूद उसने तुम में से एक गिरोह-ए-कसीर (आपकी बड़ी भीड़) को गुमराह कर दिया, क्या तुम अक़ल नहीं रखते थे
عَرَبِيهٰذِهِ جَهَنَّمُ الَّتي كُنتُم توعَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही वह जहन्नम है, जिसका तुमसे वादा किया जाता था।
Roman Urdu (Maududi)Yeh wahi jahannum hai jissey tumko daraya jata raha tha
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi woh dozakh hai jiss ka tumhen wada diya jata tha
Devnagri Urdu (Maududi)ये वही जहन्नुम है जिसे तुमको डराया जाता रहा था
عَرَبِياصلَوهَا اليَومَ بِما كُنتُم تَكفُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आज उसमें प्रवेश कर जाओ, उस कुफ़्र के बदले जो तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jo kufr tum duniya mein karte rahey ho uski padaish mein ab iska indhan (fuel) bano
Roman Urdu (Junagarhi)Apnay kufur ka badla paney kay liye aaj iss mein dakhil hojao
Devnagri Urdu (Maududi)जो कुफ्र तुम दुनिया में करते रहे हो उसकी पैदाइश में अब इसका इंधन (ईंधन) बनो
عَرَبِياليَومَ نَختِمُ عَلىٰ أَفواهِهِم وَتُكَلِّمُنا أَيديهِم وَتَشهَدُ أَرجُلُهُم بِما كانوا يَكسِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आज हम उनके मुँहों पर मुहर लगा देंगे और उनके हाथ हमसे बात करेंगे तथा उनके पैर उन कर्मों की गवाही देंगे, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aaj hum inke mooh bandh kiye detey hain, inke haath humse bolenge aur inke paon gawahi denge ke yeh duniya mein kya kamayi karte rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum aaj kay din inkay mun per mohar laga den gay aur inn kay hath hum say batein keren gay aur inn kay paaon gawaheeyian den gay unn kamon ki jo woh kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)आज हम इनको मुंह बांध देते हैं, इनके हाथ हमसे बोलेंगे और इनके पांव गवाही देंगे के ये दुनिया में क्या कमाई करते रहेंगे
عَرَبِيوَلَو نَشاءُ لَطَمَسنا عَلىٰ أَعيُنِهِم فَاستَبَقُوا الصِّراطَ فَأَنّىٰ يُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम चाहें, तो निश्चय उनकी आँखें मिटा दें। फिर वे रास्ते की ओर दौड़ें, तो कैसे देखेंगे?
Roman Urdu (Maududi)Hum chahein to inki aankhein moond dein(obliterated their eyes), phir yeh raastey ki taraf lapak kar dekhein, kahan se inhein raasta sujhayi dega
Roman Urdu (Junagarhi)Agar hum chahtay to inn ki aankhen bey noor ker detay phir yeh rastay ki taraf dortay phirtay lekin enhen kaisay dikhaee deta
Devnagri Urdu (Maududi)हम चाहें तो इनकी आंखें मूंद लें (आंखें मिटा दीं), फिर ये रास्ते की तरफ लपक कर देखें, कहां से इन्हें रास्ता सुझाएगा
عَرَبِيوَلَو نَشاءُ لَمَسَخناهُم عَلىٰ مَكانَتِهِم فَمَا استَطاعوا مُضِيًّا وَلا يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम चाहें, तो उनके स्थान ही पर उनके रूप को परिवर्तित कर दें, फिर वे न आगे जा सकें और न पीछे लौट सकें।
Roman Urdu (Maududi)Hum chahein to inhein inki jagah hi par is taraf maskh (transform) karke rakh dein ke yeh na aagey chal sakein na peechey palat sakein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum chahatay to inn ki jaga hi per inn ki soorten masakh ker detay phir na woh chal phir saktay aur na lot saktay
Devnagri Urdu (Maududi)हम चाहें तो इनकी जगह ही पर इस तरफ मास्क (रूपांतरण) करके रख दें के ये ना आगे चल सकें ना पीछे पलट सकें
عَرَبِيوَمَن نُعَمِّرهُ نُنَكِّسهُ فِي الخَلقِ ۖ أَفَلا يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिसे हम दीर्घायु प्रदान करते हैं, उसे उसकी संरचना में उल्टा फेर देते हैं। तो क्या ये नहीं समझते?
Roman Urdu (Maududi)Jis shaks ko hum lambi umar dete hain iski saakht ko hum ulat hi dete hain (we reverse in creation), kya (yeh halaat dekh kar) inhein aqal nahin aati
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jissay hum boorsha kertay hain ussay pedaeeshi halat ki taraf phir ulat detay hain kiya phir bhi woh nahi samajhtay
Devnagri Urdu (Maududi)जिस शक्स को हम लंबी उमर देते हैं इसकी सच्चाई को हम उलट ही देते हैं (हम सृजन में उलट हैं), क्या (ये हालात देख) कर) इन्हें अक्ल नहीं आती
عَرَبِيوَما عَلَّمناهُ الشِّعرَ وَما يَنبَغي لَهُ ۚ إِن هُوَ إِلّا ذِكرٌ وَقُرآنٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने न उन्हें शे'र (काव्य) सिखाया है और न वह उनके योग्य है। वह तो सर्वथा उपदेश तथा स्पष्ट क़ुरआन के सिवा कुछ नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Humne is (Nabi) ko sher nahin sikhaya hai aur na shayari isko zeib hi deti hai, yeh to ek naseehat hai aur saaf padhi janey wali kitaab
Roman Urdu (Junagarhi)Na to hum ney iss payghumber ko shair sikhaye aur na yeh iss kay laeeq hai. Woh to sirf naseehat aur wazeh quran hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इस (नबी) को शेर नहीं सिखाया है और ना शायरी इसको ज़ायब ही देती है, ये तो एक हिदायत है और साफ पढ़ी जाने वाली किताब
عَرَبِيلِيُنذِرَ مَن كانَ حَيًّا وَيَحِقَّ القَولُ عَلَى الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि वह उसे डराए, जो जीवित हो तथा काफ़िरों पर (यातना की) बात सिद्ध हो जाए।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke woh har us shaks ko khabardar karde jo zinda ho aur inkar karne walon par hujjat qayam ho jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Takay woh her uss shaks ko aagah kerday jo zindah hai aur kafiron per hujjat sabit hojaye
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के वो हर उस शक्स को खबरदार बना दे जो जिंदा हो और इंकार करने वालों पर हुज्जत कयाम हो जाए
عَرَبِيأَوَلَم يَرَوا أَنّا خَلَقنا لَهُم مِمّا عَمِلَت أَيدينا أَنعامًا فَهُم لَها مالِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने अपने हाथों से बनाई हुई चीज़ों में से उनके लिए चौपाए पैदा किए, तो वे उनके मालिक हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log dekhte nahin hain ke humne apne haathon ki banayi hui cheezon mein se inke liye maweshi paida kiye aur ab yeh inke maalik hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh nahi dekhtay kay hum ney apnay hathon banaee hui cheezon mein say unn kay liye chopaye (bhi) peda ker diye jin kay yeh malik hogaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग देखते नहीं हैं कि हमने अपने हाथों की बनाई हुई चीजों में से इनके लिए मवेशी पैदा किए और अब ये इनके मालिक हैं
عَرَبِيوَذَلَّلناها لَهُم فَمِنها رَكوبُهُم وَمِنها يَأكُلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उन्हें उनके वश में कर दिया, तो उनमें से कुछ उनकी सवारी हैं और उनमें से कुछ को वे खाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Humne unhein is tarah inke bas mein kardiya hai ke unmein se kisi par yeh sawaar hotey hain, kisika yeh gosht khate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn mawesheeyon ko hum ney unn ka tabey farman bana diya hai jin mein say baaz to inn ki sawariyan hain aur baaz ka gosht khatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उन्हें इस तरह इनके बस में कर दिया है के उनमें से किसी पर ये सवार होते हैं, किसिका ये गोश्त खाते हैं
عَرَبِيوَلَهُم فيها مَنافِعُ وَمَشارِبُ ۖ أَفَلا يَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके लिए उन (चौपायों) में कई लाभ और पीने की चीज़ें हैं। तो क्या (फिर भी) वे आभार प्रकट नहीं करते?
Roman Urdu (Maududi)Aur unke andar inke liye tarah tarah ke fawaid (benefits) aur mashrubaat (drinks) hain phir kya yeh shukar guzar nahin hotay
Roman Urdu (Junagarhi)Enhen unn say aur bhi boht faeeday hain aur peenay ki cheezen. Kiya phit (bhi) yeh shukar ada nahi keren gay
Devnagri Urdu (Maududi)और उनके अंदर इनके लिए तरह तरह के फवाद (फायदे) और मशरूबात (पेय) हैं फिर क्या ये शराब गुजर नहीं होते
عَرَبِيوَاتَّخَذوا مِن دونِ اللَّهِ آلِهَةً لَعَلَّهُم يُنصَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने अल्लाह के सिवा कई पूज्य बना लिए, ताकि उनकी सहायता की जाए।
Roman Urdu (Maududi)Yeh sabkuch hotey huey inhon ne Allah ke siwa dusre khuda bana liye hain aur yeh umeed rakhte hain ke inki madad ki jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh Allah kay siwa doosron ko mabood banatay hain takay woh madad kiye jayen
Devnagri Urdu (Maududi)ये सब कुछ होते हुए इन्होन ने अल्लाह के सिवा दूसरे खुदा बना लिए हैं और ये उम्मीद रखते हैं के इनकी मदद की जाएगी
عَرَبِيلا يَستَطيعونَ نَصرَهُم وَهُم لَهُم جُندٌ مُحضَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे उनकी सहायता करने का सामर्थ्य नहीं रखते, तथा ये उनकी सेना हैं, जो उपस्थित किए हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh inki koi madad nahin kar sakte balke yeh log ultey unke liye hazir-baash lashkar (army in waiting ) baney huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)(halankay) unn mein inn ki madad ki taqat hi nahi (lekin) phir bhi (musrikeen) unn kay liye hazir baash lashkari hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो इनकी कोई मदद नहीं कर सकते बल्के ये लोग उलटे उनके लिए हाज़िर-बाश लश्कर (प्रतीक्षा में सेना) बने हुए हैं
عَرَبِيفَلا يَحزُنكَ قَولُهُم ۘ إِنّا نَعلَمُ ما يُسِرّونَ وَما يُعلِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः उनकी बात आपको शोकग्रस्त न करे। निःसंदेह हम जानते हैं जो वे छिपाते हैं और जो वे प्रकट करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Accha, jo baatein yeh bana rahey hain woh tumhein ranjeeda na karein, inki chupi aur khuli sab baaton ko hum jaante hain
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap ko inn ki baat ghumnaak na keray hum inn ki possheedah aur ailaniya sari baaton ko (ba-khoobi) jantay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अच्छा, जो बातें ये बना रहे हैं वो तुम्हें रंजीदा ना करें, इनकी छुपी और खुली सब बातों को हम जानते हैं
عَرَبِيأَوَلَم يَرَ الإِنسانُ أَنّا خَلَقناهُ مِن نُطفَةٍ فَإِذا هُوَ خَصيمٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या मनुष्य ने नहीं देखा कि हमने उसे वीर्य से पैदा किया? फिर अचानक वह खुला झगड़ालू बन बैठा।
Roman Urdu (Maududi)Kya Insaan dekhta nahin hai ke humne usey nutfe(sperm drop) se paida kiya aur phir woh sareeh jhagdalu bankar khada ho gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya insan ko itna bhi maloom nahi kay hum ney ussay nutfay say peda kiya hai? Phir yakayak woh sarreh jhagraloo bann betha
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इंसान देखता नहीं है कि हमने उसका इस्तेमाल किया (शुक्राणु ड्रॉप) से भुगतान किया और फिर वह सारा झगड़ालू बनकर खड़ा हो गया
عَرَبِيوَضَرَبَ لَنا مَثَلًا وَنَسِيَ خَلقَهُ ۖ قالَ مَن يُحيِي العِظامَ وَهِيَ رَميمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और उसने हमारे लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया, और अपनी रचना को भूल गया। उसने कहा : इन अस्थियों को कौन जीवित करेगा, जबकि वे जीर्ण-शीर्ण हो चुकी होंगी?
Roman Urdu (Maududi)Ab woh humpar misalein chaspan karta hai aur apni paidaish ko bhool jaata hai , kehta hai “kaun in haddiyon ko zinda karega jabke yeh boseeda (rotten) ho chuki hon?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss ney humaray liye misal biyan ki aur apni (asal) pedaeesh ko bhool gaya kehney laga inn gali sarhi haddiyon ko kon zindah ker sakta hai
Devnagri Urdu (Maududi)अब वह हमपर मिसालें चस्पां करता है और अपनी कमाई को भूल जाता है, कहता है “कौन इन हदियों को जिंदा करेगा जबके ये गंदा (सड़ा हुआ) हो चुकी हूं?”
عَرَبِيقُل يُحييهَا الَّذي أَنشَأَها أَوَّلَ مَرَّةٍ ۖ وَهُوَ بِكُلِّ خَلقٍ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : उन्हें वही (अल्लाह) जीवित करेगा, जिसने उन्हें प्रथम बार पैदा किया और वह प्रत्येक उत्पत्ति को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Ussey kaho,inhein wahi zinda karega jisne pehle inhein paida kiya tha, aur woh takhleeq (creation) ka har kaam jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap jawab dijiye! Kay enhen woh zindah keray ga jiss ney enhen awwal martaba peda kiya hai jo sab tarah ki pedaeesh ka ba-khoobi jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसे कहो, वहीं जिंदा करेगा जिसने पहले उसे पैदा किया था, और वह तखलीक (सृजन) का हर काम जानता है
عَرَبِيالَّذي جَعَلَ لَكُم مِنَ الشَّجَرِ الأَخضَرِ نارًا فَإِذا أَنتُم مِنهُ توقِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह जिसने तुम्हारे लिए हरे वृक्ष से आग पैदा कर दी, फिर तुम उससे आग सुलगाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Wahi jisne tumhare liye harey bharey (green) darakht se aag paida kardi aur tum ussey apne chuleh (stoves) roshan karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi jiss ney tumharay liye sabz darakht say aag peda kerdi jiss say tum yakayak aag sulgatay ho
Devnagri Urdu (Maududi)वही जिसने तुम्हारे लिए हरे भरे (हरा) दरख्त से आग पैदा कर दी और तुम उसे अपने चूल्हे (स्टोव) रोशन करते हो
عَرَبِيأَوَلَيسَ الَّذي خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ بِقادِرٍ عَلىٰ أَن يَخلُقَ مِثلَهُم ۚ بَلىٰ وَهُوَ الخَلّاقُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा क्या वह (अल्लाह) जिसने आकाशों और धरती को पैदा किया, इस बात का सामर्थ्य नहीं रखता कि उन जैसे और पैदा कर दे? क्यों नहीं, और वही सब कुछ पैदा करने वाला, सब कुछ जानने वाला है?
Roman Urdu (Maududi)Kya woh jisne aasmaano aur zameen ko paida kiya ispar qadir nahin hai ke in jaison ko paida kar sakey? Kyun nahin, jabke woh maahir khallaq (superb creator) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ney aasman aur zamin ko peda kiya hai kiya woh inn jeson kay peda kerney per qadir nahi be-shak qadir hai. Aur wohi to peda kerney wala dana (beena) hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वो जिसने आसमानो और ज़मीन को पेदा किया इसपर कादिर नहीं है के इन जैसों को पेदा कर सके? क्यों नहीं, जबके वो माहिर खल्लाक (शानदार रचनाकार) है
عَرَبِيإِنَّما أَمرُهُ إِذا أَرادَ شَيئًا أَن يَقولَ لَهُ كُن فَيَكونُ
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हिन्दी (Al-Omari)उसका आदेश, जब वह किसी चीज़ का इरादा करता है, तो केवल यह होता है कि उससे कहता है "हो जा", तो वह हो जाती है।
Roman Urdu (Maududi)Woh to jab kisi cheez ka irada karta hai to uska kaam bas yeh hai ke usey hukum de ke hoja aur woh jo jati hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh jab kisi cheez ka iradah kerta hai ussay itna farma dena (kafi hai) kay ho ja woh ussi waqt hojati hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो तो जब किसी चीज का इरादा करता है तो उसका काम बस यही है कि उसे हुकुम दे के होजा और वो जो जाती है
عَرَبِيفَسُبحانَ الَّذي بِيَدِهِ مَلَكوتُ كُلِّ شَيءٍ وَإِلَيهِ تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः पवित्र है वह (अल्लाह), जिसके हाथ में प्रत्येक चीज़ का राज्य (पूर्ण अधिकार) है और तुम सब उसी की ओर लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Paak hai woh jiske haath mein har cheez ka mukammal iqtedar (full control) hai, aur usi ki taraf tum paltaye janey waale ho
Roman Urdu (Junagarhi)Pus pak hai woh Allah jiss hath mein her cheez ki badshaat hai aur jiss ki taraf tum sab lotaye jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)पाक है वो जिसके हाथ में हर चीज का मुकम्मल इक्तेदार (पूर्ण नियंत्रण) है, और उसकी तरफ तुम पलटाए जाने वाले हो
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Surah 36: Ya Sin (Ya Sin)

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Surah 36: Ya Sin (Ya Sin)

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Surah 36: Ya Sin (Ya Sin)

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Surah 37: As-Saffat (Those Ranging in Ranks)

Meccan🕐 Revelation #56📜 182 Verses🕮 Juz 1
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَالصّافّاتِ صَفًّا
हिन्दी (Al-Omari)क़सम है पंक्तिबद्ध (फ़रिश्तों) की!
Roman Urdu (Maududi)Qataar dar qataar saff baandhne walon ki kasam
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai saf bandhney walay (farishton ki)
Devnagri Urdu (Maududi)कतर दर कतर सैफ बांधने वालों की कसम
عَرَبِيفَالزّاجِراتِ زَجرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर झिड़क कर डाँटने वालों की!
Roman Urdu (Maududi)Phir unki kasam jo daatne phatkaar ne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir poori tarah dantney walon ki
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उनकी कसम जो दतने फाटक ने वाले हैं
عَرَبِيفَالتّالِياتِ ذِكرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर (अल्लाह के) ज़िक्र (वाणी) की तिलावत करने वालों की।
Roman Urdu (Maududi)Phir unki kasam jo kalaam e naseehat sunane waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir zikar-e-Allah ki tilawat kerney walon ki
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उनकी कसम जो कलाम ए हिदायत सुनाने वाले हैं
عَرَبِيإِنَّ إِلٰهَكُم لَواحِدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुम्हारा पूज्य निश्चय एक ही है।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara mabood e haqiqi bas ek hi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tum sab ka mabood aik hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा माबूद ए हकीकत बस एक ही है
عَرَبِيرَبُّ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَما بَينَهُما وَرَبُّ المَشارِقِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो आकाशों और धरती का तथा उन दोनों के बीच की समस्त चीज़ों का स्वामी है और सूर्य के उदय होने के सभी स्थानों का मालिक है।
Roman Urdu (Maududi)Woh jo zameen aur aasmaano ka aur tamaam un cheezon ka maalik hai jo zameen o aasmaan mein hain, aur saarey mashrikon(easts) ka maalik
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmano aur zamin aur inn kay darmiyan ki tamam cheezon aur mashriqon ka rab wohi hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो जो ज़मीन और आसमान का मालिक है और तमाम उन चीज़ों का मालिक है जो ज़मीन ओ आसमान में हैं, और सारे मशरिकों का मालिक है
عَرَبِيإِنّا زَيَّنَّا السَّماءَ الدُّنيا بِزينَةٍ الكَواكِبِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने संसार के आकाश को एक सुंदर शृंगार के साथ सुशोभित किया है, जो सितारे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Humne aasmaan e duniya ko taaron ki zeenat se aarasta (adorn) kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney aasman-e-duniya ko sitaron ki zeenat say aaraasta kiya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने आसमान ए दुनिया को तारों की ज़ीनत से सजाया है
عَرَبِيوَحِفظًا مِن كُلِّ شَيطانٍ مارِدٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और प्रत्येक सरकश शैतान से सुरक्षित करने के लिए।
Roman Urdu (Maududi)Aur har shaytan sarkash se isko mehfooz kardiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hifazat ki sirkash shetan say
Devnagri Urdu (Maududi)और हर शैतान सरकश से इसको महफ़ूज़ कर दिया है
عَرَبِيلا يَسَّمَّعونَ إِلَى المَلَإِ الأَعلىٰ وَيُقذَفونَ مِن كُلِّ جانِبٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे सर्वोच्च सभा (मला-ए-आ'ला) के फ़रिश्तों की बात नहीं सुन सकते, तथा वे हर ओर से (उल्काओं से) मारे जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh shayateen mala-e-aala (High Council) ki baatein nahin sun saktey, har taraf se maarey aur haankey jatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aalam-e-bala kay farishton (ki baaton) ko sunnay kay liye woh kaan bhi nahi laga saktay bulkay her taraf say woh maaray jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये शयातीन माला-ए-आला (हाई काउंसिल) की बातें नहीं सुन सकते, हर तरफ से मारे और हांके जाते हैं
عَرَبِيدُحورًا ۖ وَلَهُم عَذابٌ واصِبٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)भगाने के लिए। तथा उनके लिए स्थायी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur inke liye paiham azaaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bhaganey kay liye aur unn kay liye daeemi azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)और इनके लिए पैहम अज़ाब है
عَرَبِيإِلّا مَن خَطِفَ الخَطفَةَ فَأَتبَعَهُ شِهابٌ ثاقِبٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)परंतु जो कोई (शैतान फरिश्तों की किसी बात को) अचानक उचक ले जाए, तो एक दहकता हुआ अंगारा (उल्का) उसका पीछा करता है।
Roman Urdu (Maududi)Taaham agar koi inmein se kuch ley uday to ek teiz shola uska peecha karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Magar jo koi aik aadh baat uchak lay bhagay to (foran hi) uss kay peechay dehakta hua shola lag jata hai
Devnagri Urdu (Maududi)ताहम अगर कोई इनमें से कुछ ले उदय तो एक तेज़ शोला उसका पीछा करता है
عَرَبِيفَاستَفتِهِم أَهُم أَشَدُّ خَلقًا أَم مَن خَلَقنا ۚ إِنّا خَلَقناهُم مِن طينٍ لازِبٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो आप इन (काफ़िरों) से पूछें कि क्या इन्हें पैदा करना अधिक कठिन है या उनका जिन्हें हम पैदा कर चुके? निःसंदेह हमने उन्हें एक लेसदार मिट्टी से पैदा किया है।
Roman Urdu (Maududi)Ab insey pucho, inki paidaish zyada mushkil hai ya un cheezon ki jo humne paida kar rakkhi hain? Inko to humne leis daar gaaray(sticky clay/chickni mitti) se paida kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kafiron say poocho to kay aaya inn ka peda kerna ziyadah dushwaar hai ya (unn ka) jinhen hum ney (inn kay ilawa) peda kiya? Hum ney (insano) ko less daar mitti say peda kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)अब इनसे पूछो, इनकी अदायगी ज्यादा मुश्किल है या उन चीजों की जो हमने भुगतान कर रखी हैं? इनको तो हमने लीस डर गैरे (चिपचिपी मिट्टी/चिकनी मिट्टी) से पेदा किया है
عَرَبِيبَل عَجِبتَ وَيَسخَرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि आपने आश्चर्य किया और वे उपहास करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tum (Allah ki qudrat ke karishmon par) hairan ho aur yeh iska mazaak uda rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay tu tajjub ker raha hai aur yeh maskhara pan ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)तुम (अल्लाह की क़ुदरत के करिश्माओं पर) हेयरन हो और ये इसका मज़ाक उड़ा रहे हैं
عَرَبِيوَإِذا ذُكِّروا لا يَذكُرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब उन्हें नसीहत की जाए, तो वे क़बूल नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Samjhaya jaata hai to samajh kar nahin detey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab enhen naseehat ki jati hai yeh nahi mantay
Devnagri Urdu (Maududi)समझा जाता है तो समझ कर नहीं देते
عَرَبِيوَإِذا رَأَوا آيَةً يَستَسخِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब वे कोई निशानी देखते हैं, तो खूब उपहास करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Koi nishani dekhte hain to usey thatton (mazaak/mock) mein udatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab kissi moajzzay ko dekhtay hain to mazaq uratay hain
Devnagri Urdu (Maududi)कोई निशानी देखते हैं तो इस्तेमाल करते हैं थाटन (मजाक/मॉक) में उड़ाते हैं
عَرَبِيوَقالوا إِن هٰذا إِلّا سِحرٌ مُبينٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा कहते हैं कि यह तो मात्र खुला जादू है।
Roman Urdu (Maududi)Aur kehte hain “ yeh to sareeh jaadu hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kehtay hain kay yeh to bilkul khullam khulla jadoo hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और कहते हैं “ये तो सारा जादू है
عَرَبِيأَإِذا مِتنا وَكُنّا تُرابًا وَعِظامًا أَإِنّا لَمَبعوثونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या जब हम मर गए और मिट्टी तथा हड्डियाँ हो चुके, तो क्या सचमुच हम अवश्य उठाए जाने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Bhala kahin aisa ho sakta hai ke jab hum mar chuke hon aur mitti ban jayein aur haddiyon ka panjar reh jaye us waqt hum phir zinda karke utha khade kiye jayein
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya jab hum mar jayen gay aur khak aur haddi hojayen gay phir kiya (sach much) hum uthaye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)भला कहीं ऐसा हो सकता है के जब हम मर चुके हों और मिट्टी बन जाएं और हड्डियों का पंजर रह जाएं हमें वक्त हम फिर जिंदा करके उठा खड़े किए जायें
عَرَبِيأَوَآباؤُنَا الأَوَّلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और क्या हमारे पहले बाप-दादा भी (उठाए जाएँगे)?
Roman Urdu (Maududi)Aur kya hamare agle waqton ke aaba o ajdaad bhi uthaye jayenge?”
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya hum say pehlay kay humaray baap dada bhi
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या हमारे अगले वक्त के आबा ओ आजदाद भी उठाये जायेंगे?”
عَرَبِيقُل نَعَم وَأَنتُم داخِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आप कह दीजिए : हाँ! तथा तुम अपमानित (भी) होगे!
Roman Urdu (Maududi)(insey kaho haan, aur tum) khuda ke muqable mein baybas ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap jawab dijiye! Kay haan haan aur tum zaleel (bhi) howo gay
Devnagri Urdu (Maududi)(इनसे कहो हां, और तुम) खुदा के मुकाबले में बेबस हो
عَرَبِيفَإِنَّما هِيَ زَجرَةٌ واحِدَةٌ فَإِذا هُم يَنظُرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह बस एक ही झिड़की होगी, तो एकाएक वे देख रहे होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Bas ek hi jhidki hogi aur yakayak yeh apni aankhon se (woh sab kuch jiski khabar di jaa rahi hai) dekh rahey hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Woh to sirf aik zor ki jhirki hai kay yakayak yeh dekhney lagay gay
Devnagri Urdu (Maududi)बस एक ही झिडकी होगी और यकीन ये अपनी आंखों से (वो सब कुछ जिसकी खबर दी जा रही है) देख रहे होंगे
عَرَبِيوَقالوا يا وَيلَنا هٰذا يَومُ الدّينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा वे कहेंगे : हाय हमारा विनाश! यह तो बदले का दिन है।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt yeh kahengey “ haaye hamari kambakhti , yeh to yaum ul jaza hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kahen gay kay haye humari kharabi yehi jaza (saza) ka din hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त ये कहेंगे " हाये हमारी कम्बख्त, ये तो यम उल जजा है”
عَرَبِيهٰذا يَومُ الفَصلِ الَّذي كُنتُم بِهِ تُكَذِّبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यही निर्णय का दिन है, जिसे तुम झुठलाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)“yeh wahi faisley ka din hai jisey tum jhutlaya karte thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi faislay ka din hai jissay tum jhutlatay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)“ये वही फैसले का दिन है जिसे तुम झुटलाया करते थे”
عَرَبِي۞ احشُرُوا الَّذينَ ظَلَموا وَأَزواجَهُم وَما كانوا يَعبُدونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(आदेश होगा कि) इकट्ठा करो उन लोगों को जिन्होंने अत्याचार किया तथा उनके साथियों को और जिनकी वे उपासना किया करते थे ।
Roman Urdu (Maududi)(Hukum hoga) gher lao sab zaalimon aur unke saathiyon aur un maboodon ko jinki woh khuda ko chodh kar bandagi kiya karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Zalimon ko aur unn kay humrahiyon ko aur (jin) jin ki woh Allah kay ilawa parastish kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)(हुकुम होगा) घेर लाओ सब जालिमों और उनके साथियों और उन माबूदों को जिनकी वो खुदा को चोद कर बंदगी किया करते थाय
عَرَبِيمِن دونِ اللَّهِ فَاهدوهُم إِلىٰ صِراطِ الجَحيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह के सिवा। फिर उन्हें जहन्नम की राह दिखा दो।
Roman Urdu (Maududi)Phir un sab ko jahannum ka raasta dikhao
Roman Urdu (Junagarhi)(inn sab ko) jama kerkay enhen dozakh ki raah dikha do
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उन सबको जहन्नुम का रास्ता दिखाओ
عَرَبِيوَقِفوهُم ۖ إِنَّهُم مَسئولونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उन्हें ठहराओ, निःसंदेह वे प्रश्न किए जाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur zara inhein thehrao, inse kuch puchna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur enhen theraklo (iss liye) kay inn say (zaroori) sawal kiyey janay walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जरा यहीं ठहरो, इनसे कुछ पूछना है
عَرَبِيما لَكُم لا تَناصَرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तुम्हें क्या हुआ कि तुम एक-दूसरे की सहायता नहीं करते?
Roman Urdu (Maududi)“Kya ho gaya tumhein, ab kyun ek dusre ki madad nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhen kiya hogaya hai kay (iss waqt) tum aik doosray ki madad nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)“क्या हो गया तुम्हें, अब क्यों एक दूसरे की मदद नहीं करते
عَرَبِيبَل هُمُ اليَومَ مُستَسلِمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि, आज वे सर्वथा आज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Arey, aaj to yeh apne aap ko) aur ek dusre ko hawaliye (surrender) kiye de rahe hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay woh (sab kay sab) aaj farmanbardaar bann gaye
Devnagri Urdu (Maududi)(अरे, आज तो ये अपने आप को) और एक दूसरे को हवलिये (आत्मसमर्पण) किये दे रहे हैं”
عَرَبِيوَأَقبَلَ بَعضُهُم عَلىٰ بَعضٍ يَتَساءَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वे एक-दूसरे की ओर रुख़ करके परस्पर प्रश्न करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Iske baad yeh ek dusre ki taraf mudenge aur baham takrar shuru kar dengey
Roman Urdu (Junagarhi)Woh aik doosray ki taraf mutawajja hoker sawal-o-jawab kerney lagen gay
Devnagri Urdu (Maududi)इसके बाद ये एक दूसरे की तरफ मुड़ेंगे और बहाम तकरार शुरू कर देंगे
عَرَبِيقالوا إِنَّكُم كُنتُم تَأتونَنا عَنِ اليَمينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे कहेंगे : निःसंदेह तुम हमारे पास दाहिने से आया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)pairvi karne waley apne peshwaon[leaders] se) kahenge, “Tum hamare paas seedhay rukh se aate thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Kahen gay kay tum to humaray pass humari dayen taraf say aatay thay
Devnagri Urdu (Maududi)जोड़ी बनाने वाले अपने पेशवाओं से) कहेंगे, “तुम हमारे पास सीधे रुख से आते थे”
عَرَبِيقالوا بَل لَم تَكونوا مُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे कहेंगे : बल्कि तुम (स्वयं) ईमान वाले न थे।
Roman Urdu (Maududi)Woh jawaab dengey “nahin balke tum khud iman laney waley na thay
Roman Urdu (Junagarhi)Woh jawab den gay kay nahi bulkay tum hi eman daar na thay
Devnagri Urdu (Maududi)वो जवाब देंगे “नहीं बलके तुम खुद ईमान लेन वाले ना थे
عَرَبِيوَما كانَ لَنا عَلَيكُم مِن سُلطانٍ ۖ بَل كُنتُم قَومًا طاغينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा हमारा तुमपर कोई ज़ोर न था, बल्कि तुम (स्वंय) हद से बढ़ने वाले लोग थे।
Roman Urdu (Maududi)Hamara tumpar koi zoar na tha, tum khud hi sarkash log thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kuch humara zor to tum per tha (hi) nahi. Bulkay tum (khud) sirkash log thay
Devnagri Urdu (Maududi)हमारा तुमपर कोई जोर ना था, तुम खुद ही सरकश लोग थे
عَرَبِيفَحَقَّ عَلَينا قَولُ رَبِّنا ۖ إِنّا لَذائِقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो हमपर हमारे पालनहार का कथन सिद्ध हो गया। निःसंदेह हम निश्चय (यातना) चखने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar hum apne Rubb ke is farmaan ke mustahiq ho gaye ke hum azaab ka maza chakhne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Abb to hum (sab) per humaray rab ki yeh baat sabit ho chuki kay hum (azab) chakhney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार हम अपने रब के इस फरमान के मुस्तहिक हो गए के हम अज़ाब का मजा चखने वाले हैं
عَرَبِيفَأَغوَيناكُم إِنّا كُنّا غاوينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो हमने तुम्हें गुमराह किया। निःसंदेह हम स्वयं गुमराह थे।
Roman Urdu (Maududi)So humne tumko behkaya, hum khud behke huye thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus hum ney tumhen gumrah kiya hum to khud bhi gumrah hi thay
Devnagri Urdu (Maududi)तो हमने तुमको बहकाया, हम खुद बहके हुए थे”
عَرَبِيفَإِنَّهُم يَومَئِذٍ فِي العَذابِ مُشتَرِكونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो निश्चय ही वे उस दिन यातना में सहभागी होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Is taraah woh sab us roz azaab mein mushtarik (shareek) hongey
Roman Urdu (Junagarhi)So abb aaj kay din to (sab kay sab) azab mein shareek hain
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह वो सब हम रोज़ अज़ाब में मुश्तारिक (शारीक) होंगे
عَرَبِيإِنّا كَذٰلِكَ نَفعَلُ بِالمُجرِمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम अपराधियों के साथ ऐसा ही किया करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hum mujreemon ke saath yahi kuch kiya karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum gunehgaaro kay sath issi tarah kiya kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हम मुजरिमों के साथ यहीं कुछ करते हैं
عَرَبِيإِنَّهُم كانوا إِذا قيلَ لَهُم لا إِلٰهَ إِلَّا اللَّهُ يَستَكبِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वे ऐसे लोग थे कि जब उनसे कहा जाता कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य (इबादत के योग्य) नहीं, तो वे अभिमान करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log thay ke jab unsey kaha jata “Allah ke siwa koi maabood e barhaqq nahin hai” to yeh ghamand mein aa jatey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh woh (log) hain kay jab inn say kaha jata hai kay Allah kay siwa koi mabood nahi to yeh sirkashi kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग थे के जब उनसे कहा जाता "अल्लाह के सिवा कोई मबूद ए बरहक़ नहीं है" तो ये घमंड में आ जाते थे
عَرَبِيوَيَقولونَ أَئِنّا لَتارِكو آلِهَتِنا لِشاعِرٍ مَجنونٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा कहते थे : क्या सचमुच हम अपने पूज्यों को एक दीवाने कवि के कारण छोड़ देने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Aur kehte thay “kya hum ek shayar majnoon (dewane) ki khaatir apne maboodon ko chodh dein?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kehtay thay kay kiya hum apnay maboodon ko aik deewaney shaeer ki baat per chor den
Devnagri Urdu (Maududi)और कहते थे "क्या हम एक शायर मजनूं (दीवाने) की खातिर अपने मबूदों को छोड़ दें?"
عَرَبِيبَل جاءَ بِالحَقِّ وَصَدَّقَ المُرسَلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि वह सत्य लेकर आए हैं तथा उन्होंने सभी रसूलों की पुष्टि की है।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke woh haqq lekar aaya tha aur usne Rasoolon ki tasdeeq ki thi
Roman Urdu (Junagarhi)(nahi nahi) bulkay (nabi) to haq (sacha deen) laye hain aur sab rasoolon ko sach jantay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हलांके वो हक़ लेकर आया था और उसने रसूलों की तस्दीक की थी
عَرَبِيإِنَّكُم لَذائِقُو العَذابِ الأَليمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुम निश्चय दुःखदायी यातना चखने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)(Ab unse kaha jayega ke) tum laaziman dardnaak saza ka maza chakhne waley ho
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tum dard-naak azab (ka maza) chakhney walay ho
Devnagri Urdu (Maududi)(अब उन्हें कहा जाएगा के) तुम लाज़िमन दर्दनाक सज़ा का मज़ा चखने वाले हो
عَرَبِيوَما تُجزَونَ إِلّا ما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhein jo badla bhi diya jaa raha hai unhi aamaal ka diya ja raha hai jo tum karte rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhen ussi ka badla diya jayega jo tum kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हें जो बदला भी दिया जा रहा है उन्ही अमाल का दिया जा रहा है जो तुम करते रहो हो
عَرَبِيإِلّا عِبادَ اللَّهِ المُخلَصينَ
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु अल्लाह के ख़ालिस (विशुद्ध) किए हुए बंदे।
Roman Urdu (Maududi)Magar Allah ke cheeda (chune huey/chosen) banday (is anjaam e badd se) mehfooz hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Magar Allah Taalaa kay khalis bargazeedah banday
Devnagri Urdu (Maududi)मगर अल्लाह के चीदा (चुने हुए/चुने हुए) बंदे (इस अंजाम ए बद से) महफूज़ होंगे
عَرَبِيأُولٰئِكَ لَهُم رِزقٌ مَعلومٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यही लोग हैं, जिनके लिए निर्धारित रोज़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Unke liye jaana bujha rizq (known provision) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unhin kay liye muqarrara rozi hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनके लिए जाना बुझा रिज़क (ज्ञात प्रावधान) है
عَرَبِيفَواكِهُ ۖ وَهُم مُكرَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)प्रत्येक प्रकार के फल। तथा वे सम्मानित किए गए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Har tarah ki lazeez cheezein
Roman Urdu (Junagarhi)(her tarah kay) meway aur ba-izzat-o-ikraam hongay
Devnagri Urdu (Maududi)हर तरह की लज़ीज़ चीज़
عَرَبِيفي جَنّاتِ النَّعيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)नेमत के बाग़ों में।
Roman Urdu (Maududi)Aur niyamat bhari jannatein
Roman Urdu (Junagarhi)Nematon wali jannaton mein
Devnagri Urdu (Maududi)और नियामत भारी जन्नतें
عَرَبِيعَلىٰ سُرُرٍ مُتَقابِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तख़्तों पर आमने-सामने बैठे होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jinmein woh izzat ke saath rakkhey jayenge, takhaton par aamne saamne baithenge
Roman Urdu (Junagarhi)Takhton per aik doosray kay samney (bethay) hongay
Devnagri Urdu (Maududi)जिनको वो इज्जत के साथ रखेंगे, तख्तों पर आमने-सामने बैठेंगे
عَرَبِييُطافُ عَلَيهِم بِكَأسٍ مِن مَعينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उनपर प्रवाहित शराब के प्याले फिराए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Sharaab ke chamson (springs) se sagar (cups) bhar bhar kar unke darmiyan phiraye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jaari sharab kay jaam ka unn per dor chal raha hoga
Devnagri Urdu (Maududi)शराब के चमसों से सागर (कप) भर-भर कर उनके दरमियान फिराए जाएंगे
عَرَبِيبَيضاءَ لَذَّةٍ لِلشّارِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो सफ़ेद होगी, पीने वालों के लिए स्वादिष्ट होगी।
Roman Urdu (Maududi)Chamakti hui sharaab, jo peene waalon ke liye lazzat hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Jo saaf shaffaf peenay mein lazeez hogi
Devnagri Urdu (Maududi)चमकती हुई शराब, जो पीने वालों के लिए लज्जत होगी
عَرَبِيلا فيها غَولٌ وَلا هُم عَنها يُنزَفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)न उसमें कोई सिरदर्द होगा, और न वे उससे मदहोश होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Na unke jism ko ussey koi zarar hoga aur na unki aqal ussey kharab hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Na uss say dard-e-sir ho aur na uss kay peenay say behken
Devnagri Urdu (Maududi)ना उनके जिस्म को कोई जरूर होगा और ना उनका अक्ल उसे खराब होगी
عَرَبِيوَعِندَهُم قاصِراتُ الطَّرفِ عينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके पास दृष्टि नीची रखने वाली, बड़ी आँखों वाली स्त्रियाँ होंगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur unke paas nigahein bachane wali, khoobsurat aankhon wali auratein hongi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn kay pass neechi nazron bari bari aankhon wali (hooren) hongi
Devnagri Urdu (Maududi)और उनके पास निगाहें बचाने वाली, खूबसूरत आंखों वाली औरतें होंगी
عَرَبِيكَأَنَّهُنَّ بَيضٌ مَكنونٌ
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हिन्दी (Al-Omari)मानो वे छिपाकर रखे हुए अंडे हों।
Roman Urdu (Maududi)Aisi naazuk jaise andey (egg) ke chilke ke nichey chupi hui jhilli
Roman Urdu (Junagarhi)Aisi jesay chupaye huyey anday
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसी नाज़ुक जैसे अंडे (अंडे) के छिलके के नीचे छुपी हुई झिल्ली
عَرَبِيفَأَقبَلَ بَعضُهُم عَلىٰ بَعضٍ يَتَساءَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वे एक-दूसरे के सम्मुख होकर आपस में प्रश्न करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh ek dusre ki taraf mutawajjeh ho kar halaat puchengey
Roman Urdu (Junagarhi)(jannati) aik doosray ki taraf rukh kerkay poochen gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो एक दूसरे की तरफ मुतवज्जे हो कर हालात पूछेंगे
عَرَبِيقالَ قائِلٌ مِنهُم إِنّي كانَ لي قَرينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उनमें से एक कहने वाला कहेगा : मेरा एक साथी था।
Roman Urdu (Maududi)Unmein se ek kahega, “duniya mein mera ek hum nahseen (companion) tha
Roman Urdu (Junagarhi)Unn mein say aik kehney wala kahe ga mera aik sathi tha
Devnagri Urdu (Maududi)उनमें से एक कहेगा, “दुनिया में मेरा एक हम नहसीन (साथी) था
عَرَبِييَقولُ أَإِنَّكَ لَمِنَ المُصَدِّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह कहा करता था कि क्या सचमुच तू भी (मरणोपरांत पुनर्जीवन को) मानने वालों में से है?
Roman Urdu (Maududi)Jo mujhse kaha karta tha, kya tum bhi tasdeeq karne walon mein se ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jo (mujh say) kaha kerta tha kay kiya tu (qayamat kay aaney ka) yaqeen kerney walon mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो मुझसे कहता था, क्या तुम भी तस्दीक करने वालों में से हो
عَرَبِيأَإِذا مِتنا وَكُنّا تُرابًا وَعِظامًا أَإِنّا لَمَدينونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या जब हम मर गए और हम मिट्टी तथा हड्डियाँ हो गए, तो क्या सचमुच हम अवश्य बदला दिए जाने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya waqayi jab hum mar chuke hongey aur mitti ho jayenge aur haddiyon ka panjar bankar reh jayenge to humein jaza o saza di jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya jab kay hum mar ker mitti aur haddi hojayen gay kiya uss waqt hum jaza diyey janey walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वाकाई जब हम मर चुके होंगे और मिट्टी हो जाएंगे और हड्डियों का पंजर बनकर रह जाएंगे तो हमें जजा ओ सजा दी जाएगी
عَرَبِيقالَ هَل أَنتُم مُطَّلِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह कहेगा : क्या तुम झाँककर देखने वाले हो?
Roman Urdu (Maududi)Ab kya aap log dekhna chahte hain ke woh sahib ab kahan hain?”
Roman Urdu (Junagarhi)Kahey ga tum chahtay ho kay jhaank ker dekh lo
Devnagri Urdu (Maududi)अब क्या आप लोग देखना चाहते हैं कि वो साहब अब कहां हैं?”
عَرَبِيفَاطَّلَعَ فَرَآهُ في سَواءِ الجَحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वह झाँकेगा, तो उसे भड़कती हुई आग के बीच में देखेगा।
Roman Urdu (Maududi)Yeh keh kar junhi woh jhukega to jahannum ki gehrayi mein usko dekh lega
Roman Urdu (Junagarhi)Jhaanktay hi ussay beechon beech jahannum mein (jalta hua) dekhay ga
Devnagri Urdu (Maududi)ये कह कर जुन्ही वो झुकेगा तो जहन्नुम की गहराई में उसको देख लेगा
عَرَبِيقالَ تَاللَّهِ إِن كِدتَ لَتُردينِ
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हिन्दी (Al-Omari)कहेगा : अल्लाह की कसम! निश्चय तू क़रीब था कि मुझे नष्ट ही कर दे।
Roman Urdu (Maududi)Aur ussey khitaab karke kahega “khuda ki kasam, tu to mujhey tabaah hi kar dene wala tha
Roman Urdu (Junagarhi)Kahey ga Wallah! Qareeb tha kay tu mujhay (bhi) barbaad ker day
Devnagri Urdu (Maududi)और उसे खिताब करके कहेगा “खुदा की कसम, तू तो मुझे तबाह ही कर देने वाला था
عَرَبِيوَلَولا نِعمَةُ رَبّي لَكُنتُ مِنَ المُحضَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि मेरे पालनहार की अनुकंपा न होती, तो निश्चय मैं भी (जहन्नम में) उपस्थित किए गए लोगों में से होता।
Roman Urdu (Maududi)Mere Rubb ka fazal shamil e haal na hota to aaj main bhi un logon mein se hota jo pakde huey aaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Agar meray rab ka ehsan na hota to mein bhi dizakh mein hazir kiyey janey walon mein hota
Devnagri Urdu (Maududi)मेरे रब का फज़ल शामिल ए हाल ना होता तो आज मैं भी उन पर लोगों में से होता जो पकड़े हुए आये हैं
عَرَبِيأَفَما نَحنُ بِمَيِّتينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या (यह सही नहीं है) कि हम कभी मरने वाले नहीं हैं?
Roman Urdu (Maududi)Accha to kya ab hum marne waley nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya (yeh sahih hai) kay hum marney walay hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)अच्छा तो क्या अब हम मरने वाले नहीं हैं
عَرَبِيإِلّا مَوتَتَنَا الأولىٰ وَما نَحنُ بِمُعَذَّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)सिवाय अपनी प्रथम मौत के, और न हम कभी यातना दिए जाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Maut jo humein aani thi woh bas pehle aa chuki? Ab humein koi azaab nahin hona?”
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-juz pehli aik mot kay aur na hum azab kiyey janey walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मौत जो हमें आनी थी वो बस पहले आ चुकी है?
عَرَبِيإِنَّ هٰذا لَهُوَ الفَوزُ العَظيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय यही तो बहुत बड़ी सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)Yakeenan yahi azeem o shaan kaamiyabi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir to (zahir baat hai kay) yeh bari kaamyabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन यही अज़ीम ओ शान कामियाबी है
عَرَبِيلِمِثلِ هٰذا فَليَعمَلِ العامِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)इसी (जैसी सफलता) के लिए कर्म करने वालों को कर्म करना चाहिए।
Roman Urdu (Maududi)Aisi hi kamiyabi ke liye amal karne walon ko amal karna chahiye
Roman Urdu (Junagarhi)Aisi (kaamyabi) kay liye amal kernay walon ko amal kerna chahayey
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसी ही कामियाबी के लिए अमल करने वालों को अमल करना चाहिए
عَرَبِيأَذٰلِكَ خَيرٌ نُزُلًا أَم شَجَرَةُ الزَّقّومِ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या यह आतिथ्य उत्तम है या थोहड़ का वृक्ष?
Roman Urdu (Maududi)Bolo, yeh ziyafat acchi hai ya zakkhum ka darakht
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh mehmaani achi hai ya seendh (zaqoom) ka darakht
Devnagri Urdu (Maududi)बोलो, ये ज़ियाफ़त अच्छी है या ज़ख़्म का दरख्त
عَرَبِيإِنّا جَعَلناها فِتنَةً لِلظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने उसे अत्याचारियों के लिए एक परीक्षा बनाया है।
Roman Urdu (Maududi)Humne us darakht ko zaalimon ke liye fitna bana diya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jissay hum ney zalimon kay liye sakht aazmaeesh bana rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने हमें दरख्त को ज़ालिमों के लिए दिया फितना बना दिया है
عَرَبِيإِنَّها شَجَرَةٌ تَخرُجُ في أَصلِ الجَحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वह ऐसा वृक्ष है, जो जहन्नम के तल में उगता है।
Roman Urdu (Maududi)Woh ek darakht hai jo jahannum ki teh se nikalta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak woh darakht jahannum ki jarr mein say nikalta hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो एक दरख्त है जो जहन्नुम की तह से निकलता है
عَرَبِيطَلعُها كَأَنَّهُ رُءوسُ الشَّياطينِ
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हिन्दी (Al-Omari)उसके गुच्छे ऐसे हैं मानो वे शैतानों के सिर हों।
Roman Urdu (Maududi)Uske shagufe (emerging fruit) aise hain jaise shaytano ke sar
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss kay khoshay shetan kay siron jesay hotay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उसके शगुफे (उभरता हुआ फल) ऐसे हैं जैसे शैतानों के सर
عَرَبِيفَإِنَّهُم لَآكِلونَ مِنها فَمالِئونَ مِنهَا البُطونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो वे (जहन्नमवासी) निश्चय उसमें से खाने वाले हैं। फिर उससे पेट भरने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jahannum ke log usey khayenge aur usi se pait bharengey
Roman Urdu (Junagarhi)(jahannumi) issi darakht mein say khayen gay aur issi say pet bharen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जहन्नुम के लोग उसे खाएंगे और उसी से पैठ भरेंगे
عَرَبِيثُمَّ إِنَّ لَهُم عَلَيها لَشَوبًا مِن حَميمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर निःसंदेह उनके लिए उसपर खौलते हुए पानी का मिश्रण है।
Roman Urdu (Maududi)Phir ispar peene ke liye khaulta hua pani milega
Roman Urdu (Junagarhi)Phir iss per garum jaltay jaltay paani ki malooni hogi
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इसपर पीने के लिए खुलता हुआ पानी मिलेगा
عَرَبِيثُمَّ إِنَّ مَرجِعَهُم لَإِلَى الجَحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर निःसंदेह उनकी वापसी निश्चय उसी भड़कती हुई आग की ओर होगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur iske baad unki wapsi usi aatish e dozakh (blazing Hell) ki taraf hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Phir inn sab ka lotna jahannum ki (aag kay dher ki) taraf hoga
Devnagri Urdu (Maududi)और इसके बाद उनकी वापसी उसी आतिश ए दोज़ख की तरफ होगी
عَرَبِيإِنَّهُم أَلفَوا آباءَهُم ضالّينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह उन्होंने अपने बाप-दादा को गुमराह पाया।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hain jinhon ne apne baap dada ko gumraah paya
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeen mano! Kay enhon ney apnay baap dadon ko behka hua paya
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने बाप दादा को गुमराह पाया
عَرَبِيفَهُم عَلىٰ آثارِهِم يُهرَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो वे उन्हीं के पदचिह्नों पर दौड़े चले जा रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur unhi ke nakshe qadam par daud chale
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh unhi kay naqsh-e-qadam per dortay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)और उनके नक्शे क़दम पर दौड़ चले
عَرَبِيوَلَقَد ضَلَّ قَبلَهُم أَكثَرُ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह इनसे पहले अगले लोगों में से अधिकतर लोग गुमराह हो चुके हैं।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke unse pehle bahut se log gumraah ho chuke thay
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say pehlay bhi boht say aglay behak chukay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हालांके उनसे पहले बहुत से लोग गुमराह हो चुके थे
عَرَبِيوَلَقَد أَرسَلنا فيهِم مُنذِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने उनके अंदर कई डराने वाले भेजे।
Roman Urdu (Maududi)Aur unmein humne tambeeh (warn) karne walay Rasool bheje thay
Roman Urdu (Junagarhi)Jinn mein hum ney daraney walay (rasool) bhejay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और उन्हें हमने तम्बीह (चेतावनी) करने वाले रसूल भेजे थे
عَرَبِيفَانظُر كَيفَ كانَ عاقِبَةُ المُنذَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो देखो कि उन डराए जाने वालों का परिणाम कैसा हुआ?
Roman Urdu (Maududi)Ab dekhlo ke un tambeeh kiye janey walon ka kya anjaam hua
Roman Urdu (Junagarhi)Abb tu dekh ley jinhen dhamkaya gaya tha unn ka anjam kaisa kuch hua
Devnagri Urdu (Maududi)अब देखलो के उन तम्बीह किए जाने वालों का क्या अंजाम हुआ
عَرَبِيإِلّا عِبادَ اللَّهِ المُخلَصينَ
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हिन्दी (Al-Omari)सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।
Roman Urdu (Maududi)Is bad-anjaami se bas Allah ke wahi banday bachay hain jinhein usne apne liye khalis karliya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Siwaye Allah kay bargazeedah bandon kay
Devnagri Urdu (Maududi)इस बद-अंजामी से बस अल्लाह के वही बंदे बचाए हैं जिन्होंने अपने लिए खालिस कार्लिया है
عَرَبِيوَلَقَد نادانا نوحٌ فَلَنِعمَ المُجيبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह नूह ने हमें पुकारा, तो निश्चय हम अच्छे स्वीकार करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Humko (issey pehle) Nooh ne pukara tha, to dekho ke hum kaise acche jawab dene waley thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur humen nooh (alh-e-salam) ney pukara to (dekhlo) hum kaisay achay dua qabool kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हमको (इससे पहले) नहीं ने पुकारा था, तो देखो के हम कैसे अच्छे जवाब देने वाले थे
عَرَبِيوَنَجَّيناهُ وَأَهلَهُ مِنَ الكَربِ العَظيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसे और उसके घर वालों को बहुत बड़ी आपदा से बचा लिया।
Roman Urdu (Maududi)Humne usko aur uske ghar walon ko karb-e-azeem (badi musibat) se bacha liya
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney ussay aur uss kay ghar walon ko uss zabardast museebat say bacha liya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उसको और उसके घर वालों को करब-ए-अजीम (बड़ी मुसीबत) से बचा लिया
عَرَبِيوَجَعَلنا ذُرِّيَّتَهُ هُمُ الباقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उसकी संतति ही को बाक़ी रहने वाला बना दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur usi ki nasal ko baaki rakkha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss ki aulad ko hum ney baqi rehney wali bana di
Devnagri Urdu (Maududi)और उसकी नाक को बाकी रक्खा
عَرَبِيوَتَرَكنا عَلَيهِ فِي الآخِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।
Roman Urdu (Maududi)Aur baad ki nasalon mein iski taarif o tausif chodh di
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney uss ka (zikar-e-khair) pichlon mein baqi rakha
Devnagri Urdu (Maududi)और बाद की नाकों में इसकी तारीफ ओ तौसीफ छोड़ दी
عَرَبِيسَلامٌ عَلىٰ نوحٍ فِي العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)सर्व संसार में नूह़ पर सलाम हो।
Roman Urdu (Maududi)Salaam hai Nooh par tamaam duniya walon mein
Roman Urdu (Junagarhi)Nooh (alh-e-salam) per tamam jahano mein salam ho
Devnagri Urdu (Maududi)सलाम है नूंह पर तमाम दुनिया वालों में
عَرَبِيإِنّا كَذٰلِكَ نَجزِي المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम सदाचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hum neki karne walon ko aisi hi jaza diya karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum neki kerney walon ko issi tarah badlay detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा दिया करते हैं
عَرَبِيإِنَّهُ مِن عِبادِنَا المُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय वह हमारे ईमान वाले बंदों में से था।
Roman Urdu (Maududi)Dar haqeeqat woh hamare momin bandon mein se tha
Roman Urdu (Junagarhi)Woh humaray eman daar bandon mein say tha
Devnagri Urdu (Maududi)डार हकीकत वो हमारे मोमिन बंदों में से था
عَرَبِيثُمَّ أَغرَقنَا الآخَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने दूसरों को डुबो दिया।
Roman Urdu (Maududi)Phir dusre giroh ko humne garq (drown) kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney doosron ko dobo diya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर दूसरे गिरो ​​को हमने डूब कर दिखाया
عَرَبِي۞ وَإِنَّ مِن شيعَتِهِ لَإِبراهيمَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह उसी के तरीक़े पर चलने वालों में से निश्चय इबराहीम (भी) थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Nooh hi ke tareeqey par chalne wala Ibrahim tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss (nooh alh-e-salam ki) tabeydaari kerney walon mein say (hi) ibrahim (alh-e-salam bhi) thay
Devnagri Urdu (Maududi)और नूह ही के तारीख़ पर चलने वाला इब्राहिम था
عَرَبِيإِذ جاءَ رَبَّهُ بِقَلبٍ سَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)(उस समय को याद करें) जब वह अपने पालनहार के पास शुद्ध दिल लेकर आए।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh apne Rubb ke huzur qalb e saleem lekar aaya
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay apany rab kay pass bey-aib dil laye
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो अपने रुब के हुजूर क़ल्ब ए सलीम लेकर आया
عَرَبِيإِذ قالَ لِأَبيهِ وَقَومِهِ ماذا تَعبُدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब उसने अपने बाप तथा अपनी जाति से कहा : तुम किस चीज़ की इबादत करते हो?
Roman Urdu (Maududi)Jab usne apne baap aur apni qaum se kaha “yeh kya cheezein hain jinki tum ibadat kar rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney apnay baap aur apni qom say kaha kay tum kiya pooj rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)जब उसने अपने बाप और अपनी क़ौम से कहा “ये क्या चीज़ हैं जिनकी तुम इबादत कर रहे हो
عَرَبِيأَئِفكًا آلِهَةً دونَ اللَّهِ تُريدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या अल्लाह को छोड़कर अपने गढ़े हुए पूज्यों को चाहते हो?
Roman Urdu (Maududi)Kya Allah ko chodh kar jhoot ghadey huey maabood chahte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum Allah kay siwa gharay huyey maboob chahtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)क्या अल्लाह को छोड़ कर झूठ घड़े हुए माबूद चाहते हो
عَرَبِيفَما ظَنُّكُم بِرَبِّ العالَمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो सर्व संसार के पालनहार के विषय में तुम्हारा क्या गुमान है?
Roman Urdu (Maududi)Aakhir Allah Rubb-ul-Aalameen ke baarey mein tumhara kya gumaan hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)To yeh (batlao kay) tum ney rab-ul-aalameen ko kiya samjh rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर अल्लाह रब-उल-आलमीन के बारे में तुम्हारा क्या गुमान है?”
عَرَبِيفَنَظَرَ نَظرَةً فِي النُّجومِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने एक दृष्टि तारों पर डाली।
Roman Urdu (Maududi)Phir usne taaron par ek nigaah daali
Roman Urdu (Junagarhi)Abb ibrahim (alh-e-salam) ney aik nigah sitaron ki taraf uthaee
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उसने तारों पर एक निगाह डाली
عَرَبِيفَقالَ إِنّي سَقيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर कहा : मैं तो बीमार हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur kaha meri tabiyat kharaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kaha mein to beemar hun
Devnagri Urdu (Maududi)और कहा मेरी तबीयत ख़राब है
عَرَبِيفَتَوَلَّوا عَنهُ مُدبِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो वे उससे पीठ फेरकर वापस चले गए।
Roman Urdu (Maududi)Chunanche woh log usey chodh kar chale gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Iss per woh sab uss say mun moray huyey wapis chalay gaye
Devnagri Urdu (Maududi)चुनांचे वो लोग उसे छोड़ कर चले गए
عَرَبِيفَراغَ إِلىٰ آلِهَتِهِم فَقالَ أَلا تَأكُلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वह चुपके से उनके पूज्यों की ओर गया और कहा : क्या तुम खाते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Unke peechey woh chupke se unke maboodon ke mandir mein ghus gaya aur bola “aap log khate kyun nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap (chup chupatay) unn kay maboodon kay pass gaye aur farmaney lagay tum khatay kiyon nahi
Devnagri Urdu (Maududi)उनके पीछे वो चुपके से उनके मबूदों के मंदिर में घुस गया और बोला “आप लोग खाते क्यों नहीं हैं”
عَرَبِيما لَكُم لا تَنطِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हें क्या हुआ कि तुम बोलते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Kya ho gaya, aap log bolte bhi nahin?”
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhen kiya hogaya kay baat tak nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हो गया, आप लोग बोलते भी नहीं?”
عَرَبِيفَراغَ عَلَيهِم ضَربًا بِاليَمينِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वह दाएँ हाथ से मारते हुए उनपर पिल पड़ा।
Roman Urdu (Maududi)Iske baad woh unpar pil (toot) pada aur seedhay haath se khoob zarbein lagayi (todhna shuru kiya)
Roman Urdu (Junagarhi)Phir to (poori qooat kay sath) dayen hath say unhen maarney per pal paray
Devnagri Urdu (Maududi)इसके बाद वो उनपार पिल (टूट) पड़ा और सीधे हाथ से खूब ज़रबीन लगाई (तोधना शुरू किया)
عَرَبِيفَأَقبَلوا إِلَيهِ يَزِفّونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वे दौड़ते हुए उसकी ओर आए।
Roman Urdu (Maududi)(Wapas aakar) woh log bhaage bhaage uske paas aaye
Roman Urdu (Junagarhi)Woh (butt parast) doray bhagay aap ki taraf mutawajja huyey
Devnagri Urdu (Maududi)(वापस आकर) वो लोग भागे भागे उसके पास आए
عَرَبِيقالَ أَتَعبُدونَ ما تَنحِتونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : क्या तुम उसकी इबादत करते हो, जिसे ख़ुद तराशते हो?
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “kya tum apni hi tarashi hui cheezon ko poojhte ho
Roman Urdu (Junagarhi)To aap ney farmaya tum enhen poojtay ho jinhen (khud) tum tarashtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा “क्या तुम अपनी ही तराशी हुई चीज़ को पूजते हो
عَرَبِيوَاللَّهُ خَلَقَكُم وَما تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि अल्लाह ही ने तुम्हें पैदा किया तथा उसे भी जो तुम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke Allah hi ne tumko bhi paida kiya hai aur un cheezon ko bhi jinhein tum banatey ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Halankay tumhen aur tumhari banaee hui cheezon ko Allah hi ney peda kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)हलांके अल्लाह ही ने तुमको भी पेदा किया है और उन चीज़ों को भी जिनमें तुम बनाते हो”
عَرَبِيقالُوا ابنوا لَهُ بُنيانًا فَأَلقوهُ فِي الجَحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : इसके लिए एक इमारत (अग्नि-कुंड) बनाओ, फिर इसे भड़कती आग में फेंक दो।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne aapas mein kaha “ iske liya ek alaaw (pyre) tayyar karo aur isey dehakti hui aag ke dhair mein phenk do”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kehney lagay iss kay liye aik makan banao aur iss (dekakti hui) aag mein issay daal do
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने आपस में कहा “इसके लिया एक अलाव (चिता) तय्यार करो और इसे देखती हुई आग के ढेर में फेंक दो”
عَرَبِيفَأَرادوا بِهِ كَيدًا فَجَعَلناهُمُ الأَسفَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः उन्होंने उसके साथ एक चाल चलनी चाही, तो हमने उन्हीं को सबसे नीचा कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne uske khilaf ek karawayi karna chahi thi, magar humne unhi ko nicha dikha diya
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney to iss (ibrahim alh-e-salam) kay sath makar kerna chaha lekin hum ney unhi ko neecha ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने उसे ख़िलाफ एक करवायी करना चाही थी, मगर हमने उन्हें नीचा दिखा दिया
عَرَبِيوَقالَ إِنّي ذاهِبٌ إِلىٰ رَبّي سَيَهدينِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसने कहा : निःसंदेह मैं अपने पालनहार की ओर जाने वाला हूँ। वह मुझे अवश्य सीधा रास्ता दिखाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Ibrahim ne kaha “ main apne Rubb ki taraf jata hoon, wahi meri rehnumayi karega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss (ibrahim alh-e-salam) ney kaha mein to hijrat kerkay apnay perwerdigar ki taraf janey wala hun. Woh zaroor meri rehnumaee keray ga
Devnagri Urdu (Maududi)इब्राहीम ने कहा “मैं अपने रब की तरफ जाता हूं, वही मेरी रहनुमाई करेगा
عَرَبِيرَبِّ هَب لي مِنَ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे पालनहार! मुझे एक सदाचारी पुत्र प्रदान कर।
Roman Urdu (Maududi)Aey parwardigar , mujhey ek beta ata kar jo salihon (righteous) mein se ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meray rab! Mujhay nek bakht aulad ata farma
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ परवरदिगार, मुझे एक बेटा अता कर जो सालिहों (धर्मी) में से हो”
عَرَبِيفَبَشَّرناهُ بِغُلامٍ حَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उसे एक सहनशील पुत्र की शुभ सूचना दी।
Roman Urdu (Maududi)(Is dua ke jawab mein)humne usko ek haleem (burdbaar) ladke ki basharat di
Roman Urdu (Junagarhi)To hum ney ussay aik burd-baar bachay ki bisharat di
Devnagri Urdu (Maududi)(इस दुआ के जवाब में)हमने उसको एक हलीम (बुर्दबार) लड़के की बशारत दी
عَرَبِيفَلَمّا بَلَغَ مَعَهُ السَّعيَ قالَ يا بُنَيَّ إِنّي أَرىٰ فِي المَنامِ أَنّي أَذبَحُكَ فَانظُر ماذا تَرىٰ ۚ قالَ يا أَبَتِ افعَل ما تُؤمَرُ ۖ سَتَجِدُني إِن شاءَ اللَّهُ مِنَ الصّابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वह उसके साथ दौड़-धूप की आयु को पहुँचा, तो उसने कहा : ऐ मेरे प्रिय बेटे! निःसंदेह मैं स्वप्न में देखता हूँ कि मैं तुझे ज़बह कर रहा हूँ। तो अब देख, तेरा क्या विचार है? उसने कहा : ऐ मेरे पिता! आपको जो आदेश दिया जा रहा है उसे कर डालिए। अगर अल्लाह ने चाहा, तो आप अवश्य मुझे धैर्यवानों में से पाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh ladka jab uske saath daud dhoop karne ki umar ko pahunch gaya to ( ek roz) Ibrahim ne ussey kaha, “beta, main khwab mein dekhta hoon ke main tujhey zibaah kar raha hoon, ab tu bata, tera kya khayal hai?” usne kaha, “abbajan , jo kuch aapko hukum diya jaa raha hai usey kar daliye, aap insha Allah mujhey saabiron(sabr karne walon) mein se payenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab woh (bacha) itni umar ko phoncha kay uss kay sath chalay phiray to uss (ibrahim alh-e-salam) ney kaha meray piyaray bachay! Mein khuwab mein apnay aap ko tujhay zibah kertay huyey dekh raha hun. Abb tu bata kay teri kiya raye hai? Betay ney jawab diya kay abba! Jo hukum hua hai ussay baja layiye inshaAllah aap mujhay sabar kerney walon mein say payen gay
Devnagri Urdu (Maududi)वो लड़का जब उसके साथ दौड़ धूप करने की उमर को पहुंच गया तो (एक रोज़) इब्राहिम ने उसे कहा, "बेटा, मैं ख्वाब में देखता हूं के मैं तुझसे ज़िबाह" कर रहा हूँ, अब तू बता, तेरा क्या ख्याल है?” उसने कहा, "अब्बाजान, जो कुछ आपको हुकुम दिया जा रहा है उसे कर डालिये, आप इंशा अल्लाह मुझे साबिरों (सब्र करने वालों) में से पियेंगे"
عَرَبِيفَلَمّا أَسلَما وَتَلَّهُ لِلجَبينِ
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हिन्दी (Al-Omari)अंततः जब दोनों (अल्लाह के आदेश के प्रति) समर्पित हो गए, और उसने उसे पेशानी के एक किनारे पर गिरा दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir ko jab in dono ne sar-e-tasleem kham kardiya aur Ibrahim ne bete ko maathay ke bal gira diya
Roman Urdu (Junagarhi)Gharz jab dono mutee hogaye aur uss ney (baap ney) uss ko (betay ko) paishaani kay bal gira diya
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर को जब इन दोनों ने सर-ए-तस्लीम ख़म करदिया और इब्राहिम ने बेटे को मथाय के बल गिरा दिया
عَرَبِيوَنادَيناهُ أَن يا إِبراهيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसे आवाज़ दी कि ऐ इबराहीम!
Roman Urdu (Maududi)Aur humne nida di ke “Aey Ibrahim
Roman Urdu (Junagarhi)To hum ney aawaz di kay aey ibrahim
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने निदा दी के "ऐ इब्राहीम
عَرَبِيقَد صَدَّقتَ الرُّؤيا ۚ إِنّا كَذٰلِكَ نَجزِي المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय तूने स्वप्न को सच कर दिखाया। हम सदाचारियों को इसी तरह बदला प्रदान करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tu nay khwab sach kar dikhaya hum neki karne walon ko aisi hi jaza deta hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tu ney apna khuwab sacha ker dikhaya be-shak hum neki kerney walon ko issi tarah jaza detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)तू ने ख्वाब सच कर दिखाया हम नेकी करने वालों को ऐसा ही जजा देता है
عَرَبِيإِنَّ هٰذا لَهُوَ البَلاءُ المُبينُ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यही तो निश्चय खुला परीक्षण है।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan yeh ek khuli aazmaaish thi”
Roman Urdu (Junagarhi)Dar-haqeeqat yeh khulla imtehan tha
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन ये एक खुली आजमाइश थी"
عَرَبِيوَفَدَيناهُ بِذِبحٍ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसके फ़िदया (छुड़ौती) में एक बहुत बड़ा ज़बीहा दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne ek badi qurbani fidiye mein de kar us bacchey ko chuda liya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney aik bara zabeeha iss kay fidyey mein dey diya
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने एक बड़ी कुर्बानी फिदिये में दे कर हमसे बचे को छुड़ा लिया
عَرَبِيوَتَرَكنا عَلَيهِ فِي الآخِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।
Roman Urdu (Maududi)Aur uski taarif o tauseef hamesha ke liye baad ki nasalon mein chodh di
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unn ka zikar-e-khair pichlon mein baqi rakha
Devnagri Urdu (Maududi)और उसकी तारीफ ओ तौसीफ हमेशा के लिए बाद की नाकों में छोड़ दी
عَرَبِيسَلامٌ عَلىٰ إِبراهيمَ
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हिन्दी (Al-Omari)सलाम हो इबराहीम पर।
Roman Urdu (Maududi)Salaam hai Ibrahim par
Roman Urdu (Junagarhi)Ibrahim (alh-e-salam) per salam ho
Devnagri Urdu (Maududi)सलाम है इब्राहिम पर
عَرَبِيكَذٰلِكَ نَجزِي المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)हम इसी तरह सदाचारियों को बदला प्रदान करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hum neki karne waalon ko aisi hi jaza detay hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum neko karon ko issi tarah badla detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा देते हैं
عَرَبِيإِنَّهُ مِن عِبادِنَا المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय वह हमारे ईमान वाले बंदों में से था।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan woh hamare momin bandon mein se tha
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak woh humaray eman daar bandon mein say tha
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन वो हमारे मोमिन बंदों में से थे
عَرَبِيوَبَشَّرناهُ بِإِسحاقَ نَبِيًّا مِنَ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उसे इसहाक़ की शुभ सूचना दी, जो नबी होगा, सदाचारियों में से (होगा)।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne usey Ishaq(Issac) ki basharat di , ek Nabi saliheen mein se
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney uss ko ishaq (alh-e-salam) nabi ki bisharat di jo saleh logon mein say hoga
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने उसे इशाक (इसाक) की बशारत दी, एक नबी सालिहें में से
عَرَبِيوَبارَكنا عَلَيهِ وَعَلىٰ إِسحاقَ ۚ وَمِن ذُرِّيَّتِهِما مُحسِنٌ وَظالِمٌ لِنَفسِهِ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उसपर और इसहाक़ पर बरकत उतारी। और उन दोनों की संतति में से कोई सदाचारी है और कोई अपने आप पर खुला अत्याचार करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur usey aur Ishaq ko barakat di. Ab in dono ki zurriyat mein se koi mohsin hai aur koi apne nafs par sareeh zulm karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney ibrahim-o-ishaq (al-e-heem-us-salam) per barkaten nazil farmaeen aur inn dono ki aulad mein baazay to nek bakht hain aur baaz apnay nafs per sareeh zulm kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने उसे और इशाक को बरकत दी। अब दोनों की जुर्रियत में से कोई मोहसिन है और कोई अपने नफ़्स पर सारे ज़ुल्म करने वाला है
عَرَبِيوَلَقَد مَنَنّا عَلىٰ موسىٰ وَهارونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने मूसा और हारून पर उपकार किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne Moosa o Haroon par ehsan kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney musa aur haroon (al-e-heem-us-salam) per bara ehsan kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने मूसा ओ हारून पर एहसान किया
عَرَبِيوَنَجَّيناهُما وَقَومَهُما مِنَ الكَربِ العَظيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उन दोनों को और उन दोनों की जाति को बहुत बड़ी विपत्ति से छुटकारा दिया।
Roman Urdu (Maududi)Unko aur unki qaum ko karb-e-azeem( badi museebat) se nijaat di
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unhen aur unn ki qom ko baray dukh dard say nijat dey di
Devnagri Urdu (Maududi)उनको और उनकी क़ौम को करब-ए-अज़ीम (बड़ी मुसीबत) से निजात दी
عَرَبِيوَنَصَرناهُم فَكانوا هُمُ الغالِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उनकी सहायता की, तो वही प्रभुत्वशाली रहे।
Roman Urdu (Maududi)Unhein nusrat bakshi jiski wajah se wahi galib rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn ki madad ki to wohi ghalib rahey
Devnagri Urdu (Maududi)उनको नुसरत बख्शी जिसकी वजह से वही गालिब रहे
عَرَبِيوَآتَيناهُمَا الكِتابَ المُستَبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उन दोनों को अत्यंत स्पष्ट पुस्तक (तौरात) प्रदान की।
Roman Urdu (Maududi)Unko nihayat wazeh kitaab ata ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unhen (wazeh aur) roshan kitab di
Devnagri Urdu (Maududi)उनको निहायत वाजे किताब अता की
عَرَبِيوَهَدَيناهُمَا الصِّراطَ المُستَقيمَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उन दोनों को सीधे मार्ग पर चलाया।
Roman Urdu (Maududi)Unhein raah-e-raast dikhayi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unhen seedhay rastay per qaeem rakha
Devnagri Urdu (Maududi)उन्हें राह-ए-रास्त दिखाई
عَرَبِيوَتَرَكنا عَلَيهِما فِي الآخِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने पीछे आने वालों में उन दोनों का अच्छा स्मरण छोड़ा।
Roman Urdu (Maududi)Aur baad ki nasalon mein unka zikr e khair baaqi rakkha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unn dono kay liye peechay aanay walon mein yeh baat baqi rakhi
Devnagri Urdu (Maududi)और बाद की नसलों में उनका जिक्र ए खैर बाकी रक्खा
عَرَبِيسَلامٌ عَلىٰ موسىٰ وَهارونَ
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हिन्दी (Al-Omari)सलाम हो मूसा और हारून पर।
Roman Urdu (Maududi)Salaam hai Mossa aur Haroon par
Roman Urdu (Junagarhi)Kay musa aur haroon (al-e-heem-us-salam) per salam ho
Devnagri Urdu (Maududi)सलाम है मोसा और हारून पर
عَرَبِيإِنّا كَذٰلِكَ نَجزِي المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम सदाचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hum neki karne walon ko aisi hi jaza detay hain
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak hum nek logon ko issi tarah badlay diya kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा देते हैं
عَرَبِيإِنَّهُما مِن عِبادِنَا المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वे दोनों हमारे ईमान वाले बंदों में से थे।
Roman Urdu (Maududi)Dar haqeeqat woh hamare momin bandon mein se thay
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan yeh dono humaray momin bandon mein say thay
Devnagri Urdu (Maududi)दर हकीकत वो हमारे मोमिन बंदों में से थे
عَرَبِيوَإِنَّ إِلياسَ لَمِنَ المُرسَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह इलयास निश्चय नबियों में से थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Ilyas bhi yaqeenan mursaleen(messengers) mein se tha
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak ilyas (alh-e-salam) bhi payghumbaron mein say thay
Devnagri Urdu (Maududi)और इलियास भी यकीनन मुरसलीन (संदेशवाहक) में से थे
عَرَبِيإِذ قالَ لِقَومِهِ أَلا تَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब उसने अपनी जाति से कहा : क्या तुम डरते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jab usne apni qaum se kaha tha ke “tum log darte nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay unhon ney apni qom say farmaya kay tum Allah say dartay nahi ho
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जब उसने अपनी क़ौम से कहा था के “तुम लोग डरते नहीं हो
عَرَبِيأَتَدعونَ بَعلًا وَتَذَرونَ أَحسَنَ الخالِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम 'बअ्ल' (नामक मूर्ति) को पुकारते हो? तथा पैदा करने वालों में सबस बेहतर को छोड़ देते हो?
Roman Urdu (Maududi)Kya tum BAAL ko pukarte ho aur ahsanul khaliqeen ko chodh dete ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum ba’al (naami butt) ko pukartay ho? Aur sabb say behtar khaliq ko chor detay ho
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम बाल को पुकारते हो और अहसानुल खलीक़ीन को छोड़ देते हो
عَرَبِياللَّهَ رَبَّكُم وَرَبَّ آبائِكُمُ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह को, जो तुम्हारा पालनहार है तथा तुम्हारे पहले बाप-दादा का पालनहार है।
Roman Urdu (Maududi)Us Allah ko jo tumhara aur tumhare agle pichle aaba o ajdaad ka Rubb hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)Allah jo tumhara aur tumharay aglay tamam baap dadon ka rab hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमें अल्लाह को जो तुम्हारा और तुम्हारे अगले पिछले आबा ओ अजदाद का रब है?”
عَرَبِيفَكَذَّبوهُ فَإِنَّهُم لَمُحضَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)किंतु उन्होंने उसे झुठला दिया। तो निश्चय वे अवश्य हाज़िर किए जाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar unhon ne usey jhutla diya, so ab yaqeenan woh saza ke liye pesh kiye janey waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin qom ney unhen jhutlaya pus woh zaroor (azab mein) hazir rakhay jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उनहों ने उसे झुटला दिया, तो अब यकीनन वो सजा के लिए पेश किए जाने वाले हैं
عَرَبِيإِلّا عِبادَ اللَّهِ المُخلَصينَ
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हिन्दी (Al-Omari)सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।
Roman Urdu (Maududi)Bajuz un bandagaan e khuda ke jinko khaalis karliya gaya tha
Roman Urdu (Junagarhi)Siwaye Allah Taalaa kay mukhlis bandon kay
Devnagri Urdu (Maududi)बजुज उन बंदगां ए खुदा के जिनको खालिस करलिया गया था
عَرَبِيوَتَرَكنا عَلَيهِ فِي الآخِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।
Roman Urdu (Maududi)Aur Ilyas ka zikr e khair humne baad ki nasalon mein baaki rakkha
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney (ilyas alh-e-salam) ka zikar-e-khair pichlon mein bhi baqi rakha
Devnagri Urdu (Maududi)और इलियास का जिक्र ए खैर हमने बाद की नसलों में बाकी रक्खा
عَرَبِيسَلامٌ عَلىٰ إِل ياسينَ
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हिन्दी (Al-Omari)सलाम हो इल्यासीन पर।
Roman Urdu (Maududi)Salaam hai Ilyas par
Roman Urdu (Junagarhi)Kay ilyas per salam ho
Devnagri Urdu (Maududi)सलाम है इलियास पर
عَرَبِيإِنّا كَذٰلِكَ نَجزِي المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम सदाचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hum neki karne walon ko aisi hi jaza dete hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum neki kerney walon ko issi tarah badla detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा देते हैं
عَرَبِيإِنَّهُ مِن عِبادِنَا المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय वह हमारे ईमान वाले बंदों में से था।
Roman Urdu (Maududi)Waqayi wo hamare momin bandon mein se tha
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak woh humaray eman daar bandon mein say tha
Devnagri Urdu (Maududi)वाकाई वो हमारे मोमिन बंदों में से थे
عَرَبِيوَإِنَّ لوطًا لَمِنَ المُرسَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह लूत निश्चय रसूलों में से था।
Roman Urdu (Maududi)Aur Lut bhi unhi logon mein se tha jo Rasool bana kar bheje gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak loot (alh-e-salam bhi) payghumbaron mein say thay
Devnagri Urdu (Maududi)और लुट भी उन्ही लोगों में से थे जो रसूल बना कर भेज गए हैं
عَرَبِيإِذ نَجَّيناهُ وَأَهلَهُ أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब हमने उसे तथा उसके सब घर वालों को बचाया।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jab humne usko aur uske sab gar walon ko nijaat di
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney unhen aur unn kay ghar walon sab ko nijat di
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जब हमने उसको और उसके सब गर वालों को निजात दी
عَرَبِيإِلّا عَجوزًا فِي الغابِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)सिवाय एक बुढ़िया के, जो पीछे रह जाने वालों में से थी।
Roman Urdu (Maududi)Siwaye ek budiya ke jo peechey reh janey walon mein se thi
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-juz uss burhiya kay jo peechay reh janey walon mein reh gaee
Devnagri Urdu (Maududi)सिवाय एक बुदिया के जो पीछे रह जाने वालों में से थी
عَرَبِيثُمَّ دَمَّرنَا الآخَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने दूसरों का विनाश कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Phir baaki sabko tehas nehas kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney auron ko halak ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर बाकी सबको तहस नेहस करदिया
عَرَبِيوَإِنَّكُم لَتَمُرّونَ عَلَيهِم مُصبِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह तुम निश्चय सुबह के समय जाते हुए उनपर से गुज़रते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aaj tum shab-o-roz unke ujday dayar (desolate habitations) par se guzarte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum to subha honey per unn ki bastiyon kay pass say guzartay ho
Devnagri Urdu (Maududi)आज तुम शब-ओ-रोज़ उनके उजड़े दयार (उजाड़ बस्तियों) पर से गुज़रते हो
عَرَبِيوَبِاللَّيلِ ۗ أَفَلا تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा रात के समय भी। तो क्या तुम समझते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Kya tumko aqal nahin aati
Roman Urdu (Junagarhi)Aur raat ko bhi kiya phir bhi nahi samajhtay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुमको अक्ल नहीं आती
عَرَبِيوَإِنَّ يونُسَ لَمِنَ المُرسَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह यूनुस निश्चय रसूलों में से था।
Roman Urdu (Maududi)Aur yaqeenan Yunus bhi Rasoolon mein se tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bila-shuba younus (alh-e-salam) nabiyon mein say thay
Devnagri Urdu (Maududi)और यकीनन यूनुस भी रसूलों में से थे
عَرَبِيإِذ أَبَقَ إِلَى الفُلكِ المَشحونِ
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हिन्दी (Al-Omari)जब वह भरी नाव की ओर भागकर गया।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo jab woh ek bhari kashti ki taraf bhaag nikla
Roman Urdu (Junagarhi)Jab bhag ker phonchay bhari kashti per
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो जब वो एक भारी कश्ती की तरफ भाग निकला
عَرَبِيفَساهَمَ فَكانَ مِنَ المُدحَضينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वह क़ुर'आ में शामिल हुआ, तो हारने वालों में से हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Phir quora andazi (cast lots) mein shareek hua aur usmein maath khayi (among the losers)
Roman Urdu (Junagarhi)Phir qura-andazi hui to maghloob hogaye
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क़ोरा अंदाज़ी (कास्ट लॉट) में शरीक हुआ और उसमें मथ खाई (हारे हुए लोगों में)
عَرَبِيفَالتَقَمَهُ الحوتُ وَهُوَ مُليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर मछली ने उसे निगल लिया, इस हाल में कि वह निंदनीय था।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar machli ne usey nigal liya aur woh malamat zada tha
Roman Urdu (Junagarhi)To phir unhen machli ney nigal liya aur woh khud apnay aap ko malamat kerney lag gaye
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार मछली ने उसे निगल लिया और वो मलामत ज़दा था
عَرَبِيفَلَولا أَنَّهُ كانَ مِنَ المُسَبِّحينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर अगर यह बात न होती कि वह अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करने वालों में से था।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar woh tasbeeh karne walon mein se na hota to
Roman Urdu (Junagarhi)Pus agar yeh paki biyan kerney walon mein say na hotay
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर वो तस्बीह करने वालों में से न होता तो
عَرَبِيلَلَبِثَ في بَطنِهِ إِلىٰ يَومِ يُبعَثونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो निश्चय वह उसके पेट में उस दिन तक रहता, जिसमें लोग उठाए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Roz-e-qayamat tak usi machli ke pait mein rehta
Roman Urdu (Junagarhi)To logon kay uthaye janey kay din tak uss kay pet mein hi rehtay
Devnagri Urdu (Maududi)रोज़-ए-क़यामत तक उसी मछली के पैत में रहता
عَرَبِي۞ فَنَبَذناهُ بِالعَراءِ وَهُوَ سَقيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उसे चटियल मैदान में फेंक दिया, इस हाल में कि वह बीमार था।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir humne usey badi sakheem (bimar /ill) halat mein ek chatiyal zameen par phenk diya
Roman Urdu (Junagarhi)Pus unhen hum ney chatyal medan mein daal diya aur woh uss waqt beemar thay
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर हमने उसे बड़ी सकीम (बीमार/बीमार) हालात में एक छतियाल जमीन पर फेंक दिया
عَرَبِيوَأَنبَتنا عَلَيهِ شَجَرَةً مِن يَقطينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उसपर एक लता वाला वृक्ष उगा दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur uspar ek bail-daar darakht (a spreading plant of the gourd kind) uga diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn per saya kerney wala aik bel daar darakht hum ney uga diya
Devnagri Urdu (Maududi)और उसपर एक बेल-दार दरख्त (लौकी की प्रजाति का एक फैला हुआ पौधा) उगा दिया
عَرَبِيوَأَرسَلناهُ إِلىٰ مِائَةِ أَلفٍ أَو يَزيدونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उसे एक लाख की ओर भेजा, बल्कि वे अधिक होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Iske baad humne usey ek lakh ya us sey zayad logon ki taraf bheja
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unhen aik lakh bulkay aur ziyadah aadmiyon ki taraf bheja
Devnagri Urdu (Maududi)इसके बाद हमने उसे एक लाख या उससे ज्यादा लोगों की तरफ भेजा
عَرَبِيفَآمَنوا فَمَتَّعناهُم إِلىٰ حينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)चुनाँचे वे ईमान ले आए, तो हमने उन्हें एक समय तक लाभ उठाने दिया।
Roman Urdu (Maududi)Woh imaan laye aur humne ek waqt e khaas tak unhein baaqi rakkha
Roman Urdu (Junagarhi)Pus woh eman laye aur hum ney unhen aik zamaney tak aish-o-ishrat di
Devnagri Urdu (Maududi)वाह ईमान लाए और हमने एक वक्त ए खास तक उन्हें बाकी रक्खा
عَرَبِيفَاستَفتِهِم أَلِرَبِّكَ البَناتُ وَلَهُمُ البَنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो (ऐ नबी!) आप उनसे पूछें कि क्या आपके पालनहार के लिए बेटियाँ हैं और उनके लिए बेटे?
Roman Urdu (Maududi)Phir zara in logon se pucho, kya (inke dil ko yeh baat lagti hai ke) tumhare Rubb ke liye to hon betiyan aur inke liye hon betay
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say daryaft kijiye! Kay kiya aap kay rab ki to betiyan hain aur inn kay betay hain
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जरा इन लोगों से पूछो, क्या (इनके दिल को ये बात लगती है के) तुम्हारे रब के लिए तो होन बेटियां और इनके लिए होन बेटे
عَرَبِيأَم خَلَقنَا المَلائِكَةَ إِناثًا وَهُم شاهِدونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)या हमने फ़रिश्तों को मादा पैदा किया, जबकि वे उस समय उपस्थित थे?
Roman Urdu (Maududi)Kya waqayi humne malaika (farishton) ko auratein banaya hai aur yeh aankhon dekhi baat keh rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Ya yeh uss waqt mojood thay jabkay hum ney farishton ko moanniss peda kiya
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वक्त है हमने मलाइका (फ़रिश्तों) को औरतें बनाया है और ये आँखों देखी बात कह रहे हैं
عَرَبِيأَلا إِنَّهُم مِن إِفكِهِم لَيَقولونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सुन लो! निःसंदेह वे निश्चय अपने झूठ ही से कहते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Khoob sun rakkho, dar-asal yeh log apni mann ghadat se yeh baat kehte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aagah raho! Kay yeh log sirf apni iftra per-dazi say keh rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)ख़ूब सुन रक्खो, असल ये लोग अपने मन ग़ादत से ये बात कहते हैं
عَرَبِيوَلَدَ اللَّهُ وَإِنَّهُم لَكاذِبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कि अल्लाह ने संतान बनाया है। और निःसंदेह वे निश्चय झूठे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ke Allah aulad rakhta hai, aur fil waqayi yeh jhootey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kay Allah Taalaa ki aulad hai. Yeqeenan yeh mehaz jhootay hain
Devnagri Urdu (Maududi)के अल्लाह औलाद रखता है, और फ़िल वजह ये झूठे हैं
عَرَبِيأَصطَفَى البَناتِ عَلَى البَنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या उसने पुत्रियों को पुत्रों पर प्राथमिकता दी?
Roman Urdu (Maududi)Kya Allah ne beton ke bajaye betiyan apne liye pasand karli
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya Allah Taalaa ney apnay liye betiyon ko beton per tarjeeh di
Devnagri Urdu (Maududi)क्या अल्लाह ने बेटियों के बजाये बेटियां अपने लिए पसंद करली
عَرَبِيما لَكُم كَيفَ تَحكُمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसा फ़ैसला कर रहे हो?
Roman Urdu (Maududi)Tumhein kya ho gaya hai, kaise hukum laga rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhen kiya hogaya hai kaisay hukum lagatay phirtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हें क्या हो गया है, कैसे हुकुम लगा रहे हो
عَرَبِيأَفَلا تَذَكَّرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते?
Roman Urdu (Maududi)Kya tumhein hosh nahin aata
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum iss qadar bhi nahi samajhtay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम्हें होश नहीं आता
عَرَبِيأَم لَكُم سُلطانٌ مُبينٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)या तुम्हारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण है?
Roman Urdu (Maududi)Ya phir tumhare paas apni in baaton ke liye koi saaf sanad (daleel) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ya tumharay pass iss ki koi saaf daleel hai
Devnagri Urdu (Maududi)हां फिर तुम्हारे पास अपनी बातों के लिए कोई साफ सनद (दलेल) है
عَرَبِيفَأتوا بِكِتابِكُم إِن كُنتُم صادِقينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो लाओ अपनी किताब, यदि तुम सच्चे हो?
Roman Urdu (Maududi)To lao apni woh kitaab agar tum sachhey ho
Roman Urdu (Junagarhi)To jao agar sachay ho to apni hi kitab ley aao
Devnagri Urdu (Maududi)तो लाओ अपनी वो किताब अगर तुम सच्चे हो
عَرَبِيوَجَعَلوا بَينَهُ وَبَينَ الجِنَّةِ نَسَبًا ۚ وَلَقَد عَلِمَتِ الجِنَّةُ إِنَّهُم لَمُحضَرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने अल्लाह तथा जिन्नों के बीच रिश्तेदारी बना दी। हालाँकि निःसंदेह जिन्न जान चुके हैं कि निःसंदेह वे (मुश्रिक) अवश्य उपस्थित किए जाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Inhon ne Allah aur malaika ke darmiyan nasab (kinship)ka rishta bana rakkha hai, halanke malaika khoob jaante hain ke yeh log mujrim ki haisiyat se pesh honay waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn logon ney to Allah kay aur jinnaat kay darmiyan bhi qarabat daari theraee hai aur halankay khud jinnaat ko maloom hai kay woh (iss aqeeday kay log azab kay samney) paish kiyey jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)इन्होन ने अल्लाह और मलिका के दरमियान नसब (रिश्तेदारी) का रिश्ता बना रक्खा है, हालंके मलिका खूब जानते हैं के ये लोग मुजरिम की हसीयत से पेश होने वाले हैं
عَرَبِيسُبحانَ اللَّهِ عَمّا يَصِفونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह उन बातों से पवित्र है, जो वे वर्णन करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(aur woh kehte hain ke) “Allah un sifaat se paak hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo kuch yeh (Allah kay baray mein) biyan ker rahey hain uss say Allah Taalaa bilkul pak hai
Devnagri Urdu (Maududi)(और वो कहते हैं के) “अल्लाह उन सिफ़ात से पाक है
عَرَبِيإِلّا عِبادَ اللَّهِ المُخلَصينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।
Roman Urdu (Maududi)Jo uske khaalis bandon ke siwa dusre log uski taraf mansoob karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Siwaye Allah kay mukhlis bandon kay
Devnagri Urdu (Maududi)जो उसके खालिस बंदों के सिवा दूसरे लोग उसकी तरफ मंसूब करते हैं
عَرَبِيفَإِنَّكُم وَما تَعبُدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः निःसंदेह तुम तथा जिनकी तुम पूजा करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Pas tum aur tumhare yeh mabood
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeen mano kay tum sab aur tumharay maboodaan (baatil)
Devnagri Urdu (Maududi)पास तुम और तुम्हारे ये माबूद
عَرَبِيما أَنتُم عَلَيهِ بِفاتِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तुम उसके विरुद्ध (किसी को) बहकाने वाले नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Allah se kisi ko pher nahin sakte
Roman Urdu (Junagarhi)Kissi aik ko bhi behka nahi saktay
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह से किसी को फेर नहीं सकते
عَرَبِيإِلّا مَن هُوَ صالِ الجَحيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)परंतु उसको, जो भड़कती आग में प्रवेश करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Magar sifr usko jo dozakh ki bhadakti hui aag mein jhulasne wala ho
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-juz uss kay jo jahannumi hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)मगर सिफ़र उसको जो दोज़ख़ की भड़कती हुई आग में झुलसने वाला हो
عَرَبِيوَما مِنّا إِلّا لَهُ مَقامٌ مَعلومٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हम (फ़रिश्तों) में से जो भी है उसका एक नियत स्थान है।
Roman Urdu (Maududi)Aur hamara haal to yeh hai ke hum mein se har ek ka ek muqaam mukarrar hai
Roman Urdu (Junagarhi)(farishton ka qol hai kay) hum mein say to her aik ki jagah muqarrar hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारा हाल तो ये है कि हम में से हर एक का एक मुक़ाम मुकर्रर है
عَرَبِيوَإِنّا لَنَحنُ الصّافّونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हम निश्चय पंक्तिबद्ध रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur hum saff basta (in rows) khidmatgaar hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum to (bandag-e-elahee mein) saff basta kharay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और हम सफ़ बस्ता (पंक्तियों में) खिदमतगार हैं
عَرَبِيوَإِنّا لَنَحنُ المُسَبِّحونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हम निश्चय तस्बीह़ (पवित्रता गान) करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tasbeeh karne waley hain.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss ki tasbeeh biyan ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)तस्बीह करने वाले हैं।”
عَرَبِيوَإِن كانوا لَيَقولونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह वे (मुश्रिक) तो कहा करते थे
Roman Urdu (Maududi)Yeh log pehle to kaha karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Kuffaar to kaha kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग पहले तो कहां करते थे
عَرَبِيلَو أَنَّ عِندَنا ذِكرًا مِنَ الأَوَّلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यदि हमारे पास पहले लोगों की कोई शिक्षा (किताब) होती,
Roman Urdu (Maududi)Ke kaash hamare paas woh “Zikr” hota jo pichli qaumon ko mila tha
Roman Urdu (Junagarhi)Kay agar humaray samney aglay logon ka zikar hota
Devnagri Urdu (Maududi)के काश हमारे पास वो "ज़िक्र" होता जो पिछली क़ौमों को मिला था
عَرَبِيلَكُنّا عِبادَ اللَّهِ المُخلَصينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो हम अवश्य अल्लाह के ख़ालिस (चुने हुए) बंदे होते।
Roman Urdu (Maududi)To hum Allah ke cheedah (chune huey/chosen) banday hotay
Roman Urdu (Junagarhi)To hum bhi Allah kay cheedah banday bann jatay
Devnagri Urdu (Maududi)तो गुनगुनाने के लिए अल्लाह के चीदा (चुने हुए/चुने हुए) बंदे होतय
عَرَبِيفَكَفَروا بِهِ ۖ فَسَوفَ يَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(फिर जब किताब आ गई) तो उन्होंने उसका इनकार कर दिया। अतः जल्द ही उन्हें पता चल जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Magar (jab woh aa gaya) to inhon ne uska inkar kardiya, ab ankareeb inhein (is rawish ka natija) maloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin phir iss quran kay sath kufur ker gaye pus abb un-qareeb jaan len gay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर (जब वो आ गया) तो इन्हों ने उसका इनकार करदिया, अब अनकरीब इन्हें (इस रवीश का नातीजा) मालूम हो जाएगा
عَرَبِيوَلَقَد سَبَقَت كَلِمَتُنا لِعِبادِنَا المُرسَلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमारे भेजे हुए बंदों के लिए हमारी बात पहले ही निश्चित हो चुकी
Roman Urdu (Maududi)Apne bheje huey bandon se hum pehle hi waada kar chuke hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur albata humara wada pehlay hi apnay rasoolon kay liye sadir ho chuka hai
Devnagri Urdu (Maududi)अपने भेजे हुए बंदों से हम पहले ही वादा कर चुके हैं
عَرَبِيإِنَّهُم لَهُمُ المَنصورونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कि निःसंदेह वही हैं, जिनकी सहायता की जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Ke yaqeenan unki madad ki jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Kay yaqeenan woh hi madad kiyey jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)के यकीनन उनकी मदद की जाएगी
عَرَبِيوَإِنَّ جُندَنا لَهُمُ الغالِبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमारी सेना ही निश्चय प्रभुत्वशाली रहेगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur hamara lashkar hi gaalib hokar rahega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur humara hi lashkar ghalib (aur bartar) rahey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारा लश्कर ही गालिब होकर रहेगा
عَرَبِيفَتَوَلَّ عَنهُم حَتّىٰ حينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो आप कुछ समय तक के लिए उनसे मुँह फेर लें।
Roman Urdu (Maududi)Pas (aey Nabi) zara kuch muddat tak inhein inke haal par chodh do
Roman Urdu (Junagarhi)Abb aap kuch dino tak inn say mun pher lijiyey
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ नबी) ज़रा कुछ मुद्दत तक इन्हें इनके हाल पर छोड़ दो
عَرَبِيوَأَبصِرهُم فَسَوفَ يُبصِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्हें देखते रहें। वे भी शीघ्र ही देख लेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur dekhte raho, anqareeb yeh khud bhi dekh lengey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur enhen dekhtay rahiyey aur yeh bhi aagay chal ker dekh len gay
Devnagri Urdu (Maududi)और देखते रहो, अंकारीब ये खुद भी देख लेंगे
عَرَبِيأَفَبِعَذابِنا يَستَعجِلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वे हमारी यातना की शीघ्र माँग कर रहे हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh hamare azaab ke liye jaldi macha rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh humaray azab ki jaldi macha rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये हमारे अज़ाब के लिए जल्दी मचा रहे हैं
عَرَبِيفَإِذا نَزَلَ بِساحَتِهِم فَساءَ صَباحُ المُنذَرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वह उनके आँगन में उतरेगी, तो डराए गए लोगों की सुबह बहुत बुरी होगी।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh inke sehan (maidan/open space) mein aa utrega woh din un logon ke liye bahut bura hoga jinhein mutanabbeh (warn) kiya ja chuka hai
Roman Urdu (Junagarhi)Suno! Jab humara azab inn kay medan mein utar aaye ga uss waqt unn ki jin ko muta-nabbay ker diya gaya tha bari buri subha hogi
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो इनके सेहन (मैदान/खुली जगह) में आ उतरेगा वो दिन उन लोगों के लिए बहुत बुरा होगा जिनमें मुतनब्बेह (चेतावनी) किया जा चुका है
عَرَبِيوَتَوَلَّ عَنهُم حَتّىٰ حينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)َऔर आप कुछ समय तक के लिए उनसे मुँह फेर लें।
Roman Urdu (Maududi)Pas zara inhein kuch muddat ke liye chodh do
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kuch waqt tak inn ka khayal chor dijiyey
Devnagri Urdu (Maududi)पास ज़रा इन्हें कुछ मुद्दत के लिए छोड़ दो
عَرَبِيوَأَبصِر فَسَوفَ يُبصِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा देखते रहें। जल्द ही वे भी देख लेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur dekhte raho, anqareeb yeh khud dekh lenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur dekhtay rahiyey yeh bhi abhi abhi dekh len gay
Devnagri Urdu (Maududi)और देखते रहो, अनकरीब ये खुद देख लेंगे
عَرَبِيسُبحانَ رَبِّكَ رَبِّ العِزَّةِ عَمّا يَصِفونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)पवित्र है आपका पालनहार, पराक्रम व शक्ति का स्वामी!, उस बात से, जो वे बयान करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Paak hai tera Rubb, izzat ka maalik, un tamaam baaton se jo yeh log bana rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Pak hai aap ka rab jo bot bari izzat wala hai her uss cheez say (jo mushrik) biyan kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)पाक है तेरा रब, इज्जत का मालिक, उन तमाम बातों से जो ये लोग बना रहे हैं
عَرَبِيوَسَلامٌ عَلَى المُرسَلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा सलाम हो रसूलों पर।
Roman Urdu (Maududi)Aur salaam hai mursalin (messengers) par
Roman Urdu (Junagarhi)Payghumbaron per salam hai
Devnagri Urdu (Maududi)और सलाम है मुरसलीन (संदेशवाहक) पर
عَرَبِيوَالحَمدُ لِلَّهِ رَبِّ العالَمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सर्व संसार का पालनहार है।
Roman Urdu (Maududi)Aur saari taarif Allah Rabbul Aalameen hi ke liye hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur sab tarah ki tareef Allah kay liye hai jo saray jahan ka rab hai
Devnagri Urdu (Maududi)और सारी तारीफ अल्लाह रब्बुल आलमीन ही के लिए है
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Surah 37: As-Saffat (Those Ranging in Ranks)

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Surah 37: As-Saffat (Those Ranging in Ranks)

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Surah 37: As-Saffat (Those Ranging in Ranks)

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Surah 37: As-Saffat (Those Ranging in Ranks)

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Surah 38: Sad (Sad)

Meccan🕐 Revelation #38📜 88 Verses🕮 Juz 1
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عَرَبِيص ۚ وَالقُرآنِ ذِي الذِّكرِ
हिन्दी (Al-Omari)सॉद। क़सम है इस उपदेश वाले क़ुरआन की!
Roman Urdu (Maududi)Saad, kasam hai naseehat bharey Quran ki
Roman Urdu (Junagarhi)Suaad! Iss naseehat walay quran ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)साद, कसम है हिदायत भरे कुरान की
عَرَبِيبَلِ الَّذينَ كَفَروا في عِزَّةٍ وَشِقاقٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, अभिमान और विरोध में पड़े हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Balke yahi log, jinhon ne maanney se inkar kiya hai, sakht takabbur aur zid mein mubtila hain
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay kufaar ghooroor-o-mukhalifat mein paray huyey hain
Devnagri Urdu (Maududi)बलके यही लोग, जिन्होन ने मन्ने से इंकार किया है, सच तकब्बुर और जिद में मुब्तिला हैं
عَرَبِيكَم أَهلَكنا مِن قَبلِهِم مِن قَرنٍ فَنادَوا وَلاتَ حينَ مَناصٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हमने इनसे पहले कितने ही समुदायों को विनष्ट कर दिया, तो उन्होंने पुकारा। और वह बच निकलने का समय नहीं था।
Roman Urdu (Maududi)Insey pehle hum aisi kitni hi qaumon ko halaak kar chuke hain (aur jab unki shamat aayi hai) to woh cheekh utthey hain, magar woh waqt bachne ka nahin hota
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney iss say pehlay bhi boht si ummaton ko tabah ker dala unhon ney her chand cheek pukaar ki lekin woh waqt chutkaray ka na tha
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पहले हम ऐसी कितनी ही क़ौमों को हलाक कर चुके हैं (और जब उनकी शामत आई है) तो वो गाल उठे हैं, मगर वो वक़्त बचने का नहीं होता
عَرَبِيوَعَجِبوا أَن جاءَهُم مُنذِرٌ مِنهُم ۖ وَقالَ الكافِرونَ هٰذا ساحِرٌ كَذّابٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने इसपर आश्चर्य किया कि उनके पास उन्हीं में से एक डराने वाला आया! और काफ़िरों ने कहा : यह एक बड़ा झूठा जादूगर है।
Roman Urdu (Maududi)In logon ko is baat par bada taajub hua ke ek darane wala khud inhi mein se aa gaya, munkireen kehne lagey ke “yeh saahir(sorcerer) hai, sakht jhoota hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kafiron ko iss baat per tajjub hua kay unhi mein say aik unhen daraney wala aagaya aur kehney lagay kay yeh to jadoogar aur jhoota hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों को इस बात पर बड़ा ताज्जुब हुआ के एक डरने वाला खुद इनमें से आ गया, मुनकिरेन कहने लगे के "ये साहिर (जादूगर) है, सच झूठा है
عَرَبِيأَجَعَلَ الآلِهَةَ إِلٰهًا واحِدًا ۖ إِنَّ هٰذا لَشَيءٌ عُجابٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या उसने सब पूज्यों को एक पूज्य बना दिया? निःसंदेह यह तो बड़े आश्चर्य की बात है।
Roman Urdu (Maududi)Kya isney saarey khudaon ki jagah bas ek hi khuda bana dala? Yeh to badi ajeeb baat hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya iss ney itnay saray maboodon ka aik hi mabood ker diya waqaee yeh boht hi ajeeb baat hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इसने सारे ख़ुदाओं की जगह बस एक ही खुदा बना डाला? ये तो बड़ी अजीब बात है"
عَرَبِيوَانطَلَقَ المَلَأُ مِنهُم أَنِ امشوا وَاصبِروا عَلىٰ آلِهَتِكُم ۖ إِنَّ هٰذا لَشَيءٌ يُرادُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उनके प्रमुख (यह कहते हुए) चल खड़े हुए कि चलो और अपने पूज्यों पर जमे रहो। निश्चय यह एक ऐसी चीज़ है, जो वांछित (सुनियोजित) है।
Roman Urdu (Maududi)Aur sardaran e qaum yeh kehte huey nikal gaye ke “ chalo aur dat-tey raho apne maboodon ki ibadat par. Yeh baat to kisi aur hi garaz se kahi ja rahi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay sardaar yeh kehtay huyey chalay kay chalo ji aur apnay maboodon per jamay raho yaqeenan iss baat mein to koi gharz hai
Devnagri Urdu (Maududi)और सरदारन ए क़ौम ये कहते हुए निकल गए के "चलो और दत-ते रहो अपने" माबूदोन की इबादत पर। ये बात तो किसी और हाय गरज से कहीं जा रही है [38:7
عَرَبِيما سَمِعنا بِهٰذا فِي المِلَّةِ الآخِرَةِ إِن هٰذا إِلَّا اختِلاقٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हमने यह बात पिछले धर्म में नहीं सुनी। यह तो मात्र बनाई हुई बात है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh baat humne zamana e qareeb ki millat mein kisi se nahin suni. Yeh kuch nahin hai magar ek man-ghadat baat
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney to yeh baat pichlay deen mein bhi nahi suni kuch nahi yeh to sirf gharant hai
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيأَأُنزِلَ عَلَيهِ الذِّكرُ مِن بَينِنا ۚ بَل هُم في شَكٍّ مِن ذِكري ۖ بَل لَمّا يَذوقوا عَذابِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या हमारे बीच से उसी पर उपदेश उतारा गया है? बल्कि वे मेरे उपदेश के बारे में संदेह में हैं। बल्कि उन्होंने अभी तक मेरी यातना नहीं चखी।
Roman Urdu (Maududi)Kya hamarey darmiyan bas yahi ek shaks reh gaya tha jispar Allah ka zikr nazil kardiya gaya?”Asal baat yeh hai ke yeh mere “Zikr” par shakk kar rahey hain , aur yeh saari baatein isliye kar rahey hain ke inhon ne mere azaab ka maza chakkha nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya hum sab mein issi per kalam-e-elahee nazil kiya gaya hai?Dar-asal yeh log meri wahee ki taraf say shak mein hain bulkay (sahih yeh hai kay) enhon ney abb tak mera azab chakha hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيأَم عِندَهُم خَزائِنُ رَحمَةِ رَبِّكَ العَزيزِ الوَهّابِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्हीं के पास आपके अत्यंत प्रभुत्वशाली, परम दाता पालनहार की दया के ख़ज़ाने हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya tere daata (great Bestower) aur gaalib parwardigar ki rehmat ke khazane inke kabze mein hain
Roman Urdu (Junagarhi)Ya kiya inn kay pass teray zabardast fayyaz rab ki rehmat kay khazaney hain
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيأَم لَهُم مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَما بَينَهُما ۖ فَليَرتَقوا فِي الأَسبابِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)या आकाशों तथा धरती का और उन दोनों के बीच की चीज़ों का राज्य उन्हीं के पास है? तो उन्हें चाहिए कि (आकाशों में) रस्सियाँ तानकर चढ़ जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh aasmaan o zameen aur inke darmiyan ki cheezon ke maalik hain? Accha to yeh aalam e asbaab ki bulandiyon par chadh kar dekhein
Roman Urdu (Junagarhi)Ya kiya aasman-o-zamin aur inn kay damiyan ki her cheez ki badshaat inn hi ki hai to phir yeh rasiyan taan ker charh jayen
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये आसमान ओ ज़मीन और इनके दरमियान की चीज़ों के मालिक हैं? अच्छा तो ये आलम ए असबाब की बुलंदियाँ पर चढ़ कर देखें
عَرَبِيجُندٌ ما هُنالِكَ مَهزومٌ مِنَ الأَحزابِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(यह) एक तुच्छ सी सेना है, सेनाओं में से, जो वहाँ पराजित होने वाली है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh to jatthon (armies) mein se ek choota sa jattha (army) hai jo isi jagah shikhast(suffer defeat) khane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh bhi (baray baray) lashkaron mein say shikast paya hua (chota sa) lashkar hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये तो जत्थों (सेनाओं) में से एक छोटा सा जत्था (सेना) है जो इसी जगह सीखा (हार झेलना) खाने वाला है
عَرَبِيكَذَّبَت قَبلَهُم قَومُ نوحٍ وَعادٌ وَفِرعَونُ ذُو الأَوتادِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)इनसे पहले नूह की जाति तथा आद और मेखों वाले (शक्तिमान) फ़िरऔन ने झुठलाया।
Roman Urdu (Maududi)Insey pehle Nooh ki qaum, aur Aad, aur mekhon (tent-pegs/stakes) wala Firoun
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say pehlay bhi qom-e-nooh aur aad aur meekhon walay firaon ney jhutlaya tha
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पहले नूह की क़ौम, और आद, और मेखों (तम्बू-खूँटी/खूँटी) वाला फिरौन
عَرَبِيوَثَمودُ وَقَومُ لوطٍ وَأَصحابُ الأَيكَةِ ۚ أُولٰئِكَ الأَحزابُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा समूद और लूत की जाति तथा ऐका (उपवन) वालों ने। यही लोग वे सेनाएँ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur Samood, aur qaum e Lut, aur aika waley jhutla chuke hain. Jatthay woh thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur samood ney aur qom-e-loot ney aur aeeka kay rehney walon ney bhi yehi (baray) lashkar thay
Devnagri Urdu (Maududi)और समूद, और क़ौम ए लूट, और ऐका वाले झूठला चुके हैं। जत्थय वो थाय
عَرَبِيإِن كُلٌّ إِلّا كَذَّبَ الرُّسُلَ فَحَقَّ عِقابِ
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हिन्दी (Al-Omari)इन सब ने रसूलों को झुठलाया, तो मेरी यातना सिद्ध हो गई।
Roman Urdu (Maududi)Unmein se har ek ne Rasoolon ko jhutlaya aur meri uqubat ka faisla (decree of chastisement )uspar chaspan ho kar raha
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein say aik bhi aisa na tha jiss ney rasoolon ki takzeeb na ki ho pus meri saza inn per sabit hogaee
Devnagri Urdu (Maududi)उनमें से हर एक ने रसूलों को झुटलाया और मेरी उकुबत का फैसला (सजा का फैसला) उसपर चस्पां हो कर रहा
عَرَبِيوَما يَنظُرُ هٰؤُلاءِ إِلّا صَيحَةً واحِدَةً ما لَها مِن فَواقٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और ये लोग केवल एक सख़्त चीख की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसमें कोई विराम नहीं होगा।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log bhi bas ek dhamake ke muntazir hain jiske baad koi dusra dhamaka na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Enhen sirf aik cheekh ka intizar hai jiss mein koi tawaquff (aur dheel) nahi hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग भी बस एक धमाका के मुंतज़िर हैं जिसका बाद कोई दूसरा धमाका ना होगा
عَرَبِيوَقالوا رَبَّنا عَجِّل لَنا قِطَّنا قَبلَ يَومِ الحِسابِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा : ऐ हमारे पालनहार! हमें हमारा भाग हिसाब के दिन से पहले ही प्रदान कर दे।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh kehte hain ke aey hamare Rubb, yaum ul hisaab(hisab ke din) se pehle hi hamara hissa humein jaldi se dey dey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unhon ney kaha aey humaray rab! Humari sir-nawisht tu humen roz-e-hisab say pehlay hi day dey
Devnagri Urdu (Maududi)और ये कहते हैं के ऐ हमारे रब, यम उल हिसाब (हिसाब के दिन) से पहले ही हमारा हिसाब हमें जल्दी से दे दे
عَرَبِياصبِر عَلىٰ ما يَقولونَ وَاذكُر عَبدَنا داوودَ ذَا الأَيدِ ۖ إِنَّهُ أَوّابٌ
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हिन्दी (Al-Omari)वे जो कुछ कहते हैं उसपर सब्र करें, तथा हमारे बंदे दाऊद को याद करें, जो बड़ी शक्ति वाला था। निश्चय वह (अल्लाह की ओर) बहुत लौटने वाला था।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), sabr karo un baaton par jo yeh log banate hain, aur inke saamne hamare banday Dawood ka qissa bayan karo jo badi quwaton ka maalik tha. Har maamle mein Allah ki taraf rujoo karne wala tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aap inn ki baton per sabar keren aur humaray banday dawood (alh-e-salam) ko yaad keren jo bari qooat wala tha yaqeenan woh boht rujoo kerney wala tha
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), सब्र करो उन बातों पर जो ये लोग बनाते हैं, और इनके सामने हमारे बंदे दाऊद का किस्सा बयान करो जो बड़ी किस्मत का मालिक था. हर मामले में अल्लाह की तरफ रूजू करने वाला था
عَرَبِيإِنّا سَخَّرنَا الجِبالَ مَعَهُ يُسَبِّحنَ بِالعَشِيِّ وَالإِشراقِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने पर्वतों को उसके साथ वशीभूत कर दिया था, वे शाम तथा सुबह तस्बीह (पवित्रता गान) करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Humne pahadon ko uske saath musakkhar kar rakkha tha ke subah o shaam woh uske saath tasbeeh karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney paharon ko uss kay tabey ker rakha tha kay uss kay sath shaam ko aur subha tasbeeh khuwani keren
Devnagri Urdu (Maududi)हमने पहाड़ों को उसके साथ मुसक्कर कर रखा था के सुबह ओ शाम वो उसके साथ तस्बीह करते थे
عَرَبِيوَالطَّيرَ مَحشورَةً ۖ كُلٌّ لَهُ أَوّابٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा पक्षियों को भी, जो एकत्र किए होते। सब उसकी ओर पलटने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Parindey simat aate aur sabke sab uski tasbeeh ki taraf mutawajjeh ho jatey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur parindon ko bhi jama hoker sab kay sab uss kay zair-e-farman rehtay
Devnagri Urdu (Maududi)परिंदे सिमत आते और सबके सब उसकी तस्बीह की तरफ मुतवज्जे हो जाते थाय
عَرَبِيوَشَدَدنا مُلكَهُ وَآتَيناهُ الحِكمَةَ وَفَصلَ الخِطابِ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसके राज्य को मज़बूत किया और उसे हिकमत (नुबुव्वत) तथा निर्णायक बात कहने की क्षमता प्रदान की।
Roman Urdu (Maududi)Humne uski sultanat mazboot kardi thi, usko hikmat ata ki thi aur faislay-kun baat kehne ki salahiyat bakshi thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney uss ki saltanat ko mazboot ker diya tha aur ussay hikmat di thi aur baat ka faisla kerna
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उसकी सल्तनत मजबूत कर दी थी, उसको हिकमत अता की थी और फैसला-कुन बात कहने की सलाह बख्शी थी
عَرَبِي۞ وَهَل أَتاكَ نَبَأُ الخَصمِ إِذ تَسَوَّرُوا المِحرابَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा क्या आपके पास झगड़ने वालों का समाचार आया, जब वे दीवार फाँदकर उपासना-गृह में आ गए?
Roman Urdu (Maududi)Phir tumhein kuch khabar pahunchi hai un muqaddame walon ki jo deewaar chadh kar uske baala khaane(private chambers) mein ghus aaye thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kiya tujhay jhagra kerney walon ki (bhi) khabar mili? Jab kay woh deewar phaand ker mehrab mein aagaye
Devnagri Urdu (Maududi)फिर तुम्हें कुछ खबर मिली है उन मुकद्दमे वालों की जो दीवार चढ़ कर उसके बाला खाने (निजी चैंबर) में घुस आये थे
عَرَبِيإِذ دَخَلوا عَلىٰ داوودَ فَفَزِعَ مِنهُم ۖ قالوا لا تَخَف ۖ خَصمانِ بَغىٰ بَعضُنا عَلىٰ بَعضٍ فَاحكُم بَينَنا بِالحَقِّ وَلا تُشطِط وَاهدِنا إِلىٰ سَواءِ الصِّراطِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब वे दाऊद के पास अंदर आए, तो वह उनसे घबरा गया। उन्होंने कहा : डरिए नहीं। (हम) दो झगड़ने वाले हैं। हममें से एक ने दूसरे पर अत्याचार किया है। सो आप हमारे बीच सत्य के साथ न्याय कर दें, और अन्याय न करें, तथा हमारी सीधे मार्ग की ओर रहनुमाई करें।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh Dawood ke paas pahunche to woh unhein dekh kar ghabra gaya, unhon ne kaha “dariye nahin, hum do fareeq muqaddama hain jin mein se ek ne dusre par zyadati ki hai. Aap hamare darmiyan theek theek haqq ke saath faisla kardijiye, be-insafi na kijiye aur humein raah e raast bataiye
Roman Urdu (Junagarhi)Jab yeh (hazrat) dawood (alh-e-salam) kay pass phonchay pus yeh unn say darr gaye unhon ney kaha khof na kijiyey! Hum do fareeq muqadma hain hum mein say aik ney ziyadti ki hai pus humaray darmiyan haq kay sath faisla ker dijiyey aur na-insafi na kijiyey aur humen seedhi raah bata dijiyey
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो दाऊद के पास पहुँचे तो वो उन्हें देख कर घबरा गया, उनको ने कहा "डरिए नहीं, हम दो फरीक मुक़द्दमा हैं जिनके बीच में एक ने दूसरे पर ज़्यादा की है। आप हमारे दरमियान ठीक ठीक हक़ के साथ फैसला कर दीजिए, इन्साफ़ी ना किजीए और हमें राह ए रास्ता बताएं
عَرَبِيإِنَّ هٰذا أَخي لَهُ تِسعٌ وَتِسعونَ نَعجَةً وَلِيَ نَعجَةٌ واحِدَةٌ فَقالَ أَكفِلنيها وَعَزَّني فِي الخِطابِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यह मेरा भाई है। इसके पास निन्नानवे दुंबियाँ हैं और मेरे पास एक दुंबी है। तो इसने कहा कि इसे (भी) मुझे सौंप दे और इसने बात-चीत में मुझे दबा लिया।
Roman Urdu (Maududi)Yeh meri bhai hai ,iske paas ninanve (ninety nine) dumbiyan(ewes) hai aur mere paas sirf ek hi dumbi (ewe) hai , isne mujhse kaha ke yeh ek dumbi bhi mere hawale karde aur isne guftagu mein mujhe daba liya”
Roman Urdu (Junagarhi)(suniyey) yeh mera bhai hai iss kay pass ninnanway dunbiyan hain aur meray pass aik hi dunbi hai lekin yeh mujh say keh raha hai kay apni yeh aik bhi mujh hi ko day dey aur mujh per baat mein bari sakhti baratta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये मेरी भाई है, इसके पास निनानवे (निन्यानवे) डुम्बियां (ईवे) है और मेरे पास सिर्फ एक ही डुम्बी (ईवे) है, इसने मुझसे कहा के ये एक डुम्बी भी मेरे हवाले करदे और इसने गुफ्तगु में मुझे दबाया लिया''
☉ Sajda
عَرَبِيقالَ لَقَد ظَلَمَكَ بِسُؤالِ نَعجَتِكَ إِلىٰ نِعاجِهِ ۖ وَإِنَّ كَثيرًا مِنَ الخُلَطاءِ لَيَبغي بَعضُهُم عَلىٰ بَعضٍ إِلَّا الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ وَقَليلٌ ما هُم ۗ وَظَنَّ داوودُ أَنَّما فَتَنّاهُ فَاستَغفَرَ رَبَّهُ وَخَرَّ راكِعًا وَأَنابَ ۩
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : निःसंदेह उसने तेरी दुंबी को अपनी दुंबियों के साथ मिलाने की माँग करके तुझपर अत्याचार किया है। तथा निःसंदेह बहुत-से साझी निश्चय एक-दूसरे पर अत्याचार करते हैं। सिवाय उन लोगों के, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए और ये लोग बहुत ही कम हैं। और दाऊद ने यक़ीन कर लिया कि हमने उसकी परीक्षा ली है। अतः उसने अपने पालनहार से क्षमा याचना की, तथा सजदे में गिर गया, और (अल्लाह की ओर) वापस लौटा।
Roman Urdu (Maududi)Dawood ne jawab diya: “is shaks ne apni dumbiyon (ewes) ke saath teri dumbi mila lene ka mutalaba karke yaqeenan tujhpar zulm kiya, aur waqiya yeh hai ke mil-jhul kar saath rehne waley log aksar ek dusre par zyadatiyan karte rehte hain, bas wahi log is se bachey huey hain jo iman rakhte hain aur amal e saleh karte hain, aur aisey log kam hi hain.” (Yeh baat kehte kehte) Dawood samajh gaya ke yeh to humne dar-asal iski aazmaish ki hai, chunanche usne apne Rubb se maafi maangi aur sajde mein gir gaya aur rujoo karliya
Roman Urdu (Junagarhi)Aap ney farmaya! Iss ka apni dunbiyon kay sath teri aik dunbi mila lenay ka sawal be-shak teray upper aik zulm hai aur aksar hissay daar aur shareek (aisay hi hotay hain kay) aik doosray per zulm kertay hain siwaye unn kay jo eman laye aur jinhon ney nek amal kiyey aur aisay log boht hi kum hain aur (hazrat) dawwod (alh-e-salam) samajh gaye kay hum ney unhen aazmaya hai phir to apnay rab say istaghfaar kerney lagay aur aajzi kertay huyey gir paray aur (poori tarah) rujoo kiya
Devnagri Urdu (Maududi)दाऊद ने जवाब दिया: ''इस शक्स ने अपनी दुंबियों (ईव्स) के साथ तेरी दुंबी मिला लेने का मुतालबा करके यकीनन तुझपर जुल्म किया, और वाकिया ये है के मिल-जुल कर साथ रहने वाले लोग अक्सर एक दूसरे पर ज्यादातियां करते रहते हैं, बस वही लोग इस से बचे हुए हैं जो ईमान रखते हैं और अमल ए सालेह करते हैं, और ऐसे लोग काम ही हैं।” (ये बात कहते हैं) दाऊद समझ गया के ये तो हमने दार-असल इसकी आजमाइश की है, चुनांचे उसने अपने रब से माफ़ी मांगी और सजदे में गिर गया और रूजू कार्लिया
عَرَبِيفَغَفَرنا لَهُ ذٰلِكَ ۖ وَإِنَّ لَهُ عِندَنا لَزُلفىٰ وَحُسنَ مَآبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उसकी यह ग़लती क्षमा कर दी और निःसंदेह उसके लिए हमारे पास निश्चय बड़ी निकटता तथा अच्छा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Tab humne iska woh kasoor maaf kiya aur yaqeenan hamare haan uske liye taqarrub ka muqaam aur behtar anjaam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus hum ney bhi unn ka woh (kasoor) maaf ker diya yaqeenan woh humaray nazdeek baray martabay walay aur boht achay thikaney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)तब हमने इसका वो कसूर माफ किया और यकीनन हमारे हां उसके लिए तक़र्रब का मुकाम और बेहतर अंजाम है
عَرَبِييا داوودُ إِنّا جَعَلناكَ خَليفَةً فِي الأَرضِ فَاحكُم بَينَ النّاسِ بِالحَقِّ وَلا تَتَّبِعِ الهَوىٰ فَيُضِلَّكَ عَن سَبيلِ اللَّهِ ۚ إِنَّ الَّذينَ يَضِلّونَ عَن سَبيلِ اللَّهِ لَهُم عَذابٌ شَديدٌ بِما نَسوا يَومَ الحِسابِ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ दाऊद! हमने तुझे धरती में ख़लीफ़ा बनाया है। अतः लोगों के बीच सत्य के साथ निर्णय कर तथा इच्छा का अनुसरण न कर। अन्यथा, वह तुझे अल्लाह की राह से भटका देगी। निःसंदेह जो लोग अल्लाह की राह से भटक जाते हैं, उनके लिए कठोर यातना है, इस कारण कि वे हिसाब के दिन को भूल गए।
Roman Urdu (Maududi)(Humne ussey kaha) “Aey dawood, humne tujhey zameen mein khalifa banaya hai, lihaza tu logon ke darmiyan haqq ke saath hukumat kar, aur khwaish e nafs ki pairwi na kar ke woh tujhey Allah ki raah se bhatka degi. Jo log Allah ki raah se bhatakte hain yaqeenan unke liye sakht saza hai ke woh yaum ul hisaab ko bhool gaye.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey dawood! Hum ney tumhen zamin mein khalifa bana diya tum logon kay darmiyan haq kay sath faislay kero aur apni nafsani khuwaish ki perwi na kero werna woh tumhen Allah ki raah say bhatka deygi yaqeenan jo log Allah ki raah say bhatak jatay hain unn kay liye sakht azab hai iss liye kay unhon ney hisab kay din ko bhula diya hai
Devnagri Urdu (Maududi)(हमने उसे कहा) "ऐ दाऊद, हमने तुझे ज़मीन में ख़लीफ़ा बनाया है, लिहाज़ा तू लोगों के दरमियान हक़ के साथ हुकूमत कर, और ख्वाहिश ए नफ़्स की जोड़ी ना कर के वो तुझ अल्लाह की राह से भटक जाएगी. जो लोग अल्लाह की राह से भटकते हैं यकीनन उनके लिए सख्त सजा है के वो यम उल हिसाब को भूल गए।”
عَرَبِيوَما خَلَقنَا السَّماءَ وَالأَرضَ وَما بَينَهُما باطِلًا ۚ ذٰلِكَ ظَنُّ الَّذينَ كَفَروا ۚ فَوَيلٌ لِلَّذينَ كَفَروا مِنَ النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने आकाश और धरती को तथा उन दोनों के बीच की चीज़ों को व्यर्थ नहीं पैदा किया। यह तो उन लोगों का गुमान है, जिन्होंने कुफ़्र किया। तो जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उनके लिए आग के रूप में बड़ा विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Humne is aasmaan aur zameen ko, aur is duniya ko jo inke darmiyan hai , fizool paida nahin kardiya hai, yeh to un logon ka gumaan hai jinhon ne kufr kiya hai aur aisey kaafiron ke liye barbadi hai jahannum ki aag se
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney aasman-o-zamin aur inn kay darmiyan ki cheezon ko na-haq peda nahi kiya yeh guman to kafiron ka hai so kafiron kay liye kharabi hai aag ki
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इस आसमां और ज़मीन को, और इस दुनिया को जो इनके दरमियान हैं, फ़िज़ूल पैदा नहीं करदिया है, ये तो उन लोगों का गुमान है जिन्हों ने कुफ्र किया है और ऐसी काफिरों के लिए बर्बादी है जहन्नुम की आग से
عَرَبِيأَم نَجعَلُ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ كَالمُفسِدينَ فِي الأَرضِ أَم نَجعَلُ المُتَّقينَ كَالفُجّارِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या हम उन लोगों को जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, धरती में बिगाड़ पैदा करने वालों के समान कर देंगे? या क्या हम परहेज़गारों को दुराचारियों के समान कर देंगे?
Roman Urdu (Maududi)Kya hum un logon ko jo iman laatey hain aur neik aamaal karte hain aur unko jo zameen mein fasad karne waley hain yaksan kardein? Kya muttaqiyon ko hum faajiron(wicked) jaisa kardein
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya hum unn logon ko jo eman laye aur nek amal kiye unn kay barabar ker den gay jo (humesha) zamin mein fasad machatay rahey ya perhezgaron ko badkaron jesa ker den gay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हम उन लोगों को जो ईमान लाते हैं हैं और कोई अमल करते हैं और उनको जो ज़मीन में फ़साद करने वाले हैं यक्सन करदें? क्या मुत्तक़ियों को हम फाजिरों (दुष्ट) जैसा कर दें
عَرَبِيكِتابٌ أَنزَلناهُ إِلَيكَ مُبارَكٌ لِيَدَّبَّروا آياتِهِ وَلِيَتَذَكَّرَ أُولُو الأَلبابِ
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हिन्दी (Al-Omari)यह (क़ुरआन) एक पुस्तक है, हमने इसे आपकी ओर उतारा है, बहुत बरकत वाली है, ताकि वे इसकी आयतों पर विचार करें, और ताकि बुद्धि वाले लोग (इससे) उपदेश ग्रहण करें।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ek badi barakat wali kitaab hai jo (aey Muhammad) humne tumhari taraf nazil ki hai taa-ke yeh log iski aayat par gaur karein aur aqal o fikr rakhne wale issey sabaq lein
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh ba-barkat kitab hai jissay hum ney aap ki taraf iss liye nazil farmaya hai kay log iss ki aayaton per ghor keren aur aqalmand iss say naseehat hasil keren
Devnagri Urdu (Maududi)ये एक बड़ी बरकत वली किताब है जो (ऐ मुहम्मद) हमने तुम्हारी तरफ नाज़िल की है ता-के ये लोग इसकी आयतें पर गौर करें और अक़ल ओ फ़िक्र रखने वाले इसे सबक लें
عَرَبِيوَوَهَبنا لِداوودَ سُلَيمانَ ۚ نِعمَ العَبدُ ۖ إِنَّهُ أَوّابٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने दाऊद को सुलैमान (नामक पुत्र) प्रदान किया। वह बहुत अच्छा बंदा था। निःसंदेह वह (अल्लाह की ओर) बहुत लौटने वाला था।
Roman Urdu (Maududi)Aur Dawood ko humne Sulaiman (jaisa beta) ata kiya, behtareen banda, kasrat se apne Rubb ki taraf rujoo karne wala
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney dawwod ko suleman (naami farzand) ata farmaya jo bara acha bandah tha aur beyhad rujoo kerney wala tha
Devnagri Urdu (Maududi)और दाऊद को हमने सुलेमान (जैसा बेटा) अता किया, बेहतर बंदा, कसरत से अपने रब की तरफ रूजू करने वाला
عَرَبِيإِذ عُرِضَ عَلَيهِ بِالعَشِيِّ الصّافِناتُ الجِيادُ
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हिन्दी (Al-Omari)जब उसके समक्ष संध्या के समय असली तेज़गाम घोड़े प्रस्तुत किए गए।
Roman Urdu (Maududi)Kaabil e zikr hai woh mauqa jab shaam ke waqt us ke saamne khoob sidhey (well-trained) huey tez-rau(running) ghoday (horses) pesh kiye gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Jab unkay samney shaam kay waqt tez-ro khasay ghoray paish kiye gaye
Devnagri Urdu (Maududi)काबिल ए जिक्र है वो मौका जब शाम के वक्त हमारे सामने खूब सीधे (अच्छी तरह से प्रशिक्षित) हुए तेज-रौ (दौड़ना) घोड़े (घोड़े) पेश किए गए
عَرَبِيفَقالَ إِنّي أَحبَبتُ حُبَّ الخَيرِ عَن ذِكرِ رَبّي حَتّىٰ تَوارَت بِالحِجابِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उसने कहा : मैंने इस धन (घोड़ों) के प्रेम को अपने पालनहार की याद पर प्राथमिकता दी। यहाँ तक कि सूरज ग़ायब हो गया।
Roman Urdu (Maududi)To usne kaha “maine is maal ki muhabbat apne Rubb ki yaad ki wajah se ikhtiyar ki hai” yahan tak ke jab woh ghoday (horses) nigaah se ojhal ho gaye
Roman Urdu (Junagarhi)To kehney lagay mein ney apnay perwerdigar ki yaad per inn ghoron ki mohabbat ko tarjeeh di yahan tak kay (aftab) chup gaya
Devnagri Urdu (Maududi)तो उसने कहा "मैंने इस माल की मुहब्बत अपने रब की याद की वजह से इख्तियार की है" यहां तक ​​के जब वो घोड़े (घोड़े) निगाह से ओझल हो गए
عَرَبِيرُدّوها عَلَيَّ ۖ فَطَفِقَ مَسحًا بِالسّوقِ وَالأَعناقِ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्हें मेरे पास वापस लाओ। फिर वह उनकी पिंडलियों तथा गर्दनों पर (तलवार) फेरने लगे।
Roman Urdu (Maududi)To (usne hukum diya ke) inhein mere paas wapas laao, phir laga unki pindliyon (legs) aur gardano (necks) par haath pherne
Roman Urdu (Junagarhi)Unn (ghoron) ko doobara meray samney lao! Phir to pindliyon aur gardano per hath pherna shoroo ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)तो (उसने हुकुम दिया के) इन्हें मेरे पास वापस लाओ, फिर लगा उनकी पिंडलियां (पैर) और गर्दन (गर्दन) पर हाथ फेरने
عَرَبِيوَلَقَد فَتَنّا سُلَيمانَ وَأَلقَينا عَلىٰ كُرسِيِّهِ جَسَدًا ثُمَّ أَنابَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने सुलैमान की परीक्षा ली और उसके सिंहासन पर एक शरीर डाल दिया। फिर वह अल्लाह की ओर पलटा।
Roman Urdu (Maududi)Aur (dekho ke) Sulaiman ko bhi humne aazmaish mein daala aur uski kursi par ek jasad (mere body/body without life) laa kar daal diya phir usne rujoo kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney suleman (alh-e-salam) ki aazmaeesh ki aur unn kay takhat per aik jism daal diya phir uss ney rujoo kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और (देखो के) सुलेमान को भी हमने आजमाइश में डाला और उसकी कुर्सी पर एक जड़ (मात्र शरीर/शरीर बिना जान के) ला कर डाल दिया फिर उसने रूजू किया
عَرَبِيقالَ رَبِّ اغفِر لي وَهَب لي مُلكًا لا يَنبَغي لِأَحَدٍ مِن بَعدي ۖ إِنَّكَ أَنتَ الوَهّابُ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मुझे क्षमा कर दे तथा मुझे ऐसा राज्य प्रदान कर, जो मेरे बाद किसी के लिए उचित न हो। निश्चय तू ही बड़ा दाता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur kaha ke “aey mere Rubb , mujhey maaf karde aur mujhey woh baadshahi de jo mere baad kisi ke liye sazawar na ho, beshak tu hi asal daata hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Kaha kay aey meray rab! Mujhay bakhsh day aur mujhay aisa mulk ata farma jo meray siwa kissi (shaks) kay laeeq na ho tu bara hi denay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और कहा के “ऐ मेरे रब, मुझे माफ” करदे और मुझे वो बादशाही दे जो मेरे बाद किसी के लिए सजावर ना हो, क्योंकि तू ही असल दाता है”
عَرَبِيفَسَخَّرنا لَهُ الرّيحَ تَجري بِأَمرِهِ رُخاءً حَيثُ أَصابَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने वायु को उसके लिए वशीभूत कर दिया, जो उसके आदेश से कोमलता से चलती थी, जहाँ वह जाना चाहता।
Roman Urdu (Maududi)Tab humne uske liye hawa ko musakkhar kardiya jo uske hukum se narmi ke saath chalti thi jidhar woh chahta tha
Roman Urdu (Junagarhi)Pus hum ney hawa ko unn kay ma-tehat ker diya woh aap kay hukum say jahan aap chahtay narmi say phoncha diya kerti thi
Devnagri Urdu (Maududi)तब हमने उसके लिए हवा को मुस्कुरा कर दिया जो उसके हुकुम से नरमी के साथ चलती थी जिधर वो चाहता था
عَرَبِيوَالشَّياطينَ كُلَّ بَنّاءٍ وَغَوّاصٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा शैतानों को, (भी वशीभूत कर दिया) जो हर प्रकार के कुशल निर्माता तथा माहिर ग़ोताख़ोर थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur shayateen ko musakkhar kardiya, har tarah ke meimaar(builders) aur gotakhor (divers)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (taqatwar) jinnat ko bhi (unn ka ma-tehat ker diya) her imarat bananey walay ko aur ghota khor ko
Devnagri Urdu (Maududi)और शयातीन को मुस्कुरा कर दिया, हर तरह के मइमार (बिल्डर) और गोताखोर (गोताखोर)
عَرَبِيوَآخَرينَ مُقَرَّنينَ فِي الأَصفادِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा कुछ दूसरों को भी (वशीभूत कर दिया), जो बेड़ियों में इकट्ठे जकड़े हुए थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur dusre jo paband e salasil thay(bound with chains)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur doosray jinnat ko bhi jo zanjeeron mein jakray rehtay
Devnagri Urdu (Maududi)और दूसरे जो पाबंद ए सलासिल थे (जंजीरों से बंधे)
عَرَبِيهٰذا عَطاؤُنا فَامنُن أَو أَمسِك بِغَيرِ حِسابٍ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ सुलैमान!) यह हमारा प्रदान है। अब उपकार करो अथवा रोक रखो, कोई हिसाब न होगा।
Roman Urdu (Maududi)(humne ussey kaha) “ yeh hamari bakshish hai, tujhey ikhtiyar hai jisey chahe de aur jissey chahe rok le, koi hisaab nahin”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hai humara atiya abb tu ehsan ker ya rol rakh kuch hisab nahi
Devnagri Urdu (Maududi)(हमने उसे कहा) "ये हमारी बख्शीश है, तुझे इख्तियार है जिसे चाहे दे और जिसे चाहे रोक ले, कोई हिसाब नहीं"
عَرَبِيوَإِنَّ لَهُ عِندَنا لَزُلفىٰ وَحُسنَ مَآبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह उसके लिए हमारे पास निश्चय बड़ी निकटता तथा अच्छा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan uske liye hamare haan taqarrub ka muqaam aur behtar anjaam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay liye humaray pass bara taqarrub hai aur boht acha thikana hai
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन उसके लिए हमारे हां तकरारब का मुकाम और बेहतर अंजाम है
عَرَبِيوَاذكُر عَبدَنا أَيّوبَ إِذ نادىٰ رَبَّهُ أَنّي مَسَّنِيَ الشَّيطانُ بِنُصبٍ وَعَذابٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमारे बंदे अय्यूब को याद करो। जब उसने अपने पालनहार को पुकारा कि निःसंदेह शैतान ने मुझे दुःख तथा कष्ट पहुँचाया है।
Roman Urdu (Maududi)Aur hamare banday Ayub ka zikar karo, jab usne apne Rubb ko pukara ke shaytaan ne mujhey sakht takleef aur azaab mein daal diya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur humaray banday ayub (alh-e-salam) ka (bhi) zikar ker jabkay uss ney apnay rab ko pukara kay mujhay shetan ney ranj aur dukh phonchaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारे बंदे अयूब का जिक्र करो, जब उसने अपने रुब को पुकारा के शैतान ने मुझे सख्त तकलीफ और अजाब में डाल दिया है
عَرَبِياركُض بِرِجلِكَ ۖ هٰذا مُغتَسَلٌ بارِدٌ وَشَرابٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अपना पाँव (धरती पर) मार। यह स्नान का तथा पीने का शीतल जल है।
Roman Urdu (Maududi)(Humne usey hukum diya) apna paaon (leg) zameen par maar, yeh hai thanda pani nahane ke liya aur peene ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Apna paaon maaro yeh nahaney ka thanda aur peenay ka paani hai
Devnagri Urdu (Maududi)(हमने उसे हुकुम दिया) अपना पांव (पैर) ज़मीन पर मार, ये है ठंडा पानी नहाने के लिया और पीने के लिए
عَرَبِيوَوَهَبنا لَهُ أَهلَهُ وَمِثلَهُم مَعَهُم رَحمَةً مِنّا وَذِكرىٰ لِأُولِي الأَلبابِ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसे उसके घर वाले दे दिए तथा उनके साथ उतने और भी। हमारी ओर से दया के रूप में और बुद्धि वालों के लिए उपदेश के रूप में।
Roman Urdu (Maududi)Humne usey uske ahal o ayaal wapas diye aur unke saath utnay hi aur, apni taraf se rehmat ke taur par, aur aqal o fikar rakhne walon ke liye dars ke taur par
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney ussay uss ka poora kunba ata farmaya bulkay utna hi aur bhi issi kay sath apni (khaas) rehmat say aur aqalmandon ki naseehat kay liye
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उसे उसके अहल ओ अयाल वापस दिये और उनके साथ उतने ही और, अपनी तरफ से रहमत के तौर पर, और अक़ल ओ फिकर रखने वालों के लिए दर्स के तौर पर
عَرَبِيوَخُذ بِيَدِكَ ضِغثًا فَاضرِب بِهِ وَلا تَحنَث ۗ إِنّا وَجَدناهُ صابِرًا ۚ نِعمَ العَبدُ ۖ إِنَّهُ أَوّابٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अपने हाथ में तिनकों का एक मुट्ठा ले और उससे मार दे और अपनी क़सम न तोड़। निःसंदेह हमने उसे धैर्य करने वाला पाया, अच्छा बंदा था। निश्चय वह अल्लाह की तरफ़ बहुत ज़्यादा लौटने वाला था।
Roman Urdu (Maududi)(Aur humne issey kaha) tinkon ka ek mutta lay (bundle of rushes) aur ussey maar de, apni kasam na todh, humne usey saabir paya, behtareen banda, apne Rubb ki taraf bahut rujoo karne wala
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apnay hath mein tinko ka aik mutha (jhaaro) ley ker maar day aur qasam ka khilaf na ker sach to yeh hai kay hum ney ussay bara sabir banda paya woh bara nek banda tha aur bari hi raghbat rakhney wala
Devnagri Urdu (Maududi)(और हमने इसे कहा) तिनकों का एक मुत्ता ले (बंडल ऑफ रशेस) और उसे मार दे, अपनी कसम न तोड़, हमने उसे साबिर पाया, बहतरीन बंदा, अपने रब की तरफ बहुत रूजू करने वाला
عَرَبِيوَاذكُر عِبادَنا إِبراهيمَ وَإِسحاقَ وَيَعقوبَ أُولِي الأَيدي وَالأَبصارِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमारे बंदों इबराहीम और इसहाक़ और याक़ूब को याद करो, जो हाथों (शक्ति) वाले और आँखों (अंतर्दृष्टि) वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur hamare bandon , Ibrahim aur Ishaq aur Yaqub ka zikar karo badi quwwat e amail rakhne wale aur deedhawar (strength and vision)log thay
Roman Urdu (Junagarhi)Humaray bandon ibarhim, ishaq aur yaqoob (al-e-heem-us-salam) ka bhi zikar kero jo hathon aur aankhon walay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारे बंद, इब्राहिम और इशाक और याकूब का जिक्र करो बड़ी कुव्वत ए अमेल रखने वाले और दीधावर (ताकत और दूरदर्शिता)लोग थे
عَرَبِيإِنّا أَخلَصناهُم بِخالِصَةٍ ذِكرَى الدّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)हमने उन्हें एक खास विशेषता के साथ चुन लिया, जो असल घर (आख़िरत) की याद है।
Roman Urdu (Maududi)Humne unko ek khaalis siffat ki bina par barguzida kiya tha, aur woh daar-e-aakhirat ki yaad thi
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney unhen aik khaas baat yani aakhirat ki yaad kay sath makhsoos ker diya tha
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उनको एक खाली सिफत की बिना पर बरगुजिदा किया था, और वो दार-ए-आखिरत की याद थी
عَرَبِيوَإِنَّهُم عِندَنا لَمِنَ المُصطَفَينَ الأَخيارِ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह वे हमारे निकट चुने हुए बेहतरीन लोगों में से थे।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan hamare haan unka shumaar chunay huey neik ashkhaas(excellent ones) mein hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh sab humaray nazdeek bargazeedah aur behtareen log thay
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन हमारे हां उनका मशहूर चुने हुए नेक अशखास (उत्कृष्ट वाले) में हैं
عَرَبِيوَاذكُر إِسماعيلَ وَاليَسَعَ وَذَا الكِفلِ ۖ وَكُلٌّ مِنَ الأَخيارِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप इसमाईल, अल-यसअ् एवं ज़ुल्-किफ़्ल को याद करें और ये सब बेहतरीन लोगों में से थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Ismail aur Al-yasa(Elisha) aur Zulkifl ka zikr karo, yeh sab neik logon mein se thay
Roman Urdu (Junagarhi)Ismail, yasa aur zulkifil (al-e-heem-us-salam) ka bhi zikar ker dijiye. Yeh sab behtareen log thay
Devnagri Urdu (Maududi)और इस्माइल और अल-यासा (एलीशा) और ज़ुल्किफ़ल का ज़िक्र करो, ये सब दूसरे लोगों में से थे
عَرَبِيهٰذا ذِكرٌ ۚ وَإِنَّ لِلمُتَّقينَ لَحُسنَ مَآبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)यह एक उपदेश है। तथा निश्चय ही डर रखने वालों के लिए अच्छा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ek zikar tha. (Ab suno ke) muttaqi logon ke liye yaqeenan behtareen thikana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh naseehat hai aur yaqeen mano kay perhezgaron ki bari achi jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये एक ज़िक्र था। (अब सुनो के) मुत्तक़ी लोगों के लिए यक़ीनन बहतरीन ठिकाना है
عَرَبِيجَنّاتِ عَدنٍ مُفَتَّحَةً لَهُمُ الأَبوابُ
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हिन्दी (Al-Omari)सदैव रहने के बाग़, इस हाल में कि उनके लिए द्वार पूरे खोले हुए होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Hamesha rehne wali jannatein jinke darwaze unke liye khuley hongey
Roman Urdu (Junagarhi)(yani hameshgi wali) jannaten jin kay darwazay unn kay liye khilay huyey hain
Devnagri Urdu (Maududi)हमेशा रहने वाली जन्नतें जिनके दरवाजे उनके लिए खुले होंगे
عَرَبِيمُتَّكِئينَ فيها يَدعونَ فيها بِفاكِهَةٍ كَثيرَةٍ وَشَرابٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उनमें तकिए लगाए हुए होंगे। वे उनमें बहुत-से फल तथा पेय मँगवा रहे होंगे।।
Roman Urdu (Maududi)Unmein woh takiye lagaye baithay hongey, khoob khoob fawake aur mashroobat (abundant fruit and drinks) talab kar rahey hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Jin mein ba-faraghat takkiyey lagaye bethay huyey tarah tarah kay meway aur qisam qisam ki sharabon ki farmaeesh ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)उनमें वो तकिये लगाये बैठे होंगे, ख़ूब ख़ूब फ़वाके और मशरूबत (प्रचुर मात्रा में फल और पेय) तालाब कर रहे होंगे
عَرَبِي۞ وَعِندَهُم قاصِراتُ الطَّرفِ أَترابٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके पास निगाहें सीमित रखने वाली, एक-सी आयु वाली स्त्रियाँ होंगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur unke paas sharmili humsin biwiyan hongi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn kay pass neechi nazron wali hum umar hooren hongi
Devnagri Urdu (Maududi)और उनके पास शर्मीली हम्सिन बीवियां होंगी
عَرَبِيهٰذا ما توعَدونَ لِيَومِ الحِسابِ
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हिन्दी (Al-Omari)यह है जिसका हिसाब के दिन के लिए तुमसे वादा किया जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh chezein hain jinhein hisaab ke din ata karne ka tumse wada kiya ja raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hai jiss ka wada tum say hisab kay din kay liye kiya jata tha
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो चीजें हैं जिनमें हिसाब के दिन अता करने का तुमसे वादा किया जा रहा है
عَرَبِيإِنَّ هٰذا لَرِزقُنا ما لَهُ مِن نَفادٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यह हमारी जीविका है, जो कभी समाप्त न होगी।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hamara rizq hai jo kabhi khatam honaywala nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak roziyan (khaas) humara atiya hain jin ka kabhi khatma hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ये हमारा रिज्क है जो कभी खत्म होनेवाला नहीं
عَرَبِيهٰذا ۚ وَإِنَّ لِلطّاغينَ لَشَرَّ مَآبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)यह है (डरने वालो का बदला), और निःसंदेह सरकशों के लिए निश्चय बहुत बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh to hai muttaqiyon ka anjaam aur sarkashon ke liye badhtareen (evil) thikana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh to hui jaza (yad rakho kay) sirkashon kay liye bari buri jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये है मुत्तक़ियों का अंजाम और व्यंग्यों के लिए बद्तरीन (बुराई) ठिकाना है
عَرَبِيجَهَنَّمَ يَصلَونَها فَبِئسَ المِهادُ
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हिन्दी (Al-Omari)(वह) जहन्नम है, वे उसमें प्रवेश करेंगे। सो वह बहुत बुरा बिछौना है।
Roman Urdu (Maududi)Jahannum jismein woh jhulse jayenge. Bahut hi buri qayamgaah
Roman Urdu (Junagarhi)Dozakh hai jiss mein woh jayen gay (aah) kiya hi bura bichona hai
Devnagri Urdu (Maududi)जहन्नुम जिसमें वो झुलस जाएंगे। बहुत ही बुरी क़यामगाह
عَرَبِيهٰذا فَليَذوقوهُ حَميمٌ وَغَسّاقٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यह है (सज़ा), सो वे उसे चखें, खौलता पानी और पीप।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hai unke liye, pas woh maza chakhein khautley (boiling) huey pani aur peep lahu (pus)
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hai pus issay chakhen garum paani aur peep
Devnagri Urdu (Maududi)ये है उनके लिए, पास वो मजा चखें खौटले (उबलते हुए) हुए पानी और पीप लहू (मवाद)
عَرَبِيوَآخَرُ مِن شَكلِهِ أَزواجٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इसी प्रकार की कुछ अन्य विभिन्न यातनाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur isi qisam ki dusri talkhiyon ka
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kay ilawa aur tarah tarah kay azab
Devnagri Urdu (Maududi)और इसी क़िस्म की दूसरी तल्खियों का
عَرَبِيهٰذا فَوجٌ مُقتَحِمٌ مَعَكُم ۖ لا مَرحَبًا بِهِم ۚ إِنَّهُم صالُو النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)यह एक जत्था है, जो तुम्हारे साथ घुसता चला आने वाला है। उनका कोई स्वागत नहीं। निश्चय ये जहन्नम में प्रवेश करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)(woh jahannum ki taraf apne pairawon ko aatey dekh kar aapas mein kahenge) “Yeh ek lashkar tumhare paas ghusa chala aa raha hai, koi khushamadeed (welcome) inke liye nahin hai, yeh aag mein jhulasne waley hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh aik qom hai jo tumharay sath (aag mein) janey wali hai koi khush aamdeed unn kay liye nahi hai yehi to jahannum mein janey walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(वो जहन्नुम की तरफ अपने जोड़े को आते देख कर आपस में कहेंगे) "ये एक लश्कर तुम्हारे पास घुसा चला आ रहा है, कोई खुशामदीद (स्वागत) इनके लिए नहीं है, ये आग में झुलसने वाले हैं"
عَرَبِيقالوا بَل أَنتُم لا مَرحَبًا بِكُم ۖ أَنتُم قَدَّمتُموهُ لَنا ۖ فَبِئسَ القَرارُ
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हिन्दी (Al-Omari)वे उत्तर देंगे : बल्कि तुम हो, तुम्हारा कोई स्वागत नहीं। तुम ही इसे हमारे आगे लाए हो। सो यह बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Woh unko jawab denge “ nahin balke tum hi jhulse ja rahe ho, koi khair maqdam tumhare liye nahin. Tumhi to yeh anjaam hamare aagey laye ho. Kaisi buri hai yeh jaaye qaraar”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kahen gay bulkay tum hi ho jin kay liye koi khush amdeed nahi hai tum hi ney to issay pehlay hi say humaray samney laa rakha tha pus rehney ki bari buri jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो उनको जवाब देंगे " नहीं बलके तुम ही झुलसे जा रहे हो, कोई खैर मकसद तुम्हारे लिए नहीं ये अंजाम हमारे आगे लाये हो। कैसी बुरी है ये जाए क़रार”
عَرَبِيقالوا رَبَّنا مَن قَدَّمَ لَنا هٰذا فَزِدهُ عَذابًا ضِعفًا فِي النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)(फिर) वे कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! जो इसे हमारे आगे लाया है, तू उसे जहन्नम में दोगुनी यातना दे।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh kahenge “Aey hamare Rubb, jisne humein is anjaam ko pahunchane ka bandobast kiya usko dozakh ka dohra azaab de”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kahen gay aey humaray rab! Jiss ney (kufur ki rasam) humaray liye pehlay say nikali ho uss kay haq mein jahannum ki dugni saza kerday
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो कहेंगे “ऐ हमारे रब, जिसने हमें इस अंजाम को पाने का बंदोबस्त किया उसे दोज़ख का दोहरा अज़ाब दे”
عَرَبِيوَقالوا ما لَنا لا نَرىٰ رِجالًا كُنّا نَعُدُّهُم مِنَ الأَشرارِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे कहेंगे : हमें क्या हुआ कि हम उन लोगों को नहीं देख रहे हैं, जिनकी गणना हम बुरे लोगों में किया करते थे?
Roman Urdu (Maududi)Aur woh aapas mein kahenge “kya baat hai, hum un logon ko kahin nahin dekhte jinehin hum duniya mein bura samajte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jahannumi kahen gay kiya baat hai kay woh log humen dikhaee nahi detay jinhen hum buray logon mein shumar kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और वो आपस में कहेंगे “क्या बात है, हम उन लोगों को कहीं नहीं देखते जिन्हें हम कहते हैं” दुनिया में बुरा समझे थे
عَرَبِيأَتَّخَذناهُم سِخرِيًّا أَم زاغَت عَنهُمُ الأَبصارُ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या हमने उन्हें मज़ाक़ बनाए रखा, या हमारी आँखें उनसे फिर गई हैं?
Roman Urdu (Maududi)Hunme yunhi unka mazaaq bana liya tha, ya woh kahin nazaron se ojhal hain?”
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya hum ney hi unn ka mazaq bana rakha tha ya humari nigahen unn say hat gaee hain
Devnagri Urdu (Maududi)हमने यूं ही उनका मज़ाक बना लिया था, या वो कहीं नज़रों से ओझल हैं?”
عَرَبِيإِنَّ ذٰلِكَ لَحَقٌّ تَخاصُمُ أَهلِ النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यह जहन्नमियों का आपस में झगड़ना निश्चय सत्य है।
Roman Urdu (Maududi)Beshak yeh baat sacchi hai, ehle dozakh mein yahi kuch jhagde honay waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeen jano kay dozakhiyon ka yeh jhagra zaroor hi hoga
Devnagri Urdu (Maududi)बेशक ये बात सच्ची है, एहले दोज़ख में यहीं कुछ झगड़े होने वाले हैं
عَرَبِيقُل إِنَّما أَنا مُنذِرٌ ۖ وَما مِن إِلٰهٍ إِلَّا اللَّهُ الواحِدُ القَهّارُ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें : मैं तो मात्र एक डराने वाला हूँ, तथा अल्लाह के सिवा कोई (सच्चा) पूज्य नहीं, जो एक है, परम प्रभुत्वशाली है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) insey kaho, “ main to bas khabardar kardene wala hoon. Koi haqeeqi mabood nahin magar Allah, jo yakta hai, sab par gaalib
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! Kay mein to sirf khabaar kerney wala hun aur ba-juz Allah wahid ghalib kay aur koi laeeq ibadat nahi
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) इनसे कहो, "मैं तो बस ख़बरदार करने वाला हूं। कोई हक़ीक़ी माबूद नहीं मगर अल्लाह, जो जानता है, सब पर गालिब
عَرَبِيرَبُّ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَما بَينَهُمَا العَزيزُ الغَفّارُ
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हिन्दी (Al-Omari)जो आकाशों का तथा धरती का पालनहार है और उन चीज़ों का जो उन दोनों के बीच है, सब पर प्रभुत्वशाली, अत्यंत क्षमाशील है।
Roman Urdu (Maududi)Aasmaano aur zameen ka maalik aur un saari cheezon ka maalik jo inke darmiyan hain, zabardast aur darguzar karne wala”
Roman Urdu (Junagarhi)Jo perwerdigar hai aasmano ka aur zamin ka aur jo kuch inn kay darmiyan hai woh zabardast aur bara bakhsney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)आसमानों और ज़मीन का मालिक और उन सारी चीज़ों का मालिक जो इनके दरमियान हैं, ज़बरदस्त और दरगुज़ार करने वाला”
عَرَبِيقُل هُوَ نَبَأٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि वह एक बहुत बड़ी सूचना है।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho “ yeh ek badi khabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye kay yeh boht bari khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो “ ये एक बड़ी खबर है
عَرَبِيأَنتُم عَنهُ مُعرِضونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिससे तुम मुँह फेरने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Jisko sunkar tum mooh pherte ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss say tum be-parwah ho rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)जिसको सुनकर तुम मुँह फेरते हो”
عَرَبِيما كانَ لِيَ مِن عِلمٍ بِالمَلَإِ الأَعلىٰ إِذ يَختَصِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)मुझे उच्च सभा (मलए आ'ला) का कभी कुछ ज्ञान नहीं, जब वे वाद-विवाद करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Insey kaho) “Mujhey us waqt ki koi khabar na thi jab mala-e-aala (high council) mein jhagda ho raha tha
Roman Urdu (Junagarhi)Mujhay unn buland qadar farishton ki (baat cheet ka) koi ilm hi nahi jabkay woh takraar ker rahey thay
Devnagri Urdu (Maududi)(इनसे कहो) “मुझसे वक़्त की कोई ख़बर ना थी जब माला-ए-आला (उच्च परिषद) में झगड़ा हो रहा था
عَرَبِيإِن يوحىٰ إِلَيَّ إِلّا أَنَّما أَنا نَذيرٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)मेरी ओर तो मात्र इसलिए वह़्य (प्रकाशना) की जाती है कि मैं खुला सचेत करने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Mujhko to wahee (revelation/inspiration) ke zariye se yeh baatein sirf isliye batayi jaati hain ke main khula khula khabardar karne wala hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Meri taraf faqat yehi wahee ki jati hai kay mein to saaf saaf aagah ker denay wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)मुझको तो वही (खुलासा/प्रेरणा) के ज़रिये से ये बातें सिर्फ इसलिए बताई जाती हैं कि मैं खुला-खुला ख़बरदार करने वाला हूं”
عَرَبِيإِذ قالَ رَبُّكَ لِلمَلائِكَةِ إِنّي خالِقٌ بَشَرًا مِن طينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जब आपके पालनहार ने फ़रिश्तों से कहा : निःसंदेह मैं मिट्टी से एक मनुष्य पैदा करने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Jab tere Rubb ne farishton se kaha “main mitti se ek bashar banane wala hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay aap kay rab ney farishton say irshad farmaya kay mein mitti say insan ko peda kerney wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)जब तेरे रब ने फ़रिश्तों से कहा “मैं मिट्टी से एक बशर बनाने वाला हूं
عَرَبِيفَإِذا سَوَّيتُهُ وَنَفَختُ فيهِ مِن روحي فَقَعوا لَهُ ساجِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो जब मैं उसे पूरा बना चुकूँ और उसमें अपनी आत्मा फूँक दूँ, तो तुम उसके सामने सजदा करते हुए गिर जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab main usey puri tarah bana doon aur usmein apni rooh phoonk doon to tum uske aagey sajde mein gir jao”
Roman Urdu (Junagarhi)So jab mein ussay theek thaak kerlon aur uss mein apni rooh phoonk don to tum sab uss kay samney sajjday mein gir parna
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब मैं उसे पूरी तरह बना दूं और उसमें अपनी रूह फूंक दूं तो तुम उसके आगे सजदे में गिर जाओ”
عَرَبِيفَسَجَدَ المَلائِكَةُ كُلُّهُم أَجمَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो सब के सब फ़रिश्तों ने सजदा किया।
Roman Urdu (Maududi)Is hukum ke mutaabiq farishtey sab ke sab sajde mein gir gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Chunacha tamam farishton ney sajjdah kiya
Devnagri Urdu (Maududi)इस हुकुम के मुताबिक फरिश्ते सब के सब सजदे में गिर गए
عَرَبِيإِلّا إِبليسَ استَكبَرَ وَكانَ مِنَ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)सिवाय इबलीस के। उसने अभिमान किया और काफ़िरों में से हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Magar Iblis ne apni badayi ka ghamand kiya aur woh kaafiron mein se ho gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Magar iblees ney (na kiya) uss ney takabbur kiya aur woh tha kafiron mein say
Devnagri Urdu (Maududi)मगर इब्लीस ने अपनी बदाई का घमंड किया और वो काफिरों में से हो गया
عَرَبِيقالَ يا إِبليسُ ما مَنَعَكَ أَن تَسجُدَ لِما خَلَقتُ بِيَدَيَّ ۖ أَستَكبَرتَ أَم كُنتَ مِنَ العالينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) कहा : ऐ इबलीस! तूझे किस चीज़ ने रोका कि तू उसके लिए सजदा करे जिसे मैंने अपने दोनों हाथों से बनाया? क्या तू बड़ा बन गया, या तू था ही ऊँचे लोगों में से?
Roman Urdu (Maududi)Rubb ne farmaya “Aey Iblis, tujhey kya cheez usko sajda karne se maanay hui jisey maine apne dono haathon se banaya hai? Tu bada ban raha hai ya tu hai hi kuch unchey darje ki hastiyon mein se?”
Roman Urdu (Junagarhi)(Allah Taalaa ney) farmaya aey iblees! Tujhay issay sajjdah kerney say kiss cheez ney roka jissay mein ney apnay hathon say peda kiya kiya tu kuch ghamand mein aagaya hai? Ya tu baray darjay walon mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)रब ने फरमाया “ऐ इब्लीस, तुझे क्या चीज उसको सजदा करने से मनाए हुई जिसने अपने दोनों हाथों से बनाया है? तू बड़ा बन रहा है या तू ही कुछ ऊंचे दर्जे की हस्तियों में से है?”
عَرَبِيقالَ أَنا خَيرٌ مِنهُ ۖ خَلَقتَني مِن نارٍ وَخَلَقتَهُ مِن طينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : मैं उससे बेहतर हूँ। तूने मुझे आग से पैदा किया और उसे मिट्टी से पैदा किया।
Roman Urdu (Maududi)Usne jawab diya “main ussey behtar hoon , aapne mujhko aag se paida kiya hai aur isko mitti se”
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney jawab diya mein iss say behtar hun tu ney mujhay aag say banaya aur iss mitti say banaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसने जवाब दिया "मैं उसे बेहतर हूं, आपने मुझको आग से पैदा किया है और इसको मिट्टी से"
عَرَبِيقالَ فَاخرُج مِنها فَإِنَّكَ رَجيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) कहा : फिर तू यहाँ से निकल जा। निःसंदेह तू धुत्कारा हुआ है।
Roman Urdu (Maududi)Farmaya “ accha to yahan se nikal ja , tu mardood hai
Roman Urdu (Junagarhi)Irshad hua kay tu yahan say nikal ja tu mardood hua
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया " अच्छा तो यहां से निकल जा, तू मरदूद है
عَرَبِيوَإِنَّ عَلَيكَ لَعنَتي إِلىٰ يَومِ الدّينِ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह तुझपर बदले (क़ियामत) के दिन तक मेरी धिक्कार है।
Roman Urdu (Maududi)Aur tere upar yaum ul jaza tak meri laanat hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tujh per qayamat kay din tak meri lanat-o-phitkaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)और तेरे ऊपर यौम उल जजा तक मेरी लानत है"
عَرَبِيقالَ رَبِّ فَأَنظِرني إِلىٰ يَومِ يُبعَثونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उस (इबलीस) ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! फिर मुझे उस दिन तक के लिए अवसर दे, जिसमें लोग पुनः जीवित किए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh bola “ aey mere Rubb , yeh baat hai to phir mujhey us waqt tak ke liye mohlat dey dey jab yeh log dobara uthaye jayenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney laga meray rab mujhay logon kay uth kharay honey kay din tak mohlat day
Devnagri Urdu (Maududi)वो बोला " ऐ मेरे रब, ये बात है तो फिर मुझे वक़्त तक के लिए मोहलत दे दे जब ये लोग दोबारा उठेंगे"
عَرَبِيقالَ فَإِنَّكَ مِنَ المُنظَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) कहा : निःसंदेह तू मोहलत दिए गए लोगों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Farmaya, “accha tujhey us roz tak ki mohlat hai
Roman Urdu (Junagarhi)(Allah Taalaa ney) farmaya tu mohlat walon mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया, "अच्छा तुझे उस रोज़ तक की मोहलत है
عَرَبِيإِلىٰ يَومِ الوَقتِ المَعلومِ
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हिन्दी (Al-Omari)निर्धारित समय के दिन तक।
Roman Urdu (Maududi)Jiska waqt mujhey maloom hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Mutayyen waqt kay din tak
Devnagri Urdu (Maududi)जिसका वक़्त मुझे मालूम है"
عَرَبِيقالَ فَبِعِزَّتِكَ لَأُغوِيَنَّهُم أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : तो तेरे गौरव की क़सम! मैं अवश्य उन सबको गुमराह कर दूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “ teri izzat ki kasam, main in sab logon ko behka kar rahunga
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney laga phir to teri izzat ki qasam! Mein inn sab ko yaqeenan behka doon ga
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा "तेरी इज्जत की कसम, मैं सब लोगों को बहका कर रहूंगा
عَرَبِيإِلّا عِبادَكَ مِنهُمُ المُخلَصينَ
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हिन्दी (Al-Omari)सिवाय उनमें से तेरे उन बंदों के, जो चुने हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Bajuz tere un bandon ke jinhein tu nay khaalis karliya hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-juz teray unn bandon kay jo cheedah aur pasndeedah hon
Devnagri Urdu (Maududi)बजूज तेरे उन बंदों के जिन्हें तू नई खालिस करलिया है"
عَرَبِيقالَ فَالحَقُّ وَالحَقَّ أَقولُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) कहा : तो सत्य यह है और मैं सत्य ही कहता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Farmaya “to haqq yeh hai, aur main haqq hi kaha karta hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Farmaya sach to yeh hai aur mein sach hi kaha kerta hun
Devnagri Urdu (Maududi)फरमाया "तो हक ये है, और मैं हक ही कहता हूं
عَرَبِيلَأَملَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنكَ وَمِمَّن تَبِعَكَ مِنهُم أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)कि मैं अवश्य ही जहन्नम को तुझसे तथा उन लोगों से भर दूँगा, जो उनमें से तेरा अनुसरण करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Ke main jahannum ko tujhse aur un sab logon se bhar dunga jo in Insano mein se teri pairwi karenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Kay tujh say aur teray tamam mannay walon say mein (bhi) jahannum ko bhar doon ga
Devnagri Urdu (Maududi)के मैं जहन्नुम को तुझसे और उन सब लोगों से भर दूंगा जो इंसानों में से तेरी जोड़ी बनाएगा''
عَرَبِيقُل ما أَسأَلُكُم عَلَيهِ مِن أَجرٍ وَما أَنا مِنَ المُتَكَلِّفينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें कि मैं तुमसे इसपर कोई पारिश्रमिक नहीं माँगता और न मैं बनावट करने वालो में से हूँ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) insey kehdo ke main is tableeg par tumse koi ajar nahin maangta, aur na main banawati logon mein se hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! Kay mein tum say iss per koi badla talab nahi kerta aur na mein takaluf kerney walon mein say hun
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) इनसे कहदो के मैं इस तबलीग पर तुमसे कोई अजर नहीं मांगता, और ना मैं बनवाती लोगों में से हूं
عَرَبِيإِن هُوَ إِلّا ذِكرٌ لِلعالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह तो केवल सर्व संसार के लिए एक उपदेश है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh to ek naseehat hai tamam jahaan walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh to tamam jahan walon kay liye sarasir naseehat (o-ibrat) hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये तो एक हिदायत है तमाम जहां वालों के लिए
عَرَبِيوَلَتَعلَمُنَّ نَبَأَهُ بَعدَ حينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा निश्चय तुम उसके समाचार को कुछ समय के बाद अवश्य जान लोगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur thodi muddat hi guzaregi ke tumhein iska haal khud maaloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tum iss ki haqeeqat ko kuch hi waqt kay baad (sahih tor per) jaan logay
Devnagri Urdu (Maududi)और थोड़ी मुद्दत ही गुज़रेगी के तुम्हें इसका हाल खुद मालूम हो जाएगा
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Surah 38: Sad (Sad)

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Surah 38: Sad (Sad)

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Surah 38: Sad (Sad)

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Surah 38: Sad (Sad)

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Surah 38: Sad (Sad)

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Surah 39: Az-Zumar (The Companies)

Meccan🕐 Revelation #59📜 75 Verses🕮 Juz 1–24
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيتَنزيلُ الكِتابِ مِنَ اللَّهِ العَزيزِ الحَكيمِ
हिन्दी (Al-Omari)इस पुस्तक का उतारना अल्लाह की ओर से है, जो अत्यंत प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Is kitaab ka nuzul Allah zabardast aur dana (hikmat wala/full of Wisdom) ki taraf se hai
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kitab ka utaarna Allah Taalaa ghalib ba-hikmat ki taraf say hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या किताब का नुज़ुल अल्लाह ज़बरदस्त और दाना (हिकमत वाला/बुद्धि से भरा) की तरफ से है
عَرَبِيإِنّا أَنزَلنا إِلَيكَ الكِتابَ بِالحَقِّ فَاعبُدِ اللَّهَ مُخلِصًا لَهُ الدّينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने आपकी ओर यह पुस्तक सत्य के साथ उतारी है। अतः आप अल्लाह की इबादत इस तरह करें कि धर्म को उसी के लिए खालिस करने वाले हों।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Muhammad) yeh kitab humne tumhari taraf barhaqq nazil ki hai, lihaza tum Allah hi ki bandagi karo deen ko usi ke liye khalis karte huey
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney iss kitab ko aap ki taraf haq kay sath nazil farmaya hai pus aap Allah hi ki ibadat keren ussi kay liye deen ko khalis kerti huyey
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ मुहम्मद) ये किताब हमने तुम्हारी तरफ बरहक्क नाज़िल की है, लिहाज़ा तुम अल्लाह ही की बंदगी करो दीन को उसके लिए खालिस करते हुए
عَرَبِيأَلا لِلَّهِ الدّينُ الخالِصُ ۚ وَالَّذينَ اتَّخَذوا مِن دونِهِ أَولِياءَ ما نَعبُدُهُم إِلّا لِيُقَرِّبونا إِلَى اللَّهِ زُلفىٰ إِنَّ اللَّهَ يَحكُمُ بَينَهُم في ما هُم فيهِ يَختَلِفونَ ۗ إِنَّ اللَّهَ لا يَهدي مَن هُوَ كاذِبٌ كَفّارٌ
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हिन्दी (Al-Omari)सुन लो! ख़ालिस (विशुद्ध) धर्म केवल अल्लाह ही के लिए है। तथा जिन लोगों ने अल्लाह के सिवा अन्य संरक्षक बना रखे हैं (वे कहते हैं कि) हम उनकी पूजा केवल इसलिए करते हैं कि वे हमें अल्लाह से क़रीब कर दें। निश्चय अल्लाह उनके बीच उसके बारे में निर्णय करेगा, जिसमें वे मतभेद कर रहे हैं। निःसंदेह अल्लाह उसे मार्गदर्शन नहीं करता, जो झूठा, बड़ा नाशुक्रा हो।
Roman Urdu (Maududi)Khabardar, deen e khalis Allah ka haqq hai.Rahey woh log jinhon ne uske siwa dusre sarparst bana rakkhe hain (aur apne is fail ki taujeeh yeh karte hain ke) hum to unki ibadat sirf is liye karte hain ke woh Allah tak hamari rasayi karadein (bring us nearer to Allah).Allah yaqeenan unke darmiyan un tamaam baaton ka faisla kardega jin mein woh ikhtilaf kar rahey hain. Allah kisi aisey shaks ko hidayat nahin deta jo jhoota aur munkir e haqq ho
Roman Urdu (Junagarhi)Khabradaar! Allah Taalaa hi kay liye khalis ibadat kerna hai aur jin logon ney uss kay siwa auliya bana rakhay hain (aur kehtay hain) kay hum inn ki ibadat sirf iss liye kertay hain kay yeh (buzurg) Allah kay nazdeeki kay martabay tak humari rasaee kera den yeh log jiss baray mein ikhtilaf ker rahey hain iss ka (sacha) faisla Allah (khud) keray ga. Jhootay aur na-shukray (logon) ko Allah Taalaa raah nahi dikhata
Devnagri Urdu (Maududi)खबरदार, दीन ए खालिस अल्लाह का हक है। रहे वो लोग जिन्होन ने उसके सिवा दूसरे सरपरस्त बना रक्खे हैं (और अपने फेल की तौजीह ये करते हैं) है के) हम तो उनकी इबादत सिर्फ इसके लिए करते हैं के वो अल्लाह तक हमारी रसाई करादीन (हमें अल्लाह के करीब लाओ)। अल्लाह यकीनन उनके दरमियान उन तमाम बातों का फैसला कर देगा जिन में वो इख्तिलाफ कर रहे हैं। अल्लाह किसी ऐसे शक्स को हिदायत नहीं देता जो झूठा और मुनकिर ए हक हो
عَرَبِيلَو أَرادَ اللَّهُ أَن يَتَّخِذَ وَلَدًا لَاصطَفىٰ مِمّا يَخلُقُ ما يَشاءُ ۚ سُبحانَهُ ۖ هُوَ اللَّهُ الواحِدُ القَهّارُ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि अल्लाह चाहता कि (किसी को) संतान बनाए, तो वह उनमें से जिन्हें वह पैदा करता है, जिसे चाहता अवश्य चुन लेता, वह पवित्र है! वह तो अल्लाह है, जो अकेला है, बहुत प्रभुत्व वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Agar Allah kisi ko beta banana chahta to apni makhlooq mein se jisko chahta barguzida kar leta, Paak hai woh issey (ke koi uska beta ho), woh Allah hai akela aur sab par gaalib
Roman Urdu (Junagarhi)Agar Allah Taalaa ka iradah aulad hi ka hota to apni makhlooq mein say jissay chahata chun leta. (lekin) woh to pak hai wo wohi Allah Taalaa hai yagana aur qooat wala
Devnagri Urdu (Maududi)अगर अल्लाह किसी को बेटा बनाना चाहता तो अपने मखलूक में से जिसको चाहता बरगुजिदा कर लेता, पाक है वो इसे (के कोई उसका बेटा हो), वो अल्लाह है अकेला और सब पर गालिब
عَرَبِيخَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ بِالحَقِّ ۖ يُكَوِّرُ اللَّيلَ عَلَى النَّهارِ وَيُكَوِّرُ النَّهارَ عَلَى اللَّيلِ ۖ وَسَخَّرَ الشَّمسَ وَالقَمَرَ ۖ كُلٌّ يَجري لِأَجَلٍ مُسَمًّى ۗ أَلا هُوَ العَزيزُ الغَفّارُ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने आकाशों तथा धरती को सत्य के साथ पैदा किया। वह रात को दिन पर लपेटता है तथा दिन को रात पर लपेटता है। तथा उसने सूर्य और चन्द्रमा को वशीभूत कर रखा है। प्रत्येक, एक नियत समय के लिए चल रहा है। सावधान! वही सब पर प्रभुत्वशाली, अत्यंत क्षमाशील है।
Roman Urdu (Maududi)Usne aasmano aur zameen ko barhaqq paida kiya hai. Wahi din par raat aur raat par din ko lapeit-ta hai.Usi ne Suraj aur Chand ko is tarah musakkhar kar rakkha hai ke har ek ek waqt e muqarrar tak chale ja raha hai. Jaan rakkho, woh zabardast hai aur darguzar karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Nihayat achi tadbeer say uss ney aasmano aur zamin ko banaya woh raat ko din per aur din ko raat per lapet deta hai aur uss ney sooraj chaand ko kaam per laga rakha hai. Her aik muqarrara muddat tak chal raha hai yaqeen mano kay wohi zabardast aur gunahon ka bakhshney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसने आसमान और ज़मीन को बारहक़ अदा किया है। वही दिन पर रात और रात पर दिन को लपेटा-ता है।उसी ने सूरज और चांद को इस तरह मुसक्कर कर रखा है के हर एक एक वक्त ए मुकर्रर तक चले जा रहा है। जान राखो, वो ज़बरदस्त है और दरगुज़ार करने वाला है
عَرَبِيخَلَقَكُم مِن نَفسٍ واحِدَةٍ ثُمَّ جَعَلَ مِنها زَوجَها وَأَنزَلَ لَكُم مِنَ الأَنعامِ ثَمانِيَةَ أَزواجٍ ۚ يَخلُقُكُم في بُطونِ أُمَّهاتِكُم خَلقًا مِن بَعدِ خَلقٍ في ظُلُماتٍ ثَلاثٍ ۚ ذٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُم لَهُ المُلكُ ۖ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۖ فَأَنّىٰ تُصرَفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने तुम्हें एक जान से पैदा किया, फिर उसी से उसका जोड़ा बनाया, तथा तुम्हारे लिए पशुओं में से आठ प्रकार (नर-मादा) उतारे। वह तुम्हें तुम्हारी माताओं के पेटों में, तीन अंधेरों में, एक रचना के बाद दूसरी रचना में, पैदा करता है। यही अल्लाह तुम्हारा पालनहार है। उसी का राज्य है। उसके सिवा कोई (सच्चा) पूज्य नहीं। फिर तुम किस तरह फेरे जाते हो?
Roman Urdu (Maududi)Usi ne tumko ek jaan se paida kiya, phir wahi hai jisne us jaan se iska joda banaya aur usi ne tumhare liye maweshiyon mein se aath (eight) nar o maada paida kiye. Woh tumhari Maaon (mothers) ke paithon mein teen teen tareekh (andherey) paradon ke andar tumhein ek ke baad ek shakal deta chala jaata hai. Yahi Allah (jiske yeh kaam hain) tumhara Rubb hai, baadshahi usi ki hai, koi mabood uske siwa nahin hai, phir tum kidhar se phiraye jaa rahe ho
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney tum sab ko aik hi jaan say peda kiya hai phir ussi say uss ka jora peda kiya aur tumharay liye chopayon mein say (aath nar-o-madah)utaray woh tumhen tumhari maaon kay peton mein aik banawat kay baad doosri banawat per banata hai teen teen andheron mein yehi Allah Taalaa tumhara rab hai ussi kay liye badshahaat hai uss kay siwa koi mabood nahi phir tum kahan behak rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)उसी ने तुमको एक जान से पैदा किया, फिर वही है जिसने उस जान से इसका जोड़ा बनाया और उसने तुम्हारे लिए मवेशियों में से आठ (आठ) नर ओ माडा पैदा किया। वो तुम्हारी मांओं के पैठों में तीन तीन तारीख (अंधेरे) परदों के अंदर तुम्हें एक के बाद एक शकल देता चला जाता है। याही अल्लाह (जिसके ये काम हैं) तुम्हारा रब है, बादशाही उसी की है, कोई माबूद उसके सिवा नहीं है, फिर तुम किधर से फिर जा रहे हो
عَرَبِيإِن تَكفُروا فَإِنَّ اللَّهَ غَنِيٌّ عَنكُم ۖ وَلا يَرضىٰ لِعِبادِهِ الكُفرَ ۖ وَإِن تَشكُروا يَرضَهُ لَكُم ۗ وَلا تَزِرُ وازِرَةٌ وِزرَ أُخرىٰ ۗ ثُمَّ إِلىٰ رَبِّكُم مَرجِعُكُم فَيُنَبِّئُكُم بِما كُنتُم تَعمَلونَ ۚ إِنَّهُ عَليمٌ بِذاتِ الصُّدورِ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि तुम नाशुक्री करो, तो अल्लाह तुमसे बहुत बेनियाज़ है और वह अपने बंदों के लिए नाशुक्री पसंद नहीं करता, और यदि तुम शुक्रिया अदा करो, तो वह उसे तुम्हारे लिए पसंद करेगा। और कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा। फिर तुम्हारा लौटना तुम्हारे पालनहार ही की ओर है। तो वह तुम्हें बतलाएगा जो कुछ तुम किया करते थे। निश्चय वह दिलों के भेदों को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum kufr karo to Allah tumse be niyaz hai, lekin woh apne bandon ke liye kufr ko pasand nahin karta. Aur agar tum shukar karo to usey woh tumhare liye pasand karta hai. Koi bojh uthane wala kisi dusre ka bojh na uthayega.Aakhir e kaar tum sab ko apne Rubb ki taraf palatna hai, phir woh tumhein bata dega ke tum kya karte rahe ho, woh to dilon ka haal tak jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum na-shukri kero to (yaad rakho kay) Allah Taalaa tum (sab say) be-niyaz hai aur woh apnay bando ki na-shukri say khush nahi aur agar tum shukar kero to woh issay tumharay liye pasand keray ga aur koi kissi ka bojh nahi uthata phit tum sab ka lotna tumharay rab hi ki taraf hai. Tumhen woh batla dey ga jo tum kertay thay. Yaqeenan woh dilon tak ki baaton ka waqif hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम कुफ्र करो तो अल्लाह तुमसे बे नियाज है, लेकिन वो अपने बंदों के लिए कुफ्र को पसंद नहीं करता। और अगर तुम शुक्र करो तो उसे वो तुम्हारे लिए पसंद करता है। कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ ना उठेगा। आखिर ए कार तुम सब को अपनी रब की तरफ पलटना है, फिर वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या करते रहे हो, वो तो दिलों का हाल तक जानता है
عَرَبِي۞ وَإِذا مَسَّ الإِنسانَ ضُرٌّ دَعا رَبَّهُ مُنيبًا إِلَيهِ ثُمَّ إِذا خَوَّلَهُ نِعمَةً مِنهُ نَسِيَ ما كانَ يَدعو إِلَيهِ مِن قَبلُ وَجَعَلَ لِلَّهِ أَندادًا لِيُضِلَّ عَن سَبيلِهِ ۚ قُل تَمَتَّع بِكُفرِكَ قَليلًا ۖ إِنَّكَ مِن أَصحابِ النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब मनुष्य को कोई कष्ट पहुँचता है, तो वह अपने पालनहार को पुकारता है, इस हाल में कि उसी की ओर एकाग्र, ध्यानमग्न होता है। फिर जब वह उसे अपनी ओर से कोई सुख प्रदान करता है, तो वह उसे भूल जाता है, जिसे वह इससे पहले पुकार रहा था, तथा वह अल्लाह का साझी बना लेता है, ताकि उसके मार्ग से गुमराह कर दे। आप कह दें कि अपने कुफ़्र का थोड़ा सा लाभ उठा लो। निश्चय तुम जहन्नमियों में से हो।
Roman Urdu (Maududi)Insaan par jab koi aafat aati hai to woh apne Rubb ki taraf rujoo (return) karke usey pukarta hai, phir jab uska Rubb usey apni niyamat se nawaz deta hai to woh us musibat ko bhool jaata hai jispar woh pehle pukar raha tha aur dusron ko Allah ka humsar thehrata hai taa-ke uski raah se gumraah karey. (Aey Nabi) ussey kaho ke thode din apne kufr se lutf utha le, yaqeenan tu dozakh mein jaane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur insan ko jab kabhi koi takleef phonchti hai to woh khoob rujoo hoker apnay rab ko pukarta hai phir jab Allah Taalaa ussay apnay pass say nemat ata farma deta hai to woh iss say pehlay jo dua kerta tha (ussay) bhool jata hai aur Allah Taalaa kay shareek muqarrar kerney lagta hai jiss say (auron ko bhi) uss ki raah say behkaye aap keh dijiye! Kay apnay kufur ka faeedah kuch din aur utha lo (aakhir) tu dozakhiyon mein honey wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)इंसान पर जब कोई आफत आती है तो वो अपनी रब की तरफ रूजू (वापसी) करके उसे पुकारता है, फिर जब उसका रब उसे अपनी नियामत से नवाज देता है तो वो हमें मुसिबत को भूल जाता है जिसपर वो पहले पुकार रहा था और दूसरे को अल्लाह का हमसर ठहराता है ता-के उसकी राह से गुमराह करे। (ऐ नबी) उसे कहो के थोड़े दिन अपने कुफ्र से लुत्फ उठा ले, यकीनन तू दोज़ख में जाने वाला है
عَرَبِيأَمَّن هُوَ قانِتٌ آناءَ اللَّيلِ ساجِدًا وَقائِمًا يَحذَرُ الآخِرَةَ وَيَرجو رَحمَةَ رَبِّهِ ۗ قُل هَل يَستَوِي الَّذينَ يَعلَمونَ وَالَّذينَ لا يَعلَمونَ ۗ إِنَّما يَتَذَكَّرُ أُولُو الأَلبابِ
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हिन्दी (Al-Omari)(क्या यह बेहतर) या वह व्यक्ति जो रात की घड़ियों में सजदा करते हुए तथा क़ियाम करते हुए इबादत करने वाला है। आख़िरत का भय रखता है तथा अपने पालनहार की दया की आशा रखता है? आप कह दें कि क्या समान हैं वे लोग जो ज्ञान रखते हों तथा वे जो ज्ञान नहीं रखते? उपदेश तो वही ग्रहण करते हैं, जो बुद्धि वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)(kya is shaks ki rawish behtar hai ya us shaks ki) jo mutii-e-farmaan hai, raat ki ghadiyon mein khada rehta hai aur sajdey karta hai, aakhirat se darta aur apne Rubb ki rehmat se umeed lagata hai? In se pucho, kya jaanne waley aur na jaanne waley dono kabhi yaksan ho sakte hain? Naseehat to aqal rakhne waley hi qabool karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Bhala jo shaks raaton kay auqaat sajjday aur qayaam ki halat mein (ibadat mein) guzaarta ho aakhirat say darta ho aur apnay rab ki rehmat ki umeed rakhta ho(aur jo iss kay bar-aks ho barbar ho saktay hain) batao to ilm walay aur be-ilm kiya barabar kay hain? Yaqeenan naseehat wohi hasil kertay hain jo aqalmand hon. (apnay rab ki taraf say)
Devnagri Urdu (Maududi)(क्या शक्स की रवीश बेहतर है या हमारे शक्स की) जो मुती-ए-फरमान है, रात की घड़ियों में खड़ा रहता है और सजदे करता है, आख़िरत से डरता और अपने रब की रहमत से उम्मीद लगता है? इन से पूछो, क्या जाने वाले और ना जाने वाले दोनों कभी यक्सन हो सकते हैं? हिदायत तो अक़ल रखने वाले ही क़बूल करते हैं
عَرَبِيقُل يا عِبادِ الَّذينَ آمَنُوا اتَّقوا رَبَّكُم ۚ لِلَّذينَ أَحسَنوا في هٰذِهِ الدُّنيا حَسَنَةٌ ۗ وَأَرضُ اللَّهِ واسِعَةٌ ۗ إِنَّما يُوَفَّى الصّابِرونَ أَجرَهُم بِغَيرِ حِسابٍ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ रसूल!) आप कह दें : ऐ मेरे बंदो, जो ईमान लाए हो! अपने पालनहार से डरो। उन लोगों के लिए जिन्होंने इस दुनिया में अच्छे कार्य किए, बड़ी भलाई है। तथा अल्लाह की धरती विस्तृत है। केवल सब्र करने वालों ही को उनका बदला बिना किसी हिसाब (शुमार) के दिया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) kaho ke aey mere bandon jo imaan laye ho, apne Rubb se daro. Jin logon ne is duniya mein neik rawayya ikhtiyar kiya hai unke liye bhalayi hai. Aur khuda ki zameen waseeh hai, sabr karne walon ko to unka ajar be-hisaab diya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Kehdo kay aey meray eman walay bando! Apnay rab say dartay raho jo iss duniya mein neki kertay hain unn kay liye nek badla hai aur Allah Taalaa ki zamin boht kushadah hai sabar kerney walon hi ko unn ka poora poora be-shumaar ajar diya jata hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) कहो के ऐ मेरे बंदन जो ईमान लाए हो, अपने रब से डरो। जिन लोगों ने इस दुनिया में नई रवैय्या इख्तियार किया है उनके लिए भलाई है। और खुदा की ज़मीन वसीह है, सब्र करने वालों को तो उनका अजर बे-हिसाब दिया जाएगा
عَرَبِيقُل إِنّي أُمِرتُ أَن أَعبُدَ اللَّهَ مُخلِصًا لَهُ الدّينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : निःसंदेह मुझे आदेश दिया गया है कि मैं अल्लाह की इबादत करूँ, इस हाल में कि धर्म को उसी के लिए ख़ालिस (विशुद्ध) करने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) insey kaho, mujhey hukum diya gaya hai ke deen ko Allah ke liye khaalis karke uski bandagi karoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye! Kay mujhay hukum diya gaya hai kay Allah Taalaa ki iss tarah ibadat keroon kay ussi kay liye ibadat ko khalis ker loon
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) इनसे कहो, मुझे हुकुम दिया है के दीन को अल्लाह के लिए खालिस करके उसकी बंदगी करूं
عَرَبِيوَأُمِرتُ لِأَن أَكونَ أَوَّلَ المُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मुझे आदेश दिया गया है कि आज्ञाकारियों में से पहला मैं बनूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur mujhey hukum diya gaya hai ke sabse pehle main khud muslim banoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mujhay hukum diya gaya hai kay mein sab say pehla farmabardaar ban jaon
Devnagri Urdu (Maududi)और मुझे हुकुम दिया है के सबसे पहले मैं खुद मुस्लिम बनूं
عَرَبِيقُل إِنّي أَخافُ إِن عَصَيتُ رَبّي عَذابَ يَومٍ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : निःसंदेह मैं एक बहुत बड़े दिन की यातना से डरता हूँ, यदि मैं अपने पालनहार की अवज्ञा करूँ।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, agar mein apne Rubb ki naafarmaani karoon to mujhey ek badey din ke azaab ka khauf hai
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiyey! Kay mujhay to apnay rab ki na-farmani kertay huyey baray din kay azab ka khof aata lagta hai
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, अगर मैं अपने रब की नाफ़रमानी करूं तो मुझे एक बड़े दिन के अज़ाब का खौफ है
عَرَبِيقُلِ اللَّهَ أَعبُدُ مُخلِصًا لَهُ ديني
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : मैं अल्लाह ही की इबादत करता हूँ, इस हाल में कि उसी के लिए अपने धर्म को विशुद्ध (ख़ालिस) करने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Kehdo ke main to apne deen ko Allah ke liye khalis karke usi ki bandagi karunga
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiyey! Kay mein to khalis ker kay sirf apnay rab hi ki ibadat kerta hun
Devnagri Urdu (Maududi)कहदो के मैं तो अपने दीन को अल्लाह के लिए खालिस करके उसकी बंदगी करूंगा
عَرَبِيفَاعبُدوا ما شِئتُم مِن دونِهِ ۗ قُل إِنَّ الخاسِرينَ الَّذينَ خَسِروا أَنفُسَهُم وَأَهليهِم يَومَ القِيامَةِ ۗ أَلا ذٰلِكَ هُوَ الخُسرانُ المُبينُ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः तुम उसके सिवा जिसकी चाहो इबादत करो। आप कह दें : निःसंदेह वास्तविक घाटे में पड़ने वाले तो वे हैं, जिन्होंने क़ियामत के दिन खुद को तथा अपने घर वालों को घाटे में डाला। सुन लो! यही खुला घाटा है।
Roman Urdu (Maududi)Tum uske siwa jis jis ki bandagi karna chaho karte raho. Kaho asal diwaliye (losers) to wahi hain jinhon ne qayamat ke roz apne aap ko aur apne ahal-o-aayal ko ghaatey(loss) mein daal diya. khoob sun rakkho, yahi khula diwala (loss) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum uss kay siwa jiss ki chahao ibadat kertay raho keh dijiyey! Kay haqeeqi ziyan kaar woh hain jo apnay aap ko aur apnay ehal ko qayamat kay din nuksan mein daal den gay yad rekho kay khullam khulla nuksan yehi hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम उसके सिवा जिस की बंदगी करना चाहो करते रहो। कहो असल दीवालिये (हारे हुए) तो वही हैं जिन्हों ने कयामत के रोज़ अपने आप को और अपने अहल-ओ-अयाल को घाटे में डाल दिया। खूब सुन राखो, यही खुला दिवाला (नुकसान) है
عَرَبِيلَهُم مِن فَوقِهِم ظُلَلٌ مِنَ النّارِ وَمِن تَحتِهِم ظُلَلٌ ۚ ذٰلِكَ يُخَوِّفُ اللَّهُ بِهِ عِبادَهُ ۚ يا عِبادِ فَاتَّقونِ
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हिन्दी (Al-Omari)उनके लिए उनके ऊपर से आग के छत्र होंगे तथा उनके नीचे से भी छत्र होंगे। यही वह चीज़ है, जिससे अल्लाह अपने बंदों को डराता है। ऐ मेरे बंदो! अतः तुम मुझसे डरो।
Roman Urdu (Maududi)Unpar aag ki chatriyan upar se bhi chayi hongi aur nichey se bhi. Yeh woh anjaam hai jissey Allah apne bandon ko darata hai, pas aey mere bandon, mere gazab se bacho
Roman Urdu (Junagarhi)Unehn neechay uper say aag kay (sholay misil)sayebaan (kay)dhaank rahey hongay. Yehi (azab) hai jin say Allah Taalaa apnay bando ko dara raha hai aey meray bando! Pus mujh say dartay raho
Devnagri Urdu (Maududi)उन्पर आग की छतरियां ऊपर से भी चयी होंगी और नीचे से भी। ये वो अंजाम है जिसे अल्लाह अपने बंदों को डराता है, पास ऐ मेरे बंदों, मेरे गजब से बचाओ
عَرَبِيوَالَّذينَ اجتَنَبُوا الطّاغوتَ أَن يَعبُدوها وَأَنابوا إِلَى اللَّهِ لَهُمُ البُشرىٰ ۚ فَبَشِّر عِبادِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग 'ताग़ूत' की पूजा करने से बचे रहे और अल्लाह की ओर ध्यानमग्न हो गए, उन्हीं के लिए शुभ सूचना है। अतः आप मेरे बंदों को शुभ सूचना सुना दें।
Roman Urdu (Maududi)Ba-khilaf iske jin logon ne tagut(false gods) ki bandagi se ijtinab kiya aur Allah ki taraf rujoo karliya unke liye khush khabri hai .Pas (Aey Nabi) basharat dedo mere un bandon ko
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin logon ney taghoot ki ibadat say perhez kiya aur (hama-tan) Allah Taalaa ki taraf mutawajja rahey woh khushkhabri kay mustahiq hain meray bando ko khushkhabri suna dijiyey
Devnagri Urdu (Maududi)बा-खिलाफ इसके जिन लोगों ने टैगुत (झूठे देवताओं) की बंदगी से इज्तिनाब किया और अल्लाह की तरफ रूजू करलिया उनके लिए खुश खबरी है। पास (ऐ नबी) बशारत देदो मेरे उन बंदों को
عَرَبِيالَّذينَ يَستَمِعونَ القَولَ فَيَتَّبِعونَ أَحسَنَهُ ۚ أُولٰئِكَ الَّذينَ هَداهُمُ اللَّهُ ۖ وَأُولٰئِكَ هُم أُولُو الأَلبابِ
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हिन्दी (Al-Omari)वे जो ध्यान से बात सुनते हैं, फिर उसमें से सबसे अच्छी बात का अनुसरण करते हैं। यही लोग हैं, जिन्हें अल्लाह ने मार्गदर्श प्रदान किया है तथा यही बुद्धि वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo baat ko gaur se sunte hain aur uske behtareen pehlu ki pairwi karte hain, yeh woh log hain jinko Allah ne hidayat bakshi hai aur yahi daanishmand (with understanding) hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo baat ko kaan laga ker suntay hain. Phir jo behtareen baat ho uss ki ittbaa kertay hain. Yehi hain jinhen Allah Taalaa ney hidayat ki hai aur yehi aqalmand bhi hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो बात को गौर से सुनते हैं और उसके बेहतर पहलू की जोड़ी बनाते हैं, ये वो लोग हैं जिनको अल्लाह ने हिदायत बख्शी है और यहीं दानिशमंद (समझ के साथ) हैं
عَرَبِيأَفَمَن حَقَّ عَلَيهِ كَلِمَةُ العَذابِ أَفَأَنتَ تُنقِذُ مَن فِي النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वह व्यक्ति जिसपर यातना की बात सिद्ध हो चुकी, फिर क्या आप उसे बचा लेंगे, जो आग में है?
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) us shaks ko kaun bacha sakta hai jispar azaab ka faisla chaspan ho chuka ho? Kya tum usey bacha sakte ho jo aag mein gir chuka ho
Roman Urdu (Junagarhi)Bhala jiss shaks per azab ki baat saabit ho chuki hai to kiya aap ussay jo dozakh mein hai chura saktay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) हमारे शक्स को कौन बचा सकता है जिसपर अज़ाब का फैसला चस्पां हो चूका हो? क्या तुम उसे बचा सकते हो जो आग में गिर चुका हो
عَرَبِيلٰكِنِ الَّذينَ اتَّقَوا رَبَّهُم لَهُم غُرَفٌ مِن فَوقِها غُرَفٌ مَبنِيَّةٌ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ ۖ وَعدَ اللَّهِ ۖ لا يُخلِفُ اللَّهُ الميعادَ
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हिन्दी (Al-Omari)किंतु जो लोग अपने पालनहार से डरते रहे, उनके लिए उच्च भवन हैं। जिनके ऊपर निर्मित भवन हैं। जिनके नीचे से नहरें प्रवाहित हैं। यह अल्लाह का वादा है और अल्लाह अपने वादे का उल्लंघन नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jo log apne Rubb se darr kar rahey unke liye buland imaratein hain manzil par manzil bani hui jinke nichey nehrein beh rahi hongi. yeh Allah ka waada hai, Allah kabhi apne waade ki khilaf warzi nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Haan woh log jo apnay rab say dartay rahey unn kay liye bala khaney hain jinkay uper bhi banay banaye bala khaney hain (aur) unn kay neechay nehren beh rahi hain. Rab ka wada hai aur woh wada khilafi nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जो लोग अपने रब से डर कर रहे हैं उनके लिए बुलंद इमानतें हैं मंजिल पर मंजिल बनी हुई हैं जिनके बारे में नीचे कहा जा रहा है। ये अल्लाह का वादा है, अल्लाह कभी अपने वादे की खिलाफत वारजी नहीं करता
عَرَبِيأَلَم تَرَ أَنَّ اللَّهَ أَنزَلَ مِنَ السَّماءِ ماءً فَسَلَكَهُ يَنابيعَ فِي الأَرضِ ثُمَّ يُخرِجُ بِهِ زَرعًا مُختَلِفًا أَلوانُهُ ثُمَّ يَهيجُ فَتَراهُ مُصفَرًّا ثُمَّ يَجعَلُهُ حُطامًا ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَذِكرىٰ لِأُولِي الأَلبابِ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने आकाश से कुछ पानी उतारा। फिर उसे स्रोतों के रूप में धरती में चलाया। फिर वह उसके साथ विभिन्न रंगों की खेती निकालता है। फिर वह सूख जाती है, तो तुम उसे पीली देखते हो। फिर वह उसे चूरा-चूरा कर देता है। निःसंदेह इसमें बुद्धि वालों के लिए निश्चय बड़ी सीख है।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum nahin dekhte ke Allah ne aasmaan se pani barsaya, phir usko soton aur chashmon (springs and streams )aur daryaon ki shakal mein zameen ke andar jaari kiya. Phir is pani ke zariye se woh tarah tarah ki khetiyan nikalta hai jinki kismein mukhtalif hain, phir woh khetiyan pak kar sukh jaati hai, phir tum dekhte ho ke woh zard (yellow) padh gayi, phir aakhir e kaar Allah unko bhus bana deta hai. Dar haqeeqat is mein ek sabak hai aqal rakhne waalon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney nahi dekha kay Allah Taalaa aasman say paani utaarta hai aur ussay zamin ki sooton mein phonchata hai phir issi kay zariyey mukhtalif qisam ki khetiyan ugata hai phit woh khushk hojati hain aur aap unhen zard rang dekhtay hain phir unhen reza reza ker deta hai iss mein aqalmando kay liye boht ziyadah naseehat hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम नहीं देखते कि अल्लाह ने आसमां से पानी बरसाया, फिर उसको सोते और चश्मे (झरने और झरने) और दरियाओं की शकल में जमीन के अंदर जारी किया। फिर इस पानी के ज़रिये से वो तरह-तरह की खेतियाँ निकलती हैं जिनकी किस्मत मुख्तलिफ़ हैं, फिर वो खेतियाँ पक कर सुख जाती हैं, फिर तुम देखते हो के वो ज़रद (पीली) पड़ गई, फिर आख़िर ई कर अल्लाह उनको भुस बना देता है। दर हकीकत इस में एक सबक है अक्ल रखने वालों के लिए
عَرَبِيأَفَمَن شَرَحَ اللَّهُ صَدرَهُ لِلإِسلامِ فَهُوَ عَلىٰ نورٍ مِن رَبِّهِ ۚ فَوَيلٌ لِلقاسِيَةِ قُلوبُهُم مِن ذِكرِ اللَّهِ ۚ أُولٰئِكَ في ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वह व्यक्ति जिसका सीना अल्लाह ने इस्लाम के लिए खोल दिया है, तो वह अपने पालनहार की ओर से एक प्रकाश पर है (किसी कठोर हृदय काफ़िर के समान हो सकता है?) अतः उनके लिए विनाश है, जिनके दिल अल्लाह के स्मरण के प्रति कठोर हैं। ये लोग खुली गुमराही में हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ab kya woh shaks jiska seena Allah ne Islam ke liye khol diya aur woh apne Rubb ki taraf se ek roshni par chal raha hai (us shaks ki tarah ho sakta hai jisne in baaton se koi sabaq na liya)? Tabahi hai un logon ke liye jinke dil Allah ki naseehat se aur zyada sakht ho gaye. Woh khuli gumrahi mein padey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh shaks jiss ka seena Allah Taalaa ney islam kay liye khol diya hai pus woh apnay perwerdigar ki taraf say aik noor per hai aur halaki hai unn per jin kay dil yaad-e-elahi say (asar nahi letay bulkay) sakht hogaye hain. Yeh log sareeh gumrahi mein (mubtila) hain
Devnagri Urdu (Maududi)अब क्या वो शक्स जिसका सीना अल्लाह ने इस्लाम के लिए खोल दिया और वो अपने रब की तरफ से एक रोशनी पर चल रहा है (उस शक्स की तरह हो सकता है जिसने बातों से कोई सबक न लिया) लिया)? तबाही है उन लोगों के लिए जिनके दिल अल्लाह की हिदायत से और ज्यादा सख्त हो गए। वो खुली गुमराही में पड़े हुए हैं
عَرَبِياللَّهُ نَزَّلَ أَحسَنَ الحَديثِ كِتابًا مُتَشابِهًا مَثانِيَ تَقشَعِرُّ مِنهُ جُلودُ الَّذينَ يَخشَونَ رَبَّهُم ثُمَّ تَلينُ جُلودُهُم وَقُلوبُهُم إِلىٰ ذِكرِ اللَّهِ ۚ ذٰلِكَ هُدَى اللَّهِ يَهدي بِهِ مَن يَشاءُ ۚ وَمَن يُضلِلِ اللَّهُ فَما لَهُ مِن هادٍ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने सबसे अच्छी बात (क़ुरआन) अवतरित की, ऐसी पुस्तक जो परस्पर मिलती-जुलती, (जिसकी आयतें) बार-बार दोहराई जाने वाली हैं। इससे उन लोगों की खालों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं, जो अपने पालनहार से डरते हैं। फिर उनकी खालें तथा उनके दिल अल्लाह के स्मरण की ओर कोमल हो जाते हैं। यह अल्लाह का मार्गदर्शन है, जिसके द्वारा वह जिसे चाहता है, संमार्ग पर लगा देता है, और जिसे अल्लाह गुमराह कर दे, तो उसे कोई राह पर लाने वाला नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne behtareen kalaam utara hai, ek aisi kitaab jiske tamaam ajzah humrang hain aur jis mein baar baar mazameen(contents) dohraye gaye hain, usey sunkar un logon ke rongtey khade ho jatey hain jo apne Rubb se darne waley hain, aur phir unke jism aur unke dil naram hokar Allah ke zikr ki taraf raagib ho jatey hain. Yeh Allah ki hidayat hai jissey woh raah e raast par le aata hai jisey chahta hai aur jisey Allah hi hidayat na de uske liye phir koi haadi (guide) nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney behtareen kalam nazil farmaya hai jo aisi kitab hai kay aapas mein milti julti aur baar baar dohraee hui aayaton ki hai jiss say unn logon kay rongtay kharay hojatay hain jo apnay rab ka khof rakhtay hain aakhir mein unn kay jisam aur dil Allah Taalaa kay zikar ki taraf naram hojatay hain yeh hai Allah Taalaa ki hidayat jiss kay zariyey jissay chahaye raah-e-raast per laga deta hai. Aur jissay Allah Taalaa hi raah bhula dey uss ka koi hadi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने बहतरीन कलाम उतारा है, एक ऐसी किताब जिसके तमाम अज़्ज़ा हमरंग हैं और जिस में बार-बार मजामीन (सामग्री) दोहराए गए हैं, उसे सुनकर उन लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं जो अपने रब से डरें वाले हैं, और फिर उनका जिस्म और उनका दिल नरम होकर अल्लाह के जिक्र की तरफ रागिब हो जाते हैं। ये अल्लाह की हिदायत है जिसे वो राह ए रास्ते पर ले आता है जिसे चाहता है और जिसे अल्लाह ही हिदायत ना दे उसके लिए फिर कोई हादी नहीं है
عَرَبِيأَفَمَن يَتَّقي بِوَجهِهِ سوءَ العَذابِ يَومَ القِيامَةِ ۚ وَقيلَ لِلظّالِمينَ ذوقوا ما كُنتُم تَكسِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या जो व्यक्ति क़ियामत के दिन अपने चेहरे के साथ, बुरी यातना से, अपनी रक्षा करेगा? तथा अत्याचारियों से कहा जाएगा : उसे चखो, जो तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Ab us shaks ki bad-haali ka tum kya andaza kar sakte ho jo qayamat ke roz azaab ki sakht maar apne mooh par lega? Aisey zaalimon se to kehdiya jayega ke ab chakko maza us kamayi ka jo tum karte rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Bhala jo shaks qayamat kay din kay bad-tareen azab ki sapar (dhaal) apnay mun ko banaye ga. (aisay) zalimon say kaha jayega kay apnay kiyey ka (wabal) chakho
Devnagri Urdu (Maududi)अब हम शक्स की बद-हाली का तुम क्या अंदाज़ा कर सकते हो जो कयामत के रोज़ अज़ाब की तरह मार अपने मुँह पर लेगा? ऐसे ज़ालिमों से तो कहदिया जाएगा के अब चक्को मजा हमें कमाई का जो तुम करते रहे थे
عَرَبِيكَذَّبَ الَّذينَ مِن قَبلِهِم فَأَتاهُمُ العَذابُ مِن حَيثُ لا يَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)इनसे पहले के लोगों ने भी झुठलाया, तो उनपर वहाँ से यातना आई कि वे सोचते भी न थे।
Roman Urdu (Maududi)Insey pehle bhi bahut se log isi tarah jhutla chuke hain. Aakhir unpar azaab aisey rukh se aaya jidhar unka khayal bhi na ja sakta tha
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say pehlay walon ney bhi jhutlaya phir unn per wahan say azab aa para jahan say unn ko khayal bhi na tha
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पहले भी बहुत से लोग इसी तरह झूठला चुके हैं। आख़िर उन्पर अज़ाब ऐसे रुख़ से आया जिधर उनका ख़याल भी ना जा सकता था
عَرَبِيفَأَذاقَهُمُ اللَّهُ الخِزيَ فِي الحَياةِ الدُّنيا ۖ وَلَعَذابُ الآخِرَةِ أَكبَرُ ۚ لَو كانوا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो अल्लाह ने उन्हें सांसारिक जीवन में अपमान चखाया और निश्चय आख़िरत (परलोक) की यातना अत्यधिक बड़ी है। काश! वे जानते होते।
Roman Urdu (Maududi)Phir Allah ne unko duniya hi ki zindgai mein ruswayi ka maza chakhaya, aur aakhirat ka azaab to issey shadeed tarr hai, kaash yeh log jaante
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa ney unhen zindagan-e-duniya mein ruswaee ka maza chakhaya aur abhi aakhirat ka to bara bhari azab hai kaash kay yeh log samajh len
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अल्लाह ने उनको दुनिया ही कहा कि ज़िंदगी में रुसवे का मज़ा चखाया, और आख़िरत का अज़ाब तो इस तरह छाया हुआ है, काश ये लोग जानते हैं
عَرَبِيوَلَقَد ضَرَبنا لِلنّاسِ في هٰذَا القُرآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ لَعَلَّهُم يَتَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने इस क़ुरआन में लोगों के लिए हर प्रकार के उदाहरण दिए हैं, ताकि वे उपदेश ग्रहण करें।
Roman Urdu (Maududi)Humne is Quran mein logon ko tarah tarah ki misalein di hain ke yeh hosh mein aayein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqeenan hum ney iss quran mein logon kay liye her qisam ki misalen biyan ker di hain kiya ajab kay woh naseehat hasil kerlen
Devnagri Urdu (Maududi)हमने कुरान में लोगों को तरह बताया है तरह की मिसालें दी हैं के ये होश में आएं
عَرَبِيقُرآنًا عَرَبِيًّا غَيرَ ذي عِوَجٍ لَعَلَّهُم يَتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अरबी भाषा में क़ुरआन, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है, ताकि वे अल्लाह से डरें।
Roman Urdu (Maududi)Aisa Quraan jo arabi zubaan mein hai, jis mein koi tedh (croockedness) nahin hai, taa-ke yeh burey anjaam se bachein
Roman Urdu (Junagarhi)Quran hai arabi mein jiss mein koi kuji nahi ho sakta hai kay woh perhezgari ikhtiyar ker len
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसा कुरान जो अरबी ज़ुबान में है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है, ता-के ये बुरे अंजाम से बचें
عَرَبِيضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا رَجُلًا فيهِ شُرَكاءُ مُتَشاكِسونَ وَرَجُلًا سَلَمًا لِرَجُلٍ هَل يَستَوِيانِ مَثَلًا ۚ الحَمدُ لِلَّهِ ۚ بَل أَكثَرُهُم لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने एक व्यक्ति का उदाहरण दिया है, जिसमें कई परस्पर विरोधी साझी हैं तथा एक और व्यक्ति का, जो पूरा एक ही व्यक्ति का (दास) है। क्या दोनों की स्थिति समान हैं? सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है। बल्कि उनमें से अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Allah ek misaal deta hai ek shaks to woh hai jiski milkiyat mein bahut se kaj khulq (several quarrelsome masters) aaqaa shareek hain jo usey apni apni taraf khinchte hain aur dusra shaks poora ka poora ek hi aaqaa ka gulaam hai. Kya in dono ka haal yaksan ho sakta hai? Alhamdulillah, magar aksar log nadaani mein padey huye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa misal biyan farma raha hai aik woh shaks jiss mien boht say bahum zidd rakhney walay saajhi hain aur doosra woh shaks jo sirf aik hi ka (ghulam) hai kiya yeh dono sift mein yaksan hain Allah Taalaa hi kay liye sab tareef hai. Baat yeh hai kay inn mein say aksar log samajhtay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह एक मिसाल देता है एक शक्स तो वो है जिसकी मिलकियत में बहुत से काज खुल्क (कई झगड़ालू उस्ताद) आका शरीक हैं जो उसे अपनी-अपनी तरफ खींचते हैं और दूसरा शक्स पूरे का पूरा एक ही आका का गुलाम है। क्या इन दोनो का हाल यकसन हो सकता है? अल्हम्दुलिल्लाह, मगर अक्सर लोग नादानी में पड़े हुए हैं
عَرَبِيإِنَّكَ مَيِّتٌ وَإِنَّهُم مَيِّتونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) निःसंदेह आप मरने वाले हैं तथा निःसंदेह वे भी मरने वाले हैंl
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) tumhein bhi marna hai aur in logon ko bhi marna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan khud aap ko bhi mot aayegi aur yeh sab bhi marney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) तुम्हें भी मरना है और इन लोगों को भी मरना है
عَرَبِيثُمَّ إِنَّكُم يَومَ القِيامَةِ عِندَ رَبِّكُم تَختَصِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर निःसंदेह तुम क़ियामत के दिन अपने पालनहार के पास झगड़ोगे।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar qayamat ke roz tum sab apne Rubb ke huzur apna apna muqaddama pesh karogey
Roman Urdu (Junagarhi)Phir tum sab kay sab qayamat kay din apnay rab kay samney jhagro gay
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार कयामत के रोज तुम सब अपने रब के हुजूर अपना अपना मुकद्दमा पेश करोगी
🕮 Juz 24 begins here
عَرَبِي۞ فَمَن أَظلَمُ مِمَّن كَذَبَ عَلَى اللَّهِ وَكَذَّبَ بِالصِّدقِ إِذ جاءَهُ ۚ أَلَيسَ في جَهَنَّمَ مَثوًى لِلكافِرينَ
हिन्दी (Al-Omari)तथा उससे अधिक अत्याचारी कौन होगा, जो अल्लाह पर झूठ गढ़े या जब सच उसके पास आ जाए, तो उसे झुठलाए? तो क्या जहन्नम में काफ़िरों का आवास नहीं होगा?
Roman Urdu (Maududi)Phir us shaks se bada zaalim aur kaun hoga jisne Allah par jhoot baandha aur jab sacchayi uske saamne aayi to usey jhutla diya. Kya aisey kaafiron ke liye jahannum mein koi thikana nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Uss say barh ker zalim kon hai jo Allah Taalaa per jhoot bolay? Aur sacha deen jab uss kay pass aaye to ussay jhoota bataye? Kiya aisay kuffaar kay liye jahannum thikana nahi hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जिसने अल्लाह पर झूठ बांधा और जब सच्ची उसके सामने आई तो उसे झूठला दिया। क्या ऐसे काफिरों के लिए जहन्नुम में कोई ठिकाना नहीं है
عَرَبِيوَالَّذي جاءَ بِالصِّدقِ وَصَدَّقَ بِهِ ۙ أُولٰئِكَ هُمُ المُتَّقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो सत्य लेकर आया और जिसने उसे सच माना, तो वही (यातना से) सुरक्षित रहने वाले लोग हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo shaks sacchayi lekar aaya aur jinhon ne usko sach maana, wahi azaab se bachne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo sachay deen ko laye aur jiss ney iss ki tasdeeq ki yehi log paarsa hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जो शक्स सच्ची लेकर आया और जिन्हों ने उसको सच माना, वही अज़ाब से बचने वाले हैं
عَرَبِيلَهُم ما يَشاءونَ عِندَ رَبِّهِم ۚ ذٰلِكَ جَزاءُ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनके लिए उनके पालनहार के यहाँ वह सब कुछ होगा, जो वे चाहेंगे। और यही सदाचारियों का प्रतिफल है।
Roman Urdu (Maududi)Unhein apne Rubb ke haan woh sab kuch milega jiski woh khwaish karenge. Yeh hai neki karne waalon ki jaza
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay liye unn kay rab kay pass (her) woh cheez hai jo yeh chahyen nek logon ka yeh hi badla hai
Devnagri Urdu (Maududi)उन्हें अपने रुब के हां वो सब कुछ मिलेगा जिसकी वो ख्वाहिश करेंगे। ये है नेकी करने वालों की जजा
عَرَبِيلِيُكَفِّرَ اللَّهُ عَنهُم أَسوَأَ الَّذي عَمِلوا وَيَجزِيَهُم أَجرَهُم بِأَحسَنِ الَّذي كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि जो बुरे कर्म उन्होंने किए हैं, उन्हें अल्लाह क्षमा कर दे तथा उनके अच्छे कर्मों के बदले, जो वे कर रहे थे, उन्हें उनका प्रतिफल प्रदान करे।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke jo badhtareen aamaal unhon ne kiye thay unhein Allah unke hisaab se saaqit (remit ) karde aur jo behtareen aamaal woh karte rahey unke lihaz se unko ajar ata farmaye
Roman Urdu (Junagarhi)Takay Allah Taalaa unn say unn kay buray amalon ko door ker dey aur jo nek kaam unhon ney kiyey hain unn ka acha badla ata farmaye
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के जो बख्तरीन आमाल उन्होन ने किए थे उन्हें अल्लाह उनके हिसाब से साकीत करदे और जो बेहतरे आमाल वो करते रहे उनके लिहाज़ से उनको अजर अता फरमाये
عَرَبِيأَلَيسَ اللَّهُ بِكافٍ عَبدَهُ ۖ وَيُخَوِّفونَكَ بِالَّذينَ مِن دونِهِ ۚ وَمَن يُضلِلِ اللَّهُ فَما لَهُ مِن هادٍ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या अल्लाह अपने बंदे के लिए काफ़ी नहीं है? तथा वे आपको उन (झूठे पूज्यों) से डराते हैं, जो उसके सिवा हैं। तथा जिसे अल्लाह राह से हटा दे, उसे कोई राह पर लाने वाला नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) kya Allah apne banday ke liye kaafi nahin hai? Yeh log uske siwa dusron se tumko daratey hain, halaanke Allah jisey gumrahi mein daal dey usey koi raasta dikhane waala nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya Allah Taalaa apnay bandon kay liye kafi nahi? Yeh log aap ko Allah kay siwa auron say dara rahey hain aur jissay Allah gumrah ker day uss ki rehnumaee kerney wala koi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) क्या अल्लाह अपने बंदे के लिए काफी नहीं है? ये लोग उसके सिवा दूसरे से तुमको डराते हैं, हलांके अल्लाह जिसे गुमराही में डाल दे उसे कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं
عَرَبِيوَمَن يَهدِ اللَّهُ فَما لَهُ مِن مُضِلٍّ ۗ أَلَيسَ اللَّهُ بِعَزيزٍ ذِي انتِقامٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिसे अल्लाह सीधी राह पर लगा दे, उसे कोई राह से भटका नहीं सकता। क्या अल्लाह प्रभुत्वशाली, बदला लेने वाला नहीं है?
Roman Urdu (Maududi)Aur jisey woh hidayat de usey bhatkane wala bhi koi nahin. Kya Allah zabardast aur inteqaam lene wala nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jissay woh hidayat day ussay koi gumrah kerney wala nahi kiya Allah Taalaa ghalib aur badla lenay wala nahi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जिसे वो हिदायत दे उसे भटकने वाला भी कोई नहीं। क्या अल्लाह ज़बरदस्त और इन्तेक़ाम लेने वाला नहीं है
عَرَبِيوَلَئِن سَأَلتَهُم مَن خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ لَيَقولُنَّ اللَّهُ ۚ قُل أَفَرَأَيتُم ما تَدعونَ مِن دونِ اللَّهِ إِن أَرادَنِيَ اللَّهُ بِضُرٍّ هَل هُنَّ كاشِفاتُ ضُرِّهِ أَو أَرادَني بِرَحمَةٍ هَل هُنَّ مُمسِكاتُ رَحمَتِهِ ۚ قُل حَسبِيَ اللَّهُ ۖ عَلَيهِ يَتَوَكَّلُ المُتَوَكِّلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि आप उनसे पूछें कि आकाशों तथा धरती को किसने पैदा किया है? तो वे अवश्य कहेंगे कि अल्लाह ने। आप कह दीजिए कि तुम बताओ कि जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, यदि अल्लाह मुझे कोई हानि पहुँचाना चाहे, तो क्या ये उसकी हानि दूर कर सकते हैं? या मेरे साथ दया करना चाहे, तो क्या ये उसकी दया को रोक सकते हैं? आप कह दें कि मेरे लिए अल्लाह ही काफ़ी है। उसीपर भरोसा करने वाले भरोसा करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)In logon se agar tum pucho ke zameen aur aasmaano ko kisne paida kiya hai to yeh khud kahenge ke Allah ne. Insey kaho, jab haqeeqat yeh hai to tumhara kya khayal hai ke agar Allah mujhey koi nuksaan pahunchana chahe to kya tumhari yeh dewiyan (godess) jinhein tum Allah ko chodh kar pukarte ho, mujhey uske pahunchaye huey nuksaan se bacha lengi? Ya Allah mujh par meharbani karna chahe to kya yeh uski rehmat ko roak sakengi? Bas insey kehdo ke mere liye Allah hi kaafi hai, bharosa karne waley usi par bharosa karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Agar aap inn say poochen kay aasman-o-zamin ko kiss ney peda kiya hai? To yaqeenan woh yehi jawab den gay kay Allah ney. Aap inn kahiyey acha yeh to batao jinhen tum Allah kay siwa pukartay ho agar Allah Taalaa mujhay nuksan phonchana chahye to kiya yeh uss kay nuksan ko hata saktay hain? Ya Allah Taalaa mujh per meharbani ka iradah keray to kiya yeh uss ki meharbani ko rok saktay hain? Aap keh den kay Allah mujhay kafi hai tawakkal kerney walay ussi per tawakkal kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों से अगर तुम पूछो के ज़मीन और आसमान को किसने अदा किया है तो ये खुद कहेंगे के अल्लाह ने। इनसे कहो, जब हकीकत ये है तो तुम्हारा क्या ख्याल है कि अगर अल्लाह मुझे कोई नुक्सान पहुंचाना चाहे तो क्या तुम्हारी ये देवियां (देवी) जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़ कर पुकारते हो, मुझे उसे पाहुंचाए हुए नुक्सान से बचा लूंगी? या अल्लाह मुझ पर मेहरबानी करना चाहे तो क्या ये उसकी रहमत को रोक सकेगी? बस इनसे कहदो के मेरे लिए अल्लाह ही काफी है, भरोसा करने वाले उसी पर भरोसा करते हैं
عَرَبِيقُل يا قَومِ اعمَلوا عَلىٰ مَكانَتِكُم إِنّي عامِلٌ ۖ فَسَوفَ تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम काम करो अपने स्थान पर, मैं भी काम कर रहा हूँ। फिर शीघ्र ही तुम्हें पता चल जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Insey saaf kaho ke “ aey meri qaum ke logon, tum apni jagah apna kaam kiye jao, main apna kaam karta rahunga, anqareeb tumhein maloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay aey meri qom! Tum apni jagah per amal kiye jao mein bhi amal ker raha hun abhi abhi tum jaan lo gay
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे साफ कहो के “ऐ मेरी कौम के लोगों, तुम अपनी जगह अपना काम किये जाओ, मैं अपना काम करता रहूंगा, अकारिब तुम्हें मालूम हो जाएगा।”
عَرَبِيمَن يَأتيهِ عَذابٌ يُخزيهِ وَيَحِلُّ عَلَيهِ عَذابٌ مُقيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)कि कौन है वह व्यक्ति, जिसपर अपमानकारी यातना आएगी और उसपर स्थायी अज़ाब उतरेगा?
Roman Urdu (Maududi)ke kispar ruswa-kun azaab aata hai aur kisey woh saza milti hai jo kabhi talne wali nahin”
Roman Urdu (Junagarhi)Kay kiss per ruswa kerney wala azab aata hai aur kiss per daeemi maar aur hameshgi ki saza hoti hai
Devnagri Urdu (Maududi)के किस्पर रुसवा-कुन अज़ाब आता है और किसी को वो सज़ा मिलती है जो कभी तलने वाली नहीं”
عَرَبِيإِنّا أَنزَلنا عَلَيكَ الكِتابَ لِلنّاسِ بِالحَقِّ ۖ فَمَنِ اهتَدىٰ فَلِنَفسِهِ ۖ وَمَن ضَلَّ فَإِنَّما يَضِلُّ عَلَيها ۖ وَما أَنتَ عَلَيهِم بِوَكيلٍ
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हिन्दी (Al-Omari)वास्तव में, हमने ही आपपर यह पुस्तक लोगों के लिए सत्य के साथ उतारी है। अब जिसने सीधा मार्ग ग्रहण किया, तो अपने लिए, तथा जो भटका, तो वह भटककर अपना नुकसान करता है। तथा आप उनके ज़िम्मेवार नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) humne sab Insano ke liye yeh kitaabe bar-haqq tumpar nazil kardi hai. Ab jo seedha raasta ikhtiyar karega apne liye karega aur jo bhatkega uske bhatakne ka wabal usi par hoga. Tum unke zimmedaar nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap per hum ney haq kay sath yeh kitab logon kay liye nazil farmaee hai pus jo shaks rah-e-raast per aajaye uss kay apnay liye nafa hai aur jo gumrah hojaye uss ki gumrahee ka (wabal) ussi per hai aap unn kay zimay daar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) हमने सब इंसानों के लिए ये किताबे बार-हक़ तुमपर नाज़िल कर दी है। अब जो सीधा रास्ता इख्तियार करेगा अपने लिए करेगा और जो भटकेगा उसके भटकने का बदला उसी पर होगा। तुम उनके ज़िम्मेदार नहीं हो
عَرَبِياللَّهُ يَتَوَفَّى الأَنفُسَ حينَ مَوتِها وَالَّتي لَم تَمُت في مَنامِها ۖ فَيُمسِكُ الَّتي قَضىٰ عَلَيهَا المَوتَ وَيُرسِلُ الأُخرىٰ إِلىٰ أَجَلٍ مُسَمًّى ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِقَومٍ يَتَفَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही प्राणों को उनकी मौत के समय क़ब्ज़ करता है, तथा जिसकी मौत का समय नहीं आया, उसकी नींद की अवस्था में। फिर (उसे) रोक लेता है, जिसके बारे में मौत का निर्णय कर दिया हो तथा अन्य को एक निर्धारित समय तक के लिए भेज देता है। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए निश्चय कई निशानियाँ हैं, जो मनन-चिंतन करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi hai jo maut ke waqt roohein qabz karta hai aur jo abhi nahin mara hai uski rooh neend mein qabz kar leta hai, phir jispar woh maut ka faisla nafiz karta hai usey roak leta hai aur dusron ki roohein ek waqt e muqarrar ke liye wapas bhej deta hai. Is mein badi nishaniyan hain un logon ke liye jo gaur o fikar karne wale hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah hi roohon ko unn ki mot kay waqt aur jin ki mot nahi aai unhen unn ki neend kay waqt qabz ker leta hai phir jin per mot ka hukum lag chuka hai unhen to rok leta hai aur doosri (roohon) ko aik muqarrar waqt kay liye chor deta hai. Ghor kerney walon kay liye iss mein yaqeenan boht si nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह हाय है जो मौत के वक्त रूहें क़ब्ज़ करता है और जो अभी नहीं मारा है उसकी रूह नींद में क़ब्ज़ कर लेता है, फिर जिसपर वो मौत का फैसला नफ़ीज़ करता है उसे रोक लेता है और दूसरों की रूहें एक वक़्त ए मुकर्रर के लिए वापस भेज देता है. क्या मैं बड़ी निशानियां हूं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फिक्र करने वाले हैं
عَرَبِيأَمِ اتَّخَذوا مِن دونِ اللَّهِ شُفَعاءَ ۚ قُل أَوَلَو كانوا لا يَملِكونَ شَيئًا وَلا يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने अल्लाह के अतिरिक्त बहुत-से सिफ़ारिशी बना लिए हैं? आप कह दें: क्या यदि वे किसी चीज़ का अधिकार न रखते हों और न कुछ समझते हों तो भी (वे सिफ़ारिश करेंगे)?
Roman Urdu (Maududi)Kya us khuda ko chodh kar in logon ne dusron ko shafee (intercessors) bana rakkha hai? Insey kaho, kya woh shafaa-at karenge khwa unke ikhtiyar mein kuch na ho aur woh samajhte bhi na hon
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn logon ney Allah Taalaa kay siwa (auron ko) sifarshi muqarrar ker rakha hai? Aap keh dijiye! Kay go woh kuch bhi ikhtiyar na raktay hon aur na aqal rakhtay hon
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हमें खुदा को छोड़ कर लोगों ने दूसरों को शफी (मध्यस्थ) बना रखा है? इनसे कहो, क्या वो शफा-अत करेंगे ख्वा उनके इख्तियार में कुछ ना हो और वो समझे भी ना हों
عَرَبِيقُل لِلَّهِ الشَّفاعَةُ جَميعًا ۖ لَهُ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ ثُمَّ إِلَيهِ تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि सिफ़ारिश तो सब अल्लाह के अधिकार में है। उसी के लिए है आकाशों तथा धरती का राज्य। फिर उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, shafaa-at (intercession) saari ki saari Allah ke ikhtiyar mein hai. Aasmaano aur zameen ki baadshahi ka wahi maalik hai, phir usiki taraf tum paltaye janey waley ho
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! Kay tamam sifarish ka mukhtar Allah hi hai. Tamam aasmano aur zamin ka raaj ussi kay liye hai tum sab ussi k taraf pheray jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, शफा-अत (हिम्मत) सारी की सारी अल्लाह के इख्तियार में है। आसमान और ज़मीन की बादशाही का वही मालिक है, फिर उसकी तरफ तुम पलटाये जाने वाले हो
عَرَبِيوَإِذا ذُكِرَ اللَّهُ وَحدَهُ اشمَأَزَّت قُلوبُ الَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِالآخِرَةِ ۖ وَإِذا ذُكِرَ الَّذينَ مِن دونِهِ إِذا هُم يَستَبشِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब अकेले अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है, तो उन लोगों के दिल संकीर्ण होने लगते हैं, जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते तथा जब उसके सिवा अन्य पूज्यों का ज़िक्र आता है, तो वे सहसा प्रसन्न हो जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab akele Allah ka zikar kiya jaata hai to aakhirat par imaan na rakhne walon ke dil kudne(contract with bitterness) lagte hain. Aur jab uske siwa dusron ka zikr hota hai to yakayak woh khushi se khil uthte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jabb Allah akelay ka zikar kiya jaye to inn logon kay dil nafrat kerney lagtay hain jo aakhirat ka yaqeen nahi rakhtay aur jab uss kay siwa (aur ka ) zikar kiya jaye to unn kay dil khul ker khush ho jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब अकेले अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो आख़िरत पर ईमान न रखने वालों के दिल कुदने लगते हैं। और जब उसके सिवा दूसरे का जिक्र होता है तो यकीनन वो खुशी से खिल उठते हैं
عَرَبِيقُلِ اللَّهُمَّ فاطِرَ السَّماواتِ وَالأَرضِ عالِمَ الغَيبِ وَالشَّهادَةِ أَنتَ تَحكُمُ بَينَ عِبادِكَ في ما كانوا فيهِ يَختَلِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें: ऐ अल्लाह, आकाशों तथा धरती के पैदा करने वाले, परोक्ष तथा प्रत्यक्ष के जानने वाले! तू ही अपने बंदों के बीच उस बात के बारे में निर्णय करेगा, जिसमें वे झगड़ रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, khudaya! Aasmaano aur zameen ke paida karne waley, haazir o gaib ke jaan-ne waley, tu hi apne bandon ke darmiyan us cheez ka faisla karega jismein woh ikhtilaf karte rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye! Kay aey Allah ! Aasmano aur zamin kay peda kerney walay chupay khulay ka jannay walay tu hi apnay bandon mein inn umoor ka faisla farmaye ga jin mein who ulajh rahey thay
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, खुदाया! आसमानो और ज़मीन के भुगतान करने वाले, हाज़िर ओ गैब के जान-ने वाले, तू ही अपने बंदों के दरमियान उस चीज़ का फैसला करेगा जिसमें वो इख्तिलाफ करते रहेंगे
عَرَبِيوَلَو أَنَّ لِلَّذينَ ظَلَموا ما فِي الأَرضِ جَميعًا وَمِثلَهُ مَعَهُ لَافتَدَوا بِهِ مِن سوءِ العَذابِ يَومَ القِيامَةِ ۚ وَبَدا لَهُم مِنَ اللَّهِ ما لَم يَكونوا يَحتَسِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने अत्याचार किया है, अगर धरती की सारी चीज़ें उनकी हो जाएँ, और उनके साथ उतना ही और भी, तो वे क़ियामत के दिन बुरी यातना से बचने के लिए इन सारी चीज़ों को फ़िदया में दे देंगे। तथा अल्लाह की ओर से उनके लिए वह बात खुल जाएगी, जिसका वे गुमान भी न करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Agar in zaalimon ke paas zameen ki saari daulat bhi ho, aur utni hi aur bhi, to yeh roz-e-qayamat ke buray azaab se bachne ke liye sab kuch fidiye (expiation/ redeem) mein dene ke liye tayyar ho jayenge. Wahan Allah ki taraf se inke saamne woh kuch aayega jiska inhon ne kabhi andaza hi nahin kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar zulm kerney walon kay pass woh sab kuch ho jo ruy-e-zamin per hai aur iss kay sath utna hi aur ho to bhi bad-tareen saza kay badlay mein qayamat kay din yeh sab kuch day den aur inn kay samney Allah ki taraf say woh zahir hoga jiss ka gumaan bhi enhen na tha
Devnagri Urdu (Maududi)अगर जालिमों के पास ज़मीन की सारी दौलत भी हो, और उतनी ही और भी, तो ये रोज़-ए-क़यामत के बुरे अज़ाब से बचने के लिए सब कुछ फ़िडिये (प्रायश्चित/ छुड़ाने) में देने के लिए तैयार हो जाएंगे। वहां अल्लाह की तरफ से इनके सामने वो कुछ आएगा जिसका इन्होन ने कभी अंदाज़ा ही नहीं किया है
عَرَبِيوَبَدا لَهُم سَيِّئَاتُ ما كَسَبوا وَحاقَ بِهِم ما كانوا بِهِ يَستَهزِئونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनके कुकर्मों की बुराइयाँ उनके सामने आ जाएँगी और उन्हें वह यातना घेर लेगी, जिसका वे मज़ाक उड़ाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Wahan apni kamayi ke sarey bure nataij inpar khul jayenge aur wahi cheez inpar musallat ho jayegi jiska yeh mazaq udatay rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo kuch enhon ney kiya tha uss ki buraiyan inn per khul paren gi aur jiss ka woh mazaq kertay thay woh enhen aa gheray ga
Devnagri Urdu (Maududi)वहां अपनी कमाई के सारे बुरे नटैज अंदर खुल जाएंगे और वही चीज़ अंदर मुसल्लत हो जाएगी जिसका ये मज़ाक उड़ाते रहे हैं
عَرَبِيفَإِذا مَسَّ الإِنسانَ ضُرٌّ دَعانا ثُمَّ إِذا خَوَّلناهُ نِعمَةً مِنّا قالَ إِنَّما أوتيتُهُ عَلىٰ عِلمٍ ۚ بَل هِيَ فِتنَةٌ وَلٰكِنَّ أَكثَرَهُم لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब इनसान को कोई दुःख पहुँचाता है, तो हमें पुकारता है। फिर जब हम उसे अपनी ओर से कोई सुख प्रदान करते हैं, तो कहता हैः "यह तो मुझे ज्ञान के कारण प्राप्त हुआ है।" बल्कि, यह एक परीक्षा है। किन्तु, उनमें से अधिकतर लोग (इसे) नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Yahi Insaan jab zara si museebat isey choo jaati hai to humein pukarta hai, aur jab hum isey apni taraf se niyamat de kar aphar dete (favour from us) hain to kehta hai ke yeh to muhey ilm ki bina par diya gaya hai. Nahin! balke yeh aazmiash hai, magar in mein se aksar log jaante nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Insan ko jab koi takleef phonchti hai to humen pukarney lagta hai phir jab hum ussay apni taraf say koi nemat ata farma den to kehney lagta hai kay issay to mein mehaz apnay ilm ki waja say diya gaya hun bulkay yeh aazmaeesh hai lekin inn mein say aksar log bey-ilm hain
Devnagri Urdu (Maududi)यहीं इंसान जब ज़रा सी मुसीबत इसे छू जाती है तो हमें पुकारता है, और जब हम इसे अपनी तरफ से नियामत दे कर ऊपर देते हैं तो कहते हैं के ये तो मुझे इल्म की बिना पर दिया गया है। नहीं! बलके ये आजमाइश है, मगर इनमें से अक्सर लोग जानते नहीं हैं
عَرَبِيقَد قالَهَا الَّذينَ مِن قَبلِهِم فَما أَغنىٰ عَنهُم ما كانوا يَكسِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही बात, उन लोगों ने भी कही थी, जो इनसे पूर्व थे। तो नहीं काम आया उनके, जो कुछ वे कमा रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Yahi baat insey pehle guzre huey log bhi keh chuke hain, magar jo kuch woh kamaate thay woh unke kisi kaam na aaya
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say aglay bhi yehi baat keh chukay hain pus unn ki kaarawaee unn kay kuch kaam na aaee
Devnagri Urdu (Maududi)यही बात इनसे पहले गुजरे हुए लोग भी कह चुके हैं, मगर जो कुछ वो कमाते थे वो उनके किसी काम ना आया
عَرَبِيفَأَصابَهُم سَيِّئَاتُ ما كَسَبوا ۚ وَالَّذينَ ظَلَموا مِن هٰؤُلاءِ سَيُصيبُهُم سَيِّئَاتُ ما كَسَبوا وَما هُم بِمُعجِزينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उनपर उनके कर्मों की बुराइयाँ आ पड़ीं। और इनमें से जिन लोगों ने अत्याचार किया, उनपर उनके कर्मों की बुराइयाँ आ पड़ेंगी। और वे (हमें) विवश करने वाले नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir apni kamayi ke buray nataij unhon ne bhugtey, aur in logon mein se bhi jo zaalim hain woh anqareeb apni kamayi kay buray nataij bhugtenge.Yeh humein aajiz (frustrate) kardene waley nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir unn ki tamam burayian unn per aa paren aur unn mein say bhi jo gunehgaar hain unn ki ki hui burayian bhi unn per aa paren gi yeh (humen) hara denay walay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अपनी कमाई के बुरे नटैज उन्हें न भुगते, और इन लोगों में से भी जो जालिम हैं वो अंकारीब अपनी कमाई के बारे में बताते हैं। ये हमें अजीज (निराश) करने वाले नहीं हैं
عَرَبِيأَوَلَم يَعلَموا أَنَّ اللَّهَ يَبسُطُ الرِّزقَ لِمَن يَشاءُ وَيَقدِرُ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِقَومٍ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्हें मालूम नहीं कि अल्लाह जिसके लिए चाहता है, रोज़ी कुशादा कर देता है, और (जिसे चाहता है) नापकर देता है? निश्चय इसमें बहुत-सी निशानियाँ हैं, उन लोगों के लिए, जो ईमान लाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur kya inhein maloom nahin hai ke Allah jiska chahta hai rizq kushada(enlarge) kardeta hai aur jiska chahta hai tangg kardeta hai? Is mein nishaniyan hain un logon ke liye jo iman latey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya enhen yeh maloom nahi kay Allah Taalaa jiss kay liye chahye rozi kushadah ker deta hai aur tang (bhi) eman laney walon kay liye iss mein (bari bari) nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या इन्हें मालूम नहीं है के अल्लाह जिसका चाहता है रिज्क कुशादा (बड़ा करना) करता है और जिसका चाहता है तंग करदेता है? इस में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं
عَرَبِي۞ قُل يا عِبادِيَ الَّذينَ أَسرَفوا عَلىٰ أَنفُسِهِم لا تَقنَطوا مِن رَحمَةِ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَغفِرُ الذُّنوبَ جَميعًا ۚ إِنَّهُ هُوَ الغَفورُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप मेरे उन बंदों से कह दें, जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किए हैं कि तुम अल्लाह की दया से निराश न हो। निःसंदेह अल्लाह सब पापों को क्षमा कर देता है। निःसंदेह वही तो अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) kehdo ke aey mere bandon, jinhon ne apni jaano par zyadti (excesses) ki hai, Allah ki rehmat se mayous na ho jao, yaqeenan Allah saarey gunaah maaf kardeta hai, woh to gafoor o Raheem hai(Most Forgiving, Most Merciful)
Roman Urdu (Junagarhi)(meri janib say) keh do kau aey meray bando! Jinhon ney apni jano per ziyadti ki hai tum Allah ki rehmat say na-umeed na hojao bil-yaqeen Allah Taalaa saray gunahon ko bakhash deta hai waqaee woh bari bakhsish bari rehmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) कहदो के ऐ मेरे बंदों, जिन्होन ने अपनी जानो पर ज़्यादती (ज्यादती) की है, अल्लाह की रहमत से मयुस न हो जाओ, यकीनन अल्लाह सारे गुनाह माफ करता है, वो तो गफूर ओ रहीम है क्षमा करने वाला, सबसे दयालु)
عَرَبِيوَأَنيبوا إِلىٰ رَبِّكُم وَأَسلِموا لَهُ مِن قَبلِ أَن يَأتِيَكُمُ العَذابُ ثُمَّ لا تُنصَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अपने पालनहार की ओर झुक पड़ो और उसके आज्ञाकारी हो जाओ, इससे पहले कि तुमपर यातना आ जाए, फिर तुम्हारी सहायता न की जाए।
Roman Urdu (Maududi)Palat aao apne Rubb ki taraf aur mutii (submissive) ban jao uske, qabl iske ke tumpar azaab aa jaye aur phir kahin se tumhein madad na mil sakey
Roman Urdu (Junagarhi)Tum (sab) apnay perwerdigar ki taraf jhuk paro aur uss ki hukum bardaari kiye jao iss say qabal kay tumharay pass azab aajaye aur phir tumhari madad na ki jaye
Devnagri Urdu (Maududi)पलट आओ अपने रब की तरफ और मुती (विनम्र) बन जाओ उसके, कबूल इसके के तुमपर अज़ाब आ जाए और फिर कहीं से तुम्हें मदद न मिल सके
عَرَبِيوَاتَّبِعوا أَحسَنَ ما أُنزِلَ إِلَيكُم مِن رَبِّكُم مِن قَبلِ أَن يَأتِيَكُمُ العَذابُ بَغتَةً وَأَنتُم لا تَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उस सबसे उत्तम वाणी का पालन करो, जो अल्लाह की ओर से तुम्हारी तरफ़ उतारी गई है, इससे पूर्व कि तुमपर यातना आ पड़े और तुम्हें एहसास तक न हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur pairwi ikhtiyar karlo apne Rubb ki bhejhi hui kitaab ke behtareen pehlu ki, qabl iske ke tumpar achanak azaab aaye aur tumko khabar bhi na ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur pairwee kero uss behtareen cheez ki jo tumhari taraf tumharay perwerdigar ki taraf say nazil ki gaee hai iss say pehlay kay tum per achanak azab aajaye aur tumhen itla bhi na ho
Devnagri Urdu (Maududi)और जोड़ी इख्तियार करलो अपने रब की भेजी हुई किताब के बहतरीन पहलू की, कबूल इसके तुम अचानक अजब आए और तुमको खबर भी ना हो
عَرَبِيأَن تَقولَ نَفسٌ يا حَسرَتا عَلىٰ ما فَرَّطتُ في جَنبِ اللَّهِ وَإِن كُنتُ لَمِنَ السّاخِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐसा न हो कि) कोई व्यक्ति कहे कि अफ़सोस है उस कोताही पर, जो मैंने अल्लाह के हक में की तथा मैं उपहास करने वालों में रह गया।
Roman Urdu (Maududi)Kahin aisa na ho ke baad mein koi shaks kahey “ Afsos meri us taqsir(negligence) par jo main Allah ki janaab mein karta raha, balke main to ulta mazaq udane walon mein shamil tha”
Roman Urdu (Junagarhi)(Aisa na ho kay) koi shaks kahey haaye afsos! Iss baat per kay mein ney Allah Taalaa kay haq mein kotahee ki bulkay mein to mazaq uraney walon mein hi raha
Devnagri Urdu (Maududi)कहीं ऐसा ना हो के बाद में कोई शक कहे "अफसोस मेरी उस तक़सीर(लापरवाही) पर जो मैं अल्लाह की जनाब में करता रहा, बलके मैं तो उलटा मज़ाक उड़ाने वालों में शामिल था"
عَرَبِيأَو تَقولَ لَو أَنَّ اللَّهَ هَداني لَكُنتُ مِنَ المُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)या फिर कहे कि यदि अल्लाह मुझे सीधा रास्ता दिखाता, तो मैं डरने वालों में से हो जाता।
Roman Urdu (Maududi)Ya kahey “kaash Allah ne muhjey hidayat bakshi hoti to main bhi muttaqiyon mein se hota”
Roman Urdu (Junagarhi)Ya kehey kay agar Allah mujhay hidayat kerta to mein bhi paarsa logon mein hota
Devnagri Urdu (Maududi)या कहे "काश अल्लाह ने मुझे हिदायत बख्शी होती तो मैं भी मुत्तक़ियों में से होता"
عَرَبِيأَو تَقولَ حينَ تَرَى العَذابَ لَو أَنَّ لي كَرَّةً فَأَكونَ مِنَ المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)या जब यातना को देख ले, तो कहने लगे कि अगर मुझे (संसार की ओर) वापस जाने का अवसर मिले, तो मैं अवश्य सदाचारियों में से हो जाऊँगा।
Roman Urdu (Maududi)Ya azaab dekh kar kahey “kaash mujhey ek mauqa aur mil jaye aur main bhi neik amal karne walon mein shamil ho jaun.”
Roman Urdu (Junagarhi)Ya azab ko dekh ker kahey kaash! Kay kissi tarah mera lot jana ho jata to mein bhi neko kaaro mein ho jata
Devnagri Urdu (Maududi)हां अज़ाब देख कर कह" काश मुझे एक मौका और मिल जाए और मैं भी जल्द अमल करने वालों में शामिल हो जाऊं।”
عَرَبِيبَلىٰ قَد جاءَتكَ آياتي فَكَذَّبتَ بِها وَاستَكبَرتَ وَكُنتَ مِنَ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)हाँ, तुम्हारे पास मेरी निशानियाँ आईं, तो तुमने उन्हें झुठला दिया और अभिमान किया तथा तुम थे ही काफ़िरों में से।
Roman Urdu (Maududi)(Aur us waqt usey yeh jawab miley ke) “kyoun nahin meri aayat tere paas aa chuki thin , phir tu nay unhein jhutlaya aur taqabbur kiya aur tu kaafiron mein se tha”
Roman Urdu (Junagarhi)Haan (haan) be-shak teray pass meri aayaten phonch chuki thin jinhen tu ney jhutlaya aur ghooroor takabbur kiya aur tu tha hi kafiron mein
Devnagri Urdu (Maududi)(और हमारा वक्त उसे ये जवाब मिले के) "क्यों नहीं मेरी आयत तेरे पास आ चुकी पतली, फिर तू नहीं उनको झुटलाया और तकब्बुर किया और तू काफिरों में से था"
عَرَبِيوَيَومَ القِيامَةِ تَرَى الَّذينَ كَذَبوا عَلَى اللَّهِ وُجوهُهُم مُسوَدَّةٌ ۚ أَلَيسَ في جَهَنَّمَ مَثوًى لِلمُتَكَبِّرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और क़ियामत के दिन आप उन लोगों को देखेंगे, जिन्होंने अल्लाह पर झूठ बोला कि उनके चेहरे काले होंगे। तो क्या अभिमानियों का ठिकाना जहन्नम में नहीं है?
Roman Urdu (Maududi)Aaj jin logon ne khuda par jhoot baandhe hain qayamat ke roz tum dekhoge ke unke mooh kaley hongey. Kya janahhum mein mutakabbiron (haughty) ke liye kaafi jagah nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin logon ney Allah per jhoot bandha hai to aap dekhen gay kay qayamat kay din unn kay chehray siyah hogaye hongay kiya takabbur kerney walon ka thikana jahannum mein nahi
Devnagri Urdu (Maududi)आज जिन लोगों ने खुदा पर झूठ बांधे हैं कयामत के रोज तुम देखोगे के उनके मुँह काले होंगे। क्या जानहुम में मुतकब्बिरों (घमंडी) के लिए काफी जगह नहीं है
عَرَبِيوَيُنَجِّي اللَّهُ الَّذينَ اتَّقَوا بِمَفازَتِهِم لا يَمَسُّهُمُ السّوءُ وَلا هُم يَحزَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह उन लोगों को उनकी सफलता के साथ बचा लेगा, जो आज्ञाकारी रहे। न उन्हें कोई तकलीफ छुएगी और न वे शोकाकुल होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Iske bar-aks jin logon ne yahan taqwa kiya hai unke asbaab-e-kamiyabi ki wajah se Allah unko najaat dega, unko na koi gaznad (harm) pahunchega na woh ghumgeen hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin logon ney perhezgari ki unhen Allah Taalaa unn ki kamyabi kay sath bacha ley ga unhen koi dukh choo bhi na sakay ga aur na woh kissi tarah ghumgeen hongay
Devnagri Urdu (Maududi)इसके बार-अक्स जिन लोगों ने यहां तकवा किया है उनके असबाब-ए-कामियाबी की वजह से अल्लाह उनको नजात देगा, उनको कोई गजनद (नुकसान) पहुंचाएगा न वो घूमेंगे
عَرَبِياللَّهُ خالِقُ كُلِّ شَيءٍ ۖ وَهُوَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ وَكيلٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही प्रत्येक वस्तु का पैदा करने वाला है तथा वही प्रत्येक वस्तु का संरक्षक है।
Roman Urdu (Maududi)Allah har cheez ka khaliq (creator) hai aur wahi har cheez par nigehbaan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah her cheez ka peda kerney wala hai aur wohi her cheez per nigehbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह हर चीज का खालिक (निर्माता) है और वही हर चीज पर निगहबान है
عَرَبِيلَهُ مَقاليدُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۗ وَالَّذينَ كَفَروا بِآياتِ اللَّهِ أُولٰئِكَ هُمُ الخاسِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आकाशों तथा धरती की कुंजियाँ उसी के पास हैं तथा जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों का इनकार किया, वही लोग घाटा उठाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Zameen aur aasmaano ke khazano ki kunjiyan (keys) usi ke paas hain aur jo log Allah ki aayaat se kufr karte hain wahi ghatey (loss) mein rehne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmano aur zamin ki kunjiyon ka malik wohi hai jin jin logon ney Allah ki aayaton ka inkar kiya wohi khasarah paney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जमीन और आसमान के खजानो की कुंजियां (कुंजियां) उसके पास हैं और जो लोग अल्लाह की आयत से कुफ्र करते हैं वही घाटे (नुकसान) में रहने वाले हैं
عَرَبِيقُل أَفَغَيرَ اللَّهِ تَأمُرونّي أَعبُدُ أَيُّهَا الجاهِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें के ऐ अज्ञानो! क्या तुम मुझे आदेश देते हो कि मैं अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत (वंदना) करूँ?
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) insey kaho “phir kya aey jaahilon (ignorant), tum Allah ke siwa kisi aur ki bandagi karne ke liye mujhse kehte ho?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye aey jahilo! Kiya tum mujh say Allah ka siwa auron ki ibadat ka kehtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ) नबी) इनसे कहो “फिर क्या ऐ जाहिलों (अज्ञानी), तुम अल्लाह के सिवा किसी और की बंदगी करने के लिए मुझसे कहते हो?”
عَرَبِيوَلَقَد أوحِيَ إِلَيكَ وَإِلَى الَّذينَ مِن قَبلِكَ لَئِن أَشرَكتَ لَيَحبَطَنَّ عَمَلُكَ وَلَتَكونَنَّ مِنَ الخاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह तुम्हारी ओर एवं तुमसे पहले के नबियों की ओर वह़्य की गई है कि यदि तुमने शिर्क किया, तो निश्चय तुम्हारा कर्म अवश्य नष्ट हो जाएगा और तुम निश्चित रूप से हानि उठाने वालों में से हो जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)(yeh baat tumhein unsey saaf keh deni chahiye kyunke) tumhari taraf aur tumse pehle guzrey huey tamaam ambiya ki taraf yeh wahee (revelation) bheji ja chuki hai ke agar tumne shirk kiya to tumhara amal zaaya ho jayega aur tum khasarey (nuksan) mein rahogey
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan teri taraf bhi aur tujh say pehlay (kay tamam nabiyon) ki taraf bhi wahee ki gaee hai kay agar tu ney shirk kiya to bila shuba tera amal zaya hojayega aur bil-yaqeen tu ziyan kaaron mein say hojayega
Devnagri Urdu (Maududi)(ये बात तुम्हें उन्हें साफ कहना चाहिए क्योंकि) तुम्हारी तरफ और तुमसे पहले गुजरे हुए तमाम अंबिया की तरफ ये वही (खुलासा) भेजी जा चुकी है के अगर तुमने शिर्क किया तो तुम्हारा अमल जाय हो जाएगा और तुम खासे (नुक्सान) मैं रहोगे
عَرَبِيبَلِ اللَّهَ فَاعبُد وَكُن مِنَ الشّاكِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि आप अल्लाह ही की इबादत (वंदना) करें तथा शुक्र करने वालों में से हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza (Aey Nabi) tum bas Allah hi ki bandagi karo aur shukr-guzar bandon mein se ho jao
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay tu Allah hi ki ibadat ker aur shukar kerney walon mein say hoja
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाज़ा (ऐ नबी) तुम बस अल्लाह ही की बंदगी करो और शुक्र-गुज़ार बंदों में से हो जाओ
عَرَبِيوَما قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدرِهِ وَالأَرضُ جَميعًا قَبضَتُهُ يَومَ القِيامَةِ وَالسَّماواتُ مَطوِيّاتٌ بِيَمينِهِ ۚ سُبحانَهُ وَتَعالىٰ عَمّا يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने अल्लाह का सम्मान नहीं किया, जैसे उसका सम्मान करना चाहिए था और क़ियामत के दिन पूरी धरती उसकी एक मुट्ठी में होगी, तथा आकाश उसके दाएँ हाथ में लिपटे होंगे। वह उस शिर्क से पवित्र तथा उच्च है, जो वे कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)In logon ne Allah ki qadar hi na ki jaisa ke uski qadar karne ka haqq hai (uski qudrat e kaamila ka haal to yeh hai ke) qayamat ke roz poori zameen uski mutti mein hogi aur aasmaan uske dast e raast (right hand) mein liptey huey hongey. Paak aur baala-tarr hai woh us shirk se jo yeh log karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn logon ney jaisi qadar Allah Taalaa ki kerni chahyey thi nahi ki sari zami qayamat kay din uss ki muthi mein hogi aur tamam aasman uss kay dahaney hath mein lapetay huyey hongay woh pak aur bartar hai her uss cheez say jissay log uss ka shareek banayen
Devnagri Urdu (Maududi)इन लोगों ने अल्लाह की कदर ही न की जैसा के उसकी कदर करने का हक है (उसकी कुदरत ए कामिला का हाल तो ये है के) कयामत के रोज पूरी ज़मीन उसकी मुट्टी में होगी और आसमान उसके दस्त ए रास्ते (दाहिने हाथ) में लिपटे हुए होंगे। पाक और बाला-तार है वो हमसे शिर्क से जो ये लोग करते हैं
عَرَبِيوَنُفِخَ فِي الصّورِ فَصَعِقَ مَن فِي السَّماواتِ وَمَن فِي الأَرضِ إِلّا مَن شاءَ اللَّهُ ۖ ثُمَّ نُفِخَ فيهِ أُخرىٰ فَإِذا هُم قِيامٌ يَنظُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा सूर (नरसिंघा) में फूँक मारी जाएगी, तो जो कोई आकाशों और धरती में होगा, बेहोश हो जाएगा। सिवाय उसके, जिसको अल्लाह चाहे। फिर उसमें पुनः फूँक मारी जाएगी, तो अचानक सब खड़े होकर देखने लगेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur us roz sur (trumpet) phoonka jayega aur woh sab markar gir jayenge jo aasmaano aur zameen mein hain siwaye unke jinhein Allah zinda rakhna chahe. Phir ek dusra sur (trumpet) phoonka jayega aur yakayak sabke sab uth kar dekhne lagenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur soor phoonk diya jayega pus aasmano aur zamin walay sab bey-hosh ho ker gir paren gay magar jissay Allah chahyey phit doobara soor phoonka jayega pus woh aik dum kharay hoker dekhney lag jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और वो रोज़ सुर (तुरही) फूंका जाएगा और वो सब मरकर गिर जाएंगे जो आसमान और ज़मीन में हैं उनके सिवाए जिन्हें अल्लाह जिंदा रखना चाहे। फिर एक दूसरा सुर (तुरही) फूंका जाएगा और यकीन सबके सब उठ कर देखने लगेंगे
عَرَبِيوَأَشرَقَتِ الأَرضُ بِنورِ رَبِّها وَوُضِعَ الكِتابُ وَجِيءَ بِالنَّبِيّينَ وَالشُّهَداءِ وَقُضِيَ بَينَهُم بِالحَقِّ وَهُم لا يُظلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा धरती अपने पालनहार की ज्योति से जगमगाने लगेगी, और कर्मलेख (खोलकर लोगों के आगे) रख दिए जाएँगे, तथा नबियों और साक्षियों को लाया जाएगा, और उनके बीच सत्य के साथ निर्णय कर दिया जाएगा और उनपर अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Zameen apne Rubb kay Noor se chamak uthegi, kitaab e aamal laa kar rakh di jayegi, Ambiya aur tamam gawah haazir kardiye jayenge, logon ke darmiyan theek theek haqq ke saath faisla kardiya jayega aur unpar koi zulm na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aur zamin apney perwerdigar ka noor say jagmaga uthay gi naam-e-aemaal hazir kiyey jayen gay nabiyon aur gawahon ko ko laya jayega aur logon kay darmiyan haq haq faislay ker diyey jayen gay aur woh zulm na kiyey jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन अपने रुब के नूर से चमक उठेगी, किताब ए अमल ला कर रख दी जाएगी, अंबिया और तमाम गवाह हाज़िर कर दिए जाएंगे, लोगों के दरमियान ठीक ठीक हक के साथ फैसला कर दिया जाएगा और उन पर कोई जुल्म न होगा
عَرَبِيوَوُفِّيَت كُلُّ نَفسٍ ما عَمِلَت وَهُوَ أَعلَمُ بِما يَفعَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा प्रत्येक प्राणी को उसके कर्म का पूरा-पूरा फल दिया जाएगा। तथा वह भली-भाँति जानता है उसे, जो वे करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur har mutanaffis ko jo kuch bhi usney amal kiya tha uska poora poora badla diya jayega. Log jo kuch bhi karte hain Allah usko khoob jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss shaks ney jo kuch kiya hai bharpoor dey diya jayega jo kuch log ker rahey hain woh bakhoobi jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हर मुतनफ्फिस को जो कुछ भी उसने अमल किया था उसका पूरा बदला दिया जाएगा। लोग जो कुछ भी करते हैं अल्लाह उसको खूब जानता है
عَرَبِيوَسيقَ الَّذينَ كَفَروا إِلىٰ جَهَنَّمَ زُمَرًا ۖ حَتّىٰ إِذا جاءوها فُتِحَت أَبوابُها وَقالَ لَهُم خَزَنَتُها أَلَم يَأتِكُم رُسُلٌ مِنكُم يَتلونَ عَلَيكُم آياتِ رَبِّكُم وَيُنذِرونَكُم لِقاءَ يَومِكُم هٰذا ۚ قالوا بَلىٰ وَلٰكِن حَقَّت كَلِمَةُ العَذابِ عَلَى الكافِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग काफ़िर होंगे, वे जहन्नम की ओर गिरोह के गिरोह हाँके जाएँगे। यहाँ तक कि जब वे उसके पास आएँगे, तो उसके द्वार खोल दिए जाएँगे तथा उसके रक्षक उनसे कहेंगेः "क्या तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल नहीं आए थे, जो तुम्हें तुम्हारे पालनहार की आयतें सुनाते रहे तथा तुम्हें अपने इस दिन का सामना करने से सचेत करते रहे?" वे कहेंगेः "क्यों नहीं? परन्तु, काफ़िरों पर यातना की बात सिद्ध हो चुकी है।"
Roman Urdu (Maududi)(Is faisle ke baad) woh log jinhon ne kufr kiya tha jahannum ki taraf giroh dar giroh haanke jayenge, yahan tak ke jab woh wahan pahunchenge to uske darwaze kholay jayenge aur uske kaarinde (keepers) unsey kahenge “kya tumhare paas tumhare apne logon mein se aisey Rasool nahin aaye thay, jinhon ne tumko tumhare Rubb ki aayat sunayi hon aur tumhein us baat se daraya ho ke ek waqt tumhein yeh din bhi dekhna hoga?” Woh jawab dengey “haan, aaye thay , magar azaab ka faisla kaafiron par chipak gaya”
Roman Urdu (Junagarhi)Kafiron kay ghol kay ghol jahannum ki taraf hankaye jayen gay jab woh uss kay pass phonch jayen gay uss kay darwazay unn kay liye khol diye jayen gay aur wahan kay nigehbaan unn say sawal keren gay kay kiya tumharay pass tum mein say rasool nahi aaye thay? Jo tum per tumharay rab ki aayaten parhtay thay aur tumhen uss din ki mulaqat say daratay thay? Yeh jawab den gay kay haan durust hai lekin azab ka hukum kafiron per sabit hogaya
Devnagri Urdu (Maududi)(इस फैसले के बाद) वो लोग जिन्हों ने कुफ्र किया था जहन्नुम की तरफ गिरो ​​डर गिरो ​​हांके जाएंगे, यहां तक ​​के जब वो वहां पहनेंगे तो उसके दरवाजे खोले जाएंगे और उसके कारिंदे (रखवाले) उनसे कहेंगे "क्या तुम्हारे पास तुम्हारे अपने अपने लोगों में से ऐसे रसूल नहीं आए थे, जिन्होनें तुमको तुम्हारे रब की आयतें सुनाईं हों और तुम्हें हमसे बात से डराया हो के एक वक्त तुम्हें ये दिन भी देखना होगा?” वो जवाब देंगे "हां, आए थे, मगर अज़ाब का फैसला काफिरों पर चिपक गया"
عَرَبِيقيلَ ادخُلوا أَبوابَ جَهَنَّمَ خالِدينَ فيها ۖ فَبِئسَ مَثوَى المُتَكَبِّرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनसे कहा जाएगाः जहन्नम के द्वारों में प्रवेश कर जाओ। उसमें सदावासी रहोगे। अतः क्या ही बुरा है अभिमानियों का ठिकाना!
Roman Urdu (Maududi)Kaha jayega, dakhil ho jao jahannum ke darwazon mein, yahan ab tumhein hamesha rehna hai, bada hi bura thikana hai yeh mutakabbiron (arrogant) ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Kaha jayega kay abb jahannum kay darwazon mein dakhil hojao jahan hamesha rahen gay pus sirkashon ka thikana boht hi bura hai
Devnagri Urdu (Maududi)कह जाएगा, दाखिल हो जाओ जहन्नुम के दरवाजे में, यहां अब तुम्हें हमेशा रहना है, बड़ा ही बुरा ठिकाना है ये मुतकब्बिरों (अहंकारी) के लिए
عَرَبِيوَسيقَ الَّذينَ اتَّقَوا رَبَّهُم إِلَى الجَنَّةِ زُمَرًا ۖ حَتّىٰ إِذا جاءوها وَفُتِحَت أَبوابُها وَقالَ لَهُم خَزَنَتُها سَلامٌ عَلَيكُم طِبتُم فَادخُلوها خالِدينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग अपने पालनहार से डरते रहे, वे जन्नत की ओर गिरोह के गिरोह ले जाए जाएँगे। यहाँ तक कि जब वे उसके पास पहुँच जाएँगे तथा उसके द्वार खोल दिए जाएँगे और उसके रक्षक उनसे कहेंगेः सलाम है तुमपर। तुम पवित्र हो। सो तुम इसमें हमेशा रहने को प्रवेश कर जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log apne Rubb ki nafarmani se parheiz karte thay unhein giroh dar giroh jannat ki taraf le jaya jaayega yahan tak ke jab woh wahan pahunchenge, aur uske darwaze pehle hi kholay ja chuke hongey, to uske muntazimin unse kahenge ke “Salaam ho tumpar , bahut acche rahey, dakhil ho jao ismein hamesha ke liye”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log apnay rab say dartay thay unn kay giroh kay giroh jannat ki taraf rawana kiyey jayen gay yahan tak kay jab uss kay pass aajayen gay aur darwazay khol diyey jayen gay aur wahan kay nigehbaan unn say kahen gay tum per salam ho tum khushaal raho tum iss mein hamesha kay liye chalay jao
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग अपने रब की नफ़रमानी से परहेज़ करते थे उन्हें गिरो ​​दर गिरो ​​जन्नत की तरफ ले जाया जाएगा यहां तक ​​के जब वो वहां पहनेंगे, और उसके दरवाजे पहले ही खोले जा चुके होंगे, तो उसका मुंतज़िमिन उनसे कहेंगे के "सलाम हो तुमपर" , बहुत अच्छा रहे, दाखिल हो जाओ इसमें हमेशा के लिए”
عَرَبِيوَقالُوا الحَمدُ لِلَّهِ الَّذي صَدَقَنا وَعدَهُ وَأَورَثَنَا الأَرضَ نَتَبَوَّأُ مِنَ الجَنَّةِ حَيثُ نَشاءُ ۖ فَنِعمَ أَجرُ العامِلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा वे कहेंगे : सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमसे किया हुआ अपना वचन सच कर दिखाया, तथा हमें इस धरती का उत्तराधिकारी बना दिया। हम स्वर्ग के अंदर जहाँ चाहें, रहें। क्या ही अच्छा बदला है कर्म करने वालों का।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh kahenge “shukar hai us khuda ka jisne hamare saath apna waada sach kar dikaya aur humko zameen ka waris bana diya, ab hum jannat mein jahan chahein apni jagah bana sakte hain” Pas behtareen ajar hain amal karne walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kahen gay kay Allah ka shukar hai jiss ney hum say apna wada poora kiya aur hamen iss zamin ka waris bana diya kay jannat mein jahan chahyen muqam ker len pus amal kerney walon ka kiya hi acha badla hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वो कहेंगे “शुक्र है हमें खुदा का जिसने हमारे साथ अपना वादा सच कर दिखाया और हमको जमीन का वारिस बना दिया, अब हम जन्नत में जहां चाहें अपनी जगह बना सकते हैं” पास बेहतरी अजर हैं अमल करने वालों के लिए
عَرَبِيوَتَرَى المَلائِكَةَ حافّينَ مِن حَولِ العَرشِ يُسَبِّحونَ بِحَمدِ رَبِّهِم ۖ وَقُضِيَ بَينَهُم بِالحَقِّ وَقيلَ الحَمدُ لِلَّهِ رَبِّ العالَمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा आप फ़रिश्तों को अर्श (सिंहासन) के चारों ओर से उसे घेरे हुए देखेंगे। वे अपने पालनहार की पवित्रता गान कर रहे होंगे, उसकी प्रशंसा के साथ। और लोगों के बीच सत्य के साथ निर्णय कर दिया जाएगा। तथा कह दिया जाएगा कि सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सारे संसार का पालनहार है।
Roman Urdu (Maududi)Aur tum dekhoge ke farishtey arsh ke gird halqa(circle) banaye huey apne Rubb ki hamd aur tasbeeh kar rahey hongey, aur logon ke darmiyan theek theek haqq ke saath faisla chuka diya jayega, aur pukar diya jayega ke hamd hai Allah Rabbul Aalameen ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tu farishton ko Allah kay arash kay ird-gird halqa bandhay huyey apnay rab ki hamd-o-tasbeeh kerta huyey dekhay ga aur inn mein insaf ka faisla kiya jayega aur keh diya jayega kay sari khoobi Allah hi kay liye hai jo tamam jahano ka palanhaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम देखोगे के फरिश्ते अर्श के गिर्द हलका (सर्कल) बनाए हुए अपने रब की हम्द और तस्बीह कर रहे होंगे, और लोगों के दरमियान ठीक हक के साथ फैसला चुका दिया जाएगा, और पुकार दिया जयेगा के हम्द है अल्लाह रब्बुल आलमीन के लिए
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Surah 39: Az-Zumar (The Companies)

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Surah 39: Az-Zumar (The Companies)

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Surah 40: Al-Mu'min (The Believer)

Meccan🕐 Revelation #60📜 85 Verses🕮 Juz 1
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Surah 40: Al-Mu'min (The Believer)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيحم
हिन्दी (Al-Omari)ह़ा, मीम।
Roman Urdu (Maududi)Haa Meem
Roman Urdu (Junagarhi)Haa-meem
Devnagri Urdu (Maududi)हा मीम
عَرَبِيتَنزيلُ الكِتابِ مِنَ اللَّهِ العَزيزِ العَليمِ
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हिन्दी (Al-Omari)इस पुस्तक का अवतरण अति प्रभुत्वशाली, सब कुछ जानने वाले अल्लाह की ओर से है।
Roman Urdu (Maududi)Is kitaab ka nuzul Allah ki taraf se hai jo zabardast hai, sab kuch jaanne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kitab ka nazil farmana uss Allah ki taraf say hai jo ghalib aur dana hai
Devnagri Urdu (Maududi)इस किताब का नुज़ुल अल्लाह की तरफ से है जो ज़बरदस्त है, सब कुछ जानने वाला है
عَرَبِيغافِرِ الذَّنبِ وَقابِلِ التَّوبِ شَديدِ العِقابِ ذِي الطَّولِ ۖ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۖ إِلَيهِ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)जो पाप क्षमा करने वाला और तौबा स्वीकार करने वाला, कठोर दंड देने वाला, बड़ा अनुग्रहशील है। उसके सिवा कोई (सच्चा) पूज्य नहीं। उसी की ओर (सबको) जाना है।
Roman Urdu (Maududi)Gunaah maaf karne wala aur tauba qabool karne wala hai, sakht saza dene wala aur bada sahib e fazal hai. Koi mabood uske siwa nahin, usi ki taraf sabko palatna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Gunah ka bakhsney wala aur toba ka qabool farmaney wala sakht azab wala inam-o-qudrat wala jiss kay siwa koi mabood nahi. Ussi ki taraf wapis lotna hai
Devnagri Urdu (Maududi)गुनाह माफ़ करने वाला और तौबा क़बूल करने वाला है, सच सजा देने वाला और बड़ा साहब ए फ़ज़ल है। कोई माबूद उसके सिवा नहीं, उसकी तरफ सबको पलटना है
عَرَبِيما يُجادِلُ في آياتِ اللَّهِ إِلَّا الَّذينَ كَفَروا فَلا يَغرُركَ تَقَلُّبُهُم فِي البِلادِ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह की आयतों के बारे में केवल वही लोग झगड़ा करते हैं, जो काफ़िर हैं। अतः आपको उनका नगरों में चलना-फिरना धोखे में न डाले।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki aayat mein jhagde nahin karte magar sirf woh log jinhon ne kufr kiya hai. Iske baad duniya ke mulkon mein unki chalat phirat tumhein kisi dhoke mein na daale
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ki aayaton mein wohi log jhagartay hain jo kafir hain pus inn logon ka shehron mein chalna phirna aap ko dhokay mein na daal day
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की आयत में झगड़े नहीं करते मगर सिर्फ वो लोग जिन्होन ने कुफ्र किया है। इसके बाद दुनिया के मुल्कों में उनकी चलती फिरत तुम्हें कोई धोखे में ना डाले
عَرَبِيكَذَّبَت قَبلَهُم قَومُ نوحٍ وَالأَحزابُ مِن بَعدِهِم ۖ وَهَمَّت كُلُّ أُمَّةٍ بِرَسولِهِم لِيَأخُذوهُ ۖ وَجادَلوا بِالباطِلِ لِيُدحِضوا بِهِ الحَقَّ فَأَخَذتُهُم ۖ فَكَيفَ كانَ عِقابِ
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हिन्दी (Al-Omari)इनसे पहले नूह की जाति ने झुठलाया तथा उनके बाद के (दूसरे) समूहों ने भी (झुठलाया)। और प्रत्येक समुदाय के लोगों ने इरादा किया कि अपने रसूल को पकड़ लें। तथा उन्होंने असत्य के साथ झगड़ा किया ताकि उसके द्वारा सत्य को ग़लत ठहरा दें। अंततः मैंने उन्हें पकड़ लिया। तो मेरी सज़ा कैसी थी?
Roman Urdu (Maududi)Insey pehle Nooh ki qaum bhi jhutla chuki hai, aur uske baad bahut se dusre jatthon (groups) ne bhi yeh kaam kiya hai. Har qaum apne Rasool par jhapti taa-ke usey giraftar karey, un sab ne baatil ke hatyaaron se haqq ko neecha dikhane ki koshish ki. Magar aakhir e kaar maine unko pakad liya, phir dekhlo ke meri saza kaisi sakht thi
Roman Urdu (Junagarhi)Qom-e-nooh ney aur unn kay baad kay girohon ney bhi jhutlaya tha. Aur her ummat ney apnay rasool ko giriftar kerleney ka iradah kiya aur baatil kay zariyey kaj behasiyan kien takay unn say haq ko bigar den pus mein ney unn ko pakar liya so meri taraf say kaisi saza hui
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पहले नूंह की क़ौम भी झूठला चुकी है, और उसके बाद बहुत से दूसरे समूहों (समूहों) ने भी ये काम किया है। हर क़ौम अपने रसूल पर झपटी ता-के उसे गिरफ्तार करे, उन सब ने बातिल के हत्यारों से हक़ को नीचा दिखाने की कोशिश की। मगर आखिर ए कार मैंने उनको पकड़ लिया, फिर देखलो के मेरी सजा कैसी थी
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ حَقَّت كَلِمَتُ رَبِّكَ عَلَى الَّذينَ كَفَروا أَنَّهُم أَصحابُ النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार आपके पालनहार की बात उन लोगों पर सिद्ध हो गई, जिन्होंने कुफ़्र किया कि वे जहन्नम वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Isi tarah tere Rubb ka yeh faisla bhi un sab logon par chaspan ho chukka hai jo kufr ke murtakib huey hain ke woh wasil-ba-jahannum honay waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur issi tarah aap kay rab ka hukum kafiron per sabit hogaya kay woh dozakhi hain
Devnagri Urdu (Maududi)इसी तरह तेरे रब का ये फैसला भी उन सब लोगों पर चस्पां हो चुका है जो कुफ्र के मुर्तकीब हुए हैं के वो वासिल-बा-जहन्नुम होने वाले हैं
عَرَبِيالَّذينَ يَحمِلونَ العَرشَ وَمَن حَولَهُ يُسَبِّحونَ بِحَمدِ رَبِّهِم وَيُؤمِنونَ بِهِ وَيَستَغفِرونَ لِلَّذينَ آمَنوا رَبَّنا وَسِعتَ كُلَّ شَيءٍ رَحمَةً وَعِلمًا فَاغفِر لِلَّذينَ تابوا وَاتَّبَعوا سَبيلَكَ وَقِهِم عَذابَ الجَحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)जो (फ़रिश्ते) अर्श (सिंहासन) को उठाए हुए हैं और जो उसके आस-पास हैं, वे अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता बयान करते हैं, तथा उसपर ईमान रखते हैं, और उन लोगों के लिए क्षमा याचना करते हैं जो ईमान लाए। (वे कहते हैं :) ऐ हमारे पालनहार! तूने हर चीज़ को (अपनी) दया और ज्ञान से घेर रखा है। अतः उन लोगों को क्षमा कर दे, जिन्होंने तौबा की और तेरे मार्ग का अनुसरण किया, तथा उन्हें भड़कती हुई आग की यातना से बचा।
Roman Urdu (Maududi)Arsh e ilahi ke haamil farishtey aur woh jo arsh ke gird o pesh haazir rehte hain, sab apne Rubb ki hamd ke saath uski tasbeeh kar rahey hain, woh uspar imaan rakhte hain aur imaan laney walon ke haqq mein dua e magfirat karte hain, woh kehte hain : “Aey hamare Rubb, tu apni rehmat aur apne ilm ke saath har cheez par chaya hua hai, pas maaf karde aur azaab e dozakh se bacha ley un logon ko jinhon ne tauba ki hai aur tera raasta ikhtiyar karliya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Arash kay uthaney walay aur uss kay aas pass kay (farishtay) apnay rab ki tasbeeh hamd kay sath sath kertay hain aur uss per eman rakhtay hain aur eman walon kay liye istaghfaar kertay hain kehtay hain kay aey humaray perwerdigar! Tu ney her cheez ko apni bakhsish aur ilm say gher rakha hai pus tu enhen bakhash day jo toba keren aur teri raah ki perwi keren aur tu enhen dozakh kay azab say bhi bacha lay
Devnagri Urdu (Maududi)अर्श ए इलाही के हामिल फ़रिश्ते और वो जो अर्श के गिर्द ओ पेश हाज़िर रहते हैं, सब अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह कर रहे हैं, वो उसपर ईमान रखते हैं और ईमान लाने वालों के हक़ में दुआ ए मगफिरत करते हैं, वो कहते हैं हैं: “ऐ हमारे रब, तू अपनी रहमत और अपने इल्म के साथ हर चीज़ पर छाया हुआ है, पास माफ़ करदे और अज़ाब ए दोज़ख से बचा ले उन लोगों को जिन्हों ने तौबा की है और तेरा रास्ता इख्तियार करलिया है
عَرَبِيرَبَّنا وَأَدخِلهُم جَنّاتِ عَدنٍ الَّتي وَعَدتَهُم وَمَن صَلَحَ مِن آبائِهِم وَأَزواجِهِم وَذُرِّيّاتِهِم ۚ إِنَّكَ أَنتَ العَزيزُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारे पालनहार! तथा उन्हें उन स्थायी जन्नतों में दाखिल कर, जिनका तूने उनसे वादा किया है। तथा उनके सदाचारी बाप-दादाओं, पत्नियों और संतानों को भी। निःसंदेह तू प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey hamare Rubb, aur daakhil kar unko hamesha rehne wali un jannaton mein jinka tu ne unsey waada kiya hai, aur unke waldain aur biwiyon aur aulad mein se jo saleh (righteous) hon (unko bhi wahan unke saath pahuncha de). Tu bila shubah qadir e multaq (Most Mighty) aur hakeem(most wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey humaray rab! Tu enhen hameshgi wali jannaton mein ley ja jin kay tu ney inn say wada kiya hai aur inn kay baap dadon aur biwiyon aur aulad mein say (bhi) inn (sab) ko jo nek amal hain. Yaqeenan tu to ghalib-o-ba-hikmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ हमारे रब, और दाख़िल कर उनको हमेशा रहने वाली उन जन्नतों में जिनका तू ने उनसे वादा किया है, और उनके वाल्दैन और बीवीयों और औलाद में से जो सालेह (नेक) होन (उन्हें भी वहां उनके साथ पाहुंचा दे)। तू बिला शुभा कादिर ए मुल्ताक (सबसे ताकतवर) और हकीम (सबसे बुद्धिमान) है
عَرَبِيوَقِهِمُ السَّيِّئَاتِ ۚ وَمَن تَقِ السَّيِّئَاتِ يَومَئِذٍ فَقَد رَحِمتَهُ ۚ وَذٰلِكَ هُوَ الفَوزُ العَظيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्हें बुराइयों (के दुष्परिणाम) से सुरक्षित रख। और जिसे तूने उस दिन बुराइयों के दुष्परिणाम से सुरक्षित रखा, तो निश्चय ही तूने उसपर दया की। और यही बड़ी सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur bacha de unko buraiyon se. Jisko tu nay qayamat ke din buraiyon se bacha diya uspar tu nay bada reham kiya. Yahi badi kamiyabi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Enhen burayion say bhi mehfooz rakh hq to yeh hai kay uss din tu ney jissay burayion say bacha liya uss per tu ney rehmat kerdi aur boht bari kaamyabi to yehi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और बच्चा दे उनको बुराइयों से। जिसको तू नई कयामत के दिन बुराइयों से बचा लिया उसपर तू नई बड़ा रहम किया। यहीं बड़ी कामयाबी है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا يُنادَونَ لَمَقتُ اللَّهِ أَكبَرُ مِن مَقتِكُم أَنفُسَكُم إِذ تُدعَونَ إِلَى الإيمانِ فَتَكفُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उन्हें (क़ियामत के दिन) पुकारकर कहा जाएगा कि अल्लाह का क्रोध तुमपर उससे अधिक था, जितना तुम्हें आज अपने ऊपर क्रोध आ रहा है, जब तुम संसार में ईमान की ओर बुलाए जाते थे, तो तुम इनकार कर देते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne kufr kiya hai, qayamat ke roz unko pukaar kar kaha jayega “Aaj tumhein jitna shadeed gussa apne upar aa raha hai , Allah tumpar ussey zyada gazabnaak us waqt hota tha jab tumhein imaan ki taraf bulaya jata tha aur tum kufr karte thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jin logon ney kufur kiya unhen yeh awaz di jayegi kay yaqeenan Allah ka tum per gussa hona uss say boht ziyadah hai jo tum gussa hotay thay apnay ji say jab tum eman ki taraf bulaye jatay thay phir kufur kerney lagtay thay
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने कुफ़्र किया है, क़यामत के रोज़ उनको पुकार कर कहा जाएगा "आज तुम्हें जितना छायादार गुस्सा अपने ऊपर आ रहा है , अल्लाह तुम्पर उसे ज्यादा गजबनाक हमारा वक्त होता था जब तुम्हें ईमान की तरफ बुलाया जाता था और तुम कुफ्र करते थे”
عَرَبِيقالوا رَبَّنا أَمَتَّنَا اثنَتَينِ وَأَحيَيتَنَا اثنَتَينِ فَاعتَرَفنا بِذُنوبِنا فَهَل إِلىٰ خُروجٍ مِن سَبيلٍ
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हिन्दी (Al-Omari)वे कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! तूने हमें दो बार मारा तथा दो बार जीवित किया। अब हमने अपने पापों को स्वीकार किया। तो क्या (यहाँ से) निकलने का कोई रास्ता है?
Roman Urdu (Maududi)Woh kahenge “Aey hamare Rubb, tu nay waqayi humein do dafa maut aur do dafa zindagi dedi. Ab hum apne kasooron ka aitraaf karte hain.Kya ab yahan se nikalne ki bhi koi sabeel hai?”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh kahengay aey humaray perwerdigar! Tu ney humen doobara maara aur doobara hi jilaya abb hum apnay gunahon kay iqrari hain to kiya abb koi raah nikalney ki bhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो कहेंगे “ऐ हमारे रब, तू नहीं जानता हमें दो दफा मौत और दो दफा जिंदगी दे दी।” अब हम अपने कसूरों का ऐतराफ़ करते हैं। क्या अब यहाँ से निकलने की भी कोई सबील है?”
عَرَبِيذٰلِكُم بِأَنَّهُ إِذا دُعِيَ اللَّهُ وَحدَهُ كَفَرتُم ۖ وَإِن يُشرَك بِهِ تُؤمِنوا ۚ فَالحُكمُ لِلَّهِ العَلِيِّ الكَبيرِ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हें यह (यातना) इस कारण है कि जब अकेले अल्लाह को पुकारा जाता था, तो तुम इनकार कर देते थे। और यदि उसके साथ साझी ठहराया जाता, तो तुम मान लेते थे। अतः अब फ़ैसला अल्लाह के अधिकार में है, जो सर्वोच्च, बड़ा महान है।
Roman Urdu (Maududi)(jawab milega) “yeh halat jismein tum mubtala ho, is wajah se hai ke jab akele Allah ki taraf bulaya jata tha to tum manne se inkar kar detay thay aur jab uske saath dusron ko milaya jata tha to tum maan letay thay. Ab faisla Allah buzurg o bartar ke haath hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh (azab) tumhen iss liye hai kay jabb sirf akelay Allah ka ziker kiya jata to tum inkar ker jatay thay aur agar iss kay sath kissi ko shareek kiya jata tha to tum maan letay thay pus abb faisal Allah buland-o-buzurg hi ka hai
Devnagri Urdu (Maududi)(जवाब मिलेगा) “ये हालत जिसमें तुम मुबतला हो, इस वजह से है कि जब अकेले अल्लाह की तरफ बुलाया जाता था तो तुम मन्ने से इंकार कर देते थे और जब उसके साथ दूसरों को मिला जाता था तो तुम मान लेते थे। अब फैसला अल्लाह बुज़ुर्ग ओ बरतर के हाथ है”
عَرَبِيهُوَ الَّذي يُريكُم آياتِهِ وَيُنَزِّلُ لَكُم مِنَ السَّماءِ رِزقًا ۚ وَما يَتَذَكَّرُ إِلّا مَن يُنيبُ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है जो तुम्हें अपनी निशानियाँ दिखाता है, तथा तुम्हारे लिए आकाश से रोज़ी उतारता है, और शिक्षा तो केवल वही ग्रहण करता है, जो (उसकी ओर) लौटता है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jo tumko apni nishaniyan dikhata hai aur aasmaan se tumhare liye rizq naazil karta hai, magar ( in nihsaniyon ke mushahidey se)sabaq sirf wahi shaks leta hai jo Allah ki taraf rujoo karne wala ho
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi hai jo tumhen apni nishaniyan dikhalata hai aur tumharay liye aasman say rozi utarta hai naseehat to sirf wohi hasil kertay hain jo (Allah ki taraf rujoo kertay hain)
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जो तुमको अपनी निशानियां दिखाता है और आसमां से तुम्हारे लिए रिज़्क नाज़िल करता है, मगर (निहसानियों के मुशाहिदे से) सबक सिर्फ वही शक्स लेता है जो अल्लाह की तरफ रूजू करने वाला हो
عَرَبِيفَادعُوا اللَّهَ مُخلِصينَ لَهُ الدّينَ وَلَو كَرِهَ الكافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः तुम अल्लाह को, उसके लिए धर्म को विशुद्ध करते हुए पुकारो, यद्यपि काफ़िरों को बुरा लगे।
Roman Urdu (Maududi)(pas aey rujoo karne walon) Allah hi ko pukaro apne deen ko uske liye khaalis karke, khwah tumhara yeh fail(kaam/amal) kaafiron ko kitna hi nagawaar ho
Roman Urdu (Junagarhi)Tum Allah ko pukartay raho uss kay liye deen ko khalis ker key go kafir bura manen
Devnagri Urdu (Maududi)(पस ऐ रूजू करने वालों) अल्लाह ही को पुकारो अपने दीन को उसके लिए खालिस करके, ख्वाह तुम्हारा ये फेल (काम/अमल) काफिरों को कितना ही नागावर हो
عَرَبِيرَفيعُ الدَّرَجاتِ ذُو العَرشِ يُلقِي الرّوحَ مِن أَمرِهِ عَلىٰ مَن يَشاءُ مِن عِبادِهِ لِيُنذِرَ يَومَ التَّلاقِ
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हिन्दी (Al-Omari)वह उच्च श्रेणियों वाला, अर्श का स्वामी है। वह अपने आदेश से, अपने बंदों में से जिसपर चाहता है, वह़्य (प्रकाशना) उतारता है, ताकि वह मिलने के दिन से सचेत करे।
Roman Urdu (Maududi)Woh buland darajon wala, Maalik e Arsh hai apne bandon mein se jispar chahta hai apne hukum se rooh nazil kar deta hai taa-ke woh mulaqat ke din se khabardar karde
Roman Urdu (Junagarhi)Buland darjon wala arash ka malik woh apnay bandon mein say jiss per chahata hai wahee nazil kerta farmata hai takay woh mulaqat kay din say daraye
Devnagri Urdu (Maududi)वो बुलंद दर्जों वाला, मालिक ए अर्श है अपने बंदों में से जिसपर चाहता है है अपने हुकुम से रूह नाज़िल कर देता है ता-के वो मुलाक़ात के दिन से ख़बरदार करदे
عَرَبِييَومَ هُم بارِزونَ ۖ لا يَخفىٰ عَلَى اللَّهِ مِنهُم شَيءٌ ۚ لِمَنِ المُلكُ اليَومَ ۖ لِلَّهِ الواحِدِ القَهّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन वे (अपने पालनहार के सामने) प्रकट होंगे। अल्लाह से उनकी कोई चीज़ छिपी न होगी। (अल्लाह पूछेगा :) आज किसका राज्य है? (फिर खुद ही फरमाएगा :) अकेले अल्लाह का, जो सब पर प्रभुत्वशाली है।
Roman Urdu (Maududi)Woh din jabke sab log bay purdah hongey, Allah se unki koi baat bhi chupi hui na hogi ( us roz pukar kar poochca jayega) aaj baadshahi kiski hai? (saara aalam pukar utthega) Allah waahid-e-qahhar (the One the Overpowering) ki
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din sab log zahir hojayen gay unn ki koi cheez Allah say pocheedah na rahey gi. Aaj kiss ki baadshahi hai? Faqat Allah wahid-o-qahar ki
Devnagri Urdu (Maududi)वो दिन जबके सब लोग बे पर्दा होंगे, अल्लाह से उनकी कोई बात भी छुपी हुई ना होगी (हमें रोज़ पुकार कर पूछेगा) आज बादशाही किसकी है? (सारा आलम पुकार उठेगा) अल्लाह वाहिद-ए-कहर (सर्वशक्तिमान) की
عَرَبِياليَومَ تُجزىٰ كُلُّ نَفسٍ بِما كَسَبَت ۚ لا ظُلمَ اليَومَ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَريعُ الحِسابِ
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हिन्दी (Al-Omari)आज प्रत्येक प्राणी को उसके किए का बदला दिया जाएगा। आज कोई अत्याचार नहीं होगा। निःसंदेह अल्लाह अति शीघ्र हिसाब लेने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Kaha jayega) aaj har mutanaffis ko us kamayi ka badla diya jayega jo usne ki thi. Aaj kisi par koi zulm na hoga aur Allah hisaab lene mein bahut teiz hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aaj her nafas ko uss ki kamaee ka badla diya jayega. Aaj (kissi qisam ka) zulm nahi yaqeenan Allah Taalaa boht jald hisab kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(कहा जाएगा) आज हर मुतनफ्फिस को उस कमाई का बदला दिया जाएगा जो उसने की थी। आज किसी पर कोई ज़ुल्म न होगा और अल्लाह हिसाब लेने में बहुत तेज़ है
عَرَبِيوَأَنذِرهُم يَومَ الآزِفَةِ إِذِ القُلوبُ لَدَى الحَناجِرِ كاظِمينَ ۚ ما لِلظّالِمينَ مِن حَميمٍ وَلا شَفيعٍ يُطاعُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप उन्हें निकट आने वाले (क़ियामत के) दिन से सावधान कर दें, जब शोक से भरे हुए दिल गले को आ पहुँचेंगे। अत्याचारियों का न कोई मित्र होगा, न कोई सिफ़ारिशी जिसकी बात मानी जाए।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) dara do in logon ko usdin se jo qareeb aa laga hai, jab kalijey (livers) mooh ko aa rahe hongey aur log chup chaap gham ke ghoont peay khaday hongey. Zaalimon ka na koi mushfiq dost hoga aur na koi shafee jiski baat maani jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur enhen boht hi qareeb anay wali (qayamat say) aagah kerdijiye jab kay dil halaq tak phonch jayen gay aur sab khamosh hongay zalimon ka na koi dili dost hoga na sifarshi kay jiss ki baat mani jaye gi
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) दारा दो लोगों को उस दिन से जो करीब आ लगा है, जब कालिज (जिगर) मुंह को आ रहे होंगे और लोग चुप चाप गम के घूंट पी खाड़े होंगे। ज़ालिमों का ना कोई मुश्फ़िक दोस्त होगा और ना कोई शफ़ी जिसकी बात मानी जाएगी
عَرَبِييَعلَمُ خائِنَةَ الأَعيُنِ وَما تُخفِي الصُّدورُ
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हिन्दी (Al-Omari)वह आँखों की चोरी तथा सीने की छिपाई हुई बातों को जानता है।
Roman Urdu (Maududi)Allah nigahon ki chori tak se waaqif hai aur woh raaz tak jaanta hai jo seeno ne chupa rakhe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh aankhon ki khayanat ko aur seenon ki posheedah baaton ko (khoob) janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह निगाहों की चोरी तक से वाकिफ है और वो राज तक जानता है जो सीने ने छुपा रखा है
عَرَبِيوَاللَّهُ يَقضي بِالحَقِّ ۖ وَالَّذينَ يَدعونَ مِن دونِهِ لا يَقضونَ بِشَيءٍ ۗ إِنَّ اللَّهَ هُوَ السَّميعُ البَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही सत्य (न्याय) के साथ निर्णय करता है तथा जिन्हें वे अल्लाह के अतिरिक्त पुकारते हैं, वे किसी भी चीज़ का निर्णय नहीं करते। निःसंदेह अल्लाह ही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah theek theek bay-laag(with justice) faisla karega .Rahey woh jinko ( yeh mushrikeen) Allah ko chodh kar pukarte hain, woh kisi cheez ka bhi faisla karne waley nahin hain. Bila shubah Allah hi sabkuch sunney aur dekhne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa theek theek failsa ker dey ga uss kay siwa jihen yeh log pukartay hain woh kissi cheez ka bhi faisla nahi ker saktay be-shak Allah Taalaa khoob sunta khoob dekhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह ठीक ठीक बे-लाग (न्याय के साथ) फैसला करेगा। रहे वो जिनको (ये मुशरिकेन) अल्लाह को छोड़ कर पुकारते हैं, वो किसी चीज का भी फैसला करने वाले नहीं हैं। बिला शुभ अल्लाह हाय सब कुछ सुनने और देखने वाला है
عَرَبِي۞ أَوَلَم يَسيروا فِي الأَرضِ فَيَنظُروا كَيفَ كانَ عاقِبَةُ الَّذينَ كانوا مِن قَبلِهِم ۚ كانوا هُم أَشَدَّ مِنهُم قُوَّةً وَآثارًا فِي الأَرضِ فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ بِذُنوبِهِم وَما كانَ لَهُم مِنَ اللَّهِ مِن واقٍ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या वे धरती में चले-फिरे नहीं, ताकि देखते कि उन लोगों का परिणाम कैसा रहा, जो इनसे पहले थे? वे इनसे अधिक शक्तिशाली थे तथा धरती में इनसे अधिक चिह्न भी छोड़ गए। तो अल्लाह ने उन्हें उनके पापों के कारण पकड़ लिया और उन्हें अल्लाह से बचाने वाला कोई न था।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log kabhi zameen mein chaley phiray nahin hain ke inhein un logon ka anjaam nazar aata jo insey pehle guzar chuke hain? Woh insey zyada taaqatwar thay aur insey zyada zabardast aasaar zameen mein chodh gaye hain. Magar Allah ne unke gunahon par unhein pakad liya aur unko Allah se bachane wala koi na tha
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh log zamin mein chalay phiray nahi kay dekhtay kay jo log inn say pehlay thay unn ka nateeja kaisa kuch hua? Woh ab-aitbaar qooat-o-taqat kay aur ba-aitbaar zamin mein apni yaadgaron kay inn say boht ziyadah thay pus Allah ney unhen unn kay gunahon per pakar liya aur koi na hua jo unhen Allah kay azab say bacha leta
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग कभी ज़मीन में चले फिरे नहीं हैं के इनहे उन लोगों का अंजाम नज़र आता है जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं? वो इनसे ज्यादा ताकतवार थे और इनसे ज्यादा जबरदस्त असर जमीन में छूट गए हैं। मगर अल्लाह ने उनके गुनाहों पर उन्हें पकड़ लिया और उनको अल्लाह से बचाने वाला कोई ना था
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّهُم كانَت تَأتيهِم رُسُلُهُم بِالبَيِّناتِ فَكَفَروا فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ ۚ إِنَّهُ قَوِيٌّ شَديدُ العِقابِ
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हिन्दी (Al-Omari)यह इस कारण हुआ कि उनके रसूल उनके पास खुली निशानियाँ लाते थे, तो उन्होंने इनकार किया। अंततः अल्लाह ने उन्हें पकड़ लिया। निःसंदेह वह बड़ा शक्तिशाली, कठोर दंड देने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh unka anjaam is liye hua ke unke paas unke
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss waja say kay unn kay pass unn kay payghumber mojzzay ley ker aatay thay to woh inkar ker detay thay pus Allah unhen pakar leta tha. Yaqeenan woh taqatwar aur sakht azab wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये उनका अंजाम इस लिए हुआ के उनके पास उनके
عَرَبِيوَلَقَد أَرسَلنا موسىٰ بِآياتِنا وَسُلطانٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने मूसा को अपनी निशानियों (चमत्कारों) तथा स्पष्ट तर्क के साथ भेजा।
Roman Urdu (Maududi)Humne Moosa ko
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney musa (alh-e-salam) ko apni aayaton aur khulli daleelon kay sath bheja
Devnagri Urdu (Maududi)हमने मूसा को
عَرَبِيإِلىٰ فِرعَونَ وَهامانَ وَقارونَ فَقالوا ساحِرٌ كَذّابٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फ़िरऔन और (उसके मंत्री) हामान तथा क़ारून के पास। तो उन्होंने कहा : यह तो बड़ा झूठा जादूगर है।
Roman Urdu (Maududi)Firoun aur Haaman aur Qaroon ki taraf apni nishaniyon aur numaya sanad-e-maamoriyat ke saath bheja. Magar unhon ne kaha “ saahir(jaadugar) hai, kazzab(jhoota) hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon hamaan aur qaroon ki taraf to unhon ney kaha (yeh to) jaddogar aur jhoota hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौन और हामान और क़ारून की तरफ अपनी निशानियां और नुमाया सनद-ए-मामोरियत के साथ भेजा। मगर उनहों ने कहा “साहिर (जादूगर) है, कज़्ज़ब (झूठा) है”
عَرَبِيفَلَمّا جاءَهُم بِالحَقِّ مِن عِندِنا قالُوا اقتُلوا أَبناءَ الَّذينَ آمَنوا مَعَهُ وَاستَحيوا نِساءَهُم ۚ وَما كَيدُ الكافِرينَ إِلّا في ضَلالٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वह हमारी ओर से उनके पास सत्य लेकर आया, तो उन्होंने कहा : उसके साथ जो लोग ईमान लाए हैं, उनके बेटों को मार डालो और उनकी स्त्रियों को जीवित रहने दो। और काफ़िरों की चाल विफल ही हुआ करती है।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab woh hamari taraf se haqq unke saamne ley aaya to unhon ne kaha “jo log imaan laa kar iske saath shamil huey hain in sabke ladkon ko qatal karo aur ladkiyon ko jeeta (zinda) chodh do”. Magar kaafiron ki chaal akarat (vain) hi gayi
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab unn kay pass (musa alh-e-salam) humari taraf say (deen) haq ko ley ker aaye to unhon ney kaha kay iss kay sath jo eman walay hain unn kay larkon ko to maar dalo aur inn ki larkiyon ko zindah rakho aur kafiron ki jo heela saazi hai woh ghalati mein hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब वो हमारी तरफ से हक उनके सामने ले आया तो उनहों ने कहा “जो लोग ईमान ला कर इसके साथ शामिल हुए हैं सबके लड़कों को कत्ल करो और लड़कियों को जीता (जिंदा) छोड़ करना"। मगर काफ़िरों की चाल अकारत (व्यर्थ) ही गई
عَرَبِيوَقالَ فِرعَونُ ذَروني أَقتُل موسىٰ وَليَدعُ رَبَّهُ ۖ إِنّي أَخافُ أَن يُبَدِّلَ دينَكُم أَو أَن يُظهِرَ فِي الأَرضِ الفَسادَ
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हिन्दी (Al-Omari)और फ़िरऔन ने (अपने प्रमुखों से) कहा : मुझे छोड़ो, मैं मूसा को क़त्ल कर दूँ और उसे चाहिए कि अपने पालनहार को पुकारे। निःसंदेह मैं डरता हूँ कि वह तुम्हारे धर्म को बदल देगा या इस धरती (मिस्र) में बिगाड़ पैदा कर देगा।
Roman Urdu (Maududi)Ek roz Firoun ne apne darbariyon se kaha “chodo mujhey main is Moosa ko qatal kiye deta hoon, aur pukar dekhe yeh apne Rubb ko.Mujhey andesha hai ke yeh tumhara deen badal daalega, ya mulk mein fasaad barpa karega”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur firaon ney kaha mujhay choro kay mein musa (alh-e-salam) ko maar dalon aur issay chahyey kay apnay rab ko pukaray mujhay to darr hai kay yeh kahen tumhara deen na badal dalay ya mulk mein koi (boht bara) fasad barpa na ker day
Devnagri Urdu (Maududi)एक रोज़ फ़िरौन ने अपने दरबारियों से कहा "छोड़ो मुझे मैं इस मूसा को क़त्ल किये देता हूँ, और पुकार देखे ये अपने रब को। मुझे अंदेशा है के ये तुम्हारा दीन बदल डालेगा, या मुल्क में फ़साद बरपा करेगा”
عَرَبِيوَقالَ موسىٰ إِنّي عُذتُ بِرَبّي وَرَبِّكُم مِن كُلِّ مُتَكَبِّرٍ لا يُؤمِنُ بِيَومِ الحِسابِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मूसा ने कहा : निःसंदेह मैंने अपने पालनहार तथा तुम्हारे पालनहार की हर उस अहंकारी से शरण ली है, जो हिसाब के दिन पर ईमान नहीं रखता।
Roman Urdu (Maududi)Moosa ne kaha “maine to har us mutakabbir (ghamandi) ke muqable mein jo yaum ul hisaab par imaan nahin rakhta apne Rubb aur tumhare Rubb ki panaah ley li hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Musa (alh-e-salam) ney kaha mein apnay aur tumharay rab ki panah mein aata hun her uss takabbur kerney walay shaks (ki buraee) say jo roz-e-hisab per eman nahi rakhta
Devnagri Urdu (Maududi)मूसा ने कहा “मैंने तो हर उस मुतकब्बिर (घमंडी) के मुकाबले में जो यौम उल हिसाब पर ईमान नहीं रखा अपना रब और तुम्हारे रब की पनाह ले ली है”
عَرَبِيوَقالَ رَجُلٌ مُؤمِنٌ مِن آلِ فِرعَونَ يَكتُمُ إيمانَهُ أَتَقتُلونَ رَجُلًا أَن يَقولَ رَبِّيَ اللَّهُ وَقَد جاءَكُم بِالبَيِّناتِ مِن رَبِّكُم ۖ وَإِن يَكُ كاذِبًا فَعَلَيهِ كَذِبُهُ ۖ وَإِن يَكُ صادِقًا يُصِبكُم بَعضُ الَّذي يَعِدُكُم ۖ إِنَّ اللَّهَ لا يَهدي مَن هُوَ مُسرِفٌ كَذّابٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा फ़िरऔन के घराने के एक ईमानवाले व्यक्ति ने, जो अपना ईमान छिपा रहा था, कहा : क्या तुम एक व्यक्ति को केवल इसलिए मार डालना चाहते हो कि वह कहता है कि मेरा पालनहार अल्लाह है, जबकि वह तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से खुली निशानियाँ लेकर आया है? और यदि वह झूठा है, तो उसका झूठ उसी के ऊपर है और यदि वह सच्चा है, तो तुम्हें उस (यातना) का कुछ अंश पहुँचकर रहेगा, जिसका वह तुमसे वादा कर रहा है। निःसंदेह अल्लाह उसका मार्गदर्शन नहीं करता, जो उल्लंघनकारी, बहुत झूठा है।
Roman Urdu (Maududi)Is mauqe par aale Firoun mein se ek momin shaks, jo apna imaan chupaye huey tha, bol utha: “Kya tum ek shaks ko sirf is bina par qatal kardoge ke woh kehta hai mera Rubb Allah hai? Halaanke woh tumhare Rubb ki taraf se tumhare paas bayyinat le aaya, agar woh jhoota hai to uska jhoot khud usi par palat padega, lekin agar woh saccha hai to jin haulnaak nataij ka woh tumko khauff dilata hai unmein se kuch to tumpar zaroor hi aa jayenge. Allah kisi aise shaks ko hidayat nahin deta jo hadd se guzar janey wala aur kazzab (jhoota) ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aik momin shaks ney ji firaon kay khandan mein say tha aur apna eman chupaye huyey tha kaha kay kiya tum aik shaks ko mehaz iss baat per qatal kertay ho kay woh kehta hai kay mera rab Allah hai aur tumharay rab ki taraf say daleelen ley ker aaya hai agar woh jhoota ho to uss ka jhoot ussi per hai aur agar woh sacha ho to jiss (azab) ka woh tum say wada ker raha hai uss mein say kuch na kuch to tum per aa paray ga Allah Taalaa uss ki rehbari nahi kerta jo hadd say guzar janey walay aur jhootay hon
Devnagri Urdu (Maududi)इस मौके पर आले फिरौन में से एक मोमिन शक्स, जो अपना ईमान छुपे हुए थे, बोल उठा: "क्या तुम एक शक्स को सिर्फ इस बिना पर क़त्ल करदोगे के वो कहता है मेरा रब अल्लाह है? हलांके वो तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास बैयिनत ले आया, अगर वो झूठा है तो उसका झूठ खुद उसी पर पलट पड़ेगा, लेकिन अगर वो सच्चा है तो जिन
عَرَبِييا قَومِ لَكُمُ المُلكُ اليَومَ ظاهِرينَ فِي الأَرضِ فَمَن يَنصُرُنا مِن بَأسِ اللَّهِ إِن جاءَنا ۚ قالَ فِرعَونُ ما أُريكُم إِلّا ما أَرىٰ وَما أَهديكُم إِلّا سَبيلَ الرَّشادِ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरी जाति के लोगो! आज तुम्हारा राज्य है। तुम धरती में प्रभावशाली हो। यदि अल्लाह की यातना हमपर आ जाए, तो उससे बचाने के लिए कौन हमारी मदद करेगा? फ़िरऔन ने कहा : मैं तुम सब को वही समझा रहा हूँ, जिसे मैं उचित समझता हूँ और मैं तुम्हें सीधी राह ही दिखा रहा हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aey meri qaum ke logon! Aaj tumhein baadshahi hasil hai aur zameen mein tum gaalib ho, lekin agar khuda ka azaab humpar aa gaya to phir kaun hai jo hamari madad kar sakega?” Firoun ne kaha “Main to tum logon ko wahi rai dey raha hoon jo mujhey munasib nazar aati hai aur main usi raaste ki taraf tumhari rehnumayi karta hoon jo theek hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meri qom kay logo! Aaj to badshahaat tumhari hai kay iss zamin per tum ghalib ho lekin Allah ka azab hum per aagaya to kon humari madad keray ga? Firaon bola mein to tumhen wohi raye dey raha hun jo khud dekh raha hun aur mein to tumhen bhalaee ki raah hi batla raha hun
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيوَقالَ الَّذي آمَنَ يا قَومِ إِنّي أَخافُ عَلَيكُم مِثلَ يَومِ الأَحزابِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो व्यक्ति ईमान लाया था, उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! निःसंदेह मैं तुमपर (अगले) समुदायों के दिन जैसे (दिन) से डरता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Woh shaks jo imaan laaya tha usne kaha “Aey meri qaum ke logon, Mujhey khauf hai ke kahin tumpar bhi woh din na aa jaaye jo issey pehle bahut se jatthon (parties) par aa chuka hai
Roman Urdu (Junagarhi)Uss momin ney kaha aey meri qom! (kay logo) mujhay to andesha hai kay tum per bhi wesa hi roz (bad azab) na aaye jo aur ummaton per aaya
Devnagri Urdu (Maududi)वो शक्स जो ईमान लाया था उसने कहा "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, मुझे ख़ौफ़ है के कहीं" तुमपर भी वो दिन ना आ जाए जो इस पहले बहुत से जत्थों (पार्टियों) पर आ चूका है
عَرَبِيمِثلَ دَأبِ قَومِ نوحٍ وَعادٍ وَثَمودَ وَالَّذينَ مِن بَعدِهِم ۚ وَمَا اللَّهُ يُريدُ ظُلمًا لِلعِبادِ
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हिन्दी (Al-Omari)नूह की जाति, तथा आद और समूद और उनके बाद होने वाले लोगों की स्थिति के समान। तथा अल्लाह अपने बंदों पर अत्याचार नहीं चाहता।
Roman Urdu (Maududi)Jaisa din qaum e Nooh aur Aad aur Samood, aur unke baad waali qaumon par aaya tha. Aur yeh haqeeqat hai ke Allah apne bandon par zulm ka koi irada nahin rakhta
Roman Urdu (Junagarhi)Jesay ummat-e-nooh aur aad-o-samood aur inn kay baad walon ka (haal hua) Allah apnay bandon per kissi tarah ka zulm kerna nahi chahata
Devnagri Urdu (Maududi)जैसा दिन क़ौम ए नूह और आद और समूद, और उनके बाद वाली क़ौम पर आया था और ये हकीकत है के अल्लाह अपने बंदों पर ज़ुल्म का कोई इरादा नहीं। रख्ता
عَرَبِيوَيا قَومِ إِنّي أَخافُ عَلَيكُم يَومَ التَّنادِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा ऐ मेरी जाति के लोगो! निःसंदेह मैं तुमपर एक-दूसरे को पुकारने के दिन से डरता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aey Qaum, mujhey darr hai ke kahin tumpar fariyad o fugaan ka din (day of calling) na aa jaaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mujhay tum per haank pukar kay din ka bhi darr hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ क़ौम, मुझे डर है के कहीं तुम्पर फरियाद ओ फुगान का दिन (बुलाने का दिन) ना आ जाए
عَرَبِييَومَ تُوَلّونَ مُدبِرينَ ما لَكُم مِنَ اللَّهِ مِن عاصِمٍ ۗ وَمَن يُضلِلِ اللَّهُ فَما لَهُ مِن هادٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन तुम पीठ फेरकर भागोगे। तुम्हें अल्लाह से कोई बचाने वाला न होगा। तथा जिसे अल्लाह राह से भटका दे, उसे राह दिखाने वाला कोई नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Jab tum ek dusre ko pukaroge aur bhaagay bhaagay phirogey, magar us waqt Allah se bachane wala koi na hoga.Sach yeh hai ke jisey Allah bhatka dey usey phir koi raasta dikhane wala nahin hota
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din tum peeth pher ker loto gay tumhen Allah say bachaney wala koi na hoga aur jissay Allah gumrah ker day uss ka hadi koi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)जब तुम एक दूसरे को पुकारोगे और भाग जाओगे फिरोगे, मगर हमें वक्त अल्लाह से बचाने वाला कोई ना होगा। सच ये है के जिसे अल्लाह भटका दे उसे फिर कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं होता
عَرَبِيوَلَقَد جاءَكُم يوسُفُ مِن قَبلُ بِالبَيِّناتِ فَما زِلتُم في شَكٍّ مِمّا جاءَكُم بِهِ ۖ حَتّىٰ إِذا هَلَكَ قُلتُم لَن يَبعَثَ اللَّهُ مِن بَعدِهِ رَسولًا ۚ كَذٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ مَن هُوَ مُسرِفٌ مُرتابٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इससे पूर्व यूसुफ़ तुम्हारे पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए, तो तुम उस चीज़ के बारे में बराबर संदेह में पड़े रहे, जो वह तुम्हारे पास लेकर आए। यहाँ तक कि जब वह मर गए, तो तुमने कहा कि अल्लाह उनके पश्चात् कोई रसूल हरगिज़ नहीं भेजेगा। इसी प्रकार अल्लाह उसे राह से भटका देता है, जो हद से बढ़ने वाला, संदेह करने वाला हो।
Roman Urdu (Maududi)Issey pehle Yusuf tumhare paas bayyinat lekar aaye thay magar tum unki layi hui taleem ki taraf se shakk hi mein paday rahey. Phir jab unka inteqal ho gaya to tumne kaha ab unke baad Allah koi Rasool hargiz na bhejega.” Isi taraah Allah un sab logon ko gumraahi mein daal deta hai jo hadd se guzarne waale aur shakki(doubting) hotey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss say pehlay tumharay pass (hazrat) yousuf daleelen ley ker aaye phir bhi tum inn ki laaee hui (daleel) mein shak-o-shuba hi kertay rahey yahan tak kay jab unki wafaat hogaee to kehney lagay inn kay baad to Allah kissi rasool ko bhejay ga hi nahi issi tarah Allah gumrah kerta hai her uss shaks ko jo hadd say barh janey wala shak-o-shuba kerney wala ho
Devnagri Urdu (Maududi)इसके पहले युसुफ तुम्हारे पास बैयिनत लेकर आये थे मगर तुम उनकी लाई हुई तालीम की तरफ से शक्क ही में पड़े रहे। फिर जब उनका इंतिक़ाल हो गया तो तुमने कहा अब उनके बाद अल्लाह कोई रसूल हरगिज़ ना भेजेगा।” इसी तरह अल्लाह उन सब लोगों को गुमराह करने में डाल देता है जो हद से गुज़रने वाले और शकी (शक) करते हैं
عَرَبِيالَّذينَ يُجادِلونَ في آياتِ اللَّهِ بِغَيرِ سُلطانٍ أَتاهُم ۖ كَبُرَ مَقتًا عِندَ اللَّهِ وَعِندَ الَّذينَ آمَنوا ۚ كَذٰلِكَ يَطبَعُ اللَّهُ عَلىٰ كُلِّ قَلبِ مُتَكَبِّرٍ جَبّارٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जो अल्लाह की आयतों के बारे में झगड़ते हैं, बिना किसी प्रमाण के, जो उनके पास आया हो। यह अल्लाह के निकट तथा उन लोगों के निकट, जो ईमान लाए हैं, बड़े क्रोध की बात है। इसी प्रकार, अल्लाह प्रत्येक अहंकारी अत्याचारी के दिल पर मुहर लगा देता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah ki aayat mein jhagade karte hain bagair iske ke unke paas koi sanad ya daleel aayi ho.Yeh rawayya Allah aur imaan laney walon ke nazdeek sakht mabguz (na-pasand) hai.Isi tarah Allah har mutakabbir o Jabbar ke dil par thappa laga deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo baghair kissi sanad kay jo inn kay pass aaee ho Allah ki aayaton mein jhagartay hain Allah kay nazdeek aur momino kay nazdeek yeh to boht bari narazgi ki cheez hai Allah Taalaa issi tarah her aik maghroor sirkash kay dil per mohar ker deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह की आयत में झगड़े करते हैं बिना इसके के उनके पास कोई सनद या दलील आई हो।ये रवैय्या अल्लाह और ईमान लाने वालों के नाज़दिक सख़्त मबगुज़ (ना-पसंद) है। इसी तरह अल्लाह हर मुतकब्बिर ओ जब्बार के दिल पर थप्पड़ लगा देता है
عَرَبِيوَقالَ فِرعَونُ يا هامانُ ابنِ لي صَرحًا لَعَلّي أَبلُغُ الأَسبابَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा फ़िरऔन ने कहा : ऐ हामान! मेरे लिए एक उच्च भवन बनाओ, ताकि मैं मार्गों तक पहुँच सकूँ।
Roman Urdu (Maududi)Firoun ne kaha “Aey Haamaan, mere liye ek buland imarat bana taa-ke main raaston tak pahuch sakun
Roman Urdu (Junagarhi)Firaon ney kaha aey haamaan! Meray liye aik bala khana bana shayad kay mein jo aasman kay darwazay hain
Devnagri Urdu (Maududi)फ़िरौन ने कहा "ऐ हामान, मेरे लिए एक बुलंद इमारत बना ता-के मैं रास्ते तक पहुँच सकूँ
عَرَبِيأَسبابَ السَّماواتِ فَأَطَّلِعَ إِلىٰ إِلٰهِ موسىٰ وَإِنّي لَأَظُنُّهُ كاذِبًا ۚ وَكَذٰلِكَ زُيِّنَ لِفِرعَونَ سوءُ عَمَلِهِ وَصُدَّ عَنِ السَّبيلِ ۚ وَما كَيدُ فِرعَونَ إِلّا في تَبابٍ
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हिन्दी (Al-Omari)आकाशों के मार्गों तक। फिर मैं मूसा के पूज्य को देख लूँ। और निश्चय ही मैं उसे झूठा समझता हूँ। इसी प्रकार, फ़िरऔन के लिए उसके बुरे कर्म को सुंदर बना दिया गया और उसे सत्य मार्ग से रोक दिया गया। और फ़िरऔन की चाल विनाश होकर रही।
Roman Urdu (Maududi)Aasmaano ke raaston tak, aur Moosa ke khuda ko jhaank kar dekhun.Mujhey to yeh Moosa jhoota hi maloom hota hai.” Is tarah Firoun ke liye uski badh-amali khushnuma bana di gayi aur woh raah e raast se roak diya gaya. Firoun ki saari chaalbaazi (uski apni) tabahi ke raaste hi mein sarf (use/istemal) hui
Roman Urdu (Junagarhi)(unn) darwazon tak phonch jaon aur musa kay mabood ko jhaank loon aur be-shak mein samjhta hun woh jhoota hai aur issi tarah firaon ki bad-kirdariyan ussay bhali dikhaee gaeen aur raah say rok diya gaya aur firaon ki (her) heela saazi tabahee mein hi rahee
Devnagri Urdu (Maududi)आसमान के रास्ते तक, और मूसा के खुदा को झाँक कर देखूँ। मुझे तो ये मूसा झूठा ही मालूम होता है।” इस तरह फिरौन के लिए उसकी बढ़-अमली खुशनुमा बना दी गई और वो राह ए रास्ते से रुक गया। फ़िरौन की सारी चालबाज़ी (उसकी अपनी) तबाही के रास्ते ही में सिर्फ (इस्तेमाल/इस्तेमाल) हुई
عَرَبِيوَقالَ الَّذي آمَنَ يا قَومِ اتَّبِعونِ أَهدِكُم سَبيلَ الرَّشادِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो व्यक्ति ईमान लाया था, उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! मेरा अनुसरण करो, मैं तुम्हे भलाई का रास्ता दिखाऊँगा।
Roman Urdu (Maududi)Woh shaks jo imaan laya tha bola “ Aey meri qaum ke logon, meri baat maano, main tumhein saheeh raasta batata hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss momin shaks ney kaha kay aey meri qom! (kay logo) tum (sab) meri perwi kero mein nek raah ki taraf tumhari rehbari keroon ga
Devnagri Urdu (Maududi)वो शक्स जो ईमान लाया था बोला “ ऐ मेरी क़ौम के लोगों, मेरी बात मानो, मैं तुम्हें सही रास्ता बताता हूँ
عَرَبِييا قَومِ إِنَّما هٰذِهِ الحَياةُ الدُّنيا مَتاعٌ وَإِنَّ الآخِرَةَ هِيَ دارُ القَرارِ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरी जाति के लोगो! यह सांसारिक जीवन तो मात्र कुछ दिनों का लाभ है और निःसंदेह स्थायी निवास का स्थान तो आख़िरत ही है।
Roman Urdu (Maududi)Aey qaum, yeh duniya ki zindagi to chand roza hai, hamesha ke liye qayam (permanent abode) ki jagah aakhirat hi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meri qom! Yeh hayat-e-duniya matay-e-faani hai (yaqeen mano kay qarar) aur hameshgi ka ghar to aakhirat hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ क़ौम, ये दुनिया कि जिंदगी तो चांद रोजा है, हमेशा के लिए कयाम (स्थायी निवास) की जगह आखिरी ही है
عَرَبِيمَن عَمِلَ سَيِّئَةً فَلا يُجزىٰ إِلّا مِثلَها ۖ وَمَن عَمِلَ صالِحًا مِن ذَكَرٍ أَو أُنثىٰ وَهُوَ مُؤمِنٌ فَأُولٰئِكَ يَدخُلونَ الجَنَّةَ يُرزَقونَ فيها بِغَيرِ حِسابٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसने बुरा काम किया, उसे उसी के जैसा बदला दिया जाएगा तथा जिसने अच्छा काम किया, वह नर हो अथवा नारी, जबकि वह ईमान वाला (एकेश्वरवादी) हो, तो ऐसे लोग जन्नत में प्रवेश करेंगे। वहाँ उन्हें बेहिसाब रोज़ी दी जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Jo burayi karega usko utna hi badla milega jitni usne burayi ki hogi aur jo neik amal karega, khwah woh mard ho ya aurat, bashart ye ke ho woh momin, aise sab log jannat mein daakhil hongey jahan unko bay hisaab rizq diya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ney gunah kiya hai ussay to barabar barabar ka badla hi hai aur jiss ney neki ki hai khua woh mard ho ya aurat aur woh eman wala ho to yeh log jannat mein jayen gay aur wahan be-shumar rozi payen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जो बुरा करेगा उसको उतना ही बदला मिलेगा जितनी उसने बुराई की होगी और जो नीक अमल करेगा, ख्वाह वो मर्द हो या औरत, बशारत ये के हो वो मोमिन, ऐसे सब लोग जन्नत में दाख़िल होंगे जहां उनको बे हिसाब रिज़क दिया जाएगा
عَرَبِي۞ وَيا قَومِ ما لي أَدعوكُم إِلَى النَّجاةِ وَتَدعونَني إِلَى النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या बात है कि मैं तुम्हें मुक्ति की ओर बुला रहा हूँ और तुम मुझे आग (नरक) की ओर बुला रहे हो?
Roman Urdu (Maududi)Aey qaum, aakhir yeh kya maajra hai ke mai to tum logon ko nijaat (salvation) ki taraf bulata hoon aur tumlog mujhey aag ki taraf dawat detey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meri qom! Yeh kiya baat hai kay mein tumhen nijat ki taraf bula raha hun aur tum mujhay dizakh ki taraf bula rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ क़ौम, आख़िर ये क्या माजरा है के मई तो तुम लोगों को निजात (मोक्ष) की तरफ बुलाता हूं और तुमलोग मुझे आग की तरफ दावत देते हो
عَرَبِيتَدعونَني لِأَكفُرَ بِاللَّهِ وَأُشرِكَ بِهِ ما لَيسَ لي بِهِ عِلمٌ وَأَنا أَدعوكُم إِلَى العَزيزِ الغَفّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम मुझे इस बात की ओर बुला रहे हो कि मैं अल्लाह के साथ कुफ़्र करूँ और उसके साथ उसे साझी ठहराऊँ जिसका मुझे कोई ज्ञान नहीं, तथा मैं तुम्हें प्रभुत्वशाली, अत्यंत क्षमाशील (अल्लाह) की ओर बुला रहा हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Tum mujhey is baat ki dawat detey ho ke main Allah se kufr karoon aur uske saath un hastiyon ko shareek thehraun jinhein main nahin jaanta Halaanke main tumhein us zabardast magfirat karne wale khuda ki taraf bula raha hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Tum mujhay yeh dawat dey rahey ho kay mein Allah kay sath kufur keroon aur uss kay sath shirk keroon jiss ka koi ilm mujhay nahi aur mein tumhen ghalib bakhshney walay (mabood) ki taraf dawat dey raha hun
Devnagri Urdu (Maududi)तुम मुझे इस बात की दावत देते हो के मैं अल्लाह से कुफ्र करूं और उसके साथ उन हस्तियों को शरीक ठहरूं जिनहें मैं नहीं जानता हलांके मैं तुम्हें जबरदस्त मगफिरत करने वाले खुदा की तरफ बुला रहा हूं
عَرَبِيلا جَرَمَ أَنَّما تَدعونَني إِلَيهِ لَيسَ لَهُ دَعوَةٌ فِي الدُّنيا وَلا فِي الآخِرَةِ وَأَنَّ مَرَدَّنا إِلَى اللَّهِ وَأَنَّ المُسرِفينَ هُم أَصحابُ النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुम जिसकी ओर मुझे बुला रहे हो, वह न तो दुनिया में पुकारे जाने के योग्य है और न आख़िरत में। तथा यह कि निश्चय हमारा लौटना अल्लाह की ओर है और यह कि निश्चय हद से आगे बढ़ने वाले ही, आग में रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Nahin, haqq yeh hai aur iske khilaf nahin ho sakta ke jinki taraf tum mujhey bula rahey ho unke liye na duniya mein koi dawat hai na aakhirat mein, aur hum sabko palatna Allah hi ki taraf hai, aur hadd se guzarne waley aag mein janey waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh yaqeeni amar hai kay tum mujhay jiss ki taraf bula rahey ho woh to na duniya mein pukaray janey kay qabil hai na aakhirat mein aur yeh (bhi yaqeeni baat hai) kay hum sab ka lotna Allah ki taraf hai aur hadd say guzar janey walay hi (yaqeenan) ahl-e-dozakh hain
Devnagri Urdu (Maududi)नहीं, हक ये है और इसके खिलाफ नहीं हो सकता है जिनकी तरफ तुम मुझे बुला रहे हो उनके लिए ना दुनिया में कोई दावत है ना आखिररात में, और हम सबको पलटना अल्लाह ही की तरफ है, और हद से गुजारने वाले आग में जाने वाले हैं
عَرَبِيفَسَتَذكُرونَ ما أَقولُ لَكُم ۚ وَأُفَوِّضُ أَمري إِلَى اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ بَصيرٌ بِالعِبادِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो जो कुछ मैं तुमसे कह रहा हूँ, शीघ्र ही तुम उसे याद करोगे। तथा मैं अपना मामला अल्लाह के हवाले करता हूँ। निःसंदेह अल्लाह बंदों को देख रहा है।
Roman Urdu (Maududi)Aaj jo kuch main keh raha hoon , anqareeb woh waqt aayega jab tum usey yaad karogey aur apna maamla main Allah ke supurd karta hoon, woh apne bandon ka nigehbaan hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aagay chal ker tum meri baaton ko yaad kero gay mein apna moamla Allah kay supurd kerta hun yaqeenan Allah Taalaa bandon ka nigran hai
Devnagri Urdu (Maududi)आज जो कुछ मैं कह रहा हूं, अंकरीब वह वक्त आएगा जब तुम उसे याद करोगे और अपना मामला मैं अल्लाह के हवाले करता हूं, वह अपने बंदों का निगहबान है"
عَرَبِيفَوَقاهُ اللَّهُ سَيِّئَاتِ ما مَكَروا ۖ وَحاقَ بِآلِ فِرعَونَ سوءُ العَذابِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो अल्लाह ने उसे उनकी चालों की बुराइयों से बचा लिया और फ़िरऔनियों को बुरी यातना ने घेर लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar un logon ne jo buri se buri chalein us momin ke khilaf chalin, Allah ne un sabse usko bacha liya, aur Firoun ke saathi khud badtareen azaab ke pher mein aa gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Pus ussay Allah Taalaa ney tamam badiyon say mehfooz rakh liya jo unhon ney soch rakhi thin aur firaon walon per buri tarah ka azab ulat para
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार उन लोगों ने जो बुरी से बुरी चलें हमें मोमिन के खिलाफ़ चलें, अल्लाह ने उन्हें सबसे बचाया, और फिरौन के साथी खुद बद्तरीन अज़ाब के फेर में आ गए
عَرَبِيالنّارُ يُعرَضونَ عَلَيها غُدُوًّا وَعَشِيًّا ۖ وَيَومَ تَقومُ السّاعَةُ أَدخِلوا آلَ فِرعَونَ أَشَدَّ العَذابِ
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हिन्दी (Al-Omari)वे सुबह और शाम आग पर प्रस्तुत किए जाते हैं, तथा जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी, (तो आदेश होगा) कि फ़िरऔनियों को सबसे कठोर यातना में डाल दो।
Roman Urdu (Maududi)Dozakh ki aag hai jiske saamney subah o shaam woh pesh kiye jaate hain, aur jab qayamat ki ghadi aa jayegi to hukum hoga ke aale Firoun ko shadeed-tarr azaab mein daakhil karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aag hai jiss kay samney yeh her subah shaam laye jatay hain aur jiss din qayamat qaeem hogi (farman hoga kay) firaoniyon ko sakht tareen azab mein daalo
Devnagri Urdu (Maududi)दोज़ख की आग है जिसके सामने सुबह ओ शाम वो पेश किए जाते हैं, और जब कयामत की घड़ी आ जाएगी तो हुकुम होगा के आले फिरौन को छाया-तार अज़ाब में दाख़िल करो
عَرَبِيوَإِذ يَتَحاجّونَ فِي النّارِ فَيَقولُ الضُّعَفاءُ لِلَّذينَ استَكبَروا إِنّا كُنّا لَكُم تَبَعًا فَهَل أَنتُم مُغنونَ عَنّا نَصيبًا مِنَ النّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (याद करो) जब वे नरक में आपस में झगड़ा करेंगे, तो कमज़ोर लोग बड़ा बनने वाले लोगों से कहेंगे : हम (दुनिया में) तुम्हारे अनुयायी थे। तो क्या तुम हमसे आग का कुछ भाग हटा सकते हो?
Roman Urdu (Maududi)Phir zara khayal karo us waqt ka jab yeh log dozakh mein ek dusre se jhagad rahey hongey. Duniya mein jo log kamzoar thay woh badey ban-ney walon se kahenge ke “hum tumhare tabey(followers) thay, ab kya yahan tum naar-e-jahannum (hell fire) ki takleef ke kuch hissey se humko bacha logey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab kay dozakh mein aik doosray say jhagren gayto kamzor log takabbur walon say (jin kay yeh tabey thay) kahen gay kay hum to tumharay pairo thay to kiya tum hum say iss aag ka koi hissa hata saktay ho
Devnagri Urdu (Maududi)फिर ज़रा ख़याल करो उस वक़्त का जब ये लोग दोज़ख़ में एक दूसरे से झगड़ रहे होंगे। दुनिया में जो लोग कमज़ार थे वो बड़े बन-ने वालों से कहेंगे के “हम तुम्हारे तबे (अनुयायी) थे, अब क्या यहाँ तुम नार-ए-जहन्नुम (नरक की आग) की तकलीफ़ के कुछ इसी से हमको बचा लोगे
عَرَبِيقالَ الَّذينَ استَكبَروا إِنّا كُلٌّ فيها إِنَّ اللَّهَ قَد حَكَمَ بَينَ العِبادِ
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हिन्दी (Al-Omari)वे बड़ा बनने वाले लोग कहेंगे : निःसंदेह हम सब इसी में हैं। निश्चय ही अल्लाह ने बंदों के बीच निर्णय कर दिया है।
Roman Urdu (Maududi)Woh badey bannay waley jawab dengey “ hum sab yahan ek haal mein hain,aur Allah bandon ke darmiyan faisla kar chuka hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh baray log jawab den gay hum to sabhi iss aag mein hain Allah Taalaa apnay bandon kay darmiyan faislay ker chuka hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो बड़े बनने वाले जवाब देंगे” हम सब यहाँ एक हाल में हैं, और अल्लाह बंदों के दरमियान फैसला कर चूका है”
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ فِي النّارِ لِخَزَنَةِ جَهَنَّمَ ادعوا رَبَّكُم يُخَفِّف عَنّا يَومًا مِنَ العَذابِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग आग में होंगे, वे जहन्नम के रक्षकों से कहेंगे : अपने पालनहार से प्रार्थना करो कि वह हमसे एक दिन तो कुछ यातना हल्की कर दे।
Roman Urdu (Maududi)Phir yeh dozakh mein padey huey log jahannum ke ahal-kaaroon (keepers of Hell) se kahenge “ Apne Rubb se dua karo ke hamare azaab mein bas ek din ki takhfif karde”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (tamam)jahannumi mill ker jahannum kay daroghon say kahen gay kay tum hi apnay perwerdigar say dua kero kay woh kissi din to humaray azab mein kami kerdey
Devnagri Urdu (Maududi)फिर ये दोज़ख़ में पड़े हुए लोग जहन्नुम के अहल-कारून (नर्क के रखवाले) से कहेंगे “अपने रब से दुआ करो के हमारे अज़ाब में बस एक दिन की तफ़्फ़िफ़ करदे”
عَرَبِيقالوا أَوَلَم تَكُ تَأتيكُم رُسُلُكُم بِالبَيِّناتِ ۖ قالوا بَلىٰ ۚ قالوا فَادعوا ۗ وَما دُعاءُ الكافِرينَ إِلّا في ضَلالٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जहन्नम के रक्षक कहेंगे : क्या तुम्हारे पास, तुम्हारे रसूल, स्पष्ट प्रमाण लेकर नहीं आए थे? काफ़िर लोग कहेंगे : क्यों नहीं? रक्षकगण कहेंगे : तो तुम ही प्रार्थना करो। और काफ़िरों की प्रार्थना व्यर्थ ही होगी।
Roman Urdu (Maududi)Woh poochenge “kya tumhare paas tumhare Rasool bayyinaat (clear proofs) lekar nahin aatey rahey thay?” woh kahenge “haan” jahannum ke ahalkar bolenge: “phir tum hi dua karo, aur kafiron ki dua akarat (vain) hi janey wali hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh jawab den gay kay kiya tumharay pass tumharay rasool mojzzay ley ker nahi aaye thay? Woh kehen gay kiyon nahi woh kahen gay phir tum hi dua kero aur kafiron ki dua mehaz be-asar aur be-raah hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो पूछेंगे “क्या तुम्हारे पास तुम्हारे रसूल बैयिनत (स्पष्ट सबूत) लेकर नहीं आ रहे थे?” वो कहेंगे "हां" जहन्नुम के अहलकार बोलेंगे: "फिर तुम ही दुआ करो, और काफिरों की दुआ अकारत (व्यर्थ) ही जाने वाली है।"
عَرَبِيإِنّا لَنَنصُرُ رُسُلَنا وَالَّذينَ آمَنوا فِي الحَياةِ الدُّنيا وَيَومَ يَقومُ الأَشهادُ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम अपने रसूलों की और उन लोगों की जो ईमान लाए, सांसारिक जीवन में भी अवश्य सहायता करते हैं तथा उस दिन भी (करेंगे) जब साक्षी खड़े होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeen jaano ke hum apne Rasoolon aur imaan laney walon ki madad is duniya ki zindagi mein bhi laaziman karte hain, aur us roz bhi karenge jab gawaah khade hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum apnay rasoolon ki aur eman walon ki madad zindaganiy-e-duniya mein bhi keren gay aur uss din bhi jab gawahee denay walay kharay hongay
Devnagri Urdu (Maududi)यकीन जानो के हम अपने रसूलन और ईमान लाने वालों की मदद करते हैं इस दुनिया की जिंदगी में भी लाज़िमन करते हैं, और हम रोज़ भी करेंगे जब गवाह खड़े होंगे
عَرَبِييَومَ لا يَنفَعُ الظّالِمينَ مَعذِرَتُهُم ۖ وَلَهُمُ اللَّعنَةُ وَلَهُم سوءُ الدّارِ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन अत्याचारियों को उनका बहाना (सफ़ाई देना) कोई लाभ नहीं देगा तथा उनके लिए धिक्कार है और उनके लिए बुरा घर है।
Roman Urdu (Maududi)Jab zaalimon ko unki maazrat(excuses) kuch bhi faiyda na degi aur unpar laanat padegi aur badhtareen thikana unke hissay mein aayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din zalimon ko unn ki (uzar) maazrat kuch nafa na dey gi unn kay liye laanat hi hogi aur unn kay liye bura ghar hoga
Devnagri Urdu (Maududi)जब ज़ालिमों को उनकी मज़ार (बहाने) कुछ भी फ़ायदा ना देगी और अनपर लानत पड़ेगी और बेहतरीन ठिकाना उनको में आएगा
عَرَبِيوَلَقَد آتَينا موسَى الهُدىٰ وَأَورَثنا بَني إِسرائيلَ الكِتابَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने मूसा को मार्गदर्शन प्रदान किया और इसराईल की संतान को पुस्तक (तौरात) का उत्तराधिकारी बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir dekhlo ke Moosa ki humne rehmumayi ki aur bani Israel ko us kitaab ka waris bana diya
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney musa (alh-e-salam) ko hidayat nama ata farmaya aur bano israeel ko iss kitab ka waris banaya
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर देखलो के मूसा की हमने रहमुमयी की और बनी इसराइल को उस किताब का वारिस बना दिया
عَرَبِيهُدًى وَذِكرىٰ لِأُولِي الأَلبابِ
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हिन्दी (Al-Omari)जो बुद्धि वालों के लिए मार्गदर्शन तथा उपदेश थी।
Roman Urdu (Maududi)Jo aqal o daanish rakhne walon ke liye hidayat o naseehat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kay woh hidayat-o-naseehat thi aqal mando kay liye
Devnagri Urdu (Maududi)जो अक़ल ओ दानिश रखने वालों के लिए हिदायत ओ हिदायत है
عَرَبِيفَاصبِر إِنَّ وَعدَ اللَّهِ حَقٌّ وَاستَغفِر لِذَنبِكَ وَسَبِّح بِحَمدِ رَبِّكَ بِالعَشِيِّ وَالإِبكارِ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः (ऐ नबी!) आप धैर्य रखें। निःसंदेह अल्लाह का वचन सत्य है। तथा अपने पापों की क्षमा माँगें और सायंकाल तथा प्रातःकाल अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का वर्णन करते रहें।
Roman Urdu (Maududi)Pas (aey Nabi), sabr karo, Allah ka waada bar-haqq hai, apne kasoor ki maafi chaho aur subah o shaam apne Rubb ki hamd ke saath uski tasbeeh karte raho
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aey nabi! To sabar ker Allah ka wada bila shak (o-shuba) sacha hi hai tu apnay gunah ki maafi mangta reh aur subah shaam apnay perwerdigar ki tasbeeh aur hamd biyan kerta reh
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ नबी), सब्र करो, अल्लाह का वादा बार-हक़्क़ है, अपने कसूर की माफ़ी चाहो और सुबह ओ शाम अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करते रहो
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يُجادِلونَ في آياتِ اللَّهِ بِغَيرِ سُلطانٍ أَتاهُم ۙ إِن في صُدورِهِم إِلّا كِبرٌ ما هُم بِبالِغيهِ ۚ فَاستَعِذ بِاللَّهِ ۖ إِنَّهُ هُوَ السَّميعُ البَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग बिना किसी प्रमाण के, जो उनके पास आया हो, अल्लाह की आयतों के बारे में झगड़ते हैं, उनके दिलों में बड़ाई के सिवा कुछ नहीं है, जिस तक वे पहुँचने वाले नहीं हैं। अतः आप अल्लाह की शरण लें। निःसंदेह वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke jo log kisi sanad o hujjat ke bagair jo unke paas aayi ho, Allah ki aayat mein jhagade kar rahey hain unke dilon mein kibr (ghamand /pride) bhara hua hai. Magar woh us badayi ko pahunchne waley nahin hain jiska woh ghamand rakhte hain. Bas Allah ki panaah maang lo, woh sabkuch dekhta aur sunta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log bawajood apnay pass kissi sanad kay na honay kay aayat-e-elahee mein jhagra kertay hain unn kay dilon mein ba-juz nirri baraee kay aur kuch nahi woh uss tak phonchney walay hi nahi so tu Allah ki panah mangta reh be-shak woh poora sunnay wala aur sab say ziyadah dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के जो लोग किसी सनद या हुज्जत के बगैर जो उनके पास आए हो, अल्लाह की आयत में झगड़े कर रहे हैं उनके दिलों में किब्र (घमंड/गर्व) भरा हुआ है। मगर वो हमें बदनाम करने वाले नहीं हैं जिसका वो घमंड रखते हैं। बस अल्लाह की पनाह मांग लो, वो सब कुछ देखता और सुनता है
عَرَبِيلَخَلقُ السَّماواتِ وَالأَرضِ أَكبَرُ مِن خَلقِ النّاسِ وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय ही आकाशों तथा धरती को पैदा करना, मनुष्य को पैदा करने से अधिक बड़ा (कार्य) है। परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Aasmano aur zameen ka paida karna Insano ko paida karne ki ba-nisbat yaqeenan zyada bada kaam hai, magar aksar log jaante nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmano-o-zamin ki pedaeesh yaqeenan insan ki pedaeesh say boht bara kaam hai lekin (yeh aur baat hai kay) aksar log be-ilm hain
Devnagri Urdu (Maududi)आसमानो और ज़मीन का भुगतान करना इंसानों को भुगतान करना कि बा-निस्बत यकीनन ज्यादा बड़ा काम है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं
عَرَبِيوَما يَستَوِي الأَعمىٰ وَالبَصيرُ وَالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ وَلَا المُسيءُ ۚ قَليلًا ما تَتَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अंधा और आँखों वाला बराबर नहीं हो सकते। तथा जो लोग ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, वे और बुरा कर्म करने वाला बराबर नहीं हो सकते। तुम (बहुत) कम ही शिक्षा ग्रहण करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh nahin ho sakta ke andha (blind) aur beena (dekhne wala) yaksan ho jaye, aur imandaar o saleh aur badhkaar barabar thehrein. Magar tumlog kam hi kuch samajhte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Andha aur beena barabar nahi na woh log jo eman laye aur bhalay kaam kiyey bad-kaaron kay (barabar hain) tum (boht) kum naseehat hasil ker rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)और ये नहीं हो सकता के अंधा (अंधा) और बीना (देखने वाला) यकसन हो जाए, और इमानदार ओ सालेह और बदमाश बराबर ठहरें। मगर तुमलोग कम ही कुछ समझते हो
عَرَبِيإِنَّ السّاعَةَ لَآتِيَةٌ لا رَيبَ فيها وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह क़ियामत अवश्य आने वाली है। इसमें कोई संदेह नहीं। लेकिन अधिकतर लोग ईमान नहीं लाते।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan qayamat ki ghadi aane waali hai. Uske aane mein koi shakk nahin, magar aksar log nahin maante
Roman Urdu (Junagarhi)Qayamat bil-yaqeen aur be-shuba aaney wali hai lekin (yeh aur baat hai kay) boht say log eman nahi latay
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन क़यामत की घड़ी आने वाली है। उसके आने में कोई शक्क नहीं, मगर अक्सर लोग नहीं मानते
عَرَبِيوَقالَ رَبُّكُمُ ادعوني أَستَجِب لَكُم ۚ إِنَّ الَّذينَ يَستَكبِرونَ عَن عِبادَتي سَيَدخُلونَ جَهَنَّمَ داخِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम्हारे पालनहार ने कहा है : तुम मुझे पुकारो। मैं तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार करूँगा। निःसंदेह जो लोग मेरी इबादत से अहंकार करते हैं, वे शीघ्र ही अपमानित होकर जहन्नम में प्रवेश करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara Rubb kehta hai “ Mujhey pukaro, main tumhari duaein qabool karunga. Jo log ghamand mein aa kar meri ibadat se mooh moadte hain, zaroor woh zaleel o khwar ho kar jahannum mein daakhil hongey”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tumharay rab ka farman (sirzad ho chuka) hai kay mujh say dua kero mein tumhari duaon ko qabool keroon ga yaqeen mano kay jo log meri ibadat say khudsari kertay hain woh abhi abhi zaleel hoker jahannum mein phonch jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा रब कहता है “मुझे पुकारो, मैं तुम्हारी दुआएं कबूल करूंगा। जो लोग घमंड में आ कर मेरी इबादत से मुह मोड़ते हैं, जरूर वो ज़लील ओ ख़्वार हो कर जहन्नुम में दाख़िल होंगे”
عَرَبِياللَّهُ الَّذي جَعَلَ لَكُمُ اللَّيلَ لِتَسكُنوا فيهِ وَالنَّهارَ مُبصِرًا ۚ إِنَّ اللَّهَ لَذو فَضلٍ عَلَى النّاسِ وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही ने तुम्हारे लिए रात बनाई, ताकि तुम उसमें विश्राम करो तथा दिन को प्रकाशमान बनाया। निःसंदेह अल्लाह लोगों पर बड़ा अनुग्रह वाला है। लेकिन अधिकतर लोग आभार प्रकट नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi to hai jisne tumhare liye raat banayi taa-ke tum usmein sukoon haasil karo, Aur din ko roshan kiya. Haqeeqat yeh hai ke Allah logon par bada fazl farmane wala hai magar aksar log shukar ada nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney tumharay liye raat bana di kay tum iss mein aaram hasil kero aur din ko dekhney wala bana diya be-shak Allah Taalaa logon per fazal-o-karam wala hai lekin aksat log shukar guzari nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)वाह अल्लाह हाय तो है जिसने तुम्हारे लिए रात बनाई ता-के तुम हमें सुकून हासिल करो, और दिन को रोशन किया। हकीकत ये है के अल्लाह लोगों पर बड़ा फजल फरमान वाला है मगर अक्सर लोग शुक्र अदा नहीं करते
عَرَبِيذٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُم خالِقُ كُلِّ شَيءٍ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۖ فَأَنّىٰ تُؤفَكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही अल्लाह तुम्हारा पालनहार है, प्रत्येक वस्तु का रचयिता, उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं। फिर तुम कहाँ बहकाए जाते हो?
Roman Urdu (Maududi)Wahi Allah (jisne tumhare liye yeh kuch kiya hai) tumhara Rubb hai. Har cheez ka khaliq uske siwa koi mabood nahin. Phir tum kidhar se behkaye jaa rahe ho
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi Allah hai tum sab ka rab her cheez ka khaliq iss kay siwa koi mabood nahi phir kahan tum phiray jatay ho
Devnagri Urdu (Maududi)वही अल्लाह (जिसने तुम्हारे लिए ये कुछ किया है) तुम्हारा रब है। हर चीज का खालिक उसके सिवा कोई माबूद नहीं। फिर तुम किधर से बहकाए जा रहे हो
عَرَبِيكَذٰلِكَ يُؤفَكُ الَّذينَ كانوا بِآياتِ اللَّهِ يَجحَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)इसी प्रकार वे लोग बहकाए जाते रहे हैं, जो अल्लाह की आयतों का इनकार किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Isi tarah woh sab log behkaye jatey rahey hain jo Allah ki aayat ka inkar karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Issi tarah woh log bhi pheray jatay rahey jo Allah ki aayaton ka inkar kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)इसी तरह वो सब लोग बहकाए जा रहे हैं जो अल्लाह की आयत का इंकार करते हैं
عَرَبِياللَّهُ الَّذي جَعَلَ لَكُمُ الأَرضَ قَرارًا وَالسَّماءَ بِناءً وَصَوَّرَكُم فَأَحسَنَ صُوَرَكُم وَرَزَقَكُم مِنَ الطَّيِّباتِ ۚ ذٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُم ۖ فَتَبارَكَ اللَّهُ رَبُّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही है, जिसने धरती को तुम्हारे लिए निवास स्थान तथा आकाश को छत बनाया और तुम्हारा रूप बनाया, तो सुंदर रूप बनाया, तथा तुम्हें पाकीज़ा चीज़ों से जीविका प्रदान की। वही अल्लाह तुम्हारा पालनहार है। तो सारे संसार का पालनहार अल्लाह बहुत बरकत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi to hai jisne tumhare liye zameen ko jaaye qaraar (dwelling place) banaya aur upar Aasmaan ka gumbadh (canopy) bana diya, jisne tumhari surat banayi aur badi hi umdah banayi. Jisne tumhein paakeeza cheezon ka rizq diya. Wahi Allah (jis ke yeh kaam hai) tumhara Rubb hai, Bay hisaab barakaton wala hai woh qayanaat ka Rubb
Roman Urdu (Junagarhi)Allah hi hai jiss ney tumharay liye zami ko therney ki jagah aur aasman ko chat bana diya aur tumhari sooraten banaeen aur boht achi banaeen aur tumehn umdah umdah cheezen khaney ko ata farmaeen yehi Allah tumhara perwerdigar hai pus boht hi barkaton wala Allah hai saray jahaan ka perwerish kerney wala
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह ही है तो है जिसने तुम्हारे लिए जमीन को जाए क़रार (निवास स्थान) बनाया और ऊपर आसमान का गुम्बद (चंदवा) बना दिया, जिसने तुम्हारी सूरत बनाई और बड़ी ही उमड़ी बनाई। जिसने तुम्हें पाकीज़ा चीज़ का रिज़्क दिया। वही अल्लाह (जिसका ये काम है) तुम्हारा रब है, बे हिसाब बराकतों वाला है वो कायनात का रब
عَرَبِيهُوَ الحَيُّ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ فَادعوهُ مُخلِصينَ لَهُ الدّينَ ۗ الحَمدُ لِلَّهِ رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वही जीवित है, उसके सिवा कोई (सच्चा) पूज्य नहीं। अतः उसी को पुकारो, उसके लिए धर्म को विशुद्ध करते हुए। सब प्रशंसा सारे संसारों के पालनहार, अल्लाह के लिए है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi zinda hai uske siwa koi mabood nahin.Usi ko tum pukaro apne deen ko uske liye khaalis karke. Saari tareef Allah Rabbul aalameen hi ke liye hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh zindah hai jiss kay siwa koi mabood nahi pus tum khalis ussi ki ibadat kertay huyey ussay pukaro tamam khoobiyen Allah hi kay liye hain jo tamam jahano ka rab hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही जिंदा है उसके सिवा कोई माबूद नहीं।उसी को तुम पुकारो अपने दीन को उसके लिए खाली करके। सारी तारीफ अल्लाह रब्बुल आलमीन ही के लिए है
عَرَبِي۞ قُل إِنّي نُهيتُ أَن أَعبُدَ الَّذينَ تَدعونَ مِن دونِ اللَّهِ لَمّا جاءَنِيَ البَيِّناتُ مِن رَبّي وَأُمِرتُ أَن أُسلِمَ لِرَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : निःसंदेह मुझे इस बात से रोक दिया गया है कि मैं उनकी इबादत करूँ, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, जबकि मेरे पास मेरे पालनहार की ओर से स्पष्ट प्रमाण आ गए। तथा मुझे आदेश दिया गया है कि मैं सारे संसारों के पालनहार का आज्ञाकारी रहूँ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), In logon se kehdo ke “mujhey to un hastiyon ki ibadat se manah kardiya gaya hai jinhein tum Allah ko chodh kar pukarte ho. (main yeh kaam kaise kar sakta hoon) jabke mere paas mere Rubb ki taraf se bayyinat aa chuki hain. Mujhey hukum diya hai ke main Rubb ul aalameen ke aagey sar-e-tasleem kham kardun.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiyey! Kay mujhay unn ki ibadat say rok diya gaya hai jinhen tum Allah kay siwa pukar rahey ho iss bina per kay meray pass meray rab ki daleelen phonch chuki hain mujhay yeh hukum diya gaya hai kay mein tamam jahano kay rab ka tabey farman hojaon
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), लोगों से कहदो के "मुझे तो उन हस्तियों की इबादत से मना कर दिया गया है जिनको तुम अल्लाह को छोड़ कर पुकारते हो। (मैं ये काम कैसे कर सकता हूं) जबके मेरे पास मेरे रब की तरफ से बैयिनत आ चुकी हैं। मुझे हुकुम दिया है के मुख्य रब उल आलमीन के आगे सर-ए-तस्लीम ख़म करदुन।”
عَرَبِيهُوَ الَّذي خَلَقَكُم مِن تُرابٍ ثُمَّ مِن نُطفَةٍ ثُمَّ مِن عَلَقَةٍ ثُمَّ يُخرِجُكُم طِفلًا ثُمَّ لِتَبلُغوا أَشُدَّكُم ثُمَّ لِتَكونوا شُيوخًا ۚ وَمِنكُم مَن يُتَوَفّىٰ مِن قَبلُ ۖ وَلِتَبلُغوا أَجَلًا مُسَمًّى وَلَعَلَّكُم تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है, जिसने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया, फिर वीर्य से, फिर जमे हुए रक्त से। फिर वह तुम्हें बच्चे के रूप में निकालता है। फिर (बड़ा करता है) ताकि तुम अपनी पूरी शक्ति को पहुँचो, फिर ताकि तुम बूढ़े हो जाओ, तथा तुममें कुछ इससे पहले ही मर जाते हैं। और (यह इसलिए होता है) ताकि तुम अपनी निश्चित आयु को पहुँच जाओ, तथा ताकि तुम समझो।
Roman Urdu (Maududi)Wahi to hai jisne tumko mitti se paida kiya, phir nutfey se, phir khoon ke lothdey se, phir woh tumhein bachhe ki shakal mein nilkalta hai, phir tumhein badhata hai taake tum apni poori taaqat ko pahunch jao, phir aur badhata hai taa-ke tum budhape ko pahuncho aur tum mein se koi pehle hi wapas bula liya jaata hai. Yeh sab kuch is liye kiya jaata hai taa-ke tum apne muqarrar waqt tak pahunch jao, Aur is liye ke tum haqeeqat ko samjho
Roman Urdu (Junagarhi)Woh wohi hai jiss ney tumhen mitti say phir nutfay say phir khoon kay lothray say peda kiya phir tumhen bachay ki soorat mein nikalta hai phir (tumhen barhata hai kay) tum apni qooat ko phonch jao phir boorhay hojao. Tum mein say baaz iss say pehlay hi fot hojatay hain (woh tumhen chor deta hai) takay tum muddat moayyen tak phonch jao aur takay tum soch samajh lo
Devnagri Urdu (Maududi)वही तो है जिसने तुमको मिट्टी से पेदा किया, फिर से, फिर खून के लोथड़े से, फिर वो तुम्हें बच्चे की शक्ल में नीलकलता है, फिर तुम्हें बढ़ाता है ताके तुम अपनी पूरी ताक़त को पाहुंच जाओ, फिर और बढ़ता है ता-के तुम बुढ़ापे को पकड़ो और तुम में से कोई पहले ही वापस बुला लिया जाता है। ये सब कुछ इसके लिए किया जाता है ता-के तुम अपने मुकर्रर वक्त तक पहुंच जाओ, और इस लिए के तुम हकीकत को समझो
عَرَبِيهُوَ الَّذي يُحيي وَيُميتُ ۖ فَإِذا قَضىٰ أَمرًا فَإِنَّما يَقولُ لَهُ كُن فَيَكونُ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है जो जीवित करता है और मारता है। फिर जब वह किसी काम का निर्णय कर लेता है, तो उसे मात्र यह कहता है कि "हो जा", तो वह हो जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai zindagi denay wala, aur wahi maut denay wala hai. Woh jis baat ka bhi faisla karta hai, bas ek hukum deta hai ke woh ho jaye aur woh jo jaati hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi hai jo jilata hai aur maar dalta hai phir woh jab kissi kaam ka kerna muqarrar kerta hai to ussay sirf yeh kehta hai kay hoja pus woh hojata hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिंदगी देने वाला, और वही मौत देने वाला है। वो जिस बात का भी फैसला करता है, बस एक हुकुम देता है कि वो हो जाए और वो जो जाती है
عَرَبِيأَلَم تَرَ إِلَى الَّذينَ يُجادِلونَ في آياتِ اللَّهِ أَنّىٰ يُصرَفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने उन लोगों को नहीं देखा, जो अल्लाह की आयतों के बारे में झगड़ते हैं, वे कहाँ फेरे जा रहे हैं?
Roman Urdu (Maududi)Tumne dekha un logon ko jo Allah ki aayaat mein jhagade karte hain, kahan se woh phiraye jaa rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tu ney unhen dekha jo Allah ki aayaton mein jhagartay hain woh kahan pher diyey jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)तुमने देखा उन लोगों को जो अल्लाह की आयत में झगड़ा करते हैं, कहां से वो फिराए जा रहे हैं
عَرَبِيالَّذينَ كَذَّبوا بِالكِتابِ وَبِما أَرسَلنا بِهِ رُسُلَنا ۖ فَسَوفَ يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिन्होंने पुस्तक को और जो कुछ हमने अपने रसूलों को देकर भेजा, उसे झुठला दिया। तो शीघ्र ही वे जान लेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log jo is kitaab ko aur un saari kitabon ko jhutlate hain jo humne apne Rasoolon ke saath bheji thi anqareeb unhein maaloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jinn logon ney kitab ko jhutlaya aur ussay bhi jo hum ney apnay rasoolon kay sath bheja unhen abhi abhi haqeeqat-e-haal maloom hojayegi
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग जो इस किताब को और उन सारी किताबों को झूठलते हैं जो हमने अपने रसूलों के साथ भेजी थी अंकारीब उन्हें मालूम हो जाएगा
عَرَبِيإِذِ الأَغلالُ في أَعناقِهِم وَالسَّلاسِلُ يُسحَبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब उनके गले में तौक़ होंगे तथा (पैरों में) बेड़ियाँ होंगी, वे घसीटे जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Jab tauq (fetters) unki gardano mein hongey, aur zanjeerein, jinse pakad kar
Roman Urdu (Junagarhi)Jabakay unki gardano mein toq hongay aur zanjeeren hongi ghaseetay jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)जब तौक (बेड़ियां) उनकी गर्दनों में होंगी, और जंजीरें, जिनसे पकड़ कर
عَرَبِيفِي الحَميمِ ثُمَّ فِي النّارِ يُسجَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)खौलते पानी में (घसीटे जाएँगे)। फिर आग में झोंक दिए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh khaulte huey pani ki taraf kheenchey jayenge aur phir dozakh ki aag mein jhonk diye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Kholtay huyey paani mein aur phir jahannum ki aag mein jalaye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)वो खुलते हुए पानी की तरफ खिंच जाएंगे और फिर दोज़ख कि आग में झोंक दिए जाएंगे
عَرَبِيثُمَّ قيلَ لَهُم أَينَ ما كُنتُم تُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उनसे कहा जाएगा : कहाँ हैं वे, जिन्हें तुम साझी बनाया करते थे?
Roman Urdu (Maududi)Phir unse pucha jayega ke ab kahan hai Allah ke siwa woh dusre khuda jinko tum shareek karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Phir unn say poocha jayega kay jinhen tum shareek kertay thay woh kahan hain
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उनसे पूछा जाएगा के अब कहां है अल्लाह के सिवा वो दूसरे खुदा जिनको तुम शरीक करते थे
عَرَبِيمِن دونِ اللَّهِ ۖ قالوا ضَلّوا عَنّا بَل لَم نَكُن نَدعو مِن قَبلُ شَيئًا ۚ كَذٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह के सिवा? वे कहेंगे : वे हमसे गुम हो गए। बल्कि, हम इससे पहले किसी चीज़ को नहीं पुकारते थे। इसी प्रकार, अल्लाह काफ़िरों को गुमराह कर देता है।
Roman Urdu (Maududi)Woh jawab denge “khoye gaye woh humse, balke hum issey pehle kisi cheez ko na pukarte thay”. Is tarah Allah kaafiron ka gumraah hona mutahaqqiq (to stumble in error) kardega
Roman Urdu (Junagarhi)Jo Allah kay siwa thay woh kahen gay kay woh to hum say behak gaye bulkay hum to iss say pehlay kissi ko bhi pukartay hi na thay. Allah Taalaa kafiron ko issi tarah gumrah kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो जवाब देंगे "खोए गए वो हमसे, बलके हम इसे पहले किसी चीज को ना पुकारते थे"। इस तरह अल्लाह काफ़िरों का गुमराह होना मुतहक़्क़िक़ (गलती में ठोकर खाना) कर देगा
عَرَبِيذٰلِكُم بِما كُنتُم تَفرَحونَ فِي الأَرضِ بِغَيرِ الحَقِّ وَبِما كُنتُم تَمرَحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह यातना इसलिए है कि तुम धरती में नाहक़ बहुत प्रसन्न होते थे तथा इस कारण कि तुम अकड़ते फिरते थे।
Roman Urdu (Maududi)Unse kaha jayega “yeh tumhara anjaam is liye hua hai ke tum zameen mein gair haqq par magan thay aur phir us par itratay thay
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh badla hai uss cheez ka jo tum zamin mein na-haq phoolay na samatay thay. Aur (be-ja) itratay phirtay thay
Devnagri Urdu (Maududi)उनसे कहा जाएगा "ये तुम्हारा अंजाम इस लिए हुआ है के तुम ज़मीन में ग़ैर हक़ पर मगन था और फिर हम पर इतराते थे
عَرَبِيادخُلوا أَبوابَ جَهَنَّمَ خالِدينَ فيها ۖ فَبِئسَ مَثوَى المُتَكَبِّرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जहन्नम के द्वारों में प्रवेश कर जाओ, उसमें सदैव रहने वाले हो। अतः अभिमानियों का ठिकाना बहुत बुरा है।
Roman Urdu (Maududi)Ab jao, Jahannum ke darwazon mein daakhil ho jao hamesha tumko wahin rehna hai, bahut hi bura thikana hai mutakabbirin (proud) ka”
Roman Urdu (Junagarhi)(abb aao) jahannum mein hamesha rehney kay liye (iss kay) darwazon mein dakhil hojao kiya hi buri jagah hai takabbur kerney walon ki
Devnagri Urdu (Maududi)अब जाओ, जहन्नुम के दरवाज़ों में दाख़िल हो जाओ हमेशा तुमको वहीं रहना है, बहुत ही बुरा ठिकाना है मुतकब्बिरन (गर्व) का"
عَرَبِيفَاصبِر إِنَّ وَعدَ اللَّهِ حَقٌّ ۚ فَإِمّا نُرِيَنَّكَ بَعضَ الَّذي نَعِدُهُم أَو نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِلَينا يُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप धैर्य रखें। निःसंदेह अल्लाह का वादा सच्चा है। फिर यदि हम आपको उस (यातना) का कुछ भाग दिखा दें, जिसका हम उनसे वादा करते हैं या हम आपको (उससे पहले ही) मृत्यु दे दें, तो वे हमारी ही ओर लौटाए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Pas aey Nabi, sabr karo Allah ka wada barhaqq hai. Ab khwa hum tumhare saamne hi inko un buray nataij ka koi hissa dikha dein jinse hum inhein dara rahey hain, ya (ussey pehle) tumhein duniya se utha lein, palat kar aana to inhein hamari hi taraf hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap sabar keren Allah ka wada qata’an sacha hai enhen hum ney jo waday dey rakhay hain inn mein say kuch hum aap ko dikhayen ya (iss say pehlay) hum aap ko wafat dey den inn ka lotaya jana to humari hi taraf hai
Devnagri Urdu (Maududi)पस ऐ नबी, सब्र करो अल्लाह का वादा बरहक्क है। अब ख्वाह हम तुम्हारे सामने ही इनको उन बुरे नाताइज का कोई हिसा दिखा दें जिनसे हम इन्हें डरा रहे हैं, या (उससे पहले) तुम्हें दुनिया से उठा लें, पलट कर आना तो इन्हें हमारी ही तरफ है
عَرَبِيوَلَقَد أَرسَلنا رُسُلًا مِن قَبلِكَ مِنهُم مَن قَصَصنا عَلَيكَ وَمِنهُم مَن لَم نَقصُص عَلَيكَ ۗ وَما كانَ لِرَسولٍ أَن يَأتِيَ بِآيَةٍ إِلّا بِإِذنِ اللَّهِ ۚ فَإِذا جاءَ أَمرُ اللَّهِ قُضِيَ بِالحَقِّ وَخَسِرَ هُنالِكَ المُبطِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ नबी!) हम आपसे पहले बहुत-से रसूलों को भेज चुके हैं, जिनमें से कुछ ऐसे हैं जिनका हाल हम आपसे वर्णन कर चुके हैं तथा उनमें से कुछ ऐसे हैं जिनके हाल का वर्णन हमने आपसे नहीं किया है। तथा किसी रसूल के वश में यह नहीं था कि वह अल्लाह की अनुमति के बिना कोई आयत (चमत्कार) ले आए। फिर जब अल्लाह का आदेश आ गया, तो सत्य के साथ निर्णय कर दिया गया और उस समय झूठे लोग घाटे में रहे।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, tumse pehle hum bahut se Rasool bhej chuke hain jinmein se baaz ke haalat humne tumko bataye hain aur baaz ke nahin bataye. Kisi Rasool ki bhi yeh taaqat na thi ke Allah ke izan ke bagair khud koi nishani le aata. Phir jab Allah ka hukum aa gaya to haqq ke mutabiq faisla kardiya gaya aur us waqt galat-kaar log khasare (loss) mein padh gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum aap say pehlay bhi boht say rasool bhej chukay hain jinn mein say baaz kay (waqeyaat) hum aap ko biyan ker chukay hain aur unn mein say baaz kay (qissay) to hum ney aap ko biyan hi nahi kiyey aur kissi rasool ka yeh (maqdoor) na tha kay koi mojzza Allah ki ijazat kay baghair la sakay phir jiss waqt Allah ka hukum aaye ga haq kay sath faisla ker diya jayega aur uss jagah ahl-e-baatil khasaray mein reh jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, तुमसे पहले हम बहुत से रसूल भेज चुके हैं जिनसे बाज़ के हालात हमने तुमको बताए हैं और बाज़ के नहीं बताते. किसी रसूल की भी ये ताक़त न थी के अल्लाह के इज़ान के बिना खुद कोई निशानी ले आता। फिर जब अल्लाह का हुकुम आ गया तो हक के मुताबिक फैसला कर दिया गया और हमें वक्त गलत-कार लोग खासे (नुकसान) में पढ़ गए
عَرَبِياللَّهُ الَّذي جَعَلَ لَكُمُ الأَنعامَ لِتَركَبوا مِنها وَمِنها تَأكُلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही है, जिसने तुम्हारे लिए चौपाए बनाए, ताकि उनमें से कुछ पर तुम सवारी करो और उनमें से कुछ को तुम खाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Allah hi ne tumhare liye yeh maweshi janwar banaye hain taa-ke in mein se kisi par tum sawar ho aur kisi ka gosht khao
Roman Urdu (Junagarhi)Allah woh hai jiss ney tumharay liye chopaye peda kiyey jinn mein say baaz per tum sawar hotay ho aur baaz ko tum khatay ho
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ही ने तुम्हारे लिए ये मवेशी जानवर बनाए हैं ता-के इन से किसी पर तुम सवार हो और किसी का गोश्त खाओ
عَرَبِيوَلَكُم فيها مَنافِعُ وَلِتَبلُغوا عَلَيها حاجَةً في صُدورِكُم وَعَلَيها وَعَلَى الفُلكِ تُحمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम्हारे लिए उनमें बहुत लाभ हैं। और ताकि उनपर सवार होकर तुम अपनी उस आवश्यकता तक पहुँचो, जो तुम्हारे दिलों में है। तथा उन (चौपायों) पर और नावों पर तुम सवार किए जाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Inke andar tumhare liye aur bhi bahut se munafe (faidey) hain, woh is kaam bhi aate hain ke tumhare dilon mein jahan jaane ki haajat ho wahan tum unpar pahunch sako, unpar bhi aur kashtiyon par bhi tum sawar kiye jatey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bhi tumharay liye inn mein boht say nafay hain aur takay apnay seeno mein chupi hui hajaton ko inhi per sawari kerkay tum hasil kerlo aur inn chopayon per aur kashtiyon per sawar kiyey jatay ho
Devnagri Urdu (Maududi)इनके अंदर तुम्हारे लिए और भी बहुत से मुनाफ़े हैं, वो काम भी आते हैं के तुम्हारे दिलों में जहां जाने की हाज़त हो वहां तुम उन्पर पाहुंच सको, उन्पार भी और कश्तियां पर भी तुम सवार हो जाते हो
عَرَبِيوَيُريكُم آياتِهِ فَأَيَّ آياتِ اللَّهِ تُنكِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वह तुम्हें अपनी निशानियाँ दिखाता है। तो तुम अल्लाह की किन-किन निशानियों का इनकार करोगे?
Roman Urdu (Maududi)Allah apni yeh nishaniyan tumhein dikha raha hai, Aakhir tum uski kin kin nishaniyon ka inkar karogey
Roman Urdu (Junagarhi)Allah tumhen apni nishaniyan dikhata jaraha hai pus tum Allah ki kin kin nishaniyon ka munkir bantay raho gay
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह अपनी ये निशानियां तुम्हें दिखा रहा है, आखिर तुम उसकी किन किन निशानियों का इंकार करोगी
عَرَبِيأَفَلَم يَسيروا فِي الأَرضِ فَيَنظُروا كَيفَ كانَ عاقِبَةُ الَّذينَ مِن قَبلِهِم ۚ كانوا أَكثَرَ مِنهُم وَأَشَدَّ قُوَّةً وَآثارًا فِي الأَرضِ فَما أَغنىٰ عَنهُم ما كانوا يَكسِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वे धरती में चले-फिरे नहीं, ताकि देखते कि उन लोगों का परिणाम कैसा रहा, जो उनसे पहले गुज़र चुके हैं? वे (धन में) इनसे अधिक तथा शक्ति और धरती में (छोड़ी हुई) निशानियों में अधिक बढ़कर थे। किंतु वे जो कुछ कमाते थे, वह उनके कुछ काम न आया।
Roman Urdu (Maududi)Phir kya yeh zameen mein chaley phirey nahin hain ke inko un logon ka anjaam nazar aata jo insey pehle guzar chuke hain? Woh insey taadaad mein zyada thay, inse badhkar taaqatwar thay, aur zameen mein insey zyada shaandaar aasaar chodh gaye hain.Jo kuch kamayi unhon ne ki thi aakhir woh unke kisi kaam aayi
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya enhon ney zamin mein chal phir ker apnay say pehlon ka anjam nahi dekha? Jo inn say tadaad mein ziyadah thay qooat mein sakht aur zamin mein boht sari yaadgaren chori thin unn kay kiyey kaamon ney unhen kuch bhi faeedah na phonchaya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्या ये जमीन में चले फिर नहीं हैं के इनको उन लोगों का अंजाम नज़र आता जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं? वो इनसे तदाद में ज्यादा था, इनसे बढ़कर ताकतवार था, और ज़मीन में इनसे ज्यादा शानदार असर छोड़ गए हैं। जो कुछ कमाई उनहों ने की थी आख़िर वो उनके किसी काम आई
عَرَبِيفَلَمّا جاءَتهُم رُسُلُهُم بِالبَيِّناتِ فَرِحوا بِما عِندَهُم مِنَ العِلمِ وَحاقَ بِهِم ما كانوا بِهِ يَستَهزِئونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उनके रसूल उनके पास स्पष्ट प्रमाण लेकर आए, तो वे उस ज्ञान पर इतराने लगे, जो उनके पास था, और उन्हें उस (यातना) ने घेर लिया, जिसका वे उपहास कर रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Jab unke Rasool unke paas bayyinaat (clear proofs) lekar aaye to woh usi ilm mein magan rahey jo unke apne paas tha, aur phir usi cheez ke phair mein aa gaye jiska woh mazak udate thay
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab kabhi unn kay pass unn kay rasool khulli nishaniyan ley ker aaye to yeh apnay pass kay ilm per itraney lagay bil-aakhir jiss cheez ko mazaq mein ura rahey thay wohi unn per ulat pari
Devnagri Urdu (Maududi)जब उनके रसूल उनके पास बैयिनत (स्पष्ट प्रमाण) लेकर आए तो वो उसी इल्म में मगन रहे जो उनके अपने पास था, और फिर उसी चीज़ के फिर में आ गए जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे
عَرَبِيفَلَمّا رَأَوا بَأسَنا قالوا آمَنّا بِاللَّهِ وَحدَهُ وَكَفَرنا بِما كُنّا بِهِ مُشرِكينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उन्होंने हमारी यातना देखी, तो कहने लगे : हम अल्लाह अकेले पर ईमान लाए, तथा उसका इनकार किया, जिसे हम उसका साझी बनाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jab unhon ne hamara azaab dekh liya to pukar utthey ke humne maan liya Allah wahdahu laa shareek ko aur hum inkar karte hain un sab maaboodon ka jinhein hum shareek thehrate thay
Roman Urdu (Junagarhi)Humara azab dekhtay hi kehney lagay kay Allah wahid per hum eman laye aur jin jin ko hum uss ka shareek bana rahey thay hum ney unn sab say inkar kiya
Devnagri Urdu (Maududi)जब उन्होन ने हमारा अज़ाब देख लिया तो पुकार उठे के हमने मान लिया अल्लाह वहीदाहु ला शरीक को और हम इनकार करते हैं उन सब मआबूदों का जिन्हें हम शरीक ठहरते थे
عَرَبِيفَلَم يَكُ يَنفَعُهُم إيمانُهُم لَمّا رَأَوا بَأسَنا ۖ سُنَّتَ اللَّهِ الَّتي قَد خَلَت في عِبادِهِ ۖ وَخَسِرَ هُنالِكَ الكافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यह न था कि जब उन्होंने हमारी यातना को देख लिया, तो उनका ईमान (लाना) उन्हें लाभ देता। यही अल्लाह की रीति है, जो उसके बंदों में गुज़र चुकी। और उस समय काफ़िर घाटे में पड़ गए।
Roman Urdu (Maududi)Magar hamara azaab dekh lene ke baad unka imaan unke liye kuch bhi naafeh (faydamand) na ho sakta tha, kyunke yahi Allah ka muqarrar zaabta hai jo hamesha uske bandon mein jaari raha hai, aur us waqt kaafir log khasarey (nuksan) mein padh gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin humaray azab ko dekh lenay kay baad unn kay eman ney unhen nafa na diya. Allah ney apna mamool yehi muqarrar ker rakha hai jo uss kay bando mein barabar chala aaraha hai aur uss jagah kafir kharab-o-khasta huyey
Devnagri Urdu (Maududi)मगर हमारा अजब-गजब देख लेने के बाद उनका ईमान उनके लिए कुछ भी नाफे (फायदमंद) ना हो सकता था, क्योंकि यही अल्लाह का मुकर्रर ज़ब्ता है जो हमेशा उसके बंदों में जारी रह रहा है, और हम वक्त काफिर लोग खासरे (नक्सन) में पढ़ गए
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Surah 40: Al-Mu'min (The Believer)

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Surah 40: Al-Mu'min (The Believer)

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Surah 40: Al-Mu'min (The Believer)

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Surah 40: Al-Mu'min (The Believer)

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Surah 40: Al-Mu'min (The Believer)

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Surah 41: Ha Mim (Ha Mim)

Meccan🕐 Revelation #61📜 54 Verses🕮 Juz 1–25
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Surah 41: Ha Mim (Ha Mim)

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Surah 41: Ha Mim (Ha Mim)

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Surah 41: Ha Mim (Ha Mim)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيحم
हिन्दी (Al-Omari)ह़ा, मीम।
Roman Urdu (Maududi)Haa Meem
Roman Urdu (Junagarhi)Haa-meem
Devnagri Urdu (Maududi)हा मीम
عَرَبِيتَنزيلٌ مِنَ الرَّحمٰنِ الرَّحيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(यह कुरआन) अत्यंत दयावान्, असीम दयालु की ओर से अवतरित हुआ है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh khuda e Rehman o Raheem ki taraf se nazil karda cheez hai
Roman Urdu (Junagarhi)Utari hui hai baray meharban boht reham walay ki taraf say
Devnagri Urdu (Maududi)ये खुदा ए रहमान ओ रहीम की तरफ से नाज़िल करदा चीज़ है
عَرَبِيكِتابٌ فُصِّلَت آياتُهُ قُرآنًا عَرَبِيًّا لِقَومٍ يَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(यह ऐसी) पुस्तक है, जिसकी आयतें खोलकर बयान की गई हैं। (यह) क़ुरआन अरबी (भाषा में) है, उन लोगों के लिए जो ज्ञान रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ek aisi kitaab jiski aayat khoob khol kar bayan ki gayi hain, Arabi zubaan ka Quran, un logon ke liye jo ilm rakhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)(Aisi) kitab hai jiss ki aayaton ki wazeh tafseel ki gaee hai (iss haal mein kay) quran arabi zaban mein hai uss qom kay liye jo janti hai
Devnagri Urdu (Maududi)एक ऐसी किताब जिसकी आयत खूब खोल कर बयान की गई हैं, अरबी ज़ुबान का कुरान, उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं
عَرَبِيبَشيرًا وَنَذيرًا فَأَعرَضَ أَكثَرُهُم فَهُم لا يَسمَعونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह शुभ सूचना देने वाला तथा सचेत करने वाला है। लेकिन उनमें से अधिकतर ने (उससे) मुँह फेर लिया, तो वे सुनते ही नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Basharat(khush-khabri) dene wala aur dara dene wala magar in logon mein se aksar ne issey ru-gardani ki aur woh sunkar nahin detey
Roman Urdu (Junagarhi)Khuskhabri sunanay wala aur daraney wala hai phir bhi inn ki aksariyat ney mun pher liya aur woh suntay hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)बशारत (खुश-खबरी) देने वाला और दारा देने वाला मगर लोगों में से अक्सर ने इस रु-गर्दानी की और वो सुनकर नहीं देते
عَرَبِيوَقالوا قُلوبُنا في أَكِنَّةٍ مِمّا تَدعونا إِلَيهِ وَفي آذانِنا وَقرٌ وَمِن بَينِنا وَبَينِكَ حِجابٌ فَاعمَل إِنَّنا عامِلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा : हमारे दिल उससे पर्दों में हैं, जिसकी ओर आप हमें बुला रहे हैं तथा हमारे कानों में बोझ (बहरापन) है तथा हमारे और आपके बीच एक ओट है। अतः आप अपना काम करें और हम अपना काम कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kehte hain “Jis cheez ki taraf tu humein bula raha hai uske liye hamare dilon par gilaf (purde) chade huey hain, hamare kaan behrey (deaf) ho gaye hain, aur hamare aur tere darmiyaan ek hijab hayal ho gaya hai. Tu apna kaam kar, hum apna kaam kiye jayenge”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur enhon ney kaha kay tu jiss ki taraf humen bula raha hai humaray dil to iss say parday mein hain aur humaray kaano mein giraani hai aur hum mein aur tujh mein aik hijab hai acha tu abb apna kaam kiyey ja hum bhi yaqeenan kaam kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)कहते हैं "जिस चीज की तरफ तू हमें बुला रहा है उसके लिए हमारे दिलों पर गिलाफ (परदे) चढ़े हैं, हमारे कान बहरे (बहरे) हो गए हैं, और हमारे और तेरे दरमियान एक हिजाब हयाल हो गया है। तू अपना काम कर, हम अपना काम किये जायेंगे”
عَرَبِيقُل إِنَّما أَنا بَشَرٌ مِثلُكُم يوحىٰ إِلَيَّ أَنَّما إِلٰهُكُم إِلٰهٌ واحِدٌ فَاستَقيموا إِلَيهِ وَاستَغفِروهُ ۗ وَوَيلٌ لِلمُشرِكينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि मैं तो तुम्हारे ही जैसा एक इनसान हूँ। मेरी ओर वह़्य की जाती है कि तुम्हारा पूज्य मात्र एक ही पूज्य है। अतः सीधे उसी की ओर एकाग्र रहो तथा उससे क्षमा माँगो और साझी ठहराने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi , insey kaho, mein to ek bashar hoon tum jaisa. Mujhey wahee ke zariye se bataya jaata hai ke tumhara khuda to bas ek hi khuda hai, Lihaza tum seedhey usi ka rukh ikhtiyar karo aur ussey maafi chaho. Tabahi hai un mushrikon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiyey! Kay mein to tum hi jaisa insan hun mujh per wahee nazil ki jati hai kay tum sab ka mabood aik Allah hi hai so tum uss ki taraf mutawajja hojaoaur uss say gunhaon ki maafi chahao aur inn mushrikon kay liye (bari hi) kharabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, इनसे कहो, मैं तो एक बशर हूं तुम जैसा। मुझे वही के ज़रिये से बताया जाता है कि तुम्हारा खुदा तो बस एक ही खुदा है, लिहाज़ा तुम सीधे उसी का रुख इख्तियार करो और उसे माफ़ी चाहो। तबाही है उन मुशरिकों के लिए
عَرَبِيالَّذينَ لا يُؤتونَ الزَّكاةَ وَهُم بِالآخِرَةِ هُم كافِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो ज़कात नहीं देते तथा वे आख़िरत का (भी) इनकार करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo zakat nahin detay aur aakhirat ke munkir hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo zakat nahi detay aur aakhirat kay bhi munkir hi rehtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो जकात नहीं देते और आखिररात के मुनकिर हैं
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ لَهُم أَجرٌ غَيرُ مَمنونٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग ईमान लाए तथा अच्छे कर्म किए, उनके लिए समाप्त न होने वाला बदला है।
Roman Urdu (Maududi)Rahey woh log jinhon ne maan liya aur neik aamaal kiye, unke liye yaqeenan aisa ajar hai jiska silsila kabhi tootne wala nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jo log eman layen aur bhalay kaam keren unn kay liye na khatam honey wala ajar hai
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जिन्होन ने मान लिया और नेक अमाल किए, उनके लिए यकीनन ऐसा अजर है जिसका सिलसिला कभी टूटने वाला नहीं है
عَرَبِي۞ قُل أَئِنَّكُم لَتَكفُرونَ بِالَّذي خَلَقَ الأَرضَ في يَومَينِ وَتَجعَلونَ لَهُ أَندادًا ۚ ذٰلِكَ رَبُّ العالَمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि क्या तुम उस अस्तित्व का इनकार करते हो, जिसने धरती को दो दिनों में पैदा किया और उसके समकक्ष ठहराते हो? वह तो समस्त संसार का पालनहार है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi! Insey kaho, kya tum us khuda se kufr karte ho aur dusron ko uska humsar (shareek / equals) thehratey ho jisne zameen ko do (two) dino mein bana diya? Wahi to saarey jahan waalon ka Rubb hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye! Kay kiya tum uss (Allah) ka inkar kertay ho aur tum uss kay shareek muqarrar kertay ho jiss ney do din mein zamin peda kerdi saray jahano ka perwardigar wohi hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी! इनसे कहो, क्या तुम हमें खुदा से कुफ्र करते हो और दूसरे को उसका हमसर (शारीरिक/बराबर) थेरेते हो जिसने जमीन को दो (दो) दिनों में बना दिया? वही तो सारे जहां वालों का रब है
عَرَبِيوَجَعَلَ فيها رَواسِيَ مِن فَوقِها وَبارَكَ فيها وَقَدَّرَ فيها أَقواتَها في أَربَعَةِ أَيّامٍ سَواءً لِلسّائِلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उस (धरती) में उसके ऊपर से पर्वत बनाए, तथा उसमें बरकत रख दी और उसमें उसके वासियों के आहार चार दिनों में निर्धारित किए, समान रूप से, प्रश्न करने वालों के लिए।
Roman Urdu (Maududi)Usne (zameen ko wajood mein laane ke baad) upar se ispar pahadh (mountains) jamaa diye aur ismein barakatein rakh di aur iske andar sab maangne waalon ke liye har ek ki talab o haajat ke mutaabiq theek andaze se khuraak ka saaman muhaiyya kardiya. Yeh sab kaam chaar (four) din mein ho gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss ney zamin mein aur uss kay uper say pahaar gaar diyey aur iss mein barkat rakh di aur iss mein (rehney walon ki) ghizaon ki tajweez bhi issi mein kerdi (sirf) char din mein zaroorat mandon kay liye yaksan tor per
Devnagri Urdu (Maududi)उसने (जमीन को वजूद में लाने के बाद) ऊपर से इसपर पहाड़ (पहाड़) जमा दिए और इसमें बरकतें रख दी और इसके अंदर सब मांगने वालों के लिए हर एक की तालाब ओ हाजात के मुताबिक ठीक अंदाज से ख़ुराक का सामान मुहइया करदिया। ये सब काम चार (चार) दिन में हो गए
عَرَبِيثُمَّ استَوىٰ إِلَى السَّماءِ وَهِيَ دُخانٌ فَقالَ لَها وَلِلأَرضِ ائتِيا طَوعًا أَو كَرهًا قالَتا أَتَينا طائِعينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने आकाश की ओर रुख़ किया, जबकि वह धुआँ था। तो उसने उससे और धरती से कहा : तुम दोनों आओ, स्वेच्छा से या मजबूरी से। दोनों ने कहा : हम स्वेच्छा से आ गए।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh aasmaan ki taraf mutwajjeh huwa Jo us waqt mehaz dhuwan (smoke) tha. Usne aasman aur zameen se kaha “wajood mein aa jao, khwa tum chaho ya na chaho.” Dono ne kaha “ hum aa gaye farma bardaron ki tarah”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir aasman ki taraf mutawajja hua aur woh dhuwan (sa) tha pus issay aur zamin say farmaya kay tum khushi say aao ya na khushi say. Donon ney araz kiya hum ba-khushi hazir hain
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो आसमान की तरफ मुतवज्जे हुआ जो हमें वक्त महज़ धुआं (धुआं) था। उसने आसमां और ज़मीन से कहा "वजूद में आ जाओ, ख्वा तुम चाहो या ना चाहो।" दोनों ने कहा “हम आ गए फरमा बैरदारों की तरह”
عَرَبِيفَقَضاهُنَّ سَبعَ سَماواتٍ في يَومَينِ وَأَوحىٰ في كُلِّ سَماءٍ أَمرَها ۚ وَزَيَّنَّا السَّماءَ الدُّنيا بِمَصابيحَ وَحِفظًا ۚ ذٰلِكَ تَقديرُ العَزيزِ العَليمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने उन्हें दो दिनों में सात आकाश बना दिए और प्रत्येक आकाश में उससे संबंधित काम की वह़्य की। तथा हमने निकटतम (निचले) आकाश को दीपों (चमकदार सितारों) से सुशोभित किया, तथा (उनके द्वारा) उसको सुरक्षित कर दिया। यह अत्यंत प्रभुत्वशाली, सब कुछ जानने वाले (अल्लाह) की योजना है।
Roman Urdu (Maududi)Tab usne do din ke andar saath (seven) aasmaan bana diye, aur har aasmaan mein us ka kanoon wahee (reveal) kardiya. Aur aasmaan e duniya ko humne chiraagon (lamps) se aarasta (adorn) kiya aur isey khoob mehfooz kardiya. Yeh sab kuch ek zabardast hasti ka mansooba (plan) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus do din mein saat aasman bana diyey aur her aasman mein iss kay munasib ehkaam ki wahee bhej di aur hum ney aasman-e-duniya ko charaghon say zeenat di aur nigheybaani ki yeh tadbeer Allah ghalib-o-dana ki hai
Devnagri Urdu (Maududi)तब उसने दो दिन के अंदर सात (सात) आसमान बना दिए, और हर आसमान में उसका कानून वही (खुलासा) कर दिया। और आसमान ए दुनिया को हमने चिरागों से सजाया (सजाया) और इसे खूब महफूज करदिया। ये सब कुछ एक ज़बरदस्त हस्ती का मंसूबा (योजना) है
عَرَبِيفَإِن أَعرَضوا فَقُل أَنذَرتُكُم صاعِقَةً مِثلَ صاعِقَةِ عادٍ وَثَمودَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि वे विमुख हों, तो आप कह दें कि मैंने तुम्हें ऐसी कड़क (भयंकर यातना) से सावधान कर दिया है, जो आद और समूद की कड़क जैसी होगी।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar yeh log mooh moadte hain to insey kehdo ke “main tumko usi tarah ke ek achanak toot padne waley azaab se darata hoon jaisa Aad aur Samood par nazil hua tha.”
Roman Urdu (Junagarhi)Abb bhi yeh roo-gardan ho to keh dijiyey! Kay mein tumhen uss karak (azab-e-aasmani) say darata hun jo misil aadiyon aur samoodiyon ki karak kay hogi
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर ये लोग मुँह मोड़ते हैं तो इनसे कहदो के "मैं तुमको उसी तरह के एक अचानक टूट पड़ने वाले अज़ाब से डरता हूँ जैसा आद और समूद पर नाज़िल हुआ था।"
عَرَبِيإِذ جاءَتهُمُ الرُّسُلُ مِن بَينِ أَيديهِم وَمِن خَلفِهِم أَلّا تَعبُدوا إِلَّا اللَّهَ ۖ قالوا لَو شاءَ رَبُّنا لَأَنزَلَ مَلائِكَةً فَإِنّا بِما أُرسِلتُم بِهِ كافِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब उनके पास रसूल उनके आगे से तथा उनके पीछे से आए (और कहा) कि अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करो। तो उन्होंने कहा : यदि हमारा पालनहार चाहता, तो किसी फ़रिश्ते को उतार देता। अतः जिस बात के साथ तुम भेजे गए हो, हम उसका इनकार करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab khuda ke Rasool unke paas aagey aur peechey, har taraf se aaye aur unhein samjhaya ke Allah ke siwa kisi ki bandagi na karo to unhon ne kaha “hamara Rubb chahta to farishte bhejta, lihaza hum us baat ko nahin maante jiske liye tum bheje gaye ho.”
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay pass jab unkay aagay peechay payghumbar aaye kay tum Allah kay siwa kissi ki ibadat na kero to unhon ney jawab diya kay agar humara perwardigar chahata to farishton ko bhejta. Hum to tumhari risalat kay bilkul munkir hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब खुदा के रसूल उनके पास आए और पीछे, हर तरफ से आए और उन्हें समझा के अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी ना करो तो उन्हें ने कहा "हमारा रब चाहता तो फरिश्ते भेजता, लिहाजा हम उस बात को नहीं मानते जिसके लिए तुम भेजे गए हो।"
عَرَبِيفَأَمّا عادٌ فَاستَكبَروا فِي الأَرضِ بِغَيرِ الحَقِّ وَقالوا مَن أَشَدُّ مِنّا قُوَّةً ۖ أَوَلَم يَرَوا أَنَّ اللَّهَ الَّذي خَلَقَهُم هُوَ أَشَدُّ مِنهُم قُوَّةً ۖ وَكانوا بِآياتِنا يَجحَدونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर रहे आद समुदाय के लोग, तो उन्होंने धरती में नाहक़ अभिमान किया तथा कहने लगे : कौन शक्ति में हमसे बढ़कर है? क्या उन्होंने नहीं देखा कि अल्लाह, जिसने उनको पैदा किया, वह शक्ति में उनसे बहुत बढ़कर है?! तथा वे हमारी आयतों का इनकार करते रहे।
Roman Urdu (Maududi)Aad ka haal yeh tha ke woh zameen mein kisi haqq ke bagair baday ban baithey aur kehne lagey: “ kaun hai humse zyada zoorawar?” Unko yeh na soojha ke jis khuda ne unko paida kiya hai woh unse zyada zoorawar hai? Woh hamari aayat ka inkaar hi karte rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Abb aad ney to bey waja zamin mein sirkashi shooro kerdi aur kehney lagay kay hum say zor-aawar kon hai? Kiya unhen yeh nazar na aaya kay jiss ney unhen peda kiya hai woh unn say (boht hi) ziyadah zor-aawar hai woh (aakhir tak) humari aayaton ka inkar hi kertay rahey
Devnagri Urdu (Maududi)आद का हाल ये था के वो ज़मीन में किसी हक़ के बिना बदले बन बैठे और कहने लगे: "कौन है हमसे ज़्यादा ज़ोरावर?" उनको ये ना सूझा के जिस खुदा ने उनको पेदा किया है वो उनसे ज़्यादा ज़ोरावर है? वो हमारी आयत का इंकार ही करते रहें
عَرَبِيفَأَرسَلنا عَلَيهِم ريحًا صَرصَرًا في أَيّامٍ نَحِساتٍ لِنُذيقَهُم عَذابَ الخِزيِ فِي الحَياةِ الدُّنيا ۖ وَلَعَذابُ الآخِرَةِ أَخزىٰ ۖ وَهُم لا يُنصَرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अंततः, हमने कुछ अशुभ दिनों में उनपर प्रचंड वायु भेज दी। ताकि हम उन्हें सांसारिक जीवन में अपमानकारी यातना चखाएँ और आख़िरत (परलोक) की यातना तो और अधिक अपमानकारी है। तथा उन्हें कोई सहायता नहीं दी जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar humne chandh manhoos dino mein sakht toofaani hawa unpar bhej di taa-ke unhein duniya hi ki zindagi mein zillat o ruswayi ke azaab ka maza chakha dein.Aur aakhirat ka azaab to issey bhi zyada ruswa-kun hai. Wahan koi unki madad karne wala na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Bil-aakhir hum ney unn per aik tez-o-tund aandhi manhoos dino mein bhej di kay unhen dunyawi zindagi mein zillat kay azab ka maza chakha den aur (yaqeen mano) kay aakhirat ka azab iss say boht ziyadah ruswaee wala hai aur woh madad nahi kiyey jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार हमने चाँद मनहूस दिनों में सच तूफ़ानी हवा उन्पर भेज दी ता-के उनको दुनिया ही कि जिंदगी में ज़िल्लत ओ रुसवाई के अज़ाब का मज़ा चक दे। रुसवा-कुन है. वहां कोई उनकी मदद करने वाला ना होगा
عَرَبِيوَأَمّا ثَمودُ فَهَدَيناهُم فَاستَحَبُّوا العَمىٰ عَلَى الهُدىٰ فَأَخَذَتهُم صاعِقَةُ العَذابِ الهونِ بِما كانوا يَكسِبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और रहे समूद समुदाय के लोग, तो हमने उन्हें सीधा मार्ग दिखाया, परंतु उन्होंने मार्गदर्शन की अपेक्षा अंधेपन को पसंद किया। अंततः उन्हें अपमानकारी यातना की कड़क ने पकड़ लिया, उसके कारण जो वे कमा रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Rahey Samood, to unke samne humne raah e raast pesh ki magar unhon ne raasta dekhne ke bajaye andha (blind) bana rehna pasand kiya. Aakhir unke kartooton ki badaulat zillat ka azaab unpar toot pada
Roman Urdu (Junagarhi)Rahey samood so hum ney unn ki bhi rehbari ki phir bhi unhon ney hidayat per andhay-pan ko tarjeeh di jiss bina per unhen (sarapa) zillat kay azab ki karak ney unn kay kartooton kay baees pakar liya
Devnagri Urdu (Maududi)रहे समूद, तो उनके सामने हमने राह ए रास्ते पेश की मगर उनको ने रास्ता देखने के बजाय अंधा (अंधा) बना रहना पसंद किया। आख़िर उनके कार्टूनों की बदौलत ज़िल्लत का अज़ाब उन पर टूट पड़ा
عَرَبِيوَنَجَّينَا الَّذينَ آمَنوا وَكانوا يَتَّقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उन लोगों को बचा लिया, जो ईमान लाए और वे डरते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne un logon ko bacha liya jo imaan laaye thay aur gumrahi o bad-amali se parheiz karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (haan) eman daar aur paarsaaon ko hum ney (baal baal) bacha liya
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने उन लोगों को बचा लिया जो ईमान लाए थे और गुमराही ओ बद-अमली से परहेज़ करते थे
عَرَبِيوَيَومَ يُحشَرُ أَعداءُ اللَّهِ إِلَى النّارِ فَهُم يوزَعونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन अल्लाह के शत्रुओं को एकत्रित कर जहन्नम की ओर लाया जाएगा, तो उन्हें पंक्तिबद्ध कर दिया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur zara us waqt ka khayal karo jab Allah ke yeh dushman dozakh ki taraf jaane ke liye ghair laaye jayenge unke agalon ko pichlon ke aane tak roak rakkha jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss din Allah kay dushman dozakh ki taraf laye jayen gay aur inn (sab) ko jama kerdiya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)और ज़रा उस वक़्त का ख्याल करो जब अल्लाह के ये दुश्मन दोज़ख की तरफ जाने के लिए घर लाए जाएंगे उनके अगलों को पिचलों के आने तक रोक रक्खा जाएगा
عَرَبِيحَتّىٰ إِذا ما جاءوها شَهِدَ عَلَيهِم سَمعُهُم وَأَبصارُهُم وَجُلودُهُم بِما كانوا يَعمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि जब वे उस (जहन्नम) के पास आ जाएँगे, तो उनके कान तथा उनकी आँखें और उनकी खालें उनके विरुद्ध उन कर्मों की गवाही देंगी, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab sab wahan pahunch jayenge to unke kaan aur unki aankhein aur unke jism ki khaalein (skins) unpar gawahi dengi ke woh duniya mein kya kuch karte rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yahan tak kay jab bilkul jahannum kay pass aajayen gay unn per unn kay kaan aur unn ki aankhen aur unn ki khaalen unn kay aemaal ki gawahee den gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब सब वहां पहुंच जाएंगे तो उनके कान और उनकी आंखें और उनके जिस्म की खालें उन पर गवाही देंगी के वो दुनिया में क्या कुछ करते रहेंगे
عَرَبِيوَقالوا لِجُلودِهِم لِمَ شَهِدتُم عَلَينا ۖ قالوا أَنطَقَنَا اللَّهُ الَّذي أَنطَقَ كُلَّ شَيءٍ وَهُوَ خَلَقَكُم أَوَّلَ مَرَّةٍ وَإِلَيهِ تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे अपनी खालों से कहेंगे : तुमने हमारे विरुद्ध क्यों गवाही दी? तो वे उत्तर देंगी : हमें उसी अल्लाह ने बोलने की शक्ति प्रदान की, जिसने प्रत्येक वस्तु को बोलने की शक्ति दी है। तथा उसी ने तुम्हें प्रथम बार पैदा किया और तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh apne jism ki khaalon se kahenge “ tumne hamare khilaf kyun gawahi di? “ woh jawab dengi “ humein usi khuda ne goyaii (speech) di hai jisne har cheez ko goya(speech) kardiya hai. Usi ne tumko pehli martaba paida kiya tha aur ab usi ki taraf tum wapas laaye ja rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh apni khalon say kahen gay kay tum ney humaray khilaf shahdat kiyon di woh jawab den gi kay humen uss Allah ney qoot-e-goyaee ata farmaee jiss ney her cheez ko bolney ki taqat bakhshi hai ussi ney tumhen awwal martaba peda kiya aur ussi ki taraf tum sab lotaye jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)वो अपने जिस्म की ख़ालों से कहेंगे " तुमने हमारे ख़िलाफ क्यों गवाही दी? " वो जवाब देंगे " हमने उसे खुदा ने गोया (भाषण) दी है जिसने हर चीज़ को गोया (भाषण) कर दिया है। उसी ने तुमको पहली मरतबा पैदा किया था और अब उसकी तरफ तुम वापस लाए जा रहे हो
عَرَبِيوَما كُنتُم تَستَتِرونَ أَن يَشهَدَ عَلَيكُم سَمعُكُم وَلا أَبصارُكُم وَلا جُلودُكُم وَلٰكِن ظَنَنتُم أَنَّ اللَّهَ لا يَعلَمُ كَثيرًا مِمّا تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम (पाप करते समय) छिपते भी नहीं थे कि कहीं तुम्हारे कान, तुम्हारी आँखें और तुम्हारी खालें तुम्हारे विरुद्ध गवाही न दे दें। बल्कि, तुम यह समझते रहे कि अल्लाह उनमें से अधिकतर बातों को जानता ही नहीं, जो तुम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Tum duniya mein jarahim (crime) karte waqt chupte thay to tumhein yeh khayal na tha ke kabhi tumhare apne kaan aur tumhari aankhein aur tumhare jism ki khaalein (skins) tumpar gawahi dengi balke tumne yeh samajha tha ke tumhare bahut se aamal ki Allah ko bhi khabar nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum (apni bad-aemaaliyan) iss waja say pocheedah rakhtay hi na thay kay tum per tumhari kaan aur tumhari aankhen aur tumhari khaalen gawahee den gi han tum yeh samjhtay rahey kay tum jo kuch bhi ker rahey ho iss mein say boht say aemaal say Allah bey-khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम दुनिया में जराहिम (अपराध) करते वक्त छुपते थे तो तुम्हें ये ख्याल ना था कि कभी तुम्हारे अपने कान और तुम्हारी आंखें और तुम्हारे जिस्म की खालें तुमपर गवाही देंगी बालके तुमने ये समझ था के तुम्हारे बहुत से अमल की अल्लाह को भी खबर नहीं है
عَرَبِيوَذٰلِكُم ظَنُّكُمُ الَّذي ظَنَنتُم بِرَبِّكُم أَرداكُم فَأَصبَحتُم مِنَ الخاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारी इसी दुर्भावना ने, जो तुमने अपने पालनहार के प्रति रखा, तुम्हें विनष्ट कर दिया और तुम घाटा उठाने वालों में से हो गए।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara yahi gumaan jo tumne apne Rubb ke saath kiya tha, tumhein ley dooba aur isi ki badaulat tum khasare(loss) mein padh gaye”
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhari issi bad-gumani ney jo tum ney apnay rab say ker rakhi thi tumhen halak ker diya aur bil-aakhir tum ziyan kaaron mein hogaye
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा यही गुमान जो तुमने अपने रुब के साथ किया था, तुम्हें ले डूबा और इसकी बर्बादी तुम खासे (नुकसान) में पढ़ गए”
عَرَبِيفَإِن يَصبِروا فَالنّارُ مَثوًى لَهُم ۖ وَإِن يَستَعتِبوا فَما هُم مِنَ المُعتَبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अब यदि वे धैर्य रखें, तो भी जहन्नम ही उनका ठिकाना है। और यदि वे क्षमा माँगें, तो भी वे क्षमा नहीं किए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Is halat mein woh sabr karein (ya na karein) aag hi unka thikana hogi, aur agar rujoo ka mauqa chahenge to koi mauqa unhein na diya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Abb agar yeh sabar keren to bhi inn ka thikana jahannum hi hai. Aur agar yeh (uzar-o)-maafi kay khuastgaar hon to bhi (mazoor-o)-maaf nahi rakhay jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हालात में वो सब्र करें (या ना करें) आग हाय उनका ठिकाना होगी, और अगर रूजू का मौका चाहेगा तो कोई मौका उन्हें ना दिया जाएगा
عَرَبِي۞ وَقَيَّضنا لَهُم قُرَناءَ فَزَيَّنوا لَهُم ما بَينَ أَيديهِم وَما خَلفَهُم وَحَقَّ عَلَيهِمُ القَولُ في أُمَمٍ قَد خَلَت مِن قَبلِهِم مِنَ الجِنِّ وَالإِنسِ ۖ إِنَّهُم كانوا خاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उनके लिए कुछ साथी नियुक्त कर दिए, तो उन्होंने उनके अगले और पिछले कामों को उनके लिए शोभित बनाकर पेश किया। तथा उनपर भी जिन्नों और इनसानों के उन समूहों के साथ, जो उनसे पहले गुज़र चुके थे, अल्लाह (की यातना) का वादा सिद्ध हो गया। निश्चय ही वे घाटा उठाने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Humne unpar aisey saathi musallat kardiye thay jo unhein aagey aur peechey har cheez khushnuma banakar dikhate thay. Aakhir e kaar unpar bhi wahi faisla e azaab chaspan ho kar raha jo un se pehle guzray huey Jinno aur Insano ke girohon par chaspan ho chuka tha, yaqeenan woh khasare (loss) mein reh jaane waley thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney inn kay kuch hum nashee muqarrar ker rakhay rhay jinhon ney unn kay aglay pichlay aemaal unn ki nighaon mein khoobsurat bana rakhay thay aur inn kay haq mein bhi Allah ka qol unn ummaton kay sath poora hua jo inn say pehlay jinno aur insano ki guzar chuki hain. Yaqeenan woh ziyan kaar sabir huyey
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उन पर ऐसे साथी मुसल्लत कर दिए थे जो उन्हें आगे और पीछे हर चीज खुशनुमा बनकर दिखाते थे। आख़िर ए कार उन पर भी वही फ़ैसला ए अज़ाब चस्पां हो कर रहा जो उन से पहले गुजरे हुए जिन्नो और इंसानों के गिरोहों पर चस्पां हो चूका था, यकीनन वो खासे (नुकसान) में रह जाने वाले थे
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ كَفَروا لا تَسمَعوا لِهٰذَا القُرآنِ وَالغَوا فيهِ لَعَلَّكُم تَغلِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा काफ़िरों ने कहा कि इस क़ुरआन को न सुनो और (जब पढ़ा जाए तो) इसमें शोर करो। ताकि तुम प्रभावशाली रहो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh munkireen e haqq kehte hain “is Quran ko hargiz na sunoo aur jab yeh sunaya jaye to ismein khalal daalo, shayad ke is tarah tum gaalib aa jao”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kafiron ney kaha iss quran ko suno hi mat (iss kay parhay janey ka waqt) aur be-huda goee kero kiya ajab kay tum ghalib aajao
Devnagri Urdu (Maududi)ये मुनकिरीन ए हक़ कहते हैं "क्या कुरान को है" हरगिज ना सुनो और जब ये सुनाया जाए तो इस्मेन खलल डालो, शायद के इस तरह तुम गालिब आ जाओ”
عَرَبِيفَلَنُذيقَنَّ الَّذينَ كَفَروا عَذابًا شَديدًا وَلَنَجزِيَنَّهُم أَسوَأَ الَّذي كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः हम अवश्य ही उन लोगों को जो काफ़िर हो गए, कठोर यातना का मज़ा चखाएँगे, तथा निश्चय ही हम उन्हें उन दुष्कर्मों का बदला अवश्य देंगे, जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)In kaafiron ko hum sakht azaab ka maza chakha kar rahenge aur jo badhtareen harakaat yeh karte rahey hain unka poora poora badla inhein dengey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus yaqeenan hum inn kafiron ko sakht azab chakhayen gay. Aur enhen inn kay bad-tareen aemaal ka badla (zaroor) zaroor den gay
Devnagri Urdu (Maududi)काफिरों को हम सख्त अजाब का मजा चखा कर रहेंगे और जो बद्तरीन हरकतें ये करते रहेंगे हैं उनका पूरा पूरा बदला इन्हें देंगे
عَرَبِيذٰلِكَ جَزاءُ أَعداءِ اللَّهِ النّارُ ۖ لَهُم فيها دارُ الخُلدِ ۖ جَزاءً بِما كانوا بِآياتِنا يَجحَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह अल्लाह के शत्रुओं का प्रतिकार जहन्नम है। उनके लिए उसी में स्थायी घर होगा। यह उसका बदला है, जो वे हमारी अयतों का इनकार किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Woh dozakh hai jo Allah ke dushmano ko badley mein milegi, usi mein hamesha hamesha ke liye inka ghar hoga. Yeh hai saza is jurm ki ke woh hamari aayat ka inkar karte rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Allah kay dushmano ki saza yehi dozakh ki aag hai jiss mein inn ka hameshgi ka ghar hai (yeh) badla hai humari aayaton say inkar kerney ka
Devnagri Urdu (Maududi)वो दोज़ख है जो अल्लाह के दुश्मनों को बदले में मिलेगी, उसी में हमेशा हमेशा के लिए इनका घर होगा। ये है सज़ा इस जुर्म की के वो हमारी आयत का इंकार करते रहे
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ كَفَروا رَبَّنا أَرِنَا اللَّذَينِ أَضَلّانا مِنَ الجِنِّ وَالإِنسِ نَجعَلهُما تَحتَ أَقدامِنا لِيَكونا مِنَ الأَسفَلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने कुफ़्र किया, वे कहेंगे : ऐ हमारे पालनहर! हमें जिन्नों और इनसानों में से वे लोग दिखा दे, जिन्होंने हमें गुमराह किया था, हम उन्हें अपने पैरों तले रौंद डालें। ताकि वे सबसे निचले लोगों में से हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Wahan yeh kaafir kahenge ke “ aey hamare Rubb, zara humein dikha de un Jinno aur Insano ko jinhon ne humein gumraah kiya tha, hum unhein paon (legs) taley roondh daalein taa-ke woh khoob zaleel o khwar hon.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kafir log kahen gay aey humaray rab! Humen jinno insano (kay woh dono fareeq) dikha jinhon ney humen gumrah kiya (takay) hum unehn apnay qadmon talay daal den takay woh jahannum mein sab say neechay (sakht azab mein) hojayen
Devnagri Urdu (Maududi)वहां ये काफ़िर कहेंगे के “ऐ हमारे रब, ज़रा हमें दिखा दे उन जिन्नो और इंसानों को जिन्हों ने हमें गुमराह किया था, हम उन्हें पांव (पैर) तले रूंध डालें ता-के वो ख़ूब ज़लील ओ ख़्वार होन।”
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ قالوا رَبُّنَا اللَّهُ ثُمَّ استَقاموا تَتَنَزَّلُ عَلَيهِمُ المَلائِكَةُ أَلّا تَخافوا وَلا تَحزَنوا وَأَبشِروا بِالجَنَّةِ الَّتي كُنتُم توعَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने कहा : हमारा पालनहार केवल अल्लाह है, फिर उसपर मज़बूती से जमे रहे, उनपर फ़रिश्ते उतरते हैं कि भय न करो और न शोकाकुल हो तथा उस जन्नत से खुश हो जाओ, जिसका तुमसे वादा किया जाता था।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne kaha ke Allah hamara Rubb hai aur phir woh ispar saabit qadam rahey, yaqeenan unpar farishtey nazil hotay hain, aur unsey kehte hain ke “na daro, na gham karo, aur khush ho jao us jannat ki basharat (khush khabri) se jiska tumse waada kiya gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)(Waqaee) jinn logon ney kaha humara perwardigar Allah hai phir iss per waeem rahey unn kay pass farishtay (yeh kehtay huyey) aatay hain kay tum kuch bhi andesha aur ghum na kero (bulkay) iss jannat ki bisharat sunn lo jiss ka tum wada diyey gayey ho
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने कहा के अल्लाह हमारा रब है और फिर वो इसपर साबित क़दम रहे, यकीनन उन पर फरिश्ते नाज़िल होते हैं, और उनसे कहते हैं के "ना डरो, ना गम करो, और खुश हो जाओ हमें जन्नत की बशारत (खुश खबरी) से जिसका तुमसे वादा किया गया है
عَرَبِينَحنُ أَولِياؤُكُم فِي الحَياةِ الدُّنيا وَفِي الآخِرَةِ ۖ وَلَكُم فيها ما تَشتَهي أَنفُسُكُم وَلَكُم فيها ما تَدَّعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)हम सांसारिक जीवन में भी तुम्हारे सहायक हैं तथा आख़िरत में भी,और तुम्हारे लिए उस (जन्नत) में वह कुछ है, जो तुम्हारे दिल चाहेंगे तथा उसमें तुम्हारे लिए वह कुछ है, जिसकी तुम माँग करोगे।
Roman Urdu (Maududi)Hum is duniya ki zindagi mein bhi tumhare saathi hain aur aakhirat mein bhi. Wahan jo kuch tum chahoge tumhein milega aur har cheez jiski tum tamanna karoge woh tumhari hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhari dunyawi zindagi mein bhi hum tumharay rafiq thay aur aakhirat mein bhi rahen gay jiss cheez ko tumhara ji chahye aur jo kuch tum mango sab tumharay liye (jannat mein mojood) hai
Devnagri Urdu (Maududi)हम इस दुनिया की जिंदगी में भी तुम्हारे साथी हैं और आख़िरत में भी। वहां जो तुम चाहोगे तुम्हें मिलेगा और हर चीज जिसकी तुम तमन्ना करोगे वो तुम्हारी होगी
عَرَبِينُزُلًا مِن غَفورٍ رَحيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)(यह) अति क्षमाशील, असीम दयावान् की ओर से आतिथ्य है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hai samaan e ziyafat us hasti ki taraf se jo Gafoor aur Raheem hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Ghafoor-o-Raheem (mabood) ki taraf say yeh sab kuch bator mehmani kay hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये है समां ए ज़ियाफत उस हस्ती की तरफ से जो गफूर और रहीम है”
عَرَبِيوَمَن أَحسَنُ قَولًا مِمَّن دَعا إِلَى اللَّهِ وَعَمِلَ صالِحًا وَقالَ إِنَّني مِنَ المُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उस व्यक्ति से अच्छी बात किसकी हो सकती है, जिसने अल्लाह की ओर बुलाया तथा सत्कर्म किया और कहा : निःसंदेह मैं मुसलमानों (आज्ञाकारियों) में से हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur us shakhs ki baat se acchi baat aur kiski hogi jisne Allah ki taraf bulaya aur neik amal kiya aur kaha ke main musalman hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss say ziyadah achi baat wala kon hai jo Allah ki taraf bulaye aur nek kaam keray aur kahey kay mein musalmanon mein say hun
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारे शेखों की बात से अच्छी बात और किसकी होगी जिसने अल्लाह की तरफ बुलाया और नेक अमल किया और कहा के मैं मुसलमान हूं
عَرَبِيوَلا تَستَوِي الحَسَنَةُ وَلَا السَّيِّئَةُ ۚ ادفَع بِالَّتي هِيَ أَحسَنُ فَإِذَا الَّذي بَينَكَ وَبَينَهُ عَداوَةٌ كَأَنَّهُ وَلِيٌّ حَميمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)भलाई और बुराई बराबर नहीं हो सकते। आप बुराई को ऐसे तरीक़े से दूर करें जो सर्वोत्तम हो। तो सहसा वह व्यक्ति जिसके और आपके बीच बैर है, ऐसा हो जाएगा मानो वह हार्दिक मित्र है।
Roman Urdu (Maududi)[Aur aey Nabi], Neki aur badi yaksan (barabar) nahin hai, tum badi ko us neki se dafa karo jo behtareen ho, tum dekhoge ke tumhare saath jiski adawat (dushmani) padi hui thi woh jigri dost bangaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Neki aur badi barabar nahi hoti. Buraee say bhalalee ko dafa kero phir wohi jiss kay aur tumharay darmiyan dushmani hai aisa hojayega jaisay dili dost
Devnagri Urdu (Maududi)[और ऐ नबी], नेकी और बड़ी यकसन (बराबर) नहीं है, तुम बड़ी को हमने नेकी से दफा करो जो बेहतरीन हो, तुम देखोगे के तुम्हारे साथ जिसकी अदावत (दुश्मनी) पड़ी हुई थी वो जिगरी दोस्त बनाया है
عَرَبِيوَما يُلَقّاها إِلَّا الَّذينَ صَبَروا وَما يُلَقّاها إِلّا ذو حَظٍّ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह गुण उन्हीं लोगों को प्राप्त होता है, जो धैर्य से काम लेते हैं तथा यह उसी को प्राप्त होता है, जो बड़ा भाग्यशाली हो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh sifat naseeb nahin hoti magar un logon ko jo sabr karte hain, aur yeh muqaam haasil nahin hota magar un logon ko jo badey naseebey wale hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh baat unhin ko naseeb hoti hai jo sabar keren aur issay siwaye baray naseebay walon kay koi nahi paa sakta
Devnagri Urdu (Maududi)ये सिफत नसीब नहीं होती मगर उन लोगों को जो सब्र करते हैं, और ये मुकाम हासिल नहीं होता मगर उन लोगों को जो बड़े नसीब वाले हैं
عَرَبِيوَإِمّا يَنزَغَنَّكَ مِنَ الشَّيطانِ نَزغٌ فَاستَعِذ بِاللَّهِ ۖ إِنَّهُ هُوَ السَّميعُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि शैतान आपको उकसाए, तो अल्लाह से शरण माँगिए। निःसंदेह वह सब कुछ सुनने वाला, जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar tum shaytan ki taraf se koi uksahat (temptation) mehsoos karo to Allah ki panaah maang lo, woh sabkuch sunta aur jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aar shetan ki taraf say koi waswasa aaye to Allah ki panah talab kero. Yaqeenan woh boht hi sunnay wala jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर तुम शैतान की तरफ से कोई उक्साहत (प्रलोभन) महसूस करो तो अल्लाह की पनाह मांग लो, वो सब कुछ सुनता और जानता है
عَرَبِيوَمِن آياتِهِ اللَّيلُ وَالنَّهارُ وَالشَّمسُ وَالقَمَرُ ۚ لا تَسجُدوا لِلشَّمسِ وَلا لِلقَمَرِ وَاسجُدوا لِلَّهِ الَّذي خَلَقَهُنَّ إِن كُنتُم إِيّاهُ تَعبُدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसकी निशानियों में से रात और दिन तथा सूरज और चाँद हैं। तुम न तो सूरज को सजदा करो और न चाँद को, और उस अल्लाह को सजदा करो, जिसने उन्हें पैदा किया है, यदि तुम उसी (अल्लाह) की इबादत करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki nishaniyon mein se hain yeh raat aur din aur Suraj aur Chand. Suraj ko aur Chand ko sajda na karo balke us khuda ko sajda karo jisne unhein paida kiya hai agar fil waqaii tum usi ki ibadat karne waley ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur din raat aur sooraj chand bhi (ussi ki) nishaniyon mien say hain tum sooraj ko sajdah na kero na chand ko bulkay sajdah uss Allah kay liye kero jiss ney inn sab ko peda kiya hai agar tumhen ussi ki ibadat kerni hai to
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की निशानियों में से हैं ये रात और दिन और सूरज और चाँद। सूरज को और चांद को सजदा ना करो बलके हमसे खुदा को सजदा करो जिसने उन्हें अदा किया है अगर फिल वक़ै तुम उसकी इबादत करने वाले हो
☉ Sajda
عَرَبِيفَإِنِ استَكبَروا فَالَّذينَ عِندَ رَبِّكَ يُسَبِّحونَ لَهُ بِاللَّيلِ وَالنَّهارِ وَهُم لا يَسأَمونَ ۩
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि वे अभिमान करें, तो जो (फ़रिश्ते) आपके पालनहार के पास हैं, वे रात दिन उसकी पवित्रता का वर्णन करते रहते हैं, और वे थकते नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Lekin agar yeh log guroor mein aa kar apni hi baat par adey rahein to parwah nahin, jo farishtey tere Rubb ke muqarrab hain woh shab-o-roz(night and day) uski tasbeeh kar rahey hain aur kabhi nahin thakte
Roman Urdu (Junagarhi)Phir bhi agar yeh kibr-o-ghuroor keren to woh (farishtay) jo aap kay rab kay nazdeek hain woh to raat din uss ki tasbeeh biyan ker rahen hain aur (kissi waqt bhi) nahi uktatay
Devnagri Urdu (Maududi)लेकिन अगर ये लोग गुरुर में आ कर अपनी ही बात पर अड़े रहे तो परवाह नहीं, जो फरिश्ते तेरे रब के मुकर्रब हैं वो शब-ओ-रोज़ (रात और दिन) उसकी तस्बीह कर रहे हैं और कभी नहीं थकते
عَرَبِيوَمِن آياتِهِ أَنَّكَ تَرَى الأَرضَ خاشِعَةً فَإِذا أَنزَلنا عَلَيهَا الماءَ اهتَزَّت وَرَبَت ۚ إِنَّ الَّذي أَحياها لَمُحيِي المَوتىٰ ۚ إِنَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसकी निशानियों में से है कि आप धरती को सूखी हुई (बंजर) देखते हैं। फिर जब हम उसपर बारिश बरसाते हैं, तो वह हरित हो जाती है और बढ़ने लगती है। निःसंदेह जिस (अल्लाह) ने उसे जीवित किया, वह मुर्दों को अवश्य जीवित करने वाला है। निःसंदेह वह हर चीज़ पर समार्थ्यवान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah ki nishaniyon mein se ek yeh hai ke tum dekhte ho zameen sooni (barren) padi hui hai, phir joon-hi ke humne uspar paani barsaya, yakayak woh phabak uthti hai aur phool jaati hai (quivers and wells).Yakeenan jo khuda is mari (dead) hui zameen ko jila(zinda) uthata hai woh murdon ko bhi zindagi bakshne wala hai.Yaqeenan woh har cheez par qudrat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Uss Allah ki nishaniyon mein say (yeh bhi) hai kay tu zamin ko dabi dabaee dekhta hai phir jab hum iss per meenh barsatay hain to woh tar-o-taza hoker ubharney lagti hai. Jiss ney ussay zindah kiya wohi yaqeeni tor per murdon ko bhi zindah kerney wala hai be-shak woh her (her) cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह की निशानियों में से एक ये है के तुम देखते हो ज़मीन सूनी (बंजर) पड़ी हुई है, फिर जून-हाय के हमने उसपर पानी बरसाया, यक़ीनन वह फबक उठती है और फूल जाती है। वाला है। यकीनन वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يُلحِدونَ في آياتِنا لا يَخفَونَ عَلَينا ۗ أَفَمَن يُلقىٰ فِي النّارِ خَيرٌ أَم مَن يَأتي آمِنًا يَومَ القِيامَةِ ۚ اعمَلوا ما شِئتُم ۖ إِنَّهُ بِما تَعمَلونَ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग हमारी आयतों में टेढ़ापन अपनाते हैं, वे हमसे छिपे हुए नहीं हैं। तो क्या जो व्यक्ति आग में डाला जाएगा, वह उत्तम है अथवा जो क़ियामत के दिन निश्चिंत होकर आएगा? तुम जो चाहो करो। निःसंदेह, तुम जो कुछ करते हो, वह उसे ख़ूब देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log hamari aayat ko ultay maani pehnatay hain (pervert Our Signs) woh humse kuch chupe huey nahin hain. Khud hi sochlo ke aaya woh shaks behtar hai jo aag mein jhonka janey wala hai ya woh jo Qayamat ke roz aman ki halat mein haazir hoga? Karte raho jo kuch tum chaho, tumhari saari harkaton ko Allah dekh raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jo log humari aayaton mein kaj-rawi kertay hain woh (kuch) hum say makhfi nahi (batlao to) jo aag mein dala jaye woh acha hai ya woh jo aman-o-amaan kay sath qayamat kay din aaye? Tum jo chahao kertay chalay jao woh tumhara sab kiya keraya dekh raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग हमारी आयतों को उलटे माने पहचानते हैं (हमारे संकेतों को विकृत करते हैं) वो हमसे कुछ छुपे हुए नहीं हैं। खुद ही सोचलो के आया वो शक्स बेहतर है जो आग में झोंका जाने वाला है या वो जो कयामत के रोज़ अमन की हालत में हाज़िर होगा? करते रहो जो तुम चाहो, तुम्हारी सारी हरकतों को अल्लाह देख रहा है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا بِالذِّكرِ لَمّا جاءَهُم ۖ وَإِنَّهُ لَكِتابٌ عَزيزٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने इस ज़िक्र (क़ुरआन) का इनकार किया, जब वह उनके पास आया, (वे विनष्ट होने वाले हैं)। और निःसंदेह यह एक प्रभुत्वशाली पुस्तक है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hain jinke samne kalaam-e-naseehat aaya to unhon ne isey maan-ne se inkar kardiya, magar haqeeqat yeh hai ke yeh ek zabardast kitaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jinn logon ney apnay pass quran phonch janey kay bawajood uss say kufur kiya (woh bhi hum say posheedah nahi) yeh bari ba-wuqa’at kitab hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग हैं जिनके सामने कलाम-ए-नसीहत आया तो उन्हें ने इसे मान-ने से इंकार कर दिया, मगर हकीकत ये है के ये एक ज़बरदस्त किताब है
عَرَبِيلا يَأتيهِ الباطِلُ مِن بَينِ يَدَيهِ وَلا مِن خَلفِهِ ۖ تَنزيلٌ مِن حَكيمٍ حَميدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)इसके पास झूठ न इसके आगे से आ सकता है और न इसके पीछे से। यह पूर्ण हिकमत वाले, सर्व प्रशंसित (अल्लाह) की ओर से अवतरित है।
Roman Urdu (Maududi)Baatil na saamne se ispar aa sakta hai na peechey se, yeh ek hakeem (most wise) o Hameed(Immensely Praiseworthy) ki nazil karda cheez hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss kay pass baatil phatak bhi nahi sakta na uss kay aagay say na uss kay peechay say yeh hai nazil kerdah hikmaton walay khoobiyon walay (Allah) ki taraf say
Devnagri Urdu (Maududi)बातिल ना सामने से इसपर आ सकता है ना पीछे से, ये एक हकीम (सबसे बुद्धिमान) ओ हमीद (बेहद प्रशंसनीय) की नाज़िल करदा चीज़ है
عَرَبِيما يُقالُ لَكَ إِلّا ما قَد قيلَ لِلرُّسُلِ مِن قَبلِكَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ لَذو مَغفِرَةٍ وَذو عِقابٍ أَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)आपसे वही कहा जा रहा है, जो आपसे पहले के रसूलों से कहा जा चुका है। निःसंदेह आपका पालनहार निश्चय बड़ी क्षमा वाला और बहुत दुःखदायी यातना वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, tumse jo kuch kaha jaa raha hai usmein koi cheez bhi aisi nahin hai jo tumse pehle guzrey huey Rasoolon se na kahi jaa chuki ho. Beshak tumhara Rubb bada darguzar karne wala hai, aur uske saath badi dardnaak saza dene wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap say wohi kaha jata hai jo aap say pehlay rasoolon say bhi kaha gaya hai yaqeenan aap ka rab maafi wala aur dard-naak azab wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, तुमसे जो कुछ कह रहा है उसमें कोई चीज़ भी ऐसी नहीं है जो तुमसे पहले गुजरे हुए रसूलों से ना कहीं जा चुकी हो। बेशक तुम्हारा रब बड़ा दरगुज़ार करने वाला है, और उसके साथ बड़ी दर्दनाक सजा देने वाला है
عَرَبِيوَلَو جَعَلناهُ قُرآنًا أَعجَمِيًّا لَقالوا لَولا فُصِّلَت آياتُهُ ۖ أَأَعجَمِيٌّ وَعَرَبِيٌّ ۗ قُل هُوَ لِلَّذينَ آمَنوا هُدًى وَشِفاءٌ ۖ وَالَّذينَ لا يُؤمِنونَ في آذانِهِم وَقرٌ وَهُوَ عَلَيهِم عَمًى ۚ أُولٰئِكَ يُنادَونَ مِن مَكانٍ بَعيدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम इसे ग़ैर अरबी क़ुरआन बनाते, तो वे अवश्य कहते कि इसकी आयतें क्यों नहीं खोलकर बयान की गईं? क्या (पुस्तक) ग़ैर अरबी है और (नबी) अरबी? आप कह दीजिए : वह उन लोगों के लिए जो ईमान लाए, मार्गदर्शन और आरोग्य है, तथा जो लोग ईमान नहीं लाते, उनके कानों में बोझ है और यह उनके हक़ में अंधेपन का कारण है। वे लोग ऐसे हैं जो दूर स्थान से पुकारे जा रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Agar hum isko ajami(non arabic) Quraan bana kar bhejte to yeh log kehte “Kyun na iski aayat khol kar bayan ki gayi? Kya ajeeb baat hai ke kalaam ajami (non-arabic) hai aur mukhatib arabi”.Insey kaho yeh quran imaan laanay walaon ke liye to hidayat aur shifaa hai, magar jo log iman nahin laatey unke liye yeh kaano ki daat (plug / behrapan) aur aankhon ki patti (covering) hai .Unka haal to aisa hai jaise unko door se pukara ja raha ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum issay ajami zaban ka quran banatay to kehtay kay iss ki aayaten saaf saaf biyan kiyon nahi ki gayen? Yeh kiya kay ajami kitab aur aap arabi rasool? Aap keh dijiyey! Kay yeh to eman walon kay liye hidayat-o-shifa hai aur jo eman nahi latay unn kay kaano mein to (behra-pan aur) bojh hai aur yeh unn per andha-pan hai yeh woh log hain jo kissi boht door daraz jagah say pukaray jarahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)अगर हम इसको अजामी (गैर अरबी) कुरान बाना कर भेजते हैं तो ये लोग कहते हैं "क्यों ना इसकी आयत खोल कर बयान की गई? क्या अजीब बात है के कलाम अजामी (गैर अरबी) है और मुखातिब अरबी"।इनसे कहो ये कुरान ईमान लाने वालों के लिए हिदायत और शिफा है, मगर जो लोग ईमान नहीं लाते उनके लिए ये कानों की दात (प्लग/बेहरापन) और आंखों की पट्टी (कवरिंग) है। उनका हाल तो ऐसा है जैसे उनको दरवाजे से पुकारा जा रहा हो
عَرَبِيوَلَقَد آتَينا موسَى الكِتابَ فَاختُلِفَ فيهِ ۗ وَلَولا كَلِمَةٌ سَبَقَت مِن رَبِّكَ لَقُضِيَ بَينَهُم ۚ وَإِنَّهُم لَفي شَكٍّ مِنهُ مُريبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने मूसा को पुस्तक (तौरात) प्रदान की। तो उसमें मतभेद किया गया। और यदि आपके पालनहार की ओर से एक बात पहले ही से निर्धारित न होती, तो उनके बीच अवश्य निर्णय कर दिया गया होता। और निःसंदेह वे उस (कुरआन) के बारे में असमंजस में डाल देने वाले संदेह में पड़े हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Issey pehle humne Moosa ko kitaab di thi aur uske maamle mein bhi yahi ikhtilaf hua tha. Agar tere Rubb ne pehle hi ek baat tai na kardi hoti to in ikhtilaf karne walon ke darmiyan faisla chuka diya jata, aur haqeeqat yeh hai ke yeh log uski taraf se sakht iztaraab angeiz (sakht bechain karne wale/disquieting) shakk mein paday huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney Musa (alh-e-salam) ko kitab di thi so uss mein bhi ikhtilaf kiya gaya aur agar (woh) baat na hoti (jo) aap kay rab ki taraf say pehlay hi muqarrar ho chuki hai to unkay darmiyan (kabhi ka) faisla ho chuka hota yeh log to iss kay baray mein boht sakht bey-shain kerney walay shak mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)इस्के पहले हमने मूसा को किताब दी थी और उसके मामले में bhi yahi ikhtilaf hua tha. अगर तेरे रुब ने पहले ही एक बात ताई न करदी होती तो इन इख्तिलाफ करने वालों के दरमियान फैसला चुका दिया जाता, और हकीकत ये है के ये लोग उसकी तरफ से सख्त इजतराब अंगेज (सख्त बेचैन करने वाले/बेचैन करने वाले) शक्क में पैदा हुए हैं
عَرَبِيمَن عَمِلَ صالِحًا فَلِنَفسِهِ ۖ وَمَن أَساءَ فَعَلَيها ۗ وَما رَبُّكَ بِظَلّامٍ لِلعَبيدِ
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हिन्दी (Al-Omari)जो व्यक्ति अच्छा कर्म करेगा, तो वह अपने ही लाभ के लिए करेगा और जो बुरा कार्य करेगा, तो उसका दुष्परिणाम उसी पर होगा और आपका पालनहार बंदों पर तनिक भी अत्याचार करने वाला नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Jo koi neik amal karega apne hi liye accha karega, jo badi (evil) karega uska wabal usi par hoga, aur tera Rubb apne bandon ke haqq mein zaalim nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo shaks nek kaam keray ga woh apnay nafay kay liye aur jo bura kaam keray ga uss ka wabal bhi ussi per hai. Aur aap ka rab bandon per zulm kerney wala nahi
Devnagri Urdu (Maududi)जो कोई नया अमल करेगा अपने ही लिए अच्छा करेगा, जो बड़ी (बुराई) करेगा उसका वबाल उसी पर होगा, और तेरा रब अपने बंदों के हक में जालिम नहीं है
🕮 Juz 25 begins here
عَرَبِي۞ إِلَيهِ يُرَدُّ عِلمُ السّاعَةِ ۚ وَما تَخرُجُ مِن ثَمَراتٍ مِن أَكمامِها وَما تَحمِلُ مِن أُنثىٰ وَلا تَضَعُ إِلّا بِعِلمِهِ ۚ وَيَومَ يُناديهِم أَينَ شُرَكائي قالوا آذَنّاكَ ما مِنّا مِن شَهيدٍ
हिन्दी (Al-Omari)क़ियामत का ज्ञान उसी (अल्लाह) की ओर लौटाया जाता है। तथा जो भी फल अपने गाभों से निकलते हैं और जो भी मादा गर्भ धारण करती है और बच्चा जनती है, सबका उसे ज्ञान है। और जिस दिन वह उन्हें पुकारेगा : कहाँ हैं मेरे साझी? वे कहेंगे : हमने तुझे स्पष्ट कर दिया है कि हममें से कोई (इसकी) गवाही देने वाला नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Us sa-ath (hour/Qayamat) ka ilm Allah hi ki taraf raajeh hota hai, wahi un saare phalon (fruits) ko jaanta hai jo apne shagufon (coverings/sheath) mein se nilakte hain, usi ko maaloom hai ke kaunsi maada (female) hamila (conceive) hui hai aur kisne baccha janaa (give birth) hai. Phir jis roz woh in logon ko pukarega ke kahan hain mere woh shareek? Yeh kahenge, “hum arz kar chuke hain, aaj hum mein se koi iski gawahi dene wala nahin hai.”
Roman Urdu (Junagarhi)Qayamat ka ilm Allah hi ki taraf lotaya jata hai aur jo jo phal apnay shagoofon mein say nikaltay hain aur jo madah hamal say hoti hai aur jo bachay woh janti (peda kerti) hai sab ka ilm ussay hai aur jiss din Allah Taalaa inn (mushrikon) ko bula ker daryaft farmaye ga meray shareek kahan hain woh jawab den gay kay hum ney to tujhay keh sunaya kay hum mein say to koi iss ka gawah nahi
Devnagri Urdu (Maududi)हमें सा-अथ (घंटा/कयामत) का इल्म अल्लाह ही की तरफ राज़ होता है, वही उन सारे फालों (फल) को जानता है जो अपने शगूफों (आवरण/आवरण) में से निकलता है, उसे पता है कि कौनसी मां (महिला) हमीला (गर्भधारण) हुई है और किसने बच्चा पैदा करना (जन्म देना) है। फिर जिस रोज़ वो लोगों को पुकारेगा के कहाँ हैं मेरे वो शरीक? ये कहेंगे, "हम अर्ज़ कर चुके हैं, आज हममें से कोई इसकी गवाही देने वाला नहीं है।"
عَرَبِيوَضَلَّ عَنهُم ما كانوا يَدعونَ مِن قَبلُ ۖ وَظَنّوا ما لَهُم مِن مَحيصٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे उनसे ग़ायब हो जाएँगे, जिन्हें वे इससे पूर्व पुकारते थे। तथा उन्हें यह विश्वास हो जाएगा कि उनके लिए भागने की कोई जगह नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt woh sarey maabood insey ghum ho jaayenge jinhein yeh issey pehle pukarte thay, aur yeh log samajh lenge ke inke liye ab koi jaaye panaah nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh jin (jin) ki parashtish iss say pehlay kertay thay woh inn ki nigah say gum hogaye aur enhon ney samjh liya kay abb inn kay liye koi bachao nahi
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त वो सारे मबूद इनसे गम हो जाएंगे जिन्हे ये इसे पहले पुकारते थे, और ये लोग समझ लेंगे इनके लिए अब कोई जाए पनाह नहीं है
عَرَبِيلا يَسأَمُ الإِنسانُ مِن دُعاءِ الخَيرِ وَإِن مَسَّهُ الشَّرُّ فَيَئوسٌ قَنوطٌ
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हिन्दी (Al-Omari)मनुष्य भलाई माँगने से नहीं थकता और यदि उसे कोई बुराई पहुँच जाए, तो हताश और निराश हो जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Insaan kabhi bhalayi ki dua maangte nahin thakta, aur jab koi aafat ispar aa jaati hai to mayoos o dil shikasta ho jata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bhalaee kay mangney say insan thakta nahi aur agar issay koi takleef phonch jaye to mayyus aur na umeed hojata hai
Devnagri Urdu (Maududi)इंसान कभी भलाई की दुआ मांगता नहीं थकता, और जब कोई आफत इसपर आ जाती है तो मयूस ओ दिल शिकस्त हो जाता है
عَرَبِيوَلَئِن أَذَقناهُ رَحمَةً مِنّا مِن بَعدِ ضَرّاءَ مَسَّتهُ لَيَقولَنَّ هٰذا لي وَما أَظُنُّ السّاعَةَ قائِمَةً وَلَئِن رُجِعتُ إِلىٰ رَبّي إِنَّ لي عِندَهُ لَلحُسنىٰ ۚ فَلَنُنَبِّئَنَّ الَّذينَ كَفَروا بِما عَمِلوا وَلَنُذيقَنَّهُم مِن عَذابٍ غَليظٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय यदि हम उसे, किसी तकलीफ़ के पश्चात् जो उसे पहुँची हो, अपनी रहमत का मज़ा चखाएँ, तो अवश्य कहेगा : यह मेरा हक़ है, और मैं नहीं समझता कि क़ियामत आने वाली है, और यदि मैं अपने पालनहार की ओर लौटाया गया, तो निश्चय ही मेरे लिए उसके पास अवश्य भलाई है। अतः हम निश्चय उन लोगों को जिन्होंने कुफ़्र किया अवश्य बता देंगे जो कुछ उन्होंने किया, तथा निश्चय हम उन्हें एक कठिन यातना अवश्य चखाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Magar junhi ke sakht waqt guzar jaane ke baad hum isey apni rehmant ka mazaa chakhate hain, yeh kehta hai ke “main isi ka mustahiq hoon, aur main nahin samajhta ke qayamat kabhi aayegi, lekin agar waqai main apne Rubb ki tarf paltaya gaya to wahan bhi mazey karunga”. Halanke kufr karne walon ko laziman hum bata kar rahenge ke woh kya karke aaye hain, aur unhein hum baday gandhey azaab ka maza chakhayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo museebat ussay phonch chuki hai iss kay baad agar hum issay kissi rehmat ka maza chakhayen to woh keh uthta hai kay iss ka to mein haqdaar hi tha aur mein to khayal hi nahi ker sakta kay qayamat qaeem hogi aur agar mein apnay rab kay pass wapis kiya gaya to bhi yaqeenan meray liye uss kay pass bhi behtri hai yaqeenan hum inn kuffaar ko unkay aemaal say khabardaar keren gay aur unhen sakht azab ka maza chakhayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर सिर्फ वक्त गुजर जाने के बाद हम इसे अपने रहमान का मजा चखते हैं, ये कहता है के "मैं इसका मुस्तहिक हूं, और मैं नहीं समझूंगा कि कयामत कभी आएगी, लेकिन अगर वकै मैं अपने रब की तरफ पलट गया तो वहां भी मजे करूंगा”। हालंके कुफ्र करने वालों को लाज़िमन हम बता कर रहेंगे के वो क्या करके आये हैं, और उन्हें हम बदाए गंदे अज़ाब का मजा दिखाएंगे
عَرَبِيوَإِذا أَنعَمنا عَلَى الإِنسانِ أَعرَضَ وَنَأىٰ بِجانِبِهِ وَإِذا مَسَّهُ الشَّرُّ فَذو دُعاءٍ عَريضٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब हम इनसान पर उपकार करते हैं, तो वह मुँह फेर लेता है और दूर हो जाता है। तथा जब उसे बुराई पहुँचती है, तो लंबी-चौड़ी दुआएँ करने वाला हो जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Insaan ko jab hum niyamat detay hain to woh mooh pherta hai aur akad jata hai, aur jab usey koi aafat choo jaati hai to lambi chowdi duaein karne lagta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab hum insan per apna inam kertay hain to woh mun pher leta hai aur kinara kash hojata hai aur jab ussay museebat parti hai to bari lambi chori duyen kerney wala bann jata hai
Devnagri Urdu (Maududi)इंसान को जब हम नियामत देते हैं तो वो मुहं फेरता है और अकड़ जाता है, और जब उसे कोई आफत छू जाती है तो लंबी चौड़ी दुआएं करने लगता है
عَرَبِيقُل أَرَأَيتُم إِن كانَ مِن عِندِ اللَّهِ ثُمَّ كَفَرتُم بِهِ مَن أَضَلُّ مِمَّن هُوَ في شِقاقٍ بَعيدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : मुझे बतलाओ कि यदि यह (क़ुरआन) अल्लाह की ओर से हुआ, फ़िर तुमने उसका इनकार कर दिया, तो उससे अधिक भटका हुआ कौन होगा, जो बहुत दूर के विरोध में पड़ा हो?
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi), insey kaho, kabhi tumne yeh bhi socha ke agar waqayi yeh Quran khuda hi ki taraf se hua aur tum iska inkar karte rahey to us shaks se badh kar bhatka hua aur kaun hoga jo iski mukhalifat mein door tak nikal gaya ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiyey! Kay bhala yeh to batao kay agar yeh quran Allah ki taraf say aaya hua ho phir tum ney issay na mana pus uss say barh ker behka hua kon hoga jo mukhalifat mein (haq say) door chala jaye
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी), इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अगर वाकाई ये कुरान खुदा ही की तरफ से हुआ और तुम इसका इनकार करते रहे तो हमारे शक्स से बढ़ कर भटका हुआ और कौन होगा जो इसकी मुखालफत में दूर तक निकल गया हो
عَرَبِيسَنُريهِم آياتِنا فِي الآفاقِ وَفي أَنفُسِهِم حَتّىٰ يَتَبَيَّنَ لَهُم أَنَّهُ الحَقُّ ۗ أَوَلَم يَكفِ بِرَبِّكَ أَنَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ شَهيدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)शीघ्र ही हम उन्हें अपनी निशानियाँ संसार के किनारों में तथा स्वयं उनके भीतर दिखाएँगे, यहाँ तक कि उनके लिए स्पष्ट हो जाए कि निश्चय यही सत्य है। और क्या आपका पालनहार प्रयाप्त नहीं इस बात के लिए कि निःसंदेह वह चीज़ पर गवाह है?
Roman Urdu (Maududi)Anqareeb hum unko apni nishaniyan aafaq (horizons)mein bhi dikhayenge aur inke apne nafs mein bhi yahan tak-ke inpar yeh baat khul jayegi ke yeh Quran waqayi barhaqq hai, kya yeh baat kaafi nahin hai ke tera Rubb har cheez ka shahid(witness) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Un-qareeb hum enhen apni nishaniyan aafaq-e-aalam mein bhi dikhayen gay aur khud inn ki apni zaat mein bhi yahan tak kay inn per khul jaye kay haq yehi hai kiya aap kay rab ka her cheez say waqif-o-aagah hona kafi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)अंकरिब हम उनको अपनी निशानियां आफाक (क्षितिज) में भी दिखाएंगे और इनके अपने नफ्स में भी यहां तक-के अंदर ये बात खुल जाएगी के ये कुरान वाक़ई बरहक़ है, क्या ये बात काफ़ी नहीं है के तेरा रब हर चीज़ का शाहिद(गवाह) है
عَرَبِيأَلا إِنَّهُم في مِريَةٍ مِن لِقاءِ رَبِّهِم ۗ أَلا إِنَّهُ بِكُلِّ شَيءٍ مُحيطٌ
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हिन्दी (Al-Omari)सुन लो! निश्चय वे लोग अपने पालनहार से मिलने के विषय में संदेह में हैं। सुन लो! निश्चय वह (अल्लाह) प्रत्येक वस्तु को घेरे हुए है।
Roman Urdu (Maududi)Aagaah raho, yeh log apne Rubb ki mulaqaat mein shakk rakhte hain. Sun rakkho woh har cheez par muheet(fully encompasses everything) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeen jano! Kay yeh log apnay rab kay roobaroo janey say shak mein hain yaad rakho kay Allah Taalaa her cheez ka ehaata kiyey huyey hai
Devnagri Urdu (Maududi)आगाह रहो, ये लोग अपने रब की मुलाक़ात में शक्क रखते हैं। सुन रक्खो वो हर चीज़ पर मुहीत (पूरी तरह से सब कुछ शामिल है) है
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Surah 41: Ha Mim (Ha Mim)

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Surah 41: Ha Mim (Ha Mim)

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Surah 41: Ha Mim (Ha Mim)

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Surah 41: Ha Mim (Ha Mim)

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Surah 41: Ha Mim (Ha Mim)

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Surah 42: Ash-Shura (Counsel)

Meccan🕐 Revelation #62📜 53 Verses🕮 Juz 1
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Surah 42: Ash-Shura (Counsel)

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Surah 42: Ash-Shura (Counsel)

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Surah 42: Ash-Shura (Counsel)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيحم
हिन्दी (Al-Omari)ह़ा, मीम।
Roman Urdu (Maududi)Haa Meem
Roman Urdu (Junagarhi)Haa-meem
Devnagri Urdu (Maududi)हा मीम
عَرَبِيعسق
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐन, सीन, क़ाफ़।
Roman Urdu (Maududi)Ain seen Qaaf
Roman Urdu (Junagarhi)Ain –seen-qaaf
Devnagri Urdu (Maududi)ऐन देखा क़ाफ़
عَرَبِيكَذٰلِكَ يوحي إِلَيكَ وَإِلَى الَّذينَ مِن قَبلِكَ اللَّهُ العَزيزُ الحَكيمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)इसी प्रकार, आपकी ओर और आपसे पहले के नबियों की ओर, वह अल्लाह वह़्य (प्रकाशना) करता (रहा) है, जो सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Isi tarah Allah galib o hakeem (Most Mighty, the Most Wise) tumhari taraf aur tumse pehle guzre huey (Rasoolon) ki taraf wahee karta raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa jo zabardast hai aur hikmat wala hai issi tarah teri taraf aur tujh say aglon ki taraf wahee bhejta raha
Devnagri Urdu (Maududi)इसी तरह अल्लाह गालिब ओ हकीम (सबसे शक्तिशाली, सबसे बुद्धिमान) तुम्हारी तरफ और तुमसे पहले गुज़रे हुए (रसूलों) की तरफ वही करता है
عَرَبِيلَهُ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۖ وَهُوَ العَلِيُّ العَظيمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसी का है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है और वह सर्वोच्च, सबसे महान है।
Roman Urdu (Maududi)Aasmaano aur zameen mein jo kuch bhi hai usi ka hai, woh baratar aur azeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmano ki (tamam) cheezen aur jo kuch zamin mein hai sab ussi ka hai woh bartar aur azeem-us-shan hai
Devnagri Urdu (Maududi)आसमान और ज़मीन में जो कुछ भी है उसी का है, वो बारात और अज़ीम है
عَرَبِيتَكادُ السَّماواتُ يَتَفَطَّرنَ مِن فَوقِهِنَّ ۚ وَالمَلائِكَةُ يُسَبِّحونَ بِحَمدِ رَبِّهِم وَيَستَغفِرونَ لِمَن فِي الأَرضِ ۗ أَلا إِنَّ اللَّهَ هُوَ الغَفورُ الرَّحيمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निकट है कि आकाश अपने ऊपर से फट पड़ें, और फ़रिश्ते अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ पवित्रता गान करते हैं तथा उनके लिए क्षमायाचना करते हैं, जो धरती में हैं। सुन लो! निःसंदेह अल्लाह ही अत्यंत क्षमा करने वाला, असीम दया करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Qareeb hai ke aasmaan upar se phatt padein farishtey apne Rubb ki hamd ke saath uski tasbeeh kar rahey hain, aur zameen walon ke haqq mein darguzar ki darkhwastein kiye jaate hain. Aagah raho, haqeeqat mein Allah gafoor o Raheem hi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Qareeb hai aasman uper say phat paren aur tamam farishtay apnay rab ki paki tareef kay sath biyan ker rahey hain aur zamin walon kay liye istaghfar ker rahey hain. Khoob samajh rakho kay Allah Taalaa hi maaf farmaney wala rehmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)करीब है के आसमान ऊपर से फट पड़े फरिश्ते अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह कर रहे हैं, और ज़मीन वालों के हक़ में दरगुज़र की डार्कहस्टीन किये जाते हैं। आगा रहो, हकीकत में अल्लाह गफूर ओ रहीम ही है
عَرَبِيوَالَّذينَ اتَّخَذوا مِن دونِهِ أَولِياءَ اللَّهُ حَفيظٌ عَلَيهِم وَما أَنتَ عَلَيهِم بِوَكيلٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने अल्लाह के सिवा दूसरे संरक्षक बना लिए, अल्लाह उनपर निगरानी रखे हुए है और आप कदापि उनके उत्तरदायी नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne usko chodh kar apne kuch dusre sarparast bana rakkhe hain, Allah hi unpar nigraan hai, tum unke hawala daar nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jinn logon ney uss kay siwa doosron ko kaar saaz bana liya hai Allah Taalaa unn per nigran hai aur aap unkay zimaydaar nahi hain
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने उनको छोड़ कर अपने दूसरे सरपरस्त बना रक्खे हैं, अल्लाह ही उन्पार निगरानी है, तुम उनके हवाला दार नहीं हो
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ أَوحَينا إِلَيكَ قُرآنًا عَرَبِيًّا لِتُنذِرَ أُمَّ القُرىٰ وَمَن حَولَها وَتُنذِرَ يَومَ الجَمعِ لا رَيبَ فيهِ ۚ فَريقٌ فِي الجَنَّةِ وَفَريقٌ فِي السَّعيرِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा इसी प्रकार, हमने आपकी ओर अरबी क़ुरआन की वह़्य (प्रकाशना) भेजी है, ताकि आप मक्का वासियों को और उसके आस-पास के लोगों को सावधान कर दें, और एकत्र होने के दिन से सचेत कर दें, जिसमें कोई संदेह नहीं। एक समूह जन्नत में तथा एक समूह भड़कती आग में होगा।
Roman Urdu (Maududi)Haan, isi tarah aey Nabi, yeh Quraan e arabi humne tumhari taraf wahee (revelation) kiya hai taa-ke tum bastiyaon ke markaz (shehar e Makkah) aur uske gird o pesh rehne walon ko khabardar kardo, aur jamaa honay ke din se dara do jiske aane mein koi shakk nahin.Ek girooh ko jannat mein jaana hai aur dusre girooh ko dozakh mein
Roman Urdu (Junagarhi)Issi tarah hum ney aap ki taraf arabi quran ki wahee ki hai takay aap makkah walon ko aur uss kay aas pass logon ko khabardar ker den aur jama honey kay din say jiss kay aanay mein koi shak nahi dara den. Aik giroh jannat mein hoga aur aik giroh jahannum mein hoga
Devnagri Urdu (Maududi)हां, इसी तरह ऐ नबी, ये कुरान ए अरबी हमने तुम्हारी तरफ वही (खुलासा) किया है ता-के तुम बस्तियां के मरकज (शहर ए मक्का) और उसके गिर्द ओ पेश रहने वालों को खबरदार बनाओ, और जमा होने के दिन से डर दो जिसके आने में कोई शक्क नहीं। एक गिररूह को जन्नत में जाना है और दूसरा गिरूह को दोज़ख में
عَرَبِيوَلَو شاءَ اللَّهُ لَجَعَلَهُم أُمَّةً واحِدَةً وَلٰكِن يُدخِلُ مَن يَشاءُ في رَحمَتِهِ ۚ وَالظّالِمونَ ما لَهُم مِن وَلِيٍّ وَلا نَصيرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि अल्लाह चाहता, तो अवश्य उन्हें एक समुदाय बना देता। परंतु वह जिसे चाहता है अपनी रहमत में दाख़िल करता है और ज़ालिमों का न तो कोई दोस्त है और न कोई मददगार।
Roman Urdu (Maududi)Agar Allah chahta to in sab ko ek hi ummat bana deta, magar woh jisey chahta hai apni rehmat mein dakhil karta hai. Aur zaalimon ka na koi wali hai na madadgaar
Roman Urdu (Junagarhi)Agar Allah Taalaa chahata to inn sab ko aik hi ummat ka bana deta lekin woh jissay chahata hai apni rehmat mein dakhil ker leta hai aur zalimon ka haami aur madadgar koi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)अगर अल्लाह चाहता तो सबको एक ही उम्मत बना देता, मगर वो जिसे चाहता है अपनी रहमत में दखल करता है। और जालिमों का ना कोई वाली है ना मददगार
عَرَبِيأَمِ اتَّخَذوا مِن دونِهِ أَولِياءَ ۖ فَاللَّهُ هُوَ الوَلِيُّ وَهُوَ يُحيِي المَوتىٰ وَهُوَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)या उन्होंने उसके सिवा अन्य संरक्षक बना रखे हैं? सो अल्लाह ही वास्तविक संरक्षक है और वही मुर्दों को जीवित करेगा और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh (aisey naadaan hain ke) inhon ne usey chodh kar dusre wali(protectors) bana rakkhe hain? Wali(protector) to Allah hi hai, wahi murdon (dead) ko zinda karta hai, aur woh har cheez par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn logon ney Allah kay siwa aur kaar saaz bana liye hain (haqeeqatan) to Allah Taalaa hi kaar saaz hai wohi murdon ko zindah keray ga aur wohi her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये (ऐसी नादान हैं के) इन्हों ने उसे छोड़ कर दूसरे वाली (रक्षक) बना रखा है? वली (रक्षक) अल्लाह ही है, वही मुर्दों (मृत) को जिंदा करता है, और वह हर चीज पर कादिर है
عَرَبِيوَمَا اختَلَفتُم فيهِ مِن شَيءٍ فَحُكمُهُ إِلَى اللَّهِ ۚ ذٰلِكُمُ اللَّهُ رَبّي عَلَيهِ تَوَكَّلتُ وَإِلَيهِ أُنيبُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तुम जिस चीज़ के बारे में भी मतभेद करो, उसका निर्णय अल्लाह की ओर है। वही अल्लाह मेरा रब है, उसी पर मैंने भरोसा किया है तथा उसी की ओर मैं लौटता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Tumhare darmiyan jis maamle mein bhi ikhtilaf ho, uska faisla karna Allah ka kaam hai. Wahi Allah mera Rubb hai, usi par maine bharosa kiya, aur usi ki taraf main rujoo karta hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss jiss cheez mein tumhara ikhtilaf ho uss ka faisla Allah Taalaa hi ki taraf hai yehi Allah mera rab hai jiss per mein ney bharosa ker rakha hai aur jiss ki taraf mein jhukta hun
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारे दरमियान जिस मामले में भी इख्तिलाफ हो, उसका फैसला करना अल्लाह का काम है। वही अल्लाह मेरा रब है, उसी पर मैंने भरोसा किया, और उसकी तरफ मैं रूजू करता हूं
عَرَبِيفاطِرُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ جَعَلَ لَكُم مِن أَنفُسِكُم أَزواجًا وَمِنَ الأَنعامِ أَزواجًا ۖ يَذرَؤُكُم فيهِ ۚ لَيسَ كَمِثلِهِ شَيءٌ ۖ وَهُوَ السَّميعُ البَصيرُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(वह) आकाशों तथा धरती का रचयिता है। उसने तुम्हारे लिए तुम्हारी अपनी ही जाति से जोड़े बनाए तथा पशुओं से भी जोड़े। वह तुम्हें इसमें फैलाता है। उसके जैसी कोई चीज़ नहीं और वह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aasmaano aur zameen ka banane waala, jisne tumhari apni jins se tumhare liye jodey (pairs) paida kiye, aur isi tarah jaanwaron mein bhi (unhi ke hum jins) jodey(pairs) banaye, aur is tareeqe se woh tumhari naslein (generations) phailata hai. Qayanat ki koi cheez uske mushabeh nahin, woh sab kuch sunnay aur dekhne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh aasmano aur zamin ka peda kerney wala hai uss ney tumhray liye tumhari jins kay joray bana diyey hain. Aur chopayon kay joray banaye hain tumhen woh iss mein phela raha hai uss jesi koi cheez nahi woh sunnay aur dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)आसमानों और जमीन का बनाने वाला, जिसने तुम्हारी अपनी जिंदगी से तुम्हारे लिए जोड़ी बनाई, और इसी तरह के जानवरों में भी (उन्ही के हम जिन्स) जोडे (जोड़े) बनाएं, और इस तारीख से वो तुम्हारी नस्लें (पीढ़ियां) फैलती हैं। क़यानत की कोई चीज़ उसके मुशाबेह नहीं, वो सब कुछ सुनने और देखने वाला है
عَرَبِيلَهُ مَقاليدُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ يَبسُطُ الرِّزقَ لِمَن يَشاءُ وَيَقدِرُ ۚ إِنَّهُ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आकाशों तथा धरती की कुंजियाँ उसी के पास हैं। वह जिसके लिए चाहता है, रोज़ी कुशादा कर देता है और (जिसकी चाहता है) तंग कर देता है। निःसंदेह वह प्रत्येक वस्तु को ख़ूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aasmaano aur zameen ke khazano ki kunjiyan usi ke paas hain. Jisey chahta hai khula rizq deta hai aur jisey chahta hai napa tula deta hai. Usey har cheez ka ilm hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmano aur zamin ki kunjiyan ussi ki hain jiss ki chahye rozi kushada ker day aur tang ker day yaqeenan woh her cheez jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)आसमान और ज़मीन के खज़ानो की कुंजी उसके पास हैं। जिसे चाहता है खुला रिज़्क देता है और जिसे चाहता है नपा तुला देता है। उसे हर चीज़ का इल्म है
عَرَبِي۞ شَرَعَ لَكُم مِنَ الدّينِ ما وَصّىٰ بِهِ نوحًا وَالَّذي أَوحَينا إِلَيكَ وَما وَصَّينا بِهِ إِبراهيمَ وَموسىٰ وَعيسىٰ ۖ أَن أَقيمُوا الدّينَ وَلا تَتَفَرَّقوا فيهِ ۚ كَبُرَ عَلَى المُشرِكينَ ما تَدعوهُم إِلَيهِ ۚ اللَّهُ يَجتَبي إِلَيهِ مَن يَشاءُ وَيَهدي إِلَيهِ مَن يُنيبُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने तुम्हारे लिए वही धर्म निर्धारित किया है, जिसका आदेश उसने नूह़ को दिया और जिसकी वह़्य हमने आपकी ओर की, तथा जिसका आदेश हमने इबराहीम तथा मूसा और ईसा को दिया, यह कि इस धर्म को क़ायम करो और उसके विषय में अलग-अलग न हो जाओ। बहुदेववादियों पर वह बात भारी है जिसकी ओर आप उन्हें बुलाते हैं। अल्लाह जिसे चाहता है, अपने लिए चुन लेता है और अपनी ओर मार्ग उसी को दिखाता है, जो उसकी ओर लौटता है।
Roman Urdu (Maududi)Usne tumhare liye deen ka wahi tareeqa muqarrar kiya hai jiska hukum usne Nooh ko diya tha, aur jisey (aey Muhammad) ab tumhari taraf humne wahee ke zariye se bheja hai, aur jiski hidayat hum Ibrahim aur Moosa aur Isa ko de chuke hain, is takeed ke saath ke qayam karo is deen ko aur us mein mutafarriq na ho jao. Yahi baat in mushrikin ko sakht nagawaar hui hai jiski taraf aey Muhammad tum inhein dawat de rahey ho. Allah jisey chahta hai apna kar leta hai, aur woh apni taraf aane ka raasta usi ko dikhata hai jo uski taraf rujoo karey
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney tumharay liye wohi deen muqarrar ker diya hai jiss kay qaeem kerney ka uss ney Nooh (alh-e-salam) ko hukum diya tha aur jo (ba-zariya wahee) hum ney teri taraf bhej di hai aur jiss ka takeedi hukum hum ney Ibrahim aur Musa aur Essa (alheem-us-salam) ko diya tha kay iss deen ko qaeem rakhna aur iss mein phoot na dalna jiss cheez ki taraf aap ehen bula rahey hain who to (inn) mushrikon per giran guzarti hai Allah Taalaa jissay chahata hai apna bargazeedah banata hai aur jo bhi uss ki taraf rujoo keray who uss ki sahih rehnumaee kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसने तुम्हारे लिए दीन का वही तरीक़ा मुकर्रर किया है जिसका हुकुम उसने नूह को दिया था, और जैसे (ऐ मुहम्मद) अब तुम्हारी तरफ़ हमने वही के ज़रिये से भेजा है, और जिसकी हिदायत हम इब्राहिम और मूसा और ईसा को दे चुके हैं, के साथ ले लिया गया है क़याम करो इस दीन को और हममें मुतफ़र्रिक न हो जाओ। यही बात मुशरिकिन को सख्त नगावार हुई है जिसकी तरफ ऐ मुहम्मद तुम इन्हें दावत दे रहे हो। अल्लाह जिसे चाहता है अपना कर लेता है, और वो अपनी तरफ आने का रास्ता उसी को दिखाता है जो उसकी तरफ रूजू करे
عَرَبِيوَما تَفَرَّقوا إِلّا مِن بَعدِ ما جاءَهُمُ العِلمُ بَغيًا بَينَهُم ۚ وَلَولا كَلِمَةٌ سَبَقَت مِن رَبِّكَ إِلىٰ أَجَلٍ مُسَمًّى لَقُضِيَ بَينَهُم ۚ وَإِنَّ الَّذينَ أورِثُوا الكِتابَ مِن بَعدِهِم لَفي شَكٍّ مِنهُ مُريبٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वे लोग आपस की ज़िद के कारण इसके पश्चात् अलग-अलग हुए कि उनके पास ज्ञान आ चुका था। तथा यदि वह बात न होती जो आपके पालनहार की ओर से एक निश्चित समय के लिए पहले तय हो चुकी, तो अवश्य उनके बीच निर्णय कर दिया जाता। और निःसंदेह वे लोग जो उनके पश्चात् पुस्तक के उत्तराधिकारी बनाए गए, वे इस (क़ुरआन) के बारे में दुविधा में डालने वाले संदेह में पड़े हैं।
Roman Urdu (Maududi)Logon mein jo tafraqa(ikhtilaf) runuma hua woh iske baad hua ke unke paas ilm aa chuka tha aur is bina par hua ke woh aapas mein ek dusre par zyadati karna chahte thay. Agar tera Rubb pehle hi yeh na farma chuka hota ke ek waqt e muqarrar tak faisla multawi rakkha jayega to inka qaziya chuka diya gaya hota. Aur haqeeqat yeh hai ke aglon ke baad jo log kitab ke waaris banaye gaye woh uski taraf se badey istarab angez shakk mein padey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Unn logon ney apnay pass ilm aajaney kay baad hi ikhtilaf kiya (aur woh bhi) bahami zidd behas say aur agar aap kay rab ki baat aik waqt-e-muqarrara tak kay liye pehlay hi say qarar paagaee hui na hoti to yaqeenan unn ka faisla ho chuka hota aur jinn logon ko unn kay baad kitab di gaee hai woh bhi uss ki taraf say uljhan walay shak mein paray huye hain
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों में जो तफ़रका (इख्तिलाफ़) रुनुमा हुआ वो इसके बाद हुआ के उनके पास इल्म आ चूका था और इस बिना पर हुआ के वो आपस में एक दूसरे पर ज़्यादा करना चाहते थे। अगर तेरा रब पहले ही ये ना फरमा चूका होता के एक वक्त ए मुकर्रर तक फैसला मुलतवी रक्खा जाएगा तो इनका काजिया चूका दिया गया होता। और हकीकत ये है के एग्लोन के बाद जो लोग किताब के वारिस बन गए वो उसकी तरफ से बदले इस्तराब अंगेज शक्क में पड़े हुए हैं
عَرَبِيفَلِذٰلِكَ فَادعُ ۖ وَاستَقِم كَما أُمِرتَ ۖ وَلا تَتَّبِع أَهواءَهُم ۖ وَقُل آمَنتُ بِما أَنزَلَ اللَّهُ مِن كِتابٍ ۖ وَأُمِرتُ لِأَعدِلَ بَينَكُمُ ۖ اللَّهُ رَبُّنا وَرَبُّكُم ۖ لَنا أَعمالُنا وَلَكُم أَعمالُكُم ۖ لا حُجَّةَ بَينَنا وَبَينَكُمُ ۖ اللَّهُ يَجمَعُ بَينَنا ۖ وَإِلَيهِ المَصيرُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः आप लोगों को इसी (धर्म) की ओर बुलाएँ और (उसपर) जमें रहें, जैसाकि आपको आदेश दिया गया है और उनकी इच्छाओं का पालन न करें, तथा कह दें कि अल्लाह ने जो भी किताब उतारी है मैं उसपर ईमान लाया। तथा मुझे आदेश दिया गया है कि मैं तुम्हारे बीच न्याय करूँ। अल्लाह ही हमारा पालनहार तथा तुम्हारा पालनहार है। हमारे लिए हमारे कर्म हैं तथा तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म। हमारे और तुम्हारे बीच कोई झगड़ा नहीं। अल्लाह हम सभी को एकत्र करेगा तथा उसी की ओर लौटकर जाना है।
Roman Urdu (Maududi)Junke yeh halat paida ho chuki hai isliye aey Muhammad (s.a.s.) ab tum usi deen ki taraf dawat do, aur jis tarah tumhein hukum diya gaya hai us par mazbooti ke saath qayam ho jaao, aur in logon ki khwaishat ki ittiba na karo. Aur inse kehdo ke: “Allah ne jo kitaab bhi nazil ki hai main uspar imaan laya, mujhe hukum diya gaya hai ke main tumahre darmiyan insaaf karoon. Allah hi hamara Rubb bhi hai aur tumhara Rubb bhi. Hamare aamal hamare liye hain aur tumhare aamal tumhare liye. Hamare aur tumhare darmiyan koi jhagda nahin. Allah ek roz hum sab ko jamaa karega aur usi ki taraf sab ko jana hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap logon ko issi tarah bulatay rahen aur jo kuch aap say kaha gaya hai uss per mazbooti say jamm jayen aur inn ki khuwaishon per na chalen aur keh den kay Allah Taalaa ney jitni kitaben nazil farmaee hain mera unn per eman hai aur mujhay humkum diya gaya hai kay tum mein insaf kerta rahon. Humara aur tum sab ka perwerdigar Allah hi hai humaray aemaal humaray liye hain aur tumharay aemaal tumharay liye hain hum tum mein koi cut hujjati nahi Allah Taalaa hum (sab) ko jama keray ga aur ussi ki taraf lotna hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिनके ये हालत पैदा हो चुकी है इसलिए ऐ मुहम्मद (स.अ.स.) अब तुम उसी दीन की तरफ दावत दो, और जिस तरह तुम्हीं हुकुम दिया गया है उस पर मज़बूती के साथ कायम हो जाओ, और लोगों की ख्वाहिश की इतिबा ना करो। और इनसे केहदो के: "अल्लाह ने जो किताब भी नाज़िल की है मैं उसपर ईमान लाया, मुझे हुकुम दिया है के मैं तुम्हारे दरमियान इन्साफ करूं। अल्लाह ही हमारा रब भी है और तुम्हारा रब भी। हमारे अमल हमारे लिए हैं और तुम्हारे अमल तुम्हारे लिए। हमारे और तुम्हारे दरमियान कोई झगड़ा नहीं। अल्लाह एक रोज़ हम सब को जमा करेंगे और उसकी तरफ सब को जाना है”
عَرَبِيوَالَّذينَ يُحاجّونَ فِي اللَّهِ مِن بَعدِ مَا استُجيبَ لَهُ حُجَّتُهُم داحِضَةٌ عِندَ رَبِّهِم وَعَلَيهِم غَضَبٌ وَلَهُم عَذابٌ شَديدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग अल्लाह के (धर्म के) बारे में झगड़ते हैं, इसके पश्चात कि उसे स्वीकार कर लिया गया, उनका तर्क उनके रब के यहाँ बातिल (व्यर्थ) है, तथा उनपर बड़ा प्रकोप है और उनके लिए बुहत कड़ी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki dawat par labbaik kahey jaane ke baad jo log (labbaik kehne walon se) Allah ke deen ke muaamle mein jhagde karte hain, unki hujjat baazi unke Rubb ke nazdeek baatil hai, aur unpar uska gazab hai aur unke liye sakht azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log Allah Taalaa ki baton mein jhagra daltay hain iss kay baad kay (makhlooq) ussay maan chuki unn ki cut hujjati Allah kay nazdeek batil hai aur unn per ghazab hai aur unn kay liye sakht azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की दावत पर लब्बैक कहे जाने के बाद जो लोग (लब्बैक कहने वालों से) अल्लाह के दीन के मुआमले में झगड़े करते हैं, उनकी हुज्जत बाजी उनके रब के नाज़दिक बात है, और उन पर उसका ग़ज़ब है और उनके लिए सख्त अज़ाब है
عَرَبِياللَّهُ الَّذي أَنزَلَ الكِتابَ بِالحَقِّ وَالميزانَ ۗ وَما يُدريكَ لَعَلَّ السّاعَةَ قَريبٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही है जिसने सत्य के साथ यह पुस्तक उतारी तथा तराज़ू भी, और आपको क्या चीज़ सूचित करती है शायद कि क़ियामत क़रीब हो।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi hai jisne haqq ke saath yeh kitaab aur mizaan nazil ki hai aur tumhein kya khabar, shayad ke faisley ki ghadi qareeb hi aa lagi ho
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney haq kay sath kitab nazil farmaee hai aur tarazoo bhi (utari hai) aur aap ko kiya khabar shayad qayamat qareeb hi ho
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह हाय है जिसने हक़ के साथ ये किताब और मिज़ान नाज़िल की है और तुम्हें क्या खबर, शायद के फैसले की घड़ी करीब ही आ लगी हो
عَرَبِييَستَعجِلُ بِهَا الَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِها ۖ وَالَّذينَ آمَنوا مُشفِقونَ مِنها وَيَعلَمونَ أَنَّهَا الحَقُّ ۗ أَلا إِنَّ الَّذينَ يُمارونَ فِي السّاعَةِ لَفي ضَلالٍ بَعيدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उसे वे लोग शीघ्र माँगते हैं, जो उसपर ईमान नहीं रखते, तथा वे लोग जो उसपर विश्वास रखते हैं, वे उससे डरने वाले हैं और जानते हैं कि निःसंदेह वह सत्य है। सुनो! निःसंदेह जो लोग क़ियामत के विषय में बहस (संदेह) करते हैं, निश्चय वे बहुत दूर की गुमराही में हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo log uske aane par imaan nahin rakhte woh to us ke liye jaldi machate hain, magar jo uspar imaan rakhte hain woh ussey darte hain aur jaante hain ke yaqeenan woh aane wali hai.Khoob sunlo, jo log us ghadi ke aane mein shakk daalne wali behsain (arguments) karte hain woh gumrahi mein bahut dur nikal gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Iss ko jaldi unhen pari hai jo issay nahi mantay aur jo iss per yaqeen rakhtay hain woh to iss say darr rahey hain unhen iss kay haq honey ka poora ilm hai. Yad rakho jo log qayamat kay moamlay mein lar jhagar rahey hain woh door ki gumrahee mein paray huyey hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग उसके आने पर ईमान नहीं रखते वो तो हमारे लिए जल्दी मचाते हैं, मगर जो उसपर ईमान रखते हैं वो उसे डरते हैं और जानते हैं के यकीनन वो आने वाली है। खूब सुनलो, जो लोग हमें घड़ी के आने में शक्क डालने वाली बातें (तर्क) करते हैं वो गुमराही में बहुत दूर निकल गए हैं
عَرَبِياللَّهُ لَطيفٌ بِعِبادِهِ يَرزُقُ مَن يَشاءُ ۖ وَهُوَ القَوِيُّ العَزيزُ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह अपने बंदों पर बड़ा दयालु है। वह जिसे चाहता है रोज़ी देता है और वही सर्वशक्तिमान, सब पर प्रभुत्वशाली है।
Roman Urdu (Maududi)Allah apne bandon par bahut meharban hai jisey jo kuch chahta hai deta hai. Woh badi quwwat wala aur zabardast hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa apnay bandon per bara hi lutf kerney wala hai jissay chahata hai kushada rozi deta hai aur woh bari taqat baray ghalbay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है जिसे जो कुछ चाहता है देता है। वो बड़ी कुव्वत वाला और ज़बरदस्त है
عَرَبِيمَن كانَ يُريدُ حَرثَ الآخِرَةِ نَزِد لَهُ في حَرثِهِ ۖ وَمَن كانَ يُريدُ حَرثَ الدُّنيا نُؤتِهِ مِنها وَما لَهُ فِي الآخِرَةِ مِن نَصيبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जो कोई आख़िरत की खेती चाहता है, हम उसके लिए उसकी खेती में बढ़ोतरी कर देंगे, और जो कोई दुनिया की खेती चाहता है, हम उसे उसमें से कुछ दे देंगे, और आख़िरत में उसका कोई हिस्सा नहीं होगा।
Roman Urdu (Maududi)Jo koi aakhirat ki kheti chahta hai uski kheti ko hum badhate hain, aur jo duniya ki kheti chahta hai usey duniya hi mein se detay hain magar aakhirat mein uska koi hissa nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ka iradah aakhirat ki kheti ka ho hum ussay uss ki kheti mein taraqqi den gay aur jo duniya ki kheti ki talab rakhta ho hum ussay uss mein say ho kuch dey den gay aisay shaks ka aakhirat mein koi hissa nahi
Devnagri Urdu (Maududi)जो कोई आख़िरत की खेती चाहता है उसकी खेती को हम बढ़ाते हैं, और जो दुनिया की खेती चाहता है उसे दुनिया ही में से अलग कर देती है मगर आख़िरत में उसका कोई हिसा नहीं है
عَرَبِيأَم لَهُم شُرَكاءُ شَرَعوا لَهُم مِنَ الدّينِ ما لَم يَأذَن بِهِ اللَّهُ ۚ وَلَولا كَلِمَةُ الفَصلِ لَقُضِيَ بَينَهُم ۗ وَإِنَّ الظّالِمينَ لَهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)या इन (मुश्रिकों) के कुछ ऐसे साझी हैं, जिन्होंने उनके लिए धर्म का एक ऐसा नियम निर्धारित किया है जिसकी अल्लाह ने अनुमति नहीं दी है? और यदि नियत की हुई बात न होती, तो अवश्य उनके बीच निर्णय कर दिया जाता तथा निश्चय ही अत्याचारियों के लिए दुखद यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log kuch aisey sharik e khuda rakhte hain jinhon ne inke liye deen ki noiyat rakhne wala ek aisa tareeka muqarrar kardiya hai jiska Allah ne izan nahin diya? Agar faislay ki baat pehle tai na ho gayi hoti to inka qaziya chuka diya gaya hota. Yaqeenan in zaalimon ke liye dardnaak azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn logon ney aisay (Allah kay) shareek (muqarrar ker rakhay) hain jinhon ney aisay ehkaam-e-deen muqarrar ker diyey hain jo Allah kay famaye huye nahi hain. Agar faislay kay din ka wada na hota to (abhi hi) inn mein faisla ker diya jata. Yaqeenan (inn) zalimon kay liye hi dard-naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग कुछ ऐसे शारिक ए खुदा रखते हैं जिन्हों ने इनके लिए दीन की नोइयत रखने वाला एक ऐसा तरीका मुकर्रर कर दिया है जिसका अल्लाह ने इज़ान नहीं दिया? अगर फैसला की बात पहले ताई ना हो गई तो इनका क़ज़िया चुका दिया गया हो गया। यकीनन इन जालिमों के लिए दर्दनक अज़ाब है
عَرَبِيتَرَى الظّالِمينَ مُشفِقينَ مِمّا كَسَبوا وَهُوَ واقِعٌ بِهِم ۗ وَالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ في رَوضاتِ الجَنّاتِ ۖ لَهُم ما يَشاءونَ عِندَ رَبِّهِم ۚ ذٰلِكَ هُوَ الفَضلُ الكَبيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)आप अत्याचारियों को देखेंगे कि वे उससे डरने वाले होंगे जो उन्होंने कमाया, हालाँकि वह उनपर आकर रहने वाला है, तथा जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, वे जन्नतों के बागों में होंगे। उनके लिए जो कुछ भी वे चाहेंगे उनके रब के पास होगा। यही बहुत बड़ा अनुग्रह है।
Roman Urdu (Maududi)Tum dekhoge ke yeh zaalim us waqt apne kiye ke anjaam se darr rahey hongey aur woh inpar aa kar rahega. Ba-khilaf iske jo log imaan le aaye hain aur jinhon ne neik aamal kiye hain woh jannat ke gulistano mein honge, jo kuch bhi woh chahenge apne Rubb ke haan paayenge, yahi bada fazal hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap dekhen gay kay yeh zalim apnay aemaal say darr rahey hongay jinn kay wabal inn per waqey honey walay hain aur jo log eman laye aur unhon ney nek aemaal kiyey woh bahishton kay baghaat mein hongay woh jo khuwaish keren apnay rab kay pass mojood payen gay yehi hai bara fazal
Devnagri Urdu (Maududi)तुम देखोगे के ये जालिम हमें वक्त अपने किए के अंजाम से डर रहेंगे और वो अंदर आ कर रहेंगे। बा-खिलाफ इसके जो लोग ईमान ले आए हैं और जिन्होन ने नेक अमल किए हैं वो जन्नत के गुलिस्तानों में होंगे, जो कुछ भी वो चाहेंगे अपने रब के हां पाएंगे, यही बड़ा फजल है
عَرَبِيذٰلِكَ الَّذي يُبَشِّرُ اللَّهُ عِبادَهُ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ ۗ قُل لا أَسأَلُكُم عَلَيهِ أَجرًا إِلَّا المَوَدَّةَ فِي القُربىٰ ۗ وَمَن يَقتَرِف حَسَنَةً نَزِد لَهُ فيها حُسنًا ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ شَكورٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यही वह चीज़ है, जिसकी शुभ-सूचना अल्लाह अपने उन बंदों को देता है, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कार्य किए। आप कह दें : मैं इसपर तुमसे कोई पारिश्रमिक नहीं माँगता, रिश्तेदारी के कारण प्रेम-भाव के सिवा। और जो कोई नेकी कमाएगा, हम उसके लिए उसमें अच्छाई की अभिवृद्धि करेंगे। निश्चय अल्लाह अत्यंत क्षमाशील, अति गुण-ग्राहक है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hai woh cheez jiski khush khabri Allah apne un bandon ko deta hai jinhon ne maan liya aur neik amal kiye. Aey Nabi, in logon se kehdo ke main is kaam par tumse kisi ajar ka taalib nahin hoon. Albatta qarabat (kinsfolk) ki muhabbat zaroor chahta hoon. Jo koi bhalayi kamayega hum uske liye us bhalayi mein khoobi ka izafa kar dengey. Beshak Allah bada darguzar karne wala aur qadardaan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi woh hai jiss ki bisharat Allah Taalaa apney bandon ko dey raha hai jo eman laye aur (sunnat kay mutabiq) nek aemaal kiyey to keh dijiyey! Kay mein iss per tum say koi badla nahi chahata magar mohabbat rishtaydaari ki jo shaks koi neki keray hum uss kay liye uss ki neki mein aur neki barha den gay be-shak Allah Taalaa boht bakhshney wala (aur) boht qadardaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये है वो चीज जिसकी खुश खबरी अल्लाह अपने उन बंदों को देता है जिन्होनें ने मान लिया और नीक अमल किये। ऐ नबी, लोगों से कहदो के मैं इस काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं। अलबत्ता क़राबत (रिश्तेदारों) की मुहब्बत ज़रूर चाहता हूँ। जो कोई भलाई कमाएगा हम उसके लिए हमें भलाई में खूबी का इज़ाफ़ा कर देंगे। बेशक अल्लाह बड़ा दरगुज़ार करने वाला और क़दरदान है
عَرَبِيأَم يَقولونَ افتَرىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا ۖ فَإِن يَشَإِ اللَّهُ يَختِم عَلىٰ قَلبِكَ ۗ وَيَمحُ اللَّهُ الباطِلَ وَيُحِقُّ الحَقَّ بِكَلِماتِهِ ۚ إِنَّهُ عَليمٌ بِذاتِ الصُّدورِ
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हिन्दी (Al-Omari)या वे कहते हैं कि उसने अल्लाह पर झूठ गढ़ लिया है? तो यदि अल्लाह चाहे, तो आपके दिल पर मुहर लगा दे। और अल्लाह असत्य को मिटा देता है और सत्य को अपने शब्दों (प्रमाणों) द्वारा साबित कर देता है। निश्चय वह सीनों (दिलों) की बातों को ख़ूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log kehte hain ke is shaks ne Allah par jhoota bohtan ghadh liya hai? Agar Allah chahe to tumhare dil par mohar karde. Woh baatil ko mita deta hai aur haq ko apne farmaano se haqq kar dikhata hai. Woh seeno ke chupey huey raaz jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh kehtay hain kay (payghumber ney) Allah per khoot bandha hai agar Allah Taalaa chahye to aap kay dil per mohar laga day aur Allah Taalaa apni baton say jhoot ko mita deta hai aur sach ko sabit rakhta hai. Woh seenay ki baton ko jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग कहते हैं कि इस शक्स ने अल्लाह पर झूठा बोहतन गड़बड़ लिया है? अगर अल्लाह चाहे तो तुम्हारे दिल पर मोहर लगा दे। वो बातिल को मिटा देता है और हक को अपने फरमान से हक कर दिखाता है। वो सीने के छुपे हुए राज जानता है
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي يَقبَلُ التَّوبَةَ عَن عِبادِهِ وَيَعفو عَنِ السَّيِّئَاتِ وَيَعلَمُ ما تَفعَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है, जो अपने बंदों की तौबा क़बूल करता है और बुराइयों को माफ़ करता है और जो कुछ तुम करते हो, उसे जानता है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jo apne bandon se tawbah qabool karta hai aur buraiyon se darguzar karta hai, halanke tum logon ke sab afaal (jo kuch kar rahe ho) ka usey ilm hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi hai jo apnay bandon ki toba qabool farmata hai aur gunahon say darguzar farmata hai aur jo kuch tum ker rahey ho (sab) janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जो अपने बंदों से तौबा कबूल करता है और बुराइयों से दरगुजर करता है, हालंके तुम लोगों के सब अफाल (जो कुछ कर रहे हो) का उसका इल्म है
عَرَبِيوَيَستَجيبُ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ وَيَزيدُهُم مِن فَضلِهِ ۚ وَالكافِرونَ لَهُم عَذابٌ شَديدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन लोगों की प्रार्थना स्वीकार करता है, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कार्य किए तथा उन्हें अपने अनुग्रह से अधिक प्रदान करता है और जो काफ़िर हैं उनके लिए कड़ी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Woh imaan laane walon aur neik amal karne waalon ki dua qabool karta hai aur apne fazal se unko aur zyada deta hai. Rahey inkar karne walay, to unke liye dardnaak saza hai
Roman Urdu (Junagarhi)eman walon aur neko kaar logon ki sunta hai aur unhen apnay fazal say aur barha ker deta hai aur kuffaar kay liye sakht azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो ईमान लाने वालों और नेक अमल करने वालों की दुआ क़बूल करता है और अपने फ़ज़ल से उनको और ज़्यादा देता है। रहे इंकार करने वाले, तो उनके लिए दर्दनक सजा है
عَرَبِي۞ وَلَو بَسَطَ اللَّهُ الرِّزقَ لِعِبادِهِ لَبَغَوا فِي الأَرضِ وَلٰكِن يُنَزِّلُ بِقَدَرٍ ما يَشاءُ ۚ إِنَّهُ بِعِبادِهِ خَبيرٌ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि अल्लाह अपने (सब) बंदों के लिए रोज़ी कुशादा कर देता, तो वे धरती में सरकशी करते। परंतु वह एक अनुमान से उतारता है, जितना चाहता है। निश्चय वह अपने बंदों से भली-भाँति अवगत, भली-भाँति देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Agar Allah apne sab bandon(servants) ko khula rizq de deta to woh zameen mein sarkashi ka toofaan barpa kar detey, Magar woh ek hisaab se jitna chahta hai naazil karta hai, yaqeenan woh apne bandon se ba khabar hai aur un par nigaah rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar Allah Taalaa apnay (sab) bandon ki rozi faraakh ker deta to woh zamin mein fasad barpa ker detay lekin woh andazay kay sath jo kuch chahata hai nazil farmata hai woh apnay bandon say poora khabardar hai aur khoob dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर अल्लाह अपने सब बंदों (नौकरों) को खुला रिज्क दे देता तो वो ज़मीन में सरकशी का तूफ़ान बरपा कर देता, मगर वो एक हिसाब से जितना चाहता है नाज़िल करता है, यकीनन वो अपना बंदों से बा खबर है और उन पर निगाह रखता है
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي يُنَزِّلُ الغَيثَ مِن بَعدِ ما قَنَطوا وَيَنشُرُ رَحمَتَهُ ۚ وَهُوَ الوَلِيُّ الحَميدُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वही है जो बारिश बरसाता है, इसके बाद कि वे निराश हो चुके होते हैं और अपनी दया फैला देता है और वही संरक्षक, सराहनीय है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jo logon ke mayous ho janey ke baad meh (rain) barsata hai aur apni rehmat phaila deta hai, aur wahi qaabil e taareef wali hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wohi hai jo logon kay na-umeed hojaney kay bad barish barsata hai aur apni rehmat phela deta hai. Wohi hai kaar saaz aur qabil-e-hamd-o-sana
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जो लोगों के मयौस हो जाने के बाद में (बारिश) बरसात है और अपनी रहमत फैला देता है, और वही काबिल ए तारीफ वाली है
عَرَبِيوَمِن آياتِهِ خَلقُ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَما بَثَّ فيهِما مِن دابَّةٍ ۚ وَهُوَ عَلىٰ جَمعِهِم إِذا يَشاءُ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसकी निशानियों में से आकाशों और धरती का पैदा करना है और वे प्राणी जो उसने उन दोनों में फैला रखे हैं, और वह उन्हें इकट्ठा करने में जब चाहे पूर्ण सक्षम है।
Roman Urdu (Maududi)Uski nishaniyon mein se hai yeh zameen aur aasmaano ki paidaish, aur yeh jaandaar makhlooqat jo usne dono jagah phayla rakkhi hain. Woh jab chahey inhein ikattha kar sakta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss ki nishaniyon mein say aasmano aur zamin ki pedaeesh hai aur inn mein jandaron ka phelana hai. Woh iss per bhi qadir hai kay jab chahye unhen jama ker day
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी निशानियों में से है ये ज़मीन और आसमान की पैदाइश, और ये जानदार मखलूकत जो उसने दोनों जगह फैला रखा है। वो जब चाहे इन्हें इकठ्ठा कर सकता है
عَرَبِيوَما أَصابَكُم مِن مُصيبَةٍ فَبِما كَسَبَت أَيديكُم وَيَعفو عَن كَثيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो भी विपत्ति तुम्हें पहुँची, वह उसके कारण है जो तुम्हारे हाथों ने कमाया। तथा वह बहुत-सी चीज़ों को क्षमा कर देता है।
Roman Urdu (Maududi)Tumpar jo musibat bhi aayi hai, tumhare apne haathon ki kamayi se aayi hai, aur bahut se kasooron se woh waise hi darguzar kar jaata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhen jo kuch museebaten phonchti hai woh tumharay apnay hathon kay kartoot ka badla hai aur woh to boht si baton say darguzar farma deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्पर जो मुसीबत भी आई है, तुम्हारे अपने हाथों की कमाई से आई है, और बहुत से कसूरों से वो वैसे ही इकठ्ठा कर जाता है
عَرَبِيوَما أَنتُم بِمُعجِزينَ فِي الأَرضِ ۖ وَما لَكُم مِن دونِ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلا نَصيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम धरती में (अल्लाह को) विवश करने वाले नहीं हो और न अल्लाह के सिवा तुम्हारा कोई संरक्षक है और न कोई सहायक।
Roman Urdu (Maududi)Tum zameen mein apne khuda ko aajiz (frustrate) kardene waley nahin ho, aur Allah ke muqable mein tum koi haami o naasir (protector or helper) nahin rakhte
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum humen zamin mein aajiz kerney walay nahi ho tumharay liye siwaye Allah Taalaa kay na koi kaar saaz hai na madadgar
Devnagri Urdu (Maududi)तुम ज़मीन में अपने खुदा को आजिज (निराश) करदेने वाले नहीं हो, और अल्लाह के मुकाबले में तुम कोई हमी ओ नासिर (रक्षक या सहायक) नहीं रखते
عَرَبِيوَمِن آياتِهِ الجَوارِ فِي البَحرِ كَالأَعلامِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसकी निशानियों में से समुद्र में चलने वाले जहाज़ हैं, जो पहाड़ों के समान हैं।
Roman Urdu (Maududi)Uski nishaniyon mein se hain yeh jahaz (ships) jo samandar mein pahadon ki tarah nazar aate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur darya mein chalney wali paharon jaisi kashtiyan uss ki nishaniyon mein say hain
Devnagri Urdu (Maududi)उसके निशानियों में से हैं ये जहाज (जहाज) जो समंदर में पहाड़ों की तरह नजर आते हैं
عَرَبِيإِن يَشَأ يُسكِنِ الرّيحَ فَيَظلَلنَ رَواكِدَ عَلىٰ ظَهرِهِ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِكُلِّ صَبّارٍ شَكورٍ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि वह चाहे तो वायु को ठहरा दे, तो वे उसकी सतह पर खड़े रह जाएँ। निःसंदेह इसमें हर ऐसे व्यक्ति के लिए निश्चय कई निशानियाँ हैं जो बहुत धैर्यवान, बड़ा कृतज्ञ है।
Roman Urdu (Maududi)Allah jab chahey hawa ko saakin (motionless) karde aur yeh samandar ki peeth (back) par khade reh jayein. Ismein badi nishaniyan hain har us shaks ke liye jo kamal darja sabr o shukar karne wala ho
Roman Urdu (Junagarhi)Agar woh chahye to hawa band kerday aur yeh kashtiyan samnadaron per ruki reh jayen. Yaqeenan iss mein jer sabar kerney walay shukar guzar kay liye nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह जब चाहे हवा को साकिन (गतिहीन) करदे और ये समंदर की पीठ (पीछे) पर खड़े रह जाएं। इसमें बड़ी निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो कमाल दर्ज सब्र ओ शुक्र करने वाला हो
عَرَبِيأَو يوبِقهُنَّ بِما كَسَبوا وَيَعفُ عَن كَثيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)या वह उन्हें उसके कारण विनष्ट कर दे जो उन्होंने कमाया और वह बहुत-से पापों को क्षमा कर देता है।
Roman Urdu (Maududi)Ya (unpar sawar honay walon ke) bahut se gunahon se dar guzar karte huey unke chandh hi kartooton ki padash mein unhein dubo (drown) de
Roman Urdu (Junagarhi)Ya enhen inn kay kartootton kay baees tabah kerday woh to boht si khataon say darguzar farmaya kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)या (अनपार सवार होने वालों के) बहुत से गुनाहों से दर गुजर करते हुए उनके चांद ही कार्टूनों की दुनिया में उन्हें डुबो (डूब) दे
عَرَبِيوَيَعلَمَ الَّذينَ يُجادِلونَ في آياتِنا ما لَهُم مِن مَحيصٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे लोग जान लें, जो हमारी आयतों में झगड़ते हैं कि उनके लिए भागने का कोई स्थान नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Aur us waqt hamari aayat mein jhagade karne walon ko pata chal jaaye ke unke liye koi jaaye panaah nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur takay jo log humari nishaniyon mein jhagartay hain woh maloom kerlen kay unn kay liye chutkara nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और हम वक्त हमारी आयत में झगड़े करने वालों को पता चल जाए के उनके लिए कोई जाए पनाह नहीं है
عَرَبِيفَما أوتيتُم مِن شَيءٍ فَمَتاعُ الحَياةِ الدُّنيا ۖ وَما عِندَ اللَّهِ خَيرٌ وَأَبقىٰ لِلَّذينَ آمَنوا وَعَلىٰ رَبِّهِم يَتَوَكَّلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हें जो चीज़ भी दी गई है, वह सांसारिक जीवन का सामान है, तथा जो कुछ अल्लाह के पास है, वह उत्तम और स्थायी है, उन लोगों के लिए जो अल्लाह पर ईमान लाए तथा केवल अपने पालनहार पर भरोसा रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo kuch bhi tum logon ko diya gaya hai woh mehaz duniya ki chand roza zindagi ka sar o saaman hai, aur jo kuch Allah ke haan hai woh behtar bhi hai aur payedar bhi. Woh un logon ke liye hai jo imaan laye hain aur apne Rubb par bharosa karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)To tumhen jo kuch diya gaya hai woh zindaganiy-e-duniya ka kuch yun hi sa asbab hai aur Allah kay pass jo hai woh iss say ba-darja behtar aur payedaar hai woh unn kay liye hai jo eman laye aur sirf apnay rab hi per bharosa rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो कुछ भी तुम लोगों को दिया गया है वो मेहज़ दुनिया की चंद रोजा जिंदगी का सर ओ सामान है, और जो कुछ अल्लाह के हान है वो बेहतर भी है और भुगतान भी। वो उन लोगों के लिए है जो ईमान लाए हैं और अपने रुब पर भरोसा करते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ يَجتَنِبونَ كَبائِرَ الإِثمِ وَالفَواحِشَ وَإِذا ما غَضِبوا هُم يَغفِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे लोग जो बड़े पापों एवं निर्लज्जता के कामों से बचते हैं और जब भी गुस्सा आए तो माफ कर देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo badey badey gunahon aur be hayayi ke kaamon se parheiz karte hain aur agar gussa aa jaye to darguzar kar jatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kabeerah gunahon say aur be-hayaeeon say bachtay hain aur gussay kay waqt (bhi) maaf ker detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيوَالَّذينَ استَجابوا لِرَبِّهِم وَأَقامُوا الصَّلاةَ وَأَمرُهُم شورىٰ بَينَهُم وَمِمّا رَزَقناهُم يُنفِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन लोगों ने अपने रब का हुक्म माना और नमाज़ क़ायम की और उनका काम आपस में परामर्श करना है और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से ख़र्च करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo apne Rubb ka hukum maante hain, namaz qayam karte hain, apne maamlaat aapas ke mashware se chalate hain, humne jo kuch bhi rizq unhein diya hai us mein se kharch karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apnay rab kay farman ko qabool kertay hain aur unn ka (her) kaam aapas kay mashwaray say hota hai aur jo hum ney unhen dey rakha hai uss mein say (humaray naam per) detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيوَالَّذينَ إِذا أَصابَهُمُ البَغيُ هُم يَنتَصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे लोग कि जब उनपर अत्याचार होता है, तो वे बदला लेते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab unpar zyadati ki jaati hai to uska muqaabla karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab unn per zulm-(o-ziyadti) hoto woh sirf badla ley letay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जब अनपर ज्यादा की जाती है तो उसका मुकाबला करते हैं
عَرَبِيوَجَزاءُ سَيِّئَةٍ سَيِّئَةٌ مِثلُها ۖ فَمَن عَفا وَأَصلَحَ فَأَجرُهُ عَلَى اللَّهِ ۚ إِنَّهُ لا يُحِبُّ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और किसी बुराई का बदला उसी जैसी बुराई है। फिर जो क्षमा कर दे तथा सुधार कर ले, तो उसका प्रतिफल अल्लाह के ज़िम्मे है। निःसंदेह वह अत्याचारियों से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Burayi ka badla waisi hi burayi hai, phir jo koi maaf karde aur islaah karey uska ajar Allah ke zimme hai. Allah zaalimon ko pasand nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Aur baraee ka badla ussi jaisi buraee hai aur jo maaf ker dayaur islah kerley uss ka ajar Allah kay zimay hai (fil-waqey) Allah Taalaa zalimon say mohabbat nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)बुरे का बदला वैसी ही बुरा है, फिर जो कोई माफ़ करे और इस्लाह करे उसका अजर अल्लाह के ज़िम्मे है। अल्लाह ज़ालिमों को पसंद नहीं करता
عَرَبِيوَلَمَنِ انتَصَرَ بَعدَ ظُلمِهِ فَأُولٰئِكَ ما عَلَيهِم مِن سَبيلٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो अपने ऊपर अत्याचार होने के पश्चात् बदला ले ले, तो ये वे लोग हैं जिनपर कोई दोष नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log zulm honay ke baad badla lein unko malamat nahin ki ja sakti
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo shaks apnay mazloom honay kay baad (barabar ka) badla ley ley to aisay logon per (ilzam ka) koi raasta nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग ज़ुल्म होने के बाद बदला लें उनको मलामत नहीं कि जा सकती
عَرَبِيإِنَّمَا السَّبيلُ عَلَى الَّذينَ يَظلِمونَ النّاسَ وَيَبغونَ فِي الأَرضِ بِغَيرِ الحَقِّ ۚ أُولٰئِكَ لَهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)दोष तो केवल उन्हीं पर है, जो लोगों पर अत्याचार करते हैं और धरती पर बिना अधिकार के सरकशी करते हैं। यही लोग हैं जिनके लिए कष्टदायक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Malamat ke mustahiq to woh hain jo dusron par zulm karte hain aur zameen mein na haqq zyadatiyan karte hain. Aisey logon ke liye dardnaak azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh raasta sirf unn logon per hai jo khud doosron per zulm keren aur zamin mein na haq fasad kertay phiren yehi log hain jinn kay liye dard-naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)मलामत के मुस्तहिक तो वो हैं जो दूसरों पर ज़ुल्म करते हैं और ज़मीन में ना हक ज़्यादा करते हैं। ऐसे लोगों के लिए दर्दनक अज़ाब है
عَرَبِيوَلَمَن صَبَرَ وَغَفَرَ إِنَّ ذٰلِكَ لَمِن عَزمِ الأُمورِ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह जो सब्र करे तथा क्षमा कर दे, तो निःसदंहे यह निश्चय बड़े साहस के कामों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jo shaks sabr se kaam le aur darguzar karey, to yeh badi ulul azmi ke kaamon mein se hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo shaks sabar kerley aur maaf kerdey yaqeenan yeh bari himmat kay kaamon mein say (aik kaam) hai
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जो शक्स सब्र से काम ले और दरगुज़ार करे, तो ये बदी उल आज़मी के कामों में से है
عَرَبِيوَمَن يُضلِلِ اللَّهُ فَما لَهُ مِن وَلِيٍّ مِن بَعدِهِ ۗ وَتَرَى الظّالِمينَ لَمّا رَأَوُا العَذابَ يَقولونَ هَل إِلىٰ مَرَدٍّ مِن سَبيلٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिसे अल्लाह गुमराह कर दे, तो उसके बाद उसका कोई सहायक नहीं। तथा आप अत्याचारियों को देखेंगे कि जब वे यातना देखेंगे, तो कहेंगे : क्या वापसी का कोई रास्ता है?
Roman Urdu (Maududi)Jis ko Allah hi gumraahi mein phenk de us ka koi sambhaalne wala Allah ke baad nahin hai. Tum dekho ge yeh zaalim jab azaab dekhenge to kahenge ab palatne ki bhi koi sabeel hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jissay Allah Taalaa behka dey uss ka iss kay baad koi chara saaz nahi aur tu dekhay ga kay zalim log azab ko dekh ker keh rahen hongay kay kiya wapis janey ki koi raah hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिस को अल्लाह ही गुमराही में फेंक दे हमें का कोई संभालने वाला अल्लाह के बाद नहीं है। तुम देखो गी ये जालिम जब अज़ाब देखेंगे तो कहेंगे अब पलटने की भी कोई सबील है
عَرَبِيوَتَراهُم يُعرَضونَ عَلَيها خاشِعينَ مِنَ الذُّلِّ يَنظُرونَ مِن طَرفٍ خَفِيٍّ ۗ وَقالَ الَّذينَ آمَنوا إِنَّ الخاسِرينَ الَّذينَ خَسِروا أَنفُسَهُم وَأَهليهِم يَومَ القِيامَةِ ۗ أَلا إِنَّ الظّالِمينَ في عَذابٍ مُقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप उन्हें देखेंगे कि वे उस (आग) पर इस दशा में पेश किए जाएँगे कि अपमान से झुके हुए, छिपी आँखों से देख रहे होंगे। तथा ईमान वाले कहेंगे : वास्तव में, असल घाटा उठाने वाले वही लोग हैं, जिन्होंने क़ियामत के दिन अपने आपको और अपने परिवार को घाटे में डाल दिया। सुन लो! निःसंदेह अत्याचारी लोग स्थायी यातना में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur tum dekhoge ke yeh jahannum ke saamne jab laye jayenge to zillat ke maare jhuke jaa rahey hongey aur usko nazar bacha bacha kar kan aankiyon (covert glance) se dekhenge.Us waqt woh log jo iman laye thay kahenge ke waqai asal ziyan kaar ([true] losers) wahi hain jinhon ne aaj qayamat ke din apne aapko aur apne mutaaliqin ko khasare mein daal diya. Khabardar raho, zaalim log mustaqil azaab mein hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tu enhen dekhay ga kay woh (jahannum kay) samney la-kharay kiyey jayen gay maray zillat kay jhukay jarahen hongay aur kan-ankhiyon say dekh rahey hongay eman walay saaf kahen gay kay haqeeqi ziyan kaar woh hain jinhon ney aaj qayamat kay din apnay aap ko aur apnay ghar walon ko nuksan mein dal diya. Yaad rakho kay yaqeenan zalim log daaeemi azab mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम देखोगे के ये जहन्नुम के सामने जब ले जायेंगे तो ज़िल्लत के मारे झुके जा रहे होंगे और उसको नज़र बचा कर कान लगाओगे (गुप्त नज़र) से देखेंगे। हमें वक्त वो लोग जो ईमान लाए थे कहेंगे के वाकाई असल जियान कर ([सच्चे] हारे हुए) वही हैं जिन्हों ने आज कयामत के दिन अपना आपको और अपने मुतालिकिन को खसरे में डाल दिया। ख़बरदार रहो, ज़ालिम लोग मुस्तक़िल अज़ाब में होंगे
عَرَبِيوَما كانَ لَهُم مِن أَولِياءَ يَنصُرونَهُم مِن دونِ اللَّهِ ۗ وَمَن يُضلِلِ اللَّهُ فَما لَهُ مِن سَبيلٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके कोई सहायक नहीं होंगे, जो अल्लाह के मुक़ाबले में उनकी सहायता करें। और जिसे अल्लाह राह से भटका दे, फिर उसके लिए कोई मार्ग नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Aur unke koi haami o sarparast na hongey jo Allah ke muqaable mein unki madad ko aayein. Jisey Allah gumraahi mein phenk de uske liye bachao ki koi sabeel nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay koi madadgar nahi jo Allah Taalaa say alag unn ki madad ker saken aur jissay Allah gumrah kerdey uss kay liye koi raasta hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और उनके कोई हमी ओ सरपरस्त न होंगे जो अल्लाह के मुक़ाबले में उनकी मदद को आएंगे। जिसे अल्लाह गुमराही में फेंक दे उसे बचाने के लिए कोई सबील नहीं
عَرَبِياستَجيبوا لِرَبِّكُم مِن قَبلِ أَن يَأتِيَ يَومٌ لا مَرَدَّ لَهُ مِنَ اللَّهِ ۚ ما لَكُم مِن مَلجَإٍ يَومَئِذٍ وَما لَكُم مِن نَكيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)अपने पालनहार का निमंत्रण स्वीकार करो, इससे पहले कि वह दिन आए, जिसे अल्लाह की ओर से टलना नहीं। उस दिन तुम्हारे लिए न कोई शरण स्थल होगा और न तुम्हारे लिए इनकार का कोई रास्ता होगा।
Roman Urdu (Maududi)Maan lo apne Rubb ki baat qabl iske ke woh din aaye jiske talne ki koi surat Allah ki taraf se nahin hai. Us din tumhare liye koi jaaye panaah na hogi aur na koi tumhare haal ko badalne ki koshish karne wala hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Apnay rab ka hukum maan lo iss say pehlay kay Allah ki janib say woh din aajaye jiss ka hut jana na-mumkin hai tumhen uss roz na koi panah ki jagah milay gi na chup ker anjan bann janey ki
Devnagri Urdu (Maududi)मान लो अपने रब की बात कबूल इसके के वो दिन आए जिसको तलने की कोई सूरत अल्लाह की तरफ से नहीं है। हमारे दिन तुम्हारे लिए कोई जाए पनाह ना होगी और ना कोई तुम्हारे हाल को बदलने की कोशिश करने वाला होगा
عَرَبِيفَإِن أَعرَضوا فَما أَرسَلناكَ عَلَيهِم حَفيظًا ۖ إِن عَلَيكَ إِلَّا البَلاغُ ۗ وَإِنّا إِذا أَذَقنَا الإِنسانَ مِنّا رَحمَةً فَرِحَ بِها ۖ وَإِن تُصِبهُم سَيِّئَةٌ بِما قَدَّمَت أَيديهِم فَإِنَّ الإِنسانَ كَفورٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि वे मुँह फेर लें, तो हमने आपको उनपर कोई संरक्षक बनाकर नहीं भेजा। आपका दायित्व तो केवल (संदेश) पहुँचा देना है। और निःसंदेह जब हम मनुष्य को अपनी ओर से कोई दया चखाते हैं, तो वह उससे खुश हो जाता है, और यदि उनपर उसके कारण कोई विपत्ति आ पड़ती है, जो उनके हाथों ने आगे भेजा है, तो निःसंदेह मनुष्य बड़ा नाशुक्रा है।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar yeh log mooh moadte hain to aey Nabi humne tumko unpar nigehbaan bana kar to nahin bheja hai. Tumpar to sirf baat pahuncha dene ki zimmedari hai.Insaan ka haal yeh hai ke jab hum usey apni rehmat ka maza chakhate hain to uspar phool jata hai. Aur agar uske apne haathon ka kiya dhara kisi musibat ki shakal mein uspar ulat padta hai to sakht na shukra ban jata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar yeh mun pher len to hum ney aap ko inn per nigheybaan bana ker nahi bheja aap kay zimay to sirf paygham phoncha dena hai hum jab kabhi insan ko apni meharbani ka maza chakhatay hain to woh iss per itra jata hai aur agar unhen unn kay aemaal ki waja say koi museebat phonchti hai to be-shak insan bara hi na shukra hai
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर ये लोग मुंह मोड़ते हैं तो ऐ नबी हमें तुमको अनपर निगाहें बना कर तो नहीं भेजा जाता है। तुमपर तो सिर्फ बात पाहुंचा देने की जिम्मेदारी है। इंसान का हाल ये है कि जब हम उसे अपनी रहमत का मजा चखाते हैं तो उसपर फूल जाता है। और अगर उसके अपने हाथों का किया धरा किसी मुसीबत की शक्ल में उसपर उलट पड़ता है तो सच में शुक्र बन जाता है
عَرَبِيلِلَّهِ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ يَخلُقُ ما يَشاءُ ۚ يَهَبُ لِمَن يَشاءُ إِناثًا وَيَهَبُ لِمَن يَشاءُ الذُّكورَ
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हिन्दी (Al-Omari)आकाशों तथा धरती का राज्य अल्लाह ही का है। वह जो चाहता है पैदा करता है, जिसे चाहता है बेटियाँ देता है और जिसे चाहता है बेटे देता है।
Roman Urdu (Maududi)Allah zameen aur aasmaano ki baadshahi ka maalik hai. Jo kuch chahta hai paida karta hai. Jisey chahta hai ladkiyan deta hai, jisey chahta hai ladke deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmano ki aur zamin ki saltanat Allah Taalaa hi kay liye hai woh jo chahata hai peda kerta hai jiss ko chahata hai betyian deta hai aur jissay chahata hai betay deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ज़मीन और आसमान की बादशाही का मालिक है। जो कुछ चाहता है भुगतान करता है। जिसे चाहता है लड़कियां, जैसा चाहता है लड़के देता है
عَرَبِيأَو يُزَوِّجُهُم ذُكرانًا وَإِناثًا ۖ وَيَجعَلُ مَن يَشاءُ عَقيمًا ۚ إِنَّهُ عَليمٌ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)या उन्हें बेटे-बेटियाँ मिलाकर देता है और जिसे चाहता है बाँझ कर देता है। निश्चय ही वह सब कुछ जानने वाला, हर चीज़ की शक्ति रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jisey chahta hai ladke aur ladkiyan mila-jula kar deta hai aur jisey chahta hai baanjh (barren) kardeta hai. Woh sab kuch jaanta hai aur har cheez par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ya enhen jama ker deta hai betay bhi aur betyian bhi aur jissay chahye baanjh ker deta hai woh baray ilm wala aur kamil qudrat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिसे चाहता है लड़के और लड़कियां मिला-जुला कर देता है और जिसे चाहता है बांझ (बंजर) कर देता है। वो सब कुछ जानता है और हर चीज़ पर कादिर है
عَرَبِي۞ وَما كانَ لِبَشَرٍ أَن يُكَلِّمَهُ اللَّهُ إِلّا وَحيًا أَو مِن وَراءِ حِجابٍ أَو يُرسِلَ رَسولًا فَيوحِيَ بِإِذنِهِ ما يَشاءُ ۚ إِنَّهُ عَلِيٌّ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और किसी मनुष्य के लिए संभव नहीं कि अल्लाह उससे बात करे, परंतु वह़्य के द्वारा, अथवा पर्दे के पीछे से, अथवा यह कि कोई दूत (फ़रिश्ता) भेजे, फिर वह उसकी अनुमति से वह़्य करे, जो कुछ वह चाहे। निःसंदेह वह सबसे ऊँचा, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Kisi bashar (Insaan) ka yeh muqaam nahin hai ke Allah us se ru-baru baat karey, uski baat ya to wahee (isharey/ revelation) ke taur par hoti hai, ya purday ke piche se, ya phir woh koi paigaambar (farishta) bhejta hai aur woh uske hukum se jo kuch woh chahta hai, wahi karta hai. Woh bartar aur Hakeem(wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Na-mumkin hai kay kissi banday say Allah Taalaa kalam keray magar wahee kay zariyey ya parday kay peechay say ya kissi farishtay ko bhejay aur woh Allah ka hukum say jo woh chahaye wahee keray be-shak woh bartar hai hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)किसी बशर (इंसान) का ये मुकाम नहीं है कि अल्लाह हमसे रू-बरू बात करे, उसकी बात या तो वही (इशारे/रहस्योद्घाटन) के तौर पर होती है, या दिन के पीछे से, या फिर वो कोई पैगम्बर (फ़रिश्ता) भेजता है और वो उसके हुकुम से जो कुछ वो चाहता है, वही करता है। वो बारतार और हकीम (बुद्धिमान) है
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ أَوحَينا إِلَيكَ روحًا مِن أَمرِنا ۚ ما كُنتَ تَدري مَا الكِتابُ وَلَا الإيمانُ وَلٰكِن جَعَلناهُ نورًا نَهدي بِهِ مَن نَشاءُ مِن عِبادِنا ۚ وَإِنَّكَ لَتَهدي إِلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और इसी प्रकार हमने आपकी ओर अपने आदेश से एक रूह़ (क़ुरआन) की वह़्य की। आप नहीं जानते थे कि पुस्तक क्या है और न यह कि ईमान क्या है। परंतु हमने उसे एक ऐसा प्रकाश बनाया दिया है, जिसके द्वारा हम अपने बंदों में से जिसे चाहते हैं, मार्ग दिखाते हैं। और निःसंदेह आप सीधी राह की ओर मार्गदर्शन करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur isi tarah (aey Muhammad s.a.s) humne apne hukum se ek rooh tumhari tarf wahee ki hai. Tumhein kuch pata na tha ke kitaab kya hoti hai aur Imaan kya hota hai, Magar us rooh ko humne ek roshni bana diya jissey hum raah dikhate hain apne bandon mein se jisey chahte hain. Yaqeenan tum seedhey raaste ki taraf rehnumayi kar rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss tarah hum ney aap ki taraf apnay hukum say rooh ko utara hai aap iss say pehlay yeh bhi nahi jantay thay kay kitab aur eman kiya cheez hai? Lekin hum nay issay noor banaya iss kay zariyey say apnay bandon mein say jissay chahatay hain hidayat detay hain be-shak aap raah-e-raast ki rehnumaee ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)और इसी तरह (ऐ मुहम्मद स.स.) हमने अपने हुकुम से एक रूह तुम्हारी तरफ वही की है। तुम्हें कुछ पता नहीं था कि किताब क्या होती है और ईमान क्या होता है, मगर हमें रूह को हमने एक रोशनी बना दिया जिसे हम राह दिखाते हैं अपने बंदों में से जिसे चाहते हैं। यकीनन तुम सीधे रास्ते की तरफ रहनुमाई कर रहे हो
عَرَبِيصِراطِ اللَّهِ الَّذي لَهُ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۗ أَلا إِلَى اللَّهِ تَصيرُ الأُمورُ
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हिन्दी (Al-Omari)उस अल्लाह की राह की ओर कि जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, उसी का है। सुनो! सभी मामले अल्लाह ही की ओर लौटते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Us khuda ke raaste ki taraf jo zameen aur aasmaano ki har cheez ka maalik hai. khabardar raho, saarey muaamlaat Allah hi ki taraf rujoo karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Uss Allah ki raah ki jiss ki milkiyat mein aasmano aur zamin ki her cheez hai. Aagah raho sab kaam Allah Taalaa hi ki taraf lot-tay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हमें खुदा के रास्ते की तरफ जो जमीन और आसमान की हर चीज का मालिक है। ख़बरदार रहो, सारे मुआमलात अल्लाह ही की तरफ रूजू करते हैं
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Surah 42: Ash-Shura (Counsel)

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Surah 42: Ash-Shura (Counsel)

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Surah 42: Ash-Shura (Counsel)

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Surah 42: Ash-Shura (Counsel)

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Surah 42: Ash-Shura (Counsel)

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Surah 43: Az-Zukhruf (Gold)

Meccan🕐 Revelation #63📜 89 Verses🕮 Juz 1
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Surah 43: Az-Zukhruf (Gold)

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عَرَبِيحم
हिन्दी (Al-Omari)ह़ा, मीम।
Roman Urdu (Maududi)Haa Meem
Roman Urdu (Junagarhi)Haa-meem
Devnagri Urdu (Maududi)हा मीम
عَرَبِيوَالكِتابِ المُبينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क़सम है स्पष्ट करने वाली पुस्तक की।
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai is wazeh kitaab ki
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai iss wazeh kitab ki
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है इस वाज़ेह किताब की
عَرَبِيإِنّا جَعَلناهُ قُرآنًا عَرَبِيًّا لَعَلَّكُم تَعقِلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने इसे अरबी क़ुरआन बनाया, ताकि तुम समझो।
Roman Urdu (Maududi)Ke humne isey arabi zubaan ka Quran banaya hai taa-ke tumlog isey samjho
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney iss ko arabi zaban ka quran banaya hai kay tum samjh lo
Devnagri Urdu (Maududi)के हमने इसे अरबी ज़ुबान का कुरान बनाया है ता-के तुमलोग इसे समझो
عَرَبِيوَإِنَّهُ في أُمِّ الكِتابِ لَدَينا لَعَلِيٌّ حَكيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह वह हमारे पास मूल पुस्तक में निश्चय बड़ा उच्च तथा पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur dar haqeeqat yeh ummul kitaab mein sabt(transcribed) hai, hamare haan badi buland maratba aur hikmat se labrez kitaab
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan yeh loh-e-mehfooz mein hai aur humaray nazdeek buland martba hikmat wali hai
Devnagri Urdu (Maududi)और दर हकीकत ये उम्मुल किताब में सब्त (प्रतिलिपिबद्ध) है, हमारे हां बड़ी बुलंद मौत और हिकमत से लबरेज किताब
عَرَبِيأَفَنَضرِبُ عَنكُمُ الذِّكرَ صَفحًا أَن كُنتُم قَومًا مُسرِفينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो क्या हम तुमसे इस नसीहत को फेर दें, उपेक्षा करते हुए, इस कारण कि तुम हद से बढ़ने वाले लोग हो?
Roman Urdu (Maududi)Ab kya hum tumse bezaar hokar yeh dars-e-naseehat tumhare yahan bhejna chodh dein sirf isliye tum hadd se guzare huey log ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya hum iss naseehat ko tum say iss bina per hata len kay tum hadd say guzar janey walay ho
Devnagri Urdu (Maududi)अब क्या हम तुमसे बेज़ार होकर ये दर्स-ए-नसीहत तुम्हारे यहां भेजना छोड़ दें सिर्फ इसलिए तुम हद से गुजारे हुए लोग हो
عَرَبِيوَكَم أَرسَلنا مِن نَبِيٍّ فِي الأَوَّلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और कितने ही नबी हमने पहले लोगों में भेजे।
Roman Urdu (Maududi)Pehle guzri hui qaumon mein bhi baarha (baar baar) humne Nabi bheje hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney aglay logon mein bhi kitney hi nabi bhejay
Devnagri Urdu (Maududi)पहले गुज़री हुई क़ौमों में भी बारहा (बार-बार) हमने नबी भेजे हैं
عَرَبِيوَما يَأتيهِم مِن نَبِيٍّ إِلّا كانوا بِهِ يَستَهزِئونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उनके पास कोई नबी नहीं आता था, परंतु वे उसका उपहास करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Kabhi aisa nahin hua ke koi Nabi unke haan (yahan) aaya ho aur unhon ne uska mazak na udaya ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jo nabi unn kay pass aaya unhon ney uss ka mazak uraya
Devnagri Urdu (Maududi)कभी ऐसा नहीं हुआ के कोई नबी उनके हां (यहां) आया हो और उन्हें ने उसका मज़ाक न उदय हो
عَرَبِيفَأَهلَكنا أَشَدَّ مِنهُم بَطشًا وَمَضىٰ مَثَلُ الأَوَّلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो हमने इनसे कहीं अधिक बलशाली लोगों को विनष्ट कर दिया तथा अगले लोगों का उदाहरण गुज़र चुका।
Roman Urdu (Maududi)Phir jo log insey badarja zyada taaqatwar thay unhein humne halak kardiya. Pichli qaumon ki misalien guzar chuki hain
Roman Urdu (Junagarhi)Pus hum ney inn say ziyadah zor aawaron ko tabah ker dala aur aglon ki misal guzar chuki hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जो लोग इनसे बदरजा ज़्यादा ताक़तवार थे उन्हें हमने हलक करदिया. पिछली क़ौमों की मिसालें गुज़र चुकी हैं
عَرَبِيوَلَئِن سَأَلتَهُم مَن خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ لَيَقولُنَّ خَلَقَهُنَّ العَزيزُ العَليمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह यदि आप उनसे पूछें कि आकाशों तथा धरती को किसने पैदा किया? तो निश्चय अवश्य कहेंगे कि उन्हें सब पर प्रभुत्वशाली, सब कुछ जानने वाले ने पैदा किया है।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum in logon se pucho ke zameen aur aasmaano ko kisne paida kiya hai to yeh khud kahenge ke inhein usi zabardast ilmi hasti ne paida kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar aap inn say daryaft keren kay aasmano aur zamin ko kiss ney peda kiya to yaqeenan inn ka jaeab yehi hoga kay unhen ghalib-o-dana (Allah) ney hi peda kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम लोगों से पूछो के ज़मीन और आसमान को किसने पाया है तो ये खुद कहेंगे के उसमें उसकी ज़बरदस्त इल्मी हस्ती ने चुकाया है
عَرَبِيالَّذي جَعَلَ لَكُمُ الأَرضَ مَهدًا وَجَعَلَ لَكُم فيها سُبُلًا لَعَلَّكُم تَهتَدونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह जिसने तुमहारे लिए धरती को समतल बनाया और उसमें तुम्हारे लिए मार्ग बनाए, ताकि तुम राह पा सको।
Roman Urdu (Maududi)Wahi na jisne tumhare liye is zameen ko gehwara (cradle) banaya aur ismein tumhari khatir raaste bana diye taa-ke tum apni manzil e maqsood ki raah paa sako
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi hai jiss ney tumharay liye zamin ko farash (bichona) banaya aur iss mein tumharay liye rastay ker diyey takay tum raah paa liya kero
Devnagri Urdu (Maududi)वही ना जिसने तुम्हारे लिए इस ज़मीन को गहवारा किया है (पालना) बनाया और इसमें तुम्हारी खातिर रास्ते बना दिए ता-के तुम अपनी मंजिल ए मकसूद की राह पा सको
عَرَبِيوَالَّذي نَزَّلَ مِنَ السَّماءِ ماءً بِقَدَرٍ فَأَنشَرنا بِهِ بَلدَةً مَيتًا ۚ كَذٰلِكَ تُخرَجونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा वह जिसने आकाश से एक विशेष मात्रा में जल उतारा। फिर हमने उसके द्वारा एक मुर्दा शहर को ज़िंदा कर दिया, इसी तरह तुम निकाले जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Jisne ek khaas miqdar mein aasman se paani utara aur uske zariye se murda (dead) zameen ko jila uthaya. Isi tarah ek roz tum zameen se baramad kiye jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney aasman say aik andazay kay mutabiq pani nazil farmaya pus hum ney iss say murah shehar ko zindah ker diya.issi tarah tum nikalay jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने एक खास मिकदर में आसमान से पानी उतारा और उसकी ज़रिये से मुर्दा (मृत) ज़मीन को जिला उठाया। इसी तरह एक रोज तुम जमीन से बारामद किए जाओगे
عَرَبِيوَالَّذي خَلَقَ الأَزواجَ كُلَّها وَجَعَلَ لَكُم مِنَ الفُلكِ وَالأَنعامِ ما تَركَبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा वह जिसने सब प्रकार के जोड़े पैदा किए तथा तुम्हारे लिए वे नौकाएँ एवं पशु बनाए, जिनपर तुम सवार होते हो।
Roman Urdu (Maududi)Wahi jisne yeh tamaam jodey (pairs) paida kiye, aur jisne tumhare liye kashtiyon (ships) aur jaanwaron ko sawari banaya taa-ke tum unki pusht (backs) par chadho
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ney tamam cheezon kay joray banaye aur tumharay liye kashtiyan banaeen aur chopaye janwar (peda kiyey) jinn per tum sawar hotay ho
Devnagri Urdu (Maududi)वही जिसने ये तमाम जोड़े (जोड़े) बनाए, और जिसने तुम्हारे लिए कश्तियां (जहाज) और जानवरों को सवारी बनाई ता-के तुम उनकी पुश (पीठ) पर चढ़ो
عَرَبِيلِتَستَووا عَلىٰ ظُهورِهِ ثُمَّ تَذكُروا نِعمَةَ رَبِّكُم إِذَا استَوَيتُم عَلَيهِ وَتَقولوا سُبحانَ الَّذي سَخَّرَ لَنا هٰذا وَما كُنّا لَهُ مُقرِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ताकि तुम उनकी पीठों पर जमकर बैठो, फिर अपने पालनहार की नेमत को याद करो जब उनपर जमकर बैठ जाओ और कहो : पवित्र है वह अल्लाह, जिसने इसे हमारे वश में कर दिया। हालाँकि हम इसे वश में करने वाले नहीं थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab unpar baitho (sit) to apne Rubb ka ehsan yaad karo aur kaho ke “paak hai woh jisne hamare liye in cheezon ko musakkhar(bas mein) kardiya warna hum unhein qaabu mein laane ki taaqat na rakhte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Takay tum inn ki peeth per jamm ker sawar hua kero phir apnay rab ki nemat ko yaad kero jab iss per theek thaak beth jaoaur kaho pak zaat hai uss ki jiss ney issay humaray bus mein ker diya halankay humen issay qaboo kerney ki taqat na thi
Devnagri Urdu (Maududi)और जब उन्पर बैठो (बैठो) तो अपने रब का एहसान याद करो और कहो के "पाक है वो जिसने हमारे लिए चीज़ों को मुस्कुराकर (बस में) करदिया वरना हम उन्हें काबू में लाने की ताक़त न रखते थे
عَرَبِيوَإِنّا إِلىٰ رَبِّنا لَمُنقَلِبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हम अपने पालनहार की ओर अवश्य लौटकर जाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur ek roz humein apne Rubb ki taraf palatna hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bil-yaqeen hum apnay rab ki taraf lot ker janey walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और एक रोज़ हमें अपने रब की तरफ पलटना है”
عَرَبِيوَجَعَلوا لَهُ مِن عِبادِهِ جُزءًا ۚ إِنَّ الإِنسانَ لَكَفورٌ مُبينٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने उसके बंदों में से कुछ को उसका अंश बना लिया। निःसंदेह मनुष्य खुला कृतघ्न (नाशुक्रा) है।
Roman Urdu (Maududi)(Yeh sab kuch jaante aur maante huey bhi) in logon ne uske bandon (servants) mein se baaz ko uska juz (part) bana daala, haqeeqat yeh hai ke Insaan khula ehsan faramosh hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur enhon ney Allah kay baaz bando ko uss ka juzz thera diya yaqeenan insan khulla na-shukra hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ये सब कुछ जानते और मानते हैं भी) लोगों ने उसके बंदों (नौकरों) में से बाज़ को उसका जुज (हिस्सा) बना डाला, हकीकत ये है के इंसान खुला एहसान फरामोश है
عَرَبِيأَمِ اتَّخَذَ مِمّا يَخلُقُ بَناتٍ وَأَصفاكُم بِالبَنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)या उसने उसमें से जिसे वह पैदा करता है अपने लिए पुत्रियाँ रख लीं और तुम्हें पुत्रों के लिए चुन लिया?
Roman Urdu (Maududi)Kya Allah ne apni makhlooq mein se apne liye betiyan intikhab (chose) ki aur tumhein beiton (sons) se nawaza
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya Allah Taalaa ney apni makhlooq mein say betiyan to khud rakh leen aur tumhen beton say nawaza
Devnagri Urdu (Maududi)क्या अल्लाह ने अपनी मखलूक में से अपने लिए बेटियां इंतिखाब (चुने हुए) की और तुम्हारे बेटों (बेटों) से नवाजा
عَرَبِيوَإِذا بُشِّرَ أَحَدُهُم بِما ضَرَبَ لِلرَّحمٰنِ مَثَلًا ظَلَّ وَجهُهُ مُسوَدًّا وَهُوَ كَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि जब उनमें से किसी को उस चीज़ की मंगल सूचना दी जाए, जिसकी उसने रहमान (परम दयावान्) के लिए मिसाल बयान की है, तो उसके मुँह पर कलौंस छा जाती है और वह शोक से भर जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur haal yeh hai ke jis aulad ko yeh log us khuda e Rehman ki taraf mansoob karte hain uski wiladat ka musda (tidings/news/khabar) jab khud in mein se kisi ko diya jata hai to uske mooh par siyahi(darkens) chaa jaati hai aur woh gham se bhar jaata hai
Roman Urdu (Junagarhi)(Halankay) inn mein say kissi ko jab uss cheez ki khabar di jaye jiss ki misal uss ney (Allah) rehman kay liye biyan ki hai to uss ka chehra siyah parr jata hai aur woh ghumgeen hojata hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हाल ये है कि जिस औलाद को ये लोग खुदा ए रहमान की तरफ मंसूब करते हैं उसकी विलादत का संदेश (खबर/समाचार/खबर) जब खुद में से किसी को दिया जाता है तो उसके मुहं पर सियाही छा जाती है और वो ग़म से भर जाता है
عَرَبِيأَوَمَن يُنَشَّأُ فِي الحِليَةِ وَهُوَ فِي الخِصامِ غَيرُ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और क्या वह (अल्लाह के लिए) है, जिसका पालन-पोषण आभूषण में किया जाता है तथा वह वाद-विवाद में खुलकर बात नहीं कर सकती?
Roman Urdu (Maududi)Kya Allah ke hisse mein woh aulad aayi jo zewaron (ornaments) mein paali jaati hai aur behas o hujjat mein apna mudda puri tarah wazeh bhi nahin kar sakti
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya (Allah ki aulad larkiyan hain) jo zewraat mein palen aur jhagray mein (apni baat) wazeh na ker saken
Devnagri Urdu (Maududi)क्या अल्लाह के हिसे में वो औलाद आई जो ज़ेवरों (गहने) में पाली जाती है और बेहस ओ हुज्जत में अपना मुद्दा पूरी तरह वाज़े भी नहीं कर सकती
عَرَبِيوَجَعَلُوا المَلائِكَةَ الَّذينَ هُم عِبادُ الرَّحمٰنِ إِناثًا ۚ أَشَهِدوا خَلقَهُم ۚ سَتُكتَبُ شَهادَتُهُم وَيُسأَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने फ़रिश्तों को, जो 'रहमान' के बंदे हैं, स्त्रियाँ क़रार दे लिया। क्या वे उनकी उत्पत्ति के समय उपस्थित थे? उनकी गवाही लिख ली जाएगी और उनसे पूछताछ की जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne farishton ko, jo khuda e Rehman ke khaas banday hain, auratein karar de liya. Kya unke jism ki saakht inhon ne dekhi hai? Inki gawahi likh li jayegi aur inhein iske jawab-dahi karni hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur enhon ney farishton ko jo rehman kay ibadat guzaar hain aurten qarar dey liya. Kiya unn ki pedaeesh kay moqay per yeh mojood thay? Inn ki yeh gawahee likh li jayegi aur inn say (iss cheez ki) baaz purs ki jayegi
Devnagri Urdu (Maududi)उन्होन ने फ़रिश्तों को, जो खुदा ए रहमान के खास बंदे हैं, औरतें करार दे लिया। क्या उनके जिस्म की सच्चाई इन्होनें देखी है? इनकी गवाही लिख ली जाएगी और इन्हें इसके जवाब-दही करनी होगी
عَرَبِيوَقالوا لَو شاءَ الرَّحمٰنُ ما عَبَدناهُم ۗ ما لَهُم بِذٰلِكَ مِن عِلمٍ ۖ إِن هُم إِلّا يَخرُصونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा : यदि 'रहमान' चाहता, तो हम उनकी इबादत न करते। उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं, वे तो केवल अटकलें दौड़ा रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh kehte hain “agar khuda-e-Rehman chahta (ke hum unki ibadat na karein) to hum kabhi unko na poojte” yeh is maamle ki haqeeqat ko qatai nahin jaante, mehaz teer tukkay ladate hain (are simply conjecturing /guess work)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kehtay hain Allah chahta to hum inn ki ibadat na kertay. Enhen iss ki kuch khabar nahi yeh to sirf atkal pichoo (jhoot baaten) kehtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये कहते हैं "अगर खुदा-ए-रहमान चाहता (के हम उनकी इबादत ना करें) तो हम कभी उनको ना पूजते" ये मामले की हकीकत को कतई नहीं जानते, महज़ तीर तुक्के लड़ते हैं (केवल अनुमान लगा रहे हैं/अनुमान लगा रहे हैं)
عَرَبِيأَم آتَيناهُم كِتابًا مِن قَبلِهِ فَهُم بِهِ مُستَمسِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या हमने उन्हें इससे पहले कोई पुस्तक प्रदान की है? तो वे उसे दृढ़ता से थामने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya humne issey pehle koi kitaab inko di thi jiski sanad [apne is malaika (farihste) parasti ke liye] yeh apne paas rakhte hon
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya hum ney enhen iss say pehlay koi (aur) kitab di hai jissay yeh mazboot thamay huyey hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हमने इसे पहले कोई किताब इनको दी थी जिसकी सनद [अपने इस मलाईका (फरिश्ते) परस्ती के लिए] ये अपने पास रखते हैं
عَرَبِيبَل قالوا إِنّا وَجَدنا آباءَنا عَلىٰ أُمَّةٍ وَإِنّا عَلىٰ آثارِهِم مُهتَدونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि उन्होंने कहा : निःसंदेह हमने अपने बाप-दादा को एक मार्ग पर पाया है और निःसंदेह हम उन्हीं के पदचिह्नों पर राह पाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Nahin, balke yeh kehte hain ke humne apne baap dada ko ek tarike par paya hai aur hum unhi ke nakshe qadam par chal rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)(nahi nahi) bulkay yeh to kehtay hain kay hum ney apnay baad dadon ko aik mazhab per paya aur hum inhi kay naqsh-e-qadam per chal ker raah yaafta hain
Devnagri Urdu (Maududi)नहीं, बल्के ये कहते हैं के हमने अपने बाप दादा को एक तारीख पर पाया है और हम उनको नक्शे कदम पर चल रहे हैं
عَرَبِيوَكَذٰلِكَ ما أَرسَلنا مِن قَبلِكَ في قَريَةٍ مِن نَذيرٍ إِلّا قالَ مُترَفوها إِنّا وَجَدنا آباءَنا عَلىٰ أُمَّةٍ وَإِنّا عَلىٰ آثارِهِم مُقتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इसी प्रकार, हमने आपसे पूर्व जिस बस्ती में भी कोई सावधान करने वाला भेजा, तो वहाँ के संपन्न लोगों ने यही कहा कि निःसंदेह हमने अपने बाप-दादा को एक रीति पर पाया और निःसंदेह हम उन्हीं के पद्चिह्नों का अनुसरण करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Isi tarah tumse pehle jis basti mein bhi humne koi nazeer(darane wala) bheja, uske khaate peete logon ne yahi kaha ke humne apne baap dada ko ek tareeqe par paya hai aur hum unhi ke naqshe qadam ki pairwi kar rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Issi tarah aap say pehlay bhi hum ney jiss basti mein koi daraney wala bheja wahan kay aasoodah haal logon ney yehi jawab diya kay hum ney apnay baap dada ko (aik raah per aur) aik deen per paya aur hum ney inhi kay naqsh-e-paa lo perwi kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)इसी तरह तुमसे पहले जिस बस्ती में भी हमने कोई नज़ीर (दाराने वाला) भेजा, उसके खाते-पीते लोगों ने यहीं कहा के हमने अपने बाप दादा को एक तारीख़ पर पाया है और हम उन्हें नक्शे क़दम की जोड़ी कर रहे हैं
عَرَبِي۞ قالَ أَوَلَو جِئتُكُم بِأَهدىٰ مِمّا وَجَدتُم عَلَيهِ آباءَكُم ۖ قالوا إِنّا بِما أُرسِلتُم بِهِ كافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : और क्या यदि मैं तुम्हारे पास उससे अधिक सीधा मार्ग ले आऊँ, जिसपर तुमने अपने बाप-दादा को पाया है? उन्होंने कहा : निःसंदेह हम उसका इनकार करने वाले हैं, जिसके साथ तुम भेजे गए हो।
Roman Urdu (Maududi)Har Nabi ne unsey poocha, kya tum usi dagar par cahle jaogey khwah mein us raaste se zyada saheeh raasta tumhein bataun jispar tumne apne baap dada ko paya? Unhon ne saare Rasoolon ko yahi jawab diya ke jis deen ki taraf bulane ke liye tum bheje gaye ho hum uske kaafir hain
Roman Urdu (Junagarhi)(nabi ney) kaha bhi kay agar cheh mein tumharay pass uss say boht behtar (maqsood tak phonchaney wala) tareeqa ley ker aaya hun jiss per tum ney apnay baap dadon ko paya to unhon ney kaha hum iss kay munkir hain jissay day ker tumhen bheja gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)हर नबी ने उनसे पूछा, क्या तुम उसी डगर पर कहले जाओगे ख्वाह में उस रास्ते से ज्यादा सही रास्ता तुम्हें बताऊं जिसपर तुमने अपने बाप दादा को पाया? उनहों ने सारे रसूलों को यही जवाब दिया के जिस दीन की तरफ बुलाए के लिए तुम भेज गए हो हम उसके काफिर हैं
عَرَبِيفَانتَقَمنا مِنهُم ۖ فَانظُر كَيفَ كانَ عاقِبَةُ المُكَذِّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अंततः हमने उनसे बदला लिया। तो देख लो कि झुठलाने वालों का परिणाम कैसा हुआ।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar humne unki khabar le daali aur dekh lo ke jhutlane walon ka kya anjaam hua
Roman Urdu (Junagarhi)Pus hum ney unn say intiqam liya aur dekh ley jhutlaney walon ka kaisa anjam hua
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार हमने उनकी खबर ले डाली और देख लो के झूठलेन वालों का क्या अंजाम हुआ
عَرَبِيوَإِذ قالَ إِبراهيمُ لِأَبيهِ وَقَومِهِ إِنَّني بَراءٌ مِمّا تَعبُدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा याद करो, जब इबराहीम ने अपने पिता तथा अपनी जाति से कहा : निःसंदेह मैं उन चीज़ों से बरी हूँ, जिनकी तुम इबादत करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Yaad karo woh waqt jab Ibrahim ne apne baap aur apni qaum se kaha tha ke “tum jinki bandagi karte ho mera unsey koi taaq nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jabkay ibrahim (alh-e-salam) ney apnay walid say aur apni qom say farmaya kay mein inn cheezon say beyzaar hun jinn ki tum ibadat kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)याद करो वो वक्त जब इब्राहिम ने अपने बाप और अपनी क़ौम से कहा था के "तुम जिनकी बंदगी करते हो मेरा उनसे कोई ताक़ नहीं
عَرَبِيإِلَّا الَّذي فَطَرَني فَإِنَّهُ سَيَهدينِ
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हिन्दी (Al-Omari)सिवाय उसके जिसने मुझे पैदा किया। अतः निःसंदेह वह मुझे अवश्य मार्ग दिखाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Mera talluq sirf ussey hai jisne mujhe paida kiya, wahi meri rehnumayi karega”
Roman Urdu (Junagarhi)Ba-juzz uss zaat kay jiss ney mujhay peda kiya hai aur wohi mujhay hidayat bhi keray ga
Devnagri Urdu (Maududi)मेरा तल्लुक सिर्फ उसे है जिसने मुझे भुगतान किया, वही मेरी रहनुमाई करेगी"
عَرَبِيوَجَعَلَها كَلِمَةً باقِيَةً في عَقِبِهِ لَعَلَّهُم يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसने इस (एकेश्वरवाद की बात) को अपने पिछलों में बाक़ी रहने वाली बात बना दिया। ताकि वे लौट आएँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur Ibrahim yahi kalima apne peechey apni aulad mein chodh gaya taa-ke woh iski taraf ruju karein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ibrahim (alh-e-salam) issi ko apni aulad mein bhi baqi rehney wali baat qaeem ker gaye takay log (shirk say) baaz aatey rahen
Devnagri Urdu (Maududi)और इब्राहिम यहीं कलिमा अपने पीछे अपनी औलाद में छोड़ गया ता-के वो इसकी तरफ रूजू करें
عَرَبِيبَل مَتَّعتُ هٰؤُلاءِ وَآباءَهُم حَتّىٰ جاءَهُمُ الحَقُّ وَرَسولٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि, मैंने इन्हें तथा इनके बाप-दादा को जीवन का सामान दिया। यहाँ तक कि उनके पास सत्य (क़ुरआन) और खोलकर बयान करने वाला रसूल आ गया।
Roman Urdu (Maududi)(Is ke bawajood jab yeh log dusron ki bandagi karne lagey to maine inko mita nahin diya) balke main inhein aur inke baap dada ko mata-e-hayat (sustenance) deta raha yahan tak ke inke paas haqq, aur khol khol kar bayan karne wala Rasool aa gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay mein ney unn logon ko aur inn kay baap dadon ko saman (aur asbab) diya yahan tak kay unn kay pass haq aur saaf saaf sunaney wala rasool aagaya
Devnagri Urdu (Maududi)(इस के बावज़ूद जब ये लोग दूसरे की बंदगी करने लगे तो मैंने इनको मिटा नहीं दिया) बलके मैं इन्हें और इनके बाप को माता-ए-हयात देता रहा यहां तक ​​के इनके पास हक़, और खोल खोल कर बयान करने वाला रसूल आ गया
عَرَبِيوَلَمّا جاءَهُمُ الحَقُّ قالوا هٰذا سِحرٌ وَإِنّا بِهِ كافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब उनके पास सत्य आ गया, तो उन्होंने कहा : यह तो जादू है तथा निःसंदेह हम इसका इनकार करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar jab woh haqq inke paas aaya to inhon ne keh diya yeh to jaadu hai aur hum isko maanne se inkar karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur haq kay phonchtay hi yeh bol paray kay yeh to jadoo hai aur hum iss kay munkir hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जब वो हक़ इनके पास आया तो इन्हों ने कह दिया ये तो जादू है और हम इसको मन्ने से इनकार करते हैं
عَرَبِيوَقالوا لَولا نُزِّلَ هٰذَا القُرآنُ عَلىٰ رَجُلٍ مِنَ القَريَتَينِ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा कि यह क़ुरआन इन दो बस्तियों में से किसी बड़े आदमी पर क्यों नहीं उतारा गया?
Roman Urdu (Maududi)Kehte hain, yeh Quran dono sheharon ke baday aadmiyon mein se kisi par kyoun na nazil kiya gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kehney lagay yeh quran inn dono bastiyon mein say kissi baray aadmi per kiyon na nazil kiya gaya
Devnagri Urdu (Maududi)कहते हैं, ये कुरान दोनों शहरों के बदाए आदमियों में से किसी पर क्यों ना नाज़िल किया गया
عَرَبِيأَهُم يَقسِمونَ رَحمَتَ رَبِّكَ ۚ نَحنُ قَسَمنا بَينَهُم مَعيشَتَهُم فِي الحَياةِ الدُّنيا ۚ وَرَفَعنا بَعضَهُم فَوقَ بَعضٍ دَرَجاتٍ لِيَتَّخِذَ بَعضُهُم بَعضًا سُخرِيًّا ۗ وَرَحمَتُ رَبِّكَ خَيرٌ مِمّا يَجمَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)कया वे आपके पालनहार की दया को बाँटते हैं? हमने ही दुनिया के जीवन में उनके बीच उनकी रोज़ी को बाँटा है तथा उनमें से कुछ को दूसरों से श्रेणियों की दृष्टि से उच्च रखा है, ताकि उनमें से कुछ दूसरों को (अपने) अधीन बना लें, तथा आपके पालनहार की दया उससे उत्तम है, जिसे वे इकट्ठा करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya tere Rubb ki rehmat yeh log takseem karte hain? Duniya ki zindagi mein inki guzar basar ke zaraye to humne inke darmiyan takseem kiye hain, Aur in mein se kuch logon ko kuch dusre logon par humne badarja-ha fauqiyat di hai taa-ke yeh ek dusre se khidmat lein aur tere Rubb ki rehmat us daulat se zyada keemati hai jo (inke rahees) samait rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap kay rab ki rehmat ko yeh taqseem kertay hain? Hum ney hi inn ki zindagniy-e-duniya ki rozi inn mein taqseem ki hai aur aik ko doosray say buland kiya hai takay aik doosray ko matehat ker ley jissay yeh log samettay phirtay hain iss say aap kay rab ki rehmat boht hi behtar hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तेरे रब की रहमत हाँ log takseem karte hain? दुनिया की जिंदगी में इनकी गुजर बसर के ज़रिये तो हमने इनके दरमियान तकसीम किये हैं, और इसमें कुछ लोगों को कुछ दूसरे लोगों पर हमने बदरजा-हा फौकियात दी है ता-के ये एक दूसरे से खिदमत लें और तेरे रब की रहमत हमें दौलत से ज्यादा कीमती है जो (इनके) रहीस) समेट रहे हैं
عَرَبِيوَلَولا أَن يَكونَ النّاسُ أُمَّةً واحِدَةً لَجَعَلنا لِمَن يَكفُرُ بِالرَّحمٰنِ لِبُيوتِهِم سُقُفًا مِن فِضَّةٍ وَمَعارِجَ عَلَيها يَظهَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि ऐसा न होता कि सब लोग एक ही समुदाय हो जाएँगे, तो निश्चय हम उन लोगों के लिए जो रहमान के साथ कुफ़्र करते हैं, उनके घरों की छतें चाँदी की बना देते और सीढ़ियाँ भी, जिनपर वे चढ़ते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Agar yeh andesha na hota ke saare log ek hi tareeqe ke ho jayenge to hum khuda e Rehman se kufr karne walon ke gharon ki chatein (canopy), aur unki seedhiyan (ladders) jinse woh apne baala khaano par chadte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar yeh baat na hoti kay tamam log aik hi tareeqay per hojayen gay to rehman kay sath kufur kerney walon kay gharon ki chatton ko hum chandi bana detay. Aur zeenon ko (bhi) jinn per charha kertay
Devnagri Urdu (Maududi)अगर ये अंदेशा ना होता के सारे लोग एक ही तारीख के हो जाएंगे तो हम खुदा ए रहमान से कुफ्र करने वालों के घरों की छतें (छतरियां), और उनकी सीढ़ियां (सीढ़ियां) जिनसे वो अपने बाला खानों पर चढ़ते हैं
عَرَبِيوَلِبُيوتِهِم أَبوابًا وَسُرُرًا عَلَيها يَتَّكِئونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके घरों के द्वार और तख़्त भी, जिनपर वे टेक लगाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur unke darwaze , aur unke takhat jinpar woh takiye (pillows) laga kar baithte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kay gharon kay darwazay aur takhat bhi jinn per woh takkiyey laga laga ker bethtay
Devnagri Urdu (Maududi)और उनके दरवाजे, और उनके तख्त जिनपर वो तकिए (तकिये) लगा कर बैठते हैं
عَرَبِيوَزُخرُفًا ۚ وَإِن كُلُّ ذٰلِكَ لَمّا مَتاعُ الحَياةِ الدُّنيا ۚ وَالآخِرَةُ عِندَ رَبِّكَ لِلمُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और सोने के (बना देते)। यह सब तो मात्र सांसारिक जीवन का सामान है तथा आख़िरत आपके पालनहार के यहाँ केवल परहेज़गारों के लिए है।
Roman Urdu (Maududi)Sab chandi aur soney (gold) ke banwa detay .Yeh to mehaz hayat e duniya ki mataah hain.Aur aakhirat tere Rubb ke haan sirf muttaqeen ke liye hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur soney kay bhi aur yeh sabb kuch yunhi sa duniya ki zindagi ka faeedah hai aur aakhirat to aap kay rab kay nazdeek (sirf) perhezgaron kay liye (hi) hai
Devnagri Urdu (Maududi)सब चांदी और सोने (सोना) के बनवा देते हैं। ये तो महज़ हयात ए दुनिया की मताह हैं। और आखिरी तेरे रब के हां सिर्फ मुत्तक़ीन के लिए हैं
عَرَبِيوَمَن يَعشُ عَن ذِكرِ الرَّحمٰنِ نُقَيِّض لَهُ شَيطانًا فَهُوَ لَهُ قَرينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो व्यक्ति 'रहमान' (परम दयालु अल्लाह) के स्मरण से अंधा बन जाए, हम उसके लिए एक शैतान नियुक्त कर देते हैं, फिर वह उसके साथ रहने वाला होता है।
Roman Urdu (Maududi)Jo shaks Rehman ke zikar se tagaful (gaflat) barat-ta hai, hum ispar ek shaytan musallat kar detay hain aur woh uska rafiq ban jata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo shaks rehman ki yaad say ghaflat keray hum uss per aik shetan muqarrar ker detay hain wohi uss ka sathi rehta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो शक्स रहमान के जिक्र से तगाफुल (गफलत) बरात-ता है, हम इसपर एक शैतान मुसल्लत कर देते हैं और वो उसका रफीक बन जाता है
عَرَبِيوَإِنَّهُم لَيَصُدّونَهُم عَنِ السَّبيلِ وَيَحسَبونَ أَنَّهُم مُهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह ये (शैतान) उन्हें सत्य मार्ग से रोकते हैं और वे समझते हैं कि वे सीधे मार्ग पर चलने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh shayateen aisay logon ko raah e raast par aane se rokte hain, aur woh apni jagah yeh samajhte hain ke hum theek jaa rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh unhen raah say roktay hain aur yeh iss khayal mein rehtay hain kay yeh hidayat yafta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये शयातीन ऐसे लोगों को राह ए रास्ते पर आने से रोकते हैं, और वो अपनी जगह ये समझते हैं के हम ठीक जा रहे हैं
عَرَبِيحَتّىٰ إِذا جاءَنا قالَ يا لَيتَ بَيني وَبَينَكَ بُعدَ المَشرِقَينِ فَبِئسَ القَرينُ
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हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि जब वह हमारे पास आएगा, तो कहेगा : ऐ काश! मेरे और तेरे बीच पूर्व और पश्चिम की दूरी होती। अतः तू बहुत बुरा साथी है।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar jab yeh shaks hamare haan pahuchega to apne shaytan se kahega “kaash mere aur tere darmiyan mashriq o magrib ka boadh (doori/ distance) hota, tu to badhtareen saathi nikla”
Roman Urdu (Junagarhi)Yehan tak kay jabb woh humaray pass aayega kahega kash! Meray aur teray darmiyan mashriq aur maghrib ki doori hoti (to) bara bura sathi hai
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार जब ये शक्स हमारे हाँ पहुँचेगा तो अपने शैतान से कहेगा "काश मेरे और तेरे दरमियान मशरिक़ ओ मगरिब का बोध (दूरी/दूरी) होता, तू तो बढ़ता साथी निकला"
عَرَبِيوَلَن يَنفَعَكُمُ اليَومَ إِذ ظَلَمتُم أَنَّكُم فِي العَذابِ مُشتَرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आज इस बात से तुम्हें कुछ लाभ न होगा, जबकि तुमने ज़ुल्म किया, कि तुम (सब) यातना में एक-दूसरे के साझी हो।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt in logon se kaha jayega ke jab tum zulm kar chuke to aaj yeh baat tumhare liye kuch bhi nafeh nahin hai ke tum aur tumahre shayateen azaab mein mushtarik hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jabkay tum zalim thehar chukay to tumhen aaj hergiz tum sabb ka azab mein shareek hona koi nafa na dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों में हमारा वक़्त से कहा जाएगा के जब तुम ज़ुल्म कर चुके तो आज ये बात तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं है के तुम और तुम्हारी शयातें अज़ाब में मुश्तारिक हैं
عَرَبِيأَفَأَنتَ تُسمِعُ الصُّمَّ أَو تَهدِي العُميَ وَمَن كانَ في ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर क्या आप बहरों को सुनाएँगे या अंधों को राह दिखाएँगे और उनको जो खुली गुमराही में पड़े हैं?
Roman Urdu (Maududi)Ab kya aey Nabi tum behron (deaf) ko sunaoge? Ya andhon (blind) aur sareeh gumrahi mein padey huey logon ko raah dihoge
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya pus tu behray ko suna sakta hai ya andhay ko raah dikha sakta hai aur ussay jo khulli gumrahee mein ho
Devnagri Urdu (Maududi)अब क्या ऐ नबी तुम बहरों (बहरे) को सुनाओगे? हां अंधों (अंधा) और सारे गुमराही में पड़े हुए लोगों को राह दिखोगे
عَرَبِيفَإِمّا نَذهَبَنَّ بِكَ فَإِنّا مِنهُم مُنتَقِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि हम आपको (संसार से) ले ही जाएँ, तो निःसंदेह हम उनसे बदला लेने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ab to humein inko saza deni hai khwah tumhein duniya se utha lein
Roman Urdu (Junagarhi)Pus agar hum tujhay yahan say bhi ley jayen to bhi hum inn say badla lenay walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अब तो हमें इनको सज़ा देनी है ख्वाह तुम्हें दुनिया से उठा लें
عَرَبِيأَو نُرِيَنَّكَ الَّذي وَعَدناهُم فَإِنّا عَلَيهِم مُقتَدِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या हम आपको वह (यातना) दिखा दें, जिसका हमने उनसे वादा किया है, तो निःसंदेह हम उनपर पूरी शक्ति रखने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ya tumko aankhon se inka woh anjaam dikha dein jiska humne issey waada kiya hai. Humein inpar poori qudrat haasil hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ya jo kuch inn say wada kiya hai woh tujhay dikha den hum inn per bhi qudrat rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हां तुमको आंखों से इनका वो अंजाम दिखा दें जिसका हमने इसे वादा किया है। हमें इनपर पूरी क़ुदरत हासिल है
عَرَبِيفَاستَمسِك بِالَّذي أوحِيَ إِلَيكَ ۖ إِنَّكَ عَلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप उसे दृढ़ता से पकड़े रहें, जिसकी आपकी ओर वह़्य की गई है। निश्चय ही आप सीधी राह पर हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tum bahar-haal us kitaab ko mazbooti se thamay raho jo wahi ke zariye se tumhare paas bheji gayi hai, yaqeenan tum seedhey raaste par ho
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jo wahee aap ki taraf ki gaee hai ussay mazboot thamay rahen be-shak aap rah-e-raast per hain
Devnagri Urdu (Maududi)तुम बहार-हाल उस किताब को मज़बूती से थामे रहो जो वही के ज़रिये से तुम्हारे पास भेज दी गई है, यकीनन तुम सीधे रास्ते पर हो
عَرَبِيوَإِنَّهُ لَذِكرٌ لَكَ وَلِقَومِكَ ۖ وَسَوفَ تُسأَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह वह निश्चय आपके लिए तथा आपकी जाति के लिए एक नसीहत (तथा सम्मान) है और शीघ्र ही तुमसे प्रश्न किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke yeh kitaab tumahre liye aur tumhari qaum ke liye ek bahut bada sharaf hai aur anqareeb tum logon ko iski jawab-dahi karni hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqeenan yeh (khud) aap kay liye aur aap ki qom kay liye naseehat hai aur unqareeb tum log poochay jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के ये किताब तुम्हारे लिए और तुम्हारी क़ौम के लिए एक बहुत बड़ा शराफ है और अंकारिब तुम लोगों को इसका जवाब-दही करनी होगी
عَرَبِيوَاسأَل مَن أَرسَلنا مِن قَبلِكَ مِن رُسُلِنا أَجَعَلنا مِن دونِ الرَّحمٰنِ آلِهَةً يُعبَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (ऐ नबी!) आप उनसे पूछ लें, जिन्हें हमने आपसे पहले अपने रसूलों में से भेजा, क्या हमने 'रहमान' के अलावा कोई पूज्य बनाए, जिनकी इबादत की जाए?
Roman Urdu (Maududi)Tumse pehle humne jitne Rasool bheje thay un sab se pooch dekho, kya humne khuda e Rehman ke siwa kuch dusre maabood bhi muqarrar kiye thay ke unki bandagi ki jaaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur humaray inn nabiyon say poocho! Jinhen hum ney aap say pehlay bheja tha kay kiya hum ney siwaye rehman kay aur mabood muqarrar kiyey thay jinn ki ibadat ki jaye
Devnagri Urdu (Maududi)तुमसे पहले हमने जितने रसूल भेजे थे उन सब से पूछ देखो, क्या हमने खुदा ए रहमान के सिवा कुछ दूसरे माबूद भी मुकर्रर किए थाय के उनकी बंदगी की जाए
عَرَبِيوَلَقَد أَرسَلنا موسىٰ بِآياتِنا إِلىٰ فِرعَونَ وَمَلَئِهِ فَقالَ إِنّي رَسولُ رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने मूसा को अपनी निशानियों के साथ फ़िरऔन और उसके प्रमुखों की ओर भेजा। तो उसने कहा : निःसंदेह मैं सारे संसारों के पालनहार का रसूल हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Humne Moosa ko apni nishaniyon ke saath Firoun aur uske ayaan-e-sultanat ke paas bheja, aur usne jaa kar kaha ke main Rubb ul aalamin ka Rasool hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney musa (alh-e-salam) ko apni nishaniyan dey ker firaon aur usskay umraa kay pass bheja to (Musa alh-e-salam ney jaa ker) kaha kay mein tamam jahano kay rab ka rasool hun
Devnagri Urdu (Maududi)हमने मूसा को अपनी निशानियों के साथ फिरौन और उसके अयान-ए-सल्तनत के पास भेजा, और उसने जा कर कहा के मैं रब उल आलमीन का रसूल हूं
عَرَبِيفَلَمّا جاءَهُم بِآياتِنا إِذا هُم مِنها يَضحَكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वह उनके पास हमारी निशानियाँ लेकर आया, तो सहसा वे उनकी हँसी उड़ाने लगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab usne hamari nishaniyan unke saamne pesh ki to woh thatte (laughter) maarne lagey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab woh humari nishaniyan ley ker unn kay pass aaye to be-saakhta unn per hansney lagay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब उसने हमारी निशानियां उनके सामने पेश की तो वो थट्टे (हंसी) मारने लगे
عَرَبِيوَما نُريهِم مِن آيَةٍ إِلّا هِيَ أَكبَرُ مِن أُختِها ۖ وَأَخَذناهُم بِالعَذابِ لَعَلَّهُم يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हम उन्हें जो भी निशानी दिखाते, वह अपने जैसी (पहली निशानी) से बढ़कर होती थी। तथा हम उन्हें यातना से ग्रस्त किया, ताकि वे लौट आएँ।
Roman Urdu (Maududi)Hum ek par ek aisi nishani unko dikhate chale gaye jo pehli se badh chadh kar thi, aur humne unko azaab mein dhar liya taa-ke woh apni rawish se baaz aayein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum unhen jo nishaniyan dikhatay thay woh doosray say barhi chahrhi hoti thi aur hum ney unhen azab mein pakra takay woh baaz aajayen
Devnagri Urdu (Maududi)हम एक पर एक ऐसी निशानी उनको दिखाते चले गए जो पहली से बढ़ चढ़ कर थी, और हमने उनको अज़ाब में धर लिया ता-के वो अपनी रवीश से बाज़ आएं
عَرَبِيوَقالوا يا أَيُّهَ السّاحِرُ ادعُ لَنا رَبَّكَ بِما عَهِدَ عِندَكَ إِنَّنا لَمُهتَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने कहा : ऐ जादूगर! हमारे लिए अपने पालनहार से उसके द्वारा दुआ कर, जो उसने तुझसे प्रतिज्ञा कर रखी है। निःसंदेह हम अवश्य ही सीधी राह पर आने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Har azaab ke mauqe par woh kehte, Aey saahir (Jaadugar/magician), apne Rubb ki taraf se jo mansab tujhe haasil hai uski bina par hamare liye ussey duaa kar, hum zaroor raah-e-raast par aa jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unhon ney kaha aey jadoogar! Humaray liye apnay rab say uss ki dua ker jiss ka uss ney tujh say wada ker rakha hai yaqeen maan kay hum raah per lag jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)हर अज़ाब के मौके पर वो कहते, ऐ साहिर (जादूगर/जादूगर), अपने रब की तरफ से जो मनसब तुझे हासिल है उसकी बिना पर हमारे लिए उसकी दुआ कर, हम जरूर राह-ए-रास्त पर आ जाएंगे
عَرَبِيفَلَمّا كَشَفنا عَنهُمُ العَذابَ إِذا هُم يَنكُثونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब हम उनसे यातना दूर कर देते, सहसा वे वचन तोड़ देते थे।
Roman Urdu (Maududi)Magar joonh hi ke hum unpar se azaab hata detay woh apni baat se phir jaatey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab hum ney woh azab unn say hata liya unhon ney ussi waqt apna qol-o-qarar tor diya
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जून ही के हम उन्पर से अजाब हटा देते हैं वो अपनी बात से फिर जाते थे
عَرَبِيوَنادىٰ فِرعَونُ في قَومِهِ قالَ يا قَومِ أَلَيسَ لي مُلكُ مِصرَ وَهٰذِهِ الأَنهارُ تَجري مِن تَحتي ۖ أَفَلا تُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा फ़िरऔन ने अपनी जाति में घोषणा करवाया, उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या मेरे पास मिस्र का राज्य नहीं है? तथा ये नहरें मेरे तहत नहीं चलतीं? तो क्या तुम नहीं देखते?
Roman Urdu (Maududi)Ek roz Firoun ne apni qaum ke darmiyan pukar kar kaha, “logon, kya misr (egypt) ki baadshahi meri nahin hai, aur yeh nehrein (streams) mere nichey nahin beh rahi hain? Kya tum logon ko nazar nahin aata
Roman Urdu (Junagarhi)Aur firaon ney apni qom mein munadi keraee aur kaha aey meri qom! Kiya misir ka mulk mera nahi? Aur meray (mehlon kay) neechay yeh nehren beh rahi hain kiya tum dekhtay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)एक रोज फिरौन ने अपनी कौम के दरमियान पुकार कर कह, "लोगन, क्या मिसर (मिस्र) की बादशाही मेरी नहीं है, और ये नहरें (धाराएं) मेरे नीचे नहीं दिख रही हैं? क्या तुम लोगों को नज़र नहीं आती
عَرَبِيأَم أَنا خَيرٌ مِن هٰذَا الَّذي هُوَ مَهينٌ وَلا يَكادُ يُبينُ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि मैं इस व्यक्ति से बेहतर हूँ, जो हीन है और क़रीब नहीं कि वह अपनी बात स्पष्ट कर सके।
Roman Urdu (Maududi)Mein behtar hoon ya yeh shaks jo zaleel o haqeer hai aur apni baat bhi khol kar bayan nahin kar sakta
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay mein behtar hun ba-nisbat uss kay jo be-toqeer hai aur saaf bol bhi nahi sakta
Devnagri Urdu (Maududi)मैं बेहतर हूं या ये शक्स जो ज़लील ओ हक़ीर है और अपनी बात भी खोल कर बयान नहीं कर सकता
عَرَبِيفَلَولا أُلقِيَ عَلَيهِ أَسوِرَةٌ مِن ذَهَبٍ أَو جاءَ مَعَهُ المَلائِكَةُ مُقتَرِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)सो उसपर सोने के कंगन क्यों नहीं डाले गए, या उसके साथ फ़रिश्ते मिलकर क्यों नहीं आए?
Roman Urdu (Maududi)Kyun na ispar soney (gold) ke kangan (bangles) utare gaye? Ya farishton ka ek dasta iski ardali mein na aaya?”
Roman Urdu (Junagarhi)Acha iss per soney kay kanggan kiyon nahi aa paray ya iss kay sath per bandh ker farishtay hi aajatay
Devnagri Urdu (Maududi)क्यों न इसपर सोने (सोना) के कंगन (चूड़ियाँ) उतारे गए? या फरिश्तों का एक दस्ता इसकी अर्दली में ना आया?”
عَرَبِيفَاستَخَفَّ قَومَهُ فَأَطاعوهُ ۚ إِنَّهُم كانوا قَومًا فاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने अपनी जाति को फुसलाया, तो उन्होंने उसकी बात मान ली, निश्चय ही वे अवज्ञाकारी लोग थे।
Roman Urdu (Maududi)Usne apni qaum ko halka samjha aur unhon ne uski itaat ki, dar haqeeqat woh thay hi faasiq log
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney apni qom ko behlaya phuslaya aur unhon ney ussi ki maan li yaqeenan yeh saray hi nafarman log thay
Devnagri Urdu (Maududi)उसने अपनी कौम को हल्का समझा और उनहों ने उसकी इताअत की, दर हकीकत वो था हाय फासिक लोग
عَرَبِيفَلَمّا آسَفونَا انتَقَمنا مِنهُم فَأَغرَقناهُم أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उन्होंने हमें क्रोधित कर दिया, तो हमने उनसे बदला लिया। अतः हमने उन सबको डुबो दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar jab unhon ne humein gazabnaak kardiya to humne unse inteqam liya aur unko ikattha garq (drown) kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab unhon ney humen gussa dilaya to hum ney unn say intiqam liya aur sab ko dubo diya
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार जब उनहों ने हमें गजबनाक करदिया तो हमने उनसे इंतकाम लिया और उनको इकत्था गर्क (डूबना) किया
عَرَبِيفَجَعَلناهُم سَلَفًا وَمَثَلًا لِلآخِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उन्हें बाद में आने वाले लोगों के लिए अग्रगामी और एक उदाहरण बना दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur baad walon ke liye pesh-ro aur namoona ibrat banakar rakh diya
Roman Urdu (Junagarhi)Pus hum ney unhen gaya guzra ker diya aur pichlon kay liye misal bana di
Devnagri Urdu (Maududi)और बाद वालों के लिए पेश-रो और नामोना इब्रत बनाकर रख दिया
عَرَبِي۞ وَلَمّا ضُرِبَ ابنُ مَريَمَ مَثَلًا إِذا قَومُكَ مِنهُ يَصِدّونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब मरयम के पुत्र का उदाहरण दिया गया, तो सहसा आपकी जाति उसपर शोर मचाने लगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur jonhi ke ibne Maryam (Jesus) ki misal di gayi, tumhari qaum ke logon ne uspar gul macha diya (chilla utthey/ raised a clamour)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab ibn-e-mariyam ki misal biyan ki gaee to iss say teri qom (khushi say) cheekhney lagi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जॉनी के इब्ने मरियम (यीशु) की मिसाल दी गई, तुम्हारी क़ौम के लोगों ने उसपर गुल मचा दिया (चिल्ला उठे/ शोर मचाया)
عَرَبِيوَقالوا أَآلِهَتُنا خَيرٌ أَم هُوَ ۚ ما ضَرَبوهُ لَكَ إِلّا جَدَلًا ۚ بَل هُم قَومٌ خَصِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा : क्या हमारे देवता अच्छे हैं या वह? उन्होंने आपके लिए यह (उदाहरण) केवल झगड़ने के लिए दिया है। बल्कि वे झगड़ालू लोग हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur lagey kehne ke hamare maabood acche hain ya woh? Yeh misaal woh tumhare saamne mehaz kach-behasi (argument/ contentiousness) ke liye laaye hain, haqeeat yeh hai ke yeh hain hi jhagdalu log
Roman Urdu (Junagarhi)Aur enhon ney kaha kay humaray mabood achay hain ya woh? Tujh say inn ka yeh kehna mehaz jhagray ki gharaz say hai bulkay yeh log hain hi jhagraloo
Devnagri Urdu (Maududi)और लगे कहने के हमारे माबूद अच्छे hain ya woh? ये मिसाल वो तुम्हारे सामने महज़ कच-बेहसी (तर्क/विवाद) के लिए लाए हैं, हकीकत ये है के ये हैं झगड़लू लोग
عَرَبِيإِن هُوَ إِلّا عَبدٌ أَنعَمنا عَلَيهِ وَجَعَلناهُ مَثَلًا لِبَني إِسرائيلَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह तो केवल एक बंदा है, जिसपर हमने उपकार किया तथा हमने उसे बनी इसराईल के लिए एक उदाहरण बना दिया।
Roman Urdu (Maududi)Ibne Maryam (Jesus) iske siwa kuch na tha ek banda tha jispar humne inaam kiya aur bani israel ke liye apni qudrat ka ek namuna bana diya
Roman Urdu (Junagarhi)Essa (alh-e-salam) bhi sirf banda hi hai jiss per hum ney ehsan kiya aur ussay bani-isareel kay liye nishan-e-qudrat banaya
Devnagri Urdu (Maududi)इब्ने मरियम (जीसस) इसके सिवा कुछ ना था एक बंदा था जिसपर हमने इनाम किया और बानी इसराइल के लिए अपनी क़ुदरत का एक नामुना बना दिया
عَرَبِيوَلَو نَشاءُ لَجَعَلنا مِنكُم مَلائِكَةً فِي الأَرضِ يَخلُفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि हम चाहें तो अवश्य तुम्हारे स्थान पर फ़रिश्तों को बना दें, जो धरती में उत्ताराधिकारी हों।
Roman Urdu (Maududi)Hum chahein to tumse farishte paida kardein jo zameen mein tumhare janasheen(successors) hon
Roman Urdu (Junagarhi)Agar hum chahtay to tumharay ewaz farishtay kerdetay jo zamin mein ja nasheeni kertay
Devnagri Urdu (Maududi)हम चाहें तो तुमसे फ़रिश्ते अदा कर दें जो ज़मीन में तुम्हारे जनाशीं (उत्तराधिकारी) हों
عَرَبِيوَإِنَّهُ لَعِلمٌ لِلسّاعَةِ فَلا تَمتَرُنَّ بِها وَاتَّبِعونِ ۚ هٰذا صِراطٌ مُستَقيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह वह (ईसा) निश्चय क़ियामत की एक निशानी है। अतः तुम उसमें कदापि संदेह न करो और मेरी पैरवी करो, यही सीधा रास्ता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh dar-asal qayamat ki ek nishani hai, pas tum usmein shakk na karo meri baat maan lo, yahi seedha raasta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqeenan essa (alh-e-salam) qayamat ki alamat hai pus tum qayamt kay baray mein shak na kero aur meri tabeydaari kero yehi seedhi raah hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वो दर-असल कयामत की एक निशानी है, पास तुम हमें शक्क ना करो मेरी बात मान लो, यही सीधा रास्ता है
عَرَبِيوَلا يَصُدَّنَّكُمُ الشَّيطانُ ۖ إِنَّهُ لَكُم عَدُوٌّ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा शौतान तुम्हें कदापि रोकने न पाए। निश्चय वह तुम्हारा खुला शत्रु है।
Roman Urdu (Maududi)Aisa na ho shaytan tumko ussey roak de ke woh tumhara khula dushman hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur shetan tumhen rok na day yaqeenan woh tumhara sareeh dushman hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसा ना हो शैतान तुमको उसे रोक दे के वो तुम्हारा खुला दुश्मन है
عَرَبِيوَلَمّا جاءَ عيسىٰ بِالبَيِّناتِ قالَ قَد جِئتُكُم بِالحِكمَةِ وَلِأُبَيِّنَ لَكُم بَعضَ الَّذي تَختَلِفونَ فيهِ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطيعونِ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब ईसा खुले तर्कों के साथ आया, तो उसने कहा : निःसंदेह मैं तुम्हारे पास हिकमत लेकर आया हूँ और ताकि मैं तुम्हारे लिए कुछ ऐसी बातें स्पष्ट कर दूँ, जिनमें तुम विभेद करते हो। अतः अल्लाह से डरो और मेरा कहना मानो।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab Isa (Jesus) sareeh nishaniyan liye huey aaya tha to usne kaha tha ke “main tum logon ke paas hikmat lekar aaya hoon, aur isliye aaya hoon ke tumpar baaz un baaton ki haqeeqat khol doon jin mein tum ikhtilaf kar rahey ho, lihaza tum Allah se daro aur meri itaat karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab essa (alh-e-salam) mojzzay laye to kaha kay mein tumharay pass hikmat laya hun aur iss liye aaya hun kay jinn baaz cheezon mein tum mukhtalif ho unhen wazeh kerdoon pus tum Allah Taalaa say daro aur mera kaha mano
Devnagri Urdu (Maududi)और जब ईसा (यीशु) सारे निशानियां लिए हुए आये थे तो उसने कहा था के "मैं तुम लोगों के पास हिकमत लेकर आया हूं, और इसलिए आया हूं के तुमपर बाज़ उन बातों की हकीकत खोल दूं जिन में तुम इख्तिलाफ कर रहे हो, लिहाजा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ هُوَ رَبّي وَرَبُّكُم فَاعبُدوهُ ۚ هٰذا صِراطٌ مُستَقيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ही मेरा रब और तुम्हारा रब है। अतः उसी की इबादत करो। यही सीधा मार्ग है।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke Allah hi mera Rubb bhi hai aur tumhara Rubb bhi.Usi ki tum ibadat karo, yahi seedha raasta hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Mera aur tumhara rab faqat Allah Taalaa hi hai. Pus tum sab uss ki ibadat kero. Rah-e-raast (yehi) hai
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के अल्लाह ही मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी।उसी की तुम इबादत करो, यही सीधा रास्ता है”
عَرَبِيفَاختَلَفَ الأَحزابُ مِن بَينِهِم ۖ فَوَيلٌ لِلَّذينَ ظَلَموا مِن عَذابِ يَومٍ أَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर कई गिरोहों ने आपस में विभेद किया। तो उन लोगों के लिए जिन्होंने ज़ुल्म किया एक दर्दनाक दिन के अज़ाब से बड़ा विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Magar (uski is saaf taleem ke bawajood) girohon (factions) ne aapas mein ikhtilaf kiya, pas tabahi hai un logon ke liye jinhon ne zulm kiya ek dardnaak din ke azaab se
Roman Urdu (Junagarhi)Phir (bani-israeel ki) jamaton ney aapas mein ikhtilaf kiya pus zalimon kay liye kharabi hai dukh walay din ki aafat say
Devnagri Urdu (Maududi)मगर (उसकी इस साफ तालीम के बावजूद) गिरोहोन (गुटों) ने आपस में इख्तिलाफ किया, पास तबही है उन लोगों के लिए जिन्होन ने ज़ुल्म किया एक दर्दनाक दिन के अज़ाब से
عَرَبِيهَل يَنظُرونَ إِلَّا السّاعَةَ أَن تَأتِيَهُم بَغتَةً وَهُم لا يَشعُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे क़ियामत के सिवा किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं कि वह उनपर अचानक आ जाए और वे सोचते भी न हों?
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log ab bas isi cheez ke muntazir hain ke achanak inpar qiyamat aa jaye aur inhein khabar bhi na ho
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log sirf qayamat kay muntazir hain kay woh achnak inn per aa paray aur enhen khabar bhi na ho
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग अब बस इसी चीज़ के मुंतज़िर हैं के अचानक अंदर क़ियामत आ जाए और इन्हें ख़बर भी ना हो
عَرَبِيالأَخِلّاءُ يَومَئِذٍ بَعضُهُم لِبَعضٍ عَدُوٌّ إِلَّا المُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन नेक लोगों को छोड़कर सभी सच्चे दोस्त एक-दूसरे के दुश्मन होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh din jab aayega to muttaqin ko chodh kar baaki sab dost ek dursre ke dushman ho jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din (gehray) dost bhi aik doosray kay dushman ban jayen gay siwaye perhezgaron kay
Devnagri Urdu (Maududi)वो दिन जब आएगा तो मुत्तक़िन को छोड़ कर बाकी सब दोस्त एक दूसरे के दुश्मन हो जाएंगे
عَرَبِييا عِبادِ لا خَوفٌ عَلَيكُمُ اليَومَ وَلا أَنتُم تَحزَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे बंदो! आज न तुमपर कोई भय है और न तुम शोकाकुल होगे।
Roman Urdu (Maududi)Us roz un logon se jo hamari aayat par imaan laaye thay aur mutii-e-farmaan bankar rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Meray bando! Aaj to tum per koi khof (o-hiras) hai aur na tum (bad-dil aur) ghumzadah hogay
Devnagri Urdu (Maududi)हम रोज़ उन लोगों से जो हमारी आयत पर ईमान लाए थे और मुती-ए-फ़रमान बनकर रहेंगे
عَرَبِيالَّذينَ آمَنوا بِآياتِنا وَكانوا مُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग जो हमारी आयतों पर ईमान लाए तथा वे आज्ञाकारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Kaha jayega ke “aey mere bandon (servents), aaj tumhare liye koi khauff nahin aur na tumhein koi gham lahiq hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo humari aayaton per eman laye aur thay bhi woh (farmabardar) musalman
Devnagri Urdu (Maududi)कह जाएगा के "ऐ मेरे बंदों (नौकरों), आज तुम्हारे लिए कोई खौफ नहीं और ना तुम्हें कोई गम लाहिक होगा
عَرَبِيادخُلُوا الجَنَّةَ أَنتُم وَأَزواجُكُم تُحبَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम और तुम्हारी पत्नियाँ जन्नत में प्रवेश कर जाओ। तुम्हें खुश रखा जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Dakhil ho jao jannat mein tum aur tumhari biwiyan, tumhein khush kardiya jaayega”
Roman Urdu (Junagarhi)Tum aur tumhari biwiyan hasshash basshash (razi khushi) jannat mein chalay jao
Devnagri Urdu (Maududi)दाखिल हो जाओ जन्नत में तुम और तुम्हारी बीवीयां, तुम्हें खुश कर दिया जाएगा"
عَرَبِييُطافُ عَلَيهِم بِصِحافٍ مِن ذَهَبٍ وَأَكوابٍ ۖ وَفيها ما تَشتَهيهِ الأَنفُسُ وَتَلَذُّ الأَعيُنُ ۖ وَأَنتُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनपर सोने की थालें तथा प्याले फिराए जाएँगे और वहाँ वह सब कुछ होगा, जो दिलों को भाए और जिससे आँखें आनंदित हों और तुम उसमें सदा निवास करने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Unke aagay soonay (golden) ke thal (Platters) aur sagar gardish karaye jayenge aur har mann bhaati aur nigaahon ko lazzat dene wali cheez wahan maujood hogi. Unse kaha jayega, “tum ab yahan hamesha rahoge
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay charon taraf say soney ki rakabiyan aur soney kay gilason ka dor chalaya jaye ga inn kay ji jiss cheez ki khuwaish keren aur jiss say inn ki aankhen lazzat payen sab wahan hoga aur tum iss mein hamesha raho gay
Devnagri Urdu (Maududi)उनके आगे जल्द ही (सुनहरा) के थल (प्लेटर्स) और सागर गर्दिश कराएंगे और हर मन भाती और निगाहों को लज्जत देने वाली चीज वहां मौजूद होगी। उनसे कहा जाएगा, "तुम अब यहां हमेशा रहोगे
عَرَبِيوَتِلكَ الجَنَّةُ الَّتي أورِثتُموها بِما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यही वह जन्नत है, जिसके तुम उत्तराधिकारी बनाए गए हो, उसके बदले में जो तुम कार्य करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Tum is jannat ke waaris apne un aamal ki wajah se huey ho jo tum duniya mein karte rahe
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi woh bahisht hai kay tum apnay aemaal kay badlay iss kay waris banaye gaye ho
Devnagri Urdu (Maududi)तुम इस जन्नत के वारिस अपने उन अमल की वजह से हुए हो जो तुम दुनिया में करते रहे
عَرَبِيلَكُم فيها فاكِهَةٌ كَثيرَةٌ مِنها تَأكُلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारे लिए इसमें बहुत-से मेवे हैं, जिनसे तुम खाते रहोगे।
Roman Urdu (Maududi)Tumhare liye yahan bakasrat fawake(abundant fruits) maujood hain jinhein tum khaogey”
Roman Urdu (Junagarhi)Yahan tumharay liye ba-kasrat meway hain jinhen tum khatay raho gay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारे लिए यहां बकसरत फ़वाके (प्रचुर मात्रा में फल) मौजूद हैं जिनमें तुम खाओगे"
عَرَبِيإِنَّ المُجرِمينَ في عَذابِ جَهَنَّمَ خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अपराधी लोग जहन्नम की यातना में सदैव रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Rahe mujreem , to woh hamesha jahannum ke azaab mein mubtala rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak gunehgar log azab-e-dozakh mein hamesha rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)रहे मुजरिम, तो वो हमेशा जहन्नुम के अज़ाब में मुबतला रहेंगे
عَرَبِيلا يُفَتَّرُ عَنهُم وَهُم فيهِ مُبلِسونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह (यातना) उनसे हल्की नहीं की जाएगी तथा वे उसी में निराश पड़े रहेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Kabhi unke azaab mein kami na hogi, aur woh us mein mayous padey hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh azab kabhi bhi unsay halka na kiya jayega aur woh issi mein mayyus paray rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)कभी उनके अज़ाब में कमी न होगी, और वो हममें मयुस पैदा होंगे
عَرَبِيوَما ظَلَمناهُم وَلٰكِن كانوا هُمُ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने उनपर अत्याचार नहीं किया, बल्कि वे स्वयं ही अत्याचारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Unpar humne zulm nahin kiya balke woh khud hi apne upar zulm karte rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney inn per zulm nahi kiya bulkay yeh khud hi zalim thay
Devnagri Urdu (Maududi)उन्पर हमने ज़ुल्म नहीं किया बलके वो खुद ही अपने ऊपर ज़ुल्म करते रहेंगे
عَرَبِيوَنادَوا يا مالِكُ لِيَقضِ عَلَينا رَبُّكَ ۖ قالَ إِنَّكُم ماكِثونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे पुकारेंगे : ऐ मालिक! तेरा पालनहार हमारा काम तमाम ही कर दे। वह कहेगा : निःसंदेह तुम (यहीं) ठहरने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Woh pukarenge, “aey maalik, tera Rubb hamara kaam hi tamam ka de to accha hai” woh jawab dega “tum yun hi padey rahogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur pukar pukar ker kahen gay kay aey malik! Tera rab humara kaam hi tamam ker day woh kahega kay tumhen to (hamesha) rehna hai
Devnagri Urdu (Maududi)वाह पुकारेंगे, "ऐ मालिक, तेरा रब हमारा काम ही तमाम का दे तो अच्छा है" वो जवाब देगा "तुम यूं ही पड़े रहोगे
عَرَبِيلَقَد جِئناكُم بِالحَقِّ وَلٰكِنَّ أَكثَرَكُم لِلحَقِّ كارِهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम तो तुम्हारे पास सत्य लेकर आए हैं, लेकिन तुममें से अधिकतर लोग सत्य को नापसंद करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hum tumhare paas haqq lekar aaye thay magar tum mein se aksar ko haqq hi nagawaar tha”
Roman Urdu (Junagarhi)Hum to tumharay pass haq ley aaye lekin tum mein say aksar log haq say nafrat rakhney walay thay
Devnagri Urdu (Maududi)हम तुम्हारे पास हक़ लेकर आए थे, मगर तुम में से अक्सर को हक़ ही नगावार था"
عَرَبِيأَم أَبرَموا أَمرًا فَإِنّا مُبرِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या उन्होंने किसी कार्य का दृढ़ निश्चय कर लिया है? तो निःसंदेह हम भी दृढ़ उपाय करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya in logon ne koi iqdam (plot) karne ka faisla karliya hai? Accha to hum bhi phir ek faisla kiye letey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya unhon ney kissi kaam ka pukhta iradah ker liya hai to yaqeen mano kay hum bhi pukhta kaam kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों ने क्या कहा इक़दाम (कथानक) करने का फ़ैसला कर लिया है? अच्छा तो हम भी फिर एक फैसला लेते हैं
عَرَبِيأَم يَحسَبونَ أَنّا لا نَسمَعُ سِرَّهُم وَنَجواهُم ۚ بَلىٰ وَرُسُلُنا لَدَيهِم يَكتُبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या वे समझते हैं कि हम उनके रहस्य और उनकी कानाफूसी को नहीं सुनते? क्यों नहीं, और हमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते) उनके पास लिखते रहते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya inhon ne yeh samajh rakkha hai ke hum inki raaz ki baatein aur inki sargoshiyan sunte nahin hain? Hum sab kuch sun rahey hain aur hamare farishtey inke paas hi likh rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn ka yeh khayal hai kay hum inn ki posheedah baaton ko aur inn ki sirgoshiyon ko nahi suntay (yaqeenan hum barabar sunn rahey hain) bulkay humaray bhejay huyey inn kay pass hi likh rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इन्हों ने ये समझा रखा है कि हम इनकी राज की बातें और इनकी सरगोशियां सुनते नहीं हैं? हम सब कुछ सुन रहे हैं और हमारे फरिश्ते इनके पास ही लिख रहे हैं
عَرَبِيقُل إِن كانَ لِلرَّحمٰنِ وَلَدٌ فَأَنا أَوَّلُ العابِدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दें : यदि रहमान की कोई संतान हो, तो मैं सबसे पहले इबादत करने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Inse kaho, agar waqai Rehman ki koi aulad hoti to sabse pehle Ibadat karne wala main hota”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye! Kay agar bil-faraz rehman ki aulad ho to mein sab say pehlay ibadat kerney wala hota
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, अगर वक्त रहमान की कोई औलाद होती तो सबसे पहले इबादत करने वाला मैं होता”
عَرَبِيسُبحانَ رَبِّ السَّماواتِ وَالأَرضِ رَبِّ العَرشِ عَمّا يَصِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)पवित्र है आकाशों तथा धरती का पालनहार, सिंहासन का स्वामी उन बातों से जो वे बयान करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Paak hai aasmaano aur zameen ka farma rawan, Arsh ka maalik, un saari baaton se jo yeh log us ki taraf mansoob karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmano aur zamin aur arsh ka rab jo kuch yeh biyan kertay hain iss say (boht) pak hai
Devnagri Urdu (Maududi)पाक है आसमान और जमीन का फरमा, अर्श का मालिक, उन सारी बातों से जो ये लोग हमारी तरफ मंसूब करते हैं
عَرَبِيفَذَرهُم يَخوضوا وَيَلعَبوا حَتّىٰ يُلاقوا يَومَهُمُ الَّذي يوعَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो आप उन्हें छोड़ दें व्यर्थ की बहस करते रहें तथा खेलते रहें, यहाँ तक कि उनका सामना उनके उस दिन से हो जाए, जिसका उनसे वादा किया जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Accha, inhein apne baatil khayalat mein garq aur apne khel mein munhamik rehne do, yahan tak ke yeh apna woh din dekh lein jiska inhein khauff dilaya jaa raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Abb aap enhen issi behas mubahisay aur khel kood mein chor dijiye yahan tak kay enhen uss din say sabiqa parr jaye jinn ka yeh wada diyey jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अच्छा, इन्हें अपनी बात ख़यालत में गर्क और अपने खेल में मुनाहमिक रहने दो, यहाँ तक के ये अपना वो दिन देख लें जिसका इन्हें खौफ़ दिलाया जा रहा है
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي فِي السَّماءِ إِلٰهٌ وَفِي الأَرضِ إِلٰهٌ ۚ وَهُوَ الحَكيمُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है जो आकाश में पूज्य है और धरती में भी पूज्य है और वही पूर्ण ह़िकमत वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi ek aasman mein bhi khuda hai aur zameen mein bhi khuda, aur wahi hakeem o Aleem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi aasmano mein mabood hai aur zamin mein bhi wohi qabil-e-ibadat hai aur woh bari hikmat wala aur pooray ilm wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही एक आसमान मैं भी खुदा है और ज़मीन में भी खुदा, और वही हकीम ओ अलीम है
عَرَبِيوَتَبارَكَ الَّذي لَهُ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَما بَينَهُما وَعِندَهُ عِلمُ السّاعَةِ وَإِلَيهِ تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और बड़ा ही बरकत वाला है वह, जिसके पास आसमानों और ज़मीन की बादशाही है और उसकी भी जो उन दोनों के दरमियान है तथा उसी के पास क़ियामत का ज्ञान है और उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Bahut baala-o-bartar hai woh jiske qabze mein zameen aur aasmaano aur har us cheez ki baadshahi hai jo zameen o aasman ke darmiyan payi jaati hai. Aur wahi qayamat ki ghadi ka ilm rakhta hai, aur usi ki taraf tum sab paltaye jaane waale ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh boht barkaton wala hai jiss kay pass aasman-o-zamin aur inn kay darmiyan ki badshahat hai aur qayamat ka ilm bhi ussi kay pass hai aur ussi ki janib tum sab lotaye jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)बहुत बाला-ओ-बरतर है वो जिसका क़ब्ज़ में ज़मीन और आसमान और हर उस चीज़ की बादशाही है जो ज़मीन ओ आसमान के दरमियान पाई जाती है। और वही कयामत की घड़ी का इल्म रखा है, और उसकी तरफ तुम सब पलटे जाने वाले हो
عَرَبِيوَلا يَملِكُ الَّذينَ يَدعونَ مِن دونِهِ الشَّفاعَةَ إِلّا مَن شَهِدَ بِالحَقِّ وَهُم يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे लोग जिन्हें ये उसके सिवा पुकारते हैं, वे सिफ़ारिश का अधिकार नहीं रखते। परंतु जिसने सत्य की गवाही दी और वे (उसे) जानते हों।
Roman Urdu (Maududi)Usko chodh kar yeh log jinhein pukarte hain woh kisi shafaat ka ikhtiyar nahin rakhte, illa yeh ke koi ilm ki bina par haqq ki shahadat de
Roman Urdu (Junagarhi)Jinehn yeh log Allah kay siwa pukartay hain woh shifaat kerney ka ikhtiyar nahi rakhtay haan (mustahiq-e-shifaat woh hain) jo haq baat ka iqrar keren aur unhen ilm bhi ho
Devnagri Urdu (Maududi)उसको छोड़ कर ये लोग जिन्हें पुकारते हैं वो किसी शफात का इख्तियार नहीं रखते, इल्ला ये के कोई इल्म की बिना पर हक की शहादत दे
عَرَبِيوَلَئِن سَأَلتَهُم مَن خَلَقَهُم لَيَقولُنَّ اللَّهُ ۖ فَأَنّىٰ يُؤفَكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय यदि आप उनसे पूछें कि उन्हें किसने पैदा किया? तो वे अवश्य कहेंगे : अल्लाह ने। तो फिर वे कहाँ बहकाए जाते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Aur agar tum insey pucho ke inhein kisne paida kiya hai to yeh khud kahenge ke Allah ne. Phir kahan se yeh dhoka kha rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Agar aap inn say daryaft keren kay enehn kiss ney peda kiya hai? To yaqeenan yeh jawab den gay kay Allah ney, phir yeh kahan ultay jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर तुम इनसे पूछो के इन्हें किसने चुकाया है तो ये खुद कहेंगे के अल्लाह ने। फिर कहां से ये धोखा खा रहे हैं
عَرَبِيوَقيلِهِ يا رَبِّ إِنَّ هٰؤُلاءِ قَومٌ لا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा (उसके पास) रसूल के इस कथन (का भी ज्ञान है कि) : ऐ मेरे पालनहार! ये तो ऐसे लोग हैं, जो ईमान नहीं लाते।
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai Rasool ke is qaul ki ke aey Rubb, yeh woh log hain jo maan kar nahin detay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn ka (payghumbar ka aksar) yeh kehna kay aey meray rab! Yaqeenan yeh woh log hain jo eman nahi latay
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है रसूल के इस क़ौल की ऐ रब, ये वो लोग हैं जो मान कर नहीं देते
عَرَبِيفَاصفَح عَنهُم وَقُل سَلامٌ ۚ فَسَوفَ يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप उनसे मुँह फेर लें तथा कह दें कि सलाम है तुम्हें। जल्द ही उन्हें पता चल जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Accha, aey nabi insey darguzar karo aur kehdo ke salaam hai tumhein, anqareeb inhein maaloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aap inn say mun pher len aur keh den. (acha bhai) salam! Enehn unqareeb (khud hi) maloom hojaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)अच्छा, ऐ नबी इनसे दरगुज़र करो और कहदो के सलाम हैं तुम्हें, अनकरीब इन्हें मालूम हो जाएगा
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Surah 43: Az-Zukhruf (Gold)

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Surah 43: Az-Zukhruf (Gold)

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Surah 43: Az-Zukhruf (Gold)

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Surah 43: Az-Zukhruf (Gold)

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Surah 43: Az-Zukhruf (Gold)

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Surah 44: Ad-Dukhan (The Drought)

Meccan🕐 Revelation #64📜 59 Verses🕮 Juz 1
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Surah 44: Ad-Dukhan (The Drought)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيحم
हिन्दी (Al-Omari)ह़ा, मीम।
Roman Urdu (Maududi)Haa Meem
Roman Urdu (Junagarhi)Haa-meem
Devnagri Urdu (Maududi)हा मीम
عَرَبِيوَالكِتابِ المُبينِ
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हिन्दी (Al-Omari)क़सम है स्पष्ट करने वाली पुस्तक की।
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai is kitaab e Mubeen ki
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai iss wazahat wali kitab ki
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है इस किताब ए मुबीन की
عَرَبِيإِنّا أَنزَلناهُ في لَيلَةٍ مُبارَكَةٍ ۚ إِنّا كُنّا مُنذِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने इसे एक बरकत वाली रात में उतारा है। निःसंदेह हम डराने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Ke humne isey ek badi khair o barakat wali raat mein nazil kiya hai, kyunke hum logon ko mutanabbeh (warning) karne ka irada rakhte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney issay ba-barkat raat mein utara hai be-shak hum daraney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)के हमने इसे एक बड़ी खैर ओ बरकत वाली रात में नाज़िल किया है, क्योंकि हम लोगों को मुतनब्बह (चेतावनी) करने का इरादा रखते थे
عَرَبِيفيها يُفرَقُ كُلُّ أَمرٍ حَكيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)इसी (रात) में प्रत्येक अटल मामले का निर्णय किया जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh raat thi jismein har maamle ka hakeemana faisla
Roman Urdu (Junagarhi)Issi raat mein her aik mazboot kaam ka faisla kiya jata hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो रात थी जिसमें हर मामले का हकीमना फैसला
عَرَبِيأَمرًا مِن عِندِنا ۚ إِنّا كُنّا مُرسِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)हमारी ओर से आदेश के कारण। निःसंदेह हम ही भेजने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Hamare hukum se sadir kiya jata hai. Hum ek Rasool bhejne waley thay
Roman Urdu (Junagarhi)Humaray pass say hukum hoker hum hi hain rasool bana ker bhejney walay
Devnagri Urdu (Maududi)हमारे हुकुम से सादिर किया जाता है। हम एक रसूल भेजने वाले थे
عَرَبِيرَحمَةً مِن رَبِّكَ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّميعُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)आपके पालनहार की दया के कारण। निश्चय वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Tere Rubb ki rehmat ke taur par.Yaqeenan wahi sab kuch sunne aur jaanne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kay rab ki meharbani say. Wohi hai sunnay wala jannay wala
Devnagri Urdu (Maududi)तेरे रब की रहमत के तौर पर। यकीनन वही सब कुछ सुनने और जाने वाला है
عَرَبِيرَبِّ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَما بَينَهُما ۖ إِن كُنتُم موقِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो आकाशों तथा धरती और उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों का पालनहार है, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Aasmano aur zameen ka Rubb aur har us cheez ka Rubb jo Aasman o zameen ke darmiyan hai agar tum log waqaii yakeen rakhne waley ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jo rab hai aasmano ka aur zamin ka aur jo kuch inn kay darmiyan hai agar tum yaqeen kerney walay ho
Devnagri Urdu (Maududi)आसमानो और ज़मीन का रब और हर उस चीज़ का रुब जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान है अगर तुम लोग वाक़ई यक़ीन रखो वाले हो
عَرَبِيلا إِلٰهَ إِلّا هُوَ يُحيي وَيُميتُ ۖ رَبُّكُم وَرَبُّ آبائِكُمُ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसके अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं। वही जीवित करता और मारता है। तुम्हारा पालनहार तथा तुम्हारे पहले बाप-दादाओं का पालनहार है।
Roman Urdu (Maududi)Koi maabood uske siwa nahin hai. Wahi zindagi ata karta hai aur wahi maut deta hai.Tumhara Rubb aur tumhare un aslaaf (forefathers) ka Rubb jo pehle guzar chuke hain
Roman Urdu (Junagarhi)Koi mabood nahi iss kay siwa wohi jilata hai aur maarta hai wohi tumhara rab hai aur tumharay aglay baap dadon ka
Devnagri Urdu (Maududi)कोई माबूद उसके सिवा नहीं है। वही जिंदगी अता करता है और वही मौत देता है।तुम्हारा रब और तुम्हारे उन असलाफ (पूर्वजों) का रब जो पहले गुजर चुके हैं
عَرَبِيبَل هُم في شَكٍّ يَلعَبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि वे संदेह में पड़े खेल रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Magar fil-waqeh in logon ko yaqeen nahin hai) balke yeh apne shakk mein paday khel rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay woh shak mein paray khel rahen hain
Devnagri Urdu (Maududi)(मगर फिल-वक़्हे इन लोगों को यकीन नहीं है) बल्के ये अपने शक्क में पड़े खेल रहे हैं
عَرَبِيفَارتَقِب يَومَ تَأتِي السَّماءُ بِدُخانٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो आप उस दिन की प्रतीक्षा करें, जब आकाश प्रत्यक्ष धुआँ लाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Accha intezar karo us din ka jab aasman sareeh dhuwan (smoke) liye huey aayega
Roman Urdu (Junagarhi)Aap uss din kay muntazir rahen jabkay aasman zahir dhuwan laye ga
Devnagri Urdu (Maududi)अच्छा इंतजार करो उस दिन का जब आसमान सारे धुवां (धुआं) के लिए आएगा
عَرَبِييَغشَى النّاسَ ۖ هٰذا عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जो लोगों को ढाँप लेगा। यह दुःखदायी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh logon par chaa jayega, yeh hai dardnaak saza
Roman Urdu (Junagarhi)Jo logon ko gher ley ga yeh dard-naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वो लोगों पर छा जाएगा, ये है दर्दनाक सजा
عَرَبِيرَبَّنَا اكشِف عَنَّا العَذابَ إِنّا مُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारे पालनहार! हमसे यह यातना दूर कर दे। निःसंदेह हम ईमान लाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Ab kehte hain ke) “ parwardigar , humpar se yeh azaab taal de, hum imaan laatey hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Kahen gay kay aey humaray rab! Yeh aafat hum say door ker dey hum eman qabool kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)(अब कहते हैं के) "परवरदिगार, हमपर से ये अजब ताल दे, हम ईमान लाते हैं"
عَرَبِيأَنّىٰ لَهُمُ الذِّكرىٰ وَقَد جاءَهُم رَسولٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उनके लिए नसीहत कहाँ? हालाँकि, निश्चित रूप से उनके पास स्पष्ट करने वाला रसूल आ चुका।
Roman Urdu (Maududi)Inki gaflat kahan dur hoti hai? Inka haal to yeh hai ke in ke paas Rasool e mubeen aa gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay liye naseehat kahan hai? Khol khol ker biyan kerney walay payghumber unn kay pass aa chukay
Devnagri Urdu (Maududi)इनकी गफ़लत कहाँ डर होती है? इनका हाल तो ये है के इन के पास रसूल ए मुबीन आ गया
عَرَبِيثُمَّ تَوَلَّوا عَنهُ وَقالوا مُعَلَّمٌ مَجنونٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उन्होंने उससे मुँह फेर लिया और उन्होंने कहा : यह तो सिखाया हुआ है, यह पागल है।
Roman Urdu (Maududi)Phir bhi yeh uski taraf multafit na huey aur kaha ke “ yeh to sikhaya padaya bawla hai (well-tutored madman)”
Roman Urdu (Junagarhi)Phir bhi inhon ney unn say mun phera aur keh diya kay sikhaya parhaya hua baaoola hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर भी ये उसकी तरफ मुल्ताफ़ित ना हुए और कहा के “ये तो सिखाया पड़ा बावला है”
عَرَبِيإِنّا كاشِفُو العَذابِ قَليلًا ۚ إِنَّكُم عائِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम इस यातना को थोड़ी देर के लिए दूर करने वाले हैं। (परंतु) निःसंदेह तुम फिर वही कुछ करने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Hum zara azaab hataye detay hain, tum log phir wahi kuch karoge jo pehle kar rahe thay
Roman Urdu (Junagarhi)Hum azab ko thora door ker den gay to phir tum apni ussi halat per aajao gay
Devnagri Urdu (Maududi)हम जरा अजब हटाये देते हैं, तुम लोग फिर वही कुछ करोगे जो पहले कर रहे थे
عَرَبِييَومَ نَبطِشُ البَطشَةَ الكُبرىٰ إِنّا مُنتَقِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन हम बड़ी पकड़ पकड़ेंगे, निःसंदेह हम बदला लेने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz hum badi zarb (assault) lagayenge woh din hoga jab hum tumse intiqaam lenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din hum bari sakht pakar pakaren gay bilyaqeen hum badla lenay walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ हम बड़ी ज़र्ब (हमला) लगाएंगे वो दिन होगा जब हम तुमसे इंतिक़ाम लेंगे
عَرَبِي۞ وَلَقَد فَتَنّا قَبلَهُم قَومَ فِرعَونَ وَجاءَهُم رَسولٌ كَريمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने इनसे पूर्व फ़िरऔन की जाति की परीक्षा ली तथा उनके पास एक अति सम्मानित रसूल आया।
Roman Urdu (Maududi)Hum insey pehle Firaun ki qaum ko isi aazmaish mein daal chuke hain. Unke paas ek nihayat shareef Rasool aaya
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan inn say pehlay hum qom-e-firaon ko (bhi) aazma chukay hain jinn kay pass (Allah ka) ba-izzat rasool aaya
Devnagri Urdu (Maududi)हम इनसे पहले फिरौन की क़ौम को इसी आज़माइश में डाल चुके हैं। उनके पास एक निहायत शरीफ़ रसूल आया
عَرَبِيأَن أَدّوا إِلَيَّ عِبادَ اللَّهِ ۖ إِنّي لَكُم رَسولٌ أَمينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यह कि अल्लाह के बंदों को मेरे हवाले कर दो। निश्चय मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur usne kaha “Allah ke bandon ko mere hawale karo, main tumhare liye ek amanat-daar Rasool hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Kay Allah Taalaa kay bando ko meray hawalay kerdo yaqeen mano kay mein tumharay liye amanat daar rasool hun
Devnagri Urdu (Maududi)और उसने कहा "अल्लाह के बंदों को मेरे हवाले करो, मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं
عَرَبِيوَأَن لا تَعلوا عَلَى اللَّهِ ۖ إِنّي آتيكُم بِسُلطانٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यह कि अल्लाह के मुक़ाबले में सरकशी न करो, निःसंदेह मैं तुम्हारे पास स्पष्ट प्रमाण लाने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Allah ke muqable mein sarkashi na karo. Main tumhare saamne (apni maamuriyat ki) sareeh sanad (clear authority) pesh karta hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum Allah Taalaa kay samney sirkashi na kero mein tumharay pass khulli daleel laney wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के मुक़ाबले में सरकशी न करो। मैं तुम्हारे सामने (अपनी ममुरिअत की) सारी सनद (स्पष्ट अधिकार) पेश करता हूं
عَرَبِيوَإِنّي عُذتُ بِرَبّي وَرَبِّكُم أَن تَرجُمونِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह मैंने अपने पालनहार तथा तुम्हारे पालनहार की इससे शरण ली है कि तुम मुझपर पथराव कर मेरी जान ले लो।
Roman Urdu (Maududi)Aur main apne Rubb aur tumhare Rubb ki panaah le chuka hoon issey ke tum mujhpar hamla-awar (attack) ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mein apnay aur tumharay rab ki panah mein aata hun iss say kay tum mujhay sangsaar kerdo
Devnagri Urdu (Maududi)और मैं अपना रुब और तुम्हारे रुब की पनाह ले चूका हूं इसके लिए तुम मुझपर हमला-आवार (हमला) हो
عَرَبِيوَإِن لَم تُؤمِنوا لي فَاعتَزِلونِ
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हिन्दी (Al-Omari)और अगर तुम मेरी बात नहीं मानते, तो मुझसे दूर रहो।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum meri baat nahin maante to mujhpar haath daalne se baaz raho”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tum mujh per eman nahi latey to mujh say alag hi raho
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम मेरी बात नहीं मानते तो मुझपर हाथ डालने से बाज रहो”
عَرَبِيفَدَعا رَبَّهُ أَنَّ هٰؤُلاءِ قَومٌ مُجرِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अंततः उसने अपने पालनहार को पुकारा कि निःसंदेह ये अपराधी लोग हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar usne apne Rubb ko pukara ke yeh log mujrim hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir unhon ney apnay rab say dua ki kay yeh sabb gunehgar log hain
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार उसने अपने रब को पुकारा के ये लोग मुजरिम हैं
عَرَبِيفَأَسرِ بِعِبادي لَيلًا إِنَّكُم مُتَّبَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः तुम मेरे बंदों को लेकर रातों-रात चले जाओ। निःसंदेह तुम्हारा पीछा किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)(Jawab diya gaya) accha to raat-o-raat mere bandon (servants) ko lekar chal padh. Tum logon ka peecha kiya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)(hum ney keh diya) kay raton raat tu meray bando ko ley ker nikal yaqeenan tumhara peecha kiya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)(जवाब दिया गया) अच्छा तो रात-ओ-रात मेरे बंदों (नौकरों) को लेकर चल पढ़। तुम लोगों का पीछा किया जाएगा
عَرَبِيوَاترُكِ البَحرَ رَهوًا ۖ إِنَّهُم جُندٌ مُغرَقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा सागर को अपनी दशा पर ठहरा हुआ छोड़ दे। निःसंदेह वे एक ऐसी सेना हैं, जो डुबोए जाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Samandar ko uske haal par khula chodh de.Yeh saara lashkar garq (drown) honay wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tu darya ko saakin chor ker chala jaa bilashuba yeh lashkar gharq kerdiya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)समंदर को उसके हाल पर खुला छोड़ दे। ये सारा लश्कर गर्क (डूबने) होने वाला है
عَرَبِيكَم تَرَكوا مِن جَنّاتٍ وَعُيونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)वे कितने ही बाग़ और जल स्रोत छोड़ गए।
Roman Urdu (Maududi)Kitne hi baag aur chasme
Roman Urdu (Junagarhi)Woh boht say baghaat aur chashmey chor gaye
Devnagri Urdu (Maududi)कितने ही बाग और चश्मे
عَرَبِيوَزُروعٍ وَمَقامٍ كَريمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा खेतियाँ और बढ़िया स्थान।
Roman Urdu (Maududi)Aur kheit (gardens) aur shaandaar mahal thay jo woh chodh gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur khetiyan aur rahat buksh thikaney
Devnagri Urdu (Maududi)और खेत (बगीचे) और शानदार महल थे जो वो छोड़ गए
عَرَبِيوَنَعمَةٍ كانوا فيها فاكِهينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा सुख-सामग्री, जिनमें वे आनंद ले रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Kitne hi aish ke sar-o-samaan, jin mein woh mazey kar rahey thay unke pichey dharay reh gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh aaram ki cheezen jinn mein aish ker rahey thay
Devnagri Urdu (Maududi)कितने हाय ऐश के सर-ओ-समां, जिन में वो मजे कर रहे थे उनके पीछे धरे रह गए
عَرَبِيكَذٰلِكَ ۖ وَأَورَثناها قَومًا آخَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐसा ही हुआ और हमने उनका उत्तराधिकारी दूसरे लोगों को बना दिया।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hua unka anjaam, aur humne dusron ko in cheezon ka waris bana diya
Roman Urdu (Junagarhi)Uss i tarah hogaya aur hum ney inn sabb ka waris doosri qom ko bana diya
Devnagri Urdu (Maududi)ये हुआ उनका अंजाम, और हमने दूसरों को इन चीज़ों का वारिस बना दिया
عَرَبِيفَما بَكَت عَلَيهِمُ السَّماءُ وَالأَرضُ وَما كانوا مُنظَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर न उनपर आकाश और धरती रोए और न वे मोहलत पाने वाले हुए।
Roman Urdu (Maududi)Phir na aasman unpar roya na zameen, aur zara si mohalat bhi unko na di gayi
Roman Urdu (Junagarhi)So unn per na na to aasman-o-zamin roye aur na unhen mohlat mili
Devnagri Urdu (Maududi)फिर ना आसमां अनपर रोया ना ज़मीन, और ज़रा सी मोहलत भी उनको ना दी गई
عَرَبِيوَلَقَد نَجَّينا بَني إِسرائيلَ مِنَ العَذابِ المُهينِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने इसराईल की संतान को अपमानकारी यातना से बचा लिया।
Roman Urdu (Maududi)Is taraah bani Israel ko humne sakht zillat ke azaab
Roman Urdu (Junagarhi)Aur be-shak hum ney (hi) bani isareel ko (sakht) ruswakun saza say nijat di
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह बनी इसराइल को हमने ज़िल्लत के अज़ाब
عَرَبِيمِن فِرعَونَ ۚ إِنَّهُ كانَ عالِيًا مِنَ المُسرِفينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फ़िरऔन से। निःसंदेह वह हद से बढ़ने वालों में से एक सरकश व्यक्ति था।
Roman Urdu (Maududi)Firoun se najaat di jo hadd se guzar janey walon mein fil waqeh badey unchey darje ka aadmi tha
Roman Urdu (Junagarhi)(Jo) firaon ki taraf say (horahi) thi.fil-waqey woh sirkash aur hadd say guzarney walon mein say tha
Devnagri Urdu (Maududi)फ़िरौन से नजात दी जो हद से गुजर जाने वालों में फिल वक़्क़े बदे अनचे दर्जे का आदमी था
عَرَبِيوَلَقَدِ اختَرناهُم عَلىٰ عِلمٍ عَلَى العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने उन्हें ज्ञान के आधार पर संसार वासियों पर चुन लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur unki halat jaante huye, unko duniya ki dursi qaumon par tarjeeh di
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney danista tor per bani israeel ko duniya jahan walon per fokiyat di
Devnagri Urdu (Maududi)और उनकी हालात जानते हैं, उनको दुनिया की पुरानी क़ौम पर तर्जीह दी
عَرَبِيوَآتَيناهُم مِنَ الآياتِ ما فيهِ بَلاءٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उन्हें ऐसी निशानियाँ प्रदान कीं, जिनमें खुली परीछा थी।
Roman Urdu (Maududi)Aur unhein aisi nishaniya dikhayi jin mein sareeh aazmaish thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unhen aisi nishaniyan din jinn mein sareeh aazmaeesh thi
Devnagri Urdu (Maududi)और उन्हें ऐसी निशानियां दिखाई गईं जिनमें सारी आजमाइश थी
عَرَبِيإِنَّ هٰؤُلاءِ لَيَقولونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह ये लोग निश्चय कहते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log kehte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log to yehi kehtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग कहते हैं
عَرَبِيإِن هِيَ إِلّا مَوتَتُنَا الأولىٰ وَما نَحنُ بِمُنشَرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)कि हमारी इस पहली मृत्यु के सिवा कोई (मृत्यु) नहीं, और न हम कभी दोबारा उठाए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)“hamari pehli maut ke siwa aur kuch nahin uske baad hum dobara uthaye jaane wale nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kay (aakhri cheez) yehi humara pehli baar (duniya say) mar jana hai aur hum doobara uthaye nahi jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)"हमारी पहली मौत के सिवा और कुछ नहीं उसके बाद हम दोबारा उठे जाने वाले नहीं हैं
عَرَبِيفَأتوا بِآبائِنا إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम हमारे बाप-दादा को ले आओ, यदि तुम सच्चे हो?
Roman Urdu (Maududi)Agar tum sacchey ho to utha lao hamare baap dada ko”
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum sachay ho to humaray baap dadon ko ley aao
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम सच्चे हो तो उठ लाओ हमारे बाप दादा को"
عَرَبِيأَهُم خَيرٌ أَم قَومُ تُبَّعٍ وَالَّذينَ مِن قَبلِهِم ۚ أَهلَكناهُم ۖ إِنَّهُم كانوا مُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या ये लोग बेहतर हैं, अथवा तुब्बा' की जाति तथा वे लोग जो उनसे पूर्व थे? हमने उन्हें विनष्ट कर दिया। निःसंदेह वे अपराधी थे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh behtar hai ya tubbah ki qaum aur ussey pehle ke log? Humne unko isi bina par tabah kiya ke woh mujrim ho gaye thay
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh log behtar hain ya tubba’a ki qom kay log aur jo unn say bhi pehlay thay. Hum ney unn sabb ko halak ker diya yaqeenan woh gunehgar thay
Devnagri Urdu (Maududi)ये बेहतर है या तुब्बा की क़ौम और उसे पहले के लोग? हमने उनको इसी बिना पर तबाह किया के वो मुजरिम हो गए थे
عَرَبِيوَما خَلَقنَا السَّماواتِ وَالأَرضَ وَما بَينَهُما لاعِبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है, खेलते हुए नहीं बनाया है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Aasman o zameen aur inke darmiyan ki cheezein humne kuch khel ke taur par nahin bana di hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney zamin aur aasmano aur inn kay darmiyan ki cheezon ko khel kay tor per peda nahi kiya
Devnagri Urdu (Maududi)ये आसमान ओ ज़मीन और इनके दरमियान की चीजें हमने कुछ खेल के तौर पर नहीं बना दी है
عَرَبِيما خَلَقناهُما إِلّا بِالحَقِّ وَلٰكِنَّ أَكثَرَهُم لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)हमने उन दोनों को सत्य ही के साथ पैदा किया है, किंतु उनमें से अधिकतर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Inko humne bar-haqq paida kiya hai, magar aksar log jaante hain hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay hum ney unhen durust tadbeer kay sath peda kiya hai lekin inn mein aksar log nahi jantay
Devnagri Urdu (Maududi)इनको हमने बार-हक़ अदा किया है, मगर अक्सर लोग जानते हैं
عَرَبِيإِنَّ يَومَ الفَصلِ ميقاتُهُم أَجمَعينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय फ़ैसले का दिन उन सब का नियत समय है।
Roman Urdu (Maududi)In sabke uthaye janey ke liye the-shuda waqt faisle ka din hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan faislay ka din inn sabb ka tey shuda waqt hai
Devnagri Urdu (Maududi)सबके उठाए जाने के लिए थे-शुदा वक़्त फ़ैसले का दिन है
عَرَبِييَومَ لا يُغني مَولًى عَن مَولًى شَيئًا وَلا هُم يُنصَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन कोई साथी किसी साथी के कुछ काम न आएगा और न उनकी सहायता की जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Woh din jab koi azeez kareeb apne kisi azeez kareeb ke kuch bhi kaam nahin aayega. Aur na kahin se unhein koi madad pahunchegi
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din koi dost kissi dost kay kuch bhi kaam na aayega aur na unki imdad ki jayegi
Devnagri Urdu (Maududi)वो दिन जब कोई अज़ीज़ क़रीब अपने किसी अज़ीज़ क़रीब के लिए कुछ भी काम नहीं आएगा। और न कहीं से उन्हें कोई मदद मांगेगी
عَرَبِيإِلّا مَن رَحِمَ اللَّهُ ۚ إِنَّهُ هُوَ العَزيزُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)किंतु जिसपर अल्लाह ने दया की, निःसंदेह वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान है।
Roman Urdu (Maududi)Siwaye iske ke Allah hi kisi par reham karey, woh zabardast aur Raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Magar jiss per Allah ki meharbani hojaye woh zabardast aur reham kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)सिवाय इसके अल्लाह ही किसी पर रहम करे, वो ज़बरदस्त और रहीम है
عَرَبِيإِنَّ شَجَرَتَ الزَّقّومِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह ज़क़्क़ूम (थूहड़) का वृक्ष।
Roman Urdu (Maududi)Zakkhum ka darakht (tree)
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak zaqoom (thoher) ka darakht
Devnagri Urdu (Maududi)ज़ख़्म का दरख्त (पेड़)
عَرَبِيطَعامُ الأَثيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)पापी का भोजन है।
Roman Urdu (Maududi)Gunahgaar ka kha-ja (khana /food) hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Gunehgar ka khana hai
Devnagri Urdu (Maududi)गुनहगार का खा-जा (खाना/भोजन) होगा
عَرَبِيكَالمُهلِ يَغلي فِي البُطونِ
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हिन्दी (Al-Omari)पिघले हुए ताँबे (या तलछट) की तरह, पेटों में खौलता है।
Roman Urdu (Maududi)Tail (oil) ki tiljhat (dregs) jaisa, pait (bellies) mein is tarah josh khayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jo misil talchat kay hai aur pet mein kholta rehta hai
Devnagri Urdu (Maududi)पूंछ (तेल) की तिलझट (ड्रेग्स) जैसा, पैट (बेलीज़) में इस तरह जोश खाएगा
عَرَبِيكَغَليِ الحَميمِ
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हिन्दी (Al-Omari)गर्म पानी के खौलने की तरह।
Roman Urdu (Maududi)Jaise khaulta (boiling) hua pani josh khata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Misil tez garum pani kay
Devnagri Urdu (Maududi)जैसा खौलता (उबलता) हुआ पानी जोश खाता है
عَرَبِيخُذوهُ فَاعتِلوهُ إِلىٰ سَواءِ الجَحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)इसे पकड़ो, फिर इसे धधकती आग के बीच तक घसीटकर ले जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Pakado isey aur raged-te (dragging) huey le jao isko jahannum ke beechon beech
Roman Urdu (Junagarhi)Issay pakar lo phir ghaseettay huyey beech jahannum tak phonchao
Devnagri Urdu (Maududi)पकाडो इसे और क्रोधित-ते (घसीटते हुए) हुए ले जाओ इसको जहन्नुम के बीचों बीच
عَرَبِيثُمَّ صُبّوا فَوقَ رَأسِهِ مِن عَذابِ الحَميمِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर खौलते हुए पानी की कुछ यातना उसके सिर पर उँडेल दो।
Roman Urdu (Maududi)Aur undhail (pour) do iske sar par khaulte (boiling) paani ka azaab
Roman Urdu (Junagarhi)Phir iss kay sir per sakht garum pani ka azab bahao
Devnagri Urdu (Maududi)और उंधैल (डालो) दो इसके सर पर खुलते (उबलता हुआ) पानी का अज़ाब
عَرَبِيذُق إِنَّكَ أَنتَ العَزيزُ الكَريمُ
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हिन्दी (Al-Omari)चख, निःसंदेह तू ही वह व्यक्ति है जो बड़ा बलशाली और सम्माननीय है।
Roman Urdu (Maududi)Chakkh iska maza, bada zabardast izzatdaar aadmi hai tu
Roman Urdu (Junagarhi)(iss say kaha jayega) chakhta jaa tu to bara zee-izzat aur baray ikraam wala tha
Devnagri Urdu (Maududi)चक्ख इसका मजा, बड़ा जबरदस्त इज्जतदार आदमी है तू
عَرَبِيإِنَّ هٰذا ما كُنتُم بِهِ تَمتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदे यह वही है जिसके बारे में तुम संदेह करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh wahi cheez hai jiske aane mein tumlog shakk rakhte thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi woh cheez hai jiss mein tum shak kiya kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)ये वही चीज है जिसके आने में तुमलोग शक्क रखते थे”
عَرَبِيإِنَّ المُتَّقينَ في مَقامٍ أَمينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह परहेज़गार लोग शांति एवं सुरक्षा वाली जगह में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Khuda tars log aman ki jagah mein hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak (Allah say) darney walay aman chain ki jagah mein hongay
Devnagri Urdu (Maududi)खुदा तरस लोग अमन की जगह में होंगे
عَرَبِيفي جَنّاتٍ وَعُيونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)बाग़ों तथा जल स्रोतों में।
Roman Urdu (Maududi)Baaghon (gardens) aur chashmo mein
Roman Urdu (Junagarhi)Baghon aur chashmon mein
Devnagri Urdu (Maududi)बाघों (बगीचे) और चश्मे में
عَرَبِييَلبَسونَ مِن سُندُسٍ وَإِستَبرَقٍ مُتَقابِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे बारीक और गाढ़े रेशम के वस्त्र पहनेंगे, आमने-सामने बैठे होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Hareer-o-deeba (silk and brocade) ke libas pehne, aamne saamne baithey honge
Roman Urdu (Junagarhi)Bareek aur dabeez resham kay libas pehney huyey aamney samney behtay hongay
Devnagri Urdu (Maududi)हरीर-ओ-दीबा (रेशम और ब्रोकेड) के लिबास पहने, आमने सामने बैठे होंगे
عَرَبِيكَذٰلِكَ وَزَوَّجناهُم بِحورٍ عينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐसा ही होगा और हम उनका विवाह गोरे बदन, काली आँखों वाली औरतों से कर देंगे, जो बड़ी-बड़ी आँखों वाली होंगी।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hogi inki shaan aur hum gori gori aah-o-chashm auratein unse biyah denge
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh uss tarah hai aur hum bari bari aankhon wali hooron say unka nikah kerden gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये होगी इनकी शान और हम गोरी गोरी आह-ओ-चश्म औरतें उन्हें बियाह देंगे
عَرَبِييَدعونَ فيها بِكُلِّ فاكِهَةٍ آمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे उसमें निश्चिंत होकर हर प्रकार के फल मंगवाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Wahan woh itminaan se har tarah ki lazeez cheezein talab karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Dil jamaee kay sath wahan her tarah kay mewon ki farmaeeshen kertay hongay
Devnagri Urdu (Maududi)वहां वो इत्मिनान से हर तरह की लज़ीज़ चीज़ तालाब करेंगे
عَرَبِيلا يَذوقونَ فيهَا المَوتَ إِلَّا المَوتَةَ الأولىٰ ۖ وَوَقاهُم عَذابَ الجَحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)वे उसमें मृत्यु का स्वाद नहीं चखेंगे, परंतु वह मृत्यु जो पहली थी, और वह (अल्लाह) उन्हें दहकती हुई आग के अज़ाब से बचा लेगा।
Roman Urdu (Maududi)Wahan maut ka maza woh kabhi na chakhenge . Bas duniya mein jo maut aa chuki so aa chuki aur Allah apne fazal se
Roman Urdu (Junagarhi)Wahan woh mot chakhney kay nahi haan pehli mot (jo woh marr chukay) enhen Allah Taalaa ney dozakh ki saza say bacha diya
Devnagri Urdu (Maududi)वहां मौत का मज़ा वो कभी ना छोड़ेंगे। बस दुनिया में जो मौत आ चुकी सो आ चुकी और अल्लाह अपने फज़ल से
عَرَبِيفَضلًا مِن رَبِّكَ ۚ ذٰلِكَ هُوَ الفَوزُ العَظيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)आपके पालनहार की ओर से अनुग्रह के कारण। यही बहुत बड़ी सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)Unko jahannum ke azaab se bacha dega yahi badi kamiyabi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh sirf teray rab ka fazal hai yehi hai bari kamyabi
Devnagri Urdu (Maududi)उनको जहन्नुम के अज़ाब से बच्चा देगा यही बड़ी कामयाबी है
عَرَبِيفَإِنَّما يَسَّرناهُ بِلِسانِكَ لَعَلَّهُم يَتَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)सो तथ्य यही है कि हमने इसे आपकी भाषा में आसान कर दिया है, ताकि वे नसीहत ग्रहण करें।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi (s.a.s) humne is kitaab ko tumhari zubaan mein sahal (easy / aasaan) bana diya hai taake yeh log nasihat hasil karein
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney iss (quran) ko teri zaban mein aasan kerdiya takay woh naseehat hasil keren
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी (एसएएस) हमने इस किताब को तुम्हारी जुबान में सहल (आसान/आसान) बना दिया है ताके ये लोग हिदायत हासिल करें
عَرَبِيفَارتَقِب إِنَّهُم مُرتَقِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप प्रतीक्षा करें, निःसंदेह वे भी प्रतीक्षा करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ab tum bhi intezar karo, yeh bhi muntazir (intezar kar rahey) hain
Roman Urdu (Junagarhi)Abb tu muntazir reh yeh bhi muntazir hain
Devnagri Urdu (Maududi)अब तुम भी इंतज़ार करो, ये भी मुंतज़िर (इंतज़ार कर रहे) हैं
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Surah 44: Ad-Dukhan (The Drought)

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Surah 44: Ad-Dukhan (The Drought)

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Surah 44: Ad-Dukhan (The Drought)

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Surah 44: Ad-Dukhan (The Drought)

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Surah 44: Ad-Dukhan (The Drought)

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Surah 45: Al-Jathiyah (The Kneeling)

Meccan🕐 Revelation #65📜 37 Verses🕮 Juz 1
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Surah 45: Al-Jathiyah (The Kneeling)

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عَرَبِيحم
हिन्दी (Al-Omari)ह़ा, मीम।
Roman Urdu (Maududi)Haa Meem
Roman Urdu (Junagarhi)Haa-meem
Devnagri Urdu (Maududi)हा मीम
عَرَبِيتَنزيلُ الكِتابِ مِنَ اللَّهِ العَزيزِ الحَكيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)इस पुस्तक का अवतरण अल्लाह की ओर से है, जो सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Is kitaab ka nuzul Allah ki taraf se hai jo zabardast aur Hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kitab Allah ghalib hikmat walay ki taraf say nazil ki hui hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या किताब का नुज़ुल अल्लाह की तरफ से है जो ज़बरदस्त और हकीम है
عَرَبِيإِنَّ فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ لَآياتٍ لِلمُؤمِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आकाशों तथा धरती में ईमानवालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke aasmaano aur zameen mein beshumaar nishaniyan hain iman laney walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmano aur zamin mein emaandaron kay liye yaqeenan boht si nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के आसमां और ज़मीन में बेशुमार निशानियां हैं ईमान लाने वालों के लिए
عَرَبِيوَفي خَلقِكُم وَما يَبُثُّ مِن دابَّةٍ آياتٌ لِقَومٍ يوقِنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम्हारी सृष्टि में और उन जीवित चीज़ों में जो वह फैलाता है, उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं जो विश्वास करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhari apni paidaish mein, aur un haiwanaat(janwaron) mein jinko Allah (zameen mein) phayla raha hai, badi nishaniyan hain un logon ke liye jo yaqeen laney waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur khud tumhari pedaeesh mein aur inn janwaron ki pedaeesh mein jinehn woh phelata hai yaqeen rakhney wali qom kay liye boht si nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हारी अपनी पैदाइश में, और उन हैवानत (जानवरों) में जिनको अल्लाह (जमीन में) फैला रहा है, बड़ी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो यकीन लाने वाले हैं
عَرَبِيوَاختِلافِ اللَّيلِ وَالنَّهارِ وَما أَنزَلَ اللَّهُ مِنَ السَّماءِ مِن رِزقٍ فَأَحيا بِهِ الأَرضَ بَعدَ مَوتِها وَتَصريفِ الرِّياحِ آياتٌ لِقَومٍ يَعقِلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा रात और दिन के फेर-बदल में और उस रोज़ी में जो अल्लाह ने आकाश से उतारा, फिर उसके द्वारा धरती को उसके मरने के पश्चात् जीवित कर दिया, तथा हवाओं के फेरने में, उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो बुद्धि से काम लेते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur shab-o-roz (night and day) ke farq o ikhtilaf mein, aur us rizq mein jisey Allah aasmaan se nazil farmata hai phir uske zariye se murda zameen ko jila uthata hai, aur hawaon ki gardish mein bahut nishaniyan hain un logon ke liye jo aqal se kaam letey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur raat din kay badlaney mein aur jo kuch rozi Allah Taalaa aasman say nazil farma ker zamin ko usski mot kay baad zindah ker deta hai (iss mein aur hawaon kay badlney mein bhi unn logon kay liye jo awal rakhtay hain nishaniyan hain)
Devnagri Urdu (Maududi)और शब-ओ-रोज़ (रात और दिन) के फर्क ओ इख्तिलाफ में, और हम रिज्क में जैसे अल्लाह आसमान से नाज़िल फरमाता है फिर उसके ज़रिये से मुर्दा ज़मीन को जिला उठाता है, और हवाओं की गर्दिश में बहुत निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक़ल से काम लेते हैं
عَرَبِيتِلكَ آياتُ اللَّهِ نَتلوها عَلَيكَ بِالحَقِّ ۖ فَبِأَيِّ حَديثٍ بَعدَ اللَّهِ وَآياتِهِ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ये अल्लाह की आयतें हैं, जो हम तुम्हें हक़ के साथ सुना रहे हैं। फिर अल्लाह तथा उसकी आयतों के बाद वे किस बात ईमान लाएँगे?
Roman Urdu (Maududi)Yeh Allah ki nishaniyan hain jinhein hum tumhare saamne theek theek bayan kar rahey hain. Ab aakhir Allah aur uski aayat ke baad aur kaunsi baat hai jispar yeh log imaan layenge
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hain Allah ki aayaten jinhen hum aap ko raasti say suna rahey hain pus Allah Taalaa aur uss ki aayaton kay baad yeh kiss baat per eman layen gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये अल्लाह की निशानियां हैं जिनमें हम तुम्हारे सामने ठीक ठीक बयान कर रहे हैं। अब आखिर अल्लाह और उसकी आयत के बाद और कौन सी बात है जिसपर ये लोग ईमान लाएंगे
عَرَبِيوَيلٌ لِكُلِّ أَفّاكٍ أَثيمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)विनाश है प्रत्येक बहुत झूठे, महा पापी के लिए।
Roman Urdu (Maududi)Tabahi hai har us jhoote badh amal shaks ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)“Well” aur afsos hai her aik jhootay gunehgar per
Devnagri Urdu (Maududi)तबाही है हर हमारे झूठे बाद अमल शक्स के लिए
عَرَبِييَسمَعُ آياتِ اللَّهِ تُتلىٰ عَلَيهِ ثُمَّ يُصِرُّ مُستَكبِرًا كَأَن لَم يَسمَعها ۖ فَبَشِّرهُ بِعَذابٍ أَليمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो अल्लाह की आयतों को सुनता है, जबकि वे उसके सामने पढ़ी जाती हैं, फिर वह घमंड करते हुए अडिग रहता है, जैसे कि उसने उन्हें नहीं सुना, तो उसे दर्दनाक यातना की शुभ-सूचना दे दो।
Roman Urdu (Maududi)Jiske saamne Allah ki aayat padi jaati hain, aur woh unko sunta hai, phir puray istakbar ke saath apne kufr par is tarah ada rehta hai goya usne unko suna hi nahin. Aise shaks ko dardnaak azaab ka musda suna do
Roman Urdu (Junagarhi)Jo aayaten Allah ki apnay samney parhi jati hui sunay phir bhi ghuroor kerta hua iss tarah ara rahey kay goya suni hi nahi to aisay logon ko dard-naak azab ki khabar (phoncha) dijiye
Devnagri Urdu (Maududi)जिसके सामने अल्लाह की आयतें पड़ी जाती हैं, और वह उनको सुनता है, फिर पूरे इस्तकबार के साथ अपने कुफ्र पर है एडीए रहता है गोया उसने उनको सुना ही नहीं। ऐसे शक्स को दर्दनक अज़ाब का मसला सुना दो
عَرَبِيوَإِذا عَلِمَ مِن آياتِنا شَيئًا اتَّخَذَها هُزُوًا ۚ أُولٰئِكَ لَهُم عَذابٌ مُهينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब वह हमारी आयतों में से कोई चीज़ जान लेता है, तो उसकी हँसी उड़ाता है। यही लोग हैं, जिनके लिए अपमानकारी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Hamari aayat mein se koi baat jab uske ilm mein aati hai to woh unka mazaak bana leta hain. Aisey sab logon ke liye zillat ka azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh jabb humari aayaton mein say kissi aayat ki khabar paa leta hai to uss ki hansi urata hai yehi log hain jinn kay liye ruswaee ki maar hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमारी आयत में से कोई बात जब उसके इल्म में आती है तो वो उनका मज़ाक बना लेता है। ऐसे सब लोगों के लिए ज़िल्लत का अज़ाब है
عَرَبِيمِن وَرائِهِم جَهَنَّمُ ۖ وَلا يُغني عَنهُم ما كَسَبوا شَيئًا وَلا مَا اتَّخَذوا مِن دونِ اللَّهِ أَولِياءَ ۖ وَلَهُم عَذابٌ عَظيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनके आगे जहन्नम है। और न वह उनके कुछ काम आएगा, जो उन्होंने कमाया और न वे जिन्हें उन्होंने अल्लाह के सिवा अपना संरक्षक बनाया है और उनके लिए बहुत बड़ी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Unke aage jahannum hai. Jo kuch bhi unhone duniya mein kamaya hai usmein se koi cheez unke kisi kaam na aayegi. Na unke woh sarparast hi unke liye kuch kar sakenge jinhein Allah ko chodh kar unhon ne apna wali bana rakkha hai. Unke liye bada azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay peechay dozakh hai hai jo kuch unhon ney hasil kiya tha woh unhen kuch bhi nafa na dey ga aur na woh (kuch kaam aayengay) jinn ko unhon ney Allah kay siwa kaar saaz bana rakha tha unn kay liye bohat bara azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनके आगे जहन्नुम है। जो कुछ भी उन्हें दुनिया में कमाया है उसमें से कोई चीज उनके किसी काम ना आएगी। ना उनके वो सरपरस्त ही उनके लिए कुछ कर पाएंगे जिनमें अल्लाह को छोड़ कर उन्हें ने अपना वली बना रक्खा है। उनके लिए बड़ा अज़ाब है
عَرَبِيهٰذا هُدًى ۖ وَالَّذينَ كَفَروا بِآياتِ رَبِّهِم لَهُم عَذابٌ مِن رِجزٍ أَليمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह (क़ुरआन) सर्वथा मार्गदर्शन है। तथा जिन लोगों ने अपने पालनहार की आयतों का इनकार किया, उनके लिए गंभीर दर्दनाक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Quran sarasar hidayat hai, aur un logon ke liye balaa ka dardnaak azaab hai jinhon ne apne Rubb ki aayat ko maan-ne se inkar kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh (sirtapa) hidayat hai jinn logon ney apnay rab ki aayaton ko na mana unn kay liye bohat sakht dard-naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये कुरान सरसर हिदायत है, और उन लोगों के लिए बला का दर्दनाक अज़ाब है जिन्हों ने अपने रब की आयत को मान-ने से इंकार किया
عَرَبِي۞ اللَّهُ الَّذي سَخَّرَ لَكُمُ البَحرَ لِتَجرِيَ الفُلكُ فيهِ بِأَمرِهِ وَلِتَبتَغوا مِن فَضلِهِ وَلَعَلَّكُم تَشكُرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए समुद्र को वश में कर दिया, ताकि जहाज़ उसमें उसके आदेश से चलें, और ताकि तुम उसके अनुग्रह में से कुछ खोज सको, और ताकि तुम आभार प्रकट करो।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi to hai jisne tumhare liye samandar ko musakkhar kiya taa-ke uske hukum se kashtiyan usmein chalein aur tum uska fazal talash karo aur shukar guzar ho
Roman Urdu (Junagarhi)Alla hi hai jiss ney tumharay liye darya ko taabey bana diya takay uss kay hukum say iss mein kashtiyan chalen aur tum uss ka fazal talash keroaur takay tum shukar baja lao
Devnagri Urdu (Maududi)वाह अल्लाह हाय तो है जिसने तुम्हारे लिए समंदर को मुसक्कर किया ता-के उसके हुकुम से कश्तियां उसमें चलें और तुम उसका फजल तलाश करो और शुक्र गुजार हो
عَرَبِيوَسَخَّرَ لَكُم ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ جَميعًا مِنهُ ۚ إِنَّ في ذٰلِكَ لَآياتٍ لِقَومٍ يَتَفَكَّرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उसने तुम्हारे लिए जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है सबको अपनी ओर से वश में कर रखा है। निःसंदेह उसमें उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं जो चिंतन करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Usne zameen aur aasmaano ki saari hi cheezon ko tumhare liye musakkhar kardiya, sab kuch apne paas se. Ismein badi nishaniyan hai un logon ke lye jo gaur o fikr karne wale hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aasman-o-zamin ki her her cheez ko bhi uss ney apni taraf say tumharay liye tabey ker diya hai. Jo ghor keren yaqeenan woh iss mein boht si nishaniyan paa len gay
Devnagri Urdu (Maududi)उसने जमीन और आसमान की सारी ही चीजों को तुम्हारे लिए मुस्कुरा कर दिया, सब कुछ अपने पास से। इसमें बड़ी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फिक्र करने वाले हैं
عَرَبِيقُل لِلَّذينَ آمَنوا يَغفِروا لِلَّذينَ لا يَرجونَ أَيّامَ اللَّهِ لِيَجزِيَ قَومًا بِما كانوا يَكسِبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप उन लोगों से जो ईमान लाए कह दें कि वे उन लोगों को क्षमा कर दें, जो अल्लाह के दिनों की आशा नहीं रखते, ताकि वह (उनमें से) कुछ लोगों को उसका बदला दे जो वे कमाते रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) imaan laney walon se kehdo ke jo log Allah ki taraf se bure din aane ka koi andesha nahin rakhte, unki harakaton par darguzar se kaam lein taa-ke Allah khud ek giroh ko uski kamayi ka badla de
Roman Urdu (Junagarhi)Aap eman walon say keh den kay woh inn logon say dar-guzar keren jo Allah kay dinon ki tawakka nahi rakhtay takay Allah Taalaa aik qom ko unn kay kartooton ka badla day
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) ईमान लाने वालों से कहदो के जो लोग अल्लाह की तरफ से बुरे दिन आने का कोई अंदाज़ा नहीं रखते, उनकी हरकतों पर दरगुज़र से काम लें ता-के अल्लाह खुद एक गिरोह को उसकी कमाई का बदला दे
عَرَبِيمَن عَمِلَ صالِحًا فَلِنَفسِهِ ۖ وَمَن أَساءَ فَعَلَيها ۖ ثُمَّ إِلىٰ رَبِّكُم تُرجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसने कोई नेकी की, वह उसी के लिए है और जिसने बुराई की, वह उसी के ऊपर है, फिर तुम अपने पालनहार ही की ओर लौटाए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Jo koi neik amal karega apne hi liye karega, aur jo burai karega woh aap hi uska khumyaza (consequence) bhugtega. Phir jaana to sabko apne Rubb hi ki taraf hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo neki keray ga woh apnay zatti bhalay kay liye aur jo buraee keray ga uss ka wabal ussi per hai phir tum sabb apnay perwerdigar ki taraf lotaye jaogay
Devnagri Urdu (Maududi)जो कोई नेक अमल करेगा अपने ही लिए करेगा, और जो बुरा करेगा वो आप ही उसका खुम्याज़ा (परिणाम) भुगतेगा। फिर जाना तो सबको अपनी रुब ही की तरफ है
عَرَبِيوَلَقَد آتَينا بَني إِسرائيلَ الكِتابَ وَالحُكمَ وَالنُّبُوَّةَ وَرَزَقناهُم مِنَ الطَّيِّباتِ وَفَضَّلناهُم عَلَى العالَمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने इसराईल की संतान को किताब और हुक्म और नुबुव्वत प्रदान की और उन्हें पाकीज़ा चीज़ों से जीविका दी, तथा उन्हें (उनके समय के) संसार वालों पर श्रेष्ठता प्रदान की।
Roman Urdu (Maududi)Issey pehle bani Israel ko humne kitaab aur hukum aur nabuwat ata ki thi, unko humne umda samaan e zeist se nawaza, duniya bhar ke logon par unhein fazilat ata ki
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney bani israeel ko kitab hakumat aur nabowat di thi aur hum ney unhen pakeezah (aur nafees) roziyan di thin aur unhen duniya walon per fazilat di thi
Devnagri Urdu (Maududi)इस पहले बानी इजराइल को हमने किताब और हुकुम और नबुवत अता की थी, उनको हमने उमड़ा समान ए ज़िस्त से नवाजा, दुनिया भर के लोगों पर उन्हें फजीलत अता की
عَرَبِيوَآتَيناهُم بَيِّناتٍ مِنَ الأَمرِ ۖ فَمَا اختَلَفوا إِلّا مِن بَعدِ ما جاءَهُمُ العِلمُ بَغيًا بَينَهُم ۚ إِنَّ رَبَّكَ يَقضي بَينَهُم يَومَ القِيامَةِ فيما كانوا فيهِ يَختَلِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उन्हें (धर्म के) मामले में स्पष्ट आदेश दिए। फिर उन्होंने अपने पास ज्ञान आ जाने के पश्चात् ही, आपसी द्वेष के कारण विभेद किया। निःसंदेह आपका पालनहार क़ियामत के दिन उनके बीच उस चीज़ के बारे में फ़ैसला कर देगा, जिसमें वे मतभेद किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur deen ke maamle mein unhein wazeh hidayat de di.Phir jo ikhtilaf unke darmiyan runama hua woh (nawaqifiyat ki wajah se nahin balke) ilm aa jaaney ke baad hua aur us bina par hua ke woh aapas mein ek dusre par zyadati karna chahte thay. Allah qayamat ke roz un maamlaat ka faisla farmadega jinmein woh ikhtilaf karte rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unhen deen ki saaf saaf daleelen dein phir unhon ney apnay pass ilm kay phonch janey kay baad aapas ki zidd behas say hi ikhtilaf barpa ker dala yeh jinn jinn cheezon mein ikhtilaf ker rahey hain unn ka faisla qayamat walay din unn kay darmiyan (khud) tera rab keray ga
Devnagri Urdu (Maududi)और दीन के मामले में उन्हें वाज़ेह हिदायत दे दी। फिर जो इख्तिलाफ़ उनके दरमियान रुनामा हुआ वो (नवाक़िफ़ियत की वजह से नहीं बलके) इल्म आ जाने के बाद हुआ और उस बिना पर हुआ के वो आपस में एक दूसरे पर ज़्यादा करना चाहते थे। अल्लाह कयामत के रोज़ उन मामलात का फैसला फरमादेगा जिनमें वो इख्तिलाफ करते रहेंगे
عَرَبِيثُمَّ جَعَلناكَ عَلىٰ شَريعَةٍ مِنَ الأَمرِ فَاتَّبِعها وَلا تَتَّبِع أَهواءَ الَّذينَ لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने आपको धर्म के मामले में एक स्पष्ट मार्ग पर लगा दिया। अतः आप उसी का अनुसरण करें और उन लोगों की इच्छाओं का अनुसरण न करें, जो नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Iske baad aey Nabi humne tumko din ke maamley mein ek saaf shah-raah(shariyat) par qayam kiya hai. Lihaza tum usi par chalo aur un logon ki khwahishat ka ittiba na karo jo ilm nahin rakhte
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney aap ko deen ki (zahir) raah per qaeem ker diya ao aap issi per lagay rahen aur nadano ki khuwaishon ki perwee mein na paren
Devnagri Urdu (Maududi)इसके बाद ऐ नबी हमने तुमको दिन के मामले में एक साफ शाह-राह (शरीयत) पर कायम किया है। लिहाज़ा तुम उसी पर चलो और उन लोगों की ख्वाहिश का इत्तिबा न करो जो इल्म नहीं रखते
عَرَبِيإِنَّهُم لَن يُغنوا عَنكَ مِنَ اللَّهِ شَيئًا ۚ وَإِنَّ الظّالِمينَ بَعضُهُم أَولِياءُ بَعضٍ ۖ وَاللَّهُ وَلِيُّ المُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वे अल्लाह के मुक़ाबले आपके हरगिज़ किसी काम न आएँगे और निश्चय ज़ालिम लोग एक-दूसरे के दोस्त हैं और अल्लाह परहेज़गारों का दोस्त है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ke muqable mein woh tumhare kuch bhi kaam nahin aa sakte. Zaalim log ek dusre ke saathi hain, aur muttaaqiyon ka saathi Allah hai
Roman Urdu (Junagarhi)(Yad rakhen) kay yeh log hergiz Allah kay samney aap kay kuch kaam nahi aasaktay. (Samjh len kay) zalim log aapas mein aik doosray kay rafiq hotay hain aur perhezgaron ka kaar saaz Allah Taalaa hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के मुक़ाबले में वो तुम्हारे कुछ भी काम नहीं आ सकते। ज़ालिम लोग एक दूसरे के साथी हैं, और मुत्तक़ियों का साथी अल्लाह है
عَرَبِيهٰذا بَصائِرُ لِلنّاسِ وَهُدًى وَرَحمَةٌ لِقَومٍ يوقِنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ये लोगों के लिए समझ (अंतर्दृष्टि) की बातें हैं, तथा उन लोगों के लिए मार्गदर्शन और दया है, जो विश्वास करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh basirat ki roshiniyan hain sab logon ke liye aur hidayat aur rehmat un logon ke liye jo yaqeen layein
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh (quran) logon kay liye baseerat ki baaten aur hidayat-o-rehmat hai uss qom kay liye jo yaqeen rakhti hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये बसीरत की रोशनी हैं सब लोगों के लिए और हिदायत और रहमत उन लोगों के लिए जो यकीन लायें
عَرَبِيأَم حَسِبَ الَّذينَ اجتَرَحُوا السَّيِّئَاتِ أَن نَجعَلَهُم كَالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ سَواءً مَحياهُم وَمَماتُهُم ۚ ساءَ ما يَحكُمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)या वे लोग जिन्होंने बुराइयाँ की हैं, यह समझ रखा है कि हम उन्हें उन लोगों जैसा कर देंगे, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए? उनका जीना और उनका मरना समान होगा? बहुत बुरा है जो वे निर्णय कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya woh log jinhon ne buraiyon ka irtiqaab kiya hai yeh samjhe baithay hain ke hum unhein aur imaan laney walon aur neik amal karne walon ko ek jaisa kardenge ke inka jeena aur marna yaksan ho jaye? Bahut burey hukum hain jo yeh log lagate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya unn logon ka jo bura kaam kertay hain yeh guman hai kay hum unhen unn logon jaisa kerden gay jo eman laye aur nek kaam kiyey kay unn ka marna jeena yaksan hojaye bura hai woh faisla jo woh ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वो लोग जिन्होन ने बुराइयों का इर्तिक़ाब किया है ये समझे बैठे हैं के हम उन्हें और ईमान लाने वालों और नेक अमल करने वालों को एक जैसा कर देंगे के इनका जीना और मरना यक्सन हो जाए? बहुत बुरे हुकुम हैं जो ये लोग लगाते हैं
عَرَبِيوَخَلَقَ اللَّهُ السَّماواتِ وَالأَرضَ بِالحَقِّ وَلِتُجزىٰ كُلُّ نَفسٍ بِما كَسَبَت وَهُم لا يُظلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह ने आकाशों और धरती को हक़ के साथ पैदा किया और ताकि हर व्यक्ति को उसका बदला दिया जाए जो उसने कमाया तथा उनपर अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne to Aasmaano aur zameen ko barhaqq paida kiya hai aur is liye kiya hai ke har mutannafis ko uski kamayi ka badla diya jaye. Logon par zulm hargiz na kiya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aasmano aur zamin ko Allah ney boht adal kay sath peda kiya hai aur takay her shaks ko uss kay kiyey huye kaam ka poora badla diya jaye aur unn per zulm na kiya jaye
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने तो आसमानो और ज़मीन को बरहक़्क अदा किया है और इसके लिए किया है कि हर मुतनफ़िस को उसकी कमाई का बदला दिया जाए। लोगों पर ज़ुल्म हरगिज़ ना किया जाएगा
عَرَبِيأَفَرَأَيتَ مَنِ اتَّخَذَ إِلٰهَهُ هَواهُ وَأَضَلَّهُ اللَّهُ عَلىٰ عِلمٍ وَخَتَمَ عَلىٰ سَمعِهِ وَقَلبِهِ وَجَعَلَ عَلىٰ بَصَرِهِ غِشاوَةً فَمَن يَهديهِ مِن بَعدِ اللَّهِ ۚ أَفَلا تَذَكَّرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर क्या आपने उस व्यक्ति को देखा जिसने अपना पूज्य अपनी इच्छा को बना लिया तथा अल्लाह ने उसे ज्ञान के बावजूद गुमराह कर दिया और उसके कान और उसके दिल पर मुहर लगा दी और उसकी आँख पर परदा डाल दिया। फिर अल्लाह के बाद उसे कौन हिदायत दे? तो क्या तुम नसीहत ग्रहण नहीं करते?
Roman Urdu (Maududi)Phir kya tumne kabhi us shaks ke haal par bhi gaur kiya jisne apni khwahish e nafs ko apna khuda bana liya aur Allah ne ilm ke bawajood usey gumrahi mein phenk diya aur uske dil aur kaano (ears) par mohar laga di aur uski aankhon par purdah daal diya? Allah ke baad ab aur kaun hai jo usey hidayat de? Kya tum log koi sabaq nahin letay
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya aap ney ussay bhi dekha? Jiss ney apni khuwaish-e-nafas ko apna mabood bana rakha hai aur bawajood samjh boojh kay Allah ney ussay gumrah ker diya hai aur uss kay kaan aur dil per mohar laga di hai aur uss ki aankh per bhi pardah daal diya hai abb aisay shaks ko Allah kay baad kon hidayat day sakta hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्या तुमने कभी उस शक्स के हाल पर भी गौर किया जिसने अपनी ख्वाहिश ए नफ़्स को अपना खुदा बना लिया और अल्लाह ने इल्म के बावज़ूद उसे गुमराही में फेंक दिया और उसके दिल और कानो (कान) पर मोहर लगा दी और उसकी आँखों पर पर्दा डाल दिया? अल्लाह के बाद अब कौन है जो उसे हिदायत दे? क्या तुम लोग कोई सबक नहीं लेते
عَرَبِيوَقالوا ما هِيَ إِلّا حَياتُنَا الدُّنيا نَموتُ وَنَحيا وَما يُهلِكُنا إِلَّا الدَّهرُ ۚ وَما لَهُم بِذٰلِكَ مِن عِلمٍ ۖ إِن هُم إِلّا يَظُنّونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने कहा, हमारे इस सांसारिक जीवन के अलावा कोई (जीवन) नहीं। हम (यहीं) मरते और जीते हैं और काल के अलावा हमें कोई भी नष्ट नहीं करता। हालाँकि उन्हें इसका कोई ज्ञान नहीं। वे केवल अनुमान लगा रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log kehte hain ke “zindagi bas yahi hamari duniya ki zindagi hai, yahin hamara marna aur jeena hai aur gardish-e-ayyam ( passage of time) ke siwa koi cheez nahin ho humein halaak karti ho.” Dar haqeeqat is maamle mein inke paas koi ilm nahin hai yeh mehaz gumaan ki bina par yeh baatein karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya abb bhi tum naseehat nahi pakartay. Unhon ney kaha humari zindagi to sirf duniya ki zindagi hi hai. Hum martay aur jeetay hain aur humen sirf zamana hi maar dalta hai (dar-asal) unhen iss ka kuch ilm hi nahi. Yeh to sirf (qayas aur) atkal say hi kaam ley rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग कहते हैं कि "जिंदगी बस यहीं हमारी दुनिया की जिंदगी है, यहीं हमारा मरना और जीना है और गर्दिश-ए-अय्याम (समय बीतना) के सिवा कोई चीज नहीं हो हमें हलाक करती हो।" दर हकीकत इस मामले में इनके पास कोई इल्म नहीं है ये महज़ गुमान की बिना पर ये बातें करते हैं
عَرَبِيوَإِذا تُتلىٰ عَلَيهِم آياتُنا بَيِّناتٍ ما كانَ حُجَّتَهُم إِلّا أَن قالُوا ائتوا بِآبائِنا إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उनके सामने हमारी स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती हैं, तो उनका तर्क केवल यह होता है कि वे कहते हैं : यदि तुम सच्चे हो, तो हमारे बाप-दादा को ले आओ।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab hamari wazeh aayat unhein sunayi jaati hain to inke paas koi hujjat iske siwa nahin hoti ke utha lao hamare baap dada ko agar tum sacche ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jabb inn kay samney humari wazeh aur roshan aayaton ki tilawat ki jati hai to inn kay pass iss qol kay siwa koi daleel nahi hoti kay agar tum sachay ho to humaray baap dadon ko lao
Devnagri Urdu (Maududi)और जब हमारी वजह आयत उन्हें सुनाई जाती है तो इनके पास कोई हुज्जत इसके सिवा नहीं होती के उठ लाओ हमारे बाप दादा को अगर तुम सच्चे हो
عَرَبِيقُلِ اللَّهُ يُحييكُم ثُمَّ يُميتُكُم ثُمَّ يَجمَعُكُم إِلىٰ يَومِ القِيامَةِ لا رَيبَ فيهِ وَلٰكِنَّ أَكثَرَ النّاسِ لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : अल्लाह ही तुम्हें जीवन देता है, फिर तुम्हें मृत्यु देता है, फिर तुम्हें क़ियामत के दिन एकत्र करेगा, जिसमें कोई संदेह नहीं, परंतु अधिकांश लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi insey kaho Allah hi tumhein zindagi bakashta hai, phir wahi tumhein maut deta hai , phir wahi tumko us qayamat ke din jamaa karega jiske aane mein koi shakk nahin. Magar aksar log jaante nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye! Allah hi tumhen zindah kerta hai phir tumhen maar dalta hai phir tumhen qayamat kay din jama keray ga jiss mein koi shak nahi lekin aksar log nahi samajhtay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी इनसे कहो अल्लाह हाय तुम्हें जिंदगी बक्शता है, फिर वही तुम्हें मौत देता है, फिर वही तुमको उस कयामत के दिन जमा करेगा जिसके आने में कोई शक्क नहीं। मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं
عَرَبِيوَلِلَّهِ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ وَيَومَ تَقومُ السّاعَةُ يَومَئِذٍ يَخسَرُ المُبطِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आकाशों एवं धरती का राज्य अल्लाह ही का है और जिस दिन क़ियामत आएगी, उस दिन झूठे लोग (असत्यवादी) घाटे में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Zameen aur aasmaano ki badshahi Allah hi ki hai, aur jis roz qayamat ki ghadi aa khadi hogi us din baatil parast khasarey (nuksan) mein padh jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aasmano aur zamin ki badshahi Allah hi ki hai aur jiss din qayamat qaeem hogi uss din ehl-e-batil baray nuksan mein paren gay
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन और आसमानों की बादशाही अल्लाह ही की है, और जिस रोज़ क़यामत की घड़ी आ खड़ी होगी उस दिन बातिल परस्त खसारे (नुक्सान) में पढ़ जायेंगे
عَرَبِيوَتَرىٰ كُلَّ أُمَّةٍ جاثِيَةً ۚ كُلُّ أُمَّةٍ تُدعىٰ إِلىٰ كِتابِهَا اليَومَ تُجزَونَ ما كُنتُم تَعمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा आप प्रत्येक समुदाय को घुटनों के बल गिरा हुआ देखेंगे। प्रत्येक समुदाय को उसके कर्म-पत्र की ओर बुलाया जाएगा। आज तुम्हें उसका बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt tum har girooh ko ghuthano (knees) ke bal gira dekhoge. Har girooh ko pukara jayega ke aaye aur apna naame aamal dekhe. Unse kaha jayega: “aaj tum logon ko un aamal ka badla diya jayega jo tum karte rahe thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aap dekhen gay kay her ummat ghutnon kay bal giri hui hogi. Her giroh apnay naam-e-aemaal ki taraf bulaya jayega aaj tumhen apnay kiyey ka badla diya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)हमारा वक्त तुम हर गिरू को घुटनो (घुटनों) के बल गिरा देखोगे। हर गिरोह को पुकारा जायेगा के आये और अपना नाम अमल देखे। उनसे कहा जाएगा: "आज तुम लोगों को उन अमल का बदला दिया जाएगा जो तुम करते रहे थे
عَرَبِيهٰذا كِتابُنا يَنطِقُ عَلَيكُم بِالحَقِّ ۚ إِنّا كُنّا نَستَنسِخُ ما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह हमारी किताब है, जो तुम्हारे बारे में सच-सच बोलती है। निःसंदेह हम लिखवाते जाते थे, जो कुछ तुम करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hamara tayyar karaya hua aamal naama hai jo tumhare upar theek theek shahadat de raha hai, jo kuch bhi tum karte thay usey hum likhwate ja rahe thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hai humari kitab jo tumharay baray mein sach sach bol rahi hai hum tumharay aemaal likhwatay jatay thay
Devnagri Urdu (Maududi)ये हमारा तैयार किया हुआ अमल नामा है जो तुम्हारे ऊपर ठीक ठीक शहादत दे रहा है, जो कुछ भी तुम करते थे उसे हम लिखवाते जा रहे थे"
عَرَبِيفَأَمَّا الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ فَيُدخِلُهُم رَبُّهُم في رَحمَتِهِ ۚ ذٰلِكَ هُوَ الفَوزُ المُبينُ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, उनका रब उन्हें अपनी रहमत में दाख़िल करेगा, यही स्पष्ट सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)Phir jo log imaan laaye thay aur neik aamal karte rahey thay unhein unka Rubb apni rehmat mein dakhil karega. Aur yahi sareeh kaamiyabi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus lekin jo log eman layeaur unhon ney nek kaam kiyey to unko unka rab apni rehmat talay ley ley ga yehi sareeh kamyabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जो लोग ईमान लाए थे और नेक अमल करते रहे थे उनको रब्ब अपनी रहमत में दखल करेगा। और यही सारी कामयाबियां हैं
عَرَبِيوَأَمَّا الَّذينَ كَفَروا أَفَلَم تَكُن آياتي تُتلىٰ عَلَيكُم فَاستَكبَرتُم وَكُنتُم قَومًا مُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और रहे वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, तो (उनसे कहा जाएगाः) क्या तुम्हारे सामने मेरी आयतें नहीं पढ़ी जाती थीं? परंतु तुमने घमंड किया और तुम अपराधी लोग थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jin logon ne kufr kiya tha unsey kaha jayega “kya meri aayat tumko nahin sunayi jaati thin? Magar tumne takabbur kiya aur mujrim bankar rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin jinn logon ney kufur kiya to (mein unn say kahon ga) kiya meri aayaten tumhen sunaee nahi jati thin? Phir bhi tum takabbur kertay rahey aur tum thay hi gunehgar log
Devnagri Urdu (Maududi)और जिन लोगों ने कुफ्र किया था उनसे कहा जाएगा "क्या मेरी आयत तुमको नहीं सुनती जाती थी? मगर तुमने तकब्बुर किया और मुजरिम बनकर रहे
عَرَبِيوَإِذا قيلَ إِنَّ وَعدَ اللَّهِ حَقٌّ وَالسّاعَةُ لا رَيبَ فيها قُلتُم ما نَدري مَا السّاعَةُ إِن نَظُنُّ إِلّا ظَنًّا وَما نَحنُ بِمُستَيقِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब कहा जाता था कि अल्लाह का वादा सच्चा है तथा क़ियामत के दिन में कोई शक नहीं, तो तुम कहते थे : हम नहीं जानते कि क़ियामत का दिन क्या है, हम बस थोड़ा-सा सोचते हैं और हम पूर्ण विश्वास करने वाले नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab kaha jaata tha ke Allah ka waada bar- haqq hai aur qayamat ke aane mein koi shakk nahin, to tum kehte thay ke hum nahin jaante qayamat kya hoti hai, hum to bas ek gumaan sa rakhte hain , yaqeen hum ko nahin hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jabb kabhi kaha jata kay Allah ka wada yaqeenan sacha hai aur qayamat kay aaney mein koi shak nahi to tum jawab detay thay kay hum nahi jantay qayamat kiya cheez hai? Humen kuch yun hi sa khayal hojata hai lekin humen yaqeen nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और जब कहा जाता था कि अल्लाह का वादा बार- हक़ है और कयामत के आने में कोई शक्क नहीं, तो तुम कहते थे के हम नहीं जानते कयामत क्या होती है, हम तो बस एक गुमान सा रखते हैं, यकीन हम को नहीं है”
عَرَبِيوَبَدا لَهُم سَيِّئَاتُ ما عَمِلوا وَحاقَ بِهِم ما كانوا بِهِ يَستَهزِئونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनके किए हुए कर्मों की बुराइयाँ उनपर प्रकट हो जाएँगी और उन्हें वह चीज़ घेर लेगी, जिसका वे मज़ाक उड़ाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt unpar unke aamal ki buraiyan khul jayengi aur woh usi cheez ke pher mein aa jayenge jiska woh mazaak udaya karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn per apnay aemaal ki burayian khul gaeen aur jiss ka woh mazak ura rahey thay uss ney unhen gher liya
Devnagri Urdu (Maududi)हमारा वक्त उनके अमल की बुराइयां खुल जाएंगी और वो उसी चीज के फेर में आ जाएंगी जिसका वो मज़ाक उड़ाया करते थे
عَرَبِيوَقيلَ اليَومَ نَنساكُم كَما نَسيتُم لِقاءَ يَومِكُم هٰذا وَمَأواكُمُ النّارُ وَما لَكُم مِن ناصِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और कह दिया जाएगा कि आज हम तुम्हें भुला देंगे, जैसे तुमने अपने इस दिन के मिलने को भुला दिया और तुम्हारा ठिकाना आग (जहन्नम) है और तुम्हारे कोई मदद करने वाले नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Aur insey kehdiya jayega ke “Aaj hum bhi usi tarah tumhein bhulaye detay hain jis tarah tum is din ki mulaqaat ko bhool gaye thay.Tumhara thikana ab dozakh hai aur koi tumhari madad karne wala nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur keh diya gaya kay aaj hum tumhen bhula den gay jaisay kay tum ney apnay iss din say milney ko bhula diya tha tumhara thikana jahannum hai aur tumhara madadgar koi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और इनसे कहा जाएगा के "आज हम भी उसी तरह तुम्हें भुला देते हैं, जिस तरह तुम इस दिन की मुलाकात को भूल गए थे। तुम्हारा ठिकाना अब दोज़ख़ है और कोई तुम्हारी मदद करने वाला नहीं है
عَرَبِيذٰلِكُم بِأَنَّكُمُ اتَّخَذتُم آياتِ اللَّهِ هُزُوًا وَغَرَّتكُمُ الحَياةُ الدُّنيا ۚ فَاليَومَ لا يُخرَجونَ مِنها وَلا هُم يُستَعتَبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह इस कारण है कि तुमने अल्लाह की आयतों का मज़ाक़ उड़ाया तथा दुनिया की ज़िंदगी ने तुम्हें धोखा दिया। तो आज न वे इससे निकाले जाएँगे और न उनसे तौबा करने को कहा जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Yeh tumhara anjaam is liye hua hai ke tumne Allah ki aayat ka mazaak bana liya tha aur tumhein duniya ki zindagi ne dhoke mein daal diya tha. Lihaza aaj na yeh log dozakh se nikale jayenge aur na inse kaha jayega ke maafi maang kar apne Rubb ko raazi karo”
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss liye hain kay tum ney Allah Taalaa ki aayaton ki hansi uraee thi aur duniya ki zindagi ney tumhen dhokay mein daal rakha tha pus aaj kay din na to yeh (dozakh) say nikalen jayen gay aur na unn say uzar-o-maazrat qabool kiya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)ये तुम्हारा अंजाम इस लिए हुआ है कि तुमने अल्लाह की आयत बना लिया था और तुमने दुनिया की जिंदगी में धोखे में डाल दिया था, आज ना ये लोग दोज़ख से निकल जाएंगे और ना इनसे कहा जाएगा माफ़ी मांग कर अपने रब को राजी करो”
عَرَبِيفَلِلَّهِ الحَمدُ رَبِّ السَّماواتِ وَرَبِّ الأَرضِ رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः सारी प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है, जो आकाशों का रब और धरती का रब, सारे संसार का रब है।
Roman Urdu (Maududi)Pas taarif Allah hi ke liye hai jo zameen aur aasmaano ka maalik aur saare jahan waalon ka parwardigar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus Allah ki tareef hai jo aasmano aur zamin aur tamam jahan ka palanhaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास तारीफ अल्लाह ही के लिए है जो जमीन और आसमानों का मालिक और सारे जहां वालों का परवरदिगार है
عَرَبِيوَلَهُ الكِبرِياءُ فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ وَهُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसी के लिए आकाशों और धरती में सारी महानता है और वही सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Zameen aur aasmaano mein badayi usi ke liye hai aur wahi zabardast (most mighty) aur daana(most wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tamam (buzrugi aur) baraee aasmano aur zamin mein ussi ki hai aur wohi ghalib aur hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जमीन और आसमान में बदाई उसके लिए है और वही जबरदस्त (सबसे ताकतवर) और दाना (सबसे बुद्धिमान) है
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Surah 45: Al-Jathiyah (The Kneeling)

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Surah 45: Al-Jathiyah (The Kneeling)

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Surah 45: Al-Jathiyah (The Kneeling)

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Surah 45: Al-Jathiyah (The Kneeling)

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Surah 45: Al-Jathiyah (The Kneeling)

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Surah 46: Al-Ahqaf (The Sandhills)

Meccan🕐 Revelation #66📜 35 Verses🕮 Juz 26
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🕮 Juz 26 begins here
हिन्दी (Al-Omari)ह़ा, मीम।
Roman Urdu (Maududi)Haa meem
Roman Urdu (Junagarhi)Haa-meem
Devnagri Urdu (Maududi)हा मीम
عَرَبِيتَنزيلُ الكِتابِ مِنَ اللَّهِ العَزيزِ الحَكيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)इस पुस्तक का अवतरण अल्लाह की ओर से है, जो सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Is kitaab ka nuzul Allah zabardast aur dana ki taraf se hai
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kitab ka utarna Allah Taalaa ghalib hikmat waly ki taraf say hai
Devnagri Urdu (Maududi)इस किताब का नुज़ुल अल्लाह ज़बरदस्त और दाना की तरफ से है
عَرَبِيما خَلَقنَا السَّماواتِ وَالأَرضَ وَما بَينَهُما إِلّا بِالحَقِّ وَأَجَلٍ مُسَمًّى ۚ وَالَّذينَ كَفَروا عَمّا أُنذِروا مُعرِضونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हमने आकाशों तथा धरती को और जो कुछ उन दोनों के दरमियान है सत्य के साथ और एक नियत अवधि के लिए पैदा किया है। तथा जिन लोगों ने कुफ़्र किया उस चीज़ से जिससे उन्हें सावधान किया गया, मुँह फेरने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Humne zameen aur aasmaano ko aur un saari cheezon ko jo unke darmiyan hain bar-haqq aur ek muddat e khaas ke taayun ke saath paida kiya hai. Magar yeh kaafir log us haqeeqat se mooh moade hue hain jisse unko khabardar kiya gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney aasmano aur zamin aur inn dono kay darmiyan ki tamam cheezon ko behtreen tadbeer kay sath hi aik muddat moayyen kay liye peda kiya hai aur kafir log jiss cheez say daraye jatay hain mun mor letay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हमने ज़मीन और आसमान को और उन सारी चीज़ों को जो उनके दरमियान हैं बार-हक़्क़ और एक मुद्दत ए ख़ास के तायूँ के साथ अदा किया है। मगर ये काफ़िर लोग हमें हकीकत से मुंह मोड़े हुए हैं जिन्होंने उनको खबरदार किया है
عَرَبِيقُل أَرَأَيتُم ما تَدعونَ مِن دونِ اللَّهِ أَروني ماذا خَلَقوا مِنَ الأَرضِ أَم لَهُم شِركٌ فِي السَّماواتِ ۖ ائتوني بِكِتابٍ مِن قَبلِ هٰذا أَو أَثارَةٍ مِن عِلمٍ إِن كُنتُم صادِقينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ रसूल!) आप कह दें : क्या तुमने उन चीज़ों को देखा जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, मुझे दिखाओ कि उन्होंने धरती की कौन-सी चीज़ पैदा की है, या आसमानों में उनका कोई हिस्सा है? मेरे पास इससे पहले की कोई किताब, या ज्ञान की कोई अवशेष बात ले आओ, यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, inse kaho, “kabhi tumne aankhein khol kar dekha bhi ke woh hastiyan hain kya jinhein tum khuda ko chodh kar pukarte ho? Zara mujhey dikhao to sahih ke zameen mein unhon ne kya paida kiya hai, ya aasmano ki takhleeq o tadbeer mein unka kya hissa hai. Issey pehle aayi hui kitaab ya ilm ka koi baqiyya (in aqaid ke sabot mein) tumhare paas ho to wahi le aao agar tum sacche ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye! Bhala dekho to jinhen tum Allah kay siwa pukartay ho mujhay bhi to dikhao kay unho ney zamin ka konsa tukra banaya hai ya aasmano mein unn ka konsa hissa hai? Agar tum sachay ho to iss say pehlay hi ki koi kitab ya koi ilm hi jo naqal kiya jata ho meray pass lao
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, इनसे कहो, "कभी तुमने आंखें खोल कर देखा भी के वो हस्तियां हैं क्या जिन्हे तुम खुदा को छोड़ कर पुकारते हो? ज़रा मुझे दिखाओ तो सही के" ज़मीन में उनको ने क्या पेदा किया है, या आसमान की तख़लीक़ ओ तदबीर में उनका क्या हिसा है।
عَرَبِيوَمَن أَضَلُّ مِمَّن يَدعو مِن دونِ اللَّهِ مَن لا يَستَجيبُ لَهُ إِلىٰ يَومِ القِيامَةِ وَهُم عَن دُعائِهِم غافِلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उससे बढ़कर पथभ्रष्ट कौन है, जो अल्लाह के सिवा उन्हें पुकारता है, जो क़ियामत के दिन तक उसकी दुआ क़बूल नहीं करेंगे, और वे उनके पुकारने से बेखबर हैं?
Roman Urdu (Maududi)Aakhir us shaks se zyada behka hua insaan aur kaun hoga jo Allah ko chodh kar unko pukare jo qayamat tak usey jawab nahin de sakte, balke issey bhi bekhabar hain ke pukarne waley unko pukar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss say barh ker gumrah aur kon hoga? Jo Allah kay siwa aison ko pukarta hai jo qayamat tak uss ki dua qabool na ker saken bulkay unn kay pukarney say mehaz baykhabar hon
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर उस शक्स से ज्यादा बहका हुआ इंसान और कौन होगा जो अल्लाह को छोड़ कर उनको पुकारे जो कयामत तक उसे जवाब नहीं दे सके, बलके इसे भी बेखबर हैं के पुकारने वाले उनको पुकार रहे हैं
عَرَبِيوَإِذا حُشِرَ النّاسُ كانوا لَهُم أَعداءً وَكانوا بِعِبادَتِهِم كافِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जब लोग एकत्र किए जाएँगे, तो वे उनके शत्रु होंगे और उनकी इबादत का इनकार करने वाले होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab tamam Insan jamaa kiye jayenge us waqt woh apne pukarne walon ke dushman aur unki ibadat ke munkir honge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab logon ko jama kiya jayega to yeh unn kay dushman hojayen gay aur unn ki parastish say saaf inkaar ker jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जब तमाम इंसान जमा किए जाएंगे हमें वक्त वो अपने पुकारने वालों के दुश्मन और उनकी इबादत के मुनकिर होंगे
عَرَبِيوَإِذا تُتلىٰ عَلَيهِم آياتُنا بَيِّناتٍ قالَ الَّذينَ كَفَروا لِلحَقِّ لَمّا جاءَهُم هٰذا سِحرٌ مُبينٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब उनके सामने हमारी स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती हैं, तो वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, सत्य के विषय में, जब वह उनके पास आया, कहते हैं कि यह खुला जादू है।
Roman Urdu (Maududi)In logon ko jab hamari saaf saaf aayat sunayi jaati hain aur haqq inke saamne aa jata hai to yeh kafir log uske mutaaliq kehte hain ke yeh to khula jaadu hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur enhen jabb humari aayaten parh ker sunaee jati hain to munkir log sachi baat ko jabkay unkay pass aa chuki keh detay hain kay yeh to sareeh jadoo hai
Devnagri Urdu (Maududi)इन लोगों को जब हमारी साफ आयतें सुनाई जाती हैं और हक इनके सामने आ जाता है तो ये काफिर लोग उसके मुतालिक कहते हैं के ये तो खुला जादू है
عَرَبِيأَم يَقولونَ افتَراهُ ۖ قُل إِنِ افتَرَيتُهُ فَلا تَملِكونَ لي مِنَ اللَّهِ شَيئًا ۖ هُوَ أَعلَمُ بِما تُفيضونَ فيهِ ۖ كَفىٰ بِهِ شَهيدًا بَيني وَبَينَكُم ۖ وَهُوَ الغَفورُ الرَّحيمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)या वे कहते हैं कि उसने इसे स्वयं गढ़ लिया है? आप कह दें : यदि मैंने इसे स्वयं गढ़ लिया है, तो तुम मेरे लिए अल्लाह के विरुद्ध किसी चीज़ का अधिकार नहीं रखते। वह उन बातों को अधिक जानने वाला है जिनमें तुम व्यस्त होते हो। वह मेरे और तुम्हारे बीच गवाह के रूप में काफ़ी है, और वही बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान है।
Roman Urdu (Maududi)Kya unka kehna yeh hai ke Rasool ne isey khud ghadh (fabricated) liya hai? Inse kaho “ agar maine isey khud ghadh (fabricated) liya hai to tum mujhey khuda ki pakad se kuch bhi na bacha sakogey. Jo baatein tum banate ho Allah unko khoob jaanta hai, mere aur tumhare darmiyaan wahi gawahi dene ke liye kaafi hai, aur woh bada darguzar karne wala aur Raheem hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh kehtay hain kay issay to iss ney khud ghar liya hai aap keh dijiye! Kay agar mein hi issay bana laya hun to tum meray liye Allah ki taraf say kissi cheez ka ikhtiyar nahi rakhtay tum iss (quran) kay baray mein jo kuch keh sunn rahey ho ussay Allah khoob janta hai meray aur tumharay darmiyan gawahee kay liye wohi kafi hai aur woh bakhshney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या उनका कहना ये है के रसूल ने इसे खुद गढ़ लिया है? इनसे कहो " अगर मैंने इसे खुद गढ़ लिया है तो तुम मुझे खुदा की पकड़ से कुछ भी न बचा पाओगे। जो बातें तुम बनाते हो अल्लाह उनको खूब जानता है, मेरे और तुम्हारे दरमियान वही गवाही देने के लिए काफी है, और वह बड़ा दरगुजर करने वाला है और रहीम है”
عَرَبِيقُل ما كُنتُ بِدعًا مِنَ الرُّسُلِ وَما أَدري ما يُفعَلُ بي وَلا بِكُم ۖ إِن أَتَّبِعُ إِلّا ما يوحىٰ إِلَيَّ وَما أَنا إِلّا نَذيرٌ مُبينٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि मैं रसूलों में से कोई अनोखा (रसूल) नहीं हूँ और न मैं यह जानता हूँ कि मेरे साथ क्या किया जाएगा और न (यह कि) तुम्हारे साथ क्या (किया जाएगा)। मैं तो केवल उसी का अनुसरण करता हूँ जो मेरी ओर वह़्य (प्रकाशना) की जाती है और मैं तो केवल खुला डराने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Inse kaho “main koi nirala Rasool to nahin hoon, main nahin jaanta ke kal tumhare saath kya hona hai aur mere saath kya. Main to sirf us wahee (revelation) ki pairwi karta hoon jo mere paas bheji jaati hai aur main ek saaf saaf khabardar kardene wale ke siwa kuch nahin hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye! Kay mein koi bilkul anokha payghamber to nahi na mujhay yeh maloom hai kay meray satha aur tumharay sath kiya kiya jayega. Mein to sirf ussi ki perwi kerta hun jo meri taraf wahee bheji jati hai aur mein to sirf alal elan aagah ker denay wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो “मैं कोई निराला रसूल तो नहीं हूं, मैं नहीं जानता कि कल तुम्हारे साथ क्या होना है और मेरे साथ क्या। कुछ नहीं हूं"
عَرَبِيقُل أَرَأَيتُم إِن كانَ مِن عِندِ اللَّهِ وَكَفَرتُم بِهِ وَشَهِدَ شاهِدٌ مِن بَني إِسرائيلَ عَلىٰ مِثلِهِ فَآمَنَ وَاستَكبَرتُم ۖ إِنَّ اللَّهَ لا يَهدِي القَومَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : क्या तुमने देखा? यदि यह (क़ुरआन) अल्लाह की ओर से हुआ और तुमने उसका इनकार कर दिया, जबकि बनी इसराईल में से एक गवाही देने वाले ने उस जैसे की गवाही दी। फिर वह ईमान ले आया और तुम घमंड करते रहे (तो तुम्हारा क्या परिणाम होगा?)। बेशक अल्लाह ज़ालिमों को हिदायत नहीं देता।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, inse kaho “ kabhi tumne socha bhi ke agar yeh kalaam Allah hi ki taraf se hua aur tum ne iska inkar kardiya ( to tumhara kya anjaam hoga)?Aur is jaise ek kalaam par to bani Israel ka ek gawah shahadat bhi de chukka hai. Woh imaan le aaya aur tum apne ghamand (arrogant) mein padey rahey. Aise zaalimon ko Allah hidayat nahin diya karta”
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye! Agar yeh (quran) Allah hi ki taraf say ho aur tum ney issay na mana ho aur bani israeel ka aik gawah iss jaisi ki gawahee bhi dey chuka ho aur woh eman bhi la chuka ho aur tum ney sirkashi ki ho to be-shak Allah Taalaa zalimon ko raah nahi dikhata
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, इनसे कहो "कभी तुमने सोचा भी के अगर ये कलाम अल्लाह ही की तरफ से हुआ और तुम ने इसका इंकार कर दिया (तो तुम्हारा क्या अंजाम होगा)?और इस जैसा एक कलाम पर तो बानी इजराइल का एक गवाह शहादत भी दे चुका है। वो ईमान ले आया और तुम अपने घमंड में पड़े रहोगे। ऐसे ज़ालिमों को अल्लाह हिदायत नहीं दिया करता”
عَرَبِيوَقالَ الَّذينَ كَفَروا لِلَّذينَ آمَنوا لَو كانَ خَيرًا ما سَبَقونا إِلَيهِ ۚ وَإِذ لَم يَهتَدوا بِهِ فَسَيَقولونَ هٰذا إِفكٌ قَديمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और काफ़िरों ने ईमान लाने वालों के बारे में कहा : यदि यह (धर्म) कुछ भी उत्तम होता, तो ये लोग हमसे पहले उसकी ओर न आते। और जब उन्होंने उससे मार्गदर्शन नहीं पाया, तो अवश्य कहेंगे कि यह पुराना झूठ है।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne maan-ne se inkar kardiya hai woh imaan laney walon ke mutaaliq kehte hain “ke agar is kitaab ko maan lena koi accha kaam hota to yeh log is maamle mein humse sabaqat na leja sakte thay”. Chunke inhon ne usse hidayat na paayi is liye ab yeh zaroor kahenge ke yeh to purana jhoot hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kafiron ney emaandaron ki nisbat kaha kay agar yeh (deen) behtar hota to yeh log iss ki taraf hum say sabqat kerney na patay aur chonkay enhon ney iss quran say hidayat nahi paaee pus yeh keh den gay kay qadeemi jhoot hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने मान-ने से इंकार कर दिया है वो ईमान लाने वालों के मुतालिक कहते हैं “के अगर इस किताब को मान लेना कोई अच्छा काम होता तो ये लोग इस मामले में हमसे हैं सबकात न लेजा सक्ते”। चुनके इन्हों ने उसे हिदायत न पाई, अब ये जरूर कहेंगे के ये तो पुराना झूठ है
عَرَبِيوَمِن قَبلِهِ كِتابُ موسىٰ إِمامًا وَرَحمَةً ۚ وَهٰذا كِتابٌ مُصَدِّقٌ لِسانًا عَرَبِيًّا لِيُنذِرَ الَّذينَ ظَلَموا وَبُشرىٰ لِلمُحسِنينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा इससे पूर्व मूसा की पुस्तक पेशवा और दया थी। और यह एक पुष्टि करने वाली किताब (क़ुरआन) अरबी भाषा में है, ताकि उन लोगों को डराए जिन्होंने अत्याचार किया और नेकी करने वालों के लिए शुभ-सूचना हो।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke isse pehle Moosa ki kitaab rehnuma aur rehmat bankar aa chuki hai, aur yeh kitaab uski tasdeeq karne wali zubaan-e-arabi mein aayi hai taake zaalimon ko mutanabbe (warn) karde aur neik rawish ikhtiyar karne walon ko basharat de de
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss say pehlay musa ki kitab peshwa aur rehmat thi. Aur yeh kitab hai tasdeeq kernay wali arabi zaban mein takay zalimon ko daraye aur nek karon ko bisharat ho
Devnagri Urdu (Maududi)हलांके इसे पहले मूसा की किताब रहनुमा और रहमत बनकर आ चुकी है, और ये किताब उसकी तस्दीक करने वाली जुबान-ए-अरबी में आई है ताके ज़ालिमों को मुतनब्बे (चेतावनी) करदे और नीक रवीश इख्तियार करने वालों को बशारत दे दे
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ قالوا رَبُّنَا اللَّهُ ثُمَّ استَقاموا فَلا خَوفٌ عَلَيهِم وَلا هُم يَحزَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने कहा कि हमारा पालनहार अल्लाह है। फिर ख़ूब जमे रहे, तो उन्हें न तो कोई भय होगा और न वे शोकाकुल होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Yakeenan jin logon ne kehdiya ke Allah hi hamara Rubb hai, phir us par jamm gaye, unke liye na koi khauff hai aur na woh ghamgheen hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jinn logon ney kaha kay humara rab Allah hai phir iss per jamay rahey to inn per na to koi khof hoga aur na ghumgeen hongay
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन जिन लोगों ने केहदिया के अल्लाह ही हमारा रब है, फिर हम पर जम गए, उनके लिए ना कोई खौफ है और ना वो गमगीन होंगे
عَرَبِيأُولٰئِكَ أَصحابُ الجَنَّةِ خالِدينَ فيها جَزاءً بِما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ये लोग जन्नत वाले हैं, जिसमें वे हमेशा रहने वाले हैं, उसके बदले में जो वे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aise sab log Jannat mein jaane waley hain. Jahan woh hamesha rahenge apne un aamal ke badle jo woh duniya mein karte rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh to ehl-e-jannat hain jo sada issi mein rahengay unn aemaal kay badlay jo woh kiya kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसे सब लोग जन्नत में जाने वाले हैं। जहां वो हमेशा रहेंगे अपने उन अमल के बदले जो वो दुनिया में करते रहेंगे
عَرَبِيوَوَصَّينَا الإِنسانَ بِوالِدَيهِ إِحسانًا ۖ حَمَلَتهُ أُمُّهُ كُرهًا وَوَضَعَتهُ كُرهًا ۖ وَحَملُهُ وَفِصالُهُ ثَلاثونَ شَهرًا ۚ حَتّىٰ إِذا بَلَغَ أَشُدَّهُ وَبَلَغَ أَربَعينَ سَنَةً قالَ رَبِّ أَوزِعني أَن أَشكُرَ نِعمَتَكَ الَّتي أَنعَمتَ عَلَيَّ وَعَلىٰ والِدَيَّ وَأَن أَعمَلَ صالِحًا تَرضاهُ وَأَصلِح لي في ذُرِّيَّتي ۖ إِنّي تُبتُ إِلَيكَ وَإِنّي مِنَ المُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने मनुष्य को अपने माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करने की ताकीद दी। उसकी माँ ने उसे दुःख झेलकर गर्भ में रखा तथा दुःख झेलकर जन्म दिया और उसकी गर्भावस्था की अवधि और उसके दूध छोड़ने की अवधि तीस महीने है। यहाँ तक कि जब वह अपनी पूरी शक्ति को पहुँचा और चालीस वर्ष का हो गया, तो उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मुझे सामर्थ्य प्रदान कर कि मैं तेरी उस अनुकंपा के लिए आभार प्रकट करूँ, जो तूने मुझपर और मेरे माता-पिता पर उपकार किए हैं। तथा यह कि मैं वह सत्कर्म करूँ, जिसे तू पसंद करता है तथा मेरे लिए मेरी संतान को सुधार दे। निःसंदेह मैंने तेरी ओर तौबा की तथा निःसंदेह मैं मुसलमानों (आज्ञाकारियों) में से हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Humne Insan ko hidayat ki ke woh apne walidain ke saath neik bartaao karey. Uski maa ne mushakkat utha kar usey pait mein rakkha aur mushakkat utha kar hi usko jana(delivered). Aur uske hamal aur doodh chudane mein tees (thirty) mahine lag gaye. Yahan tak ke jab woh apni puri taaqat ko pahuncha aur chaalis(forty) saal ka ho gaya to usne kaha “Aey mere Rubb mujhey taufiq de ke main teri un niyamaton ka shukar ada karoon jo tu ne mujhey aur mere walidain ko ata famayi, aur aisa neik amal karoon jis se tu raazi ho, aur meri aulad ko bhi neik bana kar mujhey sukh de, mein tere huzoor tawbah karta hoon aur taabe farmaan (muslim)bandon mein se hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney insan ko apnay maa baap kay sath husn-e-salook kerney ka hukum diya hai uss ki maa ney ussay takleef jhel ker pet mein rakha aur takleef bardasht kerkay ussay jana. Uss kay hamal aur uss kay doodh churaney ka zamana tees maheeney ka hai yahan tak kay jab woh apni pukhtagi aur chalees saal ki umer ko phoncha to kehnay laga aey meray perwerdigar! Mujhay tofiq dey kay mein teri iss nemat ka shukar baja laon jo tu ney mujh per aur meray maa baap per inam ki hai aur yeh kay mein aisay nek amal keron jinn say tu khush hojaye aur tu meri aulad bhi saleh bana. Mein teri tarf rujoo kerta hun aur mein musalmano mein say hun
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इंसान को हिदायत की कि वो अपने वालिदाओं के साथ नई बात करें। उसकी माँ ने मुशक्कत उठा कर उसे पैत में रक्खा और मुशक्कत उठा कर ही उसको जाना। और उसके हमाल और दूध छुड़ाने में तीस (तीस) महीने लग गए। यहां तक ​​के जब वो अपनी पूरी ताक़त को पाहुंचा और चालीस (चालीस) साल का हो गया तो उसने कहा “ऐ मेरे रब मुझे तौफ़ीक़ दे के मैं तेरी उन नियामतों का शुक्र अदा करूं जो तू ने मुझे और मेरे वालिदैं को अता फैमई, और ऐसा नीक अमल करूं जिस से तू राजी हो, और मेरी औलाद को भी नेक बना कर मुझे सुख दे, मैं तेरे हुजूर तौबा करता हूं और ताबे फरमान (मुस्लिम) बंदों में से हूं”
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ نَتَقَبَّلُ عَنهُم أَحسَنَ ما عَمِلوا وَنَتَجاوَزُ عَن سَيِّئَاتِهِم في أَصحابِ الجَنَّةِ ۖ وَعدَ الصِّدقِ الَّذي كانوا يوعَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही वे लोग हैं, जिनके सबसे अच्छे कर्मों को हम स्वीकार करते हैं और उनकी बुराइयों को क्षमा कर देते हैं, इस हाल में कि वे जन्नत वालों में से हैं, सच्चे वादे के अनुरूप, जो उनसे वादा किया जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Is tarah ke logon se hum unke behtreen aamal ko qabool karte hain aur unki buraiyon se darguzar kar jaate hain. Yeh jannati logon mein shamil hongey us sacche waade ke mutaabiq jo insey kya jaata raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi woh log hain jinn kay nek aemaal to hum qabool farma letay hain aur jinn kay bad aemaal say darguzar ker letay hain (yeh) jannati logon mein hain. Iss sachay waday kay mutabiq jo inn say kiya jata tha
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह के लोगों से हम उनके बहतरीन अमल को कबूल करते हैं और उनकी बुराइयों से दरगुजर कर जाते हैं हैन. ये जन्नती लोगों में शामिल होंगे हमें सच्चे वादे के मुताबिक जो इनसे क्या जानता है
عَرَبِيوَالَّذي قالَ لِوالِدَيهِ أُفٍّ لَكُما أَتَعِدانِني أَن أُخرَجَ وَقَد خَلَتِ القُرونُ مِن قَبلي وَهُما يَستَغيثانِ اللَّهَ وَيلَكَ آمِن إِنَّ وَعدَ اللَّهِ حَقٌّ فَيَقولُ ما هٰذا إِلّا أَساطيرُ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जिसने अपने माता-पिता से कहा : उफ़ है तुम दोनों के लिए! क्या तुम दोनों मुझे डराते हो कि मैं (क़ब्र से) निकाला जाऊँगा, हालाँकि मुझसे पहले बहुत-सी पीढ़ियाँ बीत चुकी हैं। जबकि वे दोनों अल्लाह की दुहाई देते हुए कहते हैं : तेरा नाश हो! तू ईमान ले आ! निश्चय अल्लाह का वादा सच्चा है। तो वह कहता है : ये पहले लोगों की काल्पनिक कहानियाँ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jis shaks ne apne waldain se kaha “ Uff, tang kar diya tumne” kya tum mujhe yeh khauff dilate ho ke main marne ke baad phir qabar se nikala jaunga halanke mujh se pehle bahut si nasalein(generations) guzar chuki hain ( unmein se to koi uth kar na aaya)”Maa aur baap Allah ki duhayi dekar kehte hain “ arey badnaseeb ,maan ja , Allah ka waada saccha hai”. Magar woh kehta hai “ yeh sab agle waqton ki farsuda(fables) kahaniyan hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss ney apnay maa baap say kaha kay tum say mein tang aagaya tum mujh say yehi kehtay raho gay kay mein marney kay baad phir zindah kiya jaoon ga mujh say pehlay bhi ummaten guzar chuki hain woh dono janab bari mein faryad kertay hain aur kehtay hain tujhay kharabi ho tu eman ley aa be-shak Allah ka wada haq hai woh jawab deta hai kay yeh to sirf aglon kay afsaney hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जिस शक्स ने अपने वाल्डेन से कहा "उफ्फ, तंग कर दिया तुमने" क्या तुम मुझे ये खौफ फैलाते हो के मैं मरने के बाद फिर से काबर से निकल जाऊंगा मुझ से पहले बहुत सी नसलें (पीढ़ियां) गुजर चुकी हैं (उनमें से कोई उठ कर न आया)'' मां और बाप अल्लाह की दुहाई देकर कहते हैं '' अरे बदनसीब, मान जा, अल्लाह का वादा सच्चा है'' मगर वो कहता है '' ये सब अगले वक्त की फरसुदा (कथाएं) कहानियाँ हैं"
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ حَقَّ عَلَيهِمُ القَولُ في أُمَمٍ قَد خَلَت مِن قَبلِهِم مِنَ الجِنِّ وَالإِنسِ ۖ إِنَّهُم كانوا خاسِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही वे लोग हैं, जिनपर (यातना की) बात सिद्ध हो गई, उन समुदायों के साथ जो जिन्नों और मनुष्यों में से इनसे पहले गुज़र चुके। निश्चय ही वे घाटे में रहने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hain jinpar azaab ka faisla chaspan ho chuka hai. Insey pehle Jinno aur Insano ke jo toley(communities) (isi qumash ke) ho guzre hain unhi mein yeh bhi ja shamil hongey. Beshak yeh ghatey(loss) mein reh janey wale log hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh log hain jinn per (Allah kay azab ka) wada sadiq aagaya inn jinnaat aur insano kay girohon kay sath jo inn say pehlay guzar chukay hain yaqeenan yeh nuksan panay walay thay
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग हैं जिनपर अज़ाब का फैसला चस्पां हो चूका है। इनसे पहले जिन्नो और इंसानों के जो तोले (समुदाय) (इसी क़ौम के) हो गुज़रे हैं उनमें ये भी जा शामिल होंगे। बेशक ये घाटे (नुकसान) में रह जाने वाले लोग हैं
عَرَبِيوَلِكُلٍّ دَرَجاتٌ مِمّا عَمِلوا ۖ وَلِيُوَفِّيَهُم أَعمالَهُم وَهُم لا يُظلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा प्रत्येक के लिए अलग-अलग दर्जे हैं, उन कर्मों के कारण जो उन्होंने किए। और ताकि वह (अल्लाह) उन्हें उनके कर्मों का भरपूर बदला दे और उनपर अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Dono girohon mein se har ek ke darje unke aamal ke lihaz se hain taa-ke Allah unke kiye ka pura pura badla unko de. Unpar zulm hargiz na kiya jaaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur her aik ko apnay apnay aemaal kay mutabiq darjay milen gay takay unhen unn kay aemaal kay pooray badlay day aur unn per zulm na kiya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)दोनों गिरोहोन में से हर एक के दर्जे उनके अमल के लिहाज़ से हैं ता-के अल्लाह उनके किए का पूरा पूरा बदला उनको दे। उनपर जुल्म हरगिज़ न किया जाए
عَرَبِيوَيَومَ يُعرَضُ الَّذينَ كَفَروا عَلَى النّارِ أَذهَبتُم طَيِّباتِكُم في حَياتِكُمُ الدُّنيا وَاستَمتَعتُم بِها فَاليَومَ تُجزَونَ عَذابَ الهونِ بِما كُنتُم تَستَكبِرونَ فِي الأَرضِ بِغَيرِ الحَقِّ وَبِما كُنتُم تَفسُقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन काफ़िरों को आग के सामने लाया जाएगा। (उनसे कहा जाएगा :) तुम अपनी अच्छी चीज़ें अपने सांसारिक जीवन में ले जा चुके और तुम उनका आनंद ले चुके। सो आज तुम्हें अपमान की यातना दी जाएगी, इसलिए कि तुम धरती पर बिना किसी अधिकार के घमंड करते थे और इसलिए कि तुम अवज्ञा किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab yeh kaafir aag ke saame laa khade kiye jayenge to unse kaha jayega: “ tum apne hissay ki niyamatein apni duniya ki zindagi mein khatam kar chuke aur unka lutf tumne utha liya, ab jo takabbur tum zameen mein kisi haqq ke bagair karte rahe aur jo nafarmaniyan tumne ki unke padash mein aaj tumko zillat ka azaab diya jayega”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss din kafir jahannum kay siray per layen jayen gay (kaha jayega) tum ney apni nekiyan duniya ki zindagi mein hi barbaad kerdin aur inn say faeedah utha chukay pus aaj tumhen zillat kay azab ki saza di jayegi iss baees kay tum zamin mein na-haq takabbur kiya kertay thay aur iss baees bhi kay tum hukum adooli kiya kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब ये काफिर आग के सामने ला खड़े किए जाएंगे तो उनसे कहा जाएगा: "तुम अपने हिसाब की नियम अपनी दुनिया की जिंदगी में ख़तम कर चुके और उनका लुत्फ तुमने उठा लिया, अब जो तकब्बुर तुम ज़मीन में किसी हक़ के बिना करते रहो और जो नफ़रमानियाँ तुमने कि उनके पद में आज तुमको ज़िल्लत का अज़ाब दिया जाएगा”
عَرَبِي۞ وَاذكُر أَخا عادٍ إِذ أَنذَرَ قَومَهُ بِالأَحقافِ وَقَد خَلَتِ النُّذُرُ مِن بَينِ يَدَيهِ وَمِن خَلفِهِ أَلّا تَعبُدوا إِلَّا اللَّهَ إِنّي أَخافُ عَلَيكُم عَذابَ يَومٍ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आद के भाई (हूद) को याद करो, जब उसने अपनी जाति को अहक़ाफ़ में डराया, जबकि उससे पहले और उसके बाद कई डराने वाले गुज़र चुके कि अल्लाह के अतिरिक्त किसी की इबादत न करो, निःसंदेह मैं तुमपर एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Zara inhein Aad ke bhai (Hud) ka qissa sunao jabke usne ahqaf mein apni qaum ko khabardar kiya tha aur aise khabardar karne waley ussey pehle bhi guzar chuke thay aur uske baad bhi aate rahey ke “ Allah ke siwa kisi ki bandagi na karo , mujhe tumhare haqq mein ek baday haulnaak din ke azaab ka andesha hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aad kay bhai ko yaad kero jabb uss ney apni qom ko aahqaaf mein daraya aur yaqeenan iss say pehlay bhi daraney walay guzar chukay hain aur iss kay baad bhi yeh kay tum siwaye Allah Taalaa kay aur ki ibadat na kero. Be-shak mein tum per baray din kay azab say khof khata hun
Devnagri Urdu (Maududi)ज़रा इन्हें आद के भाई (हुद) का किस्सा सुनाओ जबके उसने अहकाफ में अपनी कौम को खबरदार बनाया था और ऐसे खबरदार करने वाले उसे पहले भी गुजर चुके थे और उसके बाद भी आते रहे के "अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी ना करो, मुझे तुम्हारे हक में एक बदाई" हौलनाक दिन के अज़ाब का अंदेशा है”
عَرَبِيقالوا أَجِئتَنا لِتَأفِكَنا عَن آلِهَتِنا فَأتِنا بِما تَعِدُنا إِن كُنتَ مِنَ الصّادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि हमको हमारे माबूदों से फेर दे? तो हम पर वह (अज़ाब) ले आ, जिसकी तू हमें धमकी देता है, यदि तू सच्चों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “ kya tu isliye aaya hai ke humein behka kar hamare maboodon se bargashta kar de? Accha to le aa apna woh azaab jissey tu humein darata hai agar waqai tu saccha hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Qom ney jawab diya kiya aap humaray pass iss liye aaye hain kay humen apnay maboodon (ki parastish) say baaz rakhen? Pus agar aap sachay hain to jiss azab ka aap wada kertay hain ussay hum per la dalen
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने कहा “क्या तू इसलिए आया है के हमें बेहका कर हमारे मबूदों से बरगश्ता कर दे? अच्छा तो ले आ अपना वो अजब जिसे तू हमें डराता है अगर वक्त तू सच्चा है”
عَرَبِيقالَ إِنَّمَا العِلمُ عِندَ اللَّهِ وَأُبَلِّغُكُم ما أُرسِلتُ بِهِ وَلٰكِنّي أَراكُم قَومًا تَجهَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : उसका ज्ञान तो अल्लाह ही के पास है और मैं तुम्हें वही कुछ पहुँचाता हूँ, जिसके साथ मैं भेजा गया हूँ। परंतु मैं तुम्हें देख रहा हूँ कि तुम अज्ञानता का प्रदर्शन कर रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha ke “iska ilm to Allah ko hai, main sirf woh paighaam tumhein pahuncha raha hoon jisey dekar mujhey bheja gaya hai. Magar main dekh raha hoon ke tumlog jahalat barat rahey ho”
Roman Urdu (Junagarhi)(hazrat Hood ney) kaha (iss ka) ilm to Allah hi kay pass hai mein to jo paygham dey ker bheja gaya tha woh tumhen phoncha raha hun lekin mein dekhta hun kay tum log nadani ker rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा के “इसका इल्म तो अल्लाह को है, मैं सिर्फ वो पैग़ाम तुम्हें पहन रहा हूं जिसे देकर मुझे भेजा गया है। मगर मैं देख रहा हूँ के तुमलोग जहालत बरात रहे हो”
عَرَبِيفَلَمّا رَأَوهُ عارِضًا مُستَقبِلَ أَودِيَتِهِم قالوا هٰذا عارِضٌ مُمطِرُنا ۚ بَل هُوَ مَا استَعجَلتُم بِهِ ۖ ريحٌ فيها عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उन्होंने उसे एक बादल के रूप में अपनी घाटियों की ओर बढ़ते हुए देखा, तो उन्होंने कहा : यह बादल है जो हमपर बरसने वाला है। बल्कि यह तो वह (यातना) है जिसके लिए तुमने जल्दी मचा रखी थी। आँधी है, जिसमें दर्दनाक अज़ाब है।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab unhon ne us azaab ko apni waadiyon (valleys) ki taraf aate dekha to kehne lagey “yeh badal hai jo humko sairaab kardega”. balke yeh wahi cheez hai jiske liye tum jaldi macha rahe thay, yeh hawa ka toofaan hai jismein dardnaak azaab chala aa raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jabb unhon ney azab ko basoorat badal dekha apni wadiyon ki taraf aatay huye to kehnay lagay yeh abar hum per barasney wala hai (nahi) bulkay dar-asal yeh abar woh (azab) hai jiss ki tum jaldi ker rahey thay hawa hai jiss mein dard-naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब उनहों ने हमें अज़ाब को अपनी वादियों (घाटियों) की तरफ आते देखा तो कहने लगे "ये बादल है जो हमको सैराब कर देगा"। बलके ये वही चीज़ है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थे, ये हवा का तूफान है जिसमें दर्दनक अज़ाब चला आ रहा है
عَرَبِيتُدَمِّرُ كُلَّ شَيءٍ بِأَمرِ رَبِّها فَأَصبَحوا لا يُرىٰ إِلّا مَساكِنُهُم ۚ كَذٰلِكَ نَجزِي القَومَ المُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह अपने पालनहार के आदेश से हर चीज़ को विनष्ट कर देगी। अंततः वे ऐसे हो गए कि उनके रहने की जगहों के सिवा कुछ नज़र न आता था। इसी तरह हम अपराधी लोगों को बदला देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke hukum se har cheez ko tabaah kar dalega”. Aakhir e kaar unka haal yeh hua ke unke rehne ke jaghon ke siwa wahan kuch nazar na aata tha. Is tarah hum mujrimon ko badla diya karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo apnay rab kay hukum say her cheez ko halak ker day gi puz woh aisay hogaye kay bajuz unkay maknaat kay aur kuch dikhaee na deta tha gunahgaron kay girohon ko hum yunhi saza detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब के हुकुम से हर चीज को तबाह कर डालेगा"। आखिर ई कार उनका हाल ये हुआ के उनके रहने के जघोन के सिवा वहां कुछ नजर ना आता था। इस तरह हम मुजरिमों को बदला दिया करते हैं
عَرَبِيوَلَقَد مَكَّنّاهُم فيما إِن مَكَّنّاكُم فيهِ وَجَعَلنا لَهُم سَمعًا وَأَبصارًا وَأَفئِدَةً فَما أَغنىٰ عَنهُم سَمعُهُم وَلا أَبصارُهُم وَلا أَفئِدَتُهُم مِن شَيءٍ إِذ كانوا يَجحَدونَ بِآياتِ اللَّهِ وَحاقَ بِهِم ما كانوا بِهِ يَستَهزِئونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने उन्हें उन चीज़ों में शक्ति दी, जिनमें हमने तुम्हें शक्ति नहीं दी और हमने उनके लिए कान और आँखें और दिल बनाए, तो न उनके कान उनके किसी काम आए और न उनकी आँखें और न उनके दिल; क्योंकि वे अल्लाह की आयतों का इनकार करते थे तथा उन्हें उस चीज़ ने घेर लिया जिसका वे उपहास करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Unko humne woh kuch diya tha jo tum logon ko nahin diya hai. Unko humne kaan, aankehin aur dil sab kuch de rakkhe thay, magar na woh kaan unke kisi kaam aaye, na aankhein, na dil, kyunke woh Allah ki aayat ka inkar karte thay, aur usi cheez ke phair mein woh aa gaye jiska woh mazaak udate thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bil-yaqeen hum ney (qom aad) ko woh maqdoor diye thay jo tumhen to diye bhi nahi aur hum ney unhen kaan aankhen aur dil bhi dey rakhay thay. Lekin inn kay kano aur dilon ney enhen kuch bhi nafa na phonchaya jabkay woh Allah Taalaa ki aayaton ka inkar kerney lagay aur jiss cheez ka woh mazak uraya kertay thay wohi unn per ulat pari
Devnagri Urdu (Maududi)उनको हमने वो कुछ दिया था जो तुम लोगों को नहीं दिया है, आंखें और दिल सब कुछ दे रखे थे, मगर ना वो कौन है। आँखें, ना दिल, क्योंकि वो अल्लाह की आयत का इन्कार करते थे, और उसी चीज़ के फिर में वो आ गए जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे
عَرَبِيوَلَقَد أَهلَكنا ما حَولَكُم مِنَ القُرىٰ وَصَرَّفنَا الآياتِ لَعَلَّهُم يَرجِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हमने तुम्हारे आस-पास की बस्तियों को विनष्ट कर दिया और हमने विविध प्रकार के प्रमाण प्रस्तुत किए, ताकि वे पलट आएँ।
Roman Urdu (Maududi)Tumhare gird o pesh ke ilakon mein bahut se bastiyon ko hum halaak kar chuke hain. Humne apni aayat bhej kar baar baar tarah tarah se unko samjhaya, shayad ke woh baaz aa jayein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqeenan hum ney tumahray aas pass ki bastiyan tabah ker den aur tarah tarah ki hum ney apni nishaniyan biyan ker den takay woh rujoo ker len
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारे घेरे ओ पेश के इलाक़ों में बहुत से बस्तियों को हम परेशान कर चुके हैं। हमने अपनी आयत भेज कर बार-बार तरह तरह से उनको समझा, शायद के वो बाज़ आ जाएं
عَرَبِيفَلَولا نَصَرَهُمُ الَّذينَ اتَّخَذوا مِن دونِ اللَّهِ قُربانًا آلِهَةً ۖ بَل ضَلّوا عَنهُم ۚ وَذٰلِكَ إِفكُهُم وَما كانوا يَفتَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो फिर उन लोगों ने उनकी मदद क्यों नहीं की जिन्हें उन्होंने निकटता प्राप्त करने के लिए अल्लाह के सिवा पूज्य बना रखा था? बल्कि वे उनसे गुम हो गए, और यह उनका झूठ था और जो वे मिथ्यारोपण करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir kyun na un hastiyon ne unki madad ki jinhein Allah ko chodh kar unhon ne taqarrub-e-ilallah ka zariya samajhte huey maabood bana liya tha? Balke woh to unsey khoye gaye. Aur yeh tha unke jhoot aur un banawati aqeedon ka anjaam jo unhon ne ghadh rakkhe thay
Roman Urdu (Junagarhi)Pus qurb-e-elahi hasil kerney kay liye unhon ney Allah kay siwa jinn jinn ko mabood bana rakha tha unhon ney unn ki madad kiyon na ki? Bulkay woh to unn say kho gaye (bulkay dar-asal) yeh unn ka mehaz jhoot aur (bilkul) bohtan tha
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्यों ना उन हस्तियों ने उनकी मदद की जिनमें अल्लाह को छोड़ कर उन्होन ने तकरारब-ए-इलल्लाह का ज़रिया समझे हुए मबूद बना लिया था? बल्के वो तो उनसे खोए गए। मैं और ये था उनके झूठ और उन बनावती अकीदों का अंजाम जो उन्होन ने घड रक्खे थे
عَرَبِيوَإِذ صَرَفنا إِلَيكَ نَفَرًا مِنَ الجِنِّ يَستَمِعونَ القُرآنَ فَلَمّا حَضَروهُ قالوا أَنصِتوا ۖ فَلَمّا قُضِيَ وَلَّوا إِلىٰ قَومِهِم مُنذِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब हमने तुम्हारी ओर जिन्नों के एक गिरोह को फेरा, जो क़ुरआन को ध्यान से सुनते थे। तो जब वे उसके पास पहुँचे, तो उन्होंने कहा : चुप हो जाओ। फिर जब वह पूरा हो गया, तो अपनी क़ौम की ओर सचेतकर्ता बनकर लौटे।
Roman Urdu (Maududi)(Aur woh waqiya bhi qabil e zikar hai) jab hum Jinno ke ek girooh ko tumhari taraf le aaye thay taa-ke Quran sunein. Jab woh us jagaah pahunche (jahan tum Quraan padh rahe thay) to unhon ne aapas mein kaha khamosh ho jao, phir jab woh padha ja chukka to woh khabardar karne walay ban kar apni qaum ki taraf palte(returned)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaad kero! Jabkay hum ney jinno ki aik jammat ko teri taraf mutawajja kiya kay woh quran sunen pus jab (nabi kay) pass phonch gaye to (aik doosray say) kehney lagay khamosh hojao phir jab parh ker khatam hogaya to apni qom ko khabardar kerney kay liye wapis lot gaye
Devnagri Urdu (Maududi)(और वो वाकिया भी काबिल ए जिक्र है) जब हम जिन्नो के एक गिरूह को तुम्हारी तरफ ले आए थे ता-के कुरान सुने। जब वो हमें जगह पाहुंचे (जहां तुम कुरान पढ़ रहे थे) तो उनको ने आपस में कहा खामोश हो जाओ, फिर जब वो पढ़ा जा चुका तो वो खबरदार करने वाले बन कर अपनी क़ौम की तरफ पलटे(लौटा)
عَرَبِيقالوا يا قَومَنا إِنّا سَمِعنا كِتابًا أُنزِلَ مِن بَعدِ موسىٰ مُصَدِّقًا لِما بَينَ يَدَيهِ يَهدي إِلَى الحَقِّ وَإِلىٰ طَريقٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : ऐ हमारी जाति! निःसंदेह हमने एक ऐसी पुस्तक सुनी है, जो मूसा के पश्चात उतारी गई है, उसकी पुष्टि करने वाली है जो उससे पहले है, वह सत्य की ओर और सीधे मार्ग की ओर मार्गदर्शन करती है।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne jaa kar kaha “aey hamari qaum ke logon, humne ek kitaab suni hai jo Moosa ke baad naazil ki gayi hai, tasdeeq(confirm) karne wali hai apne se pehle aayi hui kitaabon ki, rehnumayi karti hai haqq aur raah-e-raast ki taraf
Roman Urdu (Junagarhi)Kehney lagay aey humari qom! Hum ney yaqeenan woh kitab suni hai jo musa (alh-e-salam) kay baad nazil ki gaee hai jo apnay say pehlay kitabon ki tasdeeq kernay wali hai jo sachay deen ki aur rah-e-raast ki taraf reh numaee kerti hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनहोन ने जा कर कहा "ऐ हमारी" कौम के लोग, हमने एक किताब सुनी है जो मूसा के बाद नाज़िल की गई है, तस्दीक (पुष्टि करें) करने वाली है अपने से पहले आई हुई किताबों की, रहनुमाई करती है हक़ और राह-ए-रास्त की तरफ
عَرَبِييا قَومَنا أَجيبوا داعِيَ اللَّهِ وَآمِنوا بِهِ يَغفِر لَكُم مِن ذُنوبِكُم وَيُجِركُم مِن عَذابٍ أَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारी जाति के लोगो! अल्लाह की ओर बुलाने वाले का निमंत्रण स्वीकार करो और उसपर ईमान ले आओ, वह तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा और तुम्हें दर्दनाक यातना से पनाह देगा।
Roman Urdu (Maududi)Aey hamari qaum ke logon, Allah ki taraf bulane waley ki dawat qabool karlo aur ispar imaan le aao, Allah tumhare gunaahon se darguzar famayega aur tumhein azaab e aleem se bacha dega”
Roman Urdu (Junagarhi)Aey humari qom! Allah kay bulanay walay ka kaha mano iss per eman lao to Allah Taalaa tumharay gunah bakhsh dey ga aur tumehn alamnaak azab say panah dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ हमारी क़ौम के लोगों, अल्लाह की तरफ बुलाने वाले की दावत क़बूल करलो और इसपर ईमान ले आओ, अल्लाह तुम्हारे गुनाहों से दरगुज़र पैदा करेगा और तुम्हें अज़ाब ए आलिम से बचाएगा
عَرَبِيوَمَن لا يُجِب داعِيَ اللَّهِ فَلَيسَ بِمُعجِزٍ فِي الأَرضِ وَلَيسَ لَهُ مِن دونِهِ أَولِياءُ ۚ أُولٰئِكَ في ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो अल्लाह की ओर बुलाने वाले के निमंत्रण को स्वीकार नहीं करेगा, तो न वह धरती में किसी तरह विवश करने वाला है और न ही उसके सिवा उसके कोई सहायक होंगे। ये लोग खुली गुमराही में हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo koi Allah ke daai (one who calls to Allah) ki baat na maane woh na zameen mein khud koi bal boota rakhta hai ke Allah ko zach(frustrate) karde, aur na uske koi aise haami-o-sarparast (protector) hain ke Allah se usko bacha lein. Aisey log khuli gumraahi mein padey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo shaks Allah kay bulanay walay ka kaha na manay ga pus woh zamin mein kahin (bhag ker Allah ko) aajiz nahi ker sakta na Allah kay siwa aur koi uss kay madadgar hongay yeh log khulli gumrahee mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيأَوَلَم يَرَوا أَنَّ اللَّهَ الَّذي خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ وَلَم يَعيَ بِخَلقِهِنَّ بِقادِرٍ عَلىٰ أَن يُحيِيَ المَوتىٰ ۚ بَلىٰ إِنَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा क्या उन्होंने नहीं देखा कि निःसंदेह वह अल्लाह, जिसने आकाशों और धरती को बनाया और उन्हें बनाने से नहीं थका, वह मरे हुए लोगों को पुनर्जीवित करने में सक्षम है? क्यों नहीं! निश्चय वह हर चीज में पूर्ण सक्षम है।
Roman Urdu (Maududi)Aur kya in logon ko yeh sujhayi nahin deta ke jis khuda ne yeh zameen aur aasmaan paida kiye hain aur inko banate huey jo na thaka, woh zaroor ispar qadir hai ke murdon (dead) ko jila uthaye? Kyun nahin, yaqeenan woh har cheez ki qudrat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya woh nahi dekhtay kay jiss Allah ney aasmano aur zamin ko peda kiya hai aur inn kay peda kerney say woh na thaka woh yaqeenan murdon ko zindah kerney per qadir hai? Kiyon na ho? Woh yaqeenan her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या इन लोगों को ये समझाई नहीं देता के जिस खुदा ने ये ज़मीन और आसमां पैदा किया है और इनको बनाते हुए जो ना थका, वो जरूर इसपर कादिर है के मुर्दों (मृत) को जिला उठे? क्यों नहीं, यक़ीनन वो हर चीज़ की क़ुदरत रखता है
عَرَبِيوَيَومَ يُعرَضُ الَّذينَ كَفَروا عَلَى النّارِ أَلَيسَ هٰذا بِالحَقِّ ۖ قالوا بَلىٰ وَرَبِّنا ۚ قالَ فَذوقُوا العَذابَ بِما كُنتُم تَكفُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जिस दिन वे लोग, जिन्होंने कुफ़्र किया, आग के सामने पेश किए जाएँगे, (कहा जाएगा :) क्या यह सत्य नहीं है? वे कहेंगे : क्यों नहीं, हमारे रब की क़सम! वह कहेगा : फिर यातना का मज़ा चखो, उसके बदले जो तुम कुफ़्र किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz yeh kaafir aag ke saamne laye jayenge , us waqt unsey pucha jayega “ kya yeh haqq nahin hai?” yeh kahenge “ haan, hamare Rubb ki kasam (yeh waqai haqq hai)” Allah farmayega “ accha to ab azaab ka mazaa chakkho apne us inkar ki padash mein jo tum karte rahe thay”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh log jinhon ney kufur kiya jiss din jahannum kay samney layen jayen gay (aur unn say kaha jayega kay) kiya yeh haq nahi hai? To jawab dein gay haan qasam hai humaray rab ki (haq hai) (Allah) farmaye ga abb apnay kufur kay badlay azab ka maza chakho
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ ये काफिर आग के सामने लाये जायेंगे, हमें वक़्त उनसे पूछा जायेगा "क्या ये हक़ नहीं है?" ये कहेंगे " हां, हमारे रब की कसम (ये वाकाई हक़ है)" अल्लाह फरमायेगा " अच्छा तो अब अज़ाब का मजा चक्खो अपने हमें इंकार की याद में जो तुम करते रहे थे"
عَرَبِيفَاصبِر كَما صَبَرَ أُولُو العَزمِ مِنَ الرُّسُلِ وَلا تَستَعجِل لَهُم ۚ كَأَنَّهُم يَومَ يَرَونَ ما يوعَدونَ لَم يَلبَثوا إِلّا ساعَةً مِن نَهارٍ ۚ بَلاغٌ ۚ فَهَل يُهلَكُ إِلَّا القَومُ الفاسِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप सब्र करें, जिस प्रकार पक्के इरादे वाले रसूलों ने सब्र किया और उनके लिए (यातना की) जल्दी न करें। जिस दिन वे उस चीज़ को देखेंगे जिसका उनसे वादा किया जाता है, तो (ऐसा होगा) मानो वे दिन की एक घड़ी के सिवा नहीं रहे। यह (संदेश) पहुँचा देना है। फिर क्या अवज्ञाकारी लोगों के सिवा कोई और विनष्ट किया जाएगा?
Roman Urdu (Maududi)Pas aey Nabi, sabr karo jis tarhan ulul azm (strong will) Rasoolon ne sabr kiya hai, aur inke maamle mein jaldi na karo. Jis roz yeh log us cheez ko dekh lenge jiska inhein khauff dilaya ja raha hai to inhein yun maloon hoga ke jaise duniya mein din ki ek ghadi bhar se zyada nahin rahey thay. Baat pahuncha di gayi, ab kya nafarmaan logon ke siwa aur koi halak hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Pus (aey payghumber!) tum aisa sabar kero jaisa sabar aali himmat rasoolon ney kiya aur inn kay liye (azab talab kerney mein) jaldi na kero yeh jiss din iss azab ko dekh len gay jiss ka wada diye jatay hain to (yeh maloom honay lagay ga kay) din ki aik ghari hi (duniya mein) theray thay yeh hai pahgham phoncha dena pus badkaron kay siwa koi halak na kiya jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)पस ऐ नबी, सब्र करो जिस तरह से उलूल अज्म (दृढ़ इच्छाशक्ति) रसूलों ने सब्र किया है, और इनके मामले में जल्दी ना करो। जिस रोज़ ये लोग हमें चीज़ को देख लेंगे जिसका इन्हें ख़ौफ़ दिलाया जा रहा है तो इन्हें यूं मालूं होगा के जैसे दुनिया में दिन की एक घड़ी भर से ज्यादा नहीं रह रहे थे। बात पहुंचा दी गई, अब क्या नफरमान लोगों के सिवा और कोई हलक होगा
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Surah 46: Al-Ahqaf (The Sandhills)

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Surah 46: Al-Ahqaf (The Sandhills)

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Surah 46: Al-Ahqaf (The Sandhills)

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Surah 46: Al-Ahqaf (The Sandhills)

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Surah 46: Al-Ahqaf (The Sandhills)

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Surah 47: Muhammad (Muhammad)

Medinan🕐 Revelation #95📜 38 Verses🕮 Juz 1
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالَّذينَ كَفَروا وَصَدّوا عَن سَبيلِ اللَّهِ أَضَلَّ أَعمالَهُم
हिन्दी (Al-Omari)जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह के मार्ग से रोका, उस (अल्लाह) ने उनके कर्मों को नष्ट कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne kufr kiya aur Allah ke raaste se roka Allah ne unke aamal ko raigaan (waste /vain) kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Jinn logon ney kufur kiya aur Allah ki raah say roka Allah ney unn kay aemaal barbad ker diye
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने कुफ्र किया और अल्लाह के रास्ते से रोका अल्लाह ने उनके अमल को बर्बाद (व्यर्थ) कर दिया
عَرَبِيوَالَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ وَآمَنوا بِما نُزِّلَ عَلىٰ مُحَمَّدٍ وَهُوَ الحَقُّ مِن رَبِّهِم ۙ كَفَّرَ عَنهُم سَيِّئَاتِهِم وَأَصلَحَ بالَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए और उस पर ईमान लाए जो मुहम्मद पर उतारा गया और वही उनके रब की ओर से सत्य है, उसने उनसे उनके बुरे कर्मों को दूर कर दिया और उनके हाल को ठीक कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log imaan laye aur jinhon ne neik aamal kiye aur us cheez ko maan liya jo Muhammad par nazil hui hai aur hai woh sarasar haqq unke Rubb ki taraf se Allah ne unki burayian (evil deeds) unse dur kardi aur unka haal durust kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log eman laye aur achay kaam kiye aur uss per bhi eman laye jo Muhammad (PBUH) per utari gaee hai aur darasal inn kay rab ki taraf say sacha (deen) bhi wohi hai Allah ney inn kay gunah door ker diye aur inn kay haal ki islaah kerdi
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग ईमान लाए और जिन्होन ने नेक अमल किये और उस चीज़ को मान लिया जो मुहम्मद पर नाज़िल हुई है और है वो सरसर हक़ उनके रब की तरफ से अल्लाह ने उनकी बुराइयाँ (बुरे काम) उनसे दूर करदी और उनका हाल दुरुस्त करदिया
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّ الَّذينَ كَفَرُوا اتَّبَعُوا الباطِلَ وَأَنَّ الَّذينَ آمَنُوا اتَّبَعُوا الحَقَّ مِن رَبِّهِم ۚ كَذٰلِكَ يَضرِبُ اللَّهُ لِلنّاسِ أَمثالَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)यह इसलिए कि निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उन्होंने असत्य का अनुसरण किया और निःसंदेह जो लोग ईमान लाए, उन्होंने अपने पालनहार की ओर से (आये हुए) सत्य का अनुसरण किया। इसी प्रकार अल्लाह लोगों के लिए उनकी मिसालें बयान करता है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh is liye ke kufr karne walon ne baatil (falsehood) ki pairwi ki aur imaan lane walon ne us haqq ki pairwi ki jo unke Rubb ki taraf se aaya hai. Is tarhaan Allah logon ko unki theek theek haisiyat bataye deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss liye kay kafiron ney baatil ki pairwee ki aur momino ney uss din haq ki ittaba ki jo unn kay Allah ki taraf say hai Allah Taalaa logon ko unkay ehwaal issi tarah batata hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये इस लिए के कुफ्र करने वालों ने बातिल (झूठ) की जोड़ी बनाई है और ईमान लेन वालों ने हमें हक की जोड़ी दी है जो उनके रब की तरफ से आया है। इस तरह अल्लाह लोगों को उनकी ठीक-ठीक हकीकत बता देता है
عَرَبِيفَإِذا لَقيتُمُ الَّذينَ كَفَروا فَضَربَ الرِّقابِ حَتّىٰ إِذا أَثخَنتُموهُم فَشُدُّوا الوَثاقَ فَإِمّا مَنًّا بَعدُ وَإِمّا فِداءً حَتّىٰ تَضَعَ الحَربُ أَوزارَها ۚ ذٰلِكَ وَلَو يَشاءُ اللَّهُ لَانتَصَرَ مِنهُم وَلٰكِن لِيَبلُوَ بَعضَكُم بِبَعضٍ ۗ وَالَّذينَ قُتِلوا في سَبيلِ اللَّهِ فَلَن يُضِلَّ أَعمالَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)अतः जब तुम काफ़िरों से मुठभेड़ करो, तो गरदनें मारना है, यहाँ तक कि जब उन्हें अच्छी तरह से क़त्ल कर चुको, तो (उन्हें) कसकर बाँध लो। फिर बाद में या तो उपकार करना है और या छुड़ौती लेना। यहाँ तक कि युद्ध अपने हथियार रख दे। यही (अल्लाह का आदेश) है। और यदि अल्लाह चाहे, तो अवश्य उनसे बदला ले। किंतु (यह आदेश इसलिए दिया) ताकि तुममें से कुछ की कुछ के साथ परीक्षा ले। और जो लोग अल्लाह की राह में मारे गए, तो वह (अल्लाह) उनके कर्मों को कदापि व्यर्थ नहीं करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Pas jab in kafiron se tumhari muth-bhaid (battle) ho to pehla kaam gardanein (necks) maarna hai, yahan tak ke jab tum unko acchi tarah kuchal do tab qaidiyon (captives) ko mazboot baandho. Iske baad (tumhein ikhtiyar hai) ehsan karo ya fidiye (ransom) ka muaamla karlo, taa-aanke ladayi apne hatiyar daal de. Yeh hai tumhare karne ka kaam. Allah chahta to khud hi unse nimat leta, magar (yeh tareeqa us ne is liye ikhtiyar kiya hai) taa-ke tum logon ko ek dusre ke zariye se aazmaye aur jo log Allah ki raah mein maarey jayenge Allah unke aamal ko hargiz zaya na karega
Roman Urdu (Junagarhi)To jabb kafiron say tumhari mud-bher ho to gardano per war maro jabb unko achi tarah kuchal dalo to abb khoob mazboot qaid-o-band say giriftar kero (phir ikhtiyar hai) kay khuwa ehsan rakh ker chor do ya fidya ley ker ta-waqt-e-kay laraee apnay hathyar rakh day. Yehi hukum hai aur agar Allah chahta to (khud) hi inn say badla ley leta lekin (uska mansha yeh hai) kay tum mein say aik ka imtehan doosray kay zariyey say ley ley jo log Allah ki raah mein shaheed ker diye jatay hain Allah Taalaa unkay aemaal hergiz zaya na keray ga
Devnagri Urdu (Maududi)जब काफिरों से तुम्हारी मुठ-भैद (लड़ाई) हो तो पहला काम गर्दनें (गर्दन) मारना है, यहां तक ​​के जब तुम उनको अच्छी तरह से कुचल दो तब कैदियों (बंदियों) को मजबूत बांधो। इसके बाद (तुम्हें इख्तियार है) एहसान करो या फ़िदिये (फिरौती) का मुआमला करलो, ता-आंके लड़ायी अपनी हत्या डाल दे। ये है तुम्हारे करने का काम. अल्लाह चाहता है तो खुद ही उनसे निमत लेता है, मगर (ये तारीख़ा हमें ने इसके लिए इख्तियार किया है) ता-के तुम लोगों को एक दूसरे के ज़रीए से आज़माए और जो लोग अल्लाह की राह में मारे जाएंगे अल्लाह उनके अमल को हरगिज़ ज़या ना करेगा
عَرَبِيسَيَهديهِم وَيُصلِحُ بالَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)वह उनका मार्गदर्शन करेगा और उनकी स्थिति सुधार देगा।
Roman Urdu (Maududi)Woh unki rehnumayi farmayega, unka haal durust kardega
Roman Urdu (Junagarhi)Unhen raah dikhaye ga aur unkay halaat ki islah kerday ga
Devnagri Urdu (Maududi)वो उनकी रहनुमाई फरमायेगा, उनका हाल दुरुस्त कर देगा
عَرَبِيوَيُدخِلُهُمُ الجَنَّةَ عَرَّفَها لَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्हें उस जन्नत में दाखिल करेगा, जिससे वह उन्हें परिचित करा चुका है।
Roman Urdu (Maududi)Aur unko us jannat mein daakhil karega jissey woh unko waqif kara chuka hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unhen uss jannat mein ley jaye ga jiss say unhen shanasa ker diya hai
Devnagri Urdu (Maududi)और उनको हम जन्नत में दाख़िल करेगा जिसने उन्हें वाकिफ़ करा चुका है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِن تَنصُرُوا اللَّهَ يَنصُركُم وَيُثَبِّت أَقدامَكُم
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! यदि तुम अल्लाह (के धर्म) की सहायता करोगे, तो वह तुम्हारी सहायता करेगा और तुम्हारे क़दम जमा देगा।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo imaan laye ho, agar tum Allah ki madad karoge to woh tumhari madad karega aur tumhare qadam mazboot jamaa dega
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Agar tum Allah kay (deen) ki madad kero gay to woh tumhari madad keray ga aur tumhen sabit qadam rakhay ga
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम अल्लाह की मदद करोगे तो वो तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हारा क़दम मज़बूत जमा देगा
عَرَبِيوَالَّذينَ كَفَروا فَتَعسًا لَهُم وَأَضَلَّ أَعمالَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने कुफ़्र किया, तो उनके लिए विनाश है और उसने उनके कर्मों को व्यर्थ कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Rahe woh log jinhon ne kufr kiya hai, to unke liye halakat hai aur Allah ne unke aamal ko bhatka diya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log kafir huye unhen halaki ho Allah unkay aemaal ghaarat kerday ga
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जिन्हों ने कुफ्र किया है, तो उनके लिए हलाकत है और अल्लाह ने उनके आमाल को भटका दिया है
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّهُم كَرِهوا ما أَنزَلَ اللَّهُ فَأَحبَطَ أَعمالَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)यह इसलिए कि उन्होंने उस चीज़ को नापसंद किया, जिसे अल्लाह ने उतारा, तो उसने उनके कर्म अकारथ कर दिए।
Roman Urdu (Maududi)Kyunke unhon ne us cheez ko napasand kiya jisey Allah ne naazil kiya hai, lihaza Allah ne unke aamal zaya (waste) kardiye
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss liye kay woh Allah ki nazil kerdah cheez say na khush huye pus Allah Taalaa ney (bhi) unn kay aemaal zaya ker diye
Devnagri Urdu (Maududi)क्योंकि उन्होन ने हमें चीज को नापसंद किया है जैसे अल्लाह ने नाज़िल किया है, लिहाजा अल्लाह ने उनके आमाल को बर्बाद कर दिया है
عَرَبِي۞ أَفَلَم يَسيروا فِي الأَرضِ فَيَنظُروا كَيفَ كانَ عاقِبَةُ الَّذينَ مِن قَبلِهِم ۚ دَمَّرَ اللَّهُ عَلَيهِم ۖ وَلِلكافِرينَ أَمثالُها
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या ये लोग धरती में चले-फिरे नहीं कि देखते कि उन लोगों का कैसा परिणाम हुआ जो इनसे पहले थे? अल्लाह ने उन्हें नष्ट कर दिया और इन काफ़िरों के लिए भी इसी के समान (यातनाएँ) हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya woh zameen mein chale phire na thay ke un logon ka anjaam dekhte jo unse pehle guzar chuke hain? Allah ne unka sab kuch unpar ulat diya, aur aise hi nataij in kaafiron ke liye muqaddar hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn logon nay zamin mein chal phir ker iss ka moaeena nahi kiya kay inn say pehlay kay logon ka nateeja kiya hua? Allah ney unhen halak ker diya aur kafiron kay liye iss tarah ki sazayen hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वो जमीन में चले फिर ना थे के उन लोगों का अंजाम देखते हैं जो उनसे पहले गुजर चुके हैं? अल्लाह ने उनका सब कुछ उलट दिया, और काफिरों के लिए मुकद्दर में ऐसी ही नटाईज है
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ مَولَى الَّذينَ آمَنوا وَأَنَّ الكافِرينَ لا مَولىٰ لَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)यह इसलिए कि निःसंदेह अल्लाह उन लोगों का संरक्षक है जो ईमान लाए और इसलिए कि निःसंदेह काफ़िरों का कोई संरक्षक नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh is liye ke imaan laane walon ka haami o nasir (Protector) Allah hai aur kaafiron ka haami o nasir (Protector) koi nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Woh iss liye kay eman walon ka kaar saaz khud Allah Taalaa hai aur iss liye kay kafiron ka koi kaar saaz nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ये है उनके लिए ईमान लाने वालों का हमी ओ नासिर (रक्षक) अल्लाह है और काफिरों का हमी ओ नासिर (रक्षक) कोई नहीं
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ يُدخِلُ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ ۖ وَالَّذينَ كَفَروا يَتَمَتَّعونَ وَيَأكُلونَ كَما تَأكُلُ الأَنعامُ وَالنّارُ مَثوًى لَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, ऐसे बाग़ों में दाखिल करेगा जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। तथा जिन लोगों ने कुफ़्र किया, वे फ़ायदा उठाते और खाते हैं, जैसे पशु खाते हैं और आग उनके लिए रहने की जगह है।
Roman Urdu (Maududi)Iman laney walon aur neik amal karne walon ko Allah un jannaton mein daakhil karega jinke nichey nehrein behti hain, aur kufr karne waale bas duniya ki chandh roza zindagi ke mazey loot rahey hain, janwaron ki tarah kha pee rahey hain, aur unka aakhri thikana jahannum hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log eman laye aur unhon ney nek aemaal kiye unhen Allah Taalaa aisay baghon mein dakhil keray ga jinn kay neechay nehren beh jari hain aur jo log kafir huye woh (duniya hi ka) faeedah utha rahey hain aur misil chopayon kay kha rahey hain unn ka asal thikana jahannum hai
Devnagri Urdu (Maududi)ईमान लाने वालों और नीक अमल करने वालों को अल्लाह उन जन्नतों में दाख़िल करेगा जिनके बारे में नीचे बताया गया है, और कुफ्र करने वाले बस दुनिया की चंद रोजा जिंदगी के मजे लूट रहे हैं, जानवरों की तरह खा पी रहे हैं, और उनका आखिरी ठिकाना जहन्नुम है
عَرَبِيوَكَأَيِّن مِن قَريَةٍ هِيَ أَشَدُّ قُوَّةً مِن قَريَتِكَ الَّتي أَخرَجَتكَ أَهلَكناهُم فَلا ناصِرَ لَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)तथा कितनी ही बस्तियाँ हैं, जो आपकी उस बस्ती से अधिक शक्तिशाली थीं, जिसने आपको निकाल दिया, हमने उन्हें नष्ट कर दिया, फिर कोई उनका सहायक न था।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi (s.a.s) kitni hi bastiyan aisi guzar chuki hain jo tumhare us basti se bahut zyada zoarawar thin jisne tumhein nikal diya hai? Unhein humne is tarhaan halaak kardiya ke koi unka bachane wala na tha
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney kitni bastiyon ko jo taqat mein teri iss basti say ziyadah thin jiss say tujhay nikala hum ney unhen halak ker diya jinka madadgar koi na utha
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी (एसएएस) कितनी ही बस्तियां ऐसी गुजर चुकी हैं जो तुम्हारे उस बस्ती से बहुत ज्यादा जोरावर थी जिसने तुम्हें निकल दिया है? उन्हें हमने इस तरह हलक करदिया के कोई उनका बचाने वाला ना था
عَرَبِيأَفَمَن كانَ عَلىٰ بَيِّنَةٍ مِن رَبِّهِ كَمَن زُيِّنَ لَهُ سوءُ عَمَلِهِ وَاتَّبَعوا أَهواءَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वह व्यक्ति जो अपने रब की ओर से एक स्पष्ट तर्क पर है, उस व्यक्ति के समान है, जिसके लिए उसके बुरे कर्मों को सुंदर बना दिया गया और उसने अपनी इच्छाओं का पालन किया?
Roman Urdu (Maududi)Bhala kahin aisa ho sakta hai ke jo apne Rubb ki taraf se ek saaf o sareeh hidayat par ho, woh un logon ki tarah ho jaye jinke liye unka bura amal khushnuma bana diya gaya hai aur woh apni khwahishat ke pairo ban gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya pus woh shaks jo apnay perwerdigar ki taraf say dalil per ho uss shaks jaisa ho sakta hai? Jiss kay liye uss ka bura kaam muzayyan ker diya gaya ho aur woh apni nafsani khuwaishon ka pero ho
Devnagri Urdu (Maududi)भला कहीं ऐसा हो सकता है कि जो अपने रब की तरफ से एक साफ ओ सारी हिदायत पर हो, वो उन लोगों की तरह हो जाए जिनके लिए उनका बुरा अमल खुशनुमा बना दिया गया है और वो अपनी ख़्वाहिशात के जोड़े बन गए हैं
عَرَبِيمَثَلُ الجَنَّةِ الَّتي وُعِدَ المُتَّقونَ ۖ فيها أَنهارٌ مِن ماءٍ غَيرِ آسِنٍ وَأَنهارٌ مِن لَبَنٍ لَم يَتَغَيَّر طَعمُهُ وَأَنهارٌ مِن خَمرٍ لَذَّةٍ لِلشّارِبينَ وَأَنهارٌ مِن عَسَلٍ مُصَفًّى ۖ وَلَهُم فيها مِن كُلِّ الثَّمَراتِ وَمَغفِرَةٌ مِن رَبِّهِم ۖ كَمَن هُوَ خالِدٌ فِي النّارِ وَسُقوا ماءً حَميمًا فَقَطَّعَ أَمعاءَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)उस जन्नत की विशेषता, जिसका वादा परहेज़गारों से किया गया है, यह है कि उसमें कई नहरें ऐसे पानी की हैं जो खराब होने वाला नहीं, और कई नहरें दूध की हैं जिनका स्वाद नहीं बदला, और कई नहरें शराब की हैं जो पीने वालों के लिए स्वादिष्ट है, और कई नहरें ख़ूब साफ़ किए हुए शहद की हैं। और उनके लिए उसमें हर प्रकार के फल और उनके पालनहार की ओर से बड़ी क्षमा है। (क्या ये परहेज़गार) उनके समान हैं, जो सदैव आग (जहन्नम) में रहने वाले हैं तथा जिन्हें खौलता हुआ पानी पिलाया जाएगा, जो उनकी आँतों के टुकड़े-टुकड़े कर देगा?
Roman Urdu (Maududi)Parhezgar-on ke liye jis jannat ka waada kiya gaya hai uski shaan to yeh hai ke usmein nehrein beh rahi hongi nithre (incorruptible /unpolluted) huye pani ki, nehrein beh rahi hongi aisey doodh ki jiske mazay(taste) mein zara farq na aaya hoga, nehrein beh rahi hongi aisi sharaab ki jo peene walon ke liye lazeez (delicious) hongi, nehrein beh rahi hongi saaf shafaaf shehad (honey) ki. Usmein unke liye har taraah ke phal hongay aur unke Rubb ki taraf se bakshish. (kya woh shaks jiske hissey mein yeh jannat aane wali hai) un logon ki taraah ho sakta hai jo jahannam mein hamesha rahenge aur jinhein aisa garam(hot) pani pilaya jayega jo unke aantein (bowels) tak kaat dega
Roman Urdu (Junagarhi)Uss jannat ki sift jiss ka perhezgaron say wada kiya gaya hai yeh hai kay uss mein pani ki nehren hain jo badboo kernay wala nahi aur doodh ki nehren hain jinka maza nahi badla aur sharab ki nehren hain jinn mein peenay walon kay liye bari lazzat hai aur nehren hain shehad ki jo boht saaf hain aur unn kay liye wahan her qisam kay meway hain aur unkay rab ki taraf say maghfirat hai kiya yeh misil iss kay hain jo hamesha aag mein rehnay wala hai? Aur jihen garam kholta hua pani pilaya jaye ga jo inn ki aanton kay tukray tukray ker dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)परवाह-ऑन के लिए जिस जन्नत का वादा किया गया है उसकी शान तो ये है के उसमें नेह्रेइन बेह राही होंगी निथरे (अक्षम/अप्रदूषित) हुए पानी की, नेह्रेन बेह राही होंगी ऐसे दूध की जिसकी मजा (स्वाद) में जरा फर्क ना आया होगा, नहरें बेह राही होंगी ऐसी शराब की जो पीने वालों के लिए लजीज (स्वादिष्ट) होंगी, नहरें बह रही होंगी साफ शफाफ शेहद (शहद) की। उसमें उनके लिए हर तरह के फल होंगे और उनके रब की तरफ से बख्शीश। (क्या वो शक्स जिसके हिस्से में ये जन्नत आने वाली है) उन लोगों की तरह हो सकता है जो जहन्नम में हमेशा रहेंगे और जिनमें ऐसा गरम (गर्म) पानी पिलाया जाएगा जो उनके आंतें (आंत) तक काट देगा
عَرَبِيوَمِنهُم مَن يَستَمِعُ إِلَيكَ حَتّىٰ إِذا خَرَجوا مِن عِندِكَ قالوا لِلَّذينَ أوتُوا العِلمَ ماذا قالَ آنِفًا ۚ أُولٰئِكَ الَّذينَ طَبَعَ اللَّهُ عَلىٰ قُلوبِهِم وَاتَّبَعوا أَهواءَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं, जो आपकी ओर कान लगाते हैं, यहाँ तक कि जब वे आपके पास से निकलते हैं, तो उन लोगों से जिन्हें ज्ञान प्रदान किया गया है, कहते हैं कि उसने अभी क्या कहा? यही लोग हैं, जिनके दिलों पर अल्लाह ने मुहर लगा दी और उन्होंने अपनी इच्छाओं का पालन किया।
Roman Urdu (Maududi)In mein se kuch log aise hain jo kaan laga kar tumhari baat sunte hain aur phir jab tumhare paas se nikalte hain un logon se jinhein ilm ki niyamat bakshi gayi hai puchte hain ke abhi abhi inhon ne kya kaha tha?yeh woh log hain jinke dilon par Allah ne thappa (seal) laga diya hai aur yeh apni apni khwaishat ke pairo bane huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn mein baaz (aisay bhi hain kay) teri taraf kaan lagatay hain yahan tak kay jabb teray pass say jatay hain to ehl-e-ilm say (ba-waja kund zehni-o-laperwahee kay) poochtay hain kay iss ney abhi kiya kaha tha? Yehi log hain jinn kay dilon per Allah ney mohar ker di hai aur woh apni khuawishon ki perwi kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो कान लगा कर तुम्हारी बात सुनते हैं और फिर जब तुम्हारे पास से निकलते हैं उन लोगों से जिन्हें इल्म की नियामत बक्शी गई है पूछते हैं के अभी अभी इन्होन ने क्या कहा था?ये वो लोग हैं जिनके दिलों पर अल्लाह ने थप्पड़ (सील) लगा दिया है और ये अपनी अपनी ख्वाहिश के जोड़े बने हुए हैं है
عَرَبِيوَالَّذينَ اهتَدَوا زادَهُم هُدًى وَآتاهُم تَقواهُم
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हिन्दी (Al-Omari)और वे लोगों जिन्होंने मार्गदर्शन अपनाया, उसने उन्हें हिदायत में बढ़ा दिया और उन्हें उनका तक़वा प्रदान किया।
Roman Urdu (Maududi)Rahe woh log jinhon ne hidayat payi hai, Allah unko aur zyada hidayat deta hai aur unhein unke hisse ka taqwa ata farmata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log hidayat yafta hain Allah ney unhen hidayat mein aur barha diya hai aur unhen unki perhezgari ata farmaee hai
Devnagri Urdu (Maududi)रहे वो लोग जिन्होन ने हिदायत पाई है, अल्लाह उनको और ज्यादा हिदायत देता है और उनको हिससे का तकवा अता फरमाता है
عَرَبِيفَهَل يَنظُرونَ إِلَّا السّاعَةَ أَن تَأتِيَهُم بَغتَةً ۖ فَقَد جاءَ أَشراطُها ۚ فَأَنّىٰ لَهُم إِذا جاءَتهُم ذِكراهُم
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हिन्दी (Al-Omari)तो वे किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं सिवाय क़ियामत के कि वह उनपर अचानक आ जाए? तो निश्चय उसकी निशानियाँ आ चुकी हैं, फिर जब वह उनके पास आ जाएगी, तो उनके लिए नसीहत ग्रहण करना कैसे संभव होगा?
Roman Urdu (Maududi)Ab kya yeh log bas qayamat hi ke muntazir hain ke woh achanak inpar aa jaye? Uski alamaat to aa chuki hain jab woh khud aa jayegi to inke liye nasihat kabool karne ka kaunsa mauqa baaqi reh jayega
Roman Urdu (Junagarhi)To kiya yeh qayamat ka intezar ker rahe hain kay woh inn kay pass achanak aajaye yaqeenan iss ki alamaten to aa chuki hain phir jabkay inn kay pass qayamat aajaye enhen naseehat kerna kahan hoga
Devnagri Urdu (Maududi)अब क्या ये लोग बस कयामत ही के मुंतजिर हैं के वो अचानक अंदर आ जाए? उसकी अलामत तो आ चुकी है जब वो खुद आ जाएगी तो इनके लिए हिदायत कबूल करने का कौनसा मौका बाकी रह जाएगा
عَرَبِيفَاعلَم أَنَّهُ لا إِلٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَاستَغفِر لِذَنبِكَ وَلِلمُؤمِنينَ وَالمُؤمِناتِ ۗ وَاللَّهُ يَعلَمُ مُتَقَلَّبَكُم وَمَثواكُم
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हिन्दी (Al-Omari)अतः जान लें कि निःसंदेह तथ्य यह है कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, तथा अपने पापों के लिए क्षमा माँगें और ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों के लिए भी, और अल्लाह तुम्हारे चलने-फिरने और तुम्हारे ठहरने को जानता है।
Roman Urdu (Maududi)Pas aey Nabi, khoob jaan lo ke Allah ke siwa koi ibadat ka mustahiq nahin hai, aur maafi maango apne kasoor ke liye bhi aur momin mardon aur auraton ke liye bhi. Allah tumhari sargarmiyon ko bhi jaanta hai aur tumhare thikane se bhi waqif hai
Roman Urdu (Junagarhi)So (aey nabi) aap yaqeen kerlen kay Allah kay siwa koi mabood nahi aur apnay gunahon ki bakhsish manga keren aur momin mardon aur momin aurton kay haq mein bhi Allah tum logo ki amdoraft ki aur rehnay sehnay ki jagah khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)पस ऐ नबी, खूब जान लो के अल्लाह के सिवा कोई इबादत का मुस्तहिक नहीं है, और माफ़ी मांगो अपने कसूर के लिए भी और मोमिन मर्दन और औरतों के लिए भी। अल्लाह तुम्हारी सरगर्मियों को भी जानता है और तुम्हारे ठिकाने से भी वाकिफ है
عَرَبِيوَيَقولُ الَّذينَ آمَنوا لَولا نُزِّلَت سورَةٌ ۖ فَإِذا أُنزِلَت سورَةٌ مُحكَمَةٌ وَذُكِرَ فيهَا القِتالُ ۙ رَأَيتَ الَّذينَ في قُلوبِهِم مَرَضٌ يَنظُرونَ إِلَيكَ نَظَرَ المَغشِيِّ عَلَيهِ مِنَ المَوتِ ۖ فَأَولىٰ لَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग ईमान लाए, वे कहते हैं कि कोई सूरत क्यों नहीं उतारी गई (जिसमें युद्ध का उल्लेख हो)? फिर जब कोई मोहकम (दृढ़) सूरत उतारी जाती है और उसमें युद्ध का उल्लेख होता है, तो आप उन लोगों को देखेंगे जिनके दिलों में बीमारी है, वे आपकी ओर इस तरह देखेंगे, जैसे वह आदमी देखता है, जिसपर मौत की बेहोशी छा गई हो। तो उनके लिए उत्तम है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log iman laye hain woh keh rahe thay ke koi surat kyun nahin nazil ki jaati (jis mein jung ka hukum diya jaye) magar jab ek mohkam surat nazil kardi gayi jismein jung ka zikr tha to tumne dekha ke jinke dilon mein bimari thi woh tumhari taraf is tarah dekh rahey hain jaise kisi par maut chaa gayi ho. Afsos unke haal par
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log eman laye woh kehtay hain koi soorat kiyon nazil nahi ki gaee? Phir jab koi saaf matlab wali soorat nazil ki jati hai aur iss mein qitaal ka ziker kiya jata hai to aap dekhtay hain jinn logon kay dilon mein beemari hai woh aap ki taraf iss tarah dekhtay hain jaisay uss shaks ki nazar hoti hai jiss per mot ki beyhoshi taari ho pus boht behtar tha unn kay liye
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ईमान लाए हैं वो कह रहे थे कि कोई सूरत क्यों नहीं नाज़िल की जाती (जिस में जंग का हुकुम दिया जाए) मगर जब एक मोहकम सूरत नाज़िल हो गई जिसमें जंग का जिक्र था तो तुमने देखा के जिनके दिलों में बीमारी थी वो तुम्हारी तरफ इस तरह देख रहे हैं जैसे किसी पर मौत छा गई हो। अफ़सोस उनके हाल पर
عَرَبِيطاعَةٌ وَقَولٌ مَعروفٌ ۚ فَإِذا عَزَمَ الأَمرُ فَلَو صَدَقُوا اللَّهَ لَكانَ خَيرًا لَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)आज्ञा का पालन करना और अच्छी बात कहना, फिर जब आज्ञा आवश्यक हो जाए, तो यदि वे अल्लाह के प्रति सच्चे रहें, तो निश्चय ही यह उनके लिए बेहतर है।
Roman Urdu (Maududi)(Unki zubaan par hai) itaat ka ikrar aur acchi acchi batein. Magar jab qataii hukum de diya gaya us waqt woh Allah se apne ahad mein sacche nikalte to unhi ke liye accha tha
Roman Urdu (Junagarhi)Farman ka baja lana aur achi baat ka kehna. Phir jab kaam muqarrar hojaye to agar Allah kay sath sachay rahen to unn kay liye behtri hai
Devnagri Urdu (Maududi)(उनकी ज़ुबान पर है) इत्ता का इकरार और अच्छी अच्छी बातें। मगर जब कतई हुकुम दे दिया गया हमें वक्त वो अल्लाह से अपने अहद में सच्चे निकलते तो उनके लिए अच्छा था
عَرَبِيفَهَل عَسَيتُم إِن تَوَلَّيتُم أَن تُفسِدوا فِي الأَرضِ وَتُقَطِّعوا أَرحامَكُم
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हिन्दी (Al-Omari)फिर निश्चय तुम निकट हो, यदि तुम मुँह फेर लो, कि तुम धरती में बिगाड़ पैदा करो और अपने संबंधों को पूरी तरह से काट दो।
Roman Urdu (Maududi)Ab kya tum logon se iske siwa kuch aur tawaqqu ki ja sakti hai ke agar tum ulte mooh phir gaye to zameen mein phir fasad barpa karoge aur aapas mein ek dusre ke galay (throats) kaatoge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum say yeh bhi baeed nahi kay tum ko agar hukumat mill jaye to tum zamin per fasad berpa kerdo aur rishtay natay tor dalo
Devnagri Urdu (Maududi)अब क्या तुम लोगों से इसके सिवा कुछ और तवक्कु की जा सकती है के अगर तुम उल्टे मुंह फिर गए तो जमीन में फिर फसाद बरपा करोगे और आपस में एक दूसरे के गले कटोगे
عَرَبِيأُولٰئِكَ الَّذينَ لَعَنَهُمُ اللَّهُ فَأَصَمَّهُم وَأَعمىٰ أَبصارَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)यही वे लोग हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपनी दया से दूर कर दिया। अतः उन्हें बहरा बना दिया और उनकी आँखें अंधी कर दीं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log hain jinpar Allah ne laanat ki aur inko andha (blind) aur behra bana diya
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh wohi log hain jinn per Allah ki phitkaar hai aur jinn ki samaat aur aankhon ki roshni cheen li hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग हैं जिनपर अल्लाह ने लानत की और इनको अंधा (अंधा) और बेहरा बना दिया
عَرَبِيأَفَلا يَتَدَبَّرونَ القُرآنَ أَم عَلىٰ قُلوبٍ أَقفالُها
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वे क़ुरआन में सोच-विचार नहीं करते या उनके दिलों पर ताले लगे हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya un logon ne Quran par gaur nahin kiya, ya dilon par unke qufal (locks) chade huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh quran mein ghor-o-fiker nahi kertay? Ya inn kay dilon per unn kay talay lag gaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या उन लोगों ने कुरान पर गौर नहीं किया, या दिलों पर उनके कुफल (ताले) चढ़े हैं
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ ارتَدّوا عَلىٰ أَدبارِهِم مِن بَعدِ ما تَبَيَّنَ لَهُمُ الهُدَى ۙ الشَّيطانُ سَوَّلَ لَهُم وَأَملىٰ لَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग अपनी पीठों के बल फिर गए, इसके बाद कि उनके लिए सीधा रास्ता स्पष्ट हो गया, शैतान ने उनके लिए (उनके कार्य को) सुशोभित कर दिया और उन्हें लंबी आशा दिलाई।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai ke jo log hidayat wazeh ho jaane ke baad ussey phir gaye unke liye shaytan ne is rawish ko sahal bana diya hai aur jhuti tawaqquat ka silsila unke liye daraaz kar rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log apni peeth kay bal ultay phir gaye iss kay baad kay unn kay liye hidayat wazeh ho chuki yaqeenan shetan ney unn kay liye (unkay fail ko) muzayyen ker diya hai aur unhen dheel day rakhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के जो लोग हिदायत वाजे हो जाने के बाद उसे फिर से गए उनके लिए शैतान ने इस रवीश को सहल बना दिया है और झूठी तवाक्कत का सिलसिला उनके लिए दराज़ कर रक्खा है
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّهُم قالوا لِلَّذينَ كَرِهوا ما نَزَّلَ اللَّهُ سَنُطيعُكُم في بَعضِ الأَمرِ ۖ وَاللَّهُ يَعلَمُ إِسرارَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)यह इसलिए कि उन्होंने, उन लोगों से जिन्होंने उसे नापसंद किया जो अल्लाह ने उतारा है, कहा कि हम कुछ मामलों में तुम्हारी बात मानेंगे और अल्लाह उनके छिपाने को जानता है।
Roman Urdu (Maududi)Is liye unhon ne Allah ke nazil karda deen ko napasand karne walon se kehdiya ke baaz maamlaat mein hum tumhari manenge.Allah unki yeh khufiya baatein khoob jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss liye kay unhon ney inn logon say jinhon ney Allah ki nazil kerdah wahee ko bura samjha yeh kaha kay hum bhi unqareeb baaz kamon mein tumhara kaha manen gay aur Allah unki posheedah batein khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या उनके लिए अल्लाह के नाज़िल करदा दीन को नापसंद करने वालों से केहदिया के बाज़ मामलात में हम तुम्हारी मानेंगे।अल्लाह उनकी ये खुफिया बातें खूब जानता है
عَرَبِيفَكَيفَ إِذا تَوَفَّتهُمُ المَلائِكَةُ يَضرِبونَ وُجوهَهُم وَأَدبارَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या हाल होगा जब फ़रिश्ते उनके प्राण निकालेंगे, उनके चेहरों और उनकी पीठों पर मारते होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir us waqt kya haal hoga jab farishtey inki roohein qabz karenge aur inke mooh aur peethon (backs) par maarte huey inhein le jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Pus unki kaisi (durgat) hogi jabkay farishtay unki rooh qabaz kertay huye unkay chehron aur unki sareeno per maaren gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमें वक्त क्या हाल होगा जब फरिश्ते इनकी रूहें क़ब्ज़ करेंगी और इनके मुंह और पीठ पर मरते हुए इन्हें ले जाएंगे
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّهُمُ اتَّبَعوا ما أَسخَطَ اللَّهَ وَكَرِهوا رِضوانَهُ فَأَحبَطَ أَعمالَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)यह इस कारण कि निःसंदेह उन्होंने उसका अनुसरण किया जिसने अल्लाह को क्रोधित कर दिया और उसकी प्रसन्नता को बुरा जाना, तो उसने उनके कर्मों को नष्ट कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Yeh isi liye to hoga ke inhon ne us tariqe ki pairwi ki jo Allah ko naraaz karne wala hai aur us ki raza ka raasta ikhtiyar karna pasand na kiya. Isi bina par usne inke sab aamaal zaya kar diye
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss bina per kay yeh woh raah chalay jiss say unhon ney Allah ko naraz kerdiya aur unhon ney uss ki raza mandi ko bura jana to Allah ney unkay aemaal ikarat ker diye
Devnagri Urdu (Maududi)ये इसी के लिए तो होगा के इन्होनें हमें तारीख़ की जोड़ी की जो अल्लाह को नाराज़ करने वाला है और हमें रज़ा का रास्ता इख्तियार करना पसंद नहीं है। इसी बिना पर उसने इनके सब आमाल जया कर दिए
عَرَبِيأَم حَسِبَ الَّذينَ في قُلوبِهِم مَرَضٌ أَن لَن يُخرِجَ اللَّهُ أَضغانَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)या उन लोगों ने जिनके दिलों में कोई बीमारी है, यह समझ रखा है कि अल्लाह उनके द्वेष कभी प्रकट नहीं करेगा?
Roman Urdu (Maududi)Kya woh log jinke dilon mein bimari hai yeh samjhe baithe hain ke Allah unke dilon ke khot (keena) zahir nahin karega
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya unn logon ney jinkay dilon mein beemari hai yeh samjh rakha hai kay Allah unkay keeno ko zahir hi na keray ga
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वो लोग जिनके दिलों में बीमार है ये समझे बैठे हैं के अल्लाह उनके दिलों के खोट (कीना) जाहिर नहीं करेगा
عَرَبِيوَلَو نَشاءُ لَأَرَيناكَهُم فَلَعَرَفتَهُم بِسيماهُم ۚ وَلَتَعرِفَنَّهُم في لَحنِ القَولِ ۚ وَاللَّهُ يَعلَمُ أَعمالَكُم
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) यदि हम चाहें तो अवश्य आपको वे लोग दिखा दें, फिर निश्चय आप उन्हें उनकी निशानियों से पहचान लेंगे तथा आप उन्हें उनके बात करने के ढंग से अवश्य पहचान लेंगे। और अल्लाह तुम्हारे कामों को जानता है।
Roman Urdu (Maududi)Hum chahein to unhein tumko aankhon se dikha dein aur unke chehron se tum unko pehchaan lo magar unke andaaz e kalaam se to tum unko jaan hi logay.Allah tum sab ke aamal se khoob waqif hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar hum chahtay to unn sabb ko tujhay dikha detay pus tu unhen unn kay chehron say hi pehchan leta aur yaqeenan tu unhen unki baat kay dhab say pehchan leyga tumharay sabb kaam Allah ko maloom hain
Devnagri Urdu (Maududi)हम चाहें तो उन्हें तुमको आंखों से दिखा दें और उनके चेहरों से तुम उनको पहचान लो मगर उनके अंदाज़ ए कलाम से तो तुम उनको जान ही लोगे। अल्लाह तुम सब के अमल से ख़ूब वाकिफ़ है
عَرَبِيوَلَنَبلُوَنَّكُم حَتّىٰ نَعلَمَ المُجاهِدينَ مِنكُم وَالصّابِرينَ وَنَبلُوَ أَخبارَكُم
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हिन्दी (Al-Omari)और हम अवश्य ही तुम्हारी परीक्षा लेंगे, यहाँ तक कि हम तुममें से जिहाद करने वालों और सब्र करने वालों को जान लें और तुम्हारी परिस्थितियों को परख लें।
Roman Urdu (Maududi)Hum zaroor tum logon ko aazmaish mein dalenge taake tumhare halaat ki jaanch karein aur dekh lein ke tum mein mujahid aur sabit qadam kaun hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum tumhara imtehan keren gay takay tum mein say jihad kernay walon aur sabar kerney walon ko zahir kerden aur hum tumhari halaton ki bhi jaanch kerlen
Devnagri Urdu (Maududi)हम ज़रूर तुम लोगों को आज़माइश में डालेंगे ताकि तुम्हारे हालात की जाँच करें और देख लें के तुम में मुजाहिद और साबित क़दम कौन हैं
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا وَصَدّوا عَن سَبيلِ اللَّهِ وَشاقُّوا الرَّسولَ مِن بَعدِ ما تَبَيَّنَ لَهُمُ الهُدىٰ لَن يَضُرُّوا اللَّهَ شَيئًا وَسَيُحبِطُ أَعمالَهُم
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह की राह से रोका तथा रसूल का विरोध किया, इसके पश्चात कि उनके लिए सीधा मार्ग स्पष्ट हो गया, वे कदापि अल्लाह का कोई नुक़सान नहीं करेंगे और जल्द ही वह उनके कर्मों को नष्ट कर देगा।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne kufr kiya aur Allah ki raah se roaka aur Rasool se jhagda kiya jabke unpar raah e raast wazeh ho chuki thi, dar haqeeqat woh Allah ka koi nuksan bhi nahin kar sakte, balke Allah hi unka sab kiya karaya gaarat (null / fruitless) kardega
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan jinn logon ney kufur kiya aur Allah ki raah say logon ko roka aur rasool ki mukhalifat ki iss kay baad kay unn kay liye hidayat zahir ho chuki yeh hergiz hergiz Allah ka kuch nuksan na keren gay. Unqareeb inn kay aemaal woh ghaarat ker dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह की राह से रोका और रसूल से झगड़ा किया जबके अनपर राह ए रास्ता वज़ेह हो चुकी थी, दर हकीकत वो अल्लाह का कोई नुक्सान भी नहीं कर सकता, बल्कि अल्लाह ही उनका सब किया करा देगा।
عَرَبِي۞ يا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا أَطيعُوا اللَّهَ وَأَطيعُوا الرَّسولَ وَلا تُبطِلوا أَعمالَكُم
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो तथा अपने कर्मों को व्यर्थ न करो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, Tum Allah ki itaat karo aur Rasool ki itaat karo aur apne aamal ko barbaad na karlo
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walon! Allah ki ita’at kero aur rasool ka kaha mano aur apnay aemaal ko ghaarat na kero
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम अल्लाह की इबादत करो और रसूल की इबादत करो और अपने अमल को बरबाद ना करो
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا وَصَدّوا عَن سَبيلِ اللَّهِ ثُمَّ ماتوا وَهُم كُفّارٌ فَلَن يَغفِرَ اللَّهُ لَهُم
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह के मार्ग से रोका, फिर वे काफ़िर ही रहते हुए मर गए, तो अल्लाह उन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Kufr karne walon aur raah e khuda se roakne walon aur marte dum tak kufr par jamey rehne walon ko to Allah hargiz maaf na karega
Roman Urdu (Junagarhi)Jinn logon ney kufur kiya aur Allah ki raah say auron ko ko roka phir kufur ki halat mein hi marr gaye (yaqeen kerlo) kay Allah unhen hergiz na bakhshay ga
Devnagri Urdu (Maududi)कुफ्र करने वालों और राह ए खुदा से रुकने वालों और मरते दम तक कुफ्र पर जमे रहने वालों को तो अल्लाह हरगिज माफ ना करेगा
عَرَبِيفَلا تَهِنوا وَتَدعوا إِلَى السَّلمِ وَأَنتُمُ الأَعلَونَ وَاللَّهُ مَعَكُم وَلَن يَتِرَكُم أَعمالَكُم
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हिन्दी (Al-Omari)अतः निर्बल न बनो और न सुलह के लिए बुलाओ और तुम ही सर्वोच्च हो और अल्लाह तुम्हारे साथ है और वह कभी भी तुम्हारे कामों को तुमसे कम न करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Pas tum bodeyh (faint-hearted) na bano aur sulah ki darkhwast na karo. Tum hi ghalib rehne wale ho. Allah tumhare saath hai aur tumhare aamal ko woh hargiz zaya na karega
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum bodhay bann ker sulah ki darkhuast per na utar aao jabkay tum hi buland-o-ghalib rahop gay aur Allah tumharay sath hai na-mumkin hai kay woh tumharay aemaal zaya ker dey
Devnagri Urdu (Maududi)पस तुम बोदेह (बेहोश दिल) ना बनो और सुलह की अंधेरा ना करो। तुम ही ग़ालिब रहने वाले हो. अल्लाह तुम्हारे साथ है और तुम्हारे अमल को वो हरगिज जया ना करेगा
عَرَبِيإِنَّمَا الحَياةُ الدُّنيا لَعِبٌ وَلَهوٌ ۚ وَإِن تُؤمِنوا وَتَتَّقوا يُؤتِكُم أُجورَكُم وَلا يَسأَلكُم أَموالَكُم
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हिन्दी (Al-Omari)सांसारिक जीवन तो केवल एक खेल और तमाशा है और यदि तुम ईमान लाओ और (अल्लाह से) डरते रहो, तो वह तुम्हें तुम्हारा प्रतिफल प्रदान करेगा और तुमसे तुम्हारा (सारा) धन नहीं माँगेगा।
Roman Urdu (Maududi)Yeh duniya ki zindagi to ek khel aur tamasha hai agar tum imaan rakkho aur taqwe ki rawish par chalte raho to Allah tumhare ajar tumko dega aur woh tumhare maal tumse na maange ga
Roman Urdu (Junagarhi)Waqaee zindagan-e-duniya to sirf khel kood hai aur agar tum eman ley aao gay aur taqwa ikhtiyar kero gay to Allah tumhen tumharay ajar dey ga aur woh tum say tumharay maal nahi mangta
Devnagri Urdu (Maududi)ये दुनिया की जिंदगी तो एक खेल और तमाशा है अगर तुम ईमान रखोगे और तकवे की रवीश पर चलते रहो अल्लाह तुम्हारे अजर तुमको देगा और वो तुम्हारे माल तुमसे ना मांगे गा
عَرَبِيإِن يَسأَلكُموها فَيُحفِكُم تَبخَلوا وَيُخرِج أَضغانَكُم
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हिन्दी (Al-Omari)यदि वह तुमसे उनकी माँग करे और तुमपर ज़ोर देकर माँगे, तो तुम कंजूसी करोगे और वह तुम्हारे द्वेष को प्रकट कर देगा।
Roman Urdu (Maududi)Agar kahin woh tumhare maal tumse maang le aur sab ke sab tumse talab karle to tum bukhal (kanjoosi /niggardly /miserly) karoge aur woh tumhare khot (failings) ubhar layega
Roman Urdu (Junagarhi)Agar woh tum say tumharay maal mangay aur zor dey ker mangay to tum uss say bakheeli kerney lago gay aur woh tumharay keenay zahir ker dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)अगर कहीं वो तुम्हारे माल तुमसे मांग ले और सब के सब तुमसे तालाब करले तो तुम भूखल (कंजूसी / कंजूसी / कंजूस) करोगे और वह तुम्हारे खोट (असफलता) उबर लाएगा
عَرَبِيها أَنتُم هٰؤُلاءِ تُدعَونَ لِتُنفِقوا في سَبيلِ اللَّهِ فَمِنكُم مَن يَبخَلُ ۖ وَمَن يَبخَل فَإِنَّما يَبخَلُ عَن نَفسِهِ ۚ وَاللَّهُ الغَنِيُّ وَأَنتُمُ الفُقَراءُ ۚ وَإِن تَتَوَلَّوا يَستَبدِل قَومًا غَيرَكُم ثُمَّ لا يَكونوا أَمثالَكُم
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हिन्दी (Al-Omari)सुनो! तुम वे लोग हो कि अल्लाह की राह में खर्च करने के लिए बुलाए जाते हो, तो तुममें से कुछ लोग कंजूसी करते हैं। हालाँकि जो कंजूसी करता है, वह अपने आप ही से कंजूसी करता है। और अल्लाह तो बेनियाज़ है, और तुम ही मोहताज हो। और यदि तुम फिर जाओगे, तो वह तुम्हारे स्थान पर तुम्हारे सिवा और लोगों को ले आएगा, फिर वे तुम्हारे जैसे नहीं होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Dekho, tum logon ko dawat di jaa rahi hai ke Allah ki raah mein maal kharch karo ispar tum mein se kuch log hain jo bukhal (niggardly / kanjoosi) kar rahe hain. Halaanke jo bukhal (niggardly) karta hai woh dar haqeeqat apne aap hi se bukhal kar raha hai. Allah to Gani (all-Sufficient) hai, tumhi uske mohtaj ho. Agar tum mooh moadoge to Allah tumhari jagah kisi aur qaum ko le aayega aur woh tum jaise na hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Khabardar! Tum woh log ho kay Allah ki raah mein kharch kernay kay liye bulaye jatay ho to tum mein say baaz bakheeli kerney lagtay hain aur jo bukhul kerta hai woh to dar-asal apni jaan say bakheeli kerta hai. Allah Taalaa ghani hai aur tum faqeer (aur mohtaj) ho aur agar tum roogardaan hojao to woh tumharay badlay tumharay siwa aur logon ko laye ga jo phir tum jaisay na hongay
Devnagri Urdu (Maududi)देखो, तुम लोगों को दावत दी जा रही है कि अल्लाह की राह में माल खर्च करो इसपर तुम में से कुछ लोग हैं जो कंजूसी कर रहे हैं। हलाँके जो बुख़ल (कठिनाई) करता है वो डर हकीकत अपने आप ही से बुख़ाल कर रहा है। अल्लाह तो गनी (सर्व-पर्याप्त) है, तुम्हीं उसके मोहताज हो। अगर तुम अल्लाह से मुहं जोड़ोगे, तुम्हारी जगह किसी और कौम को ले आएगी और वो तुम जैसे ना होंगे
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Surah 47: Muhammad (Muhammad)

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Surah 47: Muhammad (Muhammad)

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Surah 47: Muhammad (Muhammad)

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Surah 47: Muhammad (Muhammad)

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Surah 47: Muhammad (Muhammad)

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Surah 48: Al-Fath (The Victory)

Medinan🕐 Revelation #111📜 29 Verses🕮 Juz 1
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Surah 48: Al-Fath (The Victory)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيإِنّا فَتَحنا لَكَ فَتحًا مُبينًا
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने आपको एक स्पष्ट विजय प्रदान की।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, humne tumko khuli fatah ata kardi
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak (aey nabi) hum ney aap ko aik khullam khulla fatah di hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, हमने तुमको खुली फतह अता करदी
عَرَبِيلِيَغفِرَ لَكَ اللَّهُ ما تَقَدَّمَ مِن ذَنبِكَ وَما تَأَخَّرَ وَيُتِمَّ نِعمَتَهُ عَلَيكَ وَيَهدِيَكَ صِراطًا مُستَقيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि अल्लाह आपके अगले और पिछले गुनाहों को क्षमा कर दे तथा आपपर अपनी अनुकंपा पूर्ण कर दे और आपको सीधे मार्ग पर चलाए।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke Allah tumhari agli pichli har kotahi se dargurzar farmaye, aur tumpar apni niyamat ki takmeel(poori) karde, aur tumhein seedha rasta dikhaye
Roman Urdu (Junagarhi)Takay jo kuch teray gunah aagay huye aur jo peechay sab ko Allah Taalaa maaf farmaye, aur tujh per apna ehsan poora ker day aur tujhay seedhi raah chalaye
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के अल्लाह तुम्हारी अगली पिचली हर कोटाही से दरगुर्जर फरमाये, और तुम अपनी नियामत की तकमील (पूरी) करदे, और तुम्हें सीधा रास्ता दिखाये
عَرَبِيوَيَنصُرَكَ اللَّهُ نَصرًا عَزيزًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह आपकी भरपूर सहायता करे।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumko zabardast nusrat bakhshe
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aap ko aik zabardast madad day
Devnagri Urdu (Maududi)और तुमको जबरदस्त नुसरत बख्शे
عَرَبِيهُوَ الَّذي أَنزَلَ السَّكينَةَ في قُلوبِ المُؤمِنينَ لِيَزدادوا إيمانًا مَعَ إيمانِهِم ۗ وَلِلَّهِ جُنودُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ وَكانَ اللَّهُ عَليمًا حَكيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)वही है, जिसने ईमान वालों के दिलों में शांति उतारी, ताकि वे अपने ईमान के साथ ईमान में और बढ़ जाएँ। और आकाशों तथा धरती की सेनाएँ अल्लाह ही की हैं। तथा अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jisne momino ke dilon mein sakinat ((Tranquility) nazil farmayi taa-ke apne imaan ke saath woh ek iman aur bada lein. Zameen aur aasmano ke sab lashkar Allah ke kabza-e-qudrat mein hain, aur woh Aleem o Hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi hai jiss ney musalmano kay dilon mein sukoon (aur itminan) daal diya takay apnay eman kay sath hi sath aur bhi eman mein barh jayen, aur aasmano aur zamin kay (kul) lashkar Allah hi kay hain. Aur Allah Taalaa dana ba-hikmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिसने मोमिनो के दिलों में सकीनत ((शांति) नाज़िल फरमायी ता-के अपने ईमान के साथ वो एक ईमान और बड़ा लें. ज़मीन और आसमान के सब लश्कर अल्लाह के कब्ज़ा-ए-क़ुदरत में हैं, और वो आलिम ओ हकीम है
عَرَبِيلِيُدخِلَ المُؤمِنينَ وَالمُؤمِناتِ جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها وَيُكَفِّرَ عَنهُم سَيِّئَاتِهِم ۚ وَكانَ ذٰلِكَ عِندَ اللَّهِ فَوزًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि वह ईमान वाले पुरुषों तथा ईमान वाली स्त्रियों को ऐसे बागों में दाखिल करे, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, वे उनमें सदैव रहेंगे। तथा उनसे उनकी बुराइयाँ दूर कर दे और यह अल्लाह के निकट हमेशा बड़ी कामयाबी है।
Roman Urdu (Maududi)(Usne yeh kaam is liye kiya hai) taa-ke momin mardon aur auraton ko hamesha rehne ke liye aisi jannaton mein daakhil farmaye jinke nichey nehrein beh rahi hongi aur unki buraiyan unse dur karde. Allah ke nazdeek yeh badi kamiyabi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Takay momin mardon aur aurton ko inn jannaton mein ley jaye jinn kay neechay nehren beh rahi hain jahan woh hamesha rahen gay aur inn say unkay gunah door ker dey aur Allah kay nazdeek yeh boht bari kamyabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)(उसने ये काम किया है) ता-के मोमिन मर्दन और औरतों को हमेशा रहने के लिए ऐसी जन्नत में दाख़िल फरमाये जिनके नीचे नहरेन बेह राही होंगी और उनकी बुराइयां उनसे दूर करदे। अल्लाह के नाज़दीक ये बदी कमियाबी है
عَرَبِيوَيُعَذِّبَ المُنافِقينَ وَالمُنافِقاتِ وَالمُشرِكينَ وَالمُشرِكاتِ الظّانّينَ بِاللَّهِ ظَنَّ السَّوءِ ۚ عَلَيهِم دائِرَةُ السَّوءِ ۖ وَغَضِبَ اللَّهُ عَلَيهِم وَلَعَنَهُم وَأَعَدَّ لَهُم جَهَنَّمَ ۖ وَساءَت مَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और (ताकि) उन मुनाफ़िक़ पुरुषों एवं मुनाफ़िक़ स्त्रियों तथा मुश्रिक पुरुषों एवं मुश्रिक स्त्रियों को यातना दे, जो अल्लाह के संबंध में बुरा गुमान रखते हैं। बुराई का फेरा उन्हीं पर है। उनपर अल्लाह का प्रकोप हुआ और उसने उनपर लानत की तथा उनके लिए जहन्नम तैयार कर रखी है और वह बहुत बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur un munafiq mardon aur auraton aur mushrik mardon aur auraton ko saza de jo Allah ke mutaliq burey gumaan rakhte hain. Burayi ke phair mein woh khud hi aa gaye hain, Allah ka gazab unpar hua aur usne unpar laanat ki aur unke liye jahannum muhayya kardi jo bahut hi bura thikana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur takay inn munafiq mardon aur mufiq aurton aur mushrik mardon aur mushrika aurton ko azab day jo Allah Taalaa kay baray mein bad-gumaniyan rakhney walay hain. (dar-asal) enhin per buraee ka phera hai, Allah inn per naraz hua aur enhen lanat ki aur inn kay liye dozakh tayyar ki aur woh (boht) buri lotney ki jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)और उन मुनाफिक मर्दों और औरतों और मुशरिक मर्दों और औरतों को सज़ा दे जो अल्लाह के मुतालिक बुरे गुमान रखते हैं। बुरेई के फेर में वो खुद ही आ गए हैं, अल्लाह का गजब असमान हुआ और उसने असमान लानत की और उनके लिए जहन्नुम मुहैय्या करदी जो बहुत ही बुरा ठिकाना है
عَرَبِيوَلِلَّهِ جُنودُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ وَكانَ اللَّهُ عَزيزًا حَكيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह ही के लिए आकाशों और धरती की सेनाएँ हैं और अल्लाह हमेशा से सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Zameen aur aasamano ke lashkar Allah hi ke qabza-e-qudrat mein hain aur woh zabardast aur hakeem(wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah ji kay liye aasmano aur zamin kay lashkar hain aur Allah ghalib aur hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जमीन और आसमानों के लश्कर अल्लाह ही के क़ब्ज़ा-ए-क़ुदरत में हैं और वह ज़बरदस्त और हकीम (बुद्धिमान) है
عَرَبِيإِنّا أَرسَلناكَ شاهِدًا وَمُبَشِّرًا وَنَذيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने आपको गवाही देने वाला और खुशख़बरी देने वाला और सावधान करने वाला बनाकर भेजा है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi hunme tumko shahadat(witness) dene wala basharat(good news) dene wala aur khabardar kardene wala bana kar bheja hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney tujhay gawahee denay wala aur khushkhabri sunanay wala aur daraney wala bana ker bheja hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी हममें तुमको शहादत (गवाह) देने वाला बशारत (खुशखबरी) देने वाला और खबरदार कार्डने वाला बना कर भेजा है
عَرَبِيلِتُؤمِنوا بِاللَّهِ وَرَسولِهِ وَتُعَزِّروهُ وَتُوَقِّروهُ وَتُسَبِّحوهُ بُكرَةً وَأَصيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और उसकी मदद करो और उसका सम्मान करो और दिन के आरंभ एवं अंत में उसकी पवित्रता का गान करो।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke aey logon , tum Allah aur uske Rasool par imaan lao aur uska saath do, uski taazim-o-tauqeer(support him, and revere ) karo aur subah o shaam uski tasbeeh karte raho
Roman Urdu (Junagarhi)Takay (aey musalmano), tum Allah aur uss kay rasool per eman lao aur uss ki madad kero aur uss ka adab kero aur Allah ki paki biyan kero subah-o-shaam
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के ऐ लोगों, तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और उसका साथ दो, उसकी ताज़िम-ओ-तौकीर (उसका समर्थन करो, और सम्मान करो) करो और सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते रहो
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يُبايِعونَكَ إِنَّما يُبايِعونَ اللَّهَ يَدُ اللَّهِ فَوقَ أَيديهِم ۚ فَمَن نَكَثَ فَإِنَّما يَنكُثُ عَلىٰ نَفسِهِ ۖ وَمَن أَوفىٰ بِما عاهَدَ عَلَيهُ اللَّهَ فَسَيُؤتيهِ أَجرًا عَظيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वे लोग, जो आपसे बैअत करते हैं, वे असल में अल्लाह से बैअत करते हैं, अल्लाह का हाथ उनके हाथों के ऊपर है। फिर जिस किसी ने वचन तोड़ा, तो वह अपने आप ही पर वचन तोड़ता है। तथा जिसने, अल्लाह से जो वादा किया था, उसे पूरा किया, तो वह जल्द ही उसे बहुत बड़ा प्रतिफल देगा।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, jo log tumse bayt kar rahe thay(pledge allegiance to you) woh dar asal Allah se bayt kar rahey thay. Unke haath par Allah ka haath tha. Ab jo is ahad ko todeyga uski ahad shikani ka wabal uski apni hi zaat par hoga, aur jo us ahad ko wafa karega jo usne Allah se kiya hai, Allah ankqareeb usko bada ajar ata farmayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log tujh say bait kertay hain woh yaqeenan Allah say bait kertay hain, unkay hathon per Allah ka hath hai, to jo shaks ehad shikni keray woh apnay nafs per hi ehad shikni kerta hai aur jo shaks iss iqrar ko poora keray jo uss ney Allah kay sath kiya hai to ussay unqareeb Allah boht bara ajar deyga
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, जो लोग तुमसे बैत कर रहे थे। उनके हाथ पर अल्लाह का हाथ था. अब जो इस अहद को तोड़ेगा उसकी अहद शिकनी का वबल उसकी अपनी ही जात पर होगा, और जो हमें अहद को वफा करेगा जो उसने अल्लाह से किया है, अल्लाह अंककारिब उसको बड़ा अजर अता फरमाएगा
عَرَبِيسَيَقولُ لَكَ المُخَلَّفونَ مِنَ الأَعرابِ شَغَلَتنا أَموالُنا وَأَهلونا فَاستَغفِر لَنا ۚ يَقولونَ بِأَلسِنَتِهِم ما لَيسَ في قُلوبِهِم ۚ قُل فَمَن يَملِكُ لَكُم مِنَ اللَّهِ شَيئًا إِن أَرادَ بِكُم ضَرًّا أَو أَرادَ بِكُم نَفعًا ۚ بَل كانَ اللَّهُ بِما تَعمَلونَ خَبيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)शीघ्र ही देहातियों में से पीछे छोड़ दिए जाने वाले लोग आपसे कहेंगे : हमारे धन और हमारे घरवालों ने हमें व्यस्त रखा। अतः आप हमारे लिए क्षमा की प्रार्थना करें। वे अपनी ज़बानों से वह बात कहते हैं, जो उनके दिलों में नहीं है। आप कह दीजिए कि कौन है, जो अल्लाह के मुकाबले में तुम्हारे लिए किसी चीज़ का अधिकार रखता है, यदि वह तुम्हें कोई हानि पहुँचाना चाहे या तुम्हें कोई लाभ पहुँचाने का इरादा करे? बल्कि तुम जो कुछ करते हो, अल्लाह हमेशा से उसकी खबर रखता है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, badwi (bedouns) arabon mein se jo log pichey chodh diye gaye thay ab woh aa kar zaroor tumse kahenge ke humein apne amwal aur baal bacchon ki fikr ne mashgul kar rakkha tha. Aap hamare liye magfirat ki dua famayein. Yeh log apni zubaano se woh baatein kehte hain jo unke dilon mein nahin hoti. Unse kehna “acha, yahi baat hai to kaun tumhare maamle mein Allah ke faisle ko rok dene ka kuch bhi ikhtiyar rakhta hai agar woh tumhein koi nuksan pahunchana chahey ya nafa bakshna chahe? Tumhare aamal se to Allah hi ba-khabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Dehatiyon mein say jo log peechay chor diyey gaye thay woh abb tujh say kahen gay kay hum apnay maal aur baal bachon mein lagay reh gaye pus aap humaray liye maghfirat talab kijiye. Yeh log apni zabano say woh kehtay hain jo inn kay dilon mein nahi hai. Aap jawab day dijiye kay tumharay liye Allah ki taraf say kissi cheez ka bhi ikhtiyar kon rakhta hai agar woh tumhen nuksan phonchana chahye to ya tumhen koi nafa dena chahye to, bulkay tum jo kuch ker rahey ho uss say Allah khoob ba-khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, बदवी (बेडौंस) अरब में से जो लोग पिचे छोड़ दिए गए थे अब वो आ कर जरूर तुमसे कहेंगे के हमें अपने अमवाल और बाल बच्चों की फिक्र ने मशगुल कर रक्खा था. आप हमारे लिए मगफिरत की दुआ फ़मायें। ये लोग अपनी जुबान से वो बातें कहते हैं जो उनके दिलों में नहीं होती। उनसे कहना "अच्छा, यही बात है तो कौन तुम्हारे मामले में अल्लाह के फैसले को रोक दे का कुछ भी इख्तियार रखता है अगर वो तुम्हें कोई नुक्सान पहचानना चाहिए या नफा बक्शना चाहिए? तुम्हारे अमल से तो अल्लाह ही बा-खबर है
عَرَبِيبَل ظَنَنتُم أَن لَن يَنقَلِبَ الرَّسولُ وَالمُؤمِنونَ إِلىٰ أَهليهِم أَبَدًا وَزُيِّنَ ذٰلِكَ في قُلوبِكُم وَظَنَنتُم ظَنَّ السَّوءِ وَكُنتُم قَومًا بورًا
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि, तुमने सोचा था कि रसूल और ईमान वाले अपने परिजनों की ओर कभी वापस ही नहीं आएँगे, और यह बात तुम्हारे दिलों में सुंदर बना दी गई। और तुमने बहुत बुरा गुमान किया, और तुम नाश होने वाले लोग थे।
Roman Urdu (Maududi)(Magar asal baat woh nahin hai jo tum keh rahey ho) balke tumne yun samjha ke Rasool aur mominin apne ghar walon mein hargiz palat kar na aa sakenge aur yeh khayal tumhare dilon ko bahut bhala laga. Aur tumne bahut burey guman kiye aur tum sakht badh batin (immensely evil) log ho”
Roman Urdu (Junagarhi)(Nahi) bulkay tum ney to yeh guman ker rakha tha kay payghamber aur musalmano ka apnay gharon ki taraf lot aana qat’an na-mumkin hai aur yehi khayal tumharay dilon mein rach bus gaya tha aur tum ney bura guman ker rakha tha. Darasal tum log ho bhi halak honey walay
Devnagri Urdu (Maududi)(मगर असल बात वो नहीं है जो तुम कह रहे हो) बलके तुमने यूं समझा के रसूल और मोमिनीन अपने घर वालों में हरगिज पलट कर ना आ सकेंगे और ये ख्याल तुम्हारे दिलों को बहुत अच्छा लगेगा। और तुमने बहुत बुरे गुमान किये और तुम बहुत बुरे बातें (बेहद बुरे) लोग हो”
عَرَبِيوَمَن لَم يُؤمِن بِاللَّهِ وَرَسولِهِ فَإِنّا أَعتَدنا لِلكافِرينَ سَعيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जो व्यक्ति अल्लाह तथा उसके रसूल पर ईमान न लाया, तो निश्चय हमने इनकार करने वालों के लिए दहकती हुई आग तैयार कर रखी है।
Roman Urdu (Maududi)Allah aur uske Rasool par jo log imaan na rakhte hon aisey kaafiron ke liye humne bhadakti aag muhaiyya kar rakkhi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo shaks Allah per aur uss kay rasool per eman na laye to hum ney bhi aisay kafiron kay liye dehakti aag tayyar ker rakhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह और उसके रसूल पर जो लोग ईमान न रखते हों ऐसे काफिरों के लिए हमने नफरत आग मुहैय्या कर रखी है
عَرَبِيوَلِلَّهِ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ يَغفِرُ لِمَن يَشاءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشاءُ ۚ وَكانَ اللَّهُ غَفورًا رَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और आकाशों तथा धरती का राज्य अल्लाह ही के लिए है। वह जिसे चाहता है क्षमा कर देता है और जिसे चाहता है दंड देता है, और अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान है।
Roman Urdu (Maududi)Aasmano aur zameen ki badshahi ka maalik Allah hi hai. Jisey chahe maaf karey aur jisey chahe saza de. Aur woh Gafoor o Raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur zamin aur aasmano ki badshaat Allah hi kay liye hai jissay chahye bakhshayaur jissay chahye azab keray. Aur Allah bara bakhshney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)आसमानो और ज़मीन की बादशाही का मालिक अल्लाह हाय है। जिसे चाहे माफ करे और जिसे चाहे सजा दे। और वो गफूर ओ रहीम है
عَرَبِيسَيَقولُ المُخَلَّفونَ إِذَا انطَلَقتُم إِلىٰ مَغانِمَ لِتَأخُذوها ذَرونا نَتَّبِعكُم ۖ يُريدونَ أَن يُبَدِّلوا كَلامَ اللَّهِ ۚ قُل لَن تَتَّبِعونا كَذٰلِكُم قالَ اللَّهُ مِن قَبلُ ۖ فَسَيَقولونَ بَل تَحسُدونَنا ۚ بَل كانوا لا يَفقَهونَ إِلّا قَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)शीघ्र ही पीछे छोड़ दिए जाने वाले लोग कहेंगे, जब तुम कुछ ग़नीमतों को प्राप्त करने के लिए चलोगे : हमें छोड़ो कि हम तुम्हारे साथ चलें। वे चाहते हैं कि अल्लाह के वचन को बदल दें। आप कह दें : तुम हमारे साथ कभी नहीं जाओगे, इसी तरह अल्लाह ने पहले ही कह दिया है। तो वे अवश्य कहेंगे : बल्कि तुम हमसे जलते हो। बल्कि वे बहुत कम समझते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab tum maal-e-ganimat hasil karne ke liye jane lagoge to yeh pichey chodey jane waley log tumse zaroor kahenge ke humein bhi apne saath chalne do. Yeh chahte hain ke Allah ke farmaan ko badal dein. Inse saaf keh dena ke “Tum hargiz hamare saath nahin chal sakte. Allah pehle hi yeh farma chuka hai” yeh kahenge ke “nahin, balke tumlog humse hasad kar rahey ho” (halanke baat hasad ki nahin hai) balke yeh log sahih baat ko kam hi samajhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jabb tum ghanimaten lenay janay lago gay to jhat say yeh peechay choray huye log kehney lagen gay kay humen bhi apnay sath chalney ki ijazat dijiye’ woh chahtay hain kay Allah Taalaa kay kalam ko badal dein aap keh dijiye! Kay Allah Taalaa pehaly hi farma chuka hai kay tum hergiz humaray sath nahi chalo gay’ woh iss ka jawab dein gay (nahi nahi) bulkay tum hum say hasad kertay ho’ (asal baat yeh hai) kay woh log boht hi kum samjhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब तुम माल-ए-गनीमत हासिल करने के लिए जाओगे तो ये पीछे छोड़े जाने वाले लोग तुमसे जरूर कहेंगे के ये चाहते हैं के अल्लाह के फरमान को बदल दें। इनसे साफ कह देना के "तुम हरगिज हमारे साथ नहीं चल सकते। अल्लाह पहले ही ये फरमा चुका है" ये कहेंगे के "नहीं, बलके तुमलोग हमसे हसद कर रहे हो" (हलांके बात हसद की नहीं है) बल्के ये लोग सही बात को कम ही समझते हैं
عَرَبِيقُل لِلمُخَلَّفينَ مِنَ الأَعرابِ سَتُدعَونَ إِلىٰ قَومٍ أُولي بَأسٍ شَديدٍ تُقاتِلونَهُم أَو يُسلِمونَ ۖ فَإِن تُطيعوا يُؤتِكُمُ اللَّهُ أَجرًا حَسَنًا ۖ وَإِن تَتَوَلَّوا كَما تَوَلَّيتُم مِن قَبلُ يُعَذِّبكُم عَذابًا أَليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप पीछे रह जाने वाले बद्दुओं से कह दें : जल्द ही तुम एक भयंकर युद्ध करने वाली जाति (से युद्ध) की ओर बुलाए जाओगे। तुम उनसे युद्ध करोगे, या वे मुसलमान बन जाएँगे। फिर यदि तुम आज्ञा का पालन करोगे, तो अल्लाह तुम्हें उत्तम प्रतिफल प्रदान करेगा और यदि तुम फिर जाओगे, जैसे तुम इससे पहले फिर गए थे, तो वह तुम्हें दर्दनाक यातना देगा।
Roman Urdu (Maududi)In pichey chodey janey waley badwi(bedouin) arabon se kehna ke “ankareeb tumhein aisey logon se ladne ke liye bulaya jayega jo badey zoarawar hain. Tumko unse jung karni hogi ya woh mutii (surrender) ho jayenge. Us waqt agar tumne hukum e jihad ki itaat ki to Allah tumhein accha ajar dega. Aur agar tum phir usi tarah mooh moad gaye jis tarah pehle moad chuke ho to Allah tumko dardnaak saza dega
Roman Urdu (Junagarhi)Aap peechay choray huye badviyon say kehdo kay unqareeb tum aik sakht jangjoo qom ki taraf bulaye jao gay kay tum unn say laro gay ya woh musalman hojayen gay pus agar tum ita’at kero gay to Allah tumhen boht behtar badla dey ga aur agar tum ney mun pher liya jaisa kay iss say pehlay tum mun pher chukay ho to woh tumhen dard-naak azab dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)पिचे छोड़े जाने वाले बादवी (बेडौइन) अरब से कहना के "अंकरीब तुम्हें ऐसे लोगों से लड़ने के लिए बुलाया जाएगा जो बड़े जोरावर हैं। तुमको उनसे जंग करनी होगी या वो मुती (समर्पण) हो जाएंगे।" हमें वक्त है अगर तुमने हुकुम ए जिहाद की इताअत की तो अल्लाह तुम्हें अच्छा अजर देगा। और अगर तुम फिर उसी तरह मुंह मोड़ गए जिस तरह पहले मोड़ चुके हो तो अल्लाह तुम्हें दर्दनक सजा देगा
عَرَبِيلَيسَ عَلَى الأَعمىٰ حَرَجٌ وَلا عَلَى الأَعرَجِ حَرَجٌ وَلا عَلَى المَريضِ حَرَجٌ ۗ وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَرَسولَهُ يُدخِلهُ جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ ۖ وَمَن يَتَوَلَّ يُعَذِّبهُ عَذابًا أَليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)न अंधे पर कोई दोष है और न लंगड़े पर कोई दोष है और न रोगी पर कोई दोष है। तथा जो अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करेगा, वह उसे ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। और जो मुँह फेरेगा, वह उसे दर्दनाक यातना देगा।
Roman Urdu (Maududi)Agar andha aur langda aur mareez jihad ke liye na aaye to koi haraj nahin. Jo koi Allah aur uske Rasool ki itaat karega Allah usey un jannaton mein dakhil karega jinke nichey nehrein beh rahi hongi, aur jo mooh pherega usey woh dardnaak azaab dega”
Roman Urdu (Junagarhi)Andhay per koi harj nahi hai aur na langray per koi harj hai aur na beemar per koi harj hai’ jo koi Allah aur uss kay rasool ki farmabardaari keray ussay Allah aisi jannaton mein dakhil keray ga jiss kay (darkhton) talay nehren jaari hain aur jo min pher ley ussay dard-naak azab (ki saza) dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)अगर अंधा और लंगड़ा और मरिज जिहाद के लिए ना आए तो कोई हराज नहीं। जो कोई अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करेगा अल्लाह उसे उन जन्नतों में दाख़िल करेगा जिनके बारे में पहले से पता नहीं होगा, और जो मुँह फेरेगा उसे वो दर्दनक अज़ाब देगा”
عَرَبِي۞ لَقَد رَضِيَ اللَّهُ عَنِ المُؤمِنينَ إِذ يُبايِعونَكَ تَحتَ الشَّجَرَةِ فَعَلِمَ ما في قُلوبِهِم فَأَنزَلَ السَّكينَةَ عَلَيهِم وَأَثابَهُم فَتحًا قَريبًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ईमान वालों से प्रसन्न हो गया, जब वे वृक्ष के नीचे आपसे बैअत कर रहे थे। तो उसने जान लिया जो कुछ उनके दिलों में था। अतः उनपर शांति उतार दी और उन्हें बदले में एक निकट विजय प्रदान की।
Roman Urdu (Maududi)Allah momino se khush ho gaya jab woh darakht ke nichey tumse bayt (swore allegiance) kar rahey thay. Unke dilon ka haal usko maloom tha. Is liye usne unpar sakinat(inner peace) nazil farmayi, unko inaam mein qareebi fatah bakshi
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan Allah Taalaa momino say khush hogaya jabkay woh darakht talay tujh say bait ker rahey thay unn kay dilon mein jo tha ussay uss ney maloom kerliya aur unn per itminaan nazil farmaya aur unhen qareeb ki fatah inayat farmaee
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह मोमिनो से ख़ुश हो गया जब वो दरख्त के आला तुमसे बैत (वफ़ादारी की कसम) कर रहे थे। उनके दिलों का हाल उसको मालूम था। इस लिए उसने उन्पर सकीनात (आंतरिक शांति) नाज़िल फरमाई, उनको इनाम में करीबी फतह बख्शी
عَرَبِيوَمَغانِمَ كَثيرَةً يَأخُذونَها ۗ وَكانَ اللَّهُ عَزيزًا حَكيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा बहुत-से ग़नीमत के धन, जिन्हें वे प्राप्त करेंगे और अल्लाह हमेशा से सबपर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur bahut sa maal-e-ganimat unhein ata kar diya jisey woh (anqareeb) hasil karenge. Allah zabardast aur hakeem(wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur boht si ghanimaten jinhen woh hasil keren gay aur Allah ghalib hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)और बहुत सा माल-ए-गनीमत उन्हें अता कर दिया वो (अंकारीब) हासिल करेंगे हकीम (बुद्धिमान) है
عَرَبِيوَعَدَكُمُ اللَّهُ مَغانِمَ كَثيرَةً تَأخُذونَها فَعَجَّلَ لَكُم هٰذِهِ وَكَفَّ أَيدِيَ النّاسِ عَنكُم وَلِتَكونَ آيَةً لِلمُؤمِنينَ وَيَهدِيَكُم صِراطًا مُستَقيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने तुमसे बहुत-सी ग़नीमतों का वादा किया है, जिन्हें तुम प्राप्त करोगे। फिर उसने तुम्हें यह जल्दी प्रदान कर दी। तथा लोगों के हाथ तुमसे रोक दिए और ताकि यह ईमान वालों के लिए एक निशानी बन जाए और (ताकि) वह तुम्हें सीधी राह पर चलाए।
Roman Urdu (Maududi)Allah tumse ba-kasrat amwal-e-ganimat ka wada karta hai jinhein tum hasil karoge. Fauri taur par to yeh fatah usne tumhein ata kardi aur logon ke haath tumhare khilaf uthne se roak diye, taa-ke yeh momino ke liye ek nishani ban jaye aur Allah seedhe raaste ki taraf tumhein hidayat bakshe
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney tum say boht sari ghnimaton ka wada kiya hai jinhen tum hasil kero gay pus yeh to tumhen jaldi hi ata farma di aur logon kay hath tum say rok diye takay momino kay liye yeh aik nishani hojaye aur (takay) woh tumhen seedhi raah chalaye
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह तुमसे ब-कसरत अमल-ए-गनीमत का वादा करता है जिन्हें तुम हासिल करोगे। फौरी तौर पर तो ये फतह उसने तुम्हें अता करदी और लोगों के हाथ तुम्हारे खिलाफ उथने से रोक दिए, ता-के ये मोमिनो के लिए एक निशानी बन जाए और अल्लाह सीधे रास्ते की तरफ तुम्हें हिदायत बख्शे
عَرَبِيوَأُخرىٰ لَم تَقدِروا عَلَيها قَد أَحاطَ اللَّهُ بِها ۚ وَكانَ اللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा कई अन्य (ग़नीमतों का भी), जिन्हें तुम प्राप्त करने में सक्षम नहीं हुए। निश्चय अल्लाह ने उन्हें घेर रखा है। तथा अल्लाह हमेशा से हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Iske alawa dusre aur ganimaton ka bhi woh tumse waada karta hai jinpar tum abhi tak qadir nahin huey ho aur Allah ne inko gher rakkha hai, Allah har cheez par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tumhen aur (ghanimaten) bhi day jinn per abb tak tum ney qaboo nahi paya. Allah Taalaa unhen apnay qaboo mein rakha hai aur Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)इसके अलावा दूसरे और गनीमतों का भी वो तुमसे वादा करता है जिनपर तुम अभी तक कादिर नहीं हुए हो और अल्लाह ने इनको घेर रखा है, अल्लाह हर चीज पर कादिर है
عَرَبِيوَلَو قاتَلَكُمُ الَّذينَ كَفَروا لَوَلَّوُا الأَدبارَ ثُمَّ لا يَجِدونَ وَلِيًّا وَلا نَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि काफ़िर लोग तुमसे युद्ध करते, तो अवश्य पीठ फेर जाते, फिर न उन्हें कोई समर्थक मिलेगा और न कोई सहायक।
Roman Urdu (Maududi)Yeh kafir log agar is waqt tumse ladd gaye hotey to yaqeenan peeth pher jaatey aur koi haami o madadgaar na paate
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tum say kafir jang kertay to yaqeenan peeth dikha ker bhagtay phir na to koi kaarsaaz patay na madadgar
Devnagri Urdu (Maududi)ये काफिर लोग अगर इस वक्त तुमसे हैं लड़ गए होते तो यकीनन पीठ फेर जाते और कोई हमी ओ मददगार न पाते
عَرَبِيسُنَّةَ اللَّهِ الَّتي قَد خَلَت مِن قَبلُ ۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّةِ اللَّهِ تَبديلًا
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह के उस नियम के अनुसार जो पहले से चला आ रहा है, तथा आप अल्लाह के नियम में कदापि कोई बदलाव नहीं पाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Allah ki sunnat hai jo pehle se chali aa rahi hai aur tum Allah ki sunnat mein koi tabdili na paogey
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa kay qaeeday kay mutabiq jo pehlay say chala aaya hai tu kabhi bhi Allah kay qaeeday ko badalta hua na paye ga
Devnagri Urdu (Maududi)ये अल्लाह की सुन्नत है जो पहले से चली आ रही है और तुम अल्लाह की सुन्नत में कोई तबदीली न पाओगे
عَرَبِيوَهُوَ الَّذي كَفَّ أَيدِيَهُم عَنكُم وَأَيدِيَكُم عَنهُم بِبَطنِ مَكَّةَ مِن بَعدِ أَن أَظفَرَكُم عَلَيهِم ۚ وَكانَ اللَّهُ بِما تَعمَلونَ بَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वही है जिसने मक्का की वादी में उनके हाथों को तुमसे तथा तुम्हारे हाथों को उनसे रोक दिया, इसके बाद कि वह तुम्हें उनपर विजय दिला चुका था। और जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उसे हमेशा से खूब देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jisne Makkah ki wadi mein unke haath tumse aur tumhare haath unse roak diye, halanke woh unpar tumhein galaba ata kar chuka tha aur jo kuch tum kar rahey thay Allah usey dekh raha tha
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi hai jiss ney khaas makkah mein kafiron kay hathon ko tum say aur tumharay hathon ko unn say rok liya iss kay baad kay uss ney tumhen unn per ghalba dey diya tha aur tum jo kuch ker rahey ho Allah Taalaa ussay dekh raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिसने मक्का की वादी में उनके हाथ तुमने और तुम्हारे हाथ उन्हें रोक दिए, हलांके वो उन पर तुम्हारे साथ गलाबा अता कर चूका था और जो कुछ तुम कर रहे थे अल्लाह उसे देख रहा था
عَرَبِيهُمُ الَّذينَ كَفَروا وَصَدّوكُم عَنِ المَسجِدِ الحَرامِ وَالهَديَ مَعكوفًا أَن يَبلُغَ مَحِلَّهُ ۚ وَلَولا رِجالٌ مُؤمِنونَ وَنِساءٌ مُؤمِناتٌ لَم تَعلَموهُم أَن تَطَئوهُم فَتُصيبَكُم مِنهُم مَعَرَّةٌ بِغَيرِ عِلمٍ ۖ لِيُدخِلَ اللَّهُ في رَحمَتِهِ مَن يَشاءُ ۚ لَو تَزَيَّلوا لَعَذَّبنَا الَّذينَ كَفَروا مِنهُم عَذابًا أَليمًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ये वही लोग हैं, जिन्होंने कुफ़्र किया और तुम्हें मस्जिदे-ह़राम से रोका तथा क़ुर्बानी के बंधे हुए जानवरों को भी इससे रोका कि वे अपने ज़बह होने के स्थान पर पहुँचें। और यदि यह बात न होती कि तुम कुछ मुसलमान पुरुषों तथा कुछ मुसलमान स्त्रियों को, जिन्हें तुम नहीं जानते, रौंद डालोगे, तो तुमपर अनजाने में उनके कारण दोष आ जाएगा (तो उनपर आक्रमण कर दिया जाता); ताकि अल्लाह जिसे चाहे, अपनी दया में दाख़िल करे। यदि वे (मुसलमान एवं काफ़िर) अलग-अगल हो गए होते, तो हम अवश्य उनमें से कुफ़्र करने वालों को दर्दनाक यातना देते।
Roman Urdu (Maududi)Whai log to hain jinhon ne kufr kiya aur tumko masjid e haram se roka aur haadi(qurbani) ke Unton (camels) ko unki qurbani ki jagah na pahunchne diya. Agar (Makkah mein) aisey momin Mard o aurat maujood na hotay jinhein tum nahin jante, aur yeh khatra na hota ke nadanastagi mein tum unhein pamaal kardoge aur ussey tumpar haraf aayega (to jung na roaki jati. roaki woh is liye gayi) taa-ke Allah apni rehmat mein jisko chahe daakhil karle. Woh momin alag ho gaye hotey to (ehle Makkah mein se) jo kafir thay unko hum zaroor sakht saza dete
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi woh log hain jinhon ney kufur kiya aur tumko masjid-e-haram say roka aur qurbani kay liye moqoof janwar ko uss ki qurban gah mein phonchney say (roka) aur agar aisay (boht say) musalman mard aur (boht si) musalman aurten na hoti jinn ki tum ko khabar na thi yani unn kay piss janey ka ehtimal na hota jiss per unki waja say tum ko bhi bey khabri mein zararr phonchta (to tumhen larney ki ijazat dey di jati lekin aisa nahi kiya gaya) takay Allah Taalaa apni rehmat mein jiss ko chahye dakhil keray aur agar yeh alag alag hotay to inn mein say jo kafir thay hum unn ko dard-naak saza detay
Devnagri Urdu (Maududi)वहां लोग तो हैं जिन्होन ने कुफ्र किया और तुमको मस्जिद ए हरम से रोका और हादी (कुर्बानी) के ऊंटों (ऊंटों) को उनकी कुर्बानी की जगह न पहनने दिया। अगर (मक्का में) ऐसे मोमिन मर्द ओ औरत मौजुद न होते जिन्हे तुम नहीं जानते, और ये खतरा ना होता के नादानस्तागी में तुम उन्हें प्यार करोगे और उससे तुमपर हरफ आएगा (तो जंग ना रुकी जाती। रोकी वो इस लिए हो गई) ता-के अल्लाह अपनी रहमत मैं जिसको चाहे दाख़िल करले। वो मोमिन अलग हो गए होते तो (एहले मक्का में से) जो काफिर थे उनको हम जरूर सजा देते
عَرَبِيإِذ جَعَلَ الَّذينَ كَفَروا في قُلوبِهِمُ الحَمِيَّةَ حَمِيَّةَ الجاهِلِيَّةِ فَأَنزَلَ اللَّهُ سَكينَتَهُ عَلىٰ رَسولِهِ وَعَلَى المُؤمِنينَ وَأَلزَمَهُم كَلِمَةَ التَّقوىٰ وَكانوا أَحَقَّ بِها وَأَهلَها ۚ وَكانَ اللَّهُ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब काफ़िरों ने अपने दिलों में हठ कर लिया, जाहिलिय्यत (पूर्व-इस्लामी युग) का हठ, तो अल्लाह ने अपने रसूल पर और ईमान वालों पर अपनी शांति उतार दी और उन्हें परहेज़गारी की बात पर सुदृढ़ कर दिया। तथा वे उसके अधिक हक़दार और उसके योग्य थे। और अल्लाह सदैव हर चीज़ को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Yahi wajah hai ke) jab in kafiron ne apne dilon mei jaahilana hamiyat bitha li to Allah ne apne Rasool aur momino par sakinat nazil farmayi aur momino ko taqwa ki baat ka paband rakkha, ke wahi uske zyada haqdar aur uske ahel thay. Allah har cheez ka ilm rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay inn kafiron ney apnay dilon mein hamiyat ko jagah di aur hamiyat bhi jaheeliyat ki so Allah Taalaa ney apnay rasool per aur momineen per apni taraf say taskeen nazil farmaee aur Allah Taalaa ney musalmano ko takway ki baat per jamaye rakha aur woh iss kay ehal aur ziyadah mustahiq thay aur Allah Taalaa her cheez ko khoob jaanta hai
Devnagri Urdu (Maududi)(यही वजह है के) जब इन काफिरों ने अपने दिलों में जाहिलाना हमियत बिठा ली तो अल्लाह ने अपने रसूल और मोमिनो पर सकीनत नाजिल फरमायी और मोमिनो को तक्वा की बात का पाबंद रक्खा, के वही उसके ज्यादा हकदार और उसके एहेल थे। अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है
عَرَبِيلَقَد صَدَقَ اللَّهُ رَسولَهُ الرُّؤيا بِالحَقِّ ۖ لَتَدخُلُنَّ المَسجِدَ الحَرامَ إِن شاءَ اللَّهُ آمِنينَ مُحَلِّقينَ رُءوسَكُم وَمُقَصِّرينَ لا تَخافونَ ۖ فَعَلِمَ ما لَم تَعلَموا فَجَعَلَ مِن دونِ ذٰلِكَ فَتحًا قَريبًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ने अपने रसूल को हक़ के साथ सच्चा सपना दिखाया कि यदि अल्लाह ने चाहा तो तुम अवश्य मस्जिदे-ह़राम में प्रवेश करोगे, सुरक्षित होकर, अपने सिर मुँडाते तथा बाल कतरवाते हुए, तुम्हें किसी प्रकार का भय नहीं होगा। तो उसने वह बात जान ली जो तुमने नहीं जानी। इसिलए उससे पहले एक निकट विजय रख दी।
Roman Urdu (Maududi)Fil waqeh Allah ne apne Rasool ko saccha khwab dikhaya tha jo theek theek haqq ke mutabiq tha. Insha Allah tum zaroor masjid e haram mein purey aman ke saath dakhil hongey, apne sar mundwa-ogey (shave) aur baal tarashwa-ogey aur tumhein koi khauff na hoga. Woh us baat ko janta tha jisey tum na jante thay is liye woh khwab pura honay se pehle usne yeh qareebi fatah tumko ata farmadi
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan Allah Taalaa ney apnay rasool ko khuwab sacha dikhaya kay inshaAllah tum yaqeenan pooray aman-o-aman kay sath masjid-e-haram mein dakhil hogay sir kay baal mundwatay huye aur sir kay baal katarwatay huye (chain kay sath) nidar hoker woh inn umoor ko jaanta hai jinhen tum nahi jantay pus uss ney iss say pehlay aik nazdeek ki fatah tumhen mayassar ki
Devnagri Urdu (Maududi)फिल वाक़े अल्लाह ने अपने रसूल को सच्चा ख्वाब दिखाया था जो ठीक ठीक हक़ के मुताबिक़ था। इंशा अल्लाह तुम ज़रूर मस्जिद ए हरम में पूरे अमन के साथ दख़िल होंगे, अपने सर मुंडवा-ओगे (दाढ़ी) और बाल तरसवा-ओगे और तुम्हें कोई ख़ौफ़ ना होगा। वो उस बात को जानता था जैसे तुम ना जानते थे इस लिए वो ख्वाब पूरा होने से पहले उसने ये करीबी फतह तुमको अता फरमादी
عَرَبِيهُوَ الَّذي أَرسَلَ رَسولَهُ بِالهُدىٰ وَدينِ الحَقِّ لِيُظهِرَهُ عَلَى الدّينِ كُلِّهِ ۚ وَكَفىٰ بِاللَّهِ شَهيدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वही है जिसने अपने रसूल को मार्गदर्शन तथा सत्य धर्म (इस्लाम) के साथ भेजा, ताकि उसे प्रत्येक धर्म पर प्रभुत्व प्रदान कर दे। और गवाह के तौर पर अल्लाह काफ़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi hai jisne apne Rasool ko hidayat aur deen e haqq ke saath bheja hai taa-ke usko purey jins-e-din par gaalib karde (prevail over every religion) aur is haqeeqat par Allah ki gawahi kaafi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi hai jiss ney apnay rasool ko hidayat aur deen-e-haq kay sath bheja takay issay her deen per ghalib keray aur Allah Taalaa kafi hai gawahee denay wala
Devnagri Urdu (Maududi)वाह अल्लाह ही है जिसने अपने रसूल को हिदायत और दीन ए हक़ के साथ भेजा है ता-के उसको पूरे जिन्स-ए-दीन पर गालिब करदे (हर धर्म पर हावी) और हकीकत पर अल्लाह की गवाही काफी है
عَرَبِيمُحَمَّدٌ رَسولُ اللَّهِ ۚ وَالَّذينَ مَعَهُ أَشِدّاءُ عَلَى الكُفّارِ رُحَماءُ بَينَهُم ۖ تَراهُم رُكَّعًا سُجَّدًا يَبتَغونَ فَضلًا مِنَ اللَّهِ وَرِضوانًا ۖ سيماهُم في وُجوهِهِم مِن أَثَرِ السُّجودِ ۚ ذٰلِكَ مَثَلُهُم فِي التَّوراةِ ۚ وَمَثَلُهُم فِي الإِنجيلِ كَزَرعٍ أَخرَجَ شَطأَهُ فَآزَرَهُ فَاستَغلَظَ فَاستَوىٰ عَلىٰ سوقِهِ يُعجِبُ الزُّرّاعَ لِيَغيظَ بِهِمُ الكُفّارَ ۗ وَعَدَ اللَّهُ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ مِنهُم مَغفِرَةً وَأَجرًا عَظيمًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं और वे लोग जो उनके साथ हैं, काफ़िरों पर बहुत सख़्त हैं, आपस में बहुत दयालु हैं। तुम उन्हें रुकू' करते हुए, सजदा करते हुए, अल्लाह का अनुग्रह और (उसकी) प्रसन्नता तलाश करते हुए देखोगे। उनकी निशानी उनके चेहरों पर है, सजदों के चिह्न से। यह उनका विवरण तौरात में है। तथा इंजील में उनका विवरण उस खेती की तरह है, जिसने अपना अंकुर निकाला, फिर उसे प्रबल किया, फिर वह मोटा हो गया, फिर वह अपने तने पर सीधा खड़ा हो गया। वह किसानों को खुश करता है, ताकि उनके द्वारा काफिरों को गुस्सा दिलाए। अल्लाह ने उनमें से उन लोगों से, जो ईमान लाए तथा उन्होंने अच्छे कर्म किए, बड़ी क्षमा तथा बहुत बड़े प्रतिफल का वादा किया है।
Roman Urdu (Maududi)Muhammad Allah ke Rasool hain, aur jo log unke saath hain woh kuffar par sakht aur aapas mein raheem hain. Tum jab dekhoge unhein ruku va sujood aur Allah ke fazl aur uski khushnudi ki talab mein mashgul paogey. Sujood ke asarat unke chehron par maujood hain jinse woh alag pehchane jatey hain. Yeh hai unki sifat Taurat mein. Aur Injeel mein unki misal yun di gayi hai ke goya ek kheti hai jisne pehle kopal nikali, phir us ko taqviyat di, phir woh gadhrayi, phir apne tanay (stem) par khadi ho gayi. Kaasht (sowers) karne walon ko woh khush karti hai taa-ke kuffar inke phalne phoolne par jalein (enraged). Is giroh ke log jo imaan laye hain aur jinhon ne neik amal kiye hain Allah ne unse magfirat aur bade ajar ka waada farmaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Muhammad (PBUH) Allah kay rasool hain aur jo log unn kay sath hain kafiron per sakht hain aapas mein reham dil hain tu enhen dekhay ga kay rukoo aur sajday ker rahey hain Allah Taalaa kay fazal aur raza mandi ki justujoo mein hain inn ka nishan inn kay chehron per sajdon kay asar say hai inn ki yeh hi misal toraat mein hai aur inn ki misal injeel mein hai misil uss kheti kay jiss ney apna ankhwa nikala phir ussay mazboot kiya aur woh mota hogaya phir apnay tanay per seedha khara hogaya aur kisano ko khush kernay laga takay inn ki waja say kafiron ko chiraye inn eman walon aur nek aemaal walon say Allah ney bakhsish ka aur boht baray sawab ka wada kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं, और जो लोग उनके साथ हैं वो कुफ्फार पर सच और आपस में रहीम हैं। तुम जब देखोगे उन्हें रुकु व सुजूद और अल्लाह के फजल और उसकी खुशनुदी की तालाब में मशगुल पाओगे। सुजूद के असर उनके चेहरों पर मौजुद हैं जिनसे वो अलग पहचाने जाते हैं। ये है उनकी सिफत तौरात में। और इंजील में उनकी मिसाल यूं दी गई है के गोया एक खेती है जिसने पहले कोपल निकाली, फिर हमें तक़्वियत दी, फिर वो गढ़राई, फिर अपने तनय (तने) पर खड़ी हो गई। काश्त (बोने वालों) करने वालों को वो ख़ुश करती है ता-के कुफ़्फ़ार इनके फ़लने फूलने पर जलें। क्या गिरोह के लोग जो ईमान लाए हैं और जिन्होन ने नीक अमल किए हैं अल्लाह ने उन्हें मगफिरत और बड़े अजर का वादा फरमाया है
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Surah 48: Al-Fath (The Victory)

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Surah 48: Al-Fath (The Victory)

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Surah 48: Al-Fath (The Victory)

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Surah 48: Al-Fath (The Victory)

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Surah 48: Al-Fath (The Victory)

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Surah 49: Al-Hujurat (The Apartments)

Medinan🕐 Revelation #106📜 18 Verses🕮 Juz 1
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Surah 49: Al-Hujurat (The Apartments)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تُقَدِّموا بَينَ يَدَيِ اللَّهِ وَرَسولِهِ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَميعٌ عَليمٌ
हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! अल्लाह और उसके रसूल से आगे न बढ़ो और अल्लाह का डर रखो। निश्चय ही अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo imaan laye ho, Allah aur uske Rasool ke aagey pesh qadmi na karo aur Allah se daro, Allah sab kuch sunne aur jaanne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walay logo! Allah aur uss kay rasool say aagay na barho aur Allah say dartay raha kero. Yaqeenan Allah Taalaa sunnay wala, jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह और उसके रसूल के आगे पेश कादमी न करो और अल्लाह से डरो, अल्लाह सब कुछ सुनने और जानने वाला है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَرفَعوا أَصواتَكُم فَوقَ صَوتِ النَّبِيِّ وَلا تَجهَروا لَهُ بِالقَولِ كَجَهرِ بَعضِكُم لِبَعضٍ أَن تَحبَطَ أَعمالُكُم وَأَنتُم لا تَشعُرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! अपनी आवाज़ें, नबी की आवाज़ से ऊँची न करो और न आपसे ऊँची आवाज़ में बात करो, जैसे तुम एक-दूसरे से ऊँची आवाज़ में बात करते हो। ऐसा न हो कि तुम्हारे कर्म व्यर्थ हो जाएँ और तुम्हें पता (भी) न हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo imaan laaye ho, apni aawaz Nabi ki awaaz se buland na karo, aur na Nabi ke saath unchi aawaz se baat kiya karo jis tarah tum aapas mein ek dusre se karte ho, kahin aisa na ho ke tumhara kiya karaya sab gharat ho jaye( deeds become vain) aur tumhein khabar bhi na ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Apni aawazen nabi ki awaz say uper na kero aur na unn say unchi aawaz say baat kero jesay aapas mein aik doosray say kertay ho, kahin (aisa na ho kay) tumharay aemaal ikaarat jayen aur tumhen khabar bhi na ho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपनी आवाज नबी की आवाज से बुलंद न करो, और न नबी के साथ ऊंची आवाज से बात किया करो जिस तरह तुम आपस में एक दूसरे से करते हो, कहीं ऐसा न हो के तुम्हारा किया किया सब खराब हो जाए (कर्म व्यर्थ हो जाएं) और तुम खबर भी ना हो
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يَغُضّونَ أَصواتَهُم عِندَ رَسولِ اللَّهِ أُولٰئِكَ الَّذينَ امتَحَنَ اللَّهُ قُلوبَهُم لِلتَّقوىٰ ۚ لَهُم مَغفِرَةٌ وَأَجرٌ عَظيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग अल्लाह के रसूल के पास अपनी आवाज़ें धीमी रखते हैं, यही लोग हैं, जिनके दिलों को अल्लाह ने परहेज़गारी के लिए जाँच लिया है। उनके लिए बड़ी क्षमा तथा महान प्रतिफल है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log Rasool-e-khuda ke huzoor baat karte huey apni aawaz pastt rakhte hain woh dar haqeeqat wahi log hai jinke dilon ko Allah ne takwa ke liye jaanch liya hai. Unke liye magfirat hai aur ajr-e- azeem
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jo log Rasool Allah (PBUH) kay huzoor mein apni aawazen past rakhtay hain yehi woh log hain jinn kay dilon ko Allah ney perhezgari kay liye jaanch liya hai. Inn kay liye maghfirat hai aur bara sawab hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग रसूल-ए-खुदा के हुजूर बात करते हैं अपनी आवाज पिछले रखते हैं वो डर हकीकत वही लोग हैं जिनके दिलों को अल्लाह ने तकवा के लिए जांच लिया है। उनके लिए मगफिरत है और अजर-ए-अज़ीम
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يُنادونَكَ مِن وَراءِ الحُجُراتِ أَكثَرُهُم لا يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग आपको कमरों के बाहर से पुकारते हैं, उनमें से अधिकांश नहीं समझते।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, jo log tumhein hujron(apartments) ke bahar se pukarte hain unmein se aksar be-aqal hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log aap ko hujron kay peechay say pukaray hain inn mein say aksar (bilkul) bey aqal hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, जो लोग तुम्हें हुज्रों (अपार्टमेंट) के बाहर से पुकारते हैं उनमें से अक्सर बे-अकाल हैं
عَرَبِيوَلَو أَنَّهُم صَبَروا حَتّىٰ تَخرُجَ إِلَيهِم لَكانَ خَيرًا لَهُم ۚ وَاللَّهُ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वे धैर्य रखते, यहाँ तक कि आप खुद ही उनकी ओर निकलकर आते, तो निश्चय यह उनके लिए बेहतर होता। तथा अल्लाह बड़ा क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Agar woh tumhare baramad honay tak sabr karte to unhi ke liye behtar tha, Allah darguzar karne wala aur Raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar yeh log yahan tak sabar kertay kay aap khud say nikal ker inn kay pass ajatay to yehi inn kay liye behtar hota, aur Allah ghafoor-o-raheem hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर वो तुम्हारे बारामद होने तक सब्र करते तो उनके लिए बेहतर था, अल्लाह दरगुज़र करें वाला और रहीम है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِن جاءَكُم فاسِقٌ بِنَبَإٍ فَتَبَيَّنوا أَن تُصيبوا قَومًا بِجَهالَةٍ فَتُصبِحوا عَلىٰ ما فَعَلتُم نادِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! यदि कोई दुराचारी (अवज्ञाकारी) तुम्हारे पास कोई सूचना लेकर आए, तो उसकी अच्छी तरह जाँच-पड़ताल कर लिया करो। ऐसा न हो कि तुम किसी समुदाय को अज्ञानता के कारण हानि पहुँचा दो, फिर अपने किए पर पछताओ।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo imaan laaye ho, agar koi faasiq tumhare paas koi khabar lekar aaye to tehqeek kar liya karo, kahin aisa na ho ke tum kisi giroh ko nadanishta(unwittingly) nuksaan pahuncha baitho aur phir apne kiye par pashemaan ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aey musalmano! Agar tumhen koi fasiq khabar dey to tum uss ko achi tarah tehqeeq kerlia kero aisa na ho kay nadaani mein kissi qom ko eza phoncha do phir apnay kiye per pasheymani uthao
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, अगर कोई फासिक तुम्हारे पास कोई खबर लेकर आए तो तहकीक कर लिया करो, कहीं ऐसा न हो के तुम किसी गिरो ​​को नादानिश्ता (अनजाने में) नुक्सान पाहुंचा बैठो और फिर अपने किए पर पशेमां हो
عَرَبِيوَاعلَموا أَنَّ فيكُم رَسولَ اللَّهِ ۚ لَو يُطيعُكُم في كَثيرٍ مِنَ الأَمرِ لَعَنِتُّم وَلٰكِنَّ اللَّهَ حَبَّبَ إِلَيكُمُ الإيمانَ وَزَيَّنَهُ في قُلوبِكُم وَكَرَّهَ إِلَيكُمُ الكُفرَ وَالفُسوقَ وَالعِصيانَ ۚ أُولٰئِكَ هُمُ الرّاشِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जान लो कि तुम्हारे बीच अल्लाह के रसूल मौजूद हैं। यदि वह बहुत-से विषयों में तुम्हारी बात मान लें, तो तुम कठिनाई में पड़ जाओ। परंतु अल्लाह ने तुम्हारे लिए ईमान को प्रिय बना दिया और उसे तुम्हारे दिलों में सुशोभित कर दिया तथा तुम्हारे लिए कुफ़्र और पाप और अवज्ञा को अप्रिय बना दिया, यही लोग हिदायत पर चलने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Khoob jaan rakkho ke tumhare darmiyaan Allah ka Rasool maujood hai. Agar woh bahut se maamelaat mein tumhari baat maan liya kare, to tum khud hi mushkilaat mein mubtala ho jao. Magar Allah ne tumko imaan ki muhabbat di aur usko tumhare liye dil pasand bana diya, aur kufr-o-fusuk aur nafarmani se tumko mutanaffir(abhorrent) kar diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jaan rakho kay tum mein Allah kay rasool mojood hain agar woh tumhara kaha kertay rahey boht umoor mein, to tum mushkil mein par jao lekin Allah Taalaa ney eman ko tumharay liye mehboob bana diya hai aur issay tumharay dilon mein zeenat dey rakhi hai aur kufur ko aur gunah ko aur nafarmaani ko tumhari nighaon mein napasandeedah bana diya hai, yehi log raah yaafta hain
Devnagri Urdu (Maududi)ख़ूब जान रक्खो के तुम्हारे दरमियान अल्लाह का रसूल मौजुद है। अगर वो बहुत से मामले में तुम्हारी बात मान लिया करे, तो तुम खुद ही मुश्किलात में मुबतला हो जाओ। मगर अल्लाह ने तुमको ईमान की मुहब्बत दी और उसको तुम्हारे लिए दिल पसंद बना दिया, और कुफ्र-ओ-फुसुक और नफरमानी से तुमको मुतनफिर (घृणित) कर दिया
عَرَبِيفَضلًا مِنَ اللَّهِ وَنِعمَةً ۚ وَاللَّهُ عَليمٌ حَكيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह की कृपा और अनुग्रह के कारण और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aisey hi log Allah ke fazal o ehsaan se raast-ro hain aur Allah Aleem-o-Hakeem(All-Knowing, All-Wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah kay ehsan-o-inam say aur Allah dana aur bahikmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसे ही लोग अल्लाह के फजल ओ एहसान से रस्त-रो हैं और अल्लाह आलिम-ओ-हकीम (सर्वज्ञ, ऑल-वाइज़) है
عَرَبِيوَإِن طائِفَتانِ مِنَ المُؤمِنينَ اقتَتَلوا فَأَصلِحوا بَينَهُما ۖ فَإِن بَغَت إِحداهُما عَلَى الأُخرىٰ فَقاتِلُوا الَّتي تَبغي حَتّىٰ تَفيءَ إِلىٰ أَمرِ اللَّهِ ۚ فَإِن فاءَت فَأَصلِحوا بَينَهُما بِالعَدلِ وَأَقسِطوا ۖ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ المُقسِطينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि ईमान वालों के दो गिरोह आपस में लड़ पड़ें, तो उनके बीच सुलह करा दो। फिर यदि दोनों में से एक, दूसरे पर अत्याचार करे, तो उस गिरोह से लड़ो, जो अत्याचार करता है, यहाँ तक कि वह अल्लाह के आदेश की ओर पलट आए। फिर यदि वह पलट आए, तो उनके बीच न्याय के साथ सुलह करा दो, तथा न्याय करो। निःसंदेह अल्लाह न्याय करने वालों से प्रेम करता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar ehle imaan mein se do giroh aapas mein ladh jayein, to unke darmiyan sulah (peace) karao. Phir agar unmein se ek giroh dusre giroh se zyadati karey, to zyadati karne wale se ladho yahan tak ke woh Allah ke hukum ki taraf palat aaye. Phir agar woh palat aaye, to unke darmiyan adal ke saath sulah kara do, aur insaaf karo ke Allah insaaf karne walon ko pasand karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar musalmanon ki do jamaten aapas mein larr paren to unn mein mail milaap kerwa diya kero. Phir agar unn dono mein say aik jamat doosri jamat per ziyadti keray to tum (sab) uss giroh say jo ziyadti kerta hai laro.yahan tak kay woh Allah kay hukum ki taraf lot aaye, agar lot aaye to phir insaf kay sath sulah kerado aur adal kero be-shak Allah Taalaa insaf kerney walon say mohabbat kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर एहले ईमान में से दो गिरो ​​आपस में लड़ जाएं, तो उनके दरमियान सुलह (शांति) कराओ। फिर अगर उनमें से एक गिरो ​​दूसरे गिरो ​​से ज्यादा करे, तो ज्यादा करने वाले से लड़ो यहां तक ​​के वो अल्लाह के हुकुम की तरफ पलट आए। फिर अगर वो पलट आए, तो उनके दरमियान अदल के साथ सुलह करा दो, और इन्साफ करो के अल्लाह इन्साफ करने वालों को पसंद करता है
عَرَبِيإِنَّمَا المُؤمِنونَ إِخوَةٌ فَأَصلِحوا بَينَ أَخَوَيكُم ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ لَعَلَّكُم تُرحَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह ईमान वाले तो भाई ही हैं। अतः अपने दो भाइयों के बीच सुलह करा दो। तथा अल्लाह से डरो, ताकि तुम पर दया की जाए।
Roman Urdu (Maududi)Momin to ek dusre ke bhai hain, lihaza apne bhaiyon ke darmiyaan taaluqat ko durust karo aur Allah se daro, umeed hai ke tumpar reham kiya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)(Yaad rakho) saray musalman bhai bhai hain pus apnay do bhaiyon mein milap kera diya kero, aur Allah say dartay raho takay tum per reham kiya jaye
Devnagri Urdu (Maududi)मोमिन तो एक दूसरे के भाई हैं, लिहाजा अपने भाइयों के दरमियान तालुकात को दुरुस्त करो और अल्लाह से डरो, उम्मीद है के तुमपर रहम किया जाएगा
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا يَسخَر قَومٌ مِن قَومٍ عَسىٰ أَن يَكونوا خَيرًا مِنهُم وَلا نِساءٌ مِن نِساءٍ عَسىٰ أَن يَكُنَّ خَيرًا مِنهُنَّ ۖ وَلا تَلمِزوا أَنفُسَكُم وَلا تَنابَزوا بِالأَلقابِ ۖ بِئسَ الِاسمُ الفُسوقُ بَعدَ الإيمانِ ۚ وَمَن لَم يَتُب فَأُولٰئِكَ هُمُ الظّالِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! एक जाति दूसरी जाति का उपहास न करे, हो सकता है कि वे उनसे बेहतर हों। और न कोई स्त्रियाँ अन्य स्त्रियों की हँसी उड़ाएँ, हो सकता है कि वे उनसे अच्छी हों। और न अपनों पर दोष लगाओ, और न एक-दूसरे को बुरे नामों से पुकारो। ईमान के बाद अवज्ञाकारी होना बुरा नाम है। और जिसने तौबा न की, तो वही लोग अत्याचारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo imaan laye ho, na mard dusre mardon ka mazaak udayein, ho sakta hai ke woh unse behtar hon, aur na auratein dusri auraton ka mazaak udayein, ho sakta hai ke woh unse behtar hon. Aapas mein ek dusre par taan na karo, aur na ek dusre ko burey alaqab (titles) se yaad karo. Imaan lane ke baad fisq mein naam paida karna bahut buri baat hai. Jo log is rawish se baaz na aayein wahi zalim hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Mard doosray mardon ka mazak na urayen mumkin hai kay yeh unn say behtar ho aur na orten orton ka mazak urayen mumkin hai kay yeh unn say behtar hon aur aapas mein aik doosray ko aib na lagao aur na kissi ko buray laqab do eman kay baad fisq bura naam hai aur jo toba na keren wohi log zalim hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ना मर्द दूसरे मर्दों का मजाक उड़ाएं, हो सकता है के वो उनसे बेहतर हों, और ना औरतें दूसरी औरतों का मजाक उड़ाएं, हो सकता है के वो उनसे बेहतर हों। आपस में एक दूसरे पर तान ना करो, और ना एक दूसरे को बुरे अलकाब (शीर्षक) से याद करो। ईमान लेन के बाद फिस्क में नाम पेदा करना बहुत बुरी बात है। जो लोग इस रवीश से बाज़ न आएं वही जालिम हैं
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا اجتَنِبوا كَثيرًا مِنَ الظَّنِّ إِنَّ بَعضَ الظَّنِّ إِثمٌ ۖ وَلا تَجَسَّسوا وَلا يَغتَب بَعضُكُم بَعضًا ۚ أَيُحِبُّ أَحَدُكُم أَن يَأكُلَ لَحمَ أَخيهِ مَيتًا فَكَرِهتُموهُ ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ تَوّابٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! बहुत-से गुमानों से बचो। निश्चय ही कुछ गुमान पाप हैं। और जासूसी न करो, और न तुममें से कोई दूसरे की ग़ीबत करे। क्या तुममें से कोई पसंद करता है कि अपने भाई का मांस खाए, जबकि वह मरा हुआ हो? सो तुम उसे नापसंद करते हो। तथा अल्लाह से डरो। निश्चय अल्लाह बहुत तौबा क़बूल करने वाला, अत्यंत दयालु है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo imaan laaye ho, bahut gumaan (suspicion)karne se parheiz karo ke baaz gumaan (suspicion) gunaah hote hain. Tajassus (jasusi) na karo aur tum mein se koi kisi ki geebat na karey. kya tumhare andar koi aisa hai jo apne marey(dead) huey bhai ka gosht khana pasand karega? Dekho, tum khud is se gheen khate ho. Allah se daro, Allah bada tawbah qabool karne wala aur Raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Boht badgumaaniyon say bacho yaqeen mano kay baaz badgumaniyan gunah hain, aur bhed na tatola kero aur na tum mein say koi kissi ki gheebat keray. Kiya tum mein say koi bhi apnay murdah bhai ka gosht khana pasand kerta ha? Tum ko iss say ghinn aayegi, aur Allah say dartay raho, be-shak Allah toba qabool kernay wala meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, बहुत गुमान (शक) करने से परहेज करो के बाज़ गुमान (शक) गुनाह होते हैं। तजस्सस (जसुसी) ना करो और तुम में से कोई किसी की गीबत ना करे। क्या तुम्हारे अन्दर कोई ऐसा है जो अपने मरे (मृत) हुए भाई का गोश्त खाना पसंद करेगा? देखो, तुम खुद इस से घी खाते हो। अल्लाह से डरो, अल्लाह बड़ा तौबा कबूल करने वाला और रहीम है
عَرَبِييا أَيُّهَا النّاسُ إِنّا خَلَقناكُم مِن ذَكَرٍ وَأُنثىٰ وَجَعَلناكُم شُعوبًا وَقَبائِلَ لِتَعارَفوا ۚ إِنَّ أَكرَمَكُم عِندَ اللَّهِ أَتقاكُم ۚ إِنَّ اللَّهَ عَليمٌ خَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ मनुष्यो! हमने तुम्हें एक नर और एक मादा से पैदा किया तथा हमने तुम्हें जातियों और क़बीलों में कर दिए, ताकि तुम एक-दूसरे को पहचानो। निःसंदेह अल्लाह के निकट तुममें सबसे अधिक सम्मान वाला वह है, जो तुममें सबसे अधिक तक़्वा वाला है। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूरी ख़बर रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Logon, humne tumko ek Mard aur ek Aurat se paida kiya aur phir tumhari qaumein aur biradariyan bana di taa-ke tum ek dusre ko pehchano. Dar haqeeqat Allah ke nazdeek tum mein sab se zyada izzat wala woh hai jo tumhare andar sab se zyada parheizgaar hai. Yaqeenan Allah sab kuch jaan-ne wala aur baakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey logo! Hum ney tum sabb ko aik (hi) mard-o-orat say peda kiya hai aur iss liye kay tum aapas mein aik doosray ko pehchano kunbay aur qabeelay bana diye hain Allah kay nazdeek tum sabb mein say ba-izzat woh hai jo sabb say ziyadah darney wala hai yaqeen mano kay Allah dana aur ba-khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगन, हमने तुमको एक मर्द और एक औरत से प्यार किया और फिर तुम्हारी कौमें और बिरादरी बना दी ता-के तुम एक दूसरे को पहचानो। दर हक़ीक़त अल्लाह के नज़दीक तुम में सब से ज़्यादा इज़्ज़त वाला वो है जो तुम्हारे अंदर सब से ज़्यादा ज़रूरी है। यकीनन अल्लाह सब कुछ जान-ने वाला और बाख़बर है
عَرَبِي۞ قالَتِ الأَعرابُ آمَنّا ۖ قُل لَم تُؤمِنوا وَلٰكِن قولوا أَسلَمنا وَلَمّا يَدخُلِ الإيمانُ في قُلوبِكُم ۖ وَإِن تُطيعُوا اللَّهَ وَرَسولَهُ لا يَلِتكُم مِن أَعمالِكُم شَيئًا ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)(कुछ) बद्दुओं ने कहा : हम ईमान ले आए। आप कह दें : तुम ईमान नहीं लाए। परंतु यह कहो कि हम इस्लाम लाए (आज्ञाकारी हो गए)। और अभी तक ईमान तुम्हारे दिलों में प्रवेश नहीं किया। और यदि तुम अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करोगे, तो वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों में से कुछ भी कमी नहीं करेगा। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh badwi (Bedouins) kehte hain ke “hum imaan laye” insey kaho: “tum imaan nahin laye, balke yun kaho ke hum muti (submissive) ho gaye” imaan abhi tumhare dilon mein daakhil nahin hua hai. Agar tum Allah aur uske Rasool ki farmabardari ikhtiyar karlo to woh tumhare amal ke ajr mein koi kami na karega.Yakeenan Allah bada darguzar karne wala aur Raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Dehaati log kehtay hain kay hum eman laye. Aap keh dijiye kay darhaqeeqat tum eman nahi laye lekin tum yun kaho kay hum islam laye (mukhalifat chor ker mutee hogaye) halankay abhi tak tumharay dilon mein eman dakhil hi nahi hua. Tum agar Allah ki aur uss kay rasool ki farmabardaari kerney lago gay to Allah tumharay aemaal mein say kuch bhi kum na keray ga. Be-shak Allah bakhshney wala meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये बदवी (बेडौइन्स) कहते हैं के "हम ईमान लाए" इनसे कहो: "तुम ईमान नहीं लाए, बलके यूं कहो के हम मुती (विनम्र) हो गए" ईमान अभी तुम्हारे दिलों में दाख़िल नहीं हुआ है। अगर तुम अल्लाह और उसके रसूल की फरमाबरदारी इख्तियार करो तो वो तुम्हारे अमल के अजर में कोई कमी ना करेगा। यकीनन अल्लाह बड़ा दरगुजर करने वाला और रहीम है
عَرَبِيإِنَّمَا المُؤمِنونَ الَّذينَ آمَنوا بِاللَّهِ وَرَسولِهِ ثُمَّ لَم يَرتابوا وَجاهَدوا بِأَموالِهِم وَأَنفُسِهِم في سَبيلِ اللَّهِ ۚ أُولٰئِكَ هُمُ الصّادِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मोमिन तो वही लोग हैं, जो अल्लाह तथा उसके रसूल पर ईमान लाए, फिर उन्होंने संदेह नहीं किया तथा उन्होंने अपने धनों और अपने प्राणों से अल्लाह की राह में जिहाद किया। यही लोग सच्चे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat mein to momin woh hain jo Allah aur uske Rasool par imaan laye phir unhon ne koi shakk na kiya aur apne jaano aur maalon se Allah ki raah mein jihad kiya, wahi sacchey log hain
Roman Urdu (Junagarhi)Momin to woh hain jo Allah per aur uss kay rasool per (pakka) eman layen phir shak-o-shuba na keren aur apnay malon say aur apni jano say Allah ki raah mein jihad kertay rahen, (apnay dawaay-e-emaan mein) yehi sachay aur raast go hain
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत में तो मोमिन वो हैं जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए फिर उन्होन ने कोई शक्क ना किया और अपने जानो और मालों से अल्लाह की राह में जिहाद किया, वही सच्चे लोग हैं
عَرَبِيقُل أَتُعَلِّمونَ اللَّهَ بِدينِكُم وَاللَّهُ يَعلَمُ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۚ وَاللَّهُ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : क्या तुम अल्लाह को अपने धर्म से अवगत करा रहे हो? हालाँकि अल्लाह जानता है, जो कुछ आकाशों में है और जो धरती में है। तथा अल्लाह प्रत्येक वस्तु को ख़ूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, In [mudaiyaan e imaan (pretenders to faith)] se kaho, kya tum Allah ko apne deen ki ittilah (apprising) de rahey ho? Halanke Allah zameen aur Aasmano ki har cheez ko jaanta hai aur woh har shay ka ilm rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kehdijiye! Kay kiya tum Allah Taalaa ko apni deen dari say aagah ker rahey ho, Allah her uss cheez say jo aasmano mein aur zamin mein hai bakhoobi aagah hai aur Allah her cheez ka jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, इन [मुदाययान ए ईमान (आस्था का ढोंग)] से कहो, क्या तुम अल्लाह को अपने दीन की इत्तिला दे रहे हो? हालंके अल्लाह ज़मीन और आसमान की हर चीज़ को जानता है और वो हर शाय का इल्म रखता है
عَرَبِييَمُنّونَ عَلَيكَ أَن أَسلَموا ۖ قُل لا تَمُنّوا عَلَيَّ إِسلامَكُم ۖ بَلِ اللَّهُ يَمُنُّ عَلَيكُم أَن هَداكُم لِلإيمانِ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे आपपर एहसान जताते हैं कि वे इस्लाम ले आए। आप कह दें : मुझपर अपने इस्लाम का एहसान न जताओ। बल्कि अल्लाह तुमपर एहसान रखता है कि उसने तुम्हें ईमान की तरफ़ हिदायत दी, यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log tumpar ehsan jatate hain ke inhon ne Islam qabool karliya. Inse kaho apne Islam ka ehsan mujhpar na rakkho , balke Allah tumpar apna ehsan rakhta hai ke usne tumhein imaan ki hidayat di agar tum waqai apne daawa-e-imaan mein sacchey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Apnay musalman honay ka aap per ehsan jatatay hain. Aap kehdijiye kay apnay musalman honay ka ehsan mujh per na rakho bulkay dar-asal Allah ka tum per ehsan hai kay uss ney tumhen eman ki hidayat ki agar tum raast go ho
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग तुमपर एहसान जताते हैं के इन्हों ने इस्लाम क़बूल करलिया। इनसे कहो अपने इस्लाम का एहसान मुझपर न रक्खो, बलके अल्लाह तुम अपना एहसान रखता है के उसने तुम्हें ईमान की हिदायत दी अगर तुम अपने दावा-ए-ईमान में सच्चे हो
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ يَعلَمُ غَيبَ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ وَاللَّهُ بَصيرٌ بِما تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह आकाशों तथा धरती की छिपी चीज़ों को जानता है। और अल्लाह ख़ूब देखने वाला है जो कुछ तुम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Allah zameen aur aasmano ki har poshida(hidden) cheez ka ilm rakhta hai aur jo kuch tum karte ho woh sab uski nigaah mein hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeen mano kay aasmano aur zamin ki posheedah baaten Allah khoob jaanta hai aut jo kuch tum ker rahey ho ussay Allah khoob dekh raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ज़मीन और आसमान की हर पोशीदा (छिपी हुई) चीज़ का इल्म रखा है और जो कुछ तुम करते हो वो सब उसकी निगाह में है
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Surah 49: Al-Hujurat (The Apartments)

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Surah 49: Al-Hujurat (The Apartments)

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Surah 49: Al-Hujurat (The Apartments)

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Surah 49: Al-Hujurat (The Apartments)

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Surah 49: Al-Hujurat (The Apartments)

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Surah 50: Qaf (Qaf)

Meccan🕐 Revelation #34📜 45 Verses🕮 Juz 1
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Surah 50: Qaf (Qaf)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيق ۚ وَالقُرآنِ المَجيدِ
हिन्दी (Al-Omari)क़ाफ़। क़सम है सम्मानित क़ुरआन की!
Roman Urdu (Maududi)Qaaf, Kasam hai quran-e-majeed ki
Roman Urdu (Junagarhi)Qaaf bohat bari shan walay iss quran ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)क़ाफ़, कसम है कुरान-ए-मजीद की
عَرَبِيبَل عَجِبوا أَن جاءَهُم مُنذِرٌ مِنهُم فَقالَ الكافِرونَ هٰذا شَيءٌ عَجيبٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि उन्हें आश्चर्य हुआ कि उनके पास उन्हीं में से एक डराने वाला आया। तो काफ़िरों ने कहा : यह बड़ी विचित्र बात है।
Roman Urdu (Maududi)Balke in logon ko taajub is baat par hua ke ek khabardar karne wala khud inhi mein se inke paas aa gaya, phir munkireen kehne lagey “yeh to ajeeb baat hai
Roman Urdu (Junagarhi)bulkay enhen tajjub maloom hua kay inn kay pass inhi mein say aik aagah kerney wala aaya to kafiron ney kaha kay yeh aik ajeeb cheez hai
Devnagri Urdu (Maududi)बल्के इन लोगों को ताज्जुब इस बात पर हुआ के एक खबरदार करने वाला खुद में से इनके पास आ गया, फिर मुनकिरीन कहने लगे "ये तो अजीब बात है
عَرَبِيأَإِذا مِتنا وَكُنّا تُرابًا ۖ ذٰلِكَ رَجعٌ بَعيدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या जब हम मर गए और मिट्टी हो गए (तो दोबारा उठाए जाएँगे)? यह पलटना तो बहुत दूर की बात है।
Roman Urdu (Maududi)Kya jab hum mar jayenge aur khaak (mitti) ho jayenge (to dobara uthaye jayenge)? Yeh wapasi to aqal se baeed hai”
Roman Urdu (Junagarhi)kiya jabb hum mar ker mitti hojayen gay phir yeh wapsi door (az aqal) hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या जब हम मर जाएंगे और खाक (मिट्टी) हो जाएंगे (तो दोबारा उठेंगे)? ये वापसी तो अक्ल से खराब है"
عَرَبِيقَد عَلِمنا ما تَنقُصُ الأَرضُ مِنهُم ۖ وَعِندَنا كِتابٌ حَفيظٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय हमें मालूम है जो कुछ धरती उनमें से कम करती है और हमारे पास एक पुस्तक है, जो ख़ूब सुरक्षित रखने वाली है।
Roman Urdu (Maududi)Zameen inke jism mein se jo kuch khati hai woh sab hamare ilm mein hai aur hamare paas ek kitaab hai jismein sab kuch mehfooz hai
Roman Urdu (Junagarhi)Zamin jo kuch inn mein say ghatati hai who humen maloom hai aur humaray pass sabb yaad rakhnay waali kitab hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन इनके जिस्म में से जो कुछ खाती है वो सब हमारे इल्म में है और हमारे पास एक किताब है जिसमें सब कुछ महफूज है
عَرَبِيبَل كَذَّبوا بِالحَقِّ لَمّا جاءَهُم فَهُم في أَمرٍ مَريجٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि उनहोंने सत्य को झुठला दिया, जब वह उनके पास आया। अतः वे एक उलझे हुए मामले में हैं।
Roman Urdu (Maududi)Balke in logon ne to jis waqt haqq inke paas aaya usi waqt usey saaf jhutla diya. Isi wajah se ab yeh uljhan mein padey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Buklay inhon nay sachi baat ko jhoot kaha hai jabkay who inn kay pass phonch chuki pus who aik uljhao mein par gaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)बल्के इन लोगों ने तो जिसका वक्त हक इनके पास आया उसका वक्त उसे साफ झूठला दिया। इसी वजह से अब ये उलझन में पड़े हुए हैं
عَرَبِيأَفَلَم يَنظُروا إِلَى السَّماءِ فَوقَهُم كَيفَ بَنَيناها وَزَيَّنّاها وَما لَها مِن فُروجٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो क्या उन्होंने अपने ऊपर आकाश की ओर नहीं देखा कि हमने उसे कैसे बनाया और उसे सजाया और उसमें कोई दरार नहीं है?
Roman Urdu (Maududi)Accha, to kya inhon ne kabhi apne upar aasmaan ki taraf nahin dekha? Kis tarah humne usey banaya aur aarasta (zeenat/ beautify) kiya, aur usmein kahin koi rakhna(cracks/rifts) nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inhon nay aasman ko apnay uper nahi dekha? Kay hum ney ussay kiss tarah banaya aur zeenat di hai iss mein koi shigaf nahi
Devnagri Urdu (Maududi)अच्छा, तो क्या इन्होनें ने कभी अपने ऊपर आसमान की तरफ नहीं देखा? किस तरह हमने उसे बनाया और अरस्ता (ज़ीनत/सुंदरीकरण) किया, और उसमें कहीं कोई रखना (दरारें/दरारें) नहीं हैं
عَرَبِيوَالأَرضَ مَدَدناها وَأَلقَينا فيها رَواسِيَ وَأَنبَتنا فيها مِن كُلِّ زَوجٍ بَهيجٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने धरती को फैलाया और उसमें पर्वत डाल दिए और उसमें हर प्रकार की सुंदर चीज़ें उगाईं।
Roman Urdu (Maududi)Aur zameen ko humne bichaya aur ismein pahadh jamaye aur uske andar har taraah ki khush manzar nabataat uga di
Roman Urdu (Junagarhi)Aur zamin ko hum ney bicha diya hai aur iss mein hum ney pahaar daal diye hain aur iss mein hum ney qisam qisam ki khushnuma cheezen uga di hain
Devnagri Urdu (Maududi)और ज़मीन को हमने बिछाया और इसमें पहाड़ जमाये और उसके अंदर हर तरह की खुश मंज़र नबातात उगा दी
عَرَبِيتَبصِرَةً وَذِكرىٰ لِكُلِّ عَبدٍ مُنيبٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हर उस बंदे को दिखाने और याद दिलाने के लिए, जो (अपने पालनहार की ओर) लौटने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh saari cheezein aankhein kholne wali aur sabaq dene wali hain har us bandey ke liye jo (haqq ki taraf) rujoo karne wala ho
Roman Urdu (Junagarhi)Takay her rujoo kernay walay bandey kay liye beenaee aur daanaaee ka zariya ho
Devnagri Urdu (Maududi)ये सारी चीज़ें आंखें खोलने वाली और सबक देने वाली हैं हर हमें बंद करने के लिए जो (हक़ की तरफ) रूजू करने वाला हो
عَرَبِيوَنَزَّلنا مِنَ السَّماءِ ماءً مُبارَكًا فَأَنبَتنا بِهِ جَنّاتٍ وَحَبَّ الحَصيدِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने आकाश से बहुत बरकत वाला पानी उतारा, फिर हमने उसके द्वारा बाग़ तथा काटी जाने वाली (खेती) के दाने उगाए।
Roman Urdu (Maududi)Aur aasmaan se humne barkat wala paani naazil kiya,phir ussey baagh aur fasal ke galley
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney aasman say babarkat pani barsaya aur iss say baghaat aur katney walay khet k ghallay peda kiye
Devnagri Urdu (Maududi)और आसमान से हमने बरकत वाला पानी नाज़िल किया, फिर उसे बाग और फसल के गले
عَرَبِيوَالنَّخلَ باسِقاتٍ لَها طَلعٌ نَضيدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा खजूरों के लंबे-लंबे ऊँचे पेड़, जिनके गुच्छे परत दर परत हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur buland o baala khajoor ke darakht paida kardiye jinpar phalon(fruits) se ladey khoshey teh-bar-teh lagte (fruit arranged in layers) hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur khujuron kay buland-o-bala darakht jinkay khoshay teh ba teh hain
Devnagri Urdu (Maududi)और बुलंद ओ बाला खजूर के दरख्त पेडा करदीए जिनपर फलन (फल) से लड़े खोशे तेह-बार-तेह लगते हैं (फलों को परतों में व्यवस्थित किया जाता है) हैं
عَرَبِيرِزقًا لِلعِبادِ ۖ وَأَحيَينا بِهِ بَلدَةً مَيتًا ۚ كَذٰلِكَ الخُروجُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बंदों को रोज़ी देने के लिए। तथा हमने उसके साथ एक मुर्दा शहर को जीवित कर दिया। इसी प्रकार निकलना है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh intizaam hai bandon ko rizq dene ka is pani se hum ek murda zameen ko zindagi baksh dete hain (marey huey Insano ka zameen se) nikalne bhi isi tarah hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Bandon ki rozi kay liye aur hum ney pani say murda shehar ko zinda ker diya. Issi tarah (qabron say) nikalna hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये इंतिजाम है बंदों को रिज्क देने का इस पानी से हम एक मुर्दा जमीन को जिंदगी बख्श देते हैं (मारे) हुए इंसानों का ज़मीन से) निकलने भी इसी तरह होगा
عَرَبِيكَذَّبَت قَبلَهُم قَومُ نوحٍ وَأَصحابُ الرَّسِّ وَثَمودُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)इनसे पहले नूह की जाति ने और कुएँ वालों ने और समूद ने झुठलाया।
Roman Urdu (Maududi)In se pehle Nooh ki qaum, aur ashab-ur-rass ,aur Samood
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say pehlay Nooh ki qom ney aur rass walon ney aur samood ney
Devnagri Urdu (Maududi)इन से पहले नूह की क़ौम, और अशब-उर-रस, और समूद
عَرَبِيوَعادٌ وَفِرعَونُ وَإِخوانُ لوطٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा आद और फ़िरऔन ने और लूत के भाइयों ने।
Roman Urdu (Maududi)Aur Aad, aur Firoun , aur Lut ke bhai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aad ney aur firaon ney aur biradran-e-loot ney
Devnagri Urdu (Maududi)और आद, और फिरौन, और लूट के भाई
عَرَبِيوَأَصحابُ الأَيكَةِ وَقَومُ تُبَّعٍ ۚ كُلٌّ كَذَّبَ الرُّسُلَ فَحَقَّ وَعيدِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा ''ऐका'' के वासियों ने और ''तुब्बा'' की जाति ने। प्रत्येक ने रसूलों को झुठलाया। तो उनपर मेरे अज़ाब का वादा साबित हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Aur aykah( dwellers in the wood) wale, aur tubba ki qaum ke log bhi jhutla chuke hain har ek ne Rasoolon ko jhutlaya , aur aakhir e kaar meri waeed(threat) un par chaspan ho gayi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aeeka walon ney aur tubba ki qom ney bhi takzeeb ki thi.sab ney payghambron ko jhutlaya pus mera wada-e-azab inn per sadiq aagaya
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐकाह (जंगल में रहने वाले) वाले, और तुब्बा की क़ौम के लोग भी झुटला चुके हैं हर एक ने रसूलों को झुटलाया, और आखिर ए कार मेरी वेद (धमकी) उन पर चस्पां हो गई
عَرَبِيأَفَعَيينا بِالخَلقِ الأَوَّلِ ۚ بَل هُم في لَبسٍ مِن خَلقٍ جَديدٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो क्या हम प्रथम बार पैदा करके थक गए हैं? बल्कि वे नए पैदा किए जाने के बारे में संदेह में पड़े हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya pehli baar ki takhleeq(creation) se hum aajiz (worn out) thay? Magar ek nayi takhleeq ki taraf se yeh log shakk mein padey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya hum pehli baar kay peda kerney say thak gaye? Bulkay yeh log naee pedaeesh ki taraf say shak mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या पहली बार की तहलीक (सृजन) से हम आजिज (घिसे-पिटे) थे? मगर एक नई तख़लीक की तरफ से ये लोग शक्क में पड़े हुए हैं
عَرَبِيوَلَقَد خَلَقنَا الإِنسانَ وَنَعلَمُ ما تُوَسوِسُ بِهِ نَفسُهُ ۖ وَنَحنُ أَقرَبُ إِلَيهِ مِن حَبلِ الوَريدِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने मनुष्य को पैदा किया और हम जानते हैं जो कुछ विचार उसके मन में आता है और हम उसके गले की उस नस से भी अधिक क़रीब हैं जो दिल से जुड़ी होती है।
Roman Urdu (Maududi)Humne Insaan ko paida kiya hai aur uske dil mein ubharne wale waswason tak ko hum jaante hain. Hum to us ki rag-e-gardan(jugular vein) se bhi zyada us se qareeb hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney insan ko peda kiya hai aur iss kay dil mein jo khayalat uthtay hain unn say hum waqif hain aur hum uss ki rag-e-jaan say bhi ziyadah uss say qareeb hain
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इंसान को भुगतान किया है और उसके दिल में उबरने वाले वतन तक को हम जानते हैं। हम तो हमारे राग-ए-गर्दन (गले की नस) से भी ज्यादा हमसे करीब हैं
عَرَبِيإِذ يَتَلَقَّى المُتَلَقِّيانِ عَنِ اليَمينِ وَعَنِ الشِّمالِ قَعيدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब दो लेने वाले (उसके हर कथन और कर्म को) लेते हैं, जो दाहिनी और बाईं ओर बैठे हैं।
Roman Urdu (Maududi)(aur hamare is barah-e-raast ilm ke alawa)do kaatib(scribes) uske dayein aur bayein baithay(farishtey) har cheez sabt(likh) kar rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din do lenay walay ja letay hain aik dayen taraf aur aik bayen taraf betha hua hai
Devnagri Urdu (Maududi)(और हमारे इस बारह-ए-रास्त इल्म के अलावा) दो कातिब (शास्त्री) उसके दिन और बायें बैठे (फरिश्ते) हर चीज सब्त (लिख) कर रहे हैं
عَرَبِيما يَلفِظُ مِن قَولٍ إِلّا لَدَيهِ رَقيبٌ عَتيدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह कोई बात नहीं बोलता, परंतु उसके पास एक निरीक्षक तैयार रहता है।
Roman Urdu (Maududi)Koi lafz us ki zubaan se nahin nikalta jisey mehfooz karne ke liye ek hazir baash nigraan maujood na ho
Roman Urdu (Junagarhi)(Insan) mun say koi lafz nikal nahi pata magar kay usskay pass nigheban tayyar hai
Devnagri Urdu (Maududi)कोई लफ्ज हमसे कि जुबान से नहीं निकलता जिसे महफूज करने के लिए एक हाजिर बाश निगरान मौजूद ना हो
عَرَبِيوَجاءَت سَكرَةُ المَوتِ بِالحَقِّ ۖ ذٰلِكَ ما كُنتَ مِنهُ تَحيدُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और मौत की बेहोशी सत्य के साथ आ गई। यही है वह जिससे तू भागता था।
Roman Urdu (Maududi)Phir dekho, woh maut ki jaan-kani (agony of death) haqq lekar aa pahunchi, yeh wahi cheez hai jisse tu bhaaghta tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mot ki beyhoshi haq ley ker aa phonchi yehi hai jiss say tu bidakta phirta tha
Devnagri Urdu (Maududi)फिर देखो, वो मौत की जान-कानी (मौत की पीड़ा) हक लेकर आ पाहुंची, ये वही चीज है जिसमें तू भागता था
عَرَبِيوَنُفِخَ فِي الصّورِ ۚ ذٰلِكَ يَومُ الوَعيدِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और सूर में फूँक दिया गया। यही यातना के वादे का दिन है।
Roman Urdu (Maududi)Aur phir sur (trumpet) phoonka gaya, yeh hai woh din jiska tujhe khauf dilaya jata tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur soor phonk diya jayega.Wada-e-azab ka din yehi hai
Devnagri Urdu (Maududi)और फिर सुर (तुरही) फूँका गया, ये है वो दिन जिसका तुझे खौफ़ दिला दिया जाता था
عَرَبِيوَجاءَت كُلُّ نَفسٍ مَعَها سائِقٌ وَشَهيدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा प्रत्येक व्यक्ति इस दशा में आएगा कि उसके साथ एक हाँकने वाला और एक गवाह होगा।
Roman Urdu (Maududi)Har shaks is haal mein aa gaya ke uske saath ek haank(drive) kar lane wala hai aur ek gawahi dene wala
Roman Urdu (Junagarhi)Aur her shaks iss tarah aayega kay uss kay sath aik lanay wala hoga aur aik gawahee denay wala
Devnagri Urdu (Maududi)हर शक्स इस हाल में आ गया के उसके साथ एक हांक(ड्राइव) कर लेन वाला है और एक गवाही देने वाला
عَرَبِيلَقَد كُنتَ في غَفلَةٍ مِن هٰذا فَكَشَفنا عَنكَ غِطاءَكَ فَبَصَرُكَ اليَومَ حَديدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तू इससे बड़ी ग़फ़लत में था। सो हमने तुझसे तेरा परदा हटा दिया। तो तेरी दृष्टि आज बड़ी पैनी है।
Roman Urdu (Maududi)Is cheez ki taraf se tu gaflat mein tha, humne woh purda hata diya jo tere aagey pada hua tha aur aaj teri nigaah khoob tez hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tu iss say ghaflat mein tha lekin hum ney teray samney say pardah hata diya pus aaj teri nigah bohat tez hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या चीज़ की तरफ से तू गफ़लत में था, हमने वो पर्दा हटा दिया जो तेरे आगे पड़ा हुआ था और आज तेरी निगाह खूब तेज़ है
عَرَبِيوَقالَ قَرينُهُ هٰذا ما لَدَيَّ عَتيدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उसका साथी कहेगा : यह है (उसके कर्मों का विवरण) जो मेरे पास तैयार है।
Roman Urdu (Maududi)Uske saathi ne arz kiya ye jo meri supurdgi mein tha haazir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ka humnasheen (farishta) kahega yeh hazir hai jo kay meray pass tha
Devnagri Urdu (Maududi)उसके साथी ने अर्ज़ किया ये जो मेरी सुपुर्दगी में था हाज़िर है
عَرَبِيأَلقِيا في جَهَنَّمَ كُلَّ كَفّارٍ عَنيدٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तुम दोनों नरक में फेंक दो हर बड़े कृतघ्न को, जो (सत्य से) बहुत दुराग्रह रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Hukum diya gaya “phenk do jahannum mein har katte (hardened, stubborn) kaafir ko jo haqq se inaad rakhta tha
Roman Urdu (Junagarhi)Daal do jahannum mein her kafir sirkash ko
Devnagri Urdu (Maududi)हुकुम दिया गया “फेंक दो जहन्नुम में हर कट्टे (कठोर, जिद्दी) काफिर को जो हक से इनाद रखता था
عَرَبِيمَنّاعٍ لِلخَيرِ مُعتَدٍ مُريبٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो भलाई को बहुत रोकने वाला, सीमा को लाँघने वाला, संदेह करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Khair ko roakne wala aur hadd se tajauz (exceeds the limits) karne wala tha, shakk mein pada hua tha
Roman Urdu (Junagarhi)Jo nek kaam say rikney wala aur hadd say guzar janay wala aur shak kerney wala tha
Devnagri Urdu (Maududi)खैर को रुकने वाला और हद से तजौज करने वाला था, शक्क में पड़ा हुआ था
عَرَبِيالَّذي جَعَلَ مَعَ اللَّهِ إِلٰهًا آخَرَ فَأَلقِياهُ فِي العَذابِ الشَّديدِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिसने अल्लाह के साथ दूसरा पूज्य बना लिया। अतः तुम दोनों उसे कठोर यातना में डाल दो।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah ke saath kisi dusre ko khuda banaye baitha tha. Daal do usey sakht azaab mein”
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ney Allah k sath doosra mabood bana liye tha pus iss say sakht azab mein daal do
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह के साथ किसी दूसरे को खुदा बना बैठा था। दाल दो उसे अकेले अज़ाब में”
عَرَبِي۞ قالَ قَرينُهُ رَبَّنا ما أَطغَيتُهُ وَلٰكِن كانَ في ضَلالٍ بَعيدٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसका साथी (शैतान) कहेगा : ऐ हमारे पालनहार! मैंने उसे सरकश नहीं बनाया। परंतु वह खुद ही दूर की गुमराही में था।
Roman Urdu (Maududi)Uske saathi ne arz kiya “khuda-wanda, maine isko sarkash nahin banaya balke yeh khud hi parle darje ki gumrahi mein pada hua tha”
Roman Urdu (Junagarhi)Iss ka humnasheen (shetan) kahega aey humaray rab! Mein ney issay gumrah nahi kiya tha bulkay yeh khud hi door daraz ki gumrahi mein tha
Devnagri Urdu (Maududi)उसके साथी ने अर्ज़ किया “खुदा-वंदा, मैंने इसको व्यंग्य नहीं बनाया बलके ये खुद ही पारले दर्जे की गुमराही में पड़ा हुआ था”
عَرَبِيقالَ لا تَختَصِموا لَدَيَّ وَقَد قَدَّمتُ إِلَيكُم بِالوَعيدِ
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हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) फरमाया : मेरे पास झगड़ा मत करो। हालाँकि मैंने तो तुम्हारी ओर चेतावनी का संदेश पहले ही भेज दिया था।
Roman Urdu (Maududi)Jawab mein irshad hua “mere huzoor jhagda na karo, main tumko pehle hi anjaam-e-badd se khabardar kar chuka tha
Roman Urdu (Junagarhi)Haq taalaa farmaye ga bus meray samney jhagray ki baat mat kero mein to pehlay hi tumhari taraf waeed (wada-e-azab) bhej chuka tha
Devnagri Urdu (Maududi)जवाब में इरशाद हुआ “मेरे हुजूर झगड़ा ना करो, मैं तुमको पहले ही अंजाम-ए-बद्द से ख़बरदार कर चूका था
عَرَبِيما يُبَدَّلُ القَولُ لَدَيَّ وَما أَنا بِظَلّامٍ لِلعَبيدِ
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हिन्दी (Al-Omari)मेरे यहाँ बात बदली नहीं जाती तथा मैं बंदों पर कदापि कोई अत्याचार करने वाला नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Mere haan (yahan) baat palti nahin jaati aur main apne bandon par zulm todhne wala nahin hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Meray haan baat badalti nahi aur na hi mein apnay bandon per zara bhi zulm kerney wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)मेरे हाँ (यहाँ) बात पलटी नहीं जाती और मैं अपने बंदों पर ज़ुल्म तोड़ने वाला नहीं हूं"
عَرَبِييَومَ نَقولُ لِجَهَنَّمَ هَلِ امتَلَأتِ وَتَقولُ هَل مِن مَزيدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन हम जहन्नम से कहेंगे : क्या तू भर गया? और वह कहेगा : क्या कुछ और है?
Roman Urdu (Maududi)Woh din jabke hum jahannum se puchenge kya tu bhar gayi? Aur woh kahegi kya aur kuch hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din hum dozakh say poochen gay kiya tu bhar chuki? Woh jawab dey di kiya kuch aur ziyadah bhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो दिन जबके हम जहन्नुम से पूछेंगे क्या तू भर गई? और वो कहेगी क्या और कुछ है
عَرَبِيوَأُزلِفَتِ الجَنَّةُ لِلمُتَّقينَ غَيرَ بَعيدٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जन्नत परहेज़गारों के लिए निकट कर दी जाएगी, जो कुछ दूर न होगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur Jannat muttaqin ke qareeb le aayi jayegi, kuch bhi dur na hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jannat perhezgaron kay liye bilkul qareeb kerdi jayegi zara bhi door na hogi
Devnagri Urdu (Maududi)और जन्नत मुत्तक़िन के करीब ले आएगी, कुछ भी डर ना होगी
عَرَبِيهٰذا ما توعَدونَ لِكُلِّ أَوّابٍ حَفيظٍ
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हिन्दी (Al-Omari)यही है जिसका तुमसे वादा किया जाता था, हर उस व्यक्ति के लिए जो (अपने रब की ओर) बहुत लौटने वाला, (उसके आदेशों की) रक्षा करने वाला हो।
Roman Urdu (Maududi)Irshad hoga “yeh hai woh cheez jiska tumse waada kiya jata tha, har us shaks ke liye jo bahut rujoo karne wala aur badi nigehdaasht (watchful of his conduct) karne wala tha
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hai jiss ka tum say wada kiya jata tha her uss shaks kay liye jo rujoo kerney wala aur pabandi kerney wala ho
Devnagri Urdu (Maududi)इरशाद होगा "ये है वो चीज़ जिसका तुमसे वादा किया जाता था, हर उस शक्स के लिए जो बहुत रूजू का है"रोने वाला और बड़ी निगहदाश्त (उसके आचरण पर नजर रखने वाला) करने वाला था
عَرَبِيمَن خَشِيَ الرَّحمٰنَ بِالغَيبِ وَجاءَ بِقَلبٍ مُنيبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जो 'रहमान' (अत्यंत दयावान्) से बिन देखे डरा तथा (उसकी ओर बहुत ज़्यादा) लौटने वाला दिल लेकर आया।
Roman Urdu (Maududi)Jo bay dekhe Rehman se darta tha, aur jo dil-e-girwida liye huey aaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo rehman ka ghaeebana khof rakhta ho aur tawajja wala dil laya ho
Devnagri Urdu (Maududi)जो बे देखे रहमान से डरता था, और जो दिल-ए-गिरविदा के लिए आए हैं
عَرَبِيادخُلوها بِسَلامٍ ۖ ذٰلِكَ يَومُ الخُلودِ
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हिन्दी (Al-Omari)इसमें शांति के साथ दाख़िल हो जाओ। यही हमेशा रहने का दिन है।
Roman Urdu (Maududi)Dakhil ho jao Jannat mein salamati ke saath” woh din hayat-e-abadi (eternity) ka din hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Tum iss jannat mein salamti kay sath dakhil hojao. Yeh hamesha rehney ka din hai
Devnagri Urdu (Maududi)दखिल हो जाओ जन्नत में सलामती के साथ'' वो दिन हयात-ए-आबादी (अनंत काल) का दिन होगा
عَرَبِيلَهُم ما يَشاءونَ فيها وَلَدَينا مَزيدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उनके लिए उसमें वह सब कुछ होगा, जो वे चाहेंगे। तथा हमारे पास और भी बहुत कुछ है।
Roman Urdu (Maududi)Wahan unke liye woh sab kuch hoga jo woh chahenge, aur hamare paas issey zyada bhi bahut kuch unke liye hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh wahan jo chahyen unhen milay ga (bulkay) humaray pass aur bhi ziyadah hai
Devnagri Urdu (Maududi)वहां उनके लिए वो सब कुछ होगा जो वो चाहेंगे, और हमारे पास इसे ज्यादा भी बहुत कुछ उनके लिए है
عَرَبِيوَكَم أَهلَكنا قَبلَهُم مِن قَرنٍ هُم أَشَدُّ مِنهُم بَطشًا فَنَقَّبوا فِي البِلادِ هَل مِن مَحيصٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने इनसे पहले बहुत-से समुदायों को विनष्ट कर दिया, जो शक्ति में इनसे कहीं बढ़-चढ़कर थे। तो उन्होंने नगरों को छान मारा, क्या भागने की कोई जहग है?
Roman Urdu (Maududi)Hum unse pehle bahut si qaumon ko halaak kar chuke hain jo insey bahut zyada taaqatwar thi aur duniya ke mulkon ko unhon ne chaan maara tha phir kya woh koi jaaye panaah paa sakey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn say pehlay bhi hum boht si ummaton ko halak ker chukay hain jo inn say taqat mein bohat ziyadah thi woh shehron mein dhondtay hi reh gaye, kay koi bhagney ka thikana hai
Devnagri Urdu (Maududi)हम उनसे पहले बहुत सी कौमों को हलाक कर चुके हैं जो इनसे बहुत ज्यादा ताकतवार थी और दुनिया के मुल्कों को अनहोन ने चैन मारा था फिर क्या वो कोई जाए पनाह पा सके
عَرَبِيإِنَّ في ذٰلِكَ لَذِكرىٰ لِمَن كانَ لَهُ قَلبٌ أَو أَلقَى السَّمعَ وَهُوَ شَهيدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह इसमें उस व्यक्ति के लिए निश्चय नसीहत है, जिसके पास दिल हो, या वह कान लगाए, इस हाल में कि उसका दिल उपस्थित हो।
Roman Urdu (Maududi)Is tareekh mein ibrat ka sabaq hai har us shaks ke liye jo dil rakhta ho, ya jo tawajju se baat ko suney
Roman Urdu (Junagarhi)Iss mein her sahib-e-dil kay liye ibrat hai aur uss kay liye jo dil say mutawajja hoker kaan lagaye aur woh hazir ho
Devnagri Urdu (Maududi)इस तारीख में इब्रत का सबक है हर उस शक्स के लिए जो दिल रखता हो, या जो तवज्जु से बात को सुने
عَرَبِيوَلَقَد خَلَقنَا السَّماواتِ وَالأَرضَ وَما بَينَهُما في سِتَّةِ أَيّامٍ وَما مَسَّنا مِن لُغوبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निश्चय हमने आकाशों एवं धरती को और जो कुछ उन दोनों के बीच है, छह दिनों में पैदा किया और हमें कोई थकान नहीं हुई।
Roman Urdu (Maududi)Humne zameen aur aasmaano ko aur unke darmiyan ki saari cheezon ko chey(six) dino mein paida kardiya aur humein koi thakaan laahiq na hui
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney aasmanon aur zamin aur jo kuch iss kay darmiyan hai sab ko (sirf) cheh (6) din mein peda kerdiya aur humen thakaan ney chua tak nahi
Devnagri Urdu (Maududi)हमने जमीन और आसमानों को और उनके दरमियान की सारी चीज़ों को छै (छह) दिनों में अदा कर दिया और हमें कोई थकान लाहिक न हुई
عَرَبِيفَاصبِر عَلىٰ ما يَقولونَ وَسَبِّح بِحَمدِ رَبِّكَ قَبلَ طُلوعِ الشَّمسِ وَقَبلَ الغُروبِ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः जो कुछ वे कहते हैं, उसपर सब्र से काम लें तथा सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त से पहले अपने रब की प्रशंसा के साथ पवित्रता बयान करें।
Roman Urdu (Maududi)Pas aey Nabi, jo baatein yeh log banate hain unpar sabr karo, aur apne Rubb ki hamd ke saath uski tasbeeh karte raho, tulu-e-aftaab( rising of the sun ) aur guroob-e-aftaab( before its setting ) se pehle
Roman Urdu (Junagarhi)Pus yeh jo kuch kehtay hain aap iss per sabar keren aur apnay rab ki tasbeeh tareef kay sath biyan keren sooraj nikalney say pehlay bhi aur sooraj ghuroob honey say pehlay bhi
Devnagri Urdu (Maududi)पास ऐ नबी, जो बातें ये लोग बनाते हैं उन पर सब्र करो, और अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करते रहो, तुलू-ए-आफताब (सूरज का उगना) और गुरुब-ए-आफताब (इसके डूबने से पहले) से पहले
عَرَبِيوَمِنَ اللَّيلِ فَسَبِّحهُ وَأَدبارَ السُّجودِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा रात के कुछ भाग में फिर उसकी पवित्रता का वर्णन करें और सजदे के बाद की घड़ियों में भी।
Roman Urdu (Maududi)Aur raat ke waqt phir uski tasbeeh karo aur sajda reizion se faarig honay ke baad bhi(wake of prostration)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur raat kay kissi waqt bhi tasbeeh keren aur namaz kay baad bhi
Devnagri Urdu (Maududi)और रात के वक्त फिर उसकी तस्बीह करो और सजदा रिजियन से दूर होने के बाद भी (साष्टांग प्रणाम)
عَرَبِيوَاستَمِع يَومَ يُنادِ المُنادِ مِن مَكانٍ قَريبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा कान लगाकर सुनें, जिस दिन पुकारने वाला एक निकट स्थान से पुकारेगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur suno, jis din munadi (pukaar) karne wala (har shaks ke)qareeb hi se pukarega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur sunn rakhen kay jiss din aik pukarney wala qareeb hi ki jagah say pukaray ga
Devnagri Urdu (Maududi)और सुनो, जिस दिन मुनादी (पुकार) करने वाला (हर शक्स के)करीब ही से पुकारेगा
عَرَبِييَومَ يَسمَعونَ الصَّيحَةَ بِالحَقِّ ۚ ذٰلِكَ يَومُ الخُروجِ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन वे भयंकर आवाज़ को सत्य के साथ सुनेंगे। यह निकलने का दिन है।
Roman Urdu (Maududi)Jis din sab log aawaza-e-hashar ko theek theek sun rahey honge, woh zameen se murdon ke nikalne ka din hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss roz uss tund-o-tez cheekh ko yaqeen kay sath sunn len gay, yeh din hoga nikalney ka
Devnagri Urdu (Maududi)जिस दिन सब लोग आवाज़-ए-हशर को ठीक ठीक सुन रहे होंगे, वो ज़मीन से मुर्दों के निकलने का दिन होगा
عَرَبِيإِنّا نَحنُ نُحيي وَنُميتُ وَإِلَينَا المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय हम ही जीवन देते हैं और हम ही मारते हैं और हमारी ही ओर लौटकर आना है।
Roman Urdu (Maududi)Hum hi zindagi bakshte hain aur hum hi maut detey hain, aur hamari hi taraf us din sabko palatna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum hi jilatay hain aur hum hi martay hain aur humari hi taraf lot phir ker aana hai
Devnagri Urdu (Maududi)हम ही जिंदगी बक्शते हैं और हम ही मौत देते हैं, और हमारी ही तरफ उस दिन सबको पलटना है
عَرَبِييَومَ تَشَقَّقُ الأَرضُ عَنهُم سِراعًا ۚ ذٰلِكَ حَشرٌ عَلَينا يَسيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन धरती उनसे फट जाएगी, जबकि वे तेज़ दौड़ने वाले होंगे। यह एकत्र करना हमारे लिए बहुत सरल है।
Roman Urdu (Maududi)Jab zameen phategi log uske andar se nikal kar teiz teiz bhage ja rahe honge. Yeh hashar hamare liye bahut aasaan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din zamin phat jayegi aur yeh dortay huye (nikal paren gay) yeh jama kerlena hum per boht hi aasan hai
Devnagri Urdu (Maududi)जब ज़मीन फटेगी लोग उसके अंदर से निकल कर तेज तेज़ भागे जा रहे होंगे। ये हश्र हमारे लिए बहुत आसान है
عَرَبِينَحنُ أَعلَمُ بِما يَقولونَ ۖ وَما أَنتَ عَلَيهِم بِجَبّارٍ ۖ فَذَكِّر بِالقُرآنِ مَن يَخافُ وَعيدِ
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हिन्दी (Al-Omari)हम उसे अधिक जानने वाले हैं, जो कुछ वे कहते हैं। और आप उनपर कोई ज़बरदस्ती करने वाले नहीं हैं। अतः आप क़ुरआन द्वारा उस व्यक्ति को उपदेश दें, जो मेरे अज़ाब के वादे से डरता है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, jo baatein yeh log bana rahe hain unhein hum khoob jaante hain, aur tumhara kaam inse jabran (zabardasti) baat manwana nahin hai. Bas tum is Quran ke zariye se har us shaks ko nasihat kardo jo meri tambeeh se darey
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh jo kuch keh rahey hain hum bakhoobi jaantay hain aur aap inn per jabar kerney walay nahi to aap quran kay zariyey enhen samjhatay rahen jo meray waeed (daraway kay wadon) say dartay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, जो बातें ये लोग बना रहे हैं उन्हें हम खूब जानते हैं, और तुम्हारा काम इनसे जबरन (ज़बरदस्ती) बात मनवाना नहीं है। बस तुम कुरान के ज़रिये से हर उस शक्स को हिदायत करदो जो मेरी तम्बीह से डरे
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Surah 50: Qaf (Qaf)

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Surah 50: Qaf (Qaf)

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Surah 50: Qaf (Qaf)

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Surah 50: Qaf (Qaf)

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Surah 50: Qaf (Qaf)

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Surah 51: Ad-Dhariyat (The Scatterers)

Meccan🕐 Revelation #67📜 60 Verses🕮 Juz 1–27
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Surah 51: Ad-Dhariyat (The Scatterers)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَالذّارِياتِ ذَروًا
हिन्दी (Al-Omari)क़सम है उन (हवाओं) की जो (धूल आदि) उड़ाने वाली हैं!
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai un hawaon ki jo gard (dust) udane wali hain
Roman Urdu (Junagarhi)qasam hai bikherney waliyan ki ura ker
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है उन हवाओं की जो गर्द (धूल) उड़ाने वाली हैं
عَرَبِيفَالحامِلاتِ وِقرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर पानी का बड़ा भारी बोझ उठाने वाले बादलों की!
Roman Urdu (Maududi)Phir pani se ladeh huey badal uthane wali hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir uthaney waliyan bojh ko
Devnagri Urdu (Maududi)फिर पानी से लड़े हुए बादल उठने वाली हैं
عَرَبِيفَالجارِياتِ يُسرًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर आसानी से चलने वाली नावों की!
Roman Urdu (Maududi)Phir subuk raftari (smoothly speed along) ke saath chalne wali hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir chalney waliyan narmi say
Devnagri Urdu (Maududi)फिर सुबुक रफ़्तारी (सुचारू गति से) के साथ चलने वाली हैं
عَرَبِيفَالمُقَسِّماتِ أَمرًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर (अल्लाह का) आदेश बाँटने वाले (फ़रिश्तों की)!
Roman Urdu (Maududi)Phir ek baday kaam (barish) ki taqseem karne wali hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir kaam ko taqseem kerney waliyan
Devnagri Urdu (Maududi)फिर एक बदे काम (बारिश) की तकसीम करने वाली हैं
عَرَبِيإِنَّما توعَدونَ لَصادِقٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो तुमसे वादा किया जाता है, निश्चय वह सत्य है।
Roman Urdu (Maududi)Haqq yeh hai ke jis cheez ka tumhein khauf dilaya ja raha hai woh sacchi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeen mano kay tum say jo wadey kiye jatay hain (sab) sachay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हक ये है कि जिस चीज का तुम्हें खौफ दिलाया जा रहा है वो सच्ची है
عَرَبِيوَإِنَّ الدّينَ لَواقِعٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हिसाब अनिवार्य रूप से घटित होने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jazaa-e-aamal (recompense) zaroor pesh aani hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur be-shak insaf honey walahai
Devnagri Urdu (Maududi)और जजा-ए-आमाल (इनाम) जरूर पेश आनी है
عَرَبِيوَالسَّماءِ ذاتِ الحُبُكِ
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हिन्दी (Al-Omari)क़सम है रास्तों वाले आकाश की!
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai muttafarriq shakalon(numerous forms) waley aasmaan ki
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai raahon walay aasman ki
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है मुत्तफ़रिक शकलों (अनेक रूप) वाले आसमान की
عَرَبِيإِنَّكُم لَفي قَولٍ مُختَلِفٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुम निश्चय एक विवादास्पद बात में पड़े हो।
Roman Urdu (Maududi)(Aakhirat ke barey mein) tumhari baat ek durse se mukhtalif hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tum mukhtalif baat mein paray huye ho
Devnagri Urdu (Maududi)(आख़िरत के बारे में) तुम्हारी बात एक दूसरे से मुख़्तलिफ़ है
عَرَبِييُؤفَكُ عَنهُ مَن أُفِكَ
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हिन्दी (Al-Omari)उससे वही फेरा जाता है, जो (अल्लाह के ज्ञान में) फेर दिया गया है।
Roman Urdu (Maududi)Ussey wahi bargashta (deluded/averse) hota hai jo haqq se phira hua hai
Roman Urdu (Junagarhi)Iss say wohi baaz rakha jatahai jo pher diya gaya ho
Devnagri Urdu (Maududi)उसे वही बरगश्ता (भ्रमित/विमुख) होता है जो हक़ से फिरा हुआ है
عَرَبِيقُتِلَ الخَرّاصونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अटकल लगाने वाले मारे गए।
Roman Urdu (Maududi)Maarey gaye qayas-o-gumaan (conjecturers) se hukum lagane wale
Roman Urdu (Junagarhi)Bey savad baten kerney walay gharat kerdiye gayr
Devnagri Urdu (Maududi)मारे गये क़यास-ओ-गुमान (अनुमान लगाने वाले) से हुकुम लगाने वाले
عَرَبِيالَّذينَ هُم في غَمرَةٍ ساهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो बड़ी ग़फ़लत में भूले हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo jihalat(ignorance) mein garq aur gaflat mein madhosh hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo ghaflat mein hain aur bhoolay huye hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो जिहालत (अज्ञानता) में ग़र्क और गफ़लत में मदहोश हैं
عَرَبِييَسأَلونَ أَيّانَ يَومُ الدّينِ
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हिन्दी (Al-Omari)वे पूछते हैं कि बदले का दिन कब है?
Roman Urdu (Maududi)Puchte hain aakhir woh roz-e-jaza kab aayega
Roman Urdu (Junagarhi)Poochtey hain kay yom-e-jaza kab hoga
Devnagri Urdu (Maududi)पूछते हैं आख़िर वो रोज़-ए-जज़ा कब आएगा
عَرَبِييَومَ هُم عَلَى النّارِ يُفتَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन वे आग पर तपाए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh us roz aayega jab yeh log aag par tapaye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)han yeh woh din hai kay yeh aag per tapaye jayen gey
Devnagri Urdu (Maududi)वो हमें रोज़ आएगा जब ये लोग आग पर तपेंगे
عَرَبِيذوقوا فِتنَتَكُم هٰذَا الَّذي كُنتُم بِهِ تَستَعجِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अपने फ़ितने (यातना) का मज़ा चखो, यही है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)(Insey kaha jayega) ab chakkho maza apne fitne ka, yeh wahi cheez hai jiske liye tum jaldi macha rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Apni fitna-perdazi ka maza chakho yehi hai jiss ki tum jaldi macha rahey thay
Devnagri Urdu (Maududi)(इनसे कहा जाएगा) अब चकखो मजा अपने फिटने का, ये वही चीज़ है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थाय
عَرَبِيإِنَّ المُتَّقينَ في جَنّاتٍ وَعُيونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह परहेज़गार लोग बाग़ों और जल स्रोतों में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Albatta muttaqi log us roz baaghon(gardens) aur chashmo (fountains) mein hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak taqwa walay log bahishton aur chashmon mein hongey
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता मुत्तकी लोग हमें रोज़ बागों (बगीचों) और चश्मो (फव्वारों) में होंगे
عَرَبِيآخِذينَ ما آتاهُم رَبُّهُم ۚ إِنَّهُم كانوا قَبلَ ذٰلِكَ مُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो कुछ उनका रब उन्हें देगा, उसे वे लेने वाले होंगे। निश्चय ही वे इससे पहले नेकी करने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Jo kuch unka Rubb unhein dega usey khushi khushi le rahey hongey. Woh us din ke aane se pehle neikukar (doers of good) thay
Roman Urdu (Junagarhi)unn kay rab ney jo kuch unhen ata farmaya hai ussay ley rahey hongey woh to iss say pehlay hi nekokaar thay
Devnagri Urdu (Maududi)जो कुछ उनका रब उन्हें देगा उसे ख़ुशी ख़ुशी ले रहे होंगे। वो उस दिन के आने से पहले नीकुकर (नेकी करने वाले) थे
عَرَبِيكانوا قَليلًا مِنَ اللَّيلِ ما يَهجَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे रात के बहुत थोड़े भाग में सोते थे।
Roman Urdu (Maududi)Raaton(nights) ko kam hi sotey(sleep) thay
Roman Urdu (Junagarhi)Woh raat ko boht kum soya kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)रातों (रातों) को कम ही सोते (नींद) थे
عَرَبِيوَبِالأَسحارِ هُم يَستَغفِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा रात्रि की अंतिम घड़ियों में वे क्षमा याचना करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir wahi raat ke pichle peharon mein maafi maangte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur waqt-e-sahar istaghfaar kiya kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वही रात के पिछले पहरों में माफ़ी माँगते थे
عَرَبِيوَفي أَموالِهِم حَقٌّ لِلسّائِلِ وَالمَحرومِ
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हिन्दी (Al-Omari)और उनके धनों में माँगने वाले तथा वंचित के लिए एक हक़ (हिस्सा) था।
Roman Urdu (Maududi)Aur unke maalon(wealth) mein haqq tha saahil( maangne waley) aur mehroom(destitute) ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unkay maal mein mangney walon ka aur sawal say bachney walon ka haq tha
Devnagri Urdu (Maududi)और उनके मालों (धन) में हक़ था साहिल (मांगने वाले) और महरूम (बेसहारा) के लिए
عَرَبِيوَفِي الأَرضِ آياتٌ لِلموقِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा धरती में विश्वास करने वालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Zameen mein bahut si nishaniyan hain yaqeen laney walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqeen walon kay liye to zamin mein boht si nishaniyan hain
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन में बहुत सी निशानियां हैं यकीन लाने वालों के लिए
عَرَبِيوَفي أَنفُسِكُم ۚ أَفَلا تُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा स्वयं तुम्हारे भीतर (भी)। तो क्या तुम नहीं देखते?
Roman Urdu (Maududi)Aur khud tumhare apne wajood mein hain, kya tumko soojhta nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Aur khud tumhari zaat mein bhi to kiya tum dekhtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)और खुद तुम्हारे अपने वजूद में हैं, क्या तुमको सूझता नहीं
عَرَبِيوَفِي السَّماءِ رِزقُكُم وَما توعَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और आकाश ही में तुम्हारी रोज़ी है तथा वह भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है।
Roman Urdu (Maududi)Aasman hi mein hai tumhara rizq bhi aur woh cheez bhi jiska tumse waada kiya ja raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tumhari rozi aur jo tum say wada kiya jata hai sab aasman mein hai
Devnagri Urdu (Maududi)आसमान ही में है तुम्हारा रिज्क भी और वो चीज भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है
عَرَبِيفَوَرَبِّ السَّماءِ وَالأَرضِ إِنَّهُ لَحَقٌّ مِثلَ ما أَنَّكُم تَنطِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)सो क़सम है आकाश एवं धरती के पालनहार की! निःसंदेह यह बात निश्चित रूप से सत्य है, इस बात की तरह कि निःसंदेह तुम बोलते हो।
Roman Urdu (Maududi)Pas kasam hai aasmaan aur zameen ke maalik ki, yeh baat haqq hai, aisi hi yaqeeni jaise tum bol rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aasman-o-zamin kay perwerdigar ki qasam! kay yeh bilkul barhaq hai aisa hi jaisay kay tum baten kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)पास कसम है आसमां और जमीन के मालिक की, ये बात हक है, ऐसी ही यकीनी जैसे तुम बोल रहे हो
عَرَبِيهَل أَتاكَ حَديثُ ضَيفِ إِبراهيمَ المُكرَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपके पास इबराहीम के सम्मानित अतिथियों की सूचना आई है?
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, Ibrahim ke muazzaz mehmano ki hiqayat bhi tumhein pahunchi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tujhay ibrahim(alh-e-salam)kay moazziz mehmanon ki khabar bhi phonchi hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, इब्राहिम के मुअज्जज मेहमान की हिकायत भी तुम्हें पाहुंची है
عَرَبِيإِذ دَخَلوا عَلَيهِ فَقالوا سَلامًا ۖ قالَ سَلامٌ قَومٌ مُنكَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब वे उसके पास आए, तो उन्होंने सलाम कहा। उसने कहा : सलाम हो। कुछ अपरिचित लोग हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh uske haan (yahan) aaye to kaha aapko salaam hai. Usne kaha “ aap logon ko bhi salaam hai kuch na-aashna se log hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh jab unkay han aaye to salam kiya ibrahim ney jawab-e-salam diya(aur kaha yeh to) ajnabi log hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो उसके हां (यहां) आए तो कहां आपको सलाम है। उसने कहा "आप लोगों को भी सलाम है कुछ ना-आशना से लोग हैं"
عَرَبِيفَراغَ إِلىٰ أَهلِهِ فَجاءَ بِعِجلٍ سَمينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वह चुपके से अपने घरवालों के पास गया। फिर एक मोटा-ताज़ा (भुना हुआ) बछड़ा ले आया।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh chupke se apne ghar walon ke paas gaya, aur ek mota taaza bachda (calf) laa kar
Roman Urdu (Junagarhi)Phir (Chup chaap jaldi jaldi) apney ghar walon ki taraf gaye aur aik farba bachrey (ka gosht) laye
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो चुपके से अपने घर वालों के पास गया, और एक मोटा ताज़ा बछड़ा (बछड़ा) ला कर
عَرَبِيفَقَرَّبَهُ إِلَيهِم قالَ أَلا تَأكُلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसे उनके सामने रख दिया। कहा : क्या तुम नहीं खाते?
Roman Urdu (Maududi)Mehmanon ke aage pesh kiya. Usne kaha aap hazraat khate nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Aur issay unkay passrakha aur kaha aap khatay kiyon nahi
Devnagri Urdu (Maududi)मेहमानों के आगे पेश किया। उसने कहा आप हज़रत खाते नहीं
عَرَبِيفَأَوجَسَ مِنهُم خيفَةً ۖ قالوا لا تَخَف ۖ وَبَشَّروهُ بِغُلامٍ عَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उसने उनसे दिल में डर महसूस किया। उन्होंने कहा : डरो नहीं। और उन्होंने उसे एक बहुत ही ज्ञानी पुत्र की शुभ-सूचना दी।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh apne dil mein unse dara. Unhon ne kaha dariye nahin, aur usey ek zee-ilm ladke ki paidaish ka mushda (good news/basharat) sunaya
Roman Urdu (Junagarhi)phir to dil hi dil mein unn say khofzada hogaye. unhon ney kaha aap khof na kijiye aur unhon ney uss (hazrat Ibrahim) ko aik ilm walay larkay ki bisharat di
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो अपने दिल में उससे डर गया। उनहों ने कहा डरिए नहीं, और उसे एक ज़ी-इल्म लड़के की अदाइश का मुश्दा (अच्छी खबर/बशारत) सुनाया
عَرَبِيفَأَقبَلَتِ امرَأَتُهُ في صَرَّةٍ فَصَكَّت وَجهَها وَقالَت عَجوزٌ عَقيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)यह सुनकर उसकी पत्नी चिल्लाती हुई आगे आई, तो उसने अपना चेहरा पीट लिया और बोली : बूढ़ी बाँझ!
Roman Urdu (Maududi)Yeh sunkar uski biwi cheekhti hui aage badhi aur usne apna mooh peeth liya aur kehne lagi, “boodhi baanj”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus unki biwi aagay barhi aur heyrat mein aaker apney mun per hath maar ker kaha kay mein to burhiya hun aur sath hi banjh
Devnagri Urdu (Maududi)ये सुनकर उसकी बीवी चीखती हुई आगे बढ़ी और उसने अपना मुंह पीठ लिया और कहने लगी, "बूढ़ी बांज"
عَرَبِيقالوا كَذٰلِكِ قالَ رَبُّكِ ۖ إِنَّهُ هُوَ الحَكيمُ العَليمُ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : तेरे पालनहार ने ऐसे ही फरमाया है। निश्चय वही पूर्ण हिकमत वाला, अत्यंत ज्ञानी है।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “yahi kuch farmaya hai tere Rubb ne. Woh hakeem hai aur sab kuch jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney kaha han teray perwerdigar ney issi tarah farmaya hai. be-shakwoh hakeem-o-aleem hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने कहा "यही कुछ फरमाया है" तेरे रब ने। वो हकीम है और सब कुछ जानता है
🕮 Juz 27 begins here
عَرَبِي۞ قالَ فَما خَطبُكُم أَيُّهَا المُرسَلونَ
हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ भेजे हुए (दूतो!) तुम्हारा अभियान क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Ibrahim ne kaha “aey farstaadgaan-e-ilaahi (envoys), kya mohim aapko dar-pesh hai
Roman Urdu (Junagarhi)(Hazrat Ibrahim alh-e-salam) ney kaha kay Allah kay bhejay huye (farishton!)tumhara kiya maqsad hai
Devnagri Urdu (Maududi)इब्राहीम ने कहा “ऐ फरस्तादगान-ए-इलाही (दूत), क्या मोहिम आपको दर-पेश है
عَرَبِيقالوا إِنّا أُرسِلنا إِلىٰ قَومٍ مُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : निःसंदेह हम कुछ अपराधी लोगों की ओर भेजे गए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne kaha “hum ek mujrim qaum ki taraf bheje gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney jawab diya kay hum gunagar qom ki taraf bhejay gaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)उन्होन ने कहा “हम एक मुजरिम क़ौम की तरफ भेजे गए हैं
عَرَبِيلِنُرسِلَ عَلَيهِم حِجارَةً مِن طينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि हम उनपर मिट्टी के पत्थर बरसाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke uspar paki hui mitti ke patthar (clay-stones) barsa de
Roman Urdu (Junagarhi)Takay hum unn per kitti kay kankar barsayen
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के उसपर पक्की हुई मिट्टी के पत्थर (मिट्टी-पत्थर) बरसा दे
عَرَبِيمُسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ لِلمُسرِفينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो तुम्हारे पालनहार के पास से सीमा से आगे बढ़ने वालों के लिए चिह्नित हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo aapke Rubb ke haan hadd se guzar jane walon ke liye nishan zada hain”
Roman Urdu (Junagarhi)Jo teray rab ki taraf say nishan zada hain unn had say guzar janay walon kay liye
Devnagri Urdu (Maududi)जो आपके रब के हां हद से गुज़र जाने वालों के लिए निशान ज़दा हैं”
عَرَبِيفَأَخرَجنا مَن كانَ فيها مِنَ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उस (बस्ती) में जो भी ईमानवाले थे उन्हें निकाल लिया।
Roman Urdu (Maududi)Phir humne un sab logon ko nikal liya jo us basti mein momin thay
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jitney eman walay wahan thay hum ney unhen nikal liya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमने उन सब लोगों को निकाल लिया जो उस बस्ती में मोमिन थे
عَرَبِيفَما وَجَدنا فيها غَيرَ بَيتٍ مِنَ المُسلِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उसमें मुसलमानों के एक घर के सिवा कोई और नहीं पाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur wahan humne ek ghar ke siwa musalmano ka koi ghar na paya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney wahan musalmanon ka sirf aik hi ghar paya
Devnagri Urdu (Maududi)और वहां हमने एक घर के सिवा मुसलमानों का कोई घर न पाया
عَرَبِيوَتَرَكنا فيها آيَةً لِلَّذينَ يَخافونَ العَذابَ الأَليمَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उसमें उन लोगों के लिए एक निशानी छोड़ दी, जो दुःखदायी यातना से डरते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Uske baad humne wahan bas ek nishani un logon ke liye chodh di jo dardnaak azaab se darte hon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wahan hum ney unkay liye jo dardnaak azab ka darr rakhtey hain aik(kamil) alamat chori
Devnagri Urdu (Maududi)उसके बाद हमने वहां बस एक निशानी उन लोगों के लिए छोड़ दी जो दर्दनक अज़ाब से डरते थे
عَرَبِيوَفي موسىٰ إِذ أَرسَلناهُ إِلىٰ فِرعَونَ بِسُلطانٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मूसा (की कहानी) में (भी एक निशानी है), जब हमने उसे फ़िरऔन की ओर एक स्पष्ट प्रमाण देकर भेजा।
Roman Urdu (Maududi)Aur (tumhare liye nishani hai) Moosa ke qissey mein jab humne usey sareeh sanad (clear authority) ke saath Firoun ke paas bheja
Roman Urdu (Junagarhi)Musa(alh-e-salam kay qissay) mein (bhi humari taraf say tanbeeh hai) kay hum ney ussay firaon ki taraf khuli daleel dey ker bheja
Devnagri Urdu (Maududi)और (तुम्हारे लिए निशानी है) मूसा के क़िस्से में जब हमने उसे सारी सनद (स्पष्ट अधिकार) के साथ फिरौन के पास भेजा
عَرَبِيفَتَوَلّىٰ بِرُكنِهِ وَقالَ ساحِرٌ أَو مَجنونٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उसने अपनी शक्ति के कारण मुँह फेर लिया और उसने कहा : यह जादूगर है, या पागल।
Roman Urdu (Maududi)To woh apne bal-bootay par akad gaya aur bola yeh jaadugar hai ya majnoon(deewana) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus uss ney apney balbootay per mun mora aur kehney laga yeh jadoogar hai ya deewana hai
Devnagri Urdu (Maududi)तो वो अपने बाल-बूटे पर अकड़ गया और बोला ये जादूगर है या मजनूं (दीवाना) है
عَرَبِيفَأَخَذناهُ وَجُنودَهُ فَنَبَذناهُم فِي اليَمِّ وَهُوَ مُليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अंततः हमने उसे और उसकी सेनाओं को पकड़ लिया, फिर उन्हें समुद्र में फेंक दिया, जबकि वह एक निंदनीय काम करने वाला था।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir-e-kaar humne usey aur uske lashkaron ko pakda aur sabko samandar mein phenk diya aur woh malamat zadah hokar reh gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Bil-aakhir hum ney ussay aur uss kay lashkaron ko apney azab mein pakar ker darya mein daal diya woh tha hi malamat kay qabil
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर-ए-कार हमने उसे और उसके लश्करों को पकड़ा और सबको समंदर में फेंक दिया और वो मलामत ज़्यादा होकर रह गया
عَرَبِيوَفي عادٍ إِذ أَرسَلنا عَلَيهِمُ الرّيحَ العَقيمَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आद में, जब हमने उनपर बाँझ हवा भेजी दी।
Roman Urdu (Maududi)Aur (tumhare liye nishani hai) Aad (people of Aad) mein, jabke humne unpar ek aisi hi bay-khair(devastating) hawa bhej di
Roman Urdu (Junagarhi)Iss tarah aadiyon mein bhi (humari taraf say tanbeeh hai) jabkay hum ney unn say khali aandhi bheji
Devnagri Urdu (Maududi)और (तुम्हारे लिए निशानी है) आद (आद के लोग) में, जबके हमने उनपर एक ऐसी ही हाय बे-खैर (विनाशकारी) हवा भेज दी
عَرَبِيما تَذَرُ مِن شَيءٍ أَتَت عَلَيهِ إِلّا جَعَلَتهُ كَالرَّميمِ
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हिन्दी (Al-Omari)वह जिस चीज़ पर से भी गुज़रती, उसे सड़ी हुई हड्डी की तरह कर देती थी।
Roman Urdu (Maududi)Ke jis cheez par bhi woh guzar gayi usey boseeda (rotten) karke rakh diya
Roman Urdu (Junagarhi)Woh jiss jiss cheez per girti thi ussay boseedah hadi ki tarah (choora choora) kerdeti thi
Devnagri Urdu (Maududi)के जिस चीज पर भी वह गुजर गई उसे बोसीदा (सड़ा हुआ) करके रख दिया
عَرَبِيوَفي ثَمودَ إِذ قيلَ لَهُم تَمَتَّعوا حَتّىٰ حينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा समूद में, जब उनसे कहा गया कि एक समय तक के लिए लाभ उठा लो।
Roman Urdu (Maududi)Aur (tumhare liye nishani hai) Samood mein, jab unse kaha gaya tha ke ek khaas waqt tak mazey karlo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur samood (kay qissay) mein bhi (ibrat) hai jab unsay kaha gaya kay tum kuch dino tak faeedah uthalo
Devnagri Urdu (Maududi)और (तुम्हारे लिए निशानी है) समूद में, जब उनसे कहा गया था कि एक खास वक्त तक मजे करलो
عَرَبِيفَعَتَوا عَن أَمرِ رَبِّهِم فَأَخَذَتهُمُ الصّاعِقَةُ وَهُم يَنظُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उन्होंने अपने पालनहार के आदेश की अवज्ञा की, तो उन्हें कड़क ने पकड़ लिया और वे देख रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Magar is tambeeh(warning) par bhi unhon ne apne Rubb ke hukum se sartabi (brazenly disobey) ki. Aakhir-e-kar unke dekhte dekhte ek achanak toot padne waley azaab ne unko aa liya
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin unhon ney apney rab kay hukum say sirtabi ki jiss per unhen unkay dekhtay dekhtay (tez-o-tund) karakay ney halak kerdiya
Devnagri Urdu (Maududi)मगर क्या तम्बीह (चेतावनी) बराबर भी है उनहों ने अपने रब के हुकुम से सरताबी (बेशर्मी से अवज्ञा) की। आख़िर-ए-कर उनको देखते एक अचानक टूट पड़ने वाले अज़ाब ने उनको आ लिया
عَرَبِيفَمَا استَطاعوا مِن قِيامٍ وَما كانوا مُنتَصِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उनमें न तो खड़े होने की शक्ति थी और न ही वे प्रतिकार करने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir na unmein uthne ki sakat thi aur na woh apna bachao kar sakte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Pus na woh kharay hosakay aur na badla ley sakay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर ना उनको उठने की ताकत थी और ना वो अपना बचाव कर सकते थे
عَرَبِيوَقَومَ نوحٍ مِن قَبلُ ۖ إِنَّهُم كانوا قَومًا فاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इससे पहले नूह़ की जाति को (विनष्ट कर दिया)। निश्चय ही वे अवज्ञाकारी लोग थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur in sabse pehle humne Nooh ki qaum ko halaak kiya kyunke woh fasiq (wicked) log thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Nooh(alh-e-salam) ki qom ka bhi iss say pehlay (yehi haal ho chuka tha) woh bhi baray nafarman log thay
Devnagri Urdu (Maududi)और सबसे पहले हमने नूह की क़ौम को हलाक किया क्योंके वो फ़ासीक (दुष्ट) लोग थे
عَرَبِيوَالسَّماءَ بَنَيناها بِأَيدٍ وَإِنّا لَموسِعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आकाश को हमने शक्ति के साथ बनाया और निःसंदेह हम निश्चय विस्तार करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aasman ko humne apne zoar se banaya hai aur hum iski qudrat rakhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aasman ko hum ney (apney) hathon say banaya hai aur yaqeenan hum kushadgi kernay walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)आसमान को हमने अपने ज़ोर से बनाया है और हम इसकी क़ुदरत रखते हैं
عَرَبِيوَالأَرضَ فَرَشناها فَنِعمَ الماهِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा धरती को हमने बिछा दिया, तो हम क्या ही खूब बिछाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Zameen ko humne bichaya hai aur hum badey acchey hamwar(Smoothers/ spread) karne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur zamin ko hum ney farsh banadiya hai pus hum boht hi achay bichanay walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन को हमने बिछाया है और हम बड़े अच्छे हमवार(स्मूथर्स/स्प्रेड) करने वाले हैं
عَرَبِيوَمِن كُلِّ شَيءٍ خَلَقنا زَوجَينِ لَعَلَّكُم تَذَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने हर चीज़ के दो प्रकार बनाए, ताकि तुम नसीहत ग्रहण करो।
Roman Urdu (Maududi)Aur har cheez ke humne jodey banaye hain, shayad ke tum ussey sabaq lo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur her cheez ko hum ney jora jora peda kiya hai takay tum naseehat hasil kero
Devnagri Urdu (Maududi)और हर चीज़ के हमने जोड़े हैं बनाए हैं, शायद के तुम उसे सबक लो
عَرَبِيفَفِرّوا إِلَى اللَّهِ ۖ إِنّي لَكُم مِنهُ نَذيرٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः अल्लाह की ओर दौड़ो। निश्चय ही मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से स्पष्ट सचेतकर्ता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)To daudo Allah ki taraf , main tumahre liye us ki taraf se saaf saaf khabardar karne wala hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum Allah ki taraf dor bhag (yani rujoo) kero yaqeenan main tumhen uss ki taraf say saaf saaf tanbeeh kernay wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)तो अल्लाह की तरफ से, मैं तुम्हारे लिए हमारे लिए साफ-साफ खबरदार करने वाला हूं
عَرَبِيوَلا تَجعَلوا مَعَ اللَّهِ إِلٰهًا آخَرَ ۖ إِنّي لَكُم مِنهُ نَذيرٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य मत बनाओ। निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से खुला डराने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur na banao Allah ke saath koi dusra mabood. Main tumahre liye uski taraf se saaf saaf khabardar karne wala hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah kay sath kissi aur ko mabood na therao. be-shak mein tumhen uss ki taraf say khula daraney wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)और ना बनाओ अल्लाह के साथ कोई दूसरा माबूद। मैं तुम्हारे लिए उसकी तरफ से साफ साफ खबरदार करने वाला हूं
عَرَبِيكَذٰلِكَ ما أَتَى الَّذينَ مِن قَبلِهِم مِن رَسولٍ إِلّا قالوا ساحِرٌ أَو مَجنونٌ
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हिन्दी (Al-Omari)इसी प्रकार, उन लोगों के पास जो इनसे पहले थे, जब भी कोई रसूल आया, तो उन्होंने कहा : यह जादूगर है, या पागल।
Roman Urdu (Maududi)Yunhi hota raha hai, inse pehle ki qaumon ke paas bhi koi Rasool aisa nahin aaya jisey unhon ne yeh na kaha ho ke yeh saahir (sorcerer) hai ya majnoon(deewana)
Roman Urdu (Junagarhi)Issi tarah jo log inn say pehlay guzray hain unkay pass jo bhi rasool aaya unhon ney keh diya ya to yeh jadoogar hai ya deewana hai
Devnagri Urdu (Maududi)यूं ही होता जा रहा है, इनसे पहले क़ौमों के पास भी कोई रसूल ऐसा नहीं आया जैसे उन्होन ने ये ना कहा हो के ये साहिर (जादूगर) है या मजनूं (दीवाना)
عَرَبِيأَتَواصَوا بِهِ ۚ بَل هُم قَومٌ طاغونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने एक-दूसरे को इस (बात) की वसीयत की है? बल्कि वे (स्वयं ही) सरकश लोग हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya in sab ne apas mein ispar koi samjhauta karliya hai? Nahin, balke yeh sab sarkash log hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh iss baat ki aik doosray ko wassiyat kertay gaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इन सब ने आपस में इसपर कोई समझौता किया है? नहीं, बलके ये सब सरकश लोग हैं
عَرَبِيفَتَوَلَّ عَنهُم فَما أَنتَ بِمَلومٍ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप उनसे मुँह फेर लें। क्योंकि आपपर कोई दोष नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Pas aey Nabi, inse rukh pher lo, tumpar kuch malamat nahin
Roman Urdu (Junagarhi)(Nahi) bulkay yeh sab kay sab sirkash hain to app inn say mun pher len. aap per koi malamat nahi
Devnagri Urdu (Maududi)पास ऐ नबी, इनसे रुख फेर लो, तुमपर कुछ मलामत नहीं
عَرَبِيوَذَكِّر فَإِنَّ الذِّكرىٰ تَنفَعُ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा आप नसीहत करें। क्योंकि निश्चय नसीहत ईमानवालों को लाभ देताी है।
Roman Urdu (Maududi)Albatta nasihat karte raho, kyunke nasihat imaan laney walon ke liye nafeh(faiyda-mand) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur naseehat kertay rahen yaqeenan yeh naseehat eman walon ko nafa degi
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता हिदायत करते रहो, क्योंके हिदायत ईमान लाने वालों के लिए नफ़ेह(फ़ैयदा-मंद) है
عَرَبِيوَما خَلَقتُ الجِنَّ وَالإِنسَ إِلّا لِيَعبُدونِ
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हिन्दी (Al-Omari)और मैंने जिन्नों तथा मनुष्यों को केवल इसलिए पैदा किया है कि वे मेरी इबादत करें।
Roman Urdu (Maududi)Maine Jinn aur Insano ko iske siwa kisi kaam ke liye paida nahin kiya hai ke woh meri bandagi karein
Roman Urdu (Junagarhi)Mein ney jinnat aur insanon ko mehaz issi liye peda kiya hai kay woh sirf meri ibadat keren
Devnagri Urdu (Maududi)मैने जिन और इंसान को इसके सिवा किसी काम के लिए भुगतान नहीं किया है के वो मेरी बंदगी करें
عَرَبِيما أُريدُ مِنهُم مِن رِزقٍ وَما أُريدُ أَن يُطعِمونِ
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हिन्दी (Al-Omari)मैं उनसे कोई रोज़ी नहीं चाहता और न यह चाहता हूँ कि वे मुझे खिलाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Main unsey koi rizq nahin chahta aur na yeh chahta hoon ke woh mujhey khilayein
Roman Urdu (Junagarhi)Na mein inn say rozi chchta hun na meri yeh chahat hai kay yeh mujhay khilayen
Devnagri Urdu (Maududi)मैं उनसे कोई रिज़्क नहीं चाहता और ना ये चाहता हूं के वो मुझे खिलाएं
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ هُوَ الرَّزّاقُ ذُو القُوَّةِ المَتينُ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह ही बहुत रोज़ी देनेवाला, बड़ा शक्तिशाली, अत्यंत मज़बूत है।
Roman Urdu (Maududi)Allah to khud hi Razzak hai, badi quwwat wala aur zabardast
Roman Urdu (Junagarhi)Allah taalaa to khud hi sab ka rozi rasan tawanaee wala aur zor awar hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह तो खुद ही रज्जाक है, बड़ी कुव्वत वाला और जबरदस्त
عَرَبِيفَإِنَّ لِلَّذينَ ظَلَموا ذَنوبًا مِثلَ ذَنوبِ أَصحابِهِم فَلا يَستَعجِلونِ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः निश्चय उन लोगों के लिए जिन्होंने अत्याचार किया, उनके साथियों के हिस्से की तरह (यातना का) एक हिस्सा है। सो वे मुझसे जल्दी न मचाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Pas jin logon ne zulm kiya hai unke hissey ka bhi waisa hi azaab tayyar hai jaisa inhi jaise logon ko unke hissey ka mil chuka hai, iske liye yeh log jaldi na machayein
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jin logon ney zulm kiya hai unhen bhi unkay sathiyon kay hissay kay nuisil hissa mileyga lehaza woh mujh say jaldi talab na keren
Devnagri Urdu (Maududi)पास जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उनके लिए वैसा ही अज़ाब तय्यार है जैसा इन्ही जैसे लोगों को उनके लिए का मिल चुका है, इसके लिए ये लोग जल्दी ना मचाएं
عَرَبِيفَوَيلٌ لِلَّذينَ كَفَروا مِن يَومِهِمُ الَّذي يوعَدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः इनकार करने वालों के लिए उनके उस दिन से बड़ा विनाश है, जिसका उनसे वादा किया जा रहा है।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir ko tabahi hai kufr karne walon ke liye us roz jiska inhein khauff dilaya jaa raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus kharabi hai munkiron ko unkay uss din ki jiss ka wada diye jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर को तबाह है कुफ़्र करने वालों के लिए हमें रोज़ जिसका इन्हें ख़ौफ़ दिलाया जा रहा है
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Surah 51: Ad-Dhariyat (The Scatterers)

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Surah 51: Ad-Dhariyat (The Scatterers)

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Surah 51: Ad-Dhariyat (The Scatterers)

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Surah 51: Ad-Dhariyat (The Scatterers)

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Surah 51: Ad-Dhariyat (The Scatterers)

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Surah 52: At-Tur (The Mountain)

Meccan🕐 Revelation #76📜 49 Verses🕮 Juz 1
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَالطّورِ
हिन्दी (Al-Omari)क़सम है तूर (पर्वत) की!
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai Tur (Mount) ki
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai toor ki
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है तूर (पर्वत) की
عَرَبِيوَكِتابٍ مَسطورٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और एक पुस्तक की जो लिखी हुई है!
Roman Urdu (Maududi)Aur ek aisi khuli kitaab ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aur likhi hui kitab ki
Devnagri Urdu (Maududi)और एक ऐसी खुली किताब की
عَرَبِيفي رَقٍّ مَنشورٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐसे पन्ने में जो खुला हुआ है।
Roman Urdu (Maududi)Jo raqeeq jild(fine parchment) mein likkhi hui hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo jhilli kay khulay huye warq mein hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो रकीक जिल्द (बारीक चर्मपत्र) में लिखी हुई है
عَرَبِيوَالبَيتِ المَعمورِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा बैतुल-मा'मूर (आबाद घर) की!
Roman Urdu (Maududi)Aur aabaad (much-frequented) ghar ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aur abad ghar ki
Devnagri Urdu (Maududi)और आबाद (बहुत बार-बार आने वाला) घर की
عَرَبِيوَالسَّقفِ المَرفوعِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा ऊँची उठाई हुई छत (आकाश) की!
Roman Urdu (Maududi)Aur unchi chatt (canopy) ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unchi chat ki
Devnagri Urdu (Maududi)और ऊंची छत (चंदवा) की
عَرَبِيوَالبَحرِ المَسجورِ
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हिन्दी (Al-Omari)और लबालब भरे हुए समुद्र की!
Roman Urdu (Maududi)Aur maujzan samandar (swelling sea) ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bharkaye huye samandar ki
Devnagri Urdu (Maududi)और मौजां समंदर (उफनता हुआ समुद्र) की
عَرَبِيإِنَّ عَذابَ رَبِّكَ لَواقِعٌ
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हिन्दी (Al-Omari)कि निश्चय आपके पालनहार की यातना अवश्चय घटित होने वाली है।
Roman Urdu (Maududi)Ke tere Rubb ka azaab zaroor waqeh honay wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak app kay rab ka azab hoker rehnay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)के तेरे रब का अज़ाब ज़रूर वक़हे होने वाला है
عَرَبِيما لَهُ مِن دافِعٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उसे कोई टालने वाला नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Jisey koi dafa karne wala nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Ussay koi rokney wala nahi
Devnagri Urdu (Maududi)जिसे कोई दफ़ा करने वाला नहीं
عَرَبِييَومَ تَمورُ السَّماءُ مَورًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन आकाश बुरी तरह डगमगाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Woh us roz waqeh hoga jab aasmaan buri tarah dagmagayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din aasman thar tharaney lagay ga
Devnagri Urdu (Maududi)वो रोज़ वक़हे होगा जब आसमां बुरी तरह डगमगाएगा
عَرَبِيوَتَسيرُ الجِبالُ سَيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा पर्वत बहुत तेज़ी से चलेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur pahad udey udey phirenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur pahaar chalney phirney lagen gey
Devnagri Urdu (Maududi)और पहाड़ उड़े उड़े फिरेंगे
عَرَبِيفَوَيلٌ يَومَئِذٍ لِلمُكَذِّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ी तबाही है।
Roman Urdu (Maududi)Tabahi hai us roz un jhutlane walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)uss din jhutlaney walon ki (poori) kharabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)तबाही है हम रोज़ उन पर झूठलाने वालों के लिए
عَرَبِيالَّذينَ هُم في خَوضٍ يَلعَبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जो व्यर्थ बातों में पड़े खेल रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo aaj khel ke taur par apni hujjat baaziyon mein lagey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo apni behuda goee mein uchal kood ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो आज खेल के तौर पर अपनी हुज्जत बाजियों में लगे हुए हैं
عَرَبِييَومَ يُدَعّونَ إِلىٰ نارِ جَهَنَّمَ دَعًّا
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन उन्हें ज़ोर से धक्का देकर जहन्नम की आग में धकेला जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Jis din unhein dhakke maar maar kar naar-e-jahannum (fire of hell) ki taraf le chala jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din woh dhakkay dey ker aatish jahannam ki taraf laye jayen gey
Devnagri Urdu (Maududi)जिस दिन उन्हें धक्के मार कर नार-ए-जहन्नुम (नरक की आग) की तरफ ले चला जाएगा
عَرَبِيهٰذِهِ النّارُ الَّتي كُنتُم بِها تُكَذِّبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही है वह आग, जिसे तुम झुठलाते थे।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt unse kaha jayega ke “ yeh wahi aag hai jisey tum jhutlaya karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi wohi aatish dozakh hai jissay tum jhoot batlatey thay
Devnagri Urdu (Maududi)हमारा वक्त उन्हें कहा जाएगा के “ये वही” आग है जैसे तुम झुटलाया करते थे
عَرَبِيأَفَسِحرٌ هٰذا أَم أَنتُم لا تُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या यह जादू है, या तुम नहीं देख रहे?
Roman Urdu (Maududi)Ab batao yeh jaadu hai ya tumhein soojh nahin raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)(Abb batao) kiya yeh jadoo hai? ya tum dekhtay hi nahi ho
Devnagri Urdu (Maududi)अब बताओ ये जादू है या तुम्हें समझ नहीं आ रहा है
عَرَبِياصلَوها فَاصبِروا أَو لا تَصبِروا سَواءٌ عَلَيكُم ۖ إِنَّما تُجزَونَ ما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)इसमें प्रवेश कर जाओ। फिर सब्र करो या सब्र न करो, तुम्हारे लिए बराबर है। तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jao ab jhulso iske andar, tum khwa sabr karo ya na karo, tumhare liye yaksan hai, tumhein waisa hi badla diya ja raha hai jaise tum amal kar rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Jao dozakh mein abb tumhara sabar kerna aur na kerna tumharay liye yaksan hai tumhein faqat tumharay kiye ka badla diya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)जाओ अब झुलसो इसके अंदर, तुम ख्वाह सब्र करो या ना करो, तुम्हारे लिए यक्सन है, तुम्हें वैसा ही बदला दिया जा रहा है जैसे तुम अमल कर रहे थे
عَرَبِيإِنَّ المُتَّقينَ في جَنّاتٍ وَنَعيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह डरने वाले लोग बागों और बड़ी नेमत में हैं।
Roman Urdu (Maududi)Muttaqi log wahan baagon (gardens) aur niyamaton mein hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan perhezgar log jannaton mein aur nematon mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)मुत्तकी लोग वहां बागों (बगीचों) और नियामतों में होंगे
عَرَبِيفاكِهينَ بِما آتاهُم رَبُّهُم وَوَقاهُم رَبُّهُم عَذابَ الجَحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)उसका आनंद लेने वाले हैं जो उनके रब ने उन्हें दिया और उनके रब ने उन्हें दहकती हुई आग की यातना से बचा लिया।
Roman Urdu (Maududi)Lutf le rahe hongey un cheezon se jo unka Rubb unhein dega, aur unka Rubb unhein dozakh ke azaab se bacha lega
Roman Urdu (Junagarhi)Jo unhen unkay rab ney dey rakhi hain uss per khush khush hain aur unkay perwerdigar ney unhen jahannam kay azab say bhi bacha liya hai
Devnagri Urdu (Maududi)लुत्फ ले रहे होंगे उन चीज़ों से जो उनका रब उन्हें देगा, और उनका रब उन्हें दोज़ख के अज़ाब से बचा लेगा
عَرَبِيكُلوا وَاشرَبوا هَنيئًا بِما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)मज़े से खाओ और पियो, उसके बदले जो तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)(Unse kaha jayega) khao aur peo mazey se apne un aamaal ke siley mein jo tum karte rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Tum mazay say khatay peetay raho inn aemaal kay badlay jo tum kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)(उनसे कहा जाएगा) खाओ और पियो भूलभुलैया से अपने उन आमाल के सिली में जो तुम करते रहे हो
عَرَبِيمُتَّكِئينَ عَلىٰ سُرُرٍ مَصفوفَةٍ ۖ وَزَوَّجناهُم بِحورٍ عينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)पंक्तिबद्ध तख़्तों पर तकिया लगाए हुए होंगे और हमने उनका विवाह गोरे बदन, काली आँखों वाली औरतों से कर दिया, जो बड़ी-बड़ी आँखों वाली हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh aamne saamne bichey huey takhaton(thrones) par takiye(couches) lagaye baithey hongey aur hum khoobsurat aankhon waali hoorein unse biyah (marry) denge
Roman Urdu (Junagarhi)Baraber bichay huye shandar takhtay per takkiye lagaye huye aur hum ney unkay nikkah bari bari aankhon wali(hooron) say kerdiye hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो आमने-सामने बिछे हुए तख्तों पर तकिए (सोफे) लगाएंगे बैठे होंगे और हम खूबसूरत आंखों वाली हूरें उन्हें बियाह (शादी) देंगे
عَرَبِيوَالَّذينَ آمَنوا وَاتَّبَعَتهُم ذُرِّيَّتُهُم بِإيمانٍ أَلحَقنا بِهِم ذُرِّيَّتَهُم وَما أَلَتناهُم مِن عَمَلِهِم مِن شَيءٍ ۚ كُلُّ امرِئٍ بِما كَسَبَ رَهينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो लोग ईमान लाए और उनकी संतान ने ईमान के साथ उनका अनुसरण किया, हम उनकी संतान को उनके साथ मिला देंगे तथा उनके कर्मों में उनसे कुछ भी कम न करेंगे। प्रत्येक व्यक्ति उसके बदले में जो उसने कमाया, गिरवी रखा हुआ है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log imaan laaye hain aur unki aulad bhi kisi darja-e-imaan mein unke naksh-e-qadam par chali hai unki us aulad ko bhi hun (jannat mein) unke saath mila denge aur unke amaal mein koi ghaata(loss) unko na denge. Har shaks apne kasb ke aevaz rehan hai.( Every person is pledged to what he did)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log eman laye aur unki olad ney bhi eman mein unki perwi ki hum unki olad ko unntak phoncha dengey aur unkay amal say hum kuch kum na keren gey.her shaks apney aemaal ka girwi hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ईमान लाए हैं और उनकी औलाद भी कोई दरजा-ए-ईमान में उनके नक्श-ए-कदम पर चली है, उनकी औलाद को भी मैं (जन्नत में) उनके साथ मिला देंगे और उनके अमल में कोई घाटा (नुकसान) उनको ना देंगे। हर शक्स अपने क़स्ब के बदले में रहता है
عَرَبِيوَأَمدَدناهُم بِفاكِهَةٍ وَلَحمٍ مِمّا يَشتَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हम उन्हें और अधिक फल और मांस देंगे उसमें से जो वे चाहेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Hum unko har tarah ke phal (fruits) aur gosht , jis cheez ko bhi unka ji chahega khoob diye chale jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Hum unkay liye meway aur marghoob gosht ki rail pail kerden gey
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِييَتَنازَعونَ فيها كَأسًا لا لَغوٌ فيها وَلا تَأثيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)वे उसमें एक-दूसरे से मदिरा का प्याला लेंगे, जिसमें न कोई व्यर्थ बात होगी और न गुनाह में डालना।
Roman Urdu (Maududi)Wahan woh ek dusre se jaam-e-sharaab lapak lapak kar le rahey hongey jis mein na yawa-goyi (ill speech) hogi na bad-kirdari
Roman Urdu (Junagarhi)(khush tabaee kay sath) aik doosray say jam (sharab) ki cheena jhapta keren gey jiss sharab kay suroor mein to beyhuda goee hogi na gunah
Devnagri Urdu (Maududi)वहां वो एक दूसरे से जाम-ए-शराब लपक लपक कर ले रहे होंगे जिसमें न यावा-गोई (बीमार भाषण) होगी न बद-किरदारी
عَرَبِي۞ وَيَطوفُ عَلَيهِم غِلمانٌ لَهُم كَأَنَّهُم لُؤلُؤٌ مَكنونٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनके आस-पास चक्कर लगाते रहेंगे उन्हीं के बच्चे, जैसे वे छुपाए हुए मोती हों।
Roman Urdu (Maududi)Aur unki khidmat mein woh ladke daudte (running) phir rahey hongey jo unhi ke liye makhsoos hongey, aisey khoobsurat jaise chupa kar rakkhe huey moti(pearls)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unkay gird unkay no-umer ghulam chal phir rahey hongey goya kay woh moti thay ji dhakay rakhay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और उनकी खिदमत में वो लड़के दौड़ते (दौड़ते हुए) फिर रहेंगे जो उनके लिए मखसूस होंगे, ऐसे खूबसूरत जैसे छुपा कर रखे हुए मोती (मोती)
عَرَبِيوَأَقبَلَ بَعضُهُم عَلىٰ بَعضٍ يَتَساءَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे एक-दूसरे की ओर मुतवज्जह होकर आपस में सवाल करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log apas mein ek dusre se (duniya mein guzre huey) halaat puchenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aapas mein aik doosray ki taraf mutawajja hoker sawal kerengey
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग आपस में एक दूसरे से (दुनिया में गुज़रे हुए) हालात पूछेंगे
عَرَبِيقالوا إِنّا كُنّا قَبلُ في أَهلِنا مُشفِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे कहेंगे : निःसंदेह हम इससे पहले अपने घरवालों में डरने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh kahenge ke hum pehle apne ghar waalon mein darte huey zindagi basar karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)kahen gey iss say pehlay hum apney ghar walon kay dar miyan boht dara kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)ये कहेंगे के हम पहले अपने घर वालों में डरते हुए जिंदगी बसर करते थे
عَرَبِيفَمَنَّ اللَّهُ عَلَينا وَوَقانا عَذابَ السَّمومِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो अल्लाह ने हमपर उपकार किया और हमें विषैली लू की यातना से बचा लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar Allah ne hum par fazl farmaya aur humein jhulsa dene wali hawa ke azaab se bacha liya
Roman Urdu (Junagarhi)Pus Allah taalaa ney hum per bara ehsan kiya aur humen tez-o-tund garum hawaon kay azab say bacha liya
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर ए कार अल्लाह ने हम पर फजल फरमाया और हमने झुलसा देने वाली हवा के अजाब से बचा लिया
عَرَبِيإِنّا كُنّا مِن قَبلُ نَدعوهُ ۖ إِنَّهُ هُوَ البَرُّ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम इससे पहले ही उसे पुकारा करते थे। निश्चय वही तो अति परोपकारी, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Hum pichli zindagi mein usi se duaein maangte thay, woh waqai bada hi Mohsin (beneficent) aur Raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum iss say pehlay hi uss ki ibadat kiya kertay thay be-shak woh mohsin aur meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)हम पिछली जिंदगी में उसकी से दुआएं मांगते थे, वो वक्त बड़ा हाय मोहसिन (परोपकारी) और रहीम है
عَرَبِيفَذَكِّر فَما أَنتَ بِنِعمَتِ رَبِّكَ بِكاهِنٍ وَلا مَجنونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप नसीहत करें। क्योंकि अपने पालनहार के अनुग्रह से आप न तो काहिन हैं और न ही पागल।
Roman Urdu (Maududi)Pas aey nabi, tum nasihat kiye jao, apne Rubb ke fazal se na tum kaahin (soothsayer) ho aur na majnoon (madman)
Roman Urdu (Junagarhi)To aap samjhatay rahen kiyoh kay app apney rab kay fazal say na to kaahin hain na deewana
Devnagri Urdu (Maududi)पास ऐ नबी, तुम हिदायत किए जाओ, अपने रब के फजल से ना तुम कहीं (भविष्यवक्ता) हो और ना मजनूं (पागल)
عَرَبِيأَم يَقولونَ شاعِرٌ نَتَرَبَّصُ بِهِ رَيبَ المَنونِ
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हिन्दी (Al-Omari)या वे कहते है कि यह एक कवि है जिसपर हम ज़माने की घटनाओं का इंतज़ार करते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log kehte hain ke yeh shaks shayar hai jiske haqq mein hum gardish-e-ayyam (misfortune) ke intizaar kar rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya kafir yun kehtay hain kay yeh shaeer hai hum iss per zamaney kay hawadis (yani mot) ka intezar ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग कहते हैं के ये शक्स शायर है जिसका हक़ में हम गर्दिश-ए-अय्याम (दुर्भाग्य) के इंतिज़ार कर रहे हैं
عَرَبِيقُل تَرَبَّصوا فَإِنّي مَعَكُم مِنَ المُتَرَبِّصينَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि तुम प्रतीक्षा करते रहो, मैं (भी) तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करने वालों में से हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Inse kaho, accha intizaar karo, main bhi tumhare saath intizaar karta hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye! tum muntazir raho mein bhi tumharay sath intezar kernay walon mein hun
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, अच्छा इंतिज़ार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतिज़ार करता हूं
عَرَبِيأَم تَأمُرُهُم أَحلامُهُم بِهٰذا ۚ أَم هُم قَومٌ طاغونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्हें उनकी बुद्धियाँ इस बात का आदेश देती हैं, ये वे स्वयं ही सरकश लोग हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya inki aqalein(minds) inhein aisi hi baatein karne ke liye kehti hain? Ya dar-haqeeqat yeh inaad (transgression)mein hadd se guzare huey log hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inki aqlen enhen yehi sikhati hain? ya yeh log hi sirkash hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इनकी अकालें ऐसी ही बातें करने के लिए कहती हैं? या दर-हकीकत ये इनाद (अपराध) में हद से गुज़रे हुए लोग हैं
عَرَبِيأَم يَقولونَ تَقَوَّلَهُ ۚ بَل لا يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या वे कहते हैं कि उसने इसे स्वयं गढ़ लिया है? बल्कि वे ईमान नहीं लाते।
Roman Urdu (Maududi)Kya ye kehte hain ke is shaks ne yeh quraan khud ghad (invented/fabricated) liya hai? Asal baat yeh hai ke yeh imaan nahin lana chahte
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh kehtay hain kay iss nabi ney khud qharh liya hai waqya yeh hai kay woh eman nahi latey
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये कहते हैं कि इस शक्स ने ये क़ुरान ख़ुद ग़ाद (आविष्कृत/मनगढ़ंत) लिया है? असल बात ये है के ये ईमान नहीं लाना चाहते
عَرَبِيفَليَأتوا بِحَديثٍ مِثلِهِ إِن كانوا صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो फिर वे इस (क़ुरआन) के समान एक ही बात बनाकर ले आएँ, यदि वे सच्चे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Agar yeh apne is qaul (saying) mein sacche hain to isi shaan ka ek kalaam bana layein
Roman Urdu (Junagarhi)Acha agar yeh sachay hain to bhala iss jaisi aik (hi) baat yeh (bhi) to ley aayen
Devnagri Urdu (Maududi)अगर ये अपने इस क़ौल (कहावत) में सच्चे हैं तो इसी शान का एक कलाम बना लें
عَرَبِيأَم خُلِقوا مِن غَيرِ شَيءٍ أَم هُمُ الخالِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या वे बिना किसी चीज़ के पैदा हो गए हैं, या वे (स्वयं) पैदा करने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh kisi khaliq ke bagair khud paida ho gaye hain? Ya yeh khud apne khaliq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh baghair kissi(peda kernay walay) kay khud ba khud peda hogaye hain? ya yeh khud peda kernay walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये किसी ख़लीक़ के बिना खुद पैदा हो गए हैं? या ये खुद अपने खालिक हैं
عَرَبِيأَم خَلَقُوا السَّماواتِ وَالأَرضَ ۚ بَل لا يوقِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या उन्होंने आकाशों और धरती को पैदा किया है? बल्कि वे विश्वास ही नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Ya zameen aur aasmaano ko inhon ne paida kiya hai? Asal baat yeh hai ke yeh yaqeen nahin rakhte
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inhon ney hi aasman aur zamin ko peda kiya hai? bulkay yeh yaqeen na kernay walay log hain
Devnagri Urdu (Maududi)या ज़मीन और आसमान को इन्हों ने पेदा किया है? असल बात ये है के ये यक़ीन नहीं रखते
عَرَبِيأَم عِندَهُم خَزائِنُ رَبِّكَ أَم هُمُ المُصَيطِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या उनके पास आपके पालनहार के ख़ज़ाने हैं, या वही अधिकार चलाने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya tere Rubb ke khazane in ke kabze mein hain? Ya un par inhi ka hukum chalta hai
Roman Urdu (Junagarhi)ya kiya inkay pass teray rab kay khazaney hain?ya (in khazanon kay) yeh darogha hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तेरे रब के ख़ज़ाने इन के कब्ज़े में हैं? हां उन पर इनका हुकुम चलता है
عَرَبِيأَم لَهُم سُلَّمٌ يَستَمِعونَ فيهِ ۖ فَليَأتِ مُستَمِعُهُم بِسُلطانٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)या उनके पास कोई सीढ़ी है, जिसपर वे अच्छी तरह सुन लेते हैं? तो उनके सुनने वाले को चाहिए कि वह कोई स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करे।
Roman Urdu (Maududi)Kya inke paas koi seedi(ladder) hai jispar chadh kar yeh ilm-e-baala ki sun-gun letey hain? In mein se jisne sun-gun li ho woh laaye ko khuli daleel
Roman Urdu (Junagarhi)Ya kiya inkay pass koi seerhi hai jiss per charh ker suntay hain?(agar aisa hai) to inka sunnay wala koi roshan daleel pesh keray
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इनके पास कोई सीढ़ी है जिसपर चढ़ कर ये इल्म-ए-बाला की सन-गन लेते हैं? उनमें से जिसने सूरज-गुन ली हो वो लाए को खुली दलील
عَرَبِيأَم لَهُ البَناتُ وَلَكُمُ البَنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या उस (अल्लाह) के लिए तो बेटियाँ है और तुम्हारे लिए बेटे?
Roman Urdu (Maududi)Kya Allah ke liye to hain betiyan aur tum logon ke liye hain betay (sons)
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya Allah ki to sab larkiyan hain aur tumharay han larkay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या अल्लाह के लिए तो हैं बेटियां और तुम लोगों के लिए हैं बेते (बेटे)
عَرَبِيأَم تَسأَلُهُم أَجرًا فَهُم مِن مَغرَمٍ مُثقَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या आप उनसे कोई पारिश्रमिक माँगते हैं? तो वे उस तावान के बोझ से दबे जा रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum insey koi ajar maangte ho key eh zabardasti padi hui chatti ke bojh taley dabey jatey hain (burdened with a load of debt)
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tu inn say koi ujrat talab kerta hai kay yeh uskay tawaan say bojhal ho rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम इनसे कोई अजर मांगते हो की एह ज़बरदस्ती पड़ी हुई चट के बोझ तले दबे जाते हैं कर्ज के बोझ के साथ)
عَرَبِيأَم عِندَهُمُ الغَيبُ فَهُم يَكتُبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या उनके पास परोक्ष (का ज्ञान) है? तो वे उसे लिखते रहते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya inke paas gaib ke haqaiq ka ilm hai ke uski bina par yeh likh rahe hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inkay pass ilm-e-gheeib hai jissay yeh likh letay hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इनके पास गैब के हक़ीक़त का इल्म है कि उसकी बिना पर ये लिख रहे हूँ
عَرَبِيأَم يُريدونَ كَيدًا ۖ فَالَّذينَ كَفَروا هُمُ المَكيدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या वे कोई चाल चलना चाहते हैं? तो जिन लोगों ने इनकार किया, वही चाल में आने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh koi chaal chalna chahte hain? (agar yeh baat hai) to kufr karne walon par in ki chaal ulti hi padegi
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh log koi fareb kerna chahtay hain? to yaqeen kerlen kay fareeb khordah kafir hi hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये कोई चाल चलना चाहता है? (अगर ये बात है) तो कुफ्र करने वालों पर इन की चाल उल्टी ही पड़ेगी
عَرَبِيأَم لَهُم إِلٰهٌ غَيرُ اللَّهِ ۚ سُبحانَ اللَّهِ عَمّا يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या उनका अल्लाह के सिवा कोई पूज्य है? पवित्र है अल्लाह उससे जो वे साझी ठहराते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya Allah ke siwa yeh koi aur maabood rakhte hain? Allah paak hai us shirk se jo yeh log kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya Allah kay siwa inka koi mabood hai? (hergiz nahi) Allah taalaa inkay shirk say pak hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या अल्लाह के सिवा ये कोई और माबूद रखते हैं? अल्लाह पाक है हमसे शिर्क से जो ये लोग कर रहे हैं
عَرَبِيوَإِن يَرَوا كِسفًا مِنَ السَّماءِ ساقِطًا يَقولوا سَحابٌ مَركومٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वे आकाश से कोई टुकड़ा गिरता हुआ देख लें, तो कह देंगे कि यह परत दर परत बादल है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log aasmaan ke tukde bhi girte huye dekh lein to kahenge yeh baadal hain jo umdey chale aa rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Agar yeh log aasman kay kissi tukray ko girta hua dekhlen tab bhi yeh keh den key yeh teh-ba-teh badal hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग आसमान के टुकड़े भी गिरे हुए देख लें तो कहेंगे ये बादल हैं जो उम्मीद चले आ रहे हैं
عَرَبِيفَذَرهُم حَتّىٰ يُلاقوا يَومَهُمُ الَّذي فيهِ يُصعَقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप उन्हें छोड़ दें, यहाँ तक कि वे अपने उस दिन को जा मिलें, जिसमें वे बेहोश किए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Pas aey nabi, inhein inke haal par chodh do yahan tak ke yeh apne us din ko pahunch jayein jismein yeh maar giraye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Tu enhen chor dey yahan tak kay enhen uss din say sabiqa paray jiss mein yeh beyhosh kerdiye jayen gey
Devnagri Urdu (Maududi)पास ऐ नबी, इन्हें इनके हाल पर छोड़ दो यहां तक ​​के ये अपने दिन को पाहुंच जाए जिसमें ये मार गिराए जाएंगे
عَرَبِييَومَ لا يُغني عَنهُم كَيدُهُم شَيئًا وَلا هُم يُنصَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन न तो उनकी चाल काम आएगी और न उनकी सहायता की जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Jis din na inki apni koi chaal inke kisi kaam aayegi na koi inki madad ko aayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din enhen inka makar kuch kaam na dey ga aur na woh madad kiye jayen gey
Devnagri Urdu (Maududi)जिस दिन ना इनकी अपनी कोई चाल होगी इनका कोई काम आएगा ना कोई इनकी मदद को आएगा
عَرَبِيوَإِنَّ لِلَّذينَ ظَلَموا عَذابًا دونَ ذٰلِكَ وَلٰكِنَّ أَكثَرَهُم لا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निश्चय उन लोगों के लिए जिन्होंने अत्याचार किया, उस (आख़िरत) से पहले भी एक यातना है। परंतु उनमें से अक्सर लोग नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Aur us waqt ke aane se pehle bhi zalimon ke liye ek azaab hai, magar in mein se aksar jaante nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak zalimon kay liye iss kay ilawa aur azab bhi hain lekin inn logon mein say aksar bey-ilm hain
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारे वक्त के आने से पहले भी जालिमों के लिए एक अज़ाब है, मगर इनमें से अक्सर जानते नहीं हैं
عَرَبِيوَاصبِر لِحُكمِ رَبِّكَ فَإِنَّكَ بِأَعيُنِنا ۖ وَسَبِّح بِحَمدِ رَبِّكَ حينَ تَقومُ
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हिन्दी (Al-Omari)और (ऐ नबी!) आप अपने पालनहार का आदेश आने तक धैर्य रखें। निःसंदेह आप हमारी आँखों के सामने हैं। तथा जब आप उठें, तो अपने रब की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता बयान करें।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi , apne Rubb ka faisla aane tak sabr karo. Tum hamari nigaah mein ho. Tum jab utho to apne Rubb ki hamd ke saath uski tasbeeh karo
Roman Urdu (Junagarhi)Tu apney rab kay hukum kay intezar kein sabar say kaam ley be-shak tu humari aankhon kay samney hai subah ko jab tu uthay apney rab ki paki aur hamd biyan ker
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, अपने रब का फैसला आने तक सब्र करो। तुम हमारी निगाह में हो. तुम जब उठो तो अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो
عَرَبِيوَمِنَ اللَّيلِ فَسَبِّحهُ وَإِدبارَ النُّجومِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा रात के कुछ भाग में फिर उसकी पवित्रता का वर्णन करें और सितारों के चले जाने के बाद भी।
Roman Urdu (Maududi)Raat ko bhi uski tasbeeh kiya karo aur sitare jab palat-te hain us waqt bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur raat ko bhi usski tasbeeh parh aur sitaron kay doobtay waqt bhi
Devnagri Urdu (Maududi)रात को भी उसकी तस्बीह किया करो और सितारे जब पलटते हैं हमें वक्त भी
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Surah 52: At-Tur (The Mountain)

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Surah 52: At-Tur (The Mountain)

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Surah 52: At-Tur (The Mountain)

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Surah 52: At-Tur (The Mountain)

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Surah 52: At-Tur (The Mountain)

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Surah 53: An-Najm (The Star)

Meccan🕐 Revelation #23📜 62 Verses🕮 Juz 1
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَالنَّجمِ إِذا هَوىٰ
हिन्दी (Al-Omari)क़सम है तारे की जब वह गिरे!
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai taare ki jabke woh guroob hua
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai sitarey ki jab woh girey
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है तारे की जबके वो गुरूब हुआ
عَرَبِيما ضَلَّ صاحِبُكُم وَما غَوىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारा साथी न तो रास्ते से भटका है और न ही गलत रास्ते पर चला है।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara rafeeq(companion) na bhatka hai na behka(deluded) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kay tumharey sathi ney na raah gum ki hai na woh terhi raah per hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा रफीक (साथी) ना भटका है ना बहका (भ्रमित) है
عَرَبِيوَما يَنطِقُ عَنِ الهَوىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और न वह अपनी इच्छा से बोलता है।
Roman Urdu (Maududi)Woh apni khwaish-e-nafs se nahin bolta
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na woh apni khuwaish say koi baat kehtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो अपनी ख्वाहिश-ए-नफ्स से नहीं बोलता
عَرَبِيإِن هُوَ إِلّا وَحيٌ يوحىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह तो केवल वह़्य है, जो उतारी जाती है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh to ek wahee (Inspiration /revelation) hai jo uspar nazil ki jati hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh to sirf wahi hai jo utari jaati hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये तो एक वही (प्रेरणा/रहस्योद्घाटन) है जो उसपर नाज़िल की जाती है
عَرَبِيعَلَّمَهُ شَديدُ القُوىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसे बहुत मज़ूबत शक्तियों वाले (फ़रिश्ते) ने सिखाया है।
Roman Urdu (Maududi)Usey zabardast quwwat waley ne taleem di hai
Roman Urdu (Junagarhi)Issay poori taqat walay farishtey ney sikhaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसे ज़बरदस्त क़ुव्वत वाले ने तालीम दी है
عَرَبِيذو مِرَّةٍ فَاستَوىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो बड़ा बलशाली है। फिर वह बुलंद हुआ (अपने असली रूप में प्रकट हुआ)।
Roman Urdu (Maududi)Jo bada sahib-e-hikmat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo zor -aawar hai phir woh seedha khara hogaya
Devnagri Urdu (Maududi)जो बड़ा साहिब-ए-हिकमत है
عَرَبِيوَهُوَ بِالأُفُقِ الأَعلىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जबकि वह आकाश के सबसे ऊँचे क्षितिज (पूर्वी किनारे) पर था।
Roman Urdu (Maududi)Woh saamne aa khada hua jabke woh balaii ufuq par tha(highest part of the horizon)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur woh buland aasmanon kay kinaron per tha
Devnagri Urdu (Maududi)वो सामने आ खड़ा हुआ जबके वो बलाई उफुक़ पार था (क्षितिज का सबसे ऊंचा हिस्सा)
عَرَبِيثُمَّ دَنا فَتَدَلّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर वह निकट हुआ और उतर आया।
Roman Urdu (Maududi)Phir kareeb aaya aur upar muallak ho gaya.(approached and descended)
Roman Urdu (Junagarhi)Phir nazdeek hua aur utar aaya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर करीब आया और ऊपर मुअल्लक हो गया।(निकला और उतरा)
عَرَبِيفَكانَ قابَ قَوسَينِ أَو أَدنىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर वह दो धनुषों की दूरी पर था, या उससे भी निकट।
Roman Urdu (Maududi)Yahan tak ke do kamano (bow lengths) ke barabar ya issey kuch kam faasla reh gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Pus woh do kamanon kay ba-qadar fasla reh gaya bulkay iss say bhi kum
Devnagri Urdu (Maududi)यहां तक ​​के दो कमानों (धनुष की लंबाई) के बराबर या इसे कुछ कम फासला रह गया
عَرَبِيفَأَوحىٰ إِلىٰ عَبدِهِ ما أَوحىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने अल्लाह के बंदे की ओर वह़्य की, जो भी वह़्य की।
Roman Urdu (Maududi)Tab usne Allah ke banday ko wahee (revelation) pahunchayi jo wahee (revelation) bhi usey pahunchani thi
Roman Urdu (Junagarhi)Pus uss ney ALLAH kay bandaey ko wahi phonchaee jo bhi phonchaee
Devnagri Urdu (Maududi)तब उसने अल्लाह के बंदे को वही (रहस्योद्घाटन) पाहुंचाई जो वही (रहस्योद्घाटन) भी उसे पाहुंचनी थी
عَرَبِيما كَذَبَ الفُؤادُ ما رَأىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)दिल ने झूठ नहीं बोला, जो कुछ उसने देखा।
Roman Urdu (Maududi)Nazar ne jo kuch dekha, dil ne usmein jhoot na milaya
Roman Urdu (Junagarhi)Dil ney jhoot nahi kaha jissay (payghumber ney) dekha
Devnagri Urdu (Maududi)नजर ने जो कुछ देखा, दिल ने हमें झूठ ना मिलाया
عَرَبِيأَفَتُمارونَهُ عَلىٰ ما يَرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर क्या तुम उससे उसपर झगड़ते हो, जो वह देखता है?
Roman Urdu (Maududi)Ab kya tum us cheez par ussey jhagadte ho jisey woh aankhon se dekhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum jhagra kertay ho iss per jo (payghumber) dekhtey hain
Devnagri Urdu (Maududi)अब क्या तुम उस चीज़ पर उसके झगड़े हो जिसे वो आँखों से देखता है
عَرَبِيوَلَقَد رَآهُ نَزلَةً أُخرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि, निश्चित रूप से उसने उसे एक और बार उतरते हुए भी देखा है।
Roman Urdu (Maududi)Aur ek martaba phir usney
Roman Urdu (Junagarhi)Issay to aik martaba aur bhi dekha tha
Devnagri Urdu (Maududi)और एक मरतबा फिर उसने
عَرَبِيعِندَ سِدرَةِ المُنتَهىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सिदरतुल-मुनतहा' के पास।
Roman Urdu (Maududi)Sidratul muntaha ke paas usko (Angel Gibriel) dekha
Roman Urdu (Junagarhi)Sidrat-ul-muntaha kay pass
Devnagri Urdu (Maududi)सिदरतुल मुंतहा के पास उसको (एंजेल जिब्रियल) देखा
عَرَبِيعِندَها جَنَّةُ المَأوىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसी के पास 'जन्नतुल मावा' (शाश्वत स्वर्ग) है।
Roman Urdu (Maududi)Jahan paas hi jannat-ul-maawa hai
Roman Urdu (Junagarhi)Issi kay pass jannat-ul-maawa hai
Devnagri Urdu (Maududi)जहां पास ही जन्नत-उल-मावा है
عَرَبِيإِذ يَغشَى السِّدرَةَ ما يَغشىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब सिदरा पर छा रहा था, जो कुछ छा रहा था।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt sidrah par chaa raha tha jo kuch ke chaa raha tha
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay sidrah ko chupaye leti thi woh cheez jo uss per cha rahi thi
Devnagri Urdu (Maududi)हमारा वक्त सिद्दरा पर चा रहा था जो कुछ कह रहा था
عَرَبِيما زاغَ البَصَرُ وَما طَغىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)न निगाह इधर-उधर हुई और न सीमा से आगे बढ़ी।
Roman Urdu (Maududi)Nigaah na chundhyayi (waver / swerve) na hadd se mutajawiz (transgress) hui
Roman Urdu (Junagarhi)Na to nigah behki na had say barhi
Devnagri Urdu (Maududi)निगाह ना चुन्धयी (वेवर / स्वर्व) ना हद से मुताजाविज (अपराध) हुई
عَرَبِيلَقَد رَأىٰ مِن آياتِ رَبِّهِ الكُبرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह उसने अपने पालनहार की कुछ बहुत बड़ी निशानियाँ देखीं।
Roman Urdu (Maududi)Aur usney apne Rubb ki badi badi nishaniyan dekhi
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan uss ney apney rab ki bari bari nishaniyon mein say baaz nishaniyan dekha len
Devnagri Urdu (Maududi)और उसने अपने रब की बड़ी बड़ी निशानियां देखी
عَرَبِيأَفَرَأَيتُمُ اللّاتَ وَالعُزّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर क्या तुमने लात और उज़्ज़ा को देखा।
Roman Urdu (Maududi)Ab zara batao , tumne kabhi is Laat aur is Uzza (names of pagan idols)
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum ney laat aur uzza ko dekha
Devnagri Urdu (Maududi)अब जरा बताओ, तुमने कभी इस लाट और इस उज्जा (बुतपरस्तों के नाम) मूर्तियां)
عَرَبِيوَمَناةَ الثّالِثَةَ الأُخرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा तीसरी एक और (मूर्ति) मनात को?
Roman Urdu (Maududi)Aur tisri (third) ek aur devi Manaat ki haqeeqat par kuch gaur bhi kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur manaat teesray pichlay ko
Devnagri Urdu (Maududi)और तीसरी (तीसरी) एक और देवी मानत की हकीकत पर कुछ गौर भी किया
عَرَبِيأَلَكُمُ الذَّكَرُ وَلَهُ الأُنثىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम्हारे लिए पुत्र हैं और उस (अल्लाह) के लिए पुत्रियाँ?
Roman Urdu (Maududi)Kya betay (sons) tumhare liye hain aur betiyan (daughters) khuda ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tumharay liye larkay aur ALLAH kay liye larkiya hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या बेटे (बेटे) तुम्हारे लिए हैं और बेटियां (बेटियां) खुदा के लिए
عَرَبِيتِلكَ إِذًا قِسمَةٌ ضيزىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तब तो यह बड़ा अन्यायपूर्ण बँटवारा है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh to badi dhandhli (unjust/unfair) ki taqseem hui
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh to abb bari beyinsafi ki taqseem hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये तो बड़ी धांधली (अन्याय/अनुचित) की तकसीम हुई
عَرَبِيإِن هِيَ إِلّا أَسماءٌ سَمَّيتُموها أَنتُم وَآباؤُكُم ما أَنزَلَ اللَّهُ بِها مِن سُلطانٍ ۚ إِن يَتَّبِعونَ إِلَّا الظَّنَّ وَما تَهوَى الأَنفُسُ ۖ وَلَقَد جاءَهُم مِن رَبِّهِمُ الهُدىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ये (मूर्तियाँ) कुछ नामों के सिवा कुछ भी नहीं हैं, जो तुमने तथा तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए हैं। अल्लाह ने इनका कोई प्रमाण नहीं उतारा है। ये लोग केवल अटकल के और उन चीज़ों के पीछे चल रहे हैं जो उनके दिल चाहते हैं। जबकि निःसंदेह उनके पास उनके पालनहार की ओर से मार्गदर्शन आ चुका है।
Roman Urdu (Maududi)Darasal yeh kuch nahin hain magar bas chandh naam jo tumne aur tumhare baap dada ne rakh liye hain. Allah ne inke liye koi sanad nazil nahin ki. Haqeeat yeh hai ke log mehez weham-o-gumaan ki pairvi kar rahey hain aur khwahishaat-e-nafs ke mureed bane huey hain, halanke unke Rubb ki taraf se unke paas hidayat aa chuki hai
Roman Urdu (Junagarhi)DAR-asal yeh sirf naam hain jo tum ney aur tumharay baap dadon ney inkay rakh liye hain Allah ney inki koi daleel nahi utaari yeh log to sirf atkal kay aur apni nafsaani khuwaishon kay peechay paray huye hain aur yaqeenan unkay rab ki taraf say unkay pass hidayat aa chuki hai
Devnagri Urdu (Maududi)दरसल ये कुछ नहीं हैं मगर बस चांद नाम जो तुमने और तुम्हारे बाप दादा ने रख लिया है। अल्लाह ने इनके लिए कोई सनद नाज़िल नहीं की। हक़ीक़त ये है के लोग महेज़ वीहम-ओ-गुमान की जोड़ी कर रहे हैं और ख़्वाहिशात-ए-नफ़्स के मुरीद बने हुए हैं, हालंके उनके रब की तरफ से उनके पास हिदायत आ चुकी है
عَرَبِيأَم لِلإِنسانِ ما تَمَنّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या मनुष्य को वह मिल जाएगा, जिसकी वह कामना करे?
Roman Urdu (Maududi)Kya insaan jo kuch chaahe uske liye wahi haqq hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya her shaks jo aarzoo keray ussay mayassar hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इंसान जो कुछ चाहे उसके लिए वही हक़ है
عَرَبِيفَلِلَّهِ الآخِرَةُ وَالأولىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(नहीं, ऐसा नहीं है) क्योंकि आख़िरत और दुनिया अल्लाह ही के अधिकार में है।
Roman Urdu (Maududi)Duniya aur aakhirat ka maalik to Allah hi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah hi kay hath hai yeh hajaan aur woh jahaan
Devnagri Urdu (Maududi)दुनिया और आख़िरत का मालिक तो अल्लाह ही है
عَرَبِي۞ وَكَم مِن مَلَكٍ فِي السَّماواتِ لا تُغني شَفاعَتُهُم شَيئًا إِلّا مِن بَعدِ أَن يَأذَنَ اللَّهُ لِمَن يَشاءُ وَيَرضىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और आकाशों में कितने ही फ़रिश्ते हैं कि उनकी सिफ़ारिश कुछ लाभ नहीं देती, परंतु इसके पश्चात कि अल्लाह अनुमति दे जिसके लिए चाहे तथा (जिसे) पसंद करे।
Roman Urdu (Maududi)Aasmano mein kitne hi farishte maujood hain, un ki shafaat (intercession) kuch bhi kaam nahin aa sakti jab tak ke Allah kisi aisey shaks ke haqq mein uski ijazat na dey jiske liye woh koi arzdaasht (plea) sunna chahe aur usko pasand karey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur boht say farishtay aasmanon mein hain jinki sifarish kuch bhi nafa nahi dey sakti magar yeh aur baat hai kay Allah taalaa apni khushi aur apni chahat say jioss kay liye chahye ijazat dey dey
Devnagri Urdu (Maududi)आसमानों में कितने ही फ़रिश्ते मौजुद हैं, उनकी शफ़ाअत (हिम्मत) कुछ भी काम नहीं आ सकती जब तक अल्लाह किसी ऐसे शक्स के हक़ में उसकी इजाज़त न दे जिसके लिए वो कोई अर्ज़दाश्त (याचिका) सुनना चाहे और उसको पसंद करे
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ لا يُؤمِنونَ بِالآخِرَةِ لَيُسَمّونَ المَلائِكَةَ تَسمِيَةَ الأُنثىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वे लोग जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, निश्चय वे फ़रिश्तों के नाम औरतों के नामों की तरह रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar jo log aakhirat ko nahin maante woh farishton ko deviyon (godess) ke naamo se mausoom karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jo log aakhirat per eman nahi rakhtay woh farishton ka zanana naam muqarrar kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जो लोग आख़िरत को नहीं मानते वो फरिश्तों को देवियों (देवी) के नामो से मौसम करते हैं
عَرَبِيوَما لَهُم بِهِ مِن عِلمٍ ۖ إِن يَتَّبِعونَ إِلَّا الظَّنَّ ۖ وَإِنَّ الظَّنَّ لا يُغني مِنَ الحَقِّ شَيئًا
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हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि उन्हें इसके बारे में कोई ज्ञान नहीं। वे केवल अनुमान के पीछे चल रहे हैं। और निःसंदेह अनुमान सच्चाई की तुलना में किसी काम नहीं आता।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke is maamle ka koi ilm (knowledge) unhein haasil nahin hai. Woh mehez gumaan ki pairvi kar rahey hain, aur gumaan haqq ki jagah kuch bhi kaam nahin de sakta
Roman Urdu (Junagarhi)Halankay unhen iss ka koi ilm nahi woh sirf apney gumaan kay peechay paray huye hain aur be-shak weham(o-guman) haq kay muqablay mein kuch kaam nahi deta
Devnagri Urdu (Maududi)हलांके इस मामले का कोई इल्म (ज्ञान) उन्हें हासिल नहीं है। वो महज़ गुमान की जोड़ी कर रहे हैं, और गुमान हक़ की जगह कुछ भी काम नहीं दे सकते
عَرَبِيفَأَعرِض عَن مَن تَوَلّىٰ عَن ذِكرِنا وَلَم يُرِد إِلَّا الحَياةَ الدُّنيا
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप उससे मुँह फेर लें, जिसने हमारी नसीहत से मुँह मोड़ लिया और जिसने दुनिया के जीवन के सिवा कुछ नहीं चाहा।
Roman Urdu (Maududi)Pas aey Nabi, jo shaks hamarey zikr se mooh pherta hai, aur duniya ki zindagi ke siwa jise kuch matloob nahin hai, usey uske haal par chodh do
Roman Urdu (Junagarhi)To app iss say mun mor len jo humari yaad say mun moray aur jinka iradah ba-juz zindagan-e-duniya kay aur kuch na ho
Devnagri Urdu (Maududi)पास ऐ नबी, जो शक्स हमारे ज़िक्र से मुह फेरता है, और दुनिया की जिंदगी के सिवा जिसे कुछ मतलब नहीं है, उसे उसके हाल पर छोड़ दो
عَرَبِيذٰلِكَ مَبلَغُهُم مِنَ العِلمِ ۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبيلِهِ وَهُوَ أَعلَمُ بِمَنِ اهتَدىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)यही उनके ज्ञान की सीमा है। निश्चित रूप से आपका पालनहार ही उसे अधिक जानने वाला है, जो उसके मार्ग से भटक गया और वही उसे भी ज़्यादा जानने वाला है, जो सीधे मार्ग पर चला।
Roman Urdu (Maududi)In logon ka mablag-e-ilm (utmost of their knowledge) bas yahi kuch hai, yeh baat tera Rubb hi zyada jaanta hai ke uske raaste se kaun bhatak gaya hai aur kaun seedhe raaste par hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi inn kay ilm ki inteha hai aap ka rab iss say khoob waqif hai jo iss ki raah say bhatak gaya hai aur wohi khoob waqif hai iss say bhi jo raah yafta hai
Devnagri Urdu (Maududi)इन लोगों का मबलाग-ए-इल्म (उनका अधिकतम ज्ञान) बस यही कुछ है, ये बात तेरा रब ही ज्यादा जानता है कि उसके रास्ते से कौन भटक गया है और कौन सीधे रास्ते पर है
عَرَبِيوَلِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ لِيَجزِيَ الَّذينَ أَساءوا بِما عَمِلوا وَيَجزِيَ الَّذينَ أَحسَنوا بِالحُسنَى
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, सब अल्लाह ही का है, ताकि वह बुराई करने वालों को उनके किए का बदला दे, और भलाई करने वालों को अच्छा बदला दे।
Roman Urdu (Maududi)Aur zameen aur aasmaano ki har cheez ka maalik Allah hi hai. Taa-ke Allah burayi karne waalon ko unke amal ka badla de aur un logon ko acchi jaza se nawaze jinhon ne neik rawayya ikhtiyar kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah hi ka hai jo kuch aasmanon mein hai. aur jo. kuch zamin mein hai takay Allah taalaa buray amal kerney walon ko unkay aemaal ka badla dey aur nek kaam kerney walon ko acha badla inayat farmaye
Devnagri Urdu (Maududi)और जमीन और आसमान की हर चीज का मालिक अल्लाह ही है। ता-के अल्लाह बुराई करने वालों को उनके अमल का बदला दे और उन लोगों को अच्छी जजा से नवाजे जिन्हों ने नीक रवैय्या इख्तियार किया है
عَرَبِيالَّذينَ يَجتَنِبونَ كَبائِرَ الإِثمِ وَالفَواحِشَ إِلَّا اللَّمَمَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ واسِعُ المَغفِرَةِ ۚ هُوَ أَعلَمُ بِكُم إِذ أَنشَأَكُم مِنَ الأَرضِ وَإِذ أَنتُم أَجِنَّةٌ في بُطونِ أُمَّهاتِكُم ۖ فَلا تُزَكّوا أَنفُسَكُم ۖ هُوَ أَعلَمُ بِمَنِ اتَّقىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग जो बड़े गुनाहों तथा अश्लील कार्यों से दूर रहते हैं, सिवाय कुछ छोटे गुनाहों के। निःसंदेह आपका पालनहार बड़ा क्षमा करने वाला है। वह तुम्हें अधिक जानने वाला है जब उसने तुम्हें धरती से पैदा किया और जब तुम अपनी माँओं के पेटों में बच्चे थे। अतः अपनी पवित्रता का दावा मत करो, वह उसे ज़्यादा जानने वाला है जो वास्तव में परहेज़गार है।
Roman Urdu (Maududi)Jo badey badey gunahon aur khule khule qabeeh afaal (shameful deeds) se parheiz karte hain, illa yeh ke kuch kasoor unse sarzad ho jaye. Bila shubhah tere Rubb ka daaman-e-magfirat bahut waseeh hai. Woh tumhein us waqt se khoob jaanta hai jab usne zameen se tumhein paida kiya, aur jab tum apni maaon (mothers) ke paiton (wombs) mein abhi janin (fetuses) hi thay. Pas apne nafs ki paaki ke daawe na karo. Wahi behtar jaanta hai ke waqai muttaqi kaun hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn logon ko jo baray gunahon say bachtay hain aur beyhayaee say bhi siwaye kissi chotay say gunah kay be-shak tera rab boht kushada maghfirat wala hai woh tumhen bakhoobi jaanta hai jabkay uss ney tumhen zamin say peda kiya aur jabkay tum apni maaon kay pet mein bachay thay pus tum apni pakeezgi aap biyan na kero wohi pehezgaron ko khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो बदे बदे गुनाहों और खुले खुले कबीह अफाल (शर्मनाक कृत्य) से परहेज़ करते हैं, इल्ला ये के कुछ कसूर उनसे सरज़ाद हो जाए। बिला शुभा तेरे रुब का दामन-ए-मगफिरत बहुत वासिह है। वो तुम्हें हमारे वक्त से खूब जानता है जब उसने जमीन से तुम्हें जन्म दिया, और जब तुम अपनी माँ के पेट में अभी भी जानिन (भ्रूण) हाय थाय। पस अपने नफ़्स की पाकी के दावे ना करो। वही बेहतर जानता है कि वक्ती मुत्तकी कौन है
عَرَبِيأَفَرَأَيتَ الَّذي تَوَلّىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर क्या आपने उसे देखा जिसने मुँह फेर लिया?
Roman Urdu (Maududi)Phir aey Nabi, tumne us shaks ko bhi dekha jo raah-e-khuda se phir gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya app ney ussay dekha jiss ney mun mor liya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर ऐ नबी, तुमने उस शक्स को भी देखा जो राह-ए-खुदा से फिर गया
عَرَبِيوَأَعطىٰ قَليلًا وَأَكدىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और थोड़ा-सा दिया फिर रोक लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur thoda sa de kar ruk gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur boht kuin diya aur hath kio rok liya
Devnagri Urdu (Maududi)और थोड़ा सा दे कर रुक गया
عَرَبِيأَعِندَهُ عِلمُ الغَيبِ فَهُوَ يَرىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उसके पास परोक्ष का ज्ञान है? अतः वह देख रहा है।
Roman Urdu (Maududi)Kya uske paas gaib ka ilm hai ke woh haqeeqat ko dekh raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya ussay ilm-e-ghaib hai kay woh (sab kuch) dekh raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या उसके पास गैब का इल्म है कि वो हकीकत को देख रहा है
عَرَبِيأَم لَم يُنَبَّأ بِما في صُحُفِ موسىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)या उसे उन बातों की सूचना नहीं दी गई, जो मूसा के ग्रंथों में हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya usey un baaton ki koi khabar nahin pahunchi jo moosa ke sahifon
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya ussay iss cheez ki khabar nahi di gaee jo musa (alh-e-salam) kay kay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या उसने उन बातों की कोई खबर नहीं पहुंची जो मूसा के सहीफों
عَرَبِيوَإِبراهيمَ الَّذي وَفّىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और इबराहीम के (ग्रंथों में), जिसने (कर्तव्य) पूरा किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur us Ibrahim ke sahifon mein bayan hui hai jisne wafa ka haqq ada kar diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wafadaar Ibrahim (alh-e-salam) kay saheefon mein tha
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारे इब्राहिम के सहीफों में बयां हुई है जिसने वफा का हक़ अदा कर दिया
عَرَبِيأَلّا تَزِرُ وازِرَةٌ وِزرَ أُخرىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)कि कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ke koi bojh uthane wala dusre ka bojh nahin uthayega
Roman Urdu (Junagarhi)Kay koi shaks kissi doosray ka bojh na uthayega
Devnagri Urdu (Maududi)ये के कोई बोझ उठाने वाला दूसरे का बोझ नहीं उठेगा
عَرَبِيوَأَن لَيسَ لِلإِنسانِ إِلّا ما سَعىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह कि मनुष्य के लिए केवल वही है, जिसके लिए उसने प्रयास किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke Insaan ke liye kuch nahin hai magar woh jiski usne saii(koshish /Strive) ki hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay her insan kay liye sirf wohi hai jiss ki kosish khud uss ney ki
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के इंसान के लिए कुछ नहीं है मगर वो जिसकी हमें सई (कोशिश/प्रयास) की है
عَرَبِيوَأَنَّ سَعيَهُ سَوفَ يُرىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह कि निश्चय उसका प्रयास शीघ्र ही देखा जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke uski saii (koshih/strive/effort) anqareeb dekhi jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay be-shak uss ki kosish unqareeb dekhi jayegi
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के उसकी सई (कोशिश/प्रयास) अनकरीब देखी जाएगी
عَرَبِيثُمَّ يُجزاهُ الجَزاءَ الأَوفىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसे उसका पूरा प्रतिफल दिया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur uski puri jaza use di jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Phir ussay poora poora badla diya jayega
Devnagri Urdu (Maududi)और उसकी पूरी जजा उसे दी जाएगी
عَرَبِيوَأَنَّ إِلىٰ رَبِّكَ المُنتَهىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह कि निःसंदेह आपके पालनहार ही की ओर अंततः पहुँचना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke aakhir-e-kaar pahunchna tere Rubb hi ke paas hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay aap kay rab hi ki taraf phonchna hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के आख़िर-ए-कार पहचानना तेरे रुब ही के पास है
عَرَبِيوَأَنَّهُ هُوَ أَضحَكَ وَأَبكىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यह कि निःसंदह वही है, जिसने हँसाया तथा रुलाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke usi ne hasaya aur usi ne rulaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay wohi hansata hai aur wohi rulata hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के उसी ने हास्य और उसी ने रुलाया
عَرَبِيوَأَنَّهُ هُوَ أَماتَ وَأَحيا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यह कि निःसंदेह वही है, जिसने मृत्यु दी और जीवन दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke usi ne maut di aur usi ne zindagi bakshi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay wohi maarta hai aur jilata hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के उसी ने मौत दी और उसी ने जिंदगी बख्शी
عَرَبِيوَأَنَّهُ خَلَقَ الزَّوجَينِ الذَّكَرَ وَالأُنثىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह कि निःसंदेह उसी ने दो प्रकार : नर और मादा पैदा किए।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke usi ne narr (male) aur maada (female) ka joda paida kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay ussi ney jora yani nar-o-mada peda kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के उसी ने नर (पुरुष) और मादा (महिला) का जोड़ा पैदा किया
عَرَبِيمِن نُطفَةٍ إِذا تُمنىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)एक बूँद से, जब वह टपकाई जाती है।
Roman Urdu (Maududi)Ek boond (sperm-drop) se jab woh tapkayi jati hai
Roman Urdu (Junagarhi)Nutfay say jabkay woh tapkaya jata hai
Devnagri Urdu (Maududi)एक बूंद (शुक्राणु-बूंद) से जब वो टपकती है
عَرَبِيوَأَنَّ عَلَيهِ النَّشأَةَ الأُخرىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह कि निःसंदेह उसी के ज़िम्मे दूसरी बार पैदा करना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke dusri zindagi bakshna bhi usi ke zimme hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay ussi kay zimmey doobara peda kerna hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के दूसरी जिंदगी बक्शना भी उसी के ज़िम्मे है
عَرَبِيوَأَنَّهُ هُوَ أَغنىٰ وَأَقنىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह कि निःसंदेह उसी ने धनी बनाया और कोष प्रदान किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke usi ne gani (enriches) kiya aur jaidad bakshi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay wohi maaldar banata hai aur sarmaya deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के उसे ने गनी (समृद्ध) किया और जयदाद बख्शी
عَرَبِيوَأَنَّهُ هُوَ رَبُّ الشِّعرىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह कि निःसंदेह वही ''शे'रा'' का रब है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke wahi sheraa (Sirius / mighty star) ka Rubb hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay wohi sheyara (sitaray) ka rab hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के वही शेरा (सीरियस) / ताकतवर सितारा) का रब है
عَرَبِيوَأَنَّهُ أَهلَكَ عادًا الأولىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह कि निःसंदेह उसी ने प्रथम 'आद' को विनष्ट किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke usi ne Aad-e-oola (people of Aad) ko halaak kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay ussi ney aad awwal ko halak kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के उसी ने अद-ए-ऊला (आद के लोगों) को हलाक किया
عَرَبِيوَثَمودَ فَما أَبقىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा समूद को, फिर (किसी को) बाक़ी न छोड़ा।
Roman Urdu (Maududi)Aur samood ko aisa mitaya ke unmein se kisi ko baaki na choda
Roman Urdu (Junagarhi)Aur samood ko bhi (jin men say) aik ko bhi baqi na rakha
Devnagri Urdu (Maududi)और समूद को ऐसा मिटाया के उनमें से किसी को बाकी ना चोदा
عَرَبِيوَقَومَ نوحٍ مِن قَبلُ ۖ إِنَّهُم كانوا هُم أَظلَمَ وَأَطغىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इनसे पहले नूह़ की जाति को। निःसंदेह वे बहुत ही ज़ालिम और बड़े ही सरकश थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur unse pehle qaum-e-Nooh ko tabaah kiya kyunke woh thay hi sakht zaalim-o-sarkash log
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss say pehlay Qom-e-nooh ko yaqeenan woh baray zalim aur sirkash thay
Devnagri Urdu (Maududi)और उसने पहले क़ौम-ए-नूह को तबाह किया क्योंकि वो वो था हाय साख्त ज़ालिम-ओ-सरकश लोग
عَرَبِيوَالمُؤتَفِكَةَ أَهوىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और उलट जाने वाली बस्ती को उसने उठाकर धरती पर दे मारा।
Roman Urdu (Maududi)Aur aundhi girne wali bastiyon ko utha phenka. (Qaum-e-Lut)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur motafiqa (shehar ya utti hui bastiyon ko) ussi ney ulat diya
Devnagri Urdu (Maududi)और औंधी गिरने वाली बस्तियों को उठा फेंका। (कौम-ए-लुत)
عَرَبِيفَغَشّاها ما غَشّىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तो ढाँप दिया उसे जिस चीज़ से ढाँपा।
Roman Urdu (Maududi)Phir chaa diya unpar woh kuch jo (tum jaante hi ho ke) kya chaa diya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir uss per cha diya jo chaya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर चाहा दिया उनपर वो कुछ जो (तुम जानते ही हो के) क्या चा दिया
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكَ تَتَمارىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तो (ऐ इनसान!) तू अपने पालनहार की ने'मतों में से किस-किस में संदेह करेगा?
Roman Urdu (Maududi)Pas aey mukhatib, apne Rubb ki kin kin niyamaton mein tu shakk karega
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aey insan tu apney rab ki kiss neimat kay baray mein jhagray ga
Devnagri Urdu (Maududi)पास ऐ मुखातिब, अपने रब की किन नियमों में तू शक्क करेगा
عَرَبِيهٰذا نَذيرٌ مِنَ النُّذُرِ الأولىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)यह पहले डराने वालों में से एक डराने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ek tambeeh (warning) hai pehle aaye huye tambihaat(warnings) mein se
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh (nabi) daranay walay hain pehlay daramay walon mensay
Devnagri Urdu (Maududi)ये एक तम्बीह (चेतावनी) है पहले आए हुए तंबीहात (चेतावनी) में से
عَرَبِيأَزِفَتِ الآزِفَةُ
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हिन्दी (Al-Omari)निकट आने वाली निकट आ गई।
Roman Urdu (Maududi)Aane wali ghadi qareeb aa lagi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aanay wali ghari qareeb aagaee hai
Devnagri Urdu (Maududi)आने वाली घड़ी करीब आ लगी है
عَرَبِيلَيسَ لَها مِن دونِ اللَّهِ كاشِفَةٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसे अल्लाह के सिवा कोई हटाने वाला नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Allah ke siwa koi usko hatane wala nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Allah kay siwa iss ka (waqt moayyen per khol) dikhaney wala koi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के सिवा कोई उसको हटाने वाला नहीं
عَرَبِيأَفَمِن هٰذَا الحَديثِ تَعجَبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या तुम इस बात पर आश्चर्य करते हो?
Roman Urdu (Maududi)Ab kya yahi woh baatein hain jinpar tum izhaar- e-taajub karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum kiya iss baat say tajjub kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)अब क्या यही वो बातें हैं जिनपर तुम इजहार-ए-ताजुब करते हो
عَرَبِيوَتَضحَكونَ وَلا تَبكونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा हँसते हो और रोते नहीं हो?
Roman Urdu (Maududi)Hanste(laugh) ho aur rotey (weep) nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hans rahey ho? rotay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)हंसते (हंसते) हो और रोते (रोते) नहीं हो
عَرَبِيوَأَنتُم سامِدونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम ग़ाफ़िल हो!
Roman Urdu (Maududi)Aur gaa (singing) bajaa kar inhein taalte ho
Roman Urdu (Junagarhi)(Bulkay) tum khel rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)और गा (गायन) बजा कर इन्हें टालते हो
☉ Sajda
عَرَبِيفَاسجُدوا لِلَّهِ وَاعبُدوا ۩
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः अल्लाह को सजदा करो और उसी की इबादत करो।
Roman Urdu (Maududi)Jhuk jao Allah ke aagey aur bandagi baja laaoo (ayat-e-sajda)
Roman Urdu (Junagarhi)Abb Allah kay samney sajday kero aur (ussi ki) ibadat kero
Devnagri Urdu (Maududi)झुक जाओ अल्लाह के आगे और बंदगी बजा लाओ (आयत-ए-सजदा)
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Surah 53: An-Najm (The Star)

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Surah 53: An-Najm (The Star)

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Surah 53: An-Najm (The Star)

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Surah 53: An-Najm (The Star)

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Surah 53: An-Najm (The Star)

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Surah 54: Al-Qamar (The Moon)

Meccan🕐 Revelation #37📜 55 Verses🕮 Juz 1
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عَرَبِياقتَرَبَتِ السّاعَةُ وَانشَقَّ القَمَرُ
हिन्दी (Al-Omari)क़ियामत बहुत निकट आ गई और चाँद फट गया।
Roman Urdu (Maududi)Qayamat ki ghadi kareeb aa gayi aur chaand phatt (split) gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Qayamat qareeb agaee aur chand phat gaya
Devnagri Urdu (Maududi)कयामत की घड़ी करीब आ गई और चांद फट गया
عَرَبِيوَإِن يَرَوا آيَةً يُعرِضوا وَيَقولوا سِحرٌ مُستَمِرٌّ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि वे कोई निशानी देखते हैं, तो मुँह फेर लेते हैं और कहते हैं कि (यह) एक जादू है जो समाप्त हो जाने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Magar in logon ka haal yeh hai ke khwa koi nishani dekh lein mooh moadh jaatey hain aur kehte hain yeh to chalta hua jaadu hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh agar koi mojzza dekhtay hain to mun pher letay hain aur kehdetay hain. kay yeh pehlay say chala aata hua jadoo hai
Devnagri Urdu (Maududi)मगर इन लोगों का हाल ये है कि ख्वा कोई निशानी देख लें मुंह मोड़ लेते हैं और कहते हैं ये तो चलता हुआ जादू है
عَرَبِيوَكَذَّبوا وَاتَّبَعوا أَهواءَهُم ۚ وَكُلُّ أَمرٍ مُستَقِرٌّ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने झुठलाया और अपनी इच्छाओं का पालन किया और प्रत्येक कार्य का एक निश्चित समय है।
Roman Urdu (Maududi)Inhon ne (isko bhi) jhutla diya aur apni khwahishat-e-nafs hi ki pairwi ki.Har maamlay ko Aakhir-e-kaar ek anjaam par pahunch kar rehna hai
Roman Urdu (Junagarhi)inhon ney jhutlaya aur apni khuwaishon ki pairwi ki aur her kaam theray huye waqt per muqarrar hai
Devnagri Urdu (Maududi)इन्हों ने (इसको भी) झूठला दिया और अपनी ख्वाहिश-ए-नफ़्स ही की जोड़ी है। हर मामले को आख़िर-ए-कार एक अंजाम पर पहुंचाना है
عَرَبِيوَلَقَد جاءَهُم مِنَ الأَنباءِ ما فيهِ مُزدَجَرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह उनके पास ऐसी सूचनाएँ आ चुकी हैं, जिनमें डाँटडपट है।
Roman Urdu (Maududi)In logon ke saamne (pichle qaumon ke) woh halaat aa chuke hain jinmein sarkashi se baaz rakhne ke liye kafi samaan-e-ibrat hai
Roman Urdu (Junagarhi)yaqeenan inn kay pass woh khabren aa chuki hain jin mein dant dapat (ki naseehat) hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोगों के सामने (पिछले क़ौमों के) वो हालात आ चुके हैं जिनमें सरकशी से बाज़ रखने के लिए काफी सामान-ए-इब्रत है
عَرَبِيحِكمَةٌ بالِغَةٌ ۖ فَما تُغنِ النُّذُرُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)पूर्णतया हिकमत है, फिर भी डरानेवाली चीज़ें काम नहीं आतीं।
Roman Urdu (Maududi)Aur aisi hikmat jo nasihat ke maqsad ko ba-darja-e-atam (consummate wisdom) pura karti hain magar tambihat(warnings) in par kaargar nahin hoti
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kamil aqal ki baat hai lekin in darawni baaton ney bhi kuch faeedah na diya
Devnagri Urdu (Maududi)और ऐसी हिकमत जो हिदायत के मक़सद को बा-दरजा-ए-आतम (पूर्ण ज्ञान) पूरा करती है मगर तंबीहत (चेतावनी) इन पर कारगर नहीं होती
عَرَبِيفَتَوَلَّ عَنهُم ۘ يَومَ يَدعُ الدّاعِ إِلىٰ شَيءٍ نُكُرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः आप उनसे मुँह फेर लें, जिस दिन पुकारने वाला एक अप्रिय चीज़ की ओर पुकारेगा।
Roman Urdu (Maududi)Pas aey Nabi, insey rukh pher lo. Jis roz pukarne wala ek sakht nagawaar cheez ki taraf pukarega
Roman Urdu (Junagarhi)Pus (aey nabi) tum inn say aeyraaz kero jiss din aik pukarnay wala nagawaar cheez ki taraf pukaray ga
Devnagri Urdu (Maududi)पस ऐ नबी, इनसे रुख फेर लो। जिस रोज पुकारने वाला एक सख्त नागावार चीज की तरफ पुकारेगा
عَرَبِيخُشَّعًا أَبصارُهُم يَخرُجونَ مِنَ الأَجداثِ كَأَنَّهُم جَرادٌ مُنتَشِرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनकी आँखें झुकी होंगी। वे कब्रों से ऐसे निकलेंगे, जैसे वे बिखरी हुई टिड्डियाँ हों।
Roman Urdu (Maududi)Log sehmi hui (down-cast) nigaahon ke saath apni qabraon se is tarah niklenge goya woh bikhri huyi tiddiyan (locusts) hain
Roman Urdu (Junagarhi)yeh jhuki aankhon qabron say iss tarah nikal kharay hongay kay goya woh phela hua taddi dal hai
Devnagri Urdu (Maududi)लोग सहमत हुए (डाउन-कास्ट) निगाहों के साथ अपनी कब्रों से इस तरह निकलेंगे गोया वो बिखरी हुई टिड्डियां (टिड्डियां) हैं
عَرَبِيمُهطِعينَ إِلَى الدّاعِ ۖ يَقولُ الكافِرونَ هٰذا يَومٌ عَسِرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे बुलाने वाले की ओर तेज़ी से भाग रहे होंगे। काफ़िर कहेंगे : यह बड़ा कठिन दिन है।
Roman Urdu (Maududi)Pukarne wale ki taraf daudey jaa rahey hongey Aur wahi munkireen (jo duniya mein iska inkar karte thay)us waqt kahenge ke yeh din to bada kathin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pukarnay walay ki taraf dortay hongay aur kafir kahengey yeh din to boht sakht hai
Devnagri Urdu (Maududi)पुकारने वाले की तरफ दौड़े जा रहेंगे होंगे और वही मुनकिरेन (जो दुनिया में इसका इन्कार करते थे)उसे वक्त कहेंगे के ये दिन तो बड़ा कहिन है
عَرَبِي۞ كَذَّبَت قَبلَهُم قَومُ نوحٍ فَكَذَّبوا عَبدَنا وَقالوا مَجنونٌ وَازدُجِرَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)इनसे पहले नूह़ की जाति ने झुठलाया। तो उन्होंने हमारे बंदे को झुठलाया और कहा कि वह पागल है और उसे झिड़क दिया गया।
Roman Urdu (Maududi)Insey pehle Nooh ki qaum jhutla chuki hai. Unhon ne hamare bandey ko jhoota karar diya aur kaha ke yeh deewana hai, aur woh buri tarah jhidka (rebuffed) gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say pehlay qom-e-nooh ney bhi humaray banday ko jhulaya tha aur deewana batla ker jhirak diya gaya tha
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पहले नूह की क़ौम झूठला चुकी है। उनहों ने हमारे बंदे को झूठा करार दिया और कहा के ये दीवाना है, और वो बुरी तरह झिडका गया
عَرَبِيفَدَعا رَبَّهُ أَنّي مَغلوبٌ فَانتَصِر
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो उसने अपने पालनहार को पुकारा कि निःसंदेह मैं विवश हूँ, अतः तू बदला ले।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir-e-kaar usne apne Rubb ko pukara ke “main magloob ho chuka , ab tu inse inteqam le”
Roman Urdu (Junagarhi)Pus uss ney apney rab say dua ki kay mein beybus hun tu meri madad ker
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर-ए-कार उसने अपने रुब को पुकारा के "मैं मगलूब हो चूका, अब तू इनसे इंतकाम ले"
عَرَبِيفَفَتَحنا أَبوابَ السَّماءِ بِماءٍ مُنهَمِرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो हमने ज़ोर से बरसने वाले पानी के साथ आकाश के द्वार खोल दिए।
Roman Urdu (Maududi)Tab humne mausla-dhaar baarish se aasmaan ke darwaze khol diye aur zameen ko phaad kar chasmon mein tabdeel kar diya
Roman Urdu (Junagarhi)Pus hum ney aasman kay darwazon ko zor kay menh say khol diya
Devnagri Urdu (Maududi)तब हमने मौसला-धार बारिश से आसमान के दरवाज़े खोल दिये और ज़मीन को फाड़ कर चश्में में तबदील कर दिया
عَرَبِيوَفَجَّرنَا الأَرضَ عُيونًا فَالتَقَى الماءُ عَلىٰ أَمرٍ قَد قُدِرَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने धरती को स्रोतों के साथ फाड़ दिया, तो सारा जल एक साथ मिल गया, उस कार्य के लिए जो नियत हो चुका था।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh saara paani us kaam ko pura karne ke liye mil gaya jo mukaddar ho chuka tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur zamin say chashmon ko jaari kerdiya pus uss kaam kay liye jo muqaddar kiya gaya tha (dono) paani jama hogaye
Devnagri Urdu (Maududi)और ये सारा पानी उस काम को पूरा करने के लिए मिल गया जो मुकद्दर हो चूका था
عَرَبِيوَحَمَلناهُ عَلىٰ ذاتِ أَلواحٍ وَدُسُرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसे तख़्तों और कीलों वाली (नाव) पर सवार कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur Nooh ko humne ek takhaton(planks) aur keelon (nails) wali par sawar kar diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney issay takhton aur keelon wali (kashti) per sawar kerliya
Devnagri Urdu (Maududi)और नूह को हमने एक तख्त (तख़्त) और कीलों (कीलों) वाली पर सवार कर दिया
عَرَبِيتَجري بِأَعيُنِنا جَزاءً لِمَن كانَ كُفِرَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो हमारी आँखों के सामने चल रही थी, उसका बदला लेने के लिए जिसका इनकार किया गया था।
Roman Urdu (Maududi)Jo hamari nigrani mein chal rahi thi .yeh tha badla us shaks ki khatir jiski na-qadri ki gayi thi
Roman Urdu (Junagarhi)Jo humari aankhon kay samnay chal rahi thi badla uss ki taraf say jiss ka kufur kiya gaya tha
Devnagri Urdu (Maududi)जो हमारी निगरानी में चल रही थी। ये था बदला उस शक्स की खातिर जिसकी ना-कादरी की गई थी
عَرَبِيوَلَقَد تَرَكناها آيَةً فَهَل مِن مُدَّكِرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने उसे एक निशानी बनाकर छोड़ा, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?
Roman Urdu (Maududi)Us kashti ko humne ek nishani bana kar chodh diya, phir koi hai nasihat qabool karne wala
Roman Urdu (Junagarhi)Aur be-shak hum ney iss waqaey ko nishani bana ker baqi rakha pus koi hai naseehat hasil kerney wala
Devnagri Urdu (Maududi)उस कश्ती को हमने एक निशानी बना कर छोड़ दिया, फिर कोई है हिदायत कबूल करने वाला
عَرَبِيفَكَيفَ كانَ عَذابي وَنُذُرِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?
Roman Urdu (Maududi)Dekhlo, kaisa tha mera azaab aur kaisi thi meri tambihaat (warnings)
Roman Urdu (Junagarhi)Batao mera azab aur meri daraney wali baaten kaisi rahen
Devnagri Urdu (Maududi)देखलो, कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तम्बीहत (चेतावनी)
عَرَبِيوَلَقَد يَسَّرنَا القُرآنَ لِلذِّكرِ فَهَل مِن مُدَّكِرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?
Roman Urdu (Maududi)Humne is Quran ko nasihat ke liye aasaan zariya bana diya hai, phir kya hai koi nasihat qabool karne wala
Roman Urdu (Junagarhi)Aur be-shak hum ney quran ko samajhney kay liye aasan kerdiya hai pus kiya koi naseehat hasil kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने कुरान को हिदायत के लिए आसान ज़रिया बना दिया है, फिर क्या है कोई हिदायत क़बूल करने वाला
عَرَبِيكَذَّبَت عادٌ فَكَيفَ كانَ عَذابي وَنُذُرِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आद ने (भी) झुठलाया। तो कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?
Roman Urdu (Maududi)Aad ne jhutlaya, to dekhlo ke kaisa tha mera azaab aur kaisi thi meri tambihaat (warnings)
Roman Urdu (Junagarhi)Qom-e-aad ney bhi jhutlaya pus kaisa hua mera azab aur meri daraney wali baten
Devnagri Urdu (Maududi)आद ने झुटलाया, तो देखलो के कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तंबीहाट (चेतावनी)
عَرَبِيإِنّا أَرسَلنا عَلَيهِم ريحًا صَرصَرًا في يَومِ نَحسٍ مُستَمِرٍّ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदहे हमने एक निरंतर अशुभ दिन में उनपर एक तेज़ ठंडी हवा भेज दी।
Roman Urdu (Maududi)Humne ek paiham nahusat (unremitting misfortune) ke din sakht toofani hawa unpar bhej di jo logon ko utha utha kar is tarah phenk rahi thi
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney unn per tez-o-tund musalsal chalney wali hawa aik peham manhoos din mein bhej di
Devnagri Urdu (Maududi)हमने एक पैहम नहुसत (निरंतर दुर्भाग्य) के दिन साख तूफानी हवा उन्पर भेज दी जो लोगों को उठा उठा कर इस तरह फेंक रही थी
عَرَبِيتَنزِعُ النّاسَ كَأَنَّهُم أَعجازُ نَخلٍ مُنقَعِرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह लोगों को ऐसे उखाड़ फेंकती थी, जैसे वे उखड़े हुए खजूर के तने हों।
Roman Urdu (Maududi)Jaise woh jadd (roots) se ukhade huey khajoor ke taney (trunks) hon
Roman Urdu (Junagarhi)Jo logon ko utha utha ker dey patakhti thi goya kay woh jarr say katey huye khajoor kay taney hain
Devnagri Urdu (Maududi)जैसे वो जड़ (जड़ें) से उखाड़े हुए खजूर के तनी (चड्डी) माननीय
عَرَبِيفَكَيفَ كانَ عَذابي وَنُذُرِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?
Roman Urdu (Maududi)Pas dekhlo ke kaisa tha mera azaab aur kaisi thi meri tambihaat (warnings)
Roman Urdu (Junagarhi)Pus kaisi rahi meri saza aur mera darana
Devnagri Urdu (Maududi)पास देखो के कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तम्बीहत (चेतावनी)
عَرَبِيوَلَقَد يَسَّرنَا القُرآنَ لِلذِّكرِ فَهَل مِن مُدَّكِرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?
Roman Urdu (Maududi)Humne is Quran ko nasihat ke liye aasaan zariya bana diya hai, phir kya hai koi nasihat qabool karne wala
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney quran ko naseehat kay liye aasan kerdia hai pus kiya koi hai naseehat hasil kerney wala
Devnagri Urdu (Maududi)हमने कुरान को हिदायत के लिए आसाना ज़रिया बना दिया है, फिर क्या है कोई हिदायत क़बूल करने वाला
عَرَبِيكَذَّبَت ثَمودُ بِالنُّذُرِ
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हिन्दी (Al-Omari)समूद ने डराने वालों को झुठलाया।
Roman Urdu (Maududi)Samood ne tambihaat ko jhutlaya
Roman Urdu (Junagarhi)Qom-e-samood ney daraney walon ko jhutlaya
Devnagri Urdu (Maududi)समूद ने तम्बीहत को झुटलाया
عَرَبِيفَقالوا أَبَشَرًا مِنّا واحِدًا نَتَّبِعُهُ إِنّا إِذًا لَفي ضَلالٍ وَسُعُرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्होंने कहा : क्या हम अपने ही में से एक आदमी का अनुसरण करें? निश्चय ही हम उस समय बड़ी गुमराही और बावलेपन में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur kehne lagey “Ek akela aadmi jo hum hi mein se hai kya ab hum uske peechey chalein? Iska ittibaah hum qabool karlein to iske maani yeh hongey ke hum behak gaye hain aur hamari aqal maari gayi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kehney lagay kiya humi mein say aik shaks ki hum farmanbardaari kerney lagen? tab to hum yaqeenan ghalati aur deewangi mein paray huye hongey
Devnagri Urdu (Maududi)और कहने लगे "एक अकेला आदमी जो हम ही में से है क्या अब हम उसके पीछे चलें? इसका इत्तिबाह हम कबूल करें तो इसके मानी ये होंगे के हम बहक गए हैं और हमारी अक्ल मारी गई है
عَرَبِيأَأُلقِيَ الذِّكرُ عَلَيهِ مِن بَينِنا بَل هُوَ كَذّابٌ أَشِرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या यह उपदेश हमारे बीच में से उसी पर उतारा गया है? बल्कि वह बड़ा झूठा है, अहंकारी है।
Roman Urdu (Maududi)Kya hamare darmiyan bas yahi ek shaks tha jispar khuda ka zikr nazil kiya gaya? nahin, balke yeh parle darje ka jhoota aur bar-khud galat (insolent liar)hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya humaray sab kay darmiyan sirf issi per wahi utaari gaee nahi bulkay woh jhoota shekhi khor hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हमारे दरमियान बस यहीं एक शक था जिसपर खुदा का जिक्र नाज़िल किया गया? नहीं, बलके ये पारले दर्जे का झूठा और बार-खुद गलत है”
عَرَبِيسَيَعلَمونَ غَدًا مَنِ الكَذّابُ الأَشِرُ
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हिन्दी (Al-Omari)शीघ्र ही वे कल जान लेंगे कि बहुत झूठा, अहंकारी कौन है?
Roman Urdu (Maududi)(Humne apne paigambar se kaha) “ Kal hi inhein maaloom hua jata hai ke kaun parle darje ka jhoota aur bar khud galat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Abb sab jaan lengey kal ko kay kon jhoota aur shekhi khor tha
Devnagri Urdu (Maududi)(हमने अपने पैगंबर से कहा) “कल ही इन्हें मालूम हुआ है के कौन पारले दर्जे का झूठा और बार खुद गलत है
عَرَبِيإِنّا مُرسِلُو النّاقَةِ فِتنَةً لَهُم فَارتَقِبهُم وَاصطَبِر
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हम यह ऊँटनी उनकी परीक्षा के लिए भेजने वाले हैं। अतः उनकी प्रतीक्षा करो और ख़ूब धैर्य रखो।
Roman Urdu (Maududi)Hum ountni (she-camel) ko inke liye fitna bana kar bhej rahe hain, ab zara sabr ke saath dekh ke inka kya anjaam hota hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak hum unki aazmaeesh kay liye untni bhejen gey pus (aey saleh) tu inka muntazir reh aur sabar ker
Devnagri Urdu (Maududi)हम ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को इनके लिए फिटना बना कर भेज रहे हैं, अब जरा सब्र के साथ देख के इनका क्या अंजाम होता है
عَرَبِيوَنَبِّئهُم أَنَّ الماءَ قِسمَةٌ بَينَهُم ۖ كُلُّ شِربٍ مُحتَضَرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्हें सूचित कर दो कि पानी उनके बीच बाँट दिया गया है। पीने की प्रत्येक बारी पर उपस्थित हुआ जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Inko jata de ke paani inke aur ountni(she-camel) ke darmiyaan takseem hoga aur har ek apni baari ke din paani par aayega”
Roman Urdu (Junagarhi)Han enhen khabar kerdey kay paani in mein taqseem shuda hai her aik apni baari per hazir hoga
Devnagri Urdu (Maududi)इनको जता दे के पानी इनके और ऊंटनी (वह-ऊंटनी) के दरमियान तकसीम होगा और हर एक अपनी बारी के दिन पानी पर आएगा”
عَرَبِيفَنادَوا صاحِبَهُم فَتَعاطىٰ فَعَقَرَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उन्होंने अपने साथी को पुकारा। सो उसने (उसे) पकड़ा और उसका वध कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir-e-kaar un logon ne apne aadmi ko pukara aur usne is kaam ka beda uthaya aur ountni (she-camel) ko maar dala
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney apney sathi ko awaz di jiss ney (untni per) waar kiya aur (uss ki) kochen kaat den
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर-ए-कार उन लोगों ने अपने आदमी को पुकारा और उसने इस काम का बेड़ा उठाया और ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को मार डाला
عَرَبِيفَكَيفَ كانَ عَذابي وَنُذُرِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर कैसी थी मेरी यातना तथा मेरा डराना?
Roman Urdu (Maududi)Phir dekh lo ke kaisa tha mera azaab aur kaisi thi meri tambeehat (warnings)
Roman Urdu (Junagarhi)Pus kiyon ker hua mera azab aur mera darana
Devnagri Urdu (Maududi)फिर देख लो के कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तम्बीहत (चेतावनी)
عَرَبِيإِنّا أَرسَلنا عَلَيهِم صَيحَةً واحِدَةً فَكانوا كَهَشيمِ المُحتَظِرِ
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हिन्दी (Al-Omari)हमने उनपर एक ही चिंघाड़ भेजी, तो वे बाड़ लगाने वाले की रौंदी हुई बाड़ की तरह हो गए।
Roman Urdu (Maududi)Humne unpar bas ek hi dhamaka chodha aur woh baade wale ki rondhi hui baad ke taraah bhus ho kar reh gaya. (Lo! We sent upon them one Shout, and they became as the dry twigs (rejected by) the builder of a cattle-fold
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney unn per aik cheekh bheji pus aisay hogaye jaisay baar bananay walay ki rondhi hui ghaas
Devnagri Urdu (Maududi)हमने बस एक ही धमाका छोड़ा और वो बड़े वाले की रोंधी हुई बाद के तरह भुस हो कर रह गया। (लो! हमने उन पर एक चिल्लाहट भेजी, और वे मवेशियों के बाड़े के निर्माता द्वारा (अस्वीकृत) सूखी टहनियों की तरह हो गए
عَرَبِيوَلَقَد يَسَّرنَا القُرآنَ لِلذِّكرِ فَهَل مِن مُدَّكِرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?
Roman Urdu (Maududi)Humne is Quran ko nasihat ke liye aasaan zariya bana diya hai, ab hai koi nasihat qabool karne wala
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney naseehat kay liye quran ko aasan kerdia hai pus kiya hai koi jo naseehat qabool keray
Devnagri Urdu (Maududi)हमने कुरान को हिदायत के लिए आसान ज़रिया बना दिया है, अब है कोई हिदायत क़बूल करने वाला
عَرَبِيكَذَّبَت قَومُ لوطٍ بِالنُّذُرِ
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हिन्दी (Al-Omari)लूत की जाति ने डराने वालों को झुठला दिया।
Roman Urdu (Maududi)Lut ki qaum ne tambihat ko jhutlaya
Roman Urdu (Junagarhi)Qom-e-Loot ney bhi daraney walon ki takzeeb ki
Devnagri Urdu (Maududi)लूट की क़ौम ने तंबीहत को झुटलाया
عَرَبِيإِنّا أَرسَلنا عَلَيهِم حاصِبًا إِلّا آلَ لوطٍ ۖ نَجَّيناهُم بِسَحَرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने उनपर पत्थर बरसाने वाली एक हवा भेजी, सिवाय लूत के घरवालों के। उन्हें हमने भोर से कुछ पहले ही बचा लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur humne pattharao karne wali hawa is par bhej di. Sirf Lut ke ghar wale ussey mehfooz rahe
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak hum ney unn per pathar barsaney wali hawa bheji siwaye loot(alh-e-salam) kay ghar walon kay waqt nijat deydi
Devnagri Urdu (Maududi)और हमने पत्थरो करने वाली हवा इस पर भेज दी। सिर्फ लुट के घर वाले उसे महफूज रहे
عَرَبِينِعمَةً مِن عِندِنا ۚ كَذٰلِكَ نَجزي مَن شَكَرَ
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हिन्दी (Al-Omari)अपनी ओर से (विशेष) अनुग्रह करते हुए। इसी प्रकार हम उसे बदला देते हैं, जो धन्यवाद करे।
Roman Urdu (Maududi)Unko humne apne fazl se raat ke pichle pehar bacha kar nikal diya. Yeh jaza dete hai hum har us shaks ko jo shukar guzar hota hai
Roman Urdu (Junagarhi)Apney ehsan say her her shukarguzaar ko hum issi tarah badla detay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उनको हमने अपने फजल से रात के पिछले पीहर बच्चा कर निकाल दिया। क़ौम के लोगों को हमारी पकड़ से ख़बरदार किया मगर वो सारी तंबीहत को मशकूक (संदिग्ध) समझ कर बातों में उड़ते रहे
عَرَبِيوَلَقَد أَنذَرَهُم بَطشَتَنا فَتَمارَوا بِالنُّذُرِ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह उसने उन्हें हमारी पकड़ से डराया, तो उन्होंने डराने में संदेह किया।
Roman Urdu (Maududi)Lut ne apni qaum ke logon ko hamari pakad se khabardaar kiya magar woh saari tambihat ko mashkuk (doubtful) samajh kar baaton mein udate rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan loot (alh-e-salam) ney unhen humari pakar say daraya tha lekinunhon ney daraney walon kay baray mein (shak-o-shuba aur) jhagra kiya
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيوَلَقَد راوَدوهُ عَن ضَيفِهِ فَطَمَسنا أَعيُنَهُم فَذوقوا عَذابي وَنُذُرِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह उन्होंने उसे उसके अतिथियों से बहकाने का प्रयास किया, तो हमने उनकी आँखें मेट दीं। अतः मेरी यातना और मेरी चेतावनी का मज़ा चखो।
Roman Urdu (Maududi)Phir unhon ne usey apne mehmano ki hifazat se baaz rakhne ki koshish ki. Aakhir-e-kaar humne unki aankhein moond-di (blinded), ke chakkho ab mera azaab aur meri tambihaat ka maza
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn loot (alh-e-salam) ko unkay mehmanon kay baray mein phuslaya pus hum ney unki aankhen andhi kerden (aur kehdia) mera azab aur mera darana chakho
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उन्होन ने उसे अपने महमानो की हिफ़ाज़त से बाज़ रखने की कोशिश की। आख़िर-ए-कार हमने उनकी आंखें मूंद-दी (अंधा), के चक्खो अब मेरा अज़ाब और मेरी तम्बीहात का मज़ा
عَرَبِيوَلَقَد صَبَّحَهُم بُكرَةً عَذابٌ مُستَقِرٌّ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह सुबह सवेरे ही उनपर एक न टलने वाली यातना आ पहुँची।
Roman Urdu (Maududi)Subah sawerey hi ek atal azaab ne unko aa liya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqeeni baat hai kay unhen subah saweray hi aik jagah pakarney walay muqarra azab ney ghaarat kerdia
Devnagri Urdu (Maududi)सुबह सवेरे ही एक अटल अज़ाब ने उनको आ लिया
عَرَبِيفَذوقوا عَذابي وَنُذُرِ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः मेरे अज़ाब और मेरे डराने का स्वाद चखो।
Roman Urdu (Maududi)Chakkho mazaa ab mere azaab ka aur meri tambihaat ka
Roman Urdu (Junagarhi)Pus meray azab aur meray darawey ka maza chakho
Devnagri Urdu (Maududi)चक्खो मजा अब मेरे अज़ाब का और मेरी तम्बीहात का
عَرَبِيوَلَقَد يَسَّرنَا القُرآنَ لِلذِّكرِ فَهَل مِن مُدَّكِرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने क़ुरआन को उपदेश ग्रहण करने के लिए आसान बना दिया, तो क्या है कोई उपदेश ग्रहण करने वाला?
Roman Urdu (Maududi)Humne is Quran ko nasihat ke liye aasaan zariya bana diya hai, pas hai koi nasihat qabool karne wala
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqeenan hum ney quran ko Pind-o-waaz kay liye aasan kerdia hai pus kiya koi hai naseehat pakarney wala
Devnagri Urdu (Maududi)हमने कुरान को है हिदायत के लिए आसान ज़रिया बना दिया है, पास है कोई हिदायत कबूल करने वाला
عَرَبِيوَلَقَد جاءَ آلَ فِرعَونَ النُّذُرُ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह फ़िरऔनियों के पास डराने वाले आए।
Roman Urdu (Maududi)Aur aal-e-Firoun ke paas bhi tambihaat aayi thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur firaoniyon kay pass bhi daraney walay aaye
Devnagri Urdu (Maududi)और आल-ए-फिरौं के पास भी तम्बीहत आई थी
عَرَبِيكَذَّبوا بِآياتِنا كُلِّها فَأَخَذناهُم أَخذَ عَزيزٍ مُقتَدِرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने हमारी सब निशानियों को झुठला दिया, तो हमने उन्हें पकड़ लिया, जिस प्रकार सब पर प्रभुत्वशाली, सबसे शक्तिशाली पकड़ता है।
Roman Urdu (Maududi)Magar unhon ne hamari saari nishaniyon ko jhutla diya. Aakhir ko humne unhein pakda jis taraah koi zabardast qudrat wala pakadta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unhon ney humari tamamnishaniyan jhutlayen pus hum ney unhen baray ghalib qavi pakarney walay ki tarah pakar liya
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उनहों ने हमारी सारी निशानियों को झुटला दिया। आख़िर को हमने उन्हें पकड़ा जिसकी तरह कोई ज़बरदस्त क़ुदरत वाला पकड़ा है
عَرَبِيأَكُفّارُكُم خَيرٌ مِن أُولٰئِكُم أَم لَكُم بَراءَةٌ فِي الزُّبُرِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम्हारे काफ़िर उन लोगों से बेहतर हैं, या तुम्हारे लिए (पहली) पुस्कतों में कोई मुक्ति लिखी हुई है?
Roman Urdu (Maududi)Kya tumhare kuffar kuch un logon se behtar hain? Ya aasmani kitaabon mein tumhare liye koi maafi likhi hui hai
Roman Urdu (Junagarhi)(Aey qureshiyo!) kiya tumharay kafir inn kafiron say kuch behtar hain? ya tumharay liye agli kitabon mein chutkara likha hua hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम्हारे कुफ़र कुछ उन लोगों से बेहतर हैं? या आसमानी किताबों में तुम्हारे लिए कोई माफ़ी लिखी हुई है
عَرَبِيأَم يَقولونَ نَحنُ جَميعٌ مُنتَصِرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)या वे कहते हैं कि हम एक जत्था हैं, जो बदला लेकर रहने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Ya in logon ka kehna yeh hai ke hum ek mazboot jattha (jamaat) hain, apna bachao kar lengey
Roman Urdu (Junagarhi)Ya yeh kehtay hain kay hum ghalba panay wali janat hain
Devnagri Urdu (Maududi)हां लोगों का कहना ये है कि हम एक मज़बूत जत्था (जमात) हैं, अपना बचाव कर लेंगे
عَرَبِيسَيُهزَمُ الجَمعُ وَيُوَلّونَ الدُّبُرَ
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हिन्दी (Al-Omari)शीध्र ही यह समूह पराजित कर दिया जाएगा और ये लोग पीठ दिखाकर भागेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Ankareeb yeh jattha(jamaat) shikhast kha jayega aur yeh sab peeth pheir kar bhaagte nazar aayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Unqareeb yeh jamat shikast di jayegi aur peeth deyker bhagey gi
Devnagri Urdu (Maududi)अंकरीब ये जत्था (जमात) सीख खा जाएगा और ये सब पीठ फिर कर भागते नजर आएंगे
عَرَبِيبَلِ السّاعَةُ مَوعِدُهُم وَالسّاعَةُ أَدهىٰ وَأَمَرُّ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि क़यामत ही उनके वादे का समय है और क़ियामत कहीं बड़ी विपत्ति और अधिक कड़वी है।
Roman Urdu (Maududi)Balke insey nimatne ke liye asal waade ka waqt to qayamat hai aur woh badi aafat aur zyaada talkh-saa-at (badi sakht aur kadwi cheez) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay qayamat ki ghari unkay waday kay waqt hai aur qayamat bari sakht aur kerwi cheez hai
Devnagri Urdu (Maududi)बलके इनसे निमत्ने के लिए असल वादे का वक्त तो कयामत है और वो बड़ी आफत और ज्यादा तल्ख-सा-अत (बड़ी साख और कड़वी चीज) है
عَرَبِيإِنَّ المُجرِمينَ في ضَلالٍ وَسُعُرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय अपराधी लोग बड़ी गुमराही और यातना में हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh mujrim log dar haqeeqat galat fehmi mein mubtala hain aur inki aqal maari gayi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak gunehgaar gumrahi mein aur azab mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये मुजरिम लोग दर हकीकत गलत फहमी में मुबतला हैं और इनकी अक्ल मारी गई है
عَرَبِييَومَ يُسحَبونَ فِي النّارِ عَلىٰ وُجوهِهِم ذوقوا مَسَّ سَقَرَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन वे आग में अपने चेहरों के बल घसीटे जाएँगे। (कहा जाएगा :) जहन्नम की यातना का मज़ा चखो।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz yeh mooh ke bal aag mein ghaseetey jayenge us roz insey kaha jayega ke ab chakkho jahannum ki lapat ka maza
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din woh apney mun kay bal aag mein ghaseetay jayen gey.(aur unn say kaha jayega) dozakh ki aag lagney kay mazay chakho
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ ये मुँह के बल आग में घसीटते जाएंगे हमें रोज़ इनसे कहा जाएगा के अब छक्खो जहन्नुम की गोद का मजा
عَرَبِيإِنّا كُلَّ شَيءٍ خَلَقناهُ بِقَدَرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने प्रत्येक वस्तु को एक अनुमान के साथ पैदा किया है।
Roman Urdu (Maududi)Humne har cheez ek taqdeer ke saath paida ki hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak hum ney her cheez ko aik (muqarra) andazay per peda kia hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने हर चीज़ एक तकदीर के साथ अदा की है
عَرَبِيوَما أَمرُنا إِلّا واحِدَةٌ كَلَمحٍ بِالبَصَرِ
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हिन्दी (Al-Omari)और हमारा आदेश तो केवल एक बार होता है, जैसे आँख की एक झपक।
Roman Urdu (Maududi)Aur hamara hukum bas ek hi hukum hota hai aur palak jhapakate (twinkling of an eye) woh amal mein aa jata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur humara hukum sirf aik dafa (ka aik kalma) hi hota hai jaisey aankh ka jhapakna
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारा हुकुम बस एक ही हुकुम होता है और पलक झपकाते (पलक झपकाते हुए) वो अमल में आ जाता है
عَرَبِيوَلَقَد أَهلَكنا أَشياعَكُم فَهَل مِن مُدَّكِرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने तुम्हारे जैसे कई समूहों को विनष्ट कर दिया, तो क्या है कोई नसीहत हासिल करने वाला?
Roman Urdu (Maududi)Tum jaisey bahut-soon ko hum halak kar chuke hain. Phir hai koi nasihat qabool karne wala
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney tum jaisey bohteron ko halak kerdia hai pus koi hai naseehat lenay wala
Devnagri Urdu (Maududi)तुम जैसे बहुत-सून को हम हलक कर चुके हैं। फिर है कोई हिदायत क़बूल करने वाला
عَرَبِيوَكُلُّ شَيءٍ فَعَلوهُ فِي الزُّبُرِ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने जो कुछ भी किया वह किताबों (कर्मपत्रों) में दर्ज है।
Roman Urdu (Maududi)Jo kuch inhon ne kiya hai woh sab daftaron (office) mein darj hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo kuch enhon ney (aemaal) kiye hain sab naam-e-aemaal mein likhay huye hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो कुछ इन्हों ने किया है वो सब दफ्तरों (कार्यालय) में दर्ज है
عَرَبِيوَكُلُّ صَغيرٍ وَكَبيرٍ مُستَطَرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और हर छोटी और बड़ी बात लिखी हुई है।
Roman Urdu (Maududi)Aur har choti badi baat likhi hui maujood hai
Roman Urdu (Junagarhi)(Issi tarah) her choti bari baat bhi likhi hui hai
Devnagri Urdu (Maududi)और हर छोटी बड़ी बात लिखी हुई मौजुद है
عَرَبِيإِنَّ المُتَّقينَ في جَنّاتٍ وَنَهَرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह (अल्लाह से) डरने वाले बाग़ो और नहरों में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Nafarmani se parhez karne waley yaqeenan baaghon aur neharon mein hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan humara darr rakhney walay jannaton aur neharon mein hongay
Devnagri Urdu (Maududi)नफ़रमानी से परहेज करने वाले यकीनन बागों और नहरों में होंगे
عَرَبِيفي مَقعَدِ صِدقٍ عِندَ مَليكٍ مُقتَدِرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)सत्य की सभा में, महान बादशाह के पास, जो असीम शक्ति वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Sacchi izzat ki jagah, badey zeeh-iqtedar baadshah ke kareeb
Roman Urdu (Junagarhi)Raasti aur izzat ki bethak mein qudrat walay badshah kay pass
Devnagri Urdu (Maududi)सच्ची इज्जत की जगह, बदले ज़ीह-इक़तेदार बादशाह के करीब
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Surah 54: Al-Qamar (The Moon)

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Surah 54: Al-Qamar (The Moon)

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Surah 54: Al-Qamar (The Moon)

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Surah 54: Al-Qamar (The Moon)

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Surah 54: Al-Qamar (The Moon)

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Surah 55: Ar-Rahman (The Beneficent)

Medinan🕐 Revelation #97📜 78 Verses🕮 Juz 1
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Surah 55: Ar-Rahman (The Beneficent)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالرَّحمٰنُ
हिन्दी (Al-Omari)अत्यंत दयावान् ने।
Roman Urdu (Maududi)Rahman ne
Roman Urdu (Junagarhi)Rehman ney
Devnagri Urdu (Maududi)रहमान ने
عَرَبِيعَلَّمَ القُرآنَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह क़ुरआन सिखाया।
Roman Urdu (Maududi)Is Quran ki taleem di hai
Roman Urdu (Junagarhi)Quran sikhaya
Devnagri Urdu (Maududi)क्या कुरान की तालीम दी है
عَرَبِيخَلَقَ الإِنسانَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने मनुष्य को पैदा किया।
Roman Urdu (Maududi)Usi ne Insan ko paida kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney insan ko peda kiya
Devnagri Urdu (Maududi)उसी ने इंसान को पढ़ाया
عَرَبِيعَلَّمَهُ البَيانَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसे बात करना सिखाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur usey bolna sikhaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ussay bolna sikhaya
Devnagri Urdu (Maududi)और उसे बोलना सिखाया
عَرَبِيالشَّمسُ وَالقَمَرُ بِحُسبانٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सूर्य तथा चंद्रमा एक हिसाब से चल रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Suraj aur chand ek hisaab ke paband hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aftab aur mahtab (muqarra) hisab hain
Devnagri Urdu (Maududi)सूरज और चांद एक हिसाब के बंधन हैं
عَرَبِيوَالنَّجمُ وَالشَّجَرُ يَسجُدانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा बिना तने के पौधे और पेड़ सजदा करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur taarey aur darakht sab sajda-reiz hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur sitaray aur darakht dono sajdah kertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और तारे और दरख्त सब सजदा-रीज हैं
عَرَبِيوَالسَّماءَ رَفَعَها وَوَضَعَ الميزانَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उसने आकाश को ऊँचा किया और न्याय का संतुलन स्थापित किया।
Roman Urdu (Maududi)Aasman ko usne buland kiya aur mizan qayam kardi
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney aasman ko buland kiya aur ussi ney tarazoo rakhi
Devnagri Urdu (Maududi)आसमान को उसने बुलंद किया और मिजान कायम करदी
عَرَبِيأَلّا تَطغَوا فِي الميزانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ताकि तुम माप-तौल में अति न करो।
Roman Urdu (Maududi)Iska taqaza yeh hai ke tum mizaan mein khalal na daalo
Roman Urdu (Junagarhi)Takay tum tolnay mein tajawuzz na kero
Devnagri Urdu (Maududi)इसका तकाजा ये है के तुम मिजान में खलाल न डालो
عَرَبِيوَأَقيمُوا الوَزنَ بِالقِسطِ وَلا تُخسِرُوا الميزانَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा न्याय के साथ तौल को सीधा रखो और माप-तौल में कमी न करो।
Roman Urdu (Maududi)Insaaf ke saath theek theek tolo (weigh) aur tarazu mein dandi (skimp ) na maaro
Roman Urdu (Junagarhi)Insaf kay sath wazan ko theek rakho aur tol mein kum na do
Devnagri Urdu (Maududi)इन्साफ के साथ ठीक-ठीक तोलो (तौलो) और तराजू में डंडी (कंजूस) ना मारो
عَرَبِيوَالأَرضَ وَضَعَها لِلأَنامِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उसने धरती को सृष्टि के लिए (रहने योग्य) बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Zameen ko usne sab makhlooqat (creatures) ke liye banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ussi ney makhlooq kay liye zameen bichadi
Devnagri Urdu (Maududi)जमीन को उसने सब मखलूकत (जीव) के लिए बनाया
عَرَبِيفيها فاكِهَةٌ وَالنَّخلُ ذاتُ الأَكمامِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसमें फल हैं, तथा आवरणों वाले खजूर के वृक्ष हैं।
Roman Urdu (Maududi)Usmein har tarah ke ba-kasrat laziz phal hain,khajoor ke darakht hain jinke phal ghilafon (sheaths) mein liptey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss mein meway hain aur khoshay walay khajoor kay darakht hain
Devnagri Urdu (Maududi)उसमें हर तरह के ब-कसरत लजीज फल हैं, खजूर के दरख्त हैं जिनके फल गिलाफों (शीथ्स) में लिपटे हुए हैं
عَرَبِيوَالحَبُّ ذُو العَصفِ وَالرَّيحانُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और भूसे वाले अन्न तथा सुगंधित पौधे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tarah tarah ke galley(corn) hain jinmein bhusa bhi hota hai aur dana (grain) bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bhuss wala anaj hai aur khushboodar phool hain
Devnagri Urdu (Maududi)तरह तरह के गैले (मकई) हैं जिनमें भूसा भी होता है और दाना (अनाज) भी
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Pas aey jinn-o-Ins (insan), tum apne Rubb ki kin kin niyamaton ko jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus (aey insano aur jinno!) tum apney perwerdigaar ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)पस ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की किन नियमों को झुठलाओगे
عَرَبِيخَلَقَ الإِنسانَ مِن صَلصالٍ كَالفَخّارِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने मनुष्य को ठीकरी की तरह बजने वाली मिट्टी से पैदा किया।
Roman Urdu (Maududi)Insan ko usne thikri (potter) jaise sukhey sadey (rotten) huey gaarey se banaya (clay like [that of] pottery
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney insan ko bajney wali mitti say peda kiya jo theekri ki tarah thi
Devnagri Urdu (Maududi)इंसान को उसने ठीकरी (कुम्हार) जैसे सुखे सादे (सड़ा हुआ) हुए गैरे से बनाया (मिट्टी की तरह [उस] मिट्टी के बर्तन
عَرَبِيوَخَلَقَ الجانَّ مِن مارِجٍ مِن نارٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जिन्नों को आग की ज्वाला से पैदा किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur Jinn ko aag ki lapat se paida kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jinnaat ko aag kay sholay say peda kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और जिन को आग की लपट से पेदा किया
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Pas aey Jinn-o-Ins (insan), tum apne Rubb ke kin kin ajaib-e-qudrat ko jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)पस ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब के रिश्तेदार अजायब-ए-कुदरत को झूठलाओगे
عَرَبِيرَبُّ المَشرِقَينِ وَرَبُّ المَغرِبَينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(वह) सूर्योदय के दोनों स्थानों तथा सूर्यास्त के दोनों स्थानों का रब है।
Roman Urdu (Maududi)Dono mashriq aur dono magrib, Sab ka maalik-o-parwardigar wahi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh rab hai dono mashriqon aur dono maghribon ka
Devnagri Urdu (Maududi)डोनो मशरिक और डोनो मगरिब, सब का मालिक-ओ-परवरदिगार वही है
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Pas aey jinn-o-Ins, tum apne Rubb ke kin kin qudraton ko jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)To(aey jinno aur insano) tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)पस ऐ जिन्न-ओ-इंस, तुम अपने रब के किन किन कुदरतों को झुटलोगे
عَرَبِيمَرَجَ البَحرَينِ يَلتَقِيانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने दो सागरों को मिला दिया, जो (देखने में) आपस में मिलते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Do samandaron (seas) ko usne chodh diya ke baham mil jayein
Roman Urdu (Junagarhi)Uss ney do darya jaari kerdiye jo aik doosray say nil jaatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)दो समंदरों (समुद्रों) को उसने छोड़ दिया के बहम मिल जायें
عَرَبِيبَينَهُما بَرزَخٌ لا يَبغِيانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन दोनों के बीच एक अवरोध है (जिससे) वे आगे नहीं बढ़ते।
Roman Urdu (Maududi)Phir bhi unke darmiyan ek purdah hayal(barrier) hai jissey woh tajawuz (transgress) nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Inn dono mein aik aar hai kay uss say barh nahi saktay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर भी उनके दरमियान एक परदा हयाल (बाधा) है जिसे वो तजावुज़ (अपराध) नहीं करते
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Pas aey jinn-o-Ins (insan), Tum apne Rubb ki qudrat ke kin kin karishmo ko jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus apney perwerdigaar ki kon kon si nemat ko jhutlao hey
Devnagri Urdu (Maududi)पस ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की क़ुदरत के किन करिश्माओं को झूठलाओगे
عَرَبِييَخرُجُ مِنهُمَا اللُّؤلُؤُ وَالمَرجانُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन दोनों से मोती और मूँगा निकलते हैं।
Roman Urdu (Maududi)In samandaron se Moti aur mongay (coral) nikalte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Inn dono mein say miti aur mongey baraamad hotay hain
Devnagri Urdu (Maududi)समंदरों से मोती और मोंगे (कोरल) निकलते हैं
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Pas aey jinn-o-Ins (insan), tum apne Rubb ki qudrat ke kin kin kamalaat ko jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Phir tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)पास ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की क़ुदरत के किन कमालात को झुठलाओगे
عَرَبِيوَلَهُ الجَوارِ المُنشَآتُ فِي البَحرِ كَالأَعلامِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उसी के अधिकार में हैं समुद्र में चलने वाले पहाड़ों जैसे जहाज़।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh jahaaz (ships) usi ke hain jo samandar mein pahadon (mountains) ki tarah unchey uthey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah hi ki (milkiyat mein) hain woh jahaaz jo samandaron mein pahaar ki tarah buland (chal phir rahey) hain
Devnagri Urdu (Maududi)और ये जहाज़ (जहाज) उसके हैं जो समंदर में पहाड़ों (पहाड़ों) की तरह ऊंचे उठे हैं
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Pas aye jinn-o-Ins (insan), tum apne Rub ke kin kin ehsanaat ko jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus (aey insano aur jinno!) tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)पास ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब के साथ एहसानात को झुठलाओगे
عَرَبِيكُلُّ مَن عَلَيها فانٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हर कोई जो इस (धरती) पर है, नष्ट होने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Har cheez jo is zameen par hai fanaa (perish) ho janey wali hai
Roman Urdu (Junagarhi)Zamin per jo hain sab fana honay walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)हर चीज़ जो इस ज़मीन पर है फ़ना (नाश) हो जाने वाली है
عَرَبِيوَيَبقىٰ وَجهُ رَبِّكَ ذُو الجَلالِ وَالإِكرامِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा आपके पालनहार का चेहरा बाक़ी रहेगा, जो बड़ी महिमा और सम्मान वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur sirf tere Rubb ki jalil-o-kareem zaat hi baaki rehne wali hai
Roman Urdu (Junagarhi)Sirf teray rab ki zaat jo azmat aur izzat wali hai baqi reh jayegi
Devnagri Urdu (Maududi)और सिर्फ तेरे रुब की जलील-ओ-करीम ज़ात ही बाकी रहने वाली है
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Pas aey jinn-o-Ins (insan), tum apne Rubb ke qudraton ke kin kin kamalaat ko jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Phir tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)पास ऐ जिन्न-ओ-इंस (इंसान), तुम अपने रब के कुदरतों के साथ कमाल से झूठ बोलोगे
عَرَبِييَسأَلُهُ مَن فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ كُلَّ يَومٍ هُوَ في شَأنٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसी से माँगता है, जो कोई आकाशों तथा धरती में है। वह प्रतिदिन एक (नए) कार्य में है।
Roman Urdu (Maududi)Zameen aur Aasmano mein jo bhi hai sab apni haajatein (needs) usi se maang rahey hain, har aan woh nayi shaan mein hai
Roman Urdu (Junagarhi)Sab aasman-o-zamin walay ussi say maantay hain her roz woh aik shaan mein hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन और आसमान में जो भी है सब अपनी हाजतें (ज़रूरतें) उसी से मांग रहे हैं, हर आन वो नई शान में है
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Pas aey jinn-o-Ins (insan), tum apne Rubb ki kin kin siffat-e-hameeda ko jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Phir tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)पास ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की किन-किन सिफत-ए-हमीदा को झुठलाओगे
عَرَبِيسَنَفرُغُ لَكُم أَيُّهَ الثَّقَلانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हम जल्द ही तुम्हारे लिए फ़ारिग़ होंगे ऐ दो भारी समूहो! (जिन्नो और इनसानो!)
Roman Urdu (Maududi)Aey zameen ke bojho(loads), ankareeb hum tumse baaz purs (questioning) karne ke liye faarig huey jatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)(Jinno aur insanon kay giroho!) unqareeb hum tumhari taraf poori tarah mutawajja hojayen gey
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ ज़मीन के बोझो(भार), अनकरीब हम तुमसे बाज़ पुर्स (सवाल करते हुए) करने के लिए फ़ारिग़ हुए जाते हैं
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)(phir dekh lenge ke) tum apne Rubb ke kin kin ehsanaat ko jhutlate ho
Roman Urdu (Junagarhi)Phir tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhut ao gey
Devnagri Urdu (Maududi)(फिर देख लेंगे के) तुम अपने रुब के किन किन एहसानात को झुटलाते हो
عَرَبِييا مَعشَرَ الجِنِّ وَالإِنسِ إِنِ استَطَعتُم أَن تَنفُذوا مِن أَقطارِ السَّماواتِ وَالأَرضِ فَانفُذوا ۚ لا تَنفُذونَ إِلّا بِسُلطانٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ जिन्न तथा मनुष्य के समूह! यदि तुम आकाशों तथा धरती के किनारों से निकल सकते हो, तो निकल भागो, (परंतु) तुम शक्ति (प्रभुत्व) के बिना नहीं निकल सकोगे।
Roman Urdu (Maududi)Aey giroh-e-jinn-o-Ins(insan) , gar tum zameen aur aasmano ki sarhadon se nikal kar bhaag sakte ho to bhaag dekho , nahin bhaag sakte iske liye bada zoar chahiye
Roman Urdu (Junagarhi)Aey giroh-e-jinnaat-o-insan! zamin kay kinaron say bahir nikal janay ki taqat hai to nikal bhago! baghair ghalba aur taqat kay tum nahi nikal saktay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ गिरो-ए-जिन्न-ओ-इन्सा (इंसान), गर तुम ज़मीन और आसमान की सरहदों से निकल कर भाग सकते हो तो भाग देखो, नहीं भाग सकते इसके लिए बड़ा ज़ोर चाहिए
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ki kin kin qudraton ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Phir apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब की किन किन क़दरतों को तुम झूठलाओगे
عَرَبِييُرسَلُ عَلَيكُما شُواظٌ مِن نارٍ وَنُحاسٌ فَلا تَنتَصِرانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम दोनों पर आग का ज्वाला तथा धुआँ छोड़ा जाएगा। फिर तुम अपने आपको बचा नहीं सकोगे।
Roman Urdu (Maududi)(Bhaagne ki koshish karogey to ) Tumpar aag ka shola aur dhoowan (smoke) chodh diya jayega jiska tum muqabla na kar sakogey
Roman Urdu (Junagarhi)Tum per aag kay sholay aur dhuwan chora jayega phir tum muqabla na ker sako gey
Devnagri Urdu (Maududi)(भागने की कोशिश करोगी तो) तुमपर आग का शोला और धुआं (धुआं) छोड़ दिया जाएगा जिसका तुम मुकाबला ना कर सकोगे
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Pas aey Jinn-o-Ins (insan),tum apne Rubb ki kin kin qudraton ka inkar karogey
Roman Urdu (Junagarhi)Phir apney rab ki nematon mein say kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)पस ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की तरह कुदरतों का इंकार करोगी
عَرَبِيفَإِذَا انشَقَّتِ السَّماءُ فَكانَت وَردَةً كَالدِّهانِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब आकाश फट जाएगा, तो वह तेल की तरह लाल हो जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Phir (kya banegi us waqt) jab aasman phatega (split) aur laal chamdey (skin) ki tarah surkh (red) ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jabkay aasman phat ker surkh hojaye jaisay kay surkh chamra
Devnagri Urdu (Maududi)फिर (क्या बनेगा हमारा वक्त) जब आसमां फटेगा (बंटवारा) और लाल चामदे (त्वचा) की तरह सुर्ख (लाल) हो जाएगा
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Aey Jinn-o-Ins (insan) (us waqt) tum apne Rubb ki kin kin qudraton ko jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान) (हम वक्त) तुम अपने रब की रिश्तेदार कुदरतों को झुटलाओगे
عَرَبِيفَيَومَئِذٍ لا يُسأَلُ عَن ذَنبِهِ إِنسٌ وَلا جانٌّ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उस दिन न किसी मनुष्य से उसके गुनाह के बारे में पूछा जाएगा और न किसी जिन्न से।
Roman Urdu (Maududi)Us roz kisi Insan aur kisi Jinn se uska gunaah puchne ke zaroorat na hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din kissi insan aur kissi jinn say uss kay gunahon ki pursish na ki jayegi
Devnagri Urdu (Maududi)हमें रोज किसी इंसान और किसी जिन से उसका गुनाह पूछने के लिए जरूरी न होगी
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Phir (dekh liya jayega ke) tum dono giroh apne Rubb ke kin kin ehsanaat ka inkar karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)फिर (देख लिया जाएगा के) तुम दोनो गिरो ​​अपने रब के साथ एहसानात का इंकार करते हो
عَرَبِييُعرَفُ المُجرِمونَ بِسيماهُم فَيُؤخَذُ بِالنَّواصي وَالأَقدامِ
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हिन्दी (Al-Omari)अपराधियों की पहचान उनके चिह्नों से होगी, फिर माथे के बालों और पैरों से (उन्हें) पकड़ा जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Mujrim wahan apne chehron se pehchan liye jayenge aur unhein peshani ke baal aur paaon pakad pakad kar ghasita jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Gunahgaar sirf huliye say hi pehchan liye jayen gey aur unki peshaniyon kay baal aur qadam pakar liye jayen gey
Devnagri Urdu (Maududi)मुजरिम वहां अपने चेहरों से पहचान के लिए जाएंगे और उन्हें पेशानी के बाल और पांव पकड़ पकड़ कर घसीटा जाएगा
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Us waqt tum apne Rub ki kin kin qudraton ko jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त तुम अपने रुब की तरह कुदरतों को झुठलाओगे
عَرَبِيهٰذِهِ جَهَنَّمُ الَّتي يُكَذِّبُ بِهَا المُجرِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यही है वह जहन्नम, जिसे अपराधी लोग झुठलाते थे।
Roman Urdu (Maududi)(Us waqt kaha jayega) yeh wahi jahannum hai jisko mujrimeen jhoot karar diya karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hai woh jahannum jissay mujrim jhoota jaantay thay
Devnagri Urdu (Maududi)(हमें वक्त कहा जाएगा) ये वही जहन्नुम है जिसको मुजरीमीन झूठ करार दिया करते थे
عَرَبِييَطوفونَ بَينَها وَبَينَ حَميمٍ آنٍ
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हिन्दी (Al-Omari)वे उसके और खौलते हुए पानी के बीच चक्कर लगा रहे होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Usi jahannum aur khaulte (boiling) paani ke darmiyan woh gardish karte rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Uss kay aur kholtay huye garum paani kay darmiyan chakkar khayen gey
Devnagri Urdu (Maududi)उसी जहन्नुम और खौलते (उबलते) पानी के दरमियान वो गर्दिश करते रहेंगे
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Phir apne Rubb ki kin kin qudraton ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अपने रुब की किन किन कुदरतों को तुम झुठलाओगे
عَرَبِيوَلِمَن خافَ مَقامَ رَبِّهِ جَنَّتانِ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो व्यक्ति अपने पालनहार के समक्ष खड़े होने से डर गया, उसके लिए दो बाग़ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur har us shaks ke liye jo apne Rubb ke huzoor pesh hone ka khauf(darr) rakhta ho, do baagh (gardens) hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uss shaks kay liye jo apney rab kay samnay khara honay say dara do jannaten hain
Devnagri Urdu (Maududi)और हर उस शक्स के लिए जो अपने रुब के हुजूर पेश होने का खौफ (डर) रखता हो, दो बाग (बगीचे) हैं
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke kin kin inaamaat ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रुब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे
عَرَبِيذَواتا أَفنانٍ
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हिन्दी (Al-Omari)दोनों बहुत शाखाओं वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hari bhari daaliyon se bharpur
Roman Urdu (Junagarhi)(Dono jannaten) boht si tehniyon aur shakhon wali hain
Devnagri Urdu (Maududi)हरी भरी डालियों से भरपुर
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke kin kin inamaat ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे
عَرَبِيفيهِما عَينانِ تَجرِيانِ
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हिन्दी (Al-Omari)उन दोनों में दो जल स्रोत बहते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Dono baaghon(gardens) mein do chashmey (springs) rawan
Roman Urdu (Junagarhi)Inn dono (jannaton) mein behtay huye chashmay hain
Devnagri Urdu (Maududi)दोनों बागों में दो चश्मे (झरने) रावन
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke kin kin inamaat ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे
عَرَبِيفيهِما مِن كُلِّ فاكِهَةٍ زَوجانِ
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हिन्दी (Al-Omari)उन दोनों में प्रत्येक फल के दो प्रकार हैं।
Roman Urdu (Maududi)Dono baaghon(gardens) mein har phal ki do qismein
Roman Urdu (Junagarhi)Inn dono jannaton mein her qisam kay mewon ki do qismen hongi
Devnagri Urdu (Maududi)दोनों बागों में हर फल की दो क़िस्में
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke kin kin inaamaat ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Phir tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे
عَرَبِيمُتَّكِئينَ عَلىٰ فُرُشٍ بَطائِنُها مِن إِستَبرَقٍ ۚ وَجَنَى الجَنَّتَينِ دانٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐसे बिस्तरों पर तकिए लगाए होंगे, जिनके स्तर मोटे रेशम के हैं और दोनों बाग़ों के फल निकट हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jannati log aisey farshon par takiye laga ke baithenge jinke astar dabiz resham ( silk brocade) ke hongey, Aur baagon ki daliyan phalon se jhuki padh rahi hongi
Roman Urdu (Junagarhi)Jannati aisay farashon per takkiya lagaye huye hongay jinkay astar dabeez resham kay hongay aur inn dono jannaton kay meway bilkul qareeb hongay
Devnagri Urdu (Maududi)जन्नती लोग ऐसे फरशोन पर तकिये लगा के बैठेंगे जिनके अस्तर दबीज रेशम (रेशम ब्रोकेड) के होंगे, और बागों की डालियां फालों से झुकी पढ़ रही होंगी
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke kin kin inaamaat ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlaogey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे
عَرَبِيفيهِنَّ قاصِراتُ الطَّرفِ لَم يَطمِثهُنَّ إِنسٌ قَبلَهُم وَلا جانٌّ
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हिन्दी (Al-Omari)उनमें नीची निगाहों वाली औरतें हैं, जिन्हें उनसे पहले न किसी मनुष्य ने हाथ लगाया है और न किसी जिन्न ने।
Roman Urdu (Maududi)In niyamaton ke darmiyan sharmili nigahon waliyan hongi jinhein in jannatiyon se pehle kisi insaan ya Jinn ne chuwa na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Wahan (sharmeeli) neechi nigah wali hooren hain jinhen unn say pehlay kissi jinn-o-ins ney hath nahi lagaya
Devnagri Urdu (Maududi)नियामतों के दरमियां शर्मिली निगाहों वलियों होंगी जिन्हे जन्नतियों से पहले कोई इंसान या जिन्न ने चुवा न होगा
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke kin kin inaamaat ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus apney paalnay walay ki kiss kiss nemat ko jhtlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब के किन किन-किन इनामों को तुम झूठलाओगे
عَرَبِيكَأَنَّهُنَّ الياقوتُ وَالمَرجانُ
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हिन्दी (Al-Omari)मानो वे (स्त्रियाँ) माणिक और मूँगा हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aisi khoobsurat jaisey hirey(diamonds) aur Moti
Roman Urdu (Junagarhi)Woh hooren misil yaqoot aur mongay kay hongi
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसी खूबसूरत जैसी हीरे (हीरे) और मोती
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke kin kin inaamaat ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum apney perwerdigaar ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झूठलाओगे
عَرَبِيهَل جَزاءُ الإِحسانِ إِلَّا الإِحسانُ
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हिन्दी (Al-Omari)एहसान का बदला एहसान के सिवा क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Neki ka badla neki ke siwa aur kya ho sakta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ehsan ka badla ehsan kay siwa kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)नेकी का बदला, नेकी के सिवा और क्या हो सकता है
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Phir aey Jinn-o-Ins (Insan),apne Rubb ke kin kin awsaaf-e-hameeda ka tum inkar karogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)फिर ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), अपने रब के रिश्तेदारों का इनाम-ए-हमीदा का तुम इंकार करोगी
عَرَبِيوَمِن دونِهِما جَنَّتانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इन दो (बाग़ों) के अलावा और दो बाग़ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur un do baaghon ke alawa do baagh aur hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn kay siwa do jannaten aur hain
Devnagri Urdu (Maududi)और उन दो बाघों के अलावा दो बाग और होंगे
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke kin kin inaamaat ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum apney perwerish kernay walay ki kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रुब के रिश्तेदारों का इनाम करो तुम झूठलाओगे
عَرَبِيمُدهامَّتانِ
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हिन्दी (Al-Omari)दोनों गहरे हरे रंग के हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ghaney sar-sabz o shadaab baagh
Roman Urdu (Junagarhi)Jo dono gehri sabz siyahi maeel hain
Devnagri Urdu (Maududi)घने सर-सब्ज़ ओ शादाब बाग
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke kin kin inaamat ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Batao abb apney perwerdigaar ki kiss kiss nemat ko jhtlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रुब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे
عَرَبِيفيهِما عَينانِ نَضّاخَتانِ
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हिन्दी (Al-Omari)उन दोनों में जोश मारते हुए दो जल स्रोत हैं।
Roman Urdu (Maududi)Dono baaghon mein do chashmey (springs) fawwaron ki tarah ubaltey (gushing) huey
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein do(josh say) ubalnay walay chashmay hain
Devnagri Urdu (Maududi)दोनो बागों में दो चश्में (झरनों) फव्वारों की तरह उबलते (उबलते) हुए
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke kin kin inaamaat ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Phir tum apney rab ki kon konsi nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रुब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे
عَرَبِيفيهِما فاكِهَةٌ وَنَخلٌ وَرُمّانٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन दोनों में फल तथा खजूर के पेड़ और अनार हैं।
Roman Urdu (Maududi)Un mein ba-kasrat phal aur khajurein aur anaar (pomegranates)
Roman Urdu (Junagarhi)Inn dono mein meway aur khajoor aur anaar hongay
Devnagri Urdu (Maududi)उन में बा-कसरत फल और खजूरें और अनार (अनार)
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke kin kin inaamaat ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya abb bhi rab ki kissi nemat ki takzeeb tum kerogay
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे
عَرَبِيفيهِنَّ خَيراتٌ حِسانٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उनमें कई अच्छे व्यवहार वाली, खूबसूरत महिलाएं हैं।
Roman Urdu (Maududi)In niyamaton ke darmiyan khoob seerat aur khoobsurat biwiyan
Roman Urdu (Junagarhi)Inn mein nek seerat khoobsurat orten hain
Devnagri Urdu (Maududi)नियामतों के दरमियान में खूब सीरत और खूबसूरत बीवियां
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke kin kin inamaat ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे
عَرَبِيحورٌ مَقصوراتٌ فِي الخِيامِ
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हिन्दी (Al-Omari)हूरें (यानी गोरे बदन, काली आँखों वाली औरतें), जो खेमों में रोकी हुई हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kheymo (tents) mein theharayi hui hoorein (maidens)
Roman Urdu (Junagarhi)(gori rangat ki) hooren jannati khemon mein rehnay waaliyah hain
Devnagri Urdu (Maududi)खीमो (टेंट) में ठहरी हुई हूरें (लड़कियां)
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke kin kin inaamaat ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रुब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे
عَرَبِيلَم يَطمِثهُنَّ إِنسٌ قَبلَهُم وَلا جانٌّ
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हिन्दी (Al-Omari)उनसे पहले न तो किसी मनुष्य ने उन्हें छुआ है और न ही किसी जिन्न ने।
Roman Urdu (Maududi)In jannatiyon se pehle kabhi kisi Insaan ya jinn ne unko na chuwa (touch) hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Unnko hath nahi lagaya kissi insan ya jinn ney iss say qabal
Devnagri Urdu (Maududi)जन्नतियों से पहले कभी किसी इंसान ने या जिन्न ने उनको न छुआ (स्पर्श) होगा
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke kin kin inaamaat ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus apney perwerdigaar ki kon konsi nemat ko jhtlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रुब के किन-किन इनाम को तुम झुटलाओगे
عَرَبِيمُتَّكِئينَ عَلىٰ رَفرَفٍ خُضرٍ وَعَبقَرِيٍّ حِسانٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे हरी और उत्कृष्ट एवं अति सुंदर क़ालीनों पर तकिया लगाए होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh jannati sabz-qaleeno (green cushions) aur nafees o nadir farshon (beautiful carpets) par takiye laga ke baithenge
Roman Urdu (Junagarhi)Sabz masnadon aur undah farshon per takkiya lagaye huye hongay
Devnagri Urdu (Maududi)वो जन्नती सब्ज़-क़लीनो (हरी गद्दियाँ) और नफीस ओ नादिर फरशोन (खूबसूरत कालीन) पर तकिए लगा के बैठेंगे
عَرَبِيفَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُما تُكَذِّبانِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो तुम दोनों अपने पालनहार की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke kin kin inaamaat ko tum jhutlaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tum apney rab ki kiss kiss nemat ko jhutlao gey
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुठलाओगे
عَرَبِيتَبارَكَ اسمُ رَبِّكَ ذِي الجَلالِ وَالإِكرامِ
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हिन्दी (Al-Omari)बहुत बरकत वाला है आपके पालनहार का नाम, जो बड़ी महिमा और सम्मान वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Badi barkat wala hai tere Rubb-e-Jaleel-o-Kareem (Majesty and Glory) ka naam
Roman Urdu (Junagarhi)Teray perwerdigar ka naam ba barkat hai jo izzat-o-jalal wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)बड़ी बरकत वाला है तेरे रुब-ए-जलील-ओ-करीम (महिमा और महिमा) का नाम
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Surah 55: Ar-Rahman (The Beneficent)

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Surah 55: Ar-Rahman (The Beneficent)

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Surah 55: Ar-Rahman (The Beneficent)

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Surah 55: Ar-Rahman (The Beneficent)

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Surah 55: Ar-Rahman (The Beneficent)

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Surah 56: Al-Waqi'ah (The Event)

Meccan🕐 Revelation #46📜 96 Verses🕮 Juz 1
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عَرَبِيإِذا وَقَعَتِ الواقِعَةُ
हिन्दी (Al-Omari)जब घटित होने वाली घटित हो जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh honay wala waqia pesh aa jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jab Qayamat qaeem hojaye gi
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो होने वाला वाकिया पेश आ जाएगा
عَرَبِيلَيسَ لِوَقعَتِها كاذِبَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसके घटित होने में कोई झूठ नहीं।
Roman Urdu (Maududi)To koi uske waquh(occurrence) ko jhutlane wala na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss kay waqaye honay mein koi jhoot nahi
Devnagri Urdu (Maududi)तो कोई उसके वक्ह (घटना) को झूठलाने वाला न होगा
عَرَبِيخافِضَةٌ رافِعَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)नीचे करने वाली, ऊपर उठाने वाली।
Roman Urdu (Maududi)Woh tah-o-bala (pasth aur buland) kardene wali aafat hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Woh pust kernay wali aur buland kernay wali hogi
Devnagri Urdu (Maududi)वो ताह-ओ-बाला (पास्त और बुलंद) करदेने वाली आफत होगी
عَرَبِيإِذا رُجَّتِ الأَرضُ رَجًّا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब धरती तेज़ी से हिलाई जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Zameen us waqt ek baar hi hila daali jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Jab kay zameen zalzala kay sath hila di jayegi
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन हमें वक़्त एक बार ही हिला डाली जाएगी
عَرَبِيوَبُسَّتِ الجِبالُ بَسًّا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और पर्वत ख़ूब चूर्ण-विचूर्ण कर दिए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur pahad is tarah reza reza kardiye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur pahar bilkul reza reza kerdiye jayen gey
Devnagri Urdu (Maududi)और पहाड़ इस तरह रज़ा रेज़ा करदिये जायेंगे
عَرَبِيفَكانَت هَباءً مُنبَثًّا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो वे बिखरी हुई धूल हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Ke paraganda (scattered) gubar (dust) ban kar reh jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)phir woh misil paragandah ghubaar kay hojayen gey
Devnagri Urdu (Maududi)के परगंदा (बिखरा हुआ) गुबर (धूल) बन कर रह जायेंगे
عَرَبِيوَكُنتُم أَزواجًا ثَلاثَةً
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तुम तीन प्रकार के लोग हो जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Tum log us waqt teen girohon (jamaat) mein taqseem ho jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum teen jamaton mein hojaogey
Devnagri Urdu (Maududi)तुम लोग हम वक़्त तीन गिरोहों (जमात) में तकसीम हो जाओगे
عَرَبِيفَأَصحابُ المَيمَنَةِ ما أَصحابُ المَيمَنَةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो दाहिने हाथ वाले, क्या ही अच्छे हैं दाहिने हाथ वाले!
Roman Urdu (Maududi)Dayein bazu waley, so dayein bazu walon (ke khush-naseebi ) ka kya kehna
Roman Urdu (Junagarhi)pus dahanay hath walay kaisay achay hain dahanay hath walay
Devnagri Urdu (Maududi)दयेन बाज़ू वाले, तो दिनें बाज़ू वालों (के खुश-नसीबी) का क्या कहना
عَرَبِيوَأَصحابُ المَشأَمَةِ ما أَصحابُ المَشأَمَةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और बाएँ हाथ वाले, क्या बुरे हैं बाएँ हाथ वाले!
Roman Urdu (Maududi)Aur bayein bazu waley, to bayein bazu walon (ki badnasibi ka) kya thikana
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bayen hath walay kiya haal hai bayen hath walon ka
Devnagri Urdu (Maududi)और बाज़ू वाले, तो बाज़ू वालों (की बदनसीबी का) क्या ठिकाना
عَرَبِيوَالسّابِقونَ السّابِقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जो पहल करने वाले हैं, वही आगे बढ़ने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur aagey waley to phir aagey waley hi hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo aagey walay hain woh to aagay walay hi hain
Devnagri Urdu (Maududi)और आगे वाले तो फिर आगे वाले ही हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ المُقَرَّبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यही लोग निकट किए हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Wahi to muqarrab (nearest to Allah) log hain
Roman Urdu (Junagarhi)Woh bilkul nazdeeki haasil kiye hain
Devnagri Urdu (Maududi)वही तो मुकर्रब (अल्लाह के सबसे करीब) लोग हैं
عَرَبِيفي جَنّاتِ النَّعيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)नेमत के बाग़ों में।
Roman Urdu (Maududi)Niyamat bhari jannaton mein rahengey
Roman Urdu (Junagarhi)Nematon wali jannaton mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)नियामत भारी जन्नतों में रहेंगे
عَرَبِيثُلَّةٌ مِنَ الأَوَّلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)पहले लोगों में से एक बहुत बड़ा समूह।
Roman Urdu (Maududi)Aglon mein se bahut hongey
Roman Urdu (Junagarhi)(Boht bara) giroh to aglay logon mein say hoga
Devnagri Urdu (Maududi)अगलों में से बहुत होंगे
عَرَبِيوَقَليلٌ مِنَ الآخِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा थोड़े-से पिछले लोगों में से होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur pichlon mein se kam
Roman Urdu (Junagarhi)Aur thoray say pechlay. logon mein say
Devnagri Urdu (Maududi)और पिचलों में से कम
عَرَبِيعَلىٰ سُرُرٍ مَوضونَةٍ
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हिन्दी (Al-Omari)सोने के तारों से बुने हुए तख़्तों पर।
Roman Urdu (Maududi)Murassasa takhaton par (On thrones decorated)
Roman Urdu (Junagarhi)yeh log sonay kay taaron say banay huye takhton per
Devnagri Urdu (Maududi)मुरास्सा तखतों पर (सजे हुए सिंहासन पर)
عَرَبِيمُتَّكِئينَ عَلَيها مُتَقابِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनपर तकिया लगाए आमने-सामने बैठे होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Takiye lagaye aamne saamne baithengey
Roman Urdu (Junagarhi)aik doosray kay samnay takiya lagaye bethay hongay
Devnagri Urdu (Maududi)ताकिये लगायें आमने सामने बैठेंगे
عَرَبِييَطوفُ عَلَيهِم وِلدانٌ مُخَلَّدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनके आस-पास (सेवा के लिए) ऐसे बालक फिर रहे होंगे, जो सदा (बालक) ही रहेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Unki majlison mein abadi ladke sharab-e-chashma-e jaari se
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay pass aisay larkay jo humesha(larkay hi) rahen gey aamdoraft keren gey
Devnagri Urdu (Maududi)उनकी मजलिसों में आबादी लड़के शराब-ए-चश्मा-ए जारी से
عَرَبِيبِأَكوابٍ وَأَباريقَ وَكَأسٍ مِن مَعينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐसे प्याले َऔर सुराहियाँ और छलकते जाम लेकर जो बहती शराब की होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Labrez pyale aur kantar (jugs) aur saagar liye daudte phirte hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Aabkhoray aur jug ley ker aur aisa jaam ley ker jo behti hui sharab say pur ho
Devnagri Urdu (Maududi)लब्रेज़ प्याले और कंतर (जुग) और सागर के लिए दौड़ते फिरते होंगे
عَرَبِيلا يُصَدَّعونَ عَنها وَلا يُنزِفونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे न उससे सिरदर्द से पीड़ित होंगे और न ही उनकी बुद्धि प्रभावित होगी।
Roman Urdu (Maududi)Jisey pee kar na unka sar chakrayega na unki aqal mein fatur (drunkenness) aayega
Roman Urdu (Junagarhi)jiss say na sir mein dard ho na aqal mein fatoor aaye
Devnagri Urdu (Maududi)जिसे पी कर ना उनका सर चकराएगा ना उनका अक्ल में फतूर (नशे की लत) आएगा
عَرَبِيوَفاكِهَةٍ مِمّا يَتَخَيَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा ऐसे फल लेकर जिन्हें वे पसंद करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh unke saamne tarah tarah ke lazeez phal (fruits) pesh karengey jisey chahe chun le
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aisay meway liye huye jo inki pasand kay hon
Devnagri Urdu (Maududi)और वो उनके सामने तरह के लज़ीज़ फल (फल) पेश करेंगे जिसे चाहे चुन ले
عَرَبِيوَلَحمِ طَيرٍ مِمّا يَشتَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा पक्षियों का मांस लेकर जिसकी वे इच्छा रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur parindon ke gosht pesh karenge ke jis parinde ka chahein istimal karein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur parindon kay gosht joenhein marghoob hon
Devnagri Urdu (Maududi)और परिन्दों के गोश्त पेश करेंगे के जिस परिंदे का चाहे इस्तिमाल करें
عَرَبِيوَحورٌ عينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और बड़ी-बड़ी नैनों वाली गोरियाँ होंगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur unke liye khubsurat aankhon wali hoorein hongi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bari bari aankhon wali hoorien
Devnagri Urdu (Maududi)और उनके लिए खुबसूरत आंखों वाली हूरें होंगी
عَرَبِيكَأَمثالِ اللُّؤلُؤِ المَكنونِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)छिपाकर रखे हुए मोतियों के समान।
Roman Urdu (Maududi)Aisi haseen jaise chupa kar rakkhey huey moti
Roman Urdu (Junagarhi)Jo chupay huye motiyon ki tarah hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसी हसीं जैसे छुपा कर रखे हुए मोती
عَرَبِيجَزاءً بِما كانوا يَعمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसके बदले में जो वे (संसार में) किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh sab kuch un aamal ki jaza ke taur par unhein milega jo woh duniya mein karte rahe thay
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh sila hai unkay aemaal kal
Devnagri Urdu (Maududi)ये सब कुछ उन अमल की जजा के तौर पर उन्हें मिलेगा जो वो दुनिया मैं करते रहे थे
عَرَبِيلا يَسمَعونَ فيها لَغوًا وَلا تَأثيمًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे उस में न कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न पाप की बात।
Roman Urdu (Maududi)Wahan woh koi behuda kalaam ya gunah ki baat na sunengey
Roman Urdu (Junagarhi)Na wahan bakwas sunein gey aur na gunnah ki baat
Devnagri Urdu (Maududi)वहां वो कोई बेहद कलाम या गुनाह की बात न सुनेंगे
عَرَبِيإِلّا قيلًا سَلامًا سَلامًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)केवल सलाम ही सलाम की आवाज़ होगी।
Roman Urdu (Maududi)Jo baat bhi hogi theek theek hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Sirf salam hi salam ki awaz hogi
Devnagri Urdu (Maududi)जो बात भी होगी ठीक ठीक होगी
عَرَبِيوَأَصحابُ اليَمينِ ما أَصحابُ اليَمينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और दाहिने हाथ वाले, क्या ही अच्छे हैं दाहिने हाथ वाले!
Roman Urdu (Maududi)Aur daayein bazu waley, daayein bazu walon ki khush nasibi ka kya kehna
Roman Urdu (Junagarhi)Aur dahanay hath walay kiya hi achay hain dahanay hath walay
Devnagri Urdu (Maududi)और दायें बाजू वाले, दायें बाजू वालों की खुश नसीब का क्या कहना
عَرَبِيفي سِدرٍ مَخضودٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे बिना कँटीले बेरियों में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh be-khaar (thornless) beriyon(lote trees)
Roman Urdu (Junagarhi)Woh baghair kanton ki bairiyon
Devnagri Urdu (Maududi)वो बे-खर (कांटा रहित) बेरियों (लोटे के पेड़)
عَرَبِيوَطَلحٍ مَنضودٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा परत-दर-परत लगे हुए केलों में।
Roman Urdu (Maududi)Aur teh bar teh chadey huey kelon (bananas)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur teh ba teh keelon
Devnagri Urdu (Maududi)और तेह बार तेह चढ़े हुए केलों (केले)
عَرَبِيوَظِلٍّ مَمدودٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और ऐसी छाया में जो अच्छी तरह फैली हुई है।
Roman Urdu (Maududi)Aur door tak phayli hui chaaon (shadow)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur lambay lambay sayon
Devnagri Urdu (Maududi)और दूर तक फैली हुई छाँव (छाया)
عَرَبِيوَماءٍ مَسكوبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और प्रवाहित जल में।
Roman Urdu (Maududi)Aur har dum rawan (gushing) paani
Roman Urdu (Junagarhi)Aur behtay huye paaniyon
Devnagri Urdu (Maududi)और हर दम रावन (घूसते हुए) पानी
عَرَبِيوَفاكِهَةٍ كَثيرَةٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा बहुत अधिक फलों में।
Roman Urdu (Maududi)Aur kabhi khatam na honay waley
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ba-kasrat phalon main
Devnagri Urdu (Maududi)और कभी ख़तम न होने वाले
عَرَبِيلا مَقطوعَةٍ وَلا مَمنوعَةٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जो न कभी समाप्त होंगे और न उनसे कोई रोक-टोक होगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur bay rok-tok milne waley ba-kasrat phalon (fruits)
Roman Urdu (Junagarhi)Jo na khatam hon na rok liye jayen
Devnagri Urdu (Maududi)और बे रोक-टोक मिलने वाले बा-कसरत फलन (फल)
عَرَبِيوَفُرُشٍ مَرفوعَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और ऊँचे बिस्तरों पर होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur unchi nishist gaahon (exalted thrones) mein hongay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unchay unchay farshon mein hongay
Devnagri Urdu (Maududi)और ऊंची निशिस्ट गाहों (ऊंचे सिंहासन) में होंगे
عَرَبِيإِنّا أَنشَأناهُنَّ إِنشاءً
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने उनको एक विशेष रूप से पैदा किया है।
Roman Urdu (Maududi)Unki biwiyon ko hum khaas taur par naye sirey se paida karengey
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney unn(Ki biwiyon ko) khaas tor per banaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)उनकी बिवियों को हम खास तौर पर नए सिरे से पैदा करेंगे
عَرَبِيفَجَعَلناهُنَّ أَبكارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो हमने उन्हें कुँवारियाँ बनाया है।
Roman Urdu (Maududi)Aur unhein bakira (virgins) bana dengey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney unhen kanwariyan banadiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)और उन्हें बकीरा (कुंवारी) बना देंगे
عَرَبِيعُرُبًا أَترابًا
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हिन्दी (Al-Omari)जो पतियों को प्रिय और समान आयु वाली हैं।
Roman Urdu (Maududi)Apne shoharon ki aashik aur umar mein humsin (equal age)
Roman Urdu (Junagarhi)Mohabbat waliyan aur hum umar hain
Devnagri Urdu (Maududi)अपने शोहरों कि आशिक और उमर में हमसिन (समान उम्र)
عَرَبِيلِأَصحابِ اليَمينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)दाहिने हाथ वालों के लिए।
Roman Urdu (Maududi)Yeh kuch daayein bazu walon ke liye hai
Roman Urdu (Junagarhi)Dayen hath walon kay liye hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये कुछ दिन बाज़ू वालों के लिए हैं
عَرَبِيثُلَّةٌ مِنَ الأَوَّلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)एक बड़ा समूह पहले लोगों में से हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh aglon mein se bahut hongey
Roman Urdu (Junagarhi)jamm-e-ghafeer aglon main say
Devnagri Urdu (Maududi)वो एगलों में से बहुत होंगे
عَرَبِيوَثُلَّةٌ مِنَ الآخِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा एक बड़ा समूह पिछले लोगों में से हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur pichlon mein se bhi bahut
Roman Urdu (Junagarhi)Aur boht bari jamat hai pichlon main say
Devnagri Urdu (Maududi)और पिचलों में से भी बहुत
عَرَبِيوَأَصحابُ الشِّمالِ ما أَصحابُ الشِّمالِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और बाएँ हाथ वाले, क्या ही बुरे हैं बाएँ हाथ वाले!
Roman Urdu (Maududi)Aur baayein (left) bazu wale, bayein bazu walon ki badnasibi ka kya puchna
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bayen hath walay kiya hai bayen hath walay
Devnagri Urdu (Maududi)और बाएँ (बाएँ) बाज़ू वाले, बाएँ बाज़ू वालों की बदनसीबी का क्या पूछना
عَرَبِيفي سَمومٍ وَحَميمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(वे) गर्म हवा तथा खौलते जल में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Woh luu ki lapat (midst of scorching wind) aur khaulte (boiling) huey paani
Roman Urdu (Junagarhi)Garum hawa aur garum paani mein (hongey)
Devnagri Urdu (Maududi)वो लू की लपट (चिलचिलाती हवा के बीच) और खुलते (उबलते) हुए पानी
عَرَبِيوَظِلٍّ مِن يَحمومٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और काले धुएँ के साये में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur kaalay dhuwon (smoke) ke saaye mein hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur siyah dhuyen kay saye mein
Devnagri Urdu (Maududi)और काले धुएं (धुआं) के साये में होंगे
عَرَبِيلا بارِدٍ وَلا كَريمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जो न शीतल होगा और न देखने में अच्छी ही लगेगा।
Roman Urdu (Maududi)Jo na thanda hoga na aaram de
Roman Urdu (Junagarhi)Jo na thanda hai na farhat buksh
Devnagri Urdu (Maududi)जो ना ठंडा होगा ना आराम दे
عَرَبِيإِنَّهُم كانوا قَبلَ ذٰلِكَ مُترَفينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय वे इससे पहले (दुनिया की) सुख-सुविधाओं का आनंद ले रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hongey jo is anjaam ko pahunchne se pehle khush haal thay
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak yeh log iss say pehlay boht nazon mein palay huye thay
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग होंगे जो इस अंजाम को पहनेंगे से पहले खुश हाल थे
عَرَبِيوَكانوا يُصِرّونَ عَلَى الحِنثِ العَظيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा वे बड़े गुनाह पर अड़े रहते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur gunaah-e-azeem par israr karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur baray baray gunahon per israr kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)और गुनाह-ए-अज़ीम पर इसरार करते थे
عَرَبِيوَكانوا يَقولونَ أَئِذا مِتنا وَكُنّا تُرابًا وَعِظامًا أَإِنّا لَمَبعوثونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वे कहा करते थे कि क्या जब हम मर जाएँगे और हम मिट्टी तथा हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या सचमुच हम अवश्य उठाए जाने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kehte thay “kya jab hum mar kar khaak ho jayengey aur haddiyon ka panjar reh jayengey to phir utha khadey kiye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kehtay thay kay kiya jab hum mar jayengey aur mithi aur haddi hojayengey to kiya hum phir doobara utha kharay kiye jayeugey
Devnagri Urdu (Maududi)कहते थे "क्या जब हम मर कर खाक हो जाएंगे और हदियों का पंजर रह जाएंगे तो फिर उठ खड़े होंगे
عَرَبِيأَوَآباؤُنَا الأَوَّلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और क्या हमारे पहले बाप-दादा भी?
Roman Urdu (Maududi)Aur kya hamare woh baap dada bhi uthaye jayengey jo pehle guzar chuke hain?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kiya humaray aglay baap dada bhi
Devnagri Urdu (Maududi)और क्या हमारे वो बाप दादा भी उठेंगे जो पहले गुज़र चुके हैं?”
عَرَبِيقُل إِنَّ الأَوَّلينَ وَالآخِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : निःसंदेह अगले तथा पिछले (सभी) लोग।
Roman Urdu (Maududi)Aye Nabi in logon se kaho, yaqeenan agle aur pichle sab
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keydijiye kay yaqeenan sab aglay aur pichlay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी इन लोगों से कहो, यकीनन अगले और पिछले सब
عَرَبِيلَمَجموعونَ إِلىٰ ميقاتِ يَومٍ مَعلومٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)एक ज्ञात दिन के निश्चित समय पर अवश्य एकत्र किए जाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ek din zaroor jama kiye janey wale hain jiska waqt muqarrar kiya ja chuka hai
Roman Urdu (Junagarhi)zaroor jama kiye jayegey aik muqarra din kay waqt
Devnagri Urdu (Maududi)एक दिन जरूर जमा किए जाने वाले हैं जिसका वक्त मुकर्रर किया जा चुका है
عَرَبِيثُمَّ إِنَّكُم أَيُّهَا الضّالّونَ المُكَذِّبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर निःसंदेह तुम ऐ गुमराहो! झुठलाने वालो!
Roman Urdu (Maududi)Phir aey gumrahon aur jhutlane walon
Roman Urdu (Junagarhi)Phir tum aey gumraho jhutlanay walon
Devnagri Urdu (Maududi)फिर ऐ गुमराहों और झूठलाने वालों
عَرَبِيلَآكِلونَ مِن شَجَرٍ مِن زَقّومٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय ही ज़क़्क़ूम (थूहड़) के वृक्ष में से खाने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Tum shajar-e-zaqqum ki giza khane waley ho
Roman Urdu (Junagarhi)Albatta khanay walay ho thoher ka darakht
Devnagri Urdu (Maududi)तुम शजर-ए-जक्कम की गीज़ा खाने वाले हो
عَرَبِيفَمالِئونَ مِنهَا البُطونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उससे अपने पेट भरने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Usi se tum pait bharogey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ussi say pet bharnay walay ho
Devnagri Urdu (Maududi)उसी से तुम पैठ भरोगे
عَرَبِيفَشارِبونَ عَلَيهِ مِنَ الحَميمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उसपर खौलते पानी से पीने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur upar se khaulta (boiling) hua paani
Roman Urdu (Junagarhi)Phir uss per garum kholta paani peenay walay ho
Devnagri Urdu (Maududi)और ऊपर से खौलता (उबलता हुआ) हुआ पानी
عَرَبِيفَشارِبونَ شُربَ الهيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर पीने वाले हो प्यास की बीमारी वाले ऊँट के समान।
Roman Urdu (Maududi)Toans (thirst) lagey huey ount (camel) ki tarah piogey
Roman Urdu (Junagarhi)Phir peenay walay bhi piyasay unton ki tarah
Devnagri Urdu (Maududi)टोंस (प्यास) लगे हुए ऊंट (ऊंट) की तरह पियोगी
عَرَبِيهٰذا نُزُلُهُم يَومَ الدّينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह बदले के दिन उनकी मेहमाननवाज़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Yahi baayein walon ki ziyafat ka saamaan roz-e-jaza mein
Roman Urdu (Junagarhi)Qayamat kay din unki mehmaain yeh hai
Devnagri Urdu (Maududi)यहीं बैठें वालों की ज़ियाफत का सामान रोज-ए-जजा में
عَرَبِينَحنُ خَلَقناكُم فَلَولا تُصَدِّقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हमने ही तुम्हें पैदा किया, फिर तुम (पुनः जीवित किए जाने को) क्यों सच नहीं मानते?
Roman Urdu (Maududi)Humne tumhein paida kiya hai phir kyun tasdeek (confirm) nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Hum hi ney tum sab ko peda kiya hai phir tum bawer nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)हमने तुम्हें भुगतान किया है फिर क्यों तस्दीक (पुष्टि) नहीं करते
عَرَبِيأَفَرَأَيتُم ما تُمنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो क्या तुमने उस वीर्य पर विचार किया, जो तुम टपकाते हो?
Roman Urdu (Maududi)Kabhi tumne gaur kiya, yeh nutfa (sperm) jo tum daltey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Acha phir yeh to batlao kay jo mani tum tapkatay ho
Devnagri Urdu (Maududi)कभी तुमने गौर किया, ये नुत्फा (शुक्राणु) जो तुम डालते हो
عَرَبِيأَأَنتُم تَخلُقونَهُ أَم نَحنُ الخالِقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम उसे पैदा करते हो, या हम ही पैदा करने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Usse baccha tum banate ho ya uske banane wale hum hain
Roman Urdu (Junagarhi)kiya uss ka (insane) tum banatay ho ya peda kernay walay hum hi hain
Devnagri Urdu (Maududi)उसे बच्चा तुम बनाते हो या उसके बनाने वाले हम हैं
عَرَبِينَحنُ قَدَّرنا بَينَكُمُ المَوتَ وَما نَحنُ بِمَسبوقينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हम ही ने तुम्हारे बीच मृत्यु का समय निश्चित किया है और हम कदापि विवश नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Humne tumharey darmiyan maut ko takseem kiya hai, aur hum issey aajiz nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum hi ney tum mein mot ko mutaeyen kerdiya hai.aur iss say haray huye nahi hain
Devnagri Urdu (Maududi)हमने तुम्हारे दरमियान मौत को तकसीम किया है, और हम इसे अजीज नहीं है
عَرَبِيعَلىٰ أَن نُبَدِّلَ أَمثالَكُم وَنُنشِئَكُم في ما لا تَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कि हम तुम्हारे रूप को परिवर्तित कर दें और तुम्हें ऐसी शक्ल-सूरत में पैदा कर दें, जिसे तुम नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Ke tumhari shaklein badal dein aur kisi aisi shakal mein tumhein paida kardein jisko tum nahin jante
Roman Urdu (Junagarhi)Kay tumhari jagah tum jaisay aur peda kerden. aur tumhen naye siray say uss aalam mein peda keren jiss say tum (bilkul) beykhabar ho
Devnagri Urdu (Maududi)के तुम्हारी शकलें बदल दें और किसी ऐसी शक्ल में तुम्हें पैदा कर दें जिसको तुम नहीं जानते
عَرَبِيوَلَقَد عَلِمتُمُ النَّشأَةَ الأولىٰ فَلَولا تَذَكَّرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा निश्चय ही तुम पहली पैदाइश को जान चुके हो, फिर तुम नसीहत ग्रहण क्यों नहीं करते?
Roman Urdu (Maududi)Apni pehli paidaish ko to tum jante ho, phir kyun sabaq nahin letay
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhen yaqeeni tor per pehli dafa ki pedaaeesh maloom hi hai phir kiyon ibrat hasil nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)अपनी पहली अदाइश को तो तुम जानते हो, फिर क्यों सबक नहीं लेते
عَرَبِيأَفَرَأَيتُم ما تَحرُثونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर क्या तुमने उसपर विचार किया जो कुछ तुम बोते हो?
Roman Urdu (Maududi)Kabhi tumne socha, yeh beej (seed) jo tum botey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Acha phir yeh bhi batlao kay tum jo kuch botay ho
Devnagri Urdu (Maududi)कभी तुमने सोचा, ये बीज (बीज) जो तुम बोते हो
عَرَبِيأَأَنتُم تَزرَعونَهُ أَم نَحنُ الزّارِعونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम उसे उगाते हो, या हम ही उगाने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Insey khetiyan tum ugatey ho ya unke ugane waley hum hain
Roman Urdu (Junagarhi)Ussay tum hi ugatay ho ya hum uganay walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे खेतियां तुम उगते हो या उनके उगने वाले हम हैं
عَرَبِيلَو نَشاءُ لَجَعَلناهُ حُطامًا فَظَلتُم تَفَكَّهونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यदि हम चाहें, तो अवश्य उसे चूर-चूर कर दें, फिर तुम आश्चर्य करते रह जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Hum chahein to un khetoun ko bhus (rubble) bana kar rakh dein aur tum tarah tarah ki baatein banate reh jao
Roman Urdu (Junagarhi)Agar hum chahyen to ussay reza reza ker dalen aur tum heyrat kay sath baten banatay hi reh jao
Devnagri Urdu (Maududi)हम चाहें तो उन खेतों को भूस (मलबा) बना कर रख दें और तुम तरह-तरह की बातें बनाते रह जाओ
عَرَبِيإِنّا لَمُغرَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कि निःसंदेह हमपर दाँड डाल दिया गया।
Roman Urdu (Maududi)Ke hum par to ulti chatti pad gayi (Lo! we are laden with debt)
Roman Urdu (Junagarhi)Kay hum per to tawaan hi par gaya
Devnagri Urdu (Maududi)के हम पर तो उल्टी चाटी पड़ गई (लो! हम कर्ज से दबे हुए हैं)
عَرَبِيبَل نَحنُ مَحرومونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि हम वंचित हो गए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Balke humarey to naseeb hi phootey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay hum bilkul mehroom hi reh gaye
Devnagri Urdu (Maududi)बलके हमारे तो नसीब ही फूटे हुए हैं
عَرَبِيأَفَرَأَيتُمُ الماءَ الَّذي تَشرَبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर क्या तुमने उस पानी पर विचार किया, जो तुम पीते हो?
Roman Urdu (Maududi)Kabhi tumne aankhein khol kar dekha, yeh paani jo tum peetey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Acha yeh batao kay jiss pani ko tum peetay ho
Devnagri Urdu (Maududi)कभी तुमने आंखें खोल कर देखा, ये पानी जो तुम पीते हो
عَرَبِيأَأَنتُم أَنزَلتُموهُ مِنَ المُزنِ أَم نَحنُ المُنزِلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या तुमने उसे बादल से उतारा है, या हम ही उतारने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Isey tumne baadal se barsaya hai ya iske barsane wale hum hain
Roman Urdu (Junagarhi)Ussay baadlon say bhi tum hi utartay ho ya hum barsatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)इसे तुमने बादलों से बरसाया है या इसके बरसाने वाले हम हैं
عَرَبِيلَو نَشاءُ جَعَلناهُ أُجاجًا فَلَولا تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि हम चाहें, तो उसे अत्यंत खारा बना दें, फिर तुम शुक्र अदा क्यों नहीं करते?
Roman Urdu (Maududi)Hum chahein to isey sakht khari(bitter) bana kar rakh dein, phir kyun tum shukar guzar nahin hotey
Roman Urdu (Junagarhi)Agar humari mansha hoto hum issay kerwa zehar kerden phir tum humari shukar guzari kiyon nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)हम चाहें तो isey सच खरी (कड़वा) बना कर रख दें, फिर क्यों तुम शुकर गुजर नहीं होते
عَرَبِيأَفَرَأَيتُمُ النّارَ الَّتي تورونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर क्या तुमने उस आग पर विचार किया, जो तुम सुलगाते हो?
Roman Urdu (Maududi)Kabhi tumne khayal kiya, yeh aag jo tum sulgate ho
Roman Urdu (Junagarhi)Acha zara yeh bhi batao kay jo aag tum sulgatay ho
Devnagri Urdu (Maududi)कभी तुमने ख्याल किया, ये आग जो तुम सुलगते हो
عَرَبِيأَأَنتُم أَنشَأتُم شَجَرَتَها أَم نَحنُ المُنشِئونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या तुमने उसके वृक्ष को पैदा किया है, या हम ही पैदा करने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Iska darakht tum ne paida kiya hai ya iske paida karne wale hum hain
Roman Urdu (Junagarhi)Iss kay darakht ko tum ney peda kiya hai ya hum uss kay peda kernay walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)इसका दर्द तुम ने पेदा किया है या इसके पेदा करने वाले हम हैं
عَرَبِينَحنُ جَعَلناها تَذكِرَةً وَمَتاعًا لِلمُقوينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हमने ही उसे यात्रियों के लिए एक नसीहत तथा लाभ का सामान बनाया है।
Roman Urdu (Maududi)Humne usko yaad-dihani(reminder) ka zariya aur haajat-mandon (needy) ke liye saaman-e-zeist (provision) banaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney issay sabab-e-naseehat aur musafiron kay faeeday ki cheez banaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उसको याद-दिहानी (रिमाइंडर) का ज़रिया और हाजत-मंदों (जरूरतमंद) के लिए सामान-ए-ज़ीस्ट (प्रावधान) बनाया है
عَرَبِيفَسَبِّح بِاسمِ رَبِّكَ العَظيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः (ऐ नबी!) आप अपने महान पालनहार के नाम की तसबीह करें।
Roman Urdu (Maududi)Pas aey Nabi, apne Rubb-e-azeem ke naam ki tasbeeh karo
Roman Urdu (Junagarhi)Pus apney boht baray rab kay naam ki tasbeeh kiya kero
Devnagri Urdu (Maududi)पास ऐ नबी, अपने रब-ए-अज़ीम के नाम की तस्बीह करो
عَرَبِي۞ فَلا أُقسِمُ بِمَواقِعِ النُّجومِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः नहीं! मैं सितारों के गिरने की जगहों की क़सम खाता हूँ!
Roman Urdu (Maududi)Pas nahin main kasam khata hoon taaron ke mawake (setting or the mansions, etc.) ki
Roman Urdu (Junagarhi)Pus mein qasam khata hun sitaron kay girnay ki
Devnagri Urdu (Maududi)पास नहीं मैं कसम खाता हूं तारों के मवाके, आदि) की
عَرَبِيوَإِنَّهُ لَقَسَمٌ لَو تَعلَمونَ عَظيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह यह निश्चय ऐसी क़सम है कि यदि तुम जानो तो बहुत बड़ी है।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum samjho to yeh bahut badi qasam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tumhen ilm hoto yeh boht bari qasam hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम समझो तो ये बहुत बड़ी क़सम है
عَرَبِيإِنَّهُ لَقُرآنٌ كَريمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह, यह निश्चित रूप से एक प्रतिष्ठित क़ुरआन है।
Roman Urdu (Maududi)Ke yeh ek buland paya Quran hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kay be-shak yeh quran boht bari izzat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)के ये एक बुलंद पाया कुरान है
عَرَبِيفي كِتابٍ مَكنونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)एक छिपाकर रखी हुई किताब में (अंकित) है।
Roman Urdu (Maududi)Ek mehfooz kitaab mein sabt (inscribed)
Roman Urdu (Junagarhi)Jo aik mehfooz kitab mein darj hai
Devnagri Urdu (Maududi)एक महफ़ूज़ किताब में सब्त (लिखा हुआ)
عَرَبِيلا يَمَسُّهُ إِلَّا المُطَهَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)इसे कोई नहीं छूता सिवाय उनके जो बहुत पवित्र किए गए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jisey mutahreen (pure) ke siwa koi choo nahin sakta
Roman Urdu (Junagarhi)Jissay sirf pak log hi chu saktay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जिसे मुतहरीन (शुद्ध) के सिवा कोई छू नहीं सकता
عَرَبِيتَنزيلٌ مِن رَبِّ العالَمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह सारे संसार के पालनहार की ओर से उतारा गया है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Rubb-ul- Aalameen ka nazil karda hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh rabul aalameen ki taraf say utra hua hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये रब्ब-उल-आलमीन का नाज़िल करदा है
عَرَبِيأَفَبِهٰذَا الحَديثِ أَنتُم مُدهِنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर क्या तुम इस वाणी की उपेक्षा करने वाले हो?
Roman Urdu (Maududi)Phir kya is kalam ke saath tum be-atnayi (indifferent) barat-te ho
Roman Urdu (Junagarhi)Pus kiya tum aisa baat ko sirsari (aur mamooli) samajh rahe ho
Devnagri Urdu (Maududi)फिर क्या इस कलाम के साथ तुम बे-अतनयी (उदासीन) बारात-ते हो
عَرَبِيوَتَجعَلونَ رِزقَكُم أَنَّكُم تُكَذِّبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम (क़ुरआन से) अपना हिस्सा यह बनाते हो कि तुम (इसे) झुठलाते हो?
Roman Urdu (Maududi)Aur is niyamat mein apna hissa tumne yeh rakkha hai ke isey jhutlate ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney hissay mein yehi letay ho kay jhutlatey phiro
Devnagri Urdu (Maududi)और इस नियामत में अपना हिसा तुमने ये रक्खा है के इसी झूठलाते हो
عَرَبِيفَلَولا إِذا بَلَغَتِ الحُلقومَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर क्यों नहीं जब वह (प्राण) गले को पहुँच जाता है।
Roman Urdu (Maududi)To jab marne wale ki jaan halaq tak pahunch chuki hoti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jabkay rooh narkharay tak phonch jaye
Devnagri Urdu (Maududi)तो जब मरने वाले की जान हलक तक पहुंच चुकी होती है है
عَرَبِيوَأَنتُم حينَئِذٍ تَنظُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम उस समय देख रहे होते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur tum aankhon se dekh rahe hotey ho ke woh marr raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum uss waqt aankhon say dekhtay raho
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम आँखों से देख रहे हो के वो मर रहा है
عَرَبِيوَنَحنُ أَقرَبُ إِلَيهِ مِنكُم وَلٰكِن لا تُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हम तुमसे अधिक उसके निकट होते हैं, परंतु तुम नहीं देखते।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt tumhare ba-nisbat hum uske zyada kareeb hotey hain magar tumko nazar nahin aatey
Roman Urdu (Junagarhi)Hum uss shaks say banisbat tumharay boht ziyadah qareeb hotay hain lekin tum nahi dekh saktey
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त तुम्हारे ब-निस्बत हम उसके ज्यादा करीब होते हैं मगर तुमको नजर नहीं आती
عَرَبِيفَلَولا إِن كُنتُم غَيرَ مَدينينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो अगर तुम (किसी के) अधीन नहीं हैं तो क्यों नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar tum kisi ke mahkoom(anyones authority) nahin ho aur apne is khayal mein sacchey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Pus agar tum kissi kay zair-e-farman nahi
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर तुम किसी के महकूम नहीं हो और अपने इस ख्याल में सच्चे हो
عَرَبِيتَرجِعونَها إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम उसे वापस ले आते, यदि तुम सच्चे हो?
Roman Urdu (Maududi)Us waqt uski nikalti hui jaan ko wapas kyun nahin ley aatey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss qol mein sachay hoto (zara) iss rooh ko to lotao
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त उसकी निकलती हुई जान को वापस क्यों नहीं ले आते
عَرَبِيفَأَمّا إِن كانَ مِنَ المُقَرَّبينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर यदि वह निकटवर्तियों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh marne wala agar muqarrabin (near to Allah) mein se hon
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jo koi barah-e-elaahi say qareeb kiya hua hoga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो मरने वाला अगर मुकर्रबीन (अल्लाह के करीब) में से हो
عَرَبِيفَرَوحٌ وَرَيحانٌ وَجَنَّتُ نَعيمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो उसके लिए आराम और अच्छी जीविका और नेमतों से भरी जन्नत है।
Roman Urdu (Maududi)To uske liye rahat aur umda rizq aur niyamat bhari jannat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ussay to rahat hai aur ghizayen hain aur aaram wali jannat hai
Devnagri Urdu (Maududi)तो उसके लिए राहत और उम्र रिज़क और नियामत भरी जन्नत है
عَرَبِيوَأَمّا إِن كانَ مِن أَصحابِ اليَمينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि वह दाहिने हाथ वालों में से है।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar woh ashaab-e-yameen mei se ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo shaks dahanay walon mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर वो अशाब-ए-यमीन में से हो
عَرَبِيفَسَلامٌ لَكَ مِن أَصحابِ اليَمينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो (कहा जाएगा) तेरे लिए सलामती है (कि तू) दाहिने हाथ वालों में से है।
Roman Urdu (Maududi)To uska istaqbal (welcome) yun hota hai ke salaam hai tujhey, tu ashab-ul-yameen (People on the Right) mein se hai
Roman Urdu (Junagarhi)To bhi salamti hai teray liye kay tu dahanay walon mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)तो उसका इस्तकबाल (स्वागत) यूं होता है के सलाम है तुझ, तू असहाब-उल-यमीन (दाहिनी ओर के लोग) में से है
عَرَبِيوَأَمّا إِن كانَ مِنَ المُكَذِّبينَ الضّالّينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वह व्यक्ति झुठलाने वाले गुमराहों में से है,
Roman Urdu (Maududi)Aur agar woh jhutlane waley gumraah logon mein se ho
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin agar koi jhut lanay walon gumrahaon mein say hai
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर वो झूठलाने वाले गुमराह लोगों में से हो
عَرَبِيفَنُزُلٌ مِن حَميمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उसके लिए खौलते हुए पानी का अतिथि सत्कार है।
Roman Urdu (Maududi)To uski tawazu ke liye khaulta (boiling) pani hai
Roman Urdu (Junagarhi)To kholtay huye garum pani ki mehmaani hai
Devnagri Urdu (Maududi)तो उसकी तवाज़ू के लिए खौलता (उबलता हुआ) पानी है
عَرَبِيوَتَصلِيَةُ جَحيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जहन्नम की आग में जलना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jahannum mein jhonka jaana
Roman Urdu (Junagarhi)Aur dozakh mein jana hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जहन्नुम में झोंका जाना
عَرَبِيإِنَّ هٰذا لَهُوَ حَقُّ اليَقينِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यक़ीनन यही है वह सत्य जो निश्चित है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh sab kuch qataii haqq hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh khabar sirasir haq aur qaton yaqeeni hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये सब कुछ कताई हक़ है
عَرَبِيفَسَبِّح بِاسمِ رَبِّكَ العَظيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप अपने महान पालनहार के नाम की महिमा करें।
Roman Urdu (Maududi)Pas aey Nabi apne Rubb-e-Azeem ke naam ki tasbeeh karo
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tu apney azeem-ul-shaan perwerdigar ki tasbeeh ker
Devnagri Urdu (Maududi)पास ऐ नबी अपने रुब-ए-अज़ीम के नाम की तस्बीह करो
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Surah 56: Al-Waqi'ah (The Event)

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Surah 56: Al-Waqi'ah (The Event)

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Surah 56: Al-Waqi'ah (The Event)

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Surah 56: Al-Waqi'ah (The Event)

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Surah 56: Al-Waqi'ah (The Event)

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Surah 57: Al-Hadid (Iron)

Medinan🕐 Revelation #94📜 29 Verses🕮 Juz 1
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Surah 57: Al-Hadid (Iron)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيسَبَّحَ لِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ وَهُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह की पवित्रता का गान किया हर उस चीज़ ने जो आकाशों और धरती में है और वही सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki tasbeeh ki hai har us cheez ne jo zameen aur aasmano mein hai, Aur wahi zabardast daana (wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmanon aur zamin mein jo hai (Sub) Allah ki tasbeeh ker rahey hain woh zabardast ba-hikmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की तस्बीह है हर उस चीज़ ने जो ज़मीन और आसमान में है, और वही ज़बरदस्त दाना (बुद्धिमान) है
عَرَبِيلَهُ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ يُحيي وَيُميتُ ۖ وَهُوَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसी के लिए आकाशों तथा धरती का राज्य है। वह जीवन प्रदान करता और मौत देता है। तथा वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Zameen aur aasmano ki sultanat ka maalik wahi hai, zindagi bakshta hai aur maut deta hai, aur har cheez par qudrat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmanon aur zamin ki badshahat ussi ki hai.woh hi zindagi deta hai aur mot bhi aur woh her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन और आसमान की सल्तनत का मालिक वही है, ज़िंदगी बक्शता है और मौत देता है, और हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है
عَرَبِيهُوَ الأَوَّلُ وَالآخِرُ وَالظّاهِرُ وَالباطِنُ ۖ وَهُوَ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वही सबसे पहले है और सबसे आख़िर है और ज़ाहिर (दृश्यमान) है और पोशीदा (अदृश्य) है और वह हर चीज़ को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi awwal bhi hai aur aakhir bhi, aur zaahir bhi hai aur makhfi(hiddin) bhi , aur woh har cheez ka ilm rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi pehlay hai aur wohi peechay wohi zahir hai aur wohi makhfi aur woh her cheez ko bakhoobi janney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही अव्वल भी है और आख़िर भी, और ज़ाहिर भी है और मख़फ़ी (हिद्दीन) भी, और वो हर चीज़ का इल्म रखता है
عَرَبِيهُوَ الَّذي خَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ في سِتَّةِ أَيّامٍ ثُمَّ استَوىٰ عَلَى العَرشِ ۚ يَعلَمُ ما يَلِجُ فِي الأَرضِ وَما يَخرُجُ مِنها وَما يَنزِلُ مِنَ السَّماءِ وَما يَعرُجُ فيها ۖ وَهُوَ مَعَكُم أَينَ ما كُنتُم ۚ وَاللَّهُ بِما تَعمَلونَ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उसी ने आकाशों तथा धरती को छह दिनों में पैदा किया, फिर वह अर्श पर बुलंद हुआ। वह जानता है जो कुछ धरती में प्रवेश करता है और जो कुछ उससे निकलता है और जो कुछ आकाश से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है और वह तुम्हारे साथ है, तुम जहाँ कहीं भी हो। और जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उसे ख़ूब देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jisne aasmano aur zameen ko chey (six) dino mein paida kiya aur phir arsh par jalwa farma hua. Uske ilm mein hai jo kuch zameen mein jata hai aur jo kuch ussey nikalta hai, aur jo kuch aasman se utarta hai aur jo kuch usmein chadhta hai. Woh tumhare saath hai jahan bhi tum ho. Jo kaam bhi karte ho usey woh dekh raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi hai jiss ney aasmanon aur zamin ko cheh (6) din mein peda kiya phir arsh per mustawi hogaya Woh (Khoob) jaanta hai uss cheez ko zamin mein jaye aur jo uss say niklay aur jo aasmanoon say neechay aaye. aur jo kuch Charh ker uss mein jaye aur jahan kahin tum ho woh tumharay sath hai aur jo tum kerahey ho Allah dekh raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिसने आसमान और ज़मीन को (छह) दिनों में पेदा किया और फिर अर्श पर जलवा फरमा हुआ। उसके इल्म में है जो कुछ ज़मीन में जाता है और जो कुछ उसे निकलता है, और जो कुछ आसमान से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है। वो तुम्हारे साथ है जहाँ भी तुम हो। जो काम भी करते हो उसे वो देख रहा है
عَرَبِيلَهُ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ وَإِلَى اللَّهِ تُرجَعُ الأُمورُ
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हिन्दी (Al-Omari)आकाशों और धरती का राज्य उसी का है और सारे मामले अल्लाह ही की ओर लौटाए जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Wahi zameen aur aasmano ki baadshahi ka maalik hai aur tamaam maamlaat faisley ke liye usi ki taraf ruju kiye jatey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmanoon ki aur zamin ki baadshahi ussi ki hai aur tamam kaam ussi ki taraf lotaye jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)वही ज़मीन और आसमान की बादशाही का मालिक है और तमाम मामले फैसले के लिए उसकी तरफ रूजू किये जाते हैं
عَرَبِييولِجُ اللَّيلَ فِي النَّهارِ وَيولِجُ النَّهارَ فِي اللَّيلِ ۚ وَهُوَ عَليمٌ بِذاتِ الصُّدورِ
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हिन्दी (Al-Omari)वह रात्रि को दिन में दाखिल करता है और दिन को रात्रि में दाखिल करता है तथा वह सीनों की बातों को ख़ूब जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi raat ko din mein aur din ko raat mein daakhil karta hai, aur dilon ke chupey huye raaz tak janta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi raat ko din mein lejata hai aur wohi din ko raat mein dakhil kerdeta hai aur seenoon kay bhedon ka woh poora aalim hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही रात को दिन में और दिन को रात में दाख़िल करता है, और दिलों को के छुपे हुए राज़ तक जानता है
عَرَبِيآمِنوا بِاللَّهِ وَرَسولِهِ وَأَنفِقوا مِمّا جَعَلَكُم مُستَخلَفينَ فيهِ ۖ فَالَّذينَ آمَنوا مِنكُم وَأَنفَقوا لَهُم أَجرٌ كَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह तथा उसके रसूल पर ईमान लाओ और उसमें से खर्च करो जिसमें उसने तुम्हें उत्तराधिकारी बनाया है। फिर तुममें से जो लोग ईमान लाए और उन्होंने ख़र्च किए, उनके लिए बहुत बड़ा प्रतिफल है।
Roman Urdu (Maududi)Iman lao Allah aur uske Rasool par aur kharch karo un cheezon mein se jinpar usney tumko khalifa banaya hai. Jo log tum mein se iman layenge aur maal kharch karenge unke liye bada ajr hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah per aur uss kay raool per eman ley aao aur uss maal mein say kharch kero jiss mein Allah ney tumhen doosron ka janasheen banaya hai pus jo tum mein say eman leyen aur kheraat keren unhen boht bara sawab milay ga
Devnagri Urdu (Maududi)ईमान लाओ अल्लाह और उसके रसूल पर और ख़र्च करो उन चीज़ों में से जिनपर उसने तुमको ख़लीफ़ा बनाया है। जो लोग तुम में से ईमान लाएंगे और माल खर्च करेंगे उनके लिए बड़ा अजर है
عَرَبِيوَما لَكُم لا تُؤمِنونَ بِاللَّهِ ۙ وَالرَّسولُ يَدعوكُم لِتُؤمِنوا بِرَبِّكُم وَقَد أَخَذَ ميثاقَكُم إِن كُنتُم مُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम्हें क्या हो गया है कि अल्लाह पर ईमान नहीं लाते, जबकि रसूल तुम्हें बुला रहा है कि अपने पालनहार पर ईमान लाओ, और निश्चय वह (अल्लाह) तुमसे दृढ़ वचन ले चुका है, यदि तुम ईमान वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Tumhein kya ho gaya hai ke tum Allah par iman nahin latey halanke Rasool tumhein apne Rubb par iman laney ki dawat de raha hai, aur woh tumse ahad (covenant) le chuka hai, agar tum waqayi maanne waley ho
Roman Urdu (Junagarhi)Tum ALLAH per eman kiyon nahi latay ? Halankay khud rasool tumhen apney rab per eman lanay ki dawat dey raha hai agar tum momin ho to who to tum say mazboot ehad-o-paymaan bhi ley chukka hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह पर ईमान नहीं लाते हालंके रसूल तुम्हें अपने रब पर ईमान लाने की दावत दे रहा है, और वो तुमसे अहद (संविदा) ले चूका है, अगर तुम वकायी मानोगे वाले हो
عَرَبِيهُوَ الَّذي يُنَزِّلُ عَلىٰ عَبدِهِ آياتٍ بَيِّناتٍ لِيُخرِجَكُم مِنَ الظُّلُماتِ إِلَى النّورِ ۚ وَإِنَّ اللَّهَ بِكُم لَرَءوفٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है, जो अपने बंदे पर स्पष्ट निशानियाँ उतारता है, ताकि तुम्हें अँधेरों से प्रकाश की ओर निकाले। तथा निःसंदेह अल्लाह तुमपर निश्चय ही बड़ा करुणामय, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi to hai jo apne banday par saaf saaf aayatein nazil kar raha hai taa-ke tumhein tareekhiyon (darkness) se nikal kar roshni mein le aaye. Aur haqeeat yeh hai ke Allah tumpar nihayat shafeeq aur meharbaan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh (ALLAH) hi hai jo apney banday per wazeh aayaten utaarta hai takay who tumhen andheron say noor ki taraf ley jaye yaqeenan ALLAH taalaa tum per narmi kernay wala reham kernay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)वाह अल्लाह हाय तो है जो अपने बंदे पर साफ साफ आयतें नाज़िल कर रहा है ता-के तुम्हें तारीख़ों (अंधेरे) से निकाल कर रोशनी में ले आये। और हक़ीक़त ये है के अल्लाह तुमपर निहायत शफ़ीक़ और मेहरबान है
عَرَبِيوَما لَكُم أَلّا تُنفِقوا في سَبيلِ اللَّهِ وَلِلَّهِ ميراثُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ لا يَستَوي مِنكُم مَن أَنفَقَ مِن قَبلِ الفَتحِ وَقاتَلَ ۚ أُولٰئِكَ أَعظَمُ دَرَجَةً مِنَ الَّذينَ أَنفَقوا مِن بَعدُ وَقاتَلوا ۚ وَكُلًّا وَعَدَ اللَّهُ الحُسنىٰ ۚ وَاللَّهُ بِما تَعمَلونَ خَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह की राह में ख़र्च नहीं करते, जबकि आसमानों और ज़मीन की मीरास अल्लाह ही के लिए है। तुममें से जिसने (मक्का की) विजय से पहले ख़र्च किया और लड़ाई की वह (बाद में ऐसा करने वालों के) बराबर नहीं है। ये लोग पद में उन लोगों से बड़े हैं, जिन्होंने बाद में ख़र्च किया और युद्ध किया। जबकि अल्लाह ने प्रत्येक से अच्छा बदला देने का वादा किया है तथा तुम जो कुछ करते हो, अल्लाह उससे भली-भाँति सूचित है।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir kya wajah hai ke tum Allah ki raah mein kharch nahin karte halanke zameen aur aasmano ki miraas (inheritance) Allah hi ke liye hai. Tum mein se jo log fatah ke baad kharch aur jihad karenge woh kabhi un logon ke barabar nahin ho sakte jinhon ne fatah se pehle kharch aur jihad kiya hai.Unka darja baad mein kharch aur jihad karne walon se badh-kar hai hai agarche Allah ne dono hi se acchey waade famaye hain. Jo kuch tum karte ho Allah ussey ba-khabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)kertay' darasal aasmanon our zamin ke meeress ka malik (tanha) Allah hi hai tum main say jin logo ney fatah say pehlay fi subilillah diya hai our qitaal kiya hai woh (doosron kay) barabar nahi bulkay unn say boht baray darjay kay hain jinhon nay fatah kay baad kheyraaten den our jahad kiyey haan bhalaee ka wada to Allah taalaaka unn sab say hai jo kuch tum ker rahey ho uss say Allah khabardaarhai
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर क्या वजह है कि तुम अल्लाह की राह में ख़र्च नहीं करते, ज़मीन और आसमान की मीरास (विरासत) अल्लाह ही के लिए है। तुम में से जो लोग फतह के बाद खर्च और जिहाद करेंगे वो कभी उन लोगों के बराबर नहीं हो सकते जिन्होन ने फतह से पहले खर्च और जिहाद किया है। जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बा-ख़बर है
عَرَبِيمَن ذَا الَّذي يُقرِضُ اللَّهَ قَرضًا حَسَنًا فَيُضاعِفَهُ لَهُ وَلَهُ أَجرٌ كَريمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)कौन है जो अल्लाह को अच्छा क़र्ज़ दे, फिर वह उसे उसके लिए कई गुना कर दे और उसके लिए अच्छा (सम्मानजनक) बदला है?
Roman Urdu (Maududi)Kaun hai jo Allah ko qarz dey? Accha qarz taa-ke Allah usey kai gunaa bada kar wapas dey. Aur uske liye behtareen ajar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kon hai jo Allah taalaa ko achi tarah qarz dey phir Allah Taalaa issay uss kay liye barhata chala jaye our uss kay liye pasandeedah ajar sabit hojaye
Devnagri Urdu (Maududi)कौन है जो अल्लाह को क़र्ज़ दे? अच्छा क़र्ज़ ता-के अल्लाह उसे कै गुनाह बड़ा कर वापस दे। और उसके लिए बेहतरीन अजर है
عَرَبِييَومَ تَرَى المُؤمِنينَ وَالمُؤمِناتِ يَسعىٰ نورُهُم بَينَ أَيديهِم وَبِأَيمانِهِم بُشراكُمُ اليَومَ جَنّاتٌ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها ۚ ذٰلِكَ هُوَ الفَوزُ العَظيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन तुम ईमान वाले पुरुषों तथा ईमान वाली स्त्रियों को देखोगे कि उनका प्रकाश उनके आगे तथा उनके दाहिनी ओर दौड़ रहा होगा। आज तुम्हें ऐसे बागों की शुभ-सूचना है, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, जिनमें तुम हमेशा रहोगे। यही तो बहुत बड़ी सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)Us din jabke tum momin mardon aur auraton ko dekhoge ke unka noor unke aagey aagey aur unke dayein jaanib daud raha hoga (unse kaha jayega ke) aaj basharat (khushkhabri) hai. Tumhare liye jannatein hongi jinke nichey nehrein beh rahi hongi, jin mein woh hamesha rahenge. Yahi hai badi kamiyabi
Roman Urdu (Junagarhi)(Qayamat Kay) din tu dekhay ga kay momin mardo our orton ka noor unn kay aagay aagay our unkay dayen dor raha hoga aaj tumhen inn jannaton ki khushkhabri hai jinkay neechay nehren jaari hain jin main humesha ki rehaeesh hai yeh hai bari kaamyabi
Devnagri Urdu (Maududi)उस दिन जबके तुम मोमिन मर्दन और औरतों को देखोगे के उनका नूर उनके आगे आगे और उनके दिन जानिब दौड़ रहा होगा (उन्हें कहा जाएगा के) आज बशारत (खुशखबरी) है। तुम्हारे लिए जन्नतें होंगी जिनके बारे में खास बातें नहीं होंगी, जिन में वो हमेशा रहेंगे। यही है बड़ी कामयाबी
عَرَبِييَومَ يَقولُ المُنافِقونَ وَالمُنافِقاتُ لِلَّذينَ آمَنُوا انظُرونا نَقتَبِس مِن نورِكُم قيلَ ارجِعوا وَراءَكُم فَالتَمِسوا نورًا فَضُرِبَ بَينَهُم بِسورٍ لَهُ بابٌ باطِنُهُ فيهِ الرَّحمَةُ وَظاهِرُهُ مِن قِبَلِهِ العَذابُ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन मुनाफ़िक़ पुरुष तथा मुनाफ़िक़ स्त्रियाँ ईमान वालों से कहेंगे कि हमारी प्रतीक्षा करो कि हम तुम्हारे प्रकाश में से कुछ प्रकाश प्राप्त कर लें। कहा जाएगा : अपने पीछे लौट जाओ, फिर कोई प्रकाश तलाश करो। फिर उनके बीच एक दीवार बना दी जाएगी, जिसमें एक द्वार होगा। उसके भीतरी भाग में दया होगी तथा उसके बाहरी भाग की ओर यातना होगी।
Roman Urdu (Maududi)Us roz munafik mardon aur auraton ka haal yeh hoga ke woh momino se kahenge zara hamari taraf dekho taa-ke hum tumhare noor se kuch fayda uthayein. Magar unse kaha jayega pichey hatt jao, Apna noor kahin aur talash karo. Phir unke darmiyan ek deewar hayal kardi jayegi jismein ek darwaza hoga us darwaze ke andar rehmat hogi aur bahar azaab
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din munafiq mard-o-orat eman walon say kahan gay kay humara intizar to kero kay hum bhi tumharay noor say kuch roshni hasil kerlen jawab diya jayega kay tum apney peechay lot jao our roshni talash kero phir inkay our unkay darmiyan aik deewar haaeel kerdi jayegi jiss main darwaaza bhi hoga uss kay androoni hissay main to rehmathogi our bahir ki taraf azab hoga
Devnagri Urdu (Maududi)हमें रोज़ मुनाफिक मर्दों और औरतों का हाल ये होगा के वो मोमिनो से कहेंगे ज़रा हमारी तरफ देखो ता-के हम तुम्हारे नूर से कुछ फ़ायदा उठायें। मगर उनसे कहा जाएगा पीछे हट जाओ, अपना नूर कहीं और तलाश करो। फिर उनके दरमियान एक दीवार होल करदी जाएगी जिसमें एक दरवाजा होगा उस दरवाज़े के अंदर रहमत होगी और बाहर अज़ाब
عَرَبِييُنادونَهُم أَلَم نَكُن مَعَكُم ۖ قالوا بَلىٰ وَلٰكِنَّكُم فَتَنتُم أَنفُسَكُم وَتَرَبَّصتُم وَارتَبتُم وَغَرَّتكُمُ الأَمانِيُّ حَتّىٰ جاءَ أَمرُ اللَّهِ وَغَرَّكُم بِاللَّهِ الغَرورُ
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हिन्दी (Al-Omari)वे उन्हें पुकारकर कहेंगे : क्या हम तुम्हारे साथ नहीं थे? वे कहेंगे : क्यों नहीं, परंतु तुमने अपने आपको फ़ितने (परीक्षा) में डाला, और तुम प्रतीक्षा करते रहे तथा तुमने संदेह किया और (झूठी) इच्छाओं ने तुम्हें धोखा दिया, यहाँ तक कि अल्लाह का आदेश आ गया, और इस धोखेबाज़ ने तुम्हें अल्लाह के बारे में धोखा दिया।
Roman Urdu (Maududi)Woh momino se pukar pukar kar kahenge kya hum tumhare saath na thay? Momin jawab dengey haan, magar tumne apne aap ko khud fitne mein dala, mauqa parasti ki, shakk mein padey rahey, aur jhooti tawakkuat (expectations) tumhein fareb deti rahi Yahan tak ke Allah ka faisla aa gaya. Aur aakhri waqt tak woh bada dhoke baaz tumhein Allah ke maamle mein dhoka deta raha
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh chilla chilla ker unn say kahen gey kay kiya hum tumharay sath na thay woh kahengay kay haan thay to sahi lekin tum ney apney app ko fitnay mein phansa rakha tha our intizar mein hi rahey our shak-o-shuba kertay raheyour tumhen tumhari fazool tamannao ney dhokay mein hi rakha yahan tak kay Allah ka hukum aa phoncha our tumhen Allah kay baray mein dhoka denay walay ney dhokay mein hi rakha
Devnagri Urdu (Maududi)वो मोमिनो से पुकार पुकार कर कहेंगे क्या हम तुम्हारे साथ ना थे? मोमिन जवाब देंगे हां, मगर तुमने अपने आप को खुद फिटने में डाला, मौका परस्त की, शक्क में पड़े रहे, और झूठी तवक्कुअत (उम्मीदें) तुम्हें फरेब देती रही यहां तक ​​के अल्लाह का फैसला आ गया। और आखिरी वक्त तक वो बड़ा धोखा बाज़ तुम्हें अल्लाह के मामले में धोखा देता रहा
عَرَبِيفَاليَومَ لا يُؤخَذُ مِنكُم فِديَةٌ وَلا مِنَ الَّذينَ كَفَروا ۚ مَأواكُمُ النّارُ ۖ هِيَ مَولاكُم ۖ وَبِئسَ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)तो आज न तुमसे कोई छुड़ौती ली जाएगी और न उन लोगों से जिन्होंने कुफ़्र किया। तुम्हारा ठिकाना जहन्नम है। वही तुम्हारी दोस्त है और वह बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza aaj na tumse koi fidiya kabool kiya jayega aur na un logon se jinhon ne khula khula kufr kiya tha. Tumhara thikana jahannum hai. Wahi tumhari khabar-giri karne wali hai aur yeh badtareen anjaam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Algharz aaj tum say na fidya (aur na badla) qabool kiya jayega our na kafiron say tum (sab) ka thikana dozakh hai wohi tumhari rafiq hai our woh bura thikana hai
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाज़ा आज ना तुमसे कोई फ़िदिया कबूल किया जाएगा और ना उन लोगों से जिन्हों ने खुला खुला कुफ्र किया था। तुम्हारा ठिकाना जहन्नुम है. वही तुम्हारी खबर-गीरी करने वाली है और ये बद्तरीन अंजाम है
عَرَبِي۞ أَلَم يَأنِ لِلَّذينَ آمَنوا أَن تَخشَعَ قُلوبُهُم لِذِكرِ اللَّهِ وَما نَزَلَ مِنَ الحَقِّ وَلا يَكونوا كَالَّذينَ أوتُوا الكِتابَ مِن قَبلُ فَطالَ عَلَيهِمُ الأَمَدُ فَقَسَت قُلوبُهُم ۖ وَكَثيرٌ مِنهُم فاسِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन लोगों के लिए जो ईमान लाए, वह समय नहीं आया कि उनके दिल अल्लाह की याद के लिए और उस सत्य के लिए झुक जाएँ जो उतरा है, और वे उन लोगों की तरह न हो जाएँ, जिन्हें इससे पहले पुस्तक प्रदान की गई थी, फिर उनपर लंबा समय गुज़र गया, तो उनके दिल कठोर हो गए और उनमें बहुत-से लोग अवज्ञाकारी हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya iman laney walon ke liye abhi woh waqt nahin aaya ke unke dil Allah ke zikr se pighlein aur uske nazil karda haqq ke aagey jhukein aur woh un logon ki tarah na ho jayein jinhein pehle kitaab di gayi thi, phir ek lambi muddat unpar guzar gayi to unke dil sakht ho gaye aur aaj unmein se aksar fasiq banay huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya abb tak eman walon kay liye waqt nahi aaya kay unkay dil zikar-e-elaahi say our our jo haqutar chuka hai uss say narum hojayen our unki tarah na hojayen jinhen unn say pehlay kitab di gaee thi phir job inn per aik zamana dorazguzer gaya to unkay dil sakht hogaye our inn mein boht say faasiq hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ईमान लाने वालों के लिए अभी वो वक्त नहीं आया के उनके दिल अल्लाह के जिक्र से पिगलें और उसके नाज़िल करदा हक के आगे झुकें और वो उन लोगों की तरह न हो जाएं जिन्हें पहली किताब दी गई थी, फिर एक लंबी मुद्दत उन पर गुजर गई तो उनका दिल सख्त हो गया और आज उनमें से अक्सर फासीक बने हुए हैं
عَرَبِياعلَموا أَنَّ اللَّهَ يُحيِي الأَرضَ بَعدَ مَوتِها ۚ قَد بَيَّنّا لَكُمُ الآياتِ لَعَلَّكُم تَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जान लो कि निःसंदेह अल्लाह धरती को उसके मरने के पश्चात जीवित करता है। निःसंदेह हमने तुम्हारे लिए निशानियाँ खोलकर बयान कर दी हैं, ताकि तुम समझो।
Roman Urdu (Maududi)Khoob jaan lo ke Allah zameen ko uski maut ke baad zindagi bakshta hai, humne nishaniyan tumko saaf saaf dikha di hai, shayad ke tum aqal se kaam lo
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeen mano Allah hi zamin ko uss ki mot kay baad zinda kerdeta hai hum ney to tumharay liye apni aayaten biyan kerdin takay tum samjho
Devnagri Urdu (Maududi)खूब जान लो के अल्लाह जमीन को उसकी मौत के बाद जिंदगी बक्शता है, हमने निशानियां तुमको साफ साफ दिखाया है, शायद के तुम अक़ल से काम लो
عَرَبِيإِنَّ المُصَّدِّقينَ وَالمُصَّدِّقاتِ وَأَقرَضُوا اللَّهَ قَرضًا حَسَنًا يُضاعَفُ لَهُم وَلَهُم أَجرٌ كَريمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह दान करने वाले पुरुष तथा दान करने वाली स्त्रियाँ और जिन्होंने अल्लाह को अच्छा ऋण दिया, उन्हें कई गुना दिया जाएगा और उनके लिए सम्मानित प्रतिफल है।
Roman Urdu (Maududi)Mardon aur auraton mein se jo log sadaqaat (charity) dene waley hain aur jinhon ne Allah ko karz-e-hasan diya hai, unko yakeenan kayi gunaa bada kar diya jayega aur unke liye behtareen ajar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak sadqa denay walay mard our sadqa denay wali orten our jo Allah ko khuloos kay sath qarz dey rahey hain unkay liye yeh barhaya jayega our unn kay liye pasandeedah ajar-o-sawab hai
Devnagri Urdu (Maududi)मर्दन और औरतों में से जो लोग सदक़ात (दान) देने वाले हैं और जिन्होन ने अल्लाह को कर्ज़-ए-हसन दिया है, उनको यकीन कई गुनाह कर दिया जाएगा और उनके लिए बेहतरीन अजर है
عَرَبِيوَالَّذينَ آمَنوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ أُولٰئِكَ هُمُ الصِّدّيقونَ ۖ وَالشُّهَداءُ عِندَ رَبِّهِم لَهُم أَجرُهُم وَنورُهُم ۖ وَالَّذينَ كَفَروا وَكَذَّبوا بِآياتِنا أُولٰئِكَ أَصحابُ الجَحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो लोग अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए, वही अपने रब के निकट सिद्दीक़ तथा शहीद (गवाही देने वाले) हैं, उन्हीं के लिए उनका प्रतिफल तथा उनका प्रकाश है। और वे लोग जिन्होंने इनकार किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वे भड़कती आग में रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo log Allah aur uske Rasoolon par iman laye hain wahi apne Rubb ke nazdeek siddiq aur shaheed hain. Unke liye unka ajar aur unka noor hai. Aur jin logon ne kufr kiya hai aur hamari aayat ko jhutlaya hai woh dozakhi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah our uskay rasool per jo eman rakhtay hain wohi log apney rab kay nazdeek siddiq our shaheed hain unkay liye unka ajar our unka noor hai our jo log kufur kertay hain our humari aayaton ko jhutlatay hain woh jahannomi hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जो लोग अल्लाह और उसके रसूलन पर ईमान लाए हैं वही अपने रब के नाज़दीक सिद्दीक और शहीद हैं। उनके लिए उनका अजर और उनका नूर है। और जिन लोगों ने कुफ़्र किया है और हमारी आयतों को झुटलाया है वो दोज़खी है
عَرَبِياعلَموا أَنَّمَا الحَياةُ الدُّنيا لَعِبٌ وَلَهوٌ وَزينَةٌ وَتَفاخُرٌ بَينَكُم وَتَكاثُرٌ فِي الأَموالِ وَالأَولادِ ۖ كَمَثَلِ غَيثٍ أَعجَبَ الكُفّارَ نَباتُهُ ثُمَّ يَهيجُ فَتَراهُ مُصفَرًّا ثُمَّ يَكونُ حُطامًا ۖ وَفِي الآخِرَةِ عَذابٌ شَديدٌ وَمَغفِرَةٌ مِنَ اللَّهِ وَرِضوانٌ ۚ وَمَا الحَياةُ الدُّنيا إِلّا مَتاعُ الغُرورِ
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हिन्दी (Al-Omari)जान लो कि वास्तव में संसार का जीवन केवल एक खेल है और मनोरंजन है और शोभा है, तथा तुम्हारा आपस में एक-दूसरे पर बड़ाई जताना है और धन एवं संतान में एक-दूसरे से बढ़ जाने की कोशिश करना है। उस वर्षा के समान जिससे उगने वाली खेती ने किसानों को प्रसन्न कर दिया, फिर वह पक जाती है, फिर तुम उसे देखते हो कि वह पीली हो गई, फिर वह चूरा हो जाती है। और आख़िरत में कड़ी यातना है और अल्लाह की ओर से बड़ी क्षमा और प्रसन्नता है, और संसार का जीवन धोखे के सामान के सिवा और कुछ नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Khoob jaan lo ke yeh duniya ki zindagi iske siwa kuch nahin ke ek khel aur dil-lagi aur zaahiri tip top aur tumhara aapas mein ek dusre par fakr jatana aur maal-o-aulad mein ek dusre se badh janey ki koshish karna hai.Iski misal aisi hai jaise ek baarish ho gayi to usse paida honay wali nabataat(vegetation) ko dekh kar kaasht-kaar (kisan) khush ho gaye. Phir wahi kheti pak jati hai aur tum dekhte ho ke woh zard (yellow) ho gayi phir woh bhus (chura chura /crumble) bankar reh jati hai. Iske baraks aakhirat woh jagah hai jahan sakht azaab hai aur Allah ki magfirat aur uski khushnudi hai. Dunkya ki zindagi ek dhoke ke tatti (means of deception) ke siwa kuch nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Khoob jaan rakho kay duniya ki zindagi sirf khel tamasha zeenat aor aapas main fakhar (o-ghuroor) our maal-o-olad main aik ka doosary say apney aap ko ziyadah batlana jaisay barish aur iss ki padawaar kisanon ko achi maloom hota hai phir job woh khushk hojati hai to zard rang main iss ko tum dejhtey ho phir woh bilkul choora choora hojatai hai our aakhirat main sakht azab aur Allah ke maghfirat our razamandi hai our duniya ki zundagi ba-juz dhokay kay saman kay our kuch bhi to nahi
Devnagri Urdu (Maududi)खूब जान लो के ये दुनिया की जिंदगी इसके सिवा कुछ नहीं के एक खेल और दिल-लगी और जाहिरी टिप टॉप और तुम्हारे आपस में एक दूसरे पर फक्र जताना और माल-ओ-औलाद में एक दूसरे से बढ़कर जाने की कोशिश करना है।इसकी मिसाल ऐसी है जैसी एक बारिश हो गई तो उसे पैदा होने वाली नबातात (वनस्पति) को देख कर काश्त-कार (किसान) खुश हो गई। फिर वही खेती पक जाती है और तुम देखते हो कि वो जर्द (पीली) हो गई है फिर वो भूस (चूरा चुरा/उखड़ जाती है) बनकर रह जाती है। इस्के बराक्स आख़िरत वो जगह है जहाँ सख्त अज़ाब है और अल्लाह की मगफिरत और उसकी खुशनुदी है। डंक्या की जिंदगी एक धोखे के टट्टी (धोखे का मतलब) के सिवा कुछ नहीं
عَرَبِيسابِقوا إِلىٰ مَغفِرَةٍ مِن رَبِّكُم وَجَنَّةٍ عَرضُها كَعَرضِ السَّماءِ وَالأَرضِ أُعِدَّت لِلَّذينَ آمَنوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ ۚ ذٰلِكَ فَضلُ اللَّهِ يُؤتيهِ مَن يَشاءُ ۚ وَاللَّهُ ذُو الفَضلِ العَظيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)अपने पालनहार की क्षमा तथा उस जन्नत की ओर एक-दूसरे से आगे बढ़ो, जिसका विस्तार आकाश तथा धरती के विस्तार के समान है, वह उन लोगों के लिए तैयार की गई है, जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए। यह अल्लाह का अनुग्रह है। वह इसे उसको देता है जिसे चाहता है और अल्लाह बहुत बड़े अनुग्रह वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Daudo (race) aur ek dusrey se aage badhne ki koshish karo apne Rubb ki magfirat aur uski jannat ki taraf jiski wussat (width) aasman-o-zameen jaisi hai. Jo muhayya ki gayi hai un logon ke liye jo Allah aur uske Rasoolon par iman laye hon. Yeh Allah ka fazl hai, jisey chahta hai ata farmata hai, aur Allah badey fazl wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)(Aao) doro apney rab ki maghfirat ki taraf our uss jannat ki taraf jiss ki wussat kay barabar hai yeh unkay liye banaee gaee hai jo Allah per aur uskay rasoolon per eman rakhtay hain yeh Allah ka fazal hai jissay chahye dey aur Allah bara fazl wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)दौड़ो (रेस) और एक दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश करो अपने रब की मगफिरत और उसकी जन्नत की तरफ जिसकी वुस्सत (चौड़ाई) आसमान-ओ-जमीन जैसी है। जो मुहैय्या हो गई है उन लोगों के लिए जो अल्लाह और उसके रसूलन पर ईमान लाए हों। ये अल्लाह का फ़ज़ल है, जिसे चाहता है अता फ़र्माता है, और अल्लाह बदे फ़ज़ल वाला है
عَرَبِيما أَصابَ مِن مُصيبَةٍ فِي الأَرضِ وَلا في أَنفُسِكُم إِلّا في كِتابٍ مِن قَبلِ أَن نَبرَأَها ۚ إِنَّ ذٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)धरती में तथा तुम्हारे प्राणों पर जो भी विपदा आती है, वह एक किताब में अंकित है, इससे पहले कि हम उसे पैदा करें। निश्चय यह अल्लाह के लिए बहुत आसान है।
Roman Urdu (Maududi)Koi museebat aisi nahin hai jo zameen mein ya tumhare apne nafs par nazil hoti ho aur humne usko paida karne se pehle ek kitaab mein likh na rakkha ho. Aisa karna Allah ke liye bahut aasaan kaam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Na koi museebat duniya main aati hai na (Khaas) tumhari jaanon main magar iss say pehlay kay hum usko peda keran woh aik khaas kitab main likhi hui hai yeh (kaam) Allah taalaa per (bilkul)aasan hai
Devnagri Urdu (Maududi)कोई मुसीबत ऐसी नहीं है जो ज़मीन में या तुम्हारे अपने नफ़्स पर नाज़िल होती हो और हमने उसको अदा करने से पहले एक किताब में लिख न रखा हो। ऐसा करना अल्लाह के लिए बहुत आसान काम है
عَرَبِيلِكَيلا تَأسَوا عَلىٰ ما فاتَكُم وَلا تَفرَحوا بِما آتاكُم ۗ وَاللَّهُ لا يُحِبُّ كُلَّ مُختالٍ فَخورٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि तुम उसपर शोक न करो, जो तुमसे छूट जाए और उसपर फूल न जाओ, जो वह तुम्हें प्रदान करे। और अल्लाह किसी अहंकार करने वाले, बहुत गर्व करने वाले से प्रेम नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)(Yeh sab kuch isliye hai) taa-ke jo kuch bhi nuksaan tumhein ho us par tum dil-shikasta (grieve) na hon aur jo kuch Allah tumhein ata farmaye uspar phool na jao. Allah aisey logon ko pasand nahin karta jo apne aap ko badi cheez samajhte hain aur fakr jatate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Takay tum apney say fol shuda kissi cheez per ranjeedah na hojoya kero our na attakerdah cheez per itra jao.our itranay walay shekhi khoron ko Allah pasand nhifarmata
Devnagri Urdu (Maududi)(ये सब कुछ इसलिए है) ता-के जो कुछ भी नुक्सान तुम्हें हो उस पर तुम दिल-शिकस्ता (शोक) न हो और जो कुछ अल्लाह तुम्हें अता फरमाये उसपर फूल ना जाओ। अल्लाह ऐसे लोगों को पसंद नहीं करता जो अपने आप को बड़ी चीज समझता है और फक्र जताता है
عَرَبِيالَّذينَ يَبخَلونَ وَيَأمُرونَ النّاسَ بِالبُخلِ ۗ وَمَن يَتَوَلَّ فَإِنَّ اللَّهَ هُوَ الغَنِيُّ الحَميدُ
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हिन्दी (Al-Omari)वे लोग जो कंजूसी करते हैं और लोगों को कंजूसी करने का आदेश देते हैं। तथा जो मुँह फेर ले, तो निश्चय अल्लाह ही है जो बड़ा बेनियाज़, बहुत प्रशंसनीय है।
Roman Urdu (Maududi)Jo khud bukhl (niggard/kanjusi) karte hain aur dusron ko bukhl par uksate hain. Ab agar koi ru-gardani (mooh pherna) karta hai to Allah be-niyaz aur satoda siffat (immensely praiseworthy) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo (khud bhi) bulkul keren aur doosron ko (bhi) bulkhul ki taleem dea Suno! jo bhi main pheray Allah beyniaz aur sazawaar hamd-o-sana hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो खुद बुखल (निगार्ड/कंजुसी) करते हैं और दूसरों को बुखल पर उक्साते हैं। अब अगर कोई रु-गर्दनी (मुंह फेरना) करता है तो अल्लाह के लिए बे-नियाज़ और सातोदा सिफत (बेहद प्रशंसनीय) है
عَرَبِيلَقَد أَرسَلنا رُسُلَنا بِالبَيِّناتِ وَأَنزَلنا مَعَهُمُ الكِتابَ وَالميزانَ لِيَقومَ النّاسُ بِالقِسطِ ۖ وَأَنزَلنَا الحَديدَ فيهِ بَأسٌ شَديدٌ وَمَنافِعُ لِلنّاسِ وَلِيَعلَمَ اللَّهُ مَن يَنصُرُهُ وَرُسُلَهُ بِالغَيبِ ۚ إِنَّ اللَّهَ قَوِيٌّ عَزيزٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने अपने रसूलों को स्पष्ट प्रमाणों के साथ भेजा तथा उनके साथ पुस्तक और तराज़ू उतारा, ताकि लोग न्याय पर क़ायम रहें। तथा हमने लोहा उतारा, जिसमें बहुत शक्ति है और लोगों के लिए बहुत-से लाभ हैं, और ताकि अल्लाह जान ले कि कौन उसकी तथा उसके रसूलों की बिना देखे सहायता करता है। निश्चय ही अल्लाह अति शक्तिशाली, सब पर प्रभुत्वशाली है।
Roman Urdu (Maududi)Humne apne Rasoolon ko saaf saaf nishaniyon aur hidayaat ke saath bheja, aur unke saath kitaab aur mizaan (balance) nazil ki taakay log insaf par qayam hon. Aur loha (Iron) utara jis mein bada zoar hai aur logon ke liye munafa hai. Yeh isliye kiya gaya hai ke Allah ko maloom ho jaye ke kaun usko dekhe bagair uski aur uske rasoolon ki madad karta hai. Yaqeenan Allah badi quwwat wala aur zabardast hai
Roman Urdu (Junagarhi)yaqeenan hum ney apney payghambaron ko khuli doleelen dey ker bheja our unkay sath kitab our meean nazilfarmaya. takay log adal per qaeem rahein aur hum ney lohey ko utara jiss mein sakht hebat-o-qooat hai aur logon kay liye aur bhi (boht say) faeeday hain aur iss liye bhi kay ALLAH jaan ley kay uski aur uss kay rasoolon ki madad bey dekhay kon kerta hai be-shak ALLAH qooat wala aur zabardast hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमने अपने रसूलों को साफ-साफ निशानियां और हिदायत के साथ भेजा, और उनके साथ किताब और मिज़ान (संतुलन) नाज़िल की ताकाय लोग इन्साफ पर कायम माननीय और लोहा (आयरन) उतारा जिसमें बड़ा ज़ोर है और लोगों के लिए मुनाफ़ा है। ये इसलिए किया गया है कि अल्लाह को मालूम हो जाए कि कौन उसको देखे बिना उसकी और उसके रसूलों की मदद करता है। यकीनन अल्लाह बड़ी कुव्वत वाला और ज़बरदस्त है
عَرَبِيوَلَقَد أَرسَلنا نوحًا وَإِبراهيمَ وَجَعَلنا في ذُرِّيَّتِهِمَا النُّبُوَّةَ وَالكِتابَ ۖ فَمِنهُم مُهتَدٍ ۖ وَكَثيرٌ مِنهُم فاسِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने नूह़ और इबराहीम को (रसूल बनाकर) भेजा, और उन दोनों की संतान में नुबुव्वत तथा पुस्तक रख दी। फिर उनमें से कुछ सीधे मार्ग पर चलने वाले हैं और उनमें से बहुत-से लोग अवज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Humne Nooh aur Ibrahim ko bheja aur un dono ki nasal mein nabuwat aur kitaab rakh di phir unki aulad mein se kisi ne hidayat ikhtiyar ki aur bahut se faasiq ho gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak hum ney nooh aur ibrahim (aleh-e-salam) ko (payghumber banaker) bheja aur hum ney inn dono ki olad mein payghumbari aur kitab jari rakhi to inn mein say kuch to raah yafta huye aur inn mein say aksar boht nafarman rahey
Devnagri Urdu (Maududi)हमने नूह और इब्राहीम को भेजा और उन दोनों की नाक में नबुवत और किताब रख दी फिर उनकी औलाद में से किसी ने हिदायत इख्तियार की और बहुत से फासिक हो गए
عَرَبِيثُمَّ قَفَّينا عَلىٰ آثارِهِم بِرُسُلِنا وَقَفَّينا بِعيسَى ابنِ مَريَمَ وَآتَيناهُ الإِنجيلَ وَجَعَلنا في قُلوبِ الَّذينَ اتَّبَعوهُ رَأفَةً وَرَحمَةً وَرَهبانِيَّةً ابتَدَعوها ما كَتَبناها عَلَيهِم إِلَّا ابتِغاءَ رِضوانِ اللَّهِ فَما رَعَوها حَقَّ رِعايَتِها ۖ فَآتَينَا الَّذينَ آمَنوا مِنهُم أَجرَهُم ۖ وَكَثيرٌ مِنهُم فاسِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उनके पद्चिह्नों पर निरंतर अपने रसूल भेजे। और उनके पीछे मरयम के पुत्र ईसा को भेजा, और उसे इंजील प्रदान किया, और हमने उन लोगों के दिलों में जिन्होंने उसका अनुसरण किया नर्मी और मेहरबानी रख दी। रहा संन्यास, तो उन्होंने खुद इसका आविष्कार किया, हमने उसे उनके ऊपर अनिवार्य नहीं किया था, परंतु अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए (उन्होंने ऐसा किया)। फिर उन्होंने उसका पूर्ण रूप से पालन नहीं किया। फिर हमने उनमें से जो लोग ईमान लाए उन्हें उनका बदला प्रदान कर दिया और उनमें से बहुत-से लोग अवज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unke baad humne pai dar pai (succession) apne Rasool bheje, aur in sabke baad Isa ibn-e-Maryam ko maboos kiya aur usko Injil ata ki, aur jin logon ne uski pairvi ikhtiyar ki unke dilon mein humne taras (tenderness ) aur reham daal diya. Aur rahbaniyat (monasticism) unhon ne khud ijaad karli, humne usey unpar farz nahin kiya tha. Magar Allah ki khushnudi ki talab mein unhon ne aap hi yeh bidaat nikali aur phir iski pabandi karne ka jo haqq tha usey ada na kiya. Unmein se jo log iman laye huye thay unka ajr humne unko ata kiya, magar unmein se aksar log faasiq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay baad phir bhi hum apney rasoolon ko pay-dar-pay bhejtay rahey aur inn kay baad Essa bin mariyum(aleh-e-salam) ko bheja aur unhen injeel ata farmaee aur unn kay mannay walon kay dilon mein shafqat aur reham peda kerdiahaan rehbaniyat (tark-e-duniya) to un logon ney unn per issay wajib na kiya tha siwaye ALLAH ki raza joee kay so so unhon ney iss ki poori riyat na ki phir bhi hum ney unn mein say jo eman laye thay unhen unka ajar diya aur unn mein ziyadaah tar log nafarman hain
Devnagri Urdu (Maududi)उनके बाद हमने पै डर पै (उत्तराधिकार) अपने रसूल भेजे, और सबके बाद ईसा इब्न-ए-मरियम को माबूस किया और उसको इंजील अता की, और जिन लोगों ने उसकी जोड़ी इख्तियार की उनके दिलों में हमने तरस (कोमलता) और रहम डाल दिया। और रहबनियात (मठवाद) उन्होन ने खुद इजाद करली, हमने उसे अनपर फर्ज नहीं किया था। मगर अल्लाह की ख़ुशनुदी की तालाब में उन्होन ने आप ही ये बिदात निकाली और फिर इसकी पबन्दी करने का जो हक़ था उसे अदा ना किया। उनमे से जो लोग ईमान लाए हुए थे उनका अजर हमने उनको अता किया, मगर उनमे से अक्सर लोग फासीक हैं
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَآمِنوا بِرَسولِهِ يُؤتِكُم كِفلَينِ مِن رَحمَتِهِ وَيَجعَل لَكُم نورًا تَمشونَ بِهِ وَيَغفِر لَكُم ۚ وَاللَّهُ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! अल्लाह से डरो और उसके रसूल पर ईमान लाओ, वह तुम्हें अपनी दया का दोहरा हिस्सा प्रदान करेगा। और तुम्हें ऐसा प्रकाश देगा, जिसमें तुम चलोगे। तथा तुम्हें क्षमा कर देगा। और अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, Allah se daro aur uske Rasool par iman lao. Allah tumhein apni Rehmat ka dohra hissa ata farmyega aur tumhein wahi noor bakhshega jiski roshni mein tum chaloge, aur tumhare kasoor maaf kardega.Allah bada maaf karne wala aur meharbaan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey woh logon jo eman laye ho ALLAH say dartay raha kero aur uss kay rasool per eman lao ALLAH tumhen apni rehmat ka dohra hissa dey ga aur tumhen noor dey ga jiss ki roshni mein tum chalo gey phiro gey aur tumharay gunah bhi moaaf farma dey ga ALLAH bakshnay wala meharbaan hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो और उसके रसूल पर ईमान लाओ। अल्लाह तुम्हें अपनी रहमत का दोहरा हिसा अता फरमाएगा और तुम्हें वही नूर बख्शेगा जिसकी रोशनी में तुम चलोगे, और तुम्हारे कसूर माफ कर देंगे। अल्लाह बड़ा माफ करने वाला और मेहरबान है
عَرَبِيلِئَلّا يَعلَمَ أَهلُ الكِتابِ أَلّا يَقدِرونَ عَلىٰ شَيءٍ مِن فَضلِ اللَّهِ ۙ وَأَنَّ الفَضلَ بِيَدِ اللَّهِ يُؤتيهِ مَن يَشاءُ ۚ وَاللَّهُ ذُو الفَضلِ العَظيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि अह्ले किताब जान लें कि वे अल्लाह के अनुग्रह में से किसी चीज़ पर अधिकार नहीं रखते और यह कि सारा अनुग्रह अल्लाह के हाथ में है। वह जिसे चाहता है, प्रदान करता है और अल्लाह बहुत बड़े अनुग्रह वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Tumko yeh rawish ikhtiyar karni chahiye) taa-ke ehle kitaab ko maalom ho jaye ke Allah ke fazal par unka koi ijara (control/ikhtiyar) nahin hai, aur yeh ke Allah ka fazal uske apne hi haath mein hai, Jisey chahta hai ata farmata hai. Aur woh badey fazal(bounty) wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)yeh iss liye kay ehl-e-kitab jaan lein kay ALLAH kay fazal kay kissi hissay per bhi unhen ikhtiyar nahi aur yeh kay (sara) fazal ALLAH hi kay hath hai woh jissay chahye dey aur ALLAH hai hi bara fazal wala
Devnagri Urdu (Maududi)(तुमको ये रवीश इख्तियार करनी चाहिए) ता-के एहले किताब को मालूम हो जाए के अल्लाह के फज़ल पर उनका कोई इजारा (नियंत्रण/इख्तियार) नहीं है, और ये के अल्लाह का फजल उसके अपने ही हाथ में है, जिसे चाहता है अता फरमाता है। और वो बदे फ़ज़ल (इनाम) वाला है
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Surah 57: Al-Hadid (Iron)

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Surah 57: Al-Hadid (Iron)

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Surah 57: Al-Hadid (Iron)

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Surah 57: Al-Hadid (Iron)

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Surah 57: Al-Hadid (Iron)

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Surah 58: Al-Mujadilah (The Pleading Woman)

Medinan🕐 Revelation #105📜 22 Verses🕮 Juz 28
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
🕮 Juz 28 begins here
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय अल्लाह ने उस स्त्री की बात सुन ली, जो (ऐ रसूल) आपसे अपने पति के बारे में झगड़ रही थी तथा अल्लाह से शिकायत कर रही थी और अल्लाह तुम दोनों का वार्तालाप सुन रहा था। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne sun li us aurat ki baat jo apne shohar kay maamle mein tumse takrar kar rahi hai aur Allah se faryaad kiye jati hai.
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan Allah Taalaa ney uss aurat ki baat suni jo tujh say apney shoher kay baray mein takraar ker rahi thi aur Allah kay aagay shikayat ker rahi thi Allah Taalaa tum dono kay sawal-o-jawab sunn raha tha be-shak Allah Taalaa sunnay dekhney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने सुन लिया हमें औरत की बात जो अपने शोहर के मामले में तुमसे तकरार कर रही है और अल्लाह से फरियाद की जाती है।
عَرَبِيالَّذينَ يُظاهِرونَ مِنكُم مِن نِسائِهِم ما هُنَّ أُمَّهاتِهِم ۖ إِن أُمَّهاتُهُم إِلَّا اللّائي وَلَدنَهُم ۚ وَإِنَّهُم لَيَقولونَ مُنكَرًا مِنَ القَولِ وَزورًا ۚ وَإِنَّ اللَّهَ لَعَفُوٌّ غَفورٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तुममें से जो लोग अपनी पत्नियों से ज़िहार करते हैं, वे उनकी माएँ नहीं हैं। उनकी माएँ तो वही हैं, जिन्होंने उन्हें जन्म दिया है। निःसंदेह वे निश्चित रूप से एक अनुचित बात और झूठ कहते हैं। और निःसंदेह अल्लाह निश्चित रूप से बहुत माफ़ करने वाला, अत्यंत क्षमाशील है।
Roman Urdu (Maududi)Tum mein se jo log apni biwiyon se zihar (divorce their wives by declaring them to be their mothers) karte hai unki biwiyan unki maayein (mothers) nahin hain. Unki maayein to wahi hai jinhon ne unko jana hai. Yeh log ek sakht napasandeeda aur jhooti baat kehte hain. Aur haqeeqat yeh hai ke Allah bada maaf karne wala aur darguzar farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum mein say jo log apni biwiyon say zahaar kertay hain (yani unhen maa keh bethtay hain) woh dar asal unn ki maayen nahi bann jatin unn ki maayen to wohi hain jin kay batan say woh peda huye yaqeenan yeh log aik na maqool aur jhooti baat kehtay hain be-shak Allah Taalaa moaf kerney wala aur bakshney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम में से जो लोग अपनी बीवियों से ज़िहार (अपनी पत्नियों को अपनी मां घोषित करके तलाक दे देते हैं) करते हैं उनकी बीवियां उनकी मां नहीं हैं। उनकी मांएं तो वही हैं जिन्हों ने उनको जाना है। ये लोग एक सच्चा साथी और झूठी बात कहते हैं। और हक़ीक़त ये है के अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला और दरगुज़र फ़रमाने वाला है
عَرَبِيوَالَّذينَ يُظاهِرونَ مِن نِسائِهِم ثُمَّ يَعودونَ لِما قالوا فَتَحريرُ رَقَبَةٍ مِن قَبلِ أَن يَتَماسّا ۚ ذٰلِكُم توعَظونَ بِهِ ۚ وَاللَّهُ بِما تَعمَلونَ خَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और जो लोग अपनी पत्नियों से ज़िहार कर लेते हैं, फिर अपनी कही हुई बात वापस लेना चाहते हैं, तो (उसका कफ़्फ़ारा यह है कि उन्हें) एक-दूसरे को हाथ लगाने से पहले एक दास मुक्त करना है। यह है वह (हुक्म) जिसकी तुम्हें शिक्षा दी जाती है और अल्लाह उससे जो तुम करते हो, भली-भाँति अवगत है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log apni biwiyon se zihar karein phir apni us baat se ruju (to go back) karein jo unhon ne kahi thi, to qabl iske ke dono ek dursre ko haath lagayein ,ek ghulaam azaad karna hoga. Issey tumko naseehat ki jati hai, Aur jo kuch tum karte ho Allah ussey bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo log apni biwiyon say zahaar keren phir apni kahi hui baat say rujoo ker len to unn kay zimmay aapas mein aik doosray ko haath laganey say pehlay aik ghulam aazad kerna hai iss kay zariye tum naseehat kiye jatay ho aur Allah Taalaa tumharay tamam aemaal say ba khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग अपनी बीवीयों से ज़िहार करें फिर अपनी हमसे बात से रूजू (वापस जाने के लिए) करें जो उन्होन ने कही थी, तो कबूल इसके के दोनों एक दूसरे को हाथ लगायें, एक गुलाम आज़ाद करना होगा. इस्से तुमको हिदायत की जाती है, और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बख़बर है
عَرَبِيفَمَن لَم يَجِد فَصِيامُ شَهرَينِ مُتَتابِعَينِ مِن قَبلِ أَن يَتَماسّا ۖ فَمَن لَم يَستَطِع فَإِطعامُ سِتّينَ مِسكينًا ۚ ذٰلِكَ لِتُؤمِنوا بِاللَّهِ وَرَسولِهِ ۚ وَتِلكَ حُدودُ اللَّهِ ۗ وَلِلكافِرينَ عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जो व्यक्ति (दास) न पाए, तो उसे एक-दूसरे को हाथ लगाने से पहले निरंतर दो महीने रोज़े रखना है। फिर जो इसका (भी) सामर्थ्य न रखे, उसे साठ निर्धनों को भोजन कराना है। यह (आदेश) इसलिए है, ताकि तुम अल्लाह तथा उसके रसूल पर ईमान लाओ। और ये अल्लाह की सीमाएँ हैं तथा काफ़िरों के लिए दुःखदायी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo shaks ghulaam na paye woh do mahine ke pai dar pai (consecutively) rozey rakkhey qabl iske ke dono ek dusre ko haath lagayein aur jo ispar bhi qadir na ho woh 60 miskeeno ko khana khilaye. Yeh hukum isliye diya ja raha hai ke tum Allah aur uske Rasool par iman lao. Yeh Allah ki mukarrar ki hui hadein (bounds) hain, aur kafiron ke liye dardnaak saza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Haan jo shaks na paye uss kay zimmay do maheenon kay laga taar rozay hain iss say pehlay kay aik doosray ko haath lagayen aur jiss shaks ko yeh taqat bhi na ho uss per saathh (60) miskeenon ka khana khilana hai. Yeh iss liye kay tum Allah ki aur uss kay rasool ki hukum bardari kero yeh Allah Taalaa ki muqarrar kerda hadden hain aur kuffaar hi kay liye dard naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जो शक्स गुलाम ना पाए वो दो माहीन के पै डर पै (लगातार) रोज़े रक्खे क़बल इसके के दोनों एक दूसरे को हाथ लगायें और जो इसपर भी कादिर ना हो वो 60 मिस्किनो को खाना खिलाये. ये हुकुम इसलिए दिया जा रहा है कि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ। ये अल्लाह की मुकर्रर की हुई हदें (सीमाएं) हैं, और काफिरों के लिए दर्दनाक सजा है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يُحادّونَ اللَّهَ وَرَسولَهُ كُبِتوا كَما كُبِتَ الَّذينَ مِن قَبلِهِم ۚ وَقَد أَنزَلنا آياتٍ بَيِّناتٍ ۚ وَلِلكافِرينَ عَذابٌ مُهينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय जो लोग अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करते हैं, वे अपमानित किए जाएँगे, जैसे उनसे पहले के लोग अपमानित किए गए। और हमने स्पष्ट आयतें उतार दी हैं। और काफ़िरों के लिए अपमानकारी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log Allah ki aur uske Rasool ki mukhalifat karte hain woh usi tarah zaleel-o-khwar kardiye jayenge jis tarah unsey pehle ke log zaleel-o-khwar kiye ja chuke hain. Humne saaf saaf ayaat nazil kardi hain , aur kafiron ke liye zillat ka azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jo log Allah aur uss kay rasool ki mukhalifat kertay hain woh zaleel kiye jayen gay jaisay unn say pehlay kay log zaleel kiye gaye thay aur be-shak hum wazeh aayaten utaar chuken hain aur kafiron kay liye to zillat wala azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग अल्लाह की और उसके रसूल की मुखालफत करते हैं वो उसकी तरह ज़लील-ओ-ख़्वार कर दिए जाएंगे जिस तरह उनसे पहले के लोग ज़लील-ओ-ख़्वार किए जा चुके हैं। हमने साफ साफ आयतें नाज़िल कर दी हैं, और काफिरों के लिए ज़िल्लत का अज़ाब है
عَرَبِييَومَ يَبعَثُهُمُ اللَّهُ جَميعًا فَيُنَبِّئُهُم بِما عَمِلوا ۚ أَحصاهُ اللَّهُ وَنَسوهُ ۚ وَاللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ شَهيدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन अल्लाह उन सब को जीवित कर उठाएगा, फिर उन्हें बताएगा जो उन्होंने किया। अल्लाह ने उसे संरक्षित कर रखा है और वे उसे भूल गए। और अल्लाह प्रत्येक वस्तु पर गवाह है।
Roman Urdu (Maududi)Us din (yeh zillat ka azaab hona hai) jab Allah in sabko phir se zinda karke uthayega aur inhein bata dega ke woh kya kuch karke aaye hain. Woh bhool gaye hain magar Allah ne in sabka kiya dhara gin gin kar mehfooz kar rakkha hai. Aur Allah ek ek cheez par shahid (witness) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din Allah Taalaa inn sab ko uthaye ga phir enhen unn kay kiye huye aemaal say aagah keray ga jissay Allah ney shumar ker rakha hai aur jissay yeh bhool gaye thay aur Allah Taalaa her cheez say waqif hai
Devnagri Urdu (Maududi)उस दिन (ये ज़िल्लत का अज़ाब होना है) जब अल्लाह सबको फिर से जिंदा करके उठाएगा और यहीं बता देगा के वो क्या कुछ करके आए हैं। वो भूल गए हैं मगर अल्लाह ने सबका किया धारा गिन-गिन कर महफूज़ कर रखा है। और अल्लाह एक चीज़ पर शाहिद (गवाह) है
عَرَبِيأَلَم تَرَ أَنَّ اللَّهَ يَعلَمُ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۖ ما يَكونُ مِن نَجوىٰ ثَلاثَةٍ إِلّا هُوَ رابِعُهُم وَلا خَمسَةٍ إِلّا هُوَ سادِسُهُم وَلا أَدنىٰ مِن ذٰلِكَ وَلا أَكثَرَ إِلّا هُوَ مَعَهُم أَينَ ما كانوا ۖ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِما عَمِلوا يَومَ القِيامَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह जानता है, जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है? तीन व्यक्तियों की कोई कानाफूसी नहीं होती, परंतु वह (अल्लाह) उनका चौथा होता है। और न पाँच (आदमियों) की, परंतु वह उनका छठा होता है। और न इससे कम और न अधिक की, परंतु वह उनके साथ होता है, वे जहाँ भी हों। फिर वह क़ियामत के दिन उन्हें उनके कर्मों से सूचित कर देगा। निःसंदेह अल्लाह प्रत्येक वस्तु से भली-भाँति अवगत है।
Roman Urdu (Maududi)Kya tumko khabar nahin hai ke zameen aur aasmano ki har cheez ka Allah ko ilm hai? Kabhi aisa nahin hota ke teen aadmiyon mein koi sargoshi(whispering) ho aur unke darmiyan chautha (fourth) Allah na ho, ya paanch aadmiyon mein sargoshi ho aur unke andar chatta (sixth) Allah na ho, khufiya baat karne wala khwa issey kam ho ya zyada jahan kahin bhi woh ho, Allah unke saath hota hai. Phir qayamat ke roz woh unko bata dega ke unhon ne kya kuch kiya hai. Allah har cheez ka ilm rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tu ney nahi dekha kay Allah aasmanon ki aur zamin ki her cheez say waqif hai. Teen aadmiyon ki sirgoshi nahi hoti magar Allah unn ka chotha hota hai na paanch ki magar unn ka chatha (6th) woh hota hai aur na iss say kum ki aur na ziyada ki magar woh sath hi hota hai jahan bhi woh hon phir qayamat kay din unhen unn ka aemaal say aagah keray ga be-shak Allah Taalaa her cheez say waqif hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुमको खबर नहीं है कि ज़मीन और आसमान की हर चीज़ का अल्लाह को इल्म है? कभी ऐसा नहीं होता के तीन आदमियों में कोई सरगोशी हो (चौथा) अल्लाह न हो, या पांच आदमियों में सरगोशी हो और उनके अंदर चट्टा (छठा) अल्लाह न हो, खुफिया बात करने वाला ख्वा इसे कम हो या ज्यादा जहां कहीं भी वो हो, अल्लाह उनके साथ होता है. फिर कयामत के रोज़ वो उनको बता देगा के अनहोन ने क्या कुछ किया है। अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है
عَرَبِيأَلَم تَرَ إِلَى الَّذينَ نُهوا عَنِ النَّجوىٰ ثُمَّ يَعودونَ لِما نُهوا عَنهُ وَيَتَناجَونَ بِالإِثمِ وَالعُدوانِ وَمَعصِيَتِ الرَّسولِ وَإِذا جاءوكَ حَيَّوكَ بِما لَم يُحَيِّكَ بِهِ اللَّهُ وَيَقولونَ في أَنفُسِهِم لَولا يُعَذِّبُنَا اللَّهُ بِما نَقولُ ۚ حَسبُهُم جَهَنَّمُ يَصلَونَها ۖ فَبِئسَ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने उन लोगों को नहीं देखा, जिन्हें कानाफूसी से रोका गया, फिर वे वही करते हैं, जिससे उन्हें मना किया गया था? तथा आपस में पाप, अत्याचार और रसूल की अवज्ञा की कानाफूसी करते हैं। और जब आपके पास आते हैं, तो आपको (ऐसे शब्दों के साथ) सलाम करते हैं, जिनके साथ अल्लाह ने आपको सलाम नहीं किया। तथा अपने दिलों में कहते हैं : हम जो कुछ कहते हैं, उसपर अल्लाह हमें यातना क्यों नहीं देता? उनके लिए जहन्नम ही काफ़ी है, जिसमें वे दाखिल होंगे। वह बहुत बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Kya tumne dekha nahin un logon ko jinhein sargoshiyan karne se mana kardiya gaya tha phir bhi woh wahi harkat kiye jatay hain jissey unhein mana kiya gaya tha? Yeh log chup chup kar aapas mein gunaah aur zyadati aur Rasool ki nafarmani ki baatein karte hain. Aur jab tumhare paas aatey hain to tumhein us tarikey se salaam karte hain jis taraah Allah ne tumpar salaam nahin kiya hai, aur apne dilon mein kehte hain ke “hamari in baaton par Allah humein azaab kyun nahin deta”. Unke liye jahannum hi kaafi hai, usi ka woh indhan (fuel) banengey, bada hi bura anjaam hai unka
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tu ney unn logon ko nahi dekha? Jinhen kaana phoosi say rok diya gaya tha woh phir bhi iss rokay huye kaam ko doobara kertay hain aur aapas mein gunah ki aur zulm-o-ziyadti ki aur na farmaniy-e-payghumbar ki sirgoshiyan kertay hain aur jab teray pass aatay hain to tujhay inn lafzon mein salam kertay hain jin lafzon mein Allah Taalaa ney nahi kaha aur apney dil mein kehtay hain kay Allah Taalaa humen iss per jo hum kehtay hain saza kiyon nahi deta inn kay liye jahannum kafi (saza) hai jiss mein yeh jayen gay so woh bura thikana hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुमने देखा नहीं उन लोगों को जिन्होंने सरगोशियां करने से मन करदिया गया था फिर भी वो वही हरकत किए जाते हैं जैसे उन्हें मन किया गया था? ये लोग चुप चुप कर आपस में गुनाह और ज्यादती और रसूल की नफ़रमानी की बातें करते हैं। और जब तुम्हारे पास आते हैं तो तुम्हें हमारी तरफ से सलाम करते हैं जिस तरह अल्लाह ने तुम्हारे पास सलाम नहीं किया है, और अपने दिलों में कहते हैं "हमारी इन बातों पर अल्लाह हमें अज़ाब क्यों नहीं देता"। उनके लिए जहन्नुम ही काफी है, उसका वो इंधन (ईंधन) बनेगा, बड़ा ही बुरा अंजाम है उनका
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِذا تَناجَيتُم فَلا تَتَناجَوا بِالإِثمِ وَالعُدوانِ وَمَعصِيَتِ الرَّسولِ وَتَناجَوا بِالبِرِّ وَالتَّقوىٰ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذي إِلَيهِ تُحشَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! जब तुम कानाफूसी करो, तो पाप तथा अत्याचार एवं रसूल की अवज्ञा की कानाफूसी न करो, बल्कि नेकी तथा तक़वा की कानाफूसी करो, और अल्लाह से डरते रहो, जिसकी ओर तुम एकत्रित किए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Aye logon jo iman laye ho jab tum apas mein poshida baat karo to gunaah aur zyadati aur Rasool ki nafarmani ki baatein nahin, balkey neki aur taqwa ki baatein karo aur us khuda se darte raho jiske huzoor tumhein hashr mein pesh hona hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tum jab sirgoshi kero to yeh sirgoshiyan gunah aur zulm (ziyadti) aur na farmaniy-e-payghumbar ki na hon bulkay neki aur perhezgari ki baaton per sirgoshi kero aur uss Allah say dartay raho jiss kay pass tum jama kiye jao gay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो जब तुम आपस में पोशिदा बात करो तो गुनाह और ज्यादती और रसूल की नफरमानी की बातें नहीं, बल्कि नेकी और तकवा की बातें करो और हमसे खुदा से डरते रहो जिसके हुजूर तुम्हें हश्र में पेश होना है
عَرَبِيإِنَّمَا النَّجوىٰ مِنَ الشَّيطانِ لِيَحزُنَ الَّذينَ آمَنوا وَلَيسَ بِضارِّهِم شَيئًا إِلّا بِإِذنِ اللَّهِ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَليَتَوَكَّلِ المُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह कानाफूसी तो मात्र शैतान की ओर से है, ताकि वह ईमान वालों को दुखी करे, हालाँकि वह अल्लाह की अनुमति के बिना उन्हें कुछ भी नुकसान नहीं पहुँचा सकता। और ईमान वालों को अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए।
Roman Urdu (Maududi)Kana-phusi (Whispering) to ek shaytani kaam hai, aur woh isliye ki jati hai ke iman laney waley log ussey ranjeedha hon, halanke bay-izan-e-khuda (except by Allahs will) woh unhein kuch bhi nuksaan nahin pahuncha sakti, aur momino ko Allah hi par bharosa rakhna chahiye
Roman Urdu (Junagarhi)(buri) sirgoshiyan pus shetani kaam hai jiss say eman daaron ko ranj phonchay. Go Allah Taalaa ki ijazat kay baghair woh enehn koi nuksan nahi phoncha sakta aur eman walon ko chahaiye kay woh Allah per bharosa rakhen
Devnagri Urdu (Maududi)काना-फूसी (फुसफुसाते हुए) तो एक शैतानी काम है, और वो इस्ली की जाति है के ईमान लेन वाले लोग उससे रंजीदा होन, हालंके बे-इज़ान-ए-खुदा (अल्लाह की इच्छा को छोड़कर) वो उन्हें कुछ भी नुक्सान नहीं पाहुंचा सकती, और मोमिनो को अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِذا قيلَ لَكُم تَفَسَّحوا فِي المَجالِسِ فَافسَحوا يَفسَحِ اللَّهُ لَكُم ۖ وَإِذا قيلَ انشُزوا فَانشُزوا يَرفَعِ اللَّهُ الَّذينَ آمَنوا مِنكُم وَالَّذينَ أوتُوا العِلمَ دَرَجاتٍ ۚ وَاللَّهُ بِما تَعمَلونَ خَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! जब तुमसे कहा जाए कि सभाओं में जगह कुशादा कर दो, तो कुशादा कर दिया करो। अल्लाह तुम्हारे लिए विस्तार पैदा करेगा। तथा जब कहा जाए कि उठ जाओ, तो उठ जाया करो। अल्लाह तुममें से उन लोगों के दर्जे ऊँचे कर देगा, जो ईमान लाए तथा जिन्हें ज्ञान प्रदान किया गया है। तथा तुम जो कुछ करते हो, अल्लाह उससे भली-भाँति अवगत है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, jab tumse kaha jaye ke apni majlison mein kushadgi paida karo(Make room) to jagah kushada kardiya karo, Allah tumhein kushadgi bakhshega. Aur jab tumse kaha jaye ke uth jao to uth jaya karo, tum mein se jo log iman rakhne waley hain aur jinko ilm bakhsha gaya hai, Allah unko buland darje ata farmayega. Aur jo kuch tum karte ho Allah ko uski khabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey musalmano! Jab tum say kaha jaye kay majlison mein zara kushagi peda kero to tum jagah kushada kerdo Allah tumhen kushadgi dey ga aur jab kaha jaye kay uth kharay hojao to tum uth kharay hojao Allah Taalaa tum mein say unn logon kay jo eman laye hain aur jo ilm diye gaye hain darjay buland ker dey ga aur Allah Taalaa (her uss kaam say) jo tum ker rahey ho (khoob) khabardaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुमसे कहा जाए के अपनी मजलिसों में जगह बनाओ तो जगह बनाओ, अल्लाह तुम्हें कुशादगी बख्शेगा। और जब तुमसे कहा जाए के उठ जाओ तो उठ जया करो, तुम में से जो लोग ईमान रखने वाले हैं और जिनको इल्म बख्शा गया है, अल्लाह उनको बुलंद दर्जे अता फरमाएगा। और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह को उसकी खबर है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِذا ناجَيتُمُ الرَّسولَ فَقَدِّموا بَينَ يَدَي نَجواكُم صَدَقَةً ۚ ذٰلِكَ خَيرٌ لَكُم وَأَطهَرُ ۚ فَإِن لَم تَجِدوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! जब तुम रसूल से गुप्त रूप से बात करो, तो गुप्त रूप से बात करने से पहले कुछ दान करो। यह तुम्हारे लिए उत्तम तथा अधिक पवित्र है। फिर यदि तुम (दान के लिए कुछ) न पाओ, तो अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, jab tum Rasool se takhliye (privacy) mein baat karo to baat karne se pehle kuch sadaqa do. Yeh tumhare liye behtar aur pakeeza-tarr hai. Albatta agar tum sadaqa dene ke liye kuch na pao to Allah Gafoor-o-Raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey musalmano! Jab tum rasool (PBUH) sau sirgoshi kerna chahao to apni sirgoshi say pehlay kuch sadqa dey diya kero yeh tumharay haq mein behtar hai haan agar na pao to be-shak Allah Taalaa bakshney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम रसूल से तख्लिए (गोपनीयता) में बात करो तो बात करने से पहले कुछ सदका दो। ये तुम्हारे लिए बेहतर और पाकीजा-तार है। अलबत्ता अगर तुम सदका देने के लिए अल्लाह गफूर-ओ-रहीम के लिए कुछ न पाओ
عَرَبِيأَأَشفَقتُم أَن تُقَدِّموا بَينَ يَدَي نَجواكُم صَدَقاتٍ ۚ فَإِذ لَم تَفعَلوا وَتابَ اللَّهُ عَلَيكُم فَأَقيمُوا الصَّلاةَ وَآتُوا الزَّكاةَ وَأَطيعُوا اللَّهَ وَرَسولَهُ ۚ وَاللَّهُ خَبيرٌ بِما تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम इससे डर गए कि अपनी गुप्त रूप से बात-चीत से पहले कुछ दान करो? सो, जब तुमने ऐसा नहीं किया और अल्लाह ने तुम्हें क्षमा कर दिया, तो नमाज़ कायम करो तथा ज़कात दो और अल्लाह तथा उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो और तुम जो कुछ करते हो, अल्लाह उससे पूरी तरह अवगत है।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum darr gaye is baat se ke takhliye (privacy) mein guftagu karne se pehle tumhein sadaqaat dene hongey? Accha, agar tum aisa na karo aur Allah ne tumko issey maaf kardiya to namaz qayam karte raho, zakaat dete raho aur Allah aur uske Rasool ki itaat karte raho. Tum jo kuch karte ho Allah ussey bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum apni sirgoshi say pehlay sadqa nikalney say darr gaye? Pus jab tum ney na kiya aur Allah Taalaa ney bhi tumhen moaf farma diya to abb (ba khoobi) namazon ko qaeem rakho zakat detay raha kero aur Allah Taalaa ki aur uss kay rasool ki tabey daari kertay raho iss (sab) say Allah (khoob) khabardaar hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम डर गए इस बात से (गोपनीयता) में गुफ्तगू करने से पहले तुम्हें सदका देने होंगे? अच्छा, अगर तुम ऐसा न करो और अल्लाह ने तुमको इसे माफ कर दिया तो नमाज़ कायम करते रहो, ज़कात देते रहो और अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करते रहो। तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसे बख़बर है
عَرَبِي۞ أَلَم تَرَ إِلَى الَّذينَ تَوَلَّوا قَومًا غَضِبَ اللَّهُ عَلَيهِم ما هُم مِنكُم وَلا مِنهُم وَيَحلِفونَ عَلَى الكَذِبِ وَهُم يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने उन लोगों को नहीं देखा, जिन्होंने उस समुदाय को मित्र बना लिया, जिसपर अल्लाह क्रोधित हुआ? वे न तुममें से हैं और न उनमें से। और वे जान-बूझकर झूठी बात पर क़समें खाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Kya tumne dekha nahin un logon ko jinhon ne dost banaya hai ek aisey giroh (people) ko jo Allah ka magzoob (gazabnaak/ Wrath) hai? Woh na tumhare hain na unke, aur wo jaan boojh kar jhooti baat par kasamein khate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tu ney unn logon ko nahi dekha? Jinhon ney uss qom say dosti ki jin per Allah ghazab naak ho chuka hai na yeh (munafiq) tumharay hi hain na unn kay hain ba wajood ilm kay phir bhi jhoot per qasmen kha rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुमने देखा नहीं उन लोगों को जिन्हों ने दोस्त बनाया है एक ऐसे गिरोह (लोगों) को जो अल्लाह का मगज़बान (क्रोध) है? वो ना तुम्हारे हैं ना उनके, और वो जान बूझ कर झूठी बात पर कसमें खाते हैं
عَرَبِيأَعَدَّ اللَّهُ لَهُم عَذابًا شَديدًا ۖ إِنَّهُم ساءَ ما كانوا يَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने उनके लिए बड़ी कठोर यातना तैयार कर रखी है। निःसंदेह वह बहुत बुरा है, जो वे करते रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Allah Ne unke liye sakht azaab muhayya kar rakkha hai. Badey hi burey kartoot hain jo woh kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney inn kay liye sakht azab tayyar ker rakha hai tehqeeq yeh jo kuch ker rahey hain bura ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने उनके लिए खुद अज़ाब मुहैय्या कर रखा है। बड़े ही बुरे कलाकार हैं जो वो कर रहे हैं
عَرَبِياتَّخَذوا أَيمانَهُم جُنَّةً فَصَدّوا عَن سَبيلِ اللَّهِ فَلَهُم عَذابٌ مُهينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने अपनी क़समों को ढाल बना लिया। फिर (लोगों को) अल्लाह के मार्ग से रोका। अतः उनके लिए अपमानकारी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne apni kasamo ko dhaal bana rakkha hai jiski aadh(shield) mein woh Allah ki raah se logon ko roakte hain. Ispar unke liye zillat ka azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn logon ney to apni qasmon ko dhaal bana rakha hai aur logon ko Allah ki raah say roktay hain inn kay liye ruswa kerney wala azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)उन्होन ने अपनी कसमों को ढाल बना रखा है जिसकी आड़ में वो अल्लाह की राह से लोगों को रोकते हैं। इसपर उनके लिए ज़िल्लत का अज़ाब है
عَرَبِيلَن تُغنِيَ عَنهُم أَموالُهُم وَلا أَولادُهُم مِنَ اللَّهِ شَيئًا ۚ أُولٰئِكَ أَصحابُ النّارِ ۖ هُم فيها خالِدونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनके धन और उनकी संतान अल्लाह के समक्ष हरगिज़ उनके किसी काम न आएँगे। ये लोग जहन्नम के वासी हैं। वे उसमें हमेशा रहेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Allah se bachane ke liye na unke maal kuch kaam aayege na unki aulad .Woh dozakh ke yaar hain, usi mein woh hamesha rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay maal aur inn ki aulad Allah kay haan inn kay kuch kaam na aayen gi. Yeh to jahannumi hain hamesha hi iss mein rahen gay
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह से बचने के लिए ना उनके माल कुछ काम आएंगे ना उनकी औलाद। वो दोज़ख़ के यार हैं, उसमें वो हमेशा रहेंगे
عَرَبِييَومَ يَبعَثُهُمُ اللَّهُ جَميعًا فَيَحلِفونَ لَهُ كَما يَحلِفونَ لَكُم ۖ وَيَحسَبونَ أَنَّهُم عَلىٰ شَيءٍ ۚ أَلا إِنَّهُم هُمُ الكاذِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन अल्लाह उन सब को उठाएगा, तो वे उसके सामने क़समें खाएँगे, जिस तरह तुम्हारे सामने क़समें खाते हैं। और वे समझेंगे कि वे किसी चीज़ (आधार) पर (क़ायम) हैं। सुन लो! निश्चय वही झूठे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz Allah un sab ko uthayega, woh uske saamne bhi usi taraah kasamein kahyenge jis tarah tumhare saamne khate hain, aur apne nazdeek yeh samajhenge ke issey unka kuch kaam ban jayega. Khoob jaan lo woh parle daraje ke jhootey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din Allah Taalaa inn sab ko utha khara keray ga to yeh jiss tarah tumharay samney qasmen khatay hain (Allah Taalaa) kay samney bhi qasmen khaney lagen gay aur samjhen gay kay woh bhi kissi (daleel) per hain yaqeen mano kay be-shak wohi jhootay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ अल्लाह उन सबको उठाएगा, वो उसके सामने भी उसकी तरह कसमें खाएंगे, जिस तरह तुम्हारे सामने खड़े हैं, और अपने नज़दीक ये समझेंगे के इस तरह उनका कुछ काम बन जाएगा। ख़ूब जान लो वो पारले दराज़ के झूठे हैं
عَرَبِياستَحوَذَ عَلَيهِمُ الشَّيطانُ فَأَنساهُم ذِكرَ اللَّهِ ۚ أُولٰئِكَ حِزبُ الشَّيطانِ ۚ أَلا إِنَّ حِزبَ الشَّيطانِ هُمُ الخاسِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनपर शैतान हावी हो गया है और उसने उन्हें अल्लाह की याद भुला दी है। ये लोग शैतान का समूह हैं। सुन लो! निःसंदेह शैतान का समूह ही घाटा उठाने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Shaytaan unpar musallat ho chuka hai aur usne khuda ki yaad unke dil se bhula di hai.Woh shaytaan ki party ke log hain. Khabardaar ho, shaytaan ki party waley hi khasarey mein rehne waley hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn per shetan ney ghalba hasil ker liya hai aur enhen Allah ka zikar bhula diya hai yeh shetani lashkar hai koi shak nahi kay shetani lashkar hi khasaray wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)शैतान उस पर मुसल्लत हो चूका है और उसने खुदा की याद उनके दिल से भुला दी है।वो शैतान की पार्टी के लोग हैं। ख़बरदार हूँ, शैतान की पार्टी वाले ही खसरे में रहने वाले हैं
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يُحادّونَ اللَّهَ وَرَسولَهُ أُولٰئِكَ فِي الأَذَلّينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग अल्लाह तथा उसके रसूल का विरोध करते हैं, वही सबसे अधिक अपमानित लोगों में से हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan zaleel tareen makhlooqat mein se hain woh log jo Allah aur uske Rasool ka muqabla karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak Allah Taalaa ki aur uss kay rasool ki jo log mukhalifat kertay hain wohi log sab say ziyada zaleelon main hain
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन ज़लील तारीन मखलूक़त में से हैं वो लोग जो अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला करते हैं
عَرَبِيكَتَبَ اللَّهُ لَأَغلِبَنَّ أَنا وَرُسُلي ۚ إِنَّ اللَّهَ قَوِيٌّ عَزيزٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने लिख दिया है कि अवश्य मैं और मेरे रसूल ही ग़ालिब (विजयी) रहेंगे। निःसंदेह अल्लाह अति शक्तिशाली,अत्यंत प्रभुत्वशाली है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne likh diya hai ke main aur mere Rasool ghalib hokar rahenge. Fil waqey Allah zabardast aur zoarawar (most strong) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa likh chuka hai kay be-shak mein aur meray payghumbar rahen gay. Yaqeenan Allah Taalaa zor aawar aur ghalib hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने लिख दिया है कि मैं और मेरे रसूल ग़ालिब होकर रहेंगे। फिल वाकी अल्लाह जबरदस्त और जोरावर (सबसे मजबूत) है
عَرَبِيلا تَجِدُ قَومًا يُؤمِنونَ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ يُوادّونَ مَن حادَّ اللَّهَ وَرَسولَهُ وَلَو كانوا آباءَهُم أَو أَبناءَهُم أَو إِخوانَهُم أَو عَشيرَتَهُم ۚ أُولٰئِكَ كَتَبَ في قُلوبِهِمُ الإيمانَ وَأَيَّدَهُم بِروحٍ مِنهُ ۖ وَيُدخِلُهُم جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها ۚ رَضِيَ اللَّهُ عَنهُم وَرَضوا عَنهُ ۚ أُولٰئِكَ حِزبُ اللَّهِ ۚ أَلا إِنَّ حِزبَ اللَّهِ هُمُ المُفلِحونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आप उन लोगों को जो अल्लाह तथा अंतिम दिवस पर ईमान रखते हैं, ऐसा नहीं पाएँगे कि वे उन लोगों से दोस्ती रखते हों, जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल का विरोध किया, चाहे वे उनके पिता या उनके पुत्र या उनके भाई या उनके परिजन हों। वही लोग हैं, जिनके दिलों में उसने ईमान लिख दिया है और अपनी ओर से एक आत्मा के साथ उन्हें शक्ति प्रदान की है। तथा उन्हें ऐसी जन्नतों में दाख़िल करेगा, जिनके नीचे से नहरें बहती होंगी, वे उनके अंदर हमेशा रहेंगे। अल्लाह उनसे प्रसन्न हो गया तथा वे उससे प्रसन्न हो गए। ये लोग अल्लाह का दल हैं। सुन लो, निःसंदेह अल्लाह का दल ही सफल होने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Tum kabhi yeh na paogey ke jo log Allah aur aakhirat par iman rakhne waley hain woh un logon se muhabbat karte hon jinhon ne Allah aur uske rasool ki mukhalifat ki hai , khwa woh unke baap hoon, ya unke betay, ya unke bhai ya unke ehle khandaan. Yeh woh log hain jinke dilon mein Allah ne iman sabt (inscribe/written) kar diya hai aur apni taraf se ek rooh ata karke unko quwwat bakshi hai, Woh unko aisey jannaton mein daakhil karega jinke nichey nehrein behti hongi. Unmein woh hamesha rahenge. Allah un se razi (pleased) hua aur woh Allah se razi huey.Woh Allah ki party ke log hain. Khabardar raho, Allah ki party waley hi falaah paney waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa per aur qayamat kay din per eman rakhney walon ko aap Allah aur uss kay rasool ki mukhalifat kerney walon say mohabbat rakhtay huye hergiz na payen gay go woh unn kay baap ya unn kay betay ya unn kay bhai ya unn kay kunbay (qabeelay) kay (aziz) hi kiyon na hon. Yehi log hain jin kay dilon mein Allah Taalaa ney eman likh diya hai aur jin ki taeed apni rooh say ki hai aur jinhen unn jannaton mein dakhil keray ga jin kay neechay nehren beh rahi hain jahan yeh hamesha rahen gay Allah inn say razi hai aur yeh Allah say khush hain yeh khudaee lashkar hai aagah raho be-shak Allah kay giroh walay hi kaamyaab log hain
Devnagri Urdu (Maududi)तुम कभी ये ना पाओगे के जो लोग अल्लाह और आखिरी पर ईमान रखने वाले हैं वो उन लोगों से मुहब्बत करते हैं जिन्होन ने अल्लाह और उसके रसूल की मुखालफत की है, ख्वा वो उनके बाप हूं, हां उनके बेटे, हां उनके भाई हां उनके एहले खानदान। ये वो लोग हैं जिनके दिलों में अल्लाह ने ईमान सब्त (लिखा/लिखा) कर दिया है और अपनी तरफ से एक रूह अता करके उनको कुव्वत बख्शी है, वो उनको ऐसी जन्नत में दाख़िल करेगा जिनके बारे में खास बातें होती होंगी। उनमें वो हमेशा रहेंगे. अल्लाह उन से रज़ी (प्रसन्न) हुआ और वो अल्लाह से रज़ी हुए। वो अल्लाह की पार्टी के लोग हैं। ख़बरदार रहो, अल्लाह की पार्टी वाले ही फलाह पैने वाले हैं
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Surah 58: Al-Mujadilah (The Pleading Woman)

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Surah 58: Al-Mujadilah (The Pleading Woman)

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Surah 58: Al-Mujadilah (The Pleading Woman)

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Surah 58: Al-Mujadilah (The Pleading Woman)

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Surah 58: Al-Mujadilah (The Pleading Woman)

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Surah 59: Al-Hashr (The Banishment)

Medinan🕐 Revelation #101📜 24 Verses🕮 Juz 1
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Surah 59: Al-Hashr (The Banishment)

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عَرَبِيسَبَّحَ لِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۖ وَهُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह की पवित्रता का गान किया हर उस चीज़ ने जो आकाशों में है और जो धरती में है, और वही प्रभुत्वशाली और हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah hi ki tasbeeh ki hai har us cheez ne jo aasmano aur zameen mein hai, aur wahi ghalib aur hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aasmanon aur zamin ki her cheez Allah Taalaa ki paki biyan kerti hai aur woh ghalib ba hikmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ही की तस्बीह की है हर उस चीज़ ने जो आसमान और ज़मीन में है, और वही ग़ालिब और हकीम है
عَرَبِيهُوَ الَّذي أَخرَجَ الَّذينَ كَفَروا مِن أَهلِ الكِتابِ مِن دِيارِهِم لِأَوَّلِ الحَشرِ ۚ ما ظَنَنتُم أَن يَخرُجوا ۖ وَظَنّوا أَنَّهُم مانِعَتُهُم حُصونُهُم مِنَ اللَّهِ فَأَتاهُمُ اللَّهُ مِن حَيثُ لَم يَحتَسِبوا ۖ وَقَذَفَ في قُلوبِهِمُ الرُّعبَ ۚ يُخرِبونَ بُيوتَهُم بِأَيديهِم وَأَيدِي المُؤمِنينَ فَاعتَبِروا يا أُولِي الأَبصارِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वही है, जिसने अह्ले किताब के काफिरों को पहले ही निष्कासन के समय उनके घरों से निकाल बाहर किया। तुम्हें गुमान न था कि वे निकल जाएँगे और वे समझ रहे थे कि उनके क़िले उन्हें अल्लाह से बचाने वाले हैं। लेकिन अल्लाह (का अज़ाब) उनके पास वहाँ से आया, जिसका उन्हें गुमान भी न था और उसने उनके दिलों में भय डाल दिया। वे अपने घरों को खुद अपने हाथों से तथा ईमान वालों के हाथों से उजाड़ रहे थे। अतः सीख ग्रहण करो, ऐ आँखों वालो!
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jisne ehle kitaab kafiron ko pehle hi hamle mein unke gharon se nikaal bahar kiya.Tumhein hargiz yeh gumaan na tha ke woh nikal jayenge aur woh bhi yeh samjhe baitey thay ke unki gadiyan (fortresses) unhein Allah se bacha lengi.Magar Allah aisey rukh se un par aaya jidhar unka khayal bhi na gaya tha. Usney unke dilon mein roab (terror) daal diya, nateeja yeh hua ke woh khud apne haathon se bhi apne gharon ko barbaad kar rahey thay aur momino ke haathon bhi barbaad karwa rahey thay. Pas ibrat haasil karo aey deedha-e-beena (perceptive eyes) rakhne walon
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi hai jiss ney ehal-e-kitab mein say kafiron ko unn kay gharon say pehlay hashar kay waqt nikala tumhara gumaan (bhi) na tha kay woh niklen gay aur woh khud (bhi) samajh rahey thay kay unn kay (sangeen) qilay unhen Allah (kay azab) say bacha len gay pus unn per Allah (ka azab) aisi jagah say aa para kay unhen gumaan bhi na tha aur unn kay dilon mein Allah ney rob daal diya aur apney gharon ko apney hi haathon ujaar rahey thay aur musalmanon kay haathon (barbad kerwa rahey thay) pus aey aankhon walo! Ibrat hasil kero
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिसने एहले किताब काफिरों को पहले ही हमले में उनके घरों से निकल बाहर किया।तुम्हें हरगिज ये गुमां ना था के वो निकल जाएंगे और वो भी ये समझे बैठे थे के उनकी गड़ियां (किले) उन्हें अल्लाह से बचा लेंगी।मगर अल्लाह ऐसे रुख से उन पर आया जिधर उनका ख्याल भी ना गया था. उसने उनके दिलों में रोब (आतंक) डाल दिया, नतीजा ये हुआ के वो खुद अपने हाथों से भी अपने घरों को बर्बाद कर रहे थे और मोमिनो के हाथों को भी बर्बाद करवा रहे थे। पस इब्रत हासिल करो ऐ दीधा-ए-बीना (समझदार आंखें) रखने वालों
عَرَبِيوَلَولا أَن كَتَبَ اللَّهُ عَلَيهِمُ الجَلاءَ لَعَذَّبَهُم فِي الدُّنيا ۖ وَلَهُم فِي الآخِرَةِ عَذابُ النّارِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि अल्लाह ने उनपर देश-निकाला न लिख दिया होता, तो निश्चय वह उन्हें दुनिया ही में यातना देता तथा उनके लिए आख़िरत में आग की यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Agar Allah ne unke haqq mein jila watani (banishment) na likh di hoti to duniya hi mein woh unhein azaab de daalta. Aur aakhirat mein to unke liye dozakh ka azaab hai hi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar Allah Taalaa ney inn per jila watni ko muqaddar na ker diya hota to yaqeenan enhen duniya mein azab deta aur aakhirat mein (to) inn kay liye aag ka azab hai hi
Devnagri Urdu (Maududi)अगर अल्लाह ने उनके हक़ में जिला वतनी (निर्वासन) ना लिख ​​दी होती तो दुनिया ही में वो उन्हें अज़ाब दे देता। और आख़िरत में तो उनके लिए दोज़ख का अज़ाब है हाय
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّهُم شاقُّوا اللَّهَ وَرَسولَهُ ۖ وَمَن يُشاقِّ اللَّهَ فَإِنَّ اللَّهَ شَديدُ العِقابِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह इसलिए कि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल का विरोध किया तथा जो अल्लाह का विरोध करे, तो निःसंदेह अल्लाह बहुत कड़ी सज़ा देने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh sab kuch isliye hua ke unhon ne Allah aur uske Rasool ka muqabla kiya. Aur jo bhi Allah ka muqabla karey Allah usko saza dene mein bahut sakht hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss liye kay enhon ney Allah Taalaa ki aur uss kay rasool ki mukhalifat ki aur jo bhi Allah ki mukhalifat keray ga to Allah Taalaa bhi sakht azab kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये सब कुछ इसलिए हुआ के उनको अल्लाह ने और उसके रसूल का मुक़ाबला किया। और जो भी अल्लाह का मुकाबला करे अल्लाह उसको सजा देने में बहुत सक्षम है
عَرَبِيما قَطَعتُم مِن لينَةٍ أَو تَرَكتُموها قائِمَةً عَلىٰ أُصولِها فَبِإِذنِ اللَّهِ وَلِيُخزِيَ الفاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ मुसलमानो!) तुमने जो भी खजूर के पेड़ काटे या उन्हें अपने तनों पर खड़ा रहने दिया, वह अल्लाह के आदेश से हुआ और ताकि अल्लाह अवज्ञाकारियों को अपमानित करे।
Roman Urdu (Maududi)Tum logon ne khajooron (dates) ke jo darakht kaate ya jinko apne jadhon (roots) par khada rehne diya, yeh sab Allah hi ke izan se tha aur (Allah ne yeh izan isliye diya) taa-ke faasiqon ko zaleel-o-khaar karey
Roman Urdu (Junagarhi)Tum ney khujooron kay jo darakht kaat dalay ya jinhen tum ney unn ki jaron mein baqi rehney diya. Yeh sab Allah Taalaa kay farmaan say tha aur iss liye bhi kay fasiqon ko Allah Taalaa ruswa keray
Devnagri Urdu (Maududi)तुम लोगों ने खजूरों (खजूरों) के जो दरख्त काटे या जिनको अपने जदों (जड़ों) पर खड़ा रहने दिया, ये सब अल्लाह ही के ईज़ान से थे और (अल्लाह ने ये इज़ान इस्लिये दिया) ता-के फ़ासीकों को ज़लील-ओ-ख़ार करे
عَرَبِيوَما أَفاءَ اللَّهُ عَلىٰ رَسولِهِ مِنهُم فَما أَوجَفتُم عَلَيهِ مِن خَيلٍ وَلا رِكابٍ وَلٰكِنَّ اللَّهَ يُسَلِّطُ رُسُلَهُ عَلىٰ مَن يَشاءُ ۚ وَاللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ने जो धन उनसे अपने रसूल पर लौटाया, तो तुमने उसपर न कोई घोड़े दौड़ाए और न ऊँट। परन्तु अल्लाह अपने रसूल को, जिसपर चाहता है, प्रभुत्व प्रदान कर देता है और अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo maal Allah ne unke kabze se nikal kar apne Rasool ki taraf palta diye, woh aisey maal nahin hai jinpar tumne apne ghodey (horses) aur ount (camels) daudaye hon. Balke Allah apne Rasoolon ko jispar chahta hai tasallut (authority/galaba) ata farma deta hai. Aur Allah har cheez par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn ka jo maal Allah Taalaa ney apney rasool kay haath lagaya hai jiss per na to tum ney ghoray doraye hain aur na oont bulkay Allah Taalaa apney rasool ko jiss per chahaye ghalib ker deta hai aur Allah Taalaa her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जो माल अल्लाह ने उनके कब्जे से निकल कर अपने रसूल की तरफ पलटा दिया, वो ऐसा माल नहीं है जिनपर तुमने अपने घोड़े और ऊंट (ऊंट) दौड़ाए। बलके अल्लाह अपने रसूलों को जिसपर चाहता है तसल्लुत (अधिकार/गलाबा) अता फरमा देता है। और अल्लाह हर चीज पर कादिर है
عَرَبِيما أَفاءَ اللَّهُ عَلىٰ رَسولِهِ مِن أَهلِ القُرىٰ فَلِلَّهِ وَلِلرَّسولِ وَلِذِي القُربىٰ وَاليَتامىٰ وَالمَساكينِ وَابنِ السَّبيلِ كَي لا يَكونَ دولَةً بَينَ الأَغنِياءِ مِنكُم ۚ وَما آتاكُمُ الرَّسولُ فَخُذوهُ وَما نَهاكُم عَنهُ فَانتَهوا ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۖ إِنَّ اللَّهَ شَديدُ العِقابِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने जो कुछ भी इन बस्तियों वालों (के धन) से अपने रसूल पर लौटाया, तो वह अल्लाह के लिए और रसूल के लिए और (रसूल के) रिश्तेदारों, अनाथों, निर्धनों तथा यात्री के लिए है; ताकि वह (धन) तुम्हारे धनवानों ही के बीच चक्कर लगाता न रह जाए, और रसूल तुम्हें जो कुछ दें, उसे ले लो और जिस चीज़ से रोक दें, उससे रुक जाओ। तथा अल्लाह से डरते रहो। निश्चय अल्लाह बहुत कड़ी यातना देने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jo kuch bhi Allah in bastiyon ke logon se apne Rasool ki tarf palta de woh Allah , aur Rasool, aur rishtedaron , aur yatama (orphans), aur masakeen, aur musafiron, ke liye hai taa-ke woh tumhare maaldaaron hi ke darmiyan gardish na karta rahey. Jo kuch Rasool tumhein de woh lelo aur jis cheez se woh tum ko roak dey ussey ruk jao. Allah se daro, Allah sakht saza dene wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bastiyon walon ka jo (maal) Allah Taalaa tumharay laray bhiray baghair apney rasool kay haath lagaye woh Allah ka hai aur rasool ka aur qarabat walon ka aur yateemon miskeenon ka aur musafiron ka hai takay tumharay dolat mandon kay haath mein hi yeh maal gardish kerta na reh jaye aur tumhen jo kuch rasool dey ley lo aur jiss say rokay ruk jao aur Allah Taalaa say dartay raha kero yaqeenan Allah Taalaa sakht azab wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो कुछ भी अल्लाह बस्तियों के लोगों से अपने रसूल की तरफ पलटा दे वो अल्लाह, और रसूल, और रिश्तेदारों, और यतामा (अनाथों), और मसाकीन, और मुसाफिरों, के लिए है ता-के वो तुम्हारे मालदारों ही के दरमियान गर्दिश न करता रहे। जो कुछ रसूल तुम्हें दे वो लेलो और जिस चीज़ से वो तुम को रोक दे उसे रुक जाओ। अल्लाह से डरो, अल्लाह सज़ा देने वाला है
عَرَبِيلِلفُقَراءِ المُهاجِرينَ الَّذينَ أُخرِجوا مِن دِيارِهِم وَأَموالِهِم يَبتَغونَ فَضلًا مِنَ اللَّهِ وَرِضوانًا وَيَنصُرونَ اللَّهَ وَرَسولَهُ ۚ أُولٰئِكَ هُمُ الصّادِقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(यह धन) उन ग़रीब मुहाजिरों के लिए है, जो अपने घरों और अपने मालों से निकाल बाहर कर दिए गए। वे अल्लाह का अनुग्रह तथा प्रसन्नता चाहते हैं और अल्लाह तथा उसके रसूल की सहायता करते हैं। यही लोग सच्चे हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Neiz woh maal) un gareeb muhajireen ke liye hai jo apne gharon aur jaidaadon se nikaal bahar kiye gaye hain. Yeh log Allah ka fazal aur uski khushnudi chahte hain aur Allah aur uske Rasool ki himayat par qamar-basta rehte hai. Yahi raast baaz ( truthful ) log hain
Roman Urdu (Junagarhi)(fey kaa maal) unn mohajir miskeenon kay liye hai jo apney gharon say aur apney maalon say nikal diye gaye hain woh Allah kay fazal aur uss ki raza mandi kay talabgaar hain aur Allah Taalaa ki aur uss kay rasool ki madad kertay hain yehi raast baaz log hain
Devnagri Urdu (Maududi)(नीज़ वो माल) उन ग़रीब मुहाजिरीन के लिए है जो अपने घरों और ज़ैदादों से निकल बाहर हो गए हैं। ये लोग अल्लाह का फ़ज़ल और उसकी ख़ुशनुदी चाहते हैं और अल्लाह और उसके रसूल की हिम्मत पर क़मर-बस्ता रहते हैं। यही रस्त बाज़ (सच्चे) लोग हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ تَبَوَّءُوا الدّارَ وَالإيمانَ مِن قَبلِهِم يُحِبّونَ مَن هاجَرَ إِلَيهِم وَلا يَجِدونَ في صُدورِهِم حاجَةً مِمّا أوتوا وَيُؤثِرونَ عَلىٰ أَنفُسِهِم وَلَو كانَ بِهِم خَصاصَةٌ ۚ وَمَن يوقَ شُحَّ نَفسِهِ فَأُولٰئِكَ هُمُ المُفلِحونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा (उनके लिए) जिन्होंने इनसे पहले इस घर (अर्थात् मदीना) में और ईमान में जगह बना ली है। वे अपनी ओर हिजरत करके आने वालों से प्रेम करते हैं। और वे अपने दिलों में उस चीज़ के प्रति कोई चाहत (हसद) नहीं पाते, जो मुहाजिरों को दी जाए और (उन्हें) अपने आप पर प्रधानता देते हैं, चाहे स्वयं ज़रूरतमंद हों। और जो अपने मन की लालच (कृपणता) से बचा लिया गया, तो वही लोग सफल होने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)(Aur woh un logon ke liye bhi hai) jo in muhajireen ki aamad se pehle hi iman laa kar daar-ul-hijrat [abode (of Hijrah)] mein muqeem thay. Yeh un logon se muhabbat karte hain jo hijrat karke inke paas aaye hain aur jo kuch bhi unko de diya jaye uski koi haajat tak yeh apne dilon mein mehsoos nahin karte aur apni zaat par dusron ko tarjeeh dete hain, khwa apni jagah khud mohtaj hon. Haqeeqat yeh hai ke jo log apne dil ki tangi se bacha liye gaye wahi falaah paney waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (unn kay liye) jinhon ney iss ghar mein (yani madina) aur eman mein inn say pehlay jagah bana li hai aur apni taraf hijrat ker kay aaney walon say mohabbat kertay hain aur mohajireen ko jo kuch dey diya jaye iss say woh apney dilon mein koi tangi nahi rakhtay bulkay khud apney upper enhen tarjeeh detay hain go khud ko kitni hi sakht haajat ho (baat yeh hai) kay jo bhi apney nafs kay bukhul say bachaya gaya wohi kaamyaab (aur baa murad) hai
Devnagri Urdu (Maududi)(और वो उन लोगों के लिए भी हैं) जो मुहाजिरीन की आमद से पहले ही ईमान ला कर दार-उल-हिजरात [निवास (हिजड़ा का)] में मुकीम था। ये उन लोगों से मुहब्बत करते हैं जो हिजरत करके इनके पास आए हैं और जो कुछ भी उनको दे दिया जाए उसकी कोई हाजत तक ये अपने दिलों में महसूस नहीं करते और अपनी जात पर दूसरे को तरजीह देते हैं, ख्वा अपनी जगह खुद मोहताज होन। हकीकत ये है के जो लोग अपने दिल की तंगी से बच गए वही फलाह पाने वाले हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ جاءوا مِن بَعدِهِم يَقولونَ رَبَّنَا اغفِر لَنا وَلِإِخوانِنَا الَّذينَ سَبَقونا بِالإيمانِ وَلا تَجعَل في قُلوبِنا غِلًّا لِلَّذينَ آمَنوا رَبَّنا إِنَّكَ رَءوفٌ رَحيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और (उनके लिए) जो उनके पश्चात् आए, वे कहते हैं : ऐ हमारे पालनहार! हमें और हमारे उन भाइयों को क्षमा कर दे, जो हमसे पहले ईमान लाए और हमारे दिलों में उन लोगों के लिए कोई द्वेष न रख, जो ईमान लाए। ऐ हमारे पालनहार! तू अति करुणामय, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)(Aur woh un logon ke liye bhi hai) jo un logon ke baad aaye hain, jo kehte hain ke “Aey hamare Rubb, humein aur hamare un sab bhaiyon ko baksh de jo humse pehle iman laye hain aur hamare dilon mein ehle iman ke liye koi bugz (rancour) na rakh. Aey hamare Rubb, tu bada meharbaan aur raheem hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (unn kay liye) jo inn kay baad aayen jo kahen gay kay aey huamray perwerdigar humen baksh dey aur humaray unn bhaiyon ko bhi jo hum say pehlay eman laa chukay hain aur eman daaron ki taraf say humaray dil mein keena (aur dushmani) naa daal aey humaray rab be-shak tu shafqat aur meharbani kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)(और वो उन लोगों के लिए भी है) जो उन लोगों के बाद आए हैं, जो कहते हैं के “ऐ हमारे रब, हमें और हमारे उन सब भाइयों को बख्श दे जो हमसे पहले ईमान लाए हैं और हमारे दिलों में एहले ईमान के लिए कोई बुग्ज़ (द्वेष) न रख
عَرَبِي۞ أَلَم تَرَ إِلَى الَّذينَ نافَقوا يَقولونَ لِإِخوانِهِمُ الَّذينَ كَفَروا مِن أَهلِ الكِتابِ لَئِن أُخرِجتُم لَنَخرُجَنَّ مَعَكُم وَلا نُطيعُ فيكُم أَحَدًا أَبَدًا وَإِن قوتِلتُم لَنَنصُرَنَّكُم وَاللَّهُ يَشهَدُ إِنَّهُم لَكاذِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने मुनाफ़िकों को नहीं देखा, वे अह्ले किताब में से अपने काफ़िर भाइयों से कहते हैं : निश्चय अगर तुम्हें निकाला गया, तो हम भी अवश्य तुम्हारे साथ निकल जाएँगे और तुम्हारे बारे में कभी किसी की बात नहीं मानेंगे और यदि तुमसे युद्ध हुआ, तो हम अवश्य तुम्हारी सहायता करेंगे। और अल्लाह गवाही देता है कि निःसंदेह वे झूठे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tumne dekha nahin un logon ko jinhon ne munafiqat (hypocrisy) ki rawish ikhtiyar ki hai? Yeh apne kafir ehle kitaab bhaiyon se kehte hain "agar tumhein nikala gaya to hum tumhare saath niklenge, aur tumhare maamle mein hum kisi ki baat hargiz na manenge, aur agar tumse jung ki gayi to hum tumhari madad karenge" magar Allah gawah hai ke yeh log qataii jhootey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tu ney munfiqon ko na dekha? Kay apney ehal-e-kitab kafir bhaiyon say kehtay hain kay agar tum jila watan kiye gaye to zaroor bil zaroor hum bhi tumharay sath nikal kharay hongay aur tumharay baray mein hum kabhi bhi kissi ki baat na maanen gay aur agar tum say jang ki jaye gi to ba khuda hum tumhari madad keren gay lekin Allah Taalaa gawahi deta hai kay yeh qata’an jhootay hain
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيلَئِن أُخرِجوا لا يَخرُجونَ مَعَهُم وَلَئِن قوتِلوا لا يَنصُرونَهُم وَلَئِن نَصَروهُم لَيُوَلُّنَّ الأَدبارَ ثُمَّ لا يُنصَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय अगर वे निकाले गए तो ये उनके साथ नहीं निकलेंगे और निश्चय अगर उनसे युद्ध किया गया तो ये उनकी सहायता नहीं करेंगे और निश्चय अगर उनकी सहायता की भी तो अवश्य पीठ फेरकर भागेंगे, फिर उनकी सहायता नहीं की जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Agar woh nikale gaye to yeh unke saath hargiz na niklenge, aur agar unse jung ki gayi to yeh unki hargiz madad na karenge, aur agar yeh unki madad karein bhi to peet phair jayenge aur phir kahin se koi madad na payenge
Roman Urdu (Junagarhi)Agar woh jila watan kiye gaye to yeh unn kay sath na jayen gay aur agar inn say jang ki gaee yeh inn ki madad (bhi) na keren gay aur agar (bil farz) madad per aa bhi gaye to peeth pher ker (bhaag kharay) hon gay phir madad na kiye jayen gay
Devnagri Urdu (Maududi)अगर वो निकले गए तो ये उनके साथ हरगिज न निकलेंगे, और अगर वो जंग की गई तो ये उनकी हरगिज मदद न करेंगे, और अगर ये उनकी मदद करें भी तो पीट-पीट कर जाएंगे और फिर कहीं से कोई मदद न पाएंगे
عَرَبِيلَأَنتُم أَشَدُّ رَهبَةً في صُدورِهِم مِنَ اللَّهِ ۚ ذٰلِكَ بِأَنَّهُم قَومٌ لا يَفقَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय उनके दिलों में तुम्हारा भय अल्लाह (के भय) से अधिक है। यह इसलिए कि वे ऐसे लोग हैं, जो नहीं समझते।
Roman Urdu (Maududi)Inke dilon mein Allah se badh kar tumhara khauf hai, isliye ke yeh aisey log hain jo samajh boojh nahin rakhte
Roman Urdu (Junagarhi)(musalmano! Yaqeen mano) kay tumhari heybat inn kay dilon mein ba nisbat Allah ki heybat kay boht ziyada hai yeh iss liye kay yeh bey samajh log hain
Devnagri Urdu (Maududi)इनके दिलों में अल्लाह से बढ़ कर तुम्हारा खौफ है, क्योंकि ये ऐसे लोग हैं जो समझते हैं, नहीं रखते
عَرَبِيلا يُقاتِلونَكُم جَميعًا إِلّا في قُرًى مُحَصَّنَةٍ أَو مِن وَراءِ جُدُرٍ ۚ بَأسُهُم بَينَهُم شَديدٌ ۚ تَحسَبُهُم جَميعًا وَقُلوبُهُم شَتّىٰ ۚ ذٰلِكَ بِأَنَّهُم قَومٌ لا يَعقِلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे तुमसे एकत्रित होकर युद्ध नहीं करेंगे, परंतु क़िलेबंद बस्तियों में या दीवारों के पीछे से। उनकी आपस की लड़ाई बहुत सख़्त है। आप उन्हें एकजुट समझते हैं, जबकि उनके दिल अलग-अलग हैं। यह इसलिए कि वे ऐसे लोग हैं, जो बुद्धि नहीं रखते।
Roman Urdu (Maududi)Yeh kabhi ikatthey hokar ( khule maidan mein ) tumhara muqabla na karenge, ladenge bhi to qila-band bastiyon ( fortified townships) mein baith kar ya deewaron ke peechay chup kar. Yeh aapas ki mukhalifat mein baday sakht hain. Tum unhein ikhatta samajte ho magar inke dil ek dusre se phatey huey hain. Inka yeh haal isliye hai ke yeh be aqal log hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh sab mill ker bhi tum say larr nahi saktay haan yeh aur baat hai kay qila band muqamaat mein hon ya deewaron ki aarh mein hon inn ki laraeeto inn mein aapas mein hi boht sakht hai go aap enhen mutahid samajh rahey hain lekin inn kay dil dar asal aik doosray say juda hain iss lie kay yeh bey aqal log hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये कभी इकट्ठे होकर (खुले मैदान में) तुम्हारा मुकाबला ना करेंगे, लड़ेंगे भी तो किला-बंद बस्तियों (गढ़वाली टाउनशिप) में बैठ कर या दीवारों के पीछे चुप कर. ये आपस की मुखालफत में बदायश हैं। तुम उन्हें इखत्ता समझते हो मगर इनके दिल एक दूसरे से फटे हुए हैं। इनका ये हाल है के ये अक्ल लोग हैं
عَرَبِيكَمَثَلِ الَّذينَ مِن قَبلِهِم قَريبًا ۖ ذاقوا وَبالَ أَمرِهِم وَلَهُم عَذابٌ أَليمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)इनकी हालत उन लोगों जैसी है, जो इनसे कुछ ही पहले गुज़रे हैं। वे अपने किए का स्वाद चख चुके हैं और उनके लिए दुःखदायी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh unhi logon ke manind hain jo insey thodi hi muddat pehle apne kiye ka maza chakh chuke hain aur inke liye dardnaak azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unn logon ki tarah jo inn say kuch hi pehlay guzray hain jinhon ney apney kaam ka wabal chakh liya aur jin kay liye alam naak azab (tayyar) hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये उन्ही लोगों के मनिंद हैं जो इनसे थोड़ी ही मुद्दत पहले अपने किए का मजा चख चुके हैं और इनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
عَرَبِيكَمَثَلِ الشَّيطانِ إِذ قالَ لِلإِنسانِ اكفُر فَلَمّا كَفَرَ قالَ إِنّي بَريءٌ مِنكَ إِنّي أَخافُ اللَّهَ رَبَّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)शैतान की तरह, जब उसने मनुष्य से कहा कि कुफ़्र कर। फिर जब वह कुफ़्र कर चुका, तो उसने कहा : निःसंदेह मैं तुझसे बरी हूँ। मैं तो अल्लाह से डरता हूँ, जो सर्व संसार का पालनहार है।
Roman Urdu (Maududi)Inki misal shaytaan ki si hai ke pehle woh insan se kehta hai kufr kar, aur jab Insan kufr kar baithta hai to woh kehta hai main tujhse bari-uz-zimma hoon, mujhey to Allah Rabb-ul-aalameen se darr lagta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Shetan ki tarah kay uss ney insan say kaha kufur ker jab woh kufur ker chuka to kehney laga mein to tujh say bari hun mein to Allah rab-ul-aalameen say darta hun
Devnagri Urdu (Maududi)इनकी मिसाल शैतान की सी है के पहले वो इंसान से कहता है कुफ्र कर, और जब इंसान कुफ्र कर बैठता है तो वो कहता है मैं तुझसे बारी-उज-जिम्मा हूं, मुझे अल्लाह रब्ब-उल-आलमीन से डर लगता है
عَرَبِيفَكانَ عاقِبَتَهُما أَنَّهُما فِي النّارِ خالِدَينِ فيها ۚ وَذٰلِكَ جَزاءُ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो दोनों का परिणाम यह हुआ कि वे हमेशा जहन्नम में रहेंगे और यही अत्याचारियों का बदला है।
Roman Urdu (Maududi)Phir dono ka anjaam yeh hona hai ke hamesha ke liye jahannum mein jayein, aur zaalimon ki yahi jaza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus dono ka anjam yeh hua kay aatish (dozakh) mein hamesha kay liye gaye aur zalimon ki yehi saza hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर दोनों का अंजाम ये होना है के हमेशा के लिए जहन्नुम में जायें, और जालिमों की यही जजा है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَلتَنظُر نَفسٌ ما قَدَّمَت لِغَدٍ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ خَبيرٌ بِما تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! अल्लाह से डरो और प्रत्येक व्यक्ति को देखना चाहिए कि उसने कल के लिए क्या आगे भेजा है तथा अल्लाह से डरते रहो। निश्चय अल्लाह उससे पूरी तरह अवगत है, जो तुम कर रहे हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, Allah se daro, Aur har shaks yeh dekhe ke usne kal ke liye kya samaan kiya hai. Allah se darte raho, Allah yaqeenan tumhare un sab aamaal se ba-khabar hai jo tum karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walon! Allah say dartay raho aur her shaks dekh (bhaal) ley kay kal (qayamat) kay wastay uss ney (aemaal ka) kiya (zakheera) bheja hai. Aur (her waqt) Allah say dartay raho Allah tumharay sab aemaal say ba khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो, और हर शक्स ये देखे के उसने कल के लिए क्या समान किया है। अल्लाह से डरते रहो, अल्लाह यकीनन तुम्हारे उन सब आमाल से बा-खबर है जो तुम करते हो
عَرَبِيوَلا تَكونوا كَالَّذينَ نَسُوا اللَّهَ فَأَنساهُم أَنفُسَهُم ۚ أُولٰئِكَ هُمُ الفاسِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन लोगों के समान न हो जाओ, जो अल्लाह को भूल गए, तो उसने उन्हें अपने आपको को भुलवा दिया। यही लोग अवज्ञाकारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Un logon ki taraah na ho jao jo Allah ko bhool gaye to Allah ne unhein khud apna nafs bhula diya. yahi log faasiq hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum unn logon ki tarah mat ho jana jinhon ney Allah (kay ehkaam) ko bhula diya to Allah ney bhi unhen apni jano say ghafil ker diya aur aisay hi log na farmaan (faasiq) hotay hain
Devnagri Urdu (Maududi)उन लोगों की तरह ना हो जाओ जो अल्लाह को भूल गए तो अल्लाह ने उन्हें खुद अपना नफ्स भुला दिया। यही लोग फ़ासीक़ हैं
عَرَبِيلا يَستَوي أَصحابُ النّارِ وَأَصحابُ الجَنَّةِ ۚ أَصحابُ الجَنَّةِ هُمُ الفائِزونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जहन्नम वाले और जन्नत वाले वाले बराबर नहीं हो सकते। जन्नत वाले ही वास्तव में सफल हैं।
Roman Urdu (Maududi)Dozakh mein jaane wale aur jannat mein jaane wale kabhi yaksan nahin ho sakte. Jannat mein janey waley hi asal mein kamiyaab hain
Roman Urdu (Junagarhi)Ehal-e-naar aur ehal-e-jannat (ba hum) barabar nahi. Jo ehal-e-jannat hain wohi kaamyaab hain (aur jo ehal-e-naar hain woh na kaam hain)
Devnagri Urdu (Maududi)दोज़ख में जाने वाले और जन्नत में जाने वाले कभी यक्सान नहीं हो सकते। जन्नत में जाने वाले ही असल में कामयाब हैं
عَرَبِيلَو أَنزَلنا هٰذَا القُرآنَ عَلىٰ جَبَلٍ لَرَأَيتَهُ خاشِعًا مُتَصَدِّعًا مِن خَشيَةِ اللَّهِ ۚ وَتِلكَ الأَمثالُ نَضرِبُها لِلنّاسِ لَعَلَّهُم يَتَفَكَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यदि हम इस क़ुरआन को किसी पर्वत पर अवतरित करते, तो निश्चय आप उसे देखते कि अल्लाह के भय से झुक जाता और फटकर टुकड़े-टुकड़े हो जाता। और हम इन उदाहरणों को लोगों के लिए वर्णन कर रहे हैं, ताकि वे सोच-विचार करें।
Roman Urdu (Maududi)Agar humne yeh Quran kisi pahad(mountain) par bhi utaar diya hota to tum dekhte ke woh Allah ke khauff se daba jaa raha hai, aur phata padta hai. Yeh misalein hum logon ke saamne isliye bayaan karte hain ke woh (apne halaat par) gaur karein
Roman Urdu (Junagarhi)Agar hum iss quran ko kissi pahar per utartay to tu dekhta kay khof-e-elahee say woh pust ho ker tukray tukray ho jata hum inn misalon ko logon kay samney biyan kertay hain takay woh ghor-o-fiker keren
Devnagri Urdu (Maududi)अगर हमने ये कुरान किसी पहाड़ पर भी उतार दिया होता तो तुम देखते के वो अल्लाह के खौफ से दबा जा रहा है, और फटा पड़ता है। ये मिसालें हम लोगों के सामने इस तरह बयान करते हैं के वो (अपने हालात पर) गौर करें
عَرَبِيهُوَ اللَّهُ الَّذي لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۖ عالِمُ الغَيبِ وَالشَّهادَةِ ۖ هُوَ الرَّحمٰنُ الرَّحيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)वह अल्लाह ही है, जिसके अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं, हर परोक्ष तथा प्रत्यक्ष को जानने वाला है, वह बहुत कृपाशील, अत्यंत दयालु है।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi hai jiske siwa koi maabood nahin, gayab aur zaahir har cheez ka jaanne wala, wahi Rehman aur Raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi Allah hai jiss kay siwa koi mabood nahi chupay khulay ka jannay wala meharban aur reham kerney wala
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह हाय है जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, गायब और जाहिर हर चीज का जाने वाला, वही रहमान और रहीम है
عَرَبِيهُوَ اللَّهُ الَّذي لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ المَلِكُ القُدّوسُ السَّلامُ المُؤمِنُ المُهَيمِنُ العَزيزُ الجَبّارُ المُتَكَبِّرُ ۚ سُبحانَ اللَّهِ عَمّا يُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वह अल्लाह ही है, जिसके अतिरिक्त कोई सच्चा पूज्य नहीं, वह बादशाह है, अत्यंत पवित्र, हर दोष से मुक्त, पुष्टि करने वाला, निगरानी करने वाला, प्रभुत्वशाली, शक्तिशाली, बहुत बड़ाई वाला है। पवित्र है अल्लाह उससे, जो वे (उसका) साझी बनाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi hai jiske siwa koi maabood nahin woh Badshah hai, nihayat muqaddas , sarasar salamati (all-peace), aman dene wala( Giver of security), nigehbaan, sab par ghalib, apna hukum ba-zoar naafiz karne wala, aur bada hi hokar rehne wala. Paak hai Allah us shirk se jo log kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi Allah hai jiss kay siwa koi mabood nahi badshah nihayat pak sab aeybon say saaf aman denay wala nighehbaan ghalib zor aawar aur baraee wala pak hai Allah unn cheezon say jinhen yeh uss ka shareek banatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह हाय है जिसके सिवा कोई माबूद नहीं वो बादशाह है, निहायत मुक़द्दस, सरसर सलामती (सर्व-शांति), अमन देने वाला (सुरक्षा देने वाला), निगाहबान, सब पर ग़ालिब, अपना हुकुम ब-ज़र नाफ़िज़ करने वाला, और बड़ा ही होकर रहने वाला। पाक है अल्लाह हमसे शिर्क से जो लोग कर रहे हैं
عَرَبِيهُوَ اللَّهُ الخالِقُ البارِئُ المُصَوِّرُ ۖ لَهُ الأَسماءُ الحُسنىٰ ۚ يُسَبِّحُ لَهُ ما فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ ۖ وَهُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)वह अल्लाह ही है, जो रचयिता, अस्तित्व प्रदान करने वाला, रूप देने वाला है। सब अच्छे नाम उसी के हैं। उसकी पवित्रता का गान हर वह चीज़ करती है जो आकाशों तथा धरती में है और वह प्रभुत्वशाली, ह़िकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Woh Allah hi hai, jo takhleeq( creation) ka mansuba(plan) banane wala, aur usko nafiz karne wala, aur uske mutabik surat-gari (fashioner) karne wala hai. Uske liye behtareen naam hain. Har cheez jo aasmano aur zameen mein hai uski tasbeeh kar rahi hai, aur woh zabardast aur Hakeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi Allah hai peda kerney wala wujood bakshney wala soorat bananey wala ussi kay liye (nihayat) achay naam hain her cheez khuwa woh aasman mein ho khuwa zamin mein ho uss ki paki biyan kerti hai aur wohi ghalib hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)वो अल्लाह ही है, जो तख़लीक़ (सृजन) का मनसूबा (योजना) बनाने वाला है, और उसको नफ़ीज़ करने वाला, और उसे मुताबिक सूरत-गारी (फैशनर) करने वाला है। उसके लिए बेहतरीन नाम हैं। हर चीज़ जो आसमान और ज़मीन में है उसकी तस्बीह कर रही है, और वह ज़बरदस्त और हकीम है
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Surah 59: Al-Hashr (The Banishment)

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Surah 59: Al-Hashr (The Banishment)

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Surah 59: Al-Hashr (The Banishment)

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Surah 59: Al-Hashr (The Banishment)

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Surah 59: Al-Hashr (The Banishment)

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Surah 60: Al-Mumtahanah (The Woman who is Examined)

Medinan🕐 Revelation #91📜 13 Verses🕮 Juz 1
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Surah 60: Al-Mumtahanah (The Woman who is Examined)

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Surah 60: Al-Mumtahanah (The Woman who is Examined)

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Surah 60: Al-Mumtahanah (The Woman who is Examined)

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Surah 60: Al-Mumtahanah (The Woman who is Examined)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَتَّخِذوا عَدُوّي وَعَدُوَّكُم أَولِياءَ تُلقونَ إِلَيهِم بِالمَوَدَّةِ وَقَد كَفَروا بِما جاءَكُم مِنَ الحَقِّ يُخرِجونَ الرَّسولَ وَإِيّاكُم ۙ أَن تُؤمِنوا بِاللَّهِ رَبِّكُم إِن كُنتُم خَرَجتُم جِهادًا في سَبيلي وَابتِغاءَ مَرضاتي ۚ تُسِرّونَ إِلَيهِم بِالمَوَدَّةِ وَأَنا أَعلَمُ بِما أَخفَيتُم وَما أَعلَنتُم ۚ وَمَن يَفعَلهُ مِنكُم فَقَد ضَلَّ سَواءَ السَّبيلِ
हिन्दी (Al-Omari)ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! मेरे शत्रुओं तथा अपने शत्रुओं को मित्र न बनाओ। तुम उनकी ओर मैत्री का संदेश भेजते हो, हालाँकि निश्चय उन्होंने उस सत्य का इनकार किया है, जो तुम्हारे पास आया है। वे रसूल को तथा तुमको इस कारण निकालते हैं कि तुम अपने पालनहार अल्लाह पर ईमान लाए हो। यदि तुम मेरी राह में जिहाद के लिए और मेरी प्रसन्नता तलाश करने के लिए निकले हो (तो ऐसा मत करो)। तुम गुप्त रूप से उनकी ओर मैत्री का संदेश भेजते हो, हालाँकि मैं अधिक जानने वाला हूँ, जो कुछ तुमने छिपाया और जो तुमने ज़ाहिर किया। तथा तुममें से जो भी ऐसा करेगा, तो निश्चय वह सीधे रास्ते से भटक गया।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, agar tum meri raah mein jihad karne ke liye aur meri raza-joyi ki khatir (watan chodh kar gharon se) nikle ho to mere aur apne dushmano ko dost na banao. Tum unke saath dosti ki tarah(befriend) dalte ho, halaanke jo haqq tumhare paas aaya hai usko maanne se woh inkar kar chuke hain. Aur unki ravish yeh hai ke Rasool ko aur khud tumko sirf is kasoor par jila-watan (expel) karte hain ke tum apne Rubb, Allah par iman laye ho. Tum chupa kar unko dostana paighaam bhejte ho, halaanke jo kuch tum chupa kar karte ho aur jo elania (openly) karte ho, har cheez ko mai khoob janta hoon. Jo shaks bhi tum mein se aisa karey woh yaqeenan raah-e-raast se bhatak gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aey woh logo jo eman laye ho! Meray aur (khud) apney dushmanon ko apna dost na banao tum to dosti say unn ki taraf payghaam bhejtay ho aur woh iss haq kay sath jo tumharay pass aa chuka hai kufur kertay hain payghumbar ko aur khud tumhen bhi mehaz iss waja say jila watan kertay hain kay tum apney rab per eman rakhtay ho agar tum meri raah mein jihad kay liye aur meri raza mandi ki talab mein nikaltay ho ( to inn say dostiyan na kero) tum inn kay pass mohabbat ka paygham posheeda posheeda bhejtay ho aur mujhay khoob maloom hai jo tum ney chupaya aur woh bhi jo tum ney zahir kiya tum mein say jo bhi iss kaam ko keray ga woh yaqeenan raah-e-raast say behak jaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम मेरी राह में जिहाद करने के लिए और मेरी रज़ा-जोई की खातिर (वतन छोड़ कर घरों से) निकले हो तो मेरे और अपने दुश्मनों को दोस्त ना बनाओ। तुम उनके साथ दोस्ती की तरह बदलते हो, हलांके जो हक तुम्हारे पास आया है उसको मन्ने से वो इनकार कर चुके हैं। और उनकी रवीश ये है के रसूल को और खुद तुमको सिर्फ इस कसूर पर जिला-वतन (निष्कासित) करते हैं कि तुम अपने रब, अल्लाह पर ईमान लाए हो। तुम छुपा कर उनको दोस्ताना पैग़ाम भेजते हो, हलाँके जो कुछ तुम छुपा कर करते हो और जो एलानिया (खुलेआम) करते हो, हर चीज़ को मैं ख़ूब जानता हूँ। जो शक्स भी तुम में से ऐसा करे वो यकीनन राह-ए-रास्त से भटक गया
عَرَبِيإِن يَثقَفوكُم يَكونوا لَكُم أَعداءً وَيَبسُطوا إِلَيكُم أَيدِيَهُم وَأَلسِنَتَهُم بِالسّوءِ وَوَدّوا لَو تَكفُرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यदि वे तुम्हें पा जाएँ, तो तुम्हारे दुश्मन होंगे तथा अपने हाथ और अपनी ज़बानें तुम्हारी ओर बुराई के साथ बढ़ाएँगे और चाहेंगे कि तुम काफ़िर हो जाओ।
Roman Urdu (Maududi)Unka rawayya to yeh hai ke agar tumpar qaabu paa jayein to tumhare saath dushmani karein aur haath aur zuban se tumhein azar (hurt) dein, woh to yeh chahte hain ke tum kisi tarah kafir ho jao
Roman Urdu (Junagarhi)Agar woh tum per kahin qaboo paa len to woh tumharay (khulay) dushman ho jayen aur buraee kay sath tum per dast darazi aur zaban darazi kerney lagen aur (dil say) chahaney lagen kay tum bhi kufur kerney lagg jao
Devnagri Urdu (Maududi)उनका रवैय्या तो ये है के अगर तुम काबू पा जाओ तो तुम्हारे साथ दुश्मनी करें और हाथ और जुबान से तुम्हें अजर (चोट) दें, वो तो ये चाहते हैं के तुम किसी तरह काफिर हो जाओ
عَرَبِيلَن تَنفَعَكُم أَرحامُكُم وَلا أَولادُكُم ۚ يَومَ القِيامَةِ يَفصِلُ بَينَكُم ۚ وَاللَّهُ بِما تَعمَلونَ بَصيرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क़ियामत के दिन हरगिज़ न तुम्हारी नातेदारियाँ तुम्हें लाभ पहुँचाएँगी और न तुम्हारी संतान। वह तुम्हारे बीच जुदाई डाल देगा। और अल्लाह उसे जो तुम कर रहे हो ख़ूब देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Qayamat ke din na tumhari rishtedarian kisi kaam aayengi na tumhari aulad. Us roz Allah tumhare darmiyan judaai daal dega. Aur wahi tumhare aamaal ka dekhne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhari qarabaten rishtay dariyan aur aulad tumhen qayamat kay din kaam na aayen gi Allah Taalaa tumharay darmiyan faisla ker dey ga aur jo kuch tum ker rahey ho ussay Allah khoob dekh raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)कयामत के दिन ना तुम्हारे रिश्ते किसी का काम आएंगी न तुम्हारी औलाद. हमें रोज़ अल्लाह तुम्हारे दरमियान जुदाई डाल देगा। और वही तुम्हारे अमाल का देखने वाला है
عَرَبِيقَد كانَت لَكُم أُسوَةٌ حَسَنَةٌ في إِبراهيمَ وَالَّذينَ مَعَهُ إِذ قالوا لِقَومِهِم إِنّا بُرَآءُ مِنكُم وَمِمّا تَعبُدونَ مِن دونِ اللَّهِ كَفَرنا بِكُم وَبَدا بَينَنا وَبَينَكُمُ العَداوَةُ وَالبَغضاءُ أَبَدًا حَتّىٰ تُؤمِنوا بِاللَّهِ وَحدَهُ إِلّا قَولَ إِبراهيمَ لِأَبيهِ لَأَستَغفِرَنَّ لَكَ وَما أَملِكُ لَكَ مِنَ اللَّهِ مِن شَيءٍ ۖ رَبَّنا عَلَيكَ تَوَكَّلنا وَإِلَيكَ أَنَبنا وَإِلَيكَ المَصيرُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय तुम्हारे लिए इबराहीम तथा उनके साथियों में एक अच्छा आदर्श है। जब उन्होंने अपनी जाति से कहा : निःसंदेह हम तुमसे और उन सभी चीज़ों से बरी हैं, जिन्हें तुम अल्लाह के अतिरिक्त पूजते हो। हम तुम्हें नहीं मानते और हमारे बीच तथा तुम्हारे बीच दुश्मनी और घृणा सदा के लिए प्रकट हो चुकी है, यहाँ तक कि तुम अकेले अल्लाह पर ईमान ले आओ। परंतु इबराहीम का अपने पिता से यह कहना (तुम्हारे लिए आदर्श नहीं) कि मैं अवश्य तुम्हारे लिए क्षमा की प्रार्थना करूँगा और मैं अल्लाह के सामने तुम्हारे लिए कुछ अधिकार नहीं रखता। ऐ हमारे पालनहार! हमने तुझी पर भरोसा किया और तेरी ही ओर लौटे और तेरी ही ओर लौटकर आना है।
Roman Urdu (Maududi)Tum logon ke liye Ibrahim aur uske saathiyon mein ek accha namuna hai ke unhon ne apni qaum se saaf kehdiya “hum tumse aur tumhare in maboodon (deities) se jinko tum khuda ko chodh kar poojhte ho qataii bezaar hain. Humne tumse kufr kiya aur hamare aur tumhare darmiyan hamesha ke liye adawat hogayi aur bair padh gaya (enmity and hatred) jabtak tum Allah wahid par iman na lao”. Magar Ibrahim ka apne baap se yeh kehna (issey mustasna hai) ke “ Main aapke liye magfirat ki darkhwast zaroor karunga, aur Allah se aap ke liye kuch haasil kar lena mere bas mein nahin hai”. (Aur Ibrahim va ashaab-e-Ibrahim ki dua yeh thi ke) “Aey hamare Rubb, tere hi upar humne bharosa kiya aur teri hi taraf humne ruju (turn) karliya aur tere hi huzoor humein palatna hai
Roman Urdu (Junagarhi)(musalmano!) tumharay liye hazrat ibrahim mein aur unn kay sathiyon mein behtareen namoona hai jabkay unn sab ney apni qom say bar mala keh diya kay hum tum say aur jin jin ki tum Allah kay siwa ibadat kertay ho unn sab say bilkul bey zaar hain. Hum tumharay (aqaeed kay) munkir hain jab tak tum Allah ki wahadaniyat per eman na lao hum mein tum mein hamesha kay liye bughz-o-adawat zahir hogaee lekin ibrahim ki itni baat apney baap say hui thi kay mein tumharay liye istaghfaar zaroor keroon ga aur tumharay liye mujhay Allah kay samney kissi cheez ka ikhtiyar kuch bhi nahi. Aey humaray perwerdigar tujhi per hum ney bharosa kiya hai aur teri hi taraf rujoo kertay hain aur teri hi tarf lotna hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम लोगों के लिए इब्राहीम और उसके साथियों में एक अच्छा नामुना है के उन्होन ने अपनी क़ौम से साफ़ कहा "हम तुमसे और तुम्हारे इन माबूदोन (देवताओं) से जिनको तुम खुदा को छोड़ कर पूजते हो कताइ बेज़ार हैं। हमने तुमसे कुफ्र किया और हमारे और तुम्हारे दरमियान हमेशा के लिए अदावत होगी और बैर पढ़ गया (शत्रुता और नफरत) जब तक तुम अल्लाह वाहिद पर ईमान न लाओ”। मगर इब्राहीम का अपने बाप से ये कहना (इससे मुस्तस्ना है) के "मैं आपके लिए मगफिरत की अंधेरगर्दी जरूर करूंगा, और अल्लाह से आप के लिए कुछ हासिल कर लेना मेरे बस में नहीं है"। (और इब्राहिम व असहाब-ए-इब्राहिम की दुआ ये थी के) "ऐ हमारे रब, तेरे ही ऊपर हमने भरोसा किया और तेरी ही तरफ हमने रूजू (टर्न) कार्लिया और तेरे ही हुजूर हमें पलटना है
عَرَبِيرَبَّنا لا تَجعَلنا فِتنَةً لِلَّذينَ كَفَروا وَاغفِر لَنا رَبَّنا ۖ إِنَّكَ أَنتَ العَزيزُ الحَكيمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ हमारे पालनहार! हमें काफ़िरों के लिए परीक्षण न बना और ऐ हमारे पालनहार! हमें क्षमा कर दे। निश्चय तू ही प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey hamare Rubb, humein kafiron ke liye fitna (trial/test) na bana de aur aey hamare Rubb, hamare kasooron se darguzar farma. Beshak tu hi zabardast (mighty) aur daana(wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey humaray rab! Tu humen kafiron ki aazmaeesh mein na daal aur aey humaray paalney walay humari khataon ko bakhsh dey be-shak tu hi ghalib hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ हमारे रब, हमें काफिरों के लिए फितना (ट्रायल/टेस्ट) ना बना दे और ऐ हमारे रब, हमारे कसूरों से दरगुज़र फ़रमा। बेशक़ तू ही ज़बरदस्त (ताकतवर) और दाना (बुद्धिमान) है
عَرَبِيلَقَد كانَ لَكُم فيهِم أُسوَةٌ حَسَنَةٌ لِمَن كانَ يَرجُو اللَّهَ وَاليَومَ الآخِرَ ۚ وَمَن يَتَوَلَّ فَإِنَّ اللَّهَ هُوَ الغَنِيُّ الحَميدُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुम्हारे लिए उनके अंदर एक अच्छा आदर्श है, उस व्यक्ति के लिए जो अल्लाह तथा अंतिम दिवस की आशा रखता है। और जो कोई मुँह फेरे, तो निश्चय अल्लाह बेनियाज़, हर प्रकार की प्रशंसा के योग्य है।
Roman Urdu (Maududi)Inhi logon ke tarz-e-amal mein tumhare liye aur har us shaks ke liye accha namuna (example) hai jo Allah aur roz-e-aakhir ka umeedwar ho. Issey koi munharif ho (turns away) to Allah be niyaz (All-Sufficient) aur apni zaat mein aap mahmood hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tumharay liye inn mein acha namoona (aur umdah pairwi hai khaas ker) her uss shaks kay liye jo Allah ki aur qayamat kay din ki mulaqat ki umeed rakhta ho aur agar koi roo gardani keray to Allah Taalaa bilkul bey niaz hai aur saza waar hamd-o-sana hai
Devnagri Urdu (Maududi)इन्ही लोगों के तर्ज़-ए-अमल में तुम्हारे लिए और हर उस शक्स के लिए अच्छा नामुना (उदाहरण) है जो अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर का उम्मीदवर हो. इस्से कोई मुनहरिफ़ हो (मुड़ जाता है) अल्लाह की ओर नियाज़ (सर्व-पर्याप्त) और अपनी ज़ात में आप महमूद हैं
عَرَبِي۞ عَسَى اللَّهُ أَن يَجعَلَ بَينَكُم وَبَينَ الَّذينَ عادَيتُم مِنهُم مَوَدَّةً ۚ وَاللَّهُ قَديرٌ ۚ وَاللَّهُ غَفورٌ رَحيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निकट है कि अल्लाह तुम्हारे बीच तथा उन लोगों के बीच, जिनसे तुम उन (काफिरों) में से बैर रखते हो, मित्रता पैदा कर दे। और अल्लाह सर्वशक्तिमान् है तथा अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Baeed nahin ke Allah kabhi tumhare aur un logon ke darmiyaan mohabbat daal de jinse aaj tumne dushmani mol li hai. Allah badi qudrat rakhta hai aur woh gafoor-o-raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya ajab hai kay un qarib hi Allah Taalaa tum mein aur tumharay dushmanon mein mohabbat peda ker dey. Allah ko sab qudraten hain aur Allah (bara) ghafoor raheem hai
Devnagri Urdu (Maududi)बैद नहीं के अल्लाह कभी तुम्हारे और उन लोगों के दरमियान मोहब्बत डाल दे जिनसे आज तुमने दुश्मनी मोल ली है। अल्लाह बड़ी क़ुदरत रखता है और वो गफूर-ओ-रहीम है
عَرَبِيلا يَنهاكُمُ اللَّهُ عَنِ الَّذينَ لَم يُقاتِلوكُم فِي الدّينِ وَلَم يُخرِجوكُم مِن دِيارِكُم أَن تَبَرّوهُم وَتُقسِطوا إِلَيهِم ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ المُقسِطينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह तुम्हें इससे नहीं रोकता कि तुम उन लोगों से अच्छा व्यवहार करो और उनके साथ न्याय करो, जिन्होंने तुमसे धर्म के विषय में युद्ध नहीं किया और न तुम्हें तुम्हारे घरों से निकाला। निश्चय अल्लाह न्याय करने वालों से प्रेम करता है।
Roman Urdu (Maududi)Allah tumhein is baat se nahin roakta ke tum un logon ke saath neki aur insaaf ka bartaao karo jinhon ne deen ke maamle mein tumse jung nahin ki hai aur tumhein tumhare gharon se nahin nikala hai. Allah insaaf karne walon ko pasand karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ney tum say deen kay baray mein laraee nahi lari aur tumhen jila watan nahi kiya unn kay sath salook-o-ehsan kerney aur munsifana bhalay bartao kerney say Allah Taalaa tumhen nahi rokta bulkay Allah Taalaa to insaf kerney walon say mohabbat kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह तुम्हें इस बात से नहीं रोकता के तुम उन लोगों के साथ हो, और इन्साफ का वादा करो जिन्हों ने दीन के मामले में तुमसे जंग नहीं की है और तुम्हारे घरों से नहीं निकला है। अल्लाह इन्साफ करने वालों को पसंद करता है है
عَرَبِيإِنَّما يَنهاكُمُ اللَّهُ عَنِ الَّذينَ قاتَلوكُم فِي الدّينِ وَأَخرَجوكُم مِن دِيارِكُم وَظاهَروا عَلىٰ إِخراجِكُم أَن تَوَلَّوهُم ۚ وَمَن يَتَوَلَّهُم فَأُولٰئِكَ هُمُ الظّالِمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह तो तुम्हें केवल उन लोगों से मैत्री रखने से रोकता है, जिन्होंने तुमसे धर्म के विषय में युद्ध किया तथा तुम्हें तुम्हारे घरों से निकाला और तुम्हें निकालने में एक-दूसरे की सहायता की। और जो उनसे मैत्री करेगा, तो वही लोग अत्याचारी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh tumhein jis baat se roakta hai woh to yeh hai ke tum un logon se dosti karo jinhon ne tumse deen ke maamle mein jung ki hai aur tumhein tumhare gharon se nikala hai aur tumhare ikhraaj (expulsion) mein ek dusre ki madad ki hai. Unse jo log dosti karein wahi zaalim hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa tumhen sirf unn logon ki mohabbat say rokta hai jinhon ney tum say deen kay baray mein laraiyan laren aur tumhen des nikalay diye aur des nikala denay walon ki madad ki jo log aisay kuffaar say mohabbat keren woh (qata’an) zalim hain
Devnagri Urdu (Maududi)वो तुम्हें जिस बात से रोकता है वो तो ये है कि तुम उन लोगों से दोस्ती करो जिन्हों ने तुमसे दीन के मामले में जंग की है और तुम्हारे घरों से निकला है और तुम्हारे इखराज (निष्कासन) में एक दूसरे की मदद की है। उनसे जो लोग दोस्ती करें वही ज़ालिम हैं
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِذا جاءَكُمُ المُؤمِناتُ مُهاجِراتٍ فَامتَحِنوهُنَّ ۖ اللَّهُ أَعلَمُ بِإيمانِهِنَّ ۖ فَإِن عَلِمتُموهُنَّ مُؤمِناتٍ فَلا تَرجِعوهُنَّ إِلَى الكُفّارِ ۖ لا هُنَّ حِلٌّ لَهُم وَلا هُم يَحِلّونَ لَهُنَّ ۖ وَآتوهُم ما أَنفَقوا ۚ وَلا جُناحَ عَلَيكُم أَن تَنكِحوهُنَّ إِذا آتَيتُموهُنَّ أُجورَهُنَّ ۚ وَلا تُمسِكوا بِعِصَمِ الكَوافِرِ وَاسأَلوا ما أَنفَقتُم وَليَسأَلوا ما أَنفَقوا ۚ ذٰلِكُم حُكمُ اللَّهِ ۖ يَحكُمُ بَينَكُم ۚ وَاللَّهُ عَليمٌ حَكيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! जब तुम्हारे पास ईमान वाली स्त्रियाँ हिजरत करके आएँ, तो उन्हें जाँच लिया करो। अल्लाह उनके ईमान को ज़्यादा जानने वाला है। फिर यदि वे तुम्हें ईमान वाली मालूम हों, तो उन्हें काफ़िरों की ओर वापस न करो। न ये स्त्रियाँ उन (काफ़िरों) के लिए हलाल हैं और न वे (काफ़िर) इनके लिए हलाल होंगे। और उन काफ़िरों ने जो खर्च किया है, वह उन्हें दे दो। तथा तुमपर कोई दोष नहीं है कि उनसे विवाह कर लो, जब उन्हें उनका महर दे दो। तथा तुम काफ़िर स्त्रियों के सतीत्व को रोक कर न रखो और जो तुमने ख़र्च किया है वह माँग लो। और वे (काफ़िर) भी माँग लें, जो उन्होंने खर्च किया है। यह अल्लाह का फैसला है। वह तुम्हारे बीच फैसला करता है। तथा अल्लाह सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, jab momin auratein hijrat karke tumhare paas aayein to (unke momin honay ki) jaanch padtaal karlo. Aur unke iman ki haqeeqat Allah hi behtar janta hai. Phir jab tumhein maloom ho jaye ke woh momin hain to unhein kuffar ki taraf wapas na karo. Na woh kuffar ke liye halal hain aur na kuffar unke liye halal. Unke kafir shoharon ne jo mehar unko diye thay woh unhein pher do aur unsey nikah kar lene par tumse koi gunaah nahin jabke tum unke mehar unko ada kardo. Aur tum khud bhi kafir auraton ko apne nikah mein na roakey raho, jo mehar tumne apni kafir biwiyon ko diye thay woh tum wapas maang lo aur jo mehar kafiron ne apni musalmaan biwiyon ko diye thay unhein woh wapas maang lein. Yeh Allah ka hukum hai, woh tumhare darmiyaan faisla karta hai aur Allah Aleem-o-Hakeem (all knowing-most wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Jab tumharay pass momin aurten hijrat ker kay aayen to tum unn ka imtehan lo. Dar asal unn kay eman ko ba khoobi janney wala to Allah hi hai lekin agar woh tumhen eman waliyan maloom hon to abb tum enhen kafiron ki taraf wapis na kero yeh unn kay liye halal nahi na woh inn kay liye halal hain aur jo kharach inn kafiron ka hua ho woh unhen ada kerdo inn aurton ko unn kay mehar dey ker inn say nikkah ker lenay mein tum per koi gunah nahi aur kafir aurton ki namoos apney qabzay mein na rakho aur jo kuch tum ney kharach kiya ho maang lo aur jo kuch inn kafiron ney kharach kiya ho woh bhi maang len yeh Allah ka faisla hai jo tumharay darmiyan ker raha hai Allah Taalaa baray ilm (aur) hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब मोमिन औरतें हिजरत करके तुम्हारे पास आएं तो (उनके मोमिन होने की) जांच पडताल करलो। और उनके ईमान की हकीकत अल्लाह ही बेहतर जानता है। फिर जब तुम्हें मालूम हो जाए कि वो मोमिन हैं तो उन्हें कुफ्फार की तरफ वापस न करो। ना वो कुफ्फार के लिए हलाल हैं और ना कुफ्फार उनके लिए हलाल हैं। उनके काफिर शोहरों ने जो मेहर उनको दिए थे वो उन्हें फेर दो और उनसे निकाह कर लेने पर तुमसे कोई गुनाह नहीं जबके तुम उनके मेहर उनको अदा करदो। और तुम खुद भी काफिर औरतों को अपने निकाह में न रोके रहो, जो मेहर तुमने अपनी काफिर बीवीयों को दिए थे वो तुम वापस मांग लो और जो मेहर काफिरों ने अपनी मुसलमान बीवीयों को दिए थे उन्हें वो वापस मांग लें। ये अल्लाह का हुकुम है, वो तुम्हारा दरमियान फैसला करता है और अल्लाह अलीम-ओ-हकीम (सभी जानने वाला-सबसे बुद्धिमान) है
عَرَبِيوَإِن فاتَكُم شَيءٌ مِن أَزواجِكُم إِلَى الكُفّارِ فَعاقَبتُم فَآتُوا الَّذينَ ذَهَبَت أَزواجُهُم مِثلَ ما أَنفَقوا ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذي أَنتُم بِهِ مُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम्हारी पत्नियों में से कोई काफ़िरों की ओर चली जाए, फिर तुम्हें बदले का अवसर मिल जाए, तो जिन लोगों की पत्नियाँ चली गई हैं, उन्हें उनके खर्च के बराबर दे दो। तथा अल्लाह से डरते रहो, जिसपर तुम ईमान रखते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar tumhari kafir biwiyon ke meharon mein se kuch tumhein kuffar se wapas na miley aur phir tumhari naubat aaye to jin logon ki biwiyan udhar reh gayi hain unko itni rakam ada kardo jo unke diye huey meharon ke barabar ho. Aur us khuda se darte raho jispar tum iman laye ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur agar tumhari koi biwi tumharay haath say nikal jaye aur kafiron kay pass chali jaye phir tumhen iss kay badlay ka waqt mill jaye to jin ki biwiyan chali gaeen hain unhen unn kay ikhrajaat kay barabar ada kerdo aur uss Allah Taalaa say dartay rahi jiss per tum eman rakhtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर तुम्हारी काफिर बीवीयों के मेहरों में से कुछ तुम्हें कुफ्फार से वापस न मिले और फिर तुम्हारी नौबत आये तो जिन लोगों की बीवीयाँ उधर रह गई हैं उनको इतनी रकम अदा करदो जो उनके दिए हुए मेहरों के बराबर हो। और हम खुदा से डरते रहो जिसपर तुम ईमान लाए हो
عَرَبِييا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِذا جاءَكَ المُؤمِناتُ يُبايِعنَكَ عَلىٰ أَن لا يُشرِكنَ بِاللَّهِ شَيئًا وَلا يَسرِقنَ وَلا يَزنينَ وَلا يَقتُلنَ أَولادَهُنَّ وَلا يَأتينَ بِبُهتانٍ يَفتَرينَهُ بَينَ أَيديهِنَّ وَأَرجُلِهِنَّ وَلا يَعصينَكَ في مَعروفٍ ۙ فَبايِعهُنَّ وَاستَغفِر لَهُنَّ اللَّهَ ۖ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी! जब आपके पास ईमान वाली स्त्रियाँ आएँ, जो आपसे इस बात पर 'बैअत' करें कि वे किसी को अल्लाह का साझी नहीं बनाएँगी और न चोरी करेंगी, न व्यभिचार करेंगी, न अपनी संतान को क़त्ल करेंगी, न कोई बोहतान (झूठा अभियोग) लगाएँगी जिसे उन्होंने अपने हाथों तथा पैरों के सामने गढ़ लिया हो और न किसी नेक काम में आपकी अवज्ञा करेंगी, तो आप उनसे 'बैअत' ले लें तथा उनके लिए अल्लाह से क्षमा की याचना करें। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, Jab tumhare paas momin auratein bayt (pledge) karne ke liye aayein aur is baat ka ahad karein ke woh Allah ke saath kisi cheez ko shareek na karengi, chori na karengi, zina na karengi, apni aulad ko qatal na karengi, apne haath paaon ke aage koi bohtan (calumny) ghad kar na layengi, Aur kisi amr-e-maaroof (anything known to be good) mein tumhari nafarmani na karengi, to unse bayt lelo aur unke haqq mein Allah se dua-e-magfirat karo. Yaqeenan Allah darguzar(maaf) farmane wala aur Reham karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey payghumbar! Jab musalman aurten aap say inn baaton per bait kerney aayen kay woh Allah kay sath kissi ko shareek na keren gi chori na keren gi zina kaari na keren gi apni aulad ko naa maar dalen gi aur koi aisa bohtaan na bandhay gi jo khud apney haathon pairon kay sath gharr len aur kissi nek kaam mein teri bey hukmi na keren gi to aap inn say bait ker liya keren aur inn kay liye Allah say maghfirat talab keren be-shak Allah bakshney aur moaf kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, जब तुम्हारे पास मोमिन औरतें बैत (प्रतिज्ञा) करने के लिए आएं और इस बात का अहद करें के वो अल्लाह के साथ किसी चीज को शरीक ना करेंगी, चोरी ना करेंगी, जीना ना करेंगी, अपनी औलाद को क़त्ल न करेंगी, अपने हाथ पैरों के आगे कोई बोहतन (कैलमनी) घड़ कर न लेंगी, और किसी अम्र-ए-मारूफ़ (कुछ भी अच्छा होने के लिए जाना जाता है) में तुम्हारी नफ़रमानी न करेंगी, तो उनसे बैत लेलो और उनके हक़ में अल्लाह से दुआ-ए-मगफिरत करो। यकीनन अल्लाह दरगुज़र (माफ़) फ़रमाने वाला और रहम करने वाला है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تَتَوَلَّوا قَومًا غَضِبَ اللَّهُ عَلَيهِم قَد يَئِسوا مِنَ الآخِرَةِ كَما يَئِسَ الكُفّارُ مِن أَصحابِ القُبورِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! तुम उन लोगों को मित्र न बनाओ, जिनपर अल्लाह क्रोधित हुआ है। निश्चय वे आख़िरत से वैसे ही निराश हो चुके हैं, जैसे काफ़िर लोग क़ब्र वालों (के जीवित होने) से निराश हो चुके हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, un logon ko dost na banao jinpar Allah ne gazab farmaya hai, Jo aakhirat se usi tarah mayous hain jis tarah kabaron mein padey huey kafir mayous hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aey musalmano! Tum uss qom say dosti na rakho jin per Allah ka ghazab nazil ho chuka hai jo aakhirat say iss tarah mayyus ho chukay hain jaisay kay murda ehal-e-qabar say kafir na umeed hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, उन लोगों को दोस्त न बनाओ जिनपर अल्लाह ने ग़ज़ब फरमाया है, जो आख़िरत से उसकी तरह मयौस हैं जिस तरह कब्रों में पड़े हुए काफिर मयौस हैं
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Surah 60: Al-Mumtahanah (The Woman who is Examined)

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Surah 60: Al-Mumtahanah (The Woman who is Examined)

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Surah 60: Al-Mumtahanah (The Woman who is Examined)

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Surah 60: Al-Mumtahanah (The Woman who is Examined)

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Surah 60: Al-Mumtahanah (The Woman who is Examined)

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Surah 61: As-Saff (The Ranks)

Medinan🕐 Revelation #109📜 14 Verses🕮 Juz 1
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Surah 61: As-Saff (The Ranks)

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Surah 61: As-Saff (The Ranks)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيسَبَّحَ لِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۖ وَهُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह के पवित्र होने का गान किया, हर उस चीज़ ने जो आकाशों और धरती में है और वही सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki tasbeeh ki hai har us cheez ne jo aasmano aur zameen mein hai, Aur woh ghalib (Mighty) aur Hakeem (wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Zamin-o-aasman ki her her cheez Allah Taalaa ki paki biyan kerti hai aur wohi ghalib hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की तस्बीह की है हर उस चीज़ ने जो आसमान और ज़मीन में है, और वो ग़ालिब (ताकतवर) और हकीम (बुद्धिमान) है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لِمَ تَقولونَ ما لا تَفعَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! तुम वह बात क्यों कहते हो जो तुम करते नहीं?
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, tum kyun woh baat kehte ho jo karte nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tum woh baat kiyon kehtay ho jo kertay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम क्यों वो बात कहते हो जो करते नहीं हो
عَرَبِيكَبُرَ مَقتًا عِندَ اللَّهِ أَن تَقولوا ما لا تَفعَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह को अत्यंत अप्रिय है कि तुम वह बात कहो, जो तुम करते नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Allah ke nazdeek yeh sakht na pasandeeda harakat hai ke tum kaho woh baat jo karte nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Tum jo kertay nahi uss ka kehna Allah Taalaa ko sakht na pasand hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के नाज़दीक ये सच ना पसंदीदा हरकत है के तुम कहो वो बात जो करते नहीं
عَرَبِيإِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الَّذينَ يُقاتِلونَ في سَبيلِهِ صَفًّا كَأَنَّهُم بُنيانٌ مَرصوصٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह अल्लाह उन लोगों से प्रेम करता है, जो उसके मार्ग में पंक्तिबद्ध होकर युद्ध करते हैं, गोया वे एक सीसा पिलाई हुई इमारत हैं।
Roman Urdu (Maududi)Allah ko to pasand woh log hain jo uski raah mein is tarah saff-basta(row) hokar ladte hain goya ke woh ek sisa pilayi hui deewar hain
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak Allah Taalaa unn logon say mohabbat kerta hai jo uss ki raah mein saff basta jihad kertay hain goya woh seesa pilaee hui emaarat hain
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह को तो पसंद वो लोग हैं जो उसकी राह में है इस तरह सफ़-बस्ता (पंक्ति) होकर लड़ते हैं गोया के वो एक सिसा पिलाई हुई दीवार हैं
عَرَبِيوَإِذ قالَ موسىٰ لِقَومِهِ يا قَومِ لِمَ تُؤذونَني وَقَد تَعلَمونَ أَنّي رَسولُ اللَّهِ إِلَيكُم ۖ فَلَمّا زاغوا أَزاغَ اللَّهُ قُلوبَهُم ۚ وَاللَّهُ لا يَهدِي القَومَ الفاسِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा याद करो जब मूसा ने अपनी जाति से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम मुझे क्यों कष्ट देते हो, जबकि निश्चय तुम जानते हो कि मैं तुम्हारी ओर अल्लाह का रसूल हूँ? फिर जब वे टेढ़े हो गए, तो अल्लाह ने उनके दिलों को टेढ़ा कर दिया और अल्लाह अवज्ञाकारी लोगों को सीधा मार्ग नहीं दिखाता।
Roman Urdu (Maududi)Aur yaad karo Moosa ki woh baat jo usne apni qaum se kahi thi “Aey meri qaum ke logon, tum kyun mujhey aziyat (torment /harm) dete ho halaanke tum khoob jaante ho ke main tumhari taraf Allah ka bheja hua Rasool hoon? Phir jab unhon ne tedh ikhtiyar ki (deviated) to Allah ne unke dil tedhey (deviant) kardiye, Allah faasiqon ko hidayat nahin deta
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (yaad kero) jabkay musa ney apni qom say kaha aey meri qom kay logo! Tum mujhay kiyon sata rahey ho halankay tumhen (ba khoobi) maloom hai kay mein tumhari janib Allah ka rasool hun pus jab woh log tairhay hi rahey to Allah ney unn kay dilon ko (aur) tairhaa ker diya aur Allah Taalaa na farman qom ko hidayat nahi deta
Devnagri Urdu (Maududi)और याद करो मूसा की वो बात जो उसने अपनी क़ौम से कहीं थी "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, तुम क्यों मुझे अज़ियात (पीड़ा/नुकसान) देते हो हलांके तुम ख़ूब जानते हो के मैं तुम्हारी तरफ अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूं? फिर जब उन्होन ने टेढ इख्तियार की (विचलित) अल्लाह के लिए ने उनका दिल टेढ़े (विचलित) कर दिया, अल्लाह फासिकों को" हिदायत नहीं देता
عَرَبِيوَإِذ قالَ عيسَى ابنُ مَريَمَ يا بَني إِسرائيلَ إِنّي رَسولُ اللَّهِ إِلَيكُم مُصَدِّقًا لِما بَينَ يَدَيَّ مِنَ التَّوراةِ وَمُبَشِّرًا بِرَسولٍ يَأتي مِن بَعدِي اسمُهُ أَحمَدُ ۖ فَلَمّا جاءَهُم بِالبَيِّناتِ قالوا هٰذا سِحرٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा याद करो जब मरयम के पुत्र ईसा ने कहा : ऐ इसराईल की संतान! निःसंदेह मैं तुम्हारी ओर अल्लाह का रसूल हूँ, उस तौरात की पुष्टि करने वाला हूँ, जो मुझसे पहले आई है तथा एक रसूल की शुभ सूचना देने वाला हूँ, जो मेरे बाद आएगा, जिसका नाम अहमद है। फिर जब वह उनके पास खुले प्रमाणों को लेकर आया, तो उन्होंने कहा यह खुला जादू है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yaad karo Isa ibn-e-Maryam ki woh baat jo usne kahi thi ke “Aey bani Israel, main tumhari taraf Allah ka bheja hua Rasool hoon, Tasdeeq (verify/confirm) karne wala hoon us Taurat ki jo mujhse pehle aayi hui maujood hai, aur basharat (khushkhabri) dene wala hoon ek rasool ki jo mere baad aayega jiska naam Ahmed hoga. Magar jab woh unke paas khuli khuli nishaniyan lekar aaya to unhon ne kaha yeh to sareeh dhoka hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab marium kay betay essa ney kaha aey (meri qom) bani israeel! Mein tum sab ki taraf Allah ka rasool hun mujh say pehlay ki kitab toraat ki mein tasdeeq kerney wala hun aur apney baad aaney walay aik rasool ki mein tumhen khushkhabri sunaney wala hun jin ka naam ahmed hai phir jab woh unn kay pass khuli daleelen laye to yeh kehney lagay yeh to khula jadoo hai
Devnagri Urdu (Maududi)और याद करो ईसा इब्न-ए-मरियम की वो बात जो उसने कही थी के "ऐ बनी इसराइल, मैं तुम्हारी तरफ अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूं, तस्दीक (सत्यापित/पुष्टि) करने वाला हूं उस तौरात की जो मुझसे पहले आई है मौजुद है, और बशारत (खुशखबरी) देने वाला हूं एक रसूल की जो मेरे बाद आएगा जिसका नाम अहमद होगा। मगर जब वो उनके पास खुली खुली निशानियां लेकर आया तो उनको ने कहा ये तो सारा धोखा है
عَرَبِيوَمَن أَظلَمُ مِمَّنِ افتَرىٰ عَلَى اللَّهِ الكَذِبَ وَهُوَ يُدعىٰ إِلَى الإِسلامِ ۚ وَاللَّهُ لا يَهدِي القَومَ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और उससे अधिक अत्याचारी कौन है, जो अल्लाह पर झूठ गढ़े, जबकि उसे इस्लाम की ओर बुलाया जा रहा हो? और अल्लाह अत्याचारी लोगों को मार्गदर्शन नहीं देता।
Roman Urdu (Maududi)Ab bhala us shaks se bada zaalim aur kaun hoga jo Allah par jhutey bohtan bandhey halaanke usey Islam (Allah ke aagey sar-e-itaat jhuka deney) ki dawat di ja rahi ho? Aisey zaalimon ko Allah hidayat nahin diya karta
Roman Urdu (Junagarhi)Uss shaks say ziyada zalim aur kaun hoga jo Allah per jhoot (iftra) bandhay halankay woh islam ki taraf bulaya jata hai aur Allah aisay zalimon ko hidayat nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)अब भला उस शक्स से बड़ा जालिम और कौन होगा जो अल्लाह पर झूठे बोहतन बंधे हलांके उसे इस्लाम (अल्लाह)। के आगे सर-ए-इताअत झुके) कि दावत दी जा रही हो? ऐसे जालिमों को अल्लाह हिदायत नहीं दिया करता
عَرَبِييُريدونَ لِيُطفِئوا نورَ اللَّهِ بِأَفواهِهِم وَاللَّهُ مُتِمُّ نورِهِ وَلَو كَرِهَ الكافِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे चाहते हैं कि अल्लाह के प्रकाश को अपने मुँहों से बुझा दें तथा अल्लाह अपने प्रकाश को पूरा करने वाला है, यद्यपि काफ़िरों को बुरा लगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log apni mooh ki phoonkon (blows) se Allah ke noor ko bujhana chahte hain, Aur Allah ka faisla yeh hai ke wo apne noor ko poora phayla kar rahega khwa kaafiron ko yeh kitna hi nagawar ho
Roman Urdu (Junagarhi)Woh chahtay hain kay Allah kay noor ko apney mun say bujha den aur Allah apney noor ko kamal tak phonchaney wala hai go kafir bura manen
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग अपने मुंह की फूंकों से अल्लाह के नूर को बुझाना चाहते हैं, और अल्लाह का फैसला ये है कि वो अपने नूर को पूरा प्यार कर रहेगा ख्वा काफिरों को ये कितना ही नागावर हो
عَرَبِيهُوَ الَّذي أَرسَلَ رَسولَهُ بِالهُدىٰ وَدينِ الحَقِّ لِيُظهِرَهُ عَلَى الدّينِ كُلِّهِ وَلَو كَرِهَ المُشرِكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है, जिसने अपने रसूल को मार्गदर्शन तथा सत्धर्म (इस्लाम) के साथ भेजा, ताकि वह उसे प्रत्येक धर्म पर प्रभुत्व प्रदान करे, यद्यपि मुश्रिकों को बुरा लगे।
Roman Urdu (Maududi)Wahi to hai jisne apne Rasool ko hidayat aur deen-e-haqq ke saath bheja hai taa-ke usey poorey ke poorey deen par ghalib karde khwa mushrikeen ko yeh kitna hi nagawar ho
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi hai jiss ney apney rasool ko hidayat aur sacha deen dey ker bheja takay ussay aur tamam mazaahib per ghalib ker dey agar cheh mushrikeen na khush hon
Devnagri Urdu (Maududi)वही तो है जिसने अपने रसूल को हिदायत और दीन-ए-हक़ के साथ भेजा है ता-के उसे पूरे के पूरे दीन पर ग़ालिब करदे ख्वा मुशरिकेन को ये कितना ही नागावर हो
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا هَل أَدُلُّكُم عَلىٰ تِجارَةٍ تُنجيكُم مِن عَذابٍ أَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! क्या मैं तुम्हें ऐसा व्यापार बताऊँ, जो तुम्हें दर्दनाक यातना से बचा ले?
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, main bataoon tumko wo tijarat jo tumhein azaab-e-aleem se bacha de
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Kiya mein tumhen woh tijarat batla doon jo tumhen dard naak azab say bacha ley
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगन जो ईमान लाए हो, मैं बताऊँ तुमको वो तिजारत जो तुम्हें अज़ाब-ए-आलिम से बचा दे
عَرَبِيتُؤمِنونَ بِاللَّهِ وَرَسولِهِ وَتُجاهِدونَ في سَبيلِ اللَّهِ بِأَموالِكُم وَأَنفُسِكُم ۚ ذٰلِكُم خَيرٌ لَكُم إِن كُنتُم تَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम अल्लाह तथा उसके रसूल पर ईमान लाओ और अपने धनों और अपनी जानों के साथ अल्लाह के मार्ग में जिहाद करो। यह तुम्हारे लिए उत्तम है, यदि तुम जानते हो।
Roman Urdu (Maududi)Iman lao Allah aur uske Rasool par, Aur jihad karo Allah ki raah mein apne maalon se aur apni jaano se, yahi tumhare liye behtar hai agar tum jaano
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa per aur uss kay rasool per eman lao aur Allah ki raah mein apney maal aur apni jaanon say jihad kero. Yeh tumharay liye behtar hai agar tum mein ilm ho
Devnagri Urdu (Maududi)ईमान लाओ अल्लाह और उसके रसूल पर, और जिहाद करो अल्लाह की राह में अपने मालों से और अपनी जानो से, यहीं तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम जानो
عَرَبِييَغفِر لَكُم ذُنوبَكُم وَيُدخِلكُم جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ وَمَساكِنَ طَيِّبَةً في جَنّاتِ عَدنٍ ۚ ذٰلِكَ الفَوزُ العَظيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)वह तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा और तुम्हें ऐसी जन्नतों में दाखिल करेगा, जिनके तले नहरें बहती हैं और पवित्र आवासों में, जो हमेशा रहने की जन्नतों में हैं। यही बड़ी सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)Allah tumhare gunaah maaf kardega, aur tumko aisey baaghon mein daakhil karega jinke nichey nehrein behti hongi, aur abadi (eternal) qayaam ki jannaton mein behtareen ghar tumhein ata farmaeyga. Yeh hai badi kamiyabi
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa tumharay gunah moaf farma dey ga aur tumhen unn jannaton mein dakhil keray ga jin kay neechay nehren jari hongi aur saaf suthray gharon mein jo jannat adan mein hon gay yeh boht bari kaamyabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह तुम्हारे गुनाह माफ कर देगा, और तुमको ऐसे बाघों में दाख़िल करेगा, जिनकी जगहें नहरें बहती होंगी, और आबादी (शाश्वत) क़याम की जन्नत में बहतरीन घर तुम्हें अता फरमायेगा। ये है बड़ी कामयाबी
عَرَبِيوَأُخرىٰ تُحِبّونَها ۖ نَصرٌ مِنَ اللَّهِ وَفَتحٌ قَريبٌ ۗ وَبَشِّرِ المُؤمِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और एक अन्य वस्तु, जो तुम पसंद करते हो। अल्लाह की ओर से सहायता तथा निकट विजय। और ईमान वालों को शुभ सूचना सुना दो।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh dusri cheez jo tum chahte ho woh bhi tumhein dega, Allah ki taraf se nusrat (victory) aur kareeb hi mein hasil ho janey wali fatah. Aey Nabi ehle iman ko iski basharat de do
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tumhen aik doosri (nemat) bhi dey ga jisay tum chahtay ho woh Allah ki madad aur jald fatah yaabi hai eman walon ko khushkhabri dey do
Devnagri Urdu (Maududi)और वो दूसरी चीज़ जो तुम चाहते हो वो भी तुम्हें देगा, अल्लाह की तरफ से नुसरत (जीत) और करीब ही में हासिल हो जाने वाली फतह। ऐ नबी एहले ईमान को इसकी बशारत दे दो
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا كونوا أَنصارَ اللَّهِ كَما قالَ عيسَى ابنُ مَريَمَ لِلحَوارِيّينَ مَن أَنصاري إِلَى اللَّهِ ۖ قالَ الحَوارِيّونَ نَحنُ أَنصارُ اللَّهِ ۖ فَآمَنَت طائِفَةٌ مِن بَني إِسرائيلَ وَكَفَرَت طائِفَةٌ ۖ فَأَيَّدنَا الَّذينَ آمَنوا عَلىٰ عَدُوِّهِم فَأَصبَحوا ظاهِرينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! तुम अल्लाह (के धर्म) के सहायक बन जाओ, जिस तरह मरयम के पुत्र ईसा ने ह़वारियों से कहा : अल्लाह की ओर मेरे सहायक कौन हैं? ह़वारियों ने कहा : हम अल्लाह के (धर्म के) सहायक हैं। तो बनी इसराईल में से एक समूह ईमान लाया और एक समूह ने इनकार किया। फिर हमने उन लोगों का, जो ईमान लाए थे, उनके शत्रुओं के विरुद्ध समर्थन किया, तो वे हावी हो गए।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, Allah ke madadgaar bano , jis tarah Isa ibn-e-Maryam ne hawariyon (disciples) ko khitaab karke kaha tha “Kaun hai Allah ki taraf (bulane) mein mera madadgaar”. Aur hawariyon (disciples) ne jawab diya tha : “hum hai Allah ke madadgaar”. Us waqt bani Israel ka ek giroh iman laya aur dusre giroh ne inkar kiya. Phir humne iman laney walon ki unke dushmano ke muqable mein taeed ki (aided) aur wahi ghalib hokar rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tum Allah key madadgar bann jao. Jiss tarah hazrat marium kay betay hazrat essa ney hawariyon say farmaya kay kaun hai jo Allah ki raah mein mera madadgar baney? Hawariyon ney kaha hum Allah ki raah mein madadgar hain pus bani israeel mein say aik jamat to eman laee aur aik jamat ney kufur kiya tum hum ney mominon ki unn kay dushman kay muqabley mein madad ki pus woh ghalib aagaye
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह के मददगार बनो, जिस तरह ईसा इब्न-ए-मरियम ने हवारियों (चेलों) को खिताब करके कहा था "कौन है अल्लाह की तरफ (बुलाने) में मेरा मददगार"। और हवारियों (चेलों) ने जवाब दिया था: "हम हैं अल्लाह के मददगार"। हमें वक्त बानी इजराइल का एक गिरो ​​ईमान लाया और दूसरे गिरो ​​ने इंकार किया। फिर हमने ईमान लाने वालों की उनके दुश्मनों के मुकाबले में तय की (सहायता) और वही ग़ालिब होकर रहे
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Surah 61: As-Saff (The Ranks)

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Surah 61: As-Saff (The Ranks)

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Surah 61: As-Saff (The Ranks)

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Surah 61: As-Saff (The Ranks)

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Surah 61: As-Saff (The Ranks)

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Surah 62: Al-Jumu'ah (The Congregation)

Medinan🕐 Revelation #110📜 11 Verses🕮 Juz 1
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِييُسَبِّحُ لِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ المَلِكِ القُدّوسِ العَزيزِ الحَكيمِ
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह की पवित्रता बयान करती है हर वह चीज़ जो आकाशों में है और जो धरती में है, (जो) बादशाह, अत्यंत पवित्र, सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki tasbeeh kar rahi hai har woh cheez jo aasmano mein hai aur har wo cheez jo zameen mein hai, baadshah hai,Quddus(holy) hai,Zabardast aur Hakeem(wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)(saari cheezen) jo aasmanon aur zamin mein hain Allah Taalaa ki paki biyan kerti hain (jo) badshah nihayat pak (hai) ghalib-o-ba hikmat
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की तस्बीह कर रही है हर वो चीज़ जो आसमानो में है और हर वो चीज़ जो ज़मीन में है, बादशाह है, कुद्दुस (पवित्र) है, ज़बरदस्त और हकीम (बुद्धिमान) है
عَرَبِيهُوَ الَّذي بَعَثَ فِي الأُمِّيّينَ رَسولًا مِنهُم يَتلو عَلَيهِم آياتِهِ وَيُزَكّيهِم وَيُعَلِّمُهُمُ الكِتابَ وَالحِكمَةَ وَإِن كانوا مِن قَبلُ لَفي ضَلالٍ مُبينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वही है, जिसने अनपढ़ों के अंदर उन्हीं में से एक रसूल भेजा, जो उन्हें अल्लाह की आयतें पढ़कर सुनाता है, उन्हें पवित्र करता है तथा उन्हें पुस्तक (क़ुरआन) एवं हिकमत (सुन्नत) की शिक्षा देता है, निःसंदेह वे इससे पहले खुली गुमराही में थे।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jisne ummiyon (gentiles/unlettered) ke andar ek Rasool khud unhi mein se uthaya, jo unhein uski ayaat sunata hai, unki zindagi sanwarta hai,aur unko kitaab aur hikmat ki taleem deta hai, halaanke issey pehle woh khuli gumraahi me padey huey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi hai jiss ney na khuanda logon mein inn hi mein say aik rasool bheja jo enhen uss ki aayaten parh ker sunata hai aur inn ko pak kerta hai aur enhen kitab-o-hikmat sikhata hai. Yaqeenan yeh iss say pehlay khuli gumrahi mein thay
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिसने उम्मियों (अन्यजातियों/अशिक्षित) के अंदर एक रसूल खुद को उनसे उठाया, जो उन्हें उसकी आयत सुनाता है, उनकी जिंदगी संवरता है, और उनको किताब और हिकमत की तालीम देता है, हलांके इस्से पहले वो खुली गुमराही में पड़े हुए थे
عَرَبِيوَآخَرينَ مِنهُم لَمّا يَلحَقوا بِهِم ۚ وَهُوَ العَزيزُ الحَكيمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उनमें से कुछ और लोगों में भी (आपको भेजा), जो अभी तक उनसे नहीं मिले। और वह सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur (is Rasool ki beasat) un dusre logon ke liye bhi hai jo abhi unse nahi miley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur doosron kay liye bhi unhi mein say jo abb tak inn say nahi milay aur wohi ghalib ba hikmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)और (इस रसूल की बिसात) उन दूसरे लोगों के लिए भी है जो अभी उनसे नहीं मिले हैं
عَرَبِيذٰلِكَ فَضلُ اللَّهِ يُؤتيهِ مَن يَشاءُ ۚ وَاللَّهُ ذُو الفَضلِ العَظيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह अल्लाह का अनुग्रह है, वह उसे जिसे चाहता है, प्रदान करता है और अल्लाह बड़े अनुग्रह है।
Roman Urdu (Maududi)Allah Zabardast aur Hakeem hai yeh uska fazal hai jisey chahta hai deta ha. Aur woh bada fazal farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh Allah ka fazal hai jissay chahaye apna fazal dey aur Allah Taalaa boht baray fazal ka maalik hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ज़बरदस्त और हकीम है ये उसका फ़ज़ल है जिसे चाहता है देता है। और वो बड़ा फ़ज़ल फ़रमाने वाला है
عَرَبِيمَثَلُ الَّذينَ حُمِّلُوا التَّوراةَ ثُمَّ لَم يَحمِلوها كَمَثَلِ الحِمارِ يَحمِلُ أَسفارًا ۚ بِئسَ مَثَلُ القَومِ الَّذينَ كَذَّبوا بِآياتِ اللَّهِ ۚ وَاللَّهُ لا يَهدِي القَومَ الظّالِمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन लोगों का उदाहरण, जिनपर तौरात का भार डाला गया, फिर उन्होंने उसे नहीं उठाया, गधे के समान है, जो पुस्तकें लादे हुए हो। उन लोगों का उदाहरण बहुत बुरा है, जिन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया। और अल्लाह अत्याचारी लोगों को मार्गदर्शन प्रदान नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ko Taurat ka hamil (charge) banaya gaya tha magar unhon ne uska baar na uthaya, unki misaal us gadhey(donkey) ki si hai jispar kitaabein laadi hui hon. Issey bhi zyada buri misaal hai un logon ki jinhon ne Allah ki ayaat ko jhutla diya hai. Aisey zaalimon ko Allah hidayat nahi diya karta
Roman Urdu (Junagarhi)Jin logon ko toraat per amal kerney ka hukum diya gaya phir unhon ney uss per amal nahi kiya unn ki misal uss gadhay ki say hai jo boht si kitaben laaday ho. Allah ki baaton ko jhutlaney walon ki bari buri misal hai aur Allah (aisay) zalim qom ko hidayat nahi deta
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों को तौरात का हमील (चार गे) बनाया गया था मगर उन्होन ने उसका बार ना उठाया, उनकी मिसाल हमें गधे (गधा) की सी है जिसपर किताबे लाडी हुई होन। इस्से भी ज्यादा बुरी मिसाल है उन लोगों की जिन्होन ने अल्लाह की आयत को झूठला दिया है। ऐसे ज़ालिमों को अल्लाह हिदायत नहीं दिया करता
عَرَبِيقُل يا أَيُّهَا الَّذينَ هادوا إِن زَعَمتُم أَنَّكُم أَولِياءُ لِلَّهِ مِن دونِ النّاسِ فَتَمَنَّوُا المَوتَ إِن كُنتُم صادِقينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि ऐ यहूदियो! यदि तुम समझते हो कि दूसरे लोगों को छोड़कर तुम ही अल्लाह के दोस्त हो, तो मौत की कामना करो, यदि तुम सच्चे हो।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho, “aey logo jo yahudi ban gaye ho, agar tumhein yeh ghamand (arrogance) hai ke baqi sab logon ko chodh kar bas tum hi Allah ke chahite (favourites) ho to maut ki tamanna karo agar tum apne is zaam (claim) mein sachche ho
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay aey yahudiyo! Agar tumhara daawa hai kay tum Allah kay dost ho doosray logon kay siwa to tum maut ki tamanna kero agar tum sachay ho
Devnagri Urdu (Maududi)इंसे कहो, “ऐ लोग जो यहुदी बन गए हो, अगर तुममें ये घमंड (अहंकार) है के बाकी सब लोगों को छोड़ कर बस तुम ही अल्लाह के चाहते (पसंदीदा) हो तो मौत की तमन्ना करो अगर तुम अपना इस ज़माना हो (दावा) मैं सच्चा हूं
عَرَبِيوَلا يَتَمَنَّونَهُ أَبَدًا بِما قَدَّمَت أَيديهِم ۚ وَاللَّهُ عَليمٌ بِالظّالِمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वे अपनी करतूतों के कारण हरगिज़ उसकी कामना नहीं करेंगे, और अल्लाह अत्याचारियों को ख़ूब जानता है।
Roman Urdu (Maududi)lekin yeh hargiz iski tamanna na karenge apne kartooton ki wajah se jo ye kar chuke hain. Aur Allah in zalimon ko khoob jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kabhi bhi maut ki tamanna na keren gay ba waja unn aemaal kay jo apney aagay apney haathon bhej rakhay hain aur Allah zalimon ko khoob janta hai
Devnagri Urdu (Maududi)लेकिन ये हरगिज उसकी तमन्ना ना करेगी अपने कार्टूनों की वजह से जो ये कर चुके हैं। और अल्लाह जालिमों को खूब जानता है
عَرَبِيقُل إِنَّ المَوتَ الَّذي تَفِرّونَ مِنهُ فَإِنَّهُ مُلاقيكُم ۖ ثُمَّ تُرَدّونَ إِلىٰ عالِمِ الغَيبِ وَالشَّهادَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِما كُنتُم تَعمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें कि जिस मौत से तुम भाग रहे हो, वह अवश्य तुमसे मिलकर रहेगी। फिर तुम हर परोक्ष (छिपे) और प्रत्यक्ष (खुले) का ज्ञान रखने वाले (अल्लाह) की ओर लौटाए जाओगे, तो वह तुम्हें बताएगा जो कुछ तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho , “jis maut se tum bhaagte ho wo to tumhein aakar rahegi. Phir tum uske saamne pesh kiye jaogey jo poshida (hidden) aur zaahir ka jaanne wala hai. Aur woh tumhein bata dega ke tum kya kuch karte rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijiye kay jiss maut say tum bhagtay phirtay ho woh to tumhen phonch ker rahey gi pohir tum sab chupay khulay kay jannay walay (Allah) ki taraf lotaye jao gay aur woh tumhen tumharay kiye huye tamam kaam batla dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, “जिस मौत से तुम भागते हो वो तो तुम आकार रहोगे। फिर तुम उसके सामने पेश हो जाओगे जो पोशिदा (छिपा हुआ) और जाहिर का जाने वाला है। और वो तुम्हे बता देगा के तुम क्या कुछ करते रहे हो
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِذا نودِيَ لِلصَّلاةِ مِن يَومِ الجُمُعَةِ فَاسعَوا إِلىٰ ذِكرِ اللَّهِ وَذَرُوا البَيعَ ۚ ذٰلِكُم خَيرٌ لَكُم إِن كُنتُم تَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! जब जुमा के दिन नमाज़ के लिए अज़ान दी जाए, तो अल्लाह की याद की ओर दौड़ पड़ो, तथा क्रय-विक्रय छोड़ दो। यह तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम जानते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, jab pukara jaye namaz ke liye jumaa ke din to Allah ke zikr ki taraf daudo aur khareed-o-farokht chodh do. Yeh tumhare liye zyada bethar hai agar tum jaano
Roman Urdu (Junagarhi)Aey woh logo jo eman laye ho! Jummay kay din namaz ki azan di jaye to tum Allah kay ziker kay taraf dor paro aur khareed-o-farokht chor do. Yeh tumharay haq mein boht hi behtar hai agar tum jantay ho
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब पुकारा जाए नमाज़ के लिए जुमा के दिन तो अल्लाह के ज़िक्र की तरफ दाऊद और ख़त्म-ओ-फ़ारोख़त छोड़ दो। ये तुम्हारे लिए ज्यादा बेहतर है अगर तुम जानो
عَرَبِيفَإِذا قُضِيَتِ الصَّلاةُ فَانتَشِروا فِي الأَرضِ وَابتَغوا مِن فَضلِ اللَّهِ وَاذكُرُوا اللَّهَ كَثيرًا لَعَلَّكُم تُفلِحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब नमाज़ पूरी कर ली जाए, तो धरती में फैल जाओ और अल्लाह का अनुग्रह तलाश करो तथा अल्लाह को बहुत ज़्यादा याद करते रहो, ताकि तुम सफल हो।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab namaz poori ho jaye to zameen mein phayl jao aur Allah ka fazl talash karo aur Allah ko kasrat se yaad karte raho, shayad ke tumhein falaah (kamiyabi/prosperity) naseeb ho jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab namaz ho chukay to zamin mein phel jao aur Allah ka fazal talash kero takay tum falah paa lo
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब नमाज पूरी हो जाए तो जमीन में फैल जाओ और अल्लाह का फजल तलाश करो और अल्लाह को कसरत से याद करते रहो, शायद के तुम्हें फलाह (कामियाबी/समृद्धि) नसीब हो जाए
عَرَبِيوَإِذا رَأَوا تِجارَةً أَو لَهوًا انفَضّوا إِلَيها وَتَرَكوكَ قائِمًا ۚ قُل ما عِندَ اللَّهِ خَيرٌ مِنَ اللَّهوِ وَمِنَ التِّجارَةِ ۚ وَاللَّهُ خَيرُ الرّازِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब उन्होंने कोई व्यापार अथवा खेल-तमाशा देखा, तो उठकर उसकी ओर चले गए और उन्होंने आपको खड़ा छोड़ दिया। आप कह दें कि जो अल्लाह के पास है, वह खेल से तथा व्यापार से बेहतर है। और अल्लाह सबसे उत्तम जीविका प्रदान करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab unhon ne tijarat (business) aur khel tamasha hote dekha to uski taraf lapak gaye aur tumhein khada chodh diya. Insey kaho, jo kuch Allah ke paas hai wo khel tamashey aur tijarat se behtar hai aur Allah sabse behtar rizq (sustenance) dene wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab koi soda biktay dekhen ya koi tamasha nazar aajaye to uss ki taraf dortay jatay hain aur aap ko khara hi chor detay hain aap keh dijiye kay Allah kay pass jo hai woh khel aur tijarat say behtar hai. Aur Allah Taalaa behtareen rozi rasan hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जब उनको ने तिजारत (व्यवसाय) और खेल तमाशा होते देखा तो उसकी तरफ लपक गए और तुम्हें खड़ा छोड़ दिया। इनसे कहो, जो कुछ अल्लाह के पास है वो खेल तमाशे और तिजारत से बेहतर है और अल्लाह सबसे बेहतर रिज्क (जीविका) देने वाला है
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Surah 62: Al-Jumu'ah (The Congregation)

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Surah 62: Al-Jumu'ah (The Congregation)

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Surah 62: Al-Jumu'ah (The Congregation)

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Surah 62: Al-Jumu'ah (The Congregation)

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Surah 63: Al-Munafiqun (The Hypocrites)

Medinan🕐 Revelation #104📜 11 Verses🕮 Juz 1
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Surah 63: Al-Munafiqun (The Hypocrites)

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Surah 63: Al-Munafiqun (The Hypocrites)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيإِذا جاءَكَ المُنافِقونَ قالوا نَشهَدُ إِنَّكَ لَرَسولُ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ يَعلَمُ إِنَّكَ لَرَسولُهُ وَاللَّهُ يَشهَدُ إِنَّ المُنافِقينَ لَكاذِبونَ
हिन्दी (Al-Omari)जब आपके पास मुनाफ़िक़ आते हैं, तो कहते हैं : हम गवाही देते हैं कि निःसंदेह आप निश्चय अल्लाह के रसूल हैं। तथा अल्लाह जानता है कि निःसंदेह आप निश्चय अल्लाह के रसूल हैं और अल्लाह गवाही देता है कि मुनाफ़िक़ निश्चित रूप से झूठे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, jab yeh munafiq (hypocrites) tumhare paas aate hain to kehte hain “hum gawahi dete hain ke aap yaqeenan Allah ke Rasool hain, “haan, Allah janta hai ke tum zaroor uske Rasool ho, magar Allah gawahi deta hai ke yeh munafiq qataii jhootey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Tumharay pass jab munafiq aatay hain to kehtay hain kay hum iss baat kay gawah hain kay be-shak aap Allah kay rasool hain aur Allah janta hai yaqeenan aap uss kay rasool hain aur Allah gawahi deta hai kay yeh munafiq qata’an jhootay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, जब ये मुनाफिक (पाखंडी) तुम्हारे पास आते हैं तो कहते हैं "हम गवाही देते हैं के आप यकीनन अल्लाह के रसूल हैं, "हाँ, अल्लाह जानता है के तुम ज़रूर उसके रसूल हो, मगर अल्लाह गवाही देता है के ये मुनाफिक क़तई झूठे हैं
عَرَبِياتَّخَذوا أَيمانَهُم جُنَّةً فَصَدّوا عَن سَبيلِ اللَّهِ ۚ إِنَّهُم ساءَ ما كانوا يَعمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने अपनी क़समों को ढाल बना लिया है, फिर उन्होंने (लोगों को) अल्लाह की राह से रोका है। निःसंदेह बहुत बुरा है, जो कुछ वे करते रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Inhon ne apni kasamo ko dhaal bana rakkha hai aur is tarah yeh Allah ke raste se khud rukte aur duniya ko roakte hain. Kaisi buri harkatein hain jo yeh log kar rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Enhon ney apni qasmon ko dhaal bana rakha hai pus Allah ki raah say ruk gaye be-shak bura hai woh kaam jo yeh ker rahey hain
Devnagri Urdu (Maududi)इन्हों ने अपनी कसमों को ढाल बना रक्खा है और इस तरह ये अल्लाह के रास्ते से खुद रुकते हैं और दुनिया को रोकते हैं। कैसी बुरी हरकतें हैं जो ये लोग कर रहे हैं
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّهُم آمَنوا ثُمَّ كَفَروا فَطُبِعَ عَلىٰ قُلوبِهِم فَهُم لا يَفقَهونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह इस कारण कि वे ईमान लाए, फिर उन्होंने कुफ़्र किया। तो अल्लाह ने उनके दिलों पर मुहर लगा दी। अतः वे नहीं समझते।
Roman Urdu (Maududi)Yeh sab kuch is wajah se hai ke in logon ne Imaan la kar phir kufr kiya is liye inke dilon par mohar laga di gayi, ab yeh kuch nahin samajhte
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss sabab say hai kay yeh eman laa ker phir kafir hogaye pus inn kay dilon per mohar ker di gaee abb yeh nahi samajhtay
Devnagri Urdu (Maududi)ये सब कुछ इस वजह से है के इन लोगों ने ईमान ला कर फिर कुफ्र किया इस के लिए इनके दिलों पर मोहर लगा दी गई, अब ये कुछ नहीं समझते
عَرَبِي۞ وَإِذا رَأَيتَهُم تُعجِبُكَ أَجسامُهُم ۖ وَإِن يَقولوا تَسمَع لِقَولِهِم ۖ كَأَنَّهُم خُشُبٌ مُسَنَّدَةٌ ۖ يَحسَبونَ كُلَّ صَيحَةٍ عَلَيهِم ۚ هُمُ العَدُوُّ فَاحذَرهُم ۚ قاتَلَهُمُ اللَّهُ ۖ أَنّىٰ يُؤفَكونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यदि तुम उन्हें देखो, तो तुम्हें उनके शरीर अच्छे लगेंगे और यदि वे बात करें, तो तुम उनकी बात पर कान लगाओगे। मानो कि वे टेक लगाई हुई लकड़ियाँ हैं। वे हर तेज़ आवाज़ को अपने ही विरुद्ध समझते हैं। वही वास्तविक शत्रु हैं। अतः आप उनसे सावधान रहें। अल्लाह उन्हें नाश करे! वे किधर फेरे जा रहे हैं!
Roman Urdu (Maududi)Inhein dekho to inke jussey(jism/bodies) tumhein badey shaandaar nazar aayein bolein to tum inki batein sunte reh jao, magar asal mein yeh goya lakhdi ke kunde hain(beams of timber) jo deewar ke saath chun kar rakh diye gaye hon. Har zoar ki aawaz ko yeh apne khilaf samajhte hain. Yeh pakke dushman hain insey bachh kar raho. Allah ki maar inpar yeh kidhar ultey phiraye ja rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jab aap enhen dekh len to inn kay jism aap ko khushnuma maloom hon yeh jab baaten kerney lagen to aap inn ki baaton per (apna) kaan lagayen goya kay yeh lakriyan hain deewar kay shaharay lagee huin her (sakht) aawaz ko apney khilaf samajhtay hain yehi haqeeqi dushman hain inn say bacho Allah enhen ghaarat keray kahan say phiray jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)इन्हें देखो तो इनके जूस(जिस्म/निकायों) तुम्हें बड़े शानदार नज़र आएं बोलें तो तुम इनकी बातें सुनते रह जाओ, मगर असल में ये गोया लाखदी के कुंडे हैं (लकड़ी के बीम) जो दीवार के साथ चुन कर रख दिए गए माननीय। हर ज़ोर की आवाज़ को ये अपने ख़िलाफ समझते हैं। ये पक्के दुश्मन हैं इनसे बच कर रहो। अल्लाह की मार इनपर ये किधर उलटे फिराए जा रहे हैं
عَرَبِيوَإِذا قيلَ لَهُم تَعالَوا يَستَغفِر لَكُم رَسولُ اللَّهِ لَوَّوا رُءوسَهُم وَرَأَيتَهُم يَصُدّونَ وَهُم مُستَكبِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब उनसे कहा जाए : आओ, अल्लाह के रसूल तुम्हारे लिए क्षमा की प्रार्थना करें, तो वे अपने सिर फेर लेते हैं। तथा आप उन्हें देखेंगे कि वे अभिमान करते हुए विमुख हो जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab inse kaha jata hai ke aao taa-ke Allah ka Rasool tumhare liye magfirat ki dua karey, To sar jhatakte hain aur tum dekhte ho ke woh bade ghamand ke saath aane se rukte hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab inn say kaha jata hai aao tumharay liye Allah kay rasool istaghfaar keren to apney sir matkatay hain aur aap dekhen gay kay woh takabbur kertay huye ruk jatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जब इनसे कहा जाता है के आओ ता-के अल्लाह का रसूल तुम्हारे लिए मगफिरत की दुआ करे, तो सर झटकते हैं और तुम देखते हो के वो बड़े घमंड के साथ आने से रुकते हैं
عَرَبِيسَواءٌ عَلَيهِم أَستَغفَرتَ لَهُم أَم لَم تَستَغفِر لَهُم لَن يَغفِرَ اللَّهُ لَهُم ۚ إِنَّ اللَّهَ لا يَهدِي القَومَ الفاسِقينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) उनके लिए बराबर है, चाहे आप उनके लिए क्षमा की प्रार्थना करें या क्षमा की प्रार्थना न करें। अल्लाह उन्हें कदापि क्षमा नहीं करेगा। निःसंदेह अल्लाह अवज्ञाकारियों को सीधा मार्ग नहीं दिखाता।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, tum chahe inke liye magfirat ki dua karo ya na karo, inke liye yaksan hai , Allah hargiz inhein maaf nahin karega. Allah faasik logon(transgressing folk) ko hargiz hidayat nahin deta
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kay haq mein aap ka istaghfaar kerna aur na kerna dono barabar hai Allah Taalaa enhen hergiz na bakshay ga be-shak Allah Taalaa (aisay) na farmaan logon ko hidayat nahi deta
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, तुम चाहे इनके लिए मगफिरत की दुआ करो या ना करो, इनके लिए यक्सान है, अल्लाह हरगिज़ इन्हें माफ़ नहीं करेगा। अल्लाह फासिक लोगों (लोक का उल्लंघन करने वाले) को हरगिज हिदायत नहीं देता
عَرَبِيهُمُ الَّذينَ يَقولونَ لا تُنفِقوا عَلىٰ مَن عِندَ رَسولِ اللَّهِ حَتّىٰ يَنفَضّوا ۗ وَلِلَّهِ خَزائِنُ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَلٰكِنَّ المُنافِقينَ لا يَفقَهونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ये वही लोग हैं, जो कहते हैं कि उन लोगों पर खर्च न करो, जो अल्लाह के रसूल के पास हैं, यहाँ तक कि वे तितर-बितर हो जाएँ। हालाँकि आकाशों और धरती के खज़ाने अल्लाह ही के हैं। परंतु मुनाफ़िक़ नहीं समझते।
Roman Urdu (Maududi)Yeh wahi log hain jo kehte hain ke Rasool ke saathiyon par kharch karna bandh kardo taa-ke yeh muntashir ho jayein. Halaanke zameen aur aasmaano ke khazano ka maalik Allah hi hai, magar yeh munafik samajhte nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi woh log hain jo kehtay hain kay jo log rasool-lullah kay pass hain unn per kuch kharach na kero yahan tak kay woh idhar udhar ho jayen aur aasman-o-zamin kay kul khazaney Allah Taalaa ki milkiyat hain lekin yeh munfiq bey samajh hain
Devnagri Urdu (Maududi)ये वही लोग हैं जो कहते हैं कि रसूल के साथियों पर खर्च करना बंद करदो ता-के ये मुंतशिर हो जाएं। हलाँके ज़मीन और आसमानों के खज़ानों का मालिक अल्लाह ही है, मगर ये मुनाफिक समझते नहीं हैं
عَرَبِييَقولونَ لَئِن رَجَعنا إِلَى المَدينَةِ لَيُخرِجَنَّ الأَعَزُّ مِنهَا الأَذَلَّ ۚ وَلِلَّهِ العِزَّةُ وَلِرَسولِهِ وَلِلمُؤمِنينَ وَلٰكِنَّ المُنافِقينَ لا يَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे कहते हैं : यदि हम मदीना वापस गए, तो जो सबसे अधिक सम्मान वाला है, वह वहाँ से तुच्छतर को निकाल बाहर करेगा। हालाँकि सम्मान तो केवल अल्लाह के लिए और उसके रसूल के लिए और ईमान वालों के लिए है। परंतु मुनाफ़िक़ नहीं जानते।
Roman Urdu (Maududi)Yeh kehte hain ke hum medina wapas pahunch jayein to jo izzat wala hai woh zaleel ko wahan se nikal bahar karega. Halaanke izzat to Allah aur uske Rasool aur momineen ke liye hai, magar yeh munafiq jante nahin hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kehtay hain kay agar hum abb lot ker madina jayen gay to izzat wala wahan say zillat walay ko nikal dey ga. Suno! Izzat to sirf Allah Taalaa kay liye aur uss kay rasool kay liye aur eman daaron kay liye hai lekin yeh munafiq jantay nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ये कहते हैं के हम मदीना वापस पहुँच जाएँ तो जो इज़्ज़त वाला है वो ज़लील को वहाँ से निकल बाहर करेगा। अल्लाह को हलांके इज्जत और उसके रसूल और मोमिनीन के लिए है, मगर ये मुनाफिक जानता नहीं है
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا لا تُلهِكُم أَموالُكُم وَلا أَولادُكُم عَن ذِكرِ اللَّهِ ۚ وَمَن يَفعَل ذٰلِكَ فَأُولٰئِكَ هُمُ الخاسِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! तुम्हारे धन तथा तुम्हारी संतानें तुम्हें अल्लाह की याद से गाफ़िल न कर दें। और जो ऐसा करे, तो वही लोग घाटा उठाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo imaan laye ho , tumhare maal aur tumhari auladein tumko Allah ki yaad se gaafil na kardein. Jo log aisa karein wahi khasare (nuqsan /loss) mein rehne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aey musalmano! Tumharay maal aur tumhari auladen tumhen Allah kay ziker say ghafil na ker den aur jo aisa keren woh baray hi ziyan kaar log hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम्हारे माल और तुम्हारी औलादें तुमको अल्लाह की याद से गाफिल ना करदें। जो लोग ऐसा करें वही खसरे (नुक्सान /नुकसान) में रहने वाले हैं
عَرَبِيوَأَنفِقوا مِن ما رَزَقناكُم مِن قَبلِ أَن يَأتِيَ أَحَدَكُمُ المَوتُ فَيَقولَ رَبِّ لَولا أَخَّرتَني إِلىٰ أَجَلٍ قَريبٍ فَأَصَّدَّقَ وَأَكُن مِنَ الصّالِحينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने तुम्हें जो कुछ दिया है, उसमें से खर्च करो, इससे पहले कि तुममें से किसी की मृत्यु आ जाए, फिर वह कहे : ऐ मेरे पालनहार! मुझे थोड़ी-सी मोहलत क्यों न दी कि मैं दान करता तथा सदाचारियों में से हो जाता।
Roman Urdu (Maududi)Jo rizq humne tumhein diya hai usmein se kharch karo qabl iske ke tum mein se kisi ki maut ka waqt aa jaye aur us waqt woh kahey "Aey mere Rubb, kyun na tu nay mujhey thodi si mahulat aur de di ke main sadaqa deta aur saleh logon mein shamil ho jata”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo kuch hum ney tumhen dey rakha hai uss mein say (humari raah mein) iss say pehaly kharach kero kay tum mein say kissi ko maut aajaye to kehney lagay aey meray perwerdigar! Mujhay to thori dare ki mohlat kiyon nahi deta? Kay mein sadqa keroon aur nek logon mein say ho jaon
Devnagri Urdu (Maududi)जो रिज़क हमने तुम्हें दिया है उसमें से खर्च करो क़बल इसके के तुम में से किसी की मौत का वक्त आ जाए और हमें वक्त वो कहे "ऐ मेरे रब, क्यों ना तू ना मुझे थोड़ी सी महौलत और दे दी के मुख्य सदका देता और साले लोगों में शामिल हो जाता”
عَرَبِيوَلَن يُؤَخِّرَ اللَّهُ نَفسًا إِذا جاءَ أَجَلُها ۚ وَاللَّهُ خَبيرٌ بِما تَعمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह किसी प्राणी को कदापि अवसर नहीं देगा, जब उसका निर्धारित समय आ गया। और अल्लाह उससे भली-भाँति अवगत है, जो कुछ तुम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Halanke jab kisi ki mahulat-e-amal puri hone ka waqt aa jata hai to Allah us ko hargiz mazeed mahulat nahin deta, aur jo kuch tum karte ho, Allah usse bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab kissi ka muqarrar waqt aajata hai phir ussay Allah Taalaa hergiz mohlat nahi deta aur jo kuch tum kertay ho uss say Allah Taalaa bakhoobi ba khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)हालंके जब किसी की महुलात-ए-अमल पूरी होने का वक्त आ जाता है तो अल्लाह हमें हरगिज़ मजीद महौलत नहीं देता, और जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उसे बाख़बर है
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Surah 63: Al-Munafiqun (The Hypocrites)

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Surah 63: Al-Munafiqun (The Hypocrites)

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Surah 63: Al-Munafiqun (The Hypocrites)

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Surah 63: Al-Munafiqun (The Hypocrites)

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Surah 63: Al-Munafiqun (The Hypocrites)

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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

Medinan🕐 Revelation #108📜 18 Verses🕮 Juz 1
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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِييُسَبِّحُ لِلَّهِ ما فِي السَّماواتِ وَما فِي الأَرضِ ۖ لَهُ المُلكُ وَلَهُ الحَمدُ ۖ وَهُوَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करती है प्रत्येक चीज़, जो आकाशों में है तथा जो धरती में है। उसी का राज्य है और उसी की सब प्रशंसा है तथा वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki tasbeeh kar rahi hai har woh cheez jo aasmano mein hai aur har woh cheez jo zameen mein hai usi ki baadshahi hai aur usi ke liye tareef hai aur woh har cheez par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tamam cheez jo aasmanon aur zamin mein hain Allah ki paki biyan kerti hain ussi ki saltanat hai aur ussi ki tareef hai aur woh her her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की तस्बीह कर रही है हर वह चीज जो आसमान में है और हर वह चीज जो जमीन में है उसकी बादशाही है और उसके लिए तारीफ है और वह हर चीज पर कादिर है
عَرَبِيهُوَ الَّذي خَلَقَكُم فَمِنكُم كافِرٌ وَمِنكُم مُؤمِنٌ ۚ وَاللَّهُ بِما تَعمَلونَ بَصيرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वही है जिसने तुम्हें पैदा किया। फिर तुममें से कोई काफ़िर है और तुममें से कोई ईमान वाला है। तथा तुम जो कुछ भी करते हो, अल्लाह उसे खूब देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi hai jisne tumko paida kiya, phir tum mein se koi kafir hai aur koi momin. Aur Allah woh sab kuch dekh raha hai jo tum karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney tumhen peda kiya hai so tum mein say baazay to kafir hain aur baaz eman walay hain aur jo kuch tum ker rahey ho Allah Taalaa khoob dekh raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही है जिसने तुमको पेदा किया, फिर तुम में से कोई काफिर है और कोई मोमिन। और अल्लाह वो सब कुछ देख रहा है जो तुम करते हो
عَرَبِيخَلَقَ السَّماواتِ وَالأَرضَ بِالحَقِّ وَصَوَّرَكُم فَأَحسَنَ صُوَرَكُم ۖ وَإِلَيهِ المَصيرُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने आकाशों तथा धरती को सत्य के साथ पैदा किया। तथा उसने तुम्हारे रूप बनाए, तो तुम्हारे रूप अच्छे बनाए। और उसी की ओर लौटकर जाना है।
Roman Urdu (Maududi)Usne zameen aur aasmano ko barhaqq paida kiya hai, aur tumhari surat banayi aur badi umdah (excellent) banayi hai, aur usi ki taraf aakhir-e-kaar tumhein palatna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ussi ney aasmanon ko aur zamin ko adal-o-himat say peda kiya ussi ney tumhari sooraten banaeen aur boht achi banaeen aur ussi ki taraf lotna hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसने ज़मीन और आसमान को बरहक़्क अदा किया है, और तुम्हारी सूरत बनाई और बड़ी उम्मीद (उत्कृष्ट) बनाई है, और उसकी तरफ आख़िर-ए-कार तुम्हें पलटना है
عَرَبِييَعلَمُ ما فِي السَّماواتِ وَالأَرضِ وَيَعلَمُ ما تُسِرّونَ وَما تُعلِنونَ ۚ وَاللَّهُ عَليمٌ بِذاتِ الصُّدورِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह जानता है जो कुछ आकाशों और धरती में है। तथा वह जानता है जो कुछ तुम छिपाते हो और जो कुछ तुम प्रकट करते हो। और अल्लाह दिलों के भेद को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Zameen aur aasmano ki har cheez ka usey ilm hai jo kuch tum chupatey ho aur jo kuch tum zaahir karte ho sab us ko maloom hai. Aur woh dilon ka haal tak jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh aasman-o-zamin ki her her cheez ka ilm rakhta hai aur jo kuch tum chupao aur jo zahir kero woh (sab ko) janta hai. Allah to seenon ki baaton tak ko jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ज़मीन और आसमानो की हर चीज़ का इस्तेमाल इल्म है जो कुछ तुम छुपाते हो और जो कुछ तुम जाहिर करते हो सब हमें मालूम है। और वो दिलों का हाल तक जानता है
عَرَبِيأَلَم يَأتِكُم نَبَأُ الَّذينَ كَفَروا مِن قَبلُ فَذاقوا وَبالَ أَمرِهِم وَلَهُم عَذابٌ أَليمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम्हारे पास उन लोगों की खबर नहीं आई, जिन्होंने इससे पहले कुफ़्र किया। फिर उन्होंने अपने कर्म का दुष्परिणाम चखा? और उनके लिए दुःखदायी यातना है।
Roman Urdu (Maududi)kya tumhein un logon ki koi khabar nahi pahunchi jinhon ne issey pehle kufar kiya aur phir apni shamat-e-aamaal (evil consequence) ka maza chakkh liya? aur aagey unke liye ek dardnaak azaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tumharay pass iss say pehlay kay kafiron ki khabar nahi phonchi? Jinhon ney apney aemaal ka wabaal chakh liya aur jin kay liye dard naak azab hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम्हें उन लोगों की कोई खबर नहीं पहुंची जिन्हों ने इसे पहले कुफर किया और फिर अपनी शामत-ए-आमाल (बुरा नतीजा) का मजा चख लिया? और आगे उनके लिए एक दर्दनाक अज़ाब है
عَرَبِيذٰلِكَ بِأَنَّهُ كانَت تَأتيهِم رُسُلُهُم بِالبَيِّناتِ فَقالوا أَبَشَرٌ يَهدونَنا فَكَفَروا وَتَوَلَّوا ۚ وَاستَغنَى اللَّهُ ۚ وَاللَّهُ غَنِيٌّ حَميدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह इस कारण कि उनके पास उनके रसूल खुली निशानियाँ लेकर आते थे। तो उन्होंने कहा : क्या मनुष्य हमें मार्गदर्शन करेंगे? चुनाँचे उन्होंने इनकार किया और मुँह फेर लिया। और अल्लाह ने परवाह न की तथा अल्लाह बेनियाज़, सर्व प्रशंसित है।
Roman Urdu (Maududi)Is anjaam ke mustahiq woh is liye huey ke unke paas unke Rasool khuli khuli daleelein (clear signs) aur nishaniyan lekar aate rahey, magar unhon ne kaha" kya Insan humein hadayat deinge ?" Is tarah unhon ne maanne se inkaar kardiya aur mooh pheir liya. Tab Allah bhi unsey be-parwa ho gaya aur Allah to hai hi be niyaz aur apni zaat mein aap Mahmood (Praiseworthy)
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh iss liey kay unn kay pass unn kay rasool wazeh dalaeel ley ker aaye to unhon ney keh diya kay kiya insan humari rehnumaee keray ga? Pus inkar ker diya aur mun pher liya aur Allah ney bhi bey niazi ki aur Allah to hi boht bey niaz sab khoobiyon wala
Devnagri Urdu (Maududi)क्या अंजाम के मुस्तहिक वो इस लिए हुए हैं उनके पास उनके रसूल खुली खुली दलीलें (स्पष्ट संकेत) और निशानियां लेकर आते रहे, मगर उनहों ने कहा" क्या इंसान हमें हदायत देंगे?" इस तरह उनहों ने मन्ने से इंकार कर दिया और मुंह फिर ले लिया। तब अल्लाह भी उनसे बे-परवा हो गया और अल्लाह तो है ही बे नियाज़ और अपनी ज़ात में आप महमूद (प्रशंसनीय)
عَرَبِيزَعَمَ الَّذينَ كَفَروا أَن لَن يُبعَثوا ۚ قُل بَلىٰ وَرَبّي لَتُبعَثُنَّ ثُمَّ لَتُنَبَّؤُنَّ بِما عَمِلتُم ۚ وَذٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسيرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)काफ़िरों ने समझ रखा है कि वे कदापि पुनर्जीवित नहीं किए जाएँगे। आप कह दें : क्यों नहीं? मेरे पालनहार की क़सम! निश्चय तुम अवश्य पुनर्जीवित किए जाओगे। फिर निश्चय तुम्हें अवश्य बताया जाएगा कि तुमने (संसार में) क्या किया है तथा यह अल्लाह के लिए अति सरल है।
Roman Urdu (Maududi)Munkireen ne badey dawey se kaha hai ke woh marne ke baad hargiz dobara na uthaye jayenge. Insey kaho" nahin, mere Rubb ki kasam tum zaroor uthaye jaogey, phir zaroor tumhein bataya jayega ke tumne (duniya mein) kya kuch kiya hai aur aisa karna Allah ke liye bahut aasaan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn kafiron ney khayal kiya hai kay doobara zinda na kiye jayen gay aap key dijiye kay kiyon nahi Allah ki qasam! Tum zaroor doobara uthaye jao gay phir jo tum ney kiya hai uss ki khabar diye jaogay aur Allah per yeh bilkul aasan hai
Devnagri Urdu (Maududi)मुनकिरीन ने बदले दावे से कहा है कि वो मरने के बाद हरगिज़ दोबारा न उठेंगे। इनसे कहो" नहीं, मेरे रब की कसम तुम जरूर उठोगे, फिर जरूर तुम्हें बता देंगे (दुनिया में) क्या कुछ किया है और ऐसा करना अल्लाह के लिए बहुत आसान है
عَرَبِيفَآمِنوا بِاللَّهِ وَرَسولِهِ وَالنّورِ الَّذي أَنزَلنا ۚ وَاللَّهُ بِما تَعمَلونَ خَبيرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः तुम ईमान लाओ अल्लाह तथा उसके रसूल पर एवं उस नूर (प्रकाश) पर, जिसे हमने उतारा है। तथा अल्लाह, जो तुम करते हो, उससे भली-भाँति अवगत है।
Roman Urdu (Maududi)Pas iman lao Allah par, aur uske Rasool par, aur us roshni par jo humne nazil ki hai. Jo kuch tum karte ho Allah usse bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)So tum Allah per aur uss kay rasool per aur uss noor per jissay hum ney nazil farmaya hai eman laao aur Allah Taalaa tumharay her amal per ba-khabar hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास ईमान लाओ अल्लाह पर, और उसके रसूल पर, और हम रोशनी पर जो हमने नाज़िल की है। जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बख़बर है
عَرَبِييَومَ يَجمَعُكُم لِيَومِ الجَمعِ ۖ ذٰلِكَ يَومُ التَّغابُنِ ۗ وَمَن يُؤمِن بِاللَّهِ وَيَعمَل صالِحًا يُكَفِّر عَنهُ سَيِّئَاتِهِ وَيُدخِلهُ جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها أَبَدًا ۚ ذٰلِكَ الفَوزُ العَظيمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन वह तुम्हें, एकत्र होने के दिन एकत्रित करेगा, वही दिन है हार जीत का। और जो अल्लाह पर ईमान लाए और सत्कर्म करे, अल्लाह उसकी बुराइयों को उससे दूर कर देगा और उसे ऐसी जन्नतों में दाख़िल करेगा, जिनके नीचे से नहरें बहतीं होंगी। वे वहाँ हमेशा रहेंगे। यही बड़ी सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)(Iska pata tumhein us roz chal jayega ) jab ijtima (will assemble you )ke din woh tum sabko ikattha karega. Woh din hoga ek dusre ke muqable mein logon ki haar jeet ka. Jo Allah par iman laya hai aur neik amal karta hai, Allah uske gunah jhaad dega aur usey aisi jannaton mein daakhil karega jinke nichey nehrein behti hongi. Yeh log hamesha hamesha inmein rahenge. Yahi badi kamiyabi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din tum sab ko uss jama honey kay din jama keray ga wohi din hai haar jeet ka aur jo shaks Allah per eman laa ker nek amal keray Allah uss say uss ki buraiyan door ker dey ga aur ussay jannaton mein dakhil keray ga jin kay neechay nehren beh rahi hain jin mein woh hamesha hamesha rahen gay. Yehi boht bari kaamyabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)(इसका पता तुम्हें रोज़ चल जाएगा) जब इज्तिमा (तुम्हें इकट्ठा करेगा) के दिन वो तुम सबको इकठ्ठा करेगा। वो दिन होगा एक दूसरे के मुकाबले में लोगों की हार जीत का नेक अमल कर्ता है, अल्लाह उसे गुनाह झाड़ देगा और उसे ऐसी जन्नत में दाख़िल करेगा जिनके बारे में पता चलेगा। ये लोग हमेशा हमेशा इनमें रहेंगे। यहीं बड़ी कामयाबी है
عَرَبِيوَالَّذينَ كَفَروا وَكَذَّبوا بِآياتِنا أُولٰئِكَ أَصحابُ النّارِ خالِدينَ فيها ۖ وَبِئسَ المَصيرُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने कुफ़्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वही जहन्नम वाले हैं, जो उसमें हमेशा रहने वाले हैं। तथा वह बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jin logon ne kufr kiya hai aur hamari aayaat ko jhutlaya hai woh dozakh ke bashindey(inmates ) honge, jismein woh hamesha rahenge. Aur woh badhtareen thikana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin logon ney kufur kiya aur humari aayaton ko jhutlaya wohi (sab) jahannumi hain (jo) jahannum mein hamesha rahen gay woh boht bura thikana hai
Devnagri Urdu (Maududi)और जिन लोगों ने कुफ्र किया है और हमारी आयतों को झुटलाया है वो दोज़ख के कैदी होंगे, जिनमें वो हमेशा रहेंगे। और वो बख्तरीन ठिकाना है
عَرَبِيما أَصابَ مِن مُصيبَةٍ إِلّا بِإِذنِ اللَّهِ ۗ وَمَن يُؤمِن بِاللَّهِ يَهدِ قَلبَهُ ۚ وَاللَّهُ بِكُلِّ شَيءٍ عَليمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कोई भी विपत्ति नहीं पहुँची परंतु अल्लाह की अनुमति से। तथा जो अल्लाह पर ईमान लाए, वह उसके दिल को मार्गदर्शन प्रदान करता है। तथा अल्लाह प्रत्येक वस्तु को भली-भाँति जानने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Koi museebat kabhi nahi aati magar Allah ke izan(Allah’s leave) hi se aati hai. Jo shakhs Allah par iman rakhta ho Allah uske dil ko hidayat bakshta hai. Aur Allah ko har cheez ka ilm hai
Roman Urdu (Junagarhi)Koi museebat Allah ki ijazat kay baghair nahi phonch sakti jo Allah per eman laye Allah uss kay dil ko hidayat deta hai aur Allah her cheez ko khoob jannay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)कोई मुसीबत कभी नहीं आती मगर अल्लाह के इज़ान (अल्लाह की छुट्टी) ही से आती है। जो शख्स अल्लाह पर ईमान रखता है अल्लाह उसके दिल को हिदायत देता है। और अल्लाह को हर चीज़ का इल्म है
عَرَبِيوَأَطيعُوا اللَّهَ وَأَطيعُوا الرَّسولَ ۚ فَإِن تَوَلَّيتُم فَإِنَّما عَلىٰ رَسولِنَا البَلاغُ المُبينُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो। फिर यदि तुम विमुख हुए, तो हमारे रसूल का दायित्व केवल स्पष्ट रूप से पहुँचा देना है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki itaat karo aur Rasool ki itaat karo lekin agar tum itaat se mooh moadtey ho to hamarey Rasool par saaf saaf haqq pahuncha dene ke siwa koi zimmedari nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)(logo) Allah ka kehna mano aur rasool ka kehna mano. Pus agar tum aeyraaz kero to humaray rasool kay zimmay sirf saaf saaf phoncha dena hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की इताअत करो और रसूल की इताअत करो लेकिन अगर तुम इताअत से मुह मोड़ते हो तो हमारे रसूल पर सफ़ सफ़ हक़ पाहुंचा देने के सिवा कोई ज़िम्मेदारी नहीं है
عَرَبِياللَّهُ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَليَتَوَكَّلِ المُؤمِنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह वह है, जिसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं है। अतः, ईमान वालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।
Roman Urdu (Maududi)Allah woh hai jiske siwa koi khuda nahin, lihaza iman laney walon ko Allah hi par bharosa rakhna chahiye
Roman Urdu (Junagarhi)Allah kay siwa koi mabood-e-bar haq nahi aur mominon ko Allah hi per tawakkal rakhna chahaiye
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह वो है जिसके सिवा कोई खुदा नहीं, लिहाज़ा ईमान लाने वालों को अल्लाह हाय पर भरोसा रखना चाहिए
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا إِنَّ مِن أَزواجِكُم وَأَولادِكُم عَدُوًّا لَكُم فَاحذَروهُم ۚ وَإِن تَعفوا وَتَصفَحوا وَتَغفِروا فَإِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! निःसंदेह तुम्हारी पत्नियों और तुम्हारी संतान में से कुछ तुम्हारे शत्रु हैं। अतः उनसे सावधान रहो। और यदि तुम माफ़ करो तथा दरगुज़र करो और क्षमा कर दो, तो निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, tumhari biwiyon aur tumhari aulad mein se baaz tumhare dushman hain, Inse hoshiyar raho. Aur agar tum Affu-o-darguzar(forgive and overlook) se kaam lo aur maaf kardo to Allah gafoor-o-Raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tumhari baaz biwiyan aur baaz bachay tumharay dushman hain pus inn say hoshiyaar rehna aur agar tum moaf kerdo aur dar-guzar ker jao aur bakhsh do to Allah Taalaa baskshney wala meharban hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारी बीवीयां और तुम्हारी औलाद में से बाज़ तुम्हारे दुश्मन हैं, इनसे होशियार रहो। और अगर तुम अफ्फु-ओ-दरगुज़ार (माफ़ कर दो और नज़रअंदाज) से काम लो और माफ़ कर दो अल्लाह गफूर-ओ-रहीम है
عَرَبِيإِنَّما أَموالُكُم وَأَولادُكُم فِتنَةٌ ۚ وَاللَّهُ عِندَهُ أَجرٌ عَظيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुम्हारे धन और तुम्हारी संतान एक परीक्षा हैं तथा अल्लाह ही के पास बड़ा प्रतिफल है।
Roman Urdu (Maududi)Tumhare maal aur tumhari aulad to ek aazmaish hai, aur Allah hi hai jiske paas bada ajar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tumharay maal aur aulad to sirasir tumahri aazmaeesh hain aur boht bara ajar Allah kay pass hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तो एक आजमाइश है, और अल्लाह ही है जिसके पास बड़ा अजर है
عَرَبِيفَاتَّقُوا اللَّهَ مَا استَطَعتُم وَاسمَعوا وَأَطيعوا وَأَنفِقوا خَيرًا لِأَنفُسِكُم ۗ وَمَن يوقَ شُحَّ نَفسِهِ فَأُولٰئِكَ هُمُ المُفلِحونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः अल्लाह से डरते रहो, जितना तुमसे हो सके, तथा सुनो और आज्ञापालन करो और खर्च करो। यह तुम्हारे लिए उत्तम है। तथा जो अपने मन की कंजूसी (लालच) से बचा लिया जाए, तो वही लोग सफल होने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)lihaza jahan tak tumhare bas mein ho Allah se darte raho, aur suno aur itaat karo, aur apne maal kharch karo, yeh tumhare hi liye behtar hai. Jo apne dil ki tanggi se mehfooz reh gaye bas wahi falaah paney waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jahan tak tum say ho sakay Allah say dartay raho aur suntay aur maantay chalay jao aur Allah ki raah mein kheyraat kertay raho jo tumhara liye behtar hai aur jo shaks apney nafs ki hirss say mehfooz rakha jaye wohi kaamyab hai
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाजा जहां तक ​​तुम्हारे बस में हो अल्लाह से डरते रहो, और सुनो और इताअत करो, और अपने माल खर्च करो, ये तुम्हारे ही लिए बेहतर है. जो अपने दिल की तंगी से महफ़ूज़ रह गए बस वही फलाह पाने वाले हैं
عَرَبِيإِن تُقرِضُوا اللَّهَ قَرضًا حَسَنًا يُضاعِفهُ لَكُم وَيَغفِر لَكُم ۚ وَاللَّهُ شَكورٌ حَليمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यदि तुम अल्लाह को उत्तम ऋण दोगो, तो वह उसे तुम्हारे लिए कई गुना कर देगा और तुम्हें क्षमा कर देगा और अल्लाह बड़ा गुणग्राही, अपार सहनशील है।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum Allah ko qarz-e-hasan do to woh tumhein kai guna (several fold) badha kar dega aur tumhare kasooron se dar guzar farmayega. Allah bada qadardaan aur burdbar (Most Forbearing) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar tum Allah ko acha qarz do gay (yani uss ki raah mein kharach kero gay) to woh ussay tumharay liye barhata jaye ga aur tumharay gunah bhi moaf farma dey ga Allah bara qadar daan bara burd baar hai
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम अल्लाह को क़र्ज़-ए-हसन दो तो वो तुम्हें कई गुना (कई गुना) बढ़ा कर देगा और तुम्हारे कसूरों से दर गुजर फरमाएगा। अल्लाह बडा क़दरदान और बोझबर (सबसे सहनशील) है
عَرَبِيعالِمُ الغَيبِ وَالشَّهادَةِ العَزيزُ الحَكيمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह हर परोक्ष और प्रत्यक्ष को जानने वाला, सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Haazir aur gayab har cheez ko jaanta hai, zabardast (mighty) aur daana(Most Wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh posheeda aur zahir ka jannay wala hai zabardast hikmat wala (hai)
Devnagri Urdu (Maududi)हाज़िर और गायब हर चीज़ को जानता है, ज़बरदस्त (शक्तिशाली) और दाना (सबसे बुद्धिमान) है
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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

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Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses)

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Surah 65: At-Talaq (Divorce)

Medinan🕐 Revelation #99📜 12 Verses🕮 Juz 1
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Surah 65: At-Talaq (Divorce)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِييا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِذا طَلَّقتُمُ النِّساءَ فَطَلِّقوهُنَّ لِعِدَّتِهِنَّ وَأَحصُوا العِدَّةَ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ رَبَّكُم ۖ لا تُخرِجوهُنَّ مِن بُيوتِهِنَّ وَلا يَخرُجنَ إِلّا أَن يَأتينَ بِفاحِشَةٍ مُبَيِّنَةٍ ۚ وَتِلكَ حُدودُ اللَّهِ ۚ وَمَن يَتَعَدَّ حُدودَ اللَّهِ فَقَد ظَلَمَ نَفسَهُ ۚ لا تَدري لَعَلَّ اللَّهَ يُحدِثُ بَعدَ ذٰلِكَ أَمرًا
हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी! जब तुम अपनी पत्नियों को तलाक़ दो, तो उन्हें उनकी 'इद्दत' के समय तलाक़ दो, और 'इद्दत' की गिनती करो। तथा अल्लाह से डरो, जो तुम्हारा पालनहार है। तुम उन्हें उनके घरों से न निकालो और न वे स्वयं निकलें, परंतु यह कि वे कोई खुली बुराई कर जाएँ। तथा ये अल्लाह की सीमाएँ हैं और जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करेगा, तो निश्चय उसने अपने ऊपर अत्याचार किया। तुम नहीं जानते, शायद अल्लाह उसके बाद कोई नई बात पैदा कर दे।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, jab tumlog auraton ko talaq do to unhein unki iddat (waiting-period) ke liye talaq diya karo aur iddat ke zamane ka theek theek shumar karo, aur Allah se daro jo tumhara Rubb hai (zamana-e-iddat mein) na tum unhein unke gharon se nikalo aur na woh khud nikle, illa yeh ke woh kisi sareeh burayi ki murtakib ho(manifestly evil deed). Yeh Allah ki muqarrar karda hadein hain, aur jo koi Allah ki hadon (bounds/limits) se tajauz karega woh apne upar khud zulm karega. Tum nahin jaante shayad iske baad Allah (muwafikat/reconciliation ki) koi surat paida karde
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi! (apni ummat say kaho kay) jab tum apni biwiyon ko tallaq dena chahao to unn ki iddat (kay dino kay aaghaaz) mein unhen tallaq do aur iddat ka hisab rakho aur Allah say jo tumhara perwerdigar hai dartay raho na tum enhen inn kay gharon say nikalo aur na woh (khud) niklen haan yeh aur baat hai kay woh khuli buraee ker bethen yeh Allah ki muqarrar kerda hadden hain jo shaks Allah ki haddon say aagay barh jaye uss ney yaqeenan apney upper zulm kiya tum nahi jantay shayad iss kay baad Allah Taalaa koi naee baat peda ker dey
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, जब तुम लोग औरतों को तलाक दो तो उनकी उनकी इद्दत (प्रतीक्षा अवधि) के लिए तलाक दिया करो और इद्दत के जमाने का ठीक ठीक शुरू करो, और अल्लाह से डरो जो तुम्हारा रब है (जमाना-ए-इद्दत में) ना तुम उन्हें उनके घरों से निकालो और ना वो खुद निकले, इल्ला ये के वो कोई सारी बुराई की मुर्तकिब हो। ये अल्लाह की मुकर्रर करदा हदें हैं, और जो कोई अल्लाह की हदों (सीमाओं/सीमाओं) से ताजुज़ करेगा वो अपने ऊपर खुद ज़ुल्म करेगा। तुम नहीं जानते शायद इसके बाद अल्लाह (मुवाफिकत/सुलह की) कोई सूरत अदा करदे
عَرَبِيفَإِذا بَلَغنَ أَجَلَهُنَّ فَأَمسِكوهُنَّ بِمَعروفٍ أَو فارِقوهُنَّ بِمَعروفٍ وَأَشهِدوا ذَوَي عَدلٍ مِنكُم وَأَقيمُوا الشَّهادَةَ لِلَّهِ ۚ ذٰلِكُم يوعَظُ بِهِ مَن كانَ يُؤمِنُ بِاللَّهِ وَاليَومِ الآخِرِ ۚ وَمَن يَتَّقِ اللَّهَ يَجعَل لَهُ مَخرَجًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वे अपने निर्धारित समय को पहुँचने लगें, तो उन्हें अच्छे ढंग से रोक लो अथवा अच्छे ढंग से उन्हें अलग कर दो। और अपने बीच से दो न्यायवान् व्यक्तियों को गवाह बना लो। और अल्लाह के लिए ठीक-ठीक गवाही दो। इस (हुक्म) की उसे नसीहत की जाती है, जो अल्लाह तथा अंतिम दिवस पर ईमान रखता है। और जो अल्लाह से डरेगा, वह उसके लिए निकलने का कोई रास्ता बना देगा।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab woh apni (iddat ki) muddat ke khaatmay par pahunchey to ya unhein bhale tarike se (apne nikah mein ) rok rakkho , ya bhale tarike par unse juda ho jao, aur do aisey aadmiyon ko gawah bana lo jo tum mein se sahib-e-adal hon, aur (aey gawah banne walon)gawahi theek theek Allah ke liye ada karo. Yeh baatein hain jinki tum logon ko nasihat ki jati hai, har us shaks ko jo Allah aur aakhirat ke din par iman rakhta ho. Jo koi Allah se darte huey kaam karega Allah uske liye mushkilat se nikalne ka koi rasta paida kardega
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab yen aurten apni iddat poori kerney kay qarib phonch jayen to unhen ya to qaeeday kay mutabiq apney nikkah mein rehney do ya dastoor kay mutabiq enhen alag kerdo aur aapas mein do aadil shakson ko gawah kerlo aur Allah ki raza mandi kay liye theek theek gawahi do. Yehi hai woh jiss ki naseehat ussay ki jati hai jo Allah per aur qayamat kay din per eman rakhta ho aur jo shaks Allah say darta hai Allah uss kay liye chutkaray ki shakal nikal deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब वो अपनी (इद्दत की) मुद्दत के ख़तम पर पहुंचें तो हां उन्हें भले तारिके से (अपने निकाह में) रोक रखो, हां भले तारिके पर उनसे जुदा हो जाओ, और दो ऐसे आदमियों को गवाह बना लो जो तुम मेरे साथ साहिब-ए-अदल हो, और (ऐ गवाह बनने वालों) गवाही ठीक ठीक अल्लाह के लिए अदा करो। ये बातें हैं जिनकी तुम लोगों को हिदायत की जाती है, हर उस शक्स को जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता हो। जो कोई अल्लाह से डरता है काम करेगा अल्लाह उसके लिए मुश्किल से निकलेगा का कोई रास्ता अदा कर देगा
عَرَبِيوَيَرزُقهُ مِن حَيثُ لا يَحتَسِبُ ۚ وَمَن يَتَوَكَّل عَلَى اللَّهِ فَهُوَ حَسبُهُ ۚ إِنَّ اللَّهَ بالِغُ أَمرِهِ ۚ قَد جَعَلَ اللَّهُ لِكُلِّ شَيءٍ قَدرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उसे वहाँ से रोज़ी देगा जहाँ से वह गुमान नहीं करता। तथा जो व्यक्ति अल्लाह पर भरोसा करे, वह उसके लिए पर्याप्त है। निःसंदेह अल्लाह अपना कार्य पूरा करने वाला है। निश्चय अल्लाह ने प्रत्येक वस्तु के लिए एक नियत समय निर्धारित कर रखा है।
Roman Urdu (Maududi)Aur usey aise raaste se rizq dega jidhar uska guman(imagination) bhi na jata ho. Jo Allah par bharosa karey uske liye woh kafi hai. Allah apna kaam pura karke rehta hai, Allah ne har cheez ke liye ek taqdeer muqarrar kar rakkhi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ussay aisi jagah say rozi deta hai jiss ka ussay guman bhi na ho aur jo shaks Allah per tawakkal keray ga Allah ussay kafi hoga. Allah Taalaa apna kaam poora ker kay hi rahey ga. Allah Taalaa ney her cheez ka aik andaza muqarrar ker rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)और उसे ऐसे रास्ते से रिज्क देगा जिधर उसका गुमान (कल्पना) भी ना जाता हो। जो अल्लाह पर भरोसा करे उसके लिए वो काफी है। अल्लाह अपना काम पूरा करके रहता है, अल्लाह ने हर चीज़ के लिए एक तकदीर मुक़र्रर कर रखी है
عَرَبِيوَاللّائي يَئِسنَ مِنَ المَحيضِ مِن نِسائِكُم إِنِ ارتَبتُم فَعِدَّتُهُنَّ ثَلاثَةُ أَشهُرٍ وَاللّائي لَم يَحِضنَ ۚ وَأُولاتُ الأَحمالِ أَجَلُهُنَّ أَن يَضَعنَ حَملَهُنَّ ۚ وَمَن يَتَّقِ اللَّهَ يَجعَل لَهُ مِن أَمرِهِ يُسرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम्हारी स्त्रियों में से जो मासिक धर्म से निराश हो चुकी हैं, यदि तुम्हें संदेह हो, तो उनकी इद्दत तीन मास है और उनकी भी जिन्हें मासिक धर्म नहीं आया। और गर्भवती स्त्रियों की 'इद्दत' यह है कि वे अपना गर्भ जन दें। तथा जो अल्लाह से डरेगा, वह उसके लिए उसके काम में आसानी पैदा कर देगाा।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhari auraton mein se jo haiz(menstruation) se mayous ho chuki hon unke maamle mein agar tum logon ko koi shak lahik hai to ( tumhe maloom ho ke ) unki iddat teen mahiney hai aur yahi hukum unka hai jinhein abhi haiz na aaya ho.Aur haamila(pregnant) aurton ki iddat ki hadd yeh hai ke unka waze hamal(delivery) ho jaye. Jo shakhs Allah se darey uske maamle mein woh sahulat paida kar deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhari aurton mein say jo aurten hez say na umeed ho gaee hon agar tumhen shuba ho to unn ki muddat teen maheeney hai aur unn ki bhi jinhen hez aana shuroo hi na hua ho aur hamila aurton ki iddat unn kay waza-e-hamal hai aur jo shaks Allah Taalaa say daray ga Allah uss kay (her) kaam mein aasani ker dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हारी औरतों में से जो हैज़ (माहवारी) से ज्यादा हो चुकी है, उनके मामले में अगर तुम लोगों को कोई शक़ नहीं है तो (तुम्हें मालूम हो के) उनकी इद्दत तीन महीनी है और यही हुकुम उनका है जिन्हें अभी हैज़ ना आया हो। और हामिला (गर्भवती) औरतों की इद्दत की हद ये है के उनका वाज़े हमल (डिलीवरी) हो जाए। जो शख़्स अल्लाह से डरे उसके मामले में वो सहूलत पैदा कर देता है
عَرَبِيذٰلِكَ أَمرُ اللَّهِ أَنزَلَهُ إِلَيكُم ۚ وَمَن يَتَّقِ اللَّهَ يُكَفِّر عَنهُ سَيِّئَاتِهِ وَيُعظِم لَهُ أَجرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह अल्लाह का आदेश है, जिसे उसने तुम्हारी ओर उतारा है। अतः जो अल्लाह से डरेगा, वह उससे उसकी बुराइयाँ दूर कर देगा तथा उसे बड़ा प्रतिफल प्रदान करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Allah ka hukum hai jo usne tumhari taraf nazil kiya hai. Jo Allah se darega Allah uski buraiyon ko ussey door kardega aur usko bada ajar dega
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh Allah ka hukum hai jo uss ney tumhari taraf utara hai aur jo shaks Allah say daray ga Allah uss kay gunah mita dey ga aur ussay bara bhari ajar dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)ये अल्लाह का हुकुम है जो उसने तुम्हारी तरफ नाज़िल किया है। जो अल्लाह से डरेगा अल्लाह उसकी बुराइयों को उससे दूर कर देगा और उसको बड़ा अजर देगा
عَرَبِيأَسكِنوهُنَّ مِن حَيثُ سَكَنتُم مِن وُجدِكُم وَلا تُضارّوهُنَّ لِتُضَيِّقوا عَلَيهِنَّ ۚ وَإِن كُنَّ أُولاتِ حَملٍ فَأَنفِقوا عَلَيهِنَّ حَتّىٰ يَضَعنَ حَملَهُنَّ ۚ فَإِن أَرضَعنَ لَكُم فَآتوهُنَّ أُجورَهُنَّ ۖ وَأتَمِروا بَينَكُم بِمَعروفٍ ۖ وَإِن تَعاسَرتُم فَسَتُرضِعُ لَهُ أُخرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन्हें अपने सामर्थ्य के अनुसार वहाँ आवास दो, जहाँ तुम (स्वयं) रहते हो और उन्हें तंग करने के लिए उनको हानि न पहुँचाओ। और यदि वे गर्भवती हों, तो उनपर खर्च करो, यहाँ तक कि वे अपने गर्भ को जन दें। फिर यदि वे तुम्हारे लिए दूध पिलाएँ, तो उन्हें उनका पारिश्रमिक दो। और आपस में ठीक से विचार विमर्श कर लो। और यदि तुम दोनों में असहमति हो जाए, तो उसके लिए कोई दूसरी स्त्री दूध पिलाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Unko ( zamana-e-iddat mein ) usi jagah rakkho jahan tum rehtey ho, jaisi kuch bhi jagah tumhe muyassar ho, aur unhein tangg karne ke liye unko na satao. Aur agar woh haamila hon to unpar us waqt tak kharch karte raho jab tak unka waze hamal(delivered their burden) na ho jaye. Phir agar woh tumhare liye ( bachhey ko ) doodh pilayein to unki ujrat(recompense) unhein do, aur bhaley tareeqe se ( ujrat ka maamla) bahami guft-o-shaneed se tai karlo. Lekin agar tumne ( ujrat tai karne mein) ek dusrey ko tangg kiya to bachhey ko koi aur aurat doodh pila legi
Roman Urdu (Junagarhi)Tum apni taqat kay mutabiq jahan tum rehtay ho wahan inn (tallaq wali) aurton ko rakho aur enhen tang kerney kay liye takleef na phonchao aur agar woh hamal say hon to jab tak bacha peda ho lay enhen kharach detay raha kero phir agar tumharay kehney say wohi doodh pilayen to tum enehn inn ki ujrat dey do aur ba-hum munasib tor per mashwara ker liya kero aur agar tum aapas mein kash-ma-kash kero to iss kay kehney say koi aur doodh pilaye gi
Devnagri Urdu (Maududi)उनको (जमाना-ए-इद्दत में) उसकी जगह रख्खो जहां तुम रहते हो, जैसी कुछ भी जगह तुम्हें मुयस्सर हो, और उन्हें तंग करने के लिए उनको ना सताओ। और अगर वो हमें परेशान करते हैं तो हमें वक्त तक खर्च करते रहो जब तक उनका वजन हमल कर दिया जाए। फिर अगर वो तुम्हारे लिए (बच्चे को) दूध पिलाएं तो उनकी उजरत (बदला) उन्हें दो, और भले तरीक़े से (उजरत का मामला) बहामी गुफ़्त-ओ-शनीद से ताई कार्लो। लेकिन अगर तुमने (उजरत ताई करने में) एक दूसरे को तंग किया तो बच्चे को कोई और औरत दूध पिला लेगी
عَرَبِيلِيُنفِق ذو سَعَةٍ مِن سَعَتِهِ ۖ وَمَن قُدِرَ عَلَيهِ رِزقُهُ فَليُنفِق مِمّا آتاهُ اللَّهُ ۚ لا يُكَلِّفُ اللَّهُ نَفسًا إِلّا ما آتاها ۚ سَيَجعَلُ اللَّهُ بَعدَ عُسرٍ يُسرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)संपन्न व्यक्ति को चाहिए कि अपनी संपन्नता के अनुसार ख़र्च करे। और जिसकी रोज़ी तंग कर दी गई हो, वह उसी में से खर्च करे, जो अल्लाह ने उसे दिया है। अल्लाह किसी प्राणी पर उतना ही भार डालता है, जितना उसे प्रदान किया है। अल्लाह शीघ्र ही तंगी के बाद आसानी पैदा कर देगा।
Roman Urdu (Maududi)Khushaal aadmi apni khushaali ke mutabiq nafqa de, aur jisko rizq kam diya gaya ho woh usi maal mein se kharch karey jo Allah ne usey diya hai. Allah ne jisko jitna kuch diya hai ussey ziyada ka woh usey mukallaf(burden) nahi karta. Baeed(door) nahin ke Allah tangdasti ke baad farakh dasti bhi ataa farmade
Roman Urdu (Junagarhi)Kushadgi walay ko apni kushadgi say kharach kerna chahaiye aur jiss per uss kay rizq ki tangi ki gaee ho ussay chahaiye kay jo kuch Allah ney ussay dey rakha hai ussi mein say (apni hasb-e-heysiyat) dey kissi shaks ko Allah takleef nahi deta magar utni hi jitni taqat ussay dey rakhi hai Allah tangi kay baad aasani aur faraghat bhi ker dey ga
Devnagri Urdu (Maududi)खुशाल आदमी अपनी खुशहाली के मुताबिक नफ्का दे, और जिसका रिज़क काम दिया गया हो वो उसी माल में से खर्च करे जो अल्लाह ने उसे दिया है। अल्लाह ने जिसको जितना कुछ दिया है उसे ज़ियादा का वो उसे मुकल्लफ (बोझ) नहीं देता। बैद (दरवाजा) नहीं के अल्लाह तंगदस्ती के बाद फरख दस्ती भी अता फरमादे
عَرَبِيوَكَأَيِّن مِن قَريَةٍ عَتَت عَن أَمرِ رَبِّها وَرُسُلِهِ فَحاسَبناها حِسابًا شَديدًا وَعَذَّبناها عَذابًا نُكرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कितनी ही बस्तियाँ हैं, जिन्होंने अपने पालनहार और उसके रसूलों के आदेश से सरकशी की, तो हमने उनका कठोर हिसाब लिया और उन्हें बुरी यातना दी।
Roman Urdu (Maududi)Kitni hi bastiyan hain jinhon ne apne Rubb aur uske Rasoolon ke hukum se sartabi (rebel) ki to humne unsey sakht muhasiba kiya aur unko buri tarhaan saza di
Roman Urdu (Junagarhi)Aur boht si basti walon ney apney rab kay hukum say aur uss kay rasoolon say sir taabi ki aur hum ney bhi unn say sakht hisab kiya aur unhen azab diya unn dekha (sakht) azab
Devnagri Urdu (Maududi)कितनी ही बस्तियां हैं जिन्हों ने अपने रब और उसके रसूलों के हुकुम से सरताबी (विद्रोही) की तो हमने उनसे कहा, मुहासिबा किया और उनको बुरी तरह सजा दी
عَرَبِيفَذاقَت وَبالَ أَمرِها وَكانَ عاقِبَةُ أَمرِها خُسرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो उन्होंने अपने किए का दुष्परिणाम चख लिया और उनके कार्य का परिणाम घाटा ही रहा।
Roman Urdu (Maududi)Unhon ne apne kiya ka maza chakkh liya aur unka anjaam-e-kaar ghaata hi ghaata(utter loss) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus unhon ney apney kartoot ka maza chakh liya aur anjam kaar unn ka khasara hi hua
Devnagri Urdu (Maududi)उनहों ने अपने किया का मजा चख लिया और उनका अंजाम-ए-कार घाटा हाय घाटा (पूरी तरह से नुकसान) है
عَرَبِيأَعَدَّ اللَّهُ لَهُم عَذابًا شَديدًا ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ يا أُولِي الأَلبابِ الَّذينَ آمَنوا ۚ قَد أَنزَلَ اللَّهُ إِلَيكُم ذِكرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने उनके लिए भीषण यातना तैयार कर रखी है। अतः, ऐ समझ वालो, जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो! निश्चय अल्लाह ने तुम्हारी ओर महान उपदेश उतारा है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne ( aakhirat mein ) unke liye sakht azaab muhaiyya kar rakha hai. Pas Allah se daro aey sahib-e-aqal logon jo imaan laaye ho. Allah ne tumhari taraf ek naseehat nazil kardi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unn kay liye Allah Taalaa ney sakht azab tayyar ker rakha hai pus Allah say daro aey aqal mand eman walo. Yaqeenan Allah ney tumhari taraf naseehar utaar di hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने (आखिरत में) उनके लिए सिर्फ अजब मुहैय्या कर रखा है। पस अल्लाह से डरो ऐ साहिब-ए-अक़ल लोग जो ईमान लाए हो। अल्लाह ने तुम्हारी तरफ एक हिदायत नाजिल कर दी है
عَرَبِيرَسولًا يَتلو عَلَيكُم آياتِ اللَّهِ مُبَيِّناتٍ لِيُخرِجَ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ مِنَ الظُّلُماتِ إِلَى النّورِ ۚ وَمَن يُؤمِن بِاللَّهِ وَيَعمَل صالِحًا يُدخِلهُ جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها أَبَدًا ۖ قَد أَحسَنَ اللَّهُ لَهُ رِزقًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो ऐसा रसूल है कि तुम्हारे सामने अल्लाह की (सत्य को) स्पष्ट करने वाली आयतें पढ़कर सुनाता हैं, ताकि वह उन लोगों को, जो ईमान लाए तथा उन्होंने अच्छे कार्य किए, अँधेरों से निकाल कर प्रकाश की ओर ले आए। और जो अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य करे, वह उसे ऐसी जन्नतों में दाख़िल करेगा, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। वे उनमें हमेशा रहने वाले हैं। अल्लाह ने उसके लिए उत्तम जीविका तैयार कर रखी है।
Roman Urdu (Maududi)Ek aisa rasool jo tumko Allah ki saaf saaf hadaayat deney wali aayaat sunataa hai taa-ke imaan laane walon aur neik amal karne walon ko tarikiyon (darkness) se nikaal kar roshni mein le aaye. Jo koi Allah par imaan laaye aur neik amal karey Allah usey aisi jannaton mein daakhil karega jinke nichey nehrein behti hongi. Yeh log inmein hamesha hamesha rahenge. Allah ne aisey shakhs ke liye behtareen rizq rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)(yani) rasool jo tumhen Allah kay saaf saaf ehkaam parh ker sunata hai takay unn logon ko jo eman layen aur nek amal keren woh tareekiyon say roshni ki taraf ley aaye aur jo shaks Allah per eman laye aur nek amal keray Allah ussay aisi jannaton mein dakhil keray ga jiss kay neechay nehren jari hain jin mein yeh hamesha hamesha rahen gay. Be-shak Allah ney ussay behtareen rozi dey rakhi hai
Devnagri Urdu (Maududi)एक ऐसा रसूल जो तुमको अल्लाह की साफ साफ हदायत देने वाली आयत सुनाता है ता-के ईमान लाने वालों और नेक अमल करने वालों को तारिकियों (अंधेरे) से निकाल कर रोशनी में ले आए। जो कोई अल्लाह पर ईमान लाए और नेक अमल करे अल्लाह उसे ऐसी जन्नत में दाख़िल करेगा जिनके बारे में पता चलेगा। ये लोग इनमें हमेशा हमेशा रहेंगे। अल्लाह ने ऐसे शख़्स के लिए बेहतरीन रिज़क रक्खा है
عَرَبِياللَّهُ الَّذي خَلَقَ سَبعَ سَماواتٍ وَمِنَ الأَرضِ مِثلَهُنَّ يَتَنَزَّلُ الأَمرُ بَينَهُنَّ لِتَعلَموا أَنَّ اللَّهَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ وَأَنَّ اللَّهَ قَد أَحاطَ بِكُلِّ شَيءٍ عِلمًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ही है, जिसने सात आकाश बनाए तथा धरती से भी उन्हीं के समान। उनके बीच आदेश उतरता है, ताकि तुम जान लो कि अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है और यह कि अल्लाह ने निश्चय प्रत्येक वस्तु को अपने ज्ञान के साथ घेर रखा है।
Roman Urdu (Maududi)Allah woh hai jisne saat(seven) aasman banaye aur zameen ki qisam se bhi unhi ke manind (like them). Unke darmiyan hukum nazil hota rehta hai. (yeh baat tumhein isliye batayi jaa rahi hai ) taakey tum jaan lo ke Allah har cheez par qudrat rakhta hai, aur yeh ke Allah ka ilm har cheez par muheet (encompassing) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Allah woh hai jiss ney saat aasaman banaye aur issi kay misil zaminen bhi. Iss ka hukum inn kay darmiyan utarta hai takay tum jaan lo kay Allah her cheez per qadir hai aur Allah Taalaa ney her cheez ko ba-aetbaar ilm gher rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह वो है जिसने सात (सात) आसमान बनाए और ज़मीन की क़िस्म से भी उन्हीं के इंसान। उनके दरमियान हुकुम नाज़िल होता रहता है। (ये बात तुम्हें बताती जा रही है) ताके तुम जान लो के अल्लाह हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है, और ये के अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर मुहीत (समावेशी) है
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Surah 65: At-Talaq (Divorce)

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Surah 65: At-Talaq (Divorce)

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Surah 65: At-Talaq (Divorce)

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Surah 65: At-Talaq (Divorce)

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Surah 65: At-Talaq (Divorce)

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Surah 66: At-Tahrim (The Prohibition)

Medinan🕐 Revelation #107📜 12 Verses🕮 Juz 1
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Surah 66: At-Tahrim (The Prohibition)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِييا أَيُّهَا النَّبِيُّ لِمَ تُحَرِّمُ ما أَحَلَّ اللَّهُ لَكَ ۖ تَبتَغي مَرضاتَ أَزواجِكَ ۚ وَاللَّهُ غَفورٌ رَحيمٌ
हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी! आप उस चीज़ को क्यों हराम करते हैं, जिसे अल्लाह ने आपके लिए हलाल किया है? आप अपनी पत्नियों की प्रसन्नता चाहते हैं? तथा अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, Tum kyun us cheez ko haraam karte ho jo Allah ne tumhare liye halal ki hai? (kya is liye ke) tum apni biwiyon ki khushi chahte ho? Allah maaf karne wala aur Reham farmane wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi! Ji ss cheez ko Allah ney aap kay liye halal ker diya hai ussay aap kiyon haram kertay hain? (Kiya) aap apni biwiyon ki raza mandi hasil kerna chahatay hain aur Allah bakhshney wala reham kerney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, तुम क्यों हमें चीज़ को हराम करता हूँ जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल किया है? (क्या इसके लिए) तुम अपनी बीवीयों की ख़ुशी चाहते हो? अल्लाह माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है
عَرَبِيقَد فَرَضَ اللَّهُ لَكُم تَحِلَّةَ أَيمانِكُم ۚ وَاللَّهُ مَولاكُم ۖ وَهُوَ العَليمُ الحَكيمُ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय अल्लाह ने तुम्हारे लिए तुम्हारी क़समों का कफ़्फ़ारा निर्धारित कर दिया है। तथा अल्लाह तुम्हारा स्वामी है और वही सब कुछ जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ne tum logon ke liye apni kasamo ki pabandi se nikalne ka tareeqa mukarrar kardiya hai Allah tumhara maula(guardian) hai aur wahi Aleem-o-Hakeem(All-Knowing, Most Wise) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tehqeeq kay Allah Taalaa ney tumharay liye qasmon ka khol daalna muqarrar ker diya hai aur Allah Taalaa tumhara kaar saaz hai aur wohi (pooray) ilm wala hikmat wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ने तुम लोगों के लिए अपनी कसमों की किताब से निकले का तरीका मुकर्रर करदिया है अल्लाह तुम्हारा मौला (अभिभावक) है और वही आलिम-ओ-हकीम (सर्वज्ञ, सबसे बुद्धिमान) है
عَرَبِيوَإِذ أَسَرَّ النَّبِيُّ إِلىٰ بَعضِ أَزواجِهِ حَديثًا فَلَمّا نَبَّأَت بِهِ وَأَظهَرَهُ اللَّهُ عَلَيهِ عَرَّفَ بَعضَهُ وَأَعرَضَ عَن بَعضٍ ۖ فَلَمّا نَبَّأَها بِهِ قالَت مَن أَنبَأَكَ هٰذا ۖ قالَ نَبَّأَنِيَ العَليمُ الخَبيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)और उस समय को याद करो, जब नबी ने अपनी किसी पत्नी से गोपनीय रूप से एक बात कही। फिर जब उस (पत्नी) ने वह बात बता दी और अल्लाह ने नबी को उससे अवगत कर दिया, तो नबी ने (उस पत्नी को) उसमें से कुछ बात बताई और कुछ टाल गए। फिर जब नबी ने उस पत्नी को इसके बारे में बताया, तो उसने कहा : यह आपको किसने बताया? आपने कहा : मूझे उस (अल्लाह) ने बताया, जो सब कुछ जानने वाला, सब की खबर रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)(Aur yeh maamla bhi kaabil-e-tawajjuh hai ke ) Nabi ne ek baat apni ek biwi se raaz mein kahi thi phir jab us biwi ne (kisi aur par) woh raaz zahir kardiya, aur Allah ne Nabi ko is (ifshaey raaz) ki ittila de di , to Nabi ne uspar kisi hadd tak (us biwi ko) khabardar kiya aur kisi hadd tak ussey dar-guzar kiya. Phir jab Nabi ne usey (ifshaey raaz ki ) yeh baat batayi to usne pucha aapko iski kisne khabar di? Nabi ne kaha “Mujhey usne khabar di jo sab kuch janta hai aur khoob bakhabar hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaad ker jab nabi ney apni baaz aurton say aik posheeda baat kahi pus jab uss ney uss baat ki khabar ker di aur Allah ney apney nabi ko iss per aagah ker diya to nabi ney thori si baat to bata di aur thori si taal gaye phir jab nabi ney apni biwi ko yeh baat bataee to woh kehnay lagi iss ki khabar aap ko kiss ney di. Kaha sab jannay walay poori khabar rakhney walay Allah ney mujhay yeh batlaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)(और ये मामला भी) काबिल-ए-तवज्जुह है के) नबी ने एक बात अपनी एक बीवी से राज में कहीं थी फिर जब उस बीवी ने (किसी और पर) वो राज जाहिर करदिया, और अल्लाह ने नबी को इस (इफ्शाए राज) की इत्तिला दे दी, तो नबी ने उसपर किसी हद तक (उस बीवी को) खबरदार किया और किसी हद तक उसे दार-गुज़ार किया। फिर जब नबी ने उसे (इफ्शाए राज़ की) ये बात बताई तो उसने पूछा आपको इसकी खबर किसने दी? नबी ने कहा "मुझे उसने खबर दी जो सब कुछ जानता है और खूब अखबार है"
عَرَبِيإِن تَتوبا إِلَى اللَّهِ فَقَد صَغَت قُلوبُكُما ۖ وَإِن تَظاهَرا عَلَيهِ فَإِنَّ اللَّهَ هُوَ مَولاهُ وَجِبريلُ وَصالِحُ المُؤمِنينَ ۖ وَالمَلائِكَةُ بَعدَ ذٰلِكَ ظَهيرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यदि तुम दोनों अल्लाह के समक्ष तौबा करो, क्योंकि निश्चय तुम दोनों के दिल झुक गए हैं। और यदि तुम उनके विरुद्ध एक-दूसरे की सहायता करोगी, तो निःसंदेह अल्लाह उनका सहायक है तथा जिब्रील और सदाचारी ईमान वाले और इसके बाद समस्त फ़रिश्ते (उनके) सहायक हैं।
Roman Urdu (Maududi)Agar tum dono Allah se tauba karti ho (to yeh tumhare liye behtar hai) kyunke tumhare dil seedhi raah se hath gaye hain, aur agar Nabi ke muqable mein tumne baham jattah-bandi ki (support one another) to jaan rakkho ke Allah uska maula(Protector) hai aur uske baad Jibrael aur tammam saaleh ehle iman aur sab malaika uske saathi aur madadgaar hai
Roman Urdu (Junagarhi)(aey nabi ki dono biwiyo!) agar tum dono Allah kay samney tauba kerlo (to boht behtar hai) yaqeenan tumharay dil jhuk paren hain aur agar tum nabi kay khilaf aik doosray ki madad kero gi pus yaqeenan uss ka kaar saaz Allah hai aur jibraeel hain aur nek ehal-e-eman aur inn kay ilawa farishtay bhi madad kerney walay hain
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम दोनों अल्लाह से तौबा करती हो (तो ये तुम्हारे लिए बेहतर है) क्योंकि तुम्हारे दिल सीधी राह से हाथ लग गए हैं, और अगर नबी के मुकाबले में तुमने बहाम जत्था-बंदी की (एक दूसरे का समर्थन करें) तो जान रक्खो के अल्लाह उसका मौला (रक्षक) है और उसके बाद जिबराईल और तम्मम सालेह एहले ईमान और सब मलिका उसके साथी और मददगार हैं
عَرَبِيعَسىٰ رَبُّهُ إِن طَلَّقَكُنَّ أَن يُبدِلَهُ أَزواجًا خَيرًا مِنكُنَّ مُسلِماتٍ مُؤمِناتٍ قانِتاتٍ تائِباتٍ عابِداتٍ سائِحاتٍ ثَيِّباتٍ وَأَبكارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यदि वह (नबी) तुम्हें तलाक़ दे दें, तो निकट है कि उनका पालनहार तुम्हारे बदले में उन्हें तुमसे बेहतर पत्नियाँ प्रदान कर दे, जो इस्लाम वालियाँ, ईमान वालियाँ, आज्ञापालन करने वालियाँ, तौबा करने वालियाँ, इबादत करने वालियाँ, रोज़ा रखने वालियाँ, पहले से शादीशुदा तथा कुँवारियाँ हों।
Roman Urdu (Maududi)Baeed (door) nahin ke agar Nabi tum sab biwiyon ko talaq dede to Allah usey aisi biwiyan tumhare badle mein ata farma de jo tumse behtar hon, sacchi musalman ,ba-iman, itaat guzar , tauba guzar, ibadat guzar, aur rozedar, khwa shohar deedha ho ya bakira (both previously wedded ones and virgins)
Roman Urdu (Junagarhi)Agar (woh) payghumbar tumhen tallaq dey den to boht jald enhen inn ka rab! Tumharay badlay tum say behtar biwiyan inayat farmaye ga jo islam waliyan eman waliyan tauba kerney waliyan ibadat baja laaney waliyan rozay rakhney waliyan hongi baiwa aur kanwariyan
Devnagri Urdu (Maududi)बद (दरवाजा) नहीं के अगर नबी तुम सब बीवीयों को तलाक दे दो अल्लाह को ऐसी बीवीयां तुम्हारे बदले में अता फरमा दे जो तुमसे बेहतर हो, सच्ची मुसलमान, बा-इमान, इताअत गुजर, तौबा गुजर, इबादत गुजर, और रोजेदार, ख्वा शोहर दीधा हो या बकीरा (पहले से शादीशुदा और कुंवारी दोनों)
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا قوا أَنفُسَكُم وَأَهليكُم نارًا وَقودُهَا النّاسُ وَالحِجارَةُ عَلَيها مَلائِكَةٌ غِلاظٌ شِدادٌ لا يَعصونَ اللَّهَ ما أَمَرَهُم وَيَفعَلونَ ما يُؤمَرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अपने आपको और अपने घर वालों को उस आग से बचाओ जिसका ईंधन मनुष्य और पत्थर हैं। जिसपर कठोर दिल, बलशाली फ़रिश्ते नियुक्त हैं। जो अल्लाह उन्हें आदेश दे, उसकी अवज्ञा नहीं करते तथा वे वही करते हैं, जिसका उन्हें आदेश दिया जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho , bachao apne aap ko aur apne ehal-o-ayal ko (yourselves and your kindred) us aag se jis ka indhan (fuel) insaan aur patthar hongey, jispar nihayat tundh-khu (fierce) aur sakht-gir (stern) farishtey mukarrar hongey jo kabhi Allah ke hukum ki na farmani nahin karte aur jo hukm bhi unhein diya jata hai usey baja latey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tum apney aap ko aur apney ghar walon ko uss aag say bachao jiss ka endhan insan hain aur pathar jiss per sakht dil mazboot farishtay muqarrar hain jinhen jo hukum Allah Taalaa deta hai uss ki na farmani nahi kertay bulkay jo hukum diya jaye baja laatay hain
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपने आप को और अपने एहल-ओ-अयाल को (अपने आप को और अपने रिश्तेदारों को) बचाओ हमें आग से जिस का इंधन (ईंधन) इंसान और पत्थर होंगे, जिसपर निहायत तुंध-खू (भयंकर) और सख्त-गिर (कठोर) फरिश्ते मुकर्रर होंगे जो कभी अल्लाह के हुकुम की ना फरमानी करते हैं और जो हुक्म भी उन्हें दिया जाता है उसे बजाते हैं
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ كَفَروا لا تَعتَذِرُوا اليَومَ ۖ إِنَّما تُجزَونَ ما كُنتُم تَعمَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ काफ़िरो! आज बहाने न बनाओ। तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)(Us waqt kaha jayega ke) aey kafiron aaj maazratein (excuses) pesh na karo, tumhein to waisa hi badla diya ja raha hai jaise tum amal kar rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aey kafiro! Aaj tum uzur aur bahana mat kero. Tumhen sirf tumharay kartoot ka badla diya jaraha hai
Devnagri Urdu (Maududi)(उसे वक्त कहा जाएगा के) ऐ काफिरों आज मजारतें (बहाने) पेश ना करो, तुम्हें तो वैसा ही बदला दिया जा रहा है जैसे तुम अमल कर रहे हो
عَرَبِييا أَيُّهَا الَّذينَ آمَنوا توبوا إِلَى اللَّهِ تَوبَةً نَصوحًا عَسىٰ رَبُّكُم أَن يُكَفِّرَ عَنكُم سَيِّئَاتِكُم وَيُدخِلَكُم جَنّاتٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ يَومَ لا يُخزِي اللَّهُ النَّبِيَّ وَالَّذينَ آمَنوا مَعَهُ ۖ نورُهُم يَسعىٰ بَينَ أَيديهِم وَبِأَيمانِهِم يَقولونَ رَبَّنا أَتمِم لَنا نورَنا وَاغفِر لَنا ۖ إِنَّكَ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ قَديرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ ईमान वालो! अल्लाह के आगे सच्ची तौबा करो। निकट है कि तुम्हारा पालनहार तुम्हारी बुराइयाँ तुमसे दूर कर दे तथा तुम्हें ऐसी जन्नतों में दाखिल करे, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। जिस दिन अल्लाह नबी को तथा उन लोगों को जो उनके साथ ईमान लाए हैं, अपमानित नहीं करेगा। उनका प्रकाश उनके आगे तथा उनके दाएँ दौड़ रहा होगा। वे कह रहे होंगे : ऐ हमारे पालनहार! हमारे लिए हमारे प्रकाश को पूर्ण कर दे तथा हमें क्षमा कर दे। निःसंदेह तू हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
Roman Urdu (Maududi)Aey logon jo iman laye ho, Allah se tauba karo, khalis tauba, baeed (door) nahin ke Allah tumhari buraiyan tumse dur karde aur tumhein aisi jannaton mein daakhil farmade jinke nichey nehrein beh rahi hongi, yeh woh din hoga jab Allah apne Nabi ko aur un logon ko jo uske saath iman laye hain ruswa na karega, unka noor unke aagey aagey aur unke dayein (right) jaanib daud raha hoga aur woh keh rahey hongey ke aey hamare Rubb, hamara noor hamare liye mukammal karde aur humse darguzar farma , tu har cheez par qudrat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey eman walo! Tum Allah kay samney sachi khalis tauba kero. Qareeb hai kay tumhara rab tumharay gunah door kerday aur tumhen aisi jannaton mein dakhil keray jin kay neechay nehren jari hain. Jiss din Allah Taalaa nabi ko aur eman daron ko jo inn kay sath hain ruswa na keray ga. Inn ka noor inn kay samney aur inn kay dayen dor raha hoga. Yeh duayen kertay hongay aey humaray rab humen kaamil noor ata farma aur humen bakhsh dey yaqeenan tu her cheez per qadir hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से तौबा करो, खालिस तौबा, बाएद (दरवाजा) नहीं कि अल्लाह तुम्हारी बुराइयां तुमसे दूर करदे और तुम्हीं ऐसी जन्नतों में दाख़िल फरमाड़े जिनके आला में बह रही होंगी, ये वो दिन होगा जब अल्लाह अपने नबी को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए हैं रुसवा ना करेगा, उनका नूर उनके आगे आगे और उनके दिन (दाएं) जानिब दौड़ रहा होगा और वो कह रहे होंगे के ऐ हमारे रब, हमारा नूर हमारे लिए मुकम्मल करदे और हमसे दरगुज़ार फरमा, तू हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है
عَرَبِييا أَيُّهَا النَّبِيُّ جاهِدِ الكُفّارَ وَالمُنافِقينَ وَاغلُظ عَلَيهِم ۚ وَمَأواهُم جَهَنَّمُ ۖ وَبِئسَ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ नबी! काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों से जिहाद करें और उनपर सख़्ती करें और उनका ठिकाना जहन्नम है और वह बहुत बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi , kuffar aur munafikeen se jihad karo aur unke saath sakhti se pesh aao, unka thikana jahannum hai aur wo bahut bura thikana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey nabi! Kafiron aur munafiqon say jihad kero aur inn per sakhti kero inn kay thikana jahannum hai aur woh boht buri jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी , कुफ्फार और मुनाफिकेन से जिहाद करो और उनके साथ मिलकर पेश आओ, उनका ठिकाना जहन्नुम है और वो बहुत बुरा ठिकाना है
عَرَبِيضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا لِلَّذينَ كَفَرُوا امرَأَتَ نوحٍ وَامرَأَتَ لوطٍ ۖ كانَتا تَحتَ عَبدَينِ مِن عِبادِنا صالِحَينِ فَخانَتاهُما فَلَم يُغنِيا عَنهُما مِنَ اللَّهِ شَيئًا وَقيلَ ادخُلَا النّارَ مَعَ الدّاخِلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने उन लोगों के लिए, जिन्होंने कुफ़्र किया, नूह की पत्नी तथा लूत की पत्नी का उदाहरण दिया है। वे दोनों हमारे बंदों में से दो नेक बंदों के विवाह में थीं। फिर उन दोनों (स्त्रियों) ने उनके साथ विश्वासघात किया। तो वे दोनों (रसूल) अल्लाह के यहाँ उनके कुछ काम न आए। तथा (दोनों स्त्रियों से) कहा गया : तुम दोनों जहन्नम में प्रवेश कर जाओ, प्रवेश करने वालों के साथ।
Roman Urdu (Maududi)Allah kafiron ke maamle mein Nooh aur Lut ki biwiyon ko bataur-e-misal pesh karta hai, woh hamare do saleh bando ki zaujiyat (marriage/wedlock) mein thi, magar unhon ne apne in shoharon se khayanat (treachery) ki aur woh Allah ke muqable mein unke kuch bhi na kaam aa sakey. Dono se kehdiya gaya ke jao aag mein janey walon ke saath tum bhi chali jao
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ney kafiron kay liye nooh ki aur loot ki biwi ki misal biyan farmaee yeh dono humaray bandon mein say do (shaista aur) nek bandon kay ghar mein thin phir unn ki enhon ney khayanat ki pus woh dono (nek banday) inn say Allah kay (kissi azab ko) na rok sakay aur hukum dey diya gaya (aey aurton) dozakh mein janey walon kay sath tum dono bhi chali jao
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह काफिरों के मामले में नूह और लुट की बीवीयों को बतौर-ए-मिसाल पेश करता है, वो हमारे दो साले बंदो की ज़ौजियात (शादी/वेडलॉक) में थी, मगर उन्होन ने अपने शोहरों से ख़ायानत (विश्वासघात) की और वो अल्लाह के मुक़दमे में उनके कुछ भी ना काम आ सके। दोनों से कहदिया गया के जाओ आग में जाने वालों के साथ तुम भी चली जाओ
عَرَبِيوَضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا لِلَّذينَ آمَنُوا امرَأَتَ فِرعَونَ إِذ قالَت رَبِّ ابنِ لي عِندَكَ بَيتًا فِي الجَنَّةِ وَنَجِّني مِن فِرعَونَ وَعَمَلِهِ وَنَجِّني مِنَ القَومِ الظّالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा अल्लाह ने उन लोगों के लिए, जो ईमान लाए, फ़िरऔन की पत्नी का उदाहरण दिया है। जब उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए अपने पास जन्नत में एक घर बना तथा मुझे फ़िरऔन और उसके कर्म से बचा ले और मुझे अत्याचारी लोगों से छुटकारा दे।
Roman Urdu (Maududi)Aur ehle iman ke maamle mein Allah Firoun ki biwi ki misal pesh karta hai jabke usne dua ki “Aey mere Rubb,mere liye apne haan jannat mein ek ghar bana de aur mujhey Firoun aur iske amal se bacha le aur zalim qaum se mujhko nijaat de.”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa ney eman walon kay liye firaon ki biwi ki misal biyan farmaee jabkay uss ney dua ki aey meray rab! Meray liye apney pass jannat mein muqam bana aur mujhay firaon say aur uss kay amal say bacha aur mujhay zalim logon say khulasi dey
Devnagri Urdu (Maududi)और एहले ईमान के मामले में अल्लाह फिरौन की बीवी की मिसाल पेश करता है जबके उसने दुआ की "ऐ मेरे रब, मेरे लिए अपने हां जन्नत में एक घर बना दे और मुझे फिरौन और इसके अमल से बच्चा ले और जालिम क़ौम से मुझको निजात दे।”
عَرَبِيوَمَريَمَ ابنَتَ عِمرانَ الَّتي أَحصَنَت فَرجَها فَنَفَخنا فيهِ مِن روحِنا وَصَدَّقَت بِكَلِماتِ رَبِّها وَكُتُبِهِ وَكانَت مِنَ القانِتينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा इमरान की बेटी मरयम का (उदाहरण प्रस्तुत किया है), जिसने अपने सतीत्व की रक्षा की, तो हमने उसमें अपनी एक रूह़ फूँक दी तथा उसने अपने पालनहार की बातों और उसकी पुस्तकों की पुष्टि की और वह इबादत करने वालों में से थी।
Roman Urdu (Maududi)Aur Imran ki beti Maryam ki misaal deta hai jisne apni sharmgaah ki hifazat ki thi, phir humne uske andar apni taraf se rooh phoonk di aur usne apne Rubb ke irshadaat aur uski kitabon ki tasdeeq ki aur woh itaat guzar (obedient) logon mein se thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (misal biyan farmaee) marium bint-e-imran ki jiss ney apney namoos ki hifazat ki phir hum ney apni taraf say uss mein jaan phook di aur (marium) uss ney apney rab ki baaton aur uss ki kitabon ki tasdeeq ki aur ibadat guzaron mein say thi
Devnagri Urdu (Maududi)और इमरान की बेटी मरियम की मिसाल देता है जिसने अपनी शर्मगाह की हिफाजत की थी, फिर हमने उसे अंदर अपनी तरफ से रूह फूंक दी और उसने अपने रब के इरशादत और उसकी किताबों की तस्दीक की और वो इताअत गुजर (आज्ञाकारी) लोगों में से थी
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Surah 66: At-Tahrim (The Prohibition)

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Surah 66: At-Tahrim (The Prohibition)

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Surah 66: At-Tahrim (The Prohibition)

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Surah 66: At-Tahrim (The Prohibition)

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Surah 66: At-Tahrim (The Prohibition)

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Surah 67: Al-Mulk (The Kingdom)

Meccan🕐 Revelation #77📜 30 Verses🕮 Juz 29
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🕮 Juz 29 begins here
हिन्दी (Al-Omari)बहुत बरकत वाला है वह (अल्लाह) जिसके हाथ में सारा राज्य है और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान् है।
Roman Urdu (Maududi)Nihayat buzurg-o-bartar hai woh jiske haath mein qayinaat ki sultanat hai , aur woh har cheez par qudrat rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Boht babarkat hai woh (Allah) jiss kay hath mein badshaee hai aur jo her cheez per qudrat rakhnay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)निहायत बुज़ुर्ग-ओ-बरतर है वो जिसके हाथ में कायनात की सल्तनत है, और वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है
عَرَبِيالَّذي خَلَقَ المَوتَ وَالحَياةَ لِيَبلُوَكُم أَيُّكُم أَحسَنُ عَمَلًا ۚ وَهُوَ العَزيزُ الغَفورُ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसने मृत्यु तथा जीवन को पैदा किया, ताकि तुम्हारा परीक्षण करे कि तुम में किसका कर्म अधिक अच्छा है? तथा वही प्रभुत्वशाली, अति क्षमावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Jisne maut aur zindagi ko ijaat kiya taa-ke tum logon ko aazma kar dekhey tum mein se kaun behtar amal karne wala hai, aur woh zabardast bhi hai aur darguzar farmane wala bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss nay mot aur hayat ko iss liye peda kiya kay tumhen aazmaye kay tum mein say achay kaam kon kerta hai aur woh ghalib (aur) bakhshnay wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने मौत और ज़िंदगी को इज़्ज़त किया ता-के तुम लोगों को आज़मा कर देखो तुम में से कौन बेहतर अमल करने वाला है, और वो ज़बरदस्त भी है और दरगुज़ार फ़रमाने वाला भी
عَرَبِيالَّذي خَلَقَ سَبعَ سَماواتٍ طِباقًا ۖ ما تَرىٰ في خَلقِ الرَّحمٰنِ مِن تَفاوُتٍ ۖ فَارجِعِ البَصَرَ هَل تَرىٰ مِن فُطورٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसने ऊपर-तले सात आकाश बनाए। तुम अत्यंत दयावान् की रचना में कोई असंगति नहीं देखोगे। फिर पुनः देखो, क्या तुम्हें कोई दरार दिखाई देता है?
Roman Urdu (Maududi)Jisne teh-bar-teh saat (seven) aasman banaye tum Rehman ki takhleeq(creation) mein kisi kism ki be-rabti (incongruity) na paogey phir palat kar dekho, kahin tumhein koi khalal (flaw) nazar aata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ney saat aasman uper talay banaye (to aey dekhnay walay) Allah Rehman ki pedaish mein koi bey-zaabtagi na dekhay ga
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने तह-बार-ते सात (सात) आसमान बनाए तुम रहमान की तख़लीक (रचना) में किसी किस्मत की बे-रब्ती (असंगति) ना पाओगे फिर पलट कर देखो, कहीं तुम्हें कोई खलल (दोष) नजर आता है
عَرَبِيثُمَّ ارجِعِ البَصَرَ كَرَّتَينِ يَنقَلِب إِلَيكَ البَصَرُ خاسِئًا وَهُوَ حَسيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर बार-बार निगाह दौड़ाओ। निगाह असफल होकर तुम्हारी ओर पलट आएगी और वह थकी हुई होगी।
Roman Urdu (Maududi)Baar baar nigaah daudao tumhari nigaah thak kar na-murad palat aayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Doobara (nazren daal ker) dekhley kiya koi shigaaf bhi nazar aaraha hai
Devnagri Urdu (Maududi)बार-बार निगाह दौड़ाओ तुम्हारी निगाह थक कर न-मुराद पलट आएगी
عَرَبِيوَلَقَد زَيَّنَّا السَّماءَ الدُّنيا بِمَصابيحَ وَجَعَلناها رُجومًا لِلشَّياطينِ ۖ وَأَعتَدنا لَهُم عَذابَ السَّعيرِ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह हमने (धरती से) निकटतम आकाश को दीपों से सजाया है तथा हमने उन्हें शैतानों को मार भगाने का साधन बनाया है और हमने उनके लिए भड़कती हुई आग की यातना तैयार कर रखी है।
Roman Urdu (Maududi)Humne tumhare kareeb ke aasman ko azeem-o-shaan chiragon se aarasta (adorned /beautify) kiya hai aur unhein shayateen ko maar bhagane ka zariya bana diya hai. In shaytano ke liye bhadakti hui aag humne muhayya kar rakkhi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir dohra ker do do baar dekhley teri nigah teri taraf zalil(o-aajiz) hoker thaki hui lot aayegi.Be-shak hum ney aasman duniya ko chiraghon (sitaron) say aarasta kiya aur enehn shetanon kay maarnay ka zariya banadiya aur shetanon kay liye hum ney (dozakh ka jalanay wala) azab tayyar kerdiya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने तुम्हारे करीब के आसमान को अज़ीम-ओ-शान चिरागों से सजाया है और उन्होंने शयातीन को मार भगाने का जरिया बना दिया है। शैतानों के लिए भड़कती हुई आग हमने मुहय्या कर रखी है
عَرَبِيوَلِلَّذينَ كَفَروا بِرَبِّهِم عَذابُ جَهَنَّمَ ۖ وَبِئسَ المَصيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन लोगों के लिए जिन्होंने अपने पालनहार का इनकार किया, जहन्नम की यातना है और वह बहुत बुरा ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne apne Rubb se kufr kiya hai unke liye jahannum ka azaab hai aur woh bahut hi bura thikana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apnay rab kay sath kafur kernay walon kay liye jahannum ka azab hai aur woh kiya hi buri jagah hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने अपने रब से कुफ्र किया है उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब है और वो बहुत ही बुरा ठिकाना है
عَرَبِيإِذا أُلقوا فيها سَمِعوا لَها شَهيقًا وَهِيَ تَفورُ
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हिन्दी (Al-Omari)जब वे उसमें फेंके जाएँगे, तो उसकी दहाड़ सुनेंगे और वह उबल रहा होगा।
Roman Urdu (Maududi)Jab woh usmein phenke jayenge to uske dhahadne (roar) ki haulnaak aawaz sunengey aur woh josh kha rahi hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Jab iss mein yeh daaley jayengey to iss ki baray zor ki aawazen sunen gey aur woh josh maar rahi hogi
Devnagri Urdu (Maududi)जब वो हमें फेंकेंगे तो उसके दहाड़ने (दहाड़ने) की हिम्मत आवाज़ सुनेंगे और वो जोश खा रही होगी
عَرَبِيتَكادُ تَمَيَّزُ مِنَ الغَيظِ ۖ كُلَّما أُلقِيَ فيها فَوجٌ سَأَلَهُم خَزَنَتُها أَلَم يَأتِكُم نَذيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)क़रीब होगा कि वह क्रोध से फट जाए। जब भी कोई समूह उसमें फेंका जाएगा, तो उसके प्रहरी उनसे पूछेंगे : क्या तुम्हारे पास कोई सावधान करने वाला नहीं आया?
Roman Urdu (Maududi)Shiddat-e-gazab se phati jati hogi, har baar jab koi anbwah (multitude/group) us mein dala jayega uske kaarinde (keepers) un logon se puchenge “kya tumhare paas koi khabardaar karne wala nahin aaya tha?”
Roman Urdu (Junagarhi)Qareeb hai kay (abhi) gussay kay maaray phat jaye jab kabhi iss mein koi giroh dala jayega uss say jahannum kay daroghay poochen gey kay kiya tumharay pass daranay wala koi nahi aaya tha
Devnagri Urdu (Maududi)शिद्दत-ए-गज़ब से फटती होगी, हर बार जब कोई भीड़ (भीड़/समूह) हमें में डाल जाएगा उसके कारिंदे (रखवाले) उन लोगों से पूछेंगे “क्या तुम्हारे पास कोई खबरदार करने वाला नहीं आया था?”
عَرَبِيقالوا بَلىٰ قَد جاءَنا نَذيرٌ فَكَذَّبنا وَقُلنا ما نَزَّلَ اللَّهُ مِن شَيءٍ إِن أَنتُم إِلّا في ضَلالٍ كَبيرٍ
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हिन्दी (Al-Omari)वे कहेंगे : क्यों नहीं, निश्चय हमारे पास सावधान करने वाला आया था। पर, हमने झुठला दिया और हमने कहा कि अल्लाह ने कुछ नहीं उतारा है। तुम तो बहुत बड़ी गुमराही में पड़े हुए हो।
Roman Urdu (Maududi)Woh jawab denge “haan ,khabardaar karne wala hamare paas aaya tha,magar humne usey jhutla diya aur kaha Allah ne kuch bhi nazil nahin kiya hai, tum badi gumraahi mein padey huey ho”
Roman Urdu (Junagarhi)Woh jawab dengey kay be-shak aaya tha lekin hum ney ussay jhutlaya aur hum ney kaha kay Allah taalaa ney kuch bhi naazil nahi farmaya tum boht bari gumrahi mein hi ho
Devnagri Urdu (Maududi)वो जवाब देंगे "हां, खबरदार करने वाला हमारे पास आया था, मगर हमने उसे झूठला दिया और कहा अल्लाह ने कुछ भी नाज़िल नहीं किया है, तुम बड़ी गुमराही में पड़े हुए हो"
عَرَبِيوَقالوا لَو كُنّا نَسمَعُ أَو نَعقِلُ ما كُنّا في أَصحابِ السَّعيرِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे कहेंगे : यदि हम सुनते होते या समझते होते, तो भड़कती हुई आग वालों में न होते।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh kahenge “kaash hum sunte ya samajhte to aaj is bhadakti hui aag ke sazawaron mein na shamil hotey”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kahen gey kay agar hum suntay hotay ya aqal rakhtay hotay to dozakhiyon mein (shareek) na hotay
Devnagri Urdu (Maududi)और वो कहेंगे "काश हम सुनते या समझते तो आज है भड़कती हुई आग के सजावरों में ना शामिल होते”
عَرَبِيفَاعتَرَفوا بِذَنبِهِم فَسُحقًا لِأَصحابِ السَّعيرِ
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हिन्दी (Al-Omari)इस तरह, वे अपने पाप को स्वीकार करेंगे। तो दूरी है भड़कती हुई आग वालों के लिए।
Roman Urdu (Maududi)Is tarah woh apne kasoor ka khud aitraaf (confess) kar lengey, laanat hai in dozakhiyon par
Roman Urdu (Junagarhi)Pus unho ney apney jurum ka iqbal kerlia abb yeh dozakhi dafa hon (door hon)
Devnagri Urdu (Maududi)इस तरह वो अपने कसूर का खुद एतराफ (कबूल) कर लेंगे, दोज़खियों में लानात है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ يَخشَونَ رَبَّهُم بِالغَيبِ لَهُم مَغفِرَةٌ وَأَجرٌ كَبيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग अपने रब से बिन देखे डरते हैं, उनके लिए क्षमा तथा बड़ा प्रतिफल है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log be-dekhe apne Rubb se darte hai , yaqeenan unke liye magfirat hai aur bada ajar
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jo log apnay perwerdigaar say ghaeebana tor per dartay rehtay hain unkay liye bakhhsish hai aur bara sawab hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग देखें अपने रब से डरते हैं, यकीनन उनके लिए मगफिरत है और बड़ा अजर
عَرَبِيوَأَسِرّوا قَولَكُم أَوِ اجهَروا بِهِ ۖ إِنَّهُ عَليمٌ بِذاتِ الصُّدورِ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम अपनी बात छिपाओ या उसे ज़ोर से कहो, निश्चय वह सीनों के भेदों को भी जानता है।
Roman Urdu (Maududi)Tum khwah chupke se baat karo ya unchi aawaz se (Allah ke liye yaksa hai) woh to dilon ka haal tak jaanta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tum apni baton ko chupao ya zahir kero woh to seenon ki posheedgiyon ko bhi bakhoobi jaanta hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम ख्वाह चुपके से बात करो या ऊँची आवाज़ से (अल्लाह के लिए यक्सा है) वो तो दिलों का हाल तक जानता है
عَرَبِيأَلا يَعلَمُ مَن خَلَقَ وَهُوَ اللَّطيفُ الخَبيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या वह नहीं जानेगा जिसने पैदा किया?! जबकि वह सूक्ष्मदर्शी, पूर्ण ख़बर रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Kya wahi na jaanega jisne paida kiya hai? Halanke woh baareek-been aur bakhabar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya wohi na janay jiss nay peda kiya? phir woh bareek been aur bakhabar bhi ho
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वही ना जानेगा जिसने भुगतान किया है? हालंके वो बारिक-बीन और खबर है
عَرَبِيهُوَ الَّذي جَعَلَ لَكُمُ الأَرضَ ذَلولًا فَامشوا في مَناكِبِها وَكُلوا مِن رِزقِهِ ۖ وَإِلَيهِ النُّشورُ
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हिन्दी (Al-Omari)वही है जिसने तुम्हारे लिए धरती को वशीभूत कर दिया, अतः उसके रास्तों में चलो-फिरो तथा उसकी प्रदान की हुई रोज़ी में से खाओ। और उसी की ओर तुम्हें फिर जीवित हो कर जाना है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi to hai jisne tumhare liye zameen ko taabeh kar rakkha hai , chalo uski chaati par aur khao khuda ka rizq, usi ke huzoor tumhein dobara zinda ho kar jana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Woh zaat jiss ney tumharay liye zamin ko past-o-mutee kerdia takay tum uss ki raahon mein chaltay phirtay raho aur Allah ki roziyan khao (piyo) ussi ki taraf (tumhen) ji ker uth khara hona hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही तो है जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन को ताब कर रखा है, चलो उसकी चाटी पर और खाओ खुदा का रिज़क, उसके हुजूर तुम्हें दोबारा जिंदा हो कर जाना है
عَرَبِيأَأَمِنتُم مَن فِي السَّماءِ أَن يَخسِفَ بِكُمُ الأَرضَ فَإِذا هِيَ تَمورُ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम उससे निर्भय हो गए हो, जो आकाश में है कि वह तुम्हें धरती में धँसा दे, फिर वह अचानक काँपने लगे?
Roman Urdu (Maududi)Kya tum issey be-khauf ho ke woh jo aasman mein hai tumhein zameen mein dhasa de aur yakayak yeh zameen jhakoley khane lagey (shake/rock violently)
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum iss baat say bey khof hogaye ho kay aasmanon wala tumhen zamin mein dhansa dey aur achanak zamin laraznay lagay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम इसे बे-खौफ हो के वो जो आसमान में है तुम्हें ज़मीन में ढासा दे और यकायक ये ज़मीन झकोले खाने लगे (हिंसक रूप से हिलाएं/रॉक करें)
عَرَبِيأَم أَمِنتُم مَن فِي السَّماءِ أَن يُرسِلَ عَلَيكُم حاصِبًا ۖ فَسَتَعلَمونَ كَيفَ نَذيرِ
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हिन्दी (Al-Omari)अथवा तुम उससे निर्भय हो गए हो, जो आकाश में है कि वह तुम पर पत्थर बरसा दे, फिर तुम जान लोगे कि मेरा डराना कैसा है?
Roman Urdu (Maududi)Kya tum issey be-khauf ho ke wo jo aasman mein hai tum par pathrao karne wali hawa bhej de? Phir tumhein maloom ho jayega ke meri tambeeh (warning) kaisi hoti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ya kiya tum iss baat say nadar hogaye ho kay aasmanon wala tum per pathar barsa dey? Phir to tumhen maloom ho hi jayega kay mera darna kaisa tha
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम इस बे-ख़ौफ़ हो के वो जो आसमान में है तुम पर पत्थरों करने वाली हवा भेज दे? फिर तुम्हें मालूम हो जाएगा के मेरी तम्बीह (चेतावनी) कैसी होती है
عَرَبِيوَلَقَد كَذَّبَ الَّذينَ مِن قَبلِهِم فَكَيفَ كانَ نَكيرِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निश्चय इनसे पहले के लोग भी झुठला चुके हैं, फिर किस तरह था मेरा इनकार?
Roman Urdu (Maududi)Inse pehle guzre huey log jhutla chuke hain phir dekhlo ke meri giraft kaisi sakht thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inn say pehlay logon ney bhi jhutlaya tha to dekho inn per mera azab kaisa kuch hua
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पहले गुजरे हुए लोग झुटला चुके हैं फिर देखलो के मेरी किस्मत कैसी थी
عَرَبِيأَوَلَم يَرَوا إِلَى الطَّيرِ فَوقَهُم صافّاتٍ وَيَقبِضنَ ۚ ما يُمسِكُهُنَّ إِلَّا الرَّحمٰنُ ۚ إِنَّهُ بِكُلِّ شَيءٍ بَصيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उन्होंने अपने ऊपर पंख फैलाते तथा समेटते हुए पक्षियों को नहीं देखे? अत्यंत दयावान् के सिवा कोई उन्हें थाम नहीं रहा होता। निःसंदेह वह प्रत्येक चीज़ को खूब देखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log apne upar udney waley parindon ko par phaylaye aur sukedte nahin dekhte? Rehman ke siwa koi nahin jo inhein thamey huey ho. Wahi har cheez ka nigehbaan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh apnay uper per kholay huye aur (kabhi kabhi) sametay huye(urnay walay) parindon ko nahi dekhtay enhen (Allah) Rehman hi (hawa-o-faza mein) thaamay huye hai. be-shak her cheez uski nigah mein hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग अपने ऊपर उड़ने वाले परिन्दों को पार फैलाते और सुकते नहीं देखते हैं? रहमान के सिवा कोई नहीं जो इन्हें थमे हुए हो। वही हर चीज़ का निगाहबाँ है
عَرَبِيأَمَّن هٰذَا الَّذي هُوَ جُندٌ لَكُم يَنصُرُكُم مِن دونِ الرَّحمٰنِ ۚ إِنِ الكافِرونَ إِلّا في غُرورٍ
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हिन्दी (Al-Omari)या वह कौन है जो तुम्हारी सेना बनकर अल्लाह के विरुद्ध तुम्हारी सहायता करे? इनकार करने वाले तो मात्र धोखे में पड़े हैं।
Roman Urdu (Maududi)Batao, aakhir woh kaunsa lashkar tumhare paas hai jo Rehman ke muqable mein tumhari madad kar sakta hai? Haqeeqat yeh hai ke yeh mukireen dhoke mein padey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Siwaye Allah kay tumhara woh konsa lashkar hai jo tumhari madad kersakay kafir to sarasar dhokay hi mein hain
Devnagri Urdu (Maududi)बताओ, आख़िर वो कौन सा लश्कर तुम्हारे पास है जो रहमान के मुक़ाबले में तुम्हारी मदद कर सकता है? हकीकत ये है के ये मुकीरीन धोखे में पड़े हैं
عَرَبِيأَمَّن هٰذَا الَّذي يَرزُقُكُم إِن أَمسَكَ رِزقَهُ ۚ بَل لَجّوا في عُتُوٍّ وَنُفورٍ
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हिन्दी (Al-Omari)या वह कौन है जो तुम्हें रोज़ी दे, यदि वह अपनी रोज़ी रोक ले? बल्कि वे सरकशी तथा बिदकने पर अड़े हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ya phir batao, kaun hai jo tumhein rizq de sakta hai agar Rehman apna rizq roak ley? Dar-asal yeh log sarkashi aur haqq se gurez par adey huey hai
Roman Urdu (Junagarhi)Agar Allah taalaa apni rozi rok ley to batao kon hai jo phir tumhen rozi dey ga? bulkay (kafir) to sirkashi aur bidaknay per arr gaye hain
Devnagri Urdu (Maududi)हां फिर बताओ, कौन है जो तुम्हें रिज्क दे सकता है अगर रहमान अपना रिज्क रोक ले? दर-असल ये लोग सरकशी और हक से गुरेज पर आगे हुए हैं
عَرَبِيأَفَمَن يَمشي مُكِبًّا عَلىٰ وَجهِهِ أَهدىٰ أَمَّن يَمشي سَوِيًّا عَلىٰ صِراطٍ مُستَقيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वह व्यक्ति जो अपने मुँह के बल उलटा होकर चलता है, अधिक मार्गदर्शन पर है या वह जो सीधा होकर सीधे मार्ग पर चलता है?
Roman Urdu (Maududi)Bhala socho, jo shaks mooh aundhaey (grovelling) chal raha ho woh zyada sahih raah paney wala hai ya woh jo sar uthaye seedha ek hamwar sadak par chal raha ho
Roman Urdu (Junagarhi)Acha woh shaks zada hidayat wala hai jo apnay mun kay bal ondha hoker chalay ya woh jo seedha (peron kay bal) raah-e-raast per chala ho
Devnagri Urdu (Maududi)भला सोचो, जो शक्स मुंह औंधे (कराहना) चल रहा हो वो ज्यादा सही राह पाने वाला है या वो जो सर उठाए सीधा एक हमवार सड़क पर चल रहा है
عَرَبِيقُل هُوَ الَّذي أَنشَأَكُم وَجَعَلَ لَكُمُ السَّمعَ وَالأَبصارَ وَالأَفئِدَةَ ۖ قَليلًا ما تَشكُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : वही है जिसने तुम्हें पैदा किया तथा तुम्हारे लिए कान तथा आँखें और दिल बनाए। तुम बहुत कम आभार प्रकट करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Inse kaho Allah hi hai jisne tumhein paida kiya, tumko sunney aur dekhne ki taaqatein di aur sochne samajhne waley dil diye, magar tum kam hi shukr ada karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)kehdijiye kay wohi (Allah) ahi jiss ney tumhen peda aur tumharay kaan aackhen aur dil banaye tum boht hi kum shukerguzari kertay ho
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो अल्लाह ही है जिसने तुमने पैदा किया, तुमको सनी और देखने की ताक़तें दी और सोचने वाले दिल दिए, मगर तुम काम ही शुक्र अदा करते हो
عَرَبِيقُل هُوَ الَّذي ذَرَأَكُم فِي الأَرضِ وَإِلَيهِ تُحشَرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : वही है जिसने तुम्हें धरती में फैलाया और तुम उसी की ओर एकत्र किए जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho, Allah hi hai jisne tumhein zameen mein phailaya hai aur usi ki taraf tum sametey jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Kehdijiye! kay wohi hai jiss ney tumhen zamin mein pehla diya aur usski taraf tum ikhattay kiye jaogey
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, अल्लाह ही है जिसने तुमने ज़मीन में फैलाया है और उसी की तरफ तुम साथ जाओगे
عَرَبِيوَيَقولونَ مَتىٰ هٰذَا الوَعدُ إِن كُنتُم صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वे कहते हैं : (क़ियामत का) यह वचन कब पूरा होगा, यदि तुम सच्चे हो?
Roman Urdu (Maududi)Yeh kehte hain “Agar tum sacchey ho to batao yeh wada kab poora hoga?”
Roman Urdu (Junagarhi)(Kafir) poochtay hain kay woh wada kab zahir hoga agar tum sachay ho (to batao)
Devnagri Urdu (Maududi)ये कहते हैं "अगर तुम सच्चे हो तो बताओ ये वादा कब पूरा होगा?"
عَرَبِيقُل إِنَّمَا العِلمُ عِندَ اللَّهِ وَإِنَّما أَنا نَذيرٌ مُبينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : इसका ज्ञान तो केवल अल्लाह के पास है। और मैं तो मात्र एक स्पष्ट डराने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Kaho “Iska ilm to Allah ke paas hai, main to bas saaf saaf khabardar kardene wala hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kehdijiye kay iss ka ilm to Allah hi ko hai mein to sirf khulay tor per aagah kerdenay wala hon
Devnagri Urdu (Maududi)कहो “इसका इल्म तो अल्लाह के पास है, मैं तो बस साफ, खबरदार बनाने वाला हूं
عَرَبِيفَلَمّا رَأَوهُ زُلفَةً سيئَت وُجوهُ الَّذينَ كَفَروا وَقيلَ هٰذَا الَّذي كُنتُم بِهِ تَدَّعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वे उसे निकट देखेंगे, तो उन लोगों के चेहरे बिगड़ जाएँगे जिन्होंने इनकार किया और कहा जाएगा : यही है वह जो तुम माँगा करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab yeh us cheez ko kareeb dekh lenge to un sab logon ke chehre bigad jayenge jinhon ne inkar kiya hai, aur us waqt unse kaha jayega ke yahi hai woh cheez jiske liye tum takazey kar rahey (ask for) thay
Roman Urdu (Junagarhi)Jab yeh log iss waday ko qareeb tar paalen gey uss waqt unn kafiron kay chehray bigar jayen gey aur kehdia jayega kay yehi hai jissay tum talab kiya kertay thay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब ये उस चीज को करीब देख लेंगे तो उन सब लोगों के चेहरे बिगाड़ जाएंगे जिन्हों ने इनकार किया है, और हमें वक्त उनसे कहा जाएगा के यहीं है वो चीज़ जिसके लिए तुम तकाज़े कर रहे थे
عَرَبِيقُل أَرَأَيتُم إِن أَهلَكَنِيَ اللَّهُ وَمَن مَعِيَ أَو رَحِمَنا فَمَن يُجيرُ الكافِرينَ مِن عَذابٍ أَليمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : भला बताओ तो सही, यदि अल्लाह मुझे और उनको, जो मेरे साथ हैं, विनष्ट कर दे या हम पर दया करे, तो काफ़िरों को दर्दनाक यातना से कौन शरण देगा?
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho, kabhi tumne yeh bhi socha ke Allah khwa mujhey aur mere saathiyon ko halaaq karde ya hum par Reham karey, kafiron ko dardnaak azaab se kaun bacha lega
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kehdijiye acha agar mujhay aur meray saathiyonko Allah taalaa halak kerdey ya hum per reham keray (bahar sooratyeh to batao) kay kafirron ko dardnaak azab say kon bachaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)इंसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अल्लाह ख्वा मुझे और मेरे साथियों को हलाक करदे या हम पर रहम करे, काफिरों को दर्दनक अज़ाब से कौन बचा लेगा
عَرَبِيقُل هُوَ الرَّحمٰنُ آمَنّا بِهِ وَعَلَيهِ تَوَكَّلنا ۖ فَسَتَعلَمونَ مَن هُوَ في ضَلالٍ مُبينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : वही अत्यंत दयावान् है। हम उसपर ईमान लाए तथा हमने उसी पर भरोसा किया। तो शीघ्र ही तुम जान लोगे कि वह कौन है जो खुली गुमराही में है।
Roman Urdu (Maududi)Insey kaho, woh bada Raheem hai, usi par hum imaan laye hain, aur usi par hamara bharosa hai, ankareeb tumhein maloom ho jayega ke sareeh gumrahi (manifest error) mein pada hua kaun hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kehdijiye! kay wohi Rehman hai hum to iss per eman la chukay aur issi per humara bharosa hai tumhenunqareeb maloom hojayega kay sareeh gumrahee mein kon hai
Devnagri Urdu (Maududi)इंसे कहो, वो बड़ा रहीम है, उसी पर हम ईमान लाए हैं, और उसी पर हमारा भरोसा है, करीब तुम्हें मालूम हो जाएगा के सारे गुमराह (प्रकट त्रुटि) में पड़ा हुआ कौन है
عَرَبِيقُل أَرَأَيتُم إِن أَصبَحَ ماؤُكُم غَورًا فَمَن يَأتيكُم بِماءٍ مَعينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : भला बताओ तो सही, यदि तुम्हारा पानी गहराई में चला जाए, तो कौन है जो तुम्हारे पास बहता हुआ पानी लाएगा?
Roman Urdu (Maududi)Inse kaho, kabhi tumne yeh bhi socha ke agar tumhare kuwon (wells) ka pani zameen mein utar jaye to kaun hai jo is pani ki behti hui sotein (flowing water) tumhein nikal kar la dega
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijiye !kay acha yeh to batao kay agar tumharay (peenay ka) paani zamin mein utar jaye to kon hai jo tumharay liye nithra hua paani laye
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अगर तुम्हारे कुओं (कुओं) का पानी जमीन में उतर जाये तो कौन है जो इस पानी की बहती हुई सोतें (बहता पानी) तुम्हें निकाल कर ला देगा
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Surah 67: Al-Mulk (The Kingdom)

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Surah 67: Al-Mulk (The Kingdom)

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Surah 67: Al-Mulk (The Kingdom)

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Surah 67: Al-Mulk (The Kingdom)

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Surah 67: Al-Mulk (The Kingdom)

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Surah 68: Al-Qalam (The Pen)

Meccan🕐 Revelation #2📜 52 Verses🕮 Juz 1
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Surah 68: Al-Qalam (The Pen)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِين ۚ وَالقَلَمِ وَما يَسطُرونَ
हिन्दी (Al-Omari)नून। क़सम है क़लम की तथा उसकी जो वे लिखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Noon, Kasam hai qalam ki aur us cheez ki jisey likhne waley likh rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Noon qasam hai qalam ki aur uss ki jo kuch kay who (farishtay) likhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)दोपहर, कसम है क़लम की और उस चीज़ की जिसके लिखने वाले लिख रहे हैं
عَرَبِيما أَنتَ بِنِعمَةِ رَبِّكَ بِمَجنونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)आप, अपने रब के अनुग्रह से हरगिज़ दीवाना नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tum apne Rubb ke fazl se majnoon (deewane) nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Tu apany rab kay fazal say deewana nhai hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम अपने रुब के फ़ज़ल से मजनूँ (दीवाने) नहीं हो
عَرَبِيوَإِنَّ لَكَ لَأَجرًا غَيرَ مَمنونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह आपके लिए निश्चय ऐसा प्रतिफल है जो निर्बाध है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yaqeenan tumhare liye aisa ajar (reward) hai jiska silsila kabhi khatm honay wala nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Aur be-shak teray liye bey inteha ajar hai
Devnagri Urdu (Maududi)और यकीनन तुम्हारे लिए ऐसा अजर (इनाम) है जिसका सिलसिला कभी खत्म होने वाला नहीं
عَرَبِيوَإِنَّكَ لَعَلىٰ خُلُقٍ عَظيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह निश्चय आप एक महान चरित्र पर हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur beshak tum akhlaaq ke bade martabe par ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur be-shak tu both baray (umda) ikhlaq per hai
Devnagri Urdu (Maududi)और बहस तुम अखलाक के बड़े मरतबे पर हो
عَرَبِيفَسَتُبصِرُ وَيُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः शीघ्र ही आप देख लेंगे तथा वे भी देख लेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Anqareeb tum bhi dekh logey aur woh bhi dekh lenge
Roman Urdu (Junagarhi)Pus abb tub hi dekhlega aur yeh bhi dekh len gay
Devnagri Urdu (Maududi)अंकारिब तुम भी देख लोगे और वो भी देख लेंगे
عَرَبِيبِأَييِكُمُ المَفتونُ
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हिन्दी (Al-Omari)कि तुममें से कौन पागलपन से ग्रसित है।
Roman Urdu (Maududi)Ke tum mein se kaun junoon (madness) mein mubtala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kay tum main say kon fitnay mein pera hua hai
Devnagri Urdu (Maududi)के तुम में से कौन जुनून (पागलपन) में मुबतला है
عَرَبِيإِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبيلِهِ وَهُوَ أَعلَمُ بِالمُهتَدينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आपका पालनहार ही उसे अधिक जानता है, जो उसकी राह से भटक गया तथा वही अधिक जानता है उन्हें, जो सीधे मार्ग पर हैं।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara Rubb un logon ko bhi khoob jaanta hai jo uski raah se bhatkey huey hain , aur wahi unko bhi acchi tarah jaanta hai jo raah-e-raast par hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak tera rab apni raah say behaknay walon ko khoob jaanta hai aur wohraah yafta logon ko tu bakhoobi jaanta hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा रब उन लोगों को भी खूब जानता है जो उसकी राह से भटके हुए हैं, और वही उनको भी अच्छी तरह जानता है जो राह-ए-रास्त पर है
عَرَبِيفَلا تُطِعِ المُكَذِّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप झुठलाने वालों की बात न मानें।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza tum in jhutlane walon ke dabao mein hargiz na aao
Roman Urdu (Junagarhi)Pus to jhutlanay walon kin a maan
Devnagri Urdu (Maududi)झूठ बोलने वालों के दबाओ में हरगिज़ तुम आओ
عَرَبِيوَدّوا لَو تُدهِنُ فَيُدهِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे चाहते हैं काश! आप नरमी करें, तो वे भी नरमी करें।
Roman Urdu (Maududi)yeh to chahte hain ke kuch tum mudahnat (narmi) karo to yeh bhi mudahnat (narmi) karein
Roman Urdu (Junagarhi)who to chahtay hain kay tu zara dheela ho to yeh bhi dheelay par jayen
Devnagri Urdu (Maududi)ये तो चाहते हैं कि तुम कुछ भी मुदाहनत (नरमी) करो तो ये भी मुदाहनत (नरमी) करें
عَرَبِيوَلا تُطِع كُلَّ حَلّافٍ مَهينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और आप किसी बहुत क़समें खाने वाले, हीन व्यक्ति की बात न मानें।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz na dabo kisi aisey shaks se jo bahut kasmein khane wala be-waqaat (worthless) aadmi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tu kissi aisay shaks ka bhi kaha na manna jo ziyada qasmen khanay wala
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज ना दबो किसी ऐसे शक्स से जो बहुत कसम खाने वाला बे-वकात (बेकार) आदमी है
عَرَبِيهَمّازٍ مَشّاءٍ بِنَميمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)जो बहुत ग़ीबत करने वाला, चुग़ली में बहुत दौड़-धूप करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Taaney deta hai , chugliyan khata phirta hai (slanderer, gossip-monger)
Roman Urdu (Junagarhi)Beywaqar’ qammena aibgo chughalkhor
Devnagri Urdu (Maududi)ताने देता है, चुगलियां खाता फिरता है (निंदक, चुगली करने वाला)
عَرَبِيمَنّاعٍ لِلخَيرِ مُعتَدٍ أَثيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)भलाई को बहुत रोकने वाला, हद से बढ़ने वाला, घोर पापी है।
Roman Urdu (Maududi)Bhalayi se rokta hai , zulm-o-zyadti mein hadd se guzar janey wala hai, sakht badh-amal hai , jafa-kaar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bhalaee say roknay wala had say barh janay wala gunehgaar
Devnagri Urdu (Maududi)भलाई से रोकता है, ज़ुल्म-ओ-ज़्यादती में हद से गुज़र जाने वाला है, सख्त बध-अमल है, जफ़ा-कार है
عَرَبِيعُتُلٍّ بَعدَ ذٰلِكَ زَنيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)क्रूर है, इसके उपरांत हरामज़ादा (वर्णसंकर) है।
Roman Urdu (Maududi)Aur in sab uyub (aib) ke saath badh-asl (illegitimate child) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Gardan kash phir sath hi beynasab ho
Devnagri Urdu (Maududi)और इन सब उयब (ऐब) के साथ बढ़-अस्ल (नाजायज औलाद) है
عَرَبِيأَن كانَ ذا مالٍ وَبَنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)इस कारण कि वह धन और बेटों वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Is bina par ke woh bahut maal-o-aulad rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Us ski sirkashi sirf iss liye hai kay who maal wala aur beton wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)इस बिना पार के वो बहुत माल-ओ-औलाद रखता है
عَرَبِيإِذا تُتلىٰ عَلَيهِ آياتُنا قالَ أَساطيرُ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं, तो कहता है : यह पहले लोगों की (कल्पित) कहानियाँ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab hamari aayat usko sunayi jati hai to kehta hai yeh to agle waqton ke afsane hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jab uss kay samnay humari aayaten parhi jaati hain to keh deta hai kay yeh to aglon kay qissay hain
Devnagri Urdu (Maududi)जब हमारी आयतें उसको सुनाती हैं तो कहता है ये तो अगले वक्त के अफसाने हैं
عَرَبِيسَنَسِمُهُ عَلَى الخُرطومِ
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हिन्दी (Al-Omari)शीघ्र ही हम उसकी थूथन पर दाग़ लगाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Ankareeb hum iski sund (snout) par daag lagayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Hum bhi us ski soond (naak) per daagh dengay
Devnagri Urdu (Maududi)अंकरीब हम इसकी सूंड (थूथन) पर दाग लगाएंगे
عَرَبِيإِنّا بَلَوناهُم كَما بَلَونا أَصحابَ الجَنَّةِ إِذ أَقسَموا لَيَصرِمُنَّها مُصبِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने उन्हें परीक्षा में डाला है, जिस प्रकार बाग़ वालों को परीक्षा में डाला था, जब उन्होंने क़सम खाई कि भोर होते ही उसके फल अवश्य तोड़ लेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Humne in (ehle makkah) ko usi taraah aazmaish mein dala hai jis tarah ek baagh (garden) ke maalikon ko aazmaish mein dala tha, jab unhon ne kasam khayi ke subah sawerey zaroor apne baagh ke phal todenge
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak hum ney unhen issi tarah aazmaliya jiss tarah hum ney baagh walon ko aazmaya tha job unho ney qasman khayen kay subha hotay hi iss baagh kay phal utar lengay
Devnagri Urdu (Maududi)हमने (एहले मक्का) को उसी तरह आजमाइश में डाला है, जिस तरह एक बाग (बगीचे) के मालिकों को आजमाइश में डाला था, जब उन्हें ने कसम खाई के सुबह सवेरे जरूर अपने बाग के फल तोड़ेंगे
عَرَبِيوَلا يَستَثنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे 'इन शा अल्लाह' नहीं कह रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh koi istasna (exception) nahin kar rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inshaAllah na kaha
Devnagri Urdu (Maududi)और वह कोई इस्तस्ना (अपवाद) नहीं कर रहे थे
عَرَبِيفَطافَ عَلَيها طائِفٌ مِن رَبِّكَ وَهُم نائِمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो आपके पालनहार की ओर से उस (बाग़) पर एक यातना फिर गई, जबकि वे सोए हुए थे।
Roman Urdu (Maududi)Raat ko woh soye padey thay ke tumhare Rubb ki taraf se ek balaa is baagh par phir gayi
Roman Urdu (Junagarhi)Pus iss per teray rab ki janib say aik bala chaaron taraf ghoom gaee aur yeh so hi rahey thay
Devnagri Urdu (Maududi)रात को वो सोए पड़े थे के तुम्हारे रब की तरफ से एक बला इस बाग पर फिर गई
عَرَبِيفَأَصبَحَت كَالصَّريمِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो वह अंधेरी रात जैसा (काला) हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Aur uska haal aisa ho gaya jaise kati hui fasal ho
Roman Urdu (Junagarhi)Pus who baagh aisa hogaya jesay kati hui kheti
Devnagri Urdu (Maududi)और उसका हाल ऐसा हो गया जैसा कटी हुई फसल हो
عَرَبِيفَتَنادَوا مُصبِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उन्होंने भोर होते ही एक-दूसरे को पुकारा :
Roman Urdu (Maududi)Subah un logon ne ek dusre ko pukara
Roman Urdu (Junagarhi)Abb subha hotay hi unho ney aik doosray ko aawazen dea
Devnagri Urdu (Maududi)सुबह उन लोगों ने एक दूसरे को पुकारा
عَرَبِيأَنِ اغدوا عَلىٰ حَرثِكُم إِن كُنتُم صارِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)कि अपने खेत पर सवेरे ही जा पहुँचो, यदि तुम फल तोड़ने वाले हो।
Roman Urdu (Maududi)Kaha agar phal todne hai ho to sawerey sawerey apni kheti ki taraf nikal chalo
Roman Urdu (Junagarhi)Kay agar tumhen phal utarnay hain to apni kheti per saweray hi saweray chal paro
Devnagri Urdu (Maududi)कहा अगर फल तोड़ने हैं तो सवेरे सवेरे अपनी खेती की तरफ निकल चलो
عَرَبِيفَانطَلَقوا وَهُم يَتَخافَتونَ
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हिन्दी (Al-Omari)चुनाँचे वे आपस में चुपके-चुपके बातें करते हुए चल दिए।
Roman Urdu (Maududi)Chunanchey woh chal padey aur aapas mein chupke chupke kehte jatay thay
Roman Urdu (Junagarhi)phir yeh sab chupkay chupkay yeh baten kertay huye chalay
Devnagri Urdu (Maududi)चुनांचे वो चल पड़े और आपस में चुपके-चुपके कह जाते थे
عَرَبِيأَن لا يَدخُلَنَّهَا اليَومَ عَلَيكُم مِسكينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)कि आज उस (बाग़) में तुम्हारे पास कोई निर्धन हरगिज़ न आने पाए।
Roman Urdu (Maududi)Ke aaj koi miskeen tumhare paas baag mein na aane paye
Roman Urdu (Junagarhi)Kay aaj kay din koi miskeen tumharay pass na aanay paye
Devnagri Urdu (Maududi)के आज कोई मिसकीन तुम्हारे पास बाग में ना आने पाए
عَرَبِيوَغَدَوا عَلىٰ حَردٍ قادِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे सुबह-सुबह (यह सोचकर) निकले कि वे (निर्धनों को) रोकने में सक्षम हैं।
Roman Urdu (Maududi)Woh kuch na dene ka faisla kiye huye subah sawerey jaldi jaldi is tarah wahan gaye jaise ke woh (phal todne par) qadir hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur lapkay huye subha subha gaye (Samajh rahey thay) kay hum qaaboo paagaye
Devnagri Urdu (Maududi)वो कुछ ना देने का फैसला किये हुए सुबह सवेरे जल्दी जल्दी इस तरह वहां गए जैसे के वो (फल तोड़ने पर) कादिर हैं
عَرَبِيفَلَمّا رَأَوها قالوا إِنّا لَضالّونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब उन्होंने उसे देखा, तो कहा : निःसंदेह हम निश्चय रास्ता भूल गए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar jab baagh ko dekha to kehne lagey “hum raasta bhool gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)job unho ney boogh dekha to kehnay logay yaqeenan hum raasta photo gaee
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जब बाघ को देखा तो कहने लगे "हम रास्ता भूल गए हैं
عَرَبِيبَل نَحنُ مَحرومونَ
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हिन्दी (Al-Omari)बल्कि हम वंचित कर दिए गए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Nahin balke hum mehroom reh gaye”
Roman Urdu (Junagarhi)Nahi nahi bulkay humari qismat phoot gaee
Devnagri Urdu (Maududi)नहीं बलके हम महरूम रह गए"
عَرَبِيقالَ أَوسَطُهُم أَلَم أَقُل لَكُم لَولا تُسَبِّحونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उनमें से बेहतर ने कहा : क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम (अल्लाह की) पवित्रता का वर्णन क्यों नहीं करते?
Roman Urdu (Maududi)Un mein jo sab se behtar aadmi tha usne kaha “maine tumse kaha na tha ke tum tasbeeh kyun nahin karte?”
Roman Urdu (Junagarhi)Inn sab main jo behtar tha uss nay kaha kay mein tumsay na kehta tha kay tum Allah ki pakeezgi q iyon nahi biyan kertay
Devnagri Urdu (Maududi)उन में जो सब से बेहतर आदमी वह था कहा “मैंने तुमसे कहा ना था के तुम तस्बीह क्यों नहीं करते?”
عَرَبِيقالوا سُبحانَ رَبِّنا إِنّا كُنّا ظالِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हमारा रब पवित्र है। निःसंदेह हम ही अत्याचारी थे।
Roman Urdu (Maududi)Woh pukar utthey paak hai hamara Rubb, waqayi hum gunahgaar thay
Roman Urdu (Junagarhi)To sab kehnay lagay humara rab pak hai be-shak hum hi zaalim thay
Devnagri Urdu (Maududi)वो पुकार उठे पाक है हमारा रब, हकीकत हम गुनहगार थे
عَرَبِيفَأَقبَلَ بَعضُهُم عَلىٰ بَعضٍ يَتَلاوَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वे आपस में एक दूसरे को दोष देने लगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir unmein se har ek dusre ko malamat karne laga
Roman Urdu (Junagarhi)Phir who aik doosray ki taraf rukh kerkay aapas mein malamat kernay lagay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उनमें से हर एक दूसरे को मालामाल करने लगा
عَرَبِيقالوا يا وَيلَنا إِنّا كُنّا طاغينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : हाय हमारा विनाश! निश्चय हम ही सीमा का उल्लंघन करने वाले थे।
Roman Urdu (Maududi)Akhir ko unhon ne kaha “afsos hamare haal par, beshak hum sarkash ho gaye thay
Roman Urdu (Junagarhi)kehnay lagay haaye afsos! Yaqeenan hum sirkash thay
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर को अनहोन ने कहा "अफसोस हमारे हाल पर, बेशक हम परेशान हो गए थे
عَرَبِيعَسىٰ رَبُّنا أَن يُبدِلَنا خَيرًا مِنها إِنّا إِلىٰ رَبِّنا راغِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)आशा है कि हमारा पालनहार हमें बदले में इस (बाग़) से बेहतर प्रदान करेगा। निश्चय हम अपने पालनहार ही की ओर इच्छा रखने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Baeed (door) nahin ke hamara Rubb humein badle mein issey behtar baagh ata farmaye, hum apne Rubb ki taraf rujoo karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya ajab hai kay humara rab humen iss say behtar badla dey dey hum to abb apnay rab say hi aarzoo rakhtay hain
Devnagri Urdu (Maududi)बाएद (दरवाजा) नहीं के हमारा रब हमें बदले में इस तरह बेहतर बाग अता फरमाये, हम अपने रब की तरफ रूजू करते हैं
عَرَبِيكَذٰلِكَ العَذابُ ۖ وَلَعَذابُ الآخِرَةِ أَكبَرُ ۚ لَو كانوا يَعلَمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)इसी तरह होती है यातना, और आख़िरत की यातना तो इससे भी बड़ी है। काश वे जानते होते!
Roman Urdu (Maududi)Aisa hota hai azaab aur aakhirat ka azaab issey bhi bada hai, kaash yeh log isko jaante
Roman Urdu (Junagarhi)Yun hi aafat aati hai aur aakhirat ki aafat both bari hai kaash! Unhen samajh hoti
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसा होता है अज़ाब और आख़िरत का अज़ाब इसे भी बड़ा है, काश ये लोग इसको जानते हैं
عَرَبِيإِنَّ لِلمُتَّقينَ عِندَ رَبِّهِم جَنّاتِ النَّعيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह डरने वालों के लिए उनके पालनहार के पास नेमत के बाग़ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan khuda-tars logon ke liye unke Rubb ke yahan niyamat bhari jannatein hain
Roman Urdu (Junagarhi)Perhezgaaron kay liye unkay rab kay pass nematon waali jannaten hain
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन खुदा-तरस लोगों के लिए उनके रब के यहां नियम भारी जन्नतें हैं
عَرَبِيأَفَنَجعَلُ المُسلِمينَ كَالمُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या हम आज्ञाकारियों को अपराध करने वालों की तरह कर देंगे?
Roman Urdu (Maududi)Kya hum farma-bardaaron ka haal mujreemon sa kardein
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya hum musalmanon ko misil gunehgaaron kay kerdengay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हम फरमा-बरदारों का हाल मुजरिमों सा करदें
عَرَبِيما لَكُم كَيفَ تَحكُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम्हें क्या हुआ, तुम कैसे फ़ैसले करते हो?
Roman Urdu (Maududi)Tum logon ko kya ho gaya hai, tum kaise hukum lagate ho
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhen kiya hogaya kaisay foislay ker rahey ho
Devnagri Urdu (Maududi)तुम लोगों को क्या हो गया है, तुम कैसे हुकुम लगाते हो
عَرَبِيأَم لَكُم كِتابٌ فيهِ تَدرُسونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम्हारे पास कोई पुस्तक है, जिसमें तुम पढ़ते हो?
Roman Urdu (Maududi)Kya tumhare paas koi kitaab hai jismein tum yeh padhte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tumharay pass koi kitab hai jiss mein tum parhtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम्हारे पास कोई किताब है जिसमें तुम ये पढ़ते हो
عَرَبِيإِنَّ لَكُم فيهِ لَما تَخَيَّرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(कि) निश्चय तुम्हारे लिए आख़िरत में वही होगा, जो तुम पसंद करोगे?
Roman Urdu (Maududi)Ke tumhare liye zaroor wahan wahi kuch hai jo tum apne liye pasand karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kay iss mein tumhari manmaani baten hon
Devnagri Urdu (Maududi)के तुम्हारे लिए जरूर वहां वहीं कुछ है जो तुम अपने लिए पसंद करते हो
عَرَبِيأَم لَكُم أَيمانٌ عَلَينا بالِغَةٌ إِلىٰ يَومِ القِيامَةِ ۙ إِنَّ لَكُم لَما تَحكُمونَ
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हिन्दी (Al-Omari)या तुम्हारे लिए हमारे ऊपर क़समें हैं, जो क़ियामत के दिन तक बाक़ी रहने वाली हैं कि तुम्हारे लिए निश्चय वही होगा, जो तुम निर्णय करोगे?
Roman Urdu (Maududi)Ya phir kya tumhare liye roz-e-qayamat tak humpar kuch ahad-o-paiman (covenant) sabit hai ke tumhein wahi kuch milega jiska tum hukum lagao
Roman Urdu (Junagarhi)Yea tum nay hum say kuch qasman li hain ?jo qzayamat tak baaqi rahen kay tumharay liye who sab hai jot um apni taraf say muqarrar kerlo
Devnagri Urdu (Maududi)या फिर क्या तुम्हारे लिए रोज-ए-कयामत तक हमपर कुछ अहद-ओ-पैमान (संविदा) साबित है के तुम्हें वही कुछ मिलेगा जिसका तुम हुकुम लगाओ
عَرَبِيسَلهُم أَيُّهُم بِذٰلِكَ زَعيمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)आप उनसे पूछिए कि उनमें से कौन इसकी ज़मानत लेता है?
Roman Urdu (Maududi)Inse pucho tum mein se kaun iska zaamin (gurantee/responsible) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Inn say poochao to kay inn mein say kon iss baat ka zimeydaar (aur daaweydaar) hai
Devnagri Urdu (Maududi)इनसे पुचो तुम में से कौन इसकी ज़मीन (गारंटी/जिम्मेदार) है
عَرَبِيأَم لَهُم شُرَكاءُ فَليَأتوا بِشُرَكائِهِم إِن كانوا صادِقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या उनके कोई साझी हैं? फिर तो वे अपने साझियों को ले आएँ, यदि वे सच्चे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ya phir inke thehraye huye kuch sahreek hain (jinhon ne iska zimma liya ho)?yeh baat hai to layein apne shareekon ko agar yeh sacchey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inn kay koi shareek hain? To chahiye kay apnay apnay shareekor ko ley aayen agar yeh sachey hain
Devnagri Urdu (Maududi)या फिर इनके ठहरे हुए कुछ साहिरे हैं (जिन्होन ने इसका ज़िम्मा लिया हो)?ये बात है तो लायें अपने शेयरों को अगर ये सच्चे हैं
عَرَبِييَومَ يُكشَفُ عَن ساقٍ وَيُدعَونَ إِلَى السُّجودِ فَلا يَستَطيعونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन पिंडली खोल दी जाएगी और वे सजदा करने के लिए बुलाए जाएँगे, तो वे सजदा नहीं कर सकेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz sakht waqt aa padega aur logon ko sajda karne ke liye bulaya jayega to yeh log sajda na kar sakenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din pindali khol di jayegi aur sajday kay liye bulaye jayengay to (sajdah) na ker saken gay
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ सही वक्त आ पड़ेगा और लोगों को सजदा करने के लिए बुलाया जाएगा तो ये लोग सजदा ना कर पाएंगे
عَرَبِيخاشِعَةً أَبصارُهُم تَرهَقُهُم ذِلَّةٌ ۖ وَقَد كانوا يُدعَونَ إِلَى السُّجودِ وَهُم سالِمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनकी आँखें झुकी होंगी, उनपर अपमान छाया होगा। हालाँकि उन्हें (संसार में) सजदे की ओर बुलाया जाता था, जबकि वे भले-चंगे थे।
Roman Urdu (Maududi)Inki nigaahein nichey hongi, zillat inpar chaa rahi hogi. Yeh jab sahi-o-saalim thay us waqt inhein sajde ke liye (bulaya jata tha) aur yeh inkar karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Nigahen neechi hongi aur unn per zillat-o-khhuaari cha rahi hogi halankay yeh sajday kay liye (uss waqt bhi) bulaye jaatay thay jabkay sahih saalim thay
Devnagri Urdu (Maududi)इनकी निगाहें नीचे होंगी, जिल्लत इनपर छा रही होगी। ये जब सही-ओ-सालिम था हमें वक्त यहीं सजदे के लिए (बुलाया जाता था) और ये इन्कार करते थे
عَرَبِيفَذَرني وَمَن يُكَذِّبُ بِهٰذَا الحَديثِ ۖ سَنَستَدرِجُهُم مِن حَيثُ لا يَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः आप मुझे तथा उसको छोड़ दें, जो इस वाणी (क़ुरआन) को झुठलाता है। हम उन्हें धीरे-धीरे (यातना की ओर) इस प्रकार ले जाएँगे कि वे जान भी न सकेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Pas aey Nabi, tum is kalam ke jhutlane walon ka maamla mujhpar chodh do hum aise tarike se inko batadreej tabahi ki taraf le jayenge ke inko khabar bhi na hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Pus mujhay aur iss kalaam ko jhutlanay walay ko chor dey hum unhen iss tarah aahista aahista bhi na hoga
Devnagri Urdu (Maududi)पस ऐ नबी, तुम इस कलाम के झूठ बोलने वालों का मामला मुझपर छोड़ दो हम ऐसे तारिके से इनको बतादरीज तबाही की तरफ ले जाएंगे के इनको खबर भी ना होगी
عَرَبِيوَأُملي لَهُم ۚ إِنَّ كَيدي مَتينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और मैं उन्हें मोहलत (अवकाश) दूँगा। निश्चय मेरा उपाय बड़ा मज़बूत है।
Roman Urdu (Maududi)Main inki rassi daraaz kar raha hoon, meri chaal badi zabardast hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mein unhen dheel doonga be-shak meri tadbeer bari mazboot hai
Devnagri Urdu (Maududi)मैं इनकी रस्सी दराज़ कर रहा हूं, मेरी चाल बड़ी ज़बरदस्त है
عَرَبِيأَم تَسأَلُهُم أَجرًا فَهُم مِن مَغرَمٍ مُثقَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या आप उनसे कोई पारिश्रमिक माँगते हैं कि वे तावान के बोझ से दबे जा रहे हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya tum insey koi ajar (compensation) talab kar rahey ho ke yeh is chatti ke bojh (feel burdened with debt) taley dabey ja rahe hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tu inn say koi ujrat chahta hai jiss kay tawaan say yeh dabay jatay hon
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम इनसे कोई अजर (मुआवजा) तालाब कर रहे हो के ये इस छत्ती के बोझ (कर्ज का बोझ महसूस कर रहे हैं) तले दबे जा रहे हूं
عَرَبِيأَم عِندَهُمُ الغَيبُ فَهُم يَكتُبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)अथवा उनके पास परोक्ष (का ज्ञान) है, तो वे लिख रहे हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya inke paas gaib ka ilam hai jisey yeh likh rahey hon
Roman Urdu (Junagarhi)Ya kiya inn kay pass ilm-e-ghaib hai jissay who likhtay hon
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इनके पास गैब का इलम है जिसे ये लिख रहे हैं माननीय
عَرَبِيفَاصبِر لِحُكمِ رَبِّكَ وَلا تَكُن كَصاحِبِ الحوتِ إِذ نادىٰ وَهُوَ مَكظومٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः अपने पालनहार के निर्णय तक धैर्य रखें और मछली वाले के समान न हो जाएँ, जब उसने (अल्लाह को) पुकारा, इस हाल में कि वह शोक से भरा हुआ था।
Roman Urdu (Maududi)Pas apne Rubb ka faisla saadir honay tak sabr karo aur machli wale (younis) ki tarah na ho jao, jab usne pukara tha aur woh gham se bhara hua tha
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tu apnay rab kay hokum ka sabar say (intezar ker) aur machli walay ki tarah na ho jo jab kay uss nay ghum ki holat main dua ki
Devnagri Urdu (Maududi)पास अपने रुब का फैसला होने तक सब्र करो और मछली wale (यूनिस) कि तरह ना हो जाओ, जब उसने पुकारा था और वो गम से भरा हुआ था
عَرَبِيلَولا أَن تَدارَكَهُ نِعمَةٌ مِن رَبِّهِ لَنُبِذَ بِالعَراءِ وَهُوَ مَذمومٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि उसके पालनहार की अनुकंपा ने उसे संभाल न लिया होता, तो निश्चय वह चटियल मैदान में इस दशा में फेंक दिया जाता कि वह निंदित होता।
Roman Urdu (Maududi)Agar uske Rubb ki meharbani uske shamil-e-haal na ho jati to woh mazmoom (disgrace) hokar chatyal maidan mein phenk diya jata
Roman Urdu (Junagarhi)Agar uss kay rab ki nemat na paaleti to yaqeenan who buray haalon main chatiyal medaan mein daal diya jata
Devnagri Urdu (Maududi)अगर उसके रुब की मेहरबानी उसके शामिल-ए-हाल ना हो जाती तो वो मज़मूम (अपमान) होकर चटयाल मैदान में फेंक दिया जाता
عَرَبِيفَاجتَباهُ رَبُّهُ فَجَعَلَهُ مِنَ الصّالِحينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसके पालनहार ने उसे चुन लिया और उसे सदाचारियों में से बना दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir-e-kaar uske Rubb ne usey barguzida (exalted) farma liya aur usey saleh bandon mein shamil kardiya
Roman Urdu (Junagarhi)ussay uss kay rab nay phir nawaza aur ussay nak-kaaron main kerdiya
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर-ए-कार उसके रुब ने उसे बरगुज़िदा (उत्कृष्ट) फ़रमा लिया और उसे सालेह बंदों में शामिल करदिया
عَرَبِيوَإِن يَكادُ الَّذينَ كَفَروا لَيُزلِقونَكَ بِأَبصارِهِم لَمّا سَمِعُوا الذِّكرَ وَيَقولونَ إِنَّهُ لَمَجنونٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और वे लोग जिन्होंने इनकार किया, निश्चय क़रीब हैं कि वे अपनी निगाहों से (घूर घूरकर) आपको अवश्य ही फिसला देंगे, जब वे क़ुरआन को सुनते हैं और कहते हैं कि यह अवश्य ही दीवाना है।
Roman Urdu (Maududi)Jab yeh kafir log kalam-e-nasihat (Quran) sunte hain to tumhein aisi nazaron se dekhte hain ke goya tumhare qadam ukhaad denge, Aur kehte hain ke yeh zaroor deewana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur qareeb hai kay kafir apni tez nigahon say aap ko phusla den jab kabhi quran suntay hain aur keh detay hain yeh to zaroor deewana hai
Devnagri Urdu (Maududi)जब ये काफिर लोग कलाम-ए-नसीहत (कुरान) सुनते हैं तो तुम्हें ऐसी नज़रों से देखते हैं के गोया तुम्हारे क़दम उखाड़ देंगे, और कहते हैं के ये ज़रूर दीवाना है
عَرَبِيوَما هُوَ إِلّا ذِكرٌ لِلعالَمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि वह सर्व संसार के लिए मात्र एक उपदेश है।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke yeh to sarey jahaan walon ke liye ek naseehat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Darhaqeeqat yeh (quran) to tamam jahan walon kay liye sarasir naseehat hi hai
Devnagri Urdu (Maududi)हलाँके ये तो सारे जहाँ वालों के लिए एक हिदायत है
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Surah 68: Al-Qalam (The Pen)

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Surah 68: Al-Qalam (The Pen)

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Surah 68: Al-Qalam (The Pen)

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Surah 68: Al-Qalam (The Pen)

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Surah 68: Al-Qalam (The Pen)

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Surah 69: Al-Haqqah (The Sure Truth)

Meccan🕐 Revelation #78📜 52 Verses🕮 Juz 1
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Surah 69: Al-Haqqah (The Sure Truth)

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Surah 69: Al-Haqqah (The Sure Truth)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالحاقَّةُ
हिन्दी (Al-Omari)होकर रहने वाली।
Roman Urdu (Maududi)Honi shudhni ! (indubitable) [sach-much honay wali]
Roman Urdu (Junagarhi)Sabit honey wali
Devnagri Urdu (Maududi)होनी शुद्धि! (अनिवार्य) [सच-बहुत होने वाली]
عَرَبِيمَا الحاقَّةُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या है वह होकर रहने वाली?
Roman Urdu (Maududi)Kya hai woh honi shudni (indubitable)
Roman Urdu (Junagarhi)Sabit honay wali kiya hay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या है वो होनी शुधनी (अविश्वसनीय)
عَرَبِيوَما أَدراكَ مَا الحاقَّةُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि होकर रहने वाली क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Aur tum kya jaano ke woh kya hai honi shudhni (indubitable)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tujhay kiya maloom kay wo sabit shuda kiya hay
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम क्या जानो के वो क्या है होनी शुधनी (अविश्वसनीय)
عَرَبِيكَذَّبَت ثَمودُ وَعادٌ بِالقارِعَةِ
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हिन्दी (Al-Omari)समूद तथा आद (जातियों) ने खड़खड़ाने वाली (क़ियामत) को झुठला दिया।
Roman Urdu (Maududi)Samood aur Aad ne us achanak toot padne wali aafat ko jhutlaya
Roman Urdu (Junagarhi)Is khrka deney wali ko samood aur aad ney jhutla dia tha
Devnagri Urdu (Maududi)समूद और आद ने हमें अचानक टूट पड़ने वाली आफत को झुटलाया
عَرَبِيفَأَمّا ثَمودُ فَأُهلِكوا بِالطّاغِيَةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर जो समूद थे, वे हद से बढ़ी हुई (तेज़) आवाज़ से विनष्ट कर दिए गए।
Roman Urdu (Maududi)To Samood ek sakht haadse mein halaaq kiye gaye
Roman Urdu (Junagarhi)(jis kay nateejay mein)samood to behad khufnak (aur onchi)awaz say halak ker diey gay
Devnagri Urdu (Maududi)समूद एक को सच हादसे में हलाक किए गए
عَرَبِيوَأَمّا عادٌ فَأُهلِكوا بِريحٍ صَرصَرٍ عاتِيَةٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और रही बात आद की, तो वे बड़ी ठंडी और प्रचंड आँधी से नष्ट कर दिए गए।
Roman Urdu (Maududi)Aur Aad ek badi shadeed toofani aandhi(storm) se tabah kardiye gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aad behad tez o tund hawa say gharat ker diey gaey
Devnagri Urdu (Maududi)और एक बड़ी छायादार तूफानी आंधी (तूफान) से तबाह कर दिए गए
عَرَبِيسَخَّرَها عَلَيهِم سَبعَ لَيالٍ وَثَمانِيَةَ أَيّامٍ حُسومًا فَتَرَى القَومَ فيها صَرعىٰ كَأَنَّهُم أَعجازُ نَخلٍ خاوِيَةٍ
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हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह ने उसे उनपर सात रातें और आठ दिन निरंतर चलाए रखा, तो आप उस जाति के लोगों को उसमें इस तरह गिरे हुए देखते, जैसे वे गिरी हुई खजूरों के खोखले तने हों।
Roman Urdu (Maududi)Allah taala ne usko musalsal saat (seven) raat aur aath (eight) din unpar musallat rakkha (tum wahan hotey to) dekhte ke woh wahan is tarah pachade paday jaise woh khajoor ke boseeda (rotten) taney (trunks) hon
Roman Urdu (Junagarhi)Jis say in per lagatar sath rat aur aath din tak (Allah ney)musalat rakha.pus tum dekhtay kay yeh log zameen per istrah gir gaey jaisay kay khjoor kay khokhly tanay hon
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह ताला ने उसको मुसलसल सात (सात) रात और आठ (आठ) दिन उनपर मुसल्लत रक्खा (तुम वहां होते तो) देखते के वो वहां इस तरह फंसे पड़े jaise वो खजूर के बोसीदा (सड़े हुए) तनी (चड्डी) माननीय
عَرَبِيفَهَل تَرىٰ لَهُم مِن باقِيَةٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तो क्या आप उनका कोई भी बाक़ी रहने वाला देखते हैं?
Roman Urdu (Maududi)Ab kya unmein se koi tumhein baki nazar aata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya in mein say koi bhi tujhay baqi nazar araha hy
Devnagri Urdu (Maududi)अब क्या उनमें से कोई तुम्हें बाकी नज़र आता है
عَرَبِيوَجاءَ فِرعَونُ وَمَن قَبلَهُ وَالمُؤتَفِكاتُ بِالخاطِئَةِ
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हिन्दी (Al-Omari)और फ़िरऔन ने तथा उससे पहले के लोगों ने एवं उलट जाने वाली बस्तियों ने पाप किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur isi khata-e-azeem ka irtiqaab Firoun aur ussey pehle ke logon ne aur talpat (overturned) ho janey wali bastiyon ne kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Firoon aur iss say pehlay kay log aur jin ki bastiyan ulat di gaein unhon ney bhi khataein kiein
Devnagri Urdu (Maududi)और इसी ख़ता-ए-अज़ीम का इर्तिक़ाब फिरौन और उसके पहले के लोगों ने और तलपत (पलट) हो जाने वाली बस्तियों ने किया
عَرَبِيفَعَصَوا رَسولَ رَبِّهِم فَأَخَذَهُم أَخذَةً رابِيَةً
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने अपने पालनहार के रसूल की अवज्ञा की। तो अल्लाह ने उन्हें बड़ी कठोर पकड़ में ले लिया।
Roman Urdu (Maududi)Un sab ne apne Rubb ke Rasool ki baat na maani to usne unko bade sakhti ke saath pakda
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney rab kay rasool ki nafarmani ki(bilakhir)Allah ney unhein(bhi)zaberdast girift mein ly lia
Devnagri Urdu (Maududi)उन सब ने अपने रुब के रसूल की बात ना मानी तो उसने उनको बड़े सक्ती के साथ पकड़ा
عَرَبِيإِنّا لَمّا طَغَى الماءُ حَمَلناكُم فِي الجارِيَةِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने ही, जब पानी सीमा पार कर गया, तुम्हें नाव में सवार किया।
Roman Urdu (Maududi)Jab pani ka toofan hadd se guzar gaya to humne tumko kashti mein sawar kardiya tha
Roman Urdu (Junagarhi)jab pani mein tughyani agai to us waqat hum ney tumhein kashti mein charha liya
Devnagri Urdu (Maududi)जब पानी का तूफ़ान हद से गुज़र गया तो हमने तुमको कश्ती में सवार कर दिया था
عَرَبِيلِنَجعَلَها لَكُم تَذكِرَةً وَتَعِيَها أُذُنٌ واعِيَةٌ
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि हम उसे तुम्हारे लिए एक (शिक्षाप्रद) यादगार बना दें और (ताकि) याद रखने वाले कान उसे याद रखें।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke is waqiye ko tumhare liye ek sabaq-aamoz yaadgaar bana dein aur yaad rakhne waley kaan iski yaad mehfooz rakkhein
Roman Urdu (Junagarhi)Takay is say tumharay liey nasehat aur yad gar banadein aur(taky)yad rakhaney waly kan issy yad rakhein
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के इस वक़िये को तुम्हारे लिए एक सबक-आमोज़ यादगार बना दें और याद रखने वाले कान इसकी याद महफूज रक्खें
عَرَبِيفَإِذا نُفِخَ فِي الصّورِ نَفخَةٌ واحِدَةٌ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab ek dafa sur mein phoonk maar di jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab kay soor mein ik phonk phonki jaey gi
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब एक दफा सुर में फूंक मार दी जाएगी
عَرَبِيوَحُمِلَتِ الأَرضُ وَالجِبالُ فَدُكَّتا دَكَّةً واحِدَةً
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हिन्दी (Al-Omari)और धरती तथा पर्वतों को उठाया जाएगा और दोनों को एक ही बार में चूर्ण-विचूर्ण कर दिया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur zameen aur pahadon ko utha kar ek hi chot mein reza reza kardiya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur zameen aur pahar utha liey jaein gay aur ik hi chot mein reza reza ker dey jaein gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जमीन और पहाड़ों को उठा कर एक ही चोट में रेजा कर दिया जाएगा
عَرَبِيفَيَومَئِذٍ وَقَعَتِ الواقِعَةُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो उस दिन घटित होने वाली घटित हो जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Us roz woh honay wala waqiya pesh aa jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Us din ho parnay wali(qiyamat)ho paray gi
Devnagri Urdu (Maududi)हमें रोज वो होने वाला वाकिया पेश आ जाएगा
عَرَبِيوَانشَقَّتِ السَّماءُ فَهِيَ يَومَئِذٍ واهِيَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा आकाश फट जाएगा, तो उस दिन वह कमज़ोर होगा।
Roman Urdu (Maududi)Usdin Aasmaan phatega aur uski bandish dhili padh jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)aur asman phat jaey ga aur us din bilkol boda ho jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)उसदिन आसमान फटेगा और उसकी बंदिश ढीली पढ़ जाएगी
عَرَبِيوَالمَلَكُ عَلىٰ أَرجائِها ۚ وَيَحمِلُ عَرشَ رَبِّكَ فَوقَهُم يَومَئِذٍ ثَمانِيَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे तथा उस दिन आपके पालनहार का अर्श (सिंहासन) आठ फ़रिश्ते अपने ऊपर उठाए हुए होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Farishtey uske atraf-o-jawanib mein hongey aur aat (eight) farishtey us roz tere Rubb ka arsh apne upar uthaye huey hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Is kay kinaron per farishtay hon gay aur tery perwardigar ka arsh us din aath(farishtay)apney opper uthaey hon gay
Devnagri Urdu (Maududi)फ़रिश्ते उसके अतराफ़-ओ-जवानीब में होंगे और आत (आठ) फ़रिश्ते उस रोज़ तेरे रब का अर्श अपने ऊपर उठेंगे होंगे
عَرَبِييَومَئِذٍ تُعرَضونَ لا تَخفىٰ مِنكُم خافِيَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन तुम (अल्लाह के सामने) पेश किए जाओगे। तुम्हारी कोई छिपी हुई बात छिपी नहीं रहेगी।
Roman Urdu (Maududi)Woh din hoga jab tumlog pesh kiye jaogey, tumhara koi raaz bhi chupa na reh jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Us din tum sab samney pesh kiey jao gay tumhara koi bhed poshida na rahy ga
Devnagri Urdu (Maududi)वो दिन होगा जब तुम लोग पेश किये जाओगे, तुम्हारा कोई राज़ भी छुपा न रह जायेगा
عَرَبِيفَأَمّا مَن أوتِيَ كِتابَهُ بِيَمينِهِ فَيَقولُ هاؤُمُ اقرَءوا كِتابِيَه
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जिसे उसका कर्म-पत्र उसके दाएँ हाथ में दिया गिया, तो वह कहेगा : यह लो, मेरा कर्म-पत्र पढ़ो।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt jiska naam-e-aamal uske seedhey haath mein diya jayega woh kahega “lo dekho, padho mera naam-e-aamal
Roman Urdu (Junagarhi)So jissay uska nama e amal us kay daein hath mein diya jaey ga to wo kehnay lagay ga kay lo mera nama e amal parh lo
Devnagri Urdu (Maududi)हमारा वक्त जिसका नाम-ए-आमाल उसके सीधे हाथ में दिया जाएगा वो कहेगा "लो देखो, पढ़ो मेरा नाम-ए-आमाल
عَرَبِيإِنّي ظَنَنتُ أَنّي مُلاقٍ حِسابِيَه
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हिन्दी (Al-Omari)मुझे विश्वास था कि मैं अपने हिसाब से मिलने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Main samajhta tha ke mujhey zaroor apna hisaab milne wala hai”
Roman Urdu (Junagarhi)Mujhy to kamil yaqeen tha kay mujhy apna hisab milna hay
Devnagri Urdu (Maududi)मैं समझता था कि मुझे जरूर अपना हिसाब मिलने वाला है"
عَرَبِيفَهُوَ في عيشَةٍ راضِيَةٍ
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हिन्दी (Al-Omari)चुनाँचे वह आनंदपूर्ण जीवन में होगा।
Roman Urdu (Maududi)Pas woh dil pasand aish mein hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Pus wo ik dil pasand zindagi mein ho ga
Devnagri Urdu (Maududi)पास वो दिल पसंद ऐश में होगा
عَرَبِيفي جَنَّةٍ عالِيَةٍ
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हिन्दी (Al-Omari)एक ऊँची जन्नत में।
Roman Urdu (Maududi)Aali muqaam jannat mein
Roman Urdu (Junagarhi)Bulan o bala jant mein
Devnagri Urdu (Maududi)आली मुकाम जन्नत में
عَرَبِيقُطوفُها دانِيَةٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसके फल निकट होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jiske phalon ke guchhey jhuke padh rahey hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss kay meway jhokay paray hon gay
Devnagri Urdu (Maududi)जिसके फलों के झुके पढ़ रहे होंगे
عَرَبِيكُلوا وَاشرَبوا هَنيئًا بِما أَسلَفتُم فِي الأَيّامِ الخالِيَةِ
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हिन्दी (Al-Omari)(उनसे कहा जायेगा :) आनंदपूर्वक खाओ और पियो, उसके बदले जो तुमने बीते दिनों में आगे भेजे।
Roman Urdu (Maududi)(Aise logon se kaha jayega) mazey se khao aur pio apne un aamal ke badle jo tumne guzre huey dino mein kiye hain
Roman Urdu (Junagarhi)(in say kaha jaey ga) kay mazay say khao piyo apney in amal kay badlay jo tum ney guzishta zamanay mein kiy
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐसे लोगों से कहा जाएगा) मजे से खाओ और पियो अपने उन अमल के बदले जो तुमने गुजरे हुए दिनों में किए हैं
عَرَبِيوَأَمّا مَن أوتِيَ كِتابَهُ بِشِمالِهِ فَيَقولُ يا لَيتَني لَم أوتَ كِتابِيَه
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हिन्दी (Al-Omari)और लेकिन जिसे उसका कर्म-पत्र उसके बाएँ हाथ में दिया गया, तो वह कहेगा : ऐ काश! मुझे मेरा कर्म-पत्र न दिया जाता।
Roman Urdu (Maududi)Aur jiska naam-e-aamal uske bayein (left) haath mein diya jayega woh kahega “ kaash mera aamal nama mujhey na diya gaya hota
Roman Urdu (Junagarhi)Lakin jissay uss(kay amal)ki kitab us kay baein hath mein di jaey gi wo to kahy ga kay kash kay mujhy meri kitab di hi na jati
Devnagri Urdu (Maududi)और जिसका नाम-ए-आमाल उसके बायें (बाएं) हाथ में दिया जाएगा वो कहेगा “ काश मेरा अमल नाम मुझे ना दिया गया होता
عَرَبِيوَلَم أَدرِ ما حِسابِيَه
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है!
Roman Urdu (Maududi)Aur main na jaanta ke mera hisaab kya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mein janta hi na kay hisab kiya hay
Devnagri Urdu (Maududi)और मैं ना जानता के मेरा हिसाब क्या है
عَرَبِييا لَيتَها كانَتِ القاضِيَةَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ काश! वह (मृत्यु) काम तमाम कर देने वाली होती।
Roman Urdu (Maududi)Kaash meri wahi maut (jo duniya mei aayi thi) faisla-kun hoti
Roman Urdu (Junagarhi)Kash ! kay moot (mera)kam hi tamam kerdyti
Devnagri Urdu (Maududi)काश मेरी वही मौत (जो दुनिया में आई थी) फैसला-कुन होती
عَرَبِيما أَغنىٰ عَنّي مالِيَه ۜ
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हिन्दी (Al-Omari)मेरा धन मेरे किसी काम न आया।
Roman Urdu (Maududi)Aaj mera maal mere kuch kaam na aaya
Roman Urdu (Junagarhi)Mery maal ney bhi mujhy kuch nafa na diya
Devnagri Urdu (Maududi)आज मेरा माल मेरे कुछ काम ना आया
عَرَبِيهَلَكَ عَنّي سُلطانِيَه
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हिन्दी (Al-Omari)मेरी सत्ता मुझसे जाती रही।
Roman Urdu (Maududi)Mera sara iqtedaar khatam ho gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Mera ghalba bhi mujhsy jata raha
Devnagri Urdu (Maududi)मेरा सारा इक्तेदार ख़तम हो गया
عَرَبِيخُذوهُ فَغُلّوهُ
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हिन्दी (Al-Omari)(आदेश होगा :) उसे पकड़ो और उसके गले में तौक़ डाल दो।
Roman Urdu (Maududi)(hukum hoga) pakdo isey aur iski gardan mei touk daal do
Roman Urdu (Junagarhi)(hokum hoga)issay pakar lo phir issy toq phyna do
Devnagri Urdu (Maududi)(हुकुम होगा) पकड़ो इसे और इसकी गर्दन में तौक डाल दो
عَرَبِيثُمَّ الجَحيمَ صَلّوهُ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसे भड़कती हुई आग में झोंक दो।
Roman Urdu (Maududi)Phir isey jahannum mein jhoonk do
Roman Urdu (Junagarhi)Phir isay dozakh mein dal do
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इसे जहन्नुम में झुक दो
عَرَبِيثُمَّ في سِلسِلَةٍ ذَرعُها سَبعونَ ذِراعًا فَاسلُكوهُ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर एक ज़ंजीर में, जिसकी लंबाई सत्तर गज़ है, उसे जकड़ दो।
Roman Urdu (Maududi)Phir isko satter(seventy) haath lambi zanjeer mei jakad do
Roman Urdu (Junagarhi)Phir issy asi zanjeer mein jiss ki paymaish satter hath ki hay jaker do
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इसको सत्तर (सत्तर) हाथ लंबी जंजीर में जकाद दो
عَرَبِيإِنَّهُ كانَ لا يُؤمِنُ بِاللَّهِ العَظيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वह सबसे महान अल्लाह पर ईमान नहीं रखता था।
Roman Urdu (Maududi)Yeh na Allah buzurg-o-bartar par iman lata tha
Roman Urdu (Junagarhi)Beshak yeh Allah azmat walay per iman na rakhta tha
Devnagri Urdu (Maududi)ये ना अल्लाह बुज़ुर्ग-ओ-बरतर पर ईमान लता था
عَرَبِيوَلا يَحُضُّ عَلىٰ طَعامِ المِسكينِ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा ग़रीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता था।
Roman Urdu (Maududi)Aur na miskeen ko khana khilane ki targeeb deta tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur miskeen kay khilanay per raghbat na dilata tha
Devnagri Urdu (Maududi)और ना मिस्कीन को खाना खिलाने की तरजीब देता था
عَرَبِيفَلَيسَ لَهُ اليَومَ هاهُنا حَميمٌ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आज यहाँ उसका कोई मित्र नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza aaj na yahan iska koi yaar-e-gamkhaar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aj iska na koi dost hay
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाजा आज ना यहां इसका कोई यार-ए-गमखार है
عَرَبِيوَلا طَعامٌ إِلّا مِن غِسلينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)और न पीप के सिवा कोई भोजन है।
Roman Urdu (Maududi)Aur na zakhmon ke dhowan (washing of wounds) ke siwa iske liye koi khana
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na siway peep kay is ki koi ghiza hay
Devnagri Urdu (Maududi)और ना जख्मों के धोवन (घावों को धोना) के सिवा इसके लिए कोई खाना
عَرَبِيلا يَأكُلُهُ إِلَّا الخاطِئونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसे पापियों के अलावा कोई नहीं खाता।
Roman Urdu (Maududi)Jisey khatakaaron (sinners) ke siwa koi nahin khata
Roman Urdu (Junagarhi)Jissay ghunahgaron kay siwa koi nai kahey ga
Devnagri Urdu (Maududi)जैसी खटकारोन (पापी) के सिवा कोई नहीं खाता
عَرَبِيفَلا أُقسِمُ بِما تُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)मैं उन चीज़ों की क़सम खता हूँ, जिन्हें तुम देखते हो।
Roman Urdu (Maududi)Pas nahin, main qasam khata hoon un cheezon ki bhi jo tum dekhte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Pus mujhy qasam hay un chezon ki jinhein tum dekhtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)पास नहीं, मैं कसम खाता हूं उन चीज़ों की भी जो तुम देखते हो
عَرَبِيوَما لا تُبصِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उनकी जिन्हें तुम नहीं देखते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur unki bhi jinhein tum nahin dekhte
Roman Urdu (Junagarhi)Aur on chezon ki jinhein tum nahi dekhtay
Devnagri Urdu (Maududi)और उनकी भी जिन्हें तुम नहीं देखते
عَرَبِيإِنَّهُ لَقَولُ رَسولٍ كَريمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यह (क़ुरआन) एक सम्मानित रसूल का कथन है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ek Rasool-e-kareem ka qaul ( speech ) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kay be sahk yeh(quran)buzurgh rasool ka qool hay
Devnagri Urdu (Maududi)ये एक रसूल-ए-करीम का क़ौल (भाषण) है
عَرَبِيوَما هُوَ بِقَولِ شاعِرٍ ۚ قَليلًا ما تُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और यह किसी कवि की वाणी नहीं है। तुम बहुत कम ईमान लाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Kisi shayar ka qaul nahin hai, tumlog kam hi iman latey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh kisi shair ka qool nahi(afsos)tumhein bohat kam yaqeen hay
Devnagri Urdu (Maududi)किसी शायर का क़ौल नहीं है, तुम लोग कम ही ईमान लाते हो
عَرَبِيوَلا بِقَولِ كاهِنٍ ۚ قَليلًا ما تَذَكَّرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और न किसी काहिन की वाणी है, तुम बहुत कम शिक्षा ग्रहण करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur na yeh kisi kaahin(soothsayer) ka qaul hai , tum log kam hi gaur karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na kisi kahin ka qool hay(afsos)bohat kam nasehat lay rahay ho
Devnagri Urdu (Maududi)और ना ये किसी काहिन (भविष्यवक्ता) का क़ौल है, तुम लोग कम ही गौर करते हो
عَرَبِيتَنزيلٌ مِن رَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)(यह) सर्व संसार के पालनहार की ओर से उतारा हुआ है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh Rabb-ul alameen ki taraf se nazil huwa hai
Roman Urdu (Junagarhi)(ye to)rab ul alameen ka utara howa hay
Devnagri Urdu (Maududi)ये रब्ब-उल आलमीन की तरफ से नाज़िल हुआ है
عَرَبِيوَلَو تَقَوَّلَ عَلَينا بَعضَ الأَقاويلِ
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हिन्दी (Al-Omari)और यदि वह (नबी) हमपर कोई बात बनाकर लगाता।
Roman Urdu (Maududi)Aur agar is (Nabi) ne khud ghad kar koi baat hamari taraf mansook ki hoti
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ager yeh hum per koi bhi bat bana lyta
Devnagri Urdu (Maududi)और अगर (नबी) ने खुद ग़ाद कर कोई बात हमारी तरफ इंसान की होती है
عَرَبِيلَأَخَذنا مِنهُ بِاليَمينِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो निश्चय हम उसे दाएँ हाथ से पकते।
Roman Urdu (Maududi)To hum iska dayan(right) haath padkad letay
Roman Urdu (Junagarhi)To albata hum iska dahana hath paker letay
Devnagri Urdu (Maududi)तो हम इसका डायन (दाएं) हाथ पकड़ लेते हैं
عَرَبِيثُمَّ لَقَطَعنا مِنهُ الوَتينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर अवश्य हम उसके जीवन की धमनी काट देते।
Roman Urdu (Maududi)Aur iski rag-e-gardan (life vein) kaat daalte
Roman Urdu (Junagarhi)Phir is ki sheyrag kaat detay
Devnagri Urdu (Maududi)और इसकी राग-ए-गर्दन काट डालते हैं
عَرَبِيفَما مِنكُم مِن أَحَدٍ عَنهُ حاجِزينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर तुममें से कोई भी हमें उससे रोकने वाला न होता।
Roman Urdu (Maududi)Phir tum mein se koi (humein)is kaam se rokne wala na hota
Roman Urdu (Junagarhi)Phir tum mein say koi bhi mujhy issy roknay wala na hota
Devnagri Urdu (Maududi)फिर तुम में से कोई (हमें)इस काम से रोकने वाला ना होता
عَرَبِيوَإِنَّهُ لَتَذكِرَةٌ لِلمُتَّقينَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यह (क़ुरआन) डरने वालों के लिए एक उपदेश है।
Roman Urdu (Maududi)Dar haqeeqat yeh parheizgar logon ke liye ek naseehat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan yeh quran perhezgaron kay liye nasehat hay
Devnagri Urdu (Maududi)दर हकीकत ये जरूरी लोगों के लिए एक हिदायत है
عَرَبِيوَإِنّا لَنَعلَمُ أَنَّ مِنكُم مُكَذِّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा निःसंदेह हम निश्चित रूप से जानते हैं कि बेशक तुममें से कुछ झुठलाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur hum jante hain ke tum mein se kuch log jhutlane waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Humein pori tarah maloom hay kay tum mein say baaz iskay jhotlanay waly hein
Devnagri Urdu (Maududi)और हम जानते हैं कि तुम में से कुछ लोग झूठ बोलने वाले हैं
عَرَبِيوَإِنَّهُ لَحَسرَةٌ عَلَى الكافِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह वह निश्चित रूप से काफ़िरों के लिए पछतावे का कारण है।
Roman Urdu (Maududi)Aise kafiron ke liye yaqeenan yeh mujeeb-e-hasrat (cause of regret) hai
Roman Urdu (Junagarhi)beshak (yeh jhutlan)kafiron per hasrat hay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसे काफिरों के लिए यकीनन ये मुजीब-ए-हसरत (अफसोस का कारण) है
عَرَبِيوَإِنَّهُ لَحَقُّ اليَقينِ
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हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह वह निश्चय विश्वसनीय सत्य है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh bilkul yaqeeni haqq hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur beshak (o shuba)yeh yaqeni haq hay
Devnagri Urdu (Maududi)और ये बिल्कुल यकीनी हक है
عَرَبِيفَسَبِّح بِاسمِ رَبِّكَ العَظيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप अपने महान पालनहार के नाम की पवित्रता का वर्णन करें।
Roman Urdu (Maududi)Pas aey nabi, apne Rubb-e-azeem ke naam ki tasbeeh karo
Roman Urdu (Junagarhi)Pus to apney rab e azeem ki paki biyan ker
Devnagri Urdu (Maududi)पास ऐ नबी, अपने रुब-ए-अज़ीम के नाम की तस्बीह करो
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Surah 69: Al-Haqqah (The Sure Truth)

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Surah 70: Al-Ma'arij (The Ways of Ascent)

Meccan🕐 Revelation #79📜 44 Verses🕮 Juz 1
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Surah 70: Al-Ma'arij (The Ways of Ascent)

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Surah 70: Al-Ma'arij (The Ways of Ascent)

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Surah 70: Al-Ma'arij (The Ways of Ascent)

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Surah 70: Al-Ma'arij (The Ways of Ascent)

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Surah 70: Al-Ma'arij (The Ways of Ascent)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيسَأَلَ سائِلٌ بِعَذابٍ واقِعٍ
हिन्दी (Al-Omari)एक माँगने वाले ने वह यातना माँगी, जो घटित होने वाली है।
Roman Urdu (Maududi)Mangne waley ne azaab maanga hai (woh azaab) jo zaroor waqey honay wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aik sawal kernay walay ney uss azab ka swal kiya jo wazeh honay wala hay
Devnagri Urdu (Maududi)मंगने वाले ने अज़ाब मांगा है (वो अज़ाब) जो जरूर होने वाला है
عَرَبِيلِلكافِرينَ لَيسَ لَهُ دافِعٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)काफ़िरों पर। उसे कोई टालने वाला नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Kafiron ke liye hai, koi usey dafa karne wala nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Kafiron per jissay koi hatanay wala nahi
Devnagri Urdu (Maududi)काफिरों के लिए है, कोई उसे दफा करने वाला नहीं
عَرَبِيمِنَ اللَّهِ ذِي المَعارِجِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऊँचाइयों वाले अल्लाह की ओर से।
Roman Urdu (Maududi)Us khuda ki taraf se hai jo urooj ke zeeno (ascending steps)ka malik hai
Roman Urdu (Junagarhi)Uss Allah ki taraf say jo seerhiyon wala hay
Devnagri Urdu (Maududi)हमें खुदा की तरफ से है जो उरूज के ज़ीनो (चढ़ते कदम) का मालिक है
عَرَبِيتَعرُجُ المَلائِكَةُ وَالرّوحُ إِلَيهِ في يَومٍ كانَ مِقدارُهُ خَمسينَ أَلفَ سَنَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फ़रिश्ते और रूह उसकी ओर चढ़ेंगे, एक ऐसे दिन में जिसकी मात्रा पचास हज़ार वर्ष है।
Roman Urdu (Maududi)Malaika (angels) aur rooh(Jibrael) uske huzoor chadh kar jatey hain ek aise din mein jiski miqdar pacchas (fifty) hazar saal hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss ki taraf farishtay aur rooh charhtay hein aik din mein jiss ki miqdaar pachas hazar saal ki hay
Devnagri Urdu (Maududi)मलायका (फ़रिश्ते) और रूह (जिब्राइल) उसके हुज़ूर चढ़ कर जाते हैं एक ऐसे दिन में जिसका मिकदार पचास (पचास) हज़ार साल है
عَرَبِيفَاصبِر صَبرًا جَميلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः (ऐ नबी!) आप अच्छे धैर्य से काम लें।
Roman Urdu (Maududi)Pas aey Nabi, sabr karo, shaista sabr
Roman Urdu (Junagarhi)Pus to achi tarah sabar ker
Devnagri Urdu (Maududi)पस ऐ नबी, सब्र करो, शाइस्ता सब्र
عَرَبِيإِنَّهُم يَرَونَهُ بَعيدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वे उसे दूर समझ रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log usey dur samajhte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Beshak yeh uss (azab) ko door samajh rahe hein
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग उसे दूर समझते हैं
عَرَبِيوَنَراهُ قَريبًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हम उसे निकट देख रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur hum usey qareeb dekh rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum issay qareeb hi dekhatay hein
Devnagri Urdu (Maududi)और हम उसे करीब देखते हैं रहे हैं
عَرَبِييَومَ تَكونُ السَّماءُ كَالمُهلِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन आकाश पिघली हुई धातु के समान हो जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)(woh azaab us roz hoga) jis roz aasman pigli huye chandi ki tarah ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din aasman misil tel ki talchat kay hojayega
Devnagri Urdu (Maududi)(वो अज़ाब हमें रोज़ होगा) जिस रोज़ आसमान पिगली हुई चांदी की तरह हो जाएगा
عَرَبِيوَتَكونُ الجِبالُ كَالعِهنِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और पर्वत धुने हुए ऊन के समान हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur pahad rang-bi-rang ke dhunke huey oon (wool) jaise ho jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur pohaar misil rangeen oon kay hojey gay
Devnagri Urdu (Maududi)और पहाड़ रंग-बि-रंग के धुनके हुए ऊन (ऊन) जैसे हो जाएंगे
عَرَبِيوَلا يَسأَلُ حَميمٌ حَميمًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और कोई मित्र किसी मित्र को नहीं पूछेगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur koi jigri dost apne jigri dost ko na puchega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur koi dost kissi dost ko na poochay ga
Devnagri Urdu (Maududi)और कोई जिगरी दोस्त अपने जिगरी दोस्त को ना पूछेगा
عَرَبِييُبَصَّرونَهُم ۚ يَوَدُّ المُجرِمُ لَو يَفتَدي مِن عَذابِ يَومِئِذٍ بِبَنيهِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि वे उन्हें दिखाए जा रहे होंगे। अपराधी चाहेगा कि काश उस दिन की यातना से बचने के लिए छुड़ौती में दे दे अपने बेटों को।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke woh ek dusre ko dikhaye jayenge, mujrim chahega ke us din ke azaab se bachne ke liye apni aulad ko
Roman Urdu (Junagarhi)(Halankay) aik doosray ko dikha diye jaeyen gay gunehgar uss din kay azab kay badlay fidye mein apney beton ko
Devnagri Urdu (Maududi)हलांके वो एक दूसरे को दिखाये जायेंगे, मुजरिम चाहेगा के उस दिन के अज़ाब से बचने के लिए अपनी औलाद को
عَرَبِيوَصاحِبَتِهِ وَأَخيهِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा अपनी पत्नी और अपने भाई को।
Roman Urdu (Maududi)Apni biwi ko, apne bhai ko
Roman Urdu (Junagarhi)Apni biwi ko aur apney bhai ko
Devnagri Urdu (Maududi)अपनी बीवी को, अपने भाई को
عَرَبِيوَفَصيلَتِهِ الَّتي تُؤويهِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा अपने परिवार (कुटुंब) को, जो उसे शरण देता था।
Roman Urdu (Maududi)Apne qareeb-tareen khandaan ko jo usey panaah dene wala tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney kunbay ko jo issay panah deta tha
Devnagri Urdu (Maududi)अपने करीब-तरीन खानदान को जो उसे पनाह देने वाला था
عَرَبِيوَمَن فِي الأَرضِ جَميعًا ثُمَّ يُنجيهِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उन सभी लोगों को जो धरती में हैं। फिर अपने आपको बचा ले।
Roman Urdu (Maududi)Aur rooh-e-zameen ke sab logon ko fidiya (badle) mein dey-de aur yeh tadbeer usey nijaat dila de
Roman Urdu (Junagarhi)Aur roy e zameen kay sab logon ko dena chahyega takay yeh ussay nijat dilaye
Devnagri Urdu (Maududi)और रूह-ए-जमीन के सब लोगों को फिदिया (बदले) में दे-दे और ये तदबीर उसे निजात दिला दे
عَرَبِيكَلّا ۖ إِنَّها لَظىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कदापि नहीं! निःसंदेह वह (जहन्नम) भड़कने वाली आग है।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin woh to bhadakti hui aag ki lapat hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Mager hergiz yeh na hoga yaqeenan wo shoal wali (aag)hai
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं वो तो भड़कती हुई आग की लपट होगी
عَرَبِينَزّاعَةً لِلشَّوىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो खाल उधेड़ देने वाली है।
Roman Urdu (Maududi)Jo gosht posht ko chaat jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Jo mun aur sar ki khal khench lynay wali hay
Devnagri Urdu (Maududi)जो प्यार पोश्त को चाट जाएगी
عَرَبِيتَدعو مَن أَدبَرَ وَتَوَلّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह उसे पुकारेगी, जिसने पीठ फेरी और मुँह मोड़ा।
Roman Urdu (Maududi)Pukar pukar kar apni taraf bulayegi har us shaks ko jisne haqq se mooh moda aur peet pheri
Roman Urdu (Junagarhi)Wo her us shaks ko pukaray gi jo pechay hata aur mun morta hay
Devnagri Urdu (Maududi)पुकार पुकार कर अपनी तरफ बुलाएगी हर उस शक्स को जिसने हक से मुंह मोड़ा और पीट फेरी
عَرَبِيوَجَمَعَ فَأَوعىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा (धन) एकत्र किया और संभाल कर रखा।
Roman Urdu (Maududi)Aur maal jamaa kiya aur seint seint kar (amassed wealth) rakkha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jama ker kay samnbhal rakhta hay
Devnagri Urdu (Maududi)और माल जमा किया और सेंत सेंत कर (संचित धन) रक्खा
عَرَبِي۞ إِنَّ الإِنسانَ خُلِقَ هَلوعًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह मनुष्य बहुत अधीर बनाया गया है।
Roman Urdu (Maududi)Insan thud-dila (impatient) paida kiya gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Beshak insan baray kachy dil wala banaya gaya hay
Devnagri Urdu (Maududi)इंसान थुड़-दिला (अधीर) पैदा किया गया है
عَرَبِيإِذا مَسَّهُ الشَّرُّ جَزوعًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब उसे कष्ट पहुँचता है, तो बहुत घबरा जाने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jab uspar museebat aati hai to ghabra uthta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jab is say musibat puhanchti hay to har bara uthta hay
Devnagri Urdu (Maududi)जब उसपर मुसीबत आती है तो घबरा उठता है
عَرَبِيوَإِذا مَسَّهُ الخَيرُ مَنوعًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब उसे भलाई मिलती है, तो बहुत रोकने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab usey khush-haali naseeb hoti hai to bukhl (kanjoosi) karne lagta hai
Roman Urdu (Junagarhi)aur jab rahat milti hay to bukhul kernay lagta hay
Devnagri Urdu (Maududi)और जब उसे ख़ुश-हाली नसीब होती है तो भुल (कंजूसी) करने लगता है
عَرَبِيإِلَّا المُصَلّينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सिवाय नमाज़ियों के।
Roman Urdu (Maududi)Magar woh log (is aib se bache huey hai) jo namaz padne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Mager wo namazi
Devnagri Urdu (Maududi)मगर वो लोग (इससे बचे हुए हैं) जो नमाज़ पढ़ने वाले हैं
عَرَبِيالَّذينَ هُم عَلىٰ صَلاتِهِم دائِمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो हमेशा अपनी नमाज़ों की पाबंदी करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo apni namaz ki hamesha pabandi karte hai
Roman Urdu (Junagarhi)J apnai namaz per hameshagi kernay walay hein
Devnagri Urdu (Maududi)जो अपनी नमाज़ की हमेशा नमाज़ अदा करते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ في أَموالِهِم حَقٌّ مَعلومٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जिनके धन में एक निश्चित भाग है।
Roman Urdu (Maududi)Jinke maalon mein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin kay maalon mein mukarra hisa hay
Devnagri Urdu (Maududi)जिनके मालों में
عَرَبِيلِلسّائِلِ وَالمَحرومِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)माँगने वाले तथा वंचित के लिए।
Roman Urdu (Maududi)Saahil (maangne waley) aur mehroom ka ek haqq mukarrar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Mangnay walon ka bhi aur sawal say bachnay walon ka bhi
Devnagri Urdu (Maududi)साहिल (मांगने) वाले) और महरूम का एक हक़ मुकर्रर है
عَرَبِيوَالَّذينَ يُصَدِّقونَ بِيَومِ الدّينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जो बदले के दिन को सत्य मानते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo roz-e-jaza ko barhaq maante hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo insaf kay din per yaqeen rakhtay hein
Devnagri Urdu (Maududi)जो रोज़-ए-जज़ा को बरहक़ मानते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ هُم مِن عَذابِ رَبِّهِم مُشفِقونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जो अपने पालनहार की यातना से डरने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo apne Rubb ke azaab se darte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo apney rab kay azab say dertay rehtay hein
Devnagri Urdu (Maududi)जो अपने रब के अज़ाब से डरते हैं
عَرَبِيإِنَّ عَذابَ رَبِّهِم غَيرُ مَأمونٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय उनके पालनहार की यातना ऐसी चीज़ है, जिससे निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता।
Roman Urdu (Maududi)Kyunke unke Rubb ka azaab aisi cheez nahin hai jissey koi bekhauf ho
Roman Urdu (Junagarhi)Beshak un kay rab ka azab bekhof honay ki chez nahi
Devnagri Urdu (Maududi)क्योंकि उनके रब का अज़ाब ऐसी चीज़ नहीं है जिसमें कोई बेख़ौफ़ हो
عَرَبِيوَالَّذينَ هُم لِفُروجِهِم حافِظونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo apni sharmgahon ki hifazat karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo log apni sharm gahon ki (haram say)hifazat kertay hein
Devnagri Urdu (Maududi)जो अपनी शर्मगाहों की हिफ़ाज़त करते हैं
عَرَبِيإِلّا عَلىٰ أَزواجِهِم أَو ما مَلَكَت أَيمانُهُم فَإِنَّهُم غَيرُ مَلومينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सिवाय अपनी पत्नियों से या अपने स्वामित्व में आई दासियों से, तो निश्चय वे निंदनीय नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ba-juz apne biwiyon ya apni mamluka aurton ke jinse mehfooz na rakhne mein unpar koi malamat nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Han unki biwion aur londion kay bary mein jin kay wo malik hein.unhein koi malamat nahi
Devnagri Urdu (Maududi)बा-जुज़ अपने बीवीयों या अपनी ममलूका औरतों के जिनसे महफ़ूज़ ना रखने में उनपर कोई मलामत नहीं
عَرَبِيفَمَنِ ابتَغىٰ وَراءَ ذٰلِكَ فَأُولٰئِكَ هُمُ العادونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर जो इसके अलावा कुछ और चाहे, तो ऐसे ही लोग सीमा का उल्लंघन करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jo iske alawa kuch aur chahein wahi hadd se tajawuz karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ab jo koi is kay ilawa(rah)dhonday ga to asay log had say guzar janay walay hongay
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जो इसके अलावा कुछ और चाहे वही हद से तजावुज करने वाला है
عَرَبِيوَالَّذينَ هُم لِأَماناتِهِم وَعَهدِهِم راعونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जो अपनी अमानतों तथा अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रखने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo apne amanaton ki hifazat aur apne ahad (covenant) ka paas karte hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo apni amanton ka aur apney qol o qarar ka pass rakhtay hein
Devnagri Urdu (Maududi)जो अपने अमानतों की हिफाजत और अपने अहद (संविदा) का पास करते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ هُم بِشَهاداتِهِم قائِمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जो अपनी गवाहियों पर क़ायम रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo apni gawahiyon mein raast baazi (upright) par qayam rehte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo apni gawahion per sidhay aur qaim rehtay hein
Devnagri Urdu (Maududi)जो अपनी गवाही में रास्ते बाजी (सीधे) पर कायम रहते हैं
عَرَبِيوَالَّذينَ هُم عَلىٰ صَلاتِهِم يُحافِظونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जो अपनी नमाज़ की रक्षा करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo apni namaz ki hifazat karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo apni namazon ki hifazat kertay hein
Devnagri Urdu (Maududi)और जो अपनी नमाज की हिफाजत करते हैं
عَرَبِيأُولٰئِكَ في جَنّاتٍ مُكرَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वही लोग जन्नतों में सम्मानित होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log izzat ke saath jannat ke baaghon mei rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi log janton mein izat walay hongay
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग इज्जत के साथ जन्नत के बाघों में रहेंगे
عَرَبِيفَمالِ الَّذينَ كَفَروا قِبَلَكَ مُهطِعينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर इन काफ़िरों को क्या हुआ है कि वे आपकी ओर दौड़े चले आ रहे है?
Roman Urdu (Maududi)Pas aey Nabi , kya baat hai ke yeh munkirin dayein(left) aur bayein(right) se
Roman Urdu (Junagarhi)Pus kafoiron ko kia hogaya hay kay wo teri taraf dortay atay hein
Devnagri Urdu (Maududi)पास ऐ नबी, क्या बात है ये मुनकिरिन दायें(बाएं) और बायें(दाएं) से
عَرَبِيعَنِ اليَمينِ وَعَنِ الشِّمالِ عِزينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)दाएँ से और बाएँ से समूह के समूह।
Roman Urdu (Maududi)Giroh (crowds) dar giroh(crowds) tumhari taraf daude chale aa rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Daein aur baein say giroh kay giroh
Devnagri Urdu (Maududi)गिरोह (भीड़) दार गिरोह (भीड़) तुम्हारी तरफ दौड़े चले आ रहे हैं
عَرَبِيأَيَطمَعُ كُلُّ امرِئٍ مِنهُم أَن يُدخَلَ جَنَّةَ نَعيمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या उनमें से प्रत्येक व्यक्ति यह लालच रखता है कि उसे नेमत वाली जन्नत में दाखिल किया जाएगा?
Roman Urdu (Maududi)Kya inmein se har ek yeh lalaj rakhta hai ke woh niyamat bhari jannat mein daakhil kardiya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Kia in mein say her ik ki tawaqa yeh hay kay wo nematon wali janat mein dakhil kia jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इनमें से हर एक ये लालज रखता है के वो नियामत भारी जन्नत में दाख़िल कर दिया जाएगा
عَرَبِيكَلّا ۖ إِنّا خَلَقناهُم مِمّا يَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कदापि नहीं, निश्चय हमने उन्हें उस चीज़ से पैदा किया है, जिसे वे जानते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin humne jis cheez se inko paida kiya hai usey yeh khud jaante hain
Roman Urdu (Junagarhi)(aisa) hergiz nahi ho ga hum ney unhein is(chez) say paida kia hay jiss say wo jantay hein
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज़ नहीं हमने जिस चीज़ से इनको पैदा किया है उसे ये खुद जानते हैं
عَرَبِيفَلا أُقسِمُ بِرَبِّ المَشارِقِ وَالمَغارِبِ إِنّا لَقادِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो मैं क़सम खाता हूँ पूर्वों (सूर्योदय के स्थानों) तथा पश्चिमों (सूर्यास्त के स्थानों) के रब की! निश्चय हम सक्षम हैं।
Roman Urdu (Maududi)Pas nahin, main qasam khata hoon mashrikon aur maghribon ke maalik ki hum ispar qadir hain
Roman Urdu (Junagarhi)Pus mujhy qasam hay mashrikon aur maghribon kay rab ki (kay)hum yaqeenan qadir hein
Devnagri Urdu (Maududi)पास नहीं, मैं कसम खाता हूं मशरिकों और मगरिबों के मालिक की हम इसपर कादिर हैं
عَرَبِيعَلىٰ أَن نُبَدِّلَ خَيرًا مِنهُم وَما نَحنُ بِمَسبوقينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कि उनके स्थान पर उनसे उत्तम लोग ले आएँ तथा हम विवश नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ke inki jagah insey behtar log le aayein aur koi humse baazi le jaane wala nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Is per kay in kay ewaz in say achay log lay ayein aur hum aajiz nahi hein
Devnagri Urdu (Maududi)के इनकी जगह इनसे बेहतर लोग ले आएं और कोई हमसे बाजी ले जाने वाला नहीं है
عَرَبِيفَذَرهُم يَخوضوا وَيَلعَبوا حَتّىٰ يُلاقوا يَومَهُمُ الَّذي يوعَدونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः आप उन्हें छोड़ दें कि वे व्यर्थ की बातों में लगे रहें तथा खेलते रहें, यहाँ तक कि उनका सामना उनके उस दिन से हो जाए, जिसका उनसे वादा किया जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza inhein apni behuda baaton aur apne khel mein pada rehne do yahan tak ke yeh apne us din ko pahunch jayenge jiska insey waada kiya ja raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus to inhein jagherta khelata chor day yahan ytak kay yeh apney us din say jamilein jis ka un say wada kia jata hay
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाजा इन्हें अपनी बेहुदा बातें और अपने खेल में पड़ा रहने दो यहां तक ​​के ये अपने हमें दिन को पाहुंच जाएंगे जिसका इनसे वादा किया जा रहा है
عَرَبِييَومَ يَخرُجونَ مِنَ الأَجداثِ سِراعًا كَأَنَّهُم إِلىٰ نُصُبٍ يوفِضونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन वे क़ब्रों से तेज़ी से बाहर निकलेंगे, जैसे कि वे किसी निशान की ओर दौड़े जा रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jab yeh apni qabron se nikal kar is tarah daude ja rahey hongey jaise apne buthon (idols) ke aasthano (altars) ki taraf daud rahey hon
Roman Urdu (Junagarhi)Jis din yeh qabron say dortay hoy niklein gay goya kay wo kisi jaga ki taraf tez tez jarahy hein
Devnagri Urdu (Maududi)जब ये अपने कब्रों से निकल कर इस तरह दउदे जा रहे होंगे जैसे अपने बुथों (मूर्तियों) के आस्थानो (वेदियों) की तरफ दौड़ रहे हों
عَرَبِيخاشِعَةً أَبصارُهُم تَرهَقُهُم ذِلَّةٌ ۚ ذٰلِكَ اليَومُ الَّذي كانوا يوعَدونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनकी निगाहें झुकी होंगी, उनपर अपमान छाया होगा। यही वह दिन है जिसका उनसे वादा किया जाता था।
Roman Urdu (Maududi)Inki nigahein jhuki hui hongi, zillat inpar chaa rahi hogi, woh din hai jiska insey wada kiya ja raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)In ki ankhein jhoki hoi hongi in per zilat charahi hon gi yeh hay wo din jis ka un say wada kia jata tha
Devnagri Urdu (Maududi)इनकी निगाहें झुकी होंगी, जिल्लत इनपर छा रही होगी, वो दिन है जिसका इनसे वादा किया जा रहा है
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Surah 70: Al-Ma'arij (The Ways of Ascent)

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Surah 70: Al-Ma'arij (The Ways of Ascent)

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Surah 70: Al-Ma'arij (The Ways of Ascent)

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Surah 70: Al-Ma'arij (The Ways of Ascent)

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Surah 71: Nuh (Noah)

Meccan🕐 Revelation #71📜 28 Verses🕮 Juz 1
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيإِنّا أَرسَلنا نوحًا إِلىٰ قَومِهِ أَن أَنذِر قَومَكَ مِن قَبلِ أَن يَأتِيَهُم عَذابٌ أَليمٌ
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने नूह़ को उनकी जाति की ओर भेजा कि अपनी जाति को सावधान कर दो, इससे पहले कि उनके पास दर्दनाक यातना आ जाए।
Roman Urdu (Maududi)Humne Nooh ko uski qaum ki taraf bheja (is hidayat ke saath) ke apni qaum ke logon ko khabardar karde qabl iske ke unpar ek dardnaak azaab aaye
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney Nooh(alh e salam)ko inki qom ki taraf bheja kay apni qom ko darado (aur khabaerdar kerdo) isss say pehlay kay inkay pass dardnak azab ajaye
Devnagri Urdu (Maududi)हमने नूह को उसकी कौम की तरफ भेजा (इस हिदायत के साथ) के अपनी क़ौम के लोगों को ख़बरदार बनाने वाला क़ब्ल इसके के ऊपर एक दर्दनाक अज़ाब आए
عَرَبِيقالَ يا قَومِ إِنّي لَكُم نَذيرٌ مُبينٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! निःसंदेह मैं तुम्हें स्पष्ट रूप से डराने वाला हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Usne kaha “ Aey meri qaum ke logon, main tumhare liye ek saaf saaf khabardar kardene wala (paighambar) hoon
Roman Urdu (Junagarhi)(Nooh alh e salam ney)kaha aey meri qom mein tumhein saaf saaf daranay wala hun
Devnagri Urdu (Maududi)उसने कहा “ ऐ मेरी क़ौम के लोगों, मैं तुम्हारे लिए एक साफ़ ख़बर बनाने वाला (पैगंबर) हूं
عَرَبِيأَنِ اعبُدُوا اللَّهَ وَاتَّقوهُ وَأَطيعونِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कि अल्लाह की इबादत करो तथा उससे डरो और मेरी बात मानो।
Roman Urdu (Maududi)(Tumko aagah karta hoon) ke Allah ki bandagi karo aur ussey daro aur meri itaat (follow) karo
Roman Urdu (Junagarhi)Kay tum Allah ki ibadat kero aur issi say daro aur mera kaha maano
Devnagri Urdu (Maududi)(तुमको आगाह करता हूं) के अल्लाह की बंदगी करो और उसे डरो और मेरी इताअत (फॉलो) करो
عَرَبِييَغفِر لَكُم مِن ذُنوبِكُم وَيُؤَخِّركُم إِلىٰ أَجَلٍ مُسَمًّى ۚ إِنَّ أَجَلَ اللَّهِ إِذا جاءَ لا يُؤَخَّرُ ۖ لَو كُنتُم تَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह तुम्हारे लिए तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा तथा तुम्हें एक निर्धारित समय तक मोहलत देगा। निश्चय जब अल्लाह का निर्धारित समय आ जाता है, तो वह टाला नहीं जाता, काश कि तुम जानते होते।
Roman Urdu (Maududi)Allah tumhare gunaahon se darguzar farmayega aur tumhein ek waqt-e-mukarrar tak baaki rakkhega. Haqeeqat yeh hai ke Allah ka mukarrar kiya hua waqt jab aa jata hai to phir taala nahin jata kaash tumhein iska ilm ho
Roman Urdu (Junagarhi)To wo tumhary gunha bukhsh day ga aur tumhein aik waqat mukarrera tak chor dega YaqeenanAllah ka wada jab aajata hay to moakhir nahi hota kaash kay tumhien samjh hoti
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह तुम्हारे गुनाहों से दरगुजर फरमाएगा और तुम्हें एक वक्त-ए-मुकर्रर तक बाकी रखेगा। हकीकत ये है के अल्लाह का मुकर्रर किया हुआ वक्त जब आ जाता है तो फिर ताला नहीं जाता काश। तुम्हें इसका इल्म हो
عَرَبِيقالَ رَبِّ إِنّي دَعَوتُ قَومي لَيلًا وَنَهارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने कहा : ऐ मेरे रब! निःसंदेह मैंने अपनी जाति को रात-दिन बुलाया।
Roman Urdu (Maududi)Usne arz kiya “Aey mere Rubb , maine apni qaum ke logon ko shab-o-roz (night and day) pukara
Roman Urdu (Junagarhi)(nooh alh e salam ney) kaha aey mery perwardigar!mein ney apni qom ko raat din teri taraf bulaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसने अर्ज़ किया “ऐ मेरे रब, मैंने अपनी क़ौम के लोगों को शब-ओ-रोज़ (रात और दिन) पुकारा
عَرَبِيفَلَم يَزِدهُم دُعائي إِلّا فِرارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो मेरे बुलाने से ये लोग और ज़्यादा भागने लगे।
Roman Urdu (Maududi)Magar meri pukar ne unke farar hi mei izafa kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Mager meray bulanay say yeh log aur ziyada bhagnay lagay
Devnagri Urdu (Maududi)मगर मेरी पुकार ने उनको फ़रार ही में इज़ाफ़ा किया
عَرَبِيوَإِنّي كُلَّما دَعَوتُهُم لِتَغفِرَ لَهُم جَعَلوا أَصابِعَهُم في آذانِهِم وَاستَغشَوا ثِيابَهُم وَأَصَرّوا وَاستَكبَرُوا استِكبارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह मैंने जब भी उन्हें बुलाया, ताकि तू उन्हें क्षमा कर दे, तो उन्होंने अपनी उँगलियाँ अपने कानों में डाल लीं तथा अपने कपड़े ओढ़ लिए और हठ दिखाया और बड़ा घमंड किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab bhi maine unko bulaya taa-ke tu unhein maaf karde , unhon ne kaano mein ungliyan thoos li aur apne kapdon se mooh dhaank liye aur apni rawish par adh gaye aur bada takabbur (proudness) kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Mein ney jab khabi unhein teri bakhsish kay liye bulaya unhon ney apni ungliyan apney kaano mein daal lein aur apney kapron ko orh liya aur urh gaye aur bara takabur kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और जब भी मैंने उनको बुलाया ता-के तू उन्हें माफ़ करदे, उन्होन ने कानो में उंगलियां थूस ली और अपने कपडों से मुंह ढक लिया और अपनी रवीश पर आधा हो गए और बड़ा तकब्बुर (गर्व) किया
عَرَبِيثُمَّ إِنّي دَعَوتُهُم جِهارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर निःसंदेह मैंने उन्हें खुल्ल-मखुल्ला बुलाया।
Roman Urdu (Maududi)Phir maine unko haanke pukarey (openly) ki dawat di
Roman Urdu (Junagarhi)Phir mein ney unhein ba-awaz buland bulaya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर मैंने उनको हांके पुकारे (खुले तौर पर) की दावत दी
عَرَبِيثُمَّ إِنّي أَعلَنتُ لَهُم وَأَسرَرتُ لَهُم إِسرارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर निःसंदेह मैंने उन्हें उच्च स्वर में आमंत्रित किया और मैंने उन्हें चुपके-चुपके (भी) समझाया।
Roman Urdu (Maududi)Phir maine aelaniya (publicly) bhi unko tableeg ki aur chupke chupke bhi samjhaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur beshak mein ney insay elaaniya bhi kaha aur chupkay chupkay bhi
Devnagri Urdu (Maududi)फिर मैंने एलानिया (सार्वजनिक रूप से) भी उनको तबलीग की और चुपके चुपके भी समझा
عَرَبِيفَقُلتُ استَغفِروا رَبَّكُم إِنَّهُ كانَ غَفّارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो मैंने कहा : अपने पालनहार से क्षमा माँगो। निःसंदेह वह बहुत क्षमा करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Maine kaha apne Rubb se maafi maango,beshak woh bada maaf karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mein ney kaha kay apney rab say apney gunha bakhswao(aur maafi mango)wo yaqeenan bara bakhsnay wala hay
Devnagri Urdu (Maududi)मैंने कहा अपने रब से माफ़ी मांगो,बेशक वो बड़ा माफ़ करने वाला है
عَرَبِييُرسِلِ السَّماءَ عَلَيكُم مِدرارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह तुम पर मूसलाधार बारिश बरसाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Woh tumpar aasmaan se khoob baarishein barsayega
Roman Urdu (Junagarhi)Wo tum per aasman ko khob barsata hua chor dega
Devnagri Urdu (Maududi)वो तुम्हारे आसमान से ख़ूब बारिशें बरसाएगा
عَرَبِيوَيُمدِدكُم بِأَموالٍ وَبَنينَ وَيَجعَل لَكُم جَنّاتٍ وَيَجعَل لَكُم أَنهارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वह तुम्हें धन और बच्चों में वृद्धि प्रदान करेगा तथा तुम्हारे लिए बाग़ बना देगा और तुम्हारे लिए नहरें निकाल देगा।
Roman Urdu (Maududi)Tumhein maal aur aulad se nawaze ga, tumhare liye baagh paida karega aur tumhare liye nehrein jaari kardega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tumhein khob pay dar pay maal aur olaad mein taraqi dega Aur tumhein baaghat dega aur tumharay liye nikaal dega
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हें माल और औलाद से नवाजे गा, तुम्हारे लिए बाग़ पैदा करेगा और तुम्हारे लिए नेहरेन जारी करदेगा
عَرَبِيما لَكُم لا تَرجونَ لِلَّهِ وَقارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह की महिमा से नहीं डरते?
Roman Urdu (Maududi)Tumhein kya ho gaya hai ke Allah ke liye tum kisi waqar (majesty) ki tawakku nahin rakhte
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhein kiya hogaya hay kay tum Allah ki bartari ki aqeedah nahi rakhtay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हें क्या हो गया है कि अल्लाह के लिए तुम किसी वकार (महिमा) की तवक्कू नहीं रखते
عَرَبِيوَقَد خَلَقَكُم أَطوارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि उसने तुम्हें विभिन्न चरणों में पैदा किया है।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke usne tarah tarah se tumhein banaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Halankay uss ney tumhein tarah tarah say paida kiya hay
Devnagri Urdu (Maududi)हालांके उसने तरह तरह से तुम्हें बनाया है
عَرَبِيأَلَم تَرَوا كَيفَ خَلَقَ اللَّهُ سَبعَ سَماواتٍ طِباقًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ने किस तरह ऊपर-तले सात आकाश बनाए?
Roman Urdu (Maududi)Kya dekhte nahin ho ke Allah ne kis tarah saat aasman teh-bar-teh banaye
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tum nahi dekhtay kay Allah Talah ney kiss tarah opper talay sath asman paida ker diey hein
Devnagri Urdu (Maududi)क्या देखते नहीं हो के अल्लाह ने किस तरह सात आसमान तह-बर-तह बनाया
عَرَبِيوَجَعَلَ القَمَرَ فيهِنَّ نورًا وَجَعَلَ الشَّمسَ سِراجًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उसने उनमें चाँद को प्रकाश बनाया और सूर्य को दीपक बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur unmein chand ko noor aur suraj ko chiraag banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur in mien chand ko khob jagmata banaya hai aur sooraj ko roshan chiragh banaya hay
Devnagri Urdu (Maududi)और उनमें चांद को नूर और सूरज को चिराग बनाया
عَرَبِيوَاللَّهُ أَنبَتَكُم مِنَ الأَرضِ نَباتًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ही ने तुम्हें धरती से (विशेष ढंग से) उगाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah ne tumko zameen se ajeeb tarah ugaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum ko zameen say aik (khass ehtimam say)ugaya hai(aur paida kiya hai)
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह ने तुमको ज़मीन से अजीब तरह उगया
عَرَبِيثُمَّ يُعيدُكُم فيها وَيُخرِجُكُم إِخراجًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर वह तुम्हें उसी में वापस ले जाएगा और तुम्हें (उसी से) निकालेगा।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh tumhein isi zameen mein wapas le jayega aur issey yakayak tumko nikal khada karega
Roman Urdu (Junagarhi)Phir tumhein issi mein lota leya jaeyga aur(aik khass tareeqay)say phir nikalay ga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो तुम्हें इसी ज़मीन में वापस ले जाएगा और इसे यकीनन तुमको निकल खड़ा करेगा
عَرَبِيوَاللَّهُ جَعَلَ لَكُمُ الأَرضَ بِساطًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह ने तुम्हारे लिए धरती को बिछौना बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah ne zameen ko tumhare liye farsh ki tarah bicha diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tumharay liye zameen ko Allah Taalaa ney farsh banadiya hay
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह ने ज़मीन को तुम्हारे लिए फर्श की तरह बिछा दिया
عَرَبِيلِتَسلُكوا مِنها سُبُلًا فِجاجًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ताकि तुम उसके विस्तृत मार्गों पर चलो।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke tum uske andar khule raaston mein chalo
Roman Urdu (Junagarhi)Takay tum uski kushada raahon mein chalo phiro
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के तुम उसके अंदर खुले रास्तों में चलो
عَرَبِيقالَ نوحٌ رَبِّ إِنَّهُم عَصَوني وَاتَّبَعوا مَن لَم يَزِدهُ مالُهُ وَوَلَدُهُ إِلّا خَسارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)नूह ने कहा : ऐ मेरे रब! निःसंदेह उन्होंने मेरी अवज्ञा की और उसका अनुसरण किया, जिसके धन और संतान ने उसकी क्षति ही को बढ़ाया।
Roman Urdu (Maududi)Nooh ne kaha “mere Rubb, unhon ne meri baat radd kardi aur un (raheeson) ki pairvi ki jo maal aur aulad paa kar aur zyada na murad ho gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Nooh(alh e salam) ney kaha aey meray perwardigar!in logon ney meri to nafarmani ki aur aison ki farmanbardari ki jinkay maal o olaad ney inko(yaqeenan)nuksan hi mein barhaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)नूह ने कहा “मेरे रब, उनहों ने मेरी बात रद्द करदी और उन (रहीसों) की जोड़ी की जो माल और औलाद पा कर और ज़्यादा ना मुराद हो गए हैं
عَرَبِيوَمَكَروا مَكرًا كُبّارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने बहुत बड़ी चाल चली।
Roman Urdu (Maududi)In logon ne bada bhaari makr (plot) ka jaal phaila rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur in logon ney bara sakht fareeb kiya
Devnagri Urdu (Maududi)इन लोगों ने बड़ा भारी मकर (प्लॉट) का जाल फैला रखा है
عَرَبِيوَقالوا لا تَذَرُنَّ آلِهَتَكُم وَلا تَذَرُنَّ وَدًّا وَلا سُواعًا وَلا يَغوثَ وَيَعوقَ وَنَسرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उन्होंने कहा : तुम अपने पूज्यों को कदापि न छोड़ना, और न कभी वद्द को छोड़ना, और न सुवाअ को और न यग़ूस और यऊक़ तथा नस्र को।
Roman Urdu (Maududi)Inhon ne kaha hargiz na chodo apne maboodon (deities) ko, aur na chodo Wadd aur Suwa ko aur na Yagus aur Yaook aur Nasr ko (idol names)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kaha unhon ney kay hergiz apney maaboodon ko na chorna aur na wad aur suwaa aur yaghoos aur yaooq aur nasar ko(chorna)
Devnagri Urdu (Maududi)इन्होन ने कहा हरगिज़ ना छोड़ो अपने मबूदोन (देवता) को, और ना छोड़ो वद्द और सुवा को और ना यगस और याऊक और नस्र को (मूर्ति के नाम)
عَرَبِيوَقَد أَضَلّوا كَثيرًا ۖ وَلا تَزِدِ الظّالِمينَ إِلّا ضَلالًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय उन्होंने बहुत-से लोगों को पथभ्रष्ट कर दिया। तथा तू अत्याचारियों की पथभ्रष्टता ही में वृद्धि कर।
Roman Urdu (Maududi)Inhon ne bahut logon ko gumraah kiya hai, aur tu bhi in zalimon ko gumrahi ke siwa kisi cheez mein tarakki na de
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unhon ney bohat say logon ko gumrah kiya (elaahi)tu in zaalimon ki gumrahi aur barha
Devnagri Urdu (Maududi)इन्होन ने बहुत लोगों को गुमराह किया है, और तू भी इन जालिमों को गुमराह के सिवा किसी चीज में तरक्की ना दे
عَرَبِيمِمّا خَطيئَاتِهِم أُغرِقوا فَأُدخِلوا نارًا فَلَم يَجِدوا لَهُم مِن دونِ اللَّهِ أَنصارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे अपने पापों के कारण डुबो दिए गए, फिर जहन्नम में डाल दिए गए, तो उन्होंने अल्लाह के सिवा अपने लिए कोई मदद करने वाले नहीं पाए।
Roman Urdu (Maududi)Apni khataon ki bina par hi woh garq(drown) kiye gaye aur Aag mein jhoonk diye gaye , phir unhon ne apne liye Allah se bachane wala koi madadgar na paya
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log ba sabab apney gunaahon kay dabo deygay aur jahanum mein phuncha diey gaye aur Allah kay siwa apna koi madadgar unhonay na paya
Devnagri Urdu (Maududi)अपनी खतों की बिना पर ही वो गर्क (डूबना) किए गए और आग में झुक गए, फिर उन्हें अपने लिए अल्लाह से बचाने वाला कोई मददगार ना पाया
عَرَبِيوَقالَ نوحٌ رَبِّ لا تَذَر عَلَى الأَرضِ مِنَ الكافِرينَ دَيّارًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा नूह़ ने कहा : ऐ मेरे रब! धरती पर (इन) काफ़िरों में से कोई रहने वाला न छोड़।
Roman Urdu (Maududi)Aur Nooh ne kaha “Mere Rubb, In kafiron mein se koi zameen par basne wala na chodh
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Nooh(alh e salam)ney kaha kay aey mery paalnay walay! To roy e zameen per kissi kafir ko rehnay sehnay wala na chor
Devnagri Urdu (Maududi)और नूह ने कहा "मेरे रब, इन काफिरों में से कोई ज़मीन पर बसने वाला ना छोड़
عَرَبِيإِنَّكَ إِن تَذَرهُم يُضِلّوا عِبادَكَ وَلا يَلِدوا إِلّا فاجِرًا كَفّارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यदि तू उन्हें छोड़े रखेगा, तो वे तेरे बंदों को पथभ्रष्ट करेंगे और दुराचारी एवं सख़्त काफ़िर ही को जन्म देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Agar tu ne inko chodh diya to yeh tere bandon ko gumraah karenge aur inki nasal se jo bhi paida hoga badkar aur sakht kafir hi hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Ager to enhen chor dega to (yaqeenan)yeh tery (aur)bandon ko(bhi)gumrah kardeingay aur yeh faajiron aur dheet kafiron hi ko janum deingay
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तू ने इन्हें छोड़ दिया तो ये तेरे बंदों को गुमराह" करेंगे और इनकी नाक से जो भी पैदा होगा बुरा और सख्त काफिर ही होगा
عَرَبِيرَبِّ اغفِر لي وَلِوالِدَيَّ وَلِمَن دَخَلَ بَيتِيَ مُؤمِنًا وَلِلمُؤمِنينَ وَالمُؤمِناتِ وَلا تَزِدِ الظّالِمينَ إِلّا تَبارًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ मेरे पालनहार! मुझे क्षमा करे दे, तथा मेरे माता-पिता को, और (हर) उस व्यक्ति को जो मेरे घर में मोमिन बन कर प्रवेश करे, तथा ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों को। और अत्याचारियों को विनाश के सिवाय किसी चीज़ में न बढ़ा।
Roman Urdu (Maududi)Mere Rubb, mujhey aur mere waldain ko aur har us shaks ko jo mere ghar mein momin ki haisiyat se dakhil hua hai, Aur sab momin mardon aur auraton ko maaf farma de, Aur zalimon ke liye halakat ke siwa kisi cheez mein izafa na kar
Roman Urdu (Junagarhi)Aey meray perwardigar!to mujhay aur meray maa baap aur jo eman ki halat mein meray ghar +mein aye aur tamam momin mardon aur auraton ko bakhsh dey aur kafiron ko siwaey barbadi key aur kissi baat mein na barha
Devnagri Urdu (Maududi)मेरे रब, मुझे और मेरे वाल्डेन को और हर उस शक्स को जो मेरे घर में मोमिन की किस्मत से दखल हुआ है, और सब मोमिन मर्दों और औरतों को माफ फरमा दे, और जालिमों के लिए हलाकत के सिवा किसी चीज़ में इज़ाफ़ा ना कर
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Surah 71: Nuh (Noah)

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Surah 71: Nuh (Noah)

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Surah 71: Nuh (Noah)

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Surah 71: Nuh (Noah)

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Surah 71: Nuh (Noah)

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Surah 72: Al-Jinn (The Jinn)

Meccan🕐 Revelation #40📜 28 Verses🕮 Juz 1
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Surah 72: Al-Jinn (The Jinn)

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Surah 72: Al-Jinn (The Jinn)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيقُل أوحِيَ إِلَيَّ أَنَّهُ استَمَعَ نَفَرٌ مِنَ الجِنِّ فَقالوا إِنّا سَمِعنا قُرآنًا عَجَبًا
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दें : मेरी ओर वह़्य की गई है कि जिन्नों के एक समूह ने (मेरे क़ुरआन पढ़ने को) ध्यान से सुना। फिर उन्होंने कहा : निःसंदेह हमने एक अद्भुत क़ुरआन सुना है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, kaho, meri taraf wahee (revelation) bheji gayi hai ke Jinno ke ek giroh (group) ne gaur se suna phir (jaa kar apne qaum ke logon se) kaha: “humne ek bada hi ajeeb Quran suna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey Muhammad (P.B.U.H)) aap keh dein kay mujhy wahi ki gai hay kay jinno ki ik jamat ney (quran)suna or kaha kay hum ney ajeeb quarn suna hay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, कहो, मेरी तरफ वही (रहस्योद्घाटन) भेजी गई है के जिन्नो के एक गिरोह (समूह) ने गौर से सुना फिर (जा कर अपने क़ौम के लोगों से) कहा: "हमने एक बड़ा ही अजीब कुरान सुना है
عَرَبِييَهدي إِلَى الرُّشدِ فَآمَنّا بِهِ ۖ وَلَن نُشرِكَ بِرَبِّنا أَحَدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो सीधी राह दिखाता है, तो हम उसपर ईमान ले आए और (अब) हम अपने पालनहार के साथ किसी को कभी साझी नहीं बनाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Jo raah-e-raast ki taraf rehnumayi karta hai is liye hum uspar iman le aaye hain aur ab hum hargiz apne Rubb ke saath kisi ko sharik nahin karenge
Roman Urdu (Junagarhi)Jo rah e rast ki tarf rahnumai kerta hay hum is per iman la chukay (ab)hum her giz kisi ko bhi apney rab ka sharek na banein gay
Devnagri Urdu (Maududi)जो राह-ए-रास्त की तरफ रहनुमाई करता है इसके लिए हम उसपर ईमान ले आए हैं और अब हम हरगिज अपने रुब के साथ किसी को शरीक नहीं करेंगे
عَرَبِيوَأَنَّهُ تَعالىٰ جَدُّ رَبِّنا مَا اتَّخَذَ صاحِبَةً وَلا وَلَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यह कि हमारे पालनहार की महिमा बहुत ऊँची है। उसने न (अपनी) कोई संगिनी (पत्नी) बनाई है और न कोई संतान।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke hamare Rubb ki shaan bahut aala-o-Arfa hai , usne kisi ko biwi ya beta nahin banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur beshak hamary rab ki shan bari buland hay aur na us ney kisi ko (apni) biwi banaya hay aur na beta
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के हमारे रुब की शान बहुत आला-ओ-अरफा है, उसने किसी को बीवी या बेटा नहीं बनाया
عَرَبِيوَأَنَّهُ كانَ يَقولُ سَفيهُنا عَلَى اللَّهِ شَطَطًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा यह कि हमारा मूर्ख अल्लाह के बारे में सत्य से हटी हुई बात कहा करता था।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke hamare nadaan log Allah ke barey mein bahut khilaf-e-haqq baatein karte rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay kehtay rahein hein hamary nadan logAllah kay bary mein bhat khilaf e haq batein
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के हमारे नादान लोग अल्लाह के बारे में बहुत खिलाफ-ए-हक़्क़ बातें करते रहते हैं
عَرَبِيوَأَنّا ظَنَنّا أَن لَن تَقولَ الإِنسُ وَالجِنُّ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यह कि हमने समझ रखा था कि मनुष्य और जिन्न अल्लाह पर हरगिज़ कोई झूठी बात नहीं बोलेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke humne samjha tha ke insaan aur jinn kabhi khuda ke baarey mein jhoot nahin bol sakte
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum to yehi samjhtay rahy kay namumkin hay kay insan aur jinnat Allah per jhoti batein lagaein
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के हमने समझा था के इंसान और जिन्न कभी खुदा के बारे में झूठ नहीं बोल जैसे
عَرَبِيوَأَنَّهُ كانَ رِجالٌ مِنَ الإِنسِ يَعوذونَ بِرِجالٍ مِنَ الجِنِّ فَزادوهُم رَهَقًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वास्तविकता यह है कि मनुष्यों में से कुछ लोग, जिन्नों में से कुछ लोगों की शरण लिया करते थे। तो उन्होंने उन (जिन्नों) को सरकशी में बढ़ा दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke Insano mein se kuch log Jinno mein se kuch logon ki panaah (refuge) maanga karte thay, is tarah unhon ne Jinno ka guroor aur zyada badha diya
Roman Urdu (Junagarhi)Baat yeh hay kay chand insan baaz jinnat say panah talab kertay thy jiss say jinnat apnai serkashi mein aur barh gay
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के इंसानों ने भी वही गुमान किया
عَرَبِيوَأَنَّهُم ظَنّوا كَما ظَنَنتُم أَن لَن يَبعَثَ اللَّهُ أَحَدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यह कि उन (इनसानों) ने गुमान किया था, जैसे कि तुमने गुमान किया था कि अल्लाह किसी को कभी नहीं उठाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke insaano ne bhi wahi gumaan kiya jaisa tumhara gumaan tha ke Allah kisi ko Rasool bana kar na bhejega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (insano)ney bhi tum jino ki tarah guman ker liya tha kay Allah kisi ko na bhyjay ga(ye kisi ko dobara zinda an kery ga)
Devnagri Urdu (Maududi)
عَرَبِيوَأَنّا لَمَسنَا السَّماءَ فَوَجَدناها مُلِئَت حَرَسًا شَديدًا وَشُهُبًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा यह कि हमने आकाश को टटोला, तो उसे सख़्त पहरेदारों और उल्काओं से भरा हुआ पाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke humne aasman ko tatola to dekha ke woh pehray-daaron (terrible guards) se patha pada hai aur shahabon (shooting meteors) ki baarish ho rahi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney asman ko tatool ker dekha to ussy sakht chokidaron aur sakht sholon say pur paya
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के हमने आसमान को ततोला तो देखा के वो पहरे-दारों (भयानक रक्षकों) से पथ पड़ा है और शहाबों (शूटिंग उल्का) की बारिश हो रही है
عَرَبِيوَأَنّا كُنّا نَقعُدُ مِنها مَقاعِدَ لِلسَّمعِ ۖ فَمَن يَستَمِعِ الآنَ يَجِد لَهُ شِهابًا رَصَدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यह कि हम उसके कई स्थानों में सुनने के लिए बैठा करते थे। परन्तु, अब जो सुनने का प्रयास करता है, वह अपने लिए एक उल्का घात में लगा हुआ पाता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke pehle hum sun-gun lene ke liye aasman mei baithnay ki jagah paa lete thay, magar ab jo chori chupey sunne ke koshish karta hai woh apne liye ghaat mein ek shahabe saaqib (shooting meteors) laga hua paata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Iss say pehlay hum baatein suneinkay liye asman mein jagah jagah beth jaya kertay thy .jo bhi kan lagata hay wo ik sholay ko apni taak mein pata hay
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के पहले हम सूरज-गन लेने के लिए आसमान में बैठने की जगह पा लेते थे, मगर अब जो चोरी छुपे सुनने के लिए कोशिश करता है वो अपने लिए घाट में एक शहाबे साकिब (शूटिंग उल्का) लगा हुआ पाता है
عَرَبِيوَأَنّا لا نَدري أَشَرٌّ أُريدَ بِمَن فِي الأَرضِ أَم أَرادَ بِهِم رَبُّهُم رَشَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यह कि हम नहीं जानते कि क्या धरती वालों के साथ किसी बुराई का इरादा किया गया है या उनके पालनहार ने उनके साथ किसी भलाई का इरादा किया है?
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke hamari samajh mein na aata tha ke aaya zameen walon ke saath koi bura maamla karne ka irada kiya gaya hai ya unka Rubb unhein raah-e-raast dikhana chahta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hum nahi jantay kay zameen walon kay sath kisi burai ka irada kiya gaya hay ya in kay rab ka irada in kay sath bhalai ka hay
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के हमारी समझ में न आता था के आया ज़मीन वालों के साथ कोई बुरा मामला करने का इरादा किया गया है या उनका रब उन्हें राह-ए-रास्त दिखाना चाहता है
عَرَبِيوَأَنّا مِنَّا الصّالِحونَ وَمِنّا دونَ ذٰلِكَ ۖ كُنّا طَرائِقَ قِدَدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यह कि हममें से कुछ सदाचारी हैं तथा हममें से कुछ इसके अलावा हैं। हम विभिन्न तरीक़ों पर हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke hum mein se kuch log saleh (upright) hain aur kuch is se farotar hain, hum mukhtalif tareeqon (ways/factions) mein batey (divided) huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay(beshak)baaz to hum mein nekokar hein aur baaz iskay barakas bhi hein hum mukhtalif tareeqon say batay hoy hein
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के हम में से कुछ लोग सालेह (ईमानदार) हैं और कुछ इस से दूर हैं, हम मुख़्तलिफ़ तरीक़ों (तरीके/गुट) में बताए (विभाजित) हुए हैं
عَرَبِيوَأَنّا ظَنَنّا أَن لَن نُعجِزَ اللَّهَ فِي الأَرضِ وَلَن نُعجِزَهُ هَرَبًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यह कि हमें विश्वास हो गया कि निःसंदेह हम धरती में अल्लाह को कदापि विवश नहीं कर सकेंगे और न ही उसे भागकर कभी विवश कर सकेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Auy yeh ke hum samajhte thay ke na zameen mein hum Allah ko aajiz (frustrate) kar sakte hain aur na bhaag kar usey hara saktey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney samajh liya hay kay hum Allah Talah ko zameen mein hergiz aajiz nahi ker saktay aur na hum bhag ker issy hara saktay hein
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के हम समझते थे के ना ज़मीन में हम अल्लाह को अजीज (निराश) कर सकते हैं और ना भाग कर उसे हरा सकते हैं
عَرَبِيوَأَنّا لَمّا سَمِعنَا الهُدىٰ آمَنّا بِهِ ۖ فَمَن يُؤمِن بِرَبِّهِ فَلا يَخافُ بَخسًا وَلا رَهَقًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा यह कि जब हमने मार्गदर्शन की बात सुनी, तो उसपर ईमान ले आए। अब जो कोई अपने पालनहार पर ईमान लाएगा, तो वह न किसी हानि से डरेगा और न किसी अत्याचार से।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke humne jab hidayat ki taleem suni to hum uspar iman le aaye ab jo koi bhi apne Rubb par iman le aayega usey kisi haq-talfi ya zulm ka khauff na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Hum to hidayat ki bat suntay hi is per eman la chukay aur jo bhi apney rab per eman laye ga us say na kisi nuksan ka andesha hay na zulm-o-sitam ka
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के हमने जब हिदायत की तालीम सुनी तो हम उसपर ईमान ले आए अब जो कोई भी अपने रब पर ईमान ले आएगा उसे कोई हक़-तलफ़ी या ज़ुल्म का ख़ौफ़ ना होगा
عَرَبِيوَأَنّا مِنَّا المُسلِمونَ وَمِنَّا القاسِطونَ ۖ فَمَن أَسلَمَ فَأُولٰئِكَ تَحَرَّوا رَشَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यह कि हममें से कुछ आज्ञाकारी हैं और हममें से कुछ अत्याचारी हैं। फिर जो आज्ञाकारी हो गया, तो वही लोग हैं जिन्होंने सीधा रास्ता खोजा।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke hum mein se kuch muslim(Allah ke itaat guzar) hain aur kuch haqq se munharif (upright) to jinhon ne Islam (itaat ka raasta) ikhtiyar kar liya unhon ne najaat ki raah dhoond li
Roman Urdu (Junagarhi)Han hum mein baaz to musalman hein baaz be-insaf hein pus jo farmaberdar hogay unhon ney to raah-e-raast ka qasad kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के हम में से कुछ मुस्लिम (अल्लाह के इताअत गुज़र) हैं और कुछ हक़ से मुनहरिफ़ (ईमानदारी से) तो जिन्होन ने इस्लाम (इताअत का रास्ता) इख्तियार कर लिया उनहों ने नवाजत की राह ढूंढ ली
عَرَبِيوَأَمَّا القاسِطونَ فَكانوا لِجَهَنَّمَ حَطَبًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जो अत्याचारी हैं, तो वे जहन्नम का ईंधन होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo haqq se muhnarif hai woh jahannum ka indhan (fuel) banney wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo zalim hein wo jahanum ka endhen bangay
Devnagri Urdu (Maududi)और जो हक़ से मुहनरिफ़ है वो जहन्नुम का इंधन (ईंधन) बनाने वाला है
عَرَبِيوَأَن لَوِ استَقاموا عَلَى الطَّريقَةِ لَأَسقَيناهُم ماءً غَدَقًا
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हिन्दी (Al-Omari)और यह (वह़्य की गई है) कि यदि वे सीधी राह पर क़ायम रहते, तो हम उन्हें अवश्य भरपूर जल से सैराब करते।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Nabi kaho mujhpar yeh wahee bhi ki gayi hai ke) log agar raah-e-raast par sabit qadami (firmly) se chalte to hum unhein khoob sairaab karte (provide abundant rain)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (aey Nabi yeh bhi khay do )kay log raaah e rast per seedhay rehtay to yaqeenan hum enhein both waffir pani pilatay
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ नबी कहो मुझपर ये वही भी की गई है के) लोग अगर राह-ए-रास्त पर साबित क़दामी (दृढ़ता से) से चलते तो हम उन्हें खूब सैराब करते (प्रचुर मात्रा में बारिश प्रदान करते हैं)
عَرَبِيلِنَفتِنَهُم فيهِ ۚ وَمَن يُعرِض عَن ذِكرِ رَبِّهِ يَسلُكهُ عَذابًا صَعَدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ताकि हम उसमें उनका परीक्षण करें। और जो अपने पालनहार की याद से विमुख होगा, वह उसे कड़ी यातना में दाख़िल करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke is niyamat se unki aazmaish karein aur jo apne Rubb ke zikr se mooh modega uska Rubb usey sakht azaab mein mubtala kardega
Roman Urdu (Junagarhi)Takay hum iss munhein azmalein aur jo sahks apney perwedigar kay zikar say mun pherlay ga to Allah Talah ussay sakht azab mein mubtila kerdayga
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के इस नियामत से उनकी आजमाइश करें और जो अपने रब के जिक्र से मुंह मोड़ेगा उसका रब उसे सख्त अजाब में मुबतला कर देगा
عَرَبِيوَأَنَّ المَساجِدَ لِلَّهِ فَلا تَدعوا مَعَ اللَّهِ أَحَدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यह कि मस्जिदें केवल अल्लाह के लिए हैं। अतः अल्लाह के साथ किसी को भी मत पुकारो।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke masjidein Allah ke liye hai, lihaza unmein Allah ke saath kisi aur ko na pukaro
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh kay mesjidein sirf Allah hi kay liye khass hein pus Allah Talah kay sath kissi aur ko na pukaro
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के मस्जिद अल्लाह के लिए है, लिहाजा उन्मेन अल्लाह के साथ किसी और को ना पुकारो
عَرَبِيوَأَنَّهُ لَمّا قامَ عَبدُ اللَّهِ يَدعوهُ كادوا يَكونونَ عَلَيهِ لِبَدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यह कि जब अल्लाह का बंदा उसे पुकारता हुआ खड़ा हुआ, तो निकट था कि वे उनपर जत्थे बनकर टूट पड़ते।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh ke jab Allah ka banda usko pukarne ke liye khada hua to log uspar toot padne ke liye tayyar ho gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab Allah ka banda uss ki ibadat kay liye khara hoa to qareeb tha kay wo bheer ki bheer ban ker uss per pal paren
Devnagri Urdu (Maududi)और ये के जब अल्लाह का बंदा उसको पुकारने के लिए खड़ा हुआ तो लोग उसपर टूट पड़ें के लिए तैयार हो गए
عَرَبِيقُل إِنَّما أَدعو رَبّي وَلا أُشرِكُ بِهِ أَحَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : मैं तो केवल अपने पालनहार को पुकारता हूँ और उसके साथ किसी को साझी नहीं ठहराता।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi ,kaho ke main to apne Rubb ko pukarta hoon aur uske saath kisi ko sharik nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Aap keh dijey kay mein to sirf apney rab hi ko pukarta hon aur iss kay sath kissi ko shareek nahi banata
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, कहो के मैं तो अपने रब को पुकारता हूं और उसके साथ किसी को शरीक नहीं करता
عَرَبِيقُل إِنّي لا أَملِكُ لَكُم ضَرًّا وَلا رَشَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए न किसी हानि का अधिकार रखता हूँ और न किसी भलाई का।
Roman Urdu (Maududi)Kaho main tum logon keliye na kisi nuksan ka ikhtiyar rakhta hoon na kisi bhalayi ka
Roman Urdu (Junagarhi)Keh dijey kay mujhy tumhary kissi nuksan nafa ka ikhtiyar nahi
Devnagri Urdu (Maududi)कहो मैं तुम लोगों के लिए ना किसी नुक्सान का इख्तियार रखता हूं ना किसी को भलाई का
عَرَبِيقُل إِنّي لَن يُجيرَني مِنَ اللَّهِ أَحَدٌ وَلَن أَجِدَ مِن دونِهِ مُلتَحَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : निश्चय मुझे कदापि कोई अल्लाह से नहीं बचा सकेगा और न मैं उसके सिवा कभी कोई शरण का स्थान पाऊँगा।
Roman Urdu (Maududi)Kaho mujhey Allah ki giraft se koi nahin bacha sakta aur na main uske daaman ke siwa koi jaye panaah (refuge) paa sakta hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Kehdijey kay mujhy hergiz koi Allah say bacha nahi sakta aur mein hergiz uss kay siwa koi jay e panah bhi paa nahi sakta
Devnagri Urdu (Maududi)कहो मुझे अल्लाह की गिरफ्त से कोई नहीं बचा सकता और ना मैं उसके दामन के सिवा कोई जाए पनाह (शरण) पा सकता हूं
عَرَبِيإِلّا بَلاغًا مِنَ اللَّهِ وَرِسالاتِهِ ۚ وَمَن يَعصِ اللَّهَ وَرَسولَهُ فَإِنَّ لَهُ نارَ جَهَنَّمَ خالِدينَ فيها أَبَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)परंतु (मैं तो केवल) अल्लाह के आदेश पहुँचाने और उसके संदेशों का (अधिकार रखता हूँ)। और जो अल्लाह तथा उसके रसूल की अवज्ञा करेगा, तो निश्चय उसी के लिए जहन्नम की आग है, जिसमें वे हमेशा के लिए रहने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Mera kaam iske siwa kuch nahin hai ke Allah ki baat aur uske paighamaat pahuncha doon. Ab jo bhi Allah aur uske Rasool ki baat na maanega uske liye jahannum ki aag hai aur aisey log usmein hamesha rahenge
Roman Urdu (Junagarhi)Albata (mera kam) Allah ki baat aur iss kay peghamaat(logon ko)phuncha dena hia(abb)jo bhi Allah aur uss kay rasool kin a maanay ga uss kay liye jahanum ki aag hai jiss mein aisay log hamesha rahengay
Devnagri Urdu (Maududi)मेरा काम इसको सिवा कुछ नहीं है के अल्लाह की बात और उसको पैग़ामात पाहुंचा दूं। अब जो भी अल्लाह और उसके रसूल की बात न मानेगा उसके लिए जहन्नुम की आग है और ऐसे लोग उसमें हमेशा रहेंगे
عَرَبِيحَتّىٰ إِذا رَأَوا ما يوعَدونَ فَسَيَعلَمونَ مَن أَضعَفُ ناصِرًا وَأَقَلُّ عَدَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि जब वे उस चीज़ को देख लेंगे, जिसका उनसे वादा किया जाता है, तो अवश्य जान लेंगे कि कौन है जो सहायक की दृष्टि से अधिक कमज़ोर है और जो संख्या में अधिक कम है?
Roman Urdu (Maududi)(Yeh log apni is rawish se baaz na aayenge) yahan tak ke jab us cheez ko dekh lenge jiska inse waada kiya ja raha hai to inhein maloom ho jayega ke kiske madadgaar kamzoar hain aur kiska jattha (group) taadad mein kam hai
Roman Urdu (Junagarhi)(unki aankh na khulaygi)Yahan tak kay ussay dekhlen jiss ka unko wada diya jata hia pus unqareeb jaan lengay kay kiss ki jamat kum hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ये लोग अपनी इस रवीश से बाज़ न आएंगे) यहां तक ​​के जब हमें चीज को देख लेंगे जिसका इनसे वादा किया जा रहा है तो इन्हें मालूम हो जाएगा के किसके मददगार कमज़ोर हैं और किसका जत्था (समूह) तदाद में कम है
عَرَبِيقُل إِن أَدري أَقَريبٌ ما توعَدونَ أَم يَجعَلُ لَهُ رَبّي أَمَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप कह दें : मैं नहीं जानता कि जिस चीज़ का तुमसे वादा किया जाता है, वह निकट है अथवा मेरा पालनहार उसके लिए कोई अवधि निर्धारित करेगा?
Roman Urdu (Maududi)Kaho, main nahin jaanta ke jis cheez ka waada tumse kiya ja raha hai woh qareeb hai ya mera Rubb uske liye koi lambi muddat muqarrar famata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kehdijey kay mujhy maloom nahi kay jiss ka wada tum say kiya jata hai wo qareeb hia ya mera rab uss kay liye door ki muddat mukarrer keryga
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, मैं नहीं जानता के जिस चीज़ का वादा तुमसे किया जा रहा है वो करीब है या मेरा रब उसके लिए कोई लंबी मुद्दत मुक़र्रर फ़माता है
عَرَبِيعالِمُ الغَيبِ فَلا يُظهِرُ عَلىٰ غَيبِهِ أَحَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)वही ग़ैब (प्रोक्ष) का जानने वाला है। वह अपने ग़ैब (प्रोक्ष) को किसी पर प्रकट नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Woh aalimul gaib hai , apne gaib par kisi ko muttala (reveal/disclose) nahin karta
Roman Urdu (Junagarhi)Wo ghaib ka jannay wala hai aur apney ghaib per kisi ko mutlaa nahi kerta
Devnagri Urdu (Maududi)वो अलीमुल गैब है, अपने गैब पर किसी को मुत्तला (खुलासा/खुलासा) नहीं करता
عَرَبِيإِلّا مَنِ ارتَضىٰ مِن رَسولٍ فَإِنَّهُ يَسلُكُ مِن بَينِ يَدَيهِ وَمِن خَلفِهِ رَصَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)सिवाय किसी रसूल के, जिसे वह पसंद कर ले। तो निःसंदेह वह उसके आगे तथा उसके पीछे पहरेदार नियुक्त कर देता है।
Roman Urdu (Maududi)Siwai us Rasool ke jisey usne (gaib ka koi ilm dene ke liye) pasand karliya ho, to uske aagey aur pichey woh muhafiz (guards) laga deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Siwaey uss peyghamber kay jissay wo pasand kerley lekin usskay bhi aagay pechay pehraydar muqarrer kerdyta hai
Devnagri Urdu (Maududi)सिवाय उस रसूल के जिसने हमें (गाइब का कोई इल्म देने के लिए) पसंद किया हो, तो उसके आगे और पीछे वो मुहाफिज (रक्षक) लगा देता है
عَرَبِيلِيَعلَمَ أَن قَد أَبلَغوا رِسالاتِ رَبِّهِم وَأَحاطَ بِما لَدَيهِم وَأَحصىٰ كُلَّ شَيءٍ عَدَدًا
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि वह जान ले कि उन्होंने वास्तव में अपने पालनहार के संदेश पहुँचा दिए हैं। और उसने उन सभी चीज़ों को घेर रखा है, जो उनके पास हैं और प्रत्येक वस्तु को गिन रखा है।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke woh jaan le ke unhon ne apne Rubb ke paighamaat pahuncha diye, aur woh unke poorey maahol ka ihata (encompass) kiye huey hai aur ek ek cheez ko usne gin rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Takay unkay apney rab kay paygham phoncha denay ka ilm hojaey.Allah talah ney unkay aas pass (ki tamam cheezon )ka ehaata ker rakha hai aur her cheez ki gintee ka shumaar ker rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के वो जान ले के उन्होन ने अपने रुब के पैगामात पहन दिए, और वो उनके पूरे महोल का इहाता (घेरें) किए हुए हैं और एक एक चीज को उसने जिन रक्खा है
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Surah 72: Al-Jinn (The Jinn)

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Surah 72: Al-Jinn (The Jinn)

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Surah 72: Al-Jinn (The Jinn)

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Surah 72: Al-Jinn (The Jinn)

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Surah 72: Al-Jinn (The Jinn)

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Surah 73: Al-Muzzammil (The One Covering Himself)

Meccan🕐 Revelation #3📜 20 Verses🕮 Juz 1
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Surah 73: Al-Muzzammil (The One Covering Himself)

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Surah 73: Al-Muzzammil (The One Covering Himself)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِييا أَيُّهَا المُزَّمِّلُ
हिन्दी (Al-Omari)ऐ कपड़े में लिपटने वाले!
Roman Urdu (Maududi)Aey oad lapet kar (enwrapped ) sone waley
Roman Urdu (Junagarhi)Aey kapray mein lipatnay walay
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ ओद लपेट कर (लिपटा हुआ) सोने वाले
عَرَبِيقُمِ اللَّيلَ إِلّا قَليلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)रात्रि के समय (नमाज़ में) खड़े रहें, सिवाय उसके थोड़े भाग के।
Roman Urdu (Maududi)Raat ko namaz mein khade raha karo magar kam
Roman Urdu (Junagarhi)Rat (kay waqat namaz) mein khary hojao mager kam
Devnagri Urdu (Maududi)रात को नमाज में खड़े रहा करो मगर कम
عَرَبِينِصفَهُ أَوِ انقُص مِنهُ قَليلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आधी रात (नमाज़ पढ़ें) अथवा उससे थोड़ा-सा कम कर लें।
Roman Urdu (Maududi)Aadhi Raat
Roman Urdu (Junagarhi)Adhi rat ya is say bhi kuch kam kerly
Devnagri Urdu (Maududi)आधी रात
عَرَبِيأَو زِد عَلَيهِ وَرَتِّلِ القُرآنَ تَرتيلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)या उससे कुछ अधिक कर लें। और क़ुरआन को ठहर-ठहर कर पढ़ें।
Roman Urdu (Maududi)Ya issey kuch kam karlo ya issey kuch zyada badha do, aur Quran ko khoob tehar tehar kar padho
Roman Urdu (Junagarhi)Ya is per barha dy aur quran ko thehar thehar kar (saf )parha ker
Devnagri Urdu (Maududi)या इस्से कुछ काम करलो या इस्से कुछ ज्यादा बढ़ा दो, और कुरान को खूब तेहर तेहर कर पढ़ो
عَرَبِيإِنّا سَنُلقي عَلَيكَ قَولًا ثَقيلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय हम आपपर (ऐ नबी!) एक भारी वाणी (क़ुरआन) उतारेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Hum tumpar ek bhari kalam nazil karne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum tuj per bohat bhari bat anqareeb nazil kerein gay
Devnagri Urdu (Maududi)हम तुम्पर एक भारी कलाम नाज़िल करने वाले हैं
عَرَبِيإِنَّ ناشِئَةَ اللَّيلِ هِيَ أَشَدُّ وَطئًا وَأَقوَمُ قيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह रात की इबादत हृदय में अधिक प्रभावी होती है और बात के लिए अधिक उपयुक्त होती है।
Roman Urdu (Maududi)Dar haqeeqat raat ka uthna nafs par qaabu paney ke liye bahut kaargar aur Quran theek padhne ke liye zyada mauzu (suitable) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Beshak rat ka uthna dil jamai kay liye intehai munasib hay aur bat ko bohat durust ker daynay wala hay
Devnagri Urdu (Maududi)दर हकीकत रात का उठना नफ्स पर काबू पाने के लिए बहुत जरूरी और कुरान ठीक पढ़ने के लिए ज्यादा मौजू (उपयुक्त) है
عَرَبِيإِنَّ لَكَ فِي النَّهارِ سَبحًا طَويلًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आपके लिए दिन में बहुत-से कार्य हैं।
Roman Urdu (Maududi)Din ke auqat mein to tumhare liye bahut masrufiyat (prolonged occupation) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeena tujhay din mein bohat shughal rahta hay
Devnagri Urdu (Maududi)दिन के औकात में तो तुम्हारे लिए बहुत मसरुफियत (लंबे समय तक कब्जा) है
عَرَبِيوَاذكُرِ اسمَ رَبِّكَ وَتَبَتَّل إِلَيهِ تَبتيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और अपने पालनहार के नाम का स्मरण करें और सबसे अलग होकर उसी की ओर ध्यान आकर्षित कर लें।
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ke naam ka zikr kiya karo aur sabse katt kar usi ke ho raho
Roman Urdu (Junagarhi)To apney rab kay nam ka ziakr kiya ker aur tamam khalaiq say kat ker us ki taraf mutawajha ho ja
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब के नाम का जिक्र किया करो और सबसे कट कर उसी के हो रहो
عَرَبِيرَبُّ المَشرِقِ وَالمَغرِبِ لا إِلٰهَ إِلّا هُوَ فَاتَّخِذهُ وَكيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)वह पूर्व तथा पश्चिम का पालनहार है। उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। अतः तुम उसी को अपना कार्यसाधक बना लो।
Roman Urdu (Maududi)Woo mashrik (east) o magrib (west) ka maalik hai, uske siwa koi khuda nahin hai, lihaza usi ko apna wakeel bana lo
Roman Urdu (Junagarhi)Mashriq o maghrib ka perwardigar jis ka koi maabood nahi to usko apna karsaz bana lay
Devnagri Urdu (Maududi)वू मशरिक (पूर्व) ओ मगरिब (पश्चिम) का मालिक है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, उसे अपना वकील बना लो
عَرَبِيوَاصبِر عَلىٰ ما يَقولونَ وَاهجُرهُم هَجرًا جَميلًا
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हिन्दी (Al-Omari)और जो कुछ वे कह रहे हैं, उसपर धैर्य से काम लें और उन्हें अच्छे ढंग से छोड़ दें।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo baatein log bana rahey hain unpar sabr karo aur sharafat ke saath unse alag ho jao
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo kuch wo kahy to sehta rah aur wazedari kay sath un say alag thalag rah
Devnagri Urdu (Maududi)और जो बातें लोग बना रहे हैं उन पर सब्र करो और शराफत के साथ उनसे अलग हो जाओ
عَرَبِيوَذَرني وَالمُكَذِّبينَ أُولِي النَّعمَةِ وَمَهِّلهُم قَليلًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा मुझे और इन झुठलाने वाले संपन्न लोगों को छोड़ दें और उन्हें थोड़ी-सी मोहलत दें।
Roman Urdu (Maududi)In jhutlane waley khush haal logon se nimatne ka kaam tum mujhpar chodh do aur inhein zara kuch dair isi halat par rehne do
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mujhy aur in jhotlanay waly asoda hal logon ko chor day aur inhein zara si muhlat dy
Devnagri Urdu (Maududi)झूठलाने वाले खुश हाल लोगों से निमत्ने का काम तुम मुझपर छोड़ दो और यहीं ज़रा कुछ देर इसी हालत पर रहने दो
عَرَبِيإِنَّ لَدَينا أَنكالًا وَجَحيمًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमारे पास बेड़ियाँ हैं तथा भड़कती हुई आग।
Roman Urdu (Maududi)Hamarey paas (inke liye) bhaari bediyan hain aur bhadakti hui aag
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hamary han sakht biriyan hein aur sulagti haoi jahanum hay
Devnagri Urdu (Maududi)हमारे पास (इनके लिए) भारी बेड़ियां हैं और भड़कती हुई आग
عَرَبِيوَطَعامًا ذا غُصَّةٍ وَعَذابًا أَليمًا
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हिन्दी (Al-Omari)और गले में फँस जाने वाला भोजन तथा दर्दनाक यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Aur halaq(throat) mein phasne wala khana aur dard-naak azaab
Roman Urdu (Junagarhi)Aur halq mein atakney wala khana hay aur dard deney wal azb
Devnagri Urdu (Maududi)और हलक (गले) में फ़ंसने वाला खाना और दर्द-नाक अज़ाब
عَرَبِييَومَ تَرجُفُ الأَرضُ وَالجِبالُ وَكانَتِ الجِبالُ كَثيبًا مَهيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन धरती और पर्वत काँप उठेंगे तथा पर्वत गिराई हुई रेत के ढेर हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh us din hoga jab zameen aur pahad laraz uthengey aur pahadon ka haal aisa ho jaeyga jaise reit (sand) ke dhair hai jo bhikhre ja rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din zamen aur pahar thar thara jaein gzy aur phaar missal bhor bhori rait kay telon kay hojaein gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये हमारा दिन होगा जब ज़मीन और पहाड़ दर्द उठेंगे और पहाड़ों का हाल ऐसा हो जाएगा जैसे रेत (रेत) के ढेर है जो बिखर जा रहे हैं
عَرَبِيإِنّا أَرسَلنا إِلَيكُم رَسولًا شاهِدًا عَلَيكُم كَما أَرسَلنا إِلىٰ فِرعَونَ رَسولًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने तुम्हारी ओर एक रसूल भेजा, जो तुमपर गवाही देने वाला है, जिस प्रकार हमने फ़िरऔन की ओर एक रसूल भेजा।
Roman Urdu (Maududi)Tum logon ke paas humne usi tarah ek rasool tum par gawah bana kar bheja hai jis tarah humne Firaun ki taraf ek rasool bheja tha
Roman Urdu (Junagarhi)Beshak hum ney tumhari taraf bhi tum per gawahi dynay wala rasool bhyj diya hay jaisa kay hum ney firoon kay pass rasol bhyja tha
Devnagri Urdu (Maududi)तुम लोगों के पास हमने उसकी तरह एक रसूल तुम पर गवाह बना कर भेजा है जिस तरह हमने फिरौन की तरफ एक रसूल भेजा था
عَرَبِيفَعَصىٰ فِرعَونُ الرَّسولَ فَأَخَذناهُ أَخذًا وَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)चुनाँचे फ़िरऔन ने उस रसूल की अवज्ञा की, तो हमने उसकी बड़ी सख़्त पकड़ की।
Roman Urdu (Maududi)(Phir dekhlo ke jab ) Firaun ne us Rasool ki baat na maani to humne usko badi sakhti kay saath pakad liya
Roman Urdu (Junagarhi)To firoon ney us rasol kin a frmani ki to hum ney usy sakht (wabal ki)pakar mein paker liya
Devnagri Urdu (Maududi)(फिर देखलो के जब) फिरौन ने हमें रसूल की बात ना मानी तो हमने उसको बड़ी ताकत के साथ पकड़ लिया
عَرَبِيفَكَيفَ تَتَّقونَ إِن كَفَرتُم يَومًا يَجعَلُ الوِلدانَ شيبًا
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हिन्दी (Al-Omari)फिर तुम कैसे बचोगे, यदि तुमने कुफ्र किया, उस दिन से जो बच्चों को बूढ़े कर देगा?
Roman Urdu (Maududi)Agar tum maan-ne se inkar karoge to us din kaisey bach jaogey jo bacchon ko boodha kardega
Roman Urdu (Junagarhi)Tum ager kafir rahy to usdin kaisy panah pao gay jo din bachon ko burha ker day ga
Devnagri Urdu (Maududi)अगर तुम मान-ने से इनकार करोगे तो उस दिन कैसे बच जाओगे जो बच्चों को बूढ़ा कर देगा
عَرَبِيالسَّماءُ مُنفَطِرٌ بِهِ ۚ كانَ وَعدُهُ مَفعولًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन आकाश फट जाएगा। उसका वादा पूरा होकर रहेगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur jiski sakhti se aasman phata ja raha hoga?Allah ka wada to poora hokar hi rehna hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss dion asman phat jaey ga Allh Talah ka yeh wada ho ker hi rahnay wala hay
Devnagri Urdu (Maududi)और जिसकी ताकत से आसमान फटा जा रहा होगा?अल्लाह का वादा तो पूरा होकर हाय रहना है
عَرَبِيإِنَّ هٰذِهِ تَذكِرَةٌ ۖ فَمَن شاءَ اتَّخَذَ إِلىٰ رَبِّهِ سَبيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय यह एक उपदेश है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर रास्ता बना ले।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ek nasihat hai , ab jiska jee chahey apne Rubb ki taraf janey ka rasta ikhtiyar karle
Roman Urdu (Junagarhi)Beshak yeh nasehat hay pus jo chahey apney rab ki taraf rah ikhtiyar keray
Devnagri Urdu (Maududi)ये एक हिदायत है, अब जिसका जी चाहिए अपने रब की तरफ जाने का रास्ता इख्तियार करले
عَرَبِي۞ إِنَّ رَبَّكَ يَعلَمُ أَنَّكَ تَقومُ أَدنىٰ مِن ثُلُثَيِ اللَّيلِ وَنِصفَهُ وَثُلُثَهُ وَطائِفَةٌ مِنَ الَّذينَ مَعَكَ ۚ وَاللَّهُ يُقَدِّرُ اللَّيلَ وَالنَّهارَ ۚ عَلِمَ أَن لَن تُحصوهُ فَتابَ عَلَيكُم ۖ فَاقرَءوا ما تَيَسَّرَ مِنَ القُرآنِ ۚ عَلِمَ أَن سَيَكونُ مِنكُم مَرضىٰ ۙ وَآخَرونَ يَضرِبونَ فِي الأَرضِ يَبتَغونَ مِن فَضلِ اللَّهِ ۙ وَآخَرونَ يُقاتِلونَ في سَبيلِ اللَّهِ ۖ فَاقرَءوا ما تَيَسَّرَ مِنهُ ۚ وَأَقيمُوا الصَّلاةَ وَآتُوا الزَّكاةَ وَأَقرِضُوا اللَّهَ قَرضًا حَسَنًا ۚ وَما تُقَدِّموا لِأَنفُسِكُم مِن خَيرٍ تَجِدوهُ عِندَ اللَّهِ هُوَ خَيرًا وَأَعظَمَ أَجرًا ۚ وَاستَغفِرُوا اللَّهَ ۖ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आपका पालनहार जानता है कि आप (तहज्जुद की नमाज़ में) रात के दो-तिहाई भाग से कुछ कम तथा उसका आधा भाग और उसका एक-तिहाई भाग खड़े होते हैं। तथा आपके साथियों का एक समूह भी (ऐसा करता है)। और अल्लाह ही रात तथा दिन का अनुमान रखता है। उसने जान लिया कि तुम हरगिज़ उसकी क्षमता नहीं रखोगे। अतः उसने तुमपर दया की। अतः क़ुरआन में से जो आसान हो, पढ़ो। वह जानता है कि निश्चय तुममें से कुछ लोग बीमार होंगे और कुछ अन्य लोग धरती में यात्रा करेंगे, अल्लाह का अनुग्रह तलाश करेंगे और कुछ दूसरे लोग अल्लाह की राह में युद्ध करेंगे। अतः उसमें से जो आसान हो, पढ़ो। तथा नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो और अल्लाह को उत्तम ऋण दो। तथा तुम अपने लिए जो भी भलाई आगे भेजोगे, उसे अल्लाह के पास अति उत्तम और बदले की दृष्टि से बढ़कर पाओगे। और अल्लाह से क्षमा याचना करो। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, tumhara Rubb janta hai ke tum kabhi do tihayi (two-third) raat ke qareeb aur kabhi aadhi raat aur kabhi ek tihayi (one-third) raat ibadat mein khade rehtey ho,Aur tumhare saathiyon mein se bhi ek giroh yeh amal karta hai, Allah hi raat aur din ke auqat ka hisab rakhta hai. Usey maloom hai ke tumlog auqat ka theek shumar nahin kar sakte, lihaza usne tumpar meharbani farmayi, Ab jitna Quran aasani se padh sakte ho padh liya karo. Usey maloom hai ke tum mein kuch mareez hongey, kuch dusre log Allah ke fazal(bounty) ki talash mein safar karte hain, Aur kuch aur log Allah ki raah mein jung karte hain, pas jitna Quran ba aasani padha ja sakey padh liya karo, namaz qayam karo, zakaat do aur Allah ko accha qarz dete raho, jo kuch bhalayi tum apne liye aagey bhejoge usey Allah ke yahan maujood paogey, wahi zyada behtar hai aur uska ajr bahut bada hai. Allah se magfirat maangte raho, beshak Allah bada Gafoor o Raheem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Apka rab bakhobi janta hay ka yap aur aap kay sath kay logon ki ik jamat qareeb do tahai rat kay aur adhi rat kay aur ik tahai rat kay tahajud parhti hay aur rat din ka pora andaza Allah Talaa ko hi hay.wo (khob) janta hay kay tum is say hergiz na nibha sako gay pus isnay tum per meharbani ki lyhaza jitna qyran parhna tumhary liye asan ho itna hi parho wo janta hay kay tum mein baaz bimar bhi hongay baaz dosray zameen mein chal phir ker Allah Talah ka fazal (yani rozi bhi)talash kerein gay aur kuch log Allah talah ki rah mein jahad bhi kerein gay so tum basani jitna quran parh sako parho aur namaz ki pabandi rakho. Aur zakat dytay raha kero aur Allah Talah ko acha qarz do aur jo neki tum apney liye agay bhyjo gay ussy Allah talah kay han bhyter say bhyter aur sawab mein bohat ziyada pao gay ALLAH TALAH say moafi mangtay raho yaqeenan AllahTalah bakhshney wala meharban hy
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, तुम्हारा रब जनता है के तुम कभी दो तिहाई (दो तिहाई) रात के करीब और कभी आधी रात और कभी एक तिहाई (एक तिहाई) रात इबादत में खड़े रहते हो, और तुम्हारे साथियों में से भी एक गिरोह ये अमल करता है, अल्लाह हाय रात और दिन के औकात का हिसाब रखा है। उसे मालूम है कि तुमलोग औकात का ठीक शाम नहीं कर सकते, लिहाजा उसने तुमपर मेहरबानी फरमायी, अब जितना कुरान आसान से पढ़ सके हो पढ़ लिया करो। उसे मालूम है कि तुम में कुछ मरिज होंगे, दूसरे लोग अल्लाह के फजल की तलाश में सफर करते हैं, और कुछ और लोग अल्लाह की राह में जंग करते हैं, जितना कुरान बा आसान पढ़ा जा सके पढ़ लिया करो, नमाज कायम करो, जकात दो और अल्लाह को अच्छा क़र्ज़ देते रहो, जो कुछ भलाई तुम अपने लिए आगे भेजोगे उसे अल्लाह के यहां मौजुद पाओगे, वही ज्यादा बेहतर है और उसका अजर बहुत बड़ा है। अल्लाह से मगफिरत मांगते रहो, बेशक अल्लाह बड़ा गफूर ओ रहीम है
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Surah 73: Al-Muzzammil (The One Covering Himself)

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Surah 73: Al-Muzzammil (The One Covering Himself)

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Surah 73: Al-Muzzammil (The One Covering Himself)

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Surah 73: Al-Muzzammil (The One Covering Himself)

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Surah 74: Al-Muddaththir (The One Wrapping Himself Up)

Meccan🕐 Revelation #4📜 56 Verses🕮 Juz 1
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِييا أَيُّهَا المُدَّثِّرُ
हिन्दी (Al-Omari)ऐ कपड़े में लिपटने वाले!
Roman Urdu (Maududi)Aey oad lapeit (enveloped) kar laitney waley
Roman Urdu (Junagarhi)Aey kapra orhnay waly
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ ओद लपीत (आवरण) कर लेटने वाले
عَرَبِيقُم فَأَنذِر
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)खड़े हो जाओ, फिर सावधान करो।
Roman Urdu (Maududi)Utho aur khabardar karo
Roman Urdu (Junagarhi)Khara ho ja aur agah ker day
Devnagri Urdu (Maududi)उठो और खबरदार करो
عَرَبِيوَرَبَّكَ فَكَبِّر
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा अपने पालनहार ही की महिमा का वर्णन करो।
Roman Urdu (Maududi)Aur apne Rubb ki badayi ka elan karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney rab hi ki baraiyan biyan ker
Devnagri Urdu (Maududi)और अपने रब की बदाई का एलान करो
عَرَبِيوَثِيابَكَ فَطَهِّر
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा अपने कपड़े को पवित्र रखो।
Roman Urdu (Maududi)Aur apne kapde paak rakho
Roman Urdu (Junagarhi)Apney kapron ko pak rakha ker
Devnagri Urdu (Maududi)और अपने कपड़े पकड़ कर रखो
عَرَبِيوَالرُّجزَ فَاهجُر
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और गंदगी (बुतों) से दूर रहो।
Roman Urdu (Maududi)Aur gandagi se dur raho
Roman Urdu (Junagarhi)Na paki ko chor day
Devnagri Urdu (Maududi)और गंदगी से दूर रहो
عَرَبِيوَلا تَمنُن تَستَكثِرُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उपकार न जताओ (अपनी नेकियों को) अधिक समझ कर।
Roman Urdu (Maududi)Aur ehsan na karo zyada hasil karne keliye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ahsan ker kay ziyada lynay ki khuwaish na ker
Devnagri Urdu (Maududi)और एहसान ना करो ज्यादा हासिल करने के लिए
عَرَبِيوَلِرَبِّكَ فَاصبِر
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और अपने पालनहार ही के लिए धैर्य से काम लो।
Roman Urdu (Maududi)Aur apne Rubb ki khatir sabr karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney rab ki rah mein sabar ker
Devnagri Urdu (Maududi)और अपने रुब की खातिर सब्र करो
عَرَبِيفَإِذا نُقِرَ فِي النّاقورِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर जब सूर में फूँक मारी जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Accha jab soor mein phook maari jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab kay sor mein phonk mari jaey gi
Devnagri Urdu (Maududi)अच्छा जब सूरज में फुक मारी जाएगी
عَرَبِيفَذٰلِكَ يَومَئِذٍ يَومٌ عَسيرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)तो वह दिन अति भीषण दिन होगा।
Roman Urdu (Maududi)Woh din bada hi sakht din hoga
Roman Urdu (Junagarhi)To wo din bara sakht din hoga
Devnagri Urdu (Maududi)वो दिन बड़ा ही सही दिन होगा
عَرَبِيعَلَى الكافِرينَ غَيرُ يَسيرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)काफ़िरों पर आसान न होगा।
Roman Urdu (Maududi)Kafiron ke liye halka na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)(jo) Kafiron per asan na hoga
Devnagri Urdu (Maududi)काफिरों के लिए हल्का न होगा
عَرَبِيذَرني وَمَن خَلَقتُ وَحيدًا
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हिन्दी (Al-Omari)आप मुझे और उसे छोड़ दें, जिसे मैंने अकेला पैदा किया।
Roman Urdu (Maududi)Chodh do mujhey aur us shaks ko jisey maine akela paida kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Mujhy aur usay chor day jissy mein ney akela paida kiya hay
Devnagri Urdu (Maududi)चोद दो मुझे और उस शक्स को जिसने मैंने अकेला पैदा किया है
عَرَبِيوَجَعَلتُ لَهُ مالًا مَمدودًا
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हिन्दी (Al-Omari)और मैंने उसे बहुत सारा धन प्रदान किया।
Roman Urdu (Maududi)Bahut sa maal usko diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur issy bohat sa maal dy rakha hay
Devnagri Urdu (Maududi)बहुत सा माल उसको दिया
عَرَبِيوَبَنينَ شُهودًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उपस्थित रहने वाले बेटे दिए।
Roman Urdu (Maududi)Uske saath hazir rehne waley bete diye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hazir bash ferzand bhi
Devnagri Urdu (Maududi)उसके साथ हाजिर रहने वाले बेटे दिए
عَرَبِيوَمَهَّدتُ لَهُ تَمهيدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और मैंने उसे प्रत्येक प्रकार का संसाधन दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur uske liye riyasat ki raah hamwaar ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mein ney ussy bohat kushadigi dy rakhi hay
Devnagri Urdu (Maududi)और उसके लिए रियासत की राह हमवार की
عَرَبِيثُمَّ يَطمَعُ أَن أَزيدَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर वह लोभ रखता है कि मैं उसे और अधिक दूँ।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh tama (greedily desire) rakhta hai ke main usey aur zyada doon
Roman Urdu (Junagarhi)Phir bhi uski chahat hay kay mein usy or ziyada don
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो तम (लालची इच्छा) रखता है के मैं उसे और ज्यादा दूं
عَرَبِيكَلّا ۖ إِنَّهُ كانَ لِآياتِنا عَنيدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कदापि नहीं! निश्चय वह हमारी आयतों का सख़्त विरोधी है।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin woh hamari ayaat se inaath(stubbornly oppose) rakhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Nahi nahi wo hamari ayaton ka mukhalif hy
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं वो हमारी आयत से इनाथ (जिद्दी विरोध) रखता है
عَرَبِيسَأُرهِقُهُ صَعودًا
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हिन्दी (Al-Omari)शीघ्र ही मैं उसे एक कठोर चढ़ाई चढ़ाऊँगा।
Roman Urdu (Maududi)Main to usey ankareeb ek kathin chadhai chadwaunga
Roman Urdu (Junagarhi)an qareeb mein usy ik sakht charhai charhaon ga
Devnagri Urdu (Maududi)मैं तो उसे इस्तेमाल करता हूं एक कथिन चढ़ै चढ़ाऊंगा
عَرَبِيإِنَّهُ فَكَّرَ وَقَدَّرَ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह उसने सोच-विचार किया और बात बनाई।
Roman Urdu (Maududi)Usne socha aur kuch baat banane ki koshish ki
Roman Urdu (Junagarhi)Us ney ghor ker kay tajweez ki
Devnagri Urdu (Maududi)उसने सोचा और कुछ बात बनाने की कोशिश की
عَرَبِيفَقُتِلَ كَيفَ قَدَّرَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो वह मारा जाए! उसने कैसी कैसी बात बनाई?
Roman Urdu (Maududi)To khuda ki maar uspar, kaisi baat banane ki koshish ki
Roman Urdu (Junagarhi)Usy halakat ho kaisi(tajweez)sochi
Devnagri Urdu (Maududi)तो खुदा की मार उसपर, कैसी बात बनाने की कोशिश की
عَرَبِيثُمَّ قُتِلَ كَيفَ قَدَّرَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर मारा जाए! उसने कैसी बात बनाई?
Roman Urdu (Maududi)Haan, khuda ki maar uspar , kaisi baat banane ki koshish ki
Roman Urdu (Junagarhi)Wo phir gharat ho kis tarah andaza kiya
Devnagri Urdu (Maududi)हां, खुदा की मार उसपर, कैसी बात बनाने की कोशिश की
عَرَبِيثُمَّ نَظَرَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने देखा।
Roman Urdu (Maududi)Phir(logon ki taraf) dekha
Roman Urdu (Junagarhi)Us ney phir dekha
Devnagri Urdu (Maududi)फिर(लोगों की तरफ) देखा
عَرَبِيثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने त्योरी चढ़ाई और मुँह बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Phir peshani sukedi aur mooh banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir teweri char hai or mun banaya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर पेशानी सुकेदी और मुंह बनाया
عَرَبِيثُمَّ أَدبَرَ وَاستَكبَرَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने पीठ फेरी और घमंड किया।
Roman Urdu (Maududi)Phir palta aur takabbur mein padh gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir pechay hat gaya aur ghoroor kiya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर पलटा और तकब्बुर में पढ़ गया
عَرَبِيفَقالَ إِن هٰذا إِلّا سِحرٌ يُؤثَرُ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने कहा : यह तो मात्र एक जादू है, जो (पहलों से) नक़ल (उद्धृत) किया जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir e kaar bola ke yeh kuch nahin hai magar ek jaadu jo pehle se chala aa raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur khynay laga yeh to sirf jado hay jo naqal kiya jata hay
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर ए कार बोला के ये कुछ नहीं है मगर एक जादू जो पहले से चला आ रहा है
عَرَبِيإِن هٰذا إِلّا قَولُ البَشَرِ
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हिन्दी (Al-Omari)यह तो मात्र मनुष्य की वाणी है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh to ek Insani kalaam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Siwaey insani kalam kay kuch bhi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ये तो एक इंसानी कलाम है
عَرَبِيسَأُصليهِ سَقَرَ
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हिन्दी (Al-Omari)मैं उसे शीघ्र ही 'सक़र' (जहन्नम) में झोंक दूँगा।
Roman Urdu (Maududi)Anqareeb main usey dozakh mei jhonk dunga
Roman Urdu (Junagarhi)Mein anqareeb usy dfozakh mein dalon ga
Devnagri Urdu (Maududi)अंकरिब मैं उसे दोज़ख में झोंक दूंगा
عَرَبِيوَما أَدراكَ ما سَقَرُ
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हिन्दी (Al-Omari)और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि 'सक़र' (जहन्नम) क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Aur tum kya jaano ke kya hai woh dozakh
Roman Urdu (Junagarhi)aur tujhay kiya khaber kay dozakh kiya chez hay
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम क्या जानो के क्या है वो दोज़ख
عَرَبِيلا تُبقي وَلا تَذَرُ
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हिन्दी (Al-Omari)वह न शेष रखेगी और न छोड़ेगी।
Roman Urdu (Maududi)Na baqi rakhey na chodey
Roman Urdu (Junagarhi)Na wo baqi rakhti hay aur na chorti hay
Devnagri Urdu (Maududi)ना बाकी राखे ना छोड़े
عَرَبِيلَوّاحَةٌ لِلبَشَرِ
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हिन्दी (Al-Omari)वह खाल को झुलस देने वाली है।
Roman Urdu (Maududi)Khaal(skin) jhulas dene wali
Roman Urdu (Junagarhi)Khal ko jholsa dyti hay
Devnagri Urdu (Maududi)ख़ाल (त्वचा) झूलस देने वाली
عَرَبِيعَلَيها تِسعَةَ عَشَرَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसपर उन्नीस (फ़रिश्ते) नियुक्त हैं।
Roman Urdu (Maududi)Unnis (ninteen) karkoon uspar muqarrar hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur is mein unnees(19)(farshtay mukarrar) hein
Devnagri Urdu (Maududi)उन्नीस (उन्नीस) कारकून उसपर मुक़र्रर हैं
عَرَبِيوَما جَعَلنا أَصحابَ النّارِ إِلّا مَلائِكَةً ۙ وَما جَعَلنا عِدَّتَهُم إِلّا فِتنَةً لِلَّذينَ كَفَروا لِيَستَيقِنَ الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ وَيَزدادَ الَّذينَ آمَنوا إيمانًا ۙ وَلا يَرتابَ الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ وَالمُؤمِنونَ ۙ وَلِيَقولَ الَّذينَ في قُلوبِهِم مَرَضٌ وَالكافِرونَ ماذا أَرادَ اللَّهُ بِهٰذا مَثَلًا ۚ كَذٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ مَن يَشاءُ وَيَهدي مَن يَشاءُ ۚ وَما يَعلَمُ جُنودَ رَبِّكَ إِلّا هُوَ ۚ وَما هِيَ إِلّا ذِكرىٰ لِلبَشَرِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने जहन्नम के रक्षक फ़रिश्ते ही बनाए हैं और उनकी संख्या को काफ़िरों के लिए परीक्षण बनाया है। ताकि अह्ले किताब विश्वास कर लें और ईमान वाले ईमान में आगे बढ़ जाएँ। और किताब वाले एवं ईमान वाले किसी संदेह में न पड़ें। और ताकि वे लोग जिनके दिलों में रोग है और वे लोग जो काफ़िर हैं, यह कहें कि इस उदाहरण से अल्लाह का क्या तात्पर्य है? ऐसे ही, अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह करता है और जिसे चाहता है सीधा मार्ग दिखाता है। और आपके पालनहार की सेनाओं को उसके सिवा कोई नहीं जानता। और यह तो केवल मनुष्य के लिए उपदेश है।
Roman Urdu (Maududi)Humne dozakh ke yeh karkoon farishtey banaye hain,aur unki tadaad ko kafiron ke liye fitna bana diya hai, taa-ke ehle kitaab ko yaqeen aa jaye aur iman laney walon ka iman badhey,Aur ehle kitaab aur momineen kisi shakk mein na rahey,aur dil ke bimar aur kuffar yeh kahein ke bhala Allah ka is ajeeb baat se kya matlab ho sakta hai. Is tarah Allah jisey chahta hai gumraah kardeta hai aur jisey chahta hai hidayat baksh deta hai aur tere Rubb ke lashkaron (soldiers) ko khud uske siwa koi nahin janta, aur is dozak ka zikr iske siwa kisi garz ke liye nahin kiya gaya hai ke logon ko issey naseehat ho
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney dozakh kay daroghy say farishtay rakhein hein aur hum ney unki tadad sirf kafiron ki azmaish kay liye mukarrar ki hay takay ahl e kitab yaqeen ker lein.aur ahl e eman kay eman mein asafa ho jay aur ahl e kitab aur ahl e eman shak na kerien aur jin kay dilon mein bimari hay wo aur kafir kahein kay is biyan say Allah Talah jissy chata hay ghumrah kerta hay aur jissy chata hay hidayat dyta hay tery rab kay lashkaron ko us kay siwa koi nahi janta yeh to kul bani adam kay liye sar a sar pind o nasehat hay
Devnagri Urdu (Maududi)हमने दोज़ख़ के ये कारकून फ़रिश्ते बनाए हैं, और उनकी तड़प को काफिरों के लिए फ़ितना बना दिया है, ता-के एहले किताब को यकीन आ जाए और ईमान लाने वालों का ईमान बढ़े, और एहले किताब और मोमिनीन किसी शक्क में ना रहे, और दिल के बीमार और कुफ्फार ये कहें कि भला अल्लाह का, अजीब बात से क्या मतलब हो सकता है। इस तरह अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह करता है और जिसे चाहता है हिदायत बख्श देता है और तेरे रब के लश्करों (सैनिकों) को खुद उसके सिवा कोई नहीं जानता, और इस दोज़क का ज़िक्र इसके सिवा किसी ग़रज़ के लिए नहीं किया गया है के लोगों को इसकी हिदायत हो
عَرَبِيكَلّا وَالقَمَرِ
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हिन्दी (Al-Omari)कदापि नहीं, क़सम है चाँद की!
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin,kasam hai Chand ki
Roman Urdu (Junagarhi)Sach khyta hon qasam hay chand ki
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज़ नहीं, कसम है चांद की
عَرَبِيوَاللَّيلِ إِذ أَدبَرَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा रात की, जब वह जाने लगे!
Roman Urdu (Maududi)Aur Raat ki jabke woh palat-ti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur rat ki jab wo pechay hatay
Devnagri Urdu (Maududi)और रात की जबके वो पलटती है
عَرَبِيوَالصُّبحِ إِذا أَسفَرَ
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हिन्दी (Al-Omari)और सुबह की, जब वह प्रकाशित हो जाए!
Roman Urdu (Maududi)Aur subah ki jabke woh roshan hoti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur subha ki jab kay roshan hojaey
Devnagri Urdu (Maududi)और सुबह की जबके वो रोशन होती है
عَرَبِيإِنَّها لَإِحدَى الكُبَرِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वह (जहन्नम) निश्चय बहुत बड़ी चीज़ों में से एक है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh dozakh bhi badi cheezon mein se ek hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kay (yaqeenan wo jahanum)bari chezon mein say ik hay
Devnagri Urdu (Maududi)ये दोज़ख भी बड़ी चीज़ों में से एक है
عَرَبِينَذيرًا لِلبَشَرِ
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हिन्दी (Al-Omari)मनुष्य के लिए डराने वाली है।
Roman Urdu (Maududi)Insano ke liye darawa
Roman Urdu (Junagarhi)Bani adam ko daraney wali
Devnagri Urdu (Maududi)इंसानों के लिए डरावा
عَرَبِيلِمَن شاءَ مِنكُم أَن يَتَقَدَّمَ أَو يَتَأَخَّرَ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम में से उसके लिए, जो आगे बढ़ना चाहे अथवा पीछे हटना चाहे।
Roman Urdu (Maududi)Tum mein se har us shaks ke liye darawa jo aagey badhna chahey ya pichey reh jana chahey
Roman Urdu (Junagarhi)(yani)ussayn jo tum mein say agay barhna chaey ya pechay hanta chaey
Devnagri Urdu (Maududi)तुम में से हर शक्स के लिए डरवा जो आगे बढ़ना चाहे या पीछे रह जाना चाहे
عَرَبِيكُلُّ نَفسٍ بِما كَسَبَت رَهينَةٌ
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हिन्दी (Al-Omari)प्रत्येक व्यक्ति उसके बदले जो उसने कमाया, गिरवी रखा हुआ है।
Roman Urdu (Maududi)Har mutanaffis, apne kasb ke badle rehan hai (hostage to one’s deeds)
Roman Urdu (Junagarhi)Her shaks apney amal kay badlay mein girwi hay
Devnagri Urdu (Maududi)हर मुतनफ़्फ़िस, अपने क़स्ब के बदले रहन है (किसी के कर्मों का बंधक)
عَرَبِيإِلّا أَصحابَ اليَمينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सिवाय दाहिने वालों के।
Roman Urdu (Maududi)Dayein bazu walon ke siwa
Roman Urdu (Junagarhi)Magar daein hath walay
Devnagri Urdu (Maududi)दयाएं बाज़ू वालों के सिवा
عَرَبِيفي جَنّاتٍ يَتَساءَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे जन्नतों में एक-दूसरे से पूछेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jo jannaton mein hongey, wahan woh
Roman Urdu (Junagarhi)Kay wo baheshton mein (bethay hoy)gunehgaron say
Devnagri Urdu (Maududi)जो जन्नत में होंगे, वहां वो
عَرَبِيعَنِ المُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)अपराधियों के बारे में।
Roman Urdu (Maududi)Mujrimon se puchenge
Roman Urdu (Junagarhi)Sawal kertay hongay
Devnagri Urdu (Maududi)मुजरिमोन से पूछेंगे
عَرَبِيما سَلَكَكُم في سَقَرَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तुम्हें किस चीज़ ने जहन्नम में डाला?
Roman Urdu (Maududi)Tumhein kya cheez dozakh mein le gayi
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhein dozakh mein kis chez ney dala
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हें क्या चीज़ दोज़ख़ में ले गई
عَرَبِيقالوا لَم نَكُ مِنَ المُصَلّينَ
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हिन्दी (Al-Omari)वे कहेंगे : हम नमाज़ पढ़ने वालों में से न थे।
Roman Urdu (Maududi)woh kahenge “hum namaz padne walon mein se na thay
Roman Urdu (Junagarhi)Wo jawab deingay kay hum namazi na thy
Devnagri Urdu (Maududi)वो कहेंगे “हम नमाज पढ़ने वालों में से ना थे
عَرَبِيوَلَم نَكُ نُطعِمُ المِسكينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और न हम निर्धन को खाना खिलाते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur miskeen ko khana nahin khilate thay
Roman Urdu (Junagarhi)Na miskeeno ko khana khilatay thy
Devnagri Urdu (Maududi)और मिस्कीन को खाना नहीं खिलाते थे
عَرَبِيوَكُنّا نَخوضُ مَعَ الخائِضينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हम बेहूदा बहस करने वालों के साथ मिलकर व्यर्थ बहस किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur haqq ke khilaf batein banane walon ke saath milkar hum bhi batein banane lagte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum bhas kernay waly(inkarion )ka sath dy ker bhas mubahisa mein mashghol raha kertay thy
Devnagri Urdu (Maududi)और हक़ के खिलाफ़ बातें बनाने वालों के साथ मिलकर हम भी बातें बनने लगते थे
عَرَبِيوَكُنّا نُكَذِّبُ بِيَومِ الدّينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हम बदले के दिन को झुठलाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur roz-e-jaza ko jhoot karar dete thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur roz e jaza ko jhutlatay thy
Devnagri Urdu (Maududi)और रोज़-ए-जज़ा को झूठ करार देते थे
عَرَبِيحَتّىٰ أَتانَا اليَقينُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि मौत हमारे पास आ गई।
Roman Urdu (Maududi)Yahan tak ke humein us yaqeeni cheez se saabqa pesh aa gaya”
Roman Urdu (Junagarhi)Yahan tak kay humein mot agai
Devnagri Urdu (Maududi)यहां तक ​​के हमें यकीनी चीज़ से सबका पेश आ गया”
عَرَبِيفَما تَنفَعُهُم شَفاعَةُ الشّافِعينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो उन्हें सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश लाभ नहीं देगी।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt sifarish karne walon ki sifarish unke kisi kaam na ayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Pus inhein sifarish kernay walon ki sifarish nafa na dy gi
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश उनके किसी काम ना आएगी
عَرَبِيفَما لَهُم عَنِ التَّذكِرَةِ مُعرِضينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो उन्हें क्या हो गया है कि उपदेश से मुँह फेर रहे हैं?
Roman Urdu (Maududi)Aakhir in logon ko kya ho gaya hai ke yeh is nasihat se mooh moad rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Inhein kiya hogaya hay?kay nasehat say mun mor rahy hein
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर लोगों को क्या हो गया है कि ये इस हिदायत से मुंह मोड़ रहे हैं
عَرَبِيكَأَنَّهُم حُمُرٌ مُستَنفِرَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जैसे वे सख़्त बिदकने वाले गधे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Goya yeh jungli gadhey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Goya kay wo bidkay hoy gadhay hein
Devnagri Urdu (Maududi)गोया ये जंगली गधे हैं
عَرَبِيفَرَّت مِن قَسوَرَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो शेर से भागे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo Sher se darr kar bhaag padey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo sher say bhagaein hon
Devnagri Urdu (Maududi)जो शेर से डर कर भाग पड़े हैं
عَرَبِيبَل يُريدُ كُلُّ امرِئٍ مِنهُم أَن يُؤتىٰ صُحُفًا مُنَشَّرَةً
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि उनमें से प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसे खुली पुस्तकें दी जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Balke inmein se to har ek yeh chahta hai ke uske naam khule khat (scroll/scripture) bhejey jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Balkay in mein say her shaks chata hay kay usay kholi hoi kitabein di jaein
Devnagri Urdu (Maududi)बलके इनमें से तो हर एक ये चाहता है के उसके नाम खुले खत (स्क्रॉल/ग्रंथ) भेजे जाए
عَرَبِيكَلّا ۖ بَل لا يَخافونَ الآخِرَةَ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐसा कदापि नहीं हो सकता, बल्कि वे आख़िरत से नहीं डरते।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin, Asal baat yeh hai ke yeh aakhirat ka khauf nahin rakhtey
Roman Urdu (Junagarhi)Hergiz asa nahi (hosakta balkay)yeh qiyamat say bay khof hein
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं, असल बात ये है के ये आखिरी का खौफ नहीं रखते
عَرَبِيكَلّا إِنَّهُ تَذكِرَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हरगिज़ नहीं, निश्चय यह (क़ुरआन) एक उपदेश (याददेहानी) है।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin,yeh to ek nasihat hai
Roman Urdu (Junagarhi)sachi bat to yeh hay kay yeh(quran)ik nasehat hay
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं, ये तो एक हिदायत है
عَرَبِيفَمَن شاءَ ذَكَرَهُ
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हिन्दी (Al-Omari)अतः जो चाहे, उससे नसीहत प्राप्त करे।
Roman Urdu (Maududi)Ab jiska jee chahey issey sabaq hasil karle
Roman Urdu (Junagarhi)Ab jo chahey issy nasehat hasil kery
Devnagri Urdu (Maududi)अब जिसका जी चाहे इसे सबक हासिल करले
عَرَبِيوَما يَذكُرونَ إِلّا أَن يَشاءَ اللَّهُ ۚ هُوَ أَهلُ التَّقوىٰ وَأَهلُ المَغفِرَةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वे नसीहत प्राप्त नहीं कर सकते, परंतु यह कि अल्लाह चाहे। वही इस योग्य है कि उससे डरा जाए और वही इस योग्य है कि क्षमा करे।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh koi sabaq hasil na karengey illa yeh ke Allah hi aisa chahey woh iska haqdar hai ke ussey taqwa kiya jaye aur woh iska ehal hai ke (taqwa karne walon ko) baksh de
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wo us waqat nasehat hasil kerein gay jab Allah Talah chahein wo issi laiq hein kay issy darein aur iss laiq bhi kay wo bakhshy
Devnagri Urdu (Maududi)और ये कोई सबक हासिल न करेगा इल्ला ये के अल्लाह ही ऐसा चाहिए वो इसका हक़दार है के उसे तकवा किया जाए और वो इस्का एहल है के (तकवा करने वालों को) बख्श दे
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Surah 74: Al-Muddaththir (The One Wrapping Himself Up)

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Surah 74: Al-Muddaththir (The One Wrapping Himself Up)

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Surah 74: Al-Muddaththir (The One Wrapping Himself Up)

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Surah 74: Al-Muddaththir (The One Wrapping Himself Up)

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Surah 74: Al-Muddaththir (The One Wrapping Himself Up)

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Surah 75: Al-Qiyamah (The Resurrection)

Meccan🕐 Revelation #31📜 40 Verses🕮 Juz 1
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Surah 75: Al-Qiyamah (The Resurrection)

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Surah 75: Al-Qiyamah (The Resurrection)

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Surah 75: Al-Qiyamah (The Resurrection)

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Surah 75: Al-Qiyamah (The Resurrection)

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Surah 75: Al-Qiyamah (The Resurrection)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيلا أُقسِمُ بِيَومِ القِيامَةِ
हिन्दी (Al-Omari)मैं क़सम खाता हूँ क़ियामत के दिन की।
Roman Urdu (Maududi)Nahin main kasam khata hoon qayamat ke din ki
Roman Urdu (Junagarhi)Mein qasam khata hun qayamat kay din ki
Devnagri Urdu (Maududi)नहीं मैं कसम खाता हूं कयामत के दिन की
عَرَبِيوَلا أُقسِمُ بِالنَّفسِ اللَّوّامَةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा मैं क़सम खाता हूँ निंदा करने वाली अंतरात्मा की।
Roman Urdu (Maududi)Aur nahin,main kasam khata hoon malamat karne wale nafs ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aur qasam khata hun uss nafas ki jo malamat kernay wala ho
Devnagri Urdu (Maududi)और नहीं, मैं कसम खाता हूं मालामत करने वाले नफ्स की
عَرَبِيأَيَحسَبُ الإِنسانُ أَلَّن نَجمَعَ عِظامَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या इनसान समझता है कि हम कभी उसकी हड्डियों को एकत्र नहीं करेंगे?
Roman Urdu (Maududi)Kya Insan yeh samajh raha hai ke hum uski haddiyon ko jama na kar sakengey
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya insan yeh khayal kert hai kay hum uss ki hadiyan jama kerengay hi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इंसान ये समझ रहा है कि हम उसकी हदियों को जमा ना कर पाएंगे
عَرَبِيبَلىٰ قادِرينَ عَلىٰ أَن نُسَوِّيَ بَنانَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्यों नहीं? हम इस बता का भी सामर्थ्य रखते हैं कि उसकी उंगलियों की पोर-पोर सीधी कर दें।
Roman Urdu (Maududi)Kyun nahin? Hum to uski ungliyon ke por por tak theek bana dene par qadir hain
Roman Urdu (Junagarhi)Han zaror kerengay hum to qadir hain kay usski por por tak durust kerdein
Devnagri Urdu (Maududi)क्यों नहीं? हम तो उसकी उंगलियों के पोर पोर तक ठीक बना देने पर कादिर हैं
عَرَبِيبَل يُريدُ الإِنسانُ لِيَفجُرَ أَمامَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि मनुष्य चाहता है कि अपने आगे भी गुनाह करता रहे।
Roman Urdu (Maududi)Magar Insan chahta yeh hai ke aagey bhi badh-aamaliyan karta rahey
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay insan to chahta hai kay aagay aagay na farmaniyan kerta jaey
Devnagri Urdu (Maududi)मगर इंसान चाहता है कि आगे भी बढ़-आमलियां करता रहे
عَرَبِييَسأَلُ أَيّانَ يَومُ القِيامَةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह पूछता है कि क़ियामत का दिन कब होगा?
Roman Urdu (Maududi)“Puchta hai” aakhir kab aana hai woh qayamat ka din
Roman Urdu (Junagarhi)Poochata hai kay qayamat ka din kab aaye ga
Devnagri Urdu (Maududi)"पूछता है" आखिर कब आना है वो कयामत का दिन
عَرَبِيفَإِذا بَرِقَ البَصَرُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो जब आँख चौंधिया जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab dedhey pathra jayengey (sight is dazed)
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jiss waqat kay nigha pathra jaeygi
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब डेढे पथरा जाएगी (दृष्टि चकित हो जाएगी)
عَرَبِيوَخَسَفَ القَمَرُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और चाँद को ग्रहण लग जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur chand be-noor ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur chand benoor hojaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और चांद बे-नूर हो जाएगा
عَرَبِيوَجُمِعَ الشَّمسُ وَالقَمَرُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और सूर्य और चाँद एकत्र कर दिए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur Chand Suraj mila kar ek kardiya jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur soraj aur chand jama kerdiye jaeingay
Devnagri Urdu (Maududi)और चांद सूरज मिला कर एक करदिया जाएगा
عَرَبِييَقولُ الإِنسانُ يَومَئِذٍ أَينَ المَفَرُّ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन मनुष्य कहेगा कि भागने का स्थान कहाँ है?
Roman Urdu (Maududi)Us waqt yahi Insan kahega kahan bhaag kar jaun
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din insan kahega kay aaj bhegnay ki jagah kahan hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त यही इंसान कहेगा कहां भाग कर जाऊं
عَرَبِيكَلّا لا وَزَرَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कदापि नहीं, शरण लेने का स्थान कोई नहीं।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin,wahan koi jaye panaah na hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Nahi nahi koi panahgah nahi
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं, वहां कोई जाएगा पनाह न होगी
عَرَبِيإِلىٰ رَبِّكَ يَومَئِذٍ المُستَقَرُّ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन तेरे पालनहार ही की ओर लौटकर जाना है।
Roman Urdu (Maududi)Us roz terey Rubb hi ke samney jaakar theharna hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aaj to teray perwardigar ki tarf hi qarar gah hai
Devnagri Urdu (Maududi)हमें रोज तेरे रुब हाय के सामने आकर ठहरना होगा
عَرَبِييُنَبَّأُ الإِنسانُ يَومَئِذٍ بِما قَدَّمَ وَأَخَّرَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन इनसान को बताया जाएगा जो उसने आगे भेजा और जो पीछे छोड़ा।
Roman Urdu (Maududi)Us roz Insan ko uska sab agla pichla kiya karaya bata diya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Aaj insan ko uss kay aagay bhejay huye aur peechay choray hoye say aagah kiya jaeyga
Devnagri Urdu (Maududi)हमें रोज इंसान को उसका सब अगला पिछला किया कराया बता दिया जाएगा
عَرَبِيبَلِ الإِنسانُ عَلىٰ نَفسِهِ بَصيرَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि इनसान स्वयं अपने विरुद्ध गवाह है।
Roman Urdu (Maududi)Balke Insan khud hi apne aap ko khoob janta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay insan khud apney upper aap hujjat hai
Devnagri Urdu (Maududi)बलके इंसान खुद ही अपने आप को खूब जानता है
عَرَبِيوَلَو أَلقىٰ مَعاذيرَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अगरचे वह अपने बहाने पेश करे।
Roman Urdu (Maududi)Chahey woh kitni hi maazratein (excuses) karey
Roman Urdu (Junagarhi)Agercha kitnay hi bahanay pesh keryga
Devnagri Urdu (Maududi)चाहे वो कितनी ही मजारतें (बहाने) करे
عَرَبِيلا تُحَرِّك بِهِ لِسانَكَ لِتَعجَلَ بِهِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप इसके साथ अपनी ज़ुबान न हिलाएँ, ताकि इसे शीघ्र याद कर लें।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi , Is wahi ko jaldi jaldi yaad karne ke liye apni zubaan ko harkat na do
Roman Urdu (Junagarhi)(ay nabi) aap quran ko jadi (yaad kernay)kay liey apni zabaan ko herkat na den
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, इस वही को जल्दी जल्दी याद करने के लिए अपनी जुबान को हरकत ना दो
عَرَبِيإِنَّ عَلَينا جَمعَهُ وَقُرآنَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह उसको एकत्र करना और (आपका) उसे पढ़ना हमारे ज़िम्मे है।
Roman Urdu (Maududi)Isko yaad kara dena aur padhwa dena hamare zimmey hai
Roman Urdu (Junagarhi)Iss ka jama kerna aur (aap ki zaba say)perhna humaray zimmay hai
Devnagri Urdu (Maududi)इसको याद करा देना और पढ़ावा देना हमारी जिम्मेदारी है
عَرَبِيفَإِذا قَرَأناهُ فَاتَّبِع قُرآنَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः जब हम उसे पढ़ लें, तो आप उसके पठन का अनुसरण करें।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza jab hum isey padh rahey hon us waqt tum iske qirat ko gaur se sunte raho
Roman Urdu (Junagarhi)Hum jab issay parhlen to aap iss kay parhnay ki perwi kerein
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाजा जब हम इसे पढ़ रहे हों हमें वक्त देते रहो, तुम इसके किरात को गौर से सुनते रहो
عَرَبِيثُمَّ إِنَّ عَلَينا بَيانَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर निःसंदेह उसे स्पषट करना हमारे ही ज़िम्मे है।
Roman Urdu (Maududi)Phir iska matlab samjha dena bhi hamarey zimmey hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir is ka wazeh ker dyna hamary zimy hay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इसका मतलब समझा देना भी हमारी जिम्मेदारी है
عَرَبِيكَلّا بَل تُحِبّونَ العاجِلَةَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कदापि नहीं, बल्कि तुम शीघ्र प्राप्त होने वाली चीज़ (संसार) से प्रेम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin, asal baat yeh hai ke tum log jaldi haasil honay wali cheez (yani duniya) se muhabbat rakhte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Nahi nahi tum jaldi milnay wali(duniya) ki mohabat rakhtay ho
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं, असल बात हाँ है के तुम लोग जल्दी हासिल होने वाली चीज (यानी दुनिया) से मुहब्बत रखते हो
عَرَبِيوَتَذَرونَ الآخِرَةَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और बाद में आने वाली (आख़िरत) को छोड़ देते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur aakhirat ko chodh dete ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur akhrat ko chor bethy ho
Devnagri Urdu (Maududi)और आखिरी को छोड़ देते हो
عَرَبِيوُجوهٌ يَومَئِذٍ ناضِرَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन कई चेहरे तरो-ताज़ा होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Us roz kuch chehrey tar-o-taza hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Uss roz bohat say chehery ter o taza aur ba runaq hongay
Devnagri Urdu (Maududi)हमें रोज कुछ चेहरे तार-ओ-ताजा होंगे
عَرَبِيإِلىٰ رَبِّها ناظِرَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अपने पालनहार की ओर देख रहे होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ki taraf dekh rahey hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Apney rab ki taraf dekhtay hongay
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब की तरफ देख रहे होंगे
عَرَبِيوَوُجوهٌ يَومَئِذٍ باسِرَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और कई चेहरे उस दिन बिगड़े हुए होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur kuch chehrey udas hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kitnay chehry us din (bad ronaq aur) udas hongay
Devnagri Urdu (Maududi)और कुछ चेहरे उदास होंगे
عَرَبِيتَظُنُّ أَن يُفعَلَ بِها فاقِرَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन्हें विश्वास होगा कि उनके साथ कमड़ तोड़ देने वाली सख्ती की जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur samajh rahey hongey ke unke saath qamar-todh bartao hone wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Samjhtay hongay kay in kay sath kamar toor dynay wala mamla ki jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और समझ रहेंगे होंगे के उनके साथ कमर-तोड़ तोड़ो होने वाला है
عَرَبِيكَلّا إِذا بَلَغَتِ التَّراقِيَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कदापि नहीं, जब प्राण हँसलियों तक पहुँच जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin, jab jaan halaq tak pahunch jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Nahi nahi jab roz hansli tak phunchay gi
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं, जब जान हलक तक पहुंच जाएगी
عَرَبِيوَقيلَ مَن ۜ راقٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और कहा जाएगा : कौन है झाड़-फूँक करने वाला?
Roman Urdu (Maududi)Aur kaha jayega ke hai koi jhaad phook karne wala
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kaha jaeyga koi char phonk kernay wala hay
Devnagri Urdu (Maududi)और कहा जाएगा के है कोई झाड़ फूंक करने वाला
عَرَبِيوَظَنَّ أَنَّهُ الفِراقُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उसे विश्वास हो जाएगा कि यह (संसार से) जुदाई का समय है।
Roman Urdu (Maududi)Aur aadmi samajh lega ke yeh duniya se judai ka waqt hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jan liya unsay kay yeh waqat judai hay
Devnagri Urdu (Maududi)और आदमी समझ लेगा के ये दुनिया से जुदाई का वक्त है
عَرَبِيوَالتَفَّتِ السّاقُ بِالسّاقِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और पिंडली, पिंडली के साथ लिपट जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur pindli(leg) se pindli(leg) judh jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur pindli say pindli lipat jaey gi
Devnagri Urdu (Maududi)और पिंडली(पैर) से पिंडली(पैर) जुड़ जाएगी
عَرَبِيإِلىٰ رَبِّكَ يَومَئِذٍ المَساقُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन तेरे पालनहार ही की ओर जाना है।
Roman Urdu (Maududi)Woh din hoga tere Rubb ki taraf rawangi ka
Roman Urdu (Junagarhi)Aj tery perwardigar ki taraf chalna hay
Devnagri Urdu (Maududi)वो दिन होगा तेरे रब की तरफ रावंगी का
عَرَبِيفَلا صَدَّقَ وَلا صَلّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो न उसने (सत्य को) माना और न नमाज़ पढ़ी।
Roman Urdu (Maududi)Magar usne na sach mana , aur na namaz padhi
Roman Urdu (Junagarhi)Us ney na to tasdeeq ki aur na namaz ada ki
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उसने ना सच माना, और ना नमाज पढ़ी
عَرَبِيوَلٰكِن كَذَّبَ وَتَوَلّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)लेकिन उसने झुठलाया तथा मुँह फेरा।
Roman Urdu (Maududi)Balke jhutlaya aur palat gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Bulkay jhutlaya aur roh gatdani ki
Devnagri Urdu (Maududi)बलके झुटलया और पलट गया
عَرَبِيثُمَّ ذَهَبَ إِلىٰ أَهلِهِ يَتَمَطّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर अकड़ता हुआ अपने परिजनों की ओर गया।
Roman Urdu (Maududi)Phir akadta hua apne ghar walon ki taraf chal diya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir apney gher walon kay pass itrata hoya gaya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर अकदता हुआ अपने घर वालों की तरफ चल दिया
عَرَبِيأَولىٰ لَكَ فَأَولىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तेरे लिए विनाश है, फिर तेरे लिए बर्बादी है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh rawish tere hi liye sazawaar hai aur tujh hi ko zeib deti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Afsos hay tujhay per hasrat hay tujh per
Devnagri Urdu (Maududi)ये रवीश तेरे ही लिए सजा देती है और तुझ ही को ज़िब देती है
عَرَبِيثُمَّ أَولىٰ لَكَ فَأَولىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर तेरे लिए विनाश है, फिर तेरे लिए बर्बादी है।
Roman Urdu (Maududi)Haan yeh rawish tere hi liye sazawaar hai aur tujh hi ko zeib deti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Waaye hai aur kharabi hay tery liye
Devnagri Urdu (Maududi)हां ये रवीश तेरे ही लिए सजा देती है और तुझ ही को ज़िब देती है
عَرَبِيأَيَحسَبُ الإِنسانُ أَن يُترَكَ سُدًى
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या इनसान समझता है कि उसे यूँ ही बेकार छोड़ दिया जायेगा?
Roman Urdu (Maududi)Kya Insan ne yeh samajh rakkha hai ke woh yunhi mohmal (left alone, unquestioned )chodh diya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya insan yeh samjhta hay kay usy be kaar chor diay jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इंसान ने ये समझ रखा है के वो यूं ही मोहमल (अकेला छोड़ दिया, बिना किसी सवाल के) छोड़ दिया जाएगा
عَرَبِيأَلَم يَكُ نُطفَةً مِن مَنِيٍّ يُمنىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या वह वीर्य की एक बूंद नहीं था, जो (गर्भाशय में) गिराई जाती है?
Roman Urdu (Maududi)Kya woh ek hakeer pani ka nutfa (sperm from semen) na tha jo (raham –e-madar mei) tapkaya jata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya wo iki ghary pani ka katra na tha jo tapkaya gaya tha
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वो एक हकीर पानी का नुत्फा (वीर्य से शुक्राणु) ना था जो (रहम-ए-मदार में) टपकया जाता है
عَرَبِيثُمَّ كانَ عَلَقَةً فَخَلَقَ فَسَوّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर वह जमे हुए रक्त का टुकड़ा हुआ, फिर अल्लाह ने पैदा किया और दुरुस्त बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Phir woh ek lothda(clot) bana, phir Allah ne uska jism banaya aur uske aazaa durust kiye
Roman Urdu (Junagarhi)Phir wo laho ka lothra hogay phir Allah ney usy paida kia aur durasat bana diya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर वो एक खून (थक्का) बना, फिर अल्लाह ने उसका जिस्म बनाया और उसकी आजा दुरुस्त किए
عَرَبِيفَجَعَلَ مِنهُ الزَّوجَينِ الذَّكَرَ وَالأُنثىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने उससे दो प्रकार : नर और मादा बनाए।
Roman Urdu (Maududi)Phir ussey mard aur aurat ki do qismein banayi
Roman Urdu (Junagarhi)Phir us say joray yani nar o mada banay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उसे मर्द और औरत की दो क़िस्में बनाई
عَرَبِيأَلَيسَ ذٰلِكَ بِقادِرٍ عَلىٰ أَن يُحيِيَ المَوتىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या वह इसमें समर्थ नहीं कि मुर्दों को जीवित कर दे?
Roman Urdu (Maududi)Kya woh ispar qadir nahin hai ke marne walon ko phir zinda karde
Roman Urdu (Junagarhi)kiya (Allah Talah) iss (amar)per qadir nahi kay murday ko zinda kerday
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वो इसपर कादिर नहीं है के मरने वालों को फिर जिंदा करदे
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Surah 75: Al-Qiyamah (The Resurrection)

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Surah 75: Al-Qiyamah (The Resurrection)

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Surah 75: Al-Qiyamah (The Resurrection)

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Surah 75: Al-Qiyamah (The Resurrection)

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Surah 75: Al-Qiyamah (The Resurrection)

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Surah 76: Al-Insan (The Man)

Medinan🕐 Revelation #98📜 31 Verses🕮 Juz 1
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عَرَبِيهَل أَتىٰ عَلَى الإِنسانِ حينٌ مِنَ الدَّهرِ لَم يَكُن شَيئًا مَذكورًا
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय इनसान पर ज़माने का एक ऐसा समय भी गुज़रा है, जब वह कोई ऐसी चीज़ नहीं था जिसका (कहीं) उल्लेख हुआ हो।
Roman Urdu (Maududi)Kya Insan par la mutanahi zamane ka ek waqt aisa bhi guzra hai jab woh koi qabil e zikr cheez na tha
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan guzra hai insan per ik waqat zamanay mein jab kay yeh koi qabe e zikar chez na tha
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इंसान पर ला मुतानाही ज़माने का एक वक़्त ऐसा भी गुज़रा है जब वो कोई काबिल ए ज़िक्र चीज़ ना था
عَرَبِيإِنّا خَلَقنَا الإِنسانَ مِن نُطفَةٍ أَمشاجٍ نَبتَليهِ فَجَعَلناهُ سَميعًا بَصيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने इनसान को मिश्रित वीर्य से पैदा किया, हम उसकी परीक्षा लेते हैं। तो हमने उसे सुनने वाला, देखने वाला बना दिया।
Roman Urdu (Maududi)Humne Insan ko ek makhlut nutfey (intermingled sperm) se paida kiya taa-ke uska imtihaan lein aur is garz ke liye humne usey sunne aur dekhne wala banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Besahak hum ney insan ko milay julay nutfay say imtehan kay liye paida kiya aur uss ko sunta dekhta banaya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इंसान को एक मख़लुत नटफ़े (अंतरमिश्रित शुक्राणु) से भुगतान किया ता-के उसका इम्तिहान लें और इस ग़रज़ के लिए हमने उसे सुने और देखने वाला बनाया
عَرَبِيإِنّا هَدَيناهُ السَّبيلَ إِمّا شاكِرًا وَإِمّا كَفورًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने उसे रास्ता दिखा दिया। (अब) वह चाहे कृतज्ञ बने और चाहे कृतघ्न।
Roman Urdu (Maududi)Humne usey rasta dikha diya, khwa shukar karne wala baney ya kufr karne wala
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney ussay raah dikhai abb khua wo shukar guzar banay khua na shukra
Devnagri Urdu (Maududi)हमने उसे रास्ता दिखाया, ख़्वाह शुकर करने वाला बने या कुफ़्र करने वाला
عَرَبِيإِنّا أَعتَدنا لِلكافِرينَ سَلاسِلَ وَأَغلالًا وَسَعيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने काफ़िरों के लिए ज़ंजीरें तथा तौक़ और भड़कती हुई आग तैयार की है।
Roman Urdu (Maududi)Kufr karne walon ke liye humne zanjeerein aur tauq (fetters) aur bhadakti hui aag muhaiyya kar rakkhi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenaa hum ney kafiron kay liye zanjeeron aur toq aur sholon wali aag tayar ker rakhi hay
Devnagri Urdu (Maududi)कुफ़्र करने वालों के लिए हमने जंजीरें और तौक (बेड़ियां) और भड़कती हुई आग मुहैया कर रखी है
عَرَبِيإِنَّ الأَبرارَ يَشرَبونَ مِن كَأسٍ كانَ مِزاجُها كافورًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय सदाचारी लोग ऐसे जाम से पिएँगे, जिसमें कपूर का मिश्रण होगा।
Roman Urdu (Maududi)Neik log (jannat mein) sharaab ke aisey sagar piyenge jinmein aabey kafoor ki aamezish (mixture) hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Besahk neek log wo jam piyein gay jiss ki azmaish kafiron ki hay
Devnagri Urdu (Maududi)नेक लोग (जन्नत में) शराब के ऐसे सागर पिएंगे जिनमें आबे काफूर की आमिश (मिश्रण) होगी
عَرَبِيعَينًا يَشرَبُ بِها عِبادُ اللَّهِ يُفَجِّرونَها تَفجيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह एक स्रोत होगा, जिससे अल्लाह के बंदे पीएँगे। वे उसे (जहाँ चाहेंगे) बहा ले जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ek behta chasma(spring) hoga jiske pani ke saath Allah ke bandey sharaab piyengey aur jahan chahengey ba-sahulat uski shakhein (nikal) lengey
Roman Urdu (Junagarhi)Jo aik chesma hai jiss say Allah kay banday piyen gay uss ki nehrein nikaal ley jaengay (jidher chahen)
Devnagri Urdu (Maududi)ये एक बहता चश्मा (वसंत) होगा जिसके पानी के साथ अल्लाह के बंदे शराब पिएंगे और जहां चाहेंगे बा-सहुलत उसकी शाखें (निकल) लेंगे
عَرَبِييوفونَ بِالنَّذرِ وَيَخافونَ يَومًا كانَ شَرُّهُ مُستَطيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो नज़्र (मन्नत) पूरी करते हैं और उस दिन से डरते हैं जिसकी आपदा चारों ओर फैली हुई होगी।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log hongey jo (duniya mein) nazar poori karte hain, aur us din se darte hain jiski aafat har taraf phaili hui hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Jo nazar poori kertay hein aur uss din say dartay hein jiss ki buraee charon taraf phel jaanay wali hia
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग होंगे जो (दुनिया में) नजर पूरी करते हैं, और उस दिन से डरते हैं जिसकी आफत हर तरफ फैली हुई होगी
عَرَبِيوَيُطعِمونَ الطَّعامَ عَلىٰ حُبِّهِ مِسكينًا وَيَتيمًا وَأَسيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वे निर्धन, अनाथ और क़ैदी को खाना (खुद) उसकी चाहत रखते हुए भी खिलाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah ki muhabbat mein miskeen aur yateem aur qaidi ko khana khilate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah Taalaa ki mohabat mein khana khilatay hein miskeen yateem aur qediyon ko
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह कि मुहब्बत में मिस्कीन और यतीम और क़ैदी को खाना खिलाते हैं
عَرَبِيإِنَّما نُطعِمُكُم لِوَجهِ اللَّهِ لا نُريدُ مِنكُم جَزاءً وَلا شُكورًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(और कहते हैं :) हम तो तुम्हें केवल अल्लाह के चेहरे की ख़ातिर खिलाते हैं। न तुमसे कोई बदला चाहते हैं और न कृतज्ञता।
Roman Urdu (Maududi)Aur unse kehte hain ke (hum tumhein sirf) Allah ki khatir khila rahey hain, hum tumse na koi badla chahte hain na shukriya
Roman Urdu (Junagarhi)Hum to tumhein sirf Allah Taalaa ki raza mandi kay liye khilatay hein na tum say badla chatay hein na shuker guzari
Devnagri Urdu (Maududi)और उन्हें कहते हैं के (हम तुम्हें सिर्फ) अल्लाह की खातिर खिला रहे हैं, हम तुमसे ना कोई बदला चाहते हैं ना शुक्रिया
عَرَبِيإِنّا نَخافُ مِن رَبِّنا يَومًا عَبوسًا قَمطَريرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हम अपने पालनहार से उस दिन से डरते हैं, जो बहुत कठिन और भयानक होगा।
Roman Urdu (Maududi)Humey to apne Rubb se us din ke azaab ka khauf lahiq hai jo sakht museebat ka intehayi taweel din hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Beshak hum apney perwardigar say uss din ka khof kertay hein jo udaasi aur sakhti wala hoga
Devnagri Urdu (Maududi)हमें तो अपने रब से उस दिन के अज़ाब का खौफ़ लाहिक है जो सच मुसीबत का इन्तेहाई तवील दिन होगा
عَرَبِيفَوَقاهُمُ اللَّهُ شَرَّ ذٰلِكَ اليَومِ وَلَقّاهُم نَضرَةً وَسُرورًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो अल्लाह ने उन्हें उस दिन की आपदा से बचा लिया और उन्हें ताज़गी तथा खुशी प्रदान की।
Roman Urdu (Maududi)Pas Allah taala unhein us din ke sharr se bacha lega aur unhein taazgi aur suroor bakshega
Roman Urdu (Junagarhi)Pus inhen Allah Taala ney uss din ki buraee say bacha liya aur inhen taazgi aur khushi phonchaee
Devnagri Urdu (Maududi)पास अल्लाह ताला उन्हें हमारे दिन के शरर से बचा लेगा और उन्हें ताजगी और सुरूर बख्शेगा
عَرَبِيوَجَزاهُم بِما صَبَروا جَنَّةً وَحَريرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उन्हें उनके धैर्य करने के बदले में जन्नत और रेशमी वस्त्र प्रदान किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur unke sabr ke badle mein unhein jannat aur reshmi libas ata karega
Roman Urdu (Junagarhi)Aut inhen inkay sabar kay badlay jannat aur reshmi libass ata farmaye
Devnagri Urdu (Maududi)और उनके सब्र के बदले में उन्हें जन्नत और रेशमी लिबास अता करेगा
عَرَبِيمُتَّكِئينَ فيها عَلَى الأَرائِكِ ۖ لا يَرَونَ فيها شَمسًا وَلا زَمهَريرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे उसमें तख़्तों पर तकिया लगाए बैठे होंगे। न उसमें धूप देखेंगे और न सख़्त ठंड।
Roman Urdu (Maududi)Wahan woh unchey masnadon par takiye lagaye baithey hongey, na unhein dhoop ki garmi satayegi na jaadey ki thirr (bitter cold)
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh wahan takhton per takiey lagaey huye bethen gay na wahan aftab ki garmi dfekhein gay ja jaray ki sakhti
Devnagri Urdu (Maududi)वहां वो अनचे मस्नदों पर ताकिये लगाये बैठे होंगे, ना उन्हें धूप की गर्मी सतायेगी ना जादे की ठंड (कड़ाके की ठंड)
عَرَبِيوَدانِيَةً عَلَيهِم ظِلالُها وَذُلِّلَت قُطوفُها تَذليلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उसके साए उनपर झुके हुए होंगे और उसके फलों के गुच्छे उनके वश में कर दिए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Jannat ki chaaon unpar jhuki hui saaya kar rahi hogi,aur uske phal har waqt unke bas mein hongey(ke jis tarah chahey unhein todh lein)
Roman Urdu (Junagarhi)In jannaton kay saaye un per jhukey huye hongay aur inkay (meway aur)gunchay neechay latkaaey huye hongay
Devnagri Urdu (Maududi)जन्नत की छाँव उन पर झुकी हुई साया कर रही होगी, और उसके फल हर वक्त उनके बस में होंगे(के जिस तरह चाहे उन्हें तोड़ लें)
عَرَبِيوَيُطافُ عَلَيهِم بِآنِيَةٍ مِن فِضَّةٍ وَأَكوابٍ كانَت قَواريرا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उनपर चाँदी के बरतन और प्याले फिराए जाएँगे, जो शीशे के होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Unke aagey chandi ke bartan aur sheshey ke pyale gardish karaye ja rahey hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur in per chandi kay bartano aur in jaamon ka dor keraya jayega jo sheeshay kay hongay
Devnagri Urdu (Maududi)उनके आगे चांदी के बर्तन और शेष के प्याले गर्दिश कराए जा रहे होंगे
عَرَبِيقَواريرَ مِن فِضَّةٍ قَدَّروها تَقديرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)शीशे चाँदी के होंगे, उन्होंने उनका ठीक अनुमान लगाया होगा।
Roman Urdu (Maududi)Sheshey bhi woh jo chandi ki qisam ke hongey,aur unko (muntazmin-e-jannat nay)theek andazey ke mutabik bhara hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Sheeshy bhi chandi kay jinko(saqi ney)andazay say nap rakha hoga
Devnagri Urdu (Maududi)शेष भी वो जो चांदी की क़िस्म के होंगे, और उनको (मुंतज़मीन-ए-जन्नत नहीं) ठीक अंदाज़ के मुताबिक भरा होगा
عَرَبِيوَيُسقَونَ فيها كَأسًا كانَ مِزاجُها زَنجَبيلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उसमें वे ऐसे जाम पिलाए जाएँगे, जिसमें सोंठ मिली होगी।
Roman Urdu (Maududi)Unko wahan aisi sharaab ke jaam pilaye jayenge jis mein soont (ginger) ki aamezish hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inhein wahan wo jam pilaya jaey ga jin ki amezish zanjabeel ki hogi
Devnagri Urdu (Maududi)उनको वहां ऐसी शराब के जाम पिलाये जायेंगे जिसमें अदरक की आमद होगी
عَرَبِيعَينًا فيها تُسَمّىٰ سَلسَبيلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह उस (जन्नत) में एक स्रोत है, जिसका नाम सलसबील है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh jannat ka ek chasma hoga jisey salsabil kaha jata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jaanat ki ik nehar say jiss ka nam salsabeel hay
Devnagri Urdu (Maududi)ये जन्नत का एक चश्मा होगा जिसे सालसबिल कहा जाता है
عَرَبِي۞ وَيَطوفُ عَلَيهِم وِلدانٌ مُخَلَّدونَ إِذا رَأَيتَهُم حَسِبتَهُم لُؤلُؤًا مَنثورًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उनके आस-पास ऐसे बालक फिर रहे होंगे, जो सदा बालक ही रहेंगे। जब तुम उन्हें देखोगे, तो उन्हें बिखरे हुए मोती समझोगे।
Roman Urdu (Maududi)Unki khidmat ke liye aisey ladke daudte phir rahey hongey jo hamesha ladke hi rahenge.Tum unhein dekho to samjho ke moti(pearls) hai jo bikhair diye gaye hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur inkay ird gird ghoomtey phirtay hongay wo kumsin bachay jo hamesha rehnay walay hein jab tu unhein dekhay to samjhay key wo bikhray hoey sachay moti hein
Devnagri Urdu (Maududi)उनकी खिदमत के लिए ऐसे लड़के दौड़ते फिर रहेंगे होंगे जो हमेशा लड़के ही रहेंगे।तुम उन्हें देखो तो समझो के मोती (मोती) है जो बिखर गए हैं
عَرَبِيوَإِذا رَأَيتَ ثَمَّ رَأَيتَ نَعيمًا وَمُلكًا كَبيرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जब तुम वहाँ देखोगे, तो महान नेमत तथा विशाल राज्य देखोगे।
Roman Urdu (Maududi)Wahan jidhar bhi tum nigah dalogey niyamatein hi niyamatein aur ek badi sultanat ka sar o saman tumhein nazar aayega
Roman Urdu (Junagarhi)Tu wahan jahan kahin bhi nazar daley ga saraser nematein aur azeem-ul-shan saltanat hi dekhay ga
Devnagri Urdu (Maududi)वहां जिधर भी तुम निगाह डालोगे नियामतें ही नियामतें और एक बड़ी सल्तनत का सर ओ समां तुम्हें नजर आएगा
عَرَبِيعالِيَهُم ثِيابُ سُندُسٍ خُضرٌ وَإِستَبرَقٌ ۖ وَحُلّوا أَساوِرَ مِن فِضَّةٍ وَسَقاهُم رَبُّهُم شَرابًا طَهورًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनके शरीर पर महीन रेशम के हरे कपड़े तथा दबीज़ रेशमी वस्त्र होंगे और उन्हें चाँदी के कंगन पहनाए जाएँगे और उनका पालनहार उन्हें पवित्र पेय पिलाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Unke upar bareek resham ke sabz libas aur atlas o deba ke kapde (rich brocade)hongey, unko chandi ke kangan pehnaye jayenge , aur unka Rubb unko nihayat pakeeza sharaab pilaeyga
Roman Urdu (Junagarhi)In kay jismoon per sabz bareek aur motay reshmi kapray hongay aur enhen chandi kay kangan ka zewar pehnaya jaeyga aur inhein unka rab pak saaf sharab pilaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)उनके ऊपर बारीक रेशम के सब्ज लिबास और एटलस ओ देबा के कपड़े (रिच) ब्रोकेड)होंगे, उनको चांदी के कंगन पहनेंगे जाएंगे, और उनका रब उनको निहायत पाकीजा शराब पिलाएगा
عَرَبِيإِنَّ هٰذا كانَ لَكُم جَزاءً وَكانَ سَعيُكُم مَشكورًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(तथा कहा जाएगा :) निःसंदेह यह तुम्हारा प्रतिफल है और तुम्हारे प्रयास का सम्मान किया गया।
Roman Urdu (Maududi)Yeh hai tumhari jaza aur tumhari kaar-guzari qabil-e-qadr thehri hai
Roman Urdu (Junagarhi)(kaha jaeyga)kay yeh hai teray aemal ka badla aur tumhari koshish kiqadar ki gaee
Devnagri Urdu (Maududi)ये है तुम्हारी जजा और तुम्हारी कार-गुजारी काबिल-ए-कदर ठहरी है
عَرَبِيإِنّا نَحنُ نَزَّلنا عَلَيكَ القُرآنَ تَنزيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय हम ही ने आपपर यह क़ुरआन थोड़ा-थोड़ा करके उतारा है।
Roman Urdu (Maududi)Aey Nabi, humne hi tumpar yeh Quran thoda thoda karke nazil kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Beshak hum ney tujh per ba tedreej quran nazil kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ नबी, हमने ही तुमपर ये कुरान थोड़ा थोड़ा करके नाज़िल किया है
عَرَبِيفَاصبِر لِحُكمِ رَبِّكَ وَلا تُطِع مِنهُم آثِمًا أَو كَفورًا
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हिन्दी (Al-Omari)अतः आप अपने पालनहार के आदेश के लिए धैर्य रखें और उनमें से किसी पापी या कृतघ्न की बात न मानें।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza tum apne Rubb ke hukum par sabr karo, aur in mein se kisi badh-amal ya munkir-e-haq ki baat na maano
Roman Urdu (Junagarhi)Pus to apney rab kay hokum per qaim rah aur in mein say kissi gunhagar ya na shukray ka kaha na maan
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाज़ा तुम अपने रुब के हुकुम पर सब्र करो, और मुझमें से कोई बढ़-अमल या मुनकिर-ए-हक की बात न मानो
عَرَبِيوَاذكُرِ اسمَ رَبِّكَ بُكرَةً وَأَصيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा प्रातःकाल और संध्या समय अपने पालनहार का नाम याद करते रहें।
Roman Urdu (Maududi)Apne Rubb ka naam subh-o-shaam yaad karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney rab kay naam ka subha o sham zikar kiya ker
Devnagri Urdu (Maududi)अपने रब का नाम सुबह-ओ-शाम याद करो
عَرَبِيوَمِنَ اللَّيلِ فَاسجُد لَهُ وَسَبِّحهُ لَيلًا طَويلًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा रात के कुछ हिस्से में भी उसके लिए सजदा करें और लंबी रात तक उसकी पवित्रता का वर्णन करें।
Roman Urdu (Maududi)Raat ko bhi uske huzoor sajda raiz ho, Aur raat ke taveel auqat mein uski tasbeeh karte raho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur raat kay waqat uss kay saamnay sajday ker aur bohat raat tak uss ki tasbeeh kiya ker
Devnagri Urdu (Maududi)रात को भी उसके हुजूर सजदा रायज़ हो, और रात के तवील औकात में उसकी तस्बीह करते रहो
عَرَبِيإِنَّ هٰؤُلاءِ يُحِبّونَ العاجِلَةَ وَيَذَرونَ وَراءَهُم يَومًا ثَقيلًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह ये लोग शीघ्र प्राप्त होने वाली चीज़ (संसार) से प्रेम रखते है और एक भारी दिन को अपने पीछे छोड़ रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log to jaldi hasil honay wali cheez (duniya ) se muhabbat rakhte hai aur aagey jo bhaari din aane wala hai usey nazar andaz kardetey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Behak yeh log jaldi milnay wali(duniya) ko chahtay hein aur apney peechay aik baray bhari din ko choray detay hein
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग तो जल्दी हासिल होने वाली चीज (दुनिया) से मुहब्बत रखते हैं है और अगले जो भारी दिन आने वाला है उसे नज़र अंदाज़ करते हैं
عَرَبِينَحنُ خَلَقناهُم وَشَدَدنا أَسرَهُم ۖ وَإِذا شِئنا بَدَّلنا أَمثالَهُم تَبديلًا
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हिन्दी (Al-Omari)हम ही ने उन्हें पैदा किया और उनके जोड़-बंद मज़बूत किए, तथा हम जब चाहेंगे बदलकर उन जैसे अन्य लोग ले आएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Humne hi inko paida kiya hai aur inke jodh bandh mazboot kiye hai, aur hum jab chahein inki shakalon ko badal kar rakh dein
Roman Urdu (Junagarhi)Hum ney inhein peda kiya aur hum ney hi in key jor aur bandhan mazboot kiey aur hum jab chahen in kay ewaz in jesay auron ko badal layen
Devnagri Urdu (Maududi)हमने ही इनको पेदा किया है और इनके जोड़ मजबूत किए हैं, और हम जब चाहें इनकी शक्लों को बदल कर रख दें
عَرَبِيإِنَّ هٰذِهِ تَذكِرَةٌ ۖ فَمَن شاءَ اتَّخَذَ إِلىٰ رَبِّهِ سَبيلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय यह एक उपदेश है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर (जाने वाला) मार्ग पकड़ ले।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ek nasihat hai,ab jiska jee chahey apne Rubb ki taraf jaane ka rasta ikhtiyar karle
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan yeh to aik naseehat hai pus jo chahey apney rab ki raah lelay
Devnagri Urdu (Maududi)ये एक हिदायत है, अब जिसका जी चाहिए अपने रब की तरफ जाने का रास्ता इख्तियार करले
عَرَبِيوَما تَشاءونَ إِلّا أَن يَشاءَ اللَّهُ ۚ إِنَّ اللَّهَ كانَ عَليمًا حَكيمًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तुम अल्लाह के चाहे बिना कुछ भी नहीं चाह सकते। निश्चय अल्लाह सब चीज़ों को जानने वाला, पूर्ण हिकमत वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumharey chahne se kuch nahin hota jab tak ke Allah na chachey, yaqeenan Allah bada Aleem-o-Haqeem hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum na chahogay magar yeh kay Allah Taalaa hi chahey beshak Allah Talah ilm wala ba hikmat hai
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हारे चाहने से कुछ नहीं होता जब तक कि अल्लाह न चाहे, यकीनन अल्लाह बड़ा अलीम-ओ-हकीम है
عَرَبِييُدخِلُ مَن يَشاءُ في رَحمَتِهِ ۚ وَالظّالِمينَ أَعَدَّ لَهُم عَذابًا أَليمًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह जिसे चाहता है अपनी दया में दाखिल करता है और अत्याचारियों के लिए उसने दर्दनाक यातना तैयार की है।
Roman Urdu (Maududi)Apni rehmat mein jisko chahta hai daakhil karta hai, Aur zalimon ke liye usne dardnaak azaab tayyar kar rakkha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jissay chahey apni rehmat mein daakhil kerley aur zaalimon kay liye uss ney dard naak azab tayyar ker rakha hai
Devnagri Urdu (Maududi)अपनी रहमत में जिसका चाहता है दाख़िल करता है, और जालिमों के लिए उसने दर्दनाक अज़ाब तय्यार कर रक्खा है
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Surah 76: Al-Insan (The Man)

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Surah 76: Al-Insan (The Man)

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Surah 76: Al-Insan (The Man)

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Surah 76: Al-Insan (The Man)

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Surah 76: Al-Insan (The Man)

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Surah 77: Al-Mursalat (Those Sent Forth)

Meccan🕐 Revelation #33📜 50 Verses🕮 Juz 1
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Surah 77: Al-Mursalat (Those Sent Forth)

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Surah 77: Al-Mursalat (Those Sent Forth)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَالمُرسَلاتِ عُرفًا
हिन्दी (Al-Omari)क़सम है उन हवाओं की जो निरंतर भेजी जाती हैं!
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai un ( hawaon) ki jo pai dar pai bheji jati hain
Roman Urdu (Junagarhi)Dil khush kun chalti hawaon ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है उन (हवाओं) की जो पै डर पै भेजती हैं
عَرَبِيفَالعاصِفاتِ عَصفًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर बहुत तेज़ चलने वाली हवाओं की क़सम!
Roman Urdu (Maududi)Phir toofani raftar se chalti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir zor say jhonka denay walion ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)फिर तूफानी रफ़्तार से चलती है
عَرَبِيوَالنّاشِراتِ نَشرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और बादलों को फैलाने वाली हवाओं की क़सम!
Roman Urdu (Maududi)Aur (baadalon ko) utha kar phailati hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir(abar ko) ubhaar ker peraganda kernay waliyon ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)और (बादलों को) उठा कर फैलाती है
عَرَبِيفَالفارِقاتِ فَرقًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर सत्य और असत्य के बीच अंतर करने वाली चीज़ के साथ उतरने वाले फ़रिश्तों की क़सम!
Roman Urdu (Maududi)Phir (unko) phaad kar juda karti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir haq o batil ko joda joda kerdenay walay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर (उनको) फाड़ कर जुदा करती है
عَرَبِيفَالمُلقِياتِ ذِكرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर वह़्य लेकर उतरने वाले फ़रिश्तों की क़सम!
Roman Urdu (Maududi)Phir (dilon mei khuda ki)yaad daalti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wahee laanay walay farishton ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)फिर (दिलों में खुदा की)याद डालती है
عَرَبِيعُذرًا أَو نُذرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उज़्र (बहाना) समाप्त करने या डराने के लिए।
Roman Urdu (Maududi)Uzar (justification) ke taur par ya daravey ke taur par
Roman Urdu (Junagarhi)Jo (wahee) ilzaam utarnay ya aggah kerdenay kay liey hoti hai
Devnagri Urdu (Maududi)उजार (औचित्य) के तौर पर या डरावे के तौर पर
عَرَبِيإِنَّما توعَدونَ لَواقِعٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुमसे जिस चीज़ का वादा किया जाता है, निश्चय वह होकर रहने वाली है।
Roman Urdu (Maududi)Jis cheez ka tumse wada kiya ja raha hai woh zaroor waqey honay wali hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss cheez ka tum saywada kiya jata hai wo yaqeenan honay wali hai
Devnagri Urdu (Maududi)जिस चीज का तुमसे वादा किया जा रहा है वह जरूर होने वाली है
عَرَبِيفَإِذَا النُّجومُ طُمِسَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर जब तारे मिटा दिए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab sitarey maand (extinguish) pad jayengey
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab sitary be nor kerdiey jaeingay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब सितारे मांड (बुझाना) पड़ जाएगा
عَرَبِيوَإِذَا السَّماءُ فُرِجَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब आकाश फाड़ दिया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur aasmaan phaad diya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab aasman tor phor diya jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और आसमान फाड़ दिया जाएगा
عَرَبِيوَإِذَا الجِبالُ نُسِفَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब पर्वत उड़ा दिए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur pahad dhunak daaley jayengey (blown away)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab pahar tukray tukray kerdkay ura diya jaeyga
Devnagri Urdu (Maududi)और पहाड़ धुनक डाले जाएंगे (उड़ा दिया जाएगा)
عَرَبِيوَإِذَا الرُّسُلُ أُقِّتَت
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हिन्दी (Al-Omari)और जब रसूलों को निर्धारित समय पर एकत्र किया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur Rasoolon ki haziri ka waqt aa pahunchega (us roz woh cheez waqey ho jaeygi)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab rasoolon ko waqat muqarrara per laya jaeyga
Devnagri Urdu (Maududi)और रसूलों की हाजिरी का वक्त आ पहुंचेगा (उस रोज वो चीज पैदा हो जाएगी)
عَرَبِيلِأَيِّ يَومٍ أُجِّلَت
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हिन्दी (Al-Omari)किस दिन के लिए वे विलंबित किए गए हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kis roz ke liye yeh kaam utha rakha gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiss din kay liey (in sab ko)mo akkhir kiya gaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)किस रोज के आपके लिए ये काम उठा रखा गया है
عَرَبِيلِيَومِ الفَصلِ
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हिन्दी (Al-Omari)निर्णय के दिन के लिए।
Roman Urdu (Maududi)Faisley ke roz ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Faislay kay din kay liey
Devnagri Urdu (Maududi)फ़ैसले के रोज़ के लिए
عَرَبِيوَما أَدراكَ ما يَومُ الفَصلِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि निर्णय का दिन क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhein kya khabar ke woh faisley ka din kya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tujhay kiya maloom kay faislay ka din kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हें क्या खबर के वो फ़ैसले का दिन क्या है
عَرَبِيوَيلٌ يَومَئِذٍ لِلمُكَذِّبينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Tabahi hai us din jhutlane walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din jhutlanay walon ki kharabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)तबाही है उस दिन झूठ बोलने वालों के लिए
عَرَبِيأَلَم نُهلِكِ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या हमने पहलों को विनष्ट नहीं किया?
Roman Urdu (Maududi)Kya humne aglon ko halaq nahin kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya hum ney aglon ko halak nahi kiya
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हमने एग्लोन को हलाक नहीं किया
عَرَبِيثُمَّ نُتبِعُهُمُ الآخِرينَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हम उनके पीछे बाद वालों को भेजेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir unhi ke pichey hum baad walon ko chalta karengey
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum inkay baad peechlon ko laey
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उन्हीं के पीछे हम बाद वालों को चलाएंगे
عَرَبِيكَذٰلِكَ نَفعَلُ بِالمُجرِمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)हम अपराधियों के साथ ऐसा ही करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Mujrimo ke saath hum yahi kuch kiya karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum gunehgaron kay sath issi tarah kertay hein
Devnagri Urdu (Maududi)मुजरिमों के साथ हम यही कुछ करते हैं
عَرَبِيوَيلٌ يَومَئِذٍ لِلمُكَذِّبينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Tabahi hai us din jhutlaney walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din jhutlanay walon kay liey wail(afsos) hai
Devnagri Urdu (Maududi)तबाही है उस दिन झुटलाने वालों के लिए
عَرَبِيأَلَم نَخلُقكُم مِن ماءٍ مَهينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या हमने तुम्हें एक तुच्छ पानी से पैदा नहीं किया?
Roman Urdu (Maududi)Kya humne ek hakeer pani se tumhein paida nahin kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya hum ney tumhein haqeer paani say(money say) peda nahi kiya
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हमने एक हकीर पानी से तुम्हें पैदा नहीं किया
عَرَبِيفَجَعَلناهُ في قَرارٍ مَكينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उसे एक सुरक्षित ठिकाने में रखा।
Roman Urdu (Maududi)Aur ek mukarrara muddat tak
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney ussay mazboot o mehfooz jaga mein rakha
Devnagri Urdu (Maududi)और एक मुकर्ररा मुद्दत तक
عَرَبِيإِلىٰ قَدَرٍ مَعلومٍ
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हिन्दी (Al-Omari)एक ज्ञात अवधि तक।
Roman Urdu (Maududi)Usey ek mehfooz jagah thehraye rakkha
Roman Urdu (Junagarhi)Aik muqarrara waqat tak
Devnagri Urdu (Maududi)उसे एक महफूज जगह ठहरे रक्खा
عَرَبِيفَقَدَرنا فَنِعمَ القادِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने अनुमान लगाया, तो हम क्या ही अच्छा अनुमान लगाने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)To dekho , hum ispar qadir thay, pas hum bahut acchi qudrat rakhne waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir hum ney andaza kiya aur hum kiya khoob andaza kernay walay hein
Devnagri Urdu (Maududi)तो देखो, हम इसपर कादिर थे, पास हम बहुत अच्छी कुदरत रखने वाले हैं
عَرَبِيوَيلٌ يَومَئِذٍ لِلمُكَذِّبينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Tabahi hai us roz jhutlaney walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din takzeeb kernay walon ki kharabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए
عَرَبِيأَلَم نَجعَلِ الأَرضَ كِفاتًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या हमने धरती को समेटने वाली नहीं बनाया?
Roman Urdu (Maududi)Kya humne zameen ko sameth kar rakhne wali nahin banaya
Roman Urdu (Junagarhi)KIya hum ney zameen ko sametnay wali nahi banaya
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हमने ज़मीन को समेट कर रखने वाली नहीं बनाया
عَرَبِيأَحياءً وَأَمواتًا
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हिन्दी (Al-Omari)जीवित और मृत लोगों को।
Roman Urdu (Maududi)Zindon ke liye bhi aur murdon ke liye bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Zindon ko bhi aur murdon ko bhi
Devnagri Urdu (Maududi)ज़िंदों के लिए भी और मुर्दों के लिए भी
عَرَبِيوَجَعَلنا فيها رَواسِيَ شامِخاتٍ وَأَسقَيناكُم ماءً فُراتًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने उसमें ऊँचे पर्वत बनाए और हमने तुम्हें मीठा पानी पिलाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur is mein buland-o-bala pahad jamaye, Aur tumhein meetha pani pilaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum ney iss mein buland o bhar pahar bana diey aur tum hein seraab kernay wala meetha paani pilaya
Devnagri Urdu (Maududi)और इस में बुलंद-ओ-बाला पहाड़ जमाए, और तुम्हें मीठा पानी पिलाया
عَرَبِيوَيلٌ يَومَئِذٍ لِلمُكَذِّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Tabahi hai us roz jhutlaney walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din jhoot jannay walon kay liey waaye aur afsos hai
Devnagri Urdu (Maududi)तबाही है हमें रोज़ झुटलाने वालों के लिए
عَرَبِيانطَلِقوا إِلىٰ ما كُنتُم بِهِ تُكَذِّبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(कहा जाएगा :) उस चीज़ की ओर चलो, जिसे तुम झुठलाते थे।
Roman Urdu (Maududi)Chalo ab usi cheez ki taraf jisey tum jhutlaya karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Uss dozakh ki taraf jao jissay tum jhutlatay rahey thay
Devnagri Urdu (Maududi)चलो अब उसी चीज़ की तरफ जिसे तुम झुटलाया करते थे
عَرَبِيانطَلِقوا إِلىٰ ظِلٍّ ذي ثَلاثِ شُعَبٍ
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हिन्दी (Al-Omari)एक छाया की ओर चलो, जो तीन शाखाओं वाली है।
Roman Urdu (Maududi)Chalo us saaye ki taraf jo teen shaakhon(columns) wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Chalo teen shakhon waly saaye ki taraf
Devnagri Urdu (Maududi)चलो हमें साए की तरफ जो तीन शाखों (कॉलम) वाला है
عَرَبِيلا ظَليلٍ وَلا يُغني مِنَ اللَّهَبِ
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हिन्दी (Al-Omari)जो न छाया देगी और न ज्वाला से बचाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Na thandak pahunchane wala aur na aag ki lapat se bachane wala
Roman Urdu (Junagarhi)Jo dar asel na saaye denay wala hai aur na sholay say bacha sakhta hai
Devnagri Urdu (Maududi)ना ठंडक छूने वाला और ना आग की गोद से बचाने वाला
عَرَبِيإِنَّها تَرمي بِشَرَرٍ كَالقَصرِ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वह (आग) भवन के समान चिंगारियाँ फेंकेगी।
Roman Urdu (Maududi)woh aag mahal (castles/fortress) jaisi badi badi chingariyan phenkegi
Roman Urdu (Junagarhi)yaqeenan dozakh chingariyan phenkti hai jo misil mehal kay hein
Devnagri Urdu (Maududi)वो आग महल (महल/किला) जैसी बड़ी बड़ी चिंगारियां फेंकेगी
عَرَبِيكَأَنَّهُ جِمالَتٌ صُفرٌ
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हिन्दी (Al-Omari)जैसे वे पीले ऊँट हों।
Roman Urdu (Maududi)(Jo uchalti hui yun mehsus hongi )goya ke woh zard ount (camel) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Goya kay who zard unt hain
Devnagri Urdu (Maududi)(जो उछलती हुई यूं मेहसूस होंगी )गोया के वो जर्द ऊंट (ऊंट) है
عَرَبِيوَيلٌ يَومَئِذٍ لِلمُكَذِّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Tabahi hai us roz jhutlaney walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Aaj in jhot jannay walon ki durgat hai
Devnagri Urdu (Maududi)तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए
عَرَبِيهٰذا يَومُ لا يَنطِقونَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह वह दिन है कि वे बोल नहीं सकेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh din hai jismein wo na kuch bolengey
Roman Urdu (Junagarhi)Aaj (ka din)wo din hai yeh bol bhi na sakein gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो दिन है जिसमें वो ना कुछ बोलेंगे
عَرَبِيوَلا يُؤذَنُ لَهُم فَيَعتَذِرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और न उन्हें अनुमति दी जाएगी कि वे उज़्र (कारण) पेश करें।
Roman Urdu (Maududi)Aur na unhein mauka diya jaeyga ke koi uzr(excuse) pesh karein
Roman Urdu (Junagarhi)Na unhen maazrat ki ijazat di jaeygi
Devnagri Urdu (Maududi)और ना उन्हें मौका दिया जाएगा के कोई उज्र(बहाना) पेश करें
عَرَبِيوَيلٌ يَومَئِذٍ لِلمُكَذِّبينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Tabahi hai us din jhutlaney walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din jhutlanay walon ki kharabi hai
Devnagri Urdu (Maududi)तबाही है उस दिन झूठलाने वालों के लिए
عَرَبِيهٰذا يَومُ الفَصلِ ۖ جَمَعناكُم وَالأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)यह निर्णय का दिन है। हमने तुम्हें और पहलों को एकत्र कर दिया है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh faisley ka din hai humne tumhein aur tumse pehle guzrey huey logon ko jamaa kardiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hai faislay ka din hum ney tumhein aur aglon ko sab ko jama kerliya hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये फ़ैसले का दिन है हमने तुम्हें और तुमसे पहले गुज़रे हुए लोगों को जमा कर दिया है
عَرَبِيفَإِن كانَ لَكُم كَيدٌ فَكيدونِ
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हिन्दी (Al-Omari)तो यदि तुम्हारे पास कोई चाल हो, तो मेरे विरुद्ध चलो।
Roman Urdu (Maududi)Ab agar koi chaal tum chal sakte ho to mere muqabley mein chal dekho
Roman Urdu (Junagarhi)Pus agar tum mujh say koi chaal chal saktay hoto chal lo
Devnagri Urdu (Maududi)अब अगर कोई चल सकता है तो मेरे मुकाबले में चल देखो
عَرَبِيوَيلٌ يَومَئِذٍ لِلمُكَذِّبينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Tabahi hai us din jhutlaney walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Waaye hai uss din jhutlanay walon kay liey
Devnagri Urdu (Maududi)तबाही है उस दिन झूठलाने वालों के लिए
عَرَبِيإِنَّ المُتَّقينَ في ظِلالٍ وَعُيونٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय डरने वाले लोग छाँवों तथा स्रोतों में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Muttaqi log aaj saayon aur chashmon mein hai
Roman Urdu (Junagarhi)Beshak perhezgar log sayon mein hein aur meethay chashmon mein
Devnagri Urdu (Maududi)मुत्तक़ी लोग आज साये और चश्में में हैं
عَرَبِيوَفَواكِهَ مِمّا يَشتَهونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा फलों में, जिसमें से वे चाहेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo phal woh chahein (unke liye hazir hai)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unn mewon mein jin ki wo khawaish kerein
Devnagri Urdu (Maududi)और जो फल वो चाहें (उनके लिए हाज़िर है)
عَرَبِيكُلوا وَاشرَبوا هَنيئًا بِما كُنتُم تَعمَلونَ
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हिन्दी (Al-Omari)(तथा उनसे कहा जाएगा :) मज़े से खाओ और पियो, उसके बदले जो तुम किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Khao aur piyo mazey se apne un aamal ke siley mein jo tum karte rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)(aey jannatiyon!)khao piyo mazay say apney kiey huey aamal kay badley
Devnagri Urdu (Maududi)खाओ और पियो मजे से अपने उन अमल के सिली में जो तुम करते रहे हो
عَرَبِيإِنّا كَذٰلِكَ نَجزِي المُحسِنينَ
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हिन्दी (Al-Omari)हम सदाचारियों को इसी तरह बदला प्रदान करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Hum neik logon ko aisi hi jaza detay hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum neki kernay walon o iss tarah jaza detay hein
Devnagri Urdu (Maududi)हम नए लोग हैं को ऐसी ही जजा देते हैं
عَرَبِيوَيلٌ يَومَئِذٍ لِلمُكَذِّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Tabahi hai us roz jhutlaney walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din sacha na jannay walon kay liye wail(afsos) hai
Devnagri Urdu (Maududi)तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए
عَرَبِيكُلوا وَتَمَتَّعوا قَليلًا إِنَّكُم مُجرِمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ झुठलाने वालो!) तुम खा लो तथा थोड़ा-सा आनंद ले लो। निश्चय तुम अपराधी हो।
Roman Urdu (Maududi)Kha lo aur mazey karlo thodey din, haqeeqat mein tum log mujrim ho
Roman Urdu (Junagarhi)(aey jhutlanay walon tum duniya mein)thora sa khaloo aur faeeda uthalo beshak tum gunehgar ho
Devnagri Urdu (Maududi)खा लो और मजे करलो थोड़े दिन, हकीकत में तुम लोग मुजरिम हो
عَرَبِيوَيلٌ يَومَئِذٍ لِلمُكَذِّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Tabahi hai us roz jhutlaney walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din jhutlanay walon kay liye sakht halakat hai
Devnagri Urdu (Maududi)तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए
عَرَبِيوَإِذا قيلَ لَهُمُ اركَعوا لا يَركَعونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जब उनसे कहा जाता है कि (अल्लाह के आगे) झुको, तो वे नहीं झुकते।
Roman Urdu (Maududi)Jab inse kaha jata hai ke (Allah ke aagey) jhuko to nahin jhuktey
Roman Urdu (Junagarhi)In say jab kaha jata hai kay rukoo kerlo to nahi kertay
Devnagri Urdu (Maududi)जब इनसे कहा जाता है के (अल्लाह के आगे) झुको तो नहीं झुकते
عَرَبِيوَيلٌ يَومَئِذٍ لِلمُكَذِّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Tabahi hai uss roz jhutlaney walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din jhutlanay walon ki tabbahi hai
Devnagri Urdu (Maududi)तबाही है उस रोज़ झुकने वालों के लिए
عَرَبِيفَبِأَيِّ حَديثٍ بَعدَهُ يُؤمِنونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर इस (क़ुरआन) के बाद वे किस बात पर ईमान लाएँगे?
Roman Urdu (Maududi)Ab is (Quran) ke baad aur kaunsa kalaam aisa ho sakta hai jispar yeh iman layein
Roman Urdu (Junagarhi)Abb iss quran kay baad kiss baat per eman layengay
Devnagri Urdu (Maududi)अब (कुरान) के बाद और कौनसा कलाम ऐसा हो सकता है जिसपर ये ईमान लाये
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Surah 77: Al-Mursalat (Those Sent Forth)

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Surah 77: Al-Mursalat (Those Sent Forth)

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Surah 77: Al-Mursalat (Those Sent Forth)

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Surah 77: Al-Mursalat (Those Sent Forth)

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Surah 77: Al-Mursalat (Those Sent Forth)

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Surah 78: An-Naba' (The Announcement)

Meccan🕐 Revelation #80📜 40 Verses🕮 Juz 30
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Surah 78: An-Naba' (The Announcement)

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Surah 78: An-Naba' (The Announcement)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
🕮 Juz 30 begins here
हिन्दी (Al-Omari)वे आपस में किस चीज़ के विषय में प्रश्न कर रहे हैं?
Roman Urdu (Maududi)Yeh log kis cheez ke baarey mei puch-gajj kar rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log kis chez kay bary mein poch gach ker rahy hein
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग किस चीज के बारे में पूछ-गज्ज कर रहे हैं
عَرَبِيعَنِ النَّبَإِ العَظيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बहुत बड़ी सूचना के विषय में।
Roman Urdu (Maududi)Kya us badi khabar ke baarey mein
Roman Urdu (Junagarhi)Us bari khabar kay mutaliq
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हम बड़ी खबर के बारे में हैं
عَرَبِيالَّذي هُم فيهِ مُختَلِفونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिसमें वे मतभेद करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jiske mutaaliq yeh mukhtalif che-mei-goiyan (disagreement) karne mein lagey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss kay bary mein yeh ikhtylaf ker rahay hein
Devnagri Urdu (Maududi)जिसका मुतालिक ये मुखतलिफ छे-मेई-गोइयां (असहमति) करने में लगे हुए हैं
عَرَبِيكَلّا سَيَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हरगिज़ नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin an-qareeb inhein maloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqenan yeh abhi jan lein gay
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं एक-करीब इन्हें मालूम हो जाएगा
عَرَبِيثُمَّ كَلّا سَيَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर हरगिज़ नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Haan hargiz nahin, an-qareeb inhein maloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Phir bil yaqeen inhein buhat jald maloom hojaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)हां हरगिज नहीं, करीब इन्हें मालूम हो जाएगा
عَرَبِيأَلَم نَجعَلِ الأَرضَ مِهادًا
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हिन्दी (Al-Omari)क्या हमने धरती को बिछौना नहीं बनाया?
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh waqiya nahin hai ke humne zameen ko farsh banaya
Roman Urdu (Junagarhi)kiya hum nay zameen ko farsh nahi banaya
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये वाकिया नहीं है के हमने जमीन को फर्श बनाया
عَرَبِيوَالجِبالَ أَوتادًا
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हिन्दी (Al-Omari)और पर्वतों को मेखें?
Roman Urdu (Maududi)Aur pahadon ko mekhon(pegs) ki tarah gaad diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur paharon ko mikhein(nahi banaya)
Devnagri Urdu (Maududi)और पहाड़ों को पहाड़ो की तरह गाड़ दिया
عَرَبِيوَخَلَقناكُم أَزواجًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने तुम्हें जोड़े-जोड़े पैदा किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhein (mardon aur auraton ke) jodon ki shakal mein paida kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum nay tumhein jora jora paida kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हें (मर्दों और औरतों के) जोड़ो की शक्ल में पैदा किया
عَرَبِيوَجَعَلنا نَومَكُم سُباتًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने तुम्हारी नींद को आराम (का साधन) बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhari neend ko baaisey sukoon banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum nay tumhari nend ko aram ka sabab banaya
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हारी नींद को ऐसे सुकून बनाया
عَرَبِيوَجَعَلنَا اللَّيلَ لِباسًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने रात को आवरण बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur raat ko purdah posh
Roman Urdu (Junagarhi)Aur rat ko hum nay parda banaya hay
Devnagri Urdu (Maududi)और रात को पर्दा पोश
عَرَبِيوَجَعَلنَا النَّهارَ مَعاشًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने दिन को कमाने के लिए बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur din ko muaash ka waqt banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur din ko hum nay waqat e rozgar banaya
Devnagri Urdu (Maududi)और दिन को मुआश का वक्त बनाया
عَرَبِيوَبَنَينا فَوقَكُم سَبعًا شِدادًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा हमने तुम्हारे ऊपर सात मज़बूत (आकाश) बनाए।
Roman Urdu (Maududi)Aur Tumharey upar saat mazboot aasman qayam kiye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tumhary opper hum nay 7 masboot asman banaey
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हारे ऊपर सात मजबूत आसमान कायम किए
عَرَبِيوَجَعَلنا سِراجًا وَهّاجًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने एक प्रकाशमान् तप्त दीप (सूर्य) बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur ek nihayat roshan aur garm chirag paida kya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ik chamkta howa roshan chiragh(soraj)paida kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और एक निहायत रोशन और गरम चिराग़ पैदा क्या
عَرَبِيوَأَنزَلنا مِنَ المُعصِراتِ ماءً ثَجّاجًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने बदलियों से मूसलाधार पानी उतारा।
Roman Urdu (Maududi)Aur baadalon se lagatar baarish barsayi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur badlon say hum nay bakasrat bhyta hoa pani barsaya
Devnagri Urdu (Maududi)और बादलों से लगता है बारिश बरसती है
عَرَبِيلِنُخرِجَ بِهِ حَبًّا وَنَباتًا
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हिन्दी (Al-Omari)ताकि हम उसके द्वारा अन्न और वनस्पति उगाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Taa-ke iske zariye se galla(grain) aur sabzi
Roman Urdu (Junagarhi)Atky us say anaj or sabza ugaein
Devnagri Urdu (Maududi)ता-के इसके ज़रिये से गल्ला (अनाज) और सब्जी
عَرَبِيوَجَنّاتٍ أَلفافًا
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हिन्दी (Al-Omari)और घने-घने बाग़।
Roman Urdu (Maududi)Aur ghaney baagh ugaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ghanay bagh(bhi ugay)
Devnagri Urdu (Maududi)और घने बाग उगे
عَرَبِيإِنَّ يَومَ الفَصلِ كانَ ميقاتًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह निर्णय (फ़ैसले) का दिन एक नियत समय है।
Roman Urdu (Maududi)Beshak faisley ka din ek mukarrar waqt hai
Roman Urdu (Junagarhi)be-shak faislay kay din ka waqat mukarer hay
Devnagri Urdu (Maududi)बाकी फ़ैसले का दिन एक मुकर्रर वक़्त है
عَرَبِييَومَ يُنفَخُ فِي الصّورِ فَتَأتونَ أَفواجًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन सूर में फूँक मारी जाएगी, तो तुम दल के दल चले आओगे।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz soor mei phook maar di jayegi tum fauj dar fauj nikal aaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din kay sor mein phonka jaey ga phir tum foj der foj chaly ao gay
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ सूर में फुक मार दी जाएगी तुम फौज डर फौज निकल आओगे
عَرَبِيوَفُتِحَتِ السَّماءُ فَكانَت أَبوابًا
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हिन्दी (Al-Omari)और आकाश खोल दिया जाएगा, तो उसमें द्वार ही द्वार हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur aasmaan khol diya jayega hatta ke woh darwaze hi darwaze ban kar reh jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur asman khol diaya jaey ga to is mein darwazy darwazy hojaein gay
Devnagri Urdu (Maududi)और आसमान खोल दिया जाएगा हटा के वो दरवाजे ही दरवाजे बन कर रह जाएगा
عَرَبِيوَسُيِّرَتِ الجِبالُ فَكانَت سَرابًا
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हिन्दी (Al-Omari)और पर्वत चलाए जाएँगे, तो वे मरीचिका बन जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur pahad chalaye jayenge yahan tak ke woh saraab(mirage) ho jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur pahar chaly jaein gay pus wo sarab hojaein gay
Devnagri Urdu (Maududi)और पहाड़ चलाएंगे यहां तक ​​के वो साराब (मृगतृष्णा) हो जाएंगे
عَرَبِيإِنَّ جَهَنَّمَ كانَت مِرصادًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जहन्नम घात में है।
Roman Urdu (Maududi)Dar haqeeqat jahannum ek ghaat(ambush) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak dozakh ghat mein hay
Devnagri Urdu (Maududi)दर हकीकत जहन्नुम एक घाट (घात) है
عَرَبِيلِلطّاغينَ مَآبًا
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हिन्दी (Al-Omari)सरकशों का ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Sarkashon ka thikana
Roman Urdu (Junagarhi)sarkashon ka thikana wohi hay
Devnagri Urdu (Maududi)सरकशों का ठिकाना
عَرَبِيلابِثينَ فيها أَحقابًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिसमें वे अनगिनत वर्षों तक रहेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jismein woh muddaton padey rahengey
Roman Urdu (Junagarhi)Is mein wo mudaton tak pary rahein gay
Devnagri Urdu (Maududi)जिसमें वो मुद्दतों पड़े रहेंगे
عَرَبِيلا يَذوقونَ فيها بَردًا وَلا شَرابًا
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हिन्दी (Al-Omari)वे उसमें न कोई ठंड चखेंगे और न पीने की चीज़।
Roman Urdu (Maududi)Uske andar kisi thandak aur peene ke qabil kisi cheez ka maza woh na chakhengey
Roman Urdu (Junagarhi)Na kabhi is mein khunki ka maza chakein gay na pani ka
Devnagri Urdu (Maududi)उसके अंदर कोई ठंडक और पीने के काबिल किसी चीज का मजा वो न चखेंगे
عَرَبِيإِلّا حَميمًا وَغَسّاقًا
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हिन्दी (Al-Omari)सिवाय अत्यंत गर्म पानी और बहती पीप के।
Roman Urdu (Maududi)kuch milega to bas garam paani aur zakhmon ka dho-wan(peep)
Roman Urdu (Junagarhi)Siwaey garm pani aur(beyti)peep kay
Devnagri Urdu (Maududi)कुछ मिलेगा तो बस गरम पानी और जख्मों का धो-वान(पीप)
عَرَبِيجَزاءً وِفاقًا
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हिन्दी (Al-Omari)यह पूरा-पूरा बदला है।
Roman Urdu (Maududi)(Unke kartuton) ka bharpur badla
Roman Urdu (Junagarhi)(Unko)pora pora badla milay ga
Devnagri Urdu (Maududi)(उनके करतूतों) का भारपुर बदला
عَرَبِيإِنَّهُم كانوا لا يَرجونَ حِسابًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वे हिसाब से नहीं डरते थे।
Roman Urdu (Maududi)Woh kisi hisab ki tawakku na rakhte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Unhein to hisab ki tawaqa hi na thi
Devnagri Urdu (Maududi)वो किसी हिसाब की तवक्कू ना रखते थे
عَرَبِيوَكَذَّبوا بِآياتِنا كِذّابًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उन्होंने हमारी आयतों को बुरी तरह झुठलाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur hamari aayat ko unhon ne bilkul jhutla diya tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bebaki say hamari ayton ki takzeb kerty thy
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारी आयतों को उन्होंने बिल्कुल झुटला दिया था
عَرَبِيوَكُلَّ شَيءٍ أَحصَيناهُ كِتابًا
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हिन्दी (Al-Omari)और हमने हर चीज़ को लिखकर संरक्षित कर रखा है।
Roman Urdu (Maududi)Aur haal yeh tha ke humne har cheez gin gin kar likh rakkhi thi
Roman Urdu (Junagarhi)Hum nay her ik chez ko likh ker shumar ker rakah hay
Devnagri Urdu (Maududi)और हाल ये था के हमने हर चीज गिन कर लिख रखी थी
عَرَبِيفَذوقوا فَلَن نَزيدَكُم إِلّا عَذابًا
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हिन्दी (Al-Omari)तो चखो, हम तुम्हारे लिए यातना ही अधिक करते रहेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Ab chakho maza, Hum tumhare liye azaab ke siwa kisi cheez mei hargiz izafa na karengey
Roman Urdu (Junagarhi)Ab tum(apnay kiey ka )maza chako hum tumhara azab bhi barhaty rahein gay
Devnagri Urdu (Maududi)अब चाहो मजा, हम तुम्हारे लिए अज़ाब के सिवा किसी चीज में हरगिज इज़ाफा ना करेंगी
عَرَبِيإِنَّ لِلمُتَّقينَ مَفازًا
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह (अल्लाह से) डरने वालों के लिए सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)Yakeenan muttakiyon(pious) ke liye kamrani ka ek Muqaam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan perhezgar logon kay liey kamyabi hay
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन मुत्तकियों (पवित्र) के लिए कामरानी का एक मुकाम है
عَرَبِيحَدائِقَ وَأَعنابًا
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हिन्दी (Al-Omari)बाग़ तथा अंगूर।
Roman Urdu (Maududi)Baagh aur angur
Roman Urdu (Junagarhi)Baghat hein or angoor hay
Devnagri Urdu (Maududi)बाघ और अंगुर
عَرَبِيوَكَواعِبَ أَترابًا
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हिन्दी (Al-Omari)और समान उम्र वाली नवयुवतियाँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur naukhez humsin ladkiyan
Roman Urdu (Junagarhi)Aur nojawan kunwari hum omer auratein hein
Devnagri Urdu (Maududi)और नौखेज हम्सिन लड़कियां
عَرَبِيوَكَأسًا دِهاقًا
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हिन्दी (Al-Omari)और छलकते हुए प्याले।
Roman Urdu (Maududi)Aur jhalakte huey jaam
Roman Urdu (Junagarhi)Aur chalkty hoy jam sharab hein
Devnagri Urdu (Maududi)और झलकते हुए जाम
عَرَبِيلا يَسمَعونَ فيها لَغوًا وَلا كِذّابًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न (एक दूसरे को) झुठलाना।
Roman Urdu (Maududi)Wahan koi lagv(vain) aur jhuthi baat woh na sunengey
Roman Urdu (Junagarhi)Wahan na to who byhoda batein sunein gay aur na jhoti batein sunein gay
Devnagri Urdu (Maududi)वहां कोई लगव(व्यर्थ) और झूठी बात वो ना सुनेंगे
عَرَبِيجَزاءً مِن رَبِّكَ عَطاءً حِسابًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह तुम्हारे पालनहार की ओर से बदले में ऐसा प्रदान है जो पर्याप्त होगा।
Roman Urdu (Maududi)Jazaa aur kafi inaam tumharey Rubb ki taraf se
Roman Urdu (Junagarhi)(Unko) tery rab ki taraf say (unkay nek amal ka)yeh badla milay ga jo kafi inam hoga
Devnagri Urdu (Maududi)जजा और काफी इनाम तुम्हारे रब की तरफ से
عَرَبِيرَبِّ السَّماواتِ وَالأَرضِ وَما بَينَهُمَا الرَّحمٰنِ ۖ لا يَملِكونَ مِنهُ خِطابًا
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हिन्दी (Al-Omari)जो आकाशों और धरती तथा उनके बीच की हर चीज़ का पालनहार है, अत्यंत दयावान् है। उससे बात करने का उन्हें अधिकार नहीं होगा।
Roman Urdu (Maududi)Us nihayat meharban khuda ki taraf se jo zameen aur aasmaano ka aur inke darmiyan ki har cheez ka malik hai jiske samney kisi ko bolne ka yara nahin
Roman Urdu (Junagarhi)(Is rab ki taraf say milay ga jo kay)asmano ka aur zameen ka aur jo kuch in kay dermiyan hay inka perwardigar hay aur bari bakhsish kernay wala hay kisi ko is say bat chet kerney ka ikhtyar nahi hoga
Devnagri Urdu (Maududi)हमें निहायत मेहरबान खुदा की तरफ से जो जमीन और आसमान का और इनके दरमियान की हर चीज का मालिक है जिसके सामने किसी को बोलने का यारा नहीं
عَرَبِييَومَ يَقومُ الرّوحُ وَالمَلائِكَةُ صَفًّا ۖ لا يَتَكَلَّمونَ إِلّا مَن أَذِنَ لَهُ الرَّحمٰنُ وَقالَ صَوابًا
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन रूह़ (जिबरील) तथा फ़रिश्ते पंक्तियों में खड़े होंगे, उससे केवल वही बात कर सकेगा जिसे रहमान (अल्लाह) आज्ञा देगा और वह ठीक बात कहेगा।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz rooh aur malaika saff basta khade hongey. Koi na bolega siwaye uske jisey Rehman ijazat de aur jo theek baat kahey
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din roh or faristy safein bandh ker khary hongay to koi kalam na kersakay ga magar jis say rehman ijazat dayday aur wo thek bat zaban say nikalay
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ रूह और मलाइका सफ़ बस खड़े होंगे। कोई ना बोलेगा सिवाए उसके जिसे रहमान इजाज़त दे और जो ठीक बात कहे
عَرَبِيذٰلِكَ اليَومُ الحَقُّ ۖ فَمَن شاءَ اتَّخَذَ إِلىٰ رَبِّهِ مَآبًا
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हिन्दी (Al-Omari)यही (वह) दिन है जो सत्य है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर लौटने की जगह (ठिकाना) बना ले।
Roman Urdu (Maududi)Woh din bar-haqq hai, ab jiska jee chahey apne Rubb ki taraf palatne ka rasta ikhtiyar karle
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh din haq hay ab jo chaeiy apnay rab kay pass (nek amal kerkay) thikana banalein
Devnagri Urdu (Maududi)वो दिन बार-हक़ है, अब जिसका जी चाहे अपने रब की तरफ पलटने का रास्ता इख्तियार करले
عَرَبِيإِنّا أَنذَرناكُم عَذابًا قَريبًا يَومَ يَنظُرُ المَرءُ ما قَدَّمَت يَداهُ وَيَقولُ الكافِرُ يا لَيتَني كُنتُ تُرابًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने तुम्हें एक निकट ही आने वाली यातना से डरा दिया है, जिस दिन मनुष्य देख लेगा, जो कुछ उसके दोनों हाथों ने आगे भेजा है, और काफिर कहेगा : ऐ काश कि मैं मिट्टी होता!
Roman Urdu (Maududi)Humne tum logon ko us azaab se dara diya hai jo qareeb aa laga hai. Jis roz aadmi woh sab kuch dekh lega jo uske hathon ne aagey bheja hai, aur kafir pukar uthega ke kaash mai khaaq(mitti) hota
Roman Urdu (Junagarhi)Hum nay tumhein unqareeb anay walay azab say dara diya(aur chokanna ker diya) hai. jis din insan apnay haton ki kamai ko dekh ly gaur kafir kahy ga kay kash!mein mitti hojata
Devnagri Urdu (Maududi)हमने तुम लोगों को अज़ाब से डरा दिया है जो करीब आ लगा है. जिस रोज़ आदमी वो सब कुछ देख लेगा जो उसके हाथों ने आगे भेजा है, और काफ़िर पुकार उठेगा के काश में खाक (मिट्टी) होता है
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Surah 78: An-Naba' (The Announcement)

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Surah 78: An-Naba' (The Announcement)

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Surah 78: An-Naba' (The Announcement)

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Surah 78: An-Naba' (The Announcement)

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Surah 78: An-Naba' (The Announcement)

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Surah 79: An-Nazi'at (Those Who Yearn)

Meccan🕐 Revelation #81📜 46 Verses🕮 Juz 1
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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَالنّازِعاتِ غَرقًا
हिन्दी (Al-Omari)क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो डूबकर सख़्ती से (प्राण) खींचने वाले हैं!
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai un (Farishton) ki jo doob kar khinchte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Doob ker sakhti say khenchnay walon ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है उन (फरिश्तों) की जो डूब कर खिंचते हैं
عَرَبِيوَالنّاشِطاتِ نَشطًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो आसानी से (प्राण) निकालने वाले हैं!
Roman Urdu (Maududi)aur aahistagi se (gently) nikaal le jataey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Band khol ker chora dyney walon ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)और आहिस्तगी से (धीरे ​​से) निकल ले जाते हैं
عَرَبِيوَالسّابِحاتِ سَبحًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो तेज़ी से तैरने वाले हैं!
Roman Urdu (Maududi)Aur (un farishton ki jo qayinaat mein) tezi se tairtey phirtay hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur terney phirnay walon ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)और (उन फ़रिश्तों की जो कायनात में) तेजी से तैरते फिरते हैं
عَرَبِيفَالسّابِقاتِ سَبقًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो दौड़कर आगे बढ़ने वाले हैं!
Roman Urdu (Maududi)phir (hukum baja laane mein) sabqat karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir dor ker agy barhnay walon ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)फिर (हुकुम बजा लाने में) सबक करते हैं
عَرَبِيفَالمُدَبِّراتِ أَمرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो आदेश को क्रियान्वित करने वाले हैं!
Roman Urdu (Maududi)phir (ehkam-ilahi ke mutabiq) maamlaat ka intizam chalate hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir kam ki tadbeer kernay walon ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)फिर (एहकाम-इलाही के मुताबिक) मामलात का इंतिज़ाम चलते हैं
عَرَبِييَومَ تَرجُفُ الرّاجِفَةُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन काँपने वाली (अर्थात् धरती) काँप उठेगी।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz hila marey ga zalzalay ka jhatka
Roman Urdu (Junagarhi)Jis din kanpney wali kanpe gi
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ हिला मारे गा ज़लज़ले का झटका
عَرَبِيتَتبَعُهَا الرّادِفَةُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसके पीछे आएगी पीछे आने वाली।
Roman Urdu (Maududi)Aur uske pichey ek aur jhatka padega
Roman Urdu (Junagarhi)Us ky bad ik peechy aney wali (peechy peechy) aye gi
Devnagri Urdu (Maududi)और उसके पीछे एक और झटका पड़ेगा
عَرَبِيقُلوبٌ يَومَئِذٍ واجِفَةٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन कई दिल धड़कने वाले होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Kuch dil hongey jo us roz khauf se kaanp rahey hongey
Roman Urdu (Junagarhi)(buhat se)dil us din dharakty hongy
Devnagri Urdu (Maududi)कुछ दिल होंगे जो हमें रोज़ खौफ से कांप रहे होंगे
عَرَبِيأَبصارُها خاشِعَةٌ
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हिन्दी (Al-Omari)उनकी आँखें झुकी हुई होंगी।
Roman Urdu (Maududi)Nigahein unki sehmi(downcast) hui hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Gin ki nigahen nichi hongien
Devnagri Urdu (Maududi)निगाहें उनकी सहमत (डाउनकास्ट) हुई होगी
عَرَبِييَقولونَ أَإِنّا لَمَردودونَ فِي الحافِرَةِ
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हिन्दी (Al-Omari)वे कहते हैं : क्या हम निश्चय पहली स्थिति में लौटाए जाने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Yeh log kehte hain “Kya waqai hum palta kar phir wapas laaye jayenge?”
Roman Urdu (Junagarhi)kehty hein ke kiya hum pehli ki si halat ki taraf phir lot aye jaein gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग कहते हैं “क्या वकै हम पलटा कर फिर वापस लाये जायेंगे?”
عَرَبِيأَإِذا كُنّا عِظامًا نَخِرَةً
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या जब हम सड़ी-गली हड्डियाँ हो जाएँगे?
Roman Urdu (Maududi)“Kya jab hum khokli boseeda (hollow and rotten) haddiyan ban chuke hongey?”
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya us waqt jab ke hum bosida hadiyaan hojaein gay
Devnagri Urdu (Maududi)"क्या जब हम खोकली बोसीदा (खोखला और सड़ा हुआ) हदियां बन चुके होंगे?"
عَرَبِيقالوا تِلكَ إِذًا كَرَّةٌ خاسِرَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन्होंने कहा : यह तो उस समय घाटे वाला लौटना होगा।
Roman Urdu (Maududi)Kehne lagey “yeh wapsi to phir badey ghatey(nuksan) ki hogi”
Roman Urdu (Junagarhi)Kehty hein ke phir to ye lotna nuksandeh hay
Devnagri Urdu (Maududi)कहने लगे "ये वापसी तो फिर बड़े घाटे(नुक्सान) की होगी"
عَرَبِيفَإِنَّما هِيَ زَجرَةٌ واحِدَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह तो केवल एक डाँट होगी।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke yeh bas itna kaam hai ke ek zoar ki daant padegi
Roman Urdu (Junagarhi)(maloom hona chaiey)wo to sirf ik (khufnak)dant hay
Devnagri Urdu (Maududi)हलांके ये बस इतना काम है के एक ज़ोर की डांट पड़ेगी
عَرَبِيفَإِذا هُم بِالسّاهِرَةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर एकाएक वे (जीवित होकर) धरती के ऊपर होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur yakayk yeh khule maidan mein maujood hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Kay (jis kay zihar hoty hi )wo ik dam medan mein jama hojaein gay
Devnagri Urdu (Maududi)और यकायक ये खुले मैदान में मौजुद होंगे
عَرَبِيهَل أَتاكَ حَديثُ موسىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) क्या आपके पास मूसा की बात पहुँची है?
Roman Urdu (Maududi)Kya tumhein Moosa ke qissey ki khabar pahunchi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya Musa (aleh e salam)ki khabar tumhein phunchi hay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम्हें मूसा के किस्से की खबर मिलती है
عَرَبِيإِذ ناداهُ رَبُّهُ بِالوادِ المُقَدَّسِ طُوًى
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हिन्दी (Al-Omari)जब उसके पालनहार ने उसे पवित्र घाटी 'तुवा' में पुकारा।
Roman Urdu (Maududi)Jab uske Rubb ne usey Tuwa ke muqaddas wadi(valley) mein pukara tha
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay unhein unkay rab nay pak medan TUA mein pukara
Devnagri Urdu (Maududi)जब उसके रब ने उसे तुवा के मुक़द्दस कहा वादी (घाटी) में पुकारा था
عَرَبِياذهَب إِلىٰ فِرعَونَ إِنَّهُ طَغىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फ़िरऔन के पास जाओ, निश्चय वह हद से बढ़ गया है।
Roman Urdu (Maududi)Ke Firaun ke paas ja, woh sarkash ho gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)(kay)tum firoon kay pass jao unsay sirkashi ikhtyar kerli hay
Devnagri Urdu (Maududi)के फिरौन के पास जा, वो व्यंग्य हो गया है
عَرَبِيفَقُل هَل لَكَ إِلىٰ أَن تَزَكّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उससे कहो : क्या तुझे इस बात की इच्छा है कि तू पवित्र हो जाए?
Roman Urdu (Maududi)Aur ussey keh, kya tu iske liye tayyar hai ke pakeezgi ikhtiyar karey
Roman Urdu (Junagarhi)ussy kaho kay kiya to apnai durstagi or islah chata hy
Devnagri Urdu (Maududi)और उसे कहा, क्या तू इसके लिए तैयार है के पाकीज़गी इख्तियार करे
عَرَبِيوَأَهدِيَكَ إِلىٰ رَبِّكَ فَتَخشىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)और मैं तेरे पालनहार की ओर तेरा मार्गदर्शन करूँ, तो तू डर जाए?
Roman Urdu (Maududi)Aur mai terey Rubb ki taraf teri rehnumai karoon to (uska) khauf terey andar paida ho?”
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh ky mein tujhhy terey Rab ki rah dikhata takay tu (uss say) darnay lagy
Devnagri Urdu (Maududi)और मैं तेरे रब की तरफ तेरी रहनुमाई करूं तो (उसका) खौफ terey andar paida ho?”
عَرَبِيفَأَراهُ الآيَةَ الكُبرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उसे सबसे बड़ी निशानी (चमत्कार) दिखाई।
Roman Urdu (Maududi)Phir Moosa ne (Firaun ke paas ja kar) usko badi nishani dikhai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus ussay bari nishani dikhai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर मूसा ने (फिरौन के पास जा कर) उसको बड़ी निशानी दिखाई
عَرَبِيفَكَذَّبَ وَعَصىٰ
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हिन्दी (Al-Omari)तो उसने झुठला दिया और अवज्ञा की।
Roman Urdu (Maududi)Magar usne jhutla diya aur na mana
Roman Urdu (Junagarhi)To us ney jhutlaya aur na fermani ki
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उसने झुटला दिया और ना माना
عَرَبِيثُمَّ أَدبَرَ يَسعىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर वह पलटा (मूसा अलैहिस्सलाम के विरोध का) प्रयास करते हुए।
Roman Urdu (Maududi)Phir chaal baaziyan karne ke liye palta
Roman Urdu (Junagarhi)Phir palta dor dhoop kertay huye
Devnagri Urdu (Maududi)फिर चाल बाज़ियां करने के लिए पलटा
عَرَبِيفَحَشَرَ فَنادىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उसने (लोगों को) एकत्रित किया। फिर पुकारा।
Roman Urdu (Maududi)Aur logon ko jama karke usne pukaar kar kaha
Roman Urdu (Junagarhi)Phir sabb ko jama kerty pukaara
Devnagri Urdu (Maududi)और लोगों को जमा करके उसने पुकार कर कहा
عَرَبِيفَقالَ أَنا رَبُّكُمُ الأَعلىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो उसने कहा : मैं तुम्हारा सबसे ऊँचा पालनहार हूँ।
Roman Urdu (Maududi)“Main tumhara sabse bada Rubb hoon”
Roman Urdu (Junagarhi)Tum sab ka rab mein hi hun
Devnagri Urdu (Maududi)“मैं तुम्हारा सबसे बड़ा रब हूं”
عَرَبِيفَأَخَذَهُ اللَّهُ نَكالَ الآخِرَةِ وَالأولىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो अल्लाह ने उसे आख़िरत और दुनिया की यातना में पकड़ लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir-e-kaar Allah ne usey aakhirat aur duniya ke azaab mei pakad liya
Roman Urdu (Junagarhi)To(sab say buland o baala)) Allah ney bhi usay aakhrat ky aur duneya ky azab mein giriftaar kerliya
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर-ए-कार अल्लाह ने उसे आख़िरत और दुनिया के अज़ाब में पकड़ लिया
عَرَبِيإِنَّ في ذٰلِكَ لَعِبرَةً لِمَن يَخشىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह इसमें उस व्यक्ति के लिए शिक्षा है, जो डरता है।
Roman Urdu (Maududi)Dar haqeeqat is mein badi ibrat hai har us shaks ke liye jo darey
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak is mein is shaks kay liye ibrat hy jo daray
Devnagri Urdu (Maududi)दर हकीकत इस में बड़ी इब्रत है हर उस शक्स के लिए जो डरे
عَرَبِيأَأَنتُم أَشَدُّ خَلقًا أَمِ السَّماءُ ۚ بَناها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या तुम्हें पैदा करना अधिक कठिन है या आकाश को, जिसे उसने बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Kya tum logon ki takhleeq(paidaish) zyada sakht kaam hai ya aasmaan ki? Allah ne usko banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tumhara peda kerna zadadushwar hy ya aasman ka
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम लोगों की तख़लीक़ (पैदाइश) ज़्यादा सच काम जय हो आसमान की? अल्लाह ने उसको बनाया
عَرَبِيرَفَعَ سَمكَها فَسَوّاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसकी छत को ऊँचा किया, फिर उसे बराबर किया।
Roman Urdu (Maududi)Uski chhat(ceiling) khoob unchi uthayi phir uska tawazun qayam kiya(proportioned it)
Roman Urdu (Junagarhi)Iss ki bulandi unchi ki phir issay theek thak kerdia
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी छत (छत) खूब ऊंची उठाई फिर उसका तवाज़ुन क़याम किया (इसे समानुपातिक)
عَرَبِيوَأَغطَشَ لَيلَها وَأَخرَجَ ضُحاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उसकी रात को अंधेरा कर दिया तथा उसके दिन के प्रकाश को प्रकट कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur uski raat dhaanki aur uska din nikala
Roman Urdu (Junagarhi)Is ski raat ko tareek banaya aur iss kay din ko nikala
Devnagri Urdu (Maududi)और उसकी रात ढांकी और उसका दिन निकला
عَرَبِيوَالأَرضَ بَعدَ ذٰلِكَ دَحاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उसके बाद धरती को बिछाया।
Roman Urdu (Maududi)Iske baad zameen ko usne bichaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur is kay baad zameen ko (humwaar)bicha diya
Devnagri Urdu (Maududi)इसके बाद ज़मीन को उसने बिछाया
عَرَبِيأَخرَجَ مِنها ماءَها وَمَرعاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उससे उसका पानी और उसका चारा निकाला।
Roman Urdu (Maududi)Uske andar se uska paani aur chara nikala
Roman Urdu (Junagarhi)Iss mein say paani aur chaara nikala
Devnagri Urdu (Maududi)उसके अंदर से उसका पानी और चारा निकला
عَرَبِيوَالجِبالَ أَرساها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और पर्वतों को गाड़ दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur pahad usmein gaadh diye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur paharon ko (mazboot) ghar diya
Devnagri Urdu (Maududi)और पहाड़ उसमें गढ़ दिए
عَرَبِيمَتاعًا لَكُم وَلِأَنعامِكُم
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारे तथा तुम्हारे पशुओं के लाभ के लिए।
Roman Urdu (Maududi)Saaman-e-zeist(provision) ke taur par tumharay liye aur tumharey maweshion ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh sab tumhary aur tumhary janwaron kay fiady kat liey (hein)
Devnagri Urdu (Maududi)सामान-ए-ज़ीस्ट (प्रावधान) के तौर पर तुम्हारे लिए और तुम्हारे अवसरों के लिए
عَرَبِيفَإِذا جاءَتِ الطّامَّةُ الكُبرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर जब बड़ी आपदा (क़ियामत) आ जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab woh hungama-e-azeem barpa hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab wo bari afat(qiyamat) ayegi
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब वो हंगामा-ए-अज़ीम बरपा होगा
عَرَبِييَومَ يَتَذَكَّرُ الإِنسانُ ما سَعىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन इनसान अपने किए को याद करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz Insan apna sab kiya dhara yaad karega
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din kay insan apnay kiey hoy kamon ko yad kery ga
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ इंसान अपना सब किया धारा याद करेगा
عَرَبِيوَبُرِّزَتِ الجَحيمُ لِمَن يَرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और देखने वाले के लिए जहन्नम सामने कर दी जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur har dekhne wale ke samney dozak khol kar rakh di jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (her)dekhney waly kay samaney jahanum zahir ki jaey gi
Devnagri Urdu (Maududi)और हर देखने वाले के सामने दोज़क खोल कर रख दी जाएगी
عَرَبِيفَأَمّا مَن طَغىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो जो व्यक्ति हद से बढ़ गया।
Roman Urdu (Maududi)To jisne sarkashi(transgress) ki thi
Roman Urdu (Junagarhi)To jiss(shaks) nay sarkashi ki (hogi)
Devnagri Urdu (Maududi)तो जिसने सरकशी की थी
عَرَبِيوَآثَرَ الحَياةَ الدُّنيا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उसने सांसारिक जीवन को वरीयता दी।
Roman Urdu (Maududi)Aur dunya ki zindagi ko tarjeeh di thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur duneyawi zindagi ko tarjeeh di(hogi)
Devnagri Urdu (Maududi)और दुनिया की जिंदगी को तारजी दी थी
عَرَبِيفَإِنَّ الجَحيمَ هِيَ المَأوىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो निःसंदेह जहन्नम ही उसका ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)dozakh hi uska thikana hogi
Roman Urdu (Junagarhi)(uska)thikana jahanum hi hay
Devnagri Urdu (Maududi)दोज़ख ही उसका ठिकाना होगी
عَرَبِيوَأَمّا مَن خافَ مَقامَ رَبِّهِ وَنَهَى النَّفسَ عَنِ الهَوىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)लेकिन जो अपने पालनहार के समक्ष खड़ा होने से डर गया तथा अपने मन को बुरी इच्छा से रोक लिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur jisne apne Rubb ke samney khade honay ka khauf kiya tha aur nafs ko buri khwaishaat se baaz rakha tha
Roman Urdu (Junagarhi)Han jo shaks apnay rab kay samaney khara honay say darta raha hogaaur apnay nafas ko khuwahish say roka hoga
Devnagri Urdu (Maududi)और जिसने अपने रुब के सामने खड़े होने का खौफ किया था और नफ्स को बुरी ख्वाहिशों से बाज़ रखा था
عَرَبِيفَإِنَّ الجَنَّةَ هِيَ المَأوىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो निःसंदेह जन्नत ही उसका ठिकाना है।
Roman Urdu (Maududi)Jannat uska thikana hogi
Roman Urdu (Junagarhi)To uska thikana janat hi hay
Devnagri Urdu (Maududi)जन्नत उसका ठिकाना होगी
عَرَبِييَسأَلونَكَ عَنِ السّاعَةِ أَيّانَ مُرساها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे आपसे क़ियामत के बारे में पूछते हैं कि वह कब घटित होगी?
Roman Urdu (Maududi)Yeh log tumse puchte hain ke aakhir woh ghadi kab aakar thehre gi
Roman Urdu (Junagarhi)Log ap say qiyamat kay waqay honay ka waqat daryafat kerty hein
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग तुमसे पूछते हैं के आखिर वो घड़ी कब आकर ठहरे गी
عَرَبِيفيمَ أَنتَ مِن ذِكراها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आपका उसके उल्लेख करने से क्या संबंध है?
Roman Urdu (Maududi)Tumhara kya kaam ke us ka waqt batao
Roman Urdu (Junagarhi)Ap ko is kay biyan kernay say kiaya taaluq
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा क्या काम है हमारे का वक़्त बताओ
عَرَبِيإِلىٰ رَبِّكَ مُنتَهاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस (के ज्ञान) की अंतिमता तुम्हारे पालनहार ही की ओर है।
Roman Urdu (Maududi)Us ka ilm to Allah par khatm hai
Roman Urdu (Junagarhi)Isskay ilam ki inteha to Allah ki janib hay
Devnagri Urdu (Maududi)उस का इल्म तो अल्लाह पर ख़तम है
عَرَبِيإِنَّما أَنتَ مُنذِرُ مَن يَخشاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आप तो केवल उसे डराने वाले हैं, जो उससे डरता है।
Roman Urdu (Maududi)Tum sirf khabardar karne waley ho har us shaks ko jo uska khauff karey
Roman Urdu (Junagarhi)Ap to sirf issy derty rahney walon ko agha kernay walay hein
Devnagri Urdu (Maududi)तुम सिर्फ ख़बरदार करने वाले हो हर उस शक्स को जो उसका ख़ौफ़ करे
عَرَبِيكَأَنَّهُم يَومَ يَرَونَها لَم يَلبَثوا إِلّا عَشِيَّةً أَو ضُحاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन वे उसे देखेंगे, तो (ऐसा लगेगा) मानो वे (दुनिया में) केवल एक शाम या उसकी सुबह ही ठहरे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz yeh log usey dekh lengey to inhein yun mehsoos hoga ke (yeh duniya mein ya halat-e-mout mei) bas ek din ke pichle pehar ya aglay pehar tak thehrey hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jis roz ye ussay dekh lein gay to asa malom hoga kay sirf din ka akhiri hisa ya awal hisa hi(duniya mein)rahy hein
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज़ ये लोग उसे देख लेंगे तो उन्हें यूं महसूस होगा के (ये दुनिया में या हालात-ए-मौत मेई) बस एक दिन के पिछले पहर या अगले पहर तक ठहरे है
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Surah 79: An-Nazi'at (Those Who Yearn)

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Surah 79: An-Nazi'at (Those Who Yearn)

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Surah 79: An-Nazi'at (Those Who Yearn)

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Surah 79: An-Nazi'at (Those Who Yearn)

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Surah 79: An-Nazi'at (Those Who Yearn)

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Surah 80: 'Abasa (He Frowned)

Meccan🕐 Revelation #24📜 42 Verses🕮 Juz 1
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Surah 80: 'Abasa (He Frowned)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيعَبَسَ وَتَوَلّىٰ
हिन्दी (Al-Omari)उस (नबी) ने त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया।
Roman Urdu (Maududi)[The prophet] Tursh-rooh (frowned) hua aur berukhi barti
Roman Urdu (Junagarhi)Wo turush ro howa aur mon mor lia
Devnagri Urdu (Maududi)[पैगंबर] तुर्श-रूह (भौंहें चढ़ाए हुए) हुआ और बेरुखी बारती
عَرَبِيأَن جاءَهُ الأَعمىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)इस कारण कि उनके पास अंधा आया।
Roman Urdu (Maududi)Is baat par ke woh andha us ke paas aa gaya
Roman Urdu (Junagarhi)(sirf isliey)kay uskay pass ik nabina aya
Devnagri Urdu (Maududi)इस बात पर के वो अंधा उसके पास आ गया
عَرَبِيوَما يُدريكَ لَعَلَّهُ يَزَّكّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और आपको क्या मालूम शायद वह पवित्रता प्राप्त कर ले।
Roman Urdu (Maududi)Tumhe kya khabar, shayad woh sudhar jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Tujhy kia khabar shayad wo sanwar jata
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हें क्या खबर, शायद वाह सुधार जाए
عَرَبِيأَو يَذَّكَّرُ فَتَنفَعَهُ الذِّكرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)या नसीहत ग्रहण करे, तो वह नसीहत उसे लाभ दे।
Roman Urdu (Maududi)ya naseehat par dhyaan de aur naseeat karna us ke liye nafea(faiydamand) ho
Roman Urdu (Junagarhi)Ya nasehat sunta or usy nesehat fiada phunchati
Devnagri Urdu (Maududi)या हिदायत पर ध्यान दे और हिदायत करना हमारे लिए नफ़ेआ (फ़य्यादमंद) हो
عَرَبِيأَمّا مَنِ استَغنىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)लेकिन जो बेपरवाह हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Jo shaks be-parwahi baratta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo be parwaii kerta hay
Devnagri Urdu (Maududi)जो शक्स बे-परवाही बरता है
عَرَبِيفَأَنتَ لَهُ تَصَدّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो आप उसके पीछे पड़ रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Uski taraf to tum tawajjuh karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Uski taraf to pori twaja kerta hy
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी तरफ तो तुम तवज्जुह करते हो
عَرَبِيوَما عَلَيكَ أَلّا يَزَّكّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि आपपर कोई दोष नहीं कि वह पवित्रता ग्रहण नहीं करता।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke agar wo na sudhrey to tum par uski kya zimmedari hai
Roman Urdu (Junagarhi)halankay us kay na sanwarney say tujh per koi ilzam nahi
Devnagri Urdu (Maududi)हलांके अगर वो ना सुधरे तो तुम पर उसकी क्या ज़िम्मेदारी है
عَرَبِيوَأَمّا مَن جاءَكَ يَسعىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)लेकिन जो व्यक्ति आपके पास दौड़ता हुआ आया।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo khud tumharey paas dauda aata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jo shaks tery pass dorta hoywa ata hay
Devnagri Urdu (Maududi)और जो खुद तुम्हारे पास दौड़ा आता है
عَرَبِيوَهُوَ يَخشىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वह डर (भी) रहा है।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh darr raha hota hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wo der (bhi) raha hay
Devnagri Urdu (Maududi)और वह डर रहा है
عَرَبِيفَأَنتَ عَنهُ تَلَهّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो आप उसकी ओर ध्यान नहीं देते।
Roman Urdu (Maududi)Usse tum berukhi barat-tey ho
Roman Urdu (Junagarhi)To us say byrukhi barta hay
Devnagri Urdu (Maududi)उससे तुम बेरुखी बारात-ते हो
عَرَبِيكَلّا إِنَّها تَذكِرَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐसा हरगिज़ नहीं चाहिए, यह (क़ुरआन) तो एक उपदेश है।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin yeh to ek naseehat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh thek nahi quran is nasehat (ki chez) hay
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं ये तो एक हिदायत है
عَرَبِيفَمَن شاءَ ذَكَرَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः जो चाहे, उसे याद करे।
Roman Urdu (Maududi)jiska jee chahey isey qabool karey
Roman Urdu (Junagarhi)jo chahy ussy nasehat ly
Devnagri Urdu (Maududi)जिसका जी चाहे इसे कबूल करे
عَرَبِيفي صُحُفٍ مُكَرَّمَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(यह क़ुरआन) सम्मानित सहीफ़ों (ग्रंथों) में है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh aisey saheefon mein darj hai jo mukarram hain
Roman Urdu (Junagarhi)(ye to)purazmat sahifon mein hay
Devnagri Urdu (Maududi)ये ऐसे सहीफों मैं दरज है जो मुकर्रम हैं
عَرَبِيمَرفوعَةٍ مُطَهَّرَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो उच्च स्थान वाले तथा पवित्र हैं।
Roman Urdu (Maududi)Buland martaba hain, pakeeza hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo buland o bala or pak saf hein
Devnagri Urdu (Maududi)बुलंद मरतबा हैं, पाकीज़ा हैं
عَرَبِيبِأَيدي سَفَرَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐसे लिखने वालों (फ़रिश्तों) के हाथों में हैं।
Roman Urdu (Maududi)muazzaz aur neik kaatibon ke
Roman Urdu (Junagarhi)Asy likhney walon kay haton mein hy
Devnagri Urdu (Maududi)मुअज्जज़ और नीक कातिबों के
عَرَبِيكِرامٍ بَرَرَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो माननीय और नेक हैं।
Roman Urdu (Maududi)haathon mein rehete hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo buzurgh or pakbaz hein
Devnagri Urdu (Maududi)हाथों में रहते हैं
عَرَبِيقُتِلَ الإِنسانُ ما أَكفَرَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सर्वनाश हो मनुष्य का, वह कितना कृतघ्न (नाशुक्रा) है।
Roman Urdu (Maududi)Laanat ho Insan par kaisa sakht munkir-e-haq (denies the Truth) hai yeh
Roman Urdu (Junagarhi)Allah ki mar insan per kaisa nashukra hay
Devnagri Urdu (Maududi)लानत हो इंसान पर कैसा सच मुन्किर-ए-हक (सच्चाई से इनकार करता है) है ये
عَرَبِيمِن أَيِّ شَيءٍ خَلَقَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(अल्लाह ने) उसे किस चीज़ से पैदा किया?
Roman Urdu (Maududi)Kis cheez se Allah ne isey paida kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Ussy Allah nay kis chez say paida kiya
Devnagri Urdu (Maududi)किस चीज से अल्लाह ने इसे पैदा किया है
عَرَبِيمِن نُطفَةٍ خَلَقَهُ فَقَدَّرَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)एक नुत्फ़े (वीर्य) से उसे पैदा किया, फिर विभिन्न चरणों में उसकी रचना की।
Roman Urdu (Maududi)Nutfa ki ek boondh se Allah ne isey paida kiya phir iski taqdeer muqarrar ki
Roman Urdu (Junagarhi)Ussy ik nutfay say phir andazy per rakha ussko
Devnagri Urdu (Maududi)नुत्फा की एक बूंद से अल्लाह ने इसे पैदा किया फिर इसकी तकदीर मुकर्रर की
عَرَبِيثُمَّ السَّبيلَ يَسَّرَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उसके लिए रास्ता आसान कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Phir iske liye zindagi ki raah aasan ki
Roman Urdu (Junagarhi)Phir us kay liey rasta asan kiya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इसके लिए जिंदगी की राह आसान की
عَرَبِيثُمَّ أَماتَهُ فَأَقبَرَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उसे मृत्यु दी, फिर उसे क़ब्र में रखवाया।
Roman Urdu (Maududi)Phir isey maut di aur qabr mei pahunchaya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir usy mot di aur phir qabar mein dafan kiya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इसे मौत दी और क़ब्र में पाहुंचया
عَرَبِيثُمَّ إِذا شاءَ أَنشَرَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर जब वह चाहेगा, उसे उठाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Phir jab chahey woh isey dobara utha khada karey
Roman Urdu (Junagarhi)Phir jab chaey ga zinda ker day ga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जब चाहिए वो इसे दोबारा उठा खड़ा करे
عَرَبِيكَلّا لَمّا يَقضِ ما أَمَرَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हरगिज़ नहीं, अभी तक उसने उसे पूरा नहीं किया, जिसका अल्लाह ने उसे आदेश दिया था।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahi, isney woh farz ada nahi kiya jiska Allah ne isey hukum diya tha
Roman Urdu (Junagarhi)Hergiz nahi unsay ab tak Allah kay hokum ki byja awari nahi ki
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं, इसने वो फर्ज अदा नहीं किया जिसका अल्लाह ने इसे हुकुम दिया था
عَرَبِيفَليَنظُرِ الإِنسانُ إِلىٰ طَعامِهِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः इनसान को चाहिए कि अपने भोजन को देखे।
Roman Urdu (Maududi)Phir zara insaan apni khuraak(khane/food) ko dekhe
Roman Urdu (Junagarhi)Insan ko chahye kay apnay khaney ko dekhy
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जरा इंसान अपनी खुराक (खाने/खाने) को देखे
عَرَبِيأَنّا صَبَبنَا الماءَ صَبًّا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कि हमने ख़ूब पानी बरसाया।
Roman Urdu (Maududi)Humne khoob paani lundhaya(poured)
Roman Urdu (Junagarhi)Kay hum nay khob pani barsaya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने खूब पानी डाला (डाला)
عَرَبِيثُمَّ شَقَقنَا الأَرضَ شَقًّا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने धरती को विशेष रूप से फाड़ा।
Roman Urdu (Maududi)Phir zameen ko ajeeb tarah phada
Roman Urdu (Junagarhi)Phir phara zamen ko achi tarah
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जमीन को अजीब तरह फाड़ा
عَرَبِيفَأَنبَتنا فيها حَبًّا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उसमें अनाज उगाया।
Roman Urdu (Maududi)phir us ke andar ugaye galley(grain)
Roman Urdu (Junagarhi)Phir is mein anaj ugaey
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमारे अंदर उगे गैले(अनाज)
عَرَبِيوَعِنَبًا وَقَضبًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा अंगूर और (मवेशियों का) चारा।
Roman Urdu (Maududi)Aur angoor aur tarkariyan
Roman Urdu (Junagarhi)Or angoor or tarkari
Devnagri Urdu (Maududi)और अंगूर और तरकारियां
عَرَبِيوَزَيتونًا وَنَخلًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा ज़ैतून और खजूर के पेड़।
Roman Urdu (Maududi)Aur zaitoon aur khajoorein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur zeitoon or khajoor
Devnagri Urdu (Maududi)और ज़ैतून और खजूरें
عَرَبِيوَحَدائِقَ غُلبًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा घने बाग़।
Roman Urdu (Maududi)Aur ghaney baagh(orchards)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur gunjan baghat
Devnagri Urdu (Maududi)और घने बाग(बगीचे)
عَرَبِيوَفاكِهَةً وَأَبًّا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा फल और चारा।
Roman Urdu (Maududi)Aur tarah tarah ke phal aur chaarey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mywa(aur ghass)chara(bhi ugaya)
Devnagri Urdu (Maududi)और तरह तरह के फल और चारे
عَرَبِيمَتاعًا لَكُم وَلِأَنعامِكُم
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारे लिए तथा तुम्हारे पशुओं के लिए जीवन-सामग्री के रूप में।
Roman Urdu (Maududi)Tumharey liye aur tumharey maweshion(cattles) ke liye saman-e-zeist(provision )ke taur par
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhary istamal o faidy kay liey or tumhary chopayon kay liey
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारे आपके लिए तुम्हारे मवेशी (मवेशी) के लिए सामान-ए-ज़िस्ट (प्रावधान) के तौर पर
عَرَبِيفَإِذا جاءَتِ الصّاخَّةُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो जब कानों को बहरा कर देने वाली प्रचंड आवाज़ (क़ियामत) आ जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir-e-kaar jab woh kaan behrey kar deney wali aawaz buland hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab kay kan bhyray ker dyney wali (qiyamat)ajaey gi
Devnagri Urdu (Maududi)आख़िर-ए-कार जब वो कान बहरे कर देने वाली आवाज़ बुलंद होगी
عَرَبِييَومَ يَفِرُّ المَرءُ مِن أَخيهِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन इनसान अपने भाई से भागेगा।
Roman Urdu (Maududi)Us roz aadmi apne bhai
Roman Urdu (Junagarhi)Us din admi apnay bhai say
Devnagri Urdu (Maududi)उस रोज़ आदमी अपने भाई
عَرَبِيوَأُمِّهِ وَأَبيهِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा अपनी माता और अपने पिता (से)।
Roman Urdu (Maududi)Aur apni maa aur apne baap
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apni maa or bap say
Devnagri Urdu (Maududi)और अपनी माँ और अपने बाप
عَرَبِيوَصاحِبَتِهِ وَبَنيهِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा अपनी पत्नी और अपने बेटों से।
Roman Urdu (Maududi)Aur apni biwi aur apni aulad se bhagega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apni biwi or apni ulad say bhagy ga
Devnagri Urdu (Maududi)और अपनी बीवी और अपनी औलाद से भागेगा
عَرَبِيلِكُلِّ امرِئٍ مِنهُم يَومَئِذٍ شَأنٌ يُغنيهِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन उनमें से प्रत्येक व्यक्ति की ऐसी स्थिति होगी, जो उसे (दूसरों से) बेपरवाह कर देगी।
Roman Urdu (Maududi)Unmein har shaks par us din aisa waqt aa padega ke usay apne siwa kisi ka hosh na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)in mein say her ik ko us din asi fikar(damengeer)hogi jo uskay liey kafi hogi
Devnagri Urdu (Maududi)उनमें हर शक्स पर उस दिन ऐसा वक्त आ पड़ेगा के उसे अपने सिवा किसी का होश न होगा
عَرَبِيوُجوهٌ يَومَئِذٍ مُسفِرَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन कुछ चेहरे रौशन होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Kuch chehrey us roz damak rahe hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Us din bohat say chehry roshan hongy
Devnagri Urdu (Maududi)कुछ चेहरे हमें रोज दमक रहे होंगे
عَرَبِيضاحِكَةٌ مُستَبشِرَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हँसते हुए, प्रसन्न होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Hashash bashash aur khush o khurram hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Jo hansty hoy aur hashshash bashshash hongay
Devnagri Urdu (Maududi)हशश बशश और खुश ओ खुर्रम होन्गी
عَرَبِيوَوُجوهٌ يَومَئِذٍ عَلَيها غَبَرَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा कुछ चेहरों उस दिन धूल से ग्रस्त होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur kuch chehron par uss roz khaak(dust) udd rahi hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur baht say chehry usdin ghubar alod hon gay
Devnagri Urdu (Maududi)और कुछ चेहरों पर उस रोज़ खाक (धूल) उड़ रही होगी
عَرَبِيتَرهَقُها قَتَرَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनपर कालिमा छाई होगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur kalons(darkness) chayi hui hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Jis per siyahi charhi hoi hogi
Devnagri Urdu (Maududi)और कलों (अंधेरा) छाई हुई होगी
عَرَبِيأُولٰئِكَ هُمُ الكَفَرَةُ الفَجَرَةُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वही काफ़िर और कुकर्मी लोग हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yahi kafir o fajir (unbelivers and wicked) log hain
Roman Urdu (Junagarhi)wo yehi kafir badkirdar log hon gay
Devnagri Urdu (Maududi)यही काफिर ओ फजिर (अविश्वासी और दुष्ट) लोग हैं
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Surah 80: 'Abasa (He Frowned)

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Surah 80: 'Abasa (He Frowned)

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Surah 80: 'Abasa (He Frowned)

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Surah 80: 'Abasa (He Frowned)

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Surah 80: 'Abasa (He Frowned)

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Surah 81: At-Takwir (The Folding Up)

Meccan🕐 Revelation #7📜 29 Verses🕮 Juz 1
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Surah 81: At-Takwir (The Folding Up)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيإِذَا الشَّمسُ كُوِّرَت
हिन्दी (Al-Omari)जब सूर्य लपेट दिया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Jab Suraj lapeit diya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jab sooraj lappet liya jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)जब सूरज लपेट दिया जाएगा
عَرَبِيوَإِذَا النُّجومُ انكَدَرَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब सितारे प्रकाश रहित हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab taarey bikhar jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab sitary by noor hojaein gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जब तारे बिखर जाएंगे
عَرَبِيوَإِذَا الجِبالُ سُيِّرَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब पर्वत चलाए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab pahad chalaye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab pahar chalaye jaein gya
Devnagri Urdu (Maududi)और जब पहाड़ चलाये जाएंगे
عَرَبِيوَإِذَا العِشارُ عُطِّلَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब गाभिन ऊँटनियाँ छोड़ दी जाएँगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab dus mahine ki hamila ountniyan (she-camels) apne haal par chod di jayengi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab das mah ki hamla oontniyan chor di jaein gi
Devnagri Urdu (Maududi)और जब दस महीने की हमीला ऊंटनियां (वह-ऊंटनी) अपने हाल पर छोड़ दी जाएंगी
عَرَبِيوَإِذَا الوُحوشُ حُشِرَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब जंगली जानवर एकत्रित किए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab jungli jaanwar sameth kar ikhattey kar diye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab wehshi janwar ikhattay kiey jaein gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जब जंगली जानवर समथ कर इखत्ते कर दिए जाएंगे
عَرَبِيوَإِذَا البِحارُ سُجِّرَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब सागर भड़काए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab samandar bhadka diye jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab samander bharka diey jaien gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जब समंदर भड़का दिए जाएंगे
عَرَبِيوَإِذَا النُّفوسُ زُوِّجَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब प्राण मिला दिए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab jaane (Jismon se) jodh di jayengi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab janein (jimson say) mila dein jaein gein
Devnagri Urdu (Maududi)और जब जाने (जिस्म से) जोध दी जाएगी
عَرَبِيوَإِذَا المَوءودَةُ سُئِلَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब जीवित गाड़ी गई लड़की से पूछा जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab zinda gaadi hui(buried) ladki se pucha jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab zinda gari hoi larki say sawal kiya jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और जब जिंदा गाड़ी हुई (दफन) लड़की से पूछ जाएगी
عَرَبِيبِأَيِّ ذَنبٍ قُتِلَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कि वह किस अपराध के कारण मारी गई?
Roman Urdu (Maududi)ke woh kis kasoor mei mari gayi
Roman Urdu (Junagarhi)Kay kis gunha ki waja say wo qatal ki gae
Devnagri Urdu (Maududi)के वो किस कसूर में मरी गई
عَرَبِيوَإِذَا الصُّحُفُ نُشِرَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जब कर्मपत्र (आमाल नामे) फैला दिए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab aamal-naame(scrolls of deeds) kholey jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab nama amal khol diey jaein gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जब आमाल-नाम (कर्मों की पुस्तक) खोले जाएंगे
عَرَبِيوَإِذَا السَّماءُ كُشِطَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब आकाश उधेड़ दिया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab aasman ka purda hata diya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab asman ki khal utar li jaey gai
Devnagri Urdu (Maududi)और जब आसमान का परदा हटा दिया जाएगा
عَرَبِيوَإِذَا الجَحيمُ سُعِّرَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब जहन्नम दहकाई जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab Jahannam dehkayi jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab jahanum bharkai jaei gi
Devnagri Urdu (Maududi)और जब जहन्नम देहकै जाएगी
عَرَبِيوَإِذَا الجَنَّةُ أُزلِفَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब जन्नत क़रीब लाई जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab Jannat qareeb le aayi jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab jant nazdek kerdi jaey gi
Devnagri Urdu (Maududi)और जब जन्नत करीब ले आएगी
عَرَبِيعَلِمَت نَفسٌ ما أَحضَرَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो प्रत्येक प्राणी जान लेगा कि वह क्या लेकर आया है।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt har shaks ko maloom ho jayega ke woh kya lekar aaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)To us din her shaks jan lyga jo kuch yeh ker aya hoga
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त हर शक्स को मालूम हो जाएगा के वो क्या लेकर आया है
عَرَبِيفَلا أُقسِمُ بِالخُنَّسِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)मैं क़सम खाता हूँ पीछे हटने वाले सितारों की।
Roman Urdu (Maududi)Pas nahin main kasam khata hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Mein qasam khata hon pechay hatnay waly
Devnagri Urdu (Maududi)पास नहीं मैं कसम खाता हूं
عَرَبِيالجَوارِ الكُنَّسِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)चलने वाले, छिप जाने वाले तारों की।
Roman Urdu (Maududi)Palatne aur chup janey wale taaron ki
Roman Urdu (Junagarhi)Chalnay phirney waly chupney waly sitaron ki
Devnagri Urdu (Maududi)पलटने और चुप जाने वाले तारों की
عَرَبِيوَاللَّيلِ إِذا عَسعَسَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और रात की (क़सम), जब वह आती और जाती है।
Roman Urdu (Maududi)Aur Raat ki jabke woh ruksat hui
Roman Urdu (Junagarhi)Aur rat ki jab janey lagy
Devnagri Urdu (Maududi)और रात की जबके वो रुक्सत हुई
عَرَبِيوَالصُّبحِ إِذا تَنَفَّسَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा सुबह की, जब वह रौशन होने लगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur subah ki jabke usne saans liya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur subha ki jab chamek ney lagy
Devnagri Urdu (Maududi)और सुबह की जबके उसने सांस लिया
عَرَبِيإِنَّهُ لَقَولُ رَسولٍ كَريمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यह (क़ुरआन) एक आदरणीय संदेशवाहक की लाई हुई वाणी है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh fil waqea ek buzurg paigam-bar ka qaul(word) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqenan yeh ik buzrug rasool ka kaha howa hay
Devnagri Urdu (Maududi)ये फिल वाकिया एक बुज़ुर्ग पैगाम-बार का क़ौल है
عَرَبِيذي قُوَّةٍ عِندَ ذِي العَرشِ مَكينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो शक्तिशाली है, अर्श (सिंहासन) वाले के पास उच्च पद वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Jo badi tawanai (might) rakhta hai, Arsh waley ke yahan buland martaba hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo qooat wala hay arsh waly (Allah) kay nazdek buland martaba hay
Devnagri Urdu (Maududi)जो बड़ी तवानाई (हो सकता है) रखता है, अर्श वाले के यहां बुलंद मरतबा है
عَرَبِيمُطاعٍ ثَمَّ أَمينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसकी वहाँ (आसमानों में) बात मानी जाती है और बड़ा विश्वसनीय है।
Roman Urdu (Maududi)Wahan uska hukum mana jata hai, Woh ba-aitamad (trustworthy) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jis ki (asmanon mein)ita-at ki jati hay amen hy
Devnagri Urdu (Maududi)वहां उसका हुकुम मन जाता है, वो बा-एतमाद (भरोसेमंद) है
عَرَبِيوَما صاحِبُكُم بِمَجنونٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तुम्हारा साथी कोई दीवाना नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey ehle Makkah) tumhara rafeeq(companion) majnoon(mad) nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tumhara sathi dewana nahi hay
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ एहले मक्का) तुम्हारा रफीक (साथी) मजनूं (पागल) नहीं है
عَرَبِيوَلَقَد رَآهُ بِالأُفُقِ المُبينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय उन्होंने उस (जिबरील) को स्पष्ट क्षितिज पर देखा है।
Roman Urdu (Maududi)Usne us paigambar ko roshan ufaq (clear horizon) par dekha hai
Roman Urdu (Junagarhi)isnay us(farishty)ko asman kay kholy kinary per dekha bhi hay
Devnagri Urdu (Maududi)उसने पैगम्बर को रोशन उफ़ाक (स्पष्ट क्षितिज) पर देखा है
عَرَبِيوَما هُوَ عَلَى الغَيبِ بِضَنينٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वह परोक्ष (ग़ैब) की बातें बताने में कृपण नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh gaib (ke is ilam ko logon tak pahunchane) ke maamle mei bakheel nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh ghaib ki baton ko batlaney mein bakhil bhi nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और वह गैब (के इस इलम को लोगों तक पहुंच सके) के मामले में बख़ील नहीं है
عَرَبِيوَما هُوَ بِقَولِ شَيطانٍ رَجيمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यह (क़ुरआन) किसी धिक्कारे हुए शैतान की वाणी नहीं है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yeh kisi shaitan-e-mardood ka qaul nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yeh quran shytan mardod ka kalam nahi
Devnagri Urdu (Maududi)और यह किसी शैतान-ए-मर्दूद का क़ौल नहीं है
عَرَبِيفَأَينَ تَذهَبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर तुम कहाँ जा रहे हो?
Roman Urdu (Maududi)Phir tum log kidhar chaley ja rahey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Phir tum kahan jarahy ho
Devnagri Urdu (Maududi)फिर तुम लोग किधर चले जा रहे हो
عَرَبِيإِن هُوَ إِلّا ذِكرٌ لِلعالَمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यह तो समस्त संसार वालों के लिए एक उपदेश है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh to saarey jahan walon ke liye ek naseehat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh to tamam jahan walon kay liey nasehat nama hay
Devnagri Urdu (Maududi)ये तो सारे जहां वालों के लिए एक हिदायत है
عَرَبِيلِمَن شاءَ مِنكُم أَن يَستَقيمَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसके लिए, जो तुममें से सीधे मार्ग पर चलना चाहे।
Roman Urdu (Maududi)Tum mein se har us shaks ke liye jo raah-e-raast par chalna chahta ho
Roman Urdu (Junagarhi)(bilkhosos)us kay liey jo tum mein say sedhi rah per chalna chahy
Devnagri Urdu (Maududi)तुम मेरे साथ हर उस शक्स के लिए जो राह-ए-रास्त पर चलना चाहता हो
عَرَبِيوَما تَشاءونَ إِلّا أَن يَشاءَ اللَّهُ رَبُّ العالَمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम कुछ नहीं चाह सकते, सिवाय इसके कि सर्व संसार का पालनहार अल्लाह चाहे।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumharey chahney se kuch nahin hota jab tak Allah Rabb-ul-Aalameen na chahey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum baghair parwardigar e alam kay chahaye kuch nahi chah saktay
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हारे चाहने से कुछ नहीं होता जब तक अल्लाह रब्ब-उल-आलमीन न चाहिए
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Surah 81: At-Takwir (The Folding Up)

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Surah 81: At-Takwir (The Folding Up)

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Surah 81: At-Takwir (The Folding Up)

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Surah 81: At-Takwir (The Folding Up)

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Surah 81: At-Takwir (The Folding Up)

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Surah 82: Al-Infitar (The Cleaving)

Meccan🕐 Revelation #82📜 19 Verses🕮 Juz 1
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Surah 82: Al-Infitar (The Cleaving)

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Surah 82: Al-Infitar (The Cleaving)

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Surah 82: Al-Infitar (The Cleaving)

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Surah 82: Al-Infitar (The Cleaving)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيإِذَا السَّماءُ انفَطَرَت
हिन्दी (Al-Omari)जब आकाश फट जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Jab Aasman phat jayega
Roman Urdu (Junagarhi)jab asman phat jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)जब आसमान फट जाएगा
عَرَبِيوَإِذَا الكَواكِبُ انتَثَرَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जब तारे झड़ जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab taarey bikhar jayengey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab sitary jhar jaein gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जब तारे बिखर जाएंगे
عَرَبِيوَإِذَا البِحارُ فُجِّرَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब समुद्र बह निकलेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab samandar phaad diye jayengey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab samander bhy niklein gay
Devnagri Urdu (Maududi)और जब समंदर फाड़ दिए जाएंगे
عَرَبِيوَإِذَا القُبورُ بُعثِرَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब क़बरें उलट दी जाएँगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab qabrein khol di jayengi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab qabreen (shak kerky) ukhar di jaey gi
Devnagri Urdu (Maududi)और जब कब्रें खुल जाएंगी
عَرَبِيعَلِمَت نَفسٌ ما قَدَّمَت وَأَخَّرَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तब प्रत्येक प्राणी जान लेगा, जो उसने आगे भेजा और जो पीछे छोड़ा।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt har shaks ko uska agla pichla sab kiya dhara maloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)(us waqat)her shaks apnay agy bhyjy hoy aur pechay chory hoy(yani agly pechly amal)ko maloom ker lyga
Devnagri Urdu (Maududi)हमारा वक्त हर शक्स को उसका अगला पिछला सब किया धरा मालूम हो जाएगा
عَرَبِييا أَيُّهَا الإِنسانُ ما غَرَّكَ بِرَبِّكَ الكَريمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐ इनसान! तुझे किस चीज़ ने तेरे उदार पालनहार से बहका दिया?
Roman Urdu (Maududi)Aey insaan kis cheez ne tujhey apne uss Rubb-e-kareem ki taraf se dhoke mein daal diya
Roman Urdu (Junagarhi)Ay insan tujhy apnay rab e karim say kis chez nay bhykaya
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ इंसान किस चीज ने तुझे और अपने उस रब-ए-करीम की तरफ से धोखे में डाल दिया
عَرَبِيالَّذي خَلَقَكَ فَسَوّاكَ فَعَدَلَكَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिसने तेरी रचना की, फिर तुझे ठीक ठाक किया, फिर तुझे संतुलित बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Jisne tujhey paida kiya, tujhey nek-suk se durust kiya(shaped you), tujhe mutanasib(well-proportioned) banaya
Roman Urdu (Junagarhi)Jis(rab nay)tujhy paida kiya phir thek thak kiya phir (durust)baraber banaya
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने तुझ पेदा किया, तुझे नेक-सुक से दुरुस्त किया (आपको आकार दिया), तुझे मुतनसिब (अच्छी तरह से अनुपातिक) बनाया
عَرَبِيفي أَيِّ صورَةٍ ما شاءَ رَكَّبَكَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिस रूप में भी उसने चाहा, तुझे बना दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur jis surat mein chaha tujhko jodh kar tayyar kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Jis sorat mein chaha tujhy jor diya
Devnagri Urdu (Maududi)और जिस सूरत में चाहा तुझको जोड़ कर तैयार किया
عَرَبِيكَلّا بَل تُكَذِّبونَ بِالدّينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हरगिज़ नहीं, बल्कि तुम बदले (के दिन) को झुठलाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin balke (asal baat yeh hai ke) tumlog jaza-o-saza ko jhutlate ho
Roman Urdu (Junagarhi)Hergiz nahi balky tum to jaza o saza kay din ko jhotlaty ho
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं बलके (असल बात ये है के) तुमलोग जजा-ओ-सजा को झुठलाते हो
عَرَبِيوَإِنَّ عَلَيكُم لَحافِظينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि निःसंदेह तुमपर निगेहबान नियुक्त हैं।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke tumpar nigraan muqarrar hain
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqenan tum per nigheban izat waly
Devnagri Urdu (Maududi)हलांके तुमपर निग्रां मुकर्रर हैं
عَرَبِيكِرامًا كاتِبينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो सम्माननीय लिखने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aisey muazzaz kaatib
Roman Urdu (Junagarhi)Likhney waly muqerer hein
Devnagri Urdu (Maududi)ऐसे मुअज्जज कातिब
عَرَبِييَعلَمونَ ما تَفعَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे जानते हैं, जो तुम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Jo tumharey har fail(amal) ko jantey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo kuch tum kerty ho wo janty hein
Devnagri Urdu (Maududi)जो तुम्हारे हर फेल (अमल) को जानते हैं
عَرَبِيإِنَّ الأَبرارَ لَفي نَعيمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह नेक लोग बड़ी नेमत (आनंद) में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan neik log mazey mei hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqenan nek log(jant kay assh o aram aur)nematon mein hongay
Devnagri Urdu (Maududi)यक़ीनन नेक लोग मजे में होंगे
عَرَبِيوَإِنَّ الفُجّارَ لَفي جَحيمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह दुराचारी लोग जहन्नम में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur beshak badkar log jahannam me jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqenan bad kar log dozakh mein hongy
Devnagri Urdu (Maududi)और बेचैन होकर लोग जहन्नम में जाएंगे
عَرَبِييَصلَونَها يَومَ الدّينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे उसमें बदले के दिन प्रवेश करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Jaza ke din woh is mein daakhil hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Badly waly din is mein jaein agy
Devnagri Urdu (Maududi)जजा के दिन वो इस में दाख़िल होंगे
عَرَبِيوَما هُم عَنها بِغائِبينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वे उससे कभी ग़ायब होने वाले नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur us se hargiz gayab na ho sakengey
Roman Urdu (Junagarhi)Wo is say kabhi ghaib na honey paein gay
Devnagri Urdu (Maududi)और हम से हरगिज़ गायब न होंगे
عَرَبِيوَما أَدراكَ ما يَومُ الدّينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और आप क्या जानें कि बदले का दिन क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Aur tum kya jaante ho ke woh jaza ka din kya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tujhy kuch khabar bhi hay kay badlay ka din kiya hay
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम क्या जानते हो के वो जजा का दिन क्या है
عَرَبِيثُمَّ ما أَدراكَ ما يَومُ الدّينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर आप क्या जानें कि बदले का दिन क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Haan tumhein kya khabar ke woh jaza ka din kya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Mein tujhy phir (khyta hun kay )tujhay kiya maloom kay jaza (aur saza) ka din kiya hay
Devnagri Urdu (Maududi)हां तुम्हें क्या खबर के वो जजा का दिन क्या है
عَرَبِييَومَ لا تَملِكُ نَفسٌ لِنَفسٍ شَيئًا ۖ وَالأَمرُ يَومَئِذٍ لِلَّهِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन कोई प्राणी किसी प्राणी के लिए किसी चीज़ का अधिकार न रखेगा और उस दिन आदेश केवल अल्लाह का होगा।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh din hai jab kisi shaks ke liye kuch karna kisi ke bas mei na hoga, faisla us din bilkul Allah ke ikhtiyar mein hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Wo hay jis din koi shaks kisi shaks kay liye kissi cheez ka mukhtar na hoga aur (tamam ter) ehkaam us roz Allah kay hi hongay
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो दिन है जब किसी शक के लिए कुछ करना किसी के बस में न होगा, फैसला उस दिन बिल्कुल अल्लाह के इख्तियार में होगा
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Surah 82: Al-Infitar (The Cleaving)

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Surah 82: Al-Infitar (The Cleaving)

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Surah 82: Al-Infitar (The Cleaving)

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Surah 82: Al-Infitar (The Cleaving)

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Surah 82: Al-Infitar (The Cleaving)

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Surah 83: At-Tatfif (Default in Duty)

Meccan🕐 Revelation #86📜 36 Verses🕮 Juz 1
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Surah 83: At-Tatfif (Default in Duty)

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Surah 83: At-Tatfif (Default in Duty)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَيلٌ لِلمُطَفِّفينَ
हिन्दी (Al-Omari)विनाश है नाप-तौल में कमी करने वालों के लिए।
Roman Urdu (Maududi)Tabahi hai dandi maarne walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Bari kharabi hay nap tool mein kami kerney walon ki
Devnagri Urdu (Maududi)तबाही है दांडी मारने वालों के लिए
عَرَبِيالَّذينَ إِذَا اكتالوا عَلَى النّاسِ يَستَوفونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे लोग कि जब लोगों से नापकर लेते हैं, तो पूरा लेते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jinka haal yeh hai ke jab logon se letey hai to pura pura letey hai
Roman Urdu (Junagarhi)kay jab logon say nap kerlyty hein to pora pora lyty hein
Devnagri Urdu (Maududi)जिनका हाल ये है कि जब लोगों से लेते हैं तो पूरा पूरा लेते हैं
عَرَبِيوَإِذا كالوهُم أَو وَزَنوهُم يُخسِرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब उन्हें नापकर या तौलकर देते हैं, तो कम देते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab unko naap kar ya toal kar dete hai to unhein ghata dete hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab inhein nap ker ya tool ker dyty hein to kam dyty hein
Devnagri Urdu (Maududi)और जब उनको नाप कर या टोल कर देते हैं तो उन्हें घाटा देते हैं है
عَرَبِيأَلا يَظُنُّ أُولٰئِكَ أَنَّهُم مَبعوثونَ
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हिन्दी (Al-Omari)क्या वे लोग विश्वास नहीं रखते कि वे (मरने के बाद) उठाए जाने वाले हैं?
Roman Urdu (Maududi)Kya yeh log nahin samajhte ke ek badey din
Roman Urdu (Junagarhi)kiya inhen apney marney kay bad ji uthney ka khayal nahi
Devnagri Urdu (Maududi)क्या ये लोग नहीं समझते के एक बड़े दिन
عَرَبِيلِيَومٍ عَظيمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)एक बहुत बड़े दिन के लिए।
Roman Urdu (Maududi)Yeh utha kar laaye jaaney waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)us azeem din kay liey
Devnagri Urdu (Maududi)ये उठा कर लाए जाने वाले हैं
عَرَبِييَومَ يَقومُ النّاسُ لِرَبِّ العالَمينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन लोग सर्व संसार के पालनहार के सामने खड़े होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Uss din jabke sab log Rabb-ul-Aalamin ke samney khadey hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Jis din sab log rab ul alameen kay samnay khary hongy
Devnagri Urdu (Maududi)उस दिन जबके सब लोग रब्ब-उल-आलमीन के सामने खड़े होंगे
عَرَبِيكَلّا إِنَّ كِتابَ الفُجّارِ لَفي سِجّينٍ
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हिन्दी (Al-Omari)हरगिज़ नहीं, निःसंदेह दुराचारियों का कर्म-पत्र "सिज्जीन" में है।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin, yaqeenan badkaaron ka naam-e- aamal qaid-khane ke daftar mei hai
Roman Urdu (Junagarhi)yaqenan badkaron ka nama e amal sijeen mein hay
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं, यकीनन बदकारों का नाम-ए-आमाल क़ैद-ख़ाने के दफ़्तर में है
عَرَبِيوَما أَدراكَ ما سِجّينٌ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम क्या जानो कि 'सिज्जीन' क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhey kya maloom ke woh qaid-khaney ka daftar kya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tujhy kiya maloom sijeen kiya hay
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हें क्या मालूम के वो क़ैद-ख़ाने का दफ़्तर क्या है
عَرَبِيكِتابٌ مَرقومٌ
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हिन्दी (Al-Omari)वह एक लिखित पुस्तक है।
Roman Urdu (Maududi)Ek kitaab hai likhi hui
Roman Urdu (Junagarhi)(yeh to)LIkhi hoi kitab hay
Devnagri Urdu (Maududi)एक किताब है लिखी हुई
عَرَبِيوَيلٌ يَومَئِذٍ لِلمُكَذِّبينَ
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हिन्दी (Al-Omari)उस दिन झुठलाने वालों के लिए विनाश है।
Roman Urdu (Maududi)Tabahi hai us roz jhutlane walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Us din jhotlaney walon ki bari khrabi hay
Devnagri Urdu (Maududi)तबाही है उस रोज़ झूठलाने वालों के लिए
عَرَبِيالَّذينَ يُكَذِّبونَ بِيَومِ الدّينِ
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हिन्दी (Al-Omari)जो बदले के दिन को झुठलाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo roz-e-jaza ko jhutlatay hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo jaza o saza kay din ko jhotlaty hein
Devnagri Urdu (Maududi)जो रोज़-ए-जज़ा को झुटलाते हैं
عَرَبِيوَما يُكَذِّبُ بِهِ إِلّا كُلُّ مُعتَدٍ أَثيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)तथा उसे केवल वही झुठलाता है, जो सीमा का उल्लंघन करने वाला, बड़ा पापी है।
Roman Urdu (Maududi)Aur usey nahin jhutlata magar har woh shaks jo hadd se guzar janey wala bad-amal hai
Roman Urdu (Junagarhi)Issy sirf wohi jhotlata hay jo had say agy nikal janey wala(aur) ghunaghar hota hay
Devnagri Urdu (Maududi)और उसे नहीं झुटलता मगर हर वो शक्स जो हद से गुजर जाने वाला बद-अमल है
عَرَبِيإِذا تُتلىٰ عَلَيهِ آياتُنا قالَ أَساطيرُ الأَوَّلينَ
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हिन्दी (Al-Omari)जब उसके सामने हमारी आयतों को पढ़ा जाता है, तो कहता है : यह पहले लोगों की कहानियाँ हैं।
Roman Urdu (Maududi)Usey jab hamari ayaat sunayi jaati hain to kehta hai yeh to agley waqton ki kahaniyan hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jab iskay samnay hamari ayatein parhi jati hein to keh dyta hay kay yeh aglon kay afsaney hein
Devnagri Urdu (Maududi)उसे जब हमारी आयतें सुनाई जाती हैं तो कहता है ये तो अगले वक्त की कहानियां हैं
عَرَبِيكَلّا ۖ بَل ۜ رانَ عَلىٰ قُلوبِهِم ما كانوا يَكسِبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)हरगिज़ नहीं, बल्कि जो कुछ वे कमाते थे, वह ज़ंग बनकर उनके दिलों पर छा गया है।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin, balke darasal in logon ke dilon par inke burey aamal ka zang(rust) chadh gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yun nahi balky in kay dilon per in kay amal ki waja say zang (charh gaya)hai
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं, बलके दरसल इन लोगों के दिलों पर इनके बुरे अमल का ज़ंग (जंग) चढ़ गया है
عَرَبِيكَلّا إِنَّهُم عَن رَبِّهِم يَومَئِذٍ لَمَحجوبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)हरगिज़ नहीं, निश्चय वे उस दिन अपने पालनहार (के दर्शन) से रोक दिए जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin bil yaqeen us roz yeh apne Rubb ki deed(deedar) se mehroom rakhey jayenge
Roman Urdu (Junagarhi)Hergiz nahi yeh log us din apnay rab say oat mein rakhy jaein gay
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज़ नहीं बिल यकीन हमें रोज़ ये अपने रब की दीदार (दीदार) से महरूम रखे जाएंगे
عَرَبِيثُمَّ إِنَّهُم لَصالُو الجَحيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर निःसंदेह वे अवश्य जहन्नम में प्रवेश करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir yeh jahannum mein jaa padenge
Roman Urdu (Junagarhi)Phir yeh log bil yaqen jahanum mein jhonky jaein gay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर ये जहन्नुम में जा पड़ेंगे
عَرَبِيثُمَّ يُقالُ هٰذَا الَّذي كُنتُم بِهِ تُكَذِّبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)फिर कहा जाएगा : यही है, जिसे तुम झुठलाया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Phir insey kaha jayega ke yeh wahi cheez hai jisey tum jhutlaya karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Phir keh diya jaey ga kay yehi hay wo jissy tum jhotlaty rahy
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इनसे कहा जाएगा के ये वही चीज़ है जैसे तुम झूठलाया करते थे
عَرَبِيكَلّا إِنَّ كِتابَ الأَبرارِ لَفي عِلِّيّينَ
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हिन्दी (Al-Omari)हरगिज़ नहीं, निःसंदेह नेक लोगों का कर्म-पत्र निश्चय "इल्लिय्यीन" में है।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin, beshak neik aadmion ka naam-e-aamal buland paya logon ke daftar mein hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqenan yaqenan nekokaron ka nam e amal illieen mein hay
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं, बेशक नए आदमियों का नाम-ए-आमाल बुलंद पाया लोगों के दफ्तर में है
عَرَبِيوَما أَدراكَ ما عِلِّيّونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और तुम क्या जानो कि 'इल्लिय्यीन' क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhein kya khabar ke kya hai woh buland paya logon ka daftar
Roman Urdu (Junagarhi)Tujhy kiya pata kay illieen kiya hay
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हें क्या खबर है क्या है वो बुलंद पाया लोगों का दफ्तर
عَرَبِيكِتابٌ مَرقومٌ
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हिन्दी (Al-Omari)वह एक लिखित पुस्तक है।
Roman Urdu (Maududi)Ek likhi hui kitaab hai
Roman Urdu (Junagarhi)(wo to) likhi hoi kitab hay
Devnagri Urdu (Maududi)एक लिखी हुई किताब है
عَرَبِييَشهَدُهُ المُقَرَّبونَ
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हिन्दी (Al-Omari)जिसके पास समीपवर्ती (फरिश्ते) उपस्थित रहते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jiski nigeh-daasht muqarrab farishtay karte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Muqarab (farishty)iska mushahida kerty hein
Devnagri Urdu (Maududi)जिसकी निगेह-दाश्त मुकर्रब फ़रिश्ते करते हैं
عَرَبِيإِنَّ الأَبرارَ لَفي نَعيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह नेक लोग बड़ी नेमत (आनंद) में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Beshak neik log badey mazey mein hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeena nek log (bari)nematon mein hongy
Devnagri Urdu (Maududi)बेशाख नेक लोग बादे मजे में होंगे
عَرَبِيعَلَى الأَرائِكِ يَنظُرونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तख़्तों पर (बैठे) देख रहे होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Unchi masnadon(couches) par baithay nazarey kar rahey hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Mesherion per bethy dekh rahy hongy
Devnagri Urdu (Maududi)ऊंची मसनादो (सोफे) पर बैठे नजरिए कर रहे होंगे
عَرَبِيتَعرِفُ في وُجوهِهِم نَضرَةَ النَّعيمِ
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हिन्दी (Al-Omari)तुम उनके चेहरों पर नेमत की ताज़गी का आभास करोगे।
Roman Urdu (Maududi)Unke chehron par tum khushhaali ki raunak mehsoos karogey
Roman Urdu (Junagarhi)To in kay chehron say hi nematon ki taro tazgi phychan lay ga
Devnagri Urdu (Maududi)उनके चेहरों पर तुम खुशहाली की रौनक महसूस करोगी
عَرَبِييُسقَونَ مِن رَحيقٍ مَختومٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उन्हें मुहर लगी शुद्ध शराब पिलाई जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Unko nafees tareen sarband sharaab pilayi jayegi jispar mushk ki mohar(seal) lagi hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log sir ba mehar khalis sharab pilaey jaeingy
Devnagri Urdu (Maududi)उनको नफ़ीस तारें सरबंद शराब पिलाई जाएगी जिसपर मुश्क की मोहर (सील) लगेगी
عَرَبِيخِتامُهُ مِسكٌ ۚ وَفي ذٰلِكَ فَليَتَنافَسِ المُتَنافِسونَ
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हिन्दी (Al-Omari)उसकी मुहर कस्तूरी की होगी। अतः प्रतिस्पर्धा करने वालों को इसी (की प्राप्ति) के लिए प्रतिस्पर्धा करना चाहिए।
Roman Urdu (Maududi)Jo log dusron par baazi le jana chahtey hon woh is cheez ko haasil karne mei baazi le jane ki koshish karein
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss per mushk ki muhar hogi sabqat lay jeney walon ko isi mein sabqat kerni chahiey
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग दूसरों पर बाजी ले जाना चाहते हैं, वह इस चीज को हासिल करने में बाजी ले जाने की कोशिश करें
عَرَبِيوَمِزاجُهُ مِن تَسنيمٍ
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हिन्दी (Al-Omari)उसमें 'तसनीम' की मिलावट होगी।
Roman Urdu (Maududi)Us sharaab mei tasneem ki aamezish(mixture) hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur isi ki amyzish tasneem ki hogi
Devnagri Urdu (Maududi)हमें शराब में तस्नीम की आमेज (मिश्रण) होगी
عَرَبِيعَينًا يَشرَبُ بِهَا المُقَرَّبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह एक स्रोत है, जिससे समीपवर्ती लोग पिएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ek chasma hai jiske paani ke saath muqarrab log sharaab piyengey
Roman Urdu (Junagarhi)(Yani) wo chashma jis ka pani muqarab log piyein gay
Devnagri Urdu (Maududi)ये एक चश्मा है जिसके पानी के साथ मुकर्रब लोग शराब पिएंगे
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ أَجرَموا كانوا مِنَ الَّذينَ آمَنوا يَضحَكونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग अपराधी हैं, वे (दुनिया में) ईमान लाने वालों पर हँसा करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Mujrim log duniya mein imaan laane walon ka mazaak udate thay
Roman Urdu (Junagarhi)Gunha gar log iman walon ki hansi uraya kerty thy
Devnagri Urdu (Maududi)मुजरिम लोग दुनिया में ईमान लाने वालों का मज़ाक उड़ाते थे
عَرَبِيوَإِذا مَرّوا بِهِم يَتَغامَزونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब वे उनके पास से गुज़रते, तो आपस में आँखों से इशारे किया करते थे।
Roman Urdu (Maududi)Jab unke paas se guzarte to aankhein maar maar kar unki taraf isharey karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur in kay pass say guzarty hoy apas mein ankh kay isahry kerty thy
Devnagri Urdu (Maududi)जब उनके पास से गुज़रते तो आंखें मार मार कर उनकी तरफ इशारे करते थे
عَرَبِيوَإِذَا انقَلَبوا إِلىٰ أَهلِهِمُ انقَلَبوا فَكِهينَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब अपने घर वालों की ओर लौटते, तो (मोमिनों के परिहास का) आनंद लेते हुए लौटते थे।
Roman Urdu (Maududi)Apne gharon ki taraf palat-tey to mazey letey huey palat-tey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab apnay walon ki taraf lot ty to dil lageyan kerty thy
Devnagri Urdu (Maududi)अपने घरोन की तरफ पलट-ते तो मजे लेते हुए पलट-ते थे
عَرَبِيوَإِذا رَأَوهُم قالوا إِنَّ هٰؤُلاءِ لَضالّونَ
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हिन्दी (Al-Omari)और जब वे उन (मोमिनों) को देखते, तो कहते थे : निःसंदेह ये लोग निश्चय भटके हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab unhein dekhte to kehte thay ke yeh behke huey log hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab inhein dekhty to kehty yaqeenan yeh log ghumrah(berah) hein
Devnagri Urdu (Maududi)और जब उन्हें देखते तो कहते थे के ये बहके हुए लोग हैं
عَرَبِيوَما أُرسِلوا عَلَيهِم حافِظينَ
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हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि वे उनपर निरीक्षक बनाकर नहीं भेजे गए थे।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke woh un par nigran banakar nahin bhejey gaye thay
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh in per pasban bana ker to nahi bhyjy gay
Devnagri Urdu (Maududi)हलांके वो उन पर निगरान बनकर नहीं भेजये गए थे
عَرَبِيفَاليَومَ الَّذينَ آمَنوا مِنَ الكُفّارِ يَضحَكونَ
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हिन्दी (Al-Omari)तो आज वे लोग जो ईमान लाए, काफ़िरों पर हँस रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aaj imaan laane waley kuffar par hans rahay hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aj iman waly in kafiron per hansein gay
Devnagri Urdu (Maududi)आज ईमान लाने वाले कुफ्फार पर हंस रहे हैं
عَرَبِيعَلَى الأَرائِكِ يَنظُرونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तख़्तों पर बैठे देख रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Masnadon par baithey huey unka haal dekh rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Takhaton per bethy dekh rahy hongy
Devnagri Urdu (Maududi)मसनदों पर बैठे हुए उनका हाल देख रहे हैं
عَرَبِيهَل ثُوِّبَ الكُفّارُ ما كانوا يَفعَلونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या काफ़िरों को उसका बदला मिल गया, जो वे किया करते थे?
Roman Urdu (Maududi)Mil gaya na kafiron ko un harkaton ka sawab jo woh kiya karte thay
Roman Urdu (Junagarhi)Kay abb in munkiron nay jaisa yeh kerty thay poora poora badla pa liya
Devnagri Urdu (Maududi)मिल गया न काफिरों को उन हरकतों का सवाब जो वो किया करता था
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Surah 83: At-Tatfif (Default in Duty)

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Surah 83: At-Tatfif (Default in Duty)

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Surah 83: At-Tatfif (Default in Duty)

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Surah 83: At-Tatfif (Default in Duty)

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Surah 83: At-Tatfif (Default in Duty)

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Surah 84: Al-Inshiqaq (The Bursting Asunder)

Meccan🕐 Revelation #83📜 25 Verses🕮 Juz 1
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Surah 84: Al-Inshiqaq (The Bursting Asunder)

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Surah 84: Al-Inshiqaq (The Bursting Asunder)

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Surah 84: Al-Inshiqaq (The Bursting Asunder)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيإِذَا السَّماءُ انشَقَّت
हिन्दी (Al-Omari)जब आकाश फट जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Jab aasman phatt jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jab asman phat jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)जब आसमां फट जाएगा
عَرَبِيوَأَذِنَت لِرَبِّها وَحُقَّت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और अपने पालनहार के आदेश पर कान लगाएगा और यही उसके योग्य है।
Roman Urdu (Maududi)Aur apne Rubb kay famaan ki tameel karega aur uske liye haq yahi hai (ke apne Rubb ka hukum maney)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney rab kay hokum per kan lagaey ga aur issi kay laiq wo hay
Devnagri Urdu (Maududi)और अपने रब का फमां की तमील करेगा और उसके लिए हक यहीं है (के अपने रुब का हुकुम माने)
عَرَبِيوَإِذَا الأَرضُ مُدَّت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जब धरती फैला दी जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab zameen phaila di jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab zameen (khench ker)phela di jaey gi
Devnagri Urdu (Maududi)और जब ज़मीन फैला दी जाएगी
عَرَبِيوَأَلقَت ما فيها وَتَخَلَّت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जो कुछ उसके भीतर है, उसे निकाल बाहर फेंक देगी और खाली हो जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo kuch uske andar hai usey bahar phenk kar khaali ho jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss mein jo hai ussay wo ugal degi aur khali hojaigi
Devnagri Urdu (Maududi)और जो कुछ उसके अंदर है उसे बाहर फेंक कर खाली हो जाएगी
عَرَبِيوَأَذِنَت لِرَبِّها وَحُقَّت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और अपने पालनहार के आदेश पर कान लगाएगी और यही उसके योग्य है।
Roman Urdu (Maududi)Aur apne Rubb ke hukum ki tameel karegi aur uske liye haq yahi hai (kay uski tameel karey)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney rab ky hokoom per kaan lagaye gi aur isi kay laeeq wo hy
Devnagri Urdu (Maududi)और अपने रुब के हुकुम की तमील करेगी और उसके लिए हक यहीं है (काय उसकी तमील करे)
عَرَبِييا أَيُّهَا الإِنسانُ إِنَّكَ كادِحٌ إِلىٰ رَبِّكَ كَدحًا فَمُلاقيهِ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ इनसान! निःसंदेह तू कठिन परिश्रम करते-करते अपने पालनहार की ओर जाने वाला है, फिर तू उससे मिलने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aey insaan tu kashaan kashaan apne Rubb ki taraf chala ja raha hai(striving unto your Lord) aur ussey milney wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aey insaan! Tu apney rab say milney tak yeh koshish aur tamam kaam aur mehnatein kerky ussymulaqatkerney wala hy
Devnagri Urdu (Maududi)ऐ इंसान तू काशान काशान अपने रब की तरफ चल जा रहा है और उसे मिलने वाला है
عَرَبِيفَأَمّا مَن أوتِيَ كِتابَهُ بِيَمينِهِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर जिस व्यक्ति को उसका कर्मपत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया।
Roman Urdu (Maududi)Phir jiska naam-e-aamal uske seedhey haath mei diya gaya
Roman Urdu (Junagarhi)To(us waqt) jis shaks kydahaney hath mein aamaal naama diya jaiyga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जिसका नाम-ए-आमाल उसके सीधे हाथ में दे दिया गया
عَرَبِيفَسَوفَ يُحاسَبُ حِسابًا يَسيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तो उसका आसान हिसाब लिया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Ussey halka hisaab liya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Us ka hisab to bari aasani say liya jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)उसका हलका हिसाब लिया जाएगा
عَرَبِيوَيَنقَلِبُ إِلىٰ أَهلِهِ مَسرورًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा वह अपने लोगों की ओर ख़ुश-ख़ुश लौटेगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh apne logon ki taraf khush khush paltega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur wo apney ehal ki taraf hansi khushi lot ayega
Devnagri Urdu (Maududi)और वो अपना लोगों की तरफ खुश ख़ुश पलटेगा
عَرَبِيوَأَمّا مَن أوتِيَ كِتابَهُ وَراءَ ظَهرِهِ
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हिन्दी (Al-Omari)और लेकिन जिसे उसका कर्मपत्र उसकी पीठ के पीछे दिया गया।
Roman Urdu (Maududi)Raha woh shaks jiska naam-e-aamal us ki peeth ke pichey diya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Han jis shaks ka aamaal nama us ki peeth ky peechy say diya jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)रहा वो शक्स जिसका नाम-ए-आमाल उस की पीठ के पीछे दिया जाएगा
عَرَبِيفَسَوفَ يَدعو ثُبورًا
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हिन्दी (Al-Omari)तो वह विनाश को पुकारेगा।
Roman Urdu (Maududi)To woh maut ko pukarega
Roman Urdu (Junagarhi)To wo maut ko bulaney lagyga
Devnagri Urdu (Maududi)तो वो मौत को पुकारेगा
عَرَبِيوَيَصلىٰ سَعيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)तथा जहन्नम में प्रवेश करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur bhadakti hui aag mei ja padega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bharakti hui jahanum meindakhil hoga
Devnagri Urdu (Maududi)और भक्ति हुई आग में जा पड़ेगा
عَرَبِيإِنَّهُ كانَ في أَهلِهِ مَسرورًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वह अपने घर वालों में बड़ा प्रसन्न था।
Roman Urdu (Maududi)Woh apne ghar walon mein magan tha
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh sahks apnay mutalqeen mein(duniya mein)khush tah
Devnagri Urdu (Maududi)वो अपने घर वालों में मगन था
عَرَبِيإِنَّهُ ظَنَّ أَن لَن يَحورَ
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हिन्दी (Al-Omari)निश्चय उसने समझा था कि वह कभी (अल्लाह की ओर) वापस नहीं लौटेगा।
Roman Urdu (Maududi)Usne samjha tha ke usey kabhi palatna nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Isska khayal tah kay Allah ki taraf loot ker hi na jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)उसने समझ था के उसे कभी पलटना नहीं है
عَرَبِيبَلىٰ إِنَّ رَبَّهُ كانَ بِهِ بَصيرًا
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हिन्दी (Al-Omari)क्यों नहीं, निश्चय उसका पालनहार उसे देख रहा था।
Roman Urdu (Maududi)Palatna kaise na tha, uska Rubb uske kartoot dekh raha tha
Roman Urdu (Junagarhi)Que nahi hanlankay iska rab usy bakhobi dekh raha tha
Devnagri Urdu (Maududi)पलटना कैसे ना था, उसका रब उसे करतूत देख रहा था
عَرَبِيفَلا أُقسِمُ بِالشَّفَقِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)मैं क़सम खाता हूँ शफ़क़ (सूर्यास्त के बाद की लाली) की।
Roman Urdu (Maududi)Pas nahin mai kasam khata hon shafaq(twilight) ki
Roman Urdu (Junagarhi)mujhy shafaq ki qasam!aur rat ki
Devnagri Urdu (Maududi)पास नहीं मैं कसम खाता हूं शफक (ट्वाइलाइट) की
عَرَبِيوَاللَّيلِ وَما وَسَقَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा रात की और उसकी जो कुछ वह एकत्रित करती है!
Roman Urdu (Maududi)Aur raat ki aur jo kuch woh sameith leti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iski jama kerda chezon ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)और रात की और जो कुछ वही लेती है
عَرَبِيوَالقَمَرِ إِذَا اتَّسَقَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा चाँद की, जब वह पूरा हो जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur chaand ki jabke woh maah-e-kaamil (full) ho jata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur chand ki jab kay wo kamil hojata hay
Devnagri Urdu (Maududi)और चांद की जबके वो माह-ए-कामिल (पूर्ण) हो जाता है
عَرَبِيلَتَركَبُنَّ طَبَقًا عَن طَبَقٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तुम अवश्य एक अवस्था से दूसरी अवस्था में स्थानांतरित होते रहोगे।
Roman Urdu (Maududi)Tumko zaroor darja ba darja ek haalat se dusri halat ki taraf guzarte chalay jana hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqenan tum ik halat say dosri halat per phuncho gay
Devnagri Urdu (Maududi)तुमको जरूर दरजा बा दरजा एक हालत से दूसरी हालत की तरफ गुज़रते जाना है
عَرَبِيفَما لَهُم لا يُؤمِنونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उन्हें क्या हो गया है कि वे ईमान नहीं लाते?
Roman Urdu (Maududi)Phir in logon ko kya ho gaya hai ke yeh imaan nahin laatey
Roman Urdu (Junagarhi)Inhein ki hogaya kay iman nahi laty
Devnagri Urdu (Maududi)फिर लोगों को क्या हो गया है के ये ईमान नहीं लाते
☉ Sajda
عَرَبِيوَإِذا قُرِئَ عَلَيهِمُ القُرآنُ لا يَسجُدونَ ۩
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब उनके सामने क़ुरआन पढ़ा जाता है, तो सजदा नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab Quran inke samney pada jata hai to sajda nahin karte
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jab in kay pass quran parha jata hay to sajda nahi kerty
Devnagri Urdu (Maududi)और जब कुरान इनके सामने पड़ा जाता है सजदा नहीं करते
عَرَبِيبَلِ الَّذينَ كَفَروا يُكَذِّبونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि जिन्होंने कुफ़्र किया, वे (उसे) झुठलाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Balke yeh munkireen to ulta jhutlatay hain
Roman Urdu (Junagarhi)balky jinhon nay kufur kiya wo jhotla rahy hein
Devnagri Urdu (Maududi)बलके ये मुनकिरीन तो उल्टा झूठलाते हैं
عَرَبِيوَاللَّهُ أَعلَمُ بِما يوعونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह सबसे अधिक जानने वाला है जो कुछ वे अपने भीतर रखते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke jo kuch yeh (apne naam-e-aamal mein) jama kar rahey hain Allah usey khoob janta hai
Roman Urdu (Junagarhi)aur Allah khob janta hay jo kuch yah dilon mein rakhty hein
Devnagri Urdu (Maududi)हलांके जो कुछ ये (अपने नाम-ए-आमाल में) जामा कर रहे हैं अल्लाह उसे खूब जानता है
عَرَبِيفَبَشِّرهُم بِعَذابٍ أَليمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः उन्हें एक दर्दनाक यातना की शुभ सूचना दे दो।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza inko dardnaak azaab ki basharat dedo
Roman Urdu (Junagarhi)Inhen alamnak azabon ki khush khabri suna do
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाजा इनको दर्दनाक अज़ाब की बशारत देदो
عَرَبِيإِلَّا الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ لَهُم أَجرٌ غَيرُ مَمنونٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)परंतु जो लोग ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए, उनके लिए कभी न समाप्त होने वाला बदला है।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jo log imaan le aaye hain aur jinho ne neik aamal kiye hain unke liye kabhi khatam na honay wala ajar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Han eman walon aur nek amal walon be shumar aur na khtam honey wala ajar hay
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जो लोग ईमान ले आये हैं और जिन्हो ने नेक अमल किये हैं उनके लिए कभी ख़तम न होने वाला अजर है
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Surah 84: Al-Inshiqaq (The Bursting Asunder)

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Surah 84: Al-Inshiqaq (The Bursting Asunder)

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Surah 84: Al-Inshiqaq (The Bursting Asunder)

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Surah 84: Al-Inshiqaq (The Bursting Asunder)

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Surah 84: Al-Inshiqaq (The Bursting Asunder)

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Surah 85: Al-Buruj (The Stars)

Meccan🕐 Revelation #27📜 22 Verses🕮 Juz 1
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Surah 85: Al-Buruj (The Stars)

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Surah 85: Al-Buruj (The Stars)

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Surah 85: Al-Buruj (The Stars)

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Surah 85: Al-Buruj (The Stars)

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Surah 85: Al-Buruj (The Stars)

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Surah 85: Al-Buruj (The Stars)

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Surah 85: Al-Buruj (The Stars)

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Surah 85: Al-Buruj (The Stars)

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Surah 85: Al-Buruj (The Stars)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَالسَّماءِ ذاتِ البُروجِ
हिन्दी (Al-Omari)क़सम है बुर्जों वाले आकाश की!
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai mazboot qalon waley (impregnable castles )aasman ki
Roman Urdu (Junagarhi)Burjoon waly asman ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है मज़बूत क़लों वाले (अभेद्य महल) आसमान की
عَرَبِيوَاليَومِ المَوعودِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और क़सम है उस दिन की, जिसका वादा किया गया है!
Roman Urdu (Maududi)Aur us din ki jiska wada kiya gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wada kiey hoy din ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)और हमारे दिन की जिसका वादा किया गया है
عَرَبِيوَشاهِدٍ وَمَشهودٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क़सम है गवाह की और उसकी, जिसके बारे में गवाही दी जाएगी!
Roman Urdu (Maududi)Aur dekhnay walay ki aur dekhi janey wali cheez ki
Roman Urdu (Junagarhi)Hazir honey waly aur hazir kiey hoy ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)और देखने वाले की और देखी जाने वाली चीज की
عَرَبِيقُتِلَ أَصحابُ الأُخدودِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)खाई वालों का नाश हो गया!
Roman Urdu (Maududi)kay maarey gaye gaddey(pit) waley
Roman Urdu (Junagarhi)(kay) kahndaqon waly halak kiey gay
Devnagri Urdu (Maududi)काय मारे गए गड्ढे वाले
عَرَبِيالنّارِ ذاتِ الوَقودِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिसमें ईंधन से भरी आग थी।
Roman Urdu (Maududi)uss gaddey(pit) waley] jis mei khoob bhadakte huey indhan ki aag thi
Roman Urdu (Junagarhi)Wo ik aag thi endhan wali
Devnagri Urdu (Maududi)उस गड्ढे वाले] जिस में खूब भड़कते हुए इंधन की आग थी
عَرَبِيإِذ هُم عَلَيها قُعودٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जबकि वे उस (के किनारों) पर बैठे हुए थे।
Roman Urdu (Maududi)jabke woh us gaddey ke kinare par baithay huey thay
Roman Urdu (Junagarhi)jab kay wo log uskay ass pass bethy thy
Devnagri Urdu (Maududi)जबके वो हमें गद्दे के किनारे पर बिठाए हुए थे
عَرَبِيوَهُم عَلىٰ ما يَفعَلونَ بِالمُؤمِنينَ شُهودٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वे ईमान वालों के साथ जो कुछ कर रहे थे, उस पर गवाह थे।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo kuch woh imaan laney walon ke saath kar rahey thay usey dekh rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Aur musalmano kay sath jo ker rahy thy us ko apney samney dekh rahy thy
Devnagri Urdu (Maududi)और जो कुछ वो ईमान लाने वालों के साथ कर रहे थे उसे देख रहे थे
عَرَبِيوَما نَقَموا مِنهُم إِلّا أَن يُؤمِنوا بِاللَّهِ العَزيزِ الحَميدِ
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हिन्दी (Al-Omari)और उन्हें ईमान वालों की केवल यह बात बुरी लगी कि वे उस अल्लाह पर ईमान रखते थे, जो प्रभुत्वशाली और हर प्रकार की प्रशंसा के योग्य है।
Roman Urdu (Maududi)Aur un ehley imaan se unki dushmani iske siwa kisi wajah se na thi ke woh us khuda par imaan le aaye thay jo zabardast aur apni zaat mei aap mahmood(praiseworthy) hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh log in musalmano(kay kisi aur gunha ka)badla nahi lay rahy thy siway iskay wo Allah galib laeeq e hamd ki zat per iman laey thy
Devnagri Urdu (Maududi)और उन एहले ईमान से उनकी दुश्मनी इसके सिवा किसी वजह से ना थी के वो हमें खुदा पर ईमान ले आए था जो ज़बरदस्त और अपनी ज़ात में आप महमूद (प्रशंसनीय) हैं
عَرَبِيالَّذي لَهُ مُلكُ السَّماواتِ وَالأَرضِ ۚ وَاللَّهُ عَلىٰ كُلِّ شَيءٍ شَهيدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह (अल्लाह) कि जिसके लिए आकाशों और धरती का राज्य है, और अल्लाह हर चीज़ से अवगत है।
Roman Urdu (Maududi)Jo aasmano aur zameen ki sultanat ka maalik hai, aur woh khuda sab kuch dekh raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)jis kay liey asman o zameen ka mulk hay aur Allah Taalaa kay samney hy her chez
Devnagri Urdu (Maududi)जो आसमान और ज़मीन की सल्तनत का मालिक है, और वो खुदा सब कुछ देख रहा है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ فَتَنُوا المُؤمِنينَ وَالمُؤمِناتِ ثُمَّ لَم يَتوبوا فَلَهُم عَذابُ جَهَنَّمَ وَلَهُم عَذابُ الحَريقِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय जिन लोगों ने ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों को परीक्षण में डाला (सताया), फिर तौबा न की, तो उनके लिए जहन्नम की यातना है तथा उनके लिए जलाने वाली यातना है।
Roman Urdu (Maududi)Jin logon ne momin mardon aur auraton par zulm o sitam toda aur phir ussey taib na huey, yaqeenan unke liye jahannum ka azaab hai aur unke liye jalaye janey ki saza hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jin logon na musalman mardon aur auraton ko sataya phir tooba (bhi)na ki to unkay liey jahanum ka azab hay aur jalney ka azab hay
Devnagri Urdu (Maududi)जिन लोगों ने मोमिन मर्दन और औरतों पर ज़ुल्म ओ सितम तोड़ा और फिर उसे तैयब ना हुए, यकीनन उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब है और उनके लिए जलाए जाने की सजा है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ لَهُم جَنّاتٌ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ ۚ ذٰلِكَ الفَوزُ الكَبيرُ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे काम किए, उनके लिए ऐसे बाग़ हैं, जिनके नीचे नहरें बह रही हैं और यही बहुत बड़ी सफलता है।
Roman Urdu (Maududi)Jo log imaan laaye aur jinho ne neik amal kiye yaqeenan unke liye jannat ke baagh hain jinke nichey nehrein behti hongi, yeh hai badi kamyabi
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak iman qabool kerney walo aur nek kam kerney walon kay liey wo baghat hein jin kay nechay nehrein beh rahi hein yehi bari kamyabi hay
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ईमान लाए और जिन्हो ने नीक अमल किया यकीनन उनके लिए जन्नत के बाग हैं जिनके बारे में खास बातें होंगी, ये है बड़ी कामयाब
عَرَبِيإِنَّ بَطشَ رَبِّكَ لَشَديدٌ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तेरे पालनहार की पकड़ बड़ी सख्त है।
Roman Urdu (Maududi)Dar haqeeqat tumharey Rubb ki pakad badi sakht hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqennan tery rab ki pukar bari sakht hay
Devnagri Urdu (Maududi)डार हकीकत तुम्हारे रब की पकड़ बड़ी है
عَرَبِيإِنَّهُ هُوَ يُبدِئُ وَيُعيدُ
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हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वही पहली बार पैदा करता है और (वही) दूसरी बार पैदा करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Wahi pehli baar paida karta hai aur wahi dobara paida karega
Roman Urdu (Junagarhi)Wohi phyli martaba paida kerta hay aur wohi dobara paida kery ga
Devnagri Urdu (Maududi)वही पहली बार पैदा करता है और वही दोबारा पैदा करेगा
عَرَبِيوَهُوَ الغَفورُ الوَدودُ
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हिन्दी (Al-Omari)और वह है जो अत्यंत क्षमा करने वाला, बहुत प्रेम करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh bakshne wala hai, mohabbat karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wo bara bakhsish kerney wala aur bohat mohabat kernay wala hay
Devnagri Urdu (Maududi)और वह बक्शने वाला है, मोहब्बत करने वाला है
عَرَبِيذُو العَرشِ المَجيدُ
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हिन्दी (Al-Omari)वह अर्श (सिंहासन) का मालिक, बड़ा गौरवशाली है।
Roman Urdu (Maududi)Arsh ka maalik hai, buzurg-o-bartar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Arsh ka malik azmat wala hay
Devnagri Urdu (Maududi)अर्श का मालिक है, बुज़ुर्ग-ओ-बरतर है
عَرَبِيفَعّالٌ لِما يُريدُ
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हिन्दी (Al-Omari)वह जो चाहता है, कर गुज़रने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Aur jo kuch chahey kar daalney wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)jo chahy usy ker guzarney wala hay
Devnagri Urdu (Maududi)और जो कुछ चाहिए कर डालने वाला है
عَرَبِيهَل أَتاكَ حَديثُ الجُنودِ
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हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) क्या तुम्हें सेनाओं की ख़बर पहुँची है?
Roman Urdu (Maududi)Kya tumhey lashkaron ki khabar pahunchi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tujhy lashkaron ki khabar bhi mili hay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम्हें लश्करों की खबर मिलती है
عَرَبِيفِرعَونَ وَثَمودَ
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हिन्दी (Al-Omari)फ़िरऔन तथा समूद की?
Roman Urdu (Maududi)Firoun aur samood (ke lashkaron) ki
Roman Urdu (Junagarhi)(Yani)firon aur samood ki
Devnagri Urdu (Maududi)फिरौन और समूद (के लश्करों) की
عَرَبِيبَلِ الَّذينَ كَفَروا في تَكذيبٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, झुठलाने में लगे हुए हैं।
Roman Urdu (Maududi)Magar jinho ne kufr kiya hai woh jhutlaney mein lagey huey hain
Roman Urdu (Junagarhi)(kuch nahi)balky kafir to jhotlaney mein pary hoy hein
Devnagri Urdu (Maududi)मगर जिन्हो ने कुफ्र किया है वो झुटलाने में लगे हैं
عَرَبِيوَاللَّهُ مِن وَرائِهِم مُحيطٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और अल्लाह उनके पीछे से (उन्हें) घेरे हुए है।
Roman Urdu (Maududi)Halaanke Allah ne unko gherey mein le rakha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur Allah bhi unhein her taraf say ghery hoy hy
Devnagri Urdu (Maududi)हलांके अल्लाह ने उनको घेरे में ले रखा है
عَرَبِيبَل هُوَ قُرآنٌ مَجيدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि वह गौरव वाला क़ुरआन है।
Roman Urdu (Maududi)(unke jhutlaney se iss quran ka kuch nahin bigadta) balkey yeh quran buland paya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Balkay yeh quran hay bari shan wala
Devnagri Urdu (Maududi)(उनके झूठलाने से इस कुरान का कुछ नहीं बिगड़ता) बाल्की ये कुरान बुलंद पाया है
عَرَبِيفي لَوحٍ مَحفوظٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो लौह़े मह़फ़ूज़ (सुरक्षित पट्टिका) में लिखा हुआ है।
Roman Urdu (Maududi)Us loah mei (naqsh hai) jo mehfooz hai
Roman Urdu (Junagarhi)loh e mahfooz mein (likha hua) hay
Devnagri Urdu (Maududi)हमें लोह में (नक्श है) जो महफूज है
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Surah 85: Al-Buruj (The Stars)

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Surah 85: Al-Buruj (The Stars)

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Surah 85: Al-Buruj (The Stars)

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Surah 85: Al-Buruj (The Stars)

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Surah 85: Al-Buruj (The Stars)

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Surah 86: At-Tariq (The Comer by Night)

Meccan🕐 Revelation #36📜 17 Verses🕮 Juz 1
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Surah 86: At-Tariq (The Comer by Night)

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Surah 86: At-Tariq (The Comer by Night)

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Surah 86: At-Tariq (The Comer by Night)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَالسَّماءِ وَالطّارِقِ
हिन्दी (Al-Omari)क़सम है आकाश की तथा रात में प्रकट होने वाले की!
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai aasmaan ki aur raat ko namudaar honay wale ki
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hay asman ki aur andhery mein roshan honay waly ki
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है आसमान की और रात को नामदार होने वाले की
عَرَبِيوَما أَدراكَ مَا الطّارِقُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तुम क्या जानो कि रात में प्रकट होने वाला क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Aur tum kya jaano kay woh raat ko namudaar honay wala kya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tujhy maloom bhi hay ky wo raat ko namodar honey wali chez kiya hay
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम क्या जानो क्या वो रात को नामदार होने वाला क्या है
عَرَبِيالنَّجمُ الثّاقِبُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह चमकता हुआ सितारा है।
Roman Urdu (Maududi)Chamakta hua tara
Roman Urdu (Junagarhi)Wo roshan sitara hay
Devnagri Urdu (Maududi)चमकता हुआ तारा
عَرَبِيإِن كُلُّ نَفسٍ لَمّا عَلَيها حافِظٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)प्रत्येक प्राणी पर एक निरीक्षक नियुक्त है।
Roman Urdu (Maududi)koi jaan aisi nahin hai jiske upar koi nigehbaan na ho
Roman Urdu (Junagarhi)Koi asa nahi jis per nigheban farishta na ho
Devnagri Urdu (Maududi)कोई जान ऐसी नहीं है जिसका ऊपर कोई निगाह न हो
عَرَبِيفَليَنظُرِ الإِنسانُ مِمَّ خُلِقَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः इनसान को देखना चाहिए कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया है?
Roman Urdu (Maududi)Phir zara Insan yahi dekh le ke woh kis cheez se paida kiya gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Insan ko dekhna chaeiy kay kis chez say paida kiya gaya hay
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जरा इंसान यहीं देख ले के वो किस चीज से भुगतान किया गया है
عَرَبِيخُلِقَ مِن ماءٍ دافِقٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह एक उछलने वाले पानी से पैदा किया गया है।
Roman Urdu (Maududi)Ek uchalne wale pani se paida kiya gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wo ik uchalty pani say paida kiya hay
Devnagri Urdu (Maududi)एक उछालने वाले पानी से भुगतान किया गया है
عَرَبِييَخرُجُ مِن بَينِ الصُّلبِ وَالتَّرائِبِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो पीठ और सीने की हड्डियों के बीच से निकलता है।
Roman Urdu (Maududi)Jo peet aur seeney ki haddiyon kay darmiyan se nikalta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo pait aur seney kay dirmiyan say nikalta hay
Devnagri Urdu (Maududi)जो पीत और सीने की हदियों के दरमियान से निकलता है
عَرَبِيإِنَّهُ عَلىٰ رَجعِهِ لَقادِرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वह उसे लौटाने में निश्चय सक्षम है।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan woh (khaliq) usey dobara paida karne par qadir hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be sahk wo usy pher lyney per yaqeenan qudrat rakhney wala hay
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन वो (खालीक) उसे दोबारा भुगतान करने पर कादिर है
عَرَبِييَومَ تُبلَى السَّرائِرُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन छिपी हुई बातों की जाँच-पड़ताल की जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Jis roz poshida asraar ki jaanch padtal hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Jis din poshida bhedon ki janch partal hogi
Devnagri Urdu (Maududi)जिस रोज पोशिदा असर की जांच पडताल होगी
عَرَبِيفَما لَهُ مِن قُوَّةٍ وَلا ناصِرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो (उस दिन) उसके पास न कोई शक्ति होगी और न ही कोई सहायक।
Roman Urdu (Maududi)Us waqt Insan ke paas na khud apna koi zoar hoga aur na koi uski madad karne wala hoga
Roman Urdu (Junagarhi)To na hoga uskay pass kuch zor na madadgar
Devnagri Urdu (Maududi)हमें वक्त इंसान के पास न खुद अपना कोई ज़ोर होगा और न कोई उसकी मदद करने वाला होगा
عَرَبِيوَالسَّماءِ ذاتِ الرَّجعِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क़सम है बार-बार बारिश बरसाने वाले आसमान की।
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai baarish barsane waley aasman ki
Roman Urdu (Junagarhi)Barish waly asman ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है बारिश बरसाने वाले आसमान की
عَرَبِيوَالأَرضِ ذاتِ الصَّدعِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा फटने वाली धरती की।
Roman Urdu (Maududi)Aur (nabataat ugte waqt) phatt jane wali zameen ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aur pahtney wali zameen ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)और (नबातात उगते वक़्त) फट जाने वाली ज़मीन की
عَرَبِيإِنَّهُ لَقَولٌ فَصلٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय ही यह (क़ुरआन) एक निर्णायक कथन है।
Roman Urdu (Maududi)Yeh ek jachi-tuli baat hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak yeh (quran)albatta do tok faisla kerney wala kalam hai
Devnagri Urdu (Maududi)ये एक जच्ची-तुली बात है
عَرَبِيوَما هُوَ بِالهَزلِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और यह हँसी-मज़ाक़ नही है।
Roman Urdu (Maududi)Hasi mazak nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh hansi ki(aur be faeeda) baat nahi
Devnagri Urdu (Maududi)हंसी मजाक नहीं है
عَرَبِيإِنَّهُم يَكيدونَ كَيدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वे गुप्त उपाय करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)yeh log kuch chalein chal rahe hain
Roman Urdu (Junagarhi)Albatta kafir dao ghaat main nahi
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग कुछ चल रहे हैं
عَرَبِيوَأَكيدُ كَيدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और मैं भी गुप्त उपाय करता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur mai bhi ek chaal chal raha hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur mein bhi aik chaal chalraha hun
Devnagri Urdu (Maududi)और मैं भी एक चल रहा हूं
عَرَبِيفَمَهِّلِ الكافِرينَ أَمهِلهُم رُوَيدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः काफ़िरों को मोहलत दे दें, उन्हें थोड़ी देर के लिए छोड़ दें।
Roman Urdu (Maududi)Pas chodh do aey nabi, in kafiron ko ek zara ki zara in ke haal par chod do
Roman Urdu (Junagarhi)Tu kafiron ko mohlat dey unhen thory dino chor dy
Devnagri Urdu (Maududi)पास छोड़ दो ऐ नबी, काफिरों को एक जरा की जरा इन के हाल पर छोड़ दो
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Surah 86: At-Tariq (The Comer by Night)

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Surah 86: At-Tariq (The Comer by Night)

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Surah 86: At-Tariq (The Comer by Night)

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Surah 86: At-Tariq (The Comer by Night)

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Surah 86: At-Tariq (The Comer by Night)

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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

Meccan🕐 Revelation #8📜 19 Verses🕮 Juz 1
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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيسَبِّحِ اسمَ رَبِّكَ الأَعلَى
हिन्दी (Al-Omari)अपने सर्वोच्च पालनहार के नाम की पवित्रता का वर्णन करो।
Roman Urdu (Maududi)(Aey nabi) Apne Rubb-e-bartar kay naam ki tasbeeh karo
Roman Urdu (Junagarhi)Apney buhat hi buland Allah kay nam ki pakizgi biyan ker
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) अपने रब-ए-बरतर का नाम की तस्बीह करो
عَرَبِيالَّذي خَلَقَ فَسَوّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिसने पैदा किया और ठीक-ठीक बनाया।
Roman Urdu (Maududi)Jisne paida kiya aur tanasub qayam kiya (then proportioned it)
Roman Urdu (Junagarhi)Jissney paida kiya aur sahi salim banaya
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने पैदा किया और तनसुब कयाम किया (फिर अनुपातिक किया)
عَرَبِيوَالَّذي قَدَّرَ فَهَدىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जिसने (हर चीज़ को) अनुमानित किया, फिर मार्ग दिखाया।
Roman Urdu (Maududi)Jisne taqdeer banayi phir raah dikhayi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss na(thek thak)andaza kiya aur phir rah dekhai
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने तकदीर बनाई फिर राह दिखाई
عَرَبِيوَالَّذي أَخرَجَ المَرعىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जिसने चारा उगाया।
Roman Urdu (Maududi)Jisne nabataat(pasture) ugayi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jis nay taza ghass paida ki
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने नबातात (चरागाह) उगई
عَرَبِيفَجَعَلَهُ غُثاءً أَحوىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उसे (सुखाकर) काले रंग का कूड़ा बना दिया।
Roman Urdu (Maududi)Phir unko siyah kuda karkat bana diya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir ussney is ko (sukha ker )siyah kora ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उनको सिया कुदा करकट बना दिया
عَرَبِيسَنُقرِئُكَ فَلا تَنسىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) हम तुम्हें ऐसा पढ़ाएँगे कि तुम नहीं भूलोगे।
Roman Urdu (Maududi)Hum tumhey padhwa dengey phir tum nahin bhuloge
Roman Urdu (Junagarhi)Hum tujhy parhaein gay phir tu na bhoolay ga
Devnagri Urdu (Maududi)हम तुम्हें पढ़ा देंगे फिर तुम नहीं भूलोगे
عَرَبِيإِلّا ما شاءَ اللَّهُ ۚ إِنَّهُ يَعلَمُ الجَهرَ وَما يَخفىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)परन्तु जो अल्लाह चाहे। निश्चय ही वह खुली बात को जानता है और उस बात को भी जो छिपी हुई है।
Roman Urdu (Maududi)Siwaye uske jo Allah chahey.Woh zahir ko bhi jaanta hai aur jo kuch posheeda(hidden) hai usko bhi
Roman Urdu (Junagarhi)Magar jo kuch Allah chahey wo zahir aur poshida ko janta hay
Devnagri Urdu (Maududi)सिवाय उसके जो अल्लाह चाहे। वो जाहिर को भी जानता है और जो कुछ पोशीदा (छिपा हुआ) है उसको भी
عَرَبِيوَنُيَسِّرُكَ لِليُسرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हम तुम्हारे लिए सरल मार्ग आसान कर देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur hum tumhein aasaan tarikey ki sahoolat dete hain
Roman Urdu (Junagarhi)Hum apky liey asani paida kerdein gay
Devnagri Urdu (Maududi)और हम तुम्हें आसान तरीके की सलाह देते हैं देखते हैं
عَرَبِيفَذَكِّر إِن نَفَعَتِ الذِّكرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो आप नसीहत करते रहें। अगर नसीहत करना लाभदायक हो।
Roman Urdu (Maududi)lihaza tum naseehat karo agar naseehat nafey(faiydamand) ho
Roman Urdu (Junagarhi)To ap nasehat kerty rahein ager nasehat kuch faida dy
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाज़ा तुम हिदायत करो अगर हिदायत नाफ़े (फ़ैयदमंद) हो
عَرَبِيسَيَذَّكَّرُ مَن يَخشىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह व्यक्ति उपदेश ग्रहण करेगा, जो डरता है।
Roman Urdu (Maududi)Jo shaks darta hai wo naseehat qabool karlega
Roman Urdu (Junagarhi)Derney wala to nasehat lyga
Devnagri Urdu (Maududi)जो शक्स डरता है वो हिदायत क़बूल करेगा
عَرَبِيوَيَتَجَنَّبُهَا الأَشقَى
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उससे दूर रहेगा, जो सबसे बड़ा अभागा है।
Roman Urdu (Maududi)Aur ussey guraiz karega woh intehayi bad-bakht
Roman Urdu (Junagarhi)(han)badbakht is say gurez karey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और उसे गुरइज़ करेगा वो इंतेहाई बद-बख्त
عَرَبِيالَّذي يَصلَى النّارَ الكُبرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो सबसे बड़ी आग में प्रवेश करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Jo badi aag mei jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Jo bari aag mein jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)जो बड़ी आग में जाएगा
عَرَبِيثُمَّ لا يَموتُ فيها وَلا يَحيىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर वह उसमें न मरेगा, न जिएगा।
Roman Urdu (Maududi)phir na usmein marega aur na jiyega
Roman Urdu (Junagarhi)Jahan phir won a mary ga jnajeiy ga(balky halat e nazah mein para rahy ga)
Devnagri Urdu (Maududi)फिर ना उसमें मरेगा और न जिएगा
عَرَبِيقَد أَفلَحَ مَن تَزَكّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय वह सफल हो गया, जो पाक हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Falah paa gaya woh jisne pakizgi ikhtiyar ki
Roman Urdu (Junagarhi)Besahk usney falah pali jo pak hogaya
Devnagri Urdu (Maududi)फलाह पा गया वो जिसने पाकीजगी इख्तियार की
عَرَبِيوَذَكَرَ اسمَ رَبِّهِ فَصَلّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा अपने पालनहार के नाम को याद किया और नमाज़ पढ़ी।
Roman Urdu (Maududi)Aur apne Rubb ka naam yaad kiya phir namaz padhi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jis nay apney rab ka nam yad rakha aur namaz parhta raha
Devnagri Urdu (Maududi)और अपने रब का नाम याद किया फिर नमाज पढ़ी
عَرَبِيبَل تُؤثِرونَ الحَياةَ الدُّنيا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)बल्कि तुम सांसारिक जीवन को प्राथमिकता देते हो।
Roman Urdu (Maududi)Magar tumlog duniya ki zindagi ko tarjeeh detay ho
Roman Urdu (Junagarhi)Lakin tum to duniya ki zindagi ko tarjeeh dyty ho
Devnagri Urdu (Maududi)मगर तुमलोग दुनिया की जिंदगी को तर्जीह देते हो
عَرَبِيوَالآخِرَةُ خَيرٌ وَأَبقىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि आख़िरत बहुत उत्तम और अधिक बाक़ी रहने वाली है।
Roman Urdu (Maududi)halaanke aakhirat behtar hai aur baqi rehne wali hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur akhrat buhat bhyter aur baqa wali hay
Devnagri Urdu (Maududi)हालांके आखिरी बेहतर है और बाकी रहने वाली है
عَرَبِيإِنَّ هٰذا لَفِي الصُّحُفِ الأولىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह यह बात पहले सह़ीफ़ों (ग्रंथों) में है।
Roman Urdu (Maududi)Yahi baat pehle aaey huey saheefon(scriptures) mei bhi kahi gayi thi
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh batein phyli kitabon mein bhi hein
Devnagri Urdu (Maududi)यही बात पहले आए हुए सहीफों (ग्रंथों) में भी कहीं गई थी
عَرَبِيصُحُفِ إِبراهيمَ وَموسىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)इबराहीम तथा मूसा के सह़ीफ़ों (ग्रंथों) में।
Roman Urdu (Maududi)Ibrahim aur Moosa ke saheefon mein
Roman Urdu (Junagarhi)(yani) Ibrahim aur Musa ki kitabon mein
Devnagri Urdu (Maududi)इब्राहीम और मूसा के सहीफों में
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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

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Surah 87: Al-A'la (The Most High)

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Surah 88: Al-Ghashiyah (The Overwhelming Event)

Meccan🕐 Revelation #68📜 26 Verses🕮 Juz 1
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Surah 88: Al-Ghashiyah (The Overwhelming Event)

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Surah 88: Al-Ghashiyah (The Overwhelming Event)

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Surah 88: Al-Ghashiyah (The Overwhelming Event)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيهَل أَتاكَ حَديثُ الغاشِيَةِ
हिन्दी (Al-Omari)क्या तेरे पास ढाँपने लेने वाली (क़ियामत) की ख़बर पहुँची?
Roman Urdu (Maududi)Kya tumhein us chaa janey wali aafat ki khabar pahunchi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tujhy bhi chopa lyney wali(qiyamat) ki khabar phunchi hay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या तुम्हें हमें चाहिए वली आफत की खबर पसंद है
عَرَبِيوُجوهٌ يَومَئِذٍ خاشِعَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन कई चेहरे अपमानित होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Kuch chehrey us roz khauff zada hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Us din bohat say chehry zalil hongy
Devnagri Urdu (Maududi)कुछ चेहरे हमें रोज खौफ जादा होंगे
عَرَبِيعامِلَةٌ ناصِبَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कठिन परिश्रम करने वाले, थक जाने वाले।
Roman Urdu (Maududi)Sakht mashakkat kar rahe hongey
Roman Urdu (Junagarhi)(aur) mehnat kerney walay thakay huye hongay
Devnagri Urdu (Maududi)सख्त मशक्कत कर रहे होंगे
عَرَبِيتَصلىٰ نارًا حامِيَةً
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे गर्म धधकती आग में प्रवेश करेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Thakey jatey hongey, shadeed aag mei jhulas rahe hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Woh dehakti hoi aag mein jaein gy
Devnagri Urdu (Maududi)थके जाते होंगे, छायादार आग में झूलते रहेंगे
عَرَبِيتُسقىٰ مِن عَينٍ آنِيَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन्हें खौलते सोते का जल पिलाया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)khaultey(boiling) huey chashmey(spring) ka paani unhei peene ko diya jaeyga
Roman Urdu (Junagarhi)Aur nihayat garm chasmy ka pani unko pilaya jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)खौलते (उबलते हुए) हुए चश्मे (वसंत) का पानी उन्हें पीने को दिया जाएगा
عَرَبِيلَيسَ لَهُم طَعامٌ إِلّا مِن ضَريعٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनके लिए कांटेदार झाड़ के सिवा कोई खाना नहीं होगा।
Roman Urdu (Maududi)khar-dar(kaante-daar) sukhi ghaans ke siwa koi khana unke liye na hoga
Roman Urdu (Junagarhi)in kay liey siway-e-kanty dar darkhton kay aur kuch khana na hoga
Devnagri Urdu (Maududi)खर-दर (कांटे-दार) सुखी घांस के सिवा कोई खाना उनके लिए ना होगा
عَرَبِيلا يُسمِنُ وَلا يُغني مِن جوعٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो न मोटा करेगा और न भूख मिटाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Jo na mota karey na bhook mitaye
Roman Urdu (Junagarhi)Jo na mota karey ga na bhook mitaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)जो ना मोटा करे ना भूख मिटाए
عَرَبِيوُجوهٌ يَومَئِذٍ ناعِمَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन कई चेहरे प्रफुल्लित होंगे।
Roman Urdu (Maududi)kuch chehrey us roz ba-raunak hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Buhat say chehry usdin tar o taza aur(asoda hall) hongy
Devnagri Urdu (Maududi)कुछ चेहरे उस रोज ब-रौनक होंगे
عَرَبِيلِسَعيِها راضِيَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अपने प्रयास पर प्रसन्न होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Apne kar-guzari par khush hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Apni koshish per khush hongy
Devnagri Urdu (Maududi)अपने कर-गुजारी पर खुश होंगे
عَرَبِيفي جَنَّةٍ عالِيَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऊँची जन्नत में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aali muqaam jannat mein hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Buland o bala janaton mein hongay
Devnagri Urdu (Maududi)आली मुकाम जन्नत में होंगे
عَرَبِيلا تَسمَعُ فيها لاغِيَةً
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसमें कोई बेकार (अशिष्ट) बात नहीं सुनेंगे।
Roman Urdu (Maududi)koi behuda baat wahan na sunengey
Roman Urdu (Junagarhi)Jahan koi byhoda bat nahi sunein gaein
Devnagri Urdu (Maududi)कोई बहुत बात वहां न सुनेंगे
عَرَبِيفيها عَينٌ جارِيَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसमें बहने वाले स्रोत (चश्मे) हैं।
Roman Urdu (Maududi)Usmein chasmey rawan hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Jahan bhyta hoa chashma hoga
Devnagri Urdu (Maududi)उसमें चश्में रावन होंगे
عَرَبِيفيها سُرُرٌ مَرفوعَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसमें ऊँचे-ऊँचे तख्त हैं।
Roman Urdu (Maududi)Uske andar unchi masnadein hongi
Roman Urdu (Junagarhi)(Aur) us mein onchy onchy takht hongy
Devnagri Urdu (Maududi)उसके अंदर ऊंची मसनदें होंगी
عَرَبِيوَأَكوابٌ مَوضوعَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और (पीने वालों के लिए तैयार) रखे हुए प्याले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Sagar rakhey huey hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur aabkhory rakhy hoy(hongy)
Devnagri Urdu (Maududi)सागर राखे हुए होंगे
عَرَبِيوَنَمارِقُ مَصفوفَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और क्रम में लगे हुए गाव-तकिए हैं।
Roman Urdu (Maududi)gaon takiyon(cushions arrayed) ke qatarein lagi hongi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur ik qatar mein lagy hoy takiey hongy
Devnagri Urdu (Maududi)गांव तकियां (कुशन लगाए हुए) के कतारें लगी होंगी
عَرَبِيوَزَرابِيُّ مَبثوثَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और बिछाए हुए क़ालीन हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur nafees farsh bichey huey hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur makhmali masnadein pheli pari hongi
Devnagri Urdu (Maududi)और नफ़ीस फ़र्श बीचे हुए होंगे
عَرَبِيأَفَلا يَنظُرونَ إِلَى الإِبِلِ كَيفَ خُلِقَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या वे ऊँटों को नहीं देखते कि वे कैसे पैदा किए गए हैं?
Roman Urdu (Maududi)(yeh log nahin mantey) to kya yeh unton ko nahin dekhtey ke kaisey banaye gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya yeh onton ko nahi dekhty kay wok is tarah paida kiey gay hein
Devnagri Urdu (Maududi)(ये लोग नहीं मानते) तो क्या ये उन्तों को नहीं देखते के कैसे बन गए
عَرَبِيوَإِلَى السَّماءِ كَيفَ رُفِعَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और आकाश को (नहीं देखते) कि उसे कैसे ऊँचा किया गया?
Roman Urdu (Maududi)Asman ko nahin dekhte ke kaise uthaya gaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur asmano ko kay kis tarah oncha kiya gaya hay
Devnagri Urdu (Maududi)आसमान को नहीं देखते के कैसे उठ गए
عَرَبِيوَإِلَى الجِبالِ كَيفَ نُصِبَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और पर्वतों को (नहीं देखते) कि कैसे गाड़े गए हैं?
Roman Urdu (Maududi)Pahadon ko nahin dekhtey ke kaisey jamaye gaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur paharon ki tarf kay kis tarah gar dey gay hein
Devnagri Urdu (Maududi)पहाड़ों को नहीं देखते के कैसे जमाए गए
عَرَبِيوَإِلَى الأَرضِ كَيفَ سُطِحَت
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा धरती को (नहीं देखते) कि कैसे बिछाई गई है?
Roman Urdu (Maududi)Aur zameen ko nahin dekhtey ke kaisey bichayi gayi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur zameen ki tarf kay kis tarah bechaei gai hay
Devnagri Urdu (Maududi)और ज़मीन को नहीं देखते के कैसे बिछाई गई
عَرَبِيفَذَكِّر إِنَّما أَنتَ مُذَكِّرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः आप नसीहत करें, आप केवल नसीहत करने वाले हैं।
Roman Urdu (Maududi)Acha to ( aey nabi) nasihat kiye jao, tum bas nasihat hi karne wale ho
Roman Urdu (Junagarhi)Pus ap nasehat ker dia kerein (qk)ap sirf nasehat kerney waly hein
Devnagri Urdu (Maududi)अच्छा तो (ऐ नबी) हिदायत किए जाओ, तुम बस हिदायत ही करने वाले हो
عَرَبِيلَستَ عَلَيهِم بِمُصَيطِرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)आप उनपर कोई दरोग़ा (नियंत्रक) नहीं हैं।
Roman Urdu (Maududi)kuch inpar jabr karne wale nahin ho
Roman Urdu (Junagarhi)Ap kuch in per darogha nahi hein
Devnagri Urdu (Maududi)कुछ इनपर जबर करने वाले नहीं हो
عَرَبِيإِلّا مَن تَوَلّىٰ وَكَفَرَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)परंतु जिसने मुँह फेरा और कुफ़्र किया।
Roman Urdu (Maududi)Albatta jo shaks mooh modega aur inkar karega
Roman Urdu (Junagarhi)Han jo shakhs rogardani kerty aur kufur kery
Devnagri Urdu (Maududi)अलबत्ता जो शक्स मुंह मोड़ेगा और इंकार करेगा
عَرَبِيفَيُعَذِّبُهُ اللَّهُ العَذابَ الأَكبَرَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो अल्लाह उसे सबसे बड़ी यातना देगा।
Roman Urdu (Maududi)To Allah usko bhaari saza dega
Roman Urdu (Junagarhi)usy Allah Taalaa buhat bara azab dyga
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के लिए उसको भारी सजा देगा
عَرَبِيإِنَّ إِلَينا إِيابَهُم
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमारी ही ओर उनका लौटकर आना है।
Roman Urdu (Maududi)In logon ko palatna hamari taraf hi hai
Roman Urdu (Junagarhi)be-shak hamari taraf inko lotna hay
Devnagri Urdu (Maududi)इन लोगों को पलटना हमारी तरफ ही है
عَرَبِيثُمَّ إِنَّ عَلَينا حِسابَهُم
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर बेशक हमारे ही ज़िम्मे उनका ह़िसाब लेना है।
Roman Urdu (Maududi)Phir inka hisab lena hamare hi zimmey hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir be-shak hamaray zimmay hay inn say hisab lena
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इनका हिसाब लेना हमारे ही ज़िम्मे है
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Surah 88: Al-Ghashiyah (The Overwhelming Event)

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Surah 88: Al-Ghashiyah (The Overwhelming Event)

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Surah 88: Al-Ghashiyah (The Overwhelming Event)

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Surah 88: Al-Ghashiyah (The Overwhelming Event)

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Surah 88: Al-Ghashiyah (The Overwhelming Event)

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Surah 89: Al-Fajr (The Daybreak)

Meccan🕐 Revelation #10📜 30 Verses🕮 Juz 1
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عَرَبِيوَالفَجرِ
हिन्दी (Al-Omari)क़सम है फ़ज्र (उषाकाल) की!
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai fajr ki
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hay fajar ki
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है फज्र की
عَرَبِيوَلَيالٍ عَشرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा दस रातों की!
Roman Urdu (Maududi)Aur dus raaton ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aur das raton ki
Devnagri Urdu (Maududi)और दस रातों की
عَرَبِيوَالشَّفعِ وَالوَترِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और सम (जोड़े) और विषम (अकेले) की!
Roman Urdu (Maududi)Aur jufft(even) aur taaq(odd) ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aur juft aur taaq ki
Devnagri Urdu (Maududi)और जफ़्त(सम) और ताक़(विषम) की
عَرَبِيوَاللَّيلِ إِذا يَسرِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और रात की, जब वह चलती है!
Roman Urdu (Maududi)Aur Raat ki jabke woh ruksat ho rahi ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur raat ki jab wo chalney lagy
Devnagri Urdu (Maududi)और रात की जबके वो रुक्सत हो रही हो
عَرَبِيهَل في ذٰلِكَ قَسَمٌ لِذي حِجرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय इसमें बुद्धिमान के लिए बड़ी क़सम है?
Roman Urdu (Maududi)kya ismein kisi sahib-e-aqal ke liye koi kasam hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya inmein aqalmand kay wasty kafi qisam hay
Devnagri Urdu (Maududi)क्या इसमे किसी साहब-ए-अकल के लिए कोई कसम है
عَرَبِيأَلَم تَرَ كَيفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِعادٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या तुमने नहीं देखा कि तुम्हारे पालनहार ने "आद" के साथ किस तरह किया?
Roman Urdu (Maududi)Tumne dekha nahin ke tumhare Rubb ne kya bartao kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya ap ney nahi dekha ka yap kay rab nay Qom aad kay sath kiya kiya
Devnagri Urdu (Maududi)तुमने देखा नहीं के तुम्हारे रब ने क्या बरताओ किया
عَرَبِيإِرَمَ ذاتِ العِمادِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(वे आद) जो स्तंभों वाले 'इरम' (गोत्र के लोग) थे।
Roman Urdu (Maududi)Unchey sutuno waley Aad-e-iram kay saath
Roman Urdu (Junagarhi)Satoonon waly erum kay sath
Devnagri Urdu (Maududi)अनचे सुतुनो वाले आद-ए-इरम के साथ
عَرَبِيالَّتي لَم يُخلَق مِثلُها فِي البِلادِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिनके समान (दुनिया के) शहरों में कोई पैदा नहीं किया गया।
Roman Urdu (Maududi)Jinke manind koi qaum duniya kay mulkon mein paida nahin ki gayi thi
Roman Urdu (Junagarhi)Jis ki manind (koi qum) mulko mein paida nahi ki gai
Devnagri Urdu (Maududi)जिनका मनिंद कोई क़ौम दुनिया के मुल्कों में पैदा नहीं हुई थी
عَرَبِيوَثَمودَ الَّذينَ جابُوا الصَّخرَ بِالوادِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा 'समूद' के साथ (किस तरह किया) जिन्होंने वादी में चट्टानों को तराशा।
Roman Urdu (Maududi)Aur Samood ke saath jinhon ne wadi mei chattane tarashi thi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur qum-e-samood kay sath jinho nay wadi mein bary bary pather trashy thy
Devnagri Urdu (Maududi)और समूद के साथ जिन्होन ने वादी में चट्टाने तराशी थी
عَرَبِيوَفِرعَونَ ذِي الأَوتادِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और मेखों वाले फ़िरऔन के साथ (किस तरह किया)।
Roman Urdu (Maududi)Aur mekhon waley Firoun kay saath
Roman Urdu (Junagarhi)Aur firoon kay sath jo meekhon wala tha
Devnagri Urdu (Maududi)और मेखों वाले फिरौन के साथ
عَرَبِيالَّذينَ طَغَوا فِي البِلادِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे लोग, जो नगरों में हद से बढ़ गए।
Roman Urdu (Maududi)Yeh woh log (thay) jinhone duniya kay mulkon mein badi sarkashi ki thi
Roman Urdu (Junagarhi)In sabhon nay shiron mein sir utha rakha tha
Devnagri Urdu (Maududi)ये वो लोग (थाय) जिन्होनें दुनिया के मुल्कों में बड़ी सरकशी की थी
عَرَبِيفَأَكثَروا فيهَا الفَسادَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उनमें बहुत अधिक उपद्रव फैलाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur inmein bahut fasaad failaya tha
Roman Urdu (Junagarhi)Aur bohat fasad macha rakha tha
Devnagri Urdu (Maududi)और उनमें बहुत फसाद फेलया था
عَرَبِيفَصَبَّ عَلَيهِم رَبُّكَ سَوطَ عَذابٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो तेरे पालनहार ने उनपर यातना का कोड़ा बरसाया।
Roman Urdu (Maududi)Aakhir-e-kaar tumhare Rubb ne inpar azaab ka koda barsa diya
Roman Urdu (Junagarhi)Akhir tery rab nay in sab py azab ka kora barsaya
Devnagri Urdu (Maududi)आखिर-ए-कार तुम्हारे रब ने इनपर अज़ाब का कोड़ा बरसा दिया
عَرَبِيإِنَّ رَبَّكَ لَبِالمِرصادِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तेरा पालनहार निश्चय घात में है।
Roman Urdu (Maududi)Haqeeqat yeh hai kay tumhara Rubb ghaath(watchful) lagaye huey hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tera rab ghat mein hay
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है काय तुम्हारा रुब घाट (सतर्क) लगाए हुए है
عَرَبِيفَأَمَّا الإِنسانُ إِذا مَا ابتَلاهُ رَبُّهُ فَأَكرَمَهُ وَنَعَّمَهُ فَيَقولُ رَبّي أَكرَمَنِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)लेकिन मनुष्य (का हाल यह है कि) जब उसका पालनहार उसका परीक्षण करे, फिर उसे सम्मानित करे और नेमत प्रदान करे, तो कहता है कि मेरे पालनहार ने मुझे सम्मानित किया।
Roman Urdu (Maududi)Magar Insan ka haal yeh hai kay uska Rubb jab usko aazmaish mein daalta hai aur usey izzat aur niyamat deta hai to woh kehta hai kay mere Rubb ne mujhey izzatdar bana diya
Roman Urdu (Junagarhi)Insan (ka yeh hal hay kay) jab ussy us ka rab azmata hay aur izat o neymat dyta hay to wo khyney lagta hay kay mery rab nay mujhy izat dar banadiya
Devnagri Urdu (Maududi)मगर इंसान का हाल ये है काय उसका रुब जब उसको आजमाइश में डालता है और उसे इज्जत और नियामत देता है तो वो कहता है काय मेरे रुब ने मुझे इज्जतदार बना दिया
عَرَبِيوَأَمّا إِذا مَا ابتَلاهُ فَقَدَرَ عَلَيهِ رِزقَهُ فَيَقولُ رَبّي أَهانَنِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)लेकिन जब वह उसका परीक्षण करे, फिर उसपर उसकी रोज़ी तंग कर दे, तो कहता कि मेरे पालनहार ने मुझे अपमानित किया।
Roman Urdu (Maududi)Aur jab woh usko azmaish mein daalta hai aur uska rizq uspar tangg kar deta hai to woh kehta hai mere Rubb ne mujhey zaleel kar diya
Roman Urdu (Junagarhi)aur jab wo usko azmata hay aur uski rozi tang kerdyta hay to wo kehney lagta hay kay mera rab nay meri ahanat ki hy(aur zalil kiya)
Devnagri Urdu (Maududi)और जब वो उसको आजमाइश में डालता है और उसका रिज़्क उसपर तंग कर देता है तो वो कहता है मेरे रब ने मुझे ज़लील कर दिया
عَرَبِيكَلّا ۖ بَل لا تُكرِمونَ اليَتيمَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हरगिज़ ऐसा नहीं, बल्कि तुम अनाथ का सम्मान नहीं करते।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin, balke tum yateem se izzat ka sulook nahin kartey
Roman Urdu (Junagarhi)Aiaa herghiz nahi balkay (bat yeh hy) kay tum (hi)log yateemo ki izat nahi kerty
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज़ नहीं, बलके तुम यतीम से इज़्ज़त का सुलुक नहीं करते
عَرَبِيوَلا تَحاضّونَ عَلىٰ طَعامِ المِسكينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम एक-दूसरे को ग़रीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur miskeen ko khana khilane par ek dusrey ko nahin uksatey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur miskino kay khilaney ki ik dosry ko targheeb nahi kerty
Devnagri Urdu (Maududi)और मिस्कीन को खाना खिलाने पर एक दूसरे को नहीं उक्साते
عَرَبِيوَتَأكُلونَ التُّراثَ أَكلًا لَمًّا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तुम मीरास का सारा धन समेटकर खा जाते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur Miras(inheritance) ka sara maal sameith kar kha jatey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur (mardon ki)miras sameth sameth ker khaty ho
Devnagri Urdu (Maududi)और मीरास (विरासत) का सारा माल समान कर खा जाते हो
عَرَبِيوَتُحِبّونَ المالَ حُبًّا جَمًّا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तुम धन से बहुत अधिक प्रेम करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Aur maal ki muhabbat mei buri tarah giraftar ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur maal ko ji bhar ker aziz rakhty ho
Devnagri Urdu (Maududi)और माल की मुहब्बत में बुरी तरह गिरफ़्तार हो
عَرَبِيكَلّا إِذا دُكَّتِ الأَرضُ دَكًّا دَكًّا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हरगिज़ नहीं! जब धरती कूट-कूटकर चूर्ण-विचूर्ण कर दी जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin jab zameen pai dar pai qoot qoot kar regzaar bana di jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan jis waqat zameen koot koot ker baraber kerdi jaey gi
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज़ नहीं जब ज़मीन पै डर पै क़ुओत क़ुत् कर रेगज़ार बना दी जाएगी
عَرَبِيوَجاءَ رَبُّكَ وَالمَلَكُ صَفًّا صَفًّا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तेरा पालनहार आएगा और फ़रिश्ते जो पंक्तियों में होंगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumahra Rubb jalwa farma hoga is haal mei kay farishtey saff dar saff khade hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tera rab(khud )ajaey ga aur farishty safen bandh ker(ajaey gay)
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हारा रब जलवा फरमा होगा हाल में के फरिश्ते सफ़ दर सफ़ खड़े होंगे
عَرَبِيوَجِيءَ يَومَئِذٍ بِجَهَنَّمَ ۚ يَومَئِذٍ يَتَذَكَّرُ الإِنسانُ وَأَنّىٰ لَهُ الذِّكرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उस दिन नरक लाई जाएगी। उस दिन इनसान याद करेगा। लेकिन उस दिन याद करना उसे कहाँ से लाभ देगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur jahannum us roz samnay le aayi jaeygi, us din Insan ko samajh ayegi aur us waqt us ke samajhne ka kya hasil
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jis din jhanum bhi lai jaey gi oss din insan ko samjh ayegi magar aj osky samjhney ka faida kahan
Devnagri Urdu (Maududi)और जहन्नुम उस रोज़ सामने ले आएगी, उस दिन इंसान को समझ आएगी और हमें वक़्त के साथ समझने का क्या हासिल होगा
عَرَبِييَقولُ يا لَيتَني قَدَّمتُ لِحَياتي
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह कहेगा : ऐ काश! मैंने अपने (इस) जीवन के लिए कुछ आगे भेजा होता।
Roman Urdu (Maududi)Woh kahega ke kaash maine apni is zindagi ke liye kuch peshgi saman kiya hota
Roman Urdu (Junagarhi)Wo kahy ga kay kash kay mein nay apni is zindagi kay liey kuch peshgi saman kiya hota
Devnagri Urdu (Maududi)वो कहेगा के काश मैंने अपनी इस ज़िंदगी के लिए कुछ पेशगी समन किया होता
عَرَبِيفَيَومَئِذٍ لا يُعَذِّبُ عَذابَهُ أَحَدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)चुनाँचे उस दिन उस (अल्लाह) के दंड जैसा दंड कोई नहीं देगा।
Roman Urdu (Maududi)Phir us din Allah jo azaab dega waisa azaab dene wala koi nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Pus aj Allah kay azab jaisa azab kisi ka na hoga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर हमें दीन अल्लाह जो अज़ाब देगा वैसा अज़ाब देने वाला कोई नहीं
عَرَبِيوَلا يوثِقُ وَثاقَهُ أَحَدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और न उसके बाँधने जैसा कोई बाँधेगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur Allah jaisa bandhega waisa bandhne wala koi nahin
Roman Urdu (Junagarhi)Na uski qaid o band jaisi kisi ki qaid o band hogi
Devnagri Urdu (Maududi)और अल्लाह जैसा बंधे वैसा बांधने वाला कोई नहीं
عَرَبِييا أَيَّتُهَا النَّفسُ المُطمَئِنَّةُ
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हिन्दी (Al-Omari)ऐ संतुष्ट आत्मा!
Roman Urdu (Maududi)(Dusri taraf irshad hoga) Aey nafsey mutmain(reassured soul/pious)
Roman Urdu (Junagarhi)Ay itmynan wali rooh
Devnagri Urdu (Maududi)(दूसरी तरफ इरशाद होगा) ऐ नफसे मुतमैन(आश्वस्त आत्मा/पवित्र)
عَرَبِيارجِعي إِلىٰ رَبِّكِ راضِيَةً مَرضِيَّةً
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अपने पालनहार की ओर लौट चल, इस हाल में कि तू उससे प्रसन्न है, उसके निकट पसंदीदा है।
Roman Urdu (Maududi)Chal apne Rubb ki taraf is haal mein ke tu (apne anjam-e-neik se) khush (Aur apne Rubb kay nazdeek) pasandida hai
Roman Urdu (Junagarhi)To apney rab ki taraf loot chal is tarah kay to issy razi wo tujh say khush
Devnagri Urdu (Maududi)चल अपने रब की तरफ इस हाल में के तू (अपने अंजाम-ए-नीक से) खुश (और अपने रुब काय नजदीक) पसंदीदा है
عَرَبِيفَادخُلي في عِبادي
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हिन्दी (Al-Omari)अतः तू मेरे बंदों में प्रवेश कर जा।
Roman Urdu (Maududi)Shamil ho ja mere (neik) bandon mein
Roman Urdu (Junagarhi)Pus mery khas bandon mein dakhil hoja
Devnagri Urdu (Maududi)शमिल हो जा मेरे (नीक) बंदों में
عَرَبِيوَادخُلي جَنَّتي
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और मेरी जन्नत में प्रवेश कर जा।
Roman Urdu (Maududi)Aur dakhil hoja meri jannat mein
Roman Urdu (Junagarhi)Aur meri jannat mein chali ja
Devnagri Urdu (Maududi)और दखिल होजा मेरी जन्नत में
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Surah 89: Al-Fajr (The Daybreak)

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Surah 90: Al-Balad (The City)

Meccan🕐 Revelation #35📜 20 Verses🕮 Juz 1
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Surah 90: Al-Balad (The City)

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Surah 90: Al-Balad (The City)

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Surah 90: Al-Balad (The City)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيلا أُقسِمُ بِهٰذَا البَلَدِ
हिन्दी (Al-Omari)मैं इस नगर (मक्का) की क़सम खाता हूँ!
Roman Urdu (Maududi)Nahin mai kasam khata hoon is shehar(city) ki
Roman Urdu (Junagarhi)Mein iss sher ki qasam khata hun
Devnagri Urdu (Maududi)नहीं मैं कसम खाता हूं इस शहर की
عَرَبِيوَأَنتَ حِلٌّ بِهٰذَا البَلَدِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा तुम्हारे लिए इस नगर में लड़ाई हलाल होने वाली है।
Roman Urdu (Maududi)Aur haal yeh hai ke (Aey nabi) is shehar mein tumko halal kar liya gaya hai
Roman Urdu (Junagarhi)aur ap is sher mein muqeem hein
Devnagri Urdu (Maududi)और हाल ये है के (ऐ नबी) इस शहर में तुमको हलाल कर लिया गया है
عَرَبِيوَوالِدٍ وَما وَلَدَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा क़सम है पिता तथा उसकी संतान की!
Roman Urdu (Maududi)Aur kasam khata hoon baap(Adam) ki aur us aulad ki jo ussey paida hui
Roman Urdu (Junagarhi)aur (qasam hy)insani bap aur olad ki
Devnagri Urdu (Maududi)और कसम खाता हूं बाप (एडम) की और उस औलाद की जो उसने पैदा की
عَرَبِيلَقَد خَلَقنَا الإِنسانَ في كَبَدٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने मनुष्य को बड़ी कठिनाई में पैदा किया है।
Roman Urdu (Maududi)Dar haqeeqat humne Insan ko mushakkat mein paida kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum ney insan ko(bari)mushaqat mein paida kia hy
Devnagri Urdu (Maududi)दर हकीकत हमने इंसान को मुशक्कत में पैदा किया है
عَرَبِيأَيَحسَبُ أَن لَن يَقدِرَ عَلَيهِ أَحَدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या वह समझता है कि उसपर कभी किसी का वश नहीं चलेगा?
Roman Urdu (Maududi)Kya usne yeh samajh rakhha hai kay uspar koi qaabu na paa sakega
Roman Urdu (Junagarhi)kiya yeh guman kerta hy kay yeh kisis kay bas mein hi nai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या उसने ये समझ रखा है कि उसपर कोई काबू ना पा सकेगा
عَرَبِييَقولُ أَهلَكتُ مالًا لُبَدًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह कहता है कि मैंने ढेर सारा धन ख़र्च कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Kehta hai ke maine dhairon maal udaa diya
Roman Urdu (Junagarhi)khyta (phirta )hy ky mein ney to bohat kuch maal khrch ker dala
Devnagri Urdu (Maududi)कहता है के मैंने ढेरों माल उड़ा दिया
عَرَبِيأَيَحسَبُ أَن لَم يَرَهُ أَحَدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या वह समझता है कि उसे किसी ने नहीं देखा?
Roman Urdu (Maududi)Kya woh samajhta hai kay kisi ne usko nahin dekha
Roman Urdu (Junagarhi)kiya(yun) samjhta hy ky kisi nay ussy dekha(hi ) nahi
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वो समझता है कि किसी ने उसको नहीं देखा
عَرَبِيأَلَم نَجعَل لَهُ عَينَينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या हमने उसके लिए दो आँखें नहीं बनाईं?
Roman Urdu (Maududi)Kya humne usey do aankhein
Roman Urdu (Junagarhi)kiya hum nay uski do ankhein nahi banain
Devnagri Urdu (Maududi)क्या हमने उसे दो आँखें
عَرَبِيوَلِسانًا وَشَفَتَينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा एक ज़बान और दो होंठ (नहीं बनाए)?
Roman Urdu (Maududi)Aur ek zubaan aur do honth nahin diye
Roman Urdu (Junagarhi)aur zaban aur hunt(nahi banaey)
Devnagri Urdu (Maududi)और एक ज़ुबान और दो होंठ नहीं दिए
عَرَبِيوَهَدَيناهُ النَّجدَينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने उसे दोनों मार्ग दिखा दिए?!
Roman Urdu (Maududi)Aur dono numayan raste usey (nahin) dikha diye
Roman Urdu (Junagarhi)hum nay dekha diy usko dono rasty
Devnagri Urdu (Maududi)और दोनों नुमायन रास्ते उसे (नहीं) दिखा दिए
عَرَبِيفَلَا اقتَحَمَ العَقَبَةَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)परंतु उसने दुर्लभ घाटी में प्रवेश ही नहीं किया।
Roman Urdu (Maududi)Magar usne dushwar guzar ghati(steep) se guzarne ki himmat na ki
Roman Urdu (Junagarhi)So issy na hosakha kay ghatti mein dakhil hota
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उसने दशवार गुज़र घाटी (खड़ी) से गुज़रने की हिम्मत ना की
عَرَبِيوَما أَدراكَ مَا العَقَبَةُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तुम्हें किस चीज़ ने ज्ञात कराया कि वह दुर्लभ 'घाटी' क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Aur tum kya jaano kay kya hai woh dushwar guzar ghaati
Roman Urdu (Junagarhi)Aur kiya samjha ky ghatti hy kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम क्या जानो क्या है वो दुस्वार गुजर घाटी
عَرَبِيفَكُّ رَقَبَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(वह) गर्दन छुड़ाना है।
Roman Urdu (Maududi)Kisi gardan ko gulami se chudana
Roman Urdu (Junagarhi)Kisi garden(gulam londi)ko azad kerna
Devnagri Urdu (Maududi)किसी बगीचे को गुलामी से छुड़ाना
عَرَبِيأَو إِطعامٌ في يَومٍ ذي مَسغَبَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)या किसी भूख वाले दिन में खाना खिलाना है।
Roman Urdu (Maududi)Ya faake ke din
Roman Urdu (Junagarhi)ya bhok waly din khana khilana
Devnagri Urdu (Maududi)या फाके के दिन
عَرَبِييَتيمًا ذا مَقرَبَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)किसी रिश्तेदार अनाथ को।
Roman Urdu (Maududi)kisi qareebi yateem
Roman Urdu (Junagarhi)Kisi reshtydar yateem ko
Devnagri Urdu (Maududi)किसी करीब यतीम
عَرَبِيأَو مِسكينًا ذا مَترَبَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)या मिट्टी में लथड़े हुए निर्धन को।
Roman Urdu (Maududi)Ya khaak nasheen miskeen ko khana khilana
Roman Urdu (Junagarhi)Ya khahsaar miskeen ko
Devnagri Urdu (Maududi)या खाक नशीं मिसकीन को खाना खिलाना
عَرَبِيثُمَّ كانَ مِنَ الَّذينَ آمَنوا وَتَواصَوا بِالصَّبرِ وَتَواصَوا بِالمَرحَمَةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर वह उन लोगों में से हो, जो ईमान लाए और एक-दूसरे को धैर्य रखने की सलाह दी और एक-दूसरे को दया करने की सलाह दी।
Roman Urdu (Maududi)Phir (iske saath yeh kay) aadmi un logon mein shamil ho jo imaan laye aur jinhon ne ek dusrey ko sabr aur (khalq-e-khuda par) raham ki talqeen ki
Roman Urdu (Junagarhi)Phir unlogon mein say hojata jo iman laey aur ik dosry ko sabar ki aurreham kerney ki wasiyat kerty hein
Devnagri Urdu (Maududi)फिर (इसके साथ ये काय) आदमी उन लोगों में शामिल हो जो ईमान लाए और जिन्होन ने एक दूसरे को सब्र और (ख़ल्क-ए-खुदा पर) रहम की तालक़ीन की
عَرَبِيأُولٰئِكَ أَصحابُ المَيمَنَةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यही लोग दाहिने हाथ वाले (सौभाग्यशाली) हैं।
Roman Urdu (Maududi)Yeh log hain dayein baazu(right hand) waley
Roman Urdu (Junagarhi)Yehi log hein daein bazo waly(khushbakhti waly)
Devnagri Urdu (Maududi)ये लोग हैं दयेन बाज़ू (दाहिने हाथ) वाले
عَرَبِيوَالَّذينَ كَفَروا بِآياتِنا هُم أَصحابُ المَشأَمَةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जिन लोगों ने हमारी आयतों का इनकार किया, वही लोग बाएँ हाथ वाले (दुर्भाग्यशाली) हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur jinhon ne hamari aayat ko mann-ney se inkar kiya woh bayen bazu(left hand) waley hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jin logon nay humari aayaton kay sath kufur kiya yeh kam-bakhti waly hain
Devnagri Urdu (Maududi)और जिन्हों ने हमारी आयत को मन-ने से इंकार किया वो बायें बाज़ू (बाएं हाथ) वाले हैं
عَرَبِيعَلَيهِم نارٌ مُؤصَدَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनपर (हर ओर से) बंद की हुई आग होगी।
Roman Urdu (Maududi)Un par aag chaayi hui hogi
Roman Urdu (Junagarhi)Inn hi per aag hogi jo charo taraf say gheri hoi hogi
Devnagri Urdu (Maududi)उन पर आग लगी हुई होगी
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Surah 90: Al-Balad (The City)

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Surah 90: Al-Balad (The City)

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Surah 90: Al-Balad (The City)

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Surah 90: Al-Balad (The City)

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Surah 90: Al-Balad (The City)

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Surah 91: Ash-Shams (The Sun)

Meccan🕐 Revelation #26📜 15 Verses🕮 Juz 1
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Surah 91: Ash-Shams (The Sun)

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Surah 91: Ash-Shams (The Sun)

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Surah 91: Ash-Shams (The Sun)

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Surah 91: Ash-Shams (The Sun)

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Surah 91: Ash-Shams (The Sun)

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Surah 91: Ash-Shams (The Sun)

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Surah 91: Ash-Shams (The Sun)

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Surah 91: Ash-Shams (The Sun)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَالشَّمسِ وَضُحاها
हिन्दी (Al-Omari)सूरज की क़सम! तथा उसके ऊपर चढ़ने के समय की क़सम!
Roman Urdu (Maududi)Suraj aur uski dhoop ki kasam
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai sooraj ki aur uski dhoop ki
Devnagri Urdu (Maududi)सूरज और उसकी धूप की कसम
عَرَبِيوَالقَمَرِ إِذا تَلاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा चाँद की (क़सम), जब वह सूरज के पीछे आए।
Roman Urdu (Maududi)Aur Chand ki kasam jabke wo uske pichey aata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai chand ki jab uskay peechay ay
Devnagri Urdu (Maududi)और चांद की कसम जबके वो उसके पीछे आता है
عَرَبِيوَالنَّهارِ إِذا جَلّاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और दिन की (क़सम), जब वह उस (सूरज) को प्रकट कर दे!
Roman Urdu (Maududi)Aur din ki kasam jabke woh (Suraj ko) numaya kar deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai din ki jab soraj ko numaya keray
Devnagri Urdu (Maududi)और दिन की कसम जबके वो (सूरज को) नुमाया कर देता है
عَرَبِيوَاللَّيلِ إِذا يَغشاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और रात की (क़सम), जब वह उस (सूरज) को ढाँप ले।
Roman Urdu (Maududi)Aur raat ki kasam jabke woh (suraj ko) dhank leti hai
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai raat ki jab ussay dhanp lay
Devnagri Urdu (Maududi)और रात की कसम जबके वो (सूरज को) धन्यवाद लेती है
عَرَبِيوَالسَّماءِ وَما بَناها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और आकाश की तथा उसके निर्माण की (क़सम)।
Roman Urdu (Maududi)Aur aasman ki aur us zaat ki kasam jisne usey qayam kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai aasman ki aur uskay bananey ki
Devnagri Urdu (Maududi)और आसमान की और उस जात की कसम जिसने उसे इस्तेमाल किया
عَرَبِيوَالأَرضِ وَما طَحاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और धरती की तथा उसे बिछाने की (क़सम!)
Roman Urdu (Maududi)Aur zameen ki aur us zaat ki kasam jisne usey bichaya
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai zamen ki or ussy hamwar kernay ki
Devnagri Urdu (Maududi)और जमीन की और उस जात की कसम जिसने उसे इस्तेमाल किया
عَرَبِيوَنَفسٍ وَما سَوّاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और आत्मा की तथा उसके ठीक-ठाक बनाने की (क़सम)।
Roman Urdu (Maududi)Aur nafs-e-Insani ki aur us zaat ki kasam jisne usey hamwar kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai nafs ki or ussy durust bananey ki
Devnagri Urdu (Maududi)और नफ्स-ए-इंसानी की और उस जात की कसम जिसने उसे इस्तेमाल किया
عَرَبِيفَأَلهَمَها فُجورَها وَتَقواها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उसके दिल में उसकी बुराई और उसकी परहेज़गारी (की समझ) डाल दी।
Roman Urdu (Maududi)Phir uski badi aur uski parhezgari uss par ilham kar di
Roman Urdu (Junagarhi)phir samjh di usko badkari ki aur bach ker chalnay ki
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उसकी बदी और उसकी परहेजगारी उस पर इल्हाम कर दी
عَرَبِيقَد أَفلَحَ مَن زَكّاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय वह सफल हो गया, जिसने उसे पवित्र कर लिया।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan falah pa gaya woh jisne nafs ka tazkiya kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss nay ussay pak kiya wo kamyab hua
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन फलाह पा गया वो जिसने नफ्स का तजकिया किया
عَرَبِيوَقَد خابَ مَن دَسّاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा निश्चय वह विफल हो गया, जिसने उसे (पापों में) दबा दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur na-murad hua woh jisne usko daba diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss nay ussay khak mein mila diya wo nakam hoa
Devnagri Urdu (Maududi)और न-मुराद हुआ वो जिसने उसको दबा दिया
عَرَبِيكَذَّبَت ثَمودُ بِطَغواها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)समूद (की जाति) ने अपनी सरकशी के कारण झुठलाया।
Roman Urdu (Maududi)Samood ne apni sarkashi ki bina par jhutlaya
Roman Urdu (Junagarhi)(Qom)samood nay apni sarkashi kay baees jhutlaya
Devnagri Urdu (Maududi)समूद ने अपनी सरकशी की बिना पर झुटलाया
عَرَبِيإِذِ انبَعَثَ أَشقاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जब उसका सबसे दुष्ट व्यक्ति उठ खड़ा हुआ।
Roman Urdu (Maududi)Jab us qaum ka sab se zyada shaqi (Badnaseeb) aadmi biphar kar utha
Roman Urdu (Junagarhi)Jab unka bara badbakht uth khara hoa
Devnagri Urdu (Maududi)जैब हमें क़ौम का सब से ज्यादा शकी (बदनसीब) आदमी बिफ़र कर उठा
عَرَبِيفَقالَ لَهُم رَسولُ اللَّهِ ناقَةَ اللَّهِ وَسُقياها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो अल्लाह के रसूल ने उनसे कहा : अल्लाह की ऊँटनी और उसके पीने की बारी का ध्यान रखो।
Roman Urdu (Maududi)To Allah ke Rasool ne un logon se kaha ke khabardar Allah ki ountni (she-camel) ko (haath na lagana) aur uske paani peene (mein maane na hona)
Roman Urdu (Junagarhi)Unhein Allah kay rassol nay farmadiya tha kay Allah Taalaa ki ontni aur uss kay peeenay ki bari ki (hifazat karo)
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह के रसूल ने उन लोगों से कहा के खबरदार अल्लाह की ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को (हाथ न लगाना) और उसके पानी पीना (मैं माने न होना)
عَرَبِيفَكَذَّبوهُ فَعَقَروها فَدَمدَمَ عَلَيهِم رَبُّهُم بِذَنبِهِم فَسَوّاها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)परंतु उन्होंने उसे झुठलाया और उस (ऊँटनी) की कूँचें काट दीं, तो उनके पालनहार ने उनके गुनाह के कारण उन्हें पीस कर विनष्ट कर दिया और उन्हें मटियामेट कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Magar unhon ne uski baat ko jhuta qarar diya aur ountni ko maar dala. Aakhir-e-kaar unke gunah ke padash mein unke Rubb ne unpar aisi aafat toodi ke ek saath sab ko paywand-e-khaaq kar diya
Roman Urdu (Junagarhi)Un logon nay apnay pyghamber ko jhota samjh ker uss ontni ki kochein kaat dein pus unkay rab nay unkay gunahon kay baees un per halakat dali aur phir halakat ko aam kerdiya aur uss basti ko barabar ker diya
Devnagri Urdu (Maududi)मगर उन लोगों ने उसकी बात को झूठा क़रार दिया और ऊंटनी को मार डाला। आख़िर-ए-कार उनके गुनाह के पैदाश में उनके रब ने उन्पर ऐसी आफत तूदी के एक साथ सबको पैवंद-ए-खाक कर दिया
عَرَبِيوَلا يَخافُ عُقباها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और वह उसके परिणाम से नहीं डरता।
Roman Urdu (Maududi)Aur usey (apne is fail kay) kisi burey natije ka koi khauf(darr) nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Wo nahi darta uskay tabahkun anjam say
Devnagri Urdu (Maududi)और उसे (अपने फेल काय) किसी बुरे नतीजे का कोई खौफ (डर) नहीं है
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Surah 91: Ash-Shams (The Sun)

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Surah 91: Ash-Shams (The Sun)

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Surah 91: Ash-Shams (The Sun)

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Surah 91: Ash-Shams (The Sun)

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Surah 91: Ash-Shams (The Sun)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

Meccan🕐 Revelation #9📜 21 Verses🕮 Juz 1
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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَاللَّيلِ إِذا يَغشىٰ
हिन्दी (Al-Omari)रात की क़सम, जब वह छा जाए।
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai raat ki jabke woh chaa jaaye
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai raat ki jab cha jaey
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है रात की जबके वो छा जाए
عَرَبِيوَالنَّهارِ إِذا تَجَلّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और दिन की क़सम, जब वह रौशन हो जाए!
Roman Urdu (Maududi)Aur din ki jabke woh roshan ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur qasam hai din ki jab roshan ho
Devnagri Urdu (Maududi)और दिन की जबके वो रोशन हो
عَرَبِيوَما خَلَقَ الذَّكَرَ وَالأُنثىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा नर और मादा को पैदा करने की क़सम।
Roman Urdu (Maududi)Aur us zaat ki jisne nar(male) aur maada(female) ko paida kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur qasam hai uss zaat ki jiss nay nar-o-mada ko peda kiya
Devnagri Urdu (Maududi)और उस जात की जिसने नर (पुरुष) और मादा (महिला) को भुगतान किया
عَرَبِيإِنَّ سَعيَكُم لَشَتّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह तुम्हारे प्रयास विविध हैं।
Roman Urdu (Maududi)Dar haqeeqat tum logon ki koshishein mukhtalif qism ki hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tumhari koshish mukhtalif qisim ki hai
Devnagri Urdu (Maududi)दर हकीकत तुम लोगों की कोशिशें मुख्तलिफ़ क़िस्म की है
عَرَبِيفَأَمّا مَن أَعطىٰ وَاتَّقىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर जिसने (दान) दिया और (अवज्ञा से) बचा।
Roman Urdu (Maududi)To jisne (rah e khuda mein) maal diya aur (khuda ki nafarmani se) parhez kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss nay diya (Allah ki rah mein)aur dara (apnay rab say)
Devnagri Urdu (Maududi)तो जिसने (राह ए खुदा में) माल दिया और (खुदा की नफरमानी से) परहेज किया
عَرَبِيوَصَدَّقَ بِالحُسنىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और सबसे अच्छी बात को सत्य माना।
Roman Urdu (Maududi)Aur bhalayi ko sach mana
Roman Urdu (Junagarhi)Aur nek baat ki tasdeq kerta rahega
Devnagri Urdu (Maududi)और भलाई को सच माना
عَرَبِيفَسَنُيَسِّرُهُ لِليُسرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो निश्चय हम उसके लिए भलाई को आसान कर देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Usko hum aasan raastey kay liye sahulat denge
Roman Urdu (Junagarhi)To hum bhi usko aasan rasty ki saholat dein gay
Devnagri Urdu (Maududi)उसको हम आसान रास्ते के लिए सहुलत देंगे
عَرَبِيوَأَمّا مَن بَخِلَ وَاستَغنىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)लेकिन वह (व्यक्ति) जिसने कंजूसी की और बेपरवाही बरती।
Roman Urdu (Maududi)Aur jisne bukhl(kanjoosi) kiya aur (apney khuda se) be niyazi(self-sufficient/independent) barti
Roman Urdu (Junagarhi)Lekin jiss nay bakheel ki aur beparwai barti
Devnagri Urdu (Maududi)और जिसने (अपने खुदा से) कहा नियाज़ी (आत्मनिर्भर/स्वतंत्र) बारती
عَرَبِيوَكَذَّبَ بِالحُسنىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और सबसे अच्छी बात को झुठलाया।
Roman Urdu (Maududi)aur bhalayi ko jhutlaya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur nek baat ki takzeeb ki
Devnagri Urdu (Maududi)और भलाई को झुटलाया
عَرَبِيفَسَنُيَسِّرُهُ لِلعُسرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो हम उसके लिए कठिनाई (बुराई का मार्ग) आसान कर देंगे।
Roman Urdu (Maududi)Usko hum sakht rastey kay liye sahulat dengey
Roman Urdu (Junagarhi)To hum bhi uski tangi-o-mushkil kay saman mayuser kerdein gay
Devnagri Urdu (Maududi)उसको हम मजबूत रास्ते के लिए सहुलत देंगे
عَرَبِيوَما يُغني عَنهُ مالُهُ إِذا تَرَدّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जब वह (जहन्नम के गड्ढे में) गिरेगा, तो उसका धन उसके किसी काम नहीं आएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur uska maal aakhir uske kis kaam aayega jabke woh halaq ho jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Uska maal ussy(ondha)giraney kay waqat kuch kam na ay ga
Devnagri Urdu (Maududi)और उसका माल आखिर उसका किस काम आएगा जबके वो हलाक हो जाए
عَرَبِيإِنَّ عَلَينا لَلهُدىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमारा ही ज़िम्मे मार्ग दिखाना है।
Roman Urdu (Maududi)Beshak rasta batana hamare zimmey hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak raah dikha dena himaray zimmay hai
Devnagri Urdu (Maududi)बेशक रास्ता बताना हमारे ज़िम्मी है
عَرَبِيوَإِنَّ لَنا لَلآخِرَةَ وَالأولىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमारे ही अधिकार में आख़िरत और दुनिया है।
Roman Urdu (Maududi)aur dar haqeeqat aakhirat aur duniya dono kay hum hi malik hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur humary hi hath akhrat aurduniya hai
Devnagri Urdu (Maududi)और दर हकीकत आख़िरत और दुनिया दोनों का हम ही मालिक हैं
عَرَبِيفَأَنذَرتُكُم نارًا تَلَظّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः मैंने तुम्हें भड़कती आग से सावधान कर दिया है।
Roman Urdu (Maududi)Pas maine tumko khabardar kar diya hai bhadakti hui aag se
Roman Urdu (Junagarhi)Mein nay to tumhein sholay marti hui aag say dara diya hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास मैंने तुमको ख़बरदार कर दिया है भड़कती हुई आग से
عَرَبِيلا يَصلاها إِلَّا الأَشقَى
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिसमें केवल सबसे बड़ा अभागा ही प्रवेश करेगा।
Roman Urdu (Maududi)Usmein nahin jhulsega magar woh intihayi badbakth
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss mein sirf wo hi badbakht dakhil hoga
Devnagri Urdu (Maududi)उसमें नहीं झुलसेगा मगर वो इंतिहायी बदबक्थ
عَرَبِيالَّذي كَذَّبَ وَتَوَلّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिसने झुठलाया तथा मुँह फेरा।
Roman Urdu (Maududi)jisne jhutlaya aur mooh phera
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss nay jhutlaya aur(uski perwi say)mun pher liya
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने झूठ बोला और मुह फेरा
عَرَبِيوَسَيُجَنَّبُهَا الأَتقَى
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उससे उस व्यक्ति को बचा लिया जाएगा, जो सबसे ज़्यादा परहेज़गार है।
Roman Urdu (Maududi)Aur usse door rakkha jayega woh nihayat parhezgaar
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss say assa shaks dor rakha jaey ga jo bara perhezgar hoga
Devnagri Urdu (Maududi)और उसे दूर रक्खा जाएगा वो निहायत परहेजगार
عَرَبِيالَّذي يُؤتي مالَهُ يَتَزَكّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो अपना धन देता है, ताकि वह पवित्र हो जाए।
Roman Urdu (Maududi)Jo paakiza honay ki khatir apna maal deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo paaki hasil kernay kay liey apna maal deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो पाकीजा होने की खातिर अपना माल देता है
عَرَبِيوَما لِأَحَدٍ عِندَهُ مِن نِعمَةٍ تُجزىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उसपर किसी का कोई उपकार नहीं है, जिसका बदला चुकाया जाए।
Roman Urdu (Maududi)Uspar kisi ka koi ehsan nahin hai jiska badla usey dena ho
Roman Urdu (Junagarhi)Kissi ka uss per koi ehsan nahi kay jiss ka badla diya jaraha ho
Devnagri Urdu (Maududi)उसपर किसी का कोई एहसान नहीं है जिसका बदला उसे देना हो
عَرَبِيإِلَّا ابتِغاءَ وَجهِ رَبِّهِ الأَعلىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह तो केवल अपने सर्वोच्च रब का चेहरा चाहता है।
Roman Urdu (Maududi)Woh to sirf apne Rubb-e-bartrar ki raza joii ke liye yeh kaam karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)bulkay sirf apnay perwardigar buzruk-o-buland ki raza chahnay kay liey
Devnagri Urdu (Maududi)वो तो सिर्फ अपने रुब-ए-बरतर की रजा जोई के लिए ये काम करता है
عَرَبِيوَلَسَوفَ يَرضىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय वह (बंदा) प्रसन्न हो जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur zaroor woh (us se) khush hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan wo (Allah bhi) un qareeb raza mand hojaeyga
Devnagri Urdu (Maududi)और जरूर वो (हमसे) खुश होगा
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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 92: Al-Lail (The Night)

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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

Meccan🕐 Revelation #11📜 11 Verses🕮 Juz 1
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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَالضُّحىٰ
हिन्दी (Al-Omari)कस़म है धूप चढ़ने के समय की!
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai rozey roshan ki
Roman Urdu (Junagarhi)Qasam hai chasht kay waqt ki
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है रोज़े रोशन की
عَرَبِيوَاللَّيلِ إِذا سَجىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और क़सम है रात की, जब वह छा जाए।
Roman Urdu (Maududi)Aur raat ki jabke woh sukoon ke saath taari ho jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur qasam hai raat ki jab cha jaey
Devnagri Urdu (Maududi)और रात की जबके वो सुकून के साथ तारी हो जाए
عَرَبِيما وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَما قَلىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) तेरे पालनहार ने तुझे न तो छोड़ा और न नाराज़ हुआ।
Roman Urdu (Maududi)(Aey nabi) tumharey Rubb ne tumko hargiz nahin chodha aur na woh naraaz hua
Roman Urdu (Junagarhi)Naa to tery rab nay tujhy chora hai aur na woh bezar hogaya hai
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) तुम्हारे रब ने तुमको हरगिज नहीं छोड़ा और न वो नाराज हुआ
عَرَبِيوَلَلآخِرَةُ خَيرٌ لَكَ مِنَ الأولىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निश्चित रूप से आख़िरत आपके लिए दुनिया से बेहतर है।
Roman Urdu (Maududi)Aur yaqeenan tumhare liya baad ka daur pehle daur se behtar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqenan tery liey injam aghaz say behter hoga
Devnagri Urdu (Maududi)और यकीनन तुम्हारे लिया बाद का दौर पहले दौर से बेहतर है
عَرَبِيوَلَسَوفَ يُعطيكَ رَبُّكَ فَتَرضىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निश्चय तेरा पालनहार तुझे प्रदान करेगा, तो तू प्रसन्न हो जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur anqareeb tumhra Rubb tumko itna dega ke tum khush ho jaogey
Roman Urdu (Junagarhi)Tujhy tere rab baht jald (inam )dyga aur to razi (o khush )hojaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)और अनकरीब तुम्हारा रुब तुमको इतना देगा के तुम खुश हो जाओगे
عَرَبِيأَلَم يَجِدكَ يَتيمًا فَآوىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या उसने आपको अनाथ पाकर शरण नहीं दी?
Roman Urdu (Maududi)Kya usne tumko yateem nahin paya aur phir thikana faraham kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya us nay tujhy yateem paker jagah nahi di
Devnagri Urdu (Maududi)क्या उसने तुमको यतीम नहीं पाया और फिर ठिकाना फरहम किया
عَرَبِيوَوَجَدَكَ ضالًّا فَهَدىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और आपको मार्ग से अनभिज्ञ पाया, तो सीधा मार्ग दिखाया।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhey nawaqif-e-raah paya aur phir hidayat bakshi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tujhay raah bhola paker hidayat nahi di
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हें नवाज़ीफ-ए-राह पाया और फिर हिदायत बख्शी
عَرَبِيوَوَجَدَكَ عائِلًا فَأَغنىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उसने आपको निर्धन पाया, तो संपन्न कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhein nadaar(in want) paya aur phir maldar kar diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tujhy na-daar paaker to-nagar nahi banadiya
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हें नादर (चाहते हुए) पाया और फिर मालदार कर दिया
عَرَبِيفَأَمَّا اليَتيمَ فَلا تَقهَر
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः आप अनाथ पर कठोरता न दिखाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza yateem par sakhti na karo
Roman Urdu (Junagarhi)Pus yateem per to bhi sakhti na kiya ker
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाज़ा यतीम पर शायद न करो
عَرَبِيوَأَمَّا السّائِلَ فَلا تَنهَر
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और माँगने वाले को न झिड़कें।
Roman Urdu (Maududi)Aur saayil(maangne waley) ko na jhidko
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na sawal kernay waly ko dant dapat
Devnagri Urdu (Maududi)और सायेल( मांगने) वाले) को ना झिडको
عَرَبِيوَأَمّا بِنِعمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّث
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और अपने रब के उपकार का वर्णन करते रहें।
Roman Urdu (Maududi)Aur apne Rubb ki niyamt ka izhar karo
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apnay rab ki nematon ko biyan kerta reh
Devnagri Urdu (Maududi)और अपने रब की नियामत का इज़हार करो
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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day)

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Surah 94: Al-Inshirah (The Expansion)

Meccan🕐 Revelation #12📜 8 Verses🕮 Juz 1
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Surah 94: Al-Inshirah (The Expansion)

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Surah 94: Al-Inshirah (The Expansion)

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Surah 94: Al-Inshirah (The Expansion)

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Surah 94: Al-Inshirah (The Expansion)

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Surah 94: Al-Inshirah (The Expansion)

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Surah 94: Al-Inshirah (The Expansion)

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Surah 94: Al-Inshirah (The Expansion)

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Surah 94: Al-Inshirah (The Expansion)

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عَرَبِيأَلَم نَشرَح لَكَ صَدرَكَ
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) क्या हमने तुम्हारे लिए तुम्हारा सीना नहीं खोल दिया?
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi) kya humne tumhara seena tumhare liye khol nahin diya
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya hum nay tera seena nahi khol diya
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) क्या हमने तुम्हारा सीना तुम्हारे लिए खोल नहीं दिया
عَرَبِيوَوَضَعنا عَنكَ وِزرَكَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने आपसे आपका बोझ उतार दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumpar se woh bhari bojh utar diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tujh per say tera bojh hum ney utar diya
Devnagri Urdu (Maududi)और तुमपर से वो भारी बोझ उतर दिया
عَرَبِيالَّذي أَنقَضَ ظَهرَكَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिसने आपकी कमर तोड़ दी थी।
Roman Urdu (Maududi)Jo tumhari qamar todhe daal raha tha
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss nay teri peth tordi thi
Devnagri Urdu (Maududi)जो तुम्हारी कमर तोढे डाल रहा था
عَرَبِيوَرَفَعنا لَكَ ذِكرَكَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और हमने आपके लिए आपका ज़िक्र ऊँचा कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhare khatir tumharey zikr ka awazah buland kar diya
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hum nay tera zikar buland kerdiya
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हारी खातिर तुम्हारे जिक्र का आवाज बुलंद कर दिया
عَرَبِيفَإِنَّ مَعَ العُسرِ يُسرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हर कठिनाई के साथ एक आसानी है।
Roman Urdu (Maududi)Pas haqeeqat yeh hai kay tangi kay saat farakhi bhi hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus yaqenan mushkil kay sath asani hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास हकीकत ये है काय तंगी काय सात फारखी भी है
عَرَبِيإِنَّ مَعَ العُسرِ يُسرًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह (उस) कठिनाई के साथ एक (और) आसानी है।
Roman Urdu (Maududi)Beshak tangi kay saath farakhi bhi hai
Roman Urdu (Junagarhi)By-shak mushkil kay sath asani hai
Devnagri Urdu (Maududi)बेशाक टांगी काय साथ फारखी भी है
عَرَبِيفَإِذا فَرَغتَ فَانصَب
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः, जब आप फ़ारिग़ हो जाएँ, तो परिश्रम करें।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza jab tum faarig ho to Ibadat ki mushakkat mei lag jao
Roman Urdu (Junagarhi)Pus jab to farigh ho to ibadat mein mehnat ker
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाज़ा जब तुम फारिग हो तो इबादत की मुशक्कत में लग जाओ
عَرَبِيوَإِلىٰ رَبِّكَ فَارغَب
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और अपने पालनहार की ओर अपना ध्यान लगाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur apne Rubb ki taraf raagib ho
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney parwardigar hi ki tareef mein dil laga
Devnagri Urdu (Maududi)और अपने रब की तरफ रागिब हो
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Surah 94: Al-Inshirah (The Expansion)

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Surah 94: Al-Inshirah (The Expansion)

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Surah 94: Al-Inshirah (The Expansion)

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Surah 94: Al-Inshirah (The Expansion)

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Surah 94: Al-Inshirah (The Expansion)

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Surah 95: At-Tin (The Fig)

Meccan🕐 Revelation #28📜 8 Verses🕮 Juz 1
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Surah 95: At-Tin (The Fig)

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Surah 95: At-Tin (The Fig)

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Surah 95: At-Tin (The Fig)

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Surah 95: At-Tin (The Fig)

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Surah 95: At-Tin (The Fig)

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Surah 95: At-Tin (The Fig)

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Surah 95: At-Tin (The Fig)

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Surah 95: At-Tin (The Fig)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَالتّينِ وَالزَّيتونِ
हिन्दी (Al-Omari)क़सम है अंजीर की! तथा ज़ैतून की!
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai Injir(fig) ki aur Zaitun ki
Roman Urdu (Junagarhi)Qasm hai enjeer ki aur zetoon ki
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है इंजीर (अंजीर) की और ज़ैतून की
عَرَبِيوَطورِ سينينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)एवं "तूरे सीनीन" की क़सम!
Roman Urdu (Maududi)Aur Tur-e-sina (Mount Sinai)
Roman Urdu (Junagarhi)Aur toor seeneen ki
Devnagri Urdu (Maududi)और तूर-ए-सीना (सिनाई पर्वत)
عَرَبِيوَهٰذَا البَلَدِ الأَمينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और इस शान्ति वाले नगर की क़सम!
Roman Urdu (Maududi)Aur is pur-aman shehar (Makkah) ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aur iss aman walay sher ki
Devnagri Urdu (Maududi)और इस पुर-अमन शहर (मक्का) की
عَرَبِيلَقَد خَلَقنَا الإِنسانَ في أَحسَنِ تَقويمٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने इनसान को सबसे अच्छी संरचना में पैदा किया है।
Roman Urdu (Maududi)Humne Insan ko behtarin saakht par paida kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqenan hum nay insan ko behtren soorat mein paida kia
Devnagri Urdu (Maududi)हमने इंसान को बहतरीन साख्त पर भुगतान किया
عَرَبِيثُمَّ رَدَدناهُ أَسفَلَ سافِلينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर हमने उसे सबसे नीची हालत की ओर लौटा दिया।
Roman Urdu (Maududi)Phir usey ulta pher kar humne sab neechon se neech kar diya
Roman Urdu (Junagarhi)Phir isssay neechon say necha kerdiye
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उसे उल्टा फेर कर हमने सब नीचों से नीच कर दिया
عَرَبِيإِلَّا الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ فَلَهُم أَجرٌ غَيرُ مَمنونٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)परंतु जो लोग ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए, उनके लिए समाप्त न होने वाला बदला है।
Roman Urdu (Maududi)Siwaye un logon ke jo iman laye aur neik amal karte rahey kay unke liye kabhi khatam na hone wala ajar hai
Roman Urdu (Junagarhi)lekin jo log eman laey aur (phir)nek amal kiey to inkay liey aisa ajar hai jo kabhi khatam na hoga
Devnagri Urdu (Maududi)सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और नेक अमल करते रहे उनके लिए कभी खत्म ना होने वाला अजर है
عَرَبِيفَما يُكَذِّبُكَ بَعدُ بِالدّينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर (ऐ मनुष्य) तुझे कौन-सी चीज़ बदले (के दिन) को झुठलाने पर आमादा करती है?
Roman Urdu (Maududi)Pas (aey nabi) iske baad kaun jaza o saza ke maamle mei tumko jhutla sakta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tujhay abb roz jaza kay jhutlanay per konsi cheez amaadah kerti hai
Devnagri Urdu (Maududi)पास (ऐ नबी) इसके बाद कौन जजा ओ सजा के मामले में तुमको झूठ बोल सकता है
عَرَبِيأَلَيسَ اللَّهُ بِأَحكَمِ الحاكِمينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या अल्लाह सब हाकिमों से बड़ा हाकिम नहीं है?
Roman Urdu (Maududi)Kya Allah sab hakimon se bada hakim nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya Allah Taalaa (sabb) haakemon ka hakim nahi hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या अल्लाह सब हकीमों से बड़ा हकीम नहीं है
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Surah 95: At-Tin (The Fig)

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Surah 95: At-Tin (The Fig)

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Surah 95: At-Tin (The Fig)

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Surah 95: At-Tin (The Fig)

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Surah 95: At-Tin (The Fig)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

Meccan🕐 Revelation #1📜 19 Verses🕮 Juz 1
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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِياقرَأ بِاسمِ رَبِّكَ الَّذي خَلَقَ
हिन्दी (Al-Omari)अपने पालनहार के नाम से पढ़, जिसने पैदा किया।
Roman Urdu (Maududi)Padho (Aey Nabi) apne Rubb ke naam ke saath Jisne paida kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Parh apnay rab kay naam say jiss nay peda kiya
Devnagri Urdu (Maududi)पढ़ो (ऐ नबी) अपने रब के नाम के साथ जिसने पढ़ा किया
عَرَبِيخَلَقَ الإِنسانَ مِن عَلَقٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिसने मनुष्य को रक्त के लोथड़े से पैदा किया।
Roman Urdu (Maududi)Jamey huey khoon ke ek lothdey se Insan ki takhliq ki
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss nay insan ko khoon kay lothray say peda kiya
Devnagri Urdu (Maududi)जमे हुए खून के एक लड़के से इंसान की तख़लीक़ की
عَرَبِياقرَأ وَرَبُّكَ الأَكرَمُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)पढ़ और तेरा पालनहार बड़े करम (उदारता) वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Padho aur tumhara Rubb bada kareem hai
Roman Urdu (Junagarhi)tu parhta reh tera rab baray karam wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)पढ़ो और तुम्हारा रब बड़ा करीम है
عَرَبِيالَّذي عَلَّمَ بِالقَلَمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिसने क़लम के द्वारा सिखाया।
Roman Urdu (Maududi)jisne qalam ke zariya se ilm sikhaya
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss nay qalam kay zariye(ilm)sikhaya
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने क़लम के ज़रिया से इल्म सिखाया
عَرَبِيعَلَّمَ الإِنسانَ ما لَم يَعلَم
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसने इनसान को वह सिखाया, जो वह नहीं जानता था।
Roman Urdu (Maududi)Insan ko woh ilm diya jisey woh na jaanta tha
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss nay insan ko who sikhaya jissay who nai janta tha
Devnagri Urdu (Maududi)इंसान को वो इल्म दिया जिसने वो ना जानता था
عَرَبِيكَلّا إِنَّ الإِنسانَ لَيَطغىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कदापि नहीं, निःसंदेह मनुष्य सीमा पार कर जाता है।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin, Insan sarkahshi karta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Such much insan to apnay say bahir hojata hy
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं, इंसान सरकशी करता है
عَرَبِيأَن رَآهُ استَغنىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)इसलिए कि वह स्वयं को बेनियाज़ (धनवान्) देखता है।
Roman Urdu (Maududi)Is bina par ke woh apne aap ko be niyaz dekhta hai
Roman Urdu (Junagarhi)isliey kay who apnay apko beparwah(ya tu nagar)samjhta hy hai
Devnagri Urdu (Maududi)इस बिना पार के वो अपने आप को बे नियाज देखता है
عَرَبِيإِنَّ إِلىٰ رَبِّكَ الرُّجعىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह, तेरे पालनहार ही की ओर वापस लौटना है।
Roman Urdu (Maududi)(halaanke) palatna yaqeenan tere Rubb hi ki taraf hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan lotna teray rab ki taraf hai
Devnagri Urdu (Maududi)(हलांके) पलटना यकीनन तेरे रब ही की तरफ है
عَرَبِيأَرَأَيتَ الَّذي يَنهىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने उस व्यक्ति को देखा, जो रोकता है।
Roman Urdu (Maududi)Tumne dekha us shaks ko
Roman Urdu (Junagarhi)(Bhala)issay bhi tumnay dekha jo bandy ko rokta hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुमने देखा हमें शक्स को
عَرَبِيعَبدًا إِذا صَلّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)एक बंदे को, जब वह नमाज़ अदा करता है।
Roman Urdu (Maududi)Jo ek banday ko mana karta hai jabke woh namaz padta ho
Roman Urdu (Junagarhi)Jabkay who banda salat ada kerta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो एक बंदे को मना करता है जबके वो नमाज पढ़ता हो
عَرَبِيأَرَأَيتَ إِن كانَ عَلَى الهُدىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने देखा यदि वह सीधे मार्ग पर हो।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara kya khayal hai agar (woh banda) raah e raast par ho
Roman Urdu (Junagarhi)Bahala batla to ager who hidayat per ho
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा क्या ख्याल है अगर (वो बंदा) राह ए रास्ते पर हो
عَرَبِيأَو أَمَرَ بِالتَّقوىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)या अल्लाह से डरने का आदेश देता हो?
Roman Urdu (Maududi)ya parhezgari ki talqeen karta ho
Roman Urdu (Junagarhi)Ya parhezgari ka hokum deta ho
Devnagri Urdu (Maududi)या परहेजगारी की तलाक़ करता हो
عَرَبِيأَرَأَيتَ إِن كَذَّبَ وَتَوَلّىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या आपने देखा यदि उसने झुठलाया तथा मुँह फेरा?
Roman Urdu (Maududi)Tumhara kya khayal hai agar (yeh mana karne wala shakhs haqq ko) jhutlata aur mooh moadta ho
Roman Urdu (Junagarhi)Bhala dekho to agar yeh jhutlata ho aur mun perhta ho to
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा क्या ख्याल है अगर (ये मन करने वाला शख़्स हक़ को) झुटलता और मुँह मोड़ता हो
عَرَبِيأَلَم يَعلَم بِأَنَّ اللَّهَ يَرىٰ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या उसने नहीं जाना कि अल्लाह देख रहा है?
Roman Urdu (Maududi)Kya woh nahin jaanta ke Allah dekh raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya uss nay nahi jana kay Allah Taalaa ussay khob dekh raha hai
Devnagri Urdu (Maududi)क्या वो नहीं जानता के अल्लाह देख रहा है
عَرَبِيكَلّا لَئِن لَم يَنتَهِ لَنَسفَعًا بِالنّاصِيَةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कदापि नहीं, निश्चय यदि वह नहीं माना, तो हम अवश्य उसे माथे की लट पकड़कर घसीटेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin agar woh baaz na aaya to hum uski peshani ke baal pakad kar usey khinchey ge
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan ager yeh baaz na raha to hum iski peshani kay baal paker ker ghaseetein gay
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज़ नहीं अगर वो बाज़ ना आया तो हम उसकी पेशानी के बाल पकड़ कर उसे खींचेगे
عَرَبِيناصِيَةٍ كاذِبَةٍ خاطِئَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)ऐसे माथे की लट जो झूठा और पापी है।
Roman Urdu (Maududi)Us peshani ko jo jhooti aur sakth khatakaar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aisi peshani jo jhooti katakar hai
Devnagri Urdu (Maududi)उस पेशानी को जो झूठी और खतरनाक है
عَرَبِيفَليَدعُ نادِيَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो वह अपनी सभा को बुला ले।
Roman Urdu (Maududi)Woh bulaley apne haamiyon ki toli ko
Roman Urdu (Junagarhi)yeh apni majlis walon ko bulalay
Devnagri Urdu (Maududi)वो बुलाले अपने हामियों की टोली को
عَرَبِيسَنَدعُ الزَّبانِيَةَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हम भी जहन्नम के फ़रिश्तों को बुला लेंगे।
Roman Urdu (Maududi)Hum bhi azaab ke farishton ko bula lengey
Roman Urdu (Junagarhi)hum bhi (dozakh kay)piyadon ko bula lein gy
Devnagri Urdu (Maududi)हम भी अज़ाब के फरिश्तों को बुला लेंगे
☉ Sajda
عَرَبِيكَلّا لا تُطِعهُ وَاسجُد وَاقتَرِب ۩
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कदापि नहीं, आप उसकी बात न मानें, (बल्कि) सजदा करें और (अल्लाह के) निकट हो जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin, uski baat na mano aur sajda karo aur (apne Rubb ka) qurb hasil karo
Roman Urdu (Junagarhi)Khabardar! isska kehna hergiz na manna aur sajda ker aur qareeb hoja
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज़ नहीं, उसकी बात न मानो और सजदा करो और (अपने रब का) क़ुरब हासिल करो
@@ -694,8 +717,7 @@

Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 96: Al-'Alaq (The Clot)

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Surah 97: Al-Qadr (The Majesty)

Meccan🕐 Revelation #25📜 5 Verses🕮 Juz 1
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Surah 97: Al-Qadr (The Majesty)

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Surah 97: Al-Qadr (The Majesty)

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Surah 97: Al-Qadr (The Majesty)

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Surah 97: Al-Qadr (The Majesty)

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Surah 97: Al-Qadr (The Majesty)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيإِنّا أَنزَلناهُ في لَيلَةِ القَدرِ
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह हमने इस (क़ुरआन) को क़द्र की रात (महिमा वाली रात) में उतारा।
Roman Urdu (Maududi)Humne is (Quran) ko shab-e-qadr mei nazil kiya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum nay issay shab qadar mein nazil farmaya
Devnagri Urdu (Maududi)हमने (कुरान) को शब-ए-क़दर में नाज़िल किया है
عَرَبِيوَما أَدراكَ ما لَيلَةُ القَدرِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और आपको क्या मालूम कि क़द्र की रात क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Aur tum kya jano kay shab-e-qadr kya hai
Roman Urdu (Junagarhi)To kiaya janey kay shab qadar kiya hy
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम क्या जानो, शब-ए-क़द्र क्या है
عَرَبِيلَيلَةُ القَدرِ خَيرٌ مِن أَلفِ شَهرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क़द्र की रात हज़ार महीनों से उत्तम है।
Roman Urdu (Maududi)Shab-e-qadr hazar mahino se zyada behtar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Shab qadar aik hazar maheeno say behter hai
Devnagri Urdu (Maududi)शब-ए-क़द्र हज़ार महिनो से ज़्यादा बेहतर है
عَرَبِيتَنَزَّلُ المَلائِكَةُ وَالرّوحُ فيها بِإِذنِ رَبِّهِم مِن كُلِّ أَمرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसमें फ़रिश्ते तथा रूह (जिबरील) अपने पालनहार की अनुमति से हर आदेश के साथ उतरते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Farishtey aur rooh(Jibrael) us mein apne Rubb ke izn(permission) se har hukm le kar utarte hai
Roman Urdu (Junagarhi)Iss (mein her kaam) kay siranjam denay ko apney rab kay hukum say farishty aur rooh(jibrael)utertay hain
Devnagri Urdu (Maududi)फ़रिश्ते और रूह (जिब्राइल) हमसे अपने रब के इज़्न (अनुमति) से हर हुक्म ले कर उतरते हैं
عَرَبِيسَلامٌ هِيَ حَتّىٰ مَطلَعِ الفَجرِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह रात फ़ज्र उदय होने तक सर्वथा सलामती (शांति) है।
Roman Urdu (Maududi)Woh raat sarasar salamati hai tulu e fajr tak
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh raat sir-a-sir slamti ki hoti hai aur fajar kay tuloo honay tak(rehti hai)
Devnagri Urdu (Maududi)वो रात सरसर सलामती है तुलू ए फज्र तक
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Surah 97: Al-Qadr (The Majesty)

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Surah 97: Al-Qadr (The Majesty)

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Surah 97: Al-Qadr (The Majesty)

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Surah 97: Al-Qadr (The Majesty)

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Surah 97: Al-Qadr (The Majesty)

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Surah 98: Al-Bayyinah (The Clear Evidence)

Medinan🕐 Revelation #100📜 8 Verses🕮 Juz 1
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Surah 98: Al-Bayyinah (The Clear Evidence)

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Surah 98: Al-Bayyinah (The Clear Evidence)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيلَم يَكُنِ الَّذينَ كَفَروا مِن أَهلِ الكِتابِ وَالمُشرِكينَ مُنفَكّينَ حَتّىٰ تَأتِيَهُمُ البَيِّنَةُ
हिन्दी (Al-Omari)किताब वालों और मुश्रिकों में से जिन लोगों ने कुफ़्र किया, वे (कुफ़्र से) बाज़ आने वाले नहीं थे, यहाँ तक कि उनके पास खुला प्रमाण आ जाए।
Roman Urdu (Maududi)Ehle kitab aur Mushrikin mein se jo log kafir thay (woh apne kufr se) baaz aane walay na thay jab tak ke unke paas dalil e roshan na aa jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Ehl-e-kitab kay kafir aur mushrik log jabb tak kay unkay pass zahir daleel na ajaye baz rehnay waly na thay(who daleel yeh thi kay)
Devnagri Urdu (Maududi)एहले किताब और मुशरिकिन में से जो लोग काफिर थे (वो अपने कुफ्र से) बाज़ आने वाले ना थे जब तक के उनके पास दलील ए रोशन ना आ जाए
عَرَبِيرَسولٌ مِنَ اللَّهِ يَتلو صُحُفًا مُطَهَّرَةً
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह की ओर से एक रसूल, जो पवित्र ग्रंथ पढ़कर सुनाता है।
Roman Urdu (Maududi)(Yani) Allah ke taraf se ek Rasool jo paak sahife padh kar sunaye
Roman Urdu (Junagarhi)Allah Taalaa ka aik rasol jo pak saheefay parhay
Devnagri Urdu (Maududi)(यानी) अल्लाह के तरफ से एक रसूल जो पाक सही पढ़ कर सुनाए
عَرَبِيفيها كُتُبٌ قَيِّمَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिनमें सच्ची ख़बरें और ठीक आदेश अंकित हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jin mein bilkul raast aur durust tehrirein likhi hui ho
Roman Urdu (Junagarhi)jin mein sahi aur durust ehkam hon
Devnagri Urdu (Maududi)जिन में बिल्कुल रास्ता और दुरुस्त तस्वीरें लिखी हुई हो
عَرَبِيوَما تَفَرَّقَ الَّذينَ أوتُوا الكِتابَ إِلّا مِن بَعدِ ما جاءَتهُمُ البَيِّنَةُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जिन्हें किताब दी गई थी, वे अपने पास स्पष्ट प्रमाण आ जाने के बाद ही अलग-अलग हुए।
Roman Urdu (Maududi)Pehle jin logon ko kitab di gayi thi unmei tafarqa barpa(split/divide) nahin hua magar is ke baad ke un ke paas (raahe rast ka) bayan e wazeh aa chuka tha
Roman Urdu (Junagarhi)Ehl-e-kitab apnay pass zahir daleel ajanay kay baad hi (ikhtilaaf mein par ker) mutafarriq hogaey
Devnagri Urdu (Maududi)पहले जिन लोगों को किताब दी गई थी उनमें तफ़रका बरपा (विभाजन/विभाजन) नहीं हुआ मगर इस के बाद के उन के पास (राहे रास्ते का) बयान ए वजह आ चूका था
عَرَبِيوَما أُمِروا إِلّا لِيَعبُدُوا اللَّهَ مُخلِصينَ لَهُ الدّينَ حُنَفاءَ وَيُقيمُوا الصَّلاةَ وَيُؤتُوا الزَّكاةَ ۚ وَذٰلِكَ دينُ القَيِّمَةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)हालाँकि उन्हें केवल यही आदेश दिया गया था कि वे अल्लाह के लिए धर्म को विशुद्ध करते हुए, एकाग्र होकर, उसकी उपासना करें, तथा नमाज़ अदा करें और ज़कात दें और यही सीधा धर्म है।
Roman Urdu (Maududi)Aur unko iske siwa koi hukum nahin diya gaya tha ke Allah ke bandagi karein apne deen ko uske liye khalis karke. Bilkul yaksu ho kar, Aur namaz qayam karein aur zakat de yahi nihayat sahih-o-durust deen hai
Roman Urdu (Junagarhi)Unhein isskay siwa koi hokum nahi diya gaya kay sirf Allah ki ibadat kerein ussi kay liey deen ko khalis rakhein.ibraheem hanif kay deen per aur salat ko qaem rakhein aur zakat dety rahen yehi hai deen sedhi millat ka
Devnagri Urdu (Maududi)और उनको इसके सिवा कोई हुकुम नहीं दिया गया था के अल्लाह के बंदगी अपने दीन को उसके लिए खालिस करके। बिल्कुल यक्सू हो कर, और नमाज़ क़याम करें और जकात दे यही निहायत सही-ओ-दुरूस्त दीन है
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ كَفَروا مِن أَهلِ الكِتابِ وَالمُشرِكينَ في نارِ جَهَنَّمَ خالِدينَ فيها ۚ أُولٰئِكَ هُم شَرُّ البَرِيَّةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह किताब वालों और मुश्रिकों में से जो लोग काफ़िर हो गए, वे सदा जहन्नम की आग में रहने वाले हैं, वही लोग सबसे बुरे प्राणी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Ehle kitaab aur mushrikin mein se jin logon ne kufr kiya hai woh yaqeenan jahannam ki aag mein jayenge aur hamesha us mein rahenge, yeh log badh-tareen e khalayek(creation) hain
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jo log ehl-e-kitab mein say kafir huye aur mushrikeen sab dozakh ki aag mein(jaeigy)jahan who hamesha(hamesha)reheingy.yeh log bad tareen khalaeeq hain
Devnagri Urdu (Maududi)एहले किताब और मुशरिकिन में से जिन लोगों ने कुफ्र किया है वो यकीनन जहन्नम की आग में जाएंगे और हमेशा उसमें रहेंगे, ये लोग बढ़-तारीन ए खलायेक (सृजन) हैं
عَرَبِيإِنَّ الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ أُولٰئِكَ هُم خَيرُ البَرِيَّةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और उन्होंने सत्कर्म किए, वही लोग सबसे अच्छे प्राणी हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo log iman le aaye aur jinhon nay neik amal kiye woh yaqeenan behtareen-e-khalayeq hai
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak jo log eman laey aur nek amal kiey yeh log behtreen khalaeeq hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोग ईमान ले आए और जिन्होन नै नेक अमल किए वो यक़ीनन बहतरीन-ए-खलायेक है
عَرَبِيجَزاؤُهُم عِندَ رَبِّهِم جَنّاتُ عَدنٍ تَجري مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدينَ فيها أَبَدًا ۖ رَضِيَ اللَّهُ عَنهُم وَرَضوا عَنهُ ۚ ذٰلِكَ لِمَن خَشِيَ رَبَّهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उनका बदला उनके पालनहार के पास सदा रहने वाले बाग़ हैं, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। वे उनमें सदैव रहने वाले हैं। अल्लाह उनसे प्रसन्न हुआ और वे अल्लाह से प्रसन्न हुए। यह उसके लिए है, जो अपने पालनहार से डर गया।
Roman Urdu (Maududi)Unki jaza unke Rubb ke yahan dayimi(eternal) qayam ki jannatein hain jinke nichey nehrein beh rahi hongi. Woh unmein hamesha hamesh rahenge. Allah unse razi hua aur woh Allah se razi huey. Yeh kuch hai us shaks ke liye jisne apne Rubb ka khauf kiya ho
Roman Urdu (Junagarhi)Inn ka badla unkay rab kay pass hameshgi wohi jannaten hein jinkay neechy nehrein beh rahi hein jin mein who hamesha hamesha rahein gay.Allah Taalaa unsy razi hua aur yeh uss say razi huye.yeh hai uskay liey jo apnay perwardigar say daray
Devnagri Urdu (Maududi)उनकी जाज़ा उनके रब के यहां दायमी (अनन्त) क़याम की जन्नतें हैं जिनके आला नेहरेन बेह राही होंगी। वो उनमें हमेशा हमेशा रहेंगे। अल्लाह उनसे राजी हुआ और वो अल्लाह से राजी हुए। ये कुछ है हमारे शक्स के लिए जिसने अपने रब का खौफ किया हो
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Surah 98: Al-Bayyinah (The Clear Evidence)

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Surah 98: Al-Bayyinah (The Clear Evidence)

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Surah 98: Al-Bayyinah (The Clear Evidence)

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Surah 98: Al-Bayyinah (The Clear Evidence)

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Surah 98: Al-Bayyinah (The Clear Evidence)

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Surah 99: Al-Zilzal (The Shaking)

Medinan🕐 Revelation #93📜 8 Verses🕮 Juz 1
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Surah 99: Al-Zilzal (The Shaking)

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Surah 99: Al-Zilzal (The Shaking)

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Surah 99: Al-Zilzal (The Shaking)

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Surah 99: Al-Zilzal (The Shaking)

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Surah 99: Al-Zilzal (The Shaking)

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Surah 99: Al-Zilzal (The Shaking)

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Surah 99: Al-Zilzal (The Shaking)

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Surah 99: Al-Zilzal (The Shaking)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيإِذا زُلزِلَتِ الأَرضُ زِلزالَها
हिन्दी (Al-Omari)जब धरती को पूरी तरह झंझोड़ दिया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Jab zameen apni puri shiddat kay saath hila daali jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Jabb zameen pori tarah jhanjor di jaeygi
Devnagri Urdu (Maududi)जब ज़मीन अपनी पूरी शिद्दत के साथ हिला डाली जाएगी
عَرَبِيوَأَخرَجَتِ الأَرضُ أَثقالَها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा धरती अपने बोझ बाहर निकाल देगी।
Roman Urdu (Maududi)Aur zameen apne andar kay sarey bojh nikal kar bahar daal degi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur apney bojh bahar nikal phenkay gi
Devnagri Urdu (Maududi)और ज़मीन अपने अंदर का सारे बोझ निकल कर बहार डाल देगी
عَرَبِيوَقالَ الإِنسانُ ما لَها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और इनसान कहेगा कि इसे क्या हो गया?
Roman Urdu (Maududi)Aur Insan kahega ke yeh isko kya ho raha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Insan kehnay lagay ga kay issay kiya hogaya
Devnagri Urdu (Maududi)और इंसान कहेगा के ये इसको क्या हो रहा है
عَرَبِييَومَئِذٍ تُحَدِّثُ أَخبارَها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन वह अपनी खबरें बयान करेगी।
Roman Urdu (Maududi)Us roz woh apne (upar guzre huey) halaat bayan karegi
Roman Urdu (Junagarhi)Uss din zameen apni sabb khabrein biyan kerdegi
Devnagri Urdu (Maududi)उस रोज वो अपने (ऊपर गुजरे हुए) हालात बयान करेगी
عَرَبِيبِأَنَّ رَبَّكَ أَوحىٰ لَها
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्योंकि तेरे पालनहार ने उसे इसका आदेश दिया होगा।
Roman Urdu (Maududi)Kyunke tere Rubb ne usey (aisa karne ka) hukm diya hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Issliye kay tery rab nay ussy hukam diya hoga
Devnagri Urdu (Maududi)क्योंकि तेरे रब ने उसे (ऐसा करने का) हुक्म दिया होगा
عَرَبِييَومَئِذٍ يَصدُرُ النّاسُ أَشتاتًا لِيُرَوا أَعمالَهُم
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस दिन लोग अलग-अलग होकर लौटेंगे, ताकि उन्हें उनके कर्म दिखाए जाएँ।
Roman Urdu (Maududi)Us roz log mutafarrik halat mein paltenge taakay unke aamal unko dikhaey jayein
Roman Urdu (Junagarhi)Uss rozlog mukhtalif jamatein hoker(wapis)lotein gay takey unhein unkay aiymaal dikha diey jaein
Devnagri Urdu (Maududi)उस रोज लोग मुताफर्रिक हालात में पलटेंगे ताके उनके अमल उनको दिखाये जायें
عَرَبِيفَمَن يَعمَل مِثقالَ ذَرَّةٍ خَيرًا يَرَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो जिसने एक कण के बराबर भी नेकी की होगी, उसे देख लेगा।
Roman Urdu (Maududi)Phir jisne zarra barabar neki ki hogi woh usko dekh lega
Roman Urdu (Junagarhi)pus jiss nay zara baraber neki ki hogi who issay dekhlega
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जिसने जरा बराबर नेकी की होगी वो उसको देख लेगा
عَرَبِيوَمَن يَعمَل مِثقالَ ذَرَّةٍ شَرًّا يَرَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जिसने एक कण के बराबर भी बुराई की होगी, उसे देख लेगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur jisne zarra barabar badi ki hogi woh usko dekh lega
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss nay zara baraber burai ki hogi who ussy dekhlega
Devnagri Urdu (Maududi)और जिसने जरा बराबर बदी की होगी वो उसको देख लेगा
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Surah 99: Al-Zilzal (The Shaking)

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Surah 99: Al-Zilzal (The Shaking)

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Surah 99: Al-Zilzal (The Shaking)

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Surah 99: Al-Zilzal (The Shaking)

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Surah 99: Al-Zilzal (The Shaking)

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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

Meccan🕐 Revelation #14📜 11 Verses🕮 Juz 1
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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَالعادِياتِ ضَبحًا
हिन्दी (Al-Omari)क़सम है उन घोड़ों की, जो पेट से साँस की आवाज़ निकालते हुए डौड़ने वाले हैं!
Roman Urdu (Maududi)Kasam hai un (ghodon) ki jo phunkare marte hue dhaudte hai
Roman Urdu (Junagarhi)Hanpety hoye dorney waly ghoron ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)कसम है उन (घोड़ों) की जो फुंकारे मारते हुए ढूंढते हैं
عَرَبِيفَالمورِياتِ قَدحًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर टाप मारकर चिंगारियाँ निकालने वाले घोड़ों की क़सम!
Roman Urdu (Maududi)Phir (apne tapon se) chingariyan jhaadte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir taap maar ker aag jharnay walon ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)फिर (अपने तपों से) चिंगारियां झड़ते हैं
عَرَبِيفَالمُغيراتِ صُبحًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर सुबह के समय हमला करने वाले (घोड़ों) की क़सम!
Roman Urdu (Maududi)Phir subah sawere chapa marte hain
Roman Urdu (Junagarhi)Phir subha kay waqat dhawa bolney walon ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)फिर सुबह सवेरे चपा मरते हैं
عَرَبِيفَأَثَرنَ بِهِ نَقعًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर उससे धूल उड़ाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir is mauke par gard o gubar udatey hai
Roman Urdu (Junagarhi)Pus uss waqat gard-o-ghubar uraty hein
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इस मौके पर गार्ड ओ गुबार उड़ाते हैं
عَرَبِيفَوَسَطنَ بِهِ جَمعًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर वे उसके साथ (दुश्मन की) सेना के बीच घुस जाते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Phir isi halat mei kisi majmey ke andar ja ghustey hai
Roman Urdu (Junagarhi)Phir ussi kay sath fojon kay darmiyan ghos jaty hein
Devnagri Urdu (Maududi)फिर इसी हालात में कोई मजे के अंदर जा घुसते हैं
عَرَبِيإِنَّ الإِنسانَ لِرَبِّهِ لَكَنودٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह इनसान अपने पालनहार का बड़ा कृतघ्न (नाशुक्रा) है।
Roman Urdu (Maududi)Haqiqat yeh hai ke Insan apne Rubb ka bada nashukra hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan insan apnay rab ka bara nashukra hy
Devnagri Urdu (Maududi)हकीकत ये है के इंसान अपने रुब का बड़ा नाशुक्र है
عَرَبِيوَإِنَّهُ عَلىٰ ذٰلِكَ لَشَهيدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह वह इसपर स्वयं गवाह है।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh khud is par gawah hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur yaqeenan who khud bhi issi per gawah hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वह खुद इस पर गवाह है
عَرَبِيوَإِنَّهُ لِحُبِّ الخَيرِ لَشَديدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और निःसंदेह वह धन के मोह में बड़ा सख़्त है।
Roman Urdu (Maududi)Aur woh maal-o-daulat ki muhabbat mei buri tarah mubtala hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yeh maal ki muhabbat mein bhi bara sakht hai
Devnagri Urdu (Maududi)और वह माल-ओ-दौलत की मुहब्बत में बुरी तरह मुबतला है
عَرَبِي۞ أَفَلا يَعلَمُ إِذا بُعثِرَ ما فِي القُبورِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो क्या वह नहीं जानता, जब क़ब्रों में जो कुछ है, निकाल बाहर किया जाएगा?
Roman Urdu (Maududi)To kya woh us waqt ko nahin janta jab qabron mein jo kuch (madfun) hai usey nikal liya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya issay who waqat maloom nahi jabb qabron mein jo kuch hy nikal liya jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)तो क्या वो हमें वक्त को नहीं जानता जब कब्रों में जो कुछ (मडफन) है उसे निकाल लिया जाएगा
عَرَبِيوَحُصِّلَ ما فِي الصُّدورِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और जो कुछ सीनों में है, वह प्रकट कर दिया जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Aur seeno mein jo kuch (makhfi) hai usey baramad karke uski jaanch padtal ki jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Aur seenon ki poshida batein zahir kerdi jaeingi
Devnagri Urdu (Maududi)और सीने में जो कुछ (मख्फी) है उसे बारामाद करके उसकी जांच पडताल की जाएगी
عَرَبِيإِنَّ رَبَّهُم بِهِم يَومَئِذٍ لَخَبيرٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह उनका पालनहार उस दिन उनके बारे में पूरी ख़बर रखने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)Yaqeenan unka Rubb us roz unse khoob bakhabar hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Be-shak inka rab uss din unkay haal say poora ba-khabar hoga
Devnagri Urdu (Maududi)यकीनन उनका रब हमें रोज उनसे खूब बख़बर होगा
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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters)

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Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity)

Meccan🕐 Revelation #30📜 11 Verses🕮 Juz 1
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Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity)

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Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity)

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Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity)

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Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity)

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Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity)

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Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity)

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Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity)

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Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity)

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Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيالقارِعَةُ
हिन्दी (Al-Omari)वह खड़खड़ा देने वाली।
Roman Urdu (Maududi)Azeem hadisa
Roman Urdu (Junagarhi)Kharkhara deney wali
Devnagri Urdu (Maududi)अज़ीम हदीसा
عَرَبِيمَا القارِعَةُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या है वह खड़खड़ा देने वाली?
Roman Urdu (Maududi)Kya hai woh azeem hadisa
Roman Urdu (Junagarhi)Kiaya hy who kharkhara deney wali
Devnagri Urdu (Maududi)क्या है वो अज़ीम हदीसा
عَرَبِيوَما أَدراكَ مَا القارِعَةُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तुम क्या जानो कि वह खड़खड़ा देने वाली क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Tum kya jano ke woh azeem hadisa kya hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tujhay kiya maloom kay who kharkhara deney wali kia hy
Devnagri Urdu (Maududi)तुम क्या जानो के वो अज़ीम हदीसा क्या है
عَرَبِييَومَ يَكونُ النّاسُ كَالفَراشِ المَبثوثِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिस दिन लोग बिखरे हुए पतिंगों की तरह हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)woh din jab log bhikre huey parwano ki tarah
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss din insan bikhray huye perwanon ki tarah hojaeyen gy
Devnagri Urdu (Maududi)वो दिन जब लोग बिखरे हुए परवानों की तरह
عَرَبِيوَتَكونُ الجِبالُ كَالعِهنِ المَنفوشِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और पर्वत धुने हुए रंगीन ऊन की तरह हो जाएँगे।
Roman Urdu (Maududi)Aur pahad rang bi rangi dhunki hui oon ke tarah hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur pahar dhunay huye rangeen oon ki tarah hojaein gay
Devnagri Urdu (Maududi)और पहाड़ रंग बी रंगी धुनकी हुई ऊन के तरह होंगे
عَرَبِيفَأَمّا مَن ثَقُلَت مَوازينُهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो जिसके पलड़े भारी हो गए,
Roman Urdu (Maududi)Phir jiske palade bhari hongey
Roman Urdu (Junagarhi)phir jiss kay palry bhari hongy
Devnagri Urdu (Maududi)फिर जिसके पलड़े भारी होंगे
عَرَبِيفَهُوَ في عيشَةٍ راضِيَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो वह संतोषजनक जीवन में होगा।
Roman Urdu (Maududi)Woh dil pasand aish mei hoga
Roman Urdu (Junagarhi)Who to dilpasand aram ki zindagi mein hoga
Devnagri Urdu (Maududi)वो दिल पसंद ऐश में होगा
عَرَبِيوَأَمّا مَن خَفَّت مَوازينُهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा जिसके पलड़े हल्के हो गए,
Roman Urdu (Maududi)Aur jis kay palade halke hongey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur jiss kay palry halky hongy
Devnagri Urdu (Maududi)और जिस के पलड़े हल्के होंगे
عَرَبِيفَأُمُّهُ هاوِيَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसका ठिकाना 'हाविया' (गड्ढा) है।
Roman Urdu (Maududi)Uski jaye qarar gehri khayi hogi
Roman Urdu (Junagarhi)uss ka thikana Laaviya hai
Devnagri Urdu (Maududi)उसकी जाए करार गहरी खाई होगी
عَرَبِيوَما أَدراكَ ما هِيَه
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तुम क्या जानो कि वह ('हाविया') क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Aur tumhein kya khabar kay woh kya cheez hai
Roman Urdu (Junagarhi)Tujhy kia maloom kay yeh kiya hai
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम्हें क्या खबर काय वो क्या चीज है
عَرَبِينارٌ حامِيَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह एक बहुत गर्म आग है।
Roman Urdu (Maududi)Bhadakti hui Aag
Roman Urdu (Junagarhi)woh Tand-o-tez aag (hai)
Devnagri Urdu (Maududi)भड़कती हुई आग
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Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity)

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Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity)

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Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity)

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Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity)

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Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity)

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Surah 102: At-Takathur (The Abundance of Wealth)

Meccan🕐 Revelation #16📜 8 Verses🕮 Juz 1
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Surah 102: At-Takathur (The Abundance of Wealth)

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Surah 102: At-Takathur (The Abundance of Wealth)

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Surah 102: At-Takathur (The Abundance of Wealth)

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Surah 102: At-Takathur (The Abundance of Wealth)

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Surah 102: At-Takathur (The Abundance of Wealth)

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Surah 102: At-Takathur (The Abundance of Wealth)

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Surah 102: At-Takathur (The Abundance of Wealth)

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Surah 102: At-Takathur (The Abundance of Wealth)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيأَلهاكُمُ التَّكاثُرُ
हिन्दी (Al-Omari)तुम्हें (धन, संतान की) बहुतायत पर गर्व ने ग़ाफ़िल कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Tum logon ko zyada se zyada aur ek dusre se badh kar duniya hasil karne ki dhun ne gaflat mei daal rakha hai
Roman Urdu (Junagarhi)Zeyadti ki chahat nay tumhein ghafil kerdia
Devnagri Urdu (Maududi)तुम लोगों को ज्यादा से ज्यादा और एक दूसरे से बढ़कर दुनिया हासिल करने की धुन ने गफलत में डाल रखा है
عَرَبِيحَتّىٰ زُرتُمُ المَقابِرَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)यहाँ तक कि तुम क़ब्रिस्तान जा पहुँचे।
Roman Urdu (Maududi)Yahan tak ke (isi fikr mei) tum lab-e-gaur tak pahunch jatey ho
Roman Urdu (Junagarhi)Yahan tak kay tum qabastan ja phunchy
Devnagri Urdu (Maududi)यहां तक ​​के (आईएसआई) फ़िक्र में) तुम लब-ए-गौर तक पहुँच जाते हो
عَرَبِيكَلّا سَوفَ تَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कदापि नहीं, तुम शीघ्र ही जान लोगे।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin, ankareeb tumko maloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Hergiz nahi tum unqareeb maloom kerlogay
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज़ नहीं, अनकरीब तुमको मालूम हो जाएगा
عَرَبِيثُمَّ كَلّا سَوفَ تَعلَمونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर कदापि नहीं, तुम शीघ्र ही जान लोगे।
Roman Urdu (Maududi)phir (sunlo kay) hargiz nahin, ankarib tumko maloom ho jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Hergiz nahi phir tumhein jald ilm hojaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर (सुनलो के) हरगिज नहीं, अनकरीब तुमको मालूम हो जाए
عَرَبِيكَلّا لَو تَعلَمونَ عِلمَ اليَقينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कदापि नहीं, यदि तुम निश्चित ज्ञान के साथ जान लेते (तो ऐसा न करते)।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin agar tum yaqeeni ilm ki haisiyat se (is rawish ke anjam ko) jantey hotey (to tumhara yeh tarze amal na hota)
Roman Urdu (Junagarhi)Hergiz nahi ager tum yaqeeni tor per jan lo
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं अगर तुम यकीनी इल्म की हकीकत से (रविश है) के अंजाम को) जानते होते (तो तुम्हारा ये तर्जे अमल ना होता)
عَرَبِيلَتَرَوُنَّ الجَحيمَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निश्चय तुम अवश्य जहन्नम को देखोगे।
Roman Urdu (Maududi)Tum dozakh dekh kar rahogey
Roman Urdu (Junagarhi)To be-shak tum jahanum dekhlogay
Devnagri Urdu (Maududi)तुम दोज़ख देख कर रहोगे
عَرَبِيثُمَّ لَتَرَوُنَّها عَينَ اليَقينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर निश्चय तुम उसे अवश्य विश्वास की आँख से देखोगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir (sun lo ke) tum bilkul yaqeen kay saath usey dekh logey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tum ussy yaqeen ki aankh say dekhlogy
Devnagri Urdu (Maududi)फिर (सुन लो के) तुम बिल्कुल यकीन के साथ उसे देख लोगे
عَرَبِيثُمَّ لَتُسأَلُنَّ يَومَئِذٍ عَنِ النَّعيمِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)फिर निश्चय तुम उस दिन नेमतों के बारे में अवश्य पूछे जाओगे।
Roman Urdu (Maududi)Phir zaroor us roz tum se in neyamaton kay barey mein jawab talabi ki jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Phir uss din tum say zarror bil-zaroor nematon ka sawal hoga
Devnagri Urdu (Maududi)फिर ज़रूर उस रोज़ तुम से इन नेअमतों के बारे में जवाब तलबी की जाएगी
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Surah 102: At-Takathur (The Abundance of Wealth)

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Surah 102: At-Takathur (The Abundance of Wealth)

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Surah 102: At-Takathur (The Abundance of Wealth)

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Surah 102: At-Takathur (The Abundance of Wealth)

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Surah 102: At-Takathur (The Abundance of Wealth)

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Surah 103: Al-'Asr (The Time)

Meccan🕐 Revelation #13📜 3 Verses🕮 Juz 1
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Surah 103: Al-'Asr (The Time)

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Surah 103: Al-'Asr (The Time)

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Surah 103: Al-'Asr (The Time)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَالعَصرِ
हिन्दी (Al-Omari)अस्र के समय की क़सम!
Roman Urdu (Maududi)Zamane ki qasam
Roman Urdu (Junagarhi)Zamaney ki qasam
Devnagri Urdu (Maududi)ज़माने की क़सम
عَرَبِيإِنَّ الإِنسانَ لَفي خُسرٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह इनसान घाटे में है।
Roman Urdu (Maududi)Insan dar haqeeqat badey khasarey(nuksaan) mein hai
Roman Urdu (Junagarhi)Beyshak (bil-yaqeen)insane sir ta sir nuqsan mein hay
Devnagri Urdu (Maududi)इंसान दर हक़ीक़त बड़े ख़सारे (नुक्सान) में है
عَرَبِيإِلَّا الَّذينَ آمَنوا وَعَمِلُوا الصّالِحاتِ وَتَواصَوا بِالحَقِّ وَتَواصَوا بِالصَّبرِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए और एक-दूसरे को सत्य की ताकीद की और एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की।
Roman Urdu (Maududi)Siwaye un logon ke jo iman laye aur neik aamal karte rahe aur ek dusrey ko haqq ki nasihat aur sabr ki talqeen karte rahe
Roman Urdu (Junagarhi)Siwaey un logon kay jo eman laey aur nek amal kiey aur(jinhon nay)apas mein haq ki waseeyat ki aur aik doosry ko sabar ki naseehat ki
Devnagri Urdu (Maududi)सिवाए उन लोगों के जो ईमान लाए और नेक अमल करते रहें और एक दूसरे को हक की हिदायत और sabr की तालक़ीन करते रहे
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Surah 103: Al-'Asr (The Time)

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Surah 103: Al-'Asr (The Time)

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Surah 103: Al-'Asr (The Time)

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Surah 103: Al-'Asr (The Time)

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Surah 103: Al-'Asr (The Time)

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Surah 104: Al-Humazah (The Slanderer)

Meccan🕐 Revelation #32📜 9 Verses🕮 Juz 1
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Surah 104: Al-Humazah (The Slanderer)

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Surah 104: Al-Humazah (The Slanderer)

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Surah 104: Al-Humazah (The Slanderer)

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Surah 104: Al-Humazah (The Slanderer)

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Surah 104: Al-Humazah (The Slanderer)

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Surah 104: Al-Humazah (The Slanderer)

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Surah 104: Al-Humazah (The Slanderer)

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Surah 104: Al-Humazah (The Slanderer)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيوَيلٌ لِكُلِّ هُمَزَةٍ لُمَزَةٍ
हिन्दी (Al-Omari)विनाश है प्रत्येक बहुत ग़ीबत करने वाले और बहुत दोष लगाने वाले के लिए।
Roman Urdu (Maududi)Tabahi hai har us shaks ke liye jo (moonh dar moonh) logon par taan aur (peeth peechey) buraiyan karne ka khugar hai
Roman Urdu (Junagarhi)Bari kharabi hai her aisy shaks ki jo aib tatolney wala geebat kerney wala ho
Devnagri Urdu (Maududi)तबाही है हर उस शक्स के लिए जो (चाँद दर चाँद) लोगों पर तान और (पीठ पीछे) बुराइयां करने का खुगर है
عَرَبِيالَّذي جَمَعَ مالًا وَعَدَّدَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिसने धन एकत्र किया और उसे गिन-गिन कर रखा।
Roman Urdu (Maududi)Jisne maal jama kiya aur usey gin gin kar rakkha
Roman Urdu (Junagarhi)Jo maal ko jama kerta jaey or ginta jaey
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने माल जमा किया और उसे गिन गिन कर रक्खा
عَرَبِييَحسَبُ أَنَّ مالَهُ أَخلَدَهُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह समझता है कि उसके धन ने उसे हमेशा रहने वाला बना दिया?
Roman Urdu (Maududi)Woh samajhta hai ke us ka maal hamesha uske paas rahega
Roman Urdu (Junagarhi)Woh samjhta hy kay uska maal usky pass sada rahay ga
Devnagri Urdu (Maududi)वो समझता है कि हमें का माल हमेशा उसके पास रहेगा
عَرَبِيكَلّا ۖ لَيُنبَذَنَّ فِي الحُطَمَةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)कदापि नहीं, वह अवश्य 'ह़ुतमा' में फेंका जाएगा।
Roman Urdu (Maududi)Hargiz nahin, woh shaks to chakna-chur kar dene wali jagah mein phenk diya jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Hergiz nahi yeh to zaroor tor phor denay wali aag mein phenk diya jaeyga
Devnagri Urdu (Maududi)हरगिज नहीं, वो शक्स तो चकना-चूर कर देने वाली जगह में फेंक दिया जाएगा
عَرَبِيوَما أَدراكَ مَا الحُطَمَةُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और तुम क्या जानो कि वह 'हुतमा' क्या है?
Roman Urdu (Maududi)Aur tum kya jano ke kya hai woh chakna-chur kar dene wali jagah
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tujhey kia maloom kay asi aag kiya hogi
Devnagri Urdu (Maududi)और तुम क्या जानो के क्या हो वो चकना-चूर कर देने वाली जगह
عَرَبِينارُ اللَّهِ الموقَدَةُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वह अल्लाह की भड़काई हुई आग है।
Roman Urdu (Maududi)Allah ki aag khoob bhadkayi hui
Roman Urdu (Junagarhi)Woh Allah Taalaa ki sulgai hoi aag hogi
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह की आग खूब भड़काई हुई
عَرَبِيالَّتي تَطَّلِعُ عَلَى الأَفئِدَةِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो दिलों तक जा पहुँचेगी।
Roman Urdu (Maududi)Jo dilon tak pahunchey gi
Roman Urdu (Junagarhi)Jo dilon per charhti chali jaey gi
Devnagri Urdu (Maududi)जो दिलों तक पहुंचें गी
عَرَبِيإِنَّها عَلَيهِم مُؤصَدَةٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह वह उनपर बंद कर दी जाएगी।
Roman Urdu (Maududi)Woh un par dhaank kar bandh kar di jayegi
Roman Urdu (Junagarhi)Who unn per her taraf say band ki hui hogi
Devnagri Urdu (Maududi)वो उन पर ढांक कर बंद कर दी जाएगी
عَرَبِيفي عَمَدٍ مُمَدَّدَةٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)लंबे-लंबे स्तंभों में।
Roman Urdu (Maududi)(Is halat mei ke woh) unchey unchey sutuno mei (ghirey huey hongey)
Roman Urdu (Junagarhi)Bary bary satoonon mein
Devnagri Urdu (Maududi)(इस हालात में के वो) अनचे अनचे सुतुनो मेई (घिरे हुए होंगे)
@@ -504,8 +517,7 @@

Surah 104: Al-Humazah (The Slanderer)

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Surah 104: Al-Humazah (The Slanderer)

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Surah 104: Al-Humazah (The Slanderer)

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Surah 104: Al-Humazah (The Slanderer)

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Surah 104: Al-Humazah (The Slanderer)

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Surah 105: Al-Fil (The Elephant)

Meccan🕐 Revelation #19📜 5 Verses🕮 Juz 1
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@@ -261,6 +265,7 @@

Surah 105: Al-Fil (The Elephant)

+ @@ -280,6 +285,7 @@

Surah 105: Al-Fil (The Elephant)

+ @@ -299,6 +305,7 @@

Surah 105: Al-Fil (The Elephant)

+ @@ -318,6 +325,7 @@

Surah 105: Al-Fil (The Elephant)

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Surah 105: Al-Fil (The Elephant)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيأَلَم تَرَ كَيفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِأَصحابِ الفيلِ
हिन्दी (Al-Omari)क्या तुमने नहीं देखा कि तुम्हारे पालनहार ने हाथी वालों के साथ किस तरह किया?
Roman Urdu (Maududi)Tumne dekha nahin ke tumhare Rubb ne haathi walon ke saath kya kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Kia tu nay na dekha kay tery rab nay hathi walon kay sath kia kiya
Devnagri Urdu (Maududi)तुमने देखा नहीं के तुम्हारे रब ने हाथी वालों के साथ क्या किया
عَرَبِيأَلَم يَجعَل كَيدَهُم في تَضليلٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)क्या उसने उनकी चाल को विफल नहीं कर दिया?
Roman Urdu (Maududi)Kya usne unki tadbir ko akarat nahin kar diya
Roman Urdu (Junagarhi)Kia unkay maker ko beykar nai kerdia
Devnagri Urdu (Maududi)क्या उसने उनकी तदबीर को आकार नहीं दिया
عَرَبِيوَأَرسَلَ عَلَيهِم طَيرًا أَبابيلَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और उनपर झुंड के झुंड पक्षी भेजे।
Roman Urdu (Maududi)Aur un par parindo ke jhund ke jhund bhej diye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur unper parindon kay jhond kay jhond bhej diey
Devnagri Urdu (Maududi)और उन पर परिंदों के झुंड के झुंड भेज दिए
عَرَبِيتَرميهِم بِحِجارَةٍ مِن سِجّيلٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो उनपर पकी हुई मिट्टी (खंगर) की कंकड़ियाँ फेंक रहे थे।
Roman Urdu (Maududi)Jo un par pakey huey mitti ke patthar phenk rahey thay
Roman Urdu (Junagarhi)Jo unhein mitti or pather ki kankariyan mar rahy thy
Devnagri Urdu (Maududi)जो उन पर पके हुए मिट्टी के पत्थर फेंक रहे थे
عَرَبِيفَجَعَلَهُم كَعَصفٍ مَأكولٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो उसने उन्हें खाए हुए भूसे की तरह कर दिया।
Roman Urdu (Maududi)Phir un ka yeh haal kar diya jaise janwaron ka khaya hua bhoosa
Roman Urdu (Junagarhi)Pus unhein khaye huye bhoosy ki tarah kerdiya
Devnagri Urdu (Maududi)फिर उनका ये हाल कर दिया जैसे जानवरों का खाया हुआ भूसा
@@ -428,8 +437,7 @@

Surah 105: Al-Fil (The Elephant)

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Surah 105: Al-Fil (The Elephant)

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Surah 105: Al-Fil (The Elephant)

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Surah 105: Al-Fil (The Elephant)

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Surah 105: Al-Fil (The Elephant)

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Surah 106: Al-Quraish (The Quraish)

Meccan🕐 Revelation #29📜 4 Verses🕮 Juz 1
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Surah 106: Al-Quraish (The Quraish)

+ @@ -280,6 +285,7 @@

Surah 106: Al-Quraish (The Quraish)

+ @@ -299,6 +305,7 @@

Surah 106: Al-Quraish (The Quraish)

+ @@ -318,6 +325,7 @@

Surah 106: Al-Quraish (The Quraish)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيلِإيلافِ قُرَيشٍ
हिन्दी (Al-Omari)क़ुरैश को मानूस कर देने के कारण।
Roman Urdu (Maududi)Chunke Quresh manoos huey
Roman Urdu (Junagarhi)Quresh kay manoos kerney kay liye
Devnagri Urdu (Maududi)चंके कुरैश मानूस हुए
عَرَبِيإيلافِهِم رِحلَةَ الشِّتاءِ وَالصَّيفِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उन्हें जाड़े तथा गर्मी की यात्रा से मानूस कर देने के कारण।
Roman Urdu (Maududi)(yani) Jaadey(winter) aur garmi ke safaron se manoos
Roman Urdu (Junagarhi)(yanni) unhen jary aur garmi kay safar say manoos kerney kay liey.(uskay shukriey main)
Devnagri Urdu (Maududi)(यानी) जाड़े (सर्दियों) और गर्मी के सफ़रों से मानूस
عَرَبِيفَليَعبُدوا رَبَّ هٰذَا البَيتِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अतः उन्हें चाहिए कि इस घर (काबा) के मालिक की इबादत करें।
Roman Urdu (Maududi)Lihaza un ko chahiye ke is ghar ke Rubb ki ibadat karein
Roman Urdu (Junagarhi)Pus unhen chahey kay issi gher kay rab ki ibadat kerty rahen
Devnagri Urdu (Maududi)लिहाज़ा उन को चाहिए के इस घर के रब की इबादत करें
عَرَبِيالَّذي أَطعَمَهُم مِن جوعٍ وَآمَنَهُم مِن خَوفٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिसने उन्हें भूख में खिलाया तथा उन्हें भय से सुरक्षित किया।
Roman Urdu (Maududi)Jisne unhein bhook se bacha kar khane ko diya aur khauf se bacha kar aman ata kiya
Roman Urdu (Junagarhi)Jiss nay inhen bhook mein khana diya aur darr (aur khof) mein aman (o-aman) diya
Devnagri Urdu (Maududi)जिसने उन्हें भूख से बचा कर खाने को दिया और खौफ से बचा कर अमन अता किया
@@ -409,8 +417,7 @@

Surah 106: Al-Quraish (The Quraish)

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Surah 106: Al-Quraish (The Quraish)

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Surah 106: Al-Quraish (The Quraish)

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Surah 106: Al-Quraish (The Quraish)

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Surah 106: Al-Quraish (The Quraish)

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Surah 107: Al-Ma'un (Acts of Kindness)

Meccan🕐 Revelation #17📜 7 Verses🕮 Juz 1
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@@ -261,6 +265,7 @@

Surah 107: Al-Ma'un (Acts of Kindness)

+ @@ -280,6 +285,7 @@

Surah 107: Al-Ma'un (Acts of Kindness)

+ @@ -299,6 +305,7 @@

Surah 107: Al-Ma'un (Acts of Kindness)

+ @@ -318,6 +325,7 @@

Surah 107: Al-Ma'un (Acts of Kindness)

+ @@ -337,6 +345,7 @@

Surah 107: Al-Ma'un (Acts of Kindness)

+ @@ -356,6 +365,7 @@

Surah 107: Al-Ma'un (Acts of Kindness)

+ @@ -375,6 +385,7 @@

Surah 107: Al-Ma'un (Acts of Kindness)

+
Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيأَرَأَيتَ الَّذي يُكَذِّبُ بِالدّينِ
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) क्या आपने उसे देखा, जो बदले के दिन को झुठलाता है?
Roman Urdu (Maududi)Tum ne dekha us shaks ko jo aakhirat ki jaza va saza ko jhutlata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Kiya tu nay(ussay bhi)dekha jo (roz) jaza ko jhutlata hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम ने देखा उस शक्स को जो आख़िरत की जजा व सजा को झुटलता है
عَرَبِيفَذٰلِكَ الَّذي يَدُعُّ اليَتيمَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो यही है, जो अनाथ (यतीम) को धक्के देता है।
Roman Urdu (Maududi)Wahi to hai jo yateem ko dhakkey deta hai
Roman Urdu (Junagarhi)yehi who hai jo yateem ko dhakkay deta hai
Devnagri Urdu (Maududi)वही तो है जो यतीम को धक्के देता है
عَرَبِيوَلا يَحُضُّ عَلىٰ طَعامِ المِسكينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा ग़रीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता है।
Roman Urdu (Maududi)Aur miskeen ka khana dene par nahin uksata
Roman Urdu (Junagarhi)Aur miskeen ko khilaney ki targeeb nahi deta
Devnagri Urdu (Maududi)और मिस्कीन का खाना देने पर नहीं उक्सता
عَرَبِيفَوَيلٌ لِلمُصَلّينَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो विनाश है उन नमाज़ियों के लिए,
Roman Urdu (Maududi)Phir tabahi hai un namaz padhne walon ke liye
Roman Urdu (Junagarhi)Un namazion kay liey afsos(aur well nami jahanum ki jagah)hai
Devnagri Urdu (Maududi)फिर तबाही है उन नमाज पढ़ने वालों के लिए
عَرَبِيالَّذينَ هُم عَن صَلاتِهِم ساهونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो अपनी नमाज़ से लापरवाह हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo apni namaz se gaflat barat-tey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Jo apni namaz say ghafil hain
Devnagri Urdu (Maududi)जो अपनी नमाज से गफ़लत बारात-ते हैं
عَرَبِيالَّذينَ هُم يُراءونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वे जो दिखावा करते हैं।
Roman Urdu (Maududi)Jo riya-kaari(dikhawa) karte hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo riya kari kerty hein
Devnagri Urdu (Maududi)जो रिया-कारी (दिखावा) करते हैं
عَرَبِيوَيَمنَعونَ الماعونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा साधारण बरतने की चीज़ भी माँगने से नहीं देते।
Roman Urdu (Maududi)Aur maamuli zarurat ki cheezen (logon ko) dene se gurez karte hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur baratnay ki chez roktay hain
Devnagri Urdu (Maududi)और मामुली ज़रुरत की चीज़ (लोगों को) देने से गुरेज करते हैं
@@ -466,8 +477,7 @@

Surah 107: Al-Ma'un (Acts of Kindness)

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Surah 107: Al-Ma'un (Acts of Kindness)

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Surah 107: Al-Ma'un (Acts of Kindness)

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Surah 107: Al-Ma'un (Acts of Kindness)

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Surah 107: Al-Ma'un (Acts of Kindness)

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Surah 108: Al-Kauthar (The Abundance of Good)

Meccan🕐 Revelation #15📜 3 Verses🕮 Juz 1
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@@ -261,6 +265,7 @@

Surah 108: Al-Kauthar (The Abundance of Good)

+ @@ -280,6 +285,7 @@

Surah 108: Al-Kauthar (The Abundance of Good)

+ @@ -299,6 +305,7 @@

Surah 108: Al-Kauthar (The Abundance of Good)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيإِنّا أَعطَيناكَ الكَوثَرَ
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) हमने आपको कौसर प्रदान किया है।
Roman Urdu (Maududi)(Aey Nabi ) Hum ne tumhein kausar ata kar diya
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan hum nay tujhay (hoz)kusar (aur bhat kuch) diya hay
Devnagri Urdu (Maududi)(ऐ नबी) हमने तुम्हें कौसर अता कर दिया
عَرَبِيفَصَلِّ لِرَبِّكَ وَانحَر
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो आप अपने पालनहार ही के लिए नमाज़ पढ़ें तथा क़ुर्बानी करें।
Roman Urdu (Maududi)Pas tum apne Rubb hi ke liye namaz padho aur qurbani karo
Roman Urdu (Junagarhi)Pus tu apney rab kay liey namz parh aur qurbani karo
Devnagri Urdu (Maududi)पास तुम अपने रब ही के लिए नमाज पढ़ो और कुर्बानी करो
عَرَبِيإِنَّ شانِئَكَ هُوَ الأَبتَرُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)निःसंदेह आपका शत्रु ही बे नाम व निशान है।
Roman Urdu (Maududi)Tumhara dushman hi jadh-kata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Yaqeenan tera dushman hi la-waris aur benam-o-nishan hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारा दुश्मन हाय जध-काटा है
@@ -390,8 +397,7 @@

Surah 108: Al-Kauthar (The Abundance of Good)

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Surah 108: Al-Kauthar (The Abundance of Good)

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Surah 108: Al-Kauthar (The Abundance of Good)

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Surah 108: Al-Kauthar (The Abundance of Good)

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Surah 108: Al-Kauthar (The Abundance of Good)

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Surah 109: Al-Kafirun (The Disbelievers)

Meccan🕐 Revelation #18📜 6 Verses🕮 Juz 1
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Surah 109: Al-Kafirun (The Disbelievers)

+ @@ -280,6 +285,7 @@

Surah 109: Al-Kafirun (The Disbelievers)

+ @@ -299,6 +305,7 @@

Surah 109: Al-Kafirun (The Disbelievers)

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Surah 109: Al-Kafirun (The Disbelievers)

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Surah 109: Al-Kafirun (The Disbelievers)

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Surah 109: Al-Kafirun (The Disbelievers)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيقُل يا أَيُّهَا الكافِرونَ
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) आप कह दीजिए : ऐ काफ़िरो!
Roman Urdu (Maududi)Kehdo ke aey kafiron
Roman Urdu (Junagarhi)Aap khydijey kay aey kafiro
Devnagri Urdu (Maududi)केहदो के ऐ काफिरों
عَرَبِيلا أَعبُدُ ما تَعبُدونَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)मैं उसकी इबादत नहीं करता, जिसकी तुम इबादत करते हो।
Roman Urdu (Maududi)Main unki ibadat nahin karta jinki ibadat tum karte ho
Roman Urdu (Junagarhi)Na mein ibadat kerta hun usski jiss kit um ibadat kerty ho
Devnagri Urdu (Maududi)मैं उनकी इबादत नहीं करता जिनकी इबादत तुम करते हो
عَرَبِيوَلا أَنتُم عابِدونَ ما أَعبُدُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और न तुम उसकी इबादत करने वाले हो, जिसकी मैं इबादत करता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur na tum uski ibadat karne wale ho jiski ibadat mai karta hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Na tum ibadat kerney waly ho usski jisski mein ibadat kerta hon
Devnagri Urdu (Maududi)और ना तुम उसकी इबादत करने वाले हो जिसकी इबादत मैं करता हूं
عَرَبِيوَلا أَنا عابِدٌ ما عَبَدتُم
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और न मैं उसकी इबादत करने वाला हूँ, जिसकी इबादत तुमने की है।
Roman Urdu (Maududi)Aur na mai unki ibadat karne wala hoon jinki ibadat tum ne ki hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na mein ibadat karon ga uski jisski tum ibadat kerty ho
Devnagri Urdu (Maududi)और ना मैं उनकी इबादत करने वाला हूं जिनकी इबादत तुम ने की है
عَرَبِيوَلا أَنتُم عابِدونَ ما أَعبُدُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और न तुम उसकी इबादत करने वाले हो, जिसकी मैं इबादत करता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Aur na tum uski ibadat karne waley ho jiski ibadat main karta hoon
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na tum usski ibadat kerney waly hojisski mein ibadat ker raha hon
Devnagri Urdu (Maududi)और ना तुम उसकी इबादत करने वाले हो जिसकी इबादत मैं करता हूं
عَرَبِيلَكُم دينُكُم وَلِيَ دينِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म तथा मेरे लिए मेरा धर्म है।
Roman Urdu (Maududi)Tumhare liye tumhara deen hai aur mere liye mera deen
Roman Urdu (Junagarhi)Tumhary liey tumhara deen hai aur mery liey mera deen hai
Devnagri Urdu (Maududi)तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन है और मेरे लिए मेरा दीन
@@ -447,8 +457,7 @@

Surah 109: Al-Kafirun (The Disbelievers)

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Surah 109: Al-Kafirun (The Disbelievers)

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Surah 109: Al-Kafirun (The Disbelievers)

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Surah 109: Al-Kafirun (The Disbelievers)

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Surah 109: Al-Kafirun (The Disbelievers)

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Surah 110: An-Nasr (The Help)

Medinan🕐 Revelation #114📜 3 Verses🕮 Juz 1
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Surah 110: An-Nasr (The Help)

+ @@ -280,6 +285,7 @@

Surah 110: An-Nasr (The Help)

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Surah 110: An-Nasr (The Help)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيإِذا جاءَ نَصرُ اللَّهِ وَالفَتحُ
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) जब अल्लाह की सहायता एवं विजय आ जाए।
Roman Urdu (Maududi)Jab Allah ki madad aa jaye aur fatah naseeb ho jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Jab Allah ji madad aur fatah ajaye
Devnagri Urdu (Maududi)जब अल्लाह की मदद आ जाए और फतह नसीब हो जाए
عَرَبِيوَرَأَيتَ النّاسَ يَدخُلونَ في دينِ اللَّهِ أَفواجًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और आप लोगों को देखें कि वे अल्लाह के धर्म में दल के दल प्रवेश कर रहे हैं।
Roman Urdu (Maududi)Aur (aey Nabi s.a.s) tum dekh lo ke log fauj dar fauj Allah ke deen mein dakhil ho rahey hain
Roman Urdu (Junagarhi)Aur tu logon ko ALLAH kay deen mein jok dar jok aata dekh lay
Devnagri Urdu (Maududi)और (ऐ नबी सास) तुम देख लो के लोग फौज दार फौज अल्लाह के दीन में दखल हो रहे हैं
عَرَبِيفَسَبِّح بِحَمدِ رَبِّكَ وَاستَغفِرهُ ۚ إِنَّهُ كانَ تَوّابًا
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तो आप अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का वर्णन करें और उससे क्षमा माँगें, निःसंदेह वह बहुत तौबा क़बूल करने वाला है।
Roman Urdu (Maududi)To apne Rubb ki hamd ke saath uski tasbeeh karo Aur us se magfirat ki duaa maango. Beshak woh bada tauba qabool karne wala hai
Roman Urdu (Junagarhi)To apnay rabb ki tasbeeh karney lag hamd kay sath aur uss say maghfirat ki dua maang bey shak woh bara hi tauba qabool karney wala hai
Devnagri Urdu (Maududi)तो अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो और हमसे मगफिरत की दुआ मांगो। बेशाक़ वो बड़ा तौबा क़बूल करने वाला है
@@ -390,8 +397,7 @@

Surah 110: An-Nasr (The Help)

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Surah 110: An-Nasr (The Help)

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Surah 110: An-Nasr (The Help)

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Surah 110: An-Nasr (The Help)

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Surah 110: An-Nasr (The Help)

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Surah 111: Al-Lahab (The Flame)

Meccan🕐 Revelation #6📜 5 Verses🕮 Juz 1
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@@ -261,6 +265,7 @@

Surah 111: Al-Lahab (The Flame)

+ @@ -280,6 +285,7 @@

Surah 111: Al-Lahab (The Flame)

+ @@ -299,6 +305,7 @@

Surah 111: Al-Lahab (The Flame)

+ @@ -318,6 +325,7 @@

Surah 111: Al-Lahab (The Flame)

+ @@ -337,6 +345,7 @@

Surah 111: Al-Lahab (The Flame)

+
Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيتَبَّت يَدا أَبي لَهَبٍ وَتَبَّ
हिन्दी (Al-Omari)अबू लहब के दोनों हाथ नाश हो जाएँ! और वह (स्वयं) विनष्ट हो गया।
Roman Urdu (Maududi)Toot gaye Abu Lahab ke haath aur na-murad ho gaya woh
Roman Urdu (Junagarhi)Abu Lahab ky dono hath toot gaye aur who (khud) halk ho gaya
Devnagri Urdu (Maududi)टूट गए अबू लहब के हाथ और ना-मुराद हो गया वो
عَرَبِيما أَغنىٰ عَنهُ مالُهُ وَما كَسَبَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसका धन तथा जो कुछ उसने कमाया था, उसके काम नहीं आया।
Roman Urdu (Maududi)Uska maal aur jo kuch us ne kamaya woh uske kisi kaam na aaya
Roman Urdu (Junagarhi)Na to uska maal usky kaam aya aur na uski kamai
Devnagri Urdu (Maududi)उसका माल और जो कुछ उसने कमाया वो उसका कोई काम ना आया
عَرَبِيسَيَصلىٰ نارًا ذاتَ لَهَبٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जल्द ही वह लपट वाली आग में दाख़िल होगा।
Roman Urdu (Maududi)Zaroor woh shola zan Aag mei dala jayega
Roman Urdu (Junagarhi)Who unqareeb bharkney waali aag mein jaey ga
Devnagri Urdu (Maududi)ज़रूर वो शोला ज़ान आग में डाला जाएगा
عَرَبِيوَامرَأَتُهُ حَمّالَةَ الحَطَبِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा उसकी पत्नी (भी जहन्नम में जाएगी), जो ईंधन उठाने वाली है।
Roman Urdu (Maududi)Aur (us ke saath) us ki joru(wife) bhi lagai bujhai karne wali
Roman Urdu (Junagarhi)Aur uski biwi bhi(jaeygi)jo lakriyan dhonay waali hai
Devnagri Urdu (Maududi)और (हमारे साथ) उसकी जोरू (पत्नी) भी लगाई बुझाई करने वाली
عَرَبِيفي جيدِها حَبلٌ مِن مَسَدٍ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उसकी गर्दन में मज़बूत बटी हुई रस्सी होगी।
Roman Urdu (Maududi)Us ki gardan(neck) mein moonj ki rassi hogi
Roman Urdu (Junagarhi)usski gardan mein post khajoor ki bati hui rassi hogi
Devnagri Urdu (Maududi)उस की गरदन (गर्दन) में मूंज की रस्सी होगी
@@ -428,8 +437,7 @@

Surah 111: Al-Lahab (The Flame)

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Surah 111: Al-Lahab (The Flame)

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Surah 111: Al-Lahab (The Flame)

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Surah 111: Al-Lahab (The Flame)

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Surah 111: Al-Lahab (The Flame)

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Surah 112: Al-Ikhlas (The Unity)

Meccan🕐 Revelation #22📜 4 Verses🕮 Juz 1
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@@ -261,6 +265,7 @@

Surah 112: Al-Ikhlas (The Unity)

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Surah 112: Al-Ikhlas (The Unity)

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Surah 112: Al-Ikhlas (The Unity)

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Surah 112: Al-Ikhlas (The Unity)

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Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيقُل هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : वह अल्लाह एक है।
Roman Urdu (Maududi)Kaho woh Allah hai, Yakta
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kehydijiye kay Woh ALLAH TaALA aik(hi)hai
Devnagri Urdu (Maududi)कहो वो अल्लाह है, यक्ता
عَرَبِياللَّهُ الصَّمَدُ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)अल्लाह बेनियाज़ है।
Roman Urdu (Maududi)Allah sab se bay-niyaz hai aur sab us kay mohtaj hain
Roman Urdu (Junagarhi)Allah bey niaz hai
Devnagri Urdu (Maududi)अल्लाह सब से बे-नियाज़ है और सब हमें का मोहताज हैं
عَرَبِيلَم يَلِد وَلَم يولَد
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)न उसकी कोई संतान है और न वह किसी की संतान है।
Roman Urdu (Maududi)Na uski koi aulad hai aur na woh kisi ki aulad
Roman Urdu (Junagarhi)Na uss say koi paida hoa na who kisi say paida hoa
Devnagri Urdu (Maududi)ना उसकी कोई औलाद है और ना वो किसी की औलाद
عَرَبِيوَلَم يَكُن لَهُ كُفُوًا أَحَدٌ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)और न कोई उसका समकक्ष है।
Roman Urdu (Maududi)Aur koi uska humsar nahin hai
Roman Urdu (Junagarhi)Aur na koi uska humser hai
Devnagri Urdu (Maududi)और कोई उसका हमसर नहीं है
@@ -409,8 +417,7 @@

Surah 112: Al-Ikhlas (The Unity)

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Surah 112: Al-Ikhlas (The Unity)

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Surah 112: Al-Ikhlas (The Unity)

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Surah 112: Al-Ikhlas (The Unity)

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Surah 112: Al-Ikhlas (The Unity)

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Surah 113: Al-Falaq (The Dawn)

Meccan🕐 Revelation #20📜 5 Verses🕮 Juz 1
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Surah 113: Al-Falaq (The Dawn)

+ @@ -280,6 +285,7 @@

Surah 113: Al-Falaq (The Dawn)

+ @@ -299,6 +305,7 @@

Surah 113: Al-Falaq (The Dawn)

+ @@ -318,6 +325,7 @@

Surah 113: Al-Falaq (The Dawn)

+ @@ -337,6 +345,7 @@

Surah 113: Al-Falaq (The Dawn)

+
Ayah  —  Arabic (Uthmani)  /  Audio (Mishary Alafasy)  /  Transliteration (Tanzil.net & Unicode Project)  /  English (Pickthall, Yusuf Ali, Saheeh Int’l, Qarai & Hilali)  /  English Explanation (Abridged)  /  हिन्दी अनुवाद (Farooq Khan, Suhail & Al-Omari)  /  हिन्दी तफ्सीर (Al-Mokhtasar)  /  ગુજરાતી (Rabila Al-Umry)  /  Nepali (Ahl-al-Hadith)  /  Roman Urdu (Maududi & Junagarhi)
عَرَبِيقُل أَعوذُ بِرَبِّ الفَلَقِ
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं सुबह के पालनहार की शरण लेता हूँ।
Roman Urdu (Maududi)Kaho main panaah maangta hoon subah ke Rubb ki
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kehdijiye! Kay mein subha ky Rab ki panah mein aata hun
Devnagri Urdu (Maududi)कहो मैं पनाह मांगता हूं सुबह के रब की
عَرَبِيمِن شَرِّ ما خَلَقَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)उस चीज़ की बुराई से, जो उसने पैदा की।
Roman Urdu (Maududi)Har us cheez ke shar se jo usne paida ki hai
Roman Urdu (Junagarhi)Her uss cheez ky shar say jo uss nay paida ki hai
Devnagri Urdu (Maududi)हर उस चीज के शर से जो उसने पैदा किया है
عَرَبِيوَمِن شَرِّ غاسِقٍ إِذا وَقَبَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा अंधेरी रात की बुराई से, जब वह छा जाए।
Roman Urdu (Maududi)Aur raat ki tareeki ke sharr se jab ke woh chaa jaye
Roman Urdu (Junagarhi)Aur andheri raat ki tareki kay shar say jab uska andhera phel jaye
Devnagri Urdu (Maududi)और रात की तारीख के शरर से जब के वो चा जाए
عَرَبِيوَمِن شَرِّ النَّفّاثاتِ فِي العُقَدِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा गाँठों में फूँकने वालियों की बुराई से।
Roman Urdu (Maududi)Aur girhon mein phoonkne walon (ya waliyon) ke sharr se
Roman Urdu (Junagarhi)Aur girah(laga ker inn)mein phonknay walon kay sher say(bhi)
Devnagri Urdu (Maududi)और गिरहों में फूंकने वालों (या वालियों) के शरर से
عَرَبِيوَمِن شَرِّ حاسِدٍ إِذا حَسَدَ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)तथा ईर्ष्या करने वाले की बुराई से, जब वह ईर्ष्या करे।
Roman Urdu (Maududi)Aur hasid(envies) ke sharr se jab ke woh hasad(envy) karey
Roman Urdu (Junagarhi)Aur hasad kerney waly ki burai say bhi jab wo hasad karey
Devnagri Urdu (Maududi)और हसीद (ईर्ष्या) के शरर से जब के वो हसद (ईर्ष्या) करे
@@ -428,8 +437,7 @@

Surah 113: Al-Falaq (The Dawn)

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Surah 113: Al-Falaq (The Dawn)

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Surah 113: Al-Falaq (The Dawn)

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Surah 113: Al-Falaq (The Dawn)

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Surah 113: Al-Falaq (The Dawn)

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Surah 114: An-Nas (The Men)

Meccan🕐 Revelation #21📜 6 Verses🕮 Juz 1
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Surah 114: An-Nas (The Men)

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Surah 114: An-Nas (The Men)

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عَرَبِيقُل أَعوذُ بِرَبِّ النّاسِ
हिन्दी (Al-Omari)(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं शरण लेता हूँ लोगों के पालनहार की।
Roman Urdu (Maududi)Kaho, main panah maangta hoon insano ke Rubb
Roman Urdu (Junagarhi)Aap kehdijiey!kay mein logo kay parwardigar ki panah mein ata hun
Devnagri Urdu (Maududi)कहो, मैं पनाह मांगता हूं इंसानों के रब
عَرَبِيمَلِكِ النّاسِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)लोगों के बादशाह की।
Roman Urdu (Maududi)Insano ke badshah
Roman Urdu (Junagarhi)Logon ky malik ki(aur)
Devnagri Urdu (Maududi)इंसानों के बादशाह
عَرَبِيإِلٰهِ النّاسِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)लोगों के सत्य पूज्य की।
Roman Urdu (Maududi)Insano ke hakiki maabood ki
Roman Urdu (Junagarhi)Logon ky maabood ki(Panah mein)
Devnagri Urdu (Maududi)इंसानों के हकीकी माबूद की
عَرَبِيمِن شَرِّ الوَسواسِ الخَنّاسِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)वसवसा डालने वाले, पीछे हट जाने वाले की बुराई से।
Roman Urdu (Maududi)us waswasa dalne wale ke shar se jo baar baar palat kar aata hai
Roman Urdu (Junagarhi)Waswasa dalney waly pechy hut janey waly kay shar say
Devnagri Urdu (Maududi)हमें बर्बाद करने वाले शहर से जो बार-बार पलट कर आता है
عَرَبِيالَّذي يُوَسوِسُ في صُدورِ النّاسِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जो लोगों के दिलों में वसवसे डालता है।
Roman Urdu (Maududi)Jo logon ke dilon mei waswasey daalta hai
Roman Urdu (Junagarhi)Jo logon kay seenon mein waswasa daalta hai
Devnagri Urdu (Maududi)जो लोगों के दिलों में वसीयत डालता है
عَرَبِيمِنَ الجِنَّةِ وَالنّاسِ
Audio (Alafasy)
हिन्दी (Al-Omari)जिन्नों और इनसानों में से।
Roman Urdu (Maududi)khwah woh jinno mein se ho ya Insano mein se
Roman Urdu (Junagarhi)(Khua) woh jinn mein say ho ya insaan mein say
Devnagri Urdu (Maududi)ख्वाह वो जिन्नो में से हो या इंसानों में से
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Surah 114: An-Nas (The Men)

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Surah 114: An-Nas (The Men)

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Surah 114: An-Nas (The Men)

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Surah 114: An-Nas (The Men)

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Surah 114: An-Nas (The Men)

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(यानी क़ुरान) और जो किताबें तुमसे पहले नाज़िल की गई थीं उन सब पर ईमान लाते हैं और आख़िरत पर यक़ीन रखते हैं","ऐसे लोग अपने रब की तरफ से राह ए रास्ते पर हैं और वही फलाह पीते हैं wale हैं","जिन लोगों ने (बातों को तस्लीम करने से) इनकार करदिया, उनके लिए यक्सन है, ख्वा तुम उन्हें खबरदार करो या ना करो, बाहर हाल वो मन्ने वाले नहीं है","अल्लाह ने उनके दिलों और उनके कानों पर मोहर लगा दी है और उनकी आंखों पर परदा पढ़ गया है, वो सच साज़ा के मुस्तहिक हैं","बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो कहते हैं कि हम अल्लाह पर और आख़िरत के दिन पर ईमान लाए हैं, हलांके दर-हक़ीक़त वो मोमिन नहीं हैं","वो अल्लाह और ईमान लाने वालों के साथ धोखे-बाज़ी कर रहे हैं, मगर दरसल वो खुद अपने आप ही को धोखे में डाल रहे हैं और उन्हें इसका शूर नहीं है","उनके दिलों में एक बीमारी है जिसे अल्लाह ने और ज्यादा बुरा दिया, और जो झूठ वो बोलते हैं, उसकी मानसिकता में उनके लिए दर्दनाक सजा है","जब कभी उन्हें कहा गया के ज़मीन में फ़साद बरपा ना करो तो उन्हें ने यही कहा के हम तो इस्लाह करने वाले हैं","ख़बरदार! हकीकत में यही लोग मुफसिद (फसाद करने वाले) हैं मगर उन्हें शूर नहीं है","और जब उन्हें कहा गया जिस तरह दूसरे लोग ईमान लाए हैं उसकी तरह तुम भी ईमान लाओ तो उन्होन ने यही जवाब दिया \"क्या हम बेवकूफों की तरह ईमान लाए हैं?\" ख़बरदार! हकीकत में तो ये खुद बेवकूफ हैं, मगर ये जानते नहीं हैं","जब ये एहले ईमान से मिलते हैं, तो कहते हैं के हम ईमान लाए हैं और जब अलैदागी (अकेले/प्राइवी) में अपने शैतानों से मिलते हैं, तो कहते हैं के असल में तो हम तुम्हारे साथ हैं और इन लोगों से महज़ मज़ाक कर रहे हैं","अल्लाह उन्हें मज़ाक कर रहा है, वो इनकी रस्सी दराज़ किए जात है, और ये अपनी सरकशी में अंधों (अंधों) की तरह भटकते चले जाते हैं","ये वो लोग हैं जिन्हों ने हिदायत के बदले गुमराही ख़त्म ली है, मगर ये सौदा इनके लिए नफा-बख्श नहीं है और ये हरगिज सही रास्ते पर नहीं हैं","इनकी मिसाल ऐसी है जैसे एक शक्स ने आग रोशन की और जब उसने सारे माहौल को रोशन कर दिया तो अल्लाह ने इनका नूर ए बसारत (दृष्टिकोण) साल्ब करलिया और इन्हें इस हाल में छोड़ दिया के तारिकियों (अंधेरों) में इन्हें कुछ नज़र नहीं आता","ये बाहर हैं, गुंगे हैं, अंधे हैं, ये अब ना पलटेंगे","हां फिर इनकी मिसाल यूं समझो के आसमान से ज़ोर की बारिश हो रही है और इसके साथ अंधेरी घटा और कड़क चमक भी है, ये बिजली की कड़क सुन कर अपनी जानो के खौफ से कानो में उंगली थूंसे लेते हैं और अल्लाह इन मुनकिरीन ए हक को हर तरफ से घेरे में लिए हुए हैं","चमक से इनकी हालत ये हो रही है के गोया अनकारीब बिजली इनकी बसारत (दृष्टि) उचक ले जाएगी, जब ज़रा कुछ रोशनी यहीं महसूस होती है तो इसमें कुछ दूर चल लेते हैं और जब अंदर अंधेरा छा जाता है तो खड़े हो जाते हैं। अल्लाह चाहता है तो इनकी समाअत (सुनना) और बसारत बिल्कुल ही सलब करलेता, यकीनन वो हर चीज पर कादिर है","लोगन! बंदगी इख्तियार करो अपने हमसे रूब की जो तुम्हारा और तुमसे पहले जो लोग हो गुजरे हैं उन सबका खालिक है, तुम्हारे बच्चों की तवक्कू इसी सूरत से हो सकती है","वही तो है जिसने तुम्हारे लिए जमीन का फर्श बिछाया, आसमान की छठ बनाई, ऊपर से पानी बरसाया और उसके ज़रीये से हर तरह की पेडवार निकल कर तुम्हारे लिए रिज़क बाहम पहुंचाया, पास जब तुम ये जानते हो तो दूसरे को अल्लाह का मद्द ए मुक़ाबिल न ठहरो","और अगर तुम्हारे पास अमृत है के ये किताब जो हमने अपने बंदे पर उतारी है, ये हमारी है या नहीं, तो इसके मानिंद (समान) एक ही सूरत बना लाओ, अपने सारे हमनवा को बुला लो (आपकी सहायता के लिए सहयोगी), एक अल्लाह को छोड़ कर बाकी जिसकी चाहो मदद लेलो अगर तुम सच्चे हो तो ये काम करके दिखाओ","लेकिन अगर तुमने ऐसा ना किया और यक़ीनन कभी नहीं कर सकते, तो डरो हमें आग से जिसका इंधन (ईंधन) बनाएंगे इंसान और पत्थर, जो मुहैय्या की गई है मुनकिरीन ए हक़ के लिए","और (ऐ पैगम्बर), जो लोग इस किताब पर ईमान ले आए और (इस्के मुताबिक) अपने अमल दुरुस्त कर लें, अनहेन ख़ुशख़बरी देदो के उनके लिए ऐसे बाघ हैं, जिनके बारे में खास बातें होंगी। उन बाघों के फाल सूरत में दुनिया के फालों से मिलते होंगे, जब कोई फल उन्हें खाने को दिया जाएगा, तो वो कहेंगे के ऐसे ही फाल इस्से पहले दुनिया में हमको दिए जाते हैं। उनके लिए वहां पाकीज़ा बीवियां होंगी, और वो वहां हमेशा रहेंगे","हां, अल्लाह इसे हरगिज़ नहीं शरमाता के मच्छर या इसे भी हकीर-तार (महत्वहीन) किसी चीज़ की तमसीलें (उदाहरण) दे। जो लोग हक़ बात को क़बूल करने वाले हैं, वो इन्हीं तमसीलों को देख कर जान लेते हैं के ये हक़ है जो उनके रब ही की तरफ से आया है, और जो मन्ने वाले नहीं हैं, वो इन्हें सुनकर कहने लगते हैं कि ऐसी तमसीलों से अल्लाह को क्या सरोकार? इस तरह अल्लाह एक ही बात से बहुतों को गुमराह करने में मदद करता है और बहुतों को राह और रास्ता दिखाता है। और गुमराही में वो उनको मुब्तिला करता है जो फ़ासीक़ है","अल्लाह के अहद को मज़बूत बांध लेने के बाद तोड़ देते हैं, अल्लाह ने जिसे जोड़ने का हुकुम दिया है उसे काट-ते हैं, और ज़मीन में फ़साद बरपा करते हैं। हकीकत में यही लोग नुक्सान उठाने वाले हैं","तुम अल्लाह के साथ कुफ्र का रवैय्या कैसे इख्तियार करते हो हालांके तुम बे-जान थे, उसने तुमको जिंदगी अता की, फिर वही तुम्हारी जान सब करेगा, फिर वही तुम्हें दोबारा जिंदगी अता करेगा, फिर उसी की तरफ तुम्हें पलट कर जाना है","वही तो है, जिसने तुम्हारे लिए जमीन की सारी चीजें पैदा कीं, फिर ऊपर की तरफ तवाज्जु फरमाई और सात आसमान उस्तवार किए और वह हर चीज का इल्म रखने वाला है","फिर जरा हमें वक़्त का तसव्वुर करो जब तुम्हारे रब ने फरिश्तों से कहा था के \"मैं जमीन में एक खलीफा बनने वाला हूं\" उनहोन ने अर्ज़ किया: \"क्या आप जमीन में किसी ऐसे को मुकर्रर करने वाले हैं, जो इसके इंतेजाम को बिगाड़ देगा और खून-रेजियां करेगा? आप की हम्द ओ सना के साथ तस्बीह और आप के लिए तकदीस तो हम कर ही रहे हैं।” फरमाया: \"मैं जानता हूं जो कुछ तुम नहीं जानते।\"","इसके बाद अल्लाह ने आदम को सारी चीज़ों के नाम सिखाए, फिर उन्हें फरिश्तों के सामने पेश किया और फरमाया \"अगर तुम्हारा ख्याल सही है (के किसी खलीफा के तकरार से इंतेज़ाम बिगड़ जाएगा) तो ज़रा इन चीज़ों के नाम बताओ।\"","अनहोन ने अर्ज़ किया: \"नुक़्स (दोष) से ​​पाक तो आप ही की ज़ात है, हम तो बस इतना ही इल्म रखते हैं, जितना आपने हमको दे दिया है, हकीकत में सब कुछ जाने और समझने वाला आप के सिवा कोई नहीं\"","फिर अल्लाह ने आदम से कहा: \"तुम इन्हें इन चीज़ों के नाम बताओ\" जब उसने उनको उन सबके नाम बता दिए, तो अल्लाह ने फरमाया: \"मैंने तुम से कहा ना था के मैं आसमान और ज़मीन की वो सारी हकीकत जानता हूं जो तुमसे मख़फ़ी (चुपी) हैं, जो कुछ तुम ज़ाहिर करते हो, वो भी मुझे मालूम है और जो कुछ तुम छुपते हो, उसे भी मैं जानता हूं।”","फिर जब हमने फरिश्तों को हुकुम दिया के आदम के आगे झुक जाओ, तो सब झुक गए, मगर इब्लीस ने इंकार किया, वो अपनी बदाई के घमंड में पढ़ गया और नफरमानों में शामिल हो गया","फिर हमने आदम से कहा के \"तुम और तुम्हारी बीवी, दोनों जन्नत मैं रहो और यहां ब-फरागत जो चाहो खाओ, मगर इस डरख्त का रुख न करना, वरना ज़ालिमों में शामिल होंगे”","आख़िर ए कार शैतान ने दोनों को इस दरख्त की तरजीब देकर हमारे हुकुम की जोड़ी से हटा दिया और उनमें हमें हालत से निकालवा कर छोड़ा जिसमें वो थे। हमने हुकुम दिया के, अब तुम सब यहां से उतर जाओ, तुम एक दूसरे के दुश्मन हो और तुम्हें एक खास वक्त तक जमीन (में) ठहरना और वहीं गुजर बसर करना है”","उस वक्त आदम ने अपने रब से चंद कलीमात सीख कर तौबा की, जिसको उसके रब ने कबूल करलिया, क्योंकि वो बड़ा माफ करने वाला और रहम फरमाने वाला है","हमने कहा के, \"तुम सब यहां से उतर जाओ फिर जो मेरी तरफ से कोई हिदायत तुम्हारे पास पहुंचें, तो जो लोग मेरी हिदायत की जोड़ी बनाएंगे, उनके लिए कोई खौफ और रांझ का मौका ना होगा","और जो इसको कबूल करने से इंकार करेंगे और हमारी आयत को झुठलाएंगे, वो आग में जाने वाले लोग हैं, जहां वो हमेशा रहेंगे।”","ऐ बानी-इज़राइल! जरा ख्याल करो मेरी उस नियामत का जो मैंने तुमको अता की थी, मेरे साथ तुम्हारा जो अहद (संविदा) था उसे तुम पूरा करो, तो मेरा जो अहद तुम्हारे साथ था उसे मैं पूरा करूंगा और मुझ ही से तुम डरो","और मैंने जो किताब भेजी है उसपर ईमान लाओ, ये उस किताब की ताईद (पुष्टि) में है जो तुम्हारे पास पहले से मौजूद थी, लिहाजा सबसे पहले तुम ही इसके मुनीर ना बन जाओ थोड़ी कीमत पर मेरी आयत को ना बेच डालो और मेरे गजब से बचाओ","बातिल का रंग चढ़ा कर हक को मुश्तबा (भ्रमित) ना बनाओ और ना जानते बूझते हक़ को छुपाने की कोशिश करो","नमाज़ क़ायम करो, ज़कात दो और जो लोग मेरे आगे झुक रहे हैं उनके साथ तुम भी झुक जाओ","तुम दूसरे को तो नेकी का रास्ता इख्तियार करने के लिए कहते हो हो, मगर अपने आप को भूल जाता हो? हलाँके तुम किताब की तिलावत करते हो, क्या तुम अक़ल से बिल्कुल ही काम नहीं लेते","साबर और नमाज से मदद लो, बेशक नमाज एक मुश्किल मुश्किल काम है","मगर उन फरमा-बरदार बंदों के लिए मुश्किल नहीं है जो समझते हैं कि आखिर ए कार उन्हें अपने रब से मिलना और उसकी तरफ पलट कर जाना है","ऐ बानी इजराइल! याद करो मेरी उस नियामत को, जिसमें मैंने तुम्हें नवाजा था और इस बात को कहा था कि मैंने तुम्हें दुनिया की सारी कौमों पर फजीलत अता की थी","और डरो उस दिन से जब कोई किसी के जरा काम न आएगा, न किसी की तरफ से सिफरिश कबूल होगी, न किसी को फिदिया लेकर चोदा जाएगा, और ना मुजर्रिमों को कहीं से मदद मिल सकेगी","याद करो वो वक्त, जब हमने तुमको फिरौनियों की गुलामी से निजात बख्शी, उन्हें ने तुम्हें मजबूत अजाब में मुब्तिला कर रखा था, तुम्हारे लड़कों को जिबाह करते थे और तुम्हारी लड़कियों को जिंदा रहने देते थे और इस हालात में तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारी बड़ी आजमाइश थी","याद करो वो वक्त, जब हमने समंदर पार कर तुम्हारे लिए रास्ता बनाया, फिर इस्में से तुम्हें ब-खैरियत गुजारवा दिया, फिर वहीं तुम्हारी आंखों के सामने फिरौनियों को बर्बाद कर दिया","याद करो, जब हमने मूसा को चालीस शबाना रोज़ की क़रारदाद पर बुलाया, तो उसके पीछे तुम बचदे (बछड़े) को अपना मबूद बना बैठे हमें वक़्त तुमने बड़ी ज़्यादा की थी","मगर इसपर भी हमने तुम्हें माफ़ कर दिया के शायद अब तुम शुकर-गुज़ार बनो","याद करो के (हमें ठीक करो) वक़्त जब तुम ये ज़ुल्म कर रहे थे) हमने मूसा को किताब और फुरकान अता की ता-के तुम उसके ज़रिये से सीधा रास्ता पा सको","याद करो जब मूसा (ये नियामत लेते हुए पलटा, हमसे) ने अपनी क़ौम से कहा के ''लोगन, तुमने बचदे को'' माबूद बना कर अपना ऊपर सख्त ज़ुल्म किया है, लिहाज़ा तुम लोग अपने खालिक के हुजूर तौबा करो और अपनी जानो को हलाक करो, इसी में तुम्हारे खालिक के नजरिए तुम्हारी बेहतरी है” हमारा वक्त तुम्हारे खालिक ने तुम्हारी तौबा कबूल कर ली के वो बड़ा माफ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","याद करो जब तुमने मूसा से कहा था कि हम तुम्हारे कहने का हरगिज़ यकीन ना करेंगे, जब तक के अपनी आंखों से एलानिया खुदा को (तुमसे कलाम करते) ना देखो, हम वक्त तुम्हारे देखते हैं एक ज़बरदस्त सायेके ने (वज्रपात) तुमको आ लिया","तुम बे-जान होकर गिर चुके थे, मगर फिर हमने तुमको जिला उठाया, शायद के इस एहसान के बाद तुम शुक्र-गुजार बन जाओ","हमने तुमपर अबर का साया (बादल छा जाना) किया, मन ओ सलवा की गीज़ा तुम्हारे लिए फराह की और तुमसे कहा के जो पाक चीजें हमने तुम्हें बख्शी हैं, उन्हें खाओ, मगर तुम्हारे असलाफ (पूर्वजों) ने जो कुछ किया, वो हमपर जुल्म ना था, बलके उन्होन ने आपने अपना ही ऊपर जुल्म किया","फिर याद करो जब हमने कहा था के, \"ये बस्ती जो तुम्हारे सामने है, इसमें दखल हो जाओ, इसकी अदायगी जिस तरह चाहो मजे से खाओ, मगर बस्ती के दरवाज़े में सजदा-रेज़ होते हुए दाख़िल होना और कहते जाना हित्ता-तुन हित्ता-तुन (हमें हमारे बोझ/मगफिरत से छुटकारा दिलाओ), हम तुम्हारी खतों से दरगुज़र करेंगे और नीकुकरोन को मज़ीद फ़ज़ल ओ करम से नवाज़ेंगे”","मगर जो बात कहीं गई थी, ज़ालिमों ने उसे बदल कर कुछ और करदिया, आख़िर ए कार हमने ज़ुल्म करने वालों पर आसमान से अज़ाब नाज़िल किया, ये सज़ा थी उन ना-फ़रमानियों की जो वो कर रहे थे","याद करो, जब मूसा ने अपनी क़ौम के लिए पानी की दुआ की तो हमने कहा कि फलां चट्टान पर अपना आसा मारो चुनान्चे उसे बारह (बारह) चश्मे (स्प्रिंग्स) फूट निकले और हर काबिले ने जान लिया के कौन सी जगह उसके पानी लेने की है। हमें वक्त ये हिदायत कर दी गई थी कि अल्लाह का दिया हुआ रिज़क खाओ, पियो और जमीन में फसाद न फैलते फिरो","याद करो, जब तुमने कहा था के, \"ऐ मूसा, हम एक ही तरह के खाने पर सब्र नहीं कर सकते, अपने रब से दुआ करो के हमारे लिए जमीन की पैदावार साग, तरकारी, खीरा, ककड़ी, गेहूं, लसन, प्याज, दाल वगैरा पैदा करे\" तो मूसा ने कहा “ “क्या एक बेहतर चीज़ के बजाये तुम अदना डरजे की चीज़ लेना चाहते हो? अच्छा, किसी शहरी आबादी में जा रहो, जो कुछ तुम माँगते हो वहाँ मिल जायेगा। करने लगे और पैगम्बरों को ना-हक़ क़त्ल करने लगे, ये नतीज़ा था उनकी नफ़रमानियों का और इस बात का के वो हुदूद ए शरा से निकल जाता है","यकीन जानो के नबी ए अरबी को मन्ने वाले होन या यहूदी, इसाई होन या सबी, जो भी अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान लाएगा और नीक अमल करेगा, उसका अजर उसके रुब के पास है और उसके लिए कोई खौफ और रांझ का मौका नहीं है","याद करो वो वक्त, जब हमने तूर (तूर पहाड़) को तुम से उठाकर अहद लिया था और कहा था के \"जो किताब हम तुम्हें दे रहे हैं उसे मज़बूती के साथ थम्ना और जो एहकाम ओ हिदायत इसमें दर्ज हैं उन्हें याद रखना, इसी जरूरी से तवक्कु की जा सकती है के तुम तकवा की रवीश पर चल सकोगे\"","मगर इसके बाद तुम अपने अहद से फिर गए इसपर भी अल्लाह के फजल और उसकी रहमत ने तुम्हारा साथ न छोड़ा, वरना तुम कभी के तबाह हो चुके होतय","फिर तुम्हें अपनी कौम के उन लोगों का क़िस्सा तो मालूम ही है जिन्होन ने सब्त (सब्बाथ) का कानून तोड़ा था, हमने उन्हें केहदिया के बंदर बन जाओ और इस हाल में रहो के हर तरफ से तुमपर धुतकर फिटकर पड़े","इस तरह हमने उनके अंजाम को हमें जमाने के लोगों और बाद में आने वाली नसलों के लिए इब्रत और डरने वालों के लिए हिदायत बना कर छोड़ा","फिर वो वाकिया याद करो, जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा के, अल्लाह तुम्हें एक गाय (गाय) ज़िबा करने का हुक्म देता है। कहने लगे क्या तुम हमसे मज़ाक करते हो? मूसा ने कहा, मैं इस खुदा की पनाह मांगता हूं कि जाहिलों की सी बातें करूं","बोले, अच्छा अपने रब से अंधेरा करो के वो हमें इस गाई की कुछ तफसील बताई, मूसा ने कहा, अल्लाह का इरशाद है के वो ऐसी गाई होनी चाहिए जो ना बूढ़ी हो ना बचिया, बलके औसत उमर की हो, लिहाजा जो हुक्म दिया जाता है उसकी तमील करो","फिर कहने लगे अपने रब से ये और पूछ दो के उसका रंग कैसा हो, मूसा ने कहा वो फरमाता है जर्द (पीला) रंग की गाई होनी चाहिए, जिसका रंग ऐसा शुख (उज्ज्वल) हो के देखने वालों का जी खुश हो जाए","फिर बोले अपने रब से साफ साफ पूछ कर बताओ कैसी गई मतलूब है, हमें इसकी तायुं में इश्तबा (भ्रम) हो गया है, अल्लाह ने चाहा तो हम इसका पता पा लेंगे","मूसा ने जवाब दिया: अल्लाह कहता है के वो ऐसी गई है जिसकी खिदमत नहीं ली जाती, ना ज़मीन जोत-ती है ना पानी खींचती है, सही सलीम और बे-दाग है, इसपर वो पुकार उठे के हां, अब तुमने ठीक पता बताया है, फिर उन्हें ज़िबा किया, वरना वो ऐसा करते मालूम न होते थे","और तुम्हें याद है वो वाकिया जब तुमने एक शक्स की जान ली थी, फिर उसके बारे में झगड़े में और एक दूसरे पर क़त्ल का इल्ज़ाम थोपने लगे थे और अल्लाह ने फैसला करलिया था के जो कुछ तुम छुपाते हो इस्तेमाल खोल कर रख देगा","हमें वक्त हमने हुक्म दिया के मकतूल ​​की लाश को उसके एक हिस्से से ज़र्ब लगाओ, देखो इस तरह अल्लाह मुर्दों को जिंदगी बक्शा है और तुम्हें अपनी निशानियां दिखती है ता-के तुम समझो","मगर ऐसी निशानियां देखने के बाद भी आखिर ए कार तुम्हारा दिल मजबूत हो जाएगा, पत्थरों की तरह सच, बलके पत्थरों में कुछ इनसे भी बड़े हुए, क्योंकि पत्थरों में से तो कोई ऐसा भी होता है जिसमें से चश्मे फूटते हैं, कोई निकलता है और इसमें से पानी निकल आता है और कोई खुदा के खौफ से लरज़ कर गिर भी पढ़ता है। अल्लाह तुम्हारे कार्टूनों से बेख़बर नहीं है","ऐ मुसलमानो! अब क्या लोगों से तुम ये तवाक्कू रखते हो के ये तुम्हारी दावत पर ईमान ले आओगे? हालांके इनमें से एक गिरोह का शेवा ये रहा है के अल्लाह का कलाम सुना और फिर खूब समझ बूझ कर दानिस्ता इस्में तहरीफ (बदलाव) की","(मुहम्मद रसूल अल्लाह पार) ईमान लाने वालों से मिलते हैं तो कहते हैं के हम भी उन्हें मानते हैं, और जब आपस मैं एक दूसरे से तख़लीये (निजी) की बात चिन्त होती है तो कहते हैं के बेवकूफ़ हो गए हो? लोगों को वो बातें बताते हैं कि अल्लाह ने तुमपर खोली है ता-के तुम्हारे रब के पास तुम्हारे मुकाबले में उन्हें हुज्जत में पेश किया है","और क्या ये जानते नहीं हैं के जो कुछ ये छुपाते हैं और जो कुछ जाहिर करते हैं, अल्लाह को सब बातों की ख़बर है","इनमें एक दूसरा गिरो ​​उम्मियों का है, जो किताब का तो इल्म रखते नहीं, बस अपनी बे-बुनियाद उम्मीद और आरज़ूओं को लिए बैठे हैं और महज़ वेहम ओ गुमान पर चले जा रहे हैं","पास हलाकत और तबाही है उन लोगों के लिए जो अपने हाथों से शरा का नविस्ता लिखते हैं (जो अपने हाथों से किताबें लिखते हैं), फिर लोगों से कहते हैं कि ये अल्लाह के पास से आया है ता-के इसके मुआवज़े में थोड़ा सा फ़ायदा हासिल करना। उनके हाथों का लिखा भी उनके लिए तबाही का सामान है और उनकी ये कमाई भी उनके लिए मुजीब ए हलाकत","वो कहते हैं के दोज़ख़ की आग हमें हरगिज़ छूने वाली नहीं इल्ला ये के चंद रोज़ की सज़ा मिल जाए तो मिल जाए। इनसे पूछो, क्या तुमने अल्लाह से कोई अहद ले लिया है, जिसका खिलाफत-वारज़ी वो नहीं कर सकता? हां बात ये है कि तुम अल्लाह के जिम्मे डाल कर ऐसी बातें कहते हो जिनका मुतालिक तुम्हें इल्म नहीं है कि उन्होंने इनका ज़िम्मा लिया है? आख़िर तुम्हें दोज़ख की आग क्यों न लगेगी","जो भी बड़ी कमाई करेगा और अपनी खाता-कारी के चक्कर में पड़ा रहेगा, वो दोज़खी है और दोज़ख ही में वो हमेशा रहेगा","और जो लोग इमाम लाएंगे और नेक अमल करेंगे वही जन्नती हैं और जन्नत में वो हमेशा रहेंगे","याद करो, इजराइल की औलाद से हमने पुख्ता अहद लिया था कि अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करना, मां बाप के साथ, रिश्तेदारों के साथ, यतीमों और मिस्कीनो के साथ नेक सुलूक करना, लोगों से अच्छी बात कहना, नमाज कायम करना और जकात देना, मगर थोड़े आदमियों के सिवा तुम सब उस अहद से फिर गए और अब तक फिर हुए हो","फिर ज़रा याद करो, हमने तुमसे मज़बूत अहद लिया था के आपस में एक दूसरे का खून ना बहाना और ना एक दूसरे को घर से बे-घर करना, तुमने इसका इक़रार किया था, तुम खुद इसपर गवाह हो","मगर आज वही तुम हो के अपने भाई बंधों को कत्ल करते हो, अपनी बिरादरी के कुछ लोगों को बे-खानुमा (बे-घर) करते हो, ज़ुल्म ओ ज्यादा के साथ उनके खिलाफ जत्थे बंदियां (समूह बनाना/सहयोग करना) करते हो, और जब वो लड़यी में पकड़े हो ह्यूय तुम्हारे पास आते हैं तो उनकी रिहाई के लिए फ़िदिये का लेन डेन करते हो, हलांके उन्हें उनके घरों से निकालना ही सारा से तुमपर हराम था। तो क्या तुम किताब के एक हिस्सी पर ईमान लाते हो और दूसरे हिस्सी के साथ कुफ्र करते हो? फिर तुम में से जो लोग ऐसा करें उनकी सजा इसके सिवा और क्या है कि दुनिया की जिंदगी में ज़लील ओ ख़्वार होकर रहें और आख़िरत में छायादार अज़ाब की तरफ फेर दिए जाएं? अल्लाह उन हरकत से बे-ख़बर नहीं है जो तुम कर रहे हो","ये वो लोग हैं जिन्हों ने आख़िरत बेच कर दुनिया की ज़िंदगी ख़त्म कर ली है, लिहाज़ा ना इनकी सज़ा में को तक़फ़ीफ़ (कामी) होगी और ना उनको कोई मदद पाहुंच सकेगी","हमने मूसा को किताब दी, इसके बाद पै दर पै रसूल भेजे, आखिर ए कार ईसा इब्न मरियम को रोशन निशानियां देकर भेजा और रूह ए पाक से उसकी मदद की, फिर ये तुम्हारा क्या ढांग है के जब भी कोई रसूल तुम्हारी ख्वाहिशात ए नफ्स के खिलाफ कोई चीज लेकर तुम्हारे पास आया, तो तुमने उसे मुक़दमे में सरकशी ही की, किसी को झुटलाया और किसी को क़त्ल कर डाला","वो कहते हैं, हमारे दिल महफ़ूज़ हैं, नहीं असल बात ये है के उनके कुफ्र की वजह से असमान अल्लाह की फितर पड़ी है, इसलिए वो कम ही ईमान लाते हैं","और अब जो एक किताब अल्लाह की तरफ से उनके पास आई है, उसके साथ उनका क्या बरताओ है? दावा ये के वो हमें किताब की तस्दीक करती है जो उनके पास पहले से मौजूद थी, विवाद ये के इसकी आमद से पहले वो खुद कुफ्फार के मुकाबले में फतह ओ नुसरत की दुआएं मंगा करते थे, मगर जब वो चीज आ गई जिसे वो पहचान भी गए तो अनहोन ने उसे मन्ने से इंकार कर दिया, खुदा की लानत मुनकिरीन पर","क्या बुरा ज़रिया है जिसे ये अपने नफ़्स की तसल्ली हासिल करते हैं के जो हिदायत अल्लाह ने नाज़िल की है, उसको क़बूल करने से सिर्फ इस जिद्द की बिना पर इंकार कर रहे हैं के अल्लाह ने अपने फज़ल (वही ओ रिसालत) से अपने जिस बंदे को खुद चाहा, नवाज़ दीया! लिहाज़ा अब ये गजब बला ए गजब के मुस्तहिक हो गए हैं और ऐसे काफिरों के लिए सख्त ज़िल्लत आमेज़ सज़ा मुकर्रर है","जब उनसे कहा जाता है के जो कुछ अल्लाह ने नाज़िल किया है उसपर ईमान लाओ तो वो कहते हैं \"हम तो सिर्फ उस चीज़ पर ईमान लाते हैं जो हमारे हां (यानी नाक ए इसराइल) में उतरी है” इस दिन के बहार जो कुछ आया है उसके मन से वो इनकार करते हैं, हालांके वो हक़ है और उस तालीम की तस्दीक ओ ताईद कर रहा है जो उनके हां पहले से मौजूद थी। अच्छा, उन्हें कहो: अगर तुम हमें तालीम ही पर ईमान रखने वाले हो जो तुम्हारे हां आई थी, तो इसे पहले अल्लाह के उन पैगंबरों को (जो खुद बनी इसराइल में पैदा हुए थे) क्यूं क़तल करते रहे","तुम्हारे पास मूसा कैसी रोशन निशानियों के साथ आया फिर भी तुम ऐसे जालिम था के, इसकी पीठ मोड़ते ही बच्चे को मबूद बना बैठे","फिर जरा हमें मिसाक (संविदा) को याद करो जो तूर (तूर पर्वत) को तुम ऊपर उठा कर हमने तुमसे लिया था, हमने ताकीद की थी के जो हिदायत हम दे रहे हैं, उनको शक्ति के साथ पाबन्दी करो और कान लगा कर सुनो। तुम्हारे असलफ ने कहा के हमने सुन लिया, मगर मानेंगे नहीं और इनकी बात परस्ती का ये हाल था के दिलों में उनके बछड़ा (बछड़ा) ही बसा हुआ था। कहो: अगर तुम मोमिन हो तो ये अजीब ईमान है जो ऐसी बुरी हरकत का तुम्हें हुकुम देता है","इनसे कहो के अगर वक्त अल्लाह के नाजदीक आखिरी का घर तमां इंसानों को चोद कर सिर्फ तुम्हारे लिए मखसूस है, तब तो तुम्हें चाहिए के मौत की तमन्ना करो अगर तुम अपने इस खयाल में सच्चे हो","यकीन जानो के ये कभी इसकी तमन्ना ना करेंगे, क्योंकि अपने हाथों में जो कुछ काम कर उन्हें ने वहां भेजा है, उसका इक्ताजा यहीं है (के ये वहां जाने की तमन्ना ना करें) अल्लाह जालिमों के हाल में है ख़ूब वाकिफ़ है","तुम इनमें सबसे ज्यादा कर जीने का हरिस पाओगी हट्टा के ये इस मामले में मुशरिकों से भी बड़े हुए हैं। इनमें से एक शक ये चाहता है कि कोई तरह हज़ार बरस जिए, हलांके लंबी उमर बहार हाल उसे अज़ाब तो दूर नहीं फेंक सकती। जैसा कुछ अमाल ये कर रहे हैं, अल्लाह तो इन्हें देख ही रहा है","इनसे कहो के जो कोई जिबराईल से अदावत (दुश्मनी) रखता है, उसे मालूम होना चाहिए के जिबराईल ने अल्लाह ही के इज़ान से ये कुरान तुम्हारे क़ल्ब पर नाज़िल किया है, जो पहले आई हुई किताबों की तस्दीक ओ ताईद करता है और ईमान लाने वालों के लिए हिदायत और कामियाबी की बशारत बनकर आया है","(अगर जिब्राइल से इनकी अदावत का सबाब यहीं है, तो केहदो के) जो अल्लाह और उसके फरिश्तों और उसके रसूलन और जिब्राईल और माइकल के दुश्मन हैं, अल्लाह उन काफिरों का दुश्मन है","हमने तुम्हारी तरफ ऐसी आयतें नाज़िल की हैं जो साफ साफ हक का इजहार करने वाली हैं और इनकी जोड़ी से सिर्फ वही लोग इंकार करते हैं जो फासिक हैं","क्या हमेशा ऐसा ही नहीं हो रहा है के जब उन्होन ने कोई अहद किया, तो उनमें से एक ना एक गिरोह ने उसे जरूर बला ए तलाक रख दिया? बलके इनमें से अक्सर ऐसे ही हैं जो सच्चे दिल से ईमान नहीं लाते","और जब इनके पास अल्लाह की तरफ से कोई रसूल उस किताब की तस्दीक ओ ताईद करता हुआ आया जो इनके हां पहले से मौजूद थी तो एहले किताब में से एक गिरोह ने किताब अल्लाह को इस तरह पास-ए-पुश्त (पीठ के पीछे) डाला गोया के वो कुछ जानते ही नहीं","और लगे उन चीज़ों की जोड़ी बनाने जो शयातीन सुलेमान की सल्तनत का नाम लेकर पेश किया करते थे, हलांके सुलेमान ने कभी कुफ़्र नहीं किया, कुफ़्र के मुर्तक़िब तो वो शयातीन थे जो लोगन को जादूगरी की तालीम देते थे। वो पिछे पड़े हमें चीज के जो बाबिल (बेबीलोन) में दो फरिश्तों, हारुत ओ मारुत पर नाज़िल की गई थी, हलांके वो (फरिश्ते) जब भी किसी को उसकी तालीम देते थे तो पहले साफ तौर पर मुतनब्बे (चेतावनी) करदिया करते थे के \"देख, हम\" मेहज़ एक आज़माइश है, तू कुफ्र में मुब्तिला ना हो\"। फिर भी ये लोग उनसे वो चीज़ सीखते थे, जिसमें शोहर और बीवी में जुदाई डाल दें, जाहिर था के इज़ान ए इलाही के बिना वो इस ज़री से किसी को भी जरूर (नुकसान) न पहुंचा सकता था, मगर इसके दावे वो ऐसी चीज सीखते थे जो खुद इनके लिए नफा बख्श नहीं, बल्के नुक्सान-दे थी और उन्हें खूब मालूम था के जो इस चीज का खरीददार बना उसके लिए आखिरी में कोई हिसा नहीं। कितनी बुरी माता थी जिसके बदले उन्हें ने अपनी जानों को बेच डाला, काश उन्हें मालूम होता","अगर वो ईमान और तकवा इख्तियार करते, तो अल्लाह के हां इसका जो बदला मिला तो उनके लिए ज्यादा बेहतर था, काश उन्हें खबर होती","ऐ लोग जो ईमान लाए हो! रैना (हमारी बात सुनो) ना कहो, बलके अनज़ुर्ना (हमें समझाओ) कहो और तवज्जु से बात को सुनो, ये काफ़िर तो अज़ाब ए अलीम के मुस्तहिक़ हैं","ये लोग जिन्हों ने दावत ए हक़ को क़बूल करने से इंकार कर दिया है, ख़्वाह एहले किताब में से होन या मुशरिक माननीय, हरगिज़ ये पसंद नहीं करते के तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर कोई भलाई नाज़िल हो, मगर अल्लाह जिसको चाहता है अपनी रहमत के लिए चुन लेता है और वो बड़ा फ़ज़ल फ़रमाने वाला है","हम अपनी जिस आयत को मनसूख (निरस्त) करते हैं हां भुला देते हैं, उसकी जगह उसे बेहतर ले आते हैं या काम अज़ काम वैसी ही। क्या तुम जानते नहीं हो कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है","क्या तुम्हें ख़बर नहीं है कि ज़मीन और आसमान की फ़ार्मा रवाई अल्लाह ही के लिए है और उसके सिवा कोई तुम्हारी ख़बरगिरी करने और तुम्हारी मदद करने वाला नहीं है","फिर क्या तुम अपने रसूल से उस क़िस्म का सवाल और मुतालबे करना चाहते हो जैसे इसे पहले मूसा से किये जा चुके हैं? हलांके जिस शक्स ने ईमान की रवीश को कुफ्र की रवीश से बदल लिया वो राह ए रास्ते से भटक गया","एहले किताब में से अक्सर लोग ये चाहते हैं के किसी तरह तुम्हें ईमान से फेर कर फिर कुफ्र की तरफ पलटा ले जाएं अगरचे हक उनपर जाहिर हो चूका है, मगर अपने नफ़्स के हसद की बिना पर तुम्हारे लिए उनकी ये ख्वाहिश है इसके जवाब में तुम अफ़ु ओ दरगुज़र (माफ़ कर दो और नज़रअंदाज) से काम लो, यहां तक ​​के अल्लाह खुद ही अपना फैसला नफीज़ करदे। मुतमइन रहो के अल्लाह ताला हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है","नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो। तुम अपनी अकीबत के लिए जो भलाई कमा कर आगे भेजोगे, अल्लाह के हन उसे मौजुद पाओगे। जो कुछ तुम करते हो वो सब अल्लाह की नज़र में है","उनका कहना है कि कोई शक्स जन्नत में ना जाएगा जब तक के वो यहूदी ना हो (या ईसाइयों के ख्याल के मुताबिक) इसाई ना हो। ये उनकी तमन्नाएं हैं, इनसे कहो अपनी दलील पेश करो अगर तुम अपने दावे में सच्चे हो","दरसल ना तुम्हारी कुछ खुसियत है ना किसी और की, हक ये है के जो भी अपनी हस्ती को अल्लाह की इताअत में सोम्प दे और अमल नेक रवीश पर चले, उसके उसके रब के पास उसका अजर है और ऐसे लोगों के लिए किसी का खौफ या रांझ का कोई मौका नहीं","यहुदी कहते हैं: इसाईयों के पास कुछ नहीं, इसाई कहते हैं: यहुदियों के पास कुछ नहीं, हलांके के दोनों ही किताब पढ़ते हैं और यही क़िस्म के दावे उन लोगों के भी हैं जिनके पास किताब का इल्म नहीं है, ये इख्तिलाफात जिन में ये लोग मुब्तिला हैं इनका फैसला अल्लाह कयामत के रोज कर देगा","और हमारे शक्स से बढ़कर जालिम कौन होगा जो अल्लाह के मबादनों (पूजा स्थलों) में उसके नाम की याद से रोके और उनकी वीरानी के दर्पे हो? ऐसे लोग काबिल हैं के उनकी इबादत-गाहों में क़दम न रखें और अगर वहां जाएं भी तो डरते हुए जाएं, उनके लिए तो दुनिया में रुसवाई है और आख़िरत में अज़ाब ए अज़ीम","मशरिक और मगरिब सब अल्लाह के हैं, जिसकी तरफ भी तुम रुख़ करोगे उसकी तरफ अल्लाह का रुख है, अल्लाह बड़ी मुसीबत वाला और सब कुछ जानने वाला है","उनका क़ौल है कि अल्लाह ने किसी को बेटा बनाया है, बातों में अल्लाह पाक है। असल हकीकत ये है के ज़मीन और आसमान की तमाम मौजुदात उसकी दूध (मिल्कियत) हैं, सबके सब उसके मुती ओ फ़रमान हैं","वो आसमान और ज़मीन का मुजिद (प्रवर्तक) है और जिस बात का वो फैसला करता है उसके लिए बस ये हुकुम देता है के \"होजा\" और वो हो जाती है","नादान कहते हैं कि अल्लाह खुद हमसे बात क्यों नहीं करता या कोई निशानी हमारे पास क्यों नहीं आती? ऐसी ही बातें इनसे पहले लोग भी किया करते थे, इन सब (अगले पिछले गुमराहों) की मानसिकता (मानसिकता) एक जैसी हैं। यकीन लाने वालों के लिए तो हम निशानियां साफ-साफ नुमायां कर चुके हैं","(इससे बढ़ कर निशानी क्या होगी के) हमने तुमको इल्म ए हक के साथ खुश खबरी देने वाला और डराने वाला बना कर भेजा, अब जो लोग जहन्नुम से रिश्ता जोड़ चुके हैं उनकी तरफ से तुम जिम्मेदार ओ जवाबदे नहीं हो","यहुदी और इसै तुमसे हरगिज़ राजी ना होंगे, जब तक तुम उनके तरीक़े पर ना चलने लगो। साफ कहदो के रास्ते बस वही है जो अल्लाह ने बताया है, वरना अगर उस इल्म के बाद जो तुम्हारे पास आ चूका है तुमने उनकी ख्वाहिश की जोड़ी तो अल्लाह की पकड़ से बचाने वाला कोई दोस्त और मददगार तुम्हारे लिए नहीं है","जिन लोगों को हमने किताब दी है, वो उसका इस्तेमाल है तरह पढ़ते हैं जैसा के पढ़ने का हक है, वो इसपर सच्चे दिल से ईमान लाते हैं और जो इसके साथ कुफ्र का रावय्या इख्तियार करते हैं वही असल में नुक्सान उठाने वाले हैं","ऐ बानी इजराइल! याद करो मेरी वो नियामत जिसकी मैंने तुम्हें नवाजा थी, और ये के मैंने तुम्हें दुनिया की तमाम कौमों पर फजीलत दी थी","और डरो उस दिन से, जब कोई किसी के जरा काम न आएगा, न किसी से फिदिया (फिरौती) कबूल किया जाएगा, न कोई सिफरिश हाय आदमी को फ़ायदा देगी, और ना मुजरेमो को कहीं से कोई मदद मांग सकेगी","याद करो के जब इब्राहिम को उसके रब ने चंद बातों में आज़माया और वो उन सब में पूरा उतर गया, तो उसने कहा: \"मैं तुझसे सब लोगों का पेशवा बनने वाला हूं\" इब्राहिम ने अर्ज़ किया: “और क्या मेरी औलाद से भी यही वादा है?” उसने जवाब दिया: \"मेरा वादा ज़ालिमों से मुतालिक नहीं है।\"","और ये के हमने इस घर (काबा) को लोगों के लिए मरकज़ और अमन की जगह क़रार दिया था और लोगों को हुकुम दिया था कि इब्राहिम जहां इबादत के लिए खड़ा होता है उस मुकाम को मुस्तक़िल जाए नमाज़ बना लो और इब्राहिम और इस्माइल को तक़ीद की थी के मेरे इस घर को तवाफ और एतेकाफ और रुकू और सजदा करने वालों के लिए पाक रक्खो","और ये के इब्राहीम ने दुआ की: \"ऐ मेरे रब, इस शहर को अमन का शहर बना दे, और इसके बाशिंदों (लोग) में जो अल्लाह और आख़िरत को माने, उन्हें हर क़िस्म के फ़लों का रिज़क दे”। जवाब में उसके रुब ने फरमाया: \"और जो ना मानेगा, दुनिया की चंद रोजा जिंदगी का सामान तो मैं उसे भी दूंगा मगर आखिर ए कार उसे अजाब ए जहन्नुम की तरफ घसीटूंगा, और वो बढतारीन ठिकाना है\"","और याद करो इब्राहिम और इस्माइल जब इस घर की दीवारें हैं उठ रहे थे, तो दुआ करते जाते थे: \"ए हमारे रब, हमसे ये खिदमत क़बूल फरमा ले, तू सबकी सुनने और सब कुछ जानने वाला है","ए रब, हम दोनों को अपना मुस्लिम (मुती ए फरमान) बना, हमारी नाक से एक ऐसी क़ौम उठो जो तेरी मुस्लिम हो, हमें अपनी इबादत के तौर-तरीके बता, और हमारी कहानियों से दरगुज़र फ़रमा, तू बड़ा माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","और ऐ रब, उन लोगों में खुद उनकी क़ौम से एक ऐसा रसूल उठियो जो उन्हें तेरी आयत सुनाए, उनको किताब और हिकमत की तालीम दे और उनकी जिंदगी संवारे, तू बड़ा मुक्तदर (सर्वशक्तिमान) और हकीम है।","अब कौन है, जो इब्राहिम के तरीक़े से नफ़रत करे? जिसने खुद को हिम्मत ओ जिहालत में मुब्तिला करलिया हो, उसके सिवा कौन ये हरकत कर सकता है? इब्राहीम तो वो शक्स है जिसको हमने दुनिया में अपने काम के लिए चुन लिया था और आख़िरत में उसका शुमार सालिहें में होगा","उसका हाल ये था के जब उसके रब ने उसे कहा: \"मुस्लिम हो जा\" तो उसने फ़वारान कहा: \"मैं मालिक ए कायनात का 'मुस्लिम' हो गया।”","इसी तारीख पर चलने की हिदायत हमें अपनी औलाद की थी और याकूब अपनी औलाद को कर गया, उसने कहा था के: \"मेरे बच्चों! अल्लाह ने तुम्हारे लिए यही दीन पसंद किया है लिहाजा मरते दम तक मुस्लिम ही रहना\"","फिर क्या तुम उस वक्त मौजूद थे जब याकूब इस दुनिया से रुक्सत हो रहा था? उसने मरते वक्त अपने बच्चों से पूछा: \"बच्चों! मेरे बाद तुम किसकी बंदगी करोगे?\" उन सब ने जवाब दिया: \"हम उसकी एक खुदा की बंदगी करेंगे जैसे आप ने और आपके बुजुर्ग इब्राहिम, इस्माइल और इशाक ने खुदा माना है और हम उसके मुस्लिम हैं\"","वो कुछ लोग थे जो गुजर गए, जो कुछ उन्होंने बनाया, जो उनके लिए है और जो कुछ तुम कमाओगे, वो तुम्हारे लिए है। तुमसे ये ना पूछा जाएगा के वो क्या करते थे","यहुदी कहते हैं: यहुदी हो तो राह ए रास्ते पाओगे, इसे कहते हैं: इसे कहो: “नहीं, बलके सबको छोड़ कर इब्राहिम का तरीका, और इब्राहीम मुशरिकों में से ना था।”","(मुसलमानो)! कहो के: \"हम ईमान लाए अल्लाह पर और हमें हिदायत पर जो हमारी तरफ नाज़िल हुई है और जो इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब की तरफ नाज़िल हुई थी और जो मूसा और ईसा और दूसरे तमाम पैगम्बरों को उनके रब की तरफ से दी\" गई थी. हम उनके दरमियान कोई तफ़रीक़ नहीं करते और हम अल्लाह के मुस्लिम हैं”","फिर अगर वो इसी तरह ईमान लायें, जिस तरह तुम लाए हो, तो हिदायत पर हैं, और अगर इसके मुह फिरें तो खुली बात है के वो हथधर्मी (विवाद) में पढ़ गए हैं, लिहाज़ा इत्मिनान रख्खो के उनके मुक़ाबले में अल्लाह तुम्हारी हिमायत के लिए काफी है। वो सब कुछ सुनता और जानता है","कहो: “अल्लाह का रंग इख्तियार करो उसके रंग से अच्छा और किसका रंग होगा? और हम उसी की बंदगी करने वाले लोग हैं।”","ऐ नबी! इनसे कहो: \"क्या तुम अल्लाह के बारे में हमसे झगड़ा करते हो? हलांके वही हमारा रब है और तुम्हारा रब भी। हमारे अमाल हमारे लिए हैं, तुम्हारे अमाल तुम्हारे लिए, और हम अल्लाह हाय के लिए अपनी बंदगी को खालिस कर चुके हैं","या फिर क्या तुम्हारा कहना ये है कि इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब सब के सब यहूदी थे या नसरानी थे? कहो: \"तुम ज़्यादा जानते हो या अल्लाह? हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जिसका ज़िमे अल्लाह की तरफ़ से एक गवाही हो और वो उसे छुपाए? तुम्हारी हरकत से अल्लाह ग़ाफ़िल तो नहीं है","वो कुछ लोग थे जो गुज़र चुके, उनकी कमाई उनके लिए थी और तुम्हारी कमाई तुम्हारे लिए। तुमसे उनके अमाल का सवाल नहीं होगा।","नादान लोग जरूर कहेंगे: इन्हें क्या हुआ के पहले ये जिस क़िबले की तरफ रुख करके नमाज पढ़ते थे उसे यकीन फिर से हो गया? (ऐ नबी) इनसे कहो: \"मशरिक और मगरिब सब अल्लाह के हैं, अल्लाह जिसे चाहता है सीधी राह दिखा देता है","और इसी तरह तो हमने तुम्हें एक \"उम्मत ए वसत (मध्य देश)\" बनाया है ता-के तुम दुनिया के लोगों पर गवाह हो और रसूल तुमपर गवाह हो। पहले जिस तरफ तुम रुख करते थे, उसको तो हमने सिर्फ ये देखने के लिए किबला मुकर्रर किया था कि कौन रसूल की जोड़ी बनाता है और कौन उल्टा फिर जाता है, मगर उन लोगों के लिए कुछ भी नहीं साबित हुआ जो अल्लाह की। हिदायत से फ़ैज़ियाब था, अल्लाह तुम्हारे इस ईमान को हरगिज़ ज़या न करेगा। यकीन जानों के वो लोगों के हक़ में निहायत शफीक ओ रहीम है","ये तुम्हारे मुँह का बार-बार आसमान की तरफ उठना हम देख रहे हैं, लो हम इसी क़िबले की तरफ तुम्हें फेर देते हैं जिसे तुम पसंद करते हो, मस्जिद ए हराम की तरफ रुख़ फेर दो अब जहां कहीं तुम हो उसकी तरफ मुंह करके नमाज पढ़ा करो। ये लोग जिन्हें किताब दी गई थी खूब जानते हैं के (तहवील ए क़िबला का/क़िबला का परिवर्तन) ये हुकुम उनके रब ही की तरफ से है और बार-हक़्क़ है मगर इसके बावज़ूद जो कुछ ये कर रहे हैं अल्लाह उसे ग़ाफ़िल नहीं है","तुम एहले किताब के पास ख्वा कोई निशानी ले आओ, मुमकिन नहीं के ये तुम्हारे क़िबले की जोड़ी बनाने लगें, और न तुम्हारे लिए ये मुमकिन है के इनके क़िबले कि जोड़ी करो, और इनमें से कोई गिरो ​​भी दूसरे के क़िबले की जोड़ी के लिए तैयार नहीं है, और अगर तुमने इस इल्म के बाद जो तुम्हारे पास आ चुका है इनकी ख्वाहिशात की जोड़ी कि तो यकीनन तुम्हारा शुमार ज़ालिमों में होगा","जिन लोगों को हमने किताब दी है वो इस मुकाम को (जिसे क़िबला बनाया गया है) ऐसा पहचानते हैं जैसा अपनी औलाद को पहचानते हैं, मगर उनमें से एक गिरोह जानते हैं बूझते हक़ को छुपा रहा है","ये क़तई एक अमर ए हक़ है तुम्हारे रब की तरफ से, लिहाज़ा इसके मुतालिक तुम हरगिज़ किसी शक्क में ना पढ़ो","हर एक के लिए एक रुख है जिसकी तरफ वो मुदता है, पस भलाईयों की तरफ सबक करो। जहां भी तुम होगे अल्लाह तुम्हें पा लेगा, उसकी क़ुदरत से कोई चीज़ बाहर नहीं","तुम्हारा गुजर जिस मुकाम से भी हो वहीं अपना रुख (नमाज के वक्त) मस्जिद ए हराम की तरफ फेर दो, क्योंकि ये तुम्हारे रब का बिल्कुल बार-हक्क फैसला है और अल्लाह तुम लोगों के अमाल से बे-खबर नहीं है","और जहां से भी तुम्हारा गुजर हो अपना रुख मस्जिद ए हराम की तरफ फेरा करो, और जहां भी तुम हो उसकी तरफ मुंह करके नमाज पढ़ो ता-के लोगों को तुम्हारे खिलाफ कोई हुज्जत ना मिले। हां जो जालिम हैं उनकी जुबान किसी हाल में बंद न होगी तो उनसे तुम न डरो बलके मुझसे डरो और इसलिए के मैं तुमपर अपनी नियामत पूरी कर दूं और इस तवक्कु पर के मेरे इस हुकुम की जोड़ी से तुम इसी तरह फलाह का रास्ता पाओगे","जिस तरह (तुम्हें वह चीज है) से फलाह नसीब हुई के) मैंने तुम्हारे दरमियान खुद तुम में से एक रसूल भेजा जो तुम्हें मेरी आयत सुनाता है, तुम्हारी जिंदगी को संवारता है, तुम्हें किताब और हिकमत की तालीम देता है और तुम्हें वो बातें सिखाता है जो तुम ना जानते थे","लिहाज़ा तुम मुझे याद रक्खो मैं तुम्हें याद रखूंगा और मेरा शुक्र अदा करो, कुफरान ए नियामत न करो","ऐ लोग जो ईमान लाए हो सब्र और नमाज से मदद लो, अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है","और जो लोग अल्लाह की राह में हैं मारे जायें उन्हें मुर्दा ना कहो, ऐसे लोग तो हकीकत में जिंदा हैं, मगर तुम्हें उनकी जिंदगी का शूर नहीं होता","और हम जरूर तुम्हें खौफ ओ खतरा, फाका काशी (भूख), जान ओ माल के नुक्सानात और आदमियों के घाटे(नुक्सान) में मुब्तिला करके तुम्हारी आजमाइश करेंगे","हालात में जो लोग सब्र करें और जब कोई मुसीबत पड़े तो कहे के: \"हम अल्लाह ही के हैं और अल्लाह ही की तरफ हमें पलट कर जाना है\"","उन्हें खुश-खबरी देदो उन्पर उनके रब की तरफ से बड़ी इनायत होगी, उसकी रहमत अनपर साया करेगी और ऐसे ही लोग रस्त-रो हैं","यकीनन सफा और मरवा अल्लाह की निशानियों में से हैं, लिहाजा जो शक्स बैतुल्लाह का हज या उमर करे, उसके लिए कोई गुनाह की बात नहीं के वो इन दोनों पहाड़ों के दरमियां सई कार्ले और जो बरीज़ा ओ रगबत (खुले दिल से) कोई भलाई का काम करेगा अल्लाह को इसका इल्म है और वो इसकी कदर करने वाला है","जो लोग हमारी नाज़िल की हुई रोशन तालीमत और हिदायत को छुपाते हैं, डरन हाल ये के हम इन्हें सब इंसानों की रहनुमाई के लिए अपनी किताब में बयान कर चुके हैं, यकीन जानो के अल्लाह भी अपर लानत करता है और तमाम लानत करने वाले भी अनपर लानत भेजते हैं","अलबत्ता जो इस रवीश से बाज़ आ जाए और अपने तर्ज़ ए अमल की इस्लाह कार्लें और जो कुछ छुपाते थे उसे बयान करने लगें, उनको मैं माफ कर दूंगा और मैं बड़ा दरगुजार करने वाला और रहम करने वाला हूं","जिन लोगों ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया और कुफ्र की हालत में ही जान दी, उन लोगों ने अल्लाह और फरिश्तों और तमाम इंसानों की लानत है","इसी लानत ज़दहगी की हालत में वो हमेशा रहेंगे, ना उनकी सज़ा में तक़फ़ीफ़ होगी और ना उन्हें फिर कोई दूसरी मोहलत दी जाएगी","तुम्हारा ख़ुदा एक ही खुदा है, उस रहमान और रहीम के सिवा कोई और ख़ुदा नहीं है","(क्या हकीकत को पहचानने के लिए अगर कोई निशानी और आलमत अंधेरा है तो) जो लोग अक़ल से काम लेते हैं उनके लिए आसमानो और ज़मीन की सच्चाई (सृजन) में, रात और दिन के पैहम एक दूसरे के बाद आने में, उन कश्तियों में जो इंसान के नफ़ा की चीज़ों के लिए हुए दरियाँ और समंदरों में चलती फिरती हैं, बारिश के हमारे पानी में जैसे अल्लाह ऊपर से बरसता है, फिर उसके ज़रीए से ज़मीन को जिंदगी बक्शता है और अपनी इसी इंतज़ाम की बदौलत ज़मीन में हर क़िस्म की जानदार मख़लूक को फैलाता है, हवाओं की गर्दिश में, और उन बादलों में जो आसमान और ज़मीन के दरमियान तबे फ़रमान बना कर रख दिए गए हैं, बेशुमार निशानियां हैं","(मगर वेहदत ए ख़ुदावंदी पर दलालत करने वाले खुले खुले आसमां के होते हुए भी) कुछ लोग ऐसे हैं जो अल्लाह के सिवा दूसरो को उसका हमसर और मद्द ए मुक़ाबिल (बराबर और प्रतिद्वंदी) बनाते हैं और उनके ऐसे गिरविदा (प्यार) हैं जैसे अल्लाह के साथ गिरविदगी होनी चाहिए, हलांके ईमान रखने वाले लोग सबसे बढ़कर अल्लाह को मेहबूब रखते हैं, काश जो कुछ अज़ाब को सामने देखकर उन्हें सूझने वाला है वो आज ही जालिमीन को समझ जाए के सारी ताक़तें और सारे इख्तियारात अल्लाह ही के क़ब्ज़े में हैं और ये के अल्लाह सज़ा देने में भी बहुत सक्षम है","जब वो सज़ा देगा हमें वक़्त कैफियत ये होगी के वही पेशवा और रहनुमा जिनकी दुनिया में जोड़ी की गई थी अपने जोड़े से बे-तालुकी जाहिर करेंगे, मगर सजा पा कर रहेंगे और उनके सारे असबाब ओ वसील का सिलसिला खत्म हो जाएगा","और वो लोग जो दुनिया में उनकी जोड़ी बनाते थे, कहेंगे के काश हमको फिर एक मौका दिया जाता है तो जिस तरह आज ये हमसे बेज़ारी जाहिर कर रहे हैं हम इनसे बेज़ार होकर दिखा देते हैं, यूं अल्लाह इन लोगों के वो अमाल जो ये दुनिया में कर रहे हैं इनके सामने इस तरह लाएगा के ये हसरतन और पशेमानियों के साथ हाथ बदलते रहेंगे, मगर आग से निकलना कि कोई राह न पायेगा","लोगन! ज़मीन में जो हलाल और पाक चीज़े हैं उन्हें खाओ और शैतान के बताए हुए रस्तों पर ना चलो, वो तुम्हारा खुला दुश्मन है","तुम्हें बुराई और फ़हाश (अभद्रता) का हुकुम देता है और ये सिखाता है कि तुम अल्लाह के नाम पर वो बातें कहो जिनको मुतालिक तुम्हें इल्म नहीं है के वो अल्लाह ने फरमायी है","इनसे जब कहा जाता है के अल्लाह ने जो एहकाम नाज़िल किये हैं उनकी जोड़ी करो तो जवाब देते हैं के हम तो उसी तारीख की जोड़ी करेंगे जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है, अच्छा अगर इनके बाप दादा ने अक्ल से कुछ भी काम न लिया हो और राह ए रास्ते न पाई हो तो क्या फिर भी ये उनहिन की जोड़ी चले जायेंगे","ये लोग जिन्हों ने खुदा के बताए हुए तारीख पर चलने से इंकार कर दिया है इनकी हालत बिल्कुल ऐसी है जैसे चारवाहा जानवरों को पुकारता है और वो हांक पुकार की सदा के सिवा कुछ नहीं सुनते। ये बाहर हैं, गुंगे हैं अंधे हैं, क्योंकि कोई बात इनकी समझ में नहीं आती","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम हकीकत में अल्लाह ही की बंदगी करने वाले हो तो जो पाक चीजें हमने तुम्हें बख्शी हैं उन्हें बे-तकल्लुफ खाओ और अल्लाह का शुकर अदा करो","अल्लाह की तरफ से अगर कोई बंदी तुम्पर है तो वो ये है के मुर्दार ना खाओ, खून से और सूअर (सूअर) के गोश्त से परहेज करो और कोई ऐसी चीज ना खाओ जिस्पर अल्लाह के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो, हां जो शक्स मजबूरी की हालात में हो और वो इनमें से कोई चीज खा ले बिना इसके के वो कानून शिकानी का इरादा रखता हो या जरूरत की हद से तजावुज़ करे, तो उसपर कुछ गुनाह नहीं। अल्लाह बख्शने वाला और रहम करने वाला है","हक़ ये है के जो लोग उन एहकाम को छुपाते हैं जो अल्लाह ने अपनी किताब में नाज़िल किए हैं और थोड़े से दुनिया फ़ायदों पर उन्हें भेंट चढ़ते हैं वो दरसल अपने पैत आग से भर रहे हैं, कयामत के रोज़ अल्लाह हरगिज उनसे बात ना करेगा, ना उन्हें पाकीजा ठहरेगा, और उनके लिए दर्दनाक सजा है","ये वो लोग हैं जिन्हों ने हिदायत के बदले ज़लालत खरीदी और मगफिरत के बदले अज़ाब मोल ले लिया, कैसा अजीब है इनका हौसला के जहन्नुम का अज़ाब बर्दाश्त करने के लिए तैयार हैं","ये सब कुछ इस वजह से हुआ के अल्लाह ने तो ठीक ठीक हक़ के मुताबिक़ किताब नाज़िल की थी मगर जिन लोगों ने किताब में इख़्तिलाफ़ात निकला वो अपने झगड़े में हक़ से बहुत दूर निकल गए","नेकी ये नहीं है के तुमने अपने चेहरे मशरिक (पूर्व) की तरफ करलिये या मगरिब (पश्चिम) की तरफ, बलके नेकी ये है कि आदमी अल्लाह को और यौम ए आखिर और मलिका को और अल्लाह की नाज़िल की हुई किताब और उसके पैगम्बरों को दिल से माने और अल्लाह की मुहब्बत में अपना दिल पसंद माल रिश्तेदारों और यतीमों पर, मिस्किनो और मुसाफ़िरों पर, मदद के लिए हाथ फैलाने वालों पर और ग़ुलामों की रिहाई पर ख़र्च करे, नमाज़ क़याम करे और ज़कात दे और नेक वो लोग हैं के जब अहद करें तो उसे वफ़ा करें, और तांगी ओ मुसीबत के वक़्त में और हक़ ओ बातिल की जंग में सब्र करें, ये हैं रस्त बाज़ लोग और यही लोग मुत्तक़ी (पवित्र) हैं","ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारे लिए क़तल के मुक़द्दमो में क़िस्स (प्रतिशोध) का हुकुम लिख दिया गया है। आज़ाद आदमी ने क़त्ल किया हो तो हमें आज़ाद हाय से बदला लिया जाए, ग़ुलाम क़ातिल हो तो वो ग़ुलाम हाय क़ातिल किया जाए, और औरत इस जुर्म की मुर्तकीब हो तो हमें औरत हाय से क़िस्स लिया जाए, हाँ अगर किसी कातिल के साथ इसका भाई कुछ नरमी करने के लिए तैयार हो तो मारूफ तारीख के मुताबिक खून बहा (खून से पैसा) का तसफिया होना चाहिए और कातिल को लाज़िम है के रास्ते के साथ खून बहा अदा करे, ये तुम्हारे रब की तरफ से तकफीफ और रहमत है, इसपर भी जो ज्यादा करे उसके लिए दर्दनाक सजा है","(अक़ल ओ खिरद रखने वालों)! तुम्हारे लिए क़िसास में ज़िन्दगी है, उम्मीद है कि तुम इस क़ानून की ख़िलाफ़त वारज़ी से परहेज़ करोगे","तुम पर फ़र्ज़ किया गया है कि जब तुम में से किसी की मौत का वक़्त आए और वो अपने पीछे माल छोड़ रहा हो, तो वालिदाएं और रिश्तेदारों के लिए मारूफ़ तारीख़े से वसीयत करे, ये हक़ है मुत्तक़ी लोगों पर","फिर जिन्हों ने वसीयत सुनी और बाद में उसे बदल डाला तो इसका गुनाह उन बदलने वालों पर होगा, अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है","अलबत्ता जिसको ये अंदेशा हो के वसीयत करने वाले ने नदानिश्ता या क़स्दन हक़ तलाफ़ी की है और फिर मामले से तालुक़ रखने वालों के दरमियान वो इस्लाह करे, तो उसपर कुछ गुनाह नहीं है, अल्लाह बख्शने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम रोज़ फ़र्ज़ करदिये गए जिस तरह तुमसे पहले अंबिया के जोड़े पर फ़र्ज़ किए गए थे, इस्से तवाक्कु है के तुम में तक़वा की सिफ़त पैदा होगी","चंद मुक़र्रर दीनो के रोज़ हैं, अगर तुम में से कोई बीमार हो, या सफ़र पर हो तो दूसरे दिनों में उतनी ही तड़प पूरी करले और जो लोग रोज़ा रखने की क़ुदरत रखते हों (फी ना रखें) तो वो फ़िद्या दीन, एक रोज़ का फ़िदिया एक मिसकीन को खाना खिलाना है और जो अपनी ख़ुशी से कुछ ज़्यादा भलाई करे तो ये उसके लिए बेहतर है, लेकिन अगर तुम समझो तो तुम्हारे हक़ में अच्छा यहीं है के रोज़ा रक्खो","रमज़ान वो महीना है जिसमें कुरान नाज़िल किया गया जो इंसानों के लिए सरसर हिदायत है और ऐसी वाज़े तालीमात पर मुश्तमिल है जो राह ए रस्त दिखने वाली और हक़ ओ बातिल का फर्क खोल कर रख देने वाली है, लिहाज़ा अब से जो शक्स इस माहीने को पाए उसको लाज़िम है के इस पूरे माहीने के रोज़ रखे और जो कोई मरीज़ हो या सफ़र पर हो तो वो दूसरे दिनो में रोज़ की तदाद पूरी करे। अल्लाह तुम्हारे साथ नरमी करना चाहता है, शक्ति करना नहीं चाहता, इसलिए ये तारीख तुम्हें बता रहा है ता-के तुम रोज़ों की तदाद पूरी कर सको और जिस हिदायत से अल्लाह ने तुम्हें सरफराज किया है उसपर अल्लाह की किताब का इज़हार ओ एतराफ करो और शुकरगुज़र बानो","(और ऐ नबी)! मेरे बंदे अगर तुमसे मेरे मुतालिक पूछें, तो उन्हें बता दो के मैं उनसे करीब ही हूं, पुकारने वाला जब मुझे पुकारता है, मैं उसकी पुकार सुनता और जवाब देता हूं, लिहाजा उन्हें चाहिए के मेरी दावत पर लब्बैक कहें और मुझपर ईमान लायें, ये बात तुम उन्हें सुना दो, शायद के वो राह ए रास्ते पा लें","तुम्हारे लिए रोज़ों के ज़माने में रातों को अपनी बीवीयों के पास जाना हलाल कर दिया गया है, वो तुम्हारे लिए लिबास हैं और तुम उनके लिए। अल्लाह को मालूम हो गया के तुमलोग चुपके-चुपके अपने आप से ख़यानत कर रहे थे, मगर उसने तुम्हारा कसूर माफ कर दिया और तुमसे दरगुज़र फरमाया, अब तुम अपनी बीवीयों के साथ शब-बाशी (संभोग) करो और जो लुत्फ़ अल्लाह ने तुम्हारे लिए जायज़ करदिया है, उसे हासिल किया करो, नई रातों को खाओ पियो यहां तक ​​के तुमको स्याही ए शब की धारी से सपेधा सुभ की धारी नुमाया नजर आ जाए तब ये सब काम छोड़ कर रात तक अपना रोजा पूरा करो और जब तुम मस्जिद में मौताकिफ (इत्तेकाफ में) होन तो बिवियों से मुबारकत ना करो, ये अल्लाह की बंदिश हुई हदें हैं, इनके करीब बा फटकना, इस तरह अल्लाह अपने एहकाम लोगों के लिए बा-सरहत (स्पष्ट रूप से) बयान करता है, तवक्कू है के वो गलत राविये से बचेंगे","और तुम लोग ना तो आपस में एक दूसरे के माल नरवा तारीख से खाओ और ना हकीमो के आगे इनको इस गरज के लिए पेश करो के तुम्हें दूसरों के माल का कोई हिसा क़स्दन ज़ालिमाना तरीक़े से खाने का मौका मिल जाए","लोग तुमसे चाँद की घटती बढ़ती सूरतों के मुतालिक पूछते हैं, कहो : ये लोगों के लिए तारेकॉन की तायिन की और हज की अलमतें हैं। नेज़ अनसे कहो: ये कोई नेकी का काम नहीं है के अपने घरों में पीछे की तरफ दाख़िल होते हो, नेकी तो असल में ये है के आदमी अल्लाह की नाराज़गी से बचे, लिहाज़ा तुम अपने घरों में दरवाज़े ही से आया करो, अलबत्ता अल्लाह से डरते रहो शायद के तुम्हें फलाह नसीब हो जाए","और तुम अल्लाह की राह में उन लोगों से लड़ो, जो तुमसे लड़ते हैं, मगर ज्यादा न करो का अल्लाह ज्यादा करने वालों को पसंद नहीं करता","उनसे लड़ो जहां भी तुम्हारा उनसे मुकाबला पेश आए और उन्हें निकालो जहां से उनहों ने तुमको निकला है, इस्ली के क़त्ल अगरचे बुरा है, मगर फ़ितना इसे भी ज़्यादा बुरा है और मस्जिद ए हराम के करीब जब तक वो तुमसे ना लड़ें तुम भी ना लड़ो, मगर जब वो वहां लड़ने से ना चूकें, तो तुम भी बे-तकल्लुफ़ उन्हें मारो के ऐसे काफ़्रियों की यही सज़ा है","फिर अगर वो बाज़ आ जाएँ, तो जान लो के अल्लाह माफ़ करने वाला और रहम फ़रमान वाला है","तुम उनसे लड़ते रहो यहाँ तक के फ़ितना बाकी ना रहे और दीन अल्लाह के लिए होजाए, फिर अगर वो बाज़ आ जाएँ, तो समझ लो के जालिमों के सिवा और किसी पर दस्त-दराज रवा नहीं","माह ए हराम का बदला हराम ही है और तमाम हुर्मतों का लिहाज़ बाराबरी के साथ होगा, लिहाज़ा जो तुमपर दस्त दराज़ी करे, तुम भी उसी तरह उसपर दस्त दराज़ी करो, अलबत्ता अल्लाह से डरते रहो और ये जान रक्खो के अल्लाह उन्ही लोगों के साथ है जो उसकी हुदूद todne se paheiz karte hain","अल्लाह की राह में ख़र्च करो और अपने हाथों अपने आप को हलकत में ना डालो, एहसान का तरीक़ा इख्तियार करो के अल्लाह मोहसिनों को पसंद करता है","अल्लाह की ख़ुशनुदी के लिए जब हज और उमरा की नियत करो तो उसे पूरा करो और अगर कहीं घिर जाओ (हिरासत में/रोका गया) तो जो कुर्बानी मुयस्सर आए अल्लाह की जनाब में पेश करो और अपने सर न मुंडो (मुंडो) जबतक के कुर्बानी अपनी जगह न पाहुंच जाए, मगर जो शक्स मेराज हो या जिसका सर में कोई तकलीफ हो और इस बिना पर अपना सर मुंडवा ले तो उसे चाहिए के फिदिये के तौर पर रोजे रखें या सदका दे या कुर्बानी करे, फिर अगर तुम्हें अमन नसीब हो जाए (और तुम हज से पहले मक्का पहुंच जाओ), तो जो शक्स तुम में से हज का जमाना आने तक उमर का फैसला उठाये वो हस्ब-ए-मकदूर (अफोर्ड कर सकते हैं) कुर्बानी दे, और अगर कुर्बानी मुयस्सर ना हो तो तीन रोजे हज के जमाने में और सात घर पहुंच कर, इस तरह पूरे दस रोजे रखले, ये रियात उन लोगों के लिए है जिनके घर बार मस्जिद ए हराम के करीब ना हो। अल्लाह के इन एहकाम की खिलाफ़-वारज़ी से बचो और ख़ूब जान लो के अल्लाह सख़्त सज़ा देने वाला है","हज के महीने में सबको मालूम है, जो शक्स इन मुक्क्कर महिनो में हज की नियत करे, उसे खबरदार रहना चाहिए के हज के दौरन में उसे कोई शेहवानी फेल (यौन) भोग) , कोई बढ़ा अमली, कोई लड़े झगड़े की बात सरज़ाद ना हो और जो नया काम तुम करोगे वो अल्लाह के इल्म में होगा। सफ़र ए हज के लिए ज़ाद ए राह (प्रावधान) साथ ले जाओ, और सबसे बेहतर ज़ाद ए राह (प्रावधान) परहेज़गारी है, पास ऐ होश-मंदों! मेरी नफ़रमानी से परहेज़ करो","और अगर हज के साथ-साथ तुम अपने रुब का फ़ज़ल (इनाम) भी तलाश करते जाओ तो इस्मे कोई मुज़हिक़ा नहीं, फिर जब अराफ़ात से चलो तो मशहरे हराम (मुज़दलिफ़ा) के पास ठहर कर अल्लाह को याद करो और हमें तरह याद करो करो, जिसकी हिदायत उसने तुम्हें दी है, वरना इसे पहले तुमलोग भटके हुए थे","फिर जहां से और सब लोग पलट-ते हैं वहीं से तुम भी पलटो और अल्लाह से माफ़ी चाहो, यकीनन वो माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","फिर जब अपने हज के अरकान अदा कर चुको, तो जिस तरह पहले अपने आबा ओ अजदाद का जिक्र करते थे, उसी तरह अब अल्लाह का जिक्र करो, बलके उसे भी बुरा (मगर अल्लाह को याद करने वाले लोगों में भी बहुत फर्क है) उन में से कोई तो ऐसा है, जो कहता है के ऐ हमारे रब हमें दुनिया ही में सब कुछ दे दे, ऐसे शक्स के लिए आख़िरत में कोई हिसा नहीं","और कोई कहता है के ऐ हमारे रब! हमने दुनिया में भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई, और आग के अज़ाब से हमें बचाया","ऐसे लोग अपनी कमाई के मुताबिक (दोनो जगह) हिसा पाएंगे और अल्लाह को हिसाब चुकाते कुछ देर नहीं लगती","ये गिनती के चांद रोज हैं, जो तुम्हें अल्लाह की याद में बसर करना चाहिए, फिर जो कोई जल्दी करके दो उसी दिन में वापस होगा तो कोई हर्ज नहीं, और जो कुछ देर ज्यादा ठहर कर पलटा तो भी कोई हर्ज नहीं बशारत ये दिन उसने तकवा के साथ बसर किये हो। अल्लाह की नफ़रमानी से बचो और ख़ूब जान रक्खो के एक रोज़ उसके हुज़ूर में तुम्हारी पेशी होने वाली है","इंसानों में कोई तो ऐसा है जिसकी बातें दुनिया की ज़िंदगी में तुम्हें बहुत अच्छी मालूम होती है, और अपनी नीक नियति पर वो बार-बार खुदा को गवाह ठहरता है, मगर हकीकत में वो बद्तरीन दुश्मन ए हक़ होता है","जब उसे इक्तेदार हासिल हो जाता है, तो ज़मीन में उसकी सारी दौड़ धूप होती है के फ़साद फैलाये, खेतों को गैरत करे और नाक ए इंसान को तबाह करे, हलाँके अल्लाह (जिसे वो गवाह बना रहा था) फसाद को हरगिज पसंद नहीं करता","और जब उसे कहा जाता है के अल्लाह से डर, तो अपने वकार का ख्याल उसको गुनाह पर जमा देता है, ऐसे शक्स के लिए तो बस जहन्नुम ही काफी है और वो बहुत बुरा ठिकाना है","दूसरी तरफ़ इंसानों ही में कोई ऐसा भी है जो रज़ा ए इलाही की तालाब में अपनी जान ख़पा देता है और ऐसे बंदों पर अल्लाह बहुत मेहरबान है","ऐ ईमान लाने वालों! तुम पूरे के पूरे इस्लाम में आ जाओ और शैतान की जोड़ी ना करो के वो तुम्हारा खुला दुश्मन है","जो साफ साफ हिदायत तुम्हारे पास आ चुकी है अगर उनको पा लेने के बाद फिर तुमने लग्ज़िश खायी, तो खूब जान रक्खो के अल्लाह सब पर गालिब और हकीम ओ दाना है","(सारी हिदायतों और हिदायतों के बाद भी लोग सीधे न हों तो) क्या अब वो इसके मुंतज़िर हैं के अल्लाह बादलों का चतर लगे फरिश्तों के परे साथ (स्वर्गदूतों की टोली के साथ बादलों की छतरियाँ) के लिए खुद सामने आ मौजूद हो और फैसला ही कर डाला जाए? आख़िर ए कार सारी मामलात पेश करने वाले अल्लाह ही के हुज़ूर होने वाले हैं","बानी इसराइल से पूछो: कैसी खुली खुली निशानियां हमने उन्हें दिखाई हैं (और फिर ये भी उनहिन से पूछ लो के) अल्लाह की नियामत पाने के बाद जो क़ौम इसको शिकावत (मनहूसियत) से बदलती है उसे अल्लाह कैसी सज़ा देता है","जिन लोगों ने कुफ्र की राह इख्तियार की है उनके लिए दुनिया की जिंदगी बड़ी मेहबूब ओ दिल पसंद बना दी गई है, ऐसे लोग ईमान की राह इख्तियार करने वालों का मजाक उड़ाते हैं, मगर कयामत के रोज़ परहेज़गार लोग ही उनके मुक़ाबले में आली मुक़ाम होंगे, राह दुनिया का रिज़क, तो अल्लाह को इख्तियार है जिसे चाहे बे-हिसाब दे","इब्तिदा में सब लोग एक ही तारीख पर थे (फिर ये हालात बाकी न रही और इख्तिलाफात रुनुमा हुए) तब अल्लाह ने नबी भेजे जो रस्त रावी पर बशारत देने वाले और कजरावी के नटाईज से डराने वाले थे, और उनके साथ किताब ए बार हक नाज़िल की ता-के हक़ के बारे में लोगों के दरमियान जो इख़्तिलाफ़ात रूनुमा हो गए थे उनका फ़ैसला करे। (और इख्तिलाफात के रूनुमा होने की वजह ये ना थी के इब्तिदा में लोगों को हक बताया नहीं गया था, नहीं) इख्तिलाफ उन लोगों ने किया जिन्होंने हक का इल्म दिया (जा) चूका था, उन्होन ने रोशन हिदायत पा लेने के बाद महज़ को हक़ को छोड़ दिया मुखतलिफ़ तारिके निकले के वो आपस में ज़्यादा करना चाहते थे, पास जो लोग अंबिया पर ईमान ले आए उनको अल्लाह ने अपने इज़ान से हमें हक़ का रास्ता दिखाया दिया जिसमें लोगों ने इख्तिलाफ़ किया था, अल्लाह जिसे चाहता है राह ए रास्ता दिखा देता है","फिर क्या तुम लोगन ने ये समझ रखा है कि यूंही जन्नत का आखिरी तुम्हें मिल जाएगा, हालांके अभी तुमपर वो सब कुछ नहीं गुजरा है जो तुमसे पहले ईमान लाने वालों पर गुजर चूका है? उन्पर साख्तियां गुजरी, मुसिबतें आई, हिला मारे गए, हत्ता के वक्त का रसूल और उसके साथी एहले ईमान चीख उठे के अल्लाह की मदद कब आएगी, हमें वक्त उन्हें तसल्ली दी गई के हां अल्लाह की मदद करीब है","लोग पूछते हैं कि हम क्या खर्च करते हैं? जवाब दो के जो माल भी तुम खर्च करो अपने वलियों पर, रिश्तों पर, यतीमो और मिस्कीनो और मुसाफिरों पर खर्च करो और जो भलाई भी तुम करोगे, अल्लाह उससे ब-खबर होगा","तुम्हें जंग का हुक्म दिया गया है और वो तुम ना-गवार हो, हो हो सकता है कि एक चीज तुम्हें पसंद हो और वही तुम्हारे लिए बुरी हो। अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते","लोग पूछते हैं माह ए हराम में लाना कैसा है? कहो: इसमें लड़ना बहुत बुरा है, मगर राह ए खुदा से लोगों को रोकना और अल्लाह से कुफ्र करना और मस्जिद ए हरम का रास्ता खुदा परस्तों पर बंद करना और हरम के रहने वालों को वहां से निकलना अल्लाह के नाजदीक इससे भी ज्यादा बुरा है और फितना खून-रेजी से छायादार-तार है. वो तो तुमसे लड़े ही जाएंगे हटा के अगर उनका बस चले तो तुम्हें इस दीन से फेर ले जाएं (और ये खूब समझलो के) तुम में से जो कोई इस दीन से फिरेगा और कुफ्र की हालत में जान देगा, उसके अमाल दुनिया और आखिरी दोनों में जया हो जाएगी, ऐसे सब लोग जहन्नुमी हैं और हमेशा जहन्नुम ही में रहेंगे","बा-खिलाफ इसके जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्होन ने खुदा की राह में अपना घर बार छोड़ा और जिहाद किया है, वो रहमत ए इलाही के जायज़ उम्मेदवार हैं और अल्लाह उनकी लग्ज़िशों को माफ़ करने वाला और अपना रहमत से उन्हें नवाज़ने वाला है","पूछते हैं: शराब और जुवे (जुआ) का क्या हुकुम है? कहो: दोनों चीज़ों में बड़ी ख़राबी है अगर इनमें लोगों के लिए कुछ मुनाफ़े भी है, मगर उनका गुनाह उनके फ़ायदे से बहुत ज़्यादा है। पूछते हैं: हम राह ए खुदा में क्या खर्च करें? कहो: जो कुछ तुम्हारी ज़रूरत से ज्यादा हो, क्या वह अल्लाह तुम्हारे लिए साफ-साफ एहकाम बयान करता है, शायद के तुम दुनिया और आख़िरत दोनों की फ़िक्र करो","पूछते हैं: यतीमों के साथ क्या मामला किया जाए? कहो: जिस तर्ज़ ए अमल में उनके लिए भलाई हो वही इख्तियार करना बेहतर है। अगर तुम अपना और उनका खर्च और रहना सहना मुश्तारिक (मिक्स) रख्खो तो इसमें कोई मुजाहिका नहीं, आखिर वो तुम्हारे भाई बंद ही तो हैं। बुराई करने वाले और भलाई करने वाले दोनों का हाल अल्लाह पर रोशन है, अल्लाह चाहता है तो इस मामले में तुमपर शक्ती करता, मगर वो साहब ए इख्तियार होने के साथ साहिब ए हिकमत भी है","तुम मुशरिक औरतों से हरगिज़ निकाह ना करना जब तक के वो ईमान ना ले आइए, एक मोमिन लौंडी (गुलाम) मुशरिक शरीफ-जादी से बेहतर है अगरचे वो तुम्हें बहुत पसंद हो, और अपनी औरतों के निकाह मुशरिक मर्दों से कभी न करना जब तक के वो ईमान न ले आएं। एक मोमिन गुलाम मुशरिक शरीफ से बेहतर है अगर वो तुम्हें बहुत पसंद हो। ये लोग तुम्हें आग की तरफ बुलाते हैं और अल्लाह अपने इज़ान से तुमको जन्नत और मगफिरत की तरफ बुलाता है, और वो अपना एहकाम वाजे तौर पर लोगों के सामने बयान करता है, तवक्कू है के वो सबक लेंगे और हिदायत कबूल करेंगे","पूछते हैं: हैज़ का क्या हुक्म है? कहो: वो एक गंदगी की हालत है, इसमें औरतों से अलग रहो और उनके करीब ना जाओ, जब तक के वो पाक साफ ना हो जाए, फिर जब वो पाक हो जाए तो उनके पास जाओ उस तरह जैसा के अल्लाह ने तुमको हुकुम दिया है, अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो गुनाहों से बाज आता है। राहें और पाकीज़गी इख्तियार करें","तुम्हारी औरतें तुम्हारी खेतियाँ हैं, तुम्हें इख्तियार है जिस तरह चाहो अपनी खेती में जाओ, मगर अपने मुस्तकबिल की फ़िक्र करो और अल्लाह की नाराज़गी से बचो। ख़ूब जान लो के तुम्हें एक दिन उससे मिलना है। और (ऐ नबी)! जो तुम्हारी हिदायत को मान लें उन्हें फलाह ओ सआदत का मुस्दा (खुशखबरी) सुना दो","अल्लाह के नाम को ऐसी कसमें खाने के लिए इस्तमाल न करो जिनसे मकसूद नेकी और तकवा और बंदगान ए खुदा की भलाई के कामोनों से बाज़ रहना हो। अल्लाह तुम्हारी सारी बातें सुन रहा है और सब कुछ जानता है","जो बे-मानी कसमें तुम बिला इरादा खा लिया करते हो, लेकिन अल्लाह गिरफ़्तार नहीं करता, मगर जो कसमें तुम सच्चे दिल से खाते हो उनकी बाज़पुर्स वो ज़रूर करेगा। अल्लाह बहुत दरगुज़ार करने वाला और बर्दबार (सहिष्णु) है","जो लोग अपनी औरतों से ताल्लुक न रखें की कसम खा बैठे हैं उनके लिए चार महीने की मोहलत है, अगर उन्होन ने रूजू करलिया तो अल्लाह माफ करने वाला और रहीम है","और अगर उन्हें तलाक ही दिया जाए तो जाने रहें के अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है","जिन औरतों को तलाक दे गई हो वो तीन मरतबा अयाम ए माहवारी आने तक अपने आप को रोके रखें और उनके लिए ये जायज नहीं है के अल्लाह ने उनके रहम (गर्भ) में जो कुछ ख़ल्क (पैदा) फरमाया हो उसे छुपाएं। उन्हें हरगिज़ ऐसा ना करना चाहिए अगर वो अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखता है। उनके शोहर तालुकात दुरुस्त कार्लें पर अमादा हों तो वो इस इद्दत के दौरन में उन्हें फिर अपनी ज़वजियात में वापस ले लेने के हक़दार हैं। औरतों के लिए भी मारूफ़ तारीख़ पर वैसे ही हुकूक़ हैं जैसे मर्दों के हुकूक़ अपर हैं। अलबत्ता मर्दों को उनपार एक दरजा हासिल है और सब पर अल्लाह गालिब इक्तेदार रखने वाला और हकीम ओ दाना मौजूद है","तलाक दो बार है, फिर या तो सीधी तरह औरत को रोक लिया जाए या भले तारिके से उसको रुखसत कर दिया जाए, और रुखसत करते हुए ऐसा करना तुम्हारे लिए जायज़ नहीं है के जो कुछ तुम उन्हें दे चुके हो, उसमें से कुछ वापस लेलो, अलबत्ता ये सूरत मुस्तसना है के ज़वजैन को अल्लाह के हुदूद पर क़याम न रह सके का अंदेशा हो, ऐसी सूरत में अगर तुम ये खौफ हो के वो डोनो हुदूद ए इलाही पर क़याम न रहेंगे, तो उन दोनों के दरमियान ये मामला हो जाने में मुज़हिक़ा नहीं के औरत अपने शहर को कुछ मुआवाज़ा देकर अलैदागी (अलगाव) हासिल करले, ये अल्लाह के मुकर्रर करदा हुद्दोद हैं, इनसे तजावुज़ ना करो, और जो लोग हुदूद ए इलाही से तजावुज करें वही जालिम हैं","फिर अगर (दो बार तलाक देने के बाद शहर ने औरत को तीसरी बार) तलाक दे दी तो वो औरत फिर उसके लिए हलाल ना होगी, इल्ला ये के उसका निकाह किसी दूसरे शक्स से हो और वो उसे तलाक देदे, तब अगर पहला शोहर और ये औरत दोनों ये ख़याल करें के हुदूद ए इलाही पर क़याम रहेंगे, तो उनके लिए एक दूसरे की तरफ़ रूज़ू कार्लें में कोई मुज़हिक़ा नहीं। ये अल्लाह की मुकर्रर करदा हदें हैं जिन्होनें वो उन लोगों की हिदायत के लिए वाजे कर रहा है जो (उसकी हुदूद को तोड़ने का अंजाम) जानते हैं","और जब तुम औरतों को तलाक दे दो और उनकी इद्दत पूरी होने को आ जाए, तो हां भले तरीक़े से उन्हें रोक लो या भले तरीक़े से रुखसत करदो, मेहज़ सताने की खातिर उन्हें ना रोके रखना, ये ज़्यादा होगी, और जो ऐसा करेगा वो डर हकीकत आप अपना ही ऊपर ज़ुल्म करेंगे। अल्लाह की आयत का खेल न बनाओ, भूल न जाओ के अल्लाह ने किस नियामत ए उज्मा से तुम्हें सरफराज किया है, वो तुम्हें हिदायत करता है के जो किताब और हिकमत उसने तुमपर नाज़िल की है, उसका एहतराम मल्हूज़ रख्खो। अल्लाह से डरो और खूब जान लो के अल्लाह को हर बात की खबर है","जब तुम अपनी औरतों को तलाक दे चुको और वो अपनी इद्दत पूरी कर लें, तो फिर इसमें माने ना हो के वो अपने दूसरे ताजवीज शोहरों से निकाह कर लें, जब के वो मारूफ तारीख से बहम मुनकीहत (शादी) पर राजी हों। तुम्हें हिदायत की जाती है कि ऐसी हरकत हरगिज़ न करना अगर तुम अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान लाने वाले हो, तुम्हारे लिए शाइस्ता और पाकीज़ा तरीक़ा यहीं है के इसी बाज़ रहो। अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते","जो बाप चाहता हो कि उनकी औलाद पूरी मुद्दत ए रजात तक दूध पिए, तो मांएं (माताओं) अपने बच्चों को कामिल दो साल दूध पिलाएं। क्या सूरत में बच्चे के बाप को मारूफ तारीख़ से उनको खाना, कपड़ा देना होगा। मगर किसी पर उसकी परेशानी से बुरा हक बार ना डालना चाहिए, ना तो मां को इस वजह से तकलीफ में डाला जाए के बच्चा उसका है, और ना बाप ही को इस वजह से तंग किया जाए के बच्चा उसका है। दूध पिलाने वाली का ये हक़ जैसा बच्चे के बाप पर है वैसा ही उसके वारिस पर भी है, लेकिन अगर फ़रीक़ैन बहामी रज़ामंडी और मैशवेयर से दूध छुड़ाना चाहिए तो ऐसा करने में कोई मुज़हिक़ा नहीं, और अगर तुम्हारा ख्याल अपनी औलाद को कोई गैर औरत से दूध पिलाने का हो, तो इसमें भी कोई हर्जा नहीं बशारत ये के इसका जो कुछ मुआवजा (मुआवजा) ताई करो, वो मारूफ तारीख पर अदा करदो। अल्लाह से डरो और जान रक्खो के जो कुछ तुम करते हो, सब अल्लाह की नजर में है","तुम में से जो लोग मर जाएंगे, उनके पीछे अगर उनकी बीवीयां जिंदा होंगी, तो वो अपने आप को चार महीने दस दिन रोके रखेंगे, फिर जब उनकी इद्दत पूरी हो जाए, तो उन्हें इख्तियार है अपनी जात के मामले में मारूफ तारीख़ से जो चाहें करें तुमपर इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं। अल्लाह तुम सब के आमाल से बख़बर है","ज़माना ए इद्दत में ख्वा तुम उन बेवा औरतों के साथ मंगनी की इरादा इशारे कनयी में जाहिर करदो, ख्वा दिल में छुपाये रक्खो, दोनों सूरतों में कोई मुज़हिक़ा नहीं। अल्लाह जानता है कि उनका ख्याल तो तुम्हारे दिल में आएगा ही मगर देखो! खुफिया (छिपा हुआ) अहद ओ पैमान न करना अगर कोई बात करनी है तो मारूफ तारीख से करो और अकद ए निकाह बांधने का फैसला हमें वक्त तक न करो जब तक के इद्दत पूरी न हो जाए, खूब समझ लो के अल्लाह तुम्हारे दिलों का हाल तक जानता है, लिहाजा उसे डरो और ये भी जान लो के अल्लाह बर्दबार है, छोटी छोटी बातों से दरगुजर फरमाता है","तुमपर कुछ गुनाह नहीं, अगर तुम अपनी औरत को तलाक दे दो कबूल इसके के हाथ लगाने की नौबत आए या मेहर मुकर्रर हो, इस सूरत में उन्हें कुछ ना कुछ देना जरूर चाहिए. ख़ुश हाल आदमी अपनी मक़दरत के मुताबिक़ और ग़रीब अपनी मक़दरत के मुताबिक़ मारूफ़ तारीख़ से दे, ये हक़ है नए आदमियों पर","और अगर तुमने हाथ लगाने से पहले तलाक दी हो, लेकिन मेहर मुकर्रर किया जा चुका हो, तो हमें सूरत में निस्फ (आधा) मेहर देना होगा, ये और बात है के औरत नरमी बरते (और मेहर ना ले) या वो मर्द जिसका इख्तियार में अकद ए निकाह है, नरमी से काम ले (और पूरा मेहर दे दे), और तुम (यानी मर्द) नरमी से काम लो तो ये तकवा से ज्यादा मुनासिबत रखा है, आपस में मामलात में फैयाज़ी को ना भूलो, तुम्हारे अमल को अल्लाह देख रहा है","अपनी नमाज़ों की निगेहदाश्त रक्खो, ख़ुसूसन ऐसी नमाज़ की जो मोहासन सलावत की जामे (मध्य प्रार्थना) हो। अल्लाह के आगे इस तरह खड़े हो जैसे फरमाबरदार गुलाम खड़े हो गए हैं","बाढ़-अमानी की हालत हो, तो ख्वा पेदल हो, ख्वा सवार, जिस तरह मुमकिन हो नमाज पढ़ो और जब अमन मयस्सर आ जाए तो अल्लाह को उस तारीख से याद करो जो उसने तुम्हें सिखाया है, जिसने तुम पहले ना-वाक़िफ़ थे","तुम में से जो लोग वफ़ात पाएं और पीछे बीवीयां छोड़ रहे हों, उनको चाहिए के अपनी बीवीयों के हक़ में ये वसीयत कर जाएं के एक साल तक उनको नान-ओ-नफ़ाका (रखरखाव) दिया जाए और वो घर से ना निकली जायें. फिर अगर वो खुद निकल जाए तो अपनी जात के मामले में मारूफ तारीख से वो जो कुछ भी करें उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। अल्लाह सब पर गालिब इक्तेदार रखने वाला और हकीम ओ दाना है","इसी तरह जिन औरतों को तलाक दी गई हो, उन्हें भी मुनासिब तौर पर कुछ न कुछ दे कर रुखसत किया जाए, ये हक है मुत्तकी लोगों पर","इस तरह अल्लाह अपने एहकाम तुम्हें साफ साफ़ बताता है, उम्मीद है के तुम समझ बूझ कर काम करो","तुमने उन लोगों के हाल पर भी कुछ गौर किया, जो मौत के डर से अपने घर बार छोड़ कर निकले थे और हज़ारों की ताड़ाद में थे? अल्लाह ने उनसे फरमाया: मर जाओ, फिर हमने उनको दोबारा जिंदगी बख्शी, हकीकत ये है के अल्लाह इंसान पर बड़ा फजल फरमान वाला है मगर अक्सर लोग शुक्र अदा नहीं करते","(मुसलमानो)! अल्लाह की राह में जंग करो, और ख़ूब जान रक्खो के अल्लाह सुनने वाला और जाने वाला है","तुम में कौन है जो अल्लाह को क़र्ज़ ए हसन (अच्छा ऋण) दे ता-के अल्लाह उसे कोई गुनाह बढ़ा कर वापस करे? घाटना भी अल्लाह के इख्तियार में है और बदन भी, और उसकी तरफ तुम्हें पलट कर जाना है","फिर तुमने उस मामले पर भी गौर किया, जो मूसा के बाद सरदारन ए बानी इजराइल को पेश आया था? उनहों ने अपने नबी से कहा: हमारे लिए एक बादशाह मुकर्रर करदो ता-के हम अल्लाह की राह में जंग करें, नबी ने पूछा: कहीं ऐसा तो न होगा के तुमको लड़ाई का हुकुम दिया जाए और फिर तुम न लड़ो? वो कहने लगे: भला ये कैसे हो सकता है कि हम राह ए खुदा में ना लड़ें, जबके हमने अपने घरों से निकल दिया है और हमारे बाल बच्चे हमसे जुदा कर दिए गए हैं? मगर जब उनको जंग का हुकुम दिया गया तो एक कलील तड़ाद के सिवा वो सब पीठ मोड़ गए, और अल्लाह उनमें से एक एक जालिम को जानता है","उनके नबी ने उन्हें कहा के अल्लाह ने तालुत को तुम्हारे लिए बादशाह मुकर्रर किया है, ये सुनकर वो बोले: \"हमपर बादशाह बनने का वो कैसे हक़दार होगा? उसके मुकाबले में बादशाही के हम ज़्यादा मुस्तहक़ हैं, वो तो कोई बड़ा मालदार आदमी नहीं है\"। नबी ने जवाब दिया: \"अल्लाह ने तुम्हारे मुक़ाबले में उसे मुंतख़ब किया है और उसको दिमाग़ी ओ जिस्मानी दोनों किस्मत की एहलियातें फ़रावानी के साथ अता फरमाई हैं और अल्लाह को इख्तियार है के अपना मुल्क जिसे चाहे दे, अल्लाह बदी वुसत रखता है और सब कुछ उसके इल्म में है\"","इसके साथ उनके नबी ने उनको ये भी बताया के \"खुदा की तरफ से उसके बादशाह मुकर्रर होने की अलामत ये है के उसके अहद में वो संदूक तुम्हें वापस मिल जाएगा, जिसमें तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे लिए सुकून ए क़ल्ब का सामान\" है, जिसमें आले मूसा और आले हारून के छोड़े हुए तबर्रुकात हैं, और जिसको इस वक्त फरिश्ते संभाले हुए हैं अगर तुम मोमिन हो, तो ये तुम्हारे लिए बहुत बड़ी निशानी है","फिर जब तलुत लस्कर लेकर चला, तो उसने कहा: \"एक दरिया पर अल्लाह की तरफ से तुम्हारी आजमाइश होने वाली है, जो उसका पानी पिएगा, वो मेरा साथी नहीं। मेरा साथी सिर्फ वो है जो उसे प्यास न बुझाए, हां एक आधा चिल्लू कोई पेशाब ले तो पेशाब ले। जालूथ (गोलियाथ) और उसके लश्करों का मुकाबला करने की ताक़त नहीं है, लेकिन जो लोग ये समझते थे के उनको एक दिन अल्लाह से मिलना है, उनको ने कहा: “बारहा ऐसा हुआ है के एक कलील गिरो, अल्लाह के इज़ान से एक बड़े गिरोह पर गालिब आ गया है, अल्लाह सब्र करने वालों का साथी है।”","और जब वो जलूथ और उसके लश्करों के मुक़ाबले पर निकले तो उन्होन ने दुआ की: \"ऐ हमारे रब हमपर सब्र का फ़ैज़ान कर, हमारे क़दम जमा दे और इस काफ़िर गिरो ​​पर हमें फ़तह नसीब कर।\"","आख़िर ए कार अल्लाह के इज़ान से उन्होन ने काफ़िरों को मार डाला और दाऊद ने जालुथ को क़त्ल कर दिया और अल्लाह ने उसे सल्तनत और हिकमत से नवाजा और जिन चीज़ों का चाहा उसको इल्म दिया, अगर इस तरह अल्लाह इंसानों के एक गिरोह को दूसरे गिरोह के ज़रिये से हटाता ना रहता, तो ज़मीन का निज़ाम बिगाड़ जाता, लेकिन दुनिया के लोगों पर अल्लाह का बड़ा फ़ज़ल है (के वो इस तरह दफ़े फ़साद का इंतेज़ाम करता रहता है)","ये अल्लाह की आयत हैं जो हम ठीक ठीक तुमको सुना रहे हैं और तुम यकीनन उन लोगों में से हो जो रसूल बना कर भेजे गए हैं","ये रसूल (जो हमारी तरफ से इंसानों की हिदायत पर मामूर हुए) हमने उनको एक दूसरे से बढ़ चढ़ कर मरताबे अता किया, उनमें कोई ऐसा था जिसका खुदा खुद हम-कलाम हुआ, किसी को उसने दूसरी जिंदगी से बुलंद दर्जे दिए, और आखिर में ईसा इब्न-मरियम को रोशन निशानियां अता की और रूह ए पाक से उसकी मदद की, अगर अल्लाह चाहता तो मुमकिन ना था के रसूलों के बाद में जो लोग रोशन निशानियां देख चुके थे वो आपस में लड़ते, मगर (अल्लाह की मशियत ये ना थी के वो लोगों को जबरान इख्तिलाफ से) रोके, इस वजह से) उन्होन ने बहम इख्तिलाफ किया, फिर कोई ईमान लाया और किसी ने कुफ्र की राह इख्तियार की, हां, अल्लाह चाहता तो वो हरगिज ना लड़ते, मगर अल्लाह जो चाहता है करता है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जो कुछ माल माता हमने तुमको बक्शा है, उसमें से ख़र्च करो, क़ब्ल इसके के वो दिन आए जिसमें न ख़त्म ओ फ़रोख़्त होगी, न दोस्ती काम आएगी और न सिफ़ारिश चलेगी और ज़ालिम असल में वही हैं जो कुफ़्र की रवीश इख्तियार करते हैं","अल्लाह वो ज़िंदा ए जावेद (हमेशा रहने वाली) हस्ती है, जो तमाम कायनात को संभाले हुए है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, वो ना सोता है और ना उसे लंबी लगती है, जमीन और आसमान में जो कुछ है उसका है, कौन है जो उसके जनाब में उसकी इज्जत के बिना सिफ़ारिश कर सके? जो कुछ बंदों के सामने है उसे भी वो जानता है और जो कुछ उन्हें ओझल है उसे भी वो वाक़िफ़ है, और उसकी मालूमात में से कोई चीज़ उनकी गिरफ़्तार ए इद्राक में नहीं आ सकती इल्ला ये के किसी चीज़ का इल्म वो खुद ही उनको देना चाहिए, उसकी हुकुमत अस्मानो और ज़मीन पर चाय हुई है और उनकी निगाहबानी उसके लिए कोई थका देने वाला काम नहीं है, बस वही एक बुज़ुर्ग ओ बरतर जात है","दीन के मामले में कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं है, सही बात गलत ख़यालत से अलग चांट कर रख दी गई है, अब जो कोई तागूत का इंकार करके अल्लाह पर ईमान ले आया, उसने एक ऐसा मजबूत सहारा थाम लिया जो कभी टूटने वाला नहीं, और अल्लाह (जिसका सहारा उसने लिया है) सब कुछ सुनने और जाने वाला है","जो लोग ईमान लाते हैं, उनका हमी ओ मददगार अल्लाह है और वो उनको तरीकियों (और यहां) से रोशनी में निकल लाता है और जो लोग कुफ्र की राह इख्तियार करते हैं उनके हामी ओ मददगार तागुत हैं और वो उन्हें रोशनी से तारीखों की तफफ खींच ले जाते हैं, ये आग में जाने वाले लोग हैं जहां ये हमेशा रहेंगे","क्या तुम हमें बताओ शक्स के हाल पर गौर नहीं किया जिसने इब्राहिम से झगड़ा किया था? झगड़ा इस बात पर है कि इब्राहिम का रुब कौन है, और इस बिना पर हमारे शक्स को अल्लाह ने हुकूमत दे रखी थी। जब इब्राहिम ने कहा के \"मेरा रब वो है, जिसका इख्तियार में जिंदगी और मौत है, तो उसने जवाब दिया: \"जिंदगी और मौत मेरे इख्तियार में है\" इब्राहिम ने कहा: \" अच्छा, अल्लाह सूरज को मशिर्क से निकलता है, तू जरा उसे मगरिब से निकाल ला\"। ये सुनकर वो मुनकिर ए हक्क शश्तर (आश्चर्यचकित) रह गया, मगर अल्लाह ज़ालिमों को राह ए रस्त नहीं दिखाया करता","हां फिर मिसाल के तौर पर उस लड़के को देखो जिसका गुजर एक ऐसी बस्ती पर हुआ जो अपनी छतों पर औंधी गिरी पड़ी थी। उसने कहा: \"ये आबादी, जो हलाक हो चुकी है, इसी अल्लाह किस तरह दोबारा जिंदगी बख्शेगा?\" इस्पर अल्लाह ने उसकी रूह क़ब्ज़ करली और वो सौ (सौ) बरस तक मुर्दा पड़ा रहा, फिर अल्लाह ने उसे दोबारा जिंदगी बख्शी और उससे पूछा: \"बताओ, कितनी मुद्दत पैदा रहे हो?\" उसने कहा: \"एक दिन या चाँद घंटे रहेगा\"। फरमाया: “तुम्हारे सौ बरस इसी हालत में गुजर चुके हैं, अब जरा अपने खाने और पानी को देखो के इसमे जरा तगय्यूर (परिवर्तन) नहीं आया है, दूसरी तरफ जरा अपने गधे (गधे) को भी देखो [के इसका पंजर (कंकाल) तक बोसीदा (सड़) हो रहा है] और ये हमने इसलिए किया है कि हम तुम्हें लोगों के लिए एक निशानी बना देना चाहते हैं, फिर देखो के हड्डियों के इस पंजर (कंकाल) को हम किस तरह उठा कर गोश्त पोश्ट इसपर चढ़ाते हैं। इस तरह जब हकीकत उसके सामने बिल्कुल नुमायन हो गई, तो उसने कहा: \"मैं जानता हूं के अल्लाह हर चीज पर क़ुदरत रखता है\"","और वो वाकिया भी पेश ए नज़र रहे, जब इब्राहिम ने कहा था के: \"मेरे मालिक, मुझे दिखा दे तू मुर्दों को कैसे ज़िंदा करता है\" फ़रमाया: “क्या तू ईमान नहीं रखता?” उसने अर्ज़ किया \"ईमान तो रखता हूं, मगर दिल का इत्मीनान अंधेरा है\", फरमाया: \"अच्छा तो चार परिंदे ले और उनको अपने से मानो (झुकाव/तम) कार्ले फिर उनका एक जज (भाग) एक एक पहाड़ पर रखदे फिर उनको पुकार, वो तेरे पास दौड़े चले आएंगे, खूब जान ले के अल्लाह निहायत बा इक्तेदार और हकीम है”","जो लोग अपने माल अल्लाह की राह में सिर्फ (खर्च) करते हैं, उनके खर्च की मिसाल ऐसी है, जैसे एक दाना बोया (सो) जाए और उसके सात (सात) बालें निकलें और हर बाल में सौ (सौ) दानी होन, इसी तरह अल्लाह जिसका अमल चाहता है अफज़ोनी (मैनिफोल्ड/ज्यादा) अता फरमाता है, वो फराग दस्त (सर्व-गले लगाने वाला) भी है और अलीम भी","जो लोग अपने माल अल्लाह की राह में खर्च करते हैं और खर्च करके फिर एहसान नहीं जाते ना दुख देते हैं, उनका अजर उनके रुब के पास है और उनके लिए कोई रांझ और खौफ का मौका नहीं","एक मीठा बोल और कोई नगावार बात पर जरा सी खाई पोशी (सहनशीलता) हमें खैरात से बेहतर है, जिसके पीछे दुख हो। अल्लाह बे-नियाज़ है और बर्दबारी (सहिष्णु) उसकी सिफ़त है","ऐ ईमान लाने वालों! अपने सदाकत को एहसान जता कर और दुख देकर उस शक्स की तरह खाख में ना मिला दो, जो अपना माल महज़ लोगों के दिखाने को खर्च करता है और ना अल्लाह पर ईमान रखता है ना आख़िरत पर, उसके खर्च की मिसाल ऐसी है जैसी एक चट्टान (रॉक) थी, जिसपर मिट्टी की तह जमी हुई थी, इसपर जब जोर का मेह (बारिश) बरसा, तो सारी मिट्टी भी गई और साफ चट्टानों की चट्टानें रह गईं, ऐसे लोग अपने नाजदीक खैरात करके जो नेकी कमाते हैं, उसमें कुछ भी उनके हाथ नहीं आता, और काफिरों को सीधी राह दिखाना अल्लाह का दस्तूर नहीं है","बख़िलाफ़ इसके जो लोग अपने माल महज़ अल्लाह की रजा-जोई के लिए दिल के पूरे सबात ओ करार (एकल दिमाग वाले) के साथ खर्च करते हैं, उनके खर्च की मिसाल ऐसी है, जैसे कोई सताए मरतफा (पठार) पर एक बाग हो, अगर ज़ोर की बारिश हो जाए तो डुगुना (दो गुना) फल लाए, और अगर जोर की बारिश ना भी हो तो एक हल्की बारिश (हल्की बौछार) हाय उसके लिए काफी हो जाए, तुम जो कुछ करते हो, सब अल्लाह की नजर में है","क्या तुम में से कोई ये पसंद करता है के उसके पास एक हरा भरा बाग हो, नेहरोन से सैराब, खजूरों और अंगूरों और हर क़िस्म के फूलों से लड़ा हुआ, और वो ऐन हमें वक़्त एक तेज़ बवंडर (उग्र बवंडर) की ज़र्द में आकर झूलस जाए, जबके वो खुद बूढ़ा हो और उसके कमसिन (छोटा) बच्चे अभी कोई लायक ना हो? इस तरह अल्लाह अपनी बातें तुम्हारे सामने बयान करता है, शायद तुम गौर ओ फिक्र करो","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जो माल तुमने कमाए हैं और जो कुछ हमने जमीन से तुम्हारे लिए निकाला है, उसमें से बेहतर हिसा राह ए खुदा में खर्च करो, ऐसा ना हो के उसकी राह में देने के लिए बुरी से बुरी चीज चांटने (पिक आउट) की कोशिश करने लगो, हलांके वही चीज अगर कोई तुम्हें दे तो तुम उसे लेना गवारा ना करोगे इल्ला ये के इसको कबूल करने में तुम इग्माज़ (तिरस्कार) बरात जाओ, तुम्हें जान लेना चाहे के अल्लाह बे-नियाज़ है और बेहतरीन सिफ़ात से मुत्तसिफ़ है","शैतान तुम्हें मुफ़लिसी (गरीबी) से डराता है और शर्मनाक तर्ज़-ए-अमल इख्तियार करने की तरजीब देता है, मगर अल्लाह तुम्हें अपनी बख्शीश और फ़ज़ल की उम्मीद दिलाती है, अल्लाह बदा फराग-दस्त और दाना है","जिसको चाहता है हिकमत अता करता है, और जिसको हिकमत (बुद्धि) मिली उसे हकीकत में बड़ी दौलत मिल गई, बातों से सिर्फ वही लोग सबक लेते हैं जो दानिशमंद हैं","तुमने जो कुछ भी खर्च किया हो और जो नजर भी मानी हो, अल्लाह को उसका इल्म है, और जालिमों का कोई मददगार नहीं","अगर अपने सदकात ऐलान (खुले तौर पर) करो तो ये भी अच्छा है, लेकिन अगर छुपा कर हाजत-मंदों को दो तो ये तुम्हारे हक में ज्यादा बेहतर है, तुम्हारी बहुत सी बुराइयां तर्ज ए है अमल से मेह्व (प्रायश्चित) हो जाती है। और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह को बाहर हाल उसकी खबर है","लोगों को हिदायत बख्श देने की जिम्मेदारी नहीं है, अल्लाह को हिदायत हाय जिसे चाहता है बख्शता है और खैरात में जो माल तुम खर्च करते हो वो तुम्हारे अपने लिए भला है, आखिर तुम इसी लिए तो खर्च करते हो के अल्लाह की रजा हासिल हो, तो जो कुछ माल तुम खैरात में खर्च करोगे उसका पूरा पूरा अजर तुम्हें दिया जाएगा और तुम्हारी हक तलफी हरगिज ना होगी","खास तौर पर मदद के मुस्तहिक से तंगदस्त लोग हैं जो अल्लाह के काम में ऐसे घिर गए हैं कि अपनी जाति कस्बे-ए-माश (आजीविका) के लिए जमीन में कोई दौड़-धूप नहीं कर सकता। उनकी खुद्दारी देख कर नवाज़ीफ आदमी गुमान करता है के ये ख़ुश-हाल हैं, तुम उनके चेहरों से उनकी अंदरुनी हालत पहचान सकते हो मगर वो ऐसे लोग नहीं हैं के लोगों के पीछे पढ़ कर कुछ माँगें। उनकी इयानत में जो कुछ माल तुम खर्च करोगे वो अल्लाह से पोशीदा ना रहेगा","जो लोग अपने माल शब-ओ-रोज़ खुले और छुपे खर्च करते हैं उनका अजर उनके रब के पास है और उनके लिए कोई खौफ और रांझ का मुकाम नहीं","मगर जो लोग सूद (सूदखोरी) खाते हैं, उनका हाल उस शक्स का सा होता है, जिसे शैतान ने छू कर बावला (दीवाना) कर दिया है और इस हालात में उनको मुब्तिला होने की वजह ये है कि वो कहते हैं: \"तिजारत भी तो आखिर सूद ही जैसी चीज है\", हालंके अल्लाह ने तिजारत को हलाल किया है और सूद को हराम। लिहाजा जिस शक्स को उसके रब की तरफ से ये हिदायत पाहुंचे और आंदा के लिए वो सूद-खोरी से बाज़ आ जाए, तो जो कुछ वो पहले खा चुका, सो खा चुका, उसका मामला अल्लाह के हवाले है और जो इस हुक्म के बाद फिर इसी हरकत का इरादा (दोहराना) करे, तो जहन्नामी है, जहां वो हमेशा रहेगा","अल्लाह सूद का मत्था मार देता है (सभी आशीर्वादों के ब्याज से वंचित करता है) और सदकात को नाशो नुमा देता है, और अल्लाह किसी नाशुक्रे बध-अमल इंसान को पसंद नहीं करता","हां, जो लोग ईमान ले आयें और नेक अमल करें और नमाज कयाम करें और जकात दें, उनका अजर बहस उनके रुब के पास है और उनके लिए कोई खौफ और रांझ का मौका नहीं","ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, खुदा से डरो और जो कुछ तुम्हारा सूद लोगों पर बाकी रह गया है उसे छोड़ दो, अगर हकीकत तुम ईमान लाए हो","लेकिन अगर तुमने ऐसा ना किया, तो आगाह हो जाओ के अल्लाह और उसके रसूल की तरफ से तुम्हारे खिलाफ एलान-ए-जंग है। अब भी तौबा करलो (और सूद चोद दो) तो अपना असल सरमाया लेने के तुम हक़दार हो, ना तुम ज़ुल्म करो, ना तुमपर ज़ुल्म किया जाए","तुम्हारा क़र्ज़दार तंगदस्त हो, तो हाथ खुलने तक उसे मोहलत दो, और जो सदका करदो तो ये तुम्हारे लिए ज़्यादा बेहतर है, अगर तुम समझो","उस दिन की रुसवेई ओ मुसीबत से बचो, जबके तुम अल्लाह की तरफ वापस होंगे, वहां हर शक्स को उसकी कमाई हुई नेकी या बड़ी का पूरा बदला मिल जाएगा और किसी पर ज़ुल्म हरगिज़ ना होगा","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब किसी मुकर्रर मुद्दत के लिए तुम आपस में क़र्ज़ का लें दीन करो तो उसे लिख लिया करो। फ़रीक़ैन के दरमियान इन्साफ़ के साथ एक शक्स दस्तावेज़ (दस्तावेज़) तहरीर करे। जिसे अल्लाह ने लिखा पढ़ने की काबिलियत बख्शी हो, उसे लिखने से इंकार न करना चाहिए। वो लिखे और इम्ला (हुक्म) वो शक्स कराए जिसपर हक़ आता है (यानी क़र्ज़ लेने वाला), और उसे अल्लाह, अपने रब से डरना चाहिए के जो मामला ताई हो उसमें कोई कमी बेशी ना करे। लेकिन अगर क़र्ज़ लेने वाला खुद नादाँ या ज़ईफ़ हो, या इमला ना करा सकता हो, तो उसका वली इन्साफ के साथ इमला कराये, फिर अपने मर्दों में से दो आदमियों की इसपर गवाही करालो और अगर दो मर्द ना हो तो एक मर्द और दो औरतें हो, ता-के एक भूल जाये तो दूसरी उसे याद दिला दे। ये गवाह ऐसे लोगों में से होनी चाहिए जिनकी गवाही तुम्हारे दरमियान मकबूल हो। गवाहों को जब गवाह बनने के लिए कहा जाए, तो उन्हें इंकार न करना चाहिए। मामला ख़्वा छोटा हो या बड़ा, मियाद की तैं (निर्दिष्ट अवधि) के साथ उसकी दस्तावेज़ (दस्तावेज़) लिखवा लेने में तसहुल (उपेक्षा) न करो। अल्लाह के नाज़दीक ये तरीक़ा तुम्हारे लिए ज़्यादा मब्नी बार इन्साफ़ है, इस शहादत क़याम होने में ज़्यादा सहुलत होती है, और तुम्हारे शुकुक ओ शुबाअत में मुब्तिला होने का इम्कान कम रह जाता है। हां जो तिजारती लें दीन दस्त बा दस्त तुमलोग आपस में करते हो, उसको ना लिखा जाए तो कोई हर्ज नहीं, मगर तिजाराती मामले तै करते वक्त गवाह कार्लिया करो। कातिब (मुंशी) और गवाह को सताया ना जाए, ऐसा करोगे तो गुनाह का इर्तेक़ाब करोगे। अल्लाह के गजब से बचो, वो तुमको सही तारीख ए अमल की तालीम देता है और उसे हर चीज का इल्म है","अगर तुम सफ़र की हालत में हो और दस्तावेज़ लिखने के लिए कोई कातिब (मुंशी) ना मिले तो रेहान बिल क़ब्ज़ (हाथ में प्रतिज्ञा की सुरक्षा) पर मामला करो, अगर तुम में से कोई शक्स दूसरे पर भरोसा करके इसके साथ कोई मामला करे तो जिसका भरोसा किया गया है उसे चाहिए के अमानत अदा करे और अल्लाह अपने रब से डरे और शहादत हरगिज़ ना छुपाओ। जो शहादत छुपाता है उसका दिल गुनाह में आलूदा है और अल्लाह तुम्हारे अमाल से बेखबर नहीं है","आसमानो और ज़मीन में जो कुछ है सब अल्लाह का है, तुम अपने दिल की बातें ख्वा जाहिर करो या छुपाओ, अल्लाह बाहर हाल उनका हिसाब तुमसे ले लेगा, फिर उसे इख्तियार है जिसे चाहे माफ करदे और जिसे चाहे सजा दे, वो हर चीज पर क़ुदरत रखता है","रसूल हमें हिदायत पर ईमान लाया है जो उसके रब की तरफ से उसपर नाज़िल हुई है और जो लोग इस रसूल के मन्ने वाले हैं उन्होन ने भी हिदायत को दिलसे तस्लीम कार्लिया है, ये सब अल्लाह और उसके फरिश्तों और उसकी किताबों और उसके रसूलों को मानते हैं और उनका क़ौल ये है के: \"हम अल्लाह के रसूलों को एक दूसरे से अलग नहीं करते, हमने हुकुम सुना और इताअत क़बूल की। ​​मालिक! हम तुझसे ख़ता-बख्शी (बख्शीश) के तालिब हैं और हमें तेरी ही तरफ पलटना है।”","अल्लाह किसी मुतनफ्फिस पर उसकी मक़दरत (ताक़त) से ख़राब ज़िम्मेदारी का बोझ नहीं डालता, हर शक्स ने जो नेकी कमाई है उसका फ़ल उसी के लिए है और जो बड़ी समेटी है उसका वबाल उसी पर है, (ईमान लाने वालों! तुम यूं दुआ किया करो) ऐ हमारे रब! हमसे भूल चुक में जो कसूर हो जाए अनपर गिरफ़्तार ना कर, मलिक! हमपर वो बोझ ना डाल जो तू-नहीं हमसे पहले लोगों पर डाले थे। परवरदिगार ! जिस बार को उठने की ताक़त हम में नहीं है वो हमपर ना रख, हमारे साथ नरमी कर, हमसे दरगुज़र फरमा, हमपर रहम कर, तू हमारा मौला है, काफिरों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर","अलिफ़ लाम मीम","अल्लाह , वो जिंदा ए जावेद हस्ती (सेल्फ सब्सिस्टिंग), जो निज़ाम ए कायनात को संभाले हुए है, हकीकत में उसके सिवा कोई खुदा नहीं है","उसने तुमपर ये किताब नाज़िल की है, जो हक लेकर आई है और उन किताबों की तस्दीक कर रही है जो पहले से आई हुई थी, इसे पहले वो इंसानों की हिदायत के लिए तौरात और इंजील नाज़िल कर चुक्का है","और उसने वो कसौटी (मानदंड) उतारी है (जो हक़ और बातिल का फर्क दिखाने वाली है)। अब जो लोग अल्लाह के फ़रामीन को क़बूल करने से इनकार करते हैं, उनको यकीनन सज़ा मिलेगी। अल्लाह बे-पनाह ताक़त का मालिक है और बुराई का बदला देने वाला है","ज़मीन और आसमान की कोई चीज़ अल्लाह से पोशीदा नहीं","वही तो है जो तुम्हारी माँओं के पैत में तुम्हारी सूरतें, जैसी चाहता है, बनता है। हमें ज़बरदस्त हिकमत वाले के सिवा कोई और खुदा नहीं है","वही खुदा है, जिसने ये किताब तुम्हारी नाज़िल की है। क्या किताब में दो तरह की आयतें हैं: एक मोहकमात, जो किताब की असल बुनियाद हैं और दूसरी मुताशाबीहात (अस्पष्ट)। जिन लोगों के दिलों में टेढ़ा है, वो फ़िटने की तलाश में हमेशा मुतास्बिहात ही के पीछे पड़े रहते हैं और उनको मानी पहचान की कोशिश करते हैं, हलांके उनका हक़ीक़ी मफ़हूम अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता। बख़िलाफ़ इसके जो लोग इल्म में पुख्ता-कार हैं, वो कहते हैं के \"हमारा अनोखा ईमान है, ये सब हमारे रब ही की तरफ से हैं\" और सच ये है के किसी चीज़ से सही सबक सिर्फ दानिशमंद लोग ही हासिल करते हैं","वो अल्लाह से दुआ करते रहते हैं हैं के \"परवरदिगार! जब तू हमें सीधे रास्ते पर लगा चुका है, तो फिर कहीं हमारे दिलों को काजी (टेढ़ापन) में मुब्तिला न करदीजियो। हमें अपने खज़ाने फ़ैज़ से रहमत अता कर के तू ही फ़ैयाज़ ए हक़ीक़ी (अता फ़रमाने वाला) है","परवरदिगार! तू यकीनन\" सब लोगों को एक रोज़ जमा करने वाला है, जिसके आने में कोई शुभ (शक्क) नहीं, तू हरगिज़ अपने वादे से तलने वाला नहीं है”","जिन लोगों ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया है, उन्हें अल्लाह के मुक़ाबले में ना उनका माल कुछ काम देगा, ना औलाद, वो दोज़ख का इंधन (ईंधन) बनकर रहेंगे","उनका अंजाम वैसा ही होगा, जैसा फिरौन के साथियों और उन्हें पहले के नफरमानों का हो चुका है कि उनको ने आयत ए इलाही को झुटलाया, नतीजा ये हुआ के अल्लाह ने उनके गुनाहों पर उन्हें पकड़ लिया और हक़ ये है के अल्लाह सज़ा देने वाला है","पस (ऐ मुहम्मद) ! जिन लोगों ने तुम्हारी दावत को कबूल करने से इंकार कर दिया है, उनसे कहदो के करीब है वो वक्त, जब तुम मगरूब हो जाओगे और जहन्नुम की तरफ हांके जाओगे और जहन्नुम बड़ा ही बुरा ठिकाना है","तुम्हारे लिए उन दो गिरोहों में एक निशान ए इब्रत था, जो (बदर में) एक दूसरे से नाबार्ड आज़मा (मुठभेड़) हुए, एक गिरोह अल्लाह की राह में लड़ रहा था और दूसरा गिरोह काफ़िर था, देखने वाले ब-चश्म ए सर देख रहे थे के काफिर गिरोह मोमिन गिरोह से दो चाँद (दोगुने नंबर) है मगर (नतीजे ने) साबित करदिया के) अल्लाह अपनी फतह ओ नुसरत से जिसको चाहता है मदद देता है। दीधा ए बीना (देखने वाली आंखें) रखने वालों के लिए इसमें बड़ा सबक पोशीदा है","लोगों के लिए मरगूबात ए नफ़्स (स्वाभाविक रूप से लालच से लुभाया गया) औरतें, औलाद, सोने चांदी के ढेर, चीदा घोड़े (ब्रांडेड घोड़े) मवेशी और ज़राय ज़मीनें बड़ी ख़ुश-आनंद बना दी गई है। मगर ये सब दुनिया की चांद रोजा जिंदगी के सामान हैं, हकीकत में जो बेहतर ठिकाना है वो तो अल्लाह के पास है","कहो: मैं तुम्हें बताऊं के इनसे ज्यादा अच्छी चीज क्या है? जो लोग तक्वा की रवीश इख्तियार करते हैं, उनके लिए उनके रब के पास बाग हैं, जिनकी जगहें नफरतें बहती होंगी, वहां उन्हें हमेशा की जिंदगी हासिल होगी, पाकीजा बीवीयां उनके रफीक (साथी) होंगी और अल्लाह की रजा से वो सरफराज होंगे। अल्लाह अपने बंदों के रवये पर गहरी नज़र रखता है","ये वो लोग हैं, जो कहते हैं \" मालिक! हम ईमान लाए, हमारी ख़ातों से दरगुज़र फ़रमा और हमें आतिश ए दोज़ख से बचा ले\"","ये लोग सब्र करने वाले हैं, रस्तबाज़ हैं, फ़रमाबरदार और फैयाज हैं और रात की आखिरी घड़ियों में अल्लाह से मगफिरत की दुआएं मांगते हैं","अल्लाह ने खुद शहादत दी है के उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, और (यही शहादत) फरिश्तों और सब एहले इल्म ने भी दी है, वो इन्साफ पर कायम है, हमें ज़बरदस्त हकीम के सिवा फिल वक़हे कोई खुदा नहीं है","अल्लाह के नाज़दीक दीन सिर्फ इस्लाम है, इस दीन से हट कर जो मुख्तलिफ तारीख उन लोगों ने इख्तियार किये जिन्होनें किताब दी गई थी, उनके इस तर्ज़ ए अमल की कोई वजह इसके सिवा ना थी के उनहोन ने इल्म आ जाने के बाद आपस में एक दूसरे पर ज़्यादा करने के लिए ऐसा किया। और जो कोई अल्लाह के एहकाम ओ हिदायत की इबादत से इन्कार करदे, अल्लाह को उसका हिसाब लेते कुछ देर नहीं लगती","अब अगर ये लोग तुमसे झगड़ा करें, तो इनसे कहो: \"मैंने और मेरे जोड़े (अनुयायियों) ने तो अल्लाह के आगे सर तस्लीम ख़त्म कर दिया है\"। फिर एहले किताब और गैर एहले किताब दोनों से पूछो: “क्या तुमने भी उसकी इताअत ओ बंदगी कबूल की?” अगर की तो वो राह ए रस्त पा गए, और अगर इस से मुहं मोड़ा तो तुम सिर्फ पैगाम पाहुंचा देने की जिम्मेदारी थी, आगे अल्लाह खुद अपने बंदों के मामले देखने वाला है","जो लोग अल्लाह के एहकाम ओ हिदायत को मानने से इंकार करते हैं और उसके पैगम्बरों को ना-हक़ क़त्ल करते हैं और ऐसे लोगों की जान के डरपे हो जाते हैं जो ख़ल्क़ ए ख़ुदा में अदल ओ रस्तियों का हुकुम देने के लिए उठें, उनको दर्दनाक सज़ा की ख़ुशख़बरी सुना दो","ये वो लोग हैं जिनके अमाल दुनिया और आखिरी दोनों में ज़या हो गए, और इनका मददगार कोई नहीं है","तुमने देखा नहीं के जिन लोगों को किताब के इल्म में से कुछ हिसा मिला है, उनका हाल क्या है? उन्हें जब किताब ए इलाही की तरफ बुलाया जाता है ता-के वो उनके दरमियान फैसला करे, तो उनसे एक फरीक इस्से पहलु-ताही (मुड़ जाता है) करता है और इस फैसले की तरफ आने से मुह फेर जाता है","उनका ये तर्ज-ए-अमल इस वजह से है के वो कहते हैं हैं \"आतिश ए दोज़ख तो हमें मास (छू) तक न करेगी और अगर दोज़ख की सज़ा हमको मिलेगी भी तो बस चंद रोज़\"। उनको खुद कहा अकीदों ने उनको अपने दीन के मामले में बड़ी गलत फहमियों में दाल रक्खा है","मगर क्या बनेगी जब हम उन्हें रोज जमा करेंगे जिसका आना यकीनी है? हमसे रोज़ हर शक्स को उसकी कमाई का बदला पूरा-पूरा दे दिया जाएगा और किसी पर ज़ुल्म न होगा","कहो! ख़ुदाया! मुल्क के मालिक! तू जिसे चाहे, हुकूमत दे और जिसे चाहे छीन ले, जिसे चाहे इज्जत बख्शी और जिसे चाहे ज़िल्लत दे। भलाई तेरे इख्तियार में है. बेशक तू हर चीज़ पर क़ादिर है","रात को दिन में पिरोता हुआ ले आता है और दिन को रात में, जानदार में से बे-जान निकलता है और बे-जान में से जानदार को, और जिसे चाहता है बे-हिसाब रिज़क़ देता है","मोमिनीन एहले ईमान को छोड़ कर काफिरों को अपना रफीक और दोस्त हरगिज ना बनाएं, जो ऐसा करेगा उसका अल्लाह से कोई तलाक नहीं, हां ये माफ है के तुम उनके ज़ुल्म से बचने के लिए बजाहिर ऐसा तर्ज ए अमल इख्तियार कर जाओ, मगर अल्लाह तुम्हें अपने आप से डराता है और तुम्हें उसकी तरफ पलट कर जाना है","(ऐ नबी)! लोगों को खबरदार करो के तुम्हारे दिलों में जो कुछ है, उसे ख्वा तुम छुपाओ या जाहिर करो, अल्लाह बाहर हाल उसे जानता है। ज़मीन ओ आसमान की कोई चीज़ उसके इल्म से बाहर नहीं है और उसका इक्तेदार हर चीज़ पर हावी है","वो दिन आने वाला है, जब हर नफ़्स अपने किये का फल हाज़िर पायेगा ख्वा उसने हमें बुलाया कि हो या बुरा। हमें रोज़ आदमी ये तमन्ना करेगा के काश अभी ये दिन उसे बहुत दूर होता! अल्लाह तुम्हें अपने आप से डरता है और वो अपने बंदों का निहायत खैर ख्वाह है","(ऐ नबी)! लोगों से कहो के \"अगर तुम हकीकत में अल्लाह से मुहब्बत रखते हो, तो मेरी जोड़ी इख्तियार करो, अल्लाह तुमसे मुहब्बत करेगा और तुम्हारी खतों से दरगुजर फरमाएगा, वो बड़ा माफ करने वाला और रहीम है\"","उनसे कहो के \"अल्लाह और रसूल की इत्ता कबूल है\" करलो” फिर अगर वो तुम्हारी दावत क़बूल ना करें, तो यकीनन ये मुमकिन नहीं है के अल्लाह ऐसे लोगों से मुहब्बत करे जो उसकी और उसके रसूल की इताअत से इंकार करे","अल्लाह ने आदम और नूह और आले- इब्राहिम और आल-ए-इमरान को तमाम दुनिया वालों पर तर्जीह देकर ( अपनी रिसालत के लिए) मुंतखब किया था","ये एक सिलसिले के लोग थे, जो एक दूसरे की नाक से पैदा हुए थे, अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है","(वो हमारा वक्त सुन रहा था) जब इमरान की औरत कह रही थी के, “मेरे परवरदिगार! मुख्य है” बच्चों को जो मेरे पैत में है तेरी नज़र रखती हूँ, वो तेरे ही काम के लिए वक्फ होगा, मेरी इस पेशकश को क़बूल फरमा, तू सुनने और जाने वाला है।”","फिर जब वो बच्ची उसे हां पैदा हुई तो उसने कहा \"मालिक! मेरे हां तो लड़की पैदा हो गई है, हालांके जो कुछ उसने जाना था, अल्लाह को इसकी खबर थी और लड़के लड़की की तरह नहीं होता। खैर, मैंने उसका नाम मरियम रख दिया है और मैं उसका इस्तेमाल करती हूं।\" उसकी आइंदा नाक को शैतान मरदूद के फिटने से तेरी पनाह में देती हूं”","आखिर ए कार उसके रब ने उस लड़की को ब-खुशी कबूल फरमा लिया, उसे बड़ी अच्छी लड़की बनाकर उठाया और जकारिया को उसका सरपरस्त बना दिया। ज़कारिया जब कभी उसके पास महराब (अभयारण्य) में जाता तो उसके पास कुछ न कुछ खाने पीने का सामान मिलता। पुछता मरियम! ये तेरे पास कहाँ से आया? वो जवाब देती अल्लाह के पास से आया है, अल्लाह जिसे चाहता है बे-हिसाब देता है","ये हाल देख कर जकारिया ने अपने रब को पुकारा \"परवरदिगार! अपनी कुदरत से मुझे नई औलाद अता कर, तू ही दुआ सुनने वाला है\"","जवाब में फरिश्तों ने आवाज दी, जब के वो मेहराब में खड़ा नमाज पढ़ रहा था के \"अल्लाह तुझे याह्या की ख़ुशख़बरी देता है, वो अल्लाह की तरफ से एक फरमान की तस्दीक करने वाला बनकर आएगा, उसमें सरदार ओ बुज़ुर्गी की शान होगी कमाल दर्जे का ज़ाबित (पूरी तरह से पवित्र) होगा, नबुवत से\" सरफराज होगा और सालिहें में शामिल हो जाएगा”","ज़कारिया ने कहा,“परवरदिगार! भला मेरे हां लड़का कहां से होगा, मैं तो बूढ़ा हूं चुका हूं और मेरी बीवी बांझ है, \"जवाब मिला, ऐसा ही होगा, अल्लाह जो चाहता है करता है\"","अर्ज़ किया \"मालिक! फिर कोई निशानी मेरे लिए मुकर्रर फरमा दे\"। कहा, निशानी ये है कि तुम तीन दिन तक लोगों से इशारे के सिवा कोई बात-चित ना करोगे, इस दौरन में अपने रब को बहुत याद करना और सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते रहना।”","फ़िर वो वक़्त आया जब मरियाँ से फ़रिश्तों ने आकार कहा, \" ऐ मरियम! अल्लाह ने तुझे बरगुज़ीदा किया और पाकीज़गी अता की और तमाम दुनिया की औरतों पर तुझको तर्जीह देकर अपनी खिदमत के लिए चुन लिया","ऐ मरियम! अपने रब की तबह फरमान बनकर रेह, उसके आगे सर ब-सजूद हो, और जो बंदे उसके हुज़ूर झुकने वाले हैं उनके साथ तू भी झुक जा”","(ऐ मुहम्मद)! ये गैब की खबरें हैं जो हम तुमको वही के ज़रिये से बता रहे हैं, वरना तुम हमें वक्त वहां मौजुद ना था जब हकल के खादिम ये फैसला करने के लिए के मयराम का सरदार कौन हो अपना अपना कलाम फेंक रहे थे, और ना तुम हमें वक्त हाज़िर था जब उनके दरमियान झगड़ा बरपा था","और जब फ़रिश्तों ने कहा, \"ऐ मरियम! अल्लाह तुझे अपने एक फ़रमान की ख़ुश-ख़बरी देता है, उसका नाम मसीह ईसा इब्न ए मरियम होगा, दुनिया और आख़िरत में मुअज़्ज़ाज़ (अत्यधिक सम्मानित) होगा, अल्लाह के मुकर्रब बंदों में\" शुमार किया जाएगा","लोगों से बर्तनों में भी कलाम (बात) करेगा और बड़ी उमर को पहुंच कर भी, और वो एक मर्द ए सालीह होगा”","ये सुनकर मरियम बोली, “परवरदिगार! मेरे हां बच्चा कहां से होगा, मुझे तो किसी शक्स ने हाथ तक नहीं लगाया'' जवाब मिला, ''ऐसा ही होगा, अल्लाह जो चाहता है अदा करता है। वो जब किसी काम के करने का फैसला फरमाता है तो बस कहता है कि होजा और वो हो जाता है”","(फरिश्तों ने फिर सिलसिला ए कलाम में कहा) “और अल्लाह उसे किताब और हिकमत की तालीम देगा, तौरात और इंजील का इल्म सिखाएगा","और बानी इस्राइल की तरफ अपना रसूल मुकर्रर करेगा'' (और जब वो बहैसियत ए रसूल बानी इस्राइल के पास आया तो उसने कहा) '' मैं तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास निशानी लेकर आया हूं, मैं तुम्हारे सामने मिट्टी से परिंदे की सूरत में एक मुजस्समा बनाता हूं और उसमें फूंक मारता हूं, वो अल्लाह के हुकुम से परिंदा बन जाता है, मैं अल्लाह के हुकुम से मदार जाद (जन्म से) अंधे और कोढ़ी (कोढ़ी) को अच्छा कर्ता हूं और मुर्दे को जिंदा कर्ता हूं, मैं तुम्हें बताता हूं के तुम क्या खाते हो और क्या अपने घरों में ज़खीरा (स्टोर) रखकर हो। इसमें तुम्हारे लिए काफी निशानी है अगर तुम ईमान लाने वाले हो","और मैं हमें तालीम ओ हिदायत की तस्दीक करने वाला बनकर आया हूं जो तौरात में से इस वक्त मेरे जमाने में मौजूद है, और इसलिए आया हूं के तुम्हारे लिए बाज़ उन चीज़ों को हलाल कर दूं जो तुमपर हराम कर दी गई है। देखो मैं तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास निशानी लेकर आया हूं, लिहाजा अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो","अल्लाह मेरा रब है और तुम्हारा रब भी, लिहाजा तुम उसी कि बंदगी इख्तियार करो, यही सीधा रास्ता है","जब ईसा ने महसूस किया के बानी इसराइल कुफ्र ओ इंकार पर आमादा हैं तो उसने कहा \"कौन अल्लाह की राह में मेरा मददगार होता है?\" हवारियों (शिष्यों) ने जवाब दिया, \"हम अल्लाह के मददगार हैं, हम अल्लाह पर ईमान लाए, गवाह रहो के हम मुसलमान (अल्लाह के आगे सर इताअत झुका देने वाले) हैं","मालिक! जो फरमान तू ने नाज़िल किया है हमने उसे मान लिया और रसूल की जोड़ी क़बूल की, हमारा नाम गवाही देने वालों में लिख ले”","फिर बनी इस्राइल (मसीह के खिलाफ) खुफिया तद्बीरें करने लगे, जवाब में अल्लाह ने भी अपनी खुफिया तदबीर की और ऐसी तदबीरों में अल्लाह सब से बुरा कर है","(वो अल्लाह की खुफिया तदबीर हाय थी) जब उसने कहा, \" ऐ ईसा! अब मैं तुझे वापस ले लूंगा और तुझको अपनी तरफ उठा लूंगा और जिन्हों ने तेरा इनकार किया उनसे (यानी इनकी मां से और उनके गांडेय माहोल में उनके साथ रहने से) तुझे पाक कर दूंगा और तेरी जोड़ी बनाने वालों को कयामत तक उन लोगों पर बालादस्त रखूंगा जिन्हों ने तेरा इंकार किया है। फिर तुम सबको आखिर मेरे पास आना है, हम वक्त में उन बातों का फैसला कर देंगे जिनमें तुम्हारे दरमियान इख्तिलाफ हुआ है","जिन लोगों ने कुफ्र ओ इंकार की रवीश इख्तियार की है उनहें दुनिया। और आखिरी दोनो में साख सजा दूंगा और वो कोई मददगार न पायेगा","और जिन्होन ने ईमान और नीक अमल का रवैय्या इख्तियार किया है उनको अजर पूरे पूरे दे दिये जायेंगे, और खूब जान ले के जालिमों से अल्लाह हरगिज मुहब्बत नहीं करता''","ये आयत और हिकमत से लबरेज़ तज़किरे हैं जो हम तुम्हें सुना रहे हैं","अल्लाह के नाज़दीक ईसा की मिसाल आदम की सी है के अल्लाह ने उसे मिट्टी से पैदा किया और हुकुम दिया के होजा और वो होगा","ये असल हकीकत है जो तुम्हारे रब की तरफ से बताई जा रही है और तुम उन लोगों में शामिल न हो जो इसमें शक करते हैं","ये इल्म आ जाने के बाद अब कोई उस मामले में तुमसे झगड़ा करे तो (ऐ मुहम्मद)! उसे कहो, \"आओ हम और तुम खुद भी आ जाएं और अपने-अपने बाल बच्चों को भी ले आएं और खुदा से दुआ करें के जो झूठा हो उसपर खुदा की लानत हो\"","ये बिल्कुल सही वाकियात हैं, और हकीकत ये है के अल्लाह के सिवा कोई खुदा-वंद नहीं है, और वो अल्लाह ही की हस्ती है जिसकी ताक़त सबसे अच्छी है और जिसकी हिकमत निज़ाम-ए-आलम में काम फरमा है","पास अगर ये लोग (इस शर्त पर मुक़ाबले में आने से) मुह मोअदें तो (उनका मुफ़सीद होना साफ़ खुल जाएगा) और अल्लाह तो मुफ़सीदों के हाल से वाकिफ ही है","कहो, \"ऐ एहले किताब! आओ एक ऐसी बात की तरफ जो हमारे और तुम्हारे दरमियान यक्सान हैं, ये के हम अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी ना करें, उसके साथ किसी को शरीक ना ठहरें, और हम में से कोई अल्लाह के सिवा किसी को अपना रब ना बना ले” इस दावत को क़बूल करने से अगर वो मुहब्बत तो साफ कहदो के गवाह रहो, हम तो मुस्लिम (सिर्फ खुदा की बंदगी ओ इताअत करने वाले) हैं","ऐ एहले किताब! तुम इब्राहिम के बारे में हमसे क्यों झगड़ा करते हो? तौरात और इंजील तो इब्राहीम के बाद ही नाज़िल हुई है, फिर क्या तुम इतनी बात भी नहीं समझते","तुम लोग जिन चीज़ों का इल्म रखते हो उनमें तो खूब बहसें (तर्क) कर चुके, अब उन मामले में बेहस क्यों करने चले हो जिनका तुम्हारे पास कुछ है भी इल्म नहीं .अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते","इब्राहीम ना यहुदी था ना इसायी, बल्के वो एक मुस्लिम था, यक्सू था और वो हरगिज मुशीरकोन में से ना था","इब्राहीम से निस्बत रखने का सबसे ज्यादा हक अगर किसी को पहुंचता है तो उन लोगों को pahunchta है जिन्हों ने उसकी जोड़ी की और अब ये नबी और उसके मन्ने वाले इस निस्बत के ज़्यादा हक़दार हैं। अल्लाह सिर्फ उनकी का हमी ओ मददगार है जो ईमान रखते हैं","(ऐ ईमान लाने वालों) एहले किताब में से एक गिरह चाहता है कि कोई तरह तुम्हें राह ए रास्ते से हटा दे, हलांके दर हकीकत वो अपने सिवा किसी को गुमराह करने में नहीं डाल रहे हैं मगर उन्हें इसका शूर नहीं है","ऐ एहले किताब! क्यों अल्लाह की आयत का इन्कार करते हो हलाँके तुम खुद इनका मुशाहिदा कर रहे हो","ऐ एहले किताब! क्यों हक़ को बातिल का रंग चढ़ा कर मुश्तबा (भ्रमित) बनाते हो? क्यों जानते हैं बूझते हक़ को झुठलाते हो","एहले किताब में से एक गिरोह कहता है कि इस नबी के मन्ने वालों पर जो कुछ नाज़िल हुआ है उसपर सुबह ईमान लाओ और शाम को इस तरह इनकार करदो, शायद इस तरकीब से ये लोग अपने ईमान से फिर जाएं","नीज़ ये लोग आपस में कहते हैं कि अपने मजहब वाले के सिवा किसी की बात ना मानो। ऐ नबी! इनसे कहदो के, “असल में हिदायत तो अल्लाह की हिदायत है और ये उसी का दिन है के किसी को वही कुछ दे दिया जाए जो कभी तुमको दिया गया था, हां ये के दूसरे को तुम्हारे रब के हुजूर पेश करने के लिए तुम्हारे खिलाफ कोई हुज्जत मिल जाए।” नबी)! इनसे कहो के, \"फज़ल ओ शर्फ अल्लाह के इख्तियार में है, जिसे चाहे अता फरमाये। वो वसीह उल नजर है और सब कुछ जानता है","अपनी रहमत के लिए जिसको चाहता है मखसूस करता है और उसका फजल बहुत बुरा है।\"","एहले किताब में कोई तो ऐसा है के अगर तुम उसके एत्माद (भरोसे) पर माल ओ दौलत का एक धैर्य भी देदो तो वो तुम्हारा माल तुम्हें अदा कर देगा, और किसी का हाल ये है के अगर तुम एक दिन के मामले में भी उसपर भरोसा करो तो वो अदा ना करेगा, इल्ला ये के तुम उसके सर पर सवार हो जाओ, उनकी इस अखलाकी हालत का सबाब ये है के वो कहते हैं, \"उम्मियों (गैर यहूदी लोगों) के मामले में हमपर कोई मवाज़ख़्ज़ा (दोष) नहीं है\" और ये बात वो मेहज़ झूठ ग़द कर अल्लाह की तरफ मंसूब करते हैं, हालांके उन्हें मालूम है के अल्लाह ने ऐसी कोई बात नहीं फरमायी है","","रहे वो लोग जो अल्लाह के अहद और अपने कसमों को थोड़ी कीमत पर बेच देते हैं, उनके लिए आख़िरत में कोई हिसा नहीं, अल्लाह कयामत के रोज़ ना उनसे बात करेगा ना उनकी तरफ देखेगा और ना उन्हें पाक करेगा, उनके लिए तो सच दर्दनाक सज़ा है","उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो किताब पढ़ते हुए इस तरह ज़ुबान का उल्टा फेर करते हैं कि तुम समझो जो कुछ वो पढ़ रहे हैं वो किताब ही की इबारत है, हलांके वो किताब की इबारत नहीं होती। वो कहते हैं के ये जो कुछ हम पढ़ रहे हैं ये खुदा की तरफ से है, हलांके वो खुदा की तरफ से नहीं होता। वो जान बूझ कर झूठ बात अल्लाह की तरफ मंसूब करते हैं","किसी इंसान का ये काम नहीं है के अल्लाह तो उसको किताब और हुकुम और नबुवत अता फरमाये और वो लोगों से कहे के अल्लाह के बजाए तुम मेरे बंदे बन जाओ। वो तो यही कहेगा के सच्चे रब्बानी बानो जैसा के इस किताब की तालीम का तकाजा है जिसे तुम पढ़ते और पढ़ते हो","वो तुमसे हरगिज ये ना कहेगा के फरिश्तों को या पैगम्बरों को अपना रब बना लो, क्या ये मुमकिन है के एक नबी तुम्हें कुफ्र का हुकुम दे जब के तुम मुस्लिम हो","याद करो, अल्लाह ने पैगंबर से अहद लिया था के, \"आज हमने तुम्हें किताब और हिकमत ओ दानिश से नवाजा है, कल अगर कोई दूसरा रसूल तुम्हारे पास उसी तालीम की तस्दीक करता हुआ आए जो पहले से तुम्हारे पास मौजुद है, तो तुमको उसपर ईमान लाना होगा और उसकी मदद करनी होगी।\" उन्होन ने कहा हन हम इक़रार करते हैं, अल्लाह ने फरमाया, \"अच्छा तो गवाह रहो और मैं भी तुम्हारे साथ गवाह हूं","इसके बाद जो अपने अहद से फिर जाए वही फासिक है\"","अब क्या ये लोग अल्लाह की इताअत का तरीक़ा (दीन अल्लाह) छोड़ कर कोई और तरीक़ा चाहते हैं? हलाँके आसमान ओ ज़मीन की सारी चीज़ें चार ओ नाचार (इच्छा से या अनिच्छा से) अल्लाह ही की तबेह फ़रमान (मुस्लिम) हैं और उसकी तरफ सबको पलटना है","(ऐ नबी)! कहो के “हम अल्लाह को मानते हैं, उस तालीम को मानते हैं जो हमपर नाज़िल की गई है, उन तालीम को भी मानते हैं जो इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब पर नाज़िल हुई थी और उन हिदायत पर भी ईमान रखते हैं जो मूसा और ईसा और दूसरे पैगम्बरों को उनके रुब की तरफ से दी गई। हम इनके दरमियान फ़र्क़ नहीं करते और हम अल्लाह के ताबे फ़रमान (मुस्लिम) हैं”","इस फ़रमाबरदारी (इस्लाम) के सिवा जो शक्स कोई और तरीक़ा इख्तियार करना चाहे उसका वो तरीक़ा हरगिज़ क़बूल न किया जाएगा और आख़िरत में वो नाकाम ओ। ना-मुराद रहेगा","कैसा हो सकता है अल्लाह उन लोगों ओ हिदायत बख्शे जिन्हों ने नियामत ए ईमान पा लेने के बाद फिर कुफ्र इख्तियार किया हलांके वो खुद इस बात पर गवाही दे चुके हैं के ये रसूल हक़ पर है और इनके पास रोशन निशानियां भी आ चुकी हैं, अल्लाह ज़ालिमों को तो हिदायत नहीं दीया","उनके ज़ुल्म का सही बदला यहीं है के बेपरवाह अल्लाह और फ़रिश्तों और तमाम इंसानों की तरह फिटकर है","इसी हालात में वो हमेशा रहेंगे, ना उनकी सज़ा में तख़्फ़िफ़ (कामी) होगी और ना उन्हें मोहलत दी जाएगी","अलबत्ता वो लोग बच जायेंगे जो इसके बाद तौबा करके अपने तर्ज़ ए अमल की इस्लाह कार्लें, अल्लाह बख्शने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","मगर जिन लोगों ने ईमान लेन के बाद कुफ़्र इख्तियार किया फिर अपने कुफ़्र में बढ़ते चले गए उनकी तौबा भी क़बूल न होगी, ऐसे लोग तो पक्के गुमराह हैं","यकीन रख्खो, जिन लोगों ने कुफ्र इख्तियार किया और कुफ्र ही की हालत में जान दी उनमें से कोई अगर अपने आप को सज़ा से बचाने के लिए रूह-ए-ज़मीन भर कर भी सोना (सोना) फ़िदे (प्रायश्चित) में दे तो उसे क़बूल न किया जाएगा, ऐसे लोगों के लिए दर्दनक सजा तय है और वो अपना कोई मददगार ना पाएगा","तुम नेकी को नहीं पाहुंच सकते जब तक के अपनी वो चीज (खुदा की राह में) खर्च ना करो जिन्हे तुम अजीज रखते हो, और जो कुछ तुम खर्च करोगे अल्लाह उसे खबर हो ना होगा","खाने की ये सारी चीज़ें (जो शरीयत ए मुहम्मदी में हलाल हैं) बानी इसराइल के लिए भी हलाल थी, अलबत्ता बाज़ चीज़े ऐसी थी जिनहें तौरात के नाज़िल किये जाने से पहले इज़राइल (याकूब) ने खुद अपने ऊपर हराम करलिया था। उनसे कहो, अगर तुम (अपने ऐतराज में) सच्चे हो तो लाओ तौरात और पेश करो उसकी कोई इबारत","इसके बाद भी जो लोग अपनी झूठी घड़ी हुई बातें अल्लाह की तरफ मंसूब करते रहें वही दर-हकीकत जालिम हैं","कहो, अल्लाह ने जो कुछ फरमाया है सच फरमाया है। तुमको यक्सू होकर इब्राहिम के तरीक़े की जोड़ी करनी चाहिए, और इब्राहिम शिर्क करने वालों में से ना था","बेशक सबसे पहली इबादत-गाह जो इंसानों के लिए तामीर हुई वो वही है जो मक्का में वाक़े है, उसको ख़ैर ओ बरकत दी गई थी और तमाम जहां वालों के लिए मरकज़ ए हिदायत बनाया गया था","इस्मेन खुली हुई निशानियां हैं, इब्राहिम का मुकाम ए इबादत है, और इसका हाल ये है के जो इस्मेन दखिल हुआ मामून (सुरक्षित) हो गया। लोगों पर अल्लाह का ये हक़ है कि जो इस घर तक पहुंचें कि इस्तितात रखे हो वो इसका हज करे, और जो कोई इस हुकुम की जोड़ी से इंकार करे तो उसे मालूम हो जाना चाहिए के अल्लाह तमाम दुनिया वालों से बे-नियाज़ है","कहो, ऐ एहले किताब! तुम अल्लाह की बातें मन से क्यों कहते हो? जो हरकतें तुम कर रहे हो अल्लाह सब कुछ देख रहा है","कहो, ऐ एहले किताब! ये तुम्हारी क्या रवानी है के जो अल्लाह की बात मानता है उसे भी तुम अल्लाह के रास्ते से रोकते हो और चाहते हो के वो टेढ़ी राह चले, हलांके तुम खुद (इसकी राह ए रास्ते होने पर) गवाह हो। तुम्हारी हरकतों से अल्लाह गाफिल नहीं है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुमने एहले किताब में से एक गिरोह की बात मानी तो ये तुम्हारे ईमान से फिर कुफ्र की तरफ फिर ले जाएंगे","तुम्हारे लिए कुफ्र की तरफ जाने का अब क्या मौका बाकी है जब तुमको अल्लाह की आयत सुनाई जा रही है और तुम्हारे दरमियान उसका रसूल मौजूद है? जो अल्लाह का दामन मज़बूती के साथ थमेगा वो ज़रूर राह ए रास्ते पाएगा","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो जैसा के उसे डरने का हक़ है, तुमको मौत ना आए मगर इस हाल में तुम मुस्लिम हो","सब मिलकर अल्लाह की रस्सी को मज़बूत पकड़ लो और तफ़रक़े (फूट डालो) में ना पड़ो। अल्लाह के हमें एहसान को याद रखो जो उसने तुम पर किया है, तुम एक दूसरे के दुश्मन थे, उसने तुम्हारा दिल जोड़ दिया और उसके फजल ओ करम से तुम भाई-भाई बन गए। तुम आग से भरे हुए एक गधे (गड्ढे) के किनारे खड़े थे, अल्लाह ने तुमको उसे बचा लिया, इस तरह अल्लाह अपनी निशानियां तुम्हारे सामने रोशन करता है शायद इन आलमतों से तुम अपने फलाह का सीधा रास्ता नजर आ जाओ","तुम में कुछ लोग तो ऐसे जरूर हाय रहने चाहिए जो नेकी की तरफ बुलाएं, भलाई का हुकुम दें, और बुराइयों से रोते रहें, जो लोग ये काम करेंगे वही फलाह पाएंगे","कहीं तुम उन लोगों की तरफ ना हो जाना जो फिरकों में बत्त गए और खुली खुली वजह हिदायत पाने के बाद फिर इख्तिलाफात में मुब्तिला हुए। जिन्हों ने ये रवीश इख्तियार की वो रोज सख्त सजा पाएंगे","जबके कुछ लोग सुरखरू (उज्ज्वल) होंगे और कुछ का मुंह काला होगा, जिनका मुंह काला होगा (उन्हें कहा जाएगा के) नियामत ए ईमान पाने के बाद भी तुमने काफिराना रवैय्या इख्तियार किया? अच्छा तो अब इस कुफ़्रान ए नियामत के सिली में अज़ाब का मजा चक्खो","रहे वो लोग जिनके चेहरे रोशन होंगे तो उनको अल्लाह के दामन ए रहमत में जगह मिलेगी और हमेशा वो इसी हालात में रहेंगे","ये अल्लाह के इरशाद हैं जो हम तुम्हें ठीक ठीक सुना रहे हैं क्योंकि अल्लाह दुनिया वालों पर ज़ुल्म करने का कोई इरादा नहीं रखता","ज़मीन ओ आसमान की सारी चीज़ों का मालिक अल्लाह है और सारे ममलात अल्लाह ही के हुज़ूर पेश होते हैं","अब दुनिया में वो बेहतरीन गिरो ​​तुम हो जैसे इंसानों की हिदायत ओ इस्लाह के लिए मैदान में लाया गया है, तुम नेकी का हुकुम देते हो, बुरी (बुरायी) से रोते हो और अल्लाह पर ईमान रखते हो। ये एहले किताब ईमान लाते तो इन्हीं के हक में बेहतर था, अगर इनमें कुछ लोग इमानदार भी पाए जाते हैं मगर इनके बेहतर (अक्सर) अफ़राद नफ़रमान हैं","ये तुम्हारा कुछ बिगाड़ नहीं सकता, ज़्यादा से ज़्यादा बस कुछ सता सकता है, अगर ये तुमसे लड़ेंगे तो मुकाबले में पीट दिखाएंगे, फिर ऐसी बेबस होंगे के कहीं से इनको मदद ना मिलेगी","ये जहां भी पये गए इनपर जिल्लत की मार ही पड़ी, कहीं अल्लाह के ज़िम्मे या इंसान के ज़िम्मे में पनाह मिल गई तो ये और बात है, ये अल्लाह के गजब में घिर चुके हैं, इनपर मोहताजी ओ मगलूबी मुसल्लत कर दी गई है (अल्लाह का प्रकोप और अपमान है) उन पर अटक गया), और ये सब कुछ सिर्फ वजह से हुआ है के ये अल्लाह की आयत से कुफ्र करते रहे और इन्होन ने पैगम्बरों को ना-हक़ क़तल किया। ये इनकी नफ़रमानियों और ज़्यादाातियों का अंजाम है","मगर सारे एहले किताब यक़सान नहीं हैं, इनमें कुछ लोग ऐसे भी हैं जो राह ए रास्ते पर क़याम हैं, रातों को अल्लाह की आयत पढ़ते हैं और उसके आगे सजदारेज़ होते हैं","अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखते हैं, नेकी का हुकुम देते हैं, बुराइयों से रोते हैं और भलाई के कामों में सरगर्म रहते हैं, ये साले लोग हैं","और जो नेकी भी ये करेंगे उसकी ना-क़ादरी ना की जाएगी, अल्लाह परहेज़गार लोगों को खूब जानता है","रहे वो लोग जिन्होन ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया तो अल्लाह के मुकाबले में उनको ना उनका माल कुछ काम देगा ना औलाद, वो तो आग में जाने वाले लोग हैं और आग ही में हमेशा रहेंगे","जो कुछ वो अपनी इस दुनिया की जिंदगी में खर्च कर रहे हैं उसकी मिसाल हमें हवा की सी है जिसमें पाला हो (ठंढ के साथ) और वो उन लोगों की खेती पर चले जिन्होन ने अपने ऊपर आप जुल्म किया है और उसे बरबाद करके रखदे, अल्लाह ने इनपर जुल्म नहीं किया, दरहकीकत ये खुद अपने ऊपर जुल्म कर रहे हैं","ऐ लोगन जो इमान लाए हो, अपनी जमात के लोगों के सिवा दूसरे को अपना राज़दार ना बनाओ, वो तुम्हारी बर्बादी के किसी मौके से फ़ायदा उठाने में नहीं छूटते, तुम्हें जिस चीज़ से नुक्सान मिले वही उनको मेहबूब है, उनके दिल का बुज़ुर्ग उनके मुँह से निकला पढ़ता है और जो कुछ वो अपने सीने में छुपाए हुए हैं वो इसी शेडेड-टार है। हमने तुम्हें साफ-साफ हिदायत दे दी है, अगर तुम अक्ल रखते हो (तो उनसे तालुक रखने में एहतियत बरतोगे)","तुम उन्हें मुहब्बत रखते हो मगर वो तुमसे मुहब्बत नहीं रखते, हलांके तुम तमाम कुतुब ए आसमानी को मानते हो। जब वो तुमसे मिलते हैं तो कहते हैं कि हमने भी (तुम्हारे रसूल और तुम्हारी किताब को) मान लिया है, मगर जब जुदा होते हैं तो तुम्हारे खिलाफ उनके गाने या गजब का ये हाल होता है कि अपनी उंगलियां चबाने लगते हैं। उनसे कहदो के अपने गुस्से में आप जल मारो, अल्लाह दिलों के छुपे हुए राज़ तक जानता है","तुम्हारा भला होता है तो उनको बुरा मालूम होता है, और तुमपर कोई मुसीबत आती है तो ये खुश होते हैं, मगर इनकी कोई तदबीर तुम्हारे खिलाफ कारगर नहीं हो सकती बशरथ ये के तुम सब्र से काम लो और अल्लाह से डर कर काम करते रहो। जो कुछ ये कर रहा है अल्लाह उसपर हावी है","(ऐ पैगम्बर! मुसलमानों के सामने हमें मौके का जिक्र करो) जब तुम सुबह सवेरे अपने घर से निकले थे और (उहुद के मैदान में) मुसलमानों को जंग के लिए जा-बाजा मामूर (ईमानवालों को युद्ध की कतार में खड़ा कर दिया) कर रहे थे, अल्लाह सारी बातें सुनते हैं और वो निहायत बाख़बर है","याद करो जब तुम में से दो गिरो ​​बुज़दिली दिखाने पर आमादा हो गए थे, हलाँके अल्लाह उनकी मदद पर मौजूद था और मोमिनों को अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए","आख़िर इसी पहले जंग ए बद्र में अल्लाह तुम्हारी मदद कर चूका था, हलाँके हमें वक्त तुम बहुत कमज़ार थे, लिहाज़ा तुमको चाहिए के अल्लाह की नाशुक्र से बचो, उम्मीद है के अब तुम शुक्रगुज़ार बनोगे","याद करो जब तुम मोमिनो से कह रहे थे, “क्या तुम्हारे लिए ये बात काफ़ी नहीं के अल्लाह तीन हज़ार फ़रिश्ते उतार कर तुम्हारी मदद करेगी?”","बेश्क, अगर तुम सब्र करो और खुदा से डरते हुए काम करो तो जिस आन दुश्मन तुम्हारे ऊपर चढ़ कर आएंगे उसकी आन तुम्हारा रब (तीन हजार नहीं) पांच हजार साहब ए निशान फरिश्तों से तुम्हारी मदद करेगा","ये बात अल्लाह ने तुम्हें दी है इसलिए बता दी है कि तुम खुश हो जाओ और तुम्हारे दिल मुतमीन हो जाएं, फतह ओ नुसरत जो कुछ भी है अल्लाह की तरफ से है जो बड़ी कुव्वत वाला और दाना ओ बीना है (सर्व-शक्तिशाली, सर्व-बुद्धिमान)","(और ये मदद वो तुम्हें इसलिए देगा) ता-के कुफ्र की राह चलने वालों का एक बाज़ू काट दे, या उनको ऐसी ज़लील शिकस्त दे के वो ना-मुरादी के साथ पसंद हो जाएँ","(ऐ पैगम्बर) फैसले के इख्तियारात में तुम्हारा कोई हिसा नहीं, अल्लाह को इख्तियार है चाहे उन्हें माफ करे चाहे सज़ा दे, क्यूँके वो ज़ालिम हैं","ज़मीन और आसमान में जो कुछ है उसका मालिक अल्लाह है, जिसको चाहे बख्श दे और जिसको चाहे अज़ाब दे, वो माफ़ करने वाला और रहीम है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ये बढ़ता और चढ़ता सूद (सूदखोरी) खाना छोड़ दो और अल्लाह से डरो, उम्मीद है के फलाह पाओगे","हमसे आग से बचो जो काफिरों के लिए मुहय्या की गई है","और अल्लाह और रसूल का हुकुम मान लो, तवक्कू है के तुमपर रहम किया जाएगा","दाऊद कर चलो उस राह पर जो तुम्हारे रब की बख्शीश और उस पर जन्नत की तरफ जाती है जिसकी वुसअत (विशालता) ज़मीन और आसमानो जैसी है, और वो उन खुदा-तरस लोगों के लिए मुहैया की गई","जो हर हाल में अपने माल खर्च करते हैं ख़्वाह बढ़ हाल होन या ख़ुश हाल, जो गुस्से को पी जाते हैं और दूसरों के कसूर माफ करते हैं, ऐसे लोग अल्लाह को बहुत पसंद हैं","और जिनका हाल ये है कि अगर कभी कोई फ़हाश काम उनसे सरज़द हो जाता है या किसी गुनाह का इर्तिक़ाब करके वो अपने ऊपर ज़ुल्म कर बैठते हैं तो मान अल्लाह उन्हें याद आ जाता है और उसे वो अपने कसूरों की माफ़ी चाहते हैं, क्योंकि अल्लाह के सिवा और कौन है जो गुनाह माफ़ कर सकता है और वो दीधा ओ दानिस्ता (जानबूझकर कायम रहेगा) अपने किये पर इसरार नहीं करते","ऐसे लोगों की जजा उनके रब के पास ये है के वो उनको माफ़ कर देगा और ऐसे बाघों में उन्हें डॉक्टर करेगा जिनके बारे में आला नेहरेन बेथी होगी और वहां वो हमेशा रहेंगे। कैसा अच्छा बदला है नई अमल करने वालों के लिए","तुमसे पहले बहुत से दौर गुजर चुके हैं, ज़मीन में चल फिर कर देखलो के उन लोगों का क्या अंजाम हुआ जिन्होन ने (अल्लाह के एहकाम ओ हिदायत को) झूठलाया","ये लोगों के लिए एक साफ और सारी तम्बीह है और जो अल्लाह से डरता हूं उनके लिए हिदायत और हिदायत","दिल शिकस्त ना हो, गम ना करो, तुम ही गालिब रहोगे अगर तुम मोमिन हो","क्या वक्त अगर तुम्हें चोट लगी है तो इसे पहले ऐसी ही चोट तुम्हारे मुखालिफ फ़रीक़ को भी लग चुकी है। ये तो ज़माने के नशीब ओ फ़राज़ हैं जिनमें हम लोगों के दरमियान गर्दिश देते रहते हैं, तुम ये वक्त इस तरह लाया गया के अल्लाह देखना चाहता था के तुम में सच्चे मोमिन कौन हैं, और उन लोगों को जपना चाहता था जो वकायी (रास्ती के) गवाही हो, क्योंके ज़ालिम लोग अल्लाह को पसंद नहीं हैं","और वो इस आजमाइश के ज़रीए से मोमिनो को अलग जप (शुद्ध) कर काफिरों की सरकोबी (ब्लॉट आउट) करना चाहता था","क्या तुमने ये समझ रखा है के यूं ही जन्नत में चले जाओगे हलांके अभी अल्लाह ने ये तो देखा ही नहीं के तुम में कौन वो लोग हैं जो उसकी राह में जानेन लड़ने वाले और उसकी खातिर सब्र करने वाले हैं","तुम तो मौत की तमन्नाएं कर रहे थे! मगर ये हमें वक्त की बात थी जब मौत सामने ना आई थी, लो अब वो तुम्हारे सामने आ गई और तुमने उसकी आंखें देख लिया","मुहम्मद इसके सिवा कुछ नहीं के बस एक रसूल हैं, उनसे पहले और रसूल भी गुजर चुके हैं। फिर क्या अगर वो मर जाए या क़त्ल कर दी जाए तो तुम लोग उल्टे पांव फिर जाओगे? याद रक्खो! जो उल्टा फिर गया वो अल्लाह का कुछ नुक्सान ना करेगा, अलबत्ता जो अल्लाह के शुक्रगुज़ार बंदे बनकर रहेंगे उनको वो इसकी जजा देगा","कोई ज़ि रूह अल्लाह के इज़ान के बिना नहीं मर सकता। मौत का वक्त तो लिखा हुआ है, जो शक्स सवाब ए दुनिया के इरादे से काम करेगा उसको हम दुनिया ही में से देंगे, और जो सवाब ए आखिरी के इरादे से काम करेगा वो आखिरी का सवाब पाएगा और शुक्र करने वालों को हम उनकी जजा जरूर अता करेंगे","इसके पहले कितने ही नबी ऐसे गुजर चुके हैं जिनके साथ मिलकर बहुत से खुदा परस्तों ने जंग की, अल्लाह की राह में जो मुसिबतें उन्पर पढ़ीं उनसे वो दिल सीखा नहीं हुए, उन्हें कामजोरी नहीं दिखाई, वो (बातिल के आगे) सरनागों (अपशब्द) नहीं हुए, ऐसे ही साबिरों को अल्लाह पसंद करता है","उनकी दुआ बस ये थी के \"ऐ हमारे रब! हमारी गलतियों और कहानियों से बेहतर फरमा, हमारे काम में तेरे हुदूद से जो कुछ तजावुज हो गया हो उसे माफ करदे, हमारे कदम जमा दे और काफिरों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर।”","आख़िर ए कार अल्लाह ने उनको दुनिया का सवाब भी दिया और इसे बेहतर सवाब ए आख़िरत भी आता किया। अल्लाह को ऐसे ही नेक अमल लोग पसंद हैं","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम उन लोगों के इशारों पर चलोगे जिन्होन ने कुफ्र की राह इख्तियार की है तो वो तुमको उल्टा फेर ले जाएंगे और तुम ना-मुराद हो जाओगे","(उनकी बातें गलत हैं) हकीकत ये है के अल्लाह तुम्हारा हमी ओ मददगार है और वो बेहतरीन मदद करने वाला है","अनकारीब वो वक्त आने वाला है जब हम मुनकिरीन ए हक के दिलों में रोब (आतंक/डर) बिठा देंगे, इसली के अनहोन ने अल्लाह के साथ उनको खुदाई में शरीक ठहराया है जिनके शरीक होने पर अल्लाह ने कोई सनद नाज़िल नहीं की, उनका आखिरी ठिकाना जहन्नुम है और बहुत ही बुरी है वो क़याम-गाह जो उन ज़ालिमों को नसीब होगी","अल्लाह ने (ताईद ओ नुसरत का) जो वादा तुमसे किया था वो तो उसने पूरा करदिया, इब्तेदा में उसके हुकुम से तुम उनको कत्ल कर रहे थे मगर जब तुमने कमजोरी दिखाई और अपने काम में बहम इख्तिलाफ किया, और जून के वो चीज अल्लाह ने तुम्हें दिखाई जिसकी मुहब्बत में तुम गिरफ्तार थे (यानी माल ओ गनीमत) तुम अपने सरदार के हुकुम की खिलाफत वारज़ी कर बैठे हैं इसलिए कि तुम में से कुछ लोग दुनिया के तालिब थे और कुछ आख़िरत की ख्वाहिश रखते थे, तब अल्लाह ने तुम्हें काफिरों के मुक़ाबले में पसंद कर दिया ता-के तुम्हारी आज़माइशें और हक़ ये है के अल्लाह ने फिर भी तुम्हें माफ़ ही करदिया क्यूँके मोमिनो पर अल्लाह बड़ी नज़र ए इनायत रखता है","याद करो जब तुम भागे चले जा रहे थे, किसी की तरफ पलट कर देखने तक का होश तुम्हें ना था, और रसूल तुम्हारे पीछे तुमको पुकार रहा था हमारा वक्त तुम्हारी इस रवीश का बदला है, अल्लाह ने तुम्हें ये दिया के तुमको रांझ पर रांझ दिए ता-के आंदा के लिए तुम्हें ये सबक मिले के जो कुछ तुम्हारे हाथ से जाए या जो मुसीबत तुम्पर नाज़िल हो उसपर मालुल (शोक) ना हो, अल्लाह तुम्हारे सब अमल से बख़बर है","इस ग़म के बाद फिर अल्लाह ने तुम में से कुछ लोगों पर ऐसी इत्मिनान की सी हालत तारी करदी के वो उगने लगे, मगर एक दूसरा गिरो ​​जिसके लिए सारी एहमियत बस अपने मफ़ाद ही की थी, अल्लाह के मुतालिक तरह तरह के जहिलाना गुमान करने लगा जो सरसर ख़िलाफ ए हक था, ये लोग अब कहते हैं के, \"क्या काम के चलने में हमारा भी कोई हिस्सा है?\" उनसे कहो, (किसी का कोई हिसा नहीं) इस काम के सारे इख्तियारात अल्लाह के हाथ में हैं। \"दरअसल ये लोग अपने दिलों में जो बात छुपाए हुए हैं उसे तुमपर जाहिर नहीं करते, इनका असल मतलब ये है के,\" अगर (क़यादत के) इख्तियारत में हमारा कुछ हिसाब होता तो यहां हम ना मारे जाते।\" इंसे कहदो के, \"अगर तुम अपने घरों में भी होते तो जिन लोगों की मौत लिखी हुई थी वो खुद अपने खून-गाहों की तरफ निकल आते थे'', और ये मामला जो पेश आया, ये तो इसलिए था के जो कुछ तुम्हारे सीने में पोशीदा (छिपा हुआ) है अल्लाह उसे आजमा ले और जो खोट तुम्हारे दिलों में है उसे चांट दे। अल्लाह दिलों का हाल खूब जानता है","तुम में से जो लोग मुकाबला के दिन पीठ फेर गए थे, उनकी इस लग्ज़िश का सबब ये था के उनकी बाज़ कमज़ोरियों की वजह से शैतान ने उन्हें कदम डगमगा दिया था। अल्लाह ने उन्हें माफ कर दिया, अल्लाह बहुत दरगुज़ार करने वाला और बर्दबार (सर्व सहनशील) है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, काफिरों की सी बातें ना करो जिनके अज़ीज़ ओ अक़रीब अगर कभी सफ़र पर जाते हैं या जंग में शरीक होते हैं (और वहां किसी हादसे से) दो-चार हो जाते हैं) तो वो कहते हैं के अगर वो हमारे पास होते तो ना मारे जाते और ना क़त्ल होते। अल्लाह क़िस्म की बातों को उनके दिलों में हसरत ओ एंडो का सबाब बना देता है, वरना दर-असल मरने और जेलाने वाला तो अल्लाह ही है और तुम्हारी तमाम हरकत पर वही निगरानी है","अगर तुम अल्लाह की राह में मारे जाओ या मर जाओ तो अल्लाह की जो रहमत और बख्शीश है तुम्हारे हिस्से में आएगी वो उन सारी चीजों से ज्यादा बेहतर है जिन्हें ये लोग जमा करते हैं","और ख्वाह तुम मारो या मारे जाओ बहार-हाल तुम सबको सिमत कर जाना अल्लाह ही की तरफ है","(ऐ पैगम्बर) ये अल्लाह की बड़ी रहमत है के तुम इन लोगों के लिए बहुत नरम मिजाज पैदा हुए हो, वरना अगर कहीं तुम तुंध-खु (कठोर) और संघ दिल होते तो ये सब तुम्हारे गिर्द ओ पेश से छठ जाते। इनके कसूर माफ़ करदो, इनके हक़ में दुआ-ए-मगफिरत करो, और दीन के काम में इनको भी शरीक ए मशवरा रक्खो। फिर जब तुम्हारा आजम (संकल्प) किसी राय पर मुस्तहकम हो जाए तो अल्लाह पर भरोसा करो, अल्लाह को वह लोग पसंद हैं जो उसके भरोसे पर काम करते हैं","अल्लाह तुम्हारी मदद पर हो तो कोई ताकत तुम पर गालिब आने वाली नहीं, और वो तुम्हें छोड़ दे तो इसके बाद कौन है जो तुम्हारी मदद कर सकता है? पास जो सच्चा मोमिन है उनको अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए","किसी नबी का ये काम नहीं हो सकता के वो खयानत कर जाए और जो कोई खयानत करे तो वो अपनी खयानत के साथ कयामत के रोज़ हाज़िर हो जाएगा, फिर हर मुतनफ़िस को उसकी कमाई का पूरा पूरा बदला मिल जाएगा और किसी पर कुछ ज़ुल्म न होगा","भला ये कैसा हो सकता है के जो शक्स हमेशा अल्लाह की रज़ा पर चलने वाला हो वो हम शक्स के कहे काम करे जो अल्लाह के गजब में घिर गया हो, और जिसका आखिरी ठिकाना जहन्नुम हो जो बढ़ता है ठिकाना है","अल्लाह के नाज़दीक डोनो क़िस्म के आदमियों में बदरजहा फर्क है और अल्लाह सबके आमाल पर नजर रखता है","दार-हकीकत एहले ईमान पर अल्लाह ने ये बहुत बड़ा एहसान किया है के उनके दरमियान खुद उन्ही में से एक ऐसा पैगम्बर उठाया जो उसकी आयत उन्हें सुनाता है, उनकी जिंदगी को संवारता है और उनको किताब और ज्ञान (बुद्धि) की तालीम देता है, हलांके इसे पहले यहीं लोग सारे गुमराहियों में पड़े हुए थे","और ये तुम्हारा क्या हाल है के जब तुमपर मुसीबत आ पड़ी तो तुम कहने लगे ये कहां से आई? हलाँके (जंग ए बद्र में) इस्से दुगनी (डबल) मुसीबत तुम्हारे हाथों [फ़ारिक ए मुख़ालिफ़ (दुश्मनों) पर] पढ़ चुकी है। (ऐ नबी)! इनसे कहो, ये मुसीबत तुम्हारी अपनी लाई हुई है, अल्लाह हर चीज पर कादिर है","जो नुक्सान लड़ायी के दिन तुम्हें पहुंचा वो अल्लाह के इज़ान से था और इसलिए था के अल्लाह देखले तुम में से मोमिन कौन है","और मुनाफिक कौन। वो मुनाफिक के जब उनसे कहा गया, आओ अल्लाह की राह में जंग करो या काम अज़ काम (अपने शहर की) मुदाफ़ियात (रक्षा) ही करो, तो कहने लगेंगे अगर हमें इल्म होता के आज जंग होगी तो हम ज़रूर तुम्हारे साथ चलते हैं। ये बात जब वो कह रहे थे हमें वक्त वो ईमान की ब-निस्बत कुफ्र से ज्यादा करीब था। वो अपनी जुबान से वो बातें कहते हैं जो उनके दिलों में नहीं होती, और जो कुछ वो दिलों में छुपते हैं अल्लाह उसे खूब जानता है","ये वही लोग हैं जो खुद तो बैठे रहे और उनके जो भाई-बंद लादने गए और मारे गए उनके मुतालिक इन्हों ने केहदिया के अगर वो हमारी बात मान लेते तो ना मारे जाते। इनसे कहो अगर तुम अपने इस क़ौल में सच्चे हो तो खुद तुम्हारी मौत जब आए उसे ताल कर दिखा देना","जो लोग अल्लाह की राह में क़त्ल हुए हैं उन्हें मुर्दा ना समझो, वो तो हकीकत में ज़िंदा हैं, अपने रब के पास रिज़्क पा रहे हैं","जो कुछ अल्लाह ने अपने फजल से उन्हें दिया है उसपर खुश ओ खुर्रम हैं, और मुतमईन हैं के जो एहले ईमान उनके पीछे दुनिया में रह गए हैं और अभी वहां नहीं पहुंच पाए हैं उनके लिए भी कोई खौफ और रांझ का मौका नहीं है","वाह अल्लाह के इनाम और उसके फ़ज़ल पर शादान ओ फ़रहान हैं और उनको मालूम हो चुका है के अल्लाह मोमिनो के अजर को ज़या नहीं करता","जिन लोगों ने ज़ख्म खाने के बाद भी अल्लाह और रसूल की पुकार पर लब्बैक कहा (उत्तर दिया) उन में जो अशखास नीकुकर और परहेज़गार हैं उनके लिए बड़ा अजर है","और वो जिनसे लोगों ने कहा के, “तुम्हारे ख़िलाफ बड़ी फौजें जमा हुई” हैं, उनसे डरो\", तो ये सुनकर उनका ईमान और बढ़ गया (बढ़ा) और उनको ने जवाब दिया के हमारे लिए अल्लाह काफी है और वही बेहतरीन कार्साज है","आखिर ए कार वो अल्लाह ताला की नियामत और फज़ल के साथ पलट आए, उनको किसी क़िस्म का ज़रार भी ना चाहिए और अल्लाह कि रजा पर चलने का शरफ भी उन्हें हासिल हो गया, अल्लाह बड़ा फजल फरमाने वाला है","अब तुम्हें मालूम होगा के वो दर-असल शैतान था जो अपने दोस्तों से ख्वा-मा-ख्वा (तुमको) डरा रहा था, लिहाजा आइंदा तुम इंसानों से ना डरना, मुझसे डरना अगर तुम हकीकत में साहिब ए ईमान हो","(ऐ पैगम्बर) जो लोग आज कुफ्र की राह में बड़ी दौड़ धूप कर रहे हैं उनकी सरगर्मियां तुम्हें दुखी न करें। ये अल्लाह का कुछ भी ना बिगाड़ पाएंगे. अल्लाह का इरादा ये है कि उनके लिए आख़िरत में कोई हिसा ना रखे, और बिल आख़िर उनको सज़ा मिलने वाली है","जो लोग ईमान को छोड़ कर कुफ़्र के ख़रिदार बने हैं वो यक़ीनन अल्लाह का कोई नुक्सान नहीं कर रहे हैं। उनके लिए दर्दनक अजब तय्यर है","ये धीरे-धीरे जो हम उन्हें दिए जाते हैं इसको ये काफिर अपने हक में बेहतरी ना समझे। हम तो उन्हें इस तरह से ढील दे रहे हैं के ये खूब बार-ए-गुनाह समित लें, फिर उनके लिए सख्त ज़लील करने वाली सजा है","अल्लाह मोमिनो को इस हालात में हरगिज़ न रहने देगा जिसमें तुम इस वक्त पे जाते हो। वो पाक लोगों को नापाक लोगों से अलग करके रहेगा। मगर अल्लाह का ये तरीक़ा नहीं है कि तुमको गैब पर मुत्तला करदे। गैब की बातें बताने के लिए तो वो अपने रसूलों में जिसको चाहता है मुंतखब करता है। लिहाजा (उमूर ए गैब के बारे में) अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रक्खो अगर तुम ईमान और खुदा तरसी की रवीश पर चलोगे तो तुमको बड़ा अजर मिलेगा","जिन लोगों को अल्लाह ने अपने फजल से नवाजा है और फिर वो भुख्ल (कंजूसी/कठिनाई) से काम लेते हैं वो इस ख़याल में ना रहें के ये बख़ैली उनके लिए अच्छी है। नहीं, ये उनके हक में निहायत बुरी है, जो कुछ वो अपनी कंजूसी से जमा कर रहे हैं वही कयामत के रोज उनके गले का तौक बन जाएगा। ज़मीन और आसमानों की मीरास अल्लाह ही के लिए है और तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसे बाख़बर है","अल्लाह ने उन लोगों का क़ौल सुना जो कहते हैं के अल्लाह फ़कीर है और हम गनी हैं। उनकी ये बातें भी हम लिख लेंगे, और इस पहले जो वो पैगम्बरों को ना-हक़ क़त्ल करते रहे हैं वो भी उनके नाम ए अमाल में सब्त है (जब फ़ैसले का वक़्त आएगा उस वक़्त) हम उनसे कहेंगे के लो अब अज़ाब ए जहन्नुम का मजा चक्खो","ये तुम्हारे अपने हाथों की कमाई है, अल्लाह अपने बंदों के लिए जालिम नहीं है","जो लोग कहते हैं \"अल्लाह ने हमको हिदायत करदी है कि हम किसी को रसूल तस्लीम न करें जब तक वो हमारे सामने ऐसी कुर्बानी न करे जिसमें (गाइब से आकार) आग खा ले\", उनसे कहो, \"तुम्हारे पास मुझसे पहले बहुत से रसूल आ चुके हैं जो बहुत सी\" रोशन निशानियां लाए थे और वो निशानियां भी लाए थे जिसका तुम ज़िक्र करते हो (ईमान लाने के लिए ये शर्त पेश करने में) तुम सच्चे हो तो उन रसूलों को तुमने क्यों क़त्ल किया?”","अब (ऐ मुहम्मद)!अगर ये लोग तुम्हें झुठलाते हैं तो बहुत से रसूल तुमसे पहले झुटले जा चुके हैं जो खुली खुली निशानियां और सहीफे (ग्रंथ) और रोशनी बख्शने वाली किताबें लाए थे","आखिर ए कार हर शक्स को मरना है और तुम सब अपने-अपने पूरे अजर कयामत के रोज़ पाने वाले हो। कमियाब दर-असल वो है जो वहां आतिश ए दोज़ख से बच जाए और जन्नत में दखल कर दिया जाए। राही ये दुनिया, तो ये महज़ एक ज़ाहिर फरेब चीज़ है","(मुसलमानो)! तुम्हें माल और जान दोनों की आजमाइशें पेश आकर रहेंगी, और तुम एहले किताब और मुशरिकेन से बहुत से तकलीफ-दे बातें सुनोगे। अगर सब हालात में तुम सब्र और खुदा तरसी की रवीश पर कायम रहो तो ये बदे हौसलों का काम है","एहले किताब को वो अहद भी याद दिलाओ जो अल्लाह ने उनसे लिया था के तुमने किताब की तालीमात को लोगों में फैलाना होगा, उनमें पोशीदा रखना नहीं होगा. मगर उनहों ने किताब को पास-ए-पुश्त (पीठ के पीछे) डाल दिया और थोड़ी कीमत पर उसे बेच डाला। कितना बुरा करोबार है जो ये कर रहे हैं","तुम उन लोगों को अजब से महफ़ूज़ ना समझो जो अपने कार्टून पर खुश हैं और चाहते हैं कि ऐसे कामों की तारीफ़ उन्हें हासिल हो जो फ़िलहाल उन्होन ने नहीं किया है। हकीकत में उनके लिए दर्दनाक सजा तय्यार है","जमीन और आसमान का मालिक अल्लाह है और उसकी कुदरत सब पर हावी है","जमीन और आसमान की अदायगी में और रात और दिन के बारी बारी से आने में उन होशमंद लोगों के लिए बहुत निशानियां हैं","जो उठते, बैठते और लेटते, हर हाल में खुदा को याद करते हैं और आसमान ओ ज़मीन की सच्चाई (सृजन) में गौर ओ फ़िक्र करते हैं। (वो बे-इख्तियार बोल उठते हैं) \"परवरदिगार! ये सब कुछ तू नई फ़िज़ुल और बे-मकसद नहीं बनाया है, तू पक गया है इसके अबस (बेकार / व्यर्थ) काम करे। पास ऐ रब! हमें दोज़ख के अज़ाब से बचा ले","तू नहीं जिसे दोज़ख में डाला उसे डार हकीकत बड़ी ज़िल्लत ओ रुसवाई में दाल दिया, और फिर ऐसे ज़ालिमों का कोई मददगार न होगा","मालिक! हमने एक पुकारने वाले को सुना जो ईमान की तरफ बुलाता था और कहता था के अपने रब को मानो, हमने उसकी दावत कबूल की, हमारे पास। आक़ा! जो कसूर हमसे हुए हैं उनसे दरगुज़र फ़रमा। जो बुराइयां हम में हैं उनसे दूर करदे और हमारा ख़तमा नीक लोगों के साथ कर","ख़ुदावंदा! जो वादे तू नहीं अपने रसूलों के ज़रिये से किये हैं उनको हमारे साथ पूरा कर और कयामत के दिन हमें रुसवाई में ना डाल, बेशक तू अपने वादे के ख़िलाफ़ करने वाला नहीं है”","जवाब में उनके रुब ने फरमाया, “मैं तुम में से किसी का अमल ज़या करने वाला नहीं हूं, ख्वा मर्द हो या औरत, तुम सब एक दूसरे के हम जिन हो। लिहाजा जिन लोगों ने मेरी खातिर अपने वतन छोड़े और जो मेरी राह में अपने घरों से निकले गए और सताए गए और मेरे लिए लड़े और मारे गए उनके सब कसूर माई माफ कर दूंगा और उन्हें ऐसे बागों में दाखिल करूंगा जिनका आला जरूरी है होंगी. ये उनकी जजा है अल्लाह के हान और बेहतरीन जजा अल्लाह ही के पास है\"","(ऐ नबी)! दुनिया के मुल्कों में खुदा के नफरमान लोगों की चलती फिरत तुम्हें किसी धोखे में ना डाले","ये महज़ चंद रोजा जिंदगी का थोड़ा सा लुत्फ है, फिर ये सब जहन्नुम में जायेंगे जो बद्दतरें जाये क़रार है","बरक्स इसके जो लोग अपने रब से डरते हुए जिंदगी बसर करते हैं उनके लिए ऐसे बाग हैं जिनका आला नेहरेन बहती हैं, बागों में वो हमेशा रहेंगे, अल्लाह की तरफ से ये समां ए ज़ियाफ़त है उनके लिए, और जो कुछ अल्लाह के पास है नए लोगों के लिए वही सबसे बेहतर है","एहले किताब में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो अल्लाह को मानते हैं, उस किताब पर ईमान लाते हैं जो तुम्हारी तरफ भेजी गई है और उस किताब पर भी ईमान रखते हैं जो इसे पहले खुद उनकी तरफ भेजी गई थी। अल्लाह के आगे झुके हैं, और अल्लाह की आयत को थोड़ी सी कीमत पर बेच नहीं देते। इनका अजर इनके रब के पास है और अल्लाह हिसाब चुकाने में डर नहीं लगता","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, सब्र से काम लो, बातिल पारसन के मुक़ाबले में पा-मरदी दिखाओ, हक़ की खिदमत के लिए कमर-बस्ता हो जाओ, और अल्लाह से डरते रहो, उम्मीद है के फलाह पाओगे","लोगन! अपने रब से डरो जिसने तुमको एक जान से अदा किया और उसी जान से उसका जोड़ा बनाया और उन दोनो से बहुत मर्द ओ औरत दुनिया में फैल गए, हमसे खुदा से डरो जिसका वास्ता देकर तुम एक दूसरे से अपना हक मांगते हो, और रिश्ता ओ क़राबत के ताल्लुकात को बिगाड़ने से परहेज करो, यकीन जानो के अल्लाह तुमपर निगरानी कर रहा है","यतीमों के माल उनको वापस दो, अच्छे माल को बुरे माल से ना बदल लो, और उनके माल अपने माल के साथ मिलकर कर ना खा जाओ, ये बहुत बड़ा गुनाह है","और अगर तुम यतीमों के साथ बे-इंसाफी करने से डरते हो तो जो औरतें तुमको पसंद आये उन्हें दो दो, तीन तीन, चार चार से निकाह करलो, लेकिन अगर तुम्हें अंदेशा हो के उनके साथ अदल ना कर सकोगे तो फिर एक ही बीवी करो या उन औरतों को जजियत में लाओ जो तुम्हारे क़ब्ज़े में आई है, इन्साफ़ी से बचने के लिए ये ज़्यादा क़रीन ए सवाब है","और औरतों के मेहर खुश दिली के साथ (फर्ज जानते हुए) अदा करो, अलबत्ता अगर वो खुद अपनी खुशी से मेहर का कोई हिसा तुम्हें माफ कर दें तो उसे तुम मजे से खा सकते हो","और अपने वो माल जिनहे अल्लाह ने तुम्हारे लिए कयाम ए ज़िन्दगी का ज़ैरया बनाया है, नादान लोगों के हवाले ना करो, अलबत्ता उन्हें खाने और पहनने के लिए दो और उन्हें नई हिदायत करो","और यतीमों की आजमाइश करते रहो यहाँ तक के वो निकाह के काबिल उमर को पाहुंच जाएँ। फिर अगर तुम उनके अंदर एहलियात पाओ (मानसिक रूप से परिपक्व) तो उनके माल उनके हवाले करदो, ऐसा कभी न करना के हद ए इन्साफ से तजावुज करके इस खौफ से उनके माल जल्दी जल्दी खा जाओ के वो बदाए होकर अपने हक का मुतालिबा करेंगे। यतीम का जो सरपरस्त मालदार हो वो परहेज़गारी से काम ले और जो ग़रीब हो वो मारूफ़ तारीख़ से खाए। फिर जब उनके माल उनके हवाले करने लगो तो लोगों को इसपर गवाह बना लो, और हिसाब लेने के लिए अल्लाह काफी है","मर्दों के लिए उस माल में हिसा है जो मां बाप और रिश्तेदार ने छोड़ा हो, और औरतों के लिए भी उस माल में हिसा है जो मां बाप और रिश्तेदार ने छोड़ा हो, ख्वाह थोड़ा हो या बहुत, और ये हिसा (अल्लाह की तरफ से) मुकर्रर है","और जब तकसीम के मौके पर कुंबे (परिवार) के लोग और यतीम और मिस्कीन आएं तो इस माल में से उनको भी कुछ दो और उनके साथ भले मानस-ऑन (इंसान) की सी बात करो उन्हें कृपया)","लोगों को इस बात का ख्याल करके डरना चाहिए के अगर वो खुद अपने पीछे बेबस औलाद छोड़ते तो मरते वक्त उन्हें अपने बच्चों के हक में कैसे कुछ अंदेशे लाहिक होते। पास चाहिए के वो खुदा का खौफ करें और रस्ती की बात करें","जो लोग ज़ुल्म के साथ यतीमों के माल खाते हैं दर-हकीकत वो अपने पैत आग से भरते हैं और वो जरूर जहन्नुम की भड़कती हुई आग में झोंके जाएंगे","तुम्हारी औलाद के बारे में अल्लाह तुम्हें हिदायत करता है के: मर्द का हिसा दो औरतों के बराबर है, अगर (मय्यत की वारिस) दो से ज़ायद लड़कियाँ हों तो उन्हें तर्क (विरासत) का दो तिहाई (2/3) दिया जाए, और अगर एक ही लड़की वारिस हो तो आधा (आधा) उसका। है, अगर मय्यत साहब ए औलाद हो तो उसके वलियों में से हर एक को तर्क का चाटा (छठा) हिसा मिलना चाहिए, और अगर वो साहब ए औलाद न हो और उसके वारिस हों तो मां को तिसरा (तीसरा) हिसा दिया जाए और अगर मय्यत के भाई बहन भी हो तो मां चाटे (छठा) इसकी हक़दार होगी। (ये सब इसी से वक्त निकले जाएंगे) जबके वसीयत जो मय्यत ने की हो पूरी करदी जाए और क़र्ज़ जो उसपर हो अदा करदिया जाए। तुम नहीं जानते कि तुम्हारे माँ बाप और तुम्हारी औलाद में से कौन बलिहाज़-ए-नफ़ा तुमसे करीब है। ये इसी तरह अल्लाह ने मुकर्रर कर दिया है, और अल्लाह यकीनन सब हकीकत से वाकिफ और सारी मसलहतों का जाने वाला है","और तुम्हारी बीवीयों ने जो कुछ छोड़ा हो उसका आधा हिसा तुम्हें मिलेगा अगर वो बे-औलाद हो, वरना औलाद होने की सूरत में तर्क का एक चौथाई (एक चौथाई) हिसा तुम्हारा है जबके वसीयत जो उन्होन ने की हो पूरी करदी जाए, और क़र्ज़ जो उन्होन ने छोड़ा हो अदा करदिया जाए, और वो तुम्हारे तर्क में से चौथी कि हक़दार होगी अगर तुम बे-औलाद हो, वरना साहब ए औलाद होने की सूरत में उनका हिसा आठवां होगा, बाद इसके के जो वसीयत तुमने की हो वो पूरी कर दी जाए और जो क़र्ज़ तुमने छोड़ा हो वो अदा कर दिया जाए और अगर वो मर्द या औरत (जिसकी मीरास तकसीम तलब है) बे-औलाद भी हो और उसकी मां बाप भी जिंदा न हो, मगर उसका एक भाई या एक बहन मौजूद हो तो भाई और बहन हर एक को चट्टा (छठा) हिसा मिलेगा, और भाई बहन एक से ज्यादा हो तो कुल तरके के एक तिहाई (एक तिहाई) में वो सब शरीक होंगे, जबके वसीयत जो की गई हो पूरी कर दी जाए, और क़र्ज़ जो मय्यत ने छोड़ा हो अदा करदिया जाए, बशरत ये के वो ज़रार रसन ना हो (कोई चोट नहीं पहुंचाता)। ये हुकुम अल्लाह की तरफ से और अल्लाह दाना ओ बीना और नरम-खु है","ये अल्लाह की मुकर्रर की हुई हदें (सीमाएं) हैं। जो अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करेगा उसे अल्लाह ऐसे बाघों में दखल करेगा जिनकी जगहें नहरें बहती होंगी और उन बाघों में वो हमेशा रहेगा और यही बड़ी कामयाबी है","और जो अल्लाह और उसके रसूल की नफरमानी करेगा और उसकी मुकर्रर की हुई हदन (हद) से तजावुज कर जाएगा उसे अल्लाह आग में डालेगा जिसमें वह हमेशा रहेगा और उसके लिए रुसवा-कुन सजा है","तुम्हारी औरतों में से जो बदकारी की मुर्तकिब हूं, अपने में से चार आदमियों की गवाही लो, और अगर चार आदमी गवाही दे दें तो उनको घरों में बंद रखें यहां तक ​​के उन्हें मौत आ जाए या अल्लाह उनके लिए कोई रास्ता निकाल दे","और तुम में से जो इस फेल का इर्तेकाब करें उन दोनों को तकलीफ दो, फिर अगर वो तौबा करें और अपनी इस्लाह कार्लें तो उन्हें छोड़ दो के अल्लाह बहुत तौबा क़बूल करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","हां ये जान लो के अल्लाह पर तौबा की क़बूलियत का हक़ उन्ही लोगों के लिए है जो नादानी की वजह से कोई बुरा फेल (अमल) कर गुज़रते हैं और उसके बाद जल्दी ही तौबा करते हैं। ऐसे लोगों पर अल्लाह अपनी नजर ए इनायत से फिर मुतवज्जैह हो जाता है और अल्लाह सारी बातों की खबर रखने वाला और हकीम ओ दाना है","मगर तौबा उन लोगों के लिए नहीं है जो बुरे काम किए चले जाते हैं यहां तक ​​के जब उनमें से किसी की मौत का वक्त आ जाता है हमें वक्त वो कहता है कि अब मैंने तौबा की, और इसी तरह तौबा उनके लिए भी नहीं है जो मरते दम तक काफिर रहे। ऐसे लोगों के लिए तो हमने दर्दनाक सजा तय्यार कर रखी है","ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारे लिए ये हलाल नहीं है के ज़बरदस्ती औरतों के वारिस बन बैठो और ना ये हलाल है के उन्हें तंग करके हमसे महर का कुछ हिसा उधार लेने की कोशिश करो जो तुम उन्हें दे चुके हो। हां अगर वो किसी सारी हद-चलनी की मुर्तकीब है (तो जरूर तुम्हें तंग करने का हक है)। उनके साथ भले तरीक़े से ज़िंदगी बसर करो, अगर वो तुम्हें ना पसंद हो तो हो सकता है कि एक चीज़ तुम्हें पसंद ना हो मगर अल्लाह ने उसमें बहुत कुछ भलाई रख दी हो","और अगर तुम एक बीवी की जगह दूसरी बीवी ले आने का इरादा ही करलो तो ख्वाह तुमने उसे ढेर सा माल ही क्यों ना दिया हो, उसमें से कुछ वापस ना लेना, क्या तुम उसे बहुत ज्यादा लगा कर और सारे ज़ुल्म करके वापस लोगे","और आख़िर तुम उसे किस तरह ले लोगे जबके तुम एक दूसरे से लुत्फ़-अंदोज़ हो चुके हो और वो तुमसे पुख़्ता अहद ले चुकी हैं","और जिन औरतों से तुम्हारे बाप निकाह कर चुके हैं, उनसे हरगिज़ निकाह ना करो, मगर जो पहले हो चूका सो हो चुका। दार-हकीकत ये एक बेहाय का फेल (काम) है, नपसंददा है और बुरा चलन है","तुम पर हराम की गई तुम्हारी मांएं, बेटियां, बहनें, फुपियां, खलाएं, भतीजियां, भंजियां और तुम्हारी वो मांएं जिन्हों ने तुमको दूध पिलाया हो, और तुम्हारी दूध शरीक बहनें, और तुम्हारी बीवियों की मायें, और तुम्हारी बीवियों की लड़कियाँ जिन्हों ने तुम्हारी गोदों में परवरिश पाई है, उन बीवियों की लड़कियाँ जिनसे तुम्हारा तालुक ज़ान ओ शॉ (अंतरंग संबंध) हो चुक्का हो वरना अगर (सिर्फ निकाह हुआ हो और) तालुक ए ज़ान ओ शॉ (अंतरंग संबंध) ना हुआ हो तो (उन्हें छोड़ कर उनकी लड़कियों से निकाह करने में) तुम्पर कोई मवाज़ख्ज़ा नहीं है, और तुम्हारे उन बेटों की बियाएं जो तुम्हारी हल्ब से पैदा हुईं (तुम्हारे दिलों से निकली) और ये भी तुम्पर हराम किया गया है के निकाह में दो बेहोन को जमा करो, मगर जो पहले हो गया सो हो गया, अल्लाह बक्शने वाला और रहम करने वाला है","और वो औरतें भी तुमपर हराम हैं जो किसी दूसरे के निकाह में हो (मोहसिनात) अलबत्ता ऐसी औरतें इसे मुस्तसना हैं जो (जंग में) तुम्हारे हाथ आएं। ये अल्लाह का कानून है जिसकी पाबंदी तुमपर लाज़िम कर दी गई है। इनके माँ-सिवा जितनी औरतें हैं उन्हें अपने अमवाल के ज़रिये से हासिल करना तुम्हारे लिए हलाल कर दिया गया है, बशारत ये के हिसार निकाह में उनको महफ़ूज़ करो, ना ये के आज़ाद शेहवत रानी (वासना की संतुष्टि) करने लगो, फिर जो इज़्ज़वाजी जिंदगी का लुत्फ़ तुम उन्हें उठाओ उसके बदले उनके मेहर बटोअर फ़र्ज़ अदा करो। अलबत्ता महर की करारादाद हो जाने के बाद आपस की रजामंडी से तुम्हारे दरमियान अगर कोई समझा हो जाए तो इसमें कोई हराज नहीं। अल्लाह अलीम और दाना (बुद्धिमान) है","और जो शक्स तुम में से इतनी मक़दरत न रखता हो के खानदानी मुसलमान औरतों (मोहसिनात) से निकाह कर सके उसे चाहिए के तुम्हारी उन लड़कियों में से किसी के साथ निकाह करले जो तुम्हारे क़ब्ज़े में माननीय और मोमिना हों। अल्लाह तुम्हारे ईमानो का हाल खूब जानता है। तुम सब एक ही गिरोह के लोग हो, लिहाजा उनके सरपरस्तों (गुराडियंस) की इजाजत से उनके साथ निकाह करलो और मारूफ तारीख से उनके मेहर अदा करदो, ता-के वो हिसार ए निकाह में महफूज (मोहसेनात) होकर रह रहे हैं, आजाद शेखवत-रानी करती फिरें और ना चोरी छिपे आशनाइयां करें(गुप्त प्रेम प्रसंग)। फिर जब वह हिसार ए निकाह में महफूज हो जाए और उसके बाद किसी की बद-चलनी की मुर्तकीब हो तो उस पर उस सजा की बा-निस्बत आधी सजा है जो खानदानी औरतों (मोहसिनात) के लिए मुकर्रर है। ये सहुलत तुम में से उन लोगों के लिए भुगतान की गई है जिनको शादी ना करने से बंद-ए-तकवा के टूट जाने का अंदेशा हो। लेकिन अगर तुम सब्र करो तो ये तुम्हारे लिए बेहतर है। और अल्लाह बख्शने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","अल्लाह चाहता है कि तुम उन तरीक़ों को वाज़ेह करे और उन्ही तरीक़ों पर तुम्हें चलाये जिनकी जोड़ी तुमसे पहले गुज़रे हुए सुलह (धर्मी) करते थे। वो अपनी रहमत के साथ तुम्हारी तरफ मुतवज्जे होने का इरादा रखता है। और वो अलीम भी है और दाना भी","हां, अल्लाह तो तुमपर रहमत के साथ तवज्जु करना चाहता है मगर जो लोग खुद अपनी ख्वाहिशत ए नफ्स की जोड़ी बना रहे हैं वो चाहते हैं के तुम राह ए रास्ते से हट कर दूर निकल जाओ","अल्लाह तुमपर से पाबंदियां को हल्का करना चाहता है क्योंकि इंसान कर्ज चुकाया गया है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, आपस में एक दूसरे के माल बातिल तारीखों से ना खाओ, लें देइन होना चाहिए आपस की रजामंडी से और अपने आप को कत्ल ना करो यकीन मानो के अल्लाह तुम्हारे ऊपर मेहरबान है","जो शक्स ज़ुल्म और ज़्यादा के साथ ऐसा करेगा उसको हम ज़रूर आग में झोंकेंगे और ये अल्लाह के लिए कोई मुश्किल काम नहीं है","अगर तुम उन बदे गुनाहों से परहेज़ करते रहो जिनसे तुम मन किया जा रहा है तो तुम्हारी छोटी मोटी बुराइयों को हम तुम्हारे हिसाब से साबित कर देंगे और तुमको इज्जत की जगह दाख़िल करेंगे","और जो कुछ अल्लाह ने तुम में से किसी को दूसरे के मुकाबले में ज्यादा दिया है उसकी तमन्ना ना करो। जो कुछ मर्दों ने कमाया है उसे मुताबिक़ उनका हिसा है और जो कुछ औरतों ने कमाया है उसे मुताबिक़ उनका हिसा। हां अल्लाह से उसके फजल की दुआ मांगते रहो। यकीनन अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है","और हमने हर हमसे तर्के (विरासत) के हक़दार मुक़र्रर करदी हैं जो वाल्दैन और रिश्तेदार छोड़ें, अब रहे वो लोग जिनसे तुम्हारे अहद ओ पैमान हों तो उनका हिसा उन्हें दो। यकीनन अल्लाह हर चीज़ पर निगरान है","मर्द औरतों पर कव्वाम (रक्षक और रखवाले) हैं, इस बिना पर के अल्लाह ने उनमें से एक को दूसरे पर फजीलत दी है, और इस बिना पर के मर्द अपने माल खर्च करते हैं। पास जो साले औरतें हैं वो इताअत शिया (आज्ञाकारी) होती हैं और मर्दों के पीछे अल्लाह की हिफ़ाज़त ओ निगरानी में उनके हुकूक़ की हिफ़ाज़त करती हैं। और जिन औरतों से तुम सरकशी का अंदेशा हो उन्हें समझाओ, ख्वाबगाहों में (बिस्तरों में) उन्हें अलहेदा (अलग) रहो और मारो, फिर अगर वो तुम्हारी मुती (आज्ञाकारी) हो जाए तो ख्वा मा ख्वा अनपर दस्त दार्जी केलिए बहाने तलाश (नुकसान पहुंचाने के तरीके ढूंढो) ना करो। यकीन रक्खो के ऊपर अल्लाह मौजूद है जो बड़ा और महान है","और अगर तुम लोगों को कहीं मिया और बीवी के तालुक्कत बिगाद जाने का अंदेशा हो तो एक हकम (मध्यस्थ) मर्द के रिश्तेदारों में से और एक औरत के रिश्तेदारों में से मुकर्रर करो। वो दोनों इस्लाह करना चाहेंगे अल्लाह के लिए उनके दरमियान मुवाफिकत की सूरत निकल देगा। अल्लाह सब कुछ जानता है और बाख़बर है","और तुम सब अल्लाह की बंदगी करो, उसके साथ किसी को शरीक न बनाओ, माँ बाप के साथ नीक बरताओ करो, क़राबतदारों (रिश्तेदारों) और यतीमों और मिस्कीनो के साथ हुस्न ए सुलूक से पेश आओ, और पड़ोसि रिश्तेदार से, अजनबी हमसाए (पड़ोसी) से, पहलू के साथी (अपनी तरफ से साथी) और मुसाफिर से, और उन लौंडी गुलामों से जो तुम्हारे क़ब्ज़े में हो, एहसान का मामला रखो, यकीन जानो अल्लाह किसी ऐसे शक्स को पसंद नहीं करता जो अपने पिंडार में मगरूर हो और अपनी बदाई पर फक्र करे (अभिमानी और घमंडी)","और ऐसे लोग भी अल्लाह को पसंद नहीं हैं जो कंजूसी करते हैं और दूसरों को भी हिदायत करते हैं, और जो कुछ अल्लाह ने अपने फज़ल से उन्हें दिया है उसे छुपाते हैं। ऐसे काफ़िर-ए-नियामत लोगों के लिए हमने रुसवा-कुन अज़ाब मुहैय्या कर रखा है","और वो लोग भी अल्लाह को ना-पसंद हैं जो अपने माल महज़ लोगों को दिखाने के लिए खर्च करते हैं और दर हकीकत ना अल्लाह पर ईमान रखते हैं ना रोज़ ए आख़िर पर, सच ये है के शैतान जिसका रफीक (साथी) हुआ उसे बहुत ही बुरी रफाकत मुयस्सर आई","आखिर लोगों पर क्या आफत आ जाती अगर ये अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान रखते और जो कुछ अल्लाह ने दिया है उसमें से खर्च करते? अगर ये ऐसा करता तो अल्लाह से इनकी नेकी का हाल छुपा न रह जाता","अल्लाह किसी पर जरा बराबर भी जुल्म नहीं करता, अगर कोई एक नेकी करे तो अल्लाह उसे दो चांद करता है और फिर अपनी तरफ से बड़ा अजर अता फरमाता है","फिर सोचो के हमें वक्त ये क्या करेंगे जब हम हर उम्मत में से एक गवाह लाएंगे और लोगों पर तुम्हारे साथ [यानी मुहम्मद (सस) को] गवाह की हैसियत से खड़ा करेंगे","हमें वक्त वो सब लोग जिन्हों ने रसूल की बात न मानी और उसकी नफ़रमानी करते रहेंगे, तमन्ना करेंगे के काश ज़मीन फट जाए और वो इस में समा जाए, वहां ये अपनी कोई बात अल्लाह से ना छुपाएंगे","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम नशे की हालत में हो तो नमाज के करीब ना जाओ, नमाज हमें वक्त पढ़ना चाहिए जब तुम जानो के क्या कह रहे हो, और इसी तरह जनाब की हालत में भी नमाज के करीब ना जाओ, जब तक के ग़ुस्ल ना करो, इल्ला ये के रास्ते से गुज़रते हो. और अगर कभी ऐसा हो कि तुम बीमार हो, या सफर में हो, या तुम में से कोई शक्स रफे खतरे में डालकर आये, या तुमने औरतों से अंतरंग संबंध बनाया हो, और फिर पानी ना मिले तो पाक मिट्टी से काम लो और इसे अपने चेहरों और हाथों पर मसला करो। बेशक अल्लाह नरमी से काम लेने वाला और बख्शीश फरमाने वाला है","तुमने उन लोगों को भी देखा जिन्होंने किताब के इल्म का कुछ हिसाब दिया है? वो खुद जलालत के खरीदार बने (खुद के लिए खरीदी गई त्रुटि) हैं और चाहते हैं के तुम भी राह गम करदो","अल्लाह तुम्हारे दुश्मनों को खूब जानता है और तुम्हारी हिमायत ओ मददगार के लिए अल्लाह ही काफी है","जो लोग यहुदी बन गए हैं उनमें कुछ लोग हैं जो अल्फ़ाज़ को उनके महल से फेर देते हैं और दीन ए हक़ के ख़िलाफ नेश-ज़ानी (शब्दों को उनके संदर्भ से बदलें) करने के लिए अपनी ज़ुबानो को तोड़ मोड़ कर कहते हैं 'समीना वा असयना' (हमने सुना है और हमने अवज्ञा की है) और 'इस्मा ग़ैर मुस्मा' (हमें ज़रूर सुनें, कहीं आप गूंगे न हो जाएं) और 'रैना' (सुनें हम)। हालंके अगर वो कहते 'समीना वा अताना' (हमने सुना है और हम मानते हैं), और इस्मा और अनज़ुर्ना [हमारी बात जरूर सुनें, और हमारी तरफ देखें (दया के साथ)] तो ये उनके लिए बेहतर था और ज्यादा रस्तबाजी का तरीका था। मगर उन पर उनकी बातिल परस्ती की बदौलत अल्लाह की फिटकर पड़ी हुई है उसके लिए वो कम ही ईमान लाते हैं","ऐ वो लोगन जिनहेन किताब दी गई थी! मान लो उस किताब को जो हमने अब नाज़िल की है और जो उस किताब की तस्दीक या तय करती है जो तुम्हारे पास पहले से मौजुद थी। इसपर ईमान ले आओ क़ब्ल इसके के हम चेरे बिगाड कर पीछे फेर दें या उनको उसी तरह लानत जदा करदें जिस तरह सब्त (सब्बाथ) वालों के साथ हमने किया था, और याद रक्खो के अल्लाह का हुकुम नफीज होकर रहता है","अल्लाह बस शिर्क ही को माफ नहीं कर्ता, इसके मा-सिवा दूसरे जिस कदर गुनाह हैं वो जिसके लिए चाहता है माफ करता है। अल्लाह के साथ जिसने और को शरीक ठहरया उसने तो बहुत ही बड़ा झूठ तसनीफ किया और बदले में गुनाह की बात की","तुमने उन लोगों को भी देखा जो बहुत अपनी पाकीज़गी ए नफ़्स का दम भरते (जो अपनी धार्मिकता का घमंड करते हैं) हैं? हलांके पाकीजगी तो अल्लाह ही जिसे चाहता है अता करता है, और (उन्हें जो पाकीजगी नहीं मिलती तो डर हकीकत) उन्पर जरा बराबर भी ज़ुल्म नहीं किया जाता","देखो तो सही, ये अल्लाह पर भी झूठे इफ्तारा गढ़ने से (झूठ गढ़ना) नहीं छोड़ते और इनके सरीहन गुनाहगार होने के लिए यही एक गुनाह काफी है","क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिन्होंने किताब के इल्म में से कुछ हिसा दिया है, और उनका हाल ये है के जिब्थ (निराधार अंधविश्वास) और तागुथ (झूठे आहार) को मानते हैं और काफिरों के मुतल्लिक कहते हैं के ईमान लाने वालों से तो यही ज्यादा सही रास्ते पर हैं","ऐसे भी लोग हैं जिनपर अल्लाह ने लानत की है, और जिसपर अल्लाह लानत करदे फिर तुम उसका कोई मददगार नहीं पाओगे","क्या हुकूमत में उनका कोई हिसा है? अगर ऐसा होता तो ये दुसरों को एक फूटी कौड़ी तक न दे देते","फिर क्या ये दुसरों से इस लिए हसद करते हैं के अल्लाह ने उन्हें अपने फज़ल से नवाज दिया? अगर ये बात है तो उन्हें मालूम हो के हमने तो इब्राहिम की औलाद को किताब और हिकमत अता की और मुल्क ए अजीम बख्श दिया","मगर उनमें से कोई उसपर ईमान लाया और कोई उसे मुंह मोड़ गया, और मुंह मोड़ने वालों के लिए तो बस जहन्नुम की भड़कती हुई आग ही काफी है","जिन लोगों ने हमारी आयत को मन्ने से इंकार कर दिया है उन्हें बिल-यकीन हम आग में झोंकेंगे, और जब उनके बदन की खल (त्वचा) गल जाएगी (भुन जाएगी) तो उसकी जगह दूसरी खल पेदा करदेंगे ता-के वो खूब अज़ाब का मजा चखें। अल्लाह बड़ी क़ुदरत रखता है और अपने फ़ैसलों को अमल में लाने की हिकमत ख़ूब जानता है","और जिन लोगों ने हमारी आयतों को मान लिया और नेक अमल किये उनको हम ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेंगे जिनका आला नेहरेन बहती होगी, जहां वो हमेशा हमेशा रहेंगे और उनको पाकीजा बिवियां मिलेंगी और उन्हें हम घनी छांव (छाया) में रखेंगे","मुसलमानो! अल्लाह तुम्हें हुकुम देता है के अमानतें एहले अमानत के सुपुर्द करदो, और जब लोगों के दरमियान फैसला करो तो अदल के साथ करो। अल्लाह तुमको निहायत उमराह हिदायत करता है और यकीनन अल्लाह सब कुछ सुनता और देखता है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, इत्तला करो अल्लाह की और इताअत करो रसूल की और उन लोगों की जो तुम में से साहब ए अम्र हो, फिर अगर तुम्हारे दरमियान किसी मामले में निज़ा (विवाद/मतभेद) हो जाए तो उसे अल्लाह और रसूल की तरफ, फेर दो अगर तुम वक़ाई अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखते हो। यही एक सही तारीख़ है और अंजाम के ऐतबार से भी बेहतर है","ऐ नबी! तुमने देखा नहीं उन लोगों को जो दावा तो करते हैं के हम ईमान लाए हैं उस किताब पर जो तुम्हारी तरफ नाज़िल की गई है और उन किताबों पर जो तुमसे पहले नाज़िल की गई थी, मगर चाहते हैं के अपने मामले का फैसला करने के लिए तघुत की तरफ रूजू करें, हलांके उन्हें टैगहुट से कुफ्र करने का हुकुम दिया गया था। शैतान उन्हें भटका कर राह ए रास्ते से बहुत दूर ले जाना चाहता है","और जब उन्हें कहा जाता है कि आओ हमें चीज की तरफ से अल्लाह ने नाज़िल किया है और आओ रसूल की तरफ से मुनाफिकों को तुम देखते हो के ये तुम्हारी तरफ आने से कतराते हैं","फिर हमें वक्त क्या होता है जब इनके अपने हाथों की लाई हुई मुसीबत इनपर आ पढ़ती है? हमें वक्त ये तुम्हारे पास कसमें खाते हुए आते हैं और कहते हैं के खुदा की कसम हम तो सिर्फ भलाई चाहते थे और हमारी तो नियत ये थी के फरीक़ैन (दो पक्ष)","अल्लाह जानता है जो कुछ उनके दिलों में है, उन्हें तारुज़ मत करो (उन्हें अकेला छोड़ दो), उन्हें समझाओ और ऐसी हिदायत करो जो उनके दिलों में उतर जाए","(उन्हें बताओ के) हमने जो रसूल भी भेजा है इसी के लिए भेजा है के इज़्न ए खुदावंदी (अल्लाह की इजाजत से) कि बिना पर उसकी इताअत की जाए, अगर उन्हें ये तारीख इख्तियार किया होता के जब ये अपने नफ़्स पर ज़ुल्म कर बैठे थे तो तुम्हारे पास आ जाते थे और अल्लाह से माफ़ी मांगते थे, और रसूल भी उनके लिए माफ़ी की अंधेरगर्दी करता था, तो यकीनन अल्लाह को बख्शने वाला और रहम करने वाला पाते","नहीं, (ऐ मुहम्मद) तुम्हारे रब की कसम ये कभी मोमिन नहीं हो सकता जब तक के अपनी बहामी इख्तिलाफात में ये तुमको फैसला करने वाला ना मान लें, फिर जो कुछ तुम फैसला करो उसपर अपने दिलों में भी कोई तंगी ना महसूस करें, बलके सर बा सर तसलीम कार्लें","अगर हमने इन्हें हुकुम दिया होता है के अपने आप को हलाक करदो या अपने घर से निकल जाओ तो इनमें से कम ही आदमी इसपर अमल करते हैं, हलांके जो हिदायत इन्हें की जाती है, अगर ये इसपर अमल करते तो ये इनके लिए ज्यादा बेहतरी और ज्यादा साबित कादमी का मौजब होता","और जब ये ऐसा करते हैं तो हम इनमें अपनी तरफ से बहुत बड़ा अजर देते हैं","और इन्हें सीधा रास्ता दिखाते हैं","जो अल्लाह और रसूल की इबादत करेगा वो उन लोगों के साथ होगा जिनपर अल्लाह ने इनाम फरमाया है, यानी अंबिया, और सिद्दीकीन और शुहदा और सालिहें, कैसे अच्छे हैं ये रफीक जो किसी को मुयस्सर आए","ये हकीकत फजल है जो अल्लाह की तरफ से मिलता है और हकीकत जाने के लिए बस अल्लाह ही का इल्म काफी है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, मुकाबला के लिए हर वक़्त तय्यार रहो, फिर जैसा मौका हो अलग अलग दास्तान (समूहों) की शक्ल में निकलो या इकत्थे होकर","हां, तुम में कोई आदमी ऐसा भी है जो लड़ाई से जीता है, अगर तुमपर कोई मुसीबत आए तो कहता है कि अल्लाह ने मुझपर बड़ा फ़ज़ल किया के मुख्य इन लोगों के साथ ना गया","और अगर अल्लाह की तरफ से तुम्पर फ़ज़ल हो तो कहता है और इस तरह कहता है कि गोया तुम्हारे और उसके दरमियान मुहब्बत का तो कोई तालुक़ था ही नहीं के काश मैं भी इनके साथ होता तो बड़ा काम बन जाता","(ऐसे लोगों को मालूम हो के) अल्लाह कि राह में लड़ना चाहिए उन लोगों को जो आख़िरत के बदले दुनिया की ज़िंदगी से फ़र्क दिलाएं, फिर जो अल्लाह की राह में लड़ेगा और मारा जाएगा या ग़ालिब रहेगा उसे ज़रूर हम अजर ए अज़ीम अता करेंगे","आख़िर क्या वजह है कि तुम अल्लाह की राह में उन बे-बस मर्दों, औरतों और बच्चों की खातिर ना लड़ो जो कमज़ार पाकर दबा लिए गए हैं और फरियाद कर रहे हैं के खुदाया हमको इस बस्ती से निकल जिसका बाशिंदा जालिम हैं और अपनी तरफ से हमारा कोई हमी ओ मददगार पैदा करदे","जिन लोगों ने ईमान का रास्ता इख्तियार किया है, वो अल्लाह की राह में लड़ते हैं और जिन्होन ने कुफ्र का रास्ता इख्तियार किया है, वो तागुत की राह में लड़ते हैं, पास शैतान के साथियों से लड़ो और यकीन जानो के शैतान की चालें हकीकत में निहायत कमज़ार हैं","तुमने उन लोगों को भी देखा जिनसे कहा गया था कि अपने हाथ रोके रखो और नमाज़ क़याम करो और ज़कात दो? अब जो उन्होंने लड़ाई का हुकुम दिया है तो उनमें से एक फरीक का हाल ये है के लोगों से ऐसा डर रहे हैं जैसा खुदा से डरना चाहिए या कुछ इस तरह भी बढ़कर। कहते हैं खुदाया! ये हमपर लड़ै का हुकुम क्यों लिख दिया? क्यों ना हमें अभी कुछ और मोहलत दी? उनसे कहो, दुनिया का सरमाया ए जिंदगी थोड़ी है, और आखिरी एक खुदा-तर्स इंसान के लिए ज्यादा बेहतर है, और तुमपर जुल्म एक शम्मा (खजूर की भूसी) बराबर भी बा किया जाएगा","राही मौत, तो जहां भी तुम हो वो बाहर हाल तुम्हें आकार रहेगी ख्वा तुम कैसी ही मजबूत इमारत में हो, अगर उन्हें कोई फ़ायदा मिलता है तो कहते हैं ये अल्लाह की तरफ से है, और अगर कोई नुक्सान पहनता है तो कहते हैं ये तुम्हारी बदौलत है। कहो, सब कुछ अल्लाह ही की तरफ से है, आख़िर लोगों को क्या हो गया है कि कोई बात इनकी समझ में नहीं आती","ऐ इंसान! तुझे जो भलाई भी हासिल होती है अल्लाह की इनायत से होती है, और जो मुसीबत तुझपर आती है वो तेरे अपने क़स्ब ओ अमल की बदौलत है। (ऐ मुहम्मद) हमने तुमको लोगों के लिए रसूल बना कर भेजा है और इसपर खुदा की गवाही काफी है","जिसने रसूल की इत्ता की हमें दर-असल खुदा की इताअत की और जो मुंह मोड़ गया, तो बहार हाल हमने तुम्हें इन लोगों पर पासबान (रक्षक/अभिभावक) बना कर तो नहीं भेजा है","वो मुहं पर कहते हैं के हम मुती ए फरमान हैं मगर जब तुम्हारे पास से निकलते हैं तो उनमें से एक गिरह रातों को जमा होकर तुम्हारी बातों के खिलाफ मशवरे करता है। अल्लाह उनकी ये सारी सरकशियां लिख रहा है, तुम उनकी परवा न करो और अल्लाह पर भरोसा रखो, वही भरोसे के लिए काफी है","क्या ये लोग कुरान पर गौर नहीं करते? अगर ये अल्लाह के सिवा किसी और की तरफ से होता तो इसमे बहुत कुछ इख्तिलाफ बयानी पाई जाती","ये लोग जहां कोई इत्मिनान बख्श या खौफनाक खबर सुन पाते हैं उसे लेकर फैला देते हैं, हलांके अगर ये उसे रसूल और अपनी जमात के जिम्मेदार असहाब तक पहुंचाएं तो वो ऐसे लोगों के इल्म में आ जाए जो इनके दरमियान इस बात की सलाह है रखते हैं के इसे सही नतीजा आख़ज़ कर सकें। तुम लोगों पर अल्लाह की मेहरबानी और रहमत न होती तो (तुम्हारी कमजोरियां ऐसी थी के) मदूद ए चांद (आप में से कुछ) के सिवा तुम सब शैतान के पीछे लग गए होते","(पस ऐ नबी) तुम अल्लाह की राह में लड्डू (लड़ाई), तुम अपनी जात के सिवा किसी और के ज़िम्मेदार नहीं हो, अलबत्ता एहले ईमान को लड़ने के लिए उक्साओ, बैद नहीं के अल्लाह काफ़िरों का ज़ोर तोड़ दे। अल्लाह का ज़ोर सबसे ज़्यादा ज़बरदस्त और उसकी सज़ा सबसे ज़्यादा सख्त है","जो भलाई की सिफ़ारिश करेगा वो उसमें से हिसा पाएगा और जो बुराई की सिफ़ारिश करेगा वो उसमें से हिसा पाएगा, और अल्लाह हर चीज़ पर नज़र रखने वाला है","और जब कोई एहतराम के साथ तुम्हें सलाम करे तो उसको हमसे बेहतर तारीख के साथ जवाब दो या कम-अज़-कम उसी तरह, अल्लाह हर चीज का हिसाब लेने वाला है","अल्लाह वो है जिसके सिवा कोई खुदा नहीं है, वो तुम सबको कयामत के दिन जमा करेगा जिसको आने दो मुझमें कोई शुभा (संदेह) नहीं, और अल्लाह की बात से बढ़कर सच्ची बात और कौन हो सकती है","फिर ये तुम्हें क्या हो गया है के मुनाफिकीन के बारे में तुम्हारे दरमियान दो रायें (राय) पाई जाती हैं, हालंके जो बुराइयां उनको ने कमायी हैं उनकी बदौलत अल्लाह उन्हें उल्टा फेर चुका है। क्या तुम चाहते हो कि जिसे अल्लाह ने हिदायत नहीं बख्शी उसे तुम हिदायत बख्श दो? हलांके जिसको अल्लाह ने रास्ते से हटा दिया उसके लिए तुम कोई रास्ता नहीं पा सकते","वो तो ये चाहते हैं के जिस तरह वो खुद काफिर हैं इसी तरह तुम भी काफिर हो जाओ, ता-के वो सब यक्सन हो जाएं। लिहाजा उनमें से किसी को अपना दोस्त न बनाओ जब तक के वो अल्लाह की राह में हिजरत करके न आ जाए, और अगर वो हिजरत से बाज़ रहे तो जहां पाओ उन्हें पकड़ो और कत्ल करो और उनमें से किसी को अपना दोस्त और मददगार न बनाओ","अलबत्ता वो मुनाफिक है हुकुम से मुस्तसना (अपवाद) हैं जो किसी ऐसी क़ौम से जा मिलें जिसके साथ तुम्हारा मुहैदा (संविदा) है, इसी तरह वो मुनाफिक भी मुस्तसना हैं जो तुम्हारे पास आते हैं और लड़यी से दिल बर्दाश्त हैं (उनके दिल लड़ने से कतराते हैं), ना तुमसे लड़ना चाहते हैं ना अपनी क़ौम से. अल्लाह चाहता है तो उनको तुम मुसल्लत करदे और वो भी तुमसे लड़े, अगर वो तुमसे किनारा कश हो जाए और लड़ने से बाज रहे और तुम्हारी तरफ सुलह ओ अष्टी का हाथ बदाएं अल्लाह ने तुम्हारे लिए उनपर दस्तूर दर्जी की कोई सबील नहीं रखी है","एक और क़िस्म के मुनाफ़िक तुम्हें ऐसे मिलेंगे जो चाहते हैं कि तुमसे भी अमन में रहें और अपनी क़ौम से भी, मगर जब कभी फ़ितने का मौक़ा पाएंगे उसमें कूद पड़ेंगे। ऐसे लोग अगर तुम्हारे मुकाबले से बाज ना रहें और सुलह ओ सलामती तुम्हारे आगे पेश ना करें और अपने हाथ ना रोकें तो जहां वो मिले उन्हें पकड़ो और मारो, उन्पर हाथ उठाने के लिए हमने तुम्हें खुली हुज्जत दे दी है","किसी मोमिन का ये काम नहीं है के दूसरे मोमिन को क़त्ल करे, इल्ला ये के उसे छोड़ दे, और जो शक्स किसी मोमिन को गलती से क़त्ल करदे तो उसका कफ़्फ़ारा ये है के एक मोमिन को गुलामी से आज़ाद करे और मक़तूल के वारिसों को खून बहा (खून-पैसा) दे, इल्ला ये के वो खून-बहा माफ करदें। लेकिन अगर वो मुसलमान मकतूल ​​किसी ऐसी क़ौम से था जिसकी तुम्हारी दुश्मनी हो तो उसका कफ़्फ़ारा एक मोमिन गुलाम आज़ाद करना है और अगर वो किसी ऐसी गैर मुस्लिम क़ौम का फ़र्द था जिसकी तुम्हारी दुश्मनी हो तो उसके वारिसों को ख़ून-बहा (खून-पैसा) दिया जाएगा और एक मोमिन गुलाम को आज़ाद करना होगा। फिर जो गुलाम ना पाए वो पै डर पै दो माहीने के रोज़ रख्खे। ये गुनाह है पर अल्लाह से तौबा करने का तरीका है। और अल्लाह आलिम ओ दाना है","रहा वो शक्स जो किसी मोमिन को जान बूझ कर कत्ल करे तो उसकी जजा जहन्नुम है जिसमें वो हमेशा रहेगा। उसपर अल्लाह का ग़ज़ब और उसकी लानत है और अल्लाह ने उसके लिए सख़्त अज़ाब मुहैय्या कर रखा है","ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, जब तुम अल्लाह की राह में जिहाद के लिए निकलो तो दोस्त दुश्मन में तमीज़ करो और जो तुम्हारी तरफ सलाम से तकदीम शांति) करे उसे फ़वारान न कहदो के तू मोमिन नहीं है, अगर तुम दुनियावी फ़ायदा चाहते हो तो अल्लाह के पास तुम्हारे लिए बहुत से अमल ए गनीमत है। आख़िर इसी हालात में तुम खुद भी तो इसे पहले मुबतला रह चुके हो, फिर अल्लाह ने तुमपर एहसान किया। लिहाजा तहकीक से काम लो. जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बख़बर है","मुसलमानों में से वो लोग जो किसी मजूरी (अक्षम चोट) के बिना घर बैठे रहते हैं और वो जो अल्लाह की राह में जान ओ माल से जिहाद करते हैं दोनों की हैसियत यक्सान नहीं है। अल्लाह ने बैठने वालों की बा निस्बत जान ओ माल से जिहाद करने वालों का दरजा बड़ा रक्खा है, अगर हर एक के लिए अल्लाह ने भलाई का वादा फरमाया है, मगर उसके हां मुजाहिदों की खिदमत का मुआवजा बैठने वालों से बहुत ज्यादा है","उनके लिए अल्लाह की तरफ से बड़े दर्जे हैं और मगफिरत और रहमत है, और अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","जो लोग अपने नफ़्स पर ज़ुल्म कर रहे थे उनकी रूहें जब फ़रिश्तों ने क़ब्ज़ की तो उनसे पूछा के ये तुम किस हाल में मुब्तिला थे? उनको ने जवाब दिया के हम ज़मीन में कमज़ूर ओ मजबूर थे, फ़रिश्तों ने कहा, क्या ख़ुदा की ज़मीन वसीह न थी के तुम हमसे हिजरत करते थे? ये वो लोग हैं जिनका ठिकाना जहन्नुम है और बड़ा ही बुरा ठिकाना है","हां जो मर्द, औरतें और बच्चे हकीकत हैं बेबस हैं और निकलने का कोई रास्ता और जरिया नहीं पाते","बैद नहीं के अल्लाह उन्हें माफ करदे, अल्लाह बड़ा माफ करने वाला और दरगुजर फरमाने वाला है","जो कोई अल्लाह की राह में हिजरत करेगा वो ज़मीन में पनाह लेने के लिए बहुत जगह और बसर अवकत के लिए बड़ी गुंजाईश पाएगा, और जो अपने घर से अल्लाह और रसूल की तरफ हिजरत के लिए निकले, फिर रास्ते ही में उसकी मौत आ जाए उसका अजर अल्लाह के ज़िम्मे वाजिब हो गया। अल्लाह बहुत बख्शीश फ़रमाने वाला और रहीम है","और जब तुम लोग सफ़र के लिए निकलो तो कोई मुज़ैका (दोष) नहीं, अगर नमाज़ में इख्तेसर (छोटा) करदो (ख़ुसुसान) जबके तुम्हीं अंदेशा हो के काफ़िर तुम्हीं सताएंगे क्योंके वो खुल्लम खुल्ला तुम्हारी दुश्मनी पर तूले हुए हैं","और (ऐ नबी)! जब तुम मुसलमानों के दरमियान हो और (हालत ए जंग में) उन्हें नमाज़ पढाने खड़े हो तो चाहिए के उनमें से एक गिरोह तुम्हारे साथ खड़ा हो और असलहा (हथियार) ले रहे, फिर जब वो सजदा करले तो पीछे चला जाए और दूसरा गिरोह जिसने अभी नमाज नहीं पढ़ी है आकार तुम्हारे साथ पढ़े और वो भी चौकन्ना रहे और अपने असलहा (हथियार) के लिए रहे, क्योंकि कुफ्फार इस ताक में है कि तुम अपने हथियारों और अपने सामान की तरफ से जरा गाफिल हो तो वो तुमपर एक बार ही टूट पड़े। अलबत्ता अगर तुम बारिश की वजह से तकलीफ़ करो या बीमार हो तो असलहा रख देने में कोई मुज़ैका नहीं, मगर फिर भी चौकन्ने रहो, यकीन रखो के अल्लाह ने काफिरों के लिए रुसवा कुन अज़ाब मुहैय्या कर रक्खा है","फिर जब नमाज से फारिग हो जाओ तो खड़े और बैठे और लेते, हर हाल में अल्लाह को याद करते रहो और जब इत्मीनान नसीब हो जाए तो पूरी नमाज पढ़ो, नमाज दार हकीकत ऐसा फर्ज है जो पाबंदी ए वक्त के साथ एहले ईमान पर लाज़िम किया गया है","क्या गिरोह के ताक़ुब में है कम्ज़ोरी ना दिखाओ, अगर तुम तकलीफ़ उठा रहे हो तो तुम्हारी तरह वो भी तकलीफ़ उठा रहे हैं और तुम अल्लाह से हमें चीज़ के उम्मीददार हो जिसकी वो उम्मीद नहीं है। अल्लाह सबको जानता है और वो हकीम ओ दाना है","(ऐ नबी)! हमने ये किताब हक़ के साथ तुम्हारी तरफ नाज़िल की है ता-के जो राह ए रास्ते अल्लाह ने तुम्हें दिखाई है उसके मुताबिक़ लोगों के दरमियान फैसला करो। तुम बद-दयानत (बेईमान) लोगों की तरफ से झगड़ा करने वाले न बनो","और अल्लाह से दरगुजर (माफी) की अंधेरगर्दी करो, वो बड़ा दरगुजर फरमान वाला और रहीम है","जो लोग अपने नफ्स से खयानत करते हैं तुम उनकी हिमायत न करो, अल्लाह को ऐसा शक्स पसंद नहीं है जो खयानतकार (जो विश्वास को धोखा देता है) और मासीयत पेशा (पाप में लगा रहता है) हो","ये लोग इंसानों से अपनी हरकत छुपा सकते हैं, मगर खुदा से नहीं छुपा सकते, वो तो हमें वक्त भी उनके साथ होता है जब ये रातों को चुपकर उसकी मर्जी के खिलाफ मैशवेयर करते हैं, इनके सारे अमल पर अल्लाह मुहीत है","हान! तुम लोगों ने मुजरिमों की तरफ से दुनिया की जिंदगी में तो झगड़ा किया, मगर कयामत के रोज इनकी तरफ से कौन झगड़ा करेगा? आखिर वहां कौन इनका वकील होगा","अगर कोई शक्स बुरा फेल (अमल) कर गुजरे या अपने नफ्स पर जुल्म कर जाए और इसके बाद अल्लाह से दरगुजर (माफी) की अंधेरगर्दी करे तो अल्लाह को दरगुजर (माफ) करने वाला और रहीम पाएगा","मगर जो बुराई कमा ले तो उसकी ये कमाई उसके लिए बढ़िया होगी। अल्लाह को सब बातों की खबर है और वह हकीम ओ दाना है","फिर जिसने कोई खता या गुनाह करके उसका ज़म (दोष) किसी बे-गुनाह पर थोप दिया उसने तो बदाए बोहतान और सारे गुनाह का बार समान लिया","(ऐ नबी)! अगर अल्लाह का फ़ज़ल तुंपार न होता और उसकी रहमत तुम्हारे शामिल ए हाल न होती तो उनमें से एक गिरो ​​ने तो तुम्हें ग़लत फ़हमी में मुब्तिला करने का फैसला कर ही लिया था, हलांके दर-हक़ीक़त वो खुद अपने सिवा किसी को ग़लत फ़हमी में मुब्तिला नहीं कर रहे थे, और तुम्हारा कोई नुक्सान ना कर सकता था। अल्लाह ने तुमपर किताब और हिकमत नाज़िल की है और तुमको वो कुछ बताया है जो तुम्हें मालूम न था और उसका फ़ज़ल तुमपर बहुत है","लोगों की खुफिया सरगोशियों (गुप्त वार्ता) में अक्सर ओ बेश्तर कोई भलाई नहीं होती, हां अगर कोई पोशीदा तौर पर सदका ओ खैरात की तालक़ीन करे या किसी नए काम के लिए या लोगों के मामले में इस्लाह करने के लिए किसी से कुछ कहे तो ये अलबत्ता भली बात है। और जो कोई अल्लाह की रजा-जोई के लिए ऐसा करेगा उसे हम बड़ा अजर अता करेंगे","मगर जो शक्स रसूल की मुखालिफत पर कमर बस्ता हो और एहले ईमान की रवीश के सिवा किसी और रवीश पर चले, डरन हाल ये के उसपर राह ए रस्त वाज़ेह हो चुकी हो, तो उसको हम उसकी तरफ चलाएंगे जिधर वो खुद फिर गया और उसे जहन्नुम में झोंकेंगे जो बदतरीन जाए करार (बुरी मंजिल) है","अल्लाह के हां बस शिर्क ही कि बख्शीश नहीं है, इसके सिवा और सब कुछ माफ हो सकता है जिसे वो माफ करना चाहे। जिसने अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहरया वो तो गुमराही में बहुत दूर निकल गया","वो अल्लाह को छोड़ कर देवियों (देवियों) को माबूद बनाते हैं, वो हमें बागी शैतान को माबूद बनाते हैं","जिसको अल्लाह ने लानत ज्यादा किया है (वो हमें शैतान की इताअत) कर रहे हैं) जिसने अल्लाह से कहा था के “मैं तेरे बंदों से एक मुकर्रर हिसा लेकर रहूंगा","मैं उन्हें बहकाऊंगा, मैं उन्हें अरज़ूओं (व्यर्थ इच्छाओं) में उलझाऊंगा, मैं उन्हें हुकुम दूंगा और वो मेरे हुकुम से जानवरों के कान फाड़ेंगे और मैं उन्हें हुकुम दूंगा और वो मेरे हुकुम से खुदाई साख्त में रद्द ओ बदल करेंगे।'' हमें शैतान को जिसने अल्लाह के बजाय अपना वाली ओ सरपरस्त बना लिया वो सारे नुक्सान में पढ़ गया","वो इन लोगों से वादे करता है और यहीं उम्मीदें फैलाती हैं, मगर शैतान के सारे वादे बाज़ु फ़रेब के और कुछ नहीं हैं","इन लोगों का ठिकाना जहन्नुम है जिसमें खलासी (पलायन) की कोई सूरत ये ना पायेगा","रहे वो लोग जो ईमान ले आयें और नेक अमल करें, तो उन्हें हम ऐसे बाघों में दखल देंगे जिनके बारे में पता चलता है और वो वहां हमेशा हमेशा रहेंगे. ये अल्लाह का सच्चा वादा है और अल्लाह से बढ़कर कौन अपनी बात में सच्चा होगा","अंजाम-ए- कार ना तुम्हारी आरज़ूओं पर मौक़ुफ़ है न एहले किताब की आरज़ूओं पर। जो भी बुरा करेगा उसका फल पाएगा और अल्लाह के मुकाबले में अपने लिए कोई हमी ओ मददगार न पा सकेगा","और जो नया अमल करेगा, ख्वा मर्द हो या औरत, बशारत ये के हो वो मोमिन, तो ऐसे ही लोग जन्नत में दाखिल होंगे और उनकी ज़र्रा बराबर हक़ तलाफ़ी ना होने देगी","हमसे बेहतर और किसका तारीख़े ज़िंदगी हो सकती है जिसने अल्लाह के आगे सर-ए-तस्लीम ख़म करदिया और अपना रवैय्या नीक रक्खा और यक्सू होकर इब्राहिम के तारीख़े की जोड़ी की, उस इब्राहिम के तारीख़े की जिसने अल्लाह ने अपना दोस्त बना लिया था","आसमान और ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह का है और अल्लाह हर चीज़ पर निर्भर है","लोग तुमसे औरतों के मामले में फतवा पूछते हैं, कहो अल्लाह तुम्हें उनके मामले में फतवा देता है, और साथ ही वह एहकाम भी याद दिलाता है जो पहले से तुमको इस किताब मैं सुनाए जा रहे हैं, यानी वो एहकाम जो उन यतीम लड़कियों के मुतालिक हैं जिनका हक तुम अदा नहीं करते और जिनका निकाह करने से तुम बाज रहते हो (या लालेज की बिना पर तुम खुद उनसे निकाह करना चाहते हो), और वो एहकाम जो उन बच्चों के मुतालिक हैं जो बेचारे कोई ज़ोर नहीं रखते, अल्लाह तुम्हें हिदायत करता है कि यतीमों के साथ इन्साफ पर कायम रहो, और जो भलाई तुम करोगे वो अल्लाह के इल्म से छुपी न रह जाएगी","जब किसी औरत को अपने शोहर से बढ़ सुलूकी या रुखी का ख़तरा हो तो कोई मुज़हिक़ा नहीं अगर मिया और बीवी (कुछ हुक़ूक़ की कमी पर) आपस में सुलह कर लें, सुलह बाहर हाल बेहतर है। नफ़्स तंग दिली के तरफ जल्दी मईल हो जाते हैं, लेकिन अगर तुमलोग एहसान से पेश आओ और खुदा तरसी से काम लो तो यकीन रखों के अल्लाह तुम्हारे इस तर्ज़-ए-अमल से बे-खबर न होगी","बीवीयों के दरमियाँ पूरा-पूरा अदल करना तुम्हारे बस में नहीं है, तुम चाहो भी तो इसपर कादिर नहीं हो सकते, लिहाजा (कानून ए इलाही का इरादा पूरा करने के लिए ये काफी है के) एक बीवी की तरफ इस तरह ना झुक जाओ के दूसरी को अधर लटकता (सस्पेंस में) छोड़ दो। अगर तुम अपना तर्ज़ ए अमल दुरुस्त रखो और अल्लाह से डरते रहो अल्लाह के लिए चश्म पोशी (सर्व-क्षमाशील) करने वाला और रहम फ़रमान वाला है","लेकिन अगर ज़वजैन एक दूसरे से अलग ही हो जाएं तो अल्लाह अपनी वसीह क़ुदरत से हर एक को दूसरे की मोहताजी से बे नियाज़ करडेगा. अल्लाह का दामन बहुत कुशादा है और वो दाना ओ बीना है","आसमानो और ज़मीन में जो कुछ भी है सब अल्लाह ही का है, तुमसे पहले जिनको हमने किताब दी थी उन्हें भी यहीं हिदायत की थी और अब तुमको भी यही हिदायत करते हैं के खुदा से डरते हुए काम करो, लेकिन अगर तुम नहीं मानते तो ना मानो, आसमान ओ ज़मीन की सारी चीज़ों का मालिक अल्लाह हाय है और वो बेनियाज़ है, हर तारीफ का मुस्तहिक","हाँ अल्लाह हाय मालिक है उन सब चीज़ों का जो आसमान में है और जो ज़मीन में है, और कारसाज़ी के लिए बस वही काफ़ी है","अगर वो चाहे तो तुम लोगों को हटा कर तुम्हारी जगह दूसरे को ले आये, और वो इसकी पूरी क़ुदरत रखता है","जो शक्स महज़ सवाब ए दुनिया का तालिब हो उसे मालूम होना चाहिए के अल्लाह के पास सवाब ए दुनिया भी है और सवाब ए आख़िरत भी, और अल्लाह समी ओ बसीर (सुनने और देखने वाला) है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, इन्साफ के अलंबरदार और खुदा बर्बादी के गवाह बनो अगरचे तुम्हारे इन्साफ और तुम्हारी गवाही की जड़ (खिलाफ) खुद तुम्हारी अपनी जात पर या तुम्हारे वलीदीन और रिश्तेदारों पर ही क्यों ना पढ़ती हो, फरीक मामला ख्वा मालदार हो या गरीब, अल्लाह तुमसे ज्यादा उनका खैर ख्वाह है। लिहाजा अपनी ख्वाहिश ए नफ्स की परिवार में अदल (इंसाफ) से बाज़ न रहो और अगर तुमने लंबी लिपटी बात कही या सच्चाई से पहलू बचाया तो जान रख्खो के जो कुछ तुम करते हो अल्लाह कोई उसकी खबर है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ईमान लाओ अल्लाह पर और उसके रसूल पर और उस किताब पर जो अल्लाह ने अपने रसूल पर नाज़िल की है और हर उस किताब पर जो उसने पहले वो नाज़िल कर चुका है। जिसने अल्लाह और उसकी मलिका और उसकी किताबें और उसके रसूलन और रोज ए आखिरीरत से कुफ्र किया वो गुमराही में भटक कर बहुत दूर निकल गया","रहे वो लोग जो ईमान लाए, फिर कुफ्र किया, फिर ईमान लाए, फिर कुफ्र किया, फिर अपने कुफ्र में बढ़ते चले गए, अल्लाह हरगिज उनको माफ न करेगा और न कभी उनको राह ए रास्ता दिखाएगा","और जो मुनाफिक एहले ईमान को छोड़ कर काफिरों को अपना रफीक बनाते हैं उन्हें ये मुस्दा (खबर दें) सुना दो के उनके लिए दर्दनाक सजा तय्यार है","क्या ये लोग इज्जत की तालाब में उनके पास जाते हैं? हालांके इज्जत तो सारी की सारी अल्लाह ही के लिए है","अल्लाह किताब में तुमको पहले ही हुकुम दे चुका है के जहां तुम सुनो अल्लाह की आयत के खिलाफ कुफ्र बका जा रहा है और उनका मजाक उड़ाया जा रहा है वहां ना बैठो जब तक के लोग किसी दूसरी बात में ना लग जायें, अब अगर तुम ऐसा करते हो तो तुम भी उनकी तरह हो। यकीन जानो के अल्लाह मुनाफिकों और काफिरों को जहन्नुम में एक जगह जमा करने वाला है","ये मुनाफिक तुम्हारे मामले में इंतजार कर रहे हैं (किस करवट बैठा है) अगर अल्लाह की तरफ से फतह तुम्हारी हुई तो आ कर कहेंगे के क्या हम तुम्हारे साथ ना थे? अगर काफिरों का पल्ला भारी रहा तो वे कहेंगे कि क्या हम तुम्हारे खिलाफ लड़ने पर कादिर न थे और फिर भी हमने तुमको मुसलमानों से बचाया? बस अल्लाह ही तुम्हारे और उनके मामले का फैसला कयामत के रोज करेगा और (इस फैसले में) अल्लाह ने काफिरों के लिए मुसलमानों पर गालिब आने की हरगिज कोई सबील नहीं रखी है","ये मुनाफिक अल्लाह के साथ धोखे-बाजी कर रहे हैं हलांके दर हकीकत अल्लाह हाय ने इन्हें धोखे में डाल रखा है। जब ये नमाज के लिए उठते हैं तो कसमसाते हुए मेहज़ लोगों को दिखाने की खातिर उठते हैं, और खुदा को काम ही याद करते हैं","कुफ्र ओ ईमान के दरमियान दावा-डोल हैं, ना पूरे इस तरफ हैं ना पूरे हमारी तरफ। जैसे अल्लाह ने भटका दिया हो उसके लिए तुम कोई रास्ता नहीं पा सकते","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, मोमिन को छोड़ कर काफिरों को अपना रफीक ना बनाओ। क्या तुम चाहते हो के अल्लाह को अपना खिलाफ़ सरीह हुज्जत देदो","यकीन जानो के मुनाफिक जहन्नुम के सबसे आला तबके में जाएंगे और तुम किसी को उनका मददगार न पाओगे","अलबत्ता जो उनमें से तैयब हो जाएं और अपने तर्ज ए अमल की इस्लाह कार्लें और अल्लाह का दामन थाम लें और अपने दीन को अल्लाह के लिए खाली कर दें, ऐसे लोग मोमिनो के साथ हैं और अल्लाह मोमिनो को जरूर अजर ए अजीम अता फरमायेगा","आखिर अल्लाह को क्या पड़ी है के तुम्हें ख्वा मा ख्वा सजा दे अगर तुम शुकरगुजर बंदे बने रहो और ईमान क्या रवीश पर चलो? अल्लाह बड़ा कदरदान है और सबके हाल से वाकिफ है","अल्लाह इसको पसंद नहीं करता के आदमी बिगड़ेगी पर जुबान खोले, इल्ला ये के किसी पर जुल्म किया गया हो। और अल्लाह सब कुछ सुनने और जाने वाला है","(मज़लूम होने की सूरत में अगरचे तुमपर बढ़ोगी का हक़ है) लेकिन अगर तुम जाहिर ओ बातों में भलाई ही किए जाओ, या कम अज़ कम बुरायी से दरगुज़र करो, तो अल्लाह की सिफ़ात भी यही है के वो बड़ा माफ़ करने वाला है, हलाँके सज़ा देने पर पूरी क़ुदरत रखता है","जो लोग अल्लाह और उसके रसूलों से कुफ्र करते हैं, और चाहते हैं के अल्लाह और उसके रसूलों के दरमियान तफ़रीक़ करें, और कहते हैं कि हम किसी को मानेंगे और किसी को ना मानेंगे, और कुफ्र ओ ईमान के बीच में एक राह निकालने का इरादा रखते हैं","वो सब पक्के काफिर हैं और ऐसे काफिरों के लिए हमने वो सज़ा मुहैय्या कर रखी है जो उन्हें ज़लील ओ ख़्वार करने वाली होगी","बा-ख़िलाफ़ इसके जो लोग अल्लाह और उसके तमाम रसूलों को मानें, और उनके दरमियान तफ़रीक़ न करें, उनको हम ज़रूर उनके अजर अता करेंगे, और अल्लाह बड़ा दरगुज़र फ़रमाने वाला और रहम करने वाला है","ये एहले किताब अगर आज तुमसे मुतालबा कर रहे हैं कि तुम आसमान से कोई तहरीर (लिखित) उन्पर नाज़िल कराओ तो इस तरह से बढ़ चढ़ कर मुजरेमाना मुतालिबे ये पहले मूसा से कर चुके हैं। उसे तो इन्हों ने कहा था के हमें खुदा को एलानिया (अपनी आंखों से) दिखा दो और इसी सरकशी की वजह से यकायक इनपर बिजली टूट पड़ी थी। फिर इन्होन ने बछड़े (बछड़े) को अपना मबूद बना लिया, हलाँके ये खुली खुली निशानियाँ देख चुके थे इस पर भी हमने इनसे दरगुज़र किया। हमने मूसा को सारे फ़रमान अता किया","और लोगों पर तूर (माउंट तूर) को उठा कर इनसे (उस फ़रमान की इताअत का) अहद लिया, हमने इनको हुकुम दिया के दरवाज़े में सजदा-राइज़ होते हुए दाख़िल होन, हमने इनसे कहा के सबथ का कानून ना तोड़ो और इसपर इंसे पुख्ता अहद लिया","आख़िर ए कार इनकी अहद शिकानी (संधि तोड़ना) कि वजह से, और इस वजह से के इन्होन ने अल्लाह की आयत को झुटलाया, और मुताअदीद पैगम्बरों को ना-हक़ क़तल किया, और यहाँ तक कहा के हमारे दिल गिलाफ़ों में महफ़ूज़ हैं। हलांके दर हकीकत इनकी बातिल परस्ती के सबाब से अल्लाह ने इनके दिलों पर थप्पड़ (सील) लगा दिया है और इसी वजह से ये बहुत कम ईमान लाते हैं","फिर अपने कुफ्र में इतने बढ़े के मरियम पर सख्त बोहतन (बदनामी) लगाया","और खुद कहा के हमने मसीहा, ईसा इब्न-मरियम रसूल अल्लाह को क़त्ल करदिया है हालानके फ़िलवाक़े इन्होन ने ना उसको क़त्ल किया ना सलीब (क्रॉस) पर चढ़ाया, बलके मामला इनके लिए मुश्तबा (उन्हें संदिग्ध बना दिया) करदिया गया, और जिन लोगों ने इसके बारे में इख्तिलाफ़ किया है वो भी दर-असल शक्क में मुब्तिला है, उनके पास इस मामले में कोई इल्म नहीं है, महज़ गुमान ही की जोड़ी है। उनहों ने मसीह को यकीन के साथ क़त्ल नहीं किया","बल्के अल्लाह ने उसको अपनी तरफ उठाया, अल्लाह ज़बर्दस्त ताक़त रखने वाला और हकीम है","और एहले किताब में से कोई ऐसा ना होगा जो उसकी मौत से पहले उसपर ईमान ना ले आएगा और कयामत के रोज़ वो उनपार गवाही देगा","ग़रज़ इन यहूदी बन जाने वालों के इसी ज़ालिमाना रवैये की बिना पर, और इस बिना पार के ये बकसरत अल्लाह के रास्ते से रोते हैं","और सूद (सूदखोरी) लेते हैं जिसने इन्हें मना किया था, और लोगों के माल नजायज़ तरीक़ों से खाते हैं, हमने बहुत सी वो पाक चीज़ें इनपर हराम करदी जो पहले इनके लिए हलाल थी। और जो लोग इनमें से काफिर हैं उनके लिए हमने दर्दनक अज़ाब तय्यार कर रखा है","मगर उनमें जो लोग पूछते इल्म रखने वाले हैं और इमानदार हैं वो सब हमसे तालीम पर ईमान लाते हैं जो तुम्हारी तरफ नाज़िल की गई है और जो तुमसे पहले नाज़िल की गई है थी. इस तरह के ईमान लाने वाले और नमाज़ ओ ज़कात की पाबन्दी करने वाले और अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर पर सच्चा अकीदा रखने वाले लोगों को हम ज़रूर अजर ए अज़ीम अता करेंगे","(ऐ मुहम्मद)! हमने तुम्हारी तरफ उसी तरह वही भेजी थी जिस तरह नूह और उसके बाद के पैगम्बरों की तरफ भेजी थी, हमने इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब, ईसा, अयूब, यूनुस, हारून और सुलेमान की तरफ वही भेजी, हमने दाऊद को जुबुर दी","हमने उन रसूलों पर भी वही नाज़िल की जिनका ज़िक्र हम इस पहले तुमसे कर चुके हैं और उन रसूलों पर भी जिनका ज़िक्र तुमसे नहीं किया, हमने मूसा से इस तरह गुफ्तगू की जाती है","ये सारे रसूल ख़ुश ख़बरी देने वाले और डराने वाले बाना कर भेजे गए थे ता-के उनको मबूस करदीन के बाद लोगों के पास अल्लाह के मुकाबले में कोई हुज्जत ना रहे और अल्लाह बाहर हाल गालिब रहने वाला और हकीम ओ दाना है","(लोग नहीं मानते तो ना माने) मगर अल्लाह गवाही देता है के जो कुछ उसने तुमपर नाज़िल किया है अपने इल्म से नाज़िल किया है, और इसपर मलिका (फरिश्ते) भी गवाह हैं, अगरचे अल्लाह का गवाह होना बिल्कुल किफायत करता है","जो लोग इसको मन से खुद इनकार करते हैं और दूसरों को खुदा के रास्ते से रोकते हैं वो यकीनन गुमराही में हक से बहुत दूर निकल गए हैं","इस तरह जिन लोगों ने कुफ्र ओ बगावत का तरीका इख्तियार किया और जुल्म ओ सितम पर उतर आए अल्लाह उनको हरगिज माफ न करेगा और उन्हें कोई रास्ता","बजुज जहन्नुम के रास्ते के ना दिखाऊंगा जिसमें वो हमेशा रहेंगे। अल्लाह के लिए ये कोई मुश्किल काम नहीं है","लोगन! ये रसूल तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से हक़ लेकर आया है, ईमान ले आओ, तुम्हारे लिए ही बेहतर है, और अगर इनकार करते हो तो जान लो के आसमान और ज़मीन में जो कुछ है सब अल्लाह का है और अल्लाह अलीम भी है और हकीम भी","ऐ एहले किताब! अपने दीन में घुलु (अति) न करो और अल्लाह की तरफ हक़ के सिवा कोई बात मंसूब न करो, मसीह ईसा इब्ने मरियम इसके सिवा कुछ न था के अल्लाह का एक रसूल था और एक फरमान था जो अल्लाह ने मरियम की तरफ भेजा और एक रूह थी अल्लाह की तरफ से (जिसने मरियम के रहम में) बच्चों की शकल इख्तियार की) पास तुम अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाओ, और ना कहो के \"तीन (त्रिमूर्ति)\" हैं बाज़ आ जाओ, ये तुम्हारे ही लिए बेहतर है, अल्लाह तो बस एक ही खुदा है, वो बाला-तर है इस्के कोई उसका बेटा हो। ज़मीन और आसमान की सारी चीज़ें उसका दूध हैं, और इनकी कफ़लत ओ ख़बरगीरी के लिए बस वही काफ़ी है","मसीह ने कभी इस बात को आर (तिरस्कार) नहीं समझा के वो अल्लाह का बंदा हो, और ना मुकर्रब-तरीन फ़रिश्ते इसको अपने लिए एआर (तिरस्कार) समझते हैं. अगर कोई अल्लाह की बंदगी को अपने लिए जानता है और तकब्बुर करता है तो एक वक्त आएगा जब अल्लाह सबको घेर कर अपने सामने हाज़िर करेगा","हमें वक्त वो लोग जिन्हों ने ईमान ला कर नीक तर्ज ए अमल इक्तियार किया है अपने अजर पूरे पूरे पायेंगे और अल्लाह अपने फजल से उनको मजीद अजर अता फरमायेगा। और जिन लोगों ने बंदगी को आर समझा और तकब्बुर किया है उनको अल्लाह दर्दनाक सजा देगा और अल्लाह के सिवा जिन की सरपरस्ती ओ मददगार पर वो भरोसा रखते हैं उनमें से किसी को भी वो वहां ना पाएंगे","लोगन! तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास दलील ए रोशन आ गई है और हमने तुम्हारी तरफ ऐसी रोशनी भेज दी है जो तुम्हें साफ साफ रास्ता दिखाने वाली है","अब जो लोग अल्लाह की बात मान लेंगे और उसकी पनाह ढूंढेंगे उनको अल्लाह अपनी रहमत और अपने फजल ओ करम के दामन में ले लेगा और अपनी तरफ आने का सीधा रास्ता उनको दिखा देगा","लोग तुमसे 'कलालाह' (उन लोगों से विरासत जो अपने पीछे कोई वंशानुगत उत्तराधिकारी नहीं छोड़े हैं) के मामले में फतवा पूछते हैं। कहो अल्लाह तुम्हें फतवा देता है: अगर कोई शक्स बे-औलाद मर जाए और उसकी एक बहन हो तो वो उसके तर्क (जो उसने पीछे छोड़ दिया है) में से निस्फ़ (आधा) पाएगी, और अगर बहन बे-औलाद मारे तो भाई उसका वारिस होगा। अगर मय्यत की वारिस दो बहनें हों तो वो तर्के में से दो-तिहाई (दो-तिहाई) की हक़दार होंगी, और अगर कई भाई बहनें हों तो औरतों का इकहरा और मर्दों का दोहरा हिस्सा (तब पुरुष को दो महिलाओं का हिस्सा मिलेगा) होगा। अल्लाह तुम्हारे लिए एहकाम की तौज़ीह (स्पष्ट करता है) करता है ता-के तुम भक्त न फिरो और अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, बंदिशों की पूरी पाबंदी करो, तुम्हारे लिए मवेशी की क़िसम के सब जानवर हलाल हो गए, सिवाय उनके जो आगे चलकर तुमको बताएँगे, लेकिन एहराम की हालत में शिकार को अपने लिए हलाल न करलो। बेशाक़ अल्लाह जो चाहता है हुकुम देता है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, खुदा परस्ती की निशानियों को बे-हुरमत न करो, न हराम महिनो (महीने) में से किसी को हलाल करो, न कुर्बानी के जाँवरों पर दस्तूर करो, न उन जानवरों पर हाथ डालो जिनकी गर्दन में नज़र ए खुदा-वंदी की हालत पर पत्ते पड़े (कॉलर पहने हुए) हुए हों, न उन लोगों को छेड़ो जो अपने रब के फजल और उसकी खुशनुदी की तलाश में मकान-ए-मोहतरम (काबा) की तरफ जा रहे हों। हां जब एहराम की हालत खत्म हो जाए तो शिकार तुम कर सकते हो और देखो एक गिरो ​​ने जो तुम्हारे लिए मस्जिद ए हराम का रास्ता बंद कर दिया है तो इसपर तुम्हारा गुस्सा तुम्हें इतना मुश्तैल ना करदे के तुम भी उनके मुकाबले में नरवा ज्यादतियां करने लगो। नहीं! जो काम नेकी और खुदा तरसी के हैं उन सब में तावुन (एक दूसरे की मदद) करो और जो गुनाह और ज्यादा के काम हैं उनमें किसी से तावुन (एक दूसरे की मदद) ना करो। अल्लाह से डरो, उसकी सज़ा बहुत ज़रूरी है","तुमपर हराम किया गया मुर्दर (मृत मांस), खून, सुवर का गोश्त, वो जानवर जो खुदा के सिवा किसी और के नाम पर जिबाह किया गया हो, वो जो गला घोंट (गला घोंट) कर, या चोट (घाव) खा कर, या बुलंदी से गिर कर, या टक्कर खा कर मारा हो, हां जिसके किसी दरिंदे ने फाड़ा हो, सिवाय उसके जिसने तुमने जिंदा पा कर जिबाह करलिया, और वो जो किसी आस्ताने (वेदियों) पर जिबाह किया गया हो, लेकिन ये भी तुम्हारे लिए जरूरी है कि पैंसों के ज़रिये से अपनी किस्मत मालूम करो। दिव्य बाण)। ये सब अफ़ज़ल फ़िस्क (पाप कर्म) हैं। आज काफ़रियों को तुम्हारे दीन की तरफ़ से पूरी मयूसी हो चुकी है लिहाज़ा तुम उनसे ना डरो बलके मुझसे डरो। आज मैंने तुम्हारे लिए मुकम्मल कर दिया है और अपनी नियामत तुमपर तमाम कर दी है और तुम्हारे लिए इस्लाम को तुम्हारे दीन की हैसियत से कबूल कर लिया है। (लिहाजा हराम ओ हलाल की जो क़ुयूद तुंपार आयद करदी गई है उनकी पबंदी करो) अलबत्ता जो शक्स भूख से मजबूर होकर उनमें से कोई चीज़ खा ले, बिना इसके के गुनाह की तरफ उसका मेलन (जानबूझकर झुका हुआ) हो तो अल्लाह माफ करने वाला और रहम फरमाने वाला है","लॉग पूछते हैं कि उनके लिए क्या हलाल किया गया है, कहो तुम्हारे लिए सारी चीजें हलाल कर दी गई हैं और जिन शिकारी जानवरों को तुमने सिखाया हो (उन्हें शिकार करना सिखाओ, प्रशिक्षित करो) जिनको खुदा के दिए हुए इलम की बिना पर तुम शिकार की तालीम दिया करते हो, वो जिस जानवर को तुम्हारे लिए पकड़ रक्खें उसको भी तुम खा सकते हो, अलबत्ता उसपर अल्लाह का नाम लेलो और अल्लाह का कानून तोड़ने से डरो। अल्लाह को हिसाब लेते कुछ देर नहीं लगती","आज तुम्हारे लिए सारी पाक चीजें हलाल हो गई हैं, एहले किताब का खाना तुम्हारे लिए हलाल है और तुम्हारा खाना उनके लिए और महफूज औरतें भी तुम्हारे लिए हलाल हैं ख्वा वो एहले ईमान के गिरो ​​से होन या उन क़ौमों में से जिनको तुमसे पहले किताब दी गई थी, बशारत-ये-के तुम उनके मेहर अदा करके निकाह में उनके मुहाफ़िज़ (रक्षक) बानो, ना हाँ के आजाद शेहवत (वासना) रानी करने लगो या चोरी छुपे आशनाईयां करो। और जो किसी ने ईमान की रवीश पर चलने से इनकार किया तो उसका सारा कारनामा ए जिंदगी जाय हो जाएगा और वो आखिरत में दीवालिया (पूरी तरह से हारे हुए लोगों के बीच) होगा","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम नमाज के लिए उठो तो चाहिए के अपने मुंह और हाथ कोहनी तक धो लो, सिरों पर हाथ फेर लो और पांव तक धो लिया करो, अगर जनाब की हालत में हो तो नहा कर पक जाओ, अगर बीमार हो या सफर की हालत में हो या तुम में से कोई शक्स रफे हाजत (खुद को राहत देते हुए) करके आए या तुमने औरतों को हाथ लगाया हो, और पानी ना मिले, तो पाक मिट्टी से काम लो, बस उसपर हाथ मार कर अपने मुंह और हाथों पर फेर लिया करो। अल्लाह तुमपर जिंदगी को तंग नहीं करना चाहता, मगर वो चाहता है कि तुम्हें पाक करे और अपनी नियामत तुमपर तमाम करदे, शायद के तुम शुक्रगुज़ार बनो","अल्लाह ने तुमको जो नियामत अता की है उसका ख्याल रक्खो और हमें पुख्ता अहद को ना भूलो जो उसने तुमसे लिया है, यानी तुम्हारा ये क़ौल के, \"हमने सुना और इताअत क़बूल की\" अल्लाह से डरो, अल्लाह दिलों के राज़ जानता है","ऐ लोगों जो ईमान लाए हो! अल्लाह की खातिर रास्ता (सीधा) पर क़याम रहने वाले और इंसाफ की गवाही देने वाले बनो, किसी गिरोह की दुश्मनी तुमको इतना मुशतैल (चाल) ना करदे के इंसाफ से फिर जाओ। अदल (इंसाफ) करो, ये खुदा तरसी से ज्यादा मुनासिबत रखता है, अल्लाह से डर कर काम करते रहो, जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे पूरी तरह ब-खबर है","जो लोग ईमान लाए और नेक अमल करें, अल्लाह ने उनसे वादा किया है कि उनकी खतों से दरगुजर किया जाएगा और उन्हें बड़ा अजर मिलेगा","रहे वो लोग जो कुफ्र करें और अल्लाह की आयतें बताएं, तो वो दोज़ख़ में जाने वाले हैं","ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, अल्लाह के हमें एहसान को याद करो जो उसने (अभी हाल में) तुमपर किया है, जबके एक गिरो ​​ने tumpar दस्त दारज़ी (अपने खिलाफ हाथ फैलाएं) का इरादा कार्लिया था, मगर अल्लाह ने उनके हाथ तुम पर खड़े से रोक दिए, अल्लाह से डर कर काम करते रहो, ईमान रखने वालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए","अल्लाह ने बानी इसराइल से पुख्ता अहद लिया था और में बारह (बारह) नकीब (नेताओं) ने मुकर्रर किया था और उनसे कहा था के \"मैं तुम्हारे साथ हूं, अगर तुमने नमाज कायम रक्खी और जकात दी और मेरे रसूलों को माना अर उनकी मदद की और अपने खुदा को अच्छा कर्ज देते रहे तो यकीन रखिए के मैं तुम्हारी बुराइयां तुमसे ज़याल (मिटा दो) कर दूंगा और तुमको ऐसे बाघों (बगीचों) में दाख़िल करुंगा जिनका आला नहरें बहती होंगी, मगर इसके बाद जिसने तुम में से कुफ्र की रवीश इख्तियार की तो दर हक़ीक़त उसने स्व-सबील गम करदी (सही रास्ते से भटक गए)”","फिर ये उनका अपने अहद को तोड़ देना था जिसकी वजह से हमने उनको अपनी रहमत से दूर फेंक दिया और उनका दिल मजबूत कर दिया। अब उनका हाल ये है कि अल्फ़ाज़ का उलट फेर करके बात को कहीं से कहीं ले जाते हैं, जो तालीम उन्हें दी गई थी उसका बड़ा हिसा भूल चुके हैं, और आए दिन तुम्हें उनकी कोई ना किसी खयानत का पता चलता रहता है। इनमें से बहुत कम लोग इस ऐब (बुराई) से बचे हुए हैं, [पास जब ये इस हाल को पाहुंच चुके हैं तो जो शरारतें भी ये करें वो इनसे ऐन मुतवक्क (अपेक्षित) हैं, लिहाजा इन्हें माफ करो और इनकी हरकत से चश्मा-पोशी (नजरअंदाज) करते रहो। अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो एहसान की रवीश रखते हैं","इसी तरह हमने उन लोगों से भी पुख्ता अहद लिया था जिन्होन ने कहा था कि \"हम नसारा (ईसाई) हैं\" लेकिन उनको भी जो सबक याद करवाया गया था उसका एक बड़ा हिसा उनहोन ने फरामोश करदिया। आख़िर ए कार हमने उनके दरमियान कयामत तक के लिए दुश्मनी और आपस के बुग्ज़ ओ इनाद (बावजूद) का बीज बो (बीज बोना) दिया, और जरूर एक वक्त आएगा जब अल्लाह उन्हें बताएगा कि वो दुनिया में क्या बना रहे हैं","ऐ एहले किताब! हमारा रसूल तुम्हारे पास आ गया है जो किताब ए इलाही की बहुत सी उन बातों को तुम्हारे सामने खोल रहा है जब तक तुम पर्दा डाला करते थे, और बहुत सी बातों से दरगुज़र भी कर लिया जाता है। तुम्हारे पास अल्लाह की तरफ से रोशनी आ गई है और एक ऐसी हक़ नुमा किताब","जिसकी ज़रिये से अल्लाह ताला उन लोगों को जो उसकी रज़ा के तालिब हैं सलामती के तारीख़े बताता है और अपने इज़ान से उनको अँधेरों से निकाल कर उजाले की तरफ लाता है और राह ए रास्ते की तरफ उनकी रहनुमाई करता है","यकीनन कुफ्र किया उन लोगों ने जिन्हों ने कहा मसीह इब्न मरियम खुदा है। (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के अगर खुदा मसीह इब्न मरियम को और उसकी माँ और तमाम ज़मीन वालों को हलाक करना चाहे तो किसकी मजाल है कि उसको इस इरादे से बाज़ रख सके? अल्लाह तो ज़मीन और आसमान का और उन सब चीज़ों का मालिक है जो ज़मीन और आसमान के दरमियान पाई जाती है, जो कुछ चाहता है अदा करता है और उसकी क़ुदरत हर चीज़ पर हावी है","यहूद और नसारा कहते हैं कि हम अल्लाह के बेटे और उसके चाहते हैं (प्यारे) हैं, इनसे पूछो, फिर वो तुम्हारे गुनाहों पर तुम्हें सजा क्यों देता है? दर हकीकत तुम भी वही इंसान हो जैसे और इंसान खुदा ने अदा किये हैं। वो जिसे चाहता है माफ़ करता है और जिसे चाहता है सज़ा देता है। ज़मीन और आसमान और इनकी सारी मौजुदात उसका दूध है। और उसकी तरफ सबको जाना है","ऐ एहले किताब! हमारा ये रसूल ऐसे वक्त तुम्हारे पास आया है और दीन की वजह से तालीम तुम्हें दे रहा है जब रसूलों की आमद का सिलसिला एक मुद्दत से बंद था, ता-के तुम ये ना कह सको के हमारे पास कोई बशारत देने वाला और डराने वाला नहीं आया। तो देखो! अब वो बशारत देने वाला और डराने वाला आ गया और अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है","याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा था के \"ऐ मेरी क़ौम के लोगों! अल्लाह की हमें नियामत का ख्याल करो जो उसने तुम्हें अता की थी, उसने तुम में नबी पैदा किया, तुमको फरमा रवा बनाया, और तुमको वो कुछ दिया जो दुनिया में किसी को ना दिया था","ऐ बिरादरान ए क़ौम! हमें मुक़द्दस सर-ज़मीन में दाख़िल हो जाओ जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिख दिया है, पीछे ना हटो वरना नाकाम ओ ना-मुराद पलटोगे”","अनहोनी जवाब दीया \"ऐ मूसा! वहां तो बड़े ज़बरदस्त लोग रहते हैं, हम वहां हरगिज़ ना जाएंगे जब तक वो वहां से निकल न जाएं, अगर वो निकल गए तो हम दखल देने के लिए तैयार हैं\"","उन डरने वालों में दो शक्स ऐसे भी थे जिनको अल्लाह ने अपनी नियामत से नवाजा था, उनहों ने कहा के \"जबरों के मुकाबले में दरवाजे के अंदर घुस जाओ, जब तुम अंदर पहुंच जाओगे तो तुम ही गालिब रहोगे। अल्लाह पर भरोसा रखो अगर तुम मोमिन हो\"","लेकिन उनहों ने फिर यहीं कहा के \" ऐ मूसा! हम तो वहां कभी ना जाएंगे जब तक वो वहां मौजूद हैं, बस तुम और तुम्हारा रब, दोनों जाओ और लाडो, हम यहां बैठे हैं","इस्पर मूसा ने कहा \"ऐ मेरे रब, मेरे इख्तियार में कोई नहीं मगर या मेरी अपनी जात या मेरा भाई, पास तू हमें इन नफ़रमान लोगों से अलग करदे।\"","अल्लाह ने जवाब दिया ' अच्छा तो वो मुल्क चालीस (चालीस) साल तक इनपर हराम है, ये ज़मीन में मारे मारे फिरेंगे। इन नफ़रमानों की हालत पर हरगिज़ तरस न खाओ”","और ज़रा इनमें आदम के दो बेटों का क़िस्सा भी बे कम-ओ-काश्त सुना दो जब उन दोनों ने क़ुर्बानी की, तो उन में से एक क़ुर्बानी क़बूल की गई और दूसरे की न की गई, उसने कहा “मैं तुझे मार डालूंगा” उसने जवाब दिया “अल्लाह तो मुत्तक़ियों ही की नज़रें (प्रसाद) क़बूल करता है","अगर तू मुझे क़त्ल करने के लिए हाथ उठाएगा तो मैं तुझे क़त्ल करने के लिए हाथ न उठाऊंगा। मैं अल्लाह रब्बुल आलमीन से डरता हूं","मैं चाहता हूं कि मेरा और अपना गुनाह तू ही समइत ले और दोज़खी बनकर रहे। ज़ालिमों के ज़ुल्म का यही ठीक बदला है।”","आख़िर ए कार उसके नफ़्स ने अपने भाई का क़त्ल उसके लिए आसान कर दिया और वो उसे मार कर उन लोगों में शामिल हो गया जो नुक्सान उठाने वाले हैं","फिर अल्लाह ने एक कौवा (कौआ) भेजा जो ज़मीन खोदने लगा ता-के उसे बताए के अपने भाई की लाश कैसे छुपाये। ये देख कर वो बोला अफ़सोस मुझपर! मैं इस कव्वे जैसा भी ना हो सका के अपने भाई की लाश छुपाने की तद्बीर निकाल लेता, इसके बाद वो अपने किये पर बहुत पछताया","इसी वजह से बनी इजराइल पर हमने ये फरमान लिख दिया था के “जिसने किसी इंसान को खून के बदले या ज़मीन में फ़साद फ़ैलाने के सिवा किसी और वजह से क़त्ल किया उसने गोया तमाम इंसानों को क़त्ल कर दिया और जिसने किसी की जान बचाई उसने गोया तमाम इंसानों को ज़िंदगी बख्श दी”। मगर उनका हाल ये है कि हमारे रसूल पै डर पै उनके पास खुली खुली हिदायत लेकर आये फिर भी उनमें बकसरत लोग ज़मीन में ज़्यादतियां (ज्यादती करना) करने वाले हैं","जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से लड़ते हैं और ज़मीन में हैं टैग-ओ-दो करते फिरते हैं के फ़साद (शरारत) बरपा करें उनकी सज़ा ये है के क़त्ल किये जायें, या सूली पर चढ़ाये जायें, या उनके हाथ और पैरों मुखालिफ़ सिमतों से काट डाले जायें, या वो जिला वतन (जमीन से निर्वासित) कर दिये जायें। ये ज़िल्लत ओ रुसवाई तो उनके लिए दुनिया में है और आख़िरत में उनके लिए इसे बड़ी सज़ा है","मगर जो लोग तौबा कार्लें क़बल इसके के तुम उन्पर क़ाबू पाओ। तुम्हें मालूम होना चाहिए के अल्लाह माफ करने वाला और रहम फरमाने वाला है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो और उसकी जनाब में बैरयाबी (नज़दीकी) का ज़रिया तलाश करो, और उसकी राह में जिद ओ जहद करो, शायद के तुम्हें कामयाबी नसीब हो जाये","खूब जान लो के जिन लोगों ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया है, अगर उनके क़ब्ज़े में सारी ज़मीन की दौलत हो और इतनी ही और इसके साथ और वो चाहे के इसी फिदिये (बदले/प्रायश्चित) में दे कर रोज़ ए कयामत के अज़ाब से बच जाएं, तब भी वो उनसे क़बूल ना की जाएगी और उन्हें दर्दनाक सज़ा मिलकर रहेगी","वो चाहे के दोज़ख की आग से निकल भागें मगर ना निकल सकेंगे और उन्हें क़याम (हमेशा) रहने वाला अज़ाब दिया जाएगा","और चोर, ख्वा औरत हो या मर्द, दोनों के हाथ काट दो, ये उनकी कमाई का बदला है और अल्लाह की तरफ़ से इब्रातनाक सज़ा। अल्लाह की क़ुदरत सब पर ग़ालिब है और वो दाना ओ बीना है","फिर जो ज़ुल्म करने के बाद तौबा करे और अपना इस्लाह करले तो अल्लाह की नज़र ए इनायत फिर उसपर मय्यल हो जाएगी, अल्लाह बहुत दरगुज़र करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","क्या तुम जानते नहीं हो के अल्लाह ज़मीन और आसमान की सल्तनत का मालिक है? जिसे चाहे सजा दे और जिसे चाहे माफ करदे, वो हर चीज का इख्तियार रखता है","ऐ पैगम्बर! तुम्हारे लिए बाइस-ए-रंझ (शोक) ना हो वो लोग जो कुफ्र की राह में बड़ी तेजी से गमी दिखा रहे हैं ख्वा वो उनमें से हो जो मुंह से कहते हैं हम ईमान लाए मगर दिल उनके ईमान नहीं लाए, हां उनमें से हो जो यहुदी बन गए हैं, जिनका हाल ये है के झूठ के लिए कान लगाते हैं, और दूसरे लोगों की खातिर जो तुम्हारे पास कभी नहीं आए, सुन गुन लेते फिरते हैं, किताब-अल्लाह के अल्फाज़ को उनका सही महल मुतायिन होना के बकवास असल मानी से फेरते हैं। और लोग कहते हैं कि अगर तुम ये हुकुम दिया जाए तो मानो नहीं तो ना मानो, जैसे अल्लाह ही ने फिटने में डालने का इरादा करलिया हो तो उसको अल्लाह की नजरों से बचाने के लिए तुम कुछ नहीं कर सकते। ये वो लोग हैं जिनके दिलों को अल्लाह ने पाक करना ना चाहा। इनके लिए दुनिया में रूसवाई है और आख़िरत में साज़ा है","ये झूठ सुनने वाले और हराम के माल खाने वाले हैं, लिहाज़ा अगर ये तुम्हारे पास (अपने मुक़द्दमात लेकर) आएं तो तुम्हें इख्तियार दिया जाता है के चाहो इनका फैसला करो वरना इंकार करदो. इंकार करदो तो ये तुम्हारा कुछ बिगाड़ नहीं सकता, और फैसला करो तो फिर ठीक ठीक इन्साफ के साथ करो के अल्लाह इन्साफ करने वालों को पसंद करता है","और ये तुम्हें कैसे हकम (जज) बनाते हैं जबके इनके पास तौरात (तोराह) मौजूद है जिसमें अल्लाह का हुकुम लिखा हुआ है और फिर ये उसे मुंह मोड़ रहे हैं? असल बात ये है के ये लोग ईमान ही नहीं रखते","हमने तौरात नाज़िल की जिसमें हिदायत और रोशनी थी। सारे नबी जो मुस्लिम थे, यहूदी बन जाने वालों के मामले में उसी के मुतालिक थे, और इसी तरह रब्बानी और एहबर (विद्वान और न्यायविद) भी (इसी पर फैसले का मदार रखते थे)। क्योंके उन्हें किताब अल्लाह की हिफ़ाज़त का ज़िम्मेदार बनाया गया था और वो इसपर गवाह थे। पस (ऐ गिरो ​​ए यहूद!) तुम लोगों से ना डरो बलके मुझसे डरो, और मेरी आयत को जरा जरा से नुकसान पहुंचाओ (तुच्छ लाभ/कीमत) लेकर बेचना छोड़ दो। जो लोग अल्लाह के नाजिल करदा कानून के मुताबिक फैसला न करें वही काफिर हैं","तौरात में हमने यहुदियों पर ये हुकुम लिख दिया था के जान के बदले जान, आंख के बदले आंख, नाक के बदले नाक, कान के बदले कान, दांत के बदले दांत, और तमाम जख्मों के लिए बराबर का बदला, फिर जो क़िस्स का सदका करदे तो वो उसके लिए कफारा है और जो लोग अल्लाह के नाज़िल करदा कानून के मुताबिक़ फैसला ना करें वही जालिम हैं","फिर हमने पैगंबर के बाद मरियम के बेटे ईसा को भेजा, तौरात में से जो कुछ उसके सामने मौजूद था वो उसकी तस्दीक करने वाली थी और हमने उसको इंजील अता की जिसकी रहनुमाई और रोशनी थी और वो भी तौरात में से जो कुछ हमें वक्त मिला उसकी तस्दीक करने वाली थी और खुदा तरस लोगों को हिदायत और हिदायत थी","हमारा हुकुम था के एहले इंजील उस कानून के मुताबिक फैसला करें जो अल्लाह ने इसमे नाजिल किया है और जो लोग अल्लाह के नाजिल करदा कानून के मुताबिक फैसला न करें वही फासिक हैं","फिर (ऐ मुहम्मद!) हमने तुम्हारी तरफ ये किताब भेजी जो हक लेकर आई है और अल-किताब में से जो कुछ इसके आगे मौजूद है उसकी तस्दीक करने वाली और इसकी मुहाफिज ओ निगेहबान है। लिहाज़ा तुम खुदा के नाज़िल करदा कानून के मुताबिक़ लोगों के मामले का फैसला करो और जो हक तुम्हारे पास आया है उससे मुह मोड़ कर इनकी ख्वाहिश की जोड़ी ना करो। हमने तुम में से हर एक केलिये एक शरीयत और एक राह ए अमल मुकर्रर की, अगर तुम्हारा खुदा चाहता तो तुम सबको एक उम्मीद भी बना सकता था, लेकिन उसने ये इसलिए किया के जो कुछ उसने तुम लोगों को दिया है उसमें तुम्हारी आजमाइश करे, लिहाजा भलाईयों में एक दूसरे से सबक ले जाने की कोशिश करो। आख़िर ए कार तुम सब को खुदा की तरफ पलट कर जाना है, फिर वो तुम्हें असल हकीकत बता देगा जिसमें तुम इख्तिलाफ करते रहोगे","पास (ऐ मुहम्मद)! तुम अल्लाह के नाज़िल करदा क़ानून के मुताबिक़ में लोगों के ममलात का फ़ैसला करो और इनकी ख्वाहिश की जोड़ी ना करो। होशियार रहो के ये लोग तुमको फ़िटने में डाल कर हमें हिदायत से ज़रा बराबर मुनहरिफ़ ना करने पाए जो खुदा ने तुम्हारी तरफ नाज़िल की है। फिर अगर ये इसी मुह मोड़ें तो जान लो के अल्लाह ने इनके बाज़ गुनाहों की याद में इनको मुबतला ए मुसीबत करने का इरादा ही कर लिया है, और ये हकीकत है के इन लोगों में से अक्सर फ़ासीक़ हैं","(अगर ये खुदा के कानून से मुह मोड़ते हैं) तो क्या फिर जेलियत का फैसला चाहते हैं? हालंके जो लोग अल्लाह पर यकीन रखते हैं उनके नजरिए से अल्लाह से बेहतर फैसला करने वाला कोई नहीं है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो! यहुदियों (यहूदियों) और ईसाइयों (ईसाइयों) को अपना रफीक (दोस्त) न बनाओ। ये आपस में ही एक दूसरे के रफीक हैं। और अगर तुम में से कोई इनको अपना रफीक बनाता है तो उसका शूमर भी फिर इसी में है। यकीनन अल्लाह ज़ालिमों को अपनी रहनुमाई से महरूम कर देता है","तुम देखते हो के जिनके दिलों में निफ़ाक की बीमारी है वो उन्ही में दौड़-धूप करते फिरते हैं, कहते हैं हैं \"हमें डर लगता है के कहीं हम किसी मुसीबत के चक्कर में न फंस जाएं\" मगर बाद नहीं कि अल्लाह जब तुम्हें फैसला-कुन फतह (निर्णायक जीत) बक्शेगा या अपनी तरफ से कोई और बात जाहिर करेगा तो ये लोग अपने इस निफाक (पाखंड) पर जैसे येह दिलों में छुपे हुए हैं नदीम होंगे","और हम वक्त एहले ईमान कहेंगे \"क्या ये वही लोग हैं जो अल्लाह के नाम से कड़ी कसमें खा कर यकीन दिलाते थे के हम तुम्हारे साथ हैं?\" उनके सब अमल ज़ाया होगे और आख़िर ए कार ये नाकाम ओ ना-मुराद होकर रहे","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम में से कोई अपने दीन से फिरता है (तो फिर जाए) अल्लाह और भूत से लोग ऐसा अदा कर देंगे जो अल्लाह को मेहबूब होंगे और अल्लाह उनको मेहबूब होगा, जो मोमिनो पर नर्म और कुफ्फार पर सख्त होंगे, जो अल्लाह की राह में जिद ओ जहद करेंगे और किसी को मलामत करने वाले से न डरेंगे। ये अल्लाह का फ़ज़ल है, जिसे चाहता है अता करता है। अल्लाह वसीह ज़राए का मालिक है और सब कुछ जानता है","तुम्हारे रफीक तो हकीकत में सिर्फ अल्लाह और अल्लाह का रसूल और वह एहले ईमान हैं जो नमाज़ क़याम करते हैं, ज़कात देते हैं और अल्लाह के आगे झुकने वाले हैं","और जो अल्लाह और उसके रसूल और एहले ईमान को अपना रफीक बना लें उसे मालूम हो के अल्लाह की जमात ही गालिब रहने वाली है","ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारे पेश्रा एहले किताब में से जिन लोगों ने तुम्हारे दीन को मजाक और तफरीह का सामान बना लिया है, उन्हें और दूसरे काफिरों को अपना दोस्त और रफीक ना बनाओ। अल्लाह से डरो अगर तुम मोमिन हो","जब तुम नमाज़ के लिए मुनादी (कॉल) करते हो तो वो इसका मज़ाक उड़ाते और इसे खेलते हैं। इसकी वजह ये है के वो अक्ल नहीं रखते","इंसे कहो \"ऐ एहले किताब! तुम जिस बात पर हमसे बड़े हो (हमसे नफरत करो) वो इसके सिवा और क्या है के हम अल्लाह पर और दीन की उस तालीम पर ईमान ले आए हैं जो हमारी तरफ नाज़िल हुई है और हमसे पहले भी नाज़िल हुई थी? और तुम में से अक्सर लोग फ़ासिक हैं।”","फिर कहो \"क्या मैं उन लोगों की निशानदेही करूं जिनका अंजाम खुदा के हां फासीकों के अंजाम से भी बढ़ता है? वो जिनपर खुदा ने लानत की, जिनपर उसका गजब टूटा, जिनमें से बंदर और सुवर बन गए, जिन्होन ने टैगहुट की बंदगी की उनका दरजा और भी ज़्यादा बुरा है और वो सवा-ए-सबील (सही रास्ता) से बहुत ज़्यादा भटके हुए हैं”","जब ये तुम लोगों के पास आते हैं तो कहते हैं कि हम ईमान लाए, हालंके कुफ़्र लिए हुए आए थे और कुफ़्र ही लिए हुए वापस गए, और अल्लाह ख़ूब जानता है है जो कुछ ये दिलों में छुपे हुए हैं","तुम देखते हो कि इनमें से बकसरत लोग गुनाह और ज़ुल्म ओ ज़्यादा के कामोन में धूप-धूप करते हैं, और हराम के माल खाते हैं, बहुत बुरी हरकत हैं जो ये कर रहे हैं","क्यों इनके उलेमा, और मशाहिक (जुर्सिट्स) इन्हें गुनाह पर ज़ुबान खोलने और हराम खाने से नहीं रोकते? यकीनन बहुत ही बुरा कारनामा ए जिंदगी है जो वो तय्यार कर रहे हैं","यहूदी कहते हैं अल्लाह के हाथ बांधे हुए हैं। बांधे गए इनके हाथ, और लानत पड़ी इनपर हमें बकवस की बदौलत जो ये करते हैं। अल्लाह के हाथ तो कुशादा हैं, जिसकी तरह चाहता है खर्च करता है। हकीकत ये है कि जो कलाम तुम्हारे रब की तरफ से तुम पर नाज़िल हुआ है वो इनमें से अक्सर लोगों की सरकशी ओ बातिल परस्ती में उलटे इज़ाफ़े का मुजीब बन गया है, और (इसकी पैदाइश में) हमने इनके दरमियान कयामत तक के लिए अदावत और दुश्मनी डाल दी है। जब कभी ये जंग भड़कती है तो अल्लाह उसको ठंडा कर देता है। ये ज़मीन में फ़साद फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, मगर अल्लाह फ़साद बरपा करने वालों को हरगिज़ पसंद नहीं करता","अगर (इस सरकशी के बजाये) ये एहले किताब ईमान ले आते और खुदा तरसी की रवीश इख्तियार करते तो हम इनकी बुराइयां इनसे दूर करदेते और इनको नियामत भरी जन्नतों में पहचानते हैं","काश इन्हों ने तौरात और इंजील और उन दूसरी किताबों को क़याम किया होता जो इनके रब की तरफ से इनके पास भेज दी गई थी। ऐसा करते तो इनके लिए ऊपर से रिज़क बरसात और नीचे से उबाल, अगर इनमें कुछ लोग रास्ते-रो भी हैं लेकिन इनकी अक्सरियत बहुत ज्यादा है","ऐ पैगम्बर! जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है वो लोगों तक पहुंच दो, अगर तुमने ऐसा ना किया तो उसकी पैगम्बरी का हक़ अदा ना किया। अल्लाह तुमको लोगों के शरर से बचाने वाला है। यकीन रख्खो के वो काफिरों को (तुम्हारे मुकाबले में) कामयाबी की राह हरगिज न दिखायेगा","साफ कहदो के \"ऐ एहले किताब! तुम हरगिज किसी असल पर नहीं हो जब तक के तौरात और इंजील और उन दूसरी किताबों को कायम न करो जो तुम्हारे रब की तरफ से नाज़िल की गई हैं”। जरूर है के ये फरमान जो तुमपर नाज़िल किया गया है उनमें से अक्सर की सरकशी और इंकार को और ज्यादा बढ़ा देगा, मगर इंकार करने वालों के हाल पर कुछ अफ़सोस ना करो","यकीन जानो के यहां इजारा (सच्चाई का विशेष दावा) किसी का भी नहीं है) मुसलमान हो या यहूदी, सबी (सबिया) हो या इसाई (ईसाई), जो भी अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान लाएगा और नेक अमल करेगा, उसके लिए ना किसी खौफ का मुकाम है ना रंज का","हमने बनी इजराइल से पुख्ता अहद लिया और उनकी तरफ बहुत से रसूल भेजे, मगर जब कभी उनके पास कोई रसूल उनकी ख्वाहिशत ए नफ्स के खिलाफ कुछ लेकर आया तो किसी को अनहोन ने झुटलाया और किसी को कत्ल कर दिया","और अपने नजरिये ये समझे के कोई फ़ितना रुनामा ना होगा, इसलिए अंधे और बाहर बन गए, फिर अल्लाह ने उन्हें माफ़ किया तो उनमें से अक्सर लोग और ज़्यादा अंधे और बाहर चले गए। अल्लाह उनकी ये सब हरकत देख रहा है","यकीनन कुफ्र किया उन लोगों ने जिन्होन ने कहा के अल्लाह मसीह इब्ने मरियम ही है, हालंके मसीह ने कहा था के \"ऐ बानी इस्राइल! अल्लाह की बंदगी करो जो मेरा रुब भी है और तुम्हारा रुब भी\"। जिसने अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहरया उसपर अल्लाह ने जन्नत हराम करदी और उसका ठिकाना जहन्नुम है और ऐसे ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं","यकीनन कुफ्र किया उन लोगों ने जिन्होन ने कहा के अल्लाह तीन (त्रिमूर्ति) में का एक है, हलांके एक खुदा के सिवा कोई खुदा नहीं है. अगर ये लोग अपनी बातों से बाज ना आएं तो इनमें से जिसने कुफ्र किया है उसको दर्दनाक सजा दी जाएगी","फिर क्या ये अल्लाह से तौबा ना करेंगे और उसे माफ़ी ना मांगेंगे? अल्लाह बहुत दरगुज़र फ़रमाने वाला और रहम करने वाला है","मसीह इब्ने मरियम इसके सिवा कुछ नहीं के बस एक रसूल था, उसके पहले और भी बहुत से रसूल गुज़र चुके थे, उसकी माँ एक रस्त-बाज़ (नेक) औरत थी, और वो दोनों खाना खाते थे, देखो हम किस तरह इनके सामने हक़ीक़त की निशानियाँ दिखाते हैं, फिर देखो ये किधर उलटे फिर जाते हैं","इंसे कहो, क्या तुम अल्लाह को छोड़ कर उसकी तरफदारी करते हो जो ना तुम्हारे लिए नुक्सान का इख्तियार रखता है ना नफ़े का? हालंके सबकी सुनने वाला और सबको जानने वाला तो अल्लाह ही है","कहो, ऐ एहले किताब! अपने दीन में ना-हक़ ग़ुलू (सीमा से परे जाना/ज्यादती करना) ना करो और उन लोगों के तक़लात (झुकाव/ख्वाहिशात) की जोड़ी ना करो जो तुमसे पहले खुद गुमराह हुए और बहुतों को गुमराह किया, और \"सवा ए सबील (सही रास्ता)\" से भटक गए","बानी इसराइल में से जिन लोगों ने कुफ्र की राह इख्तियार की अनपर दाऊद और ईसा इब्न मरियम की जुबान से लानत की गई, क्योंकि वो सरकश हो गए थे और ज्यादतियां करने लगे थे","उन्होन ने एक दूसरे को बुरे अफाल के इरतेकाब से रोकना छोड़ दिया था, बुरा तर्ज ए अमल था जो unhon ne ikhtiyar kiya","आज तुम उनमें ब-कसरत ऐसे लोग देखते हो जो (एहले ईमान के मुकाबले में) कुफ्फार की हिमायत ओ रफाकत करते हैं, यकीनन बहुत बुरा अंजाम है जिसकी तैयारी उनके नफ्सों ने उनके लिए की है। अल्लाह उन्पर गज़ब-नाक हो गया है और वो दैमी अज़ाब में मुब्तिला होने वाले हैं","अगर फिल-वाकई ये लोग अल्लाह और पैगम्बर और उस चीज के मन्ने वाले हो गए जो पैगम्बर पर नाज़िल हुई थी तो कभी (एहले ईमान के मुकाबल में) काफिरों को अपना रफीक ना बनते, मगर इनमें से तो बेहतर लोग खुदा की इताअत से निकल चुके हैं","तुम एहले ईमान की अदावत (दुश्मनी) में सबसे ज्यादा सख्त यहूद और मुशरिकेन को पाओगे, और ईमान लाने वालों के लिए दोस्ती में करीब-तार उन लोगों को पाओगे जिन्हों ने काहा था के हम नसारा (ईसाइयों) हैं, इस वजह से कि उनमें इबादत-गुज़ार आलिम और तारिक उद दुनिया फकीर (भिक्षु) पाए जाते हैं और उनमें गुरुर ए नफ़्स (अभिमानी) नहीं है","जब वो हमें कलाम को सुनते हैं जो रसूल पर उतरते हैं तो तुम देखते हो के हक़ शनासी (सच्चाई को पहचानो) के असर से उनकी आंखें आंसुओं से छलनी हो जाती हैं, वो बोल उठते हैं के \"परवरदिगार! हम ईमान लाए, हमारा नाम गवाही देने वालों में लिख ले\"","और वो कहते हैं के \"आख़िर क्यों ना हम अल्लाह पर ईमान लायें और जो हक़ हमारे पास आया है उसे क्यों ना मान लें, जबके हम इस बात की ख्वाहिश रखते हैं के हमारा रब हमें साले लोगों में शामिल करें?”","उनके इस क़ौल की वजह से अल्लाह ने उनको ऐसी जन्नतें अता की जिनके बारे में पता है कि वो हमेशा साथ रहेंगी। ये जजा है नीक रवैय्या इख्तियार करने वालों के लिए","रहे वो लोग जिन्हों ने हमारी आयतों को मन्ने से इंकार किया और उन्हें झुटलाया, तो वो जहन्नुम के मुस्तहिक़ हैं","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जो पाक चीज़ अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल की हैं उन्हें हराम न करलो और हद से तजावुज़ न करो, अल्लाह को ज़्यादा करने वाले सख़्त नापसंद हैं","जो कुछ हलाल ओ तय्यब रिज़्क अल्लाह ने तुमको दिया है उसे खाओ पियो और उस खुदा की नफ़रमानी से बचते रहो जिसपर तुम ईमान लाए हो","तुम लोग जो मोहमल (व्यर्थ रूप से) कसमें खा लेते हो उन्पर अल्लाह गिरफ़्तार नहीं करता, मगर जो कसमें तुम जान बूज़ कर खाते हो उन्पर वो तुमसे ज़रूर मवाक़ेज़ा करेगा। (ऐसी कसम तोड़ने का) कफारा ये है के दस मिस्किनो को वो औसत (औसत) दर्जे का खाना खिलाओ जो तुम अपने बाल बच्चों को खिलाते हो, या उन्हें कपडे पहनो, या एक गुलाम आज़ाद करो, और जो इसकी क्षमता (क्षमता) ना रखता हो वो तीन दिन के रोज़ रक्खे. ये तुम्हारी कसमों का कफ़्फ़ारा है जबके तुम कसम खा कर तोड़ दो। अपनी कसमों की हिफ़ाज़त किया करो, इस तरह अल्लाह अपने एहकाम तुम्हारे लिए वाज़ेह करता है शायद तुम शुक्र अदा करो","ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, ये शराब (नशा) और जुवा (जुआ) और ये आस्ताने [(समर्पण) पत्थर] और पासें [(तीरों द्वारा भविष्यवाणी], ये सब गंदे शैतानी काम हैं, इनसे परहेज करो, उम्मीद हैं के तुम्हें फलाह नसीब होगी)","शैतान तो ये चाहता है के शराब और जुवे के ज़रिये से तुम्हारे दरमियान अदावत और बुग़्ज़ (दुश्मनी और नफरत) डाल दे और तुम्हें खुदा की याद से और नमाज़ से रोक दे, फिर क्या तुम इन चीज़ों से बाज़ रहोगे","अल्लाह और उसके रसूल की बात मानो और बाज़ आ जाओ, लेकिन अगर तुमने हुकुम अदाउली की (अगर तुम पीछे मुड़ते हो) तो जान लो के हमारे रसूल पर बस साफ साफ हुकुम पंहुंचा देने की जिम्मेदारी थी","जो लोग ईमान ले आए और नेक अमल करने लगे उन्होन ने पहले जो कुछ खाया पिया था उसपर कोई गिरफ़्तार न होगी, बशारत-ए-के वो आइंदा उन चीज़ों से बचे रहे जो हराम की गई हैं और ईमान पर साबित क़दम रखें और अच्छे काम करें। फिर जिस चीज़ से रोका जाए उसे रुकें और जो फरमान ए इलाही हो उसे माने, फिर खुदा तरसी के साथ नेक रवैय्या रक्खें, अल्लाह नेक किरदार लोगों को पसंद करता है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह तुम्हें शिकार के ज़रिये से सख्त आजमाइश में डालेगा जो बिल्कुल तुम्हारे हाथ और नेज़ों (लांस) की ज़द में होगा, ये देखने के लिए कि तुम में से कौन उसे गायबाना डरता है, फिर जिसने तम्बीह (चेतावनी) के बाद अल्लाह की मुकर्रर की हुई हद से तजावुज़ किया उसके लिए दर्दनाक सज़ा है","ऐ logon jo iman laye ho! एहराम की हालत में शिकार न मारो, और अगर तुम में से कोई जान बूझ कर ऐसा कर गुजरे तो जो जानवर उसने मारा हो उसी के हम पाला (इसी तरह) एक जानवर उसी मछली में से नजर देना होगा, जिसका फैसला तुम में से दो आदिल (सिर्फ) आदमी करेंगे, और ये नजराना काबा पाहुंचाया जाएगा, हां नहीं तो इस गुनाह के कफरे में चांद मिसकीनो को खाना खिलाना होगा, हां इसके ब-काद्र रोजे रखने होंगे, ता-के वो अपने किए का मजा चक्खे, पहले जो कुछ हो चुका उसे अल्लाह ने माफ कर दिया, लेकिन अब अगर किसी ने इस हरकत का इरादा किया तो उसे अल्लाह बदला लेगा, अल्लाह सब पर गालिब है और बदला लेने की ताक़त रखता है","तुम्हारे लिए समंदर का शिकार और उसका खाना हलाल कर दिया गया, जहां तुम ठहरो वहां भी उसे खा सकते हो और काफ़िले (यात्रियों) के लिए ज़ाद-ए-राह भी बना सकते हो। अलबत्ता खुश्की (जमीन) का शिकार जब तक तुम एहराम की हालत में हो तुम पर हराम किया गया है। पास बचाओ हमें खुदा की नफरमानी से जिसकी पेशी में तुम सबको घेर कर हाज़िर किया जाएगा","अल्लाह ने मकान ए मोहतरम, काबा को लोगों के लिए (इज्तिमय जिंदगी के) कयाम का जरिया बनाया और माह ए हराम और कुर्बानी के जंवरों और कलादोन[मालाएं (जिससे) वे पहचाने जाते हैं)] को भी (इस काम में मुआविन बना दिया) ता-के तुम्हें मालूम हो जाए के अल्लाह आसमान और ज़मीन के सब हालात से बेख़बर हैं और उसे हर चीज़ का इलम है","ख़बरदार हो जाओ!अल्लाह सज़ा देने में भी शामिल है और इसके साथ बहुत दरगुज़ार और रहम भी करने वाला है","रसूल पर तो सिर्फ पैग़ाम पाहुंचा देने की ज़िम्मेदारी है, आगे तुम्हारे खुले और छुपे सब हालात का जाने वाला अल्लाह है","(ऐ पैगम्बर!) इनसे कहदो के पाक और नापाक बहार हाल यकसन नहीं हैं, ख्वा नापाक की बोहतत (बहुतायत) तुम्हें कितनी ही खुशी (प्रसन्नता) करने वाली हो। पास ऐ लोगन जो अक़ल रखते हो! अल्लाह की नफरमानी से बचते रहो, उम्मीद है के तुम्हें फलाह नसीब होगी","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ऐसी बातें ना पूछो करो जो तुमपर जाहिर कर दी जाए तो तुम्हें नगावार हो, लेकिन अगर तुम उन्हें ऐसे वक्त पूछोगे जब के कुरान नाजिल हो रहा हो तो वो तुमपर खोल दी जाएगी, अब तक जो तुमने किया उसे अल्लाह ने माफ कर दिया, वो दरगुज़ार करने वाला और बर्दबार (सर्व सहनशील) है","तुमसे पहले एक गिरोह ने इसी क़िस्म के सवाल किए थे, फिर वो लोग इन्हीं बातों की वजह से कुफ़्र में मुबतला हो गए","अल्लाह ने कोई बहिराह (मूर्तियों को समर्पित मवेशी) मुकर्रर किया है ना साइबा (एक ऊंटनी को अपने झूठे देवताओं, जैसे मूर्तियों, आदि के लिए मुक्त चरागाह के लिए खुला छोड़ दिया जाता है) और ना वसीला (एक ऊंटनी को मूर्तियों के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया जाता है क्योंकि उसने अपनी पहली डिलीवरी में एक मादा ऊंट को जन्म दिया है) और ना हाम (एक ऊंटनी-ऊंटनी को अपनी मूर्तियों के लिए काम से मुक्त कर दिया जाता है, जब वह काम पूरा कर लेती है। इसके लिए निर्धारित युग्मों की संख्या) मगर ये काफिर अल्लाह पर झूठी तोहमत लगाते हैं और इनमें से अक्सर बे-अकाल हैं (कहां ऐसे वहामियत को मान रहे हैं)","और जब इनसे कहा जाता है के आओ उस कानून की तरफ जो अल्लाह ने नाज़िल किया है और आओ पैगम्बर की तरफ, तो वाह जवाब देते हैं हमारे लिए तो बस वही तरीक़ा काफ़ी है जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है। क्या ये बाप दादा ही हैं कि तक्लीद किए चले जाएंगे ख्वा वो कुछ ना जानते हों और सही रास्ते की उनको खबर ही ना हो","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपनी फिक्र करो, किसी दूसरे की गुमराही से तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ता अगर तुम खुद राह ए रास्ते पर हो, अल्लाह की तरफ़ तुम सबको पलट कर जाना है, फिर वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या करते रहेंगे हो","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम में किसी की मौत का वक़्त आ जाए और वो वसीयत कर रहा हो तो उसके लिए शहादत का निसाब ये है के तुम्हारी जमात में से दो (दो) साहिब-ए-अदल आदमी गवाह बन जाएं, अगर तुम सफर की हालत में हो और वहां मौत की मुसीबत पेश आ जाए तो गैर मुस्लिम ही में से दो गवाह ले लिए जाए। फिर अगर कोई शक्क पढ़ जाए तो नमाज के बाद दोनों गवाहों को (मस्जिद में) रोक लिया जाए और वो खुदा की कसम खा कर कहे के \"हम किसी जाति फैसले के बदले शहादत बेचने वाले नहीं हैं, और ख्वा कोई हमारा रिश्तेदार ही क्यों ना हो (हम उसकी रियात\" करने वाले नहीं) और ना खुदा बर्बादी की गवाही को हम छुपाने वाले हैं, अगर हमने ऐसा किया तो गुनाह-गैरों में शामिल होंगे”","लेकिन अगर पता चल जाए के इन दोनो ने अपने आप को गुनाह में मुब्तिला किया है तो फिर इनकी जगह दो और शक्स जो इनकी बा-निस्बत शहादत देने के लिए एहल-तर होन उन लोगों में से खड़े होन जिनका हक़ तलफ़ी हुई हो, और जो खुदा की क़सम खा कर काहें के \"हमारी शहादत उनकी शहादत से ज़्यादा बार-हक़ है और हमने अपनी गवाही में कोई ज़्यादा नहीं की है, अगर हम ऐसा करें तो ज़ालिमों में से होंगे\"","क्या तारीख़ से ज़्यादा तवक्कु की जा सकती है के लोग ठीक ठीक शहादत देंगे, या काम आज भी बात है का खौफ करेंगे कि उनकी कसमों के बाद दूसरी कसमों से कहीं उनकी देरी न हो जाए। अल्लाह से डरो और सुनो, अल्लाह नफ़रमानी करने वालों को अपनी रहनुमाई से महरूम कर देता नहीं है","जिस रोज़ अल्लाह सब रसूलों को जमा करके पूछेगा के तुमने क्या जवाब दिया है, तो वो अर्ज़ करेंगे के हमें कुछ इल्म नहीं, आप ही तमाम पोशीदा (छिपा हुआ) हकीकतों को जानते हैं","फिर तसव्वुर करो उस मौके का जब अल्लाह फरमायेगा के \"ए मरियम के बेटे ईसा! याद कर मेरी उस नियामत को जो मैंने तुझे और तेरी मां को अता की थी, मैंने रूह-ए-पाक से तेरी मदद की, तू गहवरे (पालना) में भी लोगों से बात करता था और बड़ी उमर को पहुंच कर भी। मैंने तुझको किताब और हिकमत और तौरात और इंजील की तालीम दी, तू मेरे हुकुम से मिट्टी का पुतला परिंदे की शक्ल का बनता था और वो मेरे हुकुम से परिंदा बन जाता था, तू मदार-ज़ाद (जन्म से अंधा) और कोढ़ी (कोढ़ी) को मेरे हुकुम से अच्छा करता था, तू मुर्दो को मेरे हुकुम से निकलता था. फिर जब तू बनी इजराइल के पास सारी निशानियां लेकर पहुंचूं और जो लोग उन में से मुनकिर ए हक था था उनहों ने कहा के ये निशानियां जादूगरी के सिवा और कुछ नहीं हैं, तो मैंने ही तुझसे बचाया","और जब मैंने हवारियों (चेलों) को इशारा किया के मुझपर और मेरे रसूल पर ईमान लाओ, तब उनहों ने कहा के \"हम ईमान लाए और गवाह रहो के हम मुसलमान हैं\"","(हवारियों के सिलसिले में) ये वाकिया भी याद रहे के जब हवारियों ने कहा, ऐ ईसा इब्ने मरियम! क्या आप का रुब हमपर आसमान से खाने का एक ख़्वान उतर सकता है? तो ईसा ने कहा अल्लाह से डरो अगर तुम मोमिन हो","उन्होन ने कहा हम बस ये चाहते हैं के इस ख़्वान से खाना खायें और हमारे दिल मुतमीन (स्थिर) हों और हमें मालूम हो जाये के आप ने जो कुछ हमसे कहा है वो सच है और हम इसपर गवाह हैं","इसपर ईसा इब्न-ए-मरियम ने दुआ की \"खुदाया! हमारे रब!\" हमपर आसमान से एक ख्वान नाज़िल कर जो हमारे लिए और हमारे एग्लोन पिचलों के लिए ख़ुशी का मौका क़रार पाए और तेरी तरफ से एक निशानी हो, हमको रिज़क दे और तू बेहतरीन राज़िक है”","अल्लाह ने जवाब दिया “मैं उसको तुमसे नाज़िल करने वाला हूं” , मगर उसके बाद जो तुम में से कुफ्र करेगा उसे मैं ऐसा सजा दूंगा जो दुनिया में किसी को ना दी होगी”","गरज जब (ये एहसानात याद दिलाकर) अल्लाह फरमायेगा के \"ऐ ईसा इब्न-ए-मरियम क्या तू नये लोगों से कहा था के खुदा के सिवा मुझे और मेरी मां को भी खुदा बना लो?\" तो वो जवाब में अर्ज़ करेगा के \" सुबान अल्लाह! मेरा ये काम ना था के वो बात कहता जिसके कहने का मुझे हक़ ना था, अगर मैंने ऐसी बात कहीं होती, तो आपको ज़रूर इल्म होता, आप जानते हैं जो कुछ मेरे दिल में है और मैं नहीं जानता जो कुछ आपके दिल में है, आप तो सारी पोशिदा हकीकतों के आलिम हैं","मैंने उनके सिवा कुछ नहीं कहा जिसका आपने हुकुम दिया था, ये अल्लाह की बंदगी करो जो मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी, मैं उसका वक्त तक उनका निगरान था जब तक मैं उनके दरमियान था, जब आपने मुझे वापस बुला लिया तो आप उन पर नजर रख रहे थे और आप तो सारी ही चीजों पर नजर रख रहे हैं","अब अगर आप उन्हें सजा दें तो वो आपके बंद हैं और अगर माफ कर दें तो आप गालिब और दाना हैं”","तब अल्लाह फरमायेगा “ ये वो दिन है जिसकी सच्चाई को उनकी सच्चाई नफ़ा देती है, उनके लिए ऐसे बाग़ हैं जिनके बारे में वो नफ़रत कर रही हैं, यहाँ वो हमेशा रहेंगे, अल्लाह उनसे रज़ी हुआ और वो अल्लाह से, यही बड़ी कामयाबी है\"","ज़मीन और आसमान और तमाम मौजुदात की बादशाही अल्लाह ही के लिए है और वह हर चीज पर कुदरत रखता है","तारीफ अल्लाह के लिए है जिसने जमीन और आसमान बनाया, रोशनी और तारिकियां (अंधेरा) पैदा की, फिर भी वो लोग जिन्होन ने दावत ए हक को मन्ने से इंकार कर दिया है डर्सन को अपने रब का हमसर ठहरे हुए हैं","वही है जिसने तुमको मिट्टी से पैदा किया, फिर तुम्हारे लिए जिंदगी की एक मुद्दत मुकर्रर करदी, और एक दूसरी मुद्दत और भी है जो उसकी हां ताई शुदा है मगर तुम लोग हो के शक में पड़े हुए हो","वही एक खुदा आसमान में भी है और ज़मीन में भी। तुम्हारे खुले और छुपे सब हाल जानता है और जो बुराई या भलाई तुम कमाते हो उसे खूब वाकिफ है","लोगों का हाल ये है के उनके रब की निशानियों में से कोई निशानी ऐसी नहीं जो उनके सामने आई हो और उनको ने उसे मुंह ना मोड़ लिया हो","चुनांचे अब जो हक उनके पास आया तो उसे भी अनहोन ने झुटला दिया। अच्छा, जिस चीज़ का वो अब तक मज़ाक उड़ाते रहे हैं अंकारिब उसके मुतालिक कुछ खबरें उन्हें पहनेंगे","क्या अनहोन ने देखा नहीं के उनसे पहले कितनी ऐसी क़ौम को हम हलाक कर चुके हैं जिनका अपने अपने जमाने में प्यार हो रहा है? उनको हमने ज़मीन में वो इक्तेदार बख्शा था जो तुम्हें नहीं बख्शा है। उन्पर हमने आसमान से ख़ूब बारिशें बरसाईं और उन्हें नीची नहरें बहा दी, (मगर जब उनको ने कुफ़्रां ए नियामत किया तो) आख़िर ए कार हमने उनके गुनाहों की याद में उन्हें तबाह कर दिया और उनकी जगह दूसरे दौर की क़ौमों को उठाया","(ऐ पैगम्बर)! अगर हम तुम्हारे ऊपर कोई कागज में लिखी किताब भी उतार देते और लोग उसे अपने हाथों से छू कर भी देख लेते तब भी जिहों ने हक का इंकार किया है वो यहीं कहते के ये तो सारे जादू है","कहते हैं के इस नबी पर कोई फरिश्ता क्यों नहीं उतरा गया? अगर कहीं हमने फ़रिश्ता उतार दिया होता, तो अब तक कभी का फैसला हो चुका होता, फिर इन्हें कोई मोहलत न दी जाती","और अगर हम फ़रिश्ते को उतारते तब भी उसे इंसानी शक्ल ही में उतारते और इस तरह उन्हें उसी शुभे में मुबतला कर देते जिसमें अब ये मुबतला है","(ऐ मुहम्मद)! तुमसे पहले भी बहुत से रसूलों का मज़ाक उड़ाया जा चूका है, मगर मज़ाक उड़ाने वालों पर आख़िर ए कार वही हकीकत मुसल्लत होकर रही जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे","इनसे कहो, ज़रा ज़मीन में चल फिर कर देखो झूठलाने वालों का क्या अंजाम हुआ है","इनसे पूछो, आसमानों और ज़मीन में जो कुछ है वो किसका है? कहो सब कुछ अल्लाह ही का है, उसने रहम ओ करम का शैवा अपने ऊपर लाज़िम करलिया है (इसके लिए वो नफरमानियों और सरकशियों पर तुम्हें जदली से नहीं पकड़ लेता), कयामत के रोज वो तुम सब को जरूर जमा करेगा, ये बिल्कुल एक गैर मुश्तबा हकीकत है, मगर जिन लोगों ने अपने आप को खुद तबाही के खतरे में मुब्तिला करलिया है वो उसे नहीं मानते","रात के अंधेरे और दिन के उजाले में जो कुछ ठहरा हुआ है सब अल्लाह का है, और वो सब कुछ सुनता और जानता है","कहो, अल्लाह को छोड़ कर क्या मैं किसी और को अपना सरपरस्त बना लूं? हमें खुदा को छोड़ कर जो ज़मीन ओ आसमान का खालिक है और जो रोज़ी देता है रोज़ी लेता नहीं है? कहो, मुझे तो यही हुकुम दिया है के सबसे पहले मैं उसके आगे सर तस्लीम ख़त्म करूं (और ले ली है के कोई शिर्क करता है तो करे) तू बहार-हाल मुशरिकों में शामिल ना हो","कहो, अगर मैं अपने रब की नफ़रमानी करूं तो डरता हूं के एक बड़े (ख़ौफ़नाक) दिन मुझे सज़ा भुगतनी पड़ेगी","उस दिन जो सज़ा से बच गया उसपर अल्लाह ने बड़ा ही रहम किया और यही नुमायन कमियाबी है","अगर अल्लाह तुम्हें किसी क़िस्म का नुक्सान पहुंचाए तो उसके सिवा कोई नहीं जो तुम्हें इस नुक्सान से बच्चा सके, और अगर वो तुम्हें किसी से बेहरामद करे तो वो हर चीज़ पर कादिर है","वो अपने बंदों पर कामिल इख्तियारत रखता है और दाना और बा-खबर है","इनसे पूछो, किसकी गवाही सबसे ज्यादा खराब है? कहो, मेरे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह गवाह है, और ये कुरान मेरी तरफ बाजारिये वही भेजा गया है ता-के तुम्हें और जिस को ये पहुंचे, सबको मुतनब्बे(चेतावनी) कर्दून। क्या सच है तुम लोग ये शहादत दे सकते हो कि अल्लाह के साथ दूसरे खुदा भी हैं? कहो, मैं तो इसकी शहादत हरगिज़ नहीं दे सकता। कहो, ख़ुदा तो वही एक है और मैं हमसे शिर्क से क़तई बेज़ार हूं जिसमें तुम मुबतला हो","जिन लोगों को हमने किताब दी है वो इस बात को इस तरह गैर मुश्तबा तौर पर पहचानते हैं जैसे उनको अपने बेटों के पहचानने में कोई इश्तिबाह पेश नहीं आता, मगर जिन्होन ने अपने आप को खुद खासरे में डाल दिया है वो इसे नहीं मानते","और हम शक्स से बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठा बोहतन लगाए, या अल्लाह की निशानियों को झुठलाए? यकीनन ऐसे जालिम कभी फलाह नहीं पा सकते","जिस रोज हम सबको इकट्ठ करेंगे और मुशरिकों से पूछेंगे के अब वो तुम्हारे ठहरे हुए शरीक कहां हैं जिनको तुम अपना खुदा समझते थे","तो वो इसके सिवा कोई फिट ना उठे सकेंगे के (ये झूठा बयां देन के) ऐ हमारे आका! तेरी कसम हम हरगिज मुशरिक न थे","देखो, हमें वक्त ये किस तरह अपने ऊपर आप झूठ घड़ेंगे, और वहां उनके सारे बनवाती माबूद गम हो जाएंगे","मेरे अंदर से बाज़ लोग ऐसे हैं जो कान लगा कर तुम्हारी बात सुनते हैं मगर हाल ये है के हमने उनके दिलों पर पूरे डाल रखे हैं जिनकी वजह से वो इसको कुछ नहीं समझते और इनके कानों में गिरानी डाल देते हैं। वो ख्वा कोई निशानी देख लें, उसपर ईमान ला कर ना देंगे, हद ये है के जब वो तुम्हारे पास आ कर तुमसे झगड़ा करते हैं तो इनमें से जिन लोगों ने इंकार का फैसला कर लिया है वो (सारी बातें सुनने के बाद) यहीं कहते हैं के ये एक दास्तां ए इतिहास (प्राचीन कथाएं) के सिवा कुछ नहीं","वो इस अमर ए हक़ को क़बूल करने से लोगों को रोकते हैं और खुद भी इस तरह दूर भागते हैं (वो समझते हैं के इस हरकत से वो तुम्हारा कुछ बिगाड रहे हैं) हालंके दर असल वो खुद अपनी ही तबाही का सामान कर रहे हैं मगर उन्हें इसका शहर नहीं है","काश तुम हमें वक्त की हालत देख सकते हो जब वो दोज़ख़ के किनारे खड़े किये जायेंगे, हमें वक़्त वो कहेंगे के काश कोई सूरत ऐसी हो के हम दुनिया में फिर वापस भेज देंगे और अपने रब की निशानियों को ना झुटलायें और ईमान लाने वालों में शामिल हों","दार-हक़ीक़त ये बात वो महज़ है वजह से कहेंगे के जिस हकीकत पर उन्हें ने पर्दा डाल रखा था वो हमें वक्त बे-नकाब होकर उनके सामने आ चुकी होगी, वरना अगर उन्हें साबिक जिंदगी की तरफ वापस भेजा जाए तो फिर वही सब कुछ करें जिसमें उन्हें मन किया गया है। वो तो हैं ही झूठे (इसलिये अपनी इस ख्वाहिश के इजहार में भी झूठ ही से काम लेंगे)","आज ये लोग कहते हैं कि जिंदगी में जो कुछ भी है बस यहीं दुनिया की जिंदगी है और हम मरने के बाद हरगिज दोबारा ना उठेंगे","काश वो मंज़र तुम देख सको जब ये अपने रुब के सामने खड़े किये जायेंगे हमें वक्त इनका रुब इनसे पूछेगा “क्या ये हकीकत नहीं है?” ये कहेंगे \"हां ऐ हमारे रब! ये हकीकत ही है\", वो फरमायेगा \"अच्छा! तो अब अपने इंकार ए हकीकत की याद में अज़ाब का मजा चाहो\"","नुक्सान में पड़ गए वो लोग जिन्होन ने अल्लाह से अपनी मुलाकात की इत्तिला को झूठ करार दिया, जब अचानक वो घड़ी आ जाएगी तो यही लोग कहेंगे \"अफसोस! हमसे इस मामले में कैसी तकसीर हुई\" और इनका हाल ये होगा के अपनी पीठ पर अपने गुनाहों का बोझ लड़े होंगे। देखो! कैसा बुरा बोझ है जो ये उठा रहे हैं","दुनिया की जिंदगी तो एक खेल और एक तमाशा है, हकीकत में आखिरी ही का मुकाम उन लोगों के लिए बेहतर है जो जियान कारी से बचना चाहते हैं, फिर क्या तुम लोग अक्ल से काम ना लोगे","(ऐ मुहम्मद)! हमें मालूम है कि जो बातें ये लोग बनाते हैं इनसे तुम्हें रंज होता है, लेकिन ये लोग तुम्हें नहीं झुठलाते हैं बल्के ये जालिम दार असल अल्लाह की आयत का इंकार कर रहे हैं","तुमसे पहले भी बहुत से रसूल झुटलाए जा चुके हैं, मगर हमें तकज़ीब पर और उन अज़ियातों (उत्पीड़न) पर जो उन्हें पहुंच गई उनहों ने सब्र किया, यहां तक ​​के उन्हें हमारी मदद पहुंच गई। अल्लाह की बातों को बदलने की ताक़त किसी में नहीं है, और पिछले रसूलों के साथ जो कुछ पेश आया उसकी खबरें तुम्हें पाहुंच ही चुकी हैं","ताहम अगर लोगों की बे-रूखी तुमसे बर्दाश्त नहीं होती तो अगर तुम में कुछ ज़ोर है तो ज़मीन में कोई सुरंग ढूंढो या आसमान में सीढ़ी लगाओ और इनके पास कोई निशानी लाने की कोशिश करो। अगर अल्लाह चाहता तो इन सबको हिदायत पर जमा कर सकता था, लिहाजा नादान मत बनो","दावत ए हक पर लब्बैक वही लोग कहते हैं जो सुनने वाले हैं। रहे मुर्दे, तो उन्हें अल्लाह के पास बस क़बरों से ही उठाया जाएगा और फिर वो (उसकी अदालत में पेश होने के लिए) वापस ले जाएंगे","ये लोग कहते हैं के इस नबी पर उसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों नहीं उतरी? कहो, अल्लाह निशानी उतारने की पूरी क़ुदरत रखता है, मगर मेरे अंदर से अक्सर लोग नादानी में मुब्तिला हैं","ज़मीन में चलने वाले किसी जानवर और हवा में परों (पंखों) से उड़ने वाले किसी परिंदे को देख लो, ये सब तुम्हारी ही तरह की अनवा (समुदाय) है. हमने इनकी तकदीर के नविस्ते (रिकॉर्ड) में कोई कसर नहीं छोड़ी है, फिर ये सब अपने रब की तरफ जाते हैं","मगर जो लोग हमारे निशानियों को झुठलाते हैं वो बहरे (गूंगा) और गुंगे हैं, तारिकियों (अंधेरे) में पड़े हुए हैं, अल्लाह जिसे चाहता है है भटका देता है और जिसे चाहता है सीधे रास्ते पर लगा देता है","इनसे कहो, जरा गौर करके बताओ, अगर कभी तुमपर अल्लाह की तरफ से कोई बड़ी मुसीबत आ जाती है या आखिरी घड़ी आ जाती है तो क्या हम वक्त तुम अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारते हो? बोलो अगर तुम सच्चे हो","हमें वक्त तुम अल्लाह ही को पुकारते हो, फिर अगर वो चाहता है तो इस मुसीबत को तुमपर से ताल देता है, ऐसे मौके पर तुम अपने रुके हुए शरीकों को भूल जाते हो","तुमसे पहले बहुत सी क़ौमों की तरफ हमने रसूल भेजा और उन क़ौमों को मसाइब ओ आलम (दुर्भाग्य और कठिनाई के साथ) में मुब्तिला किया ता-के वो आजिजी (विनम्रता) के साथ हमारे सामने झुक जाएं","पास जब हमारी तरफ से अनपर शक्ति आई तो क्यों न उन्होन ने आजिजी इख्तियार (विनम्रता) की? मगर उनके दिल तो और सख्त हो गए और शैतान ने उनको इत्मिनान दिला दिया के जो कुछ तुम कर रहे हो खूब कर रहे हो","फिर जब उन्हें ने हमें हिदायत को, जो उन्हें मिल गई थी, भुला दिया तो हमने हर तरह की खुश-हालियों के दरवाजे उनके लिए खोल दिए, यहां तक ​​के जब वो उन बख्शीशों में जो उन्हें अता की गई थी खूब मगन हो गए तो अचानक हमने उन्हें पकड़ लिया और अब हाल ये था के वो हर खैर से मायुस थे","इस तरह उन लोगों की जड़ (जड़) काट कर रख दी गई जिन्हों ने ज़ुल्म किया था और तारीफ है अल्लाह रब्बुल आलमीन के लिए (के उसने उनकी जद काट दी)","(ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अगर अल्लाह तुम्हारी बिनई (आँख-देखना) और समात (सुनना) तुमसे छीन ले और तुम्हारे दिलों पर मोहर करदे तो अल्लाह के सिवा और कौन सा खुदा है जो ये कुव्वतें तुम्हें वापस दिला सकता है? देखो, किस तरह हम बार-बार अपनी नैशनियां उनके सामने पेश करते हैं और फिर ये किस तरह उन्हें नजर चुरा लेते हैं","कहो, कभी तुमने सोचा के अगर अल्लाह की तरफ से अचानक या एलानिया तुमपर अज़ाब आ जाए तो क्या जालिम लोगों के सिवा कोई और हलाक होगा","हम जो रसूल भेजते हैं इसी के लिए तो भेजते हैं के वो नए किरदार लोगों के लिए खुश-खबरी देने वाले और बड़े किरदारों के लिए दाराने वाले माननीय। फिर जो लोग उनकी बात मान लें और अपनी तरज़ ए अमल की इस्लाह कार्लें उनके लिए कोई खौफ और रंज का मौका नहीं है","और जो हमारी आयतों को झुटलाएं वो अपनी नफ़रमानियों की याद में सज़ा भुगत कर रहेंगे","(ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो, \"मैं तुमसे ये नहीं कहता के मेरे पास अल्लाह के ख़ज़ाने हैं, ना मैं गैब का इल्म रखता हूँ, और ना ये कहता हूँ के मैं फ़रिश्ता हूँ। मैं तो सिर्फ हमें वही की जोड़ी कर्ता हूँ जो मुझपर नाज़िल की जाती है\"। फिर इनसे पूछो क्या अंधा और आँखों वाला दोनों बराबर हो सकते हैं? क्या तुम गौर नहीं करते","(ऐ मुहम्मद)! तुम इस (इल्म ए वही) के ज़रिये से उन लोगों को हिदायत करो जो इस बात का ख़ौफ़ रखते हैं कि अपने रब के सामने कभी इस हाल में पेश किये जायेंगे के उसके सिवा वहां कोई (ऐसा ज़ि इक्तेकर) ना होगा जो उनका हमी ओ मददगार हो, या उनकी सिफ़रिश करे, शायद के (है) हिदायत से मुतनब्बेह होकर) वो खुदा-तरसी की रवीश इख्तियार कार्लें","और जो लोग अपने रब को रात दिन पुकारते रहते हैं और उसकी खुशनुदी की तालाब में लगे हुए हैं उन्हें अपने से दूर ना फेंको, उनके हिसाब में से किसी चीज का बार तुमपर नहीं है और तुम्हारे हिसाब में किसी चीज़ का बार ऊपर नहीं। इसपर भी अगर तुम उन्हें दूर फेंकोगे तो ज़ालिमों में शामिल होगे","दर-असल हमें इस तरह लोगों में से बाज़ को बाज़ के ज़रिये से आज़माइश में डाला गया है ता-के वो इन्हें देख कर कहें \"क्या ये हैं वो लोग जिनपर हमारे दरमियान अल्लाह का फ़ज़ल ओ करम हुआ है?\" हान ! क्या खुदा अपने शुक्र गुजर बंदों को इनसे ज्यादा नहीं जानता है","जब तुम्हारे पास वो लोग आएं जो हमारी आयत पर ईमान लाते हैं तो उनसे कहो \"तुम्हारे सलामती है तुम्हारे रब ने रहम ओ करम का शेवा अपने ऊपर लाज़िम करलिया है। ये उसका रहम ओ करम ही है के अगर तुम में से कोई नादानी के साथ किसी बुराई का इर्तिकाब कर बैठा हो फिर उसके बाद तौबा करे और इस्लाह करले तो वो उसे माफ करता है और नरमी से काम लेता है”","और इस तरह हम अपनी निशानियां खोल कर पेश करते हैं ता-के मुजरिमों की राह बिल्कुल नुमायन हो जाये","(ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के तुम लोग अल्लाह के सिवा जिन दूसरों को पुकारते हो उनकी बंदगी करने से मुझे मना किया गया है। कहो, मैं तुम्हारी ख्वाहिश की जोड़ी नहीं बनाऊंगा, अगर मैंने ऐसा किया तो गुमराह हो गया, राह ए रास्ते पाने वालों में से ना रहा","कहो, मैं अपने रब की तरफ से एक दलील ए रोशन पर कायम हूं और तुमने उसे झुठला दिया है, अब मेरे इख्तियार में वो चीज है नहीं जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे हो। फ़ैसले का सारा इख़्तियार अल्लाह को है, वही अमर ए हक़ बयान करता है और वही बेहतरीन फ़ैसला करने वाला है","कहो, अगर कहीं वो चीज़ मेरे इख़्तियार में होती जिसकी तुम जल्दी मचा रहे हो तो मेरे और तुम्हारे दरमियान कभी का फैसला हो चूका होता, मगर अल्लाह ज़्यादा बेहतर जानता है के जालिमों के साथ क्या मामला जाना चाहिए","उसके पास गैब की कुंजी हैं जिनके पास उसके सिवा कोई नहीं जानता, बाहर ओ बर्र (जमीन और समुद्र में) में जो कुछ है सबसे वो वाकिफ है, दरख्त से गिरने वाला कोई पत्ता ऐसा नहीं जिसका उसे इल्म ना हो, ज़मीन के तारिक (अंधेरा) माफ़ में कोई दाना (अनाज) ऐसा नहीं जिसे वो बाख़बर ना हो, ख़ुस्क ओ तर (हरा या सूखा) सब कुछ एक खुली किताब में लिखा हुआ है","वही है जो रात को तुम्हारी रूहें (आत्माएं) क़ब्ज़ करता है और दिन को जो कुछ तुम करते हो उसे जानता है, फिर दूसरे रोज़ वो तुम्हें इसी करोबार के आलम में वापस भेज देता है ता-के जिंदगी की मुकर्रर मुद्दत पूरी हो। आख़िर ए कार उसकी तरफ तुम्हारी वापसी है, फिर वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या करते रहोगे","अपने बंदों पर वो पूरी क़ुदरत रखता है और तुम्हारे निगरानी करने वाले मुकर्रर करके भेजता है, यहाँ तक के जब तुम में से किसी की मौत का वक़्त आ जाता है तो उसके भेजे हुए फरिश्ते इसकी जान निकल लेते हैं और अपना फर्ज ए अंजाम देने में जरा कोटाही (उपेक्षा) नहीं करते","फिर सबके सब अल्लाह, अपने हकीकी आका की तरफ वापस ले लिए जाते हैं। ख़बरदार हो जाओ, फ़ैसले के सारे इख़तियारत उसी को हासिल हैं और वो हिसाब लेने में बहुत तेज़ है","(ऐ मुहम्मद)! इनसे पूछो, सेहरा और समंदर की तारीखों में कौन तुम्हें खतरे से बचाता है? कौन है जिसकी तुम (मुसीबत के वक्त) गिड़गिड़ा, गिड़गिड़ा कर और चुपके-चुपके दुआएं मांगते हो? किस्से कहते हो के अगर इस बला से तू नहीं हमको बचा लिया तो हम जरूर शुक्रगुजार होंगे","कहो, अल्लाह तुम्हें उसमें और हर तकलीफ से निजात देता है फिर तुम दूसरों को उसका शरीक ठहरते हो","कहो, वह इसपर कादिर है के तुमपर कोई अजाब ऊपर से नाज़िल करदे, या तुम्हारे क़दमों के नीचे से बरपा करदे, या तुम्हें गिरोहों में तकसीम करके एक गिरोह को दूसरे गिरोह की ताकत का मजा चखवा दे। देखो, हम किस तरह बार-बार मुखतलिफ़ तरीक़ों से अपनी निशानियाँ इनके सामने पेश कर रहे हैं शायद के ये हकीकत को समझ लें","तुम्हारी क़ौम उसका इनकार कर रही है हलाँके वो हकीकत है। इनसे कहदो के मैं तुमपर हवालादार नहीं बना गया हूं","हर खबर के जहूर में आने का एक वक्त मुकर्रर है, करीब तुमको खुद अंजाम मालूम हो जाएगा","और (ऐ मुहम्मद)! जब तुम देखो के लोग हमारी आयत पर नुक्ता चिनियां कर रहे हैं तो उनके पास से हट जाओ यहां तक ​​के वो इस गुफ्तगू को छोड़ कर दूसरी बातों में लग जाएं और अगर कभी शैतान तुम्हें भुलावे में डाल दे तो जिसका वक्त तुम्हें इस गलती का एहसास हो जाए उसके बाद फिर ऐसे जालिम लोगों के पास न बैठो","उनके हिसाब में से किसी चीज़ की ज़िम्मेदारी नहीं, लेकिन हिदायत करना उनका फ़र्ज़ है शायद के वो गलत रावी से बच जाएँ","छोड़ो उन लोगों को जिन्हों ने अपने दीन को खेल और तमाशा बना रक्खा है और जिन्होनें दुनिया की जिंदगी फरेब में मुब्तिला किये हुए हैं। हां मगर ये कुरान सुना कर हिदायत और तम्बीह (चेतावनी) करते रहो कि कहीं कोई शक्स अपने किए कार्टूनों के जवाब में गिरफ़्तार ना हो जाए, और गिरफ़्तार भी इस हाल में हो के अल्लाह से बचाने वाला कोई हमी ओ मददगार और कोई सिफ़री इसके लिए ना हो, और अगर वो हर मुमकिन चीज़ फ़िदिये में देकर छूटना चाहे तो वो भी उसे क़बूल ना की जाए, क्योंकि ऐसे लोग तो खुद अपनी कमाई के नाते में पकड़े जाएंगे, इनको तो अपने इनकार ए हक के मुआवज़े में खौलता (उबलता हुआ) हुआ पानी पीने को और दर्दनक अज़ाब भुगतने को मीलेगा","(ऐ मुहम्मद)! इनसे पूछो, क्या हम अल्लाह को छोड़ कर उनको पुकारें जो ना हमें नफा दे सकते हैं ना नुक्सान? और जबके अल्लाह हमें सीधा रास्ता दिखा चुका है तो क्या अब हम उल्टे पांव फिर जाएंगे? क्या हम अपना हाल उस शक्स का सा कहते हैं जिसमें शैतानों ने सेहरा में भटका दिया हो और वो हेयरन ओ सरगर्दन फिर रहा हो, डरन हाल ये के उसके साथी उसे पुकार रहे हों के इधर आ ये सीधी राह मौजूद है? कहो, हकीकत में सही रहनुमाई है तो सिर्फ अल्लाह ही की रहनुमाई है और उसकी तरफ से हमें ये हुकुम मिला है के मालिक ए कायनात के आगे सर ए इताअत खत्म करदो","नमाज़ क़याम करो और उसकी नफ़रमानी से बचो, उसकी तरफ़ तुम साथ जाओगे","वही है जिसने आसमान ओ ज़मीन को बारहक़ अदा किया है और जिस दिन वो कहेगा के हश्र (पुनरुत्थान) हो जाए उसका दिन वो हो जाएगा। उसका इरशाद ऐन-ए-हक़्क़ है और जिस रोज़ सूरज फूँका जाएगा उस रोज़ बादशाही उसी की होगी, वो गैब और शहादत (दृश्यमान) हर चीज़ का आलिम है और दाना और ख़बर है","इब्राहीम का वाकिया याद करो जबके उसने अपने बाप का आज़र से कहा था, “क्या तू बुथों” (मूर्तियों) को खुदा बनाता है? मैं तो तुझे और तेरी क़ौम को खुली गुमराही में पाता हूं”","इब्राहीम को हम इसी तरह ज़मीन और आसमान का निज़ाम ए सल्तनत दिखाते थे और इस लिए दिखते थे के वो यकीन करने वालों में से हो जाए","चुनांचे जब रात उसपर तारी हुई तो उसने एक तारा देखा, कहा ये मेरा रब है, मगर जब वो डूब गया तो बोला डूब जाने वालों का तो मैं गिरविदा नहीं हूं","फिर जब चांद चमकता नजर आया तो कहा ये मेरा रब है, मगर जब वो भी डूब गया गया तो कहा अगर मेरे रब ने मेरी रहनुमाई ना की होती तो मैं भी गुमराह लोगों में शामिल हो जाता","फिर जब सूरज को रोशन देखा तो कहा ये है मेरा रब, ये सबसे बड़ा है, मगर जब वो भी डूबा तो इब्राहीम पुकार उठा'' ऐ बिरादरान ए क़ौम! मैं उन सब से बेज़ार हूं जिन्हे तुम खुदा का शरीक ठहरते हो","मैंने तो यक्सू होकर अपना रुख उस हस्ती की तरफ कार्लिया जिसने जमीन और आसमान को अदा किया है और मैं हरगिज शिर्क करने वालों में से नहीं हूं\"","उसकी क़ौम इस्से झगड़ाने लगी तो उसने क़ौम से कहा “क्या तुम लोग अल्लाह के मामले में मुझसे झगड़ा करते हो? हलाँके उसने मुझे राह ए रस्त दिखा दी है और मैं तुम्हारे रुके हुए शेयरों से नहीं डरता। हां अगर मेरा रब कुछ चाहे तो वो जरूर हो सकता है। मेरे रब का इल्म हर चीज़ पर छाया हुआ है, फिर क्या तुम होश में ना आओगे","और आख़िर मैं तुम्हारे रुके हुए शरीकों से कैसे डरूँ जबके तुम अल्लाह के साथ उन चीज़ों को ख़ुदाई में शरीक बनाते हुए नहीं डरते जिनके लिए उसके पास कोई सनद नाज़िल नहीं है? हम दोनों फरीक़ों में से कौन ज़्यादा बे-खौफ़ी ओ इत्मिनान का मुस्तहिक है? बताओ अगर तुम कुछ इल्म रखते हो","हकीकत में तो अमन उनके लिए है और राह ए रास्ते पर वही हैं जो ईमान लाए और जिन्हों ने अपने ईमान को ज़ुल्म के साथ अलुदा (कलंकित) नहीं क्या”","ये थी हमारी वो हुज्जत जो हमने इब्राहिम को उसकी क़ौम के मुक़ाबले में आता है। हम जिसे चाहते हैं बुलंद मरतबे अता करते हैं। हक ये है के तुम्हारा रब निहायत दाना (बुद्धिमान) और अलीम है","फिर हमने इब्राहीम को इशाक और याकूब जैसा औलाद दी और हर एक को राह ए रास्त दिखाई (वही राह ए रास्त जो) इसके पहले नूह को दिखाई थी और उसकी नाक से हमने दाऊद, सुलेमान, अयूब, यूसुफ, मूसा और हारून को (हिदायत बख्शी) इस तरह हम नीकुकारों (धर्मी) को उनकी नेकी का बदला देते हैं","(उसी की औलाद से) जकारिया, याह्या, ईसा और इलियास को (राह-याब किया) हर एक उनमें से साले था","(उसी के खानदान से) इस्माइल, अल-यासा (एलीशा), और यूनुस और लूत को (रास्ता दिखाया)। इनमे से हर एक को हमने तमाम दुनिया वालों पर फजीलत अता की","नीज़ इनके आबा ओ अजदाद और इनकी औलाद और उनके भाई बंदों में से बहुतों को हमने नवाजा, उन्होंने अपनी खिदमत के लिए चुन लिया और सीधे रास्ते की तरफ उनकी रहनुमाई की","ये अल्लाह की हिदायत है जिसके साथ वो अपने बंदों में से जिसकी चाहत है रहनुमाई करता है लेकिन अगर कहीं लोगों ने शिर्क किया होता तो इनका सब किया किया घरात हो जाता","वो लोग थे जिनको हमने किताब और हुकुम और नबुवत अता की थी। अब अगर ये लोग इसको मानने से इनकार करते हैं तो (परवा नहीं) हमने कुछ और लोगों को ये नियामत सोमप दी है जो इसे मुन्किर नहीं हैं","(ऐ मुहम्मद)! वही लोग अल्लाह की तरफ से हिदायत-याफ्ता थे, उन्हीं के रास्ते पर तुम चलो, और कहदो के मैं (इस तबलीग ओ हिदायत के) काम पर तुमसे किसी का तालिब नहीं हूं। ये तो एक आम हिदायत है तमाम दुनिया वालों के लिए","इन लोगों ने अल्लाह का बहुत ग़लत अंदाज़ लगाया जब कहा के अल्लाह ने किसी बशर पर कुछ नाज़िल नहीं किया है। इनसे पूछो, फिर वो किताब जिसे मूसा लाया था, जो तमाम इंसानों के लिए रोशनी और हिदायत थी, जिसे तुम पारा करके रखते हो, कुछ दिखाते हो और बहुत कुछ छुपा लेते हो, और जिसकी ज़रिये से तुमको वो इल्म दिया गया जो ना तुम्हें हासिल था और ना तुम्हारे बाप दादा को, आख़िर उसका नाज़िल करने वाला कौन था? बस इतना कहदो के अल्लाह, फिर उन्हें अपनी दलीलों से खेलने के लिए छोड़ दो","(उसी किताब की तरह) ये एक किताब है जिसने हमने नाज़िल किया है बड़ी खैर ओ बरकत वाली है, उस चीज़ की तस्दीक करती है जो इसे पहले आई थी और इसके लिए नाज़िल की गई है के इसके जरूर से तुम बस्तियों के इस मरकज (यानी मक्का) और इसके अतराफ में रहने वालों को मुतनब्बे (चेतावनी) करो। जो लोग आख़िरत को मानते हैं वो इस किताब पर ईमान लाते हैं और उनका हाल ये है कि अपनी नमाज़ की पाबन्दी करते हैं","और हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जो अल्लाह पर झूठा बोहतन घड़ी, या कहे के मुझपर वही आई है डरान हाल ये के उसपर कोई वही नाज़िल ना की गई हो, या जो अल्लाह की नाज़िल करदा चीज़ के मुक़ाबले में काहे के मैं भी ऐसी चीज़ नाज़िल करके दिखा दूंगा? काश तुम जालिमों को इस हालात में देख सको जबके वो साकारात-ए-मौत में डुबकियाँ खा रहे हैं और फरिश्ते हाथ बढ़ा कर कह रहे हैं के “लाओ, निकालो अपनी जान, आज तुम्हें उन बातों की याद में ज़िल्लत का अज़ाब दिया जाएगा जो तुम अल्लाह।” पर तोहमत रख कर ना-हक़ बका (बोला) करते थे और उसकी आयत के मुक़ाबले में सरकशी दिखाते थे”","(और अल्लाह फरमाएगा) “लो अब तुम वैसे ही तन-ए-तन्हा (अकेले) हमारे सामने हाजिर हो गए जैसा हमने तुम्हें पहली मर्तबा अकेला पेदा किया था, जो कुछ हमने तुम्हें दुनिया में दिया था वो सब तुम पीछे छोड़ आये हो, और अब हम तुम्हारे साथ हैं तुम्हारे उन सिफ़रिशियों को भी नहीं देखते जिनका मुतालिक तुम समझते थे कि तुम्हारे काम बनाने में उनका भी कुछ हिस्सा है, तुम्हारे आपस के सब राब्ते (संपर्क) टूट गए और वो सब तुमसे गुम हो गए जिनका तुम ज़म (कल्पना) रखते थे”","दाने (अनाज) और गुठली को फड़ने (अंकुरित) वाला अल्लाह है, वही जिंदा को मुर्दा से निकलता है और वही मुर्दे को जिंदा से खारिज करता है, ये सारे काम करने वाला तो अल्लाह है, फिर तुम किधर बहके चले जा रहे हो","परदा ए शब (रात) को चाक करके वही सुबह निकलता है, उसने रात को सुकून का वक्त बनाया है, उसने चांद और सूरज के तुलू-ओ-गुरूब का हिसाब मुकर्रर किया है। ये सब उसकी ज़बरदस्त क़ुदरत और इल्म रखने वाले के ठहरे हुए अंदाज़े हैं","और वही है जिसने तुम्हारे लिए तारों को सेहरा और समंदर की तरीकियों में रास्ता मालूम करने का ज़रिया बनाया। देखो हमने निशानियां खोल कर बयान कर दी हैं उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं","और वही है जिसने एक मुतनफ़्फ़िस से तुमको भुगतान किया फिर हर एक के लिए एक जाए क़रार (समय-सीमा) है और एक उसके सोमपे जाने की जगह (विश्राम स्थल)। ये निशानियाँ हमने वाज़ेह करदी हैं उन लोगों के लिए जो समझ बूझ रखते हैं","और वही है जिसने आसमान से पानी बरसाया, फिर उसके ज़री से हर क़िस्म की नबात उगी, फिर उसने हरे हरे खेत और दरख्त पैदा किये, फिर उनसे ताई बा ताई चढ़े हुए दाने (अनाज) निकले और खजूर के शगूफों से फल (फल) के गुच्छे के गुच्छे पैदा किए जो बोझ के मारे झुके पड़ते हैं, और अंगूर, जैतून और अनार के बाग लगाए जिनका फल एक दूसरे से मिलते-जुलते भी हैं और फिर हर एक की ख़ुसूसियत जुदा जुदा भी है। ये दरख्त जब फालते हैं तो इनमें फल आने और फिर उन्हें पकड़ने की कैफियत जरा गौर की नजर से देखो, चीजों में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं","इसपर भी लोगों ने जिन्नो को अल्लाह का शरीक ठहर दिया, हलांके वो उनका खालिक है,और बे-जाने बूझे उसके लिए बेटे और बेटियां तसनीफ करदी, हलांके वो पाक और बाला-तार है उन बातों से जो ये लोग कहते हैं","वो तो आसमानो और जमीन का मुजिद (प्रवर्तक) है। उसका कोई बेटा कैसे हो सकता है जबके कोई उसकी शरीक और जिंदगी ही नहीं है। उसने हर चीज़ को पेदा किया है और वो हर चीज़ का इल्म रखता है","ये है अल्लाह तुम्हारा रब, कोई खुदा उसके सिवा नहीं है, हर चीज़ का ख़ालिक, लिहाज़ा तुम उसकी बंदगी करो और वो हर चीज़ का कफ़ील है","निगाहें उसको नहीं पा जैसे और वो निगाहों को पा लेता है, वो निहायत बारीकियां और बा-खबर है","देखो, तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से बसीरत की रोशनियां आ गई हैं, अब जो शादी से काम लेगा अपना ही भला करेगा और जो अंधा बनेगा खुद नुक्सान उठाएगा, मैं तुमपर कोई पासबान (कीपर) नहीं हूं","इस तरह हम अपनी हैं आयतों को बार-बार मुख्तलिफ़ तरीक़ों से बयान करते हैं और इस लिए करते हैं कि ये लोग कहें तुम किसी से पढ़ आए हो, और जो लोग इल्म रखते हैं उन पर हम हकीकत को रोशन कर दें","(ऐ मुहम्मद)! हमें वही की जोड़ी बनाते जाओ जो तुम्हारे रब की तरफ से नाज़िल हुई है, क्योंकि हमारे पास एक रुब के सिवा कोई और खुदा नहीं है। और इन मुशरिकेन के पीछे ना पड़ो","अगर अल्लाह की मशियत होती तो (वो खुद ऐसा बंदोबस्त कर सकता था के) ये लोग शिर्क ना करते, तुमको हमने अंदर पासबान (अभिभावक) मुकर्रर नहीं किया है और ना तुम अंदर हवालादार हो","और (ऐ ईमान) लाने वालों!) ये लोग अल्लाह के सिवा जिनको पुकारते हैं उन्हें गालियाँ न दो, कहीं ऐसा न हो के ये शिर्क से आगे बढ़कर जहालत की बिना पर अल्लाह को गालियाँ देने लगें। हमने तो इसी तरह हर गिरह के लिए उसके अमल को खुशनुमा बना दिया है, फिर उन्हें अपने रब ही की तरफ पलट कर आना है, हमें वक्त वो उन्हें बता देगा के वो क्या कर रहे हैं","ये लोग कड़ी कसमें खा खा कर कहते हैं अगर कोई निशानी हमारे सामने आ जाए तो हम उसपर ईमान ले आएंगे। ऐ मुहम्मद! इनसे कहो, के \"निशानियां तो अल्लाह के पास हैं\" और तुम्हें कैसे समझा जाए कि अगर निशानियां आ भी जाएं तो ये ईमान लाने वाले नहीं","हम उसी तरह इनके दिलों और निगाहों को फेर रहे हैं जिस तरह ये पहली मरतबा उसपर ईमान नहीं लाए थे, हम इनकी सरकशी ही में भटकने के लिए छोड़ देते हैं","अगर हम फरिश्ते भी इनपर नाजिल करते और मुर्दे इनसे बातें करते और दुनिया भर की चीजों को हम उनकी आंखों के सामने जमा कर देते तब भी ये ईमान लाने वाले ना थे, इल्ला ये के मसीहत ए इलाही यहीं हो के वो ईमान लायें, मगर अक्सर लोग नादानी की बातें करते हैं","और हमने तो इसी तरह हमेशा शैतान इंसानो और शैतान जिन्नो को हर नबी का दुश्मन बनाया है जो एक दूसरे पर ख़ुशैंद बातें धोखे और फ़रेब के तौर पर इल्का करते रहे हैं. अगर तुम्हारे रब की मशहुत ये होती के वो ऐसा ना करें तो वो कभी ना करते। पास तुम उन्हें उनके हाल पर छोड़ दो के अपनी इफ्तारा परदाज़ियां करते रहो","(ये सब कुछ हम इन्हें इसके लिए करने दे रहे हैं के) जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल इस (खुशनुमा धोखे) की तरफ़ मायिल होन और वो इस रज़ी हो जाएं और उन बुराइयों का इकतिसाब करें जिनका इकतिसाब वो करना चाहते हैं","फिर जब हाल ये है तो क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और फैसला करने वाला तलाश करूं, हालांके उसने पूरी तफ़सील के साथ तुम्हारी तरफ किताब नाज़िल कर दी है? और जिन लोगों को हमने (तुमसे पहले) किताब दी थी वो जानती है कि ये किताब तुम्हारी रब ही है कि तरफ से हक़ के साथ नाज़िल हुई है, लिहाज़ा तुम शक्क करने वालों में शामिल ना हो","तुम्हारे रुब की बात सच्ची और इंसाफ के ऐतबार से कामिल है, कोई उसके फ़रामीन को तबदील करने वाला नहीं है और वो सब कुछ सुनता और जानता है","और (ऐ मुहम्मद)! अगर तुम उन लोगों की अक्सरियत के कहने पर चलो जो ज़मीन में बसे हैं तो वो तुम्हें अल्लाह के रास्ते से भटका देंगे, वो तो मेहज़ गुमान पर चलते और क़यास-आराइयां करते हैं","दर हकीकत तुम्हारा रब्ब ज़्यादा बेहतर जानता है के कौन उसके रास्ते से हटा हुआ है और कौन सीधी राह पर है","फिर अगर तुम लोग अल्लाह की आयत पर ईमान रखते हो तो जिस जानवर पर अल्लाह का नाम लिया गया हो उसका गोश्त खाओ","आखिर क्या वजह है के तुम वो चीज ना खाओ जिस्पार अल्लाह का नाम लिया गया हो, हालांके जिन चीजों का इस्तमाल हालात ए इज़्तरार (जब तक आप विवश न हों तब तक आपको मना किया जाता है) के सिवा दूसरी तमाम हालात में अल्लाह ने हराम करदिया है उनकी तफ़सील वो तुम्हें बता चुका है, बकसरत लोगों का हाल ये है के इल्म के बिना महज़ अपनी ख्वाहिशत की बिना पर गुमराह-कुन बातें करते हैं, हद से में गुज़रने वालों को तुम्हारा रब खूब जानता है","तुम खुले गुनाहों से भी बचो और छुपे गुनाहों से भी, जो लोग गुनाहों का इक्तिसाब करते हैं वो अपनी इस कमाई का बदला पा कर रहेंगे","और जिस जानवर को अल्लाह का नाम लेकर जुबां न दिया गया हो उसका गोश्त ना खाओ, ऐसा करना फिस्क है, शयातीन अपने साथियों के दिलों में शुकूक (संदेह) और एतराजात इल्का करते हैं ता-के वो तुमसे झगड़ा करें, लेकिन अगर तुमने उनकी इताअत कबूल की तो यकीनन तुम मुशरिक हो","क्या वो शक्स जो पहले मुर्दा था फिर हमने उसे जिंदगी बख्शी और उसको वो रोशनी मिलती है जिसके उजाले में वो लोगों के दरमियान जिंदगी की राह तय करता है, उस शक्स की तरह हो सकता है जो तारिकियों (अंधेरे) में पड़ा हुआ हो और कोई तरह उनसे ना निकलता हो? काफ़िरों के लिए तो इसी तरह उन्हें अमल ख़ुशनुमा बना दिए गए हैं","और इसी तरह हमने हर बस्ती में उसके बड़े-बड़े मुजरिमों को लगा दिया है के वहां अपने मकर ओ फरेब का जाल फैलाएं, दरसल वो अपने फरेब के जाल में आप फंसे हैं, मगर उन्हें इसका शूर नहीं है","जब उनके सामने कोई आयत आती है तो वो कहते हैं \"हम ना मानेंगे जब तक के वो चीज़ खुद हमको ना दी जाए जो अल्लाह के रसूलों को दी गई है\"। अल्लाह ज़्यादा बेहतर जानता है के अपनी पैगम्बरी का काम किस्से ले और किस तरह ले। करीब है वो वक्त जब ये मुजरिम अपनी मक्कारियों की याद में अल्लाह के हन जिलत और सख्त अजाब से दो-चार होंगे","पास (ये हकीकत है के) जिसे अल्लाह हिदायत बख्शने का इरादा करता है उसका सीना इस्लाम के लिए खोल देता है और जिसे गुमराही में डालने का इरादा करता है उसके सीने को तंग करता है और ऐसा दिखाता है के (इस्लाम का तसव्वुर करता ही) उसे यूं मालूम होना लगता है के गोया उसकी रूह आसमान की तरफ़ परवाज़ कर रही है। इस तरह अल्लाह (हक़ से फ़रार और नफ़रत की) नापाकी उन लोगों पर मुसल्लत करदेता है जो ईमान नहीं लाते","हलानके ये रास्ता तुम्हारे रब का सीधा रास्ता है और इसके निशाना उन लोगों के लिए वाज़ेह कर दिए गए हैं जो हिदायत क़बूल करते हैं","उनके लिए उनके रब के पास सलामती का घर है और वो उनका सरपरस्त है हमें सही तर्ज़-ए-अमल की वजह से जो उनहों ने इख्तियार किया","जिस रोज़ अल्लाह इन सब लोगों को घेर कर जमा करेगा, उस रोज़ वो जिन्नो से ख़िताब करके फ़ैमायेगा के “ऐ गिरो ए जिन्न! तुमने तो नव-ए-इंसानी पर खूब हाथ साफ किया” इंसानों में से जो उनके रफीक थे वो अर्ज़ करेंगे “परवरदिगार! हम में से हर एक ने दूसरे को खूब इस्तमाल किया है, और अब हम हमें वक्त पर आ रहे हैं जो तू नहीं हमारे लिए मुकर्रर करदिया था”। अल्लाह फरमाएगा \"अच्छा अब आग तुम्हारा सोचना है, इसमें तुम हमेशा रहोगे\"।उससे बचेंगे सिर्फ वही जिन्हें अल्लाह बचाना चाहेगा, बेशक तुम्हारा रब दाना और अलीम है","देखो, इस तरह हम (आखिरत में) जालिमों को एक दूसरे का साथी बनायेंगे हमें कमाई की वजह से जो वो (दुनिया में एक दूसरे के साथ मिलकर) करते थे","(इस मौके पर अल्लाह उनसे पूछेगा के) \"ऐ गिरो ​​ए जिन ओ इंस, क्या तुम्हारे पास खुद तुम्ही में से वो पैगंबर नहीं आए थे जो तुमको मेरी आयत सुनाते और इस दिन के अंजाम से डरते हाँ?” वो कहेंगे \"हां, हम अपने खिलाफ़ खुद गवाही देते हैं\"। आज दुनिया की जिंदगी ने लोगों को धोखे में डाल रखा है, मगर हमें वक्त वो खुद अपने खिलाफ गवाही देंगे के वो काफिर थे","(ये शहादत उनसे पूरी हो जाएगी के ये साबित हो जाए के) तुम्हारा रब बस्तियों को जुल्म के साथ तबाह करने वाला नहीं था जबके उनके बाशिंदे हकीकत से ना-वाक़िफ़ होन","हर शक्स का दरजा उसके अमल के लिहाज़ से है और तुम्हारे रब लोगों के अमल से बे खबर नहीं है","तुम्हारा रब बे-नियाज़ है और मेहरबानी उसका शेवा है। अगर वो चाहे तो तुम लोगों को ले जाए और तुम्हारी जगह दूसरे जिन लोगों को चाहे ले आए जिस तरह उसने तुम्हें कुछ और लोगों की नाक से उठाया है","तुमसे जिस चीज का वादा किया जा रहा है वो यकीनन आने वाली है और तुम खुदा को आजिज (निराश) करदेने की ताक़त नहीं रखते","(ऐ मुहम्मद)! कहदो के लोगन! तुम अपनी जगह अमल करते रहो और मैं भी अपनी जगह अमल कर रहा हूँ। अंकारीब तुम्हें मालूम हो जाएगा के अंजाम ए कार किसके हक में बेहतर होता है। बहार-हाल ये हकीकत है के जालिम कभी फलाह नहीं पा सकते","लोगों ने अल्लाह के लिए खुद की अदा की, जो हुई खेतों और मवेशियों में से एक हिसा मुकर्रर किया है और कहते हैं ये अल्लाह के लिए है, बज़म ए खुद, और ये हमारे ठहरे हुए शरीकों के लिए। फिर जो हिसा इनके ठहरे हुए शरीकों के लिए है वो तो अल्लाह को नहीं पहचानता मगर जो अल्लाह के लिए है वो इनके शरीकों को पहुंच जाता है। कैसे बुरे फैसले करते हैं ये लोग","और इसी तरह बहुत से मुशरिकों के लिए उनके शरीकों ने अपनी औलाद के कत्ल को खुशनुमा बना दिया है ता-के उनको हलकत में मुब्तिला करें और उनके दीन को मुश्तबा (भ्रम) बना दें। अगर अल्लाह चाहता तो ये ऐसा ना करते, लिहाजा इन्हें छोड़ दो के अपनी इफ्तारा पर्दाजियों में लगे रहेंगे","कहते हैं ये जानवर और ये खेत महफूज हैं, इनमें सिर्फ वही लोग खा सकते हैं जिन्हें हम खिलाना चाहते हैं, हलांके ये पाबंदी इनकी खुद साकता है (उनके दावे से)। फिर कुछ जानवर हैं जिनपर सवारी और बार बारदारी (पीठ पर बोझ) हराम कर दी गई है और कुछ जानवर हैं जिनपर अल्लाह का नाम नहीं लेते। और ये सब कुछ इन्हों ने अल्लाह पर इफ्तारा (झूठी मनगढ़ंत बातें) किया है, इफ्तारा परदाज़ियों का बदला देगा में अनकरीब अल्लाह इन्हें","और कहते हैं कि जानवरों के पेट में जो कुछ है ये हमारे मर्दों के लिए मखसूस है और हमारी औरतें पर हराम, लेकिन अगर वो मुर्दा हो (जन्म से मृत) तो दोनों इसके खाने में शरीक हो सकते हैं। ये बातें जो इन्हों ने गड़बड़ ली हैं इनका बदला अल्लाह इन्हें देकर रहेगा। यकीनन वो हकीम है और सब बातों की उपयोगी खबर है","यकीनन खसरे (नुक्सान) में पढ़ गए वो लोग जिन्होन ने अपनी औलाद को जिहालत (अज्ञानता) ओ नादानी की बिना पर क़त्ल किया और अल्लाह के दिए हुए रिज़क को अल्लाह पर इफ्तारा परदाज़ी करके हराम ठहरा लिया, यकीनन वो भटक ​​गए और हरगिज वो राह ए रास्ते पाने वालों में से ना थे","वो अल्लाह ही है जिसने तरह तरह के बाघ और ताकिस्तान और नखलास्तान (जालीदार और बिना जाली वाला) पैदा किए, खेतियां उगाई जिनसे क़िस्म क़िस्म के मकुलात हासिल होते हैं (ताड़ के पेड़, और फसलें, सभी स्वाद में भिन्न होते हैं), ज़ैतून और अनार के दरख़्त पैदा किये हैं जिनके फल सूरत में मुशाबेह (समान) और मज़ा (स्वाद) में मुख़्तलिफ़ होते हैं। खाओ उनकी पैदावर जबके ये फैलाएं, और अल्लाह का हक अदा करो जब इसकी फसल काटो, और हद से ना गुजरो के अल्लाह हद से गुजारने वालों को पसंद नहीं करता","फिर वही है जिसने मवेशियों में से वो जानवर भी पैदा किए जिनसे सवारी ओ बार-बारदारी (बोझ) का काम लिया जाता है और वो भी जो खाने और बेचने के काम आते हैं। खाओ उन चीज़ों में से जो अल्लाह ने तुम्हें बख्शी है और शैतान की जोड़ी ना करो के वो तुम्हारा खुला दुश्मन है","ये आठ (आठ) नर्र ओ माडा (जोड़े) हैं, दो भेड़ (भेड़) की क़िस्म से और दो बकरी की क़िस्म से। (ऐ मुहम्मद)! इनसे पूछो के अल्लाह ने उनके नार हराम किये हैं या माडा, या वो बच्चे जो भेड़ों (भेड़) और बकरियों के पेट में हैं? ठीक ठीक इल्म के साथ मुझे बताओ अगर तुम सच्चे हो","और इसी तरह दो औंस की क़िस्म से हैं और दो गाय (गाय) की क़िस्म से। पूछो, इनके नर अल्लाह ने हराम किये हैं या माडा, या वो बच्चे जो ऊंटनी (वह-ऊंटनी) और गाई के पेट में हैं? क्या तुमने हमें वक्त हाजिर किया था जब अल्लाह ने इनको हराम होने का हुक्म तुम्हें दिया था? फिर उस शक्स से बढ़ कर जालिम और कौन होगा जो अल्लाह की तरफ मंसूब करके झूठी बात कहे ता-के इल्म के बगैर लोगों की गलत रहनुमाई करे। यकीनन अल्लाह ऐसे ज़ालिमों को राह ए रस्त नहीं दिखता","(ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के जो वही मेरे पास आई है उसमें तो मैं कोई चीज ऐसी नहीं पाता जो किसी खाने वाले पर हराम हो, इल्ला ये के वो मुर्दार (मृत) हो, या बहया (बाहर डाला गया) हुआ खून, या सुव्वर का गोश्त हो के वो नापाक है, या फिस्क (अस्वच्छ) हो के अल्लाह के सिवा किसी और के नाम पर जुबां किया गया हो, फिर जो शक्स मजबूरी की हालत में (कोई चीज इनमें से खा ले) बिना इसके के वो नफरमानी का इरादा रखता हूं और बिना इसके के वो हद ए जरुरत से तजावुज करे, तो यकीनन तुम्हारा रब दरगुजर से काम लेने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","और जिन लोगों ने यहुदियात इख्तियार की अनपर हमने सब नाख़ून (नाखून) वाले जानवर हराम कर दिए थे, और गाय और बकरी की चारबी (मोटी) भी, बज़ुज़ उसके जो उनकी पीठ (पीठ) या उनकी एंथोन (अंतरिक्ष) से ​​लगी हुई हो या हड्डी से लगी रह जाये. ये हमने उनकी सरकशी की सजा उन्हें दी थी और ये जो कुछ हम कह रहे हैं बिल्कुल सच कह रहे हैं","अब अगर वो तुम्हें झुटलाएएं तो उनसे कहदो के तुम्हारे रब का दामन ए रहमत वही है और मुजरिमों से उसके अज़ाब को फेरा नहीं जा सकता","ये मुशरिक लोग (तुम्हारी इन बातों के जवाब में) जरूर कहेंगे के \"अगर अल्लाह चाहता तो ना हम शिर्क करते और ना हमारे बाप दादा, और ना हम किसी चीज को हराम ठहराते\"। ऐसी ही बातें बना बना कर इनसे पहले के लोगों ने भी हक को झुटलाया था, यहां तक ​​के आखिर ए कार हमारे अजब का मजा उन्होन ने चक लिया। इनसे कहो \"क्या तुम्हारे पास कोई इल्म है जिसे हमारे सामने पेश कर सकते हो? तुम तो महज गुमान पर चल रहे हो और नेरी क़यास अराइयां करते हो\"","फिर कहो (तुम्हारी इस हुज्जत के मुकाबले में) \"हकीकत रस हुज्जत तो अल्लाह के पास है, अगर अल्लाह चाहता तो तुम सबको हिदायत दे देता”","इनसे कहो के “लाओ अपने वो गवाह जो इस बात की शहादत दीन के अल्लाह ही ने इन चीज़ों को हराम किया है”। फिर अगर वो शहादत दे दें तो तुम उनके साथ शहादत न देना, और हरगिज उन लोगों की ख्वाहिश के पीछे ना चलना जिन्हों ने हमारी आयत को झुटलाया है, और जो आख़िरत के मुनकिर हैं, और जो दूसरों को अपने रुब का हमसर बनाते हैं","(ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के आओ मैं तुम्हें सुनाऊं तुम्हारे रब ने तुमपर क्या पाबंदियां आयद की हैं: ये उसके साथ किसी को शरीक ना करो, और वालिदें (मां बाप) के साथ नई सुलूक करो, और अपनी औलाद को मुफलिसी के डर से कत्ल ना करो, हम तुम्हें भी रिज्क देते हैं और उनको भी देंगे, और बेशर्मी की बातों के करीब भी ना जाओ, ख्वाह वो खुली हो या छुपी। और किसी जान को जैसे अल्लाह ने मोहतरम ठहरया है हलाक न करो मगर हक के साथ। ये बातें हैं जिनकी हिदायत हमें तुम्हें पसंद है, शायद के तुम समझ बूझ से काम लो","और ये के यतीम के माल के करीब ना जाओ मगर ऐसी तारीख से जो बेहतर हो, यहां तक ​​के वो अपने सीने-रुश्द (परिपक्वता) को पाहुंच जाए, और नाप टोल में पूरा इन्साफ करो. हम हर शक्स पर ज़िम्मेदारी का उतना ही बोझ रखते हैं जितना उसके इम्कान में (यह सहन कर सकता है) है, और जब बात कहो इन्साफ की कहो मामला अपने रिश्ते में ही का क्यों ना हो, और अल्लाह के अहद (वाचा) को पूरा करो। बातों की हिदायत में अल्लाह ने तुम्हें कहा है शायद तुम हिदायत कबूल करो","नीज़ उसकी हिदायत ये है के यही मेरा सीधा रास्ता है, लिहाज़ा तुम इसी पर चलो और दूसरे रास्ते पर ना चलो के वो उसके रास्ते से हटा कर तुम्हें परागा(बिखरा) करदेंगे. ये है वो हिदायत जो तुम्हारे रब ने तुम्हें कहा है, शायद के तुम कजरवी से बचाओ","फिर हमने मूसा को किताब अता की थी जो भलाई की रवीश इख्तियार करने वाले इंसान पर नियामत की तकमील और हर जरूरी चीज की तफसील और सरसर हिदायत और रहमत थी (और इस्लिये बानी इसराइल को दी गई थी के) शायद लोग अपने रब की मुलाकात पर ईमान लायें","और इसी तरह ये किताब हमने नाज़िल की है, एक बरकत वाली किताब, पास तुम इसकी जोड़ी करो और तक़वा की रवीश इख्तियार करो, बाद नहीं के तुमपर रहम किया जाए","अब तुम ये नहीं कह सकते कि किताब तो हमसे पहले के दो गिरोहों को दी गई थी, और हमको कुछ खबर ना थी के वो क्या पढ़ते पढ़ते थे","और अब तुम ये बहाना भी नहीं कर सकते अगर हमपर किताब नाज़िल की गई होती तो हम उनसे ज़्यादा रस्ते-कच्चे साबित होते। तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से एक दलील ए रोशन और हिदायत और रहमत आ गई है, अब इस से बढ़कर जालिम कौन होगा जो अल्लाह की आयत को झुठलाए और उससे मुह मोड़ ले। जो लोग हमारी आयत से मुह मोड़ते हैं उन्हें इस रुहगर्दानी की पैदाइश में हम बढ़ाते हैं सज़ा दे कर रहेंगे","क्या अब लोग इसके मुंतज़िर हैं के उनके सामने फ़रिश्ते आ खड़े हैं, या तुम्हारा रुब खुद आ जाए, या तुम्हारे रुब की बाज़ सारे निशानियाँ नामदार हो जायेंगे? जिस रोज़ तुम्हारे रब की बाज़ मख़सूस निशानियां नामदार हो जाएंगी फिर किसी ऐसे शक्स को उसका ईमान कुछ फ़ायदा न देगा जो पहले ईमान न लाया हो या जिसने अपने ईमान में कोई भलाई न कमाई हो। (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहदो के अच्छा, तुम इंतज़ार करो, हम भी इंतज़ार करते हैं","जिन लोगों ने अपने दीन को टुकड़े-टुकड़े कर दिया और गिरो-गिरोह बन गए यकीनन उनसे तुम्हारा कुछ वास्ता नहीं। उनका मामला तो अल्लाह के लिए सही है, वही उनको बताएगा के उन्होन ने क्या कुछ किया है","जो अल्लाह के हुज़ूर नेकी लेकर आएगा उसके लिए दस गुना (दस बार) अजर है, और जो बड़ी (बुरा काम) लेकर आएगा उसको उनता ही बलदा दिया जाएगा जितना उसने कसूर किया है, और किसी पर ज़ुल्म न किया जाएगा","(ऐ मुहम्मद)! कहो मेरे रब ने बिल-यक़ीन मुझे सीधा रास्ता दिखाया है, बिल्कुल ठीक दीन जिस में कोई टेढ़ (टेढ़ापन) नहीं, इब्राहिम का तरीक़ा जिसने यक्सू होकर उसने इख्तियार किया था और वो मुशरिकों में से ना था","कहो, मेरी नमाज़, मेरे तमाम मरासिम उबुदियात (मेरे सभी इबादत), मेरा जीना और मेरा मरना, सब कुछ अल्लाह रब्बुल आलमीन के लिए है","जिसका कोई शरीक नहीं, इसका मुझे हुकुम दिया गया है और सबसे पहले सर ए इताअत झुकने वाला मैं हूं","कहो, क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और रब तलाश करूं, हालांके वही हर चीज का रब है? हर शक्स जो कुछ कमाता है उसका ज़िम्मेदार वो खुद है, कोई बोझ उठाने वाला दूसरे का बोझ नहीं उठता। फिर तुम सबको अपने रुब की तरफ पलटना है, हमारा वक्त वो तुम्हारे इख्तिलाफत (मतभेद/विवाद) की हक़ीक़त तुमपर खोल देगा","वही है जिसने तुमको ज़मीन का ख़लीफ़ा बनाया, और तुम में से बाज़ को बाज़ के मुकाबले में ज़्यादा बुलंद दर्जे दिया, ता-के जो कुछ तुमको दिया है उसमें तुम्हारी आजमाइश करे। बेहसाक तुम्हारा रुब सज़ा देने में भी बहुत तेज़ है और बहुत दरगुज़ार करने और रहम फ़रमाने वाला भी है","अलिफ़ लाम मीम साद","ये एक किताब है जो तुम्हारी तरफ नाज़िल की गई है, पास (ऐ मुहम्मद), तुम्हारे दिल में इसे कोई परेशानी ना हो, इसके उतरने की ग़रज़ ये है के तुम इसके ज़रूरी से (मुनकिरीन को) डराओ और ईमान लाने वाले लोगों को याद दिहानी हो","लोगन, जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है उसकी जोड़ी करो और अपने रब को छोड़ कर दूसरे सरपरतों की जोड़ी ना करो, मगर तुम हिदायत कम ही मानते हो","कितनी ही बस्तियाँ हैं जिन्हें हमने हलक करदिया, उन पर हमारा अजब अचानक रात के वक्त टूट पड़ा, या दिन दहाड़े ऐसे वक्त आया जब वो आराम कर रहे थे","और जब हमारा अजब उन्पर आ गया तो उनकी ज़ुबान पर इसके सिवा कोई सदा ना थी के वाकाई हम जालिम थे","पास ये जरूर होकर रहना है के हम उन लोगों से बाज़-पुर्स करें जिनकी तरफ हमने पैगम्बर भेजे हैं और पैगम्बरों से भी पूछें (के उन्होन ने पैगाम रसानी का फर्ज कहां तक ​​अंजाम दिया और उन्हें इसका क्या जवाब मिला)","फिर हम खुद पूरे इल्म के साथ सारी सरगुशिस्ट (पूरा हिसाब) उनके आगे पेश कर देंगे। आख़िर हम कहीं गायब तो नहीं थे","और जिनके पैडले हल्के रहेंगे वही अपने आप को खासे (नुक्सान) में मुब्तिला करने वाले होंगे, क्योंकि वो हमारी आयत के साथ ज़ालिमाना बरताओ करते रहे थे","","हमने तुम्हें ज़मीन में इख्तियारत के साथ बसाया और तुम्हारे लिए यहां समां ए ज़िस्त फराहम किया मगर तुमलोग काम ही शुकर-गुज़ार होते हो","हमने तुम्हारी तख़लीक (सृजन) की इब्तेदा की, फिर तुम्हारी सूरत बनाई, फिर फ़रिश्टन से कहा आदम को सजदा करो. क्या हुक्म पर सबने सजदा किया मगर इब्लीस सजदा करने वालों में शामिल ना हुआ","पूछा, “तुझे किस चीज ने सजदा करने से रोका जबके मैंने तुझको हुकुम दिया था?” बोला, मैं उससे बेहतर हूं। तू नहीं मुझे आग से पैदा किया है और उसे मिट्टी से''","फरमाया, ''अच्छा तू यहां से नीचे उतर, तुझे हक नहीं है के यहां बदाई का घमंड करे, निकल जा के डर-हकीकत तू उन लोगों में से है जो खुद अपनी ज़िल्लत चाहता है''","बोला, \"मुझे उस दिन तक मोहलत दे जबके ये सब दोबारा उठेंगे\"","फरमाया \"तुझे मोहलत है।\"","बोला, “अच्छा तो जिस तरह तू नई मुझे गुमराही में मुबतला किया मैं भी अब तेरी सीधी राह पर","इंसानों की घाट में लगा रहूंगा, आगे और पीछे, दिनें और बायें, हर तरफ से इनको घेरूंगा और तू इनमें से अक्सर को शुक्रगुजार न पायेगा\"","फरमाया, \"निकल जा यहां से ज़लील और ठुकराया हुआ, यकीन रख के इनमें से जो तेरी जोड़ी करेगी, तुझ समेत उन सब से जहन्नुम को भर दूंगा","और ऐ आदम, तू और तेरी बीवी, दोनों इस जन्नत में रहो, जहां जिस चीज़ को तुम्हारा जी चाहे खाओ, मगर उस दरख्त के पास न फटकना वरना ज़ालिमों में से हो जाओगे”","फिर शैतान ने उनको बहकाया ता-के उनकी शर्मगाहें जो एक दूसरे से छुपी गई पतली उनके सामने खोल दे। उसने उनसे कहा, “तुम्हारे रब ने तुम्हें जो इस दरख से रोका है इसकी वजह इसके सिवा कुछ नहीं है के कहीं तुम फरिश्ते ना बन जाओ, या तुम्हें हमेशा की जिंदगी हासिल ना हो जाए","और उसने कसम खा कर उनसे कहा के मैं तुम्हारा सच्चा खैर-ख्वा हूं","इस तरह धोखा देकर वो उन दोनों को रफ्ता रफ्ता अपना धप पार ले आया. आख़िर ए कार जब उनहों ने उस दरख्त का मजा चखा तो उनके सत्र एक दूसरे के सामने खुल गए और वो अपने जिस्म को जन्नत के पत्तों से ढँकने लगे। तब उनके रब ने उन्हें पुकारा, \"क्या मैंने तुम्हें इस दरख्त से ना रोका था और ना कहा था के शैतान तुम्हारा खुला दुश्मन है?\"","दोनों बोल उठे, \"ऐ रब, हमने अपना ऊपर सितम (ज़ुल्म) किया, अब अगर तू नहीं हमसे दरगुज़ार ना फरमाया और रहम ना किया तो यकीनन हम तबाह हो जाएंगे।\"","फरमाया, \"उतर जाओ, तुम एक दूसरे के दुश्मन हो। और तुम्हारे लिए एक खास मुद्दत तक ज़मीन ही में जाए-क़रार (निवास) और सामान-ए-ज़िस्ट (निवास और प्रावधान) है\"","और फरमाया, \"वहीं तुमको जीना और वहीं मरना है और उसी मुझसे तुमको आख़िरकार निकल जाएगा।”","ऐ औलाद ए आदम, हमने तुम्हारा लिबास नाज़िल किया है कि तुम्हारे जिस्म के काबिल ए शर्म हिस्सो को धन्यवाद और तुम्हारे लिए जिस्म की हिफ़ाज़त और ज़ीनत का ज़रिया भी हो। और बेहतरीन लिबास तकवे (पवित्रता) का लिबास है। ये अल्लाह की निशानियों में से एक निहसानी है, शायद के लोग इसे सबक लें","ऐ बानी आदम, ऐसा ना हो के शैतान तुम्हें फिर उसी तरह फिटने में मुब्तला करदे जिस तरह उसने तुम्हारे वलियों को जन्नत से निकाला था और उनके लिबास उन्पर से उतरवा दिए थाय ता-के उनके शर्मगाहें एक दूसरे के सामने खोले। वो और उसके साथी तुम्हें ऐसी जगह से दिखते हैं जहां से तुम उन्हें नहीं देख सकते। शयातीन को हमने उन लोगों का सरपरस्त बना दिया है जो ईमान नहीं लाते","ये लोग जब कोई शर्मिंदा काम करते हैं तो कहते हैं हमने अपने बाप दादा को इसी तारीक पर पाया है और अल्लाह ही ने हमें ऐसा करने का हुकुम दिया है। इनसे कहो अल्लाह बे-हयायी का हुक्म कभी नहीं दिया करता। क्या तुम अल्लाह का नाम लेकर वो बातें कहते हो जिनका मुतालिक तुम्हें इल्म नहीं है (वो अल्लाह की तरफ से हैं)","(ऐ मुहम्मद), इनसे कहो, मेरे रब ने तो रस्ती ओ इन्साफ का हुकुम दिया है, और उसका हुकुम तो ये है कि हर इबादत में अपना रुख ठीक रखो और उसी को पुकारो अपने दीन को उसके लिए खालिस रख कर, जिस तरह उसने तुम्हें अब भुगतान किया है उसी तरह तुम फिर भुगतान किये जाओगे","एक गिरो ​​को तो उसने सीधा रास्ता दिखा दिया है, मगर दूसरे गिरो ​​पर गुमराही चस्पां होकर रह गई है, क्योंकि उन्हें नहीं खुदा के बजाये शयातीन को अपना सरपरस्त बना लिया है और वो समझ रहे हैं कि हम सीधी राह पर हैं","ऐ बानी आदम, हर इबादत के मुआक़े पर अपनी ज़ीनत से अरस्ता रहो और खाओ पियो और हद से तजौज़ न करो। अल्लाह हद से बढ़ने वालों को पसंद नहीं करता","(ऐ मुहम्मद), इनसे कहो किसने अल्लाह की उस ज़ीनत को हराम कर दिया जैसे अल्लाह ने अपने बंदों के लिए निकला था और किसने खुदा की बख्शी हुई पाक चीज़ ममनू (मना) करदी? कहो, ये सारी चीजें दुनिया की जिंदगी में भी ईमान लाने वालों के लिए हैं, और कयामत के रोज तो खालीसतन उनके लिए होंगी। इस तरह हम अपनी बातें साफ-साफ बयान करते हैं उन लोगों के लिए जो इल्म रखने वाले हैं","(ऐ मुहम्मद), इनसे कहो के मेरे रब ने जो चीजें हराम की हैं वो तो ये हैं: बेशर्मी के काम ख्वा खुले हों या छुपे, और गुनाह और हक के खिलाफ ज़ियादती, और ये के अल्लाह के साथ तुम किसी को शरीक करो जिसके लिए उसने कोई सनद नाज़िल नहीं की, और ये के अल्लाह के नाम पर कोई ऐसी बात कहो जिसका मुतालिक तुम्हें इल्म ना हो के वो हकीकत में उसकी ने फरमायी है","हर क़ौम के लिए मोहल्लत की एक मुद्दत मुकर्रर है, फिर जब किसी क़ौम की मुद्दत आन पूरी होती है तो एक घड़ी भर की तकदीम भी नहीं होती","(और ये बात अल्लाह ने आगाज़ ए तख़लीक ही में साफ फरमा दी थी के) ऐ बानी आदम, याद रखो, अगर तुम्हारे पास खुद तुम्हीं से ऐसे रसूल आएं जो तुम्हें मेरी आयत सुना रहे हों, तो जो कोई नफ़रमानी से बचेगा और अपने रवये की इस्लाह करेगा उसके लिए कोई खौफ और रंज का मौका नहीं है","और जो लोग हमारी आयतों को झूठलाएंगे और उनके मुक़ाबले में सरकशी बरतेंगे वही एहले दोज़ख होंगे जहां वो हमेशा रहेंगे","ज़ाहिर है के उसे बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जो बिकल झूठी बातें ग़द कर अल्लाह की तरफ मंसूर करे या अल्लाह की सच्ची आयत को झूठलाये? ऐसे लोग अपने नविस्ता ए तकदीर के मुताबिक अपना हिसा पाते रहेंगे, यहां तक ​​के वो घड़ी आ जाएगी जब हमारे भेजे हुए फरिश्ते उनकी रूहें (आत्माएं) क़ब्ज़ करने के लिए पहनेंगे। हमें वक्त है वो उनसे पूछेंगे के बताओ अब कहां हैं तुम्हारे वो माबूद जिनको तुम खुदा के बजाये पुकारते थे? वो कहेंगे के, \"सब हमसे ग़म हो गए\" और वो खुद अपने ख़िलाफ गवाही देंगे के हम वक़ाई मुनकिर ए हक़ थे","अल्लाह फरमाएगा जाओ, तुम भी उसके जहन्नुम में चले जाओ जिस्म में तुमसे पहले गुजरे हुए गिरो ​​जिन्न ओ इंसान (इंसान) जा चुके हैं। हर गिरो ​​जब जहन्नुम में दाख़िल होगा तो अपने पेशरो गिरोह (जो इससे पहले चला गया था) पर लानत करता हुआ दाख़िल होगा, हत्ता के जब सब वहाँ जमा हो जायेंगे तो हर बाद वाला गिरोह पहले गिरोह के हक़ में कहेगा के ऐ रब, ये लोग थे जिन्हों ने हमको गुमराह किया, लिहाज़ा इन्हें आग का दोहरा अज़ाब दे। जवाब में इरशाद होगा, हर एक के लिए दोहरा ही अज़ाब है मगर तुम जानते नहीं हो","और पहला गिरो ​​दूसरे गिरो ​​​​से कहेगा के (अगर हम काबिल ए इल्जाम थे) तो तुम्हीं को हमपर कौन सी फजीलत हासिल थी, अब अपनी कमाई के नतीजे में अज़ाब का मजा चक्खो","यकीन जानो, जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुटलाया है और इनके मुकाबले में सरकशी की है उनके लिए आसमान के दरवाजे हरगिज ना खोले जाएंगे। उनका जन्नत में जाना उतना ही नामुमकिन है जितना सूई (सुई) के नाक से ऊंट (ऊंट) का गुजारना। मुजरेमोन को हमारे हाँ ऐसा ही बदला मिला करता है","उनके लिए तो जहन्नुम का बिछोना होगा और जहन्नुम ही का ओदना। ये है वो जजा जो हम जालिमों को दिया करते हैं","बा-खिलाफ इसके जिन लोगों ने हमारी आयत को मान लिया है और अच्छे काम किए हैं और इस मामले में हम हर एक को उसकी क्षमता (क्षमता) ही देते हैं। वो एहले जन्नत हैं जहां वो हमेशा रहेंगे","उनके दिलों में एक दूसरे के खिलाफ जो कुछ कदुरत (द्वेष) होगी उसे हम निकल देंगे, उनके आला नेहरेन बहती होंगी, और वो कहेंगे के \"तारीफ खुदा ही के लिए है जिसने हमने ये रास्ता दिखाया, हम खुद रह ना पा सकते थे अगर\" ख़ुदा हमारी रहनुमाई न करता। हमारे रब के भेजे हुए रसूल वक़ै हक़ ही लेकर आये थे।” हमें वक्त निदा (आवाज) आएगी के \"ये जन्नत जिसके तुम वारिस बन गए हो तुम्हें उन अमल के बदले में मिली है जो तुम करते रहे थे\"","फिर ये जन्नत के लोग दोज़ख वालों से पुकार कर कहेंगे, \"हमने उन सारे वादों को ठीक पा लिया जो हमारे रब ने हमसे किये थे, क्या तुमने भी उन वादों को ठीक पाया जो तुम्हारे रब ने किये थे?” वो जवाब देंगे \"हां\" तब एक पुकारने वाला उनको दरमियान पुकारेगा के \"खुदा की लानत उन जालिमों पर","जो अल्लाह के रास्ते से लोगों को रोकते और उसे टेढ़ा करना चाहते थे और आख़िरत के मुनकिर थे\"","दोनों गिरोहों के दरमियान एक ओट में (बैरियर) हायल होगी जिसकी बुलंदियां (अराफ) पर कुछ और लोग होंगे ये हर एक को उसका कियाफा (मार्क्स) से पहचानेंगे और जन्नत वालों से पुकार कर कहेंगे \"सलामती हो तुमपर\"। ये लोग जन्नत में शामिल तो नहीं हुए मगर उसके उम्मीदवर होंगे”","और जब उनकी निगाहें दोज़ख वालों की तरफ फिरेंगी तो कहेंगे, “ऐ रब! हमने ज़ालिम लोगों में शामिल ना कीजियो”","फिर ये अराफ के लोग दोज़ख़ की चंद बड़ी बड़ी शख़्सियतों (व्यक्तित्वों) को उनकी अलमातों से पहचान कर पुकारेंगे के “देख लिया तुमने, आज ना तुम्हारे जत्थे (सभा/संख्याएँ) तुम्हारे किसी काम आये और ना वो साज़ ओ समां जिनको तुम बड़ी चीज़ समझते थे","और क्या ये एहले जन्नत वही लोग नहीं हैं जिनका मुतालिक तुम कसमें खा खा कर कहते थे उनको तो खुदा अपनी रहमत में से कुछ भी ना देगा? आज इनसे कहा गया के दखिल हो जाओ जन्नत में, तुम्हारे लिए ना खौफ है ना रंज\"","और दोज़ख के लोग जन्नत वालों को पुकारेंगे के कुछ थोड़ा सा पानी हमपर डाल दो या जो रिज्क अल्लाह ने तुम्हें दिया है उसमें से कुछ फेंक दो। वो जवाब देंगे के \"अल्लाह ने\" ये दोनों चीजें उन मुनकिरीन ए हक पर हराम करदी हैं","जिन्होन ने अपने दीन को खेल और तफरी बना लिया था। और जिन्होंने दुनिया की जिंदगी ने फरेब में मुब्तिला कर रखा था। अल्लाह फरमाता है के आज हम भी उन्हें उसी तरह भूला देंगे जिस तरह वो इस दिन की मुलाकात को भूल रहे हैं और हमारी आयतों का इनकार करते रहेंगे”","हम लोगों के पास एक ऐसी किताब ले आए हैं जिसको हमने इल्म की बिना पर मुफस्सल (व्याख्यायित) बनाया है और जो ईमान लेन वालों के लिए हिदायत और रहमत है","अब क्या ये लोग इसके सिवा किसी और बात के मुंतजिर हैं के वो अंजाम सामने आ जाए जिसकी ये किताब खबर दे रही है? जिस रोज़ वो अंजाम सामने आ गया तो वही लोग जिन्हों ने उसे नज़र-अंदाज़ कर दिया था कहेंगे के \"वक़ाई हमारे रब के रसूल हक़ लेकर आए थे, फिर क्या अब हमें कुछ सिफ़ारिश मिलेगी जो हमारे हक़ में सिफ़ारिश करें? हां हमें दोबारा वापस ही भेज\" दिया जाये ता-के जो कुछ हम पहले करते थे उसके बजाये अब दूसरे तारिके पर काम करके दिखायें”। उनहों ने अपने आप को खासे (नुक्सान) में डाल दिया और वो सारे झूठ जो उनहों ने तसनीफ कर रक्खे थे आज उनसे गम हो गए","दर हकीकत तुम्हारा रब अल्लाह हाय है जिसने आसमान और जमीन को छः (छह) दिनों में पैदा किया, फिर अपनी तख्त ए सल्तनत पर जलवा फरमा हुआ, जो रात को दिन पर धन देता है और फिर दिन रात के पीछे दौड़ा आता है, जिसने सूरज और चांद और तारे पैदा किये सब उसके फरमान के तबेह हैं। ख़बरदार रहो! उसी का ख़ल्क (सृजन) है और उसी का अमृत (आदेश) है। बड़ा बा-बरकत है अल्लाह, सारे जहांों का मालिक ओ परवरदिगार","अपने रब को पुकारो गिड़गिदाते (विनम्रता के साथ) हुए और चुपके चुपके। यकीनन वो हद से गुज़रने वालों को पसंद नहीं करता","ज़मीन में फ़साद बरपा ना करो जबके उसकी इस्लाह हो चुकी है और खुदा ही को पुकारो ख़ौफ़ के साथ और तम (उम्मीद) के साथ। यकीनन अल्लाह की रहमत नीक किरदार (जो अच्छा करते हैं) लोगों से करीब है","और वो अल्लाह ही है जो हवाएं अपनी रहमत के आगे खुश-खबरी के लिए भेजे जाते हैं, फिर जब वो पानी से लड़े हुए बादल उठा लेती हैं तो उन्हें कोई मुर्दा सर-जमीन की तरफ हरकत देता है, और वहां मेह (बारिश) बरसा कर (उसी मेरी हुई जमीन से) तरह तरह के फल निकल ला आता है। देखो, इस तरह हम मुर्दों को हालात ए मौत से निकलते हैं, शायद के तुम इस मुशाहिदे से सबक लो","जो जमीन अच्छी होती है वो अपने रब के हुकुम से खूब फल फूल लगती है और जो जमीन खराब होती है उसे नकीस (गरीब) पैदावर के सिवा कुछ नहीं निकलता। इस तरह हम निशानियों को बार-बार पेश करते हैं उन लोगों के लिए जो शुक्रगुज़ार होने वाले हैं","हमने नूह को उसकी क़ौम की तरफ भेजा, उसने कहा “ऐ बिरादरान ए क़ौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है, मैं तुम्हारा हक़ मैं एक शानदार दिन (कमाल का दिन) के अज़ाब से डरता हूं”","उसकी क़ौम के सरदारों ने जवाब दिया “हमको तो ये नज़र आता है के तुम सारे गुमराही में मुब्तिला हो”","नूह ने कहा “ऐ बिरादरान ए क़ौम, मैं किसी गुमराही में नहीं पड़ा” हूं बलके, मैं रब उल आलमीन का रसूल हूं","तुम्हें अपने रुब के पैगाम पहुंचाता हूं, तुम्हारा खैर-ख्वाह हूं, और मुझे अल्लाह की तरफ से वो कुछ मालूम है जो तुम्हें मालूम नहीं है","क्या तुम्हें इस बात पर ताज्जुब हुआ के तुम्हारे पास खुद तुम्हारी अपनी क़ौम के एक आदमी के ज़रिये से तुम्हारे रब की याद देहनी आई ता-के तुम्हें ख़बरदार करे, और तुम गलत रावी से बच जाओ और तुमपर रहम किया जाए?”","मगर उनहों ने उसको झूठला दिया। आख़िर ई कार हमने उसे और उसके साथियों को एक कश्ती में सजा दी और उन लोगों को डुबो दिया जिन्हों ने हमारी आयत को झुटलाया था। यकीनन वो अंधे लोग थे","और आद की तरफ हमने उनके भाई हद को भेजा। उसने कहा, \"ऐ बिरादरान ए क़ौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है फिर क्या तुम ग़लत रावी से परहेज़ न करोगी?\"","उसकी क़ौम के सरदारों ने, जो उसकी बात मन्ने से इंकार कर रहे थे, जवाब में कहा “हम तो तुम्हें बे-अकाली (मूर्खता में) में मुब्तिला समझते हैं और हमें गुमान है के तुम झूठे हो”","उसने कहा “ ऐ बिरादरान ए क़ौम, मैं बे-अकाली में मुब्तिला नहीं हूं बलके मैं रब उल आलमीन का रसूल हूं","तुमको अपने रुब के पैगाम पहुंचाता हूं, और तुम्हारा ऐसा खैर-ख्वाह हूं जिसपर भरोसा किया जा सकता है","क्या तुम इस बात पर ताज्जुब हुआ के तुम्हारे पास खुद तुम्हारी अपनी क़ौम के एक आदमी के ज़रिये से तुम्हारे रब की याद देहनी आई ता-के वो तुम्हें ख़बरदार करे? भूल न जाओ के तुम्हारे रब ने नूह की क़ौम के बाद तुमको उसका जानशीं (उत्तराधिकारियों) बनाया और तुम्हें खूब तनो-मंद किया (तुम्हारे कद में काफी वृद्धि हुई), पास अल्लाह की क़ुदरत के करिश्माओं को याद रखो, उम्मीद है के फलाह पाओगे\"","उनहोन ने जवाब दिया \"क्या तू हमारे पास इस लिए आया है कि हम अकेले अल्लाह ही की इबादत करें और उन्हें छोड़ दें जिनकी इबादत हमारे बाप दादा करते आये हैं? अच्छा तो ले आ वो अजब जिसका तू हमें धमकी देता है अगर तू सच्चा है”","उसने कहा “तुम्हारे रब की फिटकर तुम पर पड़ गई और उसका गजब टूट पड़ा, क्या तुम मुझसे उन नमो (नामों) पर झगड़ा करते हो जो तुमने और तुम्हारे बाप दादा ने रख लिए हैं, जिनके लिए अल्लाह ने कोई सनद नाज़िल नहीं की है। अच्छा तो तुम भी इंतज़ार करो और मैं भी तुम्हारे साथ इंतज़ार करता हूँ”","आख़िर ए कार हमने अपनी महरबानी से हद और उसके साथियों को बचा लिया और उन लोगों की जड (जड़ें) काट दी जो हमारी आयत को झुटला चुके थे और ईमान लेन वाले ना थे","और समूद की तरफ हमने उनके भाई सालेह को भेजा। उसने कहा “ऐ बिरादरान ए कौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है।” तुम्हारे पास तुम्हारे रब की खुली जगह आ गई है। ये अल्लाह की औंती (वह-ऊंटनी) तुम्हारे लिए एक निशानी के तौर पर है, लिहाजा इसे छोड़ दो के खुदा की जमीन में चढ़ती फिर, इसको किसी बुरे इरादे से हाथ न लगाना वरना एक दर्दनाक अजब तुम्हें आ लेगा","याद करो वो वक्त जब अल्लाह ने क़ौम ए अद के बाद तुम्हें उसका जानशीं (उत्तराधिकारियों) बनाया और तुमको ज़मीन में ये मंजिल बख्शी के आज तुम उसके हमवार मैदानों में आली शान महल बनाते और उसके पहाड़ों को मकान की शक्ल में तराशते हो। पस उसकी क़ुदरत के करिश्माओं से ग़ाफ़िल ना हो जाओ और ज़मीन में फ़साद बरपा ना करो।","उसकी क़ौम के सरदारों ने जो बदे बने हुए थे, कामज़ूर तबक़ी के उन लोगों से जो ईमान ले आए थे कहा \"क्या तुम यह जानते हो के सालेह अपने रब का पैगम्बर है?\" उनको ने जवाब दिया “बेशक जिस पैगाम के साथ वो भेजा गया है उसे हम मानते हैं।”","उन बुराइयों के मुद्दैयों (घमण्डियों) ने कहा जिस चीज़ को तुमने माना है हम उसे मुनीर हैं।”","फिर उनहोन ने हमें ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को मार डाला और पूरे तम्मारुद (तिरस्कारपूर्ण अवज्ञा) के साथ अपने रब के हुकुम की खिलाफ वारज़ी कर गुजरे। और सालेह से कह दिया के ले आ वो अजाब जिसकी तू हमें धमकी देता है अगर तू वाकयी पैगम्बरों में से है","आखिर ए कार एक देहला देने वाली आफत ने उन्हें आ लिया और वो अपने घरों में औंधे पड़े के पड़े रह गए","और सालेह ये कहता हुआ उनकी बस्तियों से निकल गया के \"ऐ मेरी क़ौम, मैंने अपने रब का पैगाम तुझे पहना दिया और मैंने तेरी बहुत खैर ख्वाही की, मगर मैं क्या करूं के तुझे अपने खैर ख्वाह पसंद ही नहीं हैं\"","और लुट को हमने पैगम्बर बनाकर भेजा, फिर याद करो जब उसने अपनी क़ौम से कहा, \"क्या तुम ऐसे बे-हया हो गए हो, के वो फहाश काम करते हो जो तुमसे पहले दुनिया में किसी ने नहीं किया","तुम औरतों को चोद कर मर्दों से अपनी ख्वाहिश पूरी करते हो। हकीकत ये है के तुम बिलकुल ही हद से गुज़र जाने वाले लोग हो”","मगर उसकी क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ ना था के “लोगों को अपनी बस्तियों से निकालो, बड़े पाकबाज़ बनते हैं ये”","आख़िर ए कार हमने लूट और उसके घरवालों को बजाया उसकी बीवी के जो पीछे रह गए जाने वालों में थी","बच्चा कर निकल दिया और उस क़ौम पर बरसी एक बारिश, फिर देखो के उन मुजरिमों का क्या अंजाम हुआ","और मदियां वालों की तरफ हमने उनके भाई शोएब को भेजा। उसने कहा \" ऐ बिरादरान ए कौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है। तुम्हारे पास तुम्हारे रब की साफ रहनुमाई आ गई है, वजन (वजन) और पैमाने पूरे करो। लोगों को उनकी चीज में घाटा (नुकसान) ना दो, और जमीन में फ़साद बरपा ना करो जबके उसकी इस्लाह हो चुकी है","और (जिंदगी के) हर रास्ते पर घात लगाकर बैठ जाओ के लोगों को खौफ पैदा करने और ईमान लाने वालों को खुदा के रास्ते से रोकने लगो, और सीधी राह को टेढ़ा करने के डरपे हो जाओ। याद करो वो ज़माना जबके तुम थोड़े थे फिर अल्लाह ने तुम्हें बहुत कर दिया, और आखें खोल कर देखो दुनिया में मुफ़्सिदों का क्या अंजाम हुआ है","अगर तुम में से एक गिरोह इस तालीम पर जिसके साथ मैं भेजा गया हूं, ईमान लाता है और दूसरा ईमान नहीं लता, तो सब्र के साथ देखते रहो यहाँ तक के अल्लाह हमारे दरमियान फैसला करदे, और वही सबसे बेहतर फैसला करने वाला है”","उसकी क़ौम के सरदारों ने, जो अपनी बदाई के घमंड में मुब्तिला था, उसने कहा के “ऐ शोएब, हम तुझसे” और उन लोगों को जो तेरे साथ ईमान लाए हैं अपनी बस्ती से निकल देंगे वरना तुम लोगों को हमारी मिल्लत में वापस आना होगा।'","","उसकी क़ौम के सरदारों ने, जो उसकी बात मन्ने से इंकार कर चुके थे, आपस में कहा “अगर तुमने शोएब की जोड़ी क़बूल कर ली तो बरबाद हो जाओगे।”","मगर हुआ ये के एक देहला देने वाली आफत ने उनको आ लिया और वो अपने घरों में औंधे पड़े के पड़े रह गए","जिन लोगों ने शोएब को झुटलाया वो ऐसे मिटे के गोया कभी उन घरों में बसे ही ना थे। शोएब के झूठलाने वाले आखिर ए कार बरबाद हो कर रहे","और शोएब ये कह कर उनकी बस्तियों से निकल गया के \"ऐ बिरादरान ए क़ौम, मैंने अपने रब के पैगामत तुम्हें पाहुंचा दिए और तुम्हारी ख़ैर ख़ैर का हक़ अदा करदिया, अब मैं हमसे क़ौम पर हूँ\" कैसे अफसोस करूं जो क़ुबूल ए हक़ से इंकार करती है”","कभी ऐसा नहीं हुआ के हमने किसी बस्ती में नबी भेजा हो और उस बस्ती के लोगों को पहले तंग किया हो और शक्ति में मुब्तिला ना किया हो इस ख्याल से के शायद वो आजिजी","फिर हमने उनकी बढ़-हाली को ख़ुश हाली से बदल दिया दिया यहां तक ​​के वो खूब फले फूले और कहने लगे के \"हमारे असलफ पर भी अच्छे और बुरे दिन आते ही रहे हैं\"","","फिर क्या बस्तियों के लोग अब इससे खौफ हो गए हैं के हमारी गिरफ़्तार (पकड़) कभी अचानक उन रात के वक्त ना आ जाएगी जबके वो सोते पड़े माननीय","हां उनको इत्मिनान हो गया है के हमारा मजबूत हाथ कभी यकायक अनपर दिन के वक्त ना पड़ेगा जबके वो खेल रहे होन","क्या ये लोग अल्लाह की चाल से खौफ खा रहे हैं? हालंके अल्लाह की चाल से वही क़ौम बे-ख़ौफ़ होती है जो तबाह होने वाली हो","और क्या उन लोगों को जो साबिक एहले ज़मीन के बाद ज़मीन के वारिस होते हैं, इस अम्र ए वक़ाई ने कुछ सबक नहीं दिया के अगर हम चाहें तो उनके कसूरों पर उन्हें पकड़ें क्या आप जानते हैं? (मगर वो सबक-आमोज़ हक़ीक़ से तगाफुल बारातते हैं) और हम उनके दिलों पर मोहर लगा देते हैं, फिर वो कुछ नहीं सुनते","ये क़ौमें जिनके क़िस्से हम तुम्हें सुना रहे हैं (तुम्हारे सामने मिसाल में मौजूद हैं)। उनके रसूल उनके पास खुली खुली निहस्नाइयां लेकर आए, मगर जिस चीज को वो एक दफा झूठला चुके थे फिर उसे वो मन्ने वाले ना थे। देखो इस तरह हम मुनकिरीन ए हक़ के दिलों पर मोहर लगा देते हैं","हमने उन में से अक्सर में कोई पास ए अहद न पाया, बलके अक्सर को फ़ासीक़ ही पाया","फिर उन क़ौमों के बाद (जिनका ज़िक्र ऊपर किया गया) हमने मूसा को अपनी निशानियों के साथ फ़िरौन और उसकी क़ौम के सरदारों के पास भेजा, मगर उनहों ने भी हमारी निशानियों के साथ ज़ुल्म किया। पास देखो के इन मुफ़्सिदों का क्या अंजाम हुआ","मूसा ने कहा \"ऐ फिरौन, मैं क़ायनात के मालिक की तरफ से भेजा हुआ हूँ","मेरा मनसब यहीं है के अल्लाह का नाम लेकर कोई बात हक़ के सिवा ना कहूँ। मैं तुम लोगों के पास तुम्हारे रब की।\" तरफ से सारी दलील ए ममुरियत लेकर आया हूं। लिहाजा तू बनी इजराइल को मेरे साथ भेज दे।”","फ़िरौन ने कहा \"अगर तू कोई निशानी लाया है और अपने दावे (दावा) में सच्चा है तो उसे पेश कर\"","मूसा ने अपना आसा (कर्मचारी/रॉड) फेंक और यकायक वो एक जीता जागता अजदहा (सर्पेंट) था","उसने अपनी जेब से हाथ निकला और सब देखने वालों के सामने वो चमक रहा था","इसपर फिरौन की क़ौम के सरदारों ने आपस में कहा के \"यकीनन ये शक्स बड़ा माहिर जादूगर है","तुम्हें तुम्हारी ज़मीन से बे-दखल करना चाहता है। अब कहो क्या कहते हो?”","फिर उन सब ने फिरौन को मशवरा दिया के इसके और इसके भाई को इंतजार में रखिए और तमाम शहरों में हरकारे (हेराल्ड) भेज दीजिए","के हर माहिर-ए-फन जादूगर को आपके पास ले आइए","चुनांचे जादूगर फिरौन के पास आ गए। उन्होन ने कहा “अगर हम गालिब रहे तो हमें इसका सिला तो जरूर मिलेगा?”","फिरौन ने जवाब दिया \"हां, और तुम मुकर्रब ए बारगाह होंगे\"","फिर उनहों ने मूसा से कहा \"तुम फेंकते हो या हम फेंकें?\"","मूसा ने जवाब दिया \"तुम ही फेंको\" उन्होन ने जो अपने आंचर [उनकी छड़ें] फेंके तो निगाहों को महसूर (आंखों को मंत्रमुग्ध कर दिया) और दिलों को खौफ-जदा कर दिया और बड़ा ही जबरदस्त जादू बना लिया","हमने मूसा को इशारा किया के फेंक अपना आसा, उसका फेंकना था के आन की आन में वो उनके इस झूठे तिलिस्म को निंगालता चला गया","इस तरह जो हक था वो हक साबित हुआ और जो कुछ अनहोन ने बना रक्खा था वो बातिल होकर रह गया","फिरौन और उसके साथी मैदान ए मुकाबले में मगलूब हुए और (फतह-मंद होने के बजाये) उलटे जलील हो गए","और जादूगरों का हाल ये हुआ के गोया किसी चीज ने अंदर से उनको सजदे में गिरा दिया","कहने लगे \"हमने मान लिया रब्बुल आलमीन को","हमें रुब को जिसने मूसा और हारून मानते हैं\"","फ़िरौन ने कहा \"तुम इसपर ईमान ले आए क़ब्ल इसके मैं तुम्हें इजाज़त दूं? यकीनन ये कोई ख़ुफ़िया साज़िश थी जो तुम लोगों ने इस दार-उस-सल्तनत में की ता-के इसके मालिकों को इक्तेदार से बे-दख़ल करदो नतीजा अब तुम्हें मालूम हुआ जाता है","मैं तुम्हारे हाथ पांव मुखालिफ सिमटन से काटवा दूंगा और उसके बाद तुम सबको सूली पर चढ़ाऊंगा।","उनहों ने जवाब दिया \"बहार-हाल हमें पलटना अपनी रब ही की तरफ है","तू जिस बात पर हमसे इंतिक़ाम लेना चाहता है वो इसके सिवा नहीं के हमारे रब की निशानियां जब हमारे सामने आ गई तो हमने उन्हें मान लिया। ऐ रब, हमपर सब्र का फैजान कर और हमें दुनिया से उठा तो इस हाल में के हम तेरे फरमा-बरदार हों”","फिरौन से उसकी क़ौम के सरदारों ने कहा “क्या तू मूसा और उसकी क़ौम को यूं ही छोड़ देगा के मुल्क में फ़साद फैलाएं और वो तेरी और तेरे माबूदों की बंदगी छोड़ बैठे?” फ़िरौन ने जवाब दिया “मैं उनके बेटों को क़त्ल करुंगा और उनकी औरतों को जीता रहने दूंगा। हमारे इक्तेदार की गिरफ़्तार उन पर मज़बूत है\"","मूसा ने अपनी क़ौम से कहा \"अल्लाह से मदद मांगो और सब्र करो, ज़मीन अल्लाह की है, अपने बंदों में से जिसका चाहता है उसका वारिस बना देता है। और आखिरी कामयाबियां उनके लिए जो उससे डरते हुए काम करें”","उसकी क़ौम के लोगों ने कहा “तेरे आने से पहले भी हम सताए जाते थे और अब तेरे आने पर भी सताए जा रहे हैं”। उसने जवाब दिया \"क़रीब है वो वक़्त के तुम्हारा रब तुम्हारे दुश्मन को हलाक करदे और तुमको ज़मीन में ख़लीफ़ा बने। फिर देखे के तुम कैसे अमल करते हो\"","हमने फिरौन के लोगों को कई साल तक कहा (सूखा) और बर्बादी की कमी में मुब्तिला रक्खा के शायद उनको होश आए","मगर उनका हाल ये था के जब अच्छा जमाना आता तो कहते के हम इसी के मुस्तहिक हैं, और जब बुरा जमाना आता तो मूसा और उसके साथियों को अपने लिए फल-ए-बध (दुर्भाग्य) ठहरते, हालंके दर हकीकत उनकी फ़ल ए बद तो अल्लाह के पास थी, मगर उन में से अक्सर इल्म था","उनहों ने मूसा से कहा के \"तू हमें महसूर करने के (हमें मंत्रमुग्ध करने के लिए) लिए ख्वा कोई निशानी ले आए, हम तो तेरी बात मन्ने वाले नहीं हैं\"","आकर ए कार हमने उनपर तूफान भेजा, टिड्डी-दाल छोड़े, सरसरियां फैलाए (और टिड्डियां, और) जूँ), मेंढक (मेंढक) निकले, और खून बरसाया। सब निशानियां अलग-अलग करके दिखाये, मगर वो सरकशी किये चले गये और वो बदले ही मुजरिम लोग थे","जब कभी अनपर बला नाज़िल हो जाती तो कहते \" ऐ मूसा, तुझे अपने रब की तरफ से जो मनसब हासिल है उसकी बिना पर हमारे हक़ में दुआ कर।\" अगर अब के तू हमपर से ये बला तलवा दे तो हम तेरी बात मान लेंगे और बानी इजराइल को तेरे साथ भेज देंगे”","मगर जब हम उनपार से अपना अजाब एक वक्त ए मुकर्रर तक केलिये, जिसको वो बाहर हाल पहन लेने वाले थे, हटा लेते तो वो यकलख्त अपने अहद से फिर जाते हैं","तब हमने उनसे इंतकाम लिया और उन्हें समंदर में ग़र्क करदिया क्योंके उन्होन ने हमारी निशानियों को झुटलाया था और उन्हें बे-परवा होगा थाय","और उनकी जगह हमने उन लोगों को जो कमज़ोर बना कर रक्खे गए थे, उस सर-ज़मीन के मशरिक़ ओ मगरिब का वारिस बना दिया जिसे हमने बराकतों से माला माल किया था। इस तरह बानी-इज़राइल के हक़ में तेरे रुब का वादा ए ख़ैर पूरा हुआ क्योंकि उन्होंने सब्र से काम लिया था और फिरौन और उसकी क़ौम का वो सब कुछ बर्बाद कर दिया गया जो वो बनाते और चढ़ते थे","बानी इज़राइल को हमने समंदर से गुज़र दिया, फिर वो चले और रास्ते में एक ऐसी क़ौम पर उनका गुज़र हुआ जो अपने चंद बुथों (मूर्तियों) की गिरविदा (समर्पित) हुई थी। कहने लगे, \"ऐ मूसा, हमारे लिए भी कोई ऐसा माबूद बना दे जैसे लोगों के माबूद हैं\"। मूसा ने कहा \"तुम लोग बड़ी नादानी की बातें करते हो","ये लोग जिस तारीक की जोड़ी बना रहे हैं वो तो बरबाद होने वाला है और जो अमल वो कर रहे हैं वो सरसर बातिल है।”","फिर मूसा ने कहा \"क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और माबूद तुम्हारे लिए तलाश करूं? हलांके वो अल्लाह ही है जिसने तुम्हें दुनिया भर की क़ौम पर फ़ज़िलत बख्शी है","और (अल्लाह फरमाता है) वो वक़्त याद करो जब हमने फिरौन वालों से तुम्हें निजात दी जिनका हाल ये था के तुम्हें अज़ाब में मुब्तिला रखते थे, तुम्हारे बेटे (बेटों) को कत्ल करते थे और तुम्हारी औरतों को जिंदा रहने देते थे और इस में तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारी बड़ी आजमाइश थी","हमने मूसा को तीस (तीस) शब ओ रोज़ के लिए [कोह ए सीना (माउंट सिनाई) पर] तालाब किया और बाद में दस (दस) दिन का और इज़ाफा करदिया, इस तरह उसके रब की मुकर्रर करदा मुद्दत पूरे चालीस (चालीस) दिन हो गई। मूसा ने चलते हुए अपने भाई हारून से कहा के \"मेरे पीछे तुम मेरी क़ौम में मेरी जानशीनी (मेरी जगह ले लो) करना और ठीक काम करते रहना और बिगाड़ पैदा करने वालों के तारीख पर ना चलना\"","जब वो हमारे मुकर्रर किए हुए वक्त पर पहुंच गए और उसके रब ने उसे कलाम किया तो उसने इल्तेजा की के \"ए रब, मुझे याराए नजर दे के मैं तुझे देखूं\"। फरमाया “तू मुझे नहीं देख सकता, हां जरा सामने के पहाड़ की तरफ देख, अगर वो अपनी जगह कायम रह जाए तो अलबत्ता तू मुझे देख सकेगा।” चुनान्चे उसके रब ने जब पहाड़ पर तजल्ली की तो उसे रेजा कर दिया और मूसा गश खा कर गिर पड़ा, जब होश आया तो बोला “पाक है तेरी जात, मैं तेरे हुजूर तौबा करता हूं और सबसे पहला ईमान लाने वाला मैं हूं।”","फरमाया \"ऐ मूसा, मैंने तमाम लोगों पर तरजीह देकर तुझे मुंतखब किया के मेरी पैगम्बरी करे और मुझे हम-कलाम हो, पास जो कुछ मैं तुझे दूं उसे ले और शुकर बजा ला\"","इसके बाद हमने मूसा को हर शोबा ए जिंदगी के मुतालिक हिदायत और हर पहलू के मुतालिक वाज़े हिदायत तख्तियों पर लिख कर दे दी, और उसे कहा: \"हिदायत को मजबूत हाथों से संभाल और अपनी क़ौम को हुकुम दे के इनके बेहतर मफ़हूम की जोड़ी बनाएं। अनकारीब मैं तुम्हें फासीकों के घर दिखाऊंगा","मैं अपने निशानियों से उन लोगों की निगाहें फेर दूंगा जो बिना किसी हक के जमीन में बदाये बांटते हैं, वो ख्वा कोई निशानी देखलें कभी उसपर ईमान ना लाएंगे। अगर सीधा रास्ता उनके सामने आए तो उसे इख्तियार ना करेंगे और अगर टेढ़ा रास्ता नजर आए तो उसपर चल पड़ेंगे, इसलिए हमने हमारी निशानियों को झुटलाया और उनसे परवाही करते रहे","हमारी निशानियों को जिस किसी ने झुटलाया और आखिरी की पेशी का इंकार किया उसके सारे अमल हो गया। क्या लोग इसके सिवा कुछ और जजा पा सकते हैं जैसा करें वैसा भरें?”","मूसा के पीछे उसकी क़ौम के लोगों ने अपने ज़ेवरों (आभूषणों) से एक बछड़े (बछड़े) का पुतला बना लिया जिसमें से जमानत (गाय) की सी आवाज़ निकलती थी। मगर फिर भी उनहों ने उसे माबूद बना लिया और वो सख्त जालिम थे","फिर जब उनकी फरेब खुदगी का तिलिस्म टूट गया और उनहों ने देख लिया के दर हकीकत वो गुमराह हो गए हैं तो कहने लगे के \"अगर हमारे रब ने हमपर रहम न फरमाया और हमसे दरगुजर ना किया तो हम बरबाद हो जायेंगे”","उधर से मूसा गुस्से और रंज में भरा हुआ अपनी क़ौम की तरफ पलटा। आते ही उसने कहा \"बहुत बुरी जानशिनी कि तुम लोगों ने मेरे बाद! क्या तुमसे इतना सब्र ना हुआ के अपने रब के हुकुम का इंतज़ार कर लेते?\" और तख्तियां फेंक दी और अपने भाई (हारून) के सर के बाल पकड़ कर उसे खींचा। हारून ने कहा \"ऐ मेरी मां के बेटे, इन लोगों ने मुझे दबाया लिया और करीब था के मुझे मार डाला। पास तू दुश्मनों को मुझपर हंसने का मौका ना दे और इस जालिम गिरो ​​के साथ मुझे ना शामिल कर\"","तब मूसा ने कहा \"ऐ रब, मुझे और मेरे भाई को माफ कर और हमें अपनी रहमत में दखल फरमा, तू सबसे बढ़कर रहीम है।\"","(जवाब में इरशाद हुआ के) \"जिन लोगों ने बचदे (बछड़े) को माबूद बनाया वो जरूर अपने रब के गजब में गिरफ़्तार होकर रहेंगे और दुनिया की ज़िंदगी में ज़लील होंगे। झूठ घड़ने वालों को हम ऐसे ही सजा देते हैं","और जो लोग बुरे अमल करें फिर तौबा कार्लें और ईमान ले आएं तो यकीनान इस तौबा ओ ईमान के बाद तेरा रब दरगुजर और रहम फरमाने वाला है”","फिर जब मूसा का गुस्सा ठंडा हुआ तो उसने वो तख्तियां उठा ली जिनकी तहरीर (लेखन) में हिदायत और रहमत थी उन लोगों के लिए जो अपने रब से डरते हैं","और उसने अपनी क़ौम के सत्तर (सत्तर) आदमियों को मुंतखब किया ता-के वो (उसके साथ) हमारे मुकर्रर किये हुए वक्त पर हाजिर हों। जब इन लोगों को एक सख्त ज़लज़ले ने आ पकड़ा तो मूसा ने अर्ज़ किया \" ऐ मेरे सरकार, आप चाहते तो पहले ही इनको और मुझे हलाक कर सकते थे, क्या आप हमारे कसूर में जो हम में से चंद नादानों ने किया था हम सबको हलाक कर देंगे? हाँ तो आप की डाली हुई एक आजमाइश थी जिसकी वजह से आप जिसे चाहते हैं गुमराह करते हैं और जिसे चाहते हैं हिदायत बख्श देते हैं हमारे सरपरस्त तो आप ही हैं, पस हमें माफ कर दीजिए और हमपर रहम फरमाइए है","और हमारे लिए इस दुनिया की भलाई भी लिखिए और आख़िरत की भी, हमने आपकी तरफ रूजू कर लिया\"। जवाब में इरशाद हुआ \"सजा तो मैं जिसे चाहता हूं देता हूं, मगर मेरी रहमत हर चीज पर छाई हुई है। और उसे मैं उन लोगों के हक में लिखूंगा जो नफरमानी से परहेज करेंगे, जकात देंगे और मेरी आयत पर ईमान लाएंगे।”","(पास आज ये रहमत उन लोगों का हिसा है) जो पैगम्बर है, नबी ए उम्मी की जोड़ी इख्तियार करें जिसका जिक्र उन्हें अपने हां तौरात और इंजील में लिखा हुआ मिलता है। वो उनको नेकी का हुकुम देता है, बुरी (सभी भ्रष्ट चीजें) से रुका है, उनके लिए पाक चीजें हलाल और नापाक चीजें हराम करता है, और उन पर से वो बोझ उतरता है जो उन पर लड़य हुए थे और वो बंदिशें खोलता है जिनमें वो बंद हुए थे। लिहाज़ा जो लोग इसपर ईमान लाए और इसकी हिमायत और नुसरत करें और वो हमें रोशनी की जोड़ी इख्तियार करें जो इसके साथ नाज़िल की गई है, वही फलाह पाने वाले हैं","(ऐ मुहम्मद), कहो के “ऐ इंसानो, मैं तुम सब की तरफ हमें खुदा का पैगम्बर हूं जो जमीन और आसमान की बादशाही का मालिक है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, वही जिंदगी बक्शता है और वही मौत देता है। है के तुम राह ए रस्त पा लोगे","मूसा की क़ौम में एक गिरोह ऐसा भी था जो हक़ के मुताबिक़ हिदायत करता था और हक़ ही के मुताबिक़ इन्साफ़ करता था","और हमने हमें क़ौम को बारह (बारह) घरानों में तकसीम करके उन्हें मुस्तक़िल गिरोहों की शक्ल दे दी थी। और जब मूसा से उसकी क़ौम ने पानी मांगा तो हमने उसको इशारा किया के फलां चट्टान पर अपनी लाठी मारो। चुनान्चे इस चट्टान से यकायक बारह चश्मे (बारह झरने) फूट निकले और हर गिरो ​​ने अपने पानी लेने की जगह मुतैयां करली। हमने उनपर बादल (बादल) का साया किया और उनपार मन ओ सलवा (बटेर) उतारा, खाओ वो पाक चीजें जो हमने तुमको बख्शी हैं मगर इसके बाद उन्होन ने जो कुछ किया तो हमपर जुल्म नहीं किया बलके आप अपने ही ऊपर जुल्म करते रहें","याद करो वो वक्त जब उनसे कहा गया था कि इस बस्ती में जा कर बास (बस जाओ) जाओ और इसकी अदायगी से अपने हस्ब-ए-मंशा (जो भी चाहो) रोज़ी हासिल करो और हित्ततुन हित्ततुन (पश्चाताप) कहते जाओ और शहर के दरवाज़े में सजदा-रेज़ होते हुए दाख़िल हो। हम तुम्हारी खातें माफ़ करेंगे और नेक राविया रखने वालों को मज़ीद फ़ज़ल से नवाज़ेंगे”","मगर जो लोग उनमें से ज़ालिम थे उनहों ने हमें बात को जो उनसे कहीं गई थी बदल डाला, और नतीज़ा ये हुआ के हमने उनके ज़ुल्म की पैदाइश में असमान आसमान से अज़ाब भेज दिया","और ज़रा उनसे बस्ती का हाल भी पूछो जो समंदर के किनारे थे, उन्हें याद दिलाओ वो वाकिया के वहां के लोग सब्त (सब्बाथ/हफ्ते) के दिन एहकाम ए इलाही की ख़िलाफ़ वारज़ी करते थे और ये के मछलियां (मछलियां) सब्त के दिन उबर कर सात (पानी की सतह) पर उनके सामने आती थी और सब्त के सिवा बाकी दिनों में नहीं आती थी। ये इसलिए होता था कि हम उनकी नफरमानियों की वजह से उनको आजमाइश में डाल रहे थे","और यहीं ये भी याद दिलाओ के जब उनमें से एक गिरोह ने दूसरे गिरो ​​से कहा था के \"तुम ऐसे लोगों को क्यों हिदायत करते हो जिन्होनें अल्लाह हलाक करने वाला या सच साज़ा देने वाला है'' तो उनको ने जवाब दिया था के ''हम ये सब कुछ तुम्हारे रब के हुज़ूर अपनी मज़ीरत (बहाना) पेश करने के लिए करते हैं और इस उम्मीद पर करते हैं के शायद ये लोग उसकी नफ़रमानी से परहेज़ करने लगें।”","आख़िर ए कार जब वो उन हिदायतों को बिल्कुल ही फ़रामोश कर गए जो उन्हें याद करई गई पतली तो हमने उन लोगों को बचा लिया जो बुराई से रोते थे और बाकी सब लोगों को जो ज़ालिम थे उनकी नफ़रमानियों पर सिर्फ अज़ाब में पकड़ लिया","फिर जब वो पूरी सरकशी के साथ वही काम किये चले गये जिसमें उन्हें रोका गया था, तो हमने कहा के बंदर हो जाओ ज़लील और ख्वार","और याद करो जबके तुम्हारे रब ने एलान करदिया के “वो कयामत तक बराबर ऐसे लोग बानी इजराइल पर मुसल्लत करता” रहेगा जो उनको बेहतरीन अज़ाब देंगे।” यकीनन तुम्हारा रुब सज़ा देने में तेज़-दस्त है और यकीनन वो दरगुज़ार और रहम से भी काम लेने वाला है","हमने उनको ज़मीन में टुकड़े-टुकड़े करके बहुत से क़ौमों में तकसीम कर दिया, कुछ लोग इनमें शामिल थे और कुछ इसे मुख़्तलिफ़ और हम उनको अच्छे और बुरे हालात से आज़माइश में मुब्तिला करते रहे के शायद ये पलट आएं","फिर अगली नसलों के बाद ऐसे ना-खलाफ लोग उनके जानशीन (उत्तराधिकारी) हुए जो किताब ए इलाही के वारिस होकर इसी दुनिया ए दानी के फायदे (इस दुनिया का सामान) समित-ते हैं और कहते हैं के तवक्कू है हमें माफ कर दिया जाएगा। और अगर वही माता ए दुनिया फिर सामने आती है तो फिर लपक कर उसे ले लेते हैं। क्या उनसे किताब का अहद नहीं लिया जा चुका है कि अल्लाह के नाम पर वही बात कहे जो हक हो? और ये खुद पढ़ चुके हैं जो किताब में लिखा है, आख़िरत की क़यामगाह तो खुदा-टार्स लोगों के लिए ही बेहतर है, क्या तुम इतनी सी बात नहीं समझते","जो लोग किताब की किताब पढ़ते हैं और जिन्होन ने नमाज़ क़याम रक्खी है, यकीनन ऐसे नए किरदार लोगों का अजर हम जया नहीं करेंगे","उन्हें वो वक्त भी कुछ याद है जबके हमने पहाड़ को हिला कर उस तरफ इस तरह छा दिया था के गोया वो छतरी (छाता/छतरी) है, और ये गुमान कर रहे थे के वो अंदर आ पड़ेगा, और हम वक्त हमने उनसे कहा था कि जो किताब हम तुम्हें दे रहे हैं इसे मज़बूती के साथ थामो (पकड़ो) और जो कुछ इसमें लिखा है उसे याद रखो, तवक्कू है के तुम गलत-रवी से बचे रहोगे","और (ऐ नबी), लोगों को याद दिलाओ वो वक्त जबके तुम्हारे रब ने बनी आदम की पुश्तों से उनकी नाक को निकला था और उन्हें खुद उनके ऊपर गवाह बनाते हुए पूछा था, “क्या मैं तुम्हारा रुब नहीं हूं?” कयामत के रोज़ ये ना कहदो के \"हम तो इस बात से खबर थे\"","या ये ना कहने लगो के \"शिर्क की इब्तिदा तो हमारे बाप दादा ने हमसे पहले की थी और हम बाद को उनकी नाक से पैदा हुए, फिर क्या आप हमें कसूर में पकड़ते हैं जो गलत काम लोगों ने किया था”","देखो, इस तरह हम निशानियां वाज़ेह तौर पर पेश करते हैं और इसलिए करते हैं के ये लोग पलट आते हैं","और (ऐ मुहम्मद), इनके सामने उस शक्स का हाल बयान करो जिसको हमने अपनी आयत का इल्म अता किया था मगर वो उनकी पाबंदी से निकल भागा. आख़िर ए कार शैतान उसके पीछे पड़ गया यहाँ तक के वो भटकने वालों में शामिल होकर रहा","अगर हम चाहते तो उसे उन आयतों के ज़रिये से बुलंदी अता करते, मगर वो तो ज़मीन ही की तरफ़ झुक कर रह गया और अपनी ख्वाहिश ए नफ़्स ही के पीछे पड़ा रहा, उसकी हालात कुत्ते की सी हो गई के तुम उसपर हमला करो तब भी ज़ुबान लटके रहे और उसे छोड़ दो तब भी ज़ुबान लटके रहे। यही मिसाल है उन लोगों की जो हमारी आयत को झुठलाते हैं। तुम ये हिकायत (दृष्टांत) इनको सुनाते रहो, शायद के ये कुछ गौर ओ फ़िक्र करें","बड़ी ही बुरी मिसाल है ऐसे लोगों की जिन्होनें हमारी आयतों को झुटलाया, और वो आप अपने ही ऊपर ज़ुल्म करते रहे हैं","जिसे अल्लाह हिदायत बख्शी बस वही राह-ए-रास्त पाता है और जिसको अल्लाह अपनी रहनुमाई से मेहरून करदे वही नाकाम ओ ना-मुराद होकर रहता है","और ये हकीकत है के बहुत से जिन्न और इंसान ऐसे हैं जिनको हमने जहन्नुम के लिए पैदा किया है। उनके पास दिल हैं मगर वो उन्हें सोचते नहीं, उनके पास आंखें हैं मगर वो उन्हें देखते नहीं, उनके पास कान हैं मगर वो उन्हें सुनते नहीं। वो जानवरों की तरह हैं बलके उनसे भी ज्यादा गुजरे। ये वो लोग हैं जो गफ़लत में खो गए हैं","अल्लाह अच्छे नमो का मुस्तहिक़ है। उसको अच्छे ही नामो से पुकारो, और उन लोगों को छोड़ दो जो उसका नाम रखने में रास्ते से मुन्हारिफ हो जाते हैं। जो कुछ वो करते रहेंगे उसका बदला वो पा कर रहेंगे","हमारी मख़लूक़ में एक गिरोह ऐसा भी है जो ठीक ठीक हक़ के मुताबिक हिदायत और हक़ ही के मुताबिक इन्साफ़ करता है","रहे वो लोग जिन्होन ने हमारी आयत को झुटला दिया है, तो उन्हें हम ब-तदरीज (कदम दर कदम) ऐसे तरीक़े से तबाही की तरफ ले जायेंगे के उनको ख़बर तक न होगी","मैं उनको ढील दे रहा हूँ, मेरी चाल का कोई तोड़ नहीं है","और क्या इन लोगों ने कभी सोचा नहीं? इनके रफीक पर जुनून का कोई असर नहीं है, वो तो एक खबरदार है जो (बुरा अंजाम सामने आने से पहले) साफ साफ मुतनब्बे (चेतावनी) कर रहा है","क्या इन लोगों ने आसमान ओ जमीन ए इंतजाम पर कभी गौर नहीं किया और किसी चीज को भी जो खुदा ने भुगतान की है आंखें खोल कर नहीं देखा? और क्या ये भी अनहोन ने नहीं सोचा के शायद इनकी मोहलत ए जिंदगी पूरी होने का वक्त करीब आ लगा हो? फिर आख़िर पैगंबर की इस तम्बीह (चेतावनी) के बाद और कौन सी बात ऐसी हो सकती है जिसपर ये ईमान लायें","जिसको अल्लाह रहनुमाई से महरूम करदे उसके लिए फिर कोई रहनुमा नहीं है, और अल्लाह इन्हें इनकी सरकशी ही में भटकता हुआ छोड़ देता है","ये लोग तुमसे पूछते हैं कि आख़िर वो क़यामत की घड़ी कब नाज़िल होगी? कहो\"इसका इल्म मेरे रब ही के पास है, उसे अपना वक्त पर वही जाहिर करेगा। आसमान और जमीन में वो बड़ा वक्त होगा। वो तुम्हारा अचानक आ जाएगा\"। ये लोग उसके मुतालिक तुमसे इस तरह पूछते हैं गोया के तुम उसकी खोज में लगे हुए हो। कहो, \"उसका इल्म तो सिर्फ अल्लाह को है मगर अक्सर लोग इस हकीकत से ना-वाक़िफ़ हैं\"","(ऐ मुहम्मद), इनसे कहो \"मैं अपनी जात के लिए किसी नाफ़े (फ़ैयदे) और नुक्सान का इख्तियार नहीं रखता, अल्लाह ही जो कुछ चाहता है वो होता है और अगर मुझे गैब का इल्म होता तो मैं बहुत से फ़ायदे अपने लिए हासिल करता हूं और मुझे कभी कोई नुक्सान न मिलता। मैं तो महज़ एक खबरदार करने वाला और खुश-खबरी सुनने वाला हूं उन लोगों के लिए जो मेरी बात माने।''","वो अल्लाह ही है जिसने तुम्हें एक जान से बचाया और उसकी जिंदगी से उसका जोड़ा बनाया ता-के उसके पास सुकून हासिल करे। फिर जब मर्द ने औरत को धन्यवाद लिया तो उसे एक खफीफ सा हमाल रह गया जिसके लिए वो चलती फिरती रही, फिर जब वो बोझल हो गई तो दोनों ने मिलकर अल्लाह, अपने रब से दुआ की के अगर तू नहीं हमको अच्छा सा बच्चा दिया तो हम तेरे शुक्र गुजार होंगे","मगर जब अल्लाह ने उनको एक सही ओ सलीम बच्चा दे दिया तो वो उसकी इस बख्शीश ओ इनायत में दुसरों को उसका शरीक ठहरना लगे। अल्लाह बहुत बुलंद ओ बदले में है मुशरिकाना बातों से जो ये लोग करते हैं","कैसी नादान हैं ये लोग के उनको खुदा का शरीक ठहरते हैं जो किसी चीज को भी पेदा नहीं करते बलके खुद पेदा किए जाते हैं","जो ना उनकी मदद कर सकते हैं और ना आप अपनी मदद ही पर कादिर हैं","अगर तुम उन्हें सीधी राह पर आने की दावत दो तो वो तुम्हारे पीछे ना आएं, तुम ख्वा उन्हें पुकारो या खामोश रहो, दोनों सूरतों में तुम्हारे लिए यक्सन ही रहे","तुम लोग खुदा को छोड़ कर जिन्हे पुकारते हो वो तो महज़ बंदे (गुलाम) हैं जैसे तुम बंदे हो। उनसे दुआएं मांग देखो. ये तुम्हारी दुआओं का जवाब दें अगर उनके बारे में तुम्हारा ख़यालत सही है","क्या ये पांव (पैर) रखते हैं कि उन्हें चलें? क्या ये हाथ रखते हैं के उन्हें पकाएँ? क्या ये आंखें रखते हैं कि उन्हें देखें? क्या ये कान रखते हैं के उनसे सुने? (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो के “ बुला लो अपने ठहरे हुए शरीकों को फिर तुम सब मिल कर मेरे खिलाफ तदबीरें (योजना/कथानक) करो और मुझे हरगिज़ मोहलत न दो","मेरा हामी-ओ-नासिर (अभिभावक) वो खुदा है जिसने ये किताब नाज़िल की है, और वो नए आदमियों की हिमायत करता है","बा-खिलाफ इसके तुम जिन्हें खुदा को छोड़ कर पुकारते हो वो ना तुम्हारी मदद कर सकते हैं और ना खुद अपनी मदद ही करने के काबिल हैं","बाल्के अगर तुम उन्हें सीधी राह पर आने के लिए कहो तो वो तुम्हारी बात सुन भी नहीं सकती, बा-ज़ाहिर तुमको ऐसा नज़र आता है के वो तुम्हारी तरफ़ देख रहे हैं मगर फ़िल-वाक़े वो कुछ भी नहीं देखते”","(ऐ नबी), नरमी ओ दरगुज़र का तरीक़ा इख़्तियार करो, मारूफ़ की तालक़ीन किये जाओ (आदेश दो) अच्छा), और जाहिलों से ना उलझो","अगर कभी शैतान तुम्हें अल्लाह की पनाह मांगो, वो सब कुछ सुनने और जाने वाला है","हकीकत में जो लोग मुत्तकी (अल्लाह से डरने वाले/पवित्र) हैं उनका हाल तो ये होता है के कभी शैतान के असर से कोई बुरा ख्याल अगर उन्हें छू भी जाता है तो वो जानवर चौकन्ने (अलर्ट) हो जाते हैं और फिर उन्हें साफ नजर आने लगता है के उनके लिए सही तारीख-कर क्या है","रहे उनके (यानी शैतान के) भाई बंद, तो वो उनको उनकी कजरावी में खिंचे (त्रुटि में गहराई से) लिए चले जाते हैं और उन्हें भटकने में कोई कसर नहीं उठता","(ऐ नबी), जब तुम लोगों के सामने कोई निशानी (यानी मोअजिज़ा) पेश नहीं करते तो ये कहते हैं कि तुमने अपने लिए कोई निशाना क्यों नहीं इंतखाब किया? इनसे कहो \"मैं तो सिर्फ हमें वही की जोड़ी करता हूं जो मेरे रब ने मेरी तरफ भेजी है, ये बसीरत (दृष्टि) की रोशनी हैं तुम्हारे रब की तरफ से और हिदायत और रहमत है उन लोगों के लिए जो इसे कबूल करें","जब कुरान तुम्हारे सामने पढ़ा जाए तो इसे।\" तवज्जु से सुनो और खामोश रहो, शायद के तुमपर भी रहमत हो जाए”","(ऐ नबी), अपने रुब को सुबह ओ शाम याद किया करो दिल ही दिल में ज़ारी (विनम्रता) और खौफ के साथ, और जुबान से भी हल्की आवाज के साथ। तुम उन लोगों में से ना हो जाओ जो गफ़लत में पड़े हुए हैं","जो फ़रिश्ते तुम्हारे रब के हुज़ूर तकर्रब का मुकाम रखते हैं वो कभी अपनी बदाई के घमंड में आकर उसकी इबादत से मुँह नहीं मोड़ते और उसकी तस्बीह करते हैं, और उसके आगे झुके रहते हैं","तुमसे अनफाल (युद्ध की लूट/गनीमत के माल) के मुतालिक पूछते हैं? कहो \"ये अनफ़ल तो अल्लाह और उसके रसूल के हैं, लेकिन तुम लोग अल्लाह से डरो और अपने आपस के तालुकात दुरुस्त करो और अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करो अगर तुम मोमिन हो\"","सच्चे एहले ईमान तो वो लोग हैं जिनके दिल अल्लाह का ज़िक्र सुनकर डर लगता है (भयभीत) जाते हैं और जब अल्लाह की आयत उनके सामने पड़ती है तो उनका ईमान बढ़ जाता है और वो अपने रब पर ऐतमाद (भरोसा) रखते हैं","जो नमाज कायम करते हैं और जो कुछ हमने उनको दिया है उसमें से (हमारी राह में) खर्च करते हैं","ऐसे ही लोग हक़ीक़ी मोमिन हैं। उनके लिए उनके रुब के पास बड़े दर्जे हैं, कसूरों से दरगुज़ार है और बेहतरीन रिज़क है","(इस माल ए गनीमत के मामले में भी वैसी ही सूरत पेश आ रही है जैसी उस वक्त पेश आई थी जबके) तेरा रुब तुझी हक़ के साथ तेरे घर से निकल लाया था और मोमिनो में से एक गिरोह को ये सख्त नागावर था","वो उस हक़ के मामले में तुझसे झगड़ा रहे थे दारान हाल (जबकि) ये के वो साफ़ साफ़ नुमायन हो चूका था, उनका हाल ये था के गोया वो आँखें देखे मौत की तरफ हांके (चालित) जा रहे हैं","याद करो वो मौका जबके अल्लाह तुमसे वादा कर रहा था कि दोनों गिरोहोन में से एक तुम्हें मिल जाएगा। तुम चाहते थे के कमज़ोर गिरो ​​तुम्हें मिले मगर अल्लाह का इरादा ये था के अपने इरशादत से हक़ को हक़ कर दिखाये और काफ़िरों की जद्द काट दे","ता-के हक़ हक़ होकर रहे और बातिल बातिल होकर रह जाये ख्वा मुजरिमों को ये कितना ही नागावर हो","और वो मौका याद करो जबके तुम अपने रब से फरियाद कर रहे थे जवाब में उसने फरमाया के मैं तुम्हारी मदद के लिए पै डर पै एक हजार फरिश्ते भेज रहा हूं","ये बात अल्लाह ने तुम्हें सिर्फ इसलिए बताया है कि तुम्हें खुश-खबरी हो और तुम्हारा दिल इसे मुतमइन हो जाए। वरना मदद तो जब भी होती है अल्लाह ही की तरफ से होती है। यकीनन अल्लाह ज़बरदस्त और दाना (बुद्धिमान) है","और वह वक्त जबके अल्लाह अपनी तरफ से गुनाह (उनींदापन) की शकल में तुम्हारे इत्मिनान ओ बे-खौफी की कैफियत तारी कर रहा था, और आसमान से तुम्हारे ऊपर पानी बरसा रहा था ता-के तुम्हें पाक करे और तुमसे शैतान की डाली हुई नजासत दूर करे और तुम्हारी हिम्मत बंधाए और इसके जरीए से तुम्हारे कदम जमादे","और वह वक्त जबके तुम्हारा रब फरिश्तों को इरशारा कर रहा था के \" मैं तुम्हारे साथ हूं, तुम एहले ईमान को साबित कदम रखो, मैं अभी काफिरों के दिलों में रोब (आतंक) डालता हूं। पस तुम उनकी गर्दन पर ज़र्ब (हड़ताल) और जोड़ जोड़ पर चोट लगाओ”","ये इस तरह लोगों ने अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला किया। और जो अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला करे अल्लाह उसके लिए कड़ी सजा दे","ये है तुम लोगों की सजा, अब इसका मजा चक्खो, और तुम्हें मालूम हो के हक का इनकार करने वालों के लिए दोज़ख का अज़ाब है","ऐ ईमान लानी वालों, जब तुम एक लश्कर की सूरत में कुफ्फार से दो-चार (मुठभेड़) हो तो उनके मुकाबले में पीछे हटो (अपनी पीठ मोड़ो)","जिसने ऐसे मौके पर पीठ पहरी, इल्ला ये के जंगी चाल के दौरे पर ऐसा करे या किसी दूसरी फौज से जा मिल्ने के लिए, तो वो अल्लाह के गजब में घिर जाएगा, उसका ठिकाना जहन्नुम होगा। और वो बहुत बुरी जाए बाज़ गस्त (बुरी मंजिल) है","पास हक़ीक़त ये है के तुमने उन्हें क़तल नहीं किया बलके अल्लाह ने उनको क़त्ल किया, और तू नहीं नहीं फेंका बलके अल्लाह ने फेंका (और मोमिनों के हाथ जो इस काम में इस्तमाल किए गए हैं) तो ये इसलिए था के अल्लाह मोमिनो को एक बेहतरीन आज़माइश से कामियाबी के साथ गुज़ार दे। यकीनन अल्लाह सुनने वाला और जाने वाला है","ये मामला तो तुम्हारे साथ है और काफिरों के साथ मामला ये है के अल्लाह उनकी चालों को कामजूर करने वाला है","(काफिरों से कहदो में) “अगर तुम फैसला चाहते थे तो लो, फैसला तुम्हारे सामने आ गया। अब बाज़ आ जाओ तो तुम्हारे लिए बेहतर है। वरना फिर पलट कर उसी का इरादा करोगी तो हम भी इसी सजा का इआदा करेंगे और तुम्हारी जमीअत, तुम्हारे कुछ काम न आ सकेगे।'","","उन लोगों की तरह न हो जाओ जिन्हों ने कहा के हमने सुना, हालंके वो नहीं सुनते","यकीनन खुदा के नाज़दीक बदतरीन क़िसम के जानवर वो बाहर गूँगे लोग हैं जो अक्ल से काम नहीं लेते","अगर अल्लाह को मालूम होता के उन्हें कुछ भी बुलाया जाता है तो वो जरूर उन्हें सुनने की तौफीक देता, (लेकिन भलाई के बगैर) अगर वो उनको सुनता तो वो बेरूखी के साथ मुंह फेर जाते","ऐ ईमान लाने वालों, अल्लाह और उसके रसूल की पुकार पर लब्बैक कहो जबके रसूल तुम्हें उस चीज की तरफ बुलाए जो तुम्हें जिंदगी बक्शने वाली है, और जान रक्खो के अल्लाह आदमी और उसके दिल के दरमियान हयाल है, और उसकी तरफ तुम समते जाओगे","और बच्चों हमें फिटने से जिसकी शामत मखसूस तौर पर सिर्फ उन्हीं लोगों तक महदूद ना रहेगी जिन्हों ने तुम में से गुनाह किया हो, और जान रक्खो के अल्लाह सख्त सजा देने वाला है","याद करो वो वक्त जबके तुम थोड़े थे, जमीन में तुमको बे-ज़ोर समझ जाता था, तुम डरते रहते थे के कहीं लोग तुम्हे मिटा ना दीन. फिर अल्लाह ने तुमको जाये पनाह मुहैय्या करदी, अपनी मदद से तुम्हारे हाथ मज़बूत किये और तुम्हें अच्छा रिज़्क मिल गया, शायद के तुम शुक्र-गुज़ार बनो","ऐ ईमान लाने वालों, जानते बुझते अल्लाह और उसके रसूल के साथ खयानत(बेवफा) ना करो, अपनी अमानतों में गद्दारी के मुर्तकीब न हो","और जां रख्खो के तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद हकीकत में समां ए आजमाइश हैं और अल्लाह के पास अजर देने के लिए बहुत कुछ है","ऐ ईमान लाने वालों, अगर तुम अल्लाह से खुदा-तरसी इख्तियार करोगे तुम्हारे लिए कसौटी (मानदंड) बहम पाहुंचा देगा और तुम्हारी बुराइयों को तुमसे दूर कर देगा, और तुम्हारे कसूर माफ कर देगा। अल्लाह बड़ा फ़ज़ल फ़रमाने वाला है","वो वक़्त भी याद करने के काबिल है जबके मुनकिरीन ए हक़ तेरे ख़िलाफ़ तदबीरें सोच रहे थे के तुझसे क़ैद करदें या क़तल कर डालें या जिला-वतन (दूर भगाओ) करदें। वो अपनी चालें चल रहे थे और अल्लाह अपनी चाल चल रहा था। और अल्लाह सब से बेहतर चाल चलने वाला है","जब उनको हमारी आयतें सुनाई जाती थीं तो कहते थे के \"हां सुन लिया हमने। हम चाहें तो ऐसी ही बातें हम भी बना सकते हैं। ये तो वही पुरानी कहानियां हैं जो पहले से लोग कहते चले आ रहे हैं\"","और वो बात भी याद है जो उन्होन ने कही थी के \"खुदया अगर ये हकीकत है और तेरी तरफ से है तो हमपर आसमान से पत्थर बरसा दे, या कोई दर्दनाक अजब हमपर ले आ\"","हमें अल्लाह का वक्त उन्पर अजाब नाजिल करने वाला ना था जबके तू उनके दरमियान मौजुद था, और ना अल्लाह का ये क़ायदा है के लोग इस्तेग़फ़र कर रहे हैं और वो उनको अज़ाब दे दे","लेकिन अब क्यों ना वो उन्पर अज़ाब नाज़िल करे जबके वो मस्जिद ए हराम का रास्ता रोक रहे हैं, हलांके वो मस्जिद के जायज है मुतवल्ली (अभिभावक) नहीं हैं। इसके जायज मुतवल्ली तो सिर्फ एहले तकवा ही हो स्केट हैं मगर अक्सर लोग इस बात को नहीं जानते","बैतुल्लाह के पास उन लोगों की नमाज क्या होती है, बस सीतियां बजाते और तालियां बजाते हैं। अब लो, इस अज़ाब का मजा चक्को अपने हमें इंकार ए हक़ की याद में जो तुम करते रहे हो","जिन लोगों ने हक़ को मन्ने से इंकार किया है वो अपने माल खुदा के रास्ते से रुकने के लिए सिर्फ कर रहे हैं और अभी और खर्च करते रहेंगे, मगर आख़िर ए कार यही कोशिशें उनके लिए पछतावे का सबाब बनेंगे, फिर वो मगलूब होंगे, फिर ये काफ़िर जहन्नुम की तरफ घेर ले जायेंगे","ता-के अल्लाह गंदगी को पाकीज़गी से मंत्र कर अलग करे और हर क़िस्म की गंदगी को मिला कर इकट्ठ करे फिर है पलांदे (बंडलों) को जहन्नुम में झोंक दे, यहीं लोग असली दीवालिये (हारे हुए) हैं","(ऐ नबी), उन काफिरों से कहो के अगर अब भी बाज़ आ जाएं तो जो कुछ पहले हो चुका है उसे शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन अगर ये उसकी पिछली राविश का इरादा करेंगे तो गुज़िश्ता क़ौम के साथ जो कुछ हो चुका है वो सबको मालूम है","ऐ ईमान लाने वालों, काफिरों से जंग करो यहां तक ​​के फ़ितना बाकी न रहे और दीन पूरा का पूरा अल्लाह के लिए हो जाए, फिर अगर वो फ़िटने से रुक जाएं तो उनके अमल का देखने वाला अल्लाह है","और अगर वो ना माने तो जान रक्खो के अल्लाह तुम्हारा सरपरस्त है और वो बेहतरीन हामी ओ मददगार है","और तुम्हीं मालूम हो के जो कुछ माल ए गनीमत तुमने हासिल किया है उसका पांचवां (पांचवां) हिसा अल्लाह और उसके रसूल और रिश्तेदारों और यतीमों और मिस्कीनो और मुसाफिरों के लिए है. अगर तुम ईमान लाए हो अल्लाह पर और उस चीज पर जो फैसले के रोज, यानी दोनों फौजों की लड़ाई (युद्ध में सेनाएं मिलीं) के दिन, हमने अपने बंदे पर नाज़िल की थी, (तो ये हिसा बा-ख़ुशी अदा करो)। अल्लाह हर चीज पर कादिर है","याद करो वो वक्त जब तुम वादी के इस जानिब था और वो दूसरा जानिब पड़ाव (डेरा डाले हुए) डाले हुए थे और काफिला (कारवां) तुमसे नीचे (साहिल) की तरफ था। अगर कहीं पहले से तुम्हारे और उनके दरमियान मुक़ाबले की क़रारदाद (आपसी नियुक्ति) हो चुकी होती तो तुम ज़रूर इस मौक़े पर पहलू ताहि (अस्वीकार) कर लेते। लेकिन जो कुछ पेश आया वो इस लिए था कि जिस बात का फैसला अल्लाह कर चूका था उसे जहूर में ले आए ता-के जिसे हलाक होना है तो दलील ए रोशन के साथ हलक हो और जिसे जिंदा रहना है वो दलील ए रोशन के साथ जिंदा रहे। यकीनन खुदा सुनने वाला और जाने वाला है","और याद करो वो वक्त जबके (ऐ नबी), खुदा उनको तुम्हारे ख्वाब में थोड़ा दिखा रहा था। अगर कहीं वो तुम्हें उनकी तदाद ज्यादा दिखा देता तो जरूर तुमलोग हिम्मत हार जाते और लड़ाई के मामले में झगड़ा शुरू कर देते। लेकिन अल्लाह ही ने इसे तुम्हें बचाया। यकीनन वो सीने का हाल तक जानता है","और याद करो जबके मुकाबले के लिए खुदा ने तुम लोगों की निगाहों में दुश्मनों को थोड़ा दिखाया और उनकी निगाहों में तुम्हें काम करके पेश किया, ता-के जो बात होनी थी उसे अल्लाह ज़हूर में ले आए। और आख़िर ए कार सारी ममलात अल्लाह ही की तरफ रूजू करते हैं","ऐ ईमान लाने वालों, जब किसी गिरो ​​से तुम्हारा मुकाबला हो तो साबित क़दम रहो और अल्लाह को कसरत से याद करो, तवक्कू है के तुम्हें कामयाबी नसीब होगी","और अल्लाह और उसके रसूल की इत्ता करो और आपस में झगड़ा नहीं वरना तुम्हारे अंदर कमज़ोरी पैदा हो जाएगी और तुम्हारी हवा उखड़ जाएगी। सब्र से काम लो, यकीनन अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है","और उन लोगों के साथ रंग-ढंग ना इख्तियार करो जो अपने घरों से इतराते (खुश) और लोगों को अपनी शान दिखाते हुए निकले और जिनका रवीश ये है के अल्लाह के रास्ते से रोते हैं। जो कुछ वो कर रहे हैं वो अल्लाह की गिरफ़्तार से बाहर नहीं है","ज़रा ख़याल करो हमें वक़्त का जबके शैतान ने लोगों के दिलों में इनकी निगाहों में ख़ुशनुमा बना कर दिखाया था और इनसे कहा था के आज कोई तुम्हारे गालिब नहीं आ सकता, और ये के मैं तुम्हारे साथ हूँ. मगर जब दोनों गिरोहों का आमना सामना हुआ तो वो उल्टे पांव फिर गया और कहने लगा के मेरा तुम्हारा साथ नहीं है, मैं वो कुछ देख रहा हूं जो तुमलोग नहीं देखते। मुझे खुदा से डर लगता है और खुदा बड़ी ताकत सजा देने वाला है","जबके मुनाफिकेन और वो सब लोग जिनके दिलों को रोग लगा हुआ है, कह रहे थे के इन लोगों को तो इनके दीन ने खबत (भ्रम) में मुब्तिला कर रखा है, हलांके अगर कोई अल्लाह पर भरोसा करे तो यकीनन अल्लाह बड़ा ज़बरदस्त और दाना है","काश तुम हमें हालात को देख सकते हो जबके फरिश्ते मकतूल ​​काफिरों की रूहें क़ब्ज़ कर रहे थे, वो उनके चेहरे और उनके कुल्होन पर ज़र्ब लगते जाते थे और कहते जाते थे “लो अब जलने की सजा भुगतो","ये वो जजा है जिसका सामान तुम्हारे अपने हाथों ने पेशगी मुहैय्या कर रखा था। वरना अल्लाह तो अपने बंदों पर ज़ुल्म करने वाला नहीं है।”","ये मामला उनके साथ उसी तरह पेश आया जिस तरह आले फिरौन और उन्हें पहले के दूसरे लोगों के साथ पेश आता रहा है, के उनहों ने अल्लाह की आयतों को मानने से इनकार किया और अल्लाह ने उनके गुनाहों पर उन्हें पकड़ लिया। अल्लाह क़ुव्वत रखता है और सख़्त सज़ा देने वाला है","ये अल्लाह की इस सुन्नत के मुताबिक हुआ के वो किसी नियामत को जो हमें किसी क़ौम को आता है कि हो हमें वक़्त तक नहीं बदलता जब तक के वो क़ौम खुद अपनी तर्ज़ ए अमल को नहीं बदल देती। अल्लाह सब कुछ सुनने और जाने वाला है","आले फिरौन और उनसे पहले कि क़ौमों के साथ जो कुछ पेश आया वो इसी ज़ब्ते के मुताबिक़ था। उनहों ने अपने रुब की आयतों को झुटलाया, तब हमने उनके गुनाहों की याद में उन्हें हलाक किया और आले-फिरौं को परेशान कर दिया, ये सब जालिम लोग थे","यकीनन अल्लाह के नाज़दीक ज़मीन पर चलने वाली मख़लूक़ में सबसे बेहतर वो लोग हैं जिन्हों ने हक़ को मन्ने से इनकार करदिया फिर किसी तरह वो उसे क़बूल करने पर तैयार नहीं हैं","(खुसूसन) उनमें से वो लोग जिनके साथ तू नहीं मुआहिदा (संविदा) किया फिर वो हर मौके पर उसको तोड़ते हैं और जरा खुदा का खौफ नहीं करते","अगर ये लोग तुम्हें लड़ाई में मिल जाएं तो इनकी ऐसी खबर लो के इनके बाद जो दूसरे लोग ऐसे रवीश इख्तियार करने वाले हों उनके हवास बख्ता (चेतावनी दी) हो जाएं। तवक्कू है के बाद-अहदों के इस अंजाम से वो सबक लेंगे","और अगर कभी किसी क़ौम से ख़यानत (विश्वासघात) का अंदाज़ा हो तो उसके मुहाएद को एलानिया (सार्वजनिक रूप से) उसके आगे फेंक दो, यक़ीनन अल्लाह ख़यानो (विश्वासघाती) को पसंद नहीं करता","मुनकिरीन ई हक़ इस ग़लत फ़हमी में ना रहे के वो बाजी ले गए, यक़ीनन वो हमको हारा नहीं सकते","और तुमलोग, जहां तक ​​तुम्हारे बस चले, ज़्यादा से ज़्यादा ताक़त और तैयार बंधे रहने वाले घोड़े (अच्छी तरह से तैयार घोड़े) उनके मुकाबले के लिए मुहय्या राखो, ता-के इसके ज़रिये से अल्लाह के और अपने दुश्मनों को और उनके अलावा अन्य लोगों को खौफ़ ज़्यादा करो जिन्हे तुम नहीं जानते मगर अल्लाह जानता है। अल्लाह की राह में जो कुछ तुम खर्च करोगे उसका पूरा पूरा बदल तुम्हारी तरफ पलटया जाएगा और तुम्हारे साथ हरगिज ज़ुल्म न होगा","और (ऐ नबी), अगर दुश्मन सुलह ओ सलामती की तरफ मायल हो तो तुम भी उसके लिए आमादा हो जाओ और अल्लाह पर भरोसा करो, यकीनन वही सब कुछ सुनने और जाने वाला है","और अगर वो धोखे की नियत रखे तो तुम्हारे लिए अल्लाह काफी है। वही तो है जिसने अपनी मदद से और मोमिनो के जरीये से तुम्हारी तैद की (आपको मजबूत किया)","और मोमिनो के दिल एक दूसरे के साथ जोड़ दिये। तुम रूह ए ज़मीन की सारी दौलत भी खर्च कर डालते हो इन लोगों के दिल ना जुड़ते लेकिन वो अल्लाह है जिसने इन लोगों के दिल जोड़े। यकीनन वो बड़ा ज़बरदस्त और दाना है","ऐ नबी, तुम्हारे लिए और तुम्हारे जोड़े (अनुयायियों) एहले ईमान के लिए तो बस अल्लाह काफ़ी है","ऐ नबी, मोमिनो को जंग पर उभारो। अगर तुम में से बीस (बीस) आदमी साबिर (जो कायम रहे) माननीय तो दो आरा (दो सौ) पर गालिब आएंगे, और अगर तुम में (सौ) आदमी ऐसे हो तो मुनकिरीन ए हक में से हजार (हजार) आदमियों पर भारी रहेंगे, क्योंकि वो ऐसे लोग हैं जो समझ नहीं सकते रखे","अच्छा, अब अल्लाह ने तुम्हारा बोझ हल्का किया और उसे मालूम हुआ के अभी तुम में कमी है। अगर तुम में से एक (सौ) आदमी साबिर हो तो वो दो आरी (दो सौ) पर हो और एक हजार आदमी ऐसे हो तो दो हजार पर अल्लाह के हुकुम से गालिब आएंगे। और अल्लाह उन लोगों के साथ है जो सब्र करने वाले हैं","किसी नबी के लिए ये ज़ेबा नहीं है के उसके पास क़ैदी होन जब तक के वो ज़मीन में दुश्मनों को अच्छी तरह कुचल ना दे। तुम लोग दुनिया के फ़ायदे चाहते हो, हलांके अल्लाह के पेशे नज़र आख़िर है। और अल्लाह गालिब और हकीम है","अगर अल्लाह का नविस्ता (फरमा) पहले न लिखा जा चुका हो तो जो कुछ तुम लोगों ने लिया है उसकी पैदाइश में तुमको बड़ी सजा दी जाती है","पास जो कुछ तुमने माल हासिल किया है उसे खाओ के वो हलाल और पाक है और अल्लाह से डरते हैं रहो. यकीनान अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","ऐ नबी, तुम लोगों के क़ब्ज़े में जो क़ैदी हैं उन्हें कहो अगर अल्लाह को मालूम हुआ के तुम्हारे दिलों में कुछ ख़ैर है तो वो तुम्हें उससे बढ़ कर देगा जो तुमसे लिया गया है और तुम्हारी ख़तें माफ़ करेगा. अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","लेकिन अगर वो तेरे साथ ख़यानत (विश्वासघात) का इरादा रखते हैं तो इसे पहले वो अल्लाह के साथ ख़यानत कर चुके हैं। चुनांचे उसकी सज़ा अल्लाह ने उन्हें दी के वो तेरे क़ाबू में आ गए। अल्लाह सब कुछ जानता है और हकीम है","जिन लोगों ने ईमान क़बूल किया और हिजरत की और अल्लाह की राह में अपनी जानेन लड़ें और अपने माल खापे, और जिन लोगों ने हिजरत करने वालों को जगह दी और उनकी मदद की, वही दर-असल एक दूसरे के वाली (सहयोगी) हैं। रहे वो लोग जो ईमान तो ले आए मगर हिजरत करके (दार उल इस्लाम में) आ नहीं गए तो उनसे तुम्हारा विलायत (गठबंधन) का कोई तल्लुक नहीं है जब तक के वो हिजरत करके ना आ जाए। हां अगर वो दीन के मामले में तुमसे मदद मांगे तो उनकी मदद करना तुम्हारा फर्ज है लेकिन कोई ऐसी कौम के खिलाफ नहीं जिसमें तुम्हारा मुहाएदा हो। जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे देखता है","जो लोग मुनकिर ए हक़ है वो एक दूसरे की हिमायत करते हैं, अगर तुम ये ना करोगे तो ज़मीन में फ़ितना और बड़ा फ़साद बरपा होगा","जो लोग ईमान लाए और जिन्होन ने अल्लाह की राह में घर बार छोड़े और जिद ओ जहद की और जिन्हों ने पनाह दी और मदद की वही सच्चे मोमिन हैं। उनके लिए ख़तों से दरगुज़र है और बेहतरीन रिज़क है","और जो लोग बाद में ईमान लाए और हिजरत करके आ गए और तुम्हारे साथ मिलकर जिद्द ओ जहद करने लगे वो भी तुम्हीं में शामिल हैं। मगर अल्लाह की किताब में खून के रिश्तेदार एक दूसरे के ज्यादा हकदार हैं। यकीनन अल्लाह हर चीज को जानता है","एलान ए बारात (प्रतिरक्षा) है अल्लाह और उसके रसूल की तरफ से उन मुशरिकेन को जिनसे तुमने मुहैदे (संधियाँ) किये थे","पास तुम लोग मुल्क में चार (चार) माहीन और चल फिर लो और जान रक्खो के तुम अल्लाह को अजीज (निराश) करने वाले नहीं हो, और ये के अल्लाह मुनकिरीन ए हक़ को रुसवा करने वाला है","इत्तिला-ए-आम है अल्लाह और उसके रसूल की तरफ से हज ए अकबर के दिन तमाम लोगों के लिए के अल्लाह मुशरिकेन से बारी उज़-ज़िम्मा (संधि दायित्वों से मुक्त) है और उसका रसूल भी। अब अगर तुम लोग तौबा करो तो तुम्हारे लिए ही बेहतर है और जो मुंह फेरते हो तो खूब समझ लो के तुम अल्लाह को अजीज करने वाले नहीं हो। और (ऐ नबी), इंकार करने वालों को साख अज़ाब की ख़ुशख़बरी सुना दो","बज़ुज़ उन मुशरिकेन के जिनसे तुमने मुहैदे (संधि) किया फिर उन्होन ने अपने अहद को पूरा करने में तुम्हारे साथ कोई कमी नहीं की और ना तुम्हारे ख़िलाफ़ किसी की मदद की, तो ऐसे लोगों के साथ में तुम भी मुद्दत ए मुहैदा तक वफ़ा करो क्योंकि अल्लाह मुत्तक़ियों (पवित्र) ही को पसंद करता है","पास जब हराम माहीने गुजर जाएं तो मुशरिकेन को कत्ल करो जहां पाओ और उन्हें पकड़ो और घेरो और हर घात (घात) में उनकी खबर लें के लिए बैठो. फिर अगर वो तौबा करें और नमाज़ क़याम करें और ज़कात दें तो उन्हें छोड़ दो। अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","और अगर मुशरिकेन में से कोई शक्स पनाह मांग कर तुम्हारे पास आना चाहे (ता-के अल्लाह का कलाम सुने) तो उसे पनाह दे दो यहां तक ​​के वो अल्लाह का कलाम सुनले फिर उसे मामन (सुरक्षा का स्थान) तक पाहुंचा दो, ये है करना चाहिए के ये लोग इल्म नहीं रखते","मुशरिकेन के लिए अल्लाह और उसके रसूल के नाज़दीक कोई अहद आख़िर कैसे हो सकता है? बाज़ुज़ उन लोगों के जिनसे तुमने मस्जिद ए हराम के पास मुहैदा किया था, जब तक वो तुम्हारे साथ सीधे रहे तुम भी उनके साथ सीधे रहो क्योंकि अल्लाह मुत्तक़ियों को पसंद करता है","मगर इनके सिवा दूसरे मुशरिकेन के साथ कोई अहद कैसा हो सकता है जबके उनका हाल ये है कि तुम काबू पा जाओ तो ना तुम्हारे मामले में किसी क़राबत का ज़िक्र करें ना किसी की ज़िम्मेदारी का। वो अपनी जुबान से तुमको राजी करने की कोशिश करते हैं मगर दिल उनको इनकार करते हैं और उनमें से अक्सर फासीक हैं","उन्होन ने अल्लाह की आयत के बदले थोड़ी सी कीमत कबूल कर ली फिर अल्लाह के रास्ते में सद्दे-राह बनकर खड़े हो गए (दूसरों को अपने रास्ते से रोक दिया), बहुत बुरे करतूत थे जो ये करते रहे","किसी मोमिन के मामले में ना ये क़राबत का ज़िम्मा करते हैं और ना किसी अहद की ज़िम्मेदारी का और ज़्यादा हमेशा की तरफ से हुई है","अगर ये तौबा कर लें और नमाज कयाम करें और जकात दें तो तुम्हारे दीनी भाई हैं और जाने वालों के लिए हम अपना एहकाम वाज़ेह किये देते हैं","और अगर अहद करने के बाद ये फिर अपनी कसमों को तोड़ दें और तुम्हारे दीन पर हमले करने शुरू कर दें तो कुफ्र के आलम-बरदारों (सरगना) से जंग करो क्योंकि उनकी कसमों का कोई ऐतबार नहीं, शायद के (फिर तलवार ही के ज़ोर से) वो बाज़ आएंगे","क्या तुम ना लड़ोगे (लड़ाई) ऐसे लोगों से जो अपने अहद तोड़ते रहे हैं और जिन्होन ने रसूल को मुल्क से निकल देने का क़सद (साजिश) किया था और ज़्यादा की इब्तेदा करने वाले वही थे? क्या तुम उनसे डरते हो? अगर तुम मोमिन हो तो अल्लाह से इसका ज़ियादा मुस्तहिक़ है के उससे डरो","उनसे लड़ो, अल्लाह तुम्हारे हाथों से उनको सज़ा दिलवायेगा और उन्हें ज़लील ओ ख़्वार करेगा और उनके मुकाबले में तुम्हारी मदद करेगा और बहुत से मोमिनो के दिल ठंडा करेगा","और उनके कुलूब (दिलों) की जलन मिटा देगा, और जिसे चाहेगा तौबा की तौफीक भी देगा। अल्लाह सब कुछ जानने वाला और दाना (बुद्धिमान) है","क्या तुम लोगों ने ये समझ रखा है कि यूं ही छोड़ दिए जाओगे हालंके अभी अल्लाह ने ये तो देखा ही नहीं के तुम में से कौन वो लोग हैं जिन्हों ने (उसकी राह में) जानफिशानी (अपना पूरा जोर लगाया) की और अल्लाह और उसके रसूल और मोमिनीन के सिवा किसी को जिगरी दोस्त ना बनाया, जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बा-खबर है","मुशरिकेन का ये काम नहीं है के वो अल्लाह की मस्जिद के मुजावर ओ खादिम बने, डरन हाल ये के अपने ऊपर वो खुद कुफ्र की शहादत दे रहे हैन. उनके तो सारे अमल ज़ाय हो गए और जहन्नुम में उन्हें हमेशा रहना है","अल्लाह की मस्जिद के आबाद-कार (मुजावर ओ खादिम) तो वही लोग हो सकते हैं जो अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर को माने और नमाज़ क़याम करें, ज़कात दीन और अल्लाह के सिवा किसी से ना डरें, उन्हीं से ये तवाक्कु है के सीधी राह चलेंगे","क्या तुम लोगों ने हाजियों को पानी पिलाया और मस्जिद ए हराम (खाने काबा) की मुजावरी करने के लिए उस शक्स के काम के बराबर ठहर लिया है जो ईमान लाया अल्लाह पर और रोज ए आखिर पर और जिसने जांफिशानी (जोर दिया) उसकी अत्यंत) कि अल्लाह की राह में? अल्लाह के नाज़दीक तो ये दोनों बराबर नहीं हैं और अल्लाह जालिमों की रहनुमाई नहीं करता","अल्लाह के हन तो उन्ही लोगों का दरजा बड़ा है जो ईमान लाए और जिन्होन ने उसकी राह में घर बार छोड़े और जान ओ माल से जिहाद किया, वही कामयाब हैं","उनका रब उन्हें अपनी रहमत और खुशनुदी और ऐसी जन्नत की बशारत देता है जहां उनके लिए भुगतान ऐश के समान हैं","उन्हें वो हमेशा रहेंगे, यकीनन अल्लाह के पास खिदमत का सिला देने को बहुत कुछ है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपने बापों और भाइयों को भी अपना रफीक (सहयोगी) ना बनाओ अगर वो ईमान पर कुफ्र को तर्जीह (प्रथम) दें, तुम में से जो उनको रफीक (सहयोगी) बनायेंगे वही जालिम होंगे","(ऐ नबी), कहदो के अगर तुम्हारे बाप और तुम्हारे बेटे, और तुम्हारे भाई, और तुम्हारी बीवीयां और तुम्हारे अजीज-ओ-अकारेब (करीबी और प्रियजन) और तुम्हारे वो माल जो तुमने कमाए हैं, और तुम्हारे वो कारोबार (बिजनेस) जिनका मनध (गिरावट) पढ़ जाने का तुमको खौफ है और तुम्हारे वो घर जो तुमको पसंद हैं, तुमको अल्लाह और उसके रसूल और उसकी राह में जिहाद से अज़ीज़-तर हैं तो इंतज़ार करो यहाँ तक के अल्लाह अपना फैसला तुम्हारे सामने ले आए, और अल्लाह फासिक लोगों की रहनुमाई नहीं करता","अल्लाह इस्से पहले बहुत से मौक़े (मौके पर) पर तुम्हारी मदद कर चुका है, अभी गज़वा ए हुनैन के रोज़ (उसकी दस्तगीरी की शान तुम देख चुके हो), उस रोज़ तुम्हें अपनी कसरत ए तड़ाद का गरारा (गर्व) था मगर वो तुम्हारे कुछ काम ना आई और ज़मीन अपनी वुसत के बकवास तुमपर तंग हो गई और तुम पीठ फेर कर भाग निकले","फिर अल्लाह ने अपनी सकीनत रसूल पर और मोमिनीन पर नाज़िल फरमाई और वो लश्कर उतरे जो तुमको नज़र ना आते थे और मुनकिरीन ए हक़ को सज़ा दी के यही बदला है उन लोगों के लिए जो हक़ का इंकार करें","फिर (तुम ये भी देख चुके हो के) इस तरह सजा देने के बाद अल्लाह जिसको चाहता है तौबा की तौफीक भी बख्श देता है, अल्लाह दरगुजर करने वाला और रहम फरमाने वाला है","ऐ ईमान लाने वालों, मुशरिकेन नापाक हैं, लिहाजा इस साल के बाद ये मस्जिद-ए-हराम के करीब न फटकने पाएं, और अगर तुम्हें तंगदस्ती का खौफ है तो बैद नहीं के अल्लाह चाहे तो तुम्हें अपने फजल से गनी करदे, अल्लाह आलिम ओ हकीम है","जंग करो एहले किताब में से उन लोगों के खिलाफ जो अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान नहीं लाते और जो कुछ अल्लाह और उसके रसूल ने हराम करार दिया है उसे हराम नहीं करते और दीन ए हक को अपना दीन नहीं बनाते। (उनसे लड़ो) यहां तक ​​के वो अपने हाथ से जजिया दीन और छोटे बनकर रहें","यहुदी कहते हैं के उज़ैर अल्लाह का बेटा है और इसाई कहते हैं के मसीह अल्लाह का बेटा है। ये बे-हकीकत बातें हैं जो वो अपनी जुबान से निकलते हैं उन लोगों की देखा देखी जो उनसे पहले कुफ्र में मुब्तिला हुए थे। खुदा की मार इनपर, ये कहां से धोखा खा रहे हैं","इन्होन ने अपने उलेमा और दरवेशियों को अल्लाह के सिवा अपना रुब बना लिया है और इसी तरह मसीह इब्न मरियम को भी, हालंके इनको एक माबूद के सिवा किसी की बंदगी करने का हुकुम नहीं दिया गया था, वो जिसके सिवा कोई मुस्तहिक ए इबादत नहीं। पाक है वो इन मुशरिकाना बातों से जो ये लोग करते हैं","ये लोग चाहते हैं अल्लाह की रोशनी को अपनी फुँकों से बुझा दें मगर अल्लाह अपनी रोशनी को मुकम्मल किए बगैर मन्ने वाला नहीं है ख्वाह काफिरों को ये कितना ही नागावार हो","वो अल्लाह हाय है जिसने अपने रसूल को हिदायत और दीन ए हक के साथ भेजा ता-के उसे पूरे जिन ए दीन पर गालिब करदे ख्वा मुशरिकों को ये कितना ही नागावार हो","ऐ ईमान लाने वालों, एहले किताब के अक्सर उलेमा और दरवेशों (भिक्षुओं) का हाल ये है कि वो लोगों के माल बातिल तरीक़ों से खाते हैं और उन्हें अल्लाह की राह से रोकते हैं। दर्दनाक सज़ा की ख़ुश-ख़बरी दो उनको जो सोनी और चांदी जमा करके रखते हैं और वे खुदा की राह में खर्च नहीं करते","एक दिन आएगा के इसी सोनी (गोल्ड) और चांदी पर जहन्नुम की आग ढेकाई जाएगी और फिर इसी से उन लोगों की पेशियां और पहलूओं और पीठों को दागा जाएगा, ये है वो खज़ाना जो तुमने अपने लिए जमा किया था, लो अब अपनी संपत्ति हुई दौलत का मजा चक्खो","हकीकत ये है के महिनो की तड़ाद जब से अल्लाह ने आसमां ओ ज़मीन को पैदा किया है अल्लाह के नवासे (रिकॉर्ड) मैं बारा (बारह) हाय है, और इनमें से चार महीने हराम हैं। यही ठीक ज़ब्ता है चार (चार) में लिहाज़ा महिनो में अपने ऊपर ज़ुल्म न करो और मुशरिकों से सब मिलकर लड़ो (लड़ो) जिस तरह वो सब मिलकर तुमसे लड़ते हैं और जान रक्खो के अल्लाह मुत्तक़ियों ही के साथ हैं","'नसी' [स्थगन (पवित्र महीनों के भीतर प्रतिबंधों का)] कुफ्र में एक मजीद काफिराना हरकत है जिसे ये काफिर लोग गुमराही में मुब्तिला किये जाते हैं। किसी साल एक महीने को हलाल करते हैं और किसी साल उसको हराम करते हैं, ता-के अल्लाह के हराम किये हुए महिनो की ताड़द पूरी भी कर दें और अल्लाह का हराम किया हुआ हलाल भी कर लें। इनके बुरे आमाल इनके लिए ख़ुशनुमा बना दिए गए हैं और अल्लाह मुनकिरीन ए हक़ को हिदायत नहीं दिया करता","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम्हें क्या हो गया के जब तुमसे अल्लाह की राह में निकलने के लिए कहा गया तो तुम ज़मीन से झिझक कर रह गए? क्या तुमने आख़िरत के मुक़ाबले में दुनिया की ज़िंदगी को पसंद किया? ऐसा है तो तुम्हें मालूम हो कि दुनियावी जिंदगी का ये सब सर-ओ-समान आखिरी में बहुत थोड़ा निकलेगा","तुम ना उठोगे तो खुदा तुम्हें दर्दनाक सजा देगा, और तुम्हारी जगह किसी और गिरोह को उठेगा, और तुम खुदा का कुछ भी ना बिगाड़ोगे सकोगे, वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है","तुमने अगर नबी की मदद न की तो कुछ परवा नहीं, अल्लाह उसकी मदद हमें वक्त कर चुका है जब काफिरों ने उसे निकल दिया था, जब वो सिर्फ दो में का दूसरा था, जब वो दोनों घर (गुफा) में थे, जब वो अपने साथी से कह रहा था के \"गम ना कर, अल्लाह हमारे साथ है\" हमें वक्त अल्लाह ने उसपर अपनी तरफ से सुकून ए क़ल्ब (दिल का सुकून) नाज़िल किया और उसकी मदद ऐसे लश्करों से कहा कि जो तुमको नज़र ना आते थे, और काफिरों का बोल नीचा करदिया और अल्लाह का बोल तो उनका हाय है. अल्लाह ज़बरदस्त और दाना ओ बीना है (सर्वशक्तिमान, सर्व-बुद्धिमान)","निकलो, ख्वा हल्के हो या बोझल, और जिहाद करो अल्लाह की राह में अपने मालों और अपनी जानो के साथ, ये तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम जानो","(ऐ नबी), अगर फैयदा सहल-उल-हुसूल (तत्काल लाभ की संभावना) हो और सफर हल्का होता तो वो जरूर तुम्हारे पीछे चलने पर आमदा हो जाती। मगर उन पर तो ये रास्ता बहुत मुश्किल हो गया। अब वो खुदा की कसम खा खा कर कहेंगे के अगर हम चल सकते हैं तो यकीनन तुम्हारे साथ चलते हैं। वो अपने आप को खतरे में डाल रहे हैं, अल्लाह खूब जानता है के वो झूठे हैं","(ऐ नबी), अल्लाह तुम्हें माफ करे, तुमने क्यों उन्हें रुक्सत दे दी? और झूठों (झूठों) को भी तुम जान लेते हैं","जो लोग अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखते हैं वो तो कभी तुमसे ये अंधेरा (अनुरोध) ना करेंगे के उनको ना अपनी जान ओ माल के साथ जिहाद करने से माफ़ रक्खा जाए, अल्लाह मुत्तक़ियों को ख़ूब जानता है","ऐसी डार्कह्वास्टीन (अनुरोध) सिर्फ वही लोग करते हैं जो अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान नहीं रखते, जिनके दिलों में शक्क है और वो अपने शक्क ही में मुतरद्दिद (डगमगाते हुए) हो रहे हैं","अगर वक्त इनका इरादा निकलेगा तो वो इसके लिए कुछ तयारी करते हैं. लेकिन अल्लाह को उनका उठना पसंद ही ना था, इसके लिए उन्होंने उन्हें स्थिर करदिया और केहदिया के साथ रहो बैठने वालों के साथ","अगर वो तुम्हारे साथ निकलते तो तुम्हारे अंदर ख़राबी के सिवा किसी चीज़ का इज़ाफ़ा ना करते, वो तुम्हारे दरमियान फ़िटना परदाज़ी के दौड़-धूप करते हुए, और तुम्हारे गिरो ​​का हाल ये है कि अभी हमसे बहुत से ऐसे लोग मौजूद हैं जो उनकी बातें कान लगा कर सुनते हैं, अल्लाह जालिमों को खूब जानता है","लोगों ने फितना-अंगेज़ी की कोशिशों में इसे पहले भी शामिल किया है और तुम्हें नाकाम करने के लिए ये हर तरह की तदबीरों का उल्टा फेर कर चुके हैं यहां तक ​​के इनकी मर्जी के खिलाफ हक आ गया और अल्लाह का काम होकर रहा","मेरे अंदर से कोई है जो कहता है के \"मुझे रुक्सत दे दीजिए और मुझको फिटने में ना डालिए।\" सुन रक्खो! फिटने ही में तो ये लोग पड़े हुए हैं और जहन्नुम ने काफिरों को घेर रखा है","तुम्हारा भला होता है तो इन्हें रंज होता है और तुमपर कोई मुसीबत आती है तो ये मुंह फेर कर खुश खुश पलट-ते हैं और कहते जाते हैं के अच्छा हुआ हमने पहले ही अपना मामला ठीक कार्लिया था","इंसे कहो \"हमें हरगिज़ कोई (बुराई या भलाई) नहीं पहुंचती मगर वो जो अल्लाह ने हमारे लिए लिख दी है। अल्लाह ही हमारा मौला (गुराडियन) है, और एहले ईमान को उसी पर भरोसा करना चाहिए\"","इंसे कहो, \"तुम हमारे मामले में जिस चीज के मुंतजिर हैं वो इसके सिवा और क्या है कि दो भलइयाँ में से एक भलाई है और हम तुम्हारे मामले में जिस चीज के मुंतजिर हैं वो ये है के अल्लाह खुद तुमको सज़ा देता है या हमारे हाथों को दिलवाता है? अच्छा तो अब तुम भी इंतज़ार करो और हम भी तुम्हारे साथ मुंतज़िर हैं”","इनसे कहो \"तुम अपने माल ख़्वा रज़ी ख़ुशी ख़र्च करो या बा-कराहत (अनिच्छा से), बाहर-हाल वो क़बूल ना किये जायेंगे क्योंकि तुम फ़सीक लोग हो\"","इनके दिये हुए माल क़बूल ना होने की कोई वजह इसके सिवा नहीं है के इन्हों ने अल्लाह और उसके रसूल से कुफ्र किया है, नमाज के लिए आते हैं तो कसमसाते हुए आते हैं और राह ए खुदा में खर्च करते हैं तो बा-दिल ए ना ख्वास्ता (अनचाहे दिल) खर्च करते हैं","इनके माल ओ दौलत और इनके कसम ए औलाद को देख कर धोखा ना खाओ, अल्लाह तो ये चाहता है कि इन्हीं चीजों के ज़रिये से इनको दुनिया की जिंदगी में भी मुब्तिला ए अजब करे और ये जान भी दें तो इंकार ए हक ही की हालत में दें","वो खुदा की कसम खा खा कर कहते हैं के हम तुम्हीं में से हैं, हलांके वो हरगिज तुम में से नहीं हैं. असल में तो वो ऐसे लोग हैं जो तुमसे खौफ-जदा (डरते हुए) हैं","अगर वो कोई जाए पनाह (शरण का स्थान) पा लें या कोई खो (गुफा) या घुस बैठने की जगह, तो भाग कर हमसे में जा छुपें","(ऐ नबी), मुझमें से बाज़ लोग सदाकत की तकसीम में तुम्पर एतराजात करते हैं, अगर इस माल में से कुछ दे दिया जाए तो खुश हो जाएं, और ना दिया जाए तो बिगडने लगते हैं","क्या अच्छा होता के अल्लाह और रसूल ने जो कुछ भी उन्हें दिया था उसपर वो राजी रहते और कहते के \"अल्लाह हमारे\" लिए काफ़ी है, वो अपने फ़ज़ल से हमें और बहुत कुछ देगा और उसका रसूल भी हमपर इनायत फरमाएगा, हम अल्लाह ही की तरफ नज़र जमाए हुए हैं”","ये सदक़ात तो दर-असल फ़कीरों और मिस्कीनो के लिए हैं और उन लोगों के लिए जो सदाकत के काम पर मामूर हों, और उनके लिए जिनकी तालिफ़-ए-क़लब (जिनके दिलों को जीतना है) मतलूब हो नीज़ ये गार्डानो के छुड़ाने (गुलामों की फिरौती) और क़र्ज़दारों की मदद करने में और राह ए खुदा में और मुसाफिर-नवाज़ी में इस्तेमाल करने के लिए हैं। एक फ़रीज़ा है अल्लाह की तरफ से और अल्लाह सब कुछ जानने वाला और दाना ओ बीना है","इनमें से कुछ लोग हैं जो अपनी बातों से नबी को दुख देते हैं और कहते हैं कि ये शक्स कानो (कानों) का कच्चा है। कहो, \"वो तुम्हारी भलाई के लिए ऐसा है, अल्लाह पर ईमान रखता है और एहले ईमान पर एत्माद (भरोसा) करता है और सारा रहमत है उन लोगों के लिए जो तुम में से इमानदार हैं। और जो लोग अल्लाह के रसूल को दुख देते हैं उनके लिए दर्दनाक सजा है\"","ये लोग तुम्हारे सामने कसमें खाते हैं ता-के तुम्हें राजी करें, हलांके अगर ये मोमिन हैं तो अल्लाह और रसूल इसके ज्यादा हकदार हैं के ये उनको राजी करने की फिक्र करें","क्या उन्हें मालूम नहीं है कि जो अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला करता है है उसके लिए दोज़ख की आग है जिसमें वो हमेशा रहेगा। ये बहुत बड़ी रुसवाई है","ये मुनाफिक डर रहे हैं के कहीं मुसलमानों पर कोई ऐसी सूरत नाज़िल न हो जाए जो इनके दिलों के भेद खोल कर रख दे। (ऐ नबी), इनसे कहो, \"और मज़ाक उड़ाओ, अल्लाह हमें चीज़ को खोलने वाला है जिसके खुल जाने से तुम डरते हो\"","अगर इनसे पूछो के तुम क्या बातें कर रहे थे, तो झट कह देंगे के हम तो हंसी मज़ाक और दिल लगी कर रहे थे। इनसे कहो, \"क्या तुम्हारी हंसी दिल लगी अल्लाह और उसकी आयत और उसके रसूल ही के साथ थे","अब उज़रात (बहाने) ना तराशो, तुमने ईमान लाने के बाद कुफ़्र किया है, अगर हमने तुम में से एक गिरोह को माफ़ कर भी दिया तो दूसरे गिरो ​​को तो हम ज़रूर सजा\" देंगे क्यूँके वो मुजरिम है।”","मुनाफिक मर्द और मुनाफिक औरतें सब एक दूसरे के हम-रंग हैं, बुरे का हुकुम देते हैं और भलाई से मन करते हैं और अपने हाथ खैर से रोक रहे हैं। ये अल्लाह को भूल गए तो अल्लाह ने भी इन्हें भुला दिया, यकीनन ये मुनाफिक ही फासीक है","इन मुनाफिक मर्दों और औरतों और काफिरों के लिए अल्लाह ने आतिश ए दोजख का वादा किया है जिसमें वो हमेशा रहेंगे, वही इनके लिए मौजुन (उचित जगह) है, इनपर अल्लाह की फ़िटकर है और इनके लिए क़याम रहने वाला अज़ाब है","तुम लोगों के रंग ढांग वही हैं जो तुम्हारे पेश-रावों के थे, वो तुमसे ज़्यादा ज़ोरावर और तुमसे बढ़कर माल और औलाद वाले थे, फिर उनहोन ने दुनिया में अपनी हंसी के मजे लूटे लिए और तुमने भी अपनी तरह से मजे इसी तरह लूटे जैसे उनको ने लूटे थे, और वैसी ही बेहसों (तर्क) में तुम भी पड़े जैसी बेहसों में वो पड़े थे। तो उनका अंजाम ये हुआ के दुनिया और आख़िरत में उनका सब किया धरा ज़ाया हो गया और वही ख़ासियत में हैं","क्या लोगों को अपने पेशावरों की तारीख (इतिहास/कहानी) नहीं पता? नूंह की क़ौम, आद, समूद, इब्राहीम की क़ौम, मदियां के लोग और वो बस्तियां जिन्हें उलट दिया गया। उनके रसूल उनके पास खुली-खुली निशानियां लेकर आए, फिर ये अल्लाह का काम न था के अनपर ज़ुल्म करता मगर वो आप ही अपने ऊपर ज़ुल्म करने वाले थे","मोमिन मर्द और मोमिन औरतें, ये सब एक दूसरे के रफीक (साथी/सहयोगी) हैं, भलाई का हुकुम देते हैं और बुरे से रोकते हैं, नमाज कायम करते हैं, जकात देते हैं और अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करते हैं, ये वो लोग हैं जिनपर अल्लाह की रहमत नाज़िल होकर रहेगी। यकीनन अल्लाह सब पर ग़ालिब और हकीम ओ दाना है","मोमिन मर्दन और औरतों से अल्लाह का वादा है के इन्हें ऐसे बाग़ देगा जिनके आला नेहरेन बहती होंगी और वो इनमें हमेशा रहेंगे, सदा-बहार बागों में उनके लिए पाकीज़ा क़याम-गाहें (रहते हैं) जगहें) होंगी, और सबसे बढ़कर ये के अल्लाह की खुशनुदी (खुशी) इन्हें हासिल होगी, यही बड़ी कामयाबी है","ऐ नबी, कुफ्फार और मुनाफिकेन दोनों का पूरी कुव्वत से मुकाबला करो और इनके साथ मिलकर पेश आओ, आखिर ए कार इनका ठिकाना जहन्नुम है और वो बढ़-तरीन जाए करार (निवास) है","ये लोग खुदा की कसम खा खा कर कहते हैं कि हमने वो बात नहीं कही, हालंके इन्हों ने जरूर वो काफिराना बात कही है। वो इस्लाम लाने के बाद कुफ़्र के मुर्तकीब हुए और इन्होन ने वो कुछ करने का इरादा किया जिसे कर ना सके। ये इनका सारा गुस्सा इसी बात पर है ना के अल्लाह और उसके रसूल ने अपने फज़ल से इनको गनी (समृद्ध) कर दिया है! अब अगर ये अपनी इस रवीश से बाज़ आ जाए तो इनके लिए बेहतर है, और अगर ये बाज़ ना आए अल्लाह के पास इन्हें निहायत दर्दनाक सजा देगा, दुनिया में भी और आखिरी में भी, और ज़मीन में कोई नहीं जो इनका हिमायती और मददगार हो","इन में से बाज़ ऐसे भी हैं जिन्होन ने अल्लाह से अहद किया था के अगर हमने अपने फजल से हमको नवाजा तो हम खैरात करेंगे और सालेह बन कर रहेंगे","मगर जब अल्लाह ने अपने फजल से इनको दौलत-मंद करदिया तो वो भुखल (कंजूसी) पर उतर आए और अपने अहद से फिर के येहिन उसकी परवा तक नहीं है","नतीजा ये निकला के इनकी इस बद-अहादी (विश्वासघात) की वजह से जो इन्होन ने अल्लाह के साथ की, और उस झूठ की वजह से जो वो बोलते रहे, अल्लाह ने इनके दिलों में निफाक (पाखंड) बिठा दिया जो उसके हुजूर उनकी पेशी के दिन तक इनका पीछा न छोड़ेगा","क्या ये लोग जानते नहीं हैं कि अल्लाह को इनके मख़फ़ी (छिपे हुए) राज़ और इनकी पोशीदा सरगोशियां तक ​​मालूम हैं और वो तमाम गैब की बातों से पूरी तरह बख़बर है","(वो ख़ूब जानता है उन कंजूस दौलत-मंदों को) जो बा-रज़ा (स्वेच्छा से) ओ रगबत देने वाले एहले ईमान की माली कुर्बानियों पर बातें जपते हैं और उन लोगों का मजाक उड़ाते हैं जिनके पास (राह ए खुदा में देने के लिए) उसके सिवा कुछ नहीं है जो वह अपने ऊपर मुशक्कत बर्दाश्त करके देते हैं। अल्लाह इन मज़ाक़ उड़ाने वालों का मज़ाक उड़ाता है और इनके लिए दर्दनाक सज़ा है","(ऐ नबी), तुम ख्वा ऐसे लोगों के लिए माफ़ी की अंधेरगर्दी करो या ना करो, अगर तुम सत्तर (सत्तर) मरतबा भी इन्हें माफ़ करदेने की अंधेरगर्दी करोगे तो अल्लाह इन्हें हरगिज़ माफ़ ना करेगा, इस लिए के इन्हों ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया है, और अल्लाह फासीक लोगों को राह ए नजात नहीं दिखाता","जिन लोगों को पीछे रह जाने की इजाज़त दे दी गई थी वो अल्लाह के रसूल का साथ न दें और घर बैठे रहने पर खुश हुए और उन्हें गवारा ना हुआ के अल्लाह की राह में जान ओ माल से जिहाद करें। उन्होन लोगों से कहा के “इस मजबूत गर्मी में ना निकलो”। इनसे कहो के जहन्नुम की आग इस तरह ज्यादा गरम है, काश इन्हें इसका शूर होता है","अब चाहिए के ये लोग हसना कम करें और रोयें ज्यादा, इसके लिए जो बुरी (बुराई) ये कमाते रह रहे हैं इसकी जजा ऐसी ही है (के इन्हें इसपर रोना चाहिए)","अगर अल्लाह इनके दरमियान तुम्हें वापस ले जाए और अंदर से कोई गिरो ​​जिहाद के लिए निकले कि तुमसे इज्जत मांगे तो साफ कह देना, \"अब तुम मेरे साथ हरगिज नहीं चल सकते और न मेरी मइया (कंपनी) में किसी दुश्मन से लड़ सकते हो, तुमने पहले बैठ रहने को पसंद किया था अब घर बैठने वालों ही के साथ बैठे रहो”","और अंदर से जो कोई मरे (मर जाए) उसकी नमाज ए जनाज़ा भी तुम हरगिज़ न पढ़ना और न कभी उसकी क़ब्र पर खड़े होना क्योंकि उन्होन ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया है और वो मारे हैं इस हाल में के वो फासिक थे","इनकी मालदारी और इनकी कसरत ए औलाद तुमको धोखे में ना डाले, अल्लाह ने तो इरादा करलिया है के इस माल ओ औलाद के ज़रिये से इनको इस दुनिया में सजा दे और इनकी जानें इस हाल में निकले के वो काफ़िर हूँ","जब कभी कोई सूरत इस मज़मून (विषय) की नाज़िल हुई कि अल्लाह को मानो और उसके रसूल के साथ मिलकर जिहाद करो तो तुमने देखा के जो लोग मेरे साथ हैं साहब ए मक़दरत (सक्षम लोग) था वही तुमसे अंधकार करने लगे के उन्हें जिहाद की शिर्कत से माफ़ रक्खा जाए, और उन्हें कहा के हमें छोड़ दीजिए के हम बैठने वालों के साथ रहें","इन लोगों ने घर बैठने वालों में शामिल होना पसंद किया और इनके दिलों पर थप्पड़ लगा दिया, इस लिए इनकी समझ में अब कुछ नहीं आता","बा-खिलाफ इसके रसूल ने और उन लोगों ने जो रसूल के साथ ईमान लाए थे अपनी जान ओ माल से जिहाद किया और अब सारी भलाईयां उन्हीं के लिए हैं और वही फलाह पाने वाले हैं","अल्लाह ने उनके लिए ऐसे बाग तय्यर रक्खे हैं जिनका आला नेहरेन बेह राही हैं, उनमें वो हमेशा रहेंगे. ये है अज़ीम ओ शान कामियाबी","बदवी (बेडौइन्स) अरब में से भी बहुत से लोग आए जिन्हों ने उजार (बहाना) किए ता-के उन्हें भी पीछे छोड़ दिया रे जाने की इजाज़त दी जाए इस तरह बैठ रहे वो लोग जिन्होन ने अल्लाह और उसके रसूल से ईमान का झूठा अहद किया था। बदवियों (बेडौइन्स) में से जिन लोगों ने कुफ्र का तरीक़ा इख्तियार किया है अनक़रीब वो दर्दनाक सज़ा से दो-चार होंगे","ज़ीफ़ (पुराना) और बीमार लोग और वो लोग जो शिर्कत ए जिहाद के लिए राह नहीं पाते, अगर पीछे रह जाएं तो कोई हर्ज नहीं जबके वो खुलूस ए दिल के साथ अल्लाह और उसके रसूल के वफ़ादार माननीय। ऐसे मोहसिनेन पर ऐतराज़ की कोई गुंजाईश नहीं है और अल्लाह दरगुज़र करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","इसी तरह उन लोगों पर भी कोई ऐतराज़ का मौका नहीं है जिहों ने खुद आ कर तुमसे अंधकार की थी के हमारे लिए सावरियां बहम पहन सकती हैं, और जब तुमने कहा के मैं तुम्हारे लिए सावरियों का इंतिज़ाम नहीं कर सकता तो वो मजबूरन वापस आ गए और हाल ये था के उनकी आंखों से आंसू जारी थे और उन्हें इस बात का बड़ा रंज था के वो अपने खर्च पर शरीक ए जिहाद होने की मक़दरत नहीं रखते","अलबत्ता एतराज उन लोगों पर है जो मालदार हैं और फिर भी तुमसे डार्कह्वास्टीन करते हैं के उन्हें शिर्कत ए जिहाद से माफ रखा जाएगा। उन्होन ने घर बैठने वालियों में शामिल होना पसंद किया और अल्लाह ने उनके दिलों पर थप्पड़ (सील) लगा दिया, इस लिए के अब ये कुछ नहीं जानते (के अल्लाह के हां इनकी रवीश का क्या नतीजा निकलने वाला है)","तुम जब पलट कर इनके पास पहुंचोगे तो ये तरह तरह के उज़रात (बहाना) पेश करेंगे मगर तुम साफ कह देना के “बहाने ना करो, हम तुम्हारी किसी बात का ऐतबार ना करेंगे, अल्लाह ने हमको तुम्हारे हालात बता दिए हैं, अब अल्लाह और उसका रसूल तुम्हारे तर्जे अमल को देखेगा फिर तुम उसकी तरफ पलटोगे जो खुले और छुपे सब का जाने वाला है और वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या कुछ करते रहोगे”","तुम्हारी वापसी पर ये तुम्हारे सामने कसमें खाएंगे ता-के तुम इनसे सिर्फ-ए-नजर करो (उन्हें अकेला छोड़ दो) तो बहकाओ तुम इनसे सिर्फ-ए-नजर ही करो। क्योंकि ये गंदी है और इनका असली मुकाम जहन्नुम है जो इनकी कमाई के बदले में इन्हें नसीब होगी","ये तुम्हारे सामने कसमें खाएंगे के ता-के तुम इनसे राजी हो जाओ, हलांके अगर तुम इनसे राजी हो भी जाओगे तो अल्लाह हरगिज ऐसे फासिक लोगों से राज़ी ना होगा","ये बदवी (बेदौइन) अरब कुफ्र ओ निफ़ाक (पाखंड) में ज़्यादा सच है और इनके मामले में इस अमृत के इम्कानात (संभावना) ज़्यादा हैं के हमें दीन के हुदूद से ना-वाक़िफ़ रहे जो अल्लाह ने अपने रसूल पर नाज़िल किया है। अल्लाह सब कुछ जानता है और हकीम ओ दाना है","उन बदवियों में ऐसे ऐसे लोग मौजूद हैं जो राह ए खुदा में कुछ खर्च करते हैं तो इसे अपने ऊपर ज़बरदस्ती की छत्ती (जुर्माना) समझते हैं और तुम्हारे हक़ में ज़माने की गर्दिशों का इंतज़ार कर रहे हैं (के तुम किसी चक्कर में फँसो तो वो अपनी गर्दन से हमें निज़ाम की इताअत का क़लदा उतार फेंकें जिसमें तुमने उन्हें कस दिया है) हालंके बड़ी का चक्कर खुद इन्ही पर मुसल्लत है और अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है","और इन्ही बदियों में कुछ लोग ऐसी भी है जो अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर पर ईमान रखते हैं और जो कुछ ख़र्च करते हैं उसे अल्लाह के हान तक़र्रब (मंहगाई) का और रसूल की तरफ से रहमत की दुआएं लेने का ज़रिया बनाते हैं। हाँ! वो जरूर इनके लिए तकरारब (निकटता) का जरूरी है और अल्लाह जरूर इनको अपनी रहमत में दखल देगा। यकीनन अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","वो मुहाजिर ओ अंसार जिन्होन ने सब से पहले दावत ए ईमान पर लब्बैक कहने में सबकत की, नीज़ वो जो बाद में रस्तबाज़ी के साथ पिचे आए, अल्लाह उनसे रज़ी हुआ और वो अल्लाह से रज़ी हुए, अल्लाह ने उनके लिए ऐसे बाग मुहैय्या कर रखे हैं जिनके बारे में खास बातें होंगी और वो उनमें हमेशा रहेंगे, यही अज़ीम ओ शान कामयाब है","तुम्हारे गिर्द ओ पेश जो बादवी रहते हैं उन में बहुत से मुनाफिक हैं और इसी तरह खुद मदीना के बाशिंदों में भी मुनाफिक मौजुद हैं जो निफाक में तक (विशेषज्ञ) हो गए हैं। तुम इन्हें नहीं जानते, हम उनको जानते हैं। करीब है वो वक्त जब हम उनको दोहरी सजा देंगे, फिर वो ज्यादा बड़ी सजा के लिए वापस ले जायेंगे","कुछ और लोग हैं जिन्हों ने अपने कसूरों का ऐतराफ करलिया है उनका अमल मखलूट (कर्मों का मिश्रित रिकॉर्ड, अच्छे और बुरे) है। कुछ नया है और कुछ बढ़िया। बैद नहीं के अल्लाह उनपार फिर मेहरबान हो जाए क्योंकि वो दरगुज़र करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","(ऐ नबी), तुम इनके अमवाल में से सदक़ा लेकर इन्हें पाक करो और (नेकी की राह में) इन्हें बढ़ाओ, और इनके हक़ में दुआ ए रहमत करो क्यों तुम्हारी दुआ इनके लिए वजह तस्कीन होगी। अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है","क्या इन लोगों को मालूम नहीं है कि वो अल्लाह ही है जो अपने बंदों की तौबा कबूल करता है और उनकी खैरात को कबूलियत अता फरमाता है, और ये के अल्लाह बहुत माफ करने वाला और रहीम है","और (ऐ नबी), में लोगों से कहदो के तुम अमल करो, अल्लाह और उसका रसूल और मोमिनीन सब देखेंगे के तुम्हारा तर्ज़-ए-अमल अब क्या रहता है, फिर तुम उसकी तरफ पलटे जाओगे जो खुले और छुपे सबको जानता है और वो तुम्हे बता देगा के तुम क्या करते रहोगे","कुछ दूसरे लोग हैं जिनका मामला भी खुदा के हुकुम पर ठहरा हुआ है, चाहे उन्हें सज़ा दे और चाहे उनपर अज़सर-ए-नव (फिर से) मेहरबान हो जाए, अल्लाह सब कुछ जानता है और हकीम ओ दाना है","कुछ और लोग हैं जिन्होंने एक मस्जिद बनाई है ग़रज़ के लिए के (दावत ए हक़ को) नुक़्सान पूछैं, और (ख़ुदा की बंदगी करने के बजाये) कुफ़्र करें, और एहले ईमान में फ़ुट (तफ़्राका/डिवीज़न) डालें, और (इस बज़हिर इबादत गाह को) हमें शक्स के लिए कमेंगाह (स्टेशन) बनाएं जो इस्से पहले खुदा और रसूल के ख़िलाफ़ बरस ए पाइकर (संघर्ष में) हो चूका है। वो जरूर कसमें खा खा कर कहेंगे के हमारा इरादा तो भलाई के सिवा किसी दूसरी चीज का ना था मगर अल्लाह गवाह है के वो काटते झूठे हैं","तुम हरगिज इस इमारत में खड़े ना होना। जो मस्जिद अव्वल रोज़ से तक़वा पर क़याम की गई थी, वही इसके लिए ज़्यादा मौज़ून (हक़दार/उचित जगह) है के तुम उसमें (इबादत के लिए) खड़े हो। उसमें ऐसे लोग हैं जो पाक रहना पसंद करते हैं और अल्लाह को पाकीज़गी इख्तियार करने वाले ही पसंद हैं","फिर तुम्हारा क्या ख्याल है के बेहतर इंसान वो है जिसने अपनी इमारत की बुनियाद खुदा के खौफ और उसकी रज़ा की तालाब पर राखी हो या वो जिसने अपनी इमारत एक वादी की खोकली बेसबात कगार पर उठाई (बैंक का किनारा गिरने वाला था) और वो उसे लेकर सीधी जहन्नुम की आग में जा गिरी? ऐसे जालिम लोगों को अल्लाह कभी सीधी राह नहीं दिखाता","ये इमारत जो इन्हों ने बनाई है, हमेशा इनके दिलों में यकीनी की जड (जड़) बनी रहेगी (जिसके निकलने की अब कोई सूरत नहीं) बजुज इसके के इनके दिल ही पारा हो जाएंगे। अल्लाह निहायत बाख़बर और हकीम ओ दाना है","हकीकत ये है कि अल्लाह ने मोमिनो से उनके नफ़्स (जान) और उनके माल जन्नत के बदले ख़त्म लिए हैं, वो अल्लाह की राह में लड़ते और मरते हैं। उनसे (जन्नत का वादा) अल्लाह के ज़िम्मे एक पुख्ता वादा है तौरात (तोराह) और इंजील और कुरान में। और कौन है जो अल्लाह से बढ़कर अपने अहद का पूरा करने वाला हो? पस ख़ुशियाँ मनाओ अपने हमसे सौदा (सौदा) पर जो तुमने खुदा से चुका लिया है, यही सबसे बड़ी कामयाबी है","अल्लाह की तरफ बार-बार पलटने वाले, उसकी बंदगी बाजा लाने वाले, उसकी तारीफ के गुन गाने वाले, उसकी खातिर ज़मीन में गर्दिश करने वाले वाले, उसके आगे रुकू और सजदे करने वाले, नेकी का हुकुम देने वाले, बड़ी से रोकने वाले, और अल्लाह के हुदूद की हिफाजत करने वाले, (इस शान के होते हैं वो मोमिन जो अल्लाह से खत्म ओ फारोखत का ये मामला ताई करते हैं) और (ऐ नबी), में मोमिनो को खुश खबरी दे दो","नबी को और उन लोगों को जो ईमान लाए हैं, ज़ेबा नहीं है के मुशरिकों के लिए मगफिरत की दुआ करें, चाहे वो उनके रिश्तेदार ही क्यों न हों, जबके अनपर ये बात खुल चुकी है के वो जहन्नुम के मुस्तहिक़ हैं","इब्राहिम ने अपने बाप के लिए जो दुआ ए मगफिरत की थी वो तो हमसे वादे की वजह से थी जो उसने अपने बाप से किया था, मगर जब उसपर ये बात खुल गई के उसका बाप खुदा का दुश्मन है तो वो उससे बेज़ार हो गया। हक़ ये है के इब्राहीम बड़ा रक़ीक़-उल-क़ल्ब (कोमल हृदय) ओ खुदा तरस और बर्दबार (ईश्वर से डरने वाला और सहनशील) आदमी था","अल्लाह का ये तरीक़ा नहीं है के लोगों को हिदायत देने के बाद फिर गुमराही में मुबतला करे जब तक के उन्हें साफ साफ बता ना दे के उन्हें किन चीज़ों से बचना चाहिए। दर हक़ीक़त अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है","और ये भी वक़िया है के अल्लाह ही के क़ब्ज़े में आसमां ओ ज़मीन की सल्तनत है, उसके इख्तियार में जिंदगी ओ मौत है, और तुम्हारा कोई हमी ओ मददगार ऐसा नहीं है जो तुम्हें बचा सके","अल्लाह ने माफ कर दिया नबी को और उन मुहाजिरीन ओ अंसार को जिन्हों ने बड़ी तंगी के वक्त में नबी का साथ दिया, अगरचे उनमें से कुछ लोगों के दिल काजी की तरफ मायिल हो चुके थे (मगर जब उन्होन ने उस काजी (कुटिलता) का इत्तेबा ना किया बलके नबी का साथ हाय दिया तो) अल्लाह ने उन्हें माफ कर दिया, उसका मामला लोगों के साथ शफाकत ओ मेहरबानी का है","और उन तीनो को भी उसने माफ़ किया जिनके मामले को मुल्तावी कर दिया गया था, जब ज़मीन अपनी साड़ी वुसैट (विशालता) के बावज़ूद अपर टैंग हो गई और उनकी अपनी जानेन भी उन्पर बार होने लगी और उन्होन ने जान लिया के अल्लाह से बचने के लिए कोई जाए पनाह खुद अल्लाह ही के दामन ए रहमत के सिवा नहीं है, अल्लाह के पास अपनी मेहरबानी से उनकी तरफ पलटा ता-के वो उसकी तरफ पलट आएं। यकीनन वो बड़ा माफ करने वाला और रहीम है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो और सच्चे लोगों का साथ दो","मदीना के बशिंदों और गिर्द ओ नवाह (आसपास रहने वाले)के बदवियों को ये हरगिज़ ज़ेबा ना था के अल्लाह के रसूल को छोड़ कर घर बैठे रहते और उसकी तरफ से बे-परवा होकर अपने-अपने नफ़्स की फ़िक्र में लग जाते। इस लिए ऐसा कभी न होगा के अल्लाह की राह में भूख प्यास और जिस्मानी मुशक्कत की कोई तकलीफ वो झेलें, और मुनकिरीन हक को जो राह नागवार है उसपर कोई कदम वो उठाएं, और किसी दुश्मन से [अदावत (दुश्मनी) ए हक का) कोई इंतकाम वो लें और इसके बदले उनके हक में एक अमल-ए-सालेह न लिखा जाए। यकीनन अल्लाह के हां मोहसिनों का हक़ उल खिदमत मारा नहीं जाता है","इसी तरह ये भी कभी न होगा के (राह ए खुदा में) थोड़ा या बहुत कोई खर्च वो उठायें और (साईं ए जिहाद में) कोई वादी (घाटी) वो पार करें और उनके हक़ में इसे लिख ना लिया जाए ता-के अल्लाह उनके इस अच्छे कारनामे का सिला उन्हें अता करे","और ये कुछ जरूरी ना था के एहले ईमान सारे के सारे ही निकल खड़े होते, मगर ऐसा क्यों ना हुआ के उनकी आबादी के हर हिस्से में से कुछ लोग निकल कर आते और दीन की samajh भुगतान करते और वापस जा कर अपने इलाक़े के बाशिंदों (लोगों) को ख़बरदार करते ता-के वो (गैर मुस्लिमाना राविश से) परहेज़ करते","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जंग करो उन मुनकिरीन ए हक से जो तुमसे करीब हैं और चाहिए के वो तुम्हारे अंदर ताकत पाएं, और जान लो के अल्लाह मुत्तक़ियों के साथ हैं","जब कोई नई सूरत नाज़िल होती है तो इनमें से बाज़ लोग (मज़ाक के तौर पर मुसलमानो से) पूछते हैं के \"कहो, तुम में से किसके ईमान में इसकी इज़ाफ़ा हुआ?\" (इसका जवाब ये है के) जो लोग ईमान लाए हैं उनके ईमान में तो फिल-वकाई (हर नाज़िल होने वाली सूरत ने) इजाफा ही किया है और वो इसी दिलशाद (खुशी मना रहे हैं) हैं","अलबत्ता जिन लोगों के दिलों को (निफाक का) रोग लगा हुआ था उनकी साबिक नजासत (गंदगी) पर (हर नई सूरत ने) एक और नजासत (गंदगी) का इजाफा करदिया और वो मरते दम तक कुफ्र ही में मुबतला रहे","क्या ये लोग देखते नहीं के हर साल दो मरतबा ये आजमाइश में डाले जाते हैं? मगर इसपर भी ना तौबा करते हैं ना कोई सबक (पाठ) लेते हैं","जब कोई सूरत नाज़िल होती है तो ये लोग आंखें ही आंखों में एक दूसरे से बातें करते हैं कि कहीं कोई तुमको देख तो नहीं रहा है, फिर चुपके से निकल भागते हैं। अल्लाह ने इनके दिल फेर दिये हैं क्योंकि ये ना-समझ लोग हैं","देखो! तुम लोगों के पास एक रसूल आया है जो खुद तुम्हारे अंदर से है, तुम्हारा नुक्सान में पढ़ना उसपर शाक़ (गिरान/गंभीर) है, तुम्हारी फलाह का वो हार (लालची से चिंतित) है, ईमान लाने वालों के लिए वो शफीक और रहीम है","अब अगर ये लोग तुमसे मुह फेरते हैं हैं तो (ऐ नबी), इनसे कहदो के \"मेरे लिए अल्लाह बस करता है (काफी है/मुझे काफी है), कोई माबूद नहीं मगर वो, उस पर मैंने भरोसा किया और वो मालिक है अर्श ए अज़ीम का\"","अलिफ़ लाम रा, ये उस किताब की आयतें हैं जो हिकमत ओ दानिश से लबरेज है","क्या लोगों के लिए ये एक अजीब बात हो गई है कि हमने खुद उन्ही में से एक आदमी को इशारा किया के (गफलत में पड़े हुए) लोगों को चौका दे और जो मान लें उनको खुश खबरी दे दे उनके लिए उनके लिए रब के पास सच्ची इज़्ज़त ओ सरफ़राज़ी है? (क्या यही वो बात है जिसपर) मुनकिरीन ने कहा के ये शक्स तो खुला जादूगर है","हकीकत ये है के तुम्हारा रब वही खुदा है जिसने आसमान और ज़मीन को छे (छह) दिनों में पेदा किया, फिर तख्त ए हुकुमत पर जलवा-गर हुआ और कायनात का इंतेज़ाम चल रहा है। कोई शफाअत (सिफारिश) करने वाला नहीं इल्ला ये के इसकी इजाजत के बाद शफाअत करे। याही अल्लाह तुम्हारा रब्ब है लिहाज़ा तुम उसकी इबादत करो। फिर क्या तुम होश में न आओगे","उसकी तरफ तुम सबको पलट कर जाना है। ये अल्लाह का पक्का वादा है. बेशक पैदाइश की इब्तेदा वही करता है, फिर वही दोबारा पैदा करेगा, ता-के जो लोग ईमान लाये और जिन्होन ने नीक अमाल किये उनको पूरे इन्साफ के साथ जजा दे, और जिन्होन ने कुफ्र का तरीक़ा इख्तियार किया वो खौलता (उबलता हुआ) हुआ पानी पियें और दर्दनाक साज़ा भुगतानें हमें इंकार ए हक के पद में जो वो करते रहे","वही है जिसने सूरज को उजियाला बनाया और चांद को चमक दी और चांद के घटने बढ़ने की मंजिलें ठीक ठीक मुकर्रर करदी ता-के तुम हमें बरसों (साल) और तारीखों के हिसाब मालूम करो। अल्लाह ने ये सब कुछ (खेल के तौर पर नहीं बलके) ब-मकसद ही बनाया है। वो अपनी निशानियों को खोल खोल कर पेश कर रहा है उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं","यकीनन रात और दिन के उलट फेर में और हर उस चीज़ में जो अल्लाह ने ज़मीन और आसमान में पैदा की है, निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो (गलत बनी ओ) गलत रावी से) बचना चाहते हैं","हकीकत ये है के जो लोग हमसे मिलने की तवाक्कु (उम्मीद) नहीं रखते और दुनिया की जिंदगी ही पर राजी और मुतमईन हो गए हैं, और जो लोग हमारी निशानियों से गाफिल हैं","उनका आखिरी ठिकाना जहन्नुम होगा उन बुराइयों की याद में जिनका इकतिसाब वो (अपने इस गलत अकीदत और गलत तर्ज-ए-अमल की वजह से) करते रहें","और ये भी हकीकत है के जो लोग ईमान लाए (यानी जिन्हों ने उन सदकातों को कबूल किया जो इस किताब में पेश की गई हैं) और नेक अमल करते रहे उन्हें उनका रब उनके ईमान की वजह से सीधी राह चलाएगा। नियामत भारी जन्नतों में उनके आला नेहरें बहेंगी","वहां उनकी सदा (पुकार/आवाज़) ये होगी के \"पाक है तू ऐ खुदा\", उनकी दुआ ये होगी के \"सलामती हो: और उनकी हर बात का खात्मा इस पर होगा के \"सारी तारीफ अल्लाह रब्बुल आलमीन ही के लिए है\"","अगर कहीं अल्लाह लोगों के साथ बुरा मामला करने में भी इतनी ही जल्दी करता जितनी वो दुनिया की भलाई मांगे में जल्दी करते हैं तो उनकी मोहलत और अमल कभी की खत्म हो जाती है, (मगर हमारा ये तरीका नहीं है)। मिलने की तवक्कु नहीं रखते उनकी सरकशी में भटकने के लिए चोट दे देते हैं","इंसान का हाल ये है कि जब उसपर कोई सख्त वक्त आता है तो खड़े और बैठे और लेते हैं (झूठ बोलकर) हमको पुकारता है, मगर जब हम उसकी मुसीबत टाल देते हैं तो ऐसा चल नायकलता है कि गोया उसने कभी अपने किसी बुरे वक्त पर हमको पुकारा ही ना था। इस तरह हद से गुज़र जाने वालों के लिए उनके करतूत ख़ुशनुमा बना दिए गए हैं","लोगन, तुमसे पहले की क़ौमों को (जो अपने अपने ज़माने में बार सर ई उरूज थी) हमने हलाक कर दिया जब उन्होन ने जुल्म की रवीश इख्तियार की और उनके रसूल उनके पास खुली खुली निशानियां लेकर आये और उन्होन ने ईमान ला कर ही ना दिया। इस तरह हम मुजरिमों को उनके जरायम (अपराध) का बदला दिया करते हैं","अब उनके बाद हमने तुमको ज़मीन में उनकी जगह दी है ता-के देखें तुम कैसे अमल करते हो","जब उन्हें हमारी साफ-साफ बातें सुनाई जाती हैं तो वो लोग जो हमसे मिलने की बात करते हैं तवक्कू नहीं रखते, कहते हैं \"इस्के बजाये कोई और कुरान लाओ या इस में कुछ तरमीम (परिवर्तन)\" करो। (ऐ मुहम्मद), इंसे कहो \"मेरा ये काम नहीं है के अपनी तरफ से इस में कोई तगय्युर ओ तबद्दुल कार्लून। मैं तो बस हमें वही का पेयरो (फॉलोअर) हूं जो मेरे पास भेजती है। अगर मैं अपने रब की नफ़रमानी करूं तो मुझे एक बड़ा मुश्किल दिन के अज़ाब का डर है\"","और कहो \"अगर अल्लाह की मशियत न होती तो मैं ये कुरान तुम्हें कभी न सुनाता और अल्लाह तुम्हें इसकी खबर तक न देता। आखिर इस पहले मैं एक उमर तुम्हारे दरमियान गुजार चुका हूं। क्या तुम अक्ल से काम नहीं लेते","फिर उससे बढ़कर जालिम और कौन होगा जो एक झूठी बात गड़बड़ कर अल्लाह की तरफ़ इंसान करे या अल्लाह की वक़ाई आयत को झूठ करार दे? यक़ीनन मुजरिम कभी फलाह नहीं पा सकते”","ये लोग अल्लाह के सिवा उनकी परस्ती कर रहे हैं जो इनको न नुक्सान पहुंचा सकते हैं न नफा (फ़ैयदा), और कहते ये हैं के ये अल्लाह के सिवा हमारे सिफ़ारिश हैं। (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो \"क्या तुम अल्लाह को हमारी बात बताते हो जैसे वो ना आसमानों में जानता है ना ज़मीन में?\" पाक है वो और बाला ओ बारतार है उस शिर्क से जो ये लोग करते हैं","इब्तेदान (शुरुआत में) सारे इंसान एक ही उम्मत थी, बाद में उन्होन ने मुख्तलिफ अकीदे और मसलक बना लिया। और अगर तेरे रब की तरफ से पहले ही एक बात ताई ना करली गई होती तो जिस चीज में वो बहम इख्तिलाफ कर रहे हैं उसका फैसला कर दिया जाता","और ये जो वो कहते हैं के इस नबी पर उसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों न उतारी गई, तो उनसे कहो \"गैब का मालिक ओ मुख्तार तो अल्लाह ही है। अच्छा, इंतजार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतजार करता हूं\"","लोगों का हाल ये है के मुसीबत के बाद जब हम उनको रहमत का मजा चखाते हैं तो प्यार ही वो हमारी निशानियों के मामले में चल बज़ियां शुरू कार्डते हैं. इनसे कहो \"अल्लाह अपनी चाल में तुमसे ज्यादा तेज है, उसके फरिश्ते तुम्हारी सब मक्कारियों को कलाम-बंद (रिकॉर्डिंग) कर रहे हैं\"","वो अल्लाह ही है जो तुमको खुश्की (जमीन) और तारी (समुद्र) में चलाता है। चुनांचे जब तुम कश्तियों में सवार होकर बाद-ए-मवाफिक पर फरहान-ओ-शादान सफर कर रहे हो और फिर यकीन बाद-ए-मुखालिफ़ का ज़ोर होता है (भयंकर आंधी आती है) और हर तरफ से मौजों (लहरें) के थपेड़े लगते हैं और मुसाफिर समझ लेते हैं के तूफ़ान में घिर गए, हमें वक्त सब अपने दीन को अल्लाह ही के लिए खालिस करके उसकी दुआएं मांगते हैं के \"अगर तू नहीं हमको इस बाला से नजात दे दी तो हम शुक्र गुजार बंद करेंगे\"","मगर जब वो उनको बचा लेता है तो फिर वही लोग हक से मुन्हारिफ होकर जमीन मैं बगावत करने लगता हूं। लोगन, तुम्हारी ये बगावत उल्टी तुम्हारे ही खिलाफ पढ़ रही है, दुनिया के चांद रोजा मजा आ रहा है (लूट लो), फिर हमारी तरफ तुम्हें पलट कर आना है, हमें वक्त हम तुम्हें बता देंगे के तुम क्या कुछ कर रहे हो","दुनिया की ये जिंदगी (जिस के नशे में मस्त होकर तुम हमारी निशानियां से गफलत बारात रहे हो) इसकी मिसाल ऐसी है जैसे आसमान से हमने अपना पानी बरसाया तो जमीन की पैदावर, जैसे आदमी और जानवर सब खाते हैं, खूब घनी हो गई, फिर ऐन हमारा वक्त जबके जमीन अपनी बहार पर थी और खेतियाँ बानी सांवरी खादी थी और उनके मालिक ये समझ रहे थे के अब हम इनसे फ़ायदा उठाने पर कादिर हैं, यकीन रात को या दिन को हमारा हुकुम आ गया और हमने उसे ऐसा घरत करके रख दिया के गोया कल वहां कुछ था ही नहीं। इस तरह हम निशानियां खोल खोल कर पेश करते हैं उन लोगों के लिए जो सोचने वाले हैं","(तुम इस ना पयार जिंदगी के फरेब में मुब्तिला हो रहे हो) और अल्लाह तुम्हें दार-उस-सलाम की तरफ दावत दे रहा है, (हिदायत उसके इख्तियार में है) जिसको वो चाहता है सीधा रास्ता दिखा देता है","जिन लोगों ने भलाई का तरीका बताया इख्तियार किया उनके लिए भलाई है और माज़ीद फ़ज़ल, उनके चेहरों पर रु-सियाही और ज़िल्लत न चाएगी (न उदासी और न ही अपमान)। वो जन्नत के मुस्तहिक हैं जहां वो हमेशा रहेंगे","और जिन लोगों ने बुराइयां कमाई उनकी बुराई जैसी है वैसा ही वो बदला पी आएंगे, ज़िल्लत उन्पर मुसल्लत होगी, कोई अल्लाह से उनको बचाने वाला न होगा, उनके चेहरों पर ऐसी तारीख़ चाय हुई होगी जैसी रात के सियाह (अंधेरा) परदे उनपर पड़े हुए माननीय। वो दोज़ख के मुस्तहक़ हैं जहां वो हमेशा रहेंगे","जिस रोज़ हम सब को एक साथ (अपनी अदालत में) इकठ्ठा करेंगे, फिर उन लोगों ने जिन्होनें शिर्क किया है कहेंगे के ठहर जाओ तुम भी और तुम्हारे बने शरीक भी। फिर हम उनके दरमियान से अजनबीयत का पर्दा हटा देंगे और उनके शरीक कहेंगे के “तुम हमारी इबादत तो नहीं करते थे","हमारे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह की गवाही काफी है के (तुम अगर हमारी इबादत करते भी थे तो) हम तुम्हारी उस इबादत से बिल्कुल बे-खबर थाय।”","हमें वक्त हर शक्स अपने किया का मजा चख लेगा, सब अपने हकीकी मालिक की तरफ फेर दिए जाएंगे और वो सारे झूठ जो उनको ने घड रक्खे थे गम हो जाएंगे","इनसे पूछो, कौन तुमको आसमान और जमीन से रिज्क देता है? ये समात (सुनना) और बीनायी (दृष्टि) की कुव्वतें किसके इख्तियार में हैं? कौन बे-जान में से जानदार को और जानदार में से कौन निकलता है? कौन है नज़्म ए आलम की तदबीर कर रहा है (ब्रह्मांड के सभी मामलों को नियंत्रित करता है)? वो जरूर कहेंगे के अल्लाह, कहो फिर तुम (हकीकत के खिलाफ चलने से) परहेज़ नहीं करते","तब तो यही अल्लाह तुम्हारा हक़ीक़ी रब है फिर हक के बाद गुमराही के सिवा और क्या बाकी रह गया? आख़िर ये तुम किधर फिराए जा रहे हो","(ऐ नबी, देखो) इस तरह नफरमानी इख्तियार करने वालों पर तुम्हारे रब की बात सादिक आ गई के वो मान कर न देंगे","इनसे पूछो, तुम्हारे रुके हुए हुए शेयरों में कोई है जो तख़लीक़ (सृजन) की इब्तेदा भी करता हो और फिर उसका इरादा भी करे? कहो वो सिर्फ अल्लाह है जो तकलीक की इब्तेदा भी करता है और उसका इरादा भी, फिर तुम ये किस उल्टी राह पर चलाये जा रहे हो","इनसे पूछो, तुम्हारे रुके हुए शरीकोन में कोई ऐसा भी है जो हक की तरफ रहनुमाई करता हो? कहो वो सिर्फ अल्लाह है जो हक की तरफ रहनुमाई करता है। फिर भला बताओ जो हक की तरफ रहनुमाई करता है वो इसका ज्यादा मुस्तहिक है के उसकी जोड़ी की जाए या वो जो खुद रह नहीं पता इल्ला ये के उसकी रहनुमायी की जाए? आख़िर तुम हो क्या गया है, कैसे उलटे-उल्टे फ़ैसले करते हो","हकीकत ये है कि अक्सर लोग महज़ क़यास ओ गुमान (अनुमान) के पीछे चले जा रहे हैं, हालंके गुमान हक की ज़रूरत को कुछ भी पूरा नहीं करता। जो कुछ ये कर रहा है अल्लाह उसको खूब जानता है","और ये कुरान वो चीज नहीं है जो अल्लाह की वही ओ तालीम के बगैर तसनीफ (रचित/लिखित) कार्लिया जाए। बल्के ये तो जो कुछ पहले आ चूका था उसकी तस्दीक और अल-किताब की तफ़सील है। इसमें कोई शक्क नहीं के ये फ़रमारवा-ए-क़ायनात की तरफ से है","क्या ये लोग कहते हैं के पैगम्बर ने इसे खुद तसनीफ करलिया है? कहो \"अगर तुम अपने इस इल्ज़ाम में सच्चे हो तो एक सूरत इस जैसी तसनीफ कर लाओ और एक खुदा को छोड़ दो जिसे बुला सकते हो मदद के लिए बुला लो\"","असल ये है के जो चीज़ इनके इल्म की गिरफ़्तार में नहीं आई और जिसका माल भी इनके सामने नहीं आया (जिसका अंतिम सीक्वल उन्हें स्पष्ट नहीं था), उसको इन्होन ने (ख्वा मा ख्वा अटकल पिचू) झूठला दिया। इसी तरह तो इनसे पहले के लोग भी झूठला चुके हैं। फिर देखलो उन जालिमों का क्या अंजाम हुआ","इसमें से कुछ लोग ईमान लाएंगे और कुछ नहीं लाएंगे। और तेरा रब उन मुफसीदों (शरारत करने वालों) को खूब जानता है","अगर ये तुझसे झूठ बोलते हैं तो कहदे के \"मेरा अमल मेरे लिए है और तुम्हारा अमल तुम्हारे लिए। जो कुछ मैं करता हूं उसकी जिम्मेदारी से तुम बारी हो और जो कुछ तुम कर रहे हो उसकी ज़िम्मेदारी से मैं बारी हूँ”","इन में बहुत से लोग हैं जो तेरी बातें सुनते हैं, मगर क्या तू बेहरों को सुनेगा ख्वा वो कुछ ना समझता हूँ","इन में बहुत से लोग हैं जो तुझे देखते हैं, मगर क्या तू अंधों को राह बताएगा ख्वा उन्हें कुछ ना सूझता हो","हकीकत ये है के अल्लाह लोगों पर जुल्म नहीं करता, लोग खुद ही अपने ऊपर जुल्म करते हैं","(आज ये दुनिया की जिंदगी में मस्त हैं) और जिस रोज अल्लाह इनको इकट्ठ करेगा तो (यही दुनिया की जिंदगी यहीं ऐसी है) महसूस होगी) गोया ये महज़ एक घड़ी भर आपस में जान पहचान करने को थे। (हमें वक्त तहकीक हो जाएगा के) फिल-वाक़े सख़्त घाटे (नुक्सन) में रहे वो लोग जिन्होन ने अल्लाह की मुलाक़ात को झुटलाया और हरगिज़ वो राह ए रास्ते पर ना थाय","जिन ब्यूरे नटैज से हम इन्हें डरा रहे हैं उनका कोई हिसा हम तेरे जीते जी दिखा दें या इसे पहले हाय तुझ उठा लें, बाहर हाल इन्हें आना हमारी ही तरफ है और जो कुछ ये कर रहे हैं उसपर अल्लाह गवाह है","हर उम्मत के लिए एक रसूल है फिर जब किसी उम्मत के पास उसका रसूल आ जाता है तो उसका फैसला पूरे इन्साफ के साथ चुका दिया जाता है और उसपर जरा बराबर जुल्म नहीं किया जाता","कहते हैं: अगर तुम्हारी ये धमकी सच्ची है तो आखिर ये कब पूरी होगी","कहो \"मेरे इख्तियार में खुद अपना नफ़ा (फ़ैयदा) ओ ज़रार (नुकसान) भी नहीं। सब कुछ अल्लाह की मशियत पर मौक़ुफ़ है। हर उम्मत के लिए मोहलत की एक मुद्दत है, जब ये मुद्दत पूरी हो जाती है तो घड़ी भर की तकदीम ओ तक़हीर (देरी) भी नहीं होती”","इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा था कि अगर अल्लाह का अजब अज़ाब अचानक रात को या दिन को आ जाए (तो तुम क्या कर सकते हो?) आख़िर ये ऐसी कौन सी चीज़ है जिसके लिए मुजरिम जल्दी मचाएँ","क्या जब वो तुमपर आ पाडेय वह समय तुम उसे मानोगे? अब बचना चाहते हो? हालंके तुम खुद ही इसके जल्दी आने का तकाजा कर रहे थे","फिर जालिमों से खा जाएगा के अब हमेशा के अजब का मजा चखो, जो कुछ तुम कमा रहे हो उसकी याद के सिवा और क्या बदला तुमको दिया जा सकता है","फिर पूछते हैं क्या वाक़ई ये सच है जो तुम कह रहे हो? कहो \"मेरे रब की कसम, ये बिल्कुल सच है और तुम इतना बाल-बूटा नहीं रखते के उसे ज़हूर में आने से रोक दो\"","अगर हर उस शक्स के पास जिसने ज़ुल्म किया है, रूह ए ज़मीन की दौलत भी हो तो हमें अज़ाब से बचने के लिए वो इस्तेमाल फ़िदिया (प्रायश्चित) मुझे देने पर आमादा हो जाएगा। जब ये लोग इस अज़ाब को देख लेंगे तो दिल ही दिल में पछताएंगे मगर उनके दरमियान पूरे इन्साफ से फैसला किया जाएगा, कोई ज़ुल्म उनपार ना होगा","सुनो! आसमानो और ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह का है। सुन रक्खो! अल्लाह का वादा सच्चा है मगर अक्सर इंसान जानता नहीं है","वही जिंदगी बक्शता है और वही मौत देता है और उसकी तरफ तुम सबको पलटना है","लोगन! तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से हिदायत आ गई है। ये वो चीज़ है जो दिलों के अमराज़ (मर्ज) की शिफ़ा है और जो इसे क़बूल करें उनके लिए रहनुमाई और रहमत है","(ऐ नबी), कहो के “ये अल्लाह का फ़ज़ल और उसकी मेहरबानी है के ये चीज़ हमें भेजी, इसपर तो लोगों को ख़ुशी मनानी चाहिए। येह। उन सब चीज़ों से बेहतर है जिन्हें लोग समेट रहे हैं”","(ऐ नबी) इंसे कहो, “तुम लोगों ने कभी ये भी सोचा है के जो रिज़्क अल्लाह ने तुम्हारे लिए उतारा था उसमें से तुमने खुद को ही किसी को हराम और किसी को हलाल ठहरा लिया!”। इनसे पूछो, अल्लाह ने तुमको इसकी इजाज़त दी थी? या तुम अल्लाह पर इफ्तारा कर रहे हो","जो लोग अल्लाह पर ये झूठ इफ्तार करते हैं (झूठ गढ़ते हैं) हैं उनका क्या गुमान है के कयामत के रोज़ उनसे क्या मामला होगा? अल्लाह तो लोगों पर मेहरबानी की नज़र रखता है मगर अक्सर इंसान ऐसे हैं जो शुक्र नहीं करते","(ऐ नबी), तुम जिस हाल में भी होते हो और कुरान में से कुछ भी सुनाते हो, और लोग, तुम भी जो कुछ करते हो हम सब के दौरों में हम तुमको देखते रहते हैं। कोई ज़रा बराबर चीज़ आसमान और ज़मीन में ऐसी नहीं है, ना छोटी ना बड़ी, जो तेरे रब की नज़र से पोशीदा (छुपी) हो और एक साफ़ दफ़्तर में दर्ज़ ना हो","सुनो! जो अल्लाह के दोस्त हैं, जो ईमान लाए और जिन्होन ने तक़वा का रवैय्या इख्तियार किया","उनके लिए कोई खौफ और रंज का मौका नहीं है","दुनिया और आखिरी दोनों जिंदगी में उनके लिए बशारत (खुश-खबरी) ही बशारत है। अल्लाह की बातें बदल नहीं सकतीं. यही बड़ी कामयाबी है","(ऐ नबी)! जो बातें ये लोग तुझपर बनाते हैं वो तुझसे रंजीदा ना करें। इज्जत सारी की सारी खुदा के इख्तियार में है, और वो सब कुछ सुनता और जानता है","आगाह रहो! आसमान के बसने वाले हैं या ज़मीन के, सब के सब अल्लाह के ममलूक हैं और जो लोग अल्लाह के सिवा कुछ (अपने खुद का सच) शरीकों को पुकार रहे हैं वो निरे वेहम ओ गुमान (अनुमान और केवल अनुमान लगा रहे हैं) के पेयरो हैं और महज़ क़यास अराइयां (केवल अनुमान लगा रहे हैं) करते हैं","वो अल्लाह हाय है जिसने तुम्हारे लिए रात बनाई के हमें सुकून हासिल करो और दिन को रोशन बनाया। इस में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो (खुले कानों से पैगम्बर की दावत को) सुनते हैं","लोगों ने कहा कि अल्लाह ने किसी को बेटा बनाया है। सुभान अल्लाह! वो तो बे-नियाज़ है. आसमानो और ज़मीन में जो कुछ है सब उसका दूध है। तुम्हारे पास इस क़ौल के लिए आख़िर दलील क्या है? क्या तुम अल्लाह के मुतालिक वो बातें कहते हो जो तुम्हारे इल्म में नहीं हैं","(ऐ मुहम्मद), कहदो के जो लोग अल्लाह पर झूठे इफ्तारा बांधते हैं (झूठ का अविष्कार करते हैं) वो हरगिज फलाह नहीं पा सकते","दुनिया की चंद रोजा जिंदगी में मजे करलें, फिर हमारी तरफ उनको पलटना है फिर हम इस कुफ्र के बदले जिसका इर्तेक़ाब वो कर रहे हैं उनको साख अज़ाब का मजा चककाएंगे","इनको नूह का क़िस्सा सुनाओ, हमें वक़्त का क़िस्सा जब उसने अपनी क़ौम से कहा था के \"ऐ बिरादरान ए क़ौम, अगर मेरा तुम्हारे दमियां रहना और अल्लाह की आयतें सुना सुना कर तुम्हें गफलत से बेदार करना तुम्हारे लिए न-काबिल ए बर्दाश्त हो गया है तो मेरा भरोसा अल्लाह पर है। तुम अपने रुके हुए शरीकों को साथ लेकर एक मुत्तफ़िका फैसला करलो और जो मंसूबा (योजना) तुम्हारे पेश ए नज़र हो उसको खूब सोच समझ लो ता-के उसका कोई पहलू तुम्हारी निगाह से पोशीदा ना रहे, फिर मेरे खिलाफ उसको अमल में ले आओ और मुझे हरगिज मोहलत ना दो","तुमने मेरी हिदायत से मुंह मोड़ा (तो मेरा क्या नुक्सान किया) मैं तुमसे किसी अजर का तालाब ना था, मेरा अजर तो अल्लाह के ज़िम्मे है, और मुझे हुकुम दिया है के (ख्वा कोई माने या ना माने) मैं खुद मुस्लिम बन कर रहूँ”","उन्होन ने उसे झुटलाया और नतीजा ये हुआ के हमने उसे और उन लोगों को जो उसके साथ कश्ती में थे, बचा लिया और उन्हें ज़मीन में जानशीन (उत्तराधिकारियों) ने बनाया और उन सब लोगों को गर्क (डूब) करदिया जिन्हों ने हमारी आयत को झुटलाया था, पास देखलो के जिन्हे मुतनब्बे (चेतावनी) किया गया था (और फिर भी उन्होन ने मान कर ना दिया) उनका क्या अंजाम हुआ।","फिर नूह के बाद हमने मुखतलिफ़ पैगम्बरों को उनकी क़ौमों की तरफ भेजा और वो उनके पास खुली खुली निशानियां लेकर आये, मगर जिस चीज़ को उन्होन ने पहला झुटला दिया था उसे फिर मान कर ना दिया। इस तरह हम हद से गुजर जाने वालों के दिलों पर थप्पा लगा देते हैं","फिर उनके बाद हमने मूसा और हारून को अपने निशानियों के साथ फिरौन और उसके सरदारों की तरफ भेजा, मगर उनहों ने अपनी बदाई का घमंड किया और वो मुजरिम लोग थे","पास जब हमारे पास से हक उनके सामने आया तो उनको ने कहा के ये तो खुला जादू है","मूसा ने कहा: \"तुम हक को ये कहते हो जबके वो तुम्हारे सामने आ गया, क्या ये जादू है? हालंके जादूगर फलाह नहीं पाया करते\"","उनहों ने जवाब में कहा \"क्या तू इसके लिए आया है के हमें तरीक़े से फेर दे जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है और ज़मीन में बदाई तुम दोनो की क़याम हो जाए? तुम्हारी बात तो हम मन्ने वाले नहीं हैं\"","और फिरौन ने (अपने आदमियों से) कहा के \"हर\" माहिर-ए-फन (विशेषज्ञ) जादूगर को मेरे पास हाजिर करो”","जब जादूगर आ गए तो मूसा ने उन्हें कहा “जो कुछ तुम्हें फेंकना है फेंको।”","फिर जब उन्होन ने अपने एंकर फेंके [कास्ट (उनके कर्मचारी)] दिए तो मूसा ने कहा, \"ये जो तुमने फेंका है ये जादू है, अल्लाह अभी इसे बातिल किये देता है, मुफ़्सिदों (शरारत करने वालों) के काम को अल्लाह सुधरने नहीं देता","और अल्लाह अपने फ़रमानों से हक को हक कर दिखाता है, ख्वा मुजरेमो को वो कितना ही नागावर हो”","(फिर देखो के) मूसा को उसकी क़ौम में से चंद नवाज़वानों के सिवा किसी ने ना माना, फिरौन के डर से और खुद अपनी क़ौम के सरबर-अवार्डा (अपने प्रमुख) लोगन के डर से (जिन्हें खौफ था के) फिरौन उनको अज़ाब में मुबतला करेगा। और वाकिया ये है के फिरौन ज़मीन में गलबा रखा था और वो उन लोगों में से था जो किसी हद पर रुकते नहीं हैं","मोसा ने अपनी क़ौम से कहा के \"लोगन, अगर तुम अल्लाह पर ईमान रखते हो तो उसपर भरोसा करो अगर मुसलमान हो\"","उनहों ने जवाब दिया \"हमने अल्लाह ही पर भरोसा किया, ऐ हमारे रब, हमें जालिम लोगों के लिए फितना न बना","और अपनी रहमत से हमको काफिरों से निजात दे।\"","और हमने मूसा और उसके भाई को इशारा किया के \"मिस्र (मिस्र) में चांद मकान अपनी क़ौम के लिए मुहय्या करो और अपने मकानों (घरों) को क़िबला ठहर लो और नमाज़ क़याम करो और एहले ईमान को बशारत (ख़ुश ख़बरी) दे दो\"","मूसा ने दुआ की \"ऐ हमारे रब, तू नहीं फिरौन और उसके सरदारों को दुनिया की जिंदगी में ज़ीनत और अमवाल (माल) से नवाज़ रक्खा है। ए रब! क्या ये तुम्हारे लिए है कि वो लोगों को तेरी राह से भटकाएं? ए रब, उनका माल ख़राब\" (मिटाना) करदे और उनके दिलों पर ऐसी मोहर करदे के ईमान ना लायें जब तक दर्दनक अजब ना देख लें”","अल्लाह ताला ने जवाब में फरमाया \"तुम दोनों की दुआ कबूल की गई, साबित-कदम रहो और उन लोगों के तारीख की हरगिज जोड़ी न करो जो इल्म नहीं रखते\"","और हम बानी इसराइल को समंदर से गुजर ले गए फिर फिरौन और उसके लश्कर ज़ुल्म और ज़्यादा की ग़रज़ से उनके पीछे चले हट्टा के जब फ़िरौन डूबने लगा तो बोल उठा \"मैंने मान लिया के खुदावंद ए हक़ीक़ी उसके सिवा कोई नहीं है जिसपर बानी इसराइल ईमान लाए, और मैं भी सर ए इताअत झुका देने वालों में से हूँ\"","(जवाब दिया गया) अब ईमान लता है! हालंके इस्से पहले तक तू नफरमानी करता रहा और फसाद बरपा करने वालों (शरारत करने वालों) में से था","अब तो हम सिर्फ तेरी लाश (शव) ही को बचाएंगे ता-के तू बाद की नसलों के लिए निशान ए इब्रत बने अगरचे बहुत से इंसान ऐसे हैं जो हमारी निशानियों से गफ़लत बरात-ते हैं\"","हमने बनी इसराइल को बहुत अच्छा ठिकाना दिया और निहायत उम्मीद उमदा वासिल ए जिंदगी उन्हें अता किए, फिर उन्होन ने बहाम इख्तिलाफ नहीं किया मगर हमें वक्त जबके इल्म उनके पास आ चूका था। यकीनन तेरा रुब कयामत के रोज़ उनके दरमियान हमें चीज़ का फैसला कर देगा जिसमें वो इख्तिलाफ़ करते रहेंगे हैं","अब अगर तुम्हें हिदायत की तरफ से कुछ भी शक हो जो हमें तुझपर नाज़िल की है तो उन लोगों से पूछ ले जो पहले से किताब पढ़ रहे हैं। फिल-वाक़े ये तेरे पास हक़ ही आया है तेरे रब की तरफ से, लिहाज़ा तू शक्क करने वालों में से ना हो","और उन लोगों में ना शामिल हो जिन्होन ने अल्लाह की आयत को झुटलाया है, वरना तू नुक्सान उठाने वालों में से होगा","हकीकत ये है के जिन लोगों पर तेरे रब का क़ौल रस्त आ गया है (तुम्हारे रब का वचन पूरा हो गया है) उनके सामने ख्वा कोई निशानी आ जाए","वो कभी ईमान ला कर नहीं देते जब तक के दर्दनाक अज़ाब सामने न देख लें","फिर क्या ऐसी कोई मिसाल है के एक बस्ती अज़ाब देख कर ईमान लाई हो और उसका ईमान उसके लिए नफा बख्श साबित हुआ हो? यूनुस की क़ौम के सिवा (इसकी कोई नज़ीर नहीं) वो क़ौम जब ईमान ले आई थी तो अलबत्ता हमने उसपर से दुनिया की जिंदगी में रुसवाई का अजब ताल दिया था और उसको एक मुद्दत तक जिंदगी से बेहरमंद होने का मौका दे दिया था","अगर तेरे रब की मशियत (इच्छा) ये होती (के ज़मीन में सब मोमिन ओ फ़रमाबरदार ही होते) तो सारे एहले ज़मीन ईमान ले आये होते। फिर क्या तू लोगों को मजबूर करेगा के वो मोमिन हो जाए","कोई मुतनफ़्फ़िस अल्लाह के इज़ान के बिना ईमान नहीं ला सकता, और अल्लाह का तरीक़ा ये है के जो लोग अक़ल से काम नहीं लेते उनपर गंदगी डाल देता है","इंसे कहो \"ज़मीन और आसमान में जो कुछ है उसे आंखें खोल कर देखो” और जो लोग ईमान लाना ही नहीं चाहते उनके लिए निशानियां और तम्बीहें (चेतावनी) आखिर क्या मुफीद हो सकती हैं","अब ये लोग इसके सिवा और किस चीज़ के मुंतज़िर हैं के वही बुरे दिन देखेंगे जो इनसे पहले गुज़रे हुए लोग देख चुके हैं? इनसे कहो \"अच्छा, इंतजार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतजार करता हूं\"","फिर (जब ऐसा वक्त आता है तो) हम अपने रसूलों को और उन लोगों को बचा लिया करते हैं जो ईमान लाए हैं। हमारा यही तरीका है. हमपर ये हक़ है के मोमिनो को बचा लें","(ऐ नबी!) कहदो के लोगों, अगर तुम अभी तक मेरे दीन के मुतालिक किसी शक्क में हो तो सुनलो के तुम अल्लाह के सिवा जिनकी बंदगी करते हो मैं उनकी बंदगी नहीं करता, बाल्के सिर्फ उसी खुदा की बंदगी करता हूं जिसे क़ब्ज़ में तुम्हारी मौत है। मुझे हुकुम दिया गया है के मैं ईमान लाने वालों में से हूं","और मुझसे फरमाया गया है के तू यक्सू होकर अपने आप को ठीक ठीक इस दीन पर कायम करदे, और हरगिज हरगिज मुशरिकों में से न हो","और अल्लाह को छोड़ कर कोई ऐसी हस्ती को न पुकार जो तुझे न फ़ायदा पाहुंचा सकती है न नुक्सान। अगर तू ऐसा करेगा तो जालिमों में से होगा","अगर अल्लाह तुझे किसी मुसीबत में डाले तो खुद उसके सिवा कोई नहीं जो इस मुसीबत को टाल दे, और अगर वो तेरे हक में किसी भलाई का इरादा करे तो उसके फजल को फिरने वाला भी कोई नहीं है। वो अपने बंदों में से जिसका चाहता है अपने फज़ल से नवाजता है और वो दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","(ऐ मुहम्मद), कहदो के \"लोगन, तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से हक़ आ चुका है, अब जो सीधी राह इख्तियार करे उसकी रास्ता-रवी उसके लिए मुफीद है, और जो गुमराह रहे उसकी गुमराही उसके लिए तबह-कुन है और मैं तुम्हारे ऊपर कोई हवालादार नहीं हूं”","और (ऐ नबी), तुम हिदायत की जोड़ी बनाओ जो तुम्हारी तरफ बाजारिये वही (खुलासा) भेजो। राही है, और सब्र करो यहां तक ​​के अल्लाह फैसला करदे, और वही बेहतर फैसला करने वाला है","अलिफ लाम रा. फरमान है, जिसकी आयतें पुख्ता और मुफस्सल इरशाद हुई हैं, एक दाना और बाख़बर हस्ती की तरफ से","के तुम ना बंदगी करो मगर सिर्फ अल्लाह की। मैं उसकी तरफ से तुमको खबरदार करने वाला भी हूं और बशारत देने वाला भी","और ये के तुम अपने रब से माफ़ी चाहो और उसकी तरफ पलट आओ तो वो एक खास मुद्दत तक तुमको अच्छा समान ए जिंदगी देगा और हर साहब-ए-फजल को उसका फजल अता करेगा. लेकिन अगर तुम मुह फेरते हो तो मैं तुम्हारे हक में एक बड़ा दिन के अज़ाब से डरता हूं","तुम सबको अल्लाह की तरफ पलटना है और वह सब कुछ कर सकता है","देखो! ये लोग अपने सीने को मोड़ते हैं ता-के उसे चुप जाएं। ख़बरदार! जब ये कप्तानों से अपने आप को धमकाते हैं अल्लाह उनके छुपे को भी जानता है और खुले को भी।वो तो उन भेदों से भी वाकिफ है जो सीने में हैं","ज़मीन में चलने वाला कोई जानदार ऐसा नहीं है जिसका रिज़क़ अल्लाह के ज़िम्मे ना हो और जिसका मुतालिक वो ना जानता हो के कहाँ वो रहता है और कहाँ सो जाता है, सब कुछ एक साफ़ दफ़्तर में दर्ज है","और वही है जिसने आसमानो और ज़मीन को चे (छह) दिनों में भुगतान किया जबके इसे पहले उसका अर्श पानी पर था ता-के तुमको आज़मा कर देखो तुम में कौन बेहतर अमल करने वाला है। अब अगर (ऐ मुहम्मद) तुम कहते हो के लोग, मरने का बाद तुम दोबारा उठोगे, तो मुनकिरेन फवारान बोल उठते हैं के ये तो सारी जादूगरी है","और अगर हम एक खास मुद्दत तक उनकी सजा को टालते हैं तो वो कहने लगते हैं के आखिर किस चीज ने इस्तेमाल किया रोक रक्खा है? सुनो! जिस रोज़ उस सज़ा का वक़्त आ गया तो वो किसी के फेर ना फिर बनायेगा और वही चीज़ उनको आ घेरेगी जिसका वो मज़ाक उड़ा रहे हैं","अगर कभी हम इंसान को अपनी रहमत से नवाज़ने के बाद फिर उसे महरूम करते हैं तो वो मयुस होता है और नाशुक्र करने लगता है","और अगर हमें मुसीबत के बाद जो उसपर आई थी तो हम उसे नियामत का मजा चखाते हैं तो कहते हैं मेरे तो सारे दिलादार (सख्तियां) पार हो गए, फिर वो फूला नहीं समता और अचानक लगता है","क्या ऐब से पाक अगर कोई है तो बस वो लोग जो सब्र करने वाले हैं और वही हैं जिनके लिए दरगुज़ार भी हैं और बड़ा अजर भी हैं","तो ऐ पैगम्बर! कहीं ऐसा ना हो कि तुम उन चीज़ों में से किसी चीज़ को (बयान करने से) छोड़ दो जो तुम्हारी तरफ वही की जा रही है। और इस बात पर दिल तंग हो के वो कहेंगे \"इस शक्स पर कोई खजाना क्यों ना उतारा गया\" हां ये के \"इसके साथ कोई फरिश्ता क्यों ना आया\"। तुम तो महज खबरदार करने वाले हो, आगे हर चीज का हवालादार अल्लाह है","क्या ये कहते हैं के पैगम्बर ने ये किताब खुद गढ़ ली है? कहो, “अच्छा ये बात है तो इस जैसी घड़ी हुई दस सूरतें तुम बना लाओ और अल्लाह के सिवा और जो (तुम्हारे माबूद) हैं उनको मदद के लिए बुला सकते हो तो बुला लो अगर तुम (उन्हें माबूद समझने में) सच्चे हो","अब अगर वो (तुम्हारे) माबूद) तुम्हारी मदद को नहीं पहचानते तो जान लो के ये अल्लाह के इल्म से नाज़िल हुई है और ये के अल्लाह के सिवा कोई हक़ीक़ी माबूद नहीं है फिर क्या तुम (क्या अम्र ए हक़ के आगे) सर-ए-तस्लीम ख़त्म करते हो?”","जो लोग बस इसी दुनिया की जिंदगी और इसकी खुश नुमाइयों के तालिब होते हैं उनकी कारगुजारी के सारा फल हम यहीं उनको दे देते हैं और इसमे उनके साथ कोई काम नहीं की जाती","मगर आखिरी में ऐसे लोगों के लिए आग के सिवा कुछ नहीं है। (वहां मालूम हो जाएगा के) जो कुछ उनको ने दुनिया में बनाया वो सब बेकार होगा और अब उनका सारा किआ धरा महज़ बातिल है","फिर भला वो शक्स जो अपने रब की तरफ से एक साफ शहादत (सबूत) रखता था, उसके बाद एक गवाह भी परवरदिगार की तरफ से (इस शहादत की ताईद में) आ गया, और पहले मूसा की किताब रहनुमा और रहमत के तौर पर आई भी मौजूद थी (क्या वो भी दुनिया की तरह, इसका इंकार कर सकता है?) ऐसे लोग तो इसपर ईमान ही लाएंगे। और इंसानी गिरोहों में से जो कोई इसका इंकार करे तो उसके लिए जिस जगह का वादा है वो दोज़ख है। पास (ऐ पैगम्बर), तुम इस चीज़ की तरफ से किसी शक्क में न पड़ना, ये हक़ है तुम्हारे रब की तरफ से मगर अक्सर लोग नहीं मानते","और हमारे शक्स से बढ़ कर जालिम और कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ घड़े? ऐसे लोग अपने रब के हुज़ूर पेश होंगे और गवाह शहादत देंगे के ये हैं वो लोग जिन्हों ने अपने रब पर झूठ घड़ा था। सुनो! खुदा की लानत है जालिमों पर","उन जालिमों पर जो खुदा के रास्ते से लोगों को रोकते हैं, उसके रास्ते को टेढ़ा करना चाहते हैं और आख़िरत का इंकार करते हैं","वो ज़मीन में अल्लाह को बे-बस करने वाले ना थे और ना अल्लाह के मुक़ाबले में कोई उनका हमी (रक्षक) था. उन्हें अब दोहरा (डबल) अजब दिया जाएगा। वो ना किसी की सुन ही सकता था और ना खुद ही उनको कुछ सूझता था","ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने आप को खुद घाटे (नुक्सान) में डाला और वो सब कुछ उनसे खोया गया जो उन्होन ने गढ़ रखा था","नागुज़ीर है के वही आख़िरत में सबसे बढ़कर घाटे (नुकसान) में रहेंगे","रहे वो लोग जो ईमान लाए और जिन्होन ने नीक अमल किए और अपने रब हाय के होकर रहे, तो यकीनन वो जन्नती लोग हैं और जन्नत में वो हमेशा रहेंगे","डोनो फ़रीक़ों की में मिसल ऐसा है जैसा एक आदमी तो हो अंधा बेहरा और दूसरा हो देखने और सुनने वाला। क्या ये डोनो यक्सन हो सकते हैं? क्या तुम (इस मिसाल से) कोई सबक नहीं लेते","(और ऐसी ही हालत थी जब) हमने नहीं को उसकी क़ौम की तरफ भेजा था। (उसने कहा) \"मैं तुम लोगों को साफ-साफ कहबरदार करता हूं","के अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी न करो, वरना मुझे अंदेशा है के तुमपर एक रोज़ दर्दनाक अज़ाब आएगा।\"","जवाब में उसकी क़ौम के सरदार, जिन्हों ने उसकी बात मन से इंकार किया था, बोले \"हमारी नज़र में तो तुम इसके सिवा कुछ नहीं हो के बस एक इंसान हो हम जैसे, और हम देख रहे हैं के हमारी क़ौम में से बस उन लोगों ने जो हमारे हन अराज़िल थाय (अदना दर्जे / सबसे नीच) बे-सोचे समझे तुम्हारी जोड़ी इख्तियार करली है। और हम कोई चीज भी ऐसी नहीं जानते, जिसमें तुमलोग हमसे कुछ बढ़े हुए हो।","उसने कहा \"ऐ बिरादरान ए क़ौम, जरा सोचो तो सही के अगर मैं अपने रब की तरफ से एक खुली शहादत पर कायम था और फिर उसने मुझको अपनी खास रहमत से भी नवाज दिया, मगर वो तुमको नजर ना आई, तो आखिर हमारे पास क्या जरूरी\" है के तुम मनाना न चाहो और हम ज़बरदस्ती उसको तुम्हारे सर छपाईक दीन","और ऐ बिरादरन ए क़ौम, मैं इस काम पर तुमसे कोई माल नहीं मांगता, मेरा अजर तो अल्लाह के ज़िम्मे है और मैं उन लोगों को धक्के देने से भी रहा जिन्हों ने मेरी बात मानी है अपने रब के हुजूर जाने वाले हैं मगर मैं देखता हूं कि तुमलोग जहलत बरात रहे हो","और ऐ क़ौम, मैं लोगों को धुतकार दूं तो खुदा की पकड़ से कौन मुझे बचाने आएगा? तुम लोगों की समझ में क्या इतनी बात भी नहीं आती","और मैं तुमसे नहीं कहता कि मेरे पास अल्लाह के खज़ाने हैं, ना ये कहता हूँ के मैं गैब का इल्म रखता हूँ, ना ये मेरा दावा है के मैं फ़रिश्ता हूँ और ये भी मैं नहीं कह सकता कि जिन लोगों को तुम्हारी आँखें हिकारत से देखती हैं उन्हें अल्लाह ने कोई भलायी नहीं डि उनके नफ़्स का हाल अल्लाह ही बेहतर जानता है। अगर मैं ऐसा कहूं तो ज़ालिम होगा”","आख़िर ए कार उन लोगों ने कहा के “ ऐ नूह, तुमने हमसे झगड़ा किया और बहुत कार्लिया अब तो बस वो अज़ाब ले आओ जिसकी तुम हमें धमकी देते हो अगर सच्चे हो”","नूह ने जवाब दिया,“ वाह तो अल्लाह हाय लाएगा, अगर चाहेगा, और तुम इतना बाल-बूटा नहीं रखते के इसे रोक दो","अब अगर मैं तुम्हारी कुछ खैर ख्वाही करना भी चाहूं तो मेरी खैर ख्वाही तुम्हें कोई फैयदा नहीं दे सकती जबके अल्लाह ही ने तुम्हें भटका देने का इरादा करलिया हो. वही तुम्हारा रब है और उसकी तरफ तुम्हारी पलटना है”","(ऐ मुहम्मद), क्या ये लोग कहते हैं कि इस शक्स ने ये सब कुछ खुद गढ़ लिया है? इनसे कहो “ अगर मैंने ये खुद घड़ा है तो मुझ पर अपने जुर्म की जिम्मेदारी है, और जो जुर्म है तुम कर रहे हो उसकी ज़िम्मेदारी से मैं बारी हूँ।”","नहीं पर वही कि गई के तुम्हारी क़ौम में से जो लोग ईमान ला चुके बस वो ला चुके, अब कोई मन्ने वाला नहीं है। इनके कार्टूनों पर घूम खाना छोड़ो","और हमारी निगरानी में हमारी वही के मुताबिक़ एक कश्ती बनानी शुरू करदो। और देखो, जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उनके हक़ में मुझसे कोई सिफ़रिश ना करना। ये सारे के सारे अब डूबने वाले हैं","नहीं कश्ती बना रहा था और उसकी क़ौम के सरदारों में से जो कोई उसके पास से गुज़रता था वो उसका मज़ाक उड़ाता था। उसने कहा “अगर तुम हमपर हंसते हो तो हम भी तुमपर हंस रहे हैं","अनकरीब तुम्हें खुद मालूम हो जाएगा कि किस पर वो अजब आता है जो उसे रुसवा कर देगा, और किसपर वो बला टूट पड़ती है जो तले नहीं तलेगी”","यहां तक ​​के जब हमारा हुकुम आ गया और वो तन्नूर (ओवन) उबल गया। तो हमने कहा “हर क़िस्म के जानवरों का एक जोड़ा कश्ती में रख लो, अपने घर वालों को भी सिवाय उन अश्कों के जिनके निशान-दही पहले की जा चुकी है इस में सवार करा दो, और उन लोगों को भी बिठा लो जो ईमान लाए हैं”। और थोड़े ही लोग थे जो नूह के साथ ईमान लाए थे","नूह ने कहा \"सवार हो जाओ इसमीं, अल्लाह ही के नाम से है इसका चलना भी और इसका ठहरना भी। मेरा रब बड़ा गफूर ओ रहीम है\"","कश्ती उन लोगों के लिए चली जा रही थी और एक एक मौज पहाड़ की तरह उठ रही थी। नूह का बेटा दूर फासले पर था, नूह ने पुकार कर कहा \"बेटा, हमारे साथ सवार होजा, काफिरों के साथ ना रह।\"","उसने पलट कर जवाब दिया \"मैं अभी एक पहाड़ पर चढ़ा जाता हूं जो मुझे पानी से बचा लेगा\"। नूह ने कहा, आज कोई चीज अल्लाह के हुकुम से बचाने वाली नहीं है सिवाय इसके कि अल्लाह ही किसी पर रहम फरमाये।'' इतने में एक मौज दोनों के दरमियान हायल हो गई और वो भी डूबने वालों में शामिल हो गया","हुकुम हुआ ''ऐ जमीन, अपना सारा पानी तैयार हो गया और ऐ आसमान, रुक जा” चुनांचे पानी ज़मीन में बैठ गया, फैसला चुका दिया गया, कश्ती जूड़ी पर टिक गई, और कह दिया गया के दरवाज़े जालिमों की क़ौम","नूह ने अपने रुब को पुकारा, कहा “ऐ रब! मेरा बेटा मेरे घर वालों में से है और तेरा वादा सच्चा है और तू सब हकीमो से बड़ा और बेहतर हकीम है”","जवाब में इरशाद हुआ “ऐ नूह, वो तेरे घर वालों में से नहीं है। वो तो एक बड़ा हुआ काम है. लिहाजा तू हमसे बात करता है कि मुझसे अंधेरा न कर जिसकी हकीकत तू नहीं जानता। मैं तुझे हिदायत करता हूं के अपने आप को जहिलों की तरह ना बना ले”","नूह ने फवारान अर्ज़ किया “ऐ मेरे रब, मैं तेरी पनाह मांगता हूं इसके के वो चीज तुझसे मांगूं जिसका मुझे इलम नहीं। अगर तू नहीं मुझे माफ़ ना किया और रहम ना फरमाया तो मैं बरबाद हो जाऊंगा","हुकुम हुआ \" ऐ नूह उतर जा हमारी तरफ से सलामती और बरकतें हैं तुझपर और उन गिरोहोन पर जो तेरे साथ हैं। और कुछ गिरोह ऐसे भी हैं जिनको हम कुछ मुद्दत समान ए जिंदगी बख्शेंगी फिर उन्हें हमारी तरफ से दर्दनक अजब पहचानेगा”","(ऐ मुहम्मद), ये गायब की खबरें हैं जो हम तुम्हारी तरफ वही कर रहे हैं, इसे पहले ना तुम इनको जानते थे और ना तुम्हारी क़ौम। पस सब्र करो, अंजाम-ए-कार मुत्तक़ियों के हक़ में है","और आद की तरफ हमने उनके भाई हुद को भेजा। उसने कहा \"ऐ बिरादरान ए क़ौम, अल्लाह की बंदगी करो, तुम्हारा कोई खुदा उसके सिवा नहीं है, तुमने महज़ झूठ घड़ रखा है","ए बिरादरान ए क़ौम इस काम पर मैं तुमसे कोई अजर नहीं चाहता। मेरा अजर तो उसका ज़िम्मे है जिसने मुझे भुगतान किया है क्या तुम अक्ल से जरा काम नहीं लेते","और ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अपने रब से माफ़ी चाहो, फिर उसकी तरफ पलटो। वो तुम्हारे आसमान के दहाने खोल देगा और तुम्हारी मौजुदा कुव्वत (ताकत) पर मजीद कुव्वत का इजाफा करेगा। मुजरेमोन की तरह मुँह न फेरो”","उन्होन ने जवाब दिया, “ऐ हुद, तू हमारे पास कोई सारी शहादत (सबूत) लेकर नहीं आया है, और तेरे कहने से हम अपने माबूदों को नहीं छोड़ सकते। और तुझपर हम ईमान लाने वाले नहीं हैं","हम तो ये समझते हैं कि तेरे ऊपर हमारे मबूदों में से किसी की मौत हो गई है।'' हुड ने कहा, ''मैं अल्लाह की शहादत पेश करता हूं और तुम गवाह रहो के ये जो अल्लाह के सिवा दूसरों को तुमने खुदाई में शरीक किया ठहरे रक्खा है उसे मैं बेज़ार हूं","तुम सब मिलकर मेरे खिलाफ अपनी करनी में कसार ना उठा रख और मुझे जरा मोहलत ना दो","मेरा भरोसा अल्लाह पर है जो मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी। कोई जानदार ऐसा नहीं जिसकी छोटी उसके हाथ में ना हो। बेशक मेरा रब सीधी राह पर है","अगर तुम मुंह फेरते हो तो फिर लो, जो पैगाम दे कर मैं तुम्हारे पास भेज गया था वह मैं तुमको पाहुंचा चूका हूं। अब मेरा रब तुम्हारी जगह दूसरी कौम को उठाएगा और तुम उसका कुछ न बिगाड़ पाओगे। यकीनन मेरा रब हर चीज़ पर नज़र है।”","फिर जब हमारा हुकुम आ गया तो हमने अपनी रहमत से हुद को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे निजात दे दी और एक मजबूत अज़ाब से उन्हें बचा लिया","ये हैं आद। अपने रुब की आयतों से उनको ने इंकार किया, उसके रसूलों की बात ना मानी, और हर जब्बार दुश्मन ए हक़ की जोड़ी बनाते रहे","आख़िर ए कार इस दुनिया में भी अंदर फिटकर पड़ी और कयामत के रोज़ भी। सुनो! आद ने अपने रब से कुफ्र किया, सुनो! दूर फेंक दिये गये आद, हद की क़ौम के लोग","और समूद की तरफ़ हमने उनके भाई सालेह को भेजा। उसने कहा, \"ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है। वही है जिसने तुमको ज़मीन से पैदा किया है और यहां तुमको बसाया है। लिहाज़ा तुम उसे माफ़ी चाहो और उसकी तरफ पलट आओ। यकीनन मेरा रब करीब है और वो।\" दुआओं का जवाब देने वाला है”","उन्होन ने कहा “ऐ सालेह, इसके पहले तू हमारे दरमियान ऐसा शक्स था जिसकी बड़ी तवाक्कत (उम्मीदें) वबस्ता थी। क्या तुम हमें माबूदों की परस्तियों से रोकना चाहते हैं जिनकी परस्तियां हमारे बाप दादा करते थे? तू जिस तारीख़ की तरफ हमें बुला रहा है, इसके बारे में हमको शक है, जिसने हमें ख़लजान (परेशान करने वाला शक) में डाल रखा है।”","सालेह ने कहा \" ऐ बिरादरान-ए-कौम, तुमने कुछ इस बात पर भी गौर किया के अगर मैं अपने रब की तरफ से एक साफ शहादत रखता था, और फिर उसने अपने रहमत से भी मुझको नवाज दिया तो इसके बाद अल्लाह की पकड़ से मुझे कौन बचाएगा अगर मैं उसकी नफरमानी करूं? तुम मेरे किस काम आ सकते हो सिवाय इसके मुझे और ज्यादा खसरे (नुक्सान) में डाल दो","और ऐ मेरी कौम के लोगों, देखो ये अल्लाह की ऊंटनी (वह-ऊंटनी) तुम्हारे लिए एक निशानी है, इसे खुदा की जमीन में बदलना है के लिए आज़ाद छोड़ दो। इस्से ज़रा तरुज़ ना करना (उसे चोट मत पहुँचाओ) वर्ना कुछ ज्यादा देर न गुजरेगी के तुमपर खुदा का अज़ाब आ जाएगा”","मगर उनहोन ने औंटनी को मार डाला इसपर सालेह ने उनको खबरदार कर दिया के “बस अब तीन दिन अपने घरों में और रह बस लो। ये ऐसी मियाद (वादा) है जो झूठी ना साबित होगी”","आखिर-ए-कार जब हमारे फैसले का वक्त आ गया तो हमने अपनी रहमत से सालेह को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे बचा लिया, और उस दिन की रुसवाई से उनको महफूज रक्खा। बेशाक तेरा रब ही दर-असल ताक़तवार और बाला-दस्त (ऑल-माइटी) है","रहे वो लोग जिन्होन ने ज़ुल्म किया था तो एक मजबूत धमाके ने उनको धर लिया और वो अपनी बस्तियों में इस तरह बे-हिस्स ओ हरकत (बेजान पड़ा हुआ) पड़े के पड़े रह गए","के गोया वो वहां कभी बसाए ही ना थे। सुनो! समूद ने अपने रब से कुफ्र किया, सुनो! दूर फेंक दिए गए समूद","और देखो, इब्राहिम के पास हमारे फरिश्ते खुश खबरी के लिए हुए पहुंचे। कहां तुम्पर सलाम हो, इब्राहिम ने जवाब दिया तुम्पर भी सलाम हो, फिर कुछ देर ना गुजरी के इब्राहिम एक भुना (भुना हुआ) हुआ बछड़ा (बछड़ा) (उनकी जियाफत के लिए) ले आया","मगर जब देखा के उनके हाथ खाने पर नहीं बढ़ते तो वो उनसे मुश्तबा (उन पर अविश्वास) हो गया और दिल में उनसे खौफ महसूस करने लगा। उनहों ने कहा \"दारो नहीं, हम तो लूट की क़ौम की तरफ भेज गए हैं\"","इब्राहिम की बीवी खड़ी हुई थी वो ये सुनकर हस दी (हँसे) फिर हमने उसको इशाक की और इशाक के बाद याकूब की ख़ुशख़बरी दी","वो बोली \"हाय मेरी कम्बख्त! क्या! अब मेरे हां औलाद होगी जबके मैं बुढ़िया फूल गई और ये मेरे मियां भी बूढ़े हो गए? ये तो बड़ी अजीब बात है''","फरिश्तों ने कहा ''अल्लाह के हुकुम पर ताज्जुब करती हो? यकीनन अल्लाह निहायत काबिल-ए-तारीफ और बड़ी शान वाला है”","फिर जब इब्राहिम की घबराहट दूर हो गई और (औलाद की बशारत से) उसका दिल खुश हो गया तो उसने कौम ए लूट के मामले में हमसे झगड़ा शुरू किया","हकीकत में इब्राहिम बड़ा हलीम और नरम दिल आदमी था और हर हाल में हमारी तरफ रूजू करता था","(आख़िर ए कार हमारे फ़रिश्तों ने उसे कहा) \"ऐ इब्राहिम, इसके बाज़ आ जाओ, तुम्हारे रब का हुकुम हो चुका है और अब उन लोगों पर वो अज़ाब आ कर रहेगा जो किसी के फेर नहीं फिर सकता\"","और जब हमारे फ़रिश्ते लुट के पास पहुँचे तो उनकी आमद से वो बहुत घबराया और दिल तंग हुआ और कहने लगा के आज बड़ी मुसीबत का दिन है","(महमानो का आना था के) उसकी क़ौम के लोग बे-इख्तियार उसके घर की तरफ दौड़ पड़े। पहले से वो ऐसी ही बदकारियों के शौकीन थे। लुट ने उनसे कहा \"भाइयों, ये मेरी बेटियां मौजूद हैं, ये तुम्हारे लिए पाकीजा-तरर हैं। कुछ खुदा का खौफ करो और मेरे मेहमानों के मामले में मुझे ज़लील न करो। क्या तुम में कोई भला आदमी नहीं?\"","उनको ने जवाब दिया \"तुझे तो मालूम ही है के तेरी बेटियों में हमारा कोई हिसा नहीं है और तू ये भी जानता है के हम चाहते क्या हैं\"","लूट ने कहा \" काश मेरे पास इतनी ताक़त होती के तुम्हें सीधा करदेता, या कोई मज़बूत सहारा ही होता के\" उसकी पनाह लेता”","तब फ़रिश्तों ने उसे कहा के “ऐ लुट, हम तेरे रब के भेजे हुए फ़रिश्ते हैं। ये लोग तेरा कुछ न बिगाड़ सकेंगे। बस तू कुछ रात रहे अपने एहल ओ अयाल को लेकर निकल जा और देखो, तुम में से कोई शक्स पीछे पलट कर।” ना देखे मगर तेरी बीवी (साथ नहीं जाएगी) क्योंकि उसपर भी वही कुछ गुज़रने वाला है जो इन लोगों पर गुज़रना है। उनकी तबाही के लिए सुबह का वक्त मुकर्रर है। सुबह होते अब दिन ही कितनी है”","फिर जब हमारे फैसले का वक्त आ गया तो हमने हमें बस्ती को तलपट (उल्टा) करदिया और उसपर पकी हुई मिट्टी (पकी हुई मिट्टी) के पत्थर तोड़-तोड़ बरसाये","जिन में से हर पत्थर तेरे रुब के हां निशान ज़्यादा था और ज़ालिमों से ये सज़ा कुछ दूर नहीं है","और मदियां वालों की तरफ हमने उनके भाई शोएब को भेजा. उसने कहा \"ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है। और नाप तौल में कमी ना किया करो। आज मैं तुम्हारे अच्छे हाल में देख रहा हूँ, मगर मुझे डर है के कल तुम्पर ऐसा दिन आएगा जिसका अज़ाब सबको घेर लेगा\"","और ऐ बिरादरान ए क़ौम, ठीक ठीक इन्साफ के साथ पूरा नापो और तोलो (माप) और लोगों को उनकी चीज़ में घाटा (नुकसान) ना दिया करो और ज़मीन में फ़साद ना फ़ायलते फिरो","अल्लाह की दी हुई बचत (लाभ) तुम्हारे लिए बेतार है अगर तुम मोमिन हो और बहार-हाल मैं तुम्हारे ऊपर कोई निगरानी ए कार नहीं हूं\"","उन्होन ने जवाब दिया \"ऐ शोएब, क्या तेरी नमाज़ तुझे ये सिखाती है के हम उन सारे माबूदों को छोड़ दें जिनकी परस्तिश हमारे बाप दादा करते थे? हां ये के हमको अपने माल में अपनी मंशा(जैसा हम चाहें) के मुताबिक तसर्रफ(खर्च/उपयोग) करने का इख्तियार ना हो? बस तू ही तो एक आली ज़र्फ और रस्तबाज़ आदमी (सहनशील और सही दिशा वाला) रह गया है”","शोएब ने कहा \"भाइयों, तुम खुद ही सोचो के अगर मैं अपने रब की तरफ से एक खुली शहादत पर था और फिर उसने अपने हां से मुझको अच्छा रिज्क भी आता किया (तो इसके बाद मैं तुम्हारी गुमराहियां और हराम-खोरियों में तुम्हारा शरीक ए हाल कैसे हो सकता है) हूं?) और मैं हरगिज ये नहीं चाहता के जिन बातों से मैं तुमको रोकता हूं उनका खुद इर्तकाब करूं। मैं तो इस्लाह करना चाहता हूं जहां तक ​​भी मेरा बस चले और ये जो कुछ करना चाहता हूं उसका सारा इन्हिसार अल्लाह की तौफीक पर है किया और हर मामले में उसकी तरफ मैं रूजू करता हूं","और ऐ बिरादरान ए क़ौम, मेरे खिलाफ़ तुम्हारी हद धर्मी कहीं ये नौबत न पाहुंचा दे के आख़िर ए कर तुमपर भी वही अज़ाब आ कर रहे जो नूह या हुड या सालेह की क़ौम पर आया था. और लुट की क़ौम तो तुमसे कुछ ज़्यादा दूर भी नहीं है","देखो! अपने रब से माफ़ी मांगो और उसकी तरफ पलट आओ, बेशक मेरा रुब रहीम है और अपने मख़लूक से मुहब्बत रखता है”","उनहों ने जवाब दिया “ऐ शोएब, तेरी बहुत सी बातें तो हमारी समझ ही में नहीं आती. और हम देखते हैं कि तू हमारे दरमियान एक बे-ज़ार आदमी है। तेरी बिरादरी ना होती तो हम कभी का तुझसे संगसार (पत्थर से मौत के घाट उतार देते) कर चुके होते, तेरा बलबूटा तो इतना नहीं है के हमपर भारी हो”","शोएब ने कहा “भाइयों, क्या मेरी बिरादरी तुमपर अल्लाह से ज्यादा भारी है के तुमने (बिरादरी का तो खौफ किया और) अल्लाह को बिल्कुल पास ए पुश्त (तुम्हारे पीछे) वापस) दाल दिया? जान रक्खो के जो कुछ तुम कर रहे हो वो अल्लाह की गिरफ़्तार से बाहर नहीं है","ऐ मेरी क़ौम के लोगों, तुम अपने तरीक़े पर काम किये जाओ और मैं अपनी तारीख़ पर करता रहूँगा। जल्दी ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि किस पर ज़िल्लत का अज़ाब आता है और कौन झूठा है। तुम भी इंतजार करो और मैं भी तुम्हारे साथ चश्मा-बरा हूं (मैं भी तुम्हारे साथ देखूंगा)\"","आखिर ए कार जब हमारे फैसले का वक्त आ गया तो हमने अपनी रहमत से शोएब और उसके साथी मोमिनो को बचा लिया और जिन लोगों ने जुल्म किया था उनको एक मौका धमाके ने ऐसा पकड़ा के वो अपनी बस्तियों में बे-हिस्स ओ हरकत (बेजान पड़ा हुआ) पड़े के पड़े रह गए","गोया वो कभी वहां रहे बेसी ही ना थाय. सुनो! मदियां वाले भी दूर फेंक दिए गए जिस तरह समूद फेंके गए थे","और मूसा को हमने अपने निशानियां और खुली खुली सनद ए ममोरियात (स्पष्ट अधिकार) के साथ फिरौन और उसके अयान ए सल्तनत की तरफ भेजा","मगर उनहों ने फिरौन के हुकुम की जोड़ी की हलनके फिरौन का हुकुम रास्ता (दाहिनी दिशा) पर ना था","कयामत के रोज़ वो अपनी क़ौम के आगे आगे होगा और अपनी पेशवाई में उन्हें दोज़ख की तरफ ले जाएगा। कैसी बिगड़ जाए वरूद (मनहूस मंजिल) है ये जिस पर कोई पहुंचे","और उन लोगों पर दुनिया में भी लानत पड़ी और कयामत के रोज़ भी पड़ेंगे। कैसा बुरा सिला है ये जो किसी को मिले","ये चांद बस्तियां की सरगुज़िश्त (खाता) है जो हम तुम्हें सुना रहे हैं। इनमें से बाज़ अब भी खड़ी हैं और बाज़ की फ़सल कट चुकी है","हमने उनपर ज़ुल्म नहीं किया, उन्होन ने आप ही अपने ऊपर सितम ढाया। और जब अल्लाह का हुकुम आ गया तो उनके वो माबूद जिन्हे वो अल्लाह को छोड़ कर पुकारते थे, उनके कुछ काम ना आ सके। और उनको ने हलाकत ओ बरबादी के सिवा उन्हें कुछ फ़ायदा ना दिया","और तेरा रब्ब जब किसी जालिम बस्ती को पकड़ता है तो फिर उसकी पकड़ ऐसी ही हुआ करती है, फिल वक़हे उसकी पकड़ बड़ी सच और दर्दनाक होती है","हकीकत ये है के इस में एक निशानी है हर उस शक्स के लिए जो अज़ाब ए आखिरी का खौफ करे। वो एक दिन होगा जिसमें सब लोग जमा होंगे और फिर जो कुछ भी हमें रोज़ होगा सब की आँखों के सामने होगा","हम उसके लेन में कुछ बहुत ज़्यादा तक़रीर नहीं कर रहे हैं, बस एक गिनी चुनी मुद्दत उसके लिए मुकर्रर है","जब वो आएगा तो किसी को बात करने का मजा ना होगा, इल्ला ये के खुदा की इज्जत से कुछ अर्ज़ करे, फिर कुछ लोग हमसे रोज़ बदबख्त होंगे और कुछ नई बख्त","जो बद-बख्त होंगे वो दोज़ख में जाएंगे (जहां गर्मी और प्यास की शिद्दत से)। वो हांपेंगे और फुनकारे मारेंगे (आह और कराह)","और उसकी हालत में वो हमेशा रहेंगे जब तक के जमीन ओ आसमान कायम हैं, इल्ला ये के तेरा रब कुछ और चाहे। बेशक तेरा रब पूरा इख्तियार रखता है के जो चाहे करे","रहे वो लोग जो नइक बख्त निकलेंगे, तो वो जन्नत में जाएंगे और वहां हमेशा रहेंगे जब तक जमीन ओ आसमान कायम है, इल्ला ये के तेरा रुब कुछ और चचे। ऐसी बख्शीश उनको मिलेगी जिसका सिलसिला कभी मुनक्का (खतम) न होगा","पास (ऐ नबी), तू उन माबूदों की तरफ से किसी शक्क में न रह जिनकी ये लोग इबादत कर रहे हैं। ये तो (बस लकीर के फकीर बने हुए) उसकी तरह पूजा पात किये जा रहे हैं जिस तरह पहले उनके बाप दादा करते थे। और हम इनका हिसा इन्हें भरपुर देंगे बिना इसके इस में कुछ कासर हो","हम इसे पहले मूसा को भी किताब दे चुके हैं और उसके बारे में भी इख्तिलाफ किया गया था। अगर तेरे रब की तरफ से एक बात पहले ही ताई न करदी गई होती तो इख्तिलाफ करने वालों के दरमियान में कभी का फैसला चुका दिया जाता। ये वक़िया है के ये लोग इसकी तरफ़ से शक्क और ख़लजान (अशांत करने वाला संदेह) में पड़े हुए हैं","और ये भी वक़िया है के तेरा रब इन्हें इनके अमल का पूरा पूरा बदला दे कर रहेगा। यक़ीनन वो इनकी सब हरकतों से ख़बर है","पास (ऐ मुहम्मद), तुम और तुम्हारे वो साथी जो (कुफ्र ओ बगावत से ईमान ओ इताअत की तरफ) पलट आए हैं, ठीक ठीक राह-ए-रास्त पर साबित क़दम रहो जैसा के तुम्हें हुकुम दिया गया है। और बंदगी की हद से तजावुज ना करो. जो कुछ तुम कर रहे हो उसपर तुम्हारा रब निगाह रखता है","जालिमों की तरफ़ ज़रा ना झुकना वरना जहन्नुम की लपेट में आ जाओगे और तुम्हें कोई ऐसी वाली ओ सरपरस्त ना मिलेगा जो खुदा से तुम बच सके और कहीं से तुमको मदद ना पहनोगे","और देखो, नमाज़ क़याम करो दिन के दोनों सिरों पर (दिन के दो छोर) और कुछ रात गुज़रने पर। दर हकीकत नेकियां बुराइयों को दूर कर देती हैं, ये एक याद दिहानी है उन लोगों के लिए जो खुदा को याद रखने वाले हैं","और सब्र कर, अल्लाह नेकी करने वालों का अजर कभी ज़या नहीं करता","फिर क्यों ना उन क़ौमों में जो तुमसे पहले गुज़र चुकी हैं ऐसे अहले ख़ैर मौज़ूद रहे जो लोगों को ज़मीन में फ़साद बरपा करने से रोकते हैं? ऐसे लोग निकले भी तो बहुत काम जिनको हमने उन क़ौमों में से बचा लिया, वरना जालिम लोग तो उन्ही मौजों (आसानी और आराम) के पीछे पड़े रहे, जिनके समान उन्हें फरवानी के साथ दिए गए थे (उन्हें सम्मानित किया गया) और वो मुजरिम बनकर रहे","तेरा रब ऐसा नहीं है के बस्तियों को न-हक़्क़ तबह करदे हालंके उनके बशिंदे इस्लाह करने वाले माननीय","बेशक तेरा रब अगर चाहता तो तमाम इंसानों को एक गिरह बना सकता था, मगर अब तो वो मुख़्तलिफ़ तरीक़ों ही पर चलते रहेंगे","और रहो राह-रवियों से सिर्फ वो लोग बचेंगे जब तक तेरे रब की रहमत है। इसी (आजादी इंतेखाब ओ इख्तियार) के लिए ही तो उसने उन्हें अदा किया था और तेरे रब की वो बात पूरी हो गई जो उसने कही थी के मैं जहन्नुम को जिन्न और इंसान, सबसे बाहर दूँगा","और (ऐ मुहम्मद), ये पैगंबरों के किस्से जो हम तुम्हें सुनाते हैं हैं, वो चीज़े हैं जिनके बारे में हम तुम्हारे दिल को मज़बूत करते हैं। इनके अंदर तुमको हकीकत का इलम मिला और ईमान लाने वालों को हिदायत और बेदारी नसीब हुई","रहे वो लोग जो ईमान नहीं लाते, तो उनसे कहदो के तुम अपने तारीख पर काम करते रहो और हम अपने तारीख पर किया करते हैं","अंजाम ए कर का तुम भी इंतज़ार करो और हम भी मुंतज़िर (इंतज़ार) कर रहे हैं","आसमान और ज़मीन में जो कुछ छुपा हुआ है सब अल्लाह के क़ब्ज़े कुदरत में है। और सारा मामला उसी की तरफ रूजू किया जाता है। पास (ऐ नबी) तू उसकी बंदगी कर और उसी पर भरोसा रख। जो कुछ तुमलोग कर रहे हो तेरा रब उसे बेख़बर नहीं है","अलिफ़, लाम, रा.. ये उस किताब की आयत है जो अपना मुद्दुआ (इसकी वस्तु) साफ़ साफ़ बयान करती है","हमने इसे नाज़िल किया है कुरान बना कर अरबी ज़ुबान मैं ता-के तुम (एहले अरब) इसको अच्छी तरह समझ सको","(ऐ मुहम्मद), हम कुरान को तुम्हारी तरफ वही करके बेहतरीन जोड़ी में वाकियात और हक़ीक़त तुमसे बयां करते हैं, वरना इसे पहले तो (चीजों से) तुम बिल्कुल ही बे-खबर थे","ये उस वक्त का जिक्र है जब यूसुफ ने अपने बाप से कहा \"अब्बाजान, मैंने ख्वाब देखा है के ग्यारह (ग्यारह) सितारे हैं और सूरज और चाँद हैं और वो मुझे सजदा कर रहे हैं\"","जवाब में उके बाप ने कहा, \"बेटा, अपना ये ख्वाब अपने भाइयों को ना सुनाना वरना वो तेरे डरपे आजर हो जायेंगे(किसी भी बुराई की साजिश रचेंगे) के विरुद्ध योजना आप), हकीकत ये है के शैतान आदमी का खुला दुश्मन है","और ऐसा ही होगा (जैसा तू ने ख्वाब में देखा है के) तेरा रब तुझ (अपने काम के लिए) मुंतखब (चुनें) करेगा और तुम्हें बातों की तह तक पहचानना सिखाएगा और तेरे ऊपर और आले याक़ूब पर अपनी नियामत उसी तरह पूरी करेगी जिस तरह इस तरह पहले वो तेरे बुज़ुर्गों, इब्राहीम और इस्हाक़ पर कर चुका है, यकीनन तेरा रब आलिम (सर्व-ज्ञानी)-ओ-हकीम है (सर्व-ज्ञानी)\"","हकीकत ये है के यूसुफ और उसके भाइयों के क़िस्से में पूछने वालों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं","ये क़िस्सा यूं शुरू होता है के उसके भाइयों ने आपस में कहा “ये यूसुफ़ और इसका भाई, दोनों हमारे वालिद (बाप) को हम सब से ज़्यादा मेहबूब हैं हलांके हम एक पूरा जत्था (बैंड) हैं। सच्ची बात ये है के हमारे अब्बाजान बिलकुल ही बहक गए हैं","चलो यूसुफ को क़त्ल करदो या उसे कहीं फेंक दो ता-के तुम्हारे वालिद की तवज्जु (ध्यान दें) सिर्फ तुम्हारी तरफ हो जाए ये काम कर लेने के बाद फिर से तैयार रहना”","इसपर उन में से एक बोला \"यूसुफ को कत्ल न करो, अगर कुछ करना ही है तो उसे किसी अंधे कुवें (अच्छी तरह से) में डाल दो। कोई आता जाता काफिला (कारवां) उसे निकल ले जाएगा\"","इस कराराद पर उन्होन ने जा कर अपने बाप से कहा, “अब्बाजान, क्या बात है कि आप यूसुफ के मामले में हमपर भरोसा नहीं करते हलंके हम उसके सच्चे खैर-ख्वा (शुभचिंतक) हैं","कल उसे हमारे साथ भेज दीजिए, कुछ चार-चुग (स्वतंत्र रूप से खाओ) लेगा और खेल-कूद से भी दिल बहलाएगा, हम उसकी हिफाज़त को मौजूद हैं\"","बाप ने कहा \"तुम्हारा इसे ले जाना मुझे शक गुजारता है (मुझे परेशान करता है) और मुझको अंदेशा है के कहीं इसे भेड़िया (भेड़िया) ना फाड़ खाए जबके तुम इसे गाफिल हो\"","उनको ने जवाब दिया, \"अगर हमारे होते इसे भेदिये\" (भेड़िया) ने खा लिया, जबके हम एक जत्था (बैंड) हैं, तब तो हम बदे ही निकम्मे होंगे''","इस तरह इसरार करके जब वो उसे ले गए और उनहों ने ताई कर लिया के उसे एक अंधे कुवें (खैर) में छोड़ दें, तो हमने यूसुफ को वही (खुलासा) की ''एक'' वक्त आएगा जब तू इन लोगों को इनकी ये हरकत बताएगा, ये अपने फेल के नटाईज से बे खबर हैं”","शाम को वो रोते पीठ-ते (विलाप करते हुए) अपने बाप के पास आए","और कहा \"अब्बाजान, हम दौड़ने का मुकाबला करने में लग गए थे और यूसुफ को हमने अपने सामान के पास छोड़ दिया था कि इतने में भेड़िया (भेड़िया) आकर उसे खा गया। आप हमारी बात का यकीन ना करेंगे चाहे हम सच्चे ही हों\"","और वो यूसुफ के कमीज (शर्ट) पर झूठ मूठ का खून लगा कर आये थे। ये सुनकर उनके बाप ने कहा, \"बल्के तुम्हारे नफ्स ने तुम्हारे लिए एक बड़ा काम को आसान बना दिया। अच्छा सब्र करूंगा और खूबी करूंगा। जो बात तुम बना रहे हो उसपर अल्लाह ही से मदद मांगी जा सकती है।\"","उधर एक काफिला आया और उसने अपने पानी लाने के लिए भेजा। सक़्के (जल वाहक) ने जो कुवें में डोल (बाल्टी) डाला तो (यूसुफ को देख कर) पुकार उठा \"मुबारक हो! यहाँ तो एक लड़का है\"। उन लोगों ने उसको माल ए तिजारत समझ कर छुपा लिया, हालंके जो कुछ वो कर रहे थे खुदा उसे बाख़बर था","आखिर ए कार उन्होन ने उसको थोड़ी सी कीमत पर चंद दिरहमो के बदले बेच डाला और वो उसकी कीमत के मामले में कुछ ज्यादा के उम्मेदवार ना थाय","मिसर (मिस्र) के जिस शक्स ने उसे खरीदा उसने अपनी बीवी से कहा, \"इसको अच्छी तरह रखना, बाद नहीं के ये हमारे लिए मुफीद (उपयोगी) साबित हो या हम इसे बेटा बना लें\"।इस तरह हमने यूसुफ के लिए हमें सर-जमीन में क़दम जमाने की सूरत निकली और उसे मामला फहमी की तालीम देने का इंतेज़ाम किया। अल्लाह अपना काम करके रहता है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं","और जब वह अपनी पूरी जवानी को पाहुंचा तो हमने उसे कुव्वत ए फैसला और इलम अता किया, इस तरह हम दूसरे लोगों को जजा देते हैं","जिस औरत के घर में वह था वो उसपर डोरे डालने लगी (उसे ललचाना शुरू कर दिया) और एक रोज़ दरवाज़े बंद करके बोली “आजा”। यूसुफ ने कहा, \"खुदा की पनाह, मेरे रब ने तो मुझे अच्छी मंजिल बख्शी (और मैं ये काम करूं?) ऐसे जालिम कभी फलाह नहीं पाया करते\"","वो उसकी तरफ बड़ी और यूसुफ भी उसकी तरफ बढ़ता अगर अपने रब की बुरहान ना देख लेता (अपने भगवान का सबूत) ऐसा हुआ। ता-के हम उसे बड़ी और बेहयायी (अभद्रता और अभद्रता) को दूर कर दें, दर-हकीकत वो हमारे चुने हुए बंदोंमें से था","आखिर ए कार यूसुफ और वो आगे पीछे दरवाजे की तरफ भागे और उसने पीछे से यूसुफ का कमीज (खींच कर) फाड़ दीया, दरवाज़े पर दोनो ने उसके शोहर को मौजुद पाया। उसे देखते ही औरत कहने लगी, \"क्या सजा है उस लड़के की जो तेरी घरवाली पर नियत खराब करे? इसके सिवा और क्या सजा हो सकती है के वो क़ैद किया जाए या उसे सही अज़ाब दिया जाए\"","यूसुफ़ ने कहा \"यही मुझे फांसने की कोशिश कर रही थी\"। क्या औरत के अपने कुंबे (परिवार) वालों में से एक शक्स ने (कारने की) शहादत पेश की है, \"अगर यूसुफ का कमीज़ आगे से फटा हो तो औरत सच्ची है और ये झूठा","और अगर उसका कमीज़ पीछे से फटा हो तो औरत झूठी है और ये सच्चा\"","जब शोहर ने देखा के युसूफ का कमीज पीछे से फटा है तो उसने कहा \"ये तुम औरतों की चालाकियां हैं, हकीकत बड़े गजब की होती हैं तुम्हारी चालें","युसुफ, इस मामले से दरगुजर कर और ऐ औरत, तू अपने कसूर की माफी मांग, तू ही असल मैं ख़तरा थी।”","शहर की औरतें आपस में चर्चा करने लगी के \"अज़ीज़ की बीवी अपने नौजवान गुलाम के पीछे पड़ी हुई है, मुहब्बत ने उसको बे-क़ाबू कर रखा है। हमारे नज़दीक तो वो सारी गलती कर रही है\"","उसने जो उनकी ये मकराना बातें सुनी तो उनको बुलावा भेज दिया और उनके लिए तकिया-दार मजलिस अरस्ता की और ज़ियाफत में हर एक के आगे एक चूड़ी (चाकू) रख दी। (फिर ऐन हमें वक्त जबके वो फाल काट कर खा रही थी) उसने यूसुफ को इशारा किया के उनके सामने निकल आ। जब उन औरतों की निगाह उसपर पड़ी तो वो दंग रह गई और अपने हाथ काट बैठी और सच (सहज) पुकार उठी \" हाशा-लिल-लाह (भगवान हमारी रक्षा करें), ये शक्स इंसान नहीं है, ये तो कोई बुज़ुर्ग फ़रिश्ता है\"","अज़ीज़ की बीवी ने कहा \"देख लिया! ये है वो शक्स जिसके मामले में तुम मुझपर बातें बनाती थी। बहस में मैंने इसे रुझाने (लुभाने) की कोशिश की थी मगर ये बच निकला। अगर ये मेरा कहना ना मानेगा तो क़ैद किया जाएगा और बहुत ज़लील ओ ख्वार होगा","यूसुफ ने कहा “ऐ मेरे रब, कैद मुझे मंजूर है बा-निस्बत इसके मैं वो काम करूं जो ये लोग मुझसे चाहते हैं और अगर तू नहीं इनकी चालों को मुझसे दफा ना किया तो मैं इनके दाम में फंस जाऊंगा और जाहिलों में शामिल हो जाऊंगा","उसके रब ने उसकी दुआ कबूल की और उन औरतों की चलें उससे दफा करदी। बेचैन वही है जो सब की सुनता है और सब कुछ जानता है","फिर उन लोगों को ये समझ के एक मुद्दत के लिए उसे क़ैद करदें हलंके वो (उसकी पाक दमानी और खुद अपनी औरतों के बुरे अतवर की) सारी निशानियां देख चुके थे","क़ैद-ख़ाने (जेल) में दो ग़ुलाम और भी उसके साथ दाख़िल हुए। एक रोज़ उन में से एक ने उसे कहा \"मैंने ख़्वाब में देखा है के मैं शराब कशीद कर रहा हूँ\" दूसरे ने कहा, \"मैंने देखा के मेरे सर पर रोटियाँ रखी हैं और परिंदे उनको खा रहे हैं\"। डोनो ने कहा \"हमें इसकी ताबीर बताइए, हम देखते हैं के आप एक नए आदमी हैं\"","यूसुफ ने कहा: \"यहां जो खाना तुम्हें मिला करता है उसके आने से पहले मैं तुम्हें ख्वाबों की ताबीर बता दूंगा। ये इलम उन उलूम से है जो मेरे रब ने मुझे अता किए हैं। वाकिया ये है के मैंने उन लोगों का तरीक़ा छोड़ कर जो अल्लाह पर ईमान नहीं लाते और आख़िरत का इंकार करते हैं","अपने बुज़ुर्गों, इब्राहिम, इशाक और याक़ूब का तरीक़ा इख्तियार किया है, हमारा ये काम नहीं है के अल्लाह के साथ किसी को शरीक तेहरायें .दर-हकीकत ये अल्लाह का फजल है हमपर और इंसानों पर (के उसने अपने सिवा किसी का बंदा हमें नहीं बनाया) मगर अक्सर लोग शुक्र नहीं करते","ऐ जिंदान (जेल) के साथियों (साथी कैदियों), तुम खुद ही सोचो के बहुत से मुतफ़र्रिक (विभिन्न) रब बेहतर हैं या वो एक अल्लाह जो सब पर गालिब है","उसको छोड़ कर तुम जिसकी बंदगी कर रहे हो वो इसके सिवा कुछ नहीं हैं के बस चंद नाम हैं जो तुमने और तुम्हारे आबा ओ अजदाद ने रख लिए हैं। अल्लाह ने उनके लिए कोई सनद नाज़िल नहीं की। फरमा रवायी (संप्रभुता) का इक्तेदार अल्लाह के सिवा किसी के लिए नहीं है। उसका हुकुम है के खुद उसके सिवा तुम किसी की बंदगी ना करो, यही थीथ सीधा तारीक ए जिंदगी है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं","ऐ जिंदान के साथियों, तुम्हारे ख्वाब की ताबीर ये है के तुम में से एक तो अपने रब (शाह ए मिस्र) को शराब पिलाएगा, रहा दूसरा तो उसे सूली पर चढ़ाया जाएगा (सूली पर चढ़ाया जाएगा) और परिंदे उसका सर नोच नोच कर खाएंगे। फैसला हो गया उस बात का जो तुम पूछ रहे थे\"","फिर उनमें से जिसका मुतालिक ख्याल था के वो रिहा (रिलीज़) हो जाएगा उसे यूसुफ ने कहा के \"अपने रब (शाह-ए-मिसर) से मेरा ज़िक्र करना\"। मगर शैतान ने उसे ऐसा गफ़लत में डाला के वो अपने रब (शाह-ए-मिसर) से उसका ज़िक्र करना भूल गया और यूसुफ काई साल क़ैद-खाने में पड़ा रहा","एक रोज़ बादशाह ने कहा “मैंने ख्वाब में देखा है के सात (सात) मोटी गायें (गायें) जिनको सात (सात) दुबली (दुबली) गायें खा राही हैं, और अनाज के सात बालें हरी (हरा) हैं और पुरानी सात सुखी हैं। ऐ एहले दरबार, मुझे इस ख्वाब की ताबीर बताओ अगर तुम ख्वाबों का मतलब समझते हो।”","लोगों ने कहा \"ये तो परेशान ख्वाबों की बातें हैं और हम इस तरह के ख्वाबों का मतलब नहीं जानते\"","उन दो क़ैदियों में से जो शक्स बच गया था और उसे एक मुद्दत दराज़ के बाद अब बात याद आई, उसने कहा \"मैं आप हजरत को इसकी तावील बताता हूं, मुझे ज़रा (क़ैद-खाने में युसूफ के पास) भेज दीजिए”","उसने जा कर कहा “यूसुफ, ऐ सरापा रस्ती (हे नेक इंसान), मुझे इस ख्वाब का मतलब बता के सात मोती गाएं जिनको सात दुबली गाएं खा रही हैं और सात बालें हरी (मक्के की हरी बालियाँ) हैं और सात सुखी, शायद के मैं उन लोगों के पास जाऊं और शायद के वो जान लें”","युसूफ ने कहा “सात बरस तक लगतार तुमलोग खेती-बाड़ी करते रहोगे।” इस दौरन में जो फ़सलें (फसलें) तुम काटो उन में से बस थोड़ा सा हिसा, जो तुम्हारी खुराक के काम आए निकलो और बाकी को उसके बालों में ही रहने दो","फिर सात बरस बहुत आएंगे। हमारे ज़माने में वो सब गल्ला (मकई) खा लिया जाएगा जो तुम हमारे लिए वक़्त के लिए जमा करोगे, अगर कुछ बचेगा तो बस वही जो तुमने महफ़ूज़ कर रखा हो","इसके बाद फिर एक साल ऐसा आएगा जिसमें बारां-ए-रहमत (प्रचुर मात्रा में बारिश) से लोगों की फरियाद रस की जाएगी और वो रस निचोड़ेंगे”","बादशाह ने कहा उसे मेरे पास लाओ। मगर जब शाही फ़रिश्तादा (शाही दूत) यूसुफ़ के पास पहुंचा तो उसने कहा \"अपने रब के पास वापस जा और उससे पूछ के उन औरतों का क्या मामला है जिन्हों ने अपने हाथ काट लिए थे? मेरा रब तो उनकी मक्कारी से वाकिफ़ ही है।\"","क्या पर बादशाह ने उन औरतों से दरियाफ्त किया है \"तुम्हारा क्या ताजूरबा है उस वक्त का जब तुमने यूसुफ को रुझाने (लुभाने) की कोशिश की थी?\" सब ने एक ज़ुबान होकर कहा \"हाशा लिल्लाह! (भगवान हमारी रक्षा करें), हमने तो उसमें बुराई का शईबा तक ना पाया।\" अज़ीज़ की बीवी बोल उठी, \"अब हक़ खुल चुका है, वो मैं ही थी जिसने उसको फुसलाने की कोशिश की थी। बेशक वो बिल्कुल सच्चा है\"","(यूसुफ ने कहा) \"इससे मेरी ग़रज़ ये थी के (अज़ीज़) ये जान ले के मैंने डर-पुर्दा उसकी ख़यानत नहीं की थी, और ये के जो ख़ियानत करते हैं उनकी चालों को अल्लाह कामियाबी की राह पर नहीं लगता","मैं कुछ अपने नफ़्स की बारात नहीं कर रहा हूँ (अपनी आत्मा को पाप से मुक्त नहीं रखता), नफ़्स तो बड़ी (बुराई) पर उक्सता ही है, इल्ला ये के किसी पर मेरे रब की रहमत हो, बेशक मेरा रब बड़ा गफूर ओ रहीम है\"","बादशाह ने कहा \"उन्हें मेरे पास लाओ ता-के मैं उनको अपने लिए मखसूस कर लूं\"। जब यूसुफ ने उसे गुफ्तगू की तो उसने कहा \"अब आप हमारे हां कादर ओ मंजिल रखते हैं और आप की अमानत पर पूरा भरोसा है”","यूसुफ ने कहा, “मुल्क के खज़ाने मेरे सुपुर्द किजिए, मैं हिफाजत करने वाला भी हूं और इलम भी रखता हूं”","क्या तारा हमने हमें सर-जमीन में यूसुफ के लिए इक्तेकार (शक्ति) की राह हमवार की। वो मुख्तार था के उसमें जहां चाहे अपनी जगह बने। हम अपनी रहमत से जिसको चाहते हैं नवाजते हैं। नेक लोगों का अजर हमारे हां मारा नहीं जाता","और आखिरी का अजर उन लोगों के लिए ज्यादा बेहतर है जो ईमान ले आए और खुदा-तरसी के साथ काम करते रहेंगे","यूसुफ के भाई मिस्र (मिस्र) आए और उसके हां हाजिर हुए, उसने उन्हें पहचान लिया मगर वो उसे ना-आशना था","फिर जब उसने उनका सामान तय्यार करवा दिया तो चलते वक्त उनसे कहा, “अपने सौतेले भाई को मेरे पास लाना, देखते नहीं हो के मैं किस तरह पैमाना भर कर देता हूं और कैसा अच्छा मेहमान नवाज हूं","अगर तुम उसे ना लाओगे तो मेरे पास तुम्हारे लिए कोई गल्ला (अनाज) नहीं है बलके तुम मेरे करीब भी ना फटकना”","उनहों ने कहा, “हम कोशिश करेंगे के वालिद साहब उसे भेजने पर राजी हो जाएं, और हम ऐसा जरूर करेंगे”","यूसुफ ने अपने ग़ुलामो को इशारा किया के \"इन लोगों ने गले के बदले जो माल दिया है वो चुपके से उनके समान ही में रखदो\"। ये युसुफ ने इस उम्मीद पर किया के घर पहुंच कर वो अपना वापस पाया हुआ माल पहचान जाएगा (या इस फैयाज़ी पर एहसान-मंद होंगे) और अजब नहीं के फिर पलटें","जब वो अपने बाप के पास गए तो कहा \"अब्बाजान, आइंदा हमको गल्ला देने से इंकार कर दिया है, लिहाजा आप हमारे भाई को हमारे साथ भेज दीजिए ता-के हम गल्ला लेकर आएं और उसकी हिफाजत के हम जिम्मेदार हैं\"","बाप ने जवाब दिया \"क्या मैं उसके मामले में तुम्हारे जैसा ही भरोसा करूं जैसा पहले उसके भाई के मामले में कर चूका हूं? अल्लाह ही बेहतर मुहाफिज (अभिभावक) है और वो सबसे बढ़कर रहम फरमाने वाला है\"","फिर जब उन्होन ने अपना सामान खोला तो देखा के उनका माल भी उन्हें वापस कर दिया गया है। ये देख कर वो पुकार उठे \"अब्बाजान, और हमें क्या चाहिए, देखिए ये हमारा माल भी हमने वापस दे दिया है। बस अब हम जाएंगे और अपने एहल ओ अयाल के लिए रसद (भोजन का प्रावधान) ले आएंगे, अपने भाई की हिफाजत भी करेंगे और एक बरिश्तार (मक्के का एक अतिरिक्त ऊँट भार) और ज़्यादा भी ले आयेंगे। इन्ते गैले का इज़ाफ़ा आसनी के साथ हो जाएगा”","उनके बाप ने कहा “मैं इसको हरगिज़ तुम्हारे साथ ना भेजूंगा जब तक तुम अल्लाह के नाम से मुझको पैमान (प्रतिज्ञा) ना दे दो इसके लिए मेरे पास जरूर वापस लेकर आओगे।” इल्ला ये के कहीं तुम घर ही ले जाओ”। जब उनहों ने उसको अपना पैमान दे दिया तो उसने कहा \"देखो, हमारे इस क़ौल पर अल्लाह निगेहबान हैं\"","फिर उसने कहा \"मेरे बच्चों, मिसर के दार-उल-सल्तनत में एक दरवाज़े से दाख़िल न होना बलके मुख़्तलिफ़ दरवाज़ों से जाना। मगर मैं अल्लाह की मशियत से तुमको नहीं बचा सकता, हुकुम उसके सिवा किसी का भी नहीं चलता","","ये लोग युसूफ के हुजूर थे तो हमने अपने भाई को अपने पास अलग बुला लिया और उसे बता दिया के \" मैं तेरा वही भाई हूं (जो खोया गया) था) अब तू उन बातों का गम ना कर जो ये लोग कर रहे हैं।”","जब युसूफ ने भाइयों का सामान लधवाने (लोडिंग) लगाया तो उसने अपने भाई के सामान में अपना प्याला (कप) रख दिया। फिर एक पुकारने वाले ने पुकार कर कहा \"ऐ काफिले वालों, तुम लोग चोर हो।\"","उनहों ने पलट कर पूछा \"तुम्हारी क्या चीज़ खो गई?\"","सरकारी मुलाजिमों ने कहा \"बादशाह का पैमाना हमको नहीं मिलता\" [और उनके जमादार (मुखिया) ने कहा] \"जो शक्स लाकर देगा उसके लिए एक बारीशूतार (मकई का ऊंट लादना) इनाम है, इसका मैं ज़िम्मा लेता हूं।\"","उन भाइयों ने कहा \"खुदा की कसम तुम लोग खूब जानते हो के हम इस मुल्क में फ़साद करने नहीं आये हैं, और हम चोरियाँ करने वाले लोग नहीं हैं\"","उनहोंने कहा \"अच्छा, अगर तुम्हारी बात झूठी निकली तो चोर की क्या सजा है?\"","उनहों ने कहा \"उसकी सजा? जिसके समां में से चीज निकले वो आप ही अपनी सजा में रख लिया जाए, हमारे हां तो ऐसे जालिमों को सजा देने का यही तरीका है।\"","तब यूसुफ ने अपने भाई से पहले उनकी खुर्जियां (पैक) की तलाश लेना शुरू की। फिर अपने भाई की खुर्जी (पैक) से गमशुदा चीज़ बारामद कार्ली। इस तरह हमने यूसुफ की ताईद (समर्थन) अपनी तदबीर से की, उसका ये काम ना था के बादशाह के दीन (यानी मिस्र का शाही कानून) में अपने भाई को पकड़ता इल्ला ये के अल्लाह ही ऐसा चाहे। हम जिसके दर्जे चाहते हैं बुलंद करते हैं, और एक इल्म रखने वाला ऐसा है जो हर साहिब-ए-इलम से बला-तार है","उन भाइयों ने कहा \"ये चोरी करे तो कुछ ताजुब की बात भी नहीं, इसके पहले इसका भाई (यूसुफ) भी चोरी कर चूका है\"। युसूफ उनकी ये बात सुनकर पी गया (अपनी भावनाओं को दबाते हुए) हकीकत उन्पर ना खोली, बस (ज़ेरी-ए-लब) इतना कहकर रह गया के \"बड़े ही बुरे हो तुमलोग, (मेरे मुंह डर मुंह मुझपर) जो इल्जाम तुम लगा रहे हो उसकी हकीकत खुदा खूब जानता है\"","उनहों ने कहा \"ऐ सरदार ज़ि-इक़तेदार (अज़ीज़), इसका बाप बहुत बूड़ा आदमी है, इसकी जगह आप हम में से किसी को रख लीजिए। हम आपको बड़ा ही नहीं नफ़्स इंसान पाते हैं।\"","यूसुफ ने कहा \"पनाह बा खुदा, दूसरे किसी शक्स को हम कैसे रख सकते हैं, जिसके पास हमने अपना माल पाया है उसको छोड़ कर दूसरे को रखेंगे तो हम जालिम होंगे।\"","जब वो युसूफ से मयूस हो गए तो एक गोशे में जा कर आपस में मशवरा करने लगे। उन में जो सबसे बड़ा था वो बोला \"तुम जानते नहीं हो के तुम्हारे वालिद तुमसे खुदा के नाम पर क्या अहद ओ पैमान ले चुके हैं, और इस पहले यूसुफ के मामले में जो ज्यादा तुम कर चुके हो वो भी तुमको मालूम है। अब मैं तो यहां से हरगिज ना जाऊंगा जब तक मेरे वालिद मुझे इजाज़त न दें, या फिर अल्लाह ही मेरे हक में कोई फैसला फरमा दे, के वो सब से बेहतर फैसला करने वाला है","तुम जा कर अपने वालिद से कहो के “अब्बाजान, आपके साहिबजादे ने चोरी की है। हमने उसे चोरी करते हुए नहीं देखा, जो कुछ हमें मालूम हुआ है बस वही हम बयां कर रहे हैं, और गैब की निगेबानी तो हम ना कर सकते थे","आप हमें बस्ती के लोगों से पूछ लीजिए जहां हम थे हमें काफिले से डरायाफ्त कर लीजिए जिसके साथ हम आये हैं. हम अपने बयां में बिल्कुल सच्चे हैं।”","बाप ने ये दास्तां सुन कर कहा “दर-असल तुम्हारे नफ्स ने तुम्हारे लिए एक और बड़ी बात को आसान बना दिया।” अच्छा इसपर भी सब्र करूंगा और खूबी करूंगा। क्या बुरा है के अल्लाह उन सबको मुझसे ला मिलाये, वो सब कुछ जानता है और उसके सब काम हिकमत पर मबनी हैं।”","फिर वो उनकी तरफ से मुंह फेर कर बैठ गया और कहने लगा के \"हाय यूसुफ!\" वो दिल ही दिल में ग़म से घुटा जा रहा था और उसकी आँखें सफेद पढ़ गई थीं","बेटों ने कहा \"ख़ुदा-रा! आप तो बस युसुफ़ ही को याद किये जाते हैं नौबत ये आ गई है के उसके गम में अपने आप को घुला दें या अपनी जान हलाक कर डालेंगे।\"","उसने कहा \" मैं अपनी परेशानी और अपने गम की फरियाद अल्लाह के सिवा किसी से नहीं करता। और अल्लाह से जैसा मैं वाकिफ हूं तुम नहीं हो","मेरे बच्चों, जा कर यूसुफ और उसके भाई की कुछ तो लगाओ। अल्लाह की रहमत से मायुस न हो, उसकी रहमत से तो बस काफिर ही मायुस हुआ करते हैं।”","जब ये लोग मिसर जा कर यूसुफ की पेशी में दख़िल हुए तो उन्होन ने अर्ज़ किया के \"ए सरदार बा इक्तेदार, हम और हमारे एहल ओ अयाल सख्त मुसीबत में मुबतला हैं और हम कुछ हकीर सी पूंजी लेकर आये हैं, आप हमें भरपुर गल्ला इनायत फरमायें और हमको खैरात दें, अल्लाह खैरात करने वालों को जजा देता है।”","(ये सुनकर यूसुफ़ से ना रहा गया) उसने कहा, \"तुम्हें कुछ ये भी मालूम है कि तुमने यूसुफ़ और उसके भाई के साथ क्या किया था जब तुम नादान थे।\"","वो चौंक कर बोले \"क्या तुम यूसुफ हो?\" उसने कहा, \"हां, मैं यूसुफ हूं और ये मेरा भाई है। अल्लाह ने हमपर एहसान फरमाया। हकीकत ये है कि अगर कोई तकवा और सब्र से काम ले तो अल्लाह के हां ऐसे नए लोगों का अजर मारा नहीं जाता।\"","उन्होन ने कहा \"बा-खुदा के तुमको अल्लाह ने हमपर फजीलत बख्शी और वक्ती हम ख़तरा थे।\"","उसने जवाब दिया, \"आज तुमपर कोई गिरफ़्तार नहीं, अल्लाह तुम्हें माफ़ करे, वो सब से बढ़कर रहम फ़रमाने वाला है","जाओ, मेरा ये कमीज़ ले जाओ और मेरे वालिद के मुँह पर डाल दो, उनकी बिनयि पलट आएगी। और अपने सब एहल-ओ-अयाल को मेरे पास ले आओ।”","जब ये काफिला (मिस्र से) रावना हुआ तो उनके बाप ने (कानन में) कहा \"मैं यूसुफ की खुशबू महसूस कर रहा हूं, तुम लोग कहीं ये ना कहने लगो के मैं बुढ़ापे में सात हो गया हूं।\"","घर के लोग बोले \"खुदा की कसम आप अभी तक अपने उसी पुराने ख़ब्ते (पुराने भ्रम) में पड़े हैं\"","फिर जब ख़ुश-ख़बरी लेने वाला आया तो उसने युसुफ़ का कमीज़ याक़ूब के मुँह पर डाल दिया और यक़ीन उसकी बिनयि ओद कर आई। उसे) । तब उसने कहा, \"मैं तुमसे कहता था ना कि मैं अल्लाह की तरफ से वह कुछ जानता हूं जो तुम नहीं जानते।\"","सब बोल उत्थे \"अब्बाजान, आप हमारे गुनाहों की बख्शीश के लिए दुआ करें, वाकाई हम खतरनाक थे।\"","उसने कहा 'मैं अपने रब से तुम्हारे लिए माफ़ी की अंधेरगर्दी करुंगा, वो बड़ा माफ़ करने वाला और रहीम है।'","फिर जब ये लोग युसूफ के पास पहुंचें तो हमने अपने वलियों को अपने साथ बिठा लिया और (अपने सब कुंबे वालों से) कहा \" चलो अब शहर में चलो, अल्लाह ने चाहा तो अमन चैन से रहोगे।\"","(शहर में दाख़िल होने के बाद) उसने अपने वलियों को उठा कर अपने पास तख्त पर बिठाया और सब उसके आगे बे इख्तियार सजदे में झुक गए। यूसुफ ने कहा \"अब्बाजान, ये ताबीर है मेरे उस ख्वाब की जो मैंने पहले देखा था, मेरे रब ने उसे हकीकत बना दिया। उसका एहसान है के उसने मुझे कैद-खाने से निकाला और आप लोगों को सेहरा से लाकर मुझसे मिलाया, हलांके शैतान मेरे और मेरे भाइयों के दरमियान फसाद डाल चुका वाक़िया ये है के मेरा रब ग़ैर महसूस तदबीरों (रहस्यमय तरीके) से अपनी मशियत पूरी करता है, बेशक वो आलिम और हकीम है","ऐ मेरे रब, तू नहीं मुझे हुकूमत बख्शी और मुझको बातों की तह तक। पाहुंचना सिखाया। ज़मीन ओ आसमान के बनाने वाले, तू ही दुनिया और आख़िरत में मेरा सरपरस्त है, मेरा ख़तमा इस्लाम पर कर और अंजाम ए कार मुझे सालिहें के साथ मिला''","(ऐ मुहम्मद) ये क़िस्सा गैब की ख़बरों में से है जो हम तुमपर वही कर रहे हैं, वरना तुम उस वक्त मौजुद न थे जब यूसुफ के भाइयों ने आपस में इत्तेफाक करके साजिश की थी","मगर तुम ख्वा कितना ही चाहो इनमें से अक्सर लोग मान कर देने वाले नहीं हैं","हालंके तुम इस खिदमत पर इनसे कोई उजरत भी नहीं माँगते हो, ये तो एक हिदायत है जो दुनिया वालों के लिए आम है","ज़मीन और आसमान में कितनी ही निशानियाँ हैं जिनपर से ये लोग गुज़रते रहते हैं और ज़रा तवज्जु नहीं करते","इनमें अक्सर अल्लाह को मानते हैं मगर है तरह के उसके साथ दूसरों को शरीक ठहरते हैं","क्या ये मुतमइन हैं के खुदा के अज़ाब की कोई बला इन्हें दबोच ना लेगी या बेखबरी में कयामत की घड़ी अचानक अंदर ना आ जाएगी","तुम इनसे साफ कहदो के” मेरा रास्ता तो ये है, मैं अल्लाह की तरफ बुलाता हूं, मैं खुद भी पूरी रोशनी में अपना रास्ता देख रहा हूं और मेरे साथी भी, और अल्लाह पाक है और शिर्क करने वालों से मेरा कोई वास्ता नहीं।'","(ऐ मुहम्मद), तुमसे पहले हमने जो पैगम्बर भेजा था वो सब भी इंसान ही था, और इन्हीं बस्तियों के रहने वालों में से थे, और उनकी तरफ हम वही भेज रहे हैं क़ौमों का अंजाम इन्हें नज़र ना आया जो इनसे पहले गुज़र चुकी हैं? यक़ीनन आख़िरत का घर उन लोगों के लिए और ज़्यादा बेहतर है जिन्हों ने (पैगम्बरों की बात मान कर) तकवे के रवीश इख्तियार की। क्या अब भी तुम लोग ना समझोगे","(पहले पैगम्बरों के साथ भी यही हो रहा है कि वो मुद्दतों की हिदायतें करते रहे और लोगों ने सुनकर ना दिया) यहां तक ​​के जब पैगम्बर लोगों से मयुस हो गए और लोगों ने भी समझ लिया के उनसे झूठ बोला गया था, तो यकीनन हमारी मदद पैगम्बरों को नहीं मिल पाई। फिर जब ऐसा मौका आ जाता है तो हमारा कायदा ये है कि जिसे हम चाहते हैं बच्चा लेते हैं और मुजरिमों पर से तो हमारा अजब ताला ही नहीं जा सकता","क़िस्सों में अगले लोगों के अक़ल-ओ-होश रखने वालों के लिए इबरत है। ये जो कुछ कुरान में बयान किया जा रहा है ये बनवाती बातें नहीं हैं बल्के जो किताबें इसे पहले आई हुई हैं उनकी तस्दीक है, और हर चीज की तफसील और ईमान लाने वालों के लिए हिदायत और रहमत","अलिफ़ लाम मीम रा ये किताब-ए-इलाही की आयत हैं, और जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है वो ऐन हक़ है, मगर (तुम्हारी क़ौम के) अक्सर लोग मान नहीं रहे हैं","वो अल्लाह हाय है जिसने आसमानों को ऐसे सहरों (समर्थन) के बिना क़याम किया जो तुमको नज़र आते थे, फिर वो अपनी तख्त ए सल्तनत पर जलवा फरमा हुआ, और उसने आफताब (सूरज) ओ महताब (चांद) को एक कानून का बंधन बनाया। इस सारे निज़ाम की हर चीज़ एक वक़्त-ए-मुकर्रर तक के लिए चल रही है। और अल्लाह हाय सारे काम की तद्बीर फरमा रहा है। वो निशानियां खोल-खोल कर बयान करता है, शायद के तुम अपने रब की मुलाकात का यकीन करो","और वही है जिसने जमीन फैला रखी है, इस में पहाड़ों के खूंटे गाड़ रखे हैं और दरिया बहा दिए हैं, उसी ने हर तरह के फल (फल) के जोडे पेदा किये हैं, और वही दिन पर रात तारी करता है। सारी चीज़ों में बड़ी निशानियाँ हैं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फ़िक्र से काम लेते हैं","और देखो, ज़मीन में अलग-अलग खित्ते (क्षेत्र) पाये जाते हैं जो एक दूसरे से मुत्तसिल (एक दूसरे के करीब) वक़्त हैं अंगूर के बाग़ हैं, खेतियाँ हैं, खजूर के दरख्त हैं जिनमें से कुछ अकेले (सिंगल) हैं और कुछ दोहरे (डबल ट्रंक)। सबको एक ही पानी साराब करता है मगर मजे में हम किसी को बेहतर बना देते हैं और किसी को कमतर। सब चीज़ों में बहुत सी निशानियाँ हैं उन लोगों के लिए जो अक़ल से काम लेते हैं","अब अगर तुम्हें तज्जुब करना है तो तज्जुब के काबिल लोगों का ये क़ौल है के \"जब हम मर कर मिट्टी हो जायेंगे तो क्या हम नये सिरे से पैदा किये जायेंगे?\" ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने रब से कुफ्र किया है, ये वो लोग हैं जिनके गर्दानो में तौक (तौक/बेड़ियाँ) पड़े हुए हैं, ये जहन्नुमी हैं और हमेशा रहेंगे","ये लोग भलाई से पहले बुराई के लिए जल्दी मचा रहे हैं, हलांके इनसे पहले (जो लोग इस रवीश पर चले हैं उनपर खुदा के अज़ाब की) इब्रत-नाक मिसालें गुजर चुकी हैं। हकीकत ये है के तेरा रब लोगो की ज्यादतियों के साथ उनके साथ चश्मे-पोशी (सहनशीलता) से काम लेता है और ये भी हकीकत है के तेरा रब सख्त सजा देने वाला है","ये लोग जिन्हों ने तुम्हारी बात मन से इंकार कर दिया है, कहते हैं के “इस शक्स पर इसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों ना उतारी? तुम तो महज़ ख़बरदार होने वाले हो, और हर क़ौम के लिए एक रहनुमा है","अल्लाह एक हामिला (गर्भवती) के पति से वाकिफ है, जो कुछ उसमें बनता है उसे भी वह जानता है और जो कुछ इसमें कामी या बेशी होती है उसमें भी वह खबर रहता है। हर चीज के लिए उसके हां एक मिकदर मुकर्रर है","वो पोशीदा और जाहिर, हर चीज का आलिम है, वो बुजुर्ग है और हर हाल में बाला-तर रहने वाला है","तुम में से कोई शक्स ख्वा जोर से बात करे या आहिस्ता, और कोई रात की तारीकी (अंधेरे) में छुपा हुआ हो या दिन की रोशनी में चल रहा हो, उसके लिए सब यक्सन है","हर शक्स के आगे और पीछे उसके मुकर्रर किये हुए निगरान लगे हुए हैं जो अल्लाह के हुकुम से उसकी देख-भाल कर रहे हैं। हकीकत ये है कि अल्लाह किसी कौम के हाल को नहीं बदल सकता, जब तक वो खुद अपने अवसाफ को नहीं बदल देता, और जब अल्लाह किसी कौम की शामत (प्रतिशोध) लाने का फैसला करले तो फिर वो किसी के ताले नहीं बदल सकता, ना अल्लाह के मुकाबले में ऐसी कौम का कोई हामी ओ मददगार हो सकता है","वही है जो तुम्हारे सामने बिजली चमकता है जिन्हें देख कर तुम्हें अंदेशे (डर) भी लहक होते हैं और उम्मीदें भी बांधती है, वही है जो पानी से लड़े हुए बादल उतारता है","बादलों की गरज उसकी हम्द के साथ उसकी पाकी बयां करती है और फरिश्ते उसकी हैबत(आवे) से लरजते हुए उसकी तस्बीह करते हैं। वो ताकत हुई बिजली को भेजता है और (बासा औकात) उन्हें जिसका प्यार चाहता है ऐन इस हाल में गिरा देता है जबके लोग अल्लाह के बारे में झगड़ा करते रहते हैं। फिल वक़हे उसकी चाल बड़ी ज़बरदस्त है","उसे पुकारना बार-हक़्क़ है, राही वो दूसरी हस्तियां जिन्हें छोड़ कर ये लोग पुकारते हैं, वो उनकी दुआओं का कोई जवाब नहीं दे सकती, उन्हें पुकारना तो ऐसा है जैसे कोई शक्स पानी की तरफ हाथ फैला कर उसे अंधेरा कर दे के तू मेरे मुंह तक पहुंच जा, हलंके पानी उस तक पहुंचने वाला नहीं, बस इसी तरह काफिरों की दुआएं भी कुछ नहीं है मगर एक तीर हदफ (लक्ष्यहीन प्रयास)","वो अल्लाह ही है जिसकी जमीन ओ आसमान की हर चीज तूं (स्वेच्छा से) ओ करहां (अनिच्छा से) सजदा कर रही है और सब चीज़ों के साये सुबह-ओ-शाम उसके आगे झुकते हैं","इनसे पूछो, आसमान ओ ज़मीन का रुब कौन है? कहो, अल्लाह, फिर इनसे कहो के जब हकीकत ये है तो क्या तुमने उसे छोड़ कर ऐसे माबूदों को अपना करसाज़ ठहर लिया जो खुद अपने लिए भी कोई नफा ओ नुक्सान का इख्तियार नहीं रखते? कहो, क्या अंधा और आँखों वाला बराबर हुआ करता है? क्या रोशनी और तारीख़ें यक्सन होती हैं? और अगर ऐसा नहीं तो क्या इनके ठहरे हुए शरीकों ने भी अल्लाह की तरह कुछ अदा किया है कि उसकी वजह से अंदर तकलीक (सृजन) का मामला मुश्तबा (एक जैसा लग रहा था) हो गया? कहो, हर चीज का खालिक (निर्माता) सिर्फ अल्लाह है और वह जानता है, सब पर गालिब","अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया और हर नदी नाला अपने ज़र्फ के मुताबिक इसे लेकर चल निकला, फिर जब सैलाब उठा तो साथ पर झाग (फोम) भी आ गया। और वैसे ही झग उन धातुओं (धातुओं) पर भी उठते हैं जिनमें ज़ेवर (आभूषण) और बर्तन (बर्तन) बनाने के लिए लोग पिघलाया करते हैं। इसी मिसाल से अल्लाह हक़ और बातिल के मामले को वाज़ेह करता है। जो झगड़ा है वो उड़ (गायब) हो जाता है और जो चीज़ इंसानों के लिए नाफ़े (फ़ैय्यादमंद) है वो ज़मीन में ठहर जाती है। इस तरह अल्लाह मिसालों से अपनी बात समझता है","जिन लोगों ने अपने रब की दावत कबूल की है उनके लिए भलाई है। और जिन्होन ने इसे क़बूल ना किया वो अगर ज़मीन की सारी दौलत के भी मालिक हों और उतनी ही और फ़राहम कार्लें तो वो ख़ुदा की पकड़ से बचने के लिए इस सब को फ़िदिया (फिरौती) में दे डालने पर तैयार हो जायेंगे। ये वो लोग हैं जिनसे बुरी तरह हिसाब लिया जाएगा, और उनका ठिकाना जहन्नुम है, बहुत ही बुरा ठिकाना","भला ये किस तरह मुमकिन है के वो शक्स जो तुम्हारे रब की इस किताब को जो उसने तुमपर नाज़िल की है हक़ जानता है, और वो शक्स जो इस हकीकत की है तरफ से अंधा है, दोनो यकसन हो जाये? हिदायत तो दानिशमंद (बुद्धिमान) लोग ही क़बूल किया करते हैं","और उनका तर्ज़-ए-अमल ये होता है के अल्लाह के साथ अपने अहद को पूरा करते हैं, उसे मज़बूत बांधने के बाद तोड़ नहीं डालते","उनकी रवीश ये होती है के अल्लाह ने जिन जिन रावबित को बरक़रार रखने का हुकुम दिया है, उन्हें बरक़रार रखते हैं, अपने रुब से डरते हैं और इस बात का ख़ौफ़ रखते हैं के कहीं उन्हें बुरी तरह हिसाब ना लिया जाए","उनका हाल ये होता है के अपने रुब की रज़ा के लिए सब्र से काम लेते हैं, नमाज़ क़याम करते हैं, हमारे दिए हुए रिज़क में से एलानिया (खुले तौर पर) और पोशीदा खर्च करते हैं, और बुराइयों को भलाई से दफा करते हैं, आख़िरत का घर उन्हीं लोगों के लिए है","यानी ऐसे बाग़ जो उनकी आबादी क़यामगाह होंगे। वो खुद भी उनमें दाखिल होंगे और उनके आबा ओ अजदाद और उनकी बीवीयां और उनकी औलाद में से जो सालेह (नेक) हैं वो भी उनके साथ वहां जाएंगे। मलायका हर तरफ से उनके इस्तेकबाल के लिए आएंगे","और उनसे कहेंगे के \"तुम्हारे सलामती है, तुमने दुनिया में जिस तरह सब्र से काम लिया उसकी बदौलत आज तुम इसके मुस्तहिक हुए हो\"। पास क्या ही ख़ूब है ये आख़िरत का घर","रहे वो लोग जो अल्लाह के अहद को मज़बूत बांध लेने के बाद तोड़ देते हैं, जो उन रबतों (रिश्ते) को काटते हैं जिन्हें अल्लाह ने जोड़ने का हुकुम दिया है, और जो ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं, वो लाते हैं के मुस्तहिक हैं और उनके लिए आख़िरत में बहुत बुरा ठिकाना है","अल्लाह जिसको चाहता है रिज़क की फराखी बक्शता है और जिसे चाहता है नपा-तुला रिज़क देता है","","ऐसे ही लोग हैं वो जिन्होन ने (इस नबी की दावत को) मान लिया है और उनके दिलों को अल्लाह की याद से इत्मिनान नसीब होता है, खबरदार रहो! अल्लाह की याद ही वो चीज़ है जिसके दिलों को इत्मिनान नसीब हुआ करता है","फिर जिन लोगों ने दावत-ए-हक़ को माना और नेक अमल किये वो ख़ुश-नसीब हैं और उनके लिए अच्छा अंजाम है","(ऐ मुहम्मद) इसी शान से हमने तुमको रसूल बना कर भेजा है, एक ऐसी क़ौम में जिसके पहले बहुत सी क़ौमें गुज़र चुकी हैं, ता-के तुम इन लोगों को वो पैगाम सुनाओ जो हमने तुंपर नाज़िल किया है, इस हाल में के ये अपने निहायत मेहरबान खुदा के काफिर बने हुए हैं। इनसे कहो के वही मेरा रब है, उसके सिवा कोई मबूद नहीं है, उसी पर मैंने भरोसा किया और वही मेरा मालजा-ओ-मावी है (वह मेरा एकमात्र सहारा है/उसी पर मेरा भरोसा है, और मैं उसकी ओर मुड़ता हूं)","और क्या हो जाता अगर कोई ऐसा कुरान उतार दिया जाता जाता जिसका ज़ोर से पहाड़ चले लगे, या जमीन शक्क हो (फट्ट) जाती, या मुर्दे कब्रों से निकल कर बोलने लगते? (इस तरह की निशानियां दिखा देना कुछ मुश्किल नहीं है) बलके सारा इख्तियार हाय अल्लाह के हाथ में है। फिर क्या एहले ईमान (अभी तक कुफ्फार की तालाब के जवाब में किसी निशानी के जहूर की आस लगाए बैठे हैं और वो ये जान कर) अगर अल्लाह चाहता तो सारे इंसानों को हिदायत दे देता? जिन लोगों ने खुदा के साथ कुफ्र का रवैय्या इख्तियार कर रखा है उन पर उनके कार्टूनों की वजह से कोई ना कोई आफत आती ही रहती है या उनके घर के करीब कहीं नाज़िल होती है। ये सिलसिला चलता रहेगा यहां तक ​​के अल्लाह का वादा आन पूरा हो। यकीनन अल्लाह अपने वादे की खिलाफ वारज़ी नहीं करता","तुमसे पहले भी बहुत से रसूलों का मज़ाक उड़ाया जा चूका है, मगर मैंने हमेशा मुनकिरेन को ढील दी और आख़िर ए कार उनको पकड़ लिया, फिर देखलो के मेरी सज़ा कैसी सच थी","फिर क्या वो जो एक-एक मुतनफ़्फ़िस (हर आत्मा) की कमाई पर नज़र रखता है (उसके मुक़ाबले में ये जसरतें की जा रही हैं के) लोगों ने उसे कुछ शरीक वहीं रखा है? (ऐ नबी), इनसे कहो (अगर वक्त वो खुदा के अपने बने हुए शरीक हैं तो) जरा उनके नाम लो के वो कौन हैं? क्या तुम अल्लाह को एक नई बात की खबर दे रहे हो जैसे वो अपनी ज़मीन में नहीं जानता? हां तुम लोग बस यूं ही जो मुंह में आता है केह डालते हो? हकीकत ये है के जिन लोगों ने दावत ए हक को मन्ने से इंकार किया है उनके लिए उनकी मक्कारियां खुशनुमा बना दी गई हैं और वो राह-ए-रास्त से रुक गए हैं, फिर जिसको अल्लाह गुमराही में फेंक दे उसे कोई राह दिखाने वाला नहीं है","ऐसे लोगों के लिए दुनिया की जिंदगी ही में अजाब है, और आखिरी का अजाब उसे भी ज्यादा पसंद है, कोई ऐसा नहीं जो उन्हें खुदा से बचाने वाला हो","खुदा तरस इंसानों के लिए जिस जन्नत का वादा किया गया है उसकी शान ये है के उसके खास नहेरे (नहरें) बह रही हैं, उसके फल (फल) दैमी (अनन्त) हैं और उसका साया ला-ज़वाल (सनातन)। ये अंजाम है मुत्तक़ी (पवित्र) लोगों का, और मुनकिरीन ए हक़ का अंजाम ये है के उनके लिए दोज़ख की आग है","(ऐ नबी), जिन लोगों को हमने पहले किताब दी थी वो इस किताब से जो हमने तुमपर नाज़िल की है ख़ुश हैं और मुख़्तलिफ़ गिरोहों में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसकी बाज़ बातों को नहीं मानते। तुम साफ कहदो के \"मुझे तो सिर्फ अल्लाह की बंदगी का हुकुम दिया है और इसे मना किया है कि किसी को उसके साथ शरीक ठहरूं, लिहाजा मैं उसकी तरफ दावत देता हूं और उसकी तरफ मेरा रूजू है\"","इसी हिदायत के साथ हमने ये फ़रमान-ए-अरबी तुमपर नाज़िल किया है। अब अगर तुमने इल्म के बारे में कहा है कि तुम्हारे पास आ चुका है लोगों की ख्वाहिश की जोड़ी अल्लाह के मुकाबले में ना कोई तुम्हारा हामी ओ मददगार है और ना कोई उसकी पकड़ से तुमको बचा सकता है","तुमसे पहले भी हम बहुत से रसूल भेज चुके हैं और उनको हमने बीवी बच्चों वाला ही बनाया था, और किसी रसूल की भी ये ताक़त ना थी के अल्लाह के इज़ान के बगैर कोई निशानी खुद ला दिखता। हर दौर के लिए एक किताब है","अल्लाह जो कुछ चाहता है मिटा देता है और जिस चीज को चाहता है क़याम रखता है, उम्मुल किताब (मूल किताब) उसके पास है","और (ऐ नबी), जिस बुरे अंजाम की धमकी हम इन लोगों को दे रहे हैं उसका कोई हिसा ख्वा हम तुम्हारे जीते जी दिखा दें या उसके ज़हूर में आने से पहले हम तुम्हें उठा लें, बाहर हाल तुम्हारा काम सिर्फ पैग़ाम पहनना है और हिसाब लेना हमारा काम है","क्या ये लोग देखते नहीं हैं के हम इस सर-ज़मीन पर चले आ रहे हैं और इसका दायरा (सीमाएं) हर तरफ से तंग करते चले आते हैं? अल्लाह हुकुमत कर रहा है, कोई उसके फैसले पर नज़र-ए-सानी (संशोधन) करने वाला नहीं है, और उसे हिसाब लेते हुए कुछ देर नहीं लगती","इनसे पहले जो लोग हो गुज़रे हैं वो भी बड़ी-बड़ी चलें चल चुके हैं, मगर असल फैसला-कुन चल तो पूरी की पूरी अल्लाह ही के हाथ में है। वो जानता है कि कौन क्या कमाई कर रहा है, और अनकरीब ये मुनकिरीन-ए-हक़ (काफिर) देख लेंगे के अंजाम किसका ब-खैर होता है","ये मुनकीरीन कहते हैं कि तुम खुदा के भेजे हुए नहीं हो। कहो \"मेरे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह की गवाही काफी है, और फिर हर उस शक्स की गवाही जो किताब ए आसमानी का इल्म रखता है\"","अलिफ लाम रा (ऐ मुहम्मद), ये एक किताब है जिसको हमने तुम्हारी तरफ नाज़िल किया है ता-के तुम लोगों को तारिकियों (अंधेरे) से निकाल कर रोशनी में लाओ उनके रब की तौफीक से, हमें खुदा के रास्ते पर जो ज़बरदस्त और अपनी ज़ात में आप महमूद हैं (काबिल ए तारीफ है)","और ज़मीन और आसमान की सारी मौजुद्दत (हर चीज़) का मालिक है, और सख्त तबाह-कुन सजा है कबूल ए हक से इनकार करने वालों के लिए","जो दुनिया की जिंदगी को आखिरी पर तरजीह देता है, जो अल्लाह के रास्ते से लोगों को रोक रहे हैं और चाहते हैं कि ये रास्ता (उनकी ख्वाहिश के) मुताबिक) तेदा (टेढ़ा) हो जाये। ये लोग गुमराही में बहुत दूर निकल गए हैं","हमने अपना पैगाम देने के लिए जब कभी कोई रसूल भेजा है, उसने अपनी क़ौम ही कि जुबान में पैगाम दिया है ता-के वो उन्हें अच्छी तरह से खोल कर बात समझाए। फिर अल्लाह जिसे चाहता है भटका देता है और जिसे चाहता है हिदायत बख्शता है, वो बालादस्त (गालिब/सर्वशक्तिमान) और हकीम है","हम इस पहले मूसा को भी अपनी निशानियों के साथ भेज चुके हैं, हमने भी हुकुम दिया था कि अपनी क़ौम को तरीकियों (अंधेरे) से निकल कर रोशनी में ला और उन्हें तारीख-ए-इलाही (ईश्वरीय इतिहास) के सबक-आमोज़ वाकियात सुना कर हिदायत कर। वाकियात में बड़ी निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो सब्र और शुक्र करने वाला हो","याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा \"अल्लाह के हमें एहसान को याद रखो जो उसने तुमपर किया है, उसने तुमको फिरौन वालों से छुड़ाया जो तुमको मजबूत तकलीफें देते थे, तुम्हारे लड़कों को कत्ल कर डालते थे और तुम्हारी औरतों को जिंदा बच्चा रखते थे, तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारी बड़ी आजमाइश थी","और याद रखो, तुम्हारे रब ने खबरदार बना दिया था तो मैं। तुमको और ज़्यादा नवाज़ूंगा और अगर कुफ़्रान-ए-नियामत (कृतघ्न) करोगे तो मेरी सज़ा बहुत ज़रूरी है”","और मूसा ने कहा के “अगर तुम कुफ़्र करो और ज़मीन के सारे रहने वाले भी काफ़िर हो जाएँ तो अल्लाह रहो नियाज़ और अपनी ज़ात में आप महमूद हैं”","क्या तुम उन क़ौमों के हालात नहीं पाहुंचे जो तुमसे पहले गुज़र चुकी हैं? कौम-ए-नूह, आद, समूद और उनके बाद आने वाली बहुत से कौमें जिनका शूमर अल्लाह ही को मालूम है? उनके रसूल जब उनके पास साफ-साफ बातें और खुली-खुली निशानियां लिए हुए आए तो उन्हें ने अपने मुंह में हाथ दबा लिया और कहा के “जिस पैगाम के साथ तुम भेज गए हो हम उसको नहीं मानते और जिस चीज की तुम हमें दावत देते हो उसकी तरफ से हम सख्त खलजन हैं।” आमीज़ शक्क (बेचैन करने वाला संदेह) में पैदा हुए हैं”","उनके रसूलों ने कहा “क्या खुदा के बारे में शक्क है जो आसमान और ज़मीन का खालिक है? वो तुम्हें बुला रहा है ता-के तुम्हारे कसूर माफ़ करे और तुमको एक मुद्दत-ए-मुक़र्रर तक? मोहलात दे”। अनहोन ने जवाब दिया “तुम कुछ नहीं हो मगर वैसे ही इंसान जैसे हम हैं, तुम हमें उन हस्तियों की बंदगी से रोकना चाहते हो जिनकी बंदगी बाप दादा से होती चली आ रही है, अच्छा तो लाओ कोई सारी सनद (स्पष्ट प्रमाण)”","उनके रसूलों ने उन्हें कहा “वाकई हम कुछ” नहीं हैं मगर तुम ही जैसे इंसान, लेकिन अल्लाह अपने बंदों में से जिसका चाहता है नवाजता है और ये हमारे इख्तियार में नहीं है कि तुम्हें कोई सनद ला दें अल्लाह ही के इज़ान (अनुमति/इच्छा) से आ सकता है चाहिए","और हम क्यों न अल्लाह पर भरोसा करें जबके हमारी जिंदगी की राहों में उसने हमारी रहनुमाई की है? जो अज़ियातें (तक़लीफ़ीन) तुम लोग हमें दे रहे हो उन्पर हम सब्र करेंगे और भरोसा करने वालों का भरोसा अल्लाह ही पर होना चाहिए”","आख़िर-ए-कार मुनकिरीन ने अपने रसूलों से कहा के “ हां तो तुम हमारी मिल्लत में वापस आना होगा वरना हम तुम्हें अपने मुल्क से निकल देंगे”। तब उनके रब ने उन्पर वही भेजी के \"हम इन जालिमों को हलाक कर देंगे","और उनके बाद तुम्हारी जमीन में आबाद करेंगे। ये इनाम है उसका जो मेरे हुजूर जवाब-देही (जवाबदेही) का खौफ रखता हो और मेरी वेद से डरता हो\"","अनहोन ने फैसला चाहा था (तो यूं उनका फैसला हुआ) और हर जब्बार (अत्याचारी) दुश्मन-ए-हक़्क़ ने मुहं की खाई (अपमानिता झेली)","फिर इसके बाद आगे उसके लिए जहन्नुम है, वहां उसे कच-लहू (खून) का सा पानी पीने को दिया जाएगा","जिसे वाह ज़बरदस्ती हलक़ से उतरें की कोशिश करेगा और मुश्किल ही से उतार सकेगा। मौत हर तरफ़ से उसपर छायी रहेगी मगर वो मरने ना पायेगा और आगे एक साख अज़ाब उसकी जान का लागू रहेगा","जिन लोगों ने अपने रब से कुफ्र किया है उनके अमाल की मिसाल हमें रख (राख) की सी है जिसने एक तूफानी दिन की आंधी ने उड़ा दिया हो। वो अपने किये का कुछ भी फल (ना पा सकेंगे, यहीं पारले दर्जे की गम गश्तगी (चरम विचलन) है","क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह ने आसमां ओ ज़मीन की तहलीक को हक़ पर क़याम किया है? वो चाहे तो तुम लोगों को ले जाई और एक नई ख़ल्क़त (रचना) तुम्हारी जगह ले आओ","ऐसा करना उसपर कुछ भी नहीं है","और ये लोग जब इकात्थे अल्लाह के सामने बे-नकाब होंगे तो हमारे वक्त में से जो दुनिया में कामजोर था वो उन लोगों से जो बदे बने हुए थे, कहेंगे \"दुनिया में हम तुम्हारे तबे थे, अब तुम अल्लाह के अज़ाब से हमको बचाने के लिए भी कुछ कर सकते हो?” वो जवाब देंगे \"अगर अल्लाह ने हमें नजात की कोई राह दिखाई होती तो हम जरूर तुम्हें भी दिखाते, अब तो यक्सन है, ख्वा हम जजा-फजा करें या सब्र, बाहर हाल हमारे बचने की कोई सूरत नहीं\"","और जब फैसला चुका दिया जाएगा तो शैतान कहेगा\" हकीकत ये है के अल्लाह ने जो वादे तुमसे किए थे वो सब सच्चे थे और मैंने जितने वादे किए उन में से कोई भी पूरा ना किया, मैंने इसके अलावा कुछ नहीं किया के अपने रास्ते की तरफ तुम्हें दावत दी और। तुमने मेरी दावत पर लब्बैक किया (कबूल की)। अब मुझे मालामत ना करो, अपने आप को मालामत करो। यहां ना मैं तुम्हारी फरियाद-रसी कर सकता हूं और ना तुम मेरी। इस्से पहले जो तुमने मुझे ख़ुदाई में शरीक बना रक्खा था मैं उससे बारी उज़-ज़िम्मा (खुद को अलग कर लेना) हूं। ऐसे जालिमों के लिए दर्दनाक सजा यकीनी है”","बा खिलाफ इसके जो लोग दुनिया में ईमान लाए हैं और जिन्हों ने नीक अमल किए हैं वो ऐसे बागों में दाख़िल किए जाएंगे जिनके नीचे नेहरेन बहती होंगी। वहां वो अपने रब के इज्न (अनुमति) से हमेशा रहेंगे, और वहां उनका इस्तेकबाल सलामती की मुबारकबादी से होगा","क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह ने कलिमा-ए-तैयब को किस चीज से मिसाल दी है? इसकी मिसाल ऐसी है जैसे एक अच्छी ज़ात का दरख्त, जिसकी जड़ (जड़) ज़मीन में गहरी जमी हुई है और शाखें (शाखाएँ) आसमान तक पहुँची हुई हैं","हर आन वो अपने रब के हुकुम से अपना फल दे रहा है। ये मिसालें अल्लाह इसलिए देता है के लोग इनसे सबक लें","और कलिमा ए खबीसा (बुरा शब्द) की मिसाल एक बद-ज़ात दरख्त की सी है जो ज़मीन की साथ से उखाड़ फेंका जाता है, उसके लिए कोई इस्तेहकम (स्थिरता) नहीं है","ईमान लाने वालों को अल्लाह एक क़ौल-ए-साबित की बुनियाद पर दुनिया और आख़िरत, दोनों में सबात (दृढ़) अता करता है, और ज़ालिमों को अल्लाह भटका देता है। अल्लाह को इख्तियार है जो चाहे करे","तुमने देखा उन लोगों को जिन्होनें अल्लाह की नियामत पाई और उसे कुफ्रान-ए-नियामत (कृतघ्नता) से बदल डाला और (अपने साथ) अपनी क़ौम को भी हलाकत के घर में झोंक दिया","यानी जहन्नुम, जिसमें वो झुलस जाएंगे और वो बढतरीन जाए करार है","और अल्लाह के कुछ हमसर (अल्लाह के बराबर) तजवीज कार्लिये ता-के वो उन्हें अल्लाह के रास्ते से भटका दें। इनसे कहो: अच्छा मजा करलो, आख़िर ए कार तुम्हें पलट कर जाना दोज़ख ही में है","(ऐ नबी), मेरे जो बंदे ईमान लाए हैं उनसे कहदो के नमाज़ क़याम करें और जो कुछ हमने उनको दिया है, उसमें से खुले और छुपे (राह ए ख़ैर में) ख़र्च करें क़बल इसके के वो दिन आए जिस्में ना ख़त्म ओ फ़रोख्त होगी और ना दोस्त नवाज़ी हो साकेगी (दोस्ती काम आएगी)","अल्लाह वही तो है जिसने जमीन और आसमान को पेदा किया और आसमान से पानी बरसाया, फिर उसकी ज़रिये से तुम्हारी रिज्क रसानी के लिए तरह तरह के फल पेदा किये। जिसने कश्ती को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया के समंदर में उसके हुकुम से चले और दरियाओं को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया","जिसने सूरज और चांद को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया के लगतार चले जा रहे हैं और रात और दिन को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया किया","जिनसे वो सब कुछ तुम्हें दिया जो तुमने मांगा, अगर तुम अल्लाह किन नियमों का पालन करना चाहो तो कर नहीं सकते। हकीकत ये है कि इंसान बड़ा ही बे-इंसाफ और नाशुक्र है","याद करो वो वक्त जब इब्राहीम ने दुआ की थी के “परवरदिगार, इस शहर को अमन का शहर बना और मुझे और मेरी औलाद को बुथ परस्ती (मूर्ति पूजा) से बचा","परवरदिगार, बुथों (मूर्तियों) में ने बहुतों को गुमराही में डाला है (मुमकिन है के मेरी औलाद को भी ये गुमराह कर दें, लिहाज़ा उनमें से) जो मेरे तारीख पर चले वो मेरा है और जो मेरे खिलाफ़ तारीख इख्तियार करे तो यकीनन तू दरगुज़ार करने वाला मेहरबान है","परवरदिगार, मैंने एक बे आब-ओ-गियाह वादी (बंजर घाटी) में अपनी औलाद के एक हिस्से को तेरे मोहतरम घर के पास ला बसाया है। परवरदिगार, ये मैंने इसके लिए क्या है के ये लोग यहां नमाज़ क़याम करें। लिहाज़ा तू लोगों के दिलों को इनका मुश्ताक बना (लोगों का दिल उनके प्रति) और उन्हें खाने को फल दे, शायद के ये शुक्रगुज़ार बनें","परवरदिगार, तू जानता है जो कुछ हम छुपाते हैं और जो कुछ जाहिर करते हैं”। और वक़ई अल्लाह से कुछ भी छुपा हुआ नहीं है, न ज़मीन में न आसमानो में","“शुक्र है हमें खुदा का जिसने मुझे इस बुढापे में इस्माइल और इशाक जैसे बेटे दिए, हकीकत ये है के मेरा रब ज़रूर दुआ सुनता है","ऐ मेरे परवरदिगार, मुझे नमाज़ क़याम करने वाला बना और मेरी औलाद से भी (ऐसे लोग उठा जो ये काम करें) परवरदिगार, मेरी दुआ क़बूल कर","परवरदिगार, मुझे और मेरे वलियों को और सब ईमान लाने वालों को उस दिन माफ़ करदीजियो जबके हिसाब क़याम होगा”","अब ये जालिम लोग जो कुछ कर रहे हैं अल्लाह को तुम उसे गाफिल ना समझो। अल्लाह तो इन्हें टाल रहा है उस दिन के लिए जब हाल ये होगा के आंखें फटी की फटी रह गई हैं","सर उठे भाग चले जा रहे हैं, नजरें ऊपर जमी हैं और दिल उड़े जाते हैं","(ऐ मुहम्मद), उस दिन से तुम इन्हें डराओ जबके अज़ाब इन्हें आ लेगा हमें वक्त ये जालिम कहेंगे के \"ऐ हमारे रब, हमें थोड़ी सी मोहलत और दे दे, हम तेरी दावत को लब्बैक कहेंगे और रसूलों की पैवारी करेंगे\"। (मगर उन्हें साफ जवाब दे दिया जाएगा के) क्या तुम वही लोग नहीं हो जो इसे पहले कसमें खा खा कर कहते थे थाय के हमपर तो कभी जवाब (गिरावट) आना ही नहीं है","हालंके तुम उन क़ौमों की बस्तियों में रह बस चुके थे जिन्होन ने अपने ऊपर आप ज़ुल्म किया था और देख चुके थे के हमने उनसे क्या सुलूक किया और उनकी मिसालें (उदाहरण) दे कर हम तुम्हें समझा भी चुके थे","उन्होन ने अपनी सारी ही चलें चल देखी, मगर उनकी हर चाल का तोड़ अल्लाह के पास था, अगर उनकी चालें ऐसी गजब की थी के पहाड़ उनसे ताल जाए","पास (ऐ नबी), तुम हरगिज ये गुमान न करो के अल्लाह कभी अपने रसूलों से किए हुए वादों के खिलाफ करेगा। अल्लाह ज़बरदस्त है और इंतक़ाम लेने वाला है","दारो इन्हें हम दिन से जबके ज़मीन और आसमां बदल कर कुछ कर देंगे और सब अल्लाह वाहिद ए कहार (एक जो चिड़चिड़ा है) के सामने बे-नक़ब हाज़िर हो जायेंगे","हमें रोज़ तुम मुजर्रीमों को देखोगे के ज़ंजीरों में हाथ पाँव जकड़े होंगे","तार-कोल (तरल पिच/टार/डंबर) के लिबास पहने हुए होंगे और आग के शोले उनके चेहरों पर छाये जा रहे होंगे","ये इस लिए होगा के अल्लाह हर मुतनफ्फिस को उसके किये का बलदा देगा. अल्लाह को हिसाब लेते कुछ देर नहीं लगती","ये एक पैगाम है सब इंसानों के लिए, और ये भेजा गया है इसके लिए कि उनको इसके जरीये से खबरदार कर दिया जाए और वो जान लें के हकीकत में खुदा बस एक ही है और जो अक्ल रखते हैं वो होश मैं आ जाइए","अलिफ लाम रा .. ये आयत हैं किताब ए इलाही और कुरान ए मुबीन की","बैद नहीं के एक वक्त वो आ जाए जब वही लोग जिन्होन ने आज (दवा ए इस्लाम को कबूल करने से) इनकार कार्डिया है पछता-पछता कर कहेंगे के काश हमने सार ए तसलीम खाम करदिया होता","चोदो इन्हें खायें (खाएं), पीएं (पीएं) मजे करें और बहलावे में डाले रहें इनको झूठी उम्मीद। अनकारीब इन्हें मालूम हो जाएगा","हमने इसे पहले जिस बस्ती को भी हलाक किया है उसके लिए एक खास मोहलत ए अमल लिखी जा चुकी थी","कोई क़ौम ना अपने वक्त ए मुकर्रर से पहले हलाक हो सकती है, ना उसके बाद झूठ बोल सकती है","ये लोग कहते हैं \"ऐ वो शक्स जिस पर ज़िक्र नाज़िल हुआ है, तू यकीनन दीवाना है","अगर तू सच्चा है तो हमारे सामने फरिश्तों को ले क्यों नहीं आता?\"","हम फरिश्तों को यूं ही नहीं उतारते, वो जब उतारते हैं तो हक के साथ उतारते हैं, और फिर लोगों को मोहलत नहीं देते","रहा ये जिक्र, तो इसको हमने नाज़िल किया है और हम खुद इसके निगेहबान हैं","(ऐ मुहम्मद), हम तुमसे पहले बहुत सी गुज़री हुई क़ौमों में रसूल भेज चुके हैं","कभी ऐसा नहीं हुआ के उनके पास कोई रसूल आया हो और उनको मज़ाक न उड़ाया हो","मुजरीमीन के दिलों में तो हम इस ज़िक्र को इसी तरह [सलाख़ के मानिंद (छड़ी की तरह)] गुज़रते हैं","वो इसपर ईमान नहीं लाया करते। क़दीम (प्राचीन काल) से इस क़ौम के लोगों का यही तरीक़ा चला आ रहा है","अगर हम ऊपर आसमान का कोई दरवाज़ा खोल देते हैं और वो दिन दहाड़े हमें छूने भी लगते हैं","तब भी वो यहीं कहते के हमारी आँखों को धोखा हो रहा है, बलके हमपर जादू करदिया गया है","ये हमारी कार-फरमाई है के आसमान में हमने बहुत से मजबूत गोले बनाए, उनको देखने वालों के लिए सजा लिया","और हर शैतान ए मरदूद से उनको महफूज कर दिया","कोई शैतान में राह नहीं पा सकता, इल्ला ये के कुछ सन-गन ले ले, और जब वो सन-गन लेने की कोशिश करता है तो एक शोला रोशन उसका पीछा करता है","हमने जमीन को फैलाया, हमें पहाड़ जमाये, उसमें हर नाव की नबातात ठीक ठीक नापी तुली मिकदार (माप) के साथ उगी","और इस में मैशत के असबाब फराहम किए, तुम्हारे लिए भी और उन बहुत सी मखलूकत के लिए भी जिनका राज़िक तुम नहीं हो","कोई चीज़ ऐसी नहीं जिसका खज़ाने हमारे पास ना होन, और जिस चीज को भी हम नाज़िल करते हैं एक मुकर्रर मिकदार (माप) में नाज़िल करते हैं","बार-बार हवाओं (उर्वरक हवाओं) को हम ही भेजते हैं, फिर आसमान से पानी बरसाते हैं, और हम पानी से तुम्हें सैराब करते हैं, इस दौलत के खज़ाना-दार तुम नहीं हो","जिंदगी और मौत हम देते हैं, और हम ही सबके वारिस होने वाले हैं","पहले जो लोग तुम में से हो गुज़रे हैं उनको भी हमने देख रखा है, और बाद के आने वाले भी हमारी निगाह में हैं","यकीनन तुम्हारा रब सबको इकठ्ठा करेगा, वो हकीम भी है और आलिम भी","हमने इंसान को साडी (सड़ी हुई) हुई मिट्टी के सूखे गारे से बनाया","और उसके पहले जिन्नो को हमने आग की गोद से पैदा किया कर चुके थे","फिर याद करो उस मौके को जब तुम्हारे रब ने फरिश्तों से कहा के “मैं सदी हुई मिट्टी के सूखे गले से एक बशर अदा कर रहा हूं","जब मैं उसे पूरा बना चुका हूं और हम अपनी रूह से कुछ फूंक दूं तो तुम सब उसके आगे सजदे में गिर जाना”","चुनांचे तमाम फरिश्तों ने सजदा किया","सिवाए इबलीस के, के हमें सजदा करने वालों का साथ देने से इनकार करदिया","रब ने पूछा “ ऐ इब्लीस, तुझसे क्या हुआ के तू नहीं सजदा करने वालों का साथ ना दिया?”","उसने कहा \"मेरा ये काम नहीं है के मैं इस बशर को सजदा करूं जिसमें तू नई सदी हुई मिट्टी के सूखे गले से पेदा किया है\"","रब ने फरमाया \"अच्छा तो निकल जा यहां से क्योंकि तू मरदूद (शापित) है","और अब रोज़-ए-जज़ा तक तुझपर लानत है\"","उसने अर्ज़ किया \"मेरे रब, ये बात है तो फिर मुझे रोज़ तक के लिए मोहलत दे जबके सब इंसान दोबारा उठेंगे\"","फरमाया \" अच्छा, तुझ पर मोहलत है","उस दिन तक जिसका वक़्त हमें मालूम है”","वो बोला “मेरे रब, जैसा तू नहीं मुझे बहकाया उसकी तरह अब मैं ज़मीन में इनके लिए दिल फरेबियाँ अदा करके इन सबको बहका दूंगा","सिवाय तेरे उन बंदों के जिन्हें तू नहीं इनमें से खाली करलिया हो”","फरमाया “ये रास्ता है जो सीधा मुझ तक पहुँचता है","बेशक, जो मेरे हक़ीक़ी बंदे हैं उनपर तेरा बस ना चलेगा। तेरा बस तो सिर्फ उन बहके हुए लोगों ही पर चलेगा जो तेरी जोड़ी बनाएं","और उन सब के लिए जहन्नुम की वईद (नियत) है”","ये जहन्नुम (जिसकी वईद जोड़ी ए इबलीस के लिए गई है) उसके सात (सात) दरवाजे हैं, हर दरवाजे केली उनमें से एक हिसा मखसूस करदिया गया है","बा-खिलाफ इसके मुत्तकी लोग बाघों (बगीचे) और चश्में (फव्वारे) में होंगे","और उन्हें कहा जाएगा के दखिल हो जाओ इनमें सलामती के साथ बेखौफ ओ खातिर","उनके दिलों में जो थोड़ी बहुत खोट-कपट होगी उसे हम निकाल देंगे, वो आपस में भाई भाई बनकर आमने सामने तख्तों पर बैठेंगे","उनको ना वहां किसी मुशक्कत से पाला पड़ेगा और ना वो वहां से निकल जाएंगे","(ऐ नबी), मेरे बंदों को खबर दे दो के मैं बहुत दरगुजर करने वाला (माफ करने वाला) और रहीम हूं","मगर इसके साथ मेरा अज़ाब भी निहायत दर्दनक अज़ाब है","और इन्हें जरा इब्राहिम के मेहमानों का क़िस्सा सुनाओ","जब वो आए उसके हां और कहा \"सलाम हो तुमपर,\" तो उसने कहा \"हमें तुमसे डर लगता है\"","उनको ने जवाब दिया \" डरो नहीं, हम तुम्हें एक बदे सियाने लड़के की बशारत देते हैं”","इब्राहीम ने कहा “क्या तुम इस बुढापे में मुझे औलाद की बशारत देते हो? ज़रा सोचो तो सही के ये कैसी बशारत तुम मुझे दे रहे हो?”","उनहों ने जवाब दिया “हम तुम्हें बार हक बशारत दे रहे हैं, तुम मायौस ना हो”","इब्राहिम ने कहा “अपने रब की रहमत से मायुस तो गुमराह लोग ही हुआ करते हैं”","फिर इब्राहिम ने पूछा “ऐ फरीस्ताद-गान-ए-इलाही (अल्लाह के दूत), वो मोहिम (अभियान) क्या है जिसपार आप हजरत तशरीफ लाए हैं?”","वो बोले, \"हम एक मुजरिम क़ौम की तरफ भेज गए हैं","सिर्फ लूट के घर वाले मुस्तस्ना (अपवाद) हैं, उन सबको हम बचा लेंगे","सिवाये उसकी बीवी के जिसके लिए (अल्लाह फरमाता है के) हमने मुकद्दर कर दिया है के वो पीछे रह जाने वालों में शामिल रहेगी”","फिर जब ये फरीस्तादे लूट के हां पहुंचे","तो उसने कहा “आप लोग अजनबी मालूम होते हैं”","उनको ने जवाब दिया \"नहीं, बलके हम वही चीज़ लेकर आए हैं जिसके आने में ये लोग शक्क कर रहे थे","हम तुमसे सच कहते हैं के हम हक के साथ तुम्हारे पास आए हैं","लिहाज़ा अब तुम कुछ रात रह रहे हैं अपने घर वालों को लेकर निकल जाओ और खुद उनके पीछे पीछे चलो, तुम में से कोई पलट कर ना देखे बस सीधे चले जाओ जिधर जाने का तुम्हें हुकुम दिया जा रहा है”","और हमने अपना ये फैसला पहनकर लोगों की सुबह होते होते जद्द (जड़ें) कट दी जाएंगी","इतने में शहर के लोग खुशी के मारे बेताब होकर लुट के घर चढ़ आए","लुट ने कहा \"भाइयों, ये मेरे मेहमान हैं, मेरी फजीहत (अपमान) ना करो","अल्लाह से डरो, मुझे रुसवा ना करो\"","वो बोले “क्या हम बारह तुम्हें मना नहीं कर चुके हैं कि दुनिया भर के ठेकेदार ना बनो?”","लूट ने अजीज होकर कहा \"अगर तुम्हें कुछ करना ही है तो ये मेरी बेटियां मौजूद हैं\"","तेरी जान की कसम ऐ नबी, उस वक्त एक नशा सा चढ़ा हुआ था जिसमें वो आपे से बहार हुए जाते थे","आखिर ई कार पोव फटते ही उनको एक जबरदस्त धमाके ने आ लिया (भोर में भीषण विस्फोट ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया)","और हमने उस बस्ती को तलपत करके रख दिया और ऊपर पाकी (बेक्ड) हुई मिट्टी के पत्थरों की बारिश बरसा दी","क्या वाकिये में बड़ी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो साहिब-ए-फिरसत हैं","और वो इलाक़ा (जहाँ ये वाकिया पेश आया था) गुज़र गाह ए आम (हाई वे) पर वक़्त है","उसमें समां ए इब्रत है उन लोगों के लिए जो साहिब ए ईमान हैं","और ऐका वले ज़ालिम थाय","तो देखलो के हमने उनसे भी इंतेक़ाम लिया, और इन दोनों क़ौमों के उजाड़े हुए इलाक़े खुले रास्ते पर वक़्त हैं","हिज्र के लोग भी रसूलों की तकज़ीब कर चुके हैं","हमने अपनी आयतें उनके पास भेजी, अपनी निशानियाँ उनको दिखाई, मगर वो सबको नज़र-अंदाज़ (अनदेखा) ही करते रहे","वो पहाड़ तराश तराश कर मकान बनाते थे और अपनी जगह बिलकुल बे-ख़ौफ़ और मुतमइन थे","आख़िर ई कार एक ज़बरदस्त धमाके ने उनको सुबह होते ही आ लिया","और उनकी कमाई उनके कुछ काम न आई","हमने जमीन और आसमान को और उनकी सब मौजूदत को हक़ के सिवा किसी और बुनियाद पर ख़ल्क (बनाना) नहीं बनाया है, और फैसले की घड़ी यकीनन आने वाली है। पस (ऐ मुहम्मद), तुम (लोगन की में)। बेहुदगियों पर) शरीफ़ाना दरगुज़ार से काम लो","यकीनन तुम्हारा रब सब का खालिक है और सब कुछ जानता है","हमने तुमको सात (सात) ऐसी आयतें दे रखी हैं जो बार-बार दोहरायी जाने के लायक हैं, और तुम्हें कुरान ए अजीम अता किया है","तुम हमें माता-ए-दुनिया की तरफ आंख उठा कर ना देखो जो हमने अपने अंदर से मुख्तलिफ क़िस्म के लोगों को दे रखा है, और ना इनके हाल पर अपना दिल कुढ़ाओ(शोक), इन्हें छोड़ कर ईमान लाने वालों की तरफ झुको","और (ना मनने वालों से) कहदो के मैं तो साफ साफ तम्बीह (चेतावनी) करने वाला हूं","ये उसकी तरह की तम्बीह है जैसी हमने उन तफ़रक़े परदाज़ों (जो बंटवारा करते हैं) की तरफ भेजी थी","जिन्होन ने अपने कुरान को टुकड़े-टुकड़े कर डाला है","तो कसम है तेरे रब की, हम जरूर इन सबसे पूछेंगे","के तुम क्या करते रहे हो","पास (ऐ नबी) जिस चीज का तुम्हें हुकुम दिया जा रहा है उसे हांके पुकारे कहदो (सार्वजनिक रूप से घोषित करो) और शिर्क करने वालों की जरा परवा ना करो","तुम्हारी तरफ से हम उन मजाक उड़ाने वालों की खबरें लेने के लिए काफी हैं","जो अल्लाह के साथ किसी और को भी खुदा करार देते हैं अनकरीब उन्हें मालूम हो जाएगा","हमें मालूम है कि जो बातें ये लोग तुमपर बनाते हैं उनका दिल कोफ्त होता है व्यथित)","इसका इलाज ये है के अपने रुब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो, उसके जनाब में सजदा बजा लाओ","और हम आखिरी घड़ी तक अपने रुब की बंदगी करते रहो जिसका आना यकीनी है","अगला अल्लाह का फैसला, अब इसके लिए जल्दी ना मचाओ, पाक है वो और बाला-तर है उस शिर्क से जो ये लोग कर रहे हैं","वो इस रूह को अपने जिस बंदे पर चाहता है अपने हुकुम से मलिका के लिए नाज़िल फरमा देता है हिदायत के साथ के लोगों को) \"आगा करदो, मेरे सिवा कोई तुम्हारा मबूद नहीं है, लिहाज़ा तुम मुझ से डरो\"","उसने आसमान ओ ज़मीन को बरहक़्क अदा किया है, वो बहुत बाला ओ बरतर है उस शिर्क से जो ये लोग करते हैं","उसने इंसान को एक ज़रा सी बूंद से खरीदा और देखते-देखते सारें वो एक झगड़ालु हस्ती बन गया","उसने जानवर पैदा किया जिनके पास तुम्हारे लिए पोशाक (कपड़े) भी हैं और खुराक भी, और तरह-तरह के दूसरे फायदे भी","उन्मे तुम्हारे लिए जमाल (सुखद लुक) है जब के सुबह तुम उन्हें चरणों के लिए भेजते हो और जबके शाम उन्हें वापस लाते हो","वो तुम्हारे लिए बोझ ढो (उठा) कर ऐसे ऐसे मुकाम तक ले जाते हैं जहां तुम मुश्किल जानफिशानी (दर्दनाक मेहनत) के बिना नहीं रह सकते कृपया. हकीकत ये है के तुम्हारा रब बड़ा ही शफीक और मेहरबान है","उसने घोड़े और खच्चर (खच्चर) और गधे पेदा किया ता-के तुम अपर सवार हो और वो तुम्हारी जिंदगी की रौनक बनी। वो और बहुत सी चीजें (तुम्हारे फायदे के लिए) भुगतान करता है जिनका तुम्हें इल्म तक नहीं है","और अल्लाह ही के ज़िम्मे है सीधा रास्ता बताना जबके रास्ते टेढ़े भी मौजूद हैं। अगर वो चाहता तो तुम सबको हिदायत दे देता","वही है जिसने आसमान से तुम्हारे लिए पानी बरसाया जिसमें तुम खुद भी सरायब होते हो और तुम्हारे जानवरों के लिए भी चारा पैदा होता है","वो इस पानी के ज़रिये से खेतियां उगता है और ज़ैतून और खजूर और अंगूर और तरह तरह के दूसरे फल अदा करता है। इस में एक बड़ी निशानी है उन लोगों के लिए जो गौर-ओ-फिक्र करते हैं","उसने तुम्हारी भलाई के लिए रात और दिन को और सूरज और चांद को मुस्कुरा कर रखा है, और सब तारे (सितारे) भी उसी के हुकुम से मुस्कुरा रहे हैं। इसमें बहुत सी निहसानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं","और ये जो बहुत सी रंग बी रंग की चीजें हैं उसने तुम्हारे लिए जमीन में से भुगतान कर रखा है, उनमें भी जरूर निशानी है उन लोगों के लिए जो सबक हासिल है करने वाले हैं","वही है जिसने तुम्हारे लिए समंदर को मुसक्कर कर रखा है ता-के तुम उसे तार-ओ-ताजा गोश्त लेकर खाओ और उसकी जीनत (सजावट) की वो चीज निकालो जिन्हें तुम पहचानते हो। तुम देखते हो के कश्ती समंदर का सीना चीरती हुई चलती है, ये सब कुछ इस तरह से है के तुम अपने रब का फज़ल तलाश करो और उसे शुकर-गुज़ार बनो","उसने ज़मीन में पहाड़ों की महक दी ता-के ज़मीन तुमको लेकर धूलक ना जाए, उसने दरिया जारी किया और क़दरती रास्ते बनाए ता-के तुम हिदायत पाओ","उसने ज़मीन में रास्ता बताने वाली अलमातें रख दी, और तारों (सितारों) से भी लोग हिदायत पाते हैं","फिर क्या वो जो पेदा करता है और वो जो कुछ भी पेदा नहीं करता, dono yaksan hain? क्या तुम होश में नहीं आते","अगर तुम अल्लाह की नियामतों को गिना चाहो तो गिना नहीं सकते, हकीकत ये है कि वो बड़ा ही दरगुजर करने वाला और रहीम है","हालंके वो तुम्हारे खुले से भी वाकिफ है और छुपे से भी","और वो दूसरे हस्तियां जिन्हें अल्लाह को छोड़ कर लोग पुकारते हैं, वो किसी चीज के भी खालिक नहीं हैं बलके खुद मखलूक हैं","मुर्दा हैं ना के जिंदा और उनको कुछ मालूम नहीं है के उन्हें कब (दोबारा जिंदा करके) उठाया जाएगा","तुम्हारा खुदा बस एक ही खुदा है मगर जो लोग आखिरी को नहीं मानते उनके दिलों में इंकार बसकर रह गया है और वो घमंड में पढ़ गए हैं","अल्लाह यकीनन इनके सब करोत जानता है छुपे हुए भी और खुले हुए भी। वो उन लोगों को हरगिज़ पसंद नहीं करता जो गुरूर ए नफ़्स (गर्व से फूला हुआ) में मुबतला हो","और जब कोई उनसे पूछता है कि तुम्हारे रब ने ये क्या चीज नाजिल की है तो कहते हैं, \"अजी वो तो अगले वक्त की फरसुदा कहानियां (प्राचीन कथाएं) हैं\"","ये बातें वो इसलिए करते हैं के कयामत के रोज अपने बोझ भी पूरे उठें, और साथ-साथ कुछ उन लोगों के बोझ भी समेटें, ये बार बिना जिहालत (उनकी अज्ञानता में) गुमराह कर रहे हैं। देखो! कैसी सख्त जिम्मेदारी है जो ये अपने सार ले रहे हैं","इनसे पहले भी बहुत से लोग (हक को नीचा दिखाने के लिए) ऐसी ही मक्कारियां कर चुके हैं, तो देखलो के अल्लाह ने उनके मकर की इमारत जद्द (रूट) से उखाड़ फेंकी और उसकी छत ऊपर से उनके सर पर आ रही (ऊपर से उनके सिर पर छत गिर गई) और ऐसे रुख से अनपर अज़ाब आया जिधर से उसके आने का उनको गुमान तक ना था","फिर कयामत के रोज़ अल्लाह उन्हें ज़लील ओ ख़्वार करेगा और उनसे कहेगा \"बताओ, अब कहां हैं मेरे वो शरीक जिनके लिए तुम (एहले)। हक से) झगड़े किया करते थे?” जिन लोगों को दुनिया में इल्म हासिल था वो कहेंगे \"आज रूसवाई और बदबख्ती है काफिरों के लिए\"","हां, उन्हीं काफिरों के लिए जो अपने नफ्स पर ज़ुल्म करते हुए जब मलिका के हाथ गिरफ़्तार होते हैं तो (सरकशी छोड़ कर) फ़ौरन दागें डाल देते (आत्मसमर्पण) हैं और कहते हैं \"हम तो कोई कसूर नहीं कर रहे थे\"। मलायका जवाब देते हैं \"कर कैसे नहीं रहे थे! अल्लाह तुम्हारे कार्टूनों से खूब वाकिफ है","अब जाओ, जहन्नुम के दरवाज़ों में घुस जाओ, वहीं तुमको हमेशा रहना है\"। पस हकीकत ये है के बड़ा ही बुरा ठिकाना है मुतकब्बिरों (घमंडी वालों) के लिए","दूसरी तरफ जब खुदा तरस लोगों से पूछता है के ये क्या चीज है जो तुम्हारे रब की तरफ से नाज़िल हुई है, तो वो जवाब देते हैं के \"बेहतरीन चीज़\" उतारी है”। इस तरह के कुछ लोगों के लिए इस दुनिया में भी भलाई है और आख़िरत का घर तो ज़रूर है उनके हक में बेहतर है। बड़ा अच्छा घर है मुत्तक़ियों (अल्लाह से डरने वालों) का","दैमी क़याम (स्थायी निवास) की जन्नतें, जिन में वो दख़िल होंगे, आला नेह्रेन बेह राही होंगी, और सब कुछ वहां ऐन उनकी ख्वाहिश के मुताबिक होगा। ये जज़ा देता है अल्लाह मुत्तक़ियों (पवित्र) को","उन मुत्तक़ियों को जिनकी रूहें पाकीज़गी की हालत में जब मलिका क़ब्ज़ करते हैं तो कहते हैं \"सलाम हो तुमपर, जाओ जन्नत में अपने अमाल के बदले\"","(ऐ मुहम्मद), अब जो ये लोग इंतजार कर रहे हैं तो इसके सिवा अब और क्या बाकी रह गया है कि मलायका ही आ पूछूं, या तेरे रब का फैसला सादिर हो जाए? इस तरह की धिताई इनसे पहले बहुत से लोग कर चुके हैं, फिर जो कुछ उनके साथ हुआ वो असमान अल्लाह का ज़ुल्म ना था बल्के उनका अपना ज़ुल्म था जो उनहों ने खुद अपने ऊपर किया","उनके कार्टूनों की ख़राबियां आख़िर उनकी दामनगीर हो गई और वही चीज़ असमान मुसल्लत होकर रही जिसका वो मज़ाक उड़ाया करता था","ये मुशरिकेन कहते हैं \"अगर अल्लाह चाहता तो ना हम और ना हमारे बाप दादा उसके सिवा किसी और की इबादत करते और ना उसके हुकुम के बिना किसी चीज को हराम ठहराते\"। ऐसे ही बहाने इनसे पहले के लोग भी बनाते रहे हैं तो क्या रसूलों पर साफ साफ बात पूछूंचा देने के सिवा और भी कोई जिम्मेदारी है","हमने हर उम्मत में एक रसूल भेज दिया, और उसकी ज़रिये से सबको खबरदार कर दिया के \"अल्लाह की बंदगी करो और\" टैगहुट की बंदगी से बचो”। इसके बाद मेरे से किसी को अल्लाह ने हिदायत बख्शी और किसी पर ज़लालत मुसल्लत हो गई। फिर ज़रा ज़मीन में चल फिर कर देखलो के झूठलेन वालों का क्या अंजाम हो चुका है","(ऐ मुहम्मद), तुम चाहे इनकी हिदायत के लिए कितने ही हारे हो, मगर अल्लाह जिसको भटका देता है फिर उसे हिदायत नहीं दिया करता और इस तरह के लोगों की मदद कोई नहीं कर सकता","ये लोग अल्लाह के नाम से छोटी-छोटी कसमें खा कर कहते हैं \"अल्लाह किसी को मरने वाले को फिर से जिंदा करके ना उठाएगा\"। उठायेगा क्यों नहीं, ये तो एक वादा है जिसका पूरा करना उसने अपने ऊपर वाजिब कर लिया है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं","और ऐसा होना जरूरी है के अल्लाह इनके सामने हकीकत को खोल दे जिसके बारे में ये इख्तिलाफ कर रहे हैं और मुनकिरीन ए हक़ को मालूम हो जाए के वो झूठे थे","रहा उसका इमान (संभावना) तो] हमें किसी चीज़ को वजूद में लाने के लिए इसे ज़्यादा कुछ नहीं करना होता के उसे हुकुम दीन \"हो जा\" और बस वो हो जाती है","जो लोग ज़ुल्म सहने के बाद अल्लाह की खातिर हिजरत कर गए हैं उनको हम दुनिया ही में अच्छा ठिकाना देंगे और आख़िरत का अजर तो बहुत बड़ा है, काश जान लें वो मज़लूम","जिन्हों ने सब्र किया है और जो अपने रब के भरोसे पर काम कर रहे हैं (के कैसा अच्छा अंजाम उनका) मुंतज़िर है)","(ऐ मुहम्मद), हमने तुमसे पहले भी जब कभी रसूल भेजे हैं आदमी ही भेजे हैं जिनकी तरफ हम अपने पैगाम वही किया करते थे। एहले ज़िक्र से पूछ लो अगर तुमलोग खुद नहीं जानते","पिछले रसूलों को भी हमने रोशन निशानियां और किताबें दे कर भेजा था, और अब ये ज़िक्र तुमपर नाज़िल किया है ता-के तुम लोगों के सामने उस तालीम की तशरीह ओ तौज़ीह करते जाओ जो उनके लिए उतारी गई है, और ता-के लोग (खुद भी) गौर ओ फिक्र करें","फिर क्या वो लोग जो (दावत ए पैगम्बर की मुखालिफत में) बढ़तर से बढतर चलें चल रहे हैं इस बात से बिल्कुल ही बे खौफ हो गए हैं के अल्लाह उनको जमीन में धोखा दे, हां ऐसे गोशे में अनपर अज़ाब ले आए जिधर से उसके आने का उनको हम ओ गुमान तक ना हो","या अचानक चलते फिरते इनको पकड़ ले, या ऐसी हालत में उन्हें पकड़े जबके उन्हें खुद आने वाली मुसीबत का खटका लगा हुआ हो और वो उसे बचाने की फिक्र में चौकन्ने माननीय","वो जो कुछ भी करना चाहे ये लोग उसको अजीज (निराश) करने की ताकत नहीं रखते, हकीकत ये है के तुम्हारा रब बड़ा ही नरम-खु (बहुत उदार/शफाकत करने वाला) और रहीम है","और क्या ये लोग अल्लाह की अदा की हुई किसी चीज़ को भी नहीं देखते के उसका साया किस तरह अल्लाह के हुज़ूर सजदा करते हुए दिन और बयेन गिरता है? सब के सब इस तरह इज़हार ए इज्ज़ (अपनी विनम्रता व्यक्त करें) कर रहे हैं","ज़मीन और आसमान में जिस कदर जानदार मखलूक़त हैं और जितने मालिक हैं सब अल्लाह के आगे सर ब-सजूद हैं। वो हरगिज सरकशी नहीं करते","अपने रब से जो उनके ऊपर है, डरते हैं और जो कुछ हुकुम दिया जाता है उसके मुताबिक काम करते हैं","अल्लाह का फरमान है के \"दो खुदा ना बना लो, खुदा तो बस एक ही है, लिहाजा तुम मुझ से डरो","उसका है वो सब कुछ जो आसमान में है और जो ज़मीन में है, और खालिसन उसी का दीन (सारी कायनात में) चल रहा है। फिर क्या अल्लाह को छोड़ कर तुम किसी और से तकवा (डर) करोगे","तुमको जो नियामत भी हासिल है अल्लाह ही की। तरफ से है फिर जब कोई सख्त वक्त तुमपर आता है तो तुम लोग खुद अपनी फरियाद लेकर उसी की तरफ दौड़ते हो","मगर जब अल्लाह हमें वक्त को ताल देता है तो यकीनन तुम में से एक गिरोह अपने रुब के साथ दूसरे को (इस मेहरबानी के शुक्रिया में) शरीक करने लगता है","ता-के अल्लाह के एहसान की नाशुकरी करे, अच्छा मजे करलो, अनकरीब तुम्हें मालूम हो जाएगा","ये लोग जिनकी हकीकत से वाकिफ नहीं हैं, उनके लिए हमारे दिए हुए रिज्क में से मुकर्रर करते हैं। खुदा की कसम, जरूर तुमसे पूछा जाएगा के ये झूठ तुमने कैसे गड़बड़ ले लिया था","ये खुदा के लिए बेटियां तजवीज करते हैं, सुभानअल्लाह! और इनके लिए वो जो ये खुद चाहते हैं","जब मेरे बीच में किसी को बेटी के प्यार की खुशी-खबरी दी जाती है तो उसके चेहरे पर कलौंस (काला हो जाता है) चा जाती है और वो बस खून का सा घूंट पी कर रह जाता है","लोगों से छुपता फिरता है के इस बुरी खबर के बाद क्या किसी को मुंह दिखाया गया। सोचता है कि जिल्लत के साथ बेटी को लिए रहो हां मिट्टी में दबा दे? देखो कैसे बुरे हुकुम हैं जो ये खुदा के बारे में लगते हैं","बुरी शिफत से मुत्तसफ (लिखा जाए) किया जाने के लायक तो वो लोग हैं जो आखिरी का यकीन नहीं रखते। रहा अल्लाह, तो उसके लिए सब से बरतार सिफ़्फ़त हैं, वही तो सब पर ग़ालिब और हिकमत में कामिल है","अगर कहीं अल्लाह लोगों को उनकी ज़्यादती पर फ़ौरन ही पकड़ लिया करता तो रूह ए ज़मीन पर किसी मुतनफ़्फ़िस को न छोड़ता। लेकिन वो सब को एक वक्त ए मुकर्रर तक मोहलत देता है। फिर जब वो वक्त आ जाता है तो उसे कोई एक घड़ी भर भी आगे पीछे नहीं हो सकता","आज ये लोग वो चीज़े अल्लाह के लिए तजवीज़ कर रहे हैं जो खुद अपने लिए इन्हें नापसंद हैं, और झूठ कहती हैं इनकी ज़ुबानें के इनके लिए भला ही भला है। इनके लिए तो एक ही चीज़ है, और वो है दोज़ख की आग, ज़रूर ये सब से पहले हमें में पकड़ लेंगे","ख़ुदा की कसम, (ऐ मुहम्मद) तुमसे पहले भी बहुत सी क़ौमों में हम रसूल भेज चुके हैं (और पहले भी यहीं होता जा रहा है के) शैतान ने उनको खुशनुमा बना कर दिखाया (और रसूलों की बात उनको ने मान कर ना दी)। वही शैतान आज लोगों का भी सरपरस्त बना हुआ है और ये दर्दनक सजा के मुस्तहिक बन रहे हैं","हमने ये किताब तुम्हारे लिए नाज़िल की है के तुम उन इख्तिलाफात (मतभेद) की हकीकत इनपर खोल दो जिनमें ये पड़े हुए हैं। ये किताब रहनुमाई और रहमत बनकर उतरी है उन लोगों के लिए जो इसे मान लें","(तुम हर बरसात में देखते हो के) अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया और यकीन मुर्दा पड़ी हुई जमीन में उसकी बदौलत जान डाल दी। यकीनन इस में एक निशानी हैं सुनने वालों के लिए","और तुम्हारे लिए मवेशियों में भी एक सबक मौजूद है उनके पेट (पेट) से गोबर और खून के दरमियान हम एक चीज तुम्हें पिलाते हैं, यानी खाली दूध, जो पीने वालों के लिए निहायत खुशगवार है","(इसी तरह) खजूर के दरख्तों और अंगूर की बेलों से भी हम एक चीज तुम्हें पिलाते हैं जैसे तुम नशा-अवतार भी बना लेते हो और पाक रिज्क भी। यकीनन इस में एक निशानी है अक़ल से काम लेने वालों के लिए","और देखो, तुम्हारे रब ने शहीद (शहद) की मक्खी पर ये बात वही करदी के पहाड़ों में, और दरख्तों में, और टट्टियों पर चढ़यी हुई बैलों में (पहाड़ों, पेड़ों और लताओं में) जाली) अपने छत्ता बना (अपना छत्ता बनाएं)","और हर तरह के फूलों का रस चूस और अपने रब की हमवार की हुई राहों पर चलती रह। इस मक्खी के अंदर से रंग बी रंग का एक शरबत निकलता है जिसका शिफा है लोगों के लिए। यक़ीनन इस में भी एक निशानी है उन लोगों के लिए जो गौर ओ फ़िक्र करते हैं","और देखो, अल्लाह ने तुमको पैदा किया, फिर वो तुमको मौत देता है और तुम में से कोई बेहतरीन उमर को पाहुचा दिया जाता है ता-के सब कुछ जाने के बाद फिर कुछ ना जाने। हक़ ये है के अल्लाह ही इल्म में भी कामिल है और कुदरत में भी","और देखो, अल्लाह ने तुममें से बाज़ को बाज़ पर रिज़्क में फ़ज़िलत अता की है, फिर जिन लोगों को ये फ़ज़ीलत दी गई है वो ऐसे नहीं हैं के अपना रिज़्क अपने गुलामो की तरफ फेर दीया करते हुए ता-के डोनो इस रिज़क में बराबर के हिस्सेदार बन जाएं। तो क्या अल्लाह ही का एहसान मन्ने से इन लोगों को इंकार है","और वो अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए तुम्हारी हम जिन बीवियां बनाईं और उसी ने उन बीवियों से तुम्हारे बेटे पोते (बेटे और पोते) अता किए और अच्छी अच्छी चीजें तुम्हें खाने को दी। फिर क्या ये लोग (ये सब कुछ देखते हैं और जानते हैं भी) बातिल को मानते हैं, और अल्लाह के एहसान का इंकार करते हैं","और अल्लाह को छोड़ कर उनको पूजते हैं जिनके हाथ में ना आसमान से इन्हें कुछ भी रिज्क देना है ना ज़मीन से और ना ये काम वो कर ही सकते हैं","पास अल्लाह के लिए मिसालें ना घड़ो, अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते","अल्लाह एक मिसाल देता है एक तो है गुलाम, जो दूसरे का ममलुक (गुलाम) है और खुद कोई इख्तियार नहीं रखता। दूसरा शक्स ऐसा है जिसे हमने अपनी तरफ से अच्छा रिज्क अता किया है और वो इस में से खुले और छुपे खूब खर्च करता है। बताओ क्या ये दोनों बराबर हैं? अल्हम्दुलिल्लाह, मगर अक्सर लोग (इस सीधी बात को) नहीं जानते","अल्लाह एक और मिसाल देता है, दो आदमी हैं एक गंगा बहरा है, कोई काम नहीं कर सकता, अपने आका पर बोझ बना हुआ है, जिधर भी वो उसे भेजे कोई भला काम उसे बन ना आए, दूसरा शक्स ऐसा है के इन्साफ का हुकुम देता है और खुद राह ए रस्त पर क़याम है, बताओ क्या ये दोनों यकसन हैं","और ज़मीन ओ आसमान के पोशीदा हक़ीक़ का इल्म तो अल्लाह ही को है और क़यामंत के बरपा होने का मामला कुछ दिन न लेगा मगर बस इतनी के जिसमें आदमी की पलक झपक जाए, बलके इसमें भी कुछ काम, हकीकत ये है के अल्लाह सब कुछ कर सकता है","अल्लाह ने तुमको तुम्हारी मांओं के पैरों से निकला इस हालत में के तुम कुछ ना जानते थे, उसने तुम्हें कान दिए, आंखें दी, और सोचने वाले दिल दिया, इस लिए तुम शुक्र-गुज़ार बनो","क्या इन लोगों ने कभी परिंदों को नहीं देखा के फ़िज़ा ए आसमानी में किस तरह मुसक्कर हैं? अल्लाह के सिवा किसने इनको थाम रक्खा है? इस में बहुत निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं","अल्लाह ने तुम्हारे लिए तुम्हारे घरों को जाए सुकून बनाया, उसने जानवरों की खालों से तुम्हारे लिए ऐसा मकान बनाया जिन्होंने तुम सफर और कयाम, दोनों हालात में हल्का पेटे हो. उसने जंवारों के सौफ और ऊन और बालों से (मुलायम फर और ऊन और बाल) पहने और बारातें (उपयोग) की बहुत सी चीजे अदा करदी जो जिंदगी की मुद्दत ए मुकर्ररा तक तुम्हारे काम आती हैं","उसने अपनी पेडा की हुई बहुत सी चीजो से तुम्हारे लिए साए का इंतेज़ाम किया, पहाड़ों में तुम्हारे लिए पनाह-गाहें (शरण स्थल) बनाईं, और तुम्हें ऐसी पोशाकें (वस्त्र) बख्शी जो तुम्हें गर्मी से बचाती हैं और कुछ दूसरी पोशाकें जो आपस की जंग में तुम्हारी हिफ़ाज़त करती हैं, इस तरह वह तुम्पर अपनी नियामतों की तकमील करता है शायद के तुम फरमाबरदार बानो","अब अगर ये लोग मुह मोड़ते हैं तो (ऐ मुहम्मद), तुमपर साफ साफ पैग़ाम ए हक़ पाहुंचा देने के सिवा और कोई ज़िम्मेदारी नहीं है","ये अल्लाह के एहसान को पहचानते हैं, फिर इसका इंकार करते हैं और इसमें बेशतर ऐसे हैं जो हक़ मन के लिए तैयार नहीं हैं","(इन्हें कुछ होश भी है कि हम रोज़ क्या बनाएंगे) जबके हम हर उम्मत में से एक गवाह खड़ा करेंगे, फिर काफ़िरों को ना हुज्जतें (बहाना) पेश करने का मौका दिया जाएगा ना उनसे तौबा ओ इस्तग़फ़र ही का मुतलबा किया जाएगा","ज़ालिम लोग जब एक दफ़ा अज़ाब देख लेंगे तो इसके बाद ना उनके अज़ाब में कोई तख़्फ़िफ़ (हल्का /हल्का) की जाएगी और ना उन्हें एक लम्हा भर की मोहलत दी जाएगी","और जब वो लोग जिन्हों ने दुनिया में शिर्क किया था तो अपने रुके हुए शरीकों को देखेंगे तो कहेंगे \" ऐ परवरदिगार, यहीं हैं हमारे वो शरीक जिन्हे हम तुझे छोड़ कर पुकारा करते थे\" इसपर उनके वो मबूद उन्हें साफ जवाब देंगे के \"तुम झूठे हो\"","हम वक्त ये सब अल्लाह के आगे झुक जाएंगे और उनकी वो सारी इफ्तारा-पर्दाज़ियां (जालसाजी) रफू-चक्कर (गायब) हो जाएंगी जो ये दुनिया में करते रहेंगे","जिन लोगों ने खुद कुफ्र की राह इख्तियार की और दूसरों को अल्लाह की राह से रोका उन्हें हम अज़ाब पर अज़ाब देंगे हमें फसाद के बदले जो वो दुनिया में बरपा करते रहे","(ऐ मुहम्मद, इन्हें हमारे दिन से खबरदार करदो) जबके हम हर उम्मत में खुद उसी के अंदर से एक गवाह उठा खड़ा करेंगे जो उसका मुकाबला में शहादत (गवाह/गवाही) देगा। और लोगों के मुक़ाबले में शहादत देने के लिए हम तुम्हें लाएंगे और (ये उसी शहादत की तयारी है के) हमने ये किताब तुम्हारी नाज़िल कर दी है जो हर चीज़ की सफ़ वज़ाहत करने वाली है और हिदायत ओ रहमत और बशारत है उन लोगों के लिए जिन्हों ने सर-ए-तस्लीम ख़त्म कर दिया है","अल्लाह अदल (न्याय) और एहसान (उदारता) और सिला रहमी का हुकुम देता है और बदी (दुष्टता) ओ बेहयाई और ज़ुल्म ओ ज़्यादती से मना करता है। वो तुम्हें हिदायत करता है ता-के तुम सबक लो","अल्लाह के अहद (वाचा) को पूरा करो जब तुमने उसे कोई अहद बंदा हो, और अपनी कसमें पुख्ता करने के बाद तोड़ न डालो जबके तुम अल्लाह को अपना ऊपर गवाह बना चुके हो। अल्लाह तुम्हारे सब अफाल से खबर है","तुम्हारी हालत उस औरत की सी न हो जाए जिसने आप ही मेहनत से सूत काता (काता हुआ सूत) और फिर आपने ही उसे इस्तेमाल किया टुकड़े-टुकड़े कर डाला। तुम अपनी कसमों को आपस के मामले में मकार ओ फरेब का हथियार बनाते हो ता-के एक क़ौम दूसरी क़ौम से बढ़कर फ़ायदे हासिल करे हलांके अल्लाह अहद ओ पैमान के ज़रिये से तुमको आजमाइश में डाला जाता है। और जरूर वो कयामत के रोज तुम्हारे तमाम इख्तिलाफात की हकीकत तुमपर खोल देगा","अगर अल्लाह की मशियत ये होती (के तुम में कोई इख्तिलाफ ना हो) तो वो तुम सबको एक ही उम्मत बना देता, मगर वो जिसे चाहता है गुमराही में डालता है और जिसे चाहता है राह ए रास्ता दिखाता है। और ज़रूर तुमसे तुम्हारे अमाल की बाज़-पुर्ज़े होकर रहेगी","(और ऐ मुसलमानो) तुम अपनी कसमों को आपस में एक दूसरे को धोखा देने का ज़रिया ना बना लेना, कहीं ऐसा ना हो के कोई कदम जमाने के बाद उखड़ जाए और तुम इस जुर्म की पैदाइश में के तुमने लोगों को अल्लाह की राह से रोका, बुरा नतीजा देखो और सच सज़ा भुगतो","अल्लाह के अहद को थोड़े से फ़ायदे के बदले ना बेच डालो, जो कुछ अल्लाह के पास है वो तुम्हारे लिए ज़्यादा बेहतर है अगर तुम जानो","जो कुछ तुम्हारे पास है वो ख़र्च हो जाने वाला है और जो कुछ अल्लाह के पास है वही बाकी रहने वाला है, और हम जरूर सब्र से काम लेने वालों को उनके अजर उनके बेहतरी अमल के मुताबिक देंगे","जो शक्स भी नया अमल करेगा, ख्वा वो मर्द हो या औरत, बशारत ये के हो वो मोमिन, उसे हम दुनिया में पाकीजा जिंदगी बसर कराएंगे और (आखिरत में) ऐसे लोगों को उनके अजर उनके बेहतरीन अमाल के मुताबिक बक्शेंगे","फिर जब तुम कुरान पढ़ने लगो तो शैतान ए राजिम (शापित) से खुदा की पनाह मांग लिया करो","उन लोगों पर तसल्लुत (शक्ति/अधिकार) हासिल नहीं होता जो ईमान लाते और अपने रब पर भरोसा करते हैं","उसका ज़ोर तो उन्ही लोगों पर चलता है जो उसको अपना सरपरस्त बनाता है और उसके बहकाने से शिर्क करता है","जब हम एक आयत की जगह दूसरी आयत नाज़िल करते हैं अल्लाह बेहतर जानता है के वो क्या नाज़िल करे तो ये लोग कहते हैं कि तुम ये कुरान खुद बिगाड़ते हो। असल बात ये है कि मेरे अंदर से अक्सर लोग हकीकत से ना-वाक़िफ़ हैं","इनसे कहो के इसे तो रूह-उल-क़ुद्दूस ने ठीक ठीक मेरे रब की तरफ से बा-तदरीज़ नाज़िल किया है ता-के ईमान लाने वालों के ईमान को पुख्ता करे और फरमा-बरदारों को जिंदगी के मामलात में सीधी राह बताई और उन्हें फलाह ओ सआदत की खुश खबरी दे","हमें मालूम है ये लोग तुम्हारे मुतालिक कहते हैं के इस शक्स को एक आदमी सिखाता है। हलानके उनका इशारा जिस आदमी की तरफ है उसकी जुबान अजमी है और ये साफ अरबी जुबान है","हकीकत ये है के जो लोग अल्लाह की आयत को नहीं मानते अल्लाह कभी उनको सही बात तक पहुंचने की तौफीक नहीं देता और ऐसे लोगों के लिए दर्दनाक अजाब है","(झूठी बातें नबी नहीं घड़ता बलके) झूठ वो लोग घड़ रहे हैं जो अल्लाह की आयत को नहीं मानते, वही हकीकत में झूठे हैं","जो शक्स ईमान लाने के बाद कुफ्र करे (वो अगर) मजबूर किया गया हो और दिल उसका ईमान पर मुतमइन (आश्वस्त) हो (तब तो खैर) मगर जिसने दिल की रज़ा-मंदी से कुफ्र को क़बूल करलिया उसपर अल्लाह का ग़ज़ब है और ऐसे सब लोगों के लिए बड़ा अज़ाब है","ये इस तरह के उन्होन ने आखिरी के मुकाबले में दुनिया की जिंदगी को पसंद किया कार्लिया, और अल्लाह का कायदा है कि वो उन लोगों को राह ए निजात नहीं दिखाता जो उसकी नियामत का कुफ़्रान करें","ये वो लोग हैं जिनके दिलों और कानों और आँखों पर अल्लाह ने मोहर (मुहर) लगा दी है ये गफ़लत में डूब चुके हैं","ज़रूर है के आख़िरत में यही खसरे में रहें","बा-ख़िलाफ़ इसके जिन लोगों का हाल ये है के जब (ईमान लाने की वजह से) वो सताए गए तो उनको ने घर-बार छोड़ दिए, हिजरत की, राह ए खुदा में ताकतियां झेली और सब्र से काम लिया, उनके लिए यकीनन तेरा रब गफूर ओ रहीम है","(सब का फैसला उस दिन होगा) जबके हर मुतनफ़िस अपने ही बचाव की फ़िक्र में लगा हुआ होगा और हर एक को उसके लिए बदला पूरा दिया जाएगा और किसी पर ज़रा बराबर ज़ुल्म न होने पाएगा","अल्लाह एक बस्ती की मिसाल देता है, वो अमन ओ इत्मिनान की जिंदगी बसर कर रही थी और हर तरफ से उसको ब-फरागत रिज़क पाहुंच रहा था के उसने अल्लाह की नियामतों का कुफ़्रान शुरू कर दिया, तब अल्लाह ने उसके बाशिंदों को उनके कार्टूनों का ये मजा चखाया के भूख और खौफ की मुसिबतें उनपर छा गई","उनके पास उनकी अपनी क़ौम में से एक रसूल आया मगर उन्होन ने उसको झुठला दिया, आख़िर ए कार अज़ाब ने उनको आ लिया जबके वो जालिम हो चुके थे","पस ऐ लोगों, अल्लाह ने जो कुछ हलाल और पाक रिज़क तुमको बख्शा है उसे खाओ और अल्लाह के एहसान का शुक्र अदा करो अगर तुम ठीक उसी की बंदगी करने वाले हो","अल्लाह ने जो कुछ तुमपर हराम किया है वो है मुर्दार और खून और सुवर (सूअर) का गोश्त और वो जानवर जिसपर अल्लाह के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो। अलबत्ता भूख से मजबूर होकर अगर कोई इन चीजों को खा ले, बिना इसके वो कानून ए इलाही की खिलाफ वारजी का ख्वाहिश-मंद हो, या हद ए जरूरी से तजावुज का मुर्तकिब हो, तो यकीनन अल्लाह माफ करने और रहम फरमाने वाला है","और ये जो तुम्हारी ज़ुबानें झूठे एहकाम लगाती हैं के ये चीज़ हलाल है और वो हराम है, तो इस तरह के हुकुम लगा कर अल्लाह पर झूठ ना बंद करो, जो लोग अल्लाह पर झूठे इफ्तारा बांधते हैं (झूठ लिखते हैं) हैं वो हरगिज फलाह नहीं पीते हैं","दुनिया का ऐश चांद रोजा है आखिर ई कार उनके लिए दर्दनाक सज़ा है","वो चीज़ हमने खास तौर पर यहुदियों (यहूदियों) के लिए हराम की थी जिनका ज़िक्र हम इस पहले तुमसे कर चुके हैं और ये अनपर हमारा ज़ुल्म ना था बल्के उनका अपना ही ज़ुल्म था जो वो अपने ऊपर कर रहे थे","अलबत्ता जिन लोगों ने जहालत की बिना पर बुरा अमल किया और फिर तौबा करके अपने अमल की इस्लाह कार्ली तो यकीनन तौबा ओ इस्लाह के बाद तेरा रब उनके लिए गफूर और रहीम है","वाकिया ये है के इब्राहीम अपनी ज़ात से एक पूरी उम्मत थी, अल्लाह का मुती ए फरमान और यक्सू। वो कभी मुशरिक न था","अल्लाह की नियामतों का शुक्र अदा करने वाला था। अल्लाह ने उसको मुंतखब (चुना) करलिया और सीधा रास्ता दिखाया","दुनिया में उसको बुलाया दी और आख़िरत में वो यकीनन सालिहें में से होगा","फिर हमने तुम्हारी तरफ ये वही भेजी के यक्सू होकर इब्राहिम के तारीख़े पर चलो और वो मुशरिकों में से ना था","रहा सब्त (सब्बाथ/हफ्ते का दिन) तो वो हमने उन लोगों पर मुसल्लत किया था जिन्हों ने उसके एहकाम में इख्तिलाफ किया, और यकीनन तेरा रब कयामत के रोज उन सब बातों का फैसला कर देगा जिन में वो इख्तिलाफ करते रहेंगे","(ऐ नबी), अपने रब के रास्ते की तरफ दावत दो हिकमत और उम्मीद हिदायत के साथ, और लोगों से मुबाहिसा (चर्चा) करो ऐसे तरीक़े पर जो बेहतरीन हो। तुम्हारा रब ही ज्यादा बेहतर जानता है कि कौन उसकी राह से भटका हुआ है और कौन राह-ए-रास्त पर है","और अगर तुम लोग बदला लो तो बस उसी कदर ले लो जिस कदर तुमपर ज्यादा की गई हो, लेकिन अगर तुम सब्र करो तो यकीनन ये सब्र करो वालों ही के हक में बेहतर है","(ऐ मुहम्मद) सब्र से काम किए जाओ और तुम्हारा ये सब्र अल्लाह ही की तौफीक से है, इन लोगों की हरकत पर रांझ ना करो और ना इनकी चालबाज़ियों पर दिल तंग (संकट) हो","अल्लाह उन लोगों के साथ है जो तकवा से काम लेते हैं और एहसान पर अमल करते हैं","पाक है वो जो ले गया एक रात अपने बंदे को मस्जिद ए हराम से दूर कि उस मस्जिद तक जिसने महल को उसने बरकत दी है, ता-के उसे अपनी कुछ निशानियों का मुशाहिदा(दिखाएँ)कराए। हकीकत में वही है सब कुछ सुनने और देखने वाला","हमने इसे पहले मूसा को किताब दी थी और उसे बानी इजराइल के लिए ज़रिया ए हिदायत बनाया था, इस टेक के साथ के मेरे सिवा किसी को अपना वकील (अभिभावक) न बनाना","तुम उन लोगों की औलाद हो जिनहें हमने नूह के साथ कश्ती पर सवार किया था, और नूह एक शुक्रगुज़ार बंदा था","फिर हमने अपनी किताब में बानी इसराइल को इस बात पर भी मुतनब्बेह (चेतावनी) करदिया था के तुम दो मरतबा ज़मीन में फ़साद ए अज़ीम बरपा करोगी और बड़ी सरकशी दिखाओगे","आख़िर ए कार जब उन में से पहली सरकशी का मौका पेश आया, तो ऐ बानी इज़राइल, हमने तुम्हारे मुक़ाबले पर अपने ऐसे बंदे उठाए जो निहायत ज़ोरावर थे और वो तुम्हारे मुल्क में घुस कर हर तरफ फ़ैल गए। ये एक वादा था जिसका पूरा होकर ही रहना था","इसके बाद हमने तुम्हें एक दूसरे गलेबे का मौका दे दिया और तुम्हें माल और औलाद से मदद दी और तुम्हारी तदाद पहले से बढ़ा दी","देखो! तुमने भलाई की तो वो तुम्हारी अपनी ही ली थी, और बुराई की तो वो तुम्हारी अपनी ज़ात के लिए बुरी साबित हुई। फिर जब दूसरे वादे का वक्त आया तो हमने दूसरे दुश्मनों को तुमपर मुसल्लत किया ता-के वो तुम्हारे चेहरे बिगाड़ दें और मस्जिद (बैत उल मकदिस) में उसकी तरह घुस जाएं, जिस तरह पहले दुश्मन घुसे थे और जिस चीज पर उनका हाथ पड़े उसे तबाह करके रख दें","हो सकता है कि अब तुम्हारा रब तुमपर रहम करे, लेकिन अगर तुमने फिर अपनी साबिक राविश (पूर्व व्यवहार) का इरादा किया तो हम भी फिर अपनी सजा का इरादा करेंगे, और काफिर ए नियामत लोगों के लिए हमने जहन्नुम को क़ैद खाना बना रखा है","हकीकत ये है कि ये कुरान वो राह दिखाता है जो बिल्कुल सीधी है। जो लोग इसे मान कर भले काम करने लगें उन्हें ये बशारत देता है के उनके लिए बड़ा अजर है","और जो लोग आख़िरत को ना माने उन्हें ये खबर देता है के उनके लिए हमने दर्दनक अज़ाब मुहैय्या कर रखा है","इंसान शरर (बुराई) हमें तरह माँगता है जिस तरह खैर माँगनी चाहिए। इंसान बड़ा ही जल्दी बाज़ वाकये हुआ है","देखो, हमने रात और दिन को दो निशानियां बनाई हैं। रात की निशानी को हमने बे-नूर बनाया, और दिन की निशानी को रोशन कर दिया, ता-के तुम अपने रब का फज़ल तलाश कर सको और माह-ओ-साल का हिसाब मालूम कर सको। इसी तरह हमने हर चीज को अलग-अलग मुमैय्याज (स्पष्ट रूप से अलग) करके रखा है","हर इंसान का शगुन (भाग्य/शगुन) हमने उसे अपनी गली में लटका रखा है, और कयामत के रोज हम एक नुइशता (पुस्तक/रिकॉर्ड/स्क्रॉल) उसके लिए निकालेंगे जिसे वो खुली किताब की तरह पायेगा","पढ़ अपना नाम-ए-आमाल, आज अपना हिसाब लगाने के लिए तू खुद ही काफी है","जो कोई राह-ए-रास्त इख्तियार करे उसकी रस्त-रवी उसके अपने ही लिए मुफीद है, और जो गुमराह हो उसकी गुमराही का जवाब usi par hai. कोई बोझ उठाने वाला दूसरे का बोझ ना उठाएगा और हम अजब देने वाले नहीं हैं जबतक के (लोगों को हक-ओ-बातिल का फर्क समझने के लिए) एक पैगम्बर ना भेज दें","जब हम किसी बस्ती को हलाक करने का इरादा करते हैं तो उसके खुश हाल लोग को हुकुम देते हैं और वो हमें नफरमानियां करने लगते हैं, तब अज़ाब का फैसला हमें बस्ती पर चस्पां हो जाता है और हम उसे बर्बाद करके रख देते हैं","देखलो, कितनी ही नसलें (पीढ़ियां) हैं जो नूंह के बाद हमारे हुकुम से हलाक हुई, तेरा रब अपने बंदों के गुनाहों से पूरी तरह से बाख़बर है और सब कुछ देख रहा है","जो कोई जल्दी का ख्वाहिश-मंद हो, उसे यहीं हम दे देते हैं जो कुछ भी देना चाहते हैं, फिर उसके मकसूम में जहन्नुम लिख देते हैं जिसे वो तपेगा, मलामत ज़दा और रहमत से महरून होकर","और जो आखिरी का ख्वाहिश-मंद हो और उसके लिए सई (प्रयास) करे जैसी के उसके लिए सई (प्रयास) करनी चाहिए, और हो वो मोमिन, तो ऐसे हर शक्स की सई मशकूर होगी","इनको भी और उनको भी, दोनों फरिकों को हम (दुनिया में) सामान-ए-ज़िस्ट दिए जा रहे हैं, ये तेरे रुब का अतिया है, और तेरे रुब की अता को रोकने वाला कोई नहीं है","मगर देखलो, दुनिया ही में हमने एक गिरोह को दूसरे पर कैसी फजीलत दे रखी है, और आखिरी में उसके दर्जे और भी ज्यादा होंगे, और उसकी फजीलत और भी ज्यादा बढ़ चढ़ कर होगी","तू अल्लाह के साथ कोई दूसरा मबूद न बना, वरना मलामत ज्यादा और बे यार ओ मददगार बैठा रह जाएगा","तेरे रब ने फैसला कर दिया है के: तुम लोग किसी की इबादत न करो, मगर सिर्फ उसकी, वालिदेन (मां-बाप) के साथ नई सुलूक करो। अगर तुम्हारे पास उनके साथ कोई एक, या दोनों, बूढ़े (पुराने) होकर रहें तो उन्हें 'उफ्फ' तक ना कहो, ना उन्हें जिदक कर जवाब दो, बलके उनसे एहतराम के साथ बात करो","और नरमी ओ रहम के साथ उनके सामने झुक कर रहो, और दुआ किया करो के \"परवरदिगार, इनपर रहम फरमा जिस तरह इन्हों ने रहमत ओ शफाकत के साथ मुझे बचपन में पाला था\"","तुम्हारा रब खूब जानता है के तुम्हारे दिलों में क्या है, अगर तुम साले बनकर रहो तो वो ऐसे सब लोग के लिए दरगुज़ार करने वाला है जो अपने कसूर पर मुतनब्बेह हो कर बंदगी के रवैये की तरफ पलट आएं","रिश्तेदार को उसका हक दो और मिस्कीन और मुसाफिर को उसका हक। फ़िज़ूल खर्ची न करो","फ़िज़ूल खर्च लोग शैतान के भाई हैं, और शैतान अपने रब का ना-शुक्र है","अगर उनसे (यानी हाजत-मंद रिश्तेदारों, मिस्किनो और मुसाफिरों से) तुम्हें कतराना हो (उनसे दूर हो जाओ), क्या बिना पार के अभी तुम अल्लाह की हमें रहमत को जिसकी तुम उम्मीद कर रहे हो, तो उन्हें नर्म जवाब दे दो","ना तो अपना हाथ बगीचे से बंद रखो और ना उसे बिल्कुल ही खुला छोड़ दो के मलामत जादा और अजीज बन कर रह जाओ","तेरा रब जिसके लिए चाहता है रिज्क कुशादा करता है और जिसके लिए चाहता है तंग करता है, वो अपने बंदों के हाल से ख़बर है और उन्हें देख रहा है","अपनी औलाद को इफ़्लास (तंगदस्ती) के अंदेशे से क़त्ल ना करो, हम उन्हें भी रिज़क़ देंगे और तुम्हें भी। दर हक़ीक़त उनका क़तल एक बड़ी ख़ता है","ज़िना के क़रीब ना फटको, वो बहुत बुरा फेल (काम) है और बड़ा ही बुरा रास्ता","क़त्ल-ए-नफ़्स का इर्तिक़ाब न करो जैसे अल्लाह ने हराम किया है मगर हक़ के साथ, और जो शक्स मज़लूमाना क़तल किया गया हो उसके वाली को हमने क़िस्स (प्रतिशोध) के मुतालिबे का हक़ अता किया है। पास चाहिए के वो क़तल में हद से ना गुज़रे, उसकी मदद की जाएगी","माल-ए-यतीम के पास न फटको मगर अहसान तारीख़े से, यहां तक ​​के वो अपने शबाब (जवानी) को पाहुंच जाए। अहद की पकड़ करो, अहद के बारे में तुमको जवाब-देह करनी होगी","पैमाने (माप/तराजू) से दो तो पूरा भर कर दो, और तोलो तो ठीक तराजू से तोलो। ये अच्छा तरीक़ा है और बा-लिहाज़ अंजाम भी यही बेहतर है","किसी ऐसी चीज़ के पीछे ना लगो जिसका तुम्हें इल्म ना हो, यकीनन आंख, कान और दिल सब ही कि बाज़-पुर्स होनी है","ज़मीन में अकड़ कर ना चलो, तुम ना ज़मीन को फाड़ सकते हो ना पहाड़ों की बुलंदी को पाहुंच सकते हो","उमूर में से हर एक का बुरा पहलू तेरे रब के नज़दीक ना-पसंददा है","ये वो हिकमत की बातें हैं जो तेरे रब ने तुझपर वही की है और देख! अल्लाह के साथ कोई दूसरा मबूद न बना बैठा वरना तू जहन्नुम में डाल दिया जाएगा मालामत जादा और हर भलाई से महरूम होकर","कैसी अजीब बात है के तुम्हारे रब ने तुम्हें तो बेटों (बेटों) से नवाजा और खुद अपने लिए मलिका (फरिश्तों) को बेटियां बना लिया? बड़ी झूठी बात है जो तुमलोग ज़ुबानो से निकलते हो","हमने कुरान में तरह तरह से लोगों को समझा के होश में आए, मगर वो हक़ से और ज़्यादा दूर ही भागे जा रहे हैं","(ऐ मुहम्मद), इनसे कहो के अगर अल्लाह के साथ दूसरे खुदा भी होते, जैसा के ये लोग कहते हैं, तो वो मालिक ए अर्श के मुकाम पर पहुंचने की जरूर कोशिश करते हैं","पाक है वो और बहुत बाला-ओ-बरतर है उन बातों से जो ये लोग कह रहे हैं","उसकी पाकी तो सातो (सात) आसमान और ज़मीन और वो सारी चीज़ें बयां कर रही हैं जो आसमान ओ ज़मीन में हैं। कोई चीज़ ऐसी नहीं है जो उसकी हम्द के साथ उसकी तस्बीह ना कर रही हो, मगर तुम उनकी तस्बीह समझते नहीं हो। हकीकत ये है के वो बड़ा ही बोझाबर (बहुत सहनशील) और दरगुज़ार करने वाला है","जब तुम कुरान पढ़ते हो तो हम तुम्हारे और आख़िरत पर ईमान न लाने वालों के दरमियान एक परदा रखते हैं","और उनके दिलों पर ऐसा गिलाफ़ (अदृश्य पर्दा) चढ़ा देते हैं के वो कुछ नहीं समझते, और उनके कानों में गिरानी अदा करते हैं और जब तुम कुरान में अपने एक ही रब का जिक्र करते हो तो वो नफ़रत से मुह मोड़ लेते हैं","हमें मालूम है कि जब वो कान लगा कर तुम्हारी बात सुनते हैं तो दर-असल क्या सुनते हैं, और जब बैठ कर बहस करते हैं तो क्या कहते हैं। ये जालिम आपस में कहते हैं के ये एक सहर-ज़ादा (मोहित) आदमी है जिसके पीछे तुमलोग जा रहे हो","देखो, कैसी बातें हैं जो ये लोग तुमपर चानते हैं, ये भटक गए हैं, इन्हें रास्ता नहीं मिलता","वो कहते हैं “जब हम सिर्फ हड्डियां और खाक होकर रह जाएंगे तो क्या हम नए सिरे से भुगतान करके उठेंगे?”","इनसे कहो “तुम पत्थर या लोहा भी हो जाओ","या उसे भी ज़्यादा सख्त कोई चीज़ जो तुम्हारे ज़हन में क़बूल-ए-हयात से बाहर हो” (फिर भी तुम उठ कर रहोगे)। वो जरूर पूछेंगे “कौन है वो जो हमें फिर जिंदगी की तरफ पलटा कर लाएगा?” जवाब में कहो \"वही जिसने पहली बार तुमको पेदा किया\"। तुम कहो \" क्या अजब, वो वक्त करीब ही आ लगा हो","जिस रोज वो तुम्हे पुकारेगा तो तुम उसकी हम्द करते हुए उसकी पुकार के जवाब में निकल आओगे और तुम्हारा गुमान हमारा वक्त ये होगा के हम बस थोड़ी देर ही इस हालत में पड़े रहेंगे हैं”","और (ऐ मुहम्मद), मेरे बंदों से कहदो के ज़ुबान से वो बात निकला करें जो बहती हो। दर-असल ये शैतान है जो इंसानों के दरमियान फ़साद डालने की कोशिश करता है। हकीकत ये है के शैतान इंसान का खुला दुश्मन है","तुम्हारा रब तुम्हारे हाल से ज्यादा वाकिफ है। वो चाहे तो तुमपर रहम करे और चाहे तो तुम्हें अज़ाब दे दे। और (ऐ नबी) हमने तुमको लोगों पर हवालादार (अभिभावक) बनाकर नहीं भेजा है","तेरा रब ज़मीन और आसमान की मखलूक़त को ज़्यादा जानता है। हमने पैगम्बरों को बाज़ से बर्बाद कर दिया, और हमने ही दाऊद को ज़बूर दी थी","इनसे कहो पुकार देखो उन माबूदों को जिनको तुम खुदा के सिवा (अपना कारसाज़) समझते हो, वो किसी तकलीफ को तुमसे ना हटा सकते हैं ना बदल सकते हैं हैं","जिनको ये लोग पुकारते हैं वो तो खुद अपने रब के हुजूर रसाई हासिल करने का वसीला तलाश कर रहे हैं (दृष्टिकोण के साधन तलाशते हैं) के कौन उसे करीब तार हो जाए और वो उसकी रहमत के उम्मीद और उसके अज़ाब से खैफ (डरते) हैं। हकीकत ये है कि तेरे रब का अज़ाब है हाय डरने के लाहिक","और कोई बस्ती ऐसी नहीं जिसे हम कयामत से पहले हलाक न करें या सच अज़ाब न दें। ये नविश्ता-ए-इलाही (अनन्त रिकॉर्ड) में लिखा हुआ है","और हमको निश्निया भेजने से नहीं रोका मगर इस बात ने के इनसे पहले के लोग उनको झुठला चुके हैं। (चुनांचे देखलो) समूद को हमने एलानिया ऊंटनी (वह-ऊंटनी) ला कर दी और उन्होन ने उसपर जुल्म किया। हम निशानियां इसी के लिए तो भेजते हैं के लोग उन्हें देख कर डरें","याद करो (ऐ मुहम्मद), हमने तुमसे कह दिया था के तेरे रब ने इन लोगों को घेर रखा है और ये जो कुछ अभी हमने तुम्हें दिखाया है, इसको और हम दरख्त को जिसपर कुरान में लानत की गई है, हमने लोगों के लिए बस एक फ़ितना बनाकर रख दिया। हम उनमें तम्बीह (चेतावनी) बराबर तम्बीह (चेतावनी) किए जा रहे हैं, मगर हर तम्बीह इनकी सरकशी ही में इज़ाफ़ा किए जाती है","और याद करो जबके हमने मलाइका (फरिश्तों) से कहा आदम को सजदा करो, तो सब ने सजदा किया, मगर इबलीस ने ना किया, उसने कहा “क्या मैं उसको सजदा करूं जैसे तू ने मिट्टी से बनाया है?”","फिर वो बोला \"देख तो सही, क्या ये काबिल था कि तू ने इसे मुझपर फजीलत दी? अगर तू मुझे कयामत के दिन तक मोहलत दे तो मैं इसकी पूरी नाक की बेहकानी (उखाड़) कर डालूं। बस थोड़े ही लोग मुझे बचा सकेंगे।\"","अल्लाह ताला ने फरमाया, \"अच्छा तो जा, इनमें से जो भी तेरी जोड़ी करें, तुझ समेत उन सब के लिए जहन्नुम ही भरपुर जजा है","तू जिस को अपनी दावत से फिसल सकता है फिसल ले। उन पर अपने सवार (घुड़सवार) और प्यादे (पैदल) चढ़ा ला, माल और औलाद में उनके साथ साझी (साथी) लगा, और उनको वादों के जाल में फंस, और शैतान के वादे एक धोखे के सिवा और कुछ भी नहीं","यकीनन मेरे बंदों पर तुझ पर कोई इक्तेदार हासिल न होगा, और तवक्कुल (भरोसे) के लिए तेरा रुब काफी है”","तुम्हारा (हकीकी) रुब तो वो है जो समंदर में तुम्हारी कश्ती चलाता है ता-के तुम उसका फ़ज़ल तलाश करो। हकीकत ये है के वो तुम्हारे हाल पर निहायत मेहरबान है","जब समंदर में तुम्हारी मुसीबत आती है तो हमें एक के सिवा दूसरे जिन को तुम पुकारते हो वो सब गम हो जाते हैं, मगर जब तुमको बच्चा कर ख़ुशी (जमीन) पर पहूंचा देता है तो तुम उसके मुंह मोड़ जाते हो। इंसान वक्त बड़ा नाशुक्रा है","अच्छा, तो क्या तुम इस बात से बिल्कुल बे-खौफ हो के खुदा कभी खुश्की (जमीन) पर ही तुमको जमीन में धांसा दे, या तुम पथराओ करने वाली आंधी भेज दे और तुम उसे बचाने वाला कोई हिमायती ना पाओ","और क्या तुम्हें इसका कोई अंदेशा नहीं के खुदा फिर कोई वक्त समंदर में तुमको ले जाए और तुम्हारी नाखुशी के बदले तुम्हारे साथ तूफानी हवा भेज कर तुम्हें गुस्सा करदे और तुमको ऐसा कोई ना मिले जो उसे तुम्हारे इस अंजाम की पुछ-गज्ज कर सके","ये तो हमारी इनायत है के हमने बानी आदम को बुज़ुर्गी (सम्मान) दी और उन्हें ख़ुशकी (ज़मीन) ओ तारी (समुद्र) में सवारियां अता की और उनको पाकीज़ा चीज़ों से रिज़क दिया और अपनी बहुत से मखलूक़त पर नुमायां फौक़ियात (उत्कृष्ट) बख्शी","फ़िर खयाल करो उस दिन का जबके हम हर इंसान गिरो ​​को उसके पेशवा (नेता) के साथ बुलाएंगे, हमें वक्त जिन लोगों ने उनका नाम-ए-आमाल सीधे हाथ में दिया वो अपना कारनामा पढ़ेंगे और उन्पर जरा बराबर जुल्म न होगा","और जो इस दुनिया में अंधा बनकर रहा वो आख़िरत में भी अँधा ही रहेगा बलके रास्ते पाने में अँधे से भी ज़्यादा नाकाम","(ऐ मुहम्मद), लोगों ने इस कोशिश में कोई कसार उठाया नहीं राखी के तुम्हें फिटने में डाल कर हमें वही से फेर दें जो हमने तुम्हारी तरफ भेजी है, ता-के तुम हमारे नाम पर अपनी तरफ से कोई बात गढ़ो। अगर तुम ऐसा करते तो वो जरूर तुम्हें अपना दोस्त बना लेते","और बुरा ना था के अगर हम तुम्हें मजबूत ना रखते तो तुम उनकी तरफ कुछ ना कुछ झुक जाते","लेकिन अगर तुम ऐसा करते तो हम तुम्हें दुनिया में भी दोहरे (डबल) अजब का मजा चखाते और आख़िरत में भी दोहरे अज़ाब का, फिर हमारे मुकाबले में तुम कोई मददगार न पाते","और ये लोग इस बात पर भी तुले रहे हैं के तुम्हारे कदम इस सर-जमीन से उखाड़ दें (उखाड़ें) दीन और तुम्हें यहां से निकल बाहर करें, लेकिन अगर ये ऐसा करेंगे तो तुम्हारे बाद ये खुद यहां कुछ ज्यादा देर न ठहर सकेंगे","ये हमारा मुस्तकिल तारीख-कर है जो उन सब रसूलों के मामले में हमने बारता है जिन्होंने तुमसे पहले हमें भेजा था, और हमारे तारीखे-कार में तुम कोई तगय्यूर (बदलाव) ना पाओगे","नमाज़ क़याम करो ज़वाल-ए-आफ़ताब (सूरज का ढलना) से लेकर रात के अँधेरे तक, और फज्र के कुरान का भी इंतेज़ाम करो, क्योंकि कुरान ए फज्र मशूद (गवाह) होता है","और रात को तहज्जुद पढ़ो, ये तुम्हारे लिए नफ्ल है, बैद (दूर/दूर) नहीं के तुम्हारा रब तुम्हें मक़ाम ए महमूद पर फैज़ करदे","और दुआ करो के परवरदिगार, मुझको जहां भी तू लेजा सच्चाई के साथ लेजा और जहां से भी निकल सच्चाई के साथ निकल और अपनी तरफ से एक इक्तेदार (शक्ति) को मेरा मददगार बना दे","और एलान करदो के \"हक़ आ गया और बात मिट गया, बात तो मिटने ही वाला है\"","हम कुरान के सिलसिला-ए-तंज़िल (रहस्योद्घाटन) में वो कुछ नाज़िल कर रहे हैं जो माने वालों के लिए तो शिफ़ा और रहमत है, मगर ज़ालिमों के लिए ख़सारे (नुक्सान/नुकसान) के सिवा और किसी चीज़ में इज़ाफ़ा नहीं करता","इंसान का हाल ये है के जब हम उसको नियामत अता करते हैं तो वो अहंकार (अहंकारी) और पीठ मोड़ लेता है, और जब जरा मुसीबत से दो-चार होता है तो मयुस होना लगता है","(ऐ नबी), लोगों से कहदो के \"हर एक अपने तरीके पर अमल कर रहा है, अब ये तुम्हारा रब\" हाय बेहतर जानता है के सीधी राह पर कौन है”","ये लोग तुमसे रूह (आत्मा) के मुतालिक पूछते हैं। कहो \"ये रूह मेरे रुब के हुकुम से आती है, मगर तुम लोगों ने इल्म से कम ही बेहरा पाया है\" (लेकिन आपको केवल थोड़ा सा ज्ञान दिया गया है)","और (ऐ मुहम्मद), हम चाहें तो वो सब कुछ तुमसे छीन लें जो हमने वहीं के ज़रिये से तुमको अता किया है, फिर तुम हमारे मुक़बले में कोई हिमायती (सहायक) न पाओगे जो इसे वापस दिला सके","ये तो जो कुछ तुम्हें मिला है तुम्हारे रब की रहमत से मिला है, हकीकत ये है के उसका फज़ल तुमपर बहुत बुरा है","कहदो के अगर इंसान और जिन्न सब के सब मिलकर क्या कुरान जैसी कोई चीज लाने की कोशिश करें तो ना ला सकेंगे, चाहे वो सब एक दूसरे के मददगार ही क्यों ना हों","हमने कुरान में लोगों को तरह-तरह से समझा मगर अक्सर लोग इंकार ही पर जमे रहेंगे","और उन्होंने कहा \" हम तेरी बात ना मानेंगे जब तक तू हमारे लिए ज़मीन को फाड़ कर एक चश्मा (वसंत) जारी ना करदे","हां तेरे लिए खजूरों और अंगूरों का एक बाग पैदा हो और तू हमसें नहरें रावन करदे","हां तू आसमान को टुकड़े-टुकड़े करके हमारे ऊपर गिरा दे जैसा के तेरा दावा है या खुदा और फरिश्तों को रु दार रु (आमने सामने) हमारे सामने ले आए","हां तेरे लिए सोने का एक घर बन जाए या तू आसमान पर चढ़ जाए, और तेरे पैरों का भी हम यकीन ना करेंगे जब तक कि तू हमारे ऊपर एक ऐसी तहरीर (लिखित) न उतार लाए जिसे हम पढ़ें\"। (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो \"पाक है मेरा\" परवरदिगार! क्या मैं एक पैग़ाम लाने वाले इंसान के सिवा और भी कुछ हूँ?”","लोगों के सामने जब कभी हिदायत आई तो उसपर ईमान लाने से उनको किसी चीज़ ने नहीं रोका मगर उनको इसी क़ौल ने के \"क्या अल्लाह ने बशर (इंसान) को पैगम्बर बना कर भेज दिया?\"","इनसे कहो अगर ज़मीन में फ़रिश्ते इतमीनान से चल फिर रहे होते तो हम ज़रूर आसमान से किसी फ़रिश्ते ही को उनके लिए पैगम्बर बना कर भेजते","(ऐ मुहम्मद), इनसे कहदो के मेरे और तुम्हारे दरमियान बस एक अल्लाह की गवाही काफ़ी है, वो अपने बंदों के हाल से खबर है और सब कुछ देख रहा है","जिसको अल्लाह हिदायत दे वही हिदायत पाने वाला है, और जिसे वो गुमराही में डाल दे तो उसके सिवा ऐसे लोगों के लिए तू कोई हमी ओ नासिर (रक्षक और मददगार) नहीं पा सकता। उन लोगों को हम क़यामत के रोज़ औंधे मुंह खींच लाएंगे, अंधे, गूँगे और बाहर। उनका ठिकाना जहन्नुम है. जब कभी उसकी आग धीमी होने लगेगी हम उसे और भड़का देंगे","ये बदला है उनको इस हरकत का के अनहोन ने हमारी आयत का इंकार किया और कहा \"क्या जब हम सिर्फ हदियां और खाक (धूल) हो कर रह जाएंगे तो नए सिरे से हमको पैदा करके उठा खड़ा किया\" जाएगा?”","क्या इनको ये ना सूझा के जिस खुदा ने ज़मीन और आसमान को पेदा किया है वो इस जैसन को पेदा करने की जरूर क़ुदरत रखता है? उसने इनके हश्र के लिए एक वक्त मुकर्रर कर रखा है जिसका आना यकीनी है, मगर ज़ालिमों को इसरार है के वो इसका इंकार ही करेंगे","(ऐ मुहम्मद) इनसे कहो, अगर कहीं मेरे रब की रहमत के ख़ज़ाने तुम्हारे क़ब्ज़े में होते तो तुम ख़ार हो जाने के अंदेशे से जरूर उनको रोक रखो। वक़ई इंसान बड़ा तंग दिल (संकीर्ण मानसिकता) वक़ई हुआ है","हमने मूसा को तो निशानियां अता की थी जो सारे तौर पर दिखाई दे रही थी (जो काफी स्पष्ट थीं)। अब ये तुम खुद बनी इजराइल से पूछ लो के जब वो सामने आई तो फिरौन ने यहीं कहा था ना के \"ऐ मूसा, मैं समझता हूं के तू जरूर एक सहर-जादा (मोहित) आदमी है","मूसा ने उसके जवाब में कहा \"तू खूब जानता है के ये बसीरत अफरोज (आंखें खोलने वाला) निशानियाँ रब्बुस समावती वल अर्ध (स्वर्ग और पृथ्वी के स्वामी) के सिवा किसी ने नाज़िल नहीं की है, और मेरा ख्याल ये है के ऐ फिरौन, तू ज़रूर एक शामत-ज़ादा (बर्बाद) आदमी है”","आख़िर-ए-कार फिरौन ने इरादा किया के मूसा और बानी इसराइल को ज़मीन से उखाड़ फेंके, मगर हमने उसको और उसके साथियों को इकत्था गर्क (डूब) करदिया","और उसके बाद बानी इसराइल से कहा के अब तुम ज़मीन में बसो, फिर जब आख़िरत के वादे का वक़्त आन पूरा होगा तो हम तुम सब को एक साथ ला हाज़िर करेंगे","क्या कुरान को हमने हक़ के साथ नाज़िल किया है और हक़ ही के साथ ये नाज़िल हुआ है। और (ऐ मुहम्मद) तुम्हें हमने इसके सिवा और किसी काम के लिए नहीं भेजा के (जो मान ले उसे) बशारत दे दो और (जा ना माने उसे) मुतनब्बेह (चेतावनी) करदो","और इस कुरान को हमने थोड़ा थोड़ा करके नाज़िल किया है ता-के तुम ठहर-ठहर कर इसे लोगों को सुनाओ, और इसे हमने (मौका मौका से) बा-तद्रेज उतारा है","(ऐ मुहम्मद), इन लोगों से कहदो के तुम इसे मानो या ना मानो, जिन लोगों को इसे पहले इल्म दिया गया है उन्हें जब ये सुनाया जाता है तो वो मुंह के बाल सजदे में गिर जाते हैं","और पुकार उठते हैं \"पाक है हमारा रब, उसका वादा तो पूरा होना ही था\"","और वो मुँह के बाल रोते रोते हुए गिर जाते हैं और इसे सुनकर उनका ख़ुश (विनम्रता) और बढ़ जाता है","(ऐ नबी), इंसे कहो, अल्लाह कह कर पुकारो या रहमान कहकर, जिस नाम से भी पुकारो उसके लिए सब अच्छे ही नाम हैं और अपनी नमाज न बहुत ज्यादा बुलंद आवाज से पढ़ो और न बहुत पुरानी आवाज से, दोनों के दरमियां अव्सत दर्जे का लहजा इख्तियार करो","और कहो “तारीफ है उसने खुदा के लिए जिसने ना किसी को बेटा बनाया, ना कोई बादशाही में उसका शरीक है, और ना वो अजीज (असहाय) है कि कोई उसका पुश्तबान (समर्थक) हो” और उसकी बदाई बयां करो, कमाल दर्जे की बदाई","तारीफ अल्लाह के लिए है जिसने अपने बंदे पर ये किताब नाज़िल की और इसमें कोई टेढ़ ना रखी","ठीक ठीक सीधी बात कहने वाली किताब, ता-के वो लोगों को खुदा के सख्त अज़ाब से खबर करदे, और ईमान ला कर नीक अमल करने वालों को खुश खबरी दे दे के उनके लिए अच्छा अजर है","जिसमें वो हमेशा रहेंगे","और उन लोगों को डर दे जो कहते हैं कि अल्लाह ने किसी को बेटा बनाया है","क्या बात का ना उन्हें कोई इलम है और ना उनके बाप दादा को था। बड़ी बात है जो उनके मुँह से निकलती है, वो महज़ झूठ बोलते हैं","अच्छा, तो (ऐ मुहम्मद), शायद तुम इनके पीछे ग़म के मारे अपनी जान खो देने वाले हो अगर ये तालीम पर ईमान ना लाए","वाकिया ये है के ये जो कुछ सर-ओ-समान भी ज़मीन पर है इसको हमने ज़मीन की ज़ीनत बनाई है ता-के इन लोगों को आज़माएं इनमें कौन बेहतर अमल करने वाला है","आख़िर ए कार इस सब को हम एक छतियाल मैदान बना देने वाले हैं","क्या तुम समझते हो के घर (गुफा) और कतबे (शिलालेख) वाले हमारी कोई बड़ी अजीब निसानियों में से थे","जब वो चांद नवाजवां घर में पनाह गुज़ेन हुए और उन्होन ने कहा “ए परवरदिगार, हमको अपनी रहमत ए खास से नवाज और हमारा मामला दुरुस्त करदे”","तो हमने उन्हें उसी घर में थापक कर साल हा साल के लिए गहरी नींद सुला दिया","फिर हमने उन्हें उठाया ता-के देखें उनके दो गिरोहों में से कौन अपनी मुद्दत ए कयाम का ठीक शुरू करता है","हम उनका असल क़िस्सा तुम्हें सुनाते हैं, वो चंद नवाज़वान थे जो अपने रब पर ईमान ले आए थे और हमने उनको हिदायत में तरक्की बख्शी थी","हमने उनके दिल को वक़्त मज़बूत कर दिया जब वो उठे और उन्हें हमने एलान किया करदिया के \"हमारा रब तो बस वही है जो आसमान और ज़मीन का रब है, हम उसे छोड़ कर किसी दूसरे माबूद को ना पुकारेंगे, अगर हम ऐसा करें तो बिल्कुल बेजा (अनुचित) बात करेंगे\"","(फिर उनहोन ने आपस में एक दूसरे से कहा) \"ये हमारी क़ौम रब ई को कायनात को छोड़ कर दूसरे खुदा बना बैठी है, ये लोग उनके माबूद होने पर कोई वाज़े दलील क्यों नहीं लाते? आखिर उस शक्स से बड़ा जालिम और कौन हो सकता है जो अल्लाह पर झूठ बांधे","अब जब तुम उनसे और उनके मबूदाने गैर-अल्लाह से बेताब हो चुके हो तो चलो अब फलां घर में चल कर पनाह लो। तुम्हारा रब तुम अपनी रहमत का दामन वही करेगा और तुम्हारे काम केलिए सर-ओ-सामान मुहैया कर देगा”","तुम उन्हें घर में देखते हो तो तुम्हें यूं नजर आता है कि सूरज जब निकलता है तो उनके घर को छोड़ कर जाएं जानिब चढ़ जाता है और जब गुरुब होता है तो उनसे बच कर जाएं जानिब उतर जाता है और वो हैं के घर के अंदर एक वसीह जगह में पड़े हैं। ये अल्लाह की निशानियों में से एक है. जिसको अल्लाह हिदायत दे वही हिदायत पाने वाला है और जिसे अल्लाह भटका दे उसके लिए तुम कोई वली-ए-मुर्शिद नहीं पा सकते","तुम उन्हें देख कर ये समझ के वो जाग रहे हैं, हलांके वो सो रहे थे। हम उन्हें दिनें करवट दिलवाते रहते थे और उनका कुत्ता घर के दहने [किनारे] (प्रवेश द्वार) पर हाथ फैलाये बैठे थे। अगर तुम कहीं झाँक कर उन्हें देखते तो उलटे पाँव भाग खड़े होते और तुम्पर उनके नज़ारे से अलग बैठ जाती","और इसी अजीब करिश्मा से हमने उन्हें उठाया बिठाया ता-के जरा आपस में पूछ-गज करें, उन में से एक ने पूछा “कहो कितनी” देर इस हाल में रहे?” दुसरों ने कहा \"शायद दिन भर या इस तरह कुछ काम होंगे\"। फ़िर वो बोले \"अल्लाह हाय बेहतर जानता है के हमारा कितना वक़्त इस हालात में गुज़रा। चलो अब अपने में से किसी को चाँदी का ये सिक्ख देकर शहर भेजें और वो देखे के सबसे अच्छा खाना कहाँ मिलता है वहाँ से वो कुछ खाने के लिए ले और चाहे के ज़रा होशियारी से काम करे, ऐसा ना हो के वो किसी को हमारे यहां होने से खबरदार कर बैठे","अगर कहीं उन लोगों का हाथ हमपर पढ़ गया तो बस संगसार (पत्थर से मौत ) कर डालेंगे, या फिर ज़बरदस्ती हमें अपनी मिल्लत में वापस ले जाएंगे, और ऐसा हुआ तो हम कभी फलाह न पा सकेंगे\"","इस तरह हमने एहले शहर को उनके हाल पर मुत्तला किया ता-के लोग जान लें के अल्लाह का वादा सच्चा है, और ये के कयामत की घड़ी बशक आकर रहेगी (मगर जरा ख्याल करो के जब सोचने की असल बात ये थी) हमारा वक्त वो आपस में इस बात पर झगड़ा रहे थे के (अशब-ए-कहफ) के साथ क्या। किया जाये. कुछ लोगों ने कहा \"इनपार एक दीवार चुन दो, इनका रब ही इनके मामले को बेहतर जानता है\" मगर जो लोग उनके मामले पर गालिब थे उन्हें ने कहा \"हम तो अंदर एक इबादत गाह बनाएंगे\"","कुछ लोग कहेंगे के वो तीन थे और चौथा (चौथा) उनका कुत्ता था और कुछ दूसरे कह देंगे के पांच थे और छठा (छठा) उनका कुत्ता था। ये सब बेटुकी (अप्रासंगिक अनुमान) हांकते हैं। कुछ और लोग कहते हैं कि सात (सात) था और आठवां (आठवां) उनका कुत्ता था। कहो, मेरे रब ही बेहतर जानता है के वो कितने थाय, काम ही लोग उनकी सही ताड़द जानते हैं, लेकिन तुम सर-साड़ी बात से बढ़कर उनकी तड़प के मामले में लोगों से बेहस ना करो, और ना उनको मुतालिक किसी से कुछ पूछो","और देखो, किसी चीज के बारे में कभी ये ना कहा करो मैं कल ये काम कर दूंगा","(तुम कुछ नहीं कर सकते) इल्ला ये के अल्लाह चाहे, अगर भूल से ऐसी बात जुबान से निकल जाए तो तुरंत अपने रब को याद करो और कहो \"उम्मीद है के मेरा रब इस मामले में रुशद से करीब-करीब बात की तरफ मेरी रहनुमाई फरमादेगा\"","और वो अपने घर (गुफा) में तीन सौ (तीन सौ) साल रहे, और (कुछ लोग मुद्दत के शूमर में) नौ (नौ) साल और बढ़ गए हैं","तुम कहो, अल्लाह उनके क़याम की मुद्दत (उनके रहने की अवधि) ज़्यादा जानता है, आसमान और ज़मीन के सब पोशीदा अहवाल उसी को मालूम है। क्या ख़ूब है वो देखने वाला और सुनने वाला! ज़मीन ओ आसमान की मख़लूक़त का कोई ख़बर-गीर उसके सिवा नहीं, और वो अपनी हुकूमत में किसी को शरीक नहीं करता","ऐ नबी! तुम्हारे रब की किताब में से कुछ तुम पर वही (रहस्योद्घाटन) किया गया है उसे (जून का भी/बिल्कुल) सुना दो। कोई उसके फार्मूदात को बदलने का मिजाज नहीं है, (और अगर तुम किसी की खातिर इस में रद्द या बदल करोगे तो) उसे छोड़कर भागने के लिए कोई जाएगा पनाह न पाओगे","और अपने दिल को उन लोगों की माया पर मुतमइन करो जो अपने रब की रजा के तलबगार बनकर सुबह ओ शाम उसे पुकारते हैं, और उनसे हरगिज निगाह ना फेरो। क्या तुम दुनिया की जीनत पसंद करते हो? किसी ऐसे शक्स की इत्ता ना करो जिसके दिल को हमने अपनी याद से गाफिल करदिया है और जिसने अपनी ख्वाहिश ए नफ्स की जोड़ी इख्तियार कर ली है और जिसका तारीख-कर इफरात ओ तफ़रीत पर मबनी है (अपनी वासना का अनुसरण करता है और अपने मामलों के संचालन में चरम सीमा तक चला जाता है)","साफ कहदो के ये हक है तुम्हारे रब की तरफ से, अब जिसका जी चाहे मान ले और जिसका जी चाहे इंकार करदे। हमने (इनकार करने वाले) ज़ालिमों के लिए एक आग तैयार कर रखी है जिसकी लपेटें उन्हें घेरे में ले चुकी हैं। वहां अगर वो पानी मांगेगे तो ऐसे पानी से उनकी तवाज़ो की जाएगी जो तेल (तेल) के लिए तिलचट जैसा होगा और उनका मुंह भून डालेगा। बदतरें पीने की चीज़ और बहुत बुरी आरामगाह","रहे वो लोग जो मान लें और नीक अमल करें, तो यकीनन हम नीकुकर लोगों का अजर ज़या नहीं किया करते","उनके लिए सदा बहार (सदाबहार) जन्नतें हैं जिनके आला नह्रेन बेह राही होंगी, वहां वो सोने के कंगन (सुनहरे कंगन) से जुड़ेंगे। बारीक रेशम और अतलस ओ देबा के सब्ज़ कपडे पहनेंगे, और उनकी मसनदों पर तकिये लगा कर बैठेंगे, बेहतर अजर और आला दर्जे की जाये क़याम","(ऐ मुहम्मद)! इनके सामने एक मिसाल पेश करो दो शक्स थे उन में से एक को हमने अंगूर के दो बाग दिए और उनके गिर्द खजूर के दरख्तों की बाध (बाड़) लगाई और उनके दरमियान काश्त (खेती) की जमीन राखी","डोनो बाग खूब फले फूले और बारावर होने में उनको ने जरा सी कसार भी ना छोड़ी, उन बाघों के अंदर हमने एक नेहर जारी करदी","और उसे खूब नफा ​​हासिल हुआ, ये कुछ पा कर एक दिन वो अपने हमसाए (पड़ोसी) से बात करते हुए बोला 'मैं तुझसे ज्यादा मालदार हूं और' तुझसे ज़्यादा ताक़तवर नफ़री रखता हूँ (मेरी सेवा में ताकतवर आदमी)\"","फिर वो अपनी जन्नत (बगीचे) में दखल हुआ और अपने नफ़्स के हक़ में ज़ालिम बनकर कहने लगा \"मैं नहीं समझता के ये दौलत कभी फ़ना हो जाएगी\"","और मुझे तवक्कू नहीं के कयामत की घड़ी कभी आएगी, ताहम अगर कभी मुझे अपने रब के हुजूर पलटया भी गया तो जरूर इसे भी ज्यादा शानदार जगह पाऊंगा”","उसके हमसये (पड़ोसी/साथी) ने गुफ्तगू करते हुए उसे कहा “क्या तू कुफ्र” करता है हमें जात से जिसने तुझे मिट्टी से और फिर से खिलाया किया और तुझे एक पूरा आदमी बना खड़ा किया","रहा मैं, तो मेरा रब तो वही अल्लाह है और मैं उसके साथ किसी को शरीक नहीं करता","और जब तू अपनी जन्नत में दखल हो रहा था हमें वक्त तेरी जुबान से ये क्यों न निकला के माशा अल्लाह, ला कुव्वता इल्ला बिल्ला (अल्लाह के अलावा कोई ताकत नहीं)? अगर तू मुझे माल और औलाद में अपने से कमतर पा रहा है","तो बुरा नहीं के मेरा रब मुझे तेरी जन्नत (बगीचे) से बेहतर अता फरमाड़े और तेरी जन्नत (बाग/बगीचा) पर आसमान से कोई आफत भेज दे जिसमें वो साफ मैदान बनकर रह जाए","या इसका पानी ज़मीन में उतर जाए और फिर तू इसकी तरह ना निकल सके”","आख़िर-ए-कार हुआ ये के उसका सारा सारा ख़त्म हो गया और वो अपने अंगूरों के बागों को टट्टियों पर उल्टा पड़ा देख कर अपनी लगाई हुई लगत पर हाथ माल्टा रह गया और कहने लगा के \"काश! मैंने अपने रुब के साथ किसी को शरीक ना ठहरया होता\"","ना हुआ अल्लाह को छोड़ कर उसके पास कोई जत्था (जमात/कंपनी) के उसकी मदद करता, और ना कर सका वो आप ही हमसे आफत का मुकाबला","हमें वक्त मालूम हुआ के कारसाज़ी का इख्तियार खुदा ए बरहक़्क़ ही के लिए है, इनाम वही बेहतर है जो वो बक्शे और अंजाम वही बा-खैर है जो वो दिखाए","और (ऐ नबी)! इनमें हयात ए दुनिया की हकीकत इस मिसाल से समझो कि आज हमने आसमान से पानी बरसा दिया तो जमीन की पौद खूब घनी हो गई, और कल वही नबात भुस बनकर रह गई जैसे हवाएं उड़ाए फिरती हैं, अल्लाह हर चीज पर कुदरत रखता है","ये माल और ये औलाद मेहज़ दुनियावी जिंदगी की एक हंगामा आराइश (सजावट) है, असल में तो बाकी रह जाने वाली नेकियां ही तेरे रब के नाज़दीक नातिजे के लिहाज़ से बेहतर हैं और उन्हीं से अच्छी उम्मीदे वबस्ता की जा सकती है","फ़िक्र उस दिन की होनी चाहिए जबके हम पहाड़ों को चलाएंगे, और तुम ज़मीन को बिल्कुल बरहेना (नग्न) पाओगे, और हम तमाम इंसानों को इस तरह घेर कर जमा करेंगे के (अगलों पीछेलों में से) एक भी ना छूटेगा","और सब के सब तुम्हारे रब के हुज़ूर सफ़ (पंक्तियाँ) डर सफ़ (पंक्तियाँ) पेश किये जायेंगे। लो देखलो, आगये ना तुम हमारे पास उसी तरह जैसा हमने तुमको पहली बार पेदा किया था। तुमने तो ये समझा था कि हमने तुम्हारे लिए कोई वादे का वक्त मुकर्रर ही नहीं किया","और नाम ए अमल सामने रख दिया जाएगा हमें वक्त तुम देखोगे के मुजरिम लोग अपनी किताब ए जिंदगी के इंद्रजात (रिकॉर्ड) से डर रहे होंगे और कह रहे हैं होंगी के हाए हमारी चुदाई, ये कैसी किताब है के हमारी कोई छोटी बड़ी हरकत ऐसी नहीं रही जो इसमे दर्ज ना हो गई हो। जो जो कुछ अनहोन ने किया था वो सब अपने सामने हाज़िर पाएंगे और तेरा रब किसी पर ज़रा ज़ुल्म न करेगा","याद करो, जब हमने फरिश्तों से कहा के आदम को सजदा करो तो उनहों ने सजदा किया मगर इब्लीस ने न किया, वो जिन्नो में से था इसके लिए अपने रब्ब के हुकुम की इबादत से निकल गया। अब क्या तुम मुझे छोड़ कर उसे और उसकी ज़िम्मेदारी को अपना सरपरस्त बनाते हो हलांके वो तुम्हारे दुश्मन हैं? बड़ा ही बुरा बादल है जिसमें ज़ालिम लोग इख्तियार कर रहे हैं","मैंने आसमान ओ ज़मीन पैदा करते वक्त उनको नहीं बुलाया था और ना खुद उनकी अपनी तख़लीक में उन्हें शरीक किया था। मेरा ये काम नहीं के गुमराह करने वालों को अपना मददगार बनाया करूं","फिर क्या करेंगे ये लोग हमें रोज जबके इनका रब इनसे कहेगा के पुकारो अब उन हस्तियों को जिन्हे तुम मेरा शरीक समझ बैठे थे, ये उनको पुकारेंगे, मगर वो इनकी मदद को ना आएंगे और हम इनके दरमियान एक ही हलाकत का घड़ा मुश्तारिक कर देंगे(हलाकत की जगह बना देंगे)","सारे मुजरिम हमें रोज आग देखेंगे और समझ लेंगे के अब उन्हें इस में गिराना है और वो इसे बचाने के लिए कोई जाए पनाह न पाएंगे","हमने कुरान में लोगों को तरह तरह से समझा मगर इंसान बड़ा ही झगड़ालू वाकये हुआ है","उनके सामने जब हिदायत आई तो उसे मन्ने और अपने रब के हुजूर माफ़ी चाहने से आख़िर उनको किस चीज़ ने रोक दिया? इसके सिवा और कुछ नहीं के वो मुंतज़िर हैं के उनके साथ भी वही कुछ हो जो पिछली क़ौमों के साथ हो चुका है, या ये के वो अज़ाब को सामने आते देख लें","रसूलों को हम इस काम के सिवा और कोई ग़रज़ नहीं भेजते के वो बशारत और तम्बीह (चेतावनी) की खिदमत अंजाम दे दें, मगर काफिरों का हाल ये है कि वो बातिल के हथियार लेकर हक़ को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं और उनको ने मेरी आयत को और उन तम्बीहत (चेतावनी) को जो उनको मज़ाक बना लिया है","और हमारे शक्स से बढ़ कर जालिम और कौन है जिसके बारे में रब की आयतें सुना कर हिदायत की जाए और वो उससे मुह फेरे और उस बुरे अंजाम को भूल जाए जिसका सर या सामान उसने अपने लिए खुद अपने हाथों से किया है? (जिन लोगों ने ये रवीश इख्तियार की है) उनके दिलों पर हमने गिलाफ (कवर) चढ़ा दिया है जो उन्हें कुरान की बात नहीं समझ देते, और उनके कानों में हमने गिरानी अदा कर दी है। तुम उन्हें हिदायत की तरफ कितना ही बुलाओ, वो इस हालात में कभी हिदायत न पाएंगे","तेरा रब बड़ा दरगुज़र करने वाला और रहीम है। वो इनके कार्टूनों पर इन्हें पकड़ना चाहता था तो जल्दी ही अज़ाब भेज देता, मगर इनके लिए वादे का एक वक्त मुकर्रर है और इससे बच कर भाग निकलेगा कि ये कोई राह न पाएगा","ये अज़ाब रसीदें तुम्हारे सामने मौजूद हैं, उनको ने जब ज़ुल्म किया तो हमने उन्हें हलाक कर दिया, और उनमें से हर एक की हलाकत के लिए हमने वक्त मुकर्रर कर रखा था","(ज़रा इनको वो क़िस्सा सुनाओ जो मूसा को पेश आया था) जबके मूसा ने अपने खादिम से कहा था के “मैं अपना सफर ख़तम” ना करूंगा जबतक के दोनों दरियाओं के संगम पर ना पहुंच जाऊं, वरना मैं एक जमाना ए दराज़ तक चलता ही रहूंगा”","पास जब वो उनके संगम पर पहुंचें तो अपनी मछली से गाफिल हो गईं और वो निकल कर इस तरह दरिया में चली गई जैसे के कोई सुरंग (सुरंग) लगी हो","आगे जा कर मूसा ने अपने खादिम से कहा “ लाओ हमारा नाश्ता, आज के सफर में तो हम बुरी तरह थक गए हैं”","खादिम ने कहा “आपने देखा! ये क्या हुआ? जब हम हमारे पास चट्टान (रॉक) के पास थे तब थे हमारा वक्त मुझे मछली का ख़याल ना रहा और शैतान ने मुझको ऐसा ग़ाफ़िल कर दिया के मैं उसका ज़िक्र (आपसे करना) भूल गया। मछली तो अजीब तरह से निकल कर दरिया में चली गई\"","मूसा ने कहा \"उसकी तो हमें तलाश थी\"। चुनाचे वो दोनों अपने नक्शे कदम पर फिर वापस हुए","और वहां उनको ने हमारे बंदों में से एक बंदे को पाया जिसे हमने अपनी रहमंत से नवाजा था और अपनी तरफ से एक खास इल्म अता किया था","मूसा ने उसे कहा \"क्या मैं आपके साथ रह सकता हूं ता-के आप मुझे भी हमें बताएं\" दानिश (बुद्धि) की तालीम दीन जो आपको सिखाई गई है?”","उसने जवाब दिया \"आप मेरे साथ सब्र नहीं कर सकते\"","और जिस चीज की आपको खबर न हो आखिर आप उसपर सब्र कर भी कैसे सकते हैं\"","मूसा ने कहा \"इंशा अल्लाह आप मुझे साबिर पाएंगे और मैं आपकी खबर में कोई कमी नहीं छोड़ूंगा\" नफरमानी ना करूंगा”","उसने कहा “अच्छा, अगर आप मेरे साथ चलते हैं तो मुझसे कोई बात ना पूछेगा जब तक के मैं खुद उसका आपसे जिक्र ना करूं”","अब वो दोनों रावना हुए, यहां तक ​​के जब वो एक कश्ती में सवार हो गए तो हमें शक्स ने कहा कश्ती मैंने शिगाफ़ (छेद) डाल दिया। मूसा ने कहा \"आपने इस में शिगाफ़ डाल दिया, ता-के सब कश्ती वालों को डुबो दें? ये तो आपने एक सख्त हरकत कर डाली\"","उसने कहा \"मैंने तुमसे कहा ना था के तुम मेरे साथ सब्र नहीं कर सकते?\"","मूसा ने कहा \"भूल चुक पर मुझे न पकड़िये, मेरे मामले में आप जरा खुद से काम न लें।\"","फिर वो दोनो चले, यहां तक ​​के उनको एक लड़का मिला और उस लड़के ने उसे बर्बाद कर दिया। मूसा ने कहा \"आपने एक बे-गुनाह की जान ली हलांके उसने किसी का खून ना किया था? ये काम तो आपने बहुत ही बुरा किया\"","उसने कहा \"मैंने तुमसे कहा ना था के तुम मेरे साथ सब्र नहीं कर सकते?\"","मूसा ने कहा “इसके बाद अगर मैं आप से कुछ पूछूं तो आप मुझे सात न रखें। लीजिए अब तो मेरी तरफ से आपको उज्र (एक्सक्यूज) मिल गया\"","फिर वो आगे चले यहां तक ​​के एक बस्ती में पहुंचें और वहां के लोगों से खाना मंगा मगर उन्होन ने उन दोनो के जियाफत से इनकार करदिया। वहां उन्होन ने एक दीवार देखी जो गिरा चाहती थी(गिरने वाली थी) नीचे)","","उस कश्ती का मामला ये है के वो चंद ग़रीब आदमियों की थी जो दरिया में मेहनत मज़दूरी करते थे।मैने चाहा के उसे अयबदार (क्षतिग्रस्त) कार्डून, क्यूँके आगे एक ऐसे बादशाह का इलाक़ा था जो हर कश्ती को ज़बरदस्ती छीन लेता था","रहा वो लड़का, तो उसके वालिदैन मोमिन थे, हमें अंदेशा हुआ के ये लड़का अपनी सरकशी और कुफ़्र से उनको तंग करेगा","इसलिए हमने चाहा के उनका रब उसके बदले उनको ऐसी और औलाद दे जो अखलाक में भी उससे बेहतर हो और जिसका सिला रहमी भी ज्यादा मुतावक्क हो","और इस दीवार का मामला ये है के ये दो यतीम लड़कों की है जो इस शहर में रहते हैं। क्या दीवार के नीचे बच्चों के लिए एक खजाना दफन है। और इनका बाप एक नया आदमी था, इसलिए तुम्हारे रब ने चाहा के ये डोनो बच्चे बालिग (परिपक्व) माननीय और अपना खजाना निकाल लें। ये तुम्हारे रब की रहमत की बिना पर किया गया है, मैंने कुछ अपने इख्तियार से नहीं किया है। ये है हकीकत उन बातों की जिनपर तुम सब्र न कर सके”","और (ऐ मुहम्मद), ये लोग तुमसे ज़ुल-क़रनैन के बारे में पूछते हैं, इनसे कहो, मैं इसका कुछ हाल तुमको सुनाता हूँ","हमने उसको ज़मीन में इक्तेदार अता कर रक्खा था और उसे हर क़िसम के असबाब ओ वसील बख्शे थे","उसने (पहले मगरिब की तरफ एक मोहिम का) सर ओ समां किया","हट्टा के जब वो गुरूब ए आफताब (सूर्यास्त) की हद तक पहुंच गया तो उसने सूरज को एक काले पानी में डूबते देखा और वहां उसे इस्तेमाल किया क़ौम मिली. हमने कहा, \"ऐ ज़ुल-क़रनैन, तुझे ये मक़दरत (शक्ति) भी हासिल है के इनको तकलीफ़ पाहुंचे और ये भी के इनके साथ नेक रवैय्या इख्तियार करे\"","उसने कहा, \"जो इनमें से ज़ुल्म करेगा हम उसको सजा देंगे, फिर वो अपने रुब की तरफ\" पलटया जाएगा और वो उसे और ज्यादा सख्त अजाब देगा","और जो इनमें से ईमान लाएगा और नीक अमल करेगा उसके लिए अच्छी जजा है और हम उसको नरम एहकाम देंगे”","फिर उसने (एक दूसरी मोहिम की) तयारी की","यहां तक के तुलु ए आफताब (सूर्योदय) की हद तक जा पाहुंचा। वहां उसने देखा के सूरज एक ऐसी क़ौम पर तुलू (उदय) हो रहा है जिसके लिए धूप से बचने का कोई सामान हमने नहीं किया है","ये हाल था उनका, और ज़ुल-क़रनैन के पास जो कुछ था उसे हम जानते थे","फिर उसने (एक और मोहिम का) समान किया","यहां तक ​​के जब दो पहाड़ों के दरमियां पाहुंचा तो उसके पास एक क़ौम मिली जो मुश्किल ही से कोई बात समझती थी","उन लोगों ने कहा “ऐ” ज़ुल-क़रनैन, याजुज और माजूज इस सर-जमीन में फसाद फैलाते हैं तो क्या हम तुझ पर कोई टैक्स (श्रद्धांजलि) इस काम के लिए दीन के तू हमारे और इनके दरमियान एक बंद (बाधा) तामीर करदे?”","उसने कहा \"जो कुछ मेरे रब्ब ने मुझे दे रक्खा है वो बहुत है।\" तुम बस मेहनत से मेरी मदद करो, मैं तुम्हारे और इनके दरमियान बंद (बाधा) बना देता हूं","मुझे लोहे की चादरें (चादरें) लाकर दो\"। आखिर जब दोनों पहाड़ों के दरमियानी खाला (अंतरिक्ष) को उसने पाट दिया तो लोगों से कहा के अब आग देहकाओ। हट्टा के जब [ये अहानी दीवार (लोहे की दीवार)] बिल्कुल आग की तरह सुर्ख (लाल-गर्म) हो गई तो उसने कहा \" लाओ, अब मैं इसपर पिगला हुआ तांबा (पिघला हुआ पीतल) उंडैलूंगा (डालूंगा)\"","(ये बंद ऐसा था के) याजुज ओ माजुज इसपर चढ़ कर भी ना आ सकता था और इसमें नकाब लगाना (इस पर पैमाना) उनके लिए और भी मुश्किल था","ज़ुल-क़रनैन ने कहा \"ये मेरे रब की रहमत है, मगर जब मेरे रब के वादे का वक़्त आएगा तो वो इसको पैवंद ए खाक कर देगा, और मेरे रब का वादा बार-हक़्क़ है\"","और हम रोज़ हम लोगों को छोड़ देंगे के (समंदर की मौजों की तरह) एक दूसरे से गुत्थम गुत्था (एक साथ करीब आओ) माननीय और सुर (तुरही) फूंका जाएगा और हम सब इंसानों को एक साथ जमा करेंगे","और वो दिन होगा जब हम जहन्नुम को काफिरों के सामने लाएंगे","उन काफिरों के सामने जो मेरी हिदायत की तरफ से अंधे बने हुए थे और कुछ सुने केलिए तैयार ही ना थाय","तो क्या ये लोग, जिन्हों ने कुफ्र इख्तियार किया है, ये ख्याल रखते हैं के मुझे छोड़ कर मेरे बंदों को अपना करसाज़ बना लें? हमने ऐसे काफिरों की ज़ियाफ़त के लिए जहन्नुम तय्यार कर रखी है","(ऐ मुहम्मद), इनसे कहो, क्या हम तुम्हें बताएं के अपने अमाल में सबसे ज्यादा नाकाम ओ ना-मुराद लोग कौन हैं","वो के दुनिया की जिंदगी में जिनकी सारी सई-ओ-जहाद (प्रयास/प्रयास) राह ए रास्ते से भटक रही है और वो समझे रहे के वो सब कुछ ठीक कर रहे हैं","ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने रब की आयत को मन्ने से इंकार किया और उसके हुजूर पेहसी का यकीन ना किया। इसलिए उनके सारे अमल ज़ाया हो गए, क़यामत के रोज़ हम उन्हें कोई वज़न न देंगे","उनकी जज़ा जहन्नुम है उस कुफ्र के बदले जो उनहों ने किया और उस मज़ाक की याद में जो वो मेरी आयत और मेरे रसूलों के साथ करते रहे","अलबत्ता वो लोग जो ईमान लाए और जिन्होन ने नीक अमल किया, उनकी मेजबानी के लिए फिरदौस के बाग होंगे","जिन में वो हमेशा रहेंगे और कभी उस जगह से निकल कर कहीं जाने को उनका जी न चाहेगा","(ऐ मुहम्मद), कहो के अगर समंदर मेरे रब की बातें लिखने के लिए रोशनाई (स्याही) बन जाए तो वो ख़तम हो जाए मगर मेरे रब की बातें ख़त्म ना हो, बलके इतनी ही रोशनी और ले आएं तो वो भी किफ़ायत ना करे","(ऐ मुहम्मद), कहो के मैं तो एक इंसान हूं तुम ही जैसा, मेरी तरफ वही की जाती है के तुम्हारा खुदा बस एक ही खुदा है, पास जो अपने रुब की मुलाकात का उम्मीदवर हो उसे चाहिए कि नेक अमल करे और बंदगी में अपने रुब के साथ किसी और को शरीक न करे","काफ, हा, हां, ऐन, साद","ज़िक्र है उस रहमत का जो तेरे रब ने अपने बंदे ज़कारिया पर की थी","जबके उसने अपने रब को चुपके-चुपके पुकारा","उसने अर्ज़ किया \"ऐ परवरदिगार, मेरी हदियां तक ​​घुल गई हैं और सर बुढ़ापे से भड़क उठा है, ऐ परवरदिगार, मैं कभी तुझसे दुआ मांग कर ना-मुराद नहीं रहा","मुझे अपने पीछे अपने भाई बंदों की बुराइयों का खौफ है, और मेरी बीवी बांझ (बंजर) है, तू मुझे अपने फजल ए खास से एक वारिस अता करदे [19:6]","","(जवाब दिया गया) “ऐ जकारिया, हम तुझे एक लड़के की बशारत देते हैं जिसका नाम यह होगा, हमने इस नाम का कोई आदमी इसे पहले पैदा नहीं किया”","अर्ज़ किया, “परवरदिगार, भला मेरे हां कैसे बेटा होगा जबके मेरी बीवी बाँझ (बंजर) है और मैं बूढ़ा होकर सुखा चुका हूँ?”","जवाब मिला “ऐसा ही होगा।” तेरा रब्ब फरमाता है के ये तो मेरे लिए एक ज़रा सी बात है, आख़िर इसे पहले मैं तुझ पेदा कर चूका हूँ जबके तू कोई चीज़ ना था”","ज़कारिया ने कहा, “परवरदिगार, मेरे लिए कोई निशानी मुकर्रर करदे।” फरमाया “तेरे लिए निशानी ये है के तू” पैहम तीन दिन लोगों से बात न कर सके”","चुनाचे वो मेहराब से निकल कर अपनी क़ौम के सामने आया और उसने इशारे से उनको हिदायत की के सुबह-ओ-शाम तस्बीह करो","ऐ याह्या! किताब ए इलाही को मज़बूत थाम ले, हमने उसे इस्तेमाल किया बचपन ही में \"हुकुम\" से नवाज़","और अपनी तरफ से उसको नरम दिल और पाकीज़गी अता की और वो बड़ा परहेज़गार","और अपने वालिदैन का हक़ शान (कर्तव्यनिष्ठ) था, वो जब्बार (अहंकारी) न था और न नफ़रमान","सलाम उसपर जिस रोज़ के वो पैदा हुआ और जिस दिन मरे और जिस रोज़ वो ज़िंदा करके उठया जाए","और (ऐ मुहम्मद), इस किताब में मरियम का हाल बयान करो, जबके वो अपने लोगों से अलग हो कर शर्की (पूर्वी तरफ) जानिब गोशा नशीन (एकांत में) हो गई थी","और परदा दाल कर उनसे छुप (छिपी हुई) बैठी थी इस हालत में हमने उसके पास अपनी रूह को (यानी फरिश्ते को) भेजा और वो उसके सामने एक पूरा इंसान की शक्ल में नामदार हो गया","मरियम यकायक बोल उठी के \"अगर तू कोई खुदा तरस आदमी है तो मैं तुझसे\" रहमान की पनाह मांगती हूं\"","उसने कहा \"मैं तो तेरे रब का फ़रिश्ता हूं और इसे भेजा गया हूं के तुझसे एक पाकीजा लड़का दूं\"","मरियम ने कहा \"मेरे हां कैसे लड़का होगा जबके मुझे कोई बशर (इंसान) ने छुआ तक नहीं है और मैं कोई बढ़िया औरत नहीं हूं''","फरिश्ते ने कहा '' ऐसा ही होगा, तेरा रब फरमाता है के ऐसा करना मेरे लिए बहुत आसान है और हम ये सिर्फ इसलिए करेंगे क्योंकि हम लड़के को लोगों के लिए एक निशानी बनाएंगे और अपनी तरफ से एक रहमत, और ये काम होकर रहना है\"","माया को हमारे बच्चे का हमाल रह गया और वो इस हमाल को लिए हुए एक दरवाजे के मकाम पर चली गई","फिर जचगी (डिलीवरी) की तकलीफ ने उसे एक खजूर के दरख्त के नीचे पहुंचा दिया। वो कहने लगी \"काश मैं इसे पहले ही मर जाती है और मेरा नाम ओ निशान ना रहता है”","फरिश्ते ने पेंटी (उसके बिस्तर के नीचे) से उसको पुकार कर कहा \"गुम ना कर तेरे रब ने तेरे आला एक चश्मा रावन करदिया है","और तू जरा इस दरख्त के तनय (ट्रंक) को हिला, तेरे ऊपर तार-ओ-ताजा खजूरें तपाक पडेंगी","पास तू खा और पेशाब और अपनी आंखें ठंडी कर फिर अगर कोई आदमी तुझे नज़र आए तो उसे कहे के मैंने रहमान के लिए रोज़ की नज़र मानी है, इसलिए आज मैं किसी से ना बोलूंगी”","फिर वो इस बच्चे को लिए हुए अपनी क़ौम में आई. लोग कहने लगे \"ऐ मरियम, ये तू बड़ा पाप कर डाला","ऐ हारून की बहन, ना तेरा बाप कोई बुरा आदमी था और ना तेरी माँ ही कोई बढ़कर औरत थी\"","मरियम ने बच्चे की तरफ इशारा कर दिया। लोगों ने कहा, \"हम इसे क्या बात करें जो गेहवेरे (पालना) में पड़ा हुआ एक बच्चा है?\"","बच्चा बोल उठा “मैं अल्लाह का बंदा हूं उसने मुझे किताब दी, और नबी बनाया","और बाबरकत किया जहां भी मैं रहूं, और नमाज और जकात की पाबंदियों का हुकुम दिया जब तक मैं जिंदा रहूं","और अपनी वालिदा का हक अदा करने वाला बनाया, और मुझको जब्बार (दमनकारी) और शक्की (कठोर दिल वाला) नहीं बनाया","सलाम है मुझपर जबके मैं पैदा हुआ और जबके मैं मरूं (मर जाऊं) और जबके जिंदा करके उठा जाऊं”","ये है ईसा इब्न मरियम और ये है उसके बारे में वो सच्ची बात जिसमें लोग शक्क कर रहे हैं","अल्लाह का ये काम नहीं है कि वो किसी को बेटा बने। वो पाक जात है, वो जब किसी बात का फैसला करता है तो कहता है कि होजा, और बस वो हो जाती है","(और ईसा ने कहा था के)\"अल्लाह मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी, लेकिन तुम उसी की बंदगी करो, यही सीधी राह है\"","मगर फिर मुख्तलिफ गिरो ​​बहम इख्तिलाफ करने लगे। तो जिन लोगों ने कुफ्र किया उनके लिए वो वक्त बड़ी तबाही का होगा","जबके वो एक बड़ा दिन देखेंगे, जब वो हमारे सामने होंगे हम रोज तो उनके कान भी खूब सुन रहे होंगे और उनकी आंखें भी खूब देखती होंगी, मगर आज ये जालिम खुली गुमराही में मुब्तिला हैं","(ऐ मुहम्मद), इस हालत में जबके ये लोग गाफिल हैं और ईमान नहीं ला रहे हैं, उनमें हमें दिन से डर दो जबके फैसला करदिया जाएगा और पछतावे के सिवा कोई चारा-ए-कार ना होगा","आखिर-ए-कार हम हाय ज़मीन और उसकी सारी चीज़ों के वारिस होंगे और सब हमारी तरफ ही पलटेंगे","और इस किताब में इब्राहीम का क़िस्सा बयान करो, बेशक वो एक रस्त-बाज़ इंसान और एक नबी था","(इन्हें ज़रा उस मौके की याद दिलाओ) जबके उसने अपने बाप से कह के “अब्बाजान, आप क्यों उन चीज़ों की इबादत करते हैं जो ना सुनती हैं ना देखती हैं और ना आप का कोई काम बना सकती हैं","अब्बाजान, मेरे पास एक ऐसा इलम आया है जो आपके पास नहीं आया, आप मेरे पीछे चलें, मैं आपको सीधा रास्ता बताऊंगा","अब्बाजान!आप शैतान की बंदगी ना करें, शैतान तो रहमान का नफरमान है","अब्बाजान, मुझे डर है के कहीं आप रहमान के अज़ाब में मुब्तिला न हो जाएं और शैतान के साथी बन कर रहें”","बाप ने कहा “इब्राहिम, क्या तू मेरे मबूदों से फिर गया है? अगर तू बाज़ न आया तो मैं तुझे संगसार (पत्थर मार कर मार डालूँगा) कर दूँगा। बस तू हमेशा के लिए मुझसे अलग हो जा”","इब्राहिम ने कहा “सलाम है आपको, मैं अपने रब से दुआ करूंगा के आपको माफ़ करदे। मेरा रब्ब मुझपर बड़ा ही मेहरबान है","मैं आप लोगों को भी चोदता हूं और उन हस्तियों को भी जिन्हे आप लोग खुदा को चोद कर पुकारते हैं। मैं तो अपने रुब ही को पुकारूंगा, उम्मीद है कि मैं अपने रुब को पुकार के ना-मुराद ना रहूंगा”","पास जब वो उन लोगों से और उनके माबूदाने गैर अल्लाह से जुदा हो गया तो हमने उसको इशाक और याकूब जैसी औलाद दी और हर एक को नबी बनाया","और उनको अपनी रहमत से नवाजा और उनको सच्ची नामवरी अता की","और जिक्र करो इस किताब में मूसा का, वो एक चीदा (चुना हुआ) शक्स था और रसूल नबी था","हमने उसको तूर के दहिनी(दाएं) जानिब से पुकारा और राज की गुफ्तगु से उसको तकरूब (सम्मान) अता किया","और अपनी मेहरबानी से उसके भाई हारून को नबी बना कर उसे (मददगार के तौर पर) दिया","और इस किताब में इस्माइल का जिक्र करो, वो वादे का सच्चा था और रसूल नबी था","वो अपने घर वालों को नमाज और जकात का हुकुम डी एटा था और अपने रब के नजदीक एक पसंददीदा इंसान था","और इस किताब में इदरीस का जिक्र करो, वो एक रस्त-बाज़ (नेक) इंसान और एक नबी था","और उसे हमने बुलंद मुकाम पर उठाया था","ये वो पैगम्बर हैं जिनपर अल्लाह ने इनाम फरमाया आदम की औलाद में से, और उन लोगों की नाक से जिन्होंने हमने नूह के साथ कश्ती पर सवार किया था, और इब्राहिम की नाक से और इस्राइल की नाक से और ये उन लोगों की नाक से थे जिन्हें हमने हिदायत बख्शी और बरगुजिदा किया। इनका हाल ये था के जब रहमान की आयत उनको सुनाई जाती है तो रोते हुए सजदे में गिर जाते थे","फिर इनके बाद वो नख़लफ़ (पतित) लोग इनके जानशाहीन (उत्तराधिकारी) हुए जिन्होन ने नमाज़ को ज़या किया और ख्वाहिशात ए नफ़्स की जोड़ी की। पास करीब है के वो गुमराही के अंजाम से दो-चार होन","अलबत्ता जो तौबा कार्लें और ईमान ले आएं और नेक अमली इख्तियार कार्लें वो जन्नत में दाखिल होंगे और उनकी ज़रा बराबर हक़ तलाफ़ी न होगी","इनके लिए हमेशा रहने वाली जन्नतें हैं जिनका रहमान ने अपने बंदों से डर-पुर्दा वादा कर रखा है और यकीनन ये वादा पूरा होकर रहना है","वहां वो कोई बेहुदा बात ना सुनेंगे, जो कुछ भी सुनेंगे ठीक ही सुनेंगे और उनका रिज्क उन्हें पैहम सुबह-ओ-शाम मिलता रहेगा","ये है वो जन्नत जिसका वारिस हम अपने बंदों में से उसको बनायेंगे जो परहेजगार रहा है","(ऐ मुहम्मद), हम तुम्हारे रब के हुकुम के बिना नहीं उतरते, जो कुछ हमारे आगे है और जो कुछ पीछे है और जो कुछ इसके दरमियान में है हर चीज का मालिक वही है और तुम्हारा रुब भूलने वाला नहीं है","वो रुब है आसमान का और ज़मीन का और उन सारी चीज़ों का जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान हैं, लेकिन तुम उसकी बंदगी करो और उसकी बंगदी पर साबित क़दम रहो। क्या है कोई हस्ती तुम्हारे इल्म में इसकी हम पाया (रैंक में उसके बराबर)","इंसान कहता है क्या वाकाई जब मैं मर जाऊंगा तो फिर जिंदा करके निकल लाया जाऊंगा","क्या इंसान को याद नहीं आता के हम पहले उसको पैदा कर चुके हैं जबके वो कुछ भी ना था","तेरे रब की कसम, हम जरूर उन सब को और उनके साथ शयातीन को भी घेर लेंगे, फिर जहन्नुम के गिर्द ला कर इन्हें घुटनों (घुटनों) के बल गिरा देंगे","फिर हर गिरोह में से हर उस शक्स को चांट लेंगे (बाहर निकालो) जो रहमान के मुकाबले में ज्यादा सरकश बना हुआ था","फिर हम ये जानते हैं के में से कौन सबसे बढ़कर जहन्नुम में झोंके जाने का मुस्तहिक है","तुम में से कोई नहीं है जो जहन्नुम पर वारिद ना हो, ये तो एक ताई शुदा बात है जिसे पूरा करना तेरे रब का ज़िम्मा है","फिर हम उन लोगों को बचा लेंगे जो (दुनिया में) मुत्तक़ी था और जालिमों को उसी में गिरा हुआ छोड़ देंगे","लोगों को जब हमारी खुली खुली आयत सुनाई जाती है तो इंकार करने वाले ईमान लाने वालों से कहते हैं “बताओ, हम दोनो गिरोहोन में से कौन बेहतर हालात में है और किसकी मजलिसें ज्यादा शानदार है?”","हालंके इनसे पहले हम कितनी ही ऐसी कौमो को हलाक कर चुके हैं जो इनसे ज्यादा सर-ओ-समान रखती पतली और जाहिर शान ओ शौकत में इनसे बड़ी हुई थी","इनसे कहो, जो शक्स गुमराही में मुब्तिला होता है उसे रहमान ढील दिया करता है, यहां तक ​​के जब ऐसे लोग वो चीज देख लेते हैं जिसका उनसे वादा किया गया है ख्वा वो अज़ाब ए इलाही हो या कयामत की घड़ी तब उन्हें मालूम हो जाता है के किसका हाल खराब है और किसका जत्था (पार्टी) कामज़ोर","इस्के बराक जो लोगो राह ए रास्त इख्तियार करते हैं अल्लाह उनको रस्त-रवी में तरक्की अता फरमाता है और बाकी रह जाने वाली नेकियां ही तेरे रब के नाजदीक जजा और अंजाम के ऐतबार से बेहतर हैं","फिर तू नया देखा उस शक्स को जो हमारी आयत को मन्ने से इंकार करता है और कहता है कि मैं तो माल और औलाद से नवाजा ही जाता रहूंगा","क्या उसे गैब का पता चल गया है या उसने रहमान से कोई अहद ले रखा है","हरगिज नहीं, जो कुछ ये बख्ता (घमंड) है इसे हम लिख लेंगे और इसके लिए सजा में और ज्यादा इजाफा करेंगे","जिस सर-ओ-समान और लाओ लश्कर का ये जिक्र कर रहा है वो सब हमारे पास रह जाएगा और ये अकेला हमारे सामने हाज़िर होगा","इन लोगों ने अल्लाह को छोड़ कर अपना कुछ खुदा बना रखा है ता-के वो इनके पुश्तेबान (समर्थक) माननीय","कोई पुश्तेबान ना होगा, वो सब इनकी इबादत का इंकार करेंगे और उल्टे इनके मुखालिफ़ बन जायेंगे","क्या तुम देखते नहीं हो के हमने मुनकिरीन ए हक़ पर शयातीन छोड़ रक्खे हैं जो इन्हें ख़ूब ख़ूब (मुख़ालिफ़त ए हक़ पर) उसका रहे हैं","अच्छा, तो अब इनपर नुज़ुल ए अज़ाब के लिए बेताब ना हो, हम इनके दिन गिन रहे हैं","वो दिन आने वाला है जब मुत्तक़ी लोगों को हम मेहमानों की तरह रहमान के हुजूर पेश करेंगे","और मुजरेमोन को प्यासे जानवरों की तरह जहन्नुम की तरफ हांक ले जाएंगे","हमें वक्त लोग कोई सिफ़रिश लेन पर कादिर न होंगे बज़ुज़ उसके जिसने रहमान के हुजूर से परवाना हासिल करलिया हो","वो कहते हैं के रहमान ने किसी को बेटा बना लिया है","सच बहुत बात है जो तुम लोग गड़बड़ लाए हो","करीब है के आसमां फट पड़े, जमीन शक्क हो जाए (स्प्लिट असंडर) और पहाड़ गिर जाए","इस बात पर के लोगों ने रहमान के लिए औलाद होने का दावा किया","रहमान की ये शान नहीं है के वो किसी को बेटा बना सके","जमीन और आसमान के अंदर जो भी हैं सब उसके हुजूर बंदों की हैसियत से पेश होने वाले हैं","सब पर वो मुहीत (घेरा हुआ) है और उसने उनको शामिल कर रखा है","सब कयामत के रोज़ फरदान फरदान (अकेले अकेले) उसके सामने हाज़िर होंगे","यकीनन जो लोग ईमान ले आए हैं और अमल ए सालेह कर रहे हैं अनकारी रहमान उनके लिए दिलों में मुहब्बत अदा कर देगा","पास (ऐ मुहम्मद), इस कलाम को हमने आसां करके तुम्हारी जुबान में इसके लिए नाज़िल किया है के तुम परहेज़गरों को ख़ुश ख़बरी देदो और टोपी-धर्म (झगड़ालू/अड़ियल) लोगों को डरा दो","इनसे पहले हम कितनी नमस्ते क़ौमों को हलाक कर चुके हैं, फिर आज कहीं तुम उनका निशान पाते हो, या उनकी भनक भी कहीं सुनायी देती है","ता हा","हमने ये कुरान तुम्हारे लिए नाज़िल नहीं किया है के तुम मुसीबत में पढ़ जाओ","ये तो एक याद दिहानी है हर उस शक्स के लिए जो डरे","नाज़िल किया गया है उस ज़ात की तरफ से जिसने पैदा किया है ज़मीन को और बुलंद आसमान को","वो रहमान (क़ायनात के) तख्त ए सल्तनत पर जलवा फरमा है","मालिक हैं उन सब चीज़ों का जो आसमान और ज़मीन में हैं और जो ज़मीन ओ आसमान के दरमियान में हैं और जो मिट्टी के नीचे हैं","तुम चाहे अपनी बात पुकार कर कहो, वो तो चुपके से कहीं हुई बात बल्के इसे मख़फ़ी-तर (सबसे गुप्त) बात भी जानता है","वो अल्लाह है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं, उसके लिए बेहतरीन नाम हैं","और तुम्हें कुछ मूसा की खबर भी पसंद है","जबके उसने एक आग देखी और अपने घर वालों से कहा के “जरा ठहरो, मैंने एक आग देखी” है, शायद तुम्हारे लिए एक-आद अंगारा ले आऊं, हां इस आग पर मुझे (रास्ते के मुतालिक) कोई रहनुमाई (मार्गदर्शन) मिल जाए”","वहां पहुंच तो पुकारा गया “ऐ मूसा","मैं हाय तेरा रब हूं, जूतियां (जूते) उतार दे, तू वादी ए मुक़द्दस तुवा में है","और मैंने तुझको चुन लिया है, सुन जो कुछ वही किया जाता है","मैं ही अल्लाह हूं, मेरे सिवा कोई खुदा नहीं है, पास तू मेरी बंदगी कर और मेरी याद के लिए नमाज़ क़याम कर","क़यामत की घड़ी जरूर आने वाली है, मैं उसका वक्त मख्फी रखना चाहता हूं, ता-के हर मुतनफ्फिस अपनी साई (मजदूर/कोशिश) के मुताबिक बदला पाए","पास कोई ऐसा शक्स जो उसपर ईमान नहीं लाता और अपनी ख्वाहिश ए नफ्स का बंदा बन गया है तुझको उस घड़ी की फ़िक्र से ना रोक दे, वरना तू हलकत में पढ़ जाएगा","और ऐ मूसा, ये तेरे हाथ में क्या है?”","मूसा ने जवाब दिया \"ये मेरी लाठी है, इसपर ठीक लगा कर चलता हूं, इसे अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूं, और भी बहुत से काम हैं जो इसे लेता हूं\"","फरमाया \"फेंक दे इसको मूसा\"","उसने फेंक दिया और यकीन वो एक सांप (सांप) थी जो दौड़ रहा था","फरमाया “पकड़ ले इसको और डर नहीं, हम इसे फिर वैसा ही कर देंगे जैसी ये थी","और जरा अपना हाथ अपने बगल में दबा, चमकता हुआ निकलेगा बिना किसी तकलीफ के, ये दुसरी निशानी है","इस लिए के हम तुझे अपनी बड़ी निशानियां दिखाने वाले हैं","अब तू फिरौं के पास जा, वो व्यंग्य हो गया है”","मूसा ने अर्ज़ किया “ परवरदिगार, मेरा सीना खोल दे","और मेरे काम को मेरे लिए आसां करदे","और मेरी जुबान की ग्यारह सुलझा दे","ता-के लोग मेरी बात समझ सकें","और मेरे लिए मेरे अपने कुंबे (मेरे अपने परिवार) से एक वजीर मुकर्रर करदे","हारून, जो मेरा भाई है","उसके जरूर से मेरा हाथ मजबूत कर","और उसको मेरे काम में शामिल करदे","हम खूब तेरी पाकी बयां करें","और खूब तेरा चर्चा करें","तू हमेशा हमारा हाल पर नजर रख रहा है\"","फरमाया \" दिया गया जो तू नहीं माँगा ऐ मूसा","हमने फिर एक मरतबा तुझपर एहसान किया","याद करो वो वक्त जबके हमने तेरी मां को इशारा किया, ऐसा इशारा जो वही के लिए किया जाता है","के इस बच्चे को संदूक (बॉक्स) में रख दे और संदूक को दरिया में छोड़ दे, दरिया इसे सही पर फेंक देगा और इसे मेरा दुश्मन और इस बच्चे का दुश्मन उठा लेगा। मैंने अपनी तरफ से तुझपर मोहब्बत तारी करदी और ऐसा इंतिज़ाम किया के तू मेरी निगरानी में पाला जाए","याद कर जबके तेरी बहन चल रही थी, फिर जा कर कहती है, \"मैं तुम्हें उसका पता दूं जो क्या बच्चे की परवरिश अच्छी तरह करे?\" इस तरह हमने तुझे फिर तेरी मां के पास पहुंचा दिया ता-के उसकी आंख ठंडी रहे और वो रंजीदा ना हो। और (ये भी याद कर के) तूने एक शक्स को क़त्ल कर दिया था, हमने तुझसे इस फाँदे से निकला और तुझे मुखतलिफ़ आज़माइशों से गुजारा और तू मदियाँ के लोगों में काई साल रुका रहा। फिर अब ठीक अपने वक्त पर तू आ गया है ऐ मूसा","मैंने तुझे अपने काम का बना लिया है","जा, तू और तेरा भाई मेरी निशानियों के साथ, और देखो तुम मेरी याद में तकसीर (लापरवाही) ना करना","जाओ तुम दोनों फ़िरौन के पास के वो व्यंग्य हो गया है","उसे नरमी के साथ बात करना, शायद के वो हिदायत क़बूल करे या डर जाए”","डोनो ने अर्ज़ किया “परवरदिगार, हमें अंदेशा है के वो हमपर ज़्यादा करेगा या पिल पड़ेगा।” क्रूरतापूर्वक)”","फरमाया” डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूं, सब कुछ सुन रहा हूं और देख रहा हूं","जाओ उसके पास और कहो के हम तेरे रब के फरीस्तादे (संदेशवाहक) हैं, बानी इजराइल को हमारे साथ जाने के लिए छोड़ दे और उनको तकलीफ ना दे। हम तेरे पास तेरे रब की निशानी लेकर आए हैं और सलामती है उसके लिए जो राह-ए-रास्त की जोड़ी बनाए","हमको वही (रहस्योद्घाटन) से बताया गया है कि अज़ाब है उसके लिए जो झूठलाए और मुंह मोड़े।'","फ़िरौन ने कहा \"अच्छा, तो फिर तुम दोनो का रुब कौन है ऐ मूसा?\"","मूसा ने जवाब दिया \"हमारा रब वो है जिसने हर चीज को उसकी असली बख्शी (विशिष्ट रूप दिया), फिर उसको रास्ता बताया\"","फिरौन बोला \"और पहले जो नसलें (पीढ़ियां) गुजर चुकी हैं उनकी फिर क्या हालत थी?\"","मूसा ने कहा \"उसका इलम मेरे रब के पास एक नाविश्ते (रिकॉर्ड) में महफूज है, मेरा रब ना छूटता है ना भूलता है\"","वही जिसने तुम्हारे लिए जमीन का फर्श बिछाया, और उसमें तुम्हारे चलने को रास्ते बने, और ऊपर से पानी बरसाया, फिर उसके ज़रिये से मुखतलिफ़ अक्सम की पैदावर निकली","खाओ और अपने जानवरों को भी छोड़ो, यकीनन इस में बहुत सी निशानियाँ हैं अक़ल रखने वालों के लिए","इसी ज़मीन से हमने तुमको पैदा किया है, इसी में हम तुम्हें वापस ले जायेंगे और इसी से तुमको दोबारा निकलेंगे","हमने फिरौन को अपनी सभी निशानियां बताईं मगर वो झूठलाये चला गया और ना माना","कहने लगा \"ऐ मूसा, क्या तू हमारे पास इस के लिए आया है के अपने जादू के जोर से हमको हमारे मुल्क से निकल बाहर करे","अच्छा, हम भी तेरे मुकाबले में वैसा ही जादू लाते हैं, ताई कार्ले कब और कहां मुकाबला करना है, ना हम इस झगड़े से फिरेंगे ना तू फिरियो, खुले मैदान में सामने आजा”","मूसा ने कहा “जश्न का दिन ताई हुआ, और दिन चढ़े लोग जमा होन”","फिरौं ने पलट कर अपने सारे हथकंडे जमा किये और मुकाबले में आ गया","मूसा ने (ऐन मौके पर गिरो ​​मुकाबिल को मुखातिब करके) कहा \"शामत के मारों, ना झूठी तोहमतें (झूठ का आविष्कार) बांधो अल्लाह पर, वरना वो एक सख्त अजाब से तुम्हारा सत्तियाना कर देगा, झूठ जिसने भी घड़ा वो ना-मुराद हुआ”","ये सुनकर उनको दरमियान इख्तिलाफ ए राय हो गया और वो चुपके चुपके बहाम मशवरे करने लगे","आखिर-ए-कार कुछ लोगों ने कहा के “ये डोनो तो महज़ जादूगर हैं.इंका मक़सद ये है के अपने जादू के ज़ोर से तुमको तुम्हारी ज़मीन से बे-दख़ल करदें और तुम्हारे मिसाल (आदर्श) तारीख़-ए-ज़िंदगी का ख़तम करदें","अपनी सारी तदबीरें आज इकाथी करलो और एका करके मैदान में आओ। बस ये समझलो के आज जो गालिब रहा वही जीत गया।”","जादूगर बोले \"मूसा, तुम फेंकते हो या पहले हम फेंकते हो?\"","मूसा ने कहा \"नहीं, तुम्हीं फेंको\" क्योंकि उनकी रसियां ​​और उनकी लाठियां उनके जादू के ज़ोर से मूसा को दौड़ती हुई महसूस होने लगी","और मूसा अपने दिल में डर गया","हमने कहा \"मत डर, तू ही गालिब रहेगा\"","फेंक जो कुछ तेरे हाथ में है, अभी इनकी सारी बनावती चीज़ों को निगल जाता है, ये जो कुछ बना कर लाए हैं ये तो जादूगर का फरेब है, और जादूगर कभी कामयाब नहीं हो सकता, ख़्वाह किसी शान से वो आये”","आख़िर को यहीं हुआ के सारे जादूगर सजदे में गिरा दिए गए और पुकार उठे \"मान लिया हमने हारून और मूसा के रब को\"","फिरौन ने कहा \"तुम ईमान ले आए क़ब्ल इसके मैं तुम्हें इसकी इजाज़त देता? मालूम हो गया के ये तुम्हारा गुरु है जिसने तुम्हें\" जादूगरी सिखाई थी। अच्छा अब मैं तुम्हारे हाथ पौन मुखालिफ सिमटन (वैकल्पिक पक्ष) से ​​कटवाता हूं और खजूर के तानो (चड्डी) पर तुमको सूली देता हूं, फिर तुम्हें पता चल जाएगा के हम दोनों में से किसका अजब फर्क और देर पर है” (यानी मैं तुम्हें) ज़्यादा सख्त सज़ा दे सकता हूं या मूसा)","जादूगरों (जादूगरों) ने जवाब दिया \"कसम है उस जात की जिसने हमने अदा किया है, ये हरगिज नहीं हो सकता के हम रोशन निशानियां सामने आ जाने के बाद भी (सदाकत पर) तुझे तर्जीह दें। तू जो कुछ करना चाहे करले, तू ज्यादा से ज्यादा बस इसी दुनिया की जिंदगी का फैसला कर सकता है","हम तो अपने रब पर ईमान ले आए ता-के वो हमारी खातें माफ करदे, और इस जादूगरी से जिसपर तू ने हमें मजबूर किया था दरगुजर फरमाये। अल्लाह ही अच्छा है और वही बाक़ी रहने वाला है”","हकीकत ये है के जो मुजरीन बनकर अपने रब के हुज़ूर हाज़िर होगा उसके लिए जहन्नुम है जिसमें वो ना जिएगा ना मरेगा","और जो उसके हुज़ूर मोमिन की हकीकत से हाज़िर होगा, जिसने कोई अमल किये होंगे, ऐसे सब लोगों के लिए बुलंद दर्जे हैं","सदा बहार बाग़ (बगीचे) हैं जिनके आला नहरें बह रही होंगी उन में वो हमेशा रहेंगे। ये जजा है उस शक्स की जो पकीज़गी इख्तियार करे","हमने मूसा पर वही की अब रात-ओ-रात मेरे बंदों को लेकर चल पढ़, और उनके लिए समंदर में सुखी सड़क (सूखी राह) बना ले, तुझे किसी के ताक़ुब का ज़रा ख़ौफ़ ना हो और ना (समंदर के बीच से गुज़रते हुए) डर लगे","पीछे से फ्राईउन अपने लश्कर लेकर पहुँचे और फिर समंदर उन पर छा गया जैसा के चा जाने का हक़ था","फ़िरौन ने अपनी क़ौम को गुमराह ही किया था, कोई सही रहनुमाई नहीं की थी","ऐ बानी इसराइल, हमने तुमको तुम्हारे दुश्मन से नजात दी, और तूर के दिन जानिब तुम्हारी हाज़री के लिए वक़्त मुक़र्रर किया और तुमपर मन्ना ओ सलवा (बटेर) उतारा","खाओ हमारा दिया हुआ पाक ​​रिज़क और इसे खा कर सरकशी ना करो वरना तुमपर मेरा गजब टूट पड़ेगा। और जिसपर मेरा गजब टूटा वो फिर गिर कर ही रहा","अलबत्ता जो तौबा कार्ले और ईमान लाए और नेक अमल करे, फिर सीधा चलता रहे, उसके लिए मैं बहुत दरगुजर करने वाला हूं","और क्या चीज तुम्हें अपनी कौम से पहले ले आई मूसा","उसने अर्ज़ किया “वो बस मेरे पीछे आ ही रहे हैं। मैं जल्दी करके तेरे हुजूर आ गया हूं ऐ मेरे रब, ता-के तू मुझसे खुश हो जाए”","फरमाया “अच्छा, तो सुनो, हमने तुम्हारे पीछे तुम्हारी क़ौम को आजमाइश में डाल दिया और सामरी ने उन्हें गुमराह कर डाला”","मूसा सच गुस्से और रंज की हालत में अपनी क़ौम की तरफ पलटा। जाकर उसने कहा “ऐ मेरी क़ौम के लोग, क्या तुम्हारे रब ने तुमसे अच्छे वादे नहीं किये थे? क्या तुम्हारे दिन लग गए हैं? या तुम अपने रब का गजब ही अपना ऊपर लाना चाहते थे के तुमने मुझसे वादा खिलाफी की?”","उनको ने जवाब दिया “हमने आप से वादा खिलाफी कुछ अपने इख्तियार से नहीं की। मामला ये हुआ के लोगों के ज़ेवरत के बोझ से हम लड़ गए थे और हमने बस उनको फेंक दिया था'' फिर इसी तरह सामरी ने भी कुछ डाला","और उनके लिए एक बच्चे (बछड़े का आकार) की मूरत बनकर निकल लाया जिसकी जमानत (बैल) की सी आवाज निकलती थी। लोग पुकार उठे \"यही है तुम्हारा खुदा और मूसा का खुदा, मूसा इसे भूल गया\"","क्या वो देखते ना थे के ना वो उनकी बात का जवाब देता है और ना उनके नफा ओ नुक्सान का कुछ इख्तियार रखता है।","हारून (मूसा के आने से) पहले ही उनसे कह चुका था के \"लोगन, तुम इसकी वजह से फिटने (ट्रायल) में पढ़ गए हो, तुम्हारा रब तो रहमान है, पास तुम मेरी जोड़ी करो और मेरी बात मानो।\"","उनहों ने उसे कहा के \"हम इसी तरह करते रहेंगे जब तक के मूसा वापस न आ जाएं\"","मूसा (कौम को डेटने के बाद हारून की तरफ पलटा और) बोला \" हारून, तुमने जब देखा था के ये गुमराह हो रहे हैं","तो किस चीज़ ने तुम्हारा हाथ पकड़ा था के मेरे तरीक़े पर अमल ना करो? क्या तुमने मेरे हुकुम की ख़िलाफ़-वारज़ी की","हारून ने जवाब दिया “ऐ मेरी माँ के बेटे, मेरी दादी (दाढ़ी) ना पकड़, ना मेरे सर के बाल खींच, मुझे इस बात का डर था के” तू आ कर कहेगा तुमने बनी इजराइल में फूट डाल दी और मेरी बात का पास ना किया”","मूसा ने कहा “और सामरी, तेरा क्या मामला है?”","उसने जवाब दिया \"मैंने वो चीज़ देखी जो इन लोगों को नज़र ना आई, लेकिन मैंने रसूल के नक्शे क़दम से एक मुट्ठी उठा ली और उसको डाल दिया, मेरे नफ्स ने मुझे कुछ ऐसा ही सुझाया\"","मूसा ने कहा, \"अच्छा तो जा, अब जिंदगी भर तुझे यहीं पुकारते रहना है के मुझे ना छूना और तेरे लिए बाज़-पुर्स का एक वक्त मुकर्रर है जो तुझसे हरगिज़ ना तलेगा और देख अपना इस खुदा को जिस्पार तू ऋचा (इतना प्यार करता था) हुआ था, अब हम उसे जला डालेंगे और रेजा रेजा करके दरिया में बहाएंगे देंगे","लोगन, तुम्हारा खुदा तो बस एक ही अल्लाह है जिसके सिवा कोई और खुदा नहीं है, हर चीज पर उसका इल्म है”","(ऐ मुहम्मद), इस तरह हम पिछले गुजरे हालात की खबरें तुमको सुनाते हैं, और हमने खास अपने हां से तुमको एक \"ज़िक्र\" (दरस ए हिदायत) अता किया है","जो कोई इसे मोह लेगा वो क़यामत के दिन साख बार ए गुनाह उठाएगा","और ऐसे सब लोग हमेशा इसके वबल में गिरफ़्तार रहेंगे, और कयामत के दिन उनके लिए (जुर्म की है) जिम्मेदारी का बोझ) बड़ा तकलीफ-दे बोझ होगा","उस दिन जबके सूर (तुरही) फूंका जाएगा और हम मुजरिमो को इस हाल में घेर लाएंगे के उनकी आंखें (देहशत के मारे) पथराई हुई होंगी","आपस में चुपके चुपके कहेंगे के दुनिया में मुश्किल ही से तुमने कोई दस दिन गुजारे होंगे","हमें खूब मालूम है के वो क्या बातें कर रहे होंगे, (हम ये भी जानते हैं के) हमें वक्त उनके साथ जो ज्यादा से ज्यादा मोहताज अंदाज लगाने वाला होगा वो कहेगा के नहीं, तुम्हारी दुनिया की जिंदगी बस एक दिन की जिंदगी थी","ये लोग तुमसे पूछते हैं कि आखिर उस दिन ये पहाड़ कहां चले जायेंगे? कहो के मेरा रब उनको धूल बनाकर उड़ा देगा","और ज़मीन को ऐसा हमवार चटियाल मैदान बना देगा (खाली स्तर का मैदान)","के इसमे तुम कोई बल और सलवात (न कर्व और न ही क्रीज़) ना देखोगे","हमसे रोज़ सब लोग मुनादी (बुलाने वाले/पुकारने वाले) की पुकार पर सीधे चले आएंगे, कोई जरा अकड़ न दिखा सकेगा और आवाज़ें रहमान के आगे डब जाएंगी, एक सर-सरहत के सिवा तुम कुछ ना सुनोगे","हमसे रोज़ शफ़ात (मध्यस्थता) करगर ना होगी, इल्ला ये के किसी को रहमान इसकी इजाजत दे और उसकी बात सुन्ना पसंद करे","वो लोगों का अगला पिछला सब हाल जानता है और दूसरों को इसका पूरा इल्म नहीं है","लोगों के सर उस हय्युल कय्यूम (जिंदा और कयाम) के आगे झुक जायेंगे. ना-मुराद होगा जो हमें वक्त किसी ज़ुल्म का बार (बोझ)-ए-गुनाह उठाए हुए हो","और किसी ज़ुल्म या हक़ तलाफ़ी का ख़तरा ना होगा उस शक्स को जो नेक अमल करे और इसके साथ वो मोमिन भी हो","और (ऐ मुहम्मद) इसी तरह हमने इसे कुरान ए अरबी बाना कर नाज़िल किया है और इस्में तरह-तरह से तम्बीहत (चेतावनी) की है शायद के ये लोग कजरावी (विकृति) से बचे हैं या इसमें कुछ होश के आसार इस की बदौलत पेदा हैं","पास बाला ओ बरतर है अल्लाह, बादशाह ए हक़ीक़ी। और देखो, कुरान पढ़ने में जल्दी ना किया करो जबतक के तुम्हारी तरफ उसकी वही तकमील को ना पूछ जाए, और दुआ करो के ऐ परवरदिगार मुझे मज़ीद इल्म अता कर","हमने इस्से पहले आदम को एक हुकुम दिया था, मगर वो भूल गया और हमने हममें एज़्म (दृढ़ संकल्प/दृढ़ संकल्प) ना पाया","याद करो वो वक़्त जब हमने फरिश्तों से कहा था के आदम को सजदा करो, वो सब तो सजदा कर गए, मगर एक इब्लीस था के इंकार कर बैठा","इस्पर हमने आदम से कहा के “देखो, ये तुम्हारा और तुम्हारी” बीवी का दुश्मन है, ऐसा ना हो के ये तुम्हें जन्नत से निकाल दे और तुम मुसीबत में पढ़ जाओ","यहां तो तुम्हें ये सुविधाएं (सुविधाएं) हासिल हैं के ना भूखे नंगे रहते हो","ना प्यास और धूप तुम्हें सताती है”","लेकिन शैतान ने उसको फुसलाया, कहने लगा \"आदम, बताऊं तुम्हें वो दरख्त जिसकी आबादी जिंदगी और ला-ज़वाल (सदाबहार) सल्तनत हासिल होती है?\"","आखिर ए कार वो दोनों (मियां बीवी) हमें दरख्त का फल खा गए, नतिजा ये हुआ के मौसम ही उनके सत्र (नग्नता) एक दूसरे के आगे खुल गए और लगे दोनों अपने आप को जन्नत के पत्तों से ढँकने। आदम ने अपने रुब की नफ़रमानी की और राह-ए-रास्त से भटक गया","फिर उसके रुब ने उसे बरगुज़िदा किया और उसकी तौबा क़बूल कार्ली और उसे हिदायत बख्शी","और फरमाया “तुम दोनो (फ़ारिक, यानि इंसान और शैतान) यहाँ से उतर जाओ, तुम एक दूसरे के दुश्मन रहोगे। अब अगर मेरी तरफ से तुम कोई हिदायत पाओगे तो जो मेरी हमें हिदायत की जोड़ी बनाएगा वो ना भटकेगा ना बदबख्त में मुब्तला होगा","और जो मेरे \"ज़िक्र\" (दरस ए हिदायत) से मुह मोड़ेगा उसके लिए दुनिया मैं तंग हूँ जिंदगी होगी और कयामत के रोज हम उसे अंधा उठाएंगे”","वो कहेगा \"परवरदिगार, दुनिया में तो मैं आँखों वाला था, यहाँ मुझे अंधा क्यों उठाया?\"","अल्लाह ताला फरमाएगा \"हां, इसी तरह तू हमारी आयत को, जबके वो तेरे पास आई थी, तू ने भुला दिया था उसी तरह आज तू भुलाया जा रहा है\"","इस तरह हम हद से गुज़रने वाले और अपने रब की आयत ना माने वाले को (दुनिया में) बदला देते हैं और आख़िरत का अज़ाब ज़्यादा मज़बूत और ज़्यादा देर पर है (अधिक स्थायी)","फिर क्या इन लोगों को (तारीख के इस सबक से) कोई हिदायत ना मिली के इनसे पहले कितनी ही क़ायमों को हम हलाक कर चुके हैं जिनकी (बरबाद शुदा) बस्तियों में आज ये चलते फिरते हैं? दर हकीकत इसमें बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक़ल ए सलीम रखने वाले हैं","अगर तेरे रब की तरफ से पहले एक बात ताई ना करदी गई होती और मोहलत की एक मुद्दत मुकर्रर ना कि जा चुकी होती तो जरूर इनका भी फैसला चुका दिया जाता","पास (ऐ मुहम्मद), जो बातें ये लोग बनाते हैं उन पर सब्र करो, और अपने रुब की हम्द ओ सना के साथ उसकी तस्बीह करो सूरज निकलने से पहले, और रात के औकात में भी तस्बीह करो और दिन के किनारों पर भी, शायद के तुम राजी हो जाओ","और निगाह उठा कर भी ना देखो दुनियावी जिंदगी की उस शान ओ शौकत को जो हमने अपने अंदर से मुख्तलिफ किस्मत के लोगों को दे रखा है, वो तो हमने उन्हें आजमाइश में डालने के लिए दी है, और तेरे रब का दिया हुआ रिज़क ए हलाल हाय बेहतर और पैंदातर (अधिक स्थायी) है","अपने एहल ओ अयाल (आपके परिवार के सदस्य) को नमाज की बात करो और खुद भी इसके पाबंद रहो, हम तुमसे कोई रिज्क नहीं चाहते, रिज्क तो हम ही तुम्हें दे रहे हैं और अंजाम की भलाई तक्वा हाय के लिए है","वो कहते हैं कि ये शक्स अपने रब की तरफ से कोई निशानी (मोजाज़ा) क्यों नहीं लाता? और क्या इनके पास अगले सहीफों की तमाम तालीम का बयान ए वजह नहीं आ गया","अगर हम उसके आने से पहले इनको किसी अज़ाब से हलाक कर देते तो फिर यही लोग कहते के ऐ हमारे परवरदिगार, तू नहीं हमारे पास कोई रसूल क्यों ना भेजा के ज़लील ओ रुसवा होने से पहले ही हम तेरी आयत की जोड़ी इख्तियार कर लेते हैं","(ऐ मुहम्मद) इनसे कहो, हर एक अंजाम ए कार के इंतजार में है, पास अब मुंतजिर रहो, अनकरीब तुम्हें मालूम हो जाएगा के कौन सीधी राह चलने वाले हैं और कौन हिदायत-यफ्ता (सही मार्गदर्शन) हैं","करीब आ गया है लोगों के हिसाब का वक्त, और वो हैं के गफलत में मुंह मोड़े हुए हैं","उनके पास जो ताज़ा हिदायत भी उनके रब की तरफ से आती है उसको बे-तकल्लुफ़ सुनते हैं और खेल में पड़े रहते हैं","दिल उनके (दूसरी ही फिक्रों में) मुहाफिज हैं और जालिम आपस में सरगोशियां (कानाफूसी) करते हैं के \"ये शक्स आखिर तुम जैसा एक बशर (इंसान) ही तो है, फिर क्या तुम आंखें देखते जादू के फांदों में फंस जाओगे?\"","रसूल ने कहा, मेरा रब हर उस बात को जानता है जो आसमान और ज़मीन में की जाए, वो सामी (सुनने वाला) और अलीम (जानने वाला) है","वो कहते हैं \"बलके ये परागंदा (असंगत) ख्वाब है, बलके ये इसका मन-ग़दथ है, बलके ये शक्स शायर है वरना ये लाए कोई निशानी जिस तरह पुराने जमाने के रसूल निशानियों के साथ भेज गए थे”","हलांके इनसे पहले कोई बस्ती भी, जिसने हमें हलाक किया, ईमान ना लाई, अब क्या ये ईमान लाएंगे","और (ऐय) मुहम्मद), तुमसे पहले भी हमने इंसानो ही को रसूल बना कर भेजा था जिनपर हम वही (रहस्योद्घाटन) किया करते थे, तुम लोग अगर इल्म नहीं रखते तो एहले किताब से पूछ लो","उन रसूलों को हमने कोई ऐसा जिस्म नहीं दिया था के वो खाते ना हो, और ना वो सदा (हमेशा) जीने वाले थे","फिर देखलो के आखिर ए कार हमने उनके साथ अपने वादे पूरे किए, और उन्होंने और जिस को हमने चाहा बचा लिया, और हद से गुजर जाने वालों को हलाक कर दिया","लोगन, हमने तुम्हारी तरफ एक ऐसी किताब भेजी है जिसमें तुम्हारा ही ज़िक्र है, क्या तुम समझते नहीं हो","कितनी ही जालिम बस्तियाँ हैं जिनको हमने पीस कर रख दिया और उनके बाद दूसरी किसी क़ौम को उठाया","जब उनको हमारा अज़ाब महसूस हुआ तो लागे वहाँ से भागें","(कहा गया) \"भागो नहीं, जाओ अपने उन्हीं घरों में और ऐश के समानों में जिनके अंदर तुम चैन कर रहे थे, शायद के तुमसे पूछेंगे\"","कहने लगे \"हाय हमारी कमबख्त, बेशक हम ख़तावर थे\"","और वो यहीं पुकारते रहें यहां तक ​​के हमने उनको खलियान (काटा हुआ खेत) करदिया, जिंदगी का एक शरारा तक उनमें ना रहा (जीवन की कोई चिंगारी नहीं छोड़ना)","हमने आसमान और जमीन को और जो कुछ भी इनमें है कुछ खेल के तौर पर नहीं बनाया है","अगर हम कोई खिलोना बनाना चाहते हैं और बस यहीं कुछ हमें करना होता है तो अपने ही पास से कर लेते हैं","मगर हम तो बातिल पर हक की चोट लगाते हैं जो उसका सारा तोड़ देती है और वो देखता-देखता मिट जाता है, और तुम्हारे लिए तभी। है उन बातों की वजह से जो तुम बनते हो","ज़मीन और आसमान में जो मख़लूक़ भी है अल्लाह की है और जो (फ़रिश्ते) उसके पास हैं वो ना अपने आप को बड़ा समझ कर उसकी बंदगी से सरताबी करते हैं और ना मालूल (थके हुए/थके) होते हैं","शब-ओ-रोज़ उसकी तस्बीह करते रहते हैं, दम नहीं लेते","क्या इन लोगों के बने हुए अर्ज़ी खुदा ऐसे हैं के (बे-जान को जान बख्श कर) उठा खड़ा करते हैं","अगर आसमान ओ ज़मीन में एक अल्लाह के सिवा दूसरे खुदा भी होते तो (ज़मीन और आसमान) दोनों का निज़ाम बिगड़ जाता। पास पाक है अल्लाह रब्बुल अर्श उन बातों से जो ये लोग बना रहे हैं","वो अपने कामों के लिए (किसी के आगे) जवाब-दे नहीं है और सब जवाब-दे हैं","क्या उसे छोड़ कर इन्हों ने दूसरे खुदा बना लिए हैं? (ऐ मुहम्मद) इनसे कहो के \"लाओ अपनी दलील, ये किताब भी मौजूद है जिसमें मेरे दौर के लोगों के लिए हिदायत है और वो किताबें भी मौजूद हैं जिनमें मुझसे पहले लोगों के लिए हिदायत थी\" मगर उन में से अक्सर लोग हकीकत से बेखबर हैं, इस लिए मुहं मोड़े हुए हैं","हमने तुमसे पहले जो रसूल भी भेजा है उसको यहीं कहा है कि मेरे सिवा कोई खुदा नहीं है, पास तुम लोग मेरी ही बंदगी करो","ये कहते हैं \"रहमान औलाद रखता है\" सुभानअल्लाह, वो तो बंदे हैं जिन्हे इज्जत दी गई है","उसके हुजूर बढ़ कर नहीं बोलते और बस उसके हुकुम पर अमल करते हैं","जो कुछ उनके सामने है उसे भी वो जानता है और जो कुछ उनसे ओझल है उसे भी वो खबर है, वो किसी की सिफरिश नहीं करता बाजुज उसके जिसको हक़ में सिफ़रिश सुनने पर अल्लाह रज़ी हो, और वो उसके ख़ौफ़ से डरे रहते हैं","और जो उनमें से कोई कह दे कि अल्लाह के सिवा मैं भी एक खुदा हूँ, तो उसे हम जहन्नुम की सज़ा दें, हमारे हाँ ज़ालिमों का यही बदला है","क्या ये लोग जिन्हों ने (नबी की बात मन्ने से) इंकार करदिया है गौर नहीं करते के ये सब आसमान और जमीन बहम मिले हुए थे, फिर हमने इन्हें जुदा किया, और पानी से हर जिंदा चीज पैदा की, क्या वो (हमारी इस खल्लकी को) नहीं मानते","और हमने जमीन में पहाड़ जमा दिए ता-के वो उन्हें लेकर ढुलक ना जाए, और इसमें खुशियां रखें बना दी, शायद के लोग अपना रास्ता मालूम करें","और हमने आसमान को एक महफूज छत बना दिया, मगर ये हैं के इसकी निशानियों की तरफ तवाज्जु ही नहीं करते","और वो अल्लाह ही है जिसने रात और दिन बनाए और सूरज और चांद को पैदा किया, सब एक एक फलक में तैर रहे हैं","और (ऐ मुहम्मद), हमेशा (अनंत काल) तो हमने तुमसे पहले भी कोई इंसान के लिए नहीं रखा है अगर तुम मर गए तो क्या ये लोग हमेशा जीतते रहेंगे","हर जानदार को मौत का मजा चखना है, और हम अच्छे और बुरे हालात में डाल कर तुम सबकी आजमाइश कर रहे हैं, आखिर-ए-कार तुम्हें हमारी ही तरफ पलटना है","ये मुनकिरीन ए हक जाब तुम्हें देखते हैं तो तुम्हारा मजाक बना लेते हैं। कहते हैं “क्या ये है वो शक्स जो तुम्हारे खुदाओं का ज़िक्र किया करता है?” और इनका अपना हाल ये है के रहमान के ज़िक्र से मुनकिर हैं","इंसान जल्दी बाज़ मख़लूक है, अभी मैं तुमको अपनी निशानियां दिखाये देता हूं, जल्दी ना मचाओ","ये लोग कहते हैं \"आखिर ये धमाकेदार पूरी कब होगी अगर तुम सच्चे हो\"","काफिरों को उस वक्त का कुछ इलम होता जब ये ना अपने मुंह आग से बचा सकेंगे ना अपनी पीठ, और ना इनको कहीं से मदद मांगेगी","वो बला (तबाही) अचानक आएगी और इन्हें इस तरह यक्लाख्त (अचानक) दबोच लेगी के ये ना उसको दफा कर पाएंगे और ना इनको लम्हा भर मोहलत ही मिल जाएगी","मजाक तुमसे पहले भी रसूलों का उदय जा चूका है, मगर उनका मजाक उड़ाने वाली उसी चीज़ के फेर में आ कर रहे जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे","(ऐ मुहम्मद), इनसे कहो, \"कौन है जो रात को या दिन को तुम्हें रहमान से बचा सकता हो?\" मगर ये अपने रब की हिदायत से मुह मोड़ रहे हैं","क्या ये कुछ ऐसे खुदा रखते हैं जो हमारे मुकाबले में इनकी हिमायत करें? वो ना तो खुद अपनी मदद कर सकते हैं और ना हमारी ही ताइद उनको हासिल है","असल बात ये है कि लोगों को और इनके आबा ओ अजदाद (पूर्वजों) को हम जिंदगी का सार ओ सामान दिए चले गए यहां तक ​​के इनको दिन लग गए (जब तक कि अवधि बहुत लंबी नहीं हो गई) उन्हें)। मगर क्या इन्हें नज़र नहीं आता के हम ज़मीन को मुख़्तलिफ़ सिम्तों से घटाये चले आ रहे हैं? फिर क्या ये गालिब आ जायेंगे","इनसे कहदो के \"मैं तो वही (रहस्योद्घाटन) कि बिना पर तुम्हें मुतनब्बे (चेतावनी) कर रहा हूँ\"। मगर बाहर पुकार को नहीं सुना जाता जबके उन्हें खबरदार किया जाए","और अगर तेरे रब का अजब ज़रा सा इन्हें छू जाए तो अभी गाल उठें के हाए हमारी कम्बख्त, बेशक हम ख़तावर थे","क़यामत के रोज़ हम ठीक ठीक तोलें वे तराजू रख देंगे, फिर किसी शक्स पर ज़रा बराबर ज़ुल्म न होगा। जिसका राई (सरसों) के दाने के बराबर भी कुछ किया धरा होगा वो हम सामने ले आएंगे और हिसाब लगाने के लिए हम काफी हैं","पहले हम मूसा और हारून को फुरकान (मानदंड) और रोशनी और \"ज़िक्र\" अता कर चुके हैं उन मुत्तक़ी लोगों की भलाई के लिए","जो बे-देखे (बिगैर देखे) अपने रब से डरें और जिनका (हिसाब की) हमें घड़ी का खटका लगा हुआ है","और अब ये ब-बरकत \"ज़िक्र\" हमने (तुम्हारे लिए) नाज़िल किया है फिर क्या तुम इसको क़बूल करने से इनकारी हो","उसे भी पहले हमने इब्राहिम को उसकी होश-मंदी बख्शी थी और हम उसको खूब जानते थे","याद करो वो मौका के उसने अपने बाप और अपनी क़ौम से कहा था के \"ये मूरतें (चित्र) कैसी हैं जिनके तुमलोग गिरविदा (समर्पित) हो\" रहे हो?”","उनको ने जवाब दिया \"हमने अपने बाप दादा को इनकी इबादत करते पाया है\"","उसने कहा \"तुम भी गुमराह हो और तुम्हारे बाप दादा भी सारे गुमराह में पड़े हुए थे?\"","उनहों ने कहा \"क्या तू हमारे सामने अपना असली ख्यालात पेश कर रहा है या मज़ाक करता है?\"","उसने जवाब दिया \"नहीं, बलके फिल वही तुम्हारा रब वही है जो ज़मीन और आसमान का रब और उनका भुगतान करने वाला है, इसपर मैं तुम्हारे सामने गवाही देता हूं","और खुदा की कसम मैं तुम्हारी गैर मौजुदगी में जरूर तुम्हारे बटन (मूर्तियों/मूर्तियों) की खबर लूंगा''","चुनांचे उसने उनको टुकड़े-टुकड़े कर दिया और सिर्फ उनके बदले को छोड़ दिया ता-के शायद वो इसकी तरफ रूजू करें","उन्हें आकार बुथों[मूर्तियों] का ये हाल देखा तो) कहने लगे ''हमारे खुदाओं का'' हाँ हाल किसने करदिया? बड़ा ही कोई जालिम था वो”","(बाज़ लोग) बोले “हमने एक नवाज़वान को इनका जिक्र करते सुना था जिसका नाम इब्राहिम है”","उनहों ने कहा “तो पकड़ लाओ उसे सबके सामने ता-के लोग देख लें (उसकी कैसी खबर ली जाती है)”","(इब्राहिम के आने पर) उनहों ने पूछा \"क्यूं इब्राहिम, तू नहीं हमारे खुदाओं के साथ ये हरकत की है","उसने जवाब दिया \"बल्के ये सब कुछ इनके इस सरदार ने किया है, इनसे पूछ लो अगर ये बोलते हो\"","ये सुनकर वो लोग अपने जमीर की तरफ पलटे और (अपने दिलों में) कहने लगे \"वाकई तुम खुद ही जालिम हो\"","मगर फिर उनकी गणित पलट गई (दिमाग विकृत हो गया) और बोले \"तू जानता है के ये बोलते नहीं हैं\"","इब्राहिम ने कहा \"फिर क्या तुम अल्लाह को छोड़ कर उन चीज़ को पूज रहे हो जो ना तुम्हें नफा पहन कर कादिर हैं ना नुक्सान पर","टफ (फाई) है तुमपर और तुम्हारे इन माबूदोन पर जिनके तुम अल्लाह को छोड़ कर पूजा कर रहे हो, क्या तुम कुछ भी अक्ल नहीं रखते?”","उनहों ने कहा \"जला डालो इसको और हिमायत करो अपने खुदाओं की अगर तुम्हें कुछ करना है\"","हमने कहा \"ऐ आग, ठंडी हो जा और सलामती बन जा इब्राहिम पर\"","वो चाहते थे के इब्राहिम के साथ बुराइयां करें मगर हमने उनको बुरी तरह नाकाम करदिया","और हमने उसे और लुट को बचा कर सर-जमीन की तरफ निकल ले गए जिसमें हमने दुनिया वालों के लिए बरकतें रखी हैं","और हमने उसे इशाक अता किया और याकूब उसपर मजीद, और हर एक को सालेह (नेक) बनाया","और हमने उनको इमाम बना दिया जो हमारे हुकुम से रहनुमाई करते थे और हमने उन्हें वही (रहस्योद्घाटन) के ज़रिये नीक कामोन की और नमाज़ क़याम करने की और ज़कात देने की हिदायत की, और वो हमारे इबादत गुज़ार थे","और लूट को हमने हुकुम और इल्म बख्शा और हमें बस्ती से बचाकर निकाल दिया जो बदकारियां करती थी। दर हकीकत वो बड़ी ही बुरी, फासीक़ क़ौम थी","और लुट को हमने अपनी रहमत में दाख़िल किया, वो साले लोगों में से था","और यही नियामत हमने नूह को दी, याद करो जबके सब से पहले उसने हमें पुकारा था, हमने उसकी दुआ कबूल की और उसके घर वालों को करब-ए-अज़ीम (बड़ी विपत्ति) से नजात दी","और उस क़ौम के मुक़ाबले में उसकी मदद की जिसने हमारी आयत को झूठला दिया था। वो बदे बुरे लोग थे, हमने उन सबको डराया (डूब दिया) करदिया","और इसी नियामत से हमने दाऊद और सुलेमान को सरफराज किया। याद करो वो मौका जबके वो दोनो एक खेत (खेत) के मुक़द्दमे में फैसला कर रहे थे जिसमें रात के वक्त दूसरे लोगों की बकरियां (बकरियां) पतली हो गईं (रात को भटक ​​गईं), और हम उनकी अदालत खुद देख रहे थे","हमें वक्त हमें सही फ़ैसला सुलेमान को समझा दिया, हलांके हुकुम और इल्म हमें दोनों ने ही अता किया था। दाऊद के साथ हमने पहाड़ों और परिंदों को मुसक्कर कर दिया था जो तस्बीह करते थे, इस फेल (काम) के करने वाले हम ही थे","और हमने उसको तुम्हारे फ़ैयदे के लिए ज़ीरा (कवच के कोट) बनाने की सनत (शिल्प) सिखा दी थी, ता-के तुमको एक दूसरा कि मार से बचे, फिर क्या तुम शुक्र गुज़ार हो","और सुलेमान के लिए हमने तेज़ हवा को मुस्कुरा कर दिया था जो उसके हुकुम से उस सर-ज़मीन की तरफ चलती थी जिसमें हमने बरकतें रखी हैं। हम हर चीज़ का इल्म रखने वाले थे","और शयातीन में से हमने ऐसे बहुतों (कई) को उसका तबे बना दिया था जो उसके लिए घोटे (गोताखोरी) लगाते थे और इसके सिवा दूसरे काम करते थे, सब के निगरान में हम ही थे","और याही (होश-मंदी और हुकुम ओ इल्म की नियामत) हमने अय्यूब को दी थी। याद करो जबके उसने अपने रुब को पुकारा के \"मुझे बीमारी लग गई है और तू अरहम उर रहीमीन (सब से बढ़कर रहम करने वाला) है।\"","हमने उसकी दुआ क़बूल की और जो तकलीफ इस्तेमाल की थी उसको दूर कर दिया, और सिर्फ उसके एहल-ओ-अयाल ही उसको नहीं दिए बल्कि उसके साथ उतने ही और भी दिए, अपनी खास रहमत के तौर पर, और इस तरह के ये एक सबक हो इबादत गुज़ारों केलिए","और यही नियामत इस्माइल और इदरीस (हनोक) और धुल-किफ्ल (इसैया) को दी, के ये सब साबिर लोग (दृढ़ता का अभ्यास) थे","और उनको हमने अपनी रहमत में दखल किया के वो सालिहों (धर्मी लोगों) से कहा","और मछली वाले (यूनुस) को भी हमने नवाजा, याद करो जबके वो बिगड कर चला गया था और समझा था के हम उसपर गिरफ़्तार न करेंगे। आख़िर को उसने तारिकियों (अंधेरे) में पुकारा \"नहीं है कोई खुदा मगर तू, पाक है तेरी जात, बेशक मैंने कसूर किया\"","तब हमने उसकी दुआ क़बूल की और ग़म से उसको नजात बख्शी, और इसी तरह हम मोमिनो को बचा लिया करते हैं","और ज़कारिया को, जबके उसने अपने रब को पुकारा के \"ऐ परवरदिगार, मुझे अकेला ना छोड़, और बेहतर वारिस तो तू ही है\"","पास हमने उसकी दुआ क़बूल की और उसे यहया अता किया और उसकी बीवी को उसके लिए दुरूस्त करदिया, ये लोग नेकी के कामोन में दौड़-धूप करते थे और हमें रगड़ते थे (प्यार से) और खौफ के साथ पुकारते थे, और हमारे आगे झुके हुए थे","और वह खातून जिसने अपनी इस्मत (शुद्धता) की हिफाजत की थी, हमने उसके अंदर अपनी रूह से फूंका और उसके बेटे को दुनिया भर के लिए निशानी बना दिया","ये तुम्हारी उम्मत हकीकत में एक ही उम्मत है और मैं तुम्हारा रब हूं, पास तुम मेरी इबादत करो","मगर (ये लोगों की करस्तानी है के) इन्हों ने आपस में दीन को टुकड़े-टुकड़े कर डाला, सबको हमारी तरफ पलटना है","फिर जो नई अमल करेगा, इस हाल में के वो मोमिन हो, तो उसके काम की ना-कादरी ना होगी, और उसे हम लिख रहे हैं","और मुमकिन नहीं है कि जिस बस्ती को हमने हलाक कर दिया हो वो फिर पलट सके","यहां तक ​​के जब याजूज माजूज खोल दिए जाएंगे और हर बुलंदी से वो निकल पड़ेंगे","और वादा बार हक के पूरे होने का वक्त करीब आ लगेगा तो यकायक उन लोगों के दीधे फटे के फटे रह जाएंगे (निश्चित रूप से डरावनी दृष्टि से घूरते रहेंगे), जिन्हों ने कुफ्र किया था। कहेंगे “हाय हमारी चुदाई, हम इस चीज़ की तरफ से गफ़लत में पड़े हुए थे, बलके हम ख़तरा थे।”","बेशक तुम और तुम्हारे वो माबूद जिन्हें तुम पूजते हो, जहन्नुम का इंधन (ईंधन) हैं, वहीं तुमको जाना है","अगर ये वक्त खुदा होते तो वहां ना जाते, अब सबको हमेशा उसी में रहना है।\"","वहां वो फुनकारे मारेंगे (कराहना/दहाड़ना) और हाल ये होगा के उसमें कान पड़ी आवाज ना सुनायी देगी","रहे वो लोग जिनके लिए हमारी तरफ से भलाई का पहला ही फैसला हो चूका होगा, तो वो यकीनन उसे दूर रखके जाएंगे","उसकी सरसराहट तक ना सुनेंगे और वो हमेशा हमेशा अपने मन की बाती चीज़ों के दरमियान रहेंगे","वो इंतिहाई घबराहट का वक्त उनको जरा परेशान ना करेगा, और मलाइका बढ़ कर उनको हाथ हाथ लेंगे के \"ये तुम्हारा वही दिन है\" जिसका तुमसे वादा किया जाता था\"","वो दिन जबके आसमान को हम यूं लपेट कर रख देंगे जैसे तुममें आवारा लपेट दिए जाते हैं (कागज के पत्तों को एक लिखित स्क्रॉल में लपेटा जाता है) जिस तरह पहले हमने तकलीक की इब्तिदा की थी उसी तरह हम फिर उसका इरादा (उत्पन्न) करेंगे। येह एक वादा है हमारा ज़िम्मा, और ये काम हमें बाहर-हाल करना है","और ज़बूर में हम हिदायत के बाद ये लिख चुके हैं के ज़मीन के वारिस हमारे नए बंदे होंगे","इस में एक बड़ी खबर है इबादत गुजर लोगों के लिए","(ऐ मुहम्मद), हमने जो तुमको भेजा है तो ये दर-असल दुनिया वालों के हक में हमारी रहमत है","इनसे कहो, \"मेरे पास जो वही आती है वो ये है के तुम्हारा खुदा सिर्फ एक खुदा है, फिर क्या तुम सर-ए-इतात झुकते हो?\"","अगर वो मुंह फिरें तो कहदो \"मैंने अलल-ऐलान (खुले तौर पर) तुमको खबरदार कर दिया है। अब ये मैं नहीं जानता के वो चीज जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है करीब है या दूर","अल्लाह वो बातें भी जानता है जो बा-आवाज बुलंद कहती है और वो भी जो तुम छुपा कर करते हो","मैं तो ये समझता हूं के शायद ये (देर/देरी) तुम्हारे लिए एक फिट है और तुम्हें एक वक्त और खास तक के लिए मजा करने का मौका दिया जा रहा है”","(आखि-ए-कार) रसूल ने कहा “ऐ मेरे रब, हक के साथ फैसला करदे, और लोग, तुम जो बातें बनाते हो उनके मुकाबले में हमारा रुब-ए-रहमान ही हमारे लिए मदद का सहारा है।”","लोगन, अपने रब के गजब से बचो, हकीकत ये है के कयामत का ज़लज़ला बड़ी (हौलनाक) चीज़ है","जिस रोज़ तुम उसे देखोगे, हाल ये होगा के हर दूध पिलाने वाली अपने दूध पीते बच्चों से गाफिल हो जाएगी, हर हामिला (गर्भवती) का हमाल गिर जाएगा, और लोग तुमको मदहोश नज़र आएंगे, हालंके वो नशे में ना होंगे, बलके अल्लाह का अज़ाब ही कुछ ऐसा सच होगा","बाज़ लोग ऐसे हैं जो इल्म के बिना अल्लाह के बारे में बहस करते हुए हैं और हर शैतान ए सरकश की जोड़ी बनाने लगते हैं","हालंके उसके तो नसीब ही में ये लिखा है के जो उसको दोस्त बनाएगा उसे वो गुमराह करके छोड़ेगा और अज़ाब ए जहन्नुम का रास्ता दिखाएगा","लोगन, अगर तुम जिंदगी बाद ए मौत के बारे में कुछ शक है तो तुम्हें मालूम हो के हमने तुमको मिट्टी से पेदा किया है, फिर नुत्फ़े से, फिर खून के कपड़े से, फिर गोश्त की बोतल से जो शकल वाली भी होती है और शकल भी हो (ये हम इस बारे में बता रहे हैं) ता-के तुमपर हकीकत वाज़ेह करदें, हम जिस को चाहते हैं एक खास वक्त तक रेहमो (गर्भ) में रखते हैं, फिर तुमको एक बच्चे की सूरत में निकल लाते हैं, (फिर तुम्हें परवरिश करते हैं) ता-के तुम अपनी पूरी जवानी को पाहुंचो और तुम में से कोई पहले हाय वापस बुला लिया जाता है और कोई बेहतरीन उमर की तरफ फेर दिया जाता है, ता-के सब कुछ जाने के बाद फिर कुछ ना जाने। और तुम देखते हो के ज़मीन सुखी पड़ी है, फिर जहां हमने उसपर मेह बरसाया के यकायक वो फबक उठी और फूल गई और उसने हर क़िसम की ख़ुश मंज़र नबाअत (वनस्पति) उगलनी शुरी करदी","ये सब कुछ इस वजह से है कि अल्लाह ही हक़ है, और वो मुर्दों को ज़िंदा करता है, और वो हर चीज़ पर कादिर है","और ये (इस बात की दलील है) के क़यामत की घड़ी आकार रहेगी, इस में किसी शक्क की गुंजाईश नहीं, और अल्लाह जरूर उन लोगों को उठाएगा जो कब्रों में जा चुके हैं","बाज़ लोग ऐसे हैं जो किसी इल्म और हिदायत और रोशनी बख्शने वाली किताब के बिना, गार्डन अकडे हुए","खुदा के बारे में झगड़े हैं, ता-के लोगों को राह ए खुदा से भटका दें। ऐसे शक्स के लिए दुनिया में रुसवाई है और कयामत के रोज़ उसको हम आग के अज़ाब का मजा चखाएंगे","ये है तेरा वो मुस्तकबिल (भविष्य) जो तेरे अपने हाथों ने तेरे लिए तैयार किया है, वरना अल्लाह अपने बंदों पर ज़ुल्म करने वाला नहीं है","और लोगों में कोई ऐसा है जो किनारे पर रह कर अल्लाह की बंदगी करता है, अगर फ़ैयदा हुआ तो मुतमइन होगया और जो कोई मुसीबत आ गई तो उल्टा फिर गया। उसकी दुनिया भी गई और आखिरी भी, ये है सारा खसरा (नुकसान/नुक्सान)","फिर वो अल्लाह को छोड़ कर उनको पुकारता है जो ना उसको नुक्सान पहुंचा सकता है ना फ़ायदा, ये है गुमराही की इंतेहा","वो उनको पुकारता है जिनका नुक्सान उनके नाफ़े (फ़ैयदा) से करीब तार है, बख्तरीन है हमारा मौला (अभिभावक) और बद्तरीन है उसका रफीक (साथी)","(इस्के बराक) अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए और जिन्न ने नेक अमल किया, यकीनन ऐसी जन्नत में दखल करेगा जिनका कोई मतलब नहीं रही होंगी। अल्लाह करता है जो कुछ चाहता है","जो शक्स ये गुमान रखता हो के अल्लाह दुनिया और आख़िरत में उसकी कोई मदद न करेगा उसे चाहिए के एक रस्सी (रस्सी) के ज़रीए आसमान तक पहुंच कर शिगाफ़ लगाए (इसमें एक छेद कर दो), फिर देख ले के आया उसकी तदबीर किसी ऐसी चीज़ को रद्द कर सकती है जो उसको नागावार है","ऐसी ही खुली खुली बातों के साथ हमने कुरान को नाज़िल किया है, और हिदायत अल्लाह जिसे चाहता है देता है","जो लोग ईमान लाए, और जो यहुदी हुए, और सबाई (सबाएंस), और नसारा, और माजूस, और जिन लोगों ने शिर्क किया, उन सब के दरमियान अल्लाह कयामत के रोज फैसला करेगा। हर चीज़ अल्लाह की नज़र में है","क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह के आगे सर-ब-सुजूद है वो सब जो आसमान में हैं और जो ज़मीन में हैं, सूरज और चाँद और तारे और पहाड़ और दरख्त और जानवर और बहुत से इंसान और बहुत से वो लोग भी जो अज़ाब के मुस्तहिक हो चुके हैं? और जिसे अल्लाह ज़लील-ओ-ख़्वार करदे उसे फिर कोई इज़्ज़त देने वाला नहीं है। अल्लाह करता है जो कुछ चाहता है","ये दो फरीक हैं जिनके दरमियान अपने रब के मामले का झगड़ा है। उनमें से वो लोग जिन्हों ने कुफ्र किया है उनके लिए आग के लिबास काटे जा चुके हैं, उनके सरों (सिरों) पर खौलता (उबलता) हुआ पानी डाला जाएगा","जिसकी उनकी खालें (खालें) ही नहीं पित के अंदर तक गल (पिघल) जाएंगी","और उनकी खबर लेने के लिए लोहे (लोहे) के गुर्ज़ (गदाएं) होंगे","जब कभी वो घबरा कर जहन्नुम से निकलेंगे की कोशिश करेंगे फिर उसमें ढकेल दिए जाएंगे के चक्खो अब जलने की सजा का मजा","(दूसरी तरफ) जो लोग ईमान लाए और जिन्हों नेइक अमल किए उनको अल्लाह ऐसी जन्नत में दखल करेगा जिनके बारे में खास बातें होंगी, वहां वो जल्द ही के साथ रहेंगे और उनके लिबास रेशम के होंगे","उनको पाकीजा बात कबूल करने की हिदायत बख्शी गई और उन्हें खुदे सतुदा सिफ़्फ़त (सभी प्रशंसनीय) का रास्ता दिखाया गया","जिन लोगों ने कुफ़्र किया और जो (आज) अल्लाह के रास्ते से रोक रहे हैं और उस मस्जिद ए हरम की ज़ियारत में माने हैं जिसे हमने सब लोगों के लिए बनाया है, जिसमें मुकामी बशिंदों और बहार से आने वालों के हुकूक बराबर हैं, (उनकी रवीश) यकीनन सज़ा की मुस्तहक़ है), इस (मस्जिद ए हरम) में जो भी रस्ती से हटकर (धार्मिकता से भटकना) ज़ुल्म का तरीक़ा इख्तियार करेगा उसे हम दर्दनक अज़ाब का मजा दिखाएंगे","याद करो वो वक्त जब हमने इब्राहीम के लिए इस घर (खाने काबा) की जगह तजवीज की थी (इस हिदायत के साथ) के “मेरे साथ किसी चीज़ को शरीक न करो, और मेरे घर को तवाफ़ करने वालों और क़याम वा रुकु व सुजूद करने वालों के लिए पाक रखो","और लोगों को हज के लिए इज़ान ए आम (उद्घोषणा) दे दो के वो तुम्हारे पास हर दर दराज़ मुकाम से पैदल और ऊंटों (ऊंटों) पर सवार आएं","ता-के वो फ़ैयदे देखें जो यहां उनके लिए रक्खे गए हैं, और चांद मुकर्रर दिनों में उन जानवरों पर अल्लाह का नाम लें जो उन्होंने उन्हें बख्शे हैं, खुद भी खाएं और तंग-दस्त मोहताज को भी दें","फिर अपना मेल-कुचेल (गंदगी) दरवाज़े करें और अपनी नज़रें (मन्नतें) पूरी करें, और हमारे क़दीम (प्राचीन) घर का तवाफ़ करें","ये था (तामीर ए काबा का मकसद) और जो कोई अल्लाह की क़याम करदा हुरमतों (पवित्रता) का एहतमाम करे तो ये उसके रब के नाज़दीक खुद उसी के लिए बेहतर है। और तुम्हारे लिए मवेशी (मवेशी) जानवर हलाल किए गए, मा सिवा उन चीज़ों के जो तुम्हें बतायी जा चुकी हैं। मूर्तियों की गंदगी से बचो, झूठी बातों से परहेज़ करो","यकसु होकर अल्लाह के बंदे बनो, उसके साथ किसी को शरीक ना करो और जो कोई अल्लाह के साथ शिर्क करे तो गोया वो आसमां से गिर गया, अब या तो उसे परिंदे उचक ले जाएंगे या हवा उसको ऐसी जगह ले जा कर फेंक देगी जहां उसके चिल्लाए उध (टुकड़ों में बिखर जाएगा) जाएंगे","ये है असल मामला (इसे समझ लो), और जो अल्लाह के मुकर्रर करदा शायर (पवित्रता) का एहतराम करे तो ये दिलों के तकवा से है","तुम्हें एक वक्त ए मुकर्रर तक उन (हादी के जानवरों) से फैयदा उठाने का हक़ है फिर उन (के कुर्बान करने) की जगह उसी क़दीम घर के पास है","हर उम्मत के लिए हमने कुर्बानी का एक कायदा मुकर्रर करदिया है ता-के (उस उम्मत के लोग) उन जानवरों पर अल्लाह का नाम लें जो हमें बख्शे हैं (मुखतलिफ़ तरीक़ों के अंदर) मकसद एक ही है)। पास तुम्हारा खुदा एक ही खुदा ही है और उसी के तुम मुती ए फरमान बनो। और ऐ नबी, बशारत दे दे अजीजाना (विनम्र) रवीश इख्तियार करने वालों को","जिनका हाल ये है कि अल्लाह का जिक्र सुनते हैं तो उनके दिल कानप उठते हैं, जो मुसीबत भी अनपर आती है उसपर सब्र करते हैं, नमाज कायम करते हैं, और जो कुछ रिज्क हमने उनको दिया है उसमें से खर्च करते हैं","और (कुर्बानी के) ऊंटों (ऊंटों) को हमने तुम्हारे लिए शहर-अल्लाह (अल्लाह के प्रतीक) में शामिल किया है, तुम्हारे लिए उन्हें बुलाया है। पस उन्हें खड़ा करके अनपर अल्लाह का नाम लो, और जब (कुर्बानी के बाद) उनकी पीठ जमीन पर टिक जाए तो उनसे खुद भी खाओ और उनको भी खिलाओ जो कनात किए बैठे हैं (संतुष्ट लोग) और उनको भी जो अपनी हाजत पेश करें। जानवरों को हमने इस तरह तुम्हारे लिए मुस्कुरा दिया है ता-के तुम शुक्रिया अदा करो","ना उनके गोश्त अल्लाह को पहचानते हैं ना खून, मगर उसे तुम्हारा तक़वा पहचानता है। उसने तुम्हारे लिए इस तरह मुसक्कर किया है ता-के उसकी बख्शी हुई हिदायत पर तुम उसकी तकबीर करो। और (ऐ नबी), बशारत देदो नीकुकर लोगों को","यकीनन अल्लाह मुदाफ़ियात (बचाव) करता है उन लोगों की तरफ से जो ईमान लाए हैं। यकीनन अल्लाह कोई खैन (विश्वासघाती) काफिर ए नियामत को पसंद नहीं करता","इजाज़त दे दी गई उन लोगों को जिनके खिलाफ जंग की जा रही है, क्योंकि वो मजलूम हैं, और अल्लाह यकीनन उनकी मदद पर कादिर है","ये वो लोग हैं जो अपने घर से ना-हक़ निकल गए सिर्फ इस कसूर पर के वो कहते थे \"हमारा रब अल्लाह है\"। अगर अल्लाह लोगों को एक दूसरे के ज़रिये दफा न करता रहे तो खानकाहें (मठ), और गिरजा (चर्च) और मबाद (आराधनालय) और मस्जिदें, जिन में अल्लाह का कसरत से नाम लिया जाता है, सब मिसमार (ध्वस्त) कर डाली जायेंगी। अल्लाह जरूर उन लोगों की मदद करेगा जो उसकी मदद करेंगे। अल्लाह बड़ा ताक़तवार और ज़बरदस्त है","ये वो लोग हैं जिनमें अगर हम ज़मीन में इक़्तेदार बख्शें तो वो नमाज़ क़याम करेंगे, ज़कात देंगे, मारूफ़ (भलाई) का हुकुम देंगे और मुनकर (बुराई) से मन करेंगे और तमाम मामले का अंजाम अल्लाह के हाथ में है","(ऐ नबी), अगर वो तुम्हें झुठलाते हैं तो उनसे पहले क़ौम ए नूह और अद और समूद","और क़ौम ए इब्राहीम और क़ौम ए लुट","और एहले मद्यन भी झुटला चुके हैं और मूसा भी झुटलाये जा चुके है. उन सब मुनकिरेन को मैंने पहले मोहलत दी, फिर पकड़ लिया। अब देखलो के मेरी उकुबत (सजा) कैसी थी","कितनी ही खतरनाक बस्तियां हैं जिनको हमने तबाह किया है और आज वो अपनी छतों (छतों) पर उल्टी पड़ी हैं, कितने ही कुवें (कुएं) बेकार और कितने ही क़सर (महल) खंडार बनी हुए हैं","क्या ये लोग ज़मीन में चले फिर नहीं हैं के इनके दिल समझने वाले और इनके कान सनी वाले होते? हकीकत ये है के आँखें अँधी नहीं होती मगर वो दिल अँधे हो जाते हैं जो सीने में हैं","ये लोग अज़ाब के लिए जल्दी मचा रहे हैं। अल्लाह हरगिज अपने वादे के खिलाफ न करेगा, मगर तेरे रब के हां का एक दिन तुम्हारे शुमार के हजार बरस के बराबर हुआ करता है","कितनी ही बस्तियां हैं जो जालिम थी, मैंने उनो पहले मोहलत दी, फिर पकड़ लिया और सबको वापस तो मेरे पास ही आना है","(ऐ मुहम्मद), कहदो के \"लोगन, मैं तो तुम्हारे लिए सिर्फ वो शक्स हूं जो (बुरा वक्त आने से पहले) साफ साफ खबरदार करने वाला हूं","फिर जो ईमान लाएंगे और नेक अमल करेंगे उनके लिए मगफिरत है और इज्जत की रोजी","और जो हमारी आयत को नीचा दिखाने की कोशिश करेंगे वो दोज़ख के यार हैं","और (ऐ मुहम्मद) तुमसे पहले हमने ना कोई रसूल ऐसा भेजा है ना नबी (जिसके साथ ये मामला ना पेश आया हो के) जब उसने तमन्ना की, शैतान उसकी तमन्ना में ख़लाल अंदाज़ हो गया है तारा जो कुछ भी शैतान खलाल अंदाज़ियां करता है अल्लाह उनको मिटा देता है और अपनी आयत को पुख्ता करता है। अल्लाह अलीम है और हकीम","(वो इस लिए ऐसा होने देता है) ता-के शैतान की डाली हुई ख़राबी को फ़ितना बना दे उन लोगों के लिए जिनके दिलों को [निफ़क़ का (पाखंड)] रोग लगा हुआ है और जिनका दिल खोता है। हकीकत ये है के ये जालिम लोग इनाद (दुश्मनी) में बहुत दूर निकल गए हैं","और इलम से बेहरमंद लोग जान लें के ये हक है तेरे रब की तरफ से और वो इसपर ईमान ले आएं और उनके दिल इसके आगे झुक जाएं। यकीनन अल्लाह ईमान लाने वालों को हमेशा सीधा रास्ता दिखा देता है","इनकार करने वाले तो इसकी तरफ से शक्क ही में पड़े रहेंगे यहां तक ​​के या तो उन्पर कयामत की घड़ी अचानक आ जाए, या एक मनहूस दिन का अज़ाब नाज़िल हो जाए","हमें रोज़ बादशाही अल्लाह की होगी और वो उनका दरमियान फ़ैसला कर देगा। जो ईमान रखने वाले और अमल ए सालेह करने वाले होंगे वो नियामत भारी जन्नत में जाएंगे","और जिन्होन ने कुफ्र किया होगा और हमारी आयत को झुटलाया होगा उनके लिए रुस्वाकुन अज़ाब होगा","और जिन लोगों ने अल्लाह की राह में हिजरत की, फिर क़त्ल कर दिए गए या मर गए, अल्लाह उनको अच्छा रिज्क देगा और यकीनन अल्लाह हाय बेहतरीन राज़िक है","वो उनहें ऐसी जगह पहचानेगा जिसे वो खुश हो जायेंगे। बेशक अल्लाह अलीम (सभी जानने वाले) और हलीम (सबसे सहनशील) है","ये तो है उनका हाल, और जो कोई बदला ले, वैसा ही जैसा उसका साथ दिया गया, और फिर उसपर ज़्यादा हो गया, अल्लाह उसकी मदद जरूर करेगा। अल्लाह माफ करें वाला और दरगुज़ार करने वाला है","ये इस लिए के दिन और दिन से रात निकलने वाला अल्लाह ही है और वो सामी (सनी वाला/सबकुछ सुनता है) ओ बेसिर (देखने वाला/सबकुछ देखता है) है","ये इसलिए के अल्लाह ही हक़ है और वो सब बातिल हैं जिन्हे अल्लाह को छोड़ कर ये लोग पुकारते हैं। और अल्लाह ही बालादस्त (सर्वोच्च) और बुज़ुर्ग (सर्वोच्च) है","क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह आसमान से पानी बरसाता है और उसकी बदौलत ज़मीन सर-सब्ज़ हो जाती है? हकीकत ये है के वो लतीफ़ ओ खबीर है (हर बात से पूरी तरह अवगत)","उसका है जो कुछ आसमान में है और जो कुछ ज़मीन में है। बेशाक वही गनी (सभी-पर्याप्त/सभी इच्छाओं से मुक्त) ओ हमीद (प्रशंसनीय) है","क्या तुम देखते नहीं हो के उसने वो सब कुछ तुम्हारे लिए मुस्कुरा कर रखा है जो ज़मीन में है, और उसने कश्ती को क़ैद का पाबंद बनाया है के वो उसके हुकुम से समंदर में चलती है, और वही आसमान को इस तरह थामे हुए के उसके इज़ान के बिना वो ज़मीन पर नहीं गिर सकता? वाक़िया ये है के अल्लाह लोगों के हक में बड़ा शफीक (बहुत दयालु) और रहीम (दयालु) है","वही है जिसने तुम्हें जिंदगी बख्शी है, वही तुमको मौत देता है और वहीं फिर तुमको जिंदा करेगा, सच ये है के इंसान बड़ा ही मुन्किर ए हक है","हर उम्मत के लिए हमने एक तारीख-ए-इबादत मुकर्रर किया है जिसकी वो जोड़ी बनाती है, पास (ऐ मुहम्मद), वो इस मामले में तुमसे झगड़ा ना करें, तुम अपने रब की तरफ दावत दो, यकीनन तुम सीधे रास्ते पर हो","और अगर वो तुमसे झगड़े तो कहदो के \"जो कुछ तुम कर रहे हो अल्लाह को ख़ूब मालूम है","अल्लाह क़यामत के रोज़ तुम्हारे दरमियान उन सब बातों का फैसला कर देगा जिन में तुम इख्तिलाफ करते रहोगे\"","क्या तुम नहीं जानते कि आसमां ओ ज़मीन की हर चीज़ अल्लाह के इलम में है? सब कुछ एक किताब में दर्ज है। अल्लाह केलिए ये कुछ भी मुश्किल नहीं है","ये लोग अल्लाह को छोड़ कर उनकी इबादत कर रहे हैं जिनके लिए ना तो उसने कोई सनद (अधिकार) नाज़िल की है और ना ये खुद उनके बारे में कोई इलम रखते हैं। जालिमों के लिए कोई मददगार नहीं है","और जब इनको हमारी साफ आयतें सुनायी जाती हैं तो तुम देखते हो के मुनकिरेन ए हक के चेहरे बिगाड़ने लगते हैं और ऐसा महसूस होता है के अभी वो उन लोगों पर टूट पड़ेंगे जो उन्हें हमारी आयतें सुनाते हैं। इनसे कहो \"मैं बताऊँ तुम्हें के लिए ऐसी बढ़िया चीज़ क्या है? आग, अल्लाह ने उसका वादा उन लोगों के हक़ में कर रखा है जो क़बूल ए हक़ से इंकार करें, और वो बहुत ही बुरा ठिकाना है\"","लोगन, एक मिसाल दी जाती है, गौर से सुनो, जिन माबूदों को तुम खुदा को चोद कर पुकारते हो वो सब मिलकर एक मक्खी (उड़ना) भी चुकाना चाहते हैं तो नहीं कर सकते, अगर मक्खी उनसे कोई चीज छीन ले जाए तो वो उन्हें चूड़ा भी नहीं दे सकते। मदद चाहने वाले भी कमज़ार और जिनसे मदद चाही जाती है वो भी कमज़ार","इन लोगों ने अल्लाह की कदर ही ना पहचानी जैसा के उसकी पहचान का हक़ है, वक़िया ये है के कुव्वत और इज़्ज़त वाला तो अल्लाह ही है","हकीकत ये है के अल्लाह [अपने फरामिन की तरसिल के लिए (अपने फरमानों को बताने के लिए)] मलिका (फरिश्ते) में से भी पैगाम रसन मुंतखब (चुनें) करता है और इंसानों में भी। वो सामी (सनी वाला) और बेसिर (देखने वाला) है","जो कुछ उनके सामने है उसे भी वो जानता है और जो कुछ उनसे ओझल (छिपा/पीछे) है उसे भी वो वाकिफ है, और सारे मामले उसकी तरफ रूजू होते हैं","ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, रुकू और सजदा करो, अपने रब की बंदगी करो, और कोई काम करो, शायद के तुमको फलाह नसीब हो","अल्लाह की राह में जिहाद करो जैसा के जिहाद करने का हक है, उसने तुम्हें अपने काम के लिए चुन लिया है और दीन में तुमको कोई तंगगी नहीं रक्खी। क़याम हो जाओ अपने बाप इब्राहीम की मिल्लत पर। अल्लाह ने पहले भी तुम्हारा नाम \"मुस्लिम\" रखा था और वह (कुरान) में भी (तुम्हारा यही नाम है) ता-के रसूल तुमपर गवाह हो और तुम लोग गवाह हो। पस नमाज़ क़याम करो, ज़कात दो और अल्लाह से वाबिस्ता हो जाओ (अल्लाह को मजबूती से पकड़ो), वह तुम्हारा मौला (अभिभावक), बहुत ही अच्छा है वह मौला और बहुत ही अच्छा है वह मददगार","यकीनन फलाह पाई है ईमान लानी वालों ने जो","अपनी नमाज़ में ख़ुश इख़्तियार करते हैं (विनम्रता के साथ सलात)","लग्वियत (व्यर्थ चीज़ें) से दूर रहते हैं","ज़कात के तारिके पर आमिल होते हैं","अपनी शर्मगाहों की हिफ़ाज़त करते हैं","सिवाए अपनी बिवियों के और उन औरतों के जो उनका दूध ए यमीन में होन (दाहिना हाथ रखता है) के अनपार (महफूज ना रखने में) वो काबिल ए मालामत नहीं हैं","अलबत्ता जो उसके अलावा कुछ और चाहे वही ज्यादती करने वाले हैं","अपनी अमानतन (भरोसे) और अपने अहद ओ पैमान (वादे) का पास रखते हैं","और अपनी नमाज़ की मुहाफ़िज़त (हिफ़ाज़त) करते हैं","यहीं लोग वो वारिस हैं","जो मीरास में फिरदौस पाएंगे और उसमें हमेशा रहेंगे","हमने इंसान को मिट्टी के सात कहा मिट्टी) से बनाया","फिर उसे एक महफूज जगा टपकी हुई बूंद में तबदील किया","फिर हमें बूंद को लोठडे की शक्ल दी, फिर लोठडे को बोटी बना दिया, फिर बोटी की हड्डियां (हड्डियां) बनाईं, फिर हददियों पर गोश्त चढ़ाया। फिर उसे एक दूसरा ही मख़लूक़ बना खड़ा किया। पास बड़ा ही बा-बरकत है अल्लाह, सब कारीगरों से अच्छा कारीगर","फिर इसके बाद तुमको जरूर मरना है","फिर कयामत के रोज यकीनन तुम उठोगे","और तुम्हारे ऊपर हमने सात (सात) रास्ते बनाए, तख़लीक के काम से हम कुछ ना-बलाद ना थे (हम (अपनी) रचना से कभी भी बेपरवाह नहीं होते हैं","और आसमान से हमने ठीक हिसाब के मुताबिक़ एक खास मुक़द्दर में पानी उतारा और उसको ज़मीन में ठहरा दिया। हम उसे जिस तरह चाहें गायब कर सकते हैं","फिर इस पानी के ज़रिये से हमने तुम्हारे लिए खजूर और अंगूर के बाग़ पैदा कर दिये, तुम्हारे लिए बाग़ों में बहुत से लज़ीज़ फल हैं और उनसे तुम रोज़ी हासिल करते हो","और वो दरख्त भी हमने खरीदा जो तूर-ए-सीना (माउंट सिनाई) से निकलता है, तेल (तेल) भी लिए हुए उगता है और खाने वालों के लिए सालान भी","और हकीकत ये है के तुम्हारे लिए मवेशियों में भी एक सबक है उनके पैठों (पेट) में जो कुछ है उसी में से एक चीज हम तुममें पिलाते हैं, और तुम्हारे लिए उनमें बहुत से दूसरे फायदे भी हैं","उनको तुम खाते हो और उन्पार और कश्तियों पर सवार भी हो जाते हो","हमने नूह को उसकी क़ौम की तरफ भेजा, उसने कहा “ ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारे लिए कोई और माबूद नहीं है, क्या तुम डरते नहीं हो?”","उसकी क़ौम के जिन सरदारों ने मन्ने से इंकार किया वो कहने लगे के \"ये शक्स कुछ नहीं है मगर एक बशर (इंसान) तुम ही जैसा। इसकी गरज़ ये है के तुमपर बरतारी (श्रेष्ठता) हासिल करे। अल्लाह को अगर भेजा होगा तो फरिश्ते भेजता.ये बात तो हमने कभी अपने बाप दादा के वक़्त में सुनी ही नहीं (के बशर रसूल बनकर आए)","कुछ नहीं, बस इस आदमी को ज़रा जुनून लहक हो गया है, कुछ मुद्दत और देखलो [( शायद इफ़ाक़ा हो जाए)(हो सकता है वह ठीक हो गया हो)]\"","नहीं ने कहा \"परवरदिगार, इन लोगों ने जो मेरी तकज़ीब की है इसपर अब तू ही मेरी नुसरत फरमा।\"","हमने उसपर वही की के \"हमारी निगरानी में और हमारी वही के मुताबिक कश्ती (सन्दूक) तैयार कर। फिर जब हमारा हुकुम आ जाए और तन्नूर उबल पड़ा तो हर क़िस्म के जानवरों में से एक एक जोड़ा लेकर उसमें सवार हो जा, और अपने एहल ओ अयाल\" को भी साथ ले, सिवाय उनके जिनके खिलाफ पहला फैसला हो चुका है, और जालिमों के मामले में मुझसे कुछ ना कहना, ये अब गरक (डूब/डूबना) होने वाले हैं","फिर जब तू अपने साथियों के साथ कश्ती पर सवार हो जाए तो कह, शुक्र है हमें खुदा का जिसने हमें ज़ालिम लोगों से निजात दी","और कह, परवरदिगार, मुझको बरकत वाली जगह उतार और तू बेहतरीन जगह देने वाला है।”","इस क़िस्से में बड़ी निशानियां हैं और आजमाइश तो हम करके ही रहते हैं","इनके बाद हमने एक दूसरे दौर की क़ौम उठाई","फिर उनमें खुद उनकी क़ौम का एक रसूल भेजा (जिसने उन्हें दावत दी) के अल्लाह की बंदगी करो, तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई और माबूद नहीं है, क्या तुम डरते नहीं हो","उसकी क़ौम के जिन सरदारों ने मन्ने से इनकार किया और आख़िरत की पेशी को झुटलाया, जिनको हमने दुनिया की ज़िंदगी में आसुदा कर रखा था, वो कहने लगे “ये शक्स कुछ नहीं है मगर एक बशर तुम ही जैसा, जो कुछ तुम खाते हो वही ये खाता है और जो कुछ तुम पीते हो वही ये पीटा है","अब अगर तुमने अपने ही जैसा एक बशर की इताअत क़बूल कर ली तो तुम घाटे ही में रहोगे","ये तुम्हें इत्तिला देता है के जब तुम मर कर मिटटी हो जाओगे और हदियों का पंजर रह जाओगे हमें वक्त तुम (कबरों से) निकल जाओगे","बैद (दूर/असंभव), बिल्कुल बैद (असंभव) है ये वादा जो तुमसे किया जा रहा है","जिंदगी कुछ नहीं है मगर बस यहीं दुनिया की जिंदगी। यहीं हमको मरना और जीना है और हम हरगिज उठाए जाने वाले नहीं हैं","ये शक्स खुदा के नाम पर महज़ झूठ गड़बड़ रहा है और हम कभी इसके मन्ने वाले नहीं हैं।","रसूल ने कहा \"परवरदिगार, इन लोगों ने जो मेरी तकज़ीब की है, इसपर अब तू ही मेरी नुसरत फरमा\"","जवाब में इरशाद हुआ \"करीब है वो वक्त जब ये अपने किये पर पछताएंगे\"","आखिर ए कार ठीक ठीक हक के मुताबिक़ एक हंगामा ए अज़ीम ने उनको आ लिया और हमने इनको कचरा बना कर फेंक दिया। दूर हो जालिम क़ौम","फिर हमने उनके बाद दूसरी क़ौम उठाई","कोई क़ौम ना अपने वक़्त से पहले ख़त्म हुई और ना उसके बाद ठहर साकी","फिर हमने पै डर पै अपने रसूल भेजे। जिस कौम के पास भी उसका रसूल आया, उसने उसे झुठलाया, और हम एक के बाद एक कौम को हलाक करते चले गए हटा के उनको बस अफसाना ही बना कर चोदा, फिटकर उन लोगों पर जो ईमान नहीं लाते","फिर हमने मूसा और उसके भाई हारून को अपनी निशानियां और खुली सनद के साथ फिरौन और उसके अयान सल्तनत की तरफ भेजा","मगर उनहों ने तकब्बुर (अहंकार) किया और बड़ी डंकी ली","कहने लगे \"क्या हम अपने ही जैसे दो आदमियों पर ईमान ले आयें? और आदमी भी वो जिनकी क़ौम हमारी बन्दी (ग़ुलाम) है”","पास उन्होन ने दोनों को झुटला दिया और हलाक होने वालों में जा मिले","और मूसा को हमने किताब अता फरमायी ता-के लोग उसे रहनुमायी हासिल करें","और इब्ने मरियम और उसकी मां को हमने एक निशानी बनाया और उनको एक साथ मुर्तफा (पठार पर आश्रय) पर रक्खा जो इत्मिनान की जगह थी और चश्मे उसमें जारी थे","ऐ पैगंबर, खाओ पाक चीज और अमल करो सालेह, तुम जो कुछ भी करते हो, मैं उसको ख़ूब जानता हूँ","और ये तुम्हारी ये उम्मत एक ही उम्मत है और मैं तुम्हारा रब हूं, पास मुझ से तुम डरो","मगर बाद में लोगों ने अपने दीन (धर्म) को आपस में टुकड़े-टुकड़े कर लिया, हर गिरह के पास जो कुछ है उसमें वो मगन है","अच्छा, तो छोड़ो इन्हें, डूब रहे हैं अपनी गफलत में एक वक्त ए खास तक","क्या ये समझते हैं के हम जो इन्हें माल ओ औलाद से मदद दिए जा रहे हैं","तो गोया इन्हें भलइयां देने में सरगर्म हैं? नहीं, असल मामले का इन्हें शौर नहीं है","जो अपने रब के खौफ से डरे रहते हैं","जो रुब की आयत पर ईमान लाते हैं","जो अपने रुब के साथ किसी को शरीक नहीं करते","और जिनका हाल ये है के देते हैं जो कुछ भी देते हैं और दिल उनके इस ख्याल से कांपते रहते हैं के हमें अपने रुब की तरफ पलटना है","भलाईयों की तरफ दौड़ने वाले और सबाकत करके उनको पा लेने वाले तो डर-हकीकत वो लोग हैं","हम किसी शक्स को उसकी मक़दर (ताकत) से ज़्यादा की तकलीफ़ नहीं देते और हमारे पास एक किताब है जो (हर एक का हाल) ठीक ठीक बता देने वाली है, और लोगों पर ज़ुल्म बाहर-हाल नहीं किया जाएगा","मगर ये लोग इस मामले से बे-ख़बर हैं और इनके अमल भी इस तरीक़े से (जिसका ऊपर ज़िक्र किया गया है) मुख़्तलिफ़ हैं। वो अपने ये करूट किये चले जायेंगे","यहां तक ​​के जब हम उनके अय्याशों (समृद्ध लोगों/आसुदा हाल) को अज़ाब में पकड़ लेंगे तो फिर वो डकराना शुरू कर देंगे (चिल्लाना/रोना शुरू कर देंगे)","अब बंद करो अपनी फरियाद ओ फुगां, हमारी तरफ से अब कोई मदद तुम्हें नहीं मिलनी","मेरी आयतें सुनाई जाती थीं तो तुम (रसूल की आवाज सुनते ही) उलटे पांव भाग निकलते थे","अपने घमंड में उसको खातिर ही में ना लाते थे, अपने चौपालों (बैठक स्थलों) में अनपार बातें चांट-ते (उपहास किया गया उसे) और बकवास किया करते थे","तो क्या इन लोगों ने कभी इस कलाम पर गौर नहीं किया? हां वो कोई ऐसी बात लाया है जो कभी इनके असलफ (पूर्वजों) के पास ना आई थी","हां ये अपने रसूल से कभी के वाकिफ ना थे के (अंजाना आदमी होने के लिए) उससे कहते हैं","हां ये बात के कयाल हैं के वो मजनूं [(जिन्न द्वारा)] है? नहीं, बल्के वो हक़ लाया है और हक़ ही इनकी अक्सरियत (सबसे) को नगावर है","और हक़ अगर कहीं इनकी ख्वाहिश के पीछे चलता तो ज़मीन और आसमान और इनकी सारी आबादी का निज़ाम दरहम बरहम हो जाता। नहीं, बलके हम उनका अपना ही जिक्र उनके पास लाए हैं और वो अपने जिक्र से मुंह मोड़ रहे हैं","क्या तू इनसे कुछ मांग रहा है? तेरे लिए तेरे रब का दीया ही बेहतर है और वो बेहतरीन राज़िक है","तू तो उनको सीधे रास्ते की तरफ बुला रहा है","मगर जो लोग आख़िरत को नहीं मानते वो राह ए रास्ते से हटना चाहते हैं","अगर हम इनपर रहम करें और वो तकलीफ जिस में आज कल ये मुब्तिला हैं दूर करदें तो ये अपनी सरकशी में बिल्कुल ही बहक जाएंगे","इनका हाल तो ये है के हमने उन्हें तकलीफ में मुब्तिला किया, फिर भी ये अपने रुब के आगे ना झुके और ना अजीजी (विनम्र) इख्तियार करते हैं","अलबत्ता जब नौबत यहां तक ​​पहुंच जाएगी के हम इनपर सख्त अजाब का दरवाजा खोल देंगे तो यकीन तुम देखोगे के उस हालात में ये हर खैर से मयौस हैं","वाह अल्लाह हाय तो है जिसने तुम्हें सनी और देखने की कुव्वतें दी और सोचने को दिल दिए, मगर तुम लोग कम ही शुक्रगुज़ार होते हो","वही है जिसने तुम्हें ज़मीन में फैलाया, और उसकी तरफ तुम समेट जाओगे","वही जिंदगी बक्शता है और वही मौत देता है, गर्दिश ए लयल (रात) ओ नहर (दीन) उसी के क़ब्ज़े क़ुदरत में है। क्या तुम्हारी समझ में ये बात नहीं आती","मगर ये लोग वही कुछ कहते हैं जो उनके पेशवा (पूर्वज) कह चुके हैं","ये कहते हैं \"क्या जब हम मर कर मिट्टी हो जाएंगे और हड्डियों का पंजर बन कर रह जाएंगे तो हमको फिर जिंदा\" करके उठाया जाएगा","हमने भी ये वादे बहुत सुनाए हैं और हमसे पहले हमारे बाप दादा भी सुनते रहे हैं।''","इनसे कहो, बताओ अगर तुम जानते हो, के ये ज़मीन और इसकी। सारी आबादी किसकी है","ये जरूर कहेंगे अल्लाह की, कहो फिर तुम होश में क्यों नहीं आते","इनसे पूछो, सातो (सात) आसमानो और अर्श-ए-अजीम का मालिक कौन है","ये जरूर कहेंगे अल्लाह, कहो फिर तुम डरते क्यों नहीं","इनसे कहो, बताओ अगर तुम जानते हो के हर चीज़ पर इक्तेदार किसका है? और कौन है वो जो पनाह देता है और उसके मुकाबले में कोई पनाह नहीं दे सकता","ये जरूर कहेंगे के ये बात अल्लाह ही के लिए है। कहो, फिर कहां से तुमको धोखा लगता है","जो अमर ए हक है वो हम इनके सामने ले आए हैं, और कोई शक्क नहीं के ये लोग झूठे हैं","अल्लाह ने किसी को अपना औलाद नहीं बनाया है और कोई दूसरा खुदा उसके साथ नहीं है। अगर ऐसा होता तो हर खुदा अपने ख़ल्क़ को लेकर अलग हो जाता, और फिर वो एक दूसरे पर चढ़ते। पाक है अल्लाह उन बातों से जो ये लोग बनाते हैं","खुले और छुपे का जाने वाला, वो बोलता है हमसे शिर्क से जो ये लोग तजवीज़ कर रहे हैं","(ऐ मुहम्मद) दुआ करो के \"परवरदिगार, जिस अज़ाब की इनको धमकी दी जा रही है वो अगर मेरी मौजुदगी में तू लाए","तो ऐ मेरे रब, मुझे जालिम लोगों में शामिल न करो\"","और हकीकत ये है के हम तुम्हारी आंखें के सामने ही वो चीज ले आने की पूरी कुदरत रखते हैं जिसकी धमकी हम उन्हें दे रहे हैं","(ऐ नबी), बुरे को इस तरह से दफा करो जो बेहतरीन हो जो कुछ बातें वो तुमपर बनाते हैं वो हमें खूब मालूम है","और दुआ करो के \"परवरदिगार, मैं शयातीन की उम्मीदों (वासवासों) से तेरी पनाह मांगता हूं","बल्के ऐ मेरे रब, मैं तो इसे भी तेरी पनाह मांगता हूं के वो मेरे पास आएं\"","(ये लोग अपनी करनी से बाज़ ना आएंगे) यहां तक ​​कि जब मेरे अंदर से किसी को मौत आ जाएगी तो कहना शुरू कर देगा के \"ऐ मेरे रब, मुझे उसकी दुनिया में वापस भेज दीजिए जिसे मैं छोड़ आया हूं","उम्मीद है के अब मैं जल्द अमल करूंगा\"। हरगिज़ नहीं, ये तो बस एक बात है जो वो बक रहा है। अब इन सब (मरने वालों) के पीछे एक बरज़ख (बाधा) हैयाल है दूसरी जिंदगी के दिन तक","फिर जून्ही के सुर (तुरही) फूंक दिया गया, उनके दरमियान फिर कोई रिश्ता ना रहेगा और ना वो एक दूसरे को पूछेंगे","हमारा वक्त जिनके पैडल (तराजू) भारी होंगे वही फलाह पाएंगे","और जिनके पैडले (स्केल) हल्के होंगे वही लोग होंगे जिन्हों ने अपने आप को घाटे में डाल लिया। वो जहन्नुम में हमेशा रहेंगे","आग उनके चेहरों की खाल चट जाएगी और उनके जबड़े बाहर निकल आएंगे","\"क्या तुम वही लोग नहीं हो के मेरी आयत तुम्हें सुनायी जाती थी तो तुम उन्हें झुलाते थे?\"","वो कहेंगे \"ऐ हमारे रब, हमारी बदबख्ती हम पर छा गई थी, हम वक्त गुमराह लोग थे","ऐ परवरदिगार, अब हमें यहां से निकल दे फिर हम ऐसा कसूर करें तो जालिम होंगे\"","अल्लाह ताला जवाब देगा \"दूर हो मेरे\" सामने से, पड़े रहो इसी में और मुझसे बात ना करो","तुम वही लोग तो हो के मेरे कुछ बंदे जब कहते थे के ऐ हमारे परवरदिगार, हम ईमान लाए, हमें माफ करदे, हमपर रहम कर, तू सब रहिमों से अच्छा रहीम है","तो तुमने उनका मजाक बना लीजिए, यहां तक ​​के उनकी जिद ने तुम्हें ये भी भुला दिया के मैं भी कोई हूं, और तुम उन पर हंसते रहोगे","आज उनके उस सब्र का मैंने ये फल दिया है के वही कामयाब है”","फिर अल्लाह ताला उनसे पूछेगा “बताओ, ज़मीन में तुम कितने साल रहेंगे?”","वो कहेंगे \" एक दिन या दिन का भी कुछ हिस्सा हम वहां ठहरे हैं, शुरू करने वालों से पूछ लीजिये\"","इरशाद होगा \"थोड़ी ही देर ठहरे हो ना, काश तुमने ये हमें वक्त जाना होता","क्या तुमने ये समझ रक्खा था के हमने तुम्हें फिजूल (बेकर) ही पेदा किया है और तुम्हें हमारी तरफ कभी पलटना ही नहीं है?”","पास बाला ओ बरतर है अल्लाह, बादशाह ए हकीकी, कोई खुदा उसके सिवा नहीं, मालिक है अर्श ए बुजुर्ग का","और जो कोई अल्लाह के साथ किसी और माबूद को पुकारे, जिसके लिए उसके पास कोई दलील नहीं, तो उसका हिसाब उसके रब के पास है। ऐसे काफिर कभी फलाह नहीं पा सकते","(ऐ मुहम्मद) कहो, \"मेरे रब दरगुज़र फ़रमा, और रहम कर, और तू सब रहिमों से अच्छा रहीम है\"","ये एक सूरत है जिसको हमने नाज़िल किया है, और इसने हमने फ़र्ज़ किया है, और इस में हमने साफ़ साफ़ हिदायत नाज़िल की है, शायद के तुम सबक लो","जानिया (व्यभिचारी) औरत ज़ानी मर्द, दोनों में से हर एक को सौ (सौ) कोड़े (लैश) मारो और इनपर तरस खाने का जज़्बा अल्लाह के दीन के मामले में तुमको दामनगीर (दया) ना हो अगर तुम अल्लाह ताला और रोज-ए-आखिर पर ईमान रखते हो, और इनको सज़ा देते वक्त एहले ईमान का एक गिरोह मौजुद रहे","ज़ानी (व्यभिचार का दोषी व्यक्ति) निकाह ना कैरी मगर जानिया के साथ या मुशरिक के साथ, और जानिया के साथ निकाह ना करे मगर जानी या मुशरिक। और ये हराम करदिया गया है एहले ईमान पर","और जो लोग पाक दामन औरतों पर तोहमत (इल्ज़म/बोहतन/बदनामी) लगायें, फिर चार (चार) गवाह लेकर ना आयें, उनको अस्सी (अस्सी) कोड़े (कोड़े) मारो, और उनकी शहादत कभी कबूल ना करो। और वो खुद ही फासीक हैं","सिवाय उन लोगों के जो इस हरकत के बाद ताइब (पश्चाताप) हो जाएं और इस्लाह कार्लें के अल्लाह जरूर (उनके हक में) गफूर ओ रहीम है","और जो लोग अपनी बीवी पर इल्जाम लगाएं और उनके पास खुद उनके अपने सिवा दूसरे कोई गवाह न हो तो उनमें से एक शक्स की शहादत (ये है के वो) चार मरतबा अल्लाह की कसम खा कर गवाही दे के वो (अपने इल्ज़म में) सच्चा है","और पंचवी (पांचवीं) बार कहे के उसपर अल्लाह की लानत हो अगर वो (अपने) इल्ज़ाम में) झूठा हो","और औरत से सज़ा इस तरह तल सकती है के वो चार मरतबा अल्लाह की कसम खा कर शहादत दे के ये शक्स (अपने इल्ज़ाम में) झूठा है","और पांचवी मरतबा कहे के हमें बंदी पर अल्लाह का गजब तोते अगर वो (अपने) इल्ज़म में) सच्चा हो","तुम लोगों पर अल्लाह का फ़ज़ल और उसका रहम न होता और ये बात न होती के अल्लाह बड़ा इल्तिफ़ात (सबसे क्षमा करने वाला) फ़रमाने वाला और हकीम है, तो (बीवियों पर इल्ज़म का मामला तुम्हें बड़ी मुश्किल में डाल देता)","जो लोग ये बोहतान (निंदा) गड़बड़ लाए हैं वो तुम्हारे ही अंदर का एक तोला है। क्या वक़िये को अपने हक में शरर ना समझो बल्के ये भी तुम्हारे लिए खैर ही है। जिसने इस में जितना हिसा लिया, उसने उतना ही गुनाह समथा और जिस शक्स ने इसकी जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा अपने सारा लिया उसके लिए तो अज़ाब ए अज़ीम है","जिस वक्त तुम लोगों ने इसे सुना था उसका वक्त क्यों ना मोमिन मर्दन और मोमिन औरतों ने अपने आप से नीक गुमान किया और क्यों ना केहदिया के ये सारी बोहतन (बदनामी) है","वो लोग (अपने इल्ज़म के सबूत में) चार गवाह क्यों ना लाए? अब के वो गवाह नहीं लाए हैं, अल्लाह के नज़रिए वही झूठे हैं","अगर तुम लोगों पर दुनिया और आख़िरत में अल्लाह का फ़ज़ल और रहम ओ करम न होता तो जिन बातों में तुम पढ़ गए थे उनकी याद में बड़ा अज़ाब तुम्हें आ लेता","(जरा गौर तो करो, हमें वक्त तुम कैसी गलती कर रहे थे) जबके तुम्हारी एक जुबान से दूसरी जुबान इस झूठ को लेती चली जा रही थी और तुम अपने मुंह से वो कुछ कह जा रहे थे, जिसका मुतालिक तुम्हें कोई इल्म था ना था. तुम इसे एक मामुली बात समझ रहे थे, हालंके अल्लाह के नज़दीक ये बड़ी बात थी","क्यों ना उसे सुनते ही तुमने कहादिया \"हमें ऐसी बात ज़ुबान से निकलना ज़ीब नहीं देता, सुभान अल्लाह, ये तो एक बोहतन ए अज़ीम है\"","अल्लाह तुमको हिदायत करता है कि आंदा कभी ऐसी हरकत न करना अगर तुम मोमिन हो","अल्लाह तुम्हें साफ साफ हिदायत देता है और वह आलिम ओ हकीम है","जो लोग चाहते हैं के ईमान लाने वालों के गिरोह में फ़हाश (अभद्रता) फ़ैले वो दुनिया और आख़िरत मैं दर्दनाक सज़ा के मुस्तक हूँ। अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते","अगर अल्लाह का फज़ल और उसका रहम ओ करम तुमपर न होता और ये बात न होती के अल्लाह बड़ा शफीक ओ रहीम है (तो ये चीज जो अभी तुम्हारे अंदर फैल गई थी बद्तरीन नताइज दिखा देती)","ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, शैतान के नक्शे कदम पर ना चलो, उसकी जोड़ी (जो) कोई करेगा तो वो उसे फहाश (अभद्रता) और बदी (दुष्टता) हाय का हुकुम देगा। अगर अल्लाह का फजल और उसका रहम ओ करम तुमपर ना होता तो तुम में से कोई शक पाक ना हो सकता, मगर अल्लाह हाय जिसे चाहता है पाक करता है है, और अल्लाह सुन्ने वाला और जाने वाला है","तुम में से जो लोग साहब ए फज़ल (भरपूर) और साहिब ए मक़दरत (मतलब) हैं वो इस बात की कसम न खा बैठें के अपने रिश्तेदार, मिस्कीन और मुहाजिर-फि-सबीलिल्लाह (जिन्होंने अल्लाह की राह के लिए अपने घर छोड़ दिए हैं) लोगों की मदद ना करेंगे. उन्हें माफ करना चाहिए और अपराध करना चाहिए। क्या तुम नहीं चाहते कि अल्लाह तुम्हें माफ करे? और अल्लाह की सिफत ये है के वो गफूर और रहीम है","जो लोग पाक दामन, बे-खबर, मोमिन औरतों पर तोहमतें (बदनामी) लगाते हैं अनपार दुनिया और आख़िरत में लानत की गई और उनके लिए बड़ा अज़ाब है","वो उस दिन को भूल ना जाएं जबके उनकी अपनी जुबानें और उनके अपने हाथ पांव उनके कार्टूनों की गवाही देंगे","उस दिन अल्लाह वो बदला उन्हें भरपुर दे देगा जिसका वो मुस्तहिक हैं और उन्हें मालूम हो जाएगा के अल्लाह ही हक है। सच को सच कर दिखाने वाला","खबीस (अशुद्ध) औरतें खबीस मर्दों के लिए हैं और खबीस (अशुद्ध) मर्द खबीस (अशुद्ध) औरतों के लिए। पाकीज़ा औरतें पाकीज़ा मर्दों के लिए हैं और पाकीज़ा मर्द पाकीज़ा मर्दों के लिए। उनका दामन पाक है उन बातों से जो बनने वाले बनते हैं। उनके लिए मगफिरत है और रिज़क ए करीम","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपने घरों के सिवा दूसरे घरों में दाखिल ना हुआ करो जब तक के घर वालों की रजा (इजाजत) ना लेलो और घर वालों पर सलाम ना भेज लो। ये तरीक़ा तुम्हारे लिए बेहतर है, तवक्कू है के तुम इसका ख्याल रखोगे","फिर अगर वहां किसी को ना पाओ तो दाख़िल ना हो जबतक के तुमको इजाज़त ना दे दी जाए, और अगर तुमसे कहा जाए के वापस चले जाओ तो वापस हो जाओ। ये तुम्हारे लिए ज़्यादा पाकीज़ा तरीक़ा है, और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे खूब जानता है","अलबत्ता तुम्हारे लिए इसमें कोई मुज़ाहिक़ा (नुकसान) नहीं है के ऐसे घरों में दखल हो जाओ जो किसी के रहने की जगह न हो, और जिनमें तुम्हारे फ़ैयदे (या काम) की कोई चीज़ हो, तुम जो कुछ ज़ाहिर करते हो और जो कुछ छुपाते हो सब कि अल्लाह को खबर है","ऐ नबी, मोमिन मर्दों से कहो के अपनी नज़रें बचा कर रखें और अपनी शर्म-गाहों की हिफ़ाज़त करें, ये उनके लिए ज़्यादा paakeeza tareeqa hai. जो कुछ वो करते हैं अल्लाह उसे बाख़बर रहता है","और (ऐ नबी), मोमिन औरतों से कहदो के अपनी नजरें बचा कर रखें, और अपनी शर्मगाहों की हिफाजत करें, और अपना बनाओ सिंघार ना दिखायें बाजुज उसे जो खुद जाहिर हो जाए, और अपने सीनो पर अपनी ओढ़नियों के आंचल डाले रहें, वो अपना बनाओ सिंघार न जाहिर करें मगर लोगों के सामने: शोहर, बाप, शोहरों के बाप, अपने बेटे, शोहरों के बेटे, भाई, भाइयों के बेटे, बहनों के बेटे, अपने मेल-झोल की औरतें, अपने ममलुक (जो उनके कब्जे में हैं), वो ज़िर-दस्त मर्द जो किसी और क़िस्म की ग़रज़ ना रखते हों, और वो बचे जो औरतों की पोशीदा बातों से अभी वाकिफ़ ना हुए हों। वो अपने पांव ज़मीन पर मरती हुई ना चला करें के अपनी जो ज़ीनत उनहों ने छुपा रखी है उसका लोगों को इल्म हो जाए। ऐ मोमिनो, तुम सब मिलकर अल्लाह से तौबा करो, तवक्कु है के फलाह पाओगे","तुम में से जो लोग मुजर्रद (सिंगल) हो और तुम्हारी लौंडी गुलामों में से जो साले होन, उनका निकाह करदो। अगर वो गरीब है तो अल्लाह अपने फजल से उनको गनी कर देगा। अल्लाह बदी वुसत (असीमित संसाधन) वाला और अलीम है","और जो निकाह का मौका न पाए उन्हें चाहिए के इफ्फत-माबी (निरंतरता/पाक दामनी) इख्तियार करें, यहां तक ​​के अल्लाह अपने फजल से उनको गनी करदे और तुम्हारे ममलुकों में (तुम्हारे कब्जे में) से जो मकातिबात (मुक्ति) की अंधेरे में रहें उन्हें मकातिबात करलो, अगर तुम्हें मालूम हो कि उनको अंदर बुलाया है, और उनको हमारे माल में से दो जो अल्लाह ने तुम्हें दिया है। और अपनी लौंडियों (गुलाम-लड़कियों) को अपनी दुनिया फ़ायदों की खातिर क़हबा-गारी (वेश्यावृत्ति) पर मजबूर न करो जबके वो खुद पाक दामन रहना चाहती है। और जो कोई उनको मजबूर करे तो इस जब्र के बाद अल्लाह उनके लिए गफूर ओ रहीम है","हमने साफ साफ हिदायत देने वाली आयतें तुम्हारे पास भेज दी हैं, और उन क़ौमों की इब्रातनाक मिसालें भी हम तुम्हारे सामने पेश कर चुके हैं जो तुमसे पहले हो गुज़रे हैं। और वो हिदायतें हमने कर दी हैं जो डरने वालों के लिए होती हैं","अल्लाह आसमान और ज़मीन का नूर है (कायनात में) उसके नूर की मिसाल ऐसी है जैसे एक ताक़ में चिराग रखा हुआ हो,चिराग एक फ़ानूस में हो(कांच के शेड में), फ़ानूस (कांच के शेड) का हाल ये हो के जैसे मोती की तरह चमकता हुआ तारा, और वो चिराग़ ज़ैतून के एक ऐसे मुबारक दरख्त के टेल (तेल) से रोशन किया जाता हो जो ना शर्की (पूर्वी) हो ना गराबी (पश्चिमी), जिसका टेल (तेल) आप ही आप भड़का पड़ता हो चाहे आग उसको ना लगे, (इस तरह) रोशनी बराबर रोशनी (बढ़ने के तमाम असबाब जमा हो गए)। अल्लाह अपने नूर की तरफ जिसका चाहता है रहनुमायी फरमाता है। वो लोगों को मिसालों से बात समझता है, वो हर चीज़ से ख़ूब वाकिफ़ है","(उसके नूर की तरफ हिदायत पाने वाले) उन घरों में पाए जाते हैं जिनमें बुलंद करने का और जिन में अपने नाम की याद का अल्लाह ने इज़ान (इजाज़त) दिया है","उन में ऐसे लोग सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते हैं जिन्हें तिजारत और खत्म ओ फारोखत अल्लाह की याद से और इकामत ए नमाज ओ अदाये जकात से गाफिल नहीं करते। वो उस दिन से डरते रहते हैं जिसमें दिल उलटने और दीधे पथरा जाने की (आंखें पथरा जाएंगी) नौबत आ जाएगी","(और वो ये सब कुछ करते हैं) ता-के अल्लाह उनको बेहतरीन अमाल की जजा उनको दे और मजीद अपने फजल से नवाजे। अल्लाह जिसे चाहता है बे-हिसाब देता है","(इस्के बराक्स) जिन्हों ने कुफ्र किया उनके अमल की मिसाल ऐसी है जैसे दश्त ए बे-आब में सराब का प्यासा (पानी रहित रेगिस्तान में मृगतृष्णा की तुलना) उसको पानी समझ हुए थे, मगर जब वहां पहुंचा तो कुछ न पाया, बलके वहां उसने अल्लाह को मौजुद पाया, जिसने उसका पूरा, पूरा हिसाब चुका दिया। और अल्लाह को हिसाब लेते देर नहीं लगती","या फिर उसकी मिसाल ऐसी है जैसे एक गहरे समंदर में अँधेरा, के ऊपर एक मौज छायी हुई है, उसपर एक और मौज, और उसके ऊपर बादल, तारीकी(अंधेरा) पर तारीकी (अंधेरा) मुसल्लत है, आदमी अपना हाथ निकले तो उसे भी ना देखे. जिसे अल्लाह नूर न बख्शे उसके लिए फिर कोई नूर नहीं","क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह की तस्बीह कर रहे हैं वो सब जो आसमान और ज़मीन में हैं और वो परिंदे जो पर्र फैलाये उड़ रहे हैं? हर एक अपनी नमाज और तस्बीह का तरीक़ा जानता है, और ये सब जो कुछ करते हैं अल्लाह उसे बा-ख़बर रखता है","आसमान और ज़मीन की बादशाही अल्लाह ही के लिए है और उसकी तरफ सबको पलटना है","क्या तुम देखते नहीं हो कि अल्लाह बदल को आहिस्ता आहिस्ता चलाता है, फिर उसके टुकड़ों को बहाम जोड़ता है, फिर उसे समित कर एक कसीफ अब्र (घने बादलों का समूह) बना देता है। फिर तुम देखते हो के उसके ख़ौल में से बारिश के कतरे तपकते हैं और वो आसमान से, उन पहाड़ों की बदौलत जो उसमें बुलंद हैं, औले (ओले/बर्फ) बरसात है, फिर जिसे चाहता है उनका नुक्सान पहनता है और जिसे चाहता है उनसे बचा लेता है, उसकी बिजली की चमक निगाहों को ख़ैर (आँखें चकाचौंध कर देती है) कि देती है","रात और दिन का उलट फेर वही कर रहा है। इसमें एक सबक है आंखों वालों के लिए","और अल्लाह ने हर जानदार एक तरह के पानी से भुगतान किया, कोई पेट के बाल चल रहा है तो कोई दो टांगों पर और कोई चार टांगों पर। जो कुछ वह चाहता है पैदा करता है, वह हर चीज पर कादिर है","हमने साफ साफ हकीकत बताने वाली आयत नाजिल कर दी है, आगे सिराते मुस्तकीम की तरफ हिदायत अल्लाह ही जिसे चाहता है देता है","ये लोग कहते हैं कि हम ईमान लाए अल्लाह और रसूल पर और हमने इताअत कबूल की, मगर इसके बाद इनमें से एक गिरोह (इताअत से) मुंह मोड़ जाता है, ऐसे लोग हरगिज मोमिन नहीं हैं","जब इनको बुलाया जाता है अल्लाह और रसूल की तरफ, ता-के रसूल इनके आपस के मुकद्दमे का फैसला करे तो इनमें से एक फरीक कतरा जाता है","अलबत्ता अगर हक उनकी मुआफिकत (उनकी तरफ) में हो तो रसूल के पास बदाय इताअत-किश (आज्ञाकारिता) पर प्रतिबंध कर आ जाता है","क्या उनके दिलों को (मुनाफिकत का) रोग लगा हुआ है? हां ये शक्क में पड़े हुए हैं? या इनको ये खौफ है कि अल्लाह और उसका रसूल इन्पर जुल्म करेगा? असल बात ये है के जालिम तो ये लोग खुद हैं","ईमान लाने वालों का काम तो ये है के जब वो अल्लाह और रसूल की तरफ बुलाए जाएं ता-के रसूल उनके मुकद्दमे का फैसला करें तो वो कहें के हमने सुना और इताअत की, ऐसे ही लोग फलाह पाने वाले हैं","और कामियाब वही हैं जो अल्लाह और रसूल की फरमा बरदारी करें और अल्लाह से डरें और उसकी नफ़रमानी से बचें","ये (मुनाफिक) अल्लाह के नाम से कड़ी कसमें खा कर कहते हैं \"आप हुकुम दें तो हम घरों से निकल खड़े हों\"। इनसे कहो \"कसमें न खाओ, तुम्हारी इबादत का हाल मालूम है, तुम्हारे कार्टूनों से अल्लाह बे-खबर नहीं है\"","कहो, \"अल्लाह के मुती बनो (अल्लाह की आज्ञा मानो) और रसूल के तबे फरमान बनकर रहो, लेकिन अगर तुम मुंह फेरते हो तो खूब समझ लो के रसूल पर जिस फर्ज का बार रक्खा गया है उसका ज़िम्मेदार वो है और तुम जिस फ़र्ज़ का बार डाला है उसके ज़िम्मेदार तुम हो तो खुद ही हिदायत पाओगे वरना रसूल की ज़िम्मेदारी इससे ज़्यादा कुछ नहीं है के सफ़ सफ़ हुकुम पाहुंचा दे”","अल्लाह ने वादा फरमाया है तुम में से उन लोगों के साथ जो ईमान लाए और नेक अमल करें के वो उनको उसी तरह जमीन में खलीफा बनाएगा जिस तरह उनसे पहले गुजरे हुए लोगों को बना चुका है, उनके लिए उनके लिए दीन (धर्म) को मजबूत बुनियादों पर कायम कर देगा जिसे अल्लाह ताला ने उनके हक में पसंद किया है, और उनकी (मौजूदा) हालत ए खौफ को अमन से बदल देगा, बस वो मेरी बंदगी करें और मेरे साथ किसी को शरीक न करें, और जो इसके बाद कुफ्र करें तो ऐसे ही लोग फासीक हैं","नमाज कायम करो, जकात दो, और रसूल की इताअत करो, उम्मीद है के तुमपर रहम किया जाएगा","जो लोग कुफ्र कर रहे हैं उनके मुतालिक इस गलत फहमी में ना रहो के वो ज़मीन में अल्लाह को अजीज (निराश) कर देंगे, उनका ठिकाना दोज़ख है और वो बड़ा ही बुरा ठिकाना है","ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, लाज़िम है के तुम्हारे ममलुक (तुम्हारे गुलाम) और तुम्हारे वो बच्चे जो अभी अक्ल की हद को (सेक्स कॉन्शस/यौवन) नहीं पहचाने हैं, तीन औकात में इजाज़त लेकर तुम्हारे पास आया करें: सुबह की नमाज़ से पहले, और दोपहर को जबके तुम कपड़े उतार कर रख देते हो, और ईशा की नमाज के बाद। ये तीन वक्त तुम्हारे लिए पर्दे के वक्त हैं। इनके बाद वो बिला इजाज़त आएं तो ना तुमपर कोई गुनाह है ना अनपर, तुम्हें एक दूसरे के पास बार-बार आना ही होता है। इस तरह अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी इरशादत की तौज़ीह (वज़ेह) करता है, और वह अलीम ओ हकीम है","और जब तुम्हारे बच्चे अक़ल की हद (सेक्स कॉन्शियस / यौवन) को पाहुंच जायें तो चाहिए के उसी तरह इजाज़त लेकर आया करें जिस तरह उनके बदे (बुजुर्ग) इजाज़त लेते रहे हैं. इस तरह अल्लाह अपनी आयत तुम्हारे सामने खुलता है, और वह अलीम ओ हकीम है","और जो औरतें जवानी से गुज़री बैठी हो, निकाह की उम्मीद न हो, वो अगर अपनी चादरें (बाहरी ग्रामेंट्स) उतार कर रख दें तो उनपर कोई गुनाह नहीं, बशारत के ज़ीनत की नुमाइश करने वाली ना हो। तहम (फिर भी) वो भी हया-दारी ही बारातें (संयम से व्यवहार करें) तो उनके हक़ में अच्छा है, और अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है","कोई हराज़ नहीं अगर कोई अंधा, या लंगड़ा, या मारीज़ (किसी के घर से खा ले) और ना तुम्हारे ऊपर इस में कोई मुज़हिक़ा (नुकसान/जर्ज) है के अपने घरों से खाओ या अपने बाप दादा के घरों से, या अपनी माँ, नानी के घरों से, या अपने भाइयों के घरों से, या अपनी बहनों के घरों से, या अपने चाचाओं के घरों से, या अपनी बहनों के घरों से, या अपने मामूओं के घरों से, या अपने दोस्तों के घरों से, या उन घरों से जिनकी कुंजियाँ (चाबियाँ) तुम्हारी सुपुर्दगी (कब्जा) में हो, या अपने दोस्तों के घरों से। इस में भी कोई हराज नहीं के तुमलोग मिलकर खाओ या अलग-अलग, अलबत्ता जब घरों में दखल हुआ करो तो अपने लोगों को सलाम किया करो, दुआ ए खैर, अल्लाह की तरफ से मुकर्रर फरमायी हुई, बड़ी बाबरकत और पाकीजा। इस तरह अल्लाह ताला तुम्हारे सामने आयत बयान करता है, तवक्कू है के तुम समझ बुझ से काम लोगे","मोमिन तो असल में वही हैं जो अल्लाह और उसके रसूल को दिल से माने और जब किसी इज्तिमाई काम के मौके पर रसूल के साथ हों तो उसे इज्जत के लिए बगैर न जाएं, जो लोग तुमसे इज्जत मांगते हैं वही अल्लाह और रसूल के मानने वाले हैं। जब वो अपने किसी काम से इजाज़त मांगे तो जैसे तुम चाहो इजाज़त दे दिया करो और ऐसे लोगों के हक़ में अल्लाह से दुआ ए मगफिरत किया करो। अल्लाह यकीनन गफूर ओ रहीम है","मुसलमानो, अपने दरमियान रसूल के बुलाने को आपस में एक दूसरे का सा बुलाना न समझ बैठो। अल्लाह उन लोगों को खूब जानता है जो तुम में ऐसे हैं कि एक दूसरे की मदद लेते हुए चुपके से चौंक जाते हैं। रसूल के हुकुम की खिलाफत वारज़ी करने वालों को डरना चाहिए कि वो किसी फ़िटने में गिरफ़्तार न हो जाए, या उन पर दर्दनक अज़ाब न आ जाए","ख़बरदार रहो, आसमान ओ ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह का है। तुम जिस रवीश पर भी हो अल्लाह उसको जानता है। जिस रोज़ लोग उसकी तरफ पलटेंगे वो उन्हें बता देगा के वो क्या करके आये हैं। वो हर चीज़ का इलम रखता है","निहायत मुतबर्रक(बा-बरकत) है वो जिसने ये फुरकान अपने बंदे पर नाज़िल किया ता-के सारे जहां वालों के लिए नज़ीर(डर सुनाने वाली/वार्नर) हो","वो जो ज़मीन और आसमानों की बादशाही का मालिक है, जिसने किसी को बेटा नहीं बनाया है, जिसके साथ बादशाही में कोई शरीक नहीं है, जिसने हर चीज़ को पैदा किया फिर उसकी एक तकदीर मुकर्रर की","लोगों ने उसे छोड़ कर ऐसा माबूद बना लिया जो किसी चीज़ को पेदा नहीं करते बलके खुद पेदा किये जाते हैं, जो खुद अपने लिए भी किसी नफ़े (फ़ायदे) या नुक्सान का इख्तियार नहीं रखते, जो ना मार सकते हैं ना जिला सकते हैं, ना मारे (मृत) हुए को फिर उठा सकते हैं","जिन लोगों ने नबी की बात मन से इंकार किया है वो कहते हैं के ये फुरकान एक मन गड़बड़ चीज है जैसे इस शक्स ने आप ही गड़बड़ ली है और कुछ दूसरे लोगों ने इस काम में इसकी मदद की है। बड़ा जुल्म और सख्त झूठ है जिसपर ये लोग उतर आए हैं","कहते हैं ये पुराने लोगों की लिखी हुई चीज़ें हैं जिन्हें ये शक्स नक़ल (कॉपी) करता है और वो इसे सुबह ओ शाम सुनायी जाती हैं","(ऐ मुहम्मद) इनसे कहो के “इसे नाज़िल किया है उसने जो ज़मीन और आसमान का भे डी (रहस्य) जानता है”। हकीकत ये है कि वो बड़ा गफूर उर रहीम (क्षमाशील और दयालु) है","कहते हैं \"ये कैसा रसूल है जो खाना खाता है और बाज़ारों में चलता फिरता है? क्यों ना इसके पास कोई फरिश्ता भेजा गया जो इसके साथ रहता है और (ना मनने वालों को) धमाका","हां और कुछ नहीं तो इसके लिए कोई खजाना ही उतार दिया जाता, या इसके पास कोई बाग (बगीचा) ही होता जैसा ये (इत्मिनान की) रोजी हासिल करता।'' और जालिम कहते हैं '' तुम लोग तो एक सहर जदा (मोहित) आदमी के पीछे लग गए हो''","देखो, कैसी कैसी अजीब हुज्जतें (तर्क) ये लोग तुम्हारे आगे पेश कर रहे हैं, ऐसे बहके हैं के कोई ठिकाने की बात इनको नहीं समझती","बड़ा बराकात है वो जो अगर चाहे तो इनकी तजवीज-करदा चीज़ों से भी ज़्यादा बढ़ चढ़ कर तुमको दे सकता है, (एक नहीं) बहुत सारे बाग (बगीचे) जिनके नीचे नहरेन बहती हैं, और बड़े-बड़े महल","असल बात ये है कि ये लोग \"उस घड़ी\" को झुटला चुके हैं और जो हमें घड़ी को झुटलाये उसके लिए हम भटकते हैं हुई आग मुहैय्या कर राखी है","वो जब डर से इनको देखेगी तो ये उसके गजब और जोश की आवाजें सुन लेंगे","और जब ये दस्त ओ पा-बस्ता (जंजीरों में जकड़े) उसमें एक तंग जगह थूंसे जाएंगे तो अपनी मौत को पुकारने लगेंगे","(हमारा वक्त इनसे कहा जाएगा के) आज एक मौत को नहीं बहुत सी मौत को पुकारो","इनसे पूछो, ये अंजाम अच्छा है या वो आबादी जन्नत जिसका वादा खुदा-तरस पहरेजगारों से किया गया है? जो उनके अमल की जजा और उनके सफर की आखिरी मंजिल होगी","जिस में उनकी हर ख्वाहिश पूरी होगी, जिसमें वो हमेशा हमेशा रहेंगे, जिसका अता करना तुम्हारे रब के ज़िम्मे एक वाजिब उल अदा वादा है","और वो वही दिन होगा जबके (तुम्हारा रब) लोगों को भी घेर लेगा और इनके उन माबूदों को भी बुला लेगा जिन्हे आज ये अल्लाह को चोद कर पूछ रहे हैं। फिर वो उनसे पूछेगा \"क्या तुमने मेरे साथ बंदों को गुमराह किया था? या ये खुद राह-ए-रास्त से भटक गए थे?\"","वो अर्ज करेंगे के \"पाक है आप की जात, हमारी तो ये भी मजाल न थी के आप के सिवा किसी को अपना मौला बनाएं, मगर आप ने इनको और इनके बाप को खूब सामान ए जिंदगी दिया हट्टा के ये सबक भूल गए और शामत ज्यादा होकर\" रहे”","यूं झूठला देंगे वो (तुम्हारे मजबूर) तुम्हारी उन बातों को जो आज तुम कह रहे हो, फिर तुम ना अपनी शामत (सजा) ताल सकोगे ना कहीं से मदद पा सकोगे। और जो भी तुम में से ज़ुल्म करे उसे हम असल अज़ाब का मजा दिखाएंगे","(ऐ मुहम्मद), तुमसे पहले जो रसूल भी हमने भेजा था वो सब भी खाना खाने वाले और बाज़ारों में चलने फिरने वाले लोग ही थे। दरसल हमने तुम लोगों को एक दूसरे के लिए आज़माइश का ज़रिया बना दिया है, क्या तुम सब्र करते हो? तुम्हारा रब सब कुछ देखता है","जो लोग हमारे हुज़ूर पेश होने का अंदेशा नहीं रखते वो कहते हैं \"क्यों ना फ़रिश्ते हमारे पास भेजे जाएँ? या फिर हम अपने रुब को देखेंगे? बड़ा घमंड ले बैठे ये अपने नफ़्स में और हद से गुज़र गए ये अपनी सरकशी में","जिस रोज़ ये फरिश्तों को देखेंगे वो मुजरेमो के लिए किसी बशारत (खुश खबरी) का दिन न होगा, गाल उठेंगे के पनाह-ब-खुदा","और जो कुछ भी इनका किया धरा है उसे लेकर हम गुबार (धूल) की तरह उड़ा देंगे","बस वही लोग जो जन्नत के मुस्तहिक हैं उस दिन अच्छी जगह ठहरेंगे और दोपहर (मिड-डे) गुजारने को उम्मीद मुकाम पाएंगे","आसमान को चीरता हुआ एक बादल हमें रोज नामदार होगा और फरिश्तों के परे के परे (रैंक के बाद रैंक) उतार दिए जाएंगे","हमें रोज़ हक़ीक़ी बादशाही सिर्फ़ रहमान की होगी और वो मुनकिरीन के लिए बड़ा सख्त दिन होगा","ज़ालिम इंसान अपना हाथ चबाएगा और कहेगा \"काश मैंने रसूल का साथ दिया होगा","हाय मेरी कम्बख्त, काश मैंने फलां शक्स को दोस्त ना बनाया होता","उसके बहकाए में आकर मैंने वो हिदायत ना मानी जो मेरे पास आई थी। शैतान इंसान के हक में बड़ा ही बेवफा निकला”","और रसूल कहेगा के “ऐ मेरे रब, मेरी क़ौम के लोगों ने इस कुरान को निशाना बनाकर बना लिया था।” उपहास)''","(ऐ मुहम्मद), हमने तो इसी तरह मुजरेमो को हर नबी का दुश्मन बनाया है, और तुम्हारे लिए तुम्हारा रब हाय रहनुमाई और मदद को काफी है","मुनकिरीन कहते हैं ''इस शक्स पर सारा कुरान एक ही वक्त में क्यों न उतार दिया गया? हां, ऐसा इस लिए किया गया है के इसको अच्छी तरह हम तुम्हारे जेहन नशीं करते रहे और (इसी गरज के लिए) हमने इसको एक खास तरतीब के साथ अलग अलग अजजा की शक्ल दी है","और (इसमें ये मसलाहत भी है) के जब कभी वो तुम्हारे सामने कोई निराली बात (या अजीब सवाल) लेकर आए, उसका ठीक जवाब बार वक्त हमें तुम्हें दे दिया और बेहतरी तरीक़े से बात खोल दी","जो लोग औंधे मुँह जहन्नुम की तरफ ढकेले जाने वाले हैं उनका मौक़ुफ़ बहुत बुरा (सबसे ज्यादा) ग़लत) और उनकी राह हद दर्ज़ ग़लत है","हमने मूसा को किताब दी और उसके साथ उसके भाई हारून को मददगार के तौर पर लगाया","और उनसे कहा के जाओ उस क़ौम की तरफ जिसने हमारी आयत को झुटला दिया है। आख़िर ई कर उन लोगों को हमने तबाह करके रख दिया","यही हाल क़ौम ए नूह का हुआ जब उन्होन ने रसूलों की तकज़ीब की, हमने उनको गर्क (डूब/डूबा) करदिया और दुनिया भर के लोगों के लिए एक निशान ए इबरत बना दिया, और इन ज़ालिमों के लिए एक दर्दनाक अज़ाब हमने मुहैय्या कर रक्खा है","इसी तरह अद और समूद और असहाब ए रस और बीच की सदियों के बहुत से लोग तबाह हो गए","और उन में से हर एक को हमने (पहले तबाह होने वालों की) मिसालें दे-दे कर समझा, और आखिर ए कार हर एक को नष्ट कर दिया","और उस बस्ती पर तो इनका गुजर हो चुका है, जिसपर बढ़तीं बारिश बरस गई थी। क्या इन्होन ने उसका हाल देखा ना होगा? मगर ये मौत के बाद दूसरी जिंदगी की तवक्कू ही नहीं रखते","ये लोग जब तुम्हें देखते हैं तो तुम्हारा मज़ाक बना लेते हैं, (कहते हैं) “क्या ये शक्स है जिसे खुदा ने रसूल बना कर भेजा है","इसने तो हमें गुमराह करके अपने मबूदों से बरगश्ता(आवारा/बेहका/गुमराह) हाय करदिया होता अगर हम उनकी अकीदत पर जाम ना गए होते”। अच्छा, वो वक्त दूर नहीं है जब अजब देख कर इन्हें खुद मालूम हो जाएगा कि कौन गुमराही में दूर निकल गया था","कभी तुमने उस लड़के के हाल पर गौर किया है जिसने अपनी ख्वाहिश ए नफ्स को अपना खुदा बना लिया हो? क्या तुम ऐसे शक्स को राह ए रास्ते पर लाने का ज़िम्मा ले सकते हो","क्या तुम समझते हो के अंदर से अक्सर लोग सुनते और समझते हो? ये तो जानवरों की तरह हैं, बलके उनसे भी गए गुज़रे","तुमने देखा नहीं के तुम्हारा रब किस तरह साया फैला देता है? अगर वो चाहता तो उसे डेमी (स्थिर) बना देता। हमने सूरज को तैयार किया (सूरज इसका पायलट) बनाया","फिर (जैसा जैसा सूरज उठा जाता है) हम इस साए को रफ्ता रफ्ता अपनी तरफ समित-ते चले जाते हैं","और वो अल्लाह ही है जिसने रात को तुम्हारे लिए लिबास, और नींद को सुकून ए मौत, और दिन को जी उठने का वक्त बनाया","और वही है जो अपनी रहमत के आगे, आगे हवाओं को बशारत बना कर भेजता है फिर आसमां से पाक पानी नाज़िल करता है","ता-के एक मुर्दा इलके को इसकी ज़रिये जिंदगी बक्शे और अपनी मख़लूक में से बहुत से जानवर और इंसानों को प्यास बुझाएं","क्या करिश्मा को हम बार-बार इनके सामने लाते हैं ता-के वो कुछ सबक लें। मगर अक्सर लोग कुफ्र और नाशुक्र के सिवा कोई दूसरा रवैय्या इख्तियार करने से इंकार करते हैं","अगर हम चाहते तो एक एक बस्ती में एक एक नजीर (डर सुनाने वाला) उठा खड़ा करते","पास (ऐ नबी), का फिरों की बात हरगिज़ ना मानो और इस कुरान को लेकर इनके साथ जिहाद-ए-कबीर करो","और वही है जिसने दो समंदरों को मिला रक्खा है, एक लज़ीज़ ओ शीरीन (मीठा), दूसरा तल्ख ओ शूर (कड़वा और नमकीन), और दोनों के दरमियान एक पर्दा हयाल है, एक रुकावत है (दुर्गम) बैरियर) जो उन्हें गुड़-मुद होने से रोके हुए हैं","और वही है जिसने पानी से एक बशर (इंसान) पैदा किया, फिर उसे नसब और सुसराल (खून से और शादी से) के दो अलग सिलसिले चलाये। तेरा रब बड़ा ही क़ुदरत वाला है","क्या खुदा को छोड़ दिया गया है कर लोग उनको पूज रहे हैं जो ना इनको नाफा पाहुंचा सकते हैं ना नुक्सान, और ऊपर से मजीद ये के काफिर अपने रब के मुकाबले में हर बागी का मददगार बना हुआ है","(ऐ मुहम्मद), तुमको तो हमने बस एक मुबाशीर (खुश खबरी देने वाला) और नज़ीर (डर सुनाने वाला) बना कर भेजा है","इनसे कहदो के “मैं इस काम पर तुमसे कोई उजरत (इज़ाजा) नहीं मांगता, मेरी उजरत बस यही है कि जिसका जी चाहे” वो अपने रब का रास्ता इख्तियार करले”","और (ऐ मुहम्मद) हमें खुदा पर भरोसा रक्खो जो जिंदा है और कभी मरने वाला नहीं, उसकी हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो, अपने बंदों के गुनाहों से बस उसकी बा-खबर होना काफी है","वो जिसने ची (छह) दीनों में ज़मीन और आसमान को और उन सारी चीज़ों को बना कर रख दिया जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान हैं, फिर आप ही (क़ायनात के तख्त ए सल्तनत) 'अर्श' पर जलवा फरमा हुआ। रहमान, उसकी शान बस किसी जाने वाले से पूछो","लोगों से जब कहा जाता है कि इस रहमान को सजदा करो तो कहते हैं \"रहमान क्या होता है? क्या बस जिसे तू कहता है उसे हम सजदा करते फिरें?\" ये दावत इनकी नफ़रत में उल्टा और इज़ाफा करती है","बड़ा मुतबर्रक (बा-बरकत) है वो जिसने आसमान में बुर्ज (किलेबंद गोले) बनाए और उसमें एक चिराग और एक चमकता चांद रोशन किया","वही है जिसने रात और दिन को एक दूसरे का जानशीन बनाया, हर उस शक्स के लिए जो सबक लेना चाहे, या शुक्र गुज़ार होना चाहे","रहमान के (असली) बंदे वो है जो ज़मीन पर नरम चल चलते हैं और जाहिल उनके मुंह को आएं तो कह देते हैं कि तुमको सलाम","जो अपने रब के हुजूर सजदे और कयाम में रातें गुज़ारते हैं","जो दुआएं करते हैं के \"ऐ हमारे रब, जहन्नुम के अज़ाब से हमको बचा ले, उसका अज़ाब तो जान का लागू है","वो तो बड़ा ही मुस्तकर (बुरा ठिकाना) और मुकाम है\"","जो खर्च करते हैं तो ना फ़िज़ूल खर्च करते हैं ना बुख़्ल, बलके उनका खर्च दोनों इन्तेहाओं (चरम) के दरमियान ऐतदाल पर क़याम रहता है","जो अल्लाह के सिवा किसी और माबूद को नहीं पुकारते, अल्लाह की हराम की हुई किसी जान को ना-हक़्क़ हलाक नहीं करते, और ना ज़िना (व्यभिचार) के मुर्तकीब होते हैं। ये काम जो कोई करेगा वो अपने गुनाह का बदला पाएगा","कयामत के रोज़ उसको मुकर्रर अज़ाब दिया जाएगा और इसमें वो हमेशा ज़िल्लत के साथ पड़ा रहेगा","इल्ला ये के कोई (गुनाहों के बाद में) तौबा कर चुका हो और ईमान ला कर अमल ए सलीह करने लगा हो, ऐसे लोगों की बुराइयों को अल्लाह भलाइयों से बदल देगा और वो बड़ा गफूर ओ रहीम है","जो शक्स तौबा करके नीक अमली इख्तियार करता है वो तो अल्लाह की तरफ पलट आता है जैसा के पलटने का हक़ है","(और रहमान के बंदे वो हैं) जो झूठ के गवाह नहीं बनते और किसी चीज़ पर उनका गुज़र हो जाता है तो शरीफ़ आदमियों की तरह गुज़र जाते हैं","जिन्हें अगर उनके रब की आयतें सुना कर हिदायत की जाती है तो वो उसपर अंधे और बाहर बनकर नहीं रह जाते","जो दुआएं मांगते हैं के, \"ऐ हमारे रब, हमें अपनी बीवीयों और अपनी औलाद से आंखों की ठंडक दे, और हमको परहेज़गारों का इमाम बाना।”","ये हैं वो लोग जो अपने सब्र का फल मंजिल-ए-बुलंद की शक्ल में पाएंगे, आदाब ओ तस्लीमात से उनका इस्तकबाल होगा","वो हमेशा हमेशा वहां रहेंगे। क्या ही अच्छा है वो मुस्तकर (उत्कृष्ट निवास) और वो मुक़ाम","(ऐ मुहम्मद), लोगों से कहो, \"मेरे रब को तुम्हारी क्या हाजात पड़ी है अगर तुम उसको न पुकारो। अब के तुमने झूठला दिया है, अंकरीब वो सजा पाओगे के जान छुड़ानी मुहाल होगी\"","ता सीन मीम","ये किताब ए मुबीन की आयत हैं","(ऐ मुहम्मद), शायद तुम इस ग़म (दुःख) में अपनी जान खो दोगे के ये लोग ईमान नहीं लाते","हम चाहें तो आसमां से ऐसी निशानी नाज़िल कर सकते हैं के इनकी गर्दनें इसके आगे झुक जाएँ","लोगों के पास रहमान की तरफ से जो नई हिदायत भी आती है ये उसे मुँह मोड़ लेते हैं","अब के ये झूठला चुके हैं, आख़िर इन्हें इस चीज़ की हकीकत (मुखतलिफ़) कहा जाता है तरीक़ों से) मालूम हो जाएगी जिसका ये मज़ाक उड़ाते रहे हैं","और क्या इन्होन ने कभी ज़मीन पर निगाह नहीं डाली के हमने कितनी कसीर मिकदार में हर तरह की उम्मीद नबातात (वनस्पति) इस्मेन पैदा की है","यकीनन इसमें एक निशानी है, मगर मुझमें अक्सर माने वाले नहीं","और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी","इन्हें वक़्त का क़िस्सा सुनाओ जबके तुम्हारे रब ने मूसा को पुकारा “ज़ालिम क़ौम के पास जा","फ़िरौन की क़ौम के पास, क्या वो नहीं डरते?”","उसने अर्ज़ किया \"ऐ रब, मुझे ख़ौफ़ है के वो मुझे झुतला देंगे","मेरा सीना घुट-ता है और मेरी ज़ुबान नहीं चलती, आप हारून की तरफ़ रिसालत भेजें","और मुझपर उनके हाँ एक जुर्म का इल्ज़ाम भी है, इसके लिए मैं डरता हूं के वो मुझे कत्ल कर देंगे”","फरमाया “हरगिज नहीं, तुम दोनों जाओ हमारी निशानियां लेकर, हम तुम्हारे साथ सब कुछ सुनते रहेंगे","फिरौन के पास जाओ और उसे कहो, हमको रब उल आलमीन ने इसलिए भेजा है","के तू बनी इजराइल को हमारे साथ जाने दे”","फिरौन ने कहा “क्या हमने तुझको अपना हां बच्चा सा नहीं पाला था? तू नहीं अपने उमर के काई साल हमारे हां गुजारे","और इसके बाद कर गया जो कुछ कर गया, तू बड़ा एहसान फरामोश आदमी है”","मूसा ने जवाब दिया “उस वक्त वो काम मैंने (अनजाने में) कर दिया था","फिर मैं तुम्हारा खौफ से भाग गया। इसके बाद मेरे रब ने मुझको हुकुम अता किया और मुझे रसूलन में शामिल फरमा लिया","रहा तेरा एहसान जो तू नई मुझपर जानता है तो इसकी हकीकत ये है के तू नई बनी इसराइल को गुलाम बना लिया था”","फिरौन ने कहा “और ये” रब-उल-आलमीन क्या होता है?”","मूसा ने जवाब दिया \"आसमानो और ज़मीन का रब, और उन सब चीज़ों का रब जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान हैं, अगर तुम यक़ीन लाने वाले हो।\"","फिरौं ने अपने गिर्द ओ पेश के लोगों से कहा 'सुनते हो?'","मूसा ने कहा, \"तुम्हारा रब भी और तुम्हारे उन आबा ओ अजदाद का रुब भी जो गुजर चुके हैं\"","फिरौन ने (हाज़िरिन से) कहा \"तुम्हारे ये रसूल साहब जो तुम्हारी तरफ भेजे गए हैं, बिल्कुल ही पागल मालूम होते हैं\"","मूसा ने कहा \"मशरिक़ ओ मगरिब और जो कुछ इनके दरमियान है सबका रब, अगर आप लोग कुछ अक़ल रखते हैं\"","फ़िरौन ने कहा \"अगर तू नहीं मेरे सिवा किसी और को मबूद माना तो तुझे मैं उन लोगों में शामिल कर दूँगा जो क़ैद खानो में पड़े सध (सड़) रहे हैं”","मूसा ने कहा “अगरचे मैं ले आऊं तेरे सामने एक सारी चीज़ भी?”","फ़िरौन ने कहा \"अच्छा तो ले आ अगर तू सच्चा है\"","(उसकी ज़ुबान से ये बात निकलते ही) मूसा ने अपना आसा (कर्मचारी) फेंक और यकायक वो एक सरेह अज़धा (सांप/साँप) था","फिर उसने अपना हाथ (बगल) से) खिंचा और वो सब देखने वालों के सामने चमक रहा था","फिरौन अपने गिर्द ओ पेश के सरदारों से बोला “ये शक्स यकीनन एक माहिर जादूगर है","चाहता है के अपने जादू के ज़ोर से तुमको तुम्हारे मुल्क से निकल दे, अब तुम बताओ तुम क्या हुकुम देते हो?”","उनहों ने कहा \" इसे और इसके भाई को रोक लीजिए और शहर में हरकारे (हेराल्ड्स) भेज दीजिए","के हर सियाने जादूगर को आपके पास ले आइए\"","चुनांचे एक रोज़ मुक़र्रर वक़्त पर जादूगर इकठ्ठे करलिये गए","और लोगों से कहा गया “तुम इज्तिमा में चलोगे","शायद के हम जादूगरों के दीन ही पर रह जाएंगे अगर वो गालिब रहे”","जब जादूगर मैदान में आ गए तो उनको ने फिरौन से कहा “हमें इनाम तो मिलेगा अगर हम गालिब” रहे?”","उसने कहा \"हां, और तुम तो हमें वक्त मुकर्रबीन (मेरे सबसे करीब) में शामिल हो जाओगे\"","मूसा ने कहा \"फेंको जो तुम्हें फेंकना है\"","उनहों ने फवारां अपनी रसियां ​​और लाठियां फेंक दी और बोले \"फिरौं के इकबाल से हम ही गालिब रहेंगे।”","फिर मूसा ने अपना आसा (कर्मचारी) फेंक दिया तो यकायक वो उनके झूठे करिश्माओं को हड़प कर्ता चला जा रहा था","इसपर सारे जादूगर बे-इख्तियार सजदे में गिर पड़े","और बोल उठे के \" मान गए हम रब-उल-आलमीन को","मूसा और हारून के रब को”","फिरौन ने कहा “तुम मूसा की बात मान गए क़ब्ल इसके के मैं तुम्हें इजाज़त देता! जरूर ये तुम्हारा बड़ा है जिसने तुम्हें जादू सिखाया है। अच्छा, अभी तुम्हें मालूम हुआ जाता है, मैं तुम्हारे हाथ पांव मुखालिफ़ सिम्तन (विपरीत पक्ष) में काटवाऊंगा और तुम सबको सूली पर चढ़ा दूंगा\"","उनहों ने जवाब दिया \"कुछ परवा नहीं, हम अपने रुब के हुजूर पहन जायेंगे","और हमें तवक्कू है के हमारा रब हमारे गुनाह माफ कर देगा क्योंकि सबसे पहले हम ईमान लाए हैं\"","हमने मूसा को वही (रहस्योद्घाटन) भेजी के \"रात ओ रात मेरे बंदों को लेकर निकल जाओ, तुम्हारा पीछा किया जाएगा\"","इसपर फिरौन ने (फौजीन) जमा करने के लिए) शहर में नकीब (हेराल्ड्स) भेज दिए","(और केहला भेजा) के “ये कुछ मुट्ठी भर लोग हैं","और इन्होन ने हमको बहुत नाराज किया है","और हम एक ऐसी जमात हैं जिसका शेवा हर वक्त चौकन्ना रहना है है\"","इस तरह हम उन्हें उनके बाघों और चश्में (पानी के झरने)","और खजानो और उनकी बहतरीन कयाम-गाहों से निकल लाए","ये तो हुआ उनके साथ और (दूसरी तरफ) बानी इजराइल को हमने इन सब चीज़ों का वारिस करदिया","सुबह होते ही ये लोग उनके ताक़ुब (पीछा) में चल पड़े","जब दोनों गिरोहों का आमना सामना हुआ तो मूसा के साथी गाल उठे के \"हम तो पकड़े गए\"","मूसा ने कहा \"हरगिज़ नहीं मेरे साथ मेरा रब है, वो ज़रूर मेरी रहनुमायी फरमायेगा”","हमने मूसा को वही के ज़रिये से हुकुम दिया के “मार अपना आसा (कर्मचारी) समंदर पार” क्योंकि समंदर पहँट गया और उसका हर टुकड़ा एक अज़ीम ओ शान पहाड़ की तरह हो गया","उसी जगह हम दूसरे गिरो ​​को भी करीब ले आओ","मूसा और उन सब लोगों को जो उसके साथ थे हमने बचा लिया","और दूसरों को गर्क (डूबा/डूब) करदिया","क्या वक्त में एक निशानी है, मगर इन लोगों में से अक्सर मन्ने वाले नहीं हैं","और हकीकत ये है के तेरा रब्ब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी","और यहीं इब्राहीम का क़िस्सा सुनाओ","जबके उसने अपने बाप और अपनी क़ौम से पूछा था के \"ये क्या चीज़ हैं जिनको तुम पूजते हो?\"","उनको ने जवाब दिया “कुछ बुथ (मूर्तियां/मूर्तियां) हैं जिनकी हम पूजा करते हैं और इनकी सेवा में हम लगे रहते हैं”","उसने पूछा “क्या ये तुम्हारी सुनते हैं जब तुम इन्हें पुकारते हो","हां ये तुम्हें कुछ नफ़ा या नुक्सान पहुंचते हैं?”","उनको ने जवाब दिया \" नहीं, बल्कि हमने अपने बाप दादा को ऐसा ही किया पाया है\"","इसपर इब्राहिम ने कहा \" कभी तुमने (आंखें खोल कर) उन चीज़ों को देखा भी जिनकी बंदगी तुम","और तुम्हारे पिछले बाप दादा बजा लाते रहे","मेरे तो ये सब दुश्मन हैं, बाजुज़ एक रब उल आलमीन के","जिसने मुझे भुगतान किया, फिर वही मेरी रहनुमाई फरमाता है","जो मुझे खिलाता और पिलाता है","और जब मैं बीमार हो जाता हूं तो वही मुझे शिफा देता है","जो मुझे मौत देगा और फिर दोबारा मुझको जिंदगी बक्शेगा","और जिसकी मैं उम्मीद रखता हूं के रोज ए जजा में वो मेरी खाता माफ फरमादेगा”","(इस्के बाद इब्राहिम ने दुआ की) “ऐ मेरे रब, मुझे हुकुम अता कर और मुझको सालिहों (नए लोगों) के साथ मिला","और बाद के आने वालों में मुझको सच्ची नामवारी आता कर","और मुझे जन्नत ए नईम के वारिसों (उत्तराधिकारी) में शामिल फरमा","और मेरे बाप को माफ़ करदे के बहकावे वो गुमराह लोगों में से हैं","और मुझे उस दिन रुसवा ना कर जबके सब लोग ज़िंदा करके उठेंगे","जबके ना माल कोई फ़ायदा देगा ना औलाद","बज़ुज़ इसके के कोई शक्स क़ल्ब-ए-सलीम (स्वस्थ हृदय) लिए हुए अल्लाह के हुजूर हाज़िर हो”","(उस रोज़) जन्नत परहेज़गारों के करीब ले आएगी","और दोज़ख बहके हुए लोगों के सामने खुल जाएगी","और उनसे पूछा जाएगा के “अब कहाँ है” वो जिनकी तुम खुदा को छोड़ कर इबादत करते थे","क्या वो तुम्हारी कुछ मदद कर रहे हैं या खुद अपना बचाव कर सकते हैं?”","फिर वो माबूद और ये बहके हुए लोग","और इबलीस के लश्कर सबके सब इसमें ऊपर तले ढकेल दिए जाएंगे","वहां ये सब आपस में झगड़ेंगे और ये बहके हुए लोग (अपने माबूदों से) कहेंगे","के “खुदा की कसम, हम तो सारी गुमराही में मुबतला थे","जबके तुमको रब उल आलमीन की बाराबरी का दरजा दे रहे थे","और वो मुजरिम लोग ही थे जिन्होन ने हमको इस गुमराही में डाला","अब ना हमारा कोई सिफ़रीशी है","और ना कोई जिगरी दोस्त","काश हमें एक दफा फिर पलटने का मौका मिल जाए तो हम मोमिन हों”","यकीनन इस में एक बड़ी निशानी है, मगर मेरे अंदर से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं","और हकीकत ये है के तेरा रुब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी","क़ौम ए नूह ने रसूलों को झुटलाया","याद करो जबके उनके भाई नूह ने उनसे कहा था \"क्या तुम डरते नहीं हो","मैं तुम्हारे लिए एक अमानत दार रसूल हूं","लिहाज़ा तुम अल्लाह से डरो और","","","उनहों ने जवाब दिया \"क्या हम तुझे मान लें हलांके तेरी जोड़ी रज़िल-तरीन (सबसे नीच/नीच) लोगों ने इख्तियार की है?\"","नूह ने कहा “मैं क्या जानू के उनके अमल कैसे हैं","उनका हिसाब तो मेरे रब के ज़िम्मे है, काश तुम कुछ शूर से काम लो","मेरा ये काम नहीं है के जो ईमान लायें उनको मैं धुतकार दूं","मैं तो बस एक साफ साफ मुतनब्बे (चेतावनी) करने वाला आदमी हूं\"","उनहों ने कहा \"ऐ नूह, अगर तू बाज़ ना आया तो फिटकरे हुए लोगों में शामिल होकर रहेगा\"","नूह ने दुआ की \"ऐ मेरे रब, मेरी क़ौम ने मुझे झुटला दिया","अब मेरे और उनके दरमियान दो-टूक फैसला करदे और मुझे और जो मोमिन मेरे साथ हैं इनको निजात दे”","आखिर ए कार हमने उसको और उसके साथियों को एक भारी हुई कश्ती में बचा लिया","और उसके बाद बाकी लोगों को गर्क (डूब) कर दिया","यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर लोग माने वाले नहीं","और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी","आद ने रसूलों को झुटलाया","याद करो जबके उनके भाई हुड ने उनसे कहा था \"क्या तुम डरते नहीं","मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं","लिहाजा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो","मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है","ये तुम्हारा क्या हाल है के हर ऊंचे मक़ाम पर ला हासिल एक यादगार इमारत बना डालते हो","और बड़े-बड़े क़सर (विशाल महल) तामीर करते हो गोया तुम्हें हमेशा रहना है","और जब किसी पर हाथ डालते हो जब्बार बन कर डालते हो","पास तुम लोग अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो","डरो उसे जिसने वो कुछ तुम्हें दिया है जो तुम जानते हो","तुम्हें जानवर दिए, औलादें दी","बाग दिए और चश्मे (पानी के झरने) दिए","मुझे तुम्हारे हक में एक बड़े दिन के अज़ाब का डर है\"","उनको ने जवाब दिया \" तू हिदायत कर या ना कर, हमारे लिए यकसन है","ये बातें तो यूं ही होती चली आई हैं","और हम अज़ाब में मुब्ताला होने वाले नहीं हैं\"","आख़िर ए कार उनहों ने उसे झुतला दिया और हमने उनको हलाक कर दिया। यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर लोग मन्ने वाले नहीं हैं","और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बर्दस्त भी है और रहीम भी","समूद ने रसूलों को झुटलाया","याद करो जबके उनके भाई सालेह ने उनसे कहा \"क्या तुम डरते नहीं","मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं","लिहाज़ा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो","मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है","क्या तुम उन सब चीजों के दरमियान, जो यहां हैं, बस यूंही इत्मिनान से रहना दिए जाओगे","बागों (बगीचों) और चैसमन में","खेतों और नखलिस्तानो (खजूर-कुंजों) में जिनके खोसे रस भरे हैं","तुम पहाड़ खोद खोद कर फखरिया (गर्व से) उन में इमरतें बनाते हो","अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो","उन बे-लगाम लोगों की इताअत ना करो","जो ज़मीन में फसाद बरपा करते हैं और कोई इस्लाह नहीं करते”","उन्हें ने जवाब दिया “तू महज़ एक सहर-ज़ादा (जादू से प्रभावित) आदमी है","तू हम जैसा एक इंसान के सिवा और क्या है, ला कोई निशानी अगर तू सच्चा है”","सालेह ने कहा “ये ऊंटनी (वह-ऊंटनी) है एक दिन इसके पीने का है और एक दिन तुम सब के पानी लेने का","इसको हरगिज़ न छेड़ना (छेड़छाड़) वरना एक बुरे दिन का अज़ाब तुमको आ लेगा”","मगर उन्हें ने इसकी कुंचे काट दी (उसे चोट लगी) और आख़िर-ए-कार पछताते रह गए","अज़ाब ने उन्हें आ लिया, यकीनन इस्मे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर मन्ने वाले नहीं","और हकीकत ये है के तेरा रब्ब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी","लूट की क़ौम ने रसूलों को झुटलाया","याद करो जबके उनके भाई लुट ने उनसे कहा था \"क्या तुम डरते नहीं","मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूँ","लिहाज़ा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो","मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है","क्या तुम दुनिया की मखलूक में से मर्दों के पास जाते हो","और तुम्हारी बीवीयों में तुम्हारे रब ने तुम्हारे लिए जो कुछ पेदा किया है उसे छोड़ देते हो? बल्के तुम लोग तो हद से ही गुजर गए हो।”","उनहों ने कहा \"ऐ लुट\" अगर तू इन बातों से बाज़ ना आया तो जो लोग हमारी बस्तियों से निकल गए हैं उनमें तू भी शामिल हो कर रहेगा\"","उसने कहा \"तुम्हारे कार्टून पर जो लोग कुद्द (घृणा/घृणा) कर रहे हैं मैं उन में शामिल हूं","ऐ परवरदिगार, मुझे और मेरे एहल-ओ-अयाल (मैं और मेरे लोग/मेरा परिवार) को इनकी बदकिरदारियों से निजात दे”","आखिर ए कार हमने उसे और उसके सब एहाल-ओ-अयाल को बचा लिया","बज़ुज़ एक बुदिया के जो पीछे रह जाने वालों में से थी","फिर बाकी मांदा(बाकी) लोगों को हमने तबाह कर दिया","और उन पर बरसात एक बरसात, बड़ी ही बुरी बारिश थी जो उन डराए जाने वालों पर नाज़िल हुई","यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर माने वाले नहीं","और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी","असहाब-उल-अइक़ा ने रसूलों को झुटलाया","याद करो जबके शोएब ने उनसे कहा था \"क्या तुम डरते नहीं","मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं","लिहाजा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो","मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है","पैमाने ठीक भरो (पूरा माप दो) और किसी को घाटा (कम) ना दो","सही तराजू से तोलो","और लोगों को उनकी चीजे कम ना दो, जमीन में फसाद ना फैलाओ फिरो","और हमें जात का खौफ करो जिसने तुम्हें और गुज़िश्ता नसलों को भुगतान किया है।”","उनहों ने कहा \"तू महज एक सहर जादा (जादू से प्रभावित) आदमी है","और तू कुछ नहीं मगर एक इंसान हम ही जैसा, और हम तो तुझे बिल्कुल झूठा समझते हैं","अगर तू सच्चा है तो हमपर आसमान का कोई टुकड़ा गिरा दे\"","शोएब ने कहा \"मेरा रब जानता है जो कुछ तुम कर रहे हो\"","उन्होन ने उसे झुटला दिया, आखिर-ए-कार छतरी वाले दिन (कैनोपी का दिन) का अज़ाब अनपर आ गया, और वो बदे ही खौफ़-नाक दिन का अज़ाब था","यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर मेरे अंदर से अक्सर लोग माने वाले नहीं","और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी","ये रब्बुल आलमीन की नाज़िल करदा चीज़ है","इसे लेकर तेरे दिल पर अमानत-दार रूह उतरी है","ता-के तू उन लोगों में शामिल हो जो (खुदा की तरफ से ख़ल्क़-ए-ख़ुदा को) मुतनब्बेह (चेतावनी) देने वाले हैं","साफ़ साफ़ अरबी ज़ुबान में","और अगले लोगों की किताबों में भी ये मौजूद है","क्या इन (एहले मक्का) के लिए ये कोई निशानी नहीं है के इसे उलेमा-ए-बानी इस्राइल जानते हैं","(लेकिन इनकी टोपीदारमी का हाल ये है के) अगर हम इसे किसी अजमी (गैर-अरब) पर भी नाज़िल कर देते हैं","और ये (फसीह अरबी कलाम) वो इनको पढ़ कर सुनाता तब भी ये मान कर ना देते","इसी तरह हमने इस (ज़िक्र) को मुजरिमों के दिलों में गुज़ारा है","वो इसपर ईमान नहीं लाते जब तक अज़ाब ए अलीम ना देख लें","फिर जब वो बे-ख़बरी में अनपर आ पड़ता है","हम वक़्त कहते हैं \"के क्या अब हमें कुछ मोहलत मिल सकती है?\"","तो क्या ये लोग हमारे अजब के लिए जल्दी मचा रहे हैं","तुमने कुछ गौर किया, अगर हम उन्हें बरसों तक ऐश करने की मोहलत भी दे दें","और फिर वही चीज उन्पर आ जाए जिसमें इन्हें डराया जा रहा है","तो वो सामान-ए-ज़िस्ट (जीवन के प्रावधान) जो उनको मिला हुआ है इनका किस काम आएगा","(देखो) हमने कभी किसी बस्ती को इसके बिना हलाक नहीं किया के उसके लिए खबरदार करने वाले हक़ ए हिदायत अदा करने को मौजूद थाय","और हम जालिम ना थे","इस (किताब ए मुबीन) को शयातीन लेकर नहीं उतरे हैं","ना ये काम उनको सजता है, और ना वो ऐसा कर ही सकते हैं","वो तो इसकी समात (सुनवाई) तक से दूर रक्खे गए हैं","पास (ऐ मुहम्मद), अल्लाह के साथ किसी दूसरे माबूद को न पुकारो, वरना तुम भी सजा पाने वालों में शामिल हो जाओगे","अपने करीब-तरीन रिश्तेदारों को डराओ","और ईमान लाने वालों में से जो लोग तुम्हारी जोड़ी इख्तियार करें उनके साथ तवाज़ो (विनम्रता/दया) से पेश आओ","लेकिन अगर वो तुम्हारी नफ़रमानी करें तो उनसे कहदो के जो कुछ तुम करते हो उसे मैं बारी-उज़-ज़िम्मा (जिम्मेदार नहीं) हूं","और हम ज़बरदस्त और रहीम पर तवक्कुल (भरोसा) करो","जो तुम्हीं हमें वक्त देख रहा है जब तुम उठते हो","और सजदा गुजर लोगों में तुम्हारी नक़ल ओ हरकत पर निगाह रखता है","वो सब कुछ सुनने और जाने वाला है","लोगन, क्या मैं तुम्हें बातों के शयातें किस पर उतर करते हैं","वो हर चाल साज़, बढ़कर पर उतर करते हैं","सुनी सुनाई बातें कानों में फूंकते हैं, और उनमें से अक्सर झूठे होते हैं","रहे शूरा (कवि), तो उनके पीछे बहके हुए लोग चलते हैं है","क्या तुम देखते नहीं हो के वो हर वादी (घाटी) में भटकते हैं","और ऐसी बातें कहते हैं जो करते नहीं हैं","बज़ुज उन लोगों के जो ईमान लाए और जिन्होन ने नेक अमल किए और अल्लाह को कसरत से याद किया और जब अनपर ज़ुल्म किया गया तो सिर्फ बदला ले लिया, और ज़ुल्म करने वालों को अंकाराब मालूम हो जाएगा के वो किस अंजाम से दो-चार होते हैं","ता सीन। ये आयत हैं कुरान और किताब ए मुबीन की","हिदायत और बशारत उन ईमान लाने वालों के लिए","जो नमाज कायम करते हैं और जकात देते हैं, और फिर वो ऐसे लोग हैं जो आखिरी पर पूरा यकीन रखते हैं","हकीकत ये है के जो लोग आख़िरत को नहीं मानते उनके लिए हमने उनके कार्टूनों को ख़ुशनुमा बना दिया है, इसलिए वो भटकते फिर रहे हैं","ये वो लोग हैं जिनके लिए बुरी सज़ा है और आख़िरत में यही सबसे ज़्यादा ख़ासारे (नुक्सान) में रहने वाले हैं","और (ऐ मुहम्मद) बिला शुभा तुम ये कुरान एक हकीम ओ आलिम (सर्वज्ञ और सर्वज्ञ) हस्ती की तरफ से पा रहे हो","(इन्हें वक्त का क़िस्सा सुनाओ) जब मूसा ने अपने घर वालों से कहा के \"मुझे एक आग सी नज़र आई है, मैं अभी तो वहां से कोई खबर लेकर आता हूं या कोई अंगारा चुन लाता हूं ता-के तुम लोग गरम हो सको\"","वहां जो पहनूं तो निदा (आवाज़/पुकार) आई के \"मुबारक है वो जो इस आग में है और जो इसके महोल में है, पाक है अल्लाह सब जहांओं का परवरदिगार","ऐ मूसा, ये मैं हूं अल्लाह, ज़बरदस्त और दाना (सर्व-बुद्धिमान)","और फेंक तू ज़रा अपनी लाठी।\" जुनही के मूसा ने लाठी सांप (सांप) को देखा कि तरह बल खा रही है तो पीठ फिर कर भागा और पीछे मुड़ कर भी ना देखा। \"ऐ मूसा, डरो नहीं, मेरे हुजूर रसूल दारा नहीं करते","इल्ला ये के किसी ने कसूर किया हो। फिर अगर बुराई के बाद उसने अपनी गलती से अपने फेल (अमल) को बदल लिया तो मैं माफ करने वाला मेहरबान हूं","और जरा अपना हाथ अपने गिरेबान मैं तो डालो चमकता हुआ निकलेगा बिना किसी परेशानी के, ये (दोनो निशानियां) नौ (नौ) निशानियों में से हैं फिरौन और उसके क़ौम की तरफ (ले जाने के लिए), वो बदे-किरदार (दुष्ट) लोग हैं”","मगर जब हमारी खुली खुली निहसानियां उन लोगों के सामने आईं तो उनहों ने कहा ये तो खुला जादू है","उनहों ने सारा-सर जुल्म और गुरु की राह से इन निशानियों का इंकार किया, हलांके दिल उनके कायल (आश्वस्त) हो चुके थे। अब देखलो के उन मुफसीदों का अंजाम कैसा हुआ","(दूसरी तरफ) हमने दाऊद ओ सुलेमान को इल्म अता किया और उन्होंने कहा कि शुक्र है हमें खुदा का जिसने हमको अपने बहुत से मोमिन बंदों पर फजीलत अता की","और दाऊद का वारिस सुलेमान हुआ और उसने कहा “लोगन, हमें परिन्दों (पक्षियों) की बोलियाँ सिखाई गई हैं और हमें हर तरह की चीज़ें दी गई हैं, बेशक ये (अल्लाह का) नुमाया फ़ज़ल है।”","सुलेमान के लिए जिन और इंसानों और परिंदों के लश्कर जमा किए गए थे और वो पूरे ज़ब्त (सख्त अनुशासन) में रक्खे जाते थे","एक मरतबा वो उनके साथ कूच (मार्च) कर रहा था) यहां तक ​​के जब ये सब चुनौतियां (चींटियों) की वादी (घाटी) में पहुंचे तो एक चुनती (चींटी) ने कहा \"ऐ चुनिटों, अपने बिलों (छेद) में घुस जाओ, कहीं ऐसा ना हो के सुलेमान और उसके लश्कर तुम्हें कुचलें और उन्हें खबर भी ना हो\"","सुलेमान उसकी बात पर मुस्कुराए हुए हंस पड़ा और बोला \"ऐ मेरे रब मुझे काबू में रख के मैं तेरे उस एहसान का शुक्र अदा करता रहूं जो तू-नए मुझपर और मेरे वालिदैन पर किया है और ऐसा अमल ए सालेह करूं जो तुझे पसंद आए, और अपनी रहमत से मुझको अपने साल बंदों में दाखिल कर।\"","(एक और मौक़े पर) सुलेमान ने परिन्दों का जायज़ा लिया और कहा \"क्या बात है के मैं फलां हुड़-हुद (हूपो पक्षी) को नहीं देख रहा हूँ। क्या वो कहीं गायब हो गया है","मैं उसे सख्त सजा दूंगा, या जुबा कर दूंगा, वरना उसे मेरे सामने मकूल वजह पेश करनी होगी","कुछ ज्यादा दिन न गुजरी थी के उसने आकर कहा \"मैंने वो मालूमात हासिल की है जो आपके इलम में नहीं हैं। मैं सबा के मुतालिक यकीनी इत्तिला लेकर आया हूं","मैंने वहां एक औरत देखी जो हमें क़ौम की हुक्मरान है","","के हमें खुदा को सजदा करें जो आसमानो और ज़मीन की पोशीदा (छिपी हुई) चीज़ निकलता है और वो सब कुछ जानता है जिसे तुम लोग छुपाते हो और जाहिर करते हो","अल्लाह, जिसके सिवा कोई मुस्तहिक ए इबादत (पूजा के योग्य) नहीं, जो अर्श ए अजीम का मालिक है","सुलेमान ने कहा \"अभी हम देखते लेते हैं के तू सच नहीं कहता\" है ये तू झूठ बोलने वालों में से है","मेरा ये खत (पत्र) ले जा और उसे उन लोगों की तरफ डाल दे, फिर अलग हट कर देख के वो क्या रद्द-ए-अमल जाहिर करते हैं”","मलिका बोली “ऐ एहले दरबार, मेरी तरफ एक बड़ा एहम ख़त फेंक गया है","वो सुलेमान की जानिब से है और अल्लाह रहमान ओ रहीम के नाम से शुरू किया गया है","मज़मून ये है के \"मेरे मुकाबले में सरकशी न करो और मुस्लिम हो कर मेरे पास हाज़िर हो जाओ\"","(खत सुनाकर) मलिका ने कहा “ऐ सरदारन ए क़ौम मेरे इस मामले में मुझे मशवरा दो। मैं किसी मामले का फैसला तुम्हारे बिना नहीं करती हूं\"","उन्हें ने जवाब दिया \"हम ताकतवार और लड़ने वाले लोग हैं, अगला फैसला आपके हाथ में है, आप खुद देख लें के आपको क्या हुकुम देना है\"","मलिका ने कहा के \"बादशाह जब किसी मुल्क में घुस आते हैं तो उसे ख़राब और उसके इज्जत वालों को ज़लालत कर देते हैं, यहीं कुछ वो किया करते हैं","मैं लोगों की तरफ एक हदिया (उपहार) भेजती हूं, फिर देखती हूं के मेरे एलची (दूत) क्या जवाब लेकर पलट-ते हैं”","जब वो [मलिका का सुरक्षित (दूत)] सुलेमान के हां पहुंचा तो उसने कहा, \"क्या तुम लोग माल से मेरी मदद करना चाहते हो? जो कुछ खुदा ने मुझे दे रखा है वो इससे बहुत ज्यादा है जो तुमने दिया है। तुम्हारी हादिया (उपहार) तुम्हें मुबारक रहे","ऐ सुरक्षित (दूत)]वापस जा अपने भेजने वालों की तरफ, हम उन पर ऐसे लश्कर लेकर आएंगे जिनका मुकाबला वो ना कर पाएंगे, और हम उन्हें ऐसी ज़िल्लत के साथ, वहां से निकालेंगे के वो ख़्वार होकर रह जायेंगे”","सुलेमान ने कहा “ऐ एहले दरबार, तुम में से कौन उसका तख्त (सिंहासन) मेरे पास लाता है कबूल इसके के वो लोग मुती (फरमाबरदार) होकर मेरे पास हाजिर हूं?”","जिन्नो में से एक कवी (शक्तिशाली) हयाल ने अर्ज़ किया \"मैं उसे हाजिर कर दूंगा क़बल इसके के आप अपनी जगह से उठें। मैं इसकी ताक़त रखता हूं और अमानतदार हूं\"","जिस शक्स के पास किताब का इलम था वो बोला \"मैं आपकी\" पलख झपकने से पहले उसे लाए देता हूं”। जुनही के सुलेमान ने वो तख्त अपने पास रक्खा हुआ देखा, वो पुकार उठा \"ये मेरे रब का फज़ल है ता-के वो मुझे आजमाए के मैं शुक्र करता हूं या काफिर ए नियामत करता हूं। और जो कोई शुक्र करता है उसका शुक्र उसे अपने ही लिए मुफीद है, वरना कोई नाशुकारी करे तो मेरा रब बे-नियाज़ और अपनी ज़ात में आप बुज़ुर्ग है।”","सुलेमान ने कहा, \"अंजान तारीख़ से उसका तख्त उसके सामने रख दो, देखें वो सही बात तक पहुंच जाती है या उन लोगों में से है जो राह ए रास्ता नहीं पाते।\"","मलिका जब हाजिर हुई तो उसे कहा गया, क्या तेरा तख्त (सिंहासन) ऐसा ही है? वो कहने लगी \"ये तो गया वही है, हम तो पहले ही जान गए थे और हमने सर-ए-इतात झुका दिया था (या हम मुस्लिम हो चुके थे)\"","उसको (इमान लेन से) जिस चीज ने रोक रखा था वो उन मबूदों की इबादत थी जिन्होन अल्लाह के सिवा पूजती थी, क्योंकि वो एक काफिर क़ौम से थी","उसे कहा गया के महल में दाख़िल हो, उसने जो देखा तो समझ के पानी का हौज़ है और उतरने के लिए उसने अपने दर्द उठा लिए, सुलेमान ने कहा ये शीशे (कांच) का चिकना फ़र्श है इसपर वो पुकार उठी \"ऐ मेरे रब, (आज तक) मैं अपने नफ़्स पर बड़ा ज़ुल्म करती रही, और अब मैंने सुलेमान के साथ अल्लाह रब्बुल आलमीन की इताअत क़बूल करली\"","और समूद की तरफ हमने उनके भाई सालेह को (ये पैगाम दे कर) भेजा के अल्लाह की बंदगी करो, तो यकायक वो दो मुतखसिम फरीक (दो तकरार) बन गए","सालेह ने कहा \"ऐ मेरी कौम के लोगों, भलाई से पहले बुराई के लिए क्यों जल्दी मचाते हो? क्यों नहीं अल्लाह से मगफिरत तालाब करते? शायद के तुमपर रहम फरमाया जय?”","उनहों ने कहा \"हमने तो तुमको और तुम्हारे साथियों को बद-शगुनी का निशान पाया है\"। सालेह ने जवाब दिया \"तुम्हारे नीक ओ बद शगुन का सारा रिश्ता (अच्छे और बुरे शगुन का मुद्दा) अल्लाह के पास है। असल बात ये है कि तुम लोगों की आजमाइश हो रही है\"","हमारे शहर में नौ (नौ) जत्थे-दार (रिंग-लीडर) थे जो मुल्क में फसाद फैलाते और कोई इस्लाह का काम ना करते थे","उन्होन ने आपस में कहा “खुदा की कसम खा कर अहद करलो के हम सालेह और उसके घर वालों पर शब्खुन (गुप्त रात का हमला) मारेंगे और फिर उसके वाली (अभिभावक) से कह देंगे के हम उस खानदान की हलाकत के मौके पर मौजुद ना थाय, हम बिल्कुल सच कहते हैं","ये चल तो वो चले और फिर एक चाल हमने चली जिसकी उन्हें खबर ना थी","अब देखलो के उनकी चाल का अंजाम क्या हुआ। हमने तबाह करके रख दिया उनको और उनकी पूरी कौम को","वो उनके घर खाली पड़े हैं उस जुल्म की पैदाइश में जो वो करते थे, इस में एक निशान ए इब्रत है उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं","और बच्चा लिया हमने उन लोगों को जो ईमान लाए थे और नफ़रमानी से परहेज़ करते थे","और लुट को हमने भेजा। याद करो वो वक़्त जब उसने अपनी क़ौम से कहा \"क्या तुम आँखें देखते हो ख़राबी करते हो","क्या तुम्हारा यही चलन है के औरतों को छोड़ कर मर्दों के पास शेहवत-रानी (यौन इच्छा) के लिए जाते हो? हकीकत ये है के तुमलोग सच कहते हो (अज्ञान) का काम करते हो।”","मगर उसकी क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ ना था के अनहोन ने कहा \"निकल दो लुट के घर वालों को अपनी बस्ती से, ये बड़े पाकबाज़ बनते हैं\"","आख़िर ए कार हमने बचा लिया उसको और उसके घर वालों को, बाज़ उसकी बीवी के जिसका पीछे रह जाना हमने तै करदिया था","और बरसै उन लोगों पर एक बरसात, बहुत ही बुरी बरसात थी वो उन लोगों के हक़ में जो मुतनब्बह किये जा चुके थे","(ऐ नबी) कहो, हम्द है अल्लाह के लिए और सलाम उसे उन बंदों पर जिन्होंने हमें बरगुज़िदा किया. (इंसे पूछो) अल्लाह बेहतर है या वो मबूद जिनहें ये लोग इसका शरीक बना रहे हैं","भला वो कौन है जिसने आसमान और ज़मीन को पेदा किया, और तुम्हारे लिए आसमान से पानी बरसाया, फिर उसके ज़रिये से वो खुसनुमा बाग उगे जिनके दरख्तों का उगना तुम्हारे बस में ना था? क्या अल्लाह के साथ कोई दूसरा खुदा भी है? (नहीं), बलके यहीं लोग राह ए रास्ते से हटकर चले जा रहे हैं","और वो कौन है जिसने ज़मीन को जाए क़रार बनाया और उसके अंदर दरिया रावन किए, और उसमें (पहाड़ों की) मेखें गाध दी और पानी के दो ज़ख़िरों (दो शरीर) के दरमियान पर्दा हयाल कार्डिए? क्या अल्लाह के साथ कोई और खुदा भी शरीक में है? नहीं, बल्कि मेरे से अक्सर लोग नादान हैं","कौन है जो बेकरार की दुआ सुनता है जबके वो उसे पुकारे और कौन उसकी तकलीफ रफा-दफा करता है? और (कौन है जो) तुम्हें ज़मीन का खलीफा बनाता है? क्या अल्लाह के साथ कोई और खुदा भी (ये काम करने वाला) है? तुम लोग कम ही सोचते हो","और वो कौन है जो खुशियों और समंदर की तरीकियों में तुमको रास्ता दिखता है और कौन अपनी रहमत के आगे हवाओं को खुश खबरी लेकर भेजता है? क्या अल्लाह के साथ कोई दूसरा खुदा भी (ये काम करता) है? बहुत बाला ओ बरतर है अल्लाह हमसे शिर्क से जो ये लोग करते हैं","और वो कौन है जो ख़ल्क़ (सृष्टि) की इब्तिदा (उत्पत्ति) करता है और फिर उसका इयादा (पुनः प्रस्तुत) करता है। और कौन तुमको आसमान और ज़मीन से रिज़क देता है? क्या अल्लाह के साथ कोई और खुदा भी है? कहो के लाओ अपनी दलील अगर तुम सच्चे हो","इनसे कहो, अल्लाह के सिवा आसमान और ज़मीन में कोई गैब का इलम नहीं रखता, और वो नहीं जानता के कब वो उठेगा","बलके आख़िरत का तो इलम ही इन लोगों से ग़म हो गया है, बलके ये उसकी तरफ से शक्क में हैं, बलके ये उसे अंधे हैं","ये मुन्किरें कहते हैं \"क्या जब हम और हमारे बाप दादा मिट्टी हो चुके होंगे तो हमें वक़्ती क़बरों से निकला जायेगा?”","ये खबरें हमको भी बहुत दी हैं और पहले हमारे आबा ओ अजदाद को भी दी जाती रही हैं, मगर ये बस अफसाने ही अफसाने हैं जो अगले वक्त से सुनते चले आ रहे हैं”","कहो, जरा जमीन में चल फिर कर देखो के मुजरेमो का क्या अंजाम हो चुका है","(ऐ नबी), इनके हाल पर रांझ ना करो और ना इनकी चालों पर दिल तंग हो","वो कहते हैं के \"ये धमकी कब पूरी होगी अगर तुम सच्चे हो?\"","कहो, क्या अजब के लिए तुम जल्दी मचा रहे हो उसका एक हिसा तुम्हारे करीब ही आ लगा हो","हकीकत ये है के तेरा रब तो लोगों पर बड़ा फजल फरमाने वाला है, मगर अक्सर लोग शुक्र नहीं करते","बिला शुभा तेरा रुब खूब जानता है जो कुछ उनके सीने अपने अंदर छिपाए हुए हैं और जो कुछ वो जाहिर करते हैं","आसमान ओ ज़मीन की कोई पोशीदा चीज़ ऐसी नहीं है जो एक वाज़ेह किताब में लिखी हुई मौजुद ना हो","ये वाक़िया है के ये कुरान बानी इजराइल को अक्सर उन बातों की हकीकत बताता है जिनमें वो इख्तिलाफ रखते हैं","और ये हिदायत और रहमत है ईमान लाने वालों के लिए","यकीनन (इसी तरह) तेरा रब इन लोगों के दरमियान भी अपने हुकुम से फैसला करडेगा. और वो ज़बरदस्त और सब कुछ जान-नय वाला है","पास ऐ नबी, अल्लाह पर भरोसा रखो, यकीनन तुम सारे हक़ पर हो","तुम मुर्दों को नहीं सुना सकते, ना उन दिलों तक अपनी पुकार रख सकते हो जो पीठ फेर कर भागे जा रहे होन","और ना अंधों को रास्ता बता कर भटकने से बच सकते हैं। तुम तो अपनी बात उन्ही लोगों को सुना सकते हो जो हमारी आयत पर ईमान लाते हैं और फिर फरमाबरदार बन जाते हैं","और जब हमारी बात पूरी होने का वक्त सामने आ जाएगा तो हम उनके लिए एक जानवर जमीन से निकालेंगे जो उनसे कलाम करेगा के लोग हमारी आयत पर यकीन नहीं करते थे","और जरा तसव्वुर करो उस दिन का जब हम हर उम्मत में से एक फौज की फौज उन लोगों की घेर लाएंगे जो हमारी आयत को झुटलाया करते हैं था, फिर उनको (उनकी अक्साम (वर्गीकरण और योग्यता) के लिहाज़ से दर्जा बा दर्जा) मुरत्तब (व्यवस्थित) किया जाएगा","यहां तक ​​के जब सब आ जाएंगे तो (उनका रब उनसे) पूछेगा के “तुमने मेरी आयत को झूठला दिया हलांके तुमने उनका इल्मी इहाता (समझे) ना किया था? अगर ये नहीं तो तुम क्या कर रहे थे?”","और उनके ज़ुल्म की वजह से अज़ाब का वादा उन पर पूरा हो जाएगा, तब वो कुछ भी ना बोल पाएंगे","क्या उनको समझ में नहीं आता था कि हमने रात उनके लिए सुकून हासिल करने को बनाई थी और दिन को रोशन किया था? इसी में बहुत निशानियां थी उन लोगों के लिए जो ईमान लाते थे","और क्या गुजरेगी हमें रोज जबके सुर/सूर (तुरही) फुनका जाएगा और आतंक खा जाएंगे वो सब जो आसमान और जमीन में हैं, सिवाय उन लोगों के जिनमें अल्लाह है हौल (आतंकवाद) से बचना चाहेगा। और सब कान दबाये उसके हुज़ूर हाज़िर हो जायेंगे","आज तू पहाड़ों को देखता है और समझता है कि खूब जमे हुए हैं, मगर हमें वक़्त ये बादलों की तरह उड़ रहे होंगे, ये अल्लाह की क़ुदरत का करिश्मा होगा जिसने हर चीज़ को हिकमत के साथ उस्तवार (के साथ आदेश दिया) बुद्धि) किया है. वो खूब जानता है के तुमलोग क्या करते हो","जो शक्स भलाई लेकर आएगा उसे ज्यादा बेहतर सिला मिलेगा और ऐसे लोग उस दिन के हॉल (आतंक/देहशत) से महफूज होंगे","और जो बुराई के लिए हुए आएंगे, ऐसे सब लोग औंधे मुंह आग में फेंक जायेंगे. क्या तुमलोग इसके सिवा कोई और जजा पा सकते हो जैसा करो वैसा भरो","(ऐ मुहम्मद, इनसे कहो) \"मुझे तो यहीं हुकुम दिया है के इस शहर के रब की बंदगी करूं जिसने इसे हराम (पवित्र) बनाया है, और जो हर चीज का मालिक है। मुझे।\" हुकुम दिया गया है के मैं मुस्लिम बन कर रहूं","और ये कुरान पढ़ कर सुनाऊं” अब जो हिदायत इख्तियार करेगा वो अपने ही भले के लिए हिदायत इख्तियार करेगा, और जो गुमराह हो उसे कहदो मैं तो बस खबरदार करने वाला हूं","इंसे कहो, तारीफ अल्लाह ही के लिए है, अनकरीब वो तुम्हें अपनी निशानियां दिखा देगा और तुम उन्हें पहचान लोगे, और तेरा रब बे-खबर नहीं है उन अमल से जो तुम लोग करते हो","ता सीन मीम","ये किताब ए मुबीन (साफ़ किताब) की आयत हैं","हम मूसा और फिरौन का कुछ हाल ठीक ठीक तुम्हें सुनाते हैं ऐसे लोगों के फ़ायदे के लिए जो ईमान लायें","वक़िया ये है के फिरौन ने ज़मीन में सरकशी की और उसके बाशिन्दों को गिरोहों में तस्सीम करदिया, उन मेरे से एक गिरोह को वो ज़लील करता था, इसके लड़कों को क़त्ल करता था और उसकी लड़कियों को जीता (जिंदा) रहने देता था। फिल वकै वो मुफसिद (शरारत करने वाले) लोगों में से थे","और हम ये इरादा रखते थे के मेहरबानी करें उन लोगों पर जो जमीन में जलील करके रख दिए गए थे, और उन्हें पेशवा (नेता) बना दें, और उन्हें वारिस बनाएं","और ज़मीन में उनको इक्तेदार (शक्ति) बख्शें, और उनसे फिरौन ओ हमान और उनके लश्करों को वही कुछ दिखला दे जिसका उन्हें डर था","हमने मूसा की मां को इशारा किया के \"इसको दूध पिला, फिर जब तुझे उसकी जान का खतरा हो तो इसे दरिया में डाल दे और कुछ खौफ और गम ना कर, हम इसे तेरे ही पास वापस ले आएंगे, और इसको पैगम्बरों में शामिल करेंगे\"","आखिर ए कार फ़िरौन के घर वालों ने उसे (दरिया से) निकाल लिया ता-के वो उनका दुश्मन और उनके लिए सबाब ए रंज बने। वक़ाई फिरौन और हमान और उसके लश्कर (अपनी तदबीर में) बदाए गलत-कार थे","फिरौन की बीवी ने (उससे) कहा \"ये मेरे और तेरे लिए आँखों की ठंडक है, इसे क़त्ल न करो, क्या अजब के ये हमारे लिए मुफीद साबित हो, या हम इसे बेटा ही बना लें।” और वो (अंजाम से) बेखबर थाय","उधर मूसा की मां का दिल उड़ा जा रहा था, वो इस राज को फाश कर बैठती अगर हम उसकी धरस (दिल को मजबूत करते) ना बांध देते ता-के वो (हमारे वादे पर) ईमान लाने वालों में से हो","उसने बच्चों की बहन से कहा इसके पीछे पीछे जा, चुनांचे वो अलग से उसको इस तरह देखती रही के (दुश्मनों को) उसका पता ना चला","और हमने बच्चों पर पहले ही दूध पिलाने वालियों की चटियां (स्तन) हराम कर रखी थी। (ये हालात देख कर) उस लड़की ने उनसे कहा, \"मैं तुम्हें ऐसे घर का पता बताऊं जिसके लोग इसकी परवरिश का ज़िम्मा लें और खैर ख्वाही के साथ इसे रखें?\"","इस तरह हम मूसा को उसकी मां के पास पलटा लाए ता-के उसकी आंखें ठंडी हों और वह घमघिन ना हो। और जान ले के अल्लाह का वादा सच्चा था, मगर अक्सर लोग इस बात को नहीं जानते","फिर जब मूसा अपनी पूरी जवानी को पाहुंच गया और उसका नाशो-नुमा मुकम्मल हो गया तो हमने उसका हुकुम और इल्म अता किया। हम नए लोगों को ऐसी ही जजा देते हैं","(एक रोज़) वो शहर में ऐसे वक़्त में दखल हुआ जबके एहले शहर गफ़लत में थे। वहां उसने देखा के दो आदमी लड़ रहे हैं, एक उसकी अपनी कौम का था और दूसरा उसकी दुश्मन कौम से तालुक रखता था। उसकी कौम के आदमी ने दुश्मन कौम वाले के खिलाफ उसे मदद के लिए पुकारा। मूसा ने उसको एक घुसा (मुट्ठी) मारा और उसका काम तमाम कर दिया। (ये हरकत सरज़ाद होते हाय) मूसा ने कहा \"ये शैतान की करतूत है, वो सख्त दुश्मन और खुला गुमराह कुन है\"","फिर वो कहने लगा \"ऐ मेरे रब, मैंने अपने नफ्स पर बड़ा जुल्म कर डाला, मेरी मगफिरत फरमा दे।\" चुनांचे अल्लाह ने उसकी मगफिरत फरमा दी, वो गफूर ओ रहीम है","मोसा ने अहद किया के \"ऐ मेरे रब, ये एहसान जो तू ने मुझपर किया है इसके बाद अब मैं कभी मुजरिमों का मददगार ना बनूंगा\"","दूसरे रोज वो सुबह सवारे डरता और हर तरफ से खतरा पैदा हुआ शेहर मैं जा रहा था कि यकायक क्या देखता है कि वही शक्स जिसने कल उसे मदद के लिए पुकारा था आज फिर उसे पुकार रहा है। मोसा ने कहा \"तू तो बड़ा ही बेकार हुआ आदमी है\"","फिर जब मूसा ने इरादा किया के दुश्मन कौम के आदमी पर हमला किया तो वो पुकार उठा \"ऐ मूसा, क्या आज तू मुझे उसकी तरह कत्ल करने लगा है, जिस तरह कल एक शक्स को कत्ल कर चुका है, तू इस मुल्क में जब्बार बन कर रहना चाहता है, इस्लाह नहीं करना चाहता”","इसके बाद एक आदमी शहर के पारले सिरे (शहर का दूसरा छोर) से दौड़ता हुआ आया और बोला “मूसा, सरदारों में तेरे क़त्ल के मशवरे हो रहे हैं, यहां से निकल जा, मैं तेरा ख़ैर ख़्वा (शुभचिंतक) हूं”","ये खबर सुनते ही मूसा डरता और सहमत निकल खड़ा हुआ और उसने दुआ की कि \"ऐ मेरे रब, मुझे जालिमों से बचा\"","(मिस्र से निकल कर) जब मूसा ने मदियां का रुख किया तो उसने कहा \"उम्मीद है के मेरा रब मुझे ठीक रास्ते पर डाल देगा\"","और जब वो मदियां के कुनवें (ठीक है) पर पाहुंचा तो उसने देखा के बहुत से लोग अपने जानवरों को पानी पिला रहे हैं, और उन्हें अलग एक तरफ दो औरतें अपने जानवरों को रोक रही हैं। मूसा ने औरतों से पूछा “तुम्हें क्या परेशानी है?” उनहोंने कहा \"हम अपने जानवरों को पानी नहीं पिला सकते जब तक ये चारवाहे अपने जानवर निकल कर न ले जाएं, और हमारे वालिद एक बहुत बूढ़े आदमी हैं\"","ये सुनकर मूसा ने उनके जानवरों को पानी पिला दिया, फिर एक जगह की जगह जा बैठा और बोला \"परवरदिगार, जो खैर भी तू मुझपर नाज़िल करदे मैं उसका मोहताज हूं।\"","(कुछ दिन ना गुजरी थी के) उन दोनो औरतों में से एक शरम ओ हया से चलती हुई उसके पास आई और कहने लगी \"मेरे वालिद आप को बुला रहे हैं ता-के आपने हमारे जानवरों को पानी जो पिलाया है उसका अजर आपको दें।\" मूसा जब उसके पास पहुंचा और अपना सारा क़िस्सा उसे सुनाया तो उसने कहा \"कुछ खौफ ना करो, अब तुम ज़ालिमों से बच निकले हो।\"","दोनों औरतों में से एक ने अपने बाप से कहा \"अब्बाजान इस शक्स को नौकर रख लीजिये, बेहतरीन आदमी जिसे आप मुलाजिम रखें वही हो सकता है जो मजबूत और अमानत-दार हो\"","उसके बाप ने (मूसा से) कहा \"मैं चाहता हूं के\" अपनी दो बेटियों में से एक का निकाह तुम्हारे साथ कर्दों बशारत ये के तुम आठ साल तक मेरे साथ मुलाकात करो, और अगर दस साल पूरे करदो तो ये तुम्हारी मर्जी है, तुम इंशा अल्लाह मुझे नहीं चाहते।","मोसा ने जवाब दिया \"ये बात मेरे और आपके दरमियान ताई हो गई। दोनों मुद्दतों में से जो भी मैं पूरी तरह से उसके बाद फिर कोई ज्यादा मुझपर ना हो, और जो कुछ क़ौल ओ क़रार हम कर रहे हैं अल्लाह उसपर निगहबान है।\"","जब मूसा ने मुद्दत पूरी कर दी और वो अपने एहल-ओ-अयाल (परिवार) को लेकर चला तो तूर की जानिब उसको एक आग नजर आई। उसने अपने घर वालों से कहा \"ठहरो, मैंने एक आग देखी है, शायद मैं वहां से कोई खबर ले आऊं हां इस आग से कोई अंगारा ही उठा लाओ जैसे तुम ताप सको।”","वहां पाहुंचा तो वाड़ी के दहिने किनारे पर मुबारक खित्ते में एक दरख्त से पुकारा गया के \"ऐ मूसा, मैं ही अल्लाह हूं, सारे जहां वालों का मालिक\"","और (हुकुम दिया गया के) \"फेंक दे अपनी लाठी।\" जूनी के मूसा ने देखा के वो लाठी सांप (साँप) की तरह बाल खा रही है तो वो पीठ फेर कर भागा और उसने मुड़ कर भी ना देखा। (इरशाद हुआ) \"मूसा, पलट आ और खौफ ना कर, तू बिल्कुल महफूज है","अपना हाथ गिरेबान में डाल, चमकता हुआ निकलेगा बिना किसी तकलीफ के और खौफ से बचने के लिए अपना बाजू बेंच ले। ये दो रोशन निशानियां हैं तेरे रुब की।\" तरफ से फिरौन और उसके दरबारियों के सामने पेश करने के लिए, वो बड़े ही नफ़रमान लोग हैं”","मूसा ने अर्ज़ किया “मेरे आका, मैं तो उनका एक आदमी क़त्ल कर चूका हूँ, डरता हूँ के वो मुझे मार डालेंगे","और मेरा भाई हारून मुझसे ज़्यादा ज़ुबान अवार (जीभ की वाकपटुता) है, उसे मेरे साथ मददगार के तौर पर भेज ता-के वो मेरी तायद (समर्थन) करे, मुझे अंदेशा है के वो लोग मुझे झुठलाएँगे।”","फरमाया \"हम तेरे भाई के जरूर से तेरा हाथ मजबूत करेंगे और तुम दोनो को ऐसी सत्ता बक्शेंगे के वो तुम्हारा कुछ न बिगाड़ सकेगे। हमारी निशानियों के जोर से गलाबा (विजय) तुम्हारे और तुम्हारे जोड़े का ही होगा\"","फिर जब मूसा उन लोगों के पास हमारी खुली-खुली निशानियां लेकर पहुंच गया तो उनको ने कहा के ये कुछ नहीं है मगर बनवाती जादू और ये बातें तो हमने अपने बाप दादा के जमाने में कभी सुनी ही नहीं","मूसा ने जवाब दिया \"मेरा रब उस लड़के के हाल से खूब वाकिफ\" है जो उसकी तरफ से हिदायत लेकर आया है और वही बेहतर जानता है के आखिरी अंजाम किसका अच्छा होना है, हक ये है के जालिम कभी फलाह नहीं पाते।”","और फिरौन ने कहा \"ऐ एहले दरबार मैं तो अपने सिवा तुम्हारे किसी खुदा को नहीं जानता। हमन, ज़रा ईंटें (ईंटें) पकावा कर मेरे लिए एक ऊंची इमारत तो बनवा, शायद के उसपर चढ़ कर मैं मूसा के खुदा को देख सकता हूं, मैं तो इसे झूठा हाय\" समझता हूं\"","उसने और उसके लश्करों ने जमीन में बिना किसी हक के अपनी बदनामी का घमंड किया और समझ के उन्हें कभी हमारी तरफ पलटना नहीं है","आखिर-ए-कार हमने उसे और उसके लश्करों को पकड़ा और समंदर में फेंक दिया, अब देखलो के उन जालिमों का कैसा अंजाम हुआ","हमने उन्हें जहन्नुम की तरफ दावत देने वाले पेश-रो बना दिया और कयामत के रोज वो कहीं से कोई मदद न पा सकेंगे","हमने इस दुनिया में उनके पीछे लानत लगा दी और कयामत के रोज वो बड़ी क़बाहत (अजीब दुविधा) में मुब्तिला होंगी","पिछली नसलों को हलाक करने के बाद हमने मूसा को किताब अता की, लोगों के लिए बसेरातों का सामान (ज्ञान का साधन) बना कर, हिदायत और रहमत बना कर, ता-के शायद लोग सबक हासिल करें","(ऐ मुहम्मद) तुम हमें वक्त मगरबी गोशे (पश्चिमी तरफ) में मौजुद ना था जब हमने मूसा को ये फरमान ए शरीयत अता किया और ना तुम शहीदों (गवाहों) में शामिल थे","बल्के इसके बाद (तुम्हारे जमाने तक) हम बहुत से नासलें (पीढ़ियां) उठा चुके हैं और बहुत सारा जमाना गुजर चूका है। तुम एहले मदियां के दरमियान भी मौजूद ना थे के उनको हमारी आयतें सुना रहे हो, मगर (उस वक्त की ये खबरें) भेजने वाले हम हैं","और तुम तूर के दामन में भी उस वक्त मौजूद ना थे जब हमने (मूसा को पहली मरतबा) पुकारा था, मगर ये तुम्हारे रब की रहमत है (के तुमको ये मालूमात दी जा रही है) ता-के तुम उन लोगों को मुतनब्बेह (चेतावनी) करदो जिनके पास तुमसे पहले कोई मुतनब्बेह (चेतावनी) करने वाला नहीं आया, शायद के वो होश में आएं","(और ये हमने इसलिए किया के) कहीं ऐसा ना हो के उनके अपने किए कार्टूनों की बदौलत कोई मुसीबत जब उन पर आए तो वो कहें \"ऐ परवरदिगार, तू-ने क्यों ना हमारी तरफ कोई रसूल भेजा के हम तेरी आयत की जोड़ी बनाते और एहले ईमान में से होते।\"","मगर जब हमारे हां से हक उनके पास आ गया तो वो कहने लगे 'क्यूं ना दिया गया इसको वही कुछ जो मूसा को दिया गया था?' क्या ये लोग उसका इंकार नहीं कर चुके हैं जो इस पहले मूसा को दिया गया था? उनहों ने कहा \"दोनों जादू हैं जो एक दूसरे की मदद करते हैं\" और कहा \"हम किसी को नहीं मानते।\"","(ऐ नबी) इनसे कहो \"अच्छा तो लाओ अल्लाह की तरफ से कोई किताब जो इन दोनों से ज्यादा हिदायत बक्शने वाली हो अगर तुम सच्चे हो, मैं उसकी जोड़ी इख्तियार करूंगा।\"","अब अगर वो तुम्हारा ये मुतलबा पूरा नहीं करता तो समझ लो के दर असल ये अपनी ख्वाहिशत के जोड़े हैं, और हमारे शक्स से बढ़कर कौन गुमराह होगा जो खुदाई हिदायत के बिना बस अपनी ख्वाहिश की जोड़ी बनाए? अल्लाह ऐसे ज़ालिमों को हरगिज़ हिदायत नहीं बख्शता","और (नसीहत की) बात पै डर पै हम उन्हें पाहुंचा चुके हैं ता-के वो गफ़लत से बेदार हैं","जिन लोगों को इस पहले हमने किताब दी थी वो इस (कुरान) पर ईमान लाते हैं","और जब ये उनको सुनाया जाता है है तो वो कहते हैं के \"हम इसपर ईमान लाए, ये वाकाई हक़ है हमारे रब की तरफ से, हम तो पहले ही से मुस्लिम हैं\"","ये वो लोग हैं जिनका अजर दो बार दिया जाएगा हमें साबित क़दामी के बदले जो उन्होन ने दिखाया। वो बुराइयों को भलाइ से दफा करते हैं और जो कुछ रिज्क हमने उन्हें दिया है उसमें से खर्च करते हैं","और जब उन्होन ने बेहुदा बात सुनी तो ये कह कर उसे किनारा कश हो गए के \"हमारे अमल हमारे लिए और तुम्हारे अमल तुम्हारे लिए, तुमको सलाम है, हम जाहिलों का सा तरीक़ा इख़्तियार करना नहीं चाहिए।”","\"ऐ नबी, तुम जिसे चाहो उसे हिदायत नहीं दे सकते, मगर अल्लाह जिसे चाहता है हिदायत देता है और वो उन लोगों को खूब जानता है जो हिदायत कबूल करने वाले हैं।\"","वो कहते हैं \"अगर हम तुम्हारे साथ इस हिदायत की जोड़ी इख्तियार कर लें तो अपनी ज़मीन से उचक ले जायेंगे।\" क्या ये वक़िया नहीं है कि हमने एक पुर-अमन हरम (मक्का) को इनके लिए जाये क़ियाम बना दिया जिसकी तरफ हर तरह के समारात (प्रावधान) खिंचे चले आते हैं, हमारी तरफ से रिज़क के तौर पर? मगर इनमें से अक्सर लोग जानते नहीं हैं","और कितनी ही ऐसी बस्तियां हम तबाह कर चुके हैं जिनके लोग अपनी अर्थव्यवस्था (अर्थव्यवस्था) पर इत्र गए थे सो देखलो, वो उनके मास्कन पड़े हुए हैं जिन में उनके बाद काम ही कोई बसा है। आख़िर ए कार हम ही वारिस हो कर रहे","और तेरा रब बस्तियों को हलाक करने वाला ना था जब तक उनके मरकज में एक रसूल ना भेज देता जो उनको हमारी आयतें सुनाता, और हम बस्तियों को हलाक करने वाले ना वे जब तक के उनके रहने वाले जालिम ना हो जाते हैं","तुम लोगों को जो कुछ भी दिया है वो मेहज़ दुनिया की जिंदगी का सामान और उसकी ज़ीनत (श्रृंगार) है, और जो कुछ अल्लाह के पास है वो इसके लिए बेहतर और बाकी रास्ता है। क्या तुम लोग अक्ल से काम नहीं लेते","भला वो शक्स जिसने अच्छा वादा किया हो, और वो उसे पाने वाला हो कभी उस शक्स की तरह हो सकता है जिसे हमने सिर्फ हयात-ए-दुनिया का सर-ओ-समान दे दिया हो, और फिर वो कयामत के रोज़ सज़ा के लिए पेश किया जाने वाला हो","और (भूल ना जाएं ये लोग) उस दिन को जबके वो इनको पुकारेगा और पूछेगा \"कहां है मेरे वो शरीक जिनका तुम गुमान रखते थे?\"","ये क़ौल जिनपर चस्पां होगा वो कहेंगे \"ऐ हमारे रब, बहकावे यही लोग हैं जिनको हमने गुमराह किया था, उन्होंने हमें उसी तरह गुमराह किया जैसे हम खुद गुमराह हुए। हम आप के सामने बारात (अलगाव) का इज़हार करते हैं। ये हमारी तो बंदगी नहीं करते थे”","फिर इनसे कहा जाएगा के पुकारो अब अपने ठहरे हुए शेयरों को। ये उन्हें पुकारेंगे मगर वो इनको कोई जवाब ना देंगे और ये लोग अजब देख लेंगे। काश ये हिदायत इख्तियार करने वाले होते","और (फरामोश ना करें ये लोग) वो दिन जबके वो इनको पुकारेगा और पूछेगा के \"जो रसूल भेजे गए थे उन्होंने तुमने क्या जवाब दिया था?\"","हमें वक्त कोई जवाब इनको न समझ आएगा और न ये आपस में एक दूसरे से पूछ ही पाएंगे","अलबत्ता जिसने आज तौबाह कार्ली और ईमान ले आया और नेक अमल किया वही ये तवक्को (उम्मीद) कर सकता है के वहां फलाह पाने वालों मुझसे होगा","तेरा रब अदा करता है जो कुछ चाहता है। और (वो खुद ही अपने काम के लिए जिसे चाहता है) मुंतखब (चुनें) कर लेता है। ये इंतेखाब इन लोगों के करने का काम नहीं है, अल्लाह पाक है और बहुत बाला-तरर है हमसे शिर्क से जो ये लोग करते हैं","तेरा रब जानता है जो कुछ ये दिलों में छुपे हुए हैं और जो कुछ ये जाहिर करते हैं","वही एक अल्लाह है जिसके सिवा कोई इबादत का मुस्तहिक नहीं। उसके लिए हम्द है दुनिया में भी और आखिरी में भी, फरमा रवाई उसी की है और उसकी तरफ तुम सब पलटाये जाने वाले हो","ऐ नबी, इनसे कहो कभी तुम लोगों ने गौर किया के अगर अल्लाह कयामत तक तुम हमेशा के लिए रात तारी करदे अल्लाह के सिवा वो कौन सा माबूद है जो तुम्हें रोशनी ला दे? क्या तुम सुनते नहीं हो","इनसे पूछो, कभी तुमने सोचा के अगर अल्लाह कयामत तक तुम हमेशा के लिए दिन तारी करदे तो अल्लाह के सिवा वो कौन सा माबूद है जो तुम्हें रात ला दे ता-के तुम हमें सुकून हासिल कर सको? क्या तुमको सूझता नहीं","ये उसी की रहमत है कि उसने तुम्हारे लिए रात और दिन बनाई ता-के तुम (रात में) सुकून हासिल करो और (दिन को) अपने रब का फज़ल तलाश करो। शायद के तुम शुक्र गुज़ार बनो","(याद रखें ये लोग) वो दिन जबके वो इन्हें पुकारेगा फिर पूछेगा \"कहाँ है मेरे वो शरीक जिनका तुम गुमान रखते थे?\"","और हम हर उम्मत में से एक गवाह निकाल लेंगे फिर कहेंगे के \"लाओ अब अपनी दलील\"। हमें वक़्त मालूम हो जाएगा के हक़ अल्लाह की तरफ है, और गम (गायब) हो जाएंगे इनके वो सारे झूठ जो इन्हों ने ग़ध रक्खे थे","ये एक वक़िया है के क़ारून मूसा की क़ौम का एक शक्स था, फिर वो अपनी क़ौम के ख़िलाफ़ व्यंग्य हो गया और हमने उसको इतने खज़ाने (खजाने) दे रखे थे कि उनकी कुंजियाँ (चाबियाँ) ताकतवार आदमियों की एक जमात मुश्किल से उठ सकती थी। एक दफ़ा जब उसकी क़ौम के लोगों ने उसे कहा \" फूलना (इतराना/खुशी) जा, अल्लाह फूलने (इतराने) वालों को पसंद नहीं करता","जो माल अल्लाह ने तुझे दिया है उसे आख़िरत का घर बनाने की फ़िक्र कर, और दुनिया में से भी अपना हिसा फ़रामोश न कर। एहसान कर जिस तरह अल्लाह ने तेरे साथ एहसान किया है, और ज़मीन में फ़साद बरपा करने की कोशिश ना कर, अल्लाह मुफ़्सिदों (फ़साद करने वालों) को पसंद नहीं करता।''","तो उसने कहा \"ये सब कुछ तो मुझे उस इल्म की बिना पर दिया गया है जो मुझको हासिल है\"। क्या उसको ये इल्म ना था कि अल्लाह उसे पहले बहुत से ऐसे लोगों को हलाक कर चुका है जो उसे ज्यादा कुव्वत और जमीयत रखता था? मुजरिम से तो उनके गुनाह नहीं पूछे जाते","एक रोज़ वो अपनी क़ौम के सामने अपने पूरे थेट में निकला। जो लोग हयात ए दुनिया के तालिब थे वो उसे देख कर कहने लगे \"काश हमें भी वही कुछ मिलता जो क़ारून को दिया गया है, ये तो बड़ा नसीबे वाला है।\"","मगर जो लोग इल्म रखने वाले थे वो कहने लगे \"अफसोस तुम्हारे हाल पर, अल्लाह का सवाब बेहतर है हमारे शक्स के लिए जो ईमान लाए और नेक अमल करे, और ये दौलत नहीं मिलती मगर सब्र करने वालों को।\"","आख़िर-ए-कार हमने उसे और उसके घर को ज़मीन पर धांसा दिया, फिर कोई उसके हामियों (समर्थकों) का गिरो ​​ना था जो अल्लाह के मुक़ाबले में उसकी मदद को आता, और ना वो खुद अपनी मदद आप कर सका","अब वही लोग जो कल उसकी मंजिल की तमन्ना कर रहे थे कहने लगे \"अफ़सोस, हम भूल गए थे के अल्लाह अपने बंदों में से जिसका रिज़क चाहता है कुशादा करता है और जिसे चाहता है नपा-तुला देता है। अगर अल्लाह ने हमपर एहसान न किया होता तो हमें भी ज़मीन मैं धोखा देता हूं। अफ़सोस हमको याद ना रहा के काफिर फलाह नहीं पाया करते।”","वो आख़िरत का घर तो हम उन लोगों के लिए मखसूस कर देंगे जो ज़मीन में अपनी बदाई नहीं चाहते और ना फ़साद करना चाहते हैं। और अंजाम की भलाई मुत्तक़िन ही के लिए है","जो कोई भलाई लेकर आएगा उसके लिए उसे बेहतर भलाई है, और जो बुराई लेकर आए तो बुराइयां करने वालों को वैसा ही बदला मिलेगा जैसा अमल वो करता था","ऐ नबी, यकीन जानो के जिसने ये कुरान तुमपर फ़र्ज़ किया है वो तुम्हें एक बेहतर अंजाम देने वाला है। लोगों से कहदो के \"मेरा रब खूब जानता है के हिदायत लेकर कौन आया और खुली गुमराही में कौन मुबतला है।\"","तुम इस बात के हरगिज उम्मीद न थे के तुमपर किताब नाज़िल की जाएगी। ये तो महज़ तुम्हारे रब की मेहरबानी से (तुम्हारे नाज़िल हुई है), पास तुम काफिरों के मददगार ना बनो","और ऐसा कभी ना होने पाए के ए लल्लाह की आयत जब तुम नाज़िल हूं तो कुफ्फार तुम्हें उनसे बाज़ रखेंगे। अपने रब की तरफ़ दावत दो और हरगिज़ मुशरिकों में शामिल ना हो","और अल्लाह के साथ किसी दूसरे माबूद को ना पुकारो। उसके सिवा कोई माबूद नहीं है। हर चीज़ हलाक होने वाली है सिवाए उसकी जात के। फ़रमान रवाई उसी की है और उसकी तरफ तुम सब पलटे जाने वाले हो","अलिफ़ लाम मीम","क्या लोगों ने ये समझ रखा है के वो बस इतना कहने पर छोड़ दिए जाएंगे के \"हम ईमान लाए\" और उनको आज़माया ना जाएगा","हलांके हम उन सब लोगों की आज़माइश कर चुके हैं जो इनसे पहले गुज़रे हैं। अल्लाह को तो जरूर ये देखना है कि सच्चे कौन हैं और झूठे कौन","और क्या वो लोग जो बुरी हरकतें कर रहे हैं ये समझ बैठे हैं के वो हमसे बाजी ले जाएंगे? बड़ा गलत हुकुम है जो वो लगा रहे हैं","जो कोई अल्लाह से मिलने की तवक्कू (उम्मीद) रखता है (उसे मालूम होना चाहिए के) अल्लाह का मुकर्रर किया हुआ वक्त आने ही वाला है। और अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है","जो शक्स भी मुजाहिदा (संघर्ष) करेगा अपने ही भले के लिए करेगा। अल्लाह यकीनन दुनिया जहां वालों से बे-नियाज़ (इच्छाओं से मुक्त) है","और जो लोग ईमान लाएंगे और नेक अमल करेंगे उनकी बुराइयां हम उनसे दूर कर देंगे और उन्हें उनके बेहतरी अमल की जजा देंगे","हमने इंसान को हिदायत दी है कि अपने वाल्दैन (माता-पिता) के साथ नेक सुलूक करें, लेकिन अगर वो तुझ पर जोर दें के तू मेरे साथ किसी ऐसे (माबूद) को शरीक ठहरे जैसे तू (मेरे शरीक की हकीकत से) नहीं जानता तो उनकी इताअत ना कर। मेरी ही तरफ तुम सबको पलट कर आना है। फिर मैं तुम्हें बता दूंगा के तुम क्या करते रहेंगे हो","और जो लोग ईमान लाए होंगे और जिन्होन ने कोई अमल नहीं किया होगा उनको हम जरूर सालिहें में दखल करेंगे","लोगों में से कोई ऐसा है जो कहता है के हम ईमान लाए होंगे अल्लाह पर, मगर जब वो अल्लाह के मामले मैं सताया गया तो उसने लोगों की डाली हुई आजमाइश को अल्लाह के अज़ाब की तरह समझ लिया। अब अगर तेरे रब की तरफ से फतह-ओ-नुसरत आ गई तो यही शक्स कहेगा \"हम तो तुम्हारे साथ थे\"। क्या दुनिया वालों के दिलों का हाल अल्लाह को बा-खूबी मालूम नहीं है","और अल्लाह को तो जरूर ये देखना ही है कि ईमान लाने वाले कौन हैं और मुनाफिक कौन","ये काफिर लोग ईमान लाने वालों से कहते हैं कि तुम हमारे तरीक़े की जोड़ी करो और तुम्हारी खतों (पापों) को हम अपने ऊपर ले लेंगे। हलांके उनकी खतों में से कुछ भी वो अपने ऊपर लेने वाले नहीं हैं, वो क़त-एन झूठ कहते हैं","हां ज़रूर वो अपने बोझ भी उठाएंगे और अपने बोझ के साथ बहुत से दूसरे बोझ भी। और कयामत के रोज़ यक़ीनन उनसे इफ्तारा परदाज़ियों (बोहतान/फैब्रिकेशन) में कि बाज़-पुर्स होगी जो वो करते रहे हैं","हमने नूह को उसकी क़ौम की तरफ़ भेजा और वो पचास (पचास) कम एक हज़ार बरस (950 साल) उनके दरमियान रहा। आख़िर ए कार उन लोगों को तूफ़ान ने आ घेरा इस हाल में के वो ज़ालिम थे","फिर नूंह को और कश्ती वालों को हमने बचाया लिया और उसे दुनिया वालों के लिए एक निशान ए इब्रत (पाठ) बनाकर रख दिया","और इब्राहिम को भेजा जबके उसने अपनी क़ौम से कहा \"अल्लाह की बंदगी करो और उससे डरो, ये तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम जानो","तुम अल्लाह को छोड़ कर जिनकी पूजा कर रहे हो वो तो महज़ बुथ (मूर्तियां/मूर्तियां) हैं और तुम एक झूठ गढ़ रहे हो। दर हकीकत अल्लाह के सिवाय जिनके तुम प्यार करते हो वो तुम्हें कोई रिज़क भी देने का इख्तियार नहीं रखते। अल्लाह से रिज़्क मांगो और उसकी बंदगी करो और उसका शुक्र अदा करो। उसकी तरफ तुम पलटाये जाने वाले हो","और अगर तुम झुटलाते हो तो तुमसे पहले बहुत सी कौमें झुटला चुकी हैं। और रसूल पर सफ़ सफ़ पैग़ाम पाहुंचा देने के सिवा कोई ज़िम्मेदारी नहीं है।”","क्या इन लोगों ने कभी देखा ही नहीं है कि अल्लाह किस तरह ख़ल्क़ की इब्तिदा करता है, फिर उसका इरादा (दोहराना) करता है? यकीनन ये [इआदा तो (किसी चीज़ की रचना को दोहराना)] अल्लाह के लिए आसां तरर है","इनसे कहो के ज़मीन में चलो फिरो और देखो के हमें किस तरह ख़ल्क़ की इब्तिदा की है। फिर अल्लाह बार-ए-दिगार भी जिंदगी बक्शेगा। यकीनन अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है","जिसे चाहे सजा दे और जिसपर चाहे रहम फरमाये। उसकी तरफ तुम फेरे जाने वाले हो","तुम ज़मीन में अजीज (सख्ती) करने वाले हो ना आसमान में। और अल्लाह से बचाने वाला कोई सरपरस्त और मददगार तुम्हारे लिए नहीं है","जिन लोगों ने अल्लाह की आयत का और उससे मुलाकात का इंकार किया है वो मेरी रहमत से मयुस हो चुके हैं, और उनके लिए दर्दनक सजा है","फिर उसकी क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ ना था के उन्हें कहा “कत्ल करदो इसे या जला डालो इसको”। आख़िर ए कर अल्लाह ने उसे आग से बचा लिया। यकीनन इस में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाने वाले हैं","और उसने कहा \"तुमने दुनिया की जिंदगी में अल्लाह को छोड़ कर बुथों (मूर्तियों) को अपने दरमियान मुहब्बत का जरिया बना लिया है मगर कयामत के रोज तुम एक दूसरे का इंकार और एक दूसरा पर लानत करोगे और आग तुम्हारा ठिकाना होगी, और कोई तुम्हारा मददगार ना होगा।”","हमें वक्त लुट ने उसको माना और इब्राहिम ने कहा मैं अपने रब की तरफ हिजरत (पलायन) करता हूं। वो ज़बरदस्त है और हकीम है","और हमने उसे इशाक (इसहाक) और याकूब (जैकब) (जैसी औलाद) इनायत फरमायी और उसकी नाक में नुबुवत और किताब रख दी, और उसे दुनिया में उसका अजर अता किया और आख़िरत में वो यकीनन सालिहें मुझसे होगा","और हमने लुट को भेजा जबके उसने अपनी क़ौम से कहा \"तुम तो वो फहाश काम करते हो जो तुमसे पहले दुनिया वालों में से किसी ने नहीं किया है","क्या तुम्हारा हाल ये है के मर्दों के पास जाते हो (अपनी वासना को संतुष्ट करने के लिए), और Raahzani (हाईवे डकैती) करते हो, और अपनी मजलिसों में बुरे काम करते हो?” फिर कोई जवाब उसकी क़ौम के पास इसके सिवा ना था के अनहोन ने कहा \"ले आ अल्लाह का अज़ाब अगर तू सच्चा है\"","लूट ने कहा \"ऐ मेरे रब, इन मुफसिद (शरारती) लोगों के मुक़ाबले में मेरी मदद फरमा\"","और जब हमारे फरिश्ते (दूत/संदेशवाहक) इब्राहीम के पास बशारत (खुशखबरी) लेकर पहुंचे तो उन्हें ने उसे कहा, \"हम इस बस्ती के लोगों को हलाक करने वाले हैं, इसके लोग सख्त जालिम हो चुके हैं।\"","इब्राहीम ने कहा \"वहां तो लूट मौजूद है\"। अनहोन ने कहा: \"हम खूब जानते हैं कि वहां कौन कौन है। हम उसे और उसकी बीवी के सिवा उसके बाकी घर वालों को बचा लेंगे\"। उसकी बीवी पीछे रह जाने वालों में से थी","फिर जब हमारे फरिश्ते (दूत/संदेशवाहक) लूट के पास पहुंचें तो उनकी आमद पर वो सख्त परेशान और दिल तंग हुआ। उनहों ने कहा “ ना डरो और ना रांझ करो, हम तुम्हें और तुम्हारे घर वालों को बचा लेंगे, सिवाय तुम्हारी बीवी के जो पीछे रह जाने वालों में से है","हम इस बस्ती के लोगों पर आसमान से अजब नाज़िल करने वाले हैं हमें फ़िस्क (बुराई) के बदौलत जो ये करते रहते हैं”","और हमने हमें बस्ती की एक खुली निशानी छोड़ दी है उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं","और मदयां की तरफ हमने उनके भाई शोएब को भेजा।उसने कहा \"ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो और रोज़ ए आख़िर के उम्मीद-वार रहो और ज़मीन में मुफ़सीद बन कर ज़्यादतिया (शरारत) ना करते फिरो\"","मगर उन्होन ने उसे झुटला दिया. आख़िर ए कार एक सच ज़लज़ले ने उन्हें आ लिया और वो अपने घरों में पड़े के पड़े रह गए","और आद ओ समूद को हमने हलाक किया, तुम वो मक़ामत देख चुके हो जहां वो रहते थे। उनके आमाल को शैतान ने उनके लिए ख़ुशनुमा बना दिया और उन्हें राह ए रास्ते से बरगश्ता करदिया, हलांके वो होश-गोश रखते थे","और क़ारून ओ फिरौन ओ हमान को हमने हलाक किया। मूसा उनके पास बैयिनत (खुली निशानियां) लेकर आया मगर उनहोन ने जमीन में अपनी बदाई का ज़म किया हलंके वो सबकत ले जाने (क़ाबू से निकल जाने) वाले ना थे","आख़िर ई कर हर एक को हमने उनके गुनाह में पकड़ा। फिर उनमें से किसी पर हमने पथराव (पत्थरों की बौछार) करने वाली हवा भेजी, और किसी को एक ज़बरदस्त धमाके ने आ लिया, और किसी को हमने ज़मीन में ढसा दिया, और किसी को डर (डूब) दिया। अल्लाह अनपर ज़ुल्म करने वाला ना था, मगर वो खुद ही अपना ऊपर ज़ुल्म कर रहे थे","जिन लोगों ने अल्लाह को छोड़ कर दूसरे सरपरस्त (रक्षक) बना लिए हैं उनकी मिसाल मख़दी (मकड़ी) जैसी है जो अपना एक घर बनाती है, और सब घरों से ज़्यादा कमज़ूर घर मख़दी (मकड़ी) का घर ही होता है, काश ये लोग इलम रखते हैं","ये लोग अल्लाह को छोड़ कर जिस चीज़ को भी पुकारते हैं अल्लाह उसे ख़ूब जानता है और वही ज़बरदस्त और हकीम है","ये मिसालें (उदाहरण) हम लोगों की फहमिश (समझ) के लिए देते हैं, मगर उनको वही लोग समझते हैं जो इलम रखने वाले हैं","अल्लाह ने आसमान और ज़मीन को बरहक़ अदा किया है, दर हकीकत इस में एक निशानी है एहले ईमान के लिए","(ऐ नबी) तिलावत करो इस किताब की जो तुम्हारी तरफ वही के ज़ैरे से भेज दी गई है। और नमाज़ क़याम करो, यकीनन नमाज़ फ़हाश (बेहयायी) और बुरे कामों से रुकती है। और अल्लाह का ज़िक्र इस से भी ज़्यादा बड़ी चीज़ है। अल्लाह जानता है जो कुछ तुमलोग करते हो","और एहले किताब से बेहस न करो मगर उम्र तरीक़े से, सिवाए उन लोगों के जो उन में से ज़ालिम हों। और उनसे कहो के \"हम ईमान लाए हैं उस चीज पर भी जो हमारी तरफ भेज गई है और उस चीज पर भी जो तुम्हारी तरफ भेज गई थी। हमारा खुदा और तुम्हारा खुदा एक ही है और हम उसके मुसलमान (फरमा बरदार) हैं\"","(ऐ नबी) हमने इसी तरह तुम्हारी तरफ किताब नाज़िल की है। इस लिए वो लोग जिनको हमने पहली किताब दी थी वो इसपर ईमान लाते हैं, और इन लोगों में से भी बहुत से इसपर ईमान ला रहे हैं। और हमारी आयत का इंकार सिर्फ काफिर ही करते हैं","(ऐ नबी) तुम इसे पहले कोई किताब नहीं पढ़ते थे और ना अपने हाथ से लिखते थे, अगर ऐसा होता तो बातिल परस्त लोग (झूठ के समर्थक) शक में पढ़ सकते थे","दर-असल ये रोशन निशानियां हैं उन लोगों के दिलों में जिन्हें इल्म बख्शा गया है। और हमारी आयत का इंकार नहीं करते मगर वो जो जालिम हैं","ये लोग कहते हैं के \"क्यों ना उतारी गई इस शक्स पर निशानियां इसके रब की तरफ से?\" कहो \"निशानियां तो अल्लाह के पास हैं और मैं सिर्फ खबरदार करने वाला हूं खोल खोल कर\"","और लोगों के लिए ये (निशानी) काफी नहीं है के हमने तुमपर किताब नाज़िल की जो इन्हें पढ़ कर सुनायी जाती है? दर हक़ीक़त इस में रहमत है और हिदायत है उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं","(ऐ नबी) कहो के \"मेरे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह गवाही के लिए काफ़ी है। वो आसमान और ज़मीन में सब कुछ जानता है। जो लोग बातिल को मानते हैं और अल्लाह से कुफ्र करते हैं वही खसरे (नुक्सान) में रहने वाले हैं।”","ये लोग तुमसे अज़ाब जल्दी लेन का मुतालबा करते हैं। अगर एक वक्त ए मुकर्रर ना करदिया गया होता तो इनपर अज़ाब आ चूका होता, और यकीनन (अपने वक्त पर) वो आ कर रहेगा अचानक, इस हाल में के इन्हें खबर भी ना होगी","ये तुमसे अज़ाब जल्दी लेन का मुतलबा करते हैं, हलाँके जहन्नुम इन काफिरों को घेरे में ले चुकी है","(और इन्हें पता चलेगा) हमें रोज जबके अजब इन्हें ऊपर से भी ढांक लेगा और पांव के नीचे से भी और कहेगा के अब चक्खो मजा उन कार्टूनों का जो तुम करते थे","ऐ मेरे बंदन जो ईमान लाए हो, मेरी ज़मीन वसीह है, पास तुम मेरी ही बंदगी बजा लाओ","हर मुतनफ्फिस को मौत का मजा चखना है, फिर तुम सब हमारी ही तरफ पलटा कर ले जाओगे","जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्हों ने नीक अमल किए हैं उनको हम जन्नत की बुलंद ओ बाला इमरतों (इमारतें/महल) में रखेंगे जिनके आला में नेह्रेन बहती होंगी, वहां वो हमेशा रहेंगे। क्या है उम्मीद अजर है अमल करने वालों के लिए","उन लोगों के लिए जिन्हों ने सब्र किया है और जो अपने रब पर भरोसा करते हैं","कितने ही जानवर हैं जो अपना रिज्क उठाये नहीं फिरते, अल्लाह उनको रिज्क देता है और तुम्हारा राजिक भी वही है. वो सब कुछ सुनता और जानता है","अगर तुम लोगों से पूछो के ज़मीन और आसमान को किसने पेदा किया है और चांद और सूरज को किसने मुस्कुरा कर रखा है, तो जरूर कहेंगे के अल्लाह ने, फिर ये किदर से धोखा खा रहे हैं","अल्लाह हाय है जो अपने बंदों में से जिसका चाहता है रिज़्क कुशादा (बड़ा करना) करता है और जिसका चाहता है तंग करता है। यकीनन अल्लाह हर चीज़ का जाने वाला है","और अगर तुम इनसे पूछो, किसने आसमान से पानी बरसाया और इसके जरूर से मुर्दा पड़ी हुई जमीन को जिला उठाया तो वो जरूर कहेंगे अल्लाह ने। कहो, अल्हम्दुलिल्लाह, मगर अक्सर लोग समझते नहीं हैं","और ये दुनिया की जिंदगी में कुछ नहीं है मगर एक खेल और दिल का बहलावा। असल जिंदगी का घर तो डर ए आख़िरत (इसके बाद) है, काश ये लोग जानते हैं","जब ये लोग कश्ती पर सवार होते हैं तो अपने दीन को अल्लाह के लिए खालिस करके उससे दुआ मांगते हैं। फिर जब वो उन्हें बचा कर ख़ुशी पर ले आता है तो यकीनन ये शिर्क करने लगते हैं","ता-के अल्लाह की दी हुई निजात पर उसका कुफ़्रान ए नियामत करें और (हयात ए दुनिया के) मजे लूटें। अच्छा, अनक़रीब इन्हें मालूम हो जाएगा","क्या ये देखते नहीं हैं कि हमने एक पुर-अमन हरम (सुरक्षा का अभयारण्य) बना दिया है, हलांके इनके गिर्द-ओ-पेश लोग उचक लिए जाते हैं? क्या फिर भी ये लोग बातिल को मानते हैं और अल्लाह की नियामत का कुफ़्रान करते हैं","हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ बांधे या हक़ को झूठलाए जबके वो उसके सामने आ चुका हो? क्या ऐसे काफिरों का ठिकाना जहन्नुम ही नहीं है","जो लोग हमारी खातिर मुजाहिदा (प्रयास) करेंगे उन्हें हम अपने रास्ते दिखाएंगे, और यकीनन अल्लाह नीकुकरों (जो अच्छा करते हैं) ही के साथ हैं","अलिफ लाम मीम","रूमी (रोमन) करीब की सर-जमीन में मगलूब (हार/पराजित) हो गए हैं","और अपनी इस मगलूबियत (हार) के बाद चंद साल के अंदर वो गालिब (विजयी/प्रमुख) हो जाएंगे","अल्लाह ही का इख्तियार है पहले भी और बाद में भी. और वो दिन वो होगा जबके अल्लाह की बख्शी हुई फतह पर मुसलमान खुशियां मनाएंगे","अल्लाह नुसरत (जीत) अता फरमाता है जिसे चाहता है, और वो जबरदस्त और रहीम है","ये वादा अल्लाह ने किया है, अल्लाह कभी अपने वादे की खिलाफत वारजी नहीं करता। मगर अक्सर लोग नहीं जानते हैं","लोग दुनिया की जिंदगी का बस जाहिर पहलू (बाहरी पहलू) जानते हैं और आखिरी से वो खुद ही गाफिल हैं","क्या उनहों ने कभी अपने आप में गौर-ओ-फिक्र नहीं किया? अल्लाह ने ज़मीन और आसमानों को और उन सारी चीज़ों को जो उनके दरमियान हैं बरहक़ और एक मुकर्रर मुद्दत ही के लिए अदा किया है। मगर बहुत से लोग अपने रब की मुलाक़ात के लिए तैयार हैं","और क्या ये लोग कभी ज़मीन में चले फिर नहीं हैं कि उन लोगों का अंजाम नज़र आता है जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं? वो इनसे ज़्यादा ताक़त रखते थे। उनको ने जमीन को खूब उधेड़ा (फसल के लिए जमीन जोतना/तैयार करना और खेती करना) था और उसे इतना आबाद किया था जितना इन्हों ने नहीं किया है। उनके पास उनके रसूल रोशन निशानियां लेकर आये। फिर अल्लाह अनपर ज़ुल्म करने वाला ना था, मगर वो खुद ही अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे थे","आख़िर ए कार जिन लोगों ने बुराइयां की थी उनका अंजाम बहुत बुरा हुआ। इस्ली के अनहोन ने अल्लाह की आयत को झुटलाया था और वो उनका मज़ाक उड़ाते थे","अल्लाह ही ख़ल्क की इब्तिदा (सृष्टि की उत्पत्ति) करता है, फिर वही इसका इयादा (फिर से भुगतान/दोहराना) करेगा। फिर उसकी तरफ तुम पलट जाओगे","और जब वो सा-आट (घंटा/घड़ी) बरपा होगी उस दिन मुजरिम हक-दक (बेवकूफ) रह जाएंगे","उनके तहरे हुए शरीकोन में कोई उनका सिफारिशी (मध्यस्थ) ना होगा, और वो अपने शरीकों के मुनकिर हो जाएंगे","जिस रोज वो सा-आत (घंटा/घड़ी/कयामत) बरपा होगी, उस दिन (सब इंसान) अलग गिरोहों में बत्त (विभाजित) जाएंगे","जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्होन ने नीक अमल किए हैं वो एक बाग में शादां-ओ-फरहान (खुश) हाल) रक्खे जायेंगे","और जिन्होन ने कुफ्र किया है और हमारी आयत को और आख़िरत की मुलाकात को झुटलाया वो अज़ाब में हाज़िर रक्खे जायेंगे","पस तस्बीह करो अल्लाह की जबके तुम शाम करते हो और जब सुबह करते हो","आसमानो और ज़मीन मैं उसके लिए हम्द (प्रशंसा) है और (तस्बीह करो उसकी) तीसरे पहर और जबके तुम्हारे जोहर का वक्त आता है","वो जिंदा में से मुर्दे को निकलता है और मुर्दे में से जिंदा को निकल लाता है और जमीन को उसकी मौत के बारे में बात करता है है।इसी तरह तुमलोग भी (हालत ए मौत से) निकल लिए जाओगे","उसके निशानियों में से ये है के उसने तुमको मिट्टी से पैदा किया फिर यकीन तुम बशर (इंसान) हो के (जमीन में) फैलते चले जा रहे हो","और उसकी निशानियों में से ये है कि तुम्हारे लिए तुम्हारी जिंदगी से बीवियां बनाईं ता-के तुम उनके पास सुकून हासिल करो और तुम्हारे दरमियान मोहब्बत और रहमत अदा करदी। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फिक्र करते हैं","और उसकी निशानियों में से आसमान और जमीन की अदाएं, और तुम्हारी जुबान और तुम्हारे रंग (रंग) का इख्तिलाफ है। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं दानिशमंद (बुद्धिमान) लोगों के लिए","और उसकी निशानियों में से तुम्हारी रात और दिन को सोना और तुम्हारे उसके फज़ल को तलाश करना है। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो (गौर से) सुनते हैं","और उसकी निशानियों में से ये है कि वो तुम्हें बिजली की चमक दिखाता है खौफ के साथ भी और तम (उम्मीद) के साथ भी। और आसमां से पानी बरसता है, फिर इसके ज़रीये से ज़मीन को उसकी मौत के बाद जिंदगी बक्शता है। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं","और उसकी निशानियों में से ये है के आसमां और जमीन उसके हुकुम से कायम हैं, फिर जून्ही के उसने तुम्हें जमीन से पुकारा, बस एक ही पुकार में अचानक तुम निकल आओगे","आसमान और ज़मीन में जो भी हैं उसके बंदे हैं। सब के सब उसके लिए ताबे-फ़रमान (आज्ञाकारी) हैं","वही है जो तख़लीक की इब्तिदा करता है, फिर वही उसका इआदा (फिर से भुगतान/दोहराना) करेगा और ये उसके लिए आसमां तार्र है।आस्मानो और ज़मीन में उसकी सिफत (विशेषता) सबसे बारतार है और वो ज़बरदस्त और हकीम है","वो तुम्हें खुद तुम्हारी अपनी ही ज़ात से एक मिसाल देता है। क्या तुम्हारे उन गुलामों में से जो तुम्हारी मिल्कियत में हैं, कुछ गुलाम ऐसे भी हैं जो हमारे दिए हुए माल ओ दौलत में तुम्हारे साथ बराबर के शरीके हैं और तुम उनसे जुड़े हुए हो, जिस तरह आपस में अपने हमसरों से डरते हो? इस तरह हम आयत खोल कर पेश करते हैं उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं","मगर ये जालिम बे-समझे बूझे अपनी तखाइलात (इच्छाएं) के पीछे चल पड़े हैं। अब कौन हमारे शक्स को रास्ता दिखा सकता है जिसे अल्लाह ने भटका दिया हो। ऐसे लोगों का तो कोई मददगार नहीं हो सकता","पास (ऐ नबी, और नबी के जोड़े) यक्सू होकर अपना रुख इस दीन की सिम्थ में जमा दो। क़याम हो जाओ उस फ़ितरत पर जिसपर अल्लाह ताला ने इंसानों को पेदा किया है। अल्लाह की बनाई हुई सच बदली नहीं जा सकती। यह बिल्कुल रस्त और दुरुस्त दीन है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं","(क़याम हो जाओ इस बात पर)अल्लाह की तरफ़ रूजू करते हुए, और डरो उसे, और नमाज़ क़याम करो, और न हो जाओ उन मुशरिकेन में से","जिन्होन ने अपना अपना दीन अलग बना लिया है और गिरोहों (फिरकों) में बात हो गई है। हर एक गिरोह के पास जो कुछ है उसमें वो मगन है","लोगों का हाल ये है के जब उन्हें कोई तकलीफ पहुंची है तो अपने रब की तरफ रूजू करके उसे पुकारते हैं, फिर जब वो कुछ अपने रहमत का जायका (स्वाद) उन्हें चकमा देता है तो यकीनन उन मुझमें से कुछ लोग शिर्क करने लगते हैं","ता-के हमारे किये हुए एहसान की नाशुक्री करें। अच्छा, मजा करो, अंकारीब तुम्हें मालूम हो जाएगा","क्या हमने कोई सनद और दलील उन पार नाज़िल की है जो शहादत देती हो हमें शिर्क की सदाकत पर जो ये कर रहे हैं","जब हम लोगों को रहमत का ज़ायका दिखाते हैं तो वो उसपर फूल जाते हैं हैं, और जब उनके अपने किया कार्टून से ऊपर कोई मुसीबत आती है तो यकीनन वो बहुत अच्छे लगते हैं","क्या ये लोग देखते नहीं हैं कि अल्लाह ही रिज़्क कुशादा करता है जिसका चाहता है और तंग करता है? यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं","पास (ऐ मोमिन) रिश्तेदार को उसका हक़ दे और मिस्कीन ओ मुसाफिर को (उसका हक़)। ये तरीक़ा बेहतर है उन लोगों के लिए जो अल्लाह की ख़ुशनुदी चाहते हों, और वही फ़लाह पाने वाले हैं","जो सूद (रिबा/सूद/ब्याज) तुम देते हो ता-के लोगों के अमल में शामिल होकर वो बढ़ (बढ़े) जाए, अल्लाह के नाज़दीक वो नहीं बढ़ता (बढ़े), और जो जकात तुम अल्लाह की खुशनुदी हासिल करने के इरादे से देते हो, उसी के देने वाले दर हकीकत अपने माल बढ़ाते हैं","अल्लाह ही है जिसने तुमको अदा किया, फिर तुम्हें रिज़क दिया, फिर वो तुम्हें मौत देता है, फिर वो तुम्हें जिंदा करेगा. क्या तुम्हारे रुके हुए शेयरों में कोई ऐसा है जो मेरे साथ कोई काम भी करता हो? पाक है वो और बहुत बाला-ओ-बरतर है उस शिर्क से जो ये लोग करते हैं","खुश्की (जमीन) और तारी (समुद्र) में फसाद बरपा हो गया है लोगों के अपने हाथों की कमाई से, ता-के मजा चखाये उनको उनके बाज़ अमल का, शायद के वो बाज़ आयें","(ऐ नबी) इनसे कहो के ज़मीन में चल फिर कर देखो पहले गुज़रे हुए लोगों का क्या अंजाम हो चुका है। उन में से अक्सर मुशरिक ही थाय","पास (ऐ नबी) अपना रुख मज़बूती के साथ जमा दो इस दीन-ए-रास्त की सिम्थ में कबूल इसके के वो दिन आए जिसकी ताल जाने की कोई सूरत अल्लाह की तरफ से नहीं है। उस दिन लोग फट कर एक दूसरे से अलग हो जाएंगे","जिसने कुफ्र किया है उसके कुफ्र का जवाब उसी पर है, और जिन लोगों ने नेक अमल किया है वो अपने ही लिए फलाह का रास्ता साफ कर रहे हैं","ता-के अल्लाह ईमान लाने वालों और अमल-ए-सालेह करने वालों को अपने फजल से जजा डे. यकीनन वो काफिरों को पसंद नहीं करता","उसके निशानियों में से ये है के वो हवाएं भेजता है बशारत के लिए और तुम अपनी रहमत से बेहरामन्द करने के लिए। और इस ग़रज़ के लिए के कश्तियां उसके हुकुम से चलें और तुम उसका फ़ज़ल तलाश करो और उसकी शुकर गुजर बनो","और हमने तुमसे पहले रसूलों को उनकी क़ौम की तरफ भेजा और वो उनके पास रोशन निशानियां लेकर आए। फिर जिन्हों ने जुर्म किया उनसे हमने इन्तेक़ाम लिया और हमपर ये हक़ था के हम मोमिनो की मदद करें","अल्लाह हाय है जो हवाओं को भेजता है और वो बादल उठाती हैं। फिर वो बादलों को आसमान में फैला देता है जिस तरह चाहता है, और वो टुकड़ों में तकसीम करता है, फिर तू देखता है कि बारिश के मौसम में बादल से टपकते हैं। ये बारिश जब वो अपने बंदों में से पहले चाहता है बरसात है","तो यकीनन वो खुश ओ खुर्रम हो जाते हैं, हलांके इसके नुज़ुल से पहले वो मयौस हो रहे थे","देखो अल्लाह की रहमत के असर, के मुर्दा पड़ी हुई जमीन को वो किस तरह जिला उठाता है, यकीनन वो मुर्दों को जिंदगी बक्शने वाला है और वो हर चीज पर कादिर है","और अगर हम एक ऐसी हवा भेज दें जिसके असर से वो अपनी खेती को जर्द पाएं तो वो कुफ्र करते रह जाते हैं","(ऐ नबी) तुम मुर्दों को नहीं सुना सकते, ना उन बेटों को अपनी पुकार सुना सकते हो जो पीठ फेरे भागे चले जा रहे हो","और ना तुम अंधों को उनकी गुमराही से निकल कर राह ए रस्त दिखा सकते हो, तुम तो सिर्फ उन्हें सुना सकते हो जो हमारी आयत पर ईमान लाते और सर-ए-तस्लीम खत्म कर देते हैं","अल्लाह ही तो है जिसने ज़ोफ़ (कामज़ोरी) की हालत में तुम्हारी अदायश की इब्तिदा की, फिर ज़ोफ़ है (कमज़ोरी) के बाद तुम्हें कुव्वत बख्शी, फिर इस कुव्वत के बाद तुम्हें ज़ीफ़ और बूड़ा (पुराना) करदिया। वो जो कुछ चाहता है चुकाता है, और वो सब कुछ जानने वाला, हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है","और जब वो सा-आट (घंटा) बरपा होगी तो मुजरिम कसमें खा खा कर कहेंगे के हम एक घड़ी भर से ज़्यादा नहीं ठहरते हैं। इसी तरह वो दुनिया की जिंदगी में धोखा खाया करते थे","मगर जो इल्म और ईमान से बेहरमंद (संपन्न) किए गए थे वो वो कहेंगे के खुदा के नविस्ते (रिकॉर्ड) में तो तुम रोज-ए-हशर तक पैदा कर रहे हो। तो ये वही रोज़-ए-हशर है, लेकिन तुम जानते न थे","पास वो दिन होगा जिसमें ज़ालिमों को उनकी मज़रत कोई नफ़ा (फ़ैदा) न देगी और न उनसे माफ़ी माँगने के लिए कहा जाएगा","हमने कुरान में लोगों को तरह तरह से समझा है, तुम ख्वाह कोई निशानी ले आओ, जिन लोगों ने मन्ने से इंकार कर दिया है वो यहीं कहेंगे के तुम बातिल (झूठ) पर हो","इस तरह थप्पा (मुहर) लगा देता है अल्लाह उन लोगों के दिलों पर जो बे-इल्म है","पास (ऐ नबी) सब्र करो, यकीनन अल्लाह का वादा सच्चा है. और हरगिज हल्का न पाएं तुमको वो लोग जो यकीन नहीं लाते","अलिफ लाम मीम","ये किताब-ए-हकीम (बुद्धि की किताब) की आयत हैं","हिदायत और रहमत नीकुकर लोगों के लिए","जो नमाज कायम करते हैं, जकात देते हैं और आखिरी पर यकीन रखते हैं","यहीं लोग अपने रब की तरफ से राह-ए-रास्त पर हैं और यहीं फलाह पाने वाले हैं","और इंसान ही में से कोई ऐसा भी है जो कलाम-ए-दिल फरेब [लगव बातों को/बेकार की बातें (आइम्यूजिक, गायन, आदि)] खत्म कर लाता है ता-के लोगों को अल्लाह के रास्ते से इल्म के बिना भटका दे और इस रास्ते की दावत को मज़ाक में उड़ा दें। ऐसे लोगों के लिए सख्त ज़लील करने वाला अज़ाब है","उसे जब हमारी आयतें सुनाई जाती हैं तो वो बड़े घमंड के साथ इस तरह रुख फेर लेता है गोया के उसने उन्हें सुना ही नहीं, गोया के उसके कान बाहर हैं। अच्छा मुशदा (खबर) सुना दो उसे एक दर्दनाक अज़ाब का","अलबत्ता जो लोग ईमान ले आएं और नीक अमल करें, उनके लिए नियामत भारी जन्नतें हैं","जिनमें वो हमेशा रहेंगे। ये अल्लाह का पुख्ता वादा है, और वो ज़बरदस्त और हकीम है","उसने आसमान को पैदा किया बिना सुतुनो (खंभे) के जो तुमको नज़र आए। उसने ज़मीन में पहाड़ जमा दिए ता-के वो तुम्हें लेकर धुलक (टर्न/शेक) ना जाए। उसने हर तरह के जानवर ज़मीन में फैला दिए और आसमां से पानी बरसाया और ज़मीन में क़िसम क़िसम के उम्दा चीज़ उगा दी","ये तो है अल्लाह की तख़लीक, अब ज़रा मुझे दिखाओ, दुसरों ने क्या पैदा किया है? असल बात ये है कि ये जालिम लोग सारे गुमराही में पड़े हैं","हमने लुकमान को हिकमत अता की थी के अल्लाह का शुक्र गुज़ार हो। जो कोई शुकर करे उसका शुकर उसके अपने लिए ही मुफीद (फैयदमंद) है और जो कोई कुफ्र करे तो हकीकत में अल्लाह बे-नियाज और आप से आप महमूद (अत्यंत प्रशंसनीय) हैं","याद करो जब लुकमान अपने बेटे को हिदायत कर रहा था तो उसने कहा \"बेटा! खुदा के साथ किसी को शरीक न करना, हक़ ये है के शिर्क बहुत बड़ा ज़ुल्म है\"","और ये हकीकत ये है कि हमने इंसान को अपने वलीदीन (माता-पिता) का हक़ पहचान की खुद ताकीद की है। उसकी माँ ने ज़ोफ़ पर ज़ोफ़ (कमजोरी पर कमजोरी) उठा कर उसे अपने पेट में रखा और दो साल उसका दूध छूने में लगे। (इसी के लिए हमने उसको हिदायत की के) मेरा शुक्र कर और अपने वालिदैन का शुक्र बजा ला। मेरी ही तरफ तुझे पलटना है","लेकिन अगर वो तुझपर दबाओ डालें के मेरे साथ तू किसी ऐसे को शरीक करे जिसे तू नहीं जानता तो उसकी बात हरगिज़ ना मान। दुनिया में उनके साथ नई बातें करता रह, मगर जोड़ी (फॉलो) हमें शक्स के रास्ते की कर जिसने मेरी तरफ रूजू किया है। फिर तुम सबको पलटना मेरी ही तरफ है, हमें वक्त मैं तुम्हें बता दूंगा के तुम कैसे अमल करते रहे हो","(और लुकमान ने कहा था के) \"बेटा, कोई चीज राय के दाना (सरसों) बराबर भी हो और किसी चट्टन (रॉक) में या आसमानो या जमीन मैं कहीं छुपी हुई हूं, अल्लाह उसे निकल","","","अपनी चाल में ऐतदाल (मध्यम) इख्तियार कर, और अपनी आवाज जरा पिछली रख, सब आवाजों से ज्यादा बुरी आवाज गढ़ों की आवाज होती है","क्या तुम लोग नहीं देखते कि अल्लाह ने ज़मीन और आसमान की सारी चीज़ें तुम्हारे लिए मुस्कुराकर रखी हैं और अपनी खुली और छुपी नियामतें तुमपर तमाम करदी हैं? इसपर हाल ये है कि इंसानों में से कुछ लोग हैं जो अल्लाह के बारे में झगड़ा करते हैं बिना इसके कि उनके पास कोई इल्म हो, या हिदायत, या कोई रोशनी दिखाने वाली किताब","और जब उनसे कहा जाता है कि जोड़ी बनाओ हमें चीज की जो अल्लाह ने नाज़िल की है तो कहते हैं हम तो उस चीज़ की पेयरवी करेंगे जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है। क्या ये उनकी जोड़ी करेगी ख्वाह शैतान उनको भड़काती हुई आग ही की तरफ क्यों ना बुलाता रहा हो","जो शक्स अपने आप को अल्लाह के हवाले कर दे और अमलन वो नीक हो, उसने फिल-वाकई एक भरोसे के काबिल सहारा थाम लिया, और सारे मामले का आखिरी फैसला अल्लाह ही के हाथ है","अब जो कुफ्र करता है उसका कुफ्र तुम्हें गम में मुबतला ना करे। उनको लाट कर आना तो हमारी ही तरफ है, फिर हम उन्हें बता देंगे के वो क्या कुछ करके आये हैं। यकीनन अल्लाह सीनो (छाती) के छुपे हुए राज़ तक जानता है","हम थोड़ी मुद्दत उन्हें दुनिया में मजे करने का मौका दे रहे हैं, फिर उनको बेबस करके एक साख अज़ाब की तरफ खींच ले जायेंगे","अगर तुम इनसे पूछो के ज़मीन और आसमानों को किसने पाया है, तो ये जरूर कहेंगे के अल्लाह ने। कहो अल्हम्दुलिल्लाह, मगर इनमें से अक्सर लोग जानते नहीं हैं","आसमान और ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह ही का है। बेशक अल्लाह बे-नियाज़ (ज़रूरत से मुक्त) और आप से आप महमूद (प्रशंसनीय) हैं","ज़मीन में जितने दरख़्त हैं अगर वो सब के सब क़लम बन जाएँ और समंदर (दवात (स्याही) बन जाएँ) जैसे सात (सात) मज़ीद समंदर रोशनाई (स्याही) मुहय्या करें तब भी अल्लाह की बातें (लिखने से) ख़तम न होंगी। बेशक अल्लाह ज़बरदस्त और हकीम है","तुम सारे इंसानों को भुगतान करना और फिर दोबारा जिला उठाना (जिंदा करना) तो (उसके लिए) बस ऐसा है जैसे एक मुतनफ़िस (अकेले व्यक्ति) को (पैदा करना और जिला उठाना)। हकीकत ये है के अल्लाह सब कुछ सुनने और देखने वाला है","क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह रात को दिन में पिरोता हुआ ले आता है और दिन को रात में? उसने सूरज और चाँद को मुसक्कर कर रखा है। सब एक वक्त ए मुकर्रर तक चले जा रहे हैं। और (क्या तुम नहीं जानते) के जो कुछ भी तुम करते हो अल्लाह उसे ब-ख़बर है","ये सब कुछ इस वजह से है के अल्लाह ही हक़ है और उसे छोड़ कर दूसरी चीज़ को ये लोग पुकारते हैं वो सब बातिल हैं।और (इस वजह से के) अल्लाह ही बुज़ुर्ग हे बारतार है","क्या तुम देखते नहीं हो कि कश्ती समंदर में अल्लाह के फजल से चलती है ता-के वो तुम्हें अपनी कुछ निशानियां दिखाएंगे? दर हकीकत इस में बहुत सी निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो सब्र और शुक्र करने वाला हो","और जब (समंदर में) लोगों पर एक मौज साएबानो (छतरियों की तरह) की तरह छा जाती है तो ये अल्लाह को पुकारते हैं अपने दीन को बिल्कुल उसी के लिए खाली करके। फिर जब वो बच्चा कर इन्हें खुश्की (जमीन) तक पहुंचा देता है तो इनमें से कोई इक्तेसाद बरता (गुनगुना) है। और हमारी निशानियों का इनकार नहीं करता मगर हर वो शक्स जो गद्दार और नाशुक्र है","लोगन, बचो अपने रब के गजब से और डरो उस दिन से जबके कोई बाप अपने बेटे की तरफ से बदला ना देगा और ना कोई बेटा ही अपने बाप की तरफ से कुछ बदला देने वाला होगा। फिल्वाक़े अल्लाह का वादा सच्चा है। पास ये दुनिया की जिंदगी तुम्हें धोखे में ना डाले, और ना धोखे-बाज तुमको अल्लाह के मामले में धोखा दे दे","उस घड़ी का इल्म अल्लाह ही के पास है, वही बारिश बरसात है, वही जानता है के मांओं के पैठों में क्या परवरिश पा रहा है, कोई मुतानफ़िस नहीं जानता के कल वो क्या कमाई करने वाला है और ना किसी शक्स को ये खबर है कि किस सर-ज़मीन में उसको मौत आनी है। अल्लाह ही सब कुछ जानने वाला और बाख़बर है","अलिफ़ लाम मीम","इस किताब की तंज़ील (नुज़ुल/रहस्योद्घाटन) बिला शुभा रब उल आलमीन की तरफ से है","क्या ये लोग कहते हैं के इस शक्स ने इसे खुद गड़बड़ लिया है? नहीं, बल्कि ये हक है तेरे रब की तरफ से ता-के तू मुतनब्बेह (चेतावनी) करे एक ऐसी क़ौम को जिसके पास तुझसे पहले कोई मुतनब्बेह (चेतावनी) करने नहीं आया। शायद के वो हिदायत पा जाएं","वो अल्लाह हाय है जिसने आसमानों और ज़मीन को और उन सारी चीज़ों को जो इनके दरमियान हैं छे (छह) दिनों में पेदा किया और इसके बाद अर्श पर जलवा फरमा हुआ। उसके सिवा ना तुम्हारा कोई हमी ओ मददगार है और ना कोई उसके आगे सिफ़ारिश करने वाला। फिर क्या तुम होश में ना आओगे","वो आसमान से ज़मीन तक दुनिया के मामले की तदबीर (योजना) करता है और इस तदबीर की रुदाद (रिकॉर्ड) ऊपर उसके हुजूर जाती है एक ऐसे दिन में जिसका मिक़दार तुम्हारे साथ एक हज़ार साल है","वही है हर पोशीदा (चुपी हुई) और जाहिर का जाने वाला। ज़बरदस्त, और रहीम","जो चीज़ भी उसने बनाई ख़ूब ही (अच्छी तरह) बनाई। उसने इंसान की तख़लीक की इब्तिदा गारे (मिट्टी/मिट्टी) से की","फिर उसकी नाक एक ऐसी सात से चलाई जो हकीर पानी (तरल पदार्थ) की तरह का है","फिर उसको निक-सुक से दुरुस्त किया और उसके अंदर अपनी रूह फूंक दी। और तुमको कान दिये, आँखें दी और दिल दिये। तुम लोग कम ही शुक्र गुज़ार होते हो","और ये लोग कहते हैं: \"जब हम मिट्टी में राल-मिल चुके होंगे तो क्या हम फिर नये सिरे से पैदा किये जायेंगे?\" असल बात ये है के ये अपने रब की मुलाक़ात के मुनीर हैं","इनसे कहो \"मौत का वो फ़रिश्ता जो तुम्पर मुकर्रर किया गया है तुमको पूरा का पूरा अपने क़ब्ज़ में ले लेगा और फिर तुम अपने रब की तरफ पलटा लाये जाओगे\"","काश तुम देखो वो वक़्त जब ये मुजरिम सर झुकाए अपने रुब के हुजूर खड़े होंगे. (हम वक्त ये कह रहे होंगे) \"ऐ हमारे रब, हमने खूब देख लिया और सुन लिया, अब हमें वापस भेज दे ता-के हम नई अमल करें। हमें अब यकीन आ गया है।\"","(जवाब में इरशाद होगा) “अगर हम चाहते तो पहले ही हर नफ्स को इसकी हिदायत दे देते, मगर मेरी वो बात पूरी हो गई जो मैंने कहीं थी के मैं जहन्नुम को जिन्नो और इंसानों से भर दूंगा","पास अब चक्खो मजा अपनी इस हरकत का के तुमने इस दिन की मुलाक़ात को फ़रामोश कर दिया। हमने भी अब तुम्हें फ़रामोश कर दिया","","उनकी पीठें बिस्तरों से अलग रहती हैं, अपने रब को खौफ और तमा (उम्मीद) के साथ पुकारते हैं। और जो कुछ रिज्क हमने उन्हें दिया है उसमें से खर्च करते हैं","फिर जैसा कुछ आंखों की ठंडक का सामान उनके अमाल की जजा में उनके लिए छुपा कर रखा गया है उसकी किसी मुतनफ्फिस (व्यक्ति/आत्मा) को खबर नहीं है","भला कहीं ये हो हो सकता है कि जो शक्स मोमिन हो वो हम शक्स की तरह हो जाए जो फासीक (नफ़रमान/बुराई करने वाला) हो? ये डोनो बराबर नहीं हो सकते","जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्होन ने नीक अमल किए हैं उनके लिए तो जन्नतन की क़याम-गहेन (मेहमाननवाज घर) हैं। ज़ियाफ़त के तौर पर उनके अमल के बदले में","और जिन्हों ने फिस्क (ना-फरमानी) इख्तियार किया है उनका ठिकाना दोज़ख है। जब कभी वो उसे निकालना चाहेंगे उसमें ढकैल दिए जाएंगे और उन्हें कहा जाएगा के चक्खो अब उसी आग के अज़ाब का मजा जिसको तुम झूठलाया करते थे","हमसे बड़े अज़ाब से पहले हम इसी दुनिया में (किसी न किसी छोटे) अज़ाब का मजा इन्हें चकते रहेंगे। शायद के ये (अपने बगियाना [अपराध] रवीश से) बाज़ आ जाएं","और उसे बड़ा ज़ालिम कौन होगा जिसमें उसके रब की आयत के ज़रिये से हिदायत की जाए और फिर वो इनसे मुह फेर ले। ऐसे मुजरेमो से तो हम इंतेक़ाम लेकर रहेंगे","इस्से पहले हम मूसा को किताब दे चुके हैं। लिहाज़ा उसी चीज़ के मिलने पर तुम्हें कोई शक्क न होना चाहिए। हमें किताब को हमने बानी इसराइल के लिए हिदायत बनाई थी","और जब उन्होन ने सब्र किया और हमारी आयत पर यकीन लाते रहे तो उनके अंदर हमने ऐसे पेशवा पेदा किये जो हमारे हुकुम से रहनुमायी (हिदायत/मार्गदर्शन) करते थे","यकीनन तेरा रब ही कयामत के रोज़ उन बातों का फैसला करेगा जिनमें (बानी इसराइल) बहाम (आपस में) इख्तिलाफ करते रहे हैं","और क्या इन लोगों को (तारीख़ी (ऐतिहासिक) वाकियात में) कोई हिदायत नहीं मिली के उनसे पहले कितनी कौमों को हम हलाक कर चुके हैं जिनके रहने की जगह में आज ये चलते फिरते हैं? इसमें बड़ी निशानियां हैं. क्या ये सुनते नहीं हैं","और क्या लोगों ने ये मंज़र कभी नहीं देखा के हम एक बे-आब ओ गया (बंजर) ज़मीन की तरफ पानी बहा लाते हैं, और फिर उसी ज़मीन से वो फसल उगती है जिसमें उनके जानवरों को भी चारा मिलता है और ये खुद भी खाते हैं? तो क्या इन्हें कुछ नहीं सूझता","ये लोग कहते हैं \"ये फैसला कब होगा अगर तुम सच्चे हो?\"","इनसे कहो \"फैसले के दिन ईमान लाना उन लोगों के लिए कुछ भी नफेह (फैडेमांड) न होगा जिन्हों ने कुफ्र किया है और फिर उनको कोई मोहलत न मिलेगी।\"","अच्छा, इनके हाल पर छोड़ दो और इंतज़ार करो, ये भी मुंतज़िर (इंतज़ार कर रहे) हैं","ऐ नबी! अल्लाह से डरो और कुफ्फार ओ मुनाफिकीन की इताअत (आज्ञा) न करो, हकीकत में अलीम (सभी जानने वाले) और हकीम अल्लाह ही है","पैरवी करो हमसे बात की जिसका इशारा तुम्हारे रब की तरफ से तुम किया जा रहा है। अल्लाह हर हमसे बात करता है जो तुमलोग करते हो","अल्लाह पर तवक्कुल (भरोसा) करो, अल्लाह ही वकील होने के लिए काफी है","अल्लाह ने किसी शक्स (मर्द) के धड़ (जिस्म/शरीर) में दो दिल नहीं रखे हैं, ना उसने तुम लोगों की उन बीवीयों को जिनसे तुम जिहार [आप किसकी तुलना अपनी मां की पीठ से करते हैं (उन्हें तलाक देने के लिए)] करते हो तुम्हारी मां बना दिया है, और ना उसने तुम्हारे मुंह बोले बेटों को तुम्हारा हक़ीक़ी बेटा बनाया है। ये तो वो बातें हैं जो तुमलोग अपने मुँह से निकल देते हो, मगर अल्लाह वो बात कहता है जो मबनी बार हकीकत है। और वही सही तारीख़ की तरफ़ रहनुमाई करता है","मुँह बोले बेटों (दत्तक पुत्रों) को उनके बापों (पिता) की निस्बत से पुकारो, ये अल्लाह के नज़दीक ज़्यादा मुंसिफाना (न्यायसंगत) बात है। और अगर तुम मालूम ना हो के उनके बाप कौन हैं तो वो तुम्हारे दीनी भाई और रफीक हैं। ना दानिशता जो बात तुम कहो इसके लिए तुमपर कोई पकड़ा नहीं है, लेकिन उस बात पर जरूर गिराफ्त है जिसका तुम दिल से इरादा करो। अल्लाह दरगुज़र करने वाला और रहीम है","बिला शुबा नबी तो एहले ईमान के लिए उनकी अपनी ज़ात पर मुक़द्दम है, और नबी की बीवियाँ उनकी माँ (माँ) हैं। मगर किताबुल्लाह की रूह से आम मोमिनीन और मुहाजिरीन की बा-निस्बत रिश्तेदार एक दूसरे के ज़्यादा हक़दार हैं। अलबत्ता अपने रफ़ीक़ों के साथ तुम कोई भलाई (करना चाहो तो) कर सकते हो। ये हुकुम किताब ए इलाही में लिखा हुआ है","और (ऐ नबी) याद रखो हमें अहद-ओ-पैमान (संविदा) को जो हमने सब पैगम्बरों से लिया है, तुमसे भी और नूह और इब्राहीम और मूसा और ईसा इब्ने मरियम से भी। सबसे पुख्ता अहद ले चुके हैं","ता-के सच्चे लोगों से (उनका रब) उनकी सच्चाई के बारे में सवाल करें, और काफिरों के लिए तो उसने दर्दनक अजब मुहैय्या कर ही रखा है","ऐ लोगों, जो ईमान लाए हो, याद करो अल्लाह के एहसान को जो (अभी अभी) उसने तुमपर किया है जब लश्कर तुमपर चढ़ आए तो हमने उनपर एक ताकत आंधी (हवा) भेज दी और ऐसी फौजें रावण की जो तुमको नज़र ना आती थी। अल्लाह वो सब कुछ देख रहा था जो तुमलोग हमें वक्त कर रहे थे","जब वो ऊपर से और नीचे से तुमपर चढ़ आए, जब खौफ के मारे आंखें पथरा गई, कालीजे मुह को आ गए, और तुमलोग अल्लाह के बारे में तरह तरह के गुमान करने लगे","हमें वक्त ईमान लाने वाले खूब आजमाए (परीक्षित) गए और बुरी तरह हिला मारे गए","याद करो वो वक्त जब मुनाफिकीन और वो सब लोग जिनके दिलों में रोग थे साफ़ साफ़ कह रहे वे के अल्लाह और उसके रसूल ने जो वादे हमसे किए थे वो फरेब के सिवा कुछ ना थाय","जब उन में से एक गिरो ​​​​ने कहा के \"ऐ यत्रिब के लोगों, तुम्हारे लिए अब रुकने का कोई मौका नहीं है, पलट चलो\" जब उनका एक फर्क ये कह कर नबी से रुखसत तलब कर रहा था के \"हमारे घर खतरों में हैं,\" हलांके वो खतरे में ना थे। दर-असल वो (मुहाज़ ए जंग से [युद्ध-मोर्चे से]) भागना चाहते थे","अगर शहर के अतराफ से दुश्मन घुस आए होतय और हमें वक्त उन्हें फिटने की तरफ दावत दी जाती तो ये उसमें जा पढ़ते और मुश्किल ही से उन्हें शरीक ए फिटना होने में कोई तामुल (अनिच्छा) होता है","लोगों ने इसे पहले अल्लाह से अहद किया था के ये पीठ ना फेरेंगे। और अल्लाह से किए हुए अहद की बाज़-पुर्स (सवाल करते हुए) तो होनी ही थी","(ऐ नबी!) इनसे कहो, अगर तुम मौत या कत्ल से भागो तो ये भगना तुम्हारे लिए कुछ भी नफा-बख्श ना होगा, इसके बाद जिंदगी के मजे लूटने का थोड़ा ही मौका तुम्हें मिल सकेगा","इनसे कहो, कौन है जो तुम्हें अल्लाह से बचा सकता है अगर वो तुम्हें नुक्सान पहुंचाना चाहे? और कौन उसकी रहमत को रोक सकता है अगर वो तुमपर मेहरबानी करना चाहे? अल्लाह के मुक़ाबले में तो ये लोग कोई हामी ओ मददगार (रक्षक या मददगार) नहीं पा सकते हैं","अल्लाह तुम में से उन लोगों को खूब जानता है जो (जंग के काम में) रुकावतें डालने वाले हैं, जो अपने भाइयों से कहते हैं \"आओ हमारी तरफ।\" जो लड़ाई में हिसा लेते भी हैं तो बस नाम गिनाने को","जो तुम्हारा साथ देने में सक्षम है। ख़तरे का वक़्त आ जाए तो इस तरह दिधे फिरा-फिरा कर तुम्हारी तरफ देखते हैं जैसे किसी को मरने वाले पर गशी तारी हो रही हो। मगर जब ख़तरा गुज़र जाता है तो यही लोग फ़ायदों के हरिस बनकर कैंची की तरह (कैंची की तरह) चलती है ज़ुबान के लिए तुम्हारे इस्तेकबाल को आ जाते हैं। ये लोग हरगिज़ ईमान नहीं लाए, इसी के लिए अल्लाह ने इनके सारे अमल ज़या कर दिए। और ऐसा करना अल्लाह के लिए बहुत आसान है","ये समझ रहे हैं कि हमला-आवर गिरोह अभी गए नहीं हैं और अगर वो फिर हमला हो जाए तो इनका जी चाहता है कि हमें मौका पर ये कहीं सेहरा (रेगिस्तान) में बद्दुओं (बेडौइन) के दरमियान जा बैठें और वहीं से तुम्हारे हालात पूछते रहते हैं। अगर ये तुम्हारे दरमियान रहेंगे भी तो लड़ाई में कम ही हिसा लेंगे","दर हकीकत तुम लोगों के लिए अल्लाह के रसूल में एक बहतरीन नामुना था, हर उस शक्स के लिए जो अल्लाह और यौम ए आखिर का उम्मीदवर हो और कसरत से अल्लाह को याद करे","और सच्चे मोमिनो (का हाल हमें वक्त ये था के) जब उन्होन ने हमला-आवर लश्करों को देखा तो पुकार उठे के \"ये वही चीज है जिसका अल्लाह और उसके रसूल ने हमसे वादा किया था। अल्लाह और उसके रसूल की बात बिलकुल सच्ची थी।” इस वक़िये ने उनके ईमान और उनकी सुपुर्दगी (सबमिशन) को और ज़्यादा बढ़ा दिया","ईमान लाने वालों में ऐसे लोग मौजूद हैं जिन्हों ने अल्लाह से किये हुए अहद को सच्चा कर दिखाया है। इनमें से कोई अपनी नज़र पूरी कर चुका है और कोई वक़्त आने का मुंतज़िर है। इन्हों ने अपने रवैय्ये में कोई तबदीली नहीं की","(ये सब कुछ के लिए हुआ) ता-के अल्लाह सचाई की जजा दे और मुनाफिकों को चाहे तो सजा दे और चाहे तो उनकी तौबा कबूल करले। बेशाक़ अल्लाह गफूर ओ रहीम है","अल्लाह ने कुफ्फार का मुँह फेर दिया, वो कोई फ़ायदा हासिल किए बिना अपने दिल की जलन के लिए यूं ही पलट गए, और मोमिनीन की तरफ़ से अल्लाह ही लड़ने के लिए काफी हो गया। अल्लाह बड़ी कुव्वत वाला और ज़बरदस्त है","फिर एहले किताब में से जिन लोगों ने हमला-अवरों का साथ दिया था, अल्लाह उनकी गढ़ियों (किलों) से उन्हें उतार लाया और उनके दिलों में उसने ऐसा रोब (आतंक) डाल दिया के आज उनमे से एक गिरोह को तुम क़त्ल कर रहे हो और दूसरे गिरो ​​को क़ैद कर रहे हो","उसने तुमको उनकी ज़मीन में और उनके घरों और उनके अमवाल (माल) का वारिस बना दिया और वो इलाक़ा तुम्हें दिया जिसे तुमने कभी पामाल न किया था। अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है","ऐ नबी! अपनी बीवीयों से कहो, अगर तुम दुनिया और उसकी जीनत चाहती हो तो आओ, मैं तुम्हें कुछ दे दिला कर भले तरीक़े से रुखसत कर दूं","और अगर तुम अल्लाह और उसके रसूल और दार-ए-आखिरत की तालिब हो तो जान लो के तुम में से जो नीको-कर हैं अल्लाह ने उनको लिए बड़ा अजर मुहैया कर रखा है","नबी की बीवियां, तुम में से जो किसी सरीह फहाश हरकत का इर्तिक़ाब करेगी उसे दोहरा (डबल) अज़ाब दिया जाएगा। अल्लाह के लिए ये बहुत आसान काम है","और तुम में से जो अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करेगी और नेक अमल करेगी, उसको हम दोहरा अजर देंगे। और हमने उसके लिए रिज़क ए करीम मुहैय्या कर रक्खा है","नबी की बीवी, तुम आम औरतों की तरह नहीं हो। अगर तुम अल्लाह से डरने वाली हो तो दबी ज़ुबान से बात ना किया करो के दिल की ख़राबी का मुबतला कोई शक्स लालच में पड़ जाए, बलके साफ सीधी बात करो","अपने घरों में टिक कर रहो और साबिक दौर ए जाहिलियत की सी समझ-धज ना दिखती फिरो। नमाज़ क़याम करो, ज़कात करो और अल्लाह और उसके रसूल की इत्ता करो। अल्लाह तो ये चाहता है के एहले बैत ए नबी से गंदगी को डर करे और तुम्हें पूरी तरह से पाक करदे","याद रखो अल्लाह की आयत और हिकमत की उन बातों को जो तुम्हारे घरों में सुनायी जाती है। बेशाक़ अल्लाह लतीफ़ (सूक्ष्म/कोमल) और बा-ख़बर है","बिल यकीन जो मर्द और जो औरतें मुस्लिम हैं, मोमिन हैं, मुती-ए-फ़रमान हैं, रस्त बाज़ हैं, साबिर हैं, अल्लाह के आगे झुकने वाले हैं, सदक़ा देने वाले हैं, रोज़ा रखने वाले हैं हैं, अपनी शर्मगाहों की हिफाज़त करने वाले हैं, और अल्लाह को कसरत से याद करने वाले हैं, अल्लाह ने उनके लिए मगफिरत और बड़ा अजर मुहैय्या कर रखा है","किसी मोमिन मर्द और किसी मोमिन औरत को ये हक़ नहीं है के जब अल्लाह और उसका रसूल किसी मामले का फैसला करदे तो फिर उसे अपने मामले में खुद फैसला करने का इख्तियार हासिल रहे। और जो कोई अल्लाह और उसके रसूल की ना-फरमानी करे तो वो सारे गुमराह में पढ़ गया","(ऐ नबी), याद करो वो मौका जब तुम हमें शक्स से कह रहे थे, जिसपर अल्लाह ने और तुमने एहसान किया था के \"अपनी बीवी को ना छोड़ और अल्लाह से डर\" हमें वक्त तुम अपने दिल में वो बात छुपाये हुए थे जिसे अल्लाह खोलना चाहता था। तुम लोगों से डर रहे थे, हलांके अल्लाह इसका ज़्यादा हक़दार है के तुम उससे डरो। फिर जब ज़ैद उसे अपनी हाजत पूरी कर चुका तो हमने उससे (मुतल्लका खातून) का तुमसे निकाह करदिया, ता-के मोमिनो पर अपने मुंह बोले बेटों (बेटों) की बीवीयों के मामले में कोई तंगगी ना रहे जबके वो उनसे अपनी हाजत पूरी कर चुके हों। और अल्लाह का हुकुम तो अमल में आना ही चाहिए था","नबी पर किसी ऐसे काम में कोई रुकावत नहीं है जो अल्लाह ने उसके लिए मुकर्रर कर दिया हो। याही अल्लाह की सुन्नत उन सब अंबिया (पैगंबरों) के मामले में रह रही है जो पहले गुजर चुके हैं और अल्लाह का हुकुम एक कताई ताई-शुदा फैसला होता है","(ये अल्लाह की सुन्नत है उन सब अंबिया (पैगंबर) के मामले में) जो अल्लाह के पैगामात मांगते हैं और उसी से डरते हैं और एक खुदा के सिवा किसी से नहीं डरते, और मुहासिबे (जवाबदेही) के लिए बस अल्लाह ही काफी है","(लोगन) मुहम्मद तुम्हारे मर्दों में से किसी के बाप नहीं हैं, मगर वो अल्लाह के रसूल और ख़तीम-उन-नबियिन हैं, और अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखने वाला है","ऐ लोगों! जो ईमान लाए हो, अल्लाह को कसरत से याद करो","और सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते रहो","वही है जो तुम्हारे लिए रहमत फरमाता है और उसके मलिका तुम्हारे लिए दुआ ए रहमत करते हैं ता-के वो तुम्हें तरीकियों (अंधेरे) से रोशनी में निकल लाये. वो मोमिनो पर बहुत मेहरबान है","जिस रोज वो उसे मिलेंगे उनका इस्तेकबाल सलाम से होगा और उनके लिए अल्लाह ने बड़ा बा-इज्जत अजर फरहम कर रखा है","ऐ नबी, हमने तुम्हें भेजा है गवाह बना कर, बशारत (खुश खबरी) देने वाला और डराने वाला बना कर","अल्लाह की इजाज़त से उसकी तरफ दावत देने वाला बना कर और रोशन चिराग बना कर","बशारत देदो उन लोगों को जो (तुम्हारा) ईमान लाए हैं के उनके लिए अल्लाह की तरफ से बड़ा फजल है","और हरगिज़ ना दब्बू कुफ़्फ़ार-ओ-मुनाफ़ीक़ीन से, कोई परवा न करो उनकी अज़ियात रसानी (तकलीफ़/चोट) की और भरोसा करलो अल्लाह पर। अल्लाह ही इसके लिए काफी है के आदमी अपनी गलती उसके सुपुर्द करदे","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम मोमिन औरतों से निकाह करो और फिर उन्हें हाथ लगाने से पहले तलाक दे दो तो तुम्हारी तरफ से अनपार कोई इद्दत (प्रतीक्षा अवधि) लाज़िम नहीं है जिसका पूरा होना का तुम मुतलबा कर सको. लिहाज़ा उन्हें कुछ माल दो और भले तरीक़े से रुखसत करदो","ऐ नबी, हमने तुम्हारे लिए हलाल कर दी तुम्हारी वो बीवीयां जिनके मेहर तुमने अदा की हैं, और वो औरतें जो अल्लाह की अता करदा लौंडियां (गुलाम-लड़कियां) में से तुम्हारी मिल्कियत में आइए.और तुम्हारी वो चाचा-ज़ाद और फुपी-ज़ाद और मामू-ज़ाद और खाला-ज़ाद बहनें जिन्हों ने तुम्हारे साथ हिजरत की है। और वो मोमिन औरत जिसने अपने आप को नबी के लिए हेबा किया हो अगर नबी उसे निकाह में लेना चाहे। ये रियात (विशेषाधिकार) खालीसतन तुम्हारे लिए है, दूसरे मोमिनो के लिए नहीं है। हमको मालूम है कि आम मोमिनो पर उनकी बीवीयां और लौंडियां (गुलाम लड़कियां) के बारे में हमने क्या हुदूद (प्रतिबंध) आयद किये हैं। (तुम्हें हुडदंग से हमने इस लिए मुस्तस्ना (छूट) किया है) ता-के तुम्हारे ऊपर कोई तंगगी ना रहे। और अल्लाह गफूर ओ रहीम है","तुमको इख्तियार दिया जाता है कि अपनी बीवीयों में से जिसको चाहो अपने से अलग रख लो, जिसे चाहो अपने साथ रख लो और जिसे चाहो अलग रखने के बाद अपने पास बुला लो। क्या मामले में तुमपर कोई मुज़ाइक़ा (दोष) नहीं है। क्या इस तरह मुतवक्कि (संभावना) है कि उनकी आंखें ठंडी रहेंगी और वो रंजीदा (शोक) न होंगी। और जो कुछ भी तुम उनको दोगे उसपर वो सब राजी रहेगी। अल्लाह जानता है जो कुछ तुम लोगों के दिलों में है, और अल्लाह आलिम ओ हलीम है","इसके बाद तुम्हारे लिए दूसरी औरतें हलाल नहीं हैं। और ना इसकी इजाज़त है के उनकी जगह और बीवीयां ले आओ ख़्वाह उनका हुस्न (खूबसूरती) तुम्हें कितना ही पसंद हो। अलबत्ता लौंडियों की तुम्हें इजाज़त है। अल्लाह हर चीज़ पर निगरानी है","ऐ लोग जो इमा लाए हो, नबी के घरों में बिला इजाज़त न चले आया करो, न खाने का वक़्त निकलता रहो। हां अगर तुम्हें खाने पर बुलाया जाए तो जरूर आओ, मगर जब खाना खालो तो मुंतशिर (फैलाओ) हो जाओ, बातें करने में ना लगे रहो। तुम्हारी ये हरकतें नबी को तकलीफ़ देती हैं, मगर वो शरम की वजह से कुछ नहीं कहते और अल्लाह हक़ बात कहने में शरमाता नहीं। नबी की बीवीयों से अगर तुम्हें कुछ माँगना हो तो पूरे दिन के पीछे से माँगा करो। ये तुम्हारे और उनके दिलों की पाकीज़गी के लिए ज़्यादा मुनासिब तरीक़ा है। तुम्हारे लिए ये हरगिज जायज नहीं के अल्लाह के रसूल को तकलीफ दो, और ना ये जायज है कि उनके बाद उनकी बीवीयों से निकाह करो। ये अल्लाह के नजरिए बहुत बड़ा गुनाह है","तुम ख्वाह कोई बात जाहिर करो या छुपाओ, हर बात का इल्म है","अज़वाज़ (पत्नियाँ) नबी के लिए इसमें कोई मुज़हिक़ा (दोषपूर्ण) नहीं है कि उनके बाप, उनके बेटे, उनके भाई, उनके भतीजे, उनके भांजे, उनके मेल-जोल की औरतें और उनके ममलुक घरों में आएं। (ऐ औरतें) तुम्हें अल्लाह की नफ़रमानी से बचना चाहिए। अल्लाह हर चीज़ पर निगाह रखता है","अल्लाह और उसके मलिका (फ़रिश्ते) नबी पर दरूद भेजते हैं, ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम भी उन्पर दरूद ओ सलाम भेजो","जो लोग अल्लाह और उसके रसूल को अज़ियात (झुंझलाहट) देते हैं दुनिया और आख़िरत में अल्लाह ने लानत फरमायी है और उनके लिए रुसवा-कुन अज़ाब मुहैय्या करदिया है","और जो लोग मोमिन मर्दन और औरतों को बे-कसूर अज़ियात (चोट) देते हैं उन्हें ने एक बदे बोहतन (बदनामी/निंदा) और सारी गुनाह का जवाब अपने सर ले लिया है","ऐ नबी, अपनी बीवीयां और बेटियां और एहले ईमान की औरतों से कहदो के अपने ऊपर अपनी चादरों के पल्लू लटका लें। ये ज़्यादा मुनासिब तरीक़ा है ता-के वो पहचान ली जाये और न सतायी जाये। अल्लाह ताला गफ़ूर ओ रहीम है","अगर मुनाफ़ीक़ीन, और वो लोग जिनके दिलों में ख़राबी है, और वो जो मदीना में हिजान अंगेज अफ़वाहें तुम्हें उठा खड़ा करेंगे। फिर वो इस शहर में मुश्किल ही से तुम्हारे साथ रह सकेंगे)","उनपर हर तरफ से लानत की उम्मीद होगी, जहां कहीं पाए जाएंगे पकड़े जाएंगे और बुरी तरह मारे जाएंगे","ये अल्लाह की सुन्नत है जो ऐसे लोगों के मामले में पहले से चली आ रही है, और तुम अल्लाह की सुन्नत में कोई तबदीली न पाओगे","लोग तुमसे पूछते हैं के कयामत की घड़ी कब आएगी। कहो उसका इल्म तो अल्लाह ही को है, तुम्हें क्या खबर?शायद के वो करीब ही आ लगी हो","बहार-ए-हाल ये यकीनी अमर है के अल्लाह ने काफिरों पर लानत की है और उनके लिए भड़कती हुई आग मुहइया कर दी है","जिसमें वो हमेशा रहेंगे। कोई हमी ओ मददगार न पा सकेंग","जिस रोज़ उनके चेहरे आग पर उलट पलट किये जायेंगे हमें वक्त वो कहेंगे के “काश हमें अल्लाह और रसूल की इबादत की होती”","और कहेंगे “ऐ रब हमारे, हमने अपने सरदारों और अपने बड़ों (महानों) की इताअत” कि और उनहों ने हमें राह-ए-रास्त से बे-राह करदिया","ऐ रब, उनको दोहरा(डबल) अज़ाब दे और उन्पर सख्त लानत कर”","ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, उन लोगों की तरह न बन जाओ जिन्होन ने मूसा को अज़ियातें (रंज पाहुंचा) दी पतली, फिर अल्लाह ने उनकी बनाई हुई बातों से उसकी बारात फरमायी (उसे साफ कर दिया) और वो अल्लाह के नाजदीक ब-इज्जत था","ऐ ईमान लाने वालों, अल्लाह से डरो और ठीक बात किया करो","अल्लाह तुम्हारे अमल दुरुस्त कर देगा और तुम्हारे कसूरों से दरगुजर पैदा होगा। जो शक्स अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करे उसने बड़ी कामयाब की","हमने इस अमानत को आसमान और ज़मीन और पहाड़ों के सामने पेश किया तो वो उसे उठाने के लिए तैयार न हुए, और इससे डर गए। मगर इंसान ने इसे उठाया लिया, बशक वो बड़ा जालिम और जाहिल (अज्ञानी) है","इस बार-ए-अमानत को उठने का लाज़मी नतीजा ये है के अल्लाह मुनाफिक मर्दन और औरतों, और मुशरिक मर्दन और औरतों को सज़ा दे और मोमिन मर्दन और औरतों की तौबा क़बूल करे.अल्लाह दरगुज़र फ़रमाने वाला और रहीम है","हम्द (तारीफ़) हमारे लिए खुदा के लिए है जो आसमान और ज़मीन की हर चीज़ का मालिक है और आख़िरत में भी उसी के लिए हम्द है। वो दाना (हिकमत वाला) और बाख़बर है","जो कुछ ज़मीन में जाता है और जो कुछ उससे निकलता है और जो कुछ आसमान से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है, हर चीज़ को वो जानता है।वो रहीम और गफूर है","मुकीरीन कहते हैं के क्या बात है के कयामत हमपर नहीं आ रही है! कहो कसम है मेरे आलिम-उल-गैब परवरदिगार की, वो तुमपर आ कर रहेगी। उसे ज़र्रा बराबर (परमाणुओं का वजन/सबसे छोटा कण) कोई चीज़ न आसमानों में छुपी हुई है न ज़मीन में न जर्रे से बड़ी और न उससे छोटी, सब कुछ एक नुमाया दफ़्तर में दर्ज है","और ये कयामत इस्लिये के जजा दे अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए हैं और नीक अमल करते रहे हैं। उनके लिए मगफिरत है और रिज़क-ए-करीम","और जिन लोगों ने हमारी आयतों को नीचा दिखाने के लिए ज़ोर लगाया है, उनके लिए बदतरीन क़िस्म का दर्दनाक अज़ाब है","(ऐ नबी), इल्म रखने वाले खूब जानते हैं के जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है वो सरसर हक़ है और खुदा-ए-अज़ीज़ ओ हमीद का रास्ता दिखता है","मुनकिरीन लोगों से कहते हैं \"हम बताते हैं तुम्हें ऐसा शक्स जो खबर देता है कि जब तुम्हारे जिस्म का ज़र्रा ज़र्रा मुंतशिर (बिखरा) हो चूका होगा उस वक्त तुम नए सिरे से अदा कर दिए जाओगे","ना मालूम ये शक्स अल्लाह के नाम से झूठ गड़बड़ है या इसे जुनून (दीवाना पान) लाहिक है।” नहीं, बलके जो लोग आख़िरत को नहीं मानते वो अज़ाब में मुबतला होने वाले हैं और वही बुरी तरह बहके हुए हैं","क्या इन्होन ने कभी उस आसमान ओ ज़मीन को नहीं देखा जो इन्हें आगे और पीछे से घेरे हुए हैं? हम चाहें तो इन्हें ज़मीन में ढांसा दें, या आसमान के कुछ टुकड़े अंदर गिरा दें। दर हकीकत इस में एक निशानी है हर उस बंदे के लिए जो खुदा की तरफ रूजू करने वाला हो","हमने दाऊद को अपने हां से बड़ा फजल अता किया था। यहीं हुकुम हमने) परिन्दों को दिया। हमने लोहे को उसके लिए नरम कर दिया","क्या हिदायत के साथ के ज़रीन (मेल के पूरे कोट) बना और उनके हल्के ठीक अंदाज़ पर रख। (ऐ आले दाऊद) नीक अमल करो। जो कुछ तुम करते हो उसको मैं देख रहा हूं","और सुलेमान के लिए हमने हवा को मुस्कुरा कर दिया, सुबह के वक्त उसका चलना एक महीने की राह तक और शाम के वक्त उसका चलना एक महीने की राह तक। हमने उसके लिए पिगले हुए तांबे (पिघला हुआ पीतल) का चश्मा (वसंत) बहा दिया और ऐसे जिन्न उसके ताबे करदिये जो अपने रब के हुकुम से उसके आगे काम करते थे। उनमें से जो हमारे हुकुम से सरताबी (विचलित/घुमावदार) करता है उसको हम भड़कती हुई आग का मजा चखते हैं","वो उसके लिए बनाते थे जो कुछ वो चाहता, ऊंची इमारतें, तसवीरें, बदे बदे हौज जैसी लगन (जलाशय जैसे कटोरे) और अपनी जगह से ना हटें वली भारी देगें. ऐ आले दाऊद, अमल करो शुकर के तरीक़े पर। मेरे बंदों में कम ही शुक्र गुजर हैं","फिर जब सुलेमान पर हमने मौत का फैसला नफीज किया तो जिन्नो को उसकी मौत का पता देने वाली कोई चीज उस घुन (कीड़ा) के सिवा न थी जो उसके आसा (कर्मचारी) को खा रहा था। इस तरह जब सुअलीमान गिर पड़ा तो जिन्नो पर ये बात खुल गई के अगर वो गैब के जाने वाले होते तो इस ज़िल्लत के अज़ाब में मुबतला ना रहते","सबा (शीबा) के लिए उनके अपने मसकन (घर-जमीन) ही में एक निशानी मौजूद थी, दो बाग दयेन(दाएं) और बायें(बाएं)। खाओ अपने रुब का दिया हुआ रिज़क और शुकर बजा लाओ उसका, मुल्क है उम्मीद ओ पाकीज़ा और परवरदिगार है बख्शीश फ़रमाने वाला","मगर वो मुँह मोड़ गये। आख़िर ए कार हमने उनपार बंद (बांध) तोड़ सैलाब (बाढ़) भेज दिया और उनके पिछले दो बाघों (बगीचों) के जगह दो और बाघ उन्हें दिए जिनमें कड़वे (कड़वे) कसैले (इमली) फल और झाओ के दरख्त थे और कुछ थोड़ी सी बेरियां (लोटे के पेड़)","ये था उनके कुफ्र का बदला जो हमने उनको दिया। और नाशुक्रे इंसान के सिवा ऐसा बदला हम और किसी को नहीं देते","और हमने उनके और उन बस्तियों के दरमियान, जिनको हमने बरकत अता की थी, नुमायां बस्तियां बसा दी पतली, और उनके सफर की मुसाफ़्तें एक अंदाज़े पर रख दी पतली। चलो फिरो रातों में रात दिन पूरे अमन के साथ","मगर उनहों ने कहा “ऐ हमारे रब, हमारे सफ़र की मुसाफ़तें लम्बी करदे।” उनहों ने अपने ऊपर आप जुल्म किया, आखिर ए कार हमने उन्हें अफसाना बना कर रख दिया और उन्हें बिल्कुल तित्तर बिटर कर डाला। यकीनन इसमे निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो बड़ा साबिर (दृढ़) ओ शाकिर (आभारी) हो","उनके मामले में इब्लीस ने अपना गुमान सही पाया और उन्होन ने उसकी जोड़ी बनाई, बजुज़ एक थोड़े से गिरो ​​के जो मोमिन था","इब्लीस को अनपर कोई इक्तेदार (अधिकारी) हासिल न था मगर जो कुछ हुआ वो इस तरह हुआ के हम ये देखना चाहते थे के कौन आख़िरत का मनने वाला है और कौन उसकी तरफ से शक्क में पड़ा हुआ है। तेरा रब्ब हर चीज़ पर निगरान (सतर्क) है","(ऐ नबी, मुशरिकेन से) कहो के पुकार देखो अपने उन माबूदों को जिनमें तुम अल्लाह के सिवा अपना माबूद समझे बैठे हो। वो ना आसमानों में कोई ज़रा बराबर चीज़ के मालिक हैं ना ज़मीन में। वो आसमां ओ ज़मीन की मिलकियत में शरीक भी नहीं है। उनमें से कोई अल्लाह का मददगार भी नहीं है","और अल्लाह के हुज़ूर कोई शफ़ात भी किसी के लिए नफ़ेह (फ़ैदा-मंद) नहीं हो सकता हमें शक्स के जिसके लिए अल्लाह ने सिफ़ारिश की इजाज़त दी हो। हट्टा के जब लोगों के दिलों से घबराहट दूर होगी तो वो (सिफ़रिश करने वालों से) पूछेंगे के तुम्हारे रब ने क्या जवाब दिया, वो कहेंगे के ठीक जवाब मिला है और वो बुज़ुर्ग ओ बारतार है","(ऐ नबी) इनसे पूछो, \"कौन तुमको आसमान और ज़मीन से रिज़्क देता है?” कहो \"अल्लाह। अब ला मुहाल (अनिवार्य रूप से) हम में और तुम में से कोई एक ही हिदायत पर है या खुली गुमराही में पड़ा हुआ है।\"","इनसे कहो, \"जो कसूर हमने किया हो उसकी कोई बाज-पर्स तुमसे ना होगी, और जो कुछ तुम कर रहे हो उसकी कोई जवाब तलबी हमसे नहीं की जाएगी।\"","कहो \"हमारा रब्ब हमको जमा करेगा, फिर हमारे दरमियान ठीक ठीक फैसला कर देगा। वो ऐसा जबरदस्त हकीम (महान न्यायाधीश) है जो सब कुछ जानता है।\"","इनसे कहो, \"जरा मुझे देखो तो सही वो कौन हस्तियां हैं जिन्होंने तुमने उसके साथ शरीक लगा रखा है।\" हरगिज़ नहीं, ज़बरदस्त और दाना तो बस वो अल्लाह ही है","और (ऐ नबी) हमने तुमको तमाम ही इंसानों के लिए बशीर (खुश कब्री देने वाला) ओ नज़ीर (डर सुनाने वाला) बना कर भेजा है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं","ये लोग तुमसे कहते हैं के वो (कयामत का) वादा कब पूरा होगा अगर तुम सच्चे हो","कहो तुम्हारे लिए एक ऐसे दिन की मियाद मुकर्रर है जिसके आने में ना एक घड़ी भर की आखिरी (देरी) तुम कर सकते हो और ना एक घड़ी भर पहले इसे ला सकते हो हो","ये काफ़िर कहते हैं के \"हम हरगिज़ इस कुरान को ना मानेंगे और ना इसके पहले आई हुई किसी किताब को तसलीम करेंगे\"। काश तुम देखो इनका हाल हम वक्त जब ये जालिम अपने रब के हुजूर खड़े होंगे हमें वक्त ये एक दूसरे पर इल्जाम धरेंगे। जो लोग दुनिया में दबा कर रखे गए थे वो बड़े बनने वालों से कहेंगे के \"अगर तुम ना होते तो हम मोमिन होते।\"","वो बदे बनने वाले दबाए हुए लोगों को जवाब देंगे \"क्या हमने तुम्हें हमें हिदायत से रोका था जो तुम्हारे पास आई थी? नहीं, बल्कि तुम खुद मुजरिम थे।\"","वो दबाए हुए लोग उन बदाए बनने वालों से कहेंगे, 'नहीं, बलके शब-ओ-रोज़ की मक्कारी थी जब तुम हमसे कहते थे के हम अल्लाह से कुफ्र करें और दूसरों को उसका हमसर ठहरें।' आख़िर ए कार जब ये लोग अज़ाब देखेंगे तो अपने दिलों में पछताएंगे और हम मुनकिरीन के गैलन में तौक (बेदी/बेड़ी) डाल देंगे। क्या लोगों को इसके सिवा और कोई बदला दिया जा सकता है के जैसा अमल उनके थे वैसी ही जजा वो पायें","कभी ऐसा नहीं हुआ के हमने किसी बस्ती में एक खबरदार करने वाला भेजा हो और उस बस्ती के खाते पीते लोगों ने ये ना कहा हो के जो पैग़ाम तुम लेकर आए हो उसको हम नहीं मानते","उनको ने हमेशा यहीं कहा के हम तुमसे ज्यादा माल औलाद रखते हैं और हम हरगिज सजा पाने वाले नहीं हैं","(ऐ नबी), इनसे कहो मेरा रब जैसा चाहता है कुशादा (प्रचुर मात्रा में) रिज्क देता है और जिसे चाहता है नापा तुला अता करता है, मगर अक्सर लोग इसकी हकीकत नहीं जानते","ये तुम्हारी दौलत और तुम्हारी औलाद नहीं है जो तुम्हें हमसे करीब करती हो। हां मगर जो ईमान लाए और नेक अमल करे, यहीं लोग हैं जिनके लिए उनके अमल की दोहरी (डबल) जजा है, और वो बालंद ओ बाला इमरतन में इत्मिनान से रहेंगे","रहे वो लोग जो हमारी आयत को नीचा दिखाएंगे के लिए दौड़-धूप करते हैं, तो वो अज़ाब में मुबतला होंगे","(ऐ नबी), इनसे कहो, \"मेरा रब अपने बंदों में से जैसा चाहता है खुला रिज़क देता है और जिसे चाहता है नपा तुला देता है। जो कुछ तुम खर्च कर देते हो उसकी जगह वही तुमको और देता है। वो सब रज़िकॉन (प्रदाता) से बेहतर रज़िक़ (प्रदाता) है","और जिस दिन वो तमाम इंसानों को जमा करेगा फिर फ़रिश्तों से पूछेगा \"क्या ये लोग तुम्हारी ही इबादत करते थे?\"","तो वो जवाब देंगे के \"पाक है आप की जात, हमारा तालुक़ तो आपस में है ना के इन लोगों से। दर-असल ये हमारी नहीं बलके जिन्नो की इबादत करते थे, मेरे अंदर से अक्सर उन्ही पर ईमान लाए हुए थे\"","(उस वक्त हम कहेंगे के) आज तुम मेरे से कोई ना किसी को फ़ायदा पाहुंचा सकता है ना नुक्सान। और ज़ालिमों से हम कह देंगे के अब चक्खो उस अज़ाब ए जहन्नुम का मजा जैसे तुम झूठलाया करते थे","लोगों को जब हमारी सफ़ आयत सुनाई जाती है तो ये कहते हैं के \"ये शक्स तो बस ये चाहता है के तुमको उन माबूदों से बरगश्ता (मुड़ जाना) करदे जिनकी इबादत तुम्हारे बाप दादा करते आये हैं।\" और कहते हैं \"ये (कुरान) महज़ एक झूठ है घड़ा हुआ।\" इन काफ़िरों के सामने जब हक़ आया तो उनको ने कहा के \"ये तो सारे जादू है\"","हलांके ना हमने इन लोगों को पहले कोई किताब दी थी के ये उसे पढ़ते थे, और ना तुमसे पहले इनकी तरफ कोई मुतनब्बेह करने वाला भेजा था","इंसे पहले गुज़रे हुए लोग झूठला चुके हैं। जो कुछ हमने उन्हें दिया था उसके उसरे-अशीर (यहां तक ​​कि दसवें/दसवे हिस्से) को भी ये नहीं पहुंचे हैं। मगर जब उन्हें ने मेरे रसूलों को झुटलाया तो देखलो के मेरी सजा कैसी थी","(ऐ नबी), इनसे कहो \"मैं तुम्हें बस एक बात की हिदायत करता हूं, खुदा के लिए तुम अकेले अकेले और दो दो मिल कर अपना दिमाग लड़ाओ और सोचो, तुम्हारे साहब [साथी (मुहम्मद)] में आख़िर ऐसी कौन सी बात है जो जुनून (पागलपन) की हो? वो तो एक सख्त अज़ाब की आमद (आने) से पहले तुमको मुतनब्बेह करने वाला है”","इंसे कहो “अगर मैंने तुमसे कोई अजर मांगा है तो वो तुम ही को मुबारक” रहे. मेरा अजर तो अल्लाह के ज़िम्मे है और वो हर चीज़ पर गवाह है।”","इनसे कहो \"मेरा रब (मुझपर) हक़ का इल्का (प्रेरणा/हल्स डाउन) करता है और वो तमाम पोशीदा (छुपी हुई) हक़ीक़त को जाने वाला है\"","कहो, \"हक़ आ गया और अब बातिल के लिए कुछ नहीं हो सकता\"","कहो, \"अगर मैं गुमराह हो गया हूं तो मेरी गुमराही का जवाब मुझपर है, और अगर मैं हिदायत पर हूं तो वही (रहस्योद्घाटन) की बिना पर हूं जो मेरा रब मेरे ऊपर नाज़िल करता है। वो सब कुछ सुनता है और करीब ही है।\"","काश तुम देखो उन्हें वक्त जब ये लोग घबराएं फिर रहेंगे होंगे और कहीं बच कर ना जा सकेंगे, बलके करीब ही से पकड़ लिए जाएंगे","हमें वक्त ये कहेंगे के हम उसपर ईमान ले आए, हालंके अब दूर निकली हुई चीज कहां हाथ आ सकती है","इसे पहले ये कुफ्र कर चुके थे और बिला तहकीक दूर की कोड़ियां (अनुमान) लाया करते थे","हमें वक्त जिस चीज की ये तमन्ना कर रहे होंगे हमें उसी तरह महरूम करदिये जाएंगे जिस तरह इनके पेश-रो हम मशरब (उनमें से पहले की तरह) महरूम हो चुके होंगे। ये बदाए गुमराह-कुन शक्क में पड़े हुए थे","तारीफ अल्लाह ही के लिए है जो आसमानो और ज़मीन का बनाने वाला और फ़रिश्तों को पैगाम रसान मुकर्रर करने वाला है। (ऐसी फ़रिश्ते) जिनके दो दो और तीन तीन और चार चार बाज़ू (पंख) हैं। वो अपने मख़ूक की सच्चाई में जैसा चाहता है इज़ाफ़ा करता है। यकीनन अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है","अल्लाह जिस रहमत का दरवाज़ा भी लोगों के लिए खोल दे उसे कोई रोकने वाला नहीं, और जिसे वह बंद करदे उसे अल्लाह के बाद फिर कोई दूसरा खोलने वाला नहीं। वो ज़बरदस्त और हकीम है","लोगन, तुम्हारे अल्लाह के जो एहसानात हैं उन्हें याद रक्खो, क्या अल्लाह के सिवा कोई और खालिक भी है जो तुम्हें आसमान और ज़मीन से रिज़क देता हो? कोई माबूद उसके सिवा नहीं, आखिर तुम कहां से धोखा खा रहे हो","अब अगर (ऐ नबी) ये लोग तुम्हें झुठलाते हैं (तो ये कोई नई बात नहीं), तुमसे पहले भी बहुत से रसूल झुटलाए जा चुके हैं, और सारे मामले आखिर ए कार अल्लाह हाय की तरफ रूजू होने वाले हैं","लोगन, अल्लाह का वादा यकीनन बरहक्क (सच्चा) है, लिहाजा दुनिया की जिंदगी तुम्हें धोखे में ना डाले और ना वो बड़ा धोखेबाज़ तुम्हें अल्लाह के बारे में धोखा देने वाले हैं","दर हकीकत शैतान तुम्हारा दुश्मन है आपके लिए भी उसे अपना दुश्मन ही समझो, वो तो अपने जोड़े को अपनी राह पर इस लिए बुला रहा है कि वो दोज़खियों में शामिल हो जाए","जो लोग कुफ्र करेंगे उनके लिए साख अज़ाब है और जो ईमान लाएंगे और नेक अमल करेंगे उनके लिए मगफिरत और बड़ा अजर है","(भला कुछ ठिकाना है उस लड़के की गुमराही का) जिसके लिए उसका बुरा अमल खुशनुमा बना दिया गया हो और वह उसे अच्छा समझ रहा हो? हकीकत ये है के अल्लाह जिसे चाहता है गुमराही में डाल देता है और जिसे चाहता है राह ए रस्त दिखा देता है। पास (ऐ नबी) खा-मा-खा तुम्हारी जान लोगों की खातिर ग़म-ओ-अफसोस में ना घुले। जो कुछ ये कर रहे हैं अल्लाह उसको खूब जानता है","वो अल्लाह ही तो है जो हवाओं को भेजता है, फिर वो बादल उठाती हैं, फिर हम उसे एक उजाद (बंजर) इलाके की तरफ ले जाते हैं और उसी जमीन को जिला उठाते हैं जो मेरी पड़ी थी। मारे हुए इंसान का जी उठना भी इसी तरह होगा","जो कोई इज्जत चाहता हो उसे मालूम होना चाहिए कि इज्जत सारी की सारी अल्लाह की है। उसके हाँ जो चीज़ ऊपर चढ़ती है वो सिर्फ पाकीज़ा क़ौल (बात/शब्द) है, और अमल ए साले उसको ऊपर चढ़ता है। रहे वो लोग जो बेहुदा चाल बाजियां करते हैं, उनके लिए कुछ अजीब है और उनका मकर (प्लॉटिंग) खुद ही गैरत होने वाला है","अल्लाह ने तुमको मिट्टी से पेदा किया, फिर से शुक्राणु (शुक्राणु की बूंद) से, फिर तुम्हारे जोडे बना दिए (यानी मर्द और औरत)। कोई औरत हमीला नहीं होती और ना बच्चा जानती है मगर ये सब कुछ अल्लाह के इल्म में होता है। कोई उमर पाने वाला उमर नहीं पाता और ना किसी की उमर में कुछ कमी होती है मगर ये सब कुछ एक किताब में लिखा होता है। अल्लाह के लिए ये बहुत आसान काम है","और पानी के दोनो जख़ीरे यक्सन नहीं हैं। एक मीठा और प्यास बुझाने वाला है, पीने में खुशगवार, और दूसरा साख खरी (नमकीन) के हलक शील दे (जुबान पर कड़वा), मगर दोनों से तुम तर-ओ-ताजा गोश्त हासिल करते हो। पहनने के लिए ज़ीनत का सामान निकलते हो, और इसी पानी में तुम देखते हो के कश्तियां उसका सीना चीयरती चली जा रही हैं ता-के तुम अल्लाह का फ़ज़ल तलाश करो और उसकी शुकर गुजर बानो","वो दिन के अंदर रात को और रात के अंदर दिन को पिरोता हुआ ले आता है.चांद और सूरज को उसने मुस्कुरा कर रखा है. ये सब कुछ एक वक्त-ए-मुकर्रर तक चले जा रहा है। वही अल्लाह (जिसके ये सारे काम हैं) तुम्हारा रब है, बादशाही उसी की है उसे छोड़ कर जिन दूसरे को तुम पुकारते हो वो एक परीका (खजूर की खाल) के मालिक भी नहीं है","इन्हें पुकारो तो वो तुम्हारी दुआएं सुन नहीं सकते।और सुनो तो उनका तुम्हें कोई जवाब नहीं दे सकता। और कयामत के रोज़ वो तुम्हारे शिर्क का इंकार कर देंगे। हकीकत ए हाल की ऐसी सही खबर तुम्हें एक खबरदार के सिवा कोई नहीं दे सकता","लोगन, तुम ही अल्लाह के मोहताज हो और अल्लाह तो गनी (आत्मनिर्भर) ओ हमीद (बेहद प्रशंसनीय) है","वो चाहे तो तुम्हें हटा कर कोई नई ख़लक़त (सृजन) तुम्हारी जगह ले आये","ऐसा करना अल्लाह के लिए कुछ भी दुश्वार नहीं","कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ ना उठाएगा।और अगर कोई लड़ा हुआ (भारी लादा हुआ) नफ़्स अपना बोझ उठाने के लिए उसे पुकारेगा बार का एक अदना (छोटा) हिसा भी बताने के लिए कोई ना आएगा चाहे वो करीब-तरीन रिश्तेदार ही क्यों ना हो। (ऐ नबी) तुम सिर्फ उन लोगों को मुतनब्बे (चेतावनी) दे सकते हो जो बे-देखे अपने रब से डरते हैं और नमाज़ क़याम करते हैं। जो शक्स भी पाकीज़गी इख्तियार करता है अपने ही भलाई के लिए करता है और पलटना सबको अल्लाह ही की तरफ करता है","अंधा और आँखों वाला बराबर नहीं है","ना तारीकियाँ (अंधेरा) और रोशनी यकसन हैं","ना ठंडी छाँव और धूप की तपिश एक जैसी है","और ना ज़िंदे और मुर्दे मुसावी (बराबर) हैं। अल्लाह जिसे चाहता है सुनता (सुन) है, मगर (ऐ नबी) तुम उन लोगों को नहीं सुना सकते हो कब्रों में पागल हो","तुम तो बस एक खबरदार करने वाले हो","हमने तुमको हक़ के साथ भेजा है। बशारत (ख़ुश ख़बरी) देने वाला और डरने वाला बनकर। और कोई उम्मत ऐसी नहीं गुजरी है जिसमें कोई मुतनब्बेह (चेतावनी) करने वाला ना आया हो","अब अगर ये लोग तुम्हें झुठलाते हैं तो इनसे पहले गुजरे हुए लोग भी झुटला चुके हैं। उनके पास उनके रसूल खुले दलैल (प्रमाण) और सहीफे (ग्रंथ) और रोशन हिदायत (मार्गदर्शन) देने वाली किताब लेकर आये थे","फिर जिन लोगों ने ना माना उनको मैंने पकड़ लिया और देखलो के मेरी सजा कैसी सच थी","क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह आसमान से पानी बरसाता है और फिर इसके ज़रिये से हम तरह तरह के फल निकल लाते हैं जिनका रंग मुख़्तलिफ़ होते हैं। पहाड़ों में भी सफ़ेद (सफ़ेद), सुर्ख (लाल) और गहरी सियाह (गहरा काला) धारियां पाई जाती हैं जिनके रंग मुख़्तलिफ़ होते हैं","और इसी तरह इंसानों और जानवरों और मुसलमानों के रंग भी मुख़्तलिफ़ हैं। हकीकत ये है कि अल्लाह के बंदों में से सिर्फ इल्म रखने वाले लोग ही उससे डरते हैं। बेशाक़ अल्लाह ज़बरदस्त और दरगुज़र फ़रमाने वाला है","जो लोग किताबुल्लाह की तिलावत करते हैं और नमाज़ क़याम करते हैं, और जो कुछ हमने उन्हें रिज़क़ दिया है उसमें से खुले और छुपे ख़र्च करते हैं, यक़ीनन वो एक ऐसी तिजारत के मुतवक्किह (उम्मीदवार) हैं जिसका हरगिज खसरा (नुक्सन) न होगा","(इस तिजारत में उन लोगों ने अपना सब कुछ खा लिया है) ता-के अल्लाह उनको अजर पूरय के पूर उनको दे और मजीद अपने फजल से उनको अता फरमाये। बेशाक़ अल्लाह बख्शने वाला और क़दरदान (प्रशंसनीय) है","(ऐ नबी) जो किताब हमने तुम्हारी तरफ वही के ज़रिया से भेजी है वही हक है, तस्दीक (पुष्टि करें) करती हुई आई है उन किताबों की जो इसे पहले आई थी। बेशक अल्लाह अपने बंदों के हाल से खबर है, और हर चीज पर निगाह रखने वाला है","फिर हमने इस किताब का वारिस बना दिया उन लोगों को जिन्होंने (इस विरासत के लिए) अपने बंदों में से चुन लिया। अब कोई तो इनमें से अपने नफ़्स पर ज़ुल्म करने वाला है, और कोई बीच की रास है (मध्यम कोर्स), और कोई अल्लाह के इज़ान से नेकियों में सबक करने वाला (आगे बढ़ने वाला) है, यहीं बहुत बड़ा फ़ज़ल है","हमेशा रहने वाली जन्नतें हैं जिनमें ये लोग दाखिल होंगे, वहां इन्हें सोने (सोना) के कंगन (कंगन) और मोतियों (मोती) से सजाया जाएगा, वहां इनका लिबास रेशम होगा","और वो कहेंगे के शुक्र है उस खुदा का जिसने हमसे गम दूर कर दिया, यकीनन हमारा रब माफ करने वाला और क़दर फ़रमाने वाला है","जिसने हमें अपने फ़ज़ल से आबादी (हमेशा के) क़याम की जगह ठहर दिया, अब यहां ना हमें कोई मुशक्कत पेश आती है और ना थकान लाहिक होती है","और जिन लोगों ने कुफ्र किया है उनके लिए जहन्नुम की आग है, ना उनका क़िस्सा पक कर दिया जायेगा के मर जायेंगे और ना उनके लिए जहन्नुम के अज़ाब में कोई कमी आ जायेगी। इस तरह हम बदला देते हैं हर उस शक्स को जो कुफ्र करने वाला है","वो वहां चीख-चीख कर कहेंगे के \"ऐ हमारे रब हमें यहां से निकल ले ता-के हम नई अमल करें, उन अमाल से मुख्तलिफ जो पहले करते रहे थे।\" (उन्हें जवाब दिया जाएगा) \"क्या हमने तुमको इतनी उमर न दी थी कि मैं कोई सबक लेना चाहता था तो सबक ले सकता था? और तुम्हारे पास मुतनब्बे (चेतावनी) करने वाला भी आ चूका था। अब मजा चक्खो। जालिमों का यहां कोई मददगार नहीं है","बहस अल्लाह आसमानो और ज़मीन की हर पोशीदा (चुपी) चीज़ से वाकिफ है। वो तो सीने के छुपे हुए राज़ तक जानता है","वही तो है जिसने तुमको ज़मीन में खलीफा बनाया है। अब जो कोई कुफ्र करता है उसका कुफ्र (बोझ) उसी पर है, और काफिरों को उनका कुफ्र इसके सिवा कोई तरक्की नहीं देता के उनके रब का गजब उन पर ज्यादा से ज्यादा भड़का चला जाता है। काफ़िरों के लिए खसरे (नुक्सान) में इज़ाफ़े के सिवा कोई तरक़्की नहीं","(ऐ नबी) इनसे कहो, \"कभी तुमने देखा भी है अपने उन शरीकों को जिन्हें तुम खुदा को छोड़ कर पुकारा करते हो? मुझे बताओ, उन्हें ने ज़मीन में क्या पेदा किया है? हां आसमानों में उनकी क्या शिरकत है?” (अगर ये नहीं बता सकता तो इनसे पूछो) क्या हमने इन्हें कोई तहरीर (लिखित) लिख कर दी है जिसका बिना पर ये (अपने इस शरीक के लिए) कोई साफ सनद रखते हो? नहीं, बलके ये जालिम एक दूसरे को महज़ फरेब के झाँसे दिए जा रहे हैं","हकीकत ये है के अल्लाह ही है जो आसमानों और ज़मीन को टाल (विस्थापित) जाने से रोके हुए हैं, और अगर वो ताल (विस्थापित) जाएँ तो अल्लाह के बाद कोई दूसरा इन्हें थमने (पकड़ने) वाला नहीं है। बेशक अल्लाह बड़ा हलीम (सहनशील) और दरगुज़र फ़रमाने वाला है","ये लोग कड़ी क़िस्में खा कर कहते थे कि अगर कोई ख़बरदार करने वाला उनके हाँ आ गया होता तो ये दुनिया की हर दूसरी क़ौम से बढ़ कर रास्ता-रो (बेहतर निर्देशित) होटे. मगर जब ख़बरदार करने वाला इनके पास आ गया तो उसकी आमद (आ रही है) ने इनके अंदर हक़ से फ़रार के सिवा किसी चीज़ में इज़ाफ़ा ना किया","ये ज़मीन में और ज़्यादा इस्तकबार (गुरूर) करने लगे और बुरी बुरी चालें चलने लगें, हालंके बुरी चालें चलने वालो ही को ले बैठती है। अब क्या ये लोग इसका इंतज़ार कर रहे हैं कि पिछली क़ौमों के साथ अल्लाह का जो तरीक़ा रहा है वही इनके साथ भी बढ़ता जाए? यही बात है तो तुम अल्लाह के तरीक़े में हरगिज़ कोई तबदीली न पाओगे और तुम कभी न देखोगे के अल्लाह की सुन्नत को उसके मुकर्रर रास्ते से कोई ताक़त फेर सकती है","क्या ये लोग ज़मीन में कभी चले फिर नहीं हैं के इनहे उन लोगों का अंजाम नज़र आता है जो इनसे पहले गुजर चुके हैं, और इनसे बहुत ज्यादा ताकत थी? अल्लाह को कोई चीज़ अजीज (निराश) करने वाली नहीं है, न आसमानों में और न ज़मीन में। वो सब कुछ जानता है और हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है","अगर कहीं वो लोगों को उनके किये कार्टून पर पकड़ा तो ज़मीन पर किसी मुतनफ़्फ़िस (जीवित प्राणी) को जीता (ज़िंदा) ना छोड़ता। मगर वो उनको एक मुकर्रर वक्त तक के लिए मोहलत दे रहा है, फिर जब उनका वक्त आन पूरा होगा अल्लाह के पास अपने बंदों को देख लेगा","यासीन","कसम है कुरान ए हकीम की","के तुम यकीनन रसूलन मैं से हो","सीधे रास्ते पर हो","(और ये कुरान) गालिब और रहीम हस्ती का नाज़िल करदा है","ता-के तुम खबरदार करो एक ऐसी क़ौम को जिसके बाप दादा खबरदार ना किये गए थे और इस वजह से वो गफ़लत में पड़े हुए हैं","इनमें से अक्सर लोग फ़ैसला-ए-अज़ाब के मुस्तहिक हो चुके हैं, इसके लिए वो ईमान नहीं लाते हैं","हमने उनकी गर्दनों में तौक (बेदी/बेड़ी) डाल दिए हैं जिनसे वो थोड़ीयों (चिन) तक जकड़े गए हैं, इसलिए वो सर उठाए खड़े हैं","हमने एक दीवार उनके आगे खादी करदी है और एक दीवार उनके पीछे, हमने उन्हें ढांक दिया है, उन्हें अब कुछ नहीं सूझता","उनके लिए यकसन है, तुम उन्हें खबरदार करो या ना करो, ये ना मानेंगे","तुम तो उसी खबर को खबरदार बना सकते हो जो हिदायत की जोड़ी। करे और बे-देखे खुदा ए रहमान से डरे, उसे मगफिरत और अज्र-ए-करीम की बशारत (खुश खबरी) दे दो","हम यकीनन एक रोज़ मुर्दों को जिंदा करने वाले हैं जो कुछ अफाल (आमाल) उन्होन ने किये हैं वो सब हम लिखते रहे हैं, और जो कुछ आसर उनहों ने पीछे छोड़े हैं वो भी हम सब (लिख) रहे हैं। हर चीज को हमने एक खुली किताब में दर्ज कर रखा है","इन्हें मिसाल के तौर पर उस बस्ती वालों का क़िस्सा सुनाओ जबके उसमें रसूल आए थे","हमने उनकी तरफ दो रसूल भेजे और उन्होन ने दोनों को झुटला दिया फिर हमने तीसरा मदद के लिए भेजा और उनसब ने कहा \"हम तुम्हारी तरफ रसूल की हकीकत से भेज गए हैं\"","बस्ती वालों ने कहा \"तुम कुछ नहीं हो मगर हम जैसे चांद इंसान, और खुदा ए रहमान ने हरगिज कोई चीज नाज़िल नहीं की है, तुम महज़ झूठ बोलते हो।\"","रसूलों ने कहा \"हमारा रब जानता है के हम जरूर तुम्हारी तरफ रसूल बना कर भेज गए हैं","और हमपर साफ साफ पैगाम पाहुंचा देने के सिवा कोई जिम्मेदारी नहीं है\"","बस्ती वाले कहने लगे \"हम तो तुम्हारे लिए फ़ल-ए-बद्द (मनहूस) समझते हैं, अगर तुम बाज़ ना आए तो हम तुमको संगसार (पत्थरबाजी) कर देंगे और हमसे तुम बड़ी दर्दनाक साज़ा पाओगे\"","रसूलों ने जवाब दिया \"तुम्हारी फ़ल-ए-बद्द (नहुसत) तो तुम्हारे अपने साथ लगी हुई है, क्या ये बातें तुम इसलिए करते हो कि तुम्हें हिदायत की गई है? असल बात ये है के तुम हद से गुज़रे हुए लोग हो”","इतने में शहर के दरवाज़े से एक शक्स दौड़ता हुआ आया और बोला “ऐ मेरी क़ौम के लोगों, रसूलों की जोड़ी इख्तियार करलो","जोड़ी करो उन लोगों की जो तुमसे कोई अजर नहीं चाहते और ठीक रास्ते पर हैं","आखिर क्यों ना मैं उस हस्ती की बंदगी करूं जिसने मुझे भुगतान किया है और जिसकी तरफ तुम सबको पलट कर जाना है","क्या मैं उसे चोद कर दूसरे को माबूद बना लूं? हलांके अगर खुदा ए रहमान मुझे कोई नुक्सान पहुंचाना चाहे तो ना उनकी शफाअत मेरे लिए कोई काम आ सकती है और ना वो मुझे छुड़ा ही सकते हैं","अगर मैं ऐसा करूं तो मैं सारी गुमराही में मुबतला हो जाऊंगा","मैं तो तुम्हारे रब पर ईमान ले जाऊंगा आया, तुम भी मेरी बात मान लो।”","(आखिर ए कार उन लोगों ने उसे क़त्ल कर दिया और) उस शक्स से कहदिया गया के \"दाखिल हो जा जन्नत में\" उसने कहा \"काश मेरी क़ौम को मालूम होता है","के मेरे रब ने किस चीज़ की बदौलत मेरी मगफिरत फ़रमा दी और मुझे ब-इज्जत लोगों में दाख़िल फरमाया”","इसके बाद उसकी कौम पर हमने आसमान से कोई लश्कर नहीं उतारा, हमने लश्कर भेजा कि कोई हाजात ना थी","बस एक धमाका हुआ और यकीन वो सब बुझ कर रह गए","अफसोस बंदों के हाल पर, जो रसूल भी उनके पास आया उसका वो मज़ाक ही उड़ाते रहे","क्या उन्हें ने देखा नहीं के उनसे पहले कितनी ही हाय क़ौमों को हम हलाक कर चुके हैं और उसके बाद वो फिर कभी उनकी तरफ पलट कर ना आये","उन सबको एक रोज़ हमारे सामने हाज़िर किया जाना है","लोगों के लिए बे-जान ज़मीन एक निशानी है, हमने इसको जिंदगी बख्शी और इस गल्ला (अनाज/अनाज) निकाला जिसे ये खाते हैं","हमने इसमे खजूरों और अंगूरों के बाग पैदा किये और उसके अंदर चश्मे (स्प्रिंग्स) फोढ़ निकले","ता-के ये उसके फल खायें, ये सब कुछ इनके अपने हाथों का भुगतान किया हुआ नहीं है फिर क्या ये शुक्र अदा नहीं करते","पाक है वो जात जिसने जुमला अक्साम के जोड़े पैदा किये ख्वाह वो ज़मीन की नबात में से होन या खुद इनके अपने जिन्स (यानी नाव-ए-इंसानी) में से या उन आशियानों में से जिनको ये जानते तक नहीं हैं","इनके लिए एक और निशानी रात है, हम उसके ऊपर से दिन हटा देते हैं तो अंदर अंधेरा छा जाता है","और सूरज, वो अपने ठिकाने की तरफ चल जा रहा है, ये ज़बरदत आलिम (सर्वज्ञ) हस्ती का बंदा हुआ हिसाब है","और चाँद, उसके लिए हमने मंज़िलें मुक़र्रर कर दी हैं यहाँ तक के इनसे गुज़रता हुआ वो फिर खजूर की सूखी शाखा (सूखी पुरानी शाखा) के मनिंद रह जाता है","ना सूरज के बस में ये है कि वो चांद को जा पकड़े और ना रात दिन पर सबक ले जा सकती है। सब एक एक फलक में तैर रहे हैं","इनके लिए ये भी एक निशानी है के हमने इनकी नाक को भरी हुई कश्ती में सवार करदिया","और फिर इनके लिए वैसी ही कश्तियां और पैदा कि जिनपर ये सवार होते हैं","हम चाहें तो इनको गरक करदें, कोई इनकी फरियाद सुनने वाला ना हो और किसी तरह ये ना बचाए जा सकें","बस हमारी रहमत ही है जो इन्हें पार लगाती और एक वक्त और खास तक जिंदगी से मिलता जुलता (आनंद) होने का मौका देती है","लोगों से जब कहा जाता है के बच्चों उस अंजाम से जो तुम्हारे आगे आ रहा है और तुम्हारे पीछे गुजर चुका है, शायद के तुमपर रहम किया जाए (तो ये सुनी अन सुनी कर जाते हैं)","इनके सामने इनके रब की आयत (निशानी) में से जो आयत (निशानी) भी आती है ये इसकी तरफ इल्तिफ़ात नहीं करते","और जब इनसे कहा जाता है कि अल्लाह ने जो रिज़क तुम्हें अता किया है उसमें से कुछ अल्लाह की राह में भी खर्च करो तो ये लोग जिन्होन ने कुफ्र किया है ईमान लाने वालों को जवाब देते हैं \" क्या हम उनको खिलाएं जिन्हें अगर अल्लाह चाहता तो खुद खिला देता? तुम तो बिलकुल ही बहक गए हो”","ये लोग कहते हैं के “ये कयामत की धमकी आख़िर कब पूरी होगी? बताओ अगर तुम सच्चे हो”","दर-असल ये जिस चीज की राह तक रहे हैं वो बस एक धमाका है जो यकीन है कि ऐन उस हालात में धर लेगा जब ये (अपनी दुनिया मामलात में) झगड़ा कर रहे होंगे","और हम वक्त ये वसीयत तक ना कर पाएंगे, ना अपने घरों को पलट पाएंगे","फिर एक सुर (तुरही) फूँका जाएगा और यकीन ये अपने रब के हुजूर पेश होने के लिए अपनी कब्रों से निकल पड़ेंगे","घबरा कर कहेंगे: \"अरे, ये किसने हमने हमारी ख्वाब-गाह से उठाया खड़ा किया?\" ये वही चीज़ है जिसका खुदा ए रहमान ने वादा किया था और रसूलों की बात सच्ची थी”","एक ही ज़ोर की आवाज़ होगी और सब के सब हमारे सामने हाज़िर हो जायेंगे","आज किसी पर ज़रा बराबर ज़ुल्म ना किया जायेगा और तुम्हें वैसा ही बदला दिया जाएगा जैसे अमल तुम करते रहे थे","आज जन्नती लोग मजे करने में मशगुल हैं","वो और उनकी बिवियां घने साइयों (शेड्स) में हैं मसनदों पर ताकि लगे हुए","हर क़िस्म की लज़ीज़ चीज़ें खने पीने को उनके लिए वहां मौजूद हैं, जो कुछ वो तालाब करें उनके लिए हाज़िर है","रब ए रहीम की तरफ से उनको सलाम कहा गया है","और ऐ मुजरिमोन, आज तुम चैट कर अलग हो जाओ","आदम के बच्चों, क्या मैंने तुमको हिदायत ना की थाई के शैतान की बंदगी ना करो, वो तुम्हारा खुला दुश्मन है","और मेरी ही बंदगी करो, ये सीधा रास्ता है","मगर इसके बावज़ूद उसने तुम में से एक गिरोह-ए-कसीर (आपकी बड़ी भीड़) को गुमराह कर दिया, क्या तुम अक़ल नहीं रखते थे","ये वही जहन्नुम है जिसे तुमको डराया जाता रहा था","जो कुफ्र तुम दुनिया में करते रहे हो उसकी पैदाइश में अब इसका इंधन (ईंधन) बनो","आज हम इनको मुंह बांध देते हैं, इनके हाथ हमसे बोलेंगे और इनके पांव गवाही देंगे के ये दुनिया में क्या कमाई करते रहेंगे","हम चाहें तो इनकी आंखें मूंद लें (आंखें मिटा दीं), फिर ये रास्ते की तरफ लपक कर देखें, कहां से इन्हें रास्ता सुझाएगा","हम चाहें तो इनकी जगह ही पर इस तरफ मास्क (रूपांतरण) करके रख दें के ये ना आगे चल सकें ना पीछे पलट सकें","जिस शक्स को हम लंबी उमर देते हैं इसकी सच्चाई को हम उलट ही देते हैं (हम सृजन में उलट हैं), क्या (ये हालात देख) कर) इन्हें अक्ल नहीं आती","हमने इस (नबी) को शेर नहीं सिखाया है और ना शायरी इसको ज़ायब ही देती है, ये तो एक हिदायत है और साफ पढ़ी जाने वाली किताब","ता-के वो हर उस शक्स को खबरदार बना दे जो जिंदा हो और इंकार करने वालों पर हुज्जत कयाम हो जाए","क्या ये लोग देखते नहीं हैं कि हमने अपने हाथों की बनाई हुई चीजों में से इनके लिए मवेशी पैदा किए और अब ये इनके मालिक हैं","हमने उन्हें इस तरह इनके बस में कर दिया है के उनमें से किसी पर ये सवार होते हैं, किसिका ये गोश्त खाते हैं","और उनके अंदर इनके लिए तरह तरह के फवाद (फायदे) और मशरूबात (पेय) हैं फिर क्या ये शराब गुजर नहीं होते","ये सब कुछ होते हुए इन्होन ने अल्लाह के सिवा दूसरे खुदा बना लिए हैं और ये उम्मीद रखते हैं के इनकी मदद की जाएगी","वो इनकी कोई मदद नहीं कर सकते बल्के ये लोग उलटे उनके लिए हाज़िर-बाश लश्कर (प्रतीक्षा में सेना) बने हुए हैं","अच्छा, जो बातें ये बना रहे हैं वो तुम्हें रंजीदा ना करें, इनकी छुपी और खुली सब बातों को हम जानते हैं","क्या इंसान देखता नहीं है कि हमने उसका इस्तेमाल किया (शुक्राणु ड्रॉप) से भुगतान किया और फिर वह सारा झगड़ालू बनकर खड़ा हो गया","अब वह हमपर मिसालें चस्पां करता है और अपनी कमाई को भूल जाता है, कहता है “कौन इन हदियों को जिंदा करेगा जबके ये गंदा (सड़ा हुआ) हो चुकी हूं?”","उसे कहो, वहीं जिंदा करेगा जिसने पहले उसे पैदा किया था, और वह तखलीक (सृजन) का हर काम जानता है","वही जिसने तुम्हारे लिए हरे भरे (हरा) दरख्त से आग पैदा कर दी और तुम उसे अपने चूल्हे (स्टोव) रोशन करते हो","क्या वो जिसने आसमानो और ज़मीन को पेदा किया इसपर कादिर नहीं है के इन जैसों को पेदा कर सके? क्यों नहीं, जबके वो माहिर खल्लाक (शानदार रचनाकार) है","वो तो जब किसी चीज का इरादा करता है तो उसका काम बस यही है कि उसे हुकुम दे के होजा और वो जो जाती है","पाक है वो जिसके हाथ में हर चीज का मुकम्मल इक्तेदार (पूर्ण नियंत्रण) है, और उसकी तरफ तुम पलटाए जाने वाले हो","कतर दर कतर सैफ बांधने वालों की कसम","फिर उनकी कसम जो दतने फाटक ने वाले हैं","फिर उनकी कसम जो कलाम ए हिदायत सुनाने वाले हैं","तुम्हारा माबूद ए हकीकत बस एक ही है","वो जो ज़मीन और आसमान का मालिक है और तमाम उन चीज़ों का मालिक है जो ज़मीन ओ आसमान में हैं, और सारे मशरिकों का मालिक है","हमने आसमान ए दुनिया को तारों की ज़ीनत से सजाया है","और हर शैतान सरकश से इसको महफ़ूज़ कर दिया है","ये शयातीन माला-ए-आला (हाई काउंसिल) की बातें नहीं सुन सकते, हर तरफ से मारे और हांके जाते हैं","और इनके लिए पैहम अज़ाब है","ताहम अगर कोई इनमें से कुछ ले उदय तो एक तेज़ शोला उसका पीछा करता है","अब इनसे पूछो, इनकी अदायगी ज्यादा मुश्किल है या उन चीजों की जो हमने भुगतान कर रखी हैं? इनको तो हमने लीस डर गैरे (चिपचिपी मिट्टी/चिकनी मिट्टी) से पेदा किया है","तुम (अल्लाह की क़ुदरत के करिश्माओं पर) हेयरन हो और ये इसका मज़ाक उड़ा रहे हैं","समझा जाता है तो समझ कर नहीं देते","कोई निशानी देखते हैं तो इस्तेमाल करते हैं थाटन (मजाक/मॉक) में उड़ाते हैं","और कहते हैं “ये तो सारा जादू है","भला कहीं ऐसा हो सकता है के जब हम मर चुके हों और मिट्टी बन जाएं और हड्डियों का पंजर रह जाएं हमें वक्त हम फिर जिंदा करके उठा खड़े किए जायें","और क्या हमारे अगले वक्त के आबा ओ आजदाद भी उठाये जायेंगे?”","(इनसे कहो हां, और तुम) खुदा के मुकाबले में बेबस हो","बस एक ही झिडकी होगी और यकीन ये अपनी आंखों से (वो सब कुछ जिसकी खबर दी जा रही है) देख रहे होंगे","हमें वक्त ये कहेंगे \" हाये हमारी कम्बख्त, ये तो यम उल जजा है”","“ये वही फैसले का दिन है जिसे तुम झुटलाया करते थे”","(हुकुम होगा) घेर लाओ सब जालिमों और उनके साथियों और उन माबूदों को जिनकी वो खुदा को चोद कर बंदगी किया करते थाय","फिर उन सबको जहन्नुम का रास्ता दिखाओ","और जरा यहीं ठहरो, इनसे कुछ पूछना है","“क्या हो गया तुम्हें, अब क्यों एक दूसरे की मदद नहीं करते","(अरे, आज तो ये अपने आप को) और एक दूसरे को हवलिये (आत्मसमर्पण) किये दे रहे हैं”","इसके बाद ये एक दूसरे की तरफ मुड़ेंगे और बहाम तकरार शुरू कर देंगे","जोड़ी बनाने वाले अपने पेशवाओं से) कहेंगे, “तुम हमारे पास सीधे रुख से आते थे”","वो जवाब देंगे “नहीं बलके तुम खुद ईमान लेन वाले ना थे","हमारा तुमपर कोई जोर ना था, तुम खुद ही सरकश लोग थे","आखिर ए कार हम अपने रब के इस फरमान के मुस्तहिक हो गए के हम अज़ाब का मजा चखने वाले हैं","तो हमने तुमको बहकाया, हम खुद बहके हुए थे”","इस तरह वो सब हम रोज़ अज़ाब में मुश्तारिक (शारीक) होंगे","हम मुजरिमों के साथ यहीं कुछ करते हैं","ये वो लोग थे के जब उनसे कहा जाता \"अल्लाह के सिवा कोई मबूद ए बरहक़ नहीं है\" तो ये घमंड में आ जाते थे","और कहते थे \"क्या हम एक शायर मजनूं (दीवाने) की खातिर अपने मबूदों को छोड़ दें?\"","हलांके वो हक़ लेकर आया था और उसने रसूलों की तस्दीक की थी","(अब उन्हें कहा जाएगा के) तुम लाज़िमन दर्दनाक सज़ा का मज़ा चखने वाले हो","और तुम्हें जो बदला भी दिया जा रहा है उन्ही अमाल का दिया जा रहा है जो तुम करते रहो हो","मगर अल्लाह के चीदा (चुने हुए/चुने हुए) बंदे (इस अंजाम ए बद से) महफूज़ होंगे","उनके लिए जाना बुझा रिज़क (ज्ञात प्रावधान) है","हर तरह की लज़ीज़ चीज़","और नियामत भारी जन्नतें","जिनको वो इज्जत के साथ रखेंगे, तख्तों पर आमने-सामने बैठेंगे","शराब के चमसों से सागर (कप) भर-भर कर उनके दरमियान फिराए जाएंगे","चमकती हुई शराब, जो पीने वालों के लिए लज्जत होगी","ना उनके जिस्म को कोई जरूर होगा और ना उनका अक्ल उसे खराब होगी","और उनके पास निगाहें बचाने वाली, खूबसूरत आंखों वाली औरतें होंगी","ऐसी नाज़ुक जैसे अंडे (अंडे) के छिलके के नीचे छुपी हुई झिल्ली","फिर वो एक दूसरे की तरफ मुतवज्जे हो कर हालात पूछेंगे","उनमें से एक कहेगा, “दुनिया में मेरा एक हम नहसीन (साथी) था","जो मुझसे कहता था, क्या तुम भी तस्दीक करने वालों में से हो","क्या वाकाई जब हम मर चुके होंगे और मिट्टी हो जाएंगे और हड्डियों का पंजर बनकर रह जाएंगे तो हमें जजा ओ सजा दी जाएगी","अब क्या आप लोग देखना चाहते हैं कि वो साहब अब कहां हैं?”","ये कह कर जुन्ही वो झुकेगा तो जहन्नुम की गहराई में उसको देख लेगा","और उसे खिताब करके कहेगा “खुदा की कसम, तू तो मुझे तबाह ही कर देने वाला था","मेरे रब का फज़ल शामिल ए हाल ना होता तो आज मैं भी उन पर लोगों में से होता जो पकड़े हुए आये हैं","अच्छा तो क्या अब हम मरने वाले नहीं हैं","मौत जो हमें आनी थी वो बस पहले आ चुकी है?","यकीनन यही अज़ीम ओ शान कामियाबी है","ऐसी ही कामियाबी के लिए अमल करने वालों को अमल करना चाहिए","बोलो, ये ज़ियाफ़त अच्छी है या ज़ख़्म का दरख्त","हमने हमें दरख्त को ज़ालिमों के लिए दिया फितना बना दिया है","वो एक दरख्त है जो जहन्नुम की तह से निकलता है","उसके शगुफे (उभरता हुआ फल) ऐसे हैं जैसे शैतानों के सर","जहन्नुम के लोग उसे खाएंगे और उसी से पैठ भरेंगे","फिर इसपर पीने के लिए खुलता हुआ पानी मिलेगा","और इसके बाद उनकी वापसी उसी आतिश ए दोज़ख की तरफ होगी","ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने बाप दादा को गुमराह पाया","और उनके नक्शे क़दम पर दौड़ चले","हालांके उनसे पहले बहुत से लोग गुमराह हो चुके थे","और उन्हें हमने तम्बीह (चेतावनी) करने वाले रसूल भेजे थे","अब देखलो के उन तम्बीह किए जाने वालों का क्या अंजाम हुआ","इस बद-अंजामी से बस अल्लाह के वही बंदे बचाए हैं जिन्होंने अपने लिए खालिस कार्लिया है","हमको (इससे पहले) नहीं ने पुकारा था, तो देखो के हम कैसे अच्छे जवाब देने वाले थे","हमने उसको और उसके घर वालों को करब-ए-अजीम (बड़ी मुसीबत) से बचा लिया","और उसकी नाक को बाकी रक्खा","और बाद की नाकों में इसकी तारीफ ओ तौसीफ छोड़ दी","सलाम है नूंह पर तमाम दुनिया वालों में","हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा दिया करते हैं","डार हकीकत वो हमारे मोमिन बंदों में से था","फिर दूसरे गिरो ​​को हमने डूब कर दिखाया","और नूह ही के तारीख़ पर चलने वाला इब्राहिम था","जब वो अपने रुब के हुजूर क़ल्ब ए सलीम लेकर आया","जब उसने अपने बाप और अपनी क़ौम से कहा “ये क्या चीज़ हैं जिनकी तुम इबादत कर रहे हो","क्या अल्लाह को छोड़ कर झूठ घड़े हुए माबूद चाहते हो","आख़िर अल्लाह रब-उल-आलमीन के बारे में तुम्हारा क्या गुमान है?”","फिर उसने तारों पर एक निगाह डाली","और कहा मेरी तबीयत ख़राब है","चुनांचे वो लोग उसे छोड़ कर चले गए","उनके पीछे वो चुपके से उनके मबूदों के मंदिर में घुस गया और बोला “आप लोग खाते क्यों नहीं हैं”","क्या हो गया, आप लोग बोलते भी नहीं?”","इसके बाद वो उनपार पिल (टूट) पड़ा और सीधे हाथ से खूब ज़रबीन लगाई (तोधना शुरू किया)","(वापस आकर) वो लोग भागे भागे उसके पास आए","उसने कहा “क्या तुम अपनी ही तराशी हुई चीज़ को पूजते हो","हलांके अल्लाह ही ने तुमको भी पेदा किया है और उन चीज़ों को भी जिनमें तुम बनाते हो”","उनहों ने आपस में कहा “इसके लिया एक अलाव (चिता) तय्यार करो और इसे देखती हुई आग के ढेर में फेंक दो”","उनहों ने उसे ख़िलाफ एक करवायी करना चाही थी, मगर हमने उन्हें नीचा दिखा दिया","इब्राहीम ने कहा “मैं अपने रब की तरफ जाता हूं, वही मेरी रहनुमाई करेगा","ऐ परवरदिगार, मुझे एक बेटा अता कर जो सालिहों (धर्मी) में से हो”","(इस दुआ के जवाब में)हमने उसको एक हलीम (बुर्दबार) लड़के की बशारत दी","वो लड़का जब उसके साथ दौड़ धूप करने की उमर को पहुंच गया तो (एक रोज़) इब्राहिम ने उसे कहा, \"बेटा, मैं ख्वाब में देखता हूं के मैं तुझसे ज़िबाह\" कर रहा हूँ, अब तू बता, तेरा क्या ख्याल है?” उसने कहा, \"अब्बाजान, जो कुछ आपको हुकुम दिया जा रहा है उसे कर डालिये, आप इंशा अल्लाह मुझे साबिरों (सब्र करने वालों) में से पियेंगे\"","आख़िर को जब इन दोनों ने सर-ए-तस्लीम ख़म करदिया और इब्राहिम ने बेटे को मथाय के बल गिरा दिया","और हमने निदा दी के \"ऐ इब्राहीम","तू ने ख्वाब सच कर दिखाया हम नेकी करने वालों को ऐसा ही जजा देता है","यकीनन ये एक खुली आजमाइश थी\"","और हमने एक बड़ी कुर्बानी फिदिये में दे कर हमसे बचे को छुड़ा लिया","और उसकी तारीफ ओ तौसीफ हमेशा के लिए बाद की नाकों में छोड़ दी","सलाम है इब्राहिम पर","हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा देते हैं","यकीनन वो हमारे मोमिन बंदों में से थे","और हमने उसे इशाक (इसाक) की बशारत दी, एक नबी सालिहें में से","और हमने उसे और इशाक को बरकत दी। अब दोनों की जुर्रियत में से कोई मोहसिन है और कोई अपने नफ़्स पर सारे ज़ुल्म करने वाला है","और हमने मूसा ओ हारून पर एहसान किया","उनको और उनकी क़ौम को करब-ए-अज़ीम (बड़ी मुसीबत) से निजात दी","उनको नुसरत बख्शी जिसकी वजह से वही गालिब रहे","उनको निहायत वाजे किताब अता की","उन्हें राह-ए-रास्त दिखाई","और बाद की नसलों में उनका जिक्र ए खैर बाकी रक्खा","सलाम है मोसा और हारून पर","हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा देते हैं","दर हकीकत वो हमारे मोमिन बंदों में से थे","और इलियास भी यकीनन मुरसलीन (संदेशवाहक) में से थे","याद करो जब उसने अपनी क़ौम से कहा था के “तुम लोग डरते नहीं हो","क्या तुम बाल को पुकारते हो और अहसानुल खलीक़ीन को छोड़ देते हो","हमें अल्लाह को जो तुम्हारा और तुम्हारे अगले पिछले आबा ओ अजदाद का रब है?”","मगर उनहों ने उसे झुटला दिया, तो अब यकीनन वो सजा के लिए पेश किए जाने वाले हैं","बजुज उन बंदगां ए खुदा के जिनको खालिस करलिया गया था","और इलियास का जिक्र ए खैर हमने बाद की नसलों में बाकी रक्खा","सलाम है इलियास पर","हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा देते हैं","वाकाई वो हमारे मोमिन बंदों में से थे","और लुट भी उन्ही लोगों में से थे जो रसूल बना कर भेज गए हैं","याद करो जब हमने उसको और उसके सब गर वालों को निजात दी","सिवाय एक बुदिया के जो पीछे रह जाने वालों में से थी","फिर बाकी सबको तहस नेहस करदिया","आज तुम शब-ओ-रोज़ उनके उजड़े दयार (उजाड़ बस्तियों) पर से गुज़रते हो","क्या तुमको अक्ल नहीं आती","और यकीनन यूनुस भी रसूलों में से थे","याद करो जब वो एक भारी कश्ती की तरफ भाग निकला","फिर क़ोरा अंदाज़ी (कास्ट लॉट) में शरीक हुआ और उसमें मथ खाई (हारे हुए लोगों में)","आख़िर ए कार मछली ने उसे निगल लिया और वो मलामत ज़दा था","अब अगर वो तस्बीह करने वालों में से न होता तो","रोज़-ए-क़यामत तक उसी मछली के पैत में रहता","आखिर हमने उसे बड़ी सकीम (बीमार/बीमार) हालात में एक छतियाल जमीन पर फेंक दिया","और उसपर एक बेल-दार दरख्त (लौकी की प्रजाति का एक फैला हुआ पौधा) उगा दिया","इसके बाद हमने उसे एक लाख या उससे ज्यादा लोगों की तरफ भेजा","वाह ईमान लाए और हमने एक वक्त ए खास तक उन्हें बाकी रक्खा","फिर जरा इन लोगों से पूछो, क्या (इनके दिल को ये बात लगती है के) तुम्हारे रब के लिए तो होन बेटियां और इनके लिए होन बेटे","क्या वक्त है हमने मलाइका (फ़रिश्तों) को औरतें बनाया है और ये आँखों देखी बात कह रहे हैं","ख़ूब सुन रक्खो, असल ये लोग अपने मन ग़ादत से ये बात कहते हैं","के अल्लाह औलाद रखता है, और फ़िल वजह ये झूठे हैं","क्या अल्लाह ने बेटियों के बजाये बेटियां अपने लिए पसंद करली","तुम्हें क्या हो गया है, कैसे हुकुम लगा रहे हो","क्या तुम्हें होश नहीं आता","हां फिर तुम्हारे पास अपनी बातों के लिए कोई साफ सनद (दलेल) है","तो लाओ अपनी वो किताब अगर तुम सच्चे हो","इन्होन ने अल्लाह और मलिका के दरमियान नसब (रिश्तेदारी) का रिश्ता बना रक्खा है, हालंके मलिका खूब जानते हैं के ये लोग मुजरिम की हसीयत से पेश होने वाले हैं","(और वो कहते हैं के) “अल्लाह उन सिफ़ात से पाक है","जो उसके खालिस बंदों के सिवा दूसरे लोग उसकी तरफ मंसूब करते हैं","पास तुम और तुम्हारे ये माबूद","अल्लाह से किसी को फेर नहीं सकते","मगर सिफ़र उसको जो दोज़ख़ की भड़कती हुई आग में झुलसने वाला हो","और हमारा हाल तो ये है कि हम में से हर एक का एक मुक़ाम मुकर्रर है","और हम सफ़ बस्ता (पंक्तियों में) खिदमतगार हैं","तस्बीह करने वाले हैं।”","ये लोग पहले तो कहां करते थे","के काश हमारे पास वो \"ज़िक्र\" होता जो पिछली क़ौमों को मिला था","तो गुनगुनाने के लिए अल्लाह के चीदा (चुने हुए/चुने हुए) बंदे होतय","मगर (जब वो आ गया) तो इन्हों ने उसका इनकार करदिया, अब अनकरीब इन्हें (इस रवीश का नातीजा) मालूम हो जाएगा","अपने भेजे हुए बंदों से हम पहले ही वादा कर चुके हैं","के यकीनन उनकी मदद की जाएगी","और हमारा लश्कर ही गालिब होकर रहेगा","पास (ऐ नबी) ज़रा कुछ मुद्दत तक इन्हें इनके हाल पर छोड़ दो","और देखते रहो, अंकारीब ये खुद भी देख लेंगे","क्या ये हमारे अज़ाब के लिए जल्दी मचा रहे हैं","जब वो इनके सेहन (मैदान/खुली जगह) में आ उतरेगा वो दिन उन लोगों के लिए बहुत बुरा होगा जिनमें मुतनब्बेह (चेतावनी) किया जा चुका है","पास ज़रा इन्हें कुछ मुद्दत के लिए छोड़ दो","और देखते रहो, अनकरीब ये खुद देख लेंगे","पाक है तेरा रब, इज्जत का मालिक, उन तमाम बातों से जो ये लोग बना रहे हैं","और सलाम है मुरसलीन (संदेशवाहक) पर","और सारी तारीफ अल्लाह रब्बुल आलमीन ही के लिए है","साद, कसम है हिदायत भरे कुरान की","बलके यही लोग, जिन्होन ने मन्ने से इंकार किया है, सच तकब्बुर और जिद में मुब्तिला हैं","इनसे पहले हम ऐसी कितनी ही क़ौमों को हलाक कर चुके हैं (और जब उनकी शामत आई है) तो वो गाल उठे हैं, मगर वो वक़्त बचने का नहीं होता","लोगों को इस बात पर बड़ा ताज्जुब हुआ के एक डरने वाला खुद इनमें से आ गया, मुनकिरेन कहने लगे के \"ये साहिर (जादूगर) है, सच झूठा है","क्या इसने सारे ख़ुदाओं की जगह बस एक ही खुदा बना डाला? ये तो बड़ी अजीब बात है\"","और सरदारन ए क़ौम ये कहते हुए निकल गए के \"चलो और दत-ते रहो अपने\" माबूदोन की इबादत पर। ये बात तो किसी और हाय गरज से कहीं जा रही है [38:7","","","","क्या ये आसमान ओ ज़मीन और इनके दरमियान की चीज़ों के मालिक हैं? अच्छा तो ये आलम ए असबाब की बुलंदियाँ पर चढ़ कर देखें","ये तो जत्थों (सेनाओं) में से एक छोटा सा जत्था (सेना) है जो इसी जगह सीखा (हार झेलना) खाने वाला है","इनसे पहले नूह की क़ौम, और आद, और मेखों (तम्बू-खूँटी/खूँटी) वाला फिरौन","और समूद, और क़ौम ए लूट, और ऐका वाले झूठला चुके हैं। जत्थय वो थाय","उनमें से हर एक ने रसूलों को झुटलाया और मेरी उकुबत का फैसला (सजा का फैसला) उसपर चस्पां हो कर रहा","ये लोग भी बस एक धमाका के मुंतज़िर हैं जिसका बाद कोई दूसरा धमाका ना होगा","और ये कहते हैं के ऐ हमारे रब, यम उल हिसाब (हिसाब के दिन) से पहले ही हमारा हिसाब हमें जल्दी से दे दे","(ऐ नबी), सब्र करो उन बातों पर जो ये लोग बनाते हैं, और इनके सामने हमारे बंदे दाऊद का किस्सा बयान करो जो बड़ी किस्मत का मालिक था. हर मामले में अल्लाह की तरफ रूजू करने वाला था","हमने पहाड़ों को उसके साथ मुसक्कर कर रखा था के सुबह ओ शाम वो उसके साथ तस्बीह करते थे","परिंदे सिमत आते और सबके सब उसकी तस्बीह की तरफ मुतवज्जे हो जाते थाय","हमने उसकी सल्तनत मजबूत कर दी थी, उसको हिकमत अता की थी और फैसला-कुन बात कहने की सलाह बख्शी थी","फिर तुम्हें कुछ खबर मिली है उन मुकद्दमे वालों की जो दीवार चढ़ कर उसके बाला खाने (निजी चैंबर) में घुस आये थे","जब वो दाऊद के पास पहुँचे तो वो उन्हें देख कर घबरा गया, उनको ने कहा \"डरिए नहीं, हम दो फरीक मुक़द्दमा हैं जिनके बीच में एक ने दूसरे पर ज़्यादा की है। आप हमारे दरमियान ठीक ठीक हक़ के साथ फैसला कर दीजिए, इन्साफ़ी ना किजीए और हमें राह ए रास्ता बताएं","ये मेरी भाई है, इसके पास निनानवे (निन्यानवे) डुम्बियां (ईवे) है और मेरे पास सिर्फ एक ही डुम्बी (ईवे) है, इसने मुझसे कहा के ये एक डुम्बी भी मेरे हवाले करदे और इसने गुफ्तगु में मुझे दबाया लिया''","दाऊद ने जवाब दिया: ''इस शक्स ने अपनी दुंबियों (ईव्स) के साथ तेरी दुंबी मिला लेने का मुतालबा करके यकीनन तुझपर जुल्म किया, और वाकिया ये है के मिल-जुल कर साथ रहने वाले लोग अक्सर एक दूसरे पर ज्यादातियां करते रहते हैं, बस वही लोग इस से बचे हुए हैं जो ईमान रखते हैं और अमल ए सालेह करते हैं, और ऐसे लोग काम ही हैं।” (ये बात कहते हैं) दाऊद समझ गया के ये तो हमने दार-असल इसकी आजमाइश की है, चुनांचे उसने अपने रब से माफ़ी मांगी और सजदे में गिर गया और रूजू कार्लिया","तब हमने इसका वो कसूर माफ किया और यकीनन हमारे हां उसके लिए तक़र्रब का मुकाम और बेहतर अंजाम है","(हमने उसे कहा) \"ऐ दाऊद, हमने तुझे ज़मीन में ख़लीफ़ा बनाया है, लिहाज़ा तू लोगों के दरमियान हक़ के साथ हुकूमत कर, और ख्वाहिश ए नफ़्स की जोड़ी ना कर के वो तुझ अल्लाह की राह से भटक जाएगी. जो लोग अल्लाह की राह से भटकते हैं यकीनन उनके लिए सख्त सजा है के वो यम उल हिसाब को भूल गए।”","हमने इस आसमां और ज़मीन को, और इस दुनिया को जो इनके दरमियान हैं, फ़िज़ूल पैदा नहीं करदिया है, ये तो उन लोगों का गुमान है जिन्हों ने कुफ्र किया है और ऐसी काफिरों के लिए बर्बादी है जहन्नुम की आग से","क्या हम उन लोगों को जो ईमान लाते हैं हैं और कोई अमल करते हैं और उनको जो ज़मीन में फ़साद करने वाले हैं यक्सन करदें? क्या मुत्तक़ियों को हम फाजिरों (दुष्ट) जैसा कर दें","ये एक बड़ी बरकत वली किताब है जो (ऐ मुहम्मद) हमने तुम्हारी तरफ नाज़िल की है ता-के ये लोग इसकी आयतें पर गौर करें और अक़ल ओ फ़िक्र रखने वाले इसे सबक लें","और दाऊद को हमने सुलेमान (जैसा बेटा) अता किया, बेहतर बंदा, कसरत से अपने रब की तरफ रूजू करने वाला","काबिल ए जिक्र है वो मौका जब शाम के वक्त हमारे सामने खूब सीधे (अच्छी तरह से प्रशिक्षित) हुए तेज-रौ (दौड़ना) घोड़े (घोड़े) पेश किए गए","तो उसने कहा \"मैंने इस माल की मुहब्बत अपने रब की याद की वजह से इख्तियार की है\" यहां तक ​​के जब वो घोड़े (घोड़े) निगाह से ओझल हो गए","तो (उसने हुकुम दिया के) इन्हें मेरे पास वापस लाओ, फिर लगा उनकी पिंडलियां (पैर) और गर्दन (गर्दन) पर हाथ फेरने","और (देखो के) सुलेमान को भी हमने आजमाइश में डाला और उसकी कुर्सी पर एक जड़ (मात्र शरीर/शरीर बिना जान के) ला कर डाल दिया फिर उसने रूजू किया","और कहा के “ऐ मेरे रब, मुझे माफ” करदे और मुझे वो बादशाही दे जो मेरे बाद किसी के लिए सजावर ना हो, क्योंकि तू ही असल दाता है”","तब हमने उसके लिए हवा को मुस्कुरा कर दिया जो उसके हुकुम से नरमी के साथ चलती थी जिधर वो चाहता था","और शयातीन को मुस्कुरा कर दिया, हर तरह के मइमार (बिल्डर) और गोताखोर (गोताखोर)","और दूसरे जो पाबंद ए सलासिल थे (जंजीरों से बंधे)","(हमने उसे कहा) \"ये हमारी बख्शीश है, तुझे इख्तियार है जिसे चाहे दे और जिसे चाहे रोक ले, कोई हिसाब नहीं\"","यकीनन उसके लिए हमारे हां तकरारब का मुकाम और बेहतर अंजाम है","और हमारे बंदे अयूब का जिक्र करो, जब उसने अपने रुब को पुकारा के शैतान ने मुझे सख्त तकलीफ और अजाब में डाल दिया है","(हमने उसे हुकुम दिया) अपना पांव (पैर) ज़मीन पर मार, ये है ठंडा पानी नहाने के लिया और पीने के लिए","हमने उसे उसके अहल ओ अयाल वापस दिये और उनके साथ उतने ही और, अपनी तरफ से रहमत के तौर पर, और अक़ल ओ फिकर रखने वालों के लिए दर्स के तौर पर","(और हमने इसे कहा) तिनकों का एक मुत्ता ले (बंडल ऑफ रशेस) और उसे मार दे, अपनी कसम न तोड़, हमने उसे साबिर पाया, बहतरीन बंदा, अपने रब की तरफ बहुत रूजू करने वाला","और हमारे बंद, इब्राहिम और इशाक और याकूब का जिक्र करो बड़ी कुव्वत ए अमेल रखने वाले और दीधावर (ताकत और दूरदर्शिता)लोग थे","हमने उनको एक खाली सिफत की बिना पर बरगुजिदा किया था, और वो दार-ए-आखिरत की याद थी","यकीनन हमारे हां उनका मशहूर चुने हुए नेक अशखास (उत्कृष्ट वाले) में हैं","और इस्माइल और अल-यासा (एलीशा) और ज़ुल्किफ़ल का ज़िक्र करो, ये सब दूसरे लोगों में से थे","ये एक ज़िक्र था। (अब सुनो के) मुत्तक़ी लोगों के लिए यक़ीनन बहतरीन ठिकाना है","हमेशा रहने वाली जन्नतें जिनके दरवाजे उनके लिए खुले होंगे","उनमें वो तकिये लगाये बैठे होंगे, ख़ूब ख़ूब फ़वाके और मशरूबत (प्रचुर मात्रा में फल और पेय) तालाब कर रहे होंगे","और उनके पास शर्मीली हम्सिन बीवियां होंगी","ये वो चीजें हैं जिनमें हिसाब के दिन अता करने का तुमसे वादा किया जा रहा है","ये हमारा रिज्क है जो कभी खत्म होनेवाला नहीं","ये है मुत्तक़ियों का अंजाम और व्यंग्यों के लिए बद्तरीन (बुराई) ठिकाना है","जहन्नुम जिसमें वो झुलस जाएंगे। बहुत ही बुरी क़यामगाह","ये है उनके लिए, पास वो मजा चखें खौटले (उबलते हुए) हुए पानी और पीप लहू (मवाद)","और इसी क़िस्म की दूसरी तल्खियों का","(वो जहन्नुम की तरफ अपने जोड़े को आते देख कर आपस में कहेंगे) \"ये एक लश्कर तुम्हारे पास घुसा चला आ रहा है, कोई खुशामदीद (स्वागत) इनके लिए नहीं है, ये आग में झुलसने वाले हैं\"","वो उनको जवाब देंगे \" नहीं बलके तुम ही झुलसे जा रहे हो, कोई खैर मकसद तुम्हारे लिए नहीं ये अंजाम हमारे आगे लाये हो। कैसी बुरी है ये जाए क़रार”","फिर वो कहेंगे “ऐ हमारे रब, जिसने हमें इस अंजाम को पाने का बंदोबस्त किया उसे दोज़ख का दोहरा अज़ाब दे”","और वो आपस में कहेंगे “क्या बात है, हम उन लोगों को कहीं नहीं देखते जिन्हें हम कहते हैं” दुनिया में बुरा समझे थे","हमने यूं ही उनका मज़ाक बना लिया था, या वो कहीं नज़रों से ओझल हैं?”","बेशक ये बात सच्ची है, एहले दोज़ख में यहीं कुछ झगड़े होने वाले हैं","(ऐ नबी) इनसे कहो, \"मैं तो बस ख़बरदार करने वाला हूं। कोई हक़ीक़ी माबूद नहीं मगर अल्लाह, जो जानता है, सब पर गालिब","आसमानों और ज़मीन का मालिक और उन सारी चीज़ों का मालिक जो इनके दरमियान हैं, ज़बरदस्त और दरगुज़ार करने वाला”","इनसे कहो “ ये एक बड़ी खबर है","जिसको सुनकर तुम मुँह फेरते हो”","(इनसे कहो) “मुझसे वक़्त की कोई ख़बर ना थी जब माला-ए-आला (उच्च परिषद) में झगड़ा हो रहा था","मुझको तो वही (खुलासा/प्रेरणा) के ज़रिये से ये बातें सिर्फ इसलिए बताई जाती हैं कि मैं खुला-खुला ख़बरदार करने वाला हूं”","जब तेरे रब ने फ़रिश्तों से कहा “मैं मिट्टी से एक बशर बनाने वाला हूं","फिर जब मैं उसे पूरी तरह बना दूं और उसमें अपनी रूह फूंक दूं तो तुम उसके आगे सजदे में गिर जाओ”","इस हुकुम के मुताबिक फरिश्ते सब के सब सजदे में गिर गए","मगर इब्लीस ने अपनी बदाई का घमंड किया और वो काफिरों में से हो गया","रब ने फरमाया “ऐ इब्लीस, तुझे क्या चीज उसको सजदा करने से मनाए हुई जिसने अपने दोनों हाथों से बनाया है? तू बड़ा बन रहा है या तू ही कुछ ऊंचे दर्जे की हस्तियों में से है?”","उसने जवाब दिया \"मैं उसे बेहतर हूं, आपने मुझको आग से पैदा किया है और इसको मिट्टी से\"","फरमाया \" अच्छा तो यहां से निकल जा, तू मरदूद है","और तेरे ऊपर यौम उल जजा तक मेरी लानत है\"","वो बोला \" ऐ मेरे रब, ये बात है तो फिर मुझे वक़्त तक के लिए मोहलत दे दे जब ये लोग दोबारा उठेंगे\"","फरमाया, \"अच्छा तुझे उस रोज़ तक की मोहलत है","जिसका वक़्त मुझे मालूम है\"","उसने कहा \"तेरी इज्जत की कसम, मैं सब लोगों को बहका कर रहूंगा","बजूज तेरे उन बंदों के जिन्हें तू नई खालिस करलिया है\"","फरमाया \"तो हक ये है, और मैं हक ही कहता हूं","के मैं जहन्नुम को तुझसे और उन सब लोगों से भर दूंगा जो इंसानों में से तेरी जोड़ी बनाएगा''","(ऐ नबी) इनसे कहदो के मैं इस तबलीग पर तुमसे कोई अजर नहीं मांगता, और ना मैं बनवाती लोगों में से हूं","ये तो एक हिदायत है तमाम जहां वालों के लिए","और थोड़ी मुद्दत ही गुज़रेगी के तुम्हें इसका हाल खुद मालूम हो जाएगा","क्या किताब का नुज़ुल अल्लाह ज़बरदस्त और दाना (हिकमत वाला/बुद्धि से भरा) की तरफ से है","(ऐ मुहम्मद) ये किताब हमने तुम्हारी तरफ बरहक्क नाज़िल की है, लिहाज़ा तुम अल्लाह ही की बंदगी करो दीन को उसके लिए खालिस करते हुए","खबरदार, दीन ए खालिस अल्लाह का हक है। रहे वो लोग जिन्होन ने उसके सिवा दूसरे सरपरस्त बना रक्खे हैं (और अपने फेल की तौजीह ये करते हैं) है के) हम तो उनकी इबादत सिर्फ इसके लिए करते हैं के वो अल्लाह तक हमारी रसाई करादीन (हमें अल्लाह के करीब लाओ)। अल्लाह यकीनन उनके दरमियान उन तमाम बातों का फैसला कर देगा जिन में वो इख्तिलाफ कर रहे हैं। अल्लाह किसी ऐसे शक्स को हिदायत नहीं देता जो झूठा और मुनकिर ए हक हो","अगर अल्लाह किसी को बेटा बनाना चाहता तो अपने मखलूक में से जिसको चाहता बरगुजिदा कर लेता, पाक है वो इसे (के कोई उसका बेटा हो), वो अल्लाह है अकेला और सब पर गालिब","उसने आसमान और ज़मीन को बारहक़ अदा किया है। वही दिन पर रात और रात पर दिन को लपेटा-ता है।उसी ने सूरज और चांद को इस तरह मुसक्कर कर रखा है के हर एक एक वक्त ए मुकर्रर तक चले जा रहा है। जान राखो, वो ज़बरदस्त है और दरगुज़ार करने वाला है","उसी ने तुमको एक जान से पैदा किया, फिर वही है जिसने उस जान से इसका जोड़ा बनाया और उसने तुम्हारे लिए मवेशियों में से आठ (आठ) नर ओ माडा पैदा किया। वो तुम्हारी मांओं के पैठों में तीन तीन तारीख (अंधेरे) परदों के अंदर तुम्हें एक के बाद एक शकल देता चला जाता है। याही अल्लाह (जिसके ये काम हैं) तुम्हारा रब है, बादशाही उसी की है, कोई माबूद उसके सिवा नहीं है, फिर तुम किधर से फिर जा रहे हो","अगर तुम कुफ्र करो तो अल्लाह तुमसे बे नियाज है, लेकिन वो अपने बंदों के लिए कुफ्र को पसंद नहीं करता। और अगर तुम शुक्र करो तो उसे वो तुम्हारे लिए पसंद करता है। कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ ना उठेगा। आखिर ए कार तुम सब को अपनी रब की तरफ पलटना है, फिर वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या करते रहे हो, वो तो दिलों का हाल तक जानता है","इंसान पर जब कोई आफत आती है तो वो अपनी रब की तरफ रूजू (वापसी) करके उसे पुकारता है, फिर जब उसका रब उसे अपनी नियामत से नवाज देता है तो वो हमें मुसिबत को भूल जाता है जिसपर वो पहले पुकार रहा था और दूसरे को अल्लाह का हमसर ठहराता है ता-के उसकी राह से गुमराह करे। (ऐ नबी) उसे कहो के थोड़े दिन अपने कुफ्र से लुत्फ उठा ले, यकीनन तू दोज़ख में जाने वाला है","(क्या शक्स की रवीश बेहतर है या हमारे शक्स की) जो मुती-ए-फरमान है, रात की घड़ियों में खड़ा रहता है और सजदे करता है, आख़िरत से डरता और अपने रब की रहमत से उम्मीद लगता है? इन से पूछो, क्या जाने वाले और ना जाने वाले दोनों कभी यक्सन हो सकते हैं? हिदायत तो अक़ल रखने वाले ही क़बूल करते हैं","(ऐ नबी) कहो के ऐ मेरे बंदन जो ईमान लाए हो, अपने रब से डरो। जिन लोगों ने इस दुनिया में नई रवैय्या इख्तियार किया है उनके लिए भलाई है। और खुदा की ज़मीन वसीह है, सब्र करने वालों को तो उनका अजर बे-हिसाब दिया जाएगा","(ऐ नबी) इनसे कहो, मुझे हुकुम दिया है के दीन को अल्लाह के लिए खालिस करके उसकी बंदगी करूं","और मुझे हुकुम दिया है के सबसे पहले मैं खुद मुस्लिम बनूं","कहो, अगर मैं अपने रब की नाफ़रमानी करूं तो मुझे एक बड़े दिन के अज़ाब का खौफ है","कहदो के मैं तो अपने दीन को अल्लाह के लिए खालिस करके उसकी बंदगी करूंगा","तुम उसके सिवा जिस की बंदगी करना चाहो करते रहो। कहो असल दीवालिये (हारे हुए) तो वही हैं जिन्हों ने कयामत के रोज़ अपने आप को और अपने अहल-ओ-अयाल को घाटे में डाल दिया। खूब सुन राखो, यही खुला दिवाला (नुकसान) है","उन्पर आग की छतरियां ऊपर से भी चयी होंगी और नीचे से भी। ये वो अंजाम है जिसे अल्लाह अपने बंदों को डराता है, पास ऐ मेरे बंदों, मेरे गजब से बचाओ","बा-खिलाफ इसके जिन लोगों ने टैगुत (झूठे देवताओं) की बंदगी से इज्तिनाब किया और अल्लाह की तरफ रूजू करलिया उनके लिए खुश खबरी है। पास (ऐ नबी) बशारत देदो मेरे उन बंदों को","जो बात को गौर से सुनते हैं और उसके बेहतर पहलू की जोड़ी बनाते हैं, ये वो लोग हैं जिनको अल्लाह ने हिदायत बख्शी है और यहीं दानिशमंद (समझ के साथ) हैं","(ऐ नबी) हमारे शक्स को कौन बचा सकता है जिसपर अज़ाब का फैसला चस्पां हो चूका हो? क्या तुम उसे बचा सकते हो जो आग में गिर चुका हो","अलबत्ता जो लोग अपने रब से डर कर रहे हैं उनके लिए बुलंद इमानतें हैं मंजिल पर मंजिल बनी हुई हैं जिनके बारे में नीचे कहा जा रहा है। ये अल्लाह का वादा है, अल्लाह कभी अपने वादे की खिलाफत वारजी नहीं करता","क्या तुम नहीं देखते कि अल्लाह ने आसमां से पानी बरसाया, फिर उसको सोते और चश्मे (झरने और झरने) और दरियाओं की शकल में जमीन के अंदर जारी किया। फिर इस पानी के ज़रिये से वो तरह-तरह की खेतियाँ निकलती हैं जिनकी किस्मत मुख्तलिफ़ हैं, फिर वो खेतियाँ पक कर सुख जाती हैं, फिर तुम देखते हो के वो ज़रद (पीली) पड़ गई, फिर आख़िर ई कर अल्लाह उनको भुस बना देता है। दर हकीकत इस में एक सबक है अक्ल रखने वालों के लिए","अब क्या वो शक्स जिसका सीना अल्लाह ने इस्लाम के लिए खोल दिया और वो अपने रब की तरफ से एक रोशनी पर चल रहा है (उस शक्स की तरह हो सकता है जिसने बातों से कोई सबक न लिया) लिया)? तबाही है उन लोगों के लिए जिनके दिल अल्लाह की हिदायत से और ज्यादा सख्त हो गए। वो खुली गुमराही में पड़े हुए हैं","अल्लाह ने बहतरीन कलाम उतारा है, एक ऐसी किताब जिसके तमाम अज़्ज़ा हमरंग हैं और जिस में बार-बार मजामीन (सामग्री) दोहराए गए हैं, उसे सुनकर उन लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं जो अपने रब से डरें वाले हैं, और फिर उनका जिस्म और उनका दिल नरम होकर अल्लाह के जिक्र की तरफ रागिब हो जाते हैं। ये अल्लाह की हिदायत है जिसे वो राह ए रास्ते पर ले आता है जिसे चाहता है और जिसे अल्लाह ही हिदायत ना दे उसके लिए फिर कोई हादी नहीं है","अब हम शक्स की बद-हाली का तुम क्या अंदाज़ा कर सकते हो जो कयामत के रोज़ अज़ाब की तरह मार अपने मुँह पर लेगा? ऐसे ज़ालिमों से तो कहदिया जाएगा के अब चक्को मजा हमें कमाई का जो तुम करते रहे थे","इनसे पहले भी बहुत से लोग इसी तरह झूठला चुके हैं। आख़िर उन्पर अज़ाब ऐसे रुख़ से आया जिधर उनका ख़याल भी ना जा सकता था","फिर अल्लाह ने उनको दुनिया ही कहा कि ज़िंदगी में रुसवे का मज़ा चखाया, और आख़िरत का अज़ाब तो इस तरह छाया हुआ है, काश ये लोग जानते हैं","हमने कुरान में लोगों को तरह बताया है तरह की मिसालें दी हैं के ये होश में आएं","ऐसा कुरान जो अरबी ज़ुबान में है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है, ता-के ये बुरे अंजाम से बचें","अल्लाह एक मिसाल देता है एक शक्स तो वो है जिसकी मिलकियत में बहुत से काज खुल्क (कई झगड़ालू उस्ताद) आका शरीक हैं जो उसे अपनी-अपनी तरफ खींचते हैं और दूसरा शक्स पूरे का पूरा एक ही आका का गुलाम है। क्या इन दोनो का हाल यकसन हो सकता है? अल्हम्दुलिल्लाह, मगर अक्सर लोग नादानी में पड़े हुए हैं","(ऐ नबी) तुम्हें भी मरना है और इन लोगों को भी मरना है","आखिर ए कार कयामत के रोज तुम सब अपने रब के हुजूर अपना अपना मुकद्दमा पेश करोगी","फिर हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जिसने अल्लाह पर झूठ बांधा और जब सच्ची उसके सामने आई तो उसे झूठला दिया। क्या ऐसे काफिरों के लिए जहन्नुम में कोई ठिकाना नहीं है","और जो शक्स सच्ची लेकर आया और जिन्हों ने उसको सच माना, वही अज़ाब से बचने वाले हैं","उन्हें अपने रुब के हां वो सब कुछ मिलेगा जिसकी वो ख्वाहिश करेंगे। ये है नेकी करने वालों की जजा","ता-के जो बख्तरीन आमाल उन्होन ने किए थे उन्हें अल्लाह उनके हिसाब से साकीत करदे और जो बेहतरे आमाल वो करते रहे उनके लिहाज़ से उनको अजर अता फरमाये","(ऐ नबी) क्या अल्लाह अपने बंदे के लिए काफी नहीं है? ये लोग उसके सिवा दूसरे से तुमको डराते हैं, हलांके अल्लाह जिसे गुमराही में डाल दे उसे कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं","और जिसे वो हिदायत दे उसे भटकने वाला भी कोई नहीं। क्या अल्लाह ज़बरदस्त और इन्तेक़ाम लेने वाला नहीं है","लोगों से अगर तुम पूछो के ज़मीन और आसमान को किसने अदा किया है तो ये खुद कहेंगे के अल्लाह ने। इनसे कहो, जब हकीकत ये है तो तुम्हारा क्या ख्याल है कि अगर अल्लाह मुझे कोई नुक्सान पहुंचाना चाहे तो क्या तुम्हारी ये देवियां (देवी) जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़ कर पुकारते हो, मुझे उसे पाहुंचाए हुए नुक्सान से बचा लूंगी? या अल्लाह मुझ पर मेहरबानी करना चाहे तो क्या ये उसकी रहमत को रोक सकेगी? बस इनसे कहदो के मेरे लिए अल्लाह ही काफी है, भरोसा करने वाले उसी पर भरोसा करते हैं","इनसे साफ कहो के “ऐ मेरी कौम के लोगों, तुम अपनी जगह अपना काम किये जाओ, मैं अपना काम करता रहूंगा, अकारिब तुम्हें मालूम हो जाएगा।”","के किस्पर रुसवा-कुन अज़ाब आता है और किसी को वो सज़ा मिलती है जो कभी तलने वाली नहीं”","(ऐ नबी) हमने सब इंसानों के लिए ये किताबे बार-हक़ तुमपर नाज़िल कर दी है। अब जो सीधा रास्ता इख्तियार करेगा अपने लिए करेगा और जो भटकेगा उसके भटकने का बदला उसी पर होगा। तुम उनके ज़िम्मेदार नहीं हो","वो अल्लाह हाय है जो मौत के वक्त रूहें क़ब्ज़ करता है और जो अभी नहीं मारा है उसकी रूह नींद में क़ब्ज़ कर लेता है, फिर जिसपर वो मौत का फैसला नफ़ीज़ करता है उसे रोक लेता है और दूसरों की रूहें एक वक़्त ए मुकर्रर के लिए वापस भेज देता है. क्या मैं बड़ी निशानियां हूं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फिक्र करने वाले हैं","क्या हमें खुदा को छोड़ कर लोगों ने दूसरों को शफी (मध्यस्थ) बना रखा है? इनसे कहो, क्या वो शफा-अत करेंगे ख्वा उनके इख्तियार में कुछ ना हो और वो समझे भी ना हों","कहो, शफा-अत (हिम्मत) सारी की सारी अल्लाह के इख्तियार में है। आसमान और ज़मीन की बादशाही का वही मालिक है, फिर उसकी तरफ तुम पलटाये जाने वाले हो","जब अकेले अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो आख़िरत पर ईमान न रखने वालों के दिल कुदने लगते हैं। और जब उसके सिवा दूसरे का जिक्र होता है तो यकीनन वो खुशी से खिल उठते हैं","कहो, खुदाया! आसमानो और ज़मीन के भुगतान करने वाले, हाज़िर ओ गैब के जान-ने वाले, तू ही अपने बंदों के दरमियान उस चीज़ का फैसला करेगा जिसमें वो इख्तिलाफ करते रहेंगे","अगर जालिमों के पास ज़मीन की सारी दौलत भी हो, और उतनी ही और भी, तो ये रोज़-ए-क़यामत के बुरे अज़ाब से बचने के लिए सब कुछ फ़िडिये (प्रायश्चित/ छुड़ाने) में देने के लिए तैयार हो जाएंगे। वहां अल्लाह की तरफ से इनके सामने वो कुछ आएगा जिसका इन्होन ने कभी अंदाज़ा ही नहीं किया है","वहां अपनी कमाई के सारे बुरे नटैज अंदर खुल जाएंगे और वही चीज़ अंदर मुसल्लत हो जाएगी जिसका ये मज़ाक उड़ाते रहे हैं","यहीं इंसान जब ज़रा सी मुसीबत इसे छू जाती है तो हमें पुकारता है, और जब हम इसे अपनी तरफ से नियामत दे कर ऊपर देते हैं तो कहते हैं के ये तो मुझे इल्म की बिना पर दिया गया है। नहीं! बलके ये आजमाइश है, मगर इनमें से अक्सर लोग जानते नहीं हैं","यही बात इनसे पहले गुजरे हुए लोग भी कह चुके हैं, मगर जो कुछ वो कमाते थे वो उनके किसी काम ना आया","फिर अपनी कमाई के बुरे नटैज उन्हें न भुगते, और इन लोगों में से भी जो जालिम हैं वो अंकारीब अपनी कमाई के बारे में बताते हैं। ये हमें अजीज (निराश) करने वाले नहीं हैं","और क्या इन्हें मालूम नहीं है के अल्लाह जिसका चाहता है रिज्क कुशादा (बड़ा करना) करता है और जिसका चाहता है तंग करदेता है? इस में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं","(ऐ नबी) कहदो के ऐ मेरे बंदों, जिन्होन ने अपनी जानो पर ज़्यादती (ज्यादती) की है, अल्लाह की रहमत से मयुस न हो जाओ, यकीनन अल्लाह सारे गुनाह माफ करता है, वो तो गफूर ओ रहीम है क्षमा करने वाला, सबसे दयालु)","पलट आओ अपने रब की तरफ और मुती (विनम्र) बन जाओ उसके, कबूल इसके के तुमपर अज़ाब आ जाए और फिर कहीं से तुम्हें मदद न मिल सके","और जोड़ी इख्तियार करलो अपने रब की भेजी हुई किताब के बहतरीन पहलू की, कबूल इसके तुम अचानक अजब आए और तुमको खबर भी ना हो","कहीं ऐसा ना हो के बाद में कोई शक कहे \"अफसोस मेरी उस तक़सीर(लापरवाही) पर जो मैं अल्लाह की जनाब में करता रहा, बलके मैं तो उलटा मज़ाक उड़ाने वालों में शामिल था\"","या कहे \"काश अल्लाह ने मुझे हिदायत बख्शी होती तो मैं भी मुत्तक़ियों में से होता\"","हां अज़ाब देख कर कह\" काश मुझे एक मौका और मिल जाए और मैं भी जल्द अमल करने वालों में शामिल हो जाऊं।”","(और हमारा वक्त उसे ये जवाब मिले के) \"क्यों नहीं मेरी आयत तेरे पास आ चुकी पतली, फिर तू नहीं उनको झुटलाया और तकब्बुर किया और तू काफिरों में से था\"","आज जिन लोगों ने खुदा पर झूठ बांधे हैं कयामत के रोज तुम देखोगे के उनके मुँह काले होंगे। क्या जानहुम में मुतकब्बिरों (घमंडी) के लिए काफी जगह नहीं है","इसके बार-अक्स जिन लोगों ने यहां तकवा किया है उनके असबाब-ए-कामियाबी की वजह से अल्लाह उनको नजात देगा, उनको कोई गजनद (नुकसान) पहुंचाएगा न वो घूमेंगे","अल्लाह हर चीज का खालिक (निर्माता) है और वही हर चीज पर निगहबान है","जमीन और आसमान के खजानो की कुंजियां (कुंजियां) उसके पास हैं और जो लोग अल्लाह की आयत से कुफ्र करते हैं वही घाटे (नुकसान) में रहने वाले हैं","(ऐ) नबी) इनसे कहो “फिर क्या ऐ जाहिलों (अज्ञानी), तुम अल्लाह के सिवा किसी और की बंदगी करने के लिए मुझसे कहते हो?”","(ये बात तुम्हें उन्हें साफ कहना चाहिए क्योंकि) तुम्हारी तरफ और तुमसे पहले गुजरे हुए तमाम अंबिया की तरफ ये वही (खुलासा) भेजी जा चुकी है के अगर तुमने शिर्क किया तो तुम्हारा अमल जाय हो जाएगा और तुम खासे (नुक्सान) मैं रहोगे","लिहाज़ा (ऐ नबी) तुम बस अल्लाह ही की बंदगी करो और शुक्र-गुज़ार बंदों में से हो जाओ","इन लोगों ने अल्लाह की कदर ही न की जैसा के उसकी कदर करने का हक है (उसकी कुदरत ए कामिला का हाल तो ये है के) कयामत के रोज पूरी ज़मीन उसकी मुट्टी में होगी और आसमान उसके दस्त ए रास्ते (दाहिने हाथ) में लिपटे हुए होंगे। पाक और बाला-तार है वो हमसे शिर्क से जो ये लोग करते हैं","और वो रोज़ सुर (तुरही) फूंका जाएगा और वो सब मरकर गिर जाएंगे जो आसमान और ज़मीन में हैं उनके सिवाए जिन्हें अल्लाह जिंदा रखना चाहे। फिर एक दूसरा सुर (तुरही) फूंका जाएगा और यकीन सबके सब उठ कर देखने लगेंगे","ज़मीन अपने रुब के नूर से चमक उठेगी, किताब ए अमल ला कर रख दी जाएगी, अंबिया और तमाम गवाह हाज़िर कर दिए जाएंगे, लोगों के दरमियान ठीक ठीक हक के साथ फैसला कर दिया जाएगा और उन पर कोई जुल्म न होगा","और हर मुतनफ्फिस को जो कुछ भी उसने अमल किया था उसका पूरा बदला दिया जाएगा। लोग जो कुछ भी करते हैं अल्लाह उसको खूब जानता है","(इस फैसले के बाद) वो लोग जिन्हों ने कुफ्र किया था जहन्नुम की तरफ गिरो ​​डर गिरो ​​हांके जाएंगे, यहां तक ​​के जब वो वहां पहनेंगे तो उसके दरवाजे खोले जाएंगे और उसके कारिंदे (रखवाले) उनसे कहेंगे \"क्या तुम्हारे पास तुम्हारे अपने अपने लोगों में से ऐसे रसूल नहीं आए थे, जिन्होनें तुमको तुम्हारे रब की आयतें सुनाईं हों और तुम्हें हमसे बात से डराया हो के एक वक्त तुम्हें ये दिन भी देखना होगा?” वो जवाब देंगे \"हां, आए थे, मगर अज़ाब का फैसला काफिरों पर चिपक गया\"","कह जाएगा, दाखिल हो जाओ जहन्नुम के दरवाजे में, यहां अब तुम्हें हमेशा रहना है, बड़ा ही बुरा ठिकाना है ये मुतकब्बिरों (अहंकारी) के लिए","और जो लोग अपने रब की नफ़रमानी से परहेज़ करते थे उन्हें गिरो ​​दर गिरो ​​जन्नत की तरफ ले जाया जाएगा यहां तक ​​के जब वो वहां पहनेंगे, और उसके दरवाजे पहले ही खोले जा चुके होंगे, तो उसका मुंतज़िमिन उनसे कहेंगे के \"सलाम हो तुमपर\" , बहुत अच्छा रहे, दाखिल हो जाओ इसमें हमेशा के लिए”","और वो कहेंगे “शुक्र है हमें खुदा का जिसने हमारे साथ अपना वादा सच कर दिखाया और हमको जमीन का वारिस बना दिया, अब हम जन्नत में जहां चाहें अपनी जगह बना सकते हैं” पास बेहतरी अजर हैं अमल करने वालों के लिए","और तुम देखोगे के फरिश्ते अर्श के गिर्द हलका (सर्कल) बनाए हुए अपने रब की हम्द और तस्बीह कर रहे होंगे, और लोगों के दरमियान ठीक हक के साथ फैसला चुका दिया जाएगा, और पुकार दिया जयेगा के हम्द है अल्लाह रब्बुल आलमीन के लिए","हा मीम","इस किताब का नुज़ुल अल्लाह की तरफ से है जो ज़बरदस्त है, सब कुछ जानने वाला है","गुनाह माफ़ करने वाला और तौबा क़बूल करने वाला है, सच सजा देने वाला और बड़ा साहब ए फ़ज़ल है। कोई माबूद उसके सिवा नहीं, उसकी तरफ सबको पलटना है","अल्लाह की आयत में झगड़े नहीं करते मगर सिर्फ वो लोग जिन्होन ने कुफ्र किया है। इसके बाद दुनिया के मुल्कों में उनकी चलती फिरत तुम्हें कोई धोखे में ना डाले","इनसे पहले नूंह की क़ौम भी झूठला चुकी है, और उसके बाद बहुत से दूसरे समूहों (समूहों) ने भी ये काम किया है। हर क़ौम अपने रसूल पर झपटी ता-के उसे गिरफ्तार करे, उन सब ने बातिल के हत्यारों से हक़ को नीचा दिखाने की कोशिश की। मगर आखिर ए कार मैंने उनको पकड़ लिया, फिर देखलो के मेरी सजा कैसी थी","इसी तरह तेरे रब का ये फैसला भी उन सब लोगों पर चस्पां हो चुका है जो कुफ्र के मुर्तकीब हुए हैं के वो वासिल-बा-जहन्नुम होने वाले हैं","अर्श ए इलाही के हामिल फ़रिश्ते और वो जो अर्श के गिर्द ओ पेश हाज़िर रहते हैं, सब अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह कर रहे हैं, वो उसपर ईमान रखते हैं और ईमान लाने वालों के हक़ में दुआ ए मगफिरत करते हैं, वो कहते हैं हैं: “ऐ हमारे रब, तू अपनी रहमत और अपने इल्म के साथ हर चीज़ पर छाया हुआ है, पास माफ़ करदे और अज़ाब ए दोज़ख से बचा ले उन लोगों को जिन्हों ने तौबा की है और तेरा रास्ता इख्तियार करलिया है","ऐ हमारे रब, और दाख़िल कर उनको हमेशा रहने वाली उन जन्नतों में जिनका तू ने उनसे वादा किया है, और उनके वाल्दैन और बीवीयों और औलाद में से जो सालेह (नेक) होन (उन्हें भी वहां उनके साथ पाहुंचा दे)। तू बिला शुभा कादिर ए मुल्ताक (सबसे ताकतवर) और हकीम (सबसे बुद्धिमान) है","और बच्चा दे उनको बुराइयों से। जिसको तू नई कयामत के दिन बुराइयों से बचा लिया उसपर तू नई बड़ा रहम किया। यहीं बड़ी कामयाबी है","जिन लोगों ने कुफ़्र किया है, क़यामत के रोज़ उनको पुकार कर कहा जाएगा \"आज तुम्हें जितना छायादार गुस्सा अपने ऊपर आ रहा है , अल्लाह तुम्पर उसे ज्यादा गजबनाक हमारा वक्त होता था जब तुम्हें ईमान की तरफ बुलाया जाता था और तुम कुफ्र करते थे”","वो कहेंगे “ऐ हमारे रब, तू नहीं जानता हमें दो दफा मौत और दो दफा जिंदगी दे दी।” अब हम अपने कसूरों का ऐतराफ़ करते हैं। क्या अब यहाँ से निकलने की भी कोई सबील है?”","(जवाब मिलेगा) “ये हालत जिसमें तुम मुबतला हो, इस वजह से है कि जब अकेले अल्लाह की तरफ बुलाया जाता था तो तुम मन्ने से इंकार कर देते थे और जब उसके साथ दूसरों को मिला जाता था तो तुम मान लेते थे। अब फैसला अल्लाह बुज़ुर्ग ओ बरतर के हाथ है”","वही है जो तुमको अपनी निशानियां दिखाता है और आसमां से तुम्हारे लिए रिज़्क नाज़िल करता है, मगर (निहसानियों के मुशाहिदे से) सबक सिर्फ वही शक्स लेता है जो अल्लाह की तरफ रूजू करने वाला हो","(पस ऐ रूजू करने वालों) अल्लाह ही को पुकारो अपने दीन को उसके लिए खालिस करके, ख्वाह तुम्हारा ये फेल (काम/अमल) काफिरों को कितना ही नागावर हो","वो बुलंद दर्जों वाला, मालिक ए अर्श है अपने बंदों में से जिसपर चाहता है है अपने हुकुम से रूह नाज़िल कर देता है ता-के वो मुलाक़ात के दिन से ख़बरदार करदे","वो दिन जबके सब लोग बे पर्दा होंगे, अल्लाह से उनकी कोई बात भी छुपी हुई ना होगी (हमें रोज़ पुकार कर पूछेगा) आज बादशाही किसकी है? (सारा आलम पुकार उठेगा) अल्लाह वाहिद-ए-कहर (सर्वशक्तिमान) की","(कहा जाएगा) आज हर मुतनफ्फिस को उस कमाई का बदला दिया जाएगा जो उसने की थी। आज किसी पर कोई ज़ुल्म न होगा और अल्लाह हिसाब लेने में बहुत तेज़ है","(ऐ नबी) दारा दो लोगों को उस दिन से जो करीब आ लगा है, जब कालिज (जिगर) मुंह को आ रहे होंगे और लोग चुप चाप गम के घूंट पी खाड़े होंगे। ज़ालिमों का ना कोई मुश्फ़िक दोस्त होगा और ना कोई शफ़ी जिसकी बात मानी जाएगी","अल्लाह निगाहों की चोरी तक से वाकिफ है और वो राज तक जानता है जो सीने ने छुपा रखा है","और अल्लाह ठीक ठीक बे-लाग (न्याय के साथ) फैसला करेगा। रहे वो जिनको (ये मुशरिकेन) अल्लाह को छोड़ कर पुकारते हैं, वो किसी चीज का भी फैसला करने वाले नहीं हैं। बिला शुभ अल्लाह हाय सब कुछ सुनने और देखने वाला है","क्या ये लोग कभी ज़मीन में चले फिरे नहीं हैं के इनहे उन लोगों का अंजाम नज़र आता है जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं? वो इनसे ज्यादा ताकतवार थे और इनसे ज्यादा जबरदस्त असर जमीन में छूट गए हैं। मगर अल्लाह ने उनके गुनाहों पर उन्हें पकड़ लिया और उनको अल्लाह से बचाने वाला कोई ना था","ये उनका अंजाम इस लिए हुआ के उनके पास उनके","हमने मूसा को","फिरौन और हामान और क़ारून की तरफ अपनी निशानियां और नुमाया सनद-ए-मामोरियत के साथ भेजा। मगर उनहों ने कहा “साहिर (जादूगर) है, कज़्ज़ब (झूठा) है”","फिर जब वो हमारी तरफ से हक उनके सामने ले आया तो उनहों ने कहा “जो लोग ईमान ला कर इसके साथ शामिल हुए हैं सबके लड़कों को कत्ल करो और लड़कियों को जीता (जिंदा) छोड़ करना\"। मगर काफ़िरों की चाल अकारत (व्यर्थ) ही गई","एक रोज़ फ़िरौन ने अपने दरबारियों से कहा \"छोड़ो मुझे मैं इस मूसा को क़त्ल किये देता हूँ, और पुकार देखे ये अपने रब को। मुझे अंदेशा है के ये तुम्हारा दीन बदल डालेगा, या मुल्क में फ़साद बरपा करेगा”","मूसा ने कहा “मैंने तो हर उस मुतकब्बिर (घमंडी) के मुकाबले में जो यौम उल हिसाब पर ईमान नहीं रखा अपना रब और तुम्हारे रब की पनाह ले ली है”","इस मौके पर आले फिरौन में से एक मोमिन शक्स, जो अपना ईमान छुपे हुए थे, बोल उठा: \"क्या तुम एक शक्स को सिर्फ इस बिना पर क़त्ल करदोगे के वो कहता है मेरा रब अल्लाह है? हलांके वो तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास बैयिनत ले आया, अगर वो झूठा है तो उसका झूठ खुद उसी पर पलट पड़ेगा, लेकिन अगर वो सच्चा है तो जिन","","वो शक्स जो ईमान लाया था उसने कहा \"ऐ मेरी क़ौम के लोगों, मुझे ख़ौफ़ है के कहीं\" तुमपर भी वो दिन ना आ जाए जो इस पहले बहुत से जत्थों (पार्टियों) पर आ चूका है","जैसा दिन क़ौम ए नूह और आद और समूद, और उनके बाद वाली क़ौम पर आया था और ये हकीकत है के अल्लाह अपने बंदों पर ज़ुल्म का कोई इरादा नहीं। रख्ता","ऐ क़ौम, मुझे डर है के कहीं तुम्पर फरियाद ओ फुगान का दिन (बुलाने का दिन) ना आ जाए","जब तुम एक दूसरे को पुकारोगे और भाग जाओगे फिरोगे, मगर हमें वक्त अल्लाह से बचाने वाला कोई ना होगा। सच ये है के जिसे अल्लाह भटका दे उसे फिर कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं होता","इसके पहले युसुफ तुम्हारे पास बैयिनत लेकर आये थे मगर तुम उनकी लाई हुई तालीम की तरफ से शक्क ही में पड़े रहे। फिर जब उनका इंतिक़ाल हो गया तो तुमने कहा अब उनके बाद अल्लाह कोई रसूल हरगिज़ ना भेजेगा।” इसी तरह अल्लाह उन सब लोगों को गुमराह करने में डाल देता है जो हद से गुज़रने वाले और शकी (शक) करते हैं","और अल्लाह की आयत में झगड़े करते हैं बिना इसके के उनके पास कोई सनद या दलील आई हो।ये रवैय्या अल्लाह और ईमान लाने वालों के नाज़दिक सख़्त मबगुज़ (ना-पसंद) है। इसी तरह अल्लाह हर मुतकब्बिर ओ जब्बार के दिल पर थप्पड़ लगा देता है","फ़िरौन ने कहा \"ऐ हामान, मेरे लिए एक बुलंद इमारत बना ता-के मैं रास्ते तक पहुँच सकूँ","आसमान के रास्ते तक, और मूसा के खुदा को झाँक कर देखूँ। मुझे तो ये मूसा झूठा ही मालूम होता है।” इस तरह फिरौन के लिए उसकी बढ़-अमली खुशनुमा बना दी गई और वो राह ए रास्ते से रुक गया। फ़िरौन की सारी चालबाज़ी (उसकी अपनी) तबाही के रास्ते ही में सिर्फ (इस्तेमाल/इस्तेमाल) हुई","वो शक्स जो ईमान लाया था बोला “ ऐ मेरी क़ौम के लोगों, मेरी बात मानो, मैं तुम्हें सही रास्ता बताता हूँ","ऐ क़ौम, ये दुनिया कि जिंदगी तो चांद रोजा है, हमेशा के लिए कयाम (स्थायी निवास) की जगह आखिरी ही है","जो बुरा करेगा उसको उतना ही बदला मिलेगा जितनी उसने बुराई की होगी और जो नीक अमल करेगा, ख्वाह वो मर्द हो या औरत, बशारत ये के हो वो मोमिन, ऐसे सब लोग जन्नत में दाख़िल होंगे जहां उनको बे हिसाब रिज़क दिया जाएगा","ऐ क़ौम, आख़िर ये क्या माजरा है के मई तो तुम लोगों को निजात (मोक्ष) की तरफ बुलाता हूं और तुमलोग मुझे आग की तरफ दावत देते हो","तुम मुझे इस बात की दावत देते हो के मैं अल्लाह से कुफ्र करूं और उसके साथ उन हस्तियों को शरीक ठहरूं जिनहें मैं नहीं जानता हलांके मैं तुम्हें जबरदस्त मगफिरत करने वाले खुदा की तरफ बुला रहा हूं","नहीं, हक ये है और इसके खिलाफ नहीं हो सकता है जिनकी तरफ तुम मुझे बुला रहे हो उनके लिए ना दुनिया में कोई दावत है ना आखिररात में, और हम सबको पलटना अल्लाह ही की तरफ है, और हद से गुजारने वाले आग में जाने वाले हैं","आज जो कुछ मैं कह रहा हूं, अंकरीब वह वक्त आएगा जब तुम उसे याद करोगे और अपना मामला मैं अल्लाह के हवाले करता हूं, वह अपने बंदों का निगहबान है\"","आखिर ए कार उन लोगों ने जो बुरी से बुरी चलें हमें मोमिन के खिलाफ़ चलें, अल्लाह ने उन्हें सबसे बचाया, और फिरौन के साथी खुद बद्तरीन अज़ाब के फेर में आ गए","दोज़ख की आग है जिसके सामने सुबह ओ शाम वो पेश किए जाते हैं, और जब कयामत की घड़ी आ जाएगी तो हुकुम होगा के आले फिरौन को छाया-तार अज़ाब में दाख़िल करो","फिर ज़रा ख़याल करो उस वक़्त का जब ये लोग दोज़ख़ में एक दूसरे से झगड़ रहे होंगे। दुनिया में जो लोग कमज़ार थे वो बड़े बन-ने वालों से कहेंगे के “हम तुम्हारे तबे (अनुयायी) थे, अब क्या यहाँ तुम नार-ए-जहन्नुम (नरक की आग) की तकलीफ़ के कुछ इसी से हमको बचा लोगे","वो बड़े बनने वाले जवाब देंगे” हम सब यहाँ एक हाल में हैं, और अल्लाह बंदों के दरमियान फैसला कर चूका है”","फिर ये दोज़ख़ में पड़े हुए लोग जहन्नुम के अहल-कारून (नर्क के रखवाले) से कहेंगे “अपने रब से दुआ करो के हमारे अज़ाब में बस एक दिन की तफ़्फ़िफ़ करदे”","वो पूछेंगे “क्या तुम्हारे पास तुम्हारे रसूल बैयिनत (स्पष्ट सबूत) लेकर नहीं आ रहे थे?” वो कहेंगे \"हां\" जहन्नुम के अहलकार बोलेंगे: \"फिर तुम ही दुआ करो, और काफिरों की दुआ अकारत (व्यर्थ) ही जाने वाली है।\"","यकीन जानो के हम अपने रसूलन और ईमान लाने वालों की मदद करते हैं इस दुनिया की जिंदगी में भी लाज़िमन करते हैं, और हम रोज़ भी करेंगे जब गवाह खड़े होंगे","जब ज़ालिमों को उनकी मज़ार (बहाने) कुछ भी फ़ायदा ना देगी और अनपर लानत पड़ेगी और बेहतरीन ठिकाना उनको में आएगा","आख़िर देखलो के मूसा की हमने रहमुमयी की और बनी इसराइल को उस किताब का वारिस बना दिया","जो अक़ल ओ दानिश रखने वालों के लिए हिदायत ओ हिदायत है","पास (ऐ नबी), सब्र करो, अल्लाह का वादा बार-हक़्क़ है, अपने कसूर की माफ़ी चाहो और सुबह ओ शाम अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करते रहो","हकीकत ये है के जो लोग किसी सनद या हुज्जत के बगैर जो उनके पास आए हो, अल्लाह की आयत में झगड़े कर रहे हैं उनके दिलों में किब्र (घमंड/गर्व) भरा हुआ है। मगर वो हमें बदनाम करने वाले नहीं हैं जिसका वो घमंड रखते हैं। बस अल्लाह की पनाह मांग लो, वो सब कुछ देखता और सुनता है","आसमानो और ज़मीन का भुगतान करना इंसानों को भुगतान करना कि बा-निस्बत यकीनन ज्यादा बड़ा काम है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं","और ये नहीं हो सकता के अंधा (अंधा) और बीना (देखने वाला) यकसन हो जाए, और इमानदार ओ सालेह और बदमाश बराबर ठहरें। मगर तुमलोग कम ही कुछ समझते हो","यकीनन क़यामत की घड़ी आने वाली है। उसके आने में कोई शक्क नहीं, मगर अक्सर लोग नहीं मानते","तुम्हारा रब कहता है “मुझे पुकारो, मैं तुम्हारी दुआएं कबूल करूंगा। जो लोग घमंड में आ कर मेरी इबादत से मुह मोड़ते हैं, जरूर वो ज़लील ओ ख़्वार हो कर जहन्नुम में दाख़िल होंगे”","वाह अल्लाह हाय तो है जिसने तुम्हारे लिए रात बनाई ता-के तुम हमें सुकून हासिल करो, और दिन को रोशन किया। हकीकत ये है के अल्लाह लोगों पर बड़ा फजल फरमान वाला है मगर अक्सर लोग शुक्र अदा नहीं करते","वही अल्लाह (जिसने तुम्हारे लिए ये कुछ किया है) तुम्हारा रब है। हर चीज का खालिक उसके सिवा कोई माबूद नहीं। फिर तुम किधर से बहकाए जा रहे हो","इसी तरह वो सब लोग बहकाए जा रहे हैं जो अल्लाह की आयत का इंकार करते हैं","वो अल्लाह ही है तो है जिसने तुम्हारे लिए जमीन को जाए क़रार (निवास स्थान) बनाया और ऊपर आसमान का गुम्बद (चंदवा) बना दिया, जिसने तुम्हारी सूरत बनाई और बड़ी ही उमड़ी बनाई। जिसने तुम्हें पाकीज़ा चीज़ का रिज़्क दिया। वही अल्लाह (जिसका ये काम है) तुम्हारा रब है, बे हिसाब बराकतों वाला है वो कायनात का रब","वही जिंदा है उसके सिवा कोई माबूद नहीं।उसी को तुम पुकारो अपने दीन को उसके लिए खाली करके। सारी तारीफ अल्लाह रब्बुल आलमीन ही के लिए है","(ऐ नबी), लोगों से कहदो के \"मुझे तो उन हस्तियों की इबादत से मना कर दिया गया है जिनको तुम अल्लाह को छोड़ कर पुकारते हो। (मैं ये काम कैसे कर सकता हूं) जबके मेरे पास मेरे रब की तरफ से बैयिनत आ चुकी हैं। मुझे हुकुम दिया है के मुख्य रब उल आलमीन के आगे सर-ए-तस्लीम ख़म करदुन।”","वही तो है जिसने तुमको मिट्टी से पेदा किया, फिर से, फिर खून के लोथड़े से, फिर वो तुम्हें बच्चे की शक्ल में नीलकलता है, फिर तुम्हें बढ़ाता है ताके तुम अपनी पूरी ताक़त को पाहुंच जाओ, फिर और बढ़ता है ता-के तुम बुढ़ापे को पकड़ो और तुम में से कोई पहले ही वापस बुला लिया जाता है। ये सब कुछ इसके लिए किया जाता है ता-के तुम अपने मुकर्रर वक्त तक पहुंच जाओ, और इस लिए के तुम हकीकत को समझो","वही है जिंदगी देने वाला, और वही मौत देने वाला है। वो जिस बात का भी फैसला करता है, बस एक हुकुम देता है कि वो हो जाए और वो जो जाती है","तुमने देखा उन लोगों को जो अल्लाह की आयत में झगड़ा करते हैं, कहां से वो फिराए जा रहे हैं","ये लोग जो इस किताब को और उन सारी किताबों को झूठलते हैं जो हमने अपने रसूलों के साथ भेजी थी अंकारीब उन्हें मालूम हो जाएगा","जब तौक (बेड़ियां) उनकी गर्दनों में होंगी, और जंजीरें, जिनसे पकड़ कर","वो खुलते हुए पानी की तरफ खिंच जाएंगे और फिर दोज़ख कि आग में झोंक दिए जाएंगे","फिर उनसे पूछा जाएगा के अब कहां है अल्लाह के सिवा वो दूसरे खुदा जिनको तुम शरीक करते थे","वो जवाब देंगे \"खोए गए वो हमसे, बलके हम इसे पहले किसी चीज को ना पुकारते थे\"। इस तरह अल्लाह काफ़िरों का गुमराह होना मुतहक़्क़िक़ (गलती में ठोकर खाना) कर देगा","उनसे कहा जाएगा \"ये तुम्हारा अंजाम इस लिए हुआ है के तुम ज़मीन में ग़ैर हक़ पर मगन था और फिर हम पर इतराते थे","अब जाओ, जहन्नुम के दरवाज़ों में दाख़िल हो जाओ हमेशा तुमको वहीं रहना है, बहुत ही बुरा ठिकाना है मुतकब्बिरन (गर्व) का\"","पस ऐ नबी, सब्र करो अल्लाह का वादा बरहक्क है। अब ख्वाह हम तुम्हारे सामने ही इनको उन बुरे नाताइज का कोई हिसा दिखा दें जिनसे हम इन्हें डरा रहे हैं, या (उससे पहले) तुम्हें दुनिया से उठा लें, पलट कर आना तो इन्हें हमारी ही तरफ है","ऐ नबी, तुमसे पहले हम बहुत से रसूल भेज चुके हैं जिनसे बाज़ के हालात हमने तुमको बताए हैं और बाज़ के नहीं बताते. किसी रसूल की भी ये ताक़त न थी के अल्लाह के इज़ान के बिना खुद कोई निशानी ले आता। फिर जब अल्लाह का हुकुम आ गया तो हक के मुताबिक फैसला कर दिया गया और हमें वक्त गलत-कार लोग खासे (नुकसान) में पढ़ गए","अल्लाह ही ने तुम्हारे लिए ये मवेशी जानवर बनाए हैं ता-के इन से किसी पर तुम सवार हो और किसी का गोश्त खाओ","इनके अंदर तुम्हारे लिए और भी बहुत से मुनाफ़े हैं, वो काम भी आते हैं के तुम्हारे दिलों में जहां जाने की हाज़त हो वहां तुम उन्पर पाहुंच सको, उन्पार भी और कश्तियां पर भी तुम सवार हो जाते हो","अल्लाह अपनी ये निशानियां तुम्हें दिखा रहा है, आखिर तुम उसकी किन किन निशानियों का इंकार करोगी","फिर क्या ये जमीन में चले फिर नहीं हैं के इनको उन लोगों का अंजाम नज़र आता जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं? वो इनसे तदाद में ज्यादा था, इनसे बढ़कर ताकतवार था, और ज़मीन में इनसे ज्यादा शानदार असर छोड़ गए हैं। जो कुछ कमाई उनहों ने की थी आख़िर वो उनके किसी काम आई","जब उनके रसूल उनके पास बैयिनत (स्पष्ट प्रमाण) लेकर आए तो वो उसी इल्म में मगन रहे जो उनके अपने पास था, और फिर उसी चीज़ के फिर में आ गए जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे","जब उन्होन ने हमारा अज़ाब देख लिया तो पुकार उठे के हमने मान लिया अल्लाह वहीदाहु ला शरीक को और हम इनकार करते हैं उन सब मआबूदों का जिन्हें हम शरीक ठहरते थे","मगर हमारा अजब-गजब देख लेने के बाद उनका ईमान उनके लिए कुछ भी नाफे (फायदमंद) ना हो सकता था, क्योंकि यही अल्लाह का मुकर्रर ज़ब्ता है जो हमेशा उसके बंदों में जारी रह रहा है, और हम वक्त काफिर लोग खासरे (नक्सन) में पढ़ गए","हा मीम","ये खुदा ए रहमान ओ रहीम की तरफ से नाज़िल करदा चीज़ है","एक ऐसी किताब जिसकी आयत खूब खोल कर बयान की गई हैं, अरबी ज़ुबान का कुरान, उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं","बशारत (खुश-खबरी) देने वाला और दारा देने वाला मगर लोगों में से अक्सर ने इस रु-गर्दानी की और वो सुनकर नहीं देते","कहते हैं \"जिस चीज की तरफ तू हमें बुला रहा है उसके लिए हमारे दिलों पर गिलाफ (परदे) चढ़े हैं, हमारे कान बहरे (बहरे) हो गए हैं, और हमारे और तेरे दरमियान एक हिजाब हयाल हो गया है। तू अपना काम कर, हम अपना काम किये जायेंगे”","ऐ नबी, इनसे कहो, मैं तो एक बशर हूं तुम जैसा। मुझे वही के ज़रिये से बताया जाता है कि तुम्हारा खुदा तो बस एक ही खुदा है, लिहाज़ा तुम सीधे उसी का रुख इख्तियार करो और उसे माफ़ी चाहो। तबाही है उन मुशरिकों के लिए","जो जकात नहीं देते और आखिररात के मुनकिर हैं","रहे वो लोग जिन्होन ने मान लिया और नेक अमाल किए, उनके लिए यकीनन ऐसा अजर है जिसका सिलसिला कभी टूटने वाला नहीं है","ऐ नबी! इनसे कहो, क्या तुम हमें खुदा से कुफ्र करते हो और दूसरे को उसका हमसर (शारीरिक/बराबर) थेरेते हो जिसने जमीन को दो (दो) दिनों में बना दिया? वही तो सारे जहां वालों का रब है","उसने (जमीन को वजूद में लाने के बाद) ऊपर से इसपर पहाड़ (पहाड़) जमा दिए और इसमें बरकतें रख दी और इसके अंदर सब मांगने वालों के लिए हर एक की तालाब ओ हाजात के मुताबिक ठीक अंदाज से ख़ुराक का सामान मुहइया करदिया। ये सब काम चार (चार) दिन में हो गए","फिर वो आसमान की तरफ मुतवज्जे हुआ जो हमें वक्त महज़ धुआं (धुआं) था। उसने आसमां और ज़मीन से कहा \"वजूद में आ जाओ, ख्वा तुम चाहो या ना चाहो।\" दोनों ने कहा “हम आ गए फरमा बैरदारों की तरह”","तब उसने दो दिन के अंदर सात (सात) आसमान बना दिए, और हर आसमान में उसका कानून वही (खुलासा) कर दिया। और आसमान ए दुनिया को हमने चिरागों से सजाया (सजाया) और इसे खूब महफूज करदिया। ये सब कुछ एक ज़बरदस्त हस्ती का मंसूबा (योजना) है","अब अगर ये लोग मुँह मोड़ते हैं तो इनसे कहदो के \"मैं तुमको उसी तरह के एक अचानक टूट पड़ने वाले अज़ाब से डरता हूँ जैसा आद और समूद पर नाज़िल हुआ था।\"","जब खुदा के रसूल उनके पास आए और पीछे, हर तरफ से आए और उन्हें समझा के अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी ना करो तो उन्हें ने कहा \"हमारा रब चाहता तो फरिश्ते भेजता, लिहाजा हम उस बात को नहीं मानते जिसके लिए तुम भेजे गए हो।\"","आद का हाल ये था के वो ज़मीन में किसी हक़ के बिना बदले बन बैठे और कहने लगे: \"कौन है हमसे ज़्यादा ज़ोरावर?\" उनको ये ना सूझा के जिस खुदा ने उनको पेदा किया है वो उनसे ज़्यादा ज़ोरावर है? वो हमारी आयत का इंकार ही करते रहें","आख़िर ए कार हमने चाँद मनहूस दिनों में सच तूफ़ानी हवा उन्पर भेज दी ता-के उनको दुनिया ही कि जिंदगी में ज़िल्लत ओ रुसवाई के अज़ाब का मज़ा चक दे। रुसवा-कुन है. वहां कोई उनकी मदद करने वाला ना होगा","रहे समूद, तो उनके सामने हमने राह ए रास्ते पेश की मगर उनको ने रास्ता देखने के बजाय अंधा (अंधा) बना रहना पसंद किया। आख़िर उनके कार्टूनों की बदौलत ज़िल्लत का अज़ाब उन पर टूट पड़ा","और हमने उन लोगों को बचा लिया जो ईमान लाए थे और गुमराही ओ बद-अमली से परहेज़ करते थे","और ज़रा उस वक़्त का ख्याल करो जब अल्लाह के ये दुश्मन दोज़ख की तरफ जाने के लिए घर लाए जाएंगे उनके अगलों को पिचलों के आने तक रोक रक्खा जाएगा","फिर जब सब वहां पहुंच जाएंगे तो उनके कान और उनकी आंखें और उनके जिस्म की खालें उन पर गवाही देंगी के वो दुनिया में क्या कुछ करते रहेंगे","वो अपने जिस्म की ख़ालों से कहेंगे \" तुमने हमारे ख़िलाफ क्यों गवाही दी? \" वो जवाब देंगे \" हमने उसे खुदा ने गोया (भाषण) दी है जिसने हर चीज़ को गोया (भाषण) कर दिया है। उसी ने तुमको पहली मरतबा पैदा किया था और अब उसकी तरफ तुम वापस लाए जा रहे हो","तुम दुनिया में जराहिम (अपराध) करते वक्त छुपते थे तो तुम्हें ये ख्याल ना था कि कभी तुम्हारे अपने कान और तुम्हारी आंखें और तुम्हारे जिस्म की खालें तुमपर गवाही देंगी बालके तुमने ये समझ था के तुम्हारे बहुत से अमल की अल्लाह को भी खबर नहीं है","तुम्हारा यही गुमान जो तुमने अपने रुब के साथ किया था, तुम्हें ले डूबा और इसकी बर्बादी तुम खासे (नुकसान) में पढ़ गए”","क्या हालात में वो सब्र करें (या ना करें) आग हाय उनका ठिकाना होगी, और अगर रूजू का मौका चाहेगा तो कोई मौका उन्हें ना दिया जाएगा","हमने उन पर ऐसे साथी मुसल्लत कर दिए थे जो उन्हें आगे और पीछे हर चीज खुशनुमा बनकर दिखाते थे। आख़िर ए कार उन पर भी वही फ़ैसला ए अज़ाब चस्पां हो कर रहा जो उन से पहले गुजरे हुए जिन्नो और इंसानों के गिरोहों पर चस्पां हो चूका था, यकीनन वो खासे (नुकसान) में रह जाने वाले थे","ये मुनकिरीन ए हक़ कहते हैं \"क्या कुरान को है\" हरगिज ना सुनो और जब ये सुनाया जाए तो इस्मेन खलल डालो, शायद के इस तरह तुम गालिब आ जाओ”","काफिरों को हम सख्त अजाब का मजा चखा कर रहेंगे और जो बद्तरीन हरकतें ये करते रहेंगे हैं उनका पूरा पूरा बदला इन्हें देंगे","वो दोज़ख है जो अल्लाह के दुश्मनों को बदले में मिलेगी, उसी में हमेशा हमेशा के लिए इनका घर होगा। ये है सज़ा इस जुर्म की के वो हमारी आयत का इंकार करते रहे","वहां ये काफ़िर कहेंगे के “ऐ हमारे रब, ज़रा हमें दिखा दे उन जिन्नो और इंसानों को जिन्हों ने हमें गुमराह किया था, हम उन्हें पांव (पैर) तले रूंध डालें ता-के वो ख़ूब ज़लील ओ ख़्वार होन।”","जिन लोगों ने कहा के अल्लाह हमारा रब है और फिर वो इसपर साबित क़दम रहे, यकीनन उन पर फरिश्ते नाज़िल होते हैं, और उनसे कहते हैं के \"ना डरो, ना गम करो, और खुश हो जाओ हमें जन्नत की बशारत (खुश खबरी) से जिसका तुमसे वादा किया गया है","हम इस दुनिया की जिंदगी में भी तुम्हारे साथी हैं और आख़िरत में भी। वहां जो तुम चाहोगे तुम्हें मिलेगा और हर चीज जिसकी तुम तमन्ना करोगे वो तुम्हारी होगी","ये है समां ए ज़ियाफत उस हस्ती की तरफ से जो गफूर और रहीम है”","और हमारे शेखों की बात से अच्छी बात और किसकी होगी जिसने अल्लाह की तरफ बुलाया और नेक अमल किया और कहा के मैं मुसलमान हूं","[और ऐ नबी], नेकी और बड़ी यकसन (बराबर) नहीं है, तुम बड़ी को हमने नेकी से दफा करो जो बेहतरीन हो, तुम देखोगे के तुम्हारे साथ जिसकी अदावत (दुश्मनी) पड़ी हुई थी वो जिगरी दोस्त बनाया है","ये सिफत नसीब नहीं होती मगर उन लोगों को जो सब्र करते हैं, और ये मुकाम हासिल नहीं होता मगर उन लोगों को जो बड़े नसीब वाले हैं","और अगर तुम शैतान की तरफ से कोई उक्साहत (प्रलोभन) महसूस करो तो अल्लाह की पनाह मांग लो, वो सब कुछ सुनता और जानता है","अल्लाह की निशानियों में से हैं ये रात और दिन और सूरज और चाँद। सूरज को और चांद को सजदा ना करो बलके हमसे खुदा को सजदा करो जिसने उन्हें अदा किया है अगर फिल वक़ै तुम उसकी इबादत करने वाले हो","लेकिन अगर ये लोग गुरुर में आ कर अपनी ही बात पर अड़े रहे तो परवाह नहीं, जो फरिश्ते तेरे रब के मुकर्रब हैं वो शब-ओ-रोज़ (रात और दिन) उसकी तस्बीह कर रहे हैं और कभी नहीं थकते","और अल्लाह की निशानियों में से एक ये है के तुम देखते हो ज़मीन सूनी (बंजर) पड़ी हुई है, फिर जून-हाय के हमने उसपर पानी बरसाया, यक़ीनन वह फबक उठती है और फूल जाती है। वाला है। यकीनन वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है","जो लोग हमारी आयतों को उलटे माने पहचानते हैं (हमारे संकेतों को विकृत करते हैं) वो हमसे कुछ छुपे हुए नहीं हैं। खुद ही सोचलो के आया वो शक्स बेहतर है जो आग में झोंका जाने वाला है या वो जो कयामत के रोज़ अमन की हालत में हाज़िर होगा? करते रहो जो तुम चाहो, तुम्हारी सारी हरकतों को अल्लाह देख रहा है","ये वो लोग हैं जिनके सामने कलाम-ए-नसीहत आया तो उन्हें ने इसे मान-ने से इंकार कर दिया, मगर हकीकत ये है के ये एक ज़बरदस्त किताब है","बातिल ना सामने से इसपर आ सकता है ना पीछे से, ये एक हकीम (सबसे बुद्धिमान) ओ हमीद (बेहद प्रशंसनीय) की नाज़िल करदा चीज़ है","ऐ नबी, तुमसे जो कुछ कह रहा है उसमें कोई चीज़ भी ऐसी नहीं है जो तुमसे पहले गुजरे हुए रसूलों से ना कहीं जा चुकी हो। बेशक तुम्हारा रब बड़ा दरगुज़ार करने वाला है, और उसके साथ बड़ी दर्दनाक सजा देने वाला है","अगर हम इसको अजामी (गैर अरबी) कुरान बाना कर भेजते हैं तो ये लोग कहते हैं \"क्यों ना इसकी आयत खोल कर बयान की गई? क्या अजीब बात है के कलाम अजामी (गैर अरबी) है और मुखातिब अरबी\"।इनसे कहो ये कुरान ईमान लाने वालों के लिए हिदायत और शिफा है, मगर जो लोग ईमान नहीं लाते उनके लिए ये कानों की दात (प्लग/बेहरापन) और आंखों की पट्टी (कवरिंग) है। उनका हाल तो ऐसा है जैसे उनको दरवाजे से पुकारा जा रहा हो","इस्के पहले हमने मूसा को किताब दी थी और उसके मामले में bhi yahi ikhtilaf hua tha. अगर तेरे रुब ने पहले ही एक बात ताई न करदी होती तो इन इख्तिलाफ करने वालों के दरमियान फैसला चुका दिया जाता, और हकीकत ये है के ये लोग उसकी तरफ से सख्त इजतराब अंगेज (सख्त बेचैन करने वाले/बेचैन करने वाले) शक्क में पैदा हुए हैं","जो कोई नया अमल करेगा अपने ही लिए अच्छा करेगा, जो बड़ी (बुराई) करेगा उसका वबाल उसी पर होगा, और तेरा रब अपने बंदों के हक में जालिम नहीं है","हमें सा-अथ (घंटा/कयामत) का इल्म अल्लाह ही की तरफ राज़ होता है, वही उन सारे फालों (फल) को जानता है जो अपने शगूफों (आवरण/आवरण) में से निकलता है, उसे पता है कि कौनसी मां (महिला) हमीला (गर्भधारण) हुई है और किसने बच्चा पैदा करना (जन्म देना) है। फिर जिस रोज़ वो लोगों को पुकारेगा के कहाँ हैं मेरे वो शरीक? ये कहेंगे, \"हम अर्ज़ कर चुके हैं, आज हममें से कोई इसकी गवाही देने वाला नहीं है।\"","हमें वक्त वो सारे मबूद इनसे गम हो जाएंगे जिन्हे ये इसे पहले पुकारते थे, और ये लोग समझ लेंगे इनके लिए अब कोई जाए पनाह नहीं है","इंसान कभी भलाई की दुआ मांगता नहीं थकता, और जब कोई आफत इसपर आ जाती है तो मयूस ओ दिल शिकस्त हो जाता है","मगर सिर्फ वक्त गुजर जाने के बाद हम इसे अपने रहमान का मजा चखते हैं, ये कहता है के \"मैं इसका मुस्तहिक हूं, और मैं नहीं समझूंगा कि कयामत कभी आएगी, लेकिन अगर वकै मैं अपने रब की तरफ पलट गया तो वहां भी मजे करूंगा”। हालंके कुफ्र करने वालों को लाज़िमन हम बता कर रहेंगे के वो क्या करके आये हैं, और उन्हें हम बदाए गंदे अज़ाब का मजा दिखाएंगे","इंसान को जब हम नियामत देते हैं तो वो मुहं फेरता है और अकड़ जाता है, और जब उसे कोई आफत छू जाती है तो लंबी चौड़ी दुआएं करने लगता है","(ऐ नबी), इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अगर वाकाई ये कुरान खुदा ही की तरफ से हुआ और तुम इसका इनकार करते रहे तो हमारे शक्स से बढ़ कर भटका हुआ और कौन होगा जो इसकी मुखालफत में दूर तक निकल गया हो","अंकरिब हम उनको अपनी निशानियां आफाक (क्षितिज) में भी दिखाएंगे और इनके अपने नफ्स में भी यहां तक-के अंदर ये बात खुल जाएगी के ये कुरान वाक़ई बरहक़ है, क्या ये बात काफ़ी नहीं है के तेरा रब हर चीज़ का शाहिद(गवाह) है","आगाह रहो, ये लोग अपने रब की मुलाक़ात में शक्क रखते हैं। सुन रक्खो वो हर चीज़ पर मुहीत (पूरी तरह से सब कुछ शामिल है) है","हा मीम","ऐन देखा क़ाफ़","इसी तरह अल्लाह गालिब ओ हकीम (सबसे शक्तिशाली, सबसे बुद्धिमान) तुम्हारी तरफ और तुमसे पहले गुज़रे हुए (रसूलों) की तरफ वही करता है","आसमान और ज़मीन में जो कुछ भी है उसी का है, वो बारात और अज़ीम है","करीब है के आसमान ऊपर से फट पड़े फरिश्ते अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह कर रहे हैं, और ज़मीन वालों के हक़ में दरगुज़र की डार्कहस्टीन किये जाते हैं। आगा रहो, हकीकत में अल्लाह गफूर ओ रहीम ही है","जिन लोगों ने उनको छोड़ कर अपने दूसरे सरपरस्त बना रक्खे हैं, अल्लाह ही उन्पार निगरानी है, तुम उनके हवाला दार नहीं हो","हां, इसी तरह ऐ नबी, ये कुरान ए अरबी हमने तुम्हारी तरफ वही (खुलासा) किया है ता-के तुम बस्तियां के मरकज (शहर ए मक्का) और उसके गिर्द ओ पेश रहने वालों को खबरदार बनाओ, और जमा होने के दिन से डर दो जिसके आने में कोई शक्क नहीं। एक गिररूह को जन्नत में जाना है और दूसरा गिरूह को दोज़ख में","अगर अल्लाह चाहता तो सबको एक ही उम्मत बना देता, मगर वो जिसे चाहता है अपनी रहमत में दखल करता है। और जालिमों का ना कोई वाली है ना मददगार","क्या ये (ऐसी नादान हैं के) इन्हों ने उसे छोड़ कर दूसरे वाली (रक्षक) बना रखा है? वली (रक्षक) अल्लाह ही है, वही मुर्दों (मृत) को जिंदा करता है, और वह हर चीज पर कादिर है","तुम्हारे दरमियान जिस मामले में भी इख्तिलाफ हो, उसका फैसला करना अल्लाह का काम है। वही अल्लाह मेरा रब है, उसी पर मैंने भरोसा किया, और उसकी तरफ मैं रूजू करता हूं","आसमानों और जमीन का बनाने वाला, जिसने तुम्हारी अपनी जिंदगी से तुम्हारे लिए जोड़ी बनाई, और इसी तरह के जानवरों में भी (उन्ही के हम जिन्स) जोडे (जोड़े) बनाएं, और इस तारीख से वो तुम्हारी नस्लें (पीढ़ियां) फैलती हैं। क़यानत की कोई चीज़ उसके मुशाबेह नहीं, वो सब कुछ सुनने और देखने वाला है","आसमान और ज़मीन के खज़ानो की कुंजी उसके पास हैं। जिसे चाहता है खुला रिज़्क देता है और जिसे चाहता है नपा तुला देता है। उसे हर चीज़ का इल्म है","उसने तुम्हारे लिए दीन का वही तरीक़ा मुकर्रर किया है जिसका हुकुम उसने नूह को दिया था, और जैसे (ऐ मुहम्मद) अब तुम्हारी तरफ़ हमने वही के ज़रिये से भेजा है, और जिसकी हिदायत हम इब्राहिम और मूसा और ईसा को दे चुके हैं, के साथ ले लिया गया है क़याम करो इस दीन को और हममें मुतफ़र्रिक न हो जाओ। यही बात मुशरिकिन को सख्त नगावार हुई है जिसकी तरफ ऐ मुहम्मद तुम इन्हें दावत दे रहे हो। अल्लाह जिसे चाहता है अपना कर लेता है, और वो अपनी तरफ आने का रास्ता उसी को दिखाता है जो उसकी तरफ रूजू करे","लोगों में जो तफ़रका (इख्तिलाफ़) रुनुमा हुआ वो इसके बाद हुआ के उनके पास इल्म आ चूका था और इस बिना पर हुआ के वो आपस में एक दूसरे पर ज़्यादा करना चाहते थे। अगर तेरा रब पहले ही ये ना फरमा चूका होता के एक वक्त ए मुकर्रर तक फैसला मुलतवी रक्खा जाएगा तो इनका काजिया चूका दिया गया होता। और हकीकत ये है के एग्लोन के बाद जो लोग किताब के वारिस बन गए वो उसकी तरफ से बदले इस्तराब अंगेज शक्क में पड़े हुए हैं","जिनके ये हालत पैदा हो चुकी है इसलिए ऐ मुहम्मद (स.अ.स.) अब तुम उसी दीन की तरफ दावत दो, और जिस तरह तुम्हीं हुकुम दिया गया है उस पर मज़बूती के साथ कायम हो जाओ, और लोगों की ख्वाहिश की इतिबा ना करो। और इनसे केहदो के: \"अल्लाह ने जो किताब भी नाज़िल की है मैं उसपर ईमान लाया, मुझे हुकुम दिया है के मैं तुम्हारे दरमियान इन्साफ करूं। अल्लाह ही हमारा रब भी है और तुम्हारा रब भी। हमारे अमल हमारे लिए हैं और तुम्हारे अमल तुम्हारे लिए। हमारे और तुम्हारे दरमियान कोई झगड़ा नहीं। अल्लाह एक रोज़ हम सब को जमा करेंगे और उसकी तरफ सब को जाना है”","अल्लाह की दावत पर लब्बैक कहे जाने के बाद जो लोग (लब्बैक कहने वालों से) अल्लाह के दीन के मुआमले में झगड़े करते हैं, उनकी हुज्जत बाजी उनके रब के नाज़दिक बात है, और उन पर उसका ग़ज़ब है और उनके लिए सख्त अज़ाब है","वो अल्लाह हाय है जिसने हक़ के साथ ये किताब और मिज़ान नाज़िल की है और तुम्हें क्या खबर, शायद के फैसले की घड़ी करीब ही आ लगी हो","जो लोग उसके आने पर ईमान नहीं रखते वो तो हमारे लिए जल्दी मचाते हैं, मगर जो उसपर ईमान रखते हैं वो उसे डरते हैं और जानते हैं के यकीनन वो आने वाली है। खूब सुनलो, जो लोग हमें घड़ी के आने में शक्क डालने वाली बातें (तर्क) करते हैं वो गुमराही में बहुत दूर निकल गए हैं","अल्लाह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है जिसे जो कुछ चाहता है देता है। वो बड़ी कुव्वत वाला और ज़बरदस्त है","जो कोई आख़िरत की खेती चाहता है उसकी खेती को हम बढ़ाते हैं, और जो दुनिया की खेती चाहता है उसे दुनिया ही में से अलग कर देती है मगर आख़िरत में उसका कोई हिसा नहीं है","क्या ये लोग कुछ ऐसे शारिक ए खुदा रखते हैं जिन्हों ने इनके लिए दीन की नोइयत रखने वाला एक ऐसा तरीका मुकर्रर कर दिया है जिसका अल्लाह ने इज़ान नहीं दिया? अगर फैसला की बात पहले ताई ना हो गई तो इनका क़ज़िया चुका दिया गया हो गया। यकीनन इन जालिमों के लिए दर्दनक अज़ाब है","तुम देखोगे के ये जालिम हमें वक्त अपने किए के अंजाम से डर रहेंगे और वो अंदर आ कर रहेंगे। बा-खिलाफ इसके जो लोग ईमान ले आए हैं और जिन्होन ने नेक अमल किए हैं वो जन्नत के गुलिस्तानों में होंगे, जो कुछ भी वो चाहेंगे अपने रब के हां पाएंगे, यही बड़ा फजल है","ये है वो चीज जिसकी खुश खबरी अल्लाह अपने उन बंदों को देता है जिन्होनें ने मान लिया और नीक अमल किये। ऐ नबी, लोगों से कहदो के मैं इस काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं। अलबत्ता क़राबत (रिश्तेदारों) की मुहब्बत ज़रूर चाहता हूँ। जो कोई भलाई कमाएगा हम उसके लिए हमें भलाई में खूबी का इज़ाफ़ा कर देंगे। बेशक अल्लाह बड़ा दरगुज़ार करने वाला और क़दरदान है","क्या ये लोग कहते हैं कि इस शक्स ने अल्लाह पर झूठा बोहतन गड़बड़ लिया है? अगर अल्लाह चाहे तो तुम्हारे दिल पर मोहर लगा दे। वो बातिल को मिटा देता है और हक को अपने फरमान से हक कर दिखाता है। वो सीने के छुपे हुए राज जानता है","वही है जो अपने बंदों से तौबा कबूल करता है और बुराइयों से दरगुजर करता है, हालंके तुम लोगों के सब अफाल (जो कुछ कर रहे हो) का उसका इल्म है","वो ईमान लाने वालों और नेक अमल करने वालों की दुआ क़बूल करता है और अपने फ़ज़ल से उनको और ज़्यादा देता है। रहे इंकार करने वाले, तो उनके लिए दर्दनक सजा है","अगर अल्लाह अपने सब बंदों (नौकरों) को खुला रिज्क दे देता तो वो ज़मीन में सरकशी का तूफ़ान बरपा कर देता, मगर वो एक हिसाब से जितना चाहता है नाज़िल करता है, यकीनन वो अपना बंदों से बा खबर है और उन पर निगाह रखता है","वही है जो लोगों के मयौस हो जाने के बाद में (बारिश) बरसात है और अपनी रहमत फैला देता है, और वही काबिल ए तारीफ वाली है","उसकी निशानियों में से है ये ज़मीन और आसमान की पैदाइश, और ये जानदार मखलूकत जो उसने दोनों जगह फैला रखा है। वो जब चाहे इन्हें इकठ्ठा कर सकता है","तुम्पर जो मुसीबत भी आई है, तुम्हारे अपने हाथों की कमाई से आई है, और बहुत से कसूरों से वो वैसे ही इकठ्ठा कर जाता है","तुम ज़मीन में अपने खुदा को आजिज (निराश) करदेने वाले नहीं हो, और अल्लाह के मुकाबले में तुम कोई हमी ओ नासिर (रक्षक या सहायक) नहीं रखते","उसके निशानियों में से हैं ये जहाज (जहाज) जो समंदर में पहाड़ों की तरह नजर आते हैं","अल्लाह जब चाहे हवा को साकिन (गतिहीन) करदे और ये समंदर की पीठ (पीछे) पर खड़े रह जाएं। इसमें बड़ी निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो कमाल दर्ज सब्र ओ शुक्र करने वाला हो","या (अनपार सवार होने वालों के) बहुत से गुनाहों से दर गुजर करते हुए उनके चांद ही कार्टूनों की दुनिया में उन्हें डुबो (डूब) दे","और हम वक्त हमारी आयत में झगड़े करने वालों को पता चल जाए के उनके लिए कोई जाए पनाह नहीं है","जो कुछ भी तुम लोगों को दिया गया है वो मेहज़ दुनिया की चंद रोजा जिंदगी का सर ओ सामान है, और जो कुछ अल्लाह के हान है वो बेहतर भी है और भुगतान भी। वो उन लोगों के लिए है जो ईमान लाए हैं और अपने रुब पर भरोसा करते हैं","","","और जब अनपर ज्यादा की जाती है तो उसका मुकाबला करते हैं","बुरे का बदला वैसी ही बुरा है, फिर जो कोई माफ़ करे और इस्लाह करे उसका अजर अल्लाह के ज़िम्मे है। अल्लाह ज़ालिमों को पसंद नहीं करता","और जो लोग ज़ुल्म होने के बाद बदला लें उनको मलामत नहीं कि जा सकती","मलामत के मुस्तहिक तो वो हैं जो दूसरों पर ज़ुल्म करते हैं और ज़मीन में ना हक ज़्यादा करते हैं। ऐसे लोगों के लिए दर्दनक अज़ाब है","अलबत्ता जो शक्स सब्र से काम ले और दरगुज़ार करे, तो ये बदी उल आज़मी के कामों में से है","जिस को अल्लाह ही गुमराही में फेंक दे हमें का कोई संभालने वाला अल्लाह के बाद नहीं है। तुम देखो गी ये जालिम जब अज़ाब देखेंगे तो कहेंगे अब पलटने की भी कोई सबील है","और तुम देखोगे के ये जहन्नुम के सामने जब ले जायेंगे तो ज़िल्लत के मारे झुके जा रहे होंगे और उसको नज़र बचा कर कान लगाओगे (गुप्त नज़र) से देखेंगे। हमें वक्त वो लोग जो ईमान लाए थे कहेंगे के वाकाई असल जियान कर ([सच्चे] हारे हुए) वही हैं जिन्हों ने आज कयामत के दिन अपना आपको और अपने मुतालिकिन को खसरे में डाल दिया। ख़बरदार रहो, ज़ालिम लोग मुस्तक़िल अज़ाब में होंगे","और उनके कोई हमी ओ सरपरस्त न होंगे जो अल्लाह के मुक़ाबले में उनकी मदद को आएंगे। जिसे अल्लाह गुमराही में फेंक दे उसे बचाने के लिए कोई सबील नहीं","मान लो अपने रब की बात कबूल इसके के वो दिन आए जिसको तलने की कोई सूरत अल्लाह की तरफ से नहीं है। हमारे दिन तुम्हारे लिए कोई जाए पनाह ना होगी और ना कोई तुम्हारे हाल को बदलने की कोशिश करने वाला होगा","अब अगर ये लोग मुंह मोड़ते हैं तो ऐ नबी हमें तुमको अनपर निगाहें बना कर तो नहीं भेजा जाता है। तुमपर तो सिर्फ बात पाहुंचा देने की जिम्मेदारी है। इंसान का हाल ये है कि जब हम उसे अपनी रहमत का मजा चखाते हैं तो उसपर फूल जाता है। और अगर उसके अपने हाथों का किया धरा किसी मुसीबत की शक्ल में उसपर उलट पड़ता है तो सच में शुक्र बन जाता है","अल्लाह ज़मीन और आसमान की बादशाही का मालिक है। जो कुछ चाहता है भुगतान करता है। जिसे चाहता है लड़कियां, जैसा चाहता है लड़के देता है","जिसे चाहता है लड़के और लड़कियां मिला-जुला कर देता है और जिसे चाहता है बांझ (बंजर) कर देता है। वो सब कुछ जानता है और हर चीज़ पर कादिर है","किसी बशर (इंसान) का ये मुकाम नहीं है कि अल्लाह हमसे रू-बरू बात करे, उसकी बात या तो वही (इशारे/रहस्योद्घाटन) के तौर पर होती है, या दिन के पीछे से, या फिर वो कोई पैगम्बर (फ़रिश्ता) भेजता है और वो उसके हुकुम से जो कुछ वो चाहता है, वही करता है। वो बारतार और हकीम (बुद्धिमान) है","और इसी तरह (ऐ मुहम्मद स.स.) हमने अपने हुकुम से एक रूह तुम्हारी तरफ वही की है। तुम्हें कुछ पता नहीं था कि किताब क्या होती है और ईमान क्या होता है, मगर हमें रूह को हमने एक रोशनी बना दिया जिसे हम राह दिखाते हैं अपने बंदों में से जिसे चाहते हैं। यकीनन तुम सीधे रास्ते की तरफ रहनुमाई कर रहे हो","हमें खुदा के रास्ते की तरफ जो जमीन और आसमान की हर चीज का मालिक है। ख़बरदार रहो, सारे मुआमलात अल्लाह ही की तरफ रूजू करते हैं","हा मीम","कसम है इस वाज़ेह किताब की","के हमने इसे अरबी ज़ुबान का कुरान बनाया है ता-के तुमलोग इसे समझो","और दर हकीकत ये उम्मुल किताब में सब्त (प्रतिलिपिबद्ध) है, हमारे हां बड़ी बुलंद मौत और हिकमत से लबरेज किताब","अब क्या हम तुमसे बेज़ार होकर ये दर्स-ए-नसीहत तुम्हारे यहां भेजना छोड़ दें सिर्फ इसलिए तुम हद से गुजारे हुए लोग हो","पहले गुज़री हुई क़ौमों में भी बारहा (बार-बार) हमने नबी भेजे हैं","कभी ऐसा नहीं हुआ के कोई नबी उनके हां (यहां) आया हो और उन्हें ने उसका मज़ाक न उदय हो","फिर जो लोग इनसे बदरजा ज़्यादा ताक़तवार थे उन्हें हमने हलक करदिया. पिछली क़ौमों की मिसालें गुज़र चुकी हैं","अगर तुम लोगों से पूछो के ज़मीन और आसमान को किसने पाया है तो ये खुद कहेंगे के उसमें उसकी ज़बरदस्त इल्मी हस्ती ने चुकाया है","वही ना जिसने तुम्हारे लिए इस ज़मीन को गहवारा किया है (पालना) बनाया और इसमें तुम्हारी खातिर रास्ते बना दिए ता-के तुम अपनी मंजिल ए मकसूद की राह पा सको","जिसने एक खास मिकदर में आसमान से पानी उतारा और उसकी ज़रिये से मुर्दा (मृत) ज़मीन को जिला उठाया। इसी तरह एक रोज तुम जमीन से बारामद किए जाओगे","वही जिसने ये तमाम जोड़े (जोड़े) बनाए, और जिसने तुम्हारे लिए कश्तियां (जहाज) और जानवरों को सवारी बनाई ता-के तुम उनकी पुश (पीठ) पर चढ़ो","और जब उन्पर बैठो (बैठो) तो अपने रब का एहसान याद करो और कहो के \"पाक है वो जिसने हमारे लिए चीज़ों को मुस्कुराकर (बस में) करदिया वरना हम उन्हें काबू में लाने की ताक़त न रखते थे","और एक रोज़ हमें अपने रब की तरफ पलटना है”","(ये सब कुछ जानते और मानते हैं भी) लोगों ने उसके बंदों (नौकरों) में से बाज़ को उसका जुज (हिस्सा) बना डाला, हकीकत ये है के इंसान खुला एहसान फरामोश है","क्या अल्लाह ने अपनी मखलूक में से अपने लिए बेटियां इंतिखाब (चुने हुए) की और तुम्हारे बेटों (बेटों) से नवाजा","और हाल ये है कि जिस औलाद को ये लोग खुदा ए रहमान की तरफ मंसूब करते हैं उसकी विलादत का संदेश (खबर/समाचार/खबर) जब खुद में से किसी को दिया जाता है तो उसके मुहं पर सियाही छा जाती है और वो ग़म से भर जाता है","क्या अल्लाह के हिसे में वो औलाद आई जो ज़ेवरों (गहने) में पाली जाती है और बेहस ओ हुज्जत में अपना मुद्दा पूरी तरह वाज़े भी नहीं कर सकती","उन्होन ने फ़रिश्तों को, जो खुदा ए रहमान के खास बंदे हैं, औरतें करार दे लिया। क्या उनके जिस्म की सच्चाई इन्होनें देखी है? इनकी गवाही लिख ली जाएगी और इन्हें इसके जवाब-दही करनी होगी","ये कहते हैं \"अगर खुदा-ए-रहमान चाहता (के हम उनकी इबादत ना करें) तो हम कभी उनको ना पूजते\" ये मामले की हकीकत को कतई नहीं जानते, महज़ तीर तुक्के लड़ते हैं (केवल अनुमान लगा रहे हैं/अनुमान लगा रहे हैं)","क्या हमने इसे पहले कोई किताब इनको दी थी जिसकी सनद [अपने इस मलाईका (फरिश्ते) परस्ती के लिए] ये अपने पास रखते हैं","नहीं, बल्के ये कहते हैं के हमने अपने बाप दादा को एक तारीख पर पाया है और हम उनको नक्शे कदम पर चल रहे हैं","इसी तरह तुमसे पहले जिस बस्ती में भी हमने कोई नज़ीर (दाराने वाला) भेजा, उसके खाते-पीते लोगों ने यहीं कहा के हमने अपने बाप दादा को एक तारीख़ पर पाया है और हम उन्हें नक्शे क़दम की जोड़ी कर रहे हैं","हर नबी ने उनसे पूछा, क्या तुम उसी डगर पर कहले जाओगे ख्वाह में उस रास्ते से ज्यादा सही रास्ता तुम्हें बताऊं जिसपर तुमने अपने बाप दादा को पाया? उनहों ने सारे रसूलों को यही जवाब दिया के जिस दीन की तरफ बुलाए के लिए तुम भेज गए हो हम उसके काफिर हैं","आखिर ए कार हमने उनकी खबर ले डाली और देख लो के झूठलेन वालों का क्या अंजाम हुआ","याद करो वो वक्त जब इब्राहिम ने अपने बाप और अपनी क़ौम से कहा था के \"तुम जिनकी बंदगी करते हो मेरा उनसे कोई ताक़ नहीं","मेरा तल्लुक सिर्फ उसे है जिसने मुझे भुगतान किया, वही मेरी रहनुमाई करेगी\"","और इब्राहिम यहीं कलिमा अपने पीछे अपनी औलाद में छोड़ गया ता-के वो इसकी तरफ रूजू करें","(इस के बावज़ूद जब ये लोग दूसरे की बंदगी करने लगे तो मैंने इनको मिटा नहीं दिया) बलके मैं इन्हें और इनके बाप को माता-ए-हयात देता रहा यहां तक ​​के इनके पास हक़, और खोल खोल कर बयान करने वाला रसूल आ गया","मगर जब वो हक़ इनके पास आया तो इन्हों ने कह दिया ये तो जादू है और हम इसको मन्ने से इनकार करते हैं","कहते हैं, ये कुरान दोनों शहरों के बदाए आदमियों में से किसी पर क्यों ना नाज़िल किया गया","क्या तेरे रब की रहमत हाँ log takseem karte hain? दुनिया की जिंदगी में इनकी गुजर बसर के ज़रिये तो हमने इनके दरमियान तकसीम किये हैं, और इसमें कुछ लोगों को कुछ दूसरे लोगों पर हमने बदरजा-हा फौकियात दी है ता-के ये एक दूसरे से खिदमत लें और तेरे रब की रहमत हमें दौलत से ज्यादा कीमती है जो (इनके) रहीस) समेट रहे हैं","अगर ये अंदेशा ना होता के सारे लोग एक ही तारीख के हो जाएंगे तो हम खुदा ए रहमान से कुफ्र करने वालों के घरों की छतें (छतरियां), और उनकी सीढ़ियां (सीढ़ियां) जिनसे वो अपने बाला खानों पर चढ़ते हैं","और उनके दरवाजे, और उनके तख्त जिनपर वो तकिए (तकिये) लगा कर बैठते हैं","सब चांदी और सोने (सोना) के बनवा देते हैं। ये तो महज़ हयात ए दुनिया की मताह हैं। और आखिरी तेरे रब के हां सिर्फ मुत्तक़ीन के लिए हैं","जो शक्स रहमान के जिक्र से तगाफुल (गफलत) बरात-ता है, हम इसपर एक शैतान मुसल्लत कर देते हैं और वो उसका रफीक बन जाता है","ये शयातीन ऐसे लोगों को राह ए रास्ते पर आने से रोकते हैं, और वो अपनी जगह ये समझते हैं के हम ठीक जा रहे हैं","आख़िर ए कार जब ये शक्स हमारे हाँ पहुँचेगा तो अपने शैतान से कहेगा \"काश मेरे और तेरे दरमियान मशरिक़ ओ मगरिब का बोध (दूरी/दूरी) होता, तू तो बढ़ता साथी निकला\"","लोगों में हमारा वक़्त से कहा जाएगा के जब तुम ज़ुल्म कर चुके तो आज ये बात तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं है के तुम और तुम्हारी शयातें अज़ाब में मुश्तारिक हैं","अब क्या ऐ नबी तुम बहरों (बहरे) को सुनाओगे? हां अंधों (अंधा) और सारे गुमराही में पड़े हुए लोगों को राह दिखोगे","अब तो हमें इनको सज़ा देनी है ख्वाह तुम्हें दुनिया से उठा लें","हां तुमको आंखों से इनका वो अंजाम दिखा दें जिसका हमने इसे वादा किया है। हमें इनपर पूरी क़ुदरत हासिल है","तुम बहार-हाल उस किताब को मज़बूती से थामे रहो जो वही के ज़रिये से तुम्हारे पास भेज दी गई है, यकीनन तुम सीधे रास्ते पर हो","हकीकत ये है के ये किताब तुम्हारे लिए और तुम्हारी क़ौम के लिए एक बहुत बड़ा शराफ है और अंकारिब तुम लोगों को इसका जवाब-दही करनी होगी","तुमसे पहले हमने जितने रसूल भेजे थे उन सब से पूछ देखो, क्या हमने खुदा ए रहमान के सिवा कुछ दूसरे माबूद भी मुकर्रर किए थाय के उनकी बंदगी की जाए","हमने मूसा को अपनी निशानियों के साथ फिरौन और उसके अयान-ए-सल्तनत के पास भेजा, और उसने जा कर कहा के मैं रब उल आलमीन का रसूल हूं","फिर जब उसने हमारी निशानियां उनके सामने पेश की तो वो थट्टे (हंसी) मारने लगे","हम एक पर एक ऐसी निशानी उनको दिखाते चले गए जो पहली से बढ़ चढ़ कर थी, और हमने उनको अज़ाब में धर लिया ता-के वो अपनी रवीश से बाज़ आएं","हर अज़ाब के मौके पर वो कहते, ऐ साहिर (जादूगर/जादूगर), अपने रब की तरफ से जो मनसब तुझे हासिल है उसकी बिना पर हमारे लिए उसकी दुआ कर, हम जरूर राह-ए-रास्त पर आ जाएंगे","मगर जून ही के हम उन्पर से अजाब हटा देते हैं वो अपनी बात से फिर जाते थे","एक रोज फिरौन ने अपनी कौम के दरमियान पुकार कर कह, \"लोगन, क्या मिसर (मिस्र) की बादशाही मेरी नहीं है, और ये नहरें (धाराएं) मेरे नीचे नहीं दिख रही हैं? क्या तुम लोगों को नज़र नहीं आती","मैं बेहतर हूं या ये शक्स जो ज़लील ओ हक़ीर है और अपनी बात भी खोल कर बयान नहीं कर सकता","क्यों न इसपर सोने (सोना) के कंगन (चूड़ियाँ) उतारे गए? या फरिश्तों का एक दस्ता इसकी अर्दली में ना आया?”","उसने अपनी कौम को हल्का समझा और उनहों ने उसकी इताअत की, दर हकीकत वो था हाय फासिक लोग","आखिर ए कार जब उनहों ने हमें गजबनाक करदिया तो हमने उनसे इंतकाम लिया और उनको इकत्था गर्क (डूबना) किया","और बाद वालों के लिए पेश-रो और नामोना इब्रत बनाकर रख दिया","और जॉनी के इब्ने मरियम (यीशु) की मिसाल दी गई, तुम्हारी क़ौम के लोगों ने उसपर गुल मचा दिया (चिल्ला उठे/ शोर मचाया)","और लगे कहने के हमारे माबूद अच्छे hain ya woh? ये मिसाल वो तुम्हारे सामने महज़ कच-बेहसी (तर्क/विवाद) के लिए लाए हैं, हकीकत ये है के ये हैं झगड़लू लोग","इब्ने मरियम (जीसस) इसके सिवा कुछ ना था एक बंदा था जिसपर हमने इनाम किया और बानी इसराइल के लिए अपनी क़ुदरत का एक नामुना बना दिया","हम चाहें तो तुमसे फ़रिश्ते अदा कर दें जो ज़मीन में तुम्हारे जनाशीं (उत्तराधिकारी) हों","और वो दर-असल कयामत की एक निशानी है, पास तुम हमें शक्क ना करो मेरी बात मान लो, यही सीधा रास्ता है","ऐसा ना हो शैतान तुमको उसे रोक दे के वो तुम्हारा खुला दुश्मन है","और जब ईसा (यीशु) सारे निशानियां लिए हुए आये थे तो उसने कहा था के \"मैं तुम लोगों के पास हिकमत लेकर आया हूं, और इसलिए आया हूं के तुमपर बाज़ उन बातों की हकीकत खोल दूं जिन में तुम इख्तिलाफ कर रहे हो, लिहाजा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो","हकीकत ये है के अल्लाह ही मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी।उसी की तुम इबादत करो, यही सीधा रास्ता है”","मगर (उसकी इस साफ तालीम के बावजूद) गिरोहोन (गुटों) ने आपस में इख्तिलाफ किया, पास तबही है उन लोगों के लिए जिन्होन ने ज़ुल्म किया एक दर्दनाक दिन के अज़ाब से","क्या ये लोग अब बस इसी चीज़ के मुंतज़िर हैं के अचानक अंदर क़ियामत आ जाए और इन्हें ख़बर भी ना हो","वो दिन जब आएगा तो मुत्तक़िन को छोड़ कर बाकी सब दोस्त एक दूसरे के दुश्मन हो जाएंगे","हम रोज़ उन लोगों से जो हमारी आयत पर ईमान लाए थे और मुती-ए-फ़रमान बनकर रहेंगे","कह जाएगा के \"ऐ मेरे बंदों (नौकरों), आज तुम्हारे लिए कोई खौफ नहीं और ना तुम्हें कोई गम लाहिक होगा","दाखिल हो जाओ जन्नत में तुम और तुम्हारी बीवीयां, तुम्हें खुश कर दिया जाएगा\"","उनके आगे जल्द ही (सुनहरा) के थल (प्लेटर्स) और सागर गर्दिश कराएंगे और हर मन भाती और निगाहों को लज्जत देने वाली चीज वहां मौजूद होगी। उनसे कहा जाएगा, \"तुम अब यहां हमेशा रहोगे","तुम इस जन्नत के वारिस अपने उन अमल की वजह से हुए हो जो तुम दुनिया में करते रहे","तुम्हारे लिए यहां बकसरत फ़वाके (प्रचुर मात्रा में फल) मौजूद हैं जिनमें तुम खाओगे\"","रहे मुजरिम, तो वो हमेशा जहन्नुम के अज़ाब में मुबतला रहेंगे","कभी उनके अज़ाब में कमी न होगी, और वो हममें मयुस पैदा होंगे","उन्पर हमने ज़ुल्म नहीं किया बलके वो खुद ही अपने ऊपर ज़ुल्म करते रहेंगे","वाह पुकारेंगे, \"ऐ मालिक, तेरा रब हमारा काम ही तमाम का दे तो अच्छा है\" वो जवाब देगा \"तुम यूं ही पड़े रहोगे","हम तुम्हारे पास हक़ लेकर आए थे, मगर तुम में से अक्सर को हक़ ही नगावार था\"","लोगों ने क्या कहा इक़दाम (कथानक) करने का फ़ैसला कर लिया है? अच्छा तो हम भी फिर एक फैसला लेते हैं","क्या इन्हों ने ये समझा रखा है कि हम इनकी राज की बातें और इनकी सरगोशियां सुनते नहीं हैं? हम सब कुछ सुन रहे हैं और हमारे फरिश्ते इनके पास ही लिख रहे हैं","इनसे कहो, अगर वक्त रहमान की कोई औलाद होती तो सबसे पहले इबादत करने वाला मैं होता”","पाक है आसमान और जमीन का फरमा, अर्श का मालिक, उन सारी बातों से जो ये लोग हमारी तरफ मंसूब करते हैं","अच्छा, इन्हें अपनी बात ख़यालत में गर्क और अपने खेल में मुनाहमिक रहने दो, यहाँ तक के ये अपना वो दिन देख लें जिसका इन्हें खौफ़ दिलाया जा रहा है","वही एक आसमान मैं भी खुदा है और ज़मीन में भी खुदा, और वही हकीम ओ अलीम है","बहुत बाला-ओ-बरतर है वो जिसका क़ब्ज़ में ज़मीन और आसमान और हर उस चीज़ की बादशाही है जो ज़मीन ओ आसमान के दरमियान पाई जाती है। और वही कयामत की घड़ी का इल्म रखा है, और उसकी तरफ तुम सब पलटे जाने वाले हो","उसको छोड़ कर ये लोग जिन्हें पुकारते हैं वो किसी शफात का इख्तियार नहीं रखते, इल्ला ये के कोई इल्म की बिना पर हक की शहादत दे","और अगर तुम इनसे पूछो के इन्हें किसने चुकाया है तो ये खुद कहेंगे के अल्लाह ने। फिर कहां से ये धोखा खा रहे हैं","कसम है रसूल के इस क़ौल की ऐ रब, ये वो लोग हैं जो मान कर नहीं देते","अच्छा, ऐ नबी इनसे दरगुज़र करो और कहदो के सलाम हैं तुम्हें, अनकरीब इन्हें मालूम हो जाएगा","हा मीम","कसम है इस किताब ए मुबीन की","के हमने इसे एक बड़ी खैर ओ बरकत वाली रात में नाज़िल किया है, क्योंकि हम लोगों को मुतनब्बह (चेतावनी) करने का इरादा रखते थे","ये वो रात थी जिसमें हर मामले का हकीमना फैसला","हमारे हुकुम से सादिर किया जाता है। हम एक रसूल भेजने वाले थे","तेरे रब की रहमत के तौर पर। यकीनन वही सब कुछ सुनने और जाने वाला है","आसमानो और ज़मीन का रब और हर उस चीज़ का रुब जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान है अगर तुम लोग वाक़ई यक़ीन रखो वाले हो","कोई माबूद उसके सिवा नहीं है। वही जिंदगी अता करता है और वही मौत देता है।तुम्हारा रब और तुम्हारे उन असलाफ (पूर्वजों) का रब जो पहले गुजर चुके हैं","(मगर फिल-वक़्हे इन लोगों को यकीन नहीं है) बल्के ये अपने शक्क में पड़े खेल रहे हैं","अच्छा इंतजार करो उस दिन का जब आसमान सारे धुवां (धुआं) के लिए आएगा","और वो लोगों पर छा जाएगा, ये है दर्दनाक सजा","(अब कहते हैं के) \"परवरदिगार, हमपर से ये अजब ताल दे, हम ईमान लाते हैं\"","इनकी गफ़लत कहाँ डर होती है? इनका हाल तो ये है के इन के पास रसूल ए मुबीन आ गया","फिर भी ये उसकी तरफ मुल्ताफ़ित ना हुए और कहा के “ये तो सिखाया पड़ा बावला है”","हम जरा अजब हटाये देते हैं, तुम लोग फिर वही कुछ करोगे जो पहले कर रहे थे","जिस रोज़ हम बड़ी ज़र्ब (हमला) लगाएंगे वो दिन होगा जब हम तुमसे इंतिक़ाम लेंगे","हम इनसे पहले फिरौन की क़ौम को इसी आज़माइश में डाल चुके हैं। उनके पास एक निहायत शरीफ़ रसूल आया","और उसने कहा \"अल्लाह के बंदों को मेरे हवाले करो, मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं","अल्लाह के मुक़ाबले में सरकशी न करो। मैं तुम्हारे सामने (अपनी ममुरिअत की) सारी सनद (स्पष्ट अधिकार) पेश करता हूं","और मैं अपना रुब और तुम्हारे रुब की पनाह ले चूका हूं इसके लिए तुम मुझपर हमला-आवार (हमला) हो","अगर तुम मेरी बात नहीं मानते तो मुझपर हाथ डालने से बाज रहो”","आख़िर ए कार उसने अपने रब को पुकारा के ये लोग मुजरिम हैं","(जवाब दिया गया) अच्छा तो रात-ओ-रात मेरे बंदों (नौकरों) को लेकर चल पढ़। तुम लोगों का पीछा किया जाएगा","समंदर को उसके हाल पर खुला छोड़ दे। ये सारा लश्कर गर्क (डूबने) होने वाला है","कितने ही बाग और चश्मे","और खेत (बगीचे) और शानदार महल थे जो वो छोड़ गए","कितने हाय ऐश के सर-ओ-समां, जिन में वो मजे कर रहे थे उनके पीछे धरे रह गए","ये हुआ उनका अंजाम, और हमने दूसरों को इन चीज़ों का वारिस बना दिया","फिर ना आसमां अनपर रोया ना ज़मीन, और ज़रा सी मोहलत भी उनको ना दी गई","इस तरह बनी इसराइल को हमने ज़िल्लत के अज़ाब","फ़िरौन से नजात दी जो हद से गुजर जाने वालों में फिल वक़्क़े बदे अनचे दर्जे का आदमी था","और उनकी हालात जानते हैं, उनको दुनिया की पुरानी क़ौम पर तर्जीह दी","और उन्हें ऐसी निशानियां दिखाई गईं जिनमें सारी आजमाइश थी","ये लोग कहते हैं","\"हमारी पहली मौत के सिवा और कुछ नहीं उसके बाद हम दोबारा उठे जाने वाले नहीं हैं","अगर तुम सच्चे हो तो उठ लाओ हमारे बाप दादा को\"","ये बेहतर है या तुब्बा की क़ौम और उसे पहले के लोग? हमने उनको इसी बिना पर तबाह किया के वो मुजरिम हो गए थे","ये आसमान ओ ज़मीन और इनके दरमियान की चीजें हमने कुछ खेल के तौर पर नहीं बना दी है","इनको हमने बार-हक़ अदा किया है, मगर अक्सर लोग जानते हैं","सबके उठाए जाने के लिए थे-शुदा वक़्त फ़ैसले का दिन है","वो दिन जब कोई अज़ीज़ क़रीब अपने किसी अज़ीज़ क़रीब के लिए कुछ भी काम नहीं आएगा। और न कहीं से उन्हें कोई मदद मांगेगी","सिवाय इसके अल्लाह ही किसी पर रहम करे, वो ज़बरदस्त और रहीम है","ज़ख़्म का दरख्त (पेड़)","गुनहगार का खा-जा (खाना/भोजन) होगा","पूंछ (तेल) की तिलझट (ड्रेग्स) जैसा, पैट (बेलीज़) में इस तरह जोश खाएगा","जैसा खौलता (उबलता) हुआ पानी जोश खाता है","पकाडो इसे और क्रोधित-ते (घसीटते हुए) हुए ले जाओ इसको जहन्नुम के बीचों बीच","और उंधैल (डालो) दो इसके सर पर खुलते (उबलता हुआ) पानी का अज़ाब","चक्ख इसका मजा, बड़ा जबरदस्त इज्जतदार आदमी है तू","ये वही चीज है जिसके आने में तुमलोग शक्क रखते थे”","खुदा तरस लोग अमन की जगह में होंगे","बाघों (बगीचे) और चश्मे में","हरीर-ओ-दीबा (रेशम और ब्रोकेड) के लिबास पहने, आमने सामने बैठे होंगे","ये होगी इनकी शान और हम गोरी गोरी आह-ओ-चश्म औरतें उन्हें बियाह देंगे","वहां वो इत्मिनान से हर तरह की लज़ीज़ चीज़ तालाब करेंगे","वहां मौत का मज़ा वो कभी ना छोड़ेंगे। बस दुनिया में जो मौत आ चुकी सो आ चुकी और अल्लाह अपने फज़ल से","उनको जहन्नुम के अज़ाब से बच्चा देगा यही बड़ी कामयाबी है","ऐ नबी (एसएएस) हमने इस किताब को तुम्हारी जुबान में सहल (आसान/आसान) बना दिया है ताके ये लोग हिदायत हासिल करें","अब तुम भी इंतज़ार करो, ये भी मुंतज़िर (इंतज़ार कर रहे) हैं","हा मीम","क्या किताब का नुज़ुल अल्लाह की तरफ से है जो ज़बरदस्त और हकीम है","हकीकत ये है के आसमां और ज़मीन में बेशुमार निशानियां हैं ईमान लाने वालों के लिए","और तुम्हारी अपनी पैदाइश में, और उन हैवानत (जानवरों) में जिनको अल्लाह (जमीन में) फैला रहा है, बड़ी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो यकीन लाने वाले हैं","और शब-ओ-रोज़ (रात और दिन) के फर्क ओ इख्तिलाफ में, और हम रिज्क में जैसे अल्लाह आसमान से नाज़िल फरमाता है फिर उसके ज़रिये से मुर्दा ज़मीन को जिला उठाता है, और हवाओं की गर्दिश में बहुत निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक़ल से काम लेते हैं","ये अल्लाह की निशानियां हैं जिनमें हम तुम्हारे सामने ठीक ठीक बयान कर रहे हैं। अब आखिर अल्लाह और उसकी आयत के बाद और कौन सी बात है जिसपर ये लोग ईमान लाएंगे","तबाही है हर हमारे झूठे बाद अमल शक्स के लिए","जिसके सामने अल्लाह की आयतें पड़ी जाती हैं, और वह उनको सुनता है, फिर पूरे इस्तकबार के साथ अपने कुफ्र पर है एडीए रहता है गोया उसने उनको सुना ही नहीं। ऐसे शक्स को दर्दनक अज़ाब का मसला सुना दो","हमारी आयत में से कोई बात जब उसके इल्म में आती है तो वो उनका मज़ाक बना लेता है। ऐसे सब लोगों के लिए ज़िल्लत का अज़ाब है","उनके आगे जहन्नुम है। जो कुछ भी उन्हें दुनिया में कमाया है उसमें से कोई चीज उनके किसी काम ना आएगी। ना उनके वो सरपरस्त ही उनके लिए कुछ कर पाएंगे जिनमें अल्लाह को छोड़ कर उन्हें ने अपना वली बना रक्खा है। उनके लिए बड़ा अज़ाब है","ये कुरान सरसर हिदायत है, और उन लोगों के लिए बला का दर्दनाक अज़ाब है जिन्हों ने अपने रब की आयत को मान-ने से इंकार किया","वाह अल्लाह हाय तो है जिसने तुम्हारे लिए समंदर को मुसक्कर किया ता-के उसके हुकुम से कश्तियां उसमें चलें और तुम उसका फजल तलाश करो और शुक्र गुजार हो","उसने जमीन और आसमान की सारी ही चीजों को तुम्हारे लिए मुस्कुरा कर दिया, सब कुछ अपने पास से। इसमें बड़ी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फिक्र करने वाले हैं","(ऐ नबी) ईमान लाने वालों से कहदो के जो लोग अल्लाह की तरफ से बुरे दिन आने का कोई अंदाज़ा नहीं रखते, उनकी हरकतों पर दरगुज़र से काम लें ता-के अल्लाह खुद एक गिरोह को उसकी कमाई का बदला दे","जो कोई नेक अमल करेगा अपने ही लिए करेगा, और जो बुरा करेगा वो आप ही उसका खुम्याज़ा (परिणाम) भुगतेगा। फिर जाना तो सबको अपनी रुब ही की तरफ है","इस पहले बानी इजराइल को हमने किताब और हुकुम और नबुवत अता की थी, उनको हमने उमड़ा समान ए ज़िस्त से नवाजा, दुनिया भर के लोगों पर उन्हें फजीलत अता की","और दीन के मामले में उन्हें वाज़ेह हिदायत दे दी। फिर जो इख्तिलाफ़ उनके दरमियान रुनामा हुआ वो (नवाक़िफ़ियत की वजह से नहीं बलके) इल्म आ जाने के बाद हुआ और उस बिना पर हुआ के वो आपस में एक दूसरे पर ज़्यादा करना चाहते थे। अल्लाह कयामत के रोज़ उन मामलात का फैसला फरमादेगा जिनमें वो इख्तिलाफ करते रहेंगे","इसके बाद ऐ नबी हमने तुमको दिन के मामले में एक साफ शाह-राह (शरीयत) पर कायम किया है। लिहाज़ा तुम उसी पर चलो और उन लोगों की ख्वाहिश का इत्तिबा न करो जो इल्म नहीं रखते","अल्लाह के मुक़ाबले में वो तुम्हारे कुछ भी काम नहीं आ सकते। ज़ालिम लोग एक दूसरे के साथी हैं, और मुत्तक़ियों का साथी अल्लाह है","ये बसीरत की रोशनी हैं सब लोगों के लिए और हिदायत और रहमत उन लोगों के लिए जो यकीन लायें","क्या वो लोग जिन्होन ने बुराइयों का इर्तिक़ाब किया है ये समझे बैठे हैं के हम उन्हें और ईमान लाने वालों और नेक अमल करने वालों को एक जैसा कर देंगे के इनका जीना और मरना यक्सन हो जाए? बहुत बुरे हुकुम हैं जो ये लोग लगाते हैं","अल्लाह ने तो आसमानो और ज़मीन को बरहक़्क अदा किया है और इसके लिए किया है कि हर मुतनफ़िस को उसकी कमाई का बदला दिया जाए। लोगों पर ज़ुल्म हरगिज़ ना किया जाएगा","फिर क्या तुमने कभी उस शक्स के हाल पर भी गौर किया जिसने अपनी ख्वाहिश ए नफ़्स को अपना खुदा बना लिया और अल्लाह ने इल्म के बावज़ूद उसे गुमराही में फेंक दिया और उसके दिल और कानो (कान) पर मोहर लगा दी और उसकी आँखों पर पर्दा डाल दिया? अल्लाह के बाद अब कौन है जो उसे हिदायत दे? क्या तुम लोग कोई सबक नहीं लेते","ये लोग कहते हैं कि \"जिंदगी बस यहीं हमारी दुनिया की जिंदगी है, यहीं हमारा मरना और जीना है और गर्दिश-ए-अय्याम (समय बीतना) के सिवा कोई चीज नहीं हो हमें हलाक करती हो।\" दर हकीकत इस मामले में इनके पास कोई इल्म नहीं है ये महज़ गुमान की बिना पर ये बातें करते हैं","और जब हमारी वजह आयत उन्हें सुनाई जाती है तो इनके पास कोई हुज्जत इसके सिवा नहीं होती के उठ लाओ हमारे बाप दादा को अगर तुम सच्चे हो","ऐ नबी इनसे कहो अल्लाह हाय तुम्हें जिंदगी बक्शता है, फिर वही तुम्हें मौत देता है, फिर वही तुमको उस कयामत के दिन जमा करेगा जिसके आने में कोई शक्क नहीं। मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं","ज़मीन और आसमानों की बादशाही अल्लाह ही की है, और जिस रोज़ क़यामत की घड़ी आ खड़ी होगी उस दिन बातिल परस्त खसारे (नुक्सान) में पढ़ जायेंगे","हमारा वक्त तुम हर गिरू को घुटनो (घुटनों) के बल गिरा देखोगे। हर गिरोह को पुकारा जायेगा के आये और अपना नाम अमल देखे। उनसे कहा जाएगा: \"आज तुम लोगों को उन अमल का बदला दिया जाएगा जो तुम करते रहे थे","ये हमारा तैयार किया हुआ अमल नामा है जो तुम्हारे ऊपर ठीक ठीक शहादत दे रहा है, जो कुछ भी तुम करते थे उसे हम लिखवाते जा रहे थे\"","फिर जो लोग ईमान लाए थे और नेक अमल करते रहे थे उनको रब्ब अपनी रहमत में दखल करेगा। और यही सारी कामयाबियां हैं","और जिन लोगों ने कुफ्र किया था उनसे कहा जाएगा \"क्या मेरी आयत तुमको नहीं सुनती जाती थी? मगर तुमने तकब्बुर किया और मुजरिम बनकर रहे","और जब कहा जाता था कि अल्लाह का वादा बार- हक़ है और कयामत के आने में कोई शक्क नहीं, तो तुम कहते थे के हम नहीं जानते कयामत क्या होती है, हम तो बस एक गुमान सा रखते हैं, यकीन हम को नहीं है”","हमारा वक्त उनके अमल की बुराइयां खुल जाएंगी और वो उसी चीज के फेर में आ जाएंगी जिसका वो मज़ाक उड़ाया करते थे","और इनसे कहा जाएगा के \"आज हम भी उसी तरह तुम्हें भुला देते हैं, जिस तरह तुम इस दिन की मुलाकात को भूल गए थे। तुम्हारा ठिकाना अब दोज़ख़ है और कोई तुम्हारी मदद करने वाला नहीं है","ये तुम्हारा अंजाम इस लिए हुआ है कि तुमने अल्लाह की आयत बना लिया था और तुमने दुनिया की जिंदगी में धोखे में डाल दिया था, आज ना ये लोग दोज़ख से निकल जाएंगे और ना इनसे कहा जाएगा माफ़ी मांग कर अपने रब को राजी करो”","पास तारीफ अल्लाह ही के लिए है जो जमीन और आसमानों का मालिक और सारे जहां वालों का परवरदिगार है","जमीन और आसमान में बदाई उसके लिए है और वही जबरदस्त (सबसे ताकतवर) और दाना (सबसे बुद्धिमान) है","हा मीम","इस किताब का नुज़ुल अल्लाह ज़बरदस्त और दाना की तरफ से है","हमने ज़मीन और आसमान को और उन सारी चीज़ों को जो उनके दरमियान हैं बार-हक़्क़ और एक मुद्दत ए ख़ास के तायूँ के साथ अदा किया है। मगर ये काफ़िर लोग हमें हकीकत से मुंह मोड़े हुए हैं जिन्होंने उनको खबरदार किया है","ऐ नबी, इनसे कहो, \"कभी तुमने आंखें खोल कर देखा भी के वो हस्तियां हैं क्या जिन्हे तुम खुदा को छोड़ कर पुकारते हो? ज़रा मुझे दिखाओ तो सही के\" ज़मीन में उनको ने क्या पेदा किया है, या आसमान की तख़लीक़ ओ तदबीर में उनका क्या हिसा है।","आखिर उस शक्स से ज्यादा बहका हुआ इंसान और कौन होगा जो अल्लाह को छोड़ कर उनको पुकारे जो कयामत तक उसे जवाब नहीं दे सके, बलके इसे भी बेखबर हैं के पुकारने वाले उनको पुकार रहे हैं","और जब तमाम इंसान जमा किए जाएंगे हमें वक्त वो अपने पुकारने वालों के दुश्मन और उनकी इबादत के मुनकिर होंगे","इन लोगों को जब हमारी साफ आयतें सुनाई जाती हैं और हक इनके सामने आ जाता है तो ये काफिर लोग उसके मुतालिक कहते हैं के ये तो खुला जादू है","क्या उनका कहना ये है के रसूल ने इसे खुद गढ़ लिया है? इनसे कहो \" अगर मैंने इसे खुद गढ़ लिया है तो तुम मुझे खुदा की पकड़ से कुछ भी न बचा पाओगे। जो बातें तुम बनाते हो अल्लाह उनको खूब जानता है, मेरे और तुम्हारे दरमियान वही गवाही देने के लिए काफी है, और वह बड़ा दरगुजर करने वाला है और रहीम है”","इनसे कहो “मैं कोई निराला रसूल तो नहीं हूं, मैं नहीं जानता कि कल तुम्हारे साथ क्या होना है और मेरे साथ क्या। कुछ नहीं हूं\"","ऐ नबी, इनसे कहो \"कभी तुमने सोचा भी के अगर ये कलाम अल्लाह ही की तरफ से हुआ और तुम ने इसका इंकार कर दिया (तो तुम्हारा क्या अंजाम होगा)?और इस जैसा एक कलाम पर तो बानी इजराइल का एक गवाह शहादत भी दे चुका है। वो ईमान ले आया और तुम अपने घमंड में पड़े रहोगे। ऐसे ज़ालिमों को अल्लाह हिदायत नहीं दिया करता”","जिन लोगों ने मान-ने से इंकार कर दिया है वो ईमान लाने वालों के मुतालिक कहते हैं “के अगर इस किताब को मान लेना कोई अच्छा काम होता तो ये लोग इस मामले में हमसे हैं सबकात न लेजा सक्ते”। चुनके इन्हों ने उसे हिदायत न पाई, अब ये जरूर कहेंगे के ये तो पुराना झूठ है","हलांके इसे पहले मूसा की किताब रहनुमा और रहमत बनकर आ चुकी है, और ये किताब उसकी तस्दीक करने वाली जुबान-ए-अरबी में आई है ताके ज़ालिमों को मुतनब्बे (चेतावनी) करदे और नीक रवीश इख्तियार करने वालों को बशारत दे दे","यकीनन जिन लोगों ने केहदिया के अल्लाह ही हमारा रब है, फिर हम पर जम गए, उनके लिए ना कोई खौफ है और ना वो गमगीन होंगे","ऐसे सब लोग जन्नत में जाने वाले हैं। जहां वो हमेशा रहेंगे अपने उन अमल के बदले जो वो दुनिया में करते रहेंगे","हमने इंसान को हिदायत की कि वो अपने वालिदाओं के साथ नई बात करें। उसकी माँ ने मुशक्कत उठा कर उसे पैत में रक्खा और मुशक्कत उठा कर ही उसको जाना। और उसके हमाल और दूध छुड़ाने में तीस (तीस) महीने लग गए। यहां तक ​​के जब वो अपनी पूरी ताक़त को पाहुंचा और चालीस (चालीस) साल का हो गया तो उसने कहा “ऐ मेरे रब मुझे तौफ़ीक़ दे के मैं तेरी उन नियामतों का शुक्र अदा करूं जो तू ने मुझे और मेरे वालिदैं को अता फैमई, और ऐसा नीक अमल करूं जिस से तू राजी हो, और मेरी औलाद को भी नेक बना कर मुझे सुख दे, मैं तेरे हुजूर तौबा करता हूं और ताबे फरमान (मुस्लिम) बंदों में से हूं”","इस तरह के लोगों से हम उनके बहतरीन अमल को कबूल करते हैं और उनकी बुराइयों से दरगुजर कर जाते हैं हैन. ये जन्नती लोगों में शामिल होंगे हमें सच्चे वादे के मुताबिक जो इनसे क्या जानता है","और जिस शक्स ने अपने वाल्डेन से कहा \"उफ्फ, तंग कर दिया तुमने\" क्या तुम मुझे ये खौफ फैलाते हो के मैं मरने के बाद फिर से काबर से निकल जाऊंगा मुझ से पहले बहुत सी नसलें (पीढ़ियां) गुजर चुकी हैं (उनमें से कोई उठ कर न आया)'' मां और बाप अल्लाह की दुहाई देकर कहते हैं '' अरे बदनसीब, मान जा, अल्लाह का वादा सच्चा है'' मगर वो कहता है '' ये सब अगले वक्त की फरसुदा (कथाएं) कहानियाँ हैं\"","ये वो लोग हैं जिनपर अज़ाब का फैसला चस्पां हो चूका है। इनसे पहले जिन्नो और इंसानों के जो तोले (समुदाय) (इसी क़ौम के) हो गुज़रे हैं उनमें ये भी जा शामिल होंगे। बेशक ये घाटे (नुकसान) में रह जाने वाले लोग हैं","दोनों गिरोहोन में से हर एक के दर्जे उनके अमल के लिहाज़ से हैं ता-के अल्लाह उनके किए का पूरा पूरा बदला उनको दे। उनपर जुल्म हरगिज़ न किया जाए","फिर जब ये काफिर आग के सामने ला खड़े किए जाएंगे तो उनसे कहा जाएगा: \"तुम अपने हिसाब की नियम अपनी दुनिया की जिंदगी में ख़तम कर चुके और उनका लुत्फ तुमने उठा लिया, अब जो तकब्बुर तुम ज़मीन में किसी हक़ के बिना करते रहो और जो नफ़रमानियाँ तुमने कि उनके पद में आज तुमको ज़िल्लत का अज़ाब दिया जाएगा”","ज़रा इन्हें आद के भाई (हुद) का किस्सा सुनाओ जबके उसने अहकाफ में अपनी कौम को खबरदार बनाया था और ऐसे खबरदार करने वाले उसे पहले भी गुजर चुके थे और उसके बाद भी आते रहे के \"अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी ना करो, मुझे तुम्हारे हक में एक बदाई\" हौलनाक दिन के अज़ाब का अंदेशा है”","उनहों ने कहा “क्या तू इसलिए आया है के हमें बेहका कर हमारे मबूदों से बरगश्ता कर दे? अच्छा तो ले आ अपना वो अजब जिसे तू हमें डराता है अगर वक्त तू सच्चा है”","उसने कहा के “इसका इल्म तो अल्लाह को है, मैं सिर्फ वो पैग़ाम तुम्हें पहन रहा हूं जिसे देकर मुझे भेजा गया है। मगर मैं देख रहा हूँ के तुमलोग जहालत बरात रहे हो”","फिर जब उनहों ने हमें अज़ाब को अपनी वादियों (घाटियों) की तरफ आते देखा तो कहने लगे \"ये बादल है जो हमको सैराब कर देगा\"। बलके ये वही चीज़ है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थे, ये हवा का तूफान है जिसमें दर्दनक अज़ाब चला आ रहा है","अपने रब के हुकुम से हर चीज को तबाह कर डालेगा\"। आखिर ई कार उनका हाल ये हुआ के उनके रहने के जघोन के सिवा वहां कुछ नजर ना आता था। इस तरह हम मुजरिमों को बदला दिया करते हैं","उनको हमने वो कुछ दिया था जो तुम लोगों को नहीं दिया है, आंखें और दिल सब कुछ दे रखे थे, मगर ना वो कौन है। आँखें, ना दिल, क्योंकि वो अल्लाह की आयत का इन्कार करते थे, और उसी चीज़ के फिर में वो आ गए जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे","तुम्हारे घेरे ओ पेश के इलाक़ों में बहुत से बस्तियों को हम परेशान कर चुके हैं। हमने अपनी आयत भेज कर बार-बार तरह तरह से उनको समझा, शायद के वो बाज़ आ जाएं","फिर क्यों ना उन हस्तियों ने उनकी मदद की जिनमें अल्लाह को छोड़ कर उन्होन ने तकरारब-ए-इलल्लाह का ज़रिया समझे हुए मबूद बना लिया था? बल्के वो तो उनसे खोए गए। मैं और ये था उनके झूठ और उन बनावती अकीदों का अंजाम जो उन्होन ने घड रक्खे थे","(और वो वाकिया भी काबिल ए जिक्र है) जब हम जिन्नो के एक गिरूह को तुम्हारी तरफ ले आए थे ता-के कुरान सुने। जब वो हमें जगह पाहुंचे (जहां तुम कुरान पढ़ रहे थे) तो उनको ने आपस में कहा खामोश हो जाओ, फिर जब वो पढ़ा जा चुका तो वो खबरदार करने वाले बन कर अपनी क़ौम की तरफ पलटे(लौटा)","उनहोन ने जा कर कहा \"ऐ हमारी\" कौम के लोग, हमने एक किताब सुनी है जो मूसा के बाद नाज़िल की गई है, तस्दीक (पुष्टि करें) करने वाली है अपने से पहले आई हुई किताबों की, रहनुमाई करती है हक़ और राह-ए-रास्त की तरफ","ऐ हमारी क़ौम के लोगों, अल्लाह की तरफ बुलाने वाले की दावत क़बूल करलो और इसपर ईमान ले आओ, अल्लाह तुम्हारे गुनाहों से दरगुज़र पैदा करेगा और तुम्हें अज़ाब ए आलिम से बचाएगा","","और क्या इन लोगों को ये समझाई नहीं देता के जिस खुदा ने ये ज़मीन और आसमां पैदा किया है और इनको बनाते हुए जो ना थका, वो जरूर इसपर कादिर है के मुर्दों (मृत) को जिला उठे? क्यों नहीं, यक़ीनन वो हर चीज़ की क़ुदरत रखता है","जिस रोज़ ये काफिर आग के सामने लाये जायेंगे, हमें वक़्त उनसे पूछा जायेगा \"क्या ये हक़ नहीं है?\" ये कहेंगे \" हां, हमारे रब की कसम (ये वाकाई हक़ है)\" अल्लाह फरमायेगा \" अच्छा तो अब अज़ाब का मजा चक्खो अपने हमें इंकार की याद में जो तुम करते रहे थे\"","पस ऐ नबी, सब्र करो जिस तरह से उलूल अज्म (दृढ़ इच्छाशक्ति) रसूलों ने सब्र किया है, और इनके मामले में जल्दी ना करो। जिस रोज़ ये लोग हमें चीज़ को देख लेंगे जिसका इन्हें ख़ौफ़ दिलाया जा रहा है तो इन्हें यूं मालूं होगा के जैसे दुनिया में दिन की एक घड़ी भर से ज्यादा नहीं रह रहे थे। बात पहुंचा दी गई, अब क्या नफरमान लोगों के सिवा और कोई हलक होगा","जिन लोगों ने कुफ्र किया और अल्लाह के रास्ते से रोका अल्लाह ने उनके अमल को बर्बाद (व्यर्थ) कर दिया","और जो लोग ईमान लाए और जिन्होन ने नेक अमल किये और उस चीज़ को मान लिया जो मुहम्मद पर नाज़िल हुई है और है वो सरसर हक़ उनके रब की तरफ से अल्लाह ने उनकी बुराइयाँ (बुरे काम) उनसे दूर करदी और उनका हाल दुरुस्त करदिया","ये इस लिए के कुफ्र करने वालों ने बातिल (झूठ) की जोड़ी बनाई है और ईमान लेन वालों ने हमें हक की जोड़ी दी है जो उनके रब की तरफ से आया है। इस तरह अल्लाह लोगों को उनकी ठीक-ठीक हकीकत बता देता है","जब काफिरों से तुम्हारी मुठ-भैद (लड़ाई) हो तो पहला काम गर्दनें (गर्दन) मारना है, यहां तक ​​के जब तुम उनको अच्छी तरह से कुचल दो तब कैदियों (बंदियों) को मजबूत बांधो। इसके बाद (तुम्हें इख्तियार है) एहसान करो या फ़िदिये (फिरौती) का मुआमला करलो, ता-आंके लड़ायी अपनी हत्या डाल दे। ये है तुम्हारे करने का काम. अल्लाह चाहता है तो खुद ही उनसे निमत लेता है, मगर (ये तारीख़ा हमें ने इसके लिए इख्तियार किया है) ता-के तुम लोगों को एक दूसरे के ज़रीए से आज़माए और जो लोग अल्लाह की राह में मारे जाएंगे अल्लाह उनके अमल को हरगिज़ ज़या ना करेगा","वो उनकी रहनुमाई फरमायेगा, उनका हाल दुरुस्त कर देगा","और उनको हम जन्नत में दाख़िल करेगा जिसने उन्हें वाकिफ़ करा चुका है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम अल्लाह की मदद करोगे तो वो तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हारा क़दम मज़बूत जमा देगा","रहे वो लोग जिन्हों ने कुफ्र किया है, तो उनके लिए हलाकत है और अल्लाह ने उनके आमाल को भटका दिया है","क्योंकि उन्होन ने हमें चीज को नापसंद किया है जैसे अल्लाह ने नाज़िल किया है, लिहाजा अल्लाह ने उनके आमाल को बर्बाद कर दिया है","क्या वो जमीन में चले फिर ना थे के उन लोगों का अंजाम देखते हैं जो उनसे पहले गुजर चुके हैं? अल्लाह ने उनका सब कुछ उलट दिया, और काफिरों के लिए मुकद्दर में ऐसी ही नटाईज है","ये है उनके लिए ईमान लाने वालों का हमी ओ नासिर (रक्षक) अल्लाह है और काफिरों का हमी ओ नासिर (रक्षक) कोई नहीं","ईमान लाने वालों और नीक अमल करने वालों को अल्लाह उन जन्नतों में दाख़िल करेगा जिनके बारे में नीचे बताया गया है, और कुफ्र करने वाले बस दुनिया की चंद रोजा जिंदगी के मजे लूट रहे हैं, जानवरों की तरह खा पी रहे हैं, और उनका आखिरी ठिकाना जहन्नुम है","ऐ नबी (एसएएस) कितनी ही बस्तियां ऐसी गुजर चुकी हैं जो तुम्हारे उस बस्ती से बहुत ज्यादा जोरावर थी जिसने तुम्हें निकल दिया है? उन्हें हमने इस तरह हलक करदिया के कोई उनका बचाने वाला ना था","भला कहीं ऐसा हो सकता है कि जो अपने रब की तरफ से एक साफ ओ सारी हिदायत पर हो, वो उन लोगों की तरह हो जाए जिनके लिए उनका बुरा अमल खुशनुमा बना दिया गया है और वो अपनी ख़्वाहिशात के जोड़े बन गए हैं","परवाह-ऑन के लिए जिस जन्नत का वादा किया गया है उसकी शान तो ये है के उसमें नेह्रेइन बेह राही होंगी निथरे (अक्षम/अप्रदूषित) हुए पानी की, नेह्रेन बेह राही होंगी ऐसे दूध की जिसकी मजा (स्वाद) में जरा फर्क ना आया होगा, नहरें बेह राही होंगी ऐसी शराब की जो पीने वालों के लिए लजीज (स्वादिष्ट) होंगी, नहरें बह रही होंगी साफ शफाफ शेहद (शहद) की। उसमें उनके लिए हर तरह के फल होंगे और उनके रब की तरफ से बख्शीश। (क्या वो शक्स जिसके हिस्से में ये जन्नत आने वाली है) उन लोगों की तरह हो सकता है जो जहन्नम में हमेशा रहेंगे और जिनमें ऐसा गरम (गर्म) पानी पिलाया जाएगा जो उनके आंतें (आंत) तक काट देगा","उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो कान लगा कर तुम्हारी बात सुनते हैं और फिर जब तुम्हारे पास से निकलते हैं उन लोगों से जिन्हें इल्म की नियामत बक्शी गई है पूछते हैं के अभी अभी इन्होन ने क्या कहा था?ये वो लोग हैं जिनके दिलों पर अल्लाह ने थप्पड़ (सील) लगा दिया है और ये अपनी अपनी ख्वाहिश के जोड़े बने हुए हैं है","रहे वो लोग जिन्होन ने हिदायत पाई है, अल्लाह उनको और ज्यादा हिदायत देता है और उनको हिससे का तकवा अता फरमाता है","अब क्या ये लोग बस कयामत ही के मुंतजिर हैं के वो अचानक अंदर आ जाए? उसकी अलामत तो आ चुकी है जब वो खुद आ जाएगी तो इनके लिए हिदायत कबूल करने का कौनसा मौका बाकी रह जाएगा","पस ऐ नबी, खूब जान लो के अल्लाह के सिवा कोई इबादत का मुस्तहिक नहीं है, और माफ़ी मांगो अपने कसूर के लिए भी और मोमिन मर्दन और औरतों के लिए भी। अल्लाह तुम्हारी सरगर्मियों को भी जानता है और तुम्हारे ठिकाने से भी वाकिफ है","जो लोग ईमान लाए हैं वो कह रहे थे कि कोई सूरत क्यों नहीं नाज़िल की जाती (जिस में जंग का हुकुम दिया जाए) मगर जब एक मोहकम सूरत नाज़िल हो गई जिसमें जंग का जिक्र था तो तुमने देखा के जिनके दिलों में बीमारी थी वो तुम्हारी तरफ इस तरह देख रहे हैं जैसे किसी पर मौत छा गई हो। अफ़सोस उनके हाल पर","(उनकी ज़ुबान पर है) इत्ता का इकरार और अच्छी अच्छी बातें। मगर जब कतई हुकुम दे दिया गया हमें वक्त वो अल्लाह से अपने अहद में सच्चे निकलते तो उनके लिए अच्छा था","अब क्या तुम लोगों से इसके सिवा कुछ और तवक्कु की जा सकती है के अगर तुम उल्टे मुंह फिर गए तो जमीन में फिर फसाद बरपा करोगे और आपस में एक दूसरे के गले कटोगे","ये लोग हैं जिनपर अल्लाह ने लानत की और इनको अंधा (अंधा) और बेहरा बना दिया","क्या उन लोगों ने कुरान पर गौर नहीं किया, या दिलों पर उनके कुफल (ताले) चढ़े हैं","हकीकत ये है के जो लोग हिदायत वाजे हो जाने के बाद उसे फिर से गए उनके लिए शैतान ने इस रवीश को सहल बना दिया है और झूठी तवाक्कत का सिलसिला उनके लिए दराज़ कर रक्खा है","क्या उनके लिए अल्लाह के नाज़िल करदा दीन को नापसंद करने वालों से केहदिया के बाज़ मामलात में हम तुम्हारी मानेंगे।अल्लाह उनकी ये खुफिया बातें खूब जानता है","फिर हमें वक्त क्या हाल होगा जब फरिश्ते इनकी रूहें क़ब्ज़ करेंगी और इनके मुंह और पीठ पर मरते हुए इन्हें ले जाएंगे","ये इसी के लिए तो होगा के इन्होनें हमें तारीख़ की जोड़ी की जो अल्लाह को नाराज़ करने वाला है और हमें रज़ा का रास्ता इख्तियार करना पसंद नहीं है। इसी बिना पर उसने इनके सब आमाल जया कर दिए","क्या वो लोग जिनके दिलों में बीमार है ये समझे बैठे हैं के अल्लाह उनके दिलों के खोट (कीना) जाहिर नहीं करेगा","हम चाहें तो उन्हें तुमको आंखों से दिखा दें और उनके चेहरों से तुम उनको पहचान लो मगर उनके अंदाज़ ए कलाम से तो तुम उनको जान ही लोगे। अल्लाह तुम सब के अमल से ख़ूब वाकिफ़ है","हम ज़रूर तुम लोगों को आज़माइश में डालेंगे ताकि तुम्हारे हालात की जाँच करें और देख लें के तुम में मुजाहिद और साबित क़दम कौन हैं","जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह की राह से रोका और रसूल से झगड़ा किया जबके अनपर राह ए रास्ता वज़ेह हो चुकी थी, दर हकीकत वो अल्लाह का कोई नुक्सान भी नहीं कर सकता, बल्कि अल्लाह ही उनका सब किया करा देगा।","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम अल्लाह की इबादत करो और रसूल की इबादत करो और अपने अमल को बरबाद ना करो","कुफ्र करने वालों और राह ए खुदा से रुकने वालों और मरते दम तक कुफ्र पर जमे रहने वालों को तो अल्लाह हरगिज माफ ना करेगा","पस तुम बोदेह (बेहोश दिल) ना बनो और सुलह की अंधेरा ना करो। तुम ही ग़ालिब रहने वाले हो. अल्लाह तुम्हारे साथ है और तुम्हारे अमल को वो हरगिज जया ना करेगा","ये दुनिया की जिंदगी तो एक खेल और तमाशा है अगर तुम ईमान रखोगे और तकवे की रवीश पर चलते रहो अल्लाह तुम्हारे अजर तुमको देगा और वो तुम्हारे माल तुमसे ना मांगे गा","अगर कहीं वो तुम्हारे माल तुमसे मांग ले और सब के सब तुमसे तालाब करले तो तुम भूखल (कंजूसी / कंजूसी / कंजूस) करोगे और वह तुम्हारे खोट (असफलता) उबर लाएगा","देखो, तुम लोगों को दावत दी जा रही है कि अल्लाह की राह में माल खर्च करो इसपर तुम में से कुछ लोग हैं जो कंजूसी कर रहे हैं। हलाँके जो बुख़ल (कठिनाई) करता है वो डर हकीकत अपने आप ही से बुख़ाल कर रहा है। अल्लाह तो गनी (सर्व-पर्याप्त) है, तुम्हीं उसके मोहताज हो। अगर तुम अल्लाह से मुहं जोड़ोगे, तुम्हारी जगह किसी और कौम को ले आएगी और वो तुम जैसे ना होंगे","ऐ नबी, हमने तुमको खुली फतह अता करदी","ता-के अल्लाह तुम्हारी अगली पिचली हर कोटाही से दरगुर्जर फरमाये, और तुम अपनी नियामत की तकमील (पूरी) करदे, और तुम्हें सीधा रास्ता दिखाये","और तुमको जबरदस्त नुसरत बख्शे","वही है जिसने मोमिनो के दिलों में सकीनत ((शांति) नाज़िल फरमायी ता-के अपने ईमान के साथ वो एक ईमान और बड़ा लें. ज़मीन और आसमान के सब लश्कर अल्लाह के कब्ज़ा-ए-क़ुदरत में हैं, और वो आलिम ओ हकीम है","(उसने ये काम किया है) ता-के मोमिन मर्दन और औरतों को हमेशा रहने के लिए ऐसी जन्नत में दाख़िल फरमाये जिनके नीचे नहरेन बेह राही होंगी और उनकी बुराइयां उनसे दूर करदे। अल्लाह के नाज़दीक ये बदी कमियाबी है","और उन मुनाफिक मर्दों और औरतों और मुशरिक मर्दों और औरतों को सज़ा दे जो अल्लाह के मुतालिक बुरे गुमान रखते हैं। बुरेई के फेर में वो खुद ही आ गए हैं, अल्लाह का गजब असमान हुआ और उसने असमान लानत की और उनके लिए जहन्नुम मुहैय्या करदी जो बहुत ही बुरा ठिकाना है","जमीन और आसमानों के लश्कर अल्लाह ही के क़ब्ज़ा-ए-क़ुदरत में हैं और वह ज़बरदस्त और हकीम (बुद्धिमान) है","ऐ नबी हममें तुमको शहादत (गवाह) देने वाला बशारत (खुशखबरी) देने वाला और खबरदार कार्डने वाला बना कर भेजा है","ता-के ऐ लोगों, तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और उसका साथ दो, उसकी ताज़िम-ओ-तौकीर (उसका समर्थन करो, और सम्मान करो) करो और सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते रहो","ऐ नबी, जो लोग तुमसे बैत कर रहे थे। उनके हाथ पर अल्लाह का हाथ था. अब जो इस अहद को तोड़ेगा उसकी अहद शिकनी का वबल उसकी अपनी ही जात पर होगा, और जो हमें अहद को वफा करेगा जो उसने अल्लाह से किया है, अल्लाह अंककारिब उसको बड़ा अजर अता फरमाएगा","ऐ नबी, बदवी (बेडौंस) अरब में से जो लोग पिचे छोड़ दिए गए थे अब वो आ कर जरूर तुमसे कहेंगे के हमें अपने अमवाल और बाल बच्चों की फिक्र ने मशगुल कर रक्खा था. आप हमारे लिए मगफिरत की दुआ फ़मायें। ये लोग अपनी जुबान से वो बातें कहते हैं जो उनके दिलों में नहीं होती। उनसे कहना \"अच्छा, यही बात है तो कौन तुम्हारे मामले में अल्लाह के फैसले को रोक दे का कुछ भी इख्तियार रखता है अगर वो तुम्हें कोई नुक्सान पहचानना चाहिए या नफा बक्शना चाहिए? तुम्हारे अमल से तो अल्लाह ही बा-खबर है","(मगर असल बात वो नहीं है जो तुम कह रहे हो) बलके तुमने यूं समझा के रसूल और मोमिनीन अपने घर वालों में हरगिज पलट कर ना आ सकेंगे और ये ख्याल तुम्हारे दिलों को बहुत अच्छा लगेगा। और तुमने बहुत बुरे गुमान किये और तुम बहुत बुरे बातें (बेहद बुरे) लोग हो”","अल्लाह और उसके रसूल पर जो लोग ईमान न रखते हों ऐसे काफिरों के लिए हमने नफरत आग मुहैय्या कर रखी है","आसमानो और ज़मीन की बादशाही का मालिक अल्लाह हाय है। जिसे चाहे माफ करे और जिसे चाहे सजा दे। और वो गफूर ओ रहीम है","जब तुम माल-ए-गनीमत हासिल करने के लिए जाओगे तो ये पीछे छोड़े जाने वाले लोग तुमसे जरूर कहेंगे के ये चाहते हैं के अल्लाह के फरमान को बदल दें। इनसे साफ कह देना के \"तुम हरगिज हमारे साथ नहीं चल सकते। अल्लाह पहले ही ये फरमा चुका है\" ये कहेंगे के \"नहीं, बलके तुमलोग हमसे हसद कर रहे हो\" (हलांके बात हसद की नहीं है) बल्के ये लोग सही बात को कम ही समझते हैं","पिचे छोड़े जाने वाले बादवी (बेडौइन) अरब से कहना के \"अंकरीब तुम्हें ऐसे लोगों से लड़ने के लिए बुलाया जाएगा जो बड़े जोरावर हैं। तुमको उनसे जंग करनी होगी या वो मुती (समर्पण) हो जाएंगे।\" हमें वक्त है अगर तुमने हुकुम ए जिहाद की इताअत की तो अल्लाह तुम्हें अच्छा अजर देगा। और अगर तुम फिर उसी तरह मुंह मोड़ गए जिस तरह पहले मोड़ चुके हो तो अल्लाह तुम्हें दर्दनक सजा देगा","अगर अंधा और लंगड़ा और मरिज जिहाद के लिए ना आए तो कोई हराज नहीं। जो कोई अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करेगा अल्लाह उसे उन जन्नतों में दाख़िल करेगा जिनके बारे में पहले से पता नहीं होगा, और जो मुँह फेरेगा उसे वो दर्दनक अज़ाब देगा”","अल्लाह मोमिनो से ख़ुश हो गया जब वो दरख्त के आला तुमसे बैत (वफ़ादारी की कसम) कर रहे थे। उनके दिलों का हाल उसको मालूम था। इस लिए उसने उन्पर सकीनात (आंतरिक शांति) नाज़िल फरमाई, उनको इनाम में करीबी फतह बख्शी","और बहुत सा माल-ए-गनीमत उन्हें अता कर दिया वो (अंकारीब) हासिल करेंगे हकीम (बुद्धिमान) है","अल्लाह तुमसे ब-कसरत अमल-ए-गनीमत का वादा करता है जिन्हें तुम हासिल करोगे। फौरी तौर पर तो ये फतह उसने तुम्हें अता करदी और लोगों के हाथ तुम्हारे खिलाफ उथने से रोक दिए, ता-के ये मोमिनो के लिए एक निशानी बन जाए और अल्लाह सीधे रास्ते की तरफ तुम्हें हिदायत बख्शे","इसके अलावा दूसरे और गनीमतों का भी वो तुमसे वादा करता है जिनपर तुम अभी तक कादिर नहीं हुए हो और अल्लाह ने इनको घेर रखा है, अल्लाह हर चीज पर कादिर है","ये काफिर लोग अगर इस वक्त तुमसे हैं लड़ गए होते तो यकीनन पीठ फेर जाते और कोई हमी ओ मददगार न पाते","ये अल्लाह की सुन्नत है जो पहले से चली आ रही है और तुम अल्लाह की सुन्नत में कोई तबदीली न पाओगे","वही है जिसने मक्का की वादी में उनके हाथ तुमने और तुम्हारे हाथ उन्हें रोक दिए, हलांके वो उन पर तुम्हारे साथ गलाबा अता कर चूका था और जो कुछ तुम कर रहे थे अल्लाह उसे देख रहा था","वहां लोग तो हैं जिन्होन ने कुफ्र किया और तुमको मस्जिद ए हरम से रोका और हादी (कुर्बानी) के ऊंटों (ऊंटों) को उनकी कुर्बानी की जगह न पहनने दिया। अगर (मक्का में) ऐसे मोमिन मर्द ओ औरत मौजुद न होते जिन्हे तुम नहीं जानते, और ये खतरा ना होता के नादानस्तागी में तुम उन्हें प्यार करोगे और उससे तुमपर हरफ आएगा (तो जंग ना रुकी जाती। रोकी वो इस लिए हो गई) ता-के अल्लाह अपनी रहमत मैं जिसको चाहे दाख़िल करले। वो मोमिन अलग हो गए होते तो (एहले मक्का में से) जो काफिर थे उनको हम जरूर सजा देते","(यही वजह है के) जब इन काफिरों ने अपने दिलों में जाहिलाना हमियत बिठा ली तो अल्लाह ने अपने रसूल और मोमिनो पर सकीनत नाजिल फरमायी और मोमिनो को तक्वा की बात का पाबंद रक्खा, के वही उसके ज्यादा हकदार और उसके एहेल थे। अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है","फिल वाक़े अल्लाह ने अपने रसूल को सच्चा ख्वाब दिखाया था जो ठीक ठीक हक़ के मुताबिक़ था। इंशा अल्लाह तुम ज़रूर मस्जिद ए हरम में पूरे अमन के साथ दख़िल होंगे, अपने सर मुंडवा-ओगे (दाढ़ी) और बाल तरसवा-ओगे और तुम्हें कोई ख़ौफ़ ना होगा। वो उस बात को जानता था जैसे तुम ना जानते थे इस लिए वो ख्वाब पूरा होने से पहले उसने ये करीबी फतह तुमको अता फरमादी","वाह अल्लाह ही है जिसने अपने रसूल को हिदायत और दीन ए हक़ के साथ भेजा है ता-के उसको पूरे जिन्स-ए-दीन पर गालिब करदे (हर धर्म पर हावी) और हकीकत पर अल्लाह की गवाही काफी है","मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं, और जो लोग उनके साथ हैं वो कुफ्फार पर सच और आपस में रहीम हैं। तुम जब देखोगे उन्हें रुकु व सुजूद और अल्लाह के फजल और उसकी खुशनुदी की तालाब में मशगुल पाओगे। सुजूद के असर उनके चेहरों पर मौजुद हैं जिनसे वो अलग पहचाने जाते हैं। ये है उनकी सिफत तौरात में। और इंजील में उनकी मिसाल यूं दी गई है के गोया एक खेती है जिसने पहले कोपल निकाली, फिर हमें तक़्वियत दी, फिर वो गढ़राई, फिर अपने तनय (तने) पर खड़ी हो गई। काश्त (बोने वालों) करने वालों को वो ख़ुश करती है ता-के कुफ़्फ़ार इनके फ़लने फूलने पर जलें। क्या गिरोह के लोग जो ईमान लाए हैं और जिन्होन ने नीक अमल किए हैं अल्लाह ने उन्हें मगफिरत और बड़े अजर का वादा फरमाया है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह और उसके रसूल के आगे पेश कादमी न करो और अल्लाह से डरो, अल्लाह सब कुछ सुनने और जानने वाला है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपनी आवाज नबी की आवाज से बुलंद न करो, और न नबी के साथ ऊंची आवाज से बात किया करो जिस तरह तुम आपस में एक दूसरे से करते हो, कहीं ऐसा न हो के तुम्हारा किया किया सब खराब हो जाए (कर्म व्यर्थ हो जाएं) और तुम खबर भी ना हो","जो लोग रसूल-ए-खुदा के हुजूर बात करते हैं अपनी आवाज पिछले रखते हैं वो डर हकीकत वही लोग हैं जिनके दिलों को अल्लाह ने तकवा के लिए जांच लिया है। उनके लिए मगफिरत है और अजर-ए-अज़ीम","ऐ नबी, जो लोग तुम्हें हुज्रों (अपार्टमेंट) के बाहर से पुकारते हैं उनमें से अक्सर बे-अकाल हैं","अगर वो तुम्हारे बारामद होने तक सब्र करते तो उनके लिए बेहतर था, अल्लाह दरगुज़र करें वाला और रहीम है","ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, अगर कोई फासिक तुम्हारे पास कोई खबर लेकर आए तो तहकीक कर लिया करो, कहीं ऐसा न हो के तुम किसी गिरो ​​को नादानिश्ता (अनजाने में) नुक्सान पाहुंचा बैठो और फिर अपने किए पर पशेमां हो","ख़ूब जान रक्खो के तुम्हारे दरमियान अल्लाह का रसूल मौजुद है। अगर वो बहुत से मामले में तुम्हारी बात मान लिया करे, तो तुम खुद ही मुश्किलात में मुबतला हो जाओ। मगर अल्लाह ने तुमको ईमान की मुहब्बत दी और उसको तुम्हारे लिए दिल पसंद बना दिया, और कुफ्र-ओ-फुसुक और नफरमानी से तुमको मुतनफिर (घृणित) कर दिया","ऐसे ही लोग अल्लाह के फजल ओ एहसान से रस्त-रो हैं और अल्लाह आलिम-ओ-हकीम (सर्वज्ञ, ऑल-वाइज़) है","और अगर एहले ईमान में से दो गिरो ​​आपस में लड़ जाएं, तो उनके दरमियान सुलह (शांति) कराओ। फिर अगर उनमें से एक गिरो ​​दूसरे गिरो ​​से ज्यादा करे, तो ज्यादा करने वाले से लड़ो यहां तक ​​के वो अल्लाह के हुकुम की तरफ पलट आए। फिर अगर वो पलट आए, तो उनके दरमियान अदल के साथ सुलह करा दो, और इन्साफ करो के अल्लाह इन्साफ करने वालों को पसंद करता है","मोमिन तो एक दूसरे के भाई हैं, लिहाजा अपने भाइयों के दरमियान तालुकात को दुरुस्त करो और अल्लाह से डरो, उम्मीद है के तुमपर रहम किया जाएगा","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ना मर्द दूसरे मर्दों का मजाक उड़ाएं, हो सकता है के वो उनसे बेहतर हों, और ना औरतें दूसरी औरतों का मजाक उड़ाएं, हो सकता है के वो उनसे बेहतर हों। आपस में एक दूसरे पर तान ना करो, और ना एक दूसरे को बुरे अलकाब (शीर्षक) से याद करो। ईमान लेन के बाद फिस्क में नाम पेदा करना बहुत बुरी बात है। जो लोग इस रवीश से बाज़ न आएं वही जालिम हैं","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, बहुत गुमान (शक) करने से परहेज करो के बाज़ गुमान (शक) गुनाह होते हैं। तजस्सस (जसुसी) ना करो और तुम में से कोई किसी की गीबत ना करे। क्या तुम्हारे अन्दर कोई ऐसा है जो अपने मरे (मृत) हुए भाई का गोश्त खाना पसंद करेगा? देखो, तुम खुद इस से घी खाते हो। अल्लाह से डरो, अल्लाह बड़ा तौबा कबूल करने वाला और रहीम है","लोगन, हमने तुमको एक मर्द और एक औरत से प्यार किया और फिर तुम्हारी कौमें और बिरादरी बना दी ता-के तुम एक दूसरे को पहचानो। दर हक़ीक़त अल्लाह के नज़दीक तुम में सब से ज़्यादा इज़्ज़त वाला वो है जो तुम्हारे अंदर सब से ज़्यादा ज़रूरी है। यकीनन अल्लाह सब कुछ जान-ने वाला और बाख़बर है","ये बदवी (बेडौइन्स) कहते हैं के \"हम ईमान लाए\" इनसे कहो: \"तुम ईमान नहीं लाए, बलके यूं कहो के हम मुती (विनम्र) हो गए\" ईमान अभी तुम्हारे दिलों में दाख़िल नहीं हुआ है। अगर तुम अल्लाह और उसके रसूल की फरमाबरदारी इख्तियार करो तो वो तुम्हारे अमल के अजर में कोई कमी ना करेगा। यकीनन अल्लाह बड़ा दरगुजर करने वाला और रहीम है","हकीकत में तो मोमिन वो हैं जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए फिर उन्होन ने कोई शक्क ना किया और अपने जानो और मालों से अल्लाह की राह में जिहाद किया, वही सच्चे लोग हैं","ऐ नबी, इन [मुदाययान ए ईमान (आस्था का ढोंग)] से कहो, क्या तुम अल्लाह को अपने दीन की इत्तिला दे रहे हो? हालंके अल्लाह ज़मीन और आसमान की हर चीज़ को जानता है और वो हर शाय का इल्म रखता है","ये लोग तुमपर एहसान जताते हैं के इन्हों ने इस्लाम क़बूल करलिया। इनसे कहो अपने इस्लाम का एहसान मुझपर न रक्खो, बलके अल्लाह तुम अपना एहसान रखता है के उसने तुम्हें ईमान की हिदायत दी अगर तुम अपने दावा-ए-ईमान में सच्चे हो","अल्लाह ज़मीन और आसमान की हर पोशीदा (छिपी हुई) चीज़ का इल्म रखा है और जो कुछ तुम करते हो वो सब उसकी निगाह में है","क़ाफ़, कसम है कुरान-ए-मजीद की","बल्के इन लोगों को ताज्जुब इस बात पर हुआ के एक खबरदार करने वाला खुद में से इनके पास आ गया, फिर मुनकिरीन कहने लगे \"ये तो अजीब बात है","क्या जब हम मर जाएंगे और खाक (मिट्टी) हो जाएंगे (तो दोबारा उठेंगे)? ये वापसी तो अक्ल से खराब है\"","ज़मीन इनके जिस्म में से जो कुछ खाती है वो सब हमारे इल्म में है और हमारे पास एक किताब है जिसमें सब कुछ महफूज है","बल्के इन लोगों ने तो जिसका वक्त हक इनके पास आया उसका वक्त उसे साफ झूठला दिया। इसी वजह से अब ये उलझन में पड़े हुए हैं","अच्छा, तो क्या इन्होनें ने कभी अपने ऊपर आसमान की तरफ नहीं देखा? किस तरह हमने उसे बनाया और अरस्ता (ज़ीनत/सुंदरीकरण) किया, और उसमें कहीं कोई रखना (दरारें/दरारें) नहीं हैं","और ज़मीन को हमने बिछाया और इसमें पहाड़ जमाये और उसके अंदर हर तरह की खुश मंज़र नबातात उगा दी","ये सारी चीज़ें आंखें खोलने वाली और सबक देने वाली हैं हर हमें बंद करने के लिए जो (हक़ की तरफ) रूजू करने वाला हो","और आसमान से हमने बरकत वाला पानी नाज़िल किया, फिर उसे बाग और फसल के गले","और बुलंद ओ बाला खजूर के दरख्त पेडा करदीए जिनपर फलन (फल) से लड़े खोशे तेह-बार-तेह लगते हैं (फलों को परतों में व्यवस्थित किया जाता है) हैं","ये इंतिजाम है बंदों को रिज्क देने का इस पानी से हम एक मुर्दा जमीन को जिंदगी बख्श देते हैं (मारे) हुए इंसानों का ज़मीन से) निकलने भी इसी तरह होगा","इन से पहले नूह की क़ौम, और अशब-उर-रस, और समूद","और आद, और फिरौन, और लूट के भाई","और ऐकाह (जंगल में रहने वाले) वाले, और तुब्बा की क़ौम के लोग भी झुटला चुके हैं हर एक ने रसूलों को झुटलाया, और आखिर ए कार मेरी वेद (धमकी) उन पर चस्पां हो गई","क्या पहली बार की तहलीक (सृजन) से हम आजिज (घिसे-पिटे) थे? मगर एक नई तख़लीक की तरफ से ये लोग शक्क में पड़े हुए हैं","हमने इंसान को भुगतान किया है और उसके दिल में उबरने वाले वतन तक को हम जानते हैं। हम तो हमारे राग-ए-गर्दन (गले की नस) से भी ज्यादा हमसे करीब हैं","(और हमारे इस बारह-ए-रास्त इल्म के अलावा) दो कातिब (शास्त्री) उसके दिन और बायें बैठे (फरिश्ते) हर चीज सब्त (लिख) कर रहे हैं","कोई लफ्ज हमसे कि जुबान से नहीं निकलता जिसे महफूज करने के लिए एक हाजिर बाश निगरान मौजूद ना हो","फिर देखो, वो मौत की जान-कानी (मौत की पीड़ा) हक लेकर आ पाहुंची, ये वही चीज है जिसमें तू भागता था","और फिर सुर (तुरही) फूँका गया, ये है वो दिन जिसका तुझे खौफ़ दिला दिया जाता था","हर शक्स इस हाल में आ गया के उसके साथ एक हांक(ड्राइव) कर लेन वाला है और एक गवाही देने वाला","क्या चीज़ की तरफ से तू गफ़लत में था, हमने वो पर्दा हटा दिया जो तेरे आगे पड़ा हुआ था और आज तेरी निगाह खूब तेज़ है","उसके साथी ने अर्ज़ किया ये जो मेरी सुपुर्दगी में था हाज़िर है","हुकुम दिया गया “फेंक दो जहन्नुम में हर कट्टे (कठोर, जिद्दी) काफिर को जो हक से इनाद रखता था","खैर को रुकने वाला और हद से तजौज करने वाला था, शक्क में पड़ा हुआ था","और अल्लाह के साथ किसी दूसरे को खुदा बना बैठा था। दाल दो उसे अकेले अज़ाब में”","उसके साथी ने अर्ज़ किया “खुदा-वंदा, मैंने इसको व्यंग्य नहीं बनाया बलके ये खुद ही पारले दर्जे की गुमराही में पड़ा हुआ था”","जवाब में इरशाद हुआ “मेरे हुजूर झगड़ा ना करो, मैं तुमको पहले ही अंजाम-ए-बद्द से ख़बरदार कर चूका था","मेरे हाँ (यहाँ) बात पलटी नहीं जाती और मैं अपने बंदों पर ज़ुल्म तोड़ने वाला नहीं हूं\"","वो दिन जबके हम जहन्नुम से पूछेंगे क्या तू भर गई? और वो कहेगी क्या और कुछ है","और जन्नत मुत्तक़िन के करीब ले आएगी, कुछ भी डर ना होगी","इरशाद होगा \"ये है वो चीज़ जिसका तुमसे वादा किया जाता था, हर उस शक्स के लिए जो बहुत रूजू का है\"रोने वाला और बड़ी निगहदाश्त (उसके आचरण पर नजर रखने वाला) करने वाला था","जो बे देखे रहमान से डरता था, और जो दिल-ए-गिरविदा के लिए आए हैं","दखिल हो जाओ जन्नत में सलामती के साथ'' वो दिन हयात-ए-आबादी (अनंत काल) का दिन होगा","वहां उनके लिए वो सब कुछ होगा जो वो चाहेंगे, और हमारे पास इसे ज्यादा भी बहुत कुछ उनके लिए है","हम उनसे पहले बहुत सी कौमों को हलाक कर चुके हैं जो इनसे बहुत ज्यादा ताकतवार थी और दुनिया के मुल्कों को अनहोन ने चैन मारा था फिर क्या वो कोई जाए पनाह पा सके","इस तारीख में इब्रत का सबक है हर उस शक्स के लिए जो दिल रखता हो, या जो तवज्जु से बात को सुने","हमने जमीन और आसमानों को और उनके दरमियान की सारी चीज़ों को छै (छह) दिनों में अदा कर दिया और हमें कोई थकान लाहिक न हुई","पास ऐ नबी, जो बातें ये लोग बनाते हैं उन पर सब्र करो, और अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करते रहो, तुलू-ए-आफताब (सूरज का उगना) और गुरुब-ए-आफताब (इसके डूबने से पहले) से पहले","और रात के वक्त फिर उसकी तस्बीह करो और सजदा रिजियन से दूर होने के बाद भी (साष्टांग प्रणाम)","और सुनो, जिस दिन मुनादी (पुकार) करने वाला (हर शक्स के)करीब ही से पुकारेगा","जिस दिन सब लोग आवाज़-ए-हशर को ठीक ठीक सुन रहे होंगे, वो ज़मीन से मुर्दों के निकलने का दिन होगा","हम ही जिंदगी बक्शते हैं और हम ही मौत देते हैं, और हमारी ही तरफ उस दिन सबको पलटना है","जब ज़मीन फटेगी लोग उसके अंदर से निकल कर तेज तेज़ भागे जा रहे होंगे। ये हश्र हमारे लिए बहुत आसान है","ऐ नबी, जो बातें ये लोग बना रहे हैं उन्हें हम खूब जानते हैं, और तुम्हारा काम इनसे जबरन (ज़बरदस्ती) बात मनवाना नहीं है। बस तुम कुरान के ज़रिये से हर उस शक्स को हिदायत करदो जो मेरी तम्बीह से डरे","कसम है उन हवाओं की जो गर्द (धूल) उड़ाने वाली हैं","फिर पानी से लड़े हुए बादल उठने वाली हैं","फिर सुबुक रफ़्तारी (सुचारू गति से) के साथ चलने वाली हैं","फिर एक बदे काम (बारिश) की तकसीम करने वाली हैं","हक ये है कि जिस चीज का तुम्हें खौफ दिलाया जा रहा है वो सच्ची है","और जजा-ए-आमाल (इनाम) जरूर पेश आनी है","कसम है मुत्तफ़रिक शकलों (अनेक रूप) वाले आसमान की","(आख़िरत के बारे में) तुम्हारी बात एक दूसरे से मुख़्तलिफ़ है","उसे वही बरगश्ता (भ्रमित/विमुख) होता है जो हक़ से फिरा हुआ है","मारे गये क़यास-ओ-गुमान (अनुमान लगाने वाले) से हुकुम लगाने वाले","जो जिहालत (अज्ञानता) में ग़र्क और गफ़लत में मदहोश हैं","पूछते हैं आख़िर वो रोज़-ए-जज़ा कब आएगा","वो हमें रोज़ आएगा जब ये लोग आग पर तपेंगे","(इनसे कहा जाएगा) अब चकखो मजा अपने फिटने का, ये वही चीज़ है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थाय","अलबत्ता मुत्तकी लोग हमें रोज़ बागों (बगीचों) और चश्मो (फव्वारों) में होंगे","जो कुछ उनका रब उन्हें देगा उसे ख़ुशी ख़ुशी ले रहे होंगे। वो उस दिन के आने से पहले नीकुकर (नेकी करने वाले) थे","रातों (रातों) को कम ही सोते (नींद) थे","फिर वही रात के पिछले पहरों में माफ़ी माँगते थे","और उनके मालों (धन) में हक़ था साहिल (मांगने वाले) और महरूम (बेसहारा) के लिए","ज़मीन में बहुत सी निशानियां हैं यकीन लाने वालों के लिए","और खुद तुम्हारे अपने वजूद में हैं, क्या तुमको सूझता नहीं","आसमान ही में है तुम्हारा रिज्क भी और वो चीज भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है","पास कसम है आसमां और जमीन के मालिक की, ये बात हक है, ऐसी ही यकीनी जैसे तुम बोल रहे हो","ऐ नबी, इब्राहिम के मुअज्जज मेहमान की हिकायत भी तुम्हें पाहुंची है","जब वो उसके हां (यहां) आए तो कहां आपको सलाम है। उसने कहा \"आप लोगों को भी सलाम है कुछ ना-आशना से लोग हैं\"","फिर वो चुपके से अपने घर वालों के पास गया, और एक मोटा ताज़ा बछड़ा (बछड़ा) ला कर","मेहमानों के आगे पेश किया। उसने कहा आप हज़रत खाते नहीं","फिर वो अपने दिल में उससे डर गया। उनहों ने कहा डरिए नहीं, और उसे एक ज़ी-इल्म लड़के की अदाइश का मुश्दा (अच्छी खबर/बशारत) सुनाया","ये सुनकर उसकी बीवी चीखती हुई आगे बढ़ी और उसने अपना मुंह पीठ लिया और कहने लगी, \"बूढ़ी बांज\"","उनहों ने कहा \"यही कुछ फरमाया है\" तेरे रब ने। वो हकीम है और सब कुछ जानता है","इब्राहीम ने कहा “ऐ फरस्तादगान-ए-इलाही (दूत), क्या मोहिम आपको दर-पेश है","उन्होन ने कहा “हम एक मुजरिम क़ौम की तरफ भेजे गए हैं","ता-के उसपर पक्की हुई मिट्टी के पत्थर (मिट्टी-पत्थर) बरसा दे","जो आपके रब के हां हद से गुज़र जाने वालों के लिए निशान ज़दा हैं”","फिर हमने उन सब लोगों को निकाल लिया जो उस बस्ती में मोमिन थे","और वहां हमने एक घर के सिवा मुसलमानों का कोई घर न पाया","उसके बाद हमने वहां बस एक निशानी उन लोगों के लिए छोड़ दी जो दर्दनक अज़ाब से डरते थे","और (तुम्हारे लिए निशानी है) मूसा के क़िस्से में जब हमने उसे सारी सनद (स्पष्ट अधिकार) के साथ फिरौन के पास भेजा","तो वो अपने बाल-बूटे पर अकड़ गया और बोला ये जादूगर है या मजनूं (दीवाना) है","आख़िर-ए-कार हमने उसे और उसके लश्करों को पकड़ा और सबको समंदर में फेंक दिया और वो मलामत ज़्यादा होकर रह गया","और (तुम्हारे लिए निशानी है) आद (आद के लोग) में, जबके हमने उनपर एक ऐसी ही हाय बे-खैर (विनाशकारी) हवा भेज दी","के जिस चीज पर भी वह गुजर गई उसे बोसीदा (सड़ा हुआ) करके रख दिया","और (तुम्हारे लिए निशानी है) समूद में, जब उनसे कहा गया था कि एक खास वक्त तक मजे करलो","मगर क्या तम्बीह (चेतावनी) बराबर भी है उनहों ने अपने रब के हुकुम से सरताबी (बेशर्मी से अवज्ञा) की। आख़िर-ए-कर उनको देखते एक अचानक टूट पड़ने वाले अज़ाब ने उनको आ लिया","फिर ना उनको उठने की ताकत थी और ना वो अपना बचाव कर सकते थे","और सबसे पहले हमने नूह की क़ौम को हलाक किया क्योंके वो फ़ासीक (दुष्ट) लोग थे","आसमान को हमने अपने ज़ोर से बनाया है और हम इसकी क़ुदरत रखते हैं","ज़मीन को हमने बिछाया है और हम बड़े अच्छे हमवार(स्मूथर्स/स्प्रेड) करने वाले हैं","और हर चीज़ के हमने जोड़े हैं बनाए हैं, शायद के तुम उसे सबक लो","तो अल्लाह की तरफ से, मैं तुम्हारे लिए हमारे लिए साफ-साफ खबरदार करने वाला हूं","और ना बनाओ अल्लाह के साथ कोई दूसरा माबूद। मैं तुम्हारे लिए उसकी तरफ से साफ साफ खबरदार करने वाला हूं","यूं ही होता जा रहा है, इनसे पहले क़ौमों के पास भी कोई रसूल ऐसा नहीं आया जैसे उन्होन ने ये ना कहा हो के ये साहिर (जादूगर) है या मजनूं (दीवाना)","क्या इन सब ने आपस में इसपर कोई समझौता किया है? नहीं, बलके ये सब सरकश लोग हैं","पास ऐ नबी, इनसे रुख फेर लो, तुमपर कुछ मलामत नहीं","अलबत्ता हिदायत करते रहो, क्योंके हिदायत ईमान लाने वालों के लिए नफ़ेह(फ़ैयदा-मंद) है","मैने जिन और इंसान को इसके सिवा किसी काम के लिए भुगतान नहीं किया है के वो मेरी बंदगी करें","मैं उनसे कोई रिज़्क नहीं चाहता और ना ये चाहता हूं के वो मुझे खिलाएं","अल्लाह तो खुद ही रज्जाक है, बड़ी कुव्वत वाला और जबरदस्त","पास जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उनके लिए वैसा ही अज़ाब तय्यार है जैसा इन्ही जैसे लोगों को उनके लिए का मिल चुका है, इसके लिए ये लोग जल्दी ना मचाएं","आख़िर को तबाह है कुफ़्र करने वालों के लिए हमें रोज़ जिसका इन्हें ख़ौफ़ दिलाया जा रहा है","कसम है तूर (पर्वत) की","और एक ऐसी खुली किताब की","जो रकीक जिल्द (बारीक चर्मपत्र) में लिखी हुई है","और आबाद (बहुत बार-बार आने वाला) घर की","और ऊंची छत (चंदवा) की","और मौजां समंदर (उफनता हुआ समुद्र) की","के तेरे रब का अज़ाब ज़रूर वक़हे होने वाला है","जिसे कोई दफ़ा करने वाला नहीं","वो रोज़ वक़हे होगा जब आसमां बुरी तरह डगमगाएगा","और पहाड़ उड़े उड़े फिरेंगे","तबाही है हम रोज़ उन पर झूठलाने वालों के लिए","जो आज खेल के तौर पर अपनी हुज्जत बाजियों में लगे हुए हैं","जिस दिन उन्हें धक्के मार कर नार-ए-जहन्नुम (नरक की आग) की तरफ ले चला जाएगा","हमारा वक्त उन्हें कहा जाएगा के “ये वही” आग है जैसे तुम झुटलाया करते थे","अब बताओ ये जादू है या तुम्हें समझ नहीं आ रहा है","जाओ अब झुलसो इसके अंदर, तुम ख्वाह सब्र करो या ना करो, तुम्हारे लिए यक्सन है, तुम्हें वैसा ही बदला दिया जा रहा है जैसे तुम अमल कर रहे थे","मुत्तकी लोग वहां बागों (बगीचों) और नियामतों में होंगे","लुत्फ ले रहे होंगे उन चीज़ों से जो उनका रब उन्हें देगा, और उनका रब उन्हें दोज़ख के अज़ाब से बचा लेगा","(उनसे कहा जाएगा) खाओ और पियो भूलभुलैया से अपने उन आमाल के सिली में जो तुम करते रहे हो","वो आमने-सामने बिछे हुए तख्तों पर तकिए (सोफे) लगाएंगे बैठे होंगे और हम खूबसूरत आंखों वाली हूरें उन्हें बियाह (शादी) देंगे","जो लोग ईमान लाए हैं और उनकी औलाद भी कोई दरजा-ए-ईमान में उनके नक्श-ए-कदम पर चली है, उनकी औलाद को भी मैं (जन्नत में) उनके साथ मिला देंगे और उनके अमल में कोई घाटा (नुकसान) उनको ना देंगे। हर शक्स अपने क़स्ब के बदले में रहता है","","वहां वो एक दूसरे से जाम-ए-शराब लपक लपक कर ले रहे होंगे जिसमें न यावा-गोई (बीमार भाषण) होगी न बद-किरदारी","और उनकी खिदमत में वो लड़के दौड़ते (दौड़ते हुए) फिर रहेंगे जो उनके लिए मखसूस होंगे, ऐसे खूबसूरत जैसे छुपा कर रखे हुए मोती (मोती)","ये लोग आपस में एक दूसरे से (दुनिया में गुज़रे हुए) हालात पूछेंगे","ये कहेंगे के हम पहले अपने घर वालों में डरते हुए जिंदगी बसर करते थे","आखिर ए कार अल्लाह ने हम पर फजल फरमाया और हमने झुलसा देने वाली हवा के अजाब से बचा लिया","हम पिछली जिंदगी में उसकी से दुआएं मांगते थे, वो वक्त बड़ा हाय मोहसिन (परोपकारी) और रहीम है","पास ऐ नबी, तुम हिदायत किए जाओ, अपने रब के फजल से ना तुम कहीं (भविष्यवक्ता) हो और ना मजनूं (पागल)","क्या ये लोग कहते हैं के ये शक्स शायर है जिसका हक़ में हम गर्दिश-ए-अय्याम (दुर्भाग्य) के इंतिज़ार कर रहे हैं","इनसे कहो, अच्छा इंतिज़ार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतिज़ार करता हूं","क्या इनकी अकालें ऐसी ही बातें करने के लिए कहती हैं? या दर-हकीकत ये इनाद (अपराध) में हद से गुज़रे हुए लोग हैं","क्या ये कहते हैं कि इस शक्स ने ये क़ुरान ख़ुद ग़ाद (आविष्कृत/मनगढ़ंत) लिया है? असल बात ये है के ये ईमान नहीं लाना चाहते","अगर ये अपने इस क़ौल (कहावत) में सच्चे हैं तो इसी शान का एक कलाम बना लें","क्या ये किसी ख़लीक़ के बिना खुद पैदा हो गए हैं? या ये खुद अपने खालिक हैं","या ज़मीन और आसमान को इन्हों ने पेदा किया है? असल बात ये है के ये यक़ीन नहीं रखते","क्या तेरे रब के ख़ज़ाने इन के कब्ज़े में हैं? हां उन पर इनका हुकुम चलता है","क्या इनके पास कोई सीढ़ी है जिसपर चढ़ कर ये इल्म-ए-बाला की सन-गन लेते हैं? उनमें से जिसने सूरज-गुन ली हो वो लाए को खुली दलील","क्या अल्लाह के लिए तो हैं बेटियां और तुम लोगों के लिए हैं बेते (बेटे)","क्या तुम इनसे कोई अजर मांगते हो की एह ज़बरदस्ती पड़ी हुई चट के बोझ तले दबे जाते हैं कर्ज के बोझ के साथ)","क्या इनके पास गैब के हक़ीक़त का इल्म है कि उसकी बिना पर ये लिख रहे हूँ","क्या ये कोई चाल चलना चाहता है? (अगर ये बात है) तो कुफ्र करने वालों पर इन की चाल उल्टी ही पड़ेगी","क्या अल्लाह के सिवा ये कोई और माबूद रखते हैं? अल्लाह पाक है हमसे शिर्क से जो ये लोग कर रहे हैं","ये लोग आसमान के टुकड़े भी गिरे हुए देख लें तो कहेंगे ये बादल हैं जो उम्मीद चले आ रहे हैं","पास ऐ नबी, इन्हें इनके हाल पर छोड़ दो यहां तक ​​के ये अपने दिन को पाहुंच जाए जिसमें ये मार गिराए जाएंगे","जिस दिन ना इनकी अपनी कोई चाल होगी इनका कोई काम आएगा ना कोई इनकी मदद को आएगा","और हमारे वक्त के आने से पहले भी जालिमों के लिए एक अज़ाब है, मगर इनमें से अक्सर जानते नहीं हैं","ऐ नबी, अपने रब का फैसला आने तक सब्र करो। तुम हमारी निगाह में हो. तुम जब उठो तो अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो","रात को भी उसकी तस्बीह किया करो और सितारे जब पलटते हैं हमें वक्त भी","कसम है तारे की जबके वो गुरूब हुआ","तुम्हारा रफीक (साथी) ना भटका है ना बहका (भ्रमित) है","वो अपनी ख्वाहिश-ए-नफ्स से नहीं बोलता","ये तो एक वही (प्रेरणा/रहस्योद्घाटन) है जो उसपर नाज़िल की जाती है","उसे ज़बरदस्त क़ुव्वत वाले ने तालीम दी है","जो बड़ा साहिब-ए-हिकमत है","वो सामने आ खड़ा हुआ जबके वो बलाई उफुक़ पार था (क्षितिज का सबसे ऊंचा हिस्सा)","फिर करीब आया और ऊपर मुअल्लक हो गया।(निकला और उतरा)","यहां तक ​​के दो कमानों (धनुष की लंबाई) के बराबर या इसे कुछ कम फासला रह गया","तब उसने अल्लाह के बंदे को वही (रहस्योद्घाटन) पाहुंचाई जो वही (रहस्योद्घाटन) भी उसे पाहुंचनी थी","नजर ने जो कुछ देखा, दिल ने हमें झूठ ना मिलाया","अब क्या तुम उस चीज़ पर उसके झगड़े हो जिसे वो आँखों से देखता है","और एक मरतबा फिर उसने","सिदरतुल मुंतहा के पास उसको (एंजेल जिब्रियल) देखा","जहां पास ही जन्नत-उल-मावा है","हमारा वक्त सिद्दरा पर चा रहा था जो कुछ कह रहा था","निगाह ना चुन्धयी (वेवर / स्वर्व) ना हद से मुताजाविज (अपराध) हुई","और उसने अपने रब की बड़ी बड़ी निशानियां देखी","अब जरा बताओ, तुमने कभी इस लाट और इस उज्जा (बुतपरस्तों के नाम) मूर्तियां)","और तीसरी (तीसरी) एक और देवी मानत की हकीकत पर कुछ गौर भी किया","क्या बेटे (बेटे) तुम्हारे लिए हैं और बेटियां (बेटियां) खुदा के लिए","ये तो बड़ी धांधली (अन्याय/अनुचित) की तकसीम हुई","दरसल ये कुछ नहीं हैं मगर बस चांद नाम जो तुमने और तुम्हारे बाप दादा ने रख लिया है। अल्लाह ने इनके लिए कोई सनद नाज़िल नहीं की। हक़ीक़त ये है के लोग महेज़ वीहम-ओ-गुमान की जोड़ी कर रहे हैं और ख़्वाहिशात-ए-नफ़्स के मुरीद बने हुए हैं, हालंके उनके रब की तरफ से उनके पास हिदायत आ चुकी है","क्या इंसान जो कुछ चाहे उसके लिए वही हक़ है","दुनिया और आख़िरत का मालिक तो अल्लाह ही है","आसमानों में कितने ही फ़रिश्ते मौजुद हैं, उनकी शफ़ाअत (हिम्मत) कुछ भी काम नहीं आ सकती जब तक अल्लाह किसी ऐसे शक्स के हक़ में उसकी इजाज़त न दे जिसके लिए वो कोई अर्ज़दाश्त (याचिका) सुनना चाहे और उसको पसंद करे","मगर जो लोग आख़िरत को नहीं मानते वो फरिश्तों को देवियों (देवी) के नामो से मौसम करते हैं","हलांके इस मामले का कोई इल्म (ज्ञान) उन्हें हासिल नहीं है। वो महज़ गुमान की जोड़ी कर रहे हैं, और गुमान हक़ की जगह कुछ भी काम नहीं दे सकते","पास ऐ नबी, जो शक्स हमारे ज़िक्र से मुह फेरता है, और दुनिया की जिंदगी के सिवा जिसे कुछ मतलब नहीं है, उसे उसके हाल पर छोड़ दो","इन लोगों का मबलाग-ए-इल्म (उनका अधिकतम ज्ञान) बस यही कुछ है, ये बात तेरा रब ही ज्यादा जानता है कि उसके रास्ते से कौन भटक गया है और कौन सीधे रास्ते पर है","और जमीन और आसमान की हर चीज का मालिक अल्लाह ही है। ता-के अल्लाह बुराई करने वालों को उनके अमल का बदला दे और उन लोगों को अच्छी जजा से नवाजे जिन्हों ने नीक रवैय्या इख्तियार किया है","जो बदे बदे गुनाहों और खुले खुले कबीह अफाल (शर्मनाक कृत्य) से परहेज़ करते हैं, इल्ला ये के कुछ कसूर उनसे सरज़ाद हो जाए। बिला शुभा तेरे रुब का दामन-ए-मगफिरत बहुत वासिह है। वो तुम्हें हमारे वक्त से खूब जानता है जब उसने जमीन से तुम्हें जन्म दिया, और जब तुम अपनी माँ के पेट में अभी भी जानिन (भ्रूण) हाय थाय। पस अपने नफ़्स की पाकी के दावे ना करो। वही बेहतर जानता है कि वक्ती मुत्तकी कौन है","फिर ऐ नबी, तुमने उस शक्स को भी देखा जो राह-ए-खुदा से फिर गया","और थोड़ा सा दे कर रुक गया","क्या उसके पास गैब का इल्म है कि वो हकीकत को देख रहा है","क्या उसने उन बातों की कोई खबर नहीं पहुंची जो मूसा के सहीफों","और हमारे इब्राहिम के सहीफों में बयां हुई है जिसने वफा का हक़ अदा कर दिया","ये के कोई बोझ उठाने वाला दूसरे का बोझ नहीं उठेगा","और ये के इंसान के लिए कुछ नहीं है मगर वो जिसकी हमें सई (कोशिश/प्रयास) की है","और ये के उसकी सई (कोशिश/प्रयास) अनकरीब देखी जाएगी","और उसकी पूरी जजा उसे दी जाएगी","और ये के आख़िर-ए-कार पहचानना तेरे रुब ही के पास है","और ये के उसी ने हास्य और उसी ने रुलाया","और ये के उसी ने मौत दी और उसी ने जिंदगी बख्शी","और ये के उसी ने नर (पुरुष) और मादा (महिला) का जोड़ा पैदा किया","एक बूंद (शुक्राणु-बूंद) से जब वो टपकती है","और ये के दूसरी जिंदगी बक्शना भी उसी के ज़िम्मे है","और ये के उसे ने गनी (समृद्ध) किया और जयदाद बख्शी","और ये के वही शेरा (सीरियस) / ताकतवर सितारा) का रब है","और ये के उसी ने अद-ए-ऊला (आद के लोगों) को हलाक किया","और समूद को ऐसा मिटाया के उनमें से किसी को बाकी ना चोदा","और उसने पहले क़ौम-ए-नूह को तबाह किया क्योंकि वो वो था हाय साख्त ज़ालिम-ओ-सरकश लोग","और औंधी गिरने वाली बस्तियों को उठा फेंका। (कौम-ए-लुत)","फिर चाहा दिया उनपर वो कुछ जो (तुम जानते ही हो के) क्या चा दिया","पास ऐ मुखातिब, अपने रब की किन नियमों में तू शक्क करेगा","ये एक तम्बीह (चेतावनी) है पहले आए हुए तंबीहात (चेतावनी) में से","आने वाली घड़ी करीब आ लगी है","अल्लाह के सिवा कोई उसको हटाने वाला नहीं","अब क्या यही वो बातें हैं जिनपर तुम इजहार-ए-ताजुब करते हो","हंसते (हंसते) हो और रोते (रोते) नहीं हो","और गा (गायन) बजा कर इन्हें टालते हो","झुक जाओ अल्लाह के आगे और बंदगी बजा लाओ (आयत-ए-सजदा)","कयामत की घड़ी करीब आ गई और चांद फट गया","मगर इन लोगों का हाल ये है कि ख्वा कोई निशानी देख लें मुंह मोड़ लेते हैं और कहते हैं ये तो चलता हुआ जादू है","इन्हों ने (इसको भी) झूठला दिया और अपनी ख्वाहिश-ए-नफ़्स ही की जोड़ी है। हर मामले को आख़िर-ए-कार एक अंजाम पर पहुंचाना है","लोगों के सामने (पिछले क़ौमों के) वो हालात आ चुके हैं जिनमें सरकशी से बाज़ रखने के लिए काफी सामान-ए-इब्रत है","और ऐसी हिकमत जो हिदायत के मक़सद को बा-दरजा-ए-आतम (पूर्ण ज्ञान) पूरा करती है मगर तंबीहत (चेतावनी) इन पर कारगर नहीं होती","पस ऐ नबी, इनसे रुख फेर लो। जिस रोज पुकारने वाला एक सख्त नागावार चीज की तरफ पुकारेगा","लोग सहमत हुए (डाउन-कास्ट) निगाहों के साथ अपनी कब्रों से इस तरह निकलेंगे गोया वो बिखरी हुई टिड्डियां (टिड्डियां) हैं","पुकारने वाले की तरफ दौड़े जा रहेंगे होंगे और वही मुनकिरेन (जो दुनिया में इसका इन्कार करते थे)उसे वक्त कहेंगे के ये दिन तो बड़ा कहिन है","इनसे पहले नूह की क़ौम झूठला चुकी है। उनहों ने हमारे बंदे को झूठा करार दिया और कहा के ये दीवाना है, और वो बुरी तरह झिडका गया","आखिर-ए-कार उसने अपने रुब को पुकारा के \"मैं मगलूब हो चूका, अब तू इनसे इंतकाम ले\"","तब हमने मौसला-धार बारिश से आसमान के दरवाज़े खोल दिये और ज़मीन को फाड़ कर चश्में में तबदील कर दिया","और ये सारा पानी उस काम को पूरा करने के लिए मिल गया जो मुकद्दर हो चूका था","और नूह को हमने एक तख्त (तख़्त) और कीलों (कीलों) वाली पर सवार कर दिया","जो हमारी निगरानी में चल रही थी। ये था बदला उस शक्स की खातिर जिसकी ना-कादरी की गई थी","उस कश्ती को हमने एक निशानी बना कर छोड़ दिया, फिर कोई है हिदायत कबूल करने वाला","देखलो, कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तम्बीहत (चेतावनी)","हमने कुरान को हिदायत के लिए आसान ज़रिया बना दिया है, फिर क्या है कोई हिदायत क़बूल करने वाला","आद ने झुटलाया, तो देखलो के कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तंबीहाट (चेतावनी)","हमने एक पैहम नहुसत (निरंतर दुर्भाग्य) के दिन साख तूफानी हवा उन्पर भेज दी जो लोगों को उठा उठा कर इस तरह फेंक रही थी","जैसे वो जड़ (जड़ें) से उखाड़े हुए खजूर के तनी (चड्डी) माननीय","पास देखो के कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तम्बीहत (चेतावनी)","हमने कुरान को हिदायत के लिए आसाना ज़रिया बना दिया है, फिर क्या है कोई हिदायत क़बूल करने वाला","समूद ने तम्बीहत को झुटलाया","और कहने लगे \"एक अकेला आदमी जो हम ही में से है क्या अब हम उसके पीछे चलें? इसका इत्तिबाह हम कबूल करें तो इसके मानी ये होंगे के हम बहक गए हैं और हमारी अक्ल मारी गई है","क्या हमारे दरमियान बस यहीं एक शक था जिसपर खुदा का जिक्र नाज़िल किया गया? नहीं, बलके ये पारले दर्जे का झूठा और बार-खुद गलत है”","(हमने अपने पैगंबर से कहा) “कल ही इन्हें मालूम हुआ है के कौन पारले दर्जे का झूठा और बार खुद गलत है","हम ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को इनके लिए फिटना बना कर भेज रहे हैं, अब जरा सब्र के साथ देख के इनका क्या अंजाम होता है","इनको जता दे के पानी इनके और ऊंटनी (वह-ऊंटनी) के दरमियान तकसीम होगा और हर एक अपनी बारी के दिन पानी पर आएगा”","आख़िर-ए-कार उन लोगों ने अपने आदमी को पुकारा और उसने इस काम का बेड़ा उठाया और ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को मार डाला","फिर देख लो के कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तम्बीहत (चेतावनी)","हमने बस एक ही धमाका छोड़ा और वो बड़े वाले की रोंधी हुई बाद के तरह भुस हो कर रह गया। (लो! हमने उन पर एक चिल्लाहट भेजी, और वे मवेशियों के बाड़े के निर्माता द्वारा (अस्वीकृत) सूखी टहनियों की तरह हो गए","हमने कुरान को हिदायत के लिए आसान ज़रिया बना दिया है, अब है कोई हिदायत क़बूल करने वाला","लूट की क़ौम ने तंबीहत को झुटलाया","और हमने पत्थरो करने वाली हवा इस पर भेज दी। सिर्फ लुट के घर वाले उसे महफूज रहे","उनको हमने अपने फजल से रात के पिछले पीहर बच्चा कर निकाल दिया। क़ौम के लोगों को हमारी पकड़ से ख़बरदार किया मगर वो सारी तंबीहत को मशकूक (संदिग्ध) समझ कर बातों में उड़ते रहे","","फिर उन्होन ने उसे अपने महमानो की हिफ़ाज़त से बाज़ रखने की कोशिश की। आख़िर-ए-कार हमने उनकी आंखें मूंद-दी (अंधा), के चक्खो अब मेरा अज़ाब और मेरी तम्बीहात का मज़ा","सुबह सवेरे ही एक अटल अज़ाब ने उनको आ लिया","चक्खो मजा अब मेरे अज़ाब का और मेरी तम्बीहात का","हमने कुरान को है हिदायत के लिए आसान ज़रिया बना दिया है, पास है कोई हिदायत कबूल करने वाला","और आल-ए-फिरौं के पास भी तम्बीहत आई थी","मगर उनहों ने हमारी सारी निशानियों को झुटला दिया। आख़िर को हमने उन्हें पकड़ा जिसकी तरह कोई ज़बरदस्त क़ुदरत वाला पकड़ा है","क्या तुम्हारे कुफ़र कुछ उन लोगों से बेहतर हैं? या आसमानी किताबों में तुम्हारे लिए कोई माफ़ी लिखी हुई है","हां लोगों का कहना ये है कि हम एक मज़बूत जत्था (जमात) हैं, अपना बचाव कर लेंगे","अंकरीब ये जत्था (जमात) सीख खा जाएगा और ये सब पीठ फिर कर भागते नजर आएंगे","बलके इनसे निमत्ने के लिए असल वादे का वक्त तो कयामत है और वो बड़ी आफत और ज्यादा तल्ख-सा-अत (बड़ी साख और कड़वी चीज) है","ये मुजरिम लोग दर हकीकत गलत फहमी में मुबतला हैं और इनकी अक्ल मारी गई है","जिस रोज़ ये मुँह के बल आग में घसीटते जाएंगे हमें रोज़ इनसे कहा जाएगा के अब छक्खो जहन्नुम की गोद का मजा","हमने हर चीज़ एक तकदीर के साथ अदा की है","और हमारा हुकुम बस एक ही हुकुम होता है और पलक झपकाते (पलक झपकाते हुए) वो अमल में आ जाता है","तुम जैसे बहुत-सून को हम हलक कर चुके हैं। फिर है कोई हिदायत क़बूल करने वाला","जो कुछ इन्हों ने किया है वो सब दफ्तरों (कार्यालय) में दर्ज है","और हर छोटी बड़ी बात लिखी हुई मौजुद है","नफ़रमानी से परहेज करने वाले यकीनन बागों और नहरों में होंगे","सच्ची इज्जत की जगह, बदले ज़ीह-इक़तेदार बादशाह के करीब","रहमान ने","क्या कुरान की तालीम दी है","उसी ने इंसान को पढ़ाया","और उसे बोलना सिखाया","सूरज और चांद एक हिसाब के बंधन हैं","और तारे और दरख्त सब सजदा-रीज हैं","आसमान को उसने बुलंद किया और मिजान कायम करदी","इसका तकाजा ये है के तुम मिजान में खलाल न डालो","इन्साफ के साथ ठीक-ठीक तोलो (तौलो) और तराजू में डंडी (कंजूस) ना मारो","जमीन को उसने सब मखलूकत (जीव) के लिए बनाया","उसमें हर तरह के ब-कसरत लजीज फल हैं, खजूर के दरख्त हैं जिनके फल गिलाफों (शीथ्स) में लिपटे हुए हैं","तरह तरह के गैले (मकई) हैं जिनमें भूसा भी होता है और दाना (अनाज) भी","पस ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की किन नियमों को झुठलाओगे","इंसान को उसने ठीकरी (कुम्हार) जैसे सुखे सादे (सड़ा हुआ) हुए गैरे से बनाया (मिट्टी की तरह [उस] मिट्टी के बर्तन","और जिन को आग की लपट से पेदा किया","पस ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब के रिश्तेदार अजायब-ए-कुदरत को झूठलाओगे","डोनो मशरिक और डोनो मगरिब, सब का मालिक-ओ-परवरदिगार वही है","पस ऐ जिन्न-ओ-इंस, तुम अपने रब के किन किन कुदरतों को झुटलोगे","दो समंदरों (समुद्रों) को उसने छोड़ दिया के बहम मिल जायें","फिर भी उनके दरमियान एक परदा हयाल (बाधा) है जिसे वो तजावुज़ (अपराध) नहीं करते","पस ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की क़ुदरत के किन करिश्माओं को झूठलाओगे","समंदरों से मोती और मोंगे (कोरल) निकलते हैं","पास ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की क़ुदरत के किन कमालात को झुठलाओगे","और ये जहाज़ (जहाज) उसके हैं जो समंदर में पहाड़ों (पहाड़ों) की तरह ऊंचे उठे हैं","पास ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब के साथ एहसानात को झुठलाओगे","हर चीज़ जो इस ज़मीन पर है फ़ना (नाश) हो जाने वाली है","और सिर्फ तेरे रुब की जलील-ओ-करीम ज़ात ही बाकी रहने वाली है","पास ऐ जिन्न-ओ-इंस (इंसान), तुम अपने रब के कुदरतों के साथ कमाल से झूठ बोलोगे","ज़मीन और आसमान में जो भी है सब अपनी हाजतें (ज़रूरतें) उसी से मांग रहे हैं, हर आन वो नई शान में है","पास ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की किन-किन सिफत-ए-हमीदा को झुठलाओगे","ऐ ज़मीन के बोझो(भार), अनकरीब हम तुमसे बाज़ पुर्स (सवाल करते हुए) करने के लिए फ़ारिग़ हुए जाते हैं","(फिर देख लेंगे के) तुम अपने रुब के किन किन एहसानात को झुटलाते हो","ऐ गिरो-ए-जिन्न-ओ-इन्सा (इंसान), गर तुम ज़मीन और आसमान की सरहदों से निकल कर भाग सकते हो तो भाग देखो, नहीं भाग सकते इसके लिए बड़ा ज़ोर चाहिए","अपने रब की किन किन क़दरतों को तुम झूठलाओगे","(भागने की कोशिश करोगी तो) तुमपर आग का शोला और धुआं (धुआं) छोड़ दिया जाएगा जिसका तुम मुकाबला ना कर सकोगे","पस ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की तरह कुदरतों का इंकार करोगी","फिर (क्या बनेगा हमारा वक्त) जब आसमां फटेगा (बंटवारा) और लाल चामदे (त्वचा) की तरह सुर्ख (लाल) हो जाएगा","ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान) (हम वक्त) तुम अपने रब की रिश्तेदार कुदरतों को झुटलाओगे","हमें रोज किसी इंसान और किसी जिन से उसका गुनाह पूछने के लिए जरूरी न होगी","फिर (देख लिया जाएगा के) तुम दोनो गिरो ​​अपने रब के साथ एहसानात का इंकार करते हो","मुजरिम वहां अपने चेहरों से पहचान के लिए जाएंगे और उन्हें पेशानी के बाल और पांव पकड़ पकड़ कर घसीटा जाएगा","हमें वक्त तुम अपने रुब की तरह कुदरतों को झुठलाओगे","(हमें वक्त कहा जाएगा) ये वही जहन्नुम है जिसको मुजरीमीन झूठ करार दिया करते थे","उसी जहन्नुम और खौलते (उबलते) पानी के दरमियान वो गर्दिश करते रहेंगे","फिर अपने रुब की किन किन कुदरतों को तुम झुठलाओगे","और हर उस शक्स के लिए जो अपने रुब के हुजूर पेश होने का खौफ (डर) रखता हो, दो बाग (बगीचे) हैं","अपने रुब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे","हरी भरी डालियों से भरपुर","अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे","दोनों बागों में दो चश्मे (झरने) रावन","अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे","दोनों बागों में हर फल की दो क़िस्में","अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे","जन्नती लोग ऐसे फरशोन पर तकिये लगा के बैठेंगे जिनके अस्तर दबीज रेशम (रेशम ब्रोकेड) के होंगे, और बागों की डालियां फालों से झुकी पढ़ रही होंगी","अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे","नियामतों के दरमियां शर्मिली निगाहों वलियों होंगी जिन्हे जन्नतियों से पहले कोई इंसान या जिन्न ने चुवा न होगा","अपने रब के किन किन-किन इनामों को तुम झूठलाओगे","ऐसी खूबसूरत जैसी हीरे (हीरे) और मोती","अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झूठलाओगे","नेकी का बदला, नेकी के सिवा और क्या हो सकता है","फिर ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), अपने रब के रिश्तेदारों का इनाम-ए-हमीदा का तुम इंकार करोगी","और उन दो बाघों के अलावा दो बाग और होंगे","अपने रुब के रिश्तेदारों का इनाम करो तुम झूठलाओगे","घने सर-सब्ज़ ओ शादाब बाग","अपने रुब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे","दोनो बागों में दो चश्में (झरनों) फव्वारों की तरह उबलते (उबलते) हुए","अपने रुब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे","उन में बा-कसरत फल और खजूरें और अनार (अनार)","अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे","नियामतों के दरमियान में खूब सीरत और खूबसूरत बीवियां","अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे","खीमो (टेंट) में ठहरी हुई हूरें (लड़कियां)","अपने रुब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे","जन्नतियों से पहले कभी किसी इंसान ने या जिन्न ने उनको न छुआ (स्पर्श) होगा","अपने रुब के किन-किन इनाम को तुम झुटलाओगे","वो जन्नती सब्ज़-क़लीनो (हरी गद्दियाँ) और नफीस ओ नादिर फरशोन (खूबसूरत कालीन) पर तकिए लगा के बैठेंगे","अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुठलाओगे","बड़ी बरकत वाला है तेरे रुब-ए-जलील-ओ-करीम (महिमा और महिमा) का नाम","जब वो होने वाला वाकिया पेश आ जाएगा","तो कोई उसके वक्ह (घटना) को झूठलाने वाला न होगा","वो ताह-ओ-बाला (पास्त और बुलंद) करदेने वाली आफत होगी","ज़मीन हमें वक़्त एक बार ही हिला डाली जाएगी","और पहाड़ इस तरह रज़ा रेज़ा करदिये जायेंगे","के परगंदा (बिखरा हुआ) गुबर (धूल) बन कर रह जायेंगे","तुम लोग हम वक़्त तीन गिरोहों (जमात) में तकसीम हो जाओगे","दयेन बाज़ू वाले, तो दिनें बाज़ू वालों (के खुश-नसीबी) का क्या कहना","और बाज़ू वाले, तो बाज़ू वालों (की बदनसीबी का) क्या ठिकाना","और आगे वाले तो फिर आगे वाले ही हैं","वही तो मुकर्रब (अल्लाह के सबसे करीब) लोग हैं","नियामत भारी जन्नतों में रहेंगे","अगलों में से बहुत होंगे","और पिचलों में से कम","मुरास्सा तखतों पर (सजे हुए सिंहासन पर)","ताकिये लगायें आमने सामने बैठेंगे","उनकी मजलिसों में आबादी लड़के शराब-ए-चश्मा-ए जारी से","लब्रेज़ प्याले और कंतर (जुग) और सागर के लिए दौड़ते फिरते होंगे","जिसे पी कर ना उनका सर चकराएगा ना उनका अक्ल में फतूर (नशे की लत) आएगा","और वो उनके सामने तरह के लज़ीज़ फल (फल) पेश करेंगे जिसे चाहे चुन ले","और परिन्दों के गोश्त पेश करेंगे के जिस परिंदे का चाहे इस्तिमाल करें","और उनके लिए खुबसूरत आंखों वाली हूरें होंगी","ऐसी हसीं जैसे छुपा कर रखे हुए मोती","ये सब कुछ उन अमल की जजा के तौर पर उन्हें मिलेगा जो वो दुनिया मैं करते रहे थे","वहां वो कोई बेहद कलाम या गुनाह की बात न सुनेंगे","जो बात भी होगी ठीक ठीक होगी","और दायें बाजू वाले, दायें बाजू वालों की खुश नसीब का क्या कहना","वो बे-खर (कांटा रहित) बेरियों (लोटे के पेड़)","और तेह बार तेह चढ़े हुए केलों (केले)","और दूर तक फैली हुई छाँव (छाया)","और हर दम रावन (घूसते हुए) पानी","और कभी ख़तम न होने वाले","और बे रोक-टोक मिलने वाले बा-कसरत फलन (फल)","और ऊंची निशिस्ट गाहों (ऊंचे सिंहासन) में होंगे","उनकी बिवियों को हम खास तौर पर नए सिरे से पैदा करेंगे","और उन्हें बकीरा (कुंवारी) बना देंगे","अपने शोहरों कि आशिक और उमर में हमसिन (समान उम्र)","ये कुछ दिन बाज़ू वालों के लिए हैं","वो एगलों में से बहुत होंगे","और पिचलों में से भी बहुत","और बाएँ (बाएँ) बाज़ू वाले, बाएँ बाज़ू वालों की बदनसीबी का क्या पूछना","वो लू की लपट (चिलचिलाती हवा के बीच) और खुलते (उबलते) हुए पानी","और काले धुएं (धुआं) के साये में होंगे","जो ना ठंडा होगा ना आराम दे","ये वो लोग होंगे जो इस अंजाम को पहनेंगे से पहले खुश हाल थे","और गुनाह-ए-अज़ीम पर इसरार करते थे","कहते थे \"क्या जब हम मर कर खाक हो जाएंगे और हदियों का पंजर रह जाएंगे तो फिर उठ खड़े होंगे","और क्या हमारे वो बाप दादा भी उठेंगे जो पहले गुज़र चुके हैं?”","ऐ नबी इन लोगों से कहो, यकीनन अगले और पिछले सब","एक दिन जरूर जमा किए जाने वाले हैं जिसका वक्त मुकर्रर किया जा चुका है","फिर ऐ गुमराहों और झूठलाने वालों","तुम शजर-ए-जक्कम की गीज़ा खाने वाले हो","उसी से तुम पैठ भरोगे","और ऊपर से खौलता (उबलता हुआ) हुआ पानी","टोंस (प्यास) लगे हुए ऊंट (ऊंट) की तरह पियोगी","यहीं बैठें वालों की ज़ियाफत का सामान रोज-ए-जजा में","हमने तुम्हें भुगतान किया है फिर क्यों तस्दीक (पुष्टि) नहीं करते","कभी तुमने गौर किया, ये नुत्फा (शुक्राणु) जो तुम डालते हो","उसे बच्चा तुम बनाते हो या उसके बनाने वाले हम हैं","हमने तुम्हारे दरमियान मौत को तकसीम किया है, और हम इसे अजीज नहीं है","के तुम्हारी शकलें बदल दें और किसी ऐसी शक्ल में तुम्हें पैदा कर दें जिसको तुम नहीं जानते","अपनी पहली अदाइश को तो तुम जानते हो, फिर क्यों सबक नहीं लेते","कभी तुमने सोचा, ये बीज (बीज) जो तुम बोते हो","इनसे खेतियां तुम उगते हो या उनके उगने वाले हम हैं","हम चाहें तो उन खेतों को भूस (मलबा) बना कर रख दें और तुम तरह-तरह की बातें बनाते रह जाओ","के हम पर तो उल्टी चाटी पड़ गई (लो! हम कर्ज से दबे हुए हैं)","बलके हमारे तो नसीब ही फूटे हुए हैं","कभी तुमने आंखें खोल कर देखा, ये पानी जो तुम पीते हो","इसे तुमने बादलों से बरसाया है या इसके बरसाने वाले हम हैं","हम चाहें तो isey सच खरी (कड़वा) बना कर रख दें, फिर क्यों तुम शुकर गुजर नहीं होते","कभी तुमने ख्याल किया, ये आग जो तुम सुलगते हो","इसका दर्द तुम ने पेदा किया है या इसके पेदा करने वाले हम हैं","हमने उसको याद-दिहानी (रिमाइंडर) का ज़रिया और हाजत-मंदों (जरूरतमंद) के लिए सामान-ए-ज़ीस्ट (प्रावधान) बनाया है","पास ऐ नबी, अपने रब-ए-अज़ीम के नाम की तस्बीह करो","पास नहीं मैं कसम खाता हूं तारों के मवाके, आदि) की","अगर तुम समझो तो ये बहुत बड़ी क़सम है","के ये एक बुलंद पाया कुरान है","एक महफ़ूज़ किताब में सब्त (लिखा हुआ)","जिसे मुतहरीन (शुद्ध) के सिवा कोई छू नहीं सकता","ये रब्ब-उल-आलमीन का नाज़िल करदा है","फिर क्या इस कलाम के साथ तुम बे-अतनयी (उदासीन) बारात-ते हो","और इस नियामत में अपना हिसा तुमने ये रक्खा है के इसी झूठलाते हो","तो जब मरने वाले की जान हलक तक पहुंच चुकी होती है है","और तुम आँखों से देख रहे हो के वो मर रहा है","हमें वक्त तुम्हारे ब-निस्बत हम उसके ज्यादा करीब होते हैं मगर तुमको नजर नहीं आती","अब अगर तुम किसी के महकूम नहीं हो और अपने इस ख्याल में सच्चे हो","हमें वक्त उसकी निकलती हुई जान को वापस क्यों नहीं ले आते","फिर वो मरने वाला अगर मुकर्रबीन (अल्लाह के करीब) में से हो","तो उसके लिए राहत और उम्र रिज़क और नियामत भरी जन्नत है","और अगर वो अशाब-ए-यमीन में से हो","तो उसका इस्तकबाल (स्वागत) यूं होता है के सलाम है तुझ, तू असहाब-उल-यमीन (दाहिनी ओर के लोग) में से है","और अगर वो झूठलाने वाले गुमराह लोगों में से हो","तो उसकी तवाज़ू के लिए खौलता (उबलता हुआ) पानी है","और जहन्नुम में झोंका जाना","ये सब कुछ कताई हक़ है","पास ऐ नबी अपने रुब-ए-अज़ीम के नाम की तस्बीह करो","अल्लाह की तस्बीह है हर उस चीज़ ने जो ज़मीन और आसमान में है, और वही ज़बरदस्त दाना (बुद्धिमान) है","ज़मीन और आसमान की सल्तनत का मालिक वही है, ज़िंदगी बक्शता है और मौत देता है, और हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है","वही अव्वल भी है और आख़िर भी, और ज़ाहिर भी है और मख़फ़ी (हिद्दीन) भी, और वो हर चीज़ का इल्म रखता है","वही है जिसने आसमान और ज़मीन को (छह) दिनों में पेदा किया और फिर अर्श पर जलवा फरमा हुआ। उसके इल्म में है जो कुछ ज़मीन में जाता है और जो कुछ उसे निकलता है, और जो कुछ आसमान से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है। वो तुम्हारे साथ है जहाँ भी तुम हो। जो काम भी करते हो उसे वो देख रहा है","वही ज़मीन और आसमान की बादशाही का मालिक है और तमाम मामले फैसले के लिए उसकी तरफ रूजू किये जाते हैं","वही रात को दिन में और दिन को रात में दाख़िल करता है, और दिलों को के छुपे हुए राज़ तक जानता है","ईमान लाओ अल्लाह और उसके रसूल पर और ख़र्च करो उन चीज़ों में से जिनपर उसने तुमको ख़लीफ़ा बनाया है। जो लोग तुम में से ईमान लाएंगे और माल खर्च करेंगे उनके लिए बड़ा अजर है","तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह पर ईमान नहीं लाते हालंके रसूल तुम्हें अपने रब पर ईमान लाने की दावत दे रहा है, और वो तुमसे अहद (संविदा) ले चूका है, अगर तुम वकायी मानोगे वाले हो","वाह अल्लाह हाय तो है जो अपने बंदे पर साफ साफ आयतें नाज़िल कर रहा है ता-के तुम्हें तारीख़ों (अंधेरे) से निकाल कर रोशनी में ले आये। और हक़ीक़त ये है के अल्लाह तुमपर निहायत शफ़ीक़ और मेहरबान है","आख़िर क्या वजह है कि तुम अल्लाह की राह में ख़र्च नहीं करते, ज़मीन और आसमान की मीरास (विरासत) अल्लाह ही के लिए है। तुम में से जो लोग फतह के बाद खर्च और जिहाद करेंगे वो कभी उन लोगों के बराबर नहीं हो सकते जिन्होन ने फतह से पहले खर्च और जिहाद किया है। जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बा-ख़बर है","कौन है जो अल्लाह को क़र्ज़ दे? अच्छा क़र्ज़ ता-के अल्लाह उसे कै गुनाह बड़ा कर वापस दे। और उसके लिए बेहतरीन अजर है","उस दिन जबके तुम मोमिन मर्दन और औरतों को देखोगे के उनका नूर उनके आगे आगे और उनके दिन जानिब दौड़ रहा होगा (उन्हें कहा जाएगा के) आज बशारत (खुशखबरी) है। तुम्हारे लिए जन्नतें होंगी जिनके बारे में खास बातें नहीं होंगी, जिन में वो हमेशा रहेंगे। यही है बड़ी कामयाबी","हमें रोज़ मुनाफिक मर्दों और औरतों का हाल ये होगा के वो मोमिनो से कहेंगे ज़रा हमारी तरफ देखो ता-के हम तुम्हारे नूर से कुछ फ़ायदा उठायें। मगर उनसे कहा जाएगा पीछे हट जाओ, अपना नूर कहीं और तलाश करो। फिर उनके दरमियान एक दीवार होल करदी जाएगी जिसमें एक दरवाजा होगा उस दरवाज़े के अंदर रहमत होगी और बाहर अज़ाब","वो मोमिनो से पुकार पुकार कर कहेंगे क्या हम तुम्हारे साथ ना थे? मोमिन जवाब देंगे हां, मगर तुमने अपने आप को खुद फिटने में डाला, मौका परस्त की, शक्क में पड़े रहे, और झूठी तवक्कुअत (उम्मीदें) तुम्हें फरेब देती रही यहां तक ​​के अल्लाह का फैसला आ गया। और आखिरी वक्त तक वो बड़ा धोखा बाज़ तुम्हें अल्लाह के मामले में धोखा देता रहा","लिहाज़ा आज ना तुमसे कोई फ़िदिया कबूल किया जाएगा और ना उन लोगों से जिन्हों ने खुला खुला कुफ्र किया था। तुम्हारा ठिकाना जहन्नुम है. वही तुम्हारी खबर-गीरी करने वाली है और ये बद्तरीन अंजाम है","क्या ईमान लाने वालों के लिए अभी वो वक्त नहीं आया के उनके दिल अल्लाह के जिक्र से पिगलें और उसके नाज़िल करदा हक के आगे झुकें और वो उन लोगों की तरह न हो जाएं जिन्हें पहली किताब दी गई थी, फिर एक लंबी मुद्दत उन पर गुजर गई तो उनका दिल सख्त हो गया और आज उनमें से अक्सर फासीक बने हुए हैं","खूब जान लो के अल्लाह जमीन को उसकी मौत के बाद जिंदगी बक्शता है, हमने निशानियां तुमको साफ साफ दिखाया है, शायद के तुम अक़ल से काम लो","मर्दन और औरतों में से जो लोग सदक़ात (दान) देने वाले हैं और जिन्होन ने अल्लाह को कर्ज़-ए-हसन दिया है, उनको यकीन कई गुनाह कर दिया जाएगा और उनके लिए बेहतरीन अजर है","और जो लोग अल्लाह और उसके रसूलन पर ईमान लाए हैं वही अपने रब के नाज़दीक सिद्दीक और शहीद हैं। उनके लिए उनका अजर और उनका नूर है। और जिन लोगों ने कुफ़्र किया है और हमारी आयतों को झुटलाया है वो दोज़खी है","खूब जान लो के ये दुनिया की जिंदगी इसके सिवा कुछ नहीं के एक खेल और दिल-लगी और जाहिरी टिप टॉप और तुम्हारे आपस में एक दूसरे पर फक्र जताना और माल-ओ-औलाद में एक दूसरे से बढ़कर जाने की कोशिश करना है।इसकी मिसाल ऐसी है जैसी एक बारिश हो गई तो उसे पैदा होने वाली नबातात (वनस्पति) को देख कर काश्त-कार (किसान) खुश हो गई। फिर वही खेती पक जाती है और तुम देखते हो कि वो जर्द (पीली) हो गई है फिर वो भूस (चूरा चुरा/उखड़ जाती है) बनकर रह जाती है। इस्के बराक्स आख़िरत वो जगह है जहाँ सख्त अज़ाब है और अल्लाह की मगफिरत और उसकी खुशनुदी है। डंक्या की जिंदगी एक धोखे के टट्टी (धोखे का मतलब) के सिवा कुछ नहीं","दौड़ो (रेस) और एक दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश करो अपने रब की मगफिरत और उसकी जन्नत की तरफ जिसकी वुस्सत (चौड़ाई) आसमान-ओ-जमीन जैसी है। जो मुहैय्या हो गई है उन लोगों के लिए जो अल्लाह और उसके रसूलन पर ईमान लाए हों। ये अल्लाह का फ़ज़ल है, जिसे चाहता है अता फ़र्माता है, और अल्लाह बदे फ़ज़ल वाला है","कोई मुसीबत ऐसी नहीं है जो ज़मीन में या तुम्हारे अपने नफ़्स पर नाज़िल होती हो और हमने उसको अदा करने से पहले एक किताब में लिख न रखा हो। ऐसा करना अल्लाह के लिए बहुत आसान काम है","(ये सब कुछ इसलिए है) ता-के जो कुछ भी नुक्सान तुम्हें हो उस पर तुम दिल-शिकस्ता (शोक) न हो और जो कुछ अल्लाह तुम्हें अता फरमाये उसपर फूल ना जाओ। अल्लाह ऐसे लोगों को पसंद नहीं करता जो अपने आप को बड़ी चीज समझता है और फक्र जताता है","जो खुद बुखल (निगार्ड/कंजुसी) करते हैं और दूसरों को बुखल पर उक्साते हैं। अब अगर कोई रु-गर्दनी (मुंह फेरना) करता है तो अल्लाह के लिए बे-नियाज़ और सातोदा सिफत (बेहद प्रशंसनीय) है","हमने अपने रसूलों को साफ-साफ निशानियां और हिदायत के साथ भेजा, और उनके साथ किताब और मिज़ान (संतुलन) नाज़िल की ताकाय लोग इन्साफ पर कायम माननीय और लोहा (आयरन) उतारा जिसमें बड़ा ज़ोर है और लोगों के लिए मुनाफ़ा है। ये इसलिए किया गया है कि अल्लाह को मालूम हो जाए कि कौन उसको देखे बिना उसकी और उसके रसूलों की मदद करता है। यकीनन अल्लाह बड़ी कुव्वत वाला और ज़बरदस्त है","हमने नूह और इब्राहीम को भेजा और उन दोनों की नाक में नबुवत और किताब रख दी फिर उनकी औलाद में से किसी ने हिदायत इख्तियार की और बहुत से फासिक हो गए","उनके बाद हमने पै डर पै (उत्तराधिकार) अपने रसूल भेजे, और सबके बाद ईसा इब्न-ए-मरियम को माबूस किया और उसको इंजील अता की, और जिन लोगों ने उसकी जोड़ी इख्तियार की उनके दिलों में हमने तरस (कोमलता) और रहम डाल दिया। और रहबनियात (मठवाद) उन्होन ने खुद इजाद करली, हमने उसे अनपर फर्ज नहीं किया था। मगर अल्लाह की ख़ुशनुदी की तालाब में उन्होन ने आप ही ये बिदात निकाली और फिर इसकी पबन्दी करने का जो हक़ था उसे अदा ना किया। उनमे से जो लोग ईमान लाए हुए थे उनका अजर हमने उनको अता किया, मगर उनमे से अक्सर लोग फासीक हैं","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो और उसके रसूल पर ईमान लाओ। अल्लाह तुम्हें अपनी रहमत का दोहरा हिसा अता फरमाएगा और तुम्हें वही नूर बख्शेगा जिसकी रोशनी में तुम चलोगे, और तुम्हारे कसूर माफ कर देंगे। अल्लाह बड़ा माफ करने वाला और मेहरबान है","(तुमको ये रवीश इख्तियार करनी चाहिए) ता-के एहले किताब को मालूम हो जाए के अल्लाह के फज़ल पर उनका कोई इजारा (नियंत्रण/इख्तियार) नहीं है, और ये के अल्लाह का फजल उसके अपने ही हाथ में है, जिसे चाहता है अता फरमाता है। और वो बदे फ़ज़ल (इनाम) वाला है","अल्लाह ने सुन लिया हमें औरत की बात जो अपने शोहर के मामले में तुमसे तकरार कर रही है और अल्लाह से फरियाद की जाती है।","तुम में से जो लोग अपनी बीवियों से ज़िहार (अपनी पत्नियों को अपनी मां घोषित करके तलाक दे देते हैं) करते हैं उनकी बीवियां उनकी मां नहीं हैं। उनकी मांएं तो वही हैं जिन्हों ने उनको जाना है। ये लोग एक सच्चा साथी और झूठी बात कहते हैं। और हक़ीक़त ये है के अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला और दरगुज़र फ़रमाने वाला है","जो लोग अपनी बीवीयों से ज़िहार करें फिर अपनी हमसे बात से रूजू (वापस जाने के लिए) करें जो उन्होन ने कही थी, तो कबूल इसके के दोनों एक दूसरे को हाथ लगायें, एक गुलाम आज़ाद करना होगा. इस्से तुमको हिदायत की जाती है, और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बख़बर है","और जो शक्स गुलाम ना पाए वो दो माहीन के पै डर पै (लगातार) रोज़े रक्खे क़बल इसके के दोनों एक दूसरे को हाथ लगायें और जो इसपर भी कादिर ना हो वो 60 मिस्किनो को खाना खिलाये. ये हुकुम इसलिए दिया जा रहा है कि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ। ये अल्लाह की मुकर्रर की हुई हदें (सीमाएं) हैं, और काफिरों के लिए दर्दनाक सजा है","जो लोग अल्लाह की और उसके रसूल की मुखालफत करते हैं वो उसकी तरह ज़लील-ओ-ख़्वार कर दिए जाएंगे जिस तरह उनसे पहले के लोग ज़लील-ओ-ख़्वार किए जा चुके हैं। हमने साफ साफ आयतें नाज़िल कर दी हैं, और काफिरों के लिए ज़िल्लत का अज़ाब है","उस दिन (ये ज़िल्लत का अज़ाब होना है) जब अल्लाह सबको फिर से जिंदा करके उठाएगा और यहीं बता देगा के वो क्या कुछ करके आए हैं। वो भूल गए हैं मगर अल्लाह ने सबका किया धारा गिन-गिन कर महफूज़ कर रखा है। और अल्लाह एक चीज़ पर शाहिद (गवाह) है","क्या तुमको खबर नहीं है कि ज़मीन और आसमान की हर चीज़ का अल्लाह को इल्म है? कभी ऐसा नहीं होता के तीन आदमियों में कोई सरगोशी हो (चौथा) अल्लाह न हो, या पांच आदमियों में सरगोशी हो और उनके अंदर चट्टा (छठा) अल्लाह न हो, खुफिया बात करने वाला ख्वा इसे कम हो या ज्यादा जहां कहीं भी वो हो, अल्लाह उनके साथ होता है. फिर कयामत के रोज़ वो उनको बता देगा के अनहोन ने क्या कुछ किया है। अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है","क्या तुमने देखा नहीं उन लोगों को जिन्होंने सरगोशियां करने से मन करदिया गया था फिर भी वो वही हरकत किए जाते हैं जैसे उन्हें मन किया गया था? ये लोग चुप चुप कर आपस में गुनाह और ज्यादती और रसूल की नफ़रमानी की बातें करते हैं। और जब तुम्हारे पास आते हैं तो तुम्हें हमारी तरफ से सलाम करते हैं जिस तरह अल्लाह ने तुम्हारे पास सलाम नहीं किया है, और अपने दिलों में कहते हैं \"हमारी इन बातों पर अल्लाह हमें अज़ाब क्यों नहीं देता\"। उनके लिए जहन्नुम ही काफी है, उसका वो इंधन (ईंधन) बनेगा, बड़ा ही बुरा अंजाम है उनका","ऐ लोग जो ईमान लाए हो जब तुम आपस में पोशिदा बात करो तो गुनाह और ज्यादती और रसूल की नफरमानी की बातें नहीं, बल्कि नेकी और तकवा की बातें करो और हमसे खुदा से डरते रहो जिसके हुजूर तुम्हें हश्र में पेश होना है","काना-फूसी (फुसफुसाते हुए) तो एक शैतानी काम है, और वो इस्ली की जाति है के ईमान लेन वाले लोग उससे रंजीदा होन, हालंके बे-इज़ान-ए-खुदा (अल्लाह की इच्छा को छोड़कर) वो उन्हें कुछ भी नुक्सान नहीं पाहुंचा सकती, और मोमिनो को अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुमसे कहा जाए के अपनी मजलिसों में जगह बनाओ तो जगह बनाओ, अल्लाह तुम्हें कुशादगी बख्शेगा। और जब तुमसे कहा जाए के उठ जाओ तो उठ जया करो, तुम में से जो लोग ईमान रखने वाले हैं और जिनको इल्म बख्शा गया है, अल्लाह उनको बुलंद दर्जे अता फरमाएगा। और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह को उसकी खबर है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम रसूल से तख्लिए (गोपनीयता) में बात करो तो बात करने से पहले कुछ सदका दो। ये तुम्हारे लिए बेहतर और पाकीजा-तार है। अलबत्ता अगर तुम सदका देने के लिए अल्लाह गफूर-ओ-रहीम के लिए कुछ न पाओ","क्या तुम डर गए इस बात से (गोपनीयता) में गुफ्तगू करने से पहले तुम्हें सदका देने होंगे? अच्छा, अगर तुम ऐसा न करो और अल्लाह ने तुमको इसे माफ कर दिया तो नमाज़ कायम करते रहो, ज़कात देते रहो और अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करते रहो। तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसे बख़बर है","क्या तुमने देखा नहीं उन लोगों को जिन्हों ने दोस्त बनाया है एक ऐसे गिरोह (लोगों) को जो अल्लाह का मगज़बान (क्रोध) है? वो ना तुम्हारे हैं ना उनके, और वो जान बूझ कर झूठी बात पर कसमें खाते हैं","अल्लाह ने उनके लिए खुद अज़ाब मुहैय्या कर रखा है। बड़े ही बुरे कलाकार हैं जो वो कर रहे हैं","उन्होन ने अपनी कसमों को ढाल बना रखा है जिसकी आड़ में वो अल्लाह की राह से लोगों को रोकते हैं। इसपर उनके लिए ज़िल्लत का अज़ाब है","अल्लाह से बचने के लिए ना उनके माल कुछ काम आएंगे ना उनकी औलाद। वो दोज़ख़ के यार हैं, उसमें वो हमेशा रहेंगे","जिस रोज़ अल्लाह उन सबको उठाएगा, वो उसके सामने भी उसकी तरह कसमें खाएंगे, जिस तरह तुम्हारे सामने खड़े हैं, और अपने नज़दीक ये समझेंगे के इस तरह उनका कुछ काम बन जाएगा। ख़ूब जान लो वो पारले दराज़ के झूठे हैं","शैतान उस पर मुसल्लत हो चूका है और उसने खुदा की याद उनके दिल से भुला दी है।वो शैतान की पार्टी के लोग हैं। ख़बरदार हूँ, शैतान की पार्टी वाले ही खसरे में रहने वाले हैं","यकीनन ज़लील तारीन मखलूक़त में से हैं वो लोग जो अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला करते हैं","अल्लाह ने लिख दिया है कि मैं और मेरे रसूल ग़ालिब होकर रहेंगे। फिल वाकी अल्लाह जबरदस्त और जोरावर (सबसे मजबूत) है","तुम कभी ये ना पाओगे के जो लोग अल्लाह और आखिरी पर ईमान रखने वाले हैं वो उन लोगों से मुहब्बत करते हैं जिन्होन ने अल्लाह और उसके रसूल की मुखालफत की है, ख्वा वो उनके बाप हूं, हां उनके बेटे, हां उनके भाई हां उनके एहले खानदान। ये वो लोग हैं जिनके दिलों में अल्लाह ने ईमान सब्त (लिखा/लिखा) कर दिया है और अपनी तरफ से एक रूह अता करके उनको कुव्वत बख्शी है, वो उनको ऐसी जन्नत में दाख़िल करेगा जिनके बारे में खास बातें होती होंगी। उनमें वो हमेशा रहेंगे. अल्लाह उन से रज़ी (प्रसन्न) हुआ और वो अल्लाह से रज़ी हुए। वो अल्लाह की पार्टी के लोग हैं। ख़बरदार रहो, अल्लाह की पार्टी वाले ही फलाह पैने वाले हैं","अल्लाह ही की तस्बीह की है हर उस चीज़ ने जो आसमान और ज़मीन में है, और वही ग़ालिब और हकीम है","वही है जिसने एहले किताब काफिरों को पहले ही हमले में उनके घरों से निकल बाहर किया।तुम्हें हरगिज ये गुमां ना था के वो निकल जाएंगे और वो भी ये समझे बैठे थे के उनकी गड़ियां (किले) उन्हें अल्लाह से बचा लेंगी।मगर अल्लाह ऐसे रुख से उन पर आया जिधर उनका ख्याल भी ना गया था. उसने उनके दिलों में रोब (आतंक) डाल दिया, नतीजा ये हुआ के वो खुद अपने हाथों से भी अपने घरों को बर्बाद कर रहे थे और मोमिनो के हाथों को भी बर्बाद करवा रहे थे। पस इब्रत हासिल करो ऐ दीधा-ए-बीना (समझदार आंखें) रखने वालों","अगर अल्लाह ने उनके हक़ में जिला वतनी (निर्वासन) ना लिख ​​दी होती तो दुनिया ही में वो उन्हें अज़ाब दे देता। और आख़िरत में तो उनके लिए दोज़ख का अज़ाब है हाय","ये सब कुछ इसलिए हुआ के उनको अल्लाह ने और उसके रसूल का मुक़ाबला किया। और जो भी अल्लाह का मुकाबला करे अल्लाह उसको सजा देने में बहुत सक्षम है","तुम लोगों ने खजूरों (खजूरों) के जो दरख्त काटे या जिनको अपने जदों (जड़ों) पर खड़ा रहने दिया, ये सब अल्लाह ही के ईज़ान से थे और (अल्लाह ने ये इज़ान इस्लिये दिया) ता-के फ़ासीकों को ज़लील-ओ-ख़ार करे","और जो माल अल्लाह ने उनके कब्जे से निकल कर अपने रसूल की तरफ पलटा दिया, वो ऐसा माल नहीं है जिनपर तुमने अपने घोड़े और ऊंट (ऊंट) दौड़ाए। बलके अल्लाह अपने रसूलों को जिसपर चाहता है तसल्लुत (अधिकार/गलाबा) अता फरमा देता है। और अल्लाह हर चीज पर कादिर है","जो कुछ भी अल्लाह बस्तियों के लोगों से अपने रसूल की तरफ पलटा दे वो अल्लाह, और रसूल, और रिश्तेदारों, और यतामा (अनाथों), और मसाकीन, और मुसाफिरों, के लिए है ता-के वो तुम्हारे मालदारों ही के दरमियान गर्दिश न करता रहे। जो कुछ रसूल तुम्हें दे वो लेलो और जिस चीज़ से वो तुम को रोक दे उसे रुक जाओ। अल्लाह से डरो, अल्लाह सज़ा देने वाला है","(नीज़ वो माल) उन ग़रीब मुहाजिरीन के लिए है जो अपने घरों और ज़ैदादों से निकल बाहर हो गए हैं। ये लोग अल्लाह का फ़ज़ल और उसकी ख़ुशनुदी चाहते हैं और अल्लाह और उसके रसूल की हिम्मत पर क़मर-बस्ता रहते हैं। यही रस्त बाज़ (सच्चे) लोग हैं","(और वो उन लोगों के लिए भी हैं) जो मुहाजिरीन की आमद से पहले ही ईमान ला कर दार-उल-हिजरात [निवास (हिजड़ा का)] में मुकीम था। ये उन लोगों से मुहब्बत करते हैं जो हिजरत करके इनके पास आए हैं और जो कुछ भी उनको दे दिया जाए उसकी कोई हाजत तक ये अपने दिलों में महसूस नहीं करते और अपनी जात पर दूसरे को तरजीह देते हैं, ख्वा अपनी जगह खुद मोहताज होन। हकीकत ये है के जो लोग अपने दिल की तंगी से बच गए वही फलाह पाने वाले हैं","(और वो उन लोगों के लिए भी है) जो उन लोगों के बाद आए हैं, जो कहते हैं के “ऐ हमारे रब, हमें और हमारे उन सब भाइयों को बख्श दे जो हमसे पहले ईमान लाए हैं और हमारे दिलों में एहले ईमान के लिए कोई बुग्ज़ (द्वेष) न रख","","अगर वो निकले गए तो ये उनके साथ हरगिज न निकलेंगे, और अगर वो जंग की गई तो ये उनकी हरगिज मदद न करेंगे, और अगर ये उनकी मदद करें भी तो पीट-पीट कर जाएंगे और फिर कहीं से कोई मदद न पाएंगे","इनके दिलों में अल्लाह से बढ़ कर तुम्हारा खौफ है, क्योंकि ये ऐसे लोग हैं जो समझते हैं, नहीं रखते","ये कभी इकट्ठे होकर (खुले मैदान में) तुम्हारा मुकाबला ना करेंगे, लड़ेंगे भी तो किला-बंद बस्तियों (गढ़वाली टाउनशिप) में बैठ कर या दीवारों के पीछे चुप कर. ये आपस की मुखालफत में बदायश हैं। तुम उन्हें इखत्ता समझते हो मगर इनके दिल एक दूसरे से फटे हुए हैं। इनका ये हाल है के ये अक्ल लोग हैं","ये उन्ही लोगों के मनिंद हैं जो इनसे थोड़ी ही मुद्दत पहले अपने किए का मजा चख चुके हैं और इनके लिए दर्दनाक अज़ाब है","इनकी मिसाल शैतान की सी है के पहले वो इंसान से कहता है कुफ्र कर, और जब इंसान कुफ्र कर बैठता है तो वो कहता है मैं तुझसे बारी-उज-जिम्मा हूं, मुझे अल्लाह रब्ब-उल-आलमीन से डर लगता है","फिर दोनों का अंजाम ये होना है के हमेशा के लिए जहन्नुम में जायें, और जालिमों की यही जजा है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो, और हर शक्स ये देखे के उसने कल के लिए क्या समान किया है। अल्लाह से डरते रहो, अल्लाह यकीनन तुम्हारे उन सब आमाल से बा-खबर है जो तुम करते हो","उन लोगों की तरह ना हो जाओ जो अल्लाह को भूल गए तो अल्लाह ने उन्हें खुद अपना नफ्स भुला दिया। यही लोग फ़ासीक़ हैं","दोज़ख में जाने वाले और जन्नत में जाने वाले कभी यक्सान नहीं हो सकते। जन्नत में जाने वाले ही असल में कामयाब हैं","अगर हमने ये कुरान किसी पहाड़ पर भी उतार दिया होता तो तुम देखते के वो अल्लाह के खौफ से दबा जा रहा है, और फटा पड़ता है। ये मिसालें हम लोगों के सामने इस तरह बयान करते हैं के वो (अपने हालात पर) गौर करें","वो अल्लाह हाय है जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, गायब और जाहिर हर चीज का जाने वाला, वही रहमान और रहीम है","वो अल्लाह हाय है जिसके सिवा कोई माबूद नहीं वो बादशाह है, निहायत मुक़द्दस, सरसर सलामती (सर्व-शांति), अमन देने वाला (सुरक्षा देने वाला), निगाहबान, सब पर ग़ालिब, अपना हुकुम ब-ज़र नाफ़िज़ करने वाला, और बड़ा ही होकर रहने वाला। पाक है अल्लाह हमसे शिर्क से जो लोग कर रहे हैं","वो अल्लाह ही है, जो तख़लीक़ (सृजन) का मनसूबा (योजना) बनाने वाला है, और उसको नफ़ीज़ करने वाला, और उसे मुताबिक सूरत-गारी (फैशनर) करने वाला है। उसके लिए बेहतरीन नाम हैं। हर चीज़ जो आसमान और ज़मीन में है उसकी तस्बीह कर रही है, और वह ज़बरदस्त और हकीम है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम मेरी राह में जिहाद करने के लिए और मेरी रज़ा-जोई की खातिर (वतन छोड़ कर घरों से) निकले हो तो मेरे और अपने दुश्मनों को दोस्त ना बनाओ। तुम उनके साथ दोस्ती की तरह बदलते हो, हलांके जो हक तुम्हारे पास आया है उसको मन्ने से वो इनकार कर चुके हैं। और उनकी रवीश ये है के रसूल को और खुद तुमको सिर्फ इस कसूर पर जिला-वतन (निष्कासित) करते हैं कि तुम अपने रब, अल्लाह पर ईमान लाए हो। तुम छुपा कर उनको दोस्ताना पैग़ाम भेजते हो, हलाँके जो कुछ तुम छुपा कर करते हो और जो एलानिया (खुलेआम) करते हो, हर चीज़ को मैं ख़ूब जानता हूँ। जो शक्स भी तुम में से ऐसा करे वो यकीनन राह-ए-रास्त से भटक गया","उनका रवैय्या तो ये है के अगर तुम काबू पा जाओ तो तुम्हारे साथ दुश्मनी करें और हाथ और जुबान से तुम्हें अजर (चोट) दें, वो तो ये चाहते हैं के तुम किसी तरह काफिर हो जाओ","कयामत के दिन ना तुम्हारे रिश्ते किसी का काम आएंगी न तुम्हारी औलाद. हमें रोज़ अल्लाह तुम्हारे दरमियान जुदाई डाल देगा। और वही तुम्हारे अमाल का देखने वाला है","तुम लोगों के लिए इब्राहीम और उसके साथियों में एक अच्छा नामुना है के उन्होन ने अपनी क़ौम से साफ़ कहा \"हम तुमसे और तुम्हारे इन माबूदोन (देवताओं) से जिनको तुम खुदा को छोड़ कर पूजते हो कताइ बेज़ार हैं। हमने तुमसे कुफ्र किया और हमारे और तुम्हारे दरमियान हमेशा के लिए अदावत होगी और बैर पढ़ गया (शत्रुता और नफरत) जब तक तुम अल्लाह वाहिद पर ईमान न लाओ”। मगर इब्राहीम का अपने बाप से ये कहना (इससे मुस्तस्ना है) के \"मैं आपके लिए मगफिरत की अंधेरगर्दी जरूर करूंगा, और अल्लाह से आप के लिए कुछ हासिल कर लेना मेरे बस में नहीं है\"। (और इब्राहिम व असहाब-ए-इब्राहिम की दुआ ये थी के) \"ऐ हमारे रब, तेरे ही ऊपर हमने भरोसा किया और तेरी ही तरफ हमने रूजू (टर्न) कार्लिया और तेरे ही हुजूर हमें पलटना है","ऐ हमारे रब, हमें काफिरों के लिए फितना (ट्रायल/टेस्ट) ना बना दे और ऐ हमारे रब, हमारे कसूरों से दरगुज़र फ़रमा। बेशक़ तू ही ज़बरदस्त (ताकतवर) और दाना (बुद्धिमान) है","इन्ही लोगों के तर्ज़-ए-अमल में तुम्हारे लिए और हर उस शक्स के लिए अच्छा नामुना (उदाहरण) है जो अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर का उम्मीदवर हो. इस्से कोई मुनहरिफ़ हो (मुड़ जाता है) अल्लाह की ओर नियाज़ (सर्व-पर्याप्त) और अपनी ज़ात में आप महमूद हैं","बैद नहीं के अल्लाह कभी तुम्हारे और उन लोगों के दरमियान मोहब्बत डाल दे जिनसे आज तुमने दुश्मनी मोल ली है। अल्लाह बड़ी क़ुदरत रखता है और वो गफूर-ओ-रहीम है","अल्लाह तुम्हें इस बात से नहीं रोकता के तुम उन लोगों के साथ हो, और इन्साफ का वादा करो जिन्हों ने दीन के मामले में तुमसे जंग नहीं की है और तुम्हारे घरों से नहीं निकला है। अल्लाह इन्साफ करने वालों को पसंद करता है है","वो तुम्हें जिस बात से रोकता है वो तो ये है कि तुम उन लोगों से दोस्ती करो जिन्हों ने तुमसे दीन के मामले में जंग की है और तुम्हारे घरों से निकला है और तुम्हारे इखराज (निष्कासन) में एक दूसरे की मदद की है। उनसे जो लोग दोस्ती करें वही ज़ालिम हैं","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब मोमिन औरतें हिजरत करके तुम्हारे पास आएं तो (उनके मोमिन होने की) जांच पडताल करलो। और उनके ईमान की हकीकत अल्लाह ही बेहतर जानता है। फिर जब तुम्हें मालूम हो जाए कि वो मोमिन हैं तो उन्हें कुफ्फार की तरफ वापस न करो। ना वो कुफ्फार के लिए हलाल हैं और ना कुफ्फार उनके लिए हलाल हैं। उनके काफिर शोहरों ने जो मेहर उनको दिए थे वो उन्हें फेर दो और उनसे निकाह कर लेने पर तुमसे कोई गुनाह नहीं जबके तुम उनके मेहर उनको अदा करदो। और तुम खुद भी काफिर औरतों को अपने निकाह में न रोके रहो, जो मेहर तुमने अपनी काफिर बीवीयों को दिए थे वो तुम वापस मांग लो और जो मेहर काफिरों ने अपनी मुसलमान बीवीयों को दिए थे उन्हें वो वापस मांग लें। ये अल्लाह का हुकुम है, वो तुम्हारा दरमियान फैसला करता है और अल्लाह अलीम-ओ-हकीम (सभी जानने वाला-सबसे बुद्धिमान) है","और अगर तुम्हारी काफिर बीवीयों के मेहरों में से कुछ तुम्हें कुफ्फार से वापस न मिले और फिर तुम्हारी नौबत आये तो जिन लोगों की बीवीयाँ उधर रह गई हैं उनको इतनी रकम अदा करदो जो उनके दिए हुए मेहरों के बराबर हो। और हम खुदा से डरते रहो जिसपर तुम ईमान लाए हो","ऐ नबी, जब तुम्हारे पास मोमिन औरतें बैत (प्रतिज्ञा) करने के लिए आएं और इस बात का अहद करें के वो अल्लाह के साथ किसी चीज को शरीक ना करेंगी, चोरी ना करेंगी, जीना ना करेंगी, अपनी औलाद को क़त्ल न करेंगी, अपने हाथ पैरों के आगे कोई बोहतन (कैलमनी) घड़ कर न लेंगी, और किसी अम्र-ए-मारूफ़ (कुछ भी अच्छा होने के लिए जाना जाता है) में तुम्हारी नफ़रमानी न करेंगी, तो उनसे बैत लेलो और उनके हक़ में अल्लाह से दुआ-ए-मगफिरत करो। यकीनन अल्लाह दरगुज़र (माफ़) फ़रमाने वाला और रहम करने वाला है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, उन लोगों को दोस्त न बनाओ जिनपर अल्लाह ने ग़ज़ब फरमाया है, जो आख़िरत से उसकी तरह मयौस हैं जिस तरह कब्रों में पड़े हुए काफिर मयौस हैं","अल्लाह की तस्बीह की है हर उस चीज़ ने जो आसमान और ज़मीन में है, और वो ग़ालिब (ताकतवर) और हकीम (बुद्धिमान) है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम क्यों वो बात कहते हो जो करते नहीं हो","अल्लाह के नाज़दीक ये सच ना पसंदीदा हरकत है के तुम कहो वो बात जो करते नहीं","अल्लाह को तो पसंद वो लोग हैं जो उसकी राह में है इस तरह सफ़-बस्ता (पंक्ति) होकर लड़ते हैं गोया के वो एक सिसा पिलाई हुई दीवार हैं","और याद करो मूसा की वो बात जो उसने अपनी क़ौम से कहीं थी \"ऐ मेरी क़ौम के लोगों, तुम क्यों मुझे अज़ियात (पीड़ा/नुकसान) देते हो हलांके तुम ख़ूब जानते हो के मैं तुम्हारी तरफ अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूं? फिर जब उन्होन ने टेढ इख्तियार की (विचलित) अल्लाह के लिए ने उनका दिल टेढ़े (विचलित) कर दिया, अल्लाह फासिकों को\" हिदायत नहीं देता","और याद करो ईसा इब्न-ए-मरियम की वो बात जो उसने कही थी के \"ऐ बनी इसराइल, मैं तुम्हारी तरफ अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूं, तस्दीक (सत्यापित/पुष्टि) करने वाला हूं उस तौरात की जो मुझसे पहले आई है मौजुद है, और बशारत (खुशखबरी) देने वाला हूं एक रसूल की जो मेरे बाद आएगा जिसका नाम अहमद होगा। मगर जब वो उनके पास खुली खुली निशानियां लेकर आया तो उनको ने कहा ये तो सारा धोखा है","अब भला उस शक्स से बड़ा जालिम और कौन होगा जो अल्लाह पर झूठे बोहतन बंधे हलांके उसे इस्लाम (अल्लाह)। के आगे सर-ए-इताअत झुके) कि दावत दी जा रही हो? ऐसे जालिमों को अल्लाह हिदायत नहीं दिया करता","ये लोग अपने मुंह की फूंकों से अल्लाह के नूर को बुझाना चाहते हैं, और अल्लाह का फैसला ये है कि वो अपने नूर को पूरा प्यार कर रहेगा ख्वा काफिरों को ये कितना ही नागावर हो","वही तो है जिसने अपने रसूल को हिदायत और दीन-ए-हक़ के साथ भेजा है ता-के उसे पूरे के पूरे दीन पर ग़ालिब करदे ख्वा मुशरिकेन को ये कितना ही नागावर हो","ऐ लोगन जो ईमान लाए हो, मैं बताऊँ तुमको वो तिजारत जो तुम्हें अज़ाब-ए-आलिम से बचा दे","ईमान लाओ अल्लाह और उसके रसूल पर, और जिहाद करो अल्लाह की राह में अपने मालों से और अपनी जानो से, यहीं तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम जानो","अल्लाह तुम्हारे गुनाह माफ कर देगा, और तुमको ऐसे बाघों में दाख़िल करेगा, जिनकी जगहें नहरें बहती होंगी, और आबादी (शाश्वत) क़याम की जन्नत में बहतरीन घर तुम्हें अता फरमायेगा। ये है बड़ी कामयाबी","और वो दूसरी चीज़ जो तुम चाहते हो वो भी तुम्हें देगा, अल्लाह की तरफ से नुसरत (जीत) और करीब ही में हासिल हो जाने वाली फतह। ऐ नबी एहले ईमान को इसकी बशारत दे दो","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह के मददगार बनो, जिस तरह ईसा इब्न-ए-मरियम ने हवारियों (चेलों) को खिताब करके कहा था \"कौन है अल्लाह की तरफ (बुलाने) में मेरा मददगार\"। और हवारियों (चेलों) ने जवाब दिया था: \"हम हैं अल्लाह के मददगार\"। हमें वक्त बानी इजराइल का एक गिरो ​​ईमान लाया और दूसरे गिरो ​​ने इंकार किया। फिर हमने ईमान लाने वालों की उनके दुश्मनों के मुकाबले में तय की (सहायता) और वही ग़ालिब होकर रहे","अल्लाह की तस्बीह कर रही है हर वो चीज़ जो आसमानो में है और हर वो चीज़ जो ज़मीन में है, बादशाह है, कुद्दुस (पवित्र) है, ज़बरदस्त और हकीम (बुद्धिमान) है","वही है जिसने उम्मियों (अन्यजातियों/अशिक्षित) के अंदर एक रसूल खुद को उनसे उठाया, जो उन्हें उसकी आयत सुनाता है, उनकी जिंदगी संवरता है, और उनको किताब और हिकमत की तालीम देता है, हलांके इस्से पहले वो खुली गुमराही में पड़े हुए थे","और (इस रसूल की बिसात) उन दूसरे लोगों के लिए भी है जो अभी उनसे नहीं मिले हैं","अल्लाह ज़बरदस्त और हकीम है ये उसका फ़ज़ल है जिसे चाहता है देता है। और वो बड़ा फ़ज़ल फ़रमाने वाला है","जिन लोगों को तौरात का हमील (चार गे) बनाया गया था मगर उन्होन ने उसका बार ना उठाया, उनकी मिसाल हमें गधे (गधा) की सी है जिसपर किताबे लाडी हुई होन। इस्से भी ज्यादा बुरी मिसाल है उन लोगों की जिन्होन ने अल्लाह की आयत को झूठला दिया है। ऐसे ज़ालिमों को अल्लाह हिदायत नहीं दिया करता","इंसे कहो, “ऐ लोग जो यहुदी बन गए हो, अगर तुममें ये घमंड (अहंकार) है के बाकी सब लोगों को छोड़ कर बस तुम ही अल्लाह के चाहते (पसंदीदा) हो तो मौत की तमन्ना करो अगर तुम अपना इस ज़माना हो (दावा) मैं सच्चा हूं","लेकिन ये हरगिज उसकी तमन्ना ना करेगी अपने कार्टूनों की वजह से जो ये कर चुके हैं। और अल्लाह जालिमों को खूब जानता है","इनसे कहो, “जिस मौत से तुम भागते हो वो तो तुम आकार रहोगे। फिर तुम उसके सामने पेश हो जाओगे जो पोशिदा (छिपा हुआ) और जाहिर का जाने वाला है। और वो तुम्हे बता देगा के तुम क्या कुछ करते रहे हो","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब पुकारा जाए नमाज़ के लिए जुमा के दिन तो अल्लाह के ज़िक्र की तरफ दाऊद और ख़त्म-ओ-फ़ारोख़त छोड़ दो। ये तुम्हारे लिए ज्यादा बेहतर है अगर तुम जानो","फिर जब नमाज पूरी हो जाए तो जमीन में फैल जाओ और अल्लाह का फजल तलाश करो और अल्लाह को कसरत से याद करते रहो, शायद के तुम्हें फलाह (कामियाबी/समृद्धि) नसीब हो जाए","और जब उनको ने तिजारत (व्यवसाय) और खेल तमाशा होते देखा तो उसकी तरफ लपक गए और तुम्हें खड़ा छोड़ दिया। इनसे कहो, जो कुछ अल्लाह के पास है वो खेल तमाशे और तिजारत से बेहतर है और अल्लाह सबसे बेहतर रिज्क (जीविका) देने वाला है","ऐ नबी, जब ये मुनाफिक (पाखंडी) तुम्हारे पास आते हैं तो कहते हैं \"हम गवाही देते हैं के आप यकीनन अल्लाह के रसूल हैं, \"हाँ, अल्लाह जानता है के तुम ज़रूर उसके रसूल हो, मगर अल्लाह गवाही देता है के ये मुनाफिक क़तई झूठे हैं","इन्हों ने अपनी कसमों को ढाल बना रक्खा है और इस तरह ये अल्लाह के रास्ते से खुद रुकते हैं और दुनिया को रोकते हैं। कैसी बुरी हरकतें हैं जो ये लोग कर रहे हैं","ये सब कुछ इस वजह से है के इन लोगों ने ईमान ला कर फिर कुफ्र किया इस के लिए इनके दिलों पर मोहर लगा दी गई, अब ये कुछ नहीं समझते","इन्हें देखो तो इनके जूस(जिस्म/निकायों) तुम्हें बड़े शानदार नज़र आएं बोलें तो तुम इनकी बातें सुनते रह जाओ, मगर असल में ये गोया लाखदी के कुंडे हैं (लकड़ी के बीम) जो दीवार के साथ चुन कर रख दिए गए माननीय। हर ज़ोर की आवाज़ को ये अपने ख़िलाफ समझते हैं। ये पक्के दुश्मन हैं इनसे बच कर रहो। अल्लाह की मार इनपर ये किधर उलटे फिराए जा रहे हैं","और जब इनसे कहा जाता है के आओ ता-के अल्लाह का रसूल तुम्हारे लिए मगफिरत की दुआ करे, तो सर झटकते हैं और तुम देखते हो के वो बड़े घमंड के साथ आने से रुकते हैं","ऐ नबी, तुम चाहे इनके लिए मगफिरत की दुआ करो या ना करो, इनके लिए यक्सान है, अल्लाह हरगिज़ इन्हें माफ़ नहीं करेगा। अल्लाह फासिक लोगों (लोक का उल्लंघन करने वाले) को हरगिज हिदायत नहीं देता","ये वही लोग हैं जो कहते हैं कि रसूल के साथियों पर खर्च करना बंद करदो ता-के ये मुंतशिर हो जाएं। हलाँके ज़मीन और आसमानों के खज़ानों का मालिक अल्लाह ही है, मगर ये मुनाफिक समझते नहीं हैं","ये कहते हैं के हम मदीना वापस पहुँच जाएँ तो जो इज़्ज़त वाला है वो ज़लील को वहाँ से निकल बाहर करेगा। अल्लाह को हलांके इज्जत और उसके रसूल और मोमिनीन के लिए है, मगर ये मुनाफिक जानता नहीं है","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम्हारे माल और तुम्हारी औलादें तुमको अल्लाह की याद से गाफिल ना करदें। जो लोग ऐसा करें वही खसरे (नुक्सान /नुकसान) में रहने वाले हैं","जो रिज़क हमने तुम्हें दिया है उसमें से खर्च करो क़बल इसके के तुम में से किसी की मौत का वक्त आ जाए और हमें वक्त वो कहे \"ऐ मेरे रब, क्यों ना तू ना मुझे थोड़ी सी महौलत और दे दी के मुख्य सदका देता और साले लोगों में शामिल हो जाता”","हालंके जब किसी की महुलात-ए-अमल पूरी होने का वक्त आ जाता है तो अल्लाह हमें हरगिज़ मजीद महौलत नहीं देता, और जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उसे बाख़बर है","अल्लाह की तस्बीह कर रही है हर वह चीज जो आसमान में है और हर वह चीज जो जमीन में है उसकी बादशाही है और उसके लिए तारीफ है और वह हर चीज पर कादिर है","वही है जिसने तुमको पेदा किया, फिर तुम में से कोई काफिर है और कोई मोमिन। और अल्लाह वो सब कुछ देख रहा है जो तुम करते हो","उसने ज़मीन और आसमान को बरहक़्क अदा किया है, और तुम्हारी सूरत बनाई और बड़ी उम्मीद (उत्कृष्ट) बनाई है, और उसकी तरफ आख़िर-ए-कार तुम्हें पलटना है","ज़मीन और आसमानो की हर चीज़ का इस्तेमाल इल्म है जो कुछ तुम छुपाते हो और जो कुछ तुम जाहिर करते हो सब हमें मालूम है। और वो दिलों का हाल तक जानता है","क्या तुम्हें उन लोगों की कोई खबर नहीं पहुंची जिन्हों ने इसे पहले कुफर किया और फिर अपनी शामत-ए-आमाल (बुरा नतीजा) का मजा चख लिया? और आगे उनके लिए एक दर्दनाक अज़ाब है","क्या अंजाम के मुस्तहिक वो इस लिए हुए हैं उनके पास उनके रसूल खुली खुली दलीलें (स्पष्ट संकेत) और निशानियां लेकर आते रहे, मगर उनहों ने कहा\" क्या इंसान हमें हदायत देंगे?\" इस तरह उनहों ने मन्ने से इंकार कर दिया और मुंह फिर ले लिया। तब अल्लाह भी उनसे बे-परवा हो गया और अल्लाह तो है ही बे नियाज़ और अपनी ज़ात में आप महमूद (प्रशंसनीय)","मुनकिरीन ने बदले दावे से कहा है कि वो मरने के बाद हरगिज़ दोबारा न उठेंगे। इनसे कहो\" नहीं, मेरे रब की कसम तुम जरूर उठोगे, फिर जरूर तुम्हें बता देंगे (दुनिया में) क्या कुछ किया है और ऐसा करना अल्लाह के लिए बहुत आसान है","पास ईमान लाओ अल्लाह पर, और उसके रसूल पर, और हम रोशनी पर जो हमने नाज़िल की है। जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बख़बर है","(इसका पता तुम्हें रोज़ चल जाएगा) जब इज्तिमा (तुम्हें इकट्ठा करेगा) के दिन वो तुम सबको इकठ्ठा करेगा। वो दिन होगा एक दूसरे के मुकाबले में लोगों की हार जीत का नेक अमल कर्ता है, अल्लाह उसे गुनाह झाड़ देगा और उसे ऐसी जन्नत में दाख़िल करेगा जिनके बारे में पता चलेगा। ये लोग हमेशा हमेशा इनमें रहेंगे। यहीं बड़ी कामयाबी है","और जिन लोगों ने कुफ्र किया है और हमारी आयतों को झुटलाया है वो दोज़ख के कैदी होंगे, जिनमें वो हमेशा रहेंगे। और वो बख्तरीन ठिकाना है","कोई मुसीबत कभी नहीं आती मगर अल्लाह के इज़ान (अल्लाह की छुट्टी) ही से आती है। जो शख्स अल्लाह पर ईमान रखता है अल्लाह उसके दिल को हिदायत देता है। और अल्लाह को हर चीज़ का इल्म है","अल्लाह की इताअत करो और रसूल की इताअत करो लेकिन अगर तुम इताअत से मुह मोड़ते हो तो हमारे रसूल पर सफ़ सफ़ हक़ पाहुंचा देने के सिवा कोई ज़िम्मेदारी नहीं है","अल्लाह वो है जिसके सिवा कोई खुदा नहीं, लिहाज़ा ईमान लाने वालों को अल्लाह हाय पर भरोसा रखना चाहिए","ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारी बीवीयां और तुम्हारी औलाद में से बाज़ तुम्हारे दुश्मन हैं, इनसे होशियार रहो। और अगर तुम अफ्फु-ओ-दरगुज़ार (माफ़ कर दो और नज़रअंदाज) से काम लो और माफ़ कर दो अल्लाह गफूर-ओ-रहीम है","तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तो एक आजमाइश है, और अल्लाह ही है जिसके पास बड़ा अजर है","लिहाजा जहां तक ​​तुम्हारे बस में हो अल्लाह से डरते रहो, और सुनो और इताअत करो, और अपने माल खर्च करो, ये तुम्हारे ही लिए बेहतर है. जो अपने दिल की तंगी से महफ़ूज़ रह गए बस वही फलाह पाने वाले हैं","अगर तुम अल्लाह को क़र्ज़-ए-हसन दो तो वो तुम्हें कई गुना (कई गुना) बढ़ा कर देगा और तुम्हारे कसूरों से दर गुजर फरमाएगा। अल्लाह बडा क़दरदान और बोझबर (सबसे सहनशील) है","हाज़िर और गायब हर चीज़ को जानता है, ज़बरदस्त (शक्तिशाली) और दाना (सबसे बुद्धिमान) है","ऐ नबी, जब तुम लोग औरतों को तलाक दो तो उनकी उनकी इद्दत (प्रतीक्षा अवधि) के लिए तलाक दिया करो और इद्दत के जमाने का ठीक ठीक शुरू करो, और अल्लाह से डरो जो तुम्हारा रब है (जमाना-ए-इद्दत में) ना तुम उन्हें उनके घरों से निकालो और ना वो खुद निकले, इल्ला ये के वो कोई सारी बुराई की मुर्तकिब हो। ये अल्लाह की मुकर्रर करदा हदें हैं, और जो कोई अल्लाह की हदों (सीमाओं/सीमाओं) से ताजुज़ करेगा वो अपने ऊपर खुद ज़ुल्म करेगा। तुम नहीं जानते शायद इसके बाद अल्लाह (मुवाफिकत/सुलह की) कोई सूरत अदा करदे","फिर जब वो अपनी (इद्दत की) मुद्दत के ख़तम पर पहुंचें तो हां उन्हें भले तारिके से (अपने निकाह में) रोक रखो, हां भले तारिके पर उनसे जुदा हो जाओ, और दो ऐसे आदमियों को गवाह बना लो जो तुम मेरे साथ साहिब-ए-अदल हो, और (ऐ गवाह बनने वालों) गवाही ठीक ठीक अल्लाह के लिए अदा करो। ये बातें हैं जिनकी तुम लोगों को हिदायत की जाती है, हर उस शक्स को जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता हो। जो कोई अल्लाह से डरता है काम करेगा अल्लाह उसके लिए मुश्किल से निकलेगा का कोई रास्ता अदा कर देगा","और उसे ऐसे रास्ते से रिज्क देगा जिधर उसका गुमान (कल्पना) भी ना जाता हो। जो अल्लाह पर भरोसा करे उसके लिए वो काफी है। अल्लाह अपना काम पूरा करके रहता है, अल्लाह ने हर चीज़ के लिए एक तकदीर मुक़र्रर कर रखी है","और तुम्हारी औरतों में से जो हैज़ (माहवारी) से ज्यादा हो चुकी है, उनके मामले में अगर तुम लोगों को कोई शक़ नहीं है तो (तुम्हें मालूम हो के) उनकी इद्दत तीन महीनी है और यही हुकुम उनका है जिन्हें अभी हैज़ ना आया हो। और हामिला (गर्भवती) औरतों की इद्दत की हद ये है के उनका वाज़े हमल (डिलीवरी) हो जाए। जो शख़्स अल्लाह से डरे उसके मामले में वो सहूलत पैदा कर देता है","ये अल्लाह का हुकुम है जो उसने तुम्हारी तरफ नाज़िल किया है। जो अल्लाह से डरेगा अल्लाह उसकी बुराइयों को उससे दूर कर देगा और उसको बड़ा अजर देगा","उनको (जमाना-ए-इद्दत में) उसकी जगह रख्खो जहां तुम रहते हो, जैसी कुछ भी जगह तुम्हें मुयस्सर हो, और उन्हें तंग करने के लिए उनको ना सताओ। और अगर वो हमें परेशान करते हैं तो हमें वक्त तक खर्च करते रहो जब तक उनका वजन हमल कर दिया जाए। फिर अगर वो तुम्हारे लिए (बच्चे को) दूध पिलाएं तो उनकी उजरत (बदला) उन्हें दो, और भले तरीक़े से (उजरत का मामला) बहामी गुफ़्त-ओ-शनीद से ताई कार्लो। लेकिन अगर तुमने (उजरत ताई करने में) एक दूसरे को तंग किया तो बच्चे को कोई और औरत दूध पिला लेगी","खुशाल आदमी अपनी खुशहाली के मुताबिक नफ्का दे, और जिसका रिज़क काम दिया गया हो वो उसी माल में से खर्च करे जो अल्लाह ने उसे दिया है। अल्लाह ने जिसको जितना कुछ दिया है उसे ज़ियादा का वो उसे मुकल्लफ (बोझ) नहीं देता। बैद (दरवाजा) नहीं के अल्लाह तंगदस्ती के बाद फरख दस्ती भी अता फरमादे","कितनी ही बस्तियां हैं जिन्हों ने अपने रब और उसके रसूलों के हुकुम से सरताबी (विद्रोही) की तो हमने उनसे कहा, मुहासिबा किया और उनको बुरी तरह सजा दी","उनहों ने अपने किया का मजा चख लिया और उनका अंजाम-ए-कार घाटा हाय घाटा (पूरी तरह से नुकसान) है","अल्लाह ने (आखिरत में) उनके लिए सिर्फ अजब मुहैय्या कर रखा है। पस अल्लाह से डरो ऐ साहिब-ए-अक़ल लोग जो ईमान लाए हो। अल्लाह ने तुम्हारी तरफ एक हिदायत नाजिल कर दी है","एक ऐसा रसूल जो तुमको अल्लाह की साफ साफ हदायत देने वाली आयत सुनाता है ता-के ईमान लाने वालों और नेक अमल करने वालों को तारिकियों (अंधेरे) से निकाल कर रोशनी में ले आए। जो कोई अल्लाह पर ईमान लाए और नेक अमल करे अल्लाह उसे ऐसी जन्नत में दाख़िल करेगा जिनके बारे में पता चलेगा। ये लोग इनमें हमेशा हमेशा रहेंगे। अल्लाह ने ऐसे शख़्स के लिए बेहतरीन रिज़क रक्खा है","अल्लाह वो है जिसने सात (सात) आसमान बनाए और ज़मीन की क़िस्म से भी उन्हीं के इंसान। उनके दरमियान हुकुम नाज़िल होता रहता है। (ये बात तुम्हें बताती जा रही है) ताके तुम जान लो के अल्लाह हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है, और ये के अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर मुहीत (समावेशी) है","ऐ नबी, तुम क्यों हमें चीज़ को हराम करता हूँ जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल किया है? (क्या इसके लिए) तुम अपनी बीवीयों की ख़ुशी चाहते हो? अल्लाह माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है","अल्लाह ने तुम लोगों के लिए अपनी कसमों की किताब से निकले का तरीका मुकर्रर करदिया है अल्लाह तुम्हारा मौला (अभिभावक) है और वही आलिम-ओ-हकीम (सर्वज्ञ, सबसे बुद्धिमान) है","(और ये मामला भी) काबिल-ए-तवज्जुह है के) नबी ने एक बात अपनी एक बीवी से राज में कहीं थी फिर जब उस बीवी ने (किसी और पर) वो राज जाहिर करदिया, और अल्लाह ने नबी को इस (इफ्शाए राज) की इत्तिला दे दी, तो नबी ने उसपर किसी हद तक (उस बीवी को) खबरदार किया और किसी हद तक उसे दार-गुज़ार किया। फिर जब नबी ने उसे (इफ्शाए राज़ की) ये बात बताई तो उसने पूछा आपको इसकी खबर किसने दी? नबी ने कहा \"मुझे उसने खबर दी जो सब कुछ जानता है और खूब अखबार है\"","अगर तुम दोनों अल्लाह से तौबा करती हो (तो ये तुम्हारे लिए बेहतर है) क्योंकि तुम्हारे दिल सीधी राह से हाथ लग गए हैं, और अगर नबी के मुकाबले में तुमने बहाम जत्था-बंदी की (एक दूसरे का समर्थन करें) तो जान रक्खो के अल्लाह उसका मौला (रक्षक) है और उसके बाद जिबराईल और तम्मम सालेह एहले ईमान और सब मलिका उसके साथी और मददगार हैं","बद (दरवाजा) नहीं के अगर नबी तुम सब बीवीयों को तलाक दे दो अल्लाह को ऐसी बीवीयां तुम्हारे बदले में अता फरमा दे जो तुमसे बेहतर हो, सच्ची मुसलमान, बा-इमान, इताअत गुजर, तौबा गुजर, इबादत गुजर, और रोजेदार, ख्वा शोहर दीधा हो या बकीरा (पहले से शादीशुदा और कुंवारी दोनों)","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपने आप को और अपने एहल-ओ-अयाल को (अपने आप को और अपने रिश्तेदारों को) बचाओ हमें आग से जिस का इंधन (ईंधन) इंसान और पत्थर होंगे, जिसपर निहायत तुंध-खू (भयंकर) और सख्त-गिर (कठोर) फरिश्ते मुकर्रर होंगे जो कभी अल्लाह के हुकुम की ना फरमानी करते हैं और जो हुक्म भी उन्हें दिया जाता है उसे बजाते हैं","(उसे वक्त कहा जाएगा के) ऐ काफिरों आज मजारतें (बहाने) पेश ना करो, तुम्हें तो वैसा ही बदला दिया जा रहा है जैसे तुम अमल कर रहे हो","ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से तौबा करो, खालिस तौबा, बाएद (दरवाजा) नहीं कि अल्लाह तुम्हारी बुराइयां तुमसे दूर करदे और तुम्हीं ऐसी जन्नतों में दाख़िल फरमाड़े जिनके आला में बह रही होंगी, ये वो दिन होगा जब अल्लाह अपने नबी को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए हैं रुसवा ना करेगा, उनका नूर उनके आगे आगे और उनके दिन (दाएं) जानिब दौड़ रहा होगा और वो कह रहे होंगे के ऐ हमारे रब, हमारा नूर हमारे लिए मुकम्मल करदे और हमसे दरगुज़ार फरमा, तू हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है","ऐ नबी , कुफ्फार और मुनाफिकेन से जिहाद करो और उनके साथ मिलकर पेश आओ, उनका ठिकाना जहन्नुम है और वो बहुत बुरा ठिकाना है","अल्लाह काफिरों के मामले में नूह और लुट की बीवीयों को बतौर-ए-मिसाल पेश करता है, वो हमारे दो साले बंदो की ज़ौजियात (शादी/वेडलॉक) में थी, मगर उन्होन ने अपने शोहरों से ख़ायानत (विश्वासघात) की और वो अल्लाह के मुक़दमे में उनके कुछ भी ना काम आ सके। दोनों से कहदिया गया के जाओ आग में जाने वालों के साथ तुम भी चली जाओ","और एहले ईमान के मामले में अल्लाह फिरौन की बीवी की मिसाल पेश करता है जबके उसने दुआ की \"ऐ मेरे रब, मेरे लिए अपने हां जन्नत में एक घर बना दे और मुझे फिरौन और इसके अमल से बच्चा ले और जालिम क़ौम से मुझको निजात दे।”","और इमरान की बेटी मरियम की मिसाल देता है जिसने अपनी शर्मगाह की हिफाजत की थी, फिर हमने उसे अंदर अपनी तरफ से रूह फूंक दी और उसने अपने रब के इरशादत और उसकी किताबों की तस्दीक की और वो इताअत गुजर (आज्ञाकारी) लोगों में से थी","निहायत बुज़ुर्ग-ओ-बरतर है वो जिसके हाथ में कायनात की सल्तनत है, और वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है","जिसने मौत और ज़िंदगी को इज़्ज़त किया ता-के तुम लोगों को आज़मा कर देखो तुम में से कौन बेहतर अमल करने वाला है, और वो ज़बरदस्त भी है और दरगुज़ार फ़रमाने वाला भी","जिसने तह-बार-ते सात (सात) आसमान बनाए तुम रहमान की तख़लीक (रचना) में किसी किस्मत की बे-रब्ती (असंगति) ना पाओगे फिर पलट कर देखो, कहीं तुम्हें कोई खलल (दोष) नजर आता है","बार-बार निगाह दौड़ाओ तुम्हारी निगाह थक कर न-मुराद पलट आएगी","हमने तुम्हारे करीब के आसमान को अज़ीम-ओ-शान चिरागों से सजाया है और उन्होंने शयातीन को मार भगाने का जरिया बना दिया है। शैतानों के लिए भड़कती हुई आग हमने मुहय्या कर रखी है","जिन लोगों ने अपने रब से कुफ्र किया है उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब है और वो बहुत ही बुरा ठिकाना है","जब वो हमें फेंकेंगे तो उसके दहाड़ने (दहाड़ने) की हिम्मत आवाज़ सुनेंगे और वो जोश खा रही होगी","शिद्दत-ए-गज़ब से फटती होगी, हर बार जब कोई भीड़ (भीड़/समूह) हमें में डाल जाएगा उसके कारिंदे (रखवाले) उन लोगों से पूछेंगे “क्या तुम्हारे पास कोई खबरदार करने वाला नहीं आया था?”","वो जवाब देंगे \"हां, खबरदार करने वाला हमारे पास आया था, मगर हमने उसे झूठला दिया और कहा अल्लाह ने कुछ भी नाज़िल नहीं किया है, तुम बड़ी गुमराही में पड़े हुए हो\"","और वो कहेंगे \"काश हम सुनते या समझते तो आज है भड़कती हुई आग के सजावरों में ना शामिल होते”","इस तरह वो अपने कसूर का खुद एतराफ (कबूल) कर लेंगे, दोज़खियों में लानात है","जो लोग देखें अपने रब से डरते हैं, यकीनन उनके लिए मगफिरत है और बड़ा अजर","तुम ख्वाह चुपके से बात करो या ऊँची आवाज़ से (अल्लाह के लिए यक्सा है) वो तो दिलों का हाल तक जानता है","क्या वही ना जानेगा जिसने भुगतान किया है? हालंके वो बारिक-बीन और खबर है","वही तो है जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन को ताब कर रखा है, चलो उसकी चाटी पर और खाओ खुदा का रिज़क, उसके हुजूर तुम्हें दोबारा जिंदा हो कर जाना है","क्या तुम इसे बे-खौफ हो के वो जो आसमान में है तुम्हें ज़मीन में ढासा दे और यकायक ये ज़मीन झकोले खाने लगे (हिंसक रूप से हिलाएं/रॉक करें)","क्या तुम इस बे-ख़ौफ़ हो के वो जो आसमान में है तुम पर पत्थरों करने वाली हवा भेज दे? फिर तुम्हें मालूम हो जाएगा के मेरी तम्बीह (चेतावनी) कैसी होती है","इनसे पहले गुजरे हुए लोग झुटला चुके हैं फिर देखलो के मेरी किस्मत कैसी थी","क्या ये लोग अपने ऊपर उड़ने वाले परिन्दों को पार फैलाते और सुकते नहीं देखते हैं? रहमान के सिवा कोई नहीं जो इन्हें थमे हुए हो। वही हर चीज़ का निगाहबाँ है","बताओ, आख़िर वो कौन सा लश्कर तुम्हारे पास है जो रहमान के मुक़ाबले में तुम्हारी मदद कर सकता है? हकीकत ये है के ये मुकीरीन धोखे में पड़े हैं","हां फिर बताओ, कौन है जो तुम्हें रिज्क दे सकता है अगर रहमान अपना रिज्क रोक ले? दर-असल ये लोग सरकशी और हक से गुरेज पर आगे हुए हैं","भला सोचो, जो शक्स मुंह औंधे (कराहना) चल रहा हो वो ज्यादा सही राह पाने वाला है या वो जो सर उठाए सीधा एक हमवार सड़क पर चल रहा है","इनसे कहो अल्लाह ही है जिसने तुमने पैदा किया, तुमको सनी और देखने की ताक़तें दी और सोचने वाले दिल दिए, मगर तुम काम ही शुक्र अदा करते हो","इनसे कहो, अल्लाह ही है जिसने तुमने ज़मीन में फैलाया है और उसी की तरफ तुम साथ जाओगे","ये कहते हैं \"अगर तुम सच्चे हो तो बताओ ये वादा कब पूरा होगा?\"","कहो “इसका इल्म तो अल्लाह के पास है, मैं तो बस साफ, खबरदार बनाने वाला हूं","फिर जब ये उस चीज को करीब देख लेंगे तो उन सब लोगों के चेहरे बिगाड़ जाएंगे जिन्हों ने इनकार किया है, और हमें वक्त उनसे कहा जाएगा के यहीं है वो चीज़ जिसके लिए तुम तकाज़े कर रहे थे","इंसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अल्लाह ख्वा मुझे और मेरे साथियों को हलाक करदे या हम पर रहम करे, काफिरों को दर्दनक अज़ाब से कौन बचा लेगा","इंसे कहो, वो बड़ा रहीम है, उसी पर हम ईमान लाए हैं, और उसी पर हमारा भरोसा है, करीब तुम्हें मालूम हो जाएगा के सारे गुमराह (प्रकट त्रुटि) में पड़ा हुआ कौन है","इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अगर तुम्हारे कुओं (कुओं) का पानी जमीन में उतर जाये तो कौन है जो इस पानी की बहती हुई सोतें (बहता पानी) तुम्हें निकाल कर ला देगा","दोपहर, कसम है क़लम की और उस चीज़ की जिसके लिखने वाले लिख रहे हैं","तुम अपने रुब के फ़ज़ल से मजनूँ (दीवाने) नहीं हो","और यकीनन तुम्हारे लिए ऐसा अजर (इनाम) है जिसका सिलसिला कभी खत्म होने वाला नहीं","और बहस तुम अखलाक के बड़े मरतबे पर हो","अंकारिब तुम भी देख लोगे और वो भी देख लेंगे","के तुम में से कौन जुनून (पागलपन) में मुबतला है","तुम्हारा रब उन लोगों को भी खूब जानता है जो उसकी राह से भटके हुए हैं, और वही उनको भी अच्छी तरह जानता है जो राह-ए-रास्त पर है","झूठ बोलने वालों के दबाओ में हरगिज़ तुम आओ","ये तो चाहते हैं कि तुम कुछ भी मुदाहनत (नरमी) करो तो ये भी मुदाहनत (नरमी) करें","हरगिज ना दबो किसी ऐसे शक्स से जो बहुत कसम खाने वाला बे-वकात (बेकार) आदमी है","ताने देता है, चुगलियां खाता फिरता है (निंदक, चुगली करने वाला)","भलाई से रोकता है, ज़ुल्म-ओ-ज़्यादती में हद से गुज़र जाने वाला है, सख्त बध-अमल है, जफ़ा-कार है","और इन सब उयब (ऐब) के साथ बढ़-अस्ल (नाजायज औलाद) है","इस बिना पार के वो बहुत माल-ओ-औलाद रखता है","जब हमारी आयतें उसको सुनाती हैं तो कहता है ये तो अगले वक्त के अफसाने हैं","अंकरीब हम इसकी सूंड (थूथन) पर दाग लगाएंगे","हमने (एहले मक्का) को उसी तरह आजमाइश में डाला है, जिस तरह एक बाग (बगीचे) के मालिकों को आजमाइश में डाला था, जब उन्हें ने कसम खाई के सुबह सवेरे जरूर अपने बाग के फल तोड़ेंगे","और वह कोई इस्तस्ना (अपवाद) नहीं कर रहे थे","रात को वो सोए पड़े थे के तुम्हारे रब की तरफ से एक बला इस बाग पर फिर गई","और उसका हाल ऐसा हो गया जैसा कटी हुई फसल हो","सुबह उन लोगों ने एक दूसरे को पुकारा","कहा अगर फल तोड़ने हैं तो सवेरे सवेरे अपनी खेती की तरफ निकल चलो","चुनांचे वो चल पड़े और आपस में चुपके-चुपके कह जाते थे","के आज कोई मिसकीन तुम्हारे पास बाग में ना आने पाए","वो कुछ ना देने का फैसला किये हुए सुबह सवेरे जल्दी जल्दी इस तरह वहां गए जैसे के वो (फल तोड़ने पर) कादिर हैं","मगर जब बाघ को देखा तो कहने लगे \"हम रास्ता भूल गए हैं","नहीं बलके हम महरूम रह गए\"","उन में जो सब से बेहतर आदमी वह था कहा “मैंने तुमसे कहा ना था के तुम तस्बीह क्यों नहीं करते?”","वो पुकार उठे पाक है हमारा रब, हकीकत हम गुनहगार थे","फिर उनमें से हर एक दूसरे को मालामाल करने लगा","आखिर को अनहोन ने कहा \"अफसोस हमारे हाल पर, बेशक हम परेशान हो गए थे","बाएद (दरवाजा) नहीं के हमारा रब हमें बदले में इस तरह बेहतर बाग अता फरमाये, हम अपने रब की तरफ रूजू करते हैं","ऐसा होता है अज़ाब और आख़िरत का अज़ाब इसे भी बड़ा है, काश ये लोग इसको जानते हैं","यकीनन खुदा-तरस लोगों के लिए उनके रब के यहां नियम भारी जन्नतें हैं","क्या हम फरमा-बरदारों का हाल मुजरिमों सा करदें","तुम लोगों को क्या हो गया है, तुम कैसे हुकुम लगाते हो","क्या तुम्हारे पास कोई किताब है जिसमें तुम ये पढ़ते हो","के तुम्हारे लिए जरूर वहां वहीं कुछ है जो तुम अपने लिए पसंद करते हो","या फिर क्या तुम्हारे लिए रोज-ए-कयामत तक हमपर कुछ अहद-ओ-पैमान (संविदा) साबित है के तुम्हें वही कुछ मिलेगा जिसका तुम हुकुम लगाओ","इनसे पुचो तुम में से कौन इसकी ज़मीन (गारंटी/जिम्मेदार) है","या फिर इनके ठहरे हुए कुछ साहिरे हैं (जिन्होन ने इसका ज़िम्मा लिया हो)?ये बात है तो लायें अपने शेयरों को अगर ये सच्चे हैं","जिस रोज़ सही वक्त आ पड़ेगा और लोगों को सजदा करने के लिए बुलाया जाएगा तो ये लोग सजदा ना कर पाएंगे","इनकी निगाहें नीचे होंगी, जिल्लत इनपर छा रही होगी। ये जब सही-ओ-सालिम था हमें वक्त यहीं सजदे के लिए (बुलाया जाता था) और ये इन्कार करते थे","पस ऐ नबी, तुम इस कलाम के झूठ बोलने वालों का मामला मुझपर छोड़ दो हम ऐसे तारिके से इनको बतादरीज तबाही की तरफ ले जाएंगे के इनको खबर भी ना होगी","मैं इनकी रस्सी दराज़ कर रहा हूं, मेरी चाल बड़ी ज़बरदस्त है","क्या तुम इनसे कोई अजर (मुआवजा) तालाब कर रहे हो के ये इस छत्ती के बोझ (कर्ज का बोझ महसूस कर रहे हैं) तले दबे जा रहे हूं","क्या इनके पास गैब का इलम है जिसे ये लिख रहे हैं माननीय","पास अपने रुब का फैसला होने तक सब्र करो और मछली wale (यूनिस) कि तरह ना हो जाओ, जब उसने पुकारा था और वो गम से भरा हुआ था","अगर उसके रुब की मेहरबानी उसके शामिल-ए-हाल ना हो जाती तो वो मज़मूम (अपमान) होकर चटयाल मैदान में फेंक दिया जाता","आखिर-ए-कार उसके रुब ने उसे बरगुज़िदा (उत्कृष्ट) फ़रमा लिया और उसे सालेह बंदों में शामिल करदिया","जब ये काफिर लोग कलाम-ए-नसीहत (कुरान) सुनते हैं तो तुम्हें ऐसी नज़रों से देखते हैं के गोया तुम्हारे क़दम उखाड़ देंगे, और कहते हैं के ये ज़रूर दीवाना है","हलाँके ये तो सारे जहाँ वालों के लिए एक हिदायत है","होनी शुद्धि! (अनिवार्य) [सच-बहुत होने वाली]","क्या है वो होनी शुधनी (अविश्वसनीय)","और तुम क्या जानो के वो क्या है होनी शुधनी (अविश्वसनीय)","समूद और आद ने हमें अचानक टूट पड़ने वाली आफत को झुटलाया","समूद एक को सच हादसे में हलाक किए गए","और एक बड़ी छायादार तूफानी आंधी (तूफान) से तबाह कर दिए गए","अल्लाह ताला ने उसको मुसलसल सात (सात) रात और आठ (आठ) दिन उनपर मुसल्लत रक्खा (तुम वहां होते तो) देखते के वो वहां इस तरह फंसे पड़े jaise वो खजूर के बोसीदा (सड़े हुए) तनी (चड्डी) माननीय","अब क्या उनमें से कोई तुम्हें बाकी नज़र आता है","और इसी ख़ता-ए-अज़ीम का इर्तिक़ाब फिरौन और उसके पहले के लोगों ने और तलपत (पलट) हो जाने वाली बस्तियों ने किया","उन सब ने अपने रुब के रसूल की बात ना मानी तो उसने उनको बड़े सक्ती के साथ पकड़ा","जब पानी का तूफ़ान हद से गुज़र गया तो हमने तुमको कश्ती में सवार कर दिया था","ता-के इस वक़िये को तुम्हारे लिए एक सबक-आमोज़ यादगार बना दें और याद रखने वाले कान इसकी याद महफूज रक्खें","फिर जब एक दफा सुर में फूंक मार दी जाएगी","और जमीन और पहाड़ों को उठा कर एक ही चोट में रेजा कर दिया जाएगा","हमें रोज वो होने वाला वाकिया पेश आ जाएगा","उसदिन आसमान फटेगा और उसकी बंदिश ढीली पढ़ जाएगी","फ़रिश्ते उसके अतराफ़-ओ-जवानीब में होंगे और आत (आठ) फ़रिश्ते उस रोज़ तेरे रब का अर्श अपने ऊपर उठेंगे होंगे","वो दिन होगा जब तुम लोग पेश किये जाओगे, तुम्हारा कोई राज़ भी छुपा न रह जायेगा","हमारा वक्त जिसका नाम-ए-आमाल उसके सीधे हाथ में दिया जाएगा वो कहेगा \"लो देखो, पढ़ो मेरा नाम-ए-आमाल","मैं समझता था कि मुझे जरूर अपना हिसाब मिलने वाला है\"","पास वो दिल पसंद ऐश में होगा","आली मुकाम जन्नत में","जिसके फलों के झुके पढ़ रहे होंगे","(ऐसे लोगों से कहा जाएगा) मजे से खाओ और पियो अपने उन अमल के बदले जो तुमने गुजरे हुए दिनों में किए हैं","और जिसका नाम-ए-आमाल उसके बायें (बाएं) हाथ में दिया जाएगा वो कहेगा “ काश मेरा अमल नाम मुझे ना दिया गया होता","और मैं ना जानता के मेरा हिसाब क्या है","काश मेरी वही मौत (जो दुनिया में आई थी) फैसला-कुन होती","आज मेरा माल मेरे कुछ काम ना आया","मेरा सारा इक्तेदार ख़तम हो गया","(हुकुम होगा) पकड़ो इसे और इसकी गर्दन में तौक डाल दो","फिर इसे जहन्नुम में झुक दो","फिर इसको सत्तर (सत्तर) हाथ लंबी जंजीर में जकाद दो","ये ना अल्लाह बुज़ुर्ग-ओ-बरतर पर ईमान लता था","और ना मिस्कीन को खाना खिलाने की तरजीब देता था","लिहाजा आज ना यहां इसका कोई यार-ए-गमखार है","और ना जख्मों के धोवन (घावों को धोना) के सिवा इसके लिए कोई खाना","जैसी खटकारोन (पापी) के सिवा कोई नहीं खाता","पास नहीं, मैं कसम खाता हूं उन चीज़ों की भी जो तुम देखते हो","और उनकी भी जिन्हें तुम नहीं देखते","ये एक रसूल-ए-करीम का क़ौल (भाषण) है","किसी शायर का क़ौल नहीं है, तुम लोग कम ही ईमान लाते हो","और ना ये किसी काहिन (भविष्यवक्ता) का क़ौल है, तुम लोग कम ही गौर करते हो","ये रब्ब-उल आलमीन की तरफ से नाज़िल हुआ है","और अगर (नबी) ने खुद ग़ाद कर कोई बात हमारी तरफ इंसान की होती है","तो हम इसका डायन (दाएं) हाथ पकड़ लेते हैं","और इसकी राग-ए-गर्दन काट डालते हैं","फिर तुम में से कोई (हमें)इस काम से रोकने वाला ना होता","दर हकीकत ये जरूरी लोगों के लिए एक हिदायत है","और हम जानते हैं कि तुम में से कुछ लोग झूठ बोलने वाले हैं","ऐसे काफिरों के लिए यकीनन ये मुजीब-ए-हसरत (अफसोस का कारण) है","और ये बिल्कुल यकीनी हक है","पास ऐ नबी, अपने रुब-ए-अज़ीम के नाम की तस्बीह करो","मंगने वाले ने अज़ाब मांगा है (वो अज़ाब) जो जरूर होने वाला है","काफिरों के लिए है, कोई उसे दफा करने वाला नहीं","हमें खुदा की तरफ से है जो उरूज के ज़ीनो (चढ़ते कदम) का मालिक है","मलायका (फ़रिश्ते) और रूह (जिब्राइल) उसके हुज़ूर चढ़ कर जाते हैं एक ऐसे दिन में जिसका मिकदार पचास (पचास) हज़ार साल है","पस ऐ नबी, सब्र करो, शाइस्ता सब्र","ये लोग उसे दूर समझते हैं","और हम उसे करीब देखते हैं रहे हैं","(वो अज़ाब हमें रोज़ होगा) जिस रोज़ आसमान पिगली हुई चांदी की तरह हो जाएगा","और पहाड़ रंग-बि-रंग के धुनके हुए ऊन (ऊन) जैसे हो जाएंगे","और कोई जिगरी दोस्त अपने जिगरी दोस्त को ना पूछेगा","हलांके वो एक दूसरे को दिखाये जायेंगे, मुजरिम चाहेगा के उस दिन के अज़ाब से बचने के लिए अपनी औलाद को","अपनी बीवी को, अपने भाई को","अपने करीब-तरीन खानदान को जो उसे पनाह देने वाला था","और रूह-ए-जमीन के सब लोगों को फिदिया (बदले) में दे-दे और ये तदबीर उसे निजात दिला दे","हरगिज नहीं वो तो भड़कती हुई आग की लपट होगी","जो प्यार पोश्त को चाट जाएगी","पुकार पुकार कर अपनी तरफ बुलाएगी हर उस शक्स को जिसने हक से मुंह मोड़ा और पीट फेरी","और माल जमा किया और सेंत सेंत कर (संचित धन) रक्खा","इंसान थुड़-दिला (अधीर) पैदा किया गया है","जब उसपर मुसीबत आती है तो घबरा उठता है","और जब उसे ख़ुश-हाली नसीब होती है तो भुल (कंजूसी) करने लगता है","मगर वो लोग (इससे बचे हुए हैं) जो नमाज़ पढ़ने वाले हैं","जो अपनी नमाज़ की हमेशा नमाज़ अदा करते हैं","जिनके मालों में","साहिल (मांगने) वाले) और महरूम का एक हक़ मुकर्रर है","जो रोज़-ए-जज़ा को बरहक़ मानते हैं","जो अपने रब के अज़ाब से डरते हैं","क्योंकि उनके रब का अज़ाब ऐसी चीज़ नहीं है जिसमें कोई बेख़ौफ़ हो","जो अपनी शर्मगाहों की हिफ़ाज़त करते हैं","बा-जुज़ अपने बीवीयों या अपनी ममलूका औरतों के जिनसे महफ़ूज़ ना रखने में उनपर कोई मलामत नहीं","अलबत्ता जो इसके अलावा कुछ और चाहे वही हद से तजावुज करने वाला है","जो अपने अमानतों की हिफाजत और अपने अहद (संविदा) का पास करते हैं","जो अपनी गवाही में रास्ते बाजी (सीधे) पर कायम रहते हैं","और जो अपनी नमाज की हिफाजत करते हैं","ये लोग इज्जत के साथ जन्नत के बाघों में रहेंगे","पास ऐ नबी, क्या बात है ये मुनकिरिन दायें(बाएं) और बायें(दाएं) से","गिरोह (भीड़) दार गिरोह (भीड़) तुम्हारी तरफ दौड़े चले आ रहे हैं","क्या इनमें से हर एक ये लालज रखता है के वो नियामत भारी जन्नत में दाख़िल कर दिया जाएगा","हरगिज़ नहीं हमने जिस चीज़ से इनको पैदा किया है उसे ये खुद जानते हैं","पास नहीं, मैं कसम खाता हूं मशरिकों और मगरिबों के मालिक की हम इसपर कादिर हैं","के इनकी जगह इनसे बेहतर लोग ले आएं और कोई हमसे बाजी ले जाने वाला नहीं है","लिहाजा इन्हें अपनी बेहुदा बातें और अपने खेल में पड़ा रहने दो यहां तक ​​के ये अपने हमें दिन को पाहुंच जाएंगे जिसका इनसे वादा किया जा रहा है","जब ये अपने कब्रों से निकल कर इस तरह दउदे जा रहे होंगे जैसे अपने बुथों (मूर्तियों) के आस्थानो (वेदियों) की तरफ दौड़ रहे हों","इनकी निगाहें झुकी होंगी, जिल्लत इनपर छा रही होगी, वो दिन है जिसका इनसे वादा किया जा रहा है","हमने नूह को उसकी कौम की तरफ भेजा (इस हिदायत के साथ) के अपनी क़ौम के लोगों को ख़बरदार बनाने वाला क़ब्ल इसके के ऊपर एक दर्दनाक अज़ाब आए","उसने कहा “ ऐ मेरी क़ौम के लोगों, मैं तुम्हारे लिए एक साफ़ ख़बर बनाने वाला (पैगंबर) हूं","(तुमको आगाह करता हूं) के अल्लाह की बंदगी करो और उसे डरो और मेरी इताअत (फॉलो) करो","अल्लाह तुम्हारे गुनाहों से दरगुजर फरमाएगा और तुम्हें एक वक्त-ए-मुकर्रर तक बाकी रखेगा। हकीकत ये है के अल्लाह का मुकर्रर किया हुआ वक्त जब आ जाता है तो फिर ताला नहीं जाता काश। तुम्हें इसका इल्म हो","उसने अर्ज़ किया “ऐ मेरे रब, मैंने अपनी क़ौम के लोगों को शब-ओ-रोज़ (रात और दिन) पुकारा","मगर मेरी पुकार ने उनको फ़रार ही में इज़ाफ़ा किया","और जब भी मैंने उनको बुलाया ता-के तू उन्हें माफ़ करदे, उन्होन ने कानो में उंगलियां थूस ली और अपने कपडों से मुंह ढक लिया और अपनी रवीश पर आधा हो गए और बड़ा तकब्बुर (गर्व) किया","फिर मैंने उनको हांके पुकारे (खुले तौर पर) की दावत दी","फिर मैंने एलानिया (सार्वजनिक रूप से) भी उनको तबलीग की और चुपके चुपके भी समझा","मैंने कहा अपने रब से माफ़ी मांगो,बेशक वो बड़ा माफ़ करने वाला है","वो तुम्हारे आसमान से ख़ूब बारिशें बरसाएगा","तुम्हें माल और औलाद से नवाजे गा, तुम्हारे लिए बाग़ पैदा करेगा और तुम्हारे लिए नेहरेन जारी करदेगा","तुम्हें क्या हो गया है कि अल्लाह के लिए तुम किसी वकार (महिमा) की तवक्कू नहीं रखते","हालांके उसने तरह तरह से तुम्हें बनाया है","क्या देखते नहीं हो के अल्लाह ने किस तरह सात आसमान तह-बर-तह बनाया","और उनमें चांद को नूर और सूरज को चिराग बनाया","और अल्लाह ने तुमको ज़मीन से अजीब तरह उगया","फिर वो तुम्हें इसी ज़मीन में वापस ले जाएगा और इसे यकीनन तुमको निकल खड़ा करेगा","और अल्लाह ने ज़मीन को तुम्हारे लिए फर्श की तरह बिछा दिया","ता-के तुम उसके अंदर खुले रास्तों में चलो","नूह ने कहा “मेरे रब, उनहों ने मेरी बात रद्द करदी और उन (रहीसों) की जोड़ी की जो माल और औलाद पा कर और ज़्यादा ना मुराद हो गए हैं","इन लोगों ने बड़ा भारी मकर (प्लॉट) का जाल फैला रखा है","इन्होन ने कहा हरगिज़ ना छोड़ो अपने मबूदोन (देवता) को, और ना छोड़ो वद्द और सुवा को और ना यगस और याऊक और नस्र को (मूर्ति के नाम)","इन्होन ने बहुत लोगों को गुमराह किया है, और तू भी इन जालिमों को गुमराह के सिवा किसी चीज में तरक्की ना दे","अपनी खतों की बिना पर ही वो गर्क (डूबना) किए गए और आग में झुक गए, फिर उन्हें अपने लिए अल्लाह से बचाने वाला कोई मददगार ना पाया","और नूह ने कहा \"मेरे रब, इन काफिरों में से कोई ज़मीन पर बसने वाला ना छोड़","अगर तू ने इन्हें छोड़ दिया तो ये तेरे बंदों को गुमराह\" करेंगे और इनकी नाक से जो भी पैदा होगा बुरा और सख्त काफिर ही होगा","मेरे रब, मुझे और मेरे वाल्डेन को और हर उस शक्स को जो मेरे घर में मोमिन की किस्मत से दखल हुआ है, और सब मोमिन मर्दों और औरतों को माफ फरमा दे, और जालिमों के लिए हलाकत के सिवा किसी चीज़ में इज़ाफ़ा ना कर","ऐ नबी, कहो, मेरी तरफ वही (रहस्योद्घाटन) भेजी गई है के जिन्नो के एक गिरोह (समूह) ने गौर से सुना फिर (जा कर अपने क़ौम के लोगों से) कहा: \"हमने एक बड़ा ही अजीब कुरान सुना है","जो राह-ए-रास्त की तरफ रहनुमाई करता है इसके लिए हम उसपर ईमान ले आए हैं और अब हम हरगिज अपने रुब के साथ किसी को शरीक नहीं करेंगे","और ये के हमारे रुब की शान बहुत आला-ओ-अरफा है, उसने किसी को बीवी या बेटा नहीं बनाया","और ये के हमारे नादान लोग अल्लाह के बारे में बहुत खिलाफ-ए-हक़्क़ बातें करते रहते हैं","और ये के हमने समझा था के इंसान और जिन्न कभी खुदा के बारे में झूठ नहीं बोल जैसे","और ये के इंसानों ने भी वही गुमान किया","","और ये के हमने आसमान को ततोला तो देखा के वो पहरे-दारों (भयानक रक्षकों) से पथ पड़ा है और शहाबों (शूटिंग उल्का) की बारिश हो रही है","और ये के पहले हम सूरज-गन लेने के लिए आसमान में बैठने की जगह पा लेते थे, मगर अब जो चोरी छुपे सुनने के लिए कोशिश करता है वो अपने लिए घाट में एक शहाबे साकिब (शूटिंग उल्का) लगा हुआ पाता है","और ये के हमारी समझ में न आता था के आया ज़मीन वालों के साथ कोई बुरा मामला करने का इरादा किया गया है या उनका रब उन्हें राह-ए-रास्त दिखाना चाहता है","और ये के हम में से कुछ लोग सालेह (ईमानदार) हैं और कुछ इस से दूर हैं, हम मुख़्तलिफ़ तरीक़ों (तरीके/गुट) में बताए (विभाजित) हुए हैं","और ये के हम समझते थे के ना ज़मीन में हम अल्लाह को अजीज (निराश) कर सकते हैं और ना भाग कर उसे हरा सकते हैं","और ये के हमने जब हिदायत की तालीम सुनी तो हम उसपर ईमान ले आए अब जो कोई भी अपने रब पर ईमान ले आएगा उसे कोई हक़-तलफ़ी या ज़ुल्म का ख़ौफ़ ना होगा","और ये के हम में से कुछ मुस्लिम (अल्लाह के इताअत गुज़र) हैं और कुछ हक़ से मुनहरिफ़ (ईमानदारी से) तो जिन्होन ने इस्लाम (इताअत का रास्ता) इख्तियार कर लिया उनहों ने नवाजत की राह ढूंढ ली","और जो हक़ से मुहनरिफ़ है वो जहन्नुम का इंधन (ईंधन) बनाने वाला है","और (ऐ नबी कहो मुझपर ये वही भी की गई है के) लोग अगर राह-ए-रास्त पर साबित क़दामी (दृढ़ता से) से चलते तो हम उन्हें खूब सैराब करते (प्रचुर मात्रा में बारिश प्रदान करते हैं)","ता-के इस नियामत से उनकी आजमाइश करें और जो अपने रब के जिक्र से मुंह मोड़ेगा उसका रब उसे सख्त अजाब में मुबतला कर देगा","और ये के मस्जिद अल्लाह के लिए है, लिहाजा उन्मेन अल्लाह के साथ किसी और को ना पुकारो","और ये के जब अल्लाह का बंदा उसको पुकारने के लिए खड़ा हुआ तो लोग उसपर टूट पड़ें के लिए तैयार हो गए","ऐ नबी, कहो के मैं तो अपने रब को पुकारता हूं और उसके साथ किसी को शरीक नहीं करता","कहो मैं तुम लोगों के लिए ना किसी नुक्सान का इख्तियार रखता हूं ना किसी को भलाई का","कहो मुझे अल्लाह की गिरफ्त से कोई नहीं बचा सकता और ना मैं उसके दामन के सिवा कोई जाए पनाह (शरण) पा सकता हूं","मेरा काम इसको सिवा कुछ नहीं है के अल्लाह की बात और उसको पैग़ामात पाहुंचा दूं। अब जो भी अल्लाह और उसके रसूल की बात न मानेगा उसके लिए जहन्नुम की आग है और ऐसे लोग उसमें हमेशा रहेंगे","(ये लोग अपनी इस रवीश से बाज़ न आएंगे) यहां तक ​​के जब हमें चीज को देख लेंगे जिसका इनसे वादा किया जा रहा है तो इन्हें मालूम हो जाएगा के किसके मददगार कमज़ोर हैं और किसका जत्था (समूह) तदाद में कम है","कहो, मैं नहीं जानता के जिस चीज़ का वादा तुमसे किया जा रहा है वो करीब है या मेरा रब उसके लिए कोई लंबी मुद्दत मुक़र्रर फ़माता है","वो अलीमुल गैब है, अपने गैब पर किसी को मुत्तला (खुलासा/खुलासा) नहीं करता","सिवाय उस रसूल के जिसने हमें (गाइब का कोई इल्म देने के लिए) पसंद किया हो, तो उसके आगे और पीछे वो मुहाफिज (रक्षक) लगा देता है","ता-के वो जान ले के उन्होन ने अपने रुब के पैगामात पहन दिए, और वो उनके पूरे महोल का इहाता (घेरें) किए हुए हैं और एक एक चीज को उसने जिन रक्खा है","ऐ ओद लपेट कर (लिपटा हुआ) सोने वाले","रात को नमाज में खड़े रहा करो मगर कम","आधी रात","या इस्से कुछ काम करलो या इस्से कुछ ज्यादा बढ़ा दो, और कुरान को खूब तेहर तेहर कर पढ़ो","हम तुम्पर एक भारी कलाम नाज़िल करने वाले हैं","दर हकीकत रात का उठना नफ्स पर काबू पाने के लिए बहुत जरूरी और कुरान ठीक पढ़ने के लिए ज्यादा मौजू (उपयुक्त) है","दिन के औकात में तो तुम्हारे लिए बहुत मसरुफियत (लंबे समय तक कब्जा) है","अपने रब के नाम का जिक्र किया करो और सबसे कट कर उसी के हो रहो","वू मशरिक (पूर्व) ओ मगरिब (पश्चिम) का मालिक है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, उसे अपना वकील बना लो","और जो बातें लोग बना रहे हैं उन पर सब्र करो और शराफत के साथ उनसे अलग हो जाओ","झूठलाने वाले खुश हाल लोगों से निमत्ने का काम तुम मुझपर छोड़ दो और यहीं ज़रा कुछ देर इसी हालत पर रहने दो","हमारे पास (इनके लिए) भारी बेड़ियां हैं और भड़कती हुई आग","और हलक (गले) में फ़ंसने वाला खाना और दर्द-नाक अज़ाब","ये हमारा दिन होगा जब ज़मीन और पहाड़ दर्द उठेंगे और पहाड़ों का हाल ऐसा हो जाएगा जैसे रेत (रेत) के ढेर है जो बिखर जा रहे हैं","तुम लोगों के पास हमने उसकी तरह एक रसूल तुम पर गवाह बना कर भेजा है जिस तरह हमने फिरौन की तरफ एक रसूल भेजा था","(फिर देखलो के जब) फिरौन ने हमें रसूल की बात ना मानी तो हमने उसको बड़ी ताकत के साथ पकड़ लिया","अगर तुम मान-ने से इनकार करोगे तो उस दिन कैसे बच जाओगे जो बच्चों को बूढ़ा कर देगा","और जिसकी ताकत से आसमान फटा जा रहा होगा?अल्लाह का वादा तो पूरा होकर हाय रहना है","ये एक हिदायत है, अब जिसका जी चाहिए अपने रब की तरफ जाने का रास्ता इख्तियार करले","ऐ नबी, तुम्हारा रब जनता है के तुम कभी दो तिहाई (दो तिहाई) रात के करीब और कभी आधी रात और कभी एक तिहाई (एक तिहाई) रात इबादत में खड़े रहते हो, और तुम्हारे साथियों में से भी एक गिरोह ये अमल करता है, अल्लाह हाय रात और दिन के औकात का हिसाब रखा है। उसे मालूम है कि तुमलोग औकात का ठीक शाम नहीं कर सकते, लिहाजा उसने तुमपर मेहरबानी फरमायी, अब जितना कुरान आसान से पढ़ सके हो पढ़ लिया करो। उसे मालूम है कि तुम में कुछ मरिज होंगे, दूसरे लोग अल्लाह के फजल की तलाश में सफर करते हैं, और कुछ और लोग अल्लाह की राह में जंग करते हैं, जितना कुरान बा आसान पढ़ा जा सके पढ़ लिया करो, नमाज कायम करो, जकात दो और अल्लाह को अच्छा क़र्ज़ देते रहो, जो कुछ भलाई तुम अपने लिए आगे भेजोगे उसे अल्लाह के यहां मौजुद पाओगे, वही ज्यादा बेहतर है और उसका अजर बहुत बड़ा है। अल्लाह से मगफिरत मांगते रहो, बेशक अल्लाह बड़ा गफूर ओ रहीम है","ऐ ओद लपीत (आवरण) कर लेटने वाले","उठो और खबरदार करो","और अपने रब की बदाई का एलान करो","और अपने कपड़े पकड़ कर रखो","और गंदगी से दूर रहो","और एहसान ना करो ज्यादा हासिल करने के लिए","और अपने रुब की खातिर सब्र करो","अच्छा जब सूरज में फुक मारी जाएगी","वो दिन बड़ा ही सही दिन होगा","काफिरों के लिए हल्का न होगा","चोद दो मुझे और उस शक्स को जिसने मैंने अकेला पैदा किया है","बहुत सा माल उसको दिया","उसके साथ हाजिर रहने वाले बेटे दिए","और उसके लिए रियासत की राह हमवार की","फिर वो तम (लालची इच्छा) रखता है के मैं उसे और ज्यादा दूं","हरगिज नहीं वो हमारी आयत से इनाथ (जिद्दी विरोध) रखता है","मैं तो उसे इस्तेमाल करता हूं एक कथिन चढ़ै चढ़ाऊंगा","उसने सोचा और कुछ बात बनाने की कोशिश की","तो खुदा की मार उसपर, कैसी बात बनाने की कोशिश की","हां, खुदा की मार उसपर, कैसी बात बनाने की कोशिश की","फिर(लोगों की तरफ) देखा","फिर पेशानी सुकेदी और मुंह बनाया","फिर पलटा और तकब्बुर में पढ़ गया","आख़िर ए कार बोला के ये कुछ नहीं है मगर एक जादू जो पहले से चला आ रहा है","ये तो एक इंसानी कलाम है","अंकरिब मैं उसे दोज़ख में झोंक दूंगा","और तुम क्या जानो के क्या है वो दोज़ख","ना बाकी राखे ना छोड़े","ख़ाल (त्वचा) झूलस देने वाली","उन्नीस (उन्नीस) कारकून उसपर मुक़र्रर हैं","हमने दोज़ख़ के ये कारकून फ़रिश्ते बनाए हैं, और उनकी तड़प को काफिरों के लिए फ़ितना बना दिया है, ता-के एहले किताब को यकीन आ जाए और ईमान लाने वालों का ईमान बढ़े, और एहले किताब और मोमिनीन किसी शक्क में ना रहे, और दिल के बीमार और कुफ्फार ये कहें कि भला अल्लाह का, अजीब बात से क्या मतलब हो सकता है। इस तरह अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह करता है और जिसे चाहता है हिदायत बख्श देता है और तेरे रब के लश्करों (सैनिकों) को खुद उसके सिवा कोई नहीं जानता, और इस दोज़क का ज़िक्र इसके सिवा किसी ग़रज़ के लिए नहीं किया गया है के लोगों को इसकी हिदायत हो","हरगिज़ नहीं, कसम है चांद की","और रात की जबके वो पलटती है","और सुबह की जबके वो रोशन होती है","ये दोज़ख भी बड़ी चीज़ों में से एक है","इंसानों के लिए डरावा","तुम में से हर शक्स के लिए डरवा जो आगे बढ़ना चाहे या पीछे रह जाना चाहे","हर मुतनफ़्फ़िस, अपने क़स्ब के बदले रहन है (किसी के कर्मों का बंधक)","दयाएं बाज़ू वालों के सिवा","जो जन्नत में होंगे, वहां वो","मुजरिमोन से पूछेंगे","तुम्हें क्या चीज़ दोज़ख़ में ले गई","वो कहेंगे “हम नमाज पढ़ने वालों में से ना थे","और मिस्कीन को खाना नहीं खिलाते थे","और हक़ के खिलाफ़ बातें बनाने वालों के साथ मिलकर हम भी बातें बनने लगते थे","और रोज़-ए-जज़ा को झूठ करार देते थे","यहां तक ​​के हमें यकीनी चीज़ से सबका पेश आ गया”","हमें वक्त सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश उनके किसी काम ना आएगी","आख़िर लोगों को क्या हो गया है कि ये इस हिदायत से मुंह मोड़ रहे हैं","गोया ये जंगली गधे हैं","जो शेर से डर कर भाग पड़े हैं","बलके इनमें से तो हर एक ये चाहता है के उसके नाम खुले खत (स्क्रॉल/ग्रंथ) भेजे जाए","हरगिज नहीं, असल बात ये है के ये आखिरी का खौफ नहीं रखते","हरगिज नहीं, ये तो एक हिदायत है","अब जिसका जी चाहे इसे सबक हासिल करले","और ये कोई सबक हासिल न करेगा इल्ला ये के अल्लाह ही ऐसा चाहिए वो इसका हक़दार है के उसे तकवा किया जाए और वो इस्का एहल है के (तकवा करने वालों को) बख्श दे","नहीं मैं कसम खाता हूं कयामत के दिन की","और नहीं, मैं कसम खाता हूं मालामत करने वाले नफ्स की","क्या इंसान ये समझ रहा है कि हम उसकी हदियों को जमा ना कर पाएंगे","क्यों नहीं? हम तो उसकी उंगलियों के पोर पोर तक ठीक बना देने पर कादिर हैं","मगर इंसान चाहता है कि आगे भी बढ़-आमलियां करता रहे","\"पूछता है\" आखिर कब आना है वो कयामत का दिन","फिर जब डेढे पथरा जाएगी (दृष्टि चकित हो जाएगी)","और चांद बे-नूर हो जाएगा","और चांद सूरज मिला कर एक करदिया जाएगा","हमें वक्त यही इंसान कहेगा कहां भाग कर जाऊं","हरगिज नहीं, वहां कोई जाएगा पनाह न होगी","हमें रोज तेरे रुब हाय के सामने आकर ठहरना होगा","हमें रोज इंसान को उसका सब अगला पिछला किया कराया बता दिया जाएगा","बलके इंसान खुद ही अपने आप को खूब जानता है","चाहे वो कितनी ही मजारतें (बहाने) करे","ऐ नबी, इस वही को जल्दी जल्दी याद करने के लिए अपनी जुबान को हरकत ना दो","इसको याद करा देना और पढ़ावा देना हमारी जिम्मेदारी है","लिहाजा जब हम इसे पढ़ रहे हों हमें वक्त देते रहो, तुम इसके किरात को गौर से सुनते रहो","फिर इसका मतलब समझा देना भी हमारी जिम्मेदारी है","हरगिज नहीं, असल बात हाँ है के तुम लोग जल्दी हासिल होने वाली चीज (यानी दुनिया) से मुहब्बत रखते हो","और आखिरी को छोड़ देते हो","हमें रोज कुछ चेहरे तार-ओ-ताजा होंगे","अपने रब की तरफ देख रहे होंगे","और कुछ चेहरे उदास होंगे","और समझ रहेंगे होंगे के उनके साथ कमर-तोड़ तोड़ो होने वाला है","हरगिज नहीं, जब जान हलक तक पहुंच जाएगी","और कहा जाएगा के है कोई झाड़ फूंक करने वाला","और आदमी समझ लेगा के ये दुनिया से जुदाई का वक्त है","और पिंडली(पैर) से पिंडली(पैर) जुड़ जाएगी","वो दिन होगा तेरे रब की तरफ रावंगी का","मगर उसने ना सच माना, और ना नमाज पढ़ी","बलके झुटलया और पलट गया","फिर अकदता हुआ अपने घर वालों की तरफ चल दिया","ये रवीश तेरे ही लिए सजा देती है और तुझ ही को ज़िब देती है","हां ये रवीश तेरे ही लिए सजा देती है और तुझ ही को ज़िब देती है","क्या इंसान ने ये समझ रखा है के वो यूं ही मोहमल (अकेला छोड़ दिया, बिना किसी सवाल के) छोड़ दिया जाएगा","क्या वो एक हकीर पानी का नुत्फा (वीर्य से शुक्राणु) ना था जो (रहम-ए-मदार में) टपकया जाता है","फिर वो एक खून (थक्का) बना, फिर अल्लाह ने उसका जिस्म बनाया और उसकी आजा दुरुस्त किए","फिर उसे मर्द और औरत की दो क़िस्में बनाई","क्या वो इसपर कादिर नहीं है के मरने वालों को फिर जिंदा करदे","क्या इंसान पर ला मुतानाही ज़माने का एक वक़्त ऐसा भी गुज़रा है जब वो कोई काबिल ए ज़िक्र चीज़ ना था","हमने इंसान को एक मख़लुत नटफ़े (अंतरमिश्रित शुक्राणु) से भुगतान किया ता-के उसका इम्तिहान लें और इस ग़रज़ के लिए हमने उसे सुने और देखने वाला बनाया","हमने उसे रास्ता दिखाया, ख़्वाह शुकर करने वाला बने या कुफ़्र करने वाला","कुफ़्र करने वालों के लिए हमने जंजीरें और तौक (बेड़ियां) और भड़कती हुई आग मुहैया कर रखी है","नेक लोग (जन्नत में) शराब के ऐसे सागर पिएंगे जिनमें आबे काफूर की आमिश (मिश्रण) होगी","ये एक बहता चश्मा (वसंत) होगा जिसके पानी के साथ अल्लाह के बंदे शराब पिएंगे और जहां चाहेंगे बा-सहुलत उसकी शाखें (निकल) लेंगे","ये वो लोग होंगे जो (दुनिया में) नजर पूरी करते हैं, और उस दिन से डरते हैं जिसकी आफत हर तरफ फैली हुई होगी","और अल्लाह कि मुहब्बत में मिस्कीन और यतीम और क़ैदी को खाना खिलाते हैं","और उन्हें कहते हैं के (हम तुम्हें सिर्फ) अल्लाह की खातिर खिला रहे हैं, हम तुमसे ना कोई बदला चाहते हैं ना शुक्रिया","हमें तो अपने रब से उस दिन के अज़ाब का खौफ़ लाहिक है जो सच मुसीबत का इन्तेहाई तवील दिन होगा","पास अल्लाह ताला उन्हें हमारे दिन के शरर से बचा लेगा और उन्हें ताजगी और सुरूर बख्शेगा","और उनके सब्र के बदले में उन्हें जन्नत और रेशमी लिबास अता करेगा","वहां वो अनचे मस्नदों पर ताकिये लगाये बैठे होंगे, ना उन्हें धूप की गर्मी सतायेगी ना जादे की ठंड (कड़ाके की ठंड)","जन्नत की छाँव उन पर झुकी हुई साया कर रही होगी, और उसके फल हर वक्त उनके बस में होंगे(के जिस तरह चाहे उन्हें तोड़ लें)","उनके आगे चांदी के बर्तन और शेष के प्याले गर्दिश कराए जा रहे होंगे","शेष भी वो जो चांदी की क़िस्म के होंगे, और उनको (मुंतज़मीन-ए-जन्नत नहीं) ठीक अंदाज़ के मुताबिक भरा होगा","उनको वहां ऐसी शराब के जाम पिलाये जायेंगे जिसमें अदरक की आमद होगी","ये जन्नत का एक चश्मा होगा जिसे सालसबिल कहा जाता है","उनकी खिदमत के लिए ऐसे लड़के दौड़ते फिर रहेंगे होंगे जो हमेशा लड़के ही रहेंगे।तुम उन्हें देखो तो समझो के मोती (मोती) है जो बिखर गए हैं","वहां जिधर भी तुम निगाह डालोगे नियामतें ही नियामतें और एक बड़ी सल्तनत का सर ओ समां तुम्हें नजर आएगा","उनके ऊपर बारीक रेशम के सब्ज लिबास और एटलस ओ देबा के कपड़े (रिच) ब्रोकेड)होंगे, उनको चांदी के कंगन पहनेंगे जाएंगे, और उनका रब उनको निहायत पाकीजा शराब पिलाएगा","ये है तुम्हारी जजा और तुम्हारी कार-गुजारी काबिल-ए-कदर ठहरी है","ऐ नबी, हमने ही तुमपर ये कुरान थोड़ा थोड़ा करके नाज़िल किया है","लिहाज़ा तुम अपने रुब के हुकुम पर सब्र करो, और मुझमें से कोई बढ़-अमल या मुनकिर-ए-हक की बात न मानो","अपने रब का नाम सुबह-ओ-शाम याद करो","रात को भी उसके हुजूर सजदा रायज़ हो, और रात के तवील औकात में उसकी तस्बीह करते रहो","ये लोग तो जल्दी हासिल होने वाली चीज (दुनिया) से मुहब्बत रखते हैं है और अगले जो भारी दिन आने वाला है उसे नज़र अंदाज़ करते हैं","हमने ही इनको पेदा किया है और इनके जोड़ मजबूत किए हैं, और हम जब चाहें इनकी शक्लों को बदल कर रख दें","ये एक हिदायत है, अब जिसका जी चाहिए अपने रब की तरफ जाने का रास्ता इख्तियार करले","और तुम्हारे चाहने से कुछ नहीं होता जब तक कि अल्लाह न चाहे, यकीनन अल्लाह बड़ा अलीम-ओ-हकीम है","अपनी रहमत में जिसका चाहता है दाख़िल करता है, और जालिमों के लिए उसने दर्दनाक अज़ाब तय्यार कर रक्खा है","कसम है उन (हवाओं) की जो पै डर पै भेजती हैं","फिर तूफानी रफ़्तार से चलती है","और (बादलों को) उठा कर फैलाती है","फिर (उनको) फाड़ कर जुदा करती है","फिर (दिलों में खुदा की)याद डालती है","उजार (औचित्य) के तौर पर या डरावे के तौर पर","जिस चीज का तुमसे वादा किया जा रहा है वह जरूर होने वाली है","फिर जब सितारे मांड (बुझाना) पड़ जाएगा","और आसमान फाड़ दिया जाएगा","और पहाड़ धुनक डाले जाएंगे (उड़ा दिया जाएगा)","और रसूलों की हाजिरी का वक्त आ पहुंचेगा (उस रोज वो चीज पैदा हो जाएगी)","किस रोज के आपके लिए ये काम उठा रखा गया है","फ़ैसले के रोज़ के लिए","और तुम्हें क्या खबर के वो फ़ैसले का दिन क्या है","तबाही है उस दिन झूठ बोलने वालों के लिए","क्या हमने एग्लोन को हलाक नहीं किया","फिर उन्हीं के पीछे हम बाद वालों को चलाएंगे","मुजरिमों के साथ हम यही कुछ करते हैं","तबाही है उस दिन झुटलाने वालों के लिए","क्या हमने एक हकीर पानी से तुम्हें पैदा नहीं किया","और एक मुकर्ररा मुद्दत तक","उसे एक महफूज जगह ठहरे रक्खा","तो देखो, हम इसपर कादिर थे, पास हम बहुत अच्छी कुदरत रखने वाले हैं","तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए","क्या हमने ज़मीन को समेट कर रखने वाली नहीं बनाया","ज़िंदों के लिए भी और मुर्दों के लिए भी","और इस में बुलंद-ओ-बाला पहाड़ जमाए, और तुम्हें मीठा पानी पिलाया","तबाही है हमें रोज़ झुटलाने वालों के लिए","चलो अब उसी चीज़ की तरफ जिसे तुम झुटलाया करते थे","चलो हमें साए की तरफ जो तीन शाखों (कॉलम) वाला है","ना ठंडक छूने वाला और ना आग की गोद से बचाने वाला","वो आग महल (महल/किला) जैसी बड़ी बड़ी चिंगारियां फेंकेगी","(जो उछलती हुई यूं मेहसूस होंगी )गोया के वो जर्द ऊंट (ऊंट) है","तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए","ये वो दिन है जिसमें वो ना कुछ बोलेंगे","और ना उन्हें मौका दिया जाएगा के कोई उज्र(बहाना) पेश करें","तबाही है उस दिन झूठलाने वालों के लिए","ये फ़ैसले का दिन है हमने तुम्हें और तुमसे पहले गुज़रे हुए लोगों को जमा कर दिया है","अब अगर कोई चल सकता है तो मेरे मुकाबले में चल देखो","तबाही है उस दिन झूठलाने वालों के लिए","मुत्तक़ी लोग आज साये और चश्में में हैं","और जो फल वो चाहें (उनके लिए हाज़िर है)","खाओ और पियो मजे से अपने उन अमल के सिली में जो तुम करते रहे हो","हम नए लोग हैं को ऐसी ही जजा देते हैं","तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए","खा लो और मजे करलो थोड़े दिन, हकीकत में तुम लोग मुजरिम हो","तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए","जब इनसे कहा जाता है के (अल्लाह के आगे) झुको तो नहीं झुकते","तबाही है उस रोज़ झुकने वालों के लिए","अब (कुरान) के बाद और कौनसा कलाम ऐसा हो सकता है जिसपर ये ईमान लाये","ये लोग किस चीज के बारे में पूछ-गज्ज कर रहे हैं","क्या हम बड़ी खबर के बारे में हैं","जिसका मुतालिक ये मुखतलिफ छे-मेई-गोइयां (असहमति) करने में लगे हुए हैं","हरगिज नहीं एक-करीब इन्हें मालूम हो जाएगा","हां हरगिज नहीं, करीब इन्हें मालूम हो जाएगा","क्या ये वाकिया नहीं है के हमने जमीन को फर्श बनाया","और पहाड़ों को पहाड़ो की तरह गाड़ दिया","और तुम्हें (मर्दों और औरतों के) जोड़ो की शक्ल में पैदा किया","और तुम्हारी नींद को ऐसे सुकून बनाया","और रात को पर्दा पोश","और दिन को मुआश का वक्त बनाया","और तुम्हारे ऊपर सात मजबूत आसमान कायम किए","और एक निहायत रोशन और गरम चिराग़ पैदा क्या","और बादलों से लगता है बारिश बरसती है","ता-के इसके ज़रिये से गल्ला (अनाज) और सब्जी","और घने बाग उगे","बाकी फ़ैसले का दिन एक मुकर्रर वक़्त है","जिस रोज़ सूर में फुक मार दी जाएगी तुम फौज डर फौज निकल आओगे","और आसमान खोल दिया जाएगा हटा के वो दरवाजे ही दरवाजे बन कर रह जाएगा","और पहाड़ चलाएंगे यहां तक ​​के वो साराब (मृगतृष्णा) हो जाएंगे","दर हकीकत जहन्नुम एक घाट (घात) है","सरकशों का ठिकाना","जिसमें वो मुद्दतों पड़े रहेंगे","उसके अंदर कोई ठंडक और पीने के काबिल किसी चीज का मजा वो न चखेंगे","कुछ मिलेगा तो बस गरम पानी और जख्मों का धो-वान(पीप)","(उनके करतूतों) का भारपुर बदला","वो किसी हिसाब की तवक्कू ना रखते थे","और हमारी आयतों को उन्होंने बिल्कुल झुटला दिया था","और हाल ये था के हमने हर चीज गिन कर लिख रखी थी","अब चाहो मजा, हम तुम्हारे लिए अज़ाब के सिवा किसी चीज में हरगिज इज़ाफा ना करेंगी","यकीनन मुत्तकियों (पवित्र) के लिए कामरानी का एक मुकाम है","बाघ और अंगुर","और नौखेज हम्सिन लड़कियां","और झलकते हुए जाम","वहां कोई लगव(व्यर्थ) और झूठी बात वो ना सुनेंगे","जजा और काफी इनाम तुम्हारे रब की तरफ से","हमें निहायत मेहरबान खुदा की तरफ से जो जमीन और आसमान का और इनके दरमियान की हर चीज का मालिक है जिसके सामने किसी को बोलने का यारा नहीं","जिस रोज़ रूह और मलाइका सफ़ बस खड़े होंगे। कोई ना बोलेगा सिवाए उसके जिसे रहमान इजाज़त दे और जो ठीक बात कहे","वो दिन बार-हक़ है, अब जिसका जी चाहे अपने रब की तरफ पलटने का रास्ता इख्तियार करले","हमने तुम लोगों को अज़ाब से डरा दिया है जो करीब आ लगा है. जिस रोज़ आदमी वो सब कुछ देख लेगा जो उसके हाथों ने आगे भेजा है, और काफ़िर पुकार उठेगा के काश में खाक (मिट्टी) होता है","कसम है उन (फरिश्तों) की जो डूब कर खिंचते हैं","और आहिस्तगी से (धीरे ​​से) निकल ले जाते हैं","और (उन फ़रिश्तों की जो कायनात में) तेजी से तैरते फिरते हैं","फिर (हुकुम बजा लाने में) सबक करते हैं","फिर (एहकाम-इलाही के मुताबिक) मामलात का इंतिज़ाम चलते हैं","जिस रोज़ हिला मारे गा ज़लज़ले का झटका","और उसके पीछे एक और झटका पड़ेगा","कुछ दिल होंगे जो हमें रोज़ खौफ से कांप रहे होंगे","निगाहें उनकी सहमत (डाउनकास्ट) हुई होगी","ये लोग कहते हैं “क्या वकै हम पलटा कर फिर वापस लाये जायेंगे?”","\"क्या जब हम खोकली बोसीदा (खोखला और सड़ा हुआ) हदियां बन चुके होंगे?\"","कहने लगे \"ये वापसी तो फिर बड़े घाटे(नुक्सान) की होगी\"","हलांके ये बस इतना काम है के एक ज़ोर की डांट पड़ेगी","और यकायक ये खुले मैदान में मौजुद होंगे","क्या तुम्हें मूसा के किस्से की खबर मिलती है","जब उसके रब ने उसे तुवा के मुक़द्दस कहा वादी (घाटी) में पुकारा था","के फिरौन के पास जा, वो व्यंग्य हो गया है","और उसे कहा, क्या तू इसके लिए तैयार है के पाकीज़गी इख्तियार करे","और मैं तेरे रब की तरफ तेरी रहनुमाई करूं तो (उसका) खौफ terey andar paida ho?”","फिर मूसा ने (फिरौन के पास जा कर) उसको बड़ी निशानी दिखाई","मगर उसने झुटला दिया और ना माना","फिर चाल बाज़ियां करने के लिए पलटा","और लोगों को जमा करके उसने पुकार कर कहा","“मैं तुम्हारा सबसे बड़ा रब हूं”","आख़िर-ए-कार अल्लाह ने उसे आख़िरत और दुनिया के अज़ाब में पकड़ लिया","दर हकीकत इस में बड़ी इब्रत है हर उस शक्स के लिए जो डरे","क्या तुम लोगों की तख़लीक़ (पैदाइश) ज़्यादा सच काम जय हो आसमान की? अल्लाह ने उसको बनाया","उसकी छत (छत) खूब ऊंची उठाई फिर उसका तवाज़ुन क़याम किया (इसे समानुपातिक)","और उसकी रात ढांकी और उसका दिन निकला","इसके बाद ज़मीन को उसने बिछाया","उसके अंदर से उसका पानी और चारा निकला","और पहाड़ उसमें गढ़ दिए","सामान-ए-ज़ीस्ट (प्रावधान) के तौर पर तुम्हारे लिए और तुम्हारे अवसरों के लिए","फिर जब वो हंगामा-ए-अज़ीम बरपा होगा","जिस रोज़ इंसान अपना सब किया धारा याद करेगा","और हर देखने वाले के सामने दोज़क खोल कर रख दी जाएगी","तो जिसने सरकशी की थी","और दुनिया की जिंदगी को तारजी दी थी","दोज़ख ही उसका ठिकाना होगी","और जिसने अपने रुब के सामने खड़े होने का खौफ किया था और नफ्स को बुरी ख्वाहिशों से बाज़ रखा था","जन्नत उसका ठिकाना होगी","ये लोग तुमसे पूछते हैं के आखिर वो घड़ी कब आकर ठहरे गी","तुम्हारा क्या काम है हमारे का वक़्त बताओ","उस का इल्म तो अल्लाह पर ख़तम है","तुम सिर्फ ख़बरदार करने वाले हो हर उस शक्स को जो उसका ख़ौफ़ करे","जिस रोज़ ये लोग उसे देख लेंगे तो उन्हें यूं महसूस होगा के (ये दुनिया में या हालात-ए-मौत मेई) बस एक दिन के पिछले पहर या अगले पहर तक ठहरे है","[पैगंबर] तुर्श-रूह (भौंहें चढ़ाए हुए) हुआ और बेरुखी बारती","इस बात पर के वो अंधा उसके पास आ गया","तुम्हें क्या खबर, शायद वाह सुधार जाए","या हिदायत पर ध्यान दे और हिदायत करना हमारे लिए नफ़ेआ (फ़य्यादमंद) हो","जो शक्स बे-परवाही बरता है","उसकी तरफ तो तुम तवज्जुह करते हो","हलांके अगर वो ना सुधरे तो तुम पर उसकी क्या ज़िम्मेदारी है","और जो खुद तुम्हारे पास दौड़ा आता है","और वह डर रहा है","उससे तुम बेरुखी बारात-ते हो","हरगिज नहीं ये तो एक हिदायत है","जिसका जी चाहे इसे कबूल करे","ये ऐसे सहीफों मैं दरज है जो मुकर्रम हैं","बुलंद मरतबा हैं, पाकीज़ा हैं","मुअज्जज़ और नीक कातिबों के","हाथों में रहते हैं","लानत हो इंसान पर कैसा सच मुन्किर-ए-हक (सच्चाई से इनकार करता है) है ये","किस चीज से अल्लाह ने इसे पैदा किया है","नुत्फा की एक बूंद से अल्लाह ने इसे पैदा किया फिर इसकी तकदीर मुकर्रर की","फिर इसके लिए जिंदगी की राह आसान की","फिर इसे मौत दी और क़ब्र में पाहुंचया","फिर जब चाहिए वो इसे दोबारा उठा खड़ा करे","हरगिज नहीं, इसने वो फर्ज अदा नहीं किया जिसका अल्लाह ने इसे हुकुम दिया था","फिर जरा इंसान अपनी खुराक (खाने/खाने) को देखे","हमने खूब पानी डाला (डाला)","फिर जमीन को अजीब तरह फाड़ा","फिर हमारे अंदर उगे गैले(अनाज)","और अंगूर और तरकारियां","और ज़ैतून और खजूरें","और घने बाग(बगीचे)","और तरह तरह के फल और चारे","तुम्हारे आपके लिए तुम्हारे मवेशी (मवेशी) के लिए सामान-ए-ज़िस्ट (प्रावधान) के तौर पर","आख़िर-ए-कार जब वो कान बहरे कर देने वाली आवाज़ बुलंद होगी","उस रोज़ आदमी अपने भाई","और अपनी माँ और अपने बाप","और अपनी बीवी और अपनी औलाद से भागेगा","उनमें हर शक्स पर उस दिन ऐसा वक्त आ पड़ेगा के उसे अपने सिवा किसी का होश न होगा","कुछ चेहरे हमें रोज दमक रहे होंगे","हशश बशश और खुश ओ खुर्रम होन्गी","और कुछ चेहरों पर उस रोज़ खाक (धूल) उड़ रही होगी","और कलों (अंधेरा) छाई हुई होगी","यही काफिर ओ फजिर (अविश्वासी और दुष्ट) लोग हैं","जब सूरज लपेट दिया जाएगा","और जब तारे बिखर जाएंगे","और जब पहाड़ चलाये जाएंगे","और जब दस महीने की हमीला ऊंटनियां (वह-ऊंटनी) अपने हाल पर छोड़ दी जाएंगी","और जब जंगली जानवर समथ कर इखत्ते कर दिए जाएंगे","और जब समंदर भड़का दिए जाएंगे","और जब जाने (जिस्म से) जोध दी जाएगी","और जब जिंदा गाड़ी हुई (दफन) लड़की से पूछ जाएगी","के वो किस कसूर में मरी गई","और जब आमाल-नाम (कर्मों की पुस्तक) खोले जाएंगे","और जब आसमान का परदा हटा दिया जाएगा","और जब जहन्नम देहकै जाएगी","और जब जन्नत करीब ले आएगी","हमें वक्त हर शक्स को मालूम हो जाएगा के वो क्या लेकर आया है","पास नहीं मैं कसम खाता हूं","पलटने और चुप जाने वाले तारों की","और रात की जबके वो रुक्सत हुई","और सुबह की जबके उसने सांस लिया","ये फिल वाकिया एक बुज़ुर्ग पैगाम-बार का क़ौल है","जो बड़ी तवानाई (हो सकता है) रखता है, अर्श वाले के यहां बुलंद मरतबा है","वहां उसका हुकुम मन जाता है, वो बा-एतमाद (भरोसेमंद) है","और (ऐ एहले मक्का) तुम्हारा रफीक (साथी) मजनूं (पागल) नहीं है","उसने पैगम्बर को रोशन उफ़ाक (स्पष्ट क्षितिज) पर देखा है","और वह गैब (के इस इलम को लोगों तक पहुंच सके) के मामले में बख़ील नहीं है","और यह किसी शैतान-ए-मर्दूद का क़ौल नहीं है","फिर तुम लोग किधर चले जा रहे हो","ये तो सारे जहां वालों के लिए एक हिदायत है","तुम मेरे साथ हर उस शक्स के लिए जो राह-ए-रास्त पर चलना चाहता हो","और तुम्हारे चाहने से कुछ नहीं होता जब तक अल्लाह रब्ब-उल-आलमीन न चाहिए","जब आसमान फट जाएगा","और जब तारे बिखर जाएंगे","और जब समंदर फाड़ दिए जाएंगे","और जब कब्रें खुल जाएंगी","हमारा वक्त हर शक्स को उसका अगला पिछला सब किया धरा मालूम हो जाएगा","ऐ इंसान किस चीज ने तुझे और अपने उस रब-ए-करीम की तरफ से धोखे में डाल दिया","जिसने तुझ पेदा किया, तुझे नेक-सुक से दुरुस्त किया (आपको आकार दिया), तुझे मुतनसिब (अच्छी तरह से अनुपातिक) बनाया","और जिस सूरत में चाहा तुझको जोड़ कर तैयार किया","हरगिज नहीं बलके (असल बात ये है के) तुमलोग जजा-ओ-सजा को झुठलाते हो","हलांके तुमपर निग्रां मुकर्रर हैं","ऐसे मुअज्जज कातिब","जो तुम्हारे हर फेल (अमल) को जानते हैं","यक़ीनन नेक लोग मजे में होंगे","और बेचैन होकर लोग जहन्नम में जाएंगे","जजा के दिन वो इस में दाख़िल होंगे","और हम से हरगिज़ गायब न होंगे","और तुम क्या जानते हो के वो जजा का दिन क्या है","हां तुम्हें क्या खबर के वो जजा का दिन क्या है","ये वो दिन है जब किसी शक के लिए कुछ करना किसी के बस में न होगा, फैसला उस दिन बिल्कुल अल्लाह के इख्तियार में होगा","तबाही है दांडी मारने वालों के लिए","जिनका हाल ये है कि जब लोगों से लेते हैं तो पूरा पूरा लेते हैं","और जब उनको नाप कर या टोल कर देते हैं तो उन्हें घाटा देते हैं है","क्या ये लोग नहीं समझते के एक बड़े दिन","ये उठा कर लाए जाने वाले हैं","उस दिन जबके सब लोग रब्ब-उल-आलमीन के सामने खड़े होंगे","हरगिज नहीं, यकीनन बदकारों का नाम-ए-आमाल क़ैद-ख़ाने के दफ़्तर में है","और तुम्हें क्या मालूम के वो क़ैद-ख़ाने का दफ़्तर क्या है","एक किताब है लिखी हुई","तबाही है उस रोज़ झूठलाने वालों के लिए","जो रोज़-ए-जज़ा को झुटलाते हैं","और उसे नहीं झुटलता मगर हर वो शक्स जो हद से गुजर जाने वाला बद-अमल है","उसे जब हमारी आयतें सुनाई जाती हैं तो कहता है ये तो अगले वक्त की कहानियां हैं","हरगिज नहीं, बलके दरसल इन लोगों के दिलों पर इनके बुरे अमल का ज़ंग (जंग) चढ़ गया है","हरगिज़ नहीं बिल यकीन हमें रोज़ ये अपने रब की दीदार (दीदार) से महरूम रखे जाएंगे","फिर ये जहन्नुम में जा पड़ेंगे","फिर इनसे कहा जाएगा के ये वही चीज़ है जैसे तुम झूठलाया करते थे","हरगिज नहीं, बेशक नए आदमियों का नाम-ए-आमाल बुलंद पाया लोगों के दफ्तर में है","और तुम्हें क्या खबर है क्या है वो बुलंद पाया लोगों का दफ्तर","एक लिखी हुई किताब है","जिसकी निगेह-दाश्त मुकर्रब फ़रिश्ते करते हैं","बेशाख नेक लोग बादे मजे में होंगे","ऊंची मसनादो (सोफे) पर बैठे नजरिए कर रहे होंगे","उनके चेहरों पर तुम खुशहाली की रौनक महसूस करोगी","उनको नफ़ीस तारें सरबंद शराब पिलाई जाएगी जिसपर मुश्क की मोहर (सील) लगेगी","जो लोग दूसरों पर बाजी ले जाना चाहते हैं, वह इस चीज को हासिल करने में बाजी ले जाने की कोशिश करें","हमें शराब में तस्नीम की आमेज (मिश्रण) होगी","ये एक चश्मा है जिसके पानी के साथ मुकर्रब लोग शराब पिएंगे","मुजरिम लोग दुनिया में ईमान लाने वालों का मज़ाक उड़ाते थे","जब उनके पास से गुज़रते तो आंखें मार मार कर उनकी तरफ इशारे करते थे","अपने घरोन की तरफ पलट-ते तो मजे लेते हुए पलट-ते थे","और जब उन्हें देखते तो कहते थे के ये बहके हुए लोग हैं","हलांके वो उन पर निगरान बनकर नहीं भेजये गए थे","आज ईमान लाने वाले कुफ्फार पर हंस रहे हैं","मसनदों पर बैठे हुए उनका हाल देख रहे हैं","मिल गया न काफिरों को उन हरकतों का सवाब जो वो किया करता था","जब आसमां फट जाएगा","और अपने रब का फमां की तमील करेगा और उसके लिए हक यहीं है (के अपने रुब का हुकुम माने)","और जब ज़मीन फैला दी जाएगी","और जो कुछ उसके अंदर है उसे बाहर फेंक कर खाली हो जाएगी","और अपने रुब के हुकुम की तमील करेगी और उसके लिए हक यहीं है (काय उसकी तमील करे)","ऐ इंसान तू काशान काशान अपने रब की तरफ चल जा रहा है और उसे मिलने वाला है","फिर जिसका नाम-ए-आमाल उसके सीधे हाथ में दे दिया गया","उसका हलका हिसाब लिया जाएगा","और वो अपना लोगों की तरफ खुश ख़ुश पलटेगा","रहा वो शक्स जिसका नाम-ए-आमाल उस की पीठ के पीछे दिया जाएगा","तो वो मौत को पुकारेगा","और भक्ति हुई आग में जा पड़ेगा","वो अपने घर वालों में मगन था","उसने समझ था के उसे कभी पलटना नहीं है","पलटना कैसे ना था, उसका रब उसे करतूत देख रहा था","पास नहीं मैं कसम खाता हूं शफक (ट्वाइलाइट) की","और रात की और जो कुछ वही लेती है","और चांद की जबके वो माह-ए-कामिल (पूर्ण) हो जाता है","तुमको जरूर दरजा बा दरजा एक हालत से दूसरी हालत की तरफ गुज़रते जाना है","फिर लोगों को क्या हो गया है के ये ईमान नहीं लाते","और जब कुरान इनके सामने पड़ा जाता है सजदा नहीं करते","बलके ये मुनकिरीन तो उल्टा झूठलाते हैं","हलांके जो कुछ ये (अपने नाम-ए-आमाल में) जामा कर रहे हैं अल्लाह उसे खूब जानता है","लिहाजा इनको दर्दनाक अज़ाब की बशारत देदो","अलबत्ता जो लोग ईमान ले आये हैं और जिन्हो ने नेक अमल किये हैं उनके लिए कभी ख़तम न होने वाला अजर है","कसम है मज़बूत क़लों वाले (अभेद्य महल) आसमान की","और हमारे दिन की जिसका वादा किया गया है","और देखने वाले की और देखी जाने वाली चीज की","काय मारे गए गड्ढे वाले","उस गड्ढे वाले] जिस में खूब भड़कते हुए इंधन की आग थी","जबके वो हमें गद्दे के किनारे पर बिठाए हुए थे","और जो कुछ वो ईमान लाने वालों के साथ कर रहे थे उसे देख रहे थे","और उन एहले ईमान से उनकी दुश्मनी इसके सिवा किसी वजह से ना थी के वो हमें खुदा पर ईमान ले आए था जो ज़बरदस्त और अपनी ज़ात में आप महमूद (प्रशंसनीय) हैं","जो आसमान और ज़मीन की सल्तनत का मालिक है, और वो खुदा सब कुछ देख रहा है","जिन लोगों ने मोमिन मर्दन और औरतों पर ज़ुल्म ओ सितम तोड़ा और फिर उसे तैयब ना हुए, यकीनन उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब है और उनके लिए जलाए जाने की सजा है","जो लोग ईमान लाए और जिन्हो ने नीक अमल किया यकीनन उनके लिए जन्नत के बाग हैं जिनके बारे में खास बातें होंगी, ये है बड़ी कामयाब","डार हकीकत तुम्हारे रब की पकड़ बड़ी है","वही पहली बार पैदा करता है और वही दोबारा पैदा करेगा","और वह बक्शने वाला है, मोहब्बत करने वाला है","अर्श का मालिक है, बुज़ुर्ग-ओ-बरतर है","और जो कुछ चाहिए कर डालने वाला है","क्या तुम्हें लश्करों की खबर मिलती है","फिरौन और समूद (के लश्करों) की","मगर जिन्हो ने कुफ्र किया है वो झुटलाने में लगे हैं","हलांके अल्लाह ने उनको घेरे में ले रखा है","(उनके झूठलाने से इस कुरान का कुछ नहीं बिगड़ता) बाल्की ये कुरान बुलंद पाया है","हमें लोह में (नक्श है) जो महफूज है","कसम है आसमान की और रात को नामदार होने वाले की","और तुम क्या जानो क्या वो रात को नामदार होने वाला क्या है","चमकता हुआ तारा","कोई जान ऐसी नहीं है जिसका ऊपर कोई निगाह न हो","फिर जरा इंसान यहीं देख ले के वो किस चीज से भुगतान किया गया है","एक उछालने वाले पानी से भुगतान किया गया है","जो पीत और सीने की हदियों के दरमियान से निकलता है","यकीनन वो (खालीक) उसे दोबारा भुगतान करने पर कादिर है","जिस रोज पोशिदा असर की जांच पडताल होगी","हमें वक्त इंसान के पास न खुद अपना कोई ज़ोर होगा और न कोई उसकी मदद करने वाला होगा","कसम है बारिश बरसाने वाले आसमान की","और (नबातात उगते वक़्त) फट जाने वाली ज़मीन की","ये एक जच्ची-तुली बात है","हंसी मजाक नहीं है","ये लोग कुछ चल रहे हैं","और मैं भी एक चल रहा हूं","पास छोड़ दो ऐ नबी, काफिरों को एक जरा की जरा इन के हाल पर छोड़ दो","(ऐ नबी) अपने रब-ए-बरतर का नाम की तस्बीह करो","जिसने पैदा किया और तनसुब कयाम किया (फिर अनुपातिक किया)","जिसने तकदीर बनाई फिर राह दिखाई","जिसने नबातात (चरागाह) उगई","फिर उनको सिया कुदा करकट बना दिया","हम तुम्हें पढ़ा देंगे फिर तुम नहीं भूलोगे","सिवाय उसके जो अल्लाह चाहे। वो जाहिर को भी जानता है और जो कुछ पोशीदा (छिपा हुआ) है उसको भी","और हम तुम्हें आसान तरीके की सलाह देते हैं देखते हैं","लिहाज़ा तुम हिदायत करो अगर हिदायत नाफ़े (फ़ैयदमंद) हो","जो शक्स डरता है वो हिदायत क़बूल करेगा","और उसे गुरइज़ करेगा वो इंतेहाई बद-बख्त","जो बड़ी आग में जाएगा","फिर ना उसमें मरेगा और न जिएगा","फलाह पा गया वो जिसने पाकीजगी इख्तियार की","और अपने रब का नाम याद किया फिर नमाज पढ़ी","मगर तुमलोग दुनिया की जिंदगी को तर्जीह देते हो","हालांके आखिरी बेहतर है और बाकी रहने वाली है","यही बात पहले आए हुए सहीफों (ग्रंथों) में भी कहीं गई थी","इब्राहीम और मूसा के सहीफों में","क्या तुम्हें हमें चाहिए वली आफत की खबर पसंद है","कुछ चेहरे हमें रोज खौफ जादा होंगे","सख्त मशक्कत कर रहे होंगे","थके जाते होंगे, छायादार आग में झूलते रहेंगे","खौलते (उबलते हुए) हुए चश्मे (वसंत) का पानी उन्हें पीने को दिया जाएगा","खर-दर (कांटे-दार) सुखी घांस के सिवा कोई खाना उनके लिए ना होगा","जो ना मोटा करे ना भूख मिटाए","कुछ चेहरे उस रोज ब-रौनक होंगे","अपने कर-गुजारी पर खुश होंगे","आली मुकाम जन्नत में होंगे","कोई बहुत बात वहां न सुनेंगे","उसमें चश्में रावन होंगे","उसके अंदर ऊंची मसनदें होंगी","सागर राखे हुए होंगे","गांव तकियां (कुशन लगाए हुए) के कतारें लगी होंगी","और नफ़ीस फ़र्श बीचे हुए होंगे","(ये लोग नहीं मानते) तो क्या ये उन्तों को नहीं देखते के कैसे बन गए","आसमान को नहीं देखते के कैसे उठ गए","पहाड़ों को नहीं देखते के कैसे जमाए गए","और ज़मीन को नहीं देखते के कैसे बिछाई गई","अच्छा तो (ऐ नबी) हिदायत किए जाओ, तुम बस हिदायत ही करने वाले हो","कुछ इनपर जबर करने वाले नहीं हो","अलबत्ता जो शक्स मुंह मोड़ेगा और इंकार करेगा","अल्लाह के लिए उसको भारी सजा देगा","इन लोगों को पलटना हमारी तरफ ही है","फिर इनका हिसाब लेना हमारे ही ज़िम्मे है","कसम है फज्र की","और दस रातों की","और जफ़्त(सम) और ताक़(विषम) की","और रात की जबके वो रुक्सत हो रही हो","क्या इसमे किसी साहब-ए-अकल के लिए कोई कसम है","तुमने देखा नहीं के तुम्हारे रब ने क्या बरताओ किया","अनचे सुतुनो वाले आद-ए-इरम के साथ","जिनका मनिंद कोई क़ौम दुनिया के मुल्कों में पैदा नहीं हुई थी","और समूद के साथ जिन्होन ने वादी में चट्टाने तराशी थी","और मेखों वाले फिरौन के साथ","ये वो लोग (थाय) जिन्होनें दुनिया के मुल्कों में बड़ी सरकशी की थी","और उनमें बहुत फसाद फेलया था","आखिर-ए-कार तुम्हारे रब ने इनपर अज़ाब का कोड़ा बरसा दिया","हकीकत ये है काय तुम्हारा रुब घाट (सतर्क) लगाए हुए है","मगर इंसान का हाल ये है काय उसका रुब जब उसको आजमाइश में डालता है और उसे इज्जत और नियामत देता है तो वो कहता है काय मेरे रुब ने मुझे इज्जतदार बना दिया","और जब वो उसको आजमाइश में डालता है और उसका रिज़्क उसपर तंग कर देता है तो वो कहता है मेरे रब ने मुझे ज़लील कर दिया","हरगिज़ नहीं, बलके तुम यतीम से इज़्ज़त का सुलुक नहीं करते","और मिस्कीन को खाना खिलाने पर एक दूसरे को नहीं उक्साते","और मीरास (विरासत) का सारा माल समान कर खा जाते हो","और माल की मुहब्बत में बुरी तरह गिरफ़्तार हो","हरगिज़ नहीं जब ज़मीन पै डर पै क़ुओत क़ुत् कर रेगज़ार बना दी जाएगी","और तुम्हारा रब जलवा फरमा होगा हाल में के फरिश्ते सफ़ दर सफ़ खड़े होंगे","और जहन्नुम उस रोज़ सामने ले आएगी, उस दिन इंसान को समझ आएगी और हमें वक़्त के साथ समझने का क्या हासिल होगा","वो कहेगा के काश मैंने अपनी इस ज़िंदगी के लिए कुछ पेशगी समन किया होता","फिर हमें दीन अल्लाह जो अज़ाब देगा वैसा अज़ाब देने वाला कोई नहीं","और अल्लाह जैसा बंधे वैसा बांधने वाला कोई नहीं","(दूसरी तरफ इरशाद होगा) ऐ नफसे मुतमैन(आश्वस्त आत्मा/पवित्र)","चल अपने रब की तरफ इस हाल में के तू (अपने अंजाम-ए-नीक से) खुश (और अपने रुब काय नजदीक) पसंदीदा है","शमिल हो जा मेरे (नीक) बंदों में","और दखिल होजा मेरी जन्नत में","नहीं मैं कसम खाता हूं इस शहर की","और हाल ये है के (ऐ नबी) इस शहर में तुमको हलाल कर लिया गया है","और कसम खाता हूं बाप (एडम) की और उस औलाद की जो उसने पैदा की","दर हकीकत हमने इंसान को मुशक्कत में पैदा किया है","क्या उसने ये समझ रखा है कि उसपर कोई काबू ना पा सकेगा","कहता है के मैंने ढेरों माल उड़ा दिया","क्या वो समझता है कि किसी ने उसको नहीं देखा","क्या हमने उसे दो आँखें","और एक ज़ुबान और दो होंठ नहीं दिए","और दोनों नुमायन रास्ते उसे (नहीं) दिखा दिए","मगर उसने दशवार गुज़र घाटी (खड़ी) से गुज़रने की हिम्मत ना की","और तुम क्या जानो क्या है वो दुस्वार गुजर घाटी","किसी बगीचे को गुलामी से छुड़ाना","या फाके के दिन","किसी करीब यतीम","या खाक नशीं मिसकीन को खाना खिलाना","फिर (इसके साथ ये काय) आदमी उन लोगों में शामिल हो जो ईमान लाए और जिन्होन ने एक दूसरे को सब्र और (ख़ल्क-ए-खुदा पर) रहम की तालक़ीन की","ये लोग हैं दयेन बाज़ू (दाहिने हाथ) वाले","और जिन्हों ने हमारी आयत को मन-ने से इंकार किया वो बायें बाज़ू (बाएं हाथ) वाले हैं","उन पर आग लगी हुई होगी","सूरज और उसकी धूप की कसम","और चांद की कसम जबके वो उसके पीछे आता है","और दिन की कसम जबके वो (सूरज को) नुमाया कर देता है","और रात की कसम जबके वो (सूरज को) धन्यवाद लेती है","और आसमान की और उस जात की कसम जिसने उसे इस्तेमाल किया","और जमीन की और उस जात की कसम जिसने उसे इस्तेमाल किया","और नफ्स-ए-इंसानी की और उस जात की कसम जिसने उसे इस्तेमाल किया","फिर उसकी बदी और उसकी परहेजगारी उस पर इल्हाम कर दी","यकीनन फलाह पा गया वो जिसने नफ्स का तजकिया किया","और न-मुराद हुआ वो जिसने उसको दबा दिया","समूद ने अपनी सरकशी की बिना पर झुटलाया","जैब हमें क़ौम का सब से ज्यादा शकी (बदनसीब) आदमी बिफ़र कर उठा","अल्लाह के रसूल ने उन लोगों से कहा के खबरदार अल्लाह की ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को (हाथ न लगाना) और उसके पानी पीना (मैं माने न होना)","मगर उन लोगों ने उसकी बात को झूठा क़रार दिया और ऊंटनी को मार डाला। आख़िर-ए-कार उनके गुनाह के पैदाश में उनके रब ने उन्पर ऐसी आफत तूदी के एक साथ सबको पैवंद-ए-खाक कर दिया","और उसे (अपने फेल काय) किसी बुरे नतीजे का कोई खौफ (डर) नहीं है","कसम है रात की जबके वो छा जाए","और दिन की जबके वो रोशन हो","और उस जात की जिसने नर (पुरुष) और मादा (महिला) को भुगतान किया","दर हकीकत तुम लोगों की कोशिशें मुख्तलिफ़ क़िस्म की है","तो जिसने (राह ए खुदा में) माल दिया और (खुदा की नफरमानी से) परहेज किया","और भलाई को सच माना","उसको हम आसान रास्ते के लिए सहुलत देंगे","और जिसने (अपने खुदा से) कहा नियाज़ी (आत्मनिर्भर/स्वतंत्र) बारती","और भलाई को झुटलाया","उसको हम मजबूत रास्ते के लिए सहुलत देंगे","और उसका माल आखिर उसका किस काम आएगा जबके वो हलाक हो जाए","बेशक रास्ता बताना हमारे ज़िम्मी है","और दर हकीकत आख़िरत और दुनिया दोनों का हम ही मालिक हैं","पास मैंने तुमको ख़बरदार कर दिया है भड़कती हुई आग से","उसमें नहीं झुलसेगा मगर वो इंतिहायी बदबक्थ","जिसने झूठ बोला और मुह फेरा","और उसे दूर रक्खा जाएगा वो निहायत परहेजगार","जो पाकीजा होने की खातिर अपना माल देता है","उसपर किसी का कोई एहसान नहीं है जिसका बदला उसे देना हो","वो तो सिर्फ अपने रुब-ए-बरतर की रजा जोई के लिए ये काम करता है","और जरूर वो (हमसे) खुश होगा","कसम है रोज़े रोशन की","और रात की जबके वो सुकून के साथ तारी हो जाए","(ऐ नबी) तुम्हारे रब ने तुमको हरगिज नहीं छोड़ा और न वो नाराज हुआ","और यकीनन तुम्हारे लिया बाद का दौर पहले दौर से बेहतर है","और अनकरीब तुम्हारा रुब तुमको इतना देगा के तुम खुश हो जाओगे","क्या उसने तुमको यतीम नहीं पाया और फिर ठिकाना फरहम किया","और तुम्हें नवाज़ीफ-ए-राह पाया और फिर हिदायत बख्शी","और तुम्हें नादर (चाहते हुए) पाया और फिर मालदार कर दिया","लिहाज़ा यतीम पर शायद न करो","और सायेल( मांगने) वाले) को ना झिडको","और अपने रब की नियामत का इज़हार करो","(ऐ नबी) क्या हमने तुम्हारा सीना तुम्हारे लिए खोल नहीं दिया","और तुमपर से वो भारी बोझ उतर दिया","जो तुम्हारी कमर तोढे डाल रहा था","और तुम्हारी खातिर तुम्हारे जिक्र का आवाज बुलंद कर दिया","पास हकीकत ये है काय तंगी काय सात फारखी भी है","बेशाक टांगी काय साथ फारखी भी है","लिहाज़ा जब तुम फारिग हो तो इबादत की मुशक्कत में लग जाओ","और अपने रब की तरफ रागिब हो","कसम है इंजीर (अंजीर) की और ज़ैतून की","और तूर-ए-सीना (सिनाई पर्वत)","और इस पुर-अमन शहर (मक्का) की","हमने इंसान को बहतरीन साख्त पर भुगतान किया","फिर उसे उल्टा फेर कर हमने सब नीचों से नीच कर दिया","सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और नेक अमल करते रहे उनके लिए कभी खत्म ना होने वाला अजर है","पास (ऐ नबी) इसके बाद कौन जजा ओ सजा के मामले में तुमको झूठ बोल सकता है","क्या अल्लाह सब हकीमों से बड़ा हकीम नहीं है","पढ़ो (ऐ नबी) अपने रब के नाम के साथ जिसने पढ़ा किया","जमे हुए खून के एक लड़के से इंसान की तख़लीक़ की","पढ़ो और तुम्हारा रब बड़ा करीम है","जिसने क़लम के ज़रिया से इल्म सिखाया","इंसान को वो इल्म दिया जिसने वो ना जानता था","हरगिज नहीं, इंसान सरकशी करता है","इस बिना पार के वो अपने आप को बे नियाज देखता है","(हलांके) पलटना यकीनन तेरे रब ही की तरफ है","तुमने देखा हमें शक्स को","जो एक बंदे को मना करता है जबके वो नमाज पढ़ता हो","तुम्हारा क्या ख्याल है अगर (वो बंदा) राह ए रास्ते पर हो","या परहेजगारी की तलाक़ करता हो","तुम्हारा क्या ख्याल है अगर (ये मन करने वाला शख़्स हक़ को) झुटलता और मुँह मोड़ता हो","क्या वो नहीं जानता के अल्लाह देख रहा है","हरगिज़ नहीं अगर वो बाज़ ना आया तो हम उसकी पेशानी के बाल पकड़ कर उसे खींचेगे","उस पेशानी को जो झूठी और खतरनाक है","वो बुलाले अपने हामियों की टोली को","हम भी अज़ाब के फरिश्तों को बुला लेंगे","हरगिज़ नहीं, उसकी बात न मानो और सजदा करो और (अपने रब का) क़ुरब हासिल करो","हमने (कुरान) को शब-ए-क़दर में नाज़िल किया है","और तुम क्या जानो, शब-ए-क़द्र क्या है","शब-ए-क़द्र हज़ार महिनो से ज़्यादा बेहतर है","फ़रिश्ते और रूह (जिब्राइल) हमसे अपने रब के इज़्न (अनुमति) से हर हुक्म ले कर उतरते हैं","वो रात सरसर सलामती है तुलू ए फज्र तक","एहले किताब और मुशरिकिन में से जो लोग काफिर थे (वो अपने कुफ्र से) बाज़ आने वाले ना थे जब तक के उनके पास दलील ए रोशन ना आ जाए","(यानी) अल्लाह के तरफ से एक रसूल जो पाक सही पढ़ कर सुनाए","जिन में बिल्कुल रास्ता और दुरुस्त तस्वीरें लिखी हुई हो","पहले जिन लोगों को किताब दी गई थी उनमें तफ़रका बरपा (विभाजन/विभाजन) नहीं हुआ मगर इस के बाद के उन के पास (राहे रास्ते का) बयान ए वजह आ चूका था","और उनको इसके सिवा कोई हुकुम नहीं दिया गया था के अल्लाह के बंदगी अपने दीन को उसके लिए खालिस करके। बिल्कुल यक्सू हो कर, और नमाज़ क़याम करें और जकात दे यही निहायत सही-ओ-दुरूस्त दीन है","एहले किताब और मुशरिकिन में से जिन लोगों ने कुफ्र किया है वो यकीनन जहन्नम की आग में जाएंगे और हमेशा उसमें रहेंगे, ये लोग बढ़-तारीन ए खलायेक (सृजन) हैं","जो लोग ईमान ले आए और जिन्होन नै नेक अमल किए वो यक़ीनन बहतरीन-ए-खलायेक है","उनकी जाज़ा उनके रब के यहां दायमी (अनन्त) क़याम की जन्नतें हैं जिनके आला नेहरेन बेह राही होंगी। वो उनमें हमेशा हमेशा रहेंगे। अल्लाह उनसे राजी हुआ और वो अल्लाह से राजी हुए। ये कुछ है हमारे शक्स के लिए जिसने अपने रब का खौफ किया हो","जब ज़मीन अपनी पूरी शिद्दत के साथ हिला डाली जाएगी","और ज़मीन अपने अंदर का सारे बोझ निकल कर बहार डाल देगी","और इंसान कहेगा के ये इसको क्या हो रहा है","उस रोज वो अपने (ऊपर गुजरे हुए) हालात बयान करेगी","क्योंकि तेरे रब ने उसे (ऐसा करने का) हुक्म दिया होगा","उस रोज लोग मुताफर्रिक हालात में पलटेंगे ताके उनके अमल उनको दिखाये जायें","फिर जिसने जरा बराबर नेकी की होगी वो उसको देख लेगा","और जिसने जरा बराबर बदी की होगी वो उसको देख लेगा","कसम है उन (घोड़ों) की जो फुंकारे मारते हुए ढूंढते हैं","फिर (अपने तपों से) चिंगारियां झड़ते हैं","फिर सुबह सवेरे चपा मरते हैं","फिर इस मौके पर गार्ड ओ गुबार उड़ाते हैं","फिर इसी हालात में कोई मजे के अंदर जा घुसते हैं","हकीकत ये है के इंसान अपने रुब का बड़ा नाशुक्र है","और वह खुद इस पर गवाह है","और वह माल-ओ-दौलत की मुहब्बत में बुरी तरह मुबतला है","तो क्या वो हमें वक्त को नहीं जानता जब कब्रों में जो कुछ (मडफन) है उसे निकाल लिया जाएगा","और सीने में जो कुछ (मख्फी) है उसे बारामाद करके उसकी जांच पडताल की जाएगी","यकीनन उनका रब हमें रोज उनसे खूब बख़बर होगा","अज़ीम हदीसा","क्या है वो अज़ीम हदीसा","तुम क्या जानो के वो अज़ीम हदीसा क्या है","वो दिन जब लोग बिखरे हुए परवानों की तरह","और पहाड़ रंग बी रंगी धुनकी हुई ऊन के तरह होंगे","फिर जिसके पलड़े भारी होंगे","वो दिल पसंद ऐश में होगा","और जिस के पलड़े हल्के होंगे","उसकी जाए करार गहरी खाई होगी","और तुम्हें क्या खबर काय वो क्या चीज है","भड़कती हुई आग","तुम लोगों को ज्यादा से ज्यादा और एक दूसरे से बढ़कर दुनिया हासिल करने की धुन ने गफलत में डाल रखा है","यहां तक ​​के (आईएसआई) फ़िक्र में) तुम लब-ए-गौर तक पहुँच जाते हो","हरगिज़ नहीं, अनकरीब तुमको मालूम हो जाएगा","फिर (सुनलो के) हरगिज नहीं, अनकरीब तुमको मालूम हो जाए","हरगिज नहीं अगर तुम यकीनी इल्म की हकीकत से (रविश है) के अंजाम को) जानते होते (तो तुम्हारा ये तर्जे अमल ना होता)","तुम दोज़ख देख कर रहोगे","फिर (सुन लो के) तुम बिल्कुल यकीन के साथ उसे देख लोगे","फिर ज़रूर उस रोज़ तुम से इन नेअमतों के बारे में जवाब तलबी की जाएगी","ज़माने की क़सम","इंसान दर हक़ीक़त बड़े ख़सारे (नुक्सान) में है","सिवाए उन लोगों के जो ईमान लाए और नेक अमल करते रहें और एक दूसरे को हक की हिदायत और sabr की तालक़ीन करते रहे","तबाही है हर उस शक्स के लिए जो (चाँद दर चाँद) लोगों पर तान और (पीठ पीछे) बुराइयां करने का खुगर है","जिसने माल जमा किया और उसे गिन गिन कर रक्खा","वो समझता है कि हमें का माल हमेशा उसके पास रहेगा","हरगिज नहीं, वो शक्स तो चकना-चूर कर देने वाली जगह में फेंक दिया जाएगा","और तुम क्या जानो के क्या हो वो चकना-चूर कर देने वाली जगह","अल्लाह की आग खूब भड़काई हुई","जो दिलों तक पहुंचें गी","वो उन पर ढांक कर बंद कर दी जाएगी","(इस हालात में के वो) अनचे अनचे सुतुनो मेई (घिरे हुए होंगे)","तुमने देखा नहीं के तुम्हारे रब ने हाथी वालों के साथ क्या किया","क्या उसने उनकी तदबीर को आकार नहीं दिया","और उन पर परिंदों के झुंड के झुंड भेज दिए","जो उन पर पके हुए मिट्टी के पत्थर फेंक रहे थे","फिर उनका ये हाल कर दिया जैसे जानवरों का खाया हुआ भूसा","चंके कुरैश मानूस हुए","(यानी) जाड़े (सर्दियों) और गर्मी के सफ़रों से मानूस","लिहाज़ा उन को चाहिए के इस घर के रब की इबादत करें","जिसने उन्हें भूख से बचा कर खाने को दिया और खौफ से बचा कर अमन अता किया","तुम ने देखा उस शक्स को जो आख़िरत की जजा व सजा को झुटलता है","वही तो है जो यतीम को धक्के देता है","और मिस्कीन का खाना देने पर नहीं उक्सता","फिर तबाही है उन नमाज पढ़ने वालों के लिए","जो अपनी नमाज से गफ़लत बारात-ते हैं","जो रिया-कारी (दिखावा) करते हैं","और मामुली ज़रुरत की चीज़ (लोगों को) देने से गुरेज करते हैं","(ऐ नबी) हमने तुम्हें कौसर अता कर दिया","पास तुम अपने रब ही के लिए नमाज पढ़ो और कुर्बानी करो","तुम्हारा दुश्मन हाय जध-काटा है","केहदो के ऐ काफिरों","मैं उनकी इबादत नहीं करता जिनकी इबादत तुम करते हो","और ना तुम उसकी इबादत करने वाले हो जिसकी इबादत मैं करता हूं","और ना मैं उनकी इबादत करने वाला हूं जिनकी इबादत तुम ने की है","और ना तुम उसकी इबादत करने वाले हो जिसकी इबादत मैं करता हूं","तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन है और मेरे लिए मेरा दीन","जब अल्लाह की मदद आ जाए और फतह नसीब हो जाए","और (ऐ नबी सास) तुम देख लो के लोग फौज दार फौज अल्लाह के दीन में दखल हो रहे हैं","तो अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो और हमसे मगफिरत की दुआ मांगो। बेशाक़ वो बड़ा तौबा क़बूल करने वाला है","टूट गए अबू लहब के हाथ और ना-मुराद हो गया वो","उसका माल और जो कुछ उसने कमाया वो उसका कोई काम ना आया","ज़रूर वो शोला ज़ान आग में डाला जाएगा","और (हमारे साथ) उसकी जोरू (पत्नी) भी लगाई बुझाई करने वाली","उस की गरदन (गर्दन) में मूंज की रस्सी होगी","कहो वो अल्लाह है, यक्ता","अल्लाह सब से बे-नियाज़ है और सब हमें का मोहताज हैं","ना उसकी कोई औलाद है और ना वो किसी की औलाद","और कोई उसका हमसर नहीं है","कहो मैं पनाह मांगता हूं सुबह के रब की","हर उस चीज के शर से जो उसने पैदा किया है","और रात की तारीख के शरर से जब के वो चा जाए","और गिरहों में फूंकने वालों (या वालियों) के शरर से","और हसीद (ईर्ष्या) के शरर से जब के वो हसद (ईर्ष्या) करे","कहो, मैं पनाह मांगता हूं इंसानों के रब","इंसानों के बादशाह","इंसानों के हकीकी माबूद की","हमें बर्बाद करने वाले शहर से जो बार-बार पलट कर आता है","जो लोगों के दिलों में वसीयत डालता है","ख्वाह वो जिन्नो में से हो या इंसानों में से"] \ No newline at end of file diff --git a/docs/search.html b/docs/search.html index b1bfd071..27fe7170 100644 --- a/docs/search.html +++ b/docs/search.html @@ -57,6 +57,8 @@ .roman-urdu-text{font-style:normal;font-weight:500;color:#33691e} .roman-urdu-junagarhi td{background:#e8f5e9} .roman-urdu-junagarhi-text{font-style:normal;font-weight:500;color:#1b5e20} +.devnagri-urdu td{background:#e8eaf0} 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से मदद माँगते हैं +[1:6] हमने सीधा रास्ता दिखा +[1:7] उन लोगों का रास्ता जिनपर तू नई इनाम फरमाया, जो मातूब नहीं हुए (ना उनका जिनपर तेरा गजब होता रहा), जो भटके हुए नहीं हैं + +Surah 2: Al-Baqarah (The Cow) +---------------------------------------- +[2:1] अलिफ़ लाम मीम +[2:2] ये अल्लाह की किताब है, इसमें कोई शक्क नहीं, हिदायत है उन परहेज़गार लोगों के लिए +[2:3] जो गैब पर ईमान लाते हैं, नमाज़ क़याम करते हैं, जो रिज़क हमने उनको दिया है उसमें से ख़र्च करते हैं +[2:4] जो किताबें तुमसे पहले नाज़िल की गई हैं (यानी क़ुरान) और जो किताबें तुमसे पहले नाज़िल की गई थीं उन सब पर ईमान लाते हैं और आख़िरत पर यक़ीन रखते हैं +[2:5] ऐसे लोग अपने रब की तरफ से राह ए रास्ते पर हैं और वही फलाह पीते हैं wale हैं +[2:6] जिन लोगों ने (बातों को तस्लीम करने से) इनकार करदिया, उनके लिए यक्सन है, ख्वा तुम उन्हें खबरदार करो या ना करो, बाहर हाल वो मन्ने वाले नहीं है +[2:7] अल्लाह ने उनके दिलों और उनके कानों पर मोहर लगा दी है और उनकी आंखों पर परदा पढ़ गया है, वो सच साज़ा के मुस्तहिक हैं +[2:8] बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो कहते हैं कि हम अल्लाह पर और आख़िरत के दिन पर ईमान लाए हैं, हलांके दर-हक़ीक़त वो मोमिन नहीं हैं +[2:9] वो अल्लाह और ईमान लाने वालों के साथ धोखे-बाज़ी कर रहे हैं, मगर दरसल वो खुद अपने आप ही को धोखे में डाल रहे हैं और उन्हें इसका शूर नहीं है +[2:10] उनके दिलों में एक बीमारी है जिसे अल्लाह ने और ज्यादा बुरा दिया, और जो झूठ वो बोलते हैं, उसकी मानसिकता में उनके लिए दर्दनाक सजा है +[2:11] जब कभी उन्हें कहा गया के ज़मीन में फ़साद बरपा ना करो तो उन्हें ने यही कहा के हम तो इस्लाह करने वाले हैं +[2:12] ख़बरदार! हकीकत में यही लोग मुफसिद (फसाद करने वाले) हैं मगर उन्हें शूर नहीं है +[2:13] और जब उन्हें कहा गया जिस तरह दूसरे लोग ईमान लाए हैं उसकी तरह तुम भी ईमान लाओ तो उन्होन ने यही जवाब दिया "क्या हम बेवकूफों की तरह ईमान लाए हैं?" ख़बरदार! हकीकत में तो ये खुद बेवकूफ हैं, मगर ये जानते नहीं हैं +[2:14] जब ये एहले ईमान से मिलते हैं, तो कहते हैं के हम ईमान लाए हैं और जब अलैदागी (अकेले/प्राइवी) में अपने शैतानों से मिलते हैं, तो कहते हैं के असल में तो हम तुम्हारे साथ हैं और इन लोगों से महज़ मज़ाक कर रहे हैं +[2:15] अल्लाह उन्हें मज़ाक कर रहा है, वो इनकी रस्सी दराज़ किए जात है, और ये अपनी सरकशी में अंधों (अंधों) की तरह भटकते चले जाते हैं +[2:16] ये वो लोग हैं जिन्हों ने हिदायत के बदले गुमराही ख़त्म ली है, मगर ये सौदा इनके लिए नफा-बख्श नहीं है और ये हरगिज सही रास्ते पर नहीं हैं +[2:17] इनकी मिसाल ऐसी है जैसे एक शक्स ने आग रोशन की और जब उसने सारे माहौल को रोशन कर दिया तो अल्लाह ने इनका नूर ए बसारत (दृष्टिकोण) साल्ब करलिया और इन्हें इस हाल में छोड़ दिया के तारिकियों (अंधेरों) में इन्हें कुछ नज़र नहीं आता +[2:18] ये बाहर हैं, गुंगे हैं, अंधे हैं, ये अब ना पलटेंगे +[2:19] हां फिर इनकी मिसाल यूं समझो के आसमान से ज़ोर की बारिश हो रही है और इसके साथ अंधेरी घटा और कड़क चमक भी है, ये बिजली की कड़क सुन कर अपनी जानो के खौफ से कानो में उंगली थूंसे लेते हैं और अल्लाह इन मुनकिरीन ए हक को हर तरफ से घेरे में लिए हुए हैं +[2:20] चमक से इनकी हालत ये हो रही है के गोया अनकारीब बिजली इनकी बसारत (दृष्टि) उचक ले जाएगी, जब ज़रा कुछ रोशनी यहीं महसूस होती है तो इसमें कुछ दूर चल लेते हैं और जब अंदर अंधेरा छा जाता है तो खड़े हो जाते हैं। अल्लाह चाहता है तो इनकी समाअत (सुनना) और बसारत बिल्कुल ही सलब करलेता, यकीनन वो हर चीज पर कादिर है +[2:21] लोगन! बंदगी इख्तियार करो अपने हमसे रूब की जो तुम्हारा और तुमसे पहले जो लोग हो गुजरे हैं उन सबका खालिक है, तुम्हारे बच्चों की तवक्कू इसी सूरत से हो सकती है +[2:22] वही तो है जिसने तुम्हारे लिए जमीन का फर्श बिछाया, आसमान की छठ बनाई, ऊपर से पानी बरसाया और उसके ज़रीये से हर तरह की पेडवार निकल कर तुम्हारे लिए रिज़क बाहम पहुंचाया, पास जब तुम ये जानते हो तो दूसरे को अल्लाह का मद्द ए मुक़ाबिल न ठहरो +[2:23] और अगर तुम्हारे पास अमृत है के ये किताब जो हमने अपने बंदे पर उतारी है, ये हमारी है या नहीं, तो इसके मानिंद (समान) एक ही सूरत बना लाओ, अपने सारे हमनवा को बुला लो (आपकी सहायता के लिए सहयोगी), एक अल्लाह को छोड़ कर बाकी जिसकी चाहो मदद लेलो अगर तुम सच्चे हो तो ये काम करके दिखाओ +[2:24] लेकिन अगर तुमने ऐसा ना किया और यक़ीनन कभी नहीं कर सकते, तो डरो हमें आग से जिसका इंधन (ईंधन) बनाएंगे इंसान और पत्थर, जो मुहैय्या की गई है मुनकिरीन ए हक़ के लिए +[2:25] और (ऐ पैगम्बर), जो लोग इस किताब पर ईमान ले आए और (इस्के मुताबिक) अपने अमल दुरुस्त कर लें, अनहेन ख़ुशख़बरी देदो के उनके लिए ऐसे बाघ हैं, जिनके बारे में खास बातें होंगी। उन बाघों के फाल सूरत में दुनिया के फालों से मिलते होंगे, जब कोई फल उन्हें खाने को दिया जाएगा, तो वो कहेंगे के ऐसे ही फाल इस्से पहले दुनिया में हमको दिए जाते हैं। उनके लिए वहां पाकीज़ा बीवियां होंगी, और वो वहां हमेशा रहेंगे +[2:26] हां, अल्लाह इसे हरगिज़ नहीं शरमाता के मच्छर या इसे भी हकीर-तार (महत्वहीन) किसी चीज़ की तमसीलें (उदाहरण) दे। जो लोग हक़ बात को क़बूल करने वाले हैं, वो इन्हीं तमसीलों को देख कर जान लेते हैं के ये हक़ है जो उनके रब ही की तरफ से आया है, और जो मन्ने वाले नहीं हैं, वो इन्हें सुनकर कहने लगते हैं कि ऐसी तमसीलों से अल्लाह को क्या सरोकार? इस तरह अल्लाह एक ही बात से बहुतों को गुमराह करने में मदद करता है और बहुतों को राह और रास्ता दिखाता है। और गुमराही में वो उनको मुब्तिला करता है जो फ़ासीक़ है +[2:27] अल्लाह के अहद को मज़बूत बांध लेने के बाद तोड़ देते हैं, अल्लाह ने जिसे जोड़ने का हुकुम दिया है उसे काट-ते हैं, और ज़मीन में फ़साद बरपा करते हैं। हकीकत में यही लोग नुक्सान उठाने वाले हैं +[2:28] तुम अल्लाह के साथ कुफ्र का रवैय्या कैसे इख्तियार करते हो हालांके तुम बे-जान थे, उसने तुमको जिंदगी अता की, फिर वही तुम्हारी जान सब करेगा, फिर वही तुम्हें दोबारा जिंदगी अता करेगा, फिर उसी की तरफ तुम्हें पलट कर जाना है +[2:29] वही तो है, जिसने तुम्हारे लिए जमीन की सारी चीजें पैदा कीं, फिर ऊपर की तरफ तवाज्जु फरमाई और सात आसमान उस्तवार किए और वह हर चीज का इल्म रखने वाला है +[2:30] फिर जरा हमें वक़्त का तसव्वुर करो जब तुम्हारे रब ने फरिश्तों से कहा था के "मैं जमीन में एक खलीफा बनने वाला हूं" उनहोन ने अर्ज़ किया: "क्या आप जमीन में किसी ऐसे को मुकर्रर करने वाले हैं, जो इसके इंतेजाम को बिगाड़ देगा और खून-रेजियां करेगा? आप की हम्द ओ सना के साथ तस्बीह और आप के लिए तकदीस तो हम कर ही रहे हैं।” फरमाया: "मैं जानता हूं जो कुछ तुम नहीं जानते।" +[2:31] इसके बाद अल्लाह ने आदम को सारी चीज़ों के नाम सिखाए, फिर उन्हें फरिश्तों के सामने पेश किया और फरमाया "अगर तुम्हारा ख्याल सही है (के किसी खलीफा के तकरार से इंतेज़ाम बिगड़ जाएगा) तो ज़रा इन चीज़ों के नाम बताओ।" +[2:32] अनहोन ने अर्ज़ किया: "नुक़्स (दोष) से ​​पाक तो आप ही की ज़ात है, हम तो बस इतना ही इल्म रखते हैं, जितना आपने हमको दे दिया है, हकीकत में सब कुछ जाने और समझने वाला आप के सिवा कोई नहीं" +[2:33] फिर अल्लाह ने आदम से कहा: "तुम इन्हें इन चीज़ों के नाम बताओ" जब उसने उनको उन सबके नाम बता दिए, तो अल्लाह ने फरमाया: "मैंने तुम से कहा ना था के मैं आसमान और ज़मीन की वो सारी हकीकत जानता हूं जो तुमसे मख़फ़ी (चुपी) हैं, जो कुछ तुम ज़ाहिर करते हो, वो भी मुझे मालूम है और जो कुछ तुम छुपते हो, उसे भी मैं जानता हूं।” +[2:34] फिर जब हमने फरिश्तों को हुकुम दिया के आदम के आगे झुक जाओ, तो सब झुक गए, मगर इब्लीस ने इंकार किया, वो अपनी बदाई के घमंड में पढ़ गया और नफरमानों में शामिल हो गया +[2:35] फिर हमने आदम से कहा के "तुम और तुम्हारी बीवी, दोनों जन्नत मैं रहो और यहां ब-फरागत जो चाहो खाओ, मगर इस डरख्त का रुख न करना, वरना ज़ालिमों में शामिल होंगे” +[2:36] आख़िर ए कार शैतान ने दोनों को इस दरख्त की तरजीब देकर हमारे हुकुम की जोड़ी से हटा दिया और उनमें हमें हालत से निकालवा कर छोड़ा जिसमें वो थे। हमने हुकुम दिया के, अब तुम सब यहां से उतर जाओ, तुम एक दूसरे के दुश्मन हो और तुम्हें एक खास वक्त तक जमीन (में) ठहरना और वहीं गुजर बसर करना है” +[2:37] उस वक्त आदम ने अपने रब से चंद कलीमात सीख कर तौबा की, जिसको उसके रब ने कबूल करलिया, क्योंकि वो बड़ा माफ करने वाला और रहम फरमाने वाला है +[2:38] हमने कहा के, "तुम सब यहां से उतर जाओ फिर जो मेरी तरफ से कोई हिदायत तुम्हारे पास पहुंचें, तो जो लोग मेरी हिदायत की जोड़ी बनाएंगे, उनके लिए कोई खौफ और रांझ का मौका ना होगा +[2:39] और जो इसको कबूल करने से इंकार करेंगे और हमारी आयत को झुठलाएंगे, वो आग में जाने वाले लोग हैं, जहां वो हमेशा रहेंगे।” +[2:40] ऐ बानी-इज़राइल! जरा ख्याल करो मेरी उस नियामत का जो मैंने तुमको अता की थी, मेरे साथ तुम्हारा जो अहद (संविदा) था उसे तुम पूरा करो, तो मेरा जो अहद तुम्हारे साथ था उसे मैं पूरा करूंगा और मुझ ही से तुम डरो +[2:41] और मैंने जो किताब भेजी है उसपर ईमान लाओ, ये उस किताब की ताईद (पुष्टि) में है जो तुम्हारे पास पहले से मौजूद थी, लिहाजा सबसे पहले तुम ही इसके मुनीर ना बन जाओ थोड़ी कीमत पर मेरी आयत को ना बेच डालो और मेरे गजब से बचाओ +[2:42] बातिल का रंग चढ़ा कर हक को मुश्तबा (भ्रमित) ना बनाओ और ना जानते बूझते हक़ को छुपाने की कोशिश करो +[2:43] नमाज़ क़ायम करो, ज़कात दो और जो लोग मेरे आगे झुक रहे हैं उनके साथ तुम भी झुक जाओ +[2:44] तुम दूसरे को तो नेकी का रास्ता इख्तियार करने के लिए कहते हो हो, मगर अपने आप को भूल जाता हो? हलाँके तुम किताब की तिलावत करते हो, क्या तुम अक़ल से बिल्कुल ही काम नहीं लेते +[2:45] साबर और नमाज से मदद लो, बेशक नमाज एक मुश्किल मुश्किल काम है +[2:46] मगर उन फरमा-बरदार बंदों के लिए मुश्किल नहीं है जो समझते हैं कि आखिर ए कार उन्हें अपने रब से मिलना और उसकी तरफ पलट कर जाना है +[2:47] ऐ बानी इजराइल! याद करो मेरी उस नियामत को, जिसमें मैंने तुम्हें नवाजा था और इस बात को कहा था कि मैंने तुम्हें दुनिया की सारी कौमों पर फजीलत अता की थी +[2:48] और डरो उस दिन से जब कोई किसी के जरा काम न आएगा, न किसी की तरफ से सिफरिश कबूल होगी, न किसी को फिदिया लेकर चोदा जाएगा, और ना मुजर्रिमों को कहीं से मदद मिल सकेगी +[2:49] याद करो वो वक्त, जब हमने तुमको फिरौनियों की गुलामी से निजात बख्शी, उन्हें ने तुम्हें मजबूत अजाब में मुब्तिला कर रखा था, तुम्हारे लड़कों को जिबाह करते थे और तुम्हारी लड़कियों को जिंदा रहने देते थे और इस हालात में तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारी बड़ी आजमाइश थी +[2:50] याद करो वो वक्त, जब हमने समंदर पार कर तुम्हारे लिए रास्ता बनाया, फिर इस्में से तुम्हें ब-खैरियत गुजारवा दिया, फिर वहीं तुम्हारी आंखों के सामने फिरौनियों को बर्बाद कर दिया +[2:51] याद करो, जब हमने मूसा को चालीस शबाना रोज़ की क़रारदाद पर बुलाया, तो उसके पीछे तुम बचदे (बछड़े) को अपना मबूद बना बैठे हमें वक़्त तुमने बड़ी ज़्यादा की थी +[2:52] मगर इसपर भी हमने तुम्हें माफ़ कर दिया के शायद अब तुम शुकर-गुज़ार बनो +[2:53] याद करो के (हमें ठीक करो) वक़्त जब तुम ये ज़ुल्म कर रहे थे) हमने मूसा को किताब और फुरकान अता की ता-के तुम उसके ज़रिये से सीधा रास्ता पा सको +[2:54] याद करो जब मूसा (ये नियामत लेते हुए पलटा, हमसे) ने अपनी क़ौम से कहा के ''लोगन, तुमने बचदे को'' माबूद बना कर अपना ऊपर सख्त ज़ुल्म किया है, लिहाज़ा तुम लोग अपने खालिक के हुजूर तौबा करो और अपनी जानो को हलाक करो, इसी में तुम्हारे खालिक के नजरिए तुम्हारी बेहतरी है” हमारा वक्त तुम्हारे खालिक ने तुम्हारी तौबा कबूल कर ली के वो बड़ा माफ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[2:55] याद करो जब तुमने मूसा से कहा था कि हम तुम्हारे कहने का हरगिज़ यकीन ना करेंगे, जब तक के अपनी आंखों से एलानिया खुदा को (तुमसे कलाम करते) ना देखो, हम वक्त तुम्हारे देखते हैं एक ज़बरदस्त सायेके ने (वज्रपात) तुमको आ लिया +[2:56] तुम बे-जान होकर गिर चुके थे, मगर फिर हमने तुमको जिला उठाया, शायद के इस एहसान के बाद तुम शुक्र-गुजार बन जाओ +[2:57] हमने तुमपर अबर का साया (बादल छा जाना) किया, मन ओ सलवा की गीज़ा तुम्हारे लिए फराह की और तुमसे कहा के जो पाक चीजें हमने तुम्हें बख्शी हैं, उन्हें खाओ, मगर तुम्हारे असलाफ (पूर्वजों) ने जो कुछ किया, वो हमपर जुल्म ना था, बलके उन्होन ने आपने अपना ही ऊपर जुल्म किया +[2:58] फिर याद करो जब हमने कहा था के, "ये बस्ती जो तुम्हारे सामने है, इसमें दखल हो जाओ, इसकी अदायगी जिस तरह चाहो मजे से खाओ, मगर बस्ती के दरवाज़े में सजदा-रेज़ होते हुए दाख़िल होना और कहते जाना हित्ता-तुन हित्ता-तुन (हमें हमारे बोझ/मगफिरत से छुटकारा दिलाओ), हम तुम्हारी खतों से दरगुज़र करेंगे और नीकुकरोन को मज़ीद फ़ज़ल ओ करम से नवाज़ेंगे” +[2:59] मगर जो बात कहीं गई थी, ज़ालिमों ने उसे बदल कर कुछ और करदिया, आख़िर ए कार हमने ज़ुल्म करने वालों पर आसमान से अज़ाब नाज़िल किया, ये सज़ा थी उन ना-फ़रमानियों की जो वो कर रहे थे +[2:60] याद करो, जब मूसा ने अपनी क़ौम के लिए पानी की दुआ की तो हमने कहा कि फलां चट्टान पर अपना आसा मारो चुनान्चे उसे बारह (बारह) चश्मे (स्प्रिंग्स) फूट निकले और हर काबिले ने जान लिया के कौन सी जगह उसके पानी लेने की है। हमें वक्त ये हिदायत कर दी गई थी कि अल्लाह का दिया हुआ रिज़क खाओ, पियो और जमीन में फसाद न फैलते फिरो +[2:61] याद करो, जब तुमने कहा था के, "ऐ मूसा, हम एक ही तरह के खाने पर सब्र नहीं कर सकते, अपने रब से दुआ करो के हमारे लिए जमीन की पैदावार साग, तरकारी, खीरा, ककड़ी, गेहूं, लसन, प्याज, दाल वगैरा पैदा करे" तो मूसा ने कहा “ “क्या एक बेहतर चीज़ के बजाये तुम अदना डरजे की चीज़ लेना चाहते हो? अच्छा, किसी शहरी आबादी में जा रहो, जो कुछ तुम माँगते हो वहाँ मिल जायेगा। करने लगे और पैगम्बरों को ना-हक़ क़त्ल करने लगे, ये नतीज़ा था उनकी नफ़रमानियों का और इस बात का के वो हुदूद ए शरा से निकल जाता है +[2:62] यकीन जानो के नबी ए अरबी को मन्ने वाले होन या यहूदी, इसाई होन या सबी, जो भी अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान लाएगा और नीक अमल करेगा, उसका अजर उसके रुब के पास है और उसके लिए कोई खौफ और रांझ का मौका नहीं है +[2:63] याद करो वो वक्त, जब हमने तूर (तूर पहाड़) को तुम से उठाकर अहद लिया था और कहा था के "जो किताब हम तुम्हें दे रहे हैं उसे मज़बूती के साथ थम्ना और जो एहकाम ओ हिदायत इसमें दर्ज हैं उन्हें याद रखना, इसी जरूरी से तवक्कु की जा सकती है के तुम तकवा की रवीश पर चल सकोगे" +[2:64] मगर इसके बाद तुम अपने अहद से फिर गए इसपर भी अल्लाह के फजल और उसकी रहमत ने तुम्हारा साथ न छोड़ा, वरना तुम कभी के तबाह हो चुके होतय +[2:65] फिर तुम्हें अपनी कौम के उन लोगों का क़िस्सा तो मालूम ही है जिन्होन ने सब्त (सब्बाथ) का कानून तोड़ा था, हमने उन्हें केहदिया के बंदर बन जाओ और इस हाल में रहो के हर तरफ से तुमपर धुतकर फिटकर पड़े +[2:66] इस तरह हमने उनके अंजाम को हमें जमाने के लोगों और बाद में आने वाली नसलों के लिए इब्रत और डरने वालों के लिए हिदायत बना कर छोड़ा +[2:67] फिर वो वाकिया याद करो, जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा के, अल्लाह तुम्हें एक गाय (गाय) ज़िबा करने का हुक्म देता है। कहने लगे क्या तुम हमसे मज़ाक करते हो? मूसा ने कहा, मैं इस खुदा की पनाह मांगता हूं कि जाहिलों की सी बातें करूं +[2:68] बोले, अच्छा अपने रब से अंधेरा करो के वो हमें इस गाई की कुछ तफसील बताई, मूसा ने कहा, अल्लाह का इरशाद है के वो ऐसी गाई होनी चाहिए जो ना बूढ़ी हो ना बचिया, बलके औसत उमर की हो, लिहाजा जो हुक्म दिया जाता है उसकी तमील करो +[2:69] फिर कहने लगे अपने रब से ये और पूछ दो के उसका रंग कैसा हो, मूसा ने कहा वो फरमाता है जर्द (पीला) रंग की गाई होनी चाहिए, जिसका रंग ऐसा शुख (उज्ज्वल) हो के देखने वालों का जी खुश हो जाए +[2:70] फिर बोले अपने रब से साफ साफ पूछ कर बताओ कैसी गई मतलूब है, हमें इसकी तायुं में इश्तबा (भ्रम) हो गया है, अल्लाह ने चाहा तो हम इसका पता पा लेंगे +[2:71] मूसा ने जवाब दिया: अल्लाह कहता है के वो ऐसी गई है जिसकी खिदमत नहीं ली जाती, ना ज़मीन जोत-ती है ना पानी खींचती है, सही सलीम और बे-दाग है, इसपर वो पुकार उठे के हां, अब तुमने ठीक पता बताया है, फिर उन्हें ज़िबा किया, वरना वो ऐसा करते मालूम न होते थे +[2:72] और तुम्हें याद है वो वाकिया जब तुमने एक शक्स की जान ली थी, फिर उसके बारे में झगड़े में और एक दूसरे पर क़त्ल का इल्ज़ाम थोपने लगे थे और अल्लाह ने फैसला करलिया था के जो कुछ तुम छुपाते हो इस्तेमाल खोल कर रख देगा +[2:73] हमें वक्त हमने हुक्म दिया के मकतूल ​​की लाश को उसके एक हिस्से से ज़र्ब लगाओ, देखो इस तरह अल्लाह मुर्दों को जिंदगी बक्शा है और तुम्हें अपनी निशानियां दिखती है ता-के तुम समझो +[2:74] मगर ऐसी निशानियां देखने के बाद भी आखिर ए कार तुम्हारा दिल मजबूत हो जाएगा, पत्थरों की तरह सच, बलके पत्थरों में कुछ इनसे भी बड़े हुए, क्योंकि पत्थरों में से तो कोई ऐसा भी होता है जिसमें से चश्मे फूटते हैं, कोई निकलता है और इसमें से पानी निकल आता है और कोई खुदा के खौफ से लरज़ कर गिर भी पढ़ता है। अल्लाह तुम्हारे कार्टूनों से बेख़बर नहीं है +[2:75] ऐ मुसलमानो! अब क्या लोगों से तुम ये तवाक्कू रखते हो के ये तुम्हारी दावत पर ईमान ले आओगे? हालांके इनमें से एक गिरोह का शेवा ये रहा है के अल्लाह का कलाम सुना और फिर खूब समझ बूझ कर दानिस्ता इस्में तहरीफ (बदलाव) की +[2:76] (मुहम्मद रसूल अल्लाह पार) ईमान लाने वालों से मिलते हैं तो कहते हैं के हम भी उन्हें मानते हैं, और जब आपस मैं एक दूसरे से तख़लीये (निजी) की बात चिन्त होती है तो कहते हैं के बेवकूफ़ हो गए हो? लोगों को वो बातें बताते हैं कि अल्लाह ने तुमपर खोली है ता-के तुम्हारे रब के पास तुम्हारे मुकाबले में उन्हें हुज्जत में पेश किया है +[2:77] और क्या ये जानते नहीं हैं के जो कुछ ये छुपाते हैं और जो कुछ जाहिर करते हैं, अल्लाह को सब बातों की ख़बर है +[2:78] इनमें एक दूसरा गिरो ​​उम्मियों का है, जो किताब का तो इल्म रखते नहीं, बस अपनी बे-बुनियाद उम्मीद और आरज़ूओं को लिए बैठे हैं और महज़ वेहम ओ गुमान पर चले जा रहे हैं +[2:79] पास हलाकत और तबाही है उन लोगों के लिए जो अपने हाथों से शरा का नविस्ता लिखते हैं (जो अपने हाथों से किताबें लिखते हैं), फिर लोगों से कहते हैं कि ये अल्लाह के पास से आया है ता-के इसके मुआवज़े में थोड़ा सा फ़ायदा हासिल करना। उनके हाथों का लिखा भी उनके लिए तबाही का सामान है और उनकी ये कमाई भी उनके लिए मुजीब ए हलाकत +[2:80] वो कहते हैं के दोज़ख़ की आग हमें हरगिज़ छूने वाली नहीं इल्ला ये के चंद रोज़ की सज़ा मिल जाए तो मिल जाए। इनसे पूछो, क्या तुमने अल्लाह से कोई अहद ले लिया है, जिसका खिलाफत-वारज़ी वो नहीं कर सकता? हां बात ये है कि तुम अल्लाह के जिम्मे डाल कर ऐसी बातें कहते हो जिनका मुतालिक तुम्हें इल्म नहीं है कि उन्होंने इनका ज़िम्मा लिया है? आख़िर तुम्हें दोज़ख की आग क्यों न लगेगी +[2:81] जो भी बड़ी कमाई करेगा और अपनी खाता-कारी के चक्कर में पड़ा रहेगा, वो दोज़खी है और दोज़ख ही में वो हमेशा रहेगा +[2:82] और जो लोग इमाम लाएंगे और नेक अमल करेंगे वही जन्नती हैं और जन्नत में वो हमेशा रहेंगे +[2:83] याद करो, इजराइल की औलाद से हमने पुख्ता अहद लिया था कि अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करना, मां बाप के साथ, रिश्तेदारों के साथ, यतीमों और मिस्कीनो के साथ नेक सुलूक करना, लोगों से अच्छी बात कहना, नमाज कायम करना और जकात देना, मगर थोड़े आदमियों के सिवा तुम सब उस अहद से फिर गए और अब तक फिर हुए हो +[2:84] फिर ज़रा याद करो, हमने तुमसे मज़बूत अहद लिया था के आपस में एक दूसरे का खून ना बहाना और ना एक दूसरे को घर से बे-घर करना, तुमने इसका इक़रार किया था, तुम खुद इसपर गवाह हो +[2:85] मगर आज वही तुम हो के अपने भाई बंधों को कत्ल करते हो, अपनी बिरादरी के कुछ लोगों को बे-खानुमा (बे-घर) करते हो, ज़ुल्म ओ ज्यादा के साथ उनके खिलाफ जत्थे बंदियां (समूह बनाना/सहयोग करना) करते हो, और जब वो लड़यी में पकड़े हो ह्यूय तुम्हारे पास आते हैं तो उनकी रिहाई के लिए फ़िदिये का लेन डेन करते हो, हलांके उन्हें उनके घरों से निकालना ही सारा से तुमपर हराम था। तो क्या तुम किताब के एक हिस्सी पर ईमान लाते हो और दूसरे हिस्सी के साथ कुफ्र करते हो? फिर तुम में से जो लोग ऐसा करें उनकी सजा इसके सिवा और क्या है कि दुनिया की जिंदगी में ज़लील ओ ख़्वार होकर रहें और आख़िरत में छायादार अज़ाब की तरफ फेर दिए जाएं? अल्लाह उन हरकत से बे-ख़बर नहीं है जो तुम कर रहे हो +[2:86] ये वो लोग हैं जिन्हों ने आख़िरत बेच कर दुनिया की ज़िंदगी ख़त्म कर ली है, लिहाज़ा ना इनकी सज़ा में को तक़फ़ीफ़ (कामी) होगी और ना उनको कोई मदद पाहुंच सकेगी +[2:87] हमने मूसा को किताब दी, इसके बाद पै दर पै रसूल भेजे, आखिर ए कार ईसा इब्न मरियम को रोशन निशानियां देकर भेजा और रूह ए पाक से उसकी मदद की, फिर ये तुम्हारा क्या ढांग है के जब भी कोई रसूल तुम्हारी ख्वाहिशात ए नफ्स के खिलाफ कोई चीज लेकर तुम्हारे पास आया, तो तुमने उसे मुक़दमे में सरकशी ही की, किसी को झुटलाया और किसी को क़त्ल कर डाला +[2:88] वो कहते हैं, हमारे दिल महफ़ूज़ हैं, नहीं असल बात ये है के उनके कुफ्र की वजह से असमान अल्लाह की फितर पड़ी है, इसलिए वो कम ही ईमान लाते हैं +[2:89] और अब जो एक किताब अल्लाह की तरफ से उनके पास आई है, उसके साथ उनका क्या बरताओ है? दावा ये के वो हमें किताब की तस्दीक करती है जो उनके पास पहले से मौजूद थी, विवाद ये के इसकी आमद से पहले वो खुद कुफ्फार के मुकाबले में फतह ओ नुसरत की दुआएं मंगा करते थे, मगर जब वो चीज आ गई जिसे वो पहचान भी गए तो अनहोन ने उसे मन्ने से इंकार कर दिया, खुदा की लानत मुनकिरीन पर +[2:90] क्या बुरा ज़रिया है जिसे ये अपने नफ़्स की तसल्ली हासिल करते हैं के जो हिदायत अल्लाह ने नाज़िल की है, उसको क़बूल करने से सिर्फ इस जिद्द की बिना पर इंकार कर रहे हैं के अल्लाह ने अपने फज़ल (वही ओ रिसालत) से अपने जिस बंदे को खुद चाहा, नवाज़ दीया! लिहाज़ा अब ये गजब बला ए गजब के मुस्तहिक हो गए हैं और ऐसे काफिरों के लिए सख्त ज़िल्लत आमेज़ सज़ा मुकर्रर है +[2:91] जब उनसे कहा जाता है के जो कुछ अल्लाह ने नाज़िल किया है उसपर ईमान लाओ तो वो कहते हैं "हम तो सिर्फ उस चीज़ पर ईमान लाते हैं जो हमारे हां (यानी नाक ए इसराइल) में उतरी है” इस दिन के बहार जो कुछ आया है उसके मन से वो इनकार करते हैं, हालांके वो हक़ है और उस तालीम की तस्दीक ओ ताईद कर रहा है जो उनके हां पहले से मौजूद थी। अच्छा, उन्हें कहो: अगर तुम हमें तालीम ही पर ईमान रखने वाले हो जो तुम्हारे हां आई थी, तो इसे पहले अल्लाह के उन पैगंबरों को (जो खुद बनी इसराइल में पैदा हुए थे) क्यूं क़तल करते रहे +[2:92] तुम्हारे पास मूसा कैसी रोशन निशानियों के साथ आया फिर भी तुम ऐसे जालिम था के, इसकी पीठ मोड़ते ही बच्चे को मबूद बना बैठे +[2:93] फिर जरा हमें मिसाक (संविदा) को याद करो जो तूर (तूर पर्वत) को तुम ऊपर उठा कर हमने तुमसे लिया था, हमने ताकीद की थी के जो हिदायत हम दे रहे हैं, उनको शक्ति के साथ पाबन्दी करो और कान लगा कर सुनो। तुम्हारे असलफ ने कहा के हमने सुन लिया, मगर मानेंगे नहीं और इनकी बात परस्ती का ये हाल था के दिलों में उनके बछड़ा (बछड़ा) ही बसा हुआ था। कहो: अगर तुम मोमिन हो तो ये अजीब ईमान है जो ऐसी बुरी हरकत का तुम्हें हुकुम देता है +[2:94] इनसे कहो के अगर वक्त अल्लाह के नाजदीक आखिरी का घर तमां इंसानों को चोद कर सिर्फ तुम्हारे लिए मखसूस है, तब तो तुम्हें चाहिए के मौत की तमन्ना करो अगर तुम अपने इस खयाल में सच्चे हो +[2:95] यकीन जानो के ये कभी इसकी तमन्ना ना करेंगे, क्योंकि अपने हाथों में जो कुछ काम कर उन्हें ने वहां भेजा है, उसका इक्ताजा यहीं है (के ये वहां जाने की तमन्ना ना करें) अल्लाह जालिमों के हाल में है ख़ूब वाकिफ़ है +[2:96] तुम इनमें सबसे ज्यादा कर जीने का हरिस पाओगी हट्टा के ये इस मामले में मुशरिकों से भी बड़े हुए हैं। इनमें से एक शक ये चाहता है कि कोई तरह हज़ार बरस जिए, हलांके लंबी उमर बहार हाल उसे अज़ाब तो दूर नहीं फेंक सकती। जैसा कुछ अमाल ये कर रहे हैं, अल्लाह तो इन्हें देख ही रहा है +[2:97] इनसे कहो के जो कोई जिबराईल से अदावत (दुश्मनी) रखता है, उसे मालूम होना चाहिए के जिबराईल ने अल्लाह ही के इज़ान से ये कुरान तुम्हारे क़ल्ब पर नाज़िल किया है, जो पहले आई हुई किताबों की तस्दीक ओ ताईद करता है और ईमान लाने वालों के लिए हिदायत और कामियाबी की बशारत बनकर आया है +[2:98] (अगर जिब्राइल से इनकी अदावत का सबाब यहीं है, तो केहदो के) जो अल्लाह और उसके फरिश्तों और उसके रसूलन और जिब्राईल और माइकल के दुश्मन हैं, अल्लाह उन काफिरों का दुश्मन है +[2:99] हमने तुम्हारी तरफ ऐसी आयतें नाज़िल की हैं जो साफ साफ हक का इजहार करने वाली हैं और इनकी जोड़ी से सिर्फ वही लोग इंकार करते हैं जो फासिक हैं +[2:100] क्या हमेशा ऐसा ही नहीं हो रहा है के जब उन्होन ने कोई अहद किया, तो उनमें से एक ना एक गिरोह ने उसे जरूर बला ए तलाक रख दिया? बलके इनमें से अक्सर ऐसे ही हैं जो सच्चे दिल से ईमान नहीं लाते +[2:101] और जब इनके पास अल्लाह की तरफ से कोई रसूल उस किताब की तस्दीक ओ ताईद करता हुआ आया जो इनके हां पहले से मौजूद थी तो एहले किताब में से एक गिरोह ने किताब अल्लाह को इस तरह पास-ए-पुश्त (पीठ के पीछे) डाला गोया के वो कुछ जानते ही नहीं +[2:102] और लगे उन चीज़ों की जोड़ी बनाने जो शयातीन सुलेमान की सल्तनत का नाम लेकर पेश किया करते थे, हलांके सुलेमान ने कभी कुफ़्र नहीं किया, कुफ़्र के मुर्तक़िब तो वो शयातीन थे जो लोगन को जादूगरी की तालीम देते थे। वो पिछे पड़े हमें चीज के जो बाबिल (बेबीलोन) में दो फरिश्तों, हारुत ओ मारुत पर नाज़िल की गई थी, हलांके वो (फरिश्ते) जब भी किसी को उसकी तालीम देते थे तो पहले साफ तौर पर मुतनब्बे (चेतावनी) करदिया करते थे के "देख, हम" मेहज़ एक आज़माइश है, तू कुफ्र में मुब्तिला ना हो"। फिर भी ये लोग उनसे वो चीज़ सीखते थे, जिसमें शोहर और बीवी में जुदाई डाल दें, जाहिर था के इज़ान ए इलाही के बिना वो इस ज़री से किसी को भी जरूर (नुकसान) न पहुंचा सकता था, मगर इसके दावे वो ऐसी चीज सीखते थे जो खुद इनके लिए नफा बख्श नहीं, बल्के नुक्सान-दे थी और उन्हें खूब मालूम था के जो इस चीज का खरीददार बना उसके लिए आखिरी में कोई हिसा नहीं। कितनी बुरी माता थी जिसके बदले उन्हें ने अपनी जानों को बेच डाला, काश उन्हें मालूम होता +[2:103] अगर वो ईमान और तकवा इख्तियार करते, तो अल्लाह के हां इसका जो बदला मिला तो उनके लिए ज्यादा बेहतर था, काश उन्हें खबर होती +[2:104] ऐ लोग जो ईमान लाए हो! रैना (हमारी बात सुनो) ना कहो, बलके अनज़ुर्ना (हमें समझाओ) कहो और तवज्जु से बात को सुनो, ये काफ़िर तो अज़ाब ए अलीम के मुस्तहिक़ हैं +[2:105] ये लोग जिन्हों ने दावत ए हक़ को क़बूल करने से इंकार कर दिया है, ख़्वाह एहले किताब में से होन या मुशरिक माननीय, हरगिज़ ये पसंद नहीं करते के तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर कोई भलाई नाज़िल हो, मगर अल्लाह जिसको चाहता है अपनी रहमत के लिए चुन लेता है और वो बड़ा फ़ज़ल फ़रमाने वाला है +[2:106] हम अपनी जिस आयत को मनसूख (निरस्त) करते हैं हां भुला देते हैं, उसकी जगह उसे बेहतर ले आते हैं या काम अज़ काम वैसी ही। क्या तुम जानते नहीं हो कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है +[2:107] क्या तुम्हें ख़बर नहीं है कि ज़मीन और आसमान की फ़ार्मा रवाई अल्लाह ही के लिए है और उसके सिवा कोई तुम्हारी ख़बरगिरी करने और तुम्हारी मदद करने वाला नहीं है +[2:108] फिर क्या तुम अपने रसूल से उस क़िस्म का सवाल और मुतालबे करना चाहते हो जैसे इसे पहले मूसा से किये जा चुके हैं? हलांके जिस शक्स ने ईमान की रवीश को कुफ्र की रवीश से बदल लिया वो राह ए रास्ते से भटक गया +[2:109] एहले किताब में से अक्सर लोग ये चाहते हैं के किसी तरह तुम्हें ईमान से फेर कर फिर कुफ्र की तरफ पलटा ले जाएं अगरचे हक उनपर जाहिर हो चूका है, मगर अपने नफ़्स के हसद की बिना पर तुम्हारे लिए उनकी ये ख्वाहिश है इसके जवाब में तुम अफ़ु ओ दरगुज़र (माफ़ कर दो और नज़रअंदाज) से काम लो, यहां तक ​​के अल्लाह खुद ही अपना फैसला नफीज़ करदे। मुतमइन रहो के अल्लाह ताला हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है +[2:110] नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो। तुम अपनी अकीबत के लिए जो भलाई कमा कर आगे भेजोगे, अल्लाह के हन उसे मौजुद पाओगे। जो कुछ तुम करते हो वो सब अल्लाह की नज़र में है +[2:111] उनका कहना है कि कोई शक्स जन्नत में ना जाएगा जब तक के वो यहूदी ना हो (या ईसाइयों के ख्याल के मुताबिक) इसाई ना हो। ये उनकी तमन्नाएं हैं, इनसे कहो अपनी दलील पेश करो अगर तुम अपने दावे में सच्चे हो +[2:112] दरसल ना तुम्हारी कुछ खुसियत है ना किसी और की, हक ये है के जो भी अपनी हस्ती को अल्लाह की इताअत में सोम्प दे और अमल नेक रवीश पर चले, उसके उसके रब के पास उसका अजर है और ऐसे लोगों के लिए किसी का खौफ या रांझ का कोई मौका नहीं +[2:113] यहुदी कहते हैं: इसाईयों के पास कुछ नहीं, इसाई कहते हैं: यहुदियों के पास कुछ नहीं, हलांके के दोनों ही किताब पढ़ते हैं और यही क़िस्म के दावे उन लोगों के भी हैं जिनके पास किताब का इल्म नहीं है, ये इख्तिलाफात जिन में ये लोग मुब्तिला हैं इनका फैसला अल्लाह कयामत के रोज कर देगा +[2:114] और हमारे शक्स से बढ़कर जालिम कौन होगा जो अल्लाह के मबादनों (पूजा स्थलों) में उसके नाम की याद से रोके और उनकी वीरानी के दर्पे हो? ऐसे लोग काबिल हैं के उनकी इबादत-गाहों में क़दम न रखें और अगर वहां जाएं भी तो डरते हुए जाएं, उनके लिए तो दुनिया में रुसवाई है और आख़िरत में अज़ाब ए अज़ीम +[2:115] मशरिक और मगरिब सब अल्लाह के हैं, जिसकी तरफ भी तुम रुख़ करोगे उसकी तरफ अल्लाह का रुख है, अल्लाह बड़ी मुसीबत वाला और सब कुछ जानने वाला है +[2:116] उनका क़ौल है कि अल्लाह ने किसी को बेटा बनाया है, बातों में अल्लाह पाक है। असल हकीकत ये है के ज़मीन और आसमान की तमाम मौजुदात उसकी दूध (मिल्कियत) हैं, सबके सब उसके मुती ओ फ़रमान हैं +[2:117] वो आसमान और ज़मीन का मुजिद (प्रवर्तक) है और जिस बात का वो फैसला करता है उसके लिए बस ये हुकुम देता है के "होजा" और वो हो जाती है +[2:118] नादान कहते हैं कि अल्लाह खुद हमसे बात क्यों नहीं करता या कोई निशानी हमारे पास क्यों नहीं आती? ऐसी ही बातें इनसे पहले लोग भी किया करते थे, इन सब (अगले पिछले गुमराहों) की मानसिकता (मानसिकता) एक जैसी हैं। यकीन लाने वालों के लिए तो हम निशानियां साफ-साफ नुमायां कर चुके हैं +[2:119] (इससे बढ़ कर निशानी क्या होगी के) हमने तुमको इल्म ए हक के साथ खुश खबरी देने वाला और डराने वाला बना कर भेजा, अब जो लोग जहन्नुम से रिश्ता जोड़ चुके हैं उनकी तरफ से तुम जिम्मेदार ओ जवाबदे नहीं हो +[2:120] यहुदी और इसै तुमसे हरगिज़ राजी ना होंगे, जब तक तुम उनके तरीक़े पर ना चलने लगो। साफ कहदो के रास्ते बस वही है जो अल्लाह ने बताया है, वरना अगर उस इल्म के बाद जो तुम्हारे पास आ चूका है तुमने उनकी ख्वाहिश की जोड़ी तो अल्लाह की पकड़ से बचाने वाला कोई दोस्त और मददगार तुम्हारे लिए नहीं है +[2:121] जिन लोगों को हमने किताब दी है, वो उसका इस्तेमाल है तरह पढ़ते हैं जैसा के पढ़ने का हक है, वो इसपर सच्चे दिल से ईमान लाते हैं और जो इसके साथ कुफ्र का रावय्या इख्तियार करते हैं वही असल में नुक्सान उठाने वाले हैं +[2:122] ऐ बानी इजराइल! याद करो मेरी वो नियामत जिसकी मैंने तुम्हें नवाजा थी, और ये के मैंने तुम्हें दुनिया की तमाम कौमों पर फजीलत दी थी +[2:123] और डरो उस दिन से, जब कोई किसी के जरा काम न आएगा, न किसी से फिदिया (फिरौती) कबूल किया जाएगा, न कोई सिफरिश हाय आदमी को फ़ायदा देगी, और ना मुजरेमो को कहीं से कोई मदद मांग सकेगी +[2:124] याद करो के जब इब्राहिम को उसके रब ने चंद बातों में आज़माया और वो उन सब में पूरा उतर गया, तो उसने कहा: "मैं तुझसे सब लोगों का पेशवा बनने वाला हूं" इब्राहिम ने अर्ज़ किया: “और क्या मेरी औलाद से भी यही वादा है?” उसने जवाब दिया: "मेरा वादा ज़ालिमों से मुतालिक नहीं है।" +[2:125] और ये के हमने इस घर (काबा) को लोगों के लिए मरकज़ और अमन की जगह क़रार दिया था और लोगों को हुकुम दिया था कि इब्राहिम जहां इबादत के लिए खड़ा होता है उस मुकाम को मुस्तक़िल जाए नमाज़ बना लो और इब्राहिम और इस्माइल को तक़ीद की थी के मेरे इस घर को तवाफ और एतेकाफ और रुकू और सजदा करने वालों के लिए पाक रक्खो +[2:126] और ये के इब्राहीम ने दुआ की: "ऐ मेरे रब, इस शहर को अमन का शहर बना दे, और इसके बाशिंदों (लोग) में जो अल्लाह और आख़िरत को माने, उन्हें हर क़िस्म के फ़लों का रिज़क दे”। जवाब में उसके रुब ने फरमाया: "और जो ना मानेगा, दुनिया की चंद रोजा जिंदगी का सामान तो मैं उसे भी दूंगा मगर आखिर ए कार उसे अजाब ए जहन्नुम की तरफ घसीटूंगा, और वो बढतारीन ठिकाना है" +[2:127] और याद करो इब्राहिम और इस्माइल जब इस घर की दीवारें हैं उठ रहे थे, तो दुआ करते जाते थे: "ए हमारे रब, हमसे ये खिदमत क़बूल फरमा ले, तू सबकी सुनने और सब कुछ जानने वाला है +[2:128] ए रब, हम दोनों को अपना मुस्लिम (मुती ए फरमान) बना, हमारी नाक से एक ऐसी क़ौम उठो जो तेरी मुस्लिम हो, हमें अपनी इबादत के तौर-तरीके बता, और हमारी कहानियों से दरगुज़र फ़रमा, तू बड़ा माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[2:129] और ऐ रब, उन लोगों में खुद उनकी क़ौम से एक ऐसा रसूल उठियो जो उन्हें तेरी आयत सुनाए, उनको किताब और हिकमत की तालीम दे और उनकी जिंदगी संवारे, तू बड़ा मुक्तदर (सर्वशक्तिमान) और हकीम है। +[2:130] अब कौन है, जो इब्राहिम के तरीक़े से नफ़रत करे? जिसने खुद को हिम्मत ओ जिहालत में मुब्तिला करलिया हो, उसके सिवा कौन ये हरकत कर सकता है? इब्राहीम तो वो शक्स है जिसको हमने दुनिया में अपने काम के लिए चुन लिया था और आख़िरत में उसका शुमार सालिहें में होगा +[2:131] उसका हाल ये था के जब उसके रब ने उसे कहा: "मुस्लिम हो जा" तो उसने फ़वारान कहा: "मैं मालिक ए कायनात का 'मुस्लिम' हो गया।” +[2:132] इसी तारीख पर चलने की हिदायत हमें अपनी औलाद की थी और याकूब अपनी औलाद को कर गया, उसने कहा था के: "मेरे बच्चों! अल्लाह ने तुम्हारे लिए यही दीन पसंद किया है लिहाजा मरते दम तक मुस्लिम ही रहना" +[2:133] फिर क्या तुम उस वक्त मौजूद थे जब याकूब इस दुनिया से रुक्सत हो रहा था? उसने मरते वक्त अपने बच्चों से पूछा: "बच्चों! मेरे बाद तुम किसकी बंदगी करोगे?" उन सब ने जवाब दिया: "हम उसकी एक खुदा की बंदगी करेंगे जैसे आप ने और आपके बुजुर्ग इब्राहिम, इस्माइल और इशाक ने खुदा माना है और हम उसके मुस्लिम हैं" +[2:134] वो कुछ लोग थे जो गुजर गए, जो कुछ उन्होंने बनाया, जो उनके लिए है और जो कुछ तुम कमाओगे, वो तुम्हारे लिए है। तुमसे ये ना पूछा जाएगा के वो क्या करते थे +[2:135] यहुदी कहते हैं: यहुदी हो तो राह ए रास्ते पाओगे, इसे कहते हैं: इसे कहो: “नहीं, बलके सबको छोड़ कर इब्राहिम का तरीका, और इब्राहीम मुशरिकों में से ना था।” +[2:136] (मुसलमानो)! कहो के: "हम ईमान लाए अल्लाह पर और हमें हिदायत पर जो हमारी तरफ नाज़िल हुई है और जो इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब की तरफ नाज़िल हुई थी और जो मूसा और ईसा और दूसरे तमाम पैगम्बरों को उनके रब की तरफ से दी" गई थी. हम उनके दरमियान कोई तफ़रीक़ नहीं करते और हम अल्लाह के मुस्लिम हैं” +[2:137] फिर अगर वो इसी तरह ईमान लायें, जिस तरह तुम लाए हो, तो हिदायत पर हैं, और अगर इसके मुह फिरें तो खुली बात है के वो हथधर्मी (विवाद) में पढ़ गए हैं, लिहाज़ा इत्मिनान रख्खो के उनके मुक़ाबले में अल्लाह तुम्हारी हिमायत के लिए काफी है। वो सब कुछ सुनता और जानता है +[2:138] कहो: “अल्लाह का रंग इख्तियार करो उसके रंग से अच्छा और किसका रंग होगा? और हम उसी की बंदगी करने वाले लोग हैं।” +[2:139] ऐ नबी! इनसे कहो: "क्या तुम अल्लाह के बारे में हमसे झगड़ा करते हो? हलांके वही हमारा रब है और तुम्हारा रब भी। हमारे अमाल हमारे लिए हैं, तुम्हारे अमाल तुम्हारे लिए, और हम अल्लाह हाय के लिए अपनी बंदगी को खालिस कर चुके हैं +[2:140] या फिर क्या तुम्हारा कहना ये है कि इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब सब के सब यहूदी थे या नसरानी थे? कहो: "तुम ज़्यादा जानते हो या अल्लाह? हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जिसका ज़िमे अल्लाह की तरफ़ से एक गवाही हो और वो उसे छुपाए? तुम्हारी हरकत से अल्लाह ग़ाफ़िल तो नहीं है +[2:141] वो कुछ लोग थे जो गुज़र चुके, उनकी कमाई उनके लिए थी और तुम्हारी कमाई तुम्हारे लिए। तुमसे उनके अमाल का सवाल नहीं होगा। +[2:142] नादान लोग जरूर कहेंगे: इन्हें क्या हुआ के पहले ये जिस क़िबले की तरफ रुख करके नमाज पढ़ते थे उसे यकीन फिर से हो गया? (ऐ नबी) इनसे कहो: "मशरिक और मगरिब सब अल्लाह के हैं, अल्लाह जिसे चाहता है सीधी राह दिखा देता है +[2:143] और इसी तरह तो हमने तुम्हें एक "उम्मत ए वसत (मध्य देश)" बनाया है ता-के तुम दुनिया के लोगों पर गवाह हो और रसूल तुमपर गवाह हो। पहले जिस तरफ तुम रुख करते थे, उसको तो हमने सिर्फ ये देखने के लिए किबला मुकर्रर किया था कि कौन रसूल की जोड़ी बनाता है और कौन उल्टा फिर जाता है, मगर उन लोगों के लिए कुछ भी नहीं साबित हुआ जो अल्लाह की। हिदायत से फ़ैज़ियाब था, अल्लाह तुम्हारे इस ईमान को हरगिज़ ज़या न करेगा। यकीन जानों के वो लोगों के हक़ में निहायत शफीक ओ रहीम है +[2:144] ये तुम्हारे मुँह का बार-बार आसमान की तरफ उठना हम देख रहे हैं, लो हम इसी क़िबले की तरफ तुम्हें फेर देते हैं जिसे तुम पसंद करते हो, मस्जिद ए हराम की तरफ रुख़ फेर दो अब जहां कहीं तुम हो उसकी तरफ मुंह करके नमाज पढ़ा करो। ये लोग जिन्हें किताब दी गई थी खूब जानते हैं के (तहवील ए क़िबला का/क़िबला का परिवर्तन) ये हुकुम उनके रब ही की तरफ से है और बार-हक़्क़ है मगर इसके बावज़ूद जो कुछ ये कर रहे हैं अल्लाह उसे ग़ाफ़िल नहीं है +[2:145] तुम एहले किताब के पास ख्वा कोई निशानी ले आओ, मुमकिन नहीं के ये तुम्हारे क़िबले की जोड़ी बनाने लगें, और न तुम्हारे लिए ये मुमकिन है के इनके क़िबले कि जोड़ी करो, और इनमें से कोई गिरो ​​भी दूसरे के क़िबले की जोड़ी के लिए तैयार नहीं है, और अगर तुमने इस इल्म के बाद जो तुम्हारे पास आ चुका है इनकी ख्वाहिशात की जोड़ी कि तो यकीनन तुम्हारा शुमार ज़ालिमों में होगा +[2:146] जिन लोगों को हमने किताब दी है वो इस मुकाम को (जिसे क़िबला बनाया गया है) ऐसा पहचानते हैं जैसा अपनी औलाद को पहचानते हैं, मगर उनमें से एक गिरोह जानते हैं बूझते हक़ को छुपा रहा है +[2:147] ये क़तई एक अमर ए हक़ है तुम्हारे रब की तरफ से, लिहाज़ा इसके मुतालिक तुम हरगिज़ किसी शक्क में ना पढ़ो +[2:148] हर एक के लिए एक रुख है जिसकी तरफ वो मुदता है, पस भलाईयों की तरफ सबक करो। जहां भी तुम होगे अल्लाह तुम्हें पा लेगा, उसकी क़ुदरत से कोई चीज़ बाहर नहीं +[2:149] तुम्हारा गुजर जिस मुकाम से भी हो वहीं अपना रुख (नमाज के वक्त) मस्जिद ए हराम की तरफ फेर दो, क्योंकि ये तुम्हारे रब का बिल्कुल बार-हक्क फैसला है और अल्लाह तुम लोगों के अमाल से बे-खबर नहीं है +[2:150] और जहां से भी तुम्हारा गुजर हो अपना रुख मस्जिद ए हराम की तरफ फेरा करो, और जहां भी तुम हो उसकी तरफ मुंह करके नमाज पढ़ो ता-के लोगों को तुम्हारे खिलाफ कोई हुज्जत ना मिले। हां जो जालिम हैं उनकी जुबान किसी हाल में बंद न होगी तो उनसे तुम न डरो बलके मुझसे डरो और इसलिए के मैं तुमपर अपनी नियामत पूरी कर दूं और इस तवक्कु पर के मेरे इस हुकुम की जोड़ी से तुम इसी तरह फलाह का रास्ता पाओगे +[2:151] जिस तरह (तुम्हें वह चीज है) से फलाह नसीब हुई के) मैंने तुम्हारे दरमियान खुद तुम में से एक रसूल भेजा जो तुम्हें मेरी आयत सुनाता है, तुम्हारी जिंदगी को संवारता है, तुम्हें किताब और हिकमत की तालीम देता है और तुम्हें वो बातें सिखाता है जो तुम ना जानते थे +[2:152] लिहाज़ा तुम मुझे याद रक्खो मैं तुम्हें याद रखूंगा और मेरा शुक्र अदा करो, कुफरान ए नियामत न करो +[2:153] ऐ लोग जो ईमान लाए हो सब्र और नमाज से मदद लो, अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है +[2:154] और जो लोग अल्लाह की राह में हैं मारे जायें उन्हें मुर्दा ना कहो, ऐसे लोग तो हकीकत में जिंदा हैं, मगर तुम्हें उनकी जिंदगी का शूर नहीं होता +[2:155] और हम जरूर तुम्हें खौफ ओ खतरा, फाका काशी (भूख), जान ओ माल के नुक्सानात और आदमियों के घाटे(नुक्सान) में मुब्तिला करके तुम्हारी आजमाइश करेंगे +[2:156] हालात में जो लोग सब्र करें और जब कोई मुसीबत पड़े तो कहे के: "हम अल्लाह ही के हैं और अल्लाह ही की तरफ हमें पलट कर जाना है" +[2:157] उन्हें खुश-खबरी देदो उन्पर उनके रब की तरफ से बड़ी इनायत होगी, उसकी रहमत अनपर साया करेगी और ऐसे ही लोग रस्त-रो हैं +[2:158] यकीनन सफा और मरवा अल्लाह की निशानियों में से हैं, लिहाजा जो शक्स बैतुल्लाह का हज या उमर करे, उसके लिए कोई गुनाह की बात नहीं के वो इन दोनों पहाड़ों के दरमियां सई कार्ले और जो बरीज़ा ओ रगबत (खुले दिल से) कोई भलाई का काम करेगा अल्लाह को इसका इल्म है और वो इसकी कदर करने वाला है +[2:159] जो लोग हमारी नाज़िल की हुई रोशन तालीमत और हिदायत को छुपाते हैं, डरन हाल ये के हम इन्हें सब इंसानों की रहनुमाई के लिए अपनी किताब में बयान कर चुके हैं, यकीन जानो के अल्लाह भी अपर लानत करता है और तमाम लानत करने वाले भी अनपर लानत भेजते हैं +[2:160] अलबत्ता जो इस रवीश से बाज़ आ जाए और अपने तर्ज़ ए अमल की इस्लाह कार्लें और जो कुछ छुपाते थे उसे बयान करने लगें, उनको मैं माफ कर दूंगा और मैं बड़ा दरगुजार करने वाला और रहम करने वाला हूं +[2:161] जिन लोगों ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया और कुफ्र की हालत में ही जान दी, उन लोगों ने अल्लाह और फरिश्तों और तमाम इंसानों की लानत है +[2:162] इसी लानत ज़दहगी की हालत में वो हमेशा रहेंगे, ना उनकी सज़ा में तक़फ़ीफ़ होगी और ना उन्हें फिर कोई दूसरी मोहलत दी जाएगी +[2:163] तुम्हारा ख़ुदा एक ही खुदा है, उस रहमान और रहीम के सिवा कोई और ख़ुदा नहीं है +[2:164] (क्या हकीकत को पहचानने के लिए अगर कोई निशानी और आलमत अंधेरा है तो) जो लोग अक़ल से काम लेते हैं उनके लिए आसमानो और ज़मीन की सच्चाई (सृजन) में, रात और दिन के पैहम एक दूसरे के बाद आने में, उन कश्तियों में जो इंसान के नफ़ा की चीज़ों के लिए हुए दरियाँ और समंदरों में चलती फिरती हैं, बारिश के हमारे पानी में जैसे अल्लाह ऊपर से बरसता है, फिर उसके ज़रीए से ज़मीन को जिंदगी बक्शता है और अपनी इसी इंतज़ाम की बदौलत ज़मीन में हर क़िस्म की जानदार मख़लूक को फैलाता है, हवाओं की गर्दिश में, और उन बादलों में जो आसमान और ज़मीन के दरमियान तबे फ़रमान बना कर रख दिए गए हैं, बेशुमार निशानियां हैं +[2:165] (मगर वेहदत ए ख़ुदावंदी पर दलालत करने वाले खुले खुले आसमां के होते हुए भी) कुछ लोग ऐसे हैं जो अल्लाह के सिवा दूसरो को उसका हमसर और मद्द ए मुक़ाबिल (बराबर और प्रतिद्वंदी) बनाते हैं और उनके ऐसे गिरविदा (प्यार) हैं जैसे अल्लाह के साथ गिरविदगी होनी चाहिए, हलांके ईमान रखने वाले लोग सबसे बढ़कर अल्लाह को मेहबूब रखते हैं, काश जो कुछ अज़ाब को सामने देखकर उन्हें सूझने वाला है वो आज ही जालिमीन को समझ जाए के सारी ताक़तें और सारे इख्तियारात अल्लाह ही के क़ब्ज़े में हैं और ये के अल्लाह सज़ा देने में भी बहुत सक्षम है +[2:166] जब वो सज़ा देगा हमें वक़्त कैफियत ये होगी के वही पेशवा और रहनुमा जिनकी दुनिया में जोड़ी की गई थी अपने जोड़े से बे-तालुकी जाहिर करेंगे, मगर सजा पा कर रहेंगे और उनके सारे असबाब ओ वसील का सिलसिला खत्म हो जाएगा +[2:167] और वो लोग जो दुनिया में उनकी जोड़ी बनाते थे, कहेंगे के काश हमको फिर एक मौका दिया जाता है तो जिस तरह आज ये हमसे बेज़ारी जाहिर कर रहे हैं हम इनसे बेज़ार होकर दिखा देते हैं, यूं अल्लाह इन लोगों के वो अमाल जो ये दुनिया में कर रहे हैं इनके सामने इस तरह लाएगा के ये हसरतन और पशेमानियों के साथ हाथ बदलते रहेंगे, मगर आग से निकलना कि कोई राह न पायेगा +[2:168] लोगन! ज़मीन में जो हलाल और पाक चीज़े हैं उन्हें खाओ और शैतान के बताए हुए रस्तों पर ना चलो, वो तुम्हारा खुला दुश्मन है +[2:169] तुम्हें बुराई और फ़हाश (अभद्रता) का हुकुम देता है और ये सिखाता है कि तुम अल्लाह के नाम पर वो बातें कहो जिनको मुतालिक तुम्हें इल्म नहीं है के वो अल्लाह ने फरमायी है +[2:170] इनसे जब कहा जाता है के अल्लाह ने जो एहकाम नाज़िल किये हैं उनकी जोड़ी करो तो जवाब देते हैं के हम तो उसी तारीख की जोड़ी करेंगे जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है, अच्छा अगर इनके बाप दादा ने अक्ल से कुछ भी काम न लिया हो और राह ए रास्ते न पाई हो तो क्या फिर भी ये उनहिन की जोड़ी चले जायेंगे +[2:171] ये लोग जिन्हों ने खुदा के बताए हुए तारीख पर चलने से इंकार कर दिया है इनकी हालत बिल्कुल ऐसी है जैसे चारवाहा जानवरों को पुकारता है और वो हांक पुकार की सदा के सिवा कुछ नहीं सुनते। ये बाहर हैं, गुंगे हैं अंधे हैं, क्योंकि कोई बात इनकी समझ में नहीं आती +[2:172] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम हकीकत में अल्लाह ही की बंदगी करने वाले हो तो जो पाक चीजें हमने तुम्हें बख्शी हैं उन्हें बे-तकल्लुफ खाओ और अल्लाह का शुकर अदा करो +[2:173] अल्लाह की तरफ से अगर कोई बंदी तुम्पर है तो वो ये है के मुर्दार ना खाओ, खून से और सूअर (सूअर) के गोश्त से परहेज करो और कोई ऐसी चीज ना खाओ जिस्पर अल्लाह के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो, हां जो शक्स मजबूरी की हालात में हो और वो इनमें से कोई चीज खा ले बिना इसके के वो कानून शिकानी का इरादा रखता हो या जरूरत की हद से तजावुज़ करे, तो उसपर कुछ गुनाह नहीं। अल्लाह बख्शने वाला और रहम करने वाला है +[2:174] हक़ ये है के जो लोग उन एहकाम को छुपाते हैं जो अल्लाह ने अपनी किताब में नाज़िल किए हैं और थोड़े से दुनिया फ़ायदों पर उन्हें भेंट चढ़ते हैं वो दरसल अपने पैत आग से भर रहे हैं, कयामत के रोज़ अल्लाह हरगिज उनसे बात ना करेगा, ना उन्हें पाकीजा ठहरेगा, और उनके लिए दर्दनाक सजा है +[2:175] ये वो लोग हैं जिन्हों ने हिदायत के बदले ज़लालत खरीदी और मगफिरत के बदले अज़ाब मोल ले लिया, कैसा अजीब है इनका हौसला के जहन्नुम का अज़ाब बर्दाश्त करने के लिए तैयार हैं +[2:176] ये सब कुछ इस वजह से हुआ के अल्लाह ने तो ठीक ठीक हक़ के मुताबिक़ किताब नाज़िल की थी मगर जिन लोगों ने किताब में इख़्तिलाफ़ात निकला वो अपने झगड़े में हक़ से बहुत दूर निकल गए +[2:177] नेकी ये नहीं है के तुमने अपने चेहरे मशरिक (पूर्व) की तरफ करलिये या मगरिब (पश्चिम) की तरफ, बलके नेकी ये है कि आदमी अल्लाह को और यौम ए आखिर और मलिका को और अल्लाह की नाज़िल की हुई किताब और उसके पैगम्बरों को दिल से माने और अल्लाह की मुहब्बत में अपना दिल पसंद माल रिश्तेदारों और यतीमों पर, मिस्किनो और मुसाफ़िरों पर, मदद के लिए हाथ फैलाने वालों पर और ग़ुलामों की रिहाई पर ख़र्च करे, नमाज़ क़याम करे और ज़कात दे और नेक वो लोग हैं के जब अहद करें तो उसे वफ़ा करें, और तांगी ओ मुसीबत के वक़्त में और हक़ ओ बातिल की जंग में सब्र करें, ये हैं रस्त बाज़ लोग और यही लोग मुत्तक़ी (पवित्र) हैं +[2:178] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारे लिए क़तल के मुक़द्दमो में क़िस्स (प्रतिशोध) का हुकुम लिख दिया गया है। आज़ाद आदमी ने क़त्ल किया हो तो हमें आज़ाद हाय से बदला लिया जाए, ग़ुलाम क़ातिल हो तो वो ग़ुलाम हाय क़ातिल किया जाए, और औरत इस जुर्म की मुर्तकीब हो तो हमें औरत हाय से क़िस्स लिया जाए, हाँ अगर किसी कातिल के साथ इसका भाई कुछ नरमी करने के लिए तैयार हो तो मारूफ तारीख के मुताबिक खून बहा (खून से पैसा) का तसफिया होना चाहिए और कातिल को लाज़िम है के रास्ते के साथ खून बहा अदा करे, ये तुम्हारे रब की तरफ से तकफीफ और रहमत है, इसपर भी जो ज्यादा करे उसके लिए दर्दनाक सजा है +[2:179] (अक़ल ओ खिरद रखने वालों)! तुम्हारे लिए क़िसास में ज़िन्दगी है, उम्मीद है कि तुम इस क़ानून की ख़िलाफ़त वारज़ी से परहेज़ करोगे +[2:180] तुम पर फ़र्ज़ किया गया है कि जब तुम में से किसी की मौत का वक़्त आए और वो अपने पीछे माल छोड़ रहा हो, तो वालिदाएं और रिश्तेदारों के लिए मारूफ़ तारीख़े से वसीयत करे, ये हक़ है मुत्तक़ी लोगों पर +[2:181] फिर जिन्हों ने वसीयत सुनी और बाद में उसे बदल डाला तो इसका गुनाह उन बदलने वालों पर होगा, अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है +[2:182] अलबत्ता जिसको ये अंदेशा हो के वसीयत करने वाले ने नदानिश्ता या क़स्दन हक़ तलाफ़ी की है और फिर मामले से तालुक़ रखने वालों के दरमियान वो इस्लाह करे, तो उसपर कुछ गुनाह नहीं है, अल्लाह बख्शने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[2:183] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम रोज़ फ़र्ज़ करदिये गए जिस तरह तुमसे पहले अंबिया के जोड़े पर फ़र्ज़ किए गए थे, इस्से तवाक्कु है के तुम में तक़वा की सिफ़त पैदा होगी +[2:184] चंद मुक़र्रर दीनो के रोज़ हैं, अगर तुम में से कोई बीमार हो, या सफ़र पर हो तो दूसरे दिनों में उतनी ही तड़प पूरी करले और जो लोग रोज़ा रखने की क़ुदरत रखते हों (फी ना रखें) तो वो फ़िद्या दीन, एक रोज़ का फ़िदिया एक मिसकीन को खाना खिलाना है और जो अपनी ख़ुशी से कुछ ज़्यादा भलाई करे तो ये उसके लिए बेहतर है, लेकिन अगर तुम समझो तो तुम्हारे हक़ में अच्छा यहीं है के रोज़ा रक्खो +[2:185] रमज़ान वो महीना है जिसमें कुरान नाज़िल किया गया जो इंसानों के लिए सरसर हिदायत है और ऐसी वाज़े तालीमात पर मुश्तमिल है जो राह ए रस्त दिखने वाली और हक़ ओ बातिल का फर्क खोल कर रख देने वाली है, लिहाज़ा अब से जो शक्स इस माहीने को पाए उसको लाज़िम है के इस पूरे माहीने के रोज़ रखे और जो कोई मरीज़ हो या सफ़र पर हो तो वो दूसरे दिनो में रोज़ की तदाद पूरी करे। अल्लाह तुम्हारे साथ नरमी करना चाहता है, शक्ति करना नहीं चाहता, इसलिए ये तारीख तुम्हें बता रहा है ता-के तुम रोज़ों की तदाद पूरी कर सको और जिस हिदायत से अल्लाह ने तुम्हें सरफराज किया है उसपर अल्लाह की किताब का इज़हार ओ एतराफ करो और शुकरगुज़र बानो +[2:186] (और ऐ नबी)! मेरे बंदे अगर तुमसे मेरे मुतालिक पूछें, तो उन्हें बता दो के मैं उनसे करीब ही हूं, पुकारने वाला जब मुझे पुकारता है, मैं उसकी पुकार सुनता और जवाब देता हूं, लिहाजा उन्हें चाहिए के मेरी दावत पर लब्बैक कहें और मुझपर ईमान लायें, ये बात तुम उन्हें सुना दो, शायद के वो राह ए रास्ते पा लें +[2:187] तुम्हारे लिए रोज़ों के ज़माने में रातों को अपनी बीवीयों के पास जाना हलाल कर दिया गया है, वो तुम्हारे लिए लिबास हैं और तुम उनके लिए। अल्लाह को मालूम हो गया के तुमलोग चुपके-चुपके अपने आप से ख़यानत कर रहे थे, मगर उसने तुम्हारा कसूर माफ कर दिया और तुमसे दरगुज़र फरमाया, अब तुम अपनी बीवीयों के साथ शब-बाशी (संभोग) करो और जो लुत्फ़ अल्लाह ने तुम्हारे लिए जायज़ करदिया है, उसे हासिल किया करो, नई रातों को खाओ पियो यहां तक ​​के तुमको स्याही ए शब की धारी से सपेधा सुभ की धारी नुमाया नजर आ जाए तब ये सब काम छोड़ कर रात तक अपना रोजा पूरा करो और जब तुम मस्जिद में मौताकिफ (इत्तेकाफ में) होन तो बिवियों से मुबारकत ना करो, ये अल्लाह की बंदिश हुई हदें हैं, इनके करीब बा फटकना, इस तरह अल्लाह अपने एहकाम लोगों के लिए बा-सरहत (स्पष्ट रूप से) बयान करता है, तवक्कू है के वो गलत राविये से बचेंगे +[2:188] और तुम लोग ना तो आपस में एक दूसरे के माल नरवा तारीख से खाओ और ना हकीमो के आगे इनको इस गरज के लिए पेश करो के तुम्हें दूसरों के माल का कोई हिसा क़स्दन ज़ालिमाना तरीक़े से खाने का मौका मिल जाए +[2:189] लोग तुमसे चाँद की घटती बढ़ती सूरतों के मुतालिक पूछते हैं, कहो : ये लोगों के लिए तारेकॉन की तायिन की और हज की अलमतें हैं। नेज़ अनसे कहो: ये कोई नेकी का काम नहीं है के अपने घरों में पीछे की तरफ दाख़िल होते हो, नेकी तो असल में ये है के आदमी अल्लाह की नाराज़गी से बचे, लिहाज़ा तुम अपने घरों में दरवाज़े ही से आया करो, अलबत्ता अल्लाह से डरते रहो शायद के तुम्हें फलाह नसीब हो जाए +[2:190] और तुम अल्लाह की राह में उन लोगों से लड़ो, जो तुमसे लड़ते हैं, मगर ज्यादा न करो का अल्लाह ज्यादा करने वालों को पसंद नहीं करता +[2:191] उनसे लड़ो जहां भी तुम्हारा उनसे मुकाबला पेश आए और उन्हें निकालो जहां से उनहों ने तुमको निकला है, इस्ली के क़त्ल अगरचे बुरा है, मगर फ़ितना इसे भी ज़्यादा बुरा है और मस्जिद ए हराम के करीब जब तक वो तुमसे ना लड़ें तुम भी ना लड़ो, मगर जब वो वहां लड़ने से ना चूकें, तो तुम भी बे-तकल्लुफ़ उन्हें मारो के ऐसे काफ़्रियों की यही सज़ा है +[2:192] फिर अगर वो बाज़ आ जाएँ, तो जान लो के अल्लाह माफ़ करने वाला और रहम फ़रमान वाला है +[2:193] तुम उनसे लड़ते रहो यहाँ तक के फ़ितना बाकी ना रहे और दीन अल्लाह के लिए होजाए, फिर अगर वो बाज़ आ जाएँ, तो समझ लो के जालिमों के सिवा और किसी पर दस्त-दराज रवा नहीं +[2:194] माह ए हराम का बदला हराम ही है और तमाम हुर्मतों का लिहाज़ बाराबरी के साथ होगा, लिहाज़ा जो तुमपर दस्त दराज़ी करे, तुम भी उसी तरह उसपर दस्त दराज़ी करो, अलबत्ता अल्लाह से डरते रहो और ये जान रक्खो के अल्लाह उन्ही लोगों के साथ है जो उसकी हुदूद todne se paheiz karte hain +[2:195] अल्लाह की राह में ख़र्च करो और अपने हाथों अपने आप को हलकत में ना डालो, एहसान का तरीक़ा इख्तियार करो के अल्लाह मोहसिनों को पसंद करता है +[2:196] अल्लाह की ख़ुशनुदी के लिए जब हज और उमरा की नियत करो तो उसे पूरा करो और अगर कहीं घिर जाओ (हिरासत में/रोका गया) तो जो कुर्बानी मुयस्सर आए अल्लाह की जनाब में पेश करो और अपने सर न मुंडो (मुंडो) जबतक के कुर्बानी अपनी जगह न पाहुंच जाए, मगर जो शक्स मेराज हो या जिसका सर में कोई तकलीफ हो और इस बिना पर अपना सर मुंडवा ले तो उसे चाहिए के फिदिये के तौर पर रोजे रखें या सदका दे या कुर्बानी करे, फिर अगर तुम्हें अमन नसीब हो जाए (और तुम हज से पहले मक्का पहुंच जाओ), तो जो शक्स तुम में से हज का जमाना आने तक उमर का फैसला उठाये वो हस्ब-ए-मकदूर (अफोर्ड कर सकते हैं) कुर्बानी दे, और अगर कुर्बानी मुयस्सर ना हो तो तीन रोजे हज के जमाने में और सात घर पहुंच कर, इस तरह पूरे दस रोजे रखले, ये रियात उन लोगों के लिए है जिनके घर बार मस्जिद ए हराम के करीब ना हो। अल्लाह के इन एहकाम की खिलाफ़-वारज़ी से बचो और ख़ूब जान लो के अल्लाह सख़्त सज़ा देने वाला है +[2:197] हज के महीने में सबको मालूम है, जो शक्स इन मुक्क्कर महिनो में हज की नियत करे, उसे खबरदार रहना चाहिए के हज के दौरन में उसे कोई शेहवानी फेल (यौन) भोग) , कोई बढ़ा अमली, कोई लड़े झगड़े की बात सरज़ाद ना हो और जो नया काम तुम करोगे वो अल्लाह के इल्म में होगा। सफ़र ए हज के लिए ज़ाद ए राह (प्रावधान) साथ ले जाओ, और सबसे बेहतर ज़ाद ए राह (प्रावधान) परहेज़गारी है, पास ऐ होश-मंदों! मेरी नफ़रमानी से परहेज़ करो +[2:198] और अगर हज के साथ-साथ तुम अपने रुब का फ़ज़ल (इनाम) भी तलाश करते जाओ तो इस्मे कोई मुज़हिक़ा नहीं, फिर जब अराफ़ात से चलो तो मशहरे हराम (मुज़दलिफ़ा) के पास ठहर कर अल्लाह को याद करो और हमें तरह याद करो करो, जिसकी हिदायत उसने तुम्हें दी है, वरना इसे पहले तुमलोग भटके हुए थे +[2:199] फिर जहां से और सब लोग पलट-ते हैं वहीं से तुम भी पलटो और अल्लाह से माफ़ी चाहो, यकीनन वो माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[2:200] फिर जब अपने हज के अरकान अदा कर चुको, तो जिस तरह पहले अपने आबा ओ अजदाद का जिक्र करते थे, उसी तरह अब अल्लाह का जिक्र करो, बलके उसे भी बुरा (मगर अल्लाह को याद करने वाले लोगों में भी बहुत फर्क है) उन में से कोई तो ऐसा है, जो कहता है के ऐ हमारे रब हमें दुनिया ही में सब कुछ दे दे, ऐसे शक्स के लिए आख़िरत में कोई हिसा नहीं +[2:201] और कोई कहता है के ऐ हमारे रब! हमने दुनिया में भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई, और आग के अज़ाब से हमें बचाया +[2:202] ऐसे लोग अपनी कमाई के मुताबिक (दोनो जगह) हिसा पाएंगे और अल्लाह को हिसाब चुकाते कुछ देर नहीं लगती +[2:203] ये गिनती के चांद रोज हैं, जो तुम्हें अल्लाह की याद में बसर करना चाहिए, फिर जो कोई जल्दी करके दो उसी दिन में वापस होगा तो कोई हर्ज नहीं, और जो कुछ देर ज्यादा ठहर कर पलटा तो भी कोई हर्ज नहीं बशारत ये दिन उसने तकवा के साथ बसर किये हो। अल्लाह की नफ़रमानी से बचो और ख़ूब जान रक्खो के एक रोज़ उसके हुज़ूर में तुम्हारी पेशी होने वाली है +[2:204] इंसानों में कोई तो ऐसा है जिसकी बातें दुनिया की ज़िंदगी में तुम्हें बहुत अच्छी मालूम होती है, और अपनी नीक नियति पर वो बार-बार खुदा को गवाह ठहरता है, मगर हकीकत में वो बद्तरीन दुश्मन ए हक़ होता है +[2:205] जब उसे इक्तेदार हासिल हो जाता है, तो ज़मीन में उसकी सारी दौड़ धूप होती है के फ़साद फैलाये, खेतों को गैरत करे और नाक ए इंसान को तबाह करे, हलाँके अल्लाह (जिसे वो गवाह बना रहा था) फसाद को हरगिज पसंद नहीं करता +[2:206] और जब उसे कहा जाता है के अल्लाह से डर, तो अपने वकार का ख्याल उसको गुनाह पर जमा देता है, ऐसे शक्स के लिए तो बस जहन्नुम ही काफी है और वो बहुत बुरा ठिकाना है +[2:207] दूसरी तरफ़ इंसानों ही में कोई ऐसा भी है जो रज़ा ए इलाही की तालाब में अपनी जान ख़पा देता है और ऐसे बंदों पर अल्लाह बहुत मेहरबान है +[2:208] ऐ ईमान लाने वालों! तुम पूरे के पूरे इस्लाम में आ जाओ और शैतान की जोड़ी ना करो के वो तुम्हारा खुला दुश्मन है +[2:209] जो साफ साफ हिदायत तुम्हारे पास आ चुकी है अगर उनको पा लेने के बाद फिर तुमने लग्ज़िश खायी, तो खूब जान रक्खो के अल्लाह सब पर गालिब और हकीम ओ दाना है +[2:210] (सारी हिदायतों और हिदायतों के बाद भी लोग सीधे न हों तो) क्या अब वो इसके मुंतज़िर हैं के अल्लाह बादलों का चतर लगे फरिश्तों के परे साथ (स्वर्गदूतों की टोली के साथ बादलों की छतरियाँ) के लिए खुद सामने आ मौजूद हो और फैसला ही कर डाला जाए? आख़िर ए कार सारी मामलात पेश करने वाले अल्लाह ही के हुज़ूर होने वाले हैं +[2:211] बानी इसराइल से पूछो: कैसी खुली खुली निशानियां हमने उन्हें दिखाई हैं (और फिर ये भी उनहिन से पूछ लो के) अल्लाह की नियामत पाने के बाद जो क़ौम इसको शिकावत (मनहूसियत) से बदलती है उसे अल्लाह कैसी सज़ा देता है +[2:212] जिन लोगों ने कुफ्र की राह इख्तियार की है उनके लिए दुनिया की जिंदगी बड़ी मेहबूब ओ दिल पसंद बना दी गई है, ऐसे लोग ईमान की राह इख्तियार करने वालों का मजाक उड़ाते हैं, मगर कयामत के रोज़ परहेज़गार लोग ही उनके मुक़ाबले में आली मुक़ाम होंगे, राह दुनिया का रिज़क, तो अल्लाह को इख्तियार है जिसे चाहे बे-हिसाब दे +[2:213] इब्तिदा में सब लोग एक ही तारीख पर थे (फिर ये हालात बाकी न रही और इख्तिलाफात रुनुमा हुए) तब अल्लाह ने नबी भेजे जो रस्त रावी पर बशारत देने वाले और कजरावी के नटाईज से डराने वाले थे, और उनके साथ किताब ए बार हक नाज़िल की ता-के हक़ के बारे में लोगों के दरमियान जो इख़्तिलाफ़ात रूनुमा हो गए थे उनका फ़ैसला करे। (और इख्तिलाफात के रूनुमा होने की वजह ये ना थी के इब्तिदा में लोगों को हक बताया नहीं गया था, नहीं) इख्तिलाफ उन लोगों ने किया जिन्होंने हक का इल्म दिया (जा) चूका था, उन्होन ने रोशन हिदायत पा लेने के बाद महज़ को हक़ को छोड़ दिया मुखतलिफ़ तारिके निकले के वो आपस में ज़्यादा करना चाहते थे, पास जो लोग अंबिया पर ईमान ले आए उनको अल्लाह ने अपने इज़ान से हमें हक़ का रास्ता दिखाया दिया जिसमें लोगों ने इख्तिलाफ़ किया था, अल्लाह जिसे चाहता है राह ए रास्ता दिखा देता है +[2:214] फिर क्या तुम लोगन ने ये समझ रखा है कि यूंही जन्नत का आखिरी तुम्हें मिल जाएगा, हालांके अभी तुमपर वो सब कुछ नहीं गुजरा है जो तुमसे पहले ईमान लाने वालों पर गुजर चूका है? उन्पर साख्तियां गुजरी, मुसिबतें आई, हिला मारे गए, हत्ता के वक्त का रसूल और उसके साथी एहले ईमान चीख उठे के अल्लाह की मदद कब आएगी, हमें वक्त उन्हें तसल्ली दी गई के हां अल्लाह की मदद करीब है +[2:215] लोग पूछते हैं कि हम क्या खर्च करते हैं? जवाब दो के जो माल भी तुम खर्च करो अपने वलियों पर, रिश्तों पर, यतीमो और मिस्कीनो और मुसाफिरों पर खर्च करो और जो भलाई भी तुम करोगे, अल्लाह उससे ब-खबर होगा +[2:216] तुम्हें जंग का हुक्म दिया गया है और वो तुम ना-गवार हो, हो हो सकता है कि एक चीज तुम्हें पसंद हो और वही तुम्हारे लिए बुरी हो। अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते +[2:217] लोग पूछते हैं माह ए हराम में लाना कैसा है? कहो: इसमें लड़ना बहुत बुरा है, मगर राह ए खुदा से लोगों को रोकना और अल्लाह से कुफ्र करना और मस्जिद ए हरम का रास्ता खुदा परस्तों पर बंद करना और हरम के रहने वालों को वहां से निकलना अल्लाह के नाजदीक इससे भी ज्यादा बुरा है और फितना खून-रेजी से छायादार-तार है. वो तो तुमसे लड़े ही जाएंगे हटा के अगर उनका बस चले तो तुम्हें इस दीन से फेर ले जाएं (और ये खूब समझलो के) तुम में से जो कोई इस दीन से फिरेगा और कुफ्र की हालत में जान देगा, उसके अमाल दुनिया और आखिरी दोनों में जया हो जाएगी, ऐसे सब लोग जहन्नुमी हैं और हमेशा जहन्नुम ही में रहेंगे +[2:218] बा-खिलाफ इसके जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्होन ने खुदा की राह में अपना घर बार छोड़ा और जिहाद किया है, वो रहमत ए इलाही के जायज़ उम्मेदवार हैं और अल्लाह उनकी लग्ज़िशों को माफ़ करने वाला और अपना रहमत से उन्हें नवाज़ने वाला है +[2:219] पूछते हैं: शराब और जुवे (जुआ) का क्या हुकुम है? कहो: दोनों चीज़ों में बड़ी ख़राबी है अगर इनमें लोगों के लिए कुछ मुनाफ़े भी है, मगर उनका गुनाह उनके फ़ायदे से बहुत ज़्यादा है। पूछते हैं: हम राह ए खुदा में क्या खर्च करें? कहो: जो कुछ तुम्हारी ज़रूरत से ज्यादा हो, क्या वह अल्लाह तुम्हारे लिए साफ-साफ एहकाम बयान करता है, शायद के तुम दुनिया और आख़िरत दोनों की फ़िक्र करो +[2:220] पूछते हैं: यतीमों के साथ क्या मामला किया जाए? कहो: जिस तर्ज़ ए अमल में उनके लिए भलाई हो वही इख्तियार करना बेहतर है। अगर तुम अपना और उनका खर्च और रहना सहना मुश्तारिक (मिक्स) रख्खो तो इसमें कोई मुजाहिका नहीं, आखिर वो तुम्हारे भाई बंद ही तो हैं। बुराई करने वाले और भलाई करने वाले दोनों का हाल अल्लाह पर रोशन है, अल्लाह चाहता है तो इस मामले में तुमपर शक्ती करता, मगर वो साहब ए इख्तियार होने के साथ साहिब ए हिकमत भी है +[2:221] तुम मुशरिक औरतों से हरगिज़ निकाह ना करना जब तक के वो ईमान ना ले आइए, एक मोमिन लौंडी (गुलाम) मुशरिक शरीफ-जादी से बेहतर है अगरचे वो तुम्हें बहुत पसंद हो, और अपनी औरतों के निकाह मुशरिक मर्दों से कभी न करना जब तक के वो ईमान न ले आएं। एक मोमिन गुलाम मुशरिक शरीफ से बेहतर है अगर वो तुम्हें बहुत पसंद हो। ये लोग तुम्हें आग की तरफ बुलाते हैं और अल्लाह अपने इज़ान से तुमको जन्नत और मगफिरत की तरफ बुलाता है, और वो अपना एहकाम वाजे तौर पर लोगों के सामने बयान करता है, तवक्कू है के वो सबक लेंगे और हिदायत कबूल करेंगे +[2:222] पूछते हैं: हैज़ का क्या हुक्म है? कहो: वो एक गंदगी की हालत है, इसमें औरतों से अलग रहो और उनके करीब ना जाओ, जब तक के वो पाक साफ ना हो जाए, फिर जब वो पाक हो जाए तो उनके पास जाओ उस तरह जैसा के अल्लाह ने तुमको हुकुम दिया है, अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो गुनाहों से बाज आता है। राहें और पाकीज़गी इख्तियार करें +[2:223] तुम्हारी औरतें तुम्हारी खेतियाँ हैं, तुम्हें इख्तियार है जिस तरह चाहो अपनी खेती में जाओ, मगर अपने मुस्तकबिल की फ़िक्र करो और अल्लाह की नाराज़गी से बचो। ख़ूब जान लो के तुम्हें एक दिन उससे मिलना है। और (ऐ नबी)! जो तुम्हारी हिदायत को मान लें उन्हें फलाह ओ सआदत का मुस्दा (खुशखबरी) सुना दो +[2:224] अल्लाह के नाम को ऐसी कसमें खाने के लिए इस्तमाल न करो जिनसे मकसूद नेकी और तकवा और बंदगान ए खुदा की भलाई के कामोनों से बाज़ रहना हो। अल्लाह तुम्हारी सारी बातें सुन रहा है और सब कुछ जानता है +[2:225] जो बे-मानी कसमें तुम बिला इरादा खा लिया करते हो, लेकिन अल्लाह गिरफ़्तार नहीं करता, मगर जो कसमें तुम सच्चे दिल से खाते हो उनकी बाज़पुर्स वो ज़रूर करेगा। अल्लाह बहुत दरगुज़ार करने वाला और बर्दबार (सहिष्णु) है +[2:226] जो लोग अपनी औरतों से ताल्लुक न रखें की कसम खा बैठे हैं उनके लिए चार महीने की मोहलत है, अगर उन्होन ने रूजू करलिया तो अल्लाह माफ करने वाला और रहीम है +[2:227] और अगर उन्हें तलाक ही दिया जाए तो जाने रहें के अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है +[2:228] जिन औरतों को तलाक दे गई हो वो तीन मरतबा अयाम ए माहवारी आने तक अपने आप को रोके रखें और उनके लिए ये जायज नहीं है के अल्लाह ने उनके रहम (गर्भ) में जो कुछ ख़ल्क (पैदा) फरमाया हो उसे छुपाएं। उन्हें हरगिज़ ऐसा ना करना चाहिए अगर वो अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखता है। उनके शोहर तालुकात दुरुस्त कार्लें पर अमादा हों तो वो इस इद्दत के दौरन में उन्हें फिर अपनी ज़वजियात में वापस ले लेने के हक़दार हैं। औरतों के लिए भी मारूफ़ तारीख़ पर वैसे ही हुकूक़ हैं जैसे मर्दों के हुकूक़ अपर हैं। अलबत्ता मर्दों को उनपार एक दरजा हासिल है और सब पर अल्लाह गालिब इक्तेदार रखने वाला और हकीम ओ दाना मौजूद है +[2:229] तलाक दो बार है, फिर या तो सीधी तरह औरत को रोक लिया जाए या भले तारिके से उसको रुखसत कर दिया जाए, और रुखसत करते हुए ऐसा करना तुम्हारे लिए जायज़ नहीं है के जो कुछ तुम उन्हें दे चुके हो, उसमें से कुछ वापस लेलो, अलबत्ता ये सूरत मुस्तसना है के ज़वजैन को अल्लाह के हुदूद पर क़याम न रह सके का अंदेशा हो, ऐसी सूरत में अगर तुम ये खौफ हो के वो डोनो हुदूद ए इलाही पर क़याम न रहेंगे, तो उन दोनों के दरमियान ये मामला हो जाने में मुज़हिक़ा नहीं के औरत अपने शहर को कुछ मुआवाज़ा देकर अलैदागी (अलगाव) हासिल करले, ये अल्लाह के मुकर्रर करदा हुद्दोद हैं, इनसे तजावुज़ ना करो, और जो लोग हुदूद ए इलाही से तजावुज करें वही जालिम हैं +[2:230] फिर अगर (दो बार तलाक देने के बाद शहर ने औरत को तीसरी बार) तलाक दे दी तो वो औरत फिर उसके लिए हलाल ना होगी, इल्ला ये के उसका निकाह किसी दूसरे शक्स से हो और वो उसे तलाक देदे, तब अगर पहला शोहर और ये औरत दोनों ये ख़याल करें के हुदूद ए इलाही पर क़याम रहेंगे, तो उनके लिए एक दूसरे की तरफ़ रूज़ू कार्लें में कोई मुज़हिक़ा नहीं। ये अल्लाह की मुकर्रर करदा हदें हैं जिन्होनें वो उन लोगों की हिदायत के लिए वाजे कर रहा है जो (उसकी हुदूद को तोड़ने का अंजाम) जानते हैं +[2:231] और जब तुम औरतों को तलाक दे दो और उनकी इद्दत पूरी होने को आ जाए, तो हां भले तरीक़े से उन्हें रोक लो या भले तरीक़े से रुखसत करदो, मेहज़ सताने की खातिर उन्हें ना रोके रखना, ये ज़्यादा होगी, और जो ऐसा करेगा वो डर हकीकत आप अपना ही ऊपर ज़ुल्म करेंगे। अल्लाह की आयत का खेल न बनाओ, भूल न जाओ के अल्लाह ने किस नियामत ए उज्मा से तुम्हें सरफराज किया है, वो तुम्हें हिदायत करता है के जो किताब और हिकमत उसने तुमपर नाज़िल की है, उसका एहतराम मल्हूज़ रख्खो। अल्लाह से डरो और खूब जान लो के अल्लाह को हर बात की खबर है +[2:232] जब तुम अपनी औरतों को तलाक दे चुको और वो अपनी इद्दत पूरी कर लें, तो फिर इसमें माने ना हो के वो अपने दूसरे ताजवीज शोहरों से निकाह कर लें, जब के वो मारूफ तारीख से बहम मुनकीहत (शादी) पर राजी हों। तुम्हें हिदायत की जाती है कि ऐसी हरकत हरगिज़ न करना अगर तुम अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान लाने वाले हो, तुम्हारे लिए शाइस्ता और पाकीज़ा तरीक़ा यहीं है के इसी बाज़ रहो। अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते +[2:233] जो बाप चाहता हो कि उनकी औलाद पूरी मुद्दत ए रजात तक दूध पिए, तो मांएं (माताओं) अपने बच्चों को कामिल दो साल दूध पिलाएं। क्या सूरत में बच्चे के बाप को मारूफ तारीख़ से उनको खाना, कपड़ा देना होगा। मगर किसी पर उसकी परेशानी से बुरा हक बार ना डालना चाहिए, ना तो मां को इस वजह से तकलीफ में डाला जाए के बच्चा उसका है, और ना बाप ही को इस वजह से तंग किया जाए के बच्चा उसका है। दूध पिलाने वाली का ये हक़ जैसा बच्चे के बाप पर है वैसा ही उसके वारिस पर भी है, लेकिन अगर फ़रीक़ैन बहामी रज़ामंडी और मैशवेयर से दूध छुड़ाना चाहिए तो ऐसा करने में कोई मुज़हिक़ा नहीं, और अगर तुम्हारा ख्याल अपनी औलाद को कोई गैर औरत से दूध पिलाने का हो, तो इसमें भी कोई हर्जा नहीं बशारत ये के इसका जो कुछ मुआवजा (मुआवजा) ताई करो, वो मारूफ तारीख पर अदा करदो। अल्लाह से डरो और जान रक्खो के जो कुछ तुम करते हो, सब अल्लाह की नजर में है +[2:234] तुम में से जो लोग मर जाएंगे, उनके पीछे अगर उनकी बीवीयां जिंदा होंगी, तो वो अपने आप को चार महीने दस दिन रोके रखेंगे, फिर जब उनकी इद्दत पूरी हो जाए, तो उन्हें इख्तियार है अपनी जात के मामले में मारूफ तारीख़ से जो चाहें करें तुमपर इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं। अल्लाह तुम सब के आमाल से बख़बर है +[2:235] ज़माना ए इद्दत में ख्वा तुम उन बेवा औरतों के साथ मंगनी की इरादा इशारे कनयी में जाहिर करदो, ख्वा दिल में छुपाये रक्खो, दोनों सूरतों में कोई मुज़हिक़ा नहीं। अल्लाह जानता है कि उनका ख्याल तो तुम्हारे दिल में आएगा ही मगर देखो! खुफिया (छिपा हुआ) अहद ओ पैमान न करना अगर कोई बात करनी है तो मारूफ तारीख से करो और अकद ए निकाह बांधने का फैसला हमें वक्त तक न करो जब तक के इद्दत पूरी न हो जाए, खूब समझ लो के अल्लाह तुम्हारे दिलों का हाल तक जानता है, लिहाजा उसे डरो और ये भी जान लो के अल्लाह बर्दबार है, छोटी छोटी बातों से दरगुजर फरमाता है +[2:236] तुमपर कुछ गुनाह नहीं, अगर तुम अपनी औरत को तलाक दे दो कबूल इसके के हाथ लगाने की नौबत आए या मेहर मुकर्रर हो, इस सूरत में उन्हें कुछ ना कुछ देना जरूर चाहिए. ख़ुश हाल आदमी अपनी मक़दरत के मुताबिक़ और ग़रीब अपनी मक़दरत के मुताबिक़ मारूफ़ तारीख़ से दे, ये हक़ है नए आदमियों पर +[2:237] और अगर तुमने हाथ लगाने से पहले तलाक दी हो, लेकिन मेहर मुकर्रर किया जा चुका हो, तो हमें सूरत में निस्फ (आधा) मेहर देना होगा, ये और बात है के औरत नरमी बरते (और मेहर ना ले) या वो मर्द जिसका इख्तियार में अकद ए निकाह है, नरमी से काम ले (और पूरा मेहर दे दे), और तुम (यानी मर्द) नरमी से काम लो तो ये तकवा से ज्यादा मुनासिबत रखा है, आपस में मामलात में फैयाज़ी को ना भूलो, तुम्हारे अमल को अल्लाह देख रहा है +[2:238] अपनी नमाज़ों की निगेहदाश्त रक्खो, ख़ुसूसन ऐसी नमाज़ की जो मोहासन सलावत की जामे (मध्य प्रार्थना) हो। अल्लाह के आगे इस तरह खड़े हो जैसे फरमाबरदार गुलाम खड़े हो गए हैं +[2:239] बाढ़-अमानी की हालत हो, तो ख्वा पेदल हो, ख्वा सवार, जिस तरह मुमकिन हो नमाज पढ़ो और जब अमन मयस्सर आ जाए तो अल्लाह को उस तारीख से याद करो जो उसने तुम्हें सिखाया है, जिसने तुम पहले ना-वाक़िफ़ थे +[2:240] तुम में से जो लोग वफ़ात पाएं और पीछे बीवीयां छोड़ रहे हों, उनको चाहिए के अपनी बीवीयों के हक़ में ये वसीयत कर जाएं के एक साल तक उनको नान-ओ-नफ़ाका (रखरखाव) दिया जाए और वो घर से ना निकली जायें. फिर अगर वो खुद निकल जाए तो अपनी जात के मामले में मारूफ तारीख से वो जो कुछ भी करें उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। अल्लाह सब पर गालिब इक्तेदार रखने वाला और हकीम ओ दाना है +[2:241] इसी तरह जिन औरतों को तलाक दी गई हो, उन्हें भी मुनासिब तौर पर कुछ न कुछ दे कर रुखसत किया जाए, ये हक है मुत्तकी लोगों पर +[2:242] इस तरह अल्लाह अपने एहकाम तुम्हें साफ साफ़ बताता है, उम्मीद है के तुम समझ बूझ कर काम करो +[2:243] तुमने उन लोगों के हाल पर भी कुछ गौर किया, जो मौत के डर से अपने घर बार छोड़ कर निकले थे और हज़ारों की ताड़ाद में थे? अल्लाह ने उनसे फरमाया: मर जाओ, फिर हमने उनको दोबारा जिंदगी बख्शी, हकीकत ये है के अल्लाह इंसान पर बड़ा फजल फरमान वाला है मगर अक्सर लोग शुक्र अदा नहीं करते +[2:244] (मुसलमानो)! अल्लाह की राह में जंग करो, और ख़ूब जान रक्खो के अल्लाह सुनने वाला और जाने वाला है +[2:245] तुम में कौन है जो अल्लाह को क़र्ज़ ए हसन (अच्छा ऋण) दे ता-के अल्लाह उसे कोई गुनाह बढ़ा कर वापस करे? घाटना भी अल्लाह के इख्तियार में है और बदन भी, और उसकी तरफ तुम्हें पलट कर जाना है +[2:246] फिर तुमने उस मामले पर भी गौर किया, जो मूसा के बाद सरदारन ए बानी इजराइल को पेश आया था? उनहों ने अपने नबी से कहा: हमारे लिए एक बादशाह मुकर्रर करदो ता-के हम अल्लाह की राह में जंग करें, नबी ने पूछा: कहीं ऐसा तो न होगा के तुमको लड़ाई का हुकुम दिया जाए और फिर तुम न लड़ो? वो कहने लगे: भला ये कैसे हो सकता है कि हम राह ए खुदा में ना लड़ें, जबके हमने अपने घरों से निकल दिया है और हमारे बाल बच्चे हमसे जुदा कर दिए गए हैं? मगर जब उनको जंग का हुकुम दिया गया तो एक कलील तड़ाद के सिवा वो सब पीठ मोड़ गए, और अल्लाह उनमें से एक एक जालिम को जानता है +[2:247] उनके नबी ने उन्हें कहा के अल्लाह ने तालुत को तुम्हारे लिए बादशाह मुकर्रर किया है, ये सुनकर वो बोले: "हमपर बादशाह बनने का वो कैसे हक़दार होगा? उसके मुकाबले में बादशाही के हम ज़्यादा मुस्तहक़ हैं, वो तो कोई बड़ा मालदार आदमी नहीं है"। नबी ने जवाब दिया: "अल्लाह ने तुम्हारे मुक़ाबले में उसे मुंतख़ब किया है और उसको दिमाग़ी ओ जिस्मानी दोनों किस्मत की एहलियातें फ़रावानी के साथ अता फरमाई हैं और अल्लाह को इख्तियार है के अपना मुल्क जिसे चाहे दे, अल्लाह बदी वुसत रखता है और सब कुछ उसके इल्म में है" +[2:248] इसके साथ उनके नबी ने उनको ये भी बताया के "खुदा की तरफ से उसके बादशाह मुकर्रर होने की अलामत ये है के उसके अहद में वो संदूक तुम्हें वापस मिल जाएगा, जिसमें तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे लिए सुकून ए क़ल्ब का सामान" है, जिसमें आले मूसा और आले हारून के छोड़े हुए तबर्रुकात हैं, और जिसको इस वक्त फरिश्ते संभाले हुए हैं अगर तुम मोमिन हो, तो ये तुम्हारे लिए बहुत बड़ी निशानी है +[2:249] फिर जब तलुत लस्कर लेकर चला, तो उसने कहा: "एक दरिया पर अल्लाह की तरफ से तुम्हारी आजमाइश होने वाली है, जो उसका पानी पिएगा, वो मेरा साथी नहीं। मेरा साथी सिर्फ वो है जो उसे प्यास न बुझाए, हां एक आधा चिल्लू कोई पेशाब ले तो पेशाब ले। जालूथ (गोलियाथ) और उसके लश्करों का मुकाबला करने की ताक़त नहीं है, लेकिन जो लोग ये समझते थे के उनको एक दिन अल्लाह से मिलना है, उनको ने कहा: “बारहा ऐसा हुआ है के एक कलील गिरो, अल्लाह के इज़ान से एक बड़े गिरोह पर गालिब आ गया है, अल्लाह सब्र करने वालों का साथी है।” +[2:250] और जब वो जलूथ और उसके लश्करों के मुक़ाबले पर निकले तो उन्होन ने दुआ की: "ऐ हमारे रब हमपर सब्र का फ़ैज़ान कर, हमारे क़दम जमा दे और इस काफ़िर गिरो ​​पर हमें फ़तह नसीब कर।" +[2:251] आख़िर ए कार अल्लाह के इज़ान से उन्होन ने काफ़िरों को मार डाला और दाऊद ने जालुथ को क़त्ल कर दिया और अल्लाह ने उसे सल्तनत और हिकमत से नवाजा और जिन चीज़ों का चाहा उसको इल्म दिया, अगर इस तरह अल्लाह इंसानों के एक गिरोह को दूसरे गिरोह के ज़रिये से हटाता ना रहता, तो ज़मीन का निज़ाम बिगाड़ जाता, लेकिन दुनिया के लोगों पर अल्लाह का बड़ा फ़ज़ल है (के वो इस तरह दफ़े फ़साद का इंतेज़ाम करता रहता है) +[2:252] ये अल्लाह की आयत हैं जो हम ठीक ठीक तुमको सुना रहे हैं और तुम यकीनन उन लोगों में से हो जो रसूल बना कर भेजे गए हैं +[2:253] ये रसूल (जो हमारी तरफ से इंसानों की हिदायत पर मामूर हुए) हमने उनको एक दूसरे से बढ़ चढ़ कर मरताबे अता किया, उनमें कोई ऐसा था जिसका खुदा खुद हम-कलाम हुआ, किसी को उसने दूसरी जिंदगी से बुलंद दर्जे दिए, और आखिर में ईसा इब्न-मरियम को रोशन निशानियां अता की और रूह ए पाक से उसकी मदद की, अगर अल्लाह चाहता तो मुमकिन ना था के रसूलों के बाद में जो लोग रोशन निशानियां देख चुके थे वो आपस में लड़ते, मगर (अल्लाह की मशियत ये ना थी के वो लोगों को जबरान इख्तिलाफ से) रोके, इस वजह से) उन्होन ने बहम इख्तिलाफ किया, फिर कोई ईमान लाया और किसी ने कुफ्र की राह इख्तियार की, हां, अल्लाह चाहता तो वो हरगिज ना लड़ते, मगर अल्लाह जो चाहता है करता है +[2:254] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जो कुछ माल माता हमने तुमको बक्शा है, उसमें से ख़र्च करो, क़ब्ल इसके के वो दिन आए जिसमें न ख़त्म ओ फ़रोख़्त होगी, न दोस्ती काम आएगी और न सिफ़ारिश चलेगी और ज़ालिम असल में वही हैं जो कुफ़्र की रवीश इख्तियार करते हैं +[2:255] अल्लाह वो ज़िंदा ए जावेद (हमेशा रहने वाली) हस्ती है, जो तमाम कायनात को संभाले हुए है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, वो ना सोता है और ना उसे लंबी लगती है, जमीन और आसमान में जो कुछ है उसका है, कौन है जो उसके जनाब में उसकी इज्जत के बिना सिफ़ारिश कर सके? जो कुछ बंदों के सामने है उसे भी वो जानता है और जो कुछ उन्हें ओझल है उसे भी वो वाक़िफ़ है, और उसकी मालूमात में से कोई चीज़ उनकी गिरफ़्तार ए इद्राक में नहीं आ सकती इल्ला ये के किसी चीज़ का इल्म वो खुद ही उनको देना चाहिए, उसकी हुकुमत अस्मानो और ज़मीन पर चाय हुई है और उनकी निगाहबानी उसके लिए कोई थका देने वाला काम नहीं है, बस वही एक बुज़ुर्ग ओ बरतर जात है +[2:256] दीन के मामले में कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं है, सही बात गलत ख़यालत से अलग चांट कर रख दी गई है, अब जो कोई तागूत का इंकार करके अल्लाह पर ईमान ले आया, उसने एक ऐसा मजबूत सहारा थाम लिया जो कभी टूटने वाला नहीं, और अल्लाह (जिसका सहारा उसने लिया है) सब कुछ सुनने और जाने वाला है +[2:257] जो लोग ईमान लाते हैं, उनका हमी ओ मददगार अल्लाह है और वो उनको तरीकियों (और यहां) से रोशनी में निकल लाता है और जो लोग कुफ्र की राह इख्तियार करते हैं उनके हामी ओ मददगार तागुत हैं और वो उन्हें रोशनी से तारीखों की तफफ खींच ले जाते हैं, ये आग में जाने वाले लोग हैं जहां ये हमेशा रहेंगे +[2:258] क्या तुम हमें बताओ शक्स के हाल पर गौर नहीं किया जिसने इब्राहिम से झगड़ा किया था? झगड़ा इस बात पर है कि इब्राहिम का रुब कौन है, और इस बिना पर हमारे शक्स को अल्लाह ने हुकूमत दे रखी थी। जब इब्राहिम ने कहा के "मेरा रब वो है, जिसका इख्तियार में जिंदगी और मौत है, तो उसने जवाब दिया: "जिंदगी और मौत मेरे इख्तियार में है" इब्राहिम ने कहा: " अच्छा, अल्लाह सूरज को मशिर्क से निकलता है, तू जरा उसे मगरिब से निकाल ला"। ये सुनकर वो मुनकिर ए हक्क शश्तर (आश्चर्यचकित) रह गया, मगर अल्लाह ज़ालिमों को राह ए रस्त नहीं दिखाया करता +[2:259] हां फिर मिसाल के तौर पर उस लड़के को देखो जिसका गुजर एक ऐसी बस्ती पर हुआ जो अपनी छतों पर औंधी गिरी पड़ी थी। उसने कहा: "ये आबादी, जो हलाक हो चुकी है, इसी अल्लाह किस तरह दोबारा जिंदगी बख्शेगा?" इस्पर अल्लाह ने उसकी रूह क़ब्ज़ करली और वो सौ (सौ) बरस तक मुर्दा पड़ा रहा, फिर अल्लाह ने उसे दोबारा जिंदगी बख्शी और उससे पूछा: "बताओ, कितनी मुद्दत पैदा रहे हो?" उसने कहा: "एक दिन या चाँद घंटे रहेगा"। फरमाया: “तुम्हारे सौ बरस इसी हालत में गुजर चुके हैं, अब जरा अपने खाने और पानी को देखो के इसमे जरा तगय्यूर (परिवर्तन) नहीं आया है, दूसरी तरफ जरा अपने गधे (गधे) को भी देखो [के इसका पंजर (कंकाल) तक बोसीदा (सड़) हो रहा है] और ये हमने इसलिए किया है कि हम तुम्हें लोगों के लिए एक निशानी बना देना चाहते हैं, फिर देखो के हड्डियों के इस पंजर (कंकाल) को हम किस तरह उठा कर गोश्त पोश्ट इसपर चढ़ाते हैं। इस तरह जब हकीकत उसके सामने बिल्कुल नुमायन हो गई, तो उसने कहा: "मैं जानता हूं के अल्लाह हर चीज पर क़ुदरत रखता है" +[2:260] और वो वाकिया भी पेश ए नज़र रहे, जब इब्राहिम ने कहा था के: "मेरे मालिक, मुझे दिखा दे तू मुर्दों को कैसे ज़िंदा करता है" फ़रमाया: “क्या तू ईमान नहीं रखता?” उसने अर्ज़ किया "ईमान तो रखता हूं, मगर दिल का इत्मीनान अंधेरा है", फरमाया: "अच्छा तो चार परिंदे ले और उनको अपने से मानो (झुकाव/तम) कार्ले फिर उनका एक जज (भाग) एक एक पहाड़ पर रखदे फिर उनको पुकार, वो तेरे पास दौड़े चले आएंगे, खूब जान ले के अल्लाह निहायत बा इक्तेदार और हकीम है” +[2:261] जो लोग अपने माल अल्लाह की राह में सिर्फ (खर्च) करते हैं, उनके खर्च की मिसाल ऐसी है, जैसे एक दाना बोया (सो) जाए और उसके सात (सात) बालें निकलें और हर बाल में सौ (सौ) दानी होन, इसी तरह अल्लाह जिसका अमल चाहता है अफज़ोनी (मैनिफोल्ड/ज्यादा) अता फरमाता है, वो फराग दस्त (सर्व-गले लगाने वाला) भी है और अलीम भी +[2:262] जो लोग अपने माल अल्लाह की राह में खर्च करते हैं और खर्च करके फिर एहसान नहीं जाते ना दुख देते हैं, उनका अजर उनके रुब के पास है और उनके लिए कोई रांझ और खौफ का मौका नहीं +[2:263] एक मीठा बोल और कोई नगावार बात पर जरा सी खाई पोशी (सहनशीलता) हमें खैरात से बेहतर है, जिसके पीछे दुख हो। अल्लाह बे-नियाज़ है और बर्दबारी (सहिष्णु) उसकी सिफ़त है +[2:264] ऐ ईमान लाने वालों! अपने सदाकत को एहसान जता कर और दुख देकर उस शक्स की तरह खाख में ना मिला दो, जो अपना माल महज़ लोगों के दिखाने को खर्च करता है और ना अल्लाह पर ईमान रखता है ना आख़िरत पर, उसके खर्च की मिसाल ऐसी है जैसी एक चट्टान (रॉक) थी, जिसपर मिट्टी की तह जमी हुई थी, इसपर जब जोर का मेह (बारिश) बरसा, तो सारी मिट्टी भी गई और साफ चट्टानों की चट्टानें रह गईं, ऐसे लोग अपने नाजदीक खैरात करके जो नेकी कमाते हैं, उसमें कुछ भी उनके हाथ नहीं आता, और काफिरों को सीधी राह दिखाना अल्लाह का दस्तूर नहीं है +[2:265] बख़िलाफ़ इसके जो लोग अपने माल महज़ अल्लाह की रजा-जोई के लिए दिल के पूरे सबात ओ करार (एकल दिमाग वाले) के साथ खर्च करते हैं, उनके खर्च की मिसाल ऐसी है, जैसे कोई सताए मरतफा (पठार) पर एक बाग हो, अगर ज़ोर की बारिश हो जाए तो डुगुना (दो गुना) फल लाए, और अगर जोर की बारिश ना भी हो तो एक हल्की बारिश (हल्की बौछार) हाय उसके लिए काफी हो जाए, तुम जो कुछ करते हो, सब अल्लाह की नजर में है +[2:266] क्या तुम में से कोई ये पसंद करता है के उसके पास एक हरा भरा बाग हो, नेहरोन से सैराब, खजूरों और अंगूरों और हर क़िस्म के फूलों से लड़ा हुआ, और वो ऐन हमें वक़्त एक तेज़ बवंडर (उग्र बवंडर) की ज़र्द में आकर झूलस जाए, जबके वो खुद बूढ़ा हो और उसके कमसिन (छोटा) बच्चे अभी कोई लायक ना हो? इस तरह अल्लाह अपनी बातें तुम्हारे सामने बयान करता है, शायद तुम गौर ओ फिक्र करो +[2:267] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जो माल तुमने कमाए हैं और जो कुछ हमने जमीन से तुम्हारे लिए निकाला है, उसमें से बेहतर हिसा राह ए खुदा में खर्च करो, ऐसा ना हो के उसकी राह में देने के लिए बुरी से बुरी चीज चांटने (पिक आउट) की कोशिश करने लगो, हलांके वही चीज अगर कोई तुम्हें दे तो तुम उसे लेना गवारा ना करोगे इल्ला ये के इसको कबूल करने में तुम इग्माज़ (तिरस्कार) बरात जाओ, तुम्हें जान लेना चाहे के अल्लाह बे-नियाज़ है और बेहतरीन सिफ़ात से मुत्तसिफ़ है +[2:268] शैतान तुम्हें मुफ़लिसी (गरीबी) से डराता है और शर्मनाक तर्ज़-ए-अमल इख्तियार करने की तरजीब देता है, मगर अल्लाह तुम्हें अपनी बख्शीश और फ़ज़ल की उम्मीद दिलाती है, अल्लाह बदा फराग-दस्त और दाना है +[2:269] जिसको चाहता है हिकमत अता करता है, और जिसको हिकमत (बुद्धि) मिली उसे हकीकत में बड़ी दौलत मिल गई, बातों से सिर्फ वही लोग सबक लेते हैं जो दानिशमंद हैं +[2:270] तुमने जो कुछ भी खर्च किया हो और जो नजर भी मानी हो, अल्लाह को उसका इल्म है, और जालिमों का कोई मददगार नहीं +[2:271] अगर अपने सदकात ऐलान (खुले तौर पर) करो तो ये भी अच्छा है, लेकिन अगर छुपा कर हाजत-मंदों को दो तो ये तुम्हारे हक में ज्यादा बेहतर है, तुम्हारी बहुत सी बुराइयां तर्ज ए है अमल से मेह्व (प्रायश्चित) हो जाती है। और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह को बाहर हाल उसकी खबर है +[2:272] लोगों को हिदायत बख्श देने की जिम्मेदारी नहीं है, अल्लाह को हिदायत हाय जिसे चाहता है बख्शता है और खैरात में जो माल तुम खर्च करते हो वो तुम्हारे अपने लिए भला है, आखिर तुम इसी लिए तो खर्च करते हो के अल्लाह की रजा हासिल हो, तो जो कुछ माल तुम खैरात में खर्च करोगे उसका पूरा पूरा अजर तुम्हें दिया जाएगा और तुम्हारी हक तलफी हरगिज ना होगी +[2:273] खास तौर पर मदद के मुस्तहिक से तंगदस्त लोग हैं जो अल्लाह के काम में ऐसे घिर गए हैं कि अपनी जाति कस्बे-ए-माश (आजीविका) के लिए जमीन में कोई दौड़-धूप नहीं कर सकता। उनकी खुद्दारी देख कर नवाज़ीफ आदमी गुमान करता है के ये ख़ुश-हाल हैं, तुम उनके चेहरों से उनकी अंदरुनी हालत पहचान सकते हो मगर वो ऐसे लोग नहीं हैं के लोगों के पीछे पढ़ कर कुछ माँगें। उनकी इयानत में जो कुछ माल तुम खर्च करोगे वो अल्लाह से पोशीदा ना रहेगा +[2:274] जो लोग अपने माल शब-ओ-रोज़ खुले और छुपे खर्च करते हैं उनका अजर उनके रब के पास है और उनके लिए कोई खौफ और रांझ का मुकाम नहीं +[2:275] मगर जो लोग सूद (सूदखोरी) खाते हैं, उनका हाल उस शक्स का सा होता है, जिसे शैतान ने छू कर बावला (दीवाना) कर दिया है और इस हालात में उनको मुब्तिला होने की वजह ये है कि वो कहते हैं: "तिजारत भी तो आखिर सूद ही जैसी चीज है", हालंके अल्लाह ने तिजारत को हलाल किया है और सूद को हराम। लिहाजा जिस शक्स को उसके रब की तरफ से ये हिदायत पाहुंचे और आंदा के लिए वो सूद-खोरी से बाज़ आ जाए, तो जो कुछ वो पहले खा चुका, सो खा चुका, उसका मामला अल्लाह के हवाले है और जो इस हुक्म के बाद फिर इसी हरकत का इरादा (दोहराना) करे, तो जहन्नामी है, जहां वो हमेशा रहेगा +[2:276] अल्लाह सूद का मत्था मार देता है (सभी आशीर्वादों के ब्याज से वंचित करता है) और सदकात को नाशो नुमा देता है, और अल्लाह किसी नाशुक्रे बध-अमल इंसान को पसंद नहीं करता +[2:277] हां, जो लोग ईमान ले आयें और नेक अमल करें और नमाज कयाम करें और जकात दें, उनका अजर बहस उनके रुब के पास है और उनके लिए कोई खौफ और रांझ का मौका नहीं +[2:278] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, खुदा से डरो और जो कुछ तुम्हारा सूद लोगों पर बाकी रह गया है उसे छोड़ दो, अगर हकीकत तुम ईमान लाए हो +[2:279] लेकिन अगर तुमने ऐसा ना किया, तो आगाह हो जाओ के अल्लाह और उसके रसूल की तरफ से तुम्हारे खिलाफ एलान-ए-जंग है। अब भी तौबा करलो (और सूद चोद दो) तो अपना असल सरमाया लेने के तुम हक़दार हो, ना तुम ज़ुल्म करो, ना तुमपर ज़ुल्म किया जाए +[2:280] तुम्हारा क़र्ज़दार तंगदस्त हो, तो हाथ खुलने तक उसे मोहलत दो, और जो सदका करदो तो ये तुम्हारे लिए ज़्यादा बेहतर है, अगर तुम समझो +[2:281] उस दिन की रुसवेई ओ मुसीबत से बचो, जबके तुम अल्लाह की तरफ वापस होंगे, वहां हर शक्स को उसकी कमाई हुई नेकी या बड़ी का पूरा बदला मिल जाएगा और किसी पर ज़ुल्म हरगिज़ ना होगा +[2:282] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब किसी मुकर्रर मुद्दत के लिए तुम आपस में क़र्ज़ का लें दीन करो तो उसे लिख लिया करो। फ़रीक़ैन के दरमियान इन्साफ़ के साथ एक शक्स दस्तावेज़ (दस्तावेज़) तहरीर करे। जिसे अल्लाह ने लिखा पढ़ने की काबिलियत बख्शी हो, उसे लिखने से इंकार न करना चाहिए। वो लिखे और इम्ला (हुक्म) वो शक्स कराए जिसपर हक़ आता है (यानी क़र्ज़ लेने वाला), और उसे अल्लाह, अपने रब से डरना चाहिए के जो मामला ताई हो उसमें कोई कमी बेशी ना करे। लेकिन अगर क़र्ज़ लेने वाला खुद नादाँ या ज़ईफ़ हो, या इमला ना करा सकता हो, तो उसका वली इन्साफ के साथ इमला कराये, फिर अपने मर्दों में से दो आदमियों की इसपर गवाही करालो और अगर दो मर्द ना हो तो एक मर्द और दो औरतें हो, ता-के एक भूल जाये तो दूसरी उसे याद दिला दे। ये गवाह ऐसे लोगों में से होनी चाहिए जिनकी गवाही तुम्हारे दरमियान मकबूल हो। गवाहों को जब गवाह बनने के लिए कहा जाए, तो उन्हें इंकार न करना चाहिए। मामला ख़्वा छोटा हो या बड़ा, मियाद की तैं (निर्दिष्ट अवधि) के साथ उसकी दस्तावेज़ (दस्तावेज़) लिखवा लेने में तसहुल (उपेक्षा) न करो। अल्लाह के नाज़दीक ये तरीक़ा तुम्हारे लिए ज़्यादा मब्नी बार इन्साफ़ है, इस शहादत क़याम होने में ज़्यादा सहुलत होती है, और तुम्हारे शुकुक ओ शुबाअत में मुब्तिला होने का इम्कान कम रह जाता है। हां जो तिजारती लें दीन दस्त बा दस्त तुमलोग आपस में करते हो, उसको ना लिखा जाए तो कोई हर्ज नहीं, मगर तिजाराती मामले तै करते वक्त गवाह कार्लिया करो। कातिब (मुंशी) और गवाह को सताया ना जाए, ऐसा करोगे तो गुनाह का इर्तेक़ाब करोगे। अल्लाह के गजब से बचो, वो तुमको सही तारीख ए अमल की तालीम देता है और उसे हर चीज का इल्म है +[2:283] अगर तुम सफ़र की हालत में हो और दस्तावेज़ लिखने के लिए कोई कातिब (मुंशी) ना मिले तो रेहान बिल क़ब्ज़ (हाथ में प्रतिज्ञा की सुरक्षा) पर मामला करो, अगर तुम में से कोई शक्स दूसरे पर भरोसा करके इसके साथ कोई मामला करे तो जिसका भरोसा किया गया है उसे चाहिए के अमानत अदा करे और अल्लाह अपने रब से डरे और शहादत हरगिज़ ना छुपाओ। जो शहादत छुपाता है उसका दिल गुनाह में आलूदा है और अल्लाह तुम्हारे अमाल से बेखबर नहीं है +[2:284] आसमानो और ज़मीन में जो कुछ है सब अल्लाह का है, तुम अपने दिल की बातें ख्वा जाहिर करो या छुपाओ, अल्लाह बाहर हाल उनका हिसाब तुमसे ले लेगा, फिर उसे इख्तियार है जिसे चाहे माफ करदे और जिसे चाहे सजा दे, वो हर चीज पर क़ुदरत रखता है +[2:285] रसूल हमें हिदायत पर ईमान लाया है जो उसके रब की तरफ से उसपर नाज़िल हुई है और जो लोग इस रसूल के मन्ने वाले हैं उन्होन ने भी हिदायत को दिलसे तस्लीम कार्लिया है, ये सब अल्लाह और उसके फरिश्तों और उसकी किताबों और उसके रसूलों को मानते हैं और उनका क़ौल ये है के: "हम अल्लाह के रसूलों को एक दूसरे से अलग नहीं करते, हमने हुकुम सुना और इताअत क़बूल की। ​​मालिक! हम तुझसे ख़ता-बख्शी (बख्शीश) के तालिब हैं और हमें तेरी ही तरफ पलटना है।” +[2:286] अल्लाह किसी मुतनफ्फिस पर उसकी मक़दरत (ताक़त) से ख़राब ज़िम्मेदारी का बोझ नहीं डालता, हर शक्स ने जो नेकी कमाई है उसका फ़ल उसी के लिए है और जो बड़ी समेटी है उसका वबाल उसी पर है, (ईमान लाने वालों! तुम यूं दुआ किया करो) ऐ हमारे रब! हमसे भूल चुक में जो कसूर हो जाए अनपर गिरफ़्तार ना कर, मलिक! हमपर वो बोझ ना डाल जो तू-नहीं हमसे पहले लोगों पर डाले थे। परवरदिगार ! जिस बार को उठने की ताक़त हम में नहीं है वो हमपर ना रख, हमारे साथ नरमी कर, हमसे दरगुज़र फरमा, हमपर रहम कर, तू हमारा मौला है, काफिरों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर + +Surah 3: Al-'Imran (The Family of Amran) +---------------------------------------- +[3:1] अलिफ़ लाम मीम +[3:2] अल्लाह , वो जिंदा ए जावेद हस्ती (सेल्फ सब्सिस्टिंग), जो निज़ाम ए कायनात को संभाले हुए है, हकीकत में उसके सिवा कोई खुदा नहीं है +[3:3] उसने तुमपर ये किताब नाज़िल की है, जो हक लेकर आई है और उन किताबों की तस्दीक कर रही है जो पहले से आई हुई थी, इसे पहले वो इंसानों की हिदायत के लिए तौरात और इंजील नाज़िल कर चुक्का है +[3:4] और उसने वो कसौटी (मानदंड) उतारी है (जो हक़ और बातिल का फर्क दिखाने वाली है)। अब जो लोग अल्लाह के फ़रामीन को क़बूल करने से इनकार करते हैं, उनको यकीनन सज़ा मिलेगी। अल्लाह बे-पनाह ताक़त का मालिक है और बुराई का बदला देने वाला है +[3:5] ज़मीन और आसमान की कोई चीज़ अल्लाह से पोशीदा नहीं +[3:6] वही तो है जो तुम्हारी माँओं के पैत में तुम्हारी सूरतें, जैसी चाहता है, बनता है। हमें ज़बरदस्त हिकमत वाले के सिवा कोई और खुदा नहीं है +[3:7] वही खुदा है, जिसने ये किताब तुम्हारी नाज़िल की है। क्या किताब में दो तरह की आयतें हैं: एक मोहकमात, जो किताब की असल बुनियाद हैं और दूसरी मुताशाबीहात (अस्पष्ट)। जिन लोगों के दिलों में टेढ़ा है, वो फ़िटने की तलाश में हमेशा मुतास्बिहात ही के पीछे पड़े रहते हैं और उनको मानी पहचान की कोशिश करते हैं, हलांके उनका हक़ीक़ी मफ़हूम अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता। बख़िलाफ़ इसके जो लोग इल्म में पुख्ता-कार हैं, वो कहते हैं के "हमारा अनोखा ईमान है, ये सब हमारे रब ही की तरफ से हैं" और सच ये है के किसी चीज़ से सही सबक सिर्फ दानिशमंद लोग ही हासिल करते हैं +[3:8] वो अल्लाह से दुआ करते रहते हैं हैं के "परवरदिगार! जब तू हमें सीधे रास्ते पर लगा चुका है, तो फिर कहीं हमारे दिलों को काजी (टेढ़ापन) में मुब्तिला न करदीजियो। हमें अपने खज़ाने फ़ैज़ से रहमत अता कर के तू ही फ़ैयाज़ ए हक़ीक़ी (अता फ़रमाने वाला) है +[3:9] परवरदिगार! तू यकीनन" सब लोगों को एक रोज़ जमा करने वाला है, जिसके आने में कोई शुभ (शक्क) नहीं, तू हरगिज़ अपने वादे से तलने वाला नहीं है” +[3:10] जिन लोगों ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया है, उन्हें अल्लाह के मुक़ाबले में ना उनका माल कुछ काम देगा, ना औलाद, वो दोज़ख का इंधन (ईंधन) बनकर रहेंगे +[3:11] उनका अंजाम वैसा ही होगा, जैसा फिरौन के साथियों और उन्हें पहले के नफरमानों का हो चुका है कि उनको ने आयत ए इलाही को झुटलाया, नतीजा ये हुआ के अल्लाह ने उनके गुनाहों पर उन्हें पकड़ लिया और हक़ ये है के अल्लाह सज़ा देने वाला है +[3:12] पस (ऐ मुहम्मद) ! जिन लोगों ने तुम्हारी दावत को कबूल करने से इंकार कर दिया है, उनसे कहदो के करीब है वो वक्त, जब तुम मगरूब हो जाओगे और जहन्नुम की तरफ हांके जाओगे और जहन्नुम बड़ा ही बुरा ठिकाना है +[3:13] तुम्हारे लिए उन दो गिरोहों में एक निशान ए इब्रत था, जो (बदर में) एक दूसरे से नाबार्ड आज़मा (मुठभेड़) हुए, एक गिरोह अल्लाह की राह में लड़ रहा था और दूसरा गिरोह काफ़िर था, देखने वाले ब-चश्म ए सर देख रहे थे के काफिर गिरोह मोमिन गिरोह से दो चाँद (दोगुने नंबर) है मगर (नतीजे ने) साबित करदिया के) अल्लाह अपनी फतह ओ नुसरत से जिसको चाहता है मदद देता है। दीधा ए बीना (देखने वाली आंखें) रखने वालों के लिए इसमें बड़ा सबक पोशीदा है +[3:14] लोगों के लिए मरगूबात ए नफ़्स (स्वाभाविक रूप से लालच से लुभाया गया) औरतें, औलाद, सोने चांदी के ढेर, चीदा घोड़े (ब्रांडेड घोड़े) मवेशी और ज़राय ज़मीनें बड़ी ख़ुश-आनंद बना दी गई है। मगर ये सब दुनिया की चांद रोजा जिंदगी के सामान हैं, हकीकत में जो बेहतर ठिकाना है वो तो अल्लाह के पास है +[3:15] कहो: मैं तुम्हें बताऊं के इनसे ज्यादा अच्छी चीज क्या है? जो लोग तक्वा की रवीश इख्तियार करते हैं, उनके लिए उनके रब के पास बाग हैं, जिनकी जगहें नफरतें बहती होंगी, वहां उन्हें हमेशा की जिंदगी हासिल होगी, पाकीजा बीवीयां उनके रफीक (साथी) होंगी और अल्लाह की रजा से वो सरफराज होंगे। अल्लाह अपने बंदों के रवये पर गहरी नज़र रखता है +[3:16] ये वो लोग हैं, जो कहते हैं " मालिक! हम ईमान लाए, हमारी ख़ातों से दरगुज़र फ़रमा और हमें आतिश ए दोज़ख से बचा ले" +[3:17] ये लोग सब्र करने वाले हैं, रस्तबाज़ हैं, फ़रमाबरदार और फैयाज हैं और रात की आखिरी घड़ियों में अल्लाह से मगफिरत की दुआएं मांगते हैं +[3:18] अल्लाह ने खुद शहादत दी है के उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, और (यही शहादत) फरिश्तों और सब एहले इल्म ने भी दी है, वो इन्साफ पर कायम है, हमें ज़बरदस्त हकीम के सिवा फिल वक़हे कोई खुदा नहीं है +[3:19] अल्लाह के नाज़दीक दीन सिर्फ इस्लाम है, इस दीन से हट कर जो मुख्तलिफ तारीख उन लोगों ने इख्तियार किये जिन्होनें किताब दी गई थी, उनके इस तर्ज़ ए अमल की कोई वजह इसके सिवा ना थी के उनहोन ने इल्म आ जाने के बाद आपस में एक दूसरे पर ज़्यादा करने के लिए ऐसा किया। और जो कोई अल्लाह के एहकाम ओ हिदायत की इबादत से इन्कार करदे, अल्लाह को उसका हिसाब लेते कुछ देर नहीं लगती +[3:20] अब अगर ये लोग तुमसे झगड़ा करें, तो इनसे कहो: "मैंने और मेरे जोड़े (अनुयायियों) ने तो अल्लाह के आगे सर तस्लीम ख़त्म कर दिया है"। फिर एहले किताब और गैर एहले किताब दोनों से पूछो: “क्या तुमने भी उसकी इताअत ओ बंदगी कबूल की?” अगर की तो वो राह ए रस्त पा गए, और अगर इस से मुहं मोड़ा तो तुम सिर्फ पैगाम पाहुंचा देने की जिम्मेदारी थी, आगे अल्लाह खुद अपने बंदों के मामले देखने वाला है +[3:21] जो लोग अल्लाह के एहकाम ओ हिदायत को मानने से इंकार करते हैं और उसके पैगम्बरों को ना-हक़ क़त्ल करते हैं और ऐसे लोगों की जान के डरपे हो जाते हैं जो ख़ल्क़ ए ख़ुदा में अदल ओ रस्तियों का हुकुम देने के लिए उठें, उनको दर्दनाक सज़ा की ख़ुशख़बरी सुना दो +[3:22] ये वो लोग हैं जिनके अमाल दुनिया और आखिरी दोनों में ज़या हो गए, और इनका मददगार कोई नहीं है +[3:23] तुमने देखा नहीं के जिन लोगों को किताब के इल्म में से कुछ हिसा मिला है, उनका हाल क्या है? उन्हें जब किताब ए इलाही की तरफ बुलाया जाता है ता-के वो उनके दरमियान फैसला करे, तो उनसे एक फरीक इस्से पहलु-ताही (मुड़ जाता है) करता है और इस फैसले की तरफ आने से मुह फेर जाता है +[3:24] उनका ये तर्ज-ए-अमल इस वजह से है के वो कहते हैं हैं "आतिश ए दोज़ख तो हमें मास (छू) तक न करेगी और अगर दोज़ख की सज़ा हमको मिलेगी भी तो बस चंद रोज़"। उनको खुद कहा अकीदों ने उनको अपने दीन के मामले में बड़ी गलत फहमियों में दाल रक्खा है +[3:25] मगर क्या बनेगी जब हम उन्हें रोज जमा करेंगे जिसका आना यकीनी है? हमसे रोज़ हर शक्स को उसकी कमाई का बदला पूरा-पूरा दे दिया जाएगा और किसी पर ज़ुल्म न होगा +[3:26] कहो! ख़ुदाया! मुल्क के मालिक! तू जिसे चाहे, हुकूमत दे और जिसे चाहे छीन ले, जिसे चाहे इज्जत बख्शी और जिसे चाहे ज़िल्लत दे। भलाई तेरे इख्तियार में है. बेशक तू हर चीज़ पर क़ादिर है +[3:27] रात को दिन में पिरोता हुआ ले आता है और दिन को रात में, जानदार में से बे-जान निकलता है और बे-जान में से जानदार को, और जिसे चाहता है बे-हिसाब रिज़क़ देता है +[3:28] मोमिनीन एहले ईमान को छोड़ कर काफिरों को अपना रफीक और दोस्त हरगिज ना बनाएं, जो ऐसा करेगा उसका अल्लाह से कोई तलाक नहीं, हां ये माफ है के तुम उनके ज़ुल्म से बचने के लिए बजाहिर ऐसा तर्ज ए अमल इख्तियार कर जाओ, मगर अल्लाह तुम्हें अपने आप से डराता है और तुम्हें उसकी तरफ पलट कर जाना है +[3:29] (ऐ नबी)! लोगों को खबरदार करो के तुम्हारे दिलों में जो कुछ है, उसे ख्वा तुम छुपाओ या जाहिर करो, अल्लाह बाहर हाल उसे जानता है। ज़मीन ओ आसमान की कोई चीज़ उसके इल्म से बाहर नहीं है और उसका इक्तेदार हर चीज़ पर हावी है +[3:30] वो दिन आने वाला है, जब हर नफ़्स अपने किये का फल हाज़िर पायेगा ख्वा उसने हमें बुलाया कि हो या बुरा। हमें रोज़ आदमी ये तमन्ना करेगा के काश अभी ये दिन उसे बहुत दूर होता! अल्लाह तुम्हें अपने आप से डरता है और वो अपने बंदों का निहायत खैर ख्वाह है +[3:31] (ऐ नबी)! लोगों से कहो के "अगर तुम हकीकत में अल्लाह से मुहब्बत रखते हो, तो मेरी जोड़ी इख्तियार करो, अल्लाह तुमसे मुहब्बत करेगा और तुम्हारी खतों से दरगुजर फरमाएगा, वो बड़ा माफ करने वाला और रहीम है" +[3:32] उनसे कहो के "अल्लाह और रसूल की इत्ता कबूल है" करलो” फिर अगर वो तुम्हारी दावत क़बूल ना करें, तो यकीनन ये मुमकिन नहीं है के अल्लाह ऐसे लोगों से मुहब्बत करे जो उसकी और उसके रसूल की इताअत से इंकार करे +[3:33] अल्लाह ने आदम और नूह और आले- इब्राहिम और आल-ए-इमरान को तमाम दुनिया वालों पर तर्जीह देकर ( अपनी रिसालत के लिए) मुंतखब किया था +[3:34] ये एक सिलसिले के लोग थे, जो एक दूसरे की नाक से पैदा हुए थे, अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है +[3:35] (वो हमारा वक्त सुन रहा था) जब इमरान की औरत कह रही थी के, “मेरे परवरदिगार! मुख्य है” बच्चों को जो मेरे पैत में है तेरी नज़र रखती हूँ, वो तेरे ही काम के लिए वक्फ होगा, मेरी इस पेशकश को क़बूल फरमा, तू सुनने और जाने वाला है।” +[3:36] फिर जब वो बच्ची उसे हां पैदा हुई तो उसने कहा "मालिक! मेरे हां तो लड़की पैदा हो गई है, हालांके जो कुछ उसने जाना था, अल्लाह को इसकी खबर थी और लड़के लड़की की तरह नहीं होता। खैर, मैंने उसका नाम मरियम रख दिया है और मैं उसका इस्तेमाल करती हूं।" उसकी आइंदा नाक को शैतान मरदूद के फिटने से तेरी पनाह में देती हूं” +[3:37] आखिर ए कार उसके रब ने उस लड़की को ब-खुशी कबूल फरमा लिया, उसे बड़ी अच्छी लड़की बनाकर उठाया और जकारिया को उसका सरपरस्त बना दिया। ज़कारिया जब कभी उसके पास महराब (अभयारण्य) में जाता तो उसके पास कुछ न कुछ खाने पीने का सामान मिलता। पुछता मरियम! ये तेरे पास कहाँ से आया? वो जवाब देती अल्लाह के पास से आया है, अल्लाह जिसे चाहता है बे-हिसाब देता है +[3:38] ये हाल देख कर जकारिया ने अपने रब को पुकारा "परवरदिगार! अपनी कुदरत से मुझे नई औलाद अता कर, तू ही दुआ सुनने वाला है" +[3:39] जवाब में फरिश्तों ने आवाज दी, जब के वो मेहराब में खड़ा नमाज पढ़ रहा था के "अल्लाह तुझे याह्या की ख़ुशख़बरी देता है, वो अल्लाह की तरफ से एक फरमान की तस्दीक करने वाला बनकर आएगा, उसमें सरदार ओ बुज़ुर्गी की शान होगी कमाल दर्जे का ज़ाबित (पूरी तरह से पवित्र) होगा, नबुवत से" सरफराज होगा और सालिहें में शामिल हो जाएगा” +[3:40] ज़कारिया ने कहा,“परवरदिगार! भला मेरे हां लड़का कहां से होगा, मैं तो बूढ़ा हूं चुका हूं और मेरी बीवी बांझ है, "जवाब मिला, ऐसा ही होगा, अल्लाह जो चाहता है करता है" +[3:41] अर्ज़ किया "मालिक! फिर कोई निशानी मेरे लिए मुकर्रर फरमा दे"। कहा, निशानी ये है कि तुम तीन दिन तक लोगों से इशारे के सिवा कोई बात-चित ना करोगे, इस दौरन में अपने रब को बहुत याद करना और सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते रहना।” +[3:42] फ़िर वो वक़्त आया जब मरियाँ से फ़रिश्तों ने आकार कहा, " ऐ मरियम! अल्लाह ने तुझे बरगुज़ीदा किया और पाकीज़गी अता की और तमाम दुनिया की औरतों पर तुझको तर्जीह देकर अपनी खिदमत के लिए चुन लिया +[3:43] ऐ मरियम! अपने रब की तबह फरमान बनकर रेह, उसके आगे सर ब-सजूद हो, और जो बंदे उसके हुज़ूर झुकने वाले हैं उनके साथ तू भी झुक जा” +[3:44] (ऐ मुहम्मद)! ये गैब की खबरें हैं जो हम तुमको वही के ज़रिये से बता रहे हैं, वरना तुम हमें वक्त वहां मौजुद ना था जब हकल के खादिम ये फैसला करने के लिए के मयराम का सरदार कौन हो अपना अपना कलाम फेंक रहे थे, और ना तुम हमें वक्त हाज़िर था जब उनके दरमियान झगड़ा बरपा था +[3:45] और जब फ़रिश्तों ने कहा, "ऐ मरियम! अल्लाह तुझे अपने एक फ़रमान की ख़ुश-ख़बरी देता है, उसका नाम मसीह ईसा इब्न ए मरियम होगा, दुनिया और आख़िरत में मुअज़्ज़ाज़ (अत्यधिक सम्मानित) होगा, अल्लाह के मुकर्रब बंदों में" शुमार किया जाएगा +[3:46] लोगों से बर्तनों में भी कलाम (बात) करेगा और बड़ी उमर को पहुंच कर भी, और वो एक मर्द ए सालीह होगा” +[3:47] ये सुनकर मरियम बोली, “परवरदिगार! मेरे हां बच्चा कहां से होगा, मुझे तो किसी शक्स ने हाथ तक नहीं लगाया'' जवाब मिला, ''ऐसा ही होगा, अल्लाह जो चाहता है अदा करता है। वो जब किसी काम के करने का फैसला फरमाता है तो बस कहता है कि होजा और वो हो जाता है” +[3:48] (फरिश्तों ने फिर सिलसिला ए कलाम में कहा) “और अल्लाह उसे किताब और हिकमत की तालीम देगा, तौरात और इंजील का इल्म सिखाएगा +[3:49] और बानी इस्राइल की तरफ अपना रसूल मुकर्रर करेगा'' (और जब वो बहैसियत ए रसूल बानी इस्राइल के पास आया तो उसने कहा) '' मैं तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास निशानी लेकर आया हूं, मैं तुम्हारे सामने मिट्टी से परिंदे की सूरत में एक मुजस्समा बनाता हूं और उसमें फूंक मारता हूं, वो अल्लाह के हुकुम से परिंदा बन जाता है, मैं अल्लाह के हुकुम से मदार जाद (जन्म से) अंधे और कोढ़ी (कोढ़ी) को अच्छा कर्ता हूं और मुर्दे को जिंदा कर्ता हूं, मैं तुम्हें बताता हूं के तुम क्या खाते हो और क्या अपने घरों में ज़खीरा (स्टोर) रखकर हो। इसमें तुम्हारे लिए काफी निशानी है अगर तुम ईमान लाने वाले हो +[3:50] और मैं हमें तालीम ओ हिदायत की तस्दीक करने वाला बनकर आया हूं जो तौरात में से इस वक्त मेरे जमाने में मौजूद है, और इसलिए आया हूं के तुम्हारे लिए बाज़ उन चीज़ों को हलाल कर दूं जो तुमपर हराम कर दी गई है। देखो मैं तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास निशानी लेकर आया हूं, लिहाजा अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो +[3:51] अल्लाह मेरा रब है और तुम्हारा रब भी, लिहाजा तुम उसी कि बंदगी इख्तियार करो, यही सीधा रास्ता है +[3:52] जब ईसा ने महसूस किया के बानी इसराइल कुफ्र ओ इंकार पर आमादा हैं तो उसने कहा "कौन अल्लाह की राह में मेरा मददगार होता है?" हवारियों (शिष्यों) ने जवाब दिया, "हम अल्लाह के मददगार हैं, हम अल्लाह पर ईमान लाए, गवाह रहो के हम मुसलमान (अल्लाह के आगे सर इताअत झुका देने वाले) हैं +[3:53] मालिक! जो फरमान तू ने नाज़िल किया है हमने उसे मान लिया और रसूल की जोड़ी क़बूल की, हमारा नाम गवाही देने वालों में लिख ले” +[3:54] फिर बनी इस्राइल (मसीह के खिलाफ) खुफिया तद्बीरें करने लगे, जवाब में अल्लाह ने भी अपनी खुफिया तदबीर की और ऐसी तदबीरों में अल्लाह सब से बुरा कर है +[3:55] (वो अल्लाह की खुफिया तदबीर हाय थी) जब उसने कहा, " ऐ ईसा! अब मैं तुझे वापस ले लूंगा और तुझको अपनी तरफ उठा लूंगा और जिन्हों ने तेरा इनकार किया उनसे (यानी इनकी मां से और उनके गांडेय माहोल में उनके साथ रहने से) तुझे पाक कर दूंगा और तेरी जोड़ी बनाने वालों को कयामत तक उन लोगों पर बालादस्त रखूंगा जिन्हों ने तेरा इंकार किया है। फिर तुम सबको आखिर मेरे पास आना है, हम वक्त में उन बातों का फैसला कर देंगे जिनमें तुम्हारे दरमियान इख्तिलाफ हुआ है +[3:56] जिन लोगों ने कुफ्र ओ इंकार की रवीश इख्तियार की है उनहें दुनिया। और आखिरी दोनो में साख सजा दूंगा और वो कोई मददगार न पायेगा +[3:57] और जिन्होन ने ईमान और नीक अमल का रवैय्या इख्तियार किया है उनको अजर पूरे पूरे दे दिये जायेंगे, और खूब जान ले के जालिमों से अल्लाह हरगिज मुहब्बत नहीं करता'' +[3:58] ये आयत और हिकमत से लबरेज़ तज़किरे हैं जो हम तुम्हें सुना रहे हैं +[3:59] अल्लाह के नाज़दीक ईसा की मिसाल आदम की सी है के अल्लाह ने उसे मिट्टी से पैदा किया और हुकुम दिया के होजा और वो होगा +[3:60] ये असल हकीकत है जो तुम्हारे रब की तरफ से बताई जा रही है और तुम उन लोगों में शामिल न हो जो इसमें शक करते हैं +[3:61] ये इल्म आ जाने के बाद अब कोई उस मामले में तुमसे झगड़ा करे तो (ऐ मुहम्मद)! उसे कहो, "आओ हम और तुम खुद भी आ जाएं और अपने-अपने बाल बच्चों को भी ले आएं और खुदा से दुआ करें के जो झूठा हो उसपर खुदा की लानत हो" +[3:62] ये बिल्कुल सही वाकियात हैं, और हकीकत ये है के अल्लाह के सिवा कोई खुदा-वंद नहीं है, और वो अल्लाह ही की हस्ती है जिसकी ताक़त सबसे अच्छी है और जिसकी हिकमत निज़ाम-ए-आलम में काम फरमा है +[3:63] पास अगर ये लोग (इस शर्त पर मुक़ाबले में आने से) मुह मोअदें तो (उनका मुफ़सीद होना साफ़ खुल जाएगा) और अल्लाह तो मुफ़सीदों के हाल से वाकिफ ही है +[3:64] कहो, "ऐ एहले किताब! आओ एक ऐसी बात की तरफ जो हमारे और तुम्हारे दरमियान यक्सान हैं, ये के हम अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी ना करें, उसके साथ किसी को शरीक ना ठहरें, और हम में से कोई अल्लाह के सिवा किसी को अपना रब ना बना ले” इस दावत को क़बूल करने से अगर वो मुहब्बत तो साफ कहदो के गवाह रहो, हम तो मुस्लिम (सिर्फ खुदा की बंदगी ओ इताअत करने वाले) हैं +[3:65] ऐ एहले किताब! तुम इब्राहिम के बारे में हमसे क्यों झगड़ा करते हो? तौरात और इंजील तो इब्राहीम के बाद ही नाज़िल हुई है, फिर क्या तुम इतनी बात भी नहीं समझते +[3:66] तुम लोग जिन चीज़ों का इल्म रखते हो उनमें तो खूब बहसें (तर्क) कर चुके, अब उन मामले में बेहस क्यों करने चले हो जिनका तुम्हारे पास कुछ है भी इल्म नहीं .अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते +[3:67] इब्राहीम ना यहुदी था ना इसायी, बल्के वो एक मुस्लिम था, यक्सू था और वो हरगिज मुशीरकोन में से ना था +[3:68] इब्राहीम से निस्बत रखने का सबसे ज्यादा हक अगर किसी को पहुंचता है तो उन लोगों को pahunchta है जिन्हों ने उसकी जोड़ी की और अब ये नबी और उसके मन्ने वाले इस निस्बत के ज़्यादा हक़दार हैं। अल्लाह सिर्फ उनकी का हमी ओ मददगार है जो ईमान रखते हैं +[3:69] (ऐ ईमान लाने वालों) एहले किताब में से एक गिरह चाहता है कि कोई तरह तुम्हें राह ए रास्ते से हटा दे, हलांके दर हकीकत वो अपने सिवा किसी को गुमराह करने में नहीं डाल रहे हैं मगर उन्हें इसका शूर नहीं है +[3:70] ऐ एहले किताब! क्यों अल्लाह की आयत का इन्कार करते हो हलाँके तुम खुद इनका मुशाहिदा कर रहे हो +[3:71] ऐ एहले किताब! क्यों हक़ को बातिल का रंग चढ़ा कर मुश्तबा (भ्रमित) बनाते हो? क्यों जानते हैं बूझते हक़ को झुठलाते हो +[3:72] एहले किताब में से एक गिरोह कहता है कि इस नबी के मन्ने वालों पर जो कुछ नाज़िल हुआ है उसपर सुबह ईमान लाओ और शाम को इस तरह इनकार करदो, शायद इस तरकीब से ये लोग अपने ईमान से फिर जाएं +[3:73] नीज़ ये लोग आपस में कहते हैं कि अपने मजहब वाले के सिवा किसी की बात ना मानो। ऐ नबी! इनसे कहदो के, “असल में हिदायत तो अल्लाह की हिदायत है और ये उसी का दिन है के किसी को वही कुछ दे दिया जाए जो कभी तुमको दिया गया था, हां ये के दूसरे को तुम्हारे रब के हुजूर पेश करने के लिए तुम्हारे खिलाफ कोई हुज्जत मिल जाए।” नबी)! इनसे कहो के, "फज़ल ओ शर्फ अल्लाह के इख्तियार में है, जिसे चाहे अता फरमाये। वो वसीह उल नजर है और सब कुछ जानता है +[3:74] अपनी रहमत के लिए जिसको चाहता है मखसूस करता है और उसका फजल बहुत बुरा है।" +[3:75] एहले किताब में कोई तो ऐसा है के अगर तुम उसके एत्माद (भरोसे) पर माल ओ दौलत का एक धैर्य भी देदो तो वो तुम्हारा माल तुम्हें अदा कर देगा, और किसी का हाल ये है के अगर तुम एक दिन के मामले में भी उसपर भरोसा करो तो वो अदा ना करेगा, इल्ला ये के तुम उसके सर पर सवार हो जाओ, उनकी इस अखलाकी हालत का सबाब ये है के वो कहते हैं, "उम्मियों (गैर यहूदी लोगों) के मामले में हमपर कोई मवाज़ख़्ज़ा (दोष) नहीं है" और ये बात वो मेहज़ झूठ ग़द कर अल्लाह की तरफ मंसूब करते हैं, हालांके उन्हें मालूम है के अल्लाह ने ऐसी कोई बात नहीं फरमायी है +[3:76] +[3:77] रहे वो लोग जो अल्लाह के अहद और अपने कसमों को थोड़ी कीमत पर बेच देते हैं, उनके लिए आख़िरत में कोई हिसा नहीं, अल्लाह कयामत के रोज़ ना उनसे बात करेगा ना उनकी तरफ देखेगा और ना उन्हें पाक करेगा, उनके लिए तो सच दर्दनाक सज़ा है +[3:78] उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो किताब पढ़ते हुए इस तरह ज़ुबान का उल्टा फेर करते हैं कि तुम समझो जो कुछ वो पढ़ रहे हैं वो किताब ही की इबारत है, हलांके वो किताब की इबारत नहीं होती। वो कहते हैं के ये जो कुछ हम पढ़ रहे हैं ये खुदा की तरफ से है, हलांके वो खुदा की तरफ से नहीं होता। वो जान बूझ कर झूठ बात अल्लाह की तरफ मंसूब करते हैं +[3:79] किसी इंसान का ये काम नहीं है के अल्लाह तो उसको किताब और हुकुम और नबुवत अता फरमाये और वो लोगों से कहे के अल्लाह के बजाए तुम मेरे बंदे बन जाओ। वो तो यही कहेगा के सच्चे रब्बानी बानो जैसा के इस किताब की तालीम का तकाजा है जिसे तुम पढ़ते और पढ़ते हो +[3:80] वो तुमसे हरगिज ये ना कहेगा के फरिश्तों को या पैगम्बरों को अपना रब बना लो, क्या ये मुमकिन है के एक नबी तुम्हें कुफ्र का हुकुम दे जब के तुम मुस्लिम हो +[3:81] याद करो, अल्लाह ने पैगंबर से अहद लिया था के, "आज हमने तुम्हें किताब और हिकमत ओ दानिश से नवाजा है, कल अगर कोई दूसरा रसूल तुम्हारे पास उसी तालीम की तस्दीक करता हुआ आए जो पहले से तुम्हारे पास मौजुद है, तो तुमको उसपर ईमान लाना होगा और उसकी मदद करनी होगी।" उन्होन ने कहा हन हम इक़रार करते हैं, अल्लाह ने फरमाया, "अच्छा तो गवाह रहो और मैं भी तुम्हारे साथ गवाह हूं +[3:82] इसके बाद जो अपने अहद से फिर जाए वही फासिक है" +[3:83] अब क्या ये लोग अल्लाह की इताअत का तरीक़ा (दीन अल्लाह) छोड़ कर कोई और तरीक़ा चाहते हैं? हलाँके आसमान ओ ज़मीन की सारी चीज़ें चार ओ नाचार (इच्छा से या अनिच्छा से) अल्लाह ही की तबेह फ़रमान (मुस्लिम) हैं और उसकी तरफ सबको पलटना है +[3:84] (ऐ नबी)! कहो के “हम अल्लाह को मानते हैं, उस तालीम को मानते हैं जो हमपर नाज़िल की गई है, उन तालीम को भी मानते हैं जो इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब पर नाज़िल हुई थी और उन हिदायत पर भी ईमान रखते हैं जो मूसा और ईसा और दूसरे पैगम्बरों को उनके रुब की तरफ से दी गई। हम इनके दरमियान फ़र्क़ नहीं करते और हम अल्लाह के ताबे फ़रमान (मुस्लिम) हैं” +[3:85] इस फ़रमाबरदारी (इस्लाम) के सिवा जो शक्स कोई और तरीक़ा इख्तियार करना चाहे उसका वो तरीक़ा हरगिज़ क़बूल न किया जाएगा और आख़िरत में वो नाकाम ओ। ना-मुराद रहेगा +[3:86] कैसा हो सकता है अल्लाह उन लोगों ओ हिदायत बख्शे जिन्हों ने नियामत ए ईमान पा लेने के बाद फिर कुफ्र इख्तियार किया हलांके वो खुद इस बात पर गवाही दे चुके हैं के ये रसूल हक़ पर है और इनके पास रोशन निशानियां भी आ चुकी हैं, अल्लाह ज़ालिमों को तो हिदायत नहीं दीया +[3:87] उनके ज़ुल्म का सही बदला यहीं है के बेपरवाह अल्लाह और फ़रिश्तों और तमाम इंसानों की तरह फिटकर है +[3:88] इसी हालात में वो हमेशा रहेंगे, ना उनकी सज़ा में तख़्फ़िफ़ (कामी) होगी और ना उन्हें मोहलत दी जाएगी +[3:89] अलबत्ता वो लोग बच जायेंगे जो इसके बाद तौबा करके अपने तर्ज़ ए अमल की इस्लाह कार्लें, अल्लाह बख्शने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[3:90] मगर जिन लोगों ने ईमान लेन के बाद कुफ़्र इख्तियार किया फिर अपने कुफ़्र में बढ़ते चले गए उनकी तौबा भी क़बूल न होगी, ऐसे लोग तो पक्के गुमराह हैं +[3:91] यकीन रख्खो, जिन लोगों ने कुफ्र इख्तियार किया और कुफ्र ही की हालत में जान दी उनमें से कोई अगर अपने आप को सज़ा से बचाने के लिए रूह-ए-ज़मीन भर कर भी सोना (सोना) फ़िदे (प्रायश्चित) में दे तो उसे क़बूल न किया जाएगा, ऐसे लोगों के लिए दर्दनक सजा तय है और वो अपना कोई मददगार ना पाएगा +[3:92] तुम नेकी को नहीं पाहुंच सकते जब तक के अपनी वो चीज (खुदा की राह में) खर्च ना करो जिन्हे तुम अजीज रखते हो, और जो कुछ तुम खर्च करोगे अल्लाह उसे खबर हो ना होगा +[3:93] खाने की ये सारी चीज़ें (जो शरीयत ए मुहम्मदी में हलाल हैं) बानी इसराइल के लिए भी हलाल थी, अलबत्ता बाज़ चीज़े ऐसी थी जिनहें तौरात के नाज़िल किये जाने से पहले इज़राइल (याकूब) ने खुद अपने ऊपर हराम करलिया था। उनसे कहो, अगर तुम (अपने ऐतराज में) सच्चे हो तो लाओ तौरात और पेश करो उसकी कोई इबारत +[3:94] इसके बाद भी जो लोग अपनी झूठी घड़ी हुई बातें अल्लाह की तरफ मंसूब करते रहें वही दर-हकीकत जालिम हैं +[3:95] कहो, अल्लाह ने जो कुछ फरमाया है सच फरमाया है। तुमको यक्सू होकर इब्राहिम के तरीक़े की जोड़ी करनी चाहिए, और इब्राहिम शिर्क करने वालों में से ना था +[3:96] बेशक सबसे पहली इबादत-गाह जो इंसानों के लिए तामीर हुई वो वही है जो मक्का में वाक़े है, उसको ख़ैर ओ बरकत दी गई थी और तमाम जहां वालों के लिए मरकज़ ए हिदायत बनाया गया था +[3:97] इस्मेन खुली हुई निशानियां हैं, इब्राहिम का मुकाम ए इबादत है, और इसका हाल ये है के जो इस्मेन दखिल हुआ मामून (सुरक्षित) हो गया। लोगों पर अल्लाह का ये हक़ है कि जो इस घर तक पहुंचें कि इस्तितात रखे हो वो इसका हज करे, और जो कोई इस हुकुम की जोड़ी से इंकार करे तो उसे मालूम हो जाना चाहिए के अल्लाह तमाम दुनिया वालों से बे-नियाज़ है +[3:98] कहो, ऐ एहले किताब! तुम अल्लाह की बातें मन से क्यों कहते हो? जो हरकतें तुम कर रहे हो अल्लाह सब कुछ देख रहा है +[3:99] कहो, ऐ एहले किताब! ये तुम्हारी क्या रवानी है के जो अल्लाह की बात मानता है उसे भी तुम अल्लाह के रास्ते से रोकते हो और चाहते हो के वो टेढ़ी राह चले, हलांके तुम खुद (इसकी राह ए रास्ते होने पर) गवाह हो। तुम्हारी हरकतों से अल्लाह गाफिल नहीं है +[3:100] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुमने एहले किताब में से एक गिरोह की बात मानी तो ये तुम्हारे ईमान से फिर कुफ्र की तरफ फिर ले जाएंगे +[3:101] तुम्हारे लिए कुफ्र की तरफ जाने का अब क्या मौका बाकी है जब तुमको अल्लाह की आयत सुनाई जा रही है और तुम्हारे दरमियान उसका रसूल मौजूद है? जो अल्लाह का दामन मज़बूती के साथ थमेगा वो ज़रूर राह ए रास्ते पाएगा +[3:102] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो जैसा के उसे डरने का हक़ है, तुमको मौत ना आए मगर इस हाल में तुम मुस्लिम हो +[3:103] सब मिलकर अल्लाह की रस्सी को मज़बूत पकड़ लो और तफ़रक़े (फूट डालो) में ना पड़ो। अल्लाह के हमें एहसान को याद रखो जो उसने तुम पर किया है, तुम एक दूसरे के दुश्मन थे, उसने तुम्हारा दिल जोड़ दिया और उसके फजल ओ करम से तुम भाई-भाई बन गए। तुम आग से भरे हुए एक गधे (गड्ढे) के किनारे खड़े थे, अल्लाह ने तुमको उसे बचा लिया, इस तरह अल्लाह अपनी निशानियां तुम्हारे सामने रोशन करता है शायद इन आलमतों से तुम अपने फलाह का सीधा रास्ता नजर आ जाओ +[3:104] तुम में कुछ लोग तो ऐसे जरूर हाय रहने चाहिए जो नेकी की तरफ बुलाएं, भलाई का हुकुम दें, और बुराइयों से रोते रहें, जो लोग ये काम करेंगे वही फलाह पाएंगे +[3:105] कहीं तुम उन लोगों की तरफ ना हो जाना जो फिरकों में बत्त गए और खुली खुली वजह हिदायत पाने के बाद फिर इख्तिलाफात में मुब्तिला हुए। जिन्हों ने ये रवीश इख्तियार की वो रोज सख्त सजा पाएंगे +[3:106] जबके कुछ लोग सुरखरू (उज्ज्वल) होंगे और कुछ का मुंह काला होगा, जिनका मुंह काला होगा (उन्हें कहा जाएगा के) नियामत ए ईमान पाने के बाद भी तुमने काफिराना रवैय्या इख्तियार किया? अच्छा तो अब इस कुफ़्रान ए नियामत के सिली में अज़ाब का मजा चक्खो +[3:107] रहे वो लोग जिनके चेहरे रोशन होंगे तो उनको अल्लाह के दामन ए रहमत में जगह मिलेगी और हमेशा वो इसी हालात में रहेंगे +[3:108] ये अल्लाह के इरशाद हैं जो हम तुम्हें ठीक ठीक सुना रहे हैं क्योंकि अल्लाह दुनिया वालों पर ज़ुल्म करने का कोई इरादा नहीं रखता +[3:109] ज़मीन ओ आसमान की सारी चीज़ों का मालिक अल्लाह है और सारे ममलात अल्लाह ही के हुज़ूर पेश होते हैं +[3:110] अब दुनिया में वो बेहतरीन गिरो ​​तुम हो जैसे इंसानों की हिदायत ओ इस्लाह के लिए मैदान में लाया गया है, तुम नेकी का हुकुम देते हो, बुरी (बुरायी) से रोते हो और अल्लाह पर ईमान रखते हो। ये एहले किताब ईमान लाते तो इन्हीं के हक में बेहतर था, अगर इनमें कुछ लोग इमानदार भी पाए जाते हैं मगर इनके बेहतर (अक्सर) अफ़राद नफ़रमान हैं +[3:111] ये तुम्हारा कुछ बिगाड़ नहीं सकता, ज़्यादा से ज़्यादा बस कुछ सता सकता है, अगर ये तुमसे लड़ेंगे तो मुकाबले में पीट दिखाएंगे, फिर ऐसी बेबस होंगे के कहीं से इनको मदद ना मिलेगी +[3:112] ये जहां भी पये गए इनपर जिल्लत की मार ही पड़ी, कहीं अल्लाह के ज़िम्मे या इंसान के ज़िम्मे में पनाह मिल गई तो ये और बात है, ये अल्लाह के गजब में घिर चुके हैं, इनपर मोहताजी ओ मगलूबी मुसल्लत कर दी गई है (अल्लाह का प्रकोप और अपमान है) उन पर अटक गया), और ये सब कुछ सिर्फ वजह से हुआ है के ये अल्लाह की आयत से कुफ्र करते रहे और इन्होन ने पैगम्बरों को ना-हक़ क़तल किया। ये इनकी नफ़रमानियों और ज़्यादाातियों का अंजाम है +[3:113] मगर सारे एहले किताब यक़सान नहीं हैं, इनमें कुछ लोग ऐसे भी हैं जो राह ए रास्ते पर क़याम हैं, रातों को अल्लाह की आयत पढ़ते हैं और उसके आगे सजदारेज़ होते हैं +[3:114] अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखते हैं, नेकी का हुकुम देते हैं, बुराइयों से रोते हैं और भलाई के कामों में सरगर्म रहते हैं, ये साले लोग हैं +[3:115] और जो नेकी भी ये करेंगे उसकी ना-क़ादरी ना की जाएगी, अल्लाह परहेज़गार लोगों को खूब जानता है +[3:116] रहे वो लोग जिन्होन ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया तो अल्लाह के मुकाबले में उनको ना उनका माल कुछ काम देगा ना औलाद, वो तो आग में जाने वाले लोग हैं और आग ही में हमेशा रहेंगे +[3:117] जो कुछ वो अपनी इस दुनिया की जिंदगी में खर्च कर रहे हैं उसकी मिसाल हमें हवा की सी है जिसमें पाला हो (ठंढ के साथ) और वो उन लोगों की खेती पर चले जिन्होन ने अपने ऊपर आप जुल्म किया है और उसे बरबाद करके रखदे, अल्लाह ने इनपर जुल्म नहीं किया, दरहकीकत ये खुद अपने ऊपर जुल्म कर रहे हैं +[3:118] ऐ लोगन जो इमान लाए हो, अपनी जमात के लोगों के सिवा दूसरे को अपना राज़दार ना बनाओ, वो तुम्हारी बर्बादी के किसी मौके से फ़ायदा उठाने में नहीं छूटते, तुम्हें जिस चीज़ से नुक्सान मिले वही उनको मेहबूब है, उनके दिल का बुज़ुर्ग उनके मुँह से निकला पढ़ता है और जो कुछ वो अपने सीने में छुपाए हुए हैं वो इसी शेडेड-टार है। हमने तुम्हें साफ-साफ हिदायत दे दी है, अगर तुम अक्ल रखते हो (तो उनसे तालुक रखने में एहतियत बरतोगे) +[3:119] तुम उन्हें मुहब्बत रखते हो मगर वो तुमसे मुहब्बत नहीं रखते, हलांके तुम तमाम कुतुब ए आसमानी को मानते हो। जब वो तुमसे मिलते हैं तो कहते हैं कि हमने भी (तुम्हारे रसूल और तुम्हारी किताब को) मान लिया है, मगर जब जुदा होते हैं तो तुम्हारे खिलाफ उनके गाने या गजब का ये हाल होता है कि अपनी उंगलियां चबाने लगते हैं। उनसे कहदो के अपने गुस्से में आप जल मारो, अल्लाह दिलों के छुपे हुए राज़ तक जानता है +[3:120] तुम्हारा भला होता है तो उनको बुरा मालूम होता है, और तुमपर कोई मुसीबत आती है तो ये खुश होते हैं, मगर इनकी कोई तदबीर तुम्हारे खिलाफ कारगर नहीं हो सकती बशरथ ये के तुम सब्र से काम लो और अल्लाह से डर कर काम करते रहो। जो कुछ ये कर रहा है अल्लाह उसपर हावी है +[3:121] (ऐ पैगम्बर! मुसलमानों के सामने हमें मौके का जिक्र करो) जब तुम सुबह सवेरे अपने घर से निकले थे और (उहुद के मैदान में) मुसलमानों को जंग के लिए जा-बाजा मामूर (ईमानवालों को युद्ध की कतार में खड़ा कर दिया) कर रहे थे, अल्लाह सारी बातें सुनते हैं और वो निहायत बाख़बर है +[3:122] याद करो जब तुम में से दो गिरो ​​बुज़दिली दिखाने पर आमादा हो गए थे, हलाँके अल्लाह उनकी मदद पर मौजूद था और मोमिनों को अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए +[3:123] आख़िर इसी पहले जंग ए बद्र में अल्लाह तुम्हारी मदद कर चूका था, हलाँके हमें वक्त तुम बहुत कमज़ार थे, लिहाज़ा तुमको चाहिए के अल्लाह की नाशुक्र से बचो, उम्मीद है के अब तुम शुक्रगुज़ार बनोगे +[3:124] याद करो जब तुम मोमिनो से कह रहे थे, “क्या तुम्हारे लिए ये बात काफ़ी नहीं के अल्लाह तीन हज़ार फ़रिश्ते उतार कर तुम्हारी मदद करेगी?” +[3:125] बेश्क, अगर तुम सब्र करो और खुदा से डरते हुए काम करो तो जिस आन दुश्मन तुम्हारे ऊपर चढ़ कर आएंगे उसकी आन तुम्हारा रब (तीन हजार नहीं) पांच हजार साहब ए निशान फरिश्तों से तुम्हारी मदद करेगा +[3:126] ये बात अल्लाह ने तुम्हें दी है इसलिए बता दी है कि तुम खुश हो जाओ और तुम्हारे दिल मुतमीन हो जाएं, फतह ओ नुसरत जो कुछ भी है अल्लाह की तरफ से है जो बड़ी कुव्वत वाला और दाना ओ बीना है (सर्व-शक्तिशाली, सर्व-बुद्धिमान) +[3:127] (और ये मदद वो तुम्हें इसलिए देगा) ता-के कुफ्र की राह चलने वालों का एक बाज़ू काट दे, या उनको ऐसी ज़लील शिकस्त दे के वो ना-मुरादी के साथ पसंद हो जाएँ +[3:128] (ऐ पैगम्बर) फैसले के इख्तियारात में तुम्हारा कोई हिसा नहीं, अल्लाह को इख्तियार है चाहे उन्हें माफ करे चाहे सज़ा दे, क्यूँके वो ज़ालिम हैं +[3:129] ज़मीन और आसमान में जो कुछ है उसका मालिक अल्लाह है, जिसको चाहे बख्श दे और जिसको चाहे अज़ाब दे, वो माफ़ करने वाला और रहीम है +[3:130] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ये बढ़ता और चढ़ता सूद (सूदखोरी) खाना छोड़ दो और अल्लाह से डरो, उम्मीद है के फलाह पाओगे +[3:131] हमसे आग से बचो जो काफिरों के लिए मुहय्या की गई है +[3:132] और अल्लाह और रसूल का हुकुम मान लो, तवक्कू है के तुमपर रहम किया जाएगा +[3:133] दाऊद कर चलो उस राह पर जो तुम्हारे रब की बख्शीश और उस पर जन्नत की तरफ जाती है जिसकी वुसअत (विशालता) ज़मीन और आसमानो जैसी है, और वो उन खुदा-तरस लोगों के लिए मुहैया की गई +[3:134] जो हर हाल में अपने माल खर्च करते हैं ख़्वाह बढ़ हाल होन या ख़ुश हाल, जो गुस्से को पी जाते हैं और दूसरों के कसूर माफ करते हैं, ऐसे लोग अल्लाह को बहुत पसंद हैं +[3:135] और जिनका हाल ये है कि अगर कभी कोई फ़हाश काम उनसे सरज़द हो जाता है या किसी गुनाह का इर्तिक़ाब करके वो अपने ऊपर ज़ुल्म कर बैठते हैं तो मान अल्लाह उन्हें याद आ जाता है और उसे वो अपने कसूरों की माफ़ी चाहते हैं, क्योंकि अल्लाह के सिवा और कौन है जो गुनाह माफ़ कर सकता है और वो दीधा ओ दानिस्ता (जानबूझकर कायम रहेगा) अपने किये पर इसरार नहीं करते +[3:136] ऐसे लोगों की जजा उनके रब के पास ये है के वो उनको माफ़ कर देगा और ऐसे बाघों में उन्हें डॉक्टर करेगा जिनके बारे में आला नेहरेन बेथी होगी और वहां वो हमेशा रहेंगे। कैसा अच्छा बदला है नई अमल करने वालों के लिए +[3:137] तुमसे पहले बहुत से दौर गुजर चुके हैं, ज़मीन में चल फिर कर देखलो के उन लोगों का क्या अंजाम हुआ जिन्होन ने (अल्लाह के एहकाम ओ हिदायत को) झूठलाया +[3:138] ये लोगों के लिए एक साफ और सारी तम्बीह है और जो अल्लाह से डरता हूं उनके लिए हिदायत और हिदायत +[3:139] दिल शिकस्त ना हो, गम ना करो, तुम ही गालिब रहोगे अगर तुम मोमिन हो +[3:140] क्या वक्त अगर तुम्हें चोट लगी है तो इसे पहले ऐसी ही चोट तुम्हारे मुखालिफ फ़रीक़ को भी लग चुकी है। ये तो ज़माने के नशीब ओ फ़राज़ हैं जिनमें हम लोगों के दरमियान गर्दिश देते रहते हैं, तुम ये वक्त इस तरह लाया गया के अल्लाह देखना चाहता था के तुम में सच्चे मोमिन कौन हैं, और उन लोगों को जपना चाहता था जो वकायी (रास्ती के) गवाही हो, क्योंके ज़ालिम लोग अल्लाह को पसंद नहीं हैं +[3:141] और वो इस आजमाइश के ज़रीए से मोमिनो को अलग जप (शुद्ध) कर काफिरों की सरकोबी (ब्लॉट आउट) करना चाहता था +[3:142] क्या तुमने ये समझ रखा है के यूं ही जन्नत में चले जाओगे हलांके अभी अल्लाह ने ये तो देखा ही नहीं के तुम में कौन वो लोग हैं जो उसकी राह में जानेन लड़ने वाले और उसकी खातिर सब्र करने वाले हैं +[3:143] तुम तो मौत की तमन्नाएं कर रहे थे! मगर ये हमें वक्त की बात थी जब मौत सामने ना आई थी, लो अब वो तुम्हारे सामने आ गई और तुमने उसकी आंखें देख लिया +[3:144] मुहम्मद इसके सिवा कुछ नहीं के बस एक रसूल हैं, उनसे पहले और रसूल भी गुजर चुके हैं। फिर क्या अगर वो मर जाए या क़त्ल कर दी जाए तो तुम लोग उल्टे पांव फिर जाओगे? याद रक्खो! जो उल्टा फिर गया वो अल्लाह का कुछ नुक्सान ना करेगा, अलबत्ता जो अल्लाह के शुक्रगुज़ार बंदे बनकर रहेंगे उनको वो इसकी जजा देगा +[3:145] कोई ज़ि रूह अल्लाह के इज़ान के बिना नहीं मर सकता। मौत का वक्त तो लिखा हुआ है, जो शक्स सवाब ए दुनिया के इरादे से काम करेगा उसको हम दुनिया ही में से देंगे, और जो सवाब ए आखिरी के इरादे से काम करेगा वो आखिरी का सवाब पाएगा और शुक्र करने वालों को हम उनकी जजा जरूर अता करेंगे +[3:146] इसके पहले कितने ही नबी ऐसे गुजर चुके हैं जिनके साथ मिलकर बहुत से खुदा परस्तों ने जंग की, अल्लाह की राह में जो मुसिबतें उन्पर पढ़ीं उनसे वो दिल सीखा नहीं हुए, उन्हें कामजोरी नहीं दिखाई, वो (बातिल के आगे) सरनागों (अपशब्द) नहीं हुए, ऐसे ही साबिरों को अल्लाह पसंद करता है +[3:147] उनकी दुआ बस ये थी के "ऐ हमारे रब! हमारी गलतियों और कहानियों से बेहतर फरमा, हमारे काम में तेरे हुदूद से जो कुछ तजावुज हो गया हो उसे माफ करदे, हमारे कदम जमा दे और काफिरों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर।” +[3:148] आख़िर ए कार अल्लाह ने उनको दुनिया का सवाब भी दिया और इसे बेहतर सवाब ए आख़िरत भी आता किया। अल्लाह को ऐसे ही नेक अमल लोग पसंद हैं +[3:149] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम उन लोगों के इशारों पर चलोगे जिन्होन ने कुफ्र की राह इख्तियार की है तो वो तुमको उल्टा फेर ले जाएंगे और तुम ना-मुराद हो जाओगे +[3:150] (उनकी बातें गलत हैं) हकीकत ये है के अल्लाह तुम्हारा हमी ओ मददगार है और वो बेहतरीन मदद करने वाला है +[3:151] अनकारीब वो वक्त आने वाला है जब हम मुनकिरीन ए हक के दिलों में रोब (आतंक/डर) बिठा देंगे, इसली के अनहोन ने अल्लाह के साथ उनको खुदाई में शरीक ठहराया है जिनके शरीक होने पर अल्लाह ने कोई सनद नाज़िल नहीं की, उनका आखिरी ठिकाना जहन्नुम है और बहुत ही बुरी है वो क़याम-गाह जो उन ज़ालिमों को नसीब होगी +[3:152] अल्लाह ने (ताईद ओ नुसरत का) जो वादा तुमसे किया था वो तो उसने पूरा करदिया, इब्तेदा में उसके हुकुम से तुम उनको कत्ल कर रहे थे मगर जब तुमने कमजोरी दिखाई और अपने काम में बहम इख्तिलाफ किया, और जून के वो चीज अल्लाह ने तुम्हें दिखाई जिसकी मुहब्बत में तुम गिरफ्तार थे (यानी माल ओ गनीमत) तुम अपने सरदार के हुकुम की खिलाफत वारज़ी कर बैठे हैं इसलिए कि तुम में से कुछ लोग दुनिया के तालिब थे और कुछ आख़िरत की ख्वाहिश रखते थे, तब अल्लाह ने तुम्हें काफिरों के मुक़ाबले में पसंद कर दिया ता-के तुम्हारी आज़माइशें और हक़ ये है के अल्लाह ने फिर भी तुम्हें माफ़ ही करदिया क्यूँके मोमिनो पर अल्लाह बड़ी नज़र ए इनायत रखता है +[3:153] याद करो जब तुम भागे चले जा रहे थे, किसी की तरफ पलट कर देखने तक का होश तुम्हें ना था, और रसूल तुम्हारे पीछे तुमको पुकार रहा था हमारा वक्त तुम्हारी इस रवीश का बदला है, अल्लाह ने तुम्हें ये दिया के तुमको रांझ पर रांझ दिए ता-के आंदा के लिए तुम्हें ये सबक मिले के जो कुछ तुम्हारे हाथ से जाए या जो मुसीबत तुम्पर नाज़िल हो उसपर मालुल (शोक) ना हो, अल्लाह तुम्हारे सब अमल से बख़बर है +[3:154] इस ग़म के बाद फिर अल्लाह ने तुम में से कुछ लोगों पर ऐसी इत्मिनान की सी हालत तारी करदी के वो उगने लगे, मगर एक दूसरा गिरो ​​जिसके लिए सारी एहमियत बस अपने मफ़ाद ही की थी, अल्लाह के मुतालिक तरह तरह के जहिलाना गुमान करने लगा जो सरसर ख़िलाफ ए हक था, ये लोग अब कहते हैं के, "क्या काम के चलने में हमारा भी कोई हिस्सा है?" उनसे कहो, (किसी का कोई हिसा नहीं) इस काम के सारे इख्तियारात अल्लाह के हाथ में हैं। "दरअसल ये लोग अपने दिलों में जो बात छुपाए हुए हैं उसे तुमपर जाहिर नहीं करते, इनका असल मतलब ये है के," अगर (क़यादत के) इख्तियारत में हमारा कुछ हिसाब होता तो यहां हम ना मारे जाते।" इंसे कहदो के, "अगर तुम अपने घरों में भी होते तो जिन लोगों की मौत लिखी हुई थी वो खुद अपने खून-गाहों की तरफ निकल आते थे'', और ये मामला जो पेश आया, ये तो इसलिए था के जो कुछ तुम्हारे सीने में पोशीदा (छिपा हुआ) है अल्लाह उसे आजमा ले और जो खोट तुम्हारे दिलों में है उसे चांट दे। अल्लाह दिलों का हाल खूब जानता है +[3:155] तुम में से जो लोग मुकाबला के दिन पीठ फेर गए थे, उनकी इस लग्ज़िश का सबब ये था के उनकी बाज़ कमज़ोरियों की वजह से शैतान ने उन्हें कदम डगमगा दिया था। अल्लाह ने उन्हें माफ कर दिया, अल्लाह बहुत दरगुज़ार करने वाला और बर्दबार (सर्व सहनशील) है +[3:156] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, काफिरों की सी बातें ना करो जिनके अज़ीज़ ओ अक़रीब अगर कभी सफ़र पर जाते हैं या जंग में शरीक होते हैं (और वहां किसी हादसे से) दो-चार हो जाते हैं) तो वो कहते हैं के अगर वो हमारे पास होते तो ना मारे जाते और ना क़त्ल होते। अल्लाह क़िस्म की बातों को उनके दिलों में हसरत ओ एंडो का सबाब बना देता है, वरना दर-असल मरने और जेलाने वाला तो अल्लाह ही है और तुम्हारी तमाम हरकत पर वही निगरानी है +[3:157] अगर तुम अल्लाह की राह में मारे जाओ या मर जाओ तो अल्लाह की जो रहमत और बख्शीश है तुम्हारे हिस्से में आएगी वो उन सारी चीजों से ज्यादा बेहतर है जिन्हें ये लोग जमा करते हैं +[3:158] और ख्वाह तुम मारो या मारे जाओ बहार-हाल तुम सबको सिमत कर जाना अल्लाह ही की तरफ है +[3:159] (ऐ पैगम्बर) ये अल्लाह की बड़ी रहमत है के तुम इन लोगों के लिए बहुत नरम मिजाज पैदा हुए हो, वरना अगर कहीं तुम तुंध-खु (कठोर) और संघ दिल होते तो ये सब तुम्हारे गिर्द ओ पेश से छठ जाते। इनके कसूर माफ़ करदो, इनके हक़ में दुआ-ए-मगफिरत करो, और दीन के काम में इनको भी शरीक ए मशवरा रक्खो। फिर जब तुम्हारा आजम (संकल्प) किसी राय पर मुस्तहकम हो जाए तो अल्लाह पर भरोसा करो, अल्लाह को वह लोग पसंद हैं जो उसके भरोसे पर काम करते हैं +[3:160] अल्लाह तुम्हारी मदद पर हो तो कोई ताकत तुम पर गालिब आने वाली नहीं, और वो तुम्हें छोड़ दे तो इसके बाद कौन है जो तुम्हारी मदद कर सकता है? पास जो सच्चा मोमिन है उनको अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए +[3:161] किसी नबी का ये काम नहीं हो सकता के वो खयानत कर जाए और जो कोई खयानत करे तो वो अपनी खयानत के साथ कयामत के रोज़ हाज़िर हो जाएगा, फिर हर मुतनफ़िस को उसकी कमाई का पूरा पूरा बदला मिल जाएगा और किसी पर कुछ ज़ुल्म न होगा +[3:162] भला ये कैसा हो सकता है के जो शक्स हमेशा अल्लाह की रज़ा पर चलने वाला हो वो हम शक्स के कहे काम करे जो अल्लाह के गजब में घिर गया हो, और जिसका आखिरी ठिकाना जहन्नुम हो जो बढ़ता है ठिकाना है +[3:163] अल्लाह के नाज़दीक डोनो क़िस्म के आदमियों में बदरजहा फर्क है और अल्लाह सबके आमाल पर नजर रखता है +[3:164] दार-हकीकत एहले ईमान पर अल्लाह ने ये बहुत बड़ा एहसान किया है के उनके दरमियान खुद उन्ही में से एक ऐसा पैगम्बर उठाया जो उसकी आयत उन्हें सुनाता है, उनकी जिंदगी को संवारता है और उनको किताब और ज्ञान (बुद्धि) की तालीम देता है, हलांके इसे पहले यहीं लोग सारे गुमराहियों में पड़े हुए थे +[3:165] और ये तुम्हारा क्या हाल है के जब तुमपर मुसीबत आ पड़ी तो तुम कहने लगे ये कहां से आई? हलाँके (जंग ए बद्र में) इस्से दुगनी (डबल) मुसीबत तुम्हारे हाथों [फ़ारिक ए मुख़ालिफ़ (दुश्मनों) पर] पढ़ चुकी है। (ऐ नबी)! इनसे कहो, ये मुसीबत तुम्हारी अपनी लाई हुई है, अल्लाह हर चीज पर कादिर है +[3:166] जो नुक्सान लड़ायी के दिन तुम्हें पहुंचा वो अल्लाह के इज़ान से था और इसलिए था के अल्लाह देखले तुम में से मोमिन कौन है +[3:167] और मुनाफिक कौन। वो मुनाफिक के जब उनसे कहा गया, आओ अल्लाह की राह में जंग करो या काम अज़ काम (अपने शहर की) मुदाफ़ियात (रक्षा) ही करो, तो कहने लगेंगे अगर हमें इल्म होता के आज जंग होगी तो हम ज़रूर तुम्हारे साथ चलते हैं। ये बात जब वो कह रहे थे हमें वक्त वो ईमान की ब-निस्बत कुफ्र से ज्यादा करीब था। वो अपनी जुबान से वो बातें कहते हैं जो उनके दिलों में नहीं होती, और जो कुछ वो दिलों में छुपते हैं अल्लाह उसे खूब जानता है +[3:168] ये वही लोग हैं जो खुद तो बैठे रहे और उनके जो भाई-बंद लादने गए और मारे गए उनके मुतालिक इन्हों ने केहदिया के अगर वो हमारी बात मान लेते तो ना मारे जाते। इनसे कहो अगर तुम अपने इस क़ौल में सच्चे हो तो खुद तुम्हारी मौत जब आए उसे ताल कर दिखा देना +[3:169] जो लोग अल्लाह की राह में क़त्ल हुए हैं उन्हें मुर्दा ना समझो, वो तो हकीकत में ज़िंदा हैं, अपने रब के पास रिज़्क पा रहे हैं +[3:170] जो कुछ अल्लाह ने अपने फजल से उन्हें दिया है उसपर खुश ओ खुर्रम हैं, और मुतमईन हैं के जो एहले ईमान उनके पीछे दुनिया में रह गए हैं और अभी वहां नहीं पहुंच पाए हैं उनके लिए भी कोई खौफ और रांझ का मौका नहीं है +[3:171] वाह अल्लाह के इनाम और उसके फ़ज़ल पर शादान ओ फ़रहान हैं और उनको मालूम हो चुका है के अल्लाह मोमिनो के अजर को ज़या नहीं करता +[3:172] जिन लोगों ने ज़ख्म खाने के बाद भी अल्लाह और रसूल की पुकार पर लब्बैक कहा (उत्तर दिया) उन में जो अशखास नीकुकर और परहेज़गार हैं उनके लिए बड़ा अजर है +[3:173] और वो जिनसे लोगों ने कहा के, “तुम्हारे ख़िलाफ बड़ी फौजें जमा हुई” हैं, उनसे डरो", तो ये सुनकर उनका ईमान और बढ़ गया (बढ़ा) और उनको ने जवाब दिया के हमारे लिए अल्लाह काफी है और वही बेहतरीन कार्साज है +[3:174] आखिर ए कार वो अल्लाह ताला की नियामत और फज़ल के साथ पलट आए, उनको किसी क़िस्म का ज़रार भी ना चाहिए और अल्लाह कि रजा पर चलने का शरफ भी उन्हें हासिल हो गया, अल्लाह बड़ा फजल फरमाने वाला है +[3:175] अब तुम्हें मालूम होगा के वो दर-असल शैतान था जो अपने दोस्तों से ख्वा-मा-ख्वा (तुमको) डरा रहा था, लिहाजा आइंदा तुम इंसानों से ना डरना, मुझसे डरना अगर तुम हकीकत में साहिब ए ईमान हो +[3:176] (ऐ पैगम्बर) जो लोग आज कुफ्र की राह में बड़ी दौड़ धूप कर रहे हैं उनकी सरगर्मियां तुम्हें दुखी न करें। ये अल्लाह का कुछ भी ना बिगाड़ पाएंगे. अल्लाह का इरादा ये है कि उनके लिए आख़िरत में कोई हिसा ना रखे, और बिल आख़िर उनको सज़ा मिलने वाली है +[3:177] जो लोग ईमान को छोड़ कर कुफ़्र के ख़रिदार बने हैं वो यक़ीनन अल्लाह का कोई नुक्सान नहीं कर रहे हैं। उनके लिए दर्दनक अजब तय्यर है +[3:178] ये धीरे-धीरे जो हम उन्हें दिए जाते हैं इसको ये काफिर अपने हक में बेहतरी ना समझे। हम तो उन्हें इस तरह से ढील दे रहे हैं के ये खूब बार-ए-गुनाह समित लें, फिर उनके लिए सख्त ज़लील करने वाली सजा है +[3:179] अल्लाह मोमिनो को इस हालात में हरगिज़ न रहने देगा जिसमें तुम इस वक्त पे जाते हो। वो पाक लोगों को नापाक लोगों से अलग करके रहेगा। मगर अल्लाह का ये तरीक़ा नहीं है कि तुमको गैब पर मुत्तला करदे। गैब की बातें बताने के लिए तो वो अपने रसूलों में जिसको चाहता है मुंतखब करता है। लिहाजा (उमूर ए गैब के बारे में) अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रक्खो अगर तुम ईमान और खुदा तरसी की रवीश पर चलोगे तो तुमको बड़ा अजर मिलेगा +[3:180] जिन लोगों को अल्लाह ने अपने फजल से नवाजा है और फिर वो भुख्ल (कंजूसी/कठिनाई) से काम लेते हैं वो इस ख़याल में ना रहें के ये बख़ैली उनके लिए अच्छी है। नहीं, ये उनके हक में निहायत बुरी है, जो कुछ वो अपनी कंजूसी से जमा कर रहे हैं वही कयामत के रोज उनके गले का तौक बन जाएगा। ज़मीन और आसमानों की मीरास अल्लाह ही के लिए है और तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसे बाख़बर है +[3:181] अल्लाह ने उन लोगों का क़ौल सुना जो कहते हैं के अल्लाह फ़कीर है और हम गनी हैं। उनकी ये बातें भी हम लिख लेंगे, और इस पहले जो वो पैगम्बरों को ना-हक़ क़त्ल करते रहे हैं वो भी उनके नाम ए अमाल में सब्त है (जब फ़ैसले का वक़्त आएगा उस वक़्त) हम उनसे कहेंगे के लो अब अज़ाब ए जहन्नुम का मजा चक्खो +[3:182] ये तुम्हारे अपने हाथों की कमाई है, अल्लाह अपने बंदों के लिए जालिम नहीं है +[3:183] जो लोग कहते हैं "अल्लाह ने हमको हिदायत करदी है कि हम किसी को रसूल तस्लीम न करें जब तक वो हमारे सामने ऐसी कुर्बानी न करे जिसमें (गाइब से आकार) आग खा ले", उनसे कहो, "तुम्हारे पास मुझसे पहले बहुत से रसूल आ चुके हैं जो बहुत सी" रोशन निशानियां लाए थे और वो निशानियां भी लाए थे जिसका तुम ज़िक्र करते हो (ईमान लाने के लिए ये शर्त पेश करने में) तुम सच्चे हो तो उन रसूलों को तुमने क्यों क़त्ल किया?” +[3:184] अब (ऐ मुहम्मद)!अगर ये लोग तुम्हें झुठलाते हैं तो बहुत से रसूल तुमसे पहले झुटले जा चुके हैं जो खुली खुली निशानियां और सहीफे (ग्रंथ) और रोशनी बख्शने वाली किताबें लाए थे +[3:185] आखिर ए कार हर शक्स को मरना है और तुम सब अपने-अपने पूरे अजर कयामत के रोज़ पाने वाले हो। कमियाब दर-असल वो है जो वहां आतिश ए दोज़ख से बच जाए और जन्नत में दखल कर दिया जाए। राही ये दुनिया, तो ये महज़ एक ज़ाहिर फरेब चीज़ है +[3:186] (मुसलमानो)! तुम्हें माल और जान दोनों की आजमाइशें पेश आकर रहेंगी, और तुम एहले किताब और मुशरिकेन से बहुत से तकलीफ-दे बातें सुनोगे। अगर सब हालात में तुम सब्र और खुदा तरसी की रवीश पर कायम रहो तो ये बदे हौसलों का काम है +[3:187] एहले किताब को वो अहद भी याद दिलाओ जो अल्लाह ने उनसे लिया था के तुमने किताब की तालीमात को लोगों में फैलाना होगा, उनमें पोशीदा रखना नहीं होगा. मगर उनहों ने किताब को पास-ए-पुश्त (पीठ के पीछे) डाल दिया और थोड़ी कीमत पर उसे बेच डाला। कितना बुरा करोबार है जो ये कर रहे हैं +[3:188] तुम उन लोगों को अजब से महफ़ूज़ ना समझो जो अपने कार्टून पर खुश हैं और चाहते हैं कि ऐसे कामों की तारीफ़ उन्हें हासिल हो जो फ़िलहाल उन्होन ने नहीं किया है। हकीकत में उनके लिए दर्दनाक सजा तय्यार है +[3:189] जमीन और आसमान का मालिक अल्लाह है और उसकी कुदरत सब पर हावी है +[3:190] जमीन और आसमान की अदायगी में और रात और दिन के बारी बारी से आने में उन होशमंद लोगों के लिए बहुत निशानियां हैं +[3:191] जो उठते, बैठते और लेटते, हर हाल में खुदा को याद करते हैं और आसमान ओ ज़मीन की सच्चाई (सृजन) में गौर ओ फ़िक्र करते हैं। (वो बे-इख्तियार बोल उठते हैं) "परवरदिगार! ये सब कुछ तू नई फ़िज़ुल और बे-मकसद नहीं बनाया है, तू पक गया है इसके अबस (बेकार / व्यर्थ) काम करे। पास ऐ रब! हमें दोज़ख के अज़ाब से बचा ले +[3:192] तू नहीं जिसे दोज़ख में डाला उसे डार हकीकत बड़ी ज़िल्लत ओ रुसवाई में दाल दिया, और फिर ऐसे ज़ालिमों का कोई मददगार न होगा +[3:193] मालिक! हमने एक पुकारने वाले को सुना जो ईमान की तरफ बुलाता था और कहता था के अपने रब को मानो, हमने उसकी दावत कबूल की, हमारे पास। आक़ा! जो कसूर हमसे हुए हैं उनसे दरगुज़र फ़रमा। जो बुराइयां हम में हैं उनसे दूर करदे और हमारा ख़तमा नीक लोगों के साथ कर +[3:194] ख़ुदावंदा! जो वादे तू नहीं अपने रसूलों के ज़रिये से किये हैं उनको हमारे साथ पूरा कर और कयामत के दिन हमें रुसवाई में ना डाल, बेशक तू अपने वादे के ख़िलाफ़ करने वाला नहीं है” +[3:195] जवाब में उनके रुब ने फरमाया, “मैं तुम में से किसी का अमल ज़या करने वाला नहीं हूं, ख्वा मर्द हो या औरत, तुम सब एक दूसरे के हम जिन हो। लिहाजा जिन लोगों ने मेरी खातिर अपने वतन छोड़े और जो मेरी राह में अपने घरों से निकले गए और सताए गए और मेरे लिए लड़े और मारे गए उनके सब कसूर माई माफ कर दूंगा और उन्हें ऐसे बागों में दाखिल करूंगा जिनका आला जरूरी है होंगी. ये उनकी जजा है अल्लाह के हान और बेहतरीन जजा अल्लाह ही के पास है" +[3:196] (ऐ नबी)! दुनिया के मुल्कों में खुदा के नफरमान लोगों की चलती फिरत तुम्हें किसी धोखे में ना डाले +[3:197] ये महज़ चंद रोजा जिंदगी का थोड़ा सा लुत्फ है, फिर ये सब जहन्नुम में जायेंगे जो बद्दतरें जाये क़रार है +[3:198] बरक्स इसके जो लोग अपने रब से डरते हुए जिंदगी बसर करते हैं उनके लिए ऐसे बाग हैं जिनका आला नेहरेन बहती हैं, बागों में वो हमेशा रहेंगे, अल्लाह की तरफ से ये समां ए ज़ियाफ़त है उनके लिए, और जो कुछ अल्लाह के पास है नए लोगों के लिए वही सबसे बेहतर है +[3:199] एहले किताब में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो अल्लाह को मानते हैं, उस किताब पर ईमान लाते हैं जो तुम्हारी तरफ भेजी गई है और उस किताब पर भी ईमान रखते हैं जो इसे पहले खुद उनकी तरफ भेजी गई थी। अल्लाह के आगे झुके हैं, और अल्लाह की आयत को थोड़ी सी कीमत पर बेच नहीं देते। इनका अजर इनके रब के पास है और अल्लाह हिसाब चुकाने में डर नहीं लगता +[3:200] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, सब्र से काम लो, बातिल पारसन के मुक़ाबले में पा-मरदी दिखाओ, हक़ की खिदमत के लिए कमर-बस्ता हो जाओ, और अल्लाह से डरते रहो, उम्मीद है के फलाह पाओगे + +Surah 4: An-Nisa' (The Women) +---------------------------------------- +[4:1] लोगन! अपने रब से डरो जिसने तुमको एक जान से अदा किया और उसी जान से उसका जोड़ा बनाया और उन दोनो से बहुत मर्द ओ औरत दुनिया में फैल गए, हमसे खुदा से डरो जिसका वास्ता देकर तुम एक दूसरे से अपना हक मांगते हो, और रिश्ता ओ क़राबत के ताल्लुकात को बिगाड़ने से परहेज करो, यकीन जानो के अल्लाह तुमपर निगरानी कर रहा है +[4:2] यतीमों के माल उनको वापस दो, अच्छे माल को बुरे माल से ना बदल लो, और उनके माल अपने माल के साथ मिलकर कर ना खा जाओ, ये बहुत बड़ा गुनाह है +[4:3] और अगर तुम यतीमों के साथ बे-इंसाफी करने से डरते हो तो जो औरतें तुमको पसंद आये उन्हें दो दो, तीन तीन, चार चार से निकाह करलो, लेकिन अगर तुम्हें अंदेशा हो के उनके साथ अदल ना कर सकोगे तो फिर एक ही बीवी करो या उन औरतों को जजियत में लाओ जो तुम्हारे क़ब्ज़े में आई है, इन्साफ़ी से बचने के लिए ये ज़्यादा क़रीन ए सवाब है +[4:4] और औरतों के मेहर खुश दिली के साथ (फर्ज जानते हुए) अदा करो, अलबत्ता अगर वो खुद अपनी खुशी से मेहर का कोई हिसा तुम्हें माफ कर दें तो उसे तुम मजे से खा सकते हो +[4:5] और अपने वो माल जिनहे अल्लाह ने तुम्हारे लिए कयाम ए ज़िन्दगी का ज़ैरया बनाया है, नादान लोगों के हवाले ना करो, अलबत्ता उन्हें खाने और पहनने के लिए दो और उन्हें नई हिदायत करो +[4:6] और यतीमों की आजमाइश करते रहो यहाँ तक के वो निकाह के काबिल उमर को पाहुंच जाएँ। फिर अगर तुम उनके अंदर एहलियात पाओ (मानसिक रूप से परिपक्व) तो उनके माल उनके हवाले करदो, ऐसा कभी न करना के हद ए इन्साफ से तजावुज करके इस खौफ से उनके माल जल्दी जल्दी खा जाओ के वो बदाए होकर अपने हक का मुतालिबा करेंगे। यतीम का जो सरपरस्त मालदार हो वो परहेज़गारी से काम ले और जो ग़रीब हो वो मारूफ़ तारीख़ से खाए। फिर जब उनके माल उनके हवाले करने लगो तो लोगों को इसपर गवाह बना लो, और हिसाब लेने के लिए अल्लाह काफी है +[4:7] मर्दों के लिए उस माल में हिसा है जो मां बाप और रिश्तेदार ने छोड़ा हो, और औरतों के लिए भी उस माल में हिसा है जो मां बाप और रिश्तेदार ने छोड़ा हो, ख्वाह थोड़ा हो या बहुत, और ये हिसा (अल्लाह की तरफ से) मुकर्रर है +[4:8] और जब तकसीम के मौके पर कुंबे (परिवार) के लोग और यतीम और मिस्कीन आएं तो इस माल में से उनको भी कुछ दो और उनके साथ भले मानस-ऑन (इंसान) की सी बात करो उन्हें कृपया) +[4:9] लोगों को इस बात का ख्याल करके डरना चाहिए के अगर वो खुद अपने पीछे बेबस औलाद छोड़ते तो मरते वक्त उन्हें अपने बच्चों के हक में कैसे कुछ अंदेशे लाहिक होते। पास चाहिए के वो खुदा का खौफ करें और रस्ती की बात करें +[4:10] जो लोग ज़ुल्म के साथ यतीमों के माल खाते हैं दर-हकीकत वो अपने पैत आग से भरते हैं और वो जरूर जहन्नुम की भड़कती हुई आग में झोंके जाएंगे +[4:11] तुम्हारी औलाद के बारे में अल्लाह तुम्हें हिदायत करता है के: मर्द का हिसा दो औरतों के बराबर है, अगर (मय्यत की वारिस) दो से ज़ायद लड़कियाँ हों तो उन्हें तर्क (विरासत) का दो तिहाई (2/3) दिया जाए, और अगर एक ही लड़की वारिस हो तो आधा (आधा) उसका। है, अगर मय्यत साहब ए औलाद हो तो उसके वलियों में से हर एक को तर्क का चाटा (छठा) हिसा मिलना चाहिए, और अगर वो साहब ए औलाद न हो और उसके वारिस हों तो मां को तिसरा (तीसरा) हिसा दिया जाए और अगर मय्यत के भाई बहन भी हो तो मां चाटे (छठा) इसकी हक़दार होगी। (ये सब इसी से वक्त निकले जाएंगे) जबके वसीयत जो मय्यत ने की हो पूरी करदी जाए और क़र्ज़ जो उसपर हो अदा करदिया जाए। तुम नहीं जानते कि तुम्हारे माँ बाप और तुम्हारी औलाद में से कौन बलिहाज़-ए-नफ़ा तुमसे करीब है। ये इसी तरह अल्लाह ने मुकर्रर कर दिया है, और अल्लाह यकीनन सब हकीकत से वाकिफ और सारी मसलहतों का जाने वाला है +[4:12] और तुम्हारी बीवीयों ने जो कुछ छोड़ा हो उसका आधा हिसा तुम्हें मिलेगा अगर वो बे-औलाद हो, वरना औलाद होने की सूरत में तर्क का एक चौथाई (एक चौथाई) हिसा तुम्हारा है जबके वसीयत जो उन्होन ने की हो पूरी करदी जाए, और क़र्ज़ जो उन्होन ने छोड़ा हो अदा करदिया जाए, और वो तुम्हारे तर्क में से चौथी कि हक़दार होगी अगर तुम बे-औलाद हो, वरना साहब ए औलाद होने की सूरत में उनका हिसा आठवां होगा, बाद इसके के जो वसीयत तुमने की हो वो पूरी कर दी जाए और जो क़र्ज़ तुमने छोड़ा हो वो अदा कर दिया जाए और अगर वो मर्द या औरत (जिसकी मीरास तकसीम तलब है) बे-औलाद भी हो और उसकी मां बाप भी जिंदा न हो, मगर उसका एक भाई या एक बहन मौजूद हो तो भाई और बहन हर एक को चट्टा (छठा) हिसा मिलेगा, और भाई बहन एक से ज्यादा हो तो कुल तरके के एक तिहाई (एक तिहाई) में वो सब शरीक होंगे, जबके वसीयत जो की गई हो पूरी कर दी जाए, और क़र्ज़ जो मय्यत ने छोड़ा हो अदा करदिया जाए, बशरत ये के वो ज़रार रसन ना हो (कोई चोट नहीं पहुंचाता)। ये हुकुम अल्लाह की तरफ से और अल्लाह दाना ओ बीना और नरम-खु है +[4:13] ये अल्लाह की मुकर्रर की हुई हदें (सीमाएं) हैं। जो अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करेगा उसे अल्लाह ऐसे बाघों में दखल करेगा जिनकी जगहें नहरें बहती होंगी और उन बाघों में वो हमेशा रहेगा और यही बड़ी कामयाबी है +[4:14] और जो अल्लाह और उसके रसूल की नफरमानी करेगा और उसकी मुकर्रर की हुई हदन (हद) से तजावुज कर जाएगा उसे अल्लाह आग में डालेगा जिसमें वह हमेशा रहेगा और उसके लिए रुसवा-कुन सजा है +[4:15] तुम्हारी औरतों में से जो बदकारी की मुर्तकिब हूं, अपने में से चार आदमियों की गवाही लो, और अगर चार आदमी गवाही दे दें तो उनको घरों में बंद रखें यहां तक ​​के उन्हें मौत आ जाए या अल्लाह उनके लिए कोई रास्ता निकाल दे +[4:16] और तुम में से जो इस फेल का इर्तेकाब करें उन दोनों को तकलीफ दो, फिर अगर वो तौबा करें और अपनी इस्लाह कार्लें तो उन्हें छोड़ दो के अल्लाह बहुत तौबा क़बूल करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[4:17] हां ये जान लो के अल्लाह पर तौबा की क़बूलियत का हक़ उन्ही लोगों के लिए है जो नादानी की वजह से कोई बुरा फेल (अमल) कर गुज़रते हैं और उसके बाद जल्दी ही तौबा करते हैं। ऐसे लोगों पर अल्लाह अपनी नजर ए इनायत से फिर मुतवज्जैह हो जाता है और अल्लाह सारी बातों की खबर रखने वाला और हकीम ओ दाना है +[4:18] मगर तौबा उन लोगों के लिए नहीं है जो बुरे काम किए चले जाते हैं यहां तक ​​के जब उनमें से किसी की मौत का वक्त आ जाता है हमें वक्त वो कहता है कि अब मैंने तौबा की, और इसी तरह तौबा उनके लिए भी नहीं है जो मरते दम तक काफिर रहे। ऐसे लोगों के लिए तो हमने दर्दनाक सजा तय्यार कर रखी है +[4:19] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारे लिए ये हलाल नहीं है के ज़बरदस्ती औरतों के वारिस बन बैठो और ना ये हलाल है के उन्हें तंग करके हमसे महर का कुछ हिसा उधार लेने की कोशिश करो जो तुम उन्हें दे चुके हो। हां अगर वो किसी सारी हद-चलनी की मुर्तकीब है (तो जरूर तुम्हें तंग करने का हक है)। उनके साथ भले तरीक़े से ज़िंदगी बसर करो, अगर वो तुम्हें ना पसंद हो तो हो सकता है कि एक चीज़ तुम्हें पसंद ना हो मगर अल्लाह ने उसमें बहुत कुछ भलाई रख दी हो +[4:20] और अगर तुम एक बीवी की जगह दूसरी बीवी ले आने का इरादा ही करलो तो ख्वाह तुमने उसे ढेर सा माल ही क्यों ना दिया हो, उसमें से कुछ वापस ना लेना, क्या तुम उसे बहुत ज्यादा लगा कर और सारे ज़ुल्म करके वापस लोगे +[4:21] और आख़िर तुम उसे किस तरह ले लोगे जबके तुम एक दूसरे से लुत्फ़-अंदोज़ हो चुके हो और वो तुमसे पुख़्ता अहद ले चुकी हैं +[4:22] और जिन औरतों से तुम्हारे बाप निकाह कर चुके हैं, उनसे हरगिज़ निकाह ना करो, मगर जो पहले हो चूका सो हो चुका। दार-हकीकत ये एक बेहाय का फेल (काम) है, नपसंददा है और बुरा चलन है +[4:23] तुम पर हराम की गई तुम्हारी मांएं, बेटियां, बहनें, फुपियां, खलाएं, भतीजियां, भंजियां और तुम्हारी वो मांएं जिन्हों ने तुमको दूध पिलाया हो, और तुम्हारी दूध शरीक बहनें, और तुम्हारी बीवियों की मायें, और तुम्हारी बीवियों की लड़कियाँ जिन्हों ने तुम्हारी गोदों में परवरिश पाई है, उन बीवियों की लड़कियाँ जिनसे तुम्हारा तालुक ज़ान ओ शॉ (अंतरंग संबंध) हो चुक्का हो वरना अगर (सिर्फ निकाह हुआ हो और) तालुक ए ज़ान ओ शॉ (अंतरंग संबंध) ना हुआ हो तो (उन्हें छोड़ कर उनकी लड़कियों से निकाह करने में) तुम्पर कोई मवाज़ख्ज़ा नहीं है, और तुम्हारे उन बेटों की बियाएं जो तुम्हारी हल्ब से पैदा हुईं (तुम्हारे दिलों से निकली) और ये भी तुम्पर हराम किया गया है के निकाह में दो बेहोन को जमा करो, मगर जो पहले हो गया सो हो गया, अल्लाह बक्शने वाला और रहम करने वाला है +[4:24] और वो औरतें भी तुमपर हराम हैं जो किसी दूसरे के निकाह में हो (मोहसिनात) अलबत्ता ऐसी औरतें इसे मुस्तसना हैं जो (जंग में) तुम्हारे हाथ आएं। ये अल्लाह का कानून है जिसकी पाबंदी तुमपर लाज़िम कर दी गई है। इनके माँ-सिवा जितनी औरतें हैं उन्हें अपने अमवाल के ज़रिये से हासिल करना तुम्हारे लिए हलाल कर दिया गया है, बशारत ये के हिसार निकाह में उनको महफ़ूज़ करो, ना ये के आज़ाद शेहवत रानी (वासना की संतुष्टि) करने लगो, फिर जो इज़्ज़वाजी जिंदगी का लुत्फ़ तुम उन्हें उठाओ उसके बदले उनके मेहर बटोअर फ़र्ज़ अदा करो। अलबत्ता महर की करारादाद हो जाने के बाद आपस की रजामंडी से तुम्हारे दरमियान अगर कोई समझा हो जाए तो इसमें कोई हराज नहीं। अल्लाह अलीम और दाना (बुद्धिमान) है +[4:25] और जो शक्स तुम में से इतनी मक़दरत न रखता हो के खानदानी मुसलमान औरतों (मोहसिनात) से निकाह कर सके उसे चाहिए के तुम्हारी उन लड़कियों में से किसी के साथ निकाह करले जो तुम्हारे क़ब्ज़े में माननीय और मोमिना हों। अल्लाह तुम्हारे ईमानो का हाल खूब जानता है। तुम सब एक ही गिरोह के लोग हो, लिहाजा उनके सरपरस्तों (गुराडियंस) की इजाजत से उनके साथ निकाह करलो और मारूफ तारीख से उनके मेहर अदा करदो, ता-के वो हिसार ए निकाह में महफूज (मोहसेनात) होकर रह रहे हैं, आजाद शेखवत-रानी करती फिरें और ना चोरी छिपे आशनाइयां करें(गुप्त प्रेम प्रसंग)। फिर जब वह हिसार ए निकाह में महफूज हो जाए और उसके बाद किसी की बद-चलनी की मुर्तकीब हो तो उस पर उस सजा की बा-निस्बत आधी सजा है जो खानदानी औरतों (मोहसिनात) के लिए मुकर्रर है। ये सहुलत तुम में से उन लोगों के लिए भुगतान की गई है जिनको शादी ना करने से बंद-ए-तकवा के टूट जाने का अंदेशा हो। लेकिन अगर तुम सब्र करो तो ये तुम्हारे लिए बेहतर है। और अल्लाह बख्शने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[4:26] अल्लाह चाहता है कि तुम उन तरीक़ों को वाज़ेह करे और उन्ही तरीक़ों पर तुम्हें चलाये जिनकी जोड़ी तुमसे पहले गुज़रे हुए सुलह (धर्मी) करते थे। वो अपनी रहमत के साथ तुम्हारी तरफ मुतवज्जे होने का इरादा रखता है। और वो अलीम भी है और दाना भी +[4:27] हां, अल्लाह तो तुमपर रहमत के साथ तवज्जु करना चाहता है मगर जो लोग खुद अपनी ख्वाहिशत ए नफ्स की जोड़ी बना रहे हैं वो चाहते हैं के तुम राह ए रास्ते से हट कर दूर निकल जाओ +[4:28] अल्लाह तुमपर से पाबंदियां को हल्का करना चाहता है क्योंकि इंसान कर्ज चुकाया गया है +[4:29] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, आपस में एक दूसरे के माल बातिल तारीखों से ना खाओ, लें देइन होना चाहिए आपस की रजामंडी से और अपने आप को कत्ल ना करो यकीन मानो के अल्लाह तुम्हारे ऊपर मेहरबान है +[4:30] जो शक्स ज़ुल्म और ज़्यादा के साथ ऐसा करेगा उसको हम ज़रूर आग में झोंकेंगे और ये अल्लाह के लिए कोई मुश्किल काम नहीं है +[4:31] अगर तुम उन बदे गुनाहों से परहेज़ करते रहो जिनसे तुम मन किया जा रहा है तो तुम्हारी छोटी मोटी बुराइयों को हम तुम्हारे हिसाब से साबित कर देंगे और तुमको इज्जत की जगह दाख़िल करेंगे +[4:32] और जो कुछ अल्लाह ने तुम में से किसी को दूसरे के मुकाबले में ज्यादा दिया है उसकी तमन्ना ना करो। जो कुछ मर्दों ने कमाया है उसे मुताबिक़ उनका हिसा है और जो कुछ औरतों ने कमाया है उसे मुताबिक़ उनका हिसा। हां अल्लाह से उसके फजल की दुआ मांगते रहो। यकीनन अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है +[4:33] और हमने हर हमसे तर्के (विरासत) के हक़दार मुक़र्रर करदी हैं जो वाल्दैन और रिश्तेदार छोड़ें, अब रहे वो लोग जिनसे तुम्हारे अहद ओ पैमान हों तो उनका हिसा उन्हें दो। यकीनन अल्लाह हर चीज़ पर निगरान है +[4:34] मर्द औरतों पर कव्वाम (रक्षक और रखवाले) हैं, इस बिना पर के अल्लाह ने उनमें से एक को दूसरे पर फजीलत दी है, और इस बिना पर के मर्द अपने माल खर्च करते हैं। पास जो साले औरतें हैं वो इताअत शिया (आज्ञाकारी) होती हैं और मर्दों के पीछे अल्लाह की हिफ़ाज़त ओ निगरानी में उनके हुकूक़ की हिफ़ाज़त करती हैं। और जिन औरतों से तुम सरकशी का अंदेशा हो उन्हें समझाओ, ख्वाबगाहों में (बिस्तरों में) उन्हें अलहेदा (अलग) रहो और मारो, फिर अगर वो तुम्हारी मुती (आज्ञाकारी) हो जाए तो ख्वा मा ख्वा अनपर दस्त दार्जी केलिए बहाने तलाश (नुकसान पहुंचाने के तरीके ढूंढो) ना करो। यकीन रक्खो के ऊपर अल्लाह मौजूद है जो बड़ा और महान है +[4:35] और अगर तुम लोगों को कहीं मिया और बीवी के तालुक्कत बिगाद जाने का अंदेशा हो तो एक हकम (मध्यस्थ) मर्द के रिश्तेदारों में से और एक औरत के रिश्तेदारों में से मुकर्रर करो। वो दोनों इस्लाह करना चाहेंगे अल्लाह के लिए उनके दरमियान मुवाफिकत की सूरत निकल देगा। अल्लाह सब कुछ जानता है और बाख़बर है +[4:36] और तुम सब अल्लाह की बंदगी करो, उसके साथ किसी को शरीक न बनाओ, माँ बाप के साथ नीक बरताओ करो, क़राबतदारों (रिश्तेदारों) और यतीमों और मिस्कीनो के साथ हुस्न ए सुलूक से पेश आओ, और पड़ोसि रिश्तेदार से, अजनबी हमसाए (पड़ोसी) से, पहलू के साथी (अपनी तरफ से साथी) और मुसाफिर से, और उन लौंडी गुलामों से जो तुम्हारे क़ब्ज़े में हो, एहसान का मामला रखो, यकीन जानो अल्लाह किसी ऐसे शक्स को पसंद नहीं करता जो अपने पिंडार में मगरूर हो और अपनी बदाई पर फक्र करे (अभिमानी और घमंडी) +[4:37] और ऐसे लोग भी अल्लाह को पसंद नहीं हैं जो कंजूसी करते हैं और दूसरों को भी हिदायत करते हैं, और जो कुछ अल्लाह ने अपने फज़ल से उन्हें दिया है उसे छुपाते हैं। ऐसे काफ़िर-ए-नियामत लोगों के लिए हमने रुसवा-कुन अज़ाब मुहैय्या कर रखा है +[4:38] और वो लोग भी अल्लाह को ना-पसंद हैं जो अपने माल महज़ लोगों को दिखाने के लिए खर्च करते हैं और दर हकीकत ना अल्लाह पर ईमान रखते हैं ना रोज़ ए आख़िर पर, सच ये है के शैतान जिसका रफीक (साथी) हुआ उसे बहुत ही बुरी रफाकत मुयस्सर आई +[4:39] आखिर लोगों पर क्या आफत आ जाती अगर ये अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान रखते और जो कुछ अल्लाह ने दिया है उसमें से खर्च करते? अगर ये ऐसा करता तो अल्लाह से इनकी नेकी का हाल छुपा न रह जाता +[4:40] अल्लाह किसी पर जरा बराबर भी जुल्म नहीं करता, अगर कोई एक नेकी करे तो अल्लाह उसे दो चांद करता है और फिर अपनी तरफ से बड़ा अजर अता फरमाता है +[4:41] फिर सोचो के हमें वक्त ये क्या करेंगे जब हम हर उम्मत में से एक गवाह लाएंगे और लोगों पर तुम्हारे साथ [यानी मुहम्मद (सस) को] गवाह की हैसियत से खड़ा करेंगे +[4:42] हमें वक्त वो सब लोग जिन्हों ने रसूल की बात न मानी और उसकी नफ़रमानी करते रहेंगे, तमन्ना करेंगे के काश ज़मीन फट जाए और वो इस में समा जाए, वहां ये अपनी कोई बात अल्लाह से ना छुपाएंगे +[4:43] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम नशे की हालत में हो तो नमाज के करीब ना जाओ, नमाज हमें वक्त पढ़ना चाहिए जब तुम जानो के क्या कह रहे हो, और इसी तरह जनाब की हालत में भी नमाज के करीब ना जाओ, जब तक के ग़ुस्ल ना करो, इल्ला ये के रास्ते से गुज़रते हो. और अगर कभी ऐसा हो कि तुम बीमार हो, या सफर में हो, या तुम में से कोई शक्स रफे खतरे में डालकर आये, या तुमने औरतों से अंतरंग संबंध बनाया हो, और फिर पानी ना मिले तो पाक मिट्टी से काम लो और इसे अपने चेहरों और हाथों पर मसला करो। बेशक अल्लाह नरमी से काम लेने वाला और बख्शीश फरमाने वाला है +[4:44] तुमने उन लोगों को भी देखा जिन्होंने किताब के इल्म का कुछ हिसाब दिया है? वो खुद जलालत के खरीदार बने (खुद के लिए खरीदी गई त्रुटि) हैं और चाहते हैं के तुम भी राह गम करदो +[4:45] अल्लाह तुम्हारे दुश्मनों को खूब जानता है और तुम्हारी हिमायत ओ मददगार के लिए अल्लाह ही काफी है +[4:46] जो लोग यहुदी बन गए हैं उनमें कुछ लोग हैं जो अल्फ़ाज़ को उनके महल से फेर देते हैं और दीन ए हक़ के ख़िलाफ नेश-ज़ानी (शब्दों को उनके संदर्भ से बदलें) करने के लिए अपनी ज़ुबानो को तोड़ मोड़ कर कहते हैं 'समीना वा असयना' (हमने सुना है और हमने अवज्ञा की है) और 'इस्मा ग़ैर मुस्मा' (हमें ज़रूर सुनें, कहीं आप गूंगे न हो जाएं) और 'रैना' (सुनें हम)। हालंके अगर वो कहते 'समीना वा अताना' (हमने सुना है और हम मानते हैं), और इस्मा और अनज़ुर्ना [हमारी बात जरूर सुनें, और हमारी तरफ देखें (दया के साथ)] तो ये उनके लिए बेहतर था और ज्यादा रस्तबाजी का तरीका था। मगर उन पर उनकी बातिल परस्ती की बदौलत अल्लाह की फिटकर पड़ी हुई है उसके लिए वो कम ही ईमान लाते हैं +[4:47] ऐ वो लोगन जिनहेन किताब दी गई थी! मान लो उस किताब को जो हमने अब नाज़िल की है और जो उस किताब की तस्दीक या तय करती है जो तुम्हारे पास पहले से मौजुद थी। इसपर ईमान ले आओ क़ब्ल इसके के हम चेरे बिगाड कर पीछे फेर दें या उनको उसी तरह लानत जदा करदें जिस तरह सब्त (सब्बाथ) वालों के साथ हमने किया था, और याद रक्खो के अल्लाह का हुकुम नफीज होकर रहता है +[4:48] अल्लाह बस शिर्क ही को माफ नहीं कर्ता, इसके मा-सिवा दूसरे जिस कदर गुनाह हैं वो जिसके लिए चाहता है माफ करता है। अल्लाह के साथ जिसने और को शरीक ठहरया उसने तो बहुत ही बड़ा झूठ तसनीफ किया और बदले में गुनाह की बात की +[4:49] तुमने उन लोगों को भी देखा जो बहुत अपनी पाकीज़गी ए नफ़्स का दम भरते (जो अपनी धार्मिकता का घमंड करते हैं) हैं? हलांके पाकीजगी तो अल्लाह ही जिसे चाहता है अता करता है, और (उन्हें जो पाकीजगी नहीं मिलती तो डर हकीकत) उन्पर जरा बराबर भी ज़ुल्म नहीं किया जाता +[4:50] देखो तो सही, ये अल्लाह पर भी झूठे इफ्तारा गढ़ने से (झूठ गढ़ना) नहीं छोड़ते और इनके सरीहन गुनाहगार होने के लिए यही एक गुनाह काफी है +[4:51] क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिन्होंने किताब के इल्म में से कुछ हिसा दिया है, और उनका हाल ये है के जिब्थ (निराधार अंधविश्वास) और तागुथ (झूठे आहार) को मानते हैं और काफिरों के मुतल्लिक कहते हैं के ईमान लाने वालों से तो यही ज्यादा सही रास्ते पर हैं +[4:52] ऐसे भी लोग हैं जिनपर अल्लाह ने लानत की है, और जिसपर अल्लाह लानत करदे फिर तुम उसका कोई मददगार नहीं पाओगे +[4:53] क्या हुकूमत में उनका कोई हिसा है? अगर ऐसा होता तो ये दुसरों को एक फूटी कौड़ी तक न दे देते +[4:54] फिर क्या ये दुसरों से इस लिए हसद करते हैं के अल्लाह ने उन्हें अपने फज़ल से नवाज दिया? अगर ये बात है तो उन्हें मालूम हो के हमने तो इब्राहिम की औलाद को किताब और हिकमत अता की और मुल्क ए अजीम बख्श दिया +[4:55] मगर उनमें से कोई उसपर ईमान लाया और कोई उसे मुंह मोड़ गया, और मुंह मोड़ने वालों के लिए तो बस जहन्नुम की भड़कती हुई आग ही काफी है +[4:56] जिन लोगों ने हमारी आयत को मन्ने से इंकार कर दिया है उन्हें बिल-यकीन हम आग में झोंकेंगे, और जब उनके बदन की खल (त्वचा) गल जाएगी (भुन जाएगी) तो उसकी जगह दूसरी खल पेदा करदेंगे ता-के वो खूब अज़ाब का मजा चखें। अल्लाह बड़ी क़ुदरत रखता है और अपने फ़ैसलों को अमल में लाने की हिकमत ख़ूब जानता है +[4:57] और जिन लोगों ने हमारी आयतों को मान लिया और नेक अमल किये उनको हम ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेंगे जिनका आला नेहरेन बहती होगी, जहां वो हमेशा हमेशा रहेंगे और उनको पाकीजा बिवियां मिलेंगी और उन्हें हम घनी छांव (छाया) में रखेंगे +[4:58] मुसलमानो! अल्लाह तुम्हें हुकुम देता है के अमानतें एहले अमानत के सुपुर्द करदो, और जब लोगों के दरमियान फैसला करो तो अदल के साथ करो। अल्लाह तुमको निहायत उमराह हिदायत करता है और यकीनन अल्लाह सब कुछ सुनता और देखता है +[4:59] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, इत्तला करो अल्लाह की और इताअत करो रसूल की और उन लोगों की जो तुम में से साहब ए अम्र हो, फिर अगर तुम्हारे दरमियान किसी मामले में निज़ा (विवाद/मतभेद) हो जाए तो उसे अल्लाह और रसूल की तरफ, फेर दो अगर तुम वक़ाई अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखते हो। यही एक सही तारीख़ है और अंजाम के ऐतबार से भी बेहतर है +[4:60] ऐ नबी! तुमने देखा नहीं उन लोगों को जो दावा तो करते हैं के हम ईमान लाए हैं उस किताब पर जो तुम्हारी तरफ नाज़िल की गई है और उन किताबों पर जो तुमसे पहले नाज़िल की गई थी, मगर चाहते हैं के अपने मामले का फैसला करने के लिए तघुत की तरफ रूजू करें, हलांके उन्हें टैगहुट से कुफ्र करने का हुकुम दिया गया था। शैतान उन्हें भटका कर राह ए रास्ते से बहुत दूर ले जाना चाहता है +[4:61] और जब उन्हें कहा जाता है कि आओ हमें चीज की तरफ से अल्लाह ने नाज़िल किया है और आओ रसूल की तरफ से मुनाफिकों को तुम देखते हो के ये तुम्हारी तरफ आने से कतराते हैं +[4:62] फिर हमें वक्त क्या होता है जब इनके अपने हाथों की लाई हुई मुसीबत इनपर आ पढ़ती है? हमें वक्त ये तुम्हारे पास कसमें खाते हुए आते हैं और कहते हैं के खुदा की कसम हम तो सिर्फ भलाई चाहते थे और हमारी तो नियत ये थी के फरीक़ैन (दो पक्ष) +[4:63] अल्लाह जानता है जो कुछ उनके दिलों में है, उन्हें तारुज़ मत करो (उन्हें अकेला छोड़ दो), उन्हें समझाओ और ऐसी हिदायत करो जो उनके दिलों में उतर जाए +[4:64] (उन्हें बताओ के) हमने जो रसूल भी भेजा है इसी के लिए भेजा है के इज़्न ए खुदावंदी (अल्लाह की इजाजत से) कि बिना पर उसकी इताअत की जाए, अगर उन्हें ये तारीख इख्तियार किया होता के जब ये अपने नफ़्स पर ज़ुल्म कर बैठे थे तो तुम्हारे पास आ जाते थे और अल्लाह से माफ़ी मांगते थे, और रसूल भी उनके लिए माफ़ी की अंधेरगर्दी करता था, तो यकीनन अल्लाह को बख्शने वाला और रहम करने वाला पाते +[4:65] नहीं, (ऐ मुहम्मद) तुम्हारे रब की कसम ये कभी मोमिन नहीं हो सकता जब तक के अपनी बहामी इख्तिलाफात में ये तुमको फैसला करने वाला ना मान लें, फिर जो कुछ तुम फैसला करो उसपर अपने दिलों में भी कोई तंगी ना महसूस करें, बलके सर बा सर तसलीम कार्लें +[4:66] अगर हमने इन्हें हुकुम दिया होता है के अपने आप को हलाक करदो या अपने घर से निकल जाओ तो इनमें से कम ही आदमी इसपर अमल करते हैं, हलांके जो हिदायत इन्हें की जाती है, अगर ये इसपर अमल करते तो ये इनके लिए ज्यादा बेहतरी और ज्यादा साबित कादमी का मौजब होता +[4:67] और जब ये ऐसा करते हैं तो हम इनमें अपनी तरफ से बहुत बड़ा अजर देते हैं +[4:68] और इन्हें सीधा रास्ता दिखाते हैं +[4:69] जो अल्लाह और रसूल की इबादत करेगा वो उन लोगों के साथ होगा जिनपर अल्लाह ने इनाम फरमाया है, यानी अंबिया, और सिद्दीकीन और शुहदा और सालिहें, कैसे अच्छे हैं ये रफीक जो किसी को मुयस्सर आए +[4:70] ये हकीकत फजल है जो अल्लाह की तरफ से मिलता है और हकीकत जाने के लिए बस अल्लाह ही का इल्म काफी है +[4:71] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, मुकाबला के लिए हर वक़्त तय्यार रहो, फिर जैसा मौका हो अलग अलग दास्तान (समूहों) की शक्ल में निकलो या इकत्थे होकर +[4:72] हां, तुम में कोई आदमी ऐसा भी है जो लड़ाई से जीता है, अगर तुमपर कोई मुसीबत आए तो कहता है कि अल्लाह ने मुझपर बड़ा फ़ज़ल किया के मुख्य इन लोगों के साथ ना गया +[4:73] और अगर अल्लाह की तरफ से तुम्पर फ़ज़ल हो तो कहता है और इस तरह कहता है कि गोया तुम्हारे और उसके दरमियान मुहब्बत का तो कोई तालुक़ था ही नहीं के काश मैं भी इनके साथ होता तो बड़ा काम बन जाता +[4:74] (ऐसे लोगों को मालूम हो के) अल्लाह कि राह में लड़ना चाहिए उन लोगों को जो आख़िरत के बदले दुनिया की ज़िंदगी से फ़र्क दिलाएं, फिर जो अल्लाह की राह में लड़ेगा और मारा जाएगा या ग़ालिब रहेगा उसे ज़रूर हम अजर ए अज़ीम अता करेंगे +[4:75] आख़िर क्या वजह है कि तुम अल्लाह की राह में उन बे-बस मर्दों, औरतों और बच्चों की खातिर ना लड़ो जो कमज़ार पाकर दबा लिए गए हैं और फरियाद कर रहे हैं के खुदाया हमको इस बस्ती से निकल जिसका बाशिंदा जालिम हैं और अपनी तरफ से हमारा कोई हमी ओ मददगार पैदा करदे +[4:76] जिन लोगों ने ईमान का रास्ता इख्तियार किया है, वो अल्लाह की राह में लड़ते हैं और जिन्होन ने कुफ्र का रास्ता इख्तियार किया है, वो तागुत की राह में लड़ते हैं, पास शैतान के साथियों से लड़ो और यकीन जानो के शैतान की चालें हकीकत में निहायत कमज़ार हैं +[4:77] तुमने उन लोगों को भी देखा जिनसे कहा गया था कि अपने हाथ रोके रखो और नमाज़ क़याम करो और ज़कात दो? अब जो उन्होंने लड़ाई का हुकुम दिया है तो उनमें से एक फरीक का हाल ये है के लोगों से ऐसा डर रहे हैं जैसा खुदा से डरना चाहिए या कुछ इस तरह भी बढ़कर। कहते हैं खुदाया! ये हमपर लड़ै का हुकुम क्यों लिख दिया? क्यों ना हमें अभी कुछ और मोहलत दी? उनसे कहो, दुनिया का सरमाया ए जिंदगी थोड़ी है, और आखिरी एक खुदा-तर्स इंसान के लिए ज्यादा बेहतर है, और तुमपर जुल्म एक शम्मा (खजूर की भूसी) बराबर भी बा किया जाएगा +[4:78] राही मौत, तो जहां भी तुम हो वो बाहर हाल तुम्हें आकार रहेगी ख्वा तुम कैसी ही मजबूत इमारत में हो, अगर उन्हें कोई फ़ायदा मिलता है तो कहते हैं ये अल्लाह की तरफ से है, और अगर कोई नुक्सान पहनता है तो कहते हैं ये तुम्हारी बदौलत है। कहो, सब कुछ अल्लाह ही की तरफ से है, आख़िर लोगों को क्या हो गया है कि कोई बात इनकी समझ में नहीं आती +[4:79] ऐ इंसान! तुझे जो भलाई भी हासिल होती है अल्लाह की इनायत से होती है, और जो मुसीबत तुझपर आती है वो तेरे अपने क़स्ब ओ अमल की बदौलत है। (ऐ मुहम्मद) हमने तुमको लोगों के लिए रसूल बना कर भेजा है और इसपर खुदा की गवाही काफी है +[4:80] जिसने रसूल की इत्ता की हमें दर-असल खुदा की इताअत की और जो मुंह मोड़ गया, तो बहार हाल हमने तुम्हें इन लोगों पर पासबान (रक्षक/अभिभावक) बना कर तो नहीं भेजा है +[4:81] वो मुहं पर कहते हैं के हम मुती ए फरमान हैं मगर जब तुम्हारे पास से निकलते हैं तो उनमें से एक गिरह रातों को जमा होकर तुम्हारी बातों के खिलाफ मशवरे करता है। अल्लाह उनकी ये सारी सरकशियां लिख रहा है, तुम उनकी परवा न करो और अल्लाह पर भरोसा रखो, वही भरोसे के लिए काफी है +[4:82] क्या ये लोग कुरान पर गौर नहीं करते? अगर ये अल्लाह के सिवा किसी और की तरफ से होता तो इसमे बहुत कुछ इख्तिलाफ बयानी पाई जाती +[4:83] ये लोग जहां कोई इत्मिनान बख्श या खौफनाक खबर सुन पाते हैं उसे लेकर फैला देते हैं, हलांके अगर ये उसे रसूल और अपनी जमात के जिम्मेदार असहाब तक पहुंचाएं तो वो ऐसे लोगों के इल्म में आ जाए जो इनके दरमियान इस बात की सलाह है रखते हैं के इसे सही नतीजा आख़ज़ कर सकें। तुम लोगों पर अल्लाह की मेहरबानी और रहमत न होती तो (तुम्हारी कमजोरियां ऐसी थी के) मदूद ए चांद (आप में से कुछ) के सिवा तुम सब शैतान के पीछे लग गए होते +[4:84] (पस ऐ नबी) तुम अल्लाह की राह में लड्डू (लड़ाई), तुम अपनी जात के सिवा किसी और के ज़िम्मेदार नहीं हो, अलबत्ता एहले ईमान को लड़ने के लिए उक्साओ, बैद नहीं के अल्लाह काफ़िरों का ज़ोर तोड़ दे। अल्लाह का ज़ोर सबसे ज़्यादा ज़बरदस्त और उसकी सज़ा सबसे ज़्यादा सख्त है +[4:85] जो भलाई की सिफ़ारिश करेगा वो उसमें से हिसा पाएगा और जो बुराई की सिफ़ारिश करेगा वो उसमें से हिसा पाएगा, और अल्लाह हर चीज़ पर नज़र रखने वाला है +[4:86] और जब कोई एहतराम के साथ तुम्हें सलाम करे तो उसको हमसे बेहतर तारीख के साथ जवाब दो या कम-अज़-कम उसी तरह, अल्लाह हर चीज का हिसाब लेने वाला है +[4:87] अल्लाह वो है जिसके सिवा कोई खुदा नहीं है, वो तुम सबको कयामत के दिन जमा करेगा जिसको आने दो मुझमें कोई शुभा (संदेह) नहीं, और अल्लाह की बात से बढ़कर सच्ची बात और कौन हो सकती है +[4:88] फिर ये तुम्हें क्या हो गया है के मुनाफिकीन के बारे में तुम्हारे दरमियान दो रायें (राय) पाई जाती हैं, हालंके जो बुराइयां उनको ने कमायी हैं उनकी बदौलत अल्लाह उन्हें उल्टा फेर चुका है। क्या तुम चाहते हो कि जिसे अल्लाह ने हिदायत नहीं बख्शी उसे तुम हिदायत बख्श दो? हलांके जिसको अल्लाह ने रास्ते से हटा दिया उसके लिए तुम कोई रास्ता नहीं पा सकते +[4:89] वो तो ये चाहते हैं के जिस तरह वो खुद काफिर हैं इसी तरह तुम भी काफिर हो जाओ, ता-के वो सब यक्सन हो जाएं। लिहाजा उनमें से किसी को अपना दोस्त न बनाओ जब तक के वो अल्लाह की राह में हिजरत करके न आ जाए, और अगर वो हिजरत से बाज़ रहे तो जहां पाओ उन्हें पकड़ो और कत्ल करो और उनमें से किसी को अपना दोस्त और मददगार न बनाओ +[4:90] अलबत्ता वो मुनाफिक है हुकुम से मुस्तसना (अपवाद) हैं जो किसी ऐसी क़ौम से जा मिलें जिसके साथ तुम्हारा मुहैदा (संविदा) है, इसी तरह वो मुनाफिक भी मुस्तसना हैं जो तुम्हारे पास आते हैं और लड़यी से दिल बर्दाश्त हैं (उनके दिल लड़ने से कतराते हैं), ना तुमसे लड़ना चाहते हैं ना अपनी क़ौम से. अल्लाह चाहता है तो उनको तुम मुसल्लत करदे और वो भी तुमसे लड़े, अगर वो तुमसे किनारा कश हो जाए और लड़ने से बाज रहे और तुम्हारी तरफ सुलह ओ अष्टी का हाथ बदाएं अल्लाह ने तुम्हारे लिए उनपर दस्तूर दर्जी की कोई सबील नहीं रखी है +[4:91] एक और क़िस्म के मुनाफ़िक तुम्हें ऐसे मिलेंगे जो चाहते हैं कि तुमसे भी अमन में रहें और अपनी क़ौम से भी, मगर जब कभी फ़ितने का मौक़ा पाएंगे उसमें कूद पड़ेंगे। ऐसे लोग अगर तुम्हारे मुकाबले से बाज ना रहें और सुलह ओ सलामती तुम्हारे आगे पेश ना करें और अपने हाथ ना रोकें तो जहां वो मिले उन्हें पकड़ो और मारो, उन्पर हाथ उठाने के लिए हमने तुम्हें खुली हुज्जत दे दी है +[4:92] किसी मोमिन का ये काम नहीं है के दूसरे मोमिन को क़त्ल करे, इल्ला ये के उसे छोड़ दे, और जो शक्स किसी मोमिन को गलती से क़त्ल करदे तो उसका कफ़्फ़ारा ये है के एक मोमिन को गुलामी से आज़ाद करे और मक़तूल के वारिसों को खून बहा (खून-पैसा) दे, इल्ला ये के वो खून-बहा माफ करदें। लेकिन अगर वो मुसलमान मकतूल ​​किसी ऐसी क़ौम से था जिसकी तुम्हारी दुश्मनी हो तो उसका कफ़्फ़ारा एक मोमिन गुलाम आज़ाद करना है और अगर वो किसी ऐसी गैर मुस्लिम क़ौम का फ़र्द था जिसकी तुम्हारी दुश्मनी हो तो उसके वारिसों को ख़ून-बहा (खून-पैसा) दिया जाएगा और एक मोमिन गुलाम को आज़ाद करना होगा। फिर जो गुलाम ना पाए वो पै डर पै दो माहीने के रोज़ रख्खे। ये गुनाह है पर अल्लाह से तौबा करने का तरीका है। और अल्लाह आलिम ओ दाना है +[4:93] रहा वो शक्स जो किसी मोमिन को जान बूझ कर कत्ल करे तो उसकी जजा जहन्नुम है जिसमें वो हमेशा रहेगा। उसपर अल्लाह का ग़ज़ब और उसकी लानत है और अल्लाह ने उसके लिए सख़्त अज़ाब मुहैय्या कर रखा है +[4:94] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, जब तुम अल्लाह की राह में जिहाद के लिए निकलो तो दोस्त दुश्मन में तमीज़ करो और जो तुम्हारी तरफ सलाम से तकदीम शांति) करे उसे फ़वारान न कहदो के तू मोमिन नहीं है, अगर तुम दुनियावी फ़ायदा चाहते हो तो अल्लाह के पास तुम्हारे लिए बहुत से अमल ए गनीमत है। आख़िर इसी हालात में तुम खुद भी तो इसे पहले मुबतला रह चुके हो, फिर अल्लाह ने तुमपर एहसान किया। लिहाजा तहकीक से काम लो. जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बख़बर है +[4:95] मुसलमानों में से वो लोग जो किसी मजूरी (अक्षम चोट) के बिना घर बैठे रहते हैं और वो जो अल्लाह की राह में जान ओ माल से जिहाद करते हैं दोनों की हैसियत यक्सान नहीं है। अल्लाह ने बैठने वालों की बा निस्बत जान ओ माल से जिहाद करने वालों का दरजा बड़ा रक्खा है, अगर हर एक के लिए अल्लाह ने भलाई का वादा फरमाया है, मगर उसके हां मुजाहिदों की खिदमत का मुआवजा बैठने वालों से बहुत ज्यादा है +[4:96] उनके लिए अल्लाह की तरफ से बड़े दर्जे हैं और मगफिरत और रहमत है, और अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[4:97] जो लोग अपने नफ़्स पर ज़ुल्म कर रहे थे उनकी रूहें जब फ़रिश्तों ने क़ब्ज़ की तो उनसे पूछा के ये तुम किस हाल में मुब्तिला थे? उनको ने जवाब दिया के हम ज़मीन में कमज़ूर ओ मजबूर थे, फ़रिश्तों ने कहा, क्या ख़ुदा की ज़मीन वसीह न थी के तुम हमसे हिजरत करते थे? ये वो लोग हैं जिनका ठिकाना जहन्नुम है और बड़ा ही बुरा ठिकाना है +[4:98] हां जो मर्द, औरतें और बच्चे हकीकत हैं बेबस हैं और निकलने का कोई रास्ता और जरिया नहीं पाते +[4:99] बैद नहीं के अल्लाह उन्हें माफ करदे, अल्लाह बड़ा माफ करने वाला और दरगुजर फरमाने वाला है +[4:100] जो कोई अल्लाह की राह में हिजरत करेगा वो ज़मीन में पनाह लेने के लिए बहुत जगह और बसर अवकत के लिए बड़ी गुंजाईश पाएगा, और जो अपने घर से अल्लाह और रसूल की तरफ हिजरत के लिए निकले, फिर रास्ते ही में उसकी मौत आ जाए उसका अजर अल्लाह के ज़िम्मे वाजिब हो गया। अल्लाह बहुत बख्शीश फ़रमाने वाला और रहीम है +[4:101] और जब तुम लोग सफ़र के लिए निकलो तो कोई मुज़ैका (दोष) नहीं, अगर नमाज़ में इख्तेसर (छोटा) करदो (ख़ुसुसान) जबके तुम्हीं अंदेशा हो के काफ़िर तुम्हीं सताएंगे क्योंके वो खुल्लम खुल्ला तुम्हारी दुश्मनी पर तूले हुए हैं +[4:102] और (ऐ नबी)! जब तुम मुसलमानों के दरमियान हो और (हालत ए जंग में) उन्हें नमाज़ पढाने खड़े हो तो चाहिए के उनमें से एक गिरोह तुम्हारे साथ खड़ा हो और असलहा (हथियार) ले रहे, फिर जब वो सजदा करले तो पीछे चला जाए और दूसरा गिरोह जिसने अभी नमाज नहीं पढ़ी है आकार तुम्हारे साथ पढ़े और वो भी चौकन्ना रहे और अपने असलहा (हथियार) के लिए रहे, क्योंकि कुफ्फार इस ताक में है कि तुम अपने हथियारों और अपने सामान की तरफ से जरा गाफिल हो तो वो तुमपर एक बार ही टूट पड़े। अलबत्ता अगर तुम बारिश की वजह से तकलीफ़ करो या बीमार हो तो असलहा रख देने में कोई मुज़ैका नहीं, मगर फिर भी चौकन्ने रहो, यकीन रखो के अल्लाह ने काफिरों के लिए रुसवा कुन अज़ाब मुहैय्या कर रक्खा है +[4:103] फिर जब नमाज से फारिग हो जाओ तो खड़े और बैठे और लेते, हर हाल में अल्लाह को याद करते रहो और जब इत्मीनान नसीब हो जाए तो पूरी नमाज पढ़ो, नमाज दार हकीकत ऐसा फर्ज है जो पाबंदी ए वक्त के साथ एहले ईमान पर लाज़िम किया गया है +[4:104] क्या गिरोह के ताक़ुब में है कम्ज़ोरी ना दिखाओ, अगर तुम तकलीफ़ उठा रहे हो तो तुम्हारी तरह वो भी तकलीफ़ उठा रहे हैं और तुम अल्लाह से हमें चीज़ के उम्मीददार हो जिसकी वो उम्मीद नहीं है। अल्लाह सबको जानता है और वो हकीम ओ दाना है +[4:105] (ऐ नबी)! हमने ये किताब हक़ के साथ तुम्हारी तरफ नाज़िल की है ता-के जो राह ए रास्ते अल्लाह ने तुम्हें दिखाई है उसके मुताबिक़ लोगों के दरमियान फैसला करो। तुम बद-दयानत (बेईमान) लोगों की तरफ से झगड़ा करने वाले न बनो +[4:106] और अल्लाह से दरगुजर (माफी) की अंधेरगर्दी करो, वो बड़ा दरगुजर फरमान वाला और रहीम है +[4:107] जो लोग अपने नफ्स से खयानत करते हैं तुम उनकी हिमायत न करो, अल्लाह को ऐसा शक्स पसंद नहीं है जो खयानतकार (जो विश्वास को धोखा देता है) और मासीयत पेशा (पाप में लगा रहता है) हो +[4:108] ये लोग इंसानों से अपनी हरकत छुपा सकते हैं, मगर खुदा से नहीं छुपा सकते, वो तो हमें वक्त भी उनके साथ होता है जब ये रातों को चुपकर उसकी मर्जी के खिलाफ मैशवेयर करते हैं, इनके सारे अमल पर अल्लाह मुहीत है +[4:109] हान! तुम लोगों ने मुजरिमों की तरफ से दुनिया की जिंदगी में तो झगड़ा किया, मगर कयामत के रोज इनकी तरफ से कौन झगड़ा करेगा? आखिर वहां कौन इनका वकील होगा +[4:110] अगर कोई शक्स बुरा फेल (अमल) कर गुजरे या अपने नफ्स पर जुल्म कर जाए और इसके बाद अल्लाह से दरगुजर (माफी) की अंधेरगर्दी करे तो अल्लाह को दरगुजर (माफ) करने वाला और रहीम पाएगा +[4:111] मगर जो बुराई कमा ले तो उसकी ये कमाई उसके लिए बढ़िया होगी। अल्लाह को सब बातों की खबर है और वह हकीम ओ दाना है +[4:112] फिर जिसने कोई खता या गुनाह करके उसका ज़म (दोष) किसी बे-गुनाह पर थोप दिया उसने तो बदाए बोहतान और सारे गुनाह का बार समान लिया +[4:113] (ऐ नबी)! अगर अल्लाह का फ़ज़ल तुंपार न होता और उसकी रहमत तुम्हारे शामिल ए हाल न होती तो उनमें से एक गिरो ​​ने तो तुम्हें ग़लत फ़हमी में मुब्तिला करने का फैसला कर ही लिया था, हलांके दर-हक़ीक़त वो खुद अपने सिवा किसी को ग़लत फ़हमी में मुब्तिला नहीं कर रहे थे, और तुम्हारा कोई नुक्सान ना कर सकता था। अल्लाह ने तुमपर किताब और हिकमत नाज़िल की है और तुमको वो कुछ बताया है जो तुम्हें मालूम न था और उसका फ़ज़ल तुमपर बहुत है +[4:114] लोगों की खुफिया सरगोशियों (गुप्त वार्ता) में अक्सर ओ बेश्तर कोई भलाई नहीं होती, हां अगर कोई पोशीदा तौर पर सदका ओ खैरात की तालक़ीन करे या किसी नए काम के लिए या लोगों के मामले में इस्लाह करने के लिए किसी से कुछ कहे तो ये अलबत्ता भली बात है। और जो कोई अल्लाह की रजा-जोई के लिए ऐसा करेगा उसे हम बड़ा अजर अता करेंगे +[4:115] मगर जो शक्स रसूल की मुखालिफत पर कमर बस्ता हो और एहले ईमान की रवीश के सिवा किसी और रवीश पर चले, डरन हाल ये के उसपर राह ए रस्त वाज़ेह हो चुकी हो, तो उसको हम उसकी तरफ चलाएंगे जिधर वो खुद फिर गया और उसे जहन्नुम में झोंकेंगे जो बदतरीन जाए करार (बुरी मंजिल) है +[4:116] अल्लाह के हां बस शिर्क ही कि बख्शीश नहीं है, इसके सिवा और सब कुछ माफ हो सकता है जिसे वो माफ करना चाहे। जिसने अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहरया वो तो गुमराही में बहुत दूर निकल गया +[4:117] वो अल्लाह को छोड़ कर देवियों (देवियों) को माबूद बनाते हैं, वो हमें बागी शैतान को माबूद बनाते हैं +[4:118] जिसको अल्लाह ने लानत ज्यादा किया है (वो हमें शैतान की इताअत) कर रहे हैं) जिसने अल्लाह से कहा था के “मैं तेरे बंदों से एक मुकर्रर हिसा लेकर रहूंगा +[4:119] मैं उन्हें बहकाऊंगा, मैं उन्हें अरज़ूओं (व्यर्थ इच्छाओं) में उलझाऊंगा, मैं उन्हें हुकुम दूंगा और वो मेरे हुकुम से जानवरों के कान फाड़ेंगे और मैं उन्हें हुकुम दूंगा और वो मेरे हुकुम से खुदाई साख्त में रद्द ओ बदल करेंगे।'' हमें शैतान को जिसने अल्लाह के बजाय अपना वाली ओ सरपरस्त बना लिया वो सारे नुक्सान में पढ़ गया +[4:120] वो इन लोगों से वादे करता है और यहीं उम्मीदें फैलाती हैं, मगर शैतान के सारे वादे बाज़ु फ़रेब के और कुछ नहीं हैं +[4:121] इन लोगों का ठिकाना जहन्नुम है जिसमें खलासी (पलायन) की कोई सूरत ये ना पायेगा +[4:122] रहे वो लोग जो ईमान ले आयें और नेक अमल करें, तो उन्हें हम ऐसे बाघों में दखल देंगे जिनके बारे में पता चलता है और वो वहां हमेशा हमेशा रहेंगे. ये अल्लाह का सच्चा वादा है और अल्लाह से बढ़कर कौन अपनी बात में सच्चा होगा +[4:123] अंजाम-ए- कार ना तुम्हारी आरज़ूओं पर मौक़ुफ़ है न एहले किताब की आरज़ूओं पर। जो भी बुरा करेगा उसका फल पाएगा और अल्लाह के मुकाबले में अपने लिए कोई हमी ओ मददगार न पा सकेगा +[4:124] और जो नया अमल करेगा, ख्वा मर्द हो या औरत, बशारत ये के हो वो मोमिन, तो ऐसे ही लोग जन्नत में दाखिल होंगे और उनकी ज़र्रा बराबर हक़ तलाफ़ी ना होने देगी +[4:125] हमसे बेहतर और किसका तारीख़े ज़िंदगी हो सकती है जिसने अल्लाह के आगे सर-ए-तस्लीम ख़म करदिया और अपना रवैय्या नीक रक्खा और यक्सू होकर इब्राहिम के तारीख़े की जोड़ी की, उस इब्राहिम के तारीख़े की जिसने अल्लाह ने अपना दोस्त बना लिया था +[4:126] आसमान और ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह का है और अल्लाह हर चीज़ पर निर्भर है +[4:127] लोग तुमसे औरतों के मामले में फतवा पूछते हैं, कहो अल्लाह तुम्हें उनके मामले में फतवा देता है, और साथ ही वह एहकाम भी याद दिलाता है जो पहले से तुमको इस किताब मैं सुनाए जा रहे हैं, यानी वो एहकाम जो उन यतीम लड़कियों के मुतालिक हैं जिनका हक तुम अदा नहीं करते और जिनका निकाह करने से तुम बाज रहते हो (या लालेज की बिना पर तुम खुद उनसे निकाह करना चाहते हो), और वो एहकाम जो उन बच्चों के मुतालिक हैं जो बेचारे कोई ज़ोर नहीं रखते, अल्लाह तुम्हें हिदायत करता है कि यतीमों के साथ इन्साफ पर कायम रहो, और जो भलाई तुम करोगे वो अल्लाह के इल्म से छुपी न रह जाएगी +[4:128] जब किसी औरत को अपने शोहर से बढ़ सुलूकी या रुखी का ख़तरा हो तो कोई मुज़हिक़ा नहीं अगर मिया और बीवी (कुछ हुक़ूक़ की कमी पर) आपस में सुलह कर लें, सुलह बाहर हाल बेहतर है। नफ़्स तंग दिली के तरफ जल्दी मईल हो जाते हैं, लेकिन अगर तुमलोग एहसान से पेश आओ और खुदा तरसी से काम लो तो यकीन रखों के अल्लाह तुम्हारे इस तर्ज़-ए-अमल से बे-खबर न होगी +[4:129] बीवीयों के दरमियाँ पूरा-पूरा अदल करना तुम्हारे बस में नहीं है, तुम चाहो भी तो इसपर कादिर नहीं हो सकते, लिहाजा (कानून ए इलाही का इरादा पूरा करने के लिए ये काफी है के) एक बीवी की तरफ इस तरह ना झुक जाओ के दूसरी को अधर लटकता (सस्पेंस में) छोड़ दो। अगर तुम अपना तर्ज़ ए अमल दुरुस्त रखो और अल्लाह से डरते रहो अल्लाह के लिए चश्म पोशी (सर्व-क्षमाशील) करने वाला और रहम फ़रमान वाला है +[4:130] लेकिन अगर ज़वजैन एक दूसरे से अलग ही हो जाएं तो अल्लाह अपनी वसीह क़ुदरत से हर एक को दूसरे की मोहताजी से बे नियाज़ करडेगा. अल्लाह का दामन बहुत कुशादा है और वो दाना ओ बीना है +[4:131] आसमानो और ज़मीन में जो कुछ भी है सब अल्लाह ही का है, तुमसे पहले जिनको हमने किताब दी थी उन्हें भी यहीं हिदायत की थी और अब तुमको भी यही हिदायत करते हैं के खुदा से डरते हुए काम करो, लेकिन अगर तुम नहीं मानते तो ना मानो, आसमान ओ ज़मीन की सारी चीज़ों का मालिक अल्लाह हाय है और वो बेनियाज़ है, हर तारीफ का मुस्तहिक +[4:132] हाँ अल्लाह हाय मालिक है उन सब चीज़ों का जो आसमान में है और जो ज़मीन में है, और कारसाज़ी के लिए बस वही काफ़ी है +[4:133] अगर वो चाहे तो तुम लोगों को हटा कर तुम्हारी जगह दूसरे को ले आये, और वो इसकी पूरी क़ुदरत रखता है +[4:134] जो शक्स महज़ सवाब ए दुनिया का तालिब हो उसे मालूम होना चाहिए के अल्लाह के पास सवाब ए दुनिया भी है और सवाब ए आख़िरत भी, और अल्लाह समी ओ बसीर (सुनने और देखने वाला) है +[4:135] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, इन्साफ के अलंबरदार और खुदा बर्बादी के गवाह बनो अगरचे तुम्हारे इन्साफ और तुम्हारी गवाही की जड़ (खिलाफ) खुद तुम्हारी अपनी जात पर या तुम्हारे वलीदीन और रिश्तेदारों पर ही क्यों ना पढ़ती हो, फरीक मामला ख्वा मालदार हो या गरीब, अल्लाह तुमसे ज्यादा उनका खैर ख्वाह है। लिहाजा अपनी ख्वाहिश ए नफ्स की परिवार में अदल (इंसाफ) से बाज़ न रहो और अगर तुमने लंबी लिपटी बात कही या सच्चाई से पहलू बचाया तो जान रख्खो के जो कुछ तुम करते हो अल्लाह कोई उसकी खबर है +[4:136] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ईमान लाओ अल्लाह पर और उसके रसूल पर और उस किताब पर जो अल्लाह ने अपने रसूल पर नाज़िल की है और हर उस किताब पर जो उसने पहले वो नाज़िल कर चुका है। जिसने अल्लाह और उसकी मलिका और उसकी किताबें और उसके रसूलन और रोज ए आखिरीरत से कुफ्र किया वो गुमराही में भटक कर बहुत दूर निकल गया +[4:137] रहे वो लोग जो ईमान लाए, फिर कुफ्र किया, फिर ईमान लाए, फिर कुफ्र किया, फिर अपने कुफ्र में बढ़ते चले गए, अल्लाह हरगिज उनको माफ न करेगा और न कभी उनको राह ए रास्ता दिखाएगा +[4:138] और जो मुनाफिक एहले ईमान को छोड़ कर काफिरों को अपना रफीक बनाते हैं उन्हें ये मुस्दा (खबर दें) सुना दो के उनके लिए दर्दनाक सजा तय्यार है +[4:139] क्या ये लोग इज्जत की तालाब में उनके पास जाते हैं? हालांके इज्जत तो सारी की सारी अल्लाह ही के लिए है +[4:140] अल्लाह किताब में तुमको पहले ही हुकुम दे चुका है के जहां तुम सुनो अल्लाह की आयत के खिलाफ कुफ्र बका जा रहा है और उनका मजाक उड़ाया जा रहा है वहां ना बैठो जब तक के लोग किसी दूसरी बात में ना लग जायें, अब अगर तुम ऐसा करते हो तो तुम भी उनकी तरह हो। यकीन जानो के अल्लाह मुनाफिकों और काफिरों को जहन्नुम में एक जगह जमा करने वाला है +[4:141] ये मुनाफिक तुम्हारे मामले में इंतजार कर रहे हैं (किस करवट बैठा है) अगर अल्लाह की तरफ से फतह तुम्हारी हुई तो आ कर कहेंगे के क्या हम तुम्हारे साथ ना थे? अगर काफिरों का पल्ला भारी रहा तो वे कहेंगे कि क्या हम तुम्हारे खिलाफ लड़ने पर कादिर न थे और फिर भी हमने तुमको मुसलमानों से बचाया? बस अल्लाह ही तुम्हारे और उनके मामले का फैसला कयामत के रोज करेगा और (इस फैसले में) अल्लाह ने काफिरों के लिए मुसलमानों पर गालिब आने की हरगिज कोई सबील नहीं रखी है +[4:142] ये मुनाफिक अल्लाह के साथ धोखे-बाजी कर रहे हैं हलांके दर हकीकत अल्लाह हाय ने इन्हें धोखे में डाल रखा है। जब ये नमाज के लिए उठते हैं तो कसमसाते हुए मेहज़ लोगों को दिखाने की खातिर उठते हैं, और खुदा को काम ही याद करते हैं +[4:143] कुफ्र ओ ईमान के दरमियान दावा-डोल हैं, ना पूरे इस तरफ हैं ना पूरे हमारी तरफ। जैसे अल्लाह ने भटका दिया हो उसके लिए तुम कोई रास्ता नहीं पा सकते +[4:144] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, मोमिन को छोड़ कर काफिरों को अपना रफीक ना बनाओ। क्या तुम चाहते हो के अल्लाह को अपना खिलाफ़ सरीह हुज्जत देदो +[4:145] यकीन जानो के मुनाफिक जहन्नुम के सबसे आला तबके में जाएंगे और तुम किसी को उनका मददगार न पाओगे +[4:146] अलबत्ता जो उनमें से तैयब हो जाएं और अपने तर्ज ए अमल की इस्लाह कार्लें और अल्लाह का दामन थाम लें और अपने दीन को अल्लाह के लिए खाली कर दें, ऐसे लोग मोमिनो के साथ हैं और अल्लाह मोमिनो को जरूर अजर ए अजीम अता फरमायेगा +[4:147] आखिर अल्लाह को क्या पड़ी है के तुम्हें ख्वा मा ख्वा सजा दे अगर तुम शुकरगुजर बंदे बने रहो और ईमान क्या रवीश पर चलो? अल्लाह बड़ा कदरदान है और सबके हाल से वाकिफ है +[4:148] अल्लाह इसको पसंद नहीं करता के आदमी बिगड़ेगी पर जुबान खोले, इल्ला ये के किसी पर जुल्म किया गया हो। और अल्लाह सब कुछ सुनने और जाने वाला है +[4:149] (मज़लूम होने की सूरत में अगरचे तुमपर बढ़ोगी का हक़ है) लेकिन अगर तुम जाहिर ओ बातों में भलाई ही किए जाओ, या कम अज़ कम बुरायी से दरगुज़र करो, तो अल्लाह की सिफ़ात भी यही है के वो बड़ा माफ़ करने वाला है, हलाँके सज़ा देने पर पूरी क़ुदरत रखता है +[4:150] जो लोग अल्लाह और उसके रसूलों से कुफ्र करते हैं, और चाहते हैं के अल्लाह और उसके रसूलों के दरमियान तफ़रीक़ करें, और कहते हैं कि हम किसी को मानेंगे और किसी को ना मानेंगे, और कुफ्र ओ ईमान के बीच में एक राह निकालने का इरादा रखते हैं +[4:151] वो सब पक्के काफिर हैं और ऐसे काफिरों के लिए हमने वो सज़ा मुहैय्या कर रखी है जो उन्हें ज़लील ओ ख़्वार करने वाली होगी +[4:152] बा-ख़िलाफ़ इसके जो लोग अल्लाह और उसके तमाम रसूलों को मानें, और उनके दरमियान तफ़रीक़ न करें, उनको हम ज़रूर उनके अजर अता करेंगे, और अल्लाह बड़ा दरगुज़र फ़रमाने वाला और रहम करने वाला है +[4:153] ये एहले किताब अगर आज तुमसे मुतालबा कर रहे हैं कि तुम आसमान से कोई तहरीर (लिखित) उन्पर नाज़िल कराओ तो इस तरह से बढ़ चढ़ कर मुजरेमाना मुतालिबे ये पहले मूसा से कर चुके हैं। उसे तो इन्हों ने कहा था के हमें खुदा को एलानिया (अपनी आंखों से) दिखा दो और इसी सरकशी की वजह से यकायक इनपर बिजली टूट पड़ी थी। फिर इन्होन ने बछड़े (बछड़े) को अपना मबूद बना लिया, हलाँके ये खुली खुली निशानियाँ देख चुके थे इस पर भी हमने इनसे दरगुज़र किया। हमने मूसा को सारे फ़रमान अता किया +[4:154] और लोगों पर तूर (माउंट तूर) को उठा कर इनसे (उस फ़रमान की इताअत का) अहद लिया, हमने इनको हुकुम दिया के दरवाज़े में सजदा-राइज़ होते हुए दाख़िल होन, हमने इनसे कहा के सबथ का कानून ना तोड़ो और इसपर इंसे पुख्ता अहद लिया +[4:155] आख़िर ए कार इनकी अहद शिकानी (संधि तोड़ना) कि वजह से, और इस वजह से के इन्होन ने अल्लाह की आयत को झुटलाया, और मुताअदीद पैगम्बरों को ना-हक़ क़तल किया, और यहाँ तक कहा के हमारे दिल गिलाफ़ों में महफ़ूज़ हैं। हलांके दर हकीकत इनकी बातिल परस्ती के सबाब से अल्लाह ने इनके दिलों पर थप्पड़ (सील) लगा दिया है और इसी वजह से ये बहुत कम ईमान लाते हैं +[4:156] फिर अपने कुफ्र में इतने बढ़े के मरियम पर सख्त बोहतन (बदनामी) लगाया +[4:157] और खुद कहा के हमने मसीहा, ईसा इब्न-मरियम रसूल अल्लाह को क़त्ल करदिया है हालानके फ़िलवाक़े इन्होन ने ना उसको क़त्ल किया ना सलीब (क्रॉस) पर चढ़ाया, बलके मामला इनके लिए मुश्तबा (उन्हें संदिग्ध बना दिया) करदिया गया, और जिन लोगों ने इसके बारे में इख्तिलाफ़ किया है वो भी दर-असल शक्क में मुब्तिला है, उनके पास इस मामले में कोई इल्म नहीं है, महज़ गुमान ही की जोड़ी है। उनहों ने मसीह को यकीन के साथ क़त्ल नहीं किया +[4:158] बल्के अल्लाह ने उसको अपनी तरफ उठाया, अल्लाह ज़बर्दस्त ताक़त रखने वाला और हकीम है +[4:159] और एहले किताब में से कोई ऐसा ना होगा जो उसकी मौत से पहले उसपर ईमान ना ले आएगा और कयामत के रोज़ वो उनपार गवाही देगा +[4:160] ग़रज़ इन यहूदी बन जाने वालों के इसी ज़ालिमाना रवैये की बिना पर, और इस बिना पार के ये बकसरत अल्लाह के रास्ते से रोते हैं +[4:161] और सूद (सूदखोरी) लेते हैं जिसने इन्हें मना किया था, और लोगों के माल नजायज़ तरीक़ों से खाते हैं, हमने बहुत सी वो पाक चीज़ें इनपर हराम करदी जो पहले इनके लिए हलाल थी। और जो लोग इनमें से काफिर हैं उनके लिए हमने दर्दनक अज़ाब तय्यार कर रखा है +[4:162] मगर उनमें जो लोग पूछते इल्म रखने वाले हैं और इमानदार हैं वो सब हमसे तालीम पर ईमान लाते हैं जो तुम्हारी तरफ नाज़िल की गई है और जो तुमसे पहले नाज़िल की गई है थी. इस तरह के ईमान लाने वाले और नमाज़ ओ ज़कात की पाबन्दी करने वाले और अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर पर सच्चा अकीदा रखने वाले लोगों को हम ज़रूर अजर ए अज़ीम अता करेंगे +[4:163] (ऐ मुहम्मद)! हमने तुम्हारी तरफ उसी तरह वही भेजी थी जिस तरह नूह और उसके बाद के पैगम्बरों की तरफ भेजी थी, हमने इब्राहिम, इस्माइल, इशाक, याकूब और औलाद ए याकूब, ईसा, अयूब, यूनुस, हारून और सुलेमान की तरफ वही भेजी, हमने दाऊद को जुबुर दी +[4:164] हमने उन रसूलों पर भी वही नाज़िल की जिनका ज़िक्र हम इस पहले तुमसे कर चुके हैं और उन रसूलों पर भी जिनका ज़िक्र तुमसे नहीं किया, हमने मूसा से इस तरह गुफ्तगू की जाती है +[4:165] ये सारे रसूल ख़ुश ख़बरी देने वाले और डराने वाले बाना कर भेजे गए थे ता-के उनको मबूस करदीन के बाद लोगों के पास अल्लाह के मुकाबले में कोई हुज्जत ना रहे और अल्लाह बाहर हाल गालिब रहने वाला और हकीम ओ दाना है +[4:166] (लोग नहीं मानते तो ना माने) मगर अल्लाह गवाही देता है के जो कुछ उसने तुमपर नाज़िल किया है अपने इल्म से नाज़िल किया है, और इसपर मलिका (फरिश्ते) भी गवाह हैं, अगरचे अल्लाह का गवाह होना बिल्कुल किफायत करता है +[4:167] जो लोग इसको मन से खुद इनकार करते हैं और दूसरों को खुदा के रास्ते से रोकते हैं वो यकीनन गुमराही में हक से बहुत दूर निकल गए हैं +[4:168] इस तरह जिन लोगों ने कुफ्र ओ बगावत का तरीका इख्तियार किया और जुल्म ओ सितम पर उतर आए अल्लाह उनको हरगिज माफ न करेगा और उन्हें कोई रास्ता +[4:169] बजुज जहन्नुम के रास्ते के ना दिखाऊंगा जिसमें वो हमेशा रहेंगे। अल्लाह के लिए ये कोई मुश्किल काम नहीं है +[4:170] लोगन! ये रसूल तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से हक़ लेकर आया है, ईमान ले आओ, तुम्हारे लिए ही बेहतर है, और अगर इनकार करते हो तो जान लो के आसमान और ज़मीन में जो कुछ है सब अल्लाह का है और अल्लाह अलीम भी है और हकीम भी +[4:171] ऐ एहले किताब! अपने दीन में घुलु (अति) न करो और अल्लाह की तरफ हक़ के सिवा कोई बात मंसूब न करो, मसीह ईसा इब्ने मरियम इसके सिवा कुछ न था के अल्लाह का एक रसूल था और एक फरमान था जो अल्लाह ने मरियम की तरफ भेजा और एक रूह थी अल्लाह की तरफ से (जिसने मरियम के रहम में) बच्चों की शकल इख्तियार की) पास तुम अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाओ, और ना कहो के "तीन (त्रिमूर्ति)" हैं बाज़ आ जाओ, ये तुम्हारे ही लिए बेहतर है, अल्लाह तो बस एक ही खुदा है, वो बाला-तर है इस्के कोई उसका बेटा हो। ज़मीन और आसमान की सारी चीज़ें उसका दूध हैं, और इनकी कफ़लत ओ ख़बरगीरी के लिए बस वही काफ़ी है +[4:172] मसीह ने कभी इस बात को आर (तिरस्कार) नहीं समझा के वो अल्लाह का बंदा हो, और ना मुकर्रब-तरीन फ़रिश्ते इसको अपने लिए एआर (तिरस्कार) समझते हैं. अगर कोई अल्लाह की बंदगी को अपने लिए जानता है और तकब्बुर करता है तो एक वक्त आएगा जब अल्लाह सबको घेर कर अपने सामने हाज़िर करेगा +[4:173] हमें वक्त वो लोग जिन्हों ने ईमान ला कर नीक तर्ज ए अमल इक्तियार किया है अपने अजर पूरे पूरे पायेंगे और अल्लाह अपने फजल से उनको मजीद अजर अता फरमायेगा। और जिन लोगों ने बंदगी को आर समझा और तकब्बुर किया है उनको अल्लाह दर्दनाक सजा देगा और अल्लाह के सिवा जिन की सरपरस्ती ओ मददगार पर वो भरोसा रखते हैं उनमें से किसी को भी वो वहां ना पाएंगे +[4:174] लोगन! तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास दलील ए रोशन आ गई है और हमने तुम्हारी तरफ ऐसी रोशनी भेज दी है जो तुम्हें साफ साफ रास्ता दिखाने वाली है +[4:175] अब जो लोग अल्लाह की बात मान लेंगे और उसकी पनाह ढूंढेंगे उनको अल्लाह अपनी रहमत और अपने फजल ओ करम के दामन में ले लेगा और अपनी तरफ आने का सीधा रास्ता उनको दिखा देगा +[4:176] लोग तुमसे 'कलालाह' (उन लोगों से विरासत जो अपने पीछे कोई वंशानुगत उत्तराधिकारी नहीं छोड़े हैं) के मामले में फतवा पूछते हैं। कहो अल्लाह तुम्हें फतवा देता है: अगर कोई शक्स बे-औलाद मर जाए और उसकी एक बहन हो तो वो उसके तर्क (जो उसने पीछे छोड़ दिया है) में से निस्फ़ (आधा) पाएगी, और अगर बहन बे-औलाद मारे तो भाई उसका वारिस होगा। अगर मय्यत की वारिस दो बहनें हों तो वो तर्के में से दो-तिहाई (दो-तिहाई) की हक़दार होंगी, और अगर कई भाई बहनें हों तो औरतों का इकहरा और मर्दों का दोहरा हिस्सा (तब पुरुष को दो महिलाओं का हिस्सा मिलेगा) होगा। अल्लाह तुम्हारे लिए एहकाम की तौज़ीह (स्पष्ट करता है) करता है ता-के तुम भक्त न फिरो और अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है + +Surah 5: Al-Ma'idah (The Food) +---------------------------------------- +[5:1] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, बंदिशों की पूरी पाबंदी करो, तुम्हारे लिए मवेशी की क़िसम के सब जानवर हलाल हो गए, सिवाय उनके जो आगे चलकर तुमको बताएँगे, लेकिन एहराम की हालत में शिकार को अपने लिए हलाल न करलो। बेशाक़ अल्लाह जो चाहता है हुकुम देता है +[5:2] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, खुदा परस्ती की निशानियों को बे-हुरमत न करो, न हराम महिनो (महीने) में से किसी को हलाल करो, न कुर्बानी के जाँवरों पर दस्तूर करो, न उन जानवरों पर हाथ डालो जिनकी गर्दन में नज़र ए खुदा-वंदी की हालत पर पत्ते पड़े (कॉलर पहने हुए) हुए हों, न उन लोगों को छेड़ो जो अपने रब के फजल और उसकी खुशनुदी की तलाश में मकान-ए-मोहतरम (काबा) की तरफ जा रहे हों। हां जब एहराम की हालत खत्म हो जाए तो शिकार तुम कर सकते हो और देखो एक गिरो ​​ने जो तुम्हारे लिए मस्जिद ए हराम का रास्ता बंद कर दिया है तो इसपर तुम्हारा गुस्सा तुम्हें इतना मुश्तैल ना करदे के तुम भी उनके मुकाबले में नरवा ज्यादतियां करने लगो। नहीं! जो काम नेकी और खुदा तरसी के हैं उन सब में तावुन (एक दूसरे की मदद) करो और जो गुनाह और ज्यादा के काम हैं उनमें किसी से तावुन (एक दूसरे की मदद) ना करो। अल्लाह से डरो, उसकी सज़ा बहुत ज़रूरी है +[5:3] तुमपर हराम किया गया मुर्दर (मृत मांस), खून, सुवर का गोश्त, वो जानवर जो खुदा के सिवा किसी और के नाम पर जिबाह किया गया हो, वो जो गला घोंट (गला घोंट) कर, या चोट (घाव) खा कर, या बुलंदी से गिर कर, या टक्कर खा कर मारा हो, हां जिसके किसी दरिंदे ने फाड़ा हो, सिवाय उसके जिसने तुमने जिंदा पा कर जिबाह करलिया, और वो जो किसी आस्ताने (वेदियों) पर जिबाह किया गया हो, लेकिन ये भी तुम्हारे लिए जरूरी है कि पैंसों के ज़रिये से अपनी किस्मत मालूम करो। दिव्य बाण)। ये सब अफ़ज़ल फ़िस्क (पाप कर्म) हैं। आज काफ़रियों को तुम्हारे दीन की तरफ़ से पूरी मयूसी हो चुकी है लिहाज़ा तुम उनसे ना डरो बलके मुझसे डरो। आज मैंने तुम्हारे लिए मुकम्मल कर दिया है और अपनी नियामत तुमपर तमाम कर दी है और तुम्हारे लिए इस्लाम को तुम्हारे दीन की हैसियत से कबूल कर लिया है। (लिहाजा हराम ओ हलाल की जो क़ुयूद तुंपार आयद करदी गई है उनकी पबंदी करो) अलबत्ता जो शक्स भूख से मजबूर होकर उनमें से कोई चीज़ खा ले, बिना इसके के गुनाह की तरफ उसका मेलन (जानबूझकर झुका हुआ) हो तो अल्लाह माफ करने वाला और रहम फरमाने वाला है +[5:4] लॉग पूछते हैं कि उनके लिए क्या हलाल किया गया है, कहो तुम्हारे लिए सारी चीजें हलाल कर दी गई हैं और जिन शिकारी जानवरों को तुमने सिखाया हो (उन्हें शिकार करना सिखाओ, प्रशिक्षित करो) जिनको खुदा के दिए हुए इलम की बिना पर तुम शिकार की तालीम दिया करते हो, वो जिस जानवर को तुम्हारे लिए पकड़ रक्खें उसको भी तुम खा सकते हो, अलबत्ता उसपर अल्लाह का नाम लेलो और अल्लाह का कानून तोड़ने से डरो। अल्लाह को हिसाब लेते कुछ देर नहीं लगती +[5:5] आज तुम्हारे लिए सारी पाक चीजें हलाल हो गई हैं, एहले किताब का खाना तुम्हारे लिए हलाल है और तुम्हारा खाना उनके लिए और महफूज औरतें भी तुम्हारे लिए हलाल हैं ख्वा वो एहले ईमान के गिरो ​​से होन या उन क़ौमों में से जिनको तुमसे पहले किताब दी गई थी, बशारत-ये-के तुम उनके मेहर अदा करके निकाह में उनके मुहाफ़िज़ (रक्षक) बानो, ना हाँ के आजाद शेहवत (वासना) रानी करने लगो या चोरी छुपे आशनाईयां करो। और जो किसी ने ईमान की रवीश पर चलने से इनकार किया तो उसका सारा कारनामा ए जिंदगी जाय हो जाएगा और वो आखिरत में दीवालिया (पूरी तरह से हारे हुए लोगों के बीच) होगा +[5:6] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम नमाज के लिए उठो तो चाहिए के अपने मुंह और हाथ कोहनी तक धो लो, सिरों पर हाथ फेर लो और पांव तक धो लिया करो, अगर जनाब की हालत में हो तो नहा कर पक जाओ, अगर बीमार हो या सफर की हालत में हो या तुम में से कोई शक्स रफे हाजत (खुद को राहत देते हुए) करके आए या तुमने औरतों को हाथ लगाया हो, और पानी ना मिले, तो पाक मिट्टी से काम लो, बस उसपर हाथ मार कर अपने मुंह और हाथों पर फेर लिया करो। अल्लाह तुमपर जिंदगी को तंग नहीं करना चाहता, मगर वो चाहता है कि तुम्हें पाक करे और अपनी नियामत तुमपर तमाम करदे, शायद के तुम शुक्रगुज़ार बनो +[5:7] अल्लाह ने तुमको जो नियामत अता की है उसका ख्याल रक्खो और हमें पुख्ता अहद को ना भूलो जो उसने तुमसे लिया है, यानी तुम्हारा ये क़ौल के, "हमने सुना और इताअत क़बूल की" अल्लाह से डरो, अल्लाह दिलों के राज़ जानता है +[5:8] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो! अल्लाह की खातिर रास्ता (सीधा) पर क़याम रहने वाले और इंसाफ की गवाही देने वाले बनो, किसी गिरोह की दुश्मनी तुमको इतना मुशतैल (चाल) ना करदे के इंसाफ से फिर जाओ। अदल (इंसाफ) करो, ये खुदा तरसी से ज्यादा मुनासिबत रखता है, अल्लाह से डर कर काम करते रहो, जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे पूरी तरह ब-खबर है +[5:9] जो लोग ईमान लाए और नेक अमल करें, अल्लाह ने उनसे वादा किया है कि उनकी खतों से दरगुजर किया जाएगा और उन्हें बड़ा अजर मिलेगा +[5:10] रहे वो लोग जो कुफ्र करें और अल्लाह की आयतें बताएं, तो वो दोज़ख़ में जाने वाले हैं +[5:11] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, अल्लाह के हमें एहसान को याद करो जो उसने (अभी हाल में) तुमपर किया है, जबके एक गिरो ​​ने tumpar दस्त दारज़ी (अपने खिलाफ हाथ फैलाएं) का इरादा कार्लिया था, मगर अल्लाह ने उनके हाथ तुम पर खड़े से रोक दिए, अल्लाह से डर कर काम करते रहो, ईमान रखने वालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए +[5:12] अल्लाह ने बानी इसराइल से पुख्ता अहद लिया था और में बारह (बारह) नकीब (नेताओं) ने मुकर्रर किया था और उनसे कहा था के "मैं तुम्हारे साथ हूं, अगर तुमने नमाज कायम रक्खी और जकात दी और मेरे रसूलों को माना अर उनकी मदद की और अपने खुदा को अच्छा कर्ज देते रहे तो यकीन रखिए के मैं तुम्हारी बुराइयां तुमसे ज़याल (मिटा दो) कर दूंगा और तुमको ऐसे बाघों (बगीचों) में दाख़िल करुंगा जिनका आला नहरें बहती होंगी, मगर इसके बाद जिसने तुम में से कुफ्र की रवीश इख्तियार की तो दर हक़ीक़त उसने स्व-सबील गम करदी (सही रास्ते से भटक गए)” +[5:13] फिर ये उनका अपने अहद को तोड़ देना था जिसकी वजह से हमने उनको अपनी रहमत से दूर फेंक दिया और उनका दिल मजबूत कर दिया। अब उनका हाल ये है कि अल्फ़ाज़ का उलट फेर करके बात को कहीं से कहीं ले जाते हैं, जो तालीम उन्हें दी गई थी उसका बड़ा हिसा भूल चुके हैं, और आए दिन तुम्हें उनकी कोई ना किसी खयानत का पता चलता रहता है। इनमें से बहुत कम लोग इस ऐब (बुराई) से बचे हुए हैं, [पास जब ये इस हाल को पाहुंच चुके हैं तो जो शरारतें भी ये करें वो इनसे ऐन मुतवक्क (अपेक्षित) हैं, लिहाजा इन्हें माफ करो और इनकी हरकत से चश्मा-पोशी (नजरअंदाज) करते रहो। अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो एहसान की रवीश रखते हैं +[5:14] इसी तरह हमने उन लोगों से भी पुख्ता अहद लिया था जिन्होन ने कहा था कि "हम नसारा (ईसाई) हैं" लेकिन उनको भी जो सबक याद करवाया गया था उसका एक बड़ा हिसा उनहोन ने फरामोश करदिया। आख़िर ए कार हमने उनके दरमियान कयामत तक के लिए दुश्मनी और आपस के बुग्ज़ ओ इनाद (बावजूद) का बीज बो (बीज बोना) दिया, और जरूर एक वक्त आएगा जब अल्लाह उन्हें बताएगा कि वो दुनिया में क्या बना रहे हैं +[5:15] ऐ एहले किताब! हमारा रसूल तुम्हारे पास आ गया है जो किताब ए इलाही की बहुत सी उन बातों को तुम्हारे सामने खोल रहा है जब तक तुम पर्दा डाला करते थे, और बहुत सी बातों से दरगुज़र भी कर लिया जाता है। तुम्हारे पास अल्लाह की तरफ से रोशनी आ गई है और एक ऐसी हक़ नुमा किताब +[5:16] जिसकी ज़रिये से अल्लाह ताला उन लोगों को जो उसकी रज़ा के तालिब हैं सलामती के तारीख़े बताता है और अपने इज़ान से उनको अँधेरों से निकाल कर उजाले की तरफ लाता है और राह ए रास्ते की तरफ उनकी रहनुमाई करता है +[5:17] यकीनन कुफ्र किया उन लोगों ने जिन्हों ने कहा मसीह इब्न मरियम खुदा है। (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के अगर खुदा मसीह इब्न मरियम को और उसकी माँ और तमाम ज़मीन वालों को हलाक करना चाहे तो किसकी मजाल है कि उसको इस इरादे से बाज़ रख सके? अल्लाह तो ज़मीन और आसमान का और उन सब चीज़ों का मालिक है जो ज़मीन और आसमान के दरमियान पाई जाती है, जो कुछ चाहता है अदा करता है और उसकी क़ुदरत हर चीज़ पर हावी है +[5:18] यहूद और नसारा कहते हैं कि हम अल्लाह के बेटे और उसके चाहते हैं (प्यारे) हैं, इनसे पूछो, फिर वो तुम्हारे गुनाहों पर तुम्हें सजा क्यों देता है? दर हकीकत तुम भी वही इंसान हो जैसे और इंसान खुदा ने अदा किये हैं। वो जिसे चाहता है माफ़ करता है और जिसे चाहता है सज़ा देता है। ज़मीन और आसमान और इनकी सारी मौजुदात उसका दूध है। और उसकी तरफ सबको जाना है +[5:19] ऐ एहले किताब! हमारा ये रसूल ऐसे वक्त तुम्हारे पास आया है और दीन की वजह से तालीम तुम्हें दे रहा है जब रसूलों की आमद का सिलसिला एक मुद्दत से बंद था, ता-के तुम ये ना कह सको के हमारे पास कोई बशारत देने वाला और डराने वाला नहीं आया। तो देखो! अब वो बशारत देने वाला और डराने वाला आ गया और अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है +[5:20] याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा था के "ऐ मेरी क़ौम के लोगों! अल्लाह की हमें नियामत का ख्याल करो जो उसने तुम्हें अता की थी, उसने तुम में नबी पैदा किया, तुमको फरमा रवा बनाया, और तुमको वो कुछ दिया जो दुनिया में किसी को ना दिया था +[5:21] ऐ बिरादरान ए क़ौम! हमें मुक़द्दस सर-ज़मीन में दाख़िल हो जाओ जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिख दिया है, पीछे ना हटो वरना नाकाम ओ ना-मुराद पलटोगे” +[5:22] अनहोनी जवाब दीया "ऐ मूसा! वहां तो बड़े ज़बरदस्त लोग रहते हैं, हम वहां हरगिज़ ना जाएंगे जब तक वो वहां से निकल न जाएं, अगर वो निकल गए तो हम दखल देने के लिए तैयार हैं" +[5:23] उन डरने वालों में दो शक्स ऐसे भी थे जिनको अल्लाह ने अपनी नियामत से नवाजा था, उनहों ने कहा के "जबरों के मुकाबले में दरवाजे के अंदर घुस जाओ, जब तुम अंदर पहुंच जाओगे तो तुम ही गालिब रहोगे। अल्लाह पर भरोसा रखो अगर तुम मोमिन हो" +[5:24] लेकिन उनहों ने फिर यहीं कहा के " ऐ मूसा! हम तो वहां कभी ना जाएंगे जब तक वो वहां मौजूद हैं, बस तुम और तुम्हारा रब, दोनों जाओ और लाडो, हम यहां बैठे हैं +[5:25] इस्पर मूसा ने कहा "ऐ मेरे रब, मेरे इख्तियार में कोई नहीं मगर या मेरी अपनी जात या मेरा भाई, पास तू हमें इन नफ़रमान लोगों से अलग करदे।" +[5:26] अल्लाह ने जवाब दिया ' अच्छा तो वो मुल्क चालीस (चालीस) साल तक इनपर हराम है, ये ज़मीन में मारे मारे फिरेंगे। इन नफ़रमानों की हालत पर हरगिज़ तरस न खाओ” +[5:27] और ज़रा इनमें आदम के दो बेटों का क़िस्सा भी बे कम-ओ-काश्त सुना दो जब उन दोनों ने क़ुर्बानी की, तो उन में से एक क़ुर्बानी क़बूल की गई और दूसरे की न की गई, उसने कहा “मैं तुझे मार डालूंगा” उसने जवाब दिया “अल्लाह तो मुत्तक़ियों ही की नज़रें (प्रसाद) क़बूल करता है +[5:28] अगर तू मुझे क़त्ल करने के लिए हाथ उठाएगा तो मैं तुझे क़त्ल करने के लिए हाथ न उठाऊंगा। मैं अल्लाह रब्बुल आलमीन से डरता हूं +[5:29] मैं चाहता हूं कि मेरा और अपना गुनाह तू ही समइत ले और दोज़खी बनकर रहे। ज़ालिमों के ज़ुल्म का यही ठीक बदला है।” +[5:30] आख़िर ए कार उसके नफ़्स ने अपने भाई का क़त्ल उसके लिए आसान कर दिया और वो उसे मार कर उन लोगों में शामिल हो गया जो नुक्सान उठाने वाले हैं +[5:31] फिर अल्लाह ने एक कौवा (कौआ) भेजा जो ज़मीन खोदने लगा ता-के उसे बताए के अपने भाई की लाश कैसे छुपाये। ये देख कर वो बोला अफ़सोस मुझपर! मैं इस कव्वे जैसा भी ना हो सका के अपने भाई की लाश छुपाने की तद्बीर निकाल लेता, इसके बाद वो अपने किये पर बहुत पछताया +[5:32] इसी वजह से बनी इजराइल पर हमने ये फरमान लिख दिया था के “जिसने किसी इंसान को खून के बदले या ज़मीन में फ़साद फ़ैलाने के सिवा किसी और वजह से क़त्ल किया उसने गोया तमाम इंसानों को क़त्ल कर दिया और जिसने किसी की जान बचाई उसने गोया तमाम इंसानों को ज़िंदगी बख्श दी”। मगर उनका हाल ये है कि हमारे रसूल पै डर पै उनके पास खुली खुली हिदायत लेकर आये फिर भी उनमें बकसरत लोग ज़मीन में ज़्यादतियां (ज्यादती करना) करने वाले हैं +[5:33] जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से लड़ते हैं और ज़मीन में हैं टैग-ओ-दो करते फिरते हैं के फ़साद (शरारत) बरपा करें उनकी सज़ा ये है के क़त्ल किये जायें, या सूली पर चढ़ाये जायें, या उनके हाथ और पैरों मुखालिफ़ सिमतों से काट डाले जायें, या वो जिला वतन (जमीन से निर्वासित) कर दिये जायें। ये ज़िल्लत ओ रुसवाई तो उनके लिए दुनिया में है और आख़िरत में उनके लिए इसे बड़ी सज़ा है +[5:34] मगर जो लोग तौबा कार्लें क़बल इसके के तुम उन्पर क़ाबू पाओ। तुम्हें मालूम होना चाहिए के अल्लाह माफ करने वाला और रहम फरमाने वाला है +[5:35] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो और उसकी जनाब में बैरयाबी (नज़दीकी) का ज़रिया तलाश करो, और उसकी राह में जिद ओ जहद करो, शायद के तुम्हें कामयाबी नसीब हो जाये +[5:36] खूब जान लो के जिन लोगों ने कुफ्र का रवैय्या इख्तियार किया है, अगर उनके क़ब्ज़े में सारी ज़मीन की दौलत हो और इतनी ही और इसके साथ और वो चाहे के इसी फिदिये (बदले/प्रायश्चित) में दे कर रोज़ ए कयामत के अज़ाब से बच जाएं, तब भी वो उनसे क़बूल ना की जाएगी और उन्हें दर्दनाक सज़ा मिलकर रहेगी +[5:37] वो चाहे के दोज़ख की आग से निकल भागें मगर ना निकल सकेंगे और उन्हें क़याम (हमेशा) रहने वाला अज़ाब दिया जाएगा +[5:38] और चोर, ख्वा औरत हो या मर्द, दोनों के हाथ काट दो, ये उनकी कमाई का बदला है और अल्लाह की तरफ़ से इब्रातनाक सज़ा। अल्लाह की क़ुदरत सब पर ग़ालिब है और वो दाना ओ बीना है +[5:39] फिर जो ज़ुल्म करने के बाद तौबा करे और अपना इस्लाह करले तो अल्लाह की नज़र ए इनायत फिर उसपर मय्यल हो जाएगी, अल्लाह बहुत दरगुज़र करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[5:40] क्या तुम जानते नहीं हो के अल्लाह ज़मीन और आसमान की सल्तनत का मालिक है? जिसे चाहे सजा दे और जिसे चाहे माफ करदे, वो हर चीज का इख्तियार रखता है +[5:41] ऐ पैगम्बर! तुम्हारे लिए बाइस-ए-रंझ (शोक) ना हो वो लोग जो कुफ्र की राह में बड़ी तेजी से गमी दिखा रहे हैं ख्वा वो उनमें से हो जो मुंह से कहते हैं हम ईमान लाए मगर दिल उनके ईमान नहीं लाए, हां उनमें से हो जो यहुदी बन गए हैं, जिनका हाल ये है के झूठ के लिए कान लगाते हैं, और दूसरे लोगों की खातिर जो तुम्हारे पास कभी नहीं आए, सुन गुन लेते फिरते हैं, किताब-अल्लाह के अल्फाज़ को उनका सही महल मुतायिन होना के बकवास असल मानी से फेरते हैं। और लोग कहते हैं कि अगर तुम ये हुकुम दिया जाए तो मानो नहीं तो ना मानो, जैसे अल्लाह ही ने फिटने में डालने का इरादा करलिया हो तो उसको अल्लाह की नजरों से बचाने के लिए तुम कुछ नहीं कर सकते। ये वो लोग हैं जिनके दिलों को अल्लाह ने पाक करना ना चाहा। इनके लिए दुनिया में रूसवाई है और आख़िरत में साज़ा है +[5:42] ये झूठ सुनने वाले और हराम के माल खाने वाले हैं, लिहाज़ा अगर ये तुम्हारे पास (अपने मुक़द्दमात लेकर) आएं तो तुम्हें इख्तियार दिया जाता है के चाहो इनका फैसला करो वरना इंकार करदो. इंकार करदो तो ये तुम्हारा कुछ बिगाड़ नहीं सकता, और फैसला करो तो फिर ठीक ठीक इन्साफ के साथ करो के अल्लाह इन्साफ करने वालों को पसंद करता है +[5:43] और ये तुम्हें कैसे हकम (जज) बनाते हैं जबके इनके पास तौरात (तोराह) मौजूद है जिसमें अल्लाह का हुकुम लिखा हुआ है और फिर ये उसे मुंह मोड़ रहे हैं? असल बात ये है के ये लोग ईमान ही नहीं रखते +[5:44] हमने तौरात नाज़िल की जिसमें हिदायत और रोशनी थी। सारे नबी जो मुस्लिम थे, यहूदी बन जाने वालों के मामले में उसी के मुतालिक थे, और इसी तरह रब्बानी और एहबर (विद्वान और न्यायविद) भी (इसी पर फैसले का मदार रखते थे)। क्योंके उन्हें किताब अल्लाह की हिफ़ाज़त का ज़िम्मेदार बनाया गया था और वो इसपर गवाह थे। पस (ऐ गिरो ​​ए यहूद!) तुम लोगों से ना डरो बलके मुझसे डरो, और मेरी आयत को जरा जरा से नुकसान पहुंचाओ (तुच्छ लाभ/कीमत) लेकर बेचना छोड़ दो। जो लोग अल्लाह के नाजिल करदा कानून के मुताबिक फैसला न करें वही काफिर हैं +[5:45] तौरात में हमने यहुदियों पर ये हुकुम लिख दिया था के जान के बदले जान, आंख के बदले आंख, नाक के बदले नाक, कान के बदले कान, दांत के बदले दांत, और तमाम जख्मों के लिए बराबर का बदला, फिर जो क़िस्स का सदका करदे तो वो उसके लिए कफारा है और जो लोग अल्लाह के नाज़िल करदा कानून के मुताबिक़ फैसला ना करें वही जालिम हैं +[5:46] फिर हमने पैगंबर के बाद मरियम के बेटे ईसा को भेजा, तौरात में से जो कुछ उसके सामने मौजूद था वो उसकी तस्दीक करने वाली थी और हमने उसको इंजील अता की जिसकी रहनुमाई और रोशनी थी और वो भी तौरात में से जो कुछ हमें वक्त मिला उसकी तस्दीक करने वाली थी और खुदा तरस लोगों को हिदायत और हिदायत थी +[5:47] हमारा हुकुम था के एहले इंजील उस कानून के मुताबिक फैसला करें जो अल्लाह ने इसमे नाजिल किया है और जो लोग अल्लाह के नाजिल करदा कानून के मुताबिक फैसला न करें वही फासिक हैं +[5:48] फिर (ऐ मुहम्मद!) हमने तुम्हारी तरफ ये किताब भेजी जो हक लेकर आई है और अल-किताब में से जो कुछ इसके आगे मौजूद है उसकी तस्दीक करने वाली और इसकी मुहाफिज ओ निगेहबान है। लिहाज़ा तुम खुदा के नाज़िल करदा कानून के मुताबिक़ लोगों के मामले का फैसला करो और जो हक तुम्हारे पास आया है उससे मुह मोड़ कर इनकी ख्वाहिश की जोड़ी ना करो। हमने तुम में से हर एक केलिये एक शरीयत और एक राह ए अमल मुकर्रर की, अगर तुम्हारा खुदा चाहता तो तुम सबको एक उम्मीद भी बना सकता था, लेकिन उसने ये इसलिए किया के जो कुछ उसने तुम लोगों को दिया है उसमें तुम्हारी आजमाइश करे, लिहाजा भलाईयों में एक दूसरे से सबक ले जाने की कोशिश करो। आख़िर ए कार तुम सब को खुदा की तरफ पलट कर जाना है, फिर वो तुम्हें असल हकीकत बता देगा जिसमें तुम इख्तिलाफ करते रहोगे +[5:49] पास (ऐ मुहम्मद)! तुम अल्लाह के नाज़िल करदा क़ानून के मुताबिक़ में लोगों के ममलात का फ़ैसला करो और इनकी ख्वाहिश की जोड़ी ना करो। होशियार रहो के ये लोग तुमको फ़िटने में डाल कर हमें हिदायत से ज़रा बराबर मुनहरिफ़ ना करने पाए जो खुदा ने तुम्हारी तरफ नाज़िल की है। फिर अगर ये इसी मुह मोड़ें तो जान लो के अल्लाह ने इनके बाज़ गुनाहों की याद में इनको मुबतला ए मुसीबत करने का इरादा ही कर लिया है, और ये हकीकत है के इन लोगों में से अक्सर फ़ासीक़ हैं +[5:50] (अगर ये खुदा के कानून से मुह मोड़ते हैं) तो क्या फिर जेलियत का फैसला चाहते हैं? हालंके जो लोग अल्लाह पर यकीन रखते हैं उनके नजरिए से अल्लाह से बेहतर फैसला करने वाला कोई नहीं है +[5:51] ऐ लोग जो ईमान लाए हो! यहुदियों (यहूदियों) और ईसाइयों (ईसाइयों) को अपना रफीक (दोस्त) न बनाओ। ये आपस में ही एक दूसरे के रफीक हैं। और अगर तुम में से कोई इनको अपना रफीक बनाता है तो उसका शूमर भी फिर इसी में है। यकीनन अल्लाह ज़ालिमों को अपनी रहनुमाई से महरूम कर देता है +[5:52] तुम देखते हो के जिनके दिलों में निफ़ाक की बीमारी है वो उन्ही में दौड़-धूप करते फिरते हैं, कहते हैं हैं "हमें डर लगता है के कहीं हम किसी मुसीबत के चक्कर में न फंस जाएं" मगर बाद नहीं कि अल्लाह जब तुम्हें फैसला-कुन फतह (निर्णायक जीत) बक्शेगा या अपनी तरफ से कोई और बात जाहिर करेगा तो ये लोग अपने इस निफाक (पाखंड) पर जैसे येह दिलों में छुपे हुए हैं नदीम होंगे +[5:53] और हम वक्त एहले ईमान कहेंगे "क्या ये वही लोग हैं जो अल्लाह के नाम से कड़ी कसमें खा कर यकीन दिलाते थे के हम तुम्हारे साथ हैं?" उनके सब अमल ज़ाया होगे और आख़िर ए कार ये नाकाम ओ ना-मुराद होकर रहे +[5:54] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम में से कोई अपने दीन से फिरता है (तो फिर जाए) अल्लाह और भूत से लोग ऐसा अदा कर देंगे जो अल्लाह को मेहबूब होंगे और अल्लाह उनको मेहबूब होगा, जो मोमिनो पर नर्म और कुफ्फार पर सख्त होंगे, जो अल्लाह की राह में जिद ओ जहद करेंगे और किसी को मलामत करने वाले से न डरेंगे। ये अल्लाह का फ़ज़ल है, जिसे चाहता है अता करता है। अल्लाह वसीह ज़राए का मालिक है और सब कुछ जानता है +[5:55] तुम्हारे रफीक तो हकीकत में सिर्फ अल्लाह और अल्लाह का रसूल और वह एहले ईमान हैं जो नमाज़ क़याम करते हैं, ज़कात देते हैं और अल्लाह के आगे झुकने वाले हैं +[5:56] और जो अल्लाह और उसके रसूल और एहले ईमान को अपना रफीक बना लें उसे मालूम हो के अल्लाह की जमात ही गालिब रहने वाली है +[5:57] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारे पेश्रा एहले किताब में से जिन लोगों ने तुम्हारे दीन को मजाक और तफरीह का सामान बना लिया है, उन्हें और दूसरे काफिरों को अपना दोस्त और रफीक ना बनाओ। अल्लाह से डरो अगर तुम मोमिन हो +[5:58] जब तुम नमाज़ के लिए मुनादी (कॉल) करते हो तो वो इसका मज़ाक उड़ाते और इसे खेलते हैं। इसकी वजह ये है के वो अक्ल नहीं रखते +[5:59] इंसे कहो "ऐ एहले किताब! तुम जिस बात पर हमसे बड़े हो (हमसे नफरत करो) वो इसके सिवा और क्या है के हम अल्लाह पर और दीन की उस तालीम पर ईमान ले आए हैं जो हमारी तरफ नाज़िल हुई है और हमसे पहले भी नाज़िल हुई थी? और तुम में से अक्सर लोग फ़ासिक हैं।” +[5:60] फिर कहो "क्या मैं उन लोगों की निशानदेही करूं जिनका अंजाम खुदा के हां फासीकों के अंजाम से भी बढ़ता है? वो जिनपर खुदा ने लानत की, जिनपर उसका गजब टूटा, जिनमें से बंदर और सुवर बन गए, जिन्होन ने टैगहुट की बंदगी की उनका दरजा और भी ज़्यादा बुरा है और वो सवा-ए-सबील (सही रास्ता) से बहुत ज़्यादा भटके हुए हैं” +[5:61] जब ये तुम लोगों के पास आते हैं तो कहते हैं कि हम ईमान लाए, हालंके कुफ़्र लिए हुए आए थे और कुफ़्र ही लिए हुए वापस गए, और अल्लाह ख़ूब जानता है है जो कुछ ये दिलों में छुपे हुए हैं +[5:62] तुम देखते हो कि इनमें से बकसरत लोग गुनाह और ज़ुल्म ओ ज़्यादा के कामोन में धूप-धूप करते हैं, और हराम के माल खाते हैं, बहुत बुरी हरकत हैं जो ये कर रहे हैं +[5:63] क्यों इनके उलेमा, और मशाहिक (जुर्सिट्स) इन्हें गुनाह पर ज़ुबान खोलने और हराम खाने से नहीं रोकते? यकीनन बहुत ही बुरा कारनामा ए जिंदगी है जो वो तय्यार कर रहे हैं +[5:64] यहूदी कहते हैं अल्लाह के हाथ बांधे हुए हैं। बांधे गए इनके हाथ, और लानत पड़ी इनपर हमें बकवस की बदौलत जो ये करते हैं। अल्लाह के हाथ तो कुशादा हैं, जिसकी तरह चाहता है खर्च करता है। हकीकत ये है कि जो कलाम तुम्हारे रब की तरफ से तुम पर नाज़िल हुआ है वो इनमें से अक्सर लोगों की सरकशी ओ बातिल परस्ती में उलटे इज़ाफ़े का मुजीब बन गया है, और (इसकी पैदाइश में) हमने इनके दरमियान कयामत तक के लिए अदावत और दुश्मनी डाल दी है। जब कभी ये जंग भड़कती है तो अल्लाह उसको ठंडा कर देता है। ये ज़मीन में फ़साद फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, मगर अल्लाह फ़साद बरपा करने वालों को हरगिज़ पसंद नहीं करता +[5:65] अगर (इस सरकशी के बजाये) ये एहले किताब ईमान ले आते और खुदा तरसी की रवीश इख्तियार करते तो हम इनकी बुराइयां इनसे दूर करदेते और इनको नियामत भरी जन्नतों में पहचानते हैं +[5:66] काश इन्हों ने तौरात और इंजील और उन दूसरी किताबों को क़याम किया होता जो इनके रब की तरफ से इनके पास भेज दी गई थी। ऐसा करते तो इनके लिए ऊपर से रिज़क बरसात और नीचे से उबाल, अगर इनमें कुछ लोग रास्ते-रो भी हैं लेकिन इनकी अक्सरियत बहुत ज्यादा है +[5:67] ऐ पैगम्बर! जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है वो लोगों तक पहुंच दो, अगर तुमने ऐसा ना किया तो उसकी पैगम्बरी का हक़ अदा ना किया। अल्लाह तुमको लोगों के शरर से बचाने वाला है। यकीन रख्खो के वो काफिरों को (तुम्हारे मुकाबले में) कामयाबी की राह हरगिज न दिखायेगा +[5:68] साफ कहदो के "ऐ एहले किताब! तुम हरगिज किसी असल पर नहीं हो जब तक के तौरात और इंजील और उन दूसरी किताबों को कायम न करो जो तुम्हारे रब की तरफ से नाज़िल की गई हैं”। जरूर है के ये फरमान जो तुमपर नाज़िल किया गया है उनमें से अक्सर की सरकशी और इंकार को और ज्यादा बढ़ा देगा, मगर इंकार करने वालों के हाल पर कुछ अफ़सोस ना करो +[5:69] यकीन जानो के यहां इजारा (सच्चाई का विशेष दावा) किसी का भी नहीं है) मुसलमान हो या यहूदी, सबी (सबिया) हो या इसाई (ईसाई), जो भी अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान लाएगा और नेक अमल करेगा, उसके लिए ना किसी खौफ का मुकाम है ना रंज का +[5:70] हमने बनी इजराइल से पुख्ता अहद लिया और उनकी तरफ बहुत से रसूल भेजे, मगर जब कभी उनके पास कोई रसूल उनकी ख्वाहिशत ए नफ्स के खिलाफ कुछ लेकर आया तो किसी को अनहोन ने झुटलाया और किसी को कत्ल कर दिया +[5:71] और अपने नजरिये ये समझे के कोई फ़ितना रुनामा ना होगा, इसलिए अंधे और बाहर बन गए, फिर अल्लाह ने उन्हें माफ़ किया तो उनमें से अक्सर लोग और ज़्यादा अंधे और बाहर चले गए। अल्लाह उनकी ये सब हरकत देख रहा है +[5:72] यकीनन कुफ्र किया उन लोगों ने जिन्होन ने कहा के अल्लाह मसीह इब्ने मरियम ही है, हालंके मसीह ने कहा था के "ऐ बानी इस्राइल! अल्लाह की बंदगी करो जो मेरा रुब भी है और तुम्हारा रुब भी"। जिसने अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहरया उसपर अल्लाह ने जन्नत हराम करदी और उसका ठिकाना जहन्नुम है और ऐसे ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं +[5:73] यकीनन कुफ्र किया उन लोगों ने जिन्होन ने कहा के अल्लाह तीन (त्रिमूर्ति) में का एक है, हलांके एक खुदा के सिवा कोई खुदा नहीं है. अगर ये लोग अपनी बातों से बाज ना आएं तो इनमें से जिसने कुफ्र किया है उसको दर्दनाक सजा दी जाएगी +[5:74] फिर क्या ये अल्लाह से तौबा ना करेंगे और उसे माफ़ी ना मांगेंगे? अल्लाह बहुत दरगुज़र फ़रमाने वाला और रहम करने वाला है +[5:75] मसीह इब्ने मरियम इसके सिवा कुछ नहीं के बस एक रसूल था, उसके पहले और भी बहुत से रसूल गुज़र चुके थे, उसकी माँ एक रस्त-बाज़ (नेक) औरत थी, और वो दोनों खाना खाते थे, देखो हम किस तरह इनके सामने हक़ीक़त की निशानियाँ दिखाते हैं, फिर देखो ये किधर उलटे फिर जाते हैं +[5:76] इंसे कहो, क्या तुम अल्लाह को छोड़ कर उसकी तरफदारी करते हो जो ना तुम्हारे लिए नुक्सान का इख्तियार रखता है ना नफ़े का? हालंके सबकी सुनने वाला और सबको जानने वाला तो अल्लाह ही है +[5:77] कहो, ऐ एहले किताब! अपने दीन में ना-हक़ ग़ुलू (सीमा से परे जाना/ज्यादती करना) ना करो और उन लोगों के तक़लात (झुकाव/ख्वाहिशात) की जोड़ी ना करो जो तुमसे पहले खुद गुमराह हुए और बहुतों को गुमराह किया, और "सवा ए सबील (सही रास्ता)" से भटक गए +[5:78] बानी इसराइल में से जिन लोगों ने कुफ्र की राह इख्तियार की अनपर दाऊद और ईसा इब्न मरियम की जुबान से लानत की गई, क्योंकि वो सरकश हो गए थे और ज्यादतियां करने लगे थे +[5:79] उन्होन ने एक दूसरे को बुरे अफाल के इरतेकाब से रोकना छोड़ दिया था, बुरा तर्ज ए अमल था जो unhon ne ikhtiyar kiya +[5:80] आज तुम उनमें ब-कसरत ऐसे लोग देखते हो जो (एहले ईमान के मुकाबले में) कुफ्फार की हिमायत ओ रफाकत करते हैं, यकीनन बहुत बुरा अंजाम है जिसकी तैयारी उनके नफ्सों ने उनके लिए की है। अल्लाह उन्पर गज़ब-नाक हो गया है और वो दैमी अज़ाब में मुब्तिला होने वाले हैं +[5:81] अगर फिल-वाकई ये लोग अल्लाह और पैगम्बर और उस चीज के मन्ने वाले हो गए जो पैगम्बर पर नाज़िल हुई थी तो कभी (एहले ईमान के मुकाबल में) काफिरों को अपना रफीक ना बनते, मगर इनमें से तो बेहतर लोग खुदा की इताअत से निकल चुके हैं +[5:82] तुम एहले ईमान की अदावत (दुश्मनी) में सबसे ज्यादा सख्त यहूद और मुशरिकेन को पाओगे, और ईमान लाने वालों के लिए दोस्ती में करीब-तार उन लोगों को पाओगे जिन्हों ने काहा था के हम नसारा (ईसाइयों) हैं, इस वजह से कि उनमें इबादत-गुज़ार आलिम और तारिक उद दुनिया फकीर (भिक्षु) पाए जाते हैं और उनमें गुरुर ए नफ़्स (अभिमानी) नहीं है +[5:83] जब वो हमें कलाम को सुनते हैं जो रसूल पर उतरते हैं तो तुम देखते हो के हक़ शनासी (सच्चाई को पहचानो) के असर से उनकी आंखें आंसुओं से छलनी हो जाती हैं, वो बोल उठते हैं के "परवरदिगार! हम ईमान लाए, हमारा नाम गवाही देने वालों में लिख ले" +[5:84] और वो कहते हैं के "आख़िर क्यों ना हम अल्लाह पर ईमान लायें और जो हक़ हमारे पास आया है उसे क्यों ना मान लें, जबके हम इस बात की ख्वाहिश रखते हैं के हमारा रब हमें साले लोगों में शामिल करें?” +[5:85] उनके इस क़ौल की वजह से अल्लाह ने उनको ऐसी जन्नतें अता की जिनके बारे में पता है कि वो हमेशा साथ रहेंगी। ये जजा है नीक रवैय्या इख्तियार करने वालों के लिए +[5:86] रहे वो लोग जिन्हों ने हमारी आयतों को मन्ने से इंकार किया और उन्हें झुटलाया, तो वो जहन्नुम के मुस्तहिक़ हैं +[5:87] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जो पाक चीज़ अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल की हैं उन्हें हराम न करलो और हद से तजावुज़ न करो, अल्लाह को ज़्यादा करने वाले सख़्त नापसंद हैं +[5:88] जो कुछ हलाल ओ तय्यब रिज़्क अल्लाह ने तुमको दिया है उसे खाओ पियो और उस खुदा की नफ़रमानी से बचते रहो जिसपर तुम ईमान लाए हो +[5:89] तुम लोग जो मोहमल (व्यर्थ रूप से) कसमें खा लेते हो उन्पर अल्लाह गिरफ़्तार नहीं करता, मगर जो कसमें तुम जान बूज़ कर खाते हो उन्पर वो तुमसे ज़रूर मवाक़ेज़ा करेगा। (ऐसी कसम तोड़ने का) कफारा ये है के दस मिस्किनो को वो औसत (औसत) दर्जे का खाना खिलाओ जो तुम अपने बाल बच्चों को खिलाते हो, या उन्हें कपडे पहनो, या एक गुलाम आज़ाद करो, और जो इसकी क्षमता (क्षमता) ना रखता हो वो तीन दिन के रोज़ रक्खे. ये तुम्हारी कसमों का कफ़्फ़ारा है जबके तुम कसम खा कर तोड़ दो। अपनी कसमों की हिफ़ाज़त किया करो, इस तरह अल्लाह अपने एहकाम तुम्हारे लिए वाज़ेह करता है शायद तुम शुक्र अदा करो +[5:90] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, ये शराब (नशा) और जुवा (जुआ) और ये आस्ताने [(समर्पण) पत्थर] और पासें [(तीरों द्वारा भविष्यवाणी], ये सब गंदे शैतानी काम हैं, इनसे परहेज करो, उम्मीद हैं के तुम्हें फलाह नसीब होगी) +[5:91] शैतान तो ये चाहता है के शराब और जुवे के ज़रिये से तुम्हारे दरमियान अदावत और बुग़्ज़ (दुश्मनी और नफरत) डाल दे और तुम्हें खुदा की याद से और नमाज़ से रोक दे, फिर क्या तुम इन चीज़ों से बाज़ रहोगे +[5:92] अल्लाह और उसके रसूल की बात मानो और बाज़ आ जाओ, लेकिन अगर तुमने हुकुम अदाउली की (अगर तुम पीछे मुड़ते हो) तो जान लो के हमारे रसूल पर बस साफ साफ हुकुम पंहुंचा देने की जिम्मेदारी थी +[5:93] जो लोग ईमान ले आए और नेक अमल करने लगे उन्होन ने पहले जो कुछ खाया पिया था उसपर कोई गिरफ़्तार न होगी, बशारत-ए-के वो आइंदा उन चीज़ों से बचे रहे जो हराम की गई हैं और ईमान पर साबित क़दम रखें और अच्छे काम करें। फिर जिस चीज़ से रोका जाए उसे रुकें और जो फरमान ए इलाही हो उसे माने, फिर खुदा तरसी के साथ नेक रवैय्या रक्खें, अल्लाह नेक किरदार लोगों को पसंद करता है +[5:94] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह तुम्हें शिकार के ज़रिये से सख्त आजमाइश में डालेगा जो बिल्कुल तुम्हारे हाथ और नेज़ों (लांस) की ज़द में होगा, ये देखने के लिए कि तुम में से कौन उसे गायबाना डरता है, फिर जिसने तम्बीह (चेतावनी) के बाद अल्लाह की मुकर्रर की हुई हद से तजावुज़ किया उसके लिए दर्दनाक सज़ा है +[5:95] ऐ logon jo iman laye ho! एहराम की हालत में शिकार न मारो, और अगर तुम में से कोई जान बूझ कर ऐसा कर गुजरे तो जो जानवर उसने मारा हो उसी के हम पाला (इसी तरह) एक जानवर उसी मछली में से नजर देना होगा, जिसका फैसला तुम में से दो आदिल (सिर्फ) आदमी करेंगे, और ये नजराना काबा पाहुंचाया जाएगा, हां नहीं तो इस गुनाह के कफरे में चांद मिसकीनो को खाना खिलाना होगा, हां इसके ब-काद्र रोजे रखने होंगे, ता-के वो अपने किए का मजा चक्खे, पहले जो कुछ हो चुका उसे अल्लाह ने माफ कर दिया, लेकिन अब अगर किसी ने इस हरकत का इरादा किया तो उसे अल्लाह बदला लेगा, अल्लाह सब पर गालिब है और बदला लेने की ताक़त रखता है +[5:96] तुम्हारे लिए समंदर का शिकार और उसका खाना हलाल कर दिया गया, जहां तुम ठहरो वहां भी उसे खा सकते हो और काफ़िले (यात्रियों) के लिए ज़ाद-ए-राह भी बना सकते हो। अलबत्ता खुश्की (जमीन) का शिकार जब तक तुम एहराम की हालत में हो तुम पर हराम किया गया है। पास बचाओ हमें खुदा की नफरमानी से जिसकी पेशी में तुम सबको घेर कर हाज़िर किया जाएगा +[5:97] अल्लाह ने मकान ए मोहतरम, काबा को लोगों के लिए (इज्तिमय जिंदगी के) कयाम का जरिया बनाया और माह ए हराम और कुर्बानी के जंवरों और कलादोन[मालाएं (जिससे) वे पहचाने जाते हैं)] को भी (इस काम में मुआविन बना दिया) ता-के तुम्हें मालूम हो जाए के अल्लाह आसमान और ज़मीन के सब हालात से बेख़बर हैं और उसे हर चीज़ का इलम है +[5:98] ख़बरदार हो जाओ!अल्लाह सज़ा देने में भी शामिल है और इसके साथ बहुत दरगुज़ार और रहम भी करने वाला है +[5:99] रसूल पर तो सिर्फ पैग़ाम पाहुंचा देने की ज़िम्मेदारी है, आगे तुम्हारे खुले और छुपे सब हालात का जाने वाला अल्लाह है +[5:100] (ऐ पैगम्बर!) इनसे कहदो के पाक और नापाक बहार हाल यकसन नहीं हैं, ख्वा नापाक की बोहतत (बहुतायत) तुम्हें कितनी ही खुशी (प्रसन्नता) करने वाली हो। पास ऐ लोगन जो अक़ल रखते हो! अल्लाह की नफरमानी से बचते रहो, उम्मीद है के तुम्हें फलाह नसीब होगी +[5:101] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ऐसी बातें ना पूछो करो जो तुमपर जाहिर कर दी जाए तो तुम्हें नगावार हो, लेकिन अगर तुम उन्हें ऐसे वक्त पूछोगे जब के कुरान नाजिल हो रहा हो तो वो तुमपर खोल दी जाएगी, अब तक जो तुमने किया उसे अल्लाह ने माफ कर दिया, वो दरगुज़ार करने वाला और बर्दबार (सर्व सहनशील) है +[5:102] तुमसे पहले एक गिरोह ने इसी क़िस्म के सवाल किए थे, फिर वो लोग इन्हीं बातों की वजह से कुफ़्र में मुबतला हो गए +[5:103] अल्लाह ने कोई बहिराह (मूर्तियों को समर्पित मवेशी) मुकर्रर किया है ना साइबा (एक ऊंटनी को अपने झूठे देवताओं, जैसे मूर्तियों, आदि के लिए मुक्त चरागाह के लिए खुला छोड़ दिया जाता है) और ना वसीला (एक ऊंटनी को मूर्तियों के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया जाता है क्योंकि उसने अपनी पहली डिलीवरी में एक मादा ऊंट को जन्म दिया है) और ना हाम (एक ऊंटनी-ऊंटनी को अपनी मूर्तियों के लिए काम से मुक्त कर दिया जाता है, जब वह काम पूरा कर लेती है। इसके लिए निर्धारित युग्मों की संख्या) मगर ये काफिर अल्लाह पर झूठी तोहमत लगाते हैं और इनमें से अक्सर बे-अकाल हैं (कहां ऐसे वहामियत को मान रहे हैं) +[5:104] और जब इनसे कहा जाता है के आओ उस कानून की तरफ जो अल्लाह ने नाज़िल किया है और आओ पैगम्बर की तरफ, तो वाह जवाब देते हैं हमारे लिए तो बस वही तरीक़ा काफ़ी है जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है। क्या ये बाप दादा ही हैं कि तक्लीद किए चले जाएंगे ख्वा वो कुछ ना जानते हों और सही रास्ते की उनको खबर ही ना हो +[5:105] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपनी फिक्र करो, किसी दूसरे की गुमराही से तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ता अगर तुम खुद राह ए रास्ते पर हो, अल्लाह की तरफ़ तुम सबको पलट कर जाना है, फिर वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या करते रहेंगे हो +[5:106] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम में किसी की मौत का वक़्त आ जाए और वो वसीयत कर रहा हो तो उसके लिए शहादत का निसाब ये है के तुम्हारी जमात में से दो (दो) साहिब-ए-अदल आदमी गवाह बन जाएं, अगर तुम सफर की हालत में हो और वहां मौत की मुसीबत पेश आ जाए तो गैर मुस्लिम ही में से दो गवाह ले लिए जाए। फिर अगर कोई शक्क पढ़ जाए तो नमाज के बाद दोनों गवाहों को (मस्जिद में) रोक लिया जाए और वो खुदा की कसम खा कर कहे के "हम किसी जाति फैसले के बदले शहादत बेचने वाले नहीं हैं, और ख्वा कोई हमारा रिश्तेदार ही क्यों ना हो (हम उसकी रियात" करने वाले नहीं) और ना खुदा बर्बादी की गवाही को हम छुपाने वाले हैं, अगर हमने ऐसा किया तो गुनाह-गैरों में शामिल होंगे” +[5:107] लेकिन अगर पता चल जाए के इन दोनो ने अपने आप को गुनाह में मुब्तिला किया है तो फिर इनकी जगह दो और शक्स जो इनकी बा-निस्बत शहादत देने के लिए एहल-तर होन उन लोगों में से खड़े होन जिनका हक़ तलफ़ी हुई हो, और जो खुदा की क़सम खा कर काहें के "हमारी शहादत उनकी शहादत से ज़्यादा बार-हक़ है और हमने अपनी गवाही में कोई ज़्यादा नहीं की है, अगर हम ऐसा करें तो ज़ालिमों में से होंगे" +[5:108] क्या तारीख़ से ज़्यादा तवक्कु की जा सकती है के लोग ठीक ठीक शहादत देंगे, या काम आज भी बात है का खौफ करेंगे कि उनकी कसमों के बाद दूसरी कसमों से कहीं उनकी देरी न हो जाए। अल्लाह से डरो और सुनो, अल्लाह नफ़रमानी करने वालों को अपनी रहनुमाई से महरूम कर देता नहीं है +[5:109] जिस रोज़ अल्लाह सब रसूलों को जमा करके पूछेगा के तुमने क्या जवाब दिया है, तो वो अर्ज़ करेंगे के हमें कुछ इल्म नहीं, आप ही तमाम पोशीदा (छिपा हुआ) हकीकतों को जानते हैं +[5:110] फिर तसव्वुर करो उस मौके का जब अल्लाह फरमायेगा के "ए मरियम के बेटे ईसा! याद कर मेरी उस नियामत को जो मैंने तुझे और तेरी मां को अता की थी, मैंने रूह-ए-पाक से तेरी मदद की, तू गहवरे (पालना) में भी लोगों से बात करता था और बड़ी उमर को पहुंच कर भी। मैंने तुझको किताब और हिकमत और तौरात और इंजील की तालीम दी, तू मेरे हुकुम से मिट्टी का पुतला परिंदे की शक्ल का बनता था और वो मेरे हुकुम से परिंदा बन जाता था, तू मदार-ज़ाद (जन्म से अंधा) और कोढ़ी (कोढ़ी) को मेरे हुकुम से अच्छा करता था, तू मुर्दो को मेरे हुकुम से निकलता था. फिर जब तू बनी इजराइल के पास सारी निशानियां लेकर पहुंचूं और जो लोग उन में से मुनकिर ए हक था था उनहों ने कहा के ये निशानियां जादूगरी के सिवा और कुछ नहीं हैं, तो मैंने ही तुझसे बचाया +[5:111] और जब मैंने हवारियों (चेलों) को इशारा किया के मुझपर और मेरे रसूल पर ईमान लाओ, तब उनहों ने कहा के "हम ईमान लाए और गवाह रहो के हम मुसलमान हैं" +[5:112] (हवारियों के सिलसिले में) ये वाकिया भी याद रहे के जब हवारियों ने कहा, ऐ ईसा इब्ने मरियम! क्या आप का रुब हमपर आसमान से खाने का एक ख़्वान उतर सकता है? तो ईसा ने कहा अल्लाह से डरो अगर तुम मोमिन हो +[5:113] उन्होन ने कहा हम बस ये चाहते हैं के इस ख़्वान से खाना खायें और हमारे दिल मुतमीन (स्थिर) हों और हमें मालूम हो जाये के आप ने जो कुछ हमसे कहा है वो सच है और हम इसपर गवाह हैं +[5:114] इसपर ईसा इब्न-ए-मरियम ने दुआ की "खुदाया! हमारे रब!" हमपर आसमान से एक ख्वान नाज़िल कर जो हमारे लिए और हमारे एग्लोन पिचलों के लिए ख़ुशी का मौका क़रार पाए और तेरी तरफ से एक निशानी हो, हमको रिज़क दे और तू बेहतरीन राज़िक है” +[5:115] अल्लाह ने जवाब दिया “मैं उसको तुमसे नाज़िल करने वाला हूं” , मगर उसके बाद जो तुम में से कुफ्र करेगा उसे मैं ऐसा सजा दूंगा जो दुनिया में किसी को ना दी होगी” +[5:116] गरज जब (ये एहसानात याद दिलाकर) अल्लाह फरमायेगा के "ऐ ईसा इब्न-ए-मरियम क्या तू नये लोगों से कहा था के खुदा के सिवा मुझे और मेरी मां को भी खुदा बना लो?" तो वो जवाब में अर्ज़ करेगा के " सुबान अल्लाह! मेरा ये काम ना था के वो बात कहता जिसके कहने का मुझे हक़ ना था, अगर मैंने ऐसी बात कहीं होती, तो आपको ज़रूर इल्म होता, आप जानते हैं जो कुछ मेरे दिल में है और मैं नहीं जानता जो कुछ आपके दिल में है, आप तो सारी पोशिदा हकीकतों के आलिम हैं +[5:117] मैंने उनके सिवा कुछ नहीं कहा जिसका आपने हुकुम दिया था, ये अल्लाह की बंदगी करो जो मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी, मैं उसका वक्त तक उनका निगरान था जब तक मैं उनके दरमियान था, जब आपने मुझे वापस बुला लिया तो आप उन पर नजर रख रहे थे और आप तो सारी ही चीजों पर नजर रख रहे हैं +[5:118] अब अगर आप उन्हें सजा दें तो वो आपके बंद हैं और अगर माफ कर दें तो आप गालिब और दाना हैं” +[5:119] तब अल्लाह फरमायेगा “ ये वो दिन है जिसकी सच्चाई को उनकी सच्चाई नफ़ा देती है, उनके लिए ऐसे बाग़ हैं जिनके बारे में वो नफ़रत कर रही हैं, यहाँ वो हमेशा रहेंगे, अल्लाह उनसे रज़ी हुआ और वो अल्लाह से, यही बड़ी कामयाबी है" +[5:120] ज़मीन और आसमान और तमाम मौजुदात की बादशाही अल्लाह ही के लिए है और वह हर चीज पर कुदरत रखता है + +Surah 6: Al-An'am (The Cattle) +---------------------------------------- +[6:1] तारीफ अल्लाह के लिए है जिसने जमीन और आसमान बनाया, रोशनी और तारिकियां (अंधेरा) पैदा की, फिर भी वो लोग जिन्होन ने दावत ए हक को मन्ने से इंकार कर दिया है डर्सन को अपने रब का हमसर ठहरे हुए हैं +[6:2] वही है जिसने तुमको मिट्टी से पैदा किया, फिर तुम्हारे लिए जिंदगी की एक मुद्दत मुकर्रर करदी, और एक दूसरी मुद्दत और भी है जो उसकी हां ताई शुदा है मगर तुम लोग हो के शक में पड़े हुए हो +[6:3] वही एक खुदा आसमान में भी है और ज़मीन में भी। तुम्हारे खुले और छुपे सब हाल जानता है और जो बुराई या भलाई तुम कमाते हो उसे खूब वाकिफ है +[6:4] लोगों का हाल ये है के उनके रब की निशानियों में से कोई निशानी ऐसी नहीं जो उनके सामने आई हो और उनको ने उसे मुंह ना मोड़ लिया हो +[6:5] चुनांचे अब जो हक उनके पास आया तो उसे भी अनहोन ने झुटला दिया। अच्छा, जिस चीज़ का वो अब तक मज़ाक उड़ाते रहे हैं अंकारिब उसके मुतालिक कुछ खबरें उन्हें पहनेंगे +[6:6] क्या अनहोन ने देखा नहीं के उनसे पहले कितनी ऐसी क़ौम को हम हलाक कर चुके हैं जिनका अपने अपने जमाने में प्यार हो रहा है? उनको हमने ज़मीन में वो इक्तेदार बख्शा था जो तुम्हें नहीं बख्शा है। उन्पर हमने आसमान से ख़ूब बारिशें बरसाईं और उन्हें नीची नहरें बहा दी, (मगर जब उनको ने कुफ़्रां ए नियामत किया तो) आख़िर ए कार हमने उनके गुनाहों की याद में उन्हें तबाह कर दिया और उनकी जगह दूसरे दौर की क़ौमों को उठाया +[6:7] (ऐ पैगम्बर)! अगर हम तुम्हारे ऊपर कोई कागज में लिखी किताब भी उतार देते और लोग उसे अपने हाथों से छू कर भी देख लेते तब भी जिहों ने हक का इंकार किया है वो यहीं कहते के ये तो सारे जादू है +[6:8] कहते हैं के इस नबी पर कोई फरिश्ता क्यों नहीं उतरा गया? अगर कहीं हमने फ़रिश्ता उतार दिया होता, तो अब तक कभी का फैसला हो चुका होता, फिर इन्हें कोई मोहलत न दी जाती +[6:9] और अगर हम फ़रिश्ते को उतारते तब भी उसे इंसानी शक्ल ही में उतारते और इस तरह उन्हें उसी शुभे में मुबतला कर देते जिसमें अब ये मुबतला है +[6:10] (ऐ मुहम्मद)! तुमसे पहले भी बहुत से रसूलों का मज़ाक उड़ाया जा चूका है, मगर मज़ाक उड़ाने वालों पर आख़िर ए कार वही हकीकत मुसल्लत होकर रही जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे +[6:11] इनसे कहो, ज़रा ज़मीन में चल फिर कर देखो झूठलाने वालों का क्या अंजाम हुआ है +[6:12] इनसे पूछो, आसमानों और ज़मीन में जो कुछ है वो किसका है? कहो सब कुछ अल्लाह ही का है, उसने रहम ओ करम का शैवा अपने ऊपर लाज़िम करलिया है (इसके लिए वो नफरमानियों और सरकशियों पर तुम्हें जदली से नहीं पकड़ लेता), कयामत के रोज वो तुम सब को जरूर जमा करेगा, ये बिल्कुल एक गैर मुश्तबा हकीकत है, मगर जिन लोगों ने अपने आप को खुद तबाही के खतरे में मुब्तिला करलिया है वो उसे नहीं मानते +[6:13] रात के अंधेरे और दिन के उजाले में जो कुछ ठहरा हुआ है सब अल्लाह का है, और वो सब कुछ सुनता और जानता है +[6:14] कहो, अल्लाह को छोड़ कर क्या मैं किसी और को अपना सरपरस्त बना लूं? हमें खुदा को छोड़ कर जो ज़मीन ओ आसमान का खालिक है और जो रोज़ी देता है रोज़ी लेता नहीं है? कहो, मुझे तो यही हुकुम दिया है के सबसे पहले मैं उसके आगे सर तस्लीम ख़त्म करूं (और ले ली है के कोई शिर्क करता है तो करे) तू बहार-हाल मुशरिकों में शामिल ना हो +[6:15] कहो, अगर मैं अपने रब की नफ़रमानी करूं तो डरता हूं के एक बड़े (ख़ौफ़नाक) दिन मुझे सज़ा भुगतनी पड़ेगी +[6:16] उस दिन जो सज़ा से बच गया उसपर अल्लाह ने बड़ा ही रहम किया और यही नुमायन कमियाबी है +[6:17] अगर अल्लाह तुम्हें किसी क़िस्म का नुक्सान पहुंचाए तो उसके सिवा कोई नहीं जो तुम्हें इस नुक्सान से बच्चा सके, और अगर वो तुम्हें किसी से बेहरामद करे तो वो हर चीज़ पर कादिर है +[6:18] वो अपने बंदों पर कामिल इख्तियारत रखता है और दाना और बा-खबर है +[6:19] इनसे पूछो, किसकी गवाही सबसे ज्यादा खराब है? कहो, मेरे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह गवाह है, और ये कुरान मेरी तरफ बाजारिये वही भेजा गया है ता-के तुम्हें और जिस को ये पहुंचे, सबको मुतनब्बे(चेतावनी) कर्दून। क्या सच है तुम लोग ये शहादत दे सकते हो कि अल्लाह के साथ दूसरे खुदा भी हैं? कहो, मैं तो इसकी शहादत हरगिज़ नहीं दे सकता। कहो, ख़ुदा तो वही एक है और मैं हमसे शिर्क से क़तई बेज़ार हूं जिसमें तुम मुबतला हो +[6:20] जिन लोगों को हमने किताब दी है वो इस बात को इस तरह गैर मुश्तबा तौर पर पहचानते हैं जैसे उनको अपने बेटों के पहचानने में कोई इश्तिबाह पेश नहीं आता, मगर जिन्होन ने अपने आप को खुद खासरे में डाल दिया है वो इसे नहीं मानते +[6:21] और हम शक्स से बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठा बोहतन लगाए, या अल्लाह की निशानियों को झुठलाए? यकीनन ऐसे जालिम कभी फलाह नहीं पा सकते +[6:22] जिस रोज हम सबको इकट्ठ करेंगे और मुशरिकों से पूछेंगे के अब वो तुम्हारे ठहरे हुए शरीक कहां हैं जिनको तुम अपना खुदा समझते थे +[6:23] तो वो इसके सिवा कोई फिट ना उठे सकेंगे के (ये झूठा बयां देन के) ऐ हमारे आका! तेरी कसम हम हरगिज मुशरिक न थे +[6:24] देखो, हमें वक्त ये किस तरह अपने ऊपर आप झूठ घड़ेंगे, और वहां उनके सारे बनवाती माबूद गम हो जाएंगे +[6:25] मेरे अंदर से बाज़ लोग ऐसे हैं जो कान लगा कर तुम्हारी बात सुनते हैं मगर हाल ये है के हमने उनके दिलों पर पूरे डाल रखे हैं जिनकी वजह से वो इसको कुछ नहीं समझते और इनके कानों में गिरानी डाल देते हैं। वो ख्वा कोई निशानी देख लें, उसपर ईमान ला कर ना देंगे, हद ये है के जब वो तुम्हारे पास आ कर तुमसे झगड़ा करते हैं तो इनमें से जिन लोगों ने इंकार का फैसला कर लिया है वो (सारी बातें सुनने के बाद) यहीं कहते हैं के ये एक दास्तां ए इतिहास (प्राचीन कथाएं) के सिवा कुछ नहीं +[6:26] वो इस अमर ए हक़ को क़बूल करने से लोगों को रोकते हैं और खुद भी इस तरह दूर भागते हैं (वो समझते हैं के इस हरकत से वो तुम्हारा कुछ बिगाड रहे हैं) हालंके दर असल वो खुद अपनी ही तबाही का सामान कर रहे हैं मगर उन्हें इसका शहर नहीं है +[6:27] काश तुम हमें वक्त की हालत देख सकते हो जब वो दोज़ख़ के किनारे खड़े किये जायेंगे, हमें वक़्त वो कहेंगे के काश कोई सूरत ऐसी हो के हम दुनिया में फिर वापस भेज देंगे और अपने रब की निशानियों को ना झुटलायें और ईमान लाने वालों में शामिल हों +[6:28] दार-हक़ीक़त ये बात वो महज़ है वजह से कहेंगे के जिस हकीकत पर उन्हें ने पर्दा डाल रखा था वो हमें वक्त बे-नकाब होकर उनके सामने आ चुकी होगी, वरना अगर उन्हें साबिक जिंदगी की तरफ वापस भेजा जाए तो फिर वही सब कुछ करें जिसमें उन्हें मन किया गया है। वो तो हैं ही झूठे (इसलिये अपनी इस ख्वाहिश के इजहार में भी झूठ ही से काम लेंगे) +[6:29] आज ये लोग कहते हैं कि जिंदगी में जो कुछ भी है बस यहीं दुनिया की जिंदगी है और हम मरने के बाद हरगिज दोबारा ना उठेंगे +[6:30] काश वो मंज़र तुम देख सको जब ये अपने रुब के सामने खड़े किये जायेंगे हमें वक्त इनका रुब इनसे पूछेगा “क्या ये हकीकत नहीं है?” ये कहेंगे "हां ऐ हमारे रब! ये हकीकत ही है", वो फरमायेगा "अच्छा! तो अब अपने इंकार ए हकीकत की याद में अज़ाब का मजा चाहो" +[6:31] नुक्सान में पड़ गए वो लोग जिन्होन ने अल्लाह से अपनी मुलाकात की इत्तिला को झूठ करार दिया, जब अचानक वो घड़ी आ जाएगी तो यही लोग कहेंगे "अफसोस! हमसे इस मामले में कैसी तकसीर हुई" और इनका हाल ये होगा के अपनी पीठ पर अपने गुनाहों का बोझ लड़े होंगे। देखो! कैसा बुरा बोझ है जो ये उठा रहे हैं +[6:32] दुनिया की जिंदगी तो एक खेल और एक तमाशा है, हकीकत में आखिरी ही का मुकाम उन लोगों के लिए बेहतर है जो जियान कारी से बचना चाहते हैं, फिर क्या तुम लोग अक्ल से काम ना लोगे +[6:33] (ऐ मुहम्मद)! हमें मालूम है कि जो बातें ये लोग बनाते हैं इनसे तुम्हें रंज होता है, लेकिन ये लोग तुम्हें नहीं झुठलाते हैं बल्के ये जालिम दार असल अल्लाह की आयत का इंकार कर रहे हैं +[6:34] तुमसे पहले भी बहुत से रसूल झुटलाए जा चुके हैं, मगर हमें तकज़ीब पर और उन अज़ियातों (उत्पीड़न) पर जो उन्हें पहुंच गई उनहों ने सब्र किया, यहां तक ​​के उन्हें हमारी मदद पहुंच गई। अल्लाह की बातों को बदलने की ताक़त किसी में नहीं है, और पिछले रसूलों के साथ जो कुछ पेश आया उसकी खबरें तुम्हें पाहुंच ही चुकी हैं +[6:35] ताहम अगर लोगों की बे-रूखी तुमसे बर्दाश्त नहीं होती तो अगर तुम में कुछ ज़ोर है तो ज़मीन में कोई सुरंग ढूंढो या आसमान में सीढ़ी लगाओ और इनके पास कोई निशानी लाने की कोशिश करो। अगर अल्लाह चाहता तो इन सबको हिदायत पर जमा कर सकता था, लिहाजा नादान मत बनो +[6:36] दावत ए हक पर लब्बैक वही लोग कहते हैं जो सुनने वाले हैं। रहे मुर्दे, तो उन्हें अल्लाह के पास बस क़बरों से ही उठाया जाएगा और फिर वो (उसकी अदालत में पेश होने के लिए) वापस ले जाएंगे +[6:37] ये लोग कहते हैं के इस नबी पर उसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों नहीं उतरी? कहो, अल्लाह निशानी उतारने की पूरी क़ुदरत रखता है, मगर मेरे अंदर से अक्सर लोग नादानी में मुब्तिला हैं +[6:38] ज़मीन में चलने वाले किसी जानवर और हवा में परों (पंखों) से उड़ने वाले किसी परिंदे को देख लो, ये सब तुम्हारी ही तरह की अनवा (समुदाय) है. हमने इनकी तकदीर के नविस्ते (रिकॉर्ड) में कोई कसर नहीं छोड़ी है, फिर ये सब अपने रब की तरफ जाते हैं +[6:39] मगर जो लोग हमारे निशानियों को झुठलाते हैं वो बहरे (गूंगा) और गुंगे हैं, तारिकियों (अंधेरे) में पड़े हुए हैं, अल्लाह जिसे चाहता है है भटका देता है और जिसे चाहता है सीधे रास्ते पर लगा देता है +[6:40] इनसे कहो, जरा गौर करके बताओ, अगर कभी तुमपर अल्लाह की तरफ से कोई बड़ी मुसीबत आ जाती है या आखिरी घड़ी आ जाती है तो क्या हम वक्त तुम अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारते हो? बोलो अगर तुम सच्चे हो +[6:41] हमें वक्त तुम अल्लाह ही को पुकारते हो, फिर अगर वो चाहता है तो इस मुसीबत को तुमपर से ताल देता है, ऐसे मौके पर तुम अपने रुके हुए शरीकों को भूल जाते हो +[6:42] तुमसे पहले बहुत सी क़ौमों की तरफ हमने रसूल भेजा और उन क़ौमों को मसाइब ओ आलम (दुर्भाग्य और कठिनाई के साथ) में मुब्तिला किया ता-के वो आजिजी (विनम्रता) के साथ हमारे सामने झुक जाएं +[6:43] पास जब हमारी तरफ से अनपर शक्ति आई तो क्यों न उन्होन ने आजिजी इख्तियार (विनम्रता) की? मगर उनके दिल तो और सख्त हो गए और शैतान ने उनको इत्मिनान दिला दिया के जो कुछ तुम कर रहे हो खूब कर रहे हो +[6:44] फिर जब उन्हें ने हमें हिदायत को, जो उन्हें मिल गई थी, भुला दिया तो हमने हर तरह की खुश-हालियों के दरवाजे उनके लिए खोल दिए, यहां तक ​​के जब वो उन बख्शीशों में जो उन्हें अता की गई थी खूब मगन हो गए तो अचानक हमने उन्हें पकड़ लिया और अब हाल ये था के वो हर खैर से मायुस थे +[6:45] इस तरह उन लोगों की जड़ (जड़) काट कर रख दी गई जिन्हों ने ज़ुल्म किया था और तारीफ है अल्लाह रब्बुल आलमीन के लिए (के उसने उनकी जद काट दी) +[6:46] (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अगर अल्लाह तुम्हारी बिनई (आँख-देखना) और समात (सुनना) तुमसे छीन ले और तुम्हारे दिलों पर मोहर करदे तो अल्लाह के सिवा और कौन सा खुदा है जो ये कुव्वतें तुम्हें वापस दिला सकता है? देखो, किस तरह हम बार-बार अपनी नैशनियां उनके सामने पेश करते हैं और फिर ये किस तरह उन्हें नजर चुरा लेते हैं +[6:47] कहो, कभी तुमने सोचा के अगर अल्लाह की तरफ से अचानक या एलानिया तुमपर अज़ाब आ जाए तो क्या जालिम लोगों के सिवा कोई और हलाक होगा +[6:48] हम जो रसूल भेजते हैं इसी के लिए तो भेजते हैं के वो नए किरदार लोगों के लिए खुश-खबरी देने वाले और बड़े किरदारों के लिए दाराने वाले माननीय। फिर जो लोग उनकी बात मान लें और अपनी तरज़ ए अमल की इस्लाह कार्लें उनके लिए कोई खौफ और रंज का मौका नहीं है +[6:49] और जो हमारी आयतों को झुटलाएं वो अपनी नफ़रमानियों की याद में सज़ा भुगत कर रहेंगे +[6:50] (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो, "मैं तुमसे ये नहीं कहता के मेरे पास अल्लाह के ख़ज़ाने हैं, ना मैं गैब का इल्म रखता हूँ, और ना ये कहता हूँ के मैं फ़रिश्ता हूँ। मैं तो सिर्फ हमें वही की जोड़ी कर्ता हूँ जो मुझपर नाज़िल की जाती है"। फिर इनसे पूछो क्या अंधा और आँखों वाला दोनों बराबर हो सकते हैं? क्या तुम गौर नहीं करते +[6:51] (ऐ मुहम्मद)! तुम इस (इल्म ए वही) के ज़रिये से उन लोगों को हिदायत करो जो इस बात का ख़ौफ़ रखते हैं कि अपने रब के सामने कभी इस हाल में पेश किये जायेंगे के उसके सिवा वहां कोई (ऐसा ज़ि इक्तेकर) ना होगा जो उनका हमी ओ मददगार हो, या उनकी सिफ़रिश करे, शायद के (है) हिदायत से मुतनब्बेह होकर) वो खुदा-तरसी की रवीश इख्तियार कार्लें +[6:52] और जो लोग अपने रब को रात दिन पुकारते रहते हैं और उसकी खुशनुदी की तालाब में लगे हुए हैं उन्हें अपने से दूर ना फेंको, उनके हिसाब में से किसी चीज का बार तुमपर नहीं है और तुम्हारे हिसाब में किसी चीज़ का बार ऊपर नहीं। इसपर भी अगर तुम उन्हें दूर फेंकोगे तो ज़ालिमों में शामिल होगे +[6:53] दर-असल हमें इस तरह लोगों में से बाज़ को बाज़ के ज़रिये से आज़माइश में डाला गया है ता-के वो इन्हें देख कर कहें "क्या ये हैं वो लोग जिनपर हमारे दरमियान अल्लाह का फ़ज़ल ओ करम हुआ है?" हान ! क्या खुदा अपने शुक्र गुजर बंदों को इनसे ज्यादा नहीं जानता है +[6:54] जब तुम्हारे पास वो लोग आएं जो हमारी आयत पर ईमान लाते हैं तो उनसे कहो "तुम्हारे सलामती है तुम्हारे रब ने रहम ओ करम का शेवा अपने ऊपर लाज़िम करलिया है। ये उसका रहम ओ करम ही है के अगर तुम में से कोई नादानी के साथ किसी बुराई का इर्तिकाब कर बैठा हो फिर उसके बाद तौबा करे और इस्लाह करले तो वो उसे माफ करता है और नरमी से काम लेता है” +[6:55] और इस तरह हम अपनी निशानियां खोल कर पेश करते हैं ता-के मुजरिमों की राह बिल्कुल नुमायन हो जाये +[6:56] (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के तुम लोग अल्लाह के सिवा जिन दूसरों को पुकारते हो उनकी बंदगी करने से मुझे मना किया गया है। कहो, मैं तुम्हारी ख्वाहिश की जोड़ी नहीं बनाऊंगा, अगर मैंने ऐसा किया तो गुमराह हो गया, राह ए रास्ते पाने वालों में से ना रहा +[6:57] कहो, मैं अपने रब की तरफ से एक दलील ए रोशन पर कायम हूं और तुमने उसे झुठला दिया है, अब मेरे इख्तियार में वो चीज है नहीं जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे हो। फ़ैसले का सारा इख़्तियार अल्लाह को है, वही अमर ए हक़ बयान करता है और वही बेहतरीन फ़ैसला करने वाला है +[6:58] कहो, अगर कहीं वो चीज़ मेरे इख़्तियार में होती जिसकी तुम जल्दी मचा रहे हो तो मेरे और तुम्हारे दरमियान कभी का फैसला हो चूका होता, मगर अल्लाह ज़्यादा बेहतर जानता है के जालिमों के साथ क्या मामला जाना चाहिए +[6:59] उसके पास गैब की कुंजी हैं जिनके पास उसके सिवा कोई नहीं जानता, बाहर ओ बर्र (जमीन और समुद्र में) में जो कुछ है सबसे वो वाकिफ है, दरख्त से गिरने वाला कोई पत्ता ऐसा नहीं जिसका उसे इल्म ना हो, ज़मीन के तारिक (अंधेरा) माफ़ में कोई दाना (अनाज) ऐसा नहीं जिसे वो बाख़बर ना हो, ख़ुस्क ओ तर (हरा या सूखा) सब कुछ एक खुली किताब में लिखा हुआ है +[6:60] वही है जो रात को तुम्हारी रूहें (आत्माएं) क़ब्ज़ करता है और दिन को जो कुछ तुम करते हो उसे जानता है, फिर दूसरे रोज़ वो तुम्हें इसी करोबार के आलम में वापस भेज देता है ता-के जिंदगी की मुकर्रर मुद्दत पूरी हो। आख़िर ए कार उसकी तरफ तुम्हारी वापसी है, फिर वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या करते रहोगे +[6:61] अपने बंदों पर वो पूरी क़ुदरत रखता है और तुम्हारे निगरानी करने वाले मुकर्रर करके भेजता है, यहाँ तक के जब तुम में से किसी की मौत का वक़्त आ जाता है तो उसके भेजे हुए फरिश्ते इसकी जान निकल लेते हैं और अपना फर्ज ए अंजाम देने में जरा कोटाही (उपेक्षा) नहीं करते +[6:62] फिर सबके सब अल्लाह, अपने हकीकी आका की तरफ वापस ले लिए जाते हैं। ख़बरदार हो जाओ, फ़ैसले के सारे इख़तियारत उसी को हासिल हैं और वो हिसाब लेने में बहुत तेज़ है +[6:63] (ऐ मुहम्मद)! इनसे पूछो, सेहरा और समंदर की तारीखों में कौन तुम्हें खतरे से बचाता है? कौन है जिसकी तुम (मुसीबत के वक्त) गिड़गिड़ा, गिड़गिड़ा कर और चुपके-चुपके दुआएं मांगते हो? किस्से कहते हो के अगर इस बला से तू नहीं हमको बचा लिया तो हम जरूर शुक्रगुजार होंगे +[6:64] कहो, अल्लाह तुम्हें उसमें और हर तकलीफ से निजात देता है फिर तुम दूसरों को उसका शरीक ठहरते हो +[6:65] कहो, वह इसपर कादिर है के तुमपर कोई अजाब ऊपर से नाज़िल करदे, या तुम्हारे क़दमों के नीचे से बरपा करदे, या तुम्हें गिरोहों में तकसीम करके एक गिरोह को दूसरे गिरोह की ताकत का मजा चखवा दे। देखो, हम किस तरह बार-बार मुखतलिफ़ तरीक़ों से अपनी निशानियाँ इनके सामने पेश कर रहे हैं शायद के ये हकीकत को समझ लें +[6:66] तुम्हारी क़ौम उसका इनकार कर रही है हलाँके वो हकीकत है। इनसे कहदो के मैं तुमपर हवालादार नहीं बना गया हूं +[6:67] हर खबर के जहूर में आने का एक वक्त मुकर्रर है, करीब तुमको खुद अंजाम मालूम हो जाएगा +[6:68] और (ऐ मुहम्मद)! जब तुम देखो के लोग हमारी आयत पर नुक्ता चिनियां कर रहे हैं तो उनके पास से हट जाओ यहां तक ​​के वो इस गुफ्तगू को छोड़ कर दूसरी बातों में लग जाएं और अगर कभी शैतान तुम्हें भुलावे में डाल दे तो जिसका वक्त तुम्हें इस गलती का एहसास हो जाए उसके बाद फिर ऐसे जालिम लोगों के पास न बैठो +[6:69] उनके हिसाब में से किसी चीज़ की ज़िम्मेदारी नहीं, लेकिन हिदायत करना उनका फ़र्ज़ है शायद के वो गलत रावी से बच जाएँ +[6:70] छोड़ो उन लोगों को जिन्हों ने अपने दीन को खेल और तमाशा बना रक्खा है और जिन्होनें दुनिया की जिंदगी फरेब में मुब्तिला किये हुए हैं। हां मगर ये कुरान सुना कर हिदायत और तम्बीह (चेतावनी) करते रहो कि कहीं कोई शक्स अपने किए कार्टूनों के जवाब में गिरफ़्तार ना हो जाए, और गिरफ़्तार भी इस हाल में हो के अल्लाह से बचाने वाला कोई हमी ओ मददगार और कोई सिफ़री इसके लिए ना हो, और अगर वो हर मुमकिन चीज़ फ़िदिये में देकर छूटना चाहे तो वो भी उसे क़बूल ना की जाए, क्योंकि ऐसे लोग तो खुद अपनी कमाई के नाते में पकड़े जाएंगे, इनको तो अपने इनकार ए हक के मुआवज़े में खौलता (उबलता हुआ) हुआ पानी पीने को और दर्दनक अज़ाब भुगतने को मीलेगा +[6:71] (ऐ मुहम्मद)! इनसे पूछो, क्या हम अल्लाह को छोड़ कर उनको पुकारें जो ना हमें नफा दे सकते हैं ना नुक्सान? और जबके अल्लाह हमें सीधा रास्ता दिखा चुका है तो क्या अब हम उल्टे पांव फिर जाएंगे? क्या हम अपना हाल उस शक्स का सा कहते हैं जिसमें शैतानों ने सेहरा में भटका दिया हो और वो हेयरन ओ सरगर्दन फिर रहा हो, डरन हाल ये के उसके साथी उसे पुकार रहे हों के इधर आ ये सीधी राह मौजूद है? कहो, हकीकत में सही रहनुमाई है तो सिर्फ अल्लाह ही की रहनुमाई है और उसकी तरफ से हमें ये हुकुम मिला है के मालिक ए कायनात के आगे सर ए इताअत खत्म करदो +[6:72] नमाज़ क़याम करो और उसकी नफ़रमानी से बचो, उसकी तरफ़ तुम साथ जाओगे +[6:73] वही है जिसने आसमान ओ ज़मीन को बारहक़ अदा किया है और जिस दिन वो कहेगा के हश्र (पुनरुत्थान) हो जाए उसका दिन वो हो जाएगा। उसका इरशाद ऐन-ए-हक़्क़ है और जिस रोज़ सूरज फूँका जाएगा उस रोज़ बादशाही उसी की होगी, वो गैब और शहादत (दृश्यमान) हर चीज़ का आलिम है और दाना और ख़बर है +[6:74] इब्राहीम का वाकिया याद करो जबके उसने अपने बाप का आज़र से कहा था, “क्या तू बुथों” (मूर्तियों) को खुदा बनाता है? मैं तो तुझे और तेरी क़ौम को खुली गुमराही में पाता हूं” +[6:75] इब्राहीम को हम इसी तरह ज़मीन और आसमान का निज़ाम ए सल्तनत दिखाते थे और इस लिए दिखते थे के वो यकीन करने वालों में से हो जाए +[6:76] चुनांचे जब रात उसपर तारी हुई तो उसने एक तारा देखा, कहा ये मेरा रब है, मगर जब वो डूब गया तो बोला डूब जाने वालों का तो मैं गिरविदा नहीं हूं +[6:77] फिर जब चांद चमकता नजर आया तो कहा ये मेरा रब है, मगर जब वो भी डूब गया गया तो कहा अगर मेरे रब ने मेरी रहनुमाई ना की होती तो मैं भी गुमराह लोगों में शामिल हो जाता +[6:78] फिर जब सूरज को रोशन देखा तो कहा ये है मेरा रब, ये सबसे बड़ा है, मगर जब वो भी डूबा तो इब्राहीम पुकार उठा'' ऐ बिरादरान ए क़ौम! मैं उन सब से बेज़ार हूं जिन्हे तुम खुदा का शरीक ठहरते हो +[6:79] मैंने तो यक्सू होकर अपना रुख उस हस्ती की तरफ कार्लिया जिसने जमीन और आसमान को अदा किया है और मैं हरगिज शिर्क करने वालों में से नहीं हूं" +[6:80] उसकी क़ौम इस्से झगड़ाने लगी तो उसने क़ौम से कहा “क्या तुम लोग अल्लाह के मामले में मुझसे झगड़ा करते हो? हलाँके उसने मुझे राह ए रस्त दिखा दी है और मैं तुम्हारे रुके हुए शेयरों से नहीं डरता। हां अगर मेरा रब कुछ चाहे तो वो जरूर हो सकता है। मेरे रब का इल्म हर चीज़ पर छाया हुआ है, फिर क्या तुम होश में ना आओगे +[6:81] और आख़िर मैं तुम्हारे रुके हुए शरीकों से कैसे डरूँ जबके तुम अल्लाह के साथ उन चीज़ों को ख़ुदाई में शरीक बनाते हुए नहीं डरते जिनके लिए उसके पास कोई सनद नाज़िल नहीं है? हम दोनों फरीक़ों में से कौन ज़्यादा बे-खौफ़ी ओ इत्मिनान का मुस्तहिक है? बताओ अगर तुम कुछ इल्म रखते हो +[6:82] हकीकत में तो अमन उनके लिए है और राह ए रास्ते पर वही हैं जो ईमान लाए और जिन्हों ने अपने ईमान को ज़ुल्म के साथ अलुदा (कलंकित) नहीं क्या” +[6:83] ये थी हमारी वो हुज्जत जो हमने इब्राहिम को उसकी क़ौम के मुक़ाबले में आता है। हम जिसे चाहते हैं बुलंद मरतबे अता करते हैं। हक ये है के तुम्हारा रब निहायत दाना (बुद्धिमान) और अलीम है +[6:84] फिर हमने इब्राहीम को इशाक और याकूब जैसा औलाद दी और हर एक को राह ए रास्त दिखाई (वही राह ए रास्त जो) इसके पहले नूह को दिखाई थी और उसकी नाक से हमने दाऊद, सुलेमान, अयूब, यूसुफ, मूसा और हारून को (हिदायत बख्शी) इस तरह हम नीकुकारों (धर्मी) को उनकी नेकी का बदला देते हैं +[6:85] (उसी की औलाद से) जकारिया, याह्या, ईसा और इलियास को (राह-याब किया) हर एक उनमें से साले था +[6:86] (उसी के खानदान से) इस्माइल, अल-यासा (एलीशा), और यूनुस और लूत को (रास्ता दिखाया)। इनमे से हर एक को हमने तमाम दुनिया वालों पर फजीलत अता की +[6:87] नीज़ इनके आबा ओ अजदाद और इनकी औलाद और उनके भाई बंदों में से बहुतों को हमने नवाजा, उन्होंने अपनी खिदमत के लिए चुन लिया और सीधे रास्ते की तरफ उनकी रहनुमाई की +[6:88] ये अल्लाह की हिदायत है जिसके साथ वो अपने बंदों में से जिसकी चाहत है रहनुमाई करता है लेकिन अगर कहीं लोगों ने शिर्क किया होता तो इनका सब किया किया घरात हो जाता +[6:89] वो लोग थे जिनको हमने किताब और हुकुम और नबुवत अता की थी। अब अगर ये लोग इसको मानने से इनकार करते हैं तो (परवा नहीं) हमने कुछ और लोगों को ये नियामत सोमप दी है जो इसे मुन्किर नहीं हैं +[6:90] (ऐ मुहम्मद)! वही लोग अल्लाह की तरफ से हिदायत-याफ्ता थे, उन्हीं के रास्ते पर तुम चलो, और कहदो के मैं (इस तबलीग ओ हिदायत के) काम पर तुमसे किसी का तालिब नहीं हूं। ये तो एक आम हिदायत है तमाम दुनिया वालों के लिए +[6:91] इन लोगों ने अल्लाह का बहुत ग़लत अंदाज़ लगाया जब कहा के अल्लाह ने किसी बशर पर कुछ नाज़िल नहीं किया है। इनसे पूछो, फिर वो किताब जिसे मूसा लाया था, जो तमाम इंसानों के लिए रोशनी और हिदायत थी, जिसे तुम पारा करके रखते हो, कुछ दिखाते हो और बहुत कुछ छुपा लेते हो, और जिसकी ज़रिये से तुमको वो इल्म दिया गया जो ना तुम्हें हासिल था और ना तुम्हारे बाप दादा को, आख़िर उसका नाज़िल करने वाला कौन था? बस इतना कहदो के अल्लाह, फिर उन्हें अपनी दलीलों से खेलने के लिए छोड़ दो +[6:92] (उसी किताब की तरह) ये एक किताब है जिसने हमने नाज़िल किया है बड़ी खैर ओ बरकत वाली है, उस चीज़ की तस्दीक करती है जो इसे पहले आई थी और इसके लिए नाज़िल की गई है के इसके जरूर से तुम बस्तियों के इस मरकज (यानी मक्का) और इसके अतराफ में रहने वालों को मुतनब्बे (चेतावनी) करो। जो लोग आख़िरत को मानते हैं वो इस किताब पर ईमान लाते हैं और उनका हाल ये है कि अपनी नमाज़ की पाबन्दी करते हैं +[6:93] और हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जो अल्लाह पर झूठा बोहतन घड़ी, या कहे के मुझपर वही आई है डरान हाल ये के उसपर कोई वही नाज़िल ना की गई हो, या जो अल्लाह की नाज़िल करदा चीज़ के मुक़ाबले में काहे के मैं भी ऐसी चीज़ नाज़िल करके दिखा दूंगा? काश तुम जालिमों को इस हालात में देख सको जबके वो साकारात-ए-मौत में डुबकियाँ खा रहे हैं और फरिश्ते हाथ बढ़ा कर कह रहे हैं के “लाओ, निकालो अपनी जान, आज तुम्हें उन बातों की याद में ज़िल्लत का अज़ाब दिया जाएगा जो तुम अल्लाह।” पर तोहमत रख कर ना-हक़ बका (बोला) करते थे और उसकी आयत के मुक़ाबले में सरकशी दिखाते थे” +[6:94] (और अल्लाह फरमाएगा) “लो अब तुम वैसे ही तन-ए-तन्हा (अकेले) हमारे सामने हाजिर हो गए जैसा हमने तुम्हें पहली मर्तबा अकेला पेदा किया था, जो कुछ हमने तुम्हें दुनिया में दिया था वो सब तुम पीछे छोड़ आये हो, और अब हम तुम्हारे साथ हैं तुम्हारे उन सिफ़रिशियों को भी नहीं देखते जिनका मुतालिक तुम समझते थे कि तुम्हारे काम बनाने में उनका भी कुछ हिस्सा है, तुम्हारे आपस के सब राब्ते (संपर्क) टूट गए और वो सब तुमसे गुम हो गए जिनका तुम ज़म (कल्पना) रखते थे” +[6:95] दाने (अनाज) और गुठली को फड़ने (अंकुरित) वाला अल्लाह है, वही जिंदा को मुर्दा से निकलता है और वही मुर्दे को जिंदा से खारिज करता है, ये सारे काम करने वाला तो अल्लाह है, फिर तुम किधर बहके चले जा रहे हो +[6:96] परदा ए शब (रात) को चाक करके वही सुबह निकलता है, उसने रात को सुकून का वक्त बनाया है, उसने चांद और सूरज के तुलू-ओ-गुरूब का हिसाब मुकर्रर किया है। ये सब उसकी ज़बरदस्त क़ुदरत और इल्म रखने वाले के ठहरे हुए अंदाज़े हैं +[6:97] और वही है जिसने तुम्हारे लिए तारों को सेहरा और समंदर की तरीकियों में रास्ता मालूम करने का ज़रिया बनाया। देखो हमने निशानियां खोल कर बयान कर दी हैं उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं +[6:98] और वही है जिसने एक मुतनफ़्फ़िस से तुमको भुगतान किया फिर हर एक के लिए एक जाए क़रार (समय-सीमा) है और एक उसके सोमपे जाने की जगह (विश्राम स्थल)। ये निशानियाँ हमने वाज़ेह करदी हैं उन लोगों के लिए जो समझ बूझ रखते हैं +[6:99] और वही है जिसने आसमान से पानी बरसाया, फिर उसके ज़री से हर क़िस्म की नबात उगी, फिर उसने हरे हरे खेत और दरख्त पैदा किये, फिर उनसे ताई बा ताई चढ़े हुए दाने (अनाज) निकले और खजूर के शगूफों से फल (फल) के गुच्छे के गुच्छे पैदा किए जो बोझ के मारे झुके पड़ते हैं, और अंगूर, जैतून और अनार के बाग लगाए जिनका फल एक दूसरे से मिलते-जुलते भी हैं और फिर हर एक की ख़ुसूसियत जुदा जुदा भी है। ये दरख्त जब फालते हैं तो इनमें फल आने और फिर उन्हें पकड़ने की कैफियत जरा गौर की नजर से देखो, चीजों में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं +[6:100] इसपर भी लोगों ने जिन्नो को अल्लाह का शरीक ठहर दिया, हलांके वो उनका खालिक है,और बे-जाने बूझे उसके लिए बेटे और बेटियां तसनीफ करदी, हलांके वो पाक और बाला-तार है उन बातों से जो ये लोग कहते हैं +[6:101] वो तो आसमानो और जमीन का मुजिद (प्रवर्तक) है। उसका कोई बेटा कैसे हो सकता है जबके कोई उसकी शरीक और जिंदगी ही नहीं है। उसने हर चीज़ को पेदा किया है और वो हर चीज़ का इल्म रखता है +[6:102] ये है अल्लाह तुम्हारा रब, कोई खुदा उसके सिवा नहीं है, हर चीज़ का ख़ालिक, लिहाज़ा तुम उसकी बंदगी करो और वो हर चीज़ का कफ़ील है +[6:103] निगाहें उसको नहीं पा जैसे और वो निगाहों को पा लेता है, वो निहायत बारीकियां और बा-खबर है +[6:104] देखो, तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से बसीरत की रोशनियां आ गई हैं, अब जो शादी से काम लेगा अपना ही भला करेगा और जो अंधा बनेगा खुद नुक्सान उठाएगा, मैं तुमपर कोई पासबान (कीपर) नहीं हूं +[6:105] इस तरह हम अपनी हैं आयतों को बार-बार मुख्तलिफ़ तरीक़ों से बयान करते हैं और इस लिए करते हैं कि ये लोग कहें तुम किसी से पढ़ आए हो, और जो लोग इल्म रखते हैं उन पर हम हकीकत को रोशन कर दें +[6:106] (ऐ मुहम्मद)! हमें वही की जोड़ी बनाते जाओ जो तुम्हारे रब की तरफ से नाज़िल हुई है, क्योंकि हमारे पास एक रुब के सिवा कोई और खुदा नहीं है। और इन मुशरिकेन के पीछे ना पड़ो +[6:107] अगर अल्लाह की मशियत होती तो (वो खुद ऐसा बंदोबस्त कर सकता था के) ये लोग शिर्क ना करते, तुमको हमने अंदर पासबान (अभिभावक) मुकर्रर नहीं किया है और ना तुम अंदर हवालादार हो +[6:108] और (ऐ ईमान) लाने वालों!) ये लोग अल्लाह के सिवा जिनको पुकारते हैं उन्हें गालियाँ न दो, कहीं ऐसा न हो के ये शिर्क से आगे बढ़कर जहालत की बिना पर अल्लाह को गालियाँ देने लगें। हमने तो इसी तरह हर गिरह के लिए उसके अमल को खुशनुमा बना दिया है, फिर उन्हें अपने रब ही की तरफ पलट कर आना है, हमें वक्त वो उन्हें बता देगा के वो क्या कर रहे हैं +[6:109] ये लोग कड़ी कसमें खा खा कर कहते हैं अगर कोई निशानी हमारे सामने आ जाए तो हम उसपर ईमान ले आएंगे। ऐ मुहम्मद! इनसे कहो, के "निशानियां तो अल्लाह के पास हैं" और तुम्हें कैसे समझा जाए कि अगर निशानियां आ भी जाएं तो ये ईमान लाने वाले नहीं +[6:110] हम उसी तरह इनके दिलों और निगाहों को फेर रहे हैं जिस तरह ये पहली मरतबा उसपर ईमान नहीं लाए थे, हम इनकी सरकशी ही में भटकने के लिए छोड़ देते हैं +[6:111] अगर हम फरिश्ते भी इनपर नाजिल करते और मुर्दे इनसे बातें करते और दुनिया भर की चीजों को हम उनकी आंखों के सामने जमा कर देते तब भी ये ईमान लाने वाले ना थे, इल्ला ये के मसीहत ए इलाही यहीं हो के वो ईमान लायें, मगर अक्सर लोग नादानी की बातें करते हैं +[6:112] और हमने तो इसी तरह हमेशा शैतान इंसानो और शैतान जिन्नो को हर नबी का दुश्मन बनाया है जो एक दूसरे पर ख़ुशैंद बातें धोखे और फ़रेब के तौर पर इल्का करते रहे हैं. अगर तुम्हारे रब की मशहुत ये होती के वो ऐसा ना करें तो वो कभी ना करते। पास तुम उन्हें उनके हाल पर छोड़ दो के अपनी इफ्तारा परदाज़ियां करते रहो +[6:113] (ये सब कुछ हम इन्हें इसके लिए करने दे रहे हैं के) जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल इस (खुशनुमा धोखे) की तरफ़ मायिल होन और वो इस रज़ी हो जाएं और उन बुराइयों का इकतिसाब करें जिनका इकतिसाब वो करना चाहते हैं +[6:114] फिर जब हाल ये है तो क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और फैसला करने वाला तलाश करूं, हालांके उसने पूरी तफ़सील के साथ तुम्हारी तरफ किताब नाज़िल कर दी है? और जिन लोगों को हमने (तुमसे पहले) किताब दी थी वो जानती है कि ये किताब तुम्हारी रब ही है कि तरफ से हक़ के साथ नाज़िल हुई है, लिहाज़ा तुम शक्क करने वालों में शामिल ना हो +[6:115] तुम्हारे रुब की बात सच्ची और इंसाफ के ऐतबार से कामिल है, कोई उसके फ़रामीन को तबदील करने वाला नहीं है और वो सब कुछ सुनता और जानता है +[6:116] और (ऐ मुहम्मद)! अगर तुम उन लोगों की अक्सरियत के कहने पर चलो जो ज़मीन में बसे हैं तो वो तुम्हें अल्लाह के रास्ते से भटका देंगे, वो तो मेहज़ गुमान पर चलते और क़यास-आराइयां करते हैं +[6:117] दर हकीकत तुम्हारा रब्ब ज़्यादा बेहतर जानता है के कौन उसके रास्ते से हटा हुआ है और कौन सीधी राह पर है +[6:118] फिर अगर तुम लोग अल्लाह की आयत पर ईमान रखते हो तो जिस जानवर पर अल्लाह का नाम लिया गया हो उसका गोश्त खाओ +[6:119] आखिर क्या वजह है के तुम वो चीज ना खाओ जिस्पार अल्लाह का नाम लिया गया हो, हालांके जिन चीजों का इस्तमाल हालात ए इज़्तरार (जब तक आप विवश न हों तब तक आपको मना किया जाता है) के सिवा दूसरी तमाम हालात में अल्लाह ने हराम करदिया है उनकी तफ़सील वो तुम्हें बता चुका है, बकसरत लोगों का हाल ये है के इल्म के बिना महज़ अपनी ख्वाहिशत की बिना पर गुमराह-कुन बातें करते हैं, हद से में गुज़रने वालों को तुम्हारा रब खूब जानता है +[6:120] तुम खुले गुनाहों से भी बचो और छुपे गुनाहों से भी, जो लोग गुनाहों का इक्तिसाब करते हैं वो अपनी इस कमाई का बदला पा कर रहेंगे +[6:121] और जिस जानवर को अल्लाह का नाम लेकर जुबां न दिया गया हो उसका गोश्त ना खाओ, ऐसा करना फिस्क है, शयातीन अपने साथियों के दिलों में शुकूक (संदेह) और एतराजात इल्का करते हैं ता-के वो तुमसे झगड़ा करें, लेकिन अगर तुमने उनकी इताअत कबूल की तो यकीनन तुम मुशरिक हो +[6:122] क्या वो शक्स जो पहले मुर्दा था फिर हमने उसे जिंदगी बख्शी और उसको वो रोशनी मिलती है जिसके उजाले में वो लोगों के दरमियान जिंदगी की राह तय करता है, उस शक्स की तरह हो सकता है जो तारिकियों (अंधेरे) में पड़ा हुआ हो और कोई तरह उनसे ना निकलता हो? काफ़िरों के लिए तो इसी तरह उन्हें अमल ख़ुशनुमा बना दिए गए हैं +[6:123] और इसी तरह हमने हर बस्ती में उसके बड़े-बड़े मुजरिमों को लगा दिया है के वहां अपने मकर ओ फरेब का जाल फैलाएं, दरसल वो अपने फरेब के जाल में आप फंसे हैं, मगर उन्हें इसका शूर नहीं है +[6:124] जब उनके सामने कोई आयत आती है तो वो कहते हैं "हम ना मानेंगे जब तक के वो चीज़ खुद हमको ना दी जाए जो अल्लाह के रसूलों को दी गई है"। अल्लाह ज़्यादा बेहतर जानता है के अपनी पैगम्बरी का काम किस्से ले और किस तरह ले। करीब है वो वक्त जब ये मुजरिम अपनी मक्कारियों की याद में अल्लाह के हन जिलत और सख्त अजाब से दो-चार होंगे +[6:125] पास (ये हकीकत है के) जिसे अल्लाह हिदायत बख्शने का इरादा करता है उसका सीना इस्लाम के लिए खोल देता है और जिसे गुमराही में डालने का इरादा करता है उसके सीने को तंग करता है और ऐसा दिखाता है के (इस्लाम का तसव्वुर करता ही) उसे यूं मालूम होना लगता है के गोया उसकी रूह आसमान की तरफ़ परवाज़ कर रही है। इस तरह अल्लाह (हक़ से फ़रार और नफ़रत की) नापाकी उन लोगों पर मुसल्लत करदेता है जो ईमान नहीं लाते +[6:126] हलानके ये रास्ता तुम्हारे रब का सीधा रास्ता है और इसके निशाना उन लोगों के लिए वाज़ेह कर दिए गए हैं जो हिदायत क़बूल करते हैं +[6:127] उनके लिए उनके रब के पास सलामती का घर है और वो उनका सरपरस्त है हमें सही तर्ज़-ए-अमल की वजह से जो उनहों ने इख्तियार किया +[6:128] जिस रोज़ अल्लाह इन सब लोगों को घेर कर जमा करेगा, उस रोज़ वो जिन्नो से ख़िताब करके फ़ैमायेगा के “ऐ गिरो ए जिन्न! तुमने तो नव-ए-इंसानी पर खूब हाथ साफ किया” इंसानों में से जो उनके रफीक थे वो अर्ज़ करेंगे “परवरदिगार! हम में से हर एक ने दूसरे को खूब इस्तमाल किया है, और अब हम हमें वक्त पर आ रहे हैं जो तू नहीं हमारे लिए मुकर्रर करदिया था”। अल्लाह फरमाएगा "अच्छा अब आग तुम्हारा सोचना है, इसमें तुम हमेशा रहोगे"।उससे बचेंगे सिर्फ वही जिन्हें अल्लाह बचाना चाहेगा, बेशक तुम्हारा रब दाना और अलीम है +[6:129] देखो, इस तरह हम (आखिरत में) जालिमों को एक दूसरे का साथी बनायेंगे हमें कमाई की वजह से जो वो (दुनिया में एक दूसरे के साथ मिलकर) करते थे +[6:130] (इस मौके पर अल्लाह उनसे पूछेगा के) "ऐ गिरो ​​ए जिन ओ इंस, क्या तुम्हारे पास खुद तुम्ही में से वो पैगंबर नहीं आए थे जो तुमको मेरी आयत सुनाते और इस दिन के अंजाम से डरते हाँ?” वो कहेंगे "हां, हम अपने खिलाफ़ खुद गवाही देते हैं"। आज दुनिया की जिंदगी ने लोगों को धोखे में डाल रखा है, मगर हमें वक्त वो खुद अपने खिलाफ गवाही देंगे के वो काफिर थे +[6:131] (ये शहादत उनसे पूरी हो जाएगी के ये साबित हो जाए के) तुम्हारा रब बस्तियों को जुल्म के साथ तबाह करने वाला नहीं था जबके उनके बाशिंदे हकीकत से ना-वाक़िफ़ होन +[6:132] हर शक्स का दरजा उसके अमल के लिहाज़ से है और तुम्हारे रब लोगों के अमल से बे खबर नहीं है +[6:133] तुम्हारा रब बे-नियाज़ है और मेहरबानी उसका शेवा है। अगर वो चाहे तो तुम लोगों को ले जाए और तुम्हारी जगह दूसरे जिन लोगों को चाहे ले आए जिस तरह उसने तुम्हें कुछ और लोगों की नाक से उठाया है +[6:134] तुमसे जिस चीज का वादा किया जा रहा है वो यकीनन आने वाली है और तुम खुदा को आजिज (निराश) करदेने की ताक़त नहीं रखते +[6:135] (ऐ मुहम्मद)! कहदो के लोगन! तुम अपनी जगह अमल करते रहो और मैं भी अपनी जगह अमल कर रहा हूँ। अंकारीब तुम्हें मालूम हो जाएगा के अंजाम ए कार किसके हक में बेहतर होता है। बहार-हाल ये हकीकत है के जालिम कभी फलाह नहीं पा सकते +[6:136] लोगों ने अल्लाह के लिए खुद की अदा की, जो हुई खेतों और मवेशियों में से एक हिसा मुकर्रर किया है और कहते हैं ये अल्लाह के लिए है, बज़म ए खुद, और ये हमारे ठहरे हुए शरीकों के लिए। फिर जो हिसा इनके ठहरे हुए शरीकों के लिए है वो तो अल्लाह को नहीं पहचानता मगर जो अल्लाह के लिए है वो इनके शरीकों को पहुंच जाता है। कैसे बुरे फैसले करते हैं ये लोग +[6:137] और इसी तरह बहुत से मुशरिकों के लिए उनके शरीकों ने अपनी औलाद के कत्ल को खुशनुमा बना दिया है ता-के उनको हलकत में मुब्तिला करें और उनके दीन को मुश्तबा (भ्रम) बना दें। अगर अल्लाह चाहता तो ये ऐसा ना करते, लिहाजा इन्हें छोड़ दो के अपनी इफ्तारा पर्दाजियों में लगे रहेंगे +[6:138] कहते हैं ये जानवर और ये खेत महफूज हैं, इनमें सिर्फ वही लोग खा सकते हैं जिन्हें हम खिलाना चाहते हैं, हलांके ये पाबंदी इनकी खुद साकता है (उनके दावे से)। फिर कुछ जानवर हैं जिनपर सवारी और बार बारदारी (पीठ पर बोझ) हराम कर दी गई है और कुछ जानवर हैं जिनपर अल्लाह का नाम नहीं लेते। और ये सब कुछ इन्हों ने अल्लाह पर इफ्तारा (झूठी मनगढ़ंत बातें) किया है, इफ्तारा परदाज़ियों का बदला देगा में अनकरीब अल्लाह इन्हें +[6:139] और कहते हैं कि जानवरों के पेट में जो कुछ है ये हमारे मर्दों के लिए मखसूस है और हमारी औरतें पर हराम, लेकिन अगर वो मुर्दा हो (जन्म से मृत) तो दोनों इसके खाने में शरीक हो सकते हैं। ये बातें जो इन्हों ने गड़बड़ ली हैं इनका बदला अल्लाह इन्हें देकर रहेगा। यकीनन वो हकीम है और सब बातों की उपयोगी खबर है +[6:140] यकीनन खसरे (नुक्सान) में पढ़ गए वो लोग जिन्होन ने अपनी औलाद को जिहालत (अज्ञानता) ओ नादानी की बिना पर क़त्ल किया और अल्लाह के दिए हुए रिज़क को अल्लाह पर इफ्तारा परदाज़ी करके हराम ठहरा लिया, यकीनन वो भटक ​​गए और हरगिज वो राह ए रास्ते पाने वालों में से ना थे +[6:141] वो अल्लाह ही है जिसने तरह तरह के बाघ और ताकिस्तान और नखलास्तान (जालीदार और बिना जाली वाला) पैदा किए, खेतियां उगाई जिनसे क़िस्म क़िस्म के मकुलात हासिल होते हैं (ताड़ के पेड़, और फसलें, सभी स्वाद में भिन्न होते हैं), ज़ैतून और अनार के दरख़्त पैदा किये हैं जिनके फल सूरत में मुशाबेह (समान) और मज़ा (स्वाद) में मुख़्तलिफ़ होते हैं। खाओ उनकी पैदावर जबके ये फैलाएं, और अल्लाह का हक अदा करो जब इसकी फसल काटो, और हद से ना गुजरो के अल्लाह हद से गुजारने वालों को पसंद नहीं करता +[6:142] फिर वही है जिसने मवेशियों में से वो जानवर भी पैदा किए जिनसे सवारी ओ बार-बारदारी (बोझ) का काम लिया जाता है और वो भी जो खाने और बेचने के काम आते हैं। खाओ उन चीज़ों में से जो अल्लाह ने तुम्हें बख्शी है और शैतान की जोड़ी ना करो के वो तुम्हारा खुला दुश्मन है +[6:143] ये आठ (आठ) नर्र ओ माडा (जोड़े) हैं, दो भेड़ (भेड़) की क़िस्म से और दो बकरी की क़िस्म से। (ऐ मुहम्मद)! इनसे पूछो के अल्लाह ने उनके नार हराम किये हैं या माडा, या वो बच्चे जो भेड़ों (भेड़) और बकरियों के पेट में हैं? ठीक ठीक इल्म के साथ मुझे बताओ अगर तुम सच्चे हो +[6:144] और इसी तरह दो औंस की क़िस्म से हैं और दो गाय (गाय) की क़िस्म से। पूछो, इनके नर अल्लाह ने हराम किये हैं या माडा, या वो बच्चे जो ऊंटनी (वह-ऊंटनी) और गाई के पेट में हैं? क्या तुमने हमें वक्त हाजिर किया था जब अल्लाह ने इनको हराम होने का हुक्म तुम्हें दिया था? फिर उस शक्स से बढ़ कर जालिम और कौन होगा जो अल्लाह की तरफ मंसूब करके झूठी बात कहे ता-के इल्म के बगैर लोगों की गलत रहनुमाई करे। यकीनन अल्लाह ऐसे ज़ालिमों को राह ए रस्त नहीं दिखता +[6:145] (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के जो वही मेरे पास आई है उसमें तो मैं कोई चीज ऐसी नहीं पाता जो किसी खाने वाले पर हराम हो, इल्ला ये के वो मुर्दार (मृत) हो, या बहया (बाहर डाला गया) हुआ खून, या सुव्वर का गोश्त हो के वो नापाक है, या फिस्क (अस्वच्छ) हो के अल्लाह के सिवा किसी और के नाम पर जुबां किया गया हो, फिर जो शक्स मजबूरी की हालत में (कोई चीज इनमें से खा ले) बिना इसके के वो नफरमानी का इरादा रखता हूं और बिना इसके के वो हद ए जरुरत से तजावुज करे, तो यकीनन तुम्हारा रब दरगुजर से काम लेने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[6:146] और जिन लोगों ने यहुदियात इख्तियार की अनपर हमने सब नाख़ून (नाखून) वाले जानवर हराम कर दिए थे, और गाय और बकरी की चारबी (मोटी) भी, बज़ुज़ उसके जो उनकी पीठ (पीठ) या उनकी एंथोन (अंतरिक्ष) से ​​लगी हुई हो या हड्डी से लगी रह जाये. ये हमने उनकी सरकशी की सजा उन्हें दी थी और ये जो कुछ हम कह रहे हैं बिल्कुल सच कह रहे हैं +[6:147] अब अगर वो तुम्हें झुटलाएएं तो उनसे कहदो के तुम्हारे रब का दामन ए रहमत वही है और मुजरिमों से उसके अज़ाब को फेरा नहीं जा सकता +[6:148] ये मुशरिक लोग (तुम्हारी इन बातों के जवाब में) जरूर कहेंगे के "अगर अल्लाह चाहता तो ना हम शिर्क करते और ना हमारे बाप दादा, और ना हम किसी चीज को हराम ठहराते"। ऐसी ही बातें बना बना कर इनसे पहले के लोगों ने भी हक को झुटलाया था, यहां तक ​​के आखिर ए कार हमारे अजब का मजा उन्होन ने चक लिया। इनसे कहो "क्या तुम्हारे पास कोई इल्म है जिसे हमारे सामने पेश कर सकते हो? तुम तो महज गुमान पर चल रहे हो और नेरी क़यास अराइयां करते हो" +[6:149] फिर कहो (तुम्हारी इस हुज्जत के मुकाबले में) "हकीकत रस हुज्जत तो अल्लाह के पास है, अगर अल्लाह चाहता तो तुम सबको हिदायत दे देता” +[6:150] इनसे कहो के “लाओ अपने वो गवाह जो इस बात की शहादत दीन के अल्लाह ही ने इन चीज़ों को हराम किया है”। फिर अगर वो शहादत दे दें तो तुम उनके साथ शहादत न देना, और हरगिज उन लोगों की ख्वाहिश के पीछे ना चलना जिन्हों ने हमारी आयत को झुटलाया है, और जो आख़िरत के मुनकिर हैं, और जो दूसरों को अपने रुब का हमसर बनाते हैं +[6:151] (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहो के आओ मैं तुम्हें सुनाऊं तुम्हारे रब ने तुमपर क्या पाबंदियां आयद की हैं: ये उसके साथ किसी को शरीक ना करो, और वालिदें (मां बाप) के साथ नई सुलूक करो, और अपनी औलाद को मुफलिसी के डर से कत्ल ना करो, हम तुम्हें भी रिज्क देते हैं और उनको भी देंगे, और बेशर्मी की बातों के करीब भी ना जाओ, ख्वाह वो खुली हो या छुपी। और किसी जान को जैसे अल्लाह ने मोहतरम ठहरया है हलाक न करो मगर हक के साथ। ये बातें हैं जिनकी हिदायत हमें तुम्हें पसंद है, शायद के तुम समझ बूझ से काम लो +[6:152] और ये के यतीम के माल के करीब ना जाओ मगर ऐसी तारीख से जो बेहतर हो, यहां तक ​​के वो अपने सीने-रुश्द (परिपक्वता) को पाहुंच जाए, और नाप टोल में पूरा इन्साफ करो. हम हर शक्स पर ज़िम्मेदारी का उतना ही बोझ रखते हैं जितना उसके इम्कान में (यह सहन कर सकता है) है, और जब बात कहो इन्साफ की कहो मामला अपने रिश्ते में ही का क्यों ना हो, और अल्लाह के अहद (वाचा) को पूरा करो। बातों की हिदायत में अल्लाह ने तुम्हें कहा है शायद तुम हिदायत कबूल करो +[6:153] नीज़ उसकी हिदायत ये है के यही मेरा सीधा रास्ता है, लिहाज़ा तुम इसी पर चलो और दूसरे रास्ते पर ना चलो के वो उसके रास्ते से हटा कर तुम्हें परागा(बिखरा) करदेंगे. ये है वो हिदायत जो तुम्हारे रब ने तुम्हें कहा है, शायद के तुम कजरवी से बचाओ +[6:154] फिर हमने मूसा को किताब अता की थी जो भलाई की रवीश इख्तियार करने वाले इंसान पर नियामत की तकमील और हर जरूरी चीज की तफसील और सरसर हिदायत और रहमत थी (और इस्लिये बानी इसराइल को दी गई थी के) शायद लोग अपने रब की मुलाकात पर ईमान लायें +[6:155] और इसी तरह ये किताब हमने नाज़िल की है, एक बरकत वाली किताब, पास तुम इसकी जोड़ी करो और तक़वा की रवीश इख्तियार करो, बाद नहीं के तुमपर रहम किया जाए +[6:156] अब तुम ये नहीं कह सकते कि किताब तो हमसे पहले के दो गिरोहों को दी गई थी, और हमको कुछ खबर ना थी के वो क्या पढ़ते पढ़ते थे +[6:157] और अब तुम ये बहाना भी नहीं कर सकते अगर हमपर किताब नाज़िल की गई होती तो हम उनसे ज़्यादा रस्ते-कच्चे साबित होते। तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से एक दलील ए रोशन और हिदायत और रहमत आ गई है, अब इस से बढ़कर जालिम कौन होगा जो अल्लाह की आयत को झुठलाए और उससे मुह मोड़ ले। जो लोग हमारी आयत से मुह मोड़ते हैं उन्हें इस रुहगर्दानी की पैदाइश में हम बढ़ाते हैं सज़ा दे कर रहेंगे +[6:158] क्या अब लोग इसके मुंतज़िर हैं के उनके सामने फ़रिश्ते आ खड़े हैं, या तुम्हारा रुब खुद आ जाए, या तुम्हारे रुब की बाज़ सारे निशानियाँ नामदार हो जायेंगे? जिस रोज़ तुम्हारे रब की बाज़ मख़सूस निशानियां नामदार हो जाएंगी फिर किसी ऐसे शक्स को उसका ईमान कुछ फ़ायदा न देगा जो पहले ईमान न लाया हो या जिसने अपने ईमान में कोई भलाई न कमाई हो। (ऐ मुहम्मद)! इनसे कहदो के अच्छा, तुम इंतज़ार करो, हम भी इंतज़ार करते हैं +[6:159] जिन लोगों ने अपने दीन को टुकड़े-टुकड़े कर दिया और गिरो-गिरोह बन गए यकीनन उनसे तुम्हारा कुछ वास्ता नहीं। उनका मामला तो अल्लाह के लिए सही है, वही उनको बताएगा के उन्होन ने क्या कुछ किया है +[6:160] जो अल्लाह के हुज़ूर नेकी लेकर आएगा उसके लिए दस गुना (दस बार) अजर है, और जो बड़ी (बुरा काम) लेकर आएगा उसको उनता ही बलदा दिया जाएगा जितना उसने कसूर किया है, और किसी पर ज़ुल्म न किया जाएगा +[6:161] (ऐ मुहम्मद)! कहो मेरे रब ने बिल-यक़ीन मुझे सीधा रास्ता दिखाया है, बिल्कुल ठीक दीन जिस में कोई टेढ़ (टेढ़ापन) नहीं, इब्राहिम का तरीक़ा जिसने यक्सू होकर उसने इख्तियार किया था और वो मुशरिकों में से ना था +[6:162] कहो, मेरी नमाज़, मेरे तमाम मरासिम उबुदियात (मेरे सभी इबादत), मेरा जीना और मेरा मरना, सब कुछ अल्लाह रब्बुल आलमीन के लिए है +[6:163] जिसका कोई शरीक नहीं, इसका मुझे हुकुम दिया गया है और सबसे पहले सर ए इताअत झुकने वाला मैं हूं +[6:164] कहो, क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और रब तलाश करूं, हालांके वही हर चीज का रब है? हर शक्स जो कुछ कमाता है उसका ज़िम्मेदार वो खुद है, कोई बोझ उठाने वाला दूसरे का बोझ नहीं उठता। फिर तुम सबको अपने रुब की तरफ पलटना है, हमारा वक्त वो तुम्हारे इख्तिलाफत (मतभेद/विवाद) की हक़ीक़त तुमपर खोल देगा +[6:165] वही है जिसने तुमको ज़मीन का ख़लीफ़ा बनाया, और तुम में से बाज़ को बाज़ के मुकाबले में ज़्यादा बुलंद दर्जे दिया, ता-के जो कुछ तुमको दिया है उसमें तुम्हारी आजमाइश करे। बेहसाक तुम्हारा रुब सज़ा देने में भी बहुत तेज़ है और बहुत दरगुज़ार करने और रहम फ़रमाने वाला भी है + +Surah 7: Al-A'raf (The Elevated Places) +---------------------------------------- +[7:1] अलिफ़ लाम मीम साद +[7:2] ये एक किताब है जो तुम्हारी तरफ नाज़िल की गई है, पास (ऐ मुहम्मद), तुम्हारे दिल में इसे कोई परेशानी ना हो, इसके उतरने की ग़रज़ ये है के तुम इसके ज़रूरी से (मुनकिरीन को) डराओ और ईमान लाने वाले लोगों को याद दिहानी हो +[7:3] लोगन, जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है उसकी जोड़ी करो और अपने रब को छोड़ कर दूसरे सरपरतों की जोड़ी ना करो, मगर तुम हिदायत कम ही मानते हो +[7:4] कितनी ही बस्तियाँ हैं जिन्हें हमने हलक करदिया, उन पर हमारा अजब अचानक रात के वक्त टूट पड़ा, या दिन दहाड़े ऐसे वक्त आया जब वो आराम कर रहे थे +[7:5] और जब हमारा अजब उन्पर आ गया तो उनकी ज़ुबान पर इसके सिवा कोई सदा ना थी के वाकाई हम जालिम थे +[7:6] पास ये जरूर होकर रहना है के हम उन लोगों से बाज़-पुर्स करें जिनकी तरफ हमने पैगम्बर भेजे हैं और पैगम्बरों से भी पूछें (के उन्होन ने पैगाम रसानी का फर्ज कहां तक ​​अंजाम दिया और उन्हें इसका क्या जवाब मिला) +[7:7] फिर हम खुद पूरे इल्म के साथ सारी सरगुशिस्ट (पूरा हिसाब) उनके आगे पेश कर देंगे। आख़िर हम कहीं गायब तो नहीं थे +[7:8] और जिनके पैडले हल्के रहेंगे वही अपने आप को खासे (नुक्सान) में मुब्तिला करने वाले होंगे, क्योंकि वो हमारी आयत के साथ ज़ालिमाना बरताओ करते रहे थे +[7:9] +[7:10] हमने तुम्हें ज़मीन में इख्तियारत के साथ बसाया और तुम्हारे लिए यहां समां ए ज़िस्त फराहम किया मगर तुमलोग काम ही शुकर-गुज़ार होते हो +[7:11] हमने तुम्हारी तख़लीक (सृजन) की इब्तेदा की, फिर तुम्हारी सूरत बनाई, फिर फ़रिश्टन से कहा आदम को सजदा करो. क्या हुक्म पर सबने सजदा किया मगर इब्लीस सजदा करने वालों में शामिल ना हुआ +[7:12] पूछा, “तुझे किस चीज ने सजदा करने से रोका जबके मैंने तुझको हुकुम दिया था?” बोला, मैं उससे बेहतर हूं। तू नहीं मुझे आग से पैदा किया है और उसे मिट्टी से'' +[7:13] फरमाया, ''अच्छा तू यहां से नीचे उतर, तुझे हक नहीं है के यहां बदाई का घमंड करे, निकल जा के डर-हकीकत तू उन लोगों में से है जो खुद अपनी ज़िल्लत चाहता है'' +[7:14] बोला, "मुझे उस दिन तक मोहलत दे जबके ये सब दोबारा उठेंगे" +[7:15] फरमाया "तुझे मोहलत है।" +[7:16] बोला, “अच्छा तो जिस तरह तू नई मुझे गुमराही में मुबतला किया मैं भी अब तेरी सीधी राह पर +[7:17] इंसानों की घाट में लगा रहूंगा, आगे और पीछे, दिनें और बायें, हर तरफ से इनको घेरूंगा और तू इनमें से अक्सर को शुक्रगुजार न पायेगा" +[7:18] फरमाया, "निकल जा यहां से ज़लील और ठुकराया हुआ, यकीन रख के इनमें से जो तेरी जोड़ी करेगी, तुझ समेत उन सब से जहन्नुम को भर दूंगा +[7:19] और ऐ आदम, तू और तेरी बीवी, दोनों इस जन्नत में रहो, जहां जिस चीज़ को तुम्हारा जी चाहे खाओ, मगर उस दरख्त के पास न फटकना वरना ज़ालिमों में से हो जाओगे” +[7:20] फिर शैतान ने उनको बहकाया ता-के उनकी शर्मगाहें जो एक दूसरे से छुपी गई पतली उनके सामने खोल दे। उसने उनसे कहा, “तुम्हारे रब ने तुम्हें जो इस दरख से रोका है इसकी वजह इसके सिवा कुछ नहीं है के कहीं तुम फरिश्ते ना बन जाओ, या तुम्हें हमेशा की जिंदगी हासिल ना हो जाए +[7:21] और उसने कसम खा कर उनसे कहा के मैं तुम्हारा सच्चा खैर-ख्वा हूं +[7:22] इस तरह धोखा देकर वो उन दोनों को रफ्ता रफ्ता अपना धप पार ले आया. आख़िर ए कार जब उनहों ने उस दरख्त का मजा चखा तो उनके सत्र एक दूसरे के सामने खुल गए और वो अपने जिस्म को जन्नत के पत्तों से ढँकने लगे। तब उनके रब ने उन्हें पुकारा, "क्या मैंने तुम्हें इस दरख्त से ना रोका था और ना कहा था के शैतान तुम्हारा खुला दुश्मन है?" +[7:23] दोनों बोल उठे, "ऐ रब, हमने अपना ऊपर सितम (ज़ुल्म) किया, अब अगर तू नहीं हमसे दरगुज़ार ना फरमाया और रहम ना किया तो यकीनन हम तबाह हो जाएंगे।" +[7:24] फरमाया, "उतर जाओ, तुम एक दूसरे के दुश्मन हो। और तुम्हारे लिए एक खास मुद्दत तक ज़मीन ही में जाए-क़रार (निवास) और सामान-ए-ज़िस्ट (निवास और प्रावधान) है" +[7:25] और फरमाया, "वहीं तुमको जीना और वहीं मरना है और उसी मुझसे तुमको आख़िरकार निकल जाएगा।” +[7:26] ऐ औलाद ए आदम, हमने तुम्हारा लिबास नाज़िल किया है कि तुम्हारे जिस्म के काबिल ए शर्म हिस्सो को धन्यवाद और तुम्हारे लिए जिस्म की हिफ़ाज़त और ज़ीनत का ज़रिया भी हो। और बेहतरीन लिबास तकवे (पवित्रता) का लिबास है। ये अल्लाह की निशानियों में से एक निहसानी है, शायद के लोग इसे सबक लें +[7:27] ऐ बानी आदम, ऐसा ना हो के शैतान तुम्हें फिर उसी तरह फिटने में मुब्तला करदे जिस तरह उसने तुम्हारे वलियों को जन्नत से निकाला था और उनके लिबास उन्पर से उतरवा दिए थाय ता-के उनके शर्मगाहें एक दूसरे के सामने खोले। वो और उसके साथी तुम्हें ऐसी जगह से दिखते हैं जहां से तुम उन्हें नहीं देख सकते। शयातीन को हमने उन लोगों का सरपरस्त बना दिया है जो ईमान नहीं लाते +[7:28] ये लोग जब कोई शर्मिंदा काम करते हैं तो कहते हैं हमने अपने बाप दादा को इसी तारीक पर पाया है और अल्लाह ही ने हमें ऐसा करने का हुकुम दिया है। इनसे कहो अल्लाह बे-हयायी का हुक्म कभी नहीं दिया करता। क्या तुम अल्लाह का नाम लेकर वो बातें कहते हो जिनका मुतालिक तुम्हें इल्म नहीं है (वो अल्लाह की तरफ से हैं) +[7:29] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो, मेरे रब ने तो रस्ती ओ इन्साफ का हुकुम दिया है, और उसका हुकुम तो ये है कि हर इबादत में अपना रुख ठीक रखो और उसी को पुकारो अपने दीन को उसके लिए खालिस रख कर, जिस तरह उसने तुम्हें अब भुगतान किया है उसी तरह तुम फिर भुगतान किये जाओगे +[7:30] एक गिरो ​​को तो उसने सीधा रास्ता दिखा दिया है, मगर दूसरे गिरो ​​पर गुमराही चस्पां होकर रह गई है, क्योंकि उन्हें नहीं खुदा के बजाये शयातीन को अपना सरपरस्त बना लिया है और वो समझ रहे हैं कि हम सीधी राह पर हैं +[7:31] ऐ बानी आदम, हर इबादत के मुआक़े पर अपनी ज़ीनत से अरस्ता रहो और खाओ पियो और हद से तजौज़ न करो। अल्लाह हद से बढ़ने वालों को पसंद नहीं करता +[7:32] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो किसने अल्लाह की उस ज़ीनत को हराम कर दिया जैसे अल्लाह ने अपने बंदों के लिए निकला था और किसने खुदा की बख्शी हुई पाक चीज़ ममनू (मना) करदी? कहो, ये सारी चीजें दुनिया की जिंदगी में भी ईमान लाने वालों के लिए हैं, और कयामत के रोज तो खालीसतन उनके लिए होंगी। इस तरह हम अपनी बातें साफ-साफ बयान करते हैं उन लोगों के लिए जो इल्म रखने वाले हैं +[7:33] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो के मेरे रब ने जो चीजें हराम की हैं वो तो ये हैं: बेशर्मी के काम ख्वा खुले हों या छुपे, और गुनाह और हक के खिलाफ ज़ियादती, और ये के अल्लाह के साथ तुम किसी को शरीक करो जिसके लिए उसने कोई सनद नाज़िल नहीं की, और ये के अल्लाह के नाम पर कोई ऐसी बात कहो जिसका मुतालिक तुम्हें इल्म ना हो के वो हकीकत में उसकी ने फरमायी है +[7:34] हर क़ौम के लिए मोहल्लत की एक मुद्दत मुकर्रर है, फिर जब किसी क़ौम की मुद्दत आन पूरी होती है तो एक घड़ी भर की तकदीम भी नहीं होती +[7:35] (और ये बात अल्लाह ने आगाज़ ए तख़लीक ही में साफ फरमा दी थी के) ऐ बानी आदम, याद रखो, अगर तुम्हारे पास खुद तुम्हीं से ऐसे रसूल आएं जो तुम्हें मेरी आयत सुना रहे हों, तो जो कोई नफ़रमानी से बचेगा और अपने रवये की इस्लाह करेगा उसके लिए कोई खौफ और रंज का मौका नहीं है +[7:36] और जो लोग हमारी आयतों को झूठलाएंगे और उनके मुक़ाबले में सरकशी बरतेंगे वही एहले दोज़ख होंगे जहां वो हमेशा रहेंगे +[7:37] ज़ाहिर है के उसे बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जो बिकल झूठी बातें ग़द कर अल्लाह की तरफ मंसूर करे या अल्लाह की सच्ची आयत को झूठलाये? ऐसे लोग अपने नविस्ता ए तकदीर के मुताबिक अपना हिसा पाते रहेंगे, यहां तक ​​के वो घड़ी आ जाएगी जब हमारे भेजे हुए फरिश्ते उनकी रूहें (आत्माएं) क़ब्ज़ करने के लिए पहनेंगे। हमें वक्त है वो उनसे पूछेंगे के बताओ अब कहां हैं तुम्हारे वो माबूद जिनको तुम खुदा के बजाये पुकारते थे? वो कहेंगे के, "सब हमसे ग़म हो गए" और वो खुद अपने ख़िलाफ गवाही देंगे के हम वक़ाई मुनकिर ए हक़ थे +[7:38] अल्लाह फरमाएगा जाओ, तुम भी उसके जहन्नुम में चले जाओ जिस्म में तुमसे पहले गुजरे हुए गिरो ​​जिन्न ओ इंसान (इंसान) जा चुके हैं। हर गिरो ​​जब जहन्नुम में दाख़िल होगा तो अपने पेशरो गिरोह (जो इससे पहले चला गया था) पर लानत करता हुआ दाख़िल होगा, हत्ता के जब सब वहाँ जमा हो जायेंगे तो हर बाद वाला गिरोह पहले गिरोह के हक़ में कहेगा के ऐ रब, ये लोग थे जिन्हों ने हमको गुमराह किया, लिहाज़ा इन्हें आग का दोहरा अज़ाब दे। जवाब में इरशाद होगा, हर एक के लिए दोहरा ही अज़ाब है मगर तुम जानते नहीं हो +[7:39] और पहला गिरो ​​दूसरे गिरो ​​​​से कहेगा के (अगर हम काबिल ए इल्जाम थे) तो तुम्हीं को हमपर कौन सी फजीलत हासिल थी, अब अपनी कमाई के नतीजे में अज़ाब का मजा चक्खो +[7:40] यकीन जानो, जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुटलाया है और इनके मुकाबले में सरकशी की है उनके लिए आसमान के दरवाजे हरगिज ना खोले जाएंगे। उनका जन्नत में जाना उतना ही नामुमकिन है जितना सूई (सुई) के नाक से ऊंट (ऊंट) का गुजारना। मुजरेमोन को हमारे हाँ ऐसा ही बदला मिला करता है +[7:41] उनके लिए तो जहन्नुम का बिछोना होगा और जहन्नुम ही का ओदना। ये है वो जजा जो हम जालिमों को दिया करते हैं +[7:42] बा-खिलाफ इसके जिन लोगों ने हमारी आयत को मान लिया है और अच्छे काम किए हैं और इस मामले में हम हर एक को उसकी क्षमता (क्षमता) ही देते हैं। वो एहले जन्नत हैं जहां वो हमेशा रहेंगे +[7:43] उनके दिलों में एक दूसरे के खिलाफ जो कुछ कदुरत (द्वेष) होगी उसे हम निकल देंगे, उनके आला नेहरेन बहती होंगी, और वो कहेंगे के "तारीफ खुदा ही के लिए है जिसने हमने ये रास्ता दिखाया, हम खुद रह ना पा सकते थे अगर" ख़ुदा हमारी रहनुमाई न करता। हमारे रब के भेजे हुए रसूल वक़ै हक़ ही लेकर आये थे।” हमें वक्त निदा (आवाज) आएगी के "ये जन्नत जिसके तुम वारिस बन गए हो तुम्हें उन अमल के बदले में मिली है जो तुम करते रहे थे" +[7:44] फिर ये जन्नत के लोग दोज़ख वालों से पुकार कर कहेंगे, "हमने उन सारे वादों को ठीक पा लिया जो हमारे रब ने हमसे किये थे, क्या तुमने भी उन वादों को ठीक पाया जो तुम्हारे रब ने किये थे?” वो जवाब देंगे "हां" तब एक पुकारने वाला उनको दरमियान पुकारेगा के "खुदा की लानत उन जालिमों पर +[7:45] जो अल्लाह के रास्ते से लोगों को रोकते और उसे टेढ़ा करना चाहते थे और आख़िरत के मुनकिर थे" +[7:46] दोनों गिरोहों के दरमियान एक ओट में (बैरियर) हायल होगी जिसकी बुलंदियां (अराफ) पर कुछ और लोग होंगे ये हर एक को उसका कियाफा (मार्क्स) से पहचानेंगे और जन्नत वालों से पुकार कर कहेंगे "सलामती हो तुमपर"। ये लोग जन्नत में शामिल तो नहीं हुए मगर उसके उम्मीदवर होंगे” +[7:47] और जब उनकी निगाहें दोज़ख वालों की तरफ फिरेंगी तो कहेंगे, “ऐ रब! हमने ज़ालिम लोगों में शामिल ना कीजियो” +[7:48] फिर ये अराफ के लोग दोज़ख़ की चंद बड़ी बड़ी शख़्सियतों (व्यक्तित्वों) को उनकी अलमातों से पहचान कर पुकारेंगे के “देख लिया तुमने, आज ना तुम्हारे जत्थे (सभा/संख्याएँ) तुम्हारे किसी काम आये और ना वो साज़ ओ समां जिनको तुम बड़ी चीज़ समझते थे +[7:49] और क्या ये एहले जन्नत वही लोग नहीं हैं जिनका मुतालिक तुम कसमें खा खा कर कहते थे उनको तो खुदा अपनी रहमत में से कुछ भी ना देगा? आज इनसे कहा गया के दखिल हो जाओ जन्नत में, तुम्हारे लिए ना खौफ है ना रंज" +[7:50] और दोज़ख के लोग जन्नत वालों को पुकारेंगे के कुछ थोड़ा सा पानी हमपर डाल दो या जो रिज्क अल्लाह ने तुम्हें दिया है उसमें से कुछ फेंक दो। वो जवाब देंगे के "अल्लाह ने" ये दोनों चीजें उन मुनकिरीन ए हक पर हराम करदी हैं +[7:51] जिन्होन ने अपने दीन को खेल और तफरी बना लिया था। और जिन्होंने दुनिया की जिंदगी ने फरेब में मुब्तिला कर रखा था। अल्लाह फरमाता है के आज हम भी उन्हें उसी तरह भूला देंगे जिस तरह वो इस दिन की मुलाकात को भूल रहे हैं और हमारी आयतों का इनकार करते रहेंगे” +[7:52] हम लोगों के पास एक ऐसी किताब ले आए हैं जिसको हमने इल्म की बिना पर मुफस्सल (व्याख्यायित) बनाया है और जो ईमान लेन वालों के लिए हिदायत और रहमत है +[7:53] अब क्या ये लोग इसके सिवा किसी और बात के मुंतजिर हैं के वो अंजाम सामने आ जाए जिसकी ये किताब खबर दे रही है? जिस रोज़ वो अंजाम सामने आ गया तो वही लोग जिन्हों ने उसे नज़र-अंदाज़ कर दिया था कहेंगे के "वक़ाई हमारे रब के रसूल हक़ लेकर आए थे, फिर क्या अब हमें कुछ सिफ़ारिश मिलेगी जो हमारे हक़ में सिफ़ारिश करें? हां हमें दोबारा वापस ही भेज" दिया जाये ता-के जो कुछ हम पहले करते थे उसके बजाये अब दूसरे तारिके पर काम करके दिखायें”। उनहों ने अपने आप को खासे (नुक्सान) में डाल दिया और वो सारे झूठ जो उनहों ने तसनीफ कर रक्खे थे आज उनसे गम हो गए +[7:54] दर हकीकत तुम्हारा रब अल्लाह हाय है जिसने आसमान और जमीन को छः (छह) दिनों में पैदा किया, फिर अपनी तख्त ए सल्तनत पर जलवा फरमा हुआ, जो रात को दिन पर धन देता है और फिर दिन रात के पीछे दौड़ा आता है, जिसने सूरज और चांद और तारे पैदा किये सब उसके फरमान के तबेह हैं। ख़बरदार रहो! उसी का ख़ल्क (सृजन) है और उसी का अमृत (आदेश) है। बड़ा बा-बरकत है अल्लाह, सारे जहांों का मालिक ओ परवरदिगार +[7:55] अपने रब को पुकारो गिड़गिदाते (विनम्रता के साथ) हुए और चुपके चुपके। यकीनन वो हद से गुज़रने वालों को पसंद नहीं करता +[7:56] ज़मीन में फ़साद बरपा ना करो जबके उसकी इस्लाह हो चुकी है और खुदा ही को पुकारो ख़ौफ़ के साथ और तम (उम्मीद) के साथ। यकीनन अल्लाह की रहमत नीक किरदार (जो अच्छा करते हैं) लोगों से करीब है +[7:57] और वो अल्लाह ही है जो हवाएं अपनी रहमत के आगे खुश-खबरी के लिए भेजे जाते हैं, फिर जब वो पानी से लड़े हुए बादल उठा लेती हैं तो उन्हें कोई मुर्दा सर-जमीन की तरफ हरकत देता है, और वहां मेह (बारिश) बरसा कर (उसी मेरी हुई जमीन से) तरह तरह के फल निकल ला आता है। देखो, इस तरह हम मुर्दों को हालात ए मौत से निकलते हैं, शायद के तुम इस मुशाहिदे से सबक लो +[7:58] जो जमीन अच्छी होती है वो अपने रब के हुकुम से खूब फल फूल लगती है और जो जमीन खराब होती है उसे नकीस (गरीब) पैदावर के सिवा कुछ नहीं निकलता। इस तरह हम निशानियों को बार-बार पेश करते हैं उन लोगों के लिए जो शुक्रगुज़ार होने वाले हैं +[7:59] हमने नूह को उसकी क़ौम की तरफ भेजा, उसने कहा “ऐ बिरादरान ए क़ौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है, मैं तुम्हारा हक़ मैं एक शानदार दिन (कमाल का दिन) के अज़ाब से डरता हूं” +[7:60] उसकी क़ौम के सरदारों ने जवाब दिया “हमको तो ये नज़र आता है के तुम सारे गुमराही में मुब्तिला हो” +[7:61] नूह ने कहा “ऐ बिरादरान ए क़ौम, मैं किसी गुमराही में नहीं पड़ा” हूं बलके, मैं रब उल आलमीन का रसूल हूं +[7:62] तुम्हें अपने रुब के पैगाम पहुंचाता हूं, तुम्हारा खैर-ख्वाह हूं, और मुझे अल्लाह की तरफ से वो कुछ मालूम है जो तुम्हें मालूम नहीं है +[7:63] क्या तुम्हें इस बात पर ताज्जुब हुआ के तुम्हारे पास खुद तुम्हारी अपनी क़ौम के एक आदमी के ज़रिये से तुम्हारे रब की याद देहनी आई ता-के तुम्हें ख़बरदार करे, और तुम गलत रावी से बच जाओ और तुमपर रहम किया जाए?” +[7:64] मगर उनहों ने उसको झूठला दिया। आख़िर ई कार हमने उसे और उसके साथियों को एक कश्ती में सजा दी और उन लोगों को डुबो दिया जिन्हों ने हमारी आयत को झुटलाया था। यकीनन वो अंधे लोग थे +[7:65] और आद की तरफ हमने उनके भाई हद को भेजा। उसने कहा, "ऐ बिरादरान ए क़ौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है फिर क्या तुम ग़लत रावी से परहेज़ न करोगी?" +[7:66] उसकी क़ौम के सरदारों ने, जो उसकी बात मन्ने से इंकार कर रहे थे, जवाब में कहा “हम तो तुम्हें बे-अकाली (मूर्खता में) में मुब्तिला समझते हैं और हमें गुमान है के तुम झूठे हो” +[7:67] उसने कहा “ ऐ बिरादरान ए क़ौम, मैं बे-अकाली में मुब्तिला नहीं हूं बलके मैं रब उल आलमीन का रसूल हूं +[7:68] तुमको अपने रुब के पैगाम पहुंचाता हूं, और तुम्हारा ऐसा खैर-ख्वाह हूं जिसपर भरोसा किया जा सकता है +[7:69] क्या तुम इस बात पर ताज्जुब हुआ के तुम्हारे पास खुद तुम्हारी अपनी क़ौम के एक आदमी के ज़रिये से तुम्हारे रब की याद देहनी आई ता-के वो तुम्हें ख़बरदार करे? भूल न जाओ के तुम्हारे रब ने नूह की क़ौम के बाद तुमको उसका जानशीं (उत्तराधिकारियों) बनाया और तुम्हें खूब तनो-मंद किया (तुम्हारे कद में काफी वृद्धि हुई), पास अल्लाह की क़ुदरत के करिश्माओं को याद रखो, उम्मीद है के फलाह पाओगे" +[7:70] उनहोन ने जवाब दिया "क्या तू हमारे पास इस लिए आया है कि हम अकेले अल्लाह ही की इबादत करें और उन्हें छोड़ दें जिनकी इबादत हमारे बाप दादा करते आये हैं? अच्छा तो ले आ वो अजब जिसका तू हमें धमकी देता है अगर तू सच्चा है” +[7:71] उसने कहा “तुम्हारे रब की फिटकर तुम पर पड़ गई और उसका गजब टूट पड़ा, क्या तुम मुझसे उन नमो (नामों) पर झगड़ा करते हो जो तुमने और तुम्हारे बाप दादा ने रख लिए हैं, जिनके लिए अल्लाह ने कोई सनद नाज़िल नहीं की है। अच्छा तो तुम भी इंतज़ार करो और मैं भी तुम्हारे साथ इंतज़ार करता हूँ” +[7:72] आख़िर ए कार हमने अपनी महरबानी से हद और उसके साथियों को बचा लिया और उन लोगों की जड (जड़ें) काट दी जो हमारी आयत को झुटला चुके थे और ईमान लेन वाले ना थे +[7:73] और समूद की तरफ हमने उनके भाई सालेह को भेजा। उसने कहा “ऐ बिरादरान ए कौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है।” तुम्हारे पास तुम्हारे रब की खुली जगह आ गई है। ये अल्लाह की औंती (वह-ऊंटनी) तुम्हारे लिए एक निशानी के तौर पर है, लिहाजा इसे छोड़ दो के खुदा की जमीन में चढ़ती फिर, इसको किसी बुरे इरादे से हाथ न लगाना वरना एक दर्दनाक अजब तुम्हें आ लेगा +[7:74] याद करो वो वक्त जब अल्लाह ने क़ौम ए अद के बाद तुम्हें उसका जानशीं (उत्तराधिकारियों) बनाया और तुमको ज़मीन में ये मंजिल बख्शी के आज तुम उसके हमवार मैदानों में आली शान महल बनाते और उसके पहाड़ों को मकान की शक्ल में तराशते हो। पस उसकी क़ुदरत के करिश्माओं से ग़ाफ़िल ना हो जाओ और ज़मीन में फ़साद बरपा ना करो। +[7:75] उसकी क़ौम के सरदारों ने जो बदे बने हुए थे, कामज़ूर तबक़ी के उन लोगों से जो ईमान ले आए थे कहा "क्या तुम यह जानते हो के सालेह अपने रब का पैगम्बर है?" उनको ने जवाब दिया “बेशक जिस पैगाम के साथ वो भेजा गया है उसे हम मानते हैं।” +[7:76] उन बुराइयों के मुद्दैयों (घमण्डियों) ने कहा जिस चीज़ को तुमने माना है हम उसे मुनीर हैं।” +[7:77] फिर उनहोन ने हमें ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को मार डाला और पूरे तम्मारुद (तिरस्कारपूर्ण अवज्ञा) के साथ अपने रब के हुकुम की खिलाफ वारज़ी कर गुजरे। और सालेह से कह दिया के ले आ वो अजाब जिसकी तू हमें धमकी देता है अगर तू वाकयी पैगम्बरों में से है +[7:78] आखिर ए कार एक देहला देने वाली आफत ने उन्हें आ लिया और वो अपने घरों में औंधे पड़े के पड़े रह गए +[7:79] और सालेह ये कहता हुआ उनकी बस्तियों से निकल गया के "ऐ मेरी क़ौम, मैंने अपने रब का पैगाम तुझे पहना दिया और मैंने तेरी बहुत खैर ख्वाही की, मगर मैं क्या करूं के तुझे अपने खैर ख्वाह पसंद ही नहीं हैं" +[7:80] और लुट को हमने पैगम्बर बनाकर भेजा, फिर याद करो जब उसने अपनी क़ौम से कहा, "क्या तुम ऐसे बे-हया हो गए हो, के वो फहाश काम करते हो जो तुमसे पहले दुनिया में किसी ने नहीं किया +[7:81] तुम औरतों को चोद कर मर्दों से अपनी ख्वाहिश पूरी करते हो। हकीकत ये है के तुम बिलकुल ही हद से गुज़र जाने वाले लोग हो” +[7:82] मगर उसकी क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ ना था के “लोगों को अपनी बस्तियों से निकालो, बड़े पाकबाज़ बनते हैं ये” +[7:83] आख़िर ए कार हमने लूट और उसके घरवालों को बजाया उसकी बीवी के जो पीछे रह गए जाने वालों में थी +[7:84] बच्चा कर निकल दिया और उस क़ौम पर बरसी एक बारिश, फिर देखो के उन मुजरिमों का क्या अंजाम हुआ +[7:85] और मदियां वालों की तरफ हमने उनके भाई शोएब को भेजा। उसने कहा " ऐ बिरादरान ए कौम, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है। तुम्हारे पास तुम्हारे रब की साफ रहनुमाई आ गई है, वजन (वजन) और पैमाने पूरे करो। लोगों को उनकी चीज में घाटा (नुकसान) ना दो, और जमीन में फ़साद बरपा ना करो जबके उसकी इस्लाह हो चुकी है +[7:86] और (जिंदगी के) हर रास्ते पर घात लगाकर बैठ जाओ के लोगों को खौफ पैदा करने और ईमान लाने वालों को खुदा के रास्ते से रोकने लगो, और सीधी राह को टेढ़ा करने के डरपे हो जाओ। याद करो वो ज़माना जबके तुम थोड़े थे फिर अल्लाह ने तुम्हें बहुत कर दिया, और आखें खोल कर देखो दुनिया में मुफ़्सिदों का क्या अंजाम हुआ है +[7:87] अगर तुम में से एक गिरोह इस तालीम पर जिसके साथ मैं भेजा गया हूं, ईमान लाता है और दूसरा ईमान नहीं लता, तो सब्र के साथ देखते रहो यहाँ तक के अल्लाह हमारे दरमियान फैसला करदे, और वही सबसे बेहतर फैसला करने वाला है” +[7:88] उसकी क़ौम के सरदारों ने, जो अपनी बदाई के घमंड में मुब्तिला था, उसने कहा के “ऐ शोएब, हम तुझसे” और उन लोगों को जो तेरे साथ ईमान लाए हैं अपनी बस्ती से निकल देंगे वरना तुम लोगों को हमारी मिल्लत में वापस आना होगा।' +[7:89] +[7:90] उसकी क़ौम के सरदारों ने, जो उसकी बात मन्ने से इंकार कर चुके थे, आपस में कहा “अगर तुमने शोएब की जोड़ी क़बूल कर ली तो बरबाद हो जाओगे।” +[7:91] मगर हुआ ये के एक देहला देने वाली आफत ने उनको आ लिया और वो अपने घरों में औंधे पड़े के पड़े रह गए +[7:92] जिन लोगों ने शोएब को झुटलाया वो ऐसे मिटे के गोया कभी उन घरों में बसे ही ना थे। शोएब के झूठलाने वाले आखिर ए कार बरबाद हो कर रहे +[7:93] और शोएब ये कह कर उनकी बस्तियों से निकल गया के "ऐ बिरादरान ए क़ौम, मैंने अपने रब के पैगामत तुम्हें पाहुंचा दिए और तुम्हारी ख़ैर ख़ैर का हक़ अदा करदिया, अब मैं हमसे क़ौम पर हूँ" कैसे अफसोस करूं जो क़ुबूल ए हक़ से इंकार करती है” +[7:94] कभी ऐसा नहीं हुआ के हमने किसी बस्ती में नबी भेजा हो और उस बस्ती के लोगों को पहले तंग किया हो और शक्ति में मुब्तिला ना किया हो इस ख्याल से के शायद वो आजिजी +[7:95] फिर हमने उनकी बढ़-हाली को ख़ुश हाली से बदल दिया दिया यहां तक ​​के वो खूब फले फूले और कहने लगे के "हमारे असलफ पर भी अच्छे और बुरे दिन आते ही रहे हैं" +[7:96] +[7:97] फिर क्या बस्तियों के लोग अब इससे खौफ हो गए हैं के हमारी गिरफ़्तार (पकड़) कभी अचानक उन रात के वक्त ना आ जाएगी जबके वो सोते पड़े माननीय +[7:98] हां उनको इत्मिनान हो गया है के हमारा मजबूत हाथ कभी यकायक अनपर दिन के वक्त ना पड़ेगा जबके वो खेल रहे होन +[7:99] क्या ये लोग अल्लाह की चाल से खौफ खा रहे हैं? हालंके अल्लाह की चाल से वही क़ौम बे-ख़ौफ़ होती है जो तबाह होने वाली हो +[7:100] और क्या उन लोगों को जो साबिक एहले ज़मीन के बाद ज़मीन के वारिस होते हैं, इस अम्र ए वक़ाई ने कुछ सबक नहीं दिया के अगर हम चाहें तो उनके कसूरों पर उन्हें पकड़ें क्या आप जानते हैं? (मगर वो सबक-आमोज़ हक़ीक़ से तगाफुल बारातते हैं) और हम उनके दिलों पर मोहर लगा देते हैं, फिर वो कुछ नहीं सुनते +[7:101] ये क़ौमें जिनके क़िस्से हम तुम्हें सुना रहे हैं (तुम्हारे सामने मिसाल में मौजूद हैं)। उनके रसूल उनके पास खुली खुली निहस्नाइयां लेकर आए, मगर जिस चीज को वो एक दफा झूठला चुके थे फिर उसे वो मन्ने वाले ना थे। देखो इस तरह हम मुनकिरीन ए हक़ के दिलों पर मोहर लगा देते हैं +[7:102] हमने उन में से अक्सर में कोई पास ए अहद न पाया, बलके अक्सर को फ़ासीक़ ही पाया +[7:103] फिर उन क़ौमों के बाद (जिनका ज़िक्र ऊपर किया गया) हमने मूसा को अपनी निशानियों के साथ फ़िरौन और उसकी क़ौम के सरदारों के पास भेजा, मगर उनहों ने भी हमारी निशानियों के साथ ज़ुल्म किया। पास देखो के इन मुफ़्सिदों का क्या अंजाम हुआ +[7:104] मूसा ने कहा "ऐ फिरौन, मैं क़ायनात के मालिक की तरफ से भेजा हुआ हूँ +[7:105] मेरा मनसब यहीं है के अल्लाह का नाम लेकर कोई बात हक़ के सिवा ना कहूँ। मैं तुम लोगों के पास तुम्हारे रब की।" तरफ से सारी दलील ए ममुरियत लेकर आया हूं। लिहाजा तू बनी इजराइल को मेरे साथ भेज दे।” +[7:106] फ़िरौन ने कहा "अगर तू कोई निशानी लाया है और अपने दावे (दावा) में सच्चा है तो उसे पेश कर" +[7:107] मूसा ने अपना आसा (कर्मचारी/रॉड) फेंक और यकायक वो एक जीता जागता अजदहा (सर्पेंट) था +[7:108] उसने अपनी जेब से हाथ निकला और सब देखने वालों के सामने वो चमक रहा था +[7:109] इसपर फिरौन की क़ौम के सरदारों ने आपस में कहा के "यकीनन ये शक्स बड़ा माहिर जादूगर है +[7:110] तुम्हें तुम्हारी ज़मीन से बे-दखल करना चाहता है। अब कहो क्या कहते हो?” +[7:111] फिर उन सब ने फिरौन को मशवरा दिया के इसके और इसके भाई को इंतजार में रखिए और तमाम शहरों में हरकारे (हेराल्ड) भेज दीजिए +[7:112] के हर माहिर-ए-फन जादूगर को आपके पास ले आइए +[7:113] चुनांचे जादूगर फिरौन के पास आ गए। उन्होन ने कहा “अगर हम गालिब रहे तो हमें इसका सिला तो जरूर मिलेगा?” +[7:114] फिरौन ने जवाब दिया "हां, और तुम मुकर्रब ए बारगाह होंगे" +[7:115] फिर उनहों ने मूसा से कहा "तुम फेंकते हो या हम फेंकें?" +[7:116] मूसा ने जवाब दिया "तुम ही फेंको" उन्होन ने जो अपने आंचर [उनकी छड़ें] फेंके तो निगाहों को महसूर (आंखों को मंत्रमुग्ध कर दिया) और दिलों को खौफ-जदा कर दिया और बड़ा ही जबरदस्त जादू बना लिया +[7:117] हमने मूसा को इशारा किया के फेंक अपना आसा, उसका फेंकना था के आन की आन में वो उनके इस झूठे तिलिस्म को निंगालता चला गया +[7:118] इस तरह जो हक था वो हक साबित हुआ और जो कुछ अनहोन ने बना रक्खा था वो बातिल होकर रह गया +[7:119] फिरौन और उसके साथी मैदान ए मुकाबले में मगलूब हुए और (फतह-मंद होने के बजाये) उलटे जलील हो गए +[7:120] और जादूगरों का हाल ये हुआ के गोया किसी चीज ने अंदर से उनको सजदे में गिरा दिया +[7:121] कहने लगे "हमने मान लिया रब्बुल आलमीन को +[7:122] हमें रुब को जिसने मूसा और हारून मानते हैं" +[7:123] फ़िरौन ने कहा "तुम इसपर ईमान ले आए क़ब्ल इसके मैं तुम्हें इजाज़त दूं? यकीनन ये कोई ख़ुफ़िया साज़िश थी जो तुम लोगों ने इस दार-उस-सल्तनत में की ता-के इसके मालिकों को इक्तेदार से बे-दख़ल करदो नतीजा अब तुम्हें मालूम हुआ जाता है +[7:124] मैं तुम्हारे हाथ पांव मुखालिफ सिमटन से काटवा दूंगा और उसके बाद तुम सबको सूली पर चढ़ाऊंगा। +[7:125] उनहों ने जवाब दिया "बहार-हाल हमें पलटना अपनी रब ही की तरफ है +[7:126] तू जिस बात पर हमसे इंतिक़ाम लेना चाहता है वो इसके सिवा नहीं के हमारे रब की निशानियां जब हमारे सामने आ गई तो हमने उन्हें मान लिया। ऐ रब, हमपर सब्र का फैजान कर और हमें दुनिया से उठा तो इस हाल में के हम तेरे फरमा-बरदार हों” +[7:127] फिरौन से उसकी क़ौम के सरदारों ने कहा “क्या तू मूसा और उसकी क़ौम को यूं ही छोड़ देगा के मुल्क में फ़साद फैलाएं और वो तेरी और तेरे माबूदों की बंदगी छोड़ बैठे?” फ़िरौन ने जवाब दिया “मैं उनके बेटों को क़त्ल करुंगा और उनकी औरतों को जीता रहने दूंगा। हमारे इक्तेदार की गिरफ़्तार उन पर मज़बूत है" +[7:128] मूसा ने अपनी क़ौम से कहा "अल्लाह से मदद मांगो और सब्र करो, ज़मीन अल्लाह की है, अपने बंदों में से जिसका चाहता है उसका वारिस बना देता है। और आखिरी कामयाबियां उनके लिए जो उससे डरते हुए काम करें” +[7:129] उसकी क़ौम के लोगों ने कहा “तेरे आने से पहले भी हम सताए जाते थे और अब तेरे आने पर भी सताए जा रहे हैं”। उसने जवाब दिया "क़रीब है वो वक़्त के तुम्हारा रब तुम्हारे दुश्मन को हलाक करदे और तुमको ज़मीन में ख़लीफ़ा बने। फिर देखे के तुम कैसे अमल करते हो" +[7:130] हमने फिरौन के लोगों को कई साल तक कहा (सूखा) और बर्बादी की कमी में मुब्तिला रक्खा के शायद उनको होश आए +[7:131] मगर उनका हाल ये था के जब अच्छा जमाना आता तो कहते के हम इसी के मुस्तहिक हैं, और जब बुरा जमाना आता तो मूसा और उसके साथियों को अपने लिए फल-ए-बध (दुर्भाग्य) ठहरते, हालंके दर हकीकत उनकी फ़ल ए बद तो अल्लाह के पास थी, मगर उन में से अक्सर इल्म था +[7:132] उनहों ने मूसा से कहा के "तू हमें महसूर करने के (हमें मंत्रमुग्ध करने के लिए) लिए ख्वा कोई निशानी ले आए, हम तो तेरी बात मन्ने वाले नहीं हैं" +[7:133] आकर ए कार हमने उनपर तूफान भेजा, टिड्डी-दाल छोड़े, सरसरियां फैलाए (और टिड्डियां, और) जूँ), मेंढक (मेंढक) निकले, और खून बरसाया। सब निशानियां अलग-अलग करके दिखाये, मगर वो सरकशी किये चले गये और वो बदले ही मुजरिम लोग थे +[7:134] जब कभी अनपर बला नाज़िल हो जाती तो कहते " ऐ मूसा, तुझे अपने रब की तरफ से जो मनसब हासिल है उसकी बिना पर हमारे हक़ में दुआ कर।" अगर अब के तू हमपर से ये बला तलवा दे तो हम तेरी बात मान लेंगे और बानी इजराइल को तेरे साथ भेज देंगे” +[7:135] मगर जब हम उनपार से अपना अजाब एक वक्त ए मुकर्रर तक केलिये, जिसको वो बाहर हाल पहन लेने वाले थे, हटा लेते तो वो यकलख्त अपने अहद से फिर जाते हैं +[7:136] तब हमने उनसे इंतकाम लिया और उन्हें समंदर में ग़र्क करदिया क्योंके उन्होन ने हमारी निशानियों को झुटलाया था और उन्हें बे-परवा होगा थाय +[7:137] और उनकी जगह हमने उन लोगों को जो कमज़ोर बना कर रक्खे गए थे, उस सर-ज़मीन के मशरिक़ ओ मगरिब का वारिस बना दिया जिसे हमने बराकतों से माला माल किया था। इस तरह बानी-इज़राइल के हक़ में तेरे रुब का वादा ए ख़ैर पूरा हुआ क्योंकि उन्होंने सब्र से काम लिया था और फिरौन और उसकी क़ौम का वो सब कुछ बर्बाद कर दिया गया जो वो बनाते और चढ़ते थे +[7:138] बानी इज़राइल को हमने समंदर से गुज़र दिया, फिर वो चले और रास्ते में एक ऐसी क़ौम पर उनका गुज़र हुआ जो अपने चंद बुथों (मूर्तियों) की गिरविदा (समर्पित) हुई थी। कहने लगे, "ऐ मूसा, हमारे लिए भी कोई ऐसा माबूद बना दे जैसे लोगों के माबूद हैं"। मूसा ने कहा "तुम लोग बड़ी नादानी की बातें करते हो +[7:139] ये लोग जिस तारीक की जोड़ी बना रहे हैं वो तो बरबाद होने वाला है और जो अमल वो कर रहे हैं वो सरसर बातिल है।” +[7:140] फिर मूसा ने कहा "क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और माबूद तुम्हारे लिए तलाश करूं? हलांके वो अल्लाह ही है जिसने तुम्हें दुनिया भर की क़ौम पर फ़ज़िलत बख्शी है +[7:141] और (अल्लाह फरमाता है) वो वक़्त याद करो जब हमने फिरौन वालों से तुम्हें निजात दी जिनका हाल ये था के तुम्हें अज़ाब में मुब्तिला रखते थे, तुम्हारे बेटे (बेटों) को कत्ल करते थे और तुम्हारी औरतों को जिंदा रहने देते थे और इस में तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारी बड़ी आजमाइश थी +[7:142] हमने मूसा को तीस (तीस) शब ओ रोज़ के लिए [कोह ए सीना (माउंट सिनाई) पर] तालाब किया और बाद में दस (दस) दिन का और इज़ाफा करदिया, इस तरह उसके रब की मुकर्रर करदा मुद्दत पूरे चालीस (चालीस) दिन हो गई। मूसा ने चलते हुए अपने भाई हारून से कहा के "मेरे पीछे तुम मेरी क़ौम में मेरी जानशीनी (मेरी जगह ले लो) करना और ठीक काम करते रहना और बिगाड़ पैदा करने वालों के तारीख पर ना चलना" +[7:143] जब वो हमारे मुकर्रर किए हुए वक्त पर पहुंच गए और उसके रब ने उसे कलाम किया तो उसने इल्तेजा की के "ए रब, मुझे याराए नजर दे के मैं तुझे देखूं"। फरमाया “तू मुझे नहीं देख सकता, हां जरा सामने के पहाड़ की तरफ देख, अगर वो अपनी जगह कायम रह जाए तो अलबत्ता तू मुझे देख सकेगा।” चुनान्चे उसके रब ने जब पहाड़ पर तजल्ली की तो उसे रेजा कर दिया और मूसा गश खा कर गिर पड़ा, जब होश आया तो बोला “पाक है तेरी जात, मैं तेरे हुजूर तौबा करता हूं और सबसे पहला ईमान लाने वाला मैं हूं।” +[7:144] फरमाया "ऐ मूसा, मैंने तमाम लोगों पर तरजीह देकर तुझे मुंतखब किया के मेरी पैगम्बरी करे और मुझे हम-कलाम हो, पास जो कुछ मैं तुझे दूं उसे ले और शुकर बजा ला" +[7:145] इसके बाद हमने मूसा को हर शोबा ए जिंदगी के मुतालिक हिदायत और हर पहलू के मुतालिक वाज़े हिदायत तख्तियों पर लिख कर दे दी, और उसे कहा: "हिदायत को मजबूत हाथों से संभाल और अपनी क़ौम को हुकुम दे के इनके बेहतर मफ़हूम की जोड़ी बनाएं। अनकारीब मैं तुम्हें फासीकों के घर दिखाऊंगा +[7:146] मैं अपने निशानियों से उन लोगों की निगाहें फेर दूंगा जो बिना किसी हक के जमीन में बदाये बांटते हैं, वो ख्वा कोई निशानी देखलें कभी उसपर ईमान ना लाएंगे। अगर सीधा रास्ता उनके सामने आए तो उसे इख्तियार ना करेंगे और अगर टेढ़ा रास्ता नजर आए तो उसपर चल पड़ेंगे, इसलिए हमने हमारी निशानियों को झुटलाया और उनसे परवाही करते रहे +[7:147] हमारी निशानियों को जिस किसी ने झुटलाया और आखिरी की पेशी का इंकार किया उसके सारे अमल हो गया। क्या लोग इसके सिवा कुछ और जजा पा सकते हैं जैसा करें वैसा भरें?” +[7:148] मूसा के पीछे उसकी क़ौम के लोगों ने अपने ज़ेवरों (आभूषणों) से एक बछड़े (बछड़े) का पुतला बना लिया जिसमें से जमानत (गाय) की सी आवाज़ निकलती थी। मगर फिर भी उनहों ने उसे माबूद बना लिया और वो सख्त जालिम थे +[7:149] फिर जब उनकी फरेब खुदगी का तिलिस्म टूट गया और उनहों ने देख लिया के दर हकीकत वो गुमराह हो गए हैं तो कहने लगे के "अगर हमारे रब ने हमपर रहम न फरमाया और हमसे दरगुजर ना किया तो हम बरबाद हो जायेंगे” +[7:150] उधर से मूसा गुस्से और रंज में भरा हुआ अपनी क़ौम की तरफ पलटा। आते ही उसने कहा "बहुत बुरी जानशिनी कि तुम लोगों ने मेरे बाद! क्या तुमसे इतना सब्र ना हुआ के अपने रब के हुकुम का इंतज़ार कर लेते?" और तख्तियां फेंक दी और अपने भाई (हारून) के सर के बाल पकड़ कर उसे खींचा। हारून ने कहा "ऐ मेरी मां के बेटे, इन लोगों ने मुझे दबाया लिया और करीब था के मुझे मार डाला। पास तू दुश्मनों को मुझपर हंसने का मौका ना दे और इस जालिम गिरो ​​के साथ मुझे ना शामिल कर" +[7:151] तब मूसा ने कहा "ऐ रब, मुझे और मेरे भाई को माफ कर और हमें अपनी रहमत में दखल फरमा, तू सबसे बढ़कर रहीम है।" +[7:152] (जवाब में इरशाद हुआ के) "जिन लोगों ने बचदे (बछड़े) को माबूद बनाया वो जरूर अपने रब के गजब में गिरफ़्तार होकर रहेंगे और दुनिया की ज़िंदगी में ज़लील होंगे। झूठ घड़ने वालों को हम ऐसे ही सजा देते हैं +[7:153] और जो लोग बुरे अमल करें फिर तौबा कार्लें और ईमान ले आएं तो यकीनान इस तौबा ओ ईमान के बाद तेरा रब दरगुजर और रहम फरमाने वाला है” +[7:154] फिर जब मूसा का गुस्सा ठंडा हुआ तो उसने वो तख्तियां उठा ली जिनकी तहरीर (लेखन) में हिदायत और रहमत थी उन लोगों के लिए जो अपने रब से डरते हैं +[7:155] और उसने अपनी क़ौम के सत्तर (सत्तर) आदमियों को मुंतखब किया ता-के वो (उसके साथ) हमारे मुकर्रर किये हुए वक्त पर हाजिर हों। जब इन लोगों को एक सख्त ज़लज़ले ने आ पकड़ा तो मूसा ने अर्ज़ किया " ऐ मेरे सरकार, आप चाहते तो पहले ही इनको और मुझे हलाक कर सकते थे, क्या आप हमारे कसूर में जो हम में से चंद नादानों ने किया था हम सबको हलाक कर देंगे? हाँ तो आप की डाली हुई एक आजमाइश थी जिसकी वजह से आप जिसे चाहते हैं गुमराह करते हैं और जिसे चाहते हैं हिदायत बख्श देते हैं हमारे सरपरस्त तो आप ही हैं, पस हमें माफ कर दीजिए और हमपर रहम फरमाइए है +[7:156] और हमारे लिए इस दुनिया की भलाई भी लिखिए और आख़िरत की भी, हमने आपकी तरफ रूजू कर लिया"। जवाब में इरशाद हुआ "सजा तो मैं जिसे चाहता हूं देता हूं, मगर मेरी रहमत हर चीज पर छाई हुई है। और उसे मैं उन लोगों के हक में लिखूंगा जो नफरमानी से परहेज करेंगे, जकात देंगे और मेरी आयत पर ईमान लाएंगे।” +[7:157] (पास आज ये रहमत उन लोगों का हिसा है) जो पैगम्बर है, नबी ए उम्मी की जोड़ी इख्तियार करें जिसका जिक्र उन्हें अपने हां तौरात और इंजील में लिखा हुआ मिलता है। वो उनको नेकी का हुकुम देता है, बुरी (सभी भ्रष्ट चीजें) से रुका है, उनके लिए पाक चीजें हलाल और नापाक चीजें हराम करता है, और उन पर से वो बोझ उतरता है जो उन पर लड़य हुए थे और वो बंदिशें खोलता है जिनमें वो बंद हुए थे। लिहाज़ा जो लोग इसपर ईमान लाए और इसकी हिमायत और नुसरत करें और वो हमें रोशनी की जोड़ी इख्तियार करें जो इसके साथ नाज़िल की गई है, वही फलाह पाने वाले हैं +[7:158] (ऐ मुहम्मद), कहो के “ऐ इंसानो, मैं तुम सब की तरफ हमें खुदा का पैगम्बर हूं जो जमीन और आसमान की बादशाही का मालिक है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, वही जिंदगी बक्शता है और वही मौत देता है। है के तुम राह ए रस्त पा लोगे +[7:159] मूसा की क़ौम में एक गिरोह ऐसा भी था जो हक़ के मुताबिक़ हिदायत करता था और हक़ ही के मुताबिक़ इन्साफ़ करता था +[7:160] और हमने हमें क़ौम को बारह (बारह) घरानों में तकसीम करके उन्हें मुस्तक़िल गिरोहों की शक्ल दे दी थी। और जब मूसा से उसकी क़ौम ने पानी मांगा तो हमने उसको इशारा किया के फलां चट्टान पर अपनी लाठी मारो। चुनान्चे इस चट्टान से यकायक बारह चश्मे (बारह झरने) फूट निकले और हर गिरो ​​ने अपने पानी लेने की जगह मुतैयां करली। हमने उनपर बादल (बादल) का साया किया और उनपार मन ओ सलवा (बटेर) उतारा, खाओ वो पाक चीजें जो हमने तुमको बख्शी हैं मगर इसके बाद उन्होन ने जो कुछ किया तो हमपर जुल्म नहीं किया बलके आप अपने ही ऊपर जुल्म करते रहें +[7:161] याद करो वो वक्त जब उनसे कहा गया था कि इस बस्ती में जा कर बास (बस जाओ) जाओ और इसकी अदायगी से अपने हस्ब-ए-मंशा (जो भी चाहो) रोज़ी हासिल करो और हित्ततुन हित्ततुन (पश्चाताप) कहते जाओ और शहर के दरवाज़े में सजदा-रेज़ होते हुए दाख़िल हो। हम तुम्हारी खातें माफ़ करेंगे और नेक राविया रखने वालों को मज़ीद फ़ज़ल से नवाज़ेंगे” +[7:162] मगर जो लोग उनमें से ज़ालिम थे उनहों ने हमें बात को जो उनसे कहीं गई थी बदल डाला, और नतीज़ा ये हुआ के हमने उनके ज़ुल्म की पैदाइश में असमान आसमान से अज़ाब भेज दिया +[7:163] और ज़रा उनसे बस्ती का हाल भी पूछो जो समंदर के किनारे थे, उन्हें याद दिलाओ वो वाकिया के वहां के लोग सब्त (सब्बाथ/हफ्ते) के दिन एहकाम ए इलाही की ख़िलाफ़ वारज़ी करते थे और ये के मछलियां (मछलियां) सब्त के दिन उबर कर सात (पानी की सतह) पर उनके सामने आती थी और सब्त के सिवा बाकी दिनों में नहीं आती थी। ये इसलिए होता था कि हम उनकी नफरमानियों की वजह से उनको आजमाइश में डाल रहे थे +[7:164] और यहीं ये भी याद दिलाओ के जब उनमें से एक गिरोह ने दूसरे गिरो ​​से कहा था के "तुम ऐसे लोगों को क्यों हिदायत करते हो जिन्होनें अल्लाह हलाक करने वाला या सच साज़ा देने वाला है'' तो उनको ने जवाब दिया था के ''हम ये सब कुछ तुम्हारे रब के हुज़ूर अपनी मज़ीरत (बहाना) पेश करने के लिए करते हैं और इस उम्मीद पर करते हैं के शायद ये लोग उसकी नफ़रमानी से परहेज़ करने लगें।” +[7:165] आख़िर ए कार जब वो उन हिदायतों को बिल्कुल ही फ़रामोश कर गए जो उन्हें याद करई गई पतली तो हमने उन लोगों को बचा लिया जो बुराई से रोते थे और बाकी सब लोगों को जो ज़ालिम थे उनकी नफ़रमानियों पर सिर्फ अज़ाब में पकड़ लिया +[7:166] फिर जब वो पूरी सरकशी के साथ वही काम किये चले गये जिसमें उन्हें रोका गया था, तो हमने कहा के बंदर हो जाओ ज़लील और ख्वार +[7:167] और याद करो जबके तुम्हारे रब ने एलान करदिया के “वो कयामत तक बराबर ऐसे लोग बानी इजराइल पर मुसल्लत करता” रहेगा जो उनको बेहतरीन अज़ाब देंगे।” यकीनन तुम्हारा रुब सज़ा देने में तेज़-दस्त है और यकीनन वो दरगुज़ार और रहम से भी काम लेने वाला है +[7:168] हमने उनको ज़मीन में टुकड़े-टुकड़े करके बहुत से क़ौमों में तकसीम कर दिया, कुछ लोग इनमें शामिल थे और कुछ इसे मुख़्तलिफ़ और हम उनको अच्छे और बुरे हालात से आज़माइश में मुब्तिला करते रहे के शायद ये पलट आएं +[7:169] फिर अगली नसलों के बाद ऐसे ना-खलाफ लोग उनके जानशीन (उत्तराधिकारी) हुए जो किताब ए इलाही के वारिस होकर इसी दुनिया ए दानी के फायदे (इस दुनिया का सामान) समित-ते हैं और कहते हैं के तवक्कू है हमें माफ कर दिया जाएगा। और अगर वही माता ए दुनिया फिर सामने आती है तो फिर लपक कर उसे ले लेते हैं। क्या उनसे किताब का अहद नहीं लिया जा चुका है कि अल्लाह के नाम पर वही बात कहे जो हक हो? और ये खुद पढ़ चुके हैं जो किताब में लिखा है, आख़िरत की क़यामगाह तो खुदा-टार्स लोगों के लिए ही बेहतर है, क्या तुम इतनी सी बात नहीं समझते +[7:170] जो लोग किताब की किताब पढ़ते हैं और जिन्होन ने नमाज़ क़याम रक्खी है, यकीनन ऐसे नए किरदार लोगों का अजर हम जया नहीं करेंगे +[7:171] उन्हें वो वक्त भी कुछ याद है जबके हमने पहाड़ को हिला कर उस तरफ इस तरह छा दिया था के गोया वो छतरी (छाता/छतरी) है, और ये गुमान कर रहे थे के वो अंदर आ पड़ेगा, और हम वक्त हमने उनसे कहा था कि जो किताब हम तुम्हें दे रहे हैं इसे मज़बूती के साथ थामो (पकड़ो) और जो कुछ इसमें लिखा है उसे याद रखो, तवक्कू है के तुम गलत-रवी से बचे रहोगे +[7:172] और (ऐ नबी), लोगों को याद दिलाओ वो वक्त जबके तुम्हारे रब ने बनी आदम की पुश्तों से उनकी नाक को निकला था और उन्हें खुद उनके ऊपर गवाह बनाते हुए पूछा था, “क्या मैं तुम्हारा रुब नहीं हूं?” कयामत के रोज़ ये ना कहदो के "हम तो इस बात से खबर थे" +[7:173] या ये ना कहने लगो के "शिर्क की इब्तिदा तो हमारे बाप दादा ने हमसे पहले की थी और हम बाद को उनकी नाक से पैदा हुए, फिर क्या आप हमें कसूर में पकड़ते हैं जो गलत काम लोगों ने किया था” +[7:174] देखो, इस तरह हम निशानियां वाज़ेह तौर पर पेश करते हैं और इसलिए करते हैं के ये लोग पलट आते हैं +[7:175] और (ऐ मुहम्मद), इनके सामने उस शक्स का हाल बयान करो जिसको हमने अपनी आयत का इल्म अता किया था मगर वो उनकी पाबंदी से निकल भागा. आख़िर ए कार शैतान उसके पीछे पड़ गया यहाँ तक के वो भटकने वालों में शामिल होकर रहा +[7:176] अगर हम चाहते तो उसे उन आयतों के ज़रिये से बुलंदी अता करते, मगर वो तो ज़मीन ही की तरफ़ झुक कर रह गया और अपनी ख्वाहिश ए नफ़्स ही के पीछे पड़ा रहा, उसकी हालात कुत्ते की सी हो गई के तुम उसपर हमला करो तब भी ज़ुबान लटके रहे और उसे छोड़ दो तब भी ज़ुबान लटके रहे। यही मिसाल है उन लोगों की जो हमारी आयत को झुठलाते हैं। तुम ये हिकायत (दृष्टांत) इनको सुनाते रहो, शायद के ये कुछ गौर ओ फ़िक्र करें +[7:177] बड़ी ही बुरी मिसाल है ऐसे लोगों की जिन्होनें हमारी आयतों को झुटलाया, और वो आप अपने ही ऊपर ज़ुल्म करते रहे हैं +[7:178] जिसे अल्लाह हिदायत बख्शी बस वही राह-ए-रास्त पाता है और जिसको अल्लाह अपनी रहनुमाई से मेहरून करदे वही नाकाम ओ ना-मुराद होकर रहता है +[7:179] और ये हकीकत है के बहुत से जिन्न और इंसान ऐसे हैं जिनको हमने जहन्नुम के लिए पैदा किया है। उनके पास दिल हैं मगर वो उन्हें सोचते नहीं, उनके पास आंखें हैं मगर वो उन्हें देखते नहीं, उनके पास कान हैं मगर वो उन्हें सुनते नहीं। वो जानवरों की तरह हैं बलके उनसे भी ज्यादा गुजरे। ये वो लोग हैं जो गफ़लत में खो गए हैं +[7:180] अल्लाह अच्छे नमो का मुस्तहिक़ है। उसको अच्छे ही नामो से पुकारो, और उन लोगों को छोड़ दो जो उसका नाम रखने में रास्ते से मुन्हारिफ हो जाते हैं। जो कुछ वो करते रहेंगे उसका बदला वो पा कर रहेंगे +[7:181] हमारी मख़लूक़ में एक गिरोह ऐसा भी है जो ठीक ठीक हक़ के मुताबिक हिदायत और हक़ ही के मुताबिक इन्साफ़ करता है +[7:182] रहे वो लोग जिन्होन ने हमारी आयत को झुटला दिया है, तो उन्हें हम ब-तदरीज (कदम दर कदम) ऐसे तरीक़े से तबाही की तरफ ले जायेंगे के उनको ख़बर तक न होगी +[7:183] मैं उनको ढील दे रहा हूँ, मेरी चाल का कोई तोड़ नहीं है +[7:184] और क्या इन लोगों ने कभी सोचा नहीं? इनके रफीक पर जुनून का कोई असर नहीं है, वो तो एक खबरदार है जो (बुरा अंजाम सामने आने से पहले) साफ साफ मुतनब्बे (चेतावनी) कर रहा है +[7:185] क्या इन लोगों ने आसमान ओ जमीन ए इंतजाम पर कभी गौर नहीं किया और किसी चीज को भी जो खुदा ने भुगतान की है आंखें खोल कर नहीं देखा? और क्या ये भी अनहोन ने नहीं सोचा के शायद इनकी मोहलत ए जिंदगी पूरी होने का वक्त करीब आ लगा हो? फिर आख़िर पैगंबर की इस तम्बीह (चेतावनी) के बाद और कौन सी बात ऐसी हो सकती है जिसपर ये ईमान लायें +[7:186] जिसको अल्लाह रहनुमाई से महरूम करदे उसके लिए फिर कोई रहनुमा नहीं है, और अल्लाह इन्हें इनकी सरकशी ही में भटकता हुआ छोड़ देता है +[7:187] ये लोग तुमसे पूछते हैं कि आख़िर वो क़यामत की घड़ी कब नाज़िल होगी? कहो"इसका इल्म मेरे रब ही के पास है, उसे अपना वक्त पर वही जाहिर करेगा। आसमान और जमीन में वो बड़ा वक्त होगा। वो तुम्हारा अचानक आ जाएगा"। ये लोग उसके मुतालिक तुमसे इस तरह पूछते हैं गोया के तुम उसकी खोज में लगे हुए हो। कहो, "उसका इल्म तो सिर्फ अल्लाह को है मगर अक्सर लोग इस हकीकत से ना-वाक़िफ़ हैं" +[7:188] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो "मैं अपनी जात के लिए किसी नाफ़े (फ़ैयदे) और नुक्सान का इख्तियार नहीं रखता, अल्लाह ही जो कुछ चाहता है वो होता है और अगर मुझे गैब का इल्म होता तो मैं बहुत से फ़ायदे अपने लिए हासिल करता हूं और मुझे कभी कोई नुक्सान न मिलता। मैं तो महज़ एक खबरदार करने वाला और खुश-खबरी सुनने वाला हूं उन लोगों के लिए जो मेरी बात माने।'' +[7:189] वो अल्लाह ही है जिसने तुम्हें एक जान से बचाया और उसकी जिंदगी से उसका जोड़ा बनाया ता-के उसके पास सुकून हासिल करे। फिर जब मर्द ने औरत को धन्यवाद लिया तो उसे एक खफीफ सा हमाल रह गया जिसके लिए वो चलती फिरती रही, फिर जब वो बोझल हो गई तो दोनों ने मिलकर अल्लाह, अपने रब से दुआ की के अगर तू नहीं हमको अच्छा सा बच्चा दिया तो हम तेरे शुक्र गुजार होंगे +[7:190] मगर जब अल्लाह ने उनको एक सही ओ सलीम बच्चा दे दिया तो वो उसकी इस बख्शीश ओ इनायत में दुसरों को उसका शरीक ठहरना लगे। अल्लाह बहुत बुलंद ओ बदले में है मुशरिकाना बातों से जो ये लोग करते हैं +[7:191] कैसी नादान हैं ये लोग के उनको खुदा का शरीक ठहरते हैं जो किसी चीज को भी पेदा नहीं करते बलके खुद पेदा किए जाते हैं +[7:192] जो ना उनकी मदद कर सकते हैं और ना आप अपनी मदद ही पर कादिर हैं +[7:193] अगर तुम उन्हें सीधी राह पर आने की दावत दो तो वो तुम्हारे पीछे ना आएं, तुम ख्वा उन्हें पुकारो या खामोश रहो, दोनों सूरतों में तुम्हारे लिए यक्सन ही रहे +[7:194] तुम लोग खुदा को छोड़ कर जिन्हे पुकारते हो वो तो महज़ बंदे (गुलाम) हैं जैसे तुम बंदे हो। उनसे दुआएं मांग देखो. ये तुम्हारी दुआओं का जवाब दें अगर उनके बारे में तुम्हारा ख़यालत सही है +[7:195] क्या ये पांव (पैर) रखते हैं कि उन्हें चलें? क्या ये हाथ रखते हैं के उन्हें पकाएँ? क्या ये आंखें रखते हैं कि उन्हें देखें? क्या ये कान रखते हैं के उनसे सुने? (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो के “ बुला लो अपने ठहरे हुए शरीकों को फिर तुम सब मिल कर मेरे खिलाफ तदबीरें (योजना/कथानक) करो और मुझे हरगिज़ मोहलत न दो +[7:196] मेरा हामी-ओ-नासिर (अभिभावक) वो खुदा है जिसने ये किताब नाज़िल की है, और वो नए आदमियों की हिमायत करता है +[7:197] बा-खिलाफ इसके तुम जिन्हें खुदा को छोड़ कर पुकारते हो वो ना तुम्हारी मदद कर सकते हैं और ना खुद अपनी मदद ही करने के काबिल हैं +[7:198] बाल्के अगर तुम उन्हें सीधी राह पर आने के लिए कहो तो वो तुम्हारी बात सुन भी नहीं सकती, बा-ज़ाहिर तुमको ऐसा नज़र आता है के वो तुम्हारी तरफ़ देख रहे हैं मगर फ़िल-वाक़े वो कुछ भी नहीं देखते” +[7:199] (ऐ नबी), नरमी ओ दरगुज़र का तरीक़ा इख़्तियार करो, मारूफ़ की तालक़ीन किये जाओ (आदेश दो) अच्छा), और जाहिलों से ना उलझो +[7:200] अगर कभी शैतान तुम्हें अल्लाह की पनाह मांगो, वो सब कुछ सुनने और जाने वाला है +[7:201] हकीकत में जो लोग मुत्तकी (अल्लाह से डरने वाले/पवित्र) हैं उनका हाल तो ये होता है के कभी शैतान के असर से कोई बुरा ख्याल अगर उन्हें छू भी जाता है तो वो जानवर चौकन्ने (अलर्ट) हो जाते हैं और फिर उन्हें साफ नजर आने लगता है के उनके लिए सही तारीख-कर क्या है +[7:202] रहे उनके (यानी शैतान के) भाई बंद, तो वो उनको उनकी कजरावी में खिंचे (त्रुटि में गहराई से) लिए चले जाते हैं और उन्हें भटकने में कोई कसर नहीं उठता +[7:203] (ऐ नबी), जब तुम लोगों के सामने कोई निशानी (यानी मोअजिज़ा) पेश नहीं करते तो ये कहते हैं कि तुमने अपने लिए कोई निशाना क्यों नहीं इंतखाब किया? इनसे कहो "मैं तो सिर्फ हमें वही की जोड़ी करता हूं जो मेरे रब ने मेरी तरफ भेजी है, ये बसीरत (दृष्टि) की रोशनी हैं तुम्हारे रब की तरफ से और हिदायत और रहमत है उन लोगों के लिए जो इसे कबूल करें +[7:204] जब कुरान तुम्हारे सामने पढ़ा जाए तो इसे।" तवज्जु से सुनो और खामोश रहो, शायद के तुमपर भी रहमत हो जाए” +[7:205] (ऐ नबी), अपने रुब को सुबह ओ शाम याद किया करो दिल ही दिल में ज़ारी (विनम्रता) और खौफ के साथ, और जुबान से भी हल्की आवाज के साथ। तुम उन लोगों में से ना हो जाओ जो गफ़लत में पड़े हुए हैं +[7:206] जो फ़रिश्ते तुम्हारे रब के हुज़ूर तकर्रब का मुकाम रखते हैं वो कभी अपनी बदाई के घमंड में आकर उसकी इबादत से मुँह नहीं मोड़ते और उसकी तस्बीह करते हैं, और उसके आगे झुके रहते हैं + +Surah 8: Al-Anfal (Voluntary Gifts) +---------------------------------------- +[8:1] तुमसे अनफाल (युद्ध की लूट/गनीमत के माल) के मुतालिक पूछते हैं? कहो "ये अनफ़ल तो अल्लाह और उसके रसूल के हैं, लेकिन तुम लोग अल्लाह से डरो और अपने आपस के तालुकात दुरुस्त करो और अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करो अगर तुम मोमिन हो" +[8:2] सच्चे एहले ईमान तो वो लोग हैं जिनके दिल अल्लाह का ज़िक्र सुनकर डर लगता है (भयभीत) जाते हैं और जब अल्लाह की आयत उनके सामने पड़ती है तो उनका ईमान बढ़ जाता है और वो अपने रब पर ऐतमाद (भरोसा) रखते हैं +[8:3] जो नमाज कायम करते हैं और जो कुछ हमने उनको दिया है उसमें से (हमारी राह में) खर्च करते हैं +[8:4] ऐसे ही लोग हक़ीक़ी मोमिन हैं। उनके लिए उनके रुब के पास बड़े दर्जे हैं, कसूरों से दरगुज़ार है और बेहतरीन रिज़क है +[8:5] (इस माल ए गनीमत के मामले में भी वैसी ही सूरत पेश आ रही है जैसी उस वक्त पेश आई थी जबके) तेरा रुब तुझी हक़ के साथ तेरे घर से निकल लाया था और मोमिनो में से एक गिरोह को ये सख्त नागावर था +[8:6] वो उस हक़ के मामले में तुझसे झगड़ा रहे थे दारान हाल (जबकि) ये के वो साफ़ साफ़ नुमायन हो चूका था, उनका हाल ये था के गोया वो आँखें देखे मौत की तरफ हांके (चालित) जा रहे हैं +[8:7] याद करो वो मौका जबके अल्लाह तुमसे वादा कर रहा था कि दोनों गिरोहोन में से एक तुम्हें मिल जाएगा। तुम चाहते थे के कमज़ोर गिरो ​​तुम्हें मिले मगर अल्लाह का इरादा ये था के अपने इरशादत से हक़ को हक़ कर दिखाये और काफ़िरों की जद्द काट दे +[8:8] ता-के हक़ हक़ होकर रहे और बातिल बातिल होकर रह जाये ख्वा मुजरिमों को ये कितना ही नागावर हो +[8:9] और वो मौका याद करो जबके तुम अपने रब से फरियाद कर रहे थे जवाब में उसने फरमाया के मैं तुम्हारी मदद के लिए पै डर पै एक हजार फरिश्ते भेज रहा हूं +[8:10] ये बात अल्लाह ने तुम्हें सिर्फ इसलिए बताया है कि तुम्हें खुश-खबरी हो और तुम्हारा दिल इसे मुतमइन हो जाए। वरना मदद तो जब भी होती है अल्लाह ही की तरफ से होती है। यकीनन अल्लाह ज़बरदस्त और दाना (बुद्धिमान) है +[8:11] और वह वक्त जबके अल्लाह अपनी तरफ से गुनाह (उनींदापन) की शकल में तुम्हारे इत्मिनान ओ बे-खौफी की कैफियत तारी कर रहा था, और आसमान से तुम्हारे ऊपर पानी बरसा रहा था ता-के तुम्हें पाक करे और तुमसे शैतान की डाली हुई नजासत दूर करे और तुम्हारी हिम्मत बंधाए और इसके जरीए से तुम्हारे कदम जमादे +[8:12] और वह वक्त जबके तुम्हारा रब फरिश्तों को इरशारा कर रहा था के " मैं तुम्हारे साथ हूं, तुम एहले ईमान को साबित कदम रखो, मैं अभी काफिरों के दिलों में रोब (आतंक) डालता हूं। पस तुम उनकी गर्दन पर ज़र्ब (हड़ताल) और जोड़ जोड़ पर चोट लगाओ” +[8:13] ये इस तरह लोगों ने अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला किया। और जो अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला करे अल्लाह उसके लिए कड़ी सजा दे +[8:14] ये है तुम लोगों की सजा, अब इसका मजा चक्खो, और तुम्हें मालूम हो के हक का इनकार करने वालों के लिए दोज़ख का अज़ाब है +[8:15] ऐ ईमान लानी वालों, जब तुम एक लश्कर की सूरत में कुफ्फार से दो-चार (मुठभेड़) हो तो उनके मुकाबले में पीछे हटो (अपनी पीठ मोड़ो) +[8:16] जिसने ऐसे मौके पर पीठ पहरी, इल्ला ये के जंगी चाल के दौरे पर ऐसा करे या किसी दूसरी फौज से जा मिल्ने के लिए, तो वो अल्लाह के गजब में घिर जाएगा, उसका ठिकाना जहन्नुम होगा। और वो बहुत बुरी जाए बाज़ गस्त (बुरी मंजिल) है +[8:17] पास हक़ीक़त ये है के तुमने उन्हें क़तल नहीं किया बलके अल्लाह ने उनको क़त्ल किया, और तू नहीं नहीं फेंका बलके अल्लाह ने फेंका (और मोमिनों के हाथ जो इस काम में इस्तमाल किए गए हैं) तो ये इसलिए था के अल्लाह मोमिनो को एक बेहतरीन आज़माइश से कामियाबी के साथ गुज़ार दे। यकीनन अल्लाह सुनने वाला और जाने वाला है +[8:18] ये मामला तो तुम्हारे साथ है और काफिरों के साथ मामला ये है के अल्लाह उनकी चालों को कामजूर करने वाला है +[8:19] (काफिरों से कहदो में) “अगर तुम फैसला चाहते थे तो लो, फैसला तुम्हारे सामने आ गया। अब बाज़ आ जाओ तो तुम्हारे लिए बेहतर है। वरना फिर पलट कर उसी का इरादा करोगी तो हम भी इसी सजा का इआदा करेंगे और तुम्हारी जमीअत, तुम्हारे कुछ काम न आ सकेगे।' +[8:20] +[8:21] उन लोगों की तरह न हो जाओ जिन्हों ने कहा के हमने सुना, हालंके वो नहीं सुनते +[8:22] यकीनन खुदा के नाज़दीक बदतरीन क़िसम के जानवर वो बाहर गूँगे लोग हैं जो अक्ल से काम नहीं लेते +[8:23] अगर अल्लाह को मालूम होता के उन्हें कुछ भी बुलाया जाता है तो वो जरूर उन्हें सुनने की तौफीक देता, (लेकिन भलाई के बगैर) अगर वो उनको सुनता तो वो बेरूखी के साथ मुंह फेर जाते +[8:24] ऐ ईमान लाने वालों, अल्लाह और उसके रसूल की पुकार पर लब्बैक कहो जबके रसूल तुम्हें उस चीज की तरफ बुलाए जो तुम्हें जिंदगी बक्शने वाली है, और जान रक्खो के अल्लाह आदमी और उसके दिल के दरमियान हयाल है, और उसकी तरफ तुम समते जाओगे +[8:25] और बच्चों हमें फिटने से जिसकी शामत मखसूस तौर पर सिर्फ उन्हीं लोगों तक महदूद ना रहेगी जिन्हों ने तुम में से गुनाह किया हो, और जान रक्खो के अल्लाह सख्त सजा देने वाला है +[8:26] याद करो वो वक्त जबके तुम थोड़े थे, जमीन में तुमको बे-ज़ोर समझ जाता था, तुम डरते रहते थे के कहीं लोग तुम्हे मिटा ना दीन. फिर अल्लाह ने तुमको जाये पनाह मुहैय्या करदी, अपनी मदद से तुम्हारे हाथ मज़बूत किये और तुम्हें अच्छा रिज़्क मिल गया, शायद के तुम शुक्र-गुज़ार बनो +[8:27] ऐ ईमान लाने वालों, जानते बुझते अल्लाह और उसके रसूल के साथ खयानत(बेवफा) ना करो, अपनी अमानतों में गद्दारी के मुर्तकीब न हो +[8:28] और जां रख्खो के तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद हकीकत में समां ए आजमाइश हैं और अल्लाह के पास अजर देने के लिए बहुत कुछ है +[8:29] ऐ ईमान लाने वालों, अगर तुम अल्लाह से खुदा-तरसी इख्तियार करोगे तुम्हारे लिए कसौटी (मानदंड) बहम पाहुंचा देगा और तुम्हारी बुराइयों को तुमसे दूर कर देगा, और तुम्हारे कसूर माफ कर देगा। अल्लाह बड़ा फ़ज़ल फ़रमाने वाला है +[8:30] वो वक़्त भी याद करने के काबिल है जबके मुनकिरीन ए हक़ तेरे ख़िलाफ़ तदबीरें सोच रहे थे के तुझसे क़ैद करदें या क़तल कर डालें या जिला-वतन (दूर भगाओ) करदें। वो अपनी चालें चल रहे थे और अल्लाह अपनी चाल चल रहा था। और अल्लाह सब से बेहतर चाल चलने वाला है +[8:31] जब उनको हमारी आयतें सुनाई जाती थीं तो कहते थे के "हां सुन लिया हमने। हम चाहें तो ऐसी ही बातें हम भी बना सकते हैं। ये तो वही पुरानी कहानियां हैं जो पहले से लोग कहते चले आ रहे हैं" +[8:32] और वो बात भी याद है जो उन्होन ने कही थी के "खुदया अगर ये हकीकत है और तेरी तरफ से है तो हमपर आसमान से पत्थर बरसा दे, या कोई दर्दनाक अजब हमपर ले आ" +[8:33] हमें अल्लाह का वक्त उन्पर अजाब नाजिल करने वाला ना था जबके तू उनके दरमियान मौजुद था, और ना अल्लाह का ये क़ायदा है के लोग इस्तेग़फ़र कर रहे हैं और वो उनको अज़ाब दे दे +[8:34] लेकिन अब क्यों ना वो उन्पर अज़ाब नाज़िल करे जबके वो मस्जिद ए हराम का रास्ता रोक रहे हैं, हलांके वो मस्जिद के जायज है मुतवल्ली (अभिभावक) नहीं हैं। इसके जायज मुतवल्ली तो सिर्फ एहले तकवा ही हो स्केट हैं मगर अक्सर लोग इस बात को नहीं जानते +[8:35] बैतुल्लाह के पास उन लोगों की नमाज क्या होती है, बस सीतियां बजाते और तालियां बजाते हैं। अब लो, इस अज़ाब का मजा चक्को अपने हमें इंकार ए हक़ की याद में जो तुम करते रहे हो +[8:36] जिन लोगों ने हक़ को मन्ने से इंकार किया है वो अपने माल खुदा के रास्ते से रुकने के लिए सिर्फ कर रहे हैं और अभी और खर्च करते रहेंगे, मगर आख़िर ए कार यही कोशिशें उनके लिए पछतावे का सबाब बनेंगे, फिर वो मगलूब होंगे, फिर ये काफ़िर जहन्नुम की तरफ घेर ले जायेंगे +[8:37] ता-के अल्लाह गंदगी को पाकीज़गी से मंत्र कर अलग करे और हर क़िस्म की गंदगी को मिला कर इकट्ठ करे फिर है पलांदे (बंडलों) को जहन्नुम में झोंक दे, यहीं लोग असली दीवालिये (हारे हुए) हैं +[8:38] (ऐ नबी), उन काफिरों से कहो के अगर अब भी बाज़ आ जाएं तो जो कुछ पहले हो चुका है उसे शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन अगर ये उसकी पिछली राविश का इरादा करेंगे तो गुज़िश्ता क़ौम के साथ जो कुछ हो चुका है वो सबको मालूम है +[8:39] ऐ ईमान लाने वालों, काफिरों से जंग करो यहां तक ​​के फ़ितना बाकी न रहे और दीन पूरा का पूरा अल्लाह के लिए हो जाए, फिर अगर वो फ़िटने से रुक जाएं तो उनके अमल का देखने वाला अल्लाह है +[8:40] और अगर वो ना माने तो जान रक्खो के अल्लाह तुम्हारा सरपरस्त है और वो बेहतरीन हामी ओ मददगार है +[8:41] और तुम्हीं मालूम हो के जो कुछ माल ए गनीमत तुमने हासिल किया है उसका पांचवां (पांचवां) हिसा अल्लाह और उसके रसूल और रिश्तेदारों और यतीमों और मिस्कीनो और मुसाफिरों के लिए है. अगर तुम ईमान लाए हो अल्लाह पर और उस चीज पर जो फैसले के रोज, यानी दोनों फौजों की लड़ाई (युद्ध में सेनाएं मिलीं) के दिन, हमने अपने बंदे पर नाज़िल की थी, (तो ये हिसा बा-ख़ुशी अदा करो)। अल्लाह हर चीज पर कादिर है +[8:42] याद करो वो वक्त जब तुम वादी के इस जानिब था और वो दूसरा जानिब पड़ाव (डेरा डाले हुए) डाले हुए थे और काफिला (कारवां) तुमसे नीचे (साहिल) की तरफ था। अगर कहीं पहले से तुम्हारे और उनके दरमियान मुक़ाबले की क़रारदाद (आपसी नियुक्ति) हो चुकी होती तो तुम ज़रूर इस मौक़े पर पहलू ताहि (अस्वीकार) कर लेते। लेकिन जो कुछ पेश आया वो इस लिए था कि जिस बात का फैसला अल्लाह कर चूका था उसे जहूर में ले आए ता-के जिसे हलाक होना है तो दलील ए रोशन के साथ हलक हो और जिसे जिंदा रहना है वो दलील ए रोशन के साथ जिंदा रहे। यकीनन खुदा सुनने वाला और जाने वाला है +[8:43] और याद करो वो वक्त जबके (ऐ नबी), खुदा उनको तुम्हारे ख्वाब में थोड़ा दिखा रहा था। अगर कहीं वो तुम्हें उनकी तदाद ज्यादा दिखा देता तो जरूर तुमलोग हिम्मत हार जाते और लड़ाई के मामले में झगड़ा शुरू कर देते। लेकिन अल्लाह ही ने इसे तुम्हें बचाया। यकीनन वो सीने का हाल तक जानता है +[8:44] और याद करो जबके मुकाबले के लिए खुदा ने तुम लोगों की निगाहों में दुश्मनों को थोड़ा दिखाया और उनकी निगाहों में तुम्हें काम करके पेश किया, ता-के जो बात होनी थी उसे अल्लाह ज़हूर में ले आए। और आख़िर ए कार सारी ममलात अल्लाह ही की तरफ रूजू करते हैं +[8:45] ऐ ईमान लाने वालों, जब किसी गिरो ​​से तुम्हारा मुकाबला हो तो साबित क़दम रहो और अल्लाह को कसरत से याद करो, तवक्कू है के तुम्हें कामयाबी नसीब होगी +[8:46] और अल्लाह और उसके रसूल की इत्ता करो और आपस में झगड़ा नहीं वरना तुम्हारे अंदर कमज़ोरी पैदा हो जाएगी और तुम्हारी हवा उखड़ जाएगी। सब्र से काम लो, यकीनन अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है +[8:47] और उन लोगों के साथ रंग-ढंग ना इख्तियार करो जो अपने घरों से इतराते (खुश) और लोगों को अपनी शान दिखाते हुए निकले और जिनका रवीश ये है के अल्लाह के रास्ते से रोते हैं। जो कुछ वो कर रहे हैं वो अल्लाह की गिरफ़्तार से बाहर नहीं है +[8:48] ज़रा ख़याल करो हमें वक़्त का जबके शैतान ने लोगों के दिलों में इनकी निगाहों में ख़ुशनुमा बना कर दिखाया था और इनसे कहा था के आज कोई तुम्हारे गालिब नहीं आ सकता, और ये के मैं तुम्हारे साथ हूँ. मगर जब दोनों गिरोहों का आमना सामना हुआ तो वो उल्टे पांव फिर गया और कहने लगा के मेरा तुम्हारा साथ नहीं है, मैं वो कुछ देख रहा हूं जो तुमलोग नहीं देखते। मुझे खुदा से डर लगता है और खुदा बड़ी ताकत सजा देने वाला है +[8:49] जबके मुनाफिकेन और वो सब लोग जिनके दिलों को रोग लगा हुआ है, कह रहे थे के इन लोगों को तो इनके दीन ने खबत (भ्रम) में मुब्तिला कर रखा है, हलांके अगर कोई अल्लाह पर भरोसा करे तो यकीनन अल्लाह बड़ा ज़बरदस्त और दाना है +[8:50] काश तुम हमें हालात को देख सकते हो जबके फरिश्ते मकतूल ​​काफिरों की रूहें क़ब्ज़ कर रहे थे, वो उनके चेहरे और उनके कुल्होन पर ज़र्ब लगते जाते थे और कहते जाते थे “लो अब जलने की सजा भुगतो +[8:51] ये वो जजा है जिसका सामान तुम्हारे अपने हाथों ने पेशगी मुहैय्या कर रखा था। वरना अल्लाह तो अपने बंदों पर ज़ुल्म करने वाला नहीं है।” +[8:52] ये मामला उनके साथ उसी तरह पेश आया जिस तरह आले फिरौन और उन्हें पहले के दूसरे लोगों के साथ पेश आता रहा है, के उनहों ने अल्लाह की आयतों को मानने से इनकार किया और अल्लाह ने उनके गुनाहों पर उन्हें पकड़ लिया। अल्लाह क़ुव्वत रखता है और सख़्त सज़ा देने वाला है +[8:53] ये अल्लाह की इस सुन्नत के मुताबिक हुआ के वो किसी नियामत को जो हमें किसी क़ौम को आता है कि हो हमें वक़्त तक नहीं बदलता जब तक के वो क़ौम खुद अपनी तर्ज़ ए अमल को नहीं बदल देती। अल्लाह सब कुछ सुनने और जाने वाला है +[8:54] आले फिरौन और उनसे पहले कि क़ौमों के साथ जो कुछ पेश आया वो इसी ज़ब्ते के मुताबिक़ था। उनहों ने अपने रुब की आयतों को झुटलाया, तब हमने उनके गुनाहों की याद में उन्हें हलाक किया और आले-फिरौं को परेशान कर दिया, ये सब जालिम लोग थे +[8:55] यकीनन अल्लाह के नाज़दीक ज़मीन पर चलने वाली मख़लूक़ में सबसे बेहतर वो लोग हैं जिन्हों ने हक़ को मन्ने से इनकार करदिया फिर किसी तरह वो उसे क़बूल करने पर तैयार नहीं हैं +[8:56] (खुसूसन) उनमें से वो लोग जिनके साथ तू नहीं मुआहिदा (संविदा) किया फिर वो हर मौके पर उसको तोड़ते हैं और जरा खुदा का खौफ नहीं करते +[8:57] अगर ये लोग तुम्हें लड़ाई में मिल जाएं तो इनकी ऐसी खबर लो के इनके बाद जो दूसरे लोग ऐसे रवीश इख्तियार करने वाले हों उनके हवास बख्ता (चेतावनी दी) हो जाएं। तवक्कू है के बाद-अहदों के इस अंजाम से वो सबक लेंगे +[8:58] और अगर कभी किसी क़ौम से ख़यानत (विश्वासघात) का अंदाज़ा हो तो उसके मुहाएद को एलानिया (सार्वजनिक रूप से) उसके आगे फेंक दो, यक़ीनन अल्लाह ख़यानो (विश्वासघाती) को पसंद नहीं करता +[8:59] मुनकिरीन ई हक़ इस ग़लत फ़हमी में ना रहे के वो बाजी ले गए, यक़ीनन वो हमको हारा नहीं सकते +[8:60] और तुमलोग, जहां तक ​​तुम्हारे बस चले, ज़्यादा से ज़्यादा ताक़त और तैयार बंधे रहने वाले घोड़े (अच्छी तरह से तैयार घोड़े) उनके मुकाबले के लिए मुहय्या राखो, ता-के इसके ज़रिये से अल्लाह के और अपने दुश्मनों को और उनके अलावा अन्य लोगों को खौफ़ ज़्यादा करो जिन्हे तुम नहीं जानते मगर अल्लाह जानता है। अल्लाह की राह में जो कुछ तुम खर्च करोगे उसका पूरा पूरा बदल तुम्हारी तरफ पलटया जाएगा और तुम्हारे साथ हरगिज ज़ुल्म न होगा +[8:61] और (ऐ नबी), अगर दुश्मन सुलह ओ सलामती की तरफ मायल हो तो तुम भी उसके लिए आमादा हो जाओ और अल्लाह पर भरोसा करो, यकीनन वही सब कुछ सुनने और जाने वाला है +[8:62] और अगर वो धोखे की नियत रखे तो तुम्हारे लिए अल्लाह काफी है। वही तो है जिसने अपनी मदद से और मोमिनो के जरीये से तुम्हारी तैद की (आपको मजबूत किया) +[8:63] और मोमिनो के दिल एक दूसरे के साथ जोड़ दिये। तुम रूह ए ज़मीन की सारी दौलत भी खर्च कर डालते हो इन लोगों के दिल ना जुड़ते लेकिन वो अल्लाह है जिसने इन लोगों के दिल जोड़े। यकीनन वो बड़ा ज़बरदस्त और दाना है +[8:64] ऐ नबी, तुम्हारे लिए और तुम्हारे जोड़े (अनुयायियों) एहले ईमान के लिए तो बस अल्लाह काफ़ी है +[8:65] ऐ नबी, मोमिनो को जंग पर उभारो। अगर तुम में से बीस (बीस) आदमी साबिर (जो कायम रहे) माननीय तो दो आरा (दो सौ) पर गालिब आएंगे, और अगर तुम में (सौ) आदमी ऐसे हो तो मुनकिरीन ए हक में से हजार (हजार) आदमियों पर भारी रहेंगे, क्योंकि वो ऐसे लोग हैं जो समझ नहीं सकते रखे +[8:66] अच्छा, अब अल्लाह ने तुम्हारा बोझ हल्का किया और उसे मालूम हुआ के अभी तुम में कमी है। अगर तुम में से एक (सौ) आदमी साबिर हो तो वो दो आरी (दो सौ) पर हो और एक हजार आदमी ऐसे हो तो दो हजार पर अल्लाह के हुकुम से गालिब आएंगे। और अल्लाह उन लोगों के साथ है जो सब्र करने वाले हैं +[8:67] किसी नबी के लिए ये ज़ेबा नहीं है के उसके पास क़ैदी होन जब तक के वो ज़मीन में दुश्मनों को अच्छी तरह कुचल ना दे। तुम लोग दुनिया के फ़ायदे चाहते हो, हलांके अल्लाह के पेशे नज़र आख़िर है। और अल्लाह गालिब और हकीम है +[8:68] अगर अल्लाह का नविस्ता (फरमा) पहले न लिखा जा चुका हो तो जो कुछ तुम लोगों ने लिया है उसकी पैदाइश में तुमको बड़ी सजा दी जाती है +[8:69] पास जो कुछ तुमने माल हासिल किया है उसे खाओ के वो हलाल और पाक है और अल्लाह से डरते हैं रहो. यकीनान अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[8:70] ऐ नबी, तुम लोगों के क़ब्ज़े में जो क़ैदी हैं उन्हें कहो अगर अल्लाह को मालूम हुआ के तुम्हारे दिलों में कुछ ख़ैर है तो वो तुम्हें उससे बढ़ कर देगा जो तुमसे लिया गया है और तुम्हारी ख़तें माफ़ करेगा. अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[8:71] लेकिन अगर वो तेरे साथ ख़यानत (विश्वासघात) का इरादा रखते हैं तो इसे पहले वो अल्लाह के साथ ख़यानत कर चुके हैं। चुनांचे उसकी सज़ा अल्लाह ने उन्हें दी के वो तेरे क़ाबू में आ गए। अल्लाह सब कुछ जानता है और हकीम है +[8:72] जिन लोगों ने ईमान क़बूल किया और हिजरत की और अल्लाह की राह में अपनी जानेन लड़ें और अपने माल खापे, और जिन लोगों ने हिजरत करने वालों को जगह दी और उनकी मदद की, वही दर-असल एक दूसरे के वाली (सहयोगी) हैं। रहे वो लोग जो ईमान तो ले आए मगर हिजरत करके (दार उल इस्लाम में) आ नहीं गए तो उनसे तुम्हारा विलायत (गठबंधन) का कोई तल्लुक नहीं है जब तक के वो हिजरत करके ना आ जाए। हां अगर वो दीन के मामले में तुमसे मदद मांगे तो उनकी मदद करना तुम्हारा फर्ज है लेकिन कोई ऐसी कौम के खिलाफ नहीं जिसमें तुम्हारा मुहाएदा हो। जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे देखता है +[8:73] जो लोग मुनकिर ए हक़ है वो एक दूसरे की हिमायत करते हैं, अगर तुम ये ना करोगे तो ज़मीन में फ़ितना और बड़ा फ़साद बरपा होगा +[8:74] जो लोग ईमान लाए और जिन्होन ने अल्लाह की राह में घर बार छोड़े और जिद ओ जहद की और जिन्हों ने पनाह दी और मदद की वही सच्चे मोमिन हैं। उनके लिए ख़तों से दरगुज़र है और बेहतरीन रिज़क है +[8:75] और जो लोग बाद में ईमान लाए और हिजरत करके आ गए और तुम्हारे साथ मिलकर जिद्द ओ जहद करने लगे वो भी तुम्हीं में शामिल हैं। मगर अल्लाह की किताब में खून के रिश्तेदार एक दूसरे के ज्यादा हकदार हैं। यकीनन अल्लाह हर चीज को जानता है + +Surah 9: Al-Bara'at / At-Taubah(The Immunity) +---------------------------------------- +[9:1] एलान ए बारात (प्रतिरक्षा) है अल्लाह और उसके रसूल की तरफ से उन मुशरिकेन को जिनसे तुमने मुहैदे (संधियाँ) किये थे +[9:2] पास तुम लोग मुल्क में चार (चार) माहीन और चल फिर लो और जान रक्खो के तुम अल्लाह को अजीज (निराश) करने वाले नहीं हो, और ये के अल्लाह मुनकिरीन ए हक़ को रुसवा करने वाला है +[9:3] इत्तिला-ए-आम है अल्लाह और उसके रसूल की तरफ से हज ए अकबर के दिन तमाम लोगों के लिए के अल्लाह मुशरिकेन से बारी उज़-ज़िम्मा (संधि दायित्वों से मुक्त) है और उसका रसूल भी। अब अगर तुम लोग तौबा करो तो तुम्हारे लिए ही बेहतर है और जो मुंह फेरते हो तो खूब समझ लो के तुम अल्लाह को अजीज करने वाले नहीं हो। और (ऐ नबी), इंकार करने वालों को साख अज़ाब की ख़ुशख़बरी सुना दो +[9:4] बज़ुज़ उन मुशरिकेन के जिनसे तुमने मुहैदे (संधि) किया फिर उन्होन ने अपने अहद को पूरा करने में तुम्हारे साथ कोई कमी नहीं की और ना तुम्हारे ख़िलाफ़ किसी की मदद की, तो ऐसे लोगों के साथ में तुम भी मुद्दत ए मुहैदा तक वफ़ा करो क्योंकि अल्लाह मुत्तक़ियों (पवित्र) ही को पसंद करता है +[9:5] पास जब हराम माहीने गुजर जाएं तो मुशरिकेन को कत्ल करो जहां पाओ और उन्हें पकड़ो और घेरो और हर घात (घात) में उनकी खबर लें के लिए बैठो. फिर अगर वो तौबा करें और नमाज़ क़याम करें और ज़कात दें तो उन्हें छोड़ दो। अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[9:6] और अगर मुशरिकेन में से कोई शक्स पनाह मांग कर तुम्हारे पास आना चाहे (ता-के अल्लाह का कलाम सुने) तो उसे पनाह दे दो यहां तक ​​के वो अल्लाह का कलाम सुनले फिर उसे मामन (सुरक्षा का स्थान) तक पाहुंचा दो, ये है करना चाहिए के ये लोग इल्म नहीं रखते +[9:7] मुशरिकेन के लिए अल्लाह और उसके रसूल के नाज़दीक कोई अहद आख़िर कैसे हो सकता है? बाज़ुज़ उन लोगों के जिनसे तुमने मस्जिद ए हराम के पास मुहैदा किया था, जब तक वो तुम्हारे साथ सीधे रहे तुम भी उनके साथ सीधे रहो क्योंकि अल्लाह मुत्तक़ियों को पसंद करता है +[9:8] मगर इनके सिवा दूसरे मुशरिकेन के साथ कोई अहद कैसा हो सकता है जबके उनका हाल ये है कि तुम काबू पा जाओ तो ना तुम्हारे मामले में किसी क़राबत का ज़िक्र करें ना किसी की ज़िम्मेदारी का। वो अपनी जुबान से तुमको राजी करने की कोशिश करते हैं मगर दिल उनको इनकार करते हैं और उनमें से अक्सर फासीक हैं +[9:9] उन्होन ने अल्लाह की आयत के बदले थोड़ी सी कीमत कबूल कर ली फिर अल्लाह के रास्ते में सद्दे-राह बनकर खड़े हो गए (दूसरों को अपने रास्ते से रोक दिया), बहुत बुरे करतूत थे जो ये करते रहे +[9:10] किसी मोमिन के मामले में ना ये क़राबत का ज़िम्मा करते हैं और ना किसी अहद की ज़िम्मेदारी का और ज़्यादा हमेशा की तरफ से हुई है +[9:11] अगर ये तौबा कर लें और नमाज कयाम करें और जकात दें तो तुम्हारे दीनी भाई हैं और जाने वालों के लिए हम अपना एहकाम वाज़ेह किये देते हैं +[9:12] और अगर अहद करने के बाद ये फिर अपनी कसमों को तोड़ दें और तुम्हारे दीन पर हमले करने शुरू कर दें तो कुफ्र के आलम-बरदारों (सरगना) से जंग करो क्योंकि उनकी कसमों का कोई ऐतबार नहीं, शायद के (फिर तलवार ही के ज़ोर से) वो बाज़ आएंगे +[9:13] क्या तुम ना लड़ोगे (लड़ाई) ऐसे लोगों से जो अपने अहद तोड़ते रहे हैं और जिन्होन ने रसूल को मुल्क से निकल देने का क़सद (साजिश) किया था और ज़्यादा की इब्तेदा करने वाले वही थे? क्या तुम उनसे डरते हो? अगर तुम मोमिन हो तो अल्लाह से इसका ज़ियादा मुस्तहिक़ है के उससे डरो +[9:14] उनसे लड़ो, अल्लाह तुम्हारे हाथों से उनको सज़ा दिलवायेगा और उन्हें ज़लील ओ ख़्वार करेगा और उनके मुकाबले में तुम्हारी मदद करेगा और बहुत से मोमिनो के दिल ठंडा करेगा +[9:15] और उनके कुलूब (दिलों) की जलन मिटा देगा, और जिसे चाहेगा तौबा की तौफीक भी देगा। अल्लाह सब कुछ जानने वाला और दाना (बुद्धिमान) है +[9:16] क्या तुम लोगों ने ये समझ रखा है कि यूं ही छोड़ दिए जाओगे हालंके अभी अल्लाह ने ये तो देखा ही नहीं के तुम में से कौन वो लोग हैं जिन्हों ने (उसकी राह में) जानफिशानी (अपना पूरा जोर लगाया) की और अल्लाह और उसके रसूल और मोमिनीन के सिवा किसी को जिगरी दोस्त ना बनाया, जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बा-खबर है +[9:17] मुशरिकेन का ये काम नहीं है के वो अल्लाह की मस्जिद के मुजावर ओ खादिम बने, डरन हाल ये के अपने ऊपर वो खुद कुफ्र की शहादत दे रहे हैन. उनके तो सारे अमल ज़ाय हो गए और जहन्नुम में उन्हें हमेशा रहना है +[9:18] अल्लाह की मस्जिद के आबाद-कार (मुजावर ओ खादिम) तो वही लोग हो सकते हैं जो अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर को माने और नमाज़ क़याम करें, ज़कात दीन और अल्लाह के सिवा किसी से ना डरें, उन्हीं से ये तवाक्कु है के सीधी राह चलेंगे +[9:19] क्या तुम लोगों ने हाजियों को पानी पिलाया और मस्जिद ए हराम (खाने काबा) की मुजावरी करने के लिए उस शक्स के काम के बराबर ठहर लिया है जो ईमान लाया अल्लाह पर और रोज ए आखिर पर और जिसने जांफिशानी (जोर दिया) उसकी अत्यंत) कि अल्लाह की राह में? अल्लाह के नाज़दीक तो ये दोनों बराबर नहीं हैं और अल्लाह जालिमों की रहनुमाई नहीं करता +[9:20] अल्लाह के हन तो उन्ही लोगों का दरजा बड़ा है जो ईमान लाए और जिन्होन ने उसकी राह में घर बार छोड़े और जान ओ माल से जिहाद किया, वही कामयाब हैं +[9:21] उनका रब उन्हें अपनी रहमत और खुशनुदी और ऐसी जन्नत की बशारत देता है जहां उनके लिए भुगतान ऐश के समान हैं +[9:22] उन्हें वो हमेशा रहेंगे, यकीनन अल्लाह के पास खिदमत का सिला देने को बहुत कुछ है +[9:23] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपने बापों और भाइयों को भी अपना रफीक (सहयोगी) ना बनाओ अगर वो ईमान पर कुफ्र को तर्जीह (प्रथम) दें, तुम में से जो उनको रफीक (सहयोगी) बनायेंगे वही जालिम होंगे +[9:24] (ऐ नबी), कहदो के अगर तुम्हारे बाप और तुम्हारे बेटे, और तुम्हारे भाई, और तुम्हारी बीवीयां और तुम्हारे अजीज-ओ-अकारेब (करीबी और प्रियजन) और तुम्हारे वो माल जो तुमने कमाए हैं, और तुम्हारे वो कारोबार (बिजनेस) जिनका मनध (गिरावट) पढ़ जाने का तुमको खौफ है और तुम्हारे वो घर जो तुमको पसंद हैं, तुमको अल्लाह और उसके रसूल और उसकी राह में जिहाद से अज़ीज़-तर हैं तो इंतज़ार करो यहाँ तक के अल्लाह अपना फैसला तुम्हारे सामने ले आए, और अल्लाह फासिक लोगों की रहनुमाई नहीं करता +[9:25] अल्लाह इस्से पहले बहुत से मौक़े (मौके पर) पर तुम्हारी मदद कर चुका है, अभी गज़वा ए हुनैन के रोज़ (उसकी दस्तगीरी की शान तुम देख चुके हो), उस रोज़ तुम्हें अपनी कसरत ए तड़ाद का गरारा (गर्व) था मगर वो तुम्हारे कुछ काम ना आई और ज़मीन अपनी वुसत के बकवास तुमपर तंग हो गई और तुम पीठ फेर कर भाग निकले +[9:26] फिर अल्लाह ने अपनी सकीनत रसूल पर और मोमिनीन पर नाज़िल फरमाई और वो लश्कर उतरे जो तुमको नज़र ना आते थे और मुनकिरीन ए हक़ को सज़ा दी के यही बदला है उन लोगों के लिए जो हक़ का इंकार करें +[9:27] फिर (तुम ये भी देख चुके हो के) इस तरह सजा देने के बाद अल्लाह जिसको चाहता है तौबा की तौफीक भी बख्श देता है, अल्लाह दरगुजर करने वाला और रहम फरमाने वाला है +[9:28] ऐ ईमान लाने वालों, मुशरिकेन नापाक हैं, लिहाजा इस साल के बाद ये मस्जिद-ए-हराम के करीब न फटकने पाएं, और अगर तुम्हें तंगदस्ती का खौफ है तो बैद नहीं के अल्लाह चाहे तो तुम्हें अपने फजल से गनी करदे, अल्लाह आलिम ओ हकीम है +[9:29] जंग करो एहले किताब में से उन लोगों के खिलाफ जो अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान नहीं लाते और जो कुछ अल्लाह और उसके रसूल ने हराम करार दिया है उसे हराम नहीं करते और दीन ए हक को अपना दीन नहीं बनाते। (उनसे लड़ो) यहां तक ​​के वो अपने हाथ से जजिया दीन और छोटे बनकर रहें +[9:30] यहुदी कहते हैं के उज़ैर अल्लाह का बेटा है और इसाई कहते हैं के मसीह अल्लाह का बेटा है। ये बे-हकीकत बातें हैं जो वो अपनी जुबान से निकलते हैं उन लोगों की देखा देखी जो उनसे पहले कुफ्र में मुब्तिला हुए थे। खुदा की मार इनपर, ये कहां से धोखा खा रहे हैं +[9:31] इन्होन ने अपने उलेमा और दरवेशियों को अल्लाह के सिवा अपना रुब बना लिया है और इसी तरह मसीह इब्न मरियम को भी, हालंके इनको एक माबूद के सिवा किसी की बंदगी करने का हुकुम नहीं दिया गया था, वो जिसके सिवा कोई मुस्तहिक ए इबादत नहीं। पाक है वो इन मुशरिकाना बातों से जो ये लोग करते हैं +[9:32] ये लोग चाहते हैं अल्लाह की रोशनी को अपनी फुँकों से बुझा दें मगर अल्लाह अपनी रोशनी को मुकम्मल किए बगैर मन्ने वाला नहीं है ख्वाह काफिरों को ये कितना ही नागावार हो +[9:33] वो अल्लाह हाय है जिसने अपने रसूल को हिदायत और दीन ए हक के साथ भेजा ता-के उसे पूरे जिन ए दीन पर गालिब करदे ख्वा मुशरिकों को ये कितना ही नागावार हो +[9:34] ऐ ईमान लाने वालों, एहले किताब के अक्सर उलेमा और दरवेशों (भिक्षुओं) का हाल ये है कि वो लोगों के माल बातिल तरीक़ों से खाते हैं और उन्हें अल्लाह की राह से रोकते हैं। दर्दनाक सज़ा की ख़ुश-ख़बरी दो उनको जो सोनी और चांदी जमा करके रखते हैं और वे खुदा की राह में खर्च नहीं करते +[9:35] एक दिन आएगा के इसी सोनी (गोल्ड) और चांदी पर जहन्नुम की आग ढेकाई जाएगी और फिर इसी से उन लोगों की पेशियां और पहलूओं और पीठों को दागा जाएगा, ये है वो खज़ाना जो तुमने अपने लिए जमा किया था, लो अब अपनी संपत्ति हुई दौलत का मजा चक्खो +[9:36] हकीकत ये है के महिनो की तड़ाद जब से अल्लाह ने आसमां ओ ज़मीन को पैदा किया है अल्लाह के नवासे (रिकॉर्ड) मैं बारा (बारह) हाय है, और इनमें से चार महीने हराम हैं। यही ठीक ज़ब्ता है चार (चार) में लिहाज़ा महिनो में अपने ऊपर ज़ुल्म न करो और मुशरिकों से सब मिलकर लड़ो (लड़ो) जिस तरह वो सब मिलकर तुमसे लड़ते हैं और जान रक्खो के अल्लाह मुत्तक़ियों ही के साथ हैं +[9:37] 'नसी' [स्थगन (पवित्र महीनों के भीतर प्रतिबंधों का)] कुफ्र में एक मजीद काफिराना हरकत है जिसे ये काफिर लोग गुमराही में मुब्तिला किये जाते हैं। किसी साल एक महीने को हलाल करते हैं और किसी साल उसको हराम करते हैं, ता-के अल्लाह के हराम किये हुए महिनो की ताड़द पूरी भी कर दें और अल्लाह का हराम किया हुआ हलाल भी कर लें। इनके बुरे आमाल इनके लिए ख़ुशनुमा बना दिए गए हैं और अल्लाह मुनकिरीन ए हक़ को हिदायत नहीं दिया करता +[9:38] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम्हें क्या हो गया के जब तुमसे अल्लाह की राह में निकलने के लिए कहा गया तो तुम ज़मीन से झिझक कर रह गए? क्या तुमने आख़िरत के मुक़ाबले में दुनिया की ज़िंदगी को पसंद किया? ऐसा है तो तुम्हें मालूम हो कि दुनियावी जिंदगी का ये सब सर-ओ-समान आखिरी में बहुत थोड़ा निकलेगा +[9:39] तुम ना उठोगे तो खुदा तुम्हें दर्दनाक सजा देगा, और तुम्हारी जगह किसी और गिरोह को उठेगा, और तुम खुदा का कुछ भी ना बिगाड़ोगे सकोगे, वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है +[9:40] तुमने अगर नबी की मदद न की तो कुछ परवा नहीं, अल्लाह उसकी मदद हमें वक्त कर चुका है जब काफिरों ने उसे निकल दिया था, जब वो सिर्फ दो में का दूसरा था, जब वो दोनों घर (गुफा) में थे, जब वो अपने साथी से कह रहा था के "गम ना कर, अल्लाह हमारे साथ है" हमें वक्त अल्लाह ने उसपर अपनी तरफ से सुकून ए क़ल्ब (दिल का सुकून) नाज़िल किया और उसकी मदद ऐसे लश्करों से कहा कि जो तुमको नज़र ना आते थे, और काफिरों का बोल नीचा करदिया और अल्लाह का बोल तो उनका हाय है. अल्लाह ज़बरदस्त और दाना ओ बीना है (सर्वशक्तिमान, सर्व-बुद्धिमान) +[9:41] निकलो, ख्वा हल्के हो या बोझल, और जिहाद करो अल्लाह की राह में अपने मालों और अपनी जानो के साथ, ये तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम जानो +[9:42] (ऐ नबी), अगर फैयदा सहल-उल-हुसूल (तत्काल लाभ की संभावना) हो और सफर हल्का होता तो वो जरूर तुम्हारे पीछे चलने पर आमदा हो जाती। मगर उन पर तो ये रास्ता बहुत मुश्किल हो गया। अब वो खुदा की कसम खा खा कर कहेंगे के अगर हम चल सकते हैं तो यकीनन तुम्हारे साथ चलते हैं। वो अपने आप को खतरे में डाल रहे हैं, अल्लाह खूब जानता है के वो झूठे हैं +[9:43] (ऐ नबी), अल्लाह तुम्हें माफ करे, तुमने क्यों उन्हें रुक्सत दे दी? और झूठों (झूठों) को भी तुम जान लेते हैं +[9:44] जो लोग अल्लाह और रोज़ ए आख़िर पर ईमान रखते हैं वो तो कभी तुमसे ये अंधेरा (अनुरोध) ना करेंगे के उनको ना अपनी जान ओ माल के साथ जिहाद करने से माफ़ रक्खा जाए, अल्लाह मुत्तक़ियों को ख़ूब जानता है +[9:45] ऐसी डार्कह्वास्टीन (अनुरोध) सिर्फ वही लोग करते हैं जो अल्लाह और रोज ए आखिर पर ईमान नहीं रखते, जिनके दिलों में शक्क है और वो अपने शक्क ही में मुतरद्दिद (डगमगाते हुए) हो रहे हैं +[9:46] अगर वक्त इनका इरादा निकलेगा तो वो इसके लिए कुछ तयारी करते हैं. लेकिन अल्लाह को उनका उठना पसंद ही ना था, इसके लिए उन्होंने उन्हें स्थिर करदिया और केहदिया के साथ रहो बैठने वालों के साथ +[9:47] अगर वो तुम्हारे साथ निकलते तो तुम्हारे अंदर ख़राबी के सिवा किसी चीज़ का इज़ाफ़ा ना करते, वो तुम्हारे दरमियान फ़िटना परदाज़ी के दौड़-धूप करते हुए, और तुम्हारे गिरो ​​का हाल ये है कि अभी हमसे बहुत से ऐसे लोग मौजूद हैं जो उनकी बातें कान लगा कर सुनते हैं, अल्लाह जालिमों को खूब जानता है +[9:48] लोगों ने फितना-अंगेज़ी की कोशिशों में इसे पहले भी शामिल किया है और तुम्हें नाकाम करने के लिए ये हर तरह की तदबीरों का उल्टा फेर कर चुके हैं यहां तक ​​के इनकी मर्जी के खिलाफ हक आ गया और अल्लाह का काम होकर रहा +[9:49] मेरे अंदर से कोई है जो कहता है के "मुझे रुक्सत दे दीजिए और मुझको फिटने में ना डालिए।" सुन रक्खो! फिटने ही में तो ये लोग पड़े हुए हैं और जहन्नुम ने काफिरों को घेर रखा है +[9:50] तुम्हारा भला होता है तो इन्हें रंज होता है और तुमपर कोई मुसीबत आती है तो ये मुंह फेर कर खुश खुश पलट-ते हैं और कहते जाते हैं के अच्छा हुआ हमने पहले ही अपना मामला ठीक कार्लिया था +[9:51] इंसे कहो "हमें हरगिज़ कोई (बुराई या भलाई) नहीं पहुंचती मगर वो जो अल्लाह ने हमारे लिए लिख दी है। अल्लाह ही हमारा मौला (गुराडियन) है, और एहले ईमान को उसी पर भरोसा करना चाहिए" +[9:52] इंसे कहो, "तुम हमारे मामले में जिस चीज के मुंतजिर हैं वो इसके सिवा और क्या है कि दो भलइयाँ में से एक भलाई है और हम तुम्हारे मामले में जिस चीज के मुंतजिर हैं वो ये है के अल्लाह खुद तुमको सज़ा देता है या हमारे हाथों को दिलवाता है? अच्छा तो अब तुम भी इंतज़ार करो और हम भी तुम्हारे साथ मुंतज़िर हैं” +[9:53] इनसे कहो "तुम अपने माल ख़्वा रज़ी ख़ुशी ख़र्च करो या बा-कराहत (अनिच्छा से), बाहर-हाल वो क़बूल ना किये जायेंगे क्योंकि तुम फ़सीक लोग हो" +[9:54] इनके दिये हुए माल क़बूल ना होने की कोई वजह इसके सिवा नहीं है के इन्हों ने अल्लाह और उसके रसूल से कुफ्र किया है, नमाज के लिए आते हैं तो कसमसाते हुए आते हैं और राह ए खुदा में खर्च करते हैं तो बा-दिल ए ना ख्वास्ता (अनचाहे दिल) खर्च करते हैं +[9:55] इनके माल ओ दौलत और इनके कसम ए औलाद को देख कर धोखा ना खाओ, अल्लाह तो ये चाहता है कि इन्हीं चीजों के ज़रिये से इनको दुनिया की जिंदगी में भी मुब्तिला ए अजब करे और ये जान भी दें तो इंकार ए हक ही की हालत में दें +[9:56] वो खुदा की कसम खा खा कर कहते हैं के हम तुम्हीं में से हैं, हलांके वो हरगिज तुम में से नहीं हैं. असल में तो वो ऐसे लोग हैं जो तुमसे खौफ-जदा (डरते हुए) हैं +[9:57] अगर वो कोई जाए पनाह (शरण का स्थान) पा लें या कोई खो (गुफा) या घुस बैठने की जगह, तो भाग कर हमसे में जा छुपें +[9:58] (ऐ नबी), मुझमें से बाज़ लोग सदाकत की तकसीम में तुम्पर एतराजात करते हैं, अगर इस माल में से कुछ दे दिया जाए तो खुश हो जाएं, और ना दिया जाए तो बिगडने लगते हैं +[9:59] क्या अच्छा होता के अल्लाह और रसूल ने जो कुछ भी उन्हें दिया था उसपर वो राजी रहते और कहते के "अल्लाह हमारे" लिए काफ़ी है, वो अपने फ़ज़ल से हमें और बहुत कुछ देगा और उसका रसूल भी हमपर इनायत फरमाएगा, हम अल्लाह ही की तरफ नज़र जमाए हुए हैं” +[9:60] ये सदक़ात तो दर-असल फ़कीरों और मिस्कीनो के लिए हैं और उन लोगों के लिए जो सदाकत के काम पर मामूर हों, और उनके लिए जिनकी तालिफ़-ए-क़लब (जिनके दिलों को जीतना है) मतलूब हो नीज़ ये गार्डानो के छुड़ाने (गुलामों की फिरौती) और क़र्ज़दारों की मदद करने में और राह ए खुदा में और मुसाफिर-नवाज़ी में इस्तेमाल करने के लिए हैं। एक फ़रीज़ा है अल्लाह की तरफ से और अल्लाह सब कुछ जानने वाला और दाना ओ बीना है +[9:61] इनमें से कुछ लोग हैं जो अपनी बातों से नबी को दुख देते हैं और कहते हैं कि ये शक्स कानो (कानों) का कच्चा है। कहो, "वो तुम्हारी भलाई के लिए ऐसा है, अल्लाह पर ईमान रखता है और एहले ईमान पर एत्माद (भरोसा) करता है और सारा रहमत है उन लोगों के लिए जो तुम में से इमानदार हैं। और जो लोग अल्लाह के रसूल को दुख देते हैं उनके लिए दर्दनाक सजा है" +[9:62] ये लोग तुम्हारे सामने कसमें खाते हैं ता-के तुम्हें राजी करें, हलांके अगर ये मोमिन हैं तो अल्लाह और रसूल इसके ज्यादा हकदार हैं के ये उनको राजी करने की फिक्र करें +[9:63] क्या उन्हें मालूम नहीं है कि जो अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला करता है है उसके लिए दोज़ख की आग है जिसमें वो हमेशा रहेगा। ये बहुत बड़ी रुसवाई है +[9:64] ये मुनाफिक डर रहे हैं के कहीं मुसलमानों पर कोई ऐसी सूरत नाज़िल न हो जाए जो इनके दिलों के भेद खोल कर रख दे। (ऐ नबी), इनसे कहो, "और मज़ाक उड़ाओ, अल्लाह हमें चीज़ को खोलने वाला है जिसके खुल जाने से तुम डरते हो" +[9:65] अगर इनसे पूछो के तुम क्या बातें कर रहे थे, तो झट कह देंगे के हम तो हंसी मज़ाक और दिल लगी कर रहे थे। इनसे कहो, "क्या तुम्हारी हंसी दिल लगी अल्लाह और उसकी आयत और उसके रसूल ही के साथ थे +[9:66] अब उज़रात (बहाने) ना तराशो, तुमने ईमान लाने के बाद कुफ़्र किया है, अगर हमने तुम में से एक गिरोह को माफ़ कर भी दिया तो दूसरे गिरो ​​को तो हम ज़रूर सजा" देंगे क्यूँके वो मुजरिम है।” +[9:67] मुनाफिक मर्द और मुनाफिक औरतें सब एक दूसरे के हम-रंग हैं, बुरे का हुकुम देते हैं और भलाई से मन करते हैं और अपने हाथ खैर से रोक रहे हैं। ये अल्लाह को भूल गए तो अल्लाह ने भी इन्हें भुला दिया, यकीनन ये मुनाफिक ही फासीक है +[9:68] इन मुनाफिक मर्दों और औरतों और काफिरों के लिए अल्लाह ने आतिश ए दोजख का वादा किया है जिसमें वो हमेशा रहेंगे, वही इनके लिए मौजुन (उचित जगह) है, इनपर अल्लाह की फ़िटकर है और इनके लिए क़याम रहने वाला अज़ाब है +[9:69] तुम लोगों के रंग ढांग वही हैं जो तुम्हारे पेश-रावों के थे, वो तुमसे ज़्यादा ज़ोरावर और तुमसे बढ़कर माल और औलाद वाले थे, फिर उनहोन ने दुनिया में अपनी हंसी के मजे लूटे लिए और तुमने भी अपनी तरह से मजे इसी तरह लूटे जैसे उनको ने लूटे थे, और वैसी ही बेहसों (तर्क) में तुम भी पड़े जैसी बेहसों में वो पड़े थे। तो उनका अंजाम ये हुआ के दुनिया और आख़िरत में उनका सब किया धरा ज़ाया हो गया और वही ख़ासियत में हैं +[9:70] क्या लोगों को अपने पेशावरों की तारीख (इतिहास/कहानी) नहीं पता? नूंह की क़ौम, आद, समूद, इब्राहीम की क़ौम, मदियां के लोग और वो बस्तियां जिन्हें उलट दिया गया। उनके रसूल उनके पास खुली-खुली निशानियां लेकर आए, फिर ये अल्लाह का काम न था के अनपर ज़ुल्म करता मगर वो आप ही अपने ऊपर ज़ुल्म करने वाले थे +[9:71] मोमिन मर्द और मोमिन औरतें, ये सब एक दूसरे के रफीक (साथी/सहयोगी) हैं, भलाई का हुकुम देते हैं और बुरे से रोकते हैं, नमाज कायम करते हैं, जकात देते हैं और अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करते हैं, ये वो लोग हैं जिनपर अल्लाह की रहमत नाज़िल होकर रहेगी। यकीनन अल्लाह सब पर ग़ालिब और हकीम ओ दाना है +[9:72] मोमिन मर्दन और औरतों से अल्लाह का वादा है के इन्हें ऐसे बाग़ देगा जिनके आला नेहरेन बहती होंगी और वो इनमें हमेशा रहेंगे, सदा-बहार बागों में उनके लिए पाकीज़ा क़याम-गाहें (रहते हैं) जगहें) होंगी, और सबसे बढ़कर ये के अल्लाह की खुशनुदी (खुशी) इन्हें हासिल होगी, यही बड़ी कामयाबी है +[9:73] ऐ नबी, कुफ्फार और मुनाफिकेन दोनों का पूरी कुव्वत से मुकाबला करो और इनके साथ मिलकर पेश आओ, आखिर ए कार इनका ठिकाना जहन्नुम है और वो बढ़-तरीन जाए करार (निवास) है +[9:74] ये लोग खुदा की कसम खा खा कर कहते हैं कि हमने वो बात नहीं कही, हालंके इन्हों ने जरूर वो काफिराना बात कही है। वो इस्लाम लाने के बाद कुफ़्र के मुर्तकीब हुए और इन्होन ने वो कुछ करने का इरादा किया जिसे कर ना सके। ये इनका सारा गुस्सा इसी बात पर है ना के अल्लाह और उसके रसूल ने अपने फज़ल से इनको गनी (समृद्ध) कर दिया है! अब अगर ये अपनी इस रवीश से बाज़ आ जाए तो इनके लिए बेहतर है, और अगर ये बाज़ ना आए अल्लाह के पास इन्हें निहायत दर्दनाक सजा देगा, दुनिया में भी और आखिरी में भी, और ज़मीन में कोई नहीं जो इनका हिमायती और मददगार हो +[9:75] इन में से बाज़ ऐसे भी हैं जिन्होन ने अल्लाह से अहद किया था के अगर हमने अपने फजल से हमको नवाजा तो हम खैरात करेंगे और सालेह बन कर रहेंगे +[9:76] मगर जब अल्लाह ने अपने फजल से इनको दौलत-मंद करदिया तो वो भुखल (कंजूसी) पर उतर आए और अपने अहद से फिर के येहिन उसकी परवा तक नहीं है +[9:77] नतीजा ये निकला के इनकी इस बद-अहादी (विश्वासघात) की वजह से जो इन्होन ने अल्लाह के साथ की, और उस झूठ की वजह से जो वो बोलते रहे, अल्लाह ने इनके दिलों में निफाक (पाखंड) बिठा दिया जो उसके हुजूर उनकी पेशी के दिन तक इनका पीछा न छोड़ेगा +[9:78] क्या ये लोग जानते नहीं हैं कि अल्लाह को इनके मख़फ़ी (छिपे हुए) राज़ और इनकी पोशीदा सरगोशियां तक ​​मालूम हैं और वो तमाम गैब की बातों से पूरी तरह बख़बर है +[9:79] (वो ख़ूब जानता है उन कंजूस दौलत-मंदों को) जो बा-रज़ा (स्वेच्छा से) ओ रगबत देने वाले एहले ईमान की माली कुर्बानियों पर बातें जपते हैं और उन लोगों का मजाक उड़ाते हैं जिनके पास (राह ए खुदा में देने के लिए) उसके सिवा कुछ नहीं है जो वह अपने ऊपर मुशक्कत बर्दाश्त करके देते हैं। अल्लाह इन मज़ाक़ उड़ाने वालों का मज़ाक उड़ाता है और इनके लिए दर्दनाक सज़ा है +[9:80] (ऐ नबी), तुम ख्वा ऐसे लोगों के लिए माफ़ी की अंधेरगर्दी करो या ना करो, अगर तुम सत्तर (सत्तर) मरतबा भी इन्हें माफ़ करदेने की अंधेरगर्दी करोगे तो अल्लाह इन्हें हरगिज़ माफ़ ना करेगा, इस लिए के इन्हों ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया है, और अल्लाह फासीक लोगों को राह ए नजात नहीं दिखाता +[9:81] जिन लोगों को पीछे रह जाने की इजाज़त दे दी गई थी वो अल्लाह के रसूल का साथ न दें और घर बैठे रहने पर खुश हुए और उन्हें गवारा ना हुआ के अल्लाह की राह में जान ओ माल से जिहाद करें। उन्होन लोगों से कहा के “इस मजबूत गर्मी में ना निकलो”। इनसे कहो के जहन्नुम की आग इस तरह ज्यादा गरम है, काश इन्हें इसका शूर होता है +[9:82] अब चाहिए के ये लोग हसना कम करें और रोयें ज्यादा, इसके लिए जो बुरी (बुराई) ये कमाते रह रहे हैं इसकी जजा ऐसी ही है (के इन्हें इसपर रोना चाहिए) +[9:83] अगर अल्लाह इनके दरमियान तुम्हें वापस ले जाए और अंदर से कोई गिरो ​​जिहाद के लिए निकले कि तुमसे इज्जत मांगे तो साफ कह देना, "अब तुम मेरे साथ हरगिज नहीं चल सकते और न मेरी मइया (कंपनी) में किसी दुश्मन से लड़ सकते हो, तुमने पहले बैठ रहने को पसंद किया था अब घर बैठने वालों ही के साथ बैठे रहो” +[9:84] और अंदर से जो कोई मरे (मर जाए) उसकी नमाज ए जनाज़ा भी तुम हरगिज़ न पढ़ना और न कभी उसकी क़ब्र पर खड़े होना क्योंकि उन्होन ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया है और वो मारे हैं इस हाल में के वो फासिक थे +[9:85] इनकी मालदारी और इनकी कसरत ए औलाद तुमको धोखे में ना डाले, अल्लाह ने तो इरादा करलिया है के इस माल ओ औलाद के ज़रिये से इनको इस दुनिया में सजा दे और इनकी जानें इस हाल में निकले के वो काफ़िर हूँ +[9:86] जब कभी कोई सूरत इस मज़मून (विषय) की नाज़िल हुई कि अल्लाह को मानो और उसके रसूल के साथ मिलकर जिहाद करो तो तुमने देखा के जो लोग मेरे साथ हैं साहब ए मक़दरत (सक्षम लोग) था वही तुमसे अंधकार करने लगे के उन्हें जिहाद की शिर्कत से माफ़ रक्खा जाए, और उन्हें कहा के हमें छोड़ दीजिए के हम बैठने वालों के साथ रहें +[9:87] इन लोगों ने घर बैठने वालों में शामिल होना पसंद किया और इनके दिलों पर थप्पड़ लगा दिया, इस लिए इनकी समझ में अब कुछ नहीं आता +[9:88] बा-खिलाफ इसके रसूल ने और उन लोगों ने जो रसूल के साथ ईमान लाए थे अपनी जान ओ माल से जिहाद किया और अब सारी भलाईयां उन्हीं के लिए हैं और वही फलाह पाने वाले हैं +[9:89] अल्लाह ने उनके लिए ऐसे बाग तय्यर रक्खे हैं जिनका आला नेहरेन बेह राही हैं, उनमें वो हमेशा रहेंगे. ये है अज़ीम ओ शान कामियाबी +[9:90] बदवी (बेडौइन्स) अरब में से भी बहुत से लोग आए जिन्हों ने उजार (बहाना) किए ता-के उन्हें भी पीछे छोड़ दिया रे जाने की इजाज़त दी जाए इस तरह बैठ रहे वो लोग जिन्होन ने अल्लाह और उसके रसूल से ईमान का झूठा अहद किया था। बदवियों (बेडौइन्स) में से जिन लोगों ने कुफ्र का तरीक़ा इख्तियार किया है अनक़रीब वो दर्दनाक सज़ा से दो-चार होंगे +[9:91] ज़ीफ़ (पुराना) और बीमार लोग और वो लोग जो शिर्कत ए जिहाद के लिए राह नहीं पाते, अगर पीछे रह जाएं तो कोई हर्ज नहीं जबके वो खुलूस ए दिल के साथ अल्लाह और उसके रसूल के वफ़ादार माननीय। ऐसे मोहसिनेन पर ऐतराज़ की कोई गुंजाईश नहीं है और अल्लाह दरगुज़र करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[9:92] इसी तरह उन लोगों पर भी कोई ऐतराज़ का मौका नहीं है जिहों ने खुद आ कर तुमसे अंधकार की थी के हमारे लिए सावरियां बहम पहन सकती हैं, और जब तुमने कहा के मैं तुम्हारे लिए सावरियों का इंतिज़ाम नहीं कर सकता तो वो मजबूरन वापस आ गए और हाल ये था के उनकी आंखों से आंसू जारी थे और उन्हें इस बात का बड़ा रंज था के वो अपने खर्च पर शरीक ए जिहाद होने की मक़दरत नहीं रखते +[9:93] अलबत्ता एतराज उन लोगों पर है जो मालदार हैं और फिर भी तुमसे डार्कह्वास्टीन करते हैं के उन्हें शिर्कत ए जिहाद से माफ रखा जाएगा। उन्होन ने घर बैठने वालियों में शामिल होना पसंद किया और अल्लाह ने उनके दिलों पर थप्पड़ (सील) लगा दिया, इस लिए के अब ये कुछ नहीं जानते (के अल्लाह के हां इनकी रवीश का क्या नतीजा निकलने वाला है) +[9:94] तुम जब पलट कर इनके पास पहुंचोगे तो ये तरह तरह के उज़रात (बहाना) पेश करेंगे मगर तुम साफ कह देना के “बहाने ना करो, हम तुम्हारी किसी बात का ऐतबार ना करेंगे, अल्लाह ने हमको तुम्हारे हालात बता दिए हैं, अब अल्लाह और उसका रसूल तुम्हारे तर्जे अमल को देखेगा फिर तुम उसकी तरफ पलटोगे जो खुले और छुपे सब का जाने वाला है और वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या कुछ करते रहोगे” +[9:95] तुम्हारी वापसी पर ये तुम्हारे सामने कसमें खाएंगे ता-के तुम इनसे सिर्फ-ए-नजर करो (उन्हें अकेला छोड़ दो) तो बहकाओ तुम इनसे सिर्फ-ए-नजर ही करो। क्योंकि ये गंदी है और इनका असली मुकाम जहन्नुम है जो इनकी कमाई के बदले में इन्हें नसीब होगी +[9:96] ये तुम्हारे सामने कसमें खाएंगे के ता-के तुम इनसे राजी हो जाओ, हलांके अगर तुम इनसे राजी हो भी जाओगे तो अल्लाह हरगिज ऐसे फासिक लोगों से राज़ी ना होगा +[9:97] ये बदवी (बेदौइन) अरब कुफ्र ओ निफ़ाक (पाखंड) में ज़्यादा सच है और इनके मामले में इस अमृत के इम्कानात (संभावना) ज़्यादा हैं के हमें दीन के हुदूद से ना-वाक़िफ़ रहे जो अल्लाह ने अपने रसूल पर नाज़िल किया है। अल्लाह सब कुछ जानता है और हकीम ओ दाना है +[9:98] उन बदवियों में ऐसे ऐसे लोग मौजूद हैं जो राह ए खुदा में कुछ खर्च करते हैं तो इसे अपने ऊपर ज़बरदस्ती की छत्ती (जुर्माना) समझते हैं और तुम्हारे हक़ में ज़माने की गर्दिशों का इंतज़ार कर रहे हैं (के तुम किसी चक्कर में फँसो तो वो अपनी गर्दन से हमें निज़ाम की इताअत का क़लदा उतार फेंकें जिसमें तुमने उन्हें कस दिया है) हालंके बड़ी का चक्कर खुद इन्ही पर मुसल्लत है और अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है +[9:99] और इन्ही बदियों में कुछ लोग ऐसी भी है जो अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर पर ईमान रखते हैं और जो कुछ ख़र्च करते हैं उसे अल्लाह के हान तक़र्रब (मंहगाई) का और रसूल की तरफ से रहमत की दुआएं लेने का ज़रिया बनाते हैं। हाँ! वो जरूर इनके लिए तकरारब (निकटता) का जरूरी है और अल्लाह जरूर इनको अपनी रहमत में दखल देगा। यकीनन अल्लाह दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[9:100] वो मुहाजिर ओ अंसार जिन्होन ने सब से पहले दावत ए ईमान पर लब्बैक कहने में सबकत की, नीज़ वो जो बाद में रस्तबाज़ी के साथ पिचे आए, अल्लाह उनसे रज़ी हुआ और वो अल्लाह से रज़ी हुए, अल्लाह ने उनके लिए ऐसे बाग मुहैय्या कर रखे हैं जिनके बारे में खास बातें होंगी और वो उनमें हमेशा रहेंगे, यही अज़ीम ओ शान कामयाब है +[9:101] तुम्हारे गिर्द ओ पेश जो बादवी रहते हैं उन में बहुत से मुनाफिक हैं और इसी तरह खुद मदीना के बाशिंदों में भी मुनाफिक मौजुद हैं जो निफाक में तक (विशेषज्ञ) हो गए हैं। तुम इन्हें नहीं जानते, हम उनको जानते हैं। करीब है वो वक्त जब हम उनको दोहरी सजा देंगे, फिर वो ज्यादा बड़ी सजा के लिए वापस ले जायेंगे +[9:102] कुछ और लोग हैं जिन्हों ने अपने कसूरों का ऐतराफ करलिया है उनका अमल मखलूट (कर्मों का मिश्रित रिकॉर्ड, अच्छे और बुरे) है। कुछ नया है और कुछ बढ़िया। बैद नहीं के अल्लाह उनपार फिर मेहरबान हो जाए क्योंकि वो दरगुज़र करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[9:103] (ऐ नबी), तुम इनके अमवाल में से सदक़ा लेकर इन्हें पाक करो और (नेकी की राह में) इन्हें बढ़ाओ, और इनके हक़ में दुआ ए रहमत करो क्यों तुम्हारी दुआ इनके लिए वजह तस्कीन होगी। अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है +[9:104] क्या इन लोगों को मालूम नहीं है कि वो अल्लाह ही है जो अपने बंदों की तौबा कबूल करता है और उनकी खैरात को कबूलियत अता फरमाता है, और ये के अल्लाह बहुत माफ करने वाला और रहीम है +[9:105] और (ऐ नबी), में लोगों से कहदो के तुम अमल करो, अल्लाह और उसका रसूल और मोमिनीन सब देखेंगे के तुम्हारा तर्ज़-ए-अमल अब क्या रहता है, फिर तुम उसकी तरफ पलटे जाओगे जो खुले और छुपे सबको जानता है और वो तुम्हे बता देगा के तुम क्या करते रहोगे +[9:106] कुछ दूसरे लोग हैं जिनका मामला भी खुदा के हुकुम पर ठहरा हुआ है, चाहे उन्हें सज़ा दे और चाहे उनपर अज़सर-ए-नव (फिर से) मेहरबान हो जाए, अल्लाह सब कुछ जानता है और हकीम ओ दाना है +[9:107] कुछ और लोग हैं जिन्होंने एक मस्जिद बनाई है ग़रज़ के लिए के (दावत ए हक़ को) नुक़्सान पूछैं, और (ख़ुदा की बंदगी करने के बजाये) कुफ़्र करें, और एहले ईमान में फ़ुट (तफ़्राका/डिवीज़न) डालें, और (इस बज़हिर इबादत गाह को) हमें शक्स के लिए कमेंगाह (स्टेशन) बनाएं जो इस्से पहले खुदा और रसूल के ख़िलाफ़ बरस ए पाइकर (संघर्ष में) हो चूका है। वो जरूर कसमें खा खा कर कहेंगे के हमारा इरादा तो भलाई के सिवा किसी दूसरी चीज का ना था मगर अल्लाह गवाह है के वो काटते झूठे हैं +[9:108] तुम हरगिज इस इमारत में खड़े ना होना। जो मस्जिद अव्वल रोज़ से तक़वा पर क़याम की गई थी, वही इसके लिए ज़्यादा मौज़ून (हक़दार/उचित जगह) है के तुम उसमें (इबादत के लिए) खड़े हो। उसमें ऐसे लोग हैं जो पाक रहना पसंद करते हैं और अल्लाह को पाकीज़गी इख्तियार करने वाले ही पसंद हैं +[9:109] फिर तुम्हारा क्या ख्याल है के बेहतर इंसान वो है जिसने अपनी इमारत की बुनियाद खुदा के खौफ और उसकी रज़ा की तालाब पर राखी हो या वो जिसने अपनी इमारत एक वादी की खोकली बेसबात कगार पर उठाई (बैंक का किनारा गिरने वाला था) और वो उसे लेकर सीधी जहन्नुम की आग में जा गिरी? ऐसे जालिम लोगों को अल्लाह कभी सीधी राह नहीं दिखाता +[9:110] ये इमारत जो इन्हों ने बनाई है, हमेशा इनके दिलों में यकीनी की जड (जड़) बनी रहेगी (जिसके निकलने की अब कोई सूरत नहीं) बजुज इसके के इनके दिल ही पारा हो जाएंगे। अल्लाह निहायत बाख़बर और हकीम ओ दाना है +[9:111] हकीकत ये है कि अल्लाह ने मोमिनो से उनके नफ़्स (जान) और उनके माल जन्नत के बदले ख़त्म लिए हैं, वो अल्लाह की राह में लड़ते और मरते हैं। उनसे (जन्नत का वादा) अल्लाह के ज़िम्मे एक पुख्ता वादा है तौरात (तोराह) और इंजील और कुरान में। और कौन है जो अल्लाह से बढ़कर अपने अहद का पूरा करने वाला हो? पस ख़ुशियाँ मनाओ अपने हमसे सौदा (सौदा) पर जो तुमने खुदा से चुका लिया है, यही सबसे बड़ी कामयाबी है +[9:112] अल्लाह की तरफ बार-बार पलटने वाले, उसकी बंदगी बाजा लाने वाले, उसकी तारीफ के गुन गाने वाले, उसकी खातिर ज़मीन में गर्दिश करने वाले वाले, उसके आगे रुकू और सजदे करने वाले, नेकी का हुकुम देने वाले, बड़ी से रोकने वाले, और अल्लाह के हुदूद की हिफाजत करने वाले, (इस शान के होते हैं वो मोमिन जो अल्लाह से खत्म ओ फारोखत का ये मामला ताई करते हैं) और (ऐ नबी), में मोमिनो को खुश खबरी दे दो +[9:113] नबी को और उन लोगों को जो ईमान लाए हैं, ज़ेबा नहीं है के मुशरिकों के लिए मगफिरत की दुआ करें, चाहे वो उनके रिश्तेदार ही क्यों न हों, जबके अनपर ये बात खुल चुकी है के वो जहन्नुम के मुस्तहिक़ हैं +[9:114] इब्राहिम ने अपने बाप के लिए जो दुआ ए मगफिरत की थी वो तो हमसे वादे की वजह से थी जो उसने अपने बाप से किया था, मगर जब उसपर ये बात खुल गई के उसका बाप खुदा का दुश्मन है तो वो उससे बेज़ार हो गया। हक़ ये है के इब्राहीम बड़ा रक़ीक़-उल-क़ल्ब (कोमल हृदय) ओ खुदा तरस और बर्दबार (ईश्वर से डरने वाला और सहनशील) आदमी था +[9:115] अल्लाह का ये तरीक़ा नहीं है के लोगों को हिदायत देने के बाद फिर गुमराही में मुबतला करे जब तक के उन्हें साफ साफ बता ना दे के उन्हें किन चीज़ों से बचना चाहिए। दर हक़ीक़त अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है +[9:116] और ये भी वक़िया है के अल्लाह ही के क़ब्ज़े में आसमां ओ ज़मीन की सल्तनत है, उसके इख्तियार में जिंदगी ओ मौत है, और तुम्हारा कोई हमी ओ मददगार ऐसा नहीं है जो तुम्हें बचा सके +[9:117] अल्लाह ने माफ कर दिया नबी को और उन मुहाजिरीन ओ अंसार को जिन्हों ने बड़ी तंगी के वक्त में नबी का साथ दिया, अगरचे उनमें से कुछ लोगों के दिल काजी की तरफ मायिल हो चुके थे (मगर जब उन्होन ने उस काजी (कुटिलता) का इत्तेबा ना किया बलके नबी का साथ हाय दिया तो) अल्लाह ने उन्हें माफ कर दिया, उसका मामला लोगों के साथ शफाकत ओ मेहरबानी का है +[9:118] और उन तीनो को भी उसने माफ़ किया जिनके मामले को मुल्तावी कर दिया गया था, जब ज़मीन अपनी साड़ी वुसैट (विशालता) के बावज़ूद अपर टैंग हो गई और उनकी अपनी जानेन भी उन्पर बार होने लगी और उन्होन ने जान लिया के अल्लाह से बचने के लिए कोई जाए पनाह खुद अल्लाह ही के दामन ए रहमत के सिवा नहीं है, अल्लाह के पास अपनी मेहरबानी से उनकी तरफ पलटा ता-के वो उसकी तरफ पलट आएं। यकीनन वो बड़ा माफ करने वाला और रहीम है +[9:119] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो और सच्चे लोगों का साथ दो +[9:120] मदीना के बशिंदों और गिर्द ओ नवाह (आसपास रहने वाले)के बदवियों को ये हरगिज़ ज़ेबा ना था के अल्लाह के रसूल को छोड़ कर घर बैठे रहते और उसकी तरफ से बे-परवा होकर अपने-अपने नफ़्स की फ़िक्र में लग जाते। इस लिए ऐसा कभी न होगा के अल्लाह की राह में भूख प्यास और जिस्मानी मुशक्कत की कोई तकलीफ वो झेलें, और मुनकिरीन हक को जो राह नागवार है उसपर कोई कदम वो उठाएं, और किसी दुश्मन से [अदावत (दुश्मनी) ए हक का) कोई इंतकाम वो लें और इसके बदले उनके हक में एक अमल-ए-सालेह न लिखा जाए। यकीनन अल्लाह के हां मोहसिनों का हक़ उल खिदमत मारा नहीं जाता है +[9:121] इसी तरह ये भी कभी न होगा के (राह ए खुदा में) थोड़ा या बहुत कोई खर्च वो उठायें और (साईं ए जिहाद में) कोई वादी (घाटी) वो पार करें और उनके हक़ में इसे लिख ना लिया जाए ता-के अल्लाह उनके इस अच्छे कारनामे का सिला उन्हें अता करे +[9:122] और ये कुछ जरूरी ना था के एहले ईमान सारे के सारे ही निकल खड़े होते, मगर ऐसा क्यों ना हुआ के उनकी आबादी के हर हिस्से में से कुछ लोग निकल कर आते और दीन की samajh भुगतान करते और वापस जा कर अपने इलाक़े के बाशिंदों (लोगों) को ख़बरदार करते ता-के वो (गैर मुस्लिमाना राविश से) परहेज़ करते +[9:123] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जंग करो उन मुनकिरीन ए हक से जो तुमसे करीब हैं और चाहिए के वो तुम्हारे अंदर ताकत पाएं, और जान लो के अल्लाह मुत्तक़ियों के साथ हैं +[9:124] जब कोई नई सूरत नाज़िल होती है तो इनमें से बाज़ लोग (मज़ाक के तौर पर मुसलमानो से) पूछते हैं के "कहो, तुम में से किसके ईमान में इसकी इज़ाफ़ा हुआ?" (इसका जवाब ये है के) जो लोग ईमान लाए हैं उनके ईमान में तो फिल-वकाई (हर नाज़िल होने वाली सूरत ने) इजाफा ही किया है और वो इसी दिलशाद (खुशी मना रहे हैं) हैं +[9:125] अलबत्ता जिन लोगों के दिलों को (निफाक का) रोग लगा हुआ था उनकी साबिक नजासत (गंदगी) पर (हर नई सूरत ने) एक और नजासत (गंदगी) का इजाफा करदिया और वो मरते दम तक कुफ्र ही में मुबतला रहे +[9:126] क्या ये लोग देखते नहीं के हर साल दो मरतबा ये आजमाइश में डाले जाते हैं? मगर इसपर भी ना तौबा करते हैं ना कोई सबक (पाठ) लेते हैं +[9:127] जब कोई सूरत नाज़िल होती है तो ये लोग आंखें ही आंखों में एक दूसरे से बातें करते हैं कि कहीं कोई तुमको देख तो नहीं रहा है, फिर चुपके से निकल भागते हैं। अल्लाह ने इनके दिल फेर दिये हैं क्योंकि ये ना-समझ लोग हैं +[9:128] देखो! तुम लोगों के पास एक रसूल आया है जो खुद तुम्हारे अंदर से है, तुम्हारा नुक्सान में पढ़ना उसपर शाक़ (गिरान/गंभीर) है, तुम्हारी फलाह का वो हार (लालची से चिंतित) है, ईमान लाने वालों के लिए वो शफीक और रहीम है +[9:129] अब अगर ये लोग तुमसे मुह फेरते हैं हैं तो (ऐ नबी), इनसे कहदो के "मेरे लिए अल्लाह बस करता है (काफी है/मुझे काफी है), कोई माबूद नहीं मगर वो, उस पर मैंने भरोसा किया और वो मालिक है अर्श ए अज़ीम का" + +Surah 10: Yunus (Jonah) +---------------------------------------- +[10:1] अलिफ़ लाम रा, ये उस किताब की आयतें हैं जो हिकमत ओ दानिश से लबरेज है +[10:2] क्या लोगों के लिए ये एक अजीब बात हो गई है कि हमने खुद उन्ही में से एक आदमी को इशारा किया के (गफलत में पड़े हुए) लोगों को चौका दे और जो मान लें उनको खुश खबरी दे दे उनके लिए उनके लिए रब के पास सच्ची इज़्ज़त ओ सरफ़राज़ी है? (क्या यही वो बात है जिसपर) मुनकिरीन ने कहा के ये शक्स तो खुला जादूगर है +[10:3] हकीकत ये है के तुम्हारा रब वही खुदा है जिसने आसमान और ज़मीन को छे (छह) दिनों में पेदा किया, फिर तख्त ए हुकुमत पर जलवा-गर हुआ और कायनात का इंतेज़ाम चल रहा है। कोई शफाअत (सिफारिश) करने वाला नहीं इल्ला ये के इसकी इजाजत के बाद शफाअत करे। याही अल्लाह तुम्हारा रब्ब है लिहाज़ा तुम उसकी इबादत करो। फिर क्या तुम होश में न आओगे +[10:4] उसकी तरफ तुम सबको पलट कर जाना है। ये अल्लाह का पक्का वादा है. बेशक पैदाइश की इब्तेदा वही करता है, फिर वही दोबारा पैदा करेगा, ता-के जो लोग ईमान लाये और जिन्होन ने नीक अमाल किये उनको पूरे इन्साफ के साथ जजा दे, और जिन्होन ने कुफ्र का तरीक़ा इख्तियार किया वो खौलता (उबलता हुआ) हुआ पानी पियें और दर्दनाक साज़ा भुगतानें हमें इंकार ए हक के पद में जो वो करते रहे +[10:5] वही है जिसने सूरज को उजियाला बनाया और चांद को चमक दी और चांद के घटने बढ़ने की मंजिलें ठीक ठीक मुकर्रर करदी ता-के तुम हमें बरसों (साल) और तारीखों के हिसाब मालूम करो। अल्लाह ने ये सब कुछ (खेल के तौर पर नहीं बलके) ब-मकसद ही बनाया है। वो अपनी निशानियों को खोल खोल कर पेश कर रहा है उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं +[10:6] यकीनन रात और दिन के उलट फेर में और हर उस चीज़ में जो अल्लाह ने ज़मीन और आसमान में पैदा की है, निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो (गलत बनी ओ) गलत रावी से) बचना चाहते हैं +[10:7] हकीकत ये है के जो लोग हमसे मिलने की तवाक्कु (उम्मीद) नहीं रखते और दुनिया की जिंदगी ही पर राजी और मुतमईन हो गए हैं, और जो लोग हमारी निशानियों से गाफिल हैं +[10:8] उनका आखिरी ठिकाना जहन्नुम होगा उन बुराइयों की याद में जिनका इकतिसाब वो (अपने इस गलत अकीदत और गलत तर्ज-ए-अमल की वजह से) करते रहें +[10:9] और ये भी हकीकत है के जो लोग ईमान लाए (यानी जिन्हों ने उन सदकातों को कबूल किया जो इस किताब में पेश की गई हैं) और नेक अमल करते रहे उन्हें उनका रब उनके ईमान की वजह से सीधी राह चलाएगा। नियामत भारी जन्नतों में उनके आला नेहरें बहेंगी +[10:10] वहां उनकी सदा (पुकार/आवाज़) ये होगी के "पाक है तू ऐ खुदा", उनकी दुआ ये होगी के "सलामती हो: और उनकी हर बात का खात्मा इस पर होगा के "सारी तारीफ अल्लाह रब्बुल आलमीन ही के लिए है" +[10:11] अगर कहीं अल्लाह लोगों के साथ बुरा मामला करने में भी इतनी ही जल्दी करता जितनी वो दुनिया की भलाई मांगे में जल्दी करते हैं तो उनकी मोहलत और अमल कभी की खत्म हो जाती है, (मगर हमारा ये तरीका नहीं है)। मिलने की तवक्कु नहीं रखते उनकी सरकशी में भटकने के लिए चोट दे देते हैं +[10:12] इंसान का हाल ये है कि जब उसपर कोई सख्त वक्त आता है तो खड़े और बैठे और लेते हैं (झूठ बोलकर) हमको पुकारता है, मगर जब हम उसकी मुसीबत टाल देते हैं तो ऐसा चल नायकलता है कि गोया उसने कभी अपने किसी बुरे वक्त पर हमको पुकारा ही ना था। इस तरह हद से गुज़र जाने वालों के लिए उनके करतूत ख़ुशनुमा बना दिए गए हैं +[10:13] लोगन, तुमसे पहले की क़ौमों को (जो अपने अपने ज़माने में बार सर ई उरूज थी) हमने हलाक कर दिया जब उन्होन ने जुल्म की रवीश इख्तियार की और उनके रसूल उनके पास खुली खुली निशानियां लेकर आये और उन्होन ने ईमान ला कर ही ना दिया। इस तरह हम मुजरिमों को उनके जरायम (अपराध) का बदला दिया करते हैं +[10:14] अब उनके बाद हमने तुमको ज़मीन में उनकी जगह दी है ता-के देखें तुम कैसे अमल करते हो +[10:15] जब उन्हें हमारी साफ-साफ बातें सुनाई जाती हैं तो वो लोग जो हमसे मिलने की बात करते हैं तवक्कू नहीं रखते, कहते हैं "इस्के बजाये कोई और कुरान लाओ या इस में कुछ तरमीम (परिवर्तन)" करो। (ऐ मुहम्मद), इंसे कहो "मेरा ये काम नहीं है के अपनी तरफ से इस में कोई तगय्युर ओ तबद्दुल कार्लून। मैं तो बस हमें वही का पेयरो (फॉलोअर) हूं जो मेरे पास भेजती है। अगर मैं अपने रब की नफ़रमानी करूं तो मुझे एक बड़ा मुश्किल दिन के अज़ाब का डर है" +[10:16] और कहो "अगर अल्लाह की मशियत न होती तो मैं ये कुरान तुम्हें कभी न सुनाता और अल्लाह तुम्हें इसकी खबर तक न देता। आखिर इस पहले मैं एक उमर तुम्हारे दरमियान गुजार चुका हूं। क्या तुम अक्ल से काम नहीं लेते +[10:17] फिर उससे बढ़कर जालिम और कौन होगा जो एक झूठी बात गड़बड़ कर अल्लाह की तरफ़ इंसान करे या अल्लाह की वक़ाई आयत को झूठ करार दे? यक़ीनन मुजरिम कभी फलाह नहीं पा सकते” +[10:18] ये लोग अल्लाह के सिवा उनकी परस्ती कर रहे हैं जो इनको न नुक्सान पहुंचा सकते हैं न नफा (फ़ैयदा), और कहते ये हैं के ये अल्लाह के सिवा हमारे सिफ़ारिश हैं। (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो "क्या तुम अल्लाह को हमारी बात बताते हो जैसे वो ना आसमानों में जानता है ना ज़मीन में?" पाक है वो और बाला ओ बारतार है उस शिर्क से जो ये लोग करते हैं +[10:19] इब्तेदान (शुरुआत में) सारे इंसान एक ही उम्मत थी, बाद में उन्होन ने मुख्तलिफ अकीदे और मसलक बना लिया। और अगर तेरे रब की तरफ से पहले ही एक बात ताई ना करली गई होती तो जिस चीज में वो बहम इख्तिलाफ कर रहे हैं उसका फैसला कर दिया जाता +[10:20] और ये जो वो कहते हैं के इस नबी पर उसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों न उतारी गई, तो उनसे कहो "गैब का मालिक ओ मुख्तार तो अल्लाह ही है। अच्छा, इंतजार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतजार करता हूं" +[10:21] लोगों का हाल ये है के मुसीबत के बाद जब हम उनको रहमत का मजा चखाते हैं तो प्यार ही वो हमारी निशानियों के मामले में चल बज़ियां शुरू कार्डते हैं. इनसे कहो "अल्लाह अपनी चाल में तुमसे ज्यादा तेज है, उसके फरिश्ते तुम्हारी सब मक्कारियों को कलाम-बंद (रिकॉर्डिंग) कर रहे हैं" +[10:22] वो अल्लाह ही है जो तुमको खुश्की (जमीन) और तारी (समुद्र) में चलाता है। चुनांचे जब तुम कश्तियों में सवार होकर बाद-ए-मवाफिक पर फरहान-ओ-शादान सफर कर रहे हो और फिर यकीन बाद-ए-मुखालिफ़ का ज़ोर होता है (भयंकर आंधी आती है) और हर तरफ से मौजों (लहरें) के थपेड़े लगते हैं और मुसाफिर समझ लेते हैं के तूफ़ान में घिर गए, हमें वक्त सब अपने दीन को अल्लाह ही के लिए खालिस करके उसकी दुआएं मांगते हैं के "अगर तू नहीं हमको इस बाला से नजात दे दी तो हम शुक्र गुजार बंद करेंगे" +[10:23] मगर जब वो उनको बचा लेता है तो फिर वही लोग हक से मुन्हारिफ होकर जमीन मैं बगावत करने लगता हूं। लोगन, तुम्हारी ये बगावत उल्टी तुम्हारे ही खिलाफ पढ़ रही है, दुनिया के चांद रोजा मजा आ रहा है (लूट लो), फिर हमारी तरफ तुम्हें पलट कर आना है, हमें वक्त हम तुम्हें बता देंगे के तुम क्या कुछ कर रहे हो +[10:24] दुनिया की ये जिंदगी (जिस के नशे में मस्त होकर तुम हमारी निशानियां से गफलत बारात रहे हो) इसकी मिसाल ऐसी है जैसे आसमान से हमने अपना पानी बरसाया तो जमीन की पैदावर, जैसे आदमी और जानवर सब खाते हैं, खूब घनी हो गई, फिर ऐन हमारा वक्त जबके जमीन अपनी बहार पर थी और खेतियाँ बानी सांवरी खादी थी और उनके मालिक ये समझ रहे थे के अब हम इनसे फ़ायदा उठाने पर कादिर हैं, यकीन रात को या दिन को हमारा हुकुम आ गया और हमने उसे ऐसा घरत करके रख दिया के गोया कल वहां कुछ था ही नहीं। इस तरह हम निशानियां खोल खोल कर पेश करते हैं उन लोगों के लिए जो सोचने वाले हैं +[10:25] (तुम इस ना पयार जिंदगी के फरेब में मुब्तिला हो रहे हो) और अल्लाह तुम्हें दार-उस-सलाम की तरफ दावत दे रहा है, (हिदायत उसके इख्तियार में है) जिसको वो चाहता है सीधा रास्ता दिखा देता है +[10:26] जिन लोगों ने भलाई का तरीका बताया इख्तियार किया उनके लिए भलाई है और माज़ीद फ़ज़ल, उनके चेहरों पर रु-सियाही और ज़िल्लत न चाएगी (न उदासी और न ही अपमान)। वो जन्नत के मुस्तहिक हैं जहां वो हमेशा रहेंगे +[10:27] और जिन लोगों ने बुराइयां कमाई उनकी बुराई जैसी है वैसा ही वो बदला पी आएंगे, ज़िल्लत उन्पर मुसल्लत होगी, कोई अल्लाह से उनको बचाने वाला न होगा, उनके चेहरों पर ऐसी तारीख़ चाय हुई होगी जैसी रात के सियाह (अंधेरा) परदे उनपर पड़े हुए माननीय। वो दोज़ख के मुस्तहक़ हैं जहां वो हमेशा रहेंगे +[10:28] जिस रोज़ हम सब को एक साथ (अपनी अदालत में) इकठ्ठा करेंगे, फिर उन लोगों ने जिन्होनें शिर्क किया है कहेंगे के ठहर जाओ तुम भी और तुम्हारे बने शरीक भी। फिर हम उनके दरमियान से अजनबीयत का पर्दा हटा देंगे और उनके शरीक कहेंगे के “तुम हमारी इबादत तो नहीं करते थे +[10:29] हमारे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह की गवाही काफी है के (तुम अगर हमारी इबादत करते भी थे तो) हम तुम्हारी उस इबादत से बिल्कुल बे-खबर थाय।” +[10:30] हमें वक्त हर शक्स अपने किया का मजा चख लेगा, सब अपने हकीकी मालिक की तरफ फेर दिए जाएंगे और वो सारे झूठ जो उनको ने घड रक्खे थे गम हो जाएंगे +[10:31] इनसे पूछो, कौन तुमको आसमान और जमीन से रिज्क देता है? ये समात (सुनना) और बीनायी (दृष्टि) की कुव्वतें किसके इख्तियार में हैं? कौन बे-जान में से जानदार को और जानदार में से कौन निकलता है? कौन है नज़्म ए आलम की तदबीर कर रहा है (ब्रह्मांड के सभी मामलों को नियंत्रित करता है)? वो जरूर कहेंगे के अल्लाह, कहो फिर तुम (हकीकत के खिलाफ चलने से) परहेज़ नहीं करते +[10:32] तब तो यही अल्लाह तुम्हारा हक़ीक़ी रब है फिर हक के बाद गुमराही के सिवा और क्या बाकी रह गया? आख़िर ये तुम किधर फिराए जा रहे हो +[10:33] (ऐ नबी, देखो) इस तरह नफरमानी इख्तियार करने वालों पर तुम्हारे रब की बात सादिक आ गई के वो मान कर न देंगे +[10:34] इनसे पूछो, तुम्हारे रुके हुए हुए शेयरों में कोई है जो तख़लीक़ (सृजन) की इब्तेदा भी करता हो और फिर उसका इरादा भी करे? कहो वो सिर्फ अल्लाह है जो तकलीक की इब्तेदा भी करता है और उसका इरादा भी, फिर तुम ये किस उल्टी राह पर चलाये जा रहे हो +[10:35] इनसे पूछो, तुम्हारे रुके हुए शरीकोन में कोई ऐसा भी है जो हक की तरफ रहनुमाई करता हो? कहो वो सिर्फ अल्लाह है जो हक की तरफ रहनुमाई करता है। फिर भला बताओ जो हक की तरफ रहनुमाई करता है वो इसका ज्यादा मुस्तहिक है के उसकी जोड़ी की जाए या वो जो खुद रह नहीं पता इल्ला ये के उसकी रहनुमायी की जाए? आख़िर तुम हो क्या गया है, कैसे उलटे-उल्टे फ़ैसले करते हो +[10:36] हकीकत ये है कि अक्सर लोग महज़ क़यास ओ गुमान (अनुमान) के पीछे चले जा रहे हैं, हालंके गुमान हक की ज़रूरत को कुछ भी पूरा नहीं करता। जो कुछ ये कर रहा है अल्लाह उसको खूब जानता है +[10:37] और ये कुरान वो चीज नहीं है जो अल्लाह की वही ओ तालीम के बगैर तसनीफ (रचित/लिखित) कार्लिया जाए। बल्के ये तो जो कुछ पहले आ चूका था उसकी तस्दीक और अल-किताब की तफ़सील है। इसमें कोई शक्क नहीं के ये फ़रमारवा-ए-क़ायनात की तरफ से है +[10:38] क्या ये लोग कहते हैं के पैगम्बर ने इसे खुद तसनीफ करलिया है? कहो "अगर तुम अपने इस इल्ज़ाम में सच्चे हो तो एक सूरत इस जैसी तसनीफ कर लाओ और एक खुदा को छोड़ दो जिसे बुला सकते हो मदद के लिए बुला लो" +[10:39] असल ये है के जो चीज़ इनके इल्म की गिरफ़्तार में नहीं आई और जिसका माल भी इनके सामने नहीं आया (जिसका अंतिम सीक्वल उन्हें स्पष्ट नहीं था), उसको इन्होन ने (ख्वा मा ख्वा अटकल पिचू) झूठला दिया। इसी तरह तो इनसे पहले के लोग भी झूठला चुके हैं। फिर देखलो उन जालिमों का क्या अंजाम हुआ +[10:40] इसमें से कुछ लोग ईमान लाएंगे और कुछ नहीं लाएंगे। और तेरा रब उन मुफसीदों (शरारत करने वालों) को खूब जानता है +[10:41] अगर ये तुझसे झूठ बोलते हैं तो कहदे के "मेरा अमल मेरे लिए है और तुम्हारा अमल तुम्हारे लिए। जो कुछ मैं करता हूं उसकी जिम्मेदारी से तुम बारी हो और जो कुछ तुम कर रहे हो उसकी ज़िम्मेदारी से मैं बारी हूँ” +[10:42] इन में बहुत से लोग हैं जो तेरी बातें सुनते हैं, मगर क्या तू बेहरों को सुनेगा ख्वा वो कुछ ना समझता हूँ +[10:43] इन में बहुत से लोग हैं जो तुझे देखते हैं, मगर क्या तू अंधों को राह बताएगा ख्वा उन्हें कुछ ना सूझता हो +[10:44] हकीकत ये है के अल्लाह लोगों पर जुल्म नहीं करता, लोग खुद ही अपने ऊपर जुल्म करते हैं +[10:45] (आज ये दुनिया की जिंदगी में मस्त हैं) और जिस रोज अल्लाह इनको इकट्ठ करेगा तो (यही दुनिया की जिंदगी यहीं ऐसी है) महसूस होगी) गोया ये महज़ एक घड़ी भर आपस में जान पहचान करने को थे। (हमें वक्त तहकीक हो जाएगा के) फिल-वाक़े सख़्त घाटे (नुक्सन) में रहे वो लोग जिन्होन ने अल्लाह की मुलाक़ात को झुटलाया और हरगिज़ वो राह ए रास्ते पर ना थाय +[10:46] जिन ब्यूरे नटैज से हम इन्हें डरा रहे हैं उनका कोई हिसा हम तेरे जीते जी दिखा दें या इसे पहले हाय तुझ उठा लें, बाहर हाल इन्हें आना हमारी ही तरफ है और जो कुछ ये कर रहे हैं उसपर अल्लाह गवाह है +[10:47] हर उम्मत के लिए एक रसूल है फिर जब किसी उम्मत के पास उसका रसूल आ जाता है तो उसका फैसला पूरे इन्साफ के साथ चुका दिया जाता है और उसपर जरा बराबर जुल्म नहीं किया जाता +[10:48] कहते हैं: अगर तुम्हारी ये धमकी सच्ची है तो आखिर ये कब पूरी होगी +[10:49] कहो "मेरे इख्तियार में खुद अपना नफ़ा (फ़ैयदा) ओ ज़रार (नुकसान) भी नहीं। सब कुछ अल्लाह की मशियत पर मौक़ुफ़ है। हर उम्मत के लिए मोहलत की एक मुद्दत है, जब ये मुद्दत पूरी हो जाती है तो घड़ी भर की तकदीम ओ तक़हीर (देरी) भी नहीं होती” +[10:50] इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा था कि अगर अल्लाह का अजब अज़ाब अचानक रात को या दिन को आ जाए (तो तुम क्या कर सकते हो?) आख़िर ये ऐसी कौन सी चीज़ है जिसके लिए मुजरिम जल्दी मचाएँ +[10:51] क्या जब वो तुमपर आ पाडेय वह समय तुम उसे मानोगे? अब बचना चाहते हो? हालंके तुम खुद ही इसके जल्दी आने का तकाजा कर रहे थे +[10:52] फिर जालिमों से खा जाएगा के अब हमेशा के अजब का मजा चखो, जो कुछ तुम कमा रहे हो उसकी याद के सिवा और क्या बदला तुमको दिया जा सकता है +[10:53] फिर पूछते हैं क्या वाक़ई ये सच है जो तुम कह रहे हो? कहो "मेरे रब की कसम, ये बिल्कुल सच है और तुम इतना बाल-बूटा नहीं रखते के उसे ज़हूर में आने से रोक दो" +[10:54] अगर हर उस शक्स के पास जिसने ज़ुल्म किया है, रूह ए ज़मीन की दौलत भी हो तो हमें अज़ाब से बचने के लिए वो इस्तेमाल फ़िदिया (प्रायश्चित) मुझे देने पर आमादा हो जाएगा। जब ये लोग इस अज़ाब को देख लेंगे तो दिल ही दिल में पछताएंगे मगर उनके दरमियान पूरे इन्साफ से फैसला किया जाएगा, कोई ज़ुल्म उनपार ना होगा +[10:55] सुनो! आसमानो और ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह का है। सुन रक्खो! अल्लाह का वादा सच्चा है मगर अक्सर इंसान जानता नहीं है +[10:56] वही जिंदगी बक्शता है और वही मौत देता है और उसकी तरफ तुम सबको पलटना है +[10:57] लोगन! तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से हिदायत आ गई है। ये वो चीज़ है जो दिलों के अमराज़ (मर्ज) की शिफ़ा है और जो इसे क़बूल करें उनके लिए रहनुमाई और रहमत है +[10:58] (ऐ नबी), कहो के “ये अल्लाह का फ़ज़ल और उसकी मेहरबानी है के ये चीज़ हमें भेजी, इसपर तो लोगों को ख़ुशी मनानी चाहिए। येह। उन सब चीज़ों से बेहतर है जिन्हें लोग समेट रहे हैं” +[10:59] (ऐ नबी) इंसे कहो, “तुम लोगों ने कभी ये भी सोचा है के जो रिज़्क अल्लाह ने तुम्हारे लिए उतारा था उसमें से तुमने खुद को ही किसी को हराम और किसी को हलाल ठहरा लिया!”। इनसे पूछो, अल्लाह ने तुमको इसकी इजाज़त दी थी? या तुम अल्लाह पर इफ्तारा कर रहे हो +[10:60] जो लोग अल्लाह पर ये झूठ इफ्तार करते हैं (झूठ गढ़ते हैं) हैं उनका क्या गुमान है के कयामत के रोज़ उनसे क्या मामला होगा? अल्लाह तो लोगों पर मेहरबानी की नज़र रखता है मगर अक्सर इंसान ऐसे हैं जो शुक्र नहीं करते +[10:61] (ऐ नबी), तुम जिस हाल में भी होते हो और कुरान में से कुछ भी सुनाते हो, और लोग, तुम भी जो कुछ करते हो हम सब के दौरों में हम तुमको देखते रहते हैं। कोई ज़रा बराबर चीज़ आसमान और ज़मीन में ऐसी नहीं है, ना छोटी ना बड़ी, जो तेरे रब की नज़र से पोशीदा (छुपी) हो और एक साफ़ दफ़्तर में दर्ज़ ना हो +[10:62] सुनो! जो अल्लाह के दोस्त हैं, जो ईमान लाए और जिन्होन ने तक़वा का रवैय्या इख्तियार किया +[10:63] उनके लिए कोई खौफ और रंज का मौका नहीं है +[10:64] दुनिया और आखिरी दोनों जिंदगी में उनके लिए बशारत (खुश-खबरी) ही बशारत है। अल्लाह की बातें बदल नहीं सकतीं. यही बड़ी कामयाबी है +[10:65] (ऐ नबी)! जो बातें ये लोग तुझपर बनाते हैं वो तुझसे रंजीदा ना करें। इज्जत सारी की सारी खुदा के इख्तियार में है, और वो सब कुछ सुनता और जानता है +[10:66] आगाह रहो! आसमान के बसने वाले हैं या ज़मीन के, सब के सब अल्लाह के ममलूक हैं और जो लोग अल्लाह के सिवा कुछ (अपने खुद का सच) शरीकों को पुकार रहे हैं वो निरे वेहम ओ गुमान (अनुमान और केवल अनुमान लगा रहे हैं) के पेयरो हैं और महज़ क़यास अराइयां (केवल अनुमान लगा रहे हैं) करते हैं +[10:67] वो अल्लाह हाय है जिसने तुम्हारे लिए रात बनाई के हमें सुकून हासिल करो और दिन को रोशन बनाया। इस में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो (खुले कानों से पैगम्बर की दावत को) सुनते हैं +[10:68] लोगों ने कहा कि अल्लाह ने किसी को बेटा बनाया है। सुभान अल्लाह! वो तो बे-नियाज़ है. आसमानो और ज़मीन में जो कुछ है सब उसका दूध है। तुम्हारे पास इस क़ौल के लिए आख़िर दलील क्या है? क्या तुम अल्लाह के मुतालिक वो बातें कहते हो जो तुम्हारे इल्म में नहीं हैं +[10:69] (ऐ मुहम्मद), कहदो के जो लोग अल्लाह पर झूठे इफ्तारा बांधते हैं (झूठ का अविष्कार करते हैं) वो हरगिज फलाह नहीं पा सकते +[10:70] दुनिया की चंद रोजा जिंदगी में मजे करलें, फिर हमारी तरफ उनको पलटना है फिर हम इस कुफ्र के बदले जिसका इर्तेक़ाब वो कर रहे हैं उनको साख अज़ाब का मजा चककाएंगे +[10:71] इनको नूह का क़िस्सा सुनाओ, हमें वक़्त का क़िस्सा जब उसने अपनी क़ौम से कहा था के "ऐ बिरादरान ए क़ौम, अगर मेरा तुम्हारे दमियां रहना और अल्लाह की आयतें सुना सुना कर तुम्हें गफलत से बेदार करना तुम्हारे लिए न-काबिल ए बर्दाश्त हो गया है तो मेरा भरोसा अल्लाह पर है। तुम अपने रुके हुए शरीकों को साथ लेकर एक मुत्तफ़िका फैसला करलो और जो मंसूबा (योजना) तुम्हारे पेश ए नज़र हो उसको खूब सोच समझ लो ता-के उसका कोई पहलू तुम्हारी निगाह से पोशीदा ना रहे, फिर मेरे खिलाफ उसको अमल में ले आओ और मुझे हरगिज मोहलत ना दो +[10:72] तुमने मेरी हिदायत से मुंह मोड़ा (तो मेरा क्या नुक्सान किया) मैं तुमसे किसी अजर का तालाब ना था, मेरा अजर तो अल्लाह के ज़िम्मे है, और मुझे हुकुम दिया है के (ख्वा कोई माने या ना माने) मैं खुद मुस्लिम बन कर रहूँ” +[10:73] उन्होन ने उसे झुटलाया और नतीजा ये हुआ के हमने उसे और उन लोगों को जो उसके साथ कश्ती में थे, बचा लिया और उन्हें ज़मीन में जानशीन (उत्तराधिकारियों) ने बनाया और उन सब लोगों को गर्क (डूब) करदिया जिन्हों ने हमारी आयत को झुटलाया था, पास देखलो के जिन्हे मुतनब्बे (चेतावनी) किया गया था (और फिर भी उन्होन ने मान कर ना दिया) उनका क्या अंजाम हुआ। +[10:74] फिर नूह के बाद हमने मुखतलिफ़ पैगम्बरों को उनकी क़ौमों की तरफ भेजा और वो उनके पास खुली खुली निशानियां लेकर आये, मगर जिस चीज़ को उन्होन ने पहला झुटला दिया था उसे फिर मान कर ना दिया। इस तरह हम हद से गुजर जाने वालों के दिलों पर थप्पा लगा देते हैं +[10:75] फिर उनके बाद हमने मूसा और हारून को अपने निशानियों के साथ फिरौन और उसके सरदारों की तरफ भेजा, मगर उनहों ने अपनी बदाई का घमंड किया और वो मुजरिम लोग थे +[10:76] पास जब हमारे पास से हक उनके सामने आया तो उनको ने कहा के ये तो खुला जादू है +[10:77] मूसा ने कहा: "तुम हक को ये कहते हो जबके वो तुम्हारे सामने आ गया, क्या ये जादू है? हालंके जादूगर फलाह नहीं पाया करते" +[10:78] उनहों ने जवाब में कहा "क्या तू इसके लिए आया है के हमें तरीक़े से फेर दे जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है और ज़मीन में बदाई तुम दोनो की क़याम हो जाए? तुम्हारी बात तो हम मन्ने वाले नहीं हैं" +[10:79] और फिरौन ने (अपने आदमियों से) कहा के "हर" माहिर-ए-फन (विशेषज्ञ) जादूगर को मेरे पास हाजिर करो” +[10:80] जब जादूगर आ गए तो मूसा ने उन्हें कहा “जो कुछ तुम्हें फेंकना है फेंको।” +[10:81] फिर जब उन्होन ने अपने एंकर फेंके [कास्ट (उनके कर्मचारी)] दिए तो मूसा ने कहा, "ये जो तुमने फेंका है ये जादू है, अल्लाह अभी इसे बातिल किये देता है, मुफ़्सिदों (शरारत करने वालों) के काम को अल्लाह सुधरने नहीं देता +[10:82] और अल्लाह अपने फ़रमानों से हक को हक कर दिखाता है, ख्वा मुजरेमो को वो कितना ही नागावर हो” +[10:83] (फिर देखो के) मूसा को उसकी क़ौम में से चंद नवाज़वानों के सिवा किसी ने ना माना, फिरौन के डर से और खुद अपनी क़ौम के सरबर-अवार्डा (अपने प्रमुख) लोगन के डर से (जिन्हें खौफ था के) फिरौन उनको अज़ाब में मुबतला करेगा। और वाकिया ये है के फिरौन ज़मीन में गलबा रखा था और वो उन लोगों में से था जो किसी हद पर रुकते नहीं हैं +[10:84] मोसा ने अपनी क़ौम से कहा के "लोगन, अगर तुम अल्लाह पर ईमान रखते हो तो उसपर भरोसा करो अगर मुसलमान हो" +[10:85] उनहों ने जवाब दिया "हमने अल्लाह ही पर भरोसा किया, ऐ हमारे रब, हमें जालिम लोगों के लिए फितना न बना +[10:86] और अपनी रहमत से हमको काफिरों से निजात दे।" +[10:87] और हमने मूसा और उसके भाई को इशारा किया के "मिस्र (मिस्र) में चांद मकान अपनी क़ौम के लिए मुहय्या करो और अपने मकानों (घरों) को क़िबला ठहर लो और नमाज़ क़याम करो और एहले ईमान को बशारत (ख़ुश ख़बरी) दे दो" +[10:88] मूसा ने दुआ की "ऐ हमारे रब, तू नहीं फिरौन और उसके सरदारों को दुनिया की जिंदगी में ज़ीनत और अमवाल (माल) से नवाज़ रक्खा है। ए रब! क्या ये तुम्हारे लिए है कि वो लोगों को तेरी राह से भटकाएं? ए रब, उनका माल ख़राब" (मिटाना) करदे और उनके दिलों पर ऐसी मोहर करदे के ईमान ना लायें जब तक दर्दनक अजब ना देख लें” +[10:89] अल्लाह ताला ने जवाब में फरमाया "तुम दोनों की दुआ कबूल की गई, साबित-कदम रहो और उन लोगों के तारीख की हरगिज जोड़ी न करो जो इल्म नहीं रखते" +[10:90] और हम बानी इसराइल को समंदर से गुजर ले गए फिर फिरौन और उसके लश्कर ज़ुल्म और ज़्यादा की ग़रज़ से उनके पीछे चले हट्टा के जब फ़िरौन डूबने लगा तो बोल उठा "मैंने मान लिया के खुदावंद ए हक़ीक़ी उसके सिवा कोई नहीं है जिसपर बानी इसराइल ईमान लाए, और मैं भी सर ए इताअत झुका देने वालों में से हूँ" +[10:91] (जवाब दिया गया) अब ईमान लता है! हालंके इस्से पहले तक तू नफरमानी करता रहा और फसाद बरपा करने वालों (शरारत करने वालों) में से था +[10:92] अब तो हम सिर्फ तेरी लाश (शव) ही को बचाएंगे ता-के तू बाद की नसलों के लिए निशान ए इब्रत बने अगरचे बहुत से इंसान ऐसे हैं जो हमारी निशानियों से गफ़लत बरात-ते हैं" +[10:93] हमने बनी इसराइल को बहुत अच्छा ठिकाना दिया और निहायत उम्मीद उमदा वासिल ए जिंदगी उन्हें अता किए, फिर उन्होन ने बहाम इख्तिलाफ नहीं किया मगर हमें वक्त जबके इल्म उनके पास आ चूका था। यकीनन तेरा रुब कयामत के रोज़ उनके दरमियान हमें चीज़ का फैसला कर देगा जिसमें वो इख्तिलाफ़ करते रहेंगे हैं +[10:94] अब अगर तुम्हें हिदायत की तरफ से कुछ भी शक हो जो हमें तुझपर नाज़िल की है तो उन लोगों से पूछ ले जो पहले से किताब पढ़ रहे हैं। फिल-वाक़े ये तेरे पास हक़ ही आया है तेरे रब की तरफ से, लिहाज़ा तू शक्क करने वालों में से ना हो +[10:95] और उन लोगों में ना शामिल हो जिन्होन ने अल्लाह की आयत को झुटलाया है, वरना तू नुक्सान उठाने वालों में से होगा +[10:96] हकीकत ये है के जिन लोगों पर तेरे रब का क़ौल रस्त आ गया है (तुम्हारे रब का वचन पूरा हो गया है) उनके सामने ख्वा कोई निशानी आ जाए +[10:97] वो कभी ईमान ला कर नहीं देते जब तक के दर्दनाक अज़ाब सामने न देख लें +[10:98] फिर क्या ऐसी कोई मिसाल है के एक बस्ती अज़ाब देख कर ईमान लाई हो और उसका ईमान उसके लिए नफा बख्श साबित हुआ हो? यूनुस की क़ौम के सिवा (इसकी कोई नज़ीर नहीं) वो क़ौम जब ईमान ले आई थी तो अलबत्ता हमने उसपर से दुनिया की जिंदगी में रुसवाई का अजब ताल दिया था और उसको एक मुद्दत तक जिंदगी से बेहरमंद होने का मौका दे दिया था +[10:99] अगर तेरे रब की मशियत (इच्छा) ये होती (के ज़मीन में सब मोमिन ओ फ़रमाबरदार ही होते) तो सारे एहले ज़मीन ईमान ले आये होते। फिर क्या तू लोगों को मजबूर करेगा के वो मोमिन हो जाए +[10:100] कोई मुतनफ़्फ़िस अल्लाह के इज़ान के बिना ईमान नहीं ला सकता, और अल्लाह का तरीक़ा ये है के जो लोग अक़ल से काम नहीं लेते उनपर गंदगी डाल देता है +[10:101] इंसे कहो "ज़मीन और आसमान में जो कुछ है उसे आंखें खोल कर देखो” और जो लोग ईमान लाना ही नहीं चाहते उनके लिए निशानियां और तम्बीहें (चेतावनी) आखिर क्या मुफीद हो सकती हैं +[10:102] अब ये लोग इसके सिवा और किस चीज़ के मुंतज़िर हैं के वही बुरे दिन देखेंगे जो इनसे पहले गुज़रे हुए लोग देख चुके हैं? इनसे कहो "अच्छा, इंतजार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतजार करता हूं" +[10:103] फिर (जब ऐसा वक्त आता है तो) हम अपने रसूलों को और उन लोगों को बचा लिया करते हैं जो ईमान लाए हैं। हमारा यही तरीका है. हमपर ये हक़ है के मोमिनो को बचा लें +[10:104] (ऐ नबी!) कहदो के लोगों, अगर तुम अभी तक मेरे दीन के मुतालिक किसी शक्क में हो तो सुनलो के तुम अल्लाह के सिवा जिनकी बंदगी करते हो मैं उनकी बंदगी नहीं करता, बाल्के सिर्फ उसी खुदा की बंदगी करता हूं जिसे क़ब्ज़ में तुम्हारी मौत है। मुझे हुकुम दिया गया है के मैं ईमान लाने वालों में से हूं +[10:105] और मुझसे फरमाया गया है के तू यक्सू होकर अपने आप को ठीक ठीक इस दीन पर कायम करदे, और हरगिज हरगिज मुशरिकों में से न हो +[10:106] और अल्लाह को छोड़ कर कोई ऐसी हस्ती को न पुकार जो तुझे न फ़ायदा पाहुंचा सकती है न नुक्सान। अगर तू ऐसा करेगा तो जालिमों में से होगा +[10:107] अगर अल्लाह तुझे किसी मुसीबत में डाले तो खुद उसके सिवा कोई नहीं जो इस मुसीबत को टाल दे, और अगर वो तेरे हक में किसी भलाई का इरादा करे तो उसके फजल को फिरने वाला भी कोई नहीं है। वो अपने बंदों में से जिसका चाहता है अपने फज़ल से नवाजता है और वो दरगुज़ार करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[10:108] (ऐ मुहम्मद), कहदो के "लोगन, तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से हक़ आ चुका है, अब जो सीधी राह इख्तियार करे उसकी रास्ता-रवी उसके लिए मुफीद है, और जो गुमराह रहे उसकी गुमराही उसके लिए तबह-कुन है और मैं तुम्हारे ऊपर कोई हवालादार नहीं हूं” +[10:109] और (ऐ नबी), तुम हिदायत की जोड़ी बनाओ जो तुम्हारी तरफ बाजारिये वही (खुलासा) भेजो। राही है, और सब्र करो यहां तक ​​के अल्लाह फैसला करदे, और वही बेहतर फैसला करने वाला है + +Surah 11: Hud (Hud) +---------------------------------------- +[11:1] अलिफ लाम रा. फरमान है, जिसकी आयतें पुख्ता और मुफस्सल इरशाद हुई हैं, एक दाना और बाख़बर हस्ती की तरफ से +[11:2] के तुम ना बंदगी करो मगर सिर्फ अल्लाह की। मैं उसकी तरफ से तुमको खबरदार करने वाला भी हूं और बशारत देने वाला भी +[11:3] और ये के तुम अपने रब से माफ़ी चाहो और उसकी तरफ पलट आओ तो वो एक खास मुद्दत तक तुमको अच्छा समान ए जिंदगी देगा और हर साहब-ए-फजल को उसका फजल अता करेगा. लेकिन अगर तुम मुह फेरते हो तो मैं तुम्हारे हक में एक बड़ा दिन के अज़ाब से डरता हूं +[11:4] तुम सबको अल्लाह की तरफ पलटना है और वह सब कुछ कर सकता है +[11:5] देखो! ये लोग अपने सीने को मोड़ते हैं ता-के उसे चुप जाएं। ख़बरदार! जब ये कप्तानों से अपने आप को धमकाते हैं अल्लाह उनके छुपे को भी जानता है और खुले को भी।वो तो उन भेदों से भी वाकिफ है जो सीने में हैं +[11:6] ज़मीन में चलने वाला कोई जानदार ऐसा नहीं है जिसका रिज़क़ अल्लाह के ज़िम्मे ना हो और जिसका मुतालिक वो ना जानता हो के कहाँ वो रहता है और कहाँ सो जाता है, सब कुछ एक साफ़ दफ़्तर में दर्ज है +[11:7] और वही है जिसने आसमानो और ज़मीन को चे (छह) दिनों में भुगतान किया जबके इसे पहले उसका अर्श पानी पर था ता-के तुमको आज़मा कर देखो तुम में कौन बेहतर अमल करने वाला है। अब अगर (ऐ मुहम्मद) तुम कहते हो के लोग, मरने का बाद तुम दोबारा उठोगे, तो मुनकिरेन फवारान बोल उठते हैं के ये तो सारी जादूगरी है +[11:8] और अगर हम एक खास मुद्दत तक उनकी सजा को टालते हैं तो वो कहने लगते हैं के आखिर किस चीज ने इस्तेमाल किया रोक रक्खा है? सुनो! जिस रोज़ उस सज़ा का वक़्त आ गया तो वो किसी के फेर ना फिर बनायेगा और वही चीज़ उनको आ घेरेगी जिसका वो मज़ाक उड़ा रहे हैं +[11:9] अगर कभी हम इंसान को अपनी रहमत से नवाज़ने के बाद फिर उसे महरूम करते हैं तो वो मयुस होता है और नाशुक्र करने लगता है +[11:10] और अगर हमें मुसीबत के बाद जो उसपर आई थी तो हम उसे नियामत का मजा चखाते हैं तो कहते हैं मेरे तो सारे दिलादार (सख्तियां) पार हो गए, फिर वो फूला नहीं समता और अचानक लगता है +[11:11] क्या ऐब से पाक अगर कोई है तो बस वो लोग जो सब्र करने वाले हैं और वही हैं जिनके लिए दरगुज़ार भी हैं और बड़ा अजर भी हैं +[11:12] तो ऐ पैगम्बर! कहीं ऐसा ना हो कि तुम उन चीज़ों में से किसी चीज़ को (बयान करने से) छोड़ दो जो तुम्हारी तरफ वही की जा रही है। और इस बात पर दिल तंग हो के वो कहेंगे "इस शक्स पर कोई खजाना क्यों ना उतारा गया" हां ये के "इसके साथ कोई फरिश्ता क्यों ना आया"। तुम तो महज खबरदार करने वाले हो, आगे हर चीज का हवालादार अल्लाह है +[11:13] क्या ये कहते हैं के पैगम्बर ने ये किताब खुद गढ़ ली है? कहो, “अच्छा ये बात है तो इस जैसी घड़ी हुई दस सूरतें तुम बना लाओ और अल्लाह के सिवा और जो (तुम्हारे माबूद) हैं उनको मदद के लिए बुला सकते हो तो बुला लो अगर तुम (उन्हें माबूद समझने में) सच्चे हो +[11:14] अब अगर वो (तुम्हारे) माबूद) तुम्हारी मदद को नहीं पहचानते तो जान लो के ये अल्लाह के इल्म से नाज़िल हुई है और ये के अल्लाह के सिवा कोई हक़ीक़ी माबूद नहीं है फिर क्या तुम (क्या अम्र ए हक़ के आगे) सर-ए-तस्लीम ख़त्म करते हो?” +[11:15] जो लोग बस इसी दुनिया की जिंदगी और इसकी खुश नुमाइयों के तालिब होते हैं उनकी कारगुजारी के सारा फल हम यहीं उनको दे देते हैं और इसमे उनके साथ कोई काम नहीं की जाती +[11:16] मगर आखिरी में ऐसे लोगों के लिए आग के सिवा कुछ नहीं है। (वहां मालूम हो जाएगा के) जो कुछ उनको ने दुनिया में बनाया वो सब बेकार होगा और अब उनका सारा किआ धरा महज़ बातिल है +[11:17] फिर भला वो शक्स जो अपने रब की तरफ से एक साफ शहादत (सबूत) रखता था, उसके बाद एक गवाह भी परवरदिगार की तरफ से (इस शहादत की ताईद में) आ गया, और पहले मूसा की किताब रहनुमा और रहमत के तौर पर आई भी मौजूद थी (क्या वो भी दुनिया की तरह, इसका इंकार कर सकता है?) ऐसे लोग तो इसपर ईमान ही लाएंगे। और इंसानी गिरोहों में से जो कोई इसका इंकार करे तो उसके लिए जिस जगह का वादा है वो दोज़ख है। पास (ऐ पैगम्बर), तुम इस चीज़ की तरफ से किसी शक्क में न पड़ना, ये हक़ है तुम्हारे रब की तरफ से मगर अक्सर लोग नहीं मानते +[11:18] और हमारे शक्स से बढ़ कर जालिम और कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ घड़े? ऐसे लोग अपने रब के हुज़ूर पेश होंगे और गवाह शहादत देंगे के ये हैं वो लोग जिन्हों ने अपने रब पर झूठ घड़ा था। सुनो! खुदा की लानत है जालिमों पर +[11:19] उन जालिमों पर जो खुदा के रास्ते से लोगों को रोकते हैं, उसके रास्ते को टेढ़ा करना चाहते हैं और आख़िरत का इंकार करते हैं +[11:20] वो ज़मीन में अल्लाह को बे-बस करने वाले ना थे और ना अल्लाह के मुक़ाबले में कोई उनका हमी (रक्षक) था. उन्हें अब दोहरा (डबल) अजब दिया जाएगा। वो ना किसी की सुन ही सकता था और ना खुद ही उनको कुछ सूझता था +[11:21] ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने आप को खुद घाटे (नुक्सान) में डाला और वो सब कुछ उनसे खोया गया जो उन्होन ने गढ़ रखा था +[11:22] नागुज़ीर है के वही आख़िरत में सबसे बढ़कर घाटे (नुकसान) में रहेंगे +[11:23] रहे वो लोग जो ईमान लाए और जिन्होन ने नीक अमल किए और अपने रब हाय के होकर रहे, तो यकीनन वो जन्नती लोग हैं और जन्नत में वो हमेशा रहेंगे +[11:24] डोनो फ़रीक़ों की में मिसल ऐसा है जैसा एक आदमी तो हो अंधा बेहरा और दूसरा हो देखने और सुनने वाला। क्या ये डोनो यक्सन हो सकते हैं? क्या तुम (इस मिसाल से) कोई सबक नहीं लेते +[11:25] (और ऐसी ही हालत थी जब) हमने नहीं को उसकी क़ौम की तरफ भेजा था। (उसने कहा) "मैं तुम लोगों को साफ-साफ कहबरदार करता हूं +[11:26] के अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी न करो, वरना मुझे अंदेशा है के तुमपर एक रोज़ दर्दनाक अज़ाब आएगा।" +[11:27] जवाब में उसकी क़ौम के सरदार, जिन्हों ने उसकी बात मन से इंकार किया था, बोले "हमारी नज़र में तो तुम इसके सिवा कुछ नहीं हो के बस एक इंसान हो हम जैसे, और हम देख रहे हैं के हमारी क़ौम में से बस उन लोगों ने जो हमारे हन अराज़िल थाय (अदना दर्जे / सबसे नीच) बे-सोचे समझे तुम्हारी जोड़ी इख्तियार करली है। और हम कोई चीज भी ऐसी नहीं जानते, जिसमें तुमलोग हमसे कुछ बढ़े हुए हो। +[11:28] उसने कहा "ऐ बिरादरान ए क़ौम, जरा सोचो तो सही के अगर मैं अपने रब की तरफ से एक खुली शहादत पर कायम था और फिर उसने मुझको अपनी खास रहमत से भी नवाज दिया, मगर वो तुमको नजर ना आई, तो आखिर हमारे पास क्या जरूरी" है के तुम मनाना न चाहो और हम ज़बरदस्ती उसको तुम्हारे सर छपाईक दीन +[11:29] और ऐ बिरादरन ए क़ौम, मैं इस काम पर तुमसे कोई माल नहीं मांगता, मेरा अजर तो अल्लाह के ज़िम्मे है और मैं उन लोगों को धक्के देने से भी रहा जिन्हों ने मेरी बात मानी है अपने रब के हुजूर जाने वाले हैं मगर मैं देखता हूं कि तुमलोग जहलत बरात रहे हो +[11:30] और ऐ क़ौम, मैं लोगों को धुतकार दूं तो खुदा की पकड़ से कौन मुझे बचाने आएगा? तुम लोगों की समझ में क्या इतनी बात भी नहीं आती +[11:31] और मैं तुमसे नहीं कहता कि मेरे पास अल्लाह के खज़ाने हैं, ना ये कहता हूँ के मैं गैब का इल्म रखता हूँ, ना ये मेरा दावा है के मैं फ़रिश्ता हूँ और ये भी मैं नहीं कह सकता कि जिन लोगों को तुम्हारी आँखें हिकारत से देखती हैं उन्हें अल्लाह ने कोई भलायी नहीं डि उनके नफ़्स का हाल अल्लाह ही बेहतर जानता है। अगर मैं ऐसा कहूं तो ज़ालिम होगा” +[11:32] आख़िर ए कार उन लोगों ने कहा के “ ऐ नूह, तुमने हमसे झगड़ा किया और बहुत कार्लिया अब तो बस वो अज़ाब ले आओ जिसकी तुम हमें धमकी देते हो अगर सच्चे हो” +[11:33] नूह ने जवाब दिया,“ वाह तो अल्लाह हाय लाएगा, अगर चाहेगा, और तुम इतना बाल-बूटा नहीं रखते के इसे रोक दो +[11:34] अब अगर मैं तुम्हारी कुछ खैर ख्वाही करना भी चाहूं तो मेरी खैर ख्वाही तुम्हें कोई फैयदा नहीं दे सकती जबके अल्लाह ही ने तुम्हें भटका देने का इरादा करलिया हो. वही तुम्हारा रब है और उसकी तरफ तुम्हारी पलटना है” +[11:35] (ऐ मुहम्मद), क्या ये लोग कहते हैं कि इस शक्स ने ये सब कुछ खुद गढ़ लिया है? इनसे कहो “ अगर मैंने ये खुद घड़ा है तो मुझ पर अपने जुर्म की जिम्मेदारी है, और जो जुर्म है तुम कर रहे हो उसकी ज़िम्मेदारी से मैं बारी हूँ।” +[11:36] नहीं पर वही कि गई के तुम्हारी क़ौम में से जो लोग ईमान ला चुके बस वो ला चुके, अब कोई मन्ने वाला नहीं है। इनके कार्टूनों पर घूम खाना छोड़ो +[11:37] और हमारी निगरानी में हमारी वही के मुताबिक़ एक कश्ती बनानी शुरू करदो। और देखो, जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उनके हक़ में मुझसे कोई सिफ़रिश ना करना। ये सारे के सारे अब डूबने वाले हैं +[11:38] नहीं कश्ती बना रहा था और उसकी क़ौम के सरदारों में से जो कोई उसके पास से गुज़रता था वो उसका मज़ाक उड़ाता था। उसने कहा “अगर तुम हमपर हंसते हो तो हम भी तुमपर हंस रहे हैं +[11:39] अनकरीब तुम्हें खुद मालूम हो जाएगा कि किस पर वो अजब आता है जो उसे रुसवा कर देगा, और किसपर वो बला टूट पड़ती है जो तले नहीं तलेगी” +[11:40] यहां तक ​​के जब हमारा हुकुम आ गया और वो तन्नूर (ओवन) उबल गया। तो हमने कहा “हर क़िस्म के जानवरों का एक जोड़ा कश्ती में रख लो, अपने घर वालों को भी सिवाय उन अश्कों के जिनके निशान-दही पहले की जा चुकी है इस में सवार करा दो, और उन लोगों को भी बिठा लो जो ईमान लाए हैं”। और थोड़े ही लोग थे जो नूह के साथ ईमान लाए थे +[11:41] नूह ने कहा "सवार हो जाओ इसमीं, अल्लाह ही के नाम से है इसका चलना भी और इसका ठहरना भी। मेरा रब बड़ा गफूर ओ रहीम है" +[11:42] कश्ती उन लोगों के लिए चली जा रही थी और एक एक मौज पहाड़ की तरह उठ रही थी। नूह का बेटा दूर फासले पर था, नूह ने पुकार कर कहा "बेटा, हमारे साथ सवार होजा, काफिरों के साथ ना रह।" +[11:43] उसने पलट कर जवाब दिया "मैं अभी एक पहाड़ पर चढ़ा जाता हूं जो मुझे पानी से बचा लेगा"। नूह ने कहा, आज कोई चीज अल्लाह के हुकुम से बचाने वाली नहीं है सिवाय इसके कि अल्लाह ही किसी पर रहम फरमाये।'' इतने में एक मौज दोनों के दरमियान हायल हो गई और वो भी डूबने वालों में शामिल हो गया +[11:44] हुकुम हुआ ''ऐ जमीन, अपना सारा पानी तैयार हो गया और ऐ आसमान, रुक जा” चुनांचे पानी ज़मीन में बैठ गया, फैसला चुका दिया गया, कश्ती जूड़ी पर टिक गई, और कह दिया गया के दरवाज़े जालिमों की क़ौम +[11:45] नूह ने अपने रुब को पुकारा, कहा “ऐ रब! मेरा बेटा मेरे घर वालों में से है और तेरा वादा सच्चा है और तू सब हकीमो से बड़ा और बेहतर हकीम है” +[11:46] जवाब में इरशाद हुआ “ऐ नूह, वो तेरे घर वालों में से नहीं है। वो तो एक बड़ा हुआ काम है. लिहाजा तू हमसे बात करता है कि मुझसे अंधेरा न कर जिसकी हकीकत तू नहीं जानता। मैं तुझे हिदायत करता हूं के अपने आप को जहिलों की तरह ना बना ले” +[11:47] नूह ने फवारान अर्ज़ किया “ऐ मेरे रब, मैं तेरी पनाह मांगता हूं इसके के वो चीज तुझसे मांगूं जिसका मुझे इलम नहीं। अगर तू नहीं मुझे माफ़ ना किया और रहम ना फरमाया तो मैं बरबाद हो जाऊंगा +[11:48] हुकुम हुआ " ऐ नूह उतर जा हमारी तरफ से सलामती और बरकतें हैं तुझपर और उन गिरोहोन पर जो तेरे साथ हैं। और कुछ गिरोह ऐसे भी हैं जिनको हम कुछ मुद्दत समान ए जिंदगी बख्शेंगी फिर उन्हें हमारी तरफ से दर्दनक अजब पहचानेगा” +[11:49] (ऐ मुहम्मद), ये गायब की खबरें हैं जो हम तुम्हारी तरफ वही कर रहे हैं, इसे पहले ना तुम इनको जानते थे और ना तुम्हारी क़ौम। पस सब्र करो, अंजाम-ए-कार मुत्तक़ियों के हक़ में है +[11:50] और आद की तरफ हमने उनके भाई हुद को भेजा। उसने कहा "ऐ बिरादरान ए क़ौम, अल्लाह की बंदगी करो, तुम्हारा कोई खुदा उसके सिवा नहीं है, तुमने महज़ झूठ घड़ रखा है +[11:51] ए बिरादरान ए क़ौम इस काम पर मैं तुमसे कोई अजर नहीं चाहता। मेरा अजर तो उसका ज़िम्मे है जिसने मुझे भुगतान किया है क्या तुम अक्ल से जरा काम नहीं लेते +[11:52] और ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अपने रब से माफ़ी चाहो, फिर उसकी तरफ पलटो। वो तुम्हारे आसमान के दहाने खोल देगा और तुम्हारी मौजुदा कुव्वत (ताकत) पर मजीद कुव्वत का इजाफा करेगा। मुजरेमोन की तरह मुँह न फेरो” +[11:53] उन्होन ने जवाब दिया, “ऐ हुद, तू हमारे पास कोई सारी शहादत (सबूत) लेकर नहीं आया है, और तेरे कहने से हम अपने माबूदों को नहीं छोड़ सकते। और तुझपर हम ईमान लाने वाले नहीं हैं +[11:54] हम तो ये समझते हैं कि तेरे ऊपर हमारे मबूदों में से किसी की मौत हो गई है।'' हुड ने कहा, ''मैं अल्लाह की शहादत पेश करता हूं और तुम गवाह रहो के ये जो अल्लाह के सिवा दूसरों को तुमने खुदाई में शरीक किया ठहरे रक्खा है उसे मैं बेज़ार हूं +[11:55] तुम सब मिलकर मेरे खिलाफ अपनी करनी में कसार ना उठा रख और मुझे जरा मोहलत ना दो +[11:56] मेरा भरोसा अल्लाह पर है जो मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी। कोई जानदार ऐसा नहीं जिसकी छोटी उसके हाथ में ना हो। बेशक मेरा रब सीधी राह पर है +[11:57] अगर तुम मुंह फेरते हो तो फिर लो, जो पैगाम दे कर मैं तुम्हारे पास भेज गया था वह मैं तुमको पाहुंचा चूका हूं। अब मेरा रब तुम्हारी जगह दूसरी कौम को उठाएगा और तुम उसका कुछ न बिगाड़ पाओगे। यकीनन मेरा रब हर चीज़ पर नज़र है।” +[11:58] फिर जब हमारा हुकुम आ गया तो हमने अपनी रहमत से हुद को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे निजात दे दी और एक मजबूत अज़ाब से उन्हें बचा लिया +[11:59] ये हैं आद। अपने रुब की आयतों से उनको ने इंकार किया, उसके रसूलों की बात ना मानी, और हर जब्बार दुश्मन ए हक़ की जोड़ी बनाते रहे +[11:60] आख़िर ए कार इस दुनिया में भी अंदर फिटकर पड़ी और कयामत के रोज़ भी। सुनो! आद ने अपने रब से कुफ्र किया, सुनो! दूर फेंक दिये गये आद, हद की क़ौम के लोग +[11:61] और समूद की तरफ़ हमने उनके भाई सालेह को भेजा। उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है। वही है जिसने तुमको ज़मीन से पैदा किया है और यहां तुमको बसाया है। लिहाज़ा तुम उसे माफ़ी चाहो और उसकी तरफ पलट आओ। यकीनन मेरा रब करीब है और वो।" दुआओं का जवाब देने वाला है” +[11:62] उन्होन ने कहा “ऐ सालेह, इसके पहले तू हमारे दरमियान ऐसा शक्स था जिसकी बड़ी तवाक्कत (उम्मीदें) वबस्ता थी। क्या तुम हमें माबूदों की परस्तियों से रोकना चाहते हैं जिनकी परस्तियां हमारे बाप दादा करते थे? तू जिस तारीख़ की तरफ हमें बुला रहा है, इसके बारे में हमको शक है, जिसने हमें ख़लजान (परेशान करने वाला शक) में डाल रखा है।” +[11:63] सालेह ने कहा " ऐ बिरादरान-ए-कौम, तुमने कुछ इस बात पर भी गौर किया के अगर मैं अपने रब की तरफ से एक साफ शहादत रखता था, और फिर उसने अपने रहमत से भी मुझको नवाज दिया तो इसके बाद अल्लाह की पकड़ से मुझे कौन बचाएगा अगर मैं उसकी नफरमानी करूं? तुम मेरे किस काम आ सकते हो सिवाय इसके मुझे और ज्यादा खसरे (नुक्सान) में डाल दो +[11:64] और ऐ मेरी कौम के लोगों, देखो ये अल्लाह की ऊंटनी (वह-ऊंटनी) तुम्हारे लिए एक निशानी है, इसे खुदा की जमीन में बदलना है के लिए आज़ाद छोड़ दो। इस्से ज़रा तरुज़ ना करना (उसे चोट मत पहुँचाओ) वर्ना कुछ ज्यादा देर न गुजरेगी के तुमपर खुदा का अज़ाब आ जाएगा” +[11:65] मगर उनहोन ने औंटनी को मार डाला इसपर सालेह ने उनको खबरदार कर दिया के “बस अब तीन दिन अपने घरों में और रह बस लो। ये ऐसी मियाद (वादा) है जो झूठी ना साबित होगी” +[11:66] आखिर-ए-कार जब हमारे फैसले का वक्त आ गया तो हमने अपनी रहमत से सालेह को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे बचा लिया, और उस दिन की रुसवाई से उनको महफूज रक्खा। बेशाक तेरा रब ही दर-असल ताक़तवार और बाला-दस्त (ऑल-माइटी) है +[11:67] रहे वो लोग जिन्होन ने ज़ुल्म किया था तो एक मजबूत धमाके ने उनको धर लिया और वो अपनी बस्तियों में इस तरह बे-हिस्स ओ हरकत (बेजान पड़ा हुआ) पड़े के पड़े रह गए +[11:68] के गोया वो वहां कभी बसाए ही ना थे। सुनो! समूद ने अपने रब से कुफ्र किया, सुनो! दूर फेंक दिए गए समूद +[11:69] और देखो, इब्राहिम के पास हमारे फरिश्ते खुश खबरी के लिए हुए पहुंचे। कहां तुम्पर सलाम हो, इब्राहिम ने जवाब दिया तुम्पर भी सलाम हो, फिर कुछ देर ना गुजरी के इब्राहिम एक भुना (भुना हुआ) हुआ बछड़ा (बछड़ा) (उनकी जियाफत के लिए) ले आया +[11:70] मगर जब देखा के उनके हाथ खाने पर नहीं बढ़ते तो वो उनसे मुश्तबा (उन पर अविश्वास) हो गया और दिल में उनसे खौफ महसूस करने लगा। उनहों ने कहा "दारो नहीं, हम तो लूट की क़ौम की तरफ भेज गए हैं" +[11:71] इब्राहिम की बीवी खड़ी हुई थी वो ये सुनकर हस दी (हँसे) फिर हमने उसको इशाक की और इशाक के बाद याकूब की ख़ुशख़बरी दी +[11:72] वो बोली "हाय मेरी कम्बख्त! क्या! अब मेरे हां औलाद होगी जबके मैं बुढ़िया फूल गई और ये मेरे मियां भी बूढ़े हो गए? ये तो बड़ी अजीब बात है'' +[11:73] फरिश्तों ने कहा ''अल्लाह के हुकुम पर ताज्जुब करती हो? यकीनन अल्लाह निहायत काबिल-ए-तारीफ और बड़ी शान वाला है” +[11:74] फिर जब इब्राहिम की घबराहट दूर हो गई और (औलाद की बशारत से) उसका दिल खुश हो गया तो उसने कौम ए लूट के मामले में हमसे झगड़ा शुरू किया +[11:75] हकीकत में इब्राहिम बड़ा हलीम और नरम दिल आदमी था और हर हाल में हमारी तरफ रूजू करता था +[11:76] (आख़िर ए कार हमारे फ़रिश्तों ने उसे कहा) "ऐ इब्राहिम, इसके बाज़ आ जाओ, तुम्हारे रब का हुकुम हो चुका है और अब उन लोगों पर वो अज़ाब आ कर रहेगा जो किसी के फेर नहीं फिर सकता" +[11:77] और जब हमारे फ़रिश्ते लुट के पास पहुँचे तो उनकी आमद से वो बहुत घबराया और दिल तंग हुआ और कहने लगा के आज बड़ी मुसीबत का दिन है +[11:78] (महमानो का आना था के) उसकी क़ौम के लोग बे-इख्तियार उसके घर की तरफ दौड़ पड़े। पहले से वो ऐसी ही बदकारियों के शौकीन थे। लुट ने उनसे कहा "भाइयों, ये मेरी बेटियां मौजूद हैं, ये तुम्हारे लिए पाकीजा-तरर हैं। कुछ खुदा का खौफ करो और मेरे मेहमानों के मामले में मुझे ज़लील न करो। क्या तुम में कोई भला आदमी नहीं?" +[11:79] उनको ने जवाब दिया "तुझे तो मालूम ही है के तेरी बेटियों में हमारा कोई हिसा नहीं है और तू ये भी जानता है के हम चाहते क्या हैं" +[11:80] लूट ने कहा " काश मेरे पास इतनी ताक़त होती के तुम्हें सीधा करदेता, या कोई मज़बूत सहारा ही होता के" उसकी पनाह लेता” +[11:81] तब फ़रिश्तों ने उसे कहा के “ऐ लुट, हम तेरे रब के भेजे हुए फ़रिश्ते हैं। ये लोग तेरा कुछ न बिगाड़ सकेंगे। बस तू कुछ रात रहे अपने एहल ओ अयाल को लेकर निकल जा और देखो, तुम में से कोई शक्स पीछे पलट कर।” ना देखे मगर तेरी बीवी (साथ नहीं जाएगी) क्योंकि उसपर भी वही कुछ गुज़रने वाला है जो इन लोगों पर गुज़रना है। उनकी तबाही के लिए सुबह का वक्त मुकर्रर है। सुबह होते अब दिन ही कितनी है” +[11:82] फिर जब हमारे फैसले का वक्त आ गया तो हमने हमें बस्ती को तलपट (उल्टा) करदिया और उसपर पकी हुई मिट्टी (पकी हुई मिट्टी) के पत्थर तोड़-तोड़ बरसाये +[11:83] जिन में से हर पत्थर तेरे रुब के हां निशान ज़्यादा था और ज़ालिमों से ये सज़ा कुछ दूर नहीं है +[11:84] और मदियां वालों की तरफ हमने उनके भाई शोएब को भेजा. उसने कहा "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई खुदा नहीं है। और नाप तौल में कमी ना किया करो। आज मैं तुम्हारे अच्छे हाल में देख रहा हूँ, मगर मुझे डर है के कल तुम्पर ऐसा दिन आएगा जिसका अज़ाब सबको घेर लेगा" +[11:85] और ऐ बिरादरान ए क़ौम, ठीक ठीक इन्साफ के साथ पूरा नापो और तोलो (माप) और लोगों को उनकी चीज़ में घाटा (नुकसान) ना दिया करो और ज़मीन में फ़साद ना फ़ायलते फिरो +[11:86] अल्लाह की दी हुई बचत (लाभ) तुम्हारे लिए बेतार है अगर तुम मोमिन हो और बहार-हाल मैं तुम्हारे ऊपर कोई निगरानी ए कार नहीं हूं" +[11:87] उन्होन ने जवाब दिया "ऐ शोएब, क्या तेरी नमाज़ तुझे ये सिखाती है के हम उन सारे माबूदों को छोड़ दें जिनकी परस्तिश हमारे बाप दादा करते थे? हां ये के हमको अपने माल में अपनी मंशा(जैसा हम चाहें) के मुताबिक तसर्रफ(खर्च/उपयोग) करने का इख्तियार ना हो? बस तू ही तो एक आली ज़र्फ और रस्तबाज़ आदमी (सहनशील और सही दिशा वाला) रह गया है” +[11:88] शोएब ने कहा "भाइयों, तुम खुद ही सोचो के अगर मैं अपने रब की तरफ से एक खुली शहादत पर था और फिर उसने अपने हां से मुझको अच्छा रिज्क भी आता किया (तो इसके बाद मैं तुम्हारी गुमराहियां और हराम-खोरियों में तुम्हारा शरीक ए हाल कैसे हो सकता है) हूं?) और मैं हरगिज ये नहीं चाहता के जिन बातों से मैं तुमको रोकता हूं उनका खुद इर्तकाब करूं। मैं तो इस्लाह करना चाहता हूं जहां तक ​​भी मेरा बस चले और ये जो कुछ करना चाहता हूं उसका सारा इन्हिसार अल्लाह की तौफीक पर है किया और हर मामले में उसकी तरफ मैं रूजू करता हूं +[11:89] और ऐ बिरादरान ए क़ौम, मेरे खिलाफ़ तुम्हारी हद धर्मी कहीं ये नौबत न पाहुंचा दे के आख़िर ए कर तुमपर भी वही अज़ाब आ कर रहे जो नूह या हुड या सालेह की क़ौम पर आया था. और लुट की क़ौम तो तुमसे कुछ ज़्यादा दूर भी नहीं है +[11:90] देखो! अपने रब से माफ़ी मांगो और उसकी तरफ पलट आओ, बेशक मेरा रुब रहीम है और अपने मख़लूक से मुहब्बत रखता है” +[11:91] उनहों ने जवाब दिया “ऐ शोएब, तेरी बहुत सी बातें तो हमारी समझ ही में नहीं आती. और हम देखते हैं कि तू हमारे दरमियान एक बे-ज़ार आदमी है। तेरी बिरादरी ना होती तो हम कभी का तुझसे संगसार (पत्थर से मौत के घाट उतार देते) कर चुके होते, तेरा बलबूटा तो इतना नहीं है के हमपर भारी हो” +[11:92] शोएब ने कहा “भाइयों, क्या मेरी बिरादरी तुमपर अल्लाह से ज्यादा भारी है के तुमने (बिरादरी का तो खौफ किया और) अल्लाह को बिल्कुल पास ए पुश्त (तुम्हारे पीछे) वापस) दाल दिया? जान रक्खो के जो कुछ तुम कर रहे हो वो अल्लाह की गिरफ़्तार से बाहर नहीं है +[11:93] ऐ मेरी क़ौम के लोगों, तुम अपने तरीक़े पर काम किये जाओ और मैं अपनी तारीख़ पर करता रहूँगा। जल्दी ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि किस पर ज़िल्लत का अज़ाब आता है और कौन झूठा है। तुम भी इंतजार करो और मैं भी तुम्हारे साथ चश्मा-बरा हूं (मैं भी तुम्हारे साथ देखूंगा)" +[11:94] आखिर ए कार जब हमारे फैसले का वक्त आ गया तो हमने अपनी रहमत से शोएब और उसके साथी मोमिनो को बचा लिया और जिन लोगों ने जुल्म किया था उनको एक मौका धमाके ने ऐसा पकड़ा के वो अपनी बस्तियों में बे-हिस्स ओ हरकत (बेजान पड़ा हुआ) पड़े के पड़े रह गए +[11:95] गोया वो कभी वहां रहे बेसी ही ना थाय. सुनो! मदियां वाले भी दूर फेंक दिए गए जिस तरह समूद फेंके गए थे +[11:96] और मूसा को हमने अपने निशानियां और खुली खुली सनद ए ममोरियात (स्पष्ट अधिकार) के साथ फिरौन और उसके अयान ए सल्तनत की तरफ भेजा +[11:97] मगर उनहों ने फिरौन के हुकुम की जोड़ी की हलनके फिरौन का हुकुम रास्ता (दाहिनी दिशा) पर ना था +[11:98] कयामत के रोज़ वो अपनी क़ौम के आगे आगे होगा और अपनी पेशवाई में उन्हें दोज़ख की तरफ ले जाएगा। कैसी बिगड़ जाए वरूद (मनहूस मंजिल) है ये जिस पर कोई पहुंचे +[11:99] और उन लोगों पर दुनिया में भी लानत पड़ी और कयामत के रोज़ भी पड़ेंगे। कैसा बुरा सिला है ये जो किसी को मिले +[11:100] ये चांद बस्तियां की सरगुज़िश्त (खाता) है जो हम तुम्हें सुना रहे हैं। इनमें से बाज़ अब भी खड़ी हैं और बाज़ की फ़सल कट चुकी है +[11:101] हमने उनपर ज़ुल्म नहीं किया, उन्होन ने आप ही अपने ऊपर सितम ढाया। और जब अल्लाह का हुकुम आ गया तो उनके वो माबूद जिन्हे वो अल्लाह को छोड़ कर पुकारते थे, उनके कुछ काम ना आ सके। और उनको ने हलाकत ओ बरबादी के सिवा उन्हें कुछ फ़ायदा ना दिया +[11:102] और तेरा रब्ब जब किसी जालिम बस्ती को पकड़ता है तो फिर उसकी पकड़ ऐसी ही हुआ करती है, फिल वक़हे उसकी पकड़ बड़ी सच और दर्दनाक होती है +[11:103] हकीकत ये है के इस में एक निशानी है हर उस शक्स के लिए जो अज़ाब ए आखिरी का खौफ करे। वो एक दिन होगा जिसमें सब लोग जमा होंगे और फिर जो कुछ भी हमें रोज़ होगा सब की आँखों के सामने होगा +[11:104] हम उसके लेन में कुछ बहुत ज़्यादा तक़रीर नहीं कर रहे हैं, बस एक गिनी चुनी मुद्दत उसके लिए मुकर्रर है +[11:105] जब वो आएगा तो किसी को बात करने का मजा ना होगा, इल्ला ये के खुदा की इज्जत से कुछ अर्ज़ करे, फिर कुछ लोग हमसे रोज़ बदबख्त होंगे और कुछ नई बख्त +[11:106] जो बद-बख्त होंगे वो दोज़ख में जाएंगे (जहां गर्मी और प्यास की शिद्दत से)। वो हांपेंगे और फुनकारे मारेंगे (आह और कराह) +[11:107] और उसकी हालत में वो हमेशा रहेंगे जब तक के जमीन ओ आसमान कायम हैं, इल्ला ये के तेरा रब कुछ और चाहे। बेशक तेरा रब पूरा इख्तियार रखता है के जो चाहे करे +[11:108] रहे वो लोग जो नइक बख्त निकलेंगे, तो वो जन्नत में जाएंगे और वहां हमेशा रहेंगे जब तक जमीन ओ आसमान कायम है, इल्ला ये के तेरा रुब कुछ और चचे। ऐसी बख्शीश उनको मिलेगी जिसका सिलसिला कभी मुनक्का (खतम) न होगा +[11:109] पास (ऐ नबी), तू उन माबूदों की तरफ से किसी शक्क में न रह जिनकी ये लोग इबादत कर रहे हैं। ये तो (बस लकीर के फकीर बने हुए) उसकी तरह पूजा पात किये जा रहे हैं जिस तरह पहले उनके बाप दादा करते थे। और हम इनका हिसा इन्हें भरपुर देंगे बिना इसके इस में कुछ कासर हो +[11:110] हम इसे पहले मूसा को भी किताब दे चुके हैं और उसके बारे में भी इख्तिलाफ किया गया था। अगर तेरे रब की तरफ से एक बात पहले ही ताई न करदी गई होती तो इख्तिलाफ करने वालों के दरमियान में कभी का फैसला चुका दिया जाता। ये वक़िया है के ये लोग इसकी तरफ़ से शक्क और ख़लजान (अशांत करने वाला संदेह) में पड़े हुए हैं +[11:111] और ये भी वक़िया है के तेरा रब इन्हें इनके अमल का पूरा पूरा बदला दे कर रहेगा। यक़ीनन वो इनकी सब हरकतों से ख़बर है +[11:112] पास (ऐ मुहम्मद), तुम और तुम्हारे वो साथी जो (कुफ्र ओ बगावत से ईमान ओ इताअत की तरफ) पलट आए हैं, ठीक ठीक राह-ए-रास्त पर साबित क़दम रहो जैसा के तुम्हें हुकुम दिया गया है। और बंदगी की हद से तजावुज ना करो. जो कुछ तुम कर रहे हो उसपर तुम्हारा रब निगाह रखता है +[11:113] जालिमों की तरफ़ ज़रा ना झुकना वरना जहन्नुम की लपेट में आ जाओगे और तुम्हें कोई ऐसी वाली ओ सरपरस्त ना मिलेगा जो खुदा से तुम बच सके और कहीं से तुमको मदद ना पहनोगे +[11:114] और देखो, नमाज़ क़याम करो दिन के दोनों सिरों पर (दिन के दो छोर) और कुछ रात गुज़रने पर। दर हकीकत नेकियां बुराइयों को दूर कर देती हैं, ये एक याद दिहानी है उन लोगों के लिए जो खुदा को याद रखने वाले हैं +[11:115] और सब्र कर, अल्लाह नेकी करने वालों का अजर कभी ज़या नहीं करता +[11:116] फिर क्यों ना उन क़ौमों में जो तुमसे पहले गुज़र चुकी हैं ऐसे अहले ख़ैर मौज़ूद रहे जो लोगों को ज़मीन में फ़साद बरपा करने से रोकते हैं? ऐसे लोग निकले भी तो बहुत काम जिनको हमने उन क़ौमों में से बचा लिया, वरना जालिम लोग तो उन्ही मौजों (आसानी और आराम) के पीछे पड़े रहे, जिनके समान उन्हें फरवानी के साथ दिए गए थे (उन्हें सम्मानित किया गया) और वो मुजरिम बनकर रहे +[11:117] तेरा रब ऐसा नहीं है के बस्तियों को न-हक़्क़ तबह करदे हालंके उनके बशिंदे इस्लाह करने वाले माननीय +[11:118] बेशक तेरा रब अगर चाहता तो तमाम इंसानों को एक गिरह बना सकता था, मगर अब तो वो मुख़्तलिफ़ तरीक़ों ही पर चलते रहेंगे +[11:119] और रहो राह-रवियों से सिर्फ वो लोग बचेंगे जब तक तेरे रब की रहमत है। इसी (आजादी इंतेखाब ओ इख्तियार) के लिए ही तो उसने उन्हें अदा किया था और तेरे रब की वो बात पूरी हो गई जो उसने कही थी के मैं जहन्नुम को जिन्न और इंसान, सबसे बाहर दूँगा +[11:120] और (ऐ मुहम्मद), ये पैगंबरों के किस्से जो हम तुम्हें सुनाते हैं हैं, वो चीज़े हैं जिनके बारे में हम तुम्हारे दिल को मज़बूत करते हैं। इनके अंदर तुमको हकीकत का इलम मिला और ईमान लाने वालों को हिदायत और बेदारी नसीब हुई +[11:121] रहे वो लोग जो ईमान नहीं लाते, तो उनसे कहदो के तुम अपने तारीख पर काम करते रहो और हम अपने तारीख पर किया करते हैं +[11:122] अंजाम ए कर का तुम भी इंतज़ार करो और हम भी मुंतज़िर (इंतज़ार) कर रहे हैं +[11:123] आसमान और ज़मीन में जो कुछ छुपा हुआ है सब अल्लाह के क़ब्ज़े कुदरत में है। और सारा मामला उसी की तरफ रूजू किया जाता है। पास (ऐ नबी) तू उसकी बंदगी कर और उसी पर भरोसा रख। जो कुछ तुमलोग कर रहे हो तेरा रब उसे बेख़बर नहीं है + +Surah 12: Yusuf (Joseph) +---------------------------------------- +[12:1] अलिफ़, लाम, रा.. ये उस किताब की आयत है जो अपना मुद्दुआ (इसकी वस्तु) साफ़ साफ़ बयान करती है +[12:2] हमने इसे नाज़िल किया है कुरान बना कर अरबी ज़ुबान मैं ता-के तुम (एहले अरब) इसको अच्छी तरह समझ सको +[12:3] (ऐ मुहम्मद), हम कुरान को तुम्हारी तरफ वही करके बेहतरीन जोड़ी में वाकियात और हक़ीक़त तुमसे बयां करते हैं, वरना इसे पहले तो (चीजों से) तुम बिल्कुल ही बे-खबर थे +[12:4] ये उस वक्त का जिक्र है जब यूसुफ ने अपने बाप से कहा "अब्बाजान, मैंने ख्वाब देखा है के ग्यारह (ग्यारह) सितारे हैं और सूरज और चाँद हैं और वो मुझे सजदा कर रहे हैं" +[12:5] जवाब में उके बाप ने कहा, "बेटा, अपना ये ख्वाब अपने भाइयों को ना सुनाना वरना वो तेरे डरपे आजर हो जायेंगे(किसी भी बुराई की साजिश रचेंगे) के विरुद्ध योजना आप), हकीकत ये है के शैतान आदमी का खुला दुश्मन है +[12:6] और ऐसा ही होगा (जैसा तू ने ख्वाब में देखा है के) तेरा रब तुझ (अपने काम के लिए) मुंतखब (चुनें) करेगा और तुम्हें बातों की तह तक पहचानना सिखाएगा और तेरे ऊपर और आले याक़ूब पर अपनी नियामत उसी तरह पूरी करेगी जिस तरह इस तरह पहले वो तेरे बुज़ुर्गों, इब्राहीम और इस्हाक़ पर कर चुका है, यकीनन तेरा रब आलिम (सर्व-ज्ञानी)-ओ-हकीम है (सर्व-ज्ञानी)" +[12:7] हकीकत ये है के यूसुफ और उसके भाइयों के क़िस्से में पूछने वालों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं +[12:8] ये क़िस्सा यूं शुरू होता है के उसके भाइयों ने आपस में कहा “ये यूसुफ़ और इसका भाई, दोनों हमारे वालिद (बाप) को हम सब से ज़्यादा मेहबूब हैं हलांके हम एक पूरा जत्था (बैंड) हैं। सच्ची बात ये है के हमारे अब्बाजान बिलकुल ही बहक गए हैं +[12:9] चलो यूसुफ को क़त्ल करदो या उसे कहीं फेंक दो ता-के तुम्हारे वालिद की तवज्जु (ध्यान दें) सिर्फ तुम्हारी तरफ हो जाए ये काम कर लेने के बाद फिर से तैयार रहना” +[12:10] इसपर उन में से एक बोला "यूसुफ को कत्ल न करो, अगर कुछ करना ही है तो उसे किसी अंधे कुवें (अच्छी तरह से) में डाल दो। कोई आता जाता काफिला (कारवां) उसे निकल ले जाएगा" +[12:11] इस कराराद पर उन्होन ने जा कर अपने बाप से कहा, “अब्बाजान, क्या बात है कि आप यूसुफ के मामले में हमपर भरोसा नहीं करते हलंके हम उसके सच्चे खैर-ख्वा (शुभचिंतक) हैं +[12:12] कल उसे हमारे साथ भेज दीजिए, कुछ चार-चुग (स्वतंत्र रूप से खाओ) लेगा और खेल-कूद से भी दिल बहलाएगा, हम उसकी हिफाज़त को मौजूद हैं" +[12:13] बाप ने कहा "तुम्हारा इसे ले जाना मुझे शक गुजारता है (मुझे परेशान करता है) और मुझको अंदेशा है के कहीं इसे भेड़िया (भेड़िया) ना फाड़ खाए जबके तुम इसे गाफिल हो" +[12:14] उनको ने जवाब दिया, "अगर हमारे होते इसे भेदिये" (भेड़िया) ने खा लिया, जबके हम एक जत्था (बैंड) हैं, तब तो हम बदे ही निकम्मे होंगे'' +[12:15] इस तरह इसरार करके जब वो उसे ले गए और उनहों ने ताई कर लिया के उसे एक अंधे कुवें (खैर) में छोड़ दें, तो हमने यूसुफ को वही (खुलासा) की ''एक'' वक्त आएगा जब तू इन लोगों को इनकी ये हरकत बताएगा, ये अपने फेल के नटाईज से बे खबर हैं” +[12:16] शाम को वो रोते पीठ-ते (विलाप करते हुए) अपने बाप के पास आए +[12:17] और कहा "अब्बाजान, हम दौड़ने का मुकाबला करने में लग गए थे और यूसुफ को हमने अपने सामान के पास छोड़ दिया था कि इतने में भेड़िया (भेड़िया) आकर उसे खा गया। आप हमारी बात का यकीन ना करेंगे चाहे हम सच्चे ही हों" +[12:18] और वो यूसुफ के कमीज (शर्ट) पर झूठ मूठ का खून लगा कर आये थे। ये सुनकर उनके बाप ने कहा, "बल्के तुम्हारे नफ्स ने तुम्हारे लिए एक बड़ा काम को आसान बना दिया। अच्छा सब्र करूंगा और खूबी करूंगा। जो बात तुम बना रहे हो उसपर अल्लाह ही से मदद मांगी जा सकती है।" +[12:19] उधर एक काफिला आया और उसने अपने पानी लाने के लिए भेजा। सक़्के (जल वाहक) ने जो कुवें में डोल (बाल्टी) डाला तो (यूसुफ को देख कर) पुकार उठा "मुबारक हो! यहाँ तो एक लड़का है"। उन लोगों ने उसको माल ए तिजारत समझ कर छुपा लिया, हालंके जो कुछ वो कर रहे थे खुदा उसे बाख़बर था +[12:20] आखिर ए कार उन्होन ने उसको थोड़ी सी कीमत पर चंद दिरहमो के बदले बेच डाला और वो उसकी कीमत के मामले में कुछ ज्यादा के उम्मेदवार ना थाय +[12:21] मिसर (मिस्र) के जिस शक्स ने उसे खरीदा उसने अपनी बीवी से कहा, "इसको अच्छी तरह रखना, बाद नहीं के ये हमारे लिए मुफीद (उपयोगी) साबित हो या हम इसे बेटा बना लें"।इस तरह हमने यूसुफ के लिए हमें सर-जमीन में क़दम जमाने की सूरत निकली और उसे मामला फहमी की तालीम देने का इंतेज़ाम किया। अल्लाह अपना काम करके रहता है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं +[12:22] और जब वह अपनी पूरी जवानी को पाहुंचा तो हमने उसे कुव्वत ए फैसला और इलम अता किया, इस तरह हम दूसरे लोगों को जजा देते हैं +[12:23] जिस औरत के घर में वह था वो उसपर डोरे डालने लगी (उसे ललचाना शुरू कर दिया) और एक रोज़ दरवाज़े बंद करके बोली “आजा”। यूसुफ ने कहा, "खुदा की पनाह, मेरे रब ने तो मुझे अच्छी मंजिल बख्शी (और मैं ये काम करूं?) ऐसे जालिम कभी फलाह नहीं पाया करते" +[12:24] वो उसकी तरफ बड़ी और यूसुफ भी उसकी तरफ बढ़ता अगर अपने रब की बुरहान ना देख लेता (अपने भगवान का सबूत) ऐसा हुआ। ता-के हम उसे बड़ी और बेहयायी (अभद्रता और अभद्रता) को दूर कर दें, दर-हकीकत वो हमारे चुने हुए बंदोंमें से था +[12:25] आखिर ए कार यूसुफ और वो आगे पीछे दरवाजे की तरफ भागे और उसने पीछे से यूसुफ का कमीज (खींच कर) फाड़ दीया, दरवाज़े पर दोनो ने उसके शोहर को मौजुद पाया। उसे देखते ही औरत कहने लगी, "क्या सजा है उस लड़के की जो तेरी घरवाली पर नियत खराब करे? इसके सिवा और क्या सजा हो सकती है के वो क़ैद किया जाए या उसे सही अज़ाब दिया जाए" +[12:26] यूसुफ़ ने कहा "यही मुझे फांसने की कोशिश कर रही थी"। क्या औरत के अपने कुंबे (परिवार) वालों में से एक शक्स ने (कारने की) शहादत पेश की है, "अगर यूसुफ का कमीज़ आगे से फटा हो तो औरत सच्ची है और ये झूठा +[12:27] और अगर उसका कमीज़ पीछे से फटा हो तो औरत झूठी है और ये सच्चा" +[12:28] जब शोहर ने देखा के युसूफ का कमीज पीछे से फटा है तो उसने कहा "ये तुम औरतों की चालाकियां हैं, हकीकत बड़े गजब की होती हैं तुम्हारी चालें +[12:29] युसुफ, इस मामले से दरगुजर कर और ऐ औरत, तू अपने कसूर की माफी मांग, तू ही असल मैं ख़तरा थी।” +[12:30] शहर की औरतें आपस में चर्चा करने लगी के "अज़ीज़ की बीवी अपने नौजवान गुलाम के पीछे पड़ी हुई है, मुहब्बत ने उसको बे-क़ाबू कर रखा है। हमारे नज़दीक तो वो सारी गलती कर रही है" +[12:31] उसने जो उनकी ये मकराना बातें सुनी तो उनको बुलावा भेज दिया और उनके लिए तकिया-दार मजलिस अरस्ता की और ज़ियाफत में हर एक के आगे एक चूड़ी (चाकू) रख दी। (फिर ऐन हमें वक्त जबके वो फाल काट कर खा रही थी) उसने यूसुफ को इशारा किया के उनके सामने निकल आ। जब उन औरतों की निगाह उसपर पड़ी तो वो दंग रह गई और अपने हाथ काट बैठी और सच (सहज) पुकार उठी " हाशा-लिल-लाह (भगवान हमारी रक्षा करें), ये शक्स इंसान नहीं है, ये तो कोई बुज़ुर्ग फ़रिश्ता है" +[12:32] अज़ीज़ की बीवी ने कहा "देख लिया! ये है वो शक्स जिसके मामले में तुम मुझपर बातें बनाती थी। बहस में मैंने इसे रुझाने (लुभाने) की कोशिश की थी मगर ये बच निकला। अगर ये मेरा कहना ना मानेगा तो क़ैद किया जाएगा और बहुत ज़लील ओ ख्वार होगा +[12:33] यूसुफ ने कहा “ऐ मेरे रब, कैद मुझे मंजूर है बा-निस्बत इसके मैं वो काम करूं जो ये लोग मुझसे चाहते हैं और अगर तू नहीं इनकी चालों को मुझसे दफा ना किया तो मैं इनके दाम में फंस जाऊंगा और जाहिलों में शामिल हो जाऊंगा +[12:34] उसके रब ने उसकी दुआ कबूल की और उन औरतों की चलें उससे दफा करदी। बेचैन वही है जो सब की सुनता है और सब कुछ जानता है +[12:35] फिर उन लोगों को ये समझ के एक मुद्दत के लिए उसे क़ैद करदें हलंके वो (उसकी पाक दमानी और खुद अपनी औरतों के बुरे अतवर की) सारी निशानियां देख चुके थे +[12:36] क़ैद-ख़ाने (जेल) में दो ग़ुलाम और भी उसके साथ दाख़िल हुए। एक रोज़ उन में से एक ने उसे कहा "मैंने ख़्वाब में देखा है के मैं शराब कशीद कर रहा हूँ" दूसरे ने कहा, "मैंने देखा के मेरे सर पर रोटियाँ रखी हैं और परिंदे उनको खा रहे हैं"। डोनो ने कहा "हमें इसकी ताबीर बताइए, हम देखते हैं के आप एक नए आदमी हैं" +[12:37] यूसुफ ने कहा: "यहां जो खाना तुम्हें मिला करता है उसके आने से पहले मैं तुम्हें ख्वाबों की ताबीर बता दूंगा। ये इलम उन उलूम से है जो मेरे रब ने मुझे अता किए हैं। वाकिया ये है के मैंने उन लोगों का तरीक़ा छोड़ कर जो अल्लाह पर ईमान नहीं लाते और आख़िरत का इंकार करते हैं +[12:38] अपने बुज़ुर्गों, इब्राहिम, इशाक और याक़ूब का तरीक़ा इख्तियार किया है, हमारा ये काम नहीं है के अल्लाह के साथ किसी को शरीक तेहरायें .दर-हकीकत ये अल्लाह का फजल है हमपर और इंसानों पर (के उसने अपने सिवा किसी का बंदा हमें नहीं बनाया) मगर अक्सर लोग शुक्र नहीं करते +[12:39] ऐ जिंदान (जेल) के साथियों (साथी कैदियों), तुम खुद ही सोचो के बहुत से मुतफ़र्रिक (विभिन्न) रब बेहतर हैं या वो एक अल्लाह जो सब पर गालिब है +[12:40] उसको छोड़ कर तुम जिसकी बंदगी कर रहे हो वो इसके सिवा कुछ नहीं हैं के बस चंद नाम हैं जो तुमने और तुम्हारे आबा ओ अजदाद ने रख लिए हैं। अल्लाह ने उनके लिए कोई सनद नाज़िल नहीं की। फरमा रवायी (संप्रभुता) का इक्तेदार अल्लाह के सिवा किसी के लिए नहीं है। उसका हुकुम है के खुद उसके सिवा तुम किसी की बंदगी ना करो, यही थीथ सीधा तारीक ए जिंदगी है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं +[12:41] ऐ जिंदान के साथियों, तुम्हारे ख्वाब की ताबीर ये है के तुम में से एक तो अपने रब (शाह ए मिस्र) को शराब पिलाएगा, रहा दूसरा तो उसे सूली पर चढ़ाया जाएगा (सूली पर चढ़ाया जाएगा) और परिंदे उसका सर नोच नोच कर खाएंगे। फैसला हो गया उस बात का जो तुम पूछ रहे थे" +[12:42] फिर उनमें से जिसका मुतालिक ख्याल था के वो रिहा (रिलीज़) हो जाएगा उसे यूसुफ ने कहा के "अपने रब (शाह-ए-मिसर) से मेरा ज़िक्र करना"। मगर शैतान ने उसे ऐसा गफ़लत में डाला के वो अपने रब (शाह-ए-मिसर) से उसका ज़िक्र करना भूल गया और यूसुफ काई साल क़ैद-खाने में पड़ा रहा +[12:43] एक रोज़ बादशाह ने कहा “मैंने ख्वाब में देखा है के सात (सात) मोटी गायें (गायें) जिनको सात (सात) दुबली (दुबली) गायें खा राही हैं, और अनाज के सात बालें हरी (हरा) हैं और पुरानी सात सुखी हैं। ऐ एहले दरबार, मुझे इस ख्वाब की ताबीर बताओ अगर तुम ख्वाबों का मतलब समझते हो।” +[12:44] लोगों ने कहा "ये तो परेशान ख्वाबों की बातें हैं और हम इस तरह के ख्वाबों का मतलब नहीं जानते" +[12:45] उन दो क़ैदियों में से जो शक्स बच गया था और उसे एक मुद्दत दराज़ के बाद अब बात याद आई, उसने कहा "मैं आप हजरत को इसकी तावील बताता हूं, मुझे ज़रा (क़ैद-खाने में युसूफ के पास) भेज दीजिए” +[12:46] उसने जा कर कहा “यूसुफ, ऐ सरापा रस्ती (हे नेक इंसान), मुझे इस ख्वाब का मतलब बता के सात मोती गाएं जिनको सात दुबली गाएं खा रही हैं और सात बालें हरी (मक्के की हरी बालियाँ) हैं और सात सुखी, शायद के मैं उन लोगों के पास जाऊं और शायद के वो जान लें” +[12:47] युसूफ ने कहा “सात बरस तक लगतार तुमलोग खेती-बाड़ी करते रहोगे।” इस दौरन में जो फ़सलें (फसलें) तुम काटो उन में से बस थोड़ा सा हिसा, जो तुम्हारी खुराक के काम आए निकलो और बाकी को उसके बालों में ही रहने दो +[12:48] फिर सात बरस बहुत आएंगे। हमारे ज़माने में वो सब गल्ला (मकई) खा लिया जाएगा जो तुम हमारे लिए वक़्त के लिए जमा करोगे, अगर कुछ बचेगा तो बस वही जो तुमने महफ़ूज़ कर रखा हो +[12:49] इसके बाद फिर एक साल ऐसा आएगा जिसमें बारां-ए-रहमत (प्रचुर मात्रा में बारिश) से लोगों की फरियाद रस की जाएगी और वो रस निचोड़ेंगे” +[12:50] बादशाह ने कहा उसे मेरे पास लाओ। मगर जब शाही फ़रिश्तादा (शाही दूत) यूसुफ़ के पास पहुंचा तो उसने कहा "अपने रब के पास वापस जा और उससे पूछ के उन औरतों का क्या मामला है जिन्हों ने अपने हाथ काट लिए थे? मेरा रब तो उनकी मक्कारी से वाकिफ़ ही है।" +[12:51] क्या पर बादशाह ने उन औरतों से दरियाफ्त किया है "तुम्हारा क्या ताजूरबा है उस वक्त का जब तुमने यूसुफ को रुझाने (लुभाने) की कोशिश की थी?" सब ने एक ज़ुबान होकर कहा "हाशा लिल्लाह! (भगवान हमारी रक्षा करें), हमने तो उसमें बुराई का शईबा तक ना पाया।" अज़ीज़ की बीवी बोल उठी, "अब हक़ खुल चुका है, वो मैं ही थी जिसने उसको फुसलाने की कोशिश की थी। बेशक वो बिल्कुल सच्चा है" +[12:52] (यूसुफ ने कहा) "इससे मेरी ग़रज़ ये थी के (अज़ीज़) ये जान ले के मैंने डर-पुर्दा उसकी ख़यानत नहीं की थी, और ये के जो ख़ियानत करते हैं उनकी चालों को अल्लाह कामियाबी की राह पर नहीं लगता +[12:53] मैं कुछ अपने नफ़्स की बारात नहीं कर रहा हूँ (अपनी आत्मा को पाप से मुक्त नहीं रखता), नफ़्स तो बड़ी (बुराई) पर उक्सता ही है, इल्ला ये के किसी पर मेरे रब की रहमत हो, बेशक मेरा रब बड़ा गफूर ओ रहीम है" +[12:54] बादशाह ने कहा "उन्हें मेरे पास लाओ ता-के मैं उनको अपने लिए मखसूस कर लूं"। जब यूसुफ ने उसे गुफ्तगू की तो उसने कहा "अब आप हमारे हां कादर ओ मंजिल रखते हैं और आप की अमानत पर पूरा भरोसा है” +[12:55] यूसुफ ने कहा, “मुल्क के खज़ाने मेरे सुपुर्द किजिए, मैं हिफाजत करने वाला भी हूं और इलम भी रखता हूं” +[12:56] क्या तारा हमने हमें सर-जमीन में यूसुफ के लिए इक्तेकार (शक्ति) की राह हमवार की। वो मुख्तार था के उसमें जहां चाहे अपनी जगह बने। हम अपनी रहमत से जिसको चाहते हैं नवाजते हैं। नेक लोगों का अजर हमारे हां मारा नहीं जाता +[12:57] और आखिरी का अजर उन लोगों के लिए ज्यादा बेहतर है जो ईमान ले आए और खुदा-तरसी के साथ काम करते रहेंगे +[12:58] यूसुफ के भाई मिस्र (मिस्र) आए और उसके हां हाजिर हुए, उसने उन्हें पहचान लिया मगर वो उसे ना-आशना था +[12:59] फिर जब उसने उनका सामान तय्यार करवा दिया तो चलते वक्त उनसे कहा, “अपने सौतेले भाई को मेरे पास लाना, देखते नहीं हो के मैं किस तरह पैमाना भर कर देता हूं और कैसा अच्छा मेहमान नवाज हूं +[12:60] अगर तुम उसे ना लाओगे तो मेरे पास तुम्हारे लिए कोई गल्ला (अनाज) नहीं है बलके तुम मेरे करीब भी ना फटकना” +[12:61] उनहों ने कहा, “हम कोशिश करेंगे के वालिद साहब उसे भेजने पर राजी हो जाएं, और हम ऐसा जरूर करेंगे” +[12:62] यूसुफ ने अपने ग़ुलामो को इशारा किया के "इन लोगों ने गले के बदले जो माल दिया है वो चुपके से उनके समान ही में रखदो"। ये युसुफ ने इस उम्मीद पर किया के घर पहुंच कर वो अपना वापस पाया हुआ माल पहचान जाएगा (या इस फैयाज़ी पर एहसान-मंद होंगे) और अजब नहीं के फिर पलटें +[12:63] जब वो अपने बाप के पास गए तो कहा "अब्बाजान, आइंदा हमको गल्ला देने से इंकार कर दिया है, लिहाजा आप हमारे भाई को हमारे साथ भेज दीजिए ता-के हम गल्ला लेकर आएं और उसकी हिफाजत के हम जिम्मेदार हैं" +[12:64] बाप ने जवाब दिया "क्या मैं उसके मामले में तुम्हारे जैसा ही भरोसा करूं जैसा पहले उसके भाई के मामले में कर चूका हूं? अल्लाह ही बेहतर मुहाफिज (अभिभावक) है और वो सबसे बढ़कर रहम फरमाने वाला है" +[12:65] फिर जब उन्होन ने अपना सामान खोला तो देखा के उनका माल भी उन्हें वापस कर दिया गया है। ये देख कर वो पुकार उठे "अब्बाजान, और हमें क्या चाहिए, देखिए ये हमारा माल भी हमने वापस दे दिया है। बस अब हम जाएंगे और अपने एहल ओ अयाल के लिए रसद (भोजन का प्रावधान) ले आएंगे, अपने भाई की हिफाजत भी करेंगे और एक बरिश्तार (मक्के का एक अतिरिक्त ऊँट भार) और ज़्यादा भी ले आयेंगे। इन्ते गैले का इज़ाफ़ा आसनी के साथ हो जाएगा” +[12:66] उनके बाप ने कहा “मैं इसको हरगिज़ तुम्हारे साथ ना भेजूंगा जब तक तुम अल्लाह के नाम से मुझको पैमान (प्रतिज्ञा) ना दे दो इसके लिए मेरे पास जरूर वापस लेकर आओगे।” इल्ला ये के कहीं तुम घर ही ले जाओ”। जब उनहों ने उसको अपना पैमान दे दिया तो उसने कहा "देखो, हमारे इस क़ौल पर अल्लाह निगेहबान हैं" +[12:67] फिर उसने कहा "मेरे बच्चों, मिसर के दार-उल-सल्तनत में एक दरवाज़े से दाख़िल न होना बलके मुख़्तलिफ़ दरवाज़ों से जाना। मगर मैं अल्लाह की मशियत से तुमको नहीं बचा सकता, हुकुम उसके सिवा किसी का भी नहीं चलता +[12:68] +[12:69] ये लोग युसूफ के हुजूर थे तो हमने अपने भाई को अपने पास अलग बुला लिया और उसे बता दिया के " मैं तेरा वही भाई हूं (जो खोया गया) था) अब तू उन बातों का गम ना कर जो ये लोग कर रहे हैं।” +[12:70] जब युसूफ ने भाइयों का सामान लधवाने (लोडिंग) लगाया तो उसने अपने भाई के सामान में अपना प्याला (कप) रख दिया। फिर एक पुकारने वाले ने पुकार कर कहा "ऐ काफिले वालों, तुम लोग चोर हो।" +[12:71] उनहों ने पलट कर पूछा "तुम्हारी क्या चीज़ खो गई?" +[12:72] सरकारी मुलाजिमों ने कहा "बादशाह का पैमाना हमको नहीं मिलता" [और उनके जमादार (मुखिया) ने कहा] "जो शक्स लाकर देगा उसके लिए एक बारीशूतार (मकई का ऊंट लादना) इनाम है, इसका मैं ज़िम्मा लेता हूं।" +[12:73] उन भाइयों ने कहा "खुदा की कसम तुम लोग खूब जानते हो के हम इस मुल्क में फ़साद करने नहीं आये हैं, और हम चोरियाँ करने वाले लोग नहीं हैं" +[12:74] उनहोंने कहा "अच्छा, अगर तुम्हारी बात झूठी निकली तो चोर की क्या सजा है?" +[12:75] उनहों ने कहा "उसकी सजा? जिसके समां में से चीज निकले वो आप ही अपनी सजा में रख लिया जाए, हमारे हां तो ऐसे जालिमों को सजा देने का यही तरीका है।" +[12:76] तब यूसुफ ने अपने भाई से पहले उनकी खुर्जियां (पैक) की तलाश लेना शुरू की। फिर अपने भाई की खुर्जी (पैक) से गमशुदा चीज़ बारामद कार्ली। इस तरह हमने यूसुफ की ताईद (समर्थन) अपनी तदबीर से की, उसका ये काम ना था के बादशाह के दीन (यानी मिस्र का शाही कानून) में अपने भाई को पकड़ता इल्ला ये के अल्लाह ही ऐसा चाहे। हम जिसके दर्जे चाहते हैं बुलंद करते हैं, और एक इल्म रखने वाला ऐसा है जो हर साहिब-ए-इलम से बला-तार है +[12:77] उन भाइयों ने कहा "ये चोरी करे तो कुछ ताजुब की बात भी नहीं, इसके पहले इसका भाई (यूसुफ) भी चोरी कर चूका है"। युसूफ उनकी ये बात सुनकर पी गया (अपनी भावनाओं को दबाते हुए) हकीकत उन्पर ना खोली, बस (ज़ेरी-ए-लब) इतना कहकर रह गया के "बड़े ही बुरे हो तुमलोग, (मेरे मुंह डर मुंह मुझपर) जो इल्जाम तुम लगा रहे हो उसकी हकीकत खुदा खूब जानता है" +[12:78] उनहों ने कहा "ऐ सरदार ज़ि-इक़तेदार (अज़ीज़), इसका बाप बहुत बूड़ा आदमी है, इसकी जगह आप हम में से किसी को रख लीजिए। हम आपको बड़ा ही नहीं नफ़्स इंसान पाते हैं।" +[12:79] यूसुफ ने कहा "पनाह बा खुदा, दूसरे किसी शक्स को हम कैसे रख सकते हैं, जिसके पास हमने अपना माल पाया है उसको छोड़ कर दूसरे को रखेंगे तो हम जालिम होंगे।" +[12:80] जब वो युसूफ से मयूस हो गए तो एक गोशे में जा कर आपस में मशवरा करने लगे। उन में जो सबसे बड़ा था वो बोला "तुम जानते नहीं हो के तुम्हारे वालिद तुमसे खुदा के नाम पर क्या अहद ओ पैमान ले चुके हैं, और इस पहले यूसुफ के मामले में जो ज्यादा तुम कर चुके हो वो भी तुमको मालूम है। अब मैं तो यहां से हरगिज ना जाऊंगा जब तक मेरे वालिद मुझे इजाज़त न दें, या फिर अल्लाह ही मेरे हक में कोई फैसला फरमा दे, के वो सब से बेहतर फैसला करने वाला है +[12:81] तुम जा कर अपने वालिद से कहो के “अब्बाजान, आपके साहिबजादे ने चोरी की है। हमने उसे चोरी करते हुए नहीं देखा, जो कुछ हमें मालूम हुआ है बस वही हम बयां कर रहे हैं, और गैब की निगेबानी तो हम ना कर सकते थे +[12:82] आप हमें बस्ती के लोगों से पूछ लीजिए जहां हम थे हमें काफिले से डरायाफ्त कर लीजिए जिसके साथ हम आये हैं. हम अपने बयां में बिल्कुल सच्चे हैं।” +[12:83] बाप ने ये दास्तां सुन कर कहा “दर-असल तुम्हारे नफ्स ने तुम्हारे लिए एक और बड़ी बात को आसान बना दिया।” अच्छा इसपर भी सब्र करूंगा और खूबी करूंगा। क्या बुरा है के अल्लाह उन सबको मुझसे ला मिलाये, वो सब कुछ जानता है और उसके सब काम हिकमत पर मबनी हैं।” +[12:84] फिर वो उनकी तरफ से मुंह फेर कर बैठ गया और कहने लगा के "हाय यूसुफ!" वो दिल ही दिल में ग़म से घुटा जा रहा था और उसकी आँखें सफेद पढ़ गई थीं +[12:85] बेटों ने कहा "ख़ुदा-रा! आप तो बस युसुफ़ ही को याद किये जाते हैं नौबत ये आ गई है के उसके गम में अपने आप को घुला दें या अपनी जान हलाक कर डालेंगे।" +[12:86] उसने कहा " मैं अपनी परेशानी और अपने गम की फरियाद अल्लाह के सिवा किसी से नहीं करता। और अल्लाह से जैसा मैं वाकिफ हूं तुम नहीं हो +[12:87] मेरे बच्चों, जा कर यूसुफ और उसके भाई की कुछ तो लगाओ। अल्लाह की रहमत से मायुस न हो, उसकी रहमत से तो बस काफिर ही मायुस हुआ करते हैं।” +[12:88] जब ये लोग मिसर जा कर यूसुफ की पेशी में दख़िल हुए तो उन्होन ने अर्ज़ किया के "ए सरदार बा इक्तेदार, हम और हमारे एहल ओ अयाल सख्त मुसीबत में मुबतला हैं और हम कुछ हकीर सी पूंजी लेकर आये हैं, आप हमें भरपुर गल्ला इनायत फरमायें और हमको खैरात दें, अल्लाह खैरात करने वालों को जजा देता है।” +[12:89] (ये सुनकर यूसुफ़ से ना रहा गया) उसने कहा, "तुम्हें कुछ ये भी मालूम है कि तुमने यूसुफ़ और उसके भाई के साथ क्या किया था जब तुम नादान थे।" +[12:90] वो चौंक कर बोले "क्या तुम यूसुफ हो?" उसने कहा, "हां, मैं यूसुफ हूं और ये मेरा भाई है। अल्लाह ने हमपर एहसान फरमाया। हकीकत ये है कि अगर कोई तकवा और सब्र से काम ले तो अल्लाह के हां ऐसे नए लोगों का अजर मारा नहीं जाता।" +[12:91] उन्होन ने कहा "बा-खुदा के तुमको अल्लाह ने हमपर फजीलत बख्शी और वक्ती हम ख़तरा थे।" +[12:92] उसने जवाब दिया, "आज तुमपर कोई गिरफ़्तार नहीं, अल्लाह तुम्हें माफ़ करे, वो सब से बढ़कर रहम फ़रमाने वाला है +[12:93] जाओ, मेरा ये कमीज़ ले जाओ और मेरे वालिद के मुँह पर डाल दो, उनकी बिनयि पलट आएगी। और अपने सब एहल-ओ-अयाल को मेरे पास ले आओ।” +[12:94] जब ये काफिला (मिस्र से) रावना हुआ तो उनके बाप ने (कानन में) कहा "मैं यूसुफ की खुशबू महसूस कर रहा हूं, तुम लोग कहीं ये ना कहने लगो के मैं बुढ़ापे में सात हो गया हूं।" +[12:95] घर के लोग बोले "खुदा की कसम आप अभी तक अपने उसी पुराने ख़ब्ते (पुराने भ्रम) में पड़े हैं" +[12:96] फिर जब ख़ुश-ख़बरी लेने वाला आया तो उसने युसुफ़ का कमीज़ याक़ूब के मुँह पर डाल दिया और यक़ीन उसकी बिनयि ओद कर आई। उसे) । तब उसने कहा, "मैं तुमसे कहता था ना कि मैं अल्लाह की तरफ से वह कुछ जानता हूं जो तुम नहीं जानते।" +[12:97] सब बोल उत्थे "अब्बाजान, आप हमारे गुनाहों की बख्शीश के लिए दुआ करें, वाकाई हम खतरनाक थे।" +[12:98] उसने कहा 'मैं अपने रब से तुम्हारे लिए माफ़ी की अंधेरगर्दी करुंगा, वो बड़ा माफ़ करने वाला और रहीम है।' +[12:99] फिर जब ये लोग युसूफ के पास पहुंचें तो हमने अपने वलियों को अपने साथ बिठा लिया और (अपने सब कुंबे वालों से) कहा " चलो अब शहर में चलो, अल्लाह ने चाहा तो अमन चैन से रहोगे।" +[12:100] (शहर में दाख़िल होने के बाद) उसने अपने वलियों को उठा कर अपने पास तख्त पर बिठाया और सब उसके आगे बे इख्तियार सजदे में झुक गए। यूसुफ ने कहा "अब्बाजान, ये ताबीर है मेरे उस ख्वाब की जो मैंने पहले देखा था, मेरे रब ने उसे हकीकत बना दिया। उसका एहसान है के उसने मुझे कैद-खाने से निकाला और आप लोगों को सेहरा से लाकर मुझसे मिलाया, हलांके शैतान मेरे और मेरे भाइयों के दरमियान फसाद डाल चुका वाक़िया ये है के मेरा रब ग़ैर महसूस तदबीरों (रहस्यमय तरीके) से अपनी मशियत पूरी करता है, बेशक वो आलिम और हकीम है +[12:101] ऐ मेरे रब, तू नहीं मुझे हुकूमत बख्शी और मुझको बातों की तह तक। पाहुंचना सिखाया। ज़मीन ओ आसमान के बनाने वाले, तू ही दुनिया और आख़िरत में मेरा सरपरस्त है, मेरा ख़तमा इस्लाम पर कर और अंजाम ए कार मुझे सालिहें के साथ मिला'' +[12:102] (ऐ मुहम्मद) ये क़िस्सा गैब की ख़बरों में से है जो हम तुमपर वही कर रहे हैं, वरना तुम उस वक्त मौजुद न थे जब यूसुफ के भाइयों ने आपस में इत्तेफाक करके साजिश की थी +[12:103] मगर तुम ख्वा कितना ही चाहो इनमें से अक्सर लोग मान कर देने वाले नहीं हैं +[12:104] हालंके तुम इस खिदमत पर इनसे कोई उजरत भी नहीं माँगते हो, ये तो एक हिदायत है जो दुनिया वालों के लिए आम है +[12:105] ज़मीन और आसमान में कितनी ही निशानियाँ हैं जिनपर से ये लोग गुज़रते रहते हैं और ज़रा तवज्जु नहीं करते +[12:106] इनमें अक्सर अल्लाह को मानते हैं मगर है तरह के उसके साथ दूसरों को शरीक ठहरते हैं +[12:107] क्या ये मुतमइन हैं के खुदा के अज़ाब की कोई बला इन्हें दबोच ना लेगी या बेखबरी में कयामत की घड़ी अचानक अंदर ना आ जाएगी +[12:108] तुम इनसे साफ कहदो के” मेरा रास्ता तो ये है, मैं अल्लाह की तरफ बुलाता हूं, मैं खुद भी पूरी रोशनी में अपना रास्ता देख रहा हूं और मेरे साथी भी, और अल्लाह पाक है और शिर्क करने वालों से मेरा कोई वास्ता नहीं।' +[12:109] (ऐ मुहम्मद), तुमसे पहले हमने जो पैगम्बर भेजा था वो सब भी इंसान ही था, और इन्हीं बस्तियों के रहने वालों में से थे, और उनकी तरफ हम वही भेज रहे हैं क़ौमों का अंजाम इन्हें नज़र ना आया जो इनसे पहले गुज़र चुकी हैं? यक़ीनन आख़िरत का घर उन लोगों के लिए और ज़्यादा बेहतर है जिन्हों ने (पैगम्बरों की बात मान कर) तकवे के रवीश इख्तियार की। क्या अब भी तुम लोग ना समझोगे +[12:110] (पहले पैगम्बरों के साथ भी यही हो रहा है कि वो मुद्दतों की हिदायतें करते रहे और लोगों ने सुनकर ना दिया) यहां तक ​​के जब पैगम्बर लोगों से मयुस हो गए और लोगों ने भी समझ लिया के उनसे झूठ बोला गया था, तो यकीनन हमारी मदद पैगम्बरों को नहीं मिल पाई। फिर जब ऐसा मौका आ जाता है तो हमारा कायदा ये है कि जिसे हम चाहते हैं बच्चा लेते हैं और मुजरिमों पर से तो हमारा अजब ताला ही नहीं जा सकता +[12:111] क़िस्सों में अगले लोगों के अक़ल-ओ-होश रखने वालों के लिए इबरत है। ये जो कुछ कुरान में बयान किया जा रहा है ये बनवाती बातें नहीं हैं बल्के जो किताबें इसे पहले आई हुई हैं उनकी तस्दीक है, और हर चीज की तफसील और ईमान लाने वालों के लिए हिदायत और रहमत + +Surah 13: Ar-Ra'd (The Thunder) +---------------------------------------- +[13:1] अलिफ़ लाम मीम रा ये किताब-ए-इलाही की आयत हैं, और जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है वो ऐन हक़ है, मगर (तुम्हारी क़ौम के) अक्सर लोग मान नहीं रहे हैं +[13:2] वो अल्लाह हाय है जिसने आसमानों को ऐसे सहरों (समर्थन) के बिना क़याम किया जो तुमको नज़र आते थे, फिर वो अपनी तख्त ए सल्तनत पर जलवा फरमा हुआ, और उसने आफताब (सूरज) ओ महताब (चांद) को एक कानून का बंधन बनाया। इस सारे निज़ाम की हर चीज़ एक वक़्त-ए-मुकर्रर तक के लिए चल रही है। और अल्लाह हाय सारे काम की तद्बीर फरमा रहा है। वो निशानियां खोल-खोल कर बयान करता है, शायद के तुम अपने रब की मुलाकात का यकीन करो +[13:3] और वही है जिसने जमीन फैला रखी है, इस में पहाड़ों के खूंटे गाड़ रखे हैं और दरिया बहा दिए हैं, उसी ने हर तरह के फल (फल) के जोडे पेदा किये हैं, और वही दिन पर रात तारी करता है। सारी चीज़ों में बड़ी निशानियाँ हैं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फ़िक्र से काम लेते हैं +[13:4] और देखो, ज़मीन में अलग-अलग खित्ते (क्षेत्र) पाये जाते हैं जो एक दूसरे से मुत्तसिल (एक दूसरे के करीब) वक़्त हैं अंगूर के बाग़ हैं, खेतियाँ हैं, खजूर के दरख्त हैं जिनमें से कुछ अकेले (सिंगल) हैं और कुछ दोहरे (डबल ट्रंक)। सबको एक ही पानी साराब करता है मगर मजे में हम किसी को बेहतर बना देते हैं और किसी को कमतर। सब चीज़ों में बहुत सी निशानियाँ हैं उन लोगों के लिए जो अक़ल से काम लेते हैं +[13:5] अब अगर तुम्हें तज्जुब करना है तो तज्जुब के काबिल लोगों का ये क़ौल है के "जब हम मर कर मिट्टी हो जायेंगे तो क्या हम नये सिरे से पैदा किये जायेंगे?" ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने रब से कुफ्र किया है, ये वो लोग हैं जिनके गर्दानो में तौक (तौक/बेड़ियाँ) पड़े हुए हैं, ये जहन्नुमी हैं और हमेशा रहेंगे +[13:6] ये लोग भलाई से पहले बुराई के लिए जल्दी मचा रहे हैं, हलांके इनसे पहले (जो लोग इस रवीश पर चले हैं उनपर खुदा के अज़ाब की) इब्रत-नाक मिसालें गुजर चुकी हैं। हकीकत ये है के तेरा रब लोगो की ज्यादतियों के साथ उनके साथ चश्मे-पोशी (सहनशीलता) से काम लेता है और ये भी हकीकत है के तेरा रब सख्त सजा देने वाला है +[13:7] ये लोग जिन्हों ने तुम्हारी बात मन से इंकार कर दिया है, कहते हैं के “इस शक्स पर इसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों ना उतारी? तुम तो महज़ ख़बरदार होने वाले हो, और हर क़ौम के लिए एक रहनुमा है +[13:8] अल्लाह एक हामिला (गर्भवती) के पति से वाकिफ है, जो कुछ उसमें बनता है उसे भी वह जानता है और जो कुछ इसमें कामी या बेशी होती है उसमें भी वह खबर रहता है। हर चीज के लिए उसके हां एक मिकदर मुकर्रर है +[13:9] वो पोशीदा और जाहिर, हर चीज का आलिम है, वो बुजुर्ग है और हर हाल में बाला-तर रहने वाला है +[13:10] तुम में से कोई शक्स ख्वा जोर से बात करे या आहिस्ता, और कोई रात की तारीकी (अंधेरे) में छुपा हुआ हो या दिन की रोशनी में चल रहा हो, उसके लिए सब यक्सन है +[13:11] हर शक्स के आगे और पीछे उसके मुकर्रर किये हुए निगरान लगे हुए हैं जो अल्लाह के हुकुम से उसकी देख-भाल कर रहे हैं। हकीकत ये है कि अल्लाह किसी कौम के हाल को नहीं बदल सकता, जब तक वो खुद अपने अवसाफ को नहीं बदल देता, और जब अल्लाह किसी कौम की शामत (प्रतिशोध) लाने का फैसला करले तो फिर वो किसी के ताले नहीं बदल सकता, ना अल्लाह के मुकाबले में ऐसी कौम का कोई हामी ओ मददगार हो सकता है +[13:12] वही है जो तुम्हारे सामने बिजली चमकता है जिन्हें देख कर तुम्हें अंदेशे (डर) भी लहक होते हैं और उम्मीदें भी बांधती है, वही है जो पानी से लड़े हुए बादल उतारता है +[13:13] बादलों की गरज उसकी हम्द के साथ उसकी पाकी बयां करती है और फरिश्ते उसकी हैबत(आवे) से लरजते हुए उसकी तस्बीह करते हैं। वो ताकत हुई बिजली को भेजता है और (बासा औकात) उन्हें जिसका प्यार चाहता है ऐन इस हाल में गिरा देता है जबके लोग अल्लाह के बारे में झगड़ा करते रहते हैं। फिल वक़हे उसकी चाल बड़ी ज़बरदस्त है +[13:14] उसे पुकारना बार-हक़्क़ है, राही वो दूसरी हस्तियां जिन्हें छोड़ कर ये लोग पुकारते हैं, वो उनकी दुआओं का कोई जवाब नहीं दे सकती, उन्हें पुकारना तो ऐसा है जैसे कोई शक्स पानी की तरफ हाथ फैला कर उसे अंधेरा कर दे के तू मेरे मुंह तक पहुंच जा, हलंके पानी उस तक पहुंचने वाला नहीं, बस इसी तरह काफिरों की दुआएं भी कुछ नहीं है मगर एक तीर हदफ (लक्ष्यहीन प्रयास) +[13:15] वो अल्लाह ही है जिसकी जमीन ओ आसमान की हर चीज तूं (स्वेच्छा से) ओ करहां (अनिच्छा से) सजदा कर रही है और सब चीज़ों के साये सुबह-ओ-शाम उसके आगे झुकते हैं +[13:16] इनसे पूछो, आसमान ओ ज़मीन का रुब कौन है? कहो, अल्लाह, फिर इनसे कहो के जब हकीकत ये है तो क्या तुमने उसे छोड़ कर ऐसे माबूदों को अपना करसाज़ ठहर लिया जो खुद अपने लिए भी कोई नफा ओ नुक्सान का इख्तियार नहीं रखते? कहो, क्या अंधा और आँखों वाला बराबर हुआ करता है? क्या रोशनी और तारीख़ें यक्सन होती हैं? और अगर ऐसा नहीं तो क्या इनके ठहरे हुए शरीकों ने भी अल्लाह की तरह कुछ अदा किया है कि उसकी वजह से अंदर तकलीक (सृजन) का मामला मुश्तबा (एक जैसा लग रहा था) हो गया? कहो, हर चीज का खालिक (निर्माता) सिर्फ अल्लाह है और वह जानता है, सब पर गालिब +[13:17] अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया और हर नदी नाला अपने ज़र्फ के मुताबिक इसे लेकर चल निकला, फिर जब सैलाब उठा तो साथ पर झाग (फोम) भी आ गया। और वैसे ही झग उन धातुओं (धातुओं) पर भी उठते हैं जिनमें ज़ेवर (आभूषण) और बर्तन (बर्तन) बनाने के लिए लोग पिघलाया करते हैं। इसी मिसाल से अल्लाह हक़ और बातिल के मामले को वाज़ेह करता है। जो झगड़ा है वो उड़ (गायब) हो जाता है और जो चीज़ इंसानों के लिए नाफ़े (फ़ैय्यादमंद) है वो ज़मीन में ठहर जाती है। इस तरह अल्लाह मिसालों से अपनी बात समझता है +[13:18] जिन लोगों ने अपने रब की दावत कबूल की है उनके लिए भलाई है। और जिन्होन ने इसे क़बूल ना किया वो अगर ज़मीन की सारी दौलत के भी मालिक हों और उतनी ही और फ़राहम कार्लें तो वो ख़ुदा की पकड़ से बचने के लिए इस सब को फ़िदिया (फिरौती) में दे डालने पर तैयार हो जायेंगे। ये वो लोग हैं जिनसे बुरी तरह हिसाब लिया जाएगा, और उनका ठिकाना जहन्नुम है, बहुत ही बुरा ठिकाना +[13:19] भला ये किस तरह मुमकिन है के वो शक्स जो तुम्हारे रब की इस किताब को जो उसने तुमपर नाज़िल की है हक़ जानता है, और वो शक्स जो इस हकीकत की है तरफ से अंधा है, दोनो यकसन हो जाये? हिदायत तो दानिशमंद (बुद्धिमान) लोग ही क़बूल किया करते हैं +[13:20] और उनका तर्ज़-ए-अमल ये होता है के अल्लाह के साथ अपने अहद को पूरा करते हैं, उसे मज़बूत बांधने के बाद तोड़ नहीं डालते +[13:21] उनकी रवीश ये होती है के अल्लाह ने जिन जिन रावबित को बरक़रार रखने का हुकुम दिया है, उन्हें बरक़रार रखते हैं, अपने रुब से डरते हैं और इस बात का ख़ौफ़ रखते हैं के कहीं उन्हें बुरी तरह हिसाब ना लिया जाए +[13:22] उनका हाल ये होता है के अपने रुब की रज़ा के लिए सब्र से काम लेते हैं, नमाज़ क़याम करते हैं, हमारे दिए हुए रिज़क में से एलानिया (खुले तौर पर) और पोशीदा खर्च करते हैं, और बुराइयों को भलाई से दफा करते हैं, आख़िरत का घर उन्हीं लोगों के लिए है +[13:23] यानी ऐसे बाग़ जो उनकी आबादी क़यामगाह होंगे। वो खुद भी उनमें दाखिल होंगे और उनके आबा ओ अजदाद और उनकी बीवीयां और उनकी औलाद में से जो सालेह (नेक) हैं वो भी उनके साथ वहां जाएंगे। मलायका हर तरफ से उनके इस्तेकबाल के लिए आएंगे +[13:24] और उनसे कहेंगे के "तुम्हारे सलामती है, तुमने दुनिया में जिस तरह सब्र से काम लिया उसकी बदौलत आज तुम इसके मुस्तहिक हुए हो"। पास क्या ही ख़ूब है ये आख़िरत का घर +[13:25] रहे वो लोग जो अल्लाह के अहद को मज़बूत बांध लेने के बाद तोड़ देते हैं, जो उन रबतों (रिश्ते) को काटते हैं जिन्हें अल्लाह ने जोड़ने का हुकुम दिया है, और जो ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं, वो लाते हैं के मुस्तहिक हैं और उनके लिए आख़िरत में बहुत बुरा ठिकाना है +[13:26] अल्लाह जिसको चाहता है रिज़क की फराखी बक्शता है और जिसे चाहता है नपा-तुला रिज़क देता है +[13:27] +[13:28] ऐसे ही लोग हैं वो जिन्होन ने (इस नबी की दावत को) मान लिया है और उनके दिलों को अल्लाह की याद से इत्मिनान नसीब होता है, खबरदार रहो! अल्लाह की याद ही वो चीज़ है जिसके दिलों को इत्मिनान नसीब हुआ करता है +[13:29] फिर जिन लोगों ने दावत-ए-हक़ को माना और नेक अमल किये वो ख़ुश-नसीब हैं और उनके लिए अच्छा अंजाम है +[13:30] (ऐ मुहम्मद) इसी शान से हमने तुमको रसूल बना कर भेजा है, एक ऐसी क़ौम में जिसके पहले बहुत सी क़ौमें गुज़र चुकी हैं, ता-के तुम इन लोगों को वो पैगाम सुनाओ जो हमने तुंपर नाज़िल किया है, इस हाल में के ये अपने निहायत मेहरबान खुदा के काफिर बने हुए हैं। इनसे कहो के वही मेरा रब है, उसके सिवा कोई मबूद नहीं है, उसी पर मैंने भरोसा किया और वही मेरा मालजा-ओ-मावी है (वह मेरा एकमात्र सहारा है/उसी पर मेरा भरोसा है, और मैं उसकी ओर मुड़ता हूं) +[13:31] और क्या हो जाता अगर कोई ऐसा कुरान उतार दिया जाता जाता जिसका ज़ोर से पहाड़ चले लगे, या जमीन शक्क हो (फट्ट) जाती, या मुर्दे कब्रों से निकल कर बोलने लगते? (इस तरह की निशानियां दिखा देना कुछ मुश्किल नहीं है) बलके सारा इख्तियार हाय अल्लाह के हाथ में है। फिर क्या एहले ईमान (अभी तक कुफ्फार की तालाब के जवाब में किसी निशानी के जहूर की आस लगाए बैठे हैं और वो ये जान कर) अगर अल्लाह चाहता तो सारे इंसानों को हिदायत दे देता? जिन लोगों ने खुदा के साथ कुफ्र का रवैय्या इख्तियार कर रखा है उन पर उनके कार्टूनों की वजह से कोई ना कोई आफत आती ही रहती है या उनके घर के करीब कहीं नाज़िल होती है। ये सिलसिला चलता रहेगा यहां तक ​​के अल्लाह का वादा आन पूरा हो। यकीनन अल्लाह अपने वादे की खिलाफ वारज़ी नहीं करता +[13:32] तुमसे पहले भी बहुत से रसूलों का मज़ाक उड़ाया जा चूका है, मगर मैंने हमेशा मुनकिरेन को ढील दी और आख़िर ए कार उनको पकड़ लिया, फिर देखलो के मेरी सज़ा कैसी सच थी +[13:33] फिर क्या वो जो एक-एक मुतनफ़्फ़िस (हर आत्मा) की कमाई पर नज़र रखता है (उसके मुक़ाबले में ये जसरतें की जा रही हैं के) लोगों ने उसे कुछ शरीक वहीं रखा है? (ऐ नबी), इनसे कहो (अगर वक्त वो खुदा के अपने बने हुए शरीक हैं तो) जरा उनके नाम लो के वो कौन हैं? क्या तुम अल्लाह को एक नई बात की खबर दे रहे हो जैसे वो अपनी ज़मीन में नहीं जानता? हां तुम लोग बस यूं ही जो मुंह में आता है केह डालते हो? हकीकत ये है के जिन लोगों ने दावत ए हक को मन्ने से इंकार किया है उनके लिए उनकी मक्कारियां खुशनुमा बना दी गई हैं और वो राह-ए-रास्त से रुक गए हैं, फिर जिसको अल्लाह गुमराही में फेंक दे उसे कोई राह दिखाने वाला नहीं है +[13:34] ऐसे लोगों के लिए दुनिया की जिंदगी ही में अजाब है, और आखिरी का अजाब उसे भी ज्यादा पसंद है, कोई ऐसा नहीं जो उन्हें खुदा से बचाने वाला हो +[13:35] खुदा तरस इंसानों के लिए जिस जन्नत का वादा किया गया है उसकी शान ये है के उसके खास नहेरे (नहरें) बह रही हैं, उसके फल (फल) दैमी (अनन्त) हैं और उसका साया ला-ज़वाल (सनातन)। ये अंजाम है मुत्तक़ी (पवित्र) लोगों का, और मुनकिरीन ए हक़ का अंजाम ये है के उनके लिए दोज़ख की आग है +[13:36] (ऐ नबी), जिन लोगों को हमने पहले किताब दी थी वो इस किताब से जो हमने तुमपर नाज़िल की है ख़ुश हैं और मुख़्तलिफ़ गिरोहों में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसकी बाज़ बातों को नहीं मानते। तुम साफ कहदो के "मुझे तो सिर्फ अल्लाह की बंदगी का हुकुम दिया है और इसे मना किया है कि किसी को उसके साथ शरीक ठहरूं, लिहाजा मैं उसकी तरफ दावत देता हूं और उसकी तरफ मेरा रूजू है" +[13:37] इसी हिदायत के साथ हमने ये फ़रमान-ए-अरबी तुमपर नाज़िल किया है। अब अगर तुमने इल्म के बारे में कहा है कि तुम्हारे पास आ चुका है लोगों की ख्वाहिश की जोड़ी अल्लाह के मुकाबले में ना कोई तुम्हारा हामी ओ मददगार है और ना कोई उसकी पकड़ से तुमको बचा सकता है +[13:38] तुमसे पहले भी हम बहुत से रसूल भेज चुके हैं और उनको हमने बीवी बच्चों वाला ही बनाया था, और किसी रसूल की भी ये ताक़त ना थी के अल्लाह के इज़ान के बगैर कोई निशानी खुद ला दिखता। हर दौर के लिए एक किताब है +[13:39] अल्लाह जो कुछ चाहता है मिटा देता है और जिस चीज को चाहता है क़याम रखता है, उम्मुल किताब (मूल किताब) उसके पास है +[13:40] और (ऐ नबी), जिस बुरे अंजाम की धमकी हम इन लोगों को दे रहे हैं उसका कोई हिसा ख्वा हम तुम्हारे जीते जी दिखा दें या उसके ज़हूर में आने से पहले हम तुम्हें उठा लें, बाहर हाल तुम्हारा काम सिर्फ पैग़ाम पहनना है और हिसाब लेना हमारा काम है +[13:41] क्या ये लोग देखते नहीं हैं के हम इस सर-ज़मीन पर चले आ रहे हैं और इसका दायरा (सीमाएं) हर तरफ से तंग करते चले आते हैं? अल्लाह हुकुमत कर रहा है, कोई उसके फैसले पर नज़र-ए-सानी (संशोधन) करने वाला नहीं है, और उसे हिसाब लेते हुए कुछ देर नहीं लगती +[13:42] इनसे पहले जो लोग हो गुज़रे हैं वो भी बड़ी-बड़ी चलें चल चुके हैं, मगर असल फैसला-कुन चल तो पूरी की पूरी अल्लाह ही के हाथ में है। वो जानता है कि कौन क्या कमाई कर रहा है, और अनकरीब ये मुनकिरीन-ए-हक़ (काफिर) देख लेंगे के अंजाम किसका ब-खैर होता है +[13:43] ये मुनकीरीन कहते हैं कि तुम खुदा के भेजे हुए नहीं हो। कहो "मेरे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह की गवाही काफी है, और फिर हर उस शक्स की गवाही जो किताब ए आसमानी का इल्म रखता है" + +Surah 14: Ibrahim (Abraham) +---------------------------------------- +[14:1] अलिफ लाम रा (ऐ मुहम्मद), ये एक किताब है जिसको हमने तुम्हारी तरफ नाज़िल किया है ता-के तुम लोगों को तारिकियों (अंधेरे) से निकाल कर रोशनी में लाओ उनके रब की तौफीक से, हमें खुदा के रास्ते पर जो ज़बरदस्त और अपनी ज़ात में आप महमूद हैं (काबिल ए तारीफ है) +[14:2] और ज़मीन और आसमान की सारी मौजुद्दत (हर चीज़) का मालिक है, और सख्त तबाह-कुन सजा है कबूल ए हक से इनकार करने वालों के लिए +[14:3] जो दुनिया की जिंदगी को आखिरी पर तरजीह देता है, जो अल्लाह के रास्ते से लोगों को रोक रहे हैं और चाहते हैं कि ये रास्ता (उनकी ख्वाहिश के) मुताबिक) तेदा (टेढ़ा) हो जाये। ये लोग गुमराही में बहुत दूर निकल गए हैं +[14:4] हमने अपना पैगाम देने के लिए जब कभी कोई रसूल भेजा है, उसने अपनी क़ौम ही कि जुबान में पैगाम दिया है ता-के वो उन्हें अच्छी तरह से खोल कर बात समझाए। फिर अल्लाह जिसे चाहता है भटका देता है और जिसे चाहता है हिदायत बख्शता है, वो बालादस्त (गालिब/सर्वशक्तिमान) और हकीम है +[14:5] हम इस पहले मूसा को भी अपनी निशानियों के साथ भेज चुके हैं, हमने भी हुकुम दिया था कि अपनी क़ौम को तरीकियों (अंधेरे) से निकल कर रोशनी में ला और उन्हें तारीख-ए-इलाही (ईश्वरीय इतिहास) के सबक-आमोज़ वाकियात सुना कर हिदायत कर। वाकियात में बड़ी निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो सब्र और शुक्र करने वाला हो +[14:6] याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा "अल्लाह के हमें एहसान को याद रखो जो उसने तुमपर किया है, उसने तुमको फिरौन वालों से छुड़ाया जो तुमको मजबूत तकलीफें देते थे, तुम्हारे लड़कों को कत्ल कर डालते थे और तुम्हारी औरतों को जिंदा बच्चा रखते थे, तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारी बड़ी आजमाइश थी +[14:7] और याद रखो, तुम्हारे रब ने खबरदार बना दिया था तो मैं। तुमको और ज़्यादा नवाज़ूंगा और अगर कुफ़्रान-ए-नियामत (कृतघ्न) करोगे तो मेरी सज़ा बहुत ज़रूरी है” +[14:8] और मूसा ने कहा के “अगर तुम कुफ़्र करो और ज़मीन के सारे रहने वाले भी काफ़िर हो जाएँ तो अल्लाह रहो नियाज़ और अपनी ज़ात में आप महमूद हैं” +[14:9] क्या तुम उन क़ौमों के हालात नहीं पाहुंचे जो तुमसे पहले गुज़र चुकी हैं? कौम-ए-नूह, आद, समूद और उनके बाद आने वाली बहुत से कौमें जिनका शूमर अल्लाह ही को मालूम है? उनके रसूल जब उनके पास साफ-साफ बातें और खुली-खुली निशानियां लिए हुए आए तो उन्हें ने अपने मुंह में हाथ दबा लिया और कहा के “जिस पैगाम के साथ तुम भेज गए हो हम उसको नहीं मानते और जिस चीज की तुम हमें दावत देते हो उसकी तरफ से हम सख्त खलजन हैं।” आमीज़ शक्क (बेचैन करने वाला संदेह) में पैदा हुए हैं” +[14:10] उनके रसूलों ने कहा “क्या खुदा के बारे में शक्क है जो आसमान और ज़मीन का खालिक है? वो तुम्हें बुला रहा है ता-के तुम्हारे कसूर माफ़ करे और तुमको एक मुद्दत-ए-मुक़र्रर तक? मोहलात दे”। अनहोन ने जवाब दिया “तुम कुछ नहीं हो मगर वैसे ही इंसान जैसे हम हैं, तुम हमें उन हस्तियों की बंदगी से रोकना चाहते हो जिनकी बंदगी बाप दादा से होती चली आ रही है, अच्छा तो लाओ कोई सारी सनद (स्पष्ट प्रमाण)” +[14:11] उनके रसूलों ने उन्हें कहा “वाकई हम कुछ” नहीं हैं मगर तुम ही जैसे इंसान, लेकिन अल्लाह अपने बंदों में से जिसका चाहता है नवाजता है और ये हमारे इख्तियार में नहीं है कि तुम्हें कोई सनद ला दें अल्लाह ही के इज़ान (अनुमति/इच्छा) से आ सकता है चाहिए +[14:12] और हम क्यों न अल्लाह पर भरोसा करें जबके हमारी जिंदगी की राहों में उसने हमारी रहनुमाई की है? जो अज़ियातें (तक़लीफ़ीन) तुम लोग हमें दे रहे हो उन्पर हम सब्र करेंगे और भरोसा करने वालों का भरोसा अल्लाह ही पर होना चाहिए” +[14:13] आख़िर-ए-कार मुनकिरीन ने अपने रसूलों से कहा के “ हां तो तुम हमारी मिल्लत में वापस आना होगा वरना हम तुम्हें अपने मुल्क से निकल देंगे”। तब उनके रब ने उन्पर वही भेजी के "हम इन जालिमों को हलाक कर देंगे +[14:14] और उनके बाद तुम्हारी जमीन में आबाद करेंगे। ये इनाम है उसका जो मेरे हुजूर जवाब-देही (जवाबदेही) का खौफ रखता हो और मेरी वेद से डरता हो" +[14:15] अनहोन ने फैसला चाहा था (तो यूं उनका फैसला हुआ) और हर जब्बार (अत्याचारी) दुश्मन-ए-हक़्क़ ने मुहं की खाई (अपमानिता झेली) +[14:16] फिर इसके बाद आगे उसके लिए जहन्नुम है, वहां उसे कच-लहू (खून) का सा पानी पीने को दिया जाएगा +[14:17] जिसे वाह ज़बरदस्ती हलक़ से उतरें की कोशिश करेगा और मुश्किल ही से उतार सकेगा। मौत हर तरफ़ से उसपर छायी रहेगी मगर वो मरने ना पायेगा और आगे एक साख अज़ाब उसकी जान का लागू रहेगा +[14:18] जिन लोगों ने अपने रब से कुफ्र किया है उनके अमाल की मिसाल हमें रख (राख) की सी है जिसने एक तूफानी दिन की आंधी ने उड़ा दिया हो। वो अपने किये का कुछ भी फल (ना पा सकेंगे, यहीं पारले दर्जे की गम गश्तगी (चरम विचलन) है +[14:19] क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह ने आसमां ओ ज़मीन की तहलीक को हक़ पर क़याम किया है? वो चाहे तो तुम लोगों को ले जाई और एक नई ख़ल्क़त (रचना) तुम्हारी जगह ले आओ +[14:20] ऐसा करना उसपर कुछ भी नहीं है +[14:21] और ये लोग जब इकात्थे अल्लाह के सामने बे-नकाब होंगे तो हमारे वक्त में से जो दुनिया में कामजोर था वो उन लोगों से जो बदे बने हुए थे, कहेंगे "दुनिया में हम तुम्हारे तबे थे, अब तुम अल्लाह के अज़ाब से हमको बचाने के लिए भी कुछ कर सकते हो?” वो जवाब देंगे "अगर अल्लाह ने हमें नजात की कोई राह दिखाई होती तो हम जरूर तुम्हें भी दिखाते, अब तो यक्सन है, ख्वा हम जजा-फजा करें या सब्र, बाहर हाल हमारे बचने की कोई सूरत नहीं" +[14:22] और जब फैसला चुका दिया जाएगा तो शैतान कहेगा" हकीकत ये है के अल्लाह ने जो वादे तुमसे किए थे वो सब सच्चे थे और मैंने जितने वादे किए उन में से कोई भी पूरा ना किया, मैंने इसके अलावा कुछ नहीं किया के अपने रास्ते की तरफ तुम्हें दावत दी और। तुमने मेरी दावत पर लब्बैक किया (कबूल की)। अब मुझे मालामत ना करो, अपने आप को मालामत करो। यहां ना मैं तुम्हारी फरियाद-रसी कर सकता हूं और ना तुम मेरी। इस्से पहले जो तुमने मुझे ख़ुदाई में शरीक बना रक्खा था मैं उससे बारी उज़-ज़िम्मा (खुद को अलग कर लेना) हूं। ऐसे जालिमों के लिए दर्दनाक सजा यकीनी है” +[14:23] बा खिलाफ इसके जो लोग दुनिया में ईमान लाए हैं और जिन्हों ने नीक अमल किए हैं वो ऐसे बागों में दाख़िल किए जाएंगे जिनके नीचे नेहरेन बहती होंगी। वहां वो अपने रब के इज्न (अनुमति) से हमेशा रहेंगे, और वहां उनका इस्तेकबाल सलामती की मुबारकबादी से होगा +[14:24] क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह ने कलिमा-ए-तैयब को किस चीज से मिसाल दी है? इसकी मिसाल ऐसी है जैसे एक अच्छी ज़ात का दरख्त, जिसकी जड़ (जड़) ज़मीन में गहरी जमी हुई है और शाखें (शाखाएँ) आसमान तक पहुँची हुई हैं +[14:25] हर आन वो अपने रब के हुकुम से अपना फल दे रहा है। ये मिसालें अल्लाह इसलिए देता है के लोग इनसे सबक लें +[14:26] और कलिमा ए खबीसा (बुरा शब्द) की मिसाल एक बद-ज़ात दरख्त की सी है जो ज़मीन की साथ से उखाड़ फेंका जाता है, उसके लिए कोई इस्तेहकम (स्थिरता) नहीं है +[14:27] ईमान लाने वालों को अल्लाह एक क़ौल-ए-साबित की बुनियाद पर दुनिया और आख़िरत, दोनों में सबात (दृढ़) अता करता है, और ज़ालिमों को अल्लाह भटका देता है। अल्लाह को इख्तियार है जो चाहे करे +[14:28] तुमने देखा उन लोगों को जिन्होनें अल्लाह की नियामत पाई और उसे कुफ्रान-ए-नियामत (कृतघ्नता) से बदल डाला और (अपने साथ) अपनी क़ौम को भी हलाकत के घर में झोंक दिया +[14:29] यानी जहन्नुम, जिसमें वो झुलस जाएंगे और वो बढतरीन जाए करार है +[14:30] और अल्लाह के कुछ हमसर (अल्लाह के बराबर) तजवीज कार्लिये ता-के वो उन्हें अल्लाह के रास्ते से भटका दें। इनसे कहो: अच्छा मजा करलो, आख़िर ए कार तुम्हें पलट कर जाना दोज़ख ही में है +[14:31] (ऐ नबी), मेरे जो बंदे ईमान लाए हैं उनसे कहदो के नमाज़ क़याम करें और जो कुछ हमने उनको दिया है, उसमें से खुले और छुपे (राह ए ख़ैर में) ख़र्च करें क़बल इसके के वो दिन आए जिस्में ना ख़त्म ओ फ़रोख्त होगी और ना दोस्त नवाज़ी हो साकेगी (दोस्ती काम आएगी) +[14:32] अल्लाह वही तो है जिसने जमीन और आसमान को पेदा किया और आसमान से पानी बरसाया, फिर उसकी ज़रिये से तुम्हारी रिज्क रसानी के लिए तरह तरह के फल पेदा किये। जिसने कश्ती को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया के समंदर में उसके हुकुम से चले और दरियाओं को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया +[14:33] जिसने सूरज और चांद को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया के लगतार चले जा रहे हैं और रात और दिन को तुम्हारे लिए मुसक्खर किया किया +[14:34] जिनसे वो सब कुछ तुम्हें दिया जो तुमने मांगा, अगर तुम अल्लाह किन नियमों का पालन करना चाहो तो कर नहीं सकते। हकीकत ये है कि इंसान बड़ा ही बे-इंसाफ और नाशुक्र है +[14:35] याद करो वो वक्त जब इब्राहीम ने दुआ की थी के “परवरदिगार, इस शहर को अमन का शहर बना और मुझे और मेरी औलाद को बुथ परस्ती (मूर्ति पूजा) से बचा +[14:36] परवरदिगार, बुथों (मूर्तियों) में ने बहुतों को गुमराही में डाला है (मुमकिन है के मेरी औलाद को भी ये गुमराह कर दें, लिहाज़ा उनमें से) जो मेरे तारीख पर चले वो मेरा है और जो मेरे खिलाफ़ तारीख इख्तियार करे तो यकीनन तू दरगुज़ार करने वाला मेहरबान है +[14:37] परवरदिगार, मैंने एक बे आब-ओ-गियाह वादी (बंजर घाटी) में अपनी औलाद के एक हिस्से को तेरे मोहतरम घर के पास ला बसाया है। परवरदिगार, ये मैंने इसके लिए क्या है के ये लोग यहां नमाज़ क़याम करें। लिहाज़ा तू लोगों के दिलों को इनका मुश्ताक बना (लोगों का दिल उनके प्रति) और उन्हें खाने को फल दे, शायद के ये शुक्रगुज़ार बनें +[14:38] परवरदिगार, तू जानता है जो कुछ हम छुपाते हैं और जो कुछ जाहिर करते हैं”। और वक़ई अल्लाह से कुछ भी छुपा हुआ नहीं है, न ज़मीन में न आसमानो में +[14:39] “शुक्र है हमें खुदा का जिसने मुझे इस बुढापे में इस्माइल और इशाक जैसे बेटे दिए, हकीकत ये है के मेरा रब ज़रूर दुआ सुनता है +[14:40] ऐ मेरे परवरदिगार, मुझे नमाज़ क़याम करने वाला बना और मेरी औलाद से भी (ऐसे लोग उठा जो ये काम करें) परवरदिगार, मेरी दुआ क़बूल कर +[14:41] परवरदिगार, मुझे और मेरे वलियों को और सब ईमान लाने वालों को उस दिन माफ़ करदीजियो जबके हिसाब क़याम होगा” +[14:42] अब ये जालिम लोग जो कुछ कर रहे हैं अल्लाह को तुम उसे गाफिल ना समझो। अल्लाह तो इन्हें टाल रहा है उस दिन के लिए जब हाल ये होगा के आंखें फटी की फटी रह गई हैं +[14:43] सर उठे भाग चले जा रहे हैं, नजरें ऊपर जमी हैं और दिल उड़े जाते हैं +[14:44] (ऐ मुहम्मद), उस दिन से तुम इन्हें डराओ जबके अज़ाब इन्हें आ लेगा हमें वक्त ये जालिम कहेंगे के "ऐ हमारे रब, हमें थोड़ी सी मोहलत और दे दे, हम तेरी दावत को लब्बैक कहेंगे और रसूलों की पैवारी करेंगे"। (मगर उन्हें साफ जवाब दे दिया जाएगा के) क्या तुम वही लोग नहीं हो जो इसे पहले कसमें खा खा कर कहते थे थाय के हमपर तो कभी जवाब (गिरावट) आना ही नहीं है +[14:45] हालंके तुम उन क़ौमों की बस्तियों में रह बस चुके थे जिन्होन ने अपने ऊपर आप ज़ुल्म किया था और देख चुके थे के हमने उनसे क्या सुलूक किया और उनकी मिसालें (उदाहरण) दे कर हम तुम्हें समझा भी चुके थे +[14:46] उन्होन ने अपनी सारी ही चलें चल देखी, मगर उनकी हर चाल का तोड़ अल्लाह के पास था, अगर उनकी चालें ऐसी गजब की थी के पहाड़ उनसे ताल जाए +[14:47] पास (ऐ नबी), तुम हरगिज ये गुमान न करो के अल्लाह कभी अपने रसूलों से किए हुए वादों के खिलाफ करेगा। अल्लाह ज़बरदस्त है और इंतक़ाम लेने वाला है +[14:48] दारो इन्हें हम दिन से जबके ज़मीन और आसमां बदल कर कुछ कर देंगे और सब अल्लाह वाहिद ए कहार (एक जो चिड़चिड़ा है) के सामने बे-नक़ब हाज़िर हो जायेंगे +[14:49] हमें रोज़ तुम मुजर्रीमों को देखोगे के ज़ंजीरों में हाथ पाँव जकड़े होंगे +[14:50] तार-कोल (तरल पिच/टार/डंबर) के लिबास पहने हुए होंगे और आग के शोले उनके चेहरों पर छाये जा रहे होंगे +[14:51] ये इस लिए होगा के अल्लाह हर मुतनफ्फिस को उसके किये का बलदा देगा. अल्लाह को हिसाब लेते कुछ देर नहीं लगती +[14:52] ये एक पैगाम है सब इंसानों के लिए, और ये भेजा गया है इसके लिए कि उनको इसके जरीये से खबरदार कर दिया जाए और वो जान लें के हकीकत में खुदा बस एक ही है और जो अक्ल रखते हैं वो होश मैं आ जाइए + +Surah 15: Al-Hijr (The Rock) +---------------------------------------- +[15:1] अलिफ लाम रा .. ये आयत हैं किताब ए इलाही और कुरान ए मुबीन की +[15:2] बैद नहीं के एक वक्त वो आ जाए जब वही लोग जिन्होन ने आज (दवा ए इस्लाम को कबूल करने से) इनकार कार्डिया है पछता-पछता कर कहेंगे के काश हमने सार ए तसलीम खाम करदिया होता +[15:3] चोदो इन्हें खायें (खाएं), पीएं (पीएं) मजे करें और बहलावे में डाले रहें इनको झूठी उम्मीद। अनकारीब इन्हें मालूम हो जाएगा +[15:4] हमने इसे पहले जिस बस्ती को भी हलाक किया है उसके लिए एक खास मोहलत ए अमल लिखी जा चुकी थी +[15:5] कोई क़ौम ना अपने वक्त ए मुकर्रर से पहले हलाक हो सकती है, ना उसके बाद झूठ बोल सकती है +[15:6] ये लोग कहते हैं "ऐ वो शक्स जिस पर ज़िक्र नाज़िल हुआ है, तू यकीनन दीवाना है +[15:7] अगर तू सच्चा है तो हमारे सामने फरिश्तों को ले क्यों नहीं आता?" +[15:8] हम फरिश्तों को यूं ही नहीं उतारते, वो जब उतारते हैं तो हक के साथ उतारते हैं, और फिर लोगों को मोहलत नहीं देते +[15:9] रहा ये जिक्र, तो इसको हमने नाज़िल किया है और हम खुद इसके निगेहबान हैं +[15:10] (ऐ मुहम्मद), हम तुमसे पहले बहुत सी गुज़री हुई क़ौमों में रसूल भेज चुके हैं +[15:11] कभी ऐसा नहीं हुआ के उनके पास कोई रसूल आया हो और उनको मज़ाक न उड़ाया हो +[15:12] मुजरीमीन के दिलों में तो हम इस ज़िक्र को इसी तरह [सलाख़ के मानिंद (छड़ी की तरह)] गुज़रते हैं +[15:13] वो इसपर ईमान नहीं लाया करते। क़दीम (प्राचीन काल) से इस क़ौम के लोगों का यही तरीक़ा चला आ रहा है +[15:14] अगर हम ऊपर आसमान का कोई दरवाज़ा खोल देते हैं और वो दिन दहाड़े हमें छूने भी लगते हैं +[15:15] तब भी वो यहीं कहते के हमारी आँखों को धोखा हो रहा है, बलके हमपर जादू करदिया गया है +[15:16] ये हमारी कार-फरमाई है के आसमान में हमने बहुत से मजबूत गोले बनाए, उनको देखने वालों के लिए सजा लिया +[15:17] और हर शैतान ए मरदूद से उनको महफूज कर दिया +[15:18] कोई शैतान में राह नहीं पा सकता, इल्ला ये के कुछ सन-गन ले ले, और जब वो सन-गन लेने की कोशिश करता है तो एक शोला रोशन उसका पीछा करता है +[15:19] हमने जमीन को फैलाया, हमें पहाड़ जमाये, उसमें हर नाव की नबातात ठीक ठीक नापी तुली मिकदार (माप) के साथ उगी +[15:20] और इस में मैशत के असबाब फराहम किए, तुम्हारे लिए भी और उन बहुत सी मखलूकत के लिए भी जिनका राज़िक तुम नहीं हो +[15:21] कोई चीज़ ऐसी नहीं जिसका खज़ाने हमारे पास ना होन, और जिस चीज को भी हम नाज़िल करते हैं एक मुकर्रर मिकदार (माप) में नाज़िल करते हैं +[15:22] बार-बार हवाओं (उर्वरक हवाओं) को हम ही भेजते हैं, फिर आसमान से पानी बरसाते हैं, और हम पानी से तुम्हें सैराब करते हैं, इस दौलत के खज़ाना-दार तुम नहीं हो +[15:23] जिंदगी और मौत हम देते हैं, और हम ही सबके वारिस होने वाले हैं +[15:24] पहले जो लोग तुम में से हो गुज़रे हैं उनको भी हमने देख रखा है, और बाद के आने वाले भी हमारी निगाह में हैं +[15:25] यकीनन तुम्हारा रब सबको इकठ्ठा करेगा, वो हकीम भी है और आलिम भी +[15:26] हमने इंसान को साडी (सड़ी हुई) हुई मिट्टी के सूखे गारे से बनाया +[15:27] और उसके पहले जिन्नो को हमने आग की गोद से पैदा किया कर चुके थे +[15:28] फिर याद करो उस मौके को जब तुम्हारे रब ने फरिश्तों से कहा के “मैं सदी हुई मिट्टी के सूखे गले से एक बशर अदा कर रहा हूं +[15:29] जब मैं उसे पूरा बना चुका हूं और हम अपनी रूह से कुछ फूंक दूं तो तुम सब उसके आगे सजदे में गिर जाना” +[15:30] चुनांचे तमाम फरिश्तों ने सजदा किया +[15:31] सिवाए इबलीस के, के हमें सजदा करने वालों का साथ देने से इनकार करदिया +[15:32] रब ने पूछा “ ऐ इब्लीस, तुझसे क्या हुआ के तू नहीं सजदा करने वालों का साथ ना दिया?” +[15:33] उसने कहा "मेरा ये काम नहीं है के मैं इस बशर को सजदा करूं जिसमें तू नई सदी हुई मिट्टी के सूखे गले से पेदा किया है" +[15:34] रब ने फरमाया "अच्छा तो निकल जा यहां से क्योंकि तू मरदूद (शापित) है +[15:35] और अब रोज़-ए-जज़ा तक तुझपर लानत है" +[15:36] उसने अर्ज़ किया "मेरे रब, ये बात है तो फिर मुझे रोज़ तक के लिए मोहलत दे जबके सब इंसान दोबारा उठेंगे" +[15:37] फरमाया " अच्छा, तुझ पर मोहलत है +[15:38] उस दिन तक जिसका वक़्त हमें मालूम है” +[15:39] वो बोला “मेरे रब, जैसा तू नहीं मुझे बहकाया उसकी तरह अब मैं ज़मीन में इनके लिए दिल फरेबियाँ अदा करके इन सबको बहका दूंगा +[15:40] सिवाय तेरे उन बंदों के जिन्हें तू नहीं इनमें से खाली करलिया हो” +[15:41] फरमाया “ये रास्ता है जो सीधा मुझ तक पहुँचता है +[15:42] बेशक, जो मेरे हक़ीक़ी बंदे हैं उनपर तेरा बस ना चलेगा। तेरा बस तो सिर्फ उन बहके हुए लोगों ही पर चलेगा जो तेरी जोड़ी बनाएं +[15:43] और उन सब के लिए जहन्नुम की वईद (नियत) है” +[15:44] ये जहन्नुम (जिसकी वईद जोड़ी ए इबलीस के लिए गई है) उसके सात (सात) दरवाजे हैं, हर दरवाजे केली उनमें से एक हिसा मखसूस करदिया गया है +[15:45] बा-खिलाफ इसके मुत्तकी लोग बाघों (बगीचे) और चश्में (फव्वारे) में होंगे +[15:46] और उन्हें कहा जाएगा के दखिल हो जाओ इनमें सलामती के साथ बेखौफ ओ खातिर +[15:47] उनके दिलों में जो थोड़ी बहुत खोट-कपट होगी उसे हम निकाल देंगे, वो आपस में भाई भाई बनकर आमने सामने तख्तों पर बैठेंगे +[15:48] उनको ना वहां किसी मुशक्कत से पाला पड़ेगा और ना वो वहां से निकल जाएंगे +[15:49] (ऐ नबी), मेरे बंदों को खबर दे दो के मैं बहुत दरगुजर करने वाला (माफ करने वाला) और रहीम हूं +[15:50] मगर इसके साथ मेरा अज़ाब भी निहायत दर्दनक अज़ाब है +[15:51] और इन्हें जरा इब्राहिम के मेहमानों का क़िस्सा सुनाओ +[15:52] जब वो आए उसके हां और कहा "सलाम हो तुमपर," तो उसने कहा "हमें तुमसे डर लगता है" +[15:53] उनको ने जवाब दिया " डरो नहीं, हम तुम्हें एक बदे सियाने लड़के की बशारत देते हैं” +[15:54] इब्राहीम ने कहा “क्या तुम इस बुढापे में मुझे औलाद की बशारत देते हो? ज़रा सोचो तो सही के ये कैसी बशारत तुम मुझे दे रहे हो?” +[15:55] उनहों ने जवाब दिया “हम तुम्हें बार हक बशारत दे रहे हैं, तुम मायौस ना हो” +[15:56] इब्राहिम ने कहा “अपने रब की रहमत से मायुस तो गुमराह लोग ही हुआ करते हैं” +[15:57] फिर इब्राहिम ने पूछा “ऐ फरीस्ताद-गान-ए-इलाही (अल्लाह के दूत), वो मोहिम (अभियान) क्या है जिसपार आप हजरत तशरीफ लाए हैं?” +[15:58] वो बोले, "हम एक मुजरिम क़ौम की तरफ भेज गए हैं +[15:59] सिर्फ लूट के घर वाले मुस्तस्ना (अपवाद) हैं, उन सबको हम बचा लेंगे +[15:60] सिवाये उसकी बीवी के जिसके लिए (अल्लाह फरमाता है के) हमने मुकद्दर कर दिया है के वो पीछे रह जाने वालों में शामिल रहेगी” +[15:61] फिर जब ये फरीस्तादे लूट के हां पहुंचे +[15:62] तो उसने कहा “आप लोग अजनबी मालूम होते हैं” +[15:63] उनको ने जवाब दिया "नहीं, बलके हम वही चीज़ लेकर आए हैं जिसके आने में ये लोग शक्क कर रहे थे +[15:64] हम तुमसे सच कहते हैं के हम हक के साथ तुम्हारे पास आए हैं +[15:65] लिहाज़ा अब तुम कुछ रात रह रहे हैं अपने घर वालों को लेकर निकल जाओ और खुद उनके पीछे पीछे चलो, तुम में से कोई पलट कर ना देखे बस सीधे चले जाओ जिधर जाने का तुम्हें हुकुम दिया जा रहा है” +[15:66] और हमने अपना ये फैसला पहनकर लोगों की सुबह होते होते जद्द (जड़ें) कट दी जाएंगी +[15:67] इतने में शहर के लोग खुशी के मारे बेताब होकर लुट के घर चढ़ आए +[15:68] लुट ने कहा "भाइयों, ये मेरे मेहमान हैं, मेरी फजीहत (अपमान) ना करो +[15:69] अल्लाह से डरो, मुझे रुसवा ना करो" +[15:70] वो बोले “क्या हम बारह तुम्हें मना नहीं कर चुके हैं कि दुनिया भर के ठेकेदार ना बनो?” +[15:71] लूट ने अजीज होकर कहा "अगर तुम्हें कुछ करना ही है तो ये मेरी बेटियां मौजूद हैं" +[15:72] तेरी जान की कसम ऐ नबी, उस वक्त एक नशा सा चढ़ा हुआ था जिसमें वो आपे से बहार हुए जाते थे +[15:73] आखिर ई कार पोव फटते ही उनको एक जबरदस्त धमाके ने आ लिया (भोर में भीषण विस्फोट ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया) +[15:74] और हमने उस बस्ती को तलपत करके रख दिया और ऊपर पाकी (बेक्ड) हुई मिट्टी के पत्थरों की बारिश बरसा दी +[15:75] क्या वाकिये में बड़ी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो साहिब-ए-फिरसत हैं +[15:76] और वो इलाक़ा (जहाँ ये वाकिया पेश आया था) गुज़र गाह ए आम (हाई वे) पर वक़्त है +[15:77] उसमें समां ए इब्रत है उन लोगों के लिए जो साहिब ए ईमान हैं +[15:78] और ऐका वले ज़ालिम थाय +[15:79] तो देखलो के हमने उनसे भी इंतेक़ाम लिया, और इन दोनों क़ौमों के उजाड़े हुए इलाक़े खुले रास्ते पर वक़्त हैं +[15:80] हिज्र के लोग भी रसूलों की तकज़ीब कर चुके हैं +[15:81] हमने अपनी आयतें उनके पास भेजी, अपनी निशानियाँ उनको दिखाई, मगर वो सबको नज़र-अंदाज़ (अनदेखा) ही करते रहे +[15:82] वो पहाड़ तराश तराश कर मकान बनाते थे और अपनी जगह बिलकुल बे-ख़ौफ़ और मुतमइन थे +[15:83] आख़िर ई कार एक ज़बरदस्त धमाके ने उनको सुबह होते ही आ लिया +[15:84] और उनकी कमाई उनके कुछ काम न आई +[15:85] हमने जमीन और आसमान को और उनकी सब मौजूदत को हक़ के सिवा किसी और बुनियाद पर ख़ल्क (बनाना) नहीं बनाया है, और फैसले की घड़ी यकीनन आने वाली है। पस (ऐ मुहम्मद), तुम (लोगन की में)। बेहुदगियों पर) शरीफ़ाना दरगुज़ार से काम लो +[15:86] यकीनन तुम्हारा रब सब का खालिक है और सब कुछ जानता है +[15:87] हमने तुमको सात (सात) ऐसी आयतें दे रखी हैं जो बार-बार दोहरायी जाने के लायक हैं, और तुम्हें कुरान ए अजीम अता किया है +[15:88] तुम हमें माता-ए-दुनिया की तरफ आंख उठा कर ना देखो जो हमने अपने अंदर से मुख्तलिफ क़िस्म के लोगों को दे रखा है, और ना इनके हाल पर अपना दिल कुढ़ाओ(शोक), इन्हें छोड़ कर ईमान लाने वालों की तरफ झुको +[15:89] और (ना मनने वालों से) कहदो के मैं तो साफ साफ तम्बीह (चेतावनी) करने वाला हूं +[15:90] ये उसकी तरह की तम्बीह है जैसी हमने उन तफ़रक़े परदाज़ों (जो बंटवारा करते हैं) की तरफ भेजी थी +[15:91] जिन्होन ने अपने कुरान को टुकड़े-टुकड़े कर डाला है +[15:92] तो कसम है तेरे रब की, हम जरूर इन सबसे पूछेंगे +[15:93] के तुम क्या करते रहे हो +[15:94] पास (ऐ नबी) जिस चीज का तुम्हें हुकुम दिया जा रहा है उसे हांके पुकारे कहदो (सार्वजनिक रूप से घोषित करो) और शिर्क करने वालों की जरा परवा ना करो +[15:95] तुम्हारी तरफ से हम उन मजाक उड़ाने वालों की खबरें लेने के लिए काफी हैं +[15:96] जो अल्लाह के साथ किसी और को भी खुदा करार देते हैं अनकरीब उन्हें मालूम हो जाएगा +[15:97] हमें मालूम है कि जो बातें ये लोग तुमपर बनाते हैं उनका दिल कोफ्त होता है व्यथित) +[15:98] इसका इलाज ये है के अपने रुब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो, उसके जनाब में सजदा बजा लाओ +[15:99] और हम आखिरी घड़ी तक अपने रुब की बंदगी करते रहो जिसका आना यकीनी है + +Surah 16: An-Nahl (The Bee) +---------------------------------------- +[16:1] अगला अल्लाह का फैसला, अब इसके लिए जल्दी ना मचाओ, पाक है वो और बाला-तर है उस शिर्क से जो ये लोग कर रहे हैं +[16:2] वो इस रूह को अपने जिस बंदे पर चाहता है अपने हुकुम से मलिका के लिए नाज़िल फरमा देता है हिदायत के साथ के लोगों को) "आगा करदो, मेरे सिवा कोई तुम्हारा मबूद नहीं है, लिहाज़ा तुम मुझ से डरो" +[16:3] उसने आसमान ओ ज़मीन को बरहक़्क अदा किया है, वो बहुत बाला ओ बरतर है उस शिर्क से जो ये लोग करते हैं +[16:4] उसने इंसान को एक ज़रा सी बूंद से खरीदा और देखते-देखते सारें वो एक झगड़ालु हस्ती बन गया +[16:5] उसने जानवर पैदा किया जिनके पास तुम्हारे लिए पोशाक (कपड़े) भी हैं और खुराक भी, और तरह-तरह के दूसरे फायदे भी +[16:6] उन्मे तुम्हारे लिए जमाल (सुखद लुक) है जब के सुबह तुम उन्हें चरणों के लिए भेजते हो और जबके शाम उन्हें वापस लाते हो +[16:7] वो तुम्हारे लिए बोझ ढो (उठा) कर ऐसे ऐसे मुकाम तक ले जाते हैं जहां तुम मुश्किल जानफिशानी (दर्दनाक मेहनत) के बिना नहीं रह सकते कृपया. हकीकत ये है के तुम्हारा रब बड़ा ही शफीक और मेहरबान है +[16:8] उसने घोड़े और खच्चर (खच्चर) और गधे पेदा किया ता-के तुम अपर सवार हो और वो तुम्हारी जिंदगी की रौनक बनी। वो और बहुत सी चीजें (तुम्हारे फायदे के लिए) भुगतान करता है जिनका तुम्हें इल्म तक नहीं है +[16:9] और अल्लाह ही के ज़िम्मे है सीधा रास्ता बताना जबके रास्ते टेढ़े भी मौजूद हैं। अगर वो चाहता तो तुम सबको हिदायत दे देता +[16:10] वही है जिसने आसमान से तुम्हारे लिए पानी बरसाया जिसमें तुम खुद भी सरायब होते हो और तुम्हारे जानवरों के लिए भी चारा पैदा होता है +[16:11] वो इस पानी के ज़रिये से खेतियां उगता है और ज़ैतून और खजूर और अंगूर और तरह तरह के दूसरे फल अदा करता है। इस में एक बड़ी निशानी है उन लोगों के लिए जो गौर-ओ-फिक्र करते हैं +[16:12] उसने तुम्हारी भलाई के लिए रात और दिन को और सूरज और चांद को मुस्कुरा कर रखा है, और सब तारे (सितारे) भी उसी के हुकुम से मुस्कुरा रहे हैं। इसमें बहुत सी निहसानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं +[16:13] और ये जो बहुत सी रंग बी रंग की चीजें हैं उसने तुम्हारे लिए जमीन में से भुगतान कर रखा है, उनमें भी जरूर निशानी है उन लोगों के लिए जो सबक हासिल है करने वाले हैं +[16:14] वही है जिसने तुम्हारे लिए समंदर को मुसक्कर कर रखा है ता-के तुम उसे तार-ओ-ताजा गोश्त लेकर खाओ और उसकी जीनत (सजावट) की वो चीज निकालो जिन्हें तुम पहचानते हो। तुम देखते हो के कश्ती समंदर का सीना चीरती हुई चलती है, ये सब कुछ इस तरह से है के तुम अपने रब का फज़ल तलाश करो और उसे शुकर-गुज़ार बनो +[16:15] उसने ज़मीन में पहाड़ों की महक दी ता-के ज़मीन तुमको लेकर धूलक ना जाए, उसने दरिया जारी किया और क़दरती रास्ते बनाए ता-के तुम हिदायत पाओ +[16:16] उसने ज़मीन में रास्ता बताने वाली अलमातें रख दी, और तारों (सितारों) से भी लोग हिदायत पाते हैं +[16:17] फिर क्या वो जो पेदा करता है और वो जो कुछ भी पेदा नहीं करता, dono yaksan hain? क्या तुम होश में नहीं आते +[16:18] अगर तुम अल्लाह की नियामतों को गिना चाहो तो गिना नहीं सकते, हकीकत ये है कि वो बड़ा ही दरगुजर करने वाला और रहीम है +[16:19] हालंके वो तुम्हारे खुले से भी वाकिफ है और छुपे से भी +[16:20] और वो दूसरे हस्तियां जिन्हें अल्लाह को छोड़ कर लोग पुकारते हैं, वो किसी चीज के भी खालिक नहीं हैं बलके खुद मखलूक हैं +[16:21] मुर्दा हैं ना के जिंदा और उनको कुछ मालूम नहीं है के उन्हें कब (दोबारा जिंदा करके) उठाया जाएगा +[16:22] तुम्हारा खुदा बस एक ही खुदा है मगर जो लोग आखिरी को नहीं मानते उनके दिलों में इंकार बसकर रह गया है और वो घमंड में पढ़ गए हैं +[16:23] अल्लाह यकीनन इनके सब करोत जानता है छुपे हुए भी और खुले हुए भी। वो उन लोगों को हरगिज़ पसंद नहीं करता जो गुरूर ए नफ़्स (गर्व से फूला हुआ) में मुबतला हो +[16:24] और जब कोई उनसे पूछता है कि तुम्हारे रब ने ये क्या चीज नाजिल की है तो कहते हैं, "अजी वो तो अगले वक्त की फरसुदा कहानियां (प्राचीन कथाएं) हैं" +[16:25] ये बातें वो इसलिए करते हैं के कयामत के रोज अपने बोझ भी पूरे उठें, और साथ-साथ कुछ उन लोगों के बोझ भी समेटें, ये बार बिना जिहालत (उनकी अज्ञानता में) गुमराह कर रहे हैं। देखो! कैसी सख्त जिम्मेदारी है जो ये अपने सार ले रहे हैं +[16:26] इनसे पहले भी बहुत से लोग (हक को नीचा दिखाने के लिए) ऐसी ही मक्कारियां कर चुके हैं, तो देखलो के अल्लाह ने उनके मकर की इमारत जद्द (रूट) से उखाड़ फेंकी और उसकी छत ऊपर से उनके सर पर आ रही (ऊपर से उनके सिर पर छत गिर गई) और ऐसे रुख से अनपर अज़ाब आया जिधर से उसके आने का उनको गुमान तक ना था +[16:27] फिर कयामत के रोज़ अल्लाह उन्हें ज़लील ओ ख़्वार करेगा और उनसे कहेगा "बताओ, अब कहां हैं मेरे वो शरीक जिनके लिए तुम (एहले)। हक से) झगड़े किया करते थे?” जिन लोगों को दुनिया में इल्म हासिल था वो कहेंगे "आज रूसवाई और बदबख्ती है काफिरों के लिए" +[16:28] हां, उन्हीं काफिरों के लिए जो अपने नफ्स पर ज़ुल्म करते हुए जब मलिका के हाथ गिरफ़्तार होते हैं तो (सरकशी छोड़ कर) फ़ौरन दागें डाल देते (आत्मसमर्पण) हैं और कहते हैं "हम तो कोई कसूर नहीं कर रहे थे"। मलायका जवाब देते हैं "कर कैसे नहीं रहे थे! अल्लाह तुम्हारे कार्टूनों से खूब वाकिफ है +[16:29] अब जाओ, जहन्नुम के दरवाज़ों में घुस जाओ, वहीं तुमको हमेशा रहना है"। पस हकीकत ये है के बड़ा ही बुरा ठिकाना है मुतकब्बिरों (घमंडी वालों) के लिए +[16:30] दूसरी तरफ जब खुदा तरस लोगों से पूछता है के ये क्या चीज है जो तुम्हारे रब की तरफ से नाज़िल हुई है, तो वो जवाब देते हैं के "बेहतरीन चीज़" उतारी है”। इस तरह के कुछ लोगों के लिए इस दुनिया में भी भलाई है और आख़िरत का घर तो ज़रूर है उनके हक में बेहतर है। बड़ा अच्छा घर है मुत्तक़ियों (अल्लाह से डरने वालों) का +[16:31] दैमी क़याम (स्थायी निवास) की जन्नतें, जिन में वो दख़िल होंगे, आला नेह्रेन बेह राही होंगी, और सब कुछ वहां ऐन उनकी ख्वाहिश के मुताबिक होगा। ये जज़ा देता है अल्लाह मुत्तक़ियों (पवित्र) को +[16:32] उन मुत्तक़ियों को जिनकी रूहें पाकीज़गी की हालत में जब मलिका क़ब्ज़ करते हैं तो कहते हैं "सलाम हो तुमपर, जाओ जन्नत में अपने अमाल के बदले" +[16:33] (ऐ मुहम्मद), अब जो ये लोग इंतजार कर रहे हैं तो इसके सिवा अब और क्या बाकी रह गया है कि मलायका ही आ पूछूं, या तेरे रब का फैसला सादिर हो जाए? इस तरह की धिताई इनसे पहले बहुत से लोग कर चुके हैं, फिर जो कुछ उनके साथ हुआ वो असमान अल्लाह का ज़ुल्म ना था बल्के उनका अपना ज़ुल्म था जो उनहों ने खुद अपने ऊपर किया +[16:34] उनके कार्टूनों की ख़राबियां आख़िर उनकी दामनगीर हो गई और वही चीज़ असमान मुसल्लत होकर रही जिसका वो मज़ाक उड़ाया करता था +[16:35] ये मुशरिकेन कहते हैं "अगर अल्लाह चाहता तो ना हम और ना हमारे बाप दादा उसके सिवा किसी और की इबादत करते और ना उसके हुकुम के बिना किसी चीज को हराम ठहराते"। ऐसे ही बहाने इनसे पहले के लोग भी बनाते रहे हैं तो क्या रसूलों पर साफ साफ बात पूछूंचा देने के सिवा और भी कोई जिम्मेदारी है +[16:36] हमने हर उम्मत में एक रसूल भेज दिया, और उसकी ज़रिये से सबको खबरदार कर दिया के "अल्लाह की बंदगी करो और" टैगहुट की बंदगी से बचो”। इसके बाद मेरे से किसी को अल्लाह ने हिदायत बख्शी और किसी पर ज़लालत मुसल्लत हो गई। फिर ज़रा ज़मीन में चल फिर कर देखलो के झूठलेन वालों का क्या अंजाम हो चुका है +[16:37] (ऐ मुहम्मद), तुम चाहे इनकी हिदायत के लिए कितने ही हारे हो, मगर अल्लाह जिसको भटका देता है फिर उसे हिदायत नहीं दिया करता और इस तरह के लोगों की मदद कोई नहीं कर सकता +[16:38] ये लोग अल्लाह के नाम से छोटी-छोटी कसमें खा कर कहते हैं "अल्लाह किसी को मरने वाले को फिर से जिंदा करके ना उठाएगा"। उठायेगा क्यों नहीं, ये तो एक वादा है जिसका पूरा करना उसने अपने ऊपर वाजिब कर लिया है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं +[16:39] और ऐसा होना जरूरी है के अल्लाह इनके सामने हकीकत को खोल दे जिसके बारे में ये इख्तिलाफ कर रहे हैं और मुनकिरीन ए हक़ को मालूम हो जाए के वो झूठे थे +[16:40] रहा उसका इमान (संभावना) तो] हमें किसी चीज़ को वजूद में लाने के लिए इसे ज़्यादा कुछ नहीं करना होता के उसे हुकुम दीन "हो जा" और बस वो हो जाती है +[16:41] जो लोग ज़ुल्म सहने के बाद अल्लाह की खातिर हिजरत कर गए हैं उनको हम दुनिया ही में अच्छा ठिकाना देंगे और आख़िरत का अजर तो बहुत बड़ा है, काश जान लें वो मज़लूम +[16:42] जिन्हों ने सब्र किया है और जो अपने रब के भरोसे पर काम कर रहे हैं (के कैसा अच्छा अंजाम उनका) मुंतज़िर है) +[16:43] (ऐ मुहम्मद), हमने तुमसे पहले भी जब कभी रसूल भेजे हैं आदमी ही भेजे हैं जिनकी तरफ हम अपने पैगाम वही किया करते थे। एहले ज़िक्र से पूछ लो अगर तुमलोग खुद नहीं जानते +[16:44] पिछले रसूलों को भी हमने रोशन निशानियां और किताबें दे कर भेजा था, और अब ये ज़िक्र तुमपर नाज़िल किया है ता-के तुम लोगों के सामने उस तालीम की तशरीह ओ तौज़ीह करते जाओ जो उनके लिए उतारी गई है, और ता-के लोग (खुद भी) गौर ओ फिक्र करें +[16:45] फिर क्या वो लोग जो (दावत ए पैगम्बर की मुखालिफत में) बढ़तर से बढतर चलें चल रहे हैं इस बात से बिल्कुल ही बे खौफ हो गए हैं के अल्लाह उनको जमीन में धोखा दे, हां ऐसे गोशे में अनपर अज़ाब ले आए जिधर से उसके आने का उनको हम ओ गुमान तक ना हो +[16:46] या अचानक चलते फिरते इनको पकड़ ले, या ऐसी हालत में उन्हें पकड़े जबके उन्हें खुद आने वाली मुसीबत का खटका लगा हुआ हो और वो उसे बचाने की फिक्र में चौकन्ने माननीय +[16:47] वो जो कुछ भी करना चाहे ये लोग उसको अजीज (निराश) करने की ताकत नहीं रखते, हकीकत ये है के तुम्हारा रब बड़ा ही नरम-खु (बहुत उदार/शफाकत करने वाला) और रहीम है +[16:48] और क्या ये लोग अल्लाह की अदा की हुई किसी चीज़ को भी नहीं देखते के उसका साया किस तरह अल्लाह के हुज़ूर सजदा करते हुए दिन और बयेन गिरता है? सब के सब इस तरह इज़हार ए इज्ज़ (अपनी विनम्रता व्यक्त करें) कर रहे हैं +[16:49] ज़मीन और आसमान में जिस कदर जानदार मखलूक़त हैं और जितने मालिक हैं सब अल्लाह के आगे सर ब-सजूद हैं। वो हरगिज सरकशी नहीं करते +[16:50] अपने रब से जो उनके ऊपर है, डरते हैं और जो कुछ हुकुम दिया जाता है उसके मुताबिक काम करते हैं +[16:51] अल्लाह का फरमान है के "दो खुदा ना बना लो, खुदा तो बस एक ही है, लिहाजा तुम मुझ से डरो +[16:52] उसका है वो सब कुछ जो आसमान में है और जो ज़मीन में है, और खालिसन उसी का दीन (सारी कायनात में) चल रहा है। फिर क्या अल्लाह को छोड़ कर तुम किसी और से तकवा (डर) करोगे +[16:53] तुमको जो नियामत भी हासिल है अल्लाह ही की। तरफ से है फिर जब कोई सख्त वक्त तुमपर आता है तो तुम लोग खुद अपनी फरियाद लेकर उसी की तरफ दौड़ते हो +[16:54] मगर जब अल्लाह हमें वक्त को ताल देता है तो यकीनन तुम में से एक गिरोह अपने रुब के साथ दूसरे को (इस मेहरबानी के शुक्रिया में) शरीक करने लगता है +[16:55] ता-के अल्लाह के एहसान की नाशुकरी करे, अच्छा मजे करलो, अनकरीब तुम्हें मालूम हो जाएगा +[16:56] ये लोग जिनकी हकीकत से वाकिफ नहीं हैं, उनके लिए हमारे दिए हुए रिज्क में से मुकर्रर करते हैं। खुदा की कसम, जरूर तुमसे पूछा जाएगा के ये झूठ तुमने कैसे गड़बड़ ले लिया था +[16:57] ये खुदा के लिए बेटियां तजवीज करते हैं, सुभानअल्लाह! और इनके लिए वो जो ये खुद चाहते हैं +[16:58] जब मेरे बीच में किसी को बेटी के प्यार की खुशी-खबरी दी जाती है तो उसके चेहरे पर कलौंस (काला हो जाता है) चा जाती है और वो बस खून का सा घूंट पी कर रह जाता है +[16:59] लोगों से छुपता फिरता है के इस बुरी खबर के बाद क्या किसी को मुंह दिखाया गया। सोचता है कि जिल्लत के साथ बेटी को लिए रहो हां मिट्टी में दबा दे? देखो कैसे बुरे हुकुम हैं जो ये खुदा के बारे में लगते हैं +[16:60] बुरी शिफत से मुत्तसफ (लिखा जाए) किया जाने के लायक तो वो लोग हैं जो आखिरी का यकीन नहीं रखते। रहा अल्लाह, तो उसके लिए सब से बरतार सिफ़्फ़त हैं, वही तो सब पर ग़ालिब और हिकमत में कामिल है +[16:61] अगर कहीं अल्लाह लोगों को उनकी ज़्यादती पर फ़ौरन ही पकड़ लिया करता तो रूह ए ज़मीन पर किसी मुतनफ़्फ़िस को न छोड़ता। लेकिन वो सब को एक वक्त ए मुकर्रर तक मोहलत देता है। फिर जब वो वक्त आ जाता है तो उसे कोई एक घड़ी भर भी आगे पीछे नहीं हो सकता +[16:62] आज ये लोग वो चीज़े अल्लाह के लिए तजवीज़ कर रहे हैं जो खुद अपने लिए इन्हें नापसंद हैं, और झूठ कहती हैं इनकी ज़ुबानें के इनके लिए भला ही भला है। इनके लिए तो एक ही चीज़ है, और वो है दोज़ख की आग, ज़रूर ये सब से पहले हमें में पकड़ लेंगे +[16:63] ख़ुदा की कसम, (ऐ मुहम्मद) तुमसे पहले भी बहुत सी क़ौमों में हम रसूल भेज चुके हैं (और पहले भी यहीं होता जा रहा है के) शैतान ने उनको खुशनुमा बना कर दिखाया (और रसूलों की बात उनको ने मान कर ना दी)। वही शैतान आज लोगों का भी सरपरस्त बना हुआ है और ये दर्दनक सजा के मुस्तहिक बन रहे हैं +[16:64] हमने ये किताब तुम्हारे लिए नाज़िल की है के तुम उन इख्तिलाफात (मतभेद) की हकीकत इनपर खोल दो जिनमें ये पड़े हुए हैं। ये किताब रहनुमाई और रहमत बनकर उतरी है उन लोगों के लिए जो इसे मान लें +[16:65] (तुम हर बरसात में देखते हो के) अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया और यकीन मुर्दा पड़ी हुई जमीन में उसकी बदौलत जान डाल दी। यकीनन इस में एक निशानी हैं सुनने वालों के लिए +[16:66] और तुम्हारे लिए मवेशियों में भी एक सबक मौजूद है उनके पेट (पेट) से गोबर और खून के दरमियान हम एक चीज तुम्हें पिलाते हैं, यानी खाली दूध, जो पीने वालों के लिए निहायत खुशगवार है +[16:67] (इसी तरह) खजूर के दरख्तों और अंगूर की बेलों से भी हम एक चीज तुम्हें पिलाते हैं जैसे तुम नशा-अवतार भी बना लेते हो और पाक रिज्क भी। यकीनन इस में एक निशानी है अक़ल से काम लेने वालों के लिए +[16:68] और देखो, तुम्हारे रब ने शहीद (शहद) की मक्खी पर ये बात वही करदी के पहाड़ों में, और दरख्तों में, और टट्टियों पर चढ़यी हुई बैलों में (पहाड़ों, पेड़ों और लताओं में) जाली) अपने छत्ता बना (अपना छत्ता बनाएं) +[16:69] और हर तरह के फूलों का रस चूस और अपने रब की हमवार की हुई राहों पर चलती रह। इस मक्खी के अंदर से रंग बी रंग का एक शरबत निकलता है जिसका शिफा है लोगों के लिए। यक़ीनन इस में भी एक निशानी है उन लोगों के लिए जो गौर ओ फ़िक्र करते हैं +[16:70] और देखो, अल्लाह ने तुमको पैदा किया, फिर वो तुमको मौत देता है और तुम में से कोई बेहतरीन उमर को पाहुचा दिया जाता है ता-के सब कुछ जाने के बाद फिर कुछ ना जाने। हक़ ये है के अल्लाह ही इल्म में भी कामिल है और कुदरत में भी +[16:71] और देखो, अल्लाह ने तुममें से बाज़ को बाज़ पर रिज़्क में फ़ज़िलत अता की है, फिर जिन लोगों को ये फ़ज़ीलत दी गई है वो ऐसे नहीं हैं के अपना रिज़्क अपने गुलामो की तरफ फेर दीया करते हुए ता-के डोनो इस रिज़क में बराबर के हिस्सेदार बन जाएं। तो क्या अल्लाह ही का एहसान मन्ने से इन लोगों को इंकार है +[16:72] और वो अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए तुम्हारी हम जिन बीवियां बनाईं और उसी ने उन बीवियों से तुम्हारे बेटे पोते (बेटे और पोते) अता किए और अच्छी अच्छी चीजें तुम्हें खाने को दी। फिर क्या ये लोग (ये सब कुछ देखते हैं और जानते हैं भी) बातिल को मानते हैं, और अल्लाह के एहसान का इंकार करते हैं +[16:73] और अल्लाह को छोड़ कर उनको पूजते हैं जिनके हाथ में ना आसमान से इन्हें कुछ भी रिज्क देना है ना ज़मीन से और ना ये काम वो कर ही सकते हैं +[16:74] पास अल्लाह के लिए मिसालें ना घड़ो, अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते +[16:75] अल्लाह एक मिसाल देता है एक तो है गुलाम, जो दूसरे का ममलुक (गुलाम) है और खुद कोई इख्तियार नहीं रखता। दूसरा शक्स ऐसा है जिसे हमने अपनी तरफ से अच्छा रिज्क अता किया है और वो इस में से खुले और छुपे खूब खर्च करता है। बताओ क्या ये दोनों बराबर हैं? अल्हम्दुलिल्लाह, मगर अक्सर लोग (इस सीधी बात को) नहीं जानते +[16:76] अल्लाह एक और मिसाल देता है, दो आदमी हैं एक गंगा बहरा है, कोई काम नहीं कर सकता, अपने आका पर बोझ बना हुआ है, जिधर भी वो उसे भेजे कोई भला काम उसे बन ना आए, दूसरा शक्स ऐसा है के इन्साफ का हुकुम देता है और खुद राह ए रस्त पर क़याम है, बताओ क्या ये दोनों यकसन हैं +[16:77] और ज़मीन ओ आसमान के पोशीदा हक़ीक़ का इल्म तो अल्लाह ही को है और क़यामंत के बरपा होने का मामला कुछ दिन न लेगा मगर बस इतनी के जिसमें आदमी की पलक झपक जाए, बलके इसमें भी कुछ काम, हकीकत ये है के अल्लाह सब कुछ कर सकता है +[16:78] अल्लाह ने तुमको तुम्हारी मांओं के पैरों से निकला इस हालत में के तुम कुछ ना जानते थे, उसने तुम्हें कान दिए, आंखें दी, और सोचने वाले दिल दिया, इस लिए तुम शुक्र-गुज़ार बनो +[16:79] क्या इन लोगों ने कभी परिंदों को नहीं देखा के फ़िज़ा ए आसमानी में किस तरह मुसक्कर हैं? अल्लाह के सिवा किसने इनको थाम रक्खा है? इस में बहुत निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं +[16:80] अल्लाह ने तुम्हारे लिए तुम्हारे घरों को जाए सुकून बनाया, उसने जानवरों की खालों से तुम्हारे लिए ऐसा मकान बनाया जिन्होंने तुम सफर और कयाम, दोनों हालात में हल्का पेटे हो. उसने जंवारों के सौफ और ऊन और बालों से (मुलायम फर और ऊन और बाल) पहने और बारातें (उपयोग) की बहुत सी चीजे अदा करदी जो जिंदगी की मुद्दत ए मुकर्ररा तक तुम्हारे काम आती हैं +[16:81] उसने अपनी पेडा की हुई बहुत सी चीजो से तुम्हारे लिए साए का इंतेज़ाम किया, पहाड़ों में तुम्हारे लिए पनाह-गाहें (शरण स्थल) बनाईं, और तुम्हें ऐसी पोशाकें (वस्त्र) बख्शी जो तुम्हें गर्मी से बचाती हैं और कुछ दूसरी पोशाकें जो आपस की जंग में तुम्हारी हिफ़ाज़त करती हैं, इस तरह वह तुम्पर अपनी नियामतों की तकमील करता है शायद के तुम फरमाबरदार बानो +[16:82] अब अगर ये लोग मुह मोड़ते हैं तो (ऐ मुहम्मद), तुमपर साफ साफ पैग़ाम ए हक़ पाहुंचा देने के सिवा और कोई ज़िम्मेदारी नहीं है +[16:83] ये अल्लाह के एहसान को पहचानते हैं, फिर इसका इंकार करते हैं और इसमें बेशतर ऐसे हैं जो हक़ मन के लिए तैयार नहीं हैं +[16:84] (इन्हें कुछ होश भी है कि हम रोज़ क्या बनाएंगे) जबके हम हर उम्मत में से एक गवाह खड़ा करेंगे, फिर काफ़िरों को ना हुज्जतें (बहाना) पेश करने का मौका दिया जाएगा ना उनसे तौबा ओ इस्तग़फ़र ही का मुतलबा किया जाएगा +[16:85] ज़ालिम लोग जब एक दफ़ा अज़ाब देख लेंगे तो इसके बाद ना उनके अज़ाब में कोई तख़्फ़िफ़ (हल्का /हल्का) की जाएगी और ना उन्हें एक लम्हा भर की मोहलत दी जाएगी +[16:86] और जब वो लोग जिन्हों ने दुनिया में शिर्क किया था तो अपने रुके हुए शरीकों को देखेंगे तो कहेंगे " ऐ परवरदिगार, यहीं हैं हमारे वो शरीक जिन्हे हम तुझे छोड़ कर पुकारा करते थे" इसपर उनके वो मबूद उन्हें साफ जवाब देंगे के "तुम झूठे हो" +[16:87] हम वक्त ये सब अल्लाह के आगे झुक जाएंगे और उनकी वो सारी इफ्तारा-पर्दाज़ियां (जालसाजी) रफू-चक्कर (गायब) हो जाएंगी जो ये दुनिया में करते रहेंगे +[16:88] जिन लोगों ने खुद कुफ्र की राह इख्तियार की और दूसरों को अल्लाह की राह से रोका उन्हें हम अज़ाब पर अज़ाब देंगे हमें फसाद के बदले जो वो दुनिया में बरपा करते रहे +[16:89] (ऐ मुहम्मद, इन्हें हमारे दिन से खबरदार करदो) जबके हम हर उम्मत में खुद उसी के अंदर से एक गवाह उठा खड़ा करेंगे जो उसका मुकाबला में शहादत (गवाह/गवाही) देगा। और लोगों के मुक़ाबले में शहादत देने के लिए हम तुम्हें लाएंगे और (ये उसी शहादत की तयारी है के) हमने ये किताब तुम्हारी नाज़िल कर दी है जो हर चीज़ की सफ़ वज़ाहत करने वाली है और हिदायत ओ रहमत और बशारत है उन लोगों के लिए जिन्हों ने सर-ए-तस्लीम ख़त्म कर दिया है +[16:90] अल्लाह अदल (न्याय) और एहसान (उदारता) और सिला रहमी का हुकुम देता है और बदी (दुष्टता) ओ बेहयाई और ज़ुल्म ओ ज़्यादती से मना करता है। वो तुम्हें हिदायत करता है ता-के तुम सबक लो +[16:91] अल्लाह के अहद (वाचा) को पूरा करो जब तुमने उसे कोई अहद बंदा हो, और अपनी कसमें पुख्ता करने के बाद तोड़ न डालो जबके तुम अल्लाह को अपना ऊपर गवाह बना चुके हो। अल्लाह तुम्हारे सब अफाल से खबर है +[16:92] तुम्हारी हालत उस औरत की सी न हो जाए जिसने आप ही मेहनत से सूत काता (काता हुआ सूत) और फिर आपने ही उसे इस्तेमाल किया टुकड़े-टुकड़े कर डाला। तुम अपनी कसमों को आपस के मामले में मकार ओ फरेब का हथियार बनाते हो ता-के एक क़ौम दूसरी क़ौम से बढ़कर फ़ायदे हासिल करे हलांके अल्लाह अहद ओ पैमान के ज़रिये से तुमको आजमाइश में डाला जाता है। और जरूर वो कयामत के रोज तुम्हारे तमाम इख्तिलाफात की हकीकत तुमपर खोल देगा +[16:93] अगर अल्लाह की मशियत ये होती (के तुम में कोई इख्तिलाफ ना हो) तो वो तुम सबको एक ही उम्मत बना देता, मगर वो जिसे चाहता है गुमराही में डालता है और जिसे चाहता है राह ए रास्ता दिखाता है। और ज़रूर तुमसे तुम्हारे अमाल की बाज़-पुर्ज़े होकर रहेगी +[16:94] (और ऐ मुसलमानो) तुम अपनी कसमों को आपस में एक दूसरे को धोखा देने का ज़रिया ना बना लेना, कहीं ऐसा ना हो के कोई कदम जमाने के बाद उखड़ जाए और तुम इस जुर्म की पैदाइश में के तुमने लोगों को अल्लाह की राह से रोका, बुरा नतीजा देखो और सच सज़ा भुगतो +[16:95] अल्लाह के अहद को थोड़े से फ़ायदे के बदले ना बेच डालो, जो कुछ अल्लाह के पास है वो तुम्हारे लिए ज़्यादा बेहतर है अगर तुम जानो +[16:96] जो कुछ तुम्हारे पास है वो ख़र्च हो जाने वाला है और जो कुछ अल्लाह के पास है वही बाकी रहने वाला है, और हम जरूर सब्र से काम लेने वालों को उनके अजर उनके बेहतरी अमल के मुताबिक देंगे +[16:97] जो शक्स भी नया अमल करेगा, ख्वा वो मर्द हो या औरत, बशारत ये के हो वो मोमिन, उसे हम दुनिया में पाकीजा जिंदगी बसर कराएंगे और (आखिरत में) ऐसे लोगों को उनके अजर उनके बेहतरीन अमाल के मुताबिक बक्शेंगे +[16:98] फिर जब तुम कुरान पढ़ने लगो तो शैतान ए राजिम (शापित) से खुदा की पनाह मांग लिया करो +[16:99] उन लोगों पर तसल्लुत (शक्ति/अधिकार) हासिल नहीं होता जो ईमान लाते और अपने रब पर भरोसा करते हैं +[16:100] उसका ज़ोर तो उन्ही लोगों पर चलता है जो उसको अपना सरपरस्त बनाता है और उसके बहकाने से शिर्क करता है +[16:101] जब हम एक आयत की जगह दूसरी आयत नाज़िल करते हैं अल्लाह बेहतर जानता है के वो क्या नाज़िल करे तो ये लोग कहते हैं कि तुम ये कुरान खुद बिगाड़ते हो। असल बात ये है कि मेरे अंदर से अक्सर लोग हकीकत से ना-वाक़िफ़ हैं +[16:102] इनसे कहो के इसे तो रूह-उल-क़ुद्दूस ने ठीक ठीक मेरे रब की तरफ से बा-तदरीज़ नाज़िल किया है ता-के ईमान लाने वालों के ईमान को पुख्ता करे और फरमा-बरदारों को जिंदगी के मामलात में सीधी राह बताई और उन्हें फलाह ओ सआदत की खुश खबरी दे +[16:103] हमें मालूम है ये लोग तुम्हारे मुतालिक कहते हैं के इस शक्स को एक आदमी सिखाता है। हलानके उनका इशारा जिस आदमी की तरफ है उसकी जुबान अजमी है और ये साफ अरबी जुबान है +[16:104] हकीकत ये है के जो लोग अल्लाह की आयत को नहीं मानते अल्लाह कभी उनको सही बात तक पहुंचने की तौफीक नहीं देता और ऐसे लोगों के लिए दर्दनाक अजाब है +[16:105] (झूठी बातें नबी नहीं घड़ता बलके) झूठ वो लोग घड़ रहे हैं जो अल्लाह की आयत को नहीं मानते, वही हकीकत में झूठे हैं +[16:106] जो शक्स ईमान लाने के बाद कुफ्र करे (वो अगर) मजबूर किया गया हो और दिल उसका ईमान पर मुतमइन (आश्वस्त) हो (तब तो खैर) मगर जिसने दिल की रज़ा-मंदी से कुफ्र को क़बूल करलिया उसपर अल्लाह का ग़ज़ब है और ऐसे सब लोगों के लिए बड़ा अज़ाब है +[16:107] ये इस तरह के उन्होन ने आखिरी के मुकाबले में दुनिया की जिंदगी को पसंद किया कार्लिया, और अल्लाह का कायदा है कि वो उन लोगों को राह ए निजात नहीं दिखाता जो उसकी नियामत का कुफ़्रान करें +[16:108] ये वो लोग हैं जिनके दिलों और कानों और आँखों पर अल्लाह ने मोहर (मुहर) लगा दी है ये गफ़लत में डूब चुके हैं +[16:109] ज़रूर है के आख़िरत में यही खसरे में रहें +[16:110] बा-ख़िलाफ़ इसके जिन लोगों का हाल ये है के जब (ईमान लाने की वजह से) वो सताए गए तो उनको ने घर-बार छोड़ दिए, हिजरत की, राह ए खुदा में ताकतियां झेली और सब्र से काम लिया, उनके लिए यकीनन तेरा रब गफूर ओ रहीम है +[16:111] (सब का फैसला उस दिन होगा) जबके हर मुतनफ़िस अपने ही बचाव की फ़िक्र में लगा हुआ होगा और हर एक को उसके लिए बदला पूरा दिया जाएगा और किसी पर ज़रा बराबर ज़ुल्म न होने पाएगा +[16:112] अल्लाह एक बस्ती की मिसाल देता है, वो अमन ओ इत्मिनान की जिंदगी बसर कर रही थी और हर तरफ से उसको ब-फरागत रिज़क पाहुंच रहा था के उसने अल्लाह की नियामतों का कुफ़्रान शुरू कर दिया, तब अल्लाह ने उसके बाशिंदों को उनके कार्टूनों का ये मजा चखाया के भूख और खौफ की मुसिबतें उनपर छा गई +[16:113] उनके पास उनकी अपनी क़ौम में से एक रसूल आया मगर उन्होन ने उसको झुठला दिया, आख़िर ए कार अज़ाब ने उनको आ लिया जबके वो जालिम हो चुके थे +[16:114] पस ऐ लोगों, अल्लाह ने जो कुछ हलाल और पाक रिज़क तुमको बख्शा है उसे खाओ और अल्लाह के एहसान का शुक्र अदा करो अगर तुम ठीक उसी की बंदगी करने वाले हो +[16:115] अल्लाह ने जो कुछ तुमपर हराम किया है वो है मुर्दार और खून और सुवर (सूअर) का गोश्त और वो जानवर जिसपर अल्लाह के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो। अलबत्ता भूख से मजबूर होकर अगर कोई इन चीजों को खा ले, बिना इसके वो कानून ए इलाही की खिलाफ वारजी का ख्वाहिश-मंद हो, या हद ए जरूरी से तजावुज का मुर्तकिब हो, तो यकीनन अल्लाह माफ करने और रहम फरमाने वाला है +[16:116] और ये जो तुम्हारी ज़ुबानें झूठे एहकाम लगाती हैं के ये चीज़ हलाल है और वो हराम है, तो इस तरह के हुकुम लगा कर अल्लाह पर झूठ ना बंद करो, जो लोग अल्लाह पर झूठे इफ्तारा बांधते हैं (झूठ लिखते हैं) हैं वो हरगिज फलाह नहीं पीते हैं +[16:117] दुनिया का ऐश चांद रोजा है आखिर ई कार उनके लिए दर्दनाक सज़ा है +[16:118] वो चीज़ हमने खास तौर पर यहुदियों (यहूदियों) के लिए हराम की थी जिनका ज़िक्र हम इस पहले तुमसे कर चुके हैं और ये अनपर हमारा ज़ुल्म ना था बल्के उनका अपना ही ज़ुल्म था जो वो अपने ऊपर कर रहे थे +[16:119] अलबत्ता जिन लोगों ने जहालत की बिना पर बुरा अमल किया और फिर तौबा करके अपने अमल की इस्लाह कार्ली तो यकीनन तौबा ओ इस्लाह के बाद तेरा रब उनके लिए गफूर और रहीम है +[16:120] वाकिया ये है के इब्राहीम अपनी ज़ात से एक पूरी उम्मत थी, अल्लाह का मुती ए फरमान और यक्सू। वो कभी मुशरिक न था +[16:121] अल्लाह की नियामतों का शुक्र अदा करने वाला था। अल्लाह ने उसको मुंतखब (चुना) करलिया और सीधा रास्ता दिखाया +[16:122] दुनिया में उसको बुलाया दी और आख़िरत में वो यकीनन सालिहें में से होगा +[16:123] फिर हमने तुम्हारी तरफ ये वही भेजी के यक्सू होकर इब्राहिम के तारीख़े पर चलो और वो मुशरिकों में से ना था +[16:124] रहा सब्त (सब्बाथ/हफ्ते का दिन) तो वो हमने उन लोगों पर मुसल्लत किया था जिन्हों ने उसके एहकाम में इख्तिलाफ किया, और यकीनन तेरा रब कयामत के रोज उन सब बातों का फैसला कर देगा जिन में वो इख्तिलाफ करते रहेंगे +[16:125] (ऐ नबी), अपने रब के रास्ते की तरफ दावत दो हिकमत और उम्मीद हिदायत के साथ, और लोगों से मुबाहिसा (चर्चा) करो ऐसे तरीक़े पर जो बेहतरीन हो। तुम्हारा रब ही ज्यादा बेहतर जानता है कि कौन उसकी राह से भटका हुआ है और कौन राह-ए-रास्त पर है +[16:126] और अगर तुम लोग बदला लो तो बस उसी कदर ले लो जिस कदर तुमपर ज्यादा की गई हो, लेकिन अगर तुम सब्र करो तो यकीनन ये सब्र करो वालों ही के हक में बेहतर है +[16:127] (ऐ मुहम्मद) सब्र से काम किए जाओ और तुम्हारा ये सब्र अल्लाह ही की तौफीक से है, इन लोगों की हरकत पर रांझ ना करो और ना इनकी चालबाज़ियों पर दिल तंग (संकट) हो +[16:128] अल्लाह उन लोगों के साथ है जो तकवा से काम लेते हैं और एहसान पर अमल करते हैं + +Surah 17: Bani Isra'il (The Israelites) +---------------------------------------- +[17:1] पाक है वो जो ले गया एक रात अपने बंदे को मस्जिद ए हराम से दूर कि उस मस्जिद तक जिसने महल को उसने बरकत दी है, ता-के उसे अपनी कुछ निशानियों का मुशाहिदा(दिखाएँ)कराए। हकीकत में वही है सब कुछ सुनने और देखने वाला +[17:2] हमने इसे पहले मूसा को किताब दी थी और उसे बानी इजराइल के लिए ज़रिया ए हिदायत बनाया था, इस टेक के साथ के मेरे सिवा किसी को अपना वकील (अभिभावक) न बनाना +[17:3] तुम उन लोगों की औलाद हो जिनहें हमने नूह के साथ कश्ती पर सवार किया था, और नूह एक शुक्रगुज़ार बंदा था +[17:4] फिर हमने अपनी किताब में बानी इसराइल को इस बात पर भी मुतनब्बेह (चेतावनी) करदिया था के तुम दो मरतबा ज़मीन में फ़साद ए अज़ीम बरपा करोगी और बड़ी सरकशी दिखाओगे +[17:5] आख़िर ए कार जब उन में से पहली सरकशी का मौका पेश आया, तो ऐ बानी इज़राइल, हमने तुम्हारे मुक़ाबले पर अपने ऐसे बंदे उठाए जो निहायत ज़ोरावर थे और वो तुम्हारे मुल्क में घुस कर हर तरफ फ़ैल गए। ये एक वादा था जिसका पूरा होकर ही रहना था +[17:6] इसके बाद हमने तुम्हें एक दूसरे गलेबे का मौका दे दिया और तुम्हें माल और औलाद से मदद दी और तुम्हारी तदाद पहले से बढ़ा दी +[17:7] देखो! तुमने भलाई की तो वो तुम्हारी अपनी ही ली थी, और बुराई की तो वो तुम्हारी अपनी ज़ात के लिए बुरी साबित हुई। फिर जब दूसरे वादे का वक्त आया तो हमने दूसरे दुश्मनों को तुमपर मुसल्लत किया ता-के वो तुम्हारे चेहरे बिगाड़ दें और मस्जिद (बैत उल मकदिस) में उसकी तरह घुस जाएं, जिस तरह पहले दुश्मन घुसे थे और जिस चीज पर उनका हाथ पड़े उसे तबाह करके रख दें +[17:8] हो सकता है कि अब तुम्हारा रब तुमपर रहम करे, लेकिन अगर तुमने फिर अपनी साबिक राविश (पूर्व व्यवहार) का इरादा किया तो हम भी फिर अपनी सजा का इरादा करेंगे, और काफिर ए नियामत लोगों के लिए हमने जहन्नुम को क़ैद खाना बना रखा है +[17:9] हकीकत ये है कि ये कुरान वो राह दिखाता है जो बिल्कुल सीधी है। जो लोग इसे मान कर भले काम करने लगें उन्हें ये बशारत देता है के उनके लिए बड़ा अजर है +[17:10] और जो लोग आख़िरत को ना माने उन्हें ये खबर देता है के उनके लिए हमने दर्दनक अज़ाब मुहैय्या कर रखा है +[17:11] इंसान शरर (बुराई) हमें तरह माँगता है जिस तरह खैर माँगनी चाहिए। इंसान बड़ा ही जल्दी बाज़ वाकये हुआ है +[17:12] देखो, हमने रात और दिन को दो निशानियां बनाई हैं। रात की निशानी को हमने बे-नूर बनाया, और दिन की निशानी को रोशन कर दिया, ता-के तुम अपने रब का फज़ल तलाश कर सको और माह-ओ-साल का हिसाब मालूम कर सको। इसी तरह हमने हर चीज को अलग-अलग मुमैय्याज (स्पष्ट रूप से अलग) करके रखा है +[17:13] हर इंसान का शगुन (भाग्य/शगुन) हमने उसे अपनी गली में लटका रखा है, और कयामत के रोज हम एक नुइशता (पुस्तक/रिकॉर्ड/स्क्रॉल) उसके लिए निकालेंगे जिसे वो खुली किताब की तरह पायेगा +[17:14] पढ़ अपना नाम-ए-आमाल, आज अपना हिसाब लगाने के लिए तू खुद ही काफी है +[17:15] जो कोई राह-ए-रास्त इख्तियार करे उसकी रस्त-रवी उसके अपने ही लिए मुफीद है, और जो गुमराह हो उसकी गुमराही का जवाब usi par hai. कोई बोझ उठाने वाला दूसरे का बोझ ना उठाएगा और हम अजब देने वाले नहीं हैं जबतक के (लोगों को हक-ओ-बातिल का फर्क समझने के लिए) एक पैगम्बर ना भेज दें +[17:16] जब हम किसी बस्ती को हलाक करने का इरादा करते हैं तो उसके खुश हाल लोग को हुकुम देते हैं और वो हमें नफरमानियां करने लगते हैं, तब अज़ाब का फैसला हमें बस्ती पर चस्पां हो जाता है और हम उसे बर्बाद करके रख देते हैं +[17:17] देखलो, कितनी ही नसलें (पीढ़ियां) हैं जो नूंह के बाद हमारे हुकुम से हलाक हुई, तेरा रब अपने बंदों के गुनाहों से पूरी तरह से बाख़बर है और सब कुछ देख रहा है +[17:18] जो कोई जल्दी का ख्वाहिश-मंद हो, उसे यहीं हम दे देते हैं जो कुछ भी देना चाहते हैं, फिर उसके मकसूम में जहन्नुम लिख देते हैं जिसे वो तपेगा, मलामत ज़दा और रहमत से महरून होकर +[17:19] और जो आखिरी का ख्वाहिश-मंद हो और उसके लिए सई (प्रयास) करे जैसी के उसके लिए सई (प्रयास) करनी चाहिए, और हो वो मोमिन, तो ऐसे हर शक्स की सई मशकूर होगी +[17:20] इनको भी और उनको भी, दोनों फरिकों को हम (दुनिया में) सामान-ए-ज़िस्ट दिए जा रहे हैं, ये तेरे रुब का अतिया है, और तेरे रुब की अता को रोकने वाला कोई नहीं है +[17:21] मगर देखलो, दुनिया ही में हमने एक गिरोह को दूसरे पर कैसी फजीलत दे रखी है, और आखिरी में उसके दर्जे और भी ज्यादा होंगे, और उसकी फजीलत और भी ज्यादा बढ़ चढ़ कर होगी +[17:22] तू अल्लाह के साथ कोई दूसरा मबूद न बना, वरना मलामत ज्यादा और बे यार ओ मददगार बैठा रह जाएगा +[17:23] तेरे रब ने फैसला कर दिया है के: तुम लोग किसी की इबादत न करो, मगर सिर्फ उसकी, वालिदेन (मां-बाप) के साथ नई सुलूक करो। अगर तुम्हारे पास उनके साथ कोई एक, या दोनों, बूढ़े (पुराने) होकर रहें तो उन्हें 'उफ्फ' तक ना कहो, ना उन्हें जिदक कर जवाब दो, बलके उनसे एहतराम के साथ बात करो +[17:24] और नरमी ओ रहम के साथ उनके सामने झुक कर रहो, और दुआ किया करो के "परवरदिगार, इनपर रहम फरमा जिस तरह इन्हों ने रहमत ओ शफाकत के साथ मुझे बचपन में पाला था" +[17:25] तुम्हारा रब खूब जानता है के तुम्हारे दिलों में क्या है, अगर तुम साले बनकर रहो तो वो ऐसे सब लोग के लिए दरगुज़ार करने वाला है जो अपने कसूर पर मुतनब्बेह हो कर बंदगी के रवैये की तरफ पलट आएं +[17:26] रिश्तेदार को उसका हक दो और मिस्कीन और मुसाफिर को उसका हक। फ़िज़ूल खर्ची न करो +[17:27] फ़िज़ूल खर्च लोग शैतान के भाई हैं, और शैतान अपने रब का ना-शुक्र है +[17:28] अगर उनसे (यानी हाजत-मंद रिश्तेदारों, मिस्किनो और मुसाफिरों से) तुम्हें कतराना हो (उनसे दूर हो जाओ), क्या बिना पार के अभी तुम अल्लाह की हमें रहमत को जिसकी तुम उम्मीद कर रहे हो, तो उन्हें नर्म जवाब दे दो +[17:29] ना तो अपना हाथ बगीचे से बंद रखो और ना उसे बिल्कुल ही खुला छोड़ दो के मलामत जादा और अजीज बन कर रह जाओ +[17:30] तेरा रब जिसके लिए चाहता है रिज्क कुशादा करता है और जिसके लिए चाहता है तंग करता है, वो अपने बंदों के हाल से ख़बर है और उन्हें देख रहा है +[17:31] अपनी औलाद को इफ़्लास (तंगदस्ती) के अंदेशे से क़त्ल ना करो, हम उन्हें भी रिज़क़ देंगे और तुम्हें भी। दर हक़ीक़त उनका क़तल एक बड़ी ख़ता है +[17:32] ज़िना के क़रीब ना फटको, वो बहुत बुरा फेल (काम) है और बड़ा ही बुरा रास्ता +[17:33] क़त्ल-ए-नफ़्स का इर्तिक़ाब न करो जैसे अल्लाह ने हराम किया है मगर हक़ के साथ, और जो शक्स मज़लूमाना क़तल किया गया हो उसके वाली को हमने क़िस्स (प्रतिशोध) के मुतालिबे का हक़ अता किया है। पास चाहिए के वो क़तल में हद से ना गुज़रे, उसकी मदद की जाएगी +[17:34] माल-ए-यतीम के पास न फटको मगर अहसान तारीख़े से, यहां तक ​​के वो अपने शबाब (जवानी) को पाहुंच जाए। अहद की पकड़ करो, अहद के बारे में तुमको जवाब-देह करनी होगी +[17:35] पैमाने (माप/तराजू) से दो तो पूरा भर कर दो, और तोलो तो ठीक तराजू से तोलो। ये अच्छा तरीक़ा है और बा-लिहाज़ अंजाम भी यही बेहतर है +[17:36] किसी ऐसी चीज़ के पीछे ना लगो जिसका तुम्हें इल्म ना हो, यकीनन आंख, कान और दिल सब ही कि बाज़-पुर्स होनी है +[17:37] ज़मीन में अकड़ कर ना चलो, तुम ना ज़मीन को फाड़ सकते हो ना पहाड़ों की बुलंदी को पाहुंच सकते हो +[17:38] उमूर में से हर एक का बुरा पहलू तेरे रब के नज़दीक ना-पसंददा है +[17:39] ये वो हिकमत की बातें हैं जो तेरे रब ने तुझपर वही की है और देख! अल्लाह के साथ कोई दूसरा मबूद न बना बैठा वरना तू जहन्नुम में डाल दिया जाएगा मालामत जादा और हर भलाई से महरूम होकर +[17:40] कैसी अजीब बात है के तुम्हारे रब ने तुम्हें तो बेटों (बेटों) से नवाजा और खुद अपने लिए मलिका (फरिश्तों) को बेटियां बना लिया? बड़ी झूठी बात है जो तुमलोग ज़ुबानो से निकलते हो +[17:41] हमने कुरान में तरह तरह से लोगों को समझा के होश में आए, मगर वो हक़ से और ज़्यादा दूर ही भागे जा रहे हैं +[17:42] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो के अगर अल्लाह के साथ दूसरे खुदा भी होते, जैसा के ये लोग कहते हैं, तो वो मालिक ए अर्श के मुकाम पर पहुंचने की जरूर कोशिश करते हैं +[17:43] पाक है वो और बहुत बाला-ओ-बरतर है उन बातों से जो ये लोग कह रहे हैं +[17:44] उसकी पाकी तो सातो (सात) आसमान और ज़मीन और वो सारी चीज़ें बयां कर रही हैं जो आसमान ओ ज़मीन में हैं। कोई चीज़ ऐसी नहीं है जो उसकी हम्द के साथ उसकी तस्बीह ना कर रही हो, मगर तुम उनकी तस्बीह समझते नहीं हो। हकीकत ये है के वो बड़ा ही बोझाबर (बहुत सहनशील) और दरगुज़ार करने वाला है +[17:45] जब तुम कुरान पढ़ते हो तो हम तुम्हारे और आख़िरत पर ईमान न लाने वालों के दरमियान एक परदा रखते हैं +[17:46] और उनके दिलों पर ऐसा गिलाफ़ (अदृश्य पर्दा) चढ़ा देते हैं के वो कुछ नहीं समझते, और उनके कानों में गिरानी अदा करते हैं और जब तुम कुरान में अपने एक ही रब का जिक्र करते हो तो वो नफ़रत से मुह मोड़ लेते हैं +[17:47] हमें मालूम है कि जब वो कान लगा कर तुम्हारी बात सुनते हैं तो दर-असल क्या सुनते हैं, और जब बैठ कर बहस करते हैं तो क्या कहते हैं। ये जालिम आपस में कहते हैं के ये एक सहर-ज़ादा (मोहित) आदमी है जिसके पीछे तुमलोग जा रहे हो +[17:48] देखो, कैसी बातें हैं जो ये लोग तुमपर चानते हैं, ये भटक गए हैं, इन्हें रास्ता नहीं मिलता +[17:49] वो कहते हैं “जब हम सिर्फ हड्डियां और खाक होकर रह जाएंगे तो क्या हम नए सिरे से भुगतान करके उठेंगे?” +[17:50] इनसे कहो “तुम पत्थर या लोहा भी हो जाओ +[17:51] या उसे भी ज़्यादा सख्त कोई चीज़ जो तुम्हारे ज़हन में क़बूल-ए-हयात से बाहर हो” (फिर भी तुम उठ कर रहोगे)। वो जरूर पूछेंगे “कौन है वो जो हमें फिर जिंदगी की तरफ पलटा कर लाएगा?” जवाब में कहो "वही जिसने पहली बार तुमको पेदा किया"। तुम कहो " क्या अजब, वो वक्त करीब ही आ लगा हो +[17:52] जिस रोज वो तुम्हे पुकारेगा तो तुम उसकी हम्द करते हुए उसकी पुकार के जवाब में निकल आओगे और तुम्हारा गुमान हमारा वक्त ये होगा के हम बस थोड़ी देर ही इस हालत में पड़े रहेंगे हैं” +[17:53] और (ऐ मुहम्मद), मेरे बंदों से कहदो के ज़ुबान से वो बात निकला करें जो बहती हो। दर-असल ये शैतान है जो इंसानों के दरमियान फ़साद डालने की कोशिश करता है। हकीकत ये है के शैतान इंसान का खुला दुश्मन है +[17:54] तुम्हारा रब तुम्हारे हाल से ज्यादा वाकिफ है। वो चाहे तो तुमपर रहम करे और चाहे तो तुम्हें अज़ाब दे दे। और (ऐ नबी) हमने तुमको लोगों पर हवालादार (अभिभावक) बनाकर नहीं भेजा है +[17:55] तेरा रब ज़मीन और आसमान की मखलूक़त को ज़्यादा जानता है। हमने पैगम्बरों को बाज़ से बर्बाद कर दिया, और हमने ही दाऊद को ज़बूर दी थी +[17:56] इनसे कहो पुकार देखो उन माबूदों को जिनको तुम खुदा के सिवा (अपना कारसाज़) समझते हो, वो किसी तकलीफ को तुमसे ना हटा सकते हैं ना बदल सकते हैं हैं +[17:57] जिनको ये लोग पुकारते हैं वो तो खुद अपने रब के हुजूर रसाई हासिल करने का वसीला तलाश कर रहे हैं (दृष्टिकोण के साधन तलाशते हैं) के कौन उसे करीब तार हो जाए और वो उसकी रहमत के उम्मीद और उसके अज़ाब से खैफ (डरते) हैं। हकीकत ये है कि तेरे रब का अज़ाब है हाय डरने के लाहिक +[17:58] और कोई बस्ती ऐसी नहीं जिसे हम कयामत से पहले हलाक न करें या सच अज़ाब न दें। ये नविश्ता-ए-इलाही (अनन्त रिकॉर्ड) में लिखा हुआ है +[17:59] और हमको निश्निया भेजने से नहीं रोका मगर इस बात ने के इनसे पहले के लोग उनको झुठला चुके हैं। (चुनांचे देखलो) समूद को हमने एलानिया ऊंटनी (वह-ऊंटनी) ला कर दी और उन्होन ने उसपर जुल्म किया। हम निशानियां इसी के लिए तो भेजते हैं के लोग उन्हें देख कर डरें +[17:60] याद करो (ऐ मुहम्मद), हमने तुमसे कह दिया था के तेरे रब ने इन लोगों को घेर रखा है और ये जो कुछ अभी हमने तुम्हें दिखाया है, इसको और हम दरख्त को जिसपर कुरान में लानत की गई है, हमने लोगों के लिए बस एक फ़ितना बनाकर रख दिया। हम उनमें तम्बीह (चेतावनी) बराबर तम्बीह (चेतावनी) किए जा रहे हैं, मगर हर तम्बीह इनकी सरकशी ही में इज़ाफ़ा किए जाती है +[17:61] और याद करो जबके हमने मलाइका (फरिश्तों) से कहा आदम को सजदा करो, तो सब ने सजदा किया, मगर इबलीस ने ना किया, उसने कहा “क्या मैं उसको सजदा करूं जैसे तू ने मिट्टी से बनाया है?” +[17:62] फिर वो बोला "देख तो सही, क्या ये काबिल था कि तू ने इसे मुझपर फजीलत दी? अगर तू मुझे कयामत के दिन तक मोहलत दे तो मैं इसकी पूरी नाक की बेहकानी (उखाड़) कर डालूं। बस थोड़े ही लोग मुझे बचा सकेंगे।" +[17:63] अल्लाह ताला ने फरमाया, "अच्छा तो जा, इनमें से जो भी तेरी जोड़ी करें, तुझ समेत उन सब के लिए जहन्नुम ही भरपुर जजा है +[17:64] तू जिस को अपनी दावत से फिसल सकता है फिसल ले। उन पर अपने सवार (घुड़सवार) और प्यादे (पैदल) चढ़ा ला, माल और औलाद में उनके साथ साझी (साथी) लगा, और उनको वादों के जाल में फंस, और शैतान के वादे एक धोखे के सिवा और कुछ भी नहीं +[17:65] यकीनन मेरे बंदों पर तुझ पर कोई इक्तेदार हासिल न होगा, और तवक्कुल (भरोसे) के लिए तेरा रुब काफी है” +[17:66] तुम्हारा (हकीकी) रुब तो वो है जो समंदर में तुम्हारी कश्ती चलाता है ता-के तुम उसका फ़ज़ल तलाश करो। हकीकत ये है के वो तुम्हारे हाल पर निहायत मेहरबान है +[17:67] जब समंदर में तुम्हारी मुसीबत आती है तो हमें एक के सिवा दूसरे जिन को तुम पुकारते हो वो सब गम हो जाते हैं, मगर जब तुमको बच्चा कर ख़ुशी (जमीन) पर पहूंचा देता है तो तुम उसके मुंह मोड़ जाते हो। इंसान वक्त बड़ा नाशुक्रा है +[17:68] अच्छा, तो क्या तुम इस बात से बिल्कुल बे-खौफ हो के खुदा कभी खुश्की (जमीन) पर ही तुमको जमीन में धांसा दे, या तुम पथराओ करने वाली आंधी भेज दे और तुम उसे बचाने वाला कोई हिमायती ना पाओ +[17:69] और क्या तुम्हें इसका कोई अंदेशा नहीं के खुदा फिर कोई वक्त समंदर में तुमको ले जाए और तुम्हारी नाखुशी के बदले तुम्हारे साथ तूफानी हवा भेज कर तुम्हें गुस्सा करदे और तुमको ऐसा कोई ना मिले जो उसे तुम्हारे इस अंजाम की पुछ-गज्ज कर सके +[17:70] ये तो हमारी इनायत है के हमने बानी आदम को बुज़ुर्गी (सम्मान) दी और उन्हें ख़ुशकी (ज़मीन) ओ तारी (समुद्र) में सवारियां अता की और उनको पाकीज़ा चीज़ों से रिज़क दिया और अपनी बहुत से मखलूक़त पर नुमायां फौक़ियात (उत्कृष्ट) बख्शी +[17:71] फ़िर खयाल करो उस दिन का जबके हम हर इंसान गिरो ​​को उसके पेशवा (नेता) के साथ बुलाएंगे, हमें वक्त जिन लोगों ने उनका नाम-ए-आमाल सीधे हाथ में दिया वो अपना कारनामा पढ़ेंगे और उन्पर जरा बराबर जुल्म न होगा +[17:72] और जो इस दुनिया में अंधा बनकर रहा वो आख़िरत में भी अँधा ही रहेगा बलके रास्ते पाने में अँधे से भी ज़्यादा नाकाम +[17:73] (ऐ मुहम्मद), लोगों ने इस कोशिश में कोई कसार उठाया नहीं राखी के तुम्हें फिटने में डाल कर हमें वही से फेर दें जो हमने तुम्हारी तरफ भेजी है, ता-के तुम हमारे नाम पर अपनी तरफ से कोई बात गढ़ो। अगर तुम ऐसा करते तो वो जरूर तुम्हें अपना दोस्त बना लेते +[17:74] और बुरा ना था के अगर हम तुम्हें मजबूत ना रखते तो तुम उनकी तरफ कुछ ना कुछ झुक जाते +[17:75] लेकिन अगर तुम ऐसा करते तो हम तुम्हें दुनिया में भी दोहरे (डबल) अजब का मजा चखाते और आख़िरत में भी दोहरे अज़ाब का, फिर हमारे मुकाबले में तुम कोई मददगार न पाते +[17:76] और ये लोग इस बात पर भी तुले रहे हैं के तुम्हारे कदम इस सर-जमीन से उखाड़ दें (उखाड़ें) दीन और तुम्हें यहां से निकल बाहर करें, लेकिन अगर ये ऐसा करेंगे तो तुम्हारे बाद ये खुद यहां कुछ ज्यादा देर न ठहर सकेंगे +[17:77] ये हमारा मुस्तकिल तारीख-कर है जो उन सब रसूलों के मामले में हमने बारता है जिन्होंने तुमसे पहले हमें भेजा था, और हमारे तारीखे-कार में तुम कोई तगय्यूर (बदलाव) ना पाओगे +[17:78] नमाज़ क़याम करो ज़वाल-ए-आफ़ताब (सूरज का ढलना) से लेकर रात के अँधेरे तक, और फज्र के कुरान का भी इंतेज़ाम करो, क्योंकि कुरान ए फज्र मशूद (गवाह) होता है +[17:79] और रात को तहज्जुद पढ़ो, ये तुम्हारे लिए नफ्ल है, बैद (दूर/दूर) नहीं के तुम्हारा रब तुम्हें मक़ाम ए महमूद पर फैज़ करदे +[17:80] और दुआ करो के परवरदिगार, मुझको जहां भी तू लेजा सच्चाई के साथ लेजा और जहां से भी निकल सच्चाई के साथ निकल और अपनी तरफ से एक इक्तेदार (शक्ति) को मेरा मददगार बना दे +[17:81] और एलान करदो के "हक़ आ गया और बात मिट गया, बात तो मिटने ही वाला है" +[17:82] हम कुरान के सिलसिला-ए-तंज़िल (रहस्योद्घाटन) में वो कुछ नाज़िल कर रहे हैं जो माने वालों के लिए तो शिफ़ा और रहमत है, मगर ज़ालिमों के लिए ख़सारे (नुक्सान/नुकसान) के सिवा और किसी चीज़ में इज़ाफ़ा नहीं करता +[17:83] इंसान का हाल ये है के जब हम उसको नियामत अता करते हैं तो वो अहंकार (अहंकारी) और पीठ मोड़ लेता है, और जब जरा मुसीबत से दो-चार होता है तो मयुस होना लगता है +[17:84] (ऐ नबी), लोगों से कहदो के "हर एक अपने तरीके पर अमल कर रहा है, अब ये तुम्हारा रब" हाय बेहतर जानता है के सीधी राह पर कौन है” +[17:85] ये लोग तुमसे रूह (आत्मा) के मुतालिक पूछते हैं। कहो "ये रूह मेरे रुब के हुकुम से आती है, मगर तुम लोगों ने इल्म से कम ही बेहरा पाया है" (लेकिन आपको केवल थोड़ा सा ज्ञान दिया गया है) +[17:86] और (ऐ मुहम्मद), हम चाहें तो वो सब कुछ तुमसे छीन लें जो हमने वहीं के ज़रिये से तुमको अता किया है, फिर तुम हमारे मुक़बले में कोई हिमायती (सहायक) न पाओगे जो इसे वापस दिला सके +[17:87] ये तो जो कुछ तुम्हें मिला है तुम्हारे रब की रहमत से मिला है, हकीकत ये है के उसका फज़ल तुमपर बहुत बुरा है +[17:88] कहदो के अगर इंसान और जिन्न सब के सब मिलकर क्या कुरान जैसी कोई चीज लाने की कोशिश करें तो ना ला सकेंगे, चाहे वो सब एक दूसरे के मददगार ही क्यों ना हों +[17:89] हमने कुरान में लोगों को तरह-तरह से समझा मगर अक्सर लोग इंकार ही पर जमे रहेंगे +[17:90] और उन्होंने कहा " हम तेरी बात ना मानेंगे जब तक तू हमारे लिए ज़मीन को फाड़ कर एक चश्मा (वसंत) जारी ना करदे +[17:91] हां तेरे लिए खजूरों और अंगूरों का एक बाग पैदा हो और तू हमसें नहरें रावन करदे +[17:92] हां तू आसमान को टुकड़े-टुकड़े करके हमारे ऊपर गिरा दे जैसा के तेरा दावा है या खुदा और फरिश्तों को रु दार रु (आमने सामने) हमारे सामने ले आए +[17:93] हां तेरे लिए सोने का एक घर बन जाए या तू आसमान पर चढ़ जाए, और तेरे पैरों का भी हम यकीन ना करेंगे जब तक कि तू हमारे ऊपर एक ऐसी तहरीर (लिखित) न उतार लाए जिसे हम पढ़ें"। (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो "पाक है मेरा" परवरदिगार! क्या मैं एक पैग़ाम लाने वाले इंसान के सिवा और भी कुछ हूँ?” +[17:94] लोगों के सामने जब कभी हिदायत आई तो उसपर ईमान लाने से उनको किसी चीज़ ने नहीं रोका मगर उनको इसी क़ौल ने के "क्या अल्लाह ने बशर (इंसान) को पैगम्बर बना कर भेज दिया?" +[17:95] इनसे कहो अगर ज़मीन में फ़रिश्ते इतमीनान से चल फिर रहे होते तो हम ज़रूर आसमान से किसी फ़रिश्ते ही को उनके लिए पैगम्बर बना कर भेजते +[17:96] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहदो के मेरे और तुम्हारे दरमियान बस एक अल्लाह की गवाही काफ़ी है, वो अपने बंदों के हाल से खबर है और सब कुछ देख रहा है +[17:97] जिसको अल्लाह हिदायत दे वही हिदायत पाने वाला है, और जिसे वो गुमराही में डाल दे तो उसके सिवा ऐसे लोगों के लिए तू कोई हमी ओ नासिर (रक्षक और मददगार) नहीं पा सकता। उन लोगों को हम क़यामत के रोज़ औंधे मुंह खींच लाएंगे, अंधे, गूँगे और बाहर। उनका ठिकाना जहन्नुम है. जब कभी उसकी आग धीमी होने लगेगी हम उसे और भड़का देंगे +[17:98] ये बदला है उनको इस हरकत का के अनहोन ने हमारी आयत का इंकार किया और कहा "क्या जब हम सिर्फ हदियां और खाक (धूल) हो कर रह जाएंगे तो नए सिरे से हमको पैदा करके उठा खड़ा किया" जाएगा?” +[17:99] क्या इनको ये ना सूझा के जिस खुदा ने ज़मीन और आसमान को पेदा किया है वो इस जैसन को पेदा करने की जरूर क़ुदरत रखता है? उसने इनके हश्र के लिए एक वक्त मुकर्रर कर रखा है जिसका आना यकीनी है, मगर ज़ालिमों को इसरार है के वो इसका इंकार ही करेंगे +[17:100] (ऐ मुहम्मद) इनसे कहो, अगर कहीं मेरे रब की रहमत के ख़ज़ाने तुम्हारे क़ब्ज़े में होते तो तुम ख़ार हो जाने के अंदेशे से जरूर उनको रोक रखो। वक़ई इंसान बड़ा तंग दिल (संकीर्ण मानसिकता) वक़ई हुआ है +[17:101] हमने मूसा को तो निशानियां अता की थी जो सारे तौर पर दिखाई दे रही थी (जो काफी स्पष्ट थीं)। अब ये तुम खुद बनी इजराइल से पूछ लो के जब वो सामने आई तो फिरौन ने यहीं कहा था ना के "ऐ मूसा, मैं समझता हूं के तू जरूर एक सहर-जादा (मोहित) आदमी है +[17:102] मूसा ने उसके जवाब में कहा "तू खूब जानता है के ये बसीरत अफरोज (आंखें खोलने वाला) निशानियाँ रब्बुस समावती वल अर्ध (स्वर्ग और पृथ्वी के स्वामी) के सिवा किसी ने नाज़िल नहीं की है, और मेरा ख्याल ये है के ऐ फिरौन, तू ज़रूर एक शामत-ज़ादा (बर्बाद) आदमी है” +[17:103] आख़िर-ए-कार फिरौन ने इरादा किया के मूसा और बानी इसराइल को ज़मीन से उखाड़ फेंके, मगर हमने उसको और उसके साथियों को इकत्था गर्क (डूब) करदिया +[17:104] और उसके बाद बानी इसराइल से कहा के अब तुम ज़मीन में बसो, फिर जब आख़िरत के वादे का वक़्त आन पूरा होगा तो हम तुम सब को एक साथ ला हाज़िर करेंगे +[17:105] क्या कुरान को हमने हक़ के साथ नाज़िल किया है और हक़ ही के साथ ये नाज़िल हुआ है। और (ऐ मुहम्मद) तुम्हें हमने इसके सिवा और किसी काम के लिए नहीं भेजा के (जो मान ले उसे) बशारत दे दो और (जा ना माने उसे) मुतनब्बेह (चेतावनी) करदो +[17:106] और इस कुरान को हमने थोड़ा थोड़ा करके नाज़िल किया है ता-के तुम ठहर-ठहर कर इसे लोगों को सुनाओ, और इसे हमने (मौका मौका से) बा-तद्रेज उतारा है +[17:107] (ऐ मुहम्मद), इन लोगों से कहदो के तुम इसे मानो या ना मानो, जिन लोगों को इसे पहले इल्म दिया गया है उन्हें जब ये सुनाया जाता है तो वो मुंह के बाल सजदे में गिर जाते हैं +[17:108] और पुकार उठते हैं "पाक है हमारा रब, उसका वादा तो पूरा होना ही था" +[17:109] और वो मुँह के बाल रोते रोते हुए गिर जाते हैं और इसे सुनकर उनका ख़ुश (विनम्रता) और बढ़ जाता है +[17:110] (ऐ नबी), इंसे कहो, अल्लाह कह कर पुकारो या रहमान कहकर, जिस नाम से भी पुकारो उसके लिए सब अच्छे ही नाम हैं और अपनी नमाज न बहुत ज्यादा बुलंद आवाज से पढ़ो और न बहुत पुरानी आवाज से, दोनों के दरमियां अव्सत दर्जे का लहजा इख्तियार करो +[17:111] और कहो “तारीफ है उसने खुदा के लिए जिसने ना किसी को बेटा बनाया, ना कोई बादशाही में उसका शरीक है, और ना वो अजीज (असहाय) है कि कोई उसका पुश्तबान (समर्थक) हो” और उसकी बदाई बयां करो, कमाल दर्जे की बदाई + +Surah 18: Al-Kahf (The Cave) +---------------------------------------- +[18:1] तारीफ अल्लाह के लिए है जिसने अपने बंदे पर ये किताब नाज़िल की और इसमें कोई टेढ़ ना रखी +[18:2] ठीक ठीक सीधी बात कहने वाली किताब, ता-के वो लोगों को खुदा के सख्त अज़ाब से खबर करदे, और ईमान ला कर नीक अमल करने वालों को खुश खबरी दे दे के उनके लिए अच्छा अजर है +[18:3] जिसमें वो हमेशा रहेंगे +[18:4] और उन लोगों को डर दे जो कहते हैं कि अल्लाह ने किसी को बेटा बनाया है +[18:5] क्या बात का ना उन्हें कोई इलम है और ना उनके बाप दादा को था। बड़ी बात है जो उनके मुँह से निकलती है, वो महज़ झूठ बोलते हैं +[18:6] अच्छा, तो (ऐ मुहम्मद), शायद तुम इनके पीछे ग़म के मारे अपनी जान खो देने वाले हो अगर ये तालीम पर ईमान ना लाए +[18:7] वाकिया ये है के ये जो कुछ सर-ओ-समान भी ज़मीन पर है इसको हमने ज़मीन की ज़ीनत बनाई है ता-के इन लोगों को आज़माएं इनमें कौन बेहतर अमल करने वाला है +[18:8] आख़िर ए कार इस सब को हम एक छतियाल मैदान बना देने वाले हैं +[18:9] क्या तुम समझते हो के घर (गुफा) और कतबे (शिलालेख) वाले हमारी कोई बड़ी अजीब निसानियों में से थे +[18:10] जब वो चांद नवाजवां घर में पनाह गुज़ेन हुए और उन्होन ने कहा “ए परवरदिगार, हमको अपनी रहमत ए खास से नवाज और हमारा मामला दुरुस्त करदे” +[18:11] तो हमने उन्हें उसी घर में थापक कर साल हा साल के लिए गहरी नींद सुला दिया +[18:12] फिर हमने उन्हें उठाया ता-के देखें उनके दो गिरोहों में से कौन अपनी मुद्दत ए कयाम का ठीक शुरू करता है +[18:13] हम उनका असल क़िस्सा तुम्हें सुनाते हैं, वो चंद नवाज़वान थे जो अपने रब पर ईमान ले आए थे और हमने उनको हिदायत में तरक्की बख्शी थी +[18:14] हमने उनके दिल को वक़्त मज़बूत कर दिया जब वो उठे और उन्हें हमने एलान किया करदिया के "हमारा रब तो बस वही है जो आसमान और ज़मीन का रब है, हम उसे छोड़ कर किसी दूसरे माबूद को ना पुकारेंगे, अगर हम ऐसा करें तो बिल्कुल बेजा (अनुचित) बात करेंगे" +[18:15] (फिर उनहोन ने आपस में एक दूसरे से कहा) "ये हमारी क़ौम रब ई को कायनात को छोड़ कर दूसरे खुदा बना बैठी है, ये लोग उनके माबूद होने पर कोई वाज़े दलील क्यों नहीं लाते? आखिर उस शक्स से बड़ा जालिम और कौन हो सकता है जो अल्लाह पर झूठ बांधे +[18:16] अब जब तुम उनसे और उनके मबूदाने गैर-अल्लाह से बेताब हो चुके हो तो चलो अब फलां घर में चल कर पनाह लो। तुम्हारा रब तुम अपनी रहमत का दामन वही करेगा और तुम्हारे काम केलिए सर-ओ-सामान मुहैया कर देगा” +[18:17] तुम उन्हें घर में देखते हो तो तुम्हें यूं नजर आता है कि सूरज जब निकलता है तो उनके घर को छोड़ कर जाएं जानिब चढ़ जाता है और जब गुरुब होता है तो उनसे बच कर जाएं जानिब उतर जाता है और वो हैं के घर के अंदर एक वसीह जगह में पड़े हैं। ये अल्लाह की निशानियों में से एक है. जिसको अल्लाह हिदायत दे वही हिदायत पाने वाला है और जिसे अल्लाह भटका दे उसके लिए तुम कोई वली-ए-मुर्शिद नहीं पा सकते +[18:18] तुम उन्हें देख कर ये समझ के वो जाग रहे हैं, हलांके वो सो रहे थे। हम उन्हें दिनें करवट दिलवाते रहते थे और उनका कुत्ता घर के दहने [किनारे] (प्रवेश द्वार) पर हाथ फैलाये बैठे थे। अगर तुम कहीं झाँक कर उन्हें देखते तो उलटे पाँव भाग खड़े होते और तुम्पर उनके नज़ारे से अलग बैठ जाती +[18:19] और इसी अजीब करिश्मा से हमने उन्हें उठाया बिठाया ता-के जरा आपस में पूछ-गज करें, उन में से एक ने पूछा “कहो कितनी” देर इस हाल में रहे?” दुसरों ने कहा "शायद दिन भर या इस तरह कुछ काम होंगे"। फ़िर वो बोले "अल्लाह हाय बेहतर जानता है के हमारा कितना वक़्त इस हालात में गुज़रा। चलो अब अपने में से किसी को चाँदी का ये सिक्ख देकर शहर भेजें और वो देखे के सबसे अच्छा खाना कहाँ मिलता है वहाँ से वो कुछ खाने के लिए ले और चाहे के ज़रा होशियारी से काम करे, ऐसा ना हो के वो किसी को हमारे यहां होने से खबरदार कर बैठे +[18:20] अगर कहीं उन लोगों का हाथ हमपर पढ़ गया तो बस संगसार (पत्थर से मौत ) कर डालेंगे, या फिर ज़बरदस्ती हमें अपनी मिल्लत में वापस ले जाएंगे, और ऐसा हुआ तो हम कभी फलाह न पा सकेंगे" +[18:21] इस तरह हमने एहले शहर को उनके हाल पर मुत्तला किया ता-के लोग जान लें के अल्लाह का वादा सच्चा है, और ये के कयामत की घड़ी बशक आकर रहेगी (मगर जरा ख्याल करो के जब सोचने की असल बात ये थी) हमारा वक्त वो आपस में इस बात पर झगड़ा रहे थे के (अशब-ए-कहफ) के साथ क्या। किया जाये. कुछ लोगों ने कहा "इनपार एक दीवार चुन दो, इनका रब ही इनके मामले को बेहतर जानता है" मगर जो लोग उनके मामले पर गालिब थे उन्हें ने कहा "हम तो अंदर एक इबादत गाह बनाएंगे" +[18:22] कुछ लोग कहेंगे के वो तीन थे और चौथा (चौथा) उनका कुत्ता था और कुछ दूसरे कह देंगे के पांच थे और छठा (छठा) उनका कुत्ता था। ये सब बेटुकी (अप्रासंगिक अनुमान) हांकते हैं। कुछ और लोग कहते हैं कि सात (सात) था और आठवां (आठवां) उनका कुत्ता था। कहो, मेरे रब ही बेहतर जानता है के वो कितने थाय, काम ही लोग उनकी सही ताड़द जानते हैं, लेकिन तुम सर-साड़ी बात से बढ़कर उनकी तड़प के मामले में लोगों से बेहस ना करो, और ना उनको मुतालिक किसी से कुछ पूछो +[18:23] और देखो, किसी चीज के बारे में कभी ये ना कहा करो मैं कल ये काम कर दूंगा +[18:24] (तुम कुछ नहीं कर सकते) इल्ला ये के अल्लाह चाहे, अगर भूल से ऐसी बात जुबान से निकल जाए तो तुरंत अपने रब को याद करो और कहो "उम्मीद है के मेरा रब इस मामले में रुशद से करीब-करीब बात की तरफ मेरी रहनुमाई फरमादेगा" +[18:25] और वो अपने घर (गुफा) में तीन सौ (तीन सौ) साल रहे, और (कुछ लोग मुद्दत के शूमर में) नौ (नौ) साल और बढ़ गए हैं +[18:26] तुम कहो, अल्लाह उनके क़याम की मुद्दत (उनके रहने की अवधि) ज़्यादा जानता है, आसमान और ज़मीन के सब पोशीदा अहवाल उसी को मालूम है। क्या ख़ूब है वो देखने वाला और सुनने वाला! ज़मीन ओ आसमान की मख़लूक़त का कोई ख़बर-गीर उसके सिवा नहीं, और वो अपनी हुकूमत में किसी को शरीक नहीं करता +[18:27] ऐ नबी! तुम्हारे रब की किताब में से कुछ तुम पर वही (रहस्योद्घाटन) किया गया है उसे (जून का भी/बिल्कुल) सुना दो। कोई उसके फार्मूदात को बदलने का मिजाज नहीं है, (और अगर तुम किसी की खातिर इस में रद्द या बदल करोगे तो) उसे छोड़कर भागने के लिए कोई जाएगा पनाह न पाओगे +[18:28] और अपने दिल को उन लोगों की माया पर मुतमइन करो जो अपने रब की रजा के तलबगार बनकर सुबह ओ शाम उसे पुकारते हैं, और उनसे हरगिज निगाह ना फेरो। क्या तुम दुनिया की जीनत पसंद करते हो? किसी ऐसे शक्स की इत्ता ना करो जिसके दिल को हमने अपनी याद से गाफिल करदिया है और जिसने अपनी ख्वाहिश ए नफ्स की जोड़ी इख्तियार कर ली है और जिसका तारीख-कर इफरात ओ तफ़रीत पर मबनी है (अपनी वासना का अनुसरण करता है और अपने मामलों के संचालन में चरम सीमा तक चला जाता है) +[18:29] साफ कहदो के ये हक है तुम्हारे रब की तरफ से, अब जिसका जी चाहे मान ले और जिसका जी चाहे इंकार करदे। हमने (इनकार करने वाले) ज़ालिमों के लिए एक आग तैयार कर रखी है जिसकी लपेटें उन्हें घेरे में ले चुकी हैं। वहां अगर वो पानी मांगेगे तो ऐसे पानी से उनकी तवाज़ो की जाएगी जो तेल (तेल) के लिए तिलचट जैसा होगा और उनका मुंह भून डालेगा। बदतरें पीने की चीज़ और बहुत बुरी आरामगाह +[18:30] रहे वो लोग जो मान लें और नीक अमल करें, तो यकीनन हम नीकुकर लोगों का अजर ज़या नहीं किया करते +[18:31] उनके लिए सदा बहार (सदाबहार) जन्नतें हैं जिनके आला नह्रेन बेह राही होंगी, वहां वो सोने के कंगन (सुनहरे कंगन) से जुड़ेंगे। बारीक रेशम और अतलस ओ देबा के सब्ज़ कपडे पहनेंगे, और उनकी मसनदों पर तकिये लगा कर बैठेंगे, बेहतर अजर और आला दर्जे की जाये क़याम +[18:32] (ऐ मुहम्मद)! इनके सामने एक मिसाल पेश करो दो शक्स थे उन में से एक को हमने अंगूर के दो बाग दिए और उनके गिर्द खजूर के दरख्तों की बाध (बाड़) लगाई और उनके दरमियान काश्त (खेती) की जमीन राखी +[18:33] डोनो बाग खूब फले फूले और बारावर होने में उनको ने जरा सी कसार भी ना छोड़ी, उन बाघों के अंदर हमने एक नेहर जारी करदी +[18:34] और उसे खूब नफा ​​हासिल हुआ, ये कुछ पा कर एक दिन वो अपने हमसाए (पड़ोसी) से बात करते हुए बोला 'मैं तुझसे ज्यादा मालदार हूं और' तुझसे ज़्यादा ताक़तवर नफ़री रखता हूँ (मेरी सेवा में ताकतवर आदमी)" +[18:35] फिर वो अपनी जन्नत (बगीचे) में दखल हुआ और अपने नफ़्स के हक़ में ज़ालिम बनकर कहने लगा "मैं नहीं समझता के ये दौलत कभी फ़ना हो जाएगी" +[18:36] और मुझे तवक्कू नहीं के कयामत की घड़ी कभी आएगी, ताहम अगर कभी मुझे अपने रब के हुजूर पलटया भी गया तो जरूर इसे भी ज्यादा शानदार जगह पाऊंगा” +[18:37] उसके हमसये (पड़ोसी/साथी) ने गुफ्तगू करते हुए उसे कहा “क्या तू कुफ्र” करता है हमें जात से जिसने तुझे मिट्टी से और फिर से खिलाया किया और तुझे एक पूरा आदमी बना खड़ा किया +[18:38] रहा मैं, तो मेरा रब तो वही अल्लाह है और मैं उसके साथ किसी को शरीक नहीं करता +[18:39] और जब तू अपनी जन्नत में दखल हो रहा था हमें वक्त तेरी जुबान से ये क्यों न निकला के माशा अल्लाह, ला कुव्वता इल्ला बिल्ला (अल्लाह के अलावा कोई ताकत नहीं)? अगर तू मुझे माल और औलाद में अपने से कमतर पा रहा है +[18:40] तो बुरा नहीं के मेरा रब मुझे तेरी जन्नत (बगीचे) से बेहतर अता फरमाड़े और तेरी जन्नत (बाग/बगीचा) पर आसमान से कोई आफत भेज दे जिसमें वो साफ मैदान बनकर रह जाए +[18:41] या इसका पानी ज़मीन में उतर जाए और फिर तू इसकी तरह ना निकल सके” +[18:42] आख़िर-ए-कार हुआ ये के उसका सारा सारा ख़त्म हो गया और वो अपने अंगूरों के बागों को टट्टियों पर उल्टा पड़ा देख कर अपनी लगाई हुई लगत पर हाथ माल्टा रह गया और कहने लगा के "काश! मैंने अपने रुब के साथ किसी को शरीक ना ठहरया होता" +[18:43] ना हुआ अल्लाह को छोड़ कर उसके पास कोई जत्था (जमात/कंपनी) के उसकी मदद करता, और ना कर सका वो आप ही हमसे आफत का मुकाबला +[18:44] हमें वक्त मालूम हुआ के कारसाज़ी का इख्तियार खुदा ए बरहक़्क़ ही के लिए है, इनाम वही बेहतर है जो वो बक्शे और अंजाम वही बा-खैर है जो वो दिखाए +[18:45] और (ऐ नबी)! इनमें हयात ए दुनिया की हकीकत इस मिसाल से समझो कि आज हमने आसमान से पानी बरसा दिया तो जमीन की पौद खूब घनी हो गई, और कल वही नबात भुस बनकर रह गई जैसे हवाएं उड़ाए फिरती हैं, अल्लाह हर चीज पर कुदरत रखता है +[18:46] ये माल और ये औलाद मेहज़ दुनियावी जिंदगी की एक हंगामा आराइश (सजावट) है, असल में तो बाकी रह जाने वाली नेकियां ही तेरे रब के नाज़दीक नातिजे के लिहाज़ से बेहतर हैं और उन्हीं से अच्छी उम्मीदे वबस्ता की जा सकती है +[18:47] फ़िक्र उस दिन की होनी चाहिए जबके हम पहाड़ों को चलाएंगे, और तुम ज़मीन को बिल्कुल बरहेना (नग्न) पाओगे, और हम तमाम इंसानों को इस तरह घेर कर जमा करेंगे के (अगलों पीछेलों में से) एक भी ना छूटेगा +[18:48] और सब के सब तुम्हारे रब के हुज़ूर सफ़ (पंक्तियाँ) डर सफ़ (पंक्तियाँ) पेश किये जायेंगे। लो देखलो, आगये ना तुम हमारे पास उसी तरह जैसा हमने तुमको पहली बार पेदा किया था। तुमने तो ये समझा था कि हमने तुम्हारे लिए कोई वादे का वक्त मुकर्रर ही नहीं किया +[18:49] और नाम ए अमल सामने रख दिया जाएगा हमें वक्त तुम देखोगे के मुजरिम लोग अपनी किताब ए जिंदगी के इंद्रजात (रिकॉर्ड) से डर रहे होंगे और कह रहे हैं होंगी के हाए हमारी चुदाई, ये कैसी किताब है के हमारी कोई छोटी बड़ी हरकत ऐसी नहीं रही जो इसमे दर्ज ना हो गई हो। जो जो कुछ अनहोन ने किया था वो सब अपने सामने हाज़िर पाएंगे और तेरा रब किसी पर ज़रा ज़ुल्म न करेगा +[18:50] याद करो, जब हमने फरिश्तों से कहा के आदम को सजदा करो तो उनहों ने सजदा किया मगर इब्लीस ने न किया, वो जिन्नो में से था इसके लिए अपने रब्ब के हुकुम की इबादत से निकल गया। अब क्या तुम मुझे छोड़ कर उसे और उसकी ज़िम्मेदारी को अपना सरपरस्त बनाते हो हलांके वो तुम्हारे दुश्मन हैं? बड़ा ही बुरा बादल है जिसमें ज़ालिम लोग इख्तियार कर रहे हैं +[18:51] मैंने आसमान ओ ज़मीन पैदा करते वक्त उनको नहीं बुलाया था और ना खुद उनकी अपनी तख़लीक में उन्हें शरीक किया था। मेरा ये काम नहीं के गुमराह करने वालों को अपना मददगार बनाया करूं +[18:52] फिर क्या करेंगे ये लोग हमें रोज जबके इनका रब इनसे कहेगा के पुकारो अब उन हस्तियों को जिन्हे तुम मेरा शरीक समझ बैठे थे, ये उनको पुकारेंगे, मगर वो इनकी मदद को ना आएंगे और हम इनके दरमियान एक ही हलाकत का घड़ा मुश्तारिक कर देंगे(हलाकत की जगह बना देंगे) +[18:53] सारे मुजरिम हमें रोज आग देखेंगे और समझ लेंगे के अब उन्हें इस में गिराना है और वो इसे बचाने के लिए कोई जाए पनाह न पाएंगे +[18:54] हमने कुरान में लोगों को तरह तरह से समझा मगर इंसान बड़ा ही झगड़ालू वाकये हुआ है +[18:55] उनके सामने जब हिदायत आई तो उसे मन्ने और अपने रब के हुजूर माफ़ी चाहने से आख़िर उनको किस चीज़ ने रोक दिया? इसके सिवा और कुछ नहीं के वो मुंतज़िर हैं के उनके साथ भी वही कुछ हो जो पिछली क़ौमों के साथ हो चुका है, या ये के वो अज़ाब को सामने आते देख लें +[18:56] रसूलों को हम इस काम के सिवा और कोई ग़रज़ नहीं भेजते के वो बशारत और तम्बीह (चेतावनी) की खिदमत अंजाम दे दें, मगर काफिरों का हाल ये है कि वो बातिल के हथियार लेकर हक़ को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं और उनको ने मेरी आयत को और उन तम्बीहत (चेतावनी) को जो उनको मज़ाक बना लिया है +[18:57] और हमारे शक्स से बढ़ कर जालिम और कौन है जिसके बारे में रब की आयतें सुना कर हिदायत की जाए और वो उससे मुह फेरे और उस बुरे अंजाम को भूल जाए जिसका सर या सामान उसने अपने लिए खुद अपने हाथों से किया है? (जिन लोगों ने ये रवीश इख्तियार की है) उनके दिलों पर हमने गिलाफ (कवर) चढ़ा दिया है जो उन्हें कुरान की बात नहीं समझ देते, और उनके कानों में हमने गिरानी अदा कर दी है। तुम उन्हें हिदायत की तरफ कितना ही बुलाओ, वो इस हालात में कभी हिदायत न पाएंगे +[18:58] तेरा रब बड़ा दरगुज़र करने वाला और रहीम है। वो इनके कार्टूनों पर इन्हें पकड़ना चाहता था तो जल्दी ही अज़ाब भेज देता, मगर इनके लिए वादे का एक वक्त मुकर्रर है और इससे बच कर भाग निकलेगा कि ये कोई राह न पाएगा +[18:59] ये अज़ाब रसीदें तुम्हारे सामने मौजूद हैं, उनको ने जब ज़ुल्म किया तो हमने उन्हें हलाक कर दिया, और उनमें से हर एक की हलाकत के लिए हमने वक्त मुकर्रर कर रखा था +[18:60] (ज़रा इनको वो क़िस्सा सुनाओ जो मूसा को पेश आया था) जबके मूसा ने अपने खादिम से कहा था के “मैं अपना सफर ख़तम” ना करूंगा जबतक के दोनों दरियाओं के संगम पर ना पहुंच जाऊं, वरना मैं एक जमाना ए दराज़ तक चलता ही रहूंगा” +[18:61] पास जब वो उनके संगम पर पहुंचें तो अपनी मछली से गाफिल हो गईं और वो निकल कर इस तरह दरिया में चली गई जैसे के कोई सुरंग (सुरंग) लगी हो +[18:62] आगे जा कर मूसा ने अपने खादिम से कहा “ लाओ हमारा नाश्ता, आज के सफर में तो हम बुरी तरह थक गए हैं” +[18:63] खादिम ने कहा “आपने देखा! ये क्या हुआ? जब हम हमारे पास चट्टान (रॉक) के पास थे तब थे हमारा वक्त मुझे मछली का ख़याल ना रहा और शैतान ने मुझको ऐसा ग़ाफ़िल कर दिया के मैं उसका ज़िक्र (आपसे करना) भूल गया। मछली तो अजीब तरह से निकल कर दरिया में चली गई" +[18:64] मूसा ने कहा "उसकी तो हमें तलाश थी"। चुनाचे वो दोनों अपने नक्शे कदम पर फिर वापस हुए +[18:65] और वहां उनको ने हमारे बंदों में से एक बंदे को पाया जिसे हमने अपनी रहमंत से नवाजा था और अपनी तरफ से एक खास इल्म अता किया था +[18:66] मूसा ने उसे कहा "क्या मैं आपके साथ रह सकता हूं ता-के आप मुझे भी हमें बताएं" दानिश (बुद्धि) की तालीम दीन जो आपको सिखाई गई है?” +[18:67] उसने जवाब दिया "आप मेरे साथ सब्र नहीं कर सकते" +[18:68] और जिस चीज की आपको खबर न हो आखिर आप उसपर सब्र कर भी कैसे सकते हैं" +[18:69] मूसा ने कहा "इंशा अल्लाह आप मुझे साबिर पाएंगे और मैं आपकी खबर में कोई कमी नहीं छोड़ूंगा" नफरमानी ना करूंगा” +[18:70] उसने कहा “अच्छा, अगर आप मेरे साथ चलते हैं तो मुझसे कोई बात ना पूछेगा जब तक के मैं खुद उसका आपसे जिक्र ना करूं” +[18:71] अब वो दोनों रावना हुए, यहां तक ​​के जब वो एक कश्ती में सवार हो गए तो हमें शक्स ने कहा कश्ती मैंने शिगाफ़ (छेद) डाल दिया। मूसा ने कहा "आपने इस में शिगाफ़ डाल दिया, ता-के सब कश्ती वालों को डुबो दें? ये तो आपने एक सख्त हरकत कर डाली" +[18:72] उसने कहा "मैंने तुमसे कहा ना था के तुम मेरे साथ सब्र नहीं कर सकते?" +[18:73] मूसा ने कहा "भूल चुक पर मुझे न पकड़िये, मेरे मामले में आप जरा खुद से काम न लें।" +[18:74] फिर वो दोनो चले, यहां तक ​​के उनको एक लड़का मिला और उस लड़के ने उसे बर्बाद कर दिया। मूसा ने कहा "आपने एक बे-गुनाह की जान ली हलांके उसने किसी का खून ना किया था? ये काम तो आपने बहुत ही बुरा किया" +[18:75] उसने कहा "मैंने तुमसे कहा ना था के तुम मेरे साथ सब्र नहीं कर सकते?" +[18:76] मूसा ने कहा “इसके बाद अगर मैं आप से कुछ पूछूं तो आप मुझे सात न रखें। लीजिए अब तो मेरी तरफ से आपको उज्र (एक्सक्यूज) मिल गया" +[18:77] फिर वो आगे चले यहां तक ​​के एक बस्ती में पहुंचें और वहां के लोगों से खाना मंगा मगर उन्होन ने उन दोनो के जियाफत से इनकार करदिया। वहां उन्होन ने एक दीवार देखी जो गिरा चाहती थी(गिरने वाली थी) नीचे) +[18:78] +[18:79] उस कश्ती का मामला ये है के वो चंद ग़रीब आदमियों की थी जो दरिया में मेहनत मज़दूरी करते थे।मैने चाहा के उसे अयबदार (क्षतिग्रस्त) कार्डून, क्यूँके आगे एक ऐसे बादशाह का इलाक़ा था जो हर कश्ती को ज़बरदस्ती छीन लेता था +[18:80] रहा वो लड़का, तो उसके वालिदैन मोमिन थे, हमें अंदेशा हुआ के ये लड़का अपनी सरकशी और कुफ़्र से उनको तंग करेगा +[18:81] इसलिए हमने चाहा के उनका रब उसके बदले उनको ऐसी और औलाद दे जो अखलाक में भी उससे बेहतर हो और जिसका सिला रहमी भी ज्यादा मुतावक्क हो +[18:82] और इस दीवार का मामला ये है के ये दो यतीम लड़कों की है जो इस शहर में रहते हैं। क्या दीवार के नीचे बच्चों के लिए एक खजाना दफन है। और इनका बाप एक नया आदमी था, इसलिए तुम्हारे रब ने चाहा के ये डोनो बच्चे बालिग (परिपक्व) माननीय और अपना खजाना निकाल लें। ये तुम्हारे रब की रहमत की बिना पर किया गया है, मैंने कुछ अपने इख्तियार से नहीं किया है। ये है हकीकत उन बातों की जिनपर तुम सब्र न कर सके” +[18:83] और (ऐ मुहम्मद), ये लोग तुमसे ज़ुल-क़रनैन के बारे में पूछते हैं, इनसे कहो, मैं इसका कुछ हाल तुमको सुनाता हूँ +[18:84] हमने उसको ज़मीन में इक्तेदार अता कर रक्खा था और उसे हर क़िसम के असबाब ओ वसील बख्शे थे +[18:85] उसने (पहले मगरिब की तरफ एक मोहिम का) सर ओ समां किया +[18:86] हट्टा के जब वो गुरूब ए आफताब (सूर्यास्त) की हद तक पहुंच गया तो उसने सूरज को एक काले पानी में डूबते देखा और वहां उसे इस्तेमाल किया क़ौम मिली. हमने कहा, "ऐ ज़ुल-क़रनैन, तुझे ये मक़दरत (शक्ति) भी हासिल है के इनको तकलीफ़ पाहुंचे और ये भी के इनके साथ नेक रवैय्या इख्तियार करे" +[18:87] उसने कहा, "जो इनमें से ज़ुल्म करेगा हम उसको सजा देंगे, फिर वो अपने रुब की तरफ" पलटया जाएगा और वो उसे और ज्यादा सख्त अजाब देगा +[18:88] और जो इनमें से ईमान लाएगा और नीक अमल करेगा उसके लिए अच्छी जजा है और हम उसको नरम एहकाम देंगे” +[18:89] फिर उसने (एक दूसरी मोहिम की) तयारी की +[18:90] यहां तक के तुलु ए आफताब (सूर्योदय) की हद तक जा पाहुंचा। वहां उसने देखा के सूरज एक ऐसी क़ौम पर तुलू (उदय) हो रहा है जिसके लिए धूप से बचने का कोई सामान हमने नहीं किया है +[18:91] ये हाल था उनका, और ज़ुल-क़रनैन के पास जो कुछ था उसे हम जानते थे +[18:92] फिर उसने (एक और मोहिम का) समान किया +[18:93] यहां तक ​​के जब दो पहाड़ों के दरमियां पाहुंचा तो उसके पास एक क़ौम मिली जो मुश्किल ही से कोई बात समझती थी +[18:94] उन लोगों ने कहा “ऐ” ज़ुल-क़रनैन, याजुज और माजूज इस सर-जमीन में फसाद फैलाते हैं तो क्या हम तुझ पर कोई टैक्स (श्रद्धांजलि) इस काम के लिए दीन के तू हमारे और इनके दरमियान एक बंद (बाधा) तामीर करदे?” +[18:95] उसने कहा "जो कुछ मेरे रब्ब ने मुझे दे रक्खा है वो बहुत है।" तुम बस मेहनत से मेरी मदद करो, मैं तुम्हारे और इनके दरमियान बंद (बाधा) बना देता हूं +[18:96] मुझे लोहे की चादरें (चादरें) लाकर दो"। आखिर जब दोनों पहाड़ों के दरमियानी खाला (अंतरिक्ष) को उसने पाट दिया तो लोगों से कहा के अब आग देहकाओ। हट्टा के जब [ये अहानी दीवार (लोहे की दीवार)] बिल्कुल आग की तरह सुर्ख (लाल-गर्म) हो गई तो उसने कहा " लाओ, अब मैं इसपर पिगला हुआ तांबा (पिघला हुआ पीतल) उंडैलूंगा (डालूंगा)" +[18:97] (ये बंद ऐसा था के) याजुज ओ माजुज इसपर चढ़ कर भी ना आ सकता था और इसमें नकाब लगाना (इस पर पैमाना) उनके लिए और भी मुश्किल था +[18:98] ज़ुल-क़रनैन ने कहा "ये मेरे रब की रहमत है, मगर जब मेरे रब के वादे का वक़्त आएगा तो वो इसको पैवंद ए खाक कर देगा, और मेरे रब का वादा बार-हक़्क़ है" +[18:99] और हम रोज़ हम लोगों को छोड़ देंगे के (समंदर की मौजों की तरह) एक दूसरे से गुत्थम गुत्था (एक साथ करीब आओ) माननीय और सुर (तुरही) फूंका जाएगा और हम सब इंसानों को एक साथ जमा करेंगे +[18:100] और वो दिन होगा जब हम जहन्नुम को काफिरों के सामने लाएंगे +[18:101] उन काफिरों के सामने जो मेरी हिदायत की तरफ से अंधे बने हुए थे और कुछ सुने केलिए तैयार ही ना थाय +[18:102] तो क्या ये लोग, जिन्हों ने कुफ्र इख्तियार किया है, ये ख्याल रखते हैं के मुझे छोड़ कर मेरे बंदों को अपना करसाज़ बना लें? हमने ऐसे काफिरों की ज़ियाफ़त के लिए जहन्नुम तय्यार कर रखी है +[18:103] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो, क्या हम तुम्हें बताएं के अपने अमाल में सबसे ज्यादा नाकाम ओ ना-मुराद लोग कौन हैं +[18:104] वो के दुनिया की जिंदगी में जिनकी सारी सई-ओ-जहाद (प्रयास/प्रयास) राह ए रास्ते से भटक रही है और वो समझे रहे के वो सब कुछ ठीक कर रहे हैं +[18:105] ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने रब की आयत को मन्ने से इंकार किया और उसके हुजूर पेहसी का यकीन ना किया। इसलिए उनके सारे अमल ज़ाया हो गए, क़यामत के रोज़ हम उन्हें कोई वज़न न देंगे +[18:106] उनकी जज़ा जहन्नुम है उस कुफ्र के बदले जो उनहों ने किया और उस मज़ाक की याद में जो वो मेरी आयत और मेरे रसूलों के साथ करते रहे +[18:107] अलबत्ता वो लोग जो ईमान लाए और जिन्होन ने नीक अमल किया, उनकी मेजबानी के लिए फिरदौस के बाग होंगे +[18:108] जिन में वो हमेशा रहेंगे और कभी उस जगह से निकल कर कहीं जाने को उनका जी न चाहेगा +[18:109] (ऐ मुहम्मद), कहो के अगर समंदर मेरे रब की बातें लिखने के लिए रोशनाई (स्याही) बन जाए तो वो ख़तम हो जाए मगर मेरे रब की बातें ख़त्म ना हो, बलके इतनी ही रोशनी और ले आएं तो वो भी किफ़ायत ना करे +[18:110] (ऐ मुहम्मद), कहो के मैं तो एक इंसान हूं तुम ही जैसा, मेरी तरफ वही की जाती है के तुम्हारा खुदा बस एक ही खुदा है, पास जो अपने रुब की मुलाकात का उम्मीदवर हो उसे चाहिए कि नेक अमल करे और बंदगी में अपने रुब के साथ किसी और को शरीक न करे + +Surah 19: Maryam (Mary) +---------------------------------------- +[19:1] काफ, हा, हां, ऐन, साद +[19:2] ज़िक्र है उस रहमत का जो तेरे रब ने अपने बंदे ज़कारिया पर की थी +[19:3] जबके उसने अपने रब को चुपके-चुपके पुकारा +[19:4] उसने अर्ज़ किया "ऐ परवरदिगार, मेरी हदियां तक ​​घुल गई हैं और सर बुढ़ापे से भड़क उठा है, ऐ परवरदिगार, मैं कभी तुझसे दुआ मांग कर ना-मुराद नहीं रहा +[19:5] मुझे अपने पीछे अपने भाई बंदों की बुराइयों का खौफ है, और मेरी बीवी बांझ (बंजर) है, तू मुझे अपने फजल ए खास से एक वारिस अता करदे [19:6] +[19:6] +[19:7] (जवाब दिया गया) “ऐ जकारिया, हम तुझे एक लड़के की बशारत देते हैं जिसका नाम यह होगा, हमने इस नाम का कोई आदमी इसे पहले पैदा नहीं किया” +[19:8] अर्ज़ किया, “परवरदिगार, भला मेरे हां कैसे बेटा होगा जबके मेरी बीवी बाँझ (बंजर) है और मैं बूढ़ा होकर सुखा चुका हूँ?” +[19:9] जवाब मिला “ऐसा ही होगा।” तेरा रब्ब फरमाता है के ये तो मेरे लिए एक ज़रा सी बात है, आख़िर इसे पहले मैं तुझ पेदा कर चूका हूँ जबके तू कोई चीज़ ना था” +[19:10] ज़कारिया ने कहा, “परवरदिगार, मेरे लिए कोई निशानी मुकर्रर करदे।” फरमाया “तेरे लिए निशानी ये है के तू” पैहम तीन दिन लोगों से बात न कर सके” +[19:11] चुनाचे वो मेहराब से निकल कर अपनी क़ौम के सामने आया और उसने इशारे से उनको हिदायत की के सुबह-ओ-शाम तस्बीह करो +[19:12] ऐ याह्या! किताब ए इलाही को मज़बूत थाम ले, हमने उसे इस्तेमाल किया बचपन ही में "हुकुम" से नवाज़ +[19:13] और अपनी तरफ से उसको नरम दिल और पाकीज़गी अता की और वो बड़ा परहेज़गार +[19:14] और अपने वालिदैन का हक़ शान (कर्तव्यनिष्ठ) था, वो जब्बार (अहंकारी) न था और न नफ़रमान +[19:15] सलाम उसपर जिस रोज़ के वो पैदा हुआ और जिस दिन मरे और जिस रोज़ वो ज़िंदा करके उठया जाए +[19:16] और (ऐ मुहम्मद), इस किताब में मरियम का हाल बयान करो, जबके वो अपने लोगों से अलग हो कर शर्की (पूर्वी तरफ) जानिब गोशा नशीन (एकांत में) हो गई थी +[19:17] और परदा दाल कर उनसे छुप (छिपी हुई) बैठी थी इस हालत में हमने उसके पास अपनी रूह को (यानी फरिश्ते को) भेजा और वो उसके सामने एक पूरा इंसान की शक्ल में नामदार हो गया +[19:18] मरियम यकायक बोल उठी के "अगर तू कोई खुदा तरस आदमी है तो मैं तुझसे" रहमान की पनाह मांगती हूं" +[19:19] उसने कहा "मैं तो तेरे रब का फ़रिश्ता हूं और इसे भेजा गया हूं के तुझसे एक पाकीजा लड़का दूं" +[19:20] मरियम ने कहा "मेरे हां कैसे लड़का होगा जबके मुझे कोई बशर (इंसान) ने छुआ तक नहीं है और मैं कोई बढ़िया औरत नहीं हूं'' +[19:21] फरिश्ते ने कहा '' ऐसा ही होगा, तेरा रब फरमाता है के ऐसा करना मेरे लिए बहुत आसान है और हम ये सिर्फ इसलिए करेंगे क्योंकि हम लड़के को लोगों के लिए एक निशानी बनाएंगे और अपनी तरफ से एक रहमत, और ये काम होकर रहना है" +[19:22] माया को हमारे बच्चे का हमाल रह गया और वो इस हमाल को लिए हुए एक दरवाजे के मकाम पर चली गई +[19:23] फिर जचगी (डिलीवरी) की तकलीफ ने उसे एक खजूर के दरख्त के नीचे पहुंचा दिया। वो कहने लगी "काश मैं इसे पहले ही मर जाती है और मेरा नाम ओ निशान ना रहता है” +[19:24] फरिश्ते ने पेंटी (उसके बिस्तर के नीचे) से उसको पुकार कर कहा "गुम ना कर तेरे रब ने तेरे आला एक चश्मा रावन करदिया है +[19:25] और तू जरा इस दरख्त के तनय (ट्रंक) को हिला, तेरे ऊपर तार-ओ-ताजा खजूरें तपाक पडेंगी +[19:26] पास तू खा और पेशाब और अपनी आंखें ठंडी कर फिर अगर कोई आदमी तुझे नज़र आए तो उसे कहे के मैंने रहमान के लिए रोज़ की नज़र मानी है, इसलिए आज मैं किसी से ना बोलूंगी” +[19:27] फिर वो इस बच्चे को लिए हुए अपनी क़ौम में आई. लोग कहने लगे "ऐ मरियम, ये तू बड़ा पाप कर डाला +[19:28] ऐ हारून की बहन, ना तेरा बाप कोई बुरा आदमी था और ना तेरी माँ ही कोई बढ़कर औरत थी" +[19:29] मरियम ने बच्चे की तरफ इशारा कर दिया। लोगों ने कहा, "हम इसे क्या बात करें जो गेहवेरे (पालना) में पड़ा हुआ एक बच्चा है?" +[19:30] बच्चा बोल उठा “मैं अल्लाह का बंदा हूं उसने मुझे किताब दी, और नबी बनाया +[19:31] और बाबरकत किया जहां भी मैं रहूं, और नमाज और जकात की पाबंदियों का हुकुम दिया जब तक मैं जिंदा रहूं +[19:32] और अपनी वालिदा का हक अदा करने वाला बनाया, और मुझको जब्बार (दमनकारी) और शक्की (कठोर दिल वाला) नहीं बनाया +[19:33] सलाम है मुझपर जबके मैं पैदा हुआ और जबके मैं मरूं (मर जाऊं) और जबके जिंदा करके उठा जाऊं” +[19:34] ये है ईसा इब्न मरियम और ये है उसके बारे में वो सच्ची बात जिसमें लोग शक्क कर रहे हैं +[19:35] अल्लाह का ये काम नहीं है कि वो किसी को बेटा बने। वो पाक जात है, वो जब किसी बात का फैसला करता है तो कहता है कि होजा, और बस वो हो जाती है +[19:36] (और ईसा ने कहा था के)"अल्लाह मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी, लेकिन तुम उसी की बंदगी करो, यही सीधी राह है" +[19:37] मगर फिर मुख्तलिफ गिरो ​​बहम इख्तिलाफ करने लगे। तो जिन लोगों ने कुफ्र किया उनके लिए वो वक्त बड़ी तबाही का होगा +[19:38] जबके वो एक बड़ा दिन देखेंगे, जब वो हमारे सामने होंगे हम रोज तो उनके कान भी खूब सुन रहे होंगे और उनकी आंखें भी खूब देखती होंगी, मगर आज ये जालिम खुली गुमराही में मुब्तिला हैं +[19:39] (ऐ मुहम्मद), इस हालत में जबके ये लोग गाफिल हैं और ईमान नहीं ला रहे हैं, उनमें हमें दिन से डर दो जबके फैसला करदिया जाएगा और पछतावे के सिवा कोई चारा-ए-कार ना होगा +[19:40] आखिर-ए-कार हम हाय ज़मीन और उसकी सारी चीज़ों के वारिस होंगे और सब हमारी तरफ ही पलटेंगे +[19:41] और इस किताब में इब्राहीम का क़िस्सा बयान करो, बेशक वो एक रस्त-बाज़ इंसान और एक नबी था +[19:42] (इन्हें ज़रा उस मौके की याद दिलाओ) जबके उसने अपने बाप से कह के “अब्बाजान, आप क्यों उन चीज़ों की इबादत करते हैं जो ना सुनती हैं ना देखती हैं और ना आप का कोई काम बना सकती हैं +[19:43] अब्बाजान, मेरे पास एक ऐसा इलम आया है जो आपके पास नहीं आया, आप मेरे पीछे चलें, मैं आपको सीधा रास्ता बताऊंगा +[19:44] अब्बाजान!आप शैतान की बंदगी ना करें, शैतान तो रहमान का नफरमान है +[19:45] अब्बाजान, मुझे डर है के कहीं आप रहमान के अज़ाब में मुब्तिला न हो जाएं और शैतान के साथी बन कर रहें” +[19:46] बाप ने कहा “इब्राहिम, क्या तू मेरे मबूदों से फिर गया है? अगर तू बाज़ न आया तो मैं तुझे संगसार (पत्थर मार कर मार डालूँगा) कर दूँगा। बस तू हमेशा के लिए मुझसे अलग हो जा” +[19:47] इब्राहिम ने कहा “सलाम है आपको, मैं अपने रब से दुआ करूंगा के आपको माफ़ करदे। मेरा रब्ब मुझपर बड़ा ही मेहरबान है +[19:48] मैं आप लोगों को भी चोदता हूं और उन हस्तियों को भी जिन्हे आप लोग खुदा को चोद कर पुकारते हैं। मैं तो अपने रुब ही को पुकारूंगा, उम्मीद है कि मैं अपने रुब को पुकार के ना-मुराद ना रहूंगा” +[19:49] पास जब वो उन लोगों से और उनके माबूदाने गैर अल्लाह से जुदा हो गया तो हमने उसको इशाक और याकूब जैसी औलाद दी और हर एक को नबी बनाया +[19:50] और उनको अपनी रहमत से नवाजा और उनको सच्ची नामवरी अता की +[19:51] और जिक्र करो इस किताब में मूसा का, वो एक चीदा (चुना हुआ) शक्स था और रसूल नबी था +[19:52] हमने उसको तूर के दहिनी(दाएं) जानिब से पुकारा और राज की गुफ्तगु से उसको तकरूब (सम्मान) अता किया +[19:53] और अपनी मेहरबानी से उसके भाई हारून को नबी बना कर उसे (मददगार के तौर पर) दिया +[19:54] और इस किताब में इस्माइल का जिक्र करो, वो वादे का सच्चा था और रसूल नबी था +[19:55] वो अपने घर वालों को नमाज और जकात का हुकुम डी एटा था और अपने रब के नजदीक एक पसंददीदा इंसान था +[19:56] और इस किताब में इदरीस का जिक्र करो, वो एक रस्त-बाज़ (नेक) इंसान और एक नबी था +[19:57] और उसे हमने बुलंद मुकाम पर उठाया था +[19:58] ये वो पैगम्बर हैं जिनपर अल्लाह ने इनाम फरमाया आदम की औलाद में से, और उन लोगों की नाक से जिन्होंने हमने नूह के साथ कश्ती पर सवार किया था, और इब्राहिम की नाक से और इस्राइल की नाक से और ये उन लोगों की नाक से थे जिन्हें हमने हिदायत बख्शी और बरगुजिदा किया। इनका हाल ये था के जब रहमान की आयत उनको सुनाई जाती है तो रोते हुए सजदे में गिर जाते थे +[19:59] फिर इनके बाद वो नख़लफ़ (पतित) लोग इनके जानशाहीन (उत्तराधिकारी) हुए जिन्होन ने नमाज़ को ज़या किया और ख्वाहिशात ए नफ़्स की जोड़ी की। पास करीब है के वो गुमराही के अंजाम से दो-चार होन +[19:60] अलबत्ता जो तौबा कार्लें और ईमान ले आएं और नेक अमली इख्तियार कार्लें वो जन्नत में दाखिल होंगे और उनकी ज़रा बराबर हक़ तलाफ़ी न होगी +[19:61] इनके लिए हमेशा रहने वाली जन्नतें हैं जिनका रहमान ने अपने बंदों से डर-पुर्दा वादा कर रखा है और यकीनन ये वादा पूरा होकर रहना है +[19:62] वहां वो कोई बेहुदा बात ना सुनेंगे, जो कुछ भी सुनेंगे ठीक ही सुनेंगे और उनका रिज्क उन्हें पैहम सुबह-ओ-शाम मिलता रहेगा +[19:63] ये है वो जन्नत जिसका वारिस हम अपने बंदों में से उसको बनायेंगे जो परहेजगार रहा है +[19:64] (ऐ मुहम्मद), हम तुम्हारे रब के हुकुम के बिना नहीं उतरते, जो कुछ हमारे आगे है और जो कुछ पीछे है और जो कुछ इसके दरमियान में है हर चीज का मालिक वही है और तुम्हारा रुब भूलने वाला नहीं है +[19:65] वो रुब है आसमान का और ज़मीन का और उन सारी चीज़ों का जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान हैं, लेकिन तुम उसकी बंदगी करो और उसकी बंगदी पर साबित क़दम रहो। क्या है कोई हस्ती तुम्हारे इल्म में इसकी हम पाया (रैंक में उसके बराबर) +[19:66] इंसान कहता है क्या वाकाई जब मैं मर जाऊंगा तो फिर जिंदा करके निकल लाया जाऊंगा +[19:67] क्या इंसान को याद नहीं आता के हम पहले उसको पैदा कर चुके हैं जबके वो कुछ भी ना था +[19:68] तेरे रब की कसम, हम जरूर उन सब को और उनके साथ शयातीन को भी घेर लेंगे, फिर जहन्नुम के गिर्द ला कर इन्हें घुटनों (घुटनों) के बल गिरा देंगे +[19:69] फिर हर गिरोह में से हर उस शक्स को चांट लेंगे (बाहर निकालो) जो रहमान के मुकाबले में ज्यादा सरकश बना हुआ था +[19:70] फिर हम ये जानते हैं के में से कौन सबसे बढ़कर जहन्नुम में झोंके जाने का मुस्तहिक है +[19:71] तुम में से कोई नहीं है जो जहन्नुम पर वारिद ना हो, ये तो एक ताई शुदा बात है जिसे पूरा करना तेरे रब का ज़िम्मा है +[19:72] फिर हम उन लोगों को बचा लेंगे जो (दुनिया में) मुत्तक़ी था और जालिमों को उसी में गिरा हुआ छोड़ देंगे +[19:73] लोगों को जब हमारी खुली खुली आयत सुनाई जाती है तो इंकार करने वाले ईमान लाने वालों से कहते हैं “बताओ, हम दोनो गिरोहोन में से कौन बेहतर हालात में है और किसकी मजलिसें ज्यादा शानदार है?” +[19:74] हालंके इनसे पहले हम कितनी ही ऐसी कौमो को हलाक कर चुके हैं जो इनसे ज्यादा सर-ओ-समान रखती पतली और जाहिर शान ओ शौकत में इनसे बड़ी हुई थी +[19:75] इनसे कहो, जो शक्स गुमराही में मुब्तिला होता है उसे रहमान ढील दिया करता है, यहां तक ​​के जब ऐसे लोग वो चीज देख लेते हैं जिसका उनसे वादा किया गया है ख्वा वो अज़ाब ए इलाही हो या कयामत की घड़ी तब उन्हें मालूम हो जाता है के किसका हाल खराब है और किसका जत्था (पार्टी) कामज़ोर +[19:76] इस्के बराक जो लोगो राह ए रास्त इख्तियार करते हैं अल्लाह उनको रस्त-रवी में तरक्की अता फरमाता है और बाकी रह जाने वाली नेकियां ही तेरे रब के नाजदीक जजा और अंजाम के ऐतबार से बेहतर हैं +[19:77] फिर तू नया देखा उस शक्स को जो हमारी आयत को मन्ने से इंकार करता है और कहता है कि मैं तो माल और औलाद से नवाजा ही जाता रहूंगा +[19:78] क्या उसे गैब का पता चल गया है या उसने रहमान से कोई अहद ले रखा है +[19:79] हरगिज नहीं, जो कुछ ये बख्ता (घमंड) है इसे हम लिख लेंगे और इसके लिए सजा में और ज्यादा इजाफा करेंगे +[19:80] जिस सर-ओ-समान और लाओ लश्कर का ये जिक्र कर रहा है वो सब हमारे पास रह जाएगा और ये अकेला हमारे सामने हाज़िर होगा +[19:81] इन लोगों ने अल्लाह को छोड़ कर अपना कुछ खुदा बना रखा है ता-के वो इनके पुश्तेबान (समर्थक) माननीय +[19:82] कोई पुश्तेबान ना होगा, वो सब इनकी इबादत का इंकार करेंगे और उल्टे इनके मुखालिफ़ बन जायेंगे +[19:83] क्या तुम देखते नहीं हो के हमने मुनकिरीन ए हक़ पर शयातीन छोड़ रक्खे हैं जो इन्हें ख़ूब ख़ूब (मुख़ालिफ़त ए हक़ पर) उसका रहे हैं +[19:84] अच्छा, तो अब इनपर नुज़ुल ए अज़ाब के लिए बेताब ना हो, हम इनके दिन गिन रहे हैं +[19:85] वो दिन आने वाला है जब मुत्तक़ी लोगों को हम मेहमानों की तरह रहमान के हुजूर पेश करेंगे +[19:86] और मुजरेमोन को प्यासे जानवरों की तरह जहन्नुम की तरफ हांक ले जाएंगे +[19:87] हमें वक्त लोग कोई सिफ़रिश लेन पर कादिर न होंगे बज़ुज़ उसके जिसने रहमान के हुजूर से परवाना हासिल करलिया हो +[19:88] वो कहते हैं के रहमान ने किसी को बेटा बना लिया है +[19:89] सच बहुत बात है जो तुम लोग गड़बड़ लाए हो +[19:90] करीब है के आसमां फट पड़े, जमीन शक्क हो जाए (स्प्लिट असंडर) और पहाड़ गिर जाए +[19:91] इस बात पर के लोगों ने रहमान के लिए औलाद होने का दावा किया +[19:92] रहमान की ये शान नहीं है के वो किसी को बेटा बना सके +[19:93] जमीन और आसमान के अंदर जो भी हैं सब उसके हुजूर बंदों की हैसियत से पेश होने वाले हैं +[19:94] सब पर वो मुहीत (घेरा हुआ) है और उसने उनको शामिल कर रखा है +[19:95] सब कयामत के रोज़ फरदान फरदान (अकेले अकेले) उसके सामने हाज़िर होंगे +[19:96] यकीनन जो लोग ईमान ले आए हैं और अमल ए सालेह कर रहे हैं अनकारी रहमान उनके लिए दिलों में मुहब्बत अदा कर देगा +[19:97] पास (ऐ मुहम्मद), इस कलाम को हमने आसां करके तुम्हारी जुबान में इसके लिए नाज़िल किया है के तुम परहेज़गरों को ख़ुश ख़बरी देदो और टोपी-धर्म (झगड़ालू/अड़ियल) लोगों को डरा दो +[19:98] इनसे पहले हम कितनी नमस्ते क़ौमों को हलाक कर चुके हैं, फिर आज कहीं तुम उनका निशान पाते हो, या उनकी भनक भी कहीं सुनायी देती है + +Surah 20: Ta Ha (Ta Ha) +---------------------------------------- +[20:1] ता हा +[20:2] हमने ये कुरान तुम्हारे लिए नाज़िल नहीं किया है के तुम मुसीबत में पढ़ जाओ +[20:3] ये तो एक याद दिहानी है हर उस शक्स के लिए जो डरे +[20:4] नाज़िल किया गया है उस ज़ात की तरफ से जिसने पैदा किया है ज़मीन को और बुलंद आसमान को +[20:5] वो रहमान (क़ायनात के) तख्त ए सल्तनत पर जलवा फरमा है +[20:6] मालिक हैं उन सब चीज़ों का जो आसमान और ज़मीन में हैं और जो ज़मीन ओ आसमान के दरमियान में हैं और जो मिट्टी के नीचे हैं +[20:7] तुम चाहे अपनी बात पुकार कर कहो, वो तो चुपके से कहीं हुई बात बल्के इसे मख़फ़ी-तर (सबसे गुप्त) बात भी जानता है +[20:8] वो अल्लाह है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं, उसके लिए बेहतरीन नाम हैं +[20:9] और तुम्हें कुछ मूसा की खबर भी पसंद है +[20:10] जबके उसने एक आग देखी और अपने घर वालों से कहा के “जरा ठहरो, मैंने एक आग देखी” है, शायद तुम्हारे लिए एक-आद अंगारा ले आऊं, हां इस आग पर मुझे (रास्ते के मुतालिक) कोई रहनुमाई (मार्गदर्शन) मिल जाए” +[20:11] वहां पहुंच तो पुकारा गया “ऐ मूसा +[20:12] मैं हाय तेरा रब हूं, जूतियां (जूते) उतार दे, तू वादी ए मुक़द्दस तुवा में है +[20:13] और मैंने तुझको चुन लिया है, सुन जो कुछ वही किया जाता है +[20:14] मैं ही अल्लाह हूं, मेरे सिवा कोई खुदा नहीं है, पास तू मेरी बंदगी कर और मेरी याद के लिए नमाज़ क़याम कर +[20:15] क़यामत की घड़ी जरूर आने वाली है, मैं उसका वक्त मख्फी रखना चाहता हूं, ता-के हर मुतनफ्फिस अपनी साई (मजदूर/कोशिश) के मुताबिक बदला पाए +[20:16] पास कोई ऐसा शक्स जो उसपर ईमान नहीं लाता और अपनी ख्वाहिश ए नफ्स का बंदा बन गया है तुझको उस घड़ी की फ़िक्र से ना रोक दे, वरना तू हलकत में पढ़ जाएगा +[20:17] और ऐ मूसा, ये तेरे हाथ में क्या है?” +[20:18] मूसा ने जवाब दिया "ये मेरी लाठी है, इसपर ठीक लगा कर चलता हूं, इसे अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूं, और भी बहुत से काम हैं जो इसे लेता हूं" +[20:19] फरमाया "फेंक दे इसको मूसा" +[20:20] उसने फेंक दिया और यकीन वो एक सांप (सांप) थी जो दौड़ रहा था +[20:21] फरमाया “पकड़ ले इसको और डर नहीं, हम इसे फिर वैसा ही कर देंगे जैसी ये थी +[20:22] और जरा अपना हाथ अपने बगल में दबा, चमकता हुआ निकलेगा बिना किसी तकलीफ के, ये दुसरी निशानी है +[20:23] इस लिए के हम तुझे अपनी बड़ी निशानियां दिखाने वाले हैं +[20:24] अब तू फिरौं के पास जा, वो व्यंग्य हो गया है” +[20:25] मूसा ने अर्ज़ किया “ परवरदिगार, मेरा सीना खोल दे +[20:26] और मेरे काम को मेरे लिए आसां करदे +[20:27] और मेरी जुबान की ग्यारह सुलझा दे +[20:28] ता-के लोग मेरी बात समझ सकें +[20:29] और मेरे लिए मेरे अपने कुंबे (मेरे अपने परिवार) से एक वजीर मुकर्रर करदे +[20:30] हारून, जो मेरा भाई है +[20:31] उसके जरूर से मेरा हाथ मजबूत कर +[20:32] और उसको मेरे काम में शामिल करदे +[20:33] हम खूब तेरी पाकी बयां करें +[20:34] और खूब तेरा चर्चा करें +[20:35] तू हमेशा हमारा हाल पर नजर रख रहा है" +[20:36] फरमाया " दिया गया जो तू नहीं माँगा ऐ मूसा +[20:37] हमने फिर एक मरतबा तुझपर एहसान किया +[20:38] याद करो वो वक्त जबके हमने तेरी मां को इशारा किया, ऐसा इशारा जो वही के लिए किया जाता है +[20:39] के इस बच्चे को संदूक (बॉक्स) में रख दे और संदूक को दरिया में छोड़ दे, दरिया इसे सही पर फेंक देगा और इसे मेरा दुश्मन और इस बच्चे का दुश्मन उठा लेगा। मैंने अपनी तरफ से तुझपर मोहब्बत तारी करदी और ऐसा इंतिज़ाम किया के तू मेरी निगरानी में पाला जाए +[20:40] याद कर जबके तेरी बहन चल रही थी, फिर जा कर कहती है, "मैं तुम्हें उसका पता दूं जो क्या बच्चे की परवरिश अच्छी तरह करे?" इस तरह हमने तुझे फिर तेरी मां के पास पहुंचा दिया ता-के उसकी आंख ठंडी रहे और वो रंजीदा ना हो। और (ये भी याद कर के) तूने एक शक्स को क़त्ल कर दिया था, हमने तुझसे इस फाँदे से निकला और तुझे मुखतलिफ़ आज़माइशों से गुजारा और तू मदियाँ के लोगों में काई साल रुका रहा। फिर अब ठीक अपने वक्त पर तू आ गया है ऐ मूसा +[20:41] मैंने तुझे अपने काम का बना लिया है +[20:42] जा, तू और तेरा भाई मेरी निशानियों के साथ, और देखो तुम मेरी याद में तकसीर (लापरवाही) ना करना +[20:43] जाओ तुम दोनों फ़िरौन के पास के वो व्यंग्य हो गया है +[20:44] उसे नरमी के साथ बात करना, शायद के वो हिदायत क़बूल करे या डर जाए” +[20:45] डोनो ने अर्ज़ किया “परवरदिगार, हमें अंदेशा है के वो हमपर ज़्यादा करेगा या पिल पड़ेगा।” क्रूरतापूर्वक)” +[20:46] फरमाया” डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूं, सब कुछ सुन रहा हूं और देख रहा हूं +[20:47] जाओ उसके पास और कहो के हम तेरे रब के फरीस्तादे (संदेशवाहक) हैं, बानी इजराइल को हमारे साथ जाने के लिए छोड़ दे और उनको तकलीफ ना दे। हम तेरे पास तेरे रब की निशानी लेकर आए हैं और सलामती है उसके लिए जो राह-ए-रास्त की जोड़ी बनाए +[20:48] हमको वही (रहस्योद्घाटन) से बताया गया है कि अज़ाब है उसके लिए जो झूठलाए और मुंह मोड़े।' +[20:49] फ़िरौन ने कहा "अच्छा, तो फिर तुम दोनो का रुब कौन है ऐ मूसा?" +[20:50] मूसा ने जवाब दिया "हमारा रब वो है जिसने हर चीज को उसकी असली बख्शी (विशिष्ट रूप दिया), फिर उसको रास्ता बताया" +[20:51] फिरौन बोला "और पहले जो नसलें (पीढ़ियां) गुजर चुकी हैं उनकी फिर क्या हालत थी?" +[20:52] मूसा ने कहा "उसका इलम मेरे रब के पास एक नाविश्ते (रिकॉर्ड) में महफूज है, मेरा रब ना छूटता है ना भूलता है" +[20:53] वही जिसने तुम्हारे लिए जमीन का फर्श बिछाया, और उसमें तुम्हारे चलने को रास्ते बने, और ऊपर से पानी बरसाया, फिर उसके ज़रिये से मुखतलिफ़ अक्सम की पैदावर निकली +[20:54] खाओ और अपने जानवरों को भी छोड़ो, यकीनन इस में बहुत सी निशानियाँ हैं अक़ल रखने वालों के लिए +[20:55] इसी ज़मीन से हमने तुमको पैदा किया है, इसी में हम तुम्हें वापस ले जायेंगे और इसी से तुमको दोबारा निकलेंगे +[20:56] हमने फिरौन को अपनी सभी निशानियां बताईं मगर वो झूठलाये चला गया और ना माना +[20:57] कहने लगा "ऐ मूसा, क्या तू हमारे पास इस के लिए आया है के अपने जादू के जोर से हमको हमारे मुल्क से निकल बाहर करे +[20:58] अच्छा, हम भी तेरे मुकाबले में वैसा ही जादू लाते हैं, ताई कार्ले कब और कहां मुकाबला करना है, ना हम इस झगड़े से फिरेंगे ना तू फिरियो, खुले मैदान में सामने आजा” +[20:59] मूसा ने कहा “जश्न का दिन ताई हुआ, और दिन चढ़े लोग जमा होन” +[20:60] फिरौं ने पलट कर अपने सारे हथकंडे जमा किये और मुकाबले में आ गया +[20:61] मूसा ने (ऐन मौके पर गिरो ​​मुकाबिल को मुखातिब करके) कहा "शामत के मारों, ना झूठी तोहमतें (झूठ का आविष्कार) बांधो अल्लाह पर, वरना वो एक सख्त अजाब से तुम्हारा सत्तियाना कर देगा, झूठ जिसने भी घड़ा वो ना-मुराद हुआ” +[20:62] ये सुनकर उनको दरमियान इख्तिलाफ ए राय हो गया और वो चुपके चुपके बहाम मशवरे करने लगे +[20:63] आखिर-ए-कार कुछ लोगों ने कहा के “ये डोनो तो महज़ जादूगर हैं.इंका मक़सद ये है के अपने जादू के ज़ोर से तुमको तुम्हारी ज़मीन से बे-दख़ल करदें और तुम्हारे मिसाल (आदर्श) तारीख़-ए-ज़िंदगी का ख़तम करदें +[20:64] अपनी सारी तदबीरें आज इकाथी करलो और एका करके मैदान में आओ। बस ये समझलो के आज जो गालिब रहा वही जीत गया।” +[20:65] जादूगर बोले "मूसा, तुम फेंकते हो या पहले हम फेंकते हो?" +[20:66] मूसा ने कहा "नहीं, तुम्हीं फेंको" क्योंकि उनकी रसियां ​​और उनकी लाठियां उनके जादू के ज़ोर से मूसा को दौड़ती हुई महसूस होने लगी +[20:67] और मूसा अपने दिल में डर गया +[20:68] हमने कहा "मत डर, तू ही गालिब रहेगा" +[20:69] फेंक जो कुछ तेरे हाथ में है, अभी इनकी सारी बनावती चीज़ों को निगल जाता है, ये जो कुछ बना कर लाए हैं ये तो जादूगर का फरेब है, और जादूगर कभी कामयाब नहीं हो सकता, ख़्वाह किसी शान से वो आये” +[20:70] आख़िर को यहीं हुआ के सारे जादूगर सजदे में गिरा दिए गए और पुकार उठे "मान लिया हमने हारून और मूसा के रब को" +[20:71] फिरौन ने कहा "तुम ईमान ले आए क़ब्ल इसके मैं तुम्हें इसकी इजाज़त देता? मालूम हो गया के ये तुम्हारा गुरु है जिसने तुम्हें" जादूगरी सिखाई थी। अच्छा अब मैं तुम्हारे हाथ पौन मुखालिफ सिमटन (वैकल्पिक पक्ष) से ​​कटवाता हूं और खजूर के तानो (चड्डी) पर तुमको सूली देता हूं, फिर तुम्हें पता चल जाएगा के हम दोनों में से किसका अजब फर्क और देर पर है” (यानी मैं तुम्हें) ज़्यादा सख्त सज़ा दे सकता हूं या मूसा) +[20:72] जादूगरों (जादूगरों) ने जवाब दिया "कसम है उस जात की जिसने हमने अदा किया है, ये हरगिज नहीं हो सकता के हम रोशन निशानियां सामने आ जाने के बाद भी (सदाकत पर) तुझे तर्जीह दें। तू जो कुछ करना चाहे करले, तू ज्यादा से ज्यादा बस इसी दुनिया की जिंदगी का फैसला कर सकता है +[20:73] हम तो अपने रब पर ईमान ले आए ता-के वो हमारी खातें माफ करदे, और इस जादूगरी से जिसपर तू ने हमें मजबूर किया था दरगुजर फरमाये। अल्लाह ही अच्छा है और वही बाक़ी रहने वाला है” +[20:74] हकीकत ये है के जो मुजरीन बनकर अपने रब के हुज़ूर हाज़िर होगा उसके लिए जहन्नुम है जिसमें वो ना जिएगा ना मरेगा +[20:75] और जो उसके हुज़ूर मोमिन की हकीकत से हाज़िर होगा, जिसने कोई अमल किये होंगे, ऐसे सब लोगों के लिए बुलंद दर्जे हैं +[20:76] सदा बहार बाग़ (बगीचे) हैं जिनके आला नहरें बह रही होंगी उन में वो हमेशा रहेंगे। ये जजा है उस शक्स की जो पकीज़गी इख्तियार करे +[20:77] हमने मूसा पर वही की अब रात-ओ-रात मेरे बंदों को लेकर चल पढ़, और उनके लिए समंदर में सुखी सड़क (सूखी राह) बना ले, तुझे किसी के ताक़ुब का ज़रा ख़ौफ़ ना हो और ना (समंदर के बीच से गुज़रते हुए) डर लगे +[20:78] पीछे से फ्राईउन अपने लश्कर लेकर पहुँचे और फिर समंदर उन पर छा गया जैसा के चा जाने का हक़ था +[20:79] फ़िरौन ने अपनी क़ौम को गुमराह ही किया था, कोई सही रहनुमाई नहीं की थी +[20:80] ऐ बानी इसराइल, हमने तुमको तुम्हारे दुश्मन से नजात दी, और तूर के दिन जानिब तुम्हारी हाज़री के लिए वक़्त मुक़र्रर किया और तुमपर मन्ना ओ सलवा (बटेर) उतारा +[20:81] खाओ हमारा दिया हुआ पाक ​​रिज़क और इसे खा कर सरकशी ना करो वरना तुमपर मेरा गजब टूट पड़ेगा। और जिसपर मेरा गजब टूटा वो फिर गिर कर ही रहा +[20:82] अलबत्ता जो तौबा कार्ले और ईमान लाए और नेक अमल करे, फिर सीधा चलता रहे, उसके लिए मैं बहुत दरगुजर करने वाला हूं +[20:83] और क्या चीज तुम्हें अपनी कौम से पहले ले आई मूसा +[20:84] उसने अर्ज़ किया “वो बस मेरे पीछे आ ही रहे हैं। मैं जल्दी करके तेरे हुजूर आ गया हूं ऐ मेरे रब, ता-के तू मुझसे खुश हो जाए” +[20:85] फरमाया “अच्छा, तो सुनो, हमने तुम्हारे पीछे तुम्हारी क़ौम को आजमाइश में डाल दिया और सामरी ने उन्हें गुमराह कर डाला” +[20:86] मूसा सच गुस्से और रंज की हालत में अपनी क़ौम की तरफ पलटा। जाकर उसने कहा “ऐ मेरी क़ौम के लोग, क्या तुम्हारे रब ने तुमसे अच्छे वादे नहीं किये थे? क्या तुम्हारे दिन लग गए हैं? या तुम अपने रब का गजब ही अपना ऊपर लाना चाहते थे के तुमने मुझसे वादा खिलाफी की?” +[20:87] उनको ने जवाब दिया “हमने आप से वादा खिलाफी कुछ अपने इख्तियार से नहीं की। मामला ये हुआ के लोगों के ज़ेवरत के बोझ से हम लड़ गए थे और हमने बस उनको फेंक दिया था'' फिर इसी तरह सामरी ने भी कुछ डाला +[20:88] और उनके लिए एक बच्चे (बछड़े का आकार) की मूरत बनकर निकल लाया जिसकी जमानत (बैल) की सी आवाज निकलती थी। लोग पुकार उठे "यही है तुम्हारा खुदा और मूसा का खुदा, मूसा इसे भूल गया" +[20:89] क्या वो देखते ना थे के ना वो उनकी बात का जवाब देता है और ना उनके नफा ओ नुक्सान का कुछ इख्तियार रखता है। +[20:90] हारून (मूसा के आने से) पहले ही उनसे कह चुका था के "लोगन, तुम इसकी वजह से फिटने (ट्रायल) में पढ़ गए हो, तुम्हारा रब तो रहमान है, पास तुम मेरी जोड़ी करो और मेरी बात मानो।" +[20:91] उनहों ने उसे कहा के "हम इसी तरह करते रहेंगे जब तक के मूसा वापस न आ जाएं" +[20:92] मूसा (कौम को डेटने के बाद हारून की तरफ पलटा और) बोला " हारून, तुमने जब देखा था के ये गुमराह हो रहे हैं +[20:93] तो किस चीज़ ने तुम्हारा हाथ पकड़ा था के मेरे तरीक़े पर अमल ना करो? क्या तुमने मेरे हुकुम की ख़िलाफ़-वारज़ी की +[20:94] हारून ने जवाब दिया “ऐ मेरी माँ के बेटे, मेरी दादी (दाढ़ी) ना पकड़, ना मेरे सर के बाल खींच, मुझे इस बात का डर था के” तू आ कर कहेगा तुमने बनी इजराइल में फूट डाल दी और मेरी बात का पास ना किया” +[20:95] मूसा ने कहा “और सामरी, तेरा क्या मामला है?” +[20:96] उसने जवाब दिया "मैंने वो चीज़ देखी जो इन लोगों को नज़र ना आई, लेकिन मैंने रसूल के नक्शे क़दम से एक मुट्ठी उठा ली और उसको डाल दिया, मेरे नफ्स ने मुझे कुछ ऐसा ही सुझाया" +[20:97] मूसा ने कहा, "अच्छा तो जा, अब जिंदगी भर तुझे यहीं पुकारते रहना है के मुझे ना छूना और तेरे लिए बाज़-पुर्स का एक वक्त मुकर्रर है जो तुझसे हरगिज़ ना तलेगा और देख अपना इस खुदा को जिस्पार तू ऋचा (इतना प्यार करता था) हुआ था, अब हम उसे जला डालेंगे और रेजा रेजा करके दरिया में बहाएंगे देंगे +[20:98] लोगन, तुम्हारा खुदा तो बस एक ही अल्लाह है जिसके सिवा कोई और खुदा नहीं है, हर चीज पर उसका इल्म है” +[20:99] (ऐ मुहम्मद), इस तरह हम पिछले गुजरे हालात की खबरें तुमको सुनाते हैं, और हमने खास अपने हां से तुमको एक "ज़िक्र" (दरस ए हिदायत) अता किया है +[20:100] जो कोई इसे मोह लेगा वो क़यामत के दिन साख बार ए गुनाह उठाएगा +[20:101] और ऐसे सब लोग हमेशा इसके वबल में गिरफ़्तार रहेंगे, और कयामत के दिन उनके लिए (जुर्म की है) जिम्मेदारी का बोझ) बड़ा तकलीफ-दे बोझ होगा +[20:102] उस दिन जबके सूर (तुरही) फूंका जाएगा और हम मुजरिमो को इस हाल में घेर लाएंगे के उनकी आंखें (देहशत के मारे) पथराई हुई होंगी +[20:103] आपस में चुपके चुपके कहेंगे के दुनिया में मुश्किल ही से तुमने कोई दस दिन गुजारे होंगे +[20:104] हमें खूब मालूम है के वो क्या बातें कर रहे होंगे, (हम ये भी जानते हैं के) हमें वक्त उनके साथ जो ज्यादा से ज्यादा मोहताज अंदाज लगाने वाला होगा वो कहेगा के नहीं, तुम्हारी दुनिया की जिंदगी बस एक दिन की जिंदगी थी +[20:105] ये लोग तुमसे पूछते हैं कि आखिर उस दिन ये पहाड़ कहां चले जायेंगे? कहो के मेरा रब उनको धूल बनाकर उड़ा देगा +[20:106] और ज़मीन को ऐसा हमवार चटियाल मैदान बना देगा (खाली स्तर का मैदान) +[20:107] के इसमे तुम कोई बल और सलवात (न कर्व और न ही क्रीज़) ना देखोगे +[20:108] हमसे रोज़ सब लोग मुनादी (बुलाने वाले/पुकारने वाले) की पुकार पर सीधे चले आएंगे, कोई जरा अकड़ न दिखा सकेगा और आवाज़ें रहमान के आगे डब जाएंगी, एक सर-सरहत के सिवा तुम कुछ ना सुनोगे +[20:109] हमसे रोज़ शफ़ात (मध्यस्थता) करगर ना होगी, इल्ला ये के किसी को रहमान इसकी इजाजत दे और उसकी बात सुन्ना पसंद करे +[20:110] वो लोगों का अगला पिछला सब हाल जानता है और दूसरों को इसका पूरा इल्म नहीं है +[20:111] लोगों के सर उस हय्युल कय्यूम (जिंदा और कयाम) के आगे झुक जायेंगे. ना-मुराद होगा जो हमें वक्त किसी ज़ुल्म का बार (बोझ)-ए-गुनाह उठाए हुए हो +[20:112] और किसी ज़ुल्म या हक़ तलाफ़ी का ख़तरा ना होगा उस शक्स को जो नेक अमल करे और इसके साथ वो मोमिन भी हो +[20:113] और (ऐ मुहम्मद) इसी तरह हमने इसे कुरान ए अरबी बाना कर नाज़िल किया है और इस्में तरह-तरह से तम्बीहत (चेतावनी) की है शायद के ये लोग कजरावी (विकृति) से बचे हैं या इसमें कुछ होश के आसार इस की बदौलत पेदा हैं +[20:114] पास बाला ओ बरतर है अल्लाह, बादशाह ए हक़ीक़ी। और देखो, कुरान पढ़ने में जल्दी ना किया करो जबतक के तुम्हारी तरफ उसकी वही तकमील को ना पूछ जाए, और दुआ करो के ऐ परवरदिगार मुझे मज़ीद इल्म अता कर +[20:115] हमने इस्से पहले आदम को एक हुकुम दिया था, मगर वो भूल गया और हमने हममें एज़्म (दृढ़ संकल्प/दृढ़ संकल्प) ना पाया +[20:116] याद करो वो वक़्त जब हमने फरिश्तों से कहा था के आदम को सजदा करो, वो सब तो सजदा कर गए, मगर एक इब्लीस था के इंकार कर बैठा +[20:117] इस्पर हमने आदम से कहा के “देखो, ये तुम्हारा और तुम्हारी” बीवी का दुश्मन है, ऐसा ना हो के ये तुम्हें जन्नत से निकाल दे और तुम मुसीबत में पढ़ जाओ +[20:118] यहां तो तुम्हें ये सुविधाएं (सुविधाएं) हासिल हैं के ना भूखे नंगे रहते हो +[20:119] ना प्यास और धूप तुम्हें सताती है” +[20:120] लेकिन शैतान ने उसको फुसलाया, कहने लगा "आदम, बताऊं तुम्हें वो दरख्त जिसकी आबादी जिंदगी और ला-ज़वाल (सदाबहार) सल्तनत हासिल होती है?" +[20:121] आखिर ए कार वो दोनों (मियां बीवी) हमें दरख्त का फल खा गए, नतिजा ये हुआ के मौसम ही उनके सत्र (नग्नता) एक दूसरे के आगे खुल गए और लगे दोनों अपने आप को जन्नत के पत्तों से ढँकने। आदम ने अपने रुब की नफ़रमानी की और राह-ए-रास्त से भटक गया +[20:122] फिर उसके रुब ने उसे बरगुज़िदा किया और उसकी तौबा क़बूल कार्ली और उसे हिदायत बख्शी +[20:123] और फरमाया “तुम दोनो (फ़ारिक, यानि इंसान और शैतान) यहाँ से उतर जाओ, तुम एक दूसरे के दुश्मन रहोगे। अब अगर मेरी तरफ से तुम कोई हिदायत पाओगे तो जो मेरी हमें हिदायत की जोड़ी बनाएगा वो ना भटकेगा ना बदबख्त में मुब्तला होगा +[20:124] और जो मेरे "ज़िक्र" (दरस ए हिदायत) से मुह मोड़ेगा उसके लिए दुनिया मैं तंग हूँ जिंदगी होगी और कयामत के रोज हम उसे अंधा उठाएंगे” +[20:125] वो कहेगा "परवरदिगार, दुनिया में तो मैं आँखों वाला था, यहाँ मुझे अंधा क्यों उठाया?" +[20:126] अल्लाह ताला फरमाएगा "हां, इसी तरह तू हमारी आयत को, जबके वो तेरे पास आई थी, तू ने भुला दिया था उसी तरह आज तू भुलाया जा रहा है" +[20:127] इस तरह हम हद से गुज़रने वाले और अपने रब की आयत ना माने वाले को (दुनिया में) बदला देते हैं और आख़िरत का अज़ाब ज़्यादा मज़बूत और ज़्यादा देर पर है (अधिक स्थायी) +[20:128] फिर क्या इन लोगों को (तारीख के इस सबक से) कोई हिदायत ना मिली के इनसे पहले कितनी ही क़ायमों को हम हलाक कर चुके हैं जिनकी (बरबाद शुदा) बस्तियों में आज ये चलते फिरते हैं? दर हकीकत इसमें बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक़ल ए सलीम रखने वाले हैं +[20:129] अगर तेरे रब की तरफ से पहले एक बात ताई ना करदी गई होती और मोहलत की एक मुद्दत मुकर्रर ना कि जा चुकी होती तो जरूर इनका भी फैसला चुका दिया जाता +[20:130] पास (ऐ मुहम्मद), जो बातें ये लोग बनाते हैं उन पर सब्र करो, और अपने रुब की हम्द ओ सना के साथ उसकी तस्बीह करो सूरज निकलने से पहले, और रात के औकात में भी तस्बीह करो और दिन के किनारों पर भी, शायद के तुम राजी हो जाओ +[20:131] और निगाह उठा कर भी ना देखो दुनियावी जिंदगी की उस शान ओ शौकत को जो हमने अपने अंदर से मुख्तलिफ किस्मत के लोगों को दे रखा है, वो तो हमने उन्हें आजमाइश में डालने के लिए दी है, और तेरे रब का दिया हुआ रिज़क ए हलाल हाय बेहतर और पैंदातर (अधिक स्थायी) है +[20:132] अपने एहल ओ अयाल (आपके परिवार के सदस्य) को नमाज की बात करो और खुद भी इसके पाबंद रहो, हम तुमसे कोई रिज्क नहीं चाहते, रिज्क तो हम ही तुम्हें दे रहे हैं और अंजाम की भलाई तक्वा हाय के लिए है +[20:133] वो कहते हैं कि ये शक्स अपने रब की तरफ से कोई निशानी (मोजाज़ा) क्यों नहीं लाता? और क्या इनके पास अगले सहीफों की तमाम तालीम का बयान ए वजह नहीं आ गया +[20:134] अगर हम उसके आने से पहले इनको किसी अज़ाब से हलाक कर देते तो फिर यही लोग कहते के ऐ हमारे परवरदिगार, तू नहीं हमारे पास कोई रसूल क्यों ना भेजा के ज़लील ओ रुसवा होने से पहले ही हम तेरी आयत की जोड़ी इख्तियार कर लेते हैं +[20:135] (ऐ मुहम्मद) इनसे कहो, हर एक अंजाम ए कार के इंतजार में है, पास अब मुंतजिर रहो, अनकरीब तुम्हें मालूम हो जाएगा के कौन सीधी राह चलने वाले हैं और कौन हिदायत-यफ्ता (सही मार्गदर्शन) हैं + +Surah 21: Al-Anbiya' (The Prophets) +---------------------------------------- +[21:1] करीब आ गया है लोगों के हिसाब का वक्त, और वो हैं के गफलत में मुंह मोड़े हुए हैं +[21:2] उनके पास जो ताज़ा हिदायत भी उनके रब की तरफ से आती है उसको बे-तकल्लुफ़ सुनते हैं और खेल में पड़े रहते हैं +[21:3] दिल उनके (दूसरी ही फिक्रों में) मुहाफिज हैं और जालिम आपस में सरगोशियां (कानाफूसी) करते हैं के "ये शक्स आखिर तुम जैसा एक बशर (इंसान) ही तो है, फिर क्या तुम आंखें देखते जादू के फांदों में फंस जाओगे?" +[21:4] रसूल ने कहा, मेरा रब हर उस बात को जानता है जो आसमान और ज़मीन में की जाए, वो सामी (सुनने वाला) और अलीम (जानने वाला) है +[21:5] वो कहते हैं "बलके ये परागंदा (असंगत) ख्वाब है, बलके ये इसका मन-ग़दथ है, बलके ये शक्स शायर है वरना ये लाए कोई निशानी जिस तरह पुराने जमाने के रसूल निशानियों के साथ भेज गए थे” +[21:6] हलांके इनसे पहले कोई बस्ती भी, जिसने हमें हलाक किया, ईमान ना लाई, अब क्या ये ईमान लाएंगे +[21:7] और (ऐय) मुहम्मद), तुमसे पहले भी हमने इंसानो ही को रसूल बना कर भेजा था जिनपर हम वही (रहस्योद्घाटन) किया करते थे, तुम लोग अगर इल्म नहीं रखते तो एहले किताब से पूछ लो +[21:8] उन रसूलों को हमने कोई ऐसा जिस्म नहीं दिया था के वो खाते ना हो, और ना वो सदा (हमेशा) जीने वाले थे +[21:9] फिर देखलो के आखिर ए कार हमने उनके साथ अपने वादे पूरे किए, और उन्होंने और जिस को हमने चाहा बचा लिया, और हद से गुजर जाने वालों को हलाक कर दिया +[21:10] लोगन, हमने तुम्हारी तरफ एक ऐसी किताब भेजी है जिसमें तुम्हारा ही ज़िक्र है, क्या तुम समझते नहीं हो +[21:11] कितनी ही जालिम बस्तियाँ हैं जिनको हमने पीस कर रख दिया और उनके बाद दूसरी किसी क़ौम को उठाया +[21:12] जब उनको हमारा अज़ाब महसूस हुआ तो लागे वहाँ से भागें +[21:13] (कहा गया) "भागो नहीं, जाओ अपने उन्हीं घरों में और ऐश के समानों में जिनके अंदर तुम चैन कर रहे थे, शायद के तुमसे पूछेंगे" +[21:14] कहने लगे "हाय हमारी कमबख्त, बेशक हम ख़तावर थे" +[21:15] और वो यहीं पुकारते रहें यहां तक ​​के हमने उनको खलियान (काटा हुआ खेत) करदिया, जिंदगी का एक शरारा तक उनमें ना रहा (जीवन की कोई चिंगारी नहीं छोड़ना) +[21:16] हमने आसमान और जमीन को और जो कुछ भी इनमें है कुछ खेल के तौर पर नहीं बनाया है +[21:17] अगर हम कोई खिलोना बनाना चाहते हैं और बस यहीं कुछ हमें करना होता है तो अपने ही पास से कर लेते हैं +[21:18] मगर हम तो बातिल पर हक की चोट लगाते हैं जो उसका सारा तोड़ देती है और वो देखता-देखता मिट जाता है, और तुम्हारे लिए तभी। है उन बातों की वजह से जो तुम बनते हो +[21:19] ज़मीन और आसमान में जो मख़लूक़ भी है अल्लाह की है और जो (फ़रिश्ते) उसके पास हैं वो ना अपने आप को बड़ा समझ कर उसकी बंदगी से सरताबी करते हैं और ना मालूल (थके हुए/थके) होते हैं +[21:20] शब-ओ-रोज़ उसकी तस्बीह करते रहते हैं, दम नहीं लेते +[21:21] क्या इन लोगों के बने हुए अर्ज़ी खुदा ऐसे हैं के (बे-जान को जान बख्श कर) उठा खड़ा करते हैं +[21:22] अगर आसमान ओ ज़मीन में एक अल्लाह के सिवा दूसरे खुदा भी होते तो (ज़मीन और आसमान) दोनों का निज़ाम बिगड़ जाता। पास पाक है अल्लाह रब्बुल अर्श उन बातों से जो ये लोग बना रहे हैं +[21:23] वो अपने कामों के लिए (किसी के आगे) जवाब-दे नहीं है और सब जवाब-दे हैं +[21:24] क्या उसे छोड़ कर इन्हों ने दूसरे खुदा बना लिए हैं? (ऐ मुहम्मद) इनसे कहो के "लाओ अपनी दलील, ये किताब भी मौजूद है जिसमें मेरे दौर के लोगों के लिए हिदायत है और वो किताबें भी मौजूद हैं जिनमें मुझसे पहले लोगों के लिए हिदायत थी" मगर उन में से अक्सर लोग हकीकत से बेखबर हैं, इस लिए मुहं मोड़े हुए हैं +[21:25] हमने तुमसे पहले जो रसूल भी भेजा है उसको यहीं कहा है कि मेरे सिवा कोई खुदा नहीं है, पास तुम लोग मेरी ही बंदगी करो +[21:26] ये कहते हैं "रहमान औलाद रखता है" सुभानअल्लाह, वो तो बंदे हैं जिन्हे इज्जत दी गई है +[21:27] उसके हुजूर बढ़ कर नहीं बोलते और बस उसके हुकुम पर अमल करते हैं +[21:28] जो कुछ उनके सामने है उसे भी वो जानता है और जो कुछ उनसे ओझल है उसे भी वो खबर है, वो किसी की सिफरिश नहीं करता बाजुज उसके जिसको हक़ में सिफ़रिश सुनने पर अल्लाह रज़ी हो, और वो उसके ख़ौफ़ से डरे रहते हैं +[21:29] और जो उनमें से कोई कह दे कि अल्लाह के सिवा मैं भी एक खुदा हूँ, तो उसे हम जहन्नुम की सज़ा दें, हमारे हाँ ज़ालिमों का यही बदला है +[21:30] क्या ये लोग जिन्हों ने (नबी की बात मन्ने से) इंकार करदिया है गौर नहीं करते के ये सब आसमान और जमीन बहम मिले हुए थे, फिर हमने इन्हें जुदा किया, और पानी से हर जिंदा चीज पैदा की, क्या वो (हमारी इस खल्लकी को) नहीं मानते +[21:31] और हमने जमीन में पहाड़ जमा दिए ता-के वो उन्हें लेकर ढुलक ना जाए, और इसमें खुशियां रखें बना दी, शायद के लोग अपना रास्ता मालूम करें +[21:32] और हमने आसमान को एक महफूज छत बना दिया, मगर ये हैं के इसकी निशानियों की तरफ तवाज्जु ही नहीं करते +[21:33] और वो अल्लाह ही है जिसने रात और दिन बनाए और सूरज और चांद को पैदा किया, सब एक एक फलक में तैर रहे हैं +[21:34] और (ऐ मुहम्मद), हमेशा (अनंत काल) तो हमने तुमसे पहले भी कोई इंसान के लिए नहीं रखा है अगर तुम मर गए तो क्या ये लोग हमेशा जीतते रहेंगे +[21:35] हर जानदार को मौत का मजा चखना है, और हम अच्छे और बुरे हालात में डाल कर तुम सबकी आजमाइश कर रहे हैं, आखिर-ए-कार तुम्हें हमारी ही तरफ पलटना है +[21:36] ये मुनकिरीन ए हक जाब तुम्हें देखते हैं तो तुम्हारा मजाक बना लेते हैं। कहते हैं “क्या ये है वो शक्स जो तुम्हारे खुदाओं का ज़िक्र किया करता है?” और इनका अपना हाल ये है के रहमान के ज़िक्र से मुनकिर हैं +[21:37] इंसान जल्दी बाज़ मख़लूक है, अभी मैं तुमको अपनी निशानियां दिखाये देता हूं, जल्दी ना मचाओ +[21:38] ये लोग कहते हैं "आखिर ये धमाकेदार पूरी कब होगी अगर तुम सच्चे हो" +[21:39] काफिरों को उस वक्त का कुछ इलम होता जब ये ना अपने मुंह आग से बचा सकेंगे ना अपनी पीठ, और ना इनको कहीं से मदद मांगेगी +[21:40] वो बला (तबाही) अचानक आएगी और इन्हें इस तरह यक्लाख्त (अचानक) दबोच लेगी के ये ना उसको दफा कर पाएंगे और ना इनको लम्हा भर मोहलत ही मिल जाएगी +[21:41] मजाक तुमसे पहले भी रसूलों का उदय जा चूका है, मगर उनका मजाक उड़ाने वाली उसी चीज़ के फेर में आ कर रहे जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे +[21:42] (ऐ मुहम्मद), इनसे कहो, "कौन है जो रात को या दिन को तुम्हें रहमान से बचा सकता हो?" मगर ये अपने रब की हिदायत से मुह मोड़ रहे हैं +[21:43] क्या ये कुछ ऐसे खुदा रखते हैं जो हमारे मुकाबले में इनकी हिमायत करें? वो ना तो खुद अपनी मदद कर सकते हैं और ना हमारी ही ताइद उनको हासिल है +[21:44] असल बात ये है कि लोगों को और इनके आबा ओ अजदाद (पूर्वजों) को हम जिंदगी का सार ओ सामान दिए चले गए यहां तक ​​के इनको दिन लग गए (जब तक कि अवधि बहुत लंबी नहीं हो गई) उन्हें)। मगर क्या इन्हें नज़र नहीं आता के हम ज़मीन को मुख़्तलिफ़ सिम्तों से घटाये चले आ रहे हैं? फिर क्या ये गालिब आ जायेंगे +[21:45] इनसे कहदो के "मैं तो वही (रहस्योद्घाटन) कि बिना पर तुम्हें मुतनब्बे (चेतावनी) कर रहा हूँ"। मगर बाहर पुकार को नहीं सुना जाता जबके उन्हें खबरदार किया जाए +[21:46] और अगर तेरे रब का अजब ज़रा सा इन्हें छू जाए तो अभी गाल उठें के हाए हमारी कम्बख्त, बेशक हम ख़तावर थे +[21:47] क़यामत के रोज़ हम ठीक ठीक तोलें वे तराजू रख देंगे, फिर किसी शक्स पर ज़रा बराबर ज़ुल्म न होगा। जिसका राई (सरसों) के दाने के बराबर भी कुछ किया धरा होगा वो हम सामने ले आएंगे और हिसाब लगाने के लिए हम काफी हैं +[21:48] पहले हम मूसा और हारून को फुरकान (मानदंड) और रोशनी और "ज़िक्र" अता कर चुके हैं उन मुत्तक़ी लोगों की भलाई के लिए +[21:49] जो बे-देखे (बिगैर देखे) अपने रब से डरें और जिनका (हिसाब की) हमें घड़ी का खटका लगा हुआ है +[21:50] और अब ये ब-बरकत "ज़िक्र" हमने (तुम्हारे लिए) नाज़िल किया है फिर क्या तुम इसको क़बूल करने से इनकारी हो +[21:51] उसे भी पहले हमने इब्राहिम को उसकी होश-मंदी बख्शी थी और हम उसको खूब जानते थे +[21:52] याद करो वो मौका के उसने अपने बाप और अपनी क़ौम से कहा था के "ये मूरतें (चित्र) कैसी हैं जिनके तुमलोग गिरविदा (समर्पित) हो" रहे हो?” +[21:53] उनको ने जवाब दिया "हमने अपने बाप दादा को इनकी इबादत करते पाया है" +[21:54] उसने कहा "तुम भी गुमराह हो और तुम्हारे बाप दादा भी सारे गुमराह में पड़े हुए थे?" +[21:55] उनहों ने कहा "क्या तू हमारे सामने अपना असली ख्यालात पेश कर रहा है या मज़ाक करता है?" +[21:56] उसने जवाब दिया "नहीं, बलके फिल वही तुम्हारा रब वही है जो ज़मीन और आसमान का रब और उनका भुगतान करने वाला है, इसपर मैं तुम्हारे सामने गवाही देता हूं +[21:57] और खुदा की कसम मैं तुम्हारी गैर मौजुदगी में जरूर तुम्हारे बटन (मूर्तियों/मूर्तियों) की खबर लूंगा'' +[21:58] चुनांचे उसने उनको टुकड़े-टुकड़े कर दिया और सिर्फ उनके बदले को छोड़ दिया ता-के शायद वो इसकी तरफ रूजू करें +[21:59] उन्हें आकार बुथों[मूर्तियों] का ये हाल देखा तो) कहने लगे ''हमारे खुदाओं का'' हाँ हाल किसने करदिया? बड़ा ही कोई जालिम था वो” +[21:60] (बाज़ लोग) बोले “हमने एक नवाज़वान को इनका जिक्र करते सुना था जिसका नाम इब्राहिम है” +[21:61] उनहों ने कहा “तो पकड़ लाओ उसे सबके सामने ता-के लोग देख लें (उसकी कैसी खबर ली जाती है)” +[21:62] (इब्राहिम के आने पर) उनहों ने पूछा "क्यूं इब्राहिम, तू नहीं हमारे खुदाओं के साथ ये हरकत की है +[21:63] उसने जवाब दिया "बल्के ये सब कुछ इनके इस सरदार ने किया है, इनसे पूछ लो अगर ये बोलते हो" +[21:64] ये सुनकर वो लोग अपने जमीर की तरफ पलटे और (अपने दिलों में) कहने लगे "वाकई तुम खुद ही जालिम हो" +[21:65] मगर फिर उनकी गणित पलट गई (दिमाग विकृत हो गया) और बोले "तू जानता है के ये बोलते नहीं हैं" +[21:66] इब्राहिम ने कहा "फिर क्या तुम अल्लाह को छोड़ कर उन चीज़ को पूज रहे हो जो ना तुम्हें नफा पहन कर कादिर हैं ना नुक्सान पर +[21:67] टफ (फाई) है तुमपर और तुम्हारे इन माबूदोन पर जिनके तुम अल्लाह को छोड़ कर पूजा कर रहे हो, क्या तुम कुछ भी अक्ल नहीं रखते?” +[21:68] उनहों ने कहा "जला डालो इसको और हिमायत करो अपने खुदाओं की अगर तुम्हें कुछ करना है" +[21:69] हमने कहा "ऐ आग, ठंडी हो जा और सलामती बन जा इब्राहिम पर" +[21:70] वो चाहते थे के इब्राहिम के साथ बुराइयां करें मगर हमने उनको बुरी तरह नाकाम करदिया +[21:71] और हमने उसे और लुट को बचा कर सर-जमीन की तरफ निकल ले गए जिसमें हमने दुनिया वालों के लिए बरकतें रखी हैं +[21:72] और हमने उसे इशाक अता किया और याकूब उसपर मजीद, और हर एक को सालेह (नेक) बनाया +[21:73] और हमने उनको इमाम बना दिया जो हमारे हुकुम से रहनुमाई करते थे और हमने उन्हें वही (रहस्योद्घाटन) के ज़रिये नीक कामोन की और नमाज़ क़याम करने की और ज़कात देने की हिदायत की, और वो हमारे इबादत गुज़ार थे +[21:74] और लूट को हमने हुकुम और इल्म बख्शा और हमें बस्ती से बचाकर निकाल दिया जो बदकारियां करती थी। दर हकीकत वो बड़ी ही बुरी, फासीक़ क़ौम थी +[21:75] और लुट को हमने अपनी रहमत में दाख़िल किया, वो साले लोगों में से था +[21:76] और यही नियामत हमने नूह को दी, याद करो जबके सब से पहले उसने हमें पुकारा था, हमने उसकी दुआ कबूल की और उसके घर वालों को करब-ए-अज़ीम (बड़ी विपत्ति) से नजात दी +[21:77] और उस क़ौम के मुक़ाबले में उसकी मदद की जिसने हमारी आयत को झूठला दिया था। वो बदे बुरे लोग थे, हमने उन सबको डराया (डूब दिया) करदिया +[21:78] और इसी नियामत से हमने दाऊद और सुलेमान को सरफराज किया। याद करो वो मौका जबके वो दोनो एक खेत (खेत) के मुक़द्दमे में फैसला कर रहे थे जिसमें रात के वक्त दूसरे लोगों की बकरियां (बकरियां) पतली हो गईं (रात को भटक ​​गईं), और हम उनकी अदालत खुद देख रहे थे +[21:79] हमें वक्त हमें सही फ़ैसला सुलेमान को समझा दिया, हलांके हुकुम और इल्म हमें दोनों ने ही अता किया था। दाऊद के साथ हमने पहाड़ों और परिंदों को मुसक्कर कर दिया था जो तस्बीह करते थे, इस फेल (काम) के करने वाले हम ही थे +[21:80] और हमने उसको तुम्हारे फ़ैयदे के लिए ज़ीरा (कवच के कोट) बनाने की सनत (शिल्प) सिखा दी थी, ता-के तुमको एक दूसरा कि मार से बचे, फिर क्या तुम शुक्र गुज़ार हो +[21:81] और सुलेमान के लिए हमने तेज़ हवा को मुस्कुरा कर दिया था जो उसके हुकुम से उस सर-ज़मीन की तरफ चलती थी जिसमें हमने बरकतें रखी हैं। हम हर चीज़ का इल्म रखने वाले थे +[21:82] और शयातीन में से हमने ऐसे बहुतों (कई) को उसका तबे बना दिया था जो उसके लिए घोटे (गोताखोरी) लगाते थे और इसके सिवा दूसरे काम करते थे, सब के निगरान में हम ही थे +[21:83] और याही (होश-मंदी और हुकुम ओ इल्म की नियामत) हमने अय्यूब को दी थी। याद करो जबके उसने अपने रुब को पुकारा के "मुझे बीमारी लग गई है और तू अरहम उर रहीमीन (सब से बढ़कर रहम करने वाला) है।" +[21:84] हमने उसकी दुआ क़बूल की और जो तकलीफ इस्तेमाल की थी उसको दूर कर दिया, और सिर्फ उसके एहल-ओ-अयाल ही उसको नहीं दिए बल्कि उसके साथ उतने ही और भी दिए, अपनी खास रहमत के तौर पर, और इस तरह के ये एक सबक हो इबादत गुज़ारों केलिए +[21:85] और यही नियामत इस्माइल और इदरीस (हनोक) और धुल-किफ्ल (इसैया) को दी, के ये सब साबिर लोग (दृढ़ता का अभ्यास) थे +[21:86] और उनको हमने अपनी रहमत में दखल किया के वो सालिहों (धर्मी लोगों) से कहा +[21:87] और मछली वाले (यूनुस) को भी हमने नवाजा, याद करो जबके वो बिगड कर चला गया था और समझा था के हम उसपर गिरफ़्तार न करेंगे। आख़िर को उसने तारिकियों (अंधेरे) में पुकारा "नहीं है कोई खुदा मगर तू, पाक है तेरी जात, बेशक मैंने कसूर किया" +[21:88] तब हमने उसकी दुआ क़बूल की और ग़म से उसको नजात बख्शी, और इसी तरह हम मोमिनो को बचा लिया करते हैं +[21:89] और ज़कारिया को, जबके उसने अपने रब को पुकारा के "ऐ परवरदिगार, मुझे अकेला ना छोड़, और बेहतर वारिस तो तू ही है" +[21:90] पास हमने उसकी दुआ क़बूल की और उसे यहया अता किया और उसकी बीवी को उसके लिए दुरूस्त करदिया, ये लोग नेकी के कामोन में दौड़-धूप करते थे और हमें रगड़ते थे (प्यार से) और खौफ के साथ पुकारते थे, और हमारे आगे झुके हुए थे +[21:91] और वह खातून जिसने अपनी इस्मत (शुद्धता) की हिफाजत की थी, हमने उसके अंदर अपनी रूह से फूंका और उसके बेटे को दुनिया भर के लिए निशानी बना दिया +[21:92] ये तुम्हारी उम्मत हकीकत में एक ही उम्मत है और मैं तुम्हारा रब हूं, पास तुम मेरी इबादत करो +[21:93] मगर (ये लोगों की करस्तानी है के) इन्हों ने आपस में दीन को टुकड़े-टुकड़े कर डाला, सबको हमारी तरफ पलटना है +[21:94] फिर जो नई अमल करेगा, इस हाल में के वो मोमिन हो, तो उसके काम की ना-कादरी ना होगी, और उसे हम लिख रहे हैं +[21:95] और मुमकिन नहीं है कि जिस बस्ती को हमने हलाक कर दिया हो वो फिर पलट सके +[21:96] यहां तक ​​के जब याजूज माजूज खोल दिए जाएंगे और हर बुलंदी से वो निकल पड़ेंगे +[21:97] और वादा बार हक के पूरे होने का वक्त करीब आ लगेगा तो यकायक उन लोगों के दीधे फटे के फटे रह जाएंगे (निश्चित रूप से डरावनी दृष्टि से घूरते रहेंगे), जिन्हों ने कुफ्र किया था। कहेंगे “हाय हमारी चुदाई, हम इस चीज़ की तरफ से गफ़लत में पड़े हुए थे, बलके हम ख़तरा थे।” +[21:98] बेशक तुम और तुम्हारे वो माबूद जिन्हें तुम पूजते हो, जहन्नुम का इंधन (ईंधन) हैं, वहीं तुमको जाना है +[21:99] अगर ये वक्त खुदा होते तो वहां ना जाते, अब सबको हमेशा उसी में रहना है।" +[21:100] वहां वो फुनकारे मारेंगे (कराहना/दहाड़ना) और हाल ये होगा के उसमें कान पड़ी आवाज ना सुनायी देगी +[21:101] रहे वो लोग जिनके लिए हमारी तरफ से भलाई का पहला ही फैसला हो चूका होगा, तो वो यकीनन उसे दूर रखके जाएंगे +[21:102] उसकी सरसराहट तक ना सुनेंगे और वो हमेशा हमेशा अपने मन की बाती चीज़ों के दरमियान रहेंगे +[21:103] वो इंतिहाई घबराहट का वक्त उनको जरा परेशान ना करेगा, और मलाइका बढ़ कर उनको हाथ हाथ लेंगे के "ये तुम्हारा वही दिन है" जिसका तुमसे वादा किया जाता था" +[21:104] वो दिन जबके आसमान को हम यूं लपेट कर रख देंगे जैसे तुममें आवारा लपेट दिए जाते हैं (कागज के पत्तों को एक लिखित स्क्रॉल में लपेटा जाता है) जिस तरह पहले हमने तकलीक की इब्तिदा की थी उसी तरह हम फिर उसका इरादा (उत्पन्न) करेंगे। येह एक वादा है हमारा ज़िम्मा, और ये काम हमें बाहर-हाल करना है +[21:105] और ज़बूर में हम हिदायत के बाद ये लिख चुके हैं के ज़मीन के वारिस हमारे नए बंदे होंगे +[21:106] इस में एक बड़ी खबर है इबादत गुजर लोगों के लिए +[21:107] (ऐ मुहम्मद), हमने जो तुमको भेजा है तो ये दर-असल दुनिया वालों के हक में हमारी रहमत है +[21:108] इनसे कहो, "मेरे पास जो वही आती है वो ये है के तुम्हारा खुदा सिर्फ एक खुदा है, फिर क्या तुम सर-ए-इतात झुकते हो?" +[21:109] अगर वो मुंह फिरें तो कहदो "मैंने अलल-ऐलान (खुले तौर पर) तुमको खबरदार कर दिया है। अब ये मैं नहीं जानता के वो चीज जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है करीब है या दूर +[21:110] अल्लाह वो बातें भी जानता है जो बा-आवाज बुलंद कहती है और वो भी जो तुम छुपा कर करते हो +[21:111] मैं तो ये समझता हूं के शायद ये (देर/देरी) तुम्हारे लिए एक फिट है और तुम्हें एक वक्त और खास तक के लिए मजा करने का मौका दिया जा रहा है” +[21:112] (आखि-ए-कार) रसूल ने कहा “ऐ मेरे रब, हक के साथ फैसला करदे, और लोग, तुम जो बातें बनाते हो उनके मुकाबले में हमारा रुब-ए-रहमान ही हमारे लिए मदद का सहारा है।” + +Surah 22: Al-Hajj (The Pilgrimage) +---------------------------------------- +[22:1] लोगन, अपने रब के गजब से बचो, हकीकत ये है के कयामत का ज़लज़ला बड़ी (हौलनाक) चीज़ है +[22:2] जिस रोज़ तुम उसे देखोगे, हाल ये होगा के हर दूध पिलाने वाली अपने दूध पीते बच्चों से गाफिल हो जाएगी, हर हामिला (गर्भवती) का हमाल गिर जाएगा, और लोग तुमको मदहोश नज़र आएंगे, हालंके वो नशे में ना होंगे, बलके अल्लाह का अज़ाब ही कुछ ऐसा सच होगा +[22:3] बाज़ लोग ऐसे हैं जो इल्म के बिना अल्लाह के बारे में बहस करते हुए हैं और हर शैतान ए सरकश की जोड़ी बनाने लगते हैं +[22:4] हालंके उसके तो नसीब ही में ये लिखा है के जो उसको दोस्त बनाएगा उसे वो गुमराह करके छोड़ेगा और अज़ाब ए जहन्नुम का रास्ता दिखाएगा +[22:5] लोगन, अगर तुम जिंदगी बाद ए मौत के बारे में कुछ शक है तो तुम्हें मालूम हो के हमने तुमको मिट्टी से पेदा किया है, फिर नुत्फ़े से, फिर खून के कपड़े से, फिर गोश्त की बोतल से जो शकल वाली भी होती है और शकल भी हो (ये हम इस बारे में बता रहे हैं) ता-के तुमपर हकीकत वाज़ेह करदें, हम जिस को चाहते हैं एक खास वक्त तक रेहमो (गर्भ) में रखते हैं, फिर तुमको एक बच्चे की सूरत में निकल लाते हैं, (फिर तुम्हें परवरिश करते हैं) ता-के तुम अपनी पूरी जवानी को पाहुंचो और तुम में से कोई पहले हाय वापस बुला लिया जाता है और कोई बेहतरीन उमर की तरफ फेर दिया जाता है, ता-के सब कुछ जाने के बाद फिर कुछ ना जाने। और तुम देखते हो के ज़मीन सुखी पड़ी है, फिर जहां हमने उसपर मेह बरसाया के यकायक वो फबक उठी और फूल गई और उसने हर क़िसम की ख़ुश मंज़र नबाअत (वनस्पति) उगलनी शुरी करदी +[22:6] ये सब कुछ इस वजह से है कि अल्लाह ही हक़ है, और वो मुर्दों को ज़िंदा करता है, और वो हर चीज़ पर कादिर है +[22:7] और ये (इस बात की दलील है) के क़यामत की घड़ी आकार रहेगी, इस में किसी शक्क की गुंजाईश नहीं, और अल्लाह जरूर उन लोगों को उठाएगा जो कब्रों में जा चुके हैं +[22:8] बाज़ लोग ऐसे हैं जो किसी इल्म और हिदायत और रोशनी बख्शने वाली किताब के बिना, गार्डन अकडे हुए +[22:9] खुदा के बारे में झगड़े हैं, ता-के लोगों को राह ए खुदा से भटका दें। ऐसे शक्स के लिए दुनिया में रुसवाई है और कयामत के रोज़ उसको हम आग के अज़ाब का मजा चखाएंगे +[22:10] ये है तेरा वो मुस्तकबिल (भविष्य) जो तेरे अपने हाथों ने तेरे लिए तैयार किया है, वरना अल्लाह अपने बंदों पर ज़ुल्म करने वाला नहीं है +[22:11] और लोगों में कोई ऐसा है जो किनारे पर रह कर अल्लाह की बंदगी करता है, अगर फ़ैयदा हुआ तो मुतमइन होगया और जो कोई मुसीबत आ गई तो उल्टा फिर गया। उसकी दुनिया भी गई और आखिरी भी, ये है सारा खसरा (नुकसान/नुक्सान) +[22:12] फिर वो अल्लाह को छोड़ कर उनको पुकारता है जो ना उसको नुक्सान पहुंचा सकता है ना फ़ायदा, ये है गुमराही की इंतेहा +[22:13] वो उनको पुकारता है जिनका नुक्सान उनके नाफ़े (फ़ैयदा) से करीब तार है, बख्तरीन है हमारा मौला (अभिभावक) और बद्तरीन है उसका रफीक (साथी) +[22:14] (इस्के बराक) अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए और जिन्न ने नेक अमल किया, यकीनन ऐसी जन्नत में दखल करेगा जिनका कोई मतलब नहीं रही होंगी। अल्लाह करता है जो कुछ चाहता है +[22:15] जो शक्स ये गुमान रखता हो के अल्लाह दुनिया और आख़िरत में उसकी कोई मदद न करेगा उसे चाहिए के एक रस्सी (रस्सी) के ज़रीए आसमान तक पहुंच कर शिगाफ़ लगाए (इसमें एक छेद कर दो), फिर देख ले के आया उसकी तदबीर किसी ऐसी चीज़ को रद्द कर सकती है जो उसको नागावार है +[22:16] ऐसी ही खुली खुली बातों के साथ हमने कुरान को नाज़िल किया है, और हिदायत अल्लाह जिसे चाहता है देता है +[22:17] जो लोग ईमान लाए, और जो यहुदी हुए, और सबाई (सबाएंस), और नसारा, और माजूस, और जिन लोगों ने शिर्क किया, उन सब के दरमियान अल्लाह कयामत के रोज फैसला करेगा। हर चीज़ अल्लाह की नज़र में है +[22:18] क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह के आगे सर-ब-सुजूद है वो सब जो आसमान में हैं और जो ज़मीन में हैं, सूरज और चाँद और तारे और पहाड़ और दरख्त और जानवर और बहुत से इंसान और बहुत से वो लोग भी जो अज़ाब के मुस्तहिक हो चुके हैं? और जिसे अल्लाह ज़लील-ओ-ख़्वार करदे उसे फिर कोई इज़्ज़त देने वाला नहीं है। अल्लाह करता है जो कुछ चाहता है +[22:19] ये दो फरीक हैं जिनके दरमियान अपने रब के मामले का झगड़ा है। उनमें से वो लोग जिन्हों ने कुफ्र किया है उनके लिए आग के लिबास काटे जा चुके हैं, उनके सरों (सिरों) पर खौलता (उबलता) हुआ पानी डाला जाएगा +[22:20] जिसकी उनकी खालें (खालें) ही नहीं पित के अंदर तक गल (पिघल) जाएंगी +[22:21] और उनकी खबर लेने के लिए लोहे (लोहे) के गुर्ज़ (गदाएं) होंगे +[22:22] जब कभी वो घबरा कर जहन्नुम से निकलेंगे की कोशिश करेंगे फिर उसमें ढकेल दिए जाएंगे के चक्खो अब जलने की सजा का मजा +[22:23] (दूसरी तरफ) जो लोग ईमान लाए और जिन्हों नेइक अमल किए उनको अल्लाह ऐसी जन्नत में दखल करेगा जिनके बारे में खास बातें होंगी, वहां वो जल्द ही के साथ रहेंगे और उनके लिबास रेशम के होंगे +[22:24] उनको पाकीजा बात कबूल करने की हिदायत बख्शी गई और उन्हें खुदे सतुदा सिफ़्फ़त (सभी प्रशंसनीय) का रास्ता दिखाया गया +[22:25] जिन लोगों ने कुफ़्र किया और जो (आज) अल्लाह के रास्ते से रोक रहे हैं और उस मस्जिद ए हरम की ज़ियारत में माने हैं जिसे हमने सब लोगों के लिए बनाया है, जिसमें मुकामी बशिंदों और बहार से आने वालों के हुकूक बराबर हैं, (उनकी रवीश) यकीनन सज़ा की मुस्तहक़ है), इस (मस्जिद ए हरम) में जो भी रस्ती से हटकर (धार्मिकता से भटकना) ज़ुल्म का तरीक़ा इख्तियार करेगा उसे हम दर्दनक अज़ाब का मजा दिखाएंगे +[22:26] याद करो वो वक्त जब हमने इब्राहीम के लिए इस घर (खाने काबा) की जगह तजवीज की थी (इस हिदायत के साथ) के “मेरे साथ किसी चीज़ को शरीक न करो, और मेरे घर को तवाफ़ करने वालों और क़याम वा रुकु व सुजूद करने वालों के लिए पाक रखो +[22:27] और लोगों को हज के लिए इज़ान ए आम (उद्घोषणा) दे दो के वो तुम्हारे पास हर दर दराज़ मुकाम से पैदल और ऊंटों (ऊंटों) पर सवार आएं +[22:28] ता-के वो फ़ैयदे देखें जो यहां उनके लिए रक्खे गए हैं, और चांद मुकर्रर दिनों में उन जानवरों पर अल्लाह का नाम लें जो उन्होंने उन्हें बख्शे हैं, खुद भी खाएं और तंग-दस्त मोहताज को भी दें +[22:29] फिर अपना मेल-कुचेल (गंदगी) दरवाज़े करें और अपनी नज़रें (मन्नतें) पूरी करें, और हमारे क़दीम (प्राचीन) घर का तवाफ़ करें +[22:30] ये था (तामीर ए काबा का मकसद) और जो कोई अल्लाह की क़याम करदा हुरमतों (पवित्रता) का एहतमाम करे तो ये उसके रब के नाज़दीक खुद उसी के लिए बेहतर है। और तुम्हारे लिए मवेशी (मवेशी) जानवर हलाल किए गए, मा सिवा उन चीज़ों के जो तुम्हें बतायी जा चुकी हैं। मूर्तियों की गंदगी से बचो, झूठी बातों से परहेज़ करो +[22:31] यकसु होकर अल्लाह के बंदे बनो, उसके साथ किसी को शरीक ना करो और जो कोई अल्लाह के साथ शिर्क करे तो गोया वो आसमां से गिर गया, अब या तो उसे परिंदे उचक ले जाएंगे या हवा उसको ऐसी जगह ले जा कर फेंक देगी जहां उसके चिल्लाए उध (टुकड़ों में बिखर जाएगा) जाएंगे +[22:32] ये है असल मामला (इसे समझ लो), और जो अल्लाह के मुकर्रर करदा शायर (पवित्रता) का एहतराम करे तो ये दिलों के तकवा से है +[22:33] तुम्हें एक वक्त ए मुकर्रर तक उन (हादी के जानवरों) से फैयदा उठाने का हक़ है फिर उन (के कुर्बान करने) की जगह उसी क़दीम घर के पास है +[22:34] हर उम्मत के लिए हमने कुर्बानी का एक कायदा मुकर्रर करदिया है ता-के (उस उम्मत के लोग) उन जानवरों पर अल्लाह का नाम लें जो हमें बख्शे हैं (मुखतलिफ़ तरीक़ों के अंदर) मकसद एक ही है)। पास तुम्हारा खुदा एक ही खुदा ही है और उसी के तुम मुती ए फरमान बनो। और ऐ नबी, बशारत दे दे अजीजाना (विनम्र) रवीश इख्तियार करने वालों को +[22:35] जिनका हाल ये है कि अल्लाह का जिक्र सुनते हैं तो उनके दिल कानप उठते हैं, जो मुसीबत भी अनपर आती है उसपर सब्र करते हैं, नमाज कायम करते हैं, और जो कुछ रिज्क हमने उनको दिया है उसमें से खर्च करते हैं +[22:36] और (कुर्बानी के) ऊंटों (ऊंटों) को हमने तुम्हारे लिए शहर-अल्लाह (अल्लाह के प्रतीक) में शामिल किया है, तुम्हारे लिए उन्हें बुलाया है। पस उन्हें खड़ा करके अनपर अल्लाह का नाम लो, और जब (कुर्बानी के बाद) उनकी पीठ जमीन पर टिक जाए तो उनसे खुद भी खाओ और उनको भी खिलाओ जो कनात किए बैठे हैं (संतुष्ट लोग) और उनको भी जो अपनी हाजत पेश करें। जानवरों को हमने इस तरह तुम्हारे लिए मुस्कुरा दिया है ता-के तुम शुक्रिया अदा करो +[22:37] ना उनके गोश्त अल्लाह को पहचानते हैं ना खून, मगर उसे तुम्हारा तक़वा पहचानता है। उसने तुम्हारे लिए इस तरह मुसक्कर किया है ता-के उसकी बख्शी हुई हिदायत पर तुम उसकी तकबीर करो। और (ऐ नबी), बशारत देदो नीकुकर लोगों को +[22:38] यकीनन अल्लाह मुदाफ़ियात (बचाव) करता है उन लोगों की तरफ से जो ईमान लाए हैं। यकीनन अल्लाह कोई खैन (विश्वासघाती) काफिर ए नियामत को पसंद नहीं करता +[22:39] इजाज़त दे दी गई उन लोगों को जिनके खिलाफ जंग की जा रही है, क्योंकि वो मजलूम हैं, और अल्लाह यकीनन उनकी मदद पर कादिर है +[22:40] ये वो लोग हैं जो अपने घर से ना-हक़ निकल गए सिर्फ इस कसूर पर के वो कहते थे "हमारा रब अल्लाह है"। अगर अल्लाह लोगों को एक दूसरे के ज़रिये दफा न करता रहे तो खानकाहें (मठ), और गिरजा (चर्च) और मबाद (आराधनालय) और मस्जिदें, जिन में अल्लाह का कसरत से नाम लिया जाता है, सब मिसमार (ध्वस्त) कर डाली जायेंगी। अल्लाह जरूर उन लोगों की मदद करेगा जो उसकी मदद करेंगे। अल्लाह बड़ा ताक़तवार और ज़बरदस्त है +[22:41] ये वो लोग हैं जिनमें अगर हम ज़मीन में इक़्तेदार बख्शें तो वो नमाज़ क़याम करेंगे, ज़कात देंगे, मारूफ़ (भलाई) का हुकुम देंगे और मुनकर (बुराई) से मन करेंगे और तमाम मामले का अंजाम अल्लाह के हाथ में है +[22:42] (ऐ नबी), अगर वो तुम्हें झुठलाते हैं तो उनसे पहले क़ौम ए नूह और अद और समूद +[22:43] और क़ौम ए इब्राहीम और क़ौम ए लुट +[22:44] और एहले मद्यन भी झुटला चुके हैं और मूसा भी झुटलाये जा चुके है. उन सब मुनकिरेन को मैंने पहले मोहलत दी, फिर पकड़ लिया। अब देखलो के मेरी उकुबत (सजा) कैसी थी +[22:45] कितनी ही खतरनाक बस्तियां हैं जिनको हमने तबाह किया है और आज वो अपनी छतों (छतों) पर उल्टी पड़ी हैं, कितने ही कुवें (कुएं) बेकार और कितने ही क़सर (महल) खंडार बनी हुए हैं +[22:46] क्या ये लोग ज़मीन में चले फिर नहीं हैं के इनके दिल समझने वाले और इनके कान सनी वाले होते? हकीकत ये है के आँखें अँधी नहीं होती मगर वो दिल अँधे हो जाते हैं जो सीने में हैं +[22:47] ये लोग अज़ाब के लिए जल्दी मचा रहे हैं। अल्लाह हरगिज अपने वादे के खिलाफ न करेगा, मगर तेरे रब के हां का एक दिन तुम्हारे शुमार के हजार बरस के बराबर हुआ करता है +[22:48] कितनी ही बस्तियां हैं जो जालिम थी, मैंने उनो पहले मोहलत दी, फिर पकड़ लिया और सबको वापस तो मेरे पास ही आना है +[22:49] (ऐ मुहम्मद), कहदो के "लोगन, मैं तो तुम्हारे लिए सिर्फ वो शक्स हूं जो (बुरा वक्त आने से पहले) साफ साफ खबरदार करने वाला हूं +[22:50] फिर जो ईमान लाएंगे और नेक अमल करेंगे उनके लिए मगफिरत है और इज्जत की रोजी +[22:51] और जो हमारी आयत को नीचा दिखाने की कोशिश करेंगे वो दोज़ख के यार हैं +[22:52] और (ऐ मुहम्मद) तुमसे पहले हमने ना कोई रसूल ऐसा भेजा है ना नबी (जिसके साथ ये मामला ना पेश आया हो के) जब उसने तमन्ना की, शैतान उसकी तमन्ना में ख़लाल अंदाज़ हो गया है तारा जो कुछ भी शैतान खलाल अंदाज़ियां करता है अल्लाह उनको मिटा देता है और अपनी आयत को पुख्ता करता है। अल्लाह अलीम है और हकीम +[22:53] (वो इस लिए ऐसा होने देता है) ता-के शैतान की डाली हुई ख़राबी को फ़ितना बना दे उन लोगों के लिए जिनके दिलों को [निफ़क़ का (पाखंड)] रोग लगा हुआ है और जिनका दिल खोता है। हकीकत ये है के ये जालिम लोग इनाद (दुश्मनी) में बहुत दूर निकल गए हैं +[22:54] और इलम से बेहरमंद लोग जान लें के ये हक है तेरे रब की तरफ से और वो इसपर ईमान ले आएं और उनके दिल इसके आगे झुक जाएं। यकीनन अल्लाह ईमान लाने वालों को हमेशा सीधा रास्ता दिखा देता है +[22:55] इनकार करने वाले तो इसकी तरफ से शक्क ही में पड़े रहेंगे यहां तक ​​के या तो उन्पर कयामत की घड़ी अचानक आ जाए, या एक मनहूस दिन का अज़ाब नाज़िल हो जाए +[22:56] हमें रोज़ बादशाही अल्लाह की होगी और वो उनका दरमियान फ़ैसला कर देगा। जो ईमान रखने वाले और अमल ए सालेह करने वाले होंगे वो नियामत भारी जन्नत में जाएंगे +[22:57] और जिन्होन ने कुफ्र किया होगा और हमारी आयत को झुटलाया होगा उनके लिए रुस्वाकुन अज़ाब होगा +[22:58] और जिन लोगों ने अल्लाह की राह में हिजरत की, फिर क़त्ल कर दिए गए या मर गए, अल्लाह उनको अच्छा रिज्क देगा और यकीनन अल्लाह हाय बेहतरीन राज़िक है +[22:59] वो उनहें ऐसी जगह पहचानेगा जिसे वो खुश हो जायेंगे। बेशक अल्लाह अलीम (सभी जानने वाले) और हलीम (सबसे सहनशील) है +[22:60] ये तो है उनका हाल, और जो कोई बदला ले, वैसा ही जैसा उसका साथ दिया गया, और फिर उसपर ज़्यादा हो गया, अल्लाह उसकी मदद जरूर करेगा। अल्लाह माफ करें वाला और दरगुज़ार करने वाला है +[22:61] ये इस लिए के दिन और दिन से रात निकलने वाला अल्लाह ही है और वो सामी (सनी वाला/सबकुछ सुनता है) ओ बेसिर (देखने वाला/सबकुछ देखता है) है +[22:62] ये इसलिए के अल्लाह ही हक़ है और वो सब बातिल हैं जिन्हे अल्लाह को छोड़ कर ये लोग पुकारते हैं। और अल्लाह ही बालादस्त (सर्वोच्च) और बुज़ुर्ग (सर्वोच्च) है +[22:63] क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह आसमान से पानी बरसाता है और उसकी बदौलत ज़मीन सर-सब्ज़ हो जाती है? हकीकत ये है के वो लतीफ़ ओ खबीर है (हर बात से पूरी तरह अवगत) +[22:64] उसका है जो कुछ आसमान में है और जो कुछ ज़मीन में है। बेशाक वही गनी (सभी-पर्याप्त/सभी इच्छाओं से मुक्त) ओ हमीद (प्रशंसनीय) है +[22:65] क्या तुम देखते नहीं हो के उसने वो सब कुछ तुम्हारे लिए मुस्कुरा कर रखा है जो ज़मीन में है, और उसने कश्ती को क़ैद का पाबंद बनाया है के वो उसके हुकुम से समंदर में चलती है, और वही आसमान को इस तरह थामे हुए के उसके इज़ान के बिना वो ज़मीन पर नहीं गिर सकता? वाक़िया ये है के अल्लाह लोगों के हक में बड़ा शफीक (बहुत दयालु) और रहीम (दयालु) है +[22:66] वही है जिसने तुम्हें जिंदगी बख्शी है, वही तुमको मौत देता है और वहीं फिर तुमको जिंदा करेगा, सच ये है के इंसान बड़ा ही मुन्किर ए हक है +[22:67] हर उम्मत के लिए हमने एक तारीख-ए-इबादत मुकर्रर किया है जिसकी वो जोड़ी बनाती है, पास (ऐ मुहम्मद), वो इस मामले में तुमसे झगड़ा ना करें, तुम अपने रब की तरफ दावत दो, यकीनन तुम सीधे रास्ते पर हो +[22:68] और अगर वो तुमसे झगड़े तो कहदो के "जो कुछ तुम कर रहे हो अल्लाह को ख़ूब मालूम है +[22:69] अल्लाह क़यामत के रोज़ तुम्हारे दरमियान उन सब बातों का फैसला कर देगा जिन में तुम इख्तिलाफ करते रहोगे" +[22:70] क्या तुम नहीं जानते कि आसमां ओ ज़मीन की हर चीज़ अल्लाह के इलम में है? सब कुछ एक किताब में दर्ज है। अल्लाह केलिए ये कुछ भी मुश्किल नहीं है +[22:71] ये लोग अल्लाह को छोड़ कर उनकी इबादत कर रहे हैं जिनके लिए ना तो उसने कोई सनद (अधिकार) नाज़िल की है और ना ये खुद उनके बारे में कोई इलम रखते हैं। जालिमों के लिए कोई मददगार नहीं है +[22:72] और जब इनको हमारी साफ आयतें सुनायी जाती हैं तो तुम देखते हो के मुनकिरेन ए हक के चेहरे बिगाड़ने लगते हैं और ऐसा महसूस होता है के अभी वो उन लोगों पर टूट पड़ेंगे जो उन्हें हमारी आयतें सुनाते हैं। इनसे कहो "मैं बताऊँ तुम्हें के लिए ऐसी बढ़िया चीज़ क्या है? आग, अल्लाह ने उसका वादा उन लोगों के हक़ में कर रखा है जो क़बूल ए हक़ से इंकार करें, और वो बहुत ही बुरा ठिकाना है" +[22:73] लोगन, एक मिसाल दी जाती है, गौर से सुनो, जिन माबूदों को तुम खुदा को चोद कर पुकारते हो वो सब मिलकर एक मक्खी (उड़ना) भी चुकाना चाहते हैं तो नहीं कर सकते, अगर मक्खी उनसे कोई चीज छीन ले जाए तो वो उन्हें चूड़ा भी नहीं दे सकते। मदद चाहने वाले भी कमज़ार और जिनसे मदद चाही जाती है वो भी कमज़ार +[22:74] इन लोगों ने अल्लाह की कदर ही ना पहचानी जैसा के उसकी पहचान का हक़ है, वक़िया ये है के कुव्वत और इज़्ज़त वाला तो अल्लाह ही है +[22:75] हकीकत ये है के अल्लाह [अपने फरामिन की तरसिल के लिए (अपने फरमानों को बताने के लिए)] मलिका (फरिश्ते) में से भी पैगाम रसन मुंतखब (चुनें) करता है और इंसानों में भी। वो सामी (सनी वाला) और बेसिर (देखने वाला) है +[22:76] जो कुछ उनके सामने है उसे भी वो जानता है और जो कुछ उनसे ओझल (छिपा/पीछे) है उसे भी वो वाकिफ है, और सारे मामले उसकी तरफ रूजू होते हैं +[22:77] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, रुकू और सजदा करो, अपने रब की बंदगी करो, और कोई काम करो, शायद के तुमको फलाह नसीब हो +[22:78] अल्लाह की राह में जिहाद करो जैसा के जिहाद करने का हक है, उसने तुम्हें अपने काम के लिए चुन लिया है और दीन में तुमको कोई तंगगी नहीं रक्खी। क़याम हो जाओ अपने बाप इब्राहीम की मिल्लत पर। अल्लाह ने पहले भी तुम्हारा नाम "मुस्लिम" रखा था और वह (कुरान) में भी (तुम्हारा यही नाम है) ता-के रसूल तुमपर गवाह हो और तुम लोग गवाह हो। पस नमाज़ क़याम करो, ज़कात दो और अल्लाह से वाबिस्ता हो जाओ (अल्लाह को मजबूती से पकड़ो), वह तुम्हारा मौला (अभिभावक), बहुत ही अच्छा है वह मौला और बहुत ही अच्छा है वह मददगार + +Surah 23: Al-Mu'minun (The Believers) +---------------------------------------- +[23:1] यकीनन फलाह पाई है ईमान लानी वालों ने जो +[23:2] अपनी नमाज़ में ख़ुश इख़्तियार करते हैं (विनम्रता के साथ सलात) +[23:3] लग्वियत (व्यर्थ चीज़ें) से दूर रहते हैं +[23:4] ज़कात के तारिके पर आमिल होते हैं +[23:5] अपनी शर्मगाहों की हिफ़ाज़त करते हैं +[23:6] सिवाए अपनी बिवियों के और उन औरतों के जो उनका दूध ए यमीन में होन (दाहिना हाथ रखता है) के अनपार (महफूज ना रखने में) वो काबिल ए मालामत नहीं हैं +[23:7] अलबत्ता जो उसके अलावा कुछ और चाहे वही ज्यादती करने वाले हैं +[23:8] अपनी अमानतन (भरोसे) और अपने अहद ओ पैमान (वादे) का पास रखते हैं +[23:9] और अपनी नमाज़ की मुहाफ़िज़त (हिफ़ाज़त) करते हैं +[23:10] यहीं लोग वो वारिस हैं +[23:11] जो मीरास में फिरदौस पाएंगे और उसमें हमेशा रहेंगे +[23:12] हमने इंसान को मिट्टी के सात कहा मिट्टी) से बनाया +[23:13] फिर उसे एक महफूज जगा टपकी हुई बूंद में तबदील किया +[23:14] फिर हमें बूंद को लोठडे की शक्ल दी, फिर लोठडे को बोटी बना दिया, फिर बोटी की हड्डियां (हड्डियां) बनाईं, फिर हददियों पर गोश्त चढ़ाया। फिर उसे एक दूसरा ही मख़लूक़ बना खड़ा किया। पास बड़ा ही बा-बरकत है अल्लाह, सब कारीगरों से अच्छा कारीगर +[23:15] फिर इसके बाद तुमको जरूर मरना है +[23:16] फिर कयामत के रोज यकीनन तुम उठोगे +[23:17] और तुम्हारे ऊपर हमने सात (सात) रास्ते बनाए, तख़लीक के काम से हम कुछ ना-बलाद ना थे (हम (अपनी) रचना से कभी भी बेपरवाह नहीं होते हैं +[23:18] और आसमान से हमने ठीक हिसाब के मुताबिक़ एक खास मुक़द्दर में पानी उतारा और उसको ज़मीन में ठहरा दिया। हम उसे जिस तरह चाहें गायब कर सकते हैं +[23:19] फिर इस पानी के ज़रिये से हमने तुम्हारे लिए खजूर और अंगूर के बाग़ पैदा कर दिये, तुम्हारे लिए बाग़ों में बहुत से लज़ीज़ फल हैं और उनसे तुम रोज़ी हासिल करते हो +[23:20] और वो दरख्त भी हमने खरीदा जो तूर-ए-सीना (माउंट सिनाई) से निकलता है, तेल (तेल) भी लिए हुए उगता है और खाने वालों के लिए सालान भी +[23:21] और हकीकत ये है के तुम्हारे लिए मवेशियों में भी एक सबक है उनके पैठों (पेट) में जो कुछ है उसी में से एक चीज हम तुममें पिलाते हैं, और तुम्हारे लिए उनमें बहुत से दूसरे फायदे भी हैं +[23:22] उनको तुम खाते हो और उन्पार और कश्तियों पर सवार भी हो जाते हो +[23:23] हमने नूह को उसकी क़ौम की तरफ भेजा, उसने कहा “ ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो, उसके सिवा तुम्हारे लिए कोई और माबूद नहीं है, क्या तुम डरते नहीं हो?” +[23:24] उसकी क़ौम के जिन सरदारों ने मन्ने से इंकार किया वो कहने लगे के "ये शक्स कुछ नहीं है मगर एक बशर (इंसान) तुम ही जैसा। इसकी गरज़ ये है के तुमपर बरतारी (श्रेष्ठता) हासिल करे। अल्लाह को अगर भेजा होगा तो फरिश्ते भेजता.ये बात तो हमने कभी अपने बाप दादा के वक़्त में सुनी ही नहीं (के बशर रसूल बनकर आए) +[23:25] कुछ नहीं, बस इस आदमी को ज़रा जुनून लहक हो गया है, कुछ मुद्दत और देखलो [( शायद इफ़ाक़ा हो जाए)(हो सकता है वह ठीक हो गया हो)]" +[23:26] नहीं ने कहा "परवरदिगार, इन लोगों ने जो मेरी तकज़ीब की है इसपर अब तू ही मेरी नुसरत फरमा।" +[23:27] हमने उसपर वही की के "हमारी निगरानी में और हमारी वही के मुताबिक कश्ती (सन्दूक) तैयार कर। फिर जब हमारा हुकुम आ जाए और तन्नूर उबल पड़ा तो हर क़िस्म के जानवरों में से एक एक जोड़ा लेकर उसमें सवार हो जा, और अपने एहल ओ अयाल" को भी साथ ले, सिवाय उनके जिनके खिलाफ पहला फैसला हो चुका है, और जालिमों के मामले में मुझसे कुछ ना कहना, ये अब गरक (डूब/डूबना) होने वाले हैं +[23:28] फिर जब तू अपने साथियों के साथ कश्ती पर सवार हो जाए तो कह, शुक्र है हमें खुदा का जिसने हमें ज़ालिम लोगों से निजात दी +[23:29] और कह, परवरदिगार, मुझको बरकत वाली जगह उतार और तू बेहतरीन जगह देने वाला है।” +[23:30] इस क़िस्से में बड़ी निशानियां हैं और आजमाइश तो हम करके ही रहते हैं +[23:31] इनके बाद हमने एक दूसरे दौर की क़ौम उठाई +[23:32] फिर उनमें खुद उनकी क़ौम का एक रसूल भेजा (जिसने उन्हें दावत दी) के अल्लाह की बंदगी करो, तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई और माबूद नहीं है, क्या तुम डरते नहीं हो +[23:33] उसकी क़ौम के जिन सरदारों ने मन्ने से इनकार किया और आख़िरत की पेशी को झुटलाया, जिनको हमने दुनिया की ज़िंदगी में आसुदा कर रखा था, वो कहने लगे “ये शक्स कुछ नहीं है मगर एक बशर तुम ही जैसा, जो कुछ तुम खाते हो वही ये खाता है और जो कुछ तुम पीते हो वही ये पीटा है +[23:34] अब अगर तुमने अपने ही जैसा एक बशर की इताअत क़बूल कर ली तो तुम घाटे ही में रहोगे +[23:35] ये तुम्हें इत्तिला देता है के जब तुम मर कर मिटटी हो जाओगे और हदियों का पंजर रह जाओगे हमें वक्त तुम (कबरों से) निकल जाओगे +[23:36] बैद (दूर/असंभव), बिल्कुल बैद (असंभव) है ये वादा जो तुमसे किया जा रहा है +[23:37] जिंदगी कुछ नहीं है मगर बस यहीं दुनिया की जिंदगी। यहीं हमको मरना और जीना है और हम हरगिज उठाए जाने वाले नहीं हैं +[23:38] ये शक्स खुदा के नाम पर महज़ झूठ गड़बड़ रहा है और हम कभी इसके मन्ने वाले नहीं हैं। +[23:39] रसूल ने कहा "परवरदिगार, इन लोगों ने जो मेरी तकज़ीब की है, इसपर अब तू ही मेरी नुसरत फरमा" +[23:40] जवाब में इरशाद हुआ "करीब है वो वक्त जब ये अपने किये पर पछताएंगे" +[23:41] आखिर ए कार ठीक ठीक हक के मुताबिक़ एक हंगामा ए अज़ीम ने उनको आ लिया और हमने इनको कचरा बना कर फेंक दिया। दूर हो जालिम क़ौम +[23:42] फिर हमने उनके बाद दूसरी क़ौम उठाई +[23:43] कोई क़ौम ना अपने वक़्त से पहले ख़त्म हुई और ना उसके बाद ठहर साकी +[23:44] फिर हमने पै डर पै अपने रसूल भेजे। जिस कौम के पास भी उसका रसूल आया, उसने उसे झुठलाया, और हम एक के बाद एक कौम को हलाक करते चले गए हटा के उनको बस अफसाना ही बना कर चोदा, फिटकर उन लोगों पर जो ईमान नहीं लाते +[23:45] फिर हमने मूसा और उसके भाई हारून को अपनी निशानियां और खुली सनद के साथ फिरौन और उसके अयान सल्तनत की तरफ भेजा +[23:46] मगर उनहों ने तकब्बुर (अहंकार) किया और बड़ी डंकी ली +[23:47] कहने लगे "क्या हम अपने ही जैसे दो आदमियों पर ईमान ले आयें? और आदमी भी वो जिनकी क़ौम हमारी बन्दी (ग़ुलाम) है” +[23:48] पास उन्होन ने दोनों को झुटला दिया और हलाक होने वालों में जा मिले +[23:49] और मूसा को हमने किताब अता फरमायी ता-के लोग उसे रहनुमायी हासिल करें +[23:50] और इब्ने मरियम और उसकी मां को हमने एक निशानी बनाया और उनको एक साथ मुर्तफा (पठार पर आश्रय) पर रक्खा जो इत्मिनान की जगह थी और चश्मे उसमें जारी थे +[23:51] ऐ पैगंबर, खाओ पाक चीज और अमल करो सालेह, तुम जो कुछ भी करते हो, मैं उसको ख़ूब जानता हूँ +[23:52] और ये तुम्हारी ये उम्मत एक ही उम्मत है और मैं तुम्हारा रब हूं, पास मुझ से तुम डरो +[23:53] मगर बाद में लोगों ने अपने दीन (धर्म) को आपस में टुकड़े-टुकड़े कर लिया, हर गिरह के पास जो कुछ है उसमें वो मगन है +[23:54] अच्छा, तो छोड़ो इन्हें, डूब रहे हैं अपनी गफलत में एक वक्त ए खास तक +[23:55] क्या ये समझते हैं के हम जो इन्हें माल ओ औलाद से मदद दिए जा रहे हैं +[23:56] तो गोया इन्हें भलइयां देने में सरगर्म हैं? नहीं, असल मामले का इन्हें शौर नहीं है +[23:57] जो अपने रब के खौफ से डरे रहते हैं +[23:58] जो रुब की आयत पर ईमान लाते हैं +[23:59] जो अपने रुब के साथ किसी को शरीक नहीं करते +[23:60] और जिनका हाल ये है के देते हैं जो कुछ भी देते हैं और दिल उनके इस ख्याल से कांपते रहते हैं के हमें अपने रुब की तरफ पलटना है +[23:61] भलाईयों की तरफ दौड़ने वाले और सबाकत करके उनको पा लेने वाले तो डर-हकीकत वो लोग हैं +[23:62] हम किसी शक्स को उसकी मक़दर (ताकत) से ज़्यादा की तकलीफ़ नहीं देते और हमारे पास एक किताब है जो (हर एक का हाल) ठीक ठीक बता देने वाली है, और लोगों पर ज़ुल्म बाहर-हाल नहीं किया जाएगा +[23:63] मगर ये लोग इस मामले से बे-ख़बर हैं और इनके अमल भी इस तरीक़े से (जिसका ऊपर ज़िक्र किया गया है) मुख़्तलिफ़ हैं। वो अपने ये करूट किये चले जायेंगे +[23:64] यहां तक ​​के जब हम उनके अय्याशों (समृद्ध लोगों/आसुदा हाल) को अज़ाब में पकड़ लेंगे तो फिर वो डकराना शुरू कर देंगे (चिल्लाना/रोना शुरू कर देंगे) +[23:65] अब बंद करो अपनी फरियाद ओ फुगां, हमारी तरफ से अब कोई मदद तुम्हें नहीं मिलनी +[23:66] मेरी आयतें सुनाई जाती थीं तो तुम (रसूल की आवाज सुनते ही) उलटे पांव भाग निकलते थे +[23:67] अपने घमंड में उसको खातिर ही में ना लाते थे, अपने चौपालों (बैठक स्थलों) में अनपार बातें चांट-ते (उपहास किया गया उसे) और बकवास किया करते थे +[23:68] तो क्या इन लोगों ने कभी इस कलाम पर गौर नहीं किया? हां वो कोई ऐसी बात लाया है जो कभी इनके असलफ (पूर्वजों) के पास ना आई थी +[23:69] हां ये अपने रसूल से कभी के वाकिफ ना थे के (अंजाना आदमी होने के लिए) उससे कहते हैं +[23:70] हां ये बात के कयाल हैं के वो मजनूं [(जिन्न द्वारा)] है? नहीं, बल्के वो हक़ लाया है और हक़ ही इनकी अक्सरियत (सबसे) को नगावर है +[23:71] और हक़ अगर कहीं इनकी ख्वाहिश के पीछे चलता तो ज़मीन और आसमान और इनकी सारी आबादी का निज़ाम दरहम बरहम हो जाता। नहीं, बलके हम उनका अपना ही जिक्र उनके पास लाए हैं और वो अपने जिक्र से मुंह मोड़ रहे हैं +[23:72] क्या तू इनसे कुछ मांग रहा है? तेरे लिए तेरे रब का दीया ही बेहतर है और वो बेहतरीन राज़िक है +[23:73] तू तो उनको सीधे रास्ते की तरफ बुला रहा है +[23:74] मगर जो लोग आख़िरत को नहीं मानते वो राह ए रास्ते से हटना चाहते हैं +[23:75] अगर हम इनपर रहम करें और वो तकलीफ जिस में आज कल ये मुब्तिला हैं दूर करदें तो ये अपनी सरकशी में बिल्कुल ही बहक जाएंगे +[23:76] इनका हाल तो ये है के हमने उन्हें तकलीफ में मुब्तिला किया, फिर भी ये अपने रुब के आगे ना झुके और ना अजीजी (विनम्र) इख्तियार करते हैं +[23:77] अलबत्ता जब नौबत यहां तक ​​पहुंच जाएगी के हम इनपर सख्त अजाब का दरवाजा खोल देंगे तो यकीन तुम देखोगे के उस हालात में ये हर खैर से मयौस हैं +[23:78] वाह अल्लाह हाय तो है जिसने तुम्हें सनी और देखने की कुव्वतें दी और सोचने को दिल दिए, मगर तुम लोग कम ही शुक्रगुज़ार होते हो +[23:79] वही है जिसने तुम्हें ज़मीन में फैलाया, और उसकी तरफ तुम समेट जाओगे +[23:80] वही जिंदगी बक्शता है और वही मौत देता है, गर्दिश ए लयल (रात) ओ नहर (दीन) उसी के क़ब्ज़े क़ुदरत में है। क्या तुम्हारी समझ में ये बात नहीं आती +[23:81] मगर ये लोग वही कुछ कहते हैं जो उनके पेशवा (पूर्वज) कह चुके हैं +[23:82] ये कहते हैं "क्या जब हम मर कर मिट्टी हो जाएंगे और हड्डियों का पंजर बन कर रह जाएंगे तो हमको फिर जिंदा" करके उठाया जाएगा +[23:83] हमने भी ये वादे बहुत सुनाए हैं और हमसे पहले हमारे बाप दादा भी सुनते रहे हैं।'' +[23:84] इनसे कहो, बताओ अगर तुम जानते हो, के ये ज़मीन और इसकी। सारी आबादी किसकी है +[23:85] ये जरूर कहेंगे अल्लाह की, कहो फिर तुम होश में क्यों नहीं आते +[23:86] इनसे पूछो, सातो (सात) आसमानो और अर्श-ए-अजीम का मालिक कौन है +[23:87] ये जरूर कहेंगे अल्लाह, कहो फिर तुम डरते क्यों नहीं +[23:88] इनसे कहो, बताओ अगर तुम जानते हो के हर चीज़ पर इक्तेदार किसका है? और कौन है वो जो पनाह देता है और उसके मुकाबले में कोई पनाह नहीं दे सकता +[23:89] ये जरूर कहेंगे के ये बात अल्लाह ही के लिए है। कहो, फिर कहां से तुमको धोखा लगता है +[23:90] जो अमर ए हक है वो हम इनके सामने ले आए हैं, और कोई शक्क नहीं के ये लोग झूठे हैं +[23:91] अल्लाह ने किसी को अपना औलाद नहीं बनाया है और कोई दूसरा खुदा उसके साथ नहीं है। अगर ऐसा होता तो हर खुदा अपने ख़ल्क़ को लेकर अलग हो जाता, और फिर वो एक दूसरे पर चढ़ते। पाक है अल्लाह उन बातों से जो ये लोग बनाते हैं +[23:92] खुले और छुपे का जाने वाला, वो बोलता है हमसे शिर्क से जो ये लोग तजवीज़ कर रहे हैं +[23:93] (ऐ मुहम्मद) दुआ करो के "परवरदिगार, जिस अज़ाब की इनको धमकी दी जा रही है वो अगर मेरी मौजुदगी में तू लाए +[23:94] तो ऐ मेरे रब, मुझे जालिम लोगों में शामिल न करो" +[23:95] और हकीकत ये है के हम तुम्हारी आंखें के सामने ही वो चीज ले आने की पूरी कुदरत रखते हैं जिसकी धमकी हम उन्हें दे रहे हैं +[23:96] (ऐ नबी), बुरे को इस तरह से दफा करो जो बेहतरीन हो जो कुछ बातें वो तुमपर बनाते हैं वो हमें खूब मालूम है +[23:97] और दुआ करो के "परवरदिगार, मैं शयातीन की उम्मीदों (वासवासों) से तेरी पनाह मांगता हूं +[23:98] बल्के ऐ मेरे रब, मैं तो इसे भी तेरी पनाह मांगता हूं के वो मेरे पास आएं" +[23:99] (ये लोग अपनी करनी से बाज़ ना आएंगे) यहां तक ​​कि जब मेरे अंदर से किसी को मौत आ जाएगी तो कहना शुरू कर देगा के "ऐ मेरे रब, मुझे उसकी दुनिया में वापस भेज दीजिए जिसे मैं छोड़ आया हूं +[23:100] उम्मीद है के अब मैं जल्द अमल करूंगा"। हरगिज़ नहीं, ये तो बस एक बात है जो वो बक रहा है। अब इन सब (मरने वालों) के पीछे एक बरज़ख (बाधा) हैयाल है दूसरी जिंदगी के दिन तक +[23:101] फिर जून्ही के सुर (तुरही) फूंक दिया गया, उनके दरमियान फिर कोई रिश्ता ना रहेगा और ना वो एक दूसरे को पूछेंगे +[23:102] हमारा वक्त जिनके पैडल (तराजू) भारी होंगे वही फलाह पाएंगे +[23:103] और जिनके पैडले (स्केल) हल्के होंगे वही लोग होंगे जिन्हों ने अपने आप को घाटे में डाल लिया। वो जहन्नुम में हमेशा रहेंगे +[23:104] आग उनके चेहरों की खाल चट जाएगी और उनके जबड़े बाहर निकल आएंगे +[23:105] "क्या तुम वही लोग नहीं हो के मेरी आयत तुम्हें सुनायी जाती थी तो तुम उन्हें झुलाते थे?" +[23:106] वो कहेंगे "ऐ हमारे रब, हमारी बदबख्ती हम पर छा गई थी, हम वक्त गुमराह लोग थे +[23:107] ऐ परवरदिगार, अब हमें यहां से निकल दे फिर हम ऐसा कसूर करें तो जालिम होंगे" +[23:108] अल्लाह ताला जवाब देगा "दूर हो मेरे" सामने से, पड़े रहो इसी में और मुझसे बात ना करो +[23:109] तुम वही लोग तो हो के मेरे कुछ बंदे जब कहते थे के ऐ हमारे परवरदिगार, हम ईमान लाए, हमें माफ करदे, हमपर रहम कर, तू सब रहिमों से अच्छा रहीम है +[23:110] तो तुमने उनका मजाक बना लीजिए, यहां तक ​​के उनकी जिद ने तुम्हें ये भी भुला दिया के मैं भी कोई हूं, और तुम उन पर हंसते रहोगे +[23:111] आज उनके उस सब्र का मैंने ये फल दिया है के वही कामयाब है” +[23:112] फिर अल्लाह ताला उनसे पूछेगा “बताओ, ज़मीन में तुम कितने साल रहेंगे?” +[23:113] वो कहेंगे " एक दिन या दिन का भी कुछ हिस्सा हम वहां ठहरे हैं, शुरू करने वालों से पूछ लीजिये" +[23:114] इरशाद होगा "थोड़ी ही देर ठहरे हो ना, काश तुमने ये हमें वक्त जाना होता +[23:115] क्या तुमने ये समझ रक्खा था के हमने तुम्हें फिजूल (बेकर) ही पेदा किया है और तुम्हें हमारी तरफ कभी पलटना ही नहीं है?” +[23:116] पास बाला ओ बरतर है अल्लाह, बादशाह ए हकीकी, कोई खुदा उसके सिवा नहीं, मालिक है अर्श ए बुजुर्ग का +[23:117] और जो कोई अल्लाह के साथ किसी और माबूद को पुकारे, जिसके लिए उसके पास कोई दलील नहीं, तो उसका हिसाब उसके रब के पास है। ऐसे काफिर कभी फलाह नहीं पा सकते +[23:118] (ऐ मुहम्मद) कहो, "मेरे रब दरगुज़र फ़रमा, और रहम कर, और तू सब रहिमों से अच्छा रहीम है" + +Surah 24: An-Nur (The Light) +---------------------------------------- +[24:1] ये एक सूरत है जिसको हमने नाज़िल किया है, और इसने हमने फ़र्ज़ किया है, और इस में हमने साफ़ साफ़ हिदायत नाज़िल की है, शायद के तुम सबक लो +[24:2] जानिया (व्यभिचारी) औरत ज़ानी मर्द, दोनों में से हर एक को सौ (सौ) कोड़े (लैश) मारो और इनपर तरस खाने का जज़्बा अल्लाह के दीन के मामले में तुमको दामनगीर (दया) ना हो अगर तुम अल्लाह ताला और रोज-ए-आखिर पर ईमान रखते हो, और इनको सज़ा देते वक्त एहले ईमान का एक गिरोह मौजुद रहे +[24:3] ज़ानी (व्यभिचार का दोषी व्यक्ति) निकाह ना कैरी मगर जानिया के साथ या मुशरिक के साथ, और जानिया के साथ निकाह ना करे मगर जानी या मुशरिक। और ये हराम करदिया गया है एहले ईमान पर +[24:4] और जो लोग पाक दामन औरतों पर तोहमत (इल्ज़म/बोहतन/बदनामी) लगायें, फिर चार (चार) गवाह लेकर ना आयें, उनको अस्सी (अस्सी) कोड़े (कोड़े) मारो, और उनकी शहादत कभी कबूल ना करो। और वो खुद ही फासीक हैं +[24:5] सिवाय उन लोगों के जो इस हरकत के बाद ताइब (पश्चाताप) हो जाएं और इस्लाह कार्लें के अल्लाह जरूर (उनके हक में) गफूर ओ रहीम है +[24:6] और जो लोग अपनी बीवी पर इल्जाम लगाएं और उनके पास खुद उनके अपने सिवा दूसरे कोई गवाह न हो तो उनमें से एक शक्स की शहादत (ये है के वो) चार मरतबा अल्लाह की कसम खा कर गवाही दे के वो (अपने इल्ज़म में) सच्चा है +[24:7] और पंचवी (पांचवीं) बार कहे के उसपर अल्लाह की लानत हो अगर वो (अपने) इल्ज़ाम में) झूठा हो +[24:8] और औरत से सज़ा इस तरह तल सकती है के वो चार मरतबा अल्लाह की कसम खा कर शहादत दे के ये शक्स (अपने इल्ज़ाम में) झूठा है +[24:9] और पांचवी मरतबा कहे के हमें बंदी पर अल्लाह का गजब तोते अगर वो (अपने) इल्ज़म में) सच्चा हो +[24:10] तुम लोगों पर अल्लाह का फ़ज़ल और उसका रहम न होता और ये बात न होती के अल्लाह बड़ा इल्तिफ़ात (सबसे क्षमा करने वाला) फ़रमाने वाला और हकीम है, तो (बीवियों पर इल्ज़म का मामला तुम्हें बड़ी मुश्किल में डाल देता) +[24:11] जो लोग ये बोहतान (निंदा) गड़बड़ लाए हैं वो तुम्हारे ही अंदर का एक तोला है। क्या वक़िये को अपने हक में शरर ना समझो बल्के ये भी तुम्हारे लिए खैर ही है। जिसने इस में जितना हिसा लिया, उसने उतना ही गुनाह समथा और जिस शक्स ने इसकी जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा अपने सारा लिया उसके लिए तो अज़ाब ए अज़ीम है +[24:12] जिस वक्त तुम लोगों ने इसे सुना था उसका वक्त क्यों ना मोमिन मर्दन और मोमिन औरतों ने अपने आप से नीक गुमान किया और क्यों ना केहदिया के ये सारी बोहतन (बदनामी) है +[24:13] वो लोग (अपने इल्ज़म के सबूत में) चार गवाह क्यों ना लाए? अब के वो गवाह नहीं लाए हैं, अल्लाह के नज़रिए वही झूठे हैं +[24:14] अगर तुम लोगों पर दुनिया और आख़िरत में अल्लाह का फ़ज़ल और रहम ओ करम न होता तो जिन बातों में तुम पढ़ गए थे उनकी याद में बड़ा अज़ाब तुम्हें आ लेता +[24:15] (जरा गौर तो करो, हमें वक्त तुम कैसी गलती कर रहे थे) जबके तुम्हारी एक जुबान से दूसरी जुबान इस झूठ को लेती चली जा रही थी और तुम अपने मुंह से वो कुछ कह जा रहे थे, जिसका मुतालिक तुम्हें कोई इल्म था ना था. तुम इसे एक मामुली बात समझ रहे थे, हालंके अल्लाह के नज़दीक ये बड़ी बात थी +[24:16] क्यों ना उसे सुनते ही तुमने कहादिया "हमें ऐसी बात ज़ुबान से निकलना ज़ीब नहीं देता, सुभान अल्लाह, ये तो एक बोहतन ए अज़ीम है" +[24:17] अल्लाह तुमको हिदायत करता है कि आंदा कभी ऐसी हरकत न करना अगर तुम मोमिन हो +[24:18] अल्लाह तुम्हें साफ साफ हिदायत देता है और वह आलिम ओ हकीम है +[24:19] जो लोग चाहते हैं के ईमान लाने वालों के गिरोह में फ़हाश (अभद्रता) फ़ैले वो दुनिया और आख़िरत मैं दर्दनाक सज़ा के मुस्तक हूँ। अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते +[24:20] अगर अल्लाह का फज़ल और उसका रहम ओ करम तुमपर न होता और ये बात न होती के अल्लाह बड़ा शफीक ओ रहीम है (तो ये चीज जो अभी तुम्हारे अंदर फैल गई थी बद्तरीन नताइज दिखा देती) +[24:21] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, शैतान के नक्शे कदम पर ना चलो, उसकी जोड़ी (जो) कोई करेगा तो वो उसे फहाश (अभद्रता) और बदी (दुष्टता) हाय का हुकुम देगा। अगर अल्लाह का फजल और उसका रहम ओ करम तुमपर ना होता तो तुम में से कोई शक पाक ना हो सकता, मगर अल्लाह हाय जिसे चाहता है पाक करता है है, और अल्लाह सुन्ने वाला और जाने वाला है +[24:22] तुम में से जो लोग साहब ए फज़ल (भरपूर) और साहिब ए मक़दरत (मतलब) हैं वो इस बात की कसम न खा बैठें के अपने रिश्तेदार, मिस्कीन और मुहाजिर-फि-सबीलिल्लाह (जिन्होंने अल्लाह की राह के लिए अपने घर छोड़ दिए हैं) लोगों की मदद ना करेंगे. उन्हें माफ करना चाहिए और अपराध करना चाहिए। क्या तुम नहीं चाहते कि अल्लाह तुम्हें माफ करे? और अल्लाह की सिफत ये है के वो गफूर और रहीम है +[24:23] जो लोग पाक दामन, बे-खबर, मोमिन औरतों पर तोहमतें (बदनामी) लगाते हैं अनपार दुनिया और आख़िरत में लानत की गई और उनके लिए बड़ा अज़ाब है +[24:24] वो उस दिन को भूल ना जाएं जबके उनकी अपनी जुबानें और उनके अपने हाथ पांव उनके कार्टूनों की गवाही देंगे +[24:25] उस दिन अल्लाह वो बदला उन्हें भरपुर दे देगा जिसका वो मुस्तहिक हैं और उन्हें मालूम हो जाएगा के अल्लाह ही हक है। सच को सच कर दिखाने वाला +[24:26] खबीस (अशुद्ध) औरतें खबीस मर्दों के लिए हैं और खबीस (अशुद्ध) मर्द खबीस (अशुद्ध) औरतों के लिए। पाकीज़ा औरतें पाकीज़ा मर्दों के लिए हैं और पाकीज़ा मर्द पाकीज़ा मर्दों के लिए। उनका दामन पाक है उन बातों से जो बनने वाले बनते हैं। उनके लिए मगफिरत है और रिज़क ए करीम +[24:27] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपने घरों के सिवा दूसरे घरों में दाखिल ना हुआ करो जब तक के घर वालों की रजा (इजाजत) ना लेलो और घर वालों पर सलाम ना भेज लो। ये तरीक़ा तुम्हारे लिए बेहतर है, तवक्कू है के तुम इसका ख्याल रखोगे +[24:28] फिर अगर वहां किसी को ना पाओ तो दाख़िल ना हो जबतक के तुमको इजाज़त ना दे दी जाए, और अगर तुमसे कहा जाए के वापस चले जाओ तो वापस हो जाओ। ये तुम्हारे लिए ज़्यादा पाकीज़ा तरीक़ा है, और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे खूब जानता है +[24:29] अलबत्ता तुम्हारे लिए इसमें कोई मुज़ाहिक़ा (नुकसान) नहीं है के ऐसे घरों में दखल हो जाओ जो किसी के रहने की जगह न हो, और जिनमें तुम्हारे फ़ैयदे (या काम) की कोई चीज़ हो, तुम जो कुछ ज़ाहिर करते हो और जो कुछ छुपाते हो सब कि अल्लाह को खबर है +[24:30] ऐ नबी, मोमिन मर्दों से कहो के अपनी नज़रें बचा कर रखें और अपनी शर्म-गाहों की हिफ़ाज़त करें, ये उनके लिए ज़्यादा paakeeza tareeqa hai. जो कुछ वो करते हैं अल्लाह उसे बाख़बर रहता है +[24:31] और (ऐ नबी), मोमिन औरतों से कहदो के अपनी नजरें बचा कर रखें, और अपनी शर्मगाहों की हिफाजत करें, और अपना बनाओ सिंघार ना दिखायें बाजुज उसे जो खुद जाहिर हो जाए, और अपने सीनो पर अपनी ओढ़नियों के आंचल डाले रहें, वो अपना बनाओ सिंघार न जाहिर करें मगर लोगों के सामने: शोहर, बाप, शोहरों के बाप, अपने बेटे, शोहरों के बेटे, भाई, भाइयों के बेटे, बहनों के बेटे, अपने मेल-झोल की औरतें, अपने ममलुक (जो उनके कब्जे में हैं), वो ज़िर-दस्त मर्द जो किसी और क़िस्म की ग़रज़ ना रखते हों, और वो बचे जो औरतों की पोशीदा बातों से अभी वाकिफ़ ना हुए हों। वो अपने पांव ज़मीन पर मरती हुई ना चला करें के अपनी जो ज़ीनत उनहों ने छुपा रखी है उसका लोगों को इल्म हो जाए। ऐ मोमिनो, तुम सब मिलकर अल्लाह से तौबा करो, तवक्कु है के फलाह पाओगे +[24:32] तुम में से जो लोग मुजर्रद (सिंगल) हो और तुम्हारी लौंडी गुलामों में से जो साले होन, उनका निकाह करदो। अगर वो गरीब है तो अल्लाह अपने फजल से उनको गनी कर देगा। अल्लाह बदी वुसत (असीमित संसाधन) वाला और अलीम है +[24:33] और जो निकाह का मौका न पाए उन्हें चाहिए के इफ्फत-माबी (निरंतरता/पाक दामनी) इख्तियार करें, यहां तक ​​के अल्लाह अपने फजल से उनको गनी करदे और तुम्हारे ममलुकों में (तुम्हारे कब्जे में) से जो मकातिबात (मुक्ति) की अंधेरे में रहें उन्हें मकातिबात करलो, अगर तुम्हें मालूम हो कि उनको अंदर बुलाया है, और उनको हमारे माल में से दो जो अल्लाह ने तुम्हें दिया है। और अपनी लौंडियों (गुलाम-लड़कियों) को अपनी दुनिया फ़ायदों की खातिर क़हबा-गारी (वेश्यावृत्ति) पर मजबूर न करो जबके वो खुद पाक दामन रहना चाहती है। और जो कोई उनको मजबूर करे तो इस जब्र के बाद अल्लाह उनके लिए गफूर ओ रहीम है +[24:34] हमने साफ साफ हिदायत देने वाली आयतें तुम्हारे पास भेज दी हैं, और उन क़ौमों की इब्रातनाक मिसालें भी हम तुम्हारे सामने पेश कर चुके हैं जो तुमसे पहले हो गुज़रे हैं। और वो हिदायतें हमने कर दी हैं जो डरने वालों के लिए होती हैं +[24:35] अल्लाह आसमान और ज़मीन का नूर है (कायनात में) उसके नूर की मिसाल ऐसी है जैसे एक ताक़ में चिराग रखा हुआ हो,चिराग एक फ़ानूस में हो(कांच के शेड में), फ़ानूस (कांच के शेड) का हाल ये हो के जैसे मोती की तरह चमकता हुआ तारा, और वो चिराग़ ज़ैतून के एक ऐसे मुबारक दरख्त के टेल (तेल) से रोशन किया जाता हो जो ना शर्की (पूर्वी) हो ना गराबी (पश्चिमी), जिसका टेल (तेल) आप ही आप भड़का पड़ता हो चाहे आग उसको ना लगे, (इस तरह) रोशनी बराबर रोशनी (बढ़ने के तमाम असबाब जमा हो गए)। अल्लाह अपने नूर की तरफ जिसका चाहता है रहनुमायी फरमाता है। वो लोगों को मिसालों से बात समझता है, वो हर चीज़ से ख़ूब वाकिफ़ है +[24:36] (उसके नूर की तरफ हिदायत पाने वाले) उन घरों में पाए जाते हैं जिनमें बुलंद करने का और जिन में अपने नाम की याद का अल्लाह ने इज़ान (इजाज़त) दिया है +[24:37] उन में ऐसे लोग सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते हैं जिन्हें तिजारत और खत्म ओ फारोखत अल्लाह की याद से और इकामत ए नमाज ओ अदाये जकात से गाफिल नहीं करते। वो उस दिन से डरते रहते हैं जिसमें दिल उलटने और दीधे पथरा जाने की (आंखें पथरा जाएंगी) नौबत आ जाएगी +[24:38] (और वो ये सब कुछ करते हैं) ता-के अल्लाह उनको बेहतरीन अमाल की जजा उनको दे और मजीद अपने फजल से नवाजे। अल्लाह जिसे चाहता है बे-हिसाब देता है +[24:39] (इस्के बराक्स) जिन्हों ने कुफ्र किया उनके अमल की मिसाल ऐसी है जैसे दश्त ए बे-आब में सराब का प्यासा (पानी रहित रेगिस्तान में मृगतृष्णा की तुलना) उसको पानी समझ हुए थे, मगर जब वहां पहुंचा तो कुछ न पाया, बलके वहां उसने अल्लाह को मौजुद पाया, जिसने उसका पूरा, पूरा हिसाब चुका दिया। और अल्लाह को हिसाब लेते देर नहीं लगती +[24:40] या फिर उसकी मिसाल ऐसी है जैसे एक गहरे समंदर में अँधेरा, के ऊपर एक मौज छायी हुई है, उसपर एक और मौज, और उसके ऊपर बादल, तारीकी(अंधेरा) पर तारीकी (अंधेरा) मुसल्लत है, आदमी अपना हाथ निकले तो उसे भी ना देखे. जिसे अल्लाह नूर न बख्शे उसके लिए फिर कोई नूर नहीं +[24:41] क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह की तस्बीह कर रहे हैं वो सब जो आसमान और ज़मीन में हैं और वो परिंदे जो पर्र फैलाये उड़ रहे हैं? हर एक अपनी नमाज और तस्बीह का तरीक़ा जानता है, और ये सब जो कुछ करते हैं अल्लाह उसे बा-ख़बर रखता है +[24:42] आसमान और ज़मीन की बादशाही अल्लाह ही के लिए है और उसकी तरफ सबको पलटना है +[24:43] क्या तुम देखते नहीं हो कि अल्लाह बदल को आहिस्ता आहिस्ता चलाता है, फिर उसके टुकड़ों को बहाम जोड़ता है, फिर उसे समित कर एक कसीफ अब्र (घने बादलों का समूह) बना देता है। फिर तुम देखते हो के उसके ख़ौल में से बारिश के कतरे तपकते हैं और वो आसमान से, उन पहाड़ों की बदौलत जो उसमें बुलंद हैं, औले (ओले/बर्फ) बरसात है, फिर जिसे चाहता है उनका नुक्सान पहनता है और जिसे चाहता है उनसे बचा लेता है, उसकी बिजली की चमक निगाहों को ख़ैर (आँखें चकाचौंध कर देती है) कि देती है +[24:44] रात और दिन का उलट फेर वही कर रहा है। इसमें एक सबक है आंखों वालों के लिए +[24:45] और अल्लाह ने हर जानदार एक तरह के पानी से भुगतान किया, कोई पेट के बाल चल रहा है तो कोई दो टांगों पर और कोई चार टांगों पर। जो कुछ वह चाहता है पैदा करता है, वह हर चीज पर कादिर है +[24:46] हमने साफ साफ हकीकत बताने वाली आयत नाजिल कर दी है, आगे सिराते मुस्तकीम की तरफ हिदायत अल्लाह ही जिसे चाहता है देता है +[24:47] ये लोग कहते हैं कि हम ईमान लाए अल्लाह और रसूल पर और हमने इताअत कबूल की, मगर इसके बाद इनमें से एक गिरोह (इताअत से) मुंह मोड़ जाता है, ऐसे लोग हरगिज मोमिन नहीं हैं +[24:48] जब इनको बुलाया जाता है अल्लाह और रसूल की तरफ, ता-के रसूल इनके आपस के मुकद्दमे का फैसला करे तो इनमें से एक फरीक कतरा जाता है +[24:49] अलबत्ता अगर हक उनकी मुआफिकत (उनकी तरफ) में हो तो रसूल के पास बदाय इताअत-किश (आज्ञाकारिता) पर प्रतिबंध कर आ जाता है +[24:50] क्या उनके दिलों को (मुनाफिकत का) रोग लगा हुआ है? हां ये शक्क में पड़े हुए हैं? या इनको ये खौफ है कि अल्लाह और उसका रसूल इन्पर जुल्म करेगा? असल बात ये है के जालिम तो ये लोग खुद हैं +[24:51] ईमान लाने वालों का काम तो ये है के जब वो अल्लाह और रसूल की तरफ बुलाए जाएं ता-के रसूल उनके मुकद्दमे का फैसला करें तो वो कहें के हमने सुना और इताअत की, ऐसे ही लोग फलाह पाने वाले हैं +[24:52] और कामियाब वही हैं जो अल्लाह और रसूल की फरमा बरदारी करें और अल्लाह से डरें और उसकी नफ़रमानी से बचें +[24:53] ये (मुनाफिक) अल्लाह के नाम से कड़ी कसमें खा कर कहते हैं "आप हुकुम दें तो हम घरों से निकल खड़े हों"। इनसे कहो "कसमें न खाओ, तुम्हारी इबादत का हाल मालूम है, तुम्हारे कार्टूनों से अल्लाह बे-खबर नहीं है" +[24:54] कहो, "अल्लाह के मुती बनो (अल्लाह की आज्ञा मानो) और रसूल के तबे फरमान बनकर रहो, लेकिन अगर तुम मुंह फेरते हो तो खूब समझ लो के रसूल पर जिस फर्ज का बार रक्खा गया है उसका ज़िम्मेदार वो है और तुम जिस फ़र्ज़ का बार डाला है उसके ज़िम्मेदार तुम हो तो खुद ही हिदायत पाओगे वरना रसूल की ज़िम्मेदारी इससे ज़्यादा कुछ नहीं है के सफ़ सफ़ हुकुम पाहुंचा दे” +[24:55] अल्लाह ने वादा फरमाया है तुम में से उन लोगों के साथ जो ईमान लाए और नेक अमल करें के वो उनको उसी तरह जमीन में खलीफा बनाएगा जिस तरह उनसे पहले गुजरे हुए लोगों को बना चुका है, उनके लिए उनके लिए दीन (धर्म) को मजबूत बुनियादों पर कायम कर देगा जिसे अल्लाह ताला ने उनके हक में पसंद किया है, और उनकी (मौजूदा) हालत ए खौफ को अमन से बदल देगा, बस वो मेरी बंदगी करें और मेरे साथ किसी को शरीक न करें, और जो इसके बाद कुफ्र करें तो ऐसे ही लोग फासीक हैं +[24:56] नमाज कायम करो, जकात दो, और रसूल की इताअत करो, उम्मीद है के तुमपर रहम किया जाएगा +[24:57] जो लोग कुफ्र कर रहे हैं उनके मुतालिक इस गलत फहमी में ना रहो के वो ज़मीन में अल्लाह को अजीज (निराश) कर देंगे, उनका ठिकाना दोज़ख है और वो बड़ा ही बुरा ठिकाना है +[24:58] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, लाज़िम है के तुम्हारे ममलुक (तुम्हारे गुलाम) और तुम्हारे वो बच्चे जो अभी अक्ल की हद को (सेक्स कॉन्शस/यौवन) नहीं पहचाने हैं, तीन औकात में इजाज़त लेकर तुम्हारे पास आया करें: सुबह की नमाज़ से पहले, और दोपहर को जबके तुम कपड़े उतार कर रख देते हो, और ईशा की नमाज के बाद। ये तीन वक्त तुम्हारे लिए पर्दे के वक्त हैं। इनके बाद वो बिला इजाज़त आएं तो ना तुमपर कोई गुनाह है ना अनपर, तुम्हें एक दूसरे के पास बार-बार आना ही होता है। इस तरह अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी इरशादत की तौज़ीह (वज़ेह) करता है, और वह अलीम ओ हकीम है +[24:59] और जब तुम्हारे बच्चे अक़ल की हद (सेक्स कॉन्शियस / यौवन) को पाहुंच जायें तो चाहिए के उसी तरह इजाज़त लेकर आया करें जिस तरह उनके बदे (बुजुर्ग) इजाज़त लेते रहे हैं. इस तरह अल्लाह अपनी आयत तुम्हारे सामने खुलता है, और वह अलीम ओ हकीम है +[24:60] और जो औरतें जवानी से गुज़री बैठी हो, निकाह की उम्मीद न हो, वो अगर अपनी चादरें (बाहरी ग्रामेंट्स) उतार कर रख दें तो उनपर कोई गुनाह नहीं, बशारत के ज़ीनत की नुमाइश करने वाली ना हो। तहम (फिर भी) वो भी हया-दारी ही बारातें (संयम से व्यवहार करें) तो उनके हक़ में अच्छा है, और अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है +[24:61] कोई हराज़ नहीं अगर कोई अंधा, या लंगड़ा, या मारीज़ (किसी के घर से खा ले) और ना तुम्हारे ऊपर इस में कोई मुज़हिक़ा (नुकसान/जर्ज) है के अपने घरों से खाओ या अपने बाप दादा के घरों से, या अपनी माँ, नानी के घरों से, या अपने भाइयों के घरों से, या अपनी बहनों के घरों से, या अपने चाचाओं के घरों से, या अपनी बहनों के घरों से, या अपने मामूओं के घरों से, या अपने दोस्तों के घरों से, या उन घरों से जिनकी कुंजियाँ (चाबियाँ) तुम्हारी सुपुर्दगी (कब्जा) में हो, या अपने दोस्तों के घरों से। इस में भी कोई हराज नहीं के तुमलोग मिलकर खाओ या अलग-अलग, अलबत्ता जब घरों में दखल हुआ करो तो अपने लोगों को सलाम किया करो, दुआ ए खैर, अल्लाह की तरफ से मुकर्रर फरमायी हुई, बड़ी बाबरकत और पाकीजा। इस तरह अल्लाह ताला तुम्हारे सामने आयत बयान करता है, तवक्कू है के तुम समझ बुझ से काम लोगे +[24:62] मोमिन तो असल में वही हैं जो अल्लाह और उसके रसूल को दिल से माने और जब किसी इज्तिमाई काम के मौके पर रसूल के साथ हों तो उसे इज्जत के लिए बगैर न जाएं, जो लोग तुमसे इज्जत मांगते हैं वही अल्लाह और रसूल के मानने वाले हैं। जब वो अपने किसी काम से इजाज़त मांगे तो जैसे तुम चाहो इजाज़त दे दिया करो और ऐसे लोगों के हक़ में अल्लाह से दुआ ए मगफिरत किया करो। अल्लाह यकीनन गफूर ओ रहीम है +[24:63] मुसलमानो, अपने दरमियान रसूल के बुलाने को आपस में एक दूसरे का सा बुलाना न समझ बैठो। अल्लाह उन लोगों को खूब जानता है जो तुम में ऐसे हैं कि एक दूसरे की मदद लेते हुए चुपके से चौंक जाते हैं। रसूल के हुकुम की खिलाफत वारज़ी करने वालों को डरना चाहिए कि वो किसी फ़िटने में गिरफ़्तार न हो जाए, या उन पर दर्दनक अज़ाब न आ जाए +[24:64] ख़बरदार रहो, आसमान ओ ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह का है। तुम जिस रवीश पर भी हो अल्लाह उसको जानता है। जिस रोज़ लोग उसकी तरफ पलटेंगे वो उन्हें बता देगा के वो क्या करके आये हैं। वो हर चीज़ का इलम रखता है + +Surah 25: Al-Furqan (The Discrimination) +---------------------------------------- +[25:1] निहायत मुतबर्रक(बा-बरकत) है वो जिसने ये फुरकान अपने बंदे पर नाज़िल किया ता-के सारे जहां वालों के लिए नज़ीर(डर सुनाने वाली/वार्नर) हो +[25:2] वो जो ज़मीन और आसमानों की बादशाही का मालिक है, जिसने किसी को बेटा नहीं बनाया है, जिसके साथ बादशाही में कोई शरीक नहीं है, जिसने हर चीज़ को पैदा किया फिर उसकी एक तकदीर मुकर्रर की +[25:3] लोगों ने उसे छोड़ कर ऐसा माबूद बना लिया जो किसी चीज़ को पेदा नहीं करते बलके खुद पेदा किये जाते हैं, जो खुद अपने लिए भी किसी नफ़े (फ़ायदे) या नुक्सान का इख्तियार नहीं रखते, जो ना मार सकते हैं ना जिला सकते हैं, ना मारे (मृत) हुए को फिर उठा सकते हैं +[25:4] जिन लोगों ने नबी की बात मन से इंकार किया है वो कहते हैं के ये फुरकान एक मन गड़बड़ चीज है जैसे इस शक्स ने आप ही गड़बड़ ली है और कुछ दूसरे लोगों ने इस काम में इसकी मदद की है। बड़ा जुल्म और सख्त झूठ है जिसपर ये लोग उतर आए हैं +[25:5] कहते हैं ये पुराने लोगों की लिखी हुई चीज़ें हैं जिन्हें ये शक्स नक़ल (कॉपी) करता है और वो इसे सुबह ओ शाम सुनायी जाती हैं +[25:6] (ऐ मुहम्मद) इनसे कहो के “इसे नाज़िल किया है उसने जो ज़मीन और आसमान का भे डी (रहस्य) जानता है”। हकीकत ये है कि वो बड़ा गफूर उर रहीम (क्षमाशील और दयालु) है +[25:7] कहते हैं "ये कैसा रसूल है जो खाना खाता है और बाज़ारों में चलता फिरता है? क्यों ना इसके पास कोई फरिश्ता भेजा गया जो इसके साथ रहता है और (ना मनने वालों को) धमाका +[25:8] हां और कुछ नहीं तो इसके लिए कोई खजाना ही उतार दिया जाता, या इसके पास कोई बाग (बगीचा) ही होता जैसा ये (इत्मिनान की) रोजी हासिल करता।'' और जालिम कहते हैं '' तुम लोग तो एक सहर जदा (मोहित) आदमी के पीछे लग गए हो'' +[25:9] देखो, कैसी कैसी अजीब हुज्जतें (तर्क) ये लोग तुम्हारे आगे पेश कर रहे हैं, ऐसे बहके हैं के कोई ठिकाने की बात इनको नहीं समझती +[25:10] बड़ा बराकात है वो जो अगर चाहे तो इनकी तजवीज-करदा चीज़ों से भी ज़्यादा बढ़ चढ़ कर तुमको दे सकता है, (एक नहीं) बहुत सारे बाग (बगीचे) जिनके नीचे नहरेन बहती हैं, और बड़े-बड़े महल +[25:11] असल बात ये है कि ये लोग "उस घड़ी" को झुटला चुके हैं और जो हमें घड़ी को झुटलाये उसके लिए हम भटकते हैं हुई आग मुहैय्या कर राखी है +[25:12] वो जब डर से इनको देखेगी तो ये उसके गजब और जोश की आवाजें सुन लेंगे +[25:13] और जब ये दस्त ओ पा-बस्ता (जंजीरों में जकड़े) उसमें एक तंग जगह थूंसे जाएंगे तो अपनी मौत को पुकारने लगेंगे +[25:14] (हमारा वक्त इनसे कहा जाएगा के) आज एक मौत को नहीं बहुत सी मौत को पुकारो +[25:15] इनसे पूछो, ये अंजाम अच्छा है या वो आबादी जन्नत जिसका वादा खुदा-तरस पहरेजगारों से किया गया है? जो उनके अमल की जजा और उनके सफर की आखिरी मंजिल होगी +[25:16] जिस में उनकी हर ख्वाहिश पूरी होगी, जिसमें वो हमेशा हमेशा रहेंगे, जिसका अता करना तुम्हारे रब के ज़िम्मे एक वाजिब उल अदा वादा है +[25:17] और वो वही दिन होगा जबके (तुम्हारा रब) लोगों को भी घेर लेगा और इनके उन माबूदों को भी बुला लेगा जिन्हे आज ये अल्लाह को चोद कर पूछ रहे हैं। फिर वो उनसे पूछेगा "क्या तुमने मेरे साथ बंदों को गुमराह किया था? या ये खुद राह-ए-रास्त से भटक गए थे?" +[25:18] वो अर्ज करेंगे के "पाक है आप की जात, हमारी तो ये भी मजाल न थी के आप के सिवा किसी को अपना मौला बनाएं, मगर आप ने इनको और इनके बाप को खूब सामान ए जिंदगी दिया हट्टा के ये सबक भूल गए और शामत ज्यादा होकर" रहे” +[25:19] यूं झूठला देंगे वो (तुम्हारे मजबूर) तुम्हारी उन बातों को जो आज तुम कह रहे हो, फिर तुम ना अपनी शामत (सजा) ताल सकोगे ना कहीं से मदद पा सकोगे। और जो भी तुम में से ज़ुल्म करे उसे हम असल अज़ाब का मजा दिखाएंगे +[25:20] (ऐ मुहम्मद), तुमसे पहले जो रसूल भी हमने भेजा था वो सब भी खाना खाने वाले और बाज़ारों में चलने फिरने वाले लोग ही थे। दरसल हमने तुम लोगों को एक दूसरे के लिए आज़माइश का ज़रिया बना दिया है, क्या तुम सब्र करते हो? तुम्हारा रब सब कुछ देखता है +[25:21] जो लोग हमारे हुज़ूर पेश होने का अंदेशा नहीं रखते वो कहते हैं "क्यों ना फ़रिश्ते हमारे पास भेजे जाएँ? या फिर हम अपने रुब को देखेंगे? बड़ा घमंड ले बैठे ये अपने नफ़्स में और हद से गुज़र गए ये अपनी सरकशी में +[25:22] जिस रोज़ ये फरिश्तों को देखेंगे वो मुजरेमो के लिए किसी बशारत (खुश खबरी) का दिन न होगा, गाल उठेंगे के पनाह-ब-खुदा +[25:23] और जो कुछ भी इनका किया धरा है उसे लेकर हम गुबार (धूल) की तरह उड़ा देंगे +[25:24] बस वही लोग जो जन्नत के मुस्तहिक हैं उस दिन अच्छी जगह ठहरेंगे और दोपहर (मिड-डे) गुजारने को उम्मीद मुकाम पाएंगे +[25:25] आसमान को चीरता हुआ एक बादल हमें रोज नामदार होगा और फरिश्तों के परे के परे (रैंक के बाद रैंक) उतार दिए जाएंगे +[25:26] हमें रोज़ हक़ीक़ी बादशाही सिर्फ़ रहमान की होगी और वो मुनकिरीन के लिए बड़ा सख्त दिन होगा +[25:27] ज़ालिम इंसान अपना हाथ चबाएगा और कहेगा "काश मैंने रसूल का साथ दिया होगा +[25:28] हाय मेरी कम्बख्त, काश मैंने फलां शक्स को दोस्त ना बनाया होता +[25:29] उसके बहकाए में आकर मैंने वो हिदायत ना मानी जो मेरे पास आई थी। शैतान इंसान के हक में बड़ा ही बेवफा निकला” +[25:30] और रसूल कहेगा के “ऐ मेरे रब, मेरी क़ौम के लोगों ने इस कुरान को निशाना बनाकर बना लिया था।” उपहास)'' +[25:31] (ऐ मुहम्मद), हमने तो इसी तरह मुजरेमो को हर नबी का दुश्मन बनाया है, और तुम्हारे लिए तुम्हारा रब हाय रहनुमाई और मदद को काफी है +[25:32] मुनकिरीन कहते हैं ''इस शक्स पर सारा कुरान एक ही वक्त में क्यों न उतार दिया गया? हां, ऐसा इस लिए किया गया है के इसको अच्छी तरह हम तुम्हारे जेहन नशीं करते रहे और (इसी गरज के लिए) हमने इसको एक खास तरतीब के साथ अलग अलग अजजा की शक्ल दी है +[25:33] और (इसमें ये मसलाहत भी है) के जब कभी वो तुम्हारे सामने कोई निराली बात (या अजीब सवाल) लेकर आए, उसका ठीक जवाब बार वक्त हमें तुम्हें दे दिया और बेहतरी तरीक़े से बात खोल दी +[25:34] जो लोग औंधे मुँह जहन्नुम की तरफ ढकेले जाने वाले हैं उनका मौक़ुफ़ बहुत बुरा (सबसे ज्यादा) ग़लत) और उनकी राह हद दर्ज़ ग़लत है +[25:35] हमने मूसा को किताब दी और उसके साथ उसके भाई हारून को मददगार के तौर पर लगाया +[25:36] और उनसे कहा के जाओ उस क़ौम की तरफ जिसने हमारी आयत को झुटला दिया है। आख़िर ई कर उन लोगों को हमने तबाह करके रख दिया +[25:37] यही हाल क़ौम ए नूह का हुआ जब उन्होन ने रसूलों की तकज़ीब की, हमने उनको गर्क (डूब/डूबा) करदिया और दुनिया भर के लोगों के लिए एक निशान ए इबरत बना दिया, और इन ज़ालिमों के लिए एक दर्दनाक अज़ाब हमने मुहैय्या कर रक्खा है +[25:38] इसी तरह अद और समूद और असहाब ए रस और बीच की सदियों के बहुत से लोग तबाह हो गए +[25:39] और उन में से हर एक को हमने (पहले तबाह होने वालों की) मिसालें दे-दे कर समझा, और आखिर ए कार हर एक को नष्ट कर दिया +[25:40] और उस बस्ती पर तो इनका गुजर हो चुका है, जिसपर बढ़तीं बारिश बरस गई थी। क्या इन्होन ने उसका हाल देखा ना होगा? मगर ये मौत के बाद दूसरी जिंदगी की तवक्कू ही नहीं रखते +[25:41] ये लोग जब तुम्हें देखते हैं तो तुम्हारा मज़ाक बना लेते हैं, (कहते हैं) “क्या ये शक्स है जिसे खुदा ने रसूल बना कर भेजा है +[25:42] इसने तो हमें गुमराह करके अपने मबूदों से बरगश्ता(आवारा/बेहका/गुमराह) हाय करदिया होता अगर हम उनकी अकीदत पर जाम ना गए होते”। अच्छा, वो वक्त दूर नहीं है जब अजब देख कर इन्हें खुद मालूम हो जाएगा कि कौन गुमराही में दूर निकल गया था +[25:43] कभी तुमने उस लड़के के हाल पर गौर किया है जिसने अपनी ख्वाहिश ए नफ्स को अपना खुदा बना लिया हो? क्या तुम ऐसे शक्स को राह ए रास्ते पर लाने का ज़िम्मा ले सकते हो +[25:44] क्या तुम समझते हो के अंदर से अक्सर लोग सुनते और समझते हो? ये तो जानवरों की तरह हैं, बलके उनसे भी गए गुज़रे +[25:45] तुमने देखा नहीं के तुम्हारा रब किस तरह साया फैला देता है? अगर वो चाहता तो उसे डेमी (स्थिर) बना देता। हमने सूरज को तैयार किया (सूरज इसका पायलट) बनाया +[25:46] फिर (जैसा जैसा सूरज उठा जाता है) हम इस साए को रफ्ता रफ्ता अपनी तरफ समित-ते चले जाते हैं +[25:47] और वो अल्लाह ही है जिसने रात को तुम्हारे लिए लिबास, और नींद को सुकून ए मौत, और दिन को जी उठने का वक्त बनाया +[25:48] और वही है जो अपनी रहमत के आगे, आगे हवाओं को बशारत बना कर भेजता है फिर आसमां से पाक पानी नाज़िल करता है +[25:49] ता-के एक मुर्दा इलके को इसकी ज़रिये जिंदगी बक्शे और अपनी मख़लूक में से बहुत से जानवर और इंसानों को प्यास बुझाएं +[25:50] क्या करिश्मा को हम बार-बार इनके सामने लाते हैं ता-के वो कुछ सबक लें। मगर अक्सर लोग कुफ्र और नाशुक्र के सिवा कोई दूसरा रवैय्या इख्तियार करने से इंकार करते हैं +[25:51] अगर हम चाहते तो एक एक बस्ती में एक एक नजीर (डर सुनाने वाला) उठा खड़ा करते +[25:52] पास (ऐ नबी), का फिरों की बात हरगिज़ ना मानो और इस कुरान को लेकर इनके साथ जिहाद-ए-कबीर करो +[25:53] और वही है जिसने दो समंदरों को मिला रक्खा है, एक लज़ीज़ ओ शीरीन (मीठा), दूसरा तल्ख ओ शूर (कड़वा और नमकीन), और दोनों के दरमियान एक पर्दा हयाल है, एक रुकावत है (दुर्गम) बैरियर) जो उन्हें गुड़-मुद होने से रोके हुए हैं +[25:54] और वही है जिसने पानी से एक बशर (इंसान) पैदा किया, फिर उसे नसब और सुसराल (खून से और शादी से) के दो अलग सिलसिले चलाये। तेरा रब बड़ा ही क़ुदरत वाला है +[25:55] क्या खुदा को छोड़ दिया गया है कर लोग उनको पूज रहे हैं जो ना इनको नाफा पाहुंचा सकते हैं ना नुक्सान, और ऊपर से मजीद ये के काफिर अपने रब के मुकाबले में हर बागी का मददगार बना हुआ है +[25:56] (ऐ मुहम्मद), तुमको तो हमने बस एक मुबाशीर (खुश खबरी देने वाला) और नज़ीर (डर सुनाने वाला) बना कर भेजा है +[25:57] इनसे कहदो के “मैं इस काम पर तुमसे कोई उजरत (इज़ाजा) नहीं मांगता, मेरी उजरत बस यही है कि जिसका जी चाहे” वो अपने रब का रास्ता इख्तियार करले” +[25:58] और (ऐ मुहम्मद) हमें खुदा पर भरोसा रक्खो जो जिंदा है और कभी मरने वाला नहीं, उसकी हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो, अपने बंदों के गुनाहों से बस उसकी बा-खबर होना काफी है +[25:59] वो जिसने ची (छह) दीनों में ज़मीन और आसमान को और उन सारी चीज़ों को बना कर रख दिया जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान हैं, फिर आप ही (क़ायनात के तख्त ए सल्तनत) 'अर्श' पर जलवा फरमा हुआ। रहमान, उसकी शान बस किसी जाने वाले से पूछो +[25:60] लोगों से जब कहा जाता है कि इस रहमान को सजदा करो तो कहते हैं "रहमान क्या होता है? क्या बस जिसे तू कहता है उसे हम सजदा करते फिरें?" ये दावत इनकी नफ़रत में उल्टा और इज़ाफा करती है +[25:61] बड़ा मुतबर्रक (बा-बरकत) है वो जिसने आसमान में बुर्ज (किलेबंद गोले) बनाए और उसमें एक चिराग और एक चमकता चांद रोशन किया +[25:62] वही है जिसने रात और दिन को एक दूसरे का जानशीन बनाया, हर उस शक्स के लिए जो सबक लेना चाहे, या शुक्र गुज़ार होना चाहे +[25:63] रहमान के (असली) बंदे वो है जो ज़मीन पर नरम चल चलते हैं और जाहिल उनके मुंह को आएं तो कह देते हैं कि तुमको सलाम +[25:64] जो अपने रब के हुजूर सजदे और कयाम में रातें गुज़ारते हैं +[25:65] जो दुआएं करते हैं के "ऐ हमारे रब, जहन्नुम के अज़ाब से हमको बचा ले, उसका अज़ाब तो जान का लागू है +[25:66] वो तो बड़ा ही मुस्तकर (बुरा ठिकाना) और मुकाम है" +[25:67] जो खर्च करते हैं तो ना फ़िज़ूल खर्च करते हैं ना बुख़्ल, बलके उनका खर्च दोनों इन्तेहाओं (चरम) के दरमियान ऐतदाल पर क़याम रहता है +[25:68] जो अल्लाह के सिवा किसी और माबूद को नहीं पुकारते, अल्लाह की हराम की हुई किसी जान को ना-हक़्क़ हलाक नहीं करते, और ना ज़िना (व्यभिचार) के मुर्तकीब होते हैं। ये काम जो कोई करेगा वो अपने गुनाह का बदला पाएगा +[25:69] कयामत के रोज़ उसको मुकर्रर अज़ाब दिया जाएगा और इसमें वो हमेशा ज़िल्लत के साथ पड़ा रहेगा +[25:70] इल्ला ये के कोई (गुनाहों के बाद में) तौबा कर चुका हो और ईमान ला कर अमल ए सलीह करने लगा हो, ऐसे लोगों की बुराइयों को अल्लाह भलाइयों से बदल देगा और वो बड़ा गफूर ओ रहीम है +[25:71] जो शक्स तौबा करके नीक अमली इख्तियार करता है वो तो अल्लाह की तरफ पलट आता है जैसा के पलटने का हक़ है +[25:72] (और रहमान के बंदे वो हैं) जो झूठ के गवाह नहीं बनते और किसी चीज़ पर उनका गुज़र हो जाता है तो शरीफ़ आदमियों की तरह गुज़र जाते हैं +[25:73] जिन्हें अगर उनके रब की आयतें सुना कर हिदायत की जाती है तो वो उसपर अंधे और बाहर बनकर नहीं रह जाते +[25:74] जो दुआएं मांगते हैं के, "ऐ हमारे रब, हमें अपनी बीवीयों और अपनी औलाद से आंखों की ठंडक दे, और हमको परहेज़गारों का इमाम बाना।” +[25:75] ये हैं वो लोग जो अपने सब्र का फल मंजिल-ए-बुलंद की शक्ल में पाएंगे, आदाब ओ तस्लीमात से उनका इस्तकबाल होगा +[25:76] वो हमेशा हमेशा वहां रहेंगे। क्या ही अच्छा है वो मुस्तकर (उत्कृष्ट निवास) और वो मुक़ाम +[25:77] (ऐ मुहम्मद), लोगों से कहो, "मेरे रब को तुम्हारी क्या हाजात पड़ी है अगर तुम उसको न पुकारो। अब के तुमने झूठला दिया है, अंकरीब वो सजा पाओगे के जान छुड़ानी मुहाल होगी" + +Surah 26: Ash-Shu'ara' (The Poets) +---------------------------------------- +[26:1] ता सीन मीम +[26:2] ये किताब ए मुबीन की आयत हैं +[26:3] (ऐ मुहम्मद), शायद तुम इस ग़म (दुःख) में अपनी जान खो दोगे के ये लोग ईमान नहीं लाते +[26:4] हम चाहें तो आसमां से ऐसी निशानी नाज़िल कर सकते हैं के इनकी गर्दनें इसके आगे झुक जाएँ +[26:5] लोगों के पास रहमान की तरफ से जो नई हिदायत भी आती है ये उसे मुँह मोड़ लेते हैं +[26:6] अब के ये झूठला चुके हैं, आख़िर इन्हें इस चीज़ की हकीकत (मुखतलिफ़) कहा जाता है तरीक़ों से) मालूम हो जाएगी जिसका ये मज़ाक उड़ाते रहे हैं +[26:7] और क्या इन्होन ने कभी ज़मीन पर निगाह नहीं डाली के हमने कितनी कसीर मिकदार में हर तरह की उम्मीद नबातात (वनस्पति) इस्मेन पैदा की है +[26:8] यकीनन इसमें एक निशानी है, मगर मुझमें अक्सर माने वाले नहीं +[26:9] और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी +[26:10] इन्हें वक़्त का क़िस्सा सुनाओ जबके तुम्हारे रब ने मूसा को पुकारा “ज़ालिम क़ौम के पास जा +[26:11] फ़िरौन की क़ौम के पास, क्या वो नहीं डरते?” +[26:12] उसने अर्ज़ किया "ऐ रब, मुझे ख़ौफ़ है के वो मुझे झुतला देंगे +[26:13] मेरा सीना घुट-ता है और मेरी ज़ुबान नहीं चलती, आप हारून की तरफ़ रिसालत भेजें +[26:14] और मुझपर उनके हाँ एक जुर्म का इल्ज़ाम भी है, इसके लिए मैं डरता हूं के वो मुझे कत्ल कर देंगे” +[26:15] फरमाया “हरगिज नहीं, तुम दोनों जाओ हमारी निशानियां लेकर, हम तुम्हारे साथ सब कुछ सुनते रहेंगे +[26:16] फिरौन के पास जाओ और उसे कहो, हमको रब उल आलमीन ने इसलिए भेजा है +[26:17] के तू बनी इजराइल को हमारे साथ जाने दे” +[26:18] फिरौन ने कहा “क्या हमने तुझको अपना हां बच्चा सा नहीं पाला था? तू नहीं अपने उमर के काई साल हमारे हां गुजारे +[26:19] और इसके बाद कर गया जो कुछ कर गया, तू बड़ा एहसान फरामोश आदमी है” +[26:20] मूसा ने जवाब दिया “उस वक्त वो काम मैंने (अनजाने में) कर दिया था +[26:21] फिर मैं तुम्हारा खौफ से भाग गया। इसके बाद मेरे रब ने मुझको हुकुम अता किया और मुझे रसूलन में शामिल फरमा लिया +[26:22] रहा तेरा एहसान जो तू नई मुझपर जानता है तो इसकी हकीकत ये है के तू नई बनी इसराइल को गुलाम बना लिया था” +[26:23] फिरौन ने कहा “और ये” रब-उल-आलमीन क्या होता है?” +[26:24] मूसा ने जवाब दिया "आसमानो और ज़मीन का रब, और उन सब चीज़ों का रब जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान हैं, अगर तुम यक़ीन लाने वाले हो।" +[26:25] फिरौं ने अपने गिर्द ओ पेश के लोगों से कहा 'सुनते हो?' +[26:26] मूसा ने कहा, "तुम्हारा रब भी और तुम्हारे उन आबा ओ अजदाद का रुब भी जो गुजर चुके हैं" +[26:27] फिरौन ने (हाज़िरिन से) कहा "तुम्हारे ये रसूल साहब जो तुम्हारी तरफ भेजे गए हैं, बिल्कुल ही पागल मालूम होते हैं" +[26:28] मूसा ने कहा "मशरिक़ ओ मगरिब और जो कुछ इनके दरमियान है सबका रब, अगर आप लोग कुछ अक़ल रखते हैं" +[26:29] फ़िरौन ने कहा "अगर तू नहीं मेरे सिवा किसी और को मबूद माना तो तुझे मैं उन लोगों में शामिल कर दूँगा जो क़ैद खानो में पड़े सध (सड़) रहे हैं” +[26:30] मूसा ने कहा “अगरचे मैं ले आऊं तेरे सामने एक सारी चीज़ भी?” +[26:31] फ़िरौन ने कहा "अच्छा तो ले आ अगर तू सच्चा है" +[26:32] (उसकी ज़ुबान से ये बात निकलते ही) मूसा ने अपना आसा (कर्मचारी) फेंक और यकायक वो एक सरेह अज़धा (सांप/साँप) था +[26:33] फिर उसने अपना हाथ (बगल) से) खिंचा और वो सब देखने वालों के सामने चमक रहा था +[26:34] फिरौन अपने गिर्द ओ पेश के सरदारों से बोला “ये शक्स यकीनन एक माहिर जादूगर है +[26:35] चाहता है के अपने जादू के ज़ोर से तुमको तुम्हारे मुल्क से निकल दे, अब तुम बताओ तुम क्या हुकुम देते हो?” +[26:36] उनहों ने कहा " इसे और इसके भाई को रोक लीजिए और शहर में हरकारे (हेराल्ड्स) भेज दीजिए +[26:37] के हर सियाने जादूगर को आपके पास ले आइए" +[26:38] चुनांचे एक रोज़ मुक़र्रर वक़्त पर जादूगर इकठ्ठे करलिये गए +[26:39] और लोगों से कहा गया “तुम इज्तिमा में चलोगे +[26:40] शायद के हम जादूगरों के दीन ही पर रह जाएंगे अगर वो गालिब रहे” +[26:41] जब जादूगर मैदान में आ गए तो उनको ने फिरौन से कहा “हमें इनाम तो मिलेगा अगर हम गालिब” रहे?” +[26:42] उसने कहा "हां, और तुम तो हमें वक्त मुकर्रबीन (मेरे सबसे करीब) में शामिल हो जाओगे" +[26:43] मूसा ने कहा "फेंको जो तुम्हें फेंकना है" +[26:44] उनहों ने फवारां अपनी रसियां ​​और लाठियां फेंक दी और बोले "फिरौं के इकबाल से हम ही गालिब रहेंगे।” +[26:45] फिर मूसा ने अपना आसा (कर्मचारी) फेंक दिया तो यकायक वो उनके झूठे करिश्माओं को हड़प कर्ता चला जा रहा था +[26:46] इसपर सारे जादूगर बे-इख्तियार सजदे में गिर पड़े +[26:47] और बोल उठे के " मान गए हम रब-उल-आलमीन को +[26:48] मूसा और हारून के रब को” +[26:49] फिरौन ने कहा “तुम मूसा की बात मान गए क़ब्ल इसके के मैं तुम्हें इजाज़त देता! जरूर ये तुम्हारा बड़ा है जिसने तुम्हें जादू सिखाया है। अच्छा, अभी तुम्हें मालूम हुआ जाता है, मैं तुम्हारे हाथ पांव मुखालिफ़ सिम्तन (विपरीत पक्ष) में काटवाऊंगा और तुम सबको सूली पर चढ़ा दूंगा" +[26:50] उनहों ने जवाब दिया "कुछ परवा नहीं, हम अपने रुब के हुजूर पहन जायेंगे +[26:51] और हमें तवक्कू है के हमारा रब हमारे गुनाह माफ कर देगा क्योंकि सबसे पहले हम ईमान लाए हैं" +[26:52] हमने मूसा को वही (रहस्योद्घाटन) भेजी के "रात ओ रात मेरे बंदों को लेकर निकल जाओ, तुम्हारा पीछा किया जाएगा" +[26:53] इसपर फिरौन ने (फौजीन) जमा करने के लिए) शहर में नकीब (हेराल्ड्स) भेज दिए +[26:54] (और केहला भेजा) के “ये कुछ मुट्ठी भर लोग हैं +[26:55] और इन्होन ने हमको बहुत नाराज किया है +[26:56] और हम एक ऐसी जमात हैं जिसका शेवा हर वक्त चौकन्ना रहना है है" +[26:57] इस तरह हम उन्हें उनके बाघों और चश्में (पानी के झरने) +[26:58] और खजानो और उनकी बहतरीन कयाम-गाहों से निकल लाए +[26:59] ये तो हुआ उनके साथ और (दूसरी तरफ) बानी इजराइल को हमने इन सब चीज़ों का वारिस करदिया +[26:60] सुबह होते ही ये लोग उनके ताक़ुब (पीछा) में चल पड़े +[26:61] जब दोनों गिरोहों का आमना सामना हुआ तो मूसा के साथी गाल उठे के "हम तो पकड़े गए" +[26:62] मूसा ने कहा "हरगिज़ नहीं मेरे साथ मेरा रब है, वो ज़रूर मेरी रहनुमायी फरमायेगा” +[26:63] हमने मूसा को वही के ज़रिये से हुकुम दिया के “मार अपना आसा (कर्मचारी) समंदर पार” क्योंकि समंदर पहँट गया और उसका हर टुकड़ा एक अज़ीम ओ शान पहाड़ की तरह हो गया +[26:64] उसी जगह हम दूसरे गिरो ​​को भी करीब ले आओ +[26:65] मूसा और उन सब लोगों को जो उसके साथ थे हमने बचा लिया +[26:66] और दूसरों को गर्क (डूबा/डूब) करदिया +[26:67] क्या वक्त में एक निशानी है, मगर इन लोगों में से अक्सर मन्ने वाले नहीं हैं +[26:68] और हकीकत ये है के तेरा रब्ब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी +[26:69] और यहीं इब्राहीम का क़िस्सा सुनाओ +[26:70] जबके उसने अपने बाप और अपनी क़ौम से पूछा था के "ये क्या चीज़ हैं जिनको तुम पूजते हो?" +[26:71] उनको ने जवाब दिया “कुछ बुथ (मूर्तियां/मूर्तियां) हैं जिनकी हम पूजा करते हैं और इनकी सेवा में हम लगे रहते हैं” +[26:72] उसने पूछा “क्या ये तुम्हारी सुनते हैं जब तुम इन्हें पुकारते हो +[26:73] हां ये तुम्हें कुछ नफ़ा या नुक्सान पहुंचते हैं?” +[26:74] उनको ने जवाब दिया " नहीं, बल्कि हमने अपने बाप दादा को ऐसा ही किया पाया है" +[26:75] इसपर इब्राहिम ने कहा " कभी तुमने (आंखें खोल कर) उन चीज़ों को देखा भी जिनकी बंदगी तुम +[26:76] और तुम्हारे पिछले बाप दादा बजा लाते रहे +[26:77] मेरे तो ये सब दुश्मन हैं, बाजुज़ एक रब उल आलमीन के +[26:78] जिसने मुझे भुगतान किया, फिर वही मेरी रहनुमाई फरमाता है +[26:79] जो मुझे खिलाता और पिलाता है +[26:80] और जब मैं बीमार हो जाता हूं तो वही मुझे शिफा देता है +[26:81] जो मुझे मौत देगा और फिर दोबारा मुझको जिंदगी बक्शेगा +[26:82] और जिसकी मैं उम्मीद रखता हूं के रोज ए जजा में वो मेरी खाता माफ फरमादेगा” +[26:83] (इस्के बाद इब्राहिम ने दुआ की) “ऐ मेरे रब, मुझे हुकुम अता कर और मुझको सालिहों (नए लोगों) के साथ मिला +[26:84] और बाद के आने वालों में मुझको सच्ची नामवारी आता कर +[26:85] और मुझे जन्नत ए नईम के वारिसों (उत्तराधिकारी) में शामिल फरमा +[26:86] और मेरे बाप को माफ़ करदे के बहकावे वो गुमराह लोगों में से हैं +[26:87] और मुझे उस दिन रुसवा ना कर जबके सब लोग ज़िंदा करके उठेंगे +[26:88] जबके ना माल कोई फ़ायदा देगा ना औलाद +[26:89] बज़ुज़ इसके के कोई शक्स क़ल्ब-ए-सलीम (स्वस्थ हृदय) लिए हुए अल्लाह के हुजूर हाज़िर हो” +[26:90] (उस रोज़) जन्नत परहेज़गारों के करीब ले आएगी +[26:91] और दोज़ख बहके हुए लोगों के सामने खुल जाएगी +[26:92] और उनसे पूछा जाएगा के “अब कहाँ है” वो जिनकी तुम खुदा को छोड़ कर इबादत करते थे +[26:93] क्या वो तुम्हारी कुछ मदद कर रहे हैं या खुद अपना बचाव कर सकते हैं?” +[26:94] फिर वो माबूद और ये बहके हुए लोग +[26:95] और इबलीस के लश्कर सबके सब इसमें ऊपर तले ढकेल दिए जाएंगे +[26:96] वहां ये सब आपस में झगड़ेंगे और ये बहके हुए लोग (अपने माबूदों से) कहेंगे +[26:97] के “खुदा की कसम, हम तो सारी गुमराही में मुबतला थे +[26:98] जबके तुमको रब उल आलमीन की बाराबरी का दरजा दे रहे थे +[26:99] और वो मुजरिम लोग ही थे जिन्होन ने हमको इस गुमराही में डाला +[26:100] अब ना हमारा कोई सिफ़रीशी है +[26:101] और ना कोई जिगरी दोस्त +[26:102] काश हमें एक दफा फिर पलटने का मौका मिल जाए तो हम मोमिन हों” +[26:103] यकीनन इस में एक बड़ी निशानी है, मगर मेरे अंदर से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं +[26:104] और हकीकत ये है के तेरा रुब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी +[26:105] क़ौम ए नूह ने रसूलों को झुटलाया +[26:106] याद करो जबके उनके भाई नूह ने उनसे कहा था "क्या तुम डरते नहीं हो +[26:107] मैं तुम्हारे लिए एक अमानत दार रसूल हूं +[26:108] लिहाज़ा तुम अल्लाह से डरो और +[26:109] +[26:110] +[26:111] उनहों ने जवाब दिया "क्या हम तुझे मान लें हलांके तेरी जोड़ी रज़िल-तरीन (सबसे नीच/नीच) लोगों ने इख्तियार की है?" +[26:112] नूह ने कहा “मैं क्या जानू के उनके अमल कैसे हैं +[26:113] उनका हिसाब तो मेरे रब के ज़िम्मे है, काश तुम कुछ शूर से काम लो +[26:114] मेरा ये काम नहीं है के जो ईमान लायें उनको मैं धुतकार दूं +[26:115] मैं तो बस एक साफ साफ मुतनब्बे (चेतावनी) करने वाला आदमी हूं" +[26:116] उनहों ने कहा "ऐ नूह, अगर तू बाज़ ना आया तो फिटकरे हुए लोगों में शामिल होकर रहेगा" +[26:117] नूह ने दुआ की "ऐ मेरे रब, मेरी क़ौम ने मुझे झुटला दिया +[26:118] अब मेरे और उनके दरमियान दो-टूक फैसला करदे और मुझे और जो मोमिन मेरे साथ हैं इनको निजात दे” +[26:119] आखिर ए कार हमने उसको और उसके साथियों को एक भारी हुई कश्ती में बचा लिया +[26:120] और उसके बाद बाकी लोगों को गर्क (डूब) कर दिया +[26:121] यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर लोग माने वाले नहीं +[26:122] और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी +[26:123] आद ने रसूलों को झुटलाया +[26:124] याद करो जबके उनके भाई हुड ने उनसे कहा था "क्या तुम डरते नहीं +[26:125] मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं +[26:126] लिहाजा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो +[26:127] मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है +[26:128] ये तुम्हारा क्या हाल है के हर ऊंचे मक़ाम पर ला हासिल एक यादगार इमारत बना डालते हो +[26:129] और बड़े-बड़े क़सर (विशाल महल) तामीर करते हो गोया तुम्हें हमेशा रहना है +[26:130] और जब किसी पर हाथ डालते हो जब्बार बन कर डालते हो +[26:131] पास तुम लोग अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो +[26:132] डरो उसे जिसने वो कुछ तुम्हें दिया है जो तुम जानते हो +[26:133] तुम्हें जानवर दिए, औलादें दी +[26:134] बाग दिए और चश्मे (पानी के झरने) दिए +[26:135] मुझे तुम्हारे हक में एक बड़े दिन के अज़ाब का डर है" +[26:136] उनको ने जवाब दिया " तू हिदायत कर या ना कर, हमारे लिए यकसन है +[26:137] ये बातें तो यूं ही होती चली आई हैं +[26:138] और हम अज़ाब में मुब्ताला होने वाले नहीं हैं" +[26:139] आख़िर ए कार उनहों ने उसे झुतला दिया और हमने उनको हलाक कर दिया। यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर लोग मन्ने वाले नहीं हैं +[26:140] और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बर्दस्त भी है और रहीम भी +[26:141] समूद ने रसूलों को झुटलाया +[26:142] याद करो जबके उनके भाई सालेह ने उनसे कहा "क्या तुम डरते नहीं +[26:143] मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं +[26:144] लिहाज़ा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो +[26:145] मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है +[26:146] क्या तुम उन सब चीजों के दरमियान, जो यहां हैं, बस यूंही इत्मिनान से रहना दिए जाओगे +[26:147] बागों (बगीचों) और चैसमन में +[26:148] खेतों और नखलिस्तानो (खजूर-कुंजों) में जिनके खोसे रस भरे हैं +[26:149] तुम पहाड़ खोद खोद कर फखरिया (गर्व से) उन में इमरतें बनाते हो +[26:150] अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो +[26:151] उन बे-लगाम लोगों की इताअत ना करो +[26:152] जो ज़मीन में फसाद बरपा करते हैं और कोई इस्लाह नहीं करते” +[26:153] उन्हें ने जवाब दिया “तू महज़ एक सहर-ज़ादा (जादू से प्रभावित) आदमी है +[26:154] तू हम जैसा एक इंसान के सिवा और क्या है, ला कोई निशानी अगर तू सच्चा है” +[26:155] सालेह ने कहा “ये ऊंटनी (वह-ऊंटनी) है एक दिन इसके पीने का है और एक दिन तुम सब के पानी लेने का +[26:156] इसको हरगिज़ न छेड़ना (छेड़छाड़) वरना एक बुरे दिन का अज़ाब तुमको आ लेगा” +[26:157] मगर उन्हें ने इसकी कुंचे काट दी (उसे चोट लगी) और आख़िर-ए-कार पछताते रह गए +[26:158] अज़ाब ने उन्हें आ लिया, यकीनन इस्मे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर मन्ने वाले नहीं +[26:159] और हकीकत ये है के तेरा रब्ब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी +[26:160] लूट की क़ौम ने रसूलों को झुटलाया +[26:161] याद करो जबके उनके भाई लुट ने उनसे कहा था "क्या तुम डरते नहीं +[26:162] मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूँ +[26:163] लिहाज़ा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो +[26:164] मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है +[26:165] क्या तुम दुनिया की मखलूक में से मर्दों के पास जाते हो +[26:166] और तुम्हारी बीवीयों में तुम्हारे रब ने तुम्हारे लिए जो कुछ पेदा किया है उसे छोड़ देते हो? बल्के तुम लोग तो हद से ही गुजर गए हो।” +[26:167] उनहों ने कहा "ऐ लुट" अगर तू इन बातों से बाज़ ना आया तो जो लोग हमारी बस्तियों से निकल गए हैं उनमें तू भी शामिल हो कर रहेगा" +[26:168] उसने कहा "तुम्हारे कार्टून पर जो लोग कुद्द (घृणा/घृणा) कर रहे हैं मैं उन में शामिल हूं +[26:169] ऐ परवरदिगार, मुझे और मेरे एहल-ओ-अयाल (मैं और मेरे लोग/मेरा परिवार) को इनकी बदकिरदारियों से निजात दे” +[26:170] आखिर ए कार हमने उसे और उसके सब एहाल-ओ-अयाल को बचा लिया +[26:171] बज़ुज़ एक बुदिया के जो पीछे रह जाने वालों में से थी +[26:172] फिर बाकी मांदा(बाकी) लोगों को हमने तबाह कर दिया +[26:173] और उन पर बरसात एक बरसात, बड़ी ही बुरी बारिश थी जो उन डराए जाने वालों पर नाज़िल हुई +[26:174] यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर इनमें से अक्सर माने वाले नहीं +[26:175] और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी +[26:176] असहाब-उल-अइक़ा ने रसूलों को झुटलाया +[26:177] याद करो जबके शोएब ने उनसे कहा था "क्या तुम डरते नहीं +[26:178] मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं +[26:179] लिहाजा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो +[26:180] मैं काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं, मेरा अजर तो रब्बुल आलमीन के ज़िम्मे है +[26:181] पैमाने ठीक भरो (पूरा माप दो) और किसी को घाटा (कम) ना दो +[26:182] सही तराजू से तोलो +[26:183] और लोगों को उनकी चीजे कम ना दो, जमीन में फसाद ना फैलाओ फिरो +[26:184] और हमें जात का खौफ करो जिसने तुम्हें और गुज़िश्ता नसलों को भुगतान किया है।” +[26:185] उनहों ने कहा "तू महज एक सहर जादा (जादू से प्रभावित) आदमी है +[26:186] और तू कुछ नहीं मगर एक इंसान हम ही जैसा, और हम तो तुझे बिल्कुल झूठा समझते हैं +[26:187] अगर तू सच्चा है तो हमपर आसमान का कोई टुकड़ा गिरा दे" +[26:188] शोएब ने कहा "मेरा रब जानता है जो कुछ तुम कर रहे हो" +[26:189] उन्होन ने उसे झुटला दिया, आखिर-ए-कार छतरी वाले दिन (कैनोपी का दिन) का अज़ाब अनपर आ गया, और वो बदे ही खौफ़-नाक दिन का अज़ाब था +[26:190] यकीनन इसमे एक निशानी है, मगर मेरे अंदर से अक्सर लोग माने वाले नहीं +[26:191] और हकीकत ये है के तेरा रब ज़बरदस्त भी है और रहीम भी +[26:192] ये रब्बुल आलमीन की नाज़िल करदा चीज़ है +[26:193] इसे लेकर तेरे दिल पर अमानत-दार रूह उतरी है +[26:194] ता-के तू उन लोगों में शामिल हो जो (खुदा की तरफ से ख़ल्क़-ए-ख़ुदा को) मुतनब्बेह (चेतावनी) देने वाले हैं +[26:195] साफ़ साफ़ अरबी ज़ुबान में +[26:196] और अगले लोगों की किताबों में भी ये मौजूद है +[26:197] क्या इन (एहले मक्का) के लिए ये कोई निशानी नहीं है के इसे उलेमा-ए-बानी इस्राइल जानते हैं +[26:198] (लेकिन इनकी टोपीदारमी का हाल ये है के) अगर हम इसे किसी अजमी (गैर-अरब) पर भी नाज़िल कर देते हैं +[26:199] और ये (फसीह अरबी कलाम) वो इनको पढ़ कर सुनाता तब भी ये मान कर ना देते +[26:200] इसी तरह हमने इस (ज़िक्र) को मुजरिमों के दिलों में गुज़ारा है +[26:201] वो इसपर ईमान नहीं लाते जब तक अज़ाब ए अलीम ना देख लें +[26:202] फिर जब वो बे-ख़बरी में अनपर आ पड़ता है +[26:203] हम वक़्त कहते हैं "के क्या अब हमें कुछ मोहलत मिल सकती है?" +[26:204] तो क्या ये लोग हमारे अजब के लिए जल्दी मचा रहे हैं +[26:205] तुमने कुछ गौर किया, अगर हम उन्हें बरसों तक ऐश करने की मोहलत भी दे दें +[26:206] और फिर वही चीज उन्पर आ जाए जिसमें इन्हें डराया जा रहा है +[26:207] तो वो सामान-ए-ज़िस्ट (जीवन के प्रावधान) जो उनको मिला हुआ है इनका किस काम आएगा +[26:208] (देखो) हमने कभी किसी बस्ती को इसके बिना हलाक नहीं किया के उसके लिए खबरदार करने वाले हक़ ए हिदायत अदा करने को मौजूद थाय +[26:209] और हम जालिम ना थे +[26:210] इस (किताब ए मुबीन) को शयातीन लेकर नहीं उतरे हैं +[26:211] ना ये काम उनको सजता है, और ना वो ऐसा कर ही सकते हैं +[26:212] वो तो इसकी समात (सुनवाई) तक से दूर रक्खे गए हैं +[26:213] पास (ऐ मुहम्मद), अल्लाह के साथ किसी दूसरे माबूद को न पुकारो, वरना तुम भी सजा पाने वालों में शामिल हो जाओगे +[26:214] अपने करीब-तरीन रिश्तेदारों को डराओ +[26:215] और ईमान लाने वालों में से जो लोग तुम्हारी जोड़ी इख्तियार करें उनके साथ तवाज़ो (विनम्रता/दया) से पेश आओ +[26:216] लेकिन अगर वो तुम्हारी नफ़रमानी करें तो उनसे कहदो के जो कुछ तुम करते हो उसे मैं बारी-उज़-ज़िम्मा (जिम्मेदार नहीं) हूं +[26:217] और हम ज़बरदस्त और रहीम पर तवक्कुल (भरोसा) करो +[26:218] जो तुम्हीं हमें वक्त देख रहा है जब तुम उठते हो +[26:219] और सजदा गुजर लोगों में तुम्हारी नक़ल ओ हरकत पर निगाह रखता है +[26:220] वो सब कुछ सुनने और जाने वाला है +[26:221] लोगन, क्या मैं तुम्हें बातों के शयातें किस पर उतर करते हैं +[26:222] वो हर चाल साज़, बढ़कर पर उतर करते हैं +[26:223] सुनी सुनाई बातें कानों में फूंकते हैं, और उनमें से अक्सर झूठे होते हैं +[26:224] रहे शूरा (कवि), तो उनके पीछे बहके हुए लोग चलते हैं है +[26:225] क्या तुम देखते नहीं हो के वो हर वादी (घाटी) में भटकते हैं +[26:226] और ऐसी बातें कहते हैं जो करते नहीं हैं +[26:227] बज़ुज उन लोगों के जो ईमान लाए और जिन्होन ने नेक अमल किए और अल्लाह को कसरत से याद किया और जब अनपर ज़ुल्म किया गया तो सिर्फ बदला ले लिया, और ज़ुल्म करने वालों को अंकाराब मालूम हो जाएगा के वो किस अंजाम से दो-चार होते हैं + +Surah 27: An-Naml (The Naml) +---------------------------------------- +[27:1] ता सीन। ये आयत हैं कुरान और किताब ए मुबीन की +[27:2] हिदायत और बशारत उन ईमान लाने वालों के लिए +[27:3] जो नमाज कायम करते हैं और जकात देते हैं, और फिर वो ऐसे लोग हैं जो आखिरी पर पूरा यकीन रखते हैं +[27:4] हकीकत ये है के जो लोग आख़िरत को नहीं मानते उनके लिए हमने उनके कार्टूनों को ख़ुशनुमा बना दिया है, इसलिए वो भटकते फिर रहे हैं +[27:5] ये वो लोग हैं जिनके लिए बुरी सज़ा है और आख़िरत में यही सबसे ज़्यादा ख़ासारे (नुक्सान) में रहने वाले हैं +[27:6] और (ऐ मुहम्मद) बिला शुभा तुम ये कुरान एक हकीम ओ आलिम (सर्वज्ञ और सर्वज्ञ) हस्ती की तरफ से पा रहे हो +[27:7] (इन्हें वक्त का क़िस्सा सुनाओ) जब मूसा ने अपने घर वालों से कहा के "मुझे एक आग सी नज़र आई है, मैं अभी तो वहां से कोई खबर लेकर आता हूं या कोई अंगारा चुन लाता हूं ता-के तुम लोग गरम हो सको" +[27:8] वहां जो पहनूं तो निदा (आवाज़/पुकार) आई के "मुबारक है वो जो इस आग में है और जो इसके महोल में है, पाक है अल्लाह सब जहांओं का परवरदिगार +[27:9] ऐ मूसा, ये मैं हूं अल्लाह, ज़बरदस्त और दाना (सर्व-बुद्धिमान) +[27:10] और फेंक तू ज़रा अपनी लाठी।" जुनही के मूसा ने लाठी सांप (सांप) को देखा कि तरह बल खा रही है तो पीठ फिर कर भागा और पीछे मुड़ कर भी ना देखा। "ऐ मूसा, डरो नहीं, मेरे हुजूर रसूल दारा नहीं करते +[27:11] इल्ला ये के किसी ने कसूर किया हो। फिर अगर बुराई के बाद उसने अपनी गलती से अपने फेल (अमल) को बदल लिया तो मैं माफ करने वाला मेहरबान हूं +[27:12] और जरा अपना हाथ अपने गिरेबान मैं तो डालो चमकता हुआ निकलेगा बिना किसी परेशानी के, ये (दोनो निशानियां) नौ (नौ) निशानियों में से हैं फिरौन और उसके क़ौम की तरफ (ले जाने के लिए), वो बदे-किरदार (दुष्ट) लोग हैं” +[27:13] मगर जब हमारी खुली खुली निहसानियां उन लोगों के सामने आईं तो उनहों ने कहा ये तो खुला जादू है +[27:14] उनहों ने सारा-सर जुल्म और गुरु की राह से इन निशानियों का इंकार किया, हलांके दिल उनके कायल (आश्वस्त) हो चुके थे। अब देखलो के उन मुफसीदों का अंजाम कैसा हुआ +[27:15] (दूसरी तरफ) हमने दाऊद ओ सुलेमान को इल्म अता किया और उन्होंने कहा कि शुक्र है हमें खुदा का जिसने हमको अपने बहुत से मोमिन बंदों पर फजीलत अता की +[27:16] और दाऊद का वारिस सुलेमान हुआ और उसने कहा “लोगन, हमें परिन्दों (पक्षियों) की बोलियाँ सिखाई गई हैं और हमें हर तरह की चीज़ें दी गई हैं, बेशक ये (अल्लाह का) नुमाया फ़ज़ल है।” +[27:17] सुलेमान के लिए जिन और इंसानों और परिंदों के लश्कर जमा किए गए थे और वो पूरे ज़ब्त (सख्त अनुशासन) में रक्खे जाते थे +[27:18] एक मरतबा वो उनके साथ कूच (मार्च) कर रहा था) यहां तक ​​के जब ये सब चुनौतियां (चींटियों) की वादी (घाटी) में पहुंचे तो एक चुनती (चींटी) ने कहा "ऐ चुनिटों, अपने बिलों (छेद) में घुस जाओ, कहीं ऐसा ना हो के सुलेमान और उसके लश्कर तुम्हें कुचलें और उन्हें खबर भी ना हो" +[27:19] सुलेमान उसकी बात पर मुस्कुराए हुए हंस पड़ा और बोला "ऐ मेरे रब मुझे काबू में रख के मैं तेरे उस एहसान का शुक्र अदा करता रहूं जो तू-नए मुझपर और मेरे वालिदैन पर किया है और ऐसा अमल ए सालेह करूं जो तुझे पसंद आए, और अपनी रहमत से मुझको अपने साल बंदों में दाखिल कर।" +[27:20] (एक और मौक़े पर) सुलेमान ने परिन्दों का जायज़ा लिया और कहा "क्या बात है के मैं फलां हुड़-हुद (हूपो पक्षी) को नहीं देख रहा हूँ। क्या वो कहीं गायब हो गया है +[27:21] मैं उसे सख्त सजा दूंगा, या जुबा कर दूंगा, वरना उसे मेरे सामने मकूल वजह पेश करनी होगी +[27:22] कुछ ज्यादा दिन न गुजरी थी के उसने आकर कहा "मैंने वो मालूमात हासिल की है जो आपके इलम में नहीं हैं। मैं सबा के मुतालिक यकीनी इत्तिला लेकर आया हूं +[27:23] मैंने वहां एक औरत देखी जो हमें क़ौम की हुक्मरान है +[27:24] +[27:25] के हमें खुदा को सजदा करें जो आसमानो और ज़मीन की पोशीदा (छिपी हुई) चीज़ निकलता है और वो सब कुछ जानता है जिसे तुम लोग छुपाते हो और जाहिर करते हो +[27:26] अल्लाह, जिसके सिवा कोई मुस्तहिक ए इबादत (पूजा के योग्य) नहीं, जो अर्श ए अजीम का मालिक है +[27:27] सुलेमान ने कहा "अभी हम देखते लेते हैं के तू सच नहीं कहता" है ये तू झूठ बोलने वालों में से है +[27:28] मेरा ये खत (पत्र) ले जा और उसे उन लोगों की तरफ डाल दे, फिर अलग हट कर देख के वो क्या रद्द-ए-अमल जाहिर करते हैं” +[27:29] मलिका बोली “ऐ एहले दरबार, मेरी तरफ एक बड़ा एहम ख़त फेंक गया है +[27:30] वो सुलेमान की जानिब से है और अल्लाह रहमान ओ रहीम के नाम से शुरू किया गया है +[27:31] मज़मून ये है के "मेरे मुकाबले में सरकशी न करो और मुस्लिम हो कर मेरे पास हाज़िर हो जाओ" +[27:32] (खत सुनाकर) मलिका ने कहा “ऐ सरदारन ए क़ौम मेरे इस मामले में मुझे मशवरा दो। मैं किसी मामले का फैसला तुम्हारे बिना नहीं करती हूं" +[27:33] उन्हें ने जवाब दिया "हम ताकतवार और लड़ने वाले लोग हैं, अगला फैसला आपके हाथ में है, आप खुद देख लें के आपको क्या हुकुम देना है" +[27:34] मलिका ने कहा के "बादशाह जब किसी मुल्क में घुस आते हैं तो उसे ख़राब और उसके इज्जत वालों को ज़लालत कर देते हैं, यहीं कुछ वो किया करते हैं +[27:35] मैं लोगों की तरफ एक हदिया (उपहार) भेजती हूं, फिर देखती हूं के मेरे एलची (दूत) क्या जवाब लेकर पलट-ते हैं” +[27:36] जब वो [मलिका का सुरक्षित (दूत)] सुलेमान के हां पहुंचा तो उसने कहा, "क्या तुम लोग माल से मेरी मदद करना चाहते हो? जो कुछ खुदा ने मुझे दे रखा है वो इससे बहुत ज्यादा है जो तुमने दिया है। तुम्हारी हादिया (उपहार) तुम्हें मुबारक रहे +[27:37] ऐ सुरक्षित (दूत)]वापस जा अपने भेजने वालों की तरफ, हम उन पर ऐसे लश्कर लेकर आएंगे जिनका मुकाबला वो ना कर पाएंगे, और हम उन्हें ऐसी ज़िल्लत के साथ, वहां से निकालेंगे के वो ख़्वार होकर रह जायेंगे” +[27:38] सुलेमान ने कहा “ऐ एहले दरबार, तुम में से कौन उसका तख्त (सिंहासन) मेरे पास लाता है कबूल इसके के वो लोग मुती (फरमाबरदार) होकर मेरे पास हाजिर हूं?” +[27:39] जिन्नो में से एक कवी (शक्तिशाली) हयाल ने अर्ज़ किया "मैं उसे हाजिर कर दूंगा क़बल इसके के आप अपनी जगह से उठें। मैं इसकी ताक़त रखता हूं और अमानतदार हूं" +[27:40] जिस शक्स के पास किताब का इलम था वो बोला "मैं आपकी" पलख झपकने से पहले उसे लाए देता हूं”। जुनही के सुलेमान ने वो तख्त अपने पास रक्खा हुआ देखा, वो पुकार उठा "ये मेरे रब का फज़ल है ता-के वो मुझे आजमाए के मैं शुक्र करता हूं या काफिर ए नियामत करता हूं। और जो कोई शुक्र करता है उसका शुक्र उसे अपने ही लिए मुफीद है, वरना कोई नाशुकारी करे तो मेरा रब बे-नियाज़ और अपनी ज़ात में आप बुज़ुर्ग है।” +[27:41] सुलेमान ने कहा, "अंजान तारीख़ से उसका तख्त उसके सामने रख दो, देखें वो सही बात तक पहुंच जाती है या उन लोगों में से है जो राह ए रास्ता नहीं पाते।" +[27:42] मलिका जब हाजिर हुई तो उसे कहा गया, क्या तेरा तख्त (सिंहासन) ऐसा ही है? वो कहने लगी "ये तो गया वही है, हम तो पहले ही जान गए थे और हमने सर-ए-इतात झुका दिया था (या हम मुस्लिम हो चुके थे)" +[27:43] उसको (इमान लेन से) जिस चीज ने रोक रखा था वो उन मबूदों की इबादत थी जिन्होन अल्लाह के सिवा पूजती थी, क्योंकि वो एक काफिर क़ौम से थी +[27:44] उसे कहा गया के महल में दाख़िल हो, उसने जो देखा तो समझ के पानी का हौज़ है और उतरने के लिए उसने अपने दर्द उठा लिए, सुलेमान ने कहा ये शीशे (कांच) का चिकना फ़र्श है इसपर वो पुकार उठी "ऐ मेरे रब, (आज तक) मैं अपने नफ़्स पर बड़ा ज़ुल्म करती रही, और अब मैंने सुलेमान के साथ अल्लाह रब्बुल आलमीन की इताअत क़बूल करली" +[27:45] और समूद की तरफ हमने उनके भाई सालेह को (ये पैगाम दे कर) भेजा के अल्लाह की बंदगी करो, तो यकायक वो दो मुतखसिम फरीक (दो तकरार) बन गए +[27:46] सालेह ने कहा "ऐ मेरी कौम के लोगों, भलाई से पहले बुराई के लिए क्यों जल्दी मचाते हो? क्यों नहीं अल्लाह से मगफिरत तालाब करते? शायद के तुमपर रहम फरमाया जय?” +[27:47] उनहों ने कहा "हमने तो तुमको और तुम्हारे साथियों को बद-शगुनी का निशान पाया है"। सालेह ने जवाब दिया "तुम्हारे नीक ओ बद शगुन का सारा रिश्ता (अच्छे और बुरे शगुन का मुद्दा) अल्लाह के पास है। असल बात ये है कि तुम लोगों की आजमाइश हो रही है" +[27:48] हमारे शहर में नौ (नौ) जत्थे-दार (रिंग-लीडर) थे जो मुल्क में फसाद फैलाते और कोई इस्लाह का काम ना करते थे +[27:49] उन्होन ने आपस में कहा “खुदा की कसम खा कर अहद करलो के हम सालेह और उसके घर वालों पर शब्खुन (गुप्त रात का हमला) मारेंगे और फिर उसके वाली (अभिभावक) से कह देंगे के हम उस खानदान की हलाकत के मौके पर मौजुद ना थाय, हम बिल्कुल सच कहते हैं +[27:50] ये चल तो वो चले और फिर एक चाल हमने चली जिसकी उन्हें खबर ना थी +[27:51] अब देखलो के उनकी चाल का अंजाम क्या हुआ। हमने तबाह करके रख दिया उनको और उनकी पूरी कौम को +[27:52] वो उनके घर खाली पड़े हैं उस जुल्म की पैदाइश में जो वो करते थे, इस में एक निशान ए इब्रत है उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं +[27:53] और बच्चा लिया हमने उन लोगों को जो ईमान लाए थे और नफ़रमानी से परहेज़ करते थे +[27:54] और लुट को हमने भेजा। याद करो वो वक़्त जब उसने अपनी क़ौम से कहा "क्या तुम आँखें देखते हो ख़राबी करते हो +[27:55] क्या तुम्हारा यही चलन है के औरतों को छोड़ कर मर्दों के पास शेहवत-रानी (यौन इच्छा) के लिए जाते हो? हकीकत ये है के तुमलोग सच कहते हो (अज्ञान) का काम करते हो।” +[27:56] मगर उसकी क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ ना था के अनहोन ने कहा "निकल दो लुट के घर वालों को अपनी बस्ती से, ये बड़े पाकबाज़ बनते हैं" +[27:57] आख़िर ए कार हमने बचा लिया उसको और उसके घर वालों को, बाज़ उसकी बीवी के जिसका पीछे रह जाना हमने तै करदिया था +[27:58] और बरसै उन लोगों पर एक बरसात, बहुत ही बुरी बरसात थी वो उन लोगों के हक़ में जो मुतनब्बह किये जा चुके थे +[27:59] (ऐ नबी) कहो, हम्द है अल्लाह के लिए और सलाम उसे उन बंदों पर जिन्होंने हमें बरगुज़िदा किया. (इंसे पूछो) अल्लाह बेहतर है या वो मबूद जिनहें ये लोग इसका शरीक बना रहे हैं +[27:60] भला वो कौन है जिसने आसमान और ज़मीन को पेदा किया, और तुम्हारे लिए आसमान से पानी बरसाया, फिर उसके ज़रिये से वो खुसनुमा बाग उगे जिनके दरख्तों का उगना तुम्हारे बस में ना था? क्या अल्लाह के साथ कोई दूसरा खुदा भी है? (नहीं), बलके यहीं लोग राह ए रास्ते से हटकर चले जा रहे हैं +[27:61] और वो कौन है जिसने ज़मीन को जाए क़रार बनाया और उसके अंदर दरिया रावन किए, और उसमें (पहाड़ों की) मेखें गाध दी और पानी के दो ज़ख़िरों (दो शरीर) के दरमियान पर्दा हयाल कार्डिए? क्या अल्लाह के साथ कोई और खुदा भी शरीक में है? नहीं, बल्कि मेरे से अक्सर लोग नादान हैं +[27:62] कौन है जो बेकरार की दुआ सुनता है जबके वो उसे पुकारे और कौन उसकी तकलीफ रफा-दफा करता है? और (कौन है जो) तुम्हें ज़मीन का खलीफा बनाता है? क्या अल्लाह के साथ कोई और खुदा भी (ये काम करने वाला) है? तुम लोग कम ही सोचते हो +[27:63] और वो कौन है जो खुशियों और समंदर की तरीकियों में तुमको रास्ता दिखता है और कौन अपनी रहमत के आगे हवाओं को खुश खबरी लेकर भेजता है? क्या अल्लाह के साथ कोई दूसरा खुदा भी (ये काम करता) है? बहुत बाला ओ बरतर है अल्लाह हमसे शिर्क से जो ये लोग करते हैं +[27:64] और वो कौन है जो ख़ल्क़ (सृष्टि) की इब्तिदा (उत्पत्ति) करता है और फिर उसका इयादा (पुनः प्रस्तुत) करता है। और कौन तुमको आसमान और ज़मीन से रिज़क देता है? क्या अल्लाह के साथ कोई और खुदा भी है? कहो के लाओ अपनी दलील अगर तुम सच्चे हो +[27:65] इनसे कहो, अल्लाह के सिवा आसमान और ज़मीन में कोई गैब का इलम नहीं रखता, और वो नहीं जानता के कब वो उठेगा +[27:66] बलके आख़िरत का तो इलम ही इन लोगों से ग़म हो गया है, बलके ये उसकी तरफ से शक्क में हैं, बलके ये उसे अंधे हैं +[27:67] ये मुन्किरें कहते हैं "क्या जब हम और हमारे बाप दादा मिट्टी हो चुके होंगे तो हमें वक़्ती क़बरों से निकला जायेगा?” +[27:68] ये खबरें हमको भी बहुत दी हैं और पहले हमारे आबा ओ अजदाद को भी दी जाती रही हैं, मगर ये बस अफसाने ही अफसाने हैं जो अगले वक्त से सुनते चले आ रहे हैं” +[27:69] कहो, जरा जमीन में चल फिर कर देखो के मुजरेमो का क्या अंजाम हो चुका है +[27:70] (ऐ नबी), इनके हाल पर रांझ ना करो और ना इनकी चालों पर दिल तंग हो +[27:71] वो कहते हैं के "ये धमकी कब पूरी होगी अगर तुम सच्चे हो?" +[27:72] कहो, क्या अजब के लिए तुम जल्दी मचा रहे हो उसका एक हिसा तुम्हारे करीब ही आ लगा हो +[27:73] हकीकत ये है के तेरा रब तो लोगों पर बड़ा फजल फरमाने वाला है, मगर अक्सर लोग शुक्र नहीं करते +[27:74] बिला शुभा तेरा रुब खूब जानता है जो कुछ उनके सीने अपने अंदर छिपाए हुए हैं और जो कुछ वो जाहिर करते हैं +[27:75] आसमान ओ ज़मीन की कोई पोशीदा चीज़ ऐसी नहीं है जो एक वाज़ेह किताब में लिखी हुई मौजुद ना हो +[27:76] ये वाक़िया है के ये कुरान बानी इजराइल को अक्सर उन बातों की हकीकत बताता है जिनमें वो इख्तिलाफ रखते हैं +[27:77] और ये हिदायत और रहमत है ईमान लाने वालों के लिए +[27:78] यकीनन (इसी तरह) तेरा रब इन लोगों के दरमियान भी अपने हुकुम से फैसला करडेगा. और वो ज़बरदस्त और सब कुछ जान-नय वाला है +[27:79] पास ऐ नबी, अल्लाह पर भरोसा रखो, यकीनन तुम सारे हक़ पर हो +[27:80] तुम मुर्दों को नहीं सुना सकते, ना उन दिलों तक अपनी पुकार रख सकते हो जो पीठ फेर कर भागे जा रहे होन +[27:81] और ना अंधों को रास्ता बता कर भटकने से बच सकते हैं। तुम तो अपनी बात उन्ही लोगों को सुना सकते हो जो हमारी आयत पर ईमान लाते हैं और फिर फरमाबरदार बन जाते हैं +[27:82] और जब हमारी बात पूरी होने का वक्त सामने आ जाएगा तो हम उनके लिए एक जानवर जमीन से निकालेंगे जो उनसे कलाम करेगा के लोग हमारी आयत पर यकीन नहीं करते थे +[27:83] और जरा तसव्वुर करो उस दिन का जब हम हर उम्मत में से एक फौज की फौज उन लोगों की घेर लाएंगे जो हमारी आयत को झुटलाया करते हैं था, फिर उनको (उनकी अक्साम (वर्गीकरण और योग्यता) के लिहाज़ से दर्जा बा दर्जा) मुरत्तब (व्यवस्थित) किया जाएगा +[27:84] यहां तक ​​के जब सब आ जाएंगे तो (उनका रब उनसे) पूछेगा के “तुमने मेरी आयत को झूठला दिया हलांके तुमने उनका इल्मी इहाता (समझे) ना किया था? अगर ये नहीं तो तुम क्या कर रहे थे?” +[27:85] और उनके ज़ुल्म की वजह से अज़ाब का वादा उन पर पूरा हो जाएगा, तब वो कुछ भी ना बोल पाएंगे +[27:86] क्या उनको समझ में नहीं आता था कि हमने रात उनके लिए सुकून हासिल करने को बनाई थी और दिन को रोशन किया था? इसी में बहुत निशानियां थी उन लोगों के लिए जो ईमान लाते थे +[27:87] और क्या गुजरेगी हमें रोज जबके सुर/सूर (तुरही) फुनका जाएगा और आतंक खा जाएंगे वो सब जो आसमान और जमीन में हैं, सिवाय उन लोगों के जिनमें अल्लाह है हौल (आतंकवाद) से बचना चाहेगा। और सब कान दबाये उसके हुज़ूर हाज़िर हो जायेंगे +[27:88] आज तू पहाड़ों को देखता है और समझता है कि खूब जमे हुए हैं, मगर हमें वक़्त ये बादलों की तरह उड़ रहे होंगे, ये अल्लाह की क़ुदरत का करिश्मा होगा जिसने हर चीज़ को हिकमत के साथ उस्तवार (के साथ आदेश दिया) बुद्धि) किया है. वो खूब जानता है के तुमलोग क्या करते हो +[27:89] जो शक्स भलाई लेकर आएगा उसे ज्यादा बेहतर सिला मिलेगा और ऐसे लोग उस दिन के हॉल (आतंक/देहशत) से महफूज होंगे +[27:90] और जो बुराई के लिए हुए आएंगे, ऐसे सब लोग औंधे मुंह आग में फेंक जायेंगे. क्या तुमलोग इसके सिवा कोई और जजा पा सकते हो जैसा करो वैसा भरो +[27:91] (ऐ मुहम्मद, इनसे कहो) "मुझे तो यहीं हुकुम दिया है के इस शहर के रब की बंदगी करूं जिसने इसे हराम (पवित्र) बनाया है, और जो हर चीज का मालिक है। मुझे।" हुकुम दिया गया है के मैं मुस्लिम बन कर रहूं +[27:92] और ये कुरान पढ़ कर सुनाऊं” अब जो हिदायत इख्तियार करेगा वो अपने ही भले के लिए हिदायत इख्तियार करेगा, और जो गुमराह हो उसे कहदो मैं तो बस खबरदार करने वाला हूं +[27:93] इंसे कहो, तारीफ अल्लाह ही के लिए है, अनकरीब वो तुम्हें अपनी निशानियां दिखा देगा और तुम उन्हें पहचान लोगे, और तेरा रब बे-खबर नहीं है उन अमल से जो तुम लोग करते हो + +Surah 28: Al-Qasas (The Narrative) +---------------------------------------- +[28:1] ता सीन मीम +[28:2] ये किताब ए मुबीन (साफ़ किताब) की आयत हैं +[28:3] हम मूसा और फिरौन का कुछ हाल ठीक ठीक तुम्हें सुनाते हैं ऐसे लोगों के फ़ायदे के लिए जो ईमान लायें +[28:4] वक़िया ये है के फिरौन ने ज़मीन में सरकशी की और उसके बाशिन्दों को गिरोहों में तस्सीम करदिया, उन मेरे से एक गिरोह को वो ज़लील करता था, इसके लड़कों को क़त्ल करता था और उसकी लड़कियों को जीता (जिंदा) रहने देता था। फिल वकै वो मुफसिद (शरारत करने वाले) लोगों में से थे +[28:5] और हम ये इरादा रखते थे के मेहरबानी करें उन लोगों पर जो जमीन में जलील करके रख दिए गए थे, और उन्हें पेशवा (नेता) बना दें, और उन्हें वारिस बनाएं +[28:6] और ज़मीन में उनको इक्तेदार (शक्ति) बख्शें, और उनसे फिरौन ओ हमान और उनके लश्करों को वही कुछ दिखला दे जिसका उन्हें डर था +[28:7] हमने मूसा की मां को इशारा किया के "इसको दूध पिला, फिर जब तुझे उसकी जान का खतरा हो तो इसे दरिया में डाल दे और कुछ खौफ और गम ना कर, हम इसे तेरे ही पास वापस ले आएंगे, और इसको पैगम्बरों में शामिल करेंगे" +[28:8] आखिर ए कार फ़िरौन के घर वालों ने उसे (दरिया से) निकाल लिया ता-के वो उनका दुश्मन और उनके लिए सबाब ए रंज बने। वक़ाई फिरौन और हमान और उसके लश्कर (अपनी तदबीर में) बदाए गलत-कार थे +[28:9] फिरौन की बीवी ने (उससे) कहा "ये मेरे और तेरे लिए आँखों की ठंडक है, इसे क़त्ल न करो, क्या अजब के ये हमारे लिए मुफीद साबित हो, या हम इसे बेटा ही बना लें।” और वो (अंजाम से) बेखबर थाय +[28:10] उधर मूसा की मां का दिल उड़ा जा रहा था, वो इस राज को फाश कर बैठती अगर हम उसकी धरस (दिल को मजबूत करते) ना बांध देते ता-के वो (हमारे वादे पर) ईमान लाने वालों में से हो +[28:11] उसने बच्चों की बहन से कहा इसके पीछे पीछे जा, चुनांचे वो अलग से उसको इस तरह देखती रही के (दुश्मनों को) उसका पता ना चला +[28:12] और हमने बच्चों पर पहले ही दूध पिलाने वालियों की चटियां (स्तन) हराम कर रखी थी। (ये हालात देख कर) उस लड़की ने उनसे कहा, "मैं तुम्हें ऐसे घर का पता बताऊं जिसके लोग इसकी परवरिश का ज़िम्मा लें और खैर ख्वाही के साथ इसे रखें?" +[28:13] इस तरह हम मूसा को उसकी मां के पास पलटा लाए ता-के उसकी आंखें ठंडी हों और वह घमघिन ना हो। और जान ले के अल्लाह का वादा सच्चा था, मगर अक्सर लोग इस बात को नहीं जानते +[28:14] फिर जब मूसा अपनी पूरी जवानी को पाहुंच गया और उसका नाशो-नुमा मुकम्मल हो गया तो हमने उसका हुकुम और इल्म अता किया। हम नए लोगों को ऐसी ही जजा देते हैं +[28:15] (एक रोज़) वो शहर में ऐसे वक़्त में दखल हुआ जबके एहले शहर गफ़लत में थे। वहां उसने देखा के दो आदमी लड़ रहे हैं, एक उसकी अपनी कौम का था और दूसरा उसकी दुश्मन कौम से तालुक रखता था। उसकी कौम के आदमी ने दुश्मन कौम वाले के खिलाफ उसे मदद के लिए पुकारा। मूसा ने उसको एक घुसा (मुट्ठी) मारा और उसका काम तमाम कर दिया। (ये हरकत सरज़ाद होते हाय) मूसा ने कहा "ये शैतान की करतूत है, वो सख्त दुश्मन और खुला गुमराह कुन है" +[28:16] फिर वो कहने लगा "ऐ मेरे रब, मैंने अपने नफ्स पर बड़ा जुल्म कर डाला, मेरी मगफिरत फरमा दे।" चुनांचे अल्लाह ने उसकी मगफिरत फरमा दी, वो गफूर ओ रहीम है +[28:17] मोसा ने अहद किया के "ऐ मेरे रब, ये एहसान जो तू ने मुझपर किया है इसके बाद अब मैं कभी मुजरिमों का मददगार ना बनूंगा" +[28:18] दूसरे रोज वो सुबह सवारे डरता और हर तरफ से खतरा पैदा हुआ शेहर मैं जा रहा था कि यकायक क्या देखता है कि वही शक्स जिसने कल उसे मदद के लिए पुकारा था आज फिर उसे पुकार रहा है। मोसा ने कहा "तू तो बड़ा ही बेकार हुआ आदमी है" +[28:19] फिर जब मूसा ने इरादा किया के दुश्मन कौम के आदमी पर हमला किया तो वो पुकार उठा "ऐ मूसा, क्या आज तू मुझे उसकी तरह कत्ल करने लगा है, जिस तरह कल एक शक्स को कत्ल कर चुका है, तू इस मुल्क में जब्बार बन कर रहना चाहता है, इस्लाह नहीं करना चाहता” +[28:20] इसके बाद एक आदमी शहर के पारले सिरे (शहर का दूसरा छोर) से दौड़ता हुआ आया और बोला “मूसा, सरदारों में तेरे क़त्ल के मशवरे हो रहे हैं, यहां से निकल जा, मैं तेरा ख़ैर ख़्वा (शुभचिंतक) हूं” +[28:21] ये खबर सुनते ही मूसा डरता और सहमत निकल खड़ा हुआ और उसने दुआ की कि "ऐ मेरे रब, मुझे जालिमों से बचा" +[28:22] (मिस्र से निकल कर) जब मूसा ने मदियां का रुख किया तो उसने कहा "उम्मीद है के मेरा रब मुझे ठीक रास्ते पर डाल देगा" +[28:23] और जब वो मदियां के कुनवें (ठीक है) पर पाहुंचा तो उसने देखा के बहुत से लोग अपने जानवरों को पानी पिला रहे हैं, और उन्हें अलग एक तरफ दो औरतें अपने जानवरों को रोक रही हैं। मूसा ने औरतों से पूछा “तुम्हें क्या परेशानी है?” उनहोंने कहा "हम अपने जानवरों को पानी नहीं पिला सकते जब तक ये चारवाहे अपने जानवर निकल कर न ले जाएं, और हमारे वालिद एक बहुत बूढ़े आदमी हैं" +[28:24] ये सुनकर मूसा ने उनके जानवरों को पानी पिला दिया, फिर एक जगह की जगह जा बैठा और बोला "परवरदिगार, जो खैर भी तू मुझपर नाज़िल करदे मैं उसका मोहताज हूं।" +[28:25] (कुछ दिन ना गुजरी थी के) उन दोनो औरतों में से एक शरम ओ हया से चलती हुई उसके पास आई और कहने लगी "मेरे वालिद आप को बुला रहे हैं ता-के आपने हमारे जानवरों को पानी जो पिलाया है उसका अजर आपको दें।" मूसा जब उसके पास पहुंचा और अपना सारा क़िस्सा उसे सुनाया तो उसने कहा "कुछ खौफ ना करो, अब तुम ज़ालिमों से बच निकले हो।" +[28:26] दोनों औरतों में से एक ने अपने बाप से कहा "अब्बाजान इस शक्स को नौकर रख लीजिये, बेहतरीन आदमी जिसे आप मुलाजिम रखें वही हो सकता है जो मजबूत और अमानत-दार हो" +[28:27] उसके बाप ने (मूसा से) कहा "मैं चाहता हूं के" अपनी दो बेटियों में से एक का निकाह तुम्हारे साथ कर्दों बशारत ये के तुम आठ साल तक मेरे साथ मुलाकात करो, और अगर दस साल पूरे करदो तो ये तुम्हारी मर्जी है, तुम इंशा अल्लाह मुझे नहीं चाहते। +[28:28] मोसा ने जवाब दिया "ये बात मेरे और आपके दरमियान ताई हो गई। दोनों मुद्दतों में से जो भी मैं पूरी तरह से उसके बाद फिर कोई ज्यादा मुझपर ना हो, और जो कुछ क़ौल ओ क़रार हम कर रहे हैं अल्लाह उसपर निगहबान है।" +[28:29] जब मूसा ने मुद्दत पूरी कर दी और वो अपने एहल-ओ-अयाल (परिवार) को लेकर चला तो तूर की जानिब उसको एक आग नजर आई। उसने अपने घर वालों से कहा "ठहरो, मैंने एक आग देखी है, शायद मैं वहां से कोई खबर ले आऊं हां इस आग से कोई अंगारा ही उठा लाओ जैसे तुम ताप सको।” +[28:30] वहां पाहुंचा तो वाड़ी के दहिने किनारे पर मुबारक खित्ते में एक दरख्त से पुकारा गया के "ऐ मूसा, मैं ही अल्लाह हूं, सारे जहां वालों का मालिक" +[28:31] और (हुकुम दिया गया के) "फेंक दे अपनी लाठी।" जूनी के मूसा ने देखा के वो लाठी सांप (साँप) की तरह बाल खा रही है तो वो पीठ फेर कर भागा और उसने मुड़ कर भी ना देखा। (इरशाद हुआ) "मूसा, पलट आ और खौफ ना कर, तू बिल्कुल महफूज है +[28:32] अपना हाथ गिरेबान में डाल, चमकता हुआ निकलेगा बिना किसी तकलीफ के और खौफ से बचने के लिए अपना बाजू बेंच ले। ये दो रोशन निशानियां हैं तेरे रुब की।" तरफ से फिरौन और उसके दरबारियों के सामने पेश करने के लिए, वो बड़े ही नफ़रमान लोग हैं” +[28:33] मूसा ने अर्ज़ किया “मेरे आका, मैं तो उनका एक आदमी क़त्ल कर चूका हूँ, डरता हूँ के वो मुझे मार डालेंगे +[28:34] और मेरा भाई हारून मुझसे ज़्यादा ज़ुबान अवार (जीभ की वाकपटुता) है, उसे मेरे साथ मददगार के तौर पर भेज ता-के वो मेरी तायद (समर्थन) करे, मुझे अंदेशा है के वो लोग मुझे झुठलाएँगे।” +[28:35] फरमाया "हम तेरे भाई के जरूर से तेरा हाथ मजबूत करेंगे और तुम दोनो को ऐसी सत्ता बक्शेंगे के वो तुम्हारा कुछ न बिगाड़ सकेगे। हमारी निशानियों के जोर से गलाबा (विजय) तुम्हारे और तुम्हारे जोड़े का ही होगा" +[28:36] फिर जब मूसा उन लोगों के पास हमारी खुली-खुली निशानियां लेकर पहुंच गया तो उनको ने कहा के ये कुछ नहीं है मगर बनवाती जादू और ये बातें तो हमने अपने बाप दादा के जमाने में कभी सुनी ही नहीं +[28:37] मूसा ने जवाब दिया "मेरा रब उस लड़के के हाल से खूब वाकिफ" है जो उसकी तरफ से हिदायत लेकर आया है और वही बेहतर जानता है के आखिरी अंजाम किसका अच्छा होना है, हक ये है के जालिम कभी फलाह नहीं पाते।” +[28:38] और फिरौन ने कहा "ऐ एहले दरबार मैं तो अपने सिवा तुम्हारे किसी खुदा को नहीं जानता। हमन, ज़रा ईंटें (ईंटें) पकावा कर मेरे लिए एक ऊंची इमारत तो बनवा, शायद के उसपर चढ़ कर मैं मूसा के खुदा को देख सकता हूं, मैं तो इसे झूठा हाय" समझता हूं" +[28:39] उसने और उसके लश्करों ने जमीन में बिना किसी हक के अपनी बदनामी का घमंड किया और समझ के उन्हें कभी हमारी तरफ पलटना नहीं है +[28:40] आखिर-ए-कार हमने उसे और उसके लश्करों को पकड़ा और समंदर में फेंक दिया, अब देखलो के उन जालिमों का कैसा अंजाम हुआ +[28:41] हमने उन्हें जहन्नुम की तरफ दावत देने वाले पेश-रो बना दिया और कयामत के रोज वो कहीं से कोई मदद न पा सकेंगे +[28:42] हमने इस दुनिया में उनके पीछे लानत लगा दी और कयामत के रोज वो बड़ी क़बाहत (अजीब दुविधा) में मुब्तिला होंगी +[28:43] पिछली नसलों को हलाक करने के बाद हमने मूसा को किताब अता की, लोगों के लिए बसेरातों का सामान (ज्ञान का साधन) बना कर, हिदायत और रहमत बना कर, ता-के शायद लोग सबक हासिल करें +[28:44] (ऐ मुहम्मद) तुम हमें वक्त मगरबी गोशे (पश्चिमी तरफ) में मौजुद ना था जब हमने मूसा को ये फरमान ए शरीयत अता किया और ना तुम शहीदों (गवाहों) में शामिल थे +[28:45] बल्के इसके बाद (तुम्हारे जमाने तक) हम बहुत से नासलें (पीढ़ियां) उठा चुके हैं और बहुत सारा जमाना गुजर चूका है। तुम एहले मदियां के दरमियान भी मौजूद ना थे के उनको हमारी आयतें सुना रहे हो, मगर (उस वक्त की ये खबरें) भेजने वाले हम हैं +[28:46] और तुम तूर के दामन में भी उस वक्त मौजूद ना थे जब हमने (मूसा को पहली मरतबा) पुकारा था, मगर ये तुम्हारे रब की रहमत है (के तुमको ये मालूमात दी जा रही है) ता-के तुम उन लोगों को मुतनब्बेह (चेतावनी) करदो जिनके पास तुमसे पहले कोई मुतनब्बेह (चेतावनी) करने वाला नहीं आया, शायद के वो होश में आएं +[28:47] (और ये हमने इसलिए किया के) कहीं ऐसा ना हो के उनके अपने किए कार्टूनों की बदौलत कोई मुसीबत जब उन पर आए तो वो कहें "ऐ परवरदिगार, तू-ने क्यों ना हमारी तरफ कोई रसूल भेजा के हम तेरी आयत की जोड़ी बनाते और एहले ईमान में से होते।" +[28:48] मगर जब हमारे हां से हक उनके पास आ गया तो वो कहने लगे 'क्यूं ना दिया गया इसको वही कुछ जो मूसा को दिया गया था?' क्या ये लोग उसका इंकार नहीं कर चुके हैं जो इस पहले मूसा को दिया गया था? उनहों ने कहा "दोनों जादू हैं जो एक दूसरे की मदद करते हैं" और कहा "हम किसी को नहीं मानते।" +[28:49] (ऐ नबी) इनसे कहो "अच्छा तो लाओ अल्लाह की तरफ से कोई किताब जो इन दोनों से ज्यादा हिदायत बक्शने वाली हो अगर तुम सच्चे हो, मैं उसकी जोड़ी इख्तियार करूंगा।" +[28:50] अब अगर वो तुम्हारा ये मुतलबा पूरा नहीं करता तो समझ लो के दर असल ये अपनी ख्वाहिशत के जोड़े हैं, और हमारे शक्स से बढ़कर कौन गुमराह होगा जो खुदाई हिदायत के बिना बस अपनी ख्वाहिश की जोड़ी बनाए? अल्लाह ऐसे ज़ालिमों को हरगिज़ हिदायत नहीं बख्शता +[28:51] और (नसीहत की) बात पै डर पै हम उन्हें पाहुंचा चुके हैं ता-के वो गफ़लत से बेदार हैं +[28:52] जिन लोगों को इस पहले हमने किताब दी थी वो इस (कुरान) पर ईमान लाते हैं +[28:53] और जब ये उनको सुनाया जाता है है तो वो कहते हैं के "हम इसपर ईमान लाए, ये वाकाई हक़ है हमारे रब की तरफ से, हम तो पहले ही से मुस्लिम हैं" +[28:54] ये वो लोग हैं जिनका अजर दो बार दिया जाएगा हमें साबित क़दामी के बदले जो उन्होन ने दिखाया। वो बुराइयों को भलाइ से दफा करते हैं और जो कुछ रिज्क हमने उन्हें दिया है उसमें से खर्च करते हैं +[28:55] और जब उन्होन ने बेहुदा बात सुनी तो ये कह कर उसे किनारा कश हो गए के "हमारे अमल हमारे लिए और तुम्हारे अमल तुम्हारे लिए, तुमको सलाम है, हम जाहिलों का सा तरीक़ा इख़्तियार करना नहीं चाहिए।” +[28:56] "ऐ नबी, तुम जिसे चाहो उसे हिदायत नहीं दे सकते, मगर अल्लाह जिसे चाहता है हिदायत देता है और वो उन लोगों को खूब जानता है जो हिदायत कबूल करने वाले हैं।" +[28:57] वो कहते हैं "अगर हम तुम्हारे साथ इस हिदायत की जोड़ी इख्तियार कर लें तो अपनी ज़मीन से उचक ले जायेंगे।" क्या ये वक़िया नहीं है कि हमने एक पुर-अमन हरम (मक्का) को इनके लिए जाये क़ियाम बना दिया जिसकी तरफ हर तरह के समारात (प्रावधान) खिंचे चले आते हैं, हमारी तरफ से रिज़क के तौर पर? मगर इनमें से अक्सर लोग जानते नहीं हैं +[28:58] और कितनी ही ऐसी बस्तियां हम तबाह कर चुके हैं जिनके लोग अपनी अर्थव्यवस्था (अर्थव्यवस्था) पर इत्र गए थे सो देखलो, वो उनके मास्कन पड़े हुए हैं जिन में उनके बाद काम ही कोई बसा है। आख़िर ए कार हम ही वारिस हो कर रहे +[28:59] और तेरा रब बस्तियों को हलाक करने वाला ना था जब तक उनके मरकज में एक रसूल ना भेज देता जो उनको हमारी आयतें सुनाता, और हम बस्तियों को हलाक करने वाले ना वे जब तक के उनके रहने वाले जालिम ना हो जाते हैं +[28:60] तुम लोगों को जो कुछ भी दिया है वो मेहज़ दुनिया की जिंदगी का सामान और उसकी ज़ीनत (श्रृंगार) है, और जो कुछ अल्लाह के पास है वो इसके लिए बेहतर और बाकी रास्ता है। क्या तुम लोग अक्ल से काम नहीं लेते +[28:61] भला वो शक्स जिसने अच्छा वादा किया हो, और वो उसे पाने वाला हो कभी उस शक्स की तरह हो सकता है जिसे हमने सिर्फ हयात-ए-दुनिया का सर-ओ-समान दे दिया हो, और फिर वो कयामत के रोज़ सज़ा के लिए पेश किया जाने वाला हो +[28:62] और (भूल ना जाएं ये लोग) उस दिन को जबके वो इनको पुकारेगा और पूछेगा "कहां है मेरे वो शरीक जिनका तुम गुमान रखते थे?" +[28:63] ये क़ौल जिनपर चस्पां होगा वो कहेंगे "ऐ हमारे रब, बहकावे यही लोग हैं जिनको हमने गुमराह किया था, उन्होंने हमें उसी तरह गुमराह किया जैसे हम खुद गुमराह हुए। हम आप के सामने बारात (अलगाव) का इज़हार करते हैं। ये हमारी तो बंदगी नहीं करते थे” +[28:64] फिर इनसे कहा जाएगा के पुकारो अब अपने ठहरे हुए शेयरों को। ये उन्हें पुकारेंगे मगर वो इनको कोई जवाब ना देंगे और ये लोग अजब देख लेंगे। काश ये हिदायत इख्तियार करने वाले होते +[28:65] और (फरामोश ना करें ये लोग) वो दिन जबके वो इनको पुकारेगा और पूछेगा के "जो रसूल भेजे गए थे उन्होंने तुमने क्या जवाब दिया था?" +[28:66] हमें वक्त कोई जवाब इनको न समझ आएगा और न ये आपस में एक दूसरे से पूछ ही पाएंगे +[28:67] अलबत्ता जिसने आज तौबाह कार्ली और ईमान ले आया और नेक अमल किया वही ये तवक्को (उम्मीद) कर सकता है के वहां फलाह पाने वालों मुझसे होगा +[28:68] तेरा रब अदा करता है जो कुछ चाहता है। और (वो खुद ही अपने काम के लिए जिसे चाहता है) मुंतखब (चुनें) कर लेता है। ये इंतेखाब इन लोगों के करने का काम नहीं है, अल्लाह पाक है और बहुत बाला-तरर है हमसे शिर्क से जो ये लोग करते हैं +[28:69] तेरा रब जानता है जो कुछ ये दिलों में छुपे हुए हैं और जो कुछ ये जाहिर करते हैं +[28:70] वही एक अल्लाह है जिसके सिवा कोई इबादत का मुस्तहिक नहीं। उसके लिए हम्द है दुनिया में भी और आखिरी में भी, फरमा रवाई उसी की है और उसकी तरफ तुम सब पलटाये जाने वाले हो +[28:71] ऐ नबी, इनसे कहो कभी तुम लोगों ने गौर किया के अगर अल्लाह कयामत तक तुम हमेशा के लिए रात तारी करदे अल्लाह के सिवा वो कौन सा माबूद है जो तुम्हें रोशनी ला दे? क्या तुम सुनते नहीं हो +[28:72] इनसे पूछो, कभी तुमने सोचा के अगर अल्लाह कयामत तक तुम हमेशा के लिए दिन तारी करदे तो अल्लाह के सिवा वो कौन सा माबूद है जो तुम्हें रात ला दे ता-के तुम हमें सुकून हासिल कर सको? क्या तुमको सूझता नहीं +[28:73] ये उसी की रहमत है कि उसने तुम्हारे लिए रात और दिन बनाई ता-के तुम (रात में) सुकून हासिल करो और (दिन को) अपने रब का फज़ल तलाश करो। शायद के तुम शुक्र गुज़ार बनो +[28:74] (याद रखें ये लोग) वो दिन जबके वो इन्हें पुकारेगा फिर पूछेगा "कहाँ है मेरे वो शरीक जिनका तुम गुमान रखते थे?" +[28:75] और हम हर उम्मत में से एक गवाह निकाल लेंगे फिर कहेंगे के "लाओ अब अपनी दलील"। हमें वक़्त मालूम हो जाएगा के हक़ अल्लाह की तरफ है, और गम (गायब) हो जाएंगे इनके वो सारे झूठ जो इन्हों ने ग़ध रक्खे थे +[28:76] ये एक वक़िया है के क़ारून मूसा की क़ौम का एक शक्स था, फिर वो अपनी क़ौम के ख़िलाफ़ व्यंग्य हो गया और हमने उसको इतने खज़ाने (खजाने) दे रखे थे कि उनकी कुंजियाँ (चाबियाँ) ताकतवार आदमियों की एक जमात मुश्किल से उठ सकती थी। एक दफ़ा जब उसकी क़ौम के लोगों ने उसे कहा " फूलना (इतराना/खुशी) जा, अल्लाह फूलने (इतराने) वालों को पसंद नहीं करता +[28:77] जो माल अल्लाह ने तुझे दिया है उसे आख़िरत का घर बनाने की फ़िक्र कर, और दुनिया में से भी अपना हिसा फ़रामोश न कर। एहसान कर जिस तरह अल्लाह ने तेरे साथ एहसान किया है, और ज़मीन में फ़साद बरपा करने की कोशिश ना कर, अल्लाह मुफ़्सिदों (फ़साद करने वालों) को पसंद नहीं करता।'' +[28:78] तो उसने कहा "ये सब कुछ तो मुझे उस इल्म की बिना पर दिया गया है जो मुझको हासिल है"। क्या उसको ये इल्म ना था कि अल्लाह उसे पहले बहुत से ऐसे लोगों को हलाक कर चुका है जो उसे ज्यादा कुव्वत और जमीयत रखता था? मुजरिम से तो उनके गुनाह नहीं पूछे जाते +[28:79] एक रोज़ वो अपनी क़ौम के सामने अपने पूरे थेट में निकला। जो लोग हयात ए दुनिया के तालिब थे वो उसे देख कर कहने लगे "काश हमें भी वही कुछ मिलता जो क़ारून को दिया गया है, ये तो बड़ा नसीबे वाला है।" +[28:80] मगर जो लोग इल्म रखने वाले थे वो कहने लगे "अफसोस तुम्हारे हाल पर, अल्लाह का सवाब बेहतर है हमारे शक्स के लिए जो ईमान लाए और नेक अमल करे, और ये दौलत नहीं मिलती मगर सब्र करने वालों को।" +[28:81] आख़िर-ए-कार हमने उसे और उसके घर को ज़मीन पर धांसा दिया, फिर कोई उसके हामियों (समर्थकों) का गिरो ​​ना था जो अल्लाह के मुक़ाबले में उसकी मदद को आता, और ना वो खुद अपनी मदद आप कर सका +[28:82] अब वही लोग जो कल उसकी मंजिल की तमन्ना कर रहे थे कहने लगे "अफ़सोस, हम भूल गए थे के अल्लाह अपने बंदों में से जिसका रिज़क चाहता है कुशादा करता है और जिसे चाहता है नपा-तुला देता है। अगर अल्लाह ने हमपर एहसान न किया होता तो हमें भी ज़मीन मैं धोखा देता हूं। अफ़सोस हमको याद ना रहा के काफिर फलाह नहीं पाया करते।” +[28:83] वो आख़िरत का घर तो हम उन लोगों के लिए मखसूस कर देंगे जो ज़मीन में अपनी बदाई नहीं चाहते और ना फ़साद करना चाहते हैं। और अंजाम की भलाई मुत्तक़िन ही के लिए है +[28:84] जो कोई भलाई लेकर आएगा उसके लिए उसे बेहतर भलाई है, और जो बुराई लेकर आए तो बुराइयां करने वालों को वैसा ही बदला मिलेगा जैसा अमल वो करता था +[28:85] ऐ नबी, यकीन जानो के जिसने ये कुरान तुमपर फ़र्ज़ किया है वो तुम्हें एक बेहतर अंजाम देने वाला है। लोगों से कहदो के "मेरा रब खूब जानता है के हिदायत लेकर कौन आया और खुली गुमराही में कौन मुबतला है।" +[28:86] तुम इस बात के हरगिज उम्मीद न थे के तुमपर किताब नाज़िल की जाएगी। ये तो महज़ तुम्हारे रब की मेहरबानी से (तुम्हारे नाज़िल हुई है), पास तुम काफिरों के मददगार ना बनो +[28:87] और ऐसा कभी ना होने पाए के ए लल्लाह की आयत जब तुम नाज़िल हूं तो कुफ्फार तुम्हें उनसे बाज़ रखेंगे। अपने रब की तरफ़ दावत दो और हरगिज़ मुशरिकों में शामिल ना हो +[28:88] और अल्लाह के साथ किसी दूसरे माबूद को ना पुकारो। उसके सिवा कोई माबूद नहीं है। हर चीज़ हलाक होने वाली है सिवाए उसकी जात के। फ़रमान रवाई उसी की है और उसकी तरफ तुम सब पलटे जाने वाले हो + +Surah 29: Al-'Ankabut (The Spider) +---------------------------------------- +[29:1] अलिफ़ लाम मीम +[29:2] क्या लोगों ने ये समझ रखा है के वो बस इतना कहने पर छोड़ दिए जाएंगे के "हम ईमान लाए" और उनको आज़माया ना जाएगा +[29:3] हलांके हम उन सब लोगों की आज़माइश कर चुके हैं जो इनसे पहले गुज़रे हैं। अल्लाह को तो जरूर ये देखना है कि सच्चे कौन हैं और झूठे कौन +[29:4] और क्या वो लोग जो बुरी हरकतें कर रहे हैं ये समझ बैठे हैं के वो हमसे बाजी ले जाएंगे? बड़ा गलत हुकुम है जो वो लगा रहे हैं +[29:5] जो कोई अल्लाह से मिलने की तवक्कू (उम्मीद) रखता है (उसे मालूम होना चाहिए के) अल्लाह का मुकर्रर किया हुआ वक्त आने ही वाला है। और अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है +[29:6] जो शक्स भी मुजाहिदा (संघर्ष) करेगा अपने ही भले के लिए करेगा। अल्लाह यकीनन दुनिया जहां वालों से बे-नियाज़ (इच्छाओं से मुक्त) है +[29:7] और जो लोग ईमान लाएंगे और नेक अमल करेंगे उनकी बुराइयां हम उनसे दूर कर देंगे और उन्हें उनके बेहतरी अमल की जजा देंगे +[29:8] हमने इंसान को हिदायत दी है कि अपने वाल्दैन (माता-पिता) के साथ नेक सुलूक करें, लेकिन अगर वो तुझ पर जोर दें के तू मेरे साथ किसी ऐसे (माबूद) को शरीक ठहरे जैसे तू (मेरे शरीक की हकीकत से) नहीं जानता तो उनकी इताअत ना कर। मेरी ही तरफ तुम सबको पलट कर आना है। फिर मैं तुम्हें बता दूंगा के तुम क्या करते रहेंगे हो +[29:9] और जो लोग ईमान लाए होंगे और जिन्होन ने कोई अमल नहीं किया होगा उनको हम जरूर सालिहें में दखल करेंगे +[29:10] लोगों में से कोई ऐसा है जो कहता है के हम ईमान लाए होंगे अल्लाह पर, मगर जब वो अल्लाह के मामले मैं सताया गया तो उसने लोगों की डाली हुई आजमाइश को अल्लाह के अज़ाब की तरह समझ लिया। अब अगर तेरे रब की तरफ से फतह-ओ-नुसरत आ गई तो यही शक्स कहेगा "हम तो तुम्हारे साथ थे"। क्या दुनिया वालों के दिलों का हाल अल्लाह को बा-खूबी मालूम नहीं है +[29:11] और अल्लाह को तो जरूर ये देखना ही है कि ईमान लाने वाले कौन हैं और मुनाफिक कौन +[29:12] ये काफिर लोग ईमान लाने वालों से कहते हैं कि तुम हमारे तरीक़े की जोड़ी करो और तुम्हारी खतों (पापों) को हम अपने ऊपर ले लेंगे। हलांके उनकी खतों में से कुछ भी वो अपने ऊपर लेने वाले नहीं हैं, वो क़त-एन झूठ कहते हैं +[29:13] हां ज़रूर वो अपने बोझ भी उठाएंगे और अपने बोझ के साथ बहुत से दूसरे बोझ भी। और कयामत के रोज़ यक़ीनन उनसे इफ्तारा परदाज़ियों (बोहतान/फैब्रिकेशन) में कि बाज़-पुर्स होगी जो वो करते रहे हैं +[29:14] हमने नूह को उसकी क़ौम की तरफ़ भेजा और वो पचास (पचास) कम एक हज़ार बरस (950 साल) उनके दरमियान रहा। आख़िर ए कार उन लोगों को तूफ़ान ने आ घेरा इस हाल में के वो ज़ालिम थे +[29:15] फिर नूंह को और कश्ती वालों को हमने बचाया लिया और उसे दुनिया वालों के लिए एक निशान ए इब्रत (पाठ) बनाकर रख दिया +[29:16] और इब्राहिम को भेजा जबके उसने अपनी क़ौम से कहा "अल्लाह की बंदगी करो और उससे डरो, ये तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम जानो +[29:17] तुम अल्लाह को छोड़ कर जिनकी पूजा कर रहे हो वो तो महज़ बुथ (मूर्तियां/मूर्तियां) हैं और तुम एक झूठ गढ़ रहे हो। दर हकीकत अल्लाह के सिवाय जिनके तुम प्यार करते हो वो तुम्हें कोई रिज़क भी देने का इख्तियार नहीं रखते। अल्लाह से रिज़्क मांगो और उसकी बंदगी करो और उसका शुक्र अदा करो। उसकी तरफ तुम पलटाये जाने वाले हो +[29:18] और अगर तुम झुटलाते हो तो तुमसे पहले बहुत सी कौमें झुटला चुकी हैं। और रसूल पर सफ़ सफ़ पैग़ाम पाहुंचा देने के सिवा कोई ज़िम्मेदारी नहीं है।” +[29:19] क्या इन लोगों ने कभी देखा ही नहीं है कि अल्लाह किस तरह ख़ल्क़ की इब्तिदा करता है, फिर उसका इरादा (दोहराना) करता है? यकीनन ये [इआदा तो (किसी चीज़ की रचना को दोहराना)] अल्लाह के लिए आसां तरर है +[29:20] इनसे कहो के ज़मीन में चलो फिरो और देखो के हमें किस तरह ख़ल्क़ की इब्तिदा की है। फिर अल्लाह बार-ए-दिगार भी जिंदगी बक्शेगा। यकीनन अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है +[29:21] जिसे चाहे सजा दे और जिसपर चाहे रहम फरमाये। उसकी तरफ तुम फेरे जाने वाले हो +[29:22] तुम ज़मीन में अजीज (सख्ती) करने वाले हो ना आसमान में। और अल्लाह से बचाने वाला कोई सरपरस्त और मददगार तुम्हारे लिए नहीं है +[29:23] जिन लोगों ने अल्लाह की आयत का और उससे मुलाकात का इंकार किया है वो मेरी रहमत से मयुस हो चुके हैं, और उनके लिए दर्दनक सजा है +[29:24] फिर उसकी क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ ना था के उन्हें कहा “कत्ल करदो इसे या जला डालो इसको”। आख़िर ए कर अल्लाह ने उसे आग से बचा लिया। यकीनन इस में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाने वाले हैं +[29:25] और उसने कहा "तुमने दुनिया की जिंदगी में अल्लाह को छोड़ कर बुथों (मूर्तियों) को अपने दरमियान मुहब्बत का जरिया बना लिया है मगर कयामत के रोज तुम एक दूसरे का इंकार और एक दूसरा पर लानत करोगे और आग तुम्हारा ठिकाना होगी, और कोई तुम्हारा मददगार ना होगा।” +[29:26] हमें वक्त लुट ने उसको माना और इब्राहिम ने कहा मैं अपने रब की तरफ हिजरत (पलायन) करता हूं। वो ज़बरदस्त है और हकीम है +[29:27] और हमने उसे इशाक (इसहाक) और याकूब (जैकब) (जैसी औलाद) इनायत फरमायी और उसकी नाक में नुबुवत और किताब रख दी, और उसे दुनिया में उसका अजर अता किया और आख़िरत में वो यकीनन सालिहें मुझसे होगा +[29:28] और हमने लुट को भेजा जबके उसने अपनी क़ौम से कहा "तुम तो वो फहाश काम करते हो जो तुमसे पहले दुनिया वालों में से किसी ने नहीं किया है +[29:29] क्या तुम्हारा हाल ये है के मर्दों के पास जाते हो (अपनी वासना को संतुष्ट करने के लिए), और Raahzani (हाईवे डकैती) करते हो, और अपनी मजलिसों में बुरे काम करते हो?” फिर कोई जवाब उसकी क़ौम के पास इसके सिवा ना था के अनहोन ने कहा "ले आ अल्लाह का अज़ाब अगर तू सच्चा है" +[29:30] लूट ने कहा "ऐ मेरे रब, इन मुफसिद (शरारती) लोगों के मुक़ाबले में मेरी मदद फरमा" +[29:31] और जब हमारे फरिश्ते (दूत/संदेशवाहक) इब्राहीम के पास बशारत (खुशखबरी) लेकर पहुंचे तो उन्हें ने उसे कहा, "हम इस बस्ती के लोगों को हलाक करने वाले हैं, इसके लोग सख्त जालिम हो चुके हैं।" +[29:32] इब्राहीम ने कहा "वहां तो लूट मौजूद है"। अनहोन ने कहा: "हम खूब जानते हैं कि वहां कौन कौन है। हम उसे और उसकी बीवी के सिवा उसके बाकी घर वालों को बचा लेंगे"। उसकी बीवी पीछे रह जाने वालों में से थी +[29:33] फिर जब हमारे फरिश्ते (दूत/संदेशवाहक) लूट के पास पहुंचें तो उनकी आमद पर वो सख्त परेशान और दिल तंग हुआ। उनहों ने कहा “ ना डरो और ना रांझ करो, हम तुम्हें और तुम्हारे घर वालों को बचा लेंगे, सिवाय तुम्हारी बीवी के जो पीछे रह जाने वालों में से है +[29:34] हम इस बस्ती के लोगों पर आसमान से अजब नाज़िल करने वाले हैं हमें फ़िस्क (बुराई) के बदौलत जो ये करते रहते हैं” +[29:35] और हमने हमें बस्ती की एक खुली निशानी छोड़ दी है उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं +[29:36] और मदयां की तरफ हमने उनके भाई शोएब को भेजा।उसने कहा "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, अल्लाह की बंदगी करो और रोज़ ए आख़िर के उम्मीद-वार रहो और ज़मीन में मुफ़सीद बन कर ज़्यादतिया (शरारत) ना करते फिरो" +[29:37] मगर उन्होन ने उसे झुटला दिया. आख़िर ए कार एक सच ज़लज़ले ने उन्हें आ लिया और वो अपने घरों में पड़े के पड़े रह गए +[29:38] और आद ओ समूद को हमने हलाक किया, तुम वो मक़ामत देख चुके हो जहां वो रहते थे। उनके आमाल को शैतान ने उनके लिए ख़ुशनुमा बना दिया और उन्हें राह ए रास्ते से बरगश्ता करदिया, हलांके वो होश-गोश रखते थे +[29:39] और क़ारून ओ फिरौन ओ हमान को हमने हलाक किया। मूसा उनके पास बैयिनत (खुली निशानियां) लेकर आया मगर उनहोन ने जमीन में अपनी बदाई का ज़म किया हलंके वो सबकत ले जाने (क़ाबू से निकल जाने) वाले ना थे +[29:40] आख़िर ई कर हर एक को हमने उनके गुनाह में पकड़ा। फिर उनमें से किसी पर हमने पथराव (पत्थरों की बौछार) करने वाली हवा भेजी, और किसी को एक ज़बरदस्त धमाके ने आ लिया, और किसी को हमने ज़मीन में ढसा दिया, और किसी को डर (डूब) दिया। अल्लाह अनपर ज़ुल्म करने वाला ना था, मगर वो खुद ही अपना ऊपर ज़ुल्म कर रहे थे +[29:41] जिन लोगों ने अल्लाह को छोड़ कर दूसरे सरपरस्त (रक्षक) बना लिए हैं उनकी मिसाल मख़दी (मकड़ी) जैसी है जो अपना एक घर बनाती है, और सब घरों से ज़्यादा कमज़ूर घर मख़दी (मकड़ी) का घर ही होता है, काश ये लोग इलम रखते हैं +[29:42] ये लोग अल्लाह को छोड़ कर जिस चीज़ को भी पुकारते हैं अल्लाह उसे ख़ूब जानता है और वही ज़बरदस्त और हकीम है +[29:43] ये मिसालें (उदाहरण) हम लोगों की फहमिश (समझ) के लिए देते हैं, मगर उनको वही लोग समझते हैं जो इलम रखने वाले हैं +[29:44] अल्लाह ने आसमान और ज़मीन को बरहक़ अदा किया है, दर हकीकत इस में एक निशानी है एहले ईमान के लिए +[29:45] (ऐ नबी) तिलावत करो इस किताब की जो तुम्हारी तरफ वही के ज़ैरे से भेज दी गई है। और नमाज़ क़याम करो, यकीनन नमाज़ फ़हाश (बेहयायी) और बुरे कामों से रुकती है। और अल्लाह का ज़िक्र इस से भी ज़्यादा बड़ी चीज़ है। अल्लाह जानता है जो कुछ तुमलोग करते हो +[29:46] और एहले किताब से बेहस न करो मगर उम्र तरीक़े से, सिवाए उन लोगों के जो उन में से ज़ालिम हों। और उनसे कहो के "हम ईमान लाए हैं उस चीज पर भी जो हमारी तरफ भेज गई है और उस चीज पर भी जो तुम्हारी तरफ भेज गई थी। हमारा खुदा और तुम्हारा खुदा एक ही है और हम उसके मुसलमान (फरमा बरदार) हैं" +[29:47] (ऐ नबी) हमने इसी तरह तुम्हारी तरफ किताब नाज़िल की है। इस लिए वो लोग जिनको हमने पहली किताब दी थी वो इसपर ईमान लाते हैं, और इन लोगों में से भी बहुत से इसपर ईमान ला रहे हैं। और हमारी आयत का इंकार सिर्फ काफिर ही करते हैं +[29:48] (ऐ नबी) तुम इसे पहले कोई किताब नहीं पढ़ते थे और ना अपने हाथ से लिखते थे, अगर ऐसा होता तो बातिल परस्त लोग (झूठ के समर्थक) शक में पढ़ सकते थे +[29:49] दर-असल ये रोशन निशानियां हैं उन लोगों के दिलों में जिन्हें इल्म बख्शा गया है। और हमारी आयत का इंकार नहीं करते मगर वो जो जालिम हैं +[29:50] ये लोग कहते हैं के "क्यों ना उतारी गई इस शक्स पर निशानियां इसके रब की तरफ से?" कहो "निशानियां तो अल्लाह के पास हैं और मैं सिर्फ खबरदार करने वाला हूं खोल खोल कर" +[29:51] और लोगों के लिए ये (निशानी) काफी नहीं है के हमने तुमपर किताब नाज़िल की जो इन्हें पढ़ कर सुनायी जाती है? दर हक़ीक़त इस में रहमत है और हिदायत है उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं +[29:52] (ऐ नबी) कहो के "मेरे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह गवाही के लिए काफ़ी है। वो आसमान और ज़मीन में सब कुछ जानता है। जो लोग बातिल को मानते हैं और अल्लाह से कुफ्र करते हैं वही खसरे (नुक्सान) में रहने वाले हैं।” +[29:53] ये लोग तुमसे अज़ाब जल्दी लेन का मुतालबा करते हैं। अगर एक वक्त ए मुकर्रर ना करदिया गया होता तो इनपर अज़ाब आ चूका होता, और यकीनन (अपने वक्त पर) वो आ कर रहेगा अचानक, इस हाल में के इन्हें खबर भी ना होगी +[29:54] ये तुमसे अज़ाब जल्दी लेन का मुतलबा करते हैं, हलाँके जहन्नुम इन काफिरों को घेरे में ले चुकी है +[29:55] (और इन्हें पता चलेगा) हमें रोज जबके अजब इन्हें ऊपर से भी ढांक लेगा और पांव के नीचे से भी और कहेगा के अब चक्खो मजा उन कार्टूनों का जो तुम करते थे +[29:56] ऐ मेरे बंदन जो ईमान लाए हो, मेरी ज़मीन वसीह है, पास तुम मेरी ही बंदगी बजा लाओ +[29:57] हर मुतनफ्फिस को मौत का मजा चखना है, फिर तुम सब हमारी ही तरफ पलटा कर ले जाओगे +[29:58] जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्हों ने नीक अमल किए हैं उनको हम जन्नत की बुलंद ओ बाला इमरतों (इमारतें/महल) में रखेंगे जिनके आला में नेह्रेन बहती होंगी, वहां वो हमेशा रहेंगे। क्या है उम्मीद अजर है अमल करने वालों के लिए +[29:59] उन लोगों के लिए जिन्हों ने सब्र किया है और जो अपने रब पर भरोसा करते हैं +[29:60] कितने ही जानवर हैं जो अपना रिज्क उठाये नहीं फिरते, अल्लाह उनको रिज्क देता है और तुम्हारा राजिक भी वही है. वो सब कुछ सुनता और जानता है +[29:61] अगर तुम लोगों से पूछो के ज़मीन और आसमान को किसने पेदा किया है और चांद और सूरज को किसने मुस्कुरा कर रखा है, तो जरूर कहेंगे के अल्लाह ने, फिर ये किदर से धोखा खा रहे हैं +[29:62] अल्लाह हाय है जो अपने बंदों में से जिसका चाहता है रिज़्क कुशादा (बड़ा करना) करता है और जिसका चाहता है तंग करता है। यकीनन अल्लाह हर चीज़ का जाने वाला है +[29:63] और अगर तुम इनसे पूछो, किसने आसमान से पानी बरसाया और इसके जरूर से मुर्दा पड़ी हुई जमीन को जिला उठाया तो वो जरूर कहेंगे अल्लाह ने। कहो, अल्हम्दुलिल्लाह, मगर अक्सर लोग समझते नहीं हैं +[29:64] और ये दुनिया की जिंदगी में कुछ नहीं है मगर एक खेल और दिल का बहलावा। असल जिंदगी का घर तो डर ए आख़िरत (इसके बाद) है, काश ये लोग जानते हैं +[29:65] जब ये लोग कश्ती पर सवार होते हैं तो अपने दीन को अल्लाह के लिए खालिस करके उससे दुआ मांगते हैं। फिर जब वो उन्हें बचा कर ख़ुशी पर ले आता है तो यकीनन ये शिर्क करने लगते हैं +[29:66] ता-के अल्लाह की दी हुई निजात पर उसका कुफ़्रान ए नियामत करें और (हयात ए दुनिया के) मजे लूटें। अच्छा, अनक़रीब इन्हें मालूम हो जाएगा +[29:67] क्या ये देखते नहीं हैं कि हमने एक पुर-अमन हरम (सुरक्षा का अभयारण्य) बना दिया है, हलांके इनके गिर्द-ओ-पेश लोग उचक लिए जाते हैं? क्या फिर भी ये लोग बातिल को मानते हैं और अल्लाह की नियामत का कुफ़्रान करते हैं +[29:68] हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ बांधे या हक़ को झूठलाए जबके वो उसके सामने आ चुका हो? क्या ऐसे काफिरों का ठिकाना जहन्नुम ही नहीं है +[29:69] जो लोग हमारी खातिर मुजाहिदा (प्रयास) करेंगे उन्हें हम अपने रास्ते दिखाएंगे, और यकीनन अल्लाह नीकुकरों (जो अच्छा करते हैं) ही के साथ हैं + +Surah 30: Ar-Rum (The Romans) +---------------------------------------- +[30:1] अलिफ लाम मीम +[30:2] रूमी (रोमन) करीब की सर-जमीन में मगलूब (हार/पराजित) हो गए हैं +[30:3] और अपनी इस मगलूबियत (हार) के बाद चंद साल के अंदर वो गालिब (विजयी/प्रमुख) हो जाएंगे +[30:4] अल्लाह ही का इख्तियार है पहले भी और बाद में भी. और वो दिन वो होगा जबके अल्लाह की बख्शी हुई फतह पर मुसलमान खुशियां मनाएंगे +[30:5] अल्लाह नुसरत (जीत) अता फरमाता है जिसे चाहता है, और वो जबरदस्त और रहीम है +[30:6] ये वादा अल्लाह ने किया है, अल्लाह कभी अपने वादे की खिलाफत वारजी नहीं करता। मगर अक्सर लोग नहीं जानते हैं +[30:7] लोग दुनिया की जिंदगी का बस जाहिर पहलू (बाहरी पहलू) जानते हैं और आखिरी से वो खुद ही गाफिल हैं +[30:8] क्या उनहों ने कभी अपने आप में गौर-ओ-फिक्र नहीं किया? अल्लाह ने ज़मीन और आसमानों को और उन सारी चीज़ों को जो उनके दरमियान हैं बरहक़ और एक मुकर्रर मुद्दत ही के लिए अदा किया है। मगर बहुत से लोग अपने रब की मुलाक़ात के लिए तैयार हैं +[30:9] और क्या ये लोग कभी ज़मीन में चले फिर नहीं हैं कि उन लोगों का अंजाम नज़र आता है जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं? वो इनसे ज़्यादा ताक़त रखते थे। उनको ने जमीन को खूब उधेड़ा (फसल के लिए जमीन जोतना/तैयार करना और खेती करना) था और उसे इतना आबाद किया था जितना इन्हों ने नहीं किया है। उनके पास उनके रसूल रोशन निशानियां लेकर आये। फिर अल्लाह अनपर ज़ुल्म करने वाला ना था, मगर वो खुद ही अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे थे +[30:10] आख़िर ए कार जिन लोगों ने बुराइयां की थी उनका अंजाम बहुत बुरा हुआ। इस्ली के अनहोन ने अल्लाह की आयत को झुटलाया था और वो उनका मज़ाक उड़ाते थे +[30:11] अल्लाह ही ख़ल्क की इब्तिदा (सृष्टि की उत्पत्ति) करता है, फिर वही इसका इयादा (फिर से भुगतान/दोहराना) करेगा। फिर उसकी तरफ तुम पलट जाओगे +[30:12] और जब वो सा-आट (घंटा/घड़ी) बरपा होगी उस दिन मुजरिम हक-दक (बेवकूफ) रह जाएंगे +[30:13] उनके तहरे हुए शरीकोन में कोई उनका सिफारिशी (मध्यस्थ) ना होगा, और वो अपने शरीकों के मुनकिर हो जाएंगे +[30:14] जिस रोज वो सा-आत (घंटा/घड़ी/कयामत) बरपा होगी, उस दिन (सब इंसान) अलग गिरोहों में बत्त (विभाजित) जाएंगे +[30:15] जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्होन ने नीक अमल किए हैं वो एक बाग में शादां-ओ-फरहान (खुश) हाल) रक्खे जायेंगे +[30:16] और जिन्होन ने कुफ्र किया है और हमारी आयत को और आख़िरत की मुलाकात को झुटलाया वो अज़ाब में हाज़िर रक्खे जायेंगे +[30:17] पस तस्बीह करो अल्लाह की जबके तुम शाम करते हो और जब सुबह करते हो +[30:18] आसमानो और ज़मीन मैं उसके लिए हम्द (प्रशंसा) है और (तस्बीह करो उसकी) तीसरे पहर और जबके तुम्हारे जोहर का वक्त आता है +[30:19] वो जिंदा में से मुर्दे को निकलता है और मुर्दे में से जिंदा को निकल लाता है और जमीन को उसकी मौत के बारे में बात करता है है।इसी तरह तुमलोग भी (हालत ए मौत से) निकल लिए जाओगे +[30:20] उसके निशानियों में से ये है के उसने तुमको मिट्टी से पैदा किया फिर यकीन तुम बशर (इंसान) हो के (जमीन में) फैलते चले जा रहे हो +[30:21] और उसकी निशानियों में से ये है कि तुम्हारे लिए तुम्हारी जिंदगी से बीवियां बनाईं ता-के तुम उनके पास सुकून हासिल करो और तुम्हारे दरमियान मोहब्बत और रहमत अदा करदी। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फिक्र करते हैं +[30:22] और उसकी निशानियों में से आसमान और जमीन की अदाएं, और तुम्हारी जुबान और तुम्हारे रंग (रंग) का इख्तिलाफ है। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं दानिशमंद (बुद्धिमान) लोगों के लिए +[30:23] और उसकी निशानियों में से तुम्हारी रात और दिन को सोना और तुम्हारे उसके फज़ल को तलाश करना है। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो (गौर से) सुनते हैं +[30:24] और उसकी निशानियों में से ये है कि वो तुम्हें बिजली की चमक दिखाता है खौफ के साथ भी और तम (उम्मीद) के साथ भी। और आसमां से पानी बरसता है, फिर इसके ज़रीये से ज़मीन को उसकी मौत के बाद जिंदगी बक्शता है। यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं +[30:25] और उसकी निशानियों में से ये है के आसमां और जमीन उसके हुकुम से कायम हैं, फिर जून्ही के उसने तुम्हें जमीन से पुकारा, बस एक ही पुकार में अचानक तुम निकल आओगे +[30:26] आसमान और ज़मीन में जो भी हैं उसके बंदे हैं। सब के सब उसके लिए ताबे-फ़रमान (आज्ञाकारी) हैं +[30:27] वही है जो तख़लीक की इब्तिदा करता है, फिर वही उसका इआदा (फिर से भुगतान/दोहराना) करेगा और ये उसके लिए आसमां तार्र है।आस्मानो और ज़मीन में उसकी सिफत (विशेषता) सबसे बारतार है और वो ज़बरदस्त और हकीम है +[30:28] वो तुम्हें खुद तुम्हारी अपनी ही ज़ात से एक मिसाल देता है। क्या तुम्हारे उन गुलामों में से जो तुम्हारी मिल्कियत में हैं, कुछ गुलाम ऐसे भी हैं जो हमारे दिए हुए माल ओ दौलत में तुम्हारे साथ बराबर के शरीके हैं और तुम उनसे जुड़े हुए हो, जिस तरह आपस में अपने हमसरों से डरते हो? इस तरह हम आयत खोल कर पेश करते हैं उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं +[30:29] मगर ये जालिम बे-समझे बूझे अपनी तखाइलात (इच्छाएं) के पीछे चल पड़े हैं। अब कौन हमारे शक्स को रास्ता दिखा सकता है जिसे अल्लाह ने भटका दिया हो। ऐसे लोगों का तो कोई मददगार नहीं हो सकता +[30:30] पास (ऐ नबी, और नबी के जोड़े) यक्सू होकर अपना रुख इस दीन की सिम्थ में जमा दो। क़याम हो जाओ उस फ़ितरत पर जिसपर अल्लाह ताला ने इंसानों को पेदा किया है। अल्लाह की बनाई हुई सच बदली नहीं जा सकती। यह बिल्कुल रस्त और दुरुस्त दीन है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं +[30:31] (क़याम हो जाओ इस बात पर)अल्लाह की तरफ़ रूजू करते हुए, और डरो उसे, और नमाज़ क़याम करो, और न हो जाओ उन मुशरिकेन में से +[30:32] जिन्होन ने अपना अपना दीन अलग बना लिया है और गिरोहों (फिरकों) में बात हो गई है। हर एक गिरोह के पास जो कुछ है उसमें वो मगन है +[30:33] लोगों का हाल ये है के जब उन्हें कोई तकलीफ पहुंची है तो अपने रब की तरफ रूजू करके उसे पुकारते हैं, फिर जब वो कुछ अपने रहमत का जायका (स्वाद) उन्हें चकमा देता है तो यकीनन उन मुझमें से कुछ लोग शिर्क करने लगते हैं +[30:34] ता-के हमारे किये हुए एहसान की नाशुक्री करें। अच्छा, मजा करो, अंकारीब तुम्हें मालूम हो जाएगा +[30:35] क्या हमने कोई सनद और दलील उन पार नाज़िल की है जो शहादत देती हो हमें शिर्क की सदाकत पर जो ये कर रहे हैं +[30:36] जब हम लोगों को रहमत का ज़ायका दिखाते हैं तो वो उसपर फूल जाते हैं हैं, और जब उनके अपने किया कार्टून से ऊपर कोई मुसीबत आती है तो यकीनन वो बहुत अच्छे लगते हैं +[30:37] क्या ये लोग देखते नहीं हैं कि अल्लाह ही रिज़्क कुशादा करता है जिसका चाहता है और तंग करता है? यकीनन इस में बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं +[30:38] पास (ऐ मोमिन) रिश्तेदार को उसका हक़ दे और मिस्कीन ओ मुसाफिर को (उसका हक़)। ये तरीक़ा बेहतर है उन लोगों के लिए जो अल्लाह की ख़ुशनुदी चाहते हों, और वही फ़लाह पाने वाले हैं +[30:39] जो सूद (रिबा/सूद/ब्याज) तुम देते हो ता-के लोगों के अमल में शामिल होकर वो बढ़ (बढ़े) जाए, अल्लाह के नाज़दीक वो नहीं बढ़ता (बढ़े), और जो जकात तुम अल्लाह की खुशनुदी हासिल करने के इरादे से देते हो, उसी के देने वाले दर हकीकत अपने माल बढ़ाते हैं +[30:40] अल्लाह ही है जिसने तुमको अदा किया, फिर तुम्हें रिज़क दिया, फिर वो तुम्हें मौत देता है, फिर वो तुम्हें जिंदा करेगा. क्या तुम्हारे रुके हुए शेयरों में कोई ऐसा है जो मेरे साथ कोई काम भी करता हो? पाक है वो और बहुत बाला-ओ-बरतर है उस शिर्क से जो ये लोग करते हैं +[30:41] खुश्की (जमीन) और तारी (समुद्र) में फसाद बरपा हो गया है लोगों के अपने हाथों की कमाई से, ता-के मजा चखाये उनको उनके बाज़ अमल का, शायद के वो बाज़ आयें +[30:42] (ऐ नबी) इनसे कहो के ज़मीन में चल फिर कर देखो पहले गुज़रे हुए लोगों का क्या अंजाम हो चुका है। उन में से अक्सर मुशरिक ही थाय +[30:43] पास (ऐ नबी) अपना रुख मज़बूती के साथ जमा दो इस दीन-ए-रास्त की सिम्थ में कबूल इसके के वो दिन आए जिसकी ताल जाने की कोई सूरत अल्लाह की तरफ से नहीं है। उस दिन लोग फट कर एक दूसरे से अलग हो जाएंगे +[30:44] जिसने कुफ्र किया है उसके कुफ्र का जवाब उसी पर है, और जिन लोगों ने नेक अमल किया है वो अपने ही लिए फलाह का रास्ता साफ कर रहे हैं +[30:45] ता-के अल्लाह ईमान लाने वालों और अमल-ए-सालेह करने वालों को अपने फजल से जजा डे. यकीनन वो काफिरों को पसंद नहीं करता +[30:46] उसके निशानियों में से ये है के वो हवाएं भेजता है बशारत के लिए और तुम अपनी रहमत से बेहरामन्द करने के लिए। और इस ग़रज़ के लिए के कश्तियां उसके हुकुम से चलें और तुम उसका फ़ज़ल तलाश करो और उसकी शुकर गुजर बनो +[30:47] और हमने तुमसे पहले रसूलों को उनकी क़ौम की तरफ भेजा और वो उनके पास रोशन निशानियां लेकर आए। फिर जिन्हों ने जुर्म किया उनसे हमने इन्तेक़ाम लिया और हमपर ये हक़ था के हम मोमिनो की मदद करें +[30:48] अल्लाह हाय है जो हवाओं को भेजता है और वो बादल उठाती हैं। फिर वो बादलों को आसमान में फैला देता है जिस तरह चाहता है, और वो टुकड़ों में तकसीम करता है, फिर तू देखता है कि बारिश के मौसम में बादल से टपकते हैं। ये बारिश जब वो अपने बंदों में से पहले चाहता है बरसात है +[30:49] तो यकीनन वो खुश ओ खुर्रम हो जाते हैं, हलांके इसके नुज़ुल से पहले वो मयौस हो रहे थे +[30:50] देखो अल्लाह की रहमत के असर, के मुर्दा पड़ी हुई जमीन को वो किस तरह जिला उठाता है, यकीनन वो मुर्दों को जिंदगी बक्शने वाला है और वो हर चीज पर कादिर है +[30:51] और अगर हम एक ऐसी हवा भेज दें जिसके असर से वो अपनी खेती को जर्द पाएं तो वो कुफ्र करते रह जाते हैं +[30:52] (ऐ नबी) तुम मुर्दों को नहीं सुना सकते, ना उन बेटों को अपनी पुकार सुना सकते हो जो पीठ फेरे भागे चले जा रहे हो +[30:53] और ना तुम अंधों को उनकी गुमराही से निकल कर राह ए रस्त दिखा सकते हो, तुम तो सिर्फ उन्हें सुना सकते हो जो हमारी आयत पर ईमान लाते और सर-ए-तस्लीम खत्म कर देते हैं +[30:54] अल्लाह ही तो है जिसने ज़ोफ़ (कामज़ोरी) की हालत में तुम्हारी अदायश की इब्तिदा की, फिर ज़ोफ़ है (कमज़ोरी) के बाद तुम्हें कुव्वत बख्शी, फिर इस कुव्वत के बाद तुम्हें ज़ीफ़ और बूड़ा (पुराना) करदिया। वो जो कुछ चाहता है चुकाता है, और वो सब कुछ जानने वाला, हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है +[30:55] और जब वो सा-आट (घंटा) बरपा होगी तो मुजरिम कसमें खा खा कर कहेंगे के हम एक घड़ी भर से ज़्यादा नहीं ठहरते हैं। इसी तरह वो दुनिया की जिंदगी में धोखा खाया करते थे +[30:56] मगर जो इल्म और ईमान से बेहरमंद (संपन्न) किए गए थे वो वो कहेंगे के खुदा के नविस्ते (रिकॉर्ड) में तो तुम रोज-ए-हशर तक पैदा कर रहे हो। तो ये वही रोज़-ए-हशर है, लेकिन तुम जानते न थे +[30:57] पास वो दिन होगा जिसमें ज़ालिमों को उनकी मज़रत कोई नफ़ा (फ़ैदा) न देगी और न उनसे माफ़ी माँगने के लिए कहा जाएगा +[30:58] हमने कुरान में लोगों को तरह तरह से समझा है, तुम ख्वाह कोई निशानी ले आओ, जिन लोगों ने मन्ने से इंकार कर दिया है वो यहीं कहेंगे के तुम बातिल (झूठ) पर हो +[30:59] इस तरह थप्पा (मुहर) लगा देता है अल्लाह उन लोगों के दिलों पर जो बे-इल्म है +[30:60] पास (ऐ नबी) सब्र करो, यकीनन अल्लाह का वादा सच्चा है. और हरगिज हल्का न पाएं तुमको वो लोग जो यकीन नहीं लाते + +Surah 31: Luqman (Luqman) +---------------------------------------- +[31:1] अलिफ लाम मीम +[31:2] ये किताब-ए-हकीम (बुद्धि की किताब) की आयत हैं +[31:3] हिदायत और रहमत नीकुकर लोगों के लिए +[31:4] जो नमाज कायम करते हैं, जकात देते हैं और आखिरी पर यकीन रखते हैं +[31:5] यहीं लोग अपने रब की तरफ से राह-ए-रास्त पर हैं और यहीं फलाह पाने वाले हैं +[31:6] और इंसान ही में से कोई ऐसा भी है जो कलाम-ए-दिल फरेब [लगव बातों को/बेकार की बातें (आइम्यूजिक, गायन, आदि)] खत्म कर लाता है ता-के लोगों को अल्लाह के रास्ते से इल्म के बिना भटका दे और इस रास्ते की दावत को मज़ाक में उड़ा दें। ऐसे लोगों के लिए सख्त ज़लील करने वाला अज़ाब है +[31:7] उसे जब हमारी आयतें सुनाई जाती हैं तो वो बड़े घमंड के साथ इस तरह रुख फेर लेता है गोया के उसने उन्हें सुना ही नहीं, गोया के उसके कान बाहर हैं। अच्छा मुशदा (खबर) सुना दो उसे एक दर्दनाक अज़ाब का +[31:8] अलबत्ता जो लोग ईमान ले आएं और नीक अमल करें, उनके लिए नियामत भारी जन्नतें हैं +[31:9] जिनमें वो हमेशा रहेंगे। ये अल्लाह का पुख्ता वादा है, और वो ज़बरदस्त और हकीम है +[31:10] उसने आसमान को पैदा किया बिना सुतुनो (खंभे) के जो तुमको नज़र आए। उसने ज़मीन में पहाड़ जमा दिए ता-के वो तुम्हें लेकर धुलक (टर्न/शेक) ना जाए। उसने हर तरह के जानवर ज़मीन में फैला दिए और आसमां से पानी बरसाया और ज़मीन में क़िसम क़िसम के उम्दा चीज़ उगा दी +[31:11] ये तो है अल्लाह की तख़लीक, अब ज़रा मुझे दिखाओ, दुसरों ने क्या पैदा किया है? असल बात ये है कि ये जालिम लोग सारे गुमराही में पड़े हैं +[31:12] हमने लुकमान को हिकमत अता की थी के अल्लाह का शुक्र गुज़ार हो। जो कोई शुकर करे उसका शुकर उसके अपने लिए ही मुफीद (फैयदमंद) है और जो कोई कुफ्र करे तो हकीकत में अल्लाह बे-नियाज और आप से आप महमूद (अत्यंत प्रशंसनीय) हैं +[31:13] याद करो जब लुकमान अपने बेटे को हिदायत कर रहा था तो उसने कहा "बेटा! खुदा के साथ किसी को शरीक न करना, हक़ ये है के शिर्क बहुत बड़ा ज़ुल्म है" +[31:14] और ये हकीकत ये है कि हमने इंसान को अपने वलीदीन (माता-पिता) का हक़ पहचान की खुद ताकीद की है। उसकी माँ ने ज़ोफ़ पर ज़ोफ़ (कमजोरी पर कमजोरी) उठा कर उसे अपने पेट में रखा और दो साल उसका दूध छूने में लगे। (इसी के लिए हमने उसको हिदायत की के) मेरा शुक्र कर और अपने वालिदैन का शुक्र बजा ला। मेरी ही तरफ तुझे पलटना है +[31:15] लेकिन अगर वो तुझपर दबाओ डालें के मेरे साथ तू किसी ऐसे को शरीक करे जिसे तू नहीं जानता तो उसकी बात हरगिज़ ना मान। दुनिया में उनके साथ नई बातें करता रह, मगर जोड़ी (फॉलो) हमें शक्स के रास्ते की कर जिसने मेरी तरफ रूजू किया है। फिर तुम सबको पलटना मेरी ही तरफ है, हमें वक्त मैं तुम्हें बता दूंगा के तुम कैसे अमल करते रहे हो +[31:16] (और लुकमान ने कहा था के) "बेटा, कोई चीज राय के दाना (सरसों) बराबर भी हो और किसी चट्टन (रॉक) में या आसमानो या जमीन मैं कहीं छुपी हुई हूं, अल्लाह उसे निकल +[31:17] +[31:18] +[31:19] अपनी चाल में ऐतदाल (मध्यम) इख्तियार कर, और अपनी आवाज जरा पिछली रख, सब आवाजों से ज्यादा बुरी आवाज गढ़ों की आवाज होती है +[31:20] क्या तुम लोग नहीं देखते कि अल्लाह ने ज़मीन और आसमान की सारी चीज़ें तुम्हारे लिए मुस्कुराकर रखी हैं और अपनी खुली और छुपी नियामतें तुमपर तमाम करदी हैं? इसपर हाल ये है कि इंसानों में से कुछ लोग हैं जो अल्लाह के बारे में झगड़ा करते हैं बिना इसके कि उनके पास कोई इल्म हो, या हिदायत, या कोई रोशनी दिखाने वाली किताब +[31:21] और जब उनसे कहा जाता है कि जोड़ी बनाओ हमें चीज की जो अल्लाह ने नाज़िल की है तो कहते हैं हम तो उस चीज़ की पेयरवी करेंगे जिसपर हमने अपने बाप दादा को पाया है। क्या ये उनकी जोड़ी करेगी ख्वाह शैतान उनको भड़काती हुई आग ही की तरफ क्यों ना बुलाता रहा हो +[31:22] जो शक्स अपने आप को अल्लाह के हवाले कर दे और अमलन वो नीक हो, उसने फिल-वाकई एक भरोसे के काबिल सहारा थाम लिया, और सारे मामले का आखिरी फैसला अल्लाह ही के हाथ है +[31:23] अब जो कुफ्र करता है उसका कुफ्र तुम्हें गम में मुबतला ना करे। उनको लाट कर आना तो हमारी ही तरफ है, फिर हम उन्हें बता देंगे के वो क्या कुछ करके आये हैं। यकीनन अल्लाह सीनो (छाती) के छुपे हुए राज़ तक जानता है +[31:24] हम थोड़ी मुद्दत उन्हें दुनिया में मजे करने का मौका दे रहे हैं, फिर उनको बेबस करके एक साख अज़ाब की तरफ खींच ले जायेंगे +[31:25] अगर तुम इनसे पूछो के ज़मीन और आसमानों को किसने पाया है, तो ये जरूर कहेंगे के अल्लाह ने। कहो अल्हम्दुलिल्लाह, मगर इनमें से अक्सर लोग जानते नहीं हैं +[31:26] आसमान और ज़मीन में जो कुछ है अल्लाह ही का है। बेशक अल्लाह बे-नियाज़ (ज़रूरत से मुक्त) और आप से आप महमूद (प्रशंसनीय) हैं +[31:27] ज़मीन में जितने दरख़्त हैं अगर वो सब के सब क़लम बन जाएँ और समंदर (दवात (स्याही) बन जाएँ) जैसे सात (सात) मज़ीद समंदर रोशनाई (स्याही) मुहय्या करें तब भी अल्लाह की बातें (लिखने से) ख़तम न होंगी। बेशक अल्लाह ज़बरदस्त और हकीम है +[31:28] तुम सारे इंसानों को भुगतान करना और फिर दोबारा जिला उठाना (जिंदा करना) तो (उसके लिए) बस ऐसा है जैसे एक मुतनफ़िस (अकेले व्यक्ति) को (पैदा करना और जिला उठाना)। हकीकत ये है के अल्लाह सब कुछ सुनने और देखने वाला है +[31:29] क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह रात को दिन में पिरोता हुआ ले आता है और दिन को रात में? उसने सूरज और चाँद को मुसक्कर कर रखा है। सब एक वक्त ए मुकर्रर तक चले जा रहे हैं। और (क्या तुम नहीं जानते) के जो कुछ भी तुम करते हो अल्लाह उसे ब-ख़बर है +[31:30] ये सब कुछ इस वजह से है के अल्लाह ही हक़ है और उसे छोड़ कर दूसरी चीज़ को ये लोग पुकारते हैं वो सब बातिल हैं।और (इस वजह से के) अल्लाह ही बुज़ुर्ग हे बारतार है +[31:31] क्या तुम देखते नहीं हो कि कश्ती समंदर में अल्लाह के फजल से चलती है ता-के वो तुम्हें अपनी कुछ निशानियां दिखाएंगे? दर हकीकत इस में बहुत सी निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो सब्र और शुक्र करने वाला हो +[31:32] और जब (समंदर में) लोगों पर एक मौज साएबानो (छतरियों की तरह) की तरह छा जाती है तो ये अल्लाह को पुकारते हैं अपने दीन को बिल्कुल उसी के लिए खाली करके। फिर जब वो बच्चा कर इन्हें खुश्की (जमीन) तक पहुंचा देता है तो इनमें से कोई इक्तेसाद बरता (गुनगुना) है। और हमारी निशानियों का इनकार नहीं करता मगर हर वो शक्स जो गद्दार और नाशुक्र है +[31:33] लोगन, बचो अपने रब के गजब से और डरो उस दिन से जबके कोई बाप अपने बेटे की तरफ से बदला ना देगा और ना कोई बेटा ही अपने बाप की तरफ से कुछ बदला देने वाला होगा। फिल्वाक़े अल्लाह का वादा सच्चा है। पास ये दुनिया की जिंदगी तुम्हें धोखे में ना डाले, और ना धोखे-बाज तुमको अल्लाह के मामले में धोखा दे दे +[31:34] उस घड़ी का इल्म अल्लाह ही के पास है, वही बारिश बरसात है, वही जानता है के मांओं के पैठों में क्या परवरिश पा रहा है, कोई मुतानफ़िस नहीं जानता के कल वो क्या कमाई करने वाला है और ना किसी शक्स को ये खबर है कि किस सर-ज़मीन में उसको मौत आनी है। अल्लाह ही सब कुछ जानने वाला और बाख़बर है + +Surah 32: As-Sajdah (The Adoration) +---------------------------------------- +[32:1] अलिफ़ लाम मीम +[32:2] इस किताब की तंज़ील (नुज़ुल/रहस्योद्घाटन) बिला शुभा रब उल आलमीन की तरफ से है +[32:3] क्या ये लोग कहते हैं के इस शक्स ने इसे खुद गड़बड़ लिया है? नहीं, बल्कि ये हक है तेरे रब की तरफ से ता-के तू मुतनब्बेह (चेतावनी) करे एक ऐसी क़ौम को जिसके पास तुझसे पहले कोई मुतनब्बेह (चेतावनी) करने नहीं आया। शायद के वो हिदायत पा जाएं +[32:4] वो अल्लाह हाय है जिसने आसमानों और ज़मीन को और उन सारी चीज़ों को जो इनके दरमियान हैं छे (छह) दिनों में पेदा किया और इसके बाद अर्श पर जलवा फरमा हुआ। उसके सिवा ना तुम्हारा कोई हमी ओ मददगार है और ना कोई उसके आगे सिफ़ारिश करने वाला। फिर क्या तुम होश में ना आओगे +[32:5] वो आसमान से ज़मीन तक दुनिया के मामले की तदबीर (योजना) करता है और इस तदबीर की रुदाद (रिकॉर्ड) ऊपर उसके हुजूर जाती है एक ऐसे दिन में जिसका मिक़दार तुम्हारे साथ एक हज़ार साल है +[32:6] वही है हर पोशीदा (चुपी हुई) और जाहिर का जाने वाला। ज़बरदस्त, और रहीम +[32:7] जो चीज़ भी उसने बनाई ख़ूब ही (अच्छी तरह) बनाई। उसने इंसान की तख़लीक की इब्तिदा गारे (मिट्टी/मिट्टी) से की +[32:8] फिर उसकी नाक एक ऐसी सात से चलाई जो हकीर पानी (तरल पदार्थ) की तरह का है +[32:9] फिर उसको निक-सुक से दुरुस्त किया और उसके अंदर अपनी रूह फूंक दी। और तुमको कान दिये, आँखें दी और दिल दिये। तुम लोग कम ही शुक्र गुज़ार होते हो +[32:10] और ये लोग कहते हैं: "जब हम मिट्टी में राल-मिल चुके होंगे तो क्या हम फिर नये सिरे से पैदा किये जायेंगे?" असल बात ये है के ये अपने रब की मुलाक़ात के मुनीर हैं +[32:11] इनसे कहो "मौत का वो फ़रिश्ता जो तुम्पर मुकर्रर किया गया है तुमको पूरा का पूरा अपने क़ब्ज़ में ले लेगा और फिर तुम अपने रब की तरफ पलटा लाये जाओगे" +[32:12] काश तुम देखो वो वक़्त जब ये मुजरिम सर झुकाए अपने रुब के हुजूर खड़े होंगे. (हम वक्त ये कह रहे होंगे) "ऐ हमारे रब, हमने खूब देख लिया और सुन लिया, अब हमें वापस भेज दे ता-के हम नई अमल करें। हमें अब यकीन आ गया है।" +[32:13] (जवाब में इरशाद होगा) “अगर हम चाहते तो पहले ही हर नफ्स को इसकी हिदायत दे देते, मगर मेरी वो बात पूरी हो गई जो मैंने कहीं थी के मैं जहन्नुम को जिन्नो और इंसानों से भर दूंगा +[32:14] पास अब चक्खो मजा अपनी इस हरकत का के तुमने इस दिन की मुलाक़ात को फ़रामोश कर दिया। हमने भी अब तुम्हें फ़रामोश कर दिया +[32:15] +[32:16] उनकी पीठें बिस्तरों से अलग रहती हैं, अपने रब को खौफ और तमा (उम्मीद) के साथ पुकारते हैं। और जो कुछ रिज्क हमने उन्हें दिया है उसमें से खर्च करते हैं +[32:17] फिर जैसा कुछ आंखों की ठंडक का सामान उनके अमाल की जजा में उनके लिए छुपा कर रखा गया है उसकी किसी मुतनफ्फिस (व्यक्ति/आत्मा) को खबर नहीं है +[32:18] भला कहीं ये हो हो सकता है कि जो शक्स मोमिन हो वो हम शक्स की तरह हो जाए जो फासीक (नफ़रमान/बुराई करने वाला) हो? ये डोनो बराबर नहीं हो सकते +[32:19] जो लोग ईमान लाए हैं और जिन्होन ने नीक अमल किए हैं उनके लिए तो जन्नतन की क़याम-गहेन (मेहमाननवाज घर) हैं। ज़ियाफ़त के तौर पर उनके अमल के बदले में +[32:20] और जिन्हों ने फिस्क (ना-फरमानी) इख्तियार किया है उनका ठिकाना दोज़ख है। जब कभी वो उसे निकालना चाहेंगे उसमें ढकैल दिए जाएंगे और उन्हें कहा जाएगा के चक्खो अब उसी आग के अज़ाब का मजा जिसको तुम झूठलाया करते थे +[32:21] हमसे बड़े अज़ाब से पहले हम इसी दुनिया में (किसी न किसी छोटे) अज़ाब का मजा इन्हें चकते रहेंगे। शायद के ये (अपने बगियाना [अपराध] रवीश से) बाज़ आ जाएं +[32:22] और उसे बड़ा ज़ालिम कौन होगा जिसमें उसके रब की आयत के ज़रिये से हिदायत की जाए और फिर वो इनसे मुह फेर ले। ऐसे मुजरेमो से तो हम इंतेक़ाम लेकर रहेंगे +[32:23] इस्से पहले हम मूसा को किताब दे चुके हैं। लिहाज़ा उसी चीज़ के मिलने पर तुम्हें कोई शक्क न होना चाहिए। हमें किताब को हमने बानी इसराइल के लिए हिदायत बनाई थी +[32:24] और जब उन्होन ने सब्र किया और हमारी आयत पर यकीन लाते रहे तो उनके अंदर हमने ऐसे पेशवा पेदा किये जो हमारे हुकुम से रहनुमायी (हिदायत/मार्गदर्शन) करते थे +[32:25] यकीनन तेरा रब ही कयामत के रोज़ उन बातों का फैसला करेगा जिनमें (बानी इसराइल) बहाम (आपस में) इख्तिलाफ करते रहे हैं +[32:26] और क्या इन लोगों को (तारीख़ी (ऐतिहासिक) वाकियात में) कोई हिदायत नहीं मिली के उनसे पहले कितनी कौमों को हम हलाक कर चुके हैं जिनके रहने की जगह में आज ये चलते फिरते हैं? इसमें बड़ी निशानियां हैं. क्या ये सुनते नहीं हैं +[32:27] और क्या लोगों ने ये मंज़र कभी नहीं देखा के हम एक बे-आब ओ गया (बंजर) ज़मीन की तरफ पानी बहा लाते हैं, और फिर उसी ज़मीन से वो फसल उगती है जिसमें उनके जानवरों को भी चारा मिलता है और ये खुद भी खाते हैं? तो क्या इन्हें कुछ नहीं सूझता +[32:28] ये लोग कहते हैं "ये फैसला कब होगा अगर तुम सच्चे हो?" +[32:29] इनसे कहो "फैसले के दिन ईमान लाना उन लोगों के लिए कुछ भी नफेह (फैडेमांड) न होगा जिन्हों ने कुफ्र किया है और फिर उनको कोई मोहलत न मिलेगी।" +[32:30] अच्छा, इनके हाल पर छोड़ दो और इंतज़ार करो, ये भी मुंतज़िर (इंतज़ार कर रहे) हैं + +Surah 33: Al-Ahzab (The Allies) +---------------------------------------- +[33:1] ऐ नबी! अल्लाह से डरो और कुफ्फार ओ मुनाफिकीन की इताअत (आज्ञा) न करो, हकीकत में अलीम (सभी जानने वाले) और हकीम अल्लाह ही है +[33:2] पैरवी करो हमसे बात की जिसका इशारा तुम्हारे रब की तरफ से तुम किया जा रहा है। अल्लाह हर हमसे बात करता है जो तुमलोग करते हो +[33:3] अल्लाह पर तवक्कुल (भरोसा) करो, अल्लाह ही वकील होने के लिए काफी है +[33:4] अल्लाह ने किसी शक्स (मर्द) के धड़ (जिस्म/शरीर) में दो दिल नहीं रखे हैं, ना उसने तुम लोगों की उन बीवीयों को जिनसे तुम जिहार [आप किसकी तुलना अपनी मां की पीठ से करते हैं (उन्हें तलाक देने के लिए)] करते हो तुम्हारी मां बना दिया है, और ना उसने तुम्हारे मुंह बोले बेटों को तुम्हारा हक़ीक़ी बेटा बनाया है। ये तो वो बातें हैं जो तुमलोग अपने मुँह से निकल देते हो, मगर अल्लाह वो बात कहता है जो मबनी बार हकीकत है। और वही सही तारीख़ की तरफ़ रहनुमाई करता है +[33:5] मुँह बोले बेटों (दत्तक पुत्रों) को उनके बापों (पिता) की निस्बत से पुकारो, ये अल्लाह के नज़दीक ज़्यादा मुंसिफाना (न्यायसंगत) बात है। और अगर तुम मालूम ना हो के उनके बाप कौन हैं तो वो तुम्हारे दीनी भाई और रफीक हैं। ना दानिशता जो बात तुम कहो इसके लिए तुमपर कोई पकड़ा नहीं है, लेकिन उस बात पर जरूर गिराफ्त है जिसका तुम दिल से इरादा करो। अल्लाह दरगुज़र करने वाला और रहीम है +[33:6] बिला शुबा नबी तो एहले ईमान के लिए उनकी अपनी ज़ात पर मुक़द्दम है, और नबी की बीवियाँ उनकी माँ (माँ) हैं। मगर किताबुल्लाह की रूह से आम मोमिनीन और मुहाजिरीन की बा-निस्बत रिश्तेदार एक दूसरे के ज़्यादा हक़दार हैं। अलबत्ता अपने रफ़ीक़ों के साथ तुम कोई भलाई (करना चाहो तो) कर सकते हो। ये हुकुम किताब ए इलाही में लिखा हुआ है +[33:7] और (ऐ नबी) याद रखो हमें अहद-ओ-पैमान (संविदा) को जो हमने सब पैगम्बरों से लिया है, तुमसे भी और नूह और इब्राहीम और मूसा और ईसा इब्ने मरियम से भी। सबसे पुख्ता अहद ले चुके हैं +[33:8] ता-के सच्चे लोगों से (उनका रब) उनकी सच्चाई के बारे में सवाल करें, और काफिरों के लिए तो उसने दर्दनक अजब मुहैय्या कर ही रखा है +[33:9] ऐ लोगों, जो ईमान लाए हो, याद करो अल्लाह के एहसान को जो (अभी अभी) उसने तुमपर किया है जब लश्कर तुमपर चढ़ आए तो हमने उनपर एक ताकत आंधी (हवा) भेज दी और ऐसी फौजें रावण की जो तुमको नज़र ना आती थी। अल्लाह वो सब कुछ देख रहा था जो तुमलोग हमें वक्त कर रहे थे +[33:10] जब वो ऊपर से और नीचे से तुमपर चढ़ आए, जब खौफ के मारे आंखें पथरा गई, कालीजे मुह को आ गए, और तुमलोग अल्लाह के बारे में तरह तरह के गुमान करने लगे +[33:11] हमें वक्त ईमान लाने वाले खूब आजमाए (परीक्षित) गए और बुरी तरह हिला मारे गए +[33:12] याद करो वो वक्त जब मुनाफिकीन और वो सब लोग जिनके दिलों में रोग थे साफ़ साफ़ कह रहे वे के अल्लाह और उसके रसूल ने जो वादे हमसे किए थे वो फरेब के सिवा कुछ ना थाय +[33:13] जब उन में से एक गिरो ​​​​ने कहा के "ऐ यत्रिब के लोगों, तुम्हारे लिए अब रुकने का कोई मौका नहीं है, पलट चलो" जब उनका एक फर्क ये कह कर नबी से रुखसत तलब कर रहा था के "हमारे घर खतरों में हैं," हलांके वो खतरे में ना थे। दर-असल वो (मुहाज़ ए जंग से [युद्ध-मोर्चे से]) भागना चाहते थे +[33:14] अगर शहर के अतराफ से दुश्मन घुस आए होतय और हमें वक्त उन्हें फिटने की तरफ दावत दी जाती तो ये उसमें जा पढ़ते और मुश्किल ही से उन्हें शरीक ए फिटना होने में कोई तामुल (अनिच्छा) होता है +[33:15] लोगों ने इसे पहले अल्लाह से अहद किया था के ये पीठ ना फेरेंगे। और अल्लाह से किए हुए अहद की बाज़-पुर्स (सवाल करते हुए) तो होनी ही थी +[33:16] (ऐ नबी!) इनसे कहो, अगर तुम मौत या कत्ल से भागो तो ये भगना तुम्हारे लिए कुछ भी नफा-बख्श ना होगा, इसके बाद जिंदगी के मजे लूटने का थोड़ा ही मौका तुम्हें मिल सकेगा +[33:17] इनसे कहो, कौन है जो तुम्हें अल्लाह से बचा सकता है अगर वो तुम्हें नुक्सान पहुंचाना चाहे? और कौन उसकी रहमत को रोक सकता है अगर वो तुमपर मेहरबानी करना चाहे? अल्लाह के मुक़ाबले में तो ये लोग कोई हामी ओ मददगार (रक्षक या मददगार) नहीं पा सकते हैं +[33:18] अल्लाह तुम में से उन लोगों को खूब जानता है जो (जंग के काम में) रुकावतें डालने वाले हैं, जो अपने भाइयों से कहते हैं "आओ हमारी तरफ।" जो लड़ाई में हिसा लेते भी हैं तो बस नाम गिनाने को +[33:19] जो तुम्हारा साथ देने में सक्षम है। ख़तरे का वक़्त आ जाए तो इस तरह दिधे फिरा-फिरा कर तुम्हारी तरफ देखते हैं जैसे किसी को मरने वाले पर गशी तारी हो रही हो। मगर जब ख़तरा गुज़र जाता है तो यही लोग फ़ायदों के हरिस बनकर कैंची की तरह (कैंची की तरह) चलती है ज़ुबान के लिए तुम्हारे इस्तेकबाल को आ जाते हैं। ये लोग हरगिज़ ईमान नहीं लाए, इसी के लिए अल्लाह ने इनके सारे अमल ज़या कर दिए। और ऐसा करना अल्लाह के लिए बहुत आसान है +[33:20] ये समझ रहे हैं कि हमला-आवर गिरोह अभी गए नहीं हैं और अगर वो फिर हमला हो जाए तो इनका जी चाहता है कि हमें मौका पर ये कहीं सेहरा (रेगिस्तान) में बद्दुओं (बेडौइन) के दरमियान जा बैठें और वहीं से तुम्हारे हालात पूछते रहते हैं। अगर ये तुम्हारे दरमियान रहेंगे भी तो लड़ाई में कम ही हिसा लेंगे +[33:21] दर हकीकत तुम लोगों के लिए अल्लाह के रसूल में एक बहतरीन नामुना था, हर उस शक्स के लिए जो अल्लाह और यौम ए आखिर का उम्मीदवर हो और कसरत से अल्लाह को याद करे +[33:22] और सच्चे मोमिनो (का हाल हमें वक्त ये था के) जब उन्होन ने हमला-आवर लश्करों को देखा तो पुकार उठे के "ये वही चीज है जिसका अल्लाह और उसके रसूल ने हमसे वादा किया था। अल्लाह और उसके रसूल की बात बिलकुल सच्ची थी।” इस वक़िये ने उनके ईमान और उनकी सुपुर्दगी (सबमिशन) को और ज़्यादा बढ़ा दिया +[33:23] ईमान लाने वालों में ऐसे लोग मौजूद हैं जिन्हों ने अल्लाह से किये हुए अहद को सच्चा कर दिखाया है। इनमें से कोई अपनी नज़र पूरी कर चुका है और कोई वक़्त आने का मुंतज़िर है। इन्हों ने अपने रवैय्ये में कोई तबदीली नहीं की +[33:24] (ये सब कुछ के लिए हुआ) ता-के अल्लाह सचाई की जजा दे और मुनाफिकों को चाहे तो सजा दे और चाहे तो उनकी तौबा कबूल करले। बेशाक़ अल्लाह गफूर ओ रहीम है +[33:25] अल्लाह ने कुफ्फार का मुँह फेर दिया, वो कोई फ़ायदा हासिल किए बिना अपने दिल की जलन के लिए यूं ही पलट गए, और मोमिनीन की तरफ़ से अल्लाह ही लड़ने के लिए काफी हो गया। अल्लाह बड़ी कुव्वत वाला और ज़बरदस्त है +[33:26] फिर एहले किताब में से जिन लोगों ने हमला-अवरों का साथ दिया था, अल्लाह उनकी गढ़ियों (किलों) से उन्हें उतार लाया और उनके दिलों में उसने ऐसा रोब (आतंक) डाल दिया के आज उनमे से एक गिरोह को तुम क़त्ल कर रहे हो और दूसरे गिरो ​​को क़ैद कर रहे हो +[33:27] उसने तुमको उनकी ज़मीन में और उनके घरों और उनके अमवाल (माल) का वारिस बना दिया और वो इलाक़ा तुम्हें दिया जिसे तुमने कभी पामाल न किया था। अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है +[33:28] ऐ नबी! अपनी बीवीयों से कहो, अगर तुम दुनिया और उसकी जीनत चाहती हो तो आओ, मैं तुम्हें कुछ दे दिला कर भले तरीक़े से रुखसत कर दूं +[33:29] और अगर तुम अल्लाह और उसके रसूल और दार-ए-आखिरत की तालिब हो तो जान लो के तुम में से जो नीको-कर हैं अल्लाह ने उनको लिए बड़ा अजर मुहैया कर रखा है +[33:30] नबी की बीवियां, तुम में से जो किसी सरीह फहाश हरकत का इर्तिक़ाब करेगी उसे दोहरा (डबल) अज़ाब दिया जाएगा। अल्लाह के लिए ये बहुत आसान काम है +[33:31] और तुम में से जो अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करेगी और नेक अमल करेगी, उसको हम दोहरा अजर देंगे। और हमने उसके लिए रिज़क ए करीम मुहैय्या कर रक्खा है +[33:32] नबी की बीवी, तुम आम औरतों की तरह नहीं हो। अगर तुम अल्लाह से डरने वाली हो तो दबी ज़ुबान से बात ना किया करो के दिल की ख़राबी का मुबतला कोई शक्स लालच में पड़ जाए, बलके साफ सीधी बात करो +[33:33] अपने घरों में टिक कर रहो और साबिक दौर ए जाहिलियत की सी समझ-धज ना दिखती फिरो। नमाज़ क़याम करो, ज़कात करो और अल्लाह और उसके रसूल की इत्ता करो। अल्लाह तो ये चाहता है के एहले बैत ए नबी से गंदगी को डर करे और तुम्हें पूरी तरह से पाक करदे +[33:34] याद रखो अल्लाह की आयत और हिकमत की उन बातों को जो तुम्हारे घरों में सुनायी जाती है। बेशाक़ अल्लाह लतीफ़ (सूक्ष्म/कोमल) और बा-ख़बर है +[33:35] बिल यकीन जो मर्द और जो औरतें मुस्लिम हैं, मोमिन हैं, मुती-ए-फ़रमान हैं, रस्त बाज़ हैं, साबिर हैं, अल्लाह के आगे झुकने वाले हैं, सदक़ा देने वाले हैं, रोज़ा रखने वाले हैं हैं, अपनी शर्मगाहों की हिफाज़त करने वाले हैं, और अल्लाह को कसरत से याद करने वाले हैं, अल्लाह ने उनके लिए मगफिरत और बड़ा अजर मुहैय्या कर रखा है +[33:36] किसी मोमिन मर्द और किसी मोमिन औरत को ये हक़ नहीं है के जब अल्लाह और उसका रसूल किसी मामले का फैसला करदे तो फिर उसे अपने मामले में खुद फैसला करने का इख्तियार हासिल रहे। और जो कोई अल्लाह और उसके रसूल की ना-फरमानी करे तो वो सारे गुमराह में पढ़ गया +[33:37] (ऐ नबी), याद करो वो मौका जब तुम हमें शक्स से कह रहे थे, जिसपर अल्लाह ने और तुमने एहसान किया था के "अपनी बीवी को ना छोड़ और अल्लाह से डर" हमें वक्त तुम अपने दिल में वो बात छुपाये हुए थे जिसे अल्लाह खोलना चाहता था। तुम लोगों से डर रहे थे, हलांके अल्लाह इसका ज़्यादा हक़दार है के तुम उससे डरो। फिर जब ज़ैद उसे अपनी हाजत पूरी कर चुका तो हमने उससे (मुतल्लका खातून) का तुमसे निकाह करदिया, ता-के मोमिनो पर अपने मुंह बोले बेटों (बेटों) की बीवीयों के मामले में कोई तंगगी ना रहे जबके वो उनसे अपनी हाजत पूरी कर चुके हों। और अल्लाह का हुकुम तो अमल में आना ही चाहिए था +[33:38] नबी पर किसी ऐसे काम में कोई रुकावत नहीं है जो अल्लाह ने उसके लिए मुकर्रर कर दिया हो। याही अल्लाह की सुन्नत उन सब अंबिया (पैगंबरों) के मामले में रह रही है जो पहले गुजर चुके हैं और अल्लाह का हुकुम एक कताई ताई-शुदा फैसला होता है +[33:39] (ये अल्लाह की सुन्नत है उन सब अंबिया (पैगंबर) के मामले में) जो अल्लाह के पैगामात मांगते हैं और उसी से डरते हैं और एक खुदा के सिवा किसी से नहीं डरते, और मुहासिबे (जवाबदेही) के लिए बस अल्लाह ही काफी है +[33:40] (लोगन) मुहम्मद तुम्हारे मर्दों में से किसी के बाप नहीं हैं, मगर वो अल्लाह के रसूल और ख़तीम-उन-नबियिन हैं, और अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखने वाला है +[33:41] ऐ लोगों! जो ईमान लाए हो, अल्लाह को कसरत से याद करो +[33:42] और सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते रहो +[33:43] वही है जो तुम्हारे लिए रहमत फरमाता है और उसके मलिका तुम्हारे लिए दुआ ए रहमत करते हैं ता-के वो तुम्हें तरीकियों (अंधेरे) से रोशनी में निकल लाये. वो मोमिनो पर बहुत मेहरबान है +[33:44] जिस रोज वो उसे मिलेंगे उनका इस्तेकबाल सलाम से होगा और उनके लिए अल्लाह ने बड़ा बा-इज्जत अजर फरहम कर रखा है +[33:45] ऐ नबी, हमने तुम्हें भेजा है गवाह बना कर, बशारत (खुश खबरी) देने वाला और डराने वाला बना कर +[33:46] अल्लाह की इजाज़त से उसकी तरफ दावत देने वाला बना कर और रोशन चिराग बना कर +[33:47] बशारत देदो उन लोगों को जो (तुम्हारा) ईमान लाए हैं के उनके लिए अल्लाह की तरफ से बड़ा फजल है +[33:48] और हरगिज़ ना दब्बू कुफ़्फ़ार-ओ-मुनाफ़ीक़ीन से, कोई परवा न करो उनकी अज़ियात रसानी (तकलीफ़/चोट) की और भरोसा करलो अल्लाह पर। अल्लाह ही इसके लिए काफी है के आदमी अपनी गलती उसके सुपुर्द करदे +[33:49] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम मोमिन औरतों से निकाह करो और फिर उन्हें हाथ लगाने से पहले तलाक दे दो तो तुम्हारी तरफ से अनपार कोई इद्दत (प्रतीक्षा अवधि) लाज़िम नहीं है जिसका पूरा होना का तुम मुतलबा कर सको. लिहाज़ा उन्हें कुछ माल दो और भले तरीक़े से रुखसत करदो +[33:50] ऐ नबी, हमने तुम्हारे लिए हलाल कर दी तुम्हारी वो बीवीयां जिनके मेहर तुमने अदा की हैं, और वो औरतें जो अल्लाह की अता करदा लौंडियां (गुलाम-लड़कियां) में से तुम्हारी मिल्कियत में आइए.और तुम्हारी वो चाचा-ज़ाद और फुपी-ज़ाद और मामू-ज़ाद और खाला-ज़ाद बहनें जिन्हों ने तुम्हारे साथ हिजरत की है। और वो मोमिन औरत जिसने अपने आप को नबी के लिए हेबा किया हो अगर नबी उसे निकाह में लेना चाहे। ये रियात (विशेषाधिकार) खालीसतन तुम्हारे लिए है, दूसरे मोमिनो के लिए नहीं है। हमको मालूम है कि आम मोमिनो पर उनकी बीवीयां और लौंडियां (गुलाम लड़कियां) के बारे में हमने क्या हुदूद (प्रतिबंध) आयद किये हैं। (तुम्हें हुडदंग से हमने इस लिए मुस्तस्ना (छूट) किया है) ता-के तुम्हारे ऊपर कोई तंगगी ना रहे। और अल्लाह गफूर ओ रहीम है +[33:51] तुमको इख्तियार दिया जाता है कि अपनी बीवीयों में से जिसको चाहो अपने से अलग रख लो, जिसे चाहो अपने साथ रख लो और जिसे चाहो अलग रखने के बाद अपने पास बुला लो। क्या मामले में तुमपर कोई मुज़ाइक़ा (दोष) नहीं है। क्या इस तरह मुतवक्कि (संभावना) है कि उनकी आंखें ठंडी रहेंगी और वो रंजीदा (शोक) न होंगी। और जो कुछ भी तुम उनको दोगे उसपर वो सब राजी रहेगी। अल्लाह जानता है जो कुछ तुम लोगों के दिलों में है, और अल्लाह आलिम ओ हलीम है +[33:52] इसके बाद तुम्हारे लिए दूसरी औरतें हलाल नहीं हैं। और ना इसकी इजाज़त है के उनकी जगह और बीवीयां ले आओ ख़्वाह उनका हुस्न (खूबसूरती) तुम्हें कितना ही पसंद हो। अलबत्ता लौंडियों की तुम्हें इजाज़त है। अल्लाह हर चीज़ पर निगरानी है +[33:53] ऐ लोग जो इमा लाए हो, नबी के घरों में बिला इजाज़त न चले आया करो, न खाने का वक़्त निकलता रहो। हां अगर तुम्हें खाने पर बुलाया जाए तो जरूर आओ, मगर जब खाना खालो तो मुंतशिर (फैलाओ) हो जाओ, बातें करने में ना लगे रहो। तुम्हारी ये हरकतें नबी को तकलीफ़ देती हैं, मगर वो शरम की वजह से कुछ नहीं कहते और अल्लाह हक़ बात कहने में शरमाता नहीं। नबी की बीवीयों से अगर तुम्हें कुछ माँगना हो तो पूरे दिन के पीछे से माँगा करो। ये तुम्हारे और उनके दिलों की पाकीज़गी के लिए ज़्यादा मुनासिब तरीक़ा है। तुम्हारे लिए ये हरगिज जायज नहीं के अल्लाह के रसूल को तकलीफ दो, और ना ये जायज है कि उनके बाद उनकी बीवीयों से निकाह करो। ये अल्लाह के नजरिए बहुत बड़ा गुनाह है +[33:54] तुम ख्वाह कोई बात जाहिर करो या छुपाओ, हर बात का इल्म है +[33:55] अज़वाज़ (पत्नियाँ) नबी के लिए इसमें कोई मुज़हिक़ा (दोषपूर्ण) नहीं है कि उनके बाप, उनके बेटे, उनके भाई, उनके भतीजे, उनके भांजे, उनके मेल-जोल की औरतें और उनके ममलुक घरों में आएं। (ऐ औरतें) तुम्हें अल्लाह की नफ़रमानी से बचना चाहिए। अल्लाह हर चीज़ पर निगाह रखता है +[33:56] अल्लाह और उसके मलिका (फ़रिश्ते) नबी पर दरूद भेजते हैं, ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम भी उन्पर दरूद ओ सलाम भेजो +[33:57] जो लोग अल्लाह और उसके रसूल को अज़ियात (झुंझलाहट) देते हैं दुनिया और आख़िरत में अल्लाह ने लानत फरमायी है और उनके लिए रुसवा-कुन अज़ाब मुहैय्या करदिया है +[33:58] और जो लोग मोमिन मर्दन और औरतों को बे-कसूर अज़ियात (चोट) देते हैं उन्हें ने एक बदे बोहतन (बदनामी/निंदा) और सारी गुनाह का जवाब अपने सर ले लिया है +[33:59] ऐ नबी, अपनी बीवीयां और बेटियां और एहले ईमान की औरतों से कहदो के अपने ऊपर अपनी चादरों के पल्लू लटका लें। ये ज़्यादा मुनासिब तरीक़ा है ता-के वो पहचान ली जाये और न सतायी जाये। अल्लाह ताला गफ़ूर ओ रहीम है +[33:60] अगर मुनाफ़ीक़ीन, और वो लोग जिनके दिलों में ख़राबी है, और वो जो मदीना में हिजान अंगेज अफ़वाहें तुम्हें उठा खड़ा करेंगे। फिर वो इस शहर में मुश्किल ही से तुम्हारे साथ रह सकेंगे) +[33:61] उनपर हर तरफ से लानत की उम्मीद होगी, जहां कहीं पाए जाएंगे पकड़े जाएंगे और बुरी तरह मारे जाएंगे +[33:62] ये अल्लाह की सुन्नत है जो ऐसे लोगों के मामले में पहले से चली आ रही है, और तुम अल्लाह की सुन्नत में कोई तबदीली न पाओगे +[33:63] लोग तुमसे पूछते हैं के कयामत की घड़ी कब आएगी। कहो उसका इल्म तो अल्लाह ही को है, तुम्हें क्या खबर?शायद के वो करीब ही आ लगी हो +[33:64] बहार-ए-हाल ये यकीनी अमर है के अल्लाह ने काफिरों पर लानत की है और उनके लिए भड़कती हुई आग मुहइया कर दी है +[33:65] जिसमें वो हमेशा रहेंगे। कोई हमी ओ मददगार न पा सकेंग +[33:66] जिस रोज़ उनके चेहरे आग पर उलट पलट किये जायेंगे हमें वक्त वो कहेंगे के “काश हमें अल्लाह और रसूल की इबादत की होती” +[33:67] और कहेंगे “ऐ रब हमारे, हमने अपने सरदारों और अपने बड़ों (महानों) की इताअत” कि और उनहों ने हमें राह-ए-रास्त से बे-राह करदिया +[33:68] ऐ रब, उनको दोहरा(डबल) अज़ाब दे और उन्पर सख्त लानत कर” +[33:69] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, उन लोगों की तरह न बन जाओ जिन्होन ने मूसा को अज़ियातें (रंज पाहुंचा) दी पतली, फिर अल्लाह ने उनकी बनाई हुई बातों से उसकी बारात फरमायी (उसे साफ कर दिया) और वो अल्लाह के नाजदीक ब-इज्जत था +[33:70] ऐ ईमान लाने वालों, अल्लाह से डरो और ठीक बात किया करो +[33:71] अल्लाह तुम्हारे अमल दुरुस्त कर देगा और तुम्हारे कसूरों से दरगुजर पैदा होगा। जो शक्स अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करे उसने बड़ी कामयाब की +[33:72] हमने इस अमानत को आसमान और ज़मीन और पहाड़ों के सामने पेश किया तो वो उसे उठाने के लिए तैयार न हुए, और इससे डर गए। मगर इंसान ने इसे उठाया लिया, बशक वो बड़ा जालिम और जाहिल (अज्ञानी) है +[33:73] इस बार-ए-अमानत को उठने का लाज़मी नतीजा ये है के अल्लाह मुनाफिक मर्दन और औरतों, और मुशरिक मर्दन और औरतों को सज़ा दे और मोमिन मर्दन और औरतों की तौबा क़बूल करे.अल्लाह दरगुज़र फ़रमाने वाला और रहीम है + +Surah 34: Al-Saba' (The Saba') +---------------------------------------- +[34:1] हम्द (तारीफ़) हमारे लिए खुदा के लिए है जो आसमान और ज़मीन की हर चीज़ का मालिक है और आख़िरत में भी उसी के लिए हम्द है। वो दाना (हिकमत वाला) और बाख़बर है +[34:2] जो कुछ ज़मीन में जाता है और जो कुछ उससे निकलता है और जो कुछ आसमान से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है, हर चीज़ को वो जानता है।वो रहीम और गफूर है +[34:3] मुकीरीन कहते हैं के क्या बात है के कयामत हमपर नहीं आ रही है! कहो कसम है मेरे आलिम-उल-गैब परवरदिगार की, वो तुमपर आ कर रहेगी। उसे ज़र्रा बराबर (परमाणुओं का वजन/सबसे छोटा कण) कोई चीज़ न आसमानों में छुपी हुई है न ज़मीन में न जर्रे से बड़ी और न उससे छोटी, सब कुछ एक नुमाया दफ़्तर में दर्ज है +[34:4] और ये कयामत इस्लिये के जजा दे अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए हैं और नीक अमल करते रहे हैं। उनके लिए मगफिरत है और रिज़क-ए-करीम +[34:5] और जिन लोगों ने हमारी आयतों को नीचा दिखाने के लिए ज़ोर लगाया है, उनके लिए बदतरीन क़िस्म का दर्दनाक अज़ाब है +[34:6] (ऐ नबी), इल्म रखने वाले खूब जानते हैं के जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुमपर नाज़िल किया गया है वो सरसर हक़ है और खुदा-ए-अज़ीज़ ओ हमीद का रास्ता दिखता है +[34:7] मुनकिरीन लोगों से कहते हैं "हम बताते हैं तुम्हें ऐसा शक्स जो खबर देता है कि जब तुम्हारे जिस्म का ज़र्रा ज़र्रा मुंतशिर (बिखरा) हो चूका होगा उस वक्त तुम नए सिरे से अदा कर दिए जाओगे +[34:8] ना मालूम ये शक्स अल्लाह के नाम से झूठ गड़बड़ है या इसे जुनून (दीवाना पान) लाहिक है।” नहीं, बलके जो लोग आख़िरत को नहीं मानते वो अज़ाब में मुबतला होने वाले हैं और वही बुरी तरह बहके हुए हैं +[34:9] क्या इन्होन ने कभी उस आसमान ओ ज़मीन को नहीं देखा जो इन्हें आगे और पीछे से घेरे हुए हैं? हम चाहें तो इन्हें ज़मीन में ढांसा दें, या आसमान के कुछ टुकड़े अंदर गिरा दें। दर हकीकत इस में एक निशानी है हर उस बंदे के लिए जो खुदा की तरफ रूजू करने वाला हो +[34:10] हमने दाऊद को अपने हां से बड़ा फजल अता किया था। यहीं हुकुम हमने) परिन्दों को दिया। हमने लोहे को उसके लिए नरम कर दिया +[34:11] क्या हिदायत के साथ के ज़रीन (मेल के पूरे कोट) बना और उनके हल्के ठीक अंदाज़ पर रख। (ऐ आले दाऊद) नीक अमल करो। जो कुछ तुम करते हो उसको मैं देख रहा हूं +[34:12] और सुलेमान के लिए हमने हवा को मुस्कुरा कर दिया, सुबह के वक्त उसका चलना एक महीने की राह तक और शाम के वक्त उसका चलना एक महीने की राह तक। हमने उसके लिए पिगले हुए तांबे (पिघला हुआ पीतल) का चश्मा (वसंत) बहा दिया और ऐसे जिन्न उसके ताबे करदिये जो अपने रब के हुकुम से उसके आगे काम करते थे। उनमें से जो हमारे हुकुम से सरताबी (विचलित/घुमावदार) करता है उसको हम भड़कती हुई आग का मजा चखते हैं +[34:13] वो उसके लिए बनाते थे जो कुछ वो चाहता, ऊंची इमारतें, तसवीरें, बदे बदे हौज जैसी लगन (जलाशय जैसे कटोरे) और अपनी जगह से ना हटें वली भारी देगें. ऐ आले दाऊद, अमल करो शुकर के तरीक़े पर। मेरे बंदों में कम ही शुक्र गुजर हैं +[34:14] फिर जब सुलेमान पर हमने मौत का फैसला नफीज किया तो जिन्नो को उसकी मौत का पता देने वाली कोई चीज उस घुन (कीड़ा) के सिवा न थी जो उसके आसा (कर्मचारी) को खा रहा था। इस तरह जब सुअलीमान गिर पड़ा तो जिन्नो पर ये बात खुल गई के अगर वो गैब के जाने वाले होते तो इस ज़िल्लत के अज़ाब में मुबतला ना रहते +[34:15] सबा (शीबा) के लिए उनके अपने मसकन (घर-जमीन) ही में एक निशानी मौजूद थी, दो बाग दयेन(दाएं) और बायें(बाएं)। खाओ अपने रुब का दिया हुआ रिज़क और शुकर बजा लाओ उसका, मुल्क है उम्मीद ओ पाकीज़ा और परवरदिगार है बख्शीश फ़रमाने वाला +[34:16] मगर वो मुँह मोड़ गये। आख़िर ए कार हमने उनपार बंद (बांध) तोड़ सैलाब (बाढ़) भेज दिया और उनके पिछले दो बाघों (बगीचों) के जगह दो और बाघ उन्हें दिए जिनमें कड़वे (कड़वे) कसैले (इमली) फल और झाओ के दरख्त थे और कुछ थोड़ी सी बेरियां (लोटे के पेड़) +[34:17] ये था उनके कुफ्र का बदला जो हमने उनको दिया। और नाशुक्रे इंसान के सिवा ऐसा बदला हम और किसी को नहीं देते +[34:18] और हमने उनके और उन बस्तियों के दरमियान, जिनको हमने बरकत अता की थी, नुमायां बस्तियां बसा दी पतली, और उनके सफर की मुसाफ़्तें एक अंदाज़े पर रख दी पतली। चलो फिरो रातों में रात दिन पूरे अमन के साथ +[34:19] मगर उनहों ने कहा “ऐ हमारे रब, हमारे सफ़र की मुसाफ़तें लम्बी करदे।” उनहों ने अपने ऊपर आप जुल्म किया, आखिर ए कार हमने उन्हें अफसाना बना कर रख दिया और उन्हें बिल्कुल तित्तर बिटर कर डाला। यकीनन इसमे निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो बड़ा साबिर (दृढ़) ओ शाकिर (आभारी) हो +[34:20] उनके मामले में इब्लीस ने अपना गुमान सही पाया और उन्होन ने उसकी जोड़ी बनाई, बजुज़ एक थोड़े से गिरो ​​के जो मोमिन था +[34:21] इब्लीस को अनपर कोई इक्तेदार (अधिकारी) हासिल न था मगर जो कुछ हुआ वो इस तरह हुआ के हम ये देखना चाहते थे के कौन आख़िरत का मनने वाला है और कौन उसकी तरफ से शक्क में पड़ा हुआ है। तेरा रब्ब हर चीज़ पर निगरान (सतर्क) है +[34:22] (ऐ नबी, मुशरिकेन से) कहो के पुकार देखो अपने उन माबूदों को जिनमें तुम अल्लाह के सिवा अपना माबूद समझे बैठे हो। वो ना आसमानों में कोई ज़रा बराबर चीज़ के मालिक हैं ना ज़मीन में। वो आसमां ओ ज़मीन की मिलकियत में शरीक भी नहीं है। उनमें से कोई अल्लाह का मददगार भी नहीं है +[34:23] और अल्लाह के हुज़ूर कोई शफ़ात भी किसी के लिए नफ़ेह (फ़ैदा-मंद) नहीं हो सकता हमें शक्स के जिसके लिए अल्लाह ने सिफ़ारिश की इजाज़त दी हो। हट्टा के जब लोगों के दिलों से घबराहट दूर होगी तो वो (सिफ़रिश करने वालों से) पूछेंगे के तुम्हारे रब ने क्या जवाब दिया, वो कहेंगे के ठीक जवाब मिला है और वो बुज़ुर्ग ओ बारतार है +[34:24] (ऐ नबी) इनसे पूछो, "कौन तुमको आसमान और ज़मीन से रिज़्क देता है?” कहो "अल्लाह। अब ला मुहाल (अनिवार्य रूप से) हम में और तुम में से कोई एक ही हिदायत पर है या खुली गुमराही में पड़ा हुआ है।" +[34:25] इनसे कहो, "जो कसूर हमने किया हो उसकी कोई बाज-पर्स तुमसे ना होगी, और जो कुछ तुम कर रहे हो उसकी कोई जवाब तलबी हमसे नहीं की जाएगी।" +[34:26] कहो "हमारा रब्ब हमको जमा करेगा, फिर हमारे दरमियान ठीक ठीक फैसला कर देगा। वो ऐसा जबरदस्त हकीम (महान न्यायाधीश) है जो सब कुछ जानता है।" +[34:27] इनसे कहो, "जरा मुझे देखो तो सही वो कौन हस्तियां हैं जिन्होंने तुमने उसके साथ शरीक लगा रखा है।" हरगिज़ नहीं, ज़बरदस्त और दाना तो बस वो अल्लाह ही है +[34:28] और (ऐ नबी) हमने तुमको तमाम ही इंसानों के लिए बशीर (खुश कब्री देने वाला) ओ नज़ीर (डर सुनाने वाला) बना कर भेजा है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं +[34:29] ये लोग तुमसे कहते हैं के वो (कयामत का) वादा कब पूरा होगा अगर तुम सच्चे हो +[34:30] कहो तुम्हारे लिए एक ऐसे दिन की मियाद मुकर्रर है जिसके आने में ना एक घड़ी भर की आखिरी (देरी) तुम कर सकते हो और ना एक घड़ी भर पहले इसे ला सकते हो हो +[34:31] ये काफ़िर कहते हैं के "हम हरगिज़ इस कुरान को ना मानेंगे और ना इसके पहले आई हुई किसी किताब को तसलीम करेंगे"। काश तुम देखो इनका हाल हम वक्त जब ये जालिम अपने रब के हुजूर खड़े होंगे हमें वक्त ये एक दूसरे पर इल्जाम धरेंगे। जो लोग दुनिया में दबा कर रखे गए थे वो बड़े बनने वालों से कहेंगे के "अगर तुम ना होते तो हम मोमिन होते।" +[34:32] वो बदे बनने वाले दबाए हुए लोगों को जवाब देंगे "क्या हमने तुम्हें हमें हिदायत से रोका था जो तुम्हारे पास आई थी? नहीं, बल्कि तुम खुद मुजरिम थे।" +[34:33] वो दबाए हुए लोग उन बदाए बनने वालों से कहेंगे, 'नहीं, बलके शब-ओ-रोज़ की मक्कारी थी जब तुम हमसे कहते थे के हम अल्लाह से कुफ्र करें और दूसरों को उसका हमसर ठहरें।' आख़िर ए कार जब ये लोग अज़ाब देखेंगे तो अपने दिलों में पछताएंगे और हम मुनकिरीन के गैलन में तौक (बेदी/बेड़ी) डाल देंगे। क्या लोगों को इसके सिवा और कोई बदला दिया जा सकता है के जैसा अमल उनके थे वैसी ही जजा वो पायें +[34:34] कभी ऐसा नहीं हुआ के हमने किसी बस्ती में एक खबरदार करने वाला भेजा हो और उस बस्ती के खाते पीते लोगों ने ये ना कहा हो के जो पैग़ाम तुम लेकर आए हो उसको हम नहीं मानते +[34:35] उनको ने हमेशा यहीं कहा के हम तुमसे ज्यादा माल औलाद रखते हैं और हम हरगिज सजा पाने वाले नहीं हैं +[34:36] (ऐ नबी), इनसे कहो मेरा रब जैसा चाहता है कुशादा (प्रचुर मात्रा में) रिज्क देता है और जिसे चाहता है नापा तुला अता करता है, मगर अक्सर लोग इसकी हकीकत नहीं जानते +[34:37] ये तुम्हारी दौलत और तुम्हारी औलाद नहीं है जो तुम्हें हमसे करीब करती हो। हां मगर जो ईमान लाए और नेक अमल करे, यहीं लोग हैं जिनके लिए उनके अमल की दोहरी (डबल) जजा है, और वो बालंद ओ बाला इमरतन में इत्मिनान से रहेंगे +[34:38] रहे वो लोग जो हमारी आयत को नीचा दिखाएंगे के लिए दौड़-धूप करते हैं, तो वो अज़ाब में मुबतला होंगे +[34:39] (ऐ नबी), इनसे कहो, "मेरा रब अपने बंदों में से जैसा चाहता है खुला रिज़क देता है और जिसे चाहता है नपा तुला देता है। जो कुछ तुम खर्च कर देते हो उसकी जगह वही तुमको और देता है। वो सब रज़िकॉन (प्रदाता) से बेहतर रज़िक़ (प्रदाता) है +[34:40] और जिस दिन वो तमाम इंसानों को जमा करेगा फिर फ़रिश्तों से पूछेगा "क्या ये लोग तुम्हारी ही इबादत करते थे?" +[34:41] तो वो जवाब देंगे के "पाक है आप की जात, हमारा तालुक़ तो आपस में है ना के इन लोगों से। दर-असल ये हमारी नहीं बलके जिन्नो की इबादत करते थे, मेरे अंदर से अक्सर उन्ही पर ईमान लाए हुए थे" +[34:42] (उस वक्त हम कहेंगे के) आज तुम मेरे से कोई ना किसी को फ़ायदा पाहुंचा सकता है ना नुक्सान। और ज़ालिमों से हम कह देंगे के अब चक्खो उस अज़ाब ए जहन्नुम का मजा जैसे तुम झूठलाया करते थे +[34:43] लोगों को जब हमारी सफ़ आयत सुनाई जाती है तो ये कहते हैं के "ये शक्स तो बस ये चाहता है के तुमको उन माबूदों से बरगश्ता (मुड़ जाना) करदे जिनकी इबादत तुम्हारे बाप दादा करते आये हैं।" और कहते हैं "ये (कुरान) महज़ एक झूठ है घड़ा हुआ।" इन काफ़िरों के सामने जब हक़ आया तो उनको ने कहा के "ये तो सारे जादू है" +[34:44] हलांके ना हमने इन लोगों को पहले कोई किताब दी थी के ये उसे पढ़ते थे, और ना तुमसे पहले इनकी तरफ कोई मुतनब्बेह करने वाला भेजा था +[34:45] इंसे पहले गुज़रे हुए लोग झूठला चुके हैं। जो कुछ हमने उन्हें दिया था उसके उसरे-अशीर (यहां तक ​​कि दसवें/दसवे हिस्से) को भी ये नहीं पहुंचे हैं। मगर जब उन्हें ने मेरे रसूलों को झुटलाया तो देखलो के मेरी सजा कैसी थी +[34:46] (ऐ नबी), इनसे कहो "मैं तुम्हें बस एक बात की हिदायत करता हूं, खुदा के लिए तुम अकेले अकेले और दो दो मिल कर अपना दिमाग लड़ाओ और सोचो, तुम्हारे साहब [साथी (मुहम्मद)] में आख़िर ऐसी कौन सी बात है जो जुनून (पागलपन) की हो? वो तो एक सख्त अज़ाब की आमद (आने) से पहले तुमको मुतनब्बेह करने वाला है” +[34:47] इंसे कहो “अगर मैंने तुमसे कोई अजर मांगा है तो वो तुम ही को मुबारक” रहे. मेरा अजर तो अल्लाह के ज़िम्मे है और वो हर चीज़ पर गवाह है।” +[34:48] इनसे कहो "मेरा रब (मुझपर) हक़ का इल्का (प्रेरणा/हल्स डाउन) करता है और वो तमाम पोशीदा (छुपी हुई) हक़ीक़त को जाने वाला है" +[34:49] कहो, "हक़ आ गया और अब बातिल के लिए कुछ नहीं हो सकता" +[34:50] कहो, "अगर मैं गुमराह हो गया हूं तो मेरी गुमराही का जवाब मुझपर है, और अगर मैं हिदायत पर हूं तो वही (रहस्योद्घाटन) की बिना पर हूं जो मेरा रब मेरे ऊपर नाज़िल करता है। वो सब कुछ सुनता है और करीब ही है।" +[34:51] काश तुम देखो उन्हें वक्त जब ये लोग घबराएं फिर रहेंगे होंगे और कहीं बच कर ना जा सकेंगे, बलके करीब ही से पकड़ लिए जाएंगे +[34:52] हमें वक्त ये कहेंगे के हम उसपर ईमान ले आए, हालंके अब दूर निकली हुई चीज कहां हाथ आ सकती है +[34:53] इसे पहले ये कुफ्र कर चुके थे और बिला तहकीक दूर की कोड़ियां (अनुमान) लाया करते थे +[34:54] हमें वक्त जिस चीज की ये तमन्ना कर रहे होंगे हमें उसी तरह महरूम करदिये जाएंगे जिस तरह इनके पेश-रो हम मशरब (उनमें से पहले की तरह) महरूम हो चुके होंगे। ये बदाए गुमराह-कुन शक्क में पड़े हुए थे + +Surah 35: Al-Fatir (The Originator) +---------------------------------------- +[35:1] तारीफ अल्लाह ही के लिए है जो आसमानो और ज़मीन का बनाने वाला और फ़रिश्तों को पैगाम रसान मुकर्रर करने वाला है। (ऐसी फ़रिश्ते) जिनके दो दो और तीन तीन और चार चार बाज़ू (पंख) हैं। वो अपने मख़ूक की सच्चाई में जैसा चाहता है इज़ाफ़ा करता है। यकीनन अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है +[35:2] अल्लाह जिस रहमत का दरवाज़ा भी लोगों के लिए खोल दे उसे कोई रोकने वाला नहीं, और जिसे वह बंद करदे उसे अल्लाह के बाद फिर कोई दूसरा खोलने वाला नहीं। वो ज़बरदस्त और हकीम है +[35:3] लोगन, तुम्हारे अल्लाह के जो एहसानात हैं उन्हें याद रक्खो, क्या अल्लाह के सिवा कोई और खालिक भी है जो तुम्हें आसमान और ज़मीन से रिज़क देता हो? कोई माबूद उसके सिवा नहीं, आखिर तुम कहां से धोखा खा रहे हो +[35:4] अब अगर (ऐ नबी) ये लोग तुम्हें झुठलाते हैं (तो ये कोई नई बात नहीं), तुमसे पहले भी बहुत से रसूल झुटलाए जा चुके हैं, और सारे मामले आखिर ए कार अल्लाह हाय की तरफ रूजू होने वाले हैं +[35:5] लोगन, अल्लाह का वादा यकीनन बरहक्क (सच्चा) है, लिहाजा दुनिया की जिंदगी तुम्हें धोखे में ना डाले और ना वो बड़ा धोखेबाज़ तुम्हें अल्लाह के बारे में धोखा देने वाले हैं +[35:6] दर हकीकत शैतान तुम्हारा दुश्मन है आपके लिए भी उसे अपना दुश्मन ही समझो, वो तो अपने जोड़े को अपनी राह पर इस लिए बुला रहा है कि वो दोज़खियों में शामिल हो जाए +[35:7] जो लोग कुफ्र करेंगे उनके लिए साख अज़ाब है और जो ईमान लाएंगे और नेक अमल करेंगे उनके लिए मगफिरत और बड़ा अजर है +[35:8] (भला कुछ ठिकाना है उस लड़के की गुमराही का) जिसके लिए उसका बुरा अमल खुशनुमा बना दिया गया हो और वह उसे अच्छा समझ रहा हो? हकीकत ये है के अल्लाह जिसे चाहता है गुमराही में डाल देता है और जिसे चाहता है राह ए रस्त दिखा देता है। पास (ऐ नबी) खा-मा-खा तुम्हारी जान लोगों की खातिर ग़म-ओ-अफसोस में ना घुले। जो कुछ ये कर रहे हैं अल्लाह उसको खूब जानता है +[35:9] वो अल्लाह ही तो है जो हवाओं को भेजता है, फिर वो बादल उठाती हैं, फिर हम उसे एक उजाद (बंजर) इलाके की तरफ ले जाते हैं और उसी जमीन को जिला उठाते हैं जो मेरी पड़ी थी। मारे हुए इंसान का जी उठना भी इसी तरह होगा +[35:10] जो कोई इज्जत चाहता हो उसे मालूम होना चाहिए कि इज्जत सारी की सारी अल्लाह की है। उसके हाँ जो चीज़ ऊपर चढ़ती है वो सिर्फ पाकीज़ा क़ौल (बात/शब्द) है, और अमल ए साले उसको ऊपर चढ़ता है। रहे वो लोग जो बेहुदा चाल बाजियां करते हैं, उनके लिए कुछ अजीब है और उनका मकर (प्लॉटिंग) खुद ही गैरत होने वाला है +[35:11] अल्लाह ने तुमको मिट्टी से पेदा किया, फिर से शुक्राणु (शुक्राणु की बूंद) से, फिर तुम्हारे जोडे बना दिए (यानी मर्द और औरत)। कोई औरत हमीला नहीं होती और ना बच्चा जानती है मगर ये सब कुछ अल्लाह के इल्म में होता है। कोई उमर पाने वाला उमर नहीं पाता और ना किसी की उमर में कुछ कमी होती है मगर ये सब कुछ एक किताब में लिखा होता है। अल्लाह के लिए ये बहुत आसान काम है +[35:12] और पानी के दोनो जख़ीरे यक्सन नहीं हैं। एक मीठा और प्यास बुझाने वाला है, पीने में खुशगवार, और दूसरा साख खरी (नमकीन) के हलक शील दे (जुबान पर कड़वा), मगर दोनों से तुम तर-ओ-ताजा गोश्त हासिल करते हो। पहनने के लिए ज़ीनत का सामान निकलते हो, और इसी पानी में तुम देखते हो के कश्तियां उसका सीना चीयरती चली जा रही हैं ता-के तुम अल्लाह का फ़ज़ल तलाश करो और उसकी शुकर गुजर बानो +[35:13] वो दिन के अंदर रात को और रात के अंदर दिन को पिरोता हुआ ले आता है.चांद और सूरज को उसने मुस्कुरा कर रखा है. ये सब कुछ एक वक्त-ए-मुकर्रर तक चले जा रहा है। वही अल्लाह (जिसके ये सारे काम हैं) तुम्हारा रब है, बादशाही उसी की है उसे छोड़ कर जिन दूसरे को तुम पुकारते हो वो एक परीका (खजूर की खाल) के मालिक भी नहीं है +[35:14] इन्हें पुकारो तो वो तुम्हारी दुआएं सुन नहीं सकते।और सुनो तो उनका तुम्हें कोई जवाब नहीं दे सकता। और कयामत के रोज़ वो तुम्हारे शिर्क का इंकार कर देंगे। हकीकत ए हाल की ऐसी सही खबर तुम्हें एक खबरदार के सिवा कोई नहीं दे सकता +[35:15] लोगन, तुम ही अल्लाह के मोहताज हो और अल्लाह तो गनी (आत्मनिर्भर) ओ हमीद (बेहद प्रशंसनीय) है +[35:16] वो चाहे तो तुम्हें हटा कर कोई नई ख़लक़त (सृजन) तुम्हारी जगह ले आये +[35:17] ऐसा करना अल्लाह के लिए कुछ भी दुश्वार नहीं +[35:18] कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ ना उठाएगा।और अगर कोई लड़ा हुआ (भारी लादा हुआ) नफ़्स अपना बोझ उठाने के लिए उसे पुकारेगा बार का एक अदना (छोटा) हिसा भी बताने के लिए कोई ना आएगा चाहे वो करीब-तरीन रिश्तेदार ही क्यों ना हो। (ऐ नबी) तुम सिर्फ उन लोगों को मुतनब्बे (चेतावनी) दे सकते हो जो बे-देखे अपने रब से डरते हैं और नमाज़ क़याम करते हैं। जो शक्स भी पाकीज़गी इख्तियार करता है अपने ही भलाई के लिए करता है और पलटना सबको अल्लाह ही की तरफ करता है +[35:19] अंधा और आँखों वाला बराबर नहीं है +[35:20] ना तारीकियाँ (अंधेरा) और रोशनी यकसन हैं +[35:21] ना ठंडी छाँव और धूप की तपिश एक जैसी है +[35:22] और ना ज़िंदे और मुर्दे मुसावी (बराबर) हैं। अल्लाह जिसे चाहता है सुनता (सुन) है, मगर (ऐ नबी) तुम उन लोगों को नहीं सुना सकते हो कब्रों में पागल हो +[35:23] तुम तो बस एक खबरदार करने वाले हो +[35:24] हमने तुमको हक़ के साथ भेजा है। बशारत (ख़ुश ख़बरी) देने वाला और डरने वाला बनकर। और कोई उम्मत ऐसी नहीं गुजरी है जिसमें कोई मुतनब्बेह (चेतावनी) करने वाला ना आया हो +[35:25] अब अगर ये लोग तुम्हें झुठलाते हैं तो इनसे पहले गुजरे हुए लोग भी झुटला चुके हैं। उनके पास उनके रसूल खुले दलैल (प्रमाण) और सहीफे (ग्रंथ) और रोशन हिदायत (मार्गदर्शन) देने वाली किताब लेकर आये थे +[35:26] फिर जिन लोगों ने ना माना उनको मैंने पकड़ लिया और देखलो के मेरी सजा कैसी सच थी +[35:27] क्या तुम देखते नहीं हो के अल्लाह आसमान से पानी बरसाता है और फिर इसके ज़रिये से हम तरह तरह के फल निकल लाते हैं जिनका रंग मुख़्तलिफ़ होते हैं। पहाड़ों में भी सफ़ेद (सफ़ेद), सुर्ख (लाल) और गहरी सियाह (गहरा काला) धारियां पाई जाती हैं जिनके रंग मुख़्तलिफ़ होते हैं +[35:28] और इसी तरह इंसानों और जानवरों और मुसलमानों के रंग भी मुख़्तलिफ़ हैं। हकीकत ये है कि अल्लाह के बंदों में से सिर्फ इल्म रखने वाले लोग ही उससे डरते हैं। बेशाक़ अल्लाह ज़बरदस्त और दरगुज़र फ़रमाने वाला है +[35:29] जो लोग किताबुल्लाह की तिलावत करते हैं और नमाज़ क़याम करते हैं, और जो कुछ हमने उन्हें रिज़क़ दिया है उसमें से खुले और छुपे ख़र्च करते हैं, यक़ीनन वो एक ऐसी तिजारत के मुतवक्किह (उम्मीदवार) हैं जिसका हरगिज खसरा (नुक्सन) न होगा +[35:30] (इस तिजारत में उन लोगों ने अपना सब कुछ खा लिया है) ता-के अल्लाह उनको अजर पूरय के पूर उनको दे और मजीद अपने फजल से उनको अता फरमाये। बेशाक़ अल्लाह बख्शने वाला और क़दरदान (प्रशंसनीय) है +[35:31] (ऐ नबी) जो किताब हमने तुम्हारी तरफ वही के ज़रिया से भेजी है वही हक है, तस्दीक (पुष्टि करें) करती हुई आई है उन किताबों की जो इसे पहले आई थी। बेशक अल्लाह अपने बंदों के हाल से खबर है, और हर चीज पर निगाह रखने वाला है +[35:32] फिर हमने इस किताब का वारिस बना दिया उन लोगों को जिन्होंने (इस विरासत के लिए) अपने बंदों में से चुन लिया। अब कोई तो इनमें से अपने नफ़्स पर ज़ुल्म करने वाला है, और कोई बीच की रास है (मध्यम कोर्स), और कोई अल्लाह के इज़ान से नेकियों में सबक करने वाला (आगे बढ़ने वाला) है, यहीं बहुत बड़ा फ़ज़ल है +[35:33] हमेशा रहने वाली जन्नतें हैं जिनमें ये लोग दाखिल होंगे, वहां इन्हें सोने (सोना) के कंगन (कंगन) और मोतियों (मोती) से सजाया जाएगा, वहां इनका लिबास रेशम होगा +[35:34] और वो कहेंगे के शुक्र है उस खुदा का जिसने हमसे गम दूर कर दिया, यकीनन हमारा रब माफ करने वाला और क़दर फ़रमाने वाला है +[35:35] जिसने हमें अपने फ़ज़ल से आबादी (हमेशा के) क़याम की जगह ठहर दिया, अब यहां ना हमें कोई मुशक्कत पेश आती है और ना थकान लाहिक होती है +[35:36] और जिन लोगों ने कुफ्र किया है उनके लिए जहन्नुम की आग है, ना उनका क़िस्सा पक कर दिया जायेगा के मर जायेंगे और ना उनके लिए जहन्नुम के अज़ाब में कोई कमी आ जायेगी। इस तरह हम बदला देते हैं हर उस शक्स को जो कुफ्र करने वाला है +[35:37] वो वहां चीख-चीख कर कहेंगे के "ऐ हमारे रब हमें यहां से निकल ले ता-के हम नई अमल करें, उन अमाल से मुख्तलिफ जो पहले करते रहे थे।" (उन्हें जवाब दिया जाएगा) "क्या हमने तुमको इतनी उमर न दी थी कि मैं कोई सबक लेना चाहता था तो सबक ले सकता था? और तुम्हारे पास मुतनब्बे (चेतावनी) करने वाला भी आ चूका था। अब मजा चक्खो। जालिमों का यहां कोई मददगार नहीं है +[35:38] बहस अल्लाह आसमानो और ज़मीन की हर पोशीदा (चुपी) चीज़ से वाकिफ है। वो तो सीने के छुपे हुए राज़ तक जानता है +[35:39] वही तो है जिसने तुमको ज़मीन में खलीफा बनाया है। अब जो कोई कुफ्र करता है उसका कुफ्र (बोझ) उसी पर है, और काफिरों को उनका कुफ्र इसके सिवा कोई तरक्की नहीं देता के उनके रब का गजब उन पर ज्यादा से ज्यादा भड़का चला जाता है। काफ़िरों के लिए खसरे (नुक्सान) में इज़ाफ़े के सिवा कोई तरक़्की नहीं +[35:40] (ऐ नबी) इनसे कहो, "कभी तुमने देखा भी है अपने उन शरीकों को जिन्हें तुम खुदा को छोड़ कर पुकारा करते हो? मुझे बताओ, उन्हें ने ज़मीन में क्या पेदा किया है? हां आसमानों में उनकी क्या शिरकत है?” (अगर ये नहीं बता सकता तो इनसे पूछो) क्या हमने इन्हें कोई तहरीर (लिखित) लिख कर दी है जिसका बिना पर ये (अपने इस शरीक के लिए) कोई साफ सनद रखते हो? नहीं, बलके ये जालिम एक दूसरे को महज़ फरेब के झाँसे दिए जा रहे हैं +[35:41] हकीकत ये है के अल्लाह ही है जो आसमानों और ज़मीन को टाल (विस्थापित) जाने से रोके हुए हैं, और अगर वो ताल (विस्थापित) जाएँ तो अल्लाह के बाद कोई दूसरा इन्हें थमने (पकड़ने) वाला नहीं है। बेशक अल्लाह बड़ा हलीम (सहनशील) और दरगुज़र फ़रमाने वाला है +[35:42] ये लोग कड़ी क़िस्में खा कर कहते थे कि अगर कोई ख़बरदार करने वाला उनके हाँ आ गया होता तो ये दुनिया की हर दूसरी क़ौम से बढ़ कर रास्ता-रो (बेहतर निर्देशित) होटे. मगर जब ख़बरदार करने वाला इनके पास आ गया तो उसकी आमद (आ रही है) ने इनके अंदर हक़ से फ़रार के सिवा किसी चीज़ में इज़ाफ़ा ना किया +[35:43] ये ज़मीन में और ज़्यादा इस्तकबार (गुरूर) करने लगे और बुरी बुरी चालें चलने लगें, हालंके बुरी चालें चलने वालो ही को ले बैठती है। अब क्या ये लोग इसका इंतज़ार कर रहे हैं कि पिछली क़ौमों के साथ अल्लाह का जो तरीक़ा रहा है वही इनके साथ भी बढ़ता जाए? यही बात है तो तुम अल्लाह के तरीक़े में हरगिज़ कोई तबदीली न पाओगे और तुम कभी न देखोगे के अल्लाह की सुन्नत को उसके मुकर्रर रास्ते से कोई ताक़त फेर सकती है +[35:44] क्या ये लोग ज़मीन में कभी चले फिर नहीं हैं के इनहे उन लोगों का अंजाम नज़र आता है जो इनसे पहले गुजर चुके हैं, और इनसे बहुत ज्यादा ताकत थी? अल्लाह को कोई चीज़ अजीज (निराश) करने वाली नहीं है, न आसमानों में और न ज़मीन में। वो सब कुछ जानता है और हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है +[35:45] अगर कहीं वो लोगों को उनके किये कार्टून पर पकड़ा तो ज़मीन पर किसी मुतनफ़्फ़िस (जीवित प्राणी) को जीता (ज़िंदा) ना छोड़ता। मगर वो उनको एक मुकर्रर वक्त तक के लिए मोहलत दे रहा है, फिर जब उनका वक्त आन पूरा होगा अल्लाह के पास अपने बंदों को देख लेगा + +Surah 36: Ya Sin (Ya Sin) +---------------------------------------- +[36:1] यासीन +[36:2] कसम है कुरान ए हकीम की +[36:3] के तुम यकीनन रसूलन मैं से हो +[36:4] सीधे रास्ते पर हो +[36:5] (और ये कुरान) गालिब और रहीम हस्ती का नाज़िल करदा है +[36:6] ता-के तुम खबरदार करो एक ऐसी क़ौम को जिसके बाप दादा खबरदार ना किये गए थे और इस वजह से वो गफ़लत में पड़े हुए हैं +[36:7] इनमें से अक्सर लोग फ़ैसला-ए-अज़ाब के मुस्तहिक हो चुके हैं, इसके लिए वो ईमान नहीं लाते हैं +[36:8] हमने उनकी गर्दनों में तौक (बेदी/बेड़ी) डाल दिए हैं जिनसे वो थोड़ीयों (चिन) तक जकड़े गए हैं, इसलिए वो सर उठाए खड़े हैं +[36:9] हमने एक दीवार उनके आगे खादी करदी है और एक दीवार उनके पीछे, हमने उन्हें ढांक दिया है, उन्हें अब कुछ नहीं सूझता +[36:10] उनके लिए यकसन है, तुम उन्हें खबरदार करो या ना करो, ये ना मानेंगे +[36:11] तुम तो उसी खबर को खबरदार बना सकते हो जो हिदायत की जोड़ी। करे और बे-देखे खुदा ए रहमान से डरे, उसे मगफिरत और अज्र-ए-करीम की बशारत (खुश खबरी) दे दो +[36:12] हम यकीनन एक रोज़ मुर्दों को जिंदा करने वाले हैं जो कुछ अफाल (आमाल) उन्होन ने किये हैं वो सब हम लिखते रहे हैं, और जो कुछ आसर उनहों ने पीछे छोड़े हैं वो भी हम सब (लिख) रहे हैं। हर चीज को हमने एक खुली किताब में दर्ज कर रखा है +[36:13] इन्हें मिसाल के तौर पर उस बस्ती वालों का क़िस्सा सुनाओ जबके उसमें रसूल आए थे +[36:14] हमने उनकी तरफ दो रसूल भेजे और उन्होन ने दोनों को झुटला दिया फिर हमने तीसरा मदद के लिए भेजा और उनसब ने कहा "हम तुम्हारी तरफ रसूल की हकीकत से भेज गए हैं" +[36:15] बस्ती वालों ने कहा "तुम कुछ नहीं हो मगर हम जैसे चांद इंसान, और खुदा ए रहमान ने हरगिज कोई चीज नाज़िल नहीं की है, तुम महज़ झूठ बोलते हो।" +[36:16] रसूलों ने कहा "हमारा रब जानता है के हम जरूर तुम्हारी तरफ रसूल बना कर भेज गए हैं +[36:17] और हमपर साफ साफ पैगाम पाहुंचा देने के सिवा कोई जिम्मेदारी नहीं है" +[36:18] बस्ती वाले कहने लगे "हम तो तुम्हारे लिए फ़ल-ए-बद्द (मनहूस) समझते हैं, अगर तुम बाज़ ना आए तो हम तुमको संगसार (पत्थरबाजी) कर देंगे और हमसे तुम बड़ी दर्दनाक साज़ा पाओगे" +[36:19] रसूलों ने जवाब दिया "तुम्हारी फ़ल-ए-बद्द (नहुसत) तो तुम्हारे अपने साथ लगी हुई है, क्या ये बातें तुम इसलिए करते हो कि तुम्हें हिदायत की गई है? असल बात ये है के तुम हद से गुज़रे हुए लोग हो” +[36:20] इतने में शहर के दरवाज़े से एक शक्स दौड़ता हुआ आया और बोला “ऐ मेरी क़ौम के लोगों, रसूलों की जोड़ी इख्तियार करलो +[36:21] जोड़ी करो उन लोगों की जो तुमसे कोई अजर नहीं चाहते और ठीक रास्ते पर हैं +[36:22] आखिर क्यों ना मैं उस हस्ती की बंदगी करूं जिसने मुझे भुगतान किया है और जिसकी तरफ तुम सबको पलट कर जाना है +[36:23] क्या मैं उसे चोद कर दूसरे को माबूद बना लूं? हलांके अगर खुदा ए रहमान मुझे कोई नुक्सान पहुंचाना चाहे तो ना उनकी शफाअत मेरे लिए कोई काम आ सकती है और ना वो मुझे छुड़ा ही सकते हैं +[36:24] अगर मैं ऐसा करूं तो मैं सारी गुमराही में मुबतला हो जाऊंगा +[36:25] मैं तो तुम्हारे रब पर ईमान ले जाऊंगा आया, तुम भी मेरी बात मान लो।” +[36:26] (आखिर ए कार उन लोगों ने उसे क़त्ल कर दिया और) उस शक्स से कहदिया गया के "दाखिल हो जा जन्नत में" उसने कहा "काश मेरी क़ौम को मालूम होता है +[36:27] के मेरे रब ने किस चीज़ की बदौलत मेरी मगफिरत फ़रमा दी और मुझे ब-इज्जत लोगों में दाख़िल फरमाया” +[36:28] इसके बाद उसकी कौम पर हमने आसमान से कोई लश्कर नहीं उतारा, हमने लश्कर भेजा कि कोई हाजात ना थी +[36:29] बस एक धमाका हुआ और यकीन वो सब बुझ कर रह गए +[36:30] अफसोस बंदों के हाल पर, जो रसूल भी उनके पास आया उसका वो मज़ाक ही उड़ाते रहे +[36:31] क्या उन्हें ने देखा नहीं के उनसे पहले कितनी ही हाय क़ौमों को हम हलाक कर चुके हैं और उसके बाद वो फिर कभी उनकी तरफ पलट कर ना आये +[36:32] उन सबको एक रोज़ हमारे सामने हाज़िर किया जाना है +[36:33] लोगों के लिए बे-जान ज़मीन एक निशानी है, हमने इसको जिंदगी बख्शी और इस गल्ला (अनाज/अनाज) निकाला जिसे ये खाते हैं +[36:34] हमने इसमे खजूरों और अंगूरों के बाग पैदा किये और उसके अंदर चश्मे (स्प्रिंग्स) फोढ़ निकले +[36:35] ता-के ये उसके फल खायें, ये सब कुछ इनके अपने हाथों का भुगतान किया हुआ नहीं है फिर क्या ये शुक्र अदा नहीं करते +[36:36] पाक है वो जात जिसने जुमला अक्साम के जोड़े पैदा किये ख्वाह वो ज़मीन की नबात में से होन या खुद इनके अपने जिन्स (यानी नाव-ए-इंसानी) में से या उन आशियानों में से जिनको ये जानते तक नहीं हैं +[36:37] इनके लिए एक और निशानी रात है, हम उसके ऊपर से दिन हटा देते हैं तो अंदर अंधेरा छा जाता है +[36:38] और सूरज, वो अपने ठिकाने की तरफ चल जा रहा है, ये ज़बरदत आलिम (सर्वज्ञ) हस्ती का बंदा हुआ हिसाब है +[36:39] और चाँद, उसके लिए हमने मंज़िलें मुक़र्रर कर दी हैं यहाँ तक के इनसे गुज़रता हुआ वो फिर खजूर की सूखी शाखा (सूखी पुरानी शाखा) के मनिंद रह जाता है +[36:40] ना सूरज के बस में ये है कि वो चांद को जा पकड़े और ना रात दिन पर सबक ले जा सकती है। सब एक एक फलक में तैर रहे हैं +[36:41] इनके लिए ये भी एक निशानी है के हमने इनकी नाक को भरी हुई कश्ती में सवार करदिया +[36:42] और फिर इनके लिए वैसी ही कश्तियां और पैदा कि जिनपर ये सवार होते हैं +[36:43] हम चाहें तो इनको गरक करदें, कोई इनकी फरियाद सुनने वाला ना हो और किसी तरह ये ना बचाए जा सकें +[36:44] बस हमारी रहमत ही है जो इन्हें पार लगाती और एक वक्त और खास तक जिंदगी से मिलता जुलता (आनंद) होने का मौका देती है +[36:45] लोगों से जब कहा जाता है के बच्चों उस अंजाम से जो तुम्हारे आगे आ रहा है और तुम्हारे पीछे गुजर चुका है, शायद के तुमपर रहम किया जाए (तो ये सुनी अन सुनी कर जाते हैं) +[36:46] इनके सामने इनके रब की आयत (निशानी) में से जो आयत (निशानी) भी आती है ये इसकी तरफ इल्तिफ़ात नहीं करते +[36:47] और जब इनसे कहा जाता है कि अल्लाह ने जो रिज़क तुम्हें अता किया है उसमें से कुछ अल्लाह की राह में भी खर्च करो तो ये लोग जिन्होन ने कुफ्र किया है ईमान लाने वालों को जवाब देते हैं " क्या हम उनको खिलाएं जिन्हें अगर अल्लाह चाहता तो खुद खिला देता? तुम तो बिलकुल ही बहक गए हो” +[36:48] ये लोग कहते हैं के “ये कयामत की धमकी आख़िर कब पूरी होगी? बताओ अगर तुम सच्चे हो” +[36:49] दर-असल ये जिस चीज की राह तक रहे हैं वो बस एक धमाका है जो यकीन है कि ऐन उस हालात में धर लेगा जब ये (अपनी दुनिया मामलात में) झगड़ा कर रहे होंगे +[36:50] और हम वक्त ये वसीयत तक ना कर पाएंगे, ना अपने घरों को पलट पाएंगे +[36:51] फिर एक सुर (तुरही) फूँका जाएगा और यकीन ये अपने रब के हुजूर पेश होने के लिए अपनी कब्रों से निकल पड़ेंगे +[36:52] घबरा कर कहेंगे: "अरे, ये किसने हमने हमारी ख्वाब-गाह से उठाया खड़ा किया?" ये वही चीज़ है जिसका खुदा ए रहमान ने वादा किया था और रसूलों की बात सच्ची थी” +[36:53] एक ही ज़ोर की आवाज़ होगी और सब के सब हमारे सामने हाज़िर हो जायेंगे +[36:54] आज किसी पर ज़रा बराबर ज़ुल्म ना किया जायेगा और तुम्हें वैसा ही बदला दिया जाएगा जैसे अमल तुम करते रहे थे +[36:55] आज जन्नती लोग मजे करने में मशगुल हैं +[36:56] वो और उनकी बिवियां घने साइयों (शेड्स) में हैं मसनदों पर ताकि लगे हुए +[36:57] हर क़िस्म की लज़ीज़ चीज़ें खने पीने को उनके लिए वहां मौजूद हैं, जो कुछ वो तालाब करें उनके लिए हाज़िर है +[36:58] रब ए रहीम की तरफ से उनको सलाम कहा गया है +[36:59] और ऐ मुजरिमोन, आज तुम चैट कर अलग हो जाओ +[36:60] आदम के बच्चों, क्या मैंने तुमको हिदायत ना की थाई के शैतान की बंदगी ना करो, वो तुम्हारा खुला दुश्मन है +[36:61] और मेरी ही बंदगी करो, ये सीधा रास्ता है +[36:62] मगर इसके बावज़ूद उसने तुम में से एक गिरोह-ए-कसीर (आपकी बड़ी भीड़) को गुमराह कर दिया, क्या तुम अक़ल नहीं रखते थे +[36:63] ये वही जहन्नुम है जिसे तुमको डराया जाता रहा था +[36:64] जो कुफ्र तुम दुनिया में करते रहे हो उसकी पैदाइश में अब इसका इंधन (ईंधन) बनो +[36:65] आज हम इनको मुंह बांध देते हैं, इनके हाथ हमसे बोलेंगे और इनके पांव गवाही देंगे के ये दुनिया में क्या कमाई करते रहेंगे +[36:66] हम चाहें तो इनकी आंखें मूंद लें (आंखें मिटा दीं), फिर ये रास्ते की तरफ लपक कर देखें, कहां से इन्हें रास्ता सुझाएगा +[36:67] हम चाहें तो इनकी जगह ही पर इस तरफ मास्क (रूपांतरण) करके रख दें के ये ना आगे चल सकें ना पीछे पलट सकें +[36:68] जिस शक्स को हम लंबी उमर देते हैं इसकी सच्चाई को हम उलट ही देते हैं (हम सृजन में उलट हैं), क्या (ये हालात देख) कर) इन्हें अक्ल नहीं आती +[36:69] हमने इस (नबी) को शेर नहीं सिखाया है और ना शायरी इसको ज़ायब ही देती है, ये तो एक हिदायत है और साफ पढ़ी जाने वाली किताब +[36:70] ता-के वो हर उस शक्स को खबरदार बना दे जो जिंदा हो और इंकार करने वालों पर हुज्जत कयाम हो जाए +[36:71] क्या ये लोग देखते नहीं हैं कि हमने अपने हाथों की बनाई हुई चीजों में से इनके लिए मवेशी पैदा किए और अब ये इनके मालिक हैं +[36:72] हमने उन्हें इस तरह इनके बस में कर दिया है के उनमें से किसी पर ये सवार होते हैं, किसिका ये गोश्त खाते हैं +[36:73] और उनके अंदर इनके लिए तरह तरह के फवाद (फायदे) और मशरूबात (पेय) हैं फिर क्या ये शराब गुजर नहीं होते +[36:74] ये सब कुछ होते हुए इन्होन ने अल्लाह के सिवा दूसरे खुदा बना लिए हैं और ये उम्मीद रखते हैं के इनकी मदद की जाएगी +[36:75] वो इनकी कोई मदद नहीं कर सकते बल्के ये लोग उलटे उनके लिए हाज़िर-बाश लश्कर (प्रतीक्षा में सेना) बने हुए हैं +[36:76] अच्छा, जो बातें ये बना रहे हैं वो तुम्हें रंजीदा ना करें, इनकी छुपी और खुली सब बातों को हम जानते हैं +[36:77] क्या इंसान देखता नहीं है कि हमने उसका इस्तेमाल किया (शुक्राणु ड्रॉप) से भुगतान किया और फिर वह सारा झगड़ालू बनकर खड़ा हो गया +[36:78] अब वह हमपर मिसालें चस्पां करता है और अपनी कमाई को भूल जाता है, कहता है “कौन इन हदियों को जिंदा करेगा जबके ये गंदा (सड़ा हुआ) हो चुकी हूं?” +[36:79] उसे कहो, वहीं जिंदा करेगा जिसने पहले उसे पैदा किया था, और वह तखलीक (सृजन) का हर काम जानता है +[36:80] वही जिसने तुम्हारे लिए हरे भरे (हरा) दरख्त से आग पैदा कर दी और तुम उसे अपने चूल्हे (स्टोव) रोशन करते हो +[36:81] क्या वो जिसने आसमानो और ज़मीन को पेदा किया इसपर कादिर नहीं है के इन जैसों को पेदा कर सके? क्यों नहीं, जबके वो माहिर खल्लाक (शानदार रचनाकार) है +[36:82] वो तो जब किसी चीज का इरादा करता है तो उसका काम बस यही है कि उसे हुकुम दे के होजा और वो जो जाती है +[36:83] पाक है वो जिसके हाथ में हर चीज का मुकम्मल इक्तेदार (पूर्ण नियंत्रण) है, और उसकी तरफ तुम पलटाए जाने वाले हो + +Surah 37: As-Saffat (Those Ranging in Ranks) +---------------------------------------- +[37:1] कतर दर कतर सैफ बांधने वालों की कसम +[37:2] फिर उनकी कसम जो दतने फाटक ने वाले हैं +[37:3] फिर उनकी कसम जो कलाम ए हिदायत सुनाने वाले हैं +[37:4] तुम्हारा माबूद ए हकीकत बस एक ही है +[37:5] वो जो ज़मीन और आसमान का मालिक है और तमाम उन चीज़ों का मालिक है जो ज़मीन ओ आसमान में हैं, और सारे मशरिकों का मालिक है +[37:6] हमने आसमान ए दुनिया को तारों की ज़ीनत से सजाया है +[37:7] और हर शैतान सरकश से इसको महफ़ूज़ कर दिया है +[37:8] ये शयातीन माला-ए-आला (हाई काउंसिल) की बातें नहीं सुन सकते, हर तरफ से मारे और हांके जाते हैं +[37:9] और इनके लिए पैहम अज़ाब है +[37:10] ताहम अगर कोई इनमें से कुछ ले उदय तो एक तेज़ शोला उसका पीछा करता है +[37:11] अब इनसे पूछो, इनकी अदायगी ज्यादा मुश्किल है या उन चीजों की जो हमने भुगतान कर रखी हैं? इनको तो हमने लीस डर गैरे (चिपचिपी मिट्टी/चिकनी मिट्टी) से पेदा किया है +[37:12] तुम (अल्लाह की क़ुदरत के करिश्माओं पर) हेयरन हो और ये इसका मज़ाक उड़ा रहे हैं +[37:13] समझा जाता है तो समझ कर नहीं देते +[37:14] कोई निशानी देखते हैं तो इस्तेमाल करते हैं थाटन (मजाक/मॉक) में उड़ाते हैं +[37:15] और कहते हैं “ये तो सारा जादू है +[37:16] भला कहीं ऐसा हो सकता है के जब हम मर चुके हों और मिट्टी बन जाएं और हड्डियों का पंजर रह जाएं हमें वक्त हम फिर जिंदा करके उठा खड़े किए जायें +[37:17] और क्या हमारे अगले वक्त के आबा ओ आजदाद भी उठाये जायेंगे?” +[37:18] (इनसे कहो हां, और तुम) खुदा के मुकाबले में बेबस हो +[37:19] बस एक ही झिडकी होगी और यकीन ये अपनी आंखों से (वो सब कुछ जिसकी खबर दी जा रही है) देख रहे होंगे +[37:20] हमें वक्त ये कहेंगे " हाये हमारी कम्बख्त, ये तो यम उल जजा है” +[37:21] “ये वही फैसले का दिन है जिसे तुम झुटलाया करते थे” +[37:22] (हुकुम होगा) घेर लाओ सब जालिमों और उनके साथियों और उन माबूदों को जिनकी वो खुदा को चोद कर बंदगी किया करते थाय +[37:23] फिर उन सबको जहन्नुम का रास्ता दिखाओ +[37:24] और जरा यहीं ठहरो, इनसे कुछ पूछना है +[37:25] “क्या हो गया तुम्हें, अब क्यों एक दूसरे की मदद नहीं करते +[37:26] (अरे, आज तो ये अपने आप को) और एक दूसरे को हवलिये (आत्मसमर्पण) किये दे रहे हैं” +[37:27] इसके बाद ये एक दूसरे की तरफ मुड़ेंगे और बहाम तकरार शुरू कर देंगे +[37:28] जोड़ी बनाने वाले अपने पेशवाओं से) कहेंगे, “तुम हमारे पास सीधे रुख से आते थे” +[37:29] वो जवाब देंगे “नहीं बलके तुम खुद ईमान लेन वाले ना थे +[37:30] हमारा तुमपर कोई जोर ना था, तुम खुद ही सरकश लोग थे +[37:31] आखिर ए कार हम अपने रब के इस फरमान के मुस्तहिक हो गए के हम अज़ाब का मजा चखने वाले हैं +[37:32] तो हमने तुमको बहकाया, हम खुद बहके हुए थे” +[37:33] इस तरह वो सब हम रोज़ अज़ाब में मुश्तारिक (शारीक) होंगे +[37:34] हम मुजरिमों के साथ यहीं कुछ करते हैं +[37:35] ये वो लोग थे के जब उनसे कहा जाता "अल्लाह के सिवा कोई मबूद ए बरहक़ नहीं है" तो ये घमंड में आ जाते थे +[37:36] और कहते थे "क्या हम एक शायर मजनूं (दीवाने) की खातिर अपने मबूदों को छोड़ दें?" +[37:37] हलांके वो हक़ लेकर आया था और उसने रसूलों की तस्दीक की थी +[37:38] (अब उन्हें कहा जाएगा के) तुम लाज़िमन दर्दनाक सज़ा का मज़ा चखने वाले हो +[37:39] और तुम्हें जो बदला भी दिया जा रहा है उन्ही अमाल का दिया जा रहा है जो तुम करते रहो हो +[37:40] मगर अल्लाह के चीदा (चुने हुए/चुने हुए) बंदे (इस अंजाम ए बद से) महफूज़ होंगे +[37:41] उनके लिए जाना बुझा रिज़क (ज्ञात प्रावधान) है +[37:42] हर तरह की लज़ीज़ चीज़ +[37:43] और नियामत भारी जन्नतें +[37:44] जिनको वो इज्जत के साथ रखेंगे, तख्तों पर आमने-सामने बैठेंगे +[37:45] शराब के चमसों से सागर (कप) भर-भर कर उनके दरमियान फिराए जाएंगे +[37:46] चमकती हुई शराब, जो पीने वालों के लिए लज्जत होगी +[37:47] ना उनके जिस्म को कोई जरूर होगा और ना उनका अक्ल उसे खराब होगी +[37:48] और उनके पास निगाहें बचाने वाली, खूबसूरत आंखों वाली औरतें होंगी +[37:49] ऐसी नाज़ुक जैसे अंडे (अंडे) के छिलके के नीचे छुपी हुई झिल्ली +[37:50] फिर वो एक दूसरे की तरफ मुतवज्जे हो कर हालात पूछेंगे +[37:51] उनमें से एक कहेगा, “दुनिया में मेरा एक हम नहसीन (साथी) था +[37:52] जो मुझसे कहता था, क्या तुम भी तस्दीक करने वालों में से हो +[37:53] क्या वाकाई जब हम मर चुके होंगे और मिट्टी हो जाएंगे और हड्डियों का पंजर बनकर रह जाएंगे तो हमें जजा ओ सजा दी जाएगी +[37:54] अब क्या आप लोग देखना चाहते हैं कि वो साहब अब कहां हैं?” +[37:55] ये कह कर जुन्ही वो झुकेगा तो जहन्नुम की गहराई में उसको देख लेगा +[37:56] और उसे खिताब करके कहेगा “खुदा की कसम, तू तो मुझे तबाह ही कर देने वाला था +[37:57] मेरे रब का फज़ल शामिल ए हाल ना होता तो आज मैं भी उन पर लोगों में से होता जो पकड़े हुए आये हैं +[37:58] अच्छा तो क्या अब हम मरने वाले नहीं हैं +[37:59] मौत जो हमें आनी थी वो बस पहले आ चुकी है? +[37:60] यकीनन यही अज़ीम ओ शान कामियाबी है +[37:61] ऐसी ही कामियाबी के लिए अमल करने वालों को अमल करना चाहिए +[37:62] बोलो, ये ज़ियाफ़त अच्छी है या ज़ख़्म का दरख्त +[37:63] हमने हमें दरख्त को ज़ालिमों के लिए दिया फितना बना दिया है +[37:64] वो एक दरख्त है जो जहन्नुम की तह से निकलता है +[37:65] उसके शगुफे (उभरता हुआ फल) ऐसे हैं जैसे शैतानों के सर +[37:66] जहन्नुम के लोग उसे खाएंगे और उसी से पैठ भरेंगे +[37:67] फिर इसपर पीने के लिए खुलता हुआ पानी मिलेगा +[37:68] और इसके बाद उनकी वापसी उसी आतिश ए दोज़ख की तरफ होगी +[37:69] ये वो लोग हैं जिन्हों ने अपने बाप दादा को गुमराह पाया +[37:70] और उनके नक्शे क़दम पर दौड़ चले +[37:71] हालांके उनसे पहले बहुत से लोग गुमराह हो चुके थे +[37:72] और उन्हें हमने तम्बीह (चेतावनी) करने वाले रसूल भेजे थे +[37:73] अब देखलो के उन तम्बीह किए जाने वालों का क्या अंजाम हुआ +[37:74] इस बद-अंजामी से बस अल्लाह के वही बंदे बचाए हैं जिन्होंने अपने लिए खालिस कार्लिया है +[37:75] हमको (इससे पहले) नहीं ने पुकारा था, तो देखो के हम कैसे अच्छे जवाब देने वाले थे +[37:76] हमने उसको और उसके घर वालों को करब-ए-अजीम (बड़ी मुसीबत) से बचा लिया +[37:77] और उसकी नाक को बाकी रक्खा +[37:78] और बाद की नाकों में इसकी तारीफ ओ तौसीफ छोड़ दी +[37:79] सलाम है नूंह पर तमाम दुनिया वालों में +[37:80] हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा दिया करते हैं +[37:81] डार हकीकत वो हमारे मोमिन बंदों में से था +[37:82] फिर दूसरे गिरो ​​को हमने डूब कर दिखाया +[37:83] और नूह ही के तारीख़ पर चलने वाला इब्राहिम था +[37:84] जब वो अपने रुब के हुजूर क़ल्ब ए सलीम लेकर आया +[37:85] जब उसने अपने बाप और अपनी क़ौम से कहा “ये क्या चीज़ हैं जिनकी तुम इबादत कर रहे हो +[37:86] क्या अल्लाह को छोड़ कर झूठ घड़े हुए माबूद चाहते हो +[37:87] आख़िर अल्लाह रब-उल-आलमीन के बारे में तुम्हारा क्या गुमान है?” +[37:88] फिर उसने तारों पर एक निगाह डाली +[37:89] और कहा मेरी तबीयत ख़राब है +[37:90] चुनांचे वो लोग उसे छोड़ कर चले गए +[37:91] उनके पीछे वो चुपके से उनके मबूदों के मंदिर में घुस गया और बोला “आप लोग खाते क्यों नहीं हैं” +[37:92] क्या हो गया, आप लोग बोलते भी नहीं?” +[37:93] इसके बाद वो उनपार पिल (टूट) पड़ा और सीधे हाथ से खूब ज़रबीन लगाई (तोधना शुरू किया) +[37:94] (वापस आकर) वो लोग भागे भागे उसके पास आए +[37:95] उसने कहा “क्या तुम अपनी ही तराशी हुई चीज़ को पूजते हो +[37:96] हलांके अल्लाह ही ने तुमको भी पेदा किया है और उन चीज़ों को भी जिनमें तुम बनाते हो” +[37:97] उनहों ने आपस में कहा “इसके लिया एक अलाव (चिता) तय्यार करो और इसे देखती हुई आग के ढेर में फेंक दो” +[37:98] उनहों ने उसे ख़िलाफ एक करवायी करना चाही थी, मगर हमने उन्हें नीचा दिखा दिया +[37:99] इब्राहीम ने कहा “मैं अपने रब की तरफ जाता हूं, वही मेरी रहनुमाई करेगा +[37:100] ऐ परवरदिगार, मुझे एक बेटा अता कर जो सालिहों (धर्मी) में से हो” +[37:101] (इस दुआ के जवाब में)हमने उसको एक हलीम (बुर्दबार) लड़के की बशारत दी +[37:102] वो लड़का जब उसके साथ दौड़ धूप करने की उमर को पहुंच गया तो (एक रोज़) इब्राहिम ने उसे कहा, "बेटा, मैं ख्वाब में देखता हूं के मैं तुझसे ज़िबाह" कर रहा हूँ, अब तू बता, तेरा क्या ख्याल है?” उसने कहा, "अब्बाजान, जो कुछ आपको हुकुम दिया जा रहा है उसे कर डालिये, आप इंशा अल्लाह मुझे साबिरों (सब्र करने वालों) में से पियेंगे" +[37:103] आख़िर को जब इन दोनों ने सर-ए-तस्लीम ख़म करदिया और इब्राहिम ने बेटे को मथाय के बल गिरा दिया +[37:104] और हमने निदा दी के "ऐ इब्राहीम +[37:105] तू ने ख्वाब सच कर दिखाया हम नेकी करने वालों को ऐसा ही जजा देता है +[37:106] यकीनन ये एक खुली आजमाइश थी" +[37:107] और हमने एक बड़ी कुर्बानी फिदिये में दे कर हमसे बचे को छुड़ा लिया +[37:108] और उसकी तारीफ ओ तौसीफ हमेशा के लिए बाद की नाकों में छोड़ दी +[37:109] सलाम है इब्राहिम पर +[37:110] हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा देते हैं +[37:111] यकीनन वो हमारे मोमिन बंदों में से थे +[37:112] और हमने उसे इशाक (इसाक) की बशारत दी, एक नबी सालिहें में से +[37:113] और हमने उसे और इशाक को बरकत दी। अब दोनों की जुर्रियत में से कोई मोहसिन है और कोई अपने नफ़्स पर सारे ज़ुल्म करने वाला है +[37:114] और हमने मूसा ओ हारून पर एहसान किया +[37:115] उनको और उनकी क़ौम को करब-ए-अज़ीम (बड़ी मुसीबत) से निजात दी +[37:116] उनको नुसरत बख्शी जिसकी वजह से वही गालिब रहे +[37:117] उनको निहायत वाजे किताब अता की +[37:118] उन्हें राह-ए-रास्त दिखाई +[37:119] और बाद की नसलों में उनका जिक्र ए खैर बाकी रक्खा +[37:120] सलाम है मोसा और हारून पर +[37:121] हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा देते हैं +[37:122] दर हकीकत वो हमारे मोमिन बंदों में से थे +[37:123] और इलियास भी यकीनन मुरसलीन (संदेशवाहक) में से थे +[37:124] याद करो जब उसने अपनी क़ौम से कहा था के “तुम लोग डरते नहीं हो +[37:125] क्या तुम बाल को पुकारते हो और अहसानुल खलीक़ीन को छोड़ देते हो +[37:126] हमें अल्लाह को जो तुम्हारा और तुम्हारे अगले पिछले आबा ओ अजदाद का रब है?” +[37:127] मगर उनहों ने उसे झुटला दिया, तो अब यकीनन वो सजा के लिए पेश किए जाने वाले हैं +[37:128] बजुज उन बंदगां ए खुदा के जिनको खालिस करलिया गया था +[37:129] और इलियास का जिक्र ए खैर हमने बाद की नसलों में बाकी रक्खा +[37:130] सलाम है इलियास पर +[37:131] हम नेकी करने वालों को ऐसी ही जजा देते हैं +[37:132] वाकाई वो हमारे मोमिन बंदों में से थे +[37:133] और लुट भी उन्ही लोगों में से थे जो रसूल बना कर भेज गए हैं +[37:134] याद करो जब हमने उसको और उसके सब गर वालों को निजात दी +[37:135] सिवाय एक बुदिया के जो पीछे रह जाने वालों में से थी +[37:136] फिर बाकी सबको तहस नेहस करदिया +[37:137] आज तुम शब-ओ-रोज़ उनके उजड़े दयार (उजाड़ बस्तियों) पर से गुज़रते हो +[37:138] क्या तुमको अक्ल नहीं आती +[37:139] और यकीनन यूनुस भी रसूलों में से थे +[37:140] याद करो जब वो एक भारी कश्ती की तरफ भाग निकला +[37:141] फिर क़ोरा अंदाज़ी (कास्ट लॉट) में शरीक हुआ और उसमें मथ खाई (हारे हुए लोगों में) +[37:142] आख़िर ए कार मछली ने उसे निगल लिया और वो मलामत ज़दा था +[37:143] अब अगर वो तस्बीह करने वालों में से न होता तो +[37:144] रोज़-ए-क़यामत तक उसी मछली के पैत में रहता +[37:145] आखिर हमने उसे बड़ी सकीम (बीमार/बीमार) हालात में एक छतियाल जमीन पर फेंक दिया +[37:146] और उसपर एक बेल-दार दरख्त (लौकी की प्रजाति का एक फैला हुआ पौधा) उगा दिया +[37:147] इसके बाद हमने उसे एक लाख या उससे ज्यादा लोगों की तरफ भेजा +[37:148] वाह ईमान लाए और हमने एक वक्त ए खास तक उन्हें बाकी रक्खा +[37:149] फिर जरा इन लोगों से पूछो, क्या (इनके दिल को ये बात लगती है के) तुम्हारे रब के लिए तो होन बेटियां और इनके लिए होन बेटे +[37:150] क्या वक्त है हमने मलाइका (फ़रिश्तों) को औरतें बनाया है और ये आँखों देखी बात कह रहे हैं +[37:151] ख़ूब सुन रक्खो, असल ये लोग अपने मन ग़ादत से ये बात कहते हैं +[37:152] के अल्लाह औलाद रखता है, और फ़िल वजह ये झूठे हैं +[37:153] क्या अल्लाह ने बेटियों के बजाये बेटियां अपने लिए पसंद करली +[37:154] तुम्हें क्या हो गया है, कैसे हुकुम लगा रहे हो +[37:155] क्या तुम्हें होश नहीं आता +[37:156] हां फिर तुम्हारे पास अपनी बातों के लिए कोई साफ सनद (दलेल) है +[37:157] तो लाओ अपनी वो किताब अगर तुम सच्चे हो +[37:158] इन्होन ने अल्लाह और मलिका के दरमियान नसब (रिश्तेदारी) का रिश्ता बना रक्खा है, हालंके मलिका खूब जानते हैं के ये लोग मुजरिम की हसीयत से पेश होने वाले हैं +[37:159] (और वो कहते हैं के) “अल्लाह उन सिफ़ात से पाक है +[37:160] जो उसके खालिस बंदों के सिवा दूसरे लोग उसकी तरफ मंसूब करते हैं +[37:161] पास तुम और तुम्हारे ये माबूद +[37:162] अल्लाह से किसी को फेर नहीं सकते +[37:163] मगर सिफ़र उसको जो दोज़ख़ की भड़कती हुई आग में झुलसने वाला हो +[37:164] और हमारा हाल तो ये है कि हम में से हर एक का एक मुक़ाम मुकर्रर है +[37:165] और हम सफ़ बस्ता (पंक्तियों में) खिदमतगार हैं +[37:166] तस्बीह करने वाले हैं।” +[37:167] ये लोग पहले तो कहां करते थे +[37:168] के काश हमारे पास वो "ज़िक्र" होता जो पिछली क़ौमों को मिला था +[37:169] तो गुनगुनाने के लिए अल्लाह के चीदा (चुने हुए/चुने हुए) बंदे होतय +[37:170] मगर (जब वो आ गया) तो इन्हों ने उसका इनकार करदिया, अब अनकरीब इन्हें (इस रवीश का नातीजा) मालूम हो जाएगा +[37:171] अपने भेजे हुए बंदों से हम पहले ही वादा कर चुके हैं +[37:172] के यकीनन उनकी मदद की जाएगी +[37:173] और हमारा लश्कर ही गालिब होकर रहेगा +[37:174] पास (ऐ नबी) ज़रा कुछ मुद्दत तक इन्हें इनके हाल पर छोड़ दो +[37:175] और देखते रहो, अंकारीब ये खुद भी देख लेंगे +[37:176] क्या ये हमारे अज़ाब के लिए जल्दी मचा रहे हैं +[37:177] जब वो इनके सेहन (मैदान/खुली जगह) में आ उतरेगा वो दिन उन लोगों के लिए बहुत बुरा होगा जिनमें मुतनब्बेह (चेतावनी) किया जा चुका है +[37:178] पास ज़रा इन्हें कुछ मुद्दत के लिए छोड़ दो +[37:179] और देखते रहो, अनकरीब ये खुद देख लेंगे +[37:180] पाक है तेरा रब, इज्जत का मालिक, उन तमाम बातों से जो ये लोग बना रहे हैं +[37:181] और सलाम है मुरसलीन (संदेशवाहक) पर +[37:182] और सारी तारीफ अल्लाह रब्बुल आलमीन ही के लिए है + +Surah 38: Sad (Sad) +---------------------------------------- +[38:1] साद, कसम है हिदायत भरे कुरान की +[38:2] बलके यही लोग, जिन्होन ने मन्ने से इंकार किया है, सच तकब्बुर और जिद में मुब्तिला हैं +[38:3] इनसे पहले हम ऐसी कितनी ही क़ौमों को हलाक कर चुके हैं (और जब उनकी शामत आई है) तो वो गाल उठे हैं, मगर वो वक़्त बचने का नहीं होता +[38:4] लोगों को इस बात पर बड़ा ताज्जुब हुआ के एक डरने वाला खुद इनमें से आ गया, मुनकिरेन कहने लगे के "ये साहिर (जादूगर) है, सच झूठा है +[38:5] क्या इसने सारे ख़ुदाओं की जगह बस एक ही खुदा बना डाला? ये तो बड़ी अजीब बात है" +[38:6] और सरदारन ए क़ौम ये कहते हुए निकल गए के "चलो और दत-ते रहो अपने" माबूदोन की इबादत पर। ये बात तो किसी और हाय गरज से कहीं जा रही है [38:7 +[38:7] +[38:8] +[38:9] +[38:10] क्या ये आसमान ओ ज़मीन और इनके दरमियान की चीज़ों के मालिक हैं? अच्छा तो ये आलम ए असबाब की बुलंदियाँ पर चढ़ कर देखें +[38:11] ये तो जत्थों (सेनाओं) में से एक छोटा सा जत्था (सेना) है जो इसी जगह सीखा (हार झेलना) खाने वाला है +[38:12] इनसे पहले नूह की क़ौम, और आद, और मेखों (तम्बू-खूँटी/खूँटी) वाला फिरौन +[38:13] और समूद, और क़ौम ए लूट, और ऐका वाले झूठला चुके हैं। जत्थय वो थाय +[38:14] उनमें से हर एक ने रसूलों को झुटलाया और मेरी उकुबत का फैसला (सजा का फैसला) उसपर चस्पां हो कर रहा +[38:15] ये लोग भी बस एक धमाका के मुंतज़िर हैं जिसका बाद कोई दूसरा धमाका ना होगा +[38:16] और ये कहते हैं के ऐ हमारे रब, यम उल हिसाब (हिसाब के दिन) से पहले ही हमारा हिसाब हमें जल्दी से दे दे +[38:17] (ऐ नबी), सब्र करो उन बातों पर जो ये लोग बनाते हैं, और इनके सामने हमारे बंदे दाऊद का किस्सा बयान करो जो बड़ी किस्मत का मालिक था. हर मामले में अल्लाह की तरफ रूजू करने वाला था +[38:18] हमने पहाड़ों को उसके साथ मुसक्कर कर रखा था के सुबह ओ शाम वो उसके साथ तस्बीह करते थे +[38:19] परिंदे सिमत आते और सबके सब उसकी तस्बीह की तरफ मुतवज्जे हो जाते थाय +[38:20] हमने उसकी सल्तनत मजबूत कर दी थी, उसको हिकमत अता की थी और फैसला-कुन बात कहने की सलाह बख्शी थी +[38:21] फिर तुम्हें कुछ खबर मिली है उन मुकद्दमे वालों की जो दीवार चढ़ कर उसके बाला खाने (निजी चैंबर) में घुस आये थे +[38:22] जब वो दाऊद के पास पहुँचे तो वो उन्हें देख कर घबरा गया, उनको ने कहा "डरिए नहीं, हम दो फरीक मुक़द्दमा हैं जिनके बीच में एक ने दूसरे पर ज़्यादा की है। आप हमारे दरमियान ठीक ठीक हक़ के साथ फैसला कर दीजिए, इन्साफ़ी ना किजीए और हमें राह ए रास्ता बताएं +[38:23] ये मेरी भाई है, इसके पास निनानवे (निन्यानवे) डुम्बियां (ईवे) है और मेरे पास सिर्फ एक ही डुम्बी (ईवे) है, इसने मुझसे कहा के ये एक डुम्बी भी मेरे हवाले करदे और इसने गुफ्तगु में मुझे दबाया लिया'' +[38:24] दाऊद ने जवाब दिया: ''इस शक्स ने अपनी दुंबियों (ईव्स) के साथ तेरी दुंबी मिला लेने का मुतालबा करके यकीनन तुझपर जुल्म किया, और वाकिया ये है के मिल-जुल कर साथ रहने वाले लोग अक्सर एक दूसरे पर ज्यादातियां करते रहते हैं, बस वही लोग इस से बचे हुए हैं जो ईमान रखते हैं और अमल ए सालेह करते हैं, और ऐसे लोग काम ही हैं।” (ये बात कहते हैं) दाऊद समझ गया के ये तो हमने दार-असल इसकी आजमाइश की है, चुनांचे उसने अपने रब से माफ़ी मांगी और सजदे में गिर गया और रूजू कार्लिया +[38:25] तब हमने इसका वो कसूर माफ किया और यकीनन हमारे हां उसके लिए तक़र्रब का मुकाम और बेहतर अंजाम है +[38:26] (हमने उसे कहा) "ऐ दाऊद, हमने तुझे ज़मीन में ख़लीफ़ा बनाया है, लिहाज़ा तू लोगों के दरमियान हक़ के साथ हुकूमत कर, और ख्वाहिश ए नफ़्स की जोड़ी ना कर के वो तुझ अल्लाह की राह से भटक जाएगी. जो लोग अल्लाह की राह से भटकते हैं यकीनन उनके लिए सख्त सजा है के वो यम उल हिसाब को भूल गए।” +[38:27] हमने इस आसमां और ज़मीन को, और इस दुनिया को जो इनके दरमियान हैं, फ़िज़ूल पैदा नहीं करदिया है, ये तो उन लोगों का गुमान है जिन्हों ने कुफ्र किया है और ऐसी काफिरों के लिए बर्बादी है जहन्नुम की आग से +[38:28] क्या हम उन लोगों को जो ईमान लाते हैं हैं और कोई अमल करते हैं और उनको जो ज़मीन में फ़साद करने वाले हैं यक्सन करदें? क्या मुत्तक़ियों को हम फाजिरों (दुष्ट) जैसा कर दें +[38:29] ये एक बड़ी बरकत वली किताब है जो (ऐ मुहम्मद) हमने तुम्हारी तरफ नाज़िल की है ता-के ये लोग इसकी आयतें पर गौर करें और अक़ल ओ फ़िक्र रखने वाले इसे सबक लें +[38:30] और दाऊद को हमने सुलेमान (जैसा बेटा) अता किया, बेहतर बंदा, कसरत से अपने रब की तरफ रूजू करने वाला +[38:31] काबिल ए जिक्र है वो मौका जब शाम के वक्त हमारे सामने खूब सीधे (अच्छी तरह से प्रशिक्षित) हुए तेज-रौ (दौड़ना) घोड़े (घोड़े) पेश किए गए +[38:32] तो उसने कहा "मैंने इस माल की मुहब्बत अपने रब की याद की वजह से इख्तियार की है" यहां तक ​​के जब वो घोड़े (घोड़े) निगाह से ओझल हो गए +[38:33] तो (उसने हुकुम दिया के) इन्हें मेरे पास वापस लाओ, फिर लगा उनकी पिंडलियां (पैर) और गर्दन (गर्दन) पर हाथ फेरने +[38:34] और (देखो के) सुलेमान को भी हमने आजमाइश में डाला और उसकी कुर्सी पर एक जड़ (मात्र शरीर/शरीर बिना जान के) ला कर डाल दिया फिर उसने रूजू किया +[38:35] और कहा के “ऐ मेरे रब, मुझे माफ” करदे और मुझे वो बादशाही दे जो मेरे बाद किसी के लिए सजावर ना हो, क्योंकि तू ही असल दाता है” +[38:36] तब हमने उसके लिए हवा को मुस्कुरा कर दिया जो उसके हुकुम से नरमी के साथ चलती थी जिधर वो चाहता था +[38:37] और शयातीन को मुस्कुरा कर दिया, हर तरह के मइमार (बिल्डर) और गोताखोर (गोताखोर) +[38:38] और दूसरे जो पाबंद ए सलासिल थे (जंजीरों से बंधे) +[38:39] (हमने उसे कहा) "ये हमारी बख्शीश है, तुझे इख्तियार है जिसे चाहे दे और जिसे चाहे रोक ले, कोई हिसाब नहीं" +[38:40] यकीनन उसके लिए हमारे हां तकरारब का मुकाम और बेहतर अंजाम है +[38:41] और हमारे बंदे अयूब का जिक्र करो, जब उसने अपने रुब को पुकारा के शैतान ने मुझे सख्त तकलीफ और अजाब में डाल दिया है +[38:42] (हमने उसे हुकुम दिया) अपना पांव (पैर) ज़मीन पर मार, ये है ठंडा पानी नहाने के लिया और पीने के लिए +[38:43] हमने उसे उसके अहल ओ अयाल वापस दिये और उनके साथ उतने ही और, अपनी तरफ से रहमत के तौर पर, और अक़ल ओ फिकर रखने वालों के लिए दर्स के तौर पर +[38:44] (और हमने इसे कहा) तिनकों का एक मुत्ता ले (बंडल ऑफ रशेस) और उसे मार दे, अपनी कसम न तोड़, हमने उसे साबिर पाया, बहतरीन बंदा, अपने रब की तरफ बहुत रूजू करने वाला +[38:45] और हमारे बंद, इब्राहिम और इशाक और याकूब का जिक्र करो बड़ी कुव्वत ए अमेल रखने वाले और दीधावर (ताकत और दूरदर्शिता)लोग थे +[38:46] हमने उनको एक खाली सिफत की बिना पर बरगुजिदा किया था, और वो दार-ए-आखिरत की याद थी +[38:47] यकीनन हमारे हां उनका मशहूर चुने हुए नेक अशखास (उत्कृष्ट वाले) में हैं +[38:48] और इस्माइल और अल-यासा (एलीशा) और ज़ुल्किफ़ल का ज़िक्र करो, ये सब दूसरे लोगों में से थे +[38:49] ये एक ज़िक्र था। (अब सुनो के) मुत्तक़ी लोगों के लिए यक़ीनन बहतरीन ठिकाना है +[38:50] हमेशा रहने वाली जन्नतें जिनके दरवाजे उनके लिए खुले होंगे +[38:51] उनमें वो तकिये लगाये बैठे होंगे, ख़ूब ख़ूब फ़वाके और मशरूबत (प्रचुर मात्रा में फल और पेय) तालाब कर रहे होंगे +[38:52] और उनके पास शर्मीली हम्सिन बीवियां होंगी +[38:53] ये वो चीजें हैं जिनमें हिसाब के दिन अता करने का तुमसे वादा किया जा रहा है +[38:54] ये हमारा रिज्क है जो कभी खत्म होनेवाला नहीं +[38:55] ये है मुत्तक़ियों का अंजाम और व्यंग्यों के लिए बद्तरीन (बुराई) ठिकाना है +[38:56] जहन्नुम जिसमें वो झुलस जाएंगे। बहुत ही बुरी क़यामगाह +[38:57] ये है उनके लिए, पास वो मजा चखें खौटले (उबलते हुए) हुए पानी और पीप लहू (मवाद) +[38:58] और इसी क़िस्म की दूसरी तल्खियों का +[38:59] (वो जहन्नुम की तरफ अपने जोड़े को आते देख कर आपस में कहेंगे) "ये एक लश्कर तुम्हारे पास घुसा चला आ रहा है, कोई खुशामदीद (स्वागत) इनके लिए नहीं है, ये आग में झुलसने वाले हैं" +[38:60] वो उनको जवाब देंगे " नहीं बलके तुम ही झुलसे जा रहे हो, कोई खैर मकसद तुम्हारे लिए नहीं ये अंजाम हमारे आगे लाये हो। कैसी बुरी है ये जाए क़रार” +[38:61] फिर वो कहेंगे “ऐ हमारे रब, जिसने हमें इस अंजाम को पाने का बंदोबस्त किया उसे दोज़ख का दोहरा अज़ाब दे” +[38:62] और वो आपस में कहेंगे “क्या बात है, हम उन लोगों को कहीं नहीं देखते जिन्हें हम कहते हैं” दुनिया में बुरा समझे थे +[38:63] हमने यूं ही उनका मज़ाक बना लिया था, या वो कहीं नज़रों से ओझल हैं?” +[38:64] बेशक ये बात सच्ची है, एहले दोज़ख में यहीं कुछ झगड़े होने वाले हैं +[38:65] (ऐ नबी) इनसे कहो, "मैं तो बस ख़बरदार करने वाला हूं। कोई हक़ीक़ी माबूद नहीं मगर अल्लाह, जो जानता है, सब पर गालिब +[38:66] आसमानों और ज़मीन का मालिक और उन सारी चीज़ों का मालिक जो इनके दरमियान हैं, ज़बरदस्त और दरगुज़ार करने वाला” +[38:67] इनसे कहो “ ये एक बड़ी खबर है +[38:68] जिसको सुनकर तुम मुँह फेरते हो” +[38:69] (इनसे कहो) “मुझसे वक़्त की कोई ख़बर ना थी जब माला-ए-आला (उच्च परिषद) में झगड़ा हो रहा था +[38:70] मुझको तो वही (खुलासा/प्रेरणा) के ज़रिये से ये बातें सिर्फ इसलिए बताई जाती हैं कि मैं खुला-खुला ख़बरदार करने वाला हूं” +[38:71] जब तेरे रब ने फ़रिश्तों से कहा “मैं मिट्टी से एक बशर बनाने वाला हूं +[38:72] फिर जब मैं उसे पूरी तरह बना दूं और उसमें अपनी रूह फूंक दूं तो तुम उसके आगे सजदे में गिर जाओ” +[38:73] इस हुकुम के मुताबिक फरिश्ते सब के सब सजदे में गिर गए +[38:74] मगर इब्लीस ने अपनी बदाई का घमंड किया और वो काफिरों में से हो गया +[38:75] रब ने फरमाया “ऐ इब्लीस, तुझे क्या चीज उसको सजदा करने से मनाए हुई जिसने अपने दोनों हाथों से बनाया है? तू बड़ा बन रहा है या तू ही कुछ ऊंचे दर्जे की हस्तियों में से है?” +[38:76] उसने जवाब दिया "मैं उसे बेहतर हूं, आपने मुझको आग से पैदा किया है और इसको मिट्टी से" +[38:77] फरमाया " अच्छा तो यहां से निकल जा, तू मरदूद है +[38:78] और तेरे ऊपर यौम उल जजा तक मेरी लानत है" +[38:79] वो बोला " ऐ मेरे रब, ये बात है तो फिर मुझे वक़्त तक के लिए मोहलत दे दे जब ये लोग दोबारा उठेंगे" +[38:80] फरमाया, "अच्छा तुझे उस रोज़ तक की मोहलत है +[38:81] जिसका वक़्त मुझे मालूम है" +[38:82] उसने कहा "तेरी इज्जत की कसम, मैं सब लोगों को बहका कर रहूंगा +[38:83] बजूज तेरे उन बंदों के जिन्हें तू नई खालिस करलिया है" +[38:84] फरमाया "तो हक ये है, और मैं हक ही कहता हूं +[38:85] के मैं जहन्नुम को तुझसे और उन सब लोगों से भर दूंगा जो इंसानों में से तेरी जोड़ी बनाएगा'' +[38:86] (ऐ नबी) इनसे कहदो के मैं इस तबलीग पर तुमसे कोई अजर नहीं मांगता, और ना मैं बनवाती लोगों में से हूं +[38:87] ये तो एक हिदायत है तमाम जहां वालों के लिए +[38:88] और थोड़ी मुद्दत ही गुज़रेगी के तुम्हें इसका हाल खुद मालूम हो जाएगा + +Surah 39: Az-Zumar (The Companies) +---------------------------------------- +[39:1] क्या किताब का नुज़ुल अल्लाह ज़बरदस्त और दाना (हिकमत वाला/बुद्धि से भरा) की तरफ से है +[39:2] (ऐ मुहम्मद) ये किताब हमने तुम्हारी तरफ बरहक्क नाज़िल की है, लिहाज़ा तुम अल्लाह ही की बंदगी करो दीन को उसके लिए खालिस करते हुए +[39:3] खबरदार, दीन ए खालिस अल्लाह का हक है। रहे वो लोग जिन्होन ने उसके सिवा दूसरे सरपरस्त बना रक्खे हैं (और अपने फेल की तौजीह ये करते हैं) है के) हम तो उनकी इबादत सिर्फ इसके लिए करते हैं के वो अल्लाह तक हमारी रसाई करादीन (हमें अल्लाह के करीब लाओ)। अल्लाह यकीनन उनके दरमियान उन तमाम बातों का फैसला कर देगा जिन में वो इख्तिलाफ कर रहे हैं। अल्लाह किसी ऐसे शक्स को हिदायत नहीं देता जो झूठा और मुनकिर ए हक हो +[39:4] अगर अल्लाह किसी को बेटा बनाना चाहता तो अपने मखलूक में से जिसको चाहता बरगुजिदा कर लेता, पाक है वो इसे (के कोई उसका बेटा हो), वो अल्लाह है अकेला और सब पर गालिब +[39:5] उसने आसमान और ज़मीन को बारहक़ अदा किया है। वही दिन पर रात और रात पर दिन को लपेटा-ता है।उसी ने सूरज और चांद को इस तरह मुसक्कर कर रखा है के हर एक एक वक्त ए मुकर्रर तक चले जा रहा है। जान राखो, वो ज़बरदस्त है और दरगुज़ार करने वाला है +[39:6] उसी ने तुमको एक जान से पैदा किया, फिर वही है जिसने उस जान से इसका जोड़ा बनाया और उसने तुम्हारे लिए मवेशियों में से आठ (आठ) नर ओ माडा पैदा किया। वो तुम्हारी मांओं के पैठों में तीन तीन तारीख (अंधेरे) परदों के अंदर तुम्हें एक के बाद एक शकल देता चला जाता है। याही अल्लाह (जिसके ये काम हैं) तुम्हारा रब है, बादशाही उसी की है, कोई माबूद उसके सिवा नहीं है, फिर तुम किधर से फिर जा रहे हो +[39:7] अगर तुम कुफ्र करो तो अल्लाह तुमसे बे नियाज है, लेकिन वो अपने बंदों के लिए कुफ्र को पसंद नहीं करता। और अगर तुम शुक्र करो तो उसे वो तुम्हारे लिए पसंद करता है। कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ ना उठेगा। आखिर ए कार तुम सब को अपनी रब की तरफ पलटना है, फिर वो तुम्हें बता देगा के तुम क्या करते रहे हो, वो तो दिलों का हाल तक जानता है +[39:8] इंसान पर जब कोई आफत आती है तो वो अपनी रब की तरफ रूजू (वापसी) करके उसे पुकारता है, फिर जब उसका रब उसे अपनी नियामत से नवाज देता है तो वो हमें मुसिबत को भूल जाता है जिसपर वो पहले पुकार रहा था और दूसरे को अल्लाह का हमसर ठहराता है ता-के उसकी राह से गुमराह करे। (ऐ नबी) उसे कहो के थोड़े दिन अपने कुफ्र से लुत्फ उठा ले, यकीनन तू दोज़ख में जाने वाला है +[39:9] (क्या शक्स की रवीश बेहतर है या हमारे शक्स की) जो मुती-ए-फरमान है, रात की घड़ियों में खड़ा रहता है और सजदे करता है, आख़िरत से डरता और अपने रब की रहमत से उम्मीद लगता है? इन से पूछो, क्या जाने वाले और ना जाने वाले दोनों कभी यक्सन हो सकते हैं? हिदायत तो अक़ल रखने वाले ही क़बूल करते हैं +[39:10] (ऐ नबी) कहो के ऐ मेरे बंदन जो ईमान लाए हो, अपने रब से डरो। जिन लोगों ने इस दुनिया में नई रवैय्या इख्तियार किया है उनके लिए भलाई है। और खुदा की ज़मीन वसीह है, सब्र करने वालों को तो उनका अजर बे-हिसाब दिया जाएगा +[39:11] (ऐ नबी) इनसे कहो, मुझे हुकुम दिया है के दीन को अल्लाह के लिए खालिस करके उसकी बंदगी करूं +[39:12] और मुझे हुकुम दिया है के सबसे पहले मैं खुद मुस्लिम बनूं +[39:13] कहो, अगर मैं अपने रब की नाफ़रमानी करूं तो मुझे एक बड़े दिन के अज़ाब का खौफ है +[39:14] कहदो के मैं तो अपने दीन को अल्लाह के लिए खालिस करके उसकी बंदगी करूंगा +[39:15] तुम उसके सिवा जिस की बंदगी करना चाहो करते रहो। कहो असल दीवालिये (हारे हुए) तो वही हैं जिन्हों ने कयामत के रोज़ अपने आप को और अपने अहल-ओ-अयाल को घाटे में डाल दिया। खूब सुन राखो, यही खुला दिवाला (नुकसान) है +[39:16] उन्पर आग की छतरियां ऊपर से भी चयी होंगी और नीचे से भी। ये वो अंजाम है जिसे अल्लाह अपने बंदों को डराता है, पास ऐ मेरे बंदों, मेरे गजब से बचाओ +[39:17] बा-खिलाफ इसके जिन लोगों ने टैगुत (झूठे देवताओं) की बंदगी से इज्तिनाब किया और अल्लाह की तरफ रूजू करलिया उनके लिए खुश खबरी है। पास (ऐ नबी) बशारत देदो मेरे उन बंदों को +[39:18] जो बात को गौर से सुनते हैं और उसके बेहतर पहलू की जोड़ी बनाते हैं, ये वो लोग हैं जिनको अल्लाह ने हिदायत बख्शी है और यहीं दानिशमंद (समझ के साथ) हैं +[39:19] (ऐ नबी) हमारे शक्स को कौन बचा सकता है जिसपर अज़ाब का फैसला चस्पां हो चूका हो? क्या तुम उसे बचा सकते हो जो आग में गिर चुका हो +[39:20] अलबत्ता जो लोग अपने रब से डर कर रहे हैं उनके लिए बुलंद इमानतें हैं मंजिल पर मंजिल बनी हुई हैं जिनके बारे में नीचे कहा जा रहा है। ये अल्लाह का वादा है, अल्लाह कभी अपने वादे की खिलाफत वारजी नहीं करता +[39:21] क्या तुम नहीं देखते कि अल्लाह ने आसमां से पानी बरसाया, फिर उसको सोते और चश्मे (झरने और झरने) और दरियाओं की शकल में जमीन के अंदर जारी किया। फिर इस पानी के ज़रिये से वो तरह-तरह की खेतियाँ निकलती हैं जिनकी किस्मत मुख्तलिफ़ हैं, फिर वो खेतियाँ पक कर सुख जाती हैं, फिर तुम देखते हो के वो ज़रद (पीली) पड़ गई, फिर आख़िर ई कर अल्लाह उनको भुस बना देता है। दर हकीकत इस में एक सबक है अक्ल रखने वालों के लिए +[39:22] अब क्या वो शक्स जिसका सीना अल्लाह ने इस्लाम के लिए खोल दिया और वो अपने रब की तरफ से एक रोशनी पर चल रहा है (उस शक्स की तरह हो सकता है जिसने बातों से कोई सबक न लिया) लिया)? तबाही है उन लोगों के लिए जिनके दिल अल्लाह की हिदायत से और ज्यादा सख्त हो गए। वो खुली गुमराही में पड़े हुए हैं +[39:23] अल्लाह ने बहतरीन कलाम उतारा है, एक ऐसी किताब जिसके तमाम अज़्ज़ा हमरंग हैं और जिस में बार-बार मजामीन (सामग्री) दोहराए गए हैं, उसे सुनकर उन लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं जो अपने रब से डरें वाले हैं, और फिर उनका जिस्म और उनका दिल नरम होकर अल्लाह के जिक्र की तरफ रागिब हो जाते हैं। ये अल्लाह की हिदायत है जिसे वो राह ए रास्ते पर ले आता है जिसे चाहता है और जिसे अल्लाह ही हिदायत ना दे उसके लिए फिर कोई हादी नहीं है +[39:24] अब हम शक्स की बद-हाली का तुम क्या अंदाज़ा कर सकते हो जो कयामत के रोज़ अज़ाब की तरह मार अपने मुँह पर लेगा? ऐसे ज़ालिमों से तो कहदिया जाएगा के अब चक्को मजा हमें कमाई का जो तुम करते रहे थे +[39:25] इनसे पहले भी बहुत से लोग इसी तरह झूठला चुके हैं। आख़िर उन्पर अज़ाब ऐसे रुख़ से आया जिधर उनका ख़याल भी ना जा सकता था +[39:26] फिर अल्लाह ने उनको दुनिया ही कहा कि ज़िंदगी में रुसवे का मज़ा चखाया, और आख़िरत का अज़ाब तो इस तरह छाया हुआ है, काश ये लोग जानते हैं +[39:27] हमने कुरान में लोगों को तरह बताया है तरह की मिसालें दी हैं के ये होश में आएं +[39:28] ऐसा कुरान जो अरबी ज़ुबान में है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है, ता-के ये बुरे अंजाम से बचें +[39:29] अल्लाह एक मिसाल देता है एक शक्स तो वो है जिसकी मिलकियत में बहुत से काज खुल्क (कई झगड़ालू उस्ताद) आका शरीक हैं जो उसे अपनी-अपनी तरफ खींचते हैं और दूसरा शक्स पूरे का पूरा एक ही आका का गुलाम है। क्या इन दोनो का हाल यकसन हो सकता है? अल्हम्दुलिल्लाह, मगर अक्सर लोग नादानी में पड़े हुए हैं +[39:30] (ऐ नबी) तुम्हें भी मरना है और इन लोगों को भी मरना है +[39:31] आखिर ए कार कयामत के रोज तुम सब अपने रब के हुजूर अपना अपना मुकद्दमा पेश करोगी +[39:32] फिर हमारे शक्स से बड़ा ज़ालिम और कौन होगा जिसने अल्लाह पर झूठ बांधा और जब सच्ची उसके सामने आई तो उसे झूठला दिया। क्या ऐसे काफिरों के लिए जहन्नुम में कोई ठिकाना नहीं है +[39:33] और जो शक्स सच्ची लेकर आया और जिन्हों ने उसको सच माना, वही अज़ाब से बचने वाले हैं +[39:34] उन्हें अपने रुब के हां वो सब कुछ मिलेगा जिसकी वो ख्वाहिश करेंगे। ये है नेकी करने वालों की जजा +[39:35] ता-के जो बख्तरीन आमाल उन्होन ने किए थे उन्हें अल्लाह उनके हिसाब से साकीत करदे और जो बेहतरे आमाल वो करते रहे उनके लिहाज़ से उनको अजर अता फरमाये +[39:36] (ऐ नबी) क्या अल्लाह अपने बंदे के लिए काफी नहीं है? ये लोग उसके सिवा दूसरे से तुमको डराते हैं, हलांके अल्लाह जिसे गुमराही में डाल दे उसे कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं +[39:37] और जिसे वो हिदायत दे उसे भटकने वाला भी कोई नहीं। क्या अल्लाह ज़बरदस्त और इन्तेक़ाम लेने वाला नहीं है +[39:38] लोगों से अगर तुम पूछो के ज़मीन और आसमान को किसने अदा किया है तो ये खुद कहेंगे के अल्लाह ने। इनसे कहो, जब हकीकत ये है तो तुम्हारा क्या ख्याल है कि अगर अल्लाह मुझे कोई नुक्सान पहुंचाना चाहे तो क्या तुम्हारी ये देवियां (देवी) जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़ कर पुकारते हो, मुझे उसे पाहुंचाए हुए नुक्सान से बचा लूंगी? या अल्लाह मुझ पर मेहरबानी करना चाहे तो क्या ये उसकी रहमत को रोक सकेगी? बस इनसे कहदो के मेरे लिए अल्लाह ही काफी है, भरोसा करने वाले उसी पर भरोसा करते हैं +[39:39] इनसे साफ कहो के “ऐ मेरी कौम के लोगों, तुम अपनी जगह अपना काम किये जाओ, मैं अपना काम करता रहूंगा, अकारिब तुम्हें मालूम हो जाएगा।” +[39:40] के किस्पर रुसवा-कुन अज़ाब आता है और किसी को वो सज़ा मिलती है जो कभी तलने वाली नहीं” +[39:41] (ऐ नबी) हमने सब इंसानों के लिए ये किताबे बार-हक़ तुमपर नाज़िल कर दी है। अब जो सीधा रास्ता इख्तियार करेगा अपने लिए करेगा और जो भटकेगा उसके भटकने का बदला उसी पर होगा। तुम उनके ज़िम्मेदार नहीं हो +[39:42] वो अल्लाह हाय है जो मौत के वक्त रूहें क़ब्ज़ करता है और जो अभी नहीं मारा है उसकी रूह नींद में क़ब्ज़ कर लेता है, फिर जिसपर वो मौत का फैसला नफ़ीज़ करता है उसे रोक लेता है और दूसरों की रूहें एक वक़्त ए मुकर्रर के लिए वापस भेज देता है. क्या मैं बड़ी निशानियां हूं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फिक्र करने वाले हैं +[39:43] क्या हमें खुदा को छोड़ कर लोगों ने दूसरों को शफी (मध्यस्थ) बना रखा है? इनसे कहो, क्या वो शफा-अत करेंगे ख्वा उनके इख्तियार में कुछ ना हो और वो समझे भी ना हों +[39:44] कहो, शफा-अत (हिम्मत) सारी की सारी अल्लाह के इख्तियार में है। आसमान और ज़मीन की बादशाही का वही मालिक है, फिर उसकी तरफ तुम पलटाये जाने वाले हो +[39:45] जब अकेले अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो आख़िरत पर ईमान न रखने वालों के दिल कुदने लगते हैं। और जब उसके सिवा दूसरे का जिक्र होता है तो यकीनन वो खुशी से खिल उठते हैं +[39:46] कहो, खुदाया! आसमानो और ज़मीन के भुगतान करने वाले, हाज़िर ओ गैब के जान-ने वाले, तू ही अपने बंदों के दरमियान उस चीज़ का फैसला करेगा जिसमें वो इख्तिलाफ करते रहेंगे +[39:47] अगर जालिमों के पास ज़मीन की सारी दौलत भी हो, और उतनी ही और भी, तो ये रोज़-ए-क़यामत के बुरे अज़ाब से बचने के लिए सब कुछ फ़िडिये (प्रायश्चित/ छुड़ाने) में देने के लिए तैयार हो जाएंगे। वहां अल्लाह की तरफ से इनके सामने वो कुछ आएगा जिसका इन्होन ने कभी अंदाज़ा ही नहीं किया है +[39:48] वहां अपनी कमाई के सारे बुरे नटैज अंदर खुल जाएंगे और वही चीज़ अंदर मुसल्लत हो जाएगी जिसका ये मज़ाक उड़ाते रहे हैं +[39:49] यहीं इंसान जब ज़रा सी मुसीबत इसे छू जाती है तो हमें पुकारता है, और जब हम इसे अपनी तरफ से नियामत दे कर ऊपर देते हैं तो कहते हैं के ये तो मुझे इल्म की बिना पर दिया गया है। नहीं! बलके ये आजमाइश है, मगर इनमें से अक्सर लोग जानते नहीं हैं +[39:50] यही बात इनसे पहले गुजरे हुए लोग भी कह चुके हैं, मगर जो कुछ वो कमाते थे वो उनके किसी काम ना आया +[39:51] फिर अपनी कमाई के बुरे नटैज उन्हें न भुगते, और इन लोगों में से भी जो जालिम हैं वो अंकारीब अपनी कमाई के बारे में बताते हैं। ये हमें अजीज (निराश) करने वाले नहीं हैं +[39:52] और क्या इन्हें मालूम नहीं है के अल्लाह जिसका चाहता है रिज्क कुशादा (बड़ा करना) करता है और जिसका चाहता है तंग करदेता है? इस में निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं +[39:53] (ऐ नबी) कहदो के ऐ मेरे बंदों, जिन्होन ने अपनी जानो पर ज़्यादती (ज्यादती) की है, अल्लाह की रहमत से मयुस न हो जाओ, यकीनन अल्लाह सारे गुनाह माफ करता है, वो तो गफूर ओ रहीम है क्षमा करने वाला, सबसे दयालु) +[39:54] पलट आओ अपने रब की तरफ और मुती (विनम्र) बन जाओ उसके, कबूल इसके के तुमपर अज़ाब आ जाए और फिर कहीं से तुम्हें मदद न मिल सके +[39:55] और जोड़ी इख्तियार करलो अपने रब की भेजी हुई किताब के बहतरीन पहलू की, कबूल इसके तुम अचानक अजब आए और तुमको खबर भी ना हो +[39:56] कहीं ऐसा ना हो के बाद में कोई शक कहे "अफसोस मेरी उस तक़सीर(लापरवाही) पर जो मैं अल्लाह की जनाब में करता रहा, बलके मैं तो उलटा मज़ाक उड़ाने वालों में शामिल था" +[39:57] या कहे "काश अल्लाह ने मुझे हिदायत बख्शी होती तो मैं भी मुत्तक़ियों में से होता" +[39:58] हां अज़ाब देख कर कह" काश मुझे एक मौका और मिल जाए और मैं भी जल्द अमल करने वालों में शामिल हो जाऊं।” +[39:59] (और हमारा वक्त उसे ये जवाब मिले के) "क्यों नहीं मेरी आयत तेरे पास आ चुकी पतली, फिर तू नहीं उनको झुटलाया और तकब्बुर किया और तू काफिरों में से था" +[39:60] आज जिन लोगों ने खुदा पर झूठ बांधे हैं कयामत के रोज तुम देखोगे के उनके मुँह काले होंगे। क्या जानहुम में मुतकब्बिरों (घमंडी) के लिए काफी जगह नहीं है +[39:61] इसके बार-अक्स जिन लोगों ने यहां तकवा किया है उनके असबाब-ए-कामियाबी की वजह से अल्लाह उनको नजात देगा, उनको कोई गजनद (नुकसान) पहुंचाएगा न वो घूमेंगे +[39:62] अल्लाह हर चीज का खालिक (निर्माता) है और वही हर चीज पर निगहबान है +[39:63] जमीन और आसमान के खजानो की कुंजियां (कुंजियां) उसके पास हैं और जो लोग अल्लाह की आयत से कुफ्र करते हैं वही घाटे (नुकसान) में रहने वाले हैं +[39:64] (ऐ) नबी) इनसे कहो “फिर क्या ऐ जाहिलों (अज्ञानी), तुम अल्लाह के सिवा किसी और की बंदगी करने के लिए मुझसे कहते हो?” +[39:65] (ये बात तुम्हें उन्हें साफ कहना चाहिए क्योंकि) तुम्हारी तरफ और तुमसे पहले गुजरे हुए तमाम अंबिया की तरफ ये वही (खुलासा) भेजी जा चुकी है के अगर तुमने शिर्क किया तो तुम्हारा अमल जाय हो जाएगा और तुम खासे (नुक्सान) मैं रहोगे +[39:66] लिहाज़ा (ऐ नबी) तुम बस अल्लाह ही की बंदगी करो और शुक्र-गुज़ार बंदों में से हो जाओ +[39:67] इन लोगों ने अल्लाह की कदर ही न की जैसा के उसकी कदर करने का हक है (उसकी कुदरत ए कामिला का हाल तो ये है के) कयामत के रोज पूरी ज़मीन उसकी मुट्टी में होगी और आसमान उसके दस्त ए रास्ते (दाहिने हाथ) में लिपटे हुए होंगे। पाक और बाला-तार है वो हमसे शिर्क से जो ये लोग करते हैं +[39:68] और वो रोज़ सुर (तुरही) फूंका जाएगा और वो सब मरकर गिर जाएंगे जो आसमान और ज़मीन में हैं उनके सिवाए जिन्हें अल्लाह जिंदा रखना चाहे। फिर एक दूसरा सुर (तुरही) फूंका जाएगा और यकीन सबके सब उठ कर देखने लगेंगे +[39:69] ज़मीन अपने रुब के नूर से चमक उठेगी, किताब ए अमल ला कर रख दी जाएगी, अंबिया और तमाम गवाह हाज़िर कर दिए जाएंगे, लोगों के दरमियान ठीक ठीक हक के साथ फैसला कर दिया जाएगा और उन पर कोई जुल्म न होगा +[39:70] और हर मुतनफ्फिस को जो कुछ भी उसने अमल किया था उसका पूरा बदला दिया जाएगा। लोग जो कुछ भी करते हैं अल्लाह उसको खूब जानता है +[39:71] (इस फैसले के बाद) वो लोग जिन्हों ने कुफ्र किया था जहन्नुम की तरफ गिरो ​​डर गिरो ​​हांके जाएंगे, यहां तक ​​के जब वो वहां पहनेंगे तो उसके दरवाजे खोले जाएंगे और उसके कारिंदे (रखवाले) उनसे कहेंगे "क्या तुम्हारे पास तुम्हारे अपने अपने लोगों में से ऐसे रसूल नहीं आए थे, जिन्होनें तुमको तुम्हारे रब की आयतें सुनाईं हों और तुम्हें हमसे बात से डराया हो के एक वक्त तुम्हें ये दिन भी देखना होगा?” वो जवाब देंगे "हां, आए थे, मगर अज़ाब का फैसला काफिरों पर चिपक गया" +[39:72] कह जाएगा, दाखिल हो जाओ जहन्नुम के दरवाजे में, यहां अब तुम्हें हमेशा रहना है, बड़ा ही बुरा ठिकाना है ये मुतकब्बिरों (अहंकारी) के लिए +[39:73] और जो लोग अपने रब की नफ़रमानी से परहेज़ करते थे उन्हें गिरो ​​दर गिरो ​​जन्नत की तरफ ले जाया जाएगा यहां तक ​​के जब वो वहां पहनेंगे, और उसके दरवाजे पहले ही खोले जा चुके होंगे, तो उसका मुंतज़िमिन उनसे कहेंगे के "सलाम हो तुमपर" , बहुत अच्छा रहे, दाखिल हो जाओ इसमें हमेशा के लिए” +[39:74] और वो कहेंगे “शुक्र है हमें खुदा का जिसने हमारे साथ अपना वादा सच कर दिखाया और हमको जमीन का वारिस बना दिया, अब हम जन्नत में जहां चाहें अपनी जगह बना सकते हैं” पास बेहतरी अजर हैं अमल करने वालों के लिए +[39:75] और तुम देखोगे के फरिश्ते अर्श के गिर्द हलका (सर्कल) बनाए हुए अपने रब की हम्द और तस्बीह कर रहे होंगे, और लोगों के दरमियान ठीक हक के साथ फैसला चुका दिया जाएगा, और पुकार दिया जयेगा के हम्द है अल्लाह रब्बुल आलमीन के लिए + +Surah 40: Al-Mu'min (The Believer) +---------------------------------------- +[40:1] हा मीम +[40:2] इस किताब का नुज़ुल अल्लाह की तरफ से है जो ज़बरदस्त है, सब कुछ जानने वाला है +[40:3] गुनाह माफ़ करने वाला और तौबा क़बूल करने वाला है, सच सजा देने वाला और बड़ा साहब ए फ़ज़ल है। कोई माबूद उसके सिवा नहीं, उसकी तरफ सबको पलटना है +[40:4] अल्लाह की आयत में झगड़े नहीं करते मगर सिर्फ वो लोग जिन्होन ने कुफ्र किया है। इसके बाद दुनिया के मुल्कों में उनकी चलती फिरत तुम्हें कोई धोखे में ना डाले +[40:5] इनसे पहले नूंह की क़ौम भी झूठला चुकी है, और उसके बाद बहुत से दूसरे समूहों (समूहों) ने भी ये काम किया है। हर क़ौम अपने रसूल पर झपटी ता-के उसे गिरफ्तार करे, उन सब ने बातिल के हत्यारों से हक़ को नीचा दिखाने की कोशिश की। मगर आखिर ए कार मैंने उनको पकड़ लिया, फिर देखलो के मेरी सजा कैसी थी +[40:6] इसी तरह तेरे रब का ये फैसला भी उन सब लोगों पर चस्पां हो चुका है जो कुफ्र के मुर्तकीब हुए हैं के वो वासिल-बा-जहन्नुम होने वाले हैं +[40:7] अर्श ए इलाही के हामिल फ़रिश्ते और वो जो अर्श के गिर्द ओ पेश हाज़िर रहते हैं, सब अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह कर रहे हैं, वो उसपर ईमान रखते हैं और ईमान लाने वालों के हक़ में दुआ ए मगफिरत करते हैं, वो कहते हैं हैं: “ऐ हमारे रब, तू अपनी रहमत और अपने इल्म के साथ हर चीज़ पर छाया हुआ है, पास माफ़ करदे और अज़ाब ए दोज़ख से बचा ले उन लोगों को जिन्हों ने तौबा की है और तेरा रास्ता इख्तियार करलिया है +[40:8] ऐ हमारे रब, और दाख़िल कर उनको हमेशा रहने वाली उन जन्नतों में जिनका तू ने उनसे वादा किया है, और उनके वाल्दैन और बीवीयों और औलाद में से जो सालेह (नेक) होन (उन्हें भी वहां उनके साथ पाहुंचा दे)। तू बिला शुभा कादिर ए मुल्ताक (सबसे ताकतवर) और हकीम (सबसे बुद्धिमान) है +[40:9] और बच्चा दे उनको बुराइयों से। जिसको तू नई कयामत के दिन बुराइयों से बचा लिया उसपर तू नई बड़ा रहम किया। यहीं बड़ी कामयाबी है +[40:10] जिन लोगों ने कुफ़्र किया है, क़यामत के रोज़ उनको पुकार कर कहा जाएगा "आज तुम्हें जितना छायादार गुस्सा अपने ऊपर आ रहा है , अल्लाह तुम्पर उसे ज्यादा गजबनाक हमारा वक्त होता था जब तुम्हें ईमान की तरफ बुलाया जाता था और तुम कुफ्र करते थे” +[40:11] वो कहेंगे “ऐ हमारे रब, तू नहीं जानता हमें दो दफा मौत और दो दफा जिंदगी दे दी।” अब हम अपने कसूरों का ऐतराफ़ करते हैं। क्या अब यहाँ से निकलने की भी कोई सबील है?” +[40:12] (जवाब मिलेगा) “ये हालत जिसमें तुम मुबतला हो, इस वजह से है कि जब अकेले अल्लाह की तरफ बुलाया जाता था तो तुम मन्ने से इंकार कर देते थे और जब उसके साथ दूसरों को मिला जाता था तो तुम मान लेते थे। अब फैसला अल्लाह बुज़ुर्ग ओ बरतर के हाथ है” +[40:13] वही है जो तुमको अपनी निशानियां दिखाता है और आसमां से तुम्हारे लिए रिज़्क नाज़िल करता है, मगर (निहसानियों के मुशाहिदे से) सबक सिर्फ वही शक्स लेता है जो अल्लाह की तरफ रूजू करने वाला हो +[40:14] (पस ऐ रूजू करने वालों) अल्लाह ही को पुकारो अपने दीन को उसके लिए खालिस करके, ख्वाह तुम्हारा ये फेल (काम/अमल) काफिरों को कितना ही नागावर हो +[40:15] वो बुलंद दर्जों वाला, मालिक ए अर्श है अपने बंदों में से जिसपर चाहता है है अपने हुकुम से रूह नाज़िल कर देता है ता-के वो मुलाक़ात के दिन से ख़बरदार करदे +[40:16] वो दिन जबके सब लोग बे पर्दा होंगे, अल्लाह से उनकी कोई बात भी छुपी हुई ना होगी (हमें रोज़ पुकार कर पूछेगा) आज बादशाही किसकी है? (सारा आलम पुकार उठेगा) अल्लाह वाहिद-ए-कहर (सर्वशक्तिमान) की +[40:17] (कहा जाएगा) आज हर मुतनफ्फिस को उस कमाई का बदला दिया जाएगा जो उसने की थी। आज किसी पर कोई ज़ुल्म न होगा और अल्लाह हिसाब लेने में बहुत तेज़ है +[40:18] (ऐ नबी) दारा दो लोगों को उस दिन से जो करीब आ लगा है, जब कालिज (जिगर) मुंह को आ रहे होंगे और लोग चुप चाप गम के घूंट पी खाड़े होंगे। ज़ालिमों का ना कोई मुश्फ़िक दोस्त होगा और ना कोई शफ़ी जिसकी बात मानी जाएगी +[40:19] अल्लाह निगाहों की चोरी तक से वाकिफ है और वो राज तक जानता है जो सीने ने छुपा रखा है +[40:20] और अल्लाह ठीक ठीक बे-लाग (न्याय के साथ) फैसला करेगा। रहे वो जिनको (ये मुशरिकेन) अल्लाह को छोड़ कर पुकारते हैं, वो किसी चीज का भी फैसला करने वाले नहीं हैं। बिला शुभ अल्लाह हाय सब कुछ सुनने और देखने वाला है +[40:21] क्या ये लोग कभी ज़मीन में चले फिरे नहीं हैं के इनहे उन लोगों का अंजाम नज़र आता है जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं? वो इनसे ज्यादा ताकतवार थे और इनसे ज्यादा जबरदस्त असर जमीन में छूट गए हैं। मगर अल्लाह ने उनके गुनाहों पर उन्हें पकड़ लिया और उनको अल्लाह से बचाने वाला कोई ना था +[40:22] ये उनका अंजाम इस लिए हुआ के उनके पास उनके +[40:23] हमने मूसा को +[40:24] फिरौन और हामान और क़ारून की तरफ अपनी निशानियां और नुमाया सनद-ए-मामोरियत के साथ भेजा। मगर उनहों ने कहा “साहिर (जादूगर) है, कज़्ज़ब (झूठा) है” +[40:25] फिर जब वो हमारी तरफ से हक उनके सामने ले आया तो उनहों ने कहा “जो लोग ईमान ला कर इसके साथ शामिल हुए हैं सबके लड़कों को कत्ल करो और लड़कियों को जीता (जिंदा) छोड़ करना"। मगर काफ़िरों की चाल अकारत (व्यर्थ) ही गई +[40:26] एक रोज़ फ़िरौन ने अपने दरबारियों से कहा "छोड़ो मुझे मैं इस मूसा को क़त्ल किये देता हूँ, और पुकार देखे ये अपने रब को। मुझे अंदेशा है के ये तुम्हारा दीन बदल डालेगा, या मुल्क में फ़साद बरपा करेगा” +[40:27] मूसा ने कहा “मैंने तो हर उस मुतकब्बिर (घमंडी) के मुकाबले में जो यौम उल हिसाब पर ईमान नहीं रखा अपना रब और तुम्हारे रब की पनाह ले ली है” +[40:28] इस मौके पर आले फिरौन में से एक मोमिन शक्स, जो अपना ईमान छुपे हुए थे, बोल उठा: "क्या तुम एक शक्स को सिर्फ इस बिना पर क़त्ल करदोगे के वो कहता है मेरा रब अल्लाह है? हलांके वो तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास बैयिनत ले आया, अगर वो झूठा है तो उसका झूठ खुद उसी पर पलट पड़ेगा, लेकिन अगर वो सच्चा है तो जिन +[40:29] +[40:30] वो शक्स जो ईमान लाया था उसने कहा "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, मुझे ख़ौफ़ है के कहीं" तुमपर भी वो दिन ना आ जाए जो इस पहले बहुत से जत्थों (पार्टियों) पर आ चूका है +[40:31] जैसा दिन क़ौम ए नूह और आद और समूद, और उनके बाद वाली क़ौम पर आया था और ये हकीकत है के अल्लाह अपने बंदों पर ज़ुल्म का कोई इरादा नहीं। रख्ता +[40:32] ऐ क़ौम, मुझे डर है के कहीं तुम्पर फरियाद ओ फुगान का दिन (बुलाने का दिन) ना आ जाए +[40:33] जब तुम एक दूसरे को पुकारोगे और भाग जाओगे फिरोगे, मगर हमें वक्त अल्लाह से बचाने वाला कोई ना होगा। सच ये है के जिसे अल्लाह भटका दे उसे फिर कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं होता +[40:34] इसके पहले युसुफ तुम्हारे पास बैयिनत लेकर आये थे मगर तुम उनकी लाई हुई तालीम की तरफ से शक्क ही में पड़े रहे। फिर जब उनका इंतिक़ाल हो गया तो तुमने कहा अब उनके बाद अल्लाह कोई रसूल हरगिज़ ना भेजेगा।” इसी तरह अल्लाह उन सब लोगों को गुमराह करने में डाल देता है जो हद से गुज़रने वाले और शकी (शक) करते हैं +[40:35] और अल्लाह की आयत में झगड़े करते हैं बिना इसके के उनके पास कोई सनद या दलील आई हो।ये रवैय्या अल्लाह और ईमान लाने वालों के नाज़दिक सख़्त मबगुज़ (ना-पसंद) है। इसी तरह अल्लाह हर मुतकब्बिर ओ जब्बार के दिल पर थप्पड़ लगा देता है +[40:36] फ़िरौन ने कहा "ऐ हामान, मेरे लिए एक बुलंद इमारत बना ता-के मैं रास्ते तक पहुँच सकूँ +[40:37] आसमान के रास्ते तक, और मूसा के खुदा को झाँक कर देखूँ। मुझे तो ये मूसा झूठा ही मालूम होता है।” इस तरह फिरौन के लिए उसकी बढ़-अमली खुशनुमा बना दी गई और वो राह ए रास्ते से रुक गया। फ़िरौन की सारी चालबाज़ी (उसकी अपनी) तबाही के रास्ते ही में सिर्फ (इस्तेमाल/इस्तेमाल) हुई +[40:38] वो शक्स जो ईमान लाया था बोला “ ऐ मेरी क़ौम के लोगों, मेरी बात मानो, मैं तुम्हें सही रास्ता बताता हूँ +[40:39] ऐ क़ौम, ये दुनिया कि जिंदगी तो चांद रोजा है, हमेशा के लिए कयाम (स्थायी निवास) की जगह आखिरी ही है +[40:40] जो बुरा करेगा उसको उतना ही बदला मिलेगा जितनी उसने बुराई की होगी और जो नीक अमल करेगा, ख्वाह वो मर्द हो या औरत, बशारत ये के हो वो मोमिन, ऐसे सब लोग जन्नत में दाख़िल होंगे जहां उनको बे हिसाब रिज़क दिया जाएगा +[40:41] ऐ क़ौम, आख़िर ये क्या माजरा है के मई तो तुम लोगों को निजात (मोक्ष) की तरफ बुलाता हूं और तुमलोग मुझे आग की तरफ दावत देते हो +[40:42] तुम मुझे इस बात की दावत देते हो के मैं अल्लाह से कुफ्र करूं और उसके साथ उन हस्तियों को शरीक ठहरूं जिनहें मैं नहीं जानता हलांके मैं तुम्हें जबरदस्त मगफिरत करने वाले खुदा की तरफ बुला रहा हूं +[40:43] नहीं, हक ये है और इसके खिलाफ नहीं हो सकता है जिनकी तरफ तुम मुझे बुला रहे हो उनके लिए ना दुनिया में कोई दावत है ना आखिररात में, और हम सबको पलटना अल्लाह ही की तरफ है, और हद से गुजारने वाले आग में जाने वाले हैं +[40:44] आज जो कुछ मैं कह रहा हूं, अंकरीब वह वक्त आएगा जब तुम उसे याद करोगे और अपना मामला मैं अल्लाह के हवाले करता हूं, वह अपने बंदों का निगहबान है" +[40:45] आखिर ए कार उन लोगों ने जो बुरी से बुरी चलें हमें मोमिन के खिलाफ़ चलें, अल्लाह ने उन्हें सबसे बचाया, और फिरौन के साथी खुद बद्तरीन अज़ाब के फेर में आ गए +[40:46] दोज़ख की आग है जिसके सामने सुबह ओ शाम वो पेश किए जाते हैं, और जब कयामत की घड़ी आ जाएगी तो हुकुम होगा के आले फिरौन को छाया-तार अज़ाब में दाख़िल करो +[40:47] फिर ज़रा ख़याल करो उस वक़्त का जब ये लोग दोज़ख़ में एक दूसरे से झगड़ रहे होंगे। दुनिया में जो लोग कमज़ार थे वो बड़े बन-ने वालों से कहेंगे के “हम तुम्हारे तबे (अनुयायी) थे, अब क्या यहाँ तुम नार-ए-जहन्नुम (नरक की आग) की तकलीफ़ के कुछ इसी से हमको बचा लोगे +[40:48] वो बड़े बनने वाले जवाब देंगे” हम सब यहाँ एक हाल में हैं, और अल्लाह बंदों के दरमियान फैसला कर चूका है” +[40:49] फिर ये दोज़ख़ में पड़े हुए लोग जहन्नुम के अहल-कारून (नर्क के रखवाले) से कहेंगे “अपने रब से दुआ करो के हमारे अज़ाब में बस एक दिन की तफ़्फ़िफ़ करदे” +[40:50] वो पूछेंगे “क्या तुम्हारे पास तुम्हारे रसूल बैयिनत (स्पष्ट सबूत) लेकर नहीं आ रहे थे?” वो कहेंगे "हां" जहन्नुम के अहलकार बोलेंगे: "फिर तुम ही दुआ करो, और काफिरों की दुआ अकारत (व्यर्थ) ही जाने वाली है।" +[40:51] यकीन जानो के हम अपने रसूलन और ईमान लाने वालों की मदद करते हैं इस दुनिया की जिंदगी में भी लाज़िमन करते हैं, और हम रोज़ भी करेंगे जब गवाह खड़े होंगे +[40:52] जब ज़ालिमों को उनकी मज़ार (बहाने) कुछ भी फ़ायदा ना देगी और अनपर लानत पड़ेगी और बेहतरीन ठिकाना उनको में आएगा +[40:53] आख़िर देखलो के मूसा की हमने रहमुमयी की और बनी इसराइल को उस किताब का वारिस बना दिया +[40:54] जो अक़ल ओ दानिश रखने वालों के लिए हिदायत ओ हिदायत है +[40:55] पास (ऐ नबी), सब्र करो, अल्लाह का वादा बार-हक़्क़ है, अपने कसूर की माफ़ी चाहो और सुबह ओ शाम अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करते रहो +[40:56] हकीकत ये है के जो लोग किसी सनद या हुज्जत के बगैर जो उनके पास आए हो, अल्लाह की आयत में झगड़े कर रहे हैं उनके दिलों में किब्र (घमंड/गर्व) भरा हुआ है। मगर वो हमें बदनाम करने वाले नहीं हैं जिसका वो घमंड रखते हैं। बस अल्लाह की पनाह मांग लो, वो सब कुछ देखता और सुनता है +[40:57] आसमानो और ज़मीन का भुगतान करना इंसानों को भुगतान करना कि बा-निस्बत यकीनन ज्यादा बड़ा काम है, मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं +[40:58] और ये नहीं हो सकता के अंधा (अंधा) और बीना (देखने वाला) यकसन हो जाए, और इमानदार ओ सालेह और बदमाश बराबर ठहरें। मगर तुमलोग कम ही कुछ समझते हो +[40:59] यकीनन क़यामत की घड़ी आने वाली है। उसके आने में कोई शक्क नहीं, मगर अक्सर लोग नहीं मानते +[40:60] तुम्हारा रब कहता है “मुझे पुकारो, मैं तुम्हारी दुआएं कबूल करूंगा। जो लोग घमंड में आ कर मेरी इबादत से मुह मोड़ते हैं, जरूर वो ज़लील ओ ख़्वार हो कर जहन्नुम में दाख़िल होंगे” +[40:61] वाह अल्लाह हाय तो है जिसने तुम्हारे लिए रात बनाई ता-के तुम हमें सुकून हासिल करो, और दिन को रोशन किया। हकीकत ये है के अल्लाह लोगों पर बड़ा फजल फरमान वाला है मगर अक्सर लोग शुक्र अदा नहीं करते +[40:62] वही अल्लाह (जिसने तुम्हारे लिए ये कुछ किया है) तुम्हारा रब है। हर चीज का खालिक उसके सिवा कोई माबूद नहीं। फिर तुम किधर से बहकाए जा रहे हो +[40:63] इसी तरह वो सब लोग बहकाए जा रहे हैं जो अल्लाह की आयत का इंकार करते हैं +[40:64] वो अल्लाह ही है तो है जिसने तुम्हारे लिए जमीन को जाए क़रार (निवास स्थान) बनाया और ऊपर आसमान का गुम्बद (चंदवा) बना दिया, जिसने तुम्हारी सूरत बनाई और बड़ी ही उमड़ी बनाई। जिसने तुम्हें पाकीज़ा चीज़ का रिज़्क दिया। वही अल्लाह (जिसका ये काम है) तुम्हारा रब है, बे हिसाब बराकतों वाला है वो कायनात का रब +[40:65] वही जिंदा है उसके सिवा कोई माबूद नहीं।उसी को तुम पुकारो अपने दीन को उसके लिए खाली करके। सारी तारीफ अल्लाह रब्बुल आलमीन ही के लिए है +[40:66] (ऐ नबी), लोगों से कहदो के "मुझे तो उन हस्तियों की इबादत से मना कर दिया गया है जिनको तुम अल्लाह को छोड़ कर पुकारते हो। (मैं ये काम कैसे कर सकता हूं) जबके मेरे पास मेरे रब की तरफ से बैयिनत आ चुकी हैं। मुझे हुकुम दिया है के मुख्य रब उल आलमीन के आगे सर-ए-तस्लीम ख़म करदुन।” +[40:67] वही तो है जिसने तुमको मिट्टी से पेदा किया, फिर से, फिर खून के लोथड़े से, फिर वो तुम्हें बच्चे की शक्ल में नीलकलता है, फिर तुम्हें बढ़ाता है ताके तुम अपनी पूरी ताक़त को पाहुंच जाओ, फिर और बढ़ता है ता-के तुम बुढ़ापे को पकड़ो और तुम में से कोई पहले ही वापस बुला लिया जाता है। ये सब कुछ इसके लिए किया जाता है ता-के तुम अपने मुकर्रर वक्त तक पहुंच जाओ, और इस लिए के तुम हकीकत को समझो +[40:68] वही है जिंदगी देने वाला, और वही मौत देने वाला है। वो जिस बात का भी फैसला करता है, बस एक हुकुम देता है कि वो हो जाए और वो जो जाती है +[40:69] तुमने देखा उन लोगों को जो अल्लाह की आयत में झगड़ा करते हैं, कहां से वो फिराए जा रहे हैं +[40:70] ये लोग जो इस किताब को और उन सारी किताबों को झूठलते हैं जो हमने अपने रसूलों के साथ भेजी थी अंकारीब उन्हें मालूम हो जाएगा +[40:71] जब तौक (बेड़ियां) उनकी गर्दनों में होंगी, और जंजीरें, जिनसे पकड़ कर +[40:72] वो खुलते हुए पानी की तरफ खिंच जाएंगे और फिर दोज़ख कि आग में झोंक दिए जाएंगे +[40:73] फिर उनसे पूछा जाएगा के अब कहां है अल्लाह के सिवा वो दूसरे खुदा जिनको तुम शरीक करते थे +[40:74] वो जवाब देंगे "खोए गए वो हमसे, बलके हम इसे पहले किसी चीज को ना पुकारते थे"। इस तरह अल्लाह काफ़िरों का गुमराह होना मुतहक़्क़िक़ (गलती में ठोकर खाना) कर देगा +[40:75] उनसे कहा जाएगा "ये तुम्हारा अंजाम इस लिए हुआ है के तुम ज़मीन में ग़ैर हक़ पर मगन था और फिर हम पर इतराते थे +[40:76] अब जाओ, जहन्नुम के दरवाज़ों में दाख़िल हो जाओ हमेशा तुमको वहीं रहना है, बहुत ही बुरा ठिकाना है मुतकब्बिरन (गर्व) का" +[40:77] पस ऐ नबी, सब्र करो अल्लाह का वादा बरहक्क है। अब ख्वाह हम तुम्हारे सामने ही इनको उन बुरे नाताइज का कोई हिसा दिखा दें जिनसे हम इन्हें डरा रहे हैं, या (उससे पहले) तुम्हें दुनिया से उठा लें, पलट कर आना तो इन्हें हमारी ही तरफ है +[40:78] ऐ नबी, तुमसे पहले हम बहुत से रसूल भेज चुके हैं जिनसे बाज़ के हालात हमने तुमको बताए हैं और बाज़ के नहीं बताते. किसी रसूल की भी ये ताक़त न थी के अल्लाह के इज़ान के बिना खुद कोई निशानी ले आता। फिर जब अल्लाह का हुकुम आ गया तो हक के मुताबिक फैसला कर दिया गया और हमें वक्त गलत-कार लोग खासे (नुकसान) में पढ़ गए +[40:79] अल्लाह ही ने तुम्हारे लिए ये मवेशी जानवर बनाए हैं ता-के इन से किसी पर तुम सवार हो और किसी का गोश्त खाओ +[40:80] इनके अंदर तुम्हारे लिए और भी बहुत से मुनाफ़े हैं, वो काम भी आते हैं के तुम्हारे दिलों में जहां जाने की हाज़त हो वहां तुम उन्पर पाहुंच सको, उन्पार भी और कश्तियां पर भी तुम सवार हो जाते हो +[40:81] अल्लाह अपनी ये निशानियां तुम्हें दिखा रहा है, आखिर तुम उसकी किन किन निशानियों का इंकार करोगी +[40:82] फिर क्या ये जमीन में चले फिर नहीं हैं के इनको उन लोगों का अंजाम नज़र आता जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं? वो इनसे तदाद में ज्यादा था, इनसे बढ़कर ताकतवार था, और ज़मीन में इनसे ज्यादा शानदार असर छोड़ गए हैं। जो कुछ कमाई उनहों ने की थी आख़िर वो उनके किसी काम आई +[40:83] जब उनके रसूल उनके पास बैयिनत (स्पष्ट प्रमाण) लेकर आए तो वो उसी इल्म में मगन रहे जो उनके अपने पास था, और फिर उसी चीज़ के फिर में आ गए जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे +[40:84] जब उन्होन ने हमारा अज़ाब देख लिया तो पुकार उठे के हमने मान लिया अल्लाह वहीदाहु ला शरीक को और हम इनकार करते हैं उन सब मआबूदों का जिन्हें हम शरीक ठहरते थे +[40:85] मगर हमारा अजब-गजब देख लेने के बाद उनका ईमान उनके लिए कुछ भी नाफे (फायदमंद) ना हो सकता था, क्योंकि यही अल्लाह का मुकर्रर ज़ब्ता है जो हमेशा उसके बंदों में जारी रह रहा है, और हम वक्त काफिर लोग खासरे (नक्सन) में पढ़ गए + +Surah 41: Ha Mim (Ha Mim) +---------------------------------------- +[41:1] हा मीम +[41:2] ये खुदा ए रहमान ओ रहीम की तरफ से नाज़िल करदा चीज़ है +[41:3] एक ऐसी किताब जिसकी आयत खूब खोल कर बयान की गई हैं, अरबी ज़ुबान का कुरान, उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं +[41:4] बशारत (खुश-खबरी) देने वाला और दारा देने वाला मगर लोगों में से अक्सर ने इस रु-गर्दानी की और वो सुनकर नहीं देते +[41:5] कहते हैं "जिस चीज की तरफ तू हमें बुला रहा है उसके लिए हमारे दिलों पर गिलाफ (परदे) चढ़े हैं, हमारे कान बहरे (बहरे) हो गए हैं, और हमारे और तेरे दरमियान एक हिजाब हयाल हो गया है। तू अपना काम कर, हम अपना काम किये जायेंगे” +[41:6] ऐ नबी, इनसे कहो, मैं तो एक बशर हूं तुम जैसा। मुझे वही के ज़रिये से बताया जाता है कि तुम्हारा खुदा तो बस एक ही खुदा है, लिहाज़ा तुम सीधे उसी का रुख इख्तियार करो और उसे माफ़ी चाहो। तबाही है उन मुशरिकों के लिए +[41:7] जो जकात नहीं देते और आखिररात के मुनकिर हैं +[41:8] रहे वो लोग जिन्होन ने मान लिया और नेक अमाल किए, उनके लिए यकीनन ऐसा अजर है जिसका सिलसिला कभी टूटने वाला नहीं है +[41:9] ऐ नबी! इनसे कहो, क्या तुम हमें खुदा से कुफ्र करते हो और दूसरे को उसका हमसर (शारीरिक/बराबर) थेरेते हो जिसने जमीन को दो (दो) दिनों में बना दिया? वही तो सारे जहां वालों का रब है +[41:10] उसने (जमीन को वजूद में लाने के बाद) ऊपर से इसपर पहाड़ (पहाड़) जमा दिए और इसमें बरकतें रख दी और इसके अंदर सब मांगने वालों के लिए हर एक की तालाब ओ हाजात के मुताबिक ठीक अंदाज से ख़ुराक का सामान मुहइया करदिया। ये सब काम चार (चार) दिन में हो गए +[41:11] फिर वो आसमान की तरफ मुतवज्जे हुआ जो हमें वक्त महज़ धुआं (धुआं) था। उसने आसमां और ज़मीन से कहा "वजूद में आ जाओ, ख्वा तुम चाहो या ना चाहो।" दोनों ने कहा “हम आ गए फरमा बैरदारों की तरह” +[41:12] तब उसने दो दिन के अंदर सात (सात) आसमान बना दिए, और हर आसमान में उसका कानून वही (खुलासा) कर दिया। और आसमान ए दुनिया को हमने चिरागों से सजाया (सजाया) और इसे खूब महफूज करदिया। ये सब कुछ एक ज़बरदस्त हस्ती का मंसूबा (योजना) है +[41:13] अब अगर ये लोग मुँह मोड़ते हैं तो इनसे कहदो के "मैं तुमको उसी तरह के एक अचानक टूट पड़ने वाले अज़ाब से डरता हूँ जैसा आद और समूद पर नाज़िल हुआ था।" +[41:14] जब खुदा के रसूल उनके पास आए और पीछे, हर तरफ से आए और उन्हें समझा के अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी ना करो तो उन्हें ने कहा "हमारा रब चाहता तो फरिश्ते भेजता, लिहाजा हम उस बात को नहीं मानते जिसके लिए तुम भेजे गए हो।" +[41:15] आद का हाल ये था के वो ज़मीन में किसी हक़ के बिना बदले बन बैठे और कहने लगे: "कौन है हमसे ज़्यादा ज़ोरावर?" उनको ये ना सूझा के जिस खुदा ने उनको पेदा किया है वो उनसे ज़्यादा ज़ोरावर है? वो हमारी आयत का इंकार ही करते रहें +[41:16] आख़िर ए कार हमने चाँद मनहूस दिनों में सच तूफ़ानी हवा उन्पर भेज दी ता-के उनको दुनिया ही कि जिंदगी में ज़िल्लत ओ रुसवाई के अज़ाब का मज़ा चक दे। रुसवा-कुन है. वहां कोई उनकी मदद करने वाला ना होगा +[41:17] रहे समूद, तो उनके सामने हमने राह ए रास्ते पेश की मगर उनको ने रास्ता देखने के बजाय अंधा (अंधा) बना रहना पसंद किया। आख़िर उनके कार्टूनों की बदौलत ज़िल्लत का अज़ाब उन पर टूट पड़ा +[41:18] और हमने उन लोगों को बचा लिया जो ईमान लाए थे और गुमराही ओ बद-अमली से परहेज़ करते थे +[41:19] और ज़रा उस वक़्त का ख्याल करो जब अल्लाह के ये दुश्मन दोज़ख की तरफ जाने के लिए घर लाए जाएंगे उनके अगलों को पिचलों के आने तक रोक रक्खा जाएगा +[41:20] फिर जब सब वहां पहुंच जाएंगे तो उनके कान और उनकी आंखें और उनके जिस्म की खालें उन पर गवाही देंगी के वो दुनिया में क्या कुछ करते रहेंगे +[41:21] वो अपने जिस्म की ख़ालों से कहेंगे " तुमने हमारे ख़िलाफ क्यों गवाही दी? " वो जवाब देंगे " हमने उसे खुदा ने गोया (भाषण) दी है जिसने हर चीज़ को गोया (भाषण) कर दिया है। उसी ने तुमको पहली मरतबा पैदा किया था और अब उसकी तरफ तुम वापस लाए जा रहे हो +[41:22] तुम दुनिया में जराहिम (अपराध) करते वक्त छुपते थे तो तुम्हें ये ख्याल ना था कि कभी तुम्हारे अपने कान और तुम्हारी आंखें और तुम्हारे जिस्म की खालें तुमपर गवाही देंगी बालके तुमने ये समझ था के तुम्हारे बहुत से अमल की अल्लाह को भी खबर नहीं है +[41:23] तुम्हारा यही गुमान जो तुमने अपने रुब के साथ किया था, तुम्हें ले डूबा और इसकी बर्बादी तुम खासे (नुकसान) में पढ़ गए” +[41:24] क्या हालात में वो सब्र करें (या ना करें) आग हाय उनका ठिकाना होगी, और अगर रूजू का मौका चाहेगा तो कोई मौका उन्हें ना दिया जाएगा +[41:25] हमने उन पर ऐसे साथी मुसल्लत कर दिए थे जो उन्हें आगे और पीछे हर चीज खुशनुमा बनकर दिखाते थे। आख़िर ए कार उन पर भी वही फ़ैसला ए अज़ाब चस्पां हो कर रहा जो उन से पहले गुजरे हुए जिन्नो और इंसानों के गिरोहों पर चस्पां हो चूका था, यकीनन वो खासे (नुकसान) में रह जाने वाले थे +[41:26] ये मुनकिरीन ए हक़ कहते हैं "क्या कुरान को है" हरगिज ना सुनो और जब ये सुनाया जाए तो इस्मेन खलल डालो, शायद के इस तरह तुम गालिब आ जाओ” +[41:27] काफिरों को हम सख्त अजाब का मजा चखा कर रहेंगे और जो बद्तरीन हरकतें ये करते रहेंगे हैं उनका पूरा पूरा बदला इन्हें देंगे +[41:28] वो दोज़ख है जो अल्लाह के दुश्मनों को बदले में मिलेगी, उसी में हमेशा हमेशा के लिए इनका घर होगा। ये है सज़ा इस जुर्म की के वो हमारी आयत का इंकार करते रहे +[41:29] वहां ये काफ़िर कहेंगे के “ऐ हमारे रब, ज़रा हमें दिखा दे उन जिन्नो और इंसानों को जिन्हों ने हमें गुमराह किया था, हम उन्हें पांव (पैर) तले रूंध डालें ता-के वो ख़ूब ज़लील ओ ख़्वार होन।” +[41:30] जिन लोगों ने कहा के अल्लाह हमारा रब है और फिर वो इसपर साबित क़दम रहे, यकीनन उन पर फरिश्ते नाज़िल होते हैं, और उनसे कहते हैं के "ना डरो, ना गम करो, और खुश हो जाओ हमें जन्नत की बशारत (खुश खबरी) से जिसका तुमसे वादा किया गया है +[41:31] हम इस दुनिया की जिंदगी में भी तुम्हारे साथी हैं और आख़िरत में भी। वहां जो तुम चाहोगे तुम्हें मिलेगा और हर चीज जिसकी तुम तमन्ना करोगे वो तुम्हारी होगी +[41:32] ये है समां ए ज़ियाफत उस हस्ती की तरफ से जो गफूर और रहीम है” +[41:33] और हमारे शेखों की बात से अच्छी बात और किसकी होगी जिसने अल्लाह की तरफ बुलाया और नेक अमल किया और कहा के मैं मुसलमान हूं +[41:34] [और ऐ नबी], नेकी और बड़ी यकसन (बराबर) नहीं है, तुम बड़ी को हमने नेकी से दफा करो जो बेहतरीन हो, तुम देखोगे के तुम्हारे साथ जिसकी अदावत (दुश्मनी) पड़ी हुई थी वो जिगरी दोस्त बनाया है +[41:35] ये सिफत नसीब नहीं होती मगर उन लोगों को जो सब्र करते हैं, और ये मुकाम हासिल नहीं होता मगर उन लोगों को जो बड़े नसीब वाले हैं +[41:36] और अगर तुम शैतान की तरफ से कोई उक्साहत (प्रलोभन) महसूस करो तो अल्लाह की पनाह मांग लो, वो सब कुछ सुनता और जानता है +[41:37] अल्लाह की निशानियों में से हैं ये रात और दिन और सूरज और चाँद। सूरज को और चांद को सजदा ना करो बलके हमसे खुदा को सजदा करो जिसने उन्हें अदा किया है अगर फिल वक़ै तुम उसकी इबादत करने वाले हो +[41:38] लेकिन अगर ये लोग गुरुर में आ कर अपनी ही बात पर अड़े रहे तो परवाह नहीं, जो फरिश्ते तेरे रब के मुकर्रब हैं वो शब-ओ-रोज़ (रात और दिन) उसकी तस्बीह कर रहे हैं और कभी नहीं थकते +[41:39] और अल्लाह की निशानियों में से एक ये है के तुम देखते हो ज़मीन सूनी (बंजर) पड़ी हुई है, फिर जून-हाय के हमने उसपर पानी बरसाया, यक़ीनन वह फबक उठती है और फूल जाती है। वाला है। यकीनन वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है +[41:40] जो लोग हमारी आयतों को उलटे माने पहचानते हैं (हमारे संकेतों को विकृत करते हैं) वो हमसे कुछ छुपे हुए नहीं हैं। खुद ही सोचलो के आया वो शक्स बेहतर है जो आग में झोंका जाने वाला है या वो जो कयामत के रोज़ अमन की हालत में हाज़िर होगा? करते रहो जो तुम चाहो, तुम्हारी सारी हरकतों को अल्लाह देख रहा है +[41:41] ये वो लोग हैं जिनके सामने कलाम-ए-नसीहत आया तो उन्हें ने इसे मान-ने से इंकार कर दिया, मगर हकीकत ये है के ये एक ज़बरदस्त किताब है +[41:42] बातिल ना सामने से इसपर आ सकता है ना पीछे से, ये एक हकीम (सबसे बुद्धिमान) ओ हमीद (बेहद प्रशंसनीय) की नाज़िल करदा चीज़ है +[41:43] ऐ नबी, तुमसे जो कुछ कह रहा है उसमें कोई चीज़ भी ऐसी नहीं है जो तुमसे पहले गुजरे हुए रसूलों से ना कहीं जा चुकी हो। बेशक तुम्हारा रब बड़ा दरगुज़ार करने वाला है, और उसके साथ बड़ी दर्दनाक सजा देने वाला है +[41:44] अगर हम इसको अजामी (गैर अरबी) कुरान बाना कर भेजते हैं तो ये लोग कहते हैं "क्यों ना इसकी आयत खोल कर बयान की गई? क्या अजीब बात है के कलाम अजामी (गैर अरबी) है और मुखातिब अरबी"।इनसे कहो ये कुरान ईमान लाने वालों के लिए हिदायत और शिफा है, मगर जो लोग ईमान नहीं लाते उनके लिए ये कानों की दात (प्लग/बेहरापन) और आंखों की पट्टी (कवरिंग) है। उनका हाल तो ऐसा है जैसे उनको दरवाजे से पुकारा जा रहा हो +[41:45] इस्के पहले हमने मूसा को किताब दी थी और उसके मामले में bhi yahi ikhtilaf hua tha. अगर तेरे रुब ने पहले ही एक बात ताई न करदी होती तो इन इख्तिलाफ करने वालों के दरमियान फैसला चुका दिया जाता, और हकीकत ये है के ये लोग उसकी तरफ से सख्त इजतराब अंगेज (सख्त बेचैन करने वाले/बेचैन करने वाले) शक्क में पैदा हुए हैं +[41:46] जो कोई नया अमल करेगा अपने ही लिए अच्छा करेगा, जो बड़ी (बुराई) करेगा उसका वबाल उसी पर होगा, और तेरा रब अपने बंदों के हक में जालिम नहीं है +[41:47] हमें सा-अथ (घंटा/कयामत) का इल्म अल्लाह ही की तरफ राज़ होता है, वही उन सारे फालों (फल) को जानता है जो अपने शगूफों (आवरण/आवरण) में से निकलता है, उसे पता है कि कौनसी मां (महिला) हमीला (गर्भधारण) हुई है और किसने बच्चा पैदा करना (जन्म देना) है। फिर जिस रोज़ वो लोगों को पुकारेगा के कहाँ हैं मेरे वो शरीक? ये कहेंगे, "हम अर्ज़ कर चुके हैं, आज हममें से कोई इसकी गवाही देने वाला नहीं है।" +[41:48] हमें वक्त वो सारे मबूद इनसे गम हो जाएंगे जिन्हे ये इसे पहले पुकारते थे, और ये लोग समझ लेंगे इनके लिए अब कोई जाए पनाह नहीं है +[41:49] इंसान कभी भलाई की दुआ मांगता नहीं थकता, और जब कोई आफत इसपर आ जाती है तो मयूस ओ दिल शिकस्त हो जाता है +[41:50] मगर सिर्फ वक्त गुजर जाने के बाद हम इसे अपने रहमान का मजा चखते हैं, ये कहता है के "मैं इसका मुस्तहिक हूं, और मैं नहीं समझूंगा कि कयामत कभी आएगी, लेकिन अगर वकै मैं अपने रब की तरफ पलट गया तो वहां भी मजे करूंगा”। हालंके कुफ्र करने वालों को लाज़िमन हम बता कर रहेंगे के वो क्या करके आये हैं, और उन्हें हम बदाए गंदे अज़ाब का मजा दिखाएंगे +[41:51] इंसान को जब हम नियामत देते हैं तो वो मुहं फेरता है और अकड़ जाता है, और जब उसे कोई आफत छू जाती है तो लंबी चौड़ी दुआएं करने लगता है +[41:52] (ऐ नबी), इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अगर वाकाई ये कुरान खुदा ही की तरफ से हुआ और तुम इसका इनकार करते रहे तो हमारे शक्स से बढ़ कर भटका हुआ और कौन होगा जो इसकी मुखालफत में दूर तक निकल गया हो +[41:53] अंकरिब हम उनको अपनी निशानियां आफाक (क्षितिज) में भी दिखाएंगे और इनके अपने नफ्स में भी यहां तक-के अंदर ये बात खुल जाएगी के ये कुरान वाक़ई बरहक़ है, क्या ये बात काफ़ी नहीं है के तेरा रब हर चीज़ का शाहिद(गवाह) है +[41:54] आगाह रहो, ये लोग अपने रब की मुलाक़ात में शक्क रखते हैं। सुन रक्खो वो हर चीज़ पर मुहीत (पूरी तरह से सब कुछ शामिल है) है + +Surah 42: Ash-Shura (Counsel) +---------------------------------------- +[42:1] हा मीम +[42:2] ऐन देखा क़ाफ़ +[42:3] इसी तरह अल्लाह गालिब ओ हकीम (सबसे शक्तिशाली, सबसे बुद्धिमान) तुम्हारी तरफ और तुमसे पहले गुज़रे हुए (रसूलों) की तरफ वही करता है +[42:4] आसमान और ज़मीन में जो कुछ भी है उसी का है, वो बारात और अज़ीम है +[42:5] करीब है के आसमान ऊपर से फट पड़े फरिश्ते अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह कर रहे हैं, और ज़मीन वालों के हक़ में दरगुज़र की डार्कहस्टीन किये जाते हैं। आगा रहो, हकीकत में अल्लाह गफूर ओ रहीम ही है +[42:6] जिन लोगों ने उनको छोड़ कर अपने दूसरे सरपरस्त बना रक्खे हैं, अल्लाह ही उन्पार निगरानी है, तुम उनके हवाला दार नहीं हो +[42:7] हां, इसी तरह ऐ नबी, ये कुरान ए अरबी हमने तुम्हारी तरफ वही (खुलासा) किया है ता-के तुम बस्तियां के मरकज (शहर ए मक्का) और उसके गिर्द ओ पेश रहने वालों को खबरदार बनाओ, और जमा होने के दिन से डर दो जिसके आने में कोई शक्क नहीं। एक गिररूह को जन्नत में जाना है और दूसरा गिरूह को दोज़ख में +[42:8] अगर अल्लाह चाहता तो सबको एक ही उम्मत बना देता, मगर वो जिसे चाहता है अपनी रहमत में दखल करता है। और जालिमों का ना कोई वाली है ना मददगार +[42:9] क्या ये (ऐसी नादान हैं के) इन्हों ने उसे छोड़ कर दूसरे वाली (रक्षक) बना रखा है? वली (रक्षक) अल्लाह ही है, वही मुर्दों (मृत) को जिंदा करता है, और वह हर चीज पर कादिर है +[42:10] तुम्हारे दरमियान जिस मामले में भी इख्तिलाफ हो, उसका फैसला करना अल्लाह का काम है। वही अल्लाह मेरा रब है, उसी पर मैंने भरोसा किया, और उसकी तरफ मैं रूजू करता हूं +[42:11] आसमानों और जमीन का बनाने वाला, जिसने तुम्हारी अपनी जिंदगी से तुम्हारे लिए जोड़ी बनाई, और इसी तरह के जानवरों में भी (उन्ही के हम जिन्स) जोडे (जोड़े) बनाएं, और इस तारीख से वो तुम्हारी नस्लें (पीढ़ियां) फैलती हैं। क़यानत की कोई चीज़ उसके मुशाबेह नहीं, वो सब कुछ सुनने और देखने वाला है +[42:12] आसमान और ज़मीन के खज़ानो की कुंजी उसके पास हैं। जिसे चाहता है खुला रिज़्क देता है और जिसे चाहता है नपा तुला देता है। उसे हर चीज़ का इल्म है +[42:13] उसने तुम्हारे लिए दीन का वही तरीक़ा मुकर्रर किया है जिसका हुकुम उसने नूह को दिया था, और जैसे (ऐ मुहम्मद) अब तुम्हारी तरफ़ हमने वही के ज़रिये से भेजा है, और जिसकी हिदायत हम इब्राहिम और मूसा और ईसा को दे चुके हैं, के साथ ले लिया गया है क़याम करो इस दीन को और हममें मुतफ़र्रिक न हो जाओ। यही बात मुशरिकिन को सख्त नगावार हुई है जिसकी तरफ ऐ मुहम्मद तुम इन्हें दावत दे रहे हो। अल्लाह जिसे चाहता है अपना कर लेता है, और वो अपनी तरफ आने का रास्ता उसी को दिखाता है जो उसकी तरफ रूजू करे +[42:14] लोगों में जो तफ़रका (इख्तिलाफ़) रुनुमा हुआ वो इसके बाद हुआ के उनके पास इल्म आ चूका था और इस बिना पर हुआ के वो आपस में एक दूसरे पर ज़्यादा करना चाहते थे। अगर तेरा रब पहले ही ये ना फरमा चूका होता के एक वक्त ए मुकर्रर तक फैसला मुलतवी रक्खा जाएगा तो इनका काजिया चूका दिया गया होता। और हकीकत ये है के एग्लोन के बाद जो लोग किताब के वारिस बन गए वो उसकी तरफ से बदले इस्तराब अंगेज शक्क में पड़े हुए हैं +[42:15] जिनके ये हालत पैदा हो चुकी है इसलिए ऐ मुहम्मद (स.अ.स.) अब तुम उसी दीन की तरफ दावत दो, और जिस तरह तुम्हीं हुकुम दिया गया है उस पर मज़बूती के साथ कायम हो जाओ, और लोगों की ख्वाहिश की इतिबा ना करो। और इनसे केहदो के: "अल्लाह ने जो किताब भी नाज़िल की है मैं उसपर ईमान लाया, मुझे हुकुम दिया है के मैं तुम्हारे दरमियान इन्साफ करूं। अल्लाह ही हमारा रब भी है और तुम्हारा रब भी। हमारे अमल हमारे लिए हैं और तुम्हारे अमल तुम्हारे लिए। हमारे और तुम्हारे दरमियान कोई झगड़ा नहीं। अल्लाह एक रोज़ हम सब को जमा करेंगे और उसकी तरफ सब को जाना है” +[42:16] अल्लाह की दावत पर लब्बैक कहे जाने के बाद जो लोग (लब्बैक कहने वालों से) अल्लाह के दीन के मुआमले में झगड़े करते हैं, उनकी हुज्जत बाजी उनके रब के नाज़दिक बात है, और उन पर उसका ग़ज़ब है और उनके लिए सख्त अज़ाब है +[42:17] वो अल्लाह हाय है जिसने हक़ के साथ ये किताब और मिज़ान नाज़िल की है और तुम्हें क्या खबर, शायद के फैसले की घड़ी करीब ही आ लगी हो +[42:18] जो लोग उसके आने पर ईमान नहीं रखते वो तो हमारे लिए जल्दी मचाते हैं, मगर जो उसपर ईमान रखते हैं वो उसे डरते हैं और जानते हैं के यकीनन वो आने वाली है। खूब सुनलो, जो लोग हमें घड़ी के आने में शक्क डालने वाली बातें (तर्क) करते हैं वो गुमराही में बहुत दूर निकल गए हैं +[42:19] अल्लाह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है जिसे जो कुछ चाहता है देता है। वो बड़ी कुव्वत वाला और ज़बरदस्त है +[42:20] जो कोई आख़िरत की खेती चाहता है उसकी खेती को हम बढ़ाते हैं, और जो दुनिया की खेती चाहता है उसे दुनिया ही में से अलग कर देती है मगर आख़िरत में उसका कोई हिसा नहीं है +[42:21] क्या ये लोग कुछ ऐसे शारिक ए खुदा रखते हैं जिन्हों ने इनके लिए दीन की नोइयत रखने वाला एक ऐसा तरीका मुकर्रर कर दिया है जिसका अल्लाह ने इज़ान नहीं दिया? अगर फैसला की बात पहले ताई ना हो गई तो इनका क़ज़िया चुका दिया गया हो गया। यकीनन इन जालिमों के लिए दर्दनक अज़ाब है +[42:22] तुम देखोगे के ये जालिम हमें वक्त अपने किए के अंजाम से डर रहेंगे और वो अंदर आ कर रहेंगे। बा-खिलाफ इसके जो लोग ईमान ले आए हैं और जिन्होन ने नेक अमल किए हैं वो जन्नत के गुलिस्तानों में होंगे, जो कुछ भी वो चाहेंगे अपने रब के हां पाएंगे, यही बड़ा फजल है +[42:23] ये है वो चीज जिसकी खुश खबरी अल्लाह अपने उन बंदों को देता है जिन्होनें ने मान लिया और नीक अमल किये। ऐ नबी, लोगों से कहदो के मैं इस काम पर तुमसे किसी अजर का तालिब नहीं हूं। अलबत्ता क़राबत (रिश्तेदारों) की मुहब्बत ज़रूर चाहता हूँ। जो कोई भलाई कमाएगा हम उसके लिए हमें भलाई में खूबी का इज़ाफ़ा कर देंगे। बेशक अल्लाह बड़ा दरगुज़ार करने वाला और क़दरदान है +[42:24] क्या ये लोग कहते हैं कि इस शक्स ने अल्लाह पर झूठा बोहतन गड़बड़ लिया है? अगर अल्लाह चाहे तो तुम्हारे दिल पर मोहर लगा दे। वो बातिल को मिटा देता है और हक को अपने फरमान से हक कर दिखाता है। वो सीने के छुपे हुए राज जानता है +[42:25] वही है जो अपने बंदों से तौबा कबूल करता है और बुराइयों से दरगुजर करता है, हालंके तुम लोगों के सब अफाल (जो कुछ कर रहे हो) का उसका इल्म है +[42:26] वो ईमान लाने वालों और नेक अमल करने वालों की दुआ क़बूल करता है और अपने फ़ज़ल से उनको और ज़्यादा देता है। रहे इंकार करने वाले, तो उनके लिए दर्दनक सजा है +[42:27] अगर अल्लाह अपने सब बंदों (नौकरों) को खुला रिज्क दे देता तो वो ज़मीन में सरकशी का तूफ़ान बरपा कर देता, मगर वो एक हिसाब से जितना चाहता है नाज़िल करता है, यकीनन वो अपना बंदों से बा खबर है और उन पर निगाह रखता है +[42:28] वही है जो लोगों के मयौस हो जाने के बाद में (बारिश) बरसात है और अपनी रहमत फैला देता है, और वही काबिल ए तारीफ वाली है +[42:29] उसकी निशानियों में से है ये ज़मीन और आसमान की पैदाइश, और ये जानदार मखलूकत जो उसने दोनों जगह फैला रखा है। वो जब चाहे इन्हें इकठ्ठा कर सकता है +[42:30] तुम्पर जो मुसीबत भी आई है, तुम्हारे अपने हाथों की कमाई से आई है, और बहुत से कसूरों से वो वैसे ही इकठ्ठा कर जाता है +[42:31] तुम ज़मीन में अपने खुदा को आजिज (निराश) करदेने वाले नहीं हो, और अल्लाह के मुकाबले में तुम कोई हमी ओ नासिर (रक्षक या सहायक) नहीं रखते +[42:32] उसके निशानियों में से हैं ये जहाज (जहाज) जो समंदर में पहाड़ों की तरह नजर आते हैं +[42:33] अल्लाह जब चाहे हवा को साकिन (गतिहीन) करदे और ये समंदर की पीठ (पीछे) पर खड़े रह जाएं। इसमें बड़ी निशानियां हैं हर उस शक्स के लिए जो कमाल दर्ज सब्र ओ शुक्र करने वाला हो +[42:34] या (अनपार सवार होने वालों के) बहुत से गुनाहों से दर गुजर करते हुए उनके चांद ही कार्टूनों की दुनिया में उन्हें डुबो (डूब) दे +[42:35] और हम वक्त हमारी आयत में झगड़े करने वालों को पता चल जाए के उनके लिए कोई जाए पनाह नहीं है +[42:36] जो कुछ भी तुम लोगों को दिया गया है वो मेहज़ दुनिया की चंद रोजा जिंदगी का सर ओ सामान है, और जो कुछ अल्लाह के हान है वो बेहतर भी है और भुगतान भी। वो उन लोगों के लिए है जो ईमान लाए हैं और अपने रुब पर भरोसा करते हैं +[42:37] +[42:38] +[42:39] और जब अनपर ज्यादा की जाती है तो उसका मुकाबला करते हैं +[42:40] बुरे का बदला वैसी ही बुरा है, फिर जो कोई माफ़ करे और इस्लाह करे उसका अजर अल्लाह के ज़िम्मे है। अल्लाह ज़ालिमों को पसंद नहीं करता +[42:41] और जो लोग ज़ुल्म होने के बाद बदला लें उनको मलामत नहीं कि जा सकती +[42:42] मलामत के मुस्तहिक तो वो हैं जो दूसरों पर ज़ुल्म करते हैं और ज़मीन में ना हक ज़्यादा करते हैं। ऐसे लोगों के लिए दर्दनक अज़ाब है +[42:43] अलबत्ता जो शक्स सब्र से काम ले और दरगुज़ार करे, तो ये बदी उल आज़मी के कामों में से है +[42:44] जिस को अल्लाह ही गुमराही में फेंक दे हमें का कोई संभालने वाला अल्लाह के बाद नहीं है। तुम देखो गी ये जालिम जब अज़ाब देखेंगे तो कहेंगे अब पलटने की भी कोई सबील है +[42:45] और तुम देखोगे के ये जहन्नुम के सामने जब ले जायेंगे तो ज़िल्लत के मारे झुके जा रहे होंगे और उसको नज़र बचा कर कान लगाओगे (गुप्त नज़र) से देखेंगे। हमें वक्त वो लोग जो ईमान लाए थे कहेंगे के वाकाई असल जियान कर ([सच्चे] हारे हुए) वही हैं जिन्हों ने आज कयामत के दिन अपना आपको और अपने मुतालिकिन को खसरे में डाल दिया। ख़बरदार रहो, ज़ालिम लोग मुस्तक़िल अज़ाब में होंगे +[42:46] और उनके कोई हमी ओ सरपरस्त न होंगे जो अल्लाह के मुक़ाबले में उनकी मदद को आएंगे। जिसे अल्लाह गुमराही में फेंक दे उसे बचाने के लिए कोई सबील नहीं +[42:47] मान लो अपने रब की बात कबूल इसके के वो दिन आए जिसको तलने की कोई सूरत अल्लाह की तरफ से नहीं है। हमारे दिन तुम्हारे लिए कोई जाए पनाह ना होगी और ना कोई तुम्हारे हाल को बदलने की कोशिश करने वाला होगा +[42:48] अब अगर ये लोग मुंह मोड़ते हैं तो ऐ नबी हमें तुमको अनपर निगाहें बना कर तो नहीं भेजा जाता है। तुमपर तो सिर्फ बात पाहुंचा देने की जिम्मेदारी है। इंसान का हाल ये है कि जब हम उसे अपनी रहमत का मजा चखाते हैं तो उसपर फूल जाता है। और अगर उसके अपने हाथों का किया धरा किसी मुसीबत की शक्ल में उसपर उलट पड़ता है तो सच में शुक्र बन जाता है +[42:49] अल्लाह ज़मीन और आसमान की बादशाही का मालिक है। जो कुछ चाहता है भुगतान करता है। जिसे चाहता है लड़कियां, जैसा चाहता है लड़के देता है +[42:50] जिसे चाहता है लड़के और लड़कियां मिला-जुला कर देता है और जिसे चाहता है बांझ (बंजर) कर देता है। वो सब कुछ जानता है और हर चीज़ पर कादिर है +[42:51] किसी बशर (इंसान) का ये मुकाम नहीं है कि अल्लाह हमसे रू-बरू बात करे, उसकी बात या तो वही (इशारे/रहस्योद्घाटन) के तौर पर होती है, या दिन के पीछे से, या फिर वो कोई पैगम्बर (फ़रिश्ता) भेजता है और वो उसके हुकुम से जो कुछ वो चाहता है, वही करता है। वो बारतार और हकीम (बुद्धिमान) है +[42:52] और इसी तरह (ऐ मुहम्मद स.स.) हमने अपने हुकुम से एक रूह तुम्हारी तरफ वही की है। तुम्हें कुछ पता नहीं था कि किताब क्या होती है और ईमान क्या होता है, मगर हमें रूह को हमने एक रोशनी बना दिया जिसे हम राह दिखाते हैं अपने बंदों में से जिसे चाहते हैं। यकीनन तुम सीधे रास्ते की तरफ रहनुमाई कर रहे हो +[42:53] हमें खुदा के रास्ते की तरफ जो जमीन और आसमान की हर चीज का मालिक है। ख़बरदार रहो, सारे मुआमलात अल्लाह ही की तरफ रूजू करते हैं + +Surah 43: Az-Zukhruf (Gold) +---------------------------------------- +[43:1] हा मीम +[43:2] कसम है इस वाज़ेह किताब की +[43:3] के हमने इसे अरबी ज़ुबान का कुरान बनाया है ता-के तुमलोग इसे समझो +[43:4] और दर हकीकत ये उम्मुल किताब में सब्त (प्रतिलिपिबद्ध) है, हमारे हां बड़ी बुलंद मौत और हिकमत से लबरेज किताब +[43:5] अब क्या हम तुमसे बेज़ार होकर ये दर्स-ए-नसीहत तुम्हारे यहां भेजना छोड़ दें सिर्फ इसलिए तुम हद से गुजारे हुए लोग हो +[43:6] पहले गुज़री हुई क़ौमों में भी बारहा (बार-बार) हमने नबी भेजे हैं +[43:7] कभी ऐसा नहीं हुआ के कोई नबी उनके हां (यहां) आया हो और उन्हें ने उसका मज़ाक न उदय हो +[43:8] फिर जो लोग इनसे बदरजा ज़्यादा ताक़तवार थे उन्हें हमने हलक करदिया. पिछली क़ौमों की मिसालें गुज़र चुकी हैं +[43:9] अगर तुम लोगों से पूछो के ज़मीन और आसमान को किसने पाया है तो ये खुद कहेंगे के उसमें उसकी ज़बरदस्त इल्मी हस्ती ने चुकाया है +[43:10] वही ना जिसने तुम्हारे लिए इस ज़मीन को गहवारा किया है (पालना) बनाया और इसमें तुम्हारी खातिर रास्ते बना दिए ता-के तुम अपनी मंजिल ए मकसूद की राह पा सको +[43:11] जिसने एक खास मिकदर में आसमान से पानी उतारा और उसकी ज़रिये से मुर्दा (मृत) ज़मीन को जिला उठाया। इसी तरह एक रोज तुम जमीन से बारामद किए जाओगे +[43:12] वही जिसने ये तमाम जोड़े (जोड़े) बनाए, और जिसने तुम्हारे लिए कश्तियां (जहाज) और जानवरों को सवारी बनाई ता-के तुम उनकी पुश (पीठ) पर चढ़ो +[43:13] और जब उन्पर बैठो (बैठो) तो अपने रब का एहसान याद करो और कहो के "पाक है वो जिसने हमारे लिए चीज़ों को मुस्कुराकर (बस में) करदिया वरना हम उन्हें काबू में लाने की ताक़त न रखते थे +[43:14] और एक रोज़ हमें अपने रब की तरफ पलटना है” +[43:15] (ये सब कुछ जानते और मानते हैं भी) लोगों ने उसके बंदों (नौकरों) में से बाज़ को उसका जुज (हिस्सा) बना डाला, हकीकत ये है के इंसान खुला एहसान फरामोश है +[43:16] क्या अल्लाह ने अपनी मखलूक में से अपने लिए बेटियां इंतिखाब (चुने हुए) की और तुम्हारे बेटों (बेटों) से नवाजा +[43:17] और हाल ये है कि जिस औलाद को ये लोग खुदा ए रहमान की तरफ मंसूब करते हैं उसकी विलादत का संदेश (खबर/समाचार/खबर) जब खुद में से किसी को दिया जाता है तो उसके मुहं पर सियाही छा जाती है और वो ग़म से भर जाता है +[43:18] क्या अल्लाह के हिसे में वो औलाद आई जो ज़ेवरों (गहने) में पाली जाती है और बेहस ओ हुज्जत में अपना मुद्दा पूरी तरह वाज़े भी नहीं कर सकती +[43:19] उन्होन ने फ़रिश्तों को, जो खुदा ए रहमान के खास बंदे हैं, औरतें करार दे लिया। क्या उनके जिस्म की सच्चाई इन्होनें देखी है? इनकी गवाही लिख ली जाएगी और इन्हें इसके जवाब-दही करनी होगी +[43:20] ये कहते हैं "अगर खुदा-ए-रहमान चाहता (के हम उनकी इबादत ना करें) तो हम कभी उनको ना पूजते" ये मामले की हकीकत को कतई नहीं जानते, महज़ तीर तुक्के लड़ते हैं (केवल अनुमान लगा रहे हैं/अनुमान लगा रहे हैं) +[43:21] क्या हमने इसे पहले कोई किताब इनको दी थी जिसकी सनद [अपने इस मलाईका (फरिश्ते) परस्ती के लिए] ये अपने पास रखते हैं +[43:22] नहीं, बल्के ये कहते हैं के हमने अपने बाप दादा को एक तारीख पर पाया है और हम उनको नक्शे कदम पर चल रहे हैं +[43:23] इसी तरह तुमसे पहले जिस बस्ती में भी हमने कोई नज़ीर (दाराने वाला) भेजा, उसके खाते-पीते लोगों ने यहीं कहा के हमने अपने बाप दादा को एक तारीख़ पर पाया है और हम उन्हें नक्शे क़दम की जोड़ी कर रहे हैं +[43:24] हर नबी ने उनसे पूछा, क्या तुम उसी डगर पर कहले जाओगे ख्वाह में उस रास्ते से ज्यादा सही रास्ता तुम्हें बताऊं जिसपर तुमने अपने बाप दादा को पाया? उनहों ने सारे रसूलों को यही जवाब दिया के जिस दीन की तरफ बुलाए के लिए तुम भेज गए हो हम उसके काफिर हैं +[43:25] आखिर ए कार हमने उनकी खबर ले डाली और देख लो के झूठलेन वालों का क्या अंजाम हुआ +[43:26] याद करो वो वक्त जब इब्राहिम ने अपने बाप और अपनी क़ौम से कहा था के "तुम जिनकी बंदगी करते हो मेरा उनसे कोई ताक़ नहीं +[43:27] मेरा तल्लुक सिर्फ उसे है जिसने मुझे भुगतान किया, वही मेरी रहनुमाई करेगी" +[43:28] और इब्राहिम यहीं कलिमा अपने पीछे अपनी औलाद में छोड़ गया ता-के वो इसकी तरफ रूजू करें +[43:29] (इस के बावज़ूद जब ये लोग दूसरे की बंदगी करने लगे तो मैंने इनको मिटा नहीं दिया) बलके मैं इन्हें और इनके बाप को माता-ए-हयात देता रहा यहां तक ​​के इनके पास हक़, और खोल खोल कर बयान करने वाला रसूल आ गया +[43:30] मगर जब वो हक़ इनके पास आया तो इन्हों ने कह दिया ये तो जादू है और हम इसको मन्ने से इनकार करते हैं +[43:31] कहते हैं, ये कुरान दोनों शहरों के बदाए आदमियों में से किसी पर क्यों ना नाज़िल किया गया +[43:32] क्या तेरे रब की रहमत हाँ log takseem karte hain? दुनिया की जिंदगी में इनकी गुजर बसर के ज़रिये तो हमने इनके दरमियान तकसीम किये हैं, और इसमें कुछ लोगों को कुछ दूसरे लोगों पर हमने बदरजा-हा फौकियात दी है ता-के ये एक दूसरे से खिदमत लें और तेरे रब की रहमत हमें दौलत से ज्यादा कीमती है जो (इनके) रहीस) समेट रहे हैं +[43:33] अगर ये अंदेशा ना होता के सारे लोग एक ही तारीख के हो जाएंगे तो हम खुदा ए रहमान से कुफ्र करने वालों के घरों की छतें (छतरियां), और उनकी सीढ़ियां (सीढ़ियां) जिनसे वो अपने बाला खानों पर चढ़ते हैं +[43:34] और उनके दरवाजे, और उनके तख्त जिनपर वो तकिए (तकिये) लगा कर बैठते हैं +[43:35] सब चांदी और सोने (सोना) के बनवा देते हैं। ये तो महज़ हयात ए दुनिया की मताह हैं। और आखिरी तेरे रब के हां सिर्फ मुत्तक़ीन के लिए हैं +[43:36] जो शक्स रहमान के जिक्र से तगाफुल (गफलत) बरात-ता है, हम इसपर एक शैतान मुसल्लत कर देते हैं और वो उसका रफीक बन जाता है +[43:37] ये शयातीन ऐसे लोगों को राह ए रास्ते पर आने से रोकते हैं, और वो अपनी जगह ये समझते हैं के हम ठीक जा रहे हैं +[43:38] आख़िर ए कार जब ये शक्स हमारे हाँ पहुँचेगा तो अपने शैतान से कहेगा "काश मेरे और तेरे दरमियान मशरिक़ ओ मगरिब का बोध (दूरी/दूरी) होता, तू तो बढ़ता साथी निकला" +[43:39] लोगों में हमारा वक़्त से कहा जाएगा के जब तुम ज़ुल्म कर चुके तो आज ये बात तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं है के तुम और तुम्हारी शयातें अज़ाब में मुश्तारिक हैं +[43:40] अब क्या ऐ नबी तुम बहरों (बहरे) को सुनाओगे? हां अंधों (अंधा) और सारे गुमराही में पड़े हुए लोगों को राह दिखोगे +[43:41] अब तो हमें इनको सज़ा देनी है ख्वाह तुम्हें दुनिया से उठा लें +[43:42] हां तुमको आंखों से इनका वो अंजाम दिखा दें जिसका हमने इसे वादा किया है। हमें इनपर पूरी क़ुदरत हासिल है +[43:43] तुम बहार-हाल उस किताब को मज़बूती से थामे रहो जो वही के ज़रिये से तुम्हारे पास भेज दी गई है, यकीनन तुम सीधे रास्ते पर हो +[43:44] हकीकत ये है के ये किताब तुम्हारे लिए और तुम्हारी क़ौम के लिए एक बहुत बड़ा शराफ है और अंकारिब तुम लोगों को इसका जवाब-दही करनी होगी +[43:45] तुमसे पहले हमने जितने रसूल भेजे थे उन सब से पूछ देखो, क्या हमने खुदा ए रहमान के सिवा कुछ दूसरे माबूद भी मुकर्रर किए थाय के उनकी बंदगी की जाए +[43:46] हमने मूसा को अपनी निशानियों के साथ फिरौन और उसके अयान-ए-सल्तनत के पास भेजा, और उसने जा कर कहा के मैं रब उल आलमीन का रसूल हूं +[43:47] फिर जब उसने हमारी निशानियां उनके सामने पेश की तो वो थट्टे (हंसी) मारने लगे +[43:48] हम एक पर एक ऐसी निशानी उनको दिखाते चले गए जो पहली से बढ़ चढ़ कर थी, और हमने उनको अज़ाब में धर लिया ता-के वो अपनी रवीश से बाज़ आएं +[43:49] हर अज़ाब के मौके पर वो कहते, ऐ साहिर (जादूगर/जादूगर), अपने रब की तरफ से जो मनसब तुझे हासिल है उसकी बिना पर हमारे लिए उसकी दुआ कर, हम जरूर राह-ए-रास्त पर आ जाएंगे +[43:50] मगर जून ही के हम उन्पर से अजाब हटा देते हैं वो अपनी बात से फिर जाते थे +[43:51] एक रोज फिरौन ने अपनी कौम के दरमियान पुकार कर कह, "लोगन, क्या मिसर (मिस्र) की बादशाही मेरी नहीं है, और ये नहरें (धाराएं) मेरे नीचे नहीं दिख रही हैं? क्या तुम लोगों को नज़र नहीं आती +[43:52] मैं बेहतर हूं या ये शक्स जो ज़लील ओ हक़ीर है और अपनी बात भी खोल कर बयान नहीं कर सकता +[43:53] क्यों न इसपर सोने (सोना) के कंगन (चूड़ियाँ) उतारे गए? या फरिश्तों का एक दस्ता इसकी अर्दली में ना आया?” +[43:54] उसने अपनी कौम को हल्का समझा और उनहों ने उसकी इताअत की, दर हकीकत वो था हाय फासिक लोग +[43:55] आखिर ए कार जब उनहों ने हमें गजबनाक करदिया तो हमने उनसे इंतकाम लिया और उनको इकत्था गर्क (डूबना) किया +[43:56] और बाद वालों के लिए पेश-रो और नामोना इब्रत बनाकर रख दिया +[43:57] और जॉनी के इब्ने मरियम (यीशु) की मिसाल दी गई, तुम्हारी क़ौम के लोगों ने उसपर गुल मचा दिया (चिल्ला उठे/ शोर मचाया) +[43:58] और लगे कहने के हमारे माबूद अच्छे hain ya woh? ये मिसाल वो तुम्हारे सामने महज़ कच-बेहसी (तर्क/विवाद) के लिए लाए हैं, हकीकत ये है के ये हैं झगड़लू लोग +[43:59] इब्ने मरियम (जीसस) इसके सिवा कुछ ना था एक बंदा था जिसपर हमने इनाम किया और बानी इसराइल के लिए अपनी क़ुदरत का एक नामुना बना दिया +[43:60] हम चाहें तो तुमसे फ़रिश्ते अदा कर दें जो ज़मीन में तुम्हारे जनाशीं (उत्तराधिकारी) हों +[43:61] और वो दर-असल कयामत की एक निशानी है, पास तुम हमें शक्क ना करो मेरी बात मान लो, यही सीधा रास्ता है +[43:62] ऐसा ना हो शैतान तुमको उसे रोक दे के वो तुम्हारा खुला दुश्मन है +[43:63] और जब ईसा (यीशु) सारे निशानियां लिए हुए आये थे तो उसने कहा था के "मैं तुम लोगों के पास हिकमत लेकर आया हूं, और इसलिए आया हूं के तुमपर बाज़ उन बातों की हकीकत खोल दूं जिन में तुम इख्तिलाफ कर रहे हो, लिहाजा तुम अल्लाह से डरो और मेरी इताअत करो +[43:64] हकीकत ये है के अल्लाह ही मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी।उसी की तुम इबादत करो, यही सीधा रास्ता है” +[43:65] मगर (उसकी इस साफ तालीम के बावजूद) गिरोहोन (गुटों) ने आपस में इख्तिलाफ किया, पास तबही है उन लोगों के लिए जिन्होन ने ज़ुल्म किया एक दर्दनाक दिन के अज़ाब से +[43:66] क्या ये लोग अब बस इसी चीज़ के मुंतज़िर हैं के अचानक अंदर क़ियामत आ जाए और इन्हें ख़बर भी ना हो +[43:67] वो दिन जब आएगा तो मुत्तक़िन को छोड़ कर बाकी सब दोस्त एक दूसरे के दुश्मन हो जाएंगे +[43:68] हम रोज़ उन लोगों से जो हमारी आयत पर ईमान लाए थे और मुती-ए-फ़रमान बनकर रहेंगे +[43:69] कह जाएगा के "ऐ मेरे बंदों (नौकरों), आज तुम्हारे लिए कोई खौफ नहीं और ना तुम्हें कोई गम लाहिक होगा +[43:70] दाखिल हो जाओ जन्नत में तुम और तुम्हारी बीवीयां, तुम्हें खुश कर दिया जाएगा" +[43:71] उनके आगे जल्द ही (सुनहरा) के थल (प्लेटर्स) और सागर गर्दिश कराएंगे और हर मन भाती और निगाहों को लज्जत देने वाली चीज वहां मौजूद होगी। उनसे कहा जाएगा, "तुम अब यहां हमेशा रहोगे +[43:72] तुम इस जन्नत के वारिस अपने उन अमल की वजह से हुए हो जो तुम दुनिया में करते रहे +[43:73] तुम्हारे लिए यहां बकसरत फ़वाके (प्रचुर मात्रा में फल) मौजूद हैं जिनमें तुम खाओगे" +[43:74] रहे मुजरिम, तो वो हमेशा जहन्नुम के अज़ाब में मुबतला रहेंगे +[43:75] कभी उनके अज़ाब में कमी न होगी, और वो हममें मयुस पैदा होंगे +[43:76] उन्पर हमने ज़ुल्म नहीं किया बलके वो खुद ही अपने ऊपर ज़ुल्म करते रहेंगे +[43:77] वाह पुकारेंगे, "ऐ मालिक, तेरा रब हमारा काम ही तमाम का दे तो अच्छा है" वो जवाब देगा "तुम यूं ही पड़े रहोगे +[43:78] हम तुम्हारे पास हक़ लेकर आए थे, मगर तुम में से अक्सर को हक़ ही नगावार था" +[43:79] लोगों ने क्या कहा इक़दाम (कथानक) करने का फ़ैसला कर लिया है? अच्छा तो हम भी फिर एक फैसला लेते हैं +[43:80] क्या इन्हों ने ये समझा रखा है कि हम इनकी राज की बातें और इनकी सरगोशियां सुनते नहीं हैं? हम सब कुछ सुन रहे हैं और हमारे फरिश्ते इनके पास ही लिख रहे हैं +[43:81] इनसे कहो, अगर वक्त रहमान की कोई औलाद होती तो सबसे पहले इबादत करने वाला मैं होता” +[43:82] पाक है आसमान और जमीन का फरमा, अर्श का मालिक, उन सारी बातों से जो ये लोग हमारी तरफ मंसूब करते हैं +[43:83] अच्छा, इन्हें अपनी बात ख़यालत में गर्क और अपने खेल में मुनाहमिक रहने दो, यहाँ तक के ये अपना वो दिन देख लें जिसका इन्हें खौफ़ दिलाया जा रहा है +[43:84] वही एक आसमान मैं भी खुदा है और ज़मीन में भी खुदा, और वही हकीम ओ अलीम है +[43:85] बहुत बाला-ओ-बरतर है वो जिसका क़ब्ज़ में ज़मीन और आसमान और हर उस चीज़ की बादशाही है जो ज़मीन ओ आसमान के दरमियान पाई जाती है। और वही कयामत की घड़ी का इल्म रखा है, और उसकी तरफ तुम सब पलटे जाने वाले हो +[43:86] उसको छोड़ कर ये लोग जिन्हें पुकारते हैं वो किसी शफात का इख्तियार नहीं रखते, इल्ला ये के कोई इल्म की बिना पर हक की शहादत दे +[43:87] और अगर तुम इनसे पूछो के इन्हें किसने चुकाया है तो ये खुद कहेंगे के अल्लाह ने। फिर कहां से ये धोखा खा रहे हैं +[43:88] कसम है रसूल के इस क़ौल की ऐ रब, ये वो लोग हैं जो मान कर नहीं देते +[43:89] अच्छा, ऐ नबी इनसे दरगुज़र करो और कहदो के सलाम हैं तुम्हें, अनकरीब इन्हें मालूम हो जाएगा + +Surah 44: Ad-Dukhan (The Drought) +---------------------------------------- +[44:1] हा मीम +[44:2] कसम है इस किताब ए मुबीन की +[44:3] के हमने इसे एक बड़ी खैर ओ बरकत वाली रात में नाज़िल किया है, क्योंकि हम लोगों को मुतनब्बह (चेतावनी) करने का इरादा रखते थे +[44:4] ये वो रात थी जिसमें हर मामले का हकीमना फैसला +[44:5] हमारे हुकुम से सादिर किया जाता है। हम एक रसूल भेजने वाले थे +[44:6] तेरे रब की रहमत के तौर पर। यकीनन वही सब कुछ सुनने और जाने वाला है +[44:7] आसमानो और ज़मीन का रब और हर उस चीज़ का रुब जो आसमान ओ ज़मीन के दरमियान है अगर तुम लोग वाक़ई यक़ीन रखो वाले हो +[44:8] कोई माबूद उसके सिवा नहीं है। वही जिंदगी अता करता है और वही मौत देता है।तुम्हारा रब और तुम्हारे उन असलाफ (पूर्वजों) का रब जो पहले गुजर चुके हैं +[44:9] (मगर फिल-वक़्हे इन लोगों को यकीन नहीं है) बल्के ये अपने शक्क में पड़े खेल रहे हैं +[44:10] अच्छा इंतजार करो उस दिन का जब आसमान सारे धुवां (धुआं) के लिए आएगा +[44:11] और वो लोगों पर छा जाएगा, ये है दर्दनाक सजा +[44:12] (अब कहते हैं के) "परवरदिगार, हमपर से ये अजब ताल दे, हम ईमान लाते हैं" +[44:13] इनकी गफ़लत कहाँ डर होती है? इनका हाल तो ये है के इन के पास रसूल ए मुबीन आ गया +[44:14] फिर भी ये उसकी तरफ मुल्ताफ़ित ना हुए और कहा के “ये तो सिखाया पड़ा बावला है” +[44:15] हम जरा अजब हटाये देते हैं, तुम लोग फिर वही कुछ करोगे जो पहले कर रहे थे +[44:16] जिस रोज़ हम बड़ी ज़र्ब (हमला) लगाएंगे वो दिन होगा जब हम तुमसे इंतिक़ाम लेंगे +[44:17] हम इनसे पहले फिरौन की क़ौम को इसी आज़माइश में डाल चुके हैं। उनके पास एक निहायत शरीफ़ रसूल आया +[44:18] और उसने कहा "अल्लाह के बंदों को मेरे हवाले करो, मैं तुम्हारे लिए एक अमानत-दार रसूल हूं +[44:19] अल्लाह के मुक़ाबले में सरकशी न करो। मैं तुम्हारे सामने (अपनी ममुरिअत की) सारी सनद (स्पष्ट अधिकार) पेश करता हूं +[44:20] और मैं अपना रुब और तुम्हारे रुब की पनाह ले चूका हूं इसके लिए तुम मुझपर हमला-आवार (हमला) हो +[44:21] अगर तुम मेरी बात नहीं मानते तो मुझपर हाथ डालने से बाज रहो” +[44:22] आख़िर ए कार उसने अपने रब को पुकारा के ये लोग मुजरिम हैं +[44:23] (जवाब दिया गया) अच्छा तो रात-ओ-रात मेरे बंदों (नौकरों) को लेकर चल पढ़। तुम लोगों का पीछा किया जाएगा +[44:24] समंदर को उसके हाल पर खुला छोड़ दे। ये सारा लश्कर गर्क (डूबने) होने वाला है +[44:25] कितने ही बाग और चश्मे +[44:26] और खेत (बगीचे) और शानदार महल थे जो वो छोड़ गए +[44:27] कितने हाय ऐश के सर-ओ-समां, जिन में वो मजे कर रहे थे उनके पीछे धरे रह गए +[44:28] ये हुआ उनका अंजाम, और हमने दूसरों को इन चीज़ों का वारिस बना दिया +[44:29] फिर ना आसमां अनपर रोया ना ज़मीन, और ज़रा सी मोहलत भी उनको ना दी गई +[44:30] इस तरह बनी इसराइल को हमने ज़िल्लत के अज़ाब +[44:31] फ़िरौन से नजात दी जो हद से गुजर जाने वालों में फिल वक़्क़े बदे अनचे दर्जे का आदमी था +[44:32] और उनकी हालात जानते हैं, उनको दुनिया की पुरानी क़ौम पर तर्जीह दी +[44:33] और उन्हें ऐसी निशानियां दिखाई गईं जिनमें सारी आजमाइश थी +[44:34] ये लोग कहते हैं +[44:35] "हमारी पहली मौत के सिवा और कुछ नहीं उसके बाद हम दोबारा उठे जाने वाले नहीं हैं +[44:36] अगर तुम सच्चे हो तो उठ लाओ हमारे बाप दादा को" +[44:37] ये बेहतर है या तुब्बा की क़ौम और उसे पहले के लोग? हमने उनको इसी बिना पर तबाह किया के वो मुजरिम हो गए थे +[44:38] ये आसमान ओ ज़मीन और इनके दरमियान की चीजें हमने कुछ खेल के तौर पर नहीं बना दी है +[44:39] इनको हमने बार-हक़ अदा किया है, मगर अक्सर लोग जानते हैं +[44:40] सबके उठाए जाने के लिए थे-शुदा वक़्त फ़ैसले का दिन है +[44:41] वो दिन जब कोई अज़ीज़ क़रीब अपने किसी अज़ीज़ क़रीब के लिए कुछ भी काम नहीं आएगा। और न कहीं से उन्हें कोई मदद मांगेगी +[44:42] सिवाय इसके अल्लाह ही किसी पर रहम करे, वो ज़बरदस्त और रहीम है +[44:43] ज़ख़्म का दरख्त (पेड़) +[44:44] गुनहगार का खा-जा (खाना/भोजन) होगा +[44:45] पूंछ (तेल) की तिलझट (ड्रेग्स) जैसा, पैट (बेलीज़) में इस तरह जोश खाएगा +[44:46] जैसा खौलता (उबलता) हुआ पानी जोश खाता है +[44:47] पकाडो इसे और क्रोधित-ते (घसीटते हुए) हुए ले जाओ इसको जहन्नुम के बीचों बीच +[44:48] और उंधैल (डालो) दो इसके सर पर खुलते (उबलता हुआ) पानी का अज़ाब +[44:49] चक्ख इसका मजा, बड़ा जबरदस्त इज्जतदार आदमी है तू +[44:50] ये वही चीज है जिसके आने में तुमलोग शक्क रखते थे” +[44:51] खुदा तरस लोग अमन की जगह में होंगे +[44:52] बाघों (बगीचे) और चश्मे में +[44:53] हरीर-ओ-दीबा (रेशम और ब्रोकेड) के लिबास पहने, आमने सामने बैठे होंगे +[44:54] ये होगी इनकी शान और हम गोरी गोरी आह-ओ-चश्म औरतें उन्हें बियाह देंगे +[44:55] वहां वो इत्मिनान से हर तरह की लज़ीज़ चीज़ तालाब करेंगे +[44:56] वहां मौत का मज़ा वो कभी ना छोड़ेंगे। बस दुनिया में जो मौत आ चुकी सो आ चुकी और अल्लाह अपने फज़ल से +[44:57] उनको जहन्नुम के अज़ाब से बच्चा देगा यही बड़ी कामयाबी है +[44:58] ऐ नबी (एसएएस) हमने इस किताब को तुम्हारी जुबान में सहल (आसान/आसान) बना दिया है ताके ये लोग हिदायत हासिल करें +[44:59] अब तुम भी इंतज़ार करो, ये भी मुंतज़िर (इंतज़ार कर रहे) हैं + +Surah 45: Al-Jathiyah (The Kneeling) +---------------------------------------- +[45:1] हा मीम +[45:2] क्या किताब का नुज़ुल अल्लाह की तरफ से है जो ज़बरदस्त और हकीम है +[45:3] हकीकत ये है के आसमां और ज़मीन में बेशुमार निशानियां हैं ईमान लाने वालों के लिए +[45:4] और तुम्हारी अपनी पैदाइश में, और उन हैवानत (जानवरों) में जिनको अल्लाह (जमीन में) फैला रहा है, बड़ी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो यकीन लाने वाले हैं +[45:5] और शब-ओ-रोज़ (रात और दिन) के फर्क ओ इख्तिलाफ में, और हम रिज्क में जैसे अल्लाह आसमान से नाज़िल फरमाता है फिर उसके ज़रिये से मुर्दा ज़मीन को जिला उठाता है, और हवाओं की गर्दिश में बहुत निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो अक़ल से काम लेते हैं +[45:6] ये अल्लाह की निशानियां हैं जिनमें हम तुम्हारे सामने ठीक ठीक बयान कर रहे हैं। अब आखिर अल्लाह और उसकी आयत के बाद और कौन सी बात है जिसपर ये लोग ईमान लाएंगे +[45:7] तबाही है हर हमारे झूठे बाद अमल शक्स के लिए +[45:8] जिसके सामने अल्लाह की आयतें पड़ी जाती हैं, और वह उनको सुनता है, फिर पूरे इस्तकबार के साथ अपने कुफ्र पर है एडीए रहता है गोया उसने उनको सुना ही नहीं। ऐसे शक्स को दर्दनक अज़ाब का मसला सुना दो +[45:9] हमारी आयत में से कोई बात जब उसके इल्म में आती है तो वो उनका मज़ाक बना लेता है। ऐसे सब लोगों के लिए ज़िल्लत का अज़ाब है +[45:10] उनके आगे जहन्नुम है। जो कुछ भी उन्हें दुनिया में कमाया है उसमें से कोई चीज उनके किसी काम ना आएगी। ना उनके वो सरपरस्त ही उनके लिए कुछ कर पाएंगे जिनमें अल्लाह को छोड़ कर उन्हें ने अपना वली बना रक्खा है। उनके लिए बड़ा अज़ाब है +[45:11] ये कुरान सरसर हिदायत है, और उन लोगों के लिए बला का दर्दनाक अज़ाब है जिन्हों ने अपने रब की आयत को मान-ने से इंकार किया +[45:12] वाह अल्लाह हाय तो है जिसने तुम्हारे लिए समंदर को मुसक्कर किया ता-के उसके हुकुम से कश्तियां उसमें चलें और तुम उसका फजल तलाश करो और शुक्र गुजार हो +[45:13] उसने जमीन और आसमान की सारी ही चीजों को तुम्हारे लिए मुस्कुरा कर दिया, सब कुछ अपने पास से। इसमें बड़ी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो गौर ओ फिक्र करने वाले हैं +[45:14] (ऐ नबी) ईमान लाने वालों से कहदो के जो लोग अल्लाह की तरफ से बुरे दिन आने का कोई अंदाज़ा नहीं रखते, उनकी हरकतों पर दरगुज़र से काम लें ता-के अल्लाह खुद एक गिरोह को उसकी कमाई का बदला दे +[45:15] जो कोई नेक अमल करेगा अपने ही लिए करेगा, और जो बुरा करेगा वो आप ही उसका खुम्याज़ा (परिणाम) भुगतेगा। फिर जाना तो सबको अपनी रुब ही की तरफ है +[45:16] इस पहले बानी इजराइल को हमने किताब और हुकुम और नबुवत अता की थी, उनको हमने उमड़ा समान ए ज़िस्त से नवाजा, दुनिया भर के लोगों पर उन्हें फजीलत अता की +[45:17] और दीन के मामले में उन्हें वाज़ेह हिदायत दे दी। फिर जो इख्तिलाफ़ उनके दरमियान रुनामा हुआ वो (नवाक़िफ़ियत की वजह से नहीं बलके) इल्म आ जाने के बाद हुआ और उस बिना पर हुआ के वो आपस में एक दूसरे पर ज़्यादा करना चाहते थे। अल्लाह कयामत के रोज़ उन मामलात का फैसला फरमादेगा जिनमें वो इख्तिलाफ करते रहेंगे +[45:18] इसके बाद ऐ नबी हमने तुमको दिन के मामले में एक साफ शाह-राह (शरीयत) पर कायम किया है। लिहाज़ा तुम उसी पर चलो और उन लोगों की ख्वाहिश का इत्तिबा न करो जो इल्म नहीं रखते +[45:19] अल्लाह के मुक़ाबले में वो तुम्हारे कुछ भी काम नहीं आ सकते। ज़ालिम लोग एक दूसरे के साथी हैं, और मुत्तक़ियों का साथी अल्लाह है +[45:20] ये बसीरत की रोशनी हैं सब लोगों के लिए और हिदायत और रहमत उन लोगों के लिए जो यकीन लायें +[45:21] क्या वो लोग जिन्होन ने बुराइयों का इर्तिक़ाब किया है ये समझे बैठे हैं के हम उन्हें और ईमान लाने वालों और नेक अमल करने वालों को एक जैसा कर देंगे के इनका जीना और मरना यक्सन हो जाए? बहुत बुरे हुकुम हैं जो ये लोग लगाते हैं +[45:22] अल्लाह ने तो आसमानो और ज़मीन को बरहक़्क अदा किया है और इसके लिए किया है कि हर मुतनफ़िस को उसकी कमाई का बदला दिया जाए। लोगों पर ज़ुल्म हरगिज़ ना किया जाएगा +[45:23] फिर क्या तुमने कभी उस शक्स के हाल पर भी गौर किया जिसने अपनी ख्वाहिश ए नफ़्स को अपना खुदा बना लिया और अल्लाह ने इल्म के बावज़ूद उसे गुमराही में फेंक दिया और उसके दिल और कानो (कान) पर मोहर लगा दी और उसकी आँखों पर पर्दा डाल दिया? अल्लाह के बाद अब कौन है जो उसे हिदायत दे? क्या तुम लोग कोई सबक नहीं लेते +[45:24] ये लोग कहते हैं कि "जिंदगी बस यहीं हमारी दुनिया की जिंदगी है, यहीं हमारा मरना और जीना है और गर्दिश-ए-अय्याम (समय बीतना) के सिवा कोई चीज नहीं हो हमें हलाक करती हो।" दर हकीकत इस मामले में इनके पास कोई इल्म नहीं है ये महज़ गुमान की बिना पर ये बातें करते हैं +[45:25] और जब हमारी वजह आयत उन्हें सुनाई जाती है तो इनके पास कोई हुज्जत इसके सिवा नहीं होती के उठ लाओ हमारे बाप दादा को अगर तुम सच्चे हो +[45:26] ऐ नबी इनसे कहो अल्लाह हाय तुम्हें जिंदगी बक्शता है, फिर वही तुम्हें मौत देता है, फिर वही तुमको उस कयामत के दिन जमा करेगा जिसके आने में कोई शक्क नहीं। मगर अक्सर लोग जानते नहीं हैं +[45:27] ज़मीन और आसमानों की बादशाही अल्लाह ही की है, और जिस रोज़ क़यामत की घड़ी आ खड़ी होगी उस दिन बातिल परस्त खसारे (नुक्सान) में पढ़ जायेंगे +[45:28] हमारा वक्त तुम हर गिरू को घुटनो (घुटनों) के बल गिरा देखोगे। हर गिरोह को पुकारा जायेगा के आये और अपना नाम अमल देखे। उनसे कहा जाएगा: "आज तुम लोगों को उन अमल का बदला दिया जाएगा जो तुम करते रहे थे +[45:29] ये हमारा तैयार किया हुआ अमल नामा है जो तुम्हारे ऊपर ठीक ठीक शहादत दे रहा है, जो कुछ भी तुम करते थे उसे हम लिखवाते जा रहे थे" +[45:30] फिर जो लोग ईमान लाए थे और नेक अमल करते रहे थे उनको रब्ब अपनी रहमत में दखल करेगा। और यही सारी कामयाबियां हैं +[45:31] और जिन लोगों ने कुफ्र किया था उनसे कहा जाएगा "क्या मेरी आयत तुमको नहीं सुनती जाती थी? मगर तुमने तकब्बुर किया और मुजरिम बनकर रहे +[45:32] और जब कहा जाता था कि अल्लाह का वादा बार- हक़ है और कयामत के आने में कोई शक्क नहीं, तो तुम कहते थे के हम नहीं जानते कयामत क्या होती है, हम तो बस एक गुमान सा रखते हैं, यकीन हम को नहीं है” +[45:33] हमारा वक्त उनके अमल की बुराइयां खुल जाएंगी और वो उसी चीज के फेर में आ जाएंगी जिसका वो मज़ाक उड़ाया करते थे +[45:34] और इनसे कहा जाएगा के "आज हम भी उसी तरह तुम्हें भुला देते हैं, जिस तरह तुम इस दिन की मुलाकात को भूल गए थे। तुम्हारा ठिकाना अब दोज़ख़ है और कोई तुम्हारी मदद करने वाला नहीं है +[45:35] ये तुम्हारा अंजाम इस लिए हुआ है कि तुमने अल्लाह की आयत बना लिया था और तुमने दुनिया की जिंदगी में धोखे में डाल दिया था, आज ना ये लोग दोज़ख से निकल जाएंगे और ना इनसे कहा जाएगा माफ़ी मांग कर अपने रब को राजी करो” +[45:36] पास तारीफ अल्लाह ही के लिए है जो जमीन और आसमानों का मालिक और सारे जहां वालों का परवरदिगार है +[45:37] जमीन और आसमान में बदाई उसके लिए है और वही जबरदस्त (सबसे ताकतवर) और दाना (सबसे बुद्धिमान) है + +Surah 46: Al-Ahqaf (The Sandhills) +---------------------------------------- +[46:1] हा मीम +[46:2] इस किताब का नुज़ुल अल्लाह ज़बरदस्त और दाना की तरफ से है +[46:3] हमने ज़मीन और आसमान को और उन सारी चीज़ों को जो उनके दरमियान हैं बार-हक़्क़ और एक मुद्दत ए ख़ास के तायूँ के साथ अदा किया है। मगर ये काफ़िर लोग हमें हकीकत से मुंह मोड़े हुए हैं जिन्होंने उनको खबरदार किया है +[46:4] ऐ नबी, इनसे कहो, "कभी तुमने आंखें खोल कर देखा भी के वो हस्तियां हैं क्या जिन्हे तुम खुदा को छोड़ कर पुकारते हो? ज़रा मुझे दिखाओ तो सही के" ज़मीन में उनको ने क्या पेदा किया है, या आसमान की तख़लीक़ ओ तदबीर में उनका क्या हिसा है। +[46:5] आखिर उस शक्स से ज्यादा बहका हुआ इंसान और कौन होगा जो अल्लाह को छोड़ कर उनको पुकारे जो कयामत तक उसे जवाब नहीं दे सके, बलके इसे भी बेखबर हैं के पुकारने वाले उनको पुकार रहे हैं +[46:6] और जब तमाम इंसान जमा किए जाएंगे हमें वक्त वो अपने पुकारने वालों के दुश्मन और उनकी इबादत के मुनकिर होंगे +[46:7] इन लोगों को जब हमारी साफ आयतें सुनाई जाती हैं और हक इनके सामने आ जाता है तो ये काफिर लोग उसके मुतालिक कहते हैं के ये तो खुला जादू है +[46:8] क्या उनका कहना ये है के रसूल ने इसे खुद गढ़ लिया है? इनसे कहो " अगर मैंने इसे खुद गढ़ लिया है तो तुम मुझे खुदा की पकड़ से कुछ भी न बचा पाओगे। जो बातें तुम बनाते हो अल्लाह उनको खूब जानता है, मेरे और तुम्हारे दरमियान वही गवाही देने के लिए काफी है, और वह बड़ा दरगुजर करने वाला है और रहीम है” +[46:9] इनसे कहो “मैं कोई निराला रसूल तो नहीं हूं, मैं नहीं जानता कि कल तुम्हारे साथ क्या होना है और मेरे साथ क्या। कुछ नहीं हूं" +[46:10] ऐ नबी, इनसे कहो "कभी तुमने सोचा भी के अगर ये कलाम अल्लाह ही की तरफ से हुआ और तुम ने इसका इंकार कर दिया (तो तुम्हारा क्या अंजाम होगा)?और इस जैसा एक कलाम पर तो बानी इजराइल का एक गवाह शहादत भी दे चुका है। वो ईमान ले आया और तुम अपने घमंड में पड़े रहोगे। ऐसे ज़ालिमों को अल्लाह हिदायत नहीं दिया करता” +[46:11] जिन लोगों ने मान-ने से इंकार कर दिया है वो ईमान लाने वालों के मुतालिक कहते हैं “के अगर इस किताब को मान लेना कोई अच्छा काम होता तो ये लोग इस मामले में हमसे हैं सबकात न लेजा सक्ते”। चुनके इन्हों ने उसे हिदायत न पाई, अब ये जरूर कहेंगे के ये तो पुराना झूठ है +[46:12] हलांके इसे पहले मूसा की किताब रहनुमा और रहमत बनकर आ चुकी है, और ये किताब उसकी तस्दीक करने वाली जुबान-ए-अरबी में आई है ताके ज़ालिमों को मुतनब्बे (चेतावनी) करदे और नीक रवीश इख्तियार करने वालों को बशारत दे दे +[46:13] यकीनन जिन लोगों ने केहदिया के अल्लाह ही हमारा रब है, फिर हम पर जम गए, उनके लिए ना कोई खौफ है और ना वो गमगीन होंगे +[46:14] ऐसे सब लोग जन्नत में जाने वाले हैं। जहां वो हमेशा रहेंगे अपने उन अमल के बदले जो वो दुनिया में करते रहेंगे +[46:15] हमने इंसान को हिदायत की कि वो अपने वालिदाओं के साथ नई बात करें। उसकी माँ ने मुशक्कत उठा कर उसे पैत में रक्खा और मुशक्कत उठा कर ही उसको जाना। और उसके हमाल और दूध छुड़ाने में तीस (तीस) महीने लग गए। यहां तक ​​के जब वो अपनी पूरी ताक़त को पाहुंचा और चालीस (चालीस) साल का हो गया तो उसने कहा “ऐ मेरे रब मुझे तौफ़ीक़ दे के मैं तेरी उन नियामतों का शुक्र अदा करूं जो तू ने मुझे और मेरे वालिदैं को अता फैमई, और ऐसा नीक अमल करूं जिस से तू राजी हो, और मेरी औलाद को भी नेक बना कर मुझे सुख दे, मैं तेरे हुजूर तौबा करता हूं और ताबे फरमान (मुस्लिम) बंदों में से हूं” +[46:16] इस तरह के लोगों से हम उनके बहतरीन अमल को कबूल करते हैं और उनकी बुराइयों से दरगुजर कर जाते हैं हैन. ये जन्नती लोगों में शामिल होंगे हमें सच्चे वादे के मुताबिक जो इनसे क्या जानता है +[46:17] और जिस शक्स ने अपने वाल्डेन से कहा "उफ्फ, तंग कर दिया तुमने" क्या तुम मुझे ये खौफ फैलाते हो के मैं मरने के बाद फिर से काबर से निकल जाऊंगा मुझ से पहले बहुत सी नसलें (पीढ़ियां) गुजर चुकी हैं (उनमें से कोई उठ कर न आया)'' मां और बाप अल्लाह की दुहाई देकर कहते हैं '' अरे बदनसीब, मान जा, अल्लाह का वादा सच्चा है'' मगर वो कहता है '' ये सब अगले वक्त की फरसुदा (कथाएं) कहानियाँ हैं" +[46:18] ये वो लोग हैं जिनपर अज़ाब का फैसला चस्पां हो चूका है। इनसे पहले जिन्नो और इंसानों के जो तोले (समुदाय) (इसी क़ौम के) हो गुज़रे हैं उनमें ये भी जा शामिल होंगे। बेशक ये घाटे (नुकसान) में रह जाने वाले लोग हैं +[46:19] दोनों गिरोहोन में से हर एक के दर्जे उनके अमल के लिहाज़ से हैं ता-के अल्लाह उनके किए का पूरा पूरा बदला उनको दे। उनपर जुल्म हरगिज़ न किया जाए +[46:20] फिर जब ये काफिर आग के सामने ला खड़े किए जाएंगे तो उनसे कहा जाएगा: "तुम अपने हिसाब की नियम अपनी दुनिया की जिंदगी में ख़तम कर चुके और उनका लुत्फ तुमने उठा लिया, अब जो तकब्बुर तुम ज़मीन में किसी हक़ के बिना करते रहो और जो नफ़रमानियाँ तुमने कि उनके पद में आज तुमको ज़िल्लत का अज़ाब दिया जाएगा” +[46:21] ज़रा इन्हें आद के भाई (हुद) का किस्सा सुनाओ जबके उसने अहकाफ में अपनी कौम को खबरदार बनाया था और ऐसे खबरदार करने वाले उसे पहले भी गुजर चुके थे और उसके बाद भी आते रहे के "अल्लाह के सिवा किसी की बंदगी ना करो, मुझे तुम्हारे हक में एक बदाई" हौलनाक दिन के अज़ाब का अंदेशा है” +[46:22] उनहों ने कहा “क्या तू इसलिए आया है के हमें बेहका कर हमारे मबूदों से बरगश्ता कर दे? अच्छा तो ले आ अपना वो अजब जिसे तू हमें डराता है अगर वक्त तू सच्चा है” +[46:23] उसने कहा के “इसका इल्म तो अल्लाह को है, मैं सिर्फ वो पैग़ाम तुम्हें पहन रहा हूं जिसे देकर मुझे भेजा गया है। मगर मैं देख रहा हूँ के तुमलोग जहालत बरात रहे हो” +[46:24] फिर जब उनहों ने हमें अज़ाब को अपनी वादियों (घाटियों) की तरफ आते देखा तो कहने लगे "ये बादल है जो हमको सैराब कर देगा"। बलके ये वही चीज़ है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थे, ये हवा का तूफान है जिसमें दर्दनक अज़ाब चला आ रहा है +[46:25] अपने रब के हुकुम से हर चीज को तबाह कर डालेगा"। आखिर ई कार उनका हाल ये हुआ के उनके रहने के जघोन के सिवा वहां कुछ नजर ना आता था। इस तरह हम मुजरिमों को बदला दिया करते हैं +[46:26] उनको हमने वो कुछ दिया था जो तुम लोगों को नहीं दिया है, आंखें और दिल सब कुछ दे रखे थे, मगर ना वो कौन है। आँखें, ना दिल, क्योंकि वो अल्लाह की आयत का इन्कार करते थे, और उसी चीज़ के फिर में वो आ गए जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे +[46:27] तुम्हारे घेरे ओ पेश के इलाक़ों में बहुत से बस्तियों को हम परेशान कर चुके हैं। हमने अपनी आयत भेज कर बार-बार तरह तरह से उनको समझा, शायद के वो बाज़ आ जाएं +[46:28] फिर क्यों ना उन हस्तियों ने उनकी मदद की जिनमें अल्लाह को छोड़ कर उन्होन ने तकरारब-ए-इलल्लाह का ज़रिया समझे हुए मबूद बना लिया था? बल्के वो तो उनसे खोए गए। मैं और ये था उनके झूठ और उन बनावती अकीदों का अंजाम जो उन्होन ने घड रक्खे थे +[46:29] (और वो वाकिया भी काबिल ए जिक्र है) जब हम जिन्नो के एक गिरूह को तुम्हारी तरफ ले आए थे ता-के कुरान सुने। जब वो हमें जगह पाहुंचे (जहां तुम कुरान पढ़ रहे थे) तो उनको ने आपस में कहा खामोश हो जाओ, फिर जब वो पढ़ा जा चुका तो वो खबरदार करने वाले बन कर अपनी क़ौम की तरफ पलटे(लौटा) +[46:30] उनहोन ने जा कर कहा "ऐ हमारी" कौम के लोग, हमने एक किताब सुनी है जो मूसा के बाद नाज़िल की गई है, तस्दीक (पुष्टि करें) करने वाली है अपने से पहले आई हुई किताबों की, रहनुमाई करती है हक़ और राह-ए-रास्त की तरफ +[46:31] ऐ हमारी क़ौम के लोगों, अल्लाह की तरफ बुलाने वाले की दावत क़बूल करलो और इसपर ईमान ले आओ, अल्लाह तुम्हारे गुनाहों से दरगुज़र पैदा करेगा और तुम्हें अज़ाब ए आलिम से बचाएगा +[46:32] +[46:33] और क्या इन लोगों को ये समझाई नहीं देता के जिस खुदा ने ये ज़मीन और आसमां पैदा किया है और इनको बनाते हुए जो ना थका, वो जरूर इसपर कादिर है के मुर्दों (मृत) को जिला उठे? क्यों नहीं, यक़ीनन वो हर चीज़ की क़ुदरत रखता है +[46:34] जिस रोज़ ये काफिर आग के सामने लाये जायेंगे, हमें वक़्त उनसे पूछा जायेगा "क्या ये हक़ नहीं है?" ये कहेंगे " हां, हमारे रब की कसम (ये वाकाई हक़ है)" अल्लाह फरमायेगा " अच्छा तो अब अज़ाब का मजा चक्खो अपने हमें इंकार की याद में जो तुम करते रहे थे" +[46:35] पस ऐ नबी, सब्र करो जिस तरह से उलूल अज्म (दृढ़ इच्छाशक्ति) रसूलों ने सब्र किया है, और इनके मामले में जल्दी ना करो। जिस रोज़ ये लोग हमें चीज़ को देख लेंगे जिसका इन्हें ख़ौफ़ दिलाया जा रहा है तो इन्हें यूं मालूं होगा के जैसे दुनिया में दिन की एक घड़ी भर से ज्यादा नहीं रह रहे थे। बात पहुंचा दी गई, अब क्या नफरमान लोगों के सिवा और कोई हलक होगा + +Surah 47: Muhammad (Muhammad) +---------------------------------------- +[47:1] जिन लोगों ने कुफ्र किया और अल्लाह के रास्ते से रोका अल्लाह ने उनके अमल को बर्बाद (व्यर्थ) कर दिया +[47:2] और जो लोग ईमान लाए और जिन्होन ने नेक अमल किये और उस चीज़ को मान लिया जो मुहम्मद पर नाज़िल हुई है और है वो सरसर हक़ उनके रब की तरफ से अल्लाह ने उनकी बुराइयाँ (बुरे काम) उनसे दूर करदी और उनका हाल दुरुस्त करदिया +[47:3] ये इस लिए के कुफ्र करने वालों ने बातिल (झूठ) की जोड़ी बनाई है और ईमान लेन वालों ने हमें हक की जोड़ी दी है जो उनके रब की तरफ से आया है। इस तरह अल्लाह लोगों को उनकी ठीक-ठीक हकीकत बता देता है +[47:4] जब काफिरों से तुम्हारी मुठ-भैद (लड़ाई) हो तो पहला काम गर्दनें (गर्दन) मारना है, यहां तक ​​के जब तुम उनको अच्छी तरह से कुचल दो तब कैदियों (बंदियों) को मजबूत बांधो। इसके बाद (तुम्हें इख्तियार है) एहसान करो या फ़िदिये (फिरौती) का मुआमला करलो, ता-आंके लड़ायी अपनी हत्या डाल दे। ये है तुम्हारे करने का काम. अल्लाह चाहता है तो खुद ही उनसे निमत लेता है, मगर (ये तारीख़ा हमें ने इसके लिए इख्तियार किया है) ता-के तुम लोगों को एक दूसरे के ज़रीए से आज़माए और जो लोग अल्लाह की राह में मारे जाएंगे अल्लाह उनके अमल को हरगिज़ ज़या ना करेगा +[47:5] वो उनकी रहनुमाई फरमायेगा, उनका हाल दुरुस्त कर देगा +[47:6] और उनको हम जन्नत में दाख़िल करेगा जिसने उन्हें वाकिफ़ करा चुका है +[47:7] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम अल्लाह की मदद करोगे तो वो तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हारा क़दम मज़बूत जमा देगा +[47:8] रहे वो लोग जिन्हों ने कुफ्र किया है, तो उनके लिए हलाकत है और अल्लाह ने उनके आमाल को भटका दिया है +[47:9] क्योंकि उन्होन ने हमें चीज को नापसंद किया है जैसे अल्लाह ने नाज़िल किया है, लिहाजा अल्लाह ने उनके आमाल को बर्बाद कर दिया है +[47:10] क्या वो जमीन में चले फिर ना थे के उन लोगों का अंजाम देखते हैं जो उनसे पहले गुजर चुके हैं? अल्लाह ने उनका सब कुछ उलट दिया, और काफिरों के लिए मुकद्दर में ऐसी ही नटाईज है +[47:11] ये है उनके लिए ईमान लाने वालों का हमी ओ नासिर (रक्षक) अल्लाह है और काफिरों का हमी ओ नासिर (रक्षक) कोई नहीं +[47:12] ईमान लाने वालों और नीक अमल करने वालों को अल्लाह उन जन्नतों में दाख़िल करेगा जिनके बारे में नीचे बताया गया है, और कुफ्र करने वाले बस दुनिया की चंद रोजा जिंदगी के मजे लूट रहे हैं, जानवरों की तरह खा पी रहे हैं, और उनका आखिरी ठिकाना जहन्नुम है +[47:13] ऐ नबी (एसएएस) कितनी ही बस्तियां ऐसी गुजर चुकी हैं जो तुम्हारे उस बस्ती से बहुत ज्यादा जोरावर थी जिसने तुम्हें निकल दिया है? उन्हें हमने इस तरह हलक करदिया के कोई उनका बचाने वाला ना था +[47:14] भला कहीं ऐसा हो सकता है कि जो अपने रब की तरफ से एक साफ ओ सारी हिदायत पर हो, वो उन लोगों की तरह हो जाए जिनके लिए उनका बुरा अमल खुशनुमा बना दिया गया है और वो अपनी ख़्वाहिशात के जोड़े बन गए हैं +[47:15] परवाह-ऑन के लिए जिस जन्नत का वादा किया गया है उसकी शान तो ये है के उसमें नेह्रेइन बेह राही होंगी निथरे (अक्षम/अप्रदूषित) हुए पानी की, नेह्रेन बेह राही होंगी ऐसे दूध की जिसकी मजा (स्वाद) में जरा फर्क ना आया होगा, नहरें बेह राही होंगी ऐसी शराब की जो पीने वालों के लिए लजीज (स्वादिष्ट) होंगी, नहरें बह रही होंगी साफ शफाफ शेहद (शहद) की। उसमें उनके लिए हर तरह के फल होंगे और उनके रब की तरफ से बख्शीश। (क्या वो शक्स जिसके हिस्से में ये जन्नत आने वाली है) उन लोगों की तरह हो सकता है जो जहन्नम में हमेशा रहेंगे और जिनमें ऐसा गरम (गर्म) पानी पिलाया जाएगा जो उनके आंतें (आंत) तक काट देगा +[47:16] उनमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो कान लगा कर तुम्हारी बात सुनते हैं और फिर जब तुम्हारे पास से निकलते हैं उन लोगों से जिन्हें इल्म की नियामत बक्शी गई है पूछते हैं के अभी अभी इन्होन ने क्या कहा था?ये वो लोग हैं जिनके दिलों पर अल्लाह ने थप्पड़ (सील) लगा दिया है और ये अपनी अपनी ख्वाहिश के जोड़े बने हुए हैं है +[47:17] रहे वो लोग जिन्होन ने हिदायत पाई है, अल्लाह उनको और ज्यादा हिदायत देता है और उनको हिससे का तकवा अता फरमाता है +[47:18] अब क्या ये लोग बस कयामत ही के मुंतजिर हैं के वो अचानक अंदर आ जाए? उसकी अलामत तो आ चुकी है जब वो खुद आ जाएगी तो इनके लिए हिदायत कबूल करने का कौनसा मौका बाकी रह जाएगा +[47:19] पस ऐ नबी, खूब जान लो के अल्लाह के सिवा कोई इबादत का मुस्तहिक नहीं है, और माफ़ी मांगो अपने कसूर के लिए भी और मोमिन मर्दन और औरतों के लिए भी। अल्लाह तुम्हारी सरगर्मियों को भी जानता है और तुम्हारे ठिकाने से भी वाकिफ है +[47:20] जो लोग ईमान लाए हैं वो कह रहे थे कि कोई सूरत क्यों नहीं नाज़िल की जाती (जिस में जंग का हुकुम दिया जाए) मगर जब एक मोहकम सूरत नाज़िल हो गई जिसमें जंग का जिक्र था तो तुमने देखा के जिनके दिलों में बीमारी थी वो तुम्हारी तरफ इस तरह देख रहे हैं जैसे किसी पर मौत छा गई हो। अफ़सोस उनके हाल पर +[47:21] (उनकी ज़ुबान पर है) इत्ता का इकरार और अच्छी अच्छी बातें। मगर जब कतई हुकुम दे दिया गया हमें वक्त वो अल्लाह से अपने अहद में सच्चे निकलते तो उनके लिए अच्छा था +[47:22] अब क्या तुम लोगों से इसके सिवा कुछ और तवक्कु की जा सकती है के अगर तुम उल्टे मुंह फिर गए तो जमीन में फिर फसाद बरपा करोगे और आपस में एक दूसरे के गले कटोगे +[47:23] ये लोग हैं जिनपर अल्लाह ने लानत की और इनको अंधा (अंधा) और बेहरा बना दिया +[47:24] क्या उन लोगों ने कुरान पर गौर नहीं किया, या दिलों पर उनके कुफल (ताले) चढ़े हैं +[47:25] हकीकत ये है के जो लोग हिदायत वाजे हो जाने के बाद उसे फिर से गए उनके लिए शैतान ने इस रवीश को सहल बना दिया है और झूठी तवाक्कत का सिलसिला उनके लिए दराज़ कर रक्खा है +[47:26] क्या उनके लिए अल्लाह के नाज़िल करदा दीन को नापसंद करने वालों से केहदिया के बाज़ मामलात में हम तुम्हारी मानेंगे।अल्लाह उनकी ये खुफिया बातें खूब जानता है +[47:27] फिर हमें वक्त क्या हाल होगा जब फरिश्ते इनकी रूहें क़ब्ज़ करेंगी और इनके मुंह और पीठ पर मरते हुए इन्हें ले जाएंगे +[47:28] ये इसी के लिए तो होगा के इन्होनें हमें तारीख़ की जोड़ी की जो अल्लाह को नाराज़ करने वाला है और हमें रज़ा का रास्ता इख्तियार करना पसंद नहीं है। इसी बिना पर उसने इनके सब आमाल जया कर दिए +[47:29] क्या वो लोग जिनके दिलों में बीमार है ये समझे बैठे हैं के अल्लाह उनके दिलों के खोट (कीना) जाहिर नहीं करेगा +[47:30] हम चाहें तो उन्हें तुमको आंखों से दिखा दें और उनके चेहरों से तुम उनको पहचान लो मगर उनके अंदाज़ ए कलाम से तो तुम उनको जान ही लोगे। अल्लाह तुम सब के अमल से ख़ूब वाकिफ़ है +[47:31] हम ज़रूर तुम लोगों को आज़माइश में डालेंगे ताकि तुम्हारे हालात की जाँच करें और देख लें के तुम में मुजाहिद और साबित क़दम कौन हैं +[47:32] जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह की राह से रोका और रसूल से झगड़ा किया जबके अनपर राह ए रास्ता वज़ेह हो चुकी थी, दर हकीकत वो अल्लाह का कोई नुक्सान भी नहीं कर सकता, बल्कि अल्लाह ही उनका सब किया करा देगा। +[47:33] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम अल्लाह की इबादत करो और रसूल की इबादत करो और अपने अमल को बरबाद ना करो +[47:34] कुफ्र करने वालों और राह ए खुदा से रुकने वालों और मरते दम तक कुफ्र पर जमे रहने वालों को तो अल्लाह हरगिज माफ ना करेगा +[47:35] पस तुम बोदेह (बेहोश दिल) ना बनो और सुलह की अंधेरा ना करो। तुम ही ग़ालिब रहने वाले हो. अल्लाह तुम्हारे साथ है और तुम्हारे अमल को वो हरगिज जया ना करेगा +[47:36] ये दुनिया की जिंदगी तो एक खेल और तमाशा है अगर तुम ईमान रखोगे और तकवे की रवीश पर चलते रहो अल्लाह तुम्हारे अजर तुमको देगा और वो तुम्हारे माल तुमसे ना मांगे गा +[47:37] अगर कहीं वो तुम्हारे माल तुमसे मांग ले और सब के सब तुमसे तालाब करले तो तुम भूखल (कंजूसी / कंजूसी / कंजूस) करोगे और वह तुम्हारे खोट (असफलता) उबर लाएगा +[47:38] देखो, तुम लोगों को दावत दी जा रही है कि अल्लाह की राह में माल खर्च करो इसपर तुम में से कुछ लोग हैं जो कंजूसी कर रहे हैं। हलाँके जो बुख़ल (कठिनाई) करता है वो डर हकीकत अपने आप ही से बुख़ाल कर रहा है। अल्लाह तो गनी (सर्व-पर्याप्त) है, तुम्हीं उसके मोहताज हो। अगर तुम अल्लाह से मुहं जोड़ोगे, तुम्हारी जगह किसी और कौम को ले आएगी और वो तुम जैसे ना होंगे + +Surah 48: Al-Fath (The Victory) +---------------------------------------- +[48:1] ऐ नबी, हमने तुमको खुली फतह अता करदी +[48:2] ता-के अल्लाह तुम्हारी अगली पिचली हर कोटाही से दरगुर्जर फरमाये, और तुम अपनी नियामत की तकमील (पूरी) करदे, और तुम्हें सीधा रास्ता दिखाये +[48:3] और तुमको जबरदस्त नुसरत बख्शे +[48:4] वही है जिसने मोमिनो के दिलों में सकीनत ((शांति) नाज़िल फरमायी ता-के अपने ईमान के साथ वो एक ईमान और बड़ा लें. ज़मीन और आसमान के सब लश्कर अल्लाह के कब्ज़ा-ए-क़ुदरत में हैं, और वो आलिम ओ हकीम है +[48:5] (उसने ये काम किया है) ता-के मोमिन मर्दन और औरतों को हमेशा रहने के लिए ऐसी जन्नत में दाख़िल फरमाये जिनके नीचे नहरेन बेह राही होंगी और उनकी बुराइयां उनसे दूर करदे। अल्लाह के नाज़दीक ये बदी कमियाबी है +[48:6] और उन मुनाफिक मर्दों और औरतों और मुशरिक मर्दों और औरतों को सज़ा दे जो अल्लाह के मुतालिक बुरे गुमान रखते हैं। बुरेई के फेर में वो खुद ही आ गए हैं, अल्लाह का गजब असमान हुआ और उसने असमान लानत की और उनके लिए जहन्नुम मुहैय्या करदी जो बहुत ही बुरा ठिकाना है +[48:7] जमीन और आसमानों के लश्कर अल्लाह ही के क़ब्ज़ा-ए-क़ुदरत में हैं और वह ज़बरदस्त और हकीम (बुद्धिमान) है +[48:8] ऐ नबी हममें तुमको शहादत (गवाह) देने वाला बशारत (खुशखबरी) देने वाला और खबरदार कार्डने वाला बना कर भेजा है +[48:9] ता-के ऐ लोगों, तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और उसका साथ दो, उसकी ताज़िम-ओ-तौकीर (उसका समर्थन करो, और सम्मान करो) करो और सुबह ओ शाम उसकी तस्बीह करते रहो +[48:10] ऐ नबी, जो लोग तुमसे बैत कर रहे थे। उनके हाथ पर अल्लाह का हाथ था. अब जो इस अहद को तोड़ेगा उसकी अहद शिकनी का वबल उसकी अपनी ही जात पर होगा, और जो हमें अहद को वफा करेगा जो उसने अल्लाह से किया है, अल्लाह अंककारिब उसको बड़ा अजर अता फरमाएगा +[48:11] ऐ नबी, बदवी (बेडौंस) अरब में से जो लोग पिचे छोड़ दिए गए थे अब वो आ कर जरूर तुमसे कहेंगे के हमें अपने अमवाल और बाल बच्चों की फिक्र ने मशगुल कर रक्खा था. आप हमारे लिए मगफिरत की दुआ फ़मायें। ये लोग अपनी जुबान से वो बातें कहते हैं जो उनके दिलों में नहीं होती। उनसे कहना "अच्छा, यही बात है तो कौन तुम्हारे मामले में अल्लाह के फैसले को रोक दे का कुछ भी इख्तियार रखता है अगर वो तुम्हें कोई नुक्सान पहचानना चाहिए या नफा बक्शना चाहिए? तुम्हारे अमल से तो अल्लाह ही बा-खबर है +[48:12] (मगर असल बात वो नहीं है जो तुम कह रहे हो) बलके तुमने यूं समझा के रसूल और मोमिनीन अपने घर वालों में हरगिज पलट कर ना आ सकेंगे और ये ख्याल तुम्हारे दिलों को बहुत अच्छा लगेगा। और तुमने बहुत बुरे गुमान किये और तुम बहुत बुरे बातें (बेहद बुरे) लोग हो” +[48:13] अल्लाह और उसके रसूल पर जो लोग ईमान न रखते हों ऐसे काफिरों के लिए हमने नफरत आग मुहैय्या कर रखी है +[48:14] आसमानो और ज़मीन की बादशाही का मालिक अल्लाह हाय है। जिसे चाहे माफ करे और जिसे चाहे सजा दे। और वो गफूर ओ रहीम है +[48:15] जब तुम माल-ए-गनीमत हासिल करने के लिए जाओगे तो ये पीछे छोड़े जाने वाले लोग तुमसे जरूर कहेंगे के ये चाहते हैं के अल्लाह के फरमान को बदल दें। इनसे साफ कह देना के "तुम हरगिज हमारे साथ नहीं चल सकते। अल्लाह पहले ही ये फरमा चुका है" ये कहेंगे के "नहीं, बलके तुमलोग हमसे हसद कर रहे हो" (हलांके बात हसद की नहीं है) बल्के ये लोग सही बात को कम ही समझते हैं +[48:16] पिचे छोड़े जाने वाले बादवी (बेडौइन) अरब से कहना के "अंकरीब तुम्हें ऐसे लोगों से लड़ने के लिए बुलाया जाएगा जो बड़े जोरावर हैं। तुमको उनसे जंग करनी होगी या वो मुती (समर्पण) हो जाएंगे।" हमें वक्त है अगर तुमने हुकुम ए जिहाद की इताअत की तो अल्लाह तुम्हें अच्छा अजर देगा। और अगर तुम फिर उसी तरह मुंह मोड़ गए जिस तरह पहले मोड़ चुके हो तो अल्लाह तुम्हें दर्दनक सजा देगा +[48:17] अगर अंधा और लंगड़ा और मरिज जिहाद के लिए ना आए तो कोई हराज नहीं। जो कोई अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करेगा अल्लाह उसे उन जन्नतों में दाख़िल करेगा जिनके बारे में पहले से पता नहीं होगा, और जो मुँह फेरेगा उसे वो दर्दनक अज़ाब देगा” +[48:18] अल्लाह मोमिनो से ख़ुश हो गया जब वो दरख्त के आला तुमसे बैत (वफ़ादारी की कसम) कर रहे थे। उनके दिलों का हाल उसको मालूम था। इस लिए उसने उन्पर सकीनात (आंतरिक शांति) नाज़िल फरमाई, उनको इनाम में करीबी फतह बख्शी +[48:19] और बहुत सा माल-ए-गनीमत उन्हें अता कर दिया वो (अंकारीब) हासिल करेंगे हकीम (बुद्धिमान) है +[48:20] अल्लाह तुमसे ब-कसरत अमल-ए-गनीमत का वादा करता है जिन्हें तुम हासिल करोगे। फौरी तौर पर तो ये फतह उसने तुम्हें अता करदी और लोगों के हाथ तुम्हारे खिलाफ उथने से रोक दिए, ता-के ये मोमिनो के लिए एक निशानी बन जाए और अल्लाह सीधे रास्ते की तरफ तुम्हें हिदायत बख्शे +[48:21] इसके अलावा दूसरे और गनीमतों का भी वो तुमसे वादा करता है जिनपर तुम अभी तक कादिर नहीं हुए हो और अल्लाह ने इनको घेर रखा है, अल्लाह हर चीज पर कादिर है +[48:22] ये काफिर लोग अगर इस वक्त तुमसे हैं लड़ गए होते तो यकीनन पीठ फेर जाते और कोई हमी ओ मददगार न पाते +[48:23] ये अल्लाह की सुन्नत है जो पहले से चली आ रही है और तुम अल्लाह की सुन्नत में कोई तबदीली न पाओगे +[48:24] वही है जिसने मक्का की वादी में उनके हाथ तुमने और तुम्हारे हाथ उन्हें रोक दिए, हलांके वो उन पर तुम्हारे साथ गलाबा अता कर चूका था और जो कुछ तुम कर रहे थे अल्लाह उसे देख रहा था +[48:25] वहां लोग तो हैं जिन्होन ने कुफ्र किया और तुमको मस्जिद ए हरम से रोका और हादी (कुर्बानी) के ऊंटों (ऊंटों) को उनकी कुर्बानी की जगह न पहनने दिया। अगर (मक्का में) ऐसे मोमिन मर्द ओ औरत मौजुद न होते जिन्हे तुम नहीं जानते, और ये खतरा ना होता के नादानस्तागी में तुम उन्हें प्यार करोगे और उससे तुमपर हरफ आएगा (तो जंग ना रुकी जाती। रोकी वो इस लिए हो गई) ता-के अल्लाह अपनी रहमत मैं जिसको चाहे दाख़िल करले। वो मोमिन अलग हो गए होते तो (एहले मक्का में से) जो काफिर थे उनको हम जरूर सजा देते +[48:26] (यही वजह है के) जब इन काफिरों ने अपने दिलों में जाहिलाना हमियत बिठा ली तो अल्लाह ने अपने रसूल और मोमिनो पर सकीनत नाजिल फरमायी और मोमिनो को तक्वा की बात का पाबंद रक्खा, के वही उसके ज्यादा हकदार और उसके एहेल थे। अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है +[48:27] फिल वाक़े अल्लाह ने अपने रसूल को सच्चा ख्वाब दिखाया था जो ठीक ठीक हक़ के मुताबिक़ था। इंशा अल्लाह तुम ज़रूर मस्जिद ए हरम में पूरे अमन के साथ दख़िल होंगे, अपने सर मुंडवा-ओगे (दाढ़ी) और बाल तरसवा-ओगे और तुम्हें कोई ख़ौफ़ ना होगा। वो उस बात को जानता था जैसे तुम ना जानते थे इस लिए वो ख्वाब पूरा होने से पहले उसने ये करीबी फतह तुमको अता फरमादी +[48:28] वाह अल्लाह ही है जिसने अपने रसूल को हिदायत और दीन ए हक़ के साथ भेजा है ता-के उसको पूरे जिन्स-ए-दीन पर गालिब करदे (हर धर्म पर हावी) और हकीकत पर अल्लाह की गवाही काफी है +[48:29] मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं, और जो लोग उनके साथ हैं वो कुफ्फार पर सच और आपस में रहीम हैं। तुम जब देखोगे उन्हें रुकु व सुजूद और अल्लाह के फजल और उसकी खुशनुदी की तालाब में मशगुल पाओगे। सुजूद के असर उनके चेहरों पर मौजुद हैं जिनसे वो अलग पहचाने जाते हैं। ये है उनकी सिफत तौरात में। और इंजील में उनकी मिसाल यूं दी गई है के गोया एक खेती है जिसने पहले कोपल निकाली, फिर हमें तक़्वियत दी, फिर वो गढ़राई, फिर अपने तनय (तने) पर खड़ी हो गई। काश्त (बोने वालों) करने वालों को वो ख़ुश करती है ता-के कुफ़्फ़ार इनके फ़लने फूलने पर जलें। क्या गिरोह के लोग जो ईमान लाए हैं और जिन्होन ने नीक अमल किए हैं अल्लाह ने उन्हें मगफिरत और बड़े अजर का वादा फरमाया है + +Surah 49: Al-Hujurat (The Apartments) +---------------------------------------- +[49:1] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह और उसके रसूल के आगे पेश कादमी न करो और अल्लाह से डरो, अल्लाह सब कुछ सुनने और जानने वाला है +[49:2] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपनी आवाज नबी की आवाज से बुलंद न करो, और न नबी के साथ ऊंची आवाज से बात किया करो जिस तरह तुम आपस में एक दूसरे से करते हो, कहीं ऐसा न हो के तुम्हारा किया किया सब खराब हो जाए (कर्म व्यर्थ हो जाएं) और तुम खबर भी ना हो +[49:3] जो लोग रसूल-ए-खुदा के हुजूर बात करते हैं अपनी आवाज पिछले रखते हैं वो डर हकीकत वही लोग हैं जिनके दिलों को अल्लाह ने तकवा के लिए जांच लिया है। उनके लिए मगफिरत है और अजर-ए-अज़ीम +[49:4] ऐ नबी, जो लोग तुम्हें हुज्रों (अपार्टमेंट) के बाहर से पुकारते हैं उनमें से अक्सर बे-अकाल हैं +[49:5] अगर वो तुम्हारे बारामद होने तक सब्र करते तो उनके लिए बेहतर था, अल्लाह दरगुज़र करें वाला और रहीम है +[49:6] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, अगर कोई फासिक तुम्हारे पास कोई खबर लेकर आए तो तहकीक कर लिया करो, कहीं ऐसा न हो के तुम किसी गिरो ​​को नादानिश्ता (अनजाने में) नुक्सान पाहुंचा बैठो और फिर अपने किए पर पशेमां हो +[49:7] ख़ूब जान रक्खो के तुम्हारे दरमियान अल्लाह का रसूल मौजुद है। अगर वो बहुत से मामले में तुम्हारी बात मान लिया करे, तो तुम खुद ही मुश्किलात में मुबतला हो जाओ। मगर अल्लाह ने तुमको ईमान की मुहब्बत दी और उसको तुम्हारे लिए दिल पसंद बना दिया, और कुफ्र-ओ-फुसुक और नफरमानी से तुमको मुतनफिर (घृणित) कर दिया +[49:8] ऐसे ही लोग अल्लाह के फजल ओ एहसान से रस्त-रो हैं और अल्लाह आलिम-ओ-हकीम (सर्वज्ञ, ऑल-वाइज़) है +[49:9] और अगर एहले ईमान में से दो गिरो ​​आपस में लड़ जाएं, तो उनके दरमियान सुलह (शांति) कराओ। फिर अगर उनमें से एक गिरो ​​दूसरे गिरो ​​से ज्यादा करे, तो ज्यादा करने वाले से लड़ो यहां तक ​​के वो अल्लाह के हुकुम की तरफ पलट आए। फिर अगर वो पलट आए, तो उनके दरमियान अदल के साथ सुलह करा दो, और इन्साफ करो के अल्लाह इन्साफ करने वालों को पसंद करता है +[49:10] मोमिन तो एक दूसरे के भाई हैं, लिहाजा अपने भाइयों के दरमियान तालुकात को दुरुस्त करो और अल्लाह से डरो, उम्मीद है के तुमपर रहम किया जाएगा +[49:11] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, ना मर्द दूसरे मर्दों का मजाक उड़ाएं, हो सकता है के वो उनसे बेहतर हों, और ना औरतें दूसरी औरतों का मजाक उड़ाएं, हो सकता है के वो उनसे बेहतर हों। आपस में एक दूसरे पर तान ना करो, और ना एक दूसरे को बुरे अलकाब (शीर्षक) से याद करो। ईमान लेन के बाद फिस्क में नाम पेदा करना बहुत बुरी बात है। जो लोग इस रवीश से बाज़ न आएं वही जालिम हैं +[49:12] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, बहुत गुमान (शक) करने से परहेज करो के बाज़ गुमान (शक) गुनाह होते हैं। तजस्सस (जसुसी) ना करो और तुम में से कोई किसी की गीबत ना करे। क्या तुम्हारे अन्दर कोई ऐसा है जो अपने मरे (मृत) हुए भाई का गोश्त खाना पसंद करेगा? देखो, तुम खुद इस से घी खाते हो। अल्लाह से डरो, अल्लाह बड़ा तौबा कबूल करने वाला और रहीम है +[49:13] लोगन, हमने तुमको एक मर्द और एक औरत से प्यार किया और फिर तुम्हारी कौमें और बिरादरी बना दी ता-के तुम एक दूसरे को पहचानो। दर हक़ीक़त अल्लाह के नज़दीक तुम में सब से ज़्यादा इज़्ज़त वाला वो है जो तुम्हारे अंदर सब से ज़्यादा ज़रूरी है। यकीनन अल्लाह सब कुछ जान-ने वाला और बाख़बर है +[49:14] ये बदवी (बेडौइन्स) कहते हैं के "हम ईमान लाए" इनसे कहो: "तुम ईमान नहीं लाए, बलके यूं कहो के हम मुती (विनम्र) हो गए" ईमान अभी तुम्हारे दिलों में दाख़िल नहीं हुआ है। अगर तुम अल्लाह और उसके रसूल की फरमाबरदारी इख्तियार करो तो वो तुम्हारे अमल के अजर में कोई कमी ना करेगा। यकीनन अल्लाह बड़ा दरगुजर करने वाला और रहीम है +[49:15] हकीकत में तो मोमिन वो हैं जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए फिर उन्होन ने कोई शक्क ना किया और अपने जानो और मालों से अल्लाह की राह में जिहाद किया, वही सच्चे लोग हैं +[49:16] ऐ नबी, इन [मुदाययान ए ईमान (आस्था का ढोंग)] से कहो, क्या तुम अल्लाह को अपने दीन की इत्तिला दे रहे हो? हालंके अल्लाह ज़मीन और आसमान की हर चीज़ को जानता है और वो हर शाय का इल्म रखता है +[49:17] ये लोग तुमपर एहसान जताते हैं के इन्हों ने इस्लाम क़बूल करलिया। इनसे कहो अपने इस्लाम का एहसान मुझपर न रक्खो, बलके अल्लाह तुम अपना एहसान रखता है के उसने तुम्हें ईमान की हिदायत दी अगर तुम अपने दावा-ए-ईमान में सच्चे हो +[49:18] अल्लाह ज़मीन और आसमान की हर पोशीदा (छिपी हुई) चीज़ का इल्म रखा है और जो कुछ तुम करते हो वो सब उसकी निगाह में है + +Surah 50: Qaf (Qaf) +---------------------------------------- +[50:1] क़ाफ़, कसम है कुरान-ए-मजीद की +[50:2] बल्के इन लोगों को ताज्जुब इस बात पर हुआ के एक खबरदार करने वाला खुद में से इनके पास आ गया, फिर मुनकिरीन कहने लगे "ये तो अजीब बात है +[50:3] क्या जब हम मर जाएंगे और खाक (मिट्टी) हो जाएंगे (तो दोबारा उठेंगे)? ये वापसी तो अक्ल से खराब है" +[50:4] ज़मीन इनके जिस्म में से जो कुछ खाती है वो सब हमारे इल्म में है और हमारे पास एक किताब है जिसमें सब कुछ महफूज है +[50:5] बल्के इन लोगों ने तो जिसका वक्त हक इनके पास आया उसका वक्त उसे साफ झूठला दिया। इसी वजह से अब ये उलझन में पड़े हुए हैं +[50:6] अच्छा, तो क्या इन्होनें ने कभी अपने ऊपर आसमान की तरफ नहीं देखा? किस तरह हमने उसे बनाया और अरस्ता (ज़ीनत/सुंदरीकरण) किया, और उसमें कहीं कोई रखना (दरारें/दरारें) नहीं हैं +[50:7] और ज़मीन को हमने बिछाया और इसमें पहाड़ जमाये और उसके अंदर हर तरह की खुश मंज़र नबातात उगा दी +[50:8] ये सारी चीज़ें आंखें खोलने वाली और सबक देने वाली हैं हर हमें बंद करने के लिए जो (हक़ की तरफ) रूजू करने वाला हो +[50:9] और आसमान से हमने बरकत वाला पानी नाज़िल किया, फिर उसे बाग और फसल के गले +[50:10] और बुलंद ओ बाला खजूर के दरख्त पेडा करदीए जिनपर फलन (फल) से लड़े खोशे तेह-बार-तेह लगते हैं (फलों को परतों में व्यवस्थित किया जाता है) हैं +[50:11] ये इंतिजाम है बंदों को रिज्क देने का इस पानी से हम एक मुर्दा जमीन को जिंदगी बख्श देते हैं (मारे) हुए इंसानों का ज़मीन से) निकलने भी इसी तरह होगा +[50:12] इन से पहले नूह की क़ौम, और अशब-उर-रस, और समूद +[50:13] और आद, और फिरौन, और लूट के भाई +[50:14] और ऐकाह (जंगल में रहने वाले) वाले, और तुब्बा की क़ौम के लोग भी झुटला चुके हैं हर एक ने रसूलों को झुटलाया, और आखिर ए कार मेरी वेद (धमकी) उन पर चस्पां हो गई +[50:15] क्या पहली बार की तहलीक (सृजन) से हम आजिज (घिसे-पिटे) थे? मगर एक नई तख़लीक की तरफ से ये लोग शक्क में पड़े हुए हैं +[50:16] हमने इंसान को भुगतान किया है और उसके दिल में उबरने वाले वतन तक को हम जानते हैं। हम तो हमारे राग-ए-गर्दन (गले की नस) से भी ज्यादा हमसे करीब हैं +[50:17] (और हमारे इस बारह-ए-रास्त इल्म के अलावा) दो कातिब (शास्त्री) उसके दिन और बायें बैठे (फरिश्ते) हर चीज सब्त (लिख) कर रहे हैं +[50:18] कोई लफ्ज हमसे कि जुबान से नहीं निकलता जिसे महफूज करने के लिए एक हाजिर बाश निगरान मौजूद ना हो +[50:19] फिर देखो, वो मौत की जान-कानी (मौत की पीड़ा) हक लेकर आ पाहुंची, ये वही चीज है जिसमें तू भागता था +[50:20] और फिर सुर (तुरही) फूँका गया, ये है वो दिन जिसका तुझे खौफ़ दिला दिया जाता था +[50:21] हर शक्स इस हाल में आ गया के उसके साथ एक हांक(ड्राइव) कर लेन वाला है और एक गवाही देने वाला +[50:22] क्या चीज़ की तरफ से तू गफ़लत में था, हमने वो पर्दा हटा दिया जो तेरे आगे पड़ा हुआ था और आज तेरी निगाह खूब तेज़ है +[50:23] उसके साथी ने अर्ज़ किया ये जो मेरी सुपुर्दगी में था हाज़िर है +[50:24] हुकुम दिया गया “फेंक दो जहन्नुम में हर कट्टे (कठोर, जिद्दी) काफिर को जो हक से इनाद रखता था +[50:25] खैर को रुकने वाला और हद से तजौज करने वाला था, शक्क में पड़ा हुआ था +[50:26] और अल्लाह के साथ किसी दूसरे को खुदा बना बैठा था। दाल दो उसे अकेले अज़ाब में” +[50:27] उसके साथी ने अर्ज़ किया “खुदा-वंदा, मैंने इसको व्यंग्य नहीं बनाया बलके ये खुद ही पारले दर्जे की गुमराही में पड़ा हुआ था” +[50:28] जवाब में इरशाद हुआ “मेरे हुजूर झगड़ा ना करो, मैं तुमको पहले ही अंजाम-ए-बद्द से ख़बरदार कर चूका था +[50:29] मेरे हाँ (यहाँ) बात पलटी नहीं जाती और मैं अपने बंदों पर ज़ुल्म तोड़ने वाला नहीं हूं" +[50:30] वो दिन जबके हम जहन्नुम से पूछेंगे क्या तू भर गई? और वो कहेगी क्या और कुछ है +[50:31] और जन्नत मुत्तक़िन के करीब ले आएगी, कुछ भी डर ना होगी +[50:32] इरशाद होगा "ये है वो चीज़ जिसका तुमसे वादा किया जाता था, हर उस शक्स के लिए जो बहुत रूजू का है"रोने वाला और बड़ी निगहदाश्त (उसके आचरण पर नजर रखने वाला) करने वाला था +[50:33] जो बे देखे रहमान से डरता था, और जो दिल-ए-गिरविदा के लिए आए हैं +[50:34] दखिल हो जाओ जन्नत में सलामती के साथ'' वो दिन हयात-ए-आबादी (अनंत काल) का दिन होगा +[50:35] वहां उनके लिए वो सब कुछ होगा जो वो चाहेंगे, और हमारे पास इसे ज्यादा भी बहुत कुछ उनके लिए है +[50:36] हम उनसे पहले बहुत सी कौमों को हलाक कर चुके हैं जो इनसे बहुत ज्यादा ताकतवार थी और दुनिया के मुल्कों को अनहोन ने चैन मारा था फिर क्या वो कोई जाए पनाह पा सके +[50:37] इस तारीख में इब्रत का सबक है हर उस शक्स के लिए जो दिल रखता हो, या जो तवज्जु से बात को सुने +[50:38] हमने जमीन और आसमानों को और उनके दरमियान की सारी चीज़ों को छै (छह) दिनों में अदा कर दिया और हमें कोई थकान लाहिक न हुई +[50:39] पास ऐ नबी, जो बातें ये लोग बनाते हैं उन पर सब्र करो, और अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करते रहो, तुलू-ए-आफताब (सूरज का उगना) और गुरुब-ए-आफताब (इसके डूबने से पहले) से पहले +[50:40] और रात के वक्त फिर उसकी तस्बीह करो और सजदा रिजियन से दूर होने के बाद भी (साष्टांग प्रणाम) +[50:41] और सुनो, जिस दिन मुनादी (पुकार) करने वाला (हर शक्स के)करीब ही से पुकारेगा +[50:42] जिस दिन सब लोग आवाज़-ए-हशर को ठीक ठीक सुन रहे होंगे, वो ज़मीन से मुर्दों के निकलने का दिन होगा +[50:43] हम ही जिंदगी बक्शते हैं और हम ही मौत देते हैं, और हमारी ही तरफ उस दिन सबको पलटना है +[50:44] जब ज़मीन फटेगी लोग उसके अंदर से निकल कर तेज तेज़ भागे जा रहे होंगे। ये हश्र हमारे लिए बहुत आसान है +[50:45] ऐ नबी, जो बातें ये लोग बना रहे हैं उन्हें हम खूब जानते हैं, और तुम्हारा काम इनसे जबरन (ज़बरदस्ती) बात मनवाना नहीं है। बस तुम कुरान के ज़रिये से हर उस शक्स को हिदायत करदो जो मेरी तम्बीह से डरे + +Surah 51: Ad-Dhariyat (The Scatterers) +---------------------------------------- +[51:1] कसम है उन हवाओं की जो गर्द (धूल) उड़ाने वाली हैं +[51:2] फिर पानी से लड़े हुए बादल उठने वाली हैं +[51:3] फिर सुबुक रफ़्तारी (सुचारू गति से) के साथ चलने वाली हैं +[51:4] फिर एक बदे काम (बारिश) की तकसीम करने वाली हैं +[51:5] हक ये है कि जिस चीज का तुम्हें खौफ दिलाया जा रहा है वो सच्ची है +[51:6] और जजा-ए-आमाल (इनाम) जरूर पेश आनी है +[51:7] कसम है मुत्तफ़रिक शकलों (अनेक रूप) वाले आसमान की +[51:8] (आख़िरत के बारे में) तुम्हारी बात एक दूसरे से मुख़्तलिफ़ है +[51:9] उसे वही बरगश्ता (भ्रमित/विमुख) होता है जो हक़ से फिरा हुआ है +[51:10] मारे गये क़यास-ओ-गुमान (अनुमान लगाने वाले) से हुकुम लगाने वाले +[51:11] जो जिहालत (अज्ञानता) में ग़र्क और गफ़लत में मदहोश हैं +[51:12] पूछते हैं आख़िर वो रोज़-ए-जज़ा कब आएगा +[51:13] वो हमें रोज़ आएगा जब ये लोग आग पर तपेंगे +[51:14] (इनसे कहा जाएगा) अब चकखो मजा अपने फिटने का, ये वही चीज़ है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थाय +[51:15] अलबत्ता मुत्तकी लोग हमें रोज़ बागों (बगीचों) और चश्मो (फव्वारों) में होंगे +[51:16] जो कुछ उनका रब उन्हें देगा उसे ख़ुशी ख़ुशी ले रहे होंगे। वो उस दिन के आने से पहले नीकुकर (नेकी करने वाले) थे +[51:17] रातों (रातों) को कम ही सोते (नींद) थे +[51:18] फिर वही रात के पिछले पहरों में माफ़ी माँगते थे +[51:19] और उनके मालों (धन) में हक़ था साहिल (मांगने वाले) और महरूम (बेसहारा) के लिए +[51:20] ज़मीन में बहुत सी निशानियां हैं यकीन लाने वालों के लिए +[51:21] और खुद तुम्हारे अपने वजूद में हैं, क्या तुमको सूझता नहीं +[51:22] आसमान ही में है तुम्हारा रिज्क भी और वो चीज भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है +[51:23] पास कसम है आसमां और जमीन के मालिक की, ये बात हक है, ऐसी ही यकीनी जैसे तुम बोल रहे हो +[51:24] ऐ नबी, इब्राहिम के मुअज्जज मेहमान की हिकायत भी तुम्हें पाहुंची है +[51:25] जब वो उसके हां (यहां) आए तो कहां आपको सलाम है। उसने कहा "आप लोगों को भी सलाम है कुछ ना-आशना से लोग हैं" +[51:26] फिर वो चुपके से अपने घर वालों के पास गया, और एक मोटा ताज़ा बछड़ा (बछड़ा) ला कर +[51:27] मेहमानों के आगे पेश किया। उसने कहा आप हज़रत खाते नहीं +[51:28] फिर वो अपने दिल में उससे डर गया। उनहों ने कहा डरिए नहीं, और उसे एक ज़ी-इल्म लड़के की अदाइश का मुश्दा (अच्छी खबर/बशारत) सुनाया +[51:29] ये सुनकर उसकी बीवी चीखती हुई आगे बढ़ी और उसने अपना मुंह पीठ लिया और कहने लगी, "बूढ़ी बांज" +[51:30] उनहों ने कहा "यही कुछ फरमाया है" तेरे रब ने। वो हकीम है और सब कुछ जानता है +[51:31] इब्राहीम ने कहा “ऐ फरस्तादगान-ए-इलाही (दूत), क्या मोहिम आपको दर-पेश है +[51:32] उन्होन ने कहा “हम एक मुजरिम क़ौम की तरफ भेजे गए हैं +[51:33] ता-के उसपर पक्की हुई मिट्टी के पत्थर (मिट्टी-पत्थर) बरसा दे +[51:34] जो आपके रब के हां हद से गुज़र जाने वालों के लिए निशान ज़दा हैं” +[51:35] फिर हमने उन सब लोगों को निकाल लिया जो उस बस्ती में मोमिन थे +[51:36] और वहां हमने एक घर के सिवा मुसलमानों का कोई घर न पाया +[51:37] उसके बाद हमने वहां बस एक निशानी उन लोगों के लिए छोड़ दी जो दर्दनक अज़ाब से डरते थे +[51:38] और (तुम्हारे लिए निशानी है) मूसा के क़िस्से में जब हमने उसे सारी सनद (स्पष्ट अधिकार) के साथ फिरौन के पास भेजा +[51:39] तो वो अपने बाल-बूटे पर अकड़ गया और बोला ये जादूगर है या मजनूं (दीवाना) है +[51:40] आख़िर-ए-कार हमने उसे और उसके लश्करों को पकड़ा और सबको समंदर में फेंक दिया और वो मलामत ज़्यादा होकर रह गया +[51:41] और (तुम्हारे लिए निशानी है) आद (आद के लोग) में, जबके हमने उनपर एक ऐसी ही हाय बे-खैर (विनाशकारी) हवा भेज दी +[51:42] के जिस चीज पर भी वह गुजर गई उसे बोसीदा (सड़ा हुआ) करके रख दिया +[51:43] और (तुम्हारे लिए निशानी है) समूद में, जब उनसे कहा गया था कि एक खास वक्त तक मजे करलो +[51:44] मगर क्या तम्बीह (चेतावनी) बराबर भी है उनहों ने अपने रब के हुकुम से सरताबी (बेशर्मी से अवज्ञा) की। आख़िर-ए-कर उनको देखते एक अचानक टूट पड़ने वाले अज़ाब ने उनको आ लिया +[51:45] फिर ना उनको उठने की ताकत थी और ना वो अपना बचाव कर सकते थे +[51:46] और सबसे पहले हमने नूह की क़ौम को हलाक किया क्योंके वो फ़ासीक (दुष्ट) लोग थे +[51:47] आसमान को हमने अपने ज़ोर से बनाया है और हम इसकी क़ुदरत रखते हैं +[51:48] ज़मीन को हमने बिछाया है और हम बड़े अच्छे हमवार(स्मूथर्स/स्प्रेड) करने वाले हैं +[51:49] और हर चीज़ के हमने जोड़े हैं बनाए हैं, शायद के तुम उसे सबक लो +[51:50] तो अल्लाह की तरफ से, मैं तुम्हारे लिए हमारे लिए साफ-साफ खबरदार करने वाला हूं +[51:51] और ना बनाओ अल्लाह के साथ कोई दूसरा माबूद। मैं तुम्हारे लिए उसकी तरफ से साफ साफ खबरदार करने वाला हूं +[51:52] यूं ही होता जा रहा है, इनसे पहले क़ौमों के पास भी कोई रसूल ऐसा नहीं आया जैसे उन्होन ने ये ना कहा हो के ये साहिर (जादूगर) है या मजनूं (दीवाना) +[51:53] क्या इन सब ने आपस में इसपर कोई समझौता किया है? नहीं, बलके ये सब सरकश लोग हैं +[51:54] पास ऐ नबी, इनसे रुख फेर लो, तुमपर कुछ मलामत नहीं +[51:55] अलबत्ता हिदायत करते रहो, क्योंके हिदायत ईमान लाने वालों के लिए नफ़ेह(फ़ैयदा-मंद) है +[51:56] मैने जिन और इंसान को इसके सिवा किसी काम के लिए भुगतान नहीं किया है के वो मेरी बंदगी करें +[51:57] मैं उनसे कोई रिज़्क नहीं चाहता और ना ये चाहता हूं के वो मुझे खिलाएं +[51:58] अल्लाह तो खुद ही रज्जाक है, बड़ी कुव्वत वाला और जबरदस्त +[51:59] पास जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उनके लिए वैसा ही अज़ाब तय्यार है जैसा इन्ही जैसे लोगों को उनके लिए का मिल चुका है, इसके लिए ये लोग जल्दी ना मचाएं +[51:60] आख़िर को तबाह है कुफ़्र करने वालों के लिए हमें रोज़ जिसका इन्हें ख़ौफ़ दिलाया जा रहा है + +Surah 52: At-Tur (The Mountain) +---------------------------------------- +[52:1] कसम है तूर (पर्वत) की +[52:2] और एक ऐसी खुली किताब की +[52:3] जो रकीक जिल्द (बारीक चर्मपत्र) में लिखी हुई है +[52:4] और आबाद (बहुत बार-बार आने वाला) घर की +[52:5] और ऊंची छत (चंदवा) की +[52:6] और मौजां समंदर (उफनता हुआ समुद्र) की +[52:7] के तेरे रब का अज़ाब ज़रूर वक़हे होने वाला है +[52:8] जिसे कोई दफ़ा करने वाला नहीं +[52:9] वो रोज़ वक़हे होगा जब आसमां बुरी तरह डगमगाएगा +[52:10] और पहाड़ उड़े उड़े फिरेंगे +[52:11] तबाही है हम रोज़ उन पर झूठलाने वालों के लिए +[52:12] जो आज खेल के तौर पर अपनी हुज्जत बाजियों में लगे हुए हैं +[52:13] जिस दिन उन्हें धक्के मार कर नार-ए-जहन्नुम (नरक की आग) की तरफ ले चला जाएगा +[52:14] हमारा वक्त उन्हें कहा जाएगा के “ये वही” आग है जैसे तुम झुटलाया करते थे +[52:15] अब बताओ ये जादू है या तुम्हें समझ नहीं आ रहा है +[52:16] जाओ अब झुलसो इसके अंदर, तुम ख्वाह सब्र करो या ना करो, तुम्हारे लिए यक्सन है, तुम्हें वैसा ही बदला दिया जा रहा है जैसे तुम अमल कर रहे थे +[52:17] मुत्तकी लोग वहां बागों (बगीचों) और नियामतों में होंगे +[52:18] लुत्फ ले रहे होंगे उन चीज़ों से जो उनका रब उन्हें देगा, और उनका रब उन्हें दोज़ख के अज़ाब से बचा लेगा +[52:19] (उनसे कहा जाएगा) खाओ और पियो भूलभुलैया से अपने उन आमाल के सिली में जो तुम करते रहे हो +[52:20] वो आमने-सामने बिछे हुए तख्तों पर तकिए (सोफे) लगाएंगे बैठे होंगे और हम खूबसूरत आंखों वाली हूरें उन्हें बियाह (शादी) देंगे +[52:21] जो लोग ईमान लाए हैं और उनकी औलाद भी कोई दरजा-ए-ईमान में उनके नक्श-ए-कदम पर चली है, उनकी औलाद को भी मैं (जन्नत में) उनके साथ मिला देंगे और उनके अमल में कोई घाटा (नुकसान) उनको ना देंगे। हर शक्स अपने क़स्ब के बदले में रहता है +[52:22] +[52:23] वहां वो एक दूसरे से जाम-ए-शराब लपक लपक कर ले रहे होंगे जिसमें न यावा-गोई (बीमार भाषण) होगी न बद-किरदारी +[52:24] और उनकी खिदमत में वो लड़के दौड़ते (दौड़ते हुए) फिर रहेंगे जो उनके लिए मखसूस होंगे, ऐसे खूबसूरत जैसे छुपा कर रखे हुए मोती (मोती) +[52:25] ये लोग आपस में एक दूसरे से (दुनिया में गुज़रे हुए) हालात पूछेंगे +[52:26] ये कहेंगे के हम पहले अपने घर वालों में डरते हुए जिंदगी बसर करते थे +[52:27] आखिर ए कार अल्लाह ने हम पर फजल फरमाया और हमने झुलसा देने वाली हवा के अजाब से बचा लिया +[52:28] हम पिछली जिंदगी में उसकी से दुआएं मांगते थे, वो वक्त बड़ा हाय मोहसिन (परोपकारी) और रहीम है +[52:29] पास ऐ नबी, तुम हिदायत किए जाओ, अपने रब के फजल से ना तुम कहीं (भविष्यवक्ता) हो और ना मजनूं (पागल) +[52:30] क्या ये लोग कहते हैं के ये शक्स शायर है जिसका हक़ में हम गर्दिश-ए-अय्याम (दुर्भाग्य) के इंतिज़ार कर रहे हैं +[52:31] इनसे कहो, अच्छा इंतिज़ार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतिज़ार करता हूं +[52:32] क्या इनकी अकालें ऐसी ही बातें करने के लिए कहती हैं? या दर-हकीकत ये इनाद (अपराध) में हद से गुज़रे हुए लोग हैं +[52:33] क्या ये कहते हैं कि इस शक्स ने ये क़ुरान ख़ुद ग़ाद (आविष्कृत/मनगढ़ंत) लिया है? असल बात ये है के ये ईमान नहीं लाना चाहते +[52:34] अगर ये अपने इस क़ौल (कहावत) में सच्चे हैं तो इसी शान का एक कलाम बना लें +[52:35] क्या ये किसी ख़लीक़ के बिना खुद पैदा हो गए हैं? या ये खुद अपने खालिक हैं +[52:36] या ज़मीन और आसमान को इन्हों ने पेदा किया है? असल बात ये है के ये यक़ीन नहीं रखते +[52:37] क्या तेरे रब के ख़ज़ाने इन के कब्ज़े में हैं? हां उन पर इनका हुकुम चलता है +[52:38] क्या इनके पास कोई सीढ़ी है जिसपर चढ़ कर ये इल्म-ए-बाला की सन-गन लेते हैं? उनमें से जिसने सूरज-गुन ली हो वो लाए को खुली दलील +[52:39] क्या अल्लाह के लिए तो हैं बेटियां और तुम लोगों के लिए हैं बेते (बेटे) +[52:40] क्या तुम इनसे कोई अजर मांगते हो की एह ज़बरदस्ती पड़ी हुई चट के बोझ तले दबे जाते हैं कर्ज के बोझ के साथ) +[52:41] क्या इनके पास गैब के हक़ीक़त का इल्म है कि उसकी बिना पर ये लिख रहे हूँ +[52:42] क्या ये कोई चाल चलना चाहता है? (अगर ये बात है) तो कुफ्र करने वालों पर इन की चाल उल्टी ही पड़ेगी +[52:43] क्या अल्लाह के सिवा ये कोई और माबूद रखते हैं? अल्लाह पाक है हमसे शिर्क से जो ये लोग कर रहे हैं +[52:44] ये लोग आसमान के टुकड़े भी गिरे हुए देख लें तो कहेंगे ये बादल हैं जो उम्मीद चले आ रहे हैं +[52:45] पास ऐ नबी, इन्हें इनके हाल पर छोड़ दो यहां तक ​​के ये अपने दिन को पाहुंच जाए जिसमें ये मार गिराए जाएंगे +[52:46] जिस दिन ना इनकी अपनी कोई चाल होगी इनका कोई काम आएगा ना कोई इनकी मदद को आएगा +[52:47] और हमारे वक्त के आने से पहले भी जालिमों के लिए एक अज़ाब है, मगर इनमें से अक्सर जानते नहीं हैं +[52:48] ऐ नबी, अपने रब का फैसला आने तक सब्र करो। तुम हमारी निगाह में हो. तुम जब उठो तो अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो +[52:49] रात को भी उसकी तस्बीह किया करो और सितारे जब पलटते हैं हमें वक्त भी + +Surah 53: An-Najm (The Star) +---------------------------------------- +[53:1] कसम है तारे की जबके वो गुरूब हुआ +[53:2] तुम्हारा रफीक (साथी) ना भटका है ना बहका (भ्रमित) है +[53:3] वो अपनी ख्वाहिश-ए-नफ्स से नहीं बोलता +[53:4] ये तो एक वही (प्रेरणा/रहस्योद्घाटन) है जो उसपर नाज़िल की जाती है +[53:5] उसे ज़बरदस्त क़ुव्वत वाले ने तालीम दी है +[53:6] जो बड़ा साहिब-ए-हिकमत है +[53:7] वो सामने आ खड़ा हुआ जबके वो बलाई उफुक़ पार था (क्षितिज का सबसे ऊंचा हिस्सा) +[53:8] फिर करीब आया और ऊपर मुअल्लक हो गया।(निकला और उतरा) +[53:9] यहां तक ​​के दो कमानों (धनुष की लंबाई) के बराबर या इसे कुछ कम फासला रह गया +[53:10] तब उसने अल्लाह के बंदे को वही (रहस्योद्घाटन) पाहुंचाई जो वही (रहस्योद्घाटन) भी उसे पाहुंचनी थी +[53:11] नजर ने जो कुछ देखा, दिल ने हमें झूठ ना मिलाया +[53:12] अब क्या तुम उस चीज़ पर उसके झगड़े हो जिसे वो आँखों से देखता है +[53:13] और एक मरतबा फिर उसने +[53:14] सिदरतुल मुंतहा के पास उसको (एंजेल जिब्रियल) देखा +[53:15] जहां पास ही जन्नत-उल-मावा है +[53:16] हमारा वक्त सिद्दरा पर चा रहा था जो कुछ कह रहा था +[53:17] निगाह ना चुन्धयी (वेवर / स्वर्व) ना हद से मुताजाविज (अपराध) हुई +[53:18] और उसने अपने रब की बड़ी बड़ी निशानियां देखी +[53:19] अब जरा बताओ, तुमने कभी इस लाट और इस उज्जा (बुतपरस्तों के नाम) मूर्तियां) +[53:20] और तीसरी (तीसरी) एक और देवी मानत की हकीकत पर कुछ गौर भी किया +[53:21] क्या बेटे (बेटे) तुम्हारे लिए हैं और बेटियां (बेटियां) खुदा के लिए +[53:22] ये तो बड़ी धांधली (अन्याय/अनुचित) की तकसीम हुई +[53:23] दरसल ये कुछ नहीं हैं मगर बस चांद नाम जो तुमने और तुम्हारे बाप दादा ने रख लिया है। अल्लाह ने इनके लिए कोई सनद नाज़िल नहीं की। हक़ीक़त ये है के लोग महेज़ वीहम-ओ-गुमान की जोड़ी कर रहे हैं और ख़्वाहिशात-ए-नफ़्स के मुरीद बने हुए हैं, हालंके उनके रब की तरफ से उनके पास हिदायत आ चुकी है +[53:24] क्या इंसान जो कुछ चाहे उसके लिए वही हक़ है +[53:25] दुनिया और आख़िरत का मालिक तो अल्लाह ही है +[53:26] आसमानों में कितने ही फ़रिश्ते मौजुद हैं, उनकी शफ़ाअत (हिम्मत) कुछ भी काम नहीं आ सकती जब तक अल्लाह किसी ऐसे शक्स के हक़ में उसकी इजाज़त न दे जिसके लिए वो कोई अर्ज़दाश्त (याचिका) सुनना चाहे और उसको पसंद करे +[53:27] मगर जो लोग आख़िरत को नहीं मानते वो फरिश्तों को देवियों (देवी) के नामो से मौसम करते हैं +[53:28] हलांके इस मामले का कोई इल्म (ज्ञान) उन्हें हासिल नहीं है। वो महज़ गुमान की जोड़ी कर रहे हैं, और गुमान हक़ की जगह कुछ भी काम नहीं दे सकते +[53:29] पास ऐ नबी, जो शक्स हमारे ज़िक्र से मुह फेरता है, और दुनिया की जिंदगी के सिवा जिसे कुछ मतलब नहीं है, उसे उसके हाल पर छोड़ दो +[53:30] इन लोगों का मबलाग-ए-इल्म (उनका अधिकतम ज्ञान) बस यही कुछ है, ये बात तेरा रब ही ज्यादा जानता है कि उसके रास्ते से कौन भटक गया है और कौन सीधे रास्ते पर है +[53:31] और जमीन और आसमान की हर चीज का मालिक अल्लाह ही है। ता-के अल्लाह बुराई करने वालों को उनके अमल का बदला दे और उन लोगों को अच्छी जजा से नवाजे जिन्हों ने नीक रवैय्या इख्तियार किया है +[53:32] जो बदे बदे गुनाहों और खुले खुले कबीह अफाल (शर्मनाक कृत्य) से परहेज़ करते हैं, इल्ला ये के कुछ कसूर उनसे सरज़ाद हो जाए। बिला शुभा तेरे रुब का दामन-ए-मगफिरत बहुत वासिह है। वो तुम्हें हमारे वक्त से खूब जानता है जब उसने जमीन से तुम्हें जन्म दिया, और जब तुम अपनी माँ के पेट में अभी भी जानिन (भ्रूण) हाय थाय। पस अपने नफ़्स की पाकी के दावे ना करो। वही बेहतर जानता है कि वक्ती मुत्तकी कौन है +[53:33] फिर ऐ नबी, तुमने उस शक्स को भी देखा जो राह-ए-खुदा से फिर गया +[53:34] और थोड़ा सा दे कर रुक गया +[53:35] क्या उसके पास गैब का इल्म है कि वो हकीकत को देख रहा है +[53:36] क्या उसने उन बातों की कोई खबर नहीं पहुंची जो मूसा के सहीफों +[53:37] और हमारे इब्राहिम के सहीफों में बयां हुई है जिसने वफा का हक़ अदा कर दिया +[53:38] ये के कोई बोझ उठाने वाला दूसरे का बोझ नहीं उठेगा +[53:39] और ये के इंसान के लिए कुछ नहीं है मगर वो जिसकी हमें सई (कोशिश/प्रयास) की है +[53:40] और ये के उसकी सई (कोशिश/प्रयास) अनकरीब देखी जाएगी +[53:41] और उसकी पूरी जजा उसे दी जाएगी +[53:42] और ये के आख़िर-ए-कार पहचानना तेरे रुब ही के पास है +[53:43] और ये के उसी ने हास्य और उसी ने रुलाया +[53:44] और ये के उसी ने मौत दी और उसी ने जिंदगी बख्शी +[53:45] और ये के उसी ने नर (पुरुष) और मादा (महिला) का जोड़ा पैदा किया +[53:46] एक बूंद (शुक्राणु-बूंद) से जब वो टपकती है +[53:47] और ये के दूसरी जिंदगी बक्शना भी उसी के ज़िम्मे है +[53:48] और ये के उसे ने गनी (समृद्ध) किया और जयदाद बख्शी +[53:49] और ये के वही शेरा (सीरियस) / ताकतवर सितारा) का रब है +[53:50] और ये के उसी ने अद-ए-ऊला (आद के लोगों) को हलाक किया +[53:51] और समूद को ऐसा मिटाया के उनमें से किसी को बाकी ना चोदा +[53:52] और उसने पहले क़ौम-ए-नूह को तबाह किया क्योंकि वो वो था हाय साख्त ज़ालिम-ओ-सरकश लोग +[53:53] और औंधी गिरने वाली बस्तियों को उठा फेंका। (कौम-ए-लुत) +[53:54] फिर चाहा दिया उनपर वो कुछ जो (तुम जानते ही हो के) क्या चा दिया +[53:55] पास ऐ मुखातिब, अपने रब की किन नियमों में तू शक्क करेगा +[53:56] ये एक तम्बीह (चेतावनी) है पहले आए हुए तंबीहात (चेतावनी) में से +[53:57] आने वाली घड़ी करीब आ लगी है +[53:58] अल्लाह के सिवा कोई उसको हटाने वाला नहीं +[53:59] अब क्या यही वो बातें हैं जिनपर तुम इजहार-ए-ताजुब करते हो +[53:60] हंसते (हंसते) हो और रोते (रोते) नहीं हो +[53:61] और गा (गायन) बजा कर इन्हें टालते हो +[53:62] झुक जाओ अल्लाह के आगे और बंदगी बजा लाओ (आयत-ए-सजदा) + +Surah 54: Al-Qamar (The Moon) +---------------------------------------- +[54:1] कयामत की घड़ी करीब आ गई और चांद फट गया +[54:2] मगर इन लोगों का हाल ये है कि ख्वा कोई निशानी देख लें मुंह मोड़ लेते हैं और कहते हैं ये तो चलता हुआ जादू है +[54:3] इन्हों ने (इसको भी) झूठला दिया और अपनी ख्वाहिश-ए-नफ़्स ही की जोड़ी है। हर मामले को आख़िर-ए-कार एक अंजाम पर पहुंचाना है +[54:4] लोगों के सामने (पिछले क़ौमों के) वो हालात आ चुके हैं जिनमें सरकशी से बाज़ रखने के लिए काफी सामान-ए-इब्रत है +[54:5] और ऐसी हिकमत जो हिदायत के मक़सद को बा-दरजा-ए-आतम (पूर्ण ज्ञान) पूरा करती है मगर तंबीहत (चेतावनी) इन पर कारगर नहीं होती +[54:6] पस ऐ नबी, इनसे रुख फेर लो। जिस रोज पुकारने वाला एक सख्त नागावार चीज की तरफ पुकारेगा +[54:7] लोग सहमत हुए (डाउन-कास्ट) निगाहों के साथ अपनी कब्रों से इस तरह निकलेंगे गोया वो बिखरी हुई टिड्डियां (टिड्डियां) हैं +[54:8] पुकारने वाले की तरफ दौड़े जा रहेंगे होंगे और वही मुनकिरेन (जो दुनिया में इसका इन्कार करते थे)उसे वक्त कहेंगे के ये दिन तो बड़ा कहिन है +[54:9] इनसे पहले नूह की क़ौम झूठला चुकी है। उनहों ने हमारे बंदे को झूठा करार दिया और कहा के ये दीवाना है, और वो बुरी तरह झिडका गया +[54:10] आखिर-ए-कार उसने अपने रुब को पुकारा के "मैं मगलूब हो चूका, अब तू इनसे इंतकाम ले" +[54:11] तब हमने मौसला-धार बारिश से आसमान के दरवाज़े खोल दिये और ज़मीन को फाड़ कर चश्में में तबदील कर दिया +[54:12] और ये सारा पानी उस काम को पूरा करने के लिए मिल गया जो मुकद्दर हो चूका था +[54:13] और नूह को हमने एक तख्त (तख़्त) और कीलों (कीलों) वाली पर सवार कर दिया +[54:14] जो हमारी निगरानी में चल रही थी। ये था बदला उस शक्स की खातिर जिसकी ना-कादरी की गई थी +[54:15] उस कश्ती को हमने एक निशानी बना कर छोड़ दिया, फिर कोई है हिदायत कबूल करने वाला +[54:16] देखलो, कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तम्बीहत (चेतावनी) +[54:17] हमने कुरान को हिदायत के लिए आसान ज़रिया बना दिया है, फिर क्या है कोई हिदायत क़बूल करने वाला +[54:18] आद ने झुटलाया, तो देखलो के कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तंबीहाट (चेतावनी) +[54:19] हमने एक पैहम नहुसत (निरंतर दुर्भाग्य) के दिन साख तूफानी हवा उन्पर भेज दी जो लोगों को उठा उठा कर इस तरह फेंक रही थी +[54:20] जैसे वो जड़ (जड़ें) से उखाड़े हुए खजूर के तनी (चड्डी) माननीय +[54:21] पास देखो के कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तम्बीहत (चेतावनी) +[54:22] हमने कुरान को हिदायत के लिए आसाना ज़रिया बना दिया है, फिर क्या है कोई हिदायत क़बूल करने वाला +[54:23] समूद ने तम्बीहत को झुटलाया +[54:24] और कहने लगे "एक अकेला आदमी जो हम ही में से है क्या अब हम उसके पीछे चलें? इसका इत्तिबाह हम कबूल करें तो इसके मानी ये होंगे के हम बहक गए हैं और हमारी अक्ल मारी गई है +[54:25] क्या हमारे दरमियान बस यहीं एक शक था जिसपर खुदा का जिक्र नाज़िल किया गया? नहीं, बलके ये पारले दर्जे का झूठा और बार-खुद गलत है” +[54:26] (हमने अपने पैगंबर से कहा) “कल ही इन्हें मालूम हुआ है के कौन पारले दर्जे का झूठा और बार खुद गलत है +[54:27] हम ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को इनके लिए फिटना बना कर भेज रहे हैं, अब जरा सब्र के साथ देख के इनका क्या अंजाम होता है +[54:28] इनको जता दे के पानी इनके और ऊंटनी (वह-ऊंटनी) के दरमियान तकसीम होगा और हर एक अपनी बारी के दिन पानी पर आएगा” +[54:29] आख़िर-ए-कार उन लोगों ने अपने आदमी को पुकारा और उसने इस काम का बेड़ा उठाया और ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को मार डाला +[54:30] फिर देख लो के कैसा था मेरा अज़ाब और कैसी थी मेरी तम्बीहत (चेतावनी) +[54:31] हमने बस एक ही धमाका छोड़ा और वो बड़े वाले की रोंधी हुई बाद के तरह भुस हो कर रह गया। (लो! हमने उन पर एक चिल्लाहट भेजी, और वे मवेशियों के बाड़े के निर्माता द्वारा (अस्वीकृत) सूखी टहनियों की तरह हो गए +[54:32] हमने कुरान को हिदायत के लिए आसान ज़रिया बना दिया है, अब है कोई हिदायत क़बूल करने वाला +[54:33] लूट की क़ौम ने तंबीहत को झुटलाया +[54:34] और हमने पत्थरो करने वाली हवा इस पर भेज दी। सिर्फ लुट के घर वाले उसे महफूज रहे +[54:35] उनको हमने अपने फजल से रात के पिछले पीहर बच्चा कर निकाल दिया। क़ौम के लोगों को हमारी पकड़ से ख़बरदार किया मगर वो सारी तंबीहत को मशकूक (संदिग्ध) समझ कर बातों में उड़ते रहे +[54:36] +[54:37] फिर उन्होन ने उसे अपने महमानो की हिफ़ाज़त से बाज़ रखने की कोशिश की। आख़िर-ए-कार हमने उनकी आंखें मूंद-दी (अंधा), के चक्खो अब मेरा अज़ाब और मेरी तम्बीहात का मज़ा +[54:38] सुबह सवेरे ही एक अटल अज़ाब ने उनको आ लिया +[54:39] चक्खो मजा अब मेरे अज़ाब का और मेरी तम्बीहात का +[54:40] हमने कुरान को है हिदायत के लिए आसान ज़रिया बना दिया है, पास है कोई हिदायत कबूल करने वाला +[54:41] और आल-ए-फिरौं के पास भी तम्बीहत आई थी +[54:42] मगर उनहों ने हमारी सारी निशानियों को झुटला दिया। आख़िर को हमने उन्हें पकड़ा जिसकी तरह कोई ज़बरदस्त क़ुदरत वाला पकड़ा है +[54:43] क्या तुम्हारे कुफ़र कुछ उन लोगों से बेहतर हैं? या आसमानी किताबों में तुम्हारे लिए कोई माफ़ी लिखी हुई है +[54:44] हां लोगों का कहना ये है कि हम एक मज़बूत जत्था (जमात) हैं, अपना बचाव कर लेंगे +[54:45] अंकरीब ये जत्था (जमात) सीख खा जाएगा और ये सब पीठ फिर कर भागते नजर आएंगे +[54:46] बलके इनसे निमत्ने के लिए असल वादे का वक्त तो कयामत है और वो बड़ी आफत और ज्यादा तल्ख-सा-अत (बड़ी साख और कड़वी चीज) है +[54:47] ये मुजरिम लोग दर हकीकत गलत फहमी में मुबतला हैं और इनकी अक्ल मारी गई है +[54:48] जिस रोज़ ये मुँह के बल आग में घसीटते जाएंगे हमें रोज़ इनसे कहा जाएगा के अब छक्खो जहन्नुम की गोद का मजा +[54:49] हमने हर चीज़ एक तकदीर के साथ अदा की है +[54:50] और हमारा हुकुम बस एक ही हुकुम होता है और पलक झपकाते (पलक झपकाते हुए) वो अमल में आ जाता है +[54:51] तुम जैसे बहुत-सून को हम हलक कर चुके हैं। फिर है कोई हिदायत क़बूल करने वाला +[54:52] जो कुछ इन्हों ने किया है वो सब दफ्तरों (कार्यालय) में दर्ज है +[54:53] और हर छोटी बड़ी बात लिखी हुई मौजुद है +[54:54] नफ़रमानी से परहेज करने वाले यकीनन बागों और नहरों में होंगे +[54:55] सच्ची इज्जत की जगह, बदले ज़ीह-इक़तेदार बादशाह के करीब + +Surah 55: Ar-Rahman (The Beneficent) +---------------------------------------- +[55:1] रहमान ने +[55:2] क्या कुरान की तालीम दी है +[55:3] उसी ने इंसान को पढ़ाया +[55:4] और उसे बोलना सिखाया +[55:5] सूरज और चांद एक हिसाब के बंधन हैं +[55:6] और तारे और दरख्त सब सजदा-रीज हैं +[55:7] आसमान को उसने बुलंद किया और मिजान कायम करदी +[55:8] इसका तकाजा ये है के तुम मिजान में खलाल न डालो +[55:9] इन्साफ के साथ ठीक-ठीक तोलो (तौलो) और तराजू में डंडी (कंजूस) ना मारो +[55:10] जमीन को उसने सब मखलूकत (जीव) के लिए बनाया +[55:11] उसमें हर तरह के ब-कसरत लजीज फल हैं, खजूर के दरख्त हैं जिनके फल गिलाफों (शीथ्स) में लिपटे हुए हैं +[55:12] तरह तरह के गैले (मकई) हैं जिनमें भूसा भी होता है और दाना (अनाज) भी +[55:13] पस ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की किन नियमों को झुठलाओगे +[55:14] इंसान को उसने ठीकरी (कुम्हार) जैसे सुखे सादे (सड़ा हुआ) हुए गैरे से बनाया (मिट्टी की तरह [उस] मिट्टी के बर्तन +[55:15] और जिन को आग की लपट से पेदा किया +[55:16] पस ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब के रिश्तेदार अजायब-ए-कुदरत को झूठलाओगे +[55:17] डोनो मशरिक और डोनो मगरिब, सब का मालिक-ओ-परवरदिगार वही है +[55:18] पस ऐ जिन्न-ओ-इंस, तुम अपने रब के किन किन कुदरतों को झुटलोगे +[55:19] दो समंदरों (समुद्रों) को उसने छोड़ दिया के बहम मिल जायें +[55:20] फिर भी उनके दरमियान एक परदा हयाल (बाधा) है जिसे वो तजावुज़ (अपराध) नहीं करते +[55:21] पस ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की क़ुदरत के किन करिश्माओं को झूठलाओगे +[55:22] समंदरों से मोती और मोंगे (कोरल) निकलते हैं +[55:23] पास ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की क़ुदरत के किन कमालात को झुठलाओगे +[55:24] और ये जहाज़ (जहाज) उसके हैं जो समंदर में पहाड़ों (पहाड़ों) की तरह ऊंचे उठे हैं +[55:25] पास ऐ जिन्न-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब के साथ एहसानात को झुठलाओगे +[55:26] हर चीज़ जो इस ज़मीन पर है फ़ना (नाश) हो जाने वाली है +[55:27] और सिर्फ तेरे रुब की जलील-ओ-करीम ज़ात ही बाकी रहने वाली है +[55:28] पास ऐ जिन्न-ओ-इंस (इंसान), तुम अपने रब के कुदरतों के साथ कमाल से झूठ बोलोगे +[55:29] ज़मीन और आसमान में जो भी है सब अपनी हाजतें (ज़रूरतें) उसी से मांग रहे हैं, हर आन वो नई शान में है +[55:30] पास ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की किन-किन सिफत-ए-हमीदा को झुठलाओगे +[55:31] ऐ ज़मीन के बोझो(भार), अनकरीब हम तुमसे बाज़ पुर्स (सवाल करते हुए) करने के लिए फ़ारिग़ हुए जाते हैं +[55:32] (फिर देख लेंगे के) तुम अपने रुब के किन किन एहसानात को झुटलाते हो +[55:33] ऐ गिरो-ए-जिन्न-ओ-इन्सा (इंसान), गर तुम ज़मीन और आसमान की सरहदों से निकल कर भाग सकते हो तो भाग देखो, नहीं भाग सकते इसके लिए बड़ा ज़ोर चाहिए +[55:34] अपने रब की किन किन क़दरतों को तुम झूठलाओगे +[55:35] (भागने की कोशिश करोगी तो) तुमपर आग का शोला और धुआं (धुआं) छोड़ दिया जाएगा जिसका तुम मुकाबला ना कर सकोगे +[55:36] पस ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), तुम अपने रब की तरह कुदरतों का इंकार करोगी +[55:37] फिर (क्या बनेगा हमारा वक्त) जब आसमां फटेगा (बंटवारा) और लाल चामदे (त्वचा) की तरह सुर्ख (लाल) हो जाएगा +[55:38] ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान) (हम वक्त) तुम अपने रब की रिश्तेदार कुदरतों को झुटलाओगे +[55:39] हमें रोज किसी इंसान और किसी जिन से उसका गुनाह पूछने के लिए जरूरी न होगी +[55:40] फिर (देख लिया जाएगा के) तुम दोनो गिरो ​​अपने रब के साथ एहसानात का इंकार करते हो +[55:41] मुजरिम वहां अपने चेहरों से पहचान के लिए जाएंगे और उन्हें पेशानी के बाल और पांव पकड़ पकड़ कर घसीटा जाएगा +[55:42] हमें वक्त तुम अपने रुब की तरह कुदरतों को झुठलाओगे +[55:43] (हमें वक्त कहा जाएगा) ये वही जहन्नुम है जिसको मुजरीमीन झूठ करार दिया करते थे +[55:44] उसी जहन्नुम और खौलते (उबलते) पानी के दरमियान वो गर्दिश करते रहेंगे +[55:45] फिर अपने रुब की किन किन कुदरतों को तुम झुठलाओगे +[55:46] और हर उस शक्स के लिए जो अपने रुब के हुजूर पेश होने का खौफ (डर) रखता हो, दो बाग (बगीचे) हैं +[55:47] अपने रुब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे +[55:48] हरी भरी डालियों से भरपुर +[55:49] अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे +[55:50] दोनों बागों में दो चश्मे (झरने) रावन +[55:51] अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे +[55:52] दोनों बागों में हर फल की दो क़िस्में +[55:53] अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुटलाओगे +[55:54] जन्नती लोग ऐसे फरशोन पर तकिये लगा के बैठेंगे जिनके अस्तर दबीज रेशम (रेशम ब्रोकेड) के होंगे, और बागों की डालियां फालों से झुकी पढ़ रही होंगी +[55:55] अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे +[55:56] नियामतों के दरमियां शर्मिली निगाहों वलियों होंगी जिन्हे जन्नतियों से पहले कोई इंसान या जिन्न ने चुवा न होगा +[55:57] अपने रब के किन किन-किन इनामों को तुम झूठलाओगे +[55:58] ऐसी खूबसूरत जैसी हीरे (हीरे) और मोती +[55:59] अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झूठलाओगे +[55:60] नेकी का बदला, नेकी के सिवा और क्या हो सकता है +[55:61] फिर ऐ जिन-ओ-इन्स (इंसान), अपने रब के रिश्तेदारों का इनाम-ए-हमीदा का तुम इंकार करोगी +[55:62] और उन दो बाघों के अलावा दो बाग और होंगे +[55:63] अपने रुब के रिश्तेदारों का इनाम करो तुम झूठलाओगे +[55:64] घने सर-सब्ज़ ओ शादाब बाग +[55:65] अपने रुब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे +[55:66] दोनो बागों में दो चश्में (झरनों) फव्वारों की तरह उबलते (उबलते) हुए +[55:67] अपने रुब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे +[55:68] उन में बा-कसरत फल और खजूरें और अनार (अनार) +[55:69] अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे +[55:70] नियामतों के दरमियान में खूब सीरत और खूबसूरत बीवियां +[55:71] अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे +[55:72] खीमो (टेंट) में ठहरी हुई हूरें (लड़कियां) +[55:73] अपने रुब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे +[55:74] जन्नतियों से पहले कभी किसी इंसान ने या जिन्न ने उनको न छुआ (स्पर्श) होगा +[55:75] अपने रुब के किन-किन इनाम को तुम झुटलाओगे +[55:76] वो जन्नती सब्ज़-क़लीनो (हरी गद्दियाँ) और नफीस ओ नादिर फरशोन (खूबसूरत कालीन) पर तकिए लगा के बैठेंगे +[55:77] अपने रब के किन किन इनामों को तुम झुठलाओगे +[55:78] बड़ी बरकत वाला है तेरे रुब-ए-जलील-ओ-करीम (महिमा और महिमा) का नाम + +Surah 56: Al-Waqi'ah (The Event) +---------------------------------------- +[56:1] जब वो होने वाला वाकिया पेश आ जाएगा +[56:2] तो कोई उसके वक्ह (घटना) को झूठलाने वाला न होगा +[56:3] वो ताह-ओ-बाला (पास्त और बुलंद) करदेने वाली आफत होगी +[56:4] ज़मीन हमें वक़्त एक बार ही हिला डाली जाएगी +[56:5] और पहाड़ इस तरह रज़ा रेज़ा करदिये जायेंगे +[56:6] के परगंदा (बिखरा हुआ) गुबर (धूल) बन कर रह जायेंगे +[56:7] तुम लोग हम वक़्त तीन गिरोहों (जमात) में तकसीम हो जाओगे +[56:8] दयेन बाज़ू वाले, तो दिनें बाज़ू वालों (के खुश-नसीबी) का क्या कहना +[56:9] और बाज़ू वाले, तो बाज़ू वालों (की बदनसीबी का) क्या ठिकाना +[56:10] और आगे वाले तो फिर आगे वाले ही हैं +[56:11] वही तो मुकर्रब (अल्लाह के सबसे करीब) लोग हैं +[56:12] नियामत भारी जन्नतों में रहेंगे +[56:13] अगलों में से बहुत होंगे +[56:14] और पिचलों में से कम +[56:15] मुरास्सा तखतों पर (सजे हुए सिंहासन पर) +[56:16] ताकिये लगायें आमने सामने बैठेंगे +[56:17] उनकी मजलिसों में आबादी लड़के शराब-ए-चश्मा-ए जारी से +[56:18] लब्रेज़ प्याले और कंतर (जुग) और सागर के लिए दौड़ते फिरते होंगे +[56:19] जिसे पी कर ना उनका सर चकराएगा ना उनका अक्ल में फतूर (नशे की लत) आएगा +[56:20] और वो उनके सामने तरह के लज़ीज़ फल (फल) पेश करेंगे जिसे चाहे चुन ले +[56:21] और परिन्दों के गोश्त पेश करेंगे के जिस परिंदे का चाहे इस्तिमाल करें +[56:22] और उनके लिए खुबसूरत आंखों वाली हूरें होंगी +[56:23] ऐसी हसीं जैसे छुपा कर रखे हुए मोती +[56:24] ये सब कुछ उन अमल की जजा के तौर पर उन्हें मिलेगा जो वो दुनिया मैं करते रहे थे +[56:25] वहां वो कोई बेहद कलाम या गुनाह की बात न सुनेंगे +[56:26] जो बात भी होगी ठीक ठीक होगी +[56:27] और दायें बाजू वाले, दायें बाजू वालों की खुश नसीब का क्या कहना +[56:28] वो बे-खर (कांटा रहित) बेरियों (लोटे के पेड़) +[56:29] और तेह बार तेह चढ़े हुए केलों (केले) +[56:30] और दूर तक फैली हुई छाँव (छाया) +[56:31] और हर दम रावन (घूसते हुए) पानी +[56:32] और कभी ख़तम न होने वाले +[56:33] और बे रोक-टोक मिलने वाले बा-कसरत फलन (फल) +[56:34] और ऊंची निशिस्ट गाहों (ऊंचे सिंहासन) में होंगे +[56:35] उनकी बिवियों को हम खास तौर पर नए सिरे से पैदा करेंगे +[56:36] और उन्हें बकीरा (कुंवारी) बना देंगे +[56:37] अपने शोहरों कि आशिक और उमर में हमसिन (समान उम्र) +[56:38] ये कुछ दिन बाज़ू वालों के लिए हैं +[56:39] वो एगलों में से बहुत होंगे +[56:40] और पिचलों में से भी बहुत +[56:41] और बाएँ (बाएँ) बाज़ू वाले, बाएँ बाज़ू वालों की बदनसीबी का क्या पूछना +[56:42] वो लू की लपट (चिलचिलाती हवा के बीच) और खुलते (उबलते) हुए पानी +[56:43] और काले धुएं (धुआं) के साये में होंगे +[56:44] जो ना ठंडा होगा ना आराम दे +[56:45] ये वो लोग होंगे जो इस अंजाम को पहनेंगे से पहले खुश हाल थे +[56:46] और गुनाह-ए-अज़ीम पर इसरार करते थे +[56:47] कहते थे "क्या जब हम मर कर खाक हो जाएंगे और हदियों का पंजर रह जाएंगे तो फिर उठ खड़े होंगे +[56:48] और क्या हमारे वो बाप दादा भी उठेंगे जो पहले गुज़र चुके हैं?” +[56:49] ऐ नबी इन लोगों से कहो, यकीनन अगले और पिछले सब +[56:50] एक दिन जरूर जमा किए जाने वाले हैं जिसका वक्त मुकर्रर किया जा चुका है +[56:51] फिर ऐ गुमराहों और झूठलाने वालों +[56:52] तुम शजर-ए-जक्कम की गीज़ा खाने वाले हो +[56:53] उसी से तुम पैठ भरोगे +[56:54] और ऊपर से खौलता (उबलता हुआ) हुआ पानी +[56:55] टोंस (प्यास) लगे हुए ऊंट (ऊंट) की तरह पियोगी +[56:56] यहीं बैठें वालों की ज़ियाफत का सामान रोज-ए-जजा में +[56:57] हमने तुम्हें भुगतान किया है फिर क्यों तस्दीक (पुष्टि) नहीं करते +[56:58] कभी तुमने गौर किया, ये नुत्फा (शुक्राणु) जो तुम डालते हो +[56:59] उसे बच्चा तुम बनाते हो या उसके बनाने वाले हम हैं +[56:60] हमने तुम्हारे दरमियान मौत को तकसीम किया है, और हम इसे अजीज नहीं है +[56:61] के तुम्हारी शकलें बदल दें और किसी ऐसी शक्ल में तुम्हें पैदा कर दें जिसको तुम नहीं जानते +[56:62] अपनी पहली अदाइश को तो तुम जानते हो, फिर क्यों सबक नहीं लेते +[56:63] कभी तुमने सोचा, ये बीज (बीज) जो तुम बोते हो +[56:64] इनसे खेतियां तुम उगते हो या उनके उगने वाले हम हैं +[56:65] हम चाहें तो उन खेतों को भूस (मलबा) बना कर रख दें और तुम तरह-तरह की बातें बनाते रह जाओ +[56:66] के हम पर तो उल्टी चाटी पड़ गई (लो! हम कर्ज से दबे हुए हैं) +[56:67] बलके हमारे तो नसीब ही फूटे हुए हैं +[56:68] कभी तुमने आंखें खोल कर देखा, ये पानी जो तुम पीते हो +[56:69] इसे तुमने बादलों से बरसाया है या इसके बरसाने वाले हम हैं +[56:70] हम चाहें तो isey सच खरी (कड़वा) बना कर रख दें, फिर क्यों तुम शुकर गुजर नहीं होते +[56:71] कभी तुमने ख्याल किया, ये आग जो तुम सुलगते हो +[56:72] इसका दर्द तुम ने पेदा किया है या इसके पेदा करने वाले हम हैं +[56:73] हमने उसको याद-दिहानी (रिमाइंडर) का ज़रिया और हाजत-मंदों (जरूरतमंद) के लिए सामान-ए-ज़ीस्ट (प्रावधान) बनाया है +[56:74] पास ऐ नबी, अपने रब-ए-अज़ीम के नाम की तस्बीह करो +[56:75] पास नहीं मैं कसम खाता हूं तारों के मवाके, आदि) की +[56:76] अगर तुम समझो तो ये बहुत बड़ी क़सम है +[56:77] के ये एक बुलंद पाया कुरान है +[56:78] एक महफ़ूज़ किताब में सब्त (लिखा हुआ) +[56:79] जिसे मुतहरीन (शुद्ध) के सिवा कोई छू नहीं सकता +[56:80] ये रब्ब-उल-आलमीन का नाज़िल करदा है +[56:81] फिर क्या इस कलाम के साथ तुम बे-अतनयी (उदासीन) बारात-ते हो +[56:82] और इस नियामत में अपना हिसा तुमने ये रक्खा है के इसी झूठलाते हो +[56:83] तो जब मरने वाले की जान हलक तक पहुंच चुकी होती है है +[56:84] और तुम आँखों से देख रहे हो के वो मर रहा है +[56:85] हमें वक्त तुम्हारे ब-निस्बत हम उसके ज्यादा करीब होते हैं मगर तुमको नजर नहीं आती +[56:86] अब अगर तुम किसी के महकूम नहीं हो और अपने इस ख्याल में सच्चे हो +[56:87] हमें वक्त उसकी निकलती हुई जान को वापस क्यों नहीं ले आते +[56:88] फिर वो मरने वाला अगर मुकर्रबीन (अल्लाह के करीब) में से हो +[56:89] तो उसके लिए राहत और उम्र रिज़क और नियामत भरी जन्नत है +[56:90] और अगर वो अशाब-ए-यमीन में से हो +[56:91] तो उसका इस्तकबाल (स्वागत) यूं होता है के सलाम है तुझ, तू असहाब-उल-यमीन (दाहिनी ओर के लोग) में से है +[56:92] और अगर वो झूठलाने वाले गुमराह लोगों में से हो +[56:93] तो उसकी तवाज़ू के लिए खौलता (उबलता हुआ) पानी है +[56:94] और जहन्नुम में झोंका जाना +[56:95] ये सब कुछ कताई हक़ है +[56:96] पास ऐ नबी अपने रुब-ए-अज़ीम के नाम की तस्बीह करो + +Surah 57: Al-Hadid (Iron) +---------------------------------------- +[57:1] अल्लाह की तस्बीह है हर उस चीज़ ने जो ज़मीन और आसमान में है, और वही ज़बरदस्त दाना (बुद्धिमान) है +[57:2] ज़मीन और आसमान की सल्तनत का मालिक वही है, ज़िंदगी बक्शता है और मौत देता है, और हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है +[57:3] वही अव्वल भी है और आख़िर भी, और ज़ाहिर भी है और मख़फ़ी (हिद्दीन) भी, और वो हर चीज़ का इल्म रखता है +[57:4] वही है जिसने आसमान और ज़मीन को (छह) दिनों में पेदा किया और फिर अर्श पर जलवा फरमा हुआ। उसके इल्म में है जो कुछ ज़मीन में जाता है और जो कुछ उसे निकलता है, और जो कुछ आसमान से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है। वो तुम्हारे साथ है जहाँ भी तुम हो। जो काम भी करते हो उसे वो देख रहा है +[57:5] वही ज़मीन और आसमान की बादशाही का मालिक है और तमाम मामले फैसले के लिए उसकी तरफ रूजू किये जाते हैं +[57:6] वही रात को दिन में और दिन को रात में दाख़िल करता है, और दिलों को के छुपे हुए राज़ तक जानता है +[57:7] ईमान लाओ अल्लाह और उसके रसूल पर और ख़र्च करो उन चीज़ों में से जिनपर उसने तुमको ख़लीफ़ा बनाया है। जो लोग तुम में से ईमान लाएंगे और माल खर्च करेंगे उनके लिए बड़ा अजर है +[57:8] तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह पर ईमान नहीं लाते हालंके रसूल तुम्हें अपने रब पर ईमान लाने की दावत दे रहा है, और वो तुमसे अहद (संविदा) ले चूका है, अगर तुम वकायी मानोगे वाले हो +[57:9] वाह अल्लाह हाय तो है जो अपने बंदे पर साफ साफ आयतें नाज़िल कर रहा है ता-के तुम्हें तारीख़ों (अंधेरे) से निकाल कर रोशनी में ले आये। और हक़ीक़त ये है के अल्लाह तुमपर निहायत शफ़ीक़ और मेहरबान है +[57:10] आख़िर क्या वजह है कि तुम अल्लाह की राह में ख़र्च नहीं करते, ज़मीन और आसमान की मीरास (विरासत) अल्लाह ही के लिए है। तुम में से जो लोग फतह के बाद खर्च और जिहाद करेंगे वो कभी उन लोगों के बराबर नहीं हो सकते जिन्होन ने फतह से पहले खर्च और जिहाद किया है। जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बा-ख़बर है +[57:11] कौन है जो अल्लाह को क़र्ज़ दे? अच्छा क़र्ज़ ता-के अल्लाह उसे कै गुनाह बड़ा कर वापस दे। और उसके लिए बेहतरीन अजर है +[57:12] उस दिन जबके तुम मोमिन मर्दन और औरतों को देखोगे के उनका नूर उनके आगे आगे और उनके दिन जानिब दौड़ रहा होगा (उन्हें कहा जाएगा के) आज बशारत (खुशखबरी) है। तुम्हारे लिए जन्नतें होंगी जिनके बारे में खास बातें नहीं होंगी, जिन में वो हमेशा रहेंगे। यही है बड़ी कामयाबी +[57:13] हमें रोज़ मुनाफिक मर्दों और औरतों का हाल ये होगा के वो मोमिनो से कहेंगे ज़रा हमारी तरफ देखो ता-के हम तुम्हारे नूर से कुछ फ़ायदा उठायें। मगर उनसे कहा जाएगा पीछे हट जाओ, अपना नूर कहीं और तलाश करो। फिर उनके दरमियान एक दीवार होल करदी जाएगी जिसमें एक दरवाजा होगा उस दरवाज़े के अंदर रहमत होगी और बाहर अज़ाब +[57:14] वो मोमिनो से पुकार पुकार कर कहेंगे क्या हम तुम्हारे साथ ना थे? मोमिन जवाब देंगे हां, मगर तुमने अपने आप को खुद फिटने में डाला, मौका परस्त की, शक्क में पड़े रहे, और झूठी तवक्कुअत (उम्मीदें) तुम्हें फरेब देती रही यहां तक ​​के अल्लाह का फैसला आ गया। और आखिरी वक्त तक वो बड़ा धोखा बाज़ तुम्हें अल्लाह के मामले में धोखा देता रहा +[57:15] लिहाज़ा आज ना तुमसे कोई फ़िदिया कबूल किया जाएगा और ना उन लोगों से जिन्हों ने खुला खुला कुफ्र किया था। तुम्हारा ठिकाना जहन्नुम है. वही तुम्हारी खबर-गीरी करने वाली है और ये बद्तरीन अंजाम है +[57:16] क्या ईमान लाने वालों के लिए अभी वो वक्त नहीं आया के उनके दिल अल्लाह के जिक्र से पिगलें और उसके नाज़िल करदा हक के आगे झुकें और वो उन लोगों की तरह न हो जाएं जिन्हें पहली किताब दी गई थी, फिर एक लंबी मुद्दत उन पर गुजर गई तो उनका दिल सख्त हो गया और आज उनमें से अक्सर फासीक बने हुए हैं +[57:17] खूब जान लो के अल्लाह जमीन को उसकी मौत के बाद जिंदगी बक्शता है, हमने निशानियां तुमको साफ साफ दिखाया है, शायद के तुम अक़ल से काम लो +[57:18] मर्दन और औरतों में से जो लोग सदक़ात (दान) देने वाले हैं और जिन्होन ने अल्लाह को कर्ज़-ए-हसन दिया है, उनको यकीन कई गुनाह कर दिया जाएगा और उनके लिए बेहतरीन अजर है +[57:19] और जो लोग अल्लाह और उसके रसूलन पर ईमान लाए हैं वही अपने रब के नाज़दीक सिद्दीक और शहीद हैं। उनके लिए उनका अजर और उनका नूर है। और जिन लोगों ने कुफ़्र किया है और हमारी आयतों को झुटलाया है वो दोज़खी है +[57:20] खूब जान लो के ये दुनिया की जिंदगी इसके सिवा कुछ नहीं के एक खेल और दिल-लगी और जाहिरी टिप टॉप और तुम्हारे आपस में एक दूसरे पर फक्र जताना और माल-ओ-औलाद में एक दूसरे से बढ़कर जाने की कोशिश करना है।इसकी मिसाल ऐसी है जैसी एक बारिश हो गई तो उसे पैदा होने वाली नबातात (वनस्पति) को देख कर काश्त-कार (किसान) खुश हो गई। फिर वही खेती पक जाती है और तुम देखते हो कि वो जर्द (पीली) हो गई है फिर वो भूस (चूरा चुरा/उखड़ जाती है) बनकर रह जाती है। इस्के बराक्स आख़िरत वो जगह है जहाँ सख्त अज़ाब है और अल्लाह की मगफिरत और उसकी खुशनुदी है। डंक्या की जिंदगी एक धोखे के टट्टी (धोखे का मतलब) के सिवा कुछ नहीं +[57:21] दौड़ो (रेस) और एक दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश करो अपने रब की मगफिरत और उसकी जन्नत की तरफ जिसकी वुस्सत (चौड़ाई) आसमान-ओ-जमीन जैसी है। जो मुहैय्या हो गई है उन लोगों के लिए जो अल्लाह और उसके रसूलन पर ईमान लाए हों। ये अल्लाह का फ़ज़ल है, जिसे चाहता है अता फ़र्माता है, और अल्लाह बदे फ़ज़ल वाला है +[57:22] कोई मुसीबत ऐसी नहीं है जो ज़मीन में या तुम्हारे अपने नफ़्स पर नाज़िल होती हो और हमने उसको अदा करने से पहले एक किताब में लिख न रखा हो। ऐसा करना अल्लाह के लिए बहुत आसान काम है +[57:23] (ये सब कुछ इसलिए है) ता-के जो कुछ भी नुक्सान तुम्हें हो उस पर तुम दिल-शिकस्ता (शोक) न हो और जो कुछ अल्लाह तुम्हें अता फरमाये उसपर फूल ना जाओ। अल्लाह ऐसे लोगों को पसंद नहीं करता जो अपने आप को बड़ी चीज समझता है और फक्र जताता है +[57:24] जो खुद बुखल (निगार्ड/कंजुसी) करते हैं और दूसरों को बुखल पर उक्साते हैं। अब अगर कोई रु-गर्दनी (मुंह फेरना) करता है तो अल्लाह के लिए बे-नियाज़ और सातोदा सिफत (बेहद प्रशंसनीय) है +[57:25] हमने अपने रसूलों को साफ-साफ निशानियां और हिदायत के साथ भेजा, और उनके साथ किताब और मिज़ान (संतुलन) नाज़िल की ताकाय लोग इन्साफ पर कायम माननीय और लोहा (आयरन) उतारा जिसमें बड़ा ज़ोर है और लोगों के लिए मुनाफ़ा है। ये इसलिए किया गया है कि अल्लाह को मालूम हो जाए कि कौन उसको देखे बिना उसकी और उसके रसूलों की मदद करता है। यकीनन अल्लाह बड़ी कुव्वत वाला और ज़बरदस्त है +[57:26] हमने नूह और इब्राहीम को भेजा और उन दोनों की नाक में नबुवत और किताब रख दी फिर उनकी औलाद में से किसी ने हिदायत इख्तियार की और बहुत से फासिक हो गए +[57:27] उनके बाद हमने पै डर पै (उत्तराधिकार) अपने रसूल भेजे, और सबके बाद ईसा इब्न-ए-मरियम को माबूस किया और उसको इंजील अता की, और जिन लोगों ने उसकी जोड़ी इख्तियार की उनके दिलों में हमने तरस (कोमलता) और रहम डाल दिया। और रहबनियात (मठवाद) उन्होन ने खुद इजाद करली, हमने उसे अनपर फर्ज नहीं किया था। मगर अल्लाह की ख़ुशनुदी की तालाब में उन्होन ने आप ही ये बिदात निकाली और फिर इसकी पबन्दी करने का जो हक़ था उसे अदा ना किया। उनमे से जो लोग ईमान लाए हुए थे उनका अजर हमने उनको अता किया, मगर उनमे से अक्सर लोग फासीक हैं +[57:28] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो और उसके रसूल पर ईमान लाओ। अल्लाह तुम्हें अपनी रहमत का दोहरा हिसा अता फरमाएगा और तुम्हें वही नूर बख्शेगा जिसकी रोशनी में तुम चलोगे, और तुम्हारे कसूर माफ कर देंगे। अल्लाह बड़ा माफ करने वाला और मेहरबान है +[57:29] (तुमको ये रवीश इख्तियार करनी चाहिए) ता-के एहले किताब को मालूम हो जाए के अल्लाह के फज़ल पर उनका कोई इजारा (नियंत्रण/इख्तियार) नहीं है, और ये के अल्लाह का फजल उसके अपने ही हाथ में है, जिसे चाहता है अता फरमाता है। और वो बदे फ़ज़ल (इनाम) वाला है + +Surah 58: Al-Mujadilah (The Pleading Woman) +---------------------------------------- +[58:1] अल्लाह ने सुन लिया हमें औरत की बात जो अपने शोहर के मामले में तुमसे तकरार कर रही है और अल्लाह से फरियाद की जाती है। +[58:2] तुम में से जो लोग अपनी बीवियों से ज़िहार (अपनी पत्नियों को अपनी मां घोषित करके तलाक दे देते हैं) करते हैं उनकी बीवियां उनकी मां नहीं हैं। उनकी मांएं तो वही हैं जिन्हों ने उनको जाना है। ये लोग एक सच्चा साथी और झूठी बात कहते हैं। और हक़ीक़त ये है के अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला और दरगुज़र फ़रमाने वाला है +[58:3] जो लोग अपनी बीवीयों से ज़िहार करें फिर अपनी हमसे बात से रूजू (वापस जाने के लिए) करें जो उन्होन ने कही थी, तो कबूल इसके के दोनों एक दूसरे को हाथ लगायें, एक गुलाम आज़ाद करना होगा. इस्से तुमको हिदायत की जाती है, और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बख़बर है +[58:4] और जो शक्स गुलाम ना पाए वो दो माहीन के पै डर पै (लगातार) रोज़े रक्खे क़बल इसके के दोनों एक दूसरे को हाथ लगायें और जो इसपर भी कादिर ना हो वो 60 मिस्किनो को खाना खिलाये. ये हुकुम इसलिए दिया जा रहा है कि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ। ये अल्लाह की मुकर्रर की हुई हदें (सीमाएं) हैं, और काफिरों के लिए दर्दनाक सजा है +[58:5] जो लोग अल्लाह की और उसके रसूल की मुखालफत करते हैं वो उसकी तरह ज़लील-ओ-ख़्वार कर दिए जाएंगे जिस तरह उनसे पहले के लोग ज़लील-ओ-ख़्वार किए जा चुके हैं। हमने साफ साफ आयतें नाज़िल कर दी हैं, और काफिरों के लिए ज़िल्लत का अज़ाब है +[58:6] उस दिन (ये ज़िल्लत का अज़ाब होना है) जब अल्लाह सबको फिर से जिंदा करके उठाएगा और यहीं बता देगा के वो क्या कुछ करके आए हैं। वो भूल गए हैं मगर अल्लाह ने सबका किया धारा गिन-गिन कर महफूज़ कर रखा है। और अल्लाह एक चीज़ पर शाहिद (गवाह) है +[58:7] क्या तुमको खबर नहीं है कि ज़मीन और आसमान की हर चीज़ का अल्लाह को इल्म है? कभी ऐसा नहीं होता के तीन आदमियों में कोई सरगोशी हो (चौथा) अल्लाह न हो, या पांच आदमियों में सरगोशी हो और उनके अंदर चट्टा (छठा) अल्लाह न हो, खुफिया बात करने वाला ख्वा इसे कम हो या ज्यादा जहां कहीं भी वो हो, अल्लाह उनके साथ होता है. फिर कयामत के रोज़ वो उनको बता देगा के अनहोन ने क्या कुछ किया है। अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है +[58:8] क्या तुमने देखा नहीं उन लोगों को जिन्होंने सरगोशियां करने से मन करदिया गया था फिर भी वो वही हरकत किए जाते हैं जैसे उन्हें मन किया गया था? ये लोग चुप चुप कर आपस में गुनाह और ज्यादती और रसूल की नफ़रमानी की बातें करते हैं। और जब तुम्हारे पास आते हैं तो तुम्हें हमारी तरफ से सलाम करते हैं जिस तरह अल्लाह ने तुम्हारे पास सलाम नहीं किया है, और अपने दिलों में कहते हैं "हमारी इन बातों पर अल्लाह हमें अज़ाब क्यों नहीं देता"। उनके लिए जहन्नुम ही काफी है, उसका वो इंधन (ईंधन) बनेगा, बड़ा ही बुरा अंजाम है उनका +[58:9] ऐ लोग जो ईमान लाए हो जब तुम आपस में पोशिदा बात करो तो गुनाह और ज्यादती और रसूल की नफरमानी की बातें नहीं, बल्कि नेकी और तकवा की बातें करो और हमसे खुदा से डरते रहो जिसके हुजूर तुम्हें हश्र में पेश होना है +[58:10] काना-फूसी (फुसफुसाते हुए) तो एक शैतानी काम है, और वो इस्ली की जाति है के ईमान लेन वाले लोग उससे रंजीदा होन, हालंके बे-इज़ान-ए-खुदा (अल्लाह की इच्छा को छोड़कर) वो उन्हें कुछ भी नुक्सान नहीं पाहुंचा सकती, और मोमिनो को अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए +[58:11] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुमसे कहा जाए के अपनी मजलिसों में जगह बनाओ तो जगह बनाओ, अल्लाह तुम्हें कुशादगी बख्शेगा। और जब तुमसे कहा जाए के उठ जाओ तो उठ जया करो, तुम में से जो लोग ईमान रखने वाले हैं और जिनको इल्म बख्शा गया है, अल्लाह उनको बुलंद दर्जे अता फरमाएगा। और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह को उसकी खबर है +[58:12] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब तुम रसूल से तख्लिए (गोपनीयता) में बात करो तो बात करने से पहले कुछ सदका दो। ये तुम्हारे लिए बेहतर और पाकीजा-तार है। अलबत्ता अगर तुम सदका देने के लिए अल्लाह गफूर-ओ-रहीम के लिए कुछ न पाओ +[58:13] क्या तुम डर गए इस बात से (गोपनीयता) में गुफ्तगू करने से पहले तुम्हें सदका देने होंगे? अच्छा, अगर तुम ऐसा न करो और अल्लाह ने तुमको इसे माफ कर दिया तो नमाज़ कायम करते रहो, ज़कात देते रहो और अल्लाह और उसके रसूल की इबादत करते रहो। तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसे बख़बर है +[58:14] क्या तुमने देखा नहीं उन लोगों को जिन्हों ने दोस्त बनाया है एक ऐसे गिरोह (लोगों) को जो अल्लाह का मगज़बान (क्रोध) है? वो ना तुम्हारे हैं ना उनके, और वो जान बूझ कर झूठी बात पर कसमें खाते हैं +[58:15] अल्लाह ने उनके लिए खुद अज़ाब मुहैय्या कर रखा है। बड़े ही बुरे कलाकार हैं जो वो कर रहे हैं +[58:16] उन्होन ने अपनी कसमों को ढाल बना रखा है जिसकी आड़ में वो अल्लाह की राह से लोगों को रोकते हैं। इसपर उनके लिए ज़िल्लत का अज़ाब है +[58:17] अल्लाह से बचने के लिए ना उनके माल कुछ काम आएंगे ना उनकी औलाद। वो दोज़ख़ के यार हैं, उसमें वो हमेशा रहेंगे +[58:18] जिस रोज़ अल्लाह उन सबको उठाएगा, वो उसके सामने भी उसकी तरह कसमें खाएंगे, जिस तरह तुम्हारे सामने खड़े हैं, और अपने नज़दीक ये समझेंगे के इस तरह उनका कुछ काम बन जाएगा। ख़ूब जान लो वो पारले दराज़ के झूठे हैं +[58:19] शैतान उस पर मुसल्लत हो चूका है और उसने खुदा की याद उनके दिल से भुला दी है।वो शैतान की पार्टी के लोग हैं। ख़बरदार हूँ, शैतान की पार्टी वाले ही खसरे में रहने वाले हैं +[58:20] यकीनन ज़लील तारीन मखलूक़त में से हैं वो लोग जो अल्लाह और उसके रसूल का मुकाबला करते हैं +[58:21] अल्लाह ने लिख दिया है कि मैं और मेरे रसूल ग़ालिब होकर रहेंगे। फिल वाकी अल्लाह जबरदस्त और जोरावर (सबसे मजबूत) है +[58:22] तुम कभी ये ना पाओगे के जो लोग अल्लाह और आखिरी पर ईमान रखने वाले हैं वो उन लोगों से मुहब्बत करते हैं जिन्होन ने अल्लाह और उसके रसूल की मुखालफत की है, ख्वा वो उनके बाप हूं, हां उनके बेटे, हां उनके भाई हां उनके एहले खानदान। ये वो लोग हैं जिनके दिलों में अल्लाह ने ईमान सब्त (लिखा/लिखा) कर दिया है और अपनी तरफ से एक रूह अता करके उनको कुव्वत बख्शी है, वो उनको ऐसी जन्नत में दाख़िल करेगा जिनके बारे में खास बातें होती होंगी। उनमें वो हमेशा रहेंगे. अल्लाह उन से रज़ी (प्रसन्न) हुआ और वो अल्लाह से रज़ी हुए। वो अल्लाह की पार्टी के लोग हैं। ख़बरदार रहो, अल्लाह की पार्टी वाले ही फलाह पैने वाले हैं + +Surah 59: Al-Hashr (The Banishment) +---------------------------------------- +[59:1] अल्लाह ही की तस्बीह की है हर उस चीज़ ने जो आसमान और ज़मीन में है, और वही ग़ालिब और हकीम है +[59:2] वही है जिसने एहले किताब काफिरों को पहले ही हमले में उनके घरों से निकल बाहर किया।तुम्हें हरगिज ये गुमां ना था के वो निकल जाएंगे और वो भी ये समझे बैठे थे के उनकी गड़ियां (किले) उन्हें अल्लाह से बचा लेंगी।मगर अल्लाह ऐसे रुख से उन पर आया जिधर उनका ख्याल भी ना गया था. उसने उनके दिलों में रोब (आतंक) डाल दिया, नतीजा ये हुआ के वो खुद अपने हाथों से भी अपने घरों को बर्बाद कर रहे थे और मोमिनो के हाथों को भी बर्बाद करवा रहे थे। पस इब्रत हासिल करो ऐ दीधा-ए-बीना (समझदार आंखें) रखने वालों +[59:3] अगर अल्लाह ने उनके हक़ में जिला वतनी (निर्वासन) ना लिख ​​दी होती तो दुनिया ही में वो उन्हें अज़ाब दे देता। और आख़िरत में तो उनके लिए दोज़ख का अज़ाब है हाय +[59:4] ये सब कुछ इसलिए हुआ के उनको अल्लाह ने और उसके रसूल का मुक़ाबला किया। और जो भी अल्लाह का मुकाबला करे अल्लाह उसको सजा देने में बहुत सक्षम है +[59:5] तुम लोगों ने खजूरों (खजूरों) के जो दरख्त काटे या जिनको अपने जदों (जड़ों) पर खड़ा रहने दिया, ये सब अल्लाह ही के ईज़ान से थे और (अल्लाह ने ये इज़ान इस्लिये दिया) ता-के फ़ासीकों को ज़लील-ओ-ख़ार करे +[59:6] और जो माल अल्लाह ने उनके कब्जे से निकल कर अपने रसूल की तरफ पलटा दिया, वो ऐसा माल नहीं है जिनपर तुमने अपने घोड़े और ऊंट (ऊंट) दौड़ाए। बलके अल्लाह अपने रसूलों को जिसपर चाहता है तसल्लुत (अधिकार/गलाबा) अता फरमा देता है। और अल्लाह हर चीज पर कादिर है +[59:7] जो कुछ भी अल्लाह बस्तियों के लोगों से अपने रसूल की तरफ पलटा दे वो अल्लाह, और रसूल, और रिश्तेदारों, और यतामा (अनाथों), और मसाकीन, और मुसाफिरों, के लिए है ता-के वो तुम्हारे मालदारों ही के दरमियान गर्दिश न करता रहे। जो कुछ रसूल तुम्हें दे वो लेलो और जिस चीज़ से वो तुम को रोक दे उसे रुक जाओ। अल्लाह से डरो, अल्लाह सज़ा देने वाला है +[59:8] (नीज़ वो माल) उन ग़रीब मुहाजिरीन के लिए है जो अपने घरों और ज़ैदादों से निकल बाहर हो गए हैं। ये लोग अल्लाह का फ़ज़ल और उसकी ख़ुशनुदी चाहते हैं और अल्लाह और उसके रसूल की हिम्मत पर क़मर-बस्ता रहते हैं। यही रस्त बाज़ (सच्चे) लोग हैं +[59:9] (और वो उन लोगों के लिए भी हैं) जो मुहाजिरीन की आमद से पहले ही ईमान ला कर दार-उल-हिजरात [निवास (हिजड़ा का)] में मुकीम था। ये उन लोगों से मुहब्बत करते हैं जो हिजरत करके इनके पास आए हैं और जो कुछ भी उनको दे दिया जाए उसकी कोई हाजत तक ये अपने दिलों में महसूस नहीं करते और अपनी जात पर दूसरे को तरजीह देते हैं, ख्वा अपनी जगह खुद मोहताज होन। हकीकत ये है के जो लोग अपने दिल की तंगी से बच गए वही फलाह पाने वाले हैं +[59:10] (और वो उन लोगों के लिए भी है) जो उन लोगों के बाद आए हैं, जो कहते हैं के “ऐ हमारे रब, हमें और हमारे उन सब भाइयों को बख्श दे जो हमसे पहले ईमान लाए हैं और हमारे दिलों में एहले ईमान के लिए कोई बुग्ज़ (द्वेष) न रख +[59:11] +[59:12] अगर वो निकले गए तो ये उनके साथ हरगिज न निकलेंगे, और अगर वो जंग की गई तो ये उनकी हरगिज मदद न करेंगे, और अगर ये उनकी मदद करें भी तो पीट-पीट कर जाएंगे और फिर कहीं से कोई मदद न पाएंगे +[59:13] इनके दिलों में अल्लाह से बढ़ कर तुम्हारा खौफ है, क्योंकि ये ऐसे लोग हैं जो समझते हैं, नहीं रखते +[59:14] ये कभी इकट्ठे होकर (खुले मैदान में) तुम्हारा मुकाबला ना करेंगे, लड़ेंगे भी तो किला-बंद बस्तियों (गढ़वाली टाउनशिप) में बैठ कर या दीवारों के पीछे चुप कर. ये आपस की मुखालफत में बदायश हैं। तुम उन्हें इखत्ता समझते हो मगर इनके दिल एक दूसरे से फटे हुए हैं। इनका ये हाल है के ये अक्ल लोग हैं +[59:15] ये उन्ही लोगों के मनिंद हैं जो इनसे थोड़ी ही मुद्दत पहले अपने किए का मजा चख चुके हैं और इनके लिए दर्दनाक अज़ाब है +[59:16] इनकी मिसाल शैतान की सी है के पहले वो इंसान से कहता है कुफ्र कर, और जब इंसान कुफ्र कर बैठता है तो वो कहता है मैं तुझसे बारी-उज-जिम्मा हूं, मुझे अल्लाह रब्ब-उल-आलमीन से डर लगता है +[59:17] फिर दोनों का अंजाम ये होना है के हमेशा के लिए जहन्नुम में जायें, और जालिमों की यही जजा है +[59:18] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से डरो, और हर शक्स ये देखे के उसने कल के लिए क्या समान किया है। अल्लाह से डरते रहो, अल्लाह यकीनन तुम्हारे उन सब आमाल से बा-खबर है जो तुम करते हो +[59:19] उन लोगों की तरह ना हो जाओ जो अल्लाह को भूल गए तो अल्लाह ने उन्हें खुद अपना नफ्स भुला दिया। यही लोग फ़ासीक़ हैं +[59:20] दोज़ख में जाने वाले और जन्नत में जाने वाले कभी यक्सान नहीं हो सकते। जन्नत में जाने वाले ही असल में कामयाब हैं +[59:21] अगर हमने ये कुरान किसी पहाड़ पर भी उतार दिया होता तो तुम देखते के वो अल्लाह के खौफ से दबा जा रहा है, और फटा पड़ता है। ये मिसालें हम लोगों के सामने इस तरह बयान करते हैं के वो (अपने हालात पर) गौर करें +[59:22] वो अल्लाह हाय है जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, गायब और जाहिर हर चीज का जाने वाला, वही रहमान और रहीम है +[59:23] वो अल्लाह हाय है जिसके सिवा कोई माबूद नहीं वो बादशाह है, निहायत मुक़द्दस, सरसर सलामती (सर्व-शांति), अमन देने वाला (सुरक्षा देने वाला), निगाहबान, सब पर ग़ालिब, अपना हुकुम ब-ज़र नाफ़िज़ करने वाला, और बड़ा ही होकर रहने वाला। पाक है अल्लाह हमसे शिर्क से जो लोग कर रहे हैं +[59:24] वो अल्लाह ही है, जो तख़लीक़ (सृजन) का मनसूबा (योजना) बनाने वाला है, और उसको नफ़ीज़ करने वाला, और उसे मुताबिक सूरत-गारी (फैशनर) करने वाला है। उसके लिए बेहतरीन नाम हैं। हर चीज़ जो आसमान और ज़मीन में है उसकी तस्बीह कर रही है, और वह ज़बरदस्त और हकीम है + +Surah 60: Al-Mumtahanah (The Woman who is Examined) +---------------------------------------- +[60:1] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अगर तुम मेरी राह में जिहाद करने के लिए और मेरी रज़ा-जोई की खातिर (वतन छोड़ कर घरों से) निकले हो तो मेरे और अपने दुश्मनों को दोस्त ना बनाओ। तुम उनके साथ दोस्ती की तरह बदलते हो, हलांके जो हक तुम्हारे पास आया है उसको मन्ने से वो इनकार कर चुके हैं। और उनकी रवीश ये है के रसूल को और खुद तुमको सिर्फ इस कसूर पर जिला-वतन (निष्कासित) करते हैं कि तुम अपने रब, अल्लाह पर ईमान लाए हो। तुम छुपा कर उनको दोस्ताना पैग़ाम भेजते हो, हलाँके जो कुछ तुम छुपा कर करते हो और जो एलानिया (खुलेआम) करते हो, हर चीज़ को मैं ख़ूब जानता हूँ। जो शक्स भी तुम में से ऐसा करे वो यकीनन राह-ए-रास्त से भटक गया +[60:2] उनका रवैय्या तो ये है के अगर तुम काबू पा जाओ तो तुम्हारे साथ दुश्मनी करें और हाथ और जुबान से तुम्हें अजर (चोट) दें, वो तो ये चाहते हैं के तुम किसी तरह काफिर हो जाओ +[60:3] कयामत के दिन ना तुम्हारे रिश्ते किसी का काम आएंगी न तुम्हारी औलाद. हमें रोज़ अल्लाह तुम्हारे दरमियान जुदाई डाल देगा। और वही तुम्हारे अमाल का देखने वाला है +[60:4] तुम लोगों के लिए इब्राहीम और उसके साथियों में एक अच्छा नामुना है के उन्होन ने अपनी क़ौम से साफ़ कहा "हम तुमसे और तुम्हारे इन माबूदोन (देवताओं) से जिनको तुम खुदा को छोड़ कर पूजते हो कताइ बेज़ार हैं। हमने तुमसे कुफ्र किया और हमारे और तुम्हारे दरमियान हमेशा के लिए अदावत होगी और बैर पढ़ गया (शत्रुता और नफरत) जब तक तुम अल्लाह वाहिद पर ईमान न लाओ”। मगर इब्राहीम का अपने बाप से ये कहना (इससे मुस्तस्ना है) के "मैं आपके लिए मगफिरत की अंधेरगर्दी जरूर करूंगा, और अल्लाह से आप के लिए कुछ हासिल कर लेना मेरे बस में नहीं है"। (और इब्राहिम व असहाब-ए-इब्राहिम की दुआ ये थी के) "ऐ हमारे रब, तेरे ही ऊपर हमने भरोसा किया और तेरी ही तरफ हमने रूजू (टर्न) कार्लिया और तेरे ही हुजूर हमें पलटना है +[60:5] ऐ हमारे रब, हमें काफिरों के लिए फितना (ट्रायल/टेस्ट) ना बना दे और ऐ हमारे रब, हमारे कसूरों से दरगुज़र फ़रमा। बेशक़ तू ही ज़बरदस्त (ताकतवर) और दाना (बुद्धिमान) है +[60:6] इन्ही लोगों के तर्ज़-ए-अमल में तुम्हारे लिए और हर उस शक्स के लिए अच्छा नामुना (उदाहरण) है जो अल्लाह और रोज़-ए-आख़िर का उम्मीदवर हो. इस्से कोई मुनहरिफ़ हो (मुड़ जाता है) अल्लाह की ओर नियाज़ (सर्व-पर्याप्त) और अपनी ज़ात में आप महमूद हैं +[60:7] बैद नहीं के अल्लाह कभी तुम्हारे और उन लोगों के दरमियान मोहब्बत डाल दे जिनसे आज तुमने दुश्मनी मोल ली है। अल्लाह बड़ी क़ुदरत रखता है और वो गफूर-ओ-रहीम है +[60:8] अल्लाह तुम्हें इस बात से नहीं रोकता के तुम उन लोगों के साथ हो, और इन्साफ का वादा करो जिन्हों ने दीन के मामले में तुमसे जंग नहीं की है और तुम्हारे घरों से नहीं निकला है। अल्लाह इन्साफ करने वालों को पसंद करता है है +[60:9] वो तुम्हें जिस बात से रोकता है वो तो ये है कि तुम उन लोगों से दोस्ती करो जिन्हों ने तुमसे दीन के मामले में जंग की है और तुम्हारे घरों से निकला है और तुम्हारे इखराज (निष्कासन) में एक दूसरे की मदद की है। उनसे जो लोग दोस्ती करें वही ज़ालिम हैं +[60:10] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब मोमिन औरतें हिजरत करके तुम्हारे पास आएं तो (उनके मोमिन होने की) जांच पडताल करलो। और उनके ईमान की हकीकत अल्लाह ही बेहतर जानता है। फिर जब तुम्हें मालूम हो जाए कि वो मोमिन हैं तो उन्हें कुफ्फार की तरफ वापस न करो। ना वो कुफ्फार के लिए हलाल हैं और ना कुफ्फार उनके लिए हलाल हैं। उनके काफिर शोहरों ने जो मेहर उनको दिए थे वो उन्हें फेर दो और उनसे निकाह कर लेने पर तुमसे कोई गुनाह नहीं जबके तुम उनके मेहर उनको अदा करदो। और तुम खुद भी काफिर औरतों को अपने निकाह में न रोके रहो, जो मेहर तुमने अपनी काफिर बीवीयों को दिए थे वो तुम वापस मांग लो और जो मेहर काफिरों ने अपनी मुसलमान बीवीयों को दिए थे उन्हें वो वापस मांग लें। ये अल्लाह का हुकुम है, वो तुम्हारा दरमियान फैसला करता है और अल्लाह अलीम-ओ-हकीम (सभी जानने वाला-सबसे बुद्धिमान) है +[60:11] और अगर तुम्हारी काफिर बीवीयों के मेहरों में से कुछ तुम्हें कुफ्फार से वापस न मिले और फिर तुम्हारी नौबत आये तो जिन लोगों की बीवीयाँ उधर रह गई हैं उनको इतनी रकम अदा करदो जो उनके दिए हुए मेहरों के बराबर हो। और हम खुदा से डरते रहो जिसपर तुम ईमान लाए हो +[60:12] ऐ नबी, जब तुम्हारे पास मोमिन औरतें बैत (प्रतिज्ञा) करने के लिए आएं और इस बात का अहद करें के वो अल्लाह के साथ किसी चीज को शरीक ना करेंगी, चोरी ना करेंगी, जीना ना करेंगी, अपनी औलाद को क़त्ल न करेंगी, अपने हाथ पैरों के आगे कोई बोहतन (कैलमनी) घड़ कर न लेंगी, और किसी अम्र-ए-मारूफ़ (कुछ भी अच्छा होने के लिए जाना जाता है) में तुम्हारी नफ़रमानी न करेंगी, तो उनसे बैत लेलो और उनके हक़ में अल्लाह से दुआ-ए-मगफिरत करो। यकीनन अल्लाह दरगुज़र (माफ़) फ़रमाने वाला और रहम करने वाला है +[60:13] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, उन लोगों को दोस्त न बनाओ जिनपर अल्लाह ने ग़ज़ब फरमाया है, जो आख़िरत से उसकी तरह मयौस हैं जिस तरह कब्रों में पड़े हुए काफिर मयौस हैं + +Surah 61: As-Saff (The Ranks) +---------------------------------------- +[61:1] अल्लाह की तस्बीह की है हर उस चीज़ ने जो आसमान और ज़मीन में है, और वो ग़ालिब (ताकतवर) और हकीम (बुद्धिमान) है +[61:2] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम क्यों वो बात कहते हो जो करते नहीं हो +[61:3] अल्लाह के नाज़दीक ये सच ना पसंदीदा हरकत है के तुम कहो वो बात जो करते नहीं +[61:4] अल्लाह को तो पसंद वो लोग हैं जो उसकी राह में है इस तरह सफ़-बस्ता (पंक्ति) होकर लड़ते हैं गोया के वो एक सिसा पिलाई हुई दीवार हैं +[61:5] और याद करो मूसा की वो बात जो उसने अपनी क़ौम से कहीं थी "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, तुम क्यों मुझे अज़ियात (पीड़ा/नुकसान) देते हो हलांके तुम ख़ूब जानते हो के मैं तुम्हारी तरफ अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूं? फिर जब उन्होन ने टेढ इख्तियार की (विचलित) अल्लाह के लिए ने उनका दिल टेढ़े (विचलित) कर दिया, अल्लाह फासिकों को" हिदायत नहीं देता +[61:6] और याद करो ईसा इब्न-ए-मरियम की वो बात जो उसने कही थी के "ऐ बनी इसराइल, मैं तुम्हारी तरफ अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूं, तस्दीक (सत्यापित/पुष्टि) करने वाला हूं उस तौरात की जो मुझसे पहले आई है मौजुद है, और बशारत (खुशखबरी) देने वाला हूं एक रसूल की जो मेरे बाद आएगा जिसका नाम अहमद होगा। मगर जब वो उनके पास खुली खुली निशानियां लेकर आया तो उनको ने कहा ये तो सारा धोखा है +[61:7] अब भला उस शक्स से बड़ा जालिम और कौन होगा जो अल्लाह पर झूठे बोहतन बंधे हलांके उसे इस्लाम (अल्लाह)। के आगे सर-ए-इताअत झुके) कि दावत दी जा रही हो? ऐसे जालिमों को अल्लाह हिदायत नहीं दिया करता +[61:8] ये लोग अपने मुंह की फूंकों से अल्लाह के नूर को बुझाना चाहते हैं, और अल्लाह का फैसला ये है कि वो अपने नूर को पूरा प्यार कर रहेगा ख्वा काफिरों को ये कितना ही नागावर हो +[61:9] वही तो है जिसने अपने रसूल को हिदायत और दीन-ए-हक़ के साथ भेजा है ता-के उसे पूरे के पूरे दीन पर ग़ालिब करदे ख्वा मुशरिकेन को ये कितना ही नागावर हो +[61:10] ऐ लोगन जो ईमान लाए हो, मैं बताऊँ तुमको वो तिजारत जो तुम्हें अज़ाब-ए-आलिम से बचा दे +[61:11] ईमान लाओ अल्लाह और उसके रसूल पर, और जिहाद करो अल्लाह की राह में अपने मालों से और अपनी जानो से, यहीं तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम जानो +[61:12] अल्लाह तुम्हारे गुनाह माफ कर देगा, और तुमको ऐसे बाघों में दाख़िल करेगा, जिनकी जगहें नहरें बहती होंगी, और आबादी (शाश्वत) क़याम की जन्नत में बहतरीन घर तुम्हें अता फरमायेगा। ये है बड़ी कामयाबी +[61:13] और वो दूसरी चीज़ जो तुम चाहते हो वो भी तुम्हें देगा, अल्लाह की तरफ से नुसरत (जीत) और करीब ही में हासिल हो जाने वाली फतह। ऐ नबी एहले ईमान को इसकी बशारत दे दो +[61:14] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह के मददगार बनो, जिस तरह ईसा इब्न-ए-मरियम ने हवारियों (चेलों) को खिताब करके कहा था "कौन है अल्लाह की तरफ (बुलाने) में मेरा मददगार"। और हवारियों (चेलों) ने जवाब दिया था: "हम हैं अल्लाह के मददगार"। हमें वक्त बानी इजराइल का एक गिरो ​​ईमान लाया और दूसरे गिरो ​​ने इंकार किया। फिर हमने ईमान लाने वालों की उनके दुश्मनों के मुकाबले में तय की (सहायता) और वही ग़ालिब होकर रहे + +Surah 62: Al-Jumu'ah (The Congregation) +---------------------------------------- +[62:1] अल्लाह की तस्बीह कर रही है हर वो चीज़ जो आसमानो में है और हर वो चीज़ जो ज़मीन में है, बादशाह है, कुद्दुस (पवित्र) है, ज़बरदस्त और हकीम (बुद्धिमान) है +[62:2] वही है जिसने उम्मियों (अन्यजातियों/अशिक्षित) के अंदर एक रसूल खुद को उनसे उठाया, जो उन्हें उसकी आयत सुनाता है, उनकी जिंदगी संवरता है, और उनको किताब और हिकमत की तालीम देता है, हलांके इस्से पहले वो खुली गुमराही में पड़े हुए थे +[62:3] और (इस रसूल की बिसात) उन दूसरे लोगों के लिए भी है जो अभी उनसे नहीं मिले हैं +[62:4] अल्लाह ज़बरदस्त और हकीम है ये उसका फ़ज़ल है जिसे चाहता है देता है। और वो बड़ा फ़ज़ल फ़रमाने वाला है +[62:5] जिन लोगों को तौरात का हमील (चार गे) बनाया गया था मगर उन्होन ने उसका बार ना उठाया, उनकी मिसाल हमें गधे (गधा) की सी है जिसपर किताबे लाडी हुई होन। इस्से भी ज्यादा बुरी मिसाल है उन लोगों की जिन्होन ने अल्लाह की आयत को झूठला दिया है। ऐसे ज़ालिमों को अल्लाह हिदायत नहीं दिया करता +[62:6] इंसे कहो, “ऐ लोग जो यहुदी बन गए हो, अगर तुममें ये घमंड (अहंकार) है के बाकी सब लोगों को छोड़ कर बस तुम ही अल्लाह के चाहते (पसंदीदा) हो तो मौत की तमन्ना करो अगर तुम अपना इस ज़माना हो (दावा) मैं सच्चा हूं +[62:7] लेकिन ये हरगिज उसकी तमन्ना ना करेगी अपने कार्टूनों की वजह से जो ये कर चुके हैं। और अल्लाह जालिमों को खूब जानता है +[62:8] इनसे कहो, “जिस मौत से तुम भागते हो वो तो तुम आकार रहोगे। फिर तुम उसके सामने पेश हो जाओगे जो पोशिदा (छिपा हुआ) और जाहिर का जाने वाला है। और वो तुम्हे बता देगा के तुम क्या कुछ करते रहे हो +[62:9] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, जब पुकारा जाए नमाज़ के लिए जुमा के दिन तो अल्लाह के ज़िक्र की तरफ दाऊद और ख़त्म-ओ-फ़ारोख़त छोड़ दो। ये तुम्हारे लिए ज्यादा बेहतर है अगर तुम जानो +[62:10] फिर जब नमाज पूरी हो जाए तो जमीन में फैल जाओ और अल्लाह का फजल तलाश करो और अल्लाह को कसरत से याद करते रहो, शायद के तुम्हें फलाह (कामियाबी/समृद्धि) नसीब हो जाए +[62:11] और जब उनको ने तिजारत (व्यवसाय) और खेल तमाशा होते देखा तो उसकी तरफ लपक गए और तुम्हें खड़ा छोड़ दिया। इनसे कहो, जो कुछ अल्लाह के पास है वो खेल तमाशे और तिजारत से बेहतर है और अल्लाह सबसे बेहतर रिज्क (जीविका) देने वाला है + +Surah 63: Al-Munafiqun (The Hypocrites) +---------------------------------------- +[63:1] ऐ नबी, जब ये मुनाफिक (पाखंडी) तुम्हारे पास आते हैं तो कहते हैं "हम गवाही देते हैं के आप यकीनन अल्लाह के रसूल हैं, "हाँ, अल्लाह जानता है के तुम ज़रूर उसके रसूल हो, मगर अल्लाह गवाही देता है के ये मुनाफिक क़तई झूठे हैं +[63:2] इन्हों ने अपनी कसमों को ढाल बना रक्खा है और इस तरह ये अल्लाह के रास्ते से खुद रुकते हैं और दुनिया को रोकते हैं। कैसी बुरी हरकतें हैं जो ये लोग कर रहे हैं +[63:3] ये सब कुछ इस वजह से है के इन लोगों ने ईमान ला कर फिर कुफ्र किया इस के लिए इनके दिलों पर मोहर लगा दी गई, अब ये कुछ नहीं समझते +[63:4] इन्हें देखो तो इनके जूस(जिस्म/निकायों) तुम्हें बड़े शानदार नज़र आएं बोलें तो तुम इनकी बातें सुनते रह जाओ, मगर असल में ये गोया लाखदी के कुंडे हैं (लकड़ी के बीम) जो दीवार के साथ चुन कर रख दिए गए माननीय। हर ज़ोर की आवाज़ को ये अपने ख़िलाफ समझते हैं। ये पक्के दुश्मन हैं इनसे बच कर रहो। अल्लाह की मार इनपर ये किधर उलटे फिराए जा रहे हैं +[63:5] और जब इनसे कहा जाता है के आओ ता-के अल्लाह का रसूल तुम्हारे लिए मगफिरत की दुआ करे, तो सर झटकते हैं और तुम देखते हो के वो बड़े घमंड के साथ आने से रुकते हैं +[63:6] ऐ नबी, तुम चाहे इनके लिए मगफिरत की दुआ करो या ना करो, इनके लिए यक्सान है, अल्लाह हरगिज़ इन्हें माफ़ नहीं करेगा। अल्लाह फासिक लोगों (लोक का उल्लंघन करने वाले) को हरगिज हिदायत नहीं देता +[63:7] ये वही लोग हैं जो कहते हैं कि रसूल के साथियों पर खर्च करना बंद करदो ता-के ये मुंतशिर हो जाएं। हलाँके ज़मीन और आसमानों के खज़ानों का मालिक अल्लाह ही है, मगर ये मुनाफिक समझते नहीं हैं +[63:8] ये कहते हैं के हम मदीना वापस पहुँच जाएँ तो जो इज़्ज़त वाला है वो ज़लील को वहाँ से निकल बाहर करेगा। अल्लाह को हलांके इज्जत और उसके रसूल और मोमिनीन के लिए है, मगर ये मुनाफिक जानता नहीं है +[63:9] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, तुम्हारे माल और तुम्हारी औलादें तुमको अल्लाह की याद से गाफिल ना करदें। जो लोग ऐसा करें वही खसरे (नुक्सान /नुकसान) में रहने वाले हैं +[63:10] जो रिज़क हमने तुम्हें दिया है उसमें से खर्च करो क़बल इसके के तुम में से किसी की मौत का वक्त आ जाए और हमें वक्त वो कहे "ऐ मेरे रब, क्यों ना तू ना मुझे थोड़ी सी महौलत और दे दी के मुख्य सदका देता और साले लोगों में शामिल हो जाता” +[63:11] हालंके जब किसी की महुलात-ए-अमल पूरी होने का वक्त आ जाता है तो अल्लाह हमें हरगिज़ मजीद महौलत नहीं देता, और जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उसे बाख़बर है + +Surah 64: At-Taghabun (The Manifestation of Losses) +---------------------------------------- +[64:1] अल्लाह की तस्बीह कर रही है हर वह चीज जो आसमान में है और हर वह चीज जो जमीन में है उसकी बादशाही है और उसके लिए तारीफ है और वह हर चीज पर कादिर है +[64:2] वही है जिसने तुमको पेदा किया, फिर तुम में से कोई काफिर है और कोई मोमिन। और अल्लाह वो सब कुछ देख रहा है जो तुम करते हो +[64:3] उसने ज़मीन और आसमान को बरहक़्क अदा किया है, और तुम्हारी सूरत बनाई और बड़ी उम्मीद (उत्कृष्ट) बनाई है, और उसकी तरफ आख़िर-ए-कार तुम्हें पलटना है +[64:4] ज़मीन और आसमानो की हर चीज़ का इस्तेमाल इल्म है जो कुछ तुम छुपाते हो और जो कुछ तुम जाहिर करते हो सब हमें मालूम है। और वो दिलों का हाल तक जानता है +[64:5] क्या तुम्हें उन लोगों की कोई खबर नहीं पहुंची जिन्हों ने इसे पहले कुफर किया और फिर अपनी शामत-ए-आमाल (बुरा नतीजा) का मजा चख लिया? और आगे उनके लिए एक दर्दनाक अज़ाब है +[64:6] क्या अंजाम के मुस्तहिक वो इस लिए हुए हैं उनके पास उनके रसूल खुली खुली दलीलें (स्पष्ट संकेत) और निशानियां लेकर आते रहे, मगर उनहों ने कहा" क्या इंसान हमें हदायत देंगे?" इस तरह उनहों ने मन्ने से इंकार कर दिया और मुंह फिर ले लिया। तब अल्लाह भी उनसे बे-परवा हो गया और अल्लाह तो है ही बे नियाज़ और अपनी ज़ात में आप महमूद (प्रशंसनीय) +[64:7] मुनकिरीन ने बदले दावे से कहा है कि वो मरने के बाद हरगिज़ दोबारा न उठेंगे। इनसे कहो" नहीं, मेरे रब की कसम तुम जरूर उठोगे, फिर जरूर तुम्हें बता देंगे (दुनिया में) क्या कुछ किया है और ऐसा करना अल्लाह के लिए बहुत आसान है +[64:8] पास ईमान लाओ अल्लाह पर, और उसके रसूल पर, और हम रोशनी पर जो हमने नाज़िल की है। जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे बख़बर है +[64:9] (इसका पता तुम्हें रोज़ चल जाएगा) जब इज्तिमा (तुम्हें इकट्ठा करेगा) के दिन वो तुम सबको इकठ्ठा करेगा। वो दिन होगा एक दूसरे के मुकाबले में लोगों की हार जीत का नेक अमल कर्ता है, अल्लाह उसे गुनाह झाड़ देगा और उसे ऐसी जन्नत में दाख़िल करेगा जिनके बारे में पता चलेगा। ये लोग हमेशा हमेशा इनमें रहेंगे। यहीं बड़ी कामयाबी है +[64:10] और जिन लोगों ने कुफ्र किया है और हमारी आयतों को झुटलाया है वो दोज़ख के कैदी होंगे, जिनमें वो हमेशा रहेंगे। और वो बख्तरीन ठिकाना है +[64:11] कोई मुसीबत कभी नहीं आती मगर अल्लाह के इज़ान (अल्लाह की छुट्टी) ही से आती है। जो शख्स अल्लाह पर ईमान रखता है अल्लाह उसके दिल को हिदायत देता है। और अल्लाह को हर चीज़ का इल्म है +[64:12] अल्लाह की इताअत करो और रसूल की इताअत करो लेकिन अगर तुम इताअत से मुह मोड़ते हो तो हमारे रसूल पर सफ़ सफ़ हक़ पाहुंचा देने के सिवा कोई ज़िम्मेदारी नहीं है +[64:13] अल्लाह वो है जिसके सिवा कोई खुदा नहीं, लिहाज़ा ईमान लाने वालों को अल्लाह हाय पर भरोसा रखना चाहिए +[64:14] ऐ लोगों जो ईमान लाए हो, तुम्हारी बीवीयां और तुम्हारी औलाद में से बाज़ तुम्हारे दुश्मन हैं, इनसे होशियार रहो। और अगर तुम अफ्फु-ओ-दरगुज़ार (माफ़ कर दो और नज़रअंदाज) से काम लो और माफ़ कर दो अल्लाह गफूर-ओ-रहीम है +[64:15] तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तो एक आजमाइश है, और अल्लाह ही है जिसके पास बड़ा अजर है +[64:16] लिहाजा जहां तक ​​तुम्हारे बस में हो अल्लाह से डरते रहो, और सुनो और इताअत करो, और अपने माल खर्च करो, ये तुम्हारे ही लिए बेहतर है. जो अपने दिल की तंगी से महफ़ूज़ रह गए बस वही फलाह पाने वाले हैं +[64:17] अगर तुम अल्लाह को क़र्ज़-ए-हसन दो तो वो तुम्हें कई गुना (कई गुना) बढ़ा कर देगा और तुम्हारे कसूरों से दर गुजर फरमाएगा। अल्लाह बडा क़दरदान और बोझबर (सबसे सहनशील) है +[64:18] हाज़िर और गायब हर चीज़ को जानता है, ज़बरदस्त (शक्तिशाली) और दाना (सबसे बुद्धिमान) है + +Surah 65: At-Talaq (Divorce) +---------------------------------------- +[65:1] ऐ नबी, जब तुम लोग औरतों को तलाक दो तो उनकी उनकी इद्दत (प्रतीक्षा अवधि) के लिए तलाक दिया करो और इद्दत के जमाने का ठीक ठीक शुरू करो, और अल्लाह से डरो जो तुम्हारा रब है (जमाना-ए-इद्दत में) ना तुम उन्हें उनके घरों से निकालो और ना वो खुद निकले, इल्ला ये के वो कोई सारी बुराई की मुर्तकिब हो। ये अल्लाह की मुकर्रर करदा हदें हैं, और जो कोई अल्लाह की हदों (सीमाओं/सीमाओं) से ताजुज़ करेगा वो अपने ऊपर खुद ज़ुल्म करेगा। तुम नहीं जानते शायद इसके बाद अल्लाह (मुवाफिकत/सुलह की) कोई सूरत अदा करदे +[65:2] फिर जब वो अपनी (इद्दत की) मुद्दत के ख़तम पर पहुंचें तो हां उन्हें भले तारिके से (अपने निकाह में) रोक रखो, हां भले तारिके पर उनसे जुदा हो जाओ, और दो ऐसे आदमियों को गवाह बना लो जो तुम मेरे साथ साहिब-ए-अदल हो, और (ऐ गवाह बनने वालों) गवाही ठीक ठीक अल्लाह के लिए अदा करो। ये बातें हैं जिनकी तुम लोगों को हिदायत की जाती है, हर उस शक्स को जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता हो। जो कोई अल्लाह से डरता है काम करेगा अल्लाह उसके लिए मुश्किल से निकलेगा का कोई रास्ता अदा कर देगा +[65:3] और उसे ऐसे रास्ते से रिज्क देगा जिधर उसका गुमान (कल्पना) भी ना जाता हो। जो अल्लाह पर भरोसा करे उसके लिए वो काफी है। अल्लाह अपना काम पूरा करके रहता है, अल्लाह ने हर चीज़ के लिए एक तकदीर मुक़र्रर कर रखी है +[65:4] और तुम्हारी औरतों में से जो हैज़ (माहवारी) से ज्यादा हो चुकी है, उनके मामले में अगर तुम लोगों को कोई शक़ नहीं है तो (तुम्हें मालूम हो के) उनकी इद्दत तीन महीनी है और यही हुकुम उनका है जिन्हें अभी हैज़ ना आया हो। और हामिला (गर्भवती) औरतों की इद्दत की हद ये है के उनका वाज़े हमल (डिलीवरी) हो जाए। जो शख़्स अल्लाह से डरे उसके मामले में वो सहूलत पैदा कर देता है +[65:5] ये अल्लाह का हुकुम है जो उसने तुम्हारी तरफ नाज़िल किया है। जो अल्लाह से डरेगा अल्लाह उसकी बुराइयों को उससे दूर कर देगा और उसको बड़ा अजर देगा +[65:6] उनको (जमाना-ए-इद्दत में) उसकी जगह रख्खो जहां तुम रहते हो, जैसी कुछ भी जगह तुम्हें मुयस्सर हो, और उन्हें तंग करने के लिए उनको ना सताओ। और अगर वो हमें परेशान करते हैं तो हमें वक्त तक खर्च करते रहो जब तक उनका वजन हमल कर दिया जाए। फिर अगर वो तुम्हारे लिए (बच्चे को) दूध पिलाएं तो उनकी उजरत (बदला) उन्हें दो, और भले तरीक़े से (उजरत का मामला) बहामी गुफ़्त-ओ-शनीद से ताई कार्लो। लेकिन अगर तुमने (उजरत ताई करने में) एक दूसरे को तंग किया तो बच्चे को कोई और औरत दूध पिला लेगी +[65:7] खुशाल आदमी अपनी खुशहाली के मुताबिक नफ्का दे, और जिसका रिज़क काम दिया गया हो वो उसी माल में से खर्च करे जो अल्लाह ने उसे दिया है। अल्लाह ने जिसको जितना कुछ दिया है उसे ज़ियादा का वो उसे मुकल्लफ (बोझ) नहीं देता। बैद (दरवाजा) नहीं के अल्लाह तंगदस्ती के बाद फरख दस्ती भी अता फरमादे +[65:8] कितनी ही बस्तियां हैं जिन्हों ने अपने रब और उसके रसूलों के हुकुम से सरताबी (विद्रोही) की तो हमने उनसे कहा, मुहासिबा किया और उनको बुरी तरह सजा दी +[65:9] उनहों ने अपने किया का मजा चख लिया और उनका अंजाम-ए-कार घाटा हाय घाटा (पूरी तरह से नुकसान) है +[65:10] अल्लाह ने (आखिरत में) उनके लिए सिर्फ अजब मुहैय्या कर रखा है। पस अल्लाह से डरो ऐ साहिब-ए-अक़ल लोग जो ईमान लाए हो। अल्लाह ने तुम्हारी तरफ एक हिदायत नाजिल कर दी है +[65:11] एक ऐसा रसूल जो तुमको अल्लाह की साफ साफ हदायत देने वाली आयत सुनाता है ता-के ईमान लाने वालों और नेक अमल करने वालों को तारिकियों (अंधेरे) से निकाल कर रोशनी में ले आए। जो कोई अल्लाह पर ईमान लाए और नेक अमल करे अल्लाह उसे ऐसी जन्नत में दाख़िल करेगा जिनके बारे में पता चलेगा। ये लोग इनमें हमेशा हमेशा रहेंगे। अल्लाह ने ऐसे शख़्स के लिए बेहतरीन रिज़क रक्खा है +[65:12] अल्लाह वो है जिसने सात (सात) आसमान बनाए और ज़मीन की क़िस्म से भी उन्हीं के इंसान। उनके दरमियान हुकुम नाज़िल होता रहता है। (ये बात तुम्हें बताती जा रही है) ताके तुम जान लो के अल्लाह हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है, और ये के अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर मुहीत (समावेशी) है + +Surah 66: At-Tahrim (The Prohibition) +---------------------------------------- +[66:1] ऐ नबी, तुम क्यों हमें चीज़ को हराम करता हूँ जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल किया है? (क्या इसके लिए) तुम अपनी बीवीयों की ख़ुशी चाहते हो? अल्लाह माफ़ करने वाला और रहम फ़रमाने वाला है +[66:2] अल्लाह ने तुम लोगों के लिए अपनी कसमों की किताब से निकले का तरीका मुकर्रर करदिया है अल्लाह तुम्हारा मौला (अभिभावक) है और वही आलिम-ओ-हकीम (सर्वज्ञ, सबसे बुद्धिमान) है +[66:3] (और ये मामला भी) काबिल-ए-तवज्जुह है के) नबी ने एक बात अपनी एक बीवी से राज में कहीं थी फिर जब उस बीवी ने (किसी और पर) वो राज जाहिर करदिया, और अल्लाह ने नबी को इस (इफ्शाए राज) की इत्तिला दे दी, तो नबी ने उसपर किसी हद तक (उस बीवी को) खबरदार किया और किसी हद तक उसे दार-गुज़ार किया। फिर जब नबी ने उसे (इफ्शाए राज़ की) ये बात बताई तो उसने पूछा आपको इसकी खबर किसने दी? नबी ने कहा "मुझे उसने खबर दी जो सब कुछ जानता है और खूब अखबार है" +[66:4] अगर तुम दोनों अल्लाह से तौबा करती हो (तो ये तुम्हारे लिए बेहतर है) क्योंकि तुम्हारे दिल सीधी राह से हाथ लग गए हैं, और अगर नबी के मुकाबले में तुमने बहाम जत्था-बंदी की (एक दूसरे का समर्थन करें) तो जान रक्खो के अल्लाह उसका मौला (रक्षक) है और उसके बाद जिबराईल और तम्मम सालेह एहले ईमान और सब मलिका उसके साथी और मददगार हैं +[66:5] बद (दरवाजा) नहीं के अगर नबी तुम सब बीवीयों को तलाक दे दो अल्लाह को ऐसी बीवीयां तुम्हारे बदले में अता फरमा दे जो तुमसे बेहतर हो, सच्ची मुसलमान, बा-इमान, इताअत गुजर, तौबा गुजर, इबादत गुजर, और रोजेदार, ख्वा शोहर दीधा हो या बकीरा (पहले से शादीशुदा और कुंवारी दोनों) +[66:6] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अपने आप को और अपने एहल-ओ-अयाल को (अपने आप को और अपने रिश्तेदारों को) बचाओ हमें आग से जिस का इंधन (ईंधन) इंसान और पत्थर होंगे, जिसपर निहायत तुंध-खू (भयंकर) और सख्त-गिर (कठोर) फरिश्ते मुकर्रर होंगे जो कभी अल्लाह के हुकुम की ना फरमानी करते हैं और जो हुक्म भी उन्हें दिया जाता है उसे बजाते हैं +[66:7] (उसे वक्त कहा जाएगा के) ऐ काफिरों आज मजारतें (बहाने) पेश ना करो, तुम्हें तो वैसा ही बदला दिया जा रहा है जैसे तुम अमल कर रहे हो +[66:8] ऐ लोग जो ईमान लाए हो, अल्लाह से तौबा करो, खालिस तौबा, बाएद (दरवाजा) नहीं कि अल्लाह तुम्हारी बुराइयां तुमसे दूर करदे और तुम्हीं ऐसी जन्नतों में दाख़िल फरमाड़े जिनके आला में बह रही होंगी, ये वो दिन होगा जब अल्लाह अपने नबी को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए हैं रुसवा ना करेगा, उनका नूर उनके आगे आगे और उनके दिन (दाएं) जानिब दौड़ रहा होगा और वो कह रहे होंगे के ऐ हमारे रब, हमारा नूर हमारे लिए मुकम्मल करदे और हमसे दरगुज़ार फरमा, तू हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है +[66:9] ऐ नबी , कुफ्फार और मुनाफिकेन से जिहाद करो और उनके साथ मिलकर पेश आओ, उनका ठिकाना जहन्नुम है और वो बहुत बुरा ठिकाना है +[66:10] अल्लाह काफिरों के मामले में नूह और लुट की बीवीयों को बतौर-ए-मिसाल पेश करता है, वो हमारे दो साले बंदो की ज़ौजियात (शादी/वेडलॉक) में थी, मगर उन्होन ने अपने शोहरों से ख़ायानत (विश्वासघात) की और वो अल्लाह के मुक़दमे में उनके कुछ भी ना काम आ सके। दोनों से कहदिया गया के जाओ आग में जाने वालों के साथ तुम भी चली जाओ +[66:11] और एहले ईमान के मामले में अल्लाह फिरौन की बीवी की मिसाल पेश करता है जबके उसने दुआ की "ऐ मेरे रब, मेरे लिए अपने हां जन्नत में एक घर बना दे और मुझे फिरौन और इसके अमल से बच्चा ले और जालिम क़ौम से मुझको निजात दे।” +[66:12] और इमरान की बेटी मरियम की मिसाल देता है जिसने अपनी शर्मगाह की हिफाजत की थी, फिर हमने उसे अंदर अपनी तरफ से रूह फूंक दी और उसने अपने रब के इरशादत और उसकी किताबों की तस्दीक की और वो इताअत गुजर (आज्ञाकारी) लोगों में से थी + +Surah 67: Al-Mulk (The Kingdom) +---------------------------------------- +[67:1] निहायत बुज़ुर्ग-ओ-बरतर है वो जिसके हाथ में कायनात की सल्तनत है, और वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है +[67:2] जिसने मौत और ज़िंदगी को इज़्ज़त किया ता-के तुम लोगों को आज़मा कर देखो तुम में से कौन बेहतर अमल करने वाला है, और वो ज़बरदस्त भी है और दरगुज़ार फ़रमाने वाला भी +[67:3] जिसने तह-बार-ते सात (सात) आसमान बनाए तुम रहमान की तख़लीक (रचना) में किसी किस्मत की बे-रब्ती (असंगति) ना पाओगे फिर पलट कर देखो, कहीं तुम्हें कोई खलल (दोष) नजर आता है +[67:4] बार-बार निगाह दौड़ाओ तुम्हारी निगाह थक कर न-मुराद पलट आएगी +[67:5] हमने तुम्हारे करीब के आसमान को अज़ीम-ओ-शान चिरागों से सजाया है और उन्होंने शयातीन को मार भगाने का जरिया बना दिया है। शैतानों के लिए भड़कती हुई आग हमने मुहय्या कर रखी है +[67:6] जिन लोगों ने अपने रब से कुफ्र किया है उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब है और वो बहुत ही बुरा ठिकाना है +[67:7] जब वो हमें फेंकेंगे तो उसके दहाड़ने (दहाड़ने) की हिम्मत आवाज़ सुनेंगे और वो जोश खा रही होगी +[67:8] शिद्दत-ए-गज़ब से फटती होगी, हर बार जब कोई भीड़ (भीड़/समूह) हमें में डाल जाएगा उसके कारिंदे (रखवाले) उन लोगों से पूछेंगे “क्या तुम्हारे पास कोई खबरदार करने वाला नहीं आया था?” +[67:9] वो जवाब देंगे "हां, खबरदार करने वाला हमारे पास आया था, मगर हमने उसे झूठला दिया और कहा अल्लाह ने कुछ भी नाज़िल नहीं किया है, तुम बड़ी गुमराही में पड़े हुए हो" +[67:10] और वो कहेंगे "काश हम सुनते या समझते तो आज है भड़कती हुई आग के सजावरों में ना शामिल होते” +[67:11] इस तरह वो अपने कसूर का खुद एतराफ (कबूल) कर लेंगे, दोज़खियों में लानात है +[67:12] जो लोग देखें अपने रब से डरते हैं, यकीनन उनके लिए मगफिरत है और बड़ा अजर +[67:13] तुम ख्वाह चुपके से बात करो या ऊँची आवाज़ से (अल्लाह के लिए यक्सा है) वो तो दिलों का हाल तक जानता है +[67:14] क्या वही ना जानेगा जिसने भुगतान किया है? हालंके वो बारिक-बीन और खबर है +[67:15] वही तो है जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन को ताब कर रखा है, चलो उसकी चाटी पर और खाओ खुदा का रिज़क, उसके हुजूर तुम्हें दोबारा जिंदा हो कर जाना है +[67:16] क्या तुम इसे बे-खौफ हो के वो जो आसमान में है तुम्हें ज़मीन में ढासा दे और यकायक ये ज़मीन झकोले खाने लगे (हिंसक रूप से हिलाएं/रॉक करें) +[67:17] क्या तुम इस बे-ख़ौफ़ हो के वो जो आसमान में है तुम पर पत्थरों करने वाली हवा भेज दे? फिर तुम्हें मालूम हो जाएगा के मेरी तम्बीह (चेतावनी) कैसी होती है +[67:18] इनसे पहले गुजरे हुए लोग झुटला चुके हैं फिर देखलो के मेरी किस्मत कैसी थी +[67:19] क्या ये लोग अपने ऊपर उड़ने वाले परिन्दों को पार फैलाते और सुकते नहीं देखते हैं? रहमान के सिवा कोई नहीं जो इन्हें थमे हुए हो। वही हर चीज़ का निगाहबाँ है +[67:20] बताओ, आख़िर वो कौन सा लश्कर तुम्हारे पास है जो रहमान के मुक़ाबले में तुम्हारी मदद कर सकता है? हकीकत ये है के ये मुकीरीन धोखे में पड़े हैं +[67:21] हां फिर बताओ, कौन है जो तुम्हें रिज्क दे सकता है अगर रहमान अपना रिज्क रोक ले? दर-असल ये लोग सरकशी और हक से गुरेज पर आगे हुए हैं +[67:22] भला सोचो, जो शक्स मुंह औंधे (कराहना) चल रहा हो वो ज्यादा सही राह पाने वाला है या वो जो सर उठाए सीधा एक हमवार सड़क पर चल रहा है +[67:23] इनसे कहो अल्लाह ही है जिसने तुमने पैदा किया, तुमको सनी और देखने की ताक़तें दी और सोचने वाले दिल दिए, मगर तुम काम ही शुक्र अदा करते हो +[67:24] इनसे कहो, अल्लाह ही है जिसने तुमने ज़मीन में फैलाया है और उसी की तरफ तुम साथ जाओगे +[67:25] ये कहते हैं "अगर तुम सच्चे हो तो बताओ ये वादा कब पूरा होगा?" +[67:26] कहो “इसका इल्म तो अल्लाह के पास है, मैं तो बस साफ, खबरदार बनाने वाला हूं +[67:27] फिर जब ये उस चीज को करीब देख लेंगे तो उन सब लोगों के चेहरे बिगाड़ जाएंगे जिन्हों ने इनकार किया है, और हमें वक्त उनसे कहा जाएगा के यहीं है वो चीज़ जिसके लिए तुम तकाज़े कर रहे थे +[67:28] इंसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अल्लाह ख्वा मुझे और मेरे साथियों को हलाक करदे या हम पर रहम करे, काफिरों को दर्दनक अज़ाब से कौन बचा लेगा +[67:29] इंसे कहो, वो बड़ा रहीम है, उसी पर हम ईमान लाए हैं, और उसी पर हमारा भरोसा है, करीब तुम्हें मालूम हो जाएगा के सारे गुमराह (प्रकट त्रुटि) में पड़ा हुआ कौन है +[67:30] इनसे कहो, कभी तुमने ये भी सोचा के अगर तुम्हारे कुओं (कुओं) का पानी जमीन में उतर जाये तो कौन है जो इस पानी की बहती हुई सोतें (बहता पानी) तुम्हें निकाल कर ला देगा + +Surah 68: Al-Qalam (The Pen) +---------------------------------------- +[68:1] दोपहर, कसम है क़लम की और उस चीज़ की जिसके लिखने वाले लिख रहे हैं +[68:2] तुम अपने रुब के फ़ज़ल से मजनूँ (दीवाने) नहीं हो +[68:3] और यकीनन तुम्हारे लिए ऐसा अजर (इनाम) है जिसका सिलसिला कभी खत्म होने वाला नहीं +[68:4] और बहस तुम अखलाक के बड़े मरतबे पर हो +[68:5] अंकारिब तुम भी देख लोगे और वो भी देख लेंगे +[68:6] के तुम में से कौन जुनून (पागलपन) में मुबतला है +[68:7] तुम्हारा रब उन लोगों को भी खूब जानता है जो उसकी राह से भटके हुए हैं, और वही उनको भी अच्छी तरह जानता है जो राह-ए-रास्त पर है +[68:8] झूठ बोलने वालों के दबाओ में हरगिज़ तुम आओ +[68:9] ये तो चाहते हैं कि तुम कुछ भी मुदाहनत (नरमी) करो तो ये भी मुदाहनत (नरमी) करें +[68:10] हरगिज ना दबो किसी ऐसे शक्स से जो बहुत कसम खाने वाला बे-वकात (बेकार) आदमी है +[68:11] ताने देता है, चुगलियां खाता फिरता है (निंदक, चुगली करने वाला) +[68:12] भलाई से रोकता है, ज़ुल्म-ओ-ज़्यादती में हद से गुज़र जाने वाला है, सख्त बध-अमल है, जफ़ा-कार है +[68:13] और इन सब उयब (ऐब) के साथ बढ़-अस्ल (नाजायज औलाद) है +[68:14] इस बिना पार के वो बहुत माल-ओ-औलाद रखता है +[68:15] जब हमारी आयतें उसको सुनाती हैं तो कहता है ये तो अगले वक्त के अफसाने हैं +[68:16] अंकरीब हम इसकी सूंड (थूथन) पर दाग लगाएंगे +[68:17] हमने (एहले मक्का) को उसी तरह आजमाइश में डाला है, जिस तरह एक बाग (बगीचे) के मालिकों को आजमाइश में डाला था, जब उन्हें ने कसम खाई के सुबह सवेरे जरूर अपने बाग के फल तोड़ेंगे +[68:18] और वह कोई इस्तस्ना (अपवाद) नहीं कर रहे थे +[68:19] रात को वो सोए पड़े थे के तुम्हारे रब की तरफ से एक बला इस बाग पर फिर गई +[68:20] और उसका हाल ऐसा हो गया जैसा कटी हुई फसल हो +[68:21] सुबह उन लोगों ने एक दूसरे को पुकारा +[68:22] कहा अगर फल तोड़ने हैं तो सवेरे सवेरे अपनी खेती की तरफ निकल चलो +[68:23] चुनांचे वो चल पड़े और आपस में चुपके-चुपके कह जाते थे +[68:24] के आज कोई मिसकीन तुम्हारे पास बाग में ना आने पाए +[68:25] वो कुछ ना देने का फैसला किये हुए सुबह सवेरे जल्दी जल्दी इस तरह वहां गए जैसे के वो (फल तोड़ने पर) कादिर हैं +[68:26] मगर जब बाघ को देखा तो कहने लगे "हम रास्ता भूल गए हैं +[68:27] नहीं बलके हम महरूम रह गए" +[68:28] उन में जो सब से बेहतर आदमी वह था कहा “मैंने तुमसे कहा ना था के तुम तस्बीह क्यों नहीं करते?” +[68:29] वो पुकार उठे पाक है हमारा रब, हकीकत हम गुनहगार थे +[68:30] फिर उनमें से हर एक दूसरे को मालामाल करने लगा +[68:31] आखिर को अनहोन ने कहा "अफसोस हमारे हाल पर, बेशक हम परेशान हो गए थे +[68:32] बाएद (दरवाजा) नहीं के हमारा रब हमें बदले में इस तरह बेहतर बाग अता फरमाये, हम अपने रब की तरफ रूजू करते हैं +[68:33] ऐसा होता है अज़ाब और आख़िरत का अज़ाब इसे भी बड़ा है, काश ये लोग इसको जानते हैं +[68:34] यकीनन खुदा-तरस लोगों के लिए उनके रब के यहां नियम भारी जन्नतें हैं +[68:35] क्या हम फरमा-बरदारों का हाल मुजरिमों सा करदें +[68:36] तुम लोगों को क्या हो गया है, तुम कैसे हुकुम लगाते हो +[68:37] क्या तुम्हारे पास कोई किताब है जिसमें तुम ये पढ़ते हो +[68:38] के तुम्हारे लिए जरूर वहां वहीं कुछ है जो तुम अपने लिए पसंद करते हो +[68:39] या फिर क्या तुम्हारे लिए रोज-ए-कयामत तक हमपर कुछ अहद-ओ-पैमान (संविदा) साबित है के तुम्हें वही कुछ मिलेगा जिसका तुम हुकुम लगाओ +[68:40] इनसे पुचो तुम में से कौन इसकी ज़मीन (गारंटी/जिम्मेदार) है +[68:41] या फिर इनके ठहरे हुए कुछ साहिरे हैं (जिन्होन ने इसका ज़िम्मा लिया हो)?ये बात है तो लायें अपने शेयरों को अगर ये सच्चे हैं +[68:42] जिस रोज़ सही वक्त आ पड़ेगा और लोगों को सजदा करने के लिए बुलाया जाएगा तो ये लोग सजदा ना कर पाएंगे +[68:43] इनकी निगाहें नीचे होंगी, जिल्लत इनपर छा रही होगी। ये जब सही-ओ-सालिम था हमें वक्त यहीं सजदे के लिए (बुलाया जाता था) और ये इन्कार करते थे +[68:44] पस ऐ नबी, तुम इस कलाम के झूठ बोलने वालों का मामला मुझपर छोड़ दो हम ऐसे तारिके से इनको बतादरीज तबाही की तरफ ले जाएंगे के इनको खबर भी ना होगी +[68:45] मैं इनकी रस्सी दराज़ कर रहा हूं, मेरी चाल बड़ी ज़बरदस्त है +[68:46] क्या तुम इनसे कोई अजर (मुआवजा) तालाब कर रहे हो के ये इस छत्ती के बोझ (कर्ज का बोझ महसूस कर रहे हैं) तले दबे जा रहे हूं +[68:47] क्या इनके पास गैब का इलम है जिसे ये लिख रहे हैं माननीय +[68:48] पास अपने रुब का फैसला होने तक सब्र करो और मछली wale (यूनिस) कि तरह ना हो जाओ, जब उसने पुकारा था और वो गम से भरा हुआ था +[68:49] अगर उसके रुब की मेहरबानी उसके शामिल-ए-हाल ना हो जाती तो वो मज़मूम (अपमान) होकर चटयाल मैदान में फेंक दिया जाता +[68:50] आखिर-ए-कार उसके रुब ने उसे बरगुज़िदा (उत्कृष्ट) फ़रमा लिया और उसे सालेह बंदों में शामिल करदिया +[68:51] जब ये काफिर लोग कलाम-ए-नसीहत (कुरान) सुनते हैं तो तुम्हें ऐसी नज़रों से देखते हैं के गोया तुम्हारे क़दम उखाड़ देंगे, और कहते हैं के ये ज़रूर दीवाना है +[68:52] हलाँके ये तो सारे जहाँ वालों के लिए एक हिदायत है + +Surah 69: Al-Haqqah (The Sure Truth) +---------------------------------------- +[69:1] होनी शुद्धि! (अनिवार्य) [सच-बहुत होने वाली] +[69:2] क्या है वो होनी शुधनी (अविश्वसनीय) +[69:3] और तुम क्या जानो के वो क्या है होनी शुधनी (अविश्वसनीय) +[69:4] समूद और आद ने हमें अचानक टूट पड़ने वाली आफत को झुटलाया +[69:5] समूद एक को सच हादसे में हलाक किए गए +[69:6] और एक बड़ी छायादार तूफानी आंधी (तूफान) से तबाह कर दिए गए +[69:7] अल्लाह ताला ने उसको मुसलसल सात (सात) रात और आठ (आठ) दिन उनपर मुसल्लत रक्खा (तुम वहां होते तो) देखते के वो वहां इस तरह फंसे पड़े jaise वो खजूर के बोसीदा (सड़े हुए) तनी (चड्डी) माननीय +[69:8] अब क्या उनमें से कोई तुम्हें बाकी नज़र आता है +[69:9] और इसी ख़ता-ए-अज़ीम का इर्तिक़ाब फिरौन और उसके पहले के लोगों ने और तलपत (पलट) हो जाने वाली बस्तियों ने किया +[69:10] उन सब ने अपने रुब के रसूल की बात ना मानी तो उसने उनको बड़े सक्ती के साथ पकड़ा +[69:11] जब पानी का तूफ़ान हद से गुज़र गया तो हमने तुमको कश्ती में सवार कर दिया था +[69:12] ता-के इस वक़िये को तुम्हारे लिए एक सबक-आमोज़ यादगार बना दें और याद रखने वाले कान इसकी याद महफूज रक्खें +[69:13] फिर जब एक दफा सुर में फूंक मार दी जाएगी +[69:14] और जमीन और पहाड़ों को उठा कर एक ही चोट में रेजा कर दिया जाएगा +[69:15] हमें रोज वो होने वाला वाकिया पेश आ जाएगा +[69:16] उसदिन आसमान फटेगा और उसकी बंदिश ढीली पढ़ जाएगी +[69:17] फ़रिश्ते उसके अतराफ़-ओ-जवानीब में होंगे और आत (आठ) फ़रिश्ते उस रोज़ तेरे रब का अर्श अपने ऊपर उठेंगे होंगे +[69:18] वो दिन होगा जब तुम लोग पेश किये जाओगे, तुम्हारा कोई राज़ भी छुपा न रह जायेगा +[69:19] हमारा वक्त जिसका नाम-ए-आमाल उसके सीधे हाथ में दिया जाएगा वो कहेगा "लो देखो, पढ़ो मेरा नाम-ए-आमाल +[69:20] मैं समझता था कि मुझे जरूर अपना हिसाब मिलने वाला है" +[69:21] पास वो दिल पसंद ऐश में होगा +[69:22] आली मुकाम जन्नत में +[69:23] जिसके फलों के झुके पढ़ रहे होंगे +[69:24] (ऐसे लोगों से कहा जाएगा) मजे से खाओ और पियो अपने उन अमल के बदले जो तुमने गुजरे हुए दिनों में किए हैं +[69:25] और जिसका नाम-ए-आमाल उसके बायें (बाएं) हाथ में दिया जाएगा वो कहेगा “ काश मेरा अमल नाम मुझे ना दिया गया होता +[69:26] और मैं ना जानता के मेरा हिसाब क्या है +[69:27] काश मेरी वही मौत (जो दुनिया में आई थी) फैसला-कुन होती +[69:28] आज मेरा माल मेरे कुछ काम ना आया +[69:29] मेरा सारा इक्तेदार ख़तम हो गया +[69:30] (हुकुम होगा) पकड़ो इसे और इसकी गर्दन में तौक डाल दो +[69:31] फिर इसे जहन्नुम में झुक दो +[69:32] फिर इसको सत्तर (सत्तर) हाथ लंबी जंजीर में जकाद दो +[69:33] ये ना अल्लाह बुज़ुर्ग-ओ-बरतर पर ईमान लता था +[69:34] और ना मिस्कीन को खाना खिलाने की तरजीब देता था +[69:35] लिहाजा आज ना यहां इसका कोई यार-ए-गमखार है +[69:36] और ना जख्मों के धोवन (घावों को धोना) के सिवा इसके लिए कोई खाना +[69:37] जैसी खटकारोन (पापी) के सिवा कोई नहीं खाता +[69:38] पास नहीं, मैं कसम खाता हूं उन चीज़ों की भी जो तुम देखते हो +[69:39] और उनकी भी जिन्हें तुम नहीं देखते +[69:40] ये एक रसूल-ए-करीम का क़ौल (भाषण) है +[69:41] किसी शायर का क़ौल नहीं है, तुम लोग कम ही ईमान लाते हो +[69:42] और ना ये किसी काहिन (भविष्यवक्ता) का क़ौल है, तुम लोग कम ही गौर करते हो +[69:43] ये रब्ब-उल आलमीन की तरफ से नाज़िल हुआ है +[69:44] और अगर (नबी) ने खुद ग़ाद कर कोई बात हमारी तरफ इंसान की होती है +[69:45] तो हम इसका डायन (दाएं) हाथ पकड़ लेते हैं +[69:46] और इसकी राग-ए-गर्दन काट डालते हैं +[69:47] फिर तुम में से कोई (हमें)इस काम से रोकने वाला ना होता +[69:48] दर हकीकत ये जरूरी लोगों के लिए एक हिदायत है +[69:49] और हम जानते हैं कि तुम में से कुछ लोग झूठ बोलने वाले हैं +[69:50] ऐसे काफिरों के लिए यकीनन ये मुजीब-ए-हसरत (अफसोस का कारण) है +[69:51] और ये बिल्कुल यकीनी हक है +[69:52] पास ऐ नबी, अपने रुब-ए-अज़ीम के नाम की तस्बीह करो + +Surah 70: Al-Ma'arij (The Ways of Ascent) +---------------------------------------- +[70:1] मंगने वाले ने अज़ाब मांगा है (वो अज़ाब) जो जरूर होने वाला है +[70:2] काफिरों के लिए है, कोई उसे दफा करने वाला नहीं +[70:3] हमें खुदा की तरफ से है जो उरूज के ज़ीनो (चढ़ते कदम) का मालिक है +[70:4] मलायका (फ़रिश्ते) और रूह (जिब्राइल) उसके हुज़ूर चढ़ कर जाते हैं एक ऐसे दिन में जिसका मिकदार पचास (पचास) हज़ार साल है +[70:5] पस ऐ नबी, सब्र करो, शाइस्ता सब्र +[70:6] ये लोग उसे दूर समझते हैं +[70:7] और हम उसे करीब देखते हैं रहे हैं +[70:8] (वो अज़ाब हमें रोज़ होगा) जिस रोज़ आसमान पिगली हुई चांदी की तरह हो जाएगा +[70:9] और पहाड़ रंग-बि-रंग के धुनके हुए ऊन (ऊन) जैसे हो जाएंगे +[70:10] और कोई जिगरी दोस्त अपने जिगरी दोस्त को ना पूछेगा +[70:11] हलांके वो एक दूसरे को दिखाये जायेंगे, मुजरिम चाहेगा के उस दिन के अज़ाब से बचने के लिए अपनी औलाद को +[70:12] अपनी बीवी को, अपने भाई को +[70:13] अपने करीब-तरीन खानदान को जो उसे पनाह देने वाला था +[70:14] और रूह-ए-जमीन के सब लोगों को फिदिया (बदले) में दे-दे और ये तदबीर उसे निजात दिला दे +[70:15] हरगिज नहीं वो तो भड़कती हुई आग की लपट होगी +[70:16] जो प्यार पोश्त को चाट जाएगी +[70:17] पुकार पुकार कर अपनी तरफ बुलाएगी हर उस शक्स को जिसने हक से मुंह मोड़ा और पीट फेरी +[70:18] और माल जमा किया और सेंत सेंत कर (संचित धन) रक्खा +[70:19] इंसान थुड़-दिला (अधीर) पैदा किया गया है +[70:20] जब उसपर मुसीबत आती है तो घबरा उठता है +[70:21] और जब उसे ख़ुश-हाली नसीब होती है तो भुल (कंजूसी) करने लगता है +[70:22] मगर वो लोग (इससे बचे हुए हैं) जो नमाज़ पढ़ने वाले हैं +[70:23] जो अपनी नमाज़ की हमेशा नमाज़ अदा करते हैं +[70:24] जिनके मालों में +[70:25] साहिल (मांगने) वाले) और महरूम का एक हक़ मुकर्रर है +[70:26] जो रोज़-ए-जज़ा को बरहक़ मानते हैं +[70:27] जो अपने रब के अज़ाब से डरते हैं +[70:28] क्योंकि उनके रब का अज़ाब ऐसी चीज़ नहीं है जिसमें कोई बेख़ौफ़ हो +[70:29] जो अपनी शर्मगाहों की हिफ़ाज़त करते हैं +[70:30] बा-जुज़ अपने बीवीयों या अपनी ममलूका औरतों के जिनसे महफ़ूज़ ना रखने में उनपर कोई मलामत नहीं +[70:31] अलबत्ता जो इसके अलावा कुछ और चाहे वही हद से तजावुज करने वाला है +[70:32] जो अपने अमानतों की हिफाजत और अपने अहद (संविदा) का पास करते हैं +[70:33] जो अपनी गवाही में रास्ते बाजी (सीधे) पर कायम रहते हैं +[70:34] और जो अपनी नमाज की हिफाजत करते हैं +[70:35] ये लोग इज्जत के साथ जन्नत के बाघों में रहेंगे +[70:36] पास ऐ नबी, क्या बात है ये मुनकिरिन दायें(बाएं) और बायें(दाएं) से +[70:37] गिरोह (भीड़) दार गिरोह (भीड़) तुम्हारी तरफ दौड़े चले आ रहे हैं +[70:38] क्या इनमें से हर एक ये लालज रखता है के वो नियामत भारी जन्नत में दाख़िल कर दिया जाएगा +[70:39] हरगिज़ नहीं हमने जिस चीज़ से इनको पैदा किया है उसे ये खुद जानते हैं +[70:40] पास नहीं, मैं कसम खाता हूं मशरिकों और मगरिबों के मालिक की हम इसपर कादिर हैं +[70:41] के इनकी जगह इनसे बेहतर लोग ले आएं और कोई हमसे बाजी ले जाने वाला नहीं है +[70:42] लिहाजा इन्हें अपनी बेहुदा बातें और अपने खेल में पड़ा रहने दो यहां तक ​​के ये अपने हमें दिन को पाहुंच जाएंगे जिसका इनसे वादा किया जा रहा है +[70:43] जब ये अपने कब्रों से निकल कर इस तरह दउदे जा रहे होंगे जैसे अपने बुथों (मूर्तियों) के आस्थानो (वेदियों) की तरफ दौड़ रहे हों +[70:44] इनकी निगाहें झुकी होंगी, जिल्लत इनपर छा रही होगी, वो दिन है जिसका इनसे वादा किया जा रहा है + +Surah 71: Nuh (Noah) +---------------------------------------- +[71:1] हमने नूह को उसकी कौम की तरफ भेजा (इस हिदायत के साथ) के अपनी क़ौम के लोगों को ख़बरदार बनाने वाला क़ब्ल इसके के ऊपर एक दर्दनाक अज़ाब आए +[71:2] उसने कहा “ ऐ मेरी क़ौम के लोगों, मैं तुम्हारे लिए एक साफ़ ख़बर बनाने वाला (पैगंबर) हूं +[71:3] (तुमको आगाह करता हूं) के अल्लाह की बंदगी करो और उसे डरो और मेरी इताअत (फॉलो) करो +[71:4] अल्लाह तुम्हारे गुनाहों से दरगुजर फरमाएगा और तुम्हें एक वक्त-ए-मुकर्रर तक बाकी रखेगा। हकीकत ये है के अल्लाह का मुकर्रर किया हुआ वक्त जब आ जाता है तो फिर ताला नहीं जाता काश। तुम्हें इसका इल्म हो +[71:5] उसने अर्ज़ किया “ऐ मेरे रब, मैंने अपनी क़ौम के लोगों को शब-ओ-रोज़ (रात और दिन) पुकारा +[71:6] मगर मेरी पुकार ने उनको फ़रार ही में इज़ाफ़ा किया +[71:7] और जब भी मैंने उनको बुलाया ता-के तू उन्हें माफ़ करदे, उन्होन ने कानो में उंगलियां थूस ली और अपने कपडों से मुंह ढक लिया और अपनी रवीश पर आधा हो गए और बड़ा तकब्बुर (गर्व) किया +[71:8] फिर मैंने उनको हांके पुकारे (खुले तौर पर) की दावत दी +[71:9] फिर मैंने एलानिया (सार्वजनिक रूप से) भी उनको तबलीग की और चुपके चुपके भी समझा +[71:10] मैंने कहा अपने रब से माफ़ी मांगो,बेशक वो बड़ा माफ़ करने वाला है +[71:11] वो तुम्हारे आसमान से ख़ूब बारिशें बरसाएगा +[71:12] तुम्हें माल और औलाद से नवाजे गा, तुम्हारे लिए बाग़ पैदा करेगा और तुम्हारे लिए नेहरेन जारी करदेगा +[71:13] तुम्हें क्या हो गया है कि अल्लाह के लिए तुम किसी वकार (महिमा) की तवक्कू नहीं रखते +[71:14] हालांके उसने तरह तरह से तुम्हें बनाया है +[71:15] क्या देखते नहीं हो के अल्लाह ने किस तरह सात आसमान तह-बर-तह बनाया +[71:16] और उनमें चांद को नूर और सूरज को चिराग बनाया +[71:17] और अल्लाह ने तुमको ज़मीन से अजीब तरह उगया +[71:18] फिर वो तुम्हें इसी ज़मीन में वापस ले जाएगा और इसे यकीनन तुमको निकल खड़ा करेगा +[71:19] और अल्लाह ने ज़मीन को तुम्हारे लिए फर्श की तरह बिछा दिया +[71:20] ता-के तुम उसके अंदर खुले रास्तों में चलो +[71:21] नूह ने कहा “मेरे रब, उनहों ने मेरी बात रद्द करदी और उन (रहीसों) की जोड़ी की जो माल और औलाद पा कर और ज़्यादा ना मुराद हो गए हैं +[71:22] इन लोगों ने बड़ा भारी मकर (प्लॉट) का जाल फैला रखा है +[71:23] इन्होन ने कहा हरगिज़ ना छोड़ो अपने मबूदोन (देवता) को, और ना छोड़ो वद्द और सुवा को और ना यगस और याऊक और नस्र को (मूर्ति के नाम) +[71:24] इन्होन ने बहुत लोगों को गुमराह किया है, और तू भी इन जालिमों को गुमराह के सिवा किसी चीज में तरक्की ना दे +[71:25] अपनी खतों की बिना पर ही वो गर्क (डूबना) किए गए और आग में झुक गए, फिर उन्हें अपने लिए अल्लाह से बचाने वाला कोई मददगार ना पाया +[71:26] और नूह ने कहा "मेरे रब, इन काफिरों में से कोई ज़मीन पर बसने वाला ना छोड़ +[71:27] अगर तू ने इन्हें छोड़ दिया तो ये तेरे बंदों को गुमराह" करेंगे और इनकी नाक से जो भी पैदा होगा बुरा और सख्त काफिर ही होगा +[71:28] मेरे रब, मुझे और मेरे वाल्डेन को और हर उस शक्स को जो मेरे घर में मोमिन की किस्मत से दखल हुआ है, और सब मोमिन मर्दों और औरतों को माफ फरमा दे, और जालिमों के लिए हलाकत के सिवा किसी चीज़ में इज़ाफ़ा ना कर + +Surah 72: Al-Jinn (The Jinn) +---------------------------------------- +[72:1] ऐ नबी, कहो, मेरी तरफ वही (रहस्योद्घाटन) भेजी गई है के जिन्नो के एक गिरोह (समूह) ने गौर से सुना फिर (जा कर अपने क़ौम के लोगों से) कहा: "हमने एक बड़ा ही अजीब कुरान सुना है +[72:2] जो राह-ए-रास्त की तरफ रहनुमाई करता है इसके लिए हम उसपर ईमान ले आए हैं और अब हम हरगिज अपने रुब के साथ किसी को शरीक नहीं करेंगे +[72:3] और ये के हमारे रुब की शान बहुत आला-ओ-अरफा है, उसने किसी को बीवी या बेटा नहीं बनाया +[72:4] और ये के हमारे नादान लोग अल्लाह के बारे में बहुत खिलाफ-ए-हक़्क़ बातें करते रहते हैं +[72:5] और ये के हमने समझा था के इंसान और जिन्न कभी खुदा के बारे में झूठ नहीं बोल जैसे +[72:6] और ये के इंसानों ने भी वही गुमान किया +[72:7] +[72:8] और ये के हमने आसमान को ततोला तो देखा के वो पहरे-दारों (भयानक रक्षकों) से पथ पड़ा है और शहाबों (शूटिंग उल्का) की बारिश हो रही है +[72:9] और ये के पहले हम सूरज-गन लेने के लिए आसमान में बैठने की जगह पा लेते थे, मगर अब जो चोरी छुपे सुनने के लिए कोशिश करता है वो अपने लिए घाट में एक शहाबे साकिब (शूटिंग उल्का) लगा हुआ पाता है +[72:10] और ये के हमारी समझ में न आता था के आया ज़मीन वालों के साथ कोई बुरा मामला करने का इरादा किया गया है या उनका रब उन्हें राह-ए-रास्त दिखाना चाहता है +[72:11] और ये के हम में से कुछ लोग सालेह (ईमानदार) हैं और कुछ इस से दूर हैं, हम मुख़्तलिफ़ तरीक़ों (तरीके/गुट) में बताए (विभाजित) हुए हैं +[72:12] और ये के हम समझते थे के ना ज़मीन में हम अल्लाह को अजीज (निराश) कर सकते हैं और ना भाग कर उसे हरा सकते हैं +[72:13] और ये के हमने जब हिदायत की तालीम सुनी तो हम उसपर ईमान ले आए अब जो कोई भी अपने रब पर ईमान ले आएगा उसे कोई हक़-तलफ़ी या ज़ुल्म का ख़ौफ़ ना होगा +[72:14] और ये के हम में से कुछ मुस्लिम (अल्लाह के इताअत गुज़र) हैं और कुछ हक़ से मुनहरिफ़ (ईमानदारी से) तो जिन्होन ने इस्लाम (इताअत का रास्ता) इख्तियार कर लिया उनहों ने नवाजत की राह ढूंढ ली +[72:15] और जो हक़ से मुहनरिफ़ है वो जहन्नुम का इंधन (ईंधन) बनाने वाला है +[72:16] और (ऐ नबी कहो मुझपर ये वही भी की गई है के) लोग अगर राह-ए-रास्त पर साबित क़दामी (दृढ़ता से) से चलते तो हम उन्हें खूब सैराब करते (प्रचुर मात्रा में बारिश प्रदान करते हैं) +[72:17] ता-के इस नियामत से उनकी आजमाइश करें और जो अपने रब के जिक्र से मुंह मोड़ेगा उसका रब उसे सख्त अजाब में मुबतला कर देगा +[72:18] और ये के मस्जिद अल्लाह के लिए है, लिहाजा उन्मेन अल्लाह के साथ किसी और को ना पुकारो +[72:19] और ये के जब अल्लाह का बंदा उसको पुकारने के लिए खड़ा हुआ तो लोग उसपर टूट पड़ें के लिए तैयार हो गए +[72:20] ऐ नबी, कहो के मैं तो अपने रब को पुकारता हूं और उसके साथ किसी को शरीक नहीं करता +[72:21] कहो मैं तुम लोगों के लिए ना किसी नुक्सान का इख्तियार रखता हूं ना किसी को भलाई का +[72:22] कहो मुझे अल्लाह की गिरफ्त से कोई नहीं बचा सकता और ना मैं उसके दामन के सिवा कोई जाए पनाह (शरण) पा सकता हूं +[72:23] मेरा काम इसको सिवा कुछ नहीं है के अल्लाह की बात और उसको पैग़ामात पाहुंचा दूं। अब जो भी अल्लाह और उसके रसूल की बात न मानेगा उसके लिए जहन्नुम की आग है और ऐसे लोग उसमें हमेशा रहेंगे +[72:24] (ये लोग अपनी इस रवीश से बाज़ न आएंगे) यहां तक ​​के जब हमें चीज को देख लेंगे जिसका इनसे वादा किया जा रहा है तो इन्हें मालूम हो जाएगा के किसके मददगार कमज़ोर हैं और किसका जत्था (समूह) तदाद में कम है +[72:25] कहो, मैं नहीं जानता के जिस चीज़ का वादा तुमसे किया जा रहा है वो करीब है या मेरा रब उसके लिए कोई लंबी मुद्दत मुक़र्रर फ़माता है +[72:26] वो अलीमुल गैब है, अपने गैब पर किसी को मुत्तला (खुलासा/खुलासा) नहीं करता +[72:27] सिवाय उस रसूल के जिसने हमें (गाइब का कोई इल्म देने के लिए) पसंद किया हो, तो उसके आगे और पीछे वो मुहाफिज (रक्षक) लगा देता है +[72:28] ता-के वो जान ले के उन्होन ने अपने रुब के पैगामात पहन दिए, और वो उनके पूरे महोल का इहाता (घेरें) किए हुए हैं और एक एक चीज को उसने जिन रक्खा है + +Surah 73: Al-Muzzammil (The One Covering Himself) +---------------------------------------- +[73:1] ऐ ओद लपेट कर (लिपटा हुआ) सोने वाले +[73:2] रात को नमाज में खड़े रहा करो मगर कम +[73:3] आधी रात +[73:4] या इस्से कुछ काम करलो या इस्से कुछ ज्यादा बढ़ा दो, और कुरान को खूब तेहर तेहर कर पढ़ो +[73:5] हम तुम्पर एक भारी कलाम नाज़िल करने वाले हैं +[73:6] दर हकीकत रात का उठना नफ्स पर काबू पाने के लिए बहुत जरूरी और कुरान ठीक पढ़ने के लिए ज्यादा मौजू (उपयुक्त) है +[73:7] दिन के औकात में तो तुम्हारे लिए बहुत मसरुफियत (लंबे समय तक कब्जा) है +[73:8] अपने रब के नाम का जिक्र किया करो और सबसे कट कर उसी के हो रहो +[73:9] वू मशरिक (पूर्व) ओ मगरिब (पश्चिम) का मालिक है, उसके सिवा कोई खुदा नहीं है, उसे अपना वकील बना लो +[73:10] और जो बातें लोग बना रहे हैं उन पर सब्र करो और शराफत के साथ उनसे अलग हो जाओ +[73:11] झूठलाने वाले खुश हाल लोगों से निमत्ने का काम तुम मुझपर छोड़ दो और यहीं ज़रा कुछ देर इसी हालत पर रहने दो +[73:12] हमारे पास (इनके लिए) भारी बेड़ियां हैं और भड़कती हुई आग +[73:13] और हलक (गले) में फ़ंसने वाला खाना और दर्द-नाक अज़ाब +[73:14] ये हमारा दिन होगा जब ज़मीन और पहाड़ दर्द उठेंगे और पहाड़ों का हाल ऐसा हो जाएगा जैसे रेत (रेत) के ढेर है जो बिखर जा रहे हैं +[73:15] तुम लोगों के पास हमने उसकी तरह एक रसूल तुम पर गवाह बना कर भेजा है जिस तरह हमने फिरौन की तरफ एक रसूल भेजा था +[73:16] (फिर देखलो के जब) फिरौन ने हमें रसूल की बात ना मानी तो हमने उसको बड़ी ताकत के साथ पकड़ लिया +[73:17] अगर तुम मान-ने से इनकार करोगे तो उस दिन कैसे बच जाओगे जो बच्चों को बूढ़ा कर देगा +[73:18] और जिसकी ताकत से आसमान फटा जा रहा होगा?अल्लाह का वादा तो पूरा होकर हाय रहना है +[73:19] ये एक हिदायत है, अब जिसका जी चाहिए अपने रब की तरफ जाने का रास्ता इख्तियार करले +[73:20] ऐ नबी, तुम्हारा रब जनता है के तुम कभी दो तिहाई (दो तिहाई) रात के करीब और कभी आधी रात और कभी एक तिहाई (एक तिहाई) रात इबादत में खड़े रहते हो, और तुम्हारे साथियों में से भी एक गिरोह ये अमल करता है, अल्लाह हाय रात और दिन के औकात का हिसाब रखा है। उसे मालूम है कि तुमलोग औकात का ठीक शाम नहीं कर सकते, लिहाजा उसने तुमपर मेहरबानी फरमायी, अब जितना कुरान आसान से पढ़ सके हो पढ़ लिया करो। उसे मालूम है कि तुम में कुछ मरिज होंगे, दूसरे लोग अल्लाह के फजल की तलाश में सफर करते हैं, और कुछ और लोग अल्लाह की राह में जंग करते हैं, जितना कुरान बा आसान पढ़ा जा सके पढ़ लिया करो, नमाज कायम करो, जकात दो और अल्लाह को अच्छा क़र्ज़ देते रहो, जो कुछ भलाई तुम अपने लिए आगे भेजोगे उसे अल्लाह के यहां मौजुद पाओगे, वही ज्यादा बेहतर है और उसका अजर बहुत बड़ा है। अल्लाह से मगफिरत मांगते रहो, बेशक अल्लाह बड़ा गफूर ओ रहीम है + +Surah 74: Al-Muddaththir (The One Wrapping Himself Up) +---------------------------------------- +[74:1] ऐ ओद लपीत (आवरण) कर लेटने वाले +[74:2] उठो और खबरदार करो +[74:3] और अपने रब की बदाई का एलान करो +[74:4] और अपने कपड़े पकड़ कर रखो +[74:5] और गंदगी से दूर रहो +[74:6] और एहसान ना करो ज्यादा हासिल करने के लिए +[74:7] और अपने रुब की खातिर सब्र करो +[74:8] अच्छा जब सूरज में फुक मारी जाएगी +[74:9] वो दिन बड़ा ही सही दिन होगा +[74:10] काफिरों के लिए हल्का न होगा +[74:11] चोद दो मुझे और उस शक्स को जिसने मैंने अकेला पैदा किया है +[74:12] बहुत सा माल उसको दिया +[74:13] उसके साथ हाजिर रहने वाले बेटे दिए +[74:14] और उसके लिए रियासत की राह हमवार की +[74:15] फिर वो तम (लालची इच्छा) रखता है के मैं उसे और ज्यादा दूं +[74:16] हरगिज नहीं वो हमारी आयत से इनाथ (जिद्दी विरोध) रखता है +[74:17] मैं तो उसे इस्तेमाल करता हूं एक कथिन चढ़ै चढ़ाऊंगा +[74:18] उसने सोचा और कुछ बात बनाने की कोशिश की +[74:19] तो खुदा की मार उसपर, कैसी बात बनाने की कोशिश की +[74:20] हां, खुदा की मार उसपर, कैसी बात बनाने की कोशिश की +[74:21] फिर(लोगों की तरफ) देखा +[74:22] फिर पेशानी सुकेदी और मुंह बनाया +[74:23] फिर पलटा और तकब्बुर में पढ़ गया +[74:24] आख़िर ए कार बोला के ये कुछ नहीं है मगर एक जादू जो पहले से चला आ रहा है +[74:25] ये तो एक इंसानी कलाम है +[74:26] अंकरिब मैं उसे दोज़ख में झोंक दूंगा +[74:27] और तुम क्या जानो के क्या है वो दोज़ख +[74:28] ना बाकी राखे ना छोड़े +[74:29] ख़ाल (त्वचा) झूलस देने वाली +[74:30] उन्नीस (उन्नीस) कारकून उसपर मुक़र्रर हैं +[74:31] हमने दोज़ख़ के ये कारकून फ़रिश्ते बनाए हैं, और उनकी तड़प को काफिरों के लिए फ़ितना बना दिया है, ता-के एहले किताब को यकीन आ जाए और ईमान लाने वालों का ईमान बढ़े, और एहले किताब और मोमिनीन किसी शक्क में ना रहे, और दिल के बीमार और कुफ्फार ये कहें कि भला अल्लाह का, अजीब बात से क्या मतलब हो सकता है। इस तरह अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह करता है और जिसे चाहता है हिदायत बख्श देता है और तेरे रब के लश्करों (सैनिकों) को खुद उसके सिवा कोई नहीं जानता, और इस दोज़क का ज़िक्र इसके सिवा किसी ग़रज़ के लिए नहीं किया गया है के लोगों को इसकी हिदायत हो +[74:32] हरगिज़ नहीं, कसम है चांद की +[74:33] और रात की जबके वो पलटती है +[74:34] और सुबह की जबके वो रोशन होती है +[74:35] ये दोज़ख भी बड़ी चीज़ों में से एक है +[74:36] इंसानों के लिए डरावा +[74:37] तुम में से हर शक्स के लिए डरवा जो आगे बढ़ना चाहे या पीछे रह जाना चाहे +[74:38] हर मुतनफ़्फ़िस, अपने क़स्ब के बदले रहन है (किसी के कर्मों का बंधक) +[74:39] दयाएं बाज़ू वालों के सिवा +[74:40] जो जन्नत में होंगे, वहां वो +[74:41] मुजरिमोन से पूछेंगे +[74:42] तुम्हें क्या चीज़ दोज़ख़ में ले गई +[74:43] वो कहेंगे “हम नमाज पढ़ने वालों में से ना थे +[74:44] और मिस्कीन को खाना नहीं खिलाते थे +[74:45] और हक़ के खिलाफ़ बातें बनाने वालों के साथ मिलकर हम भी बातें बनने लगते थे +[74:46] और रोज़-ए-जज़ा को झूठ करार देते थे +[74:47] यहां तक ​​के हमें यकीनी चीज़ से सबका पेश आ गया” +[74:48] हमें वक्त सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश उनके किसी काम ना आएगी +[74:49] आख़िर लोगों को क्या हो गया है कि ये इस हिदायत से मुंह मोड़ रहे हैं +[74:50] गोया ये जंगली गधे हैं +[74:51] जो शेर से डर कर भाग पड़े हैं +[74:52] बलके इनमें से तो हर एक ये चाहता है के उसके नाम खुले खत (स्क्रॉल/ग्रंथ) भेजे जाए +[74:53] हरगिज नहीं, असल बात ये है के ये आखिरी का खौफ नहीं रखते +[74:54] हरगिज नहीं, ये तो एक हिदायत है +[74:55] अब जिसका जी चाहे इसे सबक हासिल करले +[74:56] और ये कोई सबक हासिल न करेगा इल्ला ये के अल्लाह ही ऐसा चाहिए वो इसका हक़दार है के उसे तकवा किया जाए और वो इस्का एहल है के (तकवा करने वालों को) बख्श दे + +Surah 75: Al-Qiyamah (The Resurrection) +---------------------------------------- +[75:1] नहीं मैं कसम खाता हूं कयामत के दिन की +[75:2] और नहीं, मैं कसम खाता हूं मालामत करने वाले नफ्स की +[75:3] क्या इंसान ये समझ रहा है कि हम उसकी हदियों को जमा ना कर पाएंगे +[75:4] क्यों नहीं? हम तो उसकी उंगलियों के पोर पोर तक ठीक बना देने पर कादिर हैं +[75:5] मगर इंसान चाहता है कि आगे भी बढ़-आमलियां करता रहे +[75:6] "पूछता है" आखिर कब आना है वो कयामत का दिन +[75:7] फिर जब डेढे पथरा जाएगी (दृष्टि चकित हो जाएगी) +[75:8] और चांद बे-नूर हो जाएगा +[75:9] और चांद सूरज मिला कर एक करदिया जाएगा +[75:10] हमें वक्त यही इंसान कहेगा कहां भाग कर जाऊं +[75:11] हरगिज नहीं, वहां कोई जाएगा पनाह न होगी +[75:12] हमें रोज तेरे रुब हाय के सामने आकर ठहरना होगा +[75:13] हमें रोज इंसान को उसका सब अगला पिछला किया कराया बता दिया जाएगा +[75:14] बलके इंसान खुद ही अपने आप को खूब जानता है +[75:15] चाहे वो कितनी ही मजारतें (बहाने) करे +[75:16] ऐ नबी, इस वही को जल्दी जल्दी याद करने के लिए अपनी जुबान को हरकत ना दो +[75:17] इसको याद करा देना और पढ़ावा देना हमारी जिम्मेदारी है +[75:18] लिहाजा जब हम इसे पढ़ रहे हों हमें वक्त देते रहो, तुम इसके किरात को गौर से सुनते रहो +[75:19] फिर इसका मतलब समझा देना भी हमारी जिम्मेदारी है +[75:20] हरगिज नहीं, असल बात हाँ है के तुम लोग जल्दी हासिल होने वाली चीज (यानी दुनिया) से मुहब्बत रखते हो +[75:21] और आखिरी को छोड़ देते हो +[75:22] हमें रोज कुछ चेहरे तार-ओ-ताजा होंगे +[75:23] अपने रब की तरफ देख रहे होंगे +[75:24] और कुछ चेहरे उदास होंगे +[75:25] और समझ रहेंगे होंगे के उनके साथ कमर-तोड़ तोड़ो होने वाला है +[75:26] हरगिज नहीं, जब जान हलक तक पहुंच जाएगी +[75:27] और कहा जाएगा के है कोई झाड़ फूंक करने वाला +[75:28] और आदमी समझ लेगा के ये दुनिया से जुदाई का वक्त है +[75:29] और पिंडली(पैर) से पिंडली(पैर) जुड़ जाएगी +[75:30] वो दिन होगा तेरे रब की तरफ रावंगी का +[75:31] मगर उसने ना सच माना, और ना नमाज पढ़ी +[75:32] बलके झुटलया और पलट गया +[75:33] फिर अकदता हुआ अपने घर वालों की तरफ चल दिया +[75:34] ये रवीश तेरे ही लिए सजा देती है और तुझ ही को ज़िब देती है +[75:35] हां ये रवीश तेरे ही लिए सजा देती है और तुझ ही को ज़िब देती है +[75:36] क्या इंसान ने ये समझ रखा है के वो यूं ही मोहमल (अकेला छोड़ दिया, बिना किसी सवाल के) छोड़ दिया जाएगा +[75:37] क्या वो एक हकीर पानी का नुत्फा (वीर्य से शुक्राणु) ना था जो (रहम-ए-मदार में) टपकया जाता है +[75:38] फिर वो एक खून (थक्का) बना, फिर अल्लाह ने उसका जिस्म बनाया और उसकी आजा दुरुस्त किए +[75:39] फिर उसे मर्द और औरत की दो क़िस्में बनाई +[75:40] क्या वो इसपर कादिर नहीं है के मरने वालों को फिर जिंदा करदे + +Surah 76: Al-Insan (The Man) +---------------------------------------- +[76:1] क्या इंसान पर ला मुतानाही ज़माने का एक वक़्त ऐसा भी गुज़रा है जब वो कोई काबिल ए ज़िक्र चीज़ ना था +[76:2] हमने इंसान को एक मख़लुत नटफ़े (अंतरमिश्रित शुक्राणु) से भुगतान किया ता-के उसका इम्तिहान लें और इस ग़रज़ के लिए हमने उसे सुने और देखने वाला बनाया +[76:3] हमने उसे रास्ता दिखाया, ख़्वाह शुकर करने वाला बने या कुफ़्र करने वाला +[76:4] कुफ़्र करने वालों के लिए हमने जंजीरें और तौक (बेड़ियां) और भड़कती हुई आग मुहैया कर रखी है +[76:5] नेक लोग (जन्नत में) शराब के ऐसे सागर पिएंगे जिनमें आबे काफूर की आमिश (मिश्रण) होगी +[76:6] ये एक बहता चश्मा (वसंत) होगा जिसके पानी के साथ अल्लाह के बंदे शराब पिएंगे और जहां चाहेंगे बा-सहुलत उसकी शाखें (निकल) लेंगे +[76:7] ये वो लोग होंगे जो (दुनिया में) नजर पूरी करते हैं, और उस दिन से डरते हैं जिसकी आफत हर तरफ फैली हुई होगी +[76:8] और अल्लाह कि मुहब्बत में मिस्कीन और यतीम और क़ैदी को खाना खिलाते हैं +[76:9] और उन्हें कहते हैं के (हम तुम्हें सिर्फ) अल्लाह की खातिर खिला रहे हैं, हम तुमसे ना कोई बदला चाहते हैं ना शुक्रिया +[76:10] हमें तो अपने रब से उस दिन के अज़ाब का खौफ़ लाहिक है जो सच मुसीबत का इन्तेहाई तवील दिन होगा +[76:11] पास अल्लाह ताला उन्हें हमारे दिन के शरर से बचा लेगा और उन्हें ताजगी और सुरूर बख्शेगा +[76:12] और उनके सब्र के बदले में उन्हें जन्नत और रेशमी लिबास अता करेगा +[76:13] वहां वो अनचे मस्नदों पर ताकिये लगाये बैठे होंगे, ना उन्हें धूप की गर्मी सतायेगी ना जादे की ठंड (कड़ाके की ठंड) +[76:14] जन्नत की छाँव उन पर झुकी हुई साया कर रही होगी, और उसके फल हर वक्त उनके बस में होंगे(के जिस तरह चाहे उन्हें तोड़ लें) +[76:15] उनके आगे चांदी के बर्तन और शेष के प्याले गर्दिश कराए जा रहे होंगे +[76:16] शेष भी वो जो चांदी की क़िस्म के होंगे, और उनको (मुंतज़मीन-ए-जन्नत नहीं) ठीक अंदाज़ के मुताबिक भरा होगा +[76:17] उनको वहां ऐसी शराब के जाम पिलाये जायेंगे जिसमें अदरक की आमद होगी +[76:18] ये जन्नत का एक चश्मा होगा जिसे सालसबिल कहा जाता है +[76:19] उनकी खिदमत के लिए ऐसे लड़के दौड़ते फिर रहेंगे होंगे जो हमेशा लड़के ही रहेंगे।तुम उन्हें देखो तो समझो के मोती (मोती) है जो बिखर गए हैं +[76:20] वहां जिधर भी तुम निगाह डालोगे नियामतें ही नियामतें और एक बड़ी सल्तनत का सर ओ समां तुम्हें नजर आएगा +[76:21] उनके ऊपर बारीक रेशम के सब्ज लिबास और एटलस ओ देबा के कपड़े (रिच) ब्रोकेड)होंगे, उनको चांदी के कंगन पहनेंगे जाएंगे, और उनका रब उनको निहायत पाकीजा शराब पिलाएगा +[76:22] ये है तुम्हारी जजा और तुम्हारी कार-गुजारी काबिल-ए-कदर ठहरी है +[76:23] ऐ नबी, हमने ही तुमपर ये कुरान थोड़ा थोड़ा करके नाज़िल किया है +[76:24] लिहाज़ा तुम अपने रुब के हुकुम पर सब्र करो, और मुझमें से कोई बढ़-अमल या मुनकिर-ए-हक की बात न मानो +[76:25] अपने रब का नाम सुबह-ओ-शाम याद करो +[76:26] रात को भी उसके हुजूर सजदा रायज़ हो, और रात के तवील औकात में उसकी तस्बीह करते रहो +[76:27] ये लोग तो जल्दी हासिल होने वाली चीज (दुनिया) से मुहब्बत रखते हैं है और अगले जो भारी दिन आने वाला है उसे नज़र अंदाज़ करते हैं +[76:28] हमने ही इनको पेदा किया है और इनके जोड़ मजबूत किए हैं, और हम जब चाहें इनकी शक्लों को बदल कर रख दें +[76:29] ये एक हिदायत है, अब जिसका जी चाहिए अपने रब की तरफ जाने का रास्ता इख्तियार करले +[76:30] और तुम्हारे चाहने से कुछ नहीं होता जब तक कि अल्लाह न चाहे, यकीनन अल्लाह बड़ा अलीम-ओ-हकीम है +[76:31] अपनी रहमत में जिसका चाहता है दाख़िल करता है, और जालिमों के लिए उसने दर्दनाक अज़ाब तय्यार कर रक्खा है + +Surah 77: Al-Mursalat (Those Sent Forth) +---------------------------------------- +[77:1] कसम है उन (हवाओं) की जो पै डर पै भेजती हैं +[77:2] फिर तूफानी रफ़्तार से चलती है +[77:3] और (बादलों को) उठा कर फैलाती है +[77:4] फिर (उनको) फाड़ कर जुदा करती है +[77:5] फिर (दिलों में खुदा की)याद डालती है +[77:6] उजार (औचित्य) के तौर पर या डरावे के तौर पर +[77:7] जिस चीज का तुमसे वादा किया जा रहा है वह जरूर होने वाली है +[77:8] फिर जब सितारे मांड (बुझाना) पड़ जाएगा +[77:9] और आसमान फाड़ दिया जाएगा +[77:10] और पहाड़ धुनक डाले जाएंगे (उड़ा दिया जाएगा) +[77:11] और रसूलों की हाजिरी का वक्त आ पहुंचेगा (उस रोज वो चीज पैदा हो जाएगी) +[77:12] किस रोज के आपके लिए ये काम उठा रखा गया है +[77:13] फ़ैसले के रोज़ के लिए +[77:14] और तुम्हें क्या खबर के वो फ़ैसले का दिन क्या है +[77:15] तबाही है उस दिन झूठ बोलने वालों के लिए +[77:16] क्या हमने एग्लोन को हलाक नहीं किया +[77:17] फिर उन्हीं के पीछे हम बाद वालों को चलाएंगे +[77:18] मुजरिमों के साथ हम यही कुछ करते हैं +[77:19] तबाही है उस दिन झुटलाने वालों के लिए +[77:20] क्या हमने एक हकीर पानी से तुम्हें पैदा नहीं किया +[77:21] और एक मुकर्ररा मुद्दत तक +[77:22] उसे एक महफूज जगह ठहरे रक्खा +[77:23] तो देखो, हम इसपर कादिर थे, पास हम बहुत अच्छी कुदरत रखने वाले हैं +[77:24] तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए +[77:25] क्या हमने ज़मीन को समेट कर रखने वाली नहीं बनाया +[77:26] ज़िंदों के लिए भी और मुर्दों के लिए भी +[77:27] और इस में बुलंद-ओ-बाला पहाड़ जमाए, और तुम्हें मीठा पानी पिलाया +[77:28] तबाही है हमें रोज़ झुटलाने वालों के लिए +[77:29] चलो अब उसी चीज़ की तरफ जिसे तुम झुटलाया करते थे +[77:30] चलो हमें साए की तरफ जो तीन शाखों (कॉलम) वाला है +[77:31] ना ठंडक छूने वाला और ना आग की गोद से बचाने वाला +[77:32] वो आग महल (महल/किला) जैसी बड़ी बड़ी चिंगारियां फेंकेगी +[77:33] (जो उछलती हुई यूं मेहसूस होंगी )गोया के वो जर्द ऊंट (ऊंट) है +[77:34] तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए +[77:35] ये वो दिन है जिसमें वो ना कुछ बोलेंगे +[77:36] और ना उन्हें मौका दिया जाएगा के कोई उज्र(बहाना) पेश करें +[77:37] तबाही है उस दिन झूठलाने वालों के लिए +[77:38] ये फ़ैसले का दिन है हमने तुम्हें और तुमसे पहले गुज़रे हुए लोगों को जमा कर दिया है +[77:39] अब अगर कोई चल सकता है तो मेरे मुकाबले में चल देखो +[77:40] तबाही है उस दिन झूठलाने वालों के लिए +[77:41] मुत्तक़ी लोग आज साये और चश्में में हैं +[77:42] और जो फल वो चाहें (उनके लिए हाज़िर है) +[77:43] खाओ और पियो मजे से अपने उन अमल के सिली में जो तुम करते रहे हो +[77:44] हम नए लोग हैं को ऐसी ही जजा देते हैं +[77:45] तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए +[77:46] खा लो और मजे करलो थोड़े दिन, हकीकत में तुम लोग मुजरिम हो +[77:47] तबाही है हमें रोज झुटलाने वालों के लिए +[77:48] जब इनसे कहा जाता है के (अल्लाह के आगे) झुको तो नहीं झुकते +[77:49] तबाही है उस रोज़ झुकने वालों के लिए +[77:50] अब (कुरान) के बाद और कौनसा कलाम ऐसा हो सकता है जिसपर ये ईमान लाये + +Surah 78: An-Naba' (The Announcement) +---------------------------------------- +[78:1] ये लोग किस चीज के बारे में पूछ-गज्ज कर रहे हैं +[78:2] क्या हम बड़ी खबर के बारे में हैं +[78:3] जिसका मुतालिक ये मुखतलिफ छे-मेई-गोइयां (असहमति) करने में लगे हुए हैं +[78:4] हरगिज नहीं एक-करीब इन्हें मालूम हो जाएगा +[78:5] हां हरगिज नहीं, करीब इन्हें मालूम हो जाएगा +[78:6] क्या ये वाकिया नहीं है के हमने जमीन को फर्श बनाया +[78:7] और पहाड़ों को पहाड़ो की तरह गाड़ दिया +[78:8] और तुम्हें (मर्दों और औरतों के) जोड़ो की शक्ल में पैदा किया +[78:9] और तुम्हारी नींद को ऐसे सुकून बनाया +[78:10] और रात को पर्दा पोश +[78:11] और दिन को मुआश का वक्त बनाया +[78:12] और तुम्हारे ऊपर सात मजबूत आसमान कायम किए +[78:13] और एक निहायत रोशन और गरम चिराग़ पैदा क्या +[78:14] और बादलों से लगता है बारिश बरसती है +[78:15] ता-के इसके ज़रिये से गल्ला (अनाज) और सब्जी +[78:16] और घने बाग उगे +[78:17] बाकी फ़ैसले का दिन एक मुकर्रर वक़्त है +[78:18] जिस रोज़ सूर में फुक मार दी जाएगी तुम फौज डर फौज निकल आओगे +[78:19] और आसमान खोल दिया जाएगा हटा के वो दरवाजे ही दरवाजे बन कर रह जाएगा +[78:20] और पहाड़ चलाएंगे यहां तक ​​के वो साराब (मृगतृष्णा) हो जाएंगे +[78:21] दर हकीकत जहन्नुम एक घाट (घात) है +[78:22] सरकशों का ठिकाना +[78:23] जिसमें वो मुद्दतों पड़े रहेंगे +[78:24] उसके अंदर कोई ठंडक और पीने के काबिल किसी चीज का मजा वो न चखेंगे +[78:25] कुछ मिलेगा तो बस गरम पानी और जख्मों का धो-वान(पीप) +[78:26] (उनके करतूतों) का भारपुर बदला +[78:27] वो किसी हिसाब की तवक्कू ना रखते थे +[78:28] और हमारी आयतों को उन्होंने बिल्कुल झुटला दिया था +[78:29] और हाल ये था के हमने हर चीज गिन कर लिख रखी थी +[78:30] अब चाहो मजा, हम तुम्हारे लिए अज़ाब के सिवा किसी चीज में हरगिज इज़ाफा ना करेंगी +[78:31] यकीनन मुत्तकियों (पवित्र) के लिए कामरानी का एक मुकाम है +[78:32] बाघ और अंगुर +[78:33] और नौखेज हम्सिन लड़कियां +[78:34] और झलकते हुए जाम +[78:35] वहां कोई लगव(व्यर्थ) और झूठी बात वो ना सुनेंगे +[78:36] जजा और काफी इनाम तुम्हारे रब की तरफ से +[78:37] हमें निहायत मेहरबान खुदा की तरफ से जो जमीन और आसमान का और इनके दरमियान की हर चीज का मालिक है जिसके सामने किसी को बोलने का यारा नहीं +[78:38] जिस रोज़ रूह और मलाइका सफ़ बस खड़े होंगे। कोई ना बोलेगा सिवाए उसके जिसे रहमान इजाज़त दे और जो ठीक बात कहे +[78:39] वो दिन बार-हक़ है, अब जिसका जी चाहे अपने रब की तरफ पलटने का रास्ता इख्तियार करले +[78:40] हमने तुम लोगों को अज़ाब से डरा दिया है जो करीब आ लगा है. जिस रोज़ आदमी वो सब कुछ देख लेगा जो उसके हाथों ने आगे भेजा है, और काफ़िर पुकार उठेगा के काश में खाक (मिट्टी) होता है + +Surah 79: An-Nazi'at (Those Who Yearn) +---------------------------------------- +[79:1] कसम है उन (फरिश्तों) की जो डूब कर खिंचते हैं +[79:2] और आहिस्तगी से (धीरे ​​से) निकल ले जाते हैं +[79:3] और (उन फ़रिश्तों की जो कायनात में) तेजी से तैरते फिरते हैं +[79:4] फिर (हुकुम बजा लाने में) सबक करते हैं +[79:5] फिर (एहकाम-इलाही के मुताबिक) मामलात का इंतिज़ाम चलते हैं +[79:6] जिस रोज़ हिला मारे गा ज़लज़ले का झटका +[79:7] और उसके पीछे एक और झटका पड़ेगा +[79:8] कुछ दिल होंगे जो हमें रोज़ खौफ से कांप रहे होंगे +[79:9] निगाहें उनकी सहमत (डाउनकास्ट) हुई होगी +[79:10] ये लोग कहते हैं “क्या वकै हम पलटा कर फिर वापस लाये जायेंगे?” +[79:11] "क्या जब हम खोकली बोसीदा (खोखला और सड़ा हुआ) हदियां बन चुके होंगे?" +[79:12] कहने लगे "ये वापसी तो फिर बड़े घाटे(नुक्सान) की होगी" +[79:13] हलांके ये बस इतना काम है के एक ज़ोर की डांट पड़ेगी +[79:14] और यकायक ये खुले मैदान में मौजुद होंगे +[79:15] क्या तुम्हें मूसा के किस्से की खबर मिलती है +[79:16] जब उसके रब ने उसे तुवा के मुक़द्दस कहा वादी (घाटी) में पुकारा था +[79:17] के फिरौन के पास जा, वो व्यंग्य हो गया है +[79:18] और उसे कहा, क्या तू इसके लिए तैयार है के पाकीज़गी इख्तियार करे +[79:19] और मैं तेरे रब की तरफ तेरी रहनुमाई करूं तो (उसका) खौफ terey andar paida ho?” +[79:20] फिर मूसा ने (फिरौन के पास जा कर) उसको बड़ी निशानी दिखाई +[79:21] मगर उसने झुटला दिया और ना माना +[79:22] फिर चाल बाज़ियां करने के लिए पलटा +[79:23] और लोगों को जमा करके उसने पुकार कर कहा +[79:24] “मैं तुम्हारा सबसे बड़ा रब हूं” +[79:25] आख़िर-ए-कार अल्लाह ने उसे आख़िरत और दुनिया के अज़ाब में पकड़ लिया +[79:26] दर हकीकत इस में बड़ी इब्रत है हर उस शक्स के लिए जो डरे +[79:27] क्या तुम लोगों की तख़लीक़ (पैदाइश) ज़्यादा सच काम जय हो आसमान की? अल्लाह ने उसको बनाया +[79:28] उसकी छत (छत) खूब ऊंची उठाई फिर उसका तवाज़ुन क़याम किया (इसे समानुपातिक) +[79:29] और उसकी रात ढांकी और उसका दिन निकला +[79:30] इसके बाद ज़मीन को उसने बिछाया +[79:31] उसके अंदर से उसका पानी और चारा निकला +[79:32] और पहाड़ उसमें गढ़ दिए +[79:33] सामान-ए-ज़ीस्ट (प्रावधान) के तौर पर तुम्हारे लिए और तुम्हारे अवसरों के लिए +[79:34] फिर जब वो हंगामा-ए-अज़ीम बरपा होगा +[79:35] जिस रोज़ इंसान अपना सब किया धारा याद करेगा +[79:36] और हर देखने वाले के सामने दोज़क खोल कर रख दी जाएगी +[79:37] तो जिसने सरकशी की थी +[79:38] और दुनिया की जिंदगी को तारजी दी थी +[79:39] दोज़ख ही उसका ठिकाना होगी +[79:40] और जिसने अपने रुब के सामने खड़े होने का खौफ किया था और नफ्स को बुरी ख्वाहिशों से बाज़ रखा था +[79:41] जन्नत उसका ठिकाना होगी +[79:42] ये लोग तुमसे पूछते हैं के आखिर वो घड़ी कब आकर ठहरे गी +[79:43] तुम्हारा क्या काम है हमारे का वक़्त बताओ +[79:44] उस का इल्म तो अल्लाह पर ख़तम है +[79:45] तुम सिर्फ ख़बरदार करने वाले हो हर उस शक्स को जो उसका ख़ौफ़ करे +[79:46] जिस रोज़ ये लोग उसे देख लेंगे तो उन्हें यूं महसूस होगा के (ये दुनिया में या हालात-ए-मौत मेई) बस एक दिन के पिछले पहर या अगले पहर तक ठहरे है + +Surah 80: 'Abasa (He Frowned) +---------------------------------------- +[80:1] [पैगंबर] तुर्श-रूह (भौंहें चढ़ाए हुए) हुआ और बेरुखी बारती +[80:2] इस बात पर के वो अंधा उसके पास आ गया +[80:3] तुम्हें क्या खबर, शायद वाह सुधार जाए +[80:4] या हिदायत पर ध्यान दे और हिदायत करना हमारे लिए नफ़ेआ (फ़य्यादमंद) हो +[80:5] जो शक्स बे-परवाही बरता है +[80:6] उसकी तरफ तो तुम तवज्जुह करते हो +[80:7] हलांके अगर वो ना सुधरे तो तुम पर उसकी क्या ज़िम्मेदारी है +[80:8] और जो खुद तुम्हारे पास दौड़ा आता है +[80:9] और वह डर रहा है +[80:10] उससे तुम बेरुखी बारात-ते हो +[80:11] हरगिज नहीं ये तो एक हिदायत है +[80:12] जिसका जी चाहे इसे कबूल करे +[80:13] ये ऐसे सहीफों मैं दरज है जो मुकर्रम हैं +[80:14] बुलंद मरतबा हैं, पाकीज़ा हैं +[80:15] मुअज्जज़ और नीक कातिबों के +[80:16] हाथों में रहते हैं +[80:17] लानत हो इंसान पर कैसा सच मुन्किर-ए-हक (सच्चाई से इनकार करता है) है ये +[80:18] किस चीज से अल्लाह ने इसे पैदा किया है +[80:19] नुत्फा की एक बूंद से अल्लाह ने इसे पैदा किया फिर इसकी तकदीर मुकर्रर की +[80:20] फिर इसके लिए जिंदगी की राह आसान की +[80:21] फिर इसे मौत दी और क़ब्र में पाहुंचया +[80:22] फिर जब चाहिए वो इसे दोबारा उठा खड़ा करे +[80:23] हरगिज नहीं, इसने वो फर्ज अदा नहीं किया जिसका अल्लाह ने इसे हुकुम दिया था +[80:24] फिर जरा इंसान अपनी खुराक (खाने/खाने) को देखे +[80:25] हमने खूब पानी डाला (डाला) +[80:26] फिर जमीन को अजीब तरह फाड़ा +[80:27] फिर हमारे अंदर उगे गैले(अनाज) +[80:28] और अंगूर और तरकारियां +[80:29] और ज़ैतून और खजूरें +[80:30] और घने बाग(बगीचे) +[80:31] और तरह तरह के फल और चारे +[80:32] तुम्हारे आपके लिए तुम्हारे मवेशी (मवेशी) के लिए सामान-ए-ज़िस्ट (प्रावधान) के तौर पर +[80:33] आख़िर-ए-कार जब वो कान बहरे कर देने वाली आवाज़ बुलंद होगी +[80:34] उस रोज़ आदमी अपने भाई +[80:35] और अपनी माँ और अपने बाप +[80:36] और अपनी बीवी और अपनी औलाद से भागेगा +[80:37] उनमें हर शक्स पर उस दिन ऐसा वक्त आ पड़ेगा के उसे अपने सिवा किसी का होश न होगा +[80:38] कुछ चेहरे हमें रोज दमक रहे होंगे +[80:39] हशश बशश और खुश ओ खुर्रम होन्गी +[80:40] और कुछ चेहरों पर उस रोज़ खाक (धूल) उड़ रही होगी +[80:41] और कलों (अंधेरा) छाई हुई होगी +[80:42] यही काफिर ओ फजिर (अविश्वासी और दुष्ट) लोग हैं + +Surah 81: At-Takwir (The Folding Up) +---------------------------------------- +[81:1] जब सूरज लपेट दिया जाएगा +[81:2] और जब तारे बिखर जाएंगे +[81:3] और जब पहाड़ चलाये जाएंगे +[81:4] और जब दस महीने की हमीला ऊंटनियां (वह-ऊंटनी) अपने हाल पर छोड़ दी जाएंगी +[81:5] और जब जंगली जानवर समथ कर इखत्ते कर दिए जाएंगे +[81:6] और जब समंदर भड़का दिए जाएंगे +[81:7] और जब जाने (जिस्म से) जोध दी जाएगी +[81:8] और जब जिंदा गाड़ी हुई (दफन) लड़की से पूछ जाएगी +[81:9] के वो किस कसूर में मरी गई +[81:10] और जब आमाल-नाम (कर्मों की पुस्तक) खोले जाएंगे +[81:11] और जब आसमान का परदा हटा दिया जाएगा +[81:12] और जब जहन्नम देहकै जाएगी +[81:13] और जब जन्नत करीब ले आएगी +[81:14] हमें वक्त हर शक्स को मालूम हो जाएगा के वो क्या लेकर आया है +[81:15] पास नहीं मैं कसम खाता हूं +[81:16] पलटने और चुप जाने वाले तारों की +[81:17] और रात की जबके वो रुक्सत हुई +[81:18] और सुबह की जबके उसने सांस लिया +[81:19] ये फिल वाकिया एक बुज़ुर्ग पैगाम-बार का क़ौल है +[81:20] जो बड़ी तवानाई (हो सकता है) रखता है, अर्श वाले के यहां बुलंद मरतबा है +[81:21] वहां उसका हुकुम मन जाता है, वो बा-एतमाद (भरोसेमंद) है +[81:22] और (ऐ एहले मक्का) तुम्हारा रफीक (साथी) मजनूं (पागल) नहीं है +[81:23] उसने पैगम्बर को रोशन उफ़ाक (स्पष्ट क्षितिज) पर देखा है +[81:24] और वह गैब (के इस इलम को लोगों तक पहुंच सके) के मामले में बख़ील नहीं है +[81:25] और यह किसी शैतान-ए-मर्दूद का क़ौल नहीं है +[81:26] फिर तुम लोग किधर चले जा रहे हो +[81:27] ये तो सारे जहां वालों के लिए एक हिदायत है +[81:28] तुम मेरे साथ हर उस शक्स के लिए जो राह-ए-रास्त पर चलना चाहता हो +[81:29] और तुम्हारे चाहने से कुछ नहीं होता जब तक अल्लाह रब्ब-उल-आलमीन न चाहिए + +Surah 82: Al-Infitar (The Cleaving) +---------------------------------------- +[82:1] जब आसमान फट जाएगा +[82:2] और जब तारे बिखर जाएंगे +[82:3] और जब समंदर फाड़ दिए जाएंगे +[82:4] और जब कब्रें खुल जाएंगी +[82:5] हमारा वक्त हर शक्स को उसका अगला पिछला सब किया धरा मालूम हो जाएगा +[82:6] ऐ इंसान किस चीज ने तुझे और अपने उस रब-ए-करीम की तरफ से धोखे में डाल दिया +[82:7] जिसने तुझ पेदा किया, तुझे नेक-सुक से दुरुस्त किया (आपको आकार दिया), तुझे मुतनसिब (अच्छी तरह से अनुपातिक) बनाया +[82:8] और जिस सूरत में चाहा तुझको जोड़ कर तैयार किया +[82:9] हरगिज नहीं बलके (असल बात ये है के) तुमलोग जजा-ओ-सजा को झुठलाते हो +[82:10] हलांके तुमपर निग्रां मुकर्रर हैं +[82:11] ऐसे मुअज्जज कातिब +[82:12] जो तुम्हारे हर फेल (अमल) को जानते हैं +[82:13] यक़ीनन नेक लोग मजे में होंगे +[82:14] और बेचैन होकर लोग जहन्नम में जाएंगे +[82:15] जजा के दिन वो इस में दाख़िल होंगे +[82:16] और हम से हरगिज़ गायब न होंगे +[82:17] और तुम क्या जानते हो के वो जजा का दिन क्या है +[82:18] हां तुम्हें क्या खबर के वो जजा का दिन क्या है +[82:19] ये वो दिन है जब किसी शक के लिए कुछ करना किसी के बस में न होगा, फैसला उस दिन बिल्कुल अल्लाह के इख्तियार में होगा + +Surah 83: At-Tatfif (Default in Duty) +---------------------------------------- +[83:1] तबाही है दांडी मारने वालों के लिए +[83:2] जिनका हाल ये है कि जब लोगों से लेते हैं तो पूरा पूरा लेते हैं +[83:3] और जब उनको नाप कर या टोल कर देते हैं तो उन्हें घाटा देते हैं है +[83:4] क्या ये लोग नहीं समझते के एक बड़े दिन +[83:5] ये उठा कर लाए जाने वाले हैं +[83:6] उस दिन जबके सब लोग रब्ब-उल-आलमीन के सामने खड़े होंगे +[83:7] हरगिज नहीं, यकीनन बदकारों का नाम-ए-आमाल क़ैद-ख़ाने के दफ़्तर में है +[83:8] और तुम्हें क्या मालूम के वो क़ैद-ख़ाने का दफ़्तर क्या है +[83:9] एक किताब है लिखी हुई +[83:10] तबाही है उस रोज़ झूठलाने वालों के लिए +[83:11] जो रोज़-ए-जज़ा को झुटलाते हैं +[83:12] और उसे नहीं झुटलता मगर हर वो शक्स जो हद से गुजर जाने वाला बद-अमल है +[83:13] उसे जब हमारी आयतें सुनाई जाती हैं तो कहता है ये तो अगले वक्त की कहानियां हैं +[83:14] हरगिज नहीं, बलके दरसल इन लोगों के दिलों पर इनके बुरे अमल का ज़ंग (जंग) चढ़ गया है +[83:15] हरगिज़ नहीं बिल यकीन हमें रोज़ ये अपने रब की दीदार (दीदार) से महरूम रखे जाएंगे +[83:16] फिर ये जहन्नुम में जा पड़ेंगे +[83:17] फिर इनसे कहा जाएगा के ये वही चीज़ है जैसे तुम झूठलाया करते थे +[83:18] हरगिज नहीं, बेशक नए आदमियों का नाम-ए-आमाल बुलंद पाया लोगों के दफ्तर में है +[83:19] और तुम्हें क्या खबर है क्या है वो बुलंद पाया लोगों का दफ्तर +[83:20] एक लिखी हुई किताब है +[83:21] जिसकी निगेह-दाश्त मुकर्रब फ़रिश्ते करते हैं +[83:22] बेशाख नेक लोग बादे मजे में होंगे +[83:23] ऊंची मसनादो (सोफे) पर बैठे नजरिए कर रहे होंगे +[83:24] उनके चेहरों पर तुम खुशहाली की रौनक महसूस करोगी +[83:25] उनको नफ़ीस तारें सरबंद शराब पिलाई जाएगी जिसपर मुश्क की मोहर (सील) लगेगी +[83:26] जो लोग दूसरों पर बाजी ले जाना चाहते हैं, वह इस चीज को हासिल करने में बाजी ले जाने की कोशिश करें +[83:27] हमें शराब में तस्नीम की आमेज (मिश्रण) होगी +[83:28] ये एक चश्मा है जिसके पानी के साथ मुकर्रब लोग शराब पिएंगे +[83:29] मुजरिम लोग दुनिया में ईमान लाने वालों का मज़ाक उड़ाते थे +[83:30] जब उनके पास से गुज़रते तो आंखें मार मार कर उनकी तरफ इशारे करते थे +[83:31] अपने घरोन की तरफ पलट-ते तो मजे लेते हुए पलट-ते थे +[83:32] और जब उन्हें देखते तो कहते थे के ये बहके हुए लोग हैं +[83:33] हलांके वो उन पर निगरान बनकर नहीं भेजये गए थे +[83:34] आज ईमान लाने वाले कुफ्फार पर हंस रहे हैं +[83:35] मसनदों पर बैठे हुए उनका हाल देख रहे हैं +[83:36] मिल गया न काफिरों को उन हरकतों का सवाब जो वो किया करता था + +Surah 84: Al-Inshiqaq (The Bursting Asunder) +---------------------------------------- +[84:1] जब आसमां फट जाएगा +[84:2] और अपने रब का फमां की तमील करेगा और उसके लिए हक यहीं है (के अपने रुब का हुकुम माने) +[84:3] और जब ज़मीन फैला दी जाएगी +[84:4] और जो कुछ उसके अंदर है उसे बाहर फेंक कर खाली हो जाएगी +[84:5] और अपने रुब के हुकुम की तमील करेगी और उसके लिए हक यहीं है (काय उसकी तमील करे) +[84:6] ऐ इंसान तू काशान काशान अपने रब की तरफ चल जा रहा है और उसे मिलने वाला है +[84:7] फिर जिसका नाम-ए-आमाल उसके सीधे हाथ में दे दिया गया +[84:8] उसका हलका हिसाब लिया जाएगा +[84:9] और वो अपना लोगों की तरफ खुश ख़ुश पलटेगा +[84:10] रहा वो शक्स जिसका नाम-ए-आमाल उस की पीठ के पीछे दिया जाएगा +[84:11] तो वो मौत को पुकारेगा +[84:12] और भक्ति हुई आग में जा पड़ेगा +[84:13] वो अपने घर वालों में मगन था +[84:14] उसने समझ था के उसे कभी पलटना नहीं है +[84:15] पलटना कैसे ना था, उसका रब उसे करतूत देख रहा था +[84:16] पास नहीं मैं कसम खाता हूं शफक (ट्वाइलाइट) की +[84:17] और रात की और जो कुछ वही लेती है +[84:18] और चांद की जबके वो माह-ए-कामिल (पूर्ण) हो जाता है +[84:19] तुमको जरूर दरजा बा दरजा एक हालत से दूसरी हालत की तरफ गुज़रते जाना है +[84:20] फिर लोगों को क्या हो गया है के ये ईमान नहीं लाते +[84:21] और जब कुरान इनके सामने पड़ा जाता है सजदा नहीं करते +[84:22] बलके ये मुनकिरीन तो उल्टा झूठलाते हैं +[84:23] हलांके जो कुछ ये (अपने नाम-ए-आमाल में) जामा कर रहे हैं अल्लाह उसे खूब जानता है +[84:24] लिहाजा इनको दर्दनाक अज़ाब की बशारत देदो +[84:25] अलबत्ता जो लोग ईमान ले आये हैं और जिन्हो ने नेक अमल किये हैं उनके लिए कभी ख़तम न होने वाला अजर है + +Surah 85: Al-Buruj (The Stars) +---------------------------------------- +[85:1] कसम है मज़बूत क़लों वाले (अभेद्य महल) आसमान की +[85:2] और हमारे दिन की जिसका वादा किया गया है +[85:3] और देखने वाले की और देखी जाने वाली चीज की +[85:4] काय मारे गए गड्ढे वाले +[85:5] उस गड्ढे वाले] जिस में खूब भड़कते हुए इंधन की आग थी +[85:6] जबके वो हमें गद्दे के किनारे पर बिठाए हुए थे +[85:7] और जो कुछ वो ईमान लाने वालों के साथ कर रहे थे उसे देख रहे थे +[85:8] और उन एहले ईमान से उनकी दुश्मनी इसके सिवा किसी वजह से ना थी के वो हमें खुदा पर ईमान ले आए था जो ज़बरदस्त और अपनी ज़ात में आप महमूद (प्रशंसनीय) हैं +[85:9] जो आसमान और ज़मीन की सल्तनत का मालिक है, और वो खुदा सब कुछ देख रहा है +[85:10] जिन लोगों ने मोमिन मर्दन और औरतों पर ज़ुल्म ओ सितम तोड़ा और फिर उसे तैयब ना हुए, यकीनन उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब है और उनके लिए जलाए जाने की सजा है +[85:11] जो लोग ईमान लाए और जिन्हो ने नीक अमल किया यकीनन उनके लिए जन्नत के बाग हैं जिनके बारे में खास बातें होंगी, ये है बड़ी कामयाब +[85:12] डार हकीकत तुम्हारे रब की पकड़ बड़ी है +[85:13] वही पहली बार पैदा करता है और वही दोबारा पैदा करेगा +[85:14] और वह बक्शने वाला है, मोहब्बत करने वाला है +[85:15] अर्श का मालिक है, बुज़ुर्ग-ओ-बरतर है +[85:16] और जो कुछ चाहिए कर डालने वाला है +[85:17] क्या तुम्हें लश्करों की खबर मिलती है +[85:18] फिरौन और समूद (के लश्करों) की +[85:19] मगर जिन्हो ने कुफ्र किया है वो झुटलाने में लगे हैं +[85:20] हलांके अल्लाह ने उनको घेरे में ले रखा है +[85:21] (उनके झूठलाने से इस कुरान का कुछ नहीं बिगड़ता) बाल्की ये कुरान बुलंद पाया है +[85:22] हमें लोह में (नक्श है) जो महफूज है + +Surah 86: At-Tariq (The Comer by Night) +---------------------------------------- +[86:1] कसम है आसमान की और रात को नामदार होने वाले की +[86:2] और तुम क्या जानो क्या वो रात को नामदार होने वाला क्या है +[86:3] चमकता हुआ तारा +[86:4] कोई जान ऐसी नहीं है जिसका ऊपर कोई निगाह न हो +[86:5] फिर जरा इंसान यहीं देख ले के वो किस चीज से भुगतान किया गया है +[86:6] एक उछालने वाले पानी से भुगतान किया गया है +[86:7] जो पीत और सीने की हदियों के दरमियान से निकलता है +[86:8] यकीनन वो (खालीक) उसे दोबारा भुगतान करने पर कादिर है +[86:9] जिस रोज पोशिदा असर की जांच पडताल होगी +[86:10] हमें वक्त इंसान के पास न खुद अपना कोई ज़ोर होगा और न कोई उसकी मदद करने वाला होगा +[86:11] कसम है बारिश बरसाने वाले आसमान की +[86:12] और (नबातात उगते वक़्त) फट जाने वाली ज़मीन की +[86:13] ये एक जच्ची-तुली बात है +[86:14] हंसी मजाक नहीं है +[86:15] ये लोग कुछ चल रहे हैं +[86:16] और मैं भी एक चल रहा हूं +[86:17] पास छोड़ दो ऐ नबी, काफिरों को एक जरा की जरा इन के हाल पर छोड़ दो + +Surah 87: Al-A'la (The Most High) +---------------------------------------- +[87:1] (ऐ नबी) अपने रब-ए-बरतर का नाम की तस्बीह करो +[87:2] जिसने पैदा किया और तनसुब कयाम किया (फिर अनुपातिक किया) +[87:3] जिसने तकदीर बनाई फिर राह दिखाई +[87:4] जिसने नबातात (चरागाह) उगई +[87:5] फिर उनको सिया कुदा करकट बना दिया +[87:6] हम तुम्हें पढ़ा देंगे फिर तुम नहीं भूलोगे +[87:7] सिवाय उसके जो अल्लाह चाहे। वो जाहिर को भी जानता है और जो कुछ पोशीदा (छिपा हुआ) है उसको भी +[87:8] और हम तुम्हें आसान तरीके की सलाह देते हैं देखते हैं +[87:9] लिहाज़ा तुम हिदायत करो अगर हिदायत नाफ़े (फ़ैयदमंद) हो +[87:10] जो शक्स डरता है वो हिदायत क़बूल करेगा +[87:11] और उसे गुरइज़ करेगा वो इंतेहाई बद-बख्त +[87:12] जो बड़ी आग में जाएगा +[87:13] फिर ना उसमें मरेगा और न जिएगा +[87:14] फलाह पा गया वो जिसने पाकीजगी इख्तियार की +[87:15] और अपने रब का नाम याद किया फिर नमाज पढ़ी +[87:16] मगर तुमलोग दुनिया की जिंदगी को तर्जीह देते हो +[87:17] हालांके आखिरी बेहतर है और बाकी रहने वाली है +[87:18] यही बात पहले आए हुए सहीफों (ग्रंथों) में भी कहीं गई थी +[87:19] इब्राहीम और मूसा के सहीफों में + +Surah 88: Al-Ghashiyah (The Overwhelming Event) +---------------------------------------- +[88:1] क्या तुम्हें हमें चाहिए वली आफत की खबर पसंद है +[88:2] कुछ चेहरे हमें रोज खौफ जादा होंगे +[88:3] सख्त मशक्कत कर रहे होंगे +[88:4] थके जाते होंगे, छायादार आग में झूलते रहेंगे +[88:5] खौलते (उबलते हुए) हुए चश्मे (वसंत) का पानी उन्हें पीने को दिया जाएगा +[88:6] खर-दर (कांटे-दार) सुखी घांस के सिवा कोई खाना उनके लिए ना होगा +[88:7] जो ना मोटा करे ना भूख मिटाए +[88:8] कुछ चेहरे उस रोज ब-रौनक होंगे +[88:9] अपने कर-गुजारी पर खुश होंगे +[88:10] आली मुकाम जन्नत में होंगे +[88:11] कोई बहुत बात वहां न सुनेंगे +[88:12] उसमें चश्में रावन होंगे +[88:13] उसके अंदर ऊंची मसनदें होंगी +[88:14] सागर राखे हुए होंगे +[88:15] गांव तकियां (कुशन लगाए हुए) के कतारें लगी होंगी +[88:16] और नफ़ीस फ़र्श बीचे हुए होंगे +[88:17] (ये लोग नहीं मानते) तो क्या ये उन्तों को नहीं देखते के कैसे बन गए +[88:18] आसमान को नहीं देखते के कैसे उठ गए +[88:19] पहाड़ों को नहीं देखते के कैसे जमाए गए +[88:20] और ज़मीन को नहीं देखते के कैसे बिछाई गई +[88:21] अच्छा तो (ऐ नबी) हिदायत किए जाओ, तुम बस हिदायत ही करने वाले हो +[88:22] कुछ इनपर जबर करने वाले नहीं हो +[88:23] अलबत्ता जो शक्स मुंह मोड़ेगा और इंकार करेगा +[88:24] अल्लाह के लिए उसको भारी सजा देगा +[88:25] इन लोगों को पलटना हमारी तरफ ही है +[88:26] फिर इनका हिसाब लेना हमारे ही ज़िम्मे है + +Surah 89: Al-Fajr (The Daybreak) +---------------------------------------- +[89:1] कसम है फज्र की +[89:2] और दस रातों की +[89:3] और जफ़्त(सम) और ताक़(विषम) की +[89:4] और रात की जबके वो रुक्सत हो रही हो +[89:5] क्या इसमे किसी साहब-ए-अकल के लिए कोई कसम है +[89:6] तुमने देखा नहीं के तुम्हारे रब ने क्या बरताओ किया +[89:7] अनचे सुतुनो वाले आद-ए-इरम के साथ +[89:8] जिनका मनिंद कोई क़ौम दुनिया के मुल्कों में पैदा नहीं हुई थी +[89:9] और समूद के साथ जिन्होन ने वादी में चट्टाने तराशी थी +[89:10] और मेखों वाले फिरौन के साथ +[89:11] ये वो लोग (थाय) जिन्होनें दुनिया के मुल्कों में बड़ी सरकशी की थी +[89:12] और उनमें बहुत फसाद फेलया था +[89:13] आखिर-ए-कार तुम्हारे रब ने इनपर अज़ाब का कोड़ा बरसा दिया +[89:14] हकीकत ये है काय तुम्हारा रुब घाट (सतर्क) लगाए हुए है +[89:15] मगर इंसान का हाल ये है काय उसका रुब जब उसको आजमाइश में डालता है और उसे इज्जत और नियामत देता है तो वो कहता है काय मेरे रुब ने मुझे इज्जतदार बना दिया +[89:16] और जब वो उसको आजमाइश में डालता है और उसका रिज़्क उसपर तंग कर देता है तो वो कहता है मेरे रब ने मुझे ज़लील कर दिया +[89:17] हरगिज़ नहीं, बलके तुम यतीम से इज़्ज़त का सुलुक नहीं करते +[89:18] और मिस्कीन को खाना खिलाने पर एक दूसरे को नहीं उक्साते +[89:19] और मीरास (विरासत) का सारा माल समान कर खा जाते हो +[89:20] और माल की मुहब्बत में बुरी तरह गिरफ़्तार हो +[89:21] हरगिज़ नहीं जब ज़मीन पै डर पै क़ुओत क़ुत् कर रेगज़ार बना दी जाएगी +[89:22] और तुम्हारा रब जलवा फरमा होगा हाल में के फरिश्ते सफ़ दर सफ़ खड़े होंगे +[89:23] और जहन्नुम उस रोज़ सामने ले आएगी, उस दिन इंसान को समझ आएगी और हमें वक़्त के साथ समझने का क्या हासिल होगा +[89:24] वो कहेगा के काश मैंने अपनी इस ज़िंदगी के लिए कुछ पेशगी समन किया होता +[89:25] फिर हमें दीन अल्लाह जो अज़ाब देगा वैसा अज़ाब देने वाला कोई नहीं +[89:26] और अल्लाह जैसा बंधे वैसा बांधने वाला कोई नहीं +[89:27] (दूसरी तरफ इरशाद होगा) ऐ नफसे मुतमैन(आश्वस्त आत्मा/पवित्र) +[89:28] चल अपने रब की तरफ इस हाल में के तू (अपने अंजाम-ए-नीक से) खुश (और अपने रुब काय नजदीक) पसंदीदा है +[89:29] शमिल हो जा मेरे (नीक) बंदों में +[89:30] और दखिल होजा मेरी जन्नत में + +Surah 90: Al-Balad (The City) +---------------------------------------- +[90:1] नहीं मैं कसम खाता हूं इस शहर की +[90:2] और हाल ये है के (ऐ नबी) इस शहर में तुमको हलाल कर लिया गया है +[90:3] और कसम खाता हूं बाप (एडम) की और उस औलाद की जो उसने पैदा की +[90:4] दर हकीकत हमने इंसान को मुशक्कत में पैदा किया है +[90:5] क्या उसने ये समझ रखा है कि उसपर कोई काबू ना पा सकेगा +[90:6] कहता है के मैंने ढेरों माल उड़ा दिया +[90:7] क्या वो समझता है कि किसी ने उसको नहीं देखा +[90:8] क्या हमने उसे दो आँखें +[90:9] और एक ज़ुबान और दो होंठ नहीं दिए +[90:10] और दोनों नुमायन रास्ते उसे (नहीं) दिखा दिए +[90:11] मगर उसने दशवार गुज़र घाटी (खड़ी) से गुज़रने की हिम्मत ना की +[90:12] और तुम क्या जानो क्या है वो दुस्वार गुजर घाटी +[90:13] किसी बगीचे को गुलामी से छुड़ाना +[90:14] या फाके के दिन +[90:15] किसी करीब यतीम +[90:16] या खाक नशीं मिसकीन को खाना खिलाना +[90:17] फिर (इसके साथ ये काय) आदमी उन लोगों में शामिल हो जो ईमान लाए और जिन्होन ने एक दूसरे को सब्र और (ख़ल्क-ए-खुदा पर) रहम की तालक़ीन की +[90:18] ये लोग हैं दयेन बाज़ू (दाहिने हाथ) वाले +[90:19] और जिन्हों ने हमारी आयत को मन-ने से इंकार किया वो बायें बाज़ू (बाएं हाथ) वाले हैं +[90:20] उन पर आग लगी हुई होगी + +Surah 91: Ash-Shams (The Sun) +---------------------------------------- +[91:1] सूरज और उसकी धूप की कसम +[91:2] और चांद की कसम जबके वो उसके पीछे आता है +[91:3] और दिन की कसम जबके वो (सूरज को) नुमाया कर देता है +[91:4] और रात की कसम जबके वो (सूरज को) धन्यवाद लेती है +[91:5] और आसमान की और उस जात की कसम जिसने उसे इस्तेमाल किया +[91:6] और जमीन की और उस जात की कसम जिसने उसे इस्तेमाल किया +[91:7] और नफ्स-ए-इंसानी की और उस जात की कसम जिसने उसे इस्तेमाल किया +[91:8] फिर उसकी बदी और उसकी परहेजगारी उस पर इल्हाम कर दी +[91:9] यकीनन फलाह पा गया वो जिसने नफ्स का तजकिया किया +[91:10] और न-मुराद हुआ वो जिसने उसको दबा दिया +[91:11] समूद ने अपनी सरकशी की बिना पर झुटलाया +[91:12] जैब हमें क़ौम का सब से ज्यादा शकी (बदनसीब) आदमी बिफ़र कर उठा +[91:13] अल्लाह के रसूल ने उन लोगों से कहा के खबरदार अल्लाह की ऊंटनी (वह-ऊंटनी) को (हाथ न लगाना) और उसके पानी पीना (मैं माने न होना) +[91:14] मगर उन लोगों ने उसकी बात को झूठा क़रार दिया और ऊंटनी को मार डाला। आख़िर-ए-कार उनके गुनाह के पैदाश में उनके रब ने उन्पर ऐसी आफत तूदी के एक साथ सबको पैवंद-ए-खाक कर दिया +[91:15] और उसे (अपने फेल काय) किसी बुरे नतीजे का कोई खौफ (डर) नहीं है + +Surah 92: Al-Lail (The Night) +---------------------------------------- +[92:1] कसम है रात की जबके वो छा जाए +[92:2] और दिन की जबके वो रोशन हो +[92:3] और उस जात की जिसने नर (पुरुष) और मादा (महिला) को भुगतान किया +[92:4] दर हकीकत तुम लोगों की कोशिशें मुख्तलिफ़ क़िस्म की है +[92:5] तो जिसने (राह ए खुदा में) माल दिया और (खुदा की नफरमानी से) परहेज किया +[92:6] और भलाई को सच माना +[92:7] उसको हम आसान रास्ते के लिए सहुलत देंगे +[92:8] और जिसने (अपने खुदा से) कहा नियाज़ी (आत्मनिर्भर/स्वतंत्र) बारती +[92:9] और भलाई को झुटलाया +[92:10] उसको हम मजबूत रास्ते के लिए सहुलत देंगे +[92:11] और उसका माल आखिर उसका किस काम आएगा जबके वो हलाक हो जाए +[92:12] बेशक रास्ता बताना हमारे ज़िम्मी है +[92:13] और दर हकीकत आख़िरत और दुनिया दोनों का हम ही मालिक हैं +[92:14] पास मैंने तुमको ख़बरदार कर दिया है भड़कती हुई आग से +[92:15] उसमें नहीं झुलसेगा मगर वो इंतिहायी बदबक्थ +[92:16] जिसने झूठ बोला और मुह फेरा +[92:17] और उसे दूर रक्खा जाएगा वो निहायत परहेजगार +[92:18] जो पाकीजा होने की खातिर अपना माल देता है +[92:19] उसपर किसी का कोई एहसान नहीं है जिसका बदला उसे देना हो +[92:20] वो तो सिर्फ अपने रुब-ए-बरतर की रजा जोई के लिए ये काम करता है +[92:21] और जरूर वो (हमसे) खुश होगा + +Surah 93: Ad-Duha (The Brightness of the Day) +---------------------------------------- +[93:1] कसम है रोज़े रोशन की +[93:2] और रात की जबके वो सुकून के साथ तारी हो जाए +[93:3] (ऐ नबी) तुम्हारे रब ने तुमको हरगिज नहीं छोड़ा और न वो नाराज हुआ +[93:4] और यकीनन तुम्हारे लिया बाद का दौर पहले दौर से बेहतर है +[93:5] और अनकरीब तुम्हारा रुब तुमको इतना देगा के तुम खुश हो जाओगे +[93:6] क्या उसने तुमको यतीम नहीं पाया और फिर ठिकाना फरहम किया +[93:7] और तुम्हें नवाज़ीफ-ए-राह पाया और फिर हिदायत बख्शी +[93:8] और तुम्हें नादर (चाहते हुए) पाया और फिर मालदार कर दिया +[93:9] लिहाज़ा यतीम पर शायद न करो +[93:10] और सायेल( मांगने) वाले) को ना झिडको +[93:11] और अपने रब की नियामत का इज़हार करो + +Surah 94: Al-Inshirah (The Expansion) +---------------------------------------- +[94:1] (ऐ नबी) क्या हमने तुम्हारा सीना तुम्हारे लिए खोल नहीं दिया +[94:2] और तुमपर से वो भारी बोझ उतर दिया +[94:3] जो तुम्हारी कमर तोढे डाल रहा था +[94:4] और तुम्हारी खातिर तुम्हारे जिक्र का आवाज बुलंद कर दिया +[94:5] पास हकीकत ये है काय तंगी काय सात फारखी भी है +[94:6] बेशाक टांगी काय साथ फारखी भी है +[94:7] लिहाज़ा जब तुम फारिग हो तो इबादत की मुशक्कत में लग जाओ +[94:8] और अपने रब की तरफ रागिब हो + +Surah 95: At-Tin (The Fig) +---------------------------------------- +[95:1] कसम है इंजीर (अंजीर) की और ज़ैतून की +[95:2] और तूर-ए-सीना (सिनाई पर्वत) +[95:3] और इस पुर-अमन शहर (मक्का) की +[95:4] हमने इंसान को बहतरीन साख्त पर भुगतान किया +[95:5] फिर उसे उल्टा फेर कर हमने सब नीचों से नीच कर दिया +[95:6] सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और नेक अमल करते रहे उनके लिए कभी खत्म ना होने वाला अजर है +[95:7] पास (ऐ नबी) इसके बाद कौन जजा ओ सजा के मामले में तुमको झूठ बोल सकता है +[95:8] क्या अल्लाह सब हकीमों से बड़ा हकीम नहीं है + +Surah 96: Al-'Alaq (The Clot) +---------------------------------------- +[96:1] पढ़ो (ऐ नबी) अपने रब के नाम के साथ जिसने पढ़ा किया +[96:2] जमे हुए खून के एक लड़के से इंसान की तख़लीक़ की +[96:3] पढ़ो और तुम्हारा रब बड़ा करीम है +[96:4] जिसने क़लम के ज़रिया से इल्म सिखाया +[96:5] इंसान को वो इल्म दिया जिसने वो ना जानता था +[96:6] हरगिज नहीं, इंसान सरकशी करता है +[96:7] इस बिना पार के वो अपने आप को बे नियाज देखता है +[96:8] (हलांके) पलटना यकीनन तेरे रब ही की तरफ है +[96:9] तुमने देखा हमें शक्स को +[96:10] जो एक बंदे को मना करता है जबके वो नमाज पढ़ता हो +[96:11] तुम्हारा क्या ख्याल है अगर (वो बंदा) राह ए रास्ते पर हो +[96:12] या परहेजगारी की तलाक़ करता हो +[96:13] तुम्हारा क्या ख्याल है अगर (ये मन करने वाला शख़्स हक़ को) झुटलता और मुँह मोड़ता हो +[96:14] क्या वो नहीं जानता के अल्लाह देख रहा है +[96:15] हरगिज़ नहीं अगर वो बाज़ ना आया तो हम उसकी पेशानी के बाल पकड़ कर उसे खींचेगे +[96:16] उस पेशानी को जो झूठी और खतरनाक है +[96:17] वो बुलाले अपने हामियों की टोली को +[96:18] हम भी अज़ाब के फरिश्तों को बुला लेंगे +[96:19] हरगिज़ नहीं, उसकी बात न मानो और सजदा करो और (अपने रब का) क़ुरब हासिल करो + +Surah 97: Al-Qadr (The Majesty) +---------------------------------------- +[97:1] हमने (कुरान) को शब-ए-क़दर में नाज़िल किया है +[97:2] और तुम क्या जानो, शब-ए-क़द्र क्या है +[97:3] शब-ए-क़द्र हज़ार महिनो से ज़्यादा बेहतर है +[97:4] फ़रिश्ते और रूह (जिब्राइल) हमसे अपने रब के इज़्न (अनुमति) से हर हुक्म ले कर उतरते हैं +[97:5] वो रात सरसर सलामती है तुलू ए फज्र तक + +Surah 98: Al-Bayyinah (The Clear Evidence) +---------------------------------------- +[98:1] एहले किताब और मुशरिकिन में से जो लोग काफिर थे (वो अपने कुफ्र से) बाज़ आने वाले ना थे जब तक के उनके पास दलील ए रोशन ना आ जाए +[98:2] (यानी) अल्लाह के तरफ से एक रसूल जो पाक सही पढ़ कर सुनाए +[98:3] जिन में बिल्कुल रास्ता और दुरुस्त तस्वीरें लिखी हुई हो +[98:4] पहले जिन लोगों को किताब दी गई थी उनमें तफ़रका बरपा (विभाजन/विभाजन) नहीं हुआ मगर इस के बाद के उन के पास (राहे रास्ते का) बयान ए वजह आ चूका था +[98:5] और उनको इसके सिवा कोई हुकुम नहीं दिया गया था के अल्लाह के बंदगी अपने दीन को उसके लिए खालिस करके। बिल्कुल यक्सू हो कर, और नमाज़ क़याम करें और जकात दे यही निहायत सही-ओ-दुरूस्त दीन है +[98:6] एहले किताब और मुशरिकिन में से जिन लोगों ने कुफ्र किया है वो यकीनन जहन्नम की आग में जाएंगे और हमेशा उसमें रहेंगे, ये लोग बढ़-तारीन ए खलायेक (सृजन) हैं +[98:7] जो लोग ईमान ले आए और जिन्होन नै नेक अमल किए वो यक़ीनन बहतरीन-ए-खलायेक है +[98:8] उनकी जाज़ा उनके रब के यहां दायमी (अनन्त) क़याम की जन्नतें हैं जिनके आला नेहरेन बेह राही होंगी। वो उनमें हमेशा हमेशा रहेंगे। अल्लाह उनसे राजी हुआ और वो अल्लाह से राजी हुए। ये कुछ है हमारे शक्स के लिए जिसने अपने रब का खौफ किया हो + +Surah 99: Al-Zilzal (The Shaking) +---------------------------------------- +[99:1] जब ज़मीन अपनी पूरी शिद्दत के साथ हिला डाली जाएगी +[99:2] और ज़मीन अपने अंदर का सारे बोझ निकल कर बहार डाल देगी +[99:3] और इंसान कहेगा के ये इसको क्या हो रहा है +[99:4] उस रोज वो अपने (ऊपर गुजरे हुए) हालात बयान करेगी +[99:5] क्योंकि तेरे रब ने उसे (ऐसा करने का) हुक्म दिया होगा +[99:6] उस रोज लोग मुताफर्रिक हालात में पलटेंगे ताके उनके अमल उनको दिखाये जायें +[99:7] फिर जिसने जरा बराबर नेकी की होगी वो उसको देख लेगा +[99:8] और जिसने जरा बराबर बदी की होगी वो उसको देख लेगा + +Surah 100: Al-'Adiyat (The Assaulters) +---------------------------------------- +[100:1] कसम है उन (घोड़ों) की जो फुंकारे मारते हुए ढूंढते हैं +[100:2] फिर (अपने तपों से) चिंगारियां झड़ते हैं +[100:3] फिर सुबह सवेरे चपा मरते हैं +[100:4] फिर इस मौके पर गार्ड ओ गुबार उड़ाते हैं +[100:5] फिर इसी हालात में कोई मजे के अंदर जा घुसते हैं +[100:6] हकीकत ये है के इंसान अपने रुब का बड़ा नाशुक्र है +[100:7] और वह खुद इस पर गवाह है +[100:8] और वह माल-ओ-दौलत की मुहब्बत में बुरी तरह मुबतला है +[100:9] तो क्या वो हमें वक्त को नहीं जानता जब कब्रों में जो कुछ (मडफन) है उसे निकाल लिया जाएगा +[100:10] और सीने में जो कुछ (मख्फी) है उसे बारामाद करके उसकी जांच पडताल की जाएगी +[100:11] यकीनन उनका रब हमें रोज उनसे खूब बख़बर होगा + +Surah 101: Al-Qari'ah (The Calamity) +---------------------------------------- +[101:1] अज़ीम हदीसा +[101:2] क्या है वो अज़ीम हदीसा +[101:3] तुम क्या जानो के वो अज़ीम हदीसा क्या है +[101:4] वो दिन जब लोग बिखरे हुए परवानों की तरह +[101:5] और पहाड़ रंग बी रंगी धुनकी हुई ऊन के तरह होंगे +[101:6] फिर जिसके पलड़े भारी होंगे +[101:7] वो दिल पसंद ऐश में होगा +[101:8] और जिस के पलड़े हल्के होंगे +[101:9] उसकी जाए करार गहरी खाई होगी +[101:10] और तुम्हें क्या खबर काय वो क्या चीज है +[101:11] भड़कती हुई आग + +Surah 102: At-Takathur (The Abundance of Wealth) +---------------------------------------- +[102:1] तुम लोगों को ज्यादा से ज्यादा और एक दूसरे से बढ़कर दुनिया हासिल करने की धुन ने गफलत में डाल रखा है +[102:2] यहां तक ​​के (आईएसआई) फ़िक्र में) तुम लब-ए-गौर तक पहुँच जाते हो +[102:3] हरगिज़ नहीं, अनकरीब तुमको मालूम हो जाएगा +[102:4] फिर (सुनलो के) हरगिज नहीं, अनकरीब तुमको मालूम हो जाए +[102:5] हरगिज नहीं अगर तुम यकीनी इल्म की हकीकत से (रविश है) के अंजाम को) जानते होते (तो तुम्हारा ये तर्जे अमल ना होता) +[102:6] तुम दोज़ख देख कर रहोगे +[102:7] फिर (सुन लो के) तुम बिल्कुल यकीन के साथ उसे देख लोगे +[102:8] फिर ज़रूर उस रोज़ तुम से इन नेअमतों के बारे में जवाब तलबी की जाएगी + +Surah 103: Al-'Asr (The Time) +---------------------------------------- +[103:1] ज़माने की क़सम +[103:2] इंसान दर हक़ीक़त बड़े ख़सारे (नुक्सान) में है +[103:3] सिवाए उन लोगों के जो ईमान लाए और नेक अमल करते रहें और एक दूसरे को हक की हिदायत और sabr की तालक़ीन करते रहे + +Surah 104: Al-Humazah (The Slanderer) +---------------------------------------- +[104:1] तबाही है हर उस शक्स के लिए जो (चाँद दर चाँद) लोगों पर तान और (पीठ पीछे) बुराइयां करने का खुगर है +[104:2] जिसने माल जमा किया और उसे गिन गिन कर रक्खा +[104:3] वो समझता है कि हमें का माल हमेशा उसके पास रहेगा +[104:4] हरगिज नहीं, वो शक्स तो चकना-चूर कर देने वाली जगह में फेंक दिया जाएगा +[104:5] और तुम क्या जानो के क्या हो वो चकना-चूर कर देने वाली जगह +[104:6] अल्लाह की आग खूब भड़काई हुई +[104:7] जो दिलों तक पहुंचें गी +[104:8] वो उन पर ढांक कर बंद कर दी जाएगी +[104:9] (इस हालात में के वो) अनचे अनचे सुतुनो मेई (घिरे हुए होंगे) + +Surah 105: Al-Fil (The Elephant) +---------------------------------------- +[105:1] तुमने देखा नहीं के तुम्हारे रब ने हाथी वालों के साथ क्या किया +[105:2] क्या उसने उनकी तदबीर को आकार नहीं दिया +[105:3] और उन पर परिंदों के झुंड के झुंड भेज दिए +[105:4] जो उन पर पके हुए मिट्टी के पत्थर फेंक रहे थे +[105:5] फिर उनका ये हाल कर दिया जैसे जानवरों का खाया हुआ भूसा + +Surah 106: Al-Quraish (The Quraish) +---------------------------------------- +[106:1] चंके कुरैश मानूस हुए +[106:2] (यानी) जाड़े (सर्दियों) और गर्मी के सफ़रों से मानूस +[106:3] लिहाज़ा उन को चाहिए के इस घर के रब की इबादत करें +[106:4] जिसने उन्हें भूख से बचा कर खाने को दिया और खौफ से बचा कर अमन अता किया + +Surah 107: Al-Ma'un (Acts of Kindness) +---------------------------------------- +[107:1] तुम ने देखा उस शक्स को जो आख़िरत की जजा व सजा को झुटलता है +[107:2] वही तो है जो यतीम को धक्के देता है +[107:3] और मिस्कीन का खाना देने पर नहीं उक्सता +[107:4] फिर तबाही है उन नमाज पढ़ने वालों के लिए +[107:5] जो अपनी नमाज से गफ़लत बारात-ते हैं +[107:6] जो रिया-कारी (दिखावा) करते हैं +[107:7] और मामुली ज़रुरत की चीज़ (लोगों को) देने से गुरेज करते हैं + +Surah 108: Al-Kauthar (The Abundance of Good) +---------------------------------------- +[108:1] (ऐ नबी) हमने तुम्हें कौसर अता कर दिया +[108:2] पास तुम अपने रब ही के लिए नमाज पढ़ो और कुर्बानी करो +[108:3] तुम्हारा दुश्मन हाय जध-काटा है + +Surah 109: Al-Kafirun (The Disbelievers) +---------------------------------------- +[109:1] केहदो के ऐ काफिरों +[109:2] मैं उनकी इबादत नहीं करता जिनकी इबादत तुम करते हो +[109:3] और ना तुम उसकी इबादत करने वाले हो जिसकी इबादत मैं करता हूं +[109:4] और ना मैं उनकी इबादत करने वाला हूं जिनकी इबादत तुम ने की है +[109:5] और ना तुम उसकी इबादत करने वाले हो जिसकी इबादत मैं करता हूं +[109:6] तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन है और मेरे लिए मेरा दीन + +Surah 110: An-Nasr (The Help) +---------------------------------------- +[110:1] जब अल्लाह की मदद आ जाए और फतह नसीब हो जाए +[110:2] और (ऐ नबी सास) तुम देख लो के लोग फौज दार फौज अल्लाह के दीन में दखल हो रहे हैं +[110:3] तो अपने रब की हम्द के साथ उसकी तस्बीह करो और हमसे मगफिरत की दुआ मांगो। बेशाक़ वो बड़ा तौबा क़बूल करने वाला है + +Surah 111: Al-Lahab (The Flame) +---------------------------------------- +[111:1] टूट गए अबू लहब के हाथ और ना-मुराद हो गया वो +[111:2] उसका माल और जो कुछ उसने कमाया वो उसका कोई काम ना आया +[111:3] ज़रूर वो शोला ज़ान आग में डाला जाएगा +[111:4] और (हमारे साथ) उसकी जोरू (पत्नी) भी लगाई बुझाई करने वाली +[111:5] उस की गरदन (गर्दन) में मूंज की रस्सी होगी + +Surah 112: Al-Ikhlas (The Unity) +---------------------------------------- +[112:1] कहो वो अल्लाह है, यक्ता +[112:2] अल्लाह सब से बे-नियाज़ है और सब हमें का मोहताज हैं +[112:3] ना उसकी कोई औलाद है और ना वो किसी की औलाद +[112:4] और कोई उसका हमसर नहीं है + +Surah 113: Al-Falaq (The Dawn) +---------------------------------------- +[113:1] कहो मैं पनाह मांगता हूं सुबह के रब की +[113:2] हर उस चीज के शर से जो उसने पैदा किया है +[113:3] और रात की तारीख के शरर से जब के वो चा जाए +[113:4] और गिरहों में फूंकने वालों (या वालियों) के शरर से +[113:5] और हसीद (ईर्ष्या) के शरर से जब के वो हसद (ईर्ष्या) करे + +Surah 114: An-Nas (The Men) +---------------------------------------- +[114:1] कहो, मैं पनाह मांगता हूं इंसानों के रब +[114:2] इंसानों के बादशाह +[114:3] इंसानों के हकीकी माबूद की +[114:4] हमें बर्बाद करने वाले शहर से जो बार-बार पलट कर आता है +[114:5] जो लोगों के दिलों में वसीयत डालता है +[114:6] ख्वाह वो जिन्नो में से हो या इंसानों में से + diff --git a/src/gendocshtml.py b/src/gendocshtml.py index 95b3892a..0e2f2532 100644 --- a/src/gendocshtml.py +++ b/src/gendocshtml.py @@ -21,6 +21,7 @@ - output/quran_nepali_ahl_al_hadith.txt : [sura:ayah] Nepali translation (Ahl-al-Hadith Nepal) - output/quran_roman_urdu_maududi.txt: [sura:ayah] Roman Urdu translation (Abul Ala Maududi) - output/quran_roman_urdu_junagarhi.txt: [sura:ayah] Roman Urdu translation (Muhammad Junagarhi) + - output/quran_devnagri_urdu_maududi.txt: [sura:ayah] Devanagari-script Urdu translation (Abul Ala Maududi) """ import os @@ -389,6 +390,18 @@ def 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Bookmarked '+relTime(b.t)+'
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